ऊनो रिवर्स: कर्नाटक में भाजपा ने कांग्रेस पर लगा दिया वोट चोरी का आरोप, वीडियो आया सामने
कर्नाटक में भाजपा ने कांग्रेस पार्टी के ऊपर वोट चोरी और बोगस वोटिंग का आरोप लगाया है। पार्टी की तरफ से आरोप लगाया गया कि कांग्रेस नेता की पत्नी का वोट पार्टी की दूसरी कार्यकर्ता ने डाला है। नेता ने इस बात को स्वीकार भी किया है।
'बम धमकी को हल्के में नहीं ले सकते', कर्नाटक HC की सख्त टिप्पणी; 22 वर्षीय युवक को नहीं मिली राहत
कर्नाटक हाई कोर्ट ने बम धमाके की धमकी देने वाले को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी धमकियों को हल्के में नहीं लिया जा सकता, भले ही हमला करने का इरादा न हो, क्योंकि इनसे लोगों में डर पैदा होता है।
'बिहार का मखाना ग्रीस तो कर्नाटक की दाल मालदीव पहुंची', बोले PM मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि 12 साल पहले विजयादशमी के मौके पर 'मन की बात' की शुरुआत हुई थी. तब से अब तक ये यात्रा लगातार जारी है. उन्होंने कहा कि मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से एक तरह से देश की लोकशक्ति की आराधना करता हूं.
RSS ने Karnataka के कई शहरों में निकाला पथ संचलन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने और विजयादशमी के उपलक्ष्य में रविवार को बेंगलुरु में कई स्थानों पर पथ संचलन किया, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता आर. अशोक और सी. नारायणस्वामी भी शामिल हुए। कर्नाटक के कई अन्य जिलों में भी पथ संचलन आयोजित किए गए। हालांकि, अनुमति संबंधी कारणों से कुछ स्थानों पर कार्यक्रम रद्द या स्थगित कर दिए गए। आरएसएस के सूत्रों ने बताया कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच बेंगलुरु के जयनगर और चामराजपेट सहित कई स्थानों पर पथ संचलन किया गया। इन कार्यक्रमों में बच्चों, युवाओं और संघ के वरिष्ठ सदस्यों ने हिस्सा लिया। चामराजपेट में पथ संचलन विभिन्न इलाकों से होकर गुजरा और सिद्धरूढ़ आश्रम के सामने समाप्त हुआ। स्वयंसेवकों ने ढोल की थाप पर कदमताल की और भारत माता को नमन किया। बेंगलुरु के पूर्व पुलिस आयुक्त एवं भाजपा नेता भास्कर राव ने भी पथ संचलन में हिस्सा लिया। पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना और यातायात जाम को रोकने के लिए कार्यक्रम स्थलों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। तुमकुरु में प्रस्तावित पथ संचलन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के मद्देनजर स्थगित कर दिया गया। कोलार जिले के मुलबागल में कार्यक्रम की तारीख बदलकर 31 अक्टूबर कर दी गई, जबकि चिक्कबल्लापुर में उपायुक्त द्वारा अनुमति वापस लिए जाने के बाद पथ संचलन स्थगित कर दिया गया। कोप्पल में भी पथ संचलन स्थगित किए जाने की खबर है, जबकि रामनगर और कलबुर्गी में कार्यक्रमों के लिए सशर्त अनुमति दी गई। कलबुर्गी में आयोजकों को निर्धारित मार्ग का पालन करने और भड़काऊ भाषण नहीं देने के निर्देश दिए गए। सूत्रों ने बताया कि आरएसएस ने हुब्बल्ली में भी पथ संचलन आयोजित करने की योजना बनाई है, जिसके बाद एक जनसभा होगी। ये कार्यक्रम ऐसे समय आयोजित किए जा रहे हैं, जब आरएसएस के पथ संचलन के लिए अनुमति लेने को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे का कहना है कि आरएसएस को केवल पुलिस को सूचना देने के बजाय संबंधित प्राधिकारियों से अनुमति लेनी होगी। खरगे आरएसएस पर लगातार निशाना साध रहे हैं और उन्होंने स्वयंसेवकों के लाठियां लेकर पथ संचलन करने की परंपरा पर सवाल उठाया है। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि संगठन के अस्तित्व में आने के एक सदी बाद भी इसका पंजीकरण क्यों नहीं कराया गया है और इतने बड़े कार्यक्रमों के आयोजन के लिए उसे धन कहां से मिलता है।
क्या IPL 2027 खेलेंगे MS Dhoni? खुद Thala ने दुनिया के सामने दिया जवाब; देखें VIDEO
MS Dhoni Video: महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) 45 साल के हो गए हैं। उनकी फिटनेस अब पहले जैसे उनका साथ नहीं दे रही। वो IPL 2026 में चोटिल होने के कारण ही चेन्नई सुपर किंग्स (Chennai Super Kings) के लिए एक भी मुकाबला नहीं खेल पाए थे। ऐसे में फैंस के मन में ये सवाल है कि क्या वो IPL 2027 में हिस्सा लेंगे या फिर इससे पहले ही अपने संन्यास की घोषणा कर देंगे। अगर आप भी धोनी के फैन हो और इन सभी सवालों के जवाब जानना चाहते हो, तो बता दें कि खुद धोनी ने IPL 2027 में हिस्सा लेने पर अपने फ्यूचर प्लान के हिंट दे दिए हैं। MSD ने बेंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान IPL 2027 में खेलने पर अपनी बात रखी। उन्होंने यहां साफ किया कि अब IPL में खेलना पूरी तरह उनकी फिटनेस पर निर्भर करेगा। वो बोले, 'मुझे फिटनेस टेस्ट से गुजरना होगा। रिपोर्ट देखने के बाद दिसंबर से पहले यह आकलन करना होगा कि मैं एक और सीजन खेलने के लिए कितना फिट हूं। अगर मैं फिट नहीं हुआ, तो आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि इस पुरानी गाड़ी को सड़क पर अच्छी तरह चलाने के लिए सब कुछ सही किया जाए।' ANI ने खुद अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से एक ट्वीट साझा करके महेंद्र सिंह धोनी के पूरे बयान का वीडियो साझा किया है। ये वीडियो 44 सेकंड का है, जिसे आप नीचे देख सकते हो। धोनी का IPL रिकॉर्ड: महेंद्र सिंह धोनी एक लीज़ेंड क्रिकेटर हैं। धोनी के इंटरनेशनल क्रिकेट की तरह IPL के आंकड़ें भी उनकी महानत की गवाही देते हैं। उन्होंने IPL टूर्नामेंट में 278 मुकाबले खेले और 38.30 की औसत से 5439 रन बनाए। #WATCH | Bengaluru, Karnataka | On his IPL future, Former Indian Cricket Team Captain Mahendra Singh Dhoni says, I'll have to go through the tests. You'll have to give me the report, and before December, I'll need to assess how strong I am and whether I can play one more season. If I'm not fit enough, then you'll have to make sure you do everything right to get this old vintage vehicle running smoothly on the road... (24.10) — ANI (@ANI) October 24, 2026 Also Read: LIVE Cricket Score MS Dhoni की कैप्टेंसी में चेन्नई सुपर किंग्स ने हमेशा ही शानदार प्रदर्शन किया। वो 10 बार टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचे और इस दौरान 5 बार चैंपियन बने। उन्होंने 2022 में रविंद्र जडेजा के द्वारा बीच सीजन कैप्टेंसी छोड़ने और 2025 में ऋतुराज गायकवाड़ के बीमार होने के बाद भी चेन्नई सुपर किंग्स के लिए कैप्टेंसी की जिम्मेदारी संभाली। CSK फैंस पूरी उम्मीद करेंगे कि धोनी 2027 IPL के लिए फिट रहें और एक बार फिर टूर्नामेंट खेलेंगे।
स्टिंग ऑपरेशन ने बढ़ाई कांग्रेस की चिंता, कर्नाटक में फिर आमने-सामने आए शिवकुमार और सिद्धारमैया
कुमारस्वामी ने सिद्धारमैया का समर्थन करते हुए उनसे कहा है कि वे इस मामले पर खुलकर बोलें, ताकि अफवाहों और इशारों के जरिए उनकी छवि खराब होने से रोकी जा सके।
स्टिंग ऑपरेशन विवाद पर कांग्रेस हाईकमान सख्त, कर्नाटक सरकार को दिए जांच के निर्देश
कांग्रेस हाईकमान ने कर्नाटक सरकार को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और पूर्व सीएम सिद्दरमैया सहित अन्य नेताओं को निशाना बनाने वाले कथित स्टिंग ऑपरेशन की जांच के निर्देश दिए हैं।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया परिसर में फ्री कश्मीर और फ्री शरजील इमाम लिखे विवादास्पद पोस्टरों और ग्रैफिटी के सामने आने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि मीडिया को उनसे सवाल पूछने के बजाय, इन्हें लगाने वालों से सवाल पूछना चाहिए। ANI से बात करते हुए, खुर्शीद ने इन सवालों को खारिज कर दिया और ऐसी हरकतों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Siddaramaiah के बाद अब CM DK Shivakumar का हो गया Sting Operation! साजिशों के खेल में बुरी तरह उलझी Karnataka Politics खुर्शीद ने कहा कि नहीं, नहीं, नहीं। जिसने पोस्टर लगाए हैं, उससे पूछिए। मैंने कोई पोस्टर नहीं लगाए हैं, फिर भी आप मुझसे पूछ रहे हैं। जिसने भी इन्हें लगाया है, उससे पूछिए। आपको सतर्क रहना चाहिए, और अगर कोई ऐसे पोस्टर लगाता है, तो उनसे पूछिए कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं। यह बयान तब आया है जब राष्ट्रीय राजधानी के एक केंद्रीय विश्वविद्यालय की दीवारों पर कुछ ऐसे पोस्टर और दीवार पर लिखे नारे देखे गए, जिनमें फ्री कश्मीर, फ्री शरजील इमाम, फ्री फिलिस्तीन और RSS गो बैक जैसे विवादित नारे शामिल थे। बताया जा रहा है कि यह घटना तब सामने आई, जब कैंपस में छात्र समूहों द्वारा छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहे थे। इससे पहले, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने भारत की विदेश नीति पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयानों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत किसी भी देश का गुलाम अनुयायी नहीं बन सकता, चाहे वह देश कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो या भारत को उसकी कितनी भी जरूरत क्यों न हो। इसे भी पढ़ें: BJP नेता Anurag Thakur का 52वां जन्मदिन, सेना और BCCI से केंद्रीय मंत्री तक ऐसा रहा सफर ANI से बात करते हुए, खुर्शीद ने कहा कि राहुल गांधी ने राजनयिक प्रतीकों के महत्व, अन्य देशों के साथ भारत के जुड़ाव, और देश की गरिमा व आत्म-सम्मान की रक्षा करने की आवश्यकता पर महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकार की विदेश नीति के नतीजों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसके लिए व्यापार समझौते के न होने, H-1B वीजा को लेकर चिंताओं और भारतीयों को हथकड़ी लगाकर वापस भेजे जाने (निर्वासन) का हवाला दिया।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने 'कर्नाटक पोर्टफोलियो' के एडमिन संदीप कुमार के खिलाफ एक घटना की रिपोर्ट रीपोस्ट करने पर दर्ज आपराधिक मामला रद कर दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कथित स्टिंग ऑपरेशन का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि कर्नाटक की राजनीति में एक और स्टिंग की खबर ने हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया है कि उन्हें और केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन को गुप्त कैमरे के जरिए फंसाने की कोशिश की गई, जबकि भाजपा और एनडीए के मुख्यमंत्रियों को निशाना नहीं बनाया गया। इस खुलासे ने सियासी लड़ाई को नया मोड़ दे दिया है। मेटा स्मार्ट चश्मे से शुरू हुआ शक हम आपको बता दें कि कन्नड़ समाचार चैनल एशियानेट सुवर्णा न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में डीके शिवकुमार ने दावा किया कि एक उद्योगपति उनसे मिलने आया था। अधिकारियों के माध्यम से मुलाकात का समय लेने वाले इस व्यक्ति ने शुरुआत में कारोबारी मुद्दों पर चर्चा की, लेकिन बातचीत धीरे-धीरे बूथ स्तर की रणनीति और राजनीतिक घटनाक्रम की तरफ मुड़ गई। शिवकुमार के मुताबिक, उस व्यक्ति के चेहरे पर लगे मेटा स्मार्ट चश्मे और बातचीत के अचानक राजनीतिक रंग लेने से उन्हें संदेह हुआ कि कहीं यह मुलाकात किसी गुप्त रिकॉर्डिंग की तैयारी तो नहीं है। उन्होंने अपने अधिकारियों से उस उद्योगपति की पृष्ठभूमि की जानकारी जुटाने को कहा। शिवकुमार का दावा है कि उन्हें मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित व्यक्ति ने केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन से मुलाकात के दौरान भी वही चश्मा पहना था, लेकिन आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एक केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के समय ऐसा नहीं किया। शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों को भी सतर्क कर दिया है। उन्होंने कहा कि नेताओं को निजी सहायकों, फोन कॉल और दूसरे माध्यमों से फंसाने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित लोगों के बारे में जानकारी और रिकॉर्ड उनके पास हैं, लेकिन अभी नाम सार्वजनिक नहीं करेंगे। उनका कहना था कि सरकार ने एहतियाती कदम उठाए हैं और कार्रवाई के बारे में हर जानकारी सार्वजनिक करना जरूरी नहीं है। हालांकि, शिवकुमार ने न तो उस उद्योगपति का नाम बताया और न ही कथित रिकॉर्डिंग के सबूत पेश किए हैं। इसे भी पढ़ें: DK Shivakumar बोले Congress ने लोकतंत्र दिया तभी PM Modi आज शीर्ष पद पर हैं सिद्धारमैया प्रकरण ने खोली कांग्रेस के भीतर की दरार उधर, शिवकुमार के ताजा आरोपों को सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग वीडियो विवाद से अलग करके नहीं देखा जा सकता। सिद्धारमैया ने वीडियो को अपनी प्रतिष्ठा धूमिल करने की कोशिश बताते हुए पुलिस जांच की मांग की है। 14 अक्टूबर को बेंगलुरु की एक अदालत ने संबंधित वीडियो के प्रसारण और प्रसार पर अंतरिम रोक लगा दी थी। मामले में पुलिस जांच जारी है। सिद्धारमैया ने कहा है कि वीडियो उन्हें ब्लैकमेल करने और उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से तैयार किया गया। उनके बेटे और मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया ने भी कांग्रेस के कुछ लोगों की संभावित भूमिका का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, इस प्रकरण ने कांग्रेस के भीतर सिद्धारमैया और शिवकुमार के समर्थक खेमों के बीच अविश्वास को और बढ़ा दिया है। सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद से हटने और शिवकुमार के सत्ता संभालने के घटनाक्रम के बाद यह विवाद और संवेदनशील हो गया है। राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि कहीं कथित स्टिंग का इस्तेमाल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और प्रभाव हासिल करने की लड़ाई में तो नहीं हुआ? कुमारस्वामी का हमला, भाजपा को भी मिला सियासी मौका इस बीच, केंद्रीय मंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के नेता एचडी कुमारस्वामी ने इस पूरे प्रकरण में शिवकुमार पर ही सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि सिद्धारमैया से जुड़े वीडियो का इस्तेमाल उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने के दबाव के लिए किया गया हो सकता है। कुमारस्वामी ने स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधा है। दूसरी ओर, कांग्रेस विधायक रवि कुमार गणिगा ने आरोप लगाया था कि एक केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक भाजपा के एक नेता ने निजी एजेंसी के जरिए राज्य के करीब दस मंत्रियों तथा मुख्यमंत्री कार्यालय को निशाना बनाने की योजना के लिए धन मुहैया कराया। उन्होंने कथित सबूतों वाली एक पेन ड्राइव का भी उल्लेख किया है। वहीं मुख्यमंत्री शिवकुमार ने सिद्धारमैया के खिलाफ स्टिंग कराने की साजिश रचने के आरोपों को खारिज किया है। बताया जा रहा है कि राज्य मंत्रिमंडल ने मामले पर चर्चा तो की, लेकिन फिलहाल अलग विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का फैसला नहीं किया है। सरकार ने आगे की कार्रवाई को पुलिस जांच के नतीजों पर छोड़ दिया है। स्टिंग के पीछे कौन और मकसद क्या? देखा जाये तो कर्नाटक की इस सियासी उठापटक में सबसे अहम सवाल यही है कि कथित स्टिंग ऑपरेशनों के पीछे कौन है, उन्हें वित्तीय मदद कौन दे रहा है और इनका राजनीतिक लाभ किसे मिलना है? साथ ही यह विवाद कांग्रेस के लिए दोहरी चुनौती बन गया है। एक तरफ उसे अपने नेताओं की प्रतिष्ठा और सरकार की विश्वसनीयता बचानी है, दूसरी तरफ पार्टी के भीतर भरोसे और नेतृत्व के संतुलन को बनाए रखना है। बहरहाल, कर्नाटक की राजनीति में स्टिंग ऑपरेशन केवल कैमरे में कैद बातचीत का मामला नहीं रह गया है। यह सत्ता, संगठन, नेतृत्व और राजनीतिक दबाव की लड़ाई का केंद्र बन चुका है। जब तक जांच यह स्पष्ट नहीं करती कि कैमरे किसके इशारे पर चल रहे थे और उनका असली निशाना कौन था, तब तक कर्नाटक की सियासत में यह सवाल गूंजता रहेगा कि स्टिंग का खेल कौन खेल रहा है और आखिर किसकी कुर्सी पर उसकी नजर है?
सऊदी अरब में फंसे 600 से अधिक उमराह तीर्थयात्रियों की वापसी के लिए कर्नाटक सीएम ने एस. जयशंकर से लगाई गुहार
Meta Smart Glasses से Sting Operation की कोशिश, DK Shivakumar ने कराई जांच
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया है कि उन्हें और केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन को मेटा स्मार्ट ग्लास के ज़रिए एक स्टिंग ऑपरेशन के ज़रिए निशाना बनाने की कोशिश की गई। इस दावे ने कर्नाटक में कथित गुप्त रिकॉर्डिंग से जुड़े राजनीतिक विवाद को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। कन्नड़ ब्रॉडकास्टर 'एशियानेट सुवर्णा न्यूज़' को दिए एक इंटरव्यू में शिवकुमार ने आरोप लगाया कि एक उद्योगपति के अजीब बर्ताव से उन्हें शक हुआ कि शायद कोई गुप्त रिकॉर्डिंग की जा रही है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि यही उद्योगपति कांग्रेस के एक अन्य नेता, वी.डी. सतीसन से मिलते समय भी वही स्मार्ट ग्लास पहने हुए था। कर्नाटक के मुख्यमंत्री के इस दावे ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन वीडियो के विवाद में एक नया मोड़ ला दिया है। हालाँकि, शिवकुमार ने अभी तक सार्वजनिक रूप से उस उद्योगपति की पहचान नहीं बताई है और न ही ऐसा कोई सबूत पेश किया है जिससे यह साबित हो सके कि कोई रिकॉर्डिंग की गई थी। इसे भी पढ़ें: DK Shivakumar का एलान: कर्नाटक में नई नियुक्तियों के लिए भंग होंगी मौजूदा समितियां डीके शिवकुमार ने क्या कहा? शिवकुमार के अनुसार, एक उद्योगपति ने सरकारी अधिकारियों के ज़रिए उनसे मुलाक़ात का इंतज़ाम किया था। शुरुआत में तो बातचीत व्यापार से जुड़े मामलों पर हुई, लेकिन धीरे-धीरे यह राजनीतिक मुद्दों की तरफ़ मुड़ गई, जिसमें बूथ-स्तर की रणनीतियाँ और राजनीतिक घटनाक्रम शामिल थे। कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि उस व्यक्ति की अचानक राजनीतिक चर्चाओं में दिलचस्पी और उसके द्वारा पहने गए 'मेटा ग्लास' (स्मार्ट चश्मे) को देखकर, उन्हें इस मुलाक़ात के असली मक़सद पर शक होने लगा। इसे भी पढ़ें: Karnataka MLC Election: चार विधान परिषद सीटों पर वोटिंग, BJP-JDS और कांग्रेस में टक्कर इसके बाद, शिवकुमार ने अधिकारियों से उस उद्योगपति की पृष्ठभूमि और उसकी गतिविधियों की जाँच करने को कहा। शिवकुमार ने 'एशियानेट सुवर्णा न्यूज़' को बताया मैंने अपने अधिकारियों से उस उद्योगपति की पृष्ठभूमि के बारे में एक छोटी सी जाँच करने को कहा था। जाँच के दौरान मिली जानकारी से कुछ ऐसी बातें सामने आईं, जिससे उनका शक और गहरा गया। शिवकुमार का दावा है कि उस व्यक्ति ने केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन के साथ मुलाक़ात के दौरान भी ये स्मार्ट चश्मे पहने थे, लेकिन आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एक केंद्रीय मंत्री के साथ हुई मुलाक़ातों में उसने ऐसा नहीं किया। शिवकुमार ने दावा किया, उसने ये 'मेटा ग्लास' सिर्फ़ वीडी सतीसन और मुझसे मिलने के दौरान ही पहने थे। कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने यह नहीं बताया कि जाँच में उन चश्मों के बारे में क्या पता चला या अधिकारियों को कोई रिकॉर्डिंग मिली या नहीं। उस उद्योगपति की पहचान और इस कथित घटना से जुड़ी परिस्थितियाँ अभी भी सामने नहीं आई हैं।
मांझे से मौत: कर्नाटक के डिप्टी सीएम की चेतावनी, लापरवाही से इस्तेमाल पर लग सकते हैं आपराधिक आरोप
मांझे से मौत: कर्नाटक के डिप्टी सीएम की चेतावनी, लापरवाही से इस्तेमाल पर लग सकते हैं आपराधिक आरोप
‘स्टिंग ऑपरेशन’ को हल्के में ले रही कर्नाटक सरकार : एचडी कुमारस्वामी
Bengaluru, 23 अक्टूबर . कर्नाटक में स्टिंग ऑपरेशन को लेकर केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने Friday को कर्नाटक Government पर इस मामले को हल्के…
कर्नाटक की लक्ष्मीबाई कही जाने वाली रानी चेन्नम्मा का 23 अक्टूबर को जन्म हुआ था। उनको घुड़सवारी, तीरंदाजी और तलवारबाजी आदि का शौक था। उन्होंने हर एक कला को मन लगाकर सीखा और रानी चेन्नम्मा को अपनी धरती से गहरा लगाव था। हालांकि उन्होंने अपनी जीवन में बहुत दुख देखे, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने जनता के हितों को सर्वोपरि रखा। कित्तूर की रानी चेनम्मा ने साल 1824 में अंग्रेजों से लोहा लिया था। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर कित्तूर की रानी चेन्नम्मा के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में... जन्म और परिवार कर्नाटक के काकती नाम के गांव में 23 अक्टूबर 1778 को रानी चेन्नम्मा का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम धुलप्पा गौड़ देसाई और माता का नाम पद्मावती था। रानी चेन्नम्मा ने उस जमाने में तीरंदाजी, तलवारबाजी और घुड़सवारी करती थीं, जब लड़कियों को इस तरह के प्रशिक्षण नहीं दिए जाते थे। इसे भी पढ़ें: R K Narayan Birth Anniversary: अंग्रेजी के प्रसिद्ध साहित्यकार थे R K Narayan, अंग्रेजी में हो गए थे फेल विवाह चेन्नम्मा का विवाह कित्तूर के राजा मल्लसर्ज से हुआ। विवाह के बाद वह कित्तूर की रानी चेन्नम्मा बनीं और राज परिवार व राज्य के कामकाजों को देखने और समझने लगीं। रानी चेन्नम्मा सिर्फ महल तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि वह लोगों की समस्याओं को सुनती और उसका समाधान करने का प्रयास करती थीं। रानी चेन्नम्मा ने अपने राज्य में व्यवस्था औऱ न्याय को महत्व दिया था। पति और बेटे की मौत रानी चेन्नम्मा के जीवन में कई दुख आए, उनके पति राजा मल्लसर्ज का निधन हो गया और बेटे की मृत्यु से रानी को गहरा आघात पहुंचा। जब राज्य के सामने उत्तराधिकारी का सवाल उठा, तो उन्होंने शिवलिंगप्पा नाम के बालक को गोद लिया और उसको राज्य का उत्तराधिकारी माना। वहीं उस दौरान अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी भारत के अनेक राज्यों पर अपना कंट्रोल ले रही थी। वहीं ईस्ट इंडिया कंपनी ने शिवलिंगप्पा को कित्तूर का वैध उत्तराधिकारी मानने से मना कर दिया और अंग्रेजों ने कित्तूर पर अधिकार जमाने का प्रयास किया। अंग्रेजों को दिया दो टूक जवाब रानी चेन्नम्मा का अंग्रेजों को साफ संदेश था कि कित्तूर की सत्ता और उसके भविष्य का फैसला कित्तूर के लोग और उनका राज परिवार करेगा। रानी चेन्नम्मा ने अपने राज्य को बचाने के प्रयास में अधिकारियों से बातचीक की कोशिश की। लेकिन अंग्रेजों ने उनकी बात को नहीं माना। हार मानने की जगह पर रानी चेन्नम्मा ने अपने सैनिकों को अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा किया। उनके साथ राज्य के सरदार, सहयोगी और सेनापति खड़े हुए। आसान नहीं था कित्तूर संघर्ष साल 1824 में अंग्रेजी सेना ने कित्तूर पर हमला कर दिया। रानी चेन्नम्मा ने अपनी सेना का नेतृत्व किया और युद्ध के मैदान में डटी रहीं। वहीं रानी चेन्नम्मा के सैनिकों ने साहस के साथ अंग्रेजी सेना का मुकाबला किया। शुरूआती संघर्ष में कित्तूर की सेना ने अंग्रेजी सेना को कड़ी चुनौती दी और अंग्रेजी सेना के एक अधिकारी, सेंट जॉन ठाकरे को मार गिराया। इससे अंग्रेजों को बड़ा झटका लगा। अंग्रेजी सेना ने अधिक सैनिक और हथियार जुटाए और कित्तूर को चारों ओर से घेर लिया। रानी और उनके सहयोगियों ने कई दिनों कर इसका अंतर था वहीं, रानी के सैनिकों और साधनों में भी अंतर था। हालांकि उन्होंने कित्तूर की राज्य का रक्षा के लिए पूरी शक्ति लगा दी। मृत्यु लंबे संघर्ष के बाद कित्तूर पर अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया और रानी चेन्नम्मा को गिरफ्तार कर बेलहोंगल के किले में रखा गया। रानी चेन्नम्मा कई वर्षों तक कैद में रहीं। वहीं 21 फरवरी 1829 को कित्तूर की रानी चेन्नम्मा का निधन हो गया।
2003 Bengaluru Murder Case: उम्रकैद काट रही शुभा को राहत नहीं, खारिज हुई Mercy Petition
कर्नाटक मंत्रिमंडल ने गुरुवार को शुभा शंकरनारायण और डी. अरुण वर्मा की दया याचिकाओं को खारिज कर दिया। ये दोनों दिसंबर 2003 में बेंगलुरु में शुभा के 27 वर्षीय मंगेतर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर बी. वी. गिरीश की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। मंत्रिमंडल ने माना कि यह हत्या पहले से सोची-समझी और अत्यंत क्रूर थी, और मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत दया की याचिकाओं को स्वीकार नहीं किया जा सकता। याचिकाओं पर अंतिम निर्णय लेने के लिए अब यह सिफारिश राज्यपाल थावरचंद गहलोत के पास भेजी जाएगी। गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने गुरुवार को हुई बैठक के बाद बताया, कैबिनेट के सामने यह मामला रखने से पहले, गृह विभाग ने पुलिस और जेल विभागों से राय ली थी। इसे भी पढ़ें: Karnataka MLC Election: चार विधान परिषद सीटों पर वोटिंग, BJP-JDS और कांग्रेस में टक्कर ये याचिकाएं 14 जुलाई, 2025 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद दायर की गई थीं, जिसमें इस मामले के चारों दोषियों को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया था। अदालत ने उनकी अपीलें खारिज करते हुए दोषियों को संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल के पास जाने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया। इस अनुच्छेद के तहत राज्यपाल को राज्य के कार्यकारी अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों में माफी देने, सजा को निलंबित करने, कम करने या बदलने का अधिकार है। कैबिनेट द्वारा इसे खारिज कर देने का मतलब यह नहीं है कि राज्यपाल का अंतिम निर्णय भी यही होगा। संवैधानिक प्रक्रिया तब पूरी होगी जब राज्यपाल इन याचिकाओं पर अपना फैसला लेंगे। बेंगलुरु में इंटेल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर गिरीश और बीएमएस लॉ कॉलेज में इंटीग्रेटेड बीए एलएलबी कोर्स की पांचवें सेमेस्टर की छात्रा शुभा की सगाई 1 दिसंबर 2003 को हुई थी, और उनकी शादी 11 अप्रैल 2004 को तय थी। इसे भी पढ़ें: DK Shivakumar का एलान: कर्नाटक में नई नियुक्तियों के लिए भंग होंगी मौजूदा समितियां सुप्रीम कोर्ट द्वारा देखे गए अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार, शुभा गिरीश से शादी नहीं करना चाहती थी और वह लॉ के ही एक अन्य छात्र अरुण वर्मा के साथ अपना रिश्ता आगे बढ़ाना चाहती थी। उस समय 19 साल का वर्मा, उसी कोर्स के पहले सेमेस्टर में पढ़ाई कर रहा था। 3 दिसंबर 2003 की शाम को, शुभा ने गिरीश से उसे डिनर पर ले जाने के लिए कहा। गिरीश शाम करीब 6:30 बजे उसे उसके घर से अपने स्कूटर पर ले गया और वे दोनों उसके काम की जगह के पास स्थित 'टीजीआई फ्राइडेज़' (TGI Friday’s) नाम के एक रेस्तरां में गए।
यूपी, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद चुनाव के लिए मतदान जारी
उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद की 28 सीटों पर मतदान हो रहा है. इनमें स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं. लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और आगरा जैसी अहम सीटों पर भाजपा और सपा के बीच कड़ा मुकाबला देखा जा रहा है. चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से जारी है.
रानी चेन्नम्मा की जयंती पर कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे और कर्नाटक सीएम शिवकुमार ने किया नमन
New Delhi, 23 अक्टूबर . कर्नाटक की ऐतिहासिक कित्तूर रियासत की रानी चेन्नम्मा की जयंती पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कर्नाटक के Chief Minister डी.के. शिवकुमार की…
Karnataka MLC Election: चार विधान परिषद सीटों पर वोटिंग, BJP-JDS और कांग्रेस में टक्कर
कर्नाटक विधान परिषद की चार सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान शुरू हुआ। इन सीटों पर सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा-जद(एस) गठबंधन के बीच मुकाबला है। इस चुनाव को भारतीय जनता पार्टी-जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन के आपसी तालमेल और स्नातकों व शिक्षकों के बीच सत्तारूढ़ कांग्रेस के जनाधार की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। मतदान शाम चार बजे तक चलेगा। मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। जिन चार निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हो रहा है, वे दक्षिण-पूर्व स्नातक, पश्चिम स्नातक, उत्तर-पूर्व शिक्षक और बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र हैं। भाजपा ने पहले तीन निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि उसकी सहयोगी जद(एस) बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रही है। दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के उम्मीदवार शशि हुलिकुंते मठ का मुकाबला भाजपा के के. एम. सुरेश से है। पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के उम्मीदवार मोहन लिम्बिकाई का सामना भाजपा के मौजूदा विधान परिषद सदस्य एस. वी. संकनूर से है। उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के उम्मीदवार शरणप्पा मत्तूर का मुकाबला भाजपा के मौजूदा विधान परिषद सदस्य शशिल जी. नामोशी से है। बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य पुट्टन्ना का सामना जद(एस) के उम्मीदवार ए. पी. रंगनाथ से है। फिलहाल भाजपा के पास इन चार में से तीन सीटें हैं और वह उन्हें बरकरार रखने की कोशिश कर रही है। वहीं, जद(एस) की नजर बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट कांग्रेस से छीनने पर है। इन चुनावों से यह भी पता चलेगा कि गठबंधन के दोनों सहयोगी दल एक-दूसरे के उम्मीदवारों के पक्ष में अपने समर्थकों का वोट दिलाने में कितने सफल होते हैं। बेंगलुरु की सीट पर मुकाबला महत्वपूर्ण है, क्योंकि पुट्टन्ना पिछले विधानसभा चुनाव से पहले जद(एस) छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। पुट्टन्ना और रंगनाथ दोनों वोक्कालिगा समुदाय से हैं। कांग्रेस अपनी एकमात्र सीट बरकरार रखने के साथ-साथ अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में भी अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार, कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष बी. के. हरिप्रसाद, मंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सभी निर्वाचन क्षेत्रों में प्रचार किया है। हालांकि, इन चुनावों के नतीजों से राज्य सरकार की स्थिरता पर असर पड़ने की संभावना नहीं है, लेकिन विपक्षी गठबंधन का मजबूत प्रदर्शन उसे 2023 में सत्ता में आई कांग्रेस सरकार के खिलाफ राजनीतिक हमले तेज करने का मौका दे सकता है। राज्य की 75 सदस्यीय विधान परिषद में फिलहाल कांग्रेस के 38, भाजपा के 24 और जद(एस) के छह सदस्य हैं। सदन में एक निर्दलीय सदस्य और सभापति सलीम अहमद भी हैं। सरकार की ओर से मनोनीत किए जाने वाले पांच सदस्यों के पद खाली हैं। इन रिक्त पदों पर नियुक्तियां होने के बाद कांग्रेस की सदस्य संख्या बढ़ने की उम्मीद है। इससे सदन में कुल शक्ति संतुलन पर चुनाव नतीजों का असर सीमित रहने की संभावना है।
कर्नाटक के कटील में स्थित श्री दुर्गा परमेश्वरी मंदिर अपनी अनूठी पौराणिक कथाओं के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर पवित्र नंदिनी नदी के बीच एक द्वीप पर बना है, जहां देवी दुर्गा के प्रकट होने की कहानी जुड़ी है।
Karnataka: कुड़रोली श्री गोकर्णनाथ मंदिर में 10 दिवसीय मैंगलोर दशहरा उत्सव पिली वेषा के साथ शुरू
11 अक्टूबर, रविवार: मैंगलुरु के कुड़रोली श्री गोकर्णनाथ मंदिर में 10 दिवसीय मैंगलोर दशहरा उत्सव पिली वेषा प्रस्तुति के साथ शुरू हुआ, देखें दृश्य।
आतंकी लिंक, हथियार और पाकिस्तान कनेक्शन... कर्नाटक में BBA छात्र गिरफ्तार
कर्नाटक के बीदर में पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित संगठन और अवैध हथियार तस्करी नेटवर्क से कथित संपर्क के आरोप में 24 वर्षीय विशाल कुमार मेट्रे को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक, उसके मोबाइल में पाकिस्तान स्थित कुछ लोगों और WhatsApp चैनलों से संपर्क मिला. मामले में UAPA और BNS की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है.
Karnataka Government ने RSS के पथ संचलन में शामिल दो Teachers को क्यों किया सस्पेंड? Priyank Kharge
कर्नाटक में RSS के पथ संचलन में शामिल होना दो सरकारी शिक्षकों को भारी पड़ गया है। शिक्षा विभाग ने RSS कार्यक्रम में शामिल होने को सरकारी सेवा के आचरण नियमों का उल्लंघन मानते हुए दोनों शिक्षकों को विभागीय जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया है।
Karnataka High Court ने क्यों कहा- Parents की सेवा करना बहू की जिम्मेदारी नहीं? Married Woman
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान शादीशुदा महिलाओं के अधिकारों को लेकर बेहद अहम टिप्पणियां की हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई भी पति अपनी पत्नी को घर का काम करने या अपने माता-पिता की देखभाल करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता और ना ही उस पर हुक्म चला सकता है।
कावेरी विवाद को लेकर SC पहुंचा तमिलनाडु, कर्नाटक ने जल संकट को बताया गंभीर
तमिलनाडु ने अदालत को बताया कि कर्नाटक ने सिंचाई के लिए पानी छोड़ना शुरू कर दिया है, लेकिन तमिलनाडु को अभी तक उसके हिस्से का पानी नहीं मिला है. इससे खेती-किसानी पर गंभीर असर पड़ रहा है.
मेरी जान तिरंगा है... आजादी के रंग में नहाया देश, कश्मीर से कर्नाटक तक जश्न
80वें स्वतंत्रता दिवस पर देशभर में जश्न की अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिलीं. दिल्ली से लेकर कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर तक लोगों ने अपने-अपने अंदाज में आजादी का पर्व मनाया. इंडिया गेट तिरंगे के रंगों में रोशन हुआ, जबकि विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और समारोहों का आयोजन किया गया.
Karnataka में RSS शाखाएं कैसे लगेंगी, कांग्रेस सरकार ला रही नया कानून। DK Shivakumar। Priyank Kharge
क्या कर्नाटक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखाओं पर बैन लगने वाला है? मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने एक ऐसा बिल कैबिनेट से पास किया है, जिसने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है
साउथ स्टार यश की अपकमिंग फिल्म 'टॉक्सिक' कर्नाटक में किसी भी फिल्म के लिए अब तक की सबसे बड़ी थिएट्रिकल रिलीज़ के लिए तैयार है, जहां टीम का लक्ष्य राज्य के बॉक्स ऑफिस इतिहास की सबसे बड़ी ओपनिंग हासिल करना है। यह फिल्म पूरे राज्य में रिकॉर्ड तोड़ ...
आंध्र को एयरपोर्ट-सेमिकंडक्टर प्लांट की सौगात, कर्नाटक में विवेक स्मारक का उद्घाटन करेंगे PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को दक्षिण भारत के दौरे पर रहने वाले हैं. आंध्र प्रदेश को वे अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की सौगात देने वाले हैं.

