दिवाली और छठ से पहले बिहार में 24 घंटे पुलिस गश्त के निर्देश, हर जिले में बनेगी क्विक रिस्पॉन्स टीम
दिवाली और छठ से पहले बिहार में 24 घंटे पुलिस गश्त के निर्देश, हर जिले में बनेगी क्विक रिस्पॉन्स टीम
Samrat Choudhary ने बिहार में छठ और दिवाली पर सुरक्षा बढ़ाने के दिए निर्देश
पटना, छह नवंबर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को दिवाली, काली पूजा और छठ पर्व के मद्देनजर राज्य में सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने, चौबीसों घंटे गश्त सुनिश्चित करने और रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों तथा छठ घाटों पर विशेष सफाई अभियान चलाने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को यहां वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए राज्य के सभी जिलों में पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात करने और आपात स्थितियों से निपटने के लिए सक्रिय त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) गठित करने को कहा। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान दूसरे राज्यों और विदेशों से बिहार लौटने वाले लोगों को सुरक्षित और स्वागतपूर्ण माहौल मिलना चाहिए। चौधरी ने जिलाधिकारियों को सार्वजनिक स्थलों और छठ घाटों पर साफ-सफाई एवं सुरक्षा व्यवस्था की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने, पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराने, स्थानीय स्वयंसेवकों को शामिल करने और ग्रामीण क्षेत्रों के घाटों पर तैराकों की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने विद्युत सुरक्षा को प्राथमिकता देने और नंगे तारों के इस्तेमाल पर सख्ती से रोक लगाने को भी कहा। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, चौधरी ने अधिकारियों को त्योहारों के दौरान दलित और महादलित बस्तियों का दौरा करने, सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने और वहां के निवासियों के साथ मिलकर पर्व मनाने का निर्देश भी दिया। बयान में कहा गया कि अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं पर लगाम लगाने के लिए मुख्यमंत्री ने हर स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया दल गठित करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को वास्तविक शिकायतों पर कार्रवाई करने तथा फर्जी खबरों का अधिकतम चार घंटे के भीतर खंडन करने का निर्देश दिया। विकास योजनाओं की समीक्षा करते हुए चौधरी ने कहा कि कायाकल्प अभियान के तहत संचालित योजनाओं की संख्या दोगुनी कर दी गई है। उन्होंने जिलाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि कोई भी गांव इस अभियान से वंचित न रहे। उन्होंने बाढ़ से क्षतिग्रस्त ग्रामीण सड़कों की मरम्मत में भी तेजी लाने का निर्देश दिया। औद्योगिक विकास को गति देने के लिए मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को उद्योगपतियों के साथ हर महीने बैठक करने, उनकी समस्याओं का समाधान करने, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने तथा निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) पहल को प्रोत्साहित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह 25 नवंबर के बाद विभिन्न जिलों का दौरा करेंगे, जबकि 16 नवंबर के बाद विकास योजनाओं की विशेष समीक्षा की जाएगी। इस बैठक में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) प्रीति वर्मा ने बताया कि त्योहारों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए 16,000 प्रशिक्षु पुलिसकर्मियों, 1,500 पीटीसी कर्मियों, होमगार्ड और त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) के जवानों सहित अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है। इस बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के अलावा वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। वहीं, प्रमंडलीय आयुक्तों, पुलिस रेंज के अधिकारियों, जिलाधिकारियों और जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में हिस्सा लिया।
Diwali Chhath Special Trains 2026: दिवाली और छठ पर यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने 106 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है. इनमें सेमी-हाई स्पीड वंदे भारत भी शामिल हैं, जो दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों से बिहार के पटना, मुजफ्फरपुर और दरभंगा जैसे प्रमुख स्टेशनों को जोड़ेगी.
BIHAR NEWS: धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की हुई पूजा-अर्चना
6 शुक्रवार, नवंबर: धन्वंतरि त्रयोदशी धनतेरस पर भगवान विष्णु के अवतार आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि की विभिन्न जगहों पर पूजा हुई।
बिहार में नदियों और जलाशयों में जमा गाद (सिल्ट) अब राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में काम आएगी। इसके लिए केंद्र सरकार और बिहार सरकार ने 'नदी संजीवनी' योजना के तहत एक समझौता किया है। इस योजना का मकसद नदियों और जलस्रोतों से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालना और उसके इस्तेमाल से सड़क निर्माण की जरूरतें पूरी करना है। सरकार का मानना है कि इससे नदियों की पानी ले जाने की क्षमता बढ़ेगी, जल निकासी बेहतर होगी और बाढ़ के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, हाईवे बनाने के लिए किसानों के खेतों की उपजाऊ मिट्टी का इस्तेमाल करने की जरूरत भी कम होगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और बिहार सरकार के बीच इस संबंध में MoU हो चुका है।आपको बता दें कि इस योजना के तहत बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग की 16 निर्माणाधीन परियोजनाओं में 243 लाख घन मीटर उपयुक्त गाद का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा भविष्य की 27 परियोजनाओं के लिए 835 लाख घन मीटर गाद के इस्तेमाल का प्रस्ताव है। इस तरह कुल 43 परियोजनाओं में करीब 1078 लाख घन मीटर गाद के इस्तेमाल की योजना है।क्या है बिहार का नदी संजीवनी प्लान?नदी संजीवनी का मुख्य विचार यह है कि नदियों और दूसरे जलस्रोतों में जमा गाद को बेकार समझकर छोड़ने के बजाय उसका इस्तेमाल निर्माण कार्यों में किया जाए। इसके लिए पहले नदियों और जलाशयों की स्थिति का तकनीकी आकलन होगा। इसके बाद तय जगहों से निर्धारित सीमा के भीतर वैज्ञानिक तरीके से गाद निकाली जाएगी। जांच में हाईवे निर्माण के लिए उपयुक्त पाई जाने वाली गाद को सड़क परियोजनाओं में भराव और निर्माण सामग्री के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। इस योजना को नदी सुधार, बाढ़ प्रबंधन, खेती की जमीन के संरक्षण और सड़क निर्माण को एक साथ जोड़कर तैयार किया गया है। सरकार का उद्देश्य है कि नदियों से गाद हटाने का फायदा सिर्फ जल प्रबंधन तक सीमित न रहे बल्कि उससे सड़क निर्माण के लिए जरूरी सामग्री भी मिले। #NadiSanjivani: Reviving Rivers, Building Sustainable Highways!In a significant step towards integrating water-body restoration with infrastructure development, @MORTHIndia and the Government of Bihar have signed an MoU for scientific desilting of rivers and water bodies and utilisation of suitable excavated silt in National Highway projects.Under this initiative:- 243 lakh cubic metres of silt will be utilised across 16 ongoing NH projects.- 835 lakh cubic metres is proposed for utilisation across 27 future projects, subject to technical suitability and approvals.The initiative aims to improve water-carrying capacity, strengthen flood management, conserve agricultural land and promote sustainable highway construction.Read the press release for details: https://t.co/cpoukulWF2Watch the video on YouTube: https://t.co/grOTpTEuUH@PMOIndia @MORTHIndia @officecmbihar @IPRDBihar @PIBMoRTH #NHAI #BuildingANation— NHAI (@NHAI_Official) November 3, 2026 बिहार में बाढ़ की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। राज्य में नेपाल से आने वाली नदियां बड़ी मात्रा में पानी और अपने साथ गाद लेकर पहुंचती हैं। नदियों और जलस्रोतों में गाद जमा होने से उनकी पानी ले जाने की क्षमता प्रभावित होती है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी कहा कि नदियों में जमा गाद के कारण उनकी जलधारण क्षमता कम हुई है। इससे बाढ़, खेती की जमीन को नुकसान और संपत्ति के नुकसान जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।16 चालू हाईवे परियोजनाओं में इस्तेमाल होगी 243 लाख घन मीटर गादनदी संजीवनी योजना के तहत फिलहाल राष्ट्रीय राजमार्ग की 16 निर्माणाधीन परियोजनाओं में 243 लाख घन मीटर उपयुक्त गाद के इस्तेमाल की योजना है। इसके अलावा 27 भविष्य की परियोजनाओं के लिए 835 लाख घन मीटर गाद के इस्तेमाल का प्रस्ताव रखा गया है। इसका उद्देश्य हाईवे निर्माण में नई मिट्टी की जरूरत घटाना और निर्माण लागत को कम करना है। इस योजना के लिए बिहार में सड़क निर्माण की मौजूदा और प्रस्तावित परियोजनाओं का बड़ा आधार मौजूद है। NHAI की 39 परियोजनाएं इस समय बिहार में निर्माणाधीन हैं। इनकी कुल लंबाई करीब 1561 किलोमीटर है और अनुमानित लागत 58340 करोड़ रुपये है।इसके अलावा 11 अन्य परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनकी कुल लंबाई करीब 1982 किलोमीटर और अनुमानित लागत 185200 करोड़ रुपये है। सरकार को उम्मीद है कि नदियों से मिलने वाली उपयुक्त गाद इन परियोजनाओं की सामग्री संबंधी जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा कर सकती है। इससे निर्माण लागत घटाने और काम समय पर पूरा करने में मदद मिल सकती है।बिहार में बाढ़ की समस्या कम करने में कैसे मदद कर सकती है योजना?बिहार में बाढ़ की समस्या का एक बड़ा कारण नेपाल से आने वाली नदियों में पानी और गाद का भारी प्रवाह है। नदियों के तल में गाद जमा होने से पानी के बहाव और उसे अपने भीतर समाहित करने की क्षमता पर असर पड़ता है। ऐसे में नदी संजीवनी योजना के तहत वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालने का उद्देश्य नदियों की पानी ले जाने की क्षमता और जल निकासी में सुधार करना है। इस गाद प्रबंधन की तुलना महाराष्ट्र के बुलढाणा मॉडल से की गई है। इसके तहत नदियों और जलाशयों से वैज्ञानिक तरीके से गाद हटाकर उनकी गहराई और पानी रखने की क्षमता बढ़ाने की बात कही गई है।बिहार में गंगा और उसकी सहायक नदियों के साथ कोसी, गंडक, बागमती और महानंदा जैसी नदियों के तल में जमा गाद का प्रबंधन भी अहम माना गया है। योजना से जुड़े ब्योरे में नेपाल से आने वाले तेज जलप्रवाह और फरक्का बैराज के बैकवाटर प्रभाव के संदर्भ में भी नदियों में गाद जमा होने की समस्या का उल्लेख है। इन नदियों से वैज्ञानिक तरीके से गाद हटाने का उद्देश्य हर साल आने वाली बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करना है।योजना का एक दूसरा उद्देश्य मानसून के दौरान आने वाले अतिरिक्त पानी का बेहतर इस्तेमाल करना है। जुलाई से अक्टूबर के चार महीनों में आने वाले अतिरिक्त पानी को जलाशयों और नहरों में बेहतर तरीके से जमा करने की व्यवस्था विकसित करने की बात है। इससे साल के बाकी महीनों में पानी की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।किसानों की उपजाऊ मिट्टी बचेगी, खेती और सिंचाई को भी फायदानदी संजीवनी योजना का एक अहम पहलू खेती की जमीन की उपजाऊ मिट्टी को बचाना है। सड़क और तटबंध बनाने के लिए कई बार भराव सामग्री की जरूरत होती है। इसके लिए खेतों से मिट्टी निकाली जाती है, जिससे खेती की जमीन की ऊपरी उपजाऊ परत को नुकसान पहुंच सकता है। योजना के तहत नदियों और जलाशयों से निकाली गई उपयुक्त गाद को हाईवे निर्माण में इस्तेमाल करने से खेतों की मिट्टी पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य है। इससे किसानों की जमीन की ऊपरी उपजाऊ परत को बचाने में मदद मिल सकती है।बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य में बाढ़ के कारण किसानों, खेती की जमीन, आजीविका और बुनियादी ढांचे को नुकसान होता है। उन्होंने बताया कि बिहार जलस्रोत पुनरुद्धार एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026 तैयार की गई है। इस नीति के तहत जलस्रोतों को फिर से बेहतर बनाने और जमा गाद के प्रबंधन के लिए एक व्यवस्थित ढांचा तैयार किया गया है। इस नीति में बाढ़ के बाद किसानों की जमीन पर जमा रेत और गाद हटाने की सुविधा भी शामिल है। इससे उन किसानों को राहत मिल सकती है जिनके खेतों में बाढ़ के बाद रेत या गाद जमा हो जाती है।जलस्रोतों में गाद कम होने से सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर बनाने, नहरों के जरिए खेतों तक पानी पहुंचाने और भूजल स्तर को सुधारने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। योजना से जुड़े विवरण में खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने और आसपास के भूजल के पुनर्भरण का लक्ष्य भी बताया गया है।नदी के पर्यावरण और जलीय जीवों को भी मिल सकता है फायदानदी संजीवनी योजना सिर्फ गाद निकालने और उसे सड़क निर्माण में इस्तेमाल करने तक सीमित नहीं है। इसका एक उद्देश्य नदियों के प्राकृतिक बहाव और उनके पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर बनाना भी है। वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालने से नदियों के बहाव में सुधार हो सकता है। इससे जलस्रोतों की स्थिति और उनमें रहने वाले जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। योजना से जुड़े विवरण में मिट्टी के कटाव की समस्या को नियंत्रित करने की संभावना भी जताई गई है।इसके लिए गाद निकालने का काम तय तकनीकी सीमाओं और पर्यावरण से जुड़े नियमों के तहत ही किया जाएगा। नदियों के प्राकृतिक तंत्र, किनारों, तटबंधों और पुलों को नुकसान पहुंचाए बिना काम करना इस योजना की अहम शर्त है।बिहार सरकार की 2026 की नीति क्या कहती है?बिहार जलस्रोत पुनरुद्धार एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026 को राज्य में नदियों और दूसरे जलस्रोतों की बहाली तथा जमा गाद के प्रबंधन के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य गाद निकालने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना और निकाली गई सामग्री का उपयोग तय मानकों के अनुसार करना है। इस नीति के तहत बाढ़ के बाद खेतों में जमा रेत और गाद हटाने का प्रावधान भी बताया गया है। इससे प्रभावित किसानों को राहत देने में मदद मिल सकती है।केंद्र और बिहार सरकार के बीच हुए समझौते से इस नीति को लागू करने के लिए संस्थागत व्यवस्था भी बनाई गई है। बिहार सरकार का सड़क निर्माण विभाग (RCD) इस योजना का नोडल विभाग होगा। इसके अलावा राज्य स्तर पर एक समन्वय समिति बनाई जाएगी। यह समिति अलग-अलग प्रस्तावों की जांच, मंजूरी की प्रक्रिया में मदद, काम की निगरानी और कामकाज से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने का काम करेगी।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने योजना को बिहार में बाढ़ प्रबंधन, कृषि विकास और सड़क निर्माण के प्रयासों से जोड़ने वाला कदम बताया। उन्होंने इसके क्रियान्वयन में राज्य सरकार की ओर से पूरा सहयोग देने और प्रस्तावों पर समय से कार्रवाई करने का भरोसा दिया।गाद निकालने के लिए तय होंगे स्थान, जांच के बाद ही हाईवे में होगा इस्तेमालनदी संजीवनी योजना में गाद निकालने के काम को लेकर तकनीकी और पर्यावरण संबंधी सावधानियां तय की गई हैं। इसके तहत किसी भी नदी या जलस्रोत से मनमाने तरीके से गाद नहीं निकाली जाएगी। सबसे पहले चुने गए जलस्रोतों का विस्तृत तकनीकी आकलन किया जाएगा। इसके बाद सिर्फ स्वीकृत जगहों पर और तय तकनीकी सीमाओं के भीतर ही गाद निकालने की अनुमति होगी। इस प्रक्रिया में नदी के पारिस्थितिकी तंत्र, नदी के किनारों, तटबंधों, पुलों और दूसरे निर्माणों को नुकसान से बचाने का ध्यान रखा जाएगा।निकाली गई गाद को राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में इस्तेमाल करने से पहले उसकी गुणवत्ता और उपयुक्तता की जांच की जाएगी। इसके लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्धारित मानकों और भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के संबंधित कोड का पालन किया जाएगा। गाद की निकासी, उसे ले जाने और निर्माण में इस्तेमाल की गई मात्रा का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। इसके लिए संयुक्त माप, डिजिटल रिकॉर्ड, नियमित निगरानी और समय-समय पर आंकड़ों का मिलान किया जाएगा। इससे यह पता रखा जा सकेगा कि कितनी गाद निकाली गई, कितनी ढुलाई हुई और कितनी मात्रा का इस्तेमाल निर्माण कार्यों में किया गया।हाईवे निर्माण की लागत और समय दोनों बचाने का लक्ष्यराष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में बड़ी मात्रा में मिट्टी और भराव सामग्री की जरूरत होती है। अगर यह सामग्री निर्माण स्थल के आसपास उपलब्ध हो जाए तो उसे दूर से लाने की जरूरत कम हो सकती है। इससे ढुलाई पर होने वाला खर्च घट सकता है और निर्माण कार्य तेजी से पूरा करने में मदद मिल सकती है। नदी संजीवनी योजना में नदियों से निकाली गई उपयुक्त गाद को हाईवे निर्माण में इस्तेमाल करने का यही उद्देश्य है। इससे नई मिट्टी और कृषि भूमि की ऊपरी परत पर निर्भरता कम करने की कोशिश होगी।निर्माण सामग्री की स्थानीय उपलब्धता से परिवहन खर्च और उससे होने वाले कार्बन उत्सर्जन में कमी आ सकती है। इसके अलावा राज्य में विकसित हो रही 12 नई टाउनशिप, 10 नए एयरपोर्ट और 32 मेडिकल कॉलेजों के भू-समतलीकरण और बुनियादी निर्माण कार्यों में भी इस गाद के वैकल्पिक इस्तेमाल की संभावना बताई गई है।बिहार में 2014 के बाद बढ़ा राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्कबिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क 2014 में 4,615 किलोमीटर था, जो अब बढ़कर करीब 6,500 किलोमीटर हो गया है। इसके अलावा 2014 से राज्य की प्रमुख नदियों पर करीब 29 नए पुलों के निर्माण का काम भी शुरू किया गया है। इन पुलों का उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करना और लोगों तथा सामान की आवाजाही को आसान बनाना है। नदी संजीवनी योजना को इसी बुनियादी ढांचे के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके जरिए नदियों से निकली गाद को सड़क निर्माण की सामग्री में बदलने की योजना है। इससे जलस्रोतों की बहाली और सड़क निर्माण के बीच तालमेल बनाने की कोशिश होगी।
बांका में युवाओं को मिलेगी टूल और स्टडी किट:17 नवंबर शाम 5 बजे तक ऑनलाइन आवेदन करें
बांका के बेरोजगार एवं योग्य युवाओं को रोजगार और कौशल विकास से जोड़ने के लिए बिहार सरकार की ओर से टूल किट और स्टडी किट योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को रोजगार शुरू करने के लिए टूल किट और सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को स्टडी किट उपलब्ध कराई जाएगी। जिला नियोजन पदाधिकारी ने पात्र युवाओं से योजना का लाभ उठाने की अपील की है। इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर समेत कई ट्रेड को टूल किट योजना के तहत इलेक्ट्रिशियन, फिटर, मोबाइल रिपेयरिंग, ब्यूटीशियन, प्लंबर, इलेक्ट्रॉनिक रिपेयरिंग, होम अप्लायंस रिपेयरिंग और सिलाई मशीन ऑपरेटर जैसे ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को टूल किट दी जाएगी। इसके लिए अभ्यर्थियों की उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। केंद्र या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थान से संबंधित ट्रेड में कम से कम तीन महीने का प्रशिक्षण अनिवार्य है। सरकारी नौकरी की तैयारी करने वालों को स्टडी किट यूपीएससी, बीपीएससी, एसएससी, रेलवे, बैंकिंग, बिहार पुलिस समेत अन्य सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को स्टडी किट उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए अभ्यर्थियों का इंटरमीडिएट या स्नातक उत्तीर्ण होना और किसी सरकारी सेवा की लिखित परीक्षा के लिए आवेदन किया होना जरूरी है। परिवार की आय तीन लाख तक निर्धारित दोनों योजनाओं का लाभ लेने के लिए अभ्यर्थियों की अधिकतम वार्षिक पारिवारिक आय तीन लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसके अलावा नियोजनालय अथवा एनसीएस पोर्टल पर कम से कम छह महीने पुराना निबंधन होना आवश्यक है। दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के पात्र अभ्यर्थी भी योजना का लाभ उठा सकते हैं। 17 नवंबर तक ऑनलाइन आवेदन इच्छुक और पात्र अभ्यर्थी 17 नवंबर 2026 को शाम पांच बजे तक बिहार रोजगार सेतु पोर्टल detjob.bihar.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अभ्यर्थियों का चयन उप निदेशक (नियोजन), भागलपुर प्रमंडल की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा विभागीय निर्देशों के अनुसार किया जाएगा। योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए अभ्यर्थी जिला नियोजनालय, बांका कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
'जाति देखकर एनकाउंटर नहीं होना चाहिए', बिहार सरकार पर बरसे भाई वीरेंद्र
पटना में आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने एनकाउंटर को लेकर सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि असली अपराधी की जवाबी कार्रवाई में मौत अलग मामला है, लेकिन निजी दुश्मनी या जाति के आधार पर किसी व्यक्ति को अपराधी मानकर गोली चलाना गलत है.
श्रावस्ती। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) भिनगा में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय अप्रेंटिस मेले के तहत होंडा टू व्हीलर कंपनी, मानेसर (गुरुग्राम) के प्लांट में अप्रेंटिस भर्ती के लिए कैंपस चयन का आयोजन किया गया। शुक्रवार को दोपहर 2:00 बजे आईटीआई प्रबंधन ने बताया कि इसमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों के अलावा बिहार और राजस्थान से पहुंचे कुल 61 अभ्यर्थियों ने प्रतिभाग किया, जिनमें साक्षात्कार के माध्यम से 31 अभ्यर्थियों का चयन किया गया। कार्यक्रम में पहुंचे होंडा प्लांट के एचआर संदीप कुमार का संस्थान के प्रधानाचार्य विनोद कुमार गुप्ता ने स्वागत किया। संस्थान के कार्यदेशक एमपी वर्मा की देखरेख में भर्ती मेला संपन्न हुआ। इसके आयोजन में संस्थान के समस्त स्टाफ का सराहनीय योगदान रहा। प्रधानाचार्य विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि युवाओं को रोजगार और अप्रेंटिसशिप से जोड़ने के उद्देश्य से संस्थान में प्रत्येक माह ऐसे कैंपस चयन कार्यक्रम आयोजित कराए जाते हैं। बिहार से आए अभ्यर्थी रितेश कुमार और रूपेंद्र कुमार वर्मा ने चयनित होने पर खुशी जताई। वहीं अप्रेंटिस प्रभारी पवन मलिक ने बताया कि हर महीने अप्रेंटिस मेले के माध्यम से युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। चयन के बाद युवाओं ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि आईटीआई के द्वारा लगाए जा रहे हैं अप्रेंटिस मेले में युवाओं का चयन हो रहा इससे युवा रोजगार से जुड़े रहे और यह आईटीआई की अच्छी पहल है।
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 71वीं के कैंडिडेट्स का इइंतजार खत्म हो गया है। आयोग ने संयुक्त मुख्य प्रतियोगिता परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया है। इस परीक्षा में कुल 3392 अभ्यर्थियों को सफलता मिली है। ये अभ्यर्थी अब चयन प्रक्रिया के अगले चरण यानी इंटरव्यू में शामिल होंगे। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर कुछ घंटों बाद रिजल्ट उपलब्ध कराया जाएगा। 1298 पदों के लिए हुई थी परीक्षा BPSC की 71वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के जरिए बिहार सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 1298 पदों पर नियुक्ति होनी है। इसके लिए प्रारंभिक परीक्षा 13 सितंबर 2025 को आयोजित की गई थी। परीक्षा राज्य के 37 जिलों में 912 केंद्रों पर हुई थी। इसमें 4.71 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जबकि 3.16 लाख से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। अब इंटरव्यू की होगी तैयारी मुख्य परीक्षा में सफल घोषित अभ्यर्थियों को अब आगे की चयन प्रक्रिया के लिए तैयारी करनी होगी। मुख्य परीक्षा के परिणाम के बाद आयोग की ओर से साक्षात्कार (इंटरव्यू) की प्रक्रिया और उससे संबंधित कार्यक्रम जारी किया जाएगा। अंतिम चयन मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों के आधार पर निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा। PT में 14,261 अभ्यर्थी हुए थे सफल PT परीक्षा का परिणाम 18 नवंबर 2025 को जारी किया गया था। इसमें कुल 14,261 अभ्यर्थियों को सफलता मिली थी। इनमें 13,368 अभ्यर्थी 71वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा और 893 अभ्यर्थी वित्तीय प्रशासनिक पदाधिकारी के पदों के लिए सफल घोषित किए गए थे। इसके बाद सफल अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका मिला। अप्रैल में हुई थी मुख्य परीक्षा 71वीं संयुक्त मुख्य प्रतियोगिता परीक्षा 25 से 30 अप्रैल 2026 के बीच आयोजित की गई थी। मुख्य परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी लंबे समय से परिणाम का इंतजार कर रहे थे। अब आयोग ने 3392 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया है। मुख्य परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को अब इंटरव्यू की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके बाद अंतिम मेधा सूची जारी की जाएगी। कहां और कैसे चेक करें रिजल्ट? अभ्यर्थी BPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रिजल्ट से संबंधित अपडेट प्राप्त कर सकते हैं।आधिकारिक वेबसाइट: https://bpsc.bihar.gov.in/वेबसाइट पर रिजल्ट पीडीएफ उपलब्ध होने के बाद अभ्यर्थी उसमें अपना रोल नंबर सर्च करके परिणाम देख सकेंगे। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आयोग की आधिकारिक सूचना और आगे जारी होने वाले निर्देशों पर नजर बनाए रखें।3392 अभ्यर्थियों की सफलता के साथ अब BPSC 71वीं परीक्षा का अगला चरण अहम होने जा रहा है। सफल उम्मीदवारों की निगाहें अब इंटरव्यू और अंतिम चयन सूची पर रहेंगी।
दिवाली और छठ पूजा पर बिहार जाने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था की है। दिल्ली, पंजाब, मुंबई, पुणे और दक्षिण भारत से वंदे भारत समेत कई ट्रेनें चलेंगी। जानें प्रमुख रूट और तारीखें।
वैशाली की धरती पर पीएम मोदी का दौरा, बिहार के लिए सौभाग्य की बात: दिलीप जायसवाल
Patna, 6 नवंबर . Prime Minister Narendra Modi के 21 नवंबर को प्रस्तावित बिहार दौरे को लेकर राज्य में Political हलचल तेज हो गई है. बिहार Government के…
Bihar Police STF ने जब्त की 10 करोड़ रुपये की चरस, दो अलग-अलग अभियानों में महिला समेत 2 गिरफ्तार
मोतिहारी/पूर्णिया, छह नवंबर बिहार पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) और जिला पुलिस के साथ मिलकर दो अलग-अलग अभियानों में मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में एक पुरुष और एक महिला को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि इस दौरान पूर्वी चंपारण एवं पूर्णिया जिलों से 10 करोड़ रुपये मूल्य का चरस और 61 ग्राम स्मैक जब्त किया गया। एसटीएफ की ओर से शुक्रवार को जारी बयान के अनुसार, पहले अभियान में एसटीएफ और डीआरआई की पटना एवं मुजफ्फरपुर इकाइयों की संयुक्त टीम ने बृहस्पतिवार को पूर्वी चंपारण जिले के डुमरिया घाट थाना क्षेत्र से राजेश सहनी को गिरफ्तार किया और उसके पास से 10 किलोग्राम चरस जब्त किया गया, जिसकी कीमत करीब 10 करोड़ रुपये आंकी गई है। बयान में कहा गया है कि इसके अलावा एक मोबाइल फोन और 2,320 रुपये नकद भी बरामद किए गए। बयान के मुताबिक, सहनी कथित तौर पर मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा है। वह नेपाल से चरस मंगवाकर बिहार के रास्ते उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र के तस्करों तक इसकी आपूर्ति करता था। इसमें कहा गया है कि बरामद की गई चरस की खेप गुजरात के पाटन जिले में पहुंचाई जानी थी। वहीं, एसटीएफ और पूर्णिया जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को जिले के गुलाबबाग से इशरत खातून नामक महिला को गिरफ्तार किया और उसके पास से 61 ग्राम स्मैक और एक मोटरसाइकिल जब्त की गई। वह पूर्णिया के सदर थाना क्षेत्र के कब्रिस्तान टोला की निवासी है। एसटीएफ के बयान में कहा गया है कि दोनों मामलों में आगे की जांच जारी है। गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक इतिहास का भी सत्यापन किया जा रहा है। दोनों मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
मुंगेर के लक्ष्मीपुर की डॉ. प्रीति सिंह ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में सहायक प्राध्यापक बनकर सफलता की नई कहानी लिखी है।
Bihar Teacher Salary Scam 34 Crore Overpayment: शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के वेतन, आवास भत्ता और एरियर में ₹34.11 करोड़ की वित्तीय अनियमितता पर सभी 38 जिलों के DEO से 7 दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। भागलपुर में ₹1.84 करोड़ की वसूली होनी है, जिसमें मेकर, चेकर और अप्रूवर की मिलीभगत से गड़बड़ी का आरोप है।
ट्रेनें फुल, हवाई किराया 25000... छठ पर बिहार आने के क्या हैं विकल्प?
दिवाली और छठ पर अपने घर बिहार लौटने की तैयारी कर रहे प्रवासियों के सामने इस बार सफर का संकट खड़ा हो गया है. नियमित ट्रेनों में टिकट मिलना मुश्किल है और कई रूट पर वेटिंग के साथ बुकिंग बंद होने की नौबत है. दूसरी तरफ फ्लाइट का किराया 25 से 35 हजार रुपये तक पहुंच रहा है. बसें सस्ती जरूर हैं, लेकिन लंबी दूरी और परिवार के साथ सफर का खर्च भी कम नहीं है. ऐसे में घर पहुंचना बड़ी चुनौती बन गया है.
16 साल के बेटे के अंगदान से तीन मरीजों को मिली नई जिंदगी, बिहार में पहली बार सरकारी खर्च पर हुआ लिवर ट्रांसप्लांट
Bihar Education: बिहार के सरकारी स्कूलों में अब भोजपुरी-मगही समेत 6 भाषाओं में होगी पढ़ाई, 40 लाख बच्चों को मुफ्त मिलेंगी किताबें
धनतेरस से पहले बिहार में खूनी खेल; पूजारी को फोन कर बुलाया और मार दी 3 गोलियां, सड़क पर बवाल
मंदिर में पूजा करने वाले सोनू कुमार को फोन पर कॉल करके बुलाया गया और तीन गोलियां मार दी गई। सोनू की मौत के बाद जोरदार आक्रोश फूटा। लोगों ने एनएच 28 को जाम कर दिया।
दीपावली और छठ पर बिहार के सरकारी अस्पतालों में 24 घंटे मिलेगा इलाज, घाटों पर मेडिकल कैंप और एम्बुलेंस रहेंगी तैनात
दिल्ली के चावड़ी बाजार में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत ढही, बिहार के खगड़िया के दो मजदूरों की मौत
दिल्ली के चावड़ी बाजार में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत ढही, बिहार के खगड़िया के दो मजदूरों की मौत
PATNA NEWS: 21 नवंबर को बिहार आएंगे PM मोदी, NDA मनाएगी वर्षगांठ
6 शुक्रवार, नवंबर: पीएम मोदी 21 नवंबर को बिहार आएंगे, वैशाली औद्योगिक पार्क में NDA सरकार की पहली वर्षगांठ कार्यक्रम में शामिल होंगे।
Bihar News Today Live: बिहार ब्रेकिंग न्यूज़, पढ़ें 6 नवम्बर के मुख्य और ताजा समाचार
Bihar Breaking News Today Live - Read latest and breaking news today in hindi at Amarujala. यहां पढ़ें, बिहार की ताजा खबरें, राजनीति, खेल, मनोरंजन, धर्म, क्राइम और शिक्षा की खबरों का लाइव अपडेशन
बिहार में वैशाली और पटना जिले को जोड़ने वाला 6 लेन का लगभग 10 किमी लंबा पुल तैयार हो गया है. पीएम मोदी 21 नवंबर को बिहार दौरे में इस पुल का उद्घाटन करेंगे. ये महासेतु उत्तर और दक्षिण बिहार में कनेक्टिविटी का नया जरिया बनेगा.
Diwali-Chhath Trains: बिहार के लिए 106 स्पेशल ट्रेनों का ऐलान, वंदे भारत भी शामिल; पूरी लिस्ट आई
रेलवे ने 106 स्पेशल ट्रेनों का इंतजाम किया है। दिल्ली, मुंबई, पंजाब और बेंगलुरु से चलेंगी ट्रेनें। वंदे भारत एक्सप्रेस भी शामिल। जानें पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर समेत बिहार के प्रमुख शहरों के लिए ट्रेनों की पूरी लिस्ट, रूट और तारीखें।
पुराने आम-लीची के बागों में लौटेगी बहार, जीर्णोद्धार पर 40% सब्सिडी
देश के पारंपरिक फल उत्पादक राज्यों में दशकों पुराने आम और लीची के बागान कभी किसानों की समृद्धि का मुख्य आधार हुआ करते थे। लेकिन 30 से 40 वर्ष या उससे अधिक पुराने हो चुके इन पेड़ों में अब उम्र का असर साफ दिखने लगा है। तनों का खोखला होना, शाखाओं का आपस में उलझना, सूरज की धूप जमीन तक न पहुंचना और कीट-व्याधियों के बढ़ते प्रकोप के कारण इन पेड़ों की फल उत्पादन क्षमता 50 से 70 प्रतिशत तक घट चुकी है। घटते उत्पादन और गिरती गुणवत्ता से परेशान होकर कई किसान अपने पुरखों के इन ऐतिहासिक बागों को काटने या कंक्रीट के प्लाटों में बदलने को मजबूर हो रहे थे। बागवानों की इसी गंभीर समस्या को हल करने और फल उत्पादन को फिर से रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचाने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) और राज्य बागवानी विभागों के सहयोग से 'जीर्णोद्धार एवं वितान प्रबंधन योजना' (Orchard Rejuvenation Scheme) के तहत 40 से 50 प्रतिशत तक की सीधी वित्तीय सहायता (सब्सिडी) देने का फैसला किया है।क्या है रीजुविनेशन और कैनोपी मैनेजमेंट तकनीक?अक्सर किसान यह सोचते हैं कि अनुत्पादक हो चुके पुराने पेड़ को काटकर उसकी जगह नया पौधा लगाना ही एकमात्र उपाय है। लेकिन नए पौधे को फल देने लायक पेड़ बनने में कम से कम 8 से 10 साल का लंबा इंतजार करना पड़ता है। इसके विपरीत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH, लखनऊ) के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई 'कैनोपी रीजुविनेशन' (छत्रक प्रबंधन) तकनीक से पुराने पेड़ को बिना उखाड़े महज 2 साल में फिर से भरपूर फल देने लायक बना दिया जाता है। इस वैज्ञानिक प्रक्रिया में पुराने पेड़ के मुख्य तने से 2.5 से 3 मीटर की ऊंचाई पर मुख्य शाखाओं की सुनियोजित प्रूनिंग (छंटाई या पोलार्डिंग) की जाती है। कटे हुए हिस्सों पर तुरंत बोर्डो पेस्ट या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का लेप लगाकर फंगस से सुरक्षा दी जाती है। कुछ ही महीनों में तने से मजबूत और नई शाखाएं फूटती हैं, जिनकी ट्रेनिंग कर एक संतुलित छत्रक (छतरीनुमा आकार) तैयार किया जाता है। इससे पेड़ के भीतरी हिस्से तक भरपूर धूप और ताजी हवा पहुंचती है, जिससे फलों का आकार, मिठास और रंग पहले से कहीं बेहतर हो जाता है।40% से 50% तक सब्सिडी का वित्तीय ढांचा: प्रति हेक्टेयर कितनी मिलेगी मदद?राष्ट्रीय बागवानी मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुसार, फलदार वृक्षों के जीर्णोद्धार के लिए प्रति हेक्टेयर लागत का एक मानक पैमाना तय किया गया है। पुराने बाग के पुनरुद्धार पर आने वाले कुल खर्च (कटाई-छंटाई, जैविक खाद, दवाइयां, माइक्रो-इरिगेशन और ड्रिप लाइन) पर सामान्य वर्ग के किसानों को 40% और लघु, सीमांत, महिला व अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों को 50% तक का बैक-एंडेड प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) अनुदान दिया जाता है।यूनिट कॉस्ट: सरकार द्वारा प्रति हेक्टेयर जीर्णोद्धार की मानक लागत लगभग ₹40,000 से ₹50,000 निर्धारित की गई है।सब्सिडी राशि: इसके तहत पात्र बागवानों को ₹16,000 से लेकर ₹20,000 प्रति हेक्टेयर की सीधी वित्तीय सहायता सीधे उनके आधार से जुड़े बैंक खाते में दी जाती है।अतिरिक्त इनपुट सहायता: सब्सिडी के साथ-साथ बागवानी विभाग चयनित किसानों को सघन पौधरोपण (Gap Filling) के लिए उन्नत कलमी पौधे, ट्राइकोडर्मा, वर्मीकम्पोस्ट और कीटनाशक छिड़काव यंत्र भी रियायती दरों पर उपलब्ध कराता है।मध्यवर्ती खेती (इंटरक्रॉपिंग) से शुरुआती 2 साल में भी होगी लाखों की कमाईपुराने पेड़ों की गहरी छंटाई के बाद शुरुआती डेढ़ से दो साल तक जब नई शाखाएं विकसित हो रही होती हैं, तब बाग के भीतर जमीन पर खुली धूप उपलब्ध रहती है। इस खाली पड़ी जमीन का सदुपयोग करने के लिए कृषि वैज्ञानिक किसानों को अंतःवर्ती फसलें (Intercropping) लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। पेड़ की छंटाई के तुरंत बाद किसान बाग की पंक्तियों के बीच हल्दी, अदरक, अरबी, मटर, फ्रेंच बीन्स, कद्दू वर्गीय सब्जियां या औषधीय पौधे उगा सकते हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, आम और लीची के जीर्णोद्धार किए गए बागों में हल्दी या अदरक की अंतःवर्ती खेती करने से किसानों को पहले ही साल प्रति हेक्टेयर 80,000 से 1.20 लाख रुपये की अतिरिक्त शुद्ध आय प्राप्त हो जाती है। जब तक पेड़ों में दोबारा बंपर बौर (मंजर) और फल आने शुरू होते हैं, तब तक किसान का नियमित घरेलू खर्च और बाग की देखरेख की लागत इंटरक्रॉपिंग से आसानी से निकल आती है।प्रमुख आम और लीची बेल्ट्स को सीधा फायदाइस पुनरुद्धार अभियान का सबसे बड़ा लाभ देश के प्रमुख फल उत्पादक क्षेत्रों को मिलेगा।आम उत्पादक बेल्ट: उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध मलिहाबाद (दशहरी), सहारनपुर, बुलंदशहर, बाराबंकी बेल्ट; बिहार का भागलपुर (जर्दालु), दरभंगा; पश्चिम बंगाल का मालदा (हिमसागर, लंगड़ा); और आंध्र प्रदेश व तेलंगाना के बंगनपल्ली व तोतापरी बागानों के लाखों किसानों को इस योजना से सीधा संबल मिलेगा।लीची उत्पादक क्षेत्र: बिहार के मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, वैशाली (शाही लीची) और उत्तराखंड के देहरादून व रामनगर की विश्वप्रसिद्ध लीची के पुराने बगीचों में इस तकनीक से फलों के फटने (Fruit Cracking) और कीटों की समस्या में 60% तक की कमी दर्ज की गई है।आवेदन कैसे करें: जरूरी दस्तावेज और प्रक्रियाबागवानी जीर्णोद्धार सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए किसानों को अपने राज्य के बागवानी विभाग के आधिकारिक पोर्टल (जैसे यूपी में dbt.uphorticulture.in या बिहार में horticulture.bihar.gov.in) पर ऑनलाइन पंजीकरण करना होता है। इसके अलावा किसान अपने ब्लॉक या जनपद स्तर पर स्थित उप निदेशक / जिला उद्यान अधिकारी (DHO) कार्यालय में जाकर भी ऑफलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदन के लिए किसान की खतौनी/जमाबंदी (भूमि अभिलेख), आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रति, पासपोर्ट साइज फोटो और बाग में पुराने पेड़ों की मौजूदा स्थिति का स्थलीय विवरण जरूरी होता है। उद्यान विभाग के तकनीकी अधिकारी बाग का भौतिक सत्यापन (Geotagging Survey) करते हैं, जिसके बाद स्वीकृति पत्र जारी होता है। कार्य पूरा होने के बाद सत्यापन उपरांत सब्सिडी की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेज दी जाती है। पुरखों की धरोहर रहे इन बागों को आधुनिक विज्ञान और सरकारी सहायता से संवारकर किसान अपनी वार्षिक आय में 2 से 3 गुना तक टिकाऊ इजाफा कर सकते हैं।
Anant Singh LIVE: अनंत सिंह का बिहार से यूपी रोड शो वाला शक्ति प्रदर्शन, प्रयागराज में भी लगे पोस्टर
Anant Singh LIVE: जेडीयू से पूर्व एमएलए पत्नी नीलम देवी समेत छह साल के लिए निष्कासित मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह शुक्रवार को पटना से सड़क मार्ग से प्रयागराज रवाना हो गए हैं। रास्ते में जगह-जगह उनका स्वागत है।
Bihar दौरे से पहले Tejashwi Yadav का PM Modi पर हमला, कहा- नहीं मिला बाढ़ पैकेज
राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने 6 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिहार दौरे से पहले उनकी आलोचना की। उन्होंने केंद्र सरकार पर राज्य को पर्याप्त मदद न देने का आरोप लगाया और अपराध, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवा से जुड़े मुद्दों को उठाया। यादव ने कहा कि भले ही बिहार की जनता ने मोदी को भारी जनादेश दिया, लेकिन जब भी राज्य को मदद की जरूरत पड़ी, तो उसके साथ सौतेले बच्चों जैसा बर्ताव किया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बिहार आ रहे हैं, लेकिन वे एक प्रधानमंत्री से अपेक्षित जिम्मेदारियों को पूरा करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। बिहार की जनता ने उन्हें भारी जनादेश दिया, लेकिन जब भी बिहार को जरूरत होती है, तो हमारे साथ सौतेले बच्चों जैसा व्यवहार किया जाता है। हमें बाढ़ के लिए कोई विशेष पैकेज नहीं मिला; बिहार सरकार का खजाना खाली है। 'डबल-इंजन' सरकार का एक इंजन भ्रष्टाचार से चल रहा है, तो दूसरा अपराध से; बिहार में अराजकता का माहौल है। अब जब वे आ रहे हैं, तो निश्चित रूप से केवल खोखले वादे ही करेंगे। इसे भी पढ़ें: PM Modi का 21 नवंबर को Vaishali दौरा, औद्योगिक गलियारा परियोजनाओं की देंगे सौगात राज्य सरकार के विकास कार्यों पर सवाल उठाते हुए, यादव ने नीति आयोग की रिपोर्टों का हवाला दिया और कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में बिहार लगातार सबसे निचले पायदान पर बना हुआ है। उन्होंने कहा, वे (सत्ता पक्ष) हमेशा वही रटी-रटाई बातें दोहराते रहते हैं। नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बने कितना समय हो गया है? यहाँ उनकी सरकार लगातार सत्ता में रही है। नीति आयोग की रिपोर्टें बताती हैं कि शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य सेवा तक, हम हर क्षेत्र में सबसे नीचे हैं। आज भी हालात बिल्कुल वैसे ही हैं; इसमें कोई सुधार नहीं हुआ है। इसे भी पढ़ें: Bhupender Yadav ने कहा, Bihar की अटकी परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी पर मंत्रालय देगा ध्यान यादव ने कानून-व्यवस्था की स्थिति और अपराध पर सरकार के रवैये को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की भी आलोचना की। उन्होंने सवाल किया कि क्या यहाँ कोई ऐसा जिला है जहाँ अपराध न होता हो? फिर भी, हमारे मुख्यमंत्री को शायद लगता है कि 'अपराध' (apradh) और 'क्राइम' (crime) अलग-अलग चीजें हैं। एक अंग्रेजी शब्द है और दूसरा हिंदी, लेकिन दोनों का मतलब बिल्कुल एक ही है। वे बिहार का मजाक बनवा रहे हैं। ऐसे मुख्यमंत्री से क्या उम्मीद की जा सकती है? बिहार का क्या होगा?
दीपावली और छठ के दौरान बिहार के सरकारी अस्पतालों में 24 घंटे इलाज की व्यवस्था रहेगी। छठ घाटों पर मेडिकल कैंप लगाए जाएंगे और एम्बुलेंस तैनात रहेगी। स्वास्थ्य विभाग ने त्योहारों के दौरान मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के लिए विशेष तैयारी की है। डॉक्टर, स्टाफ की छुटि्टयां रद्द विभाग ने मेडिकल कॉलेज-अस्पतालों, जिला अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों और पीएचसी-सीएचसी को निर्देश जारी किए हैं। 6 से 17 नवंबर तक डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की छुट्टियां रद्द रहेंगी। विशेष परिस्थिति में सक्षम अधिकारी की अनुमति से ही छुट्टी मिल सकेगी। इस अवधि में सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी अनिवार्य होगी। अस्पतालों में ड्यूटी रोस्टर बनाया जाएगा और उसके मुताबिक कर्मचारियों की तैनाती होगी। रोस्टर इमरजेंसी वार्ड और सूचना पट्ट पर लगाया जाएगा, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों की जानकारी मिल सके। 24 घंटे मिलेगी इमरजेंसी सेवा दीपावली पर पटाखों से जलने, आंखों में चोट लगने और सांस लेने में परेशानी जैसी स्थिति से निपटने के लिए अस्पतालों को तैयार रहने को कहा गया है। अस्पतालों में 24 घंटे इमरजेंसी सेवा चालू रहेगी। जरूरी दवाइयों, पट्टियों, सर्जिकल सामान, आईवी फ्लूड और ऑक्सीजन का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश हैं। बर्न वार्ड, क्रिटिकल केयर बेड और वेंटिलेटर की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी। छठ के दौरान प्रमुख और संवेदनशील घाटों पर मेडिकल कैंप लगाए जाएंगे। यहां डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की शिफ्ट के मुताबिक ड्यूटी लगेगी। सिविल सर्जन को स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर मेडिकल कैंप लगाने के निर्देश दिए गए हैं। 102 समेत अन्य एंबुलेंस सेवाओं को भी अलर्ट रखा जाएगा। एंबुलेंस में ऑक्सीजन, जीवनरक्षक उपकरण, फर्स्ट एड किट और पर्याप्त ईंधन उपलब्ध रखना होगा। भीड़भाड़ वाले इलाकों और प्रमुख छठ घाटों के पास एम्बुलेंस की तैनाती होगी, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके। अस्पतालों में पटाखे और दीये जलाने पर रोक दीपावली के दौरान आग लगने की आशंका को देखते हुए सभी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रखने का निर्देश दिया गया है। फायर एक्सटिंग्विशर, फायर अलार्म और इमरजेंसी निकासी रास्तों की जांच होगी। ऑक्सीजन प्लांट, सिलेंडर स्टोर और अस्पताल परिसर के आसपास दीये, मोमबत्ती और पटाखे जलाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। हर जिले में 24 घंटे कंट्रोल रूम, 104 हेल्पलाइन भी रहेगी चालू त्योहारों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी के लिए सभी जिलों में सिविल सर्जन कार्यालय के तहत 24 घंटे कंट्रोल रूम संचालित होगा। इसके लिए नोडल पदाधिकारी नियुक्त किए जाएंगे और हेल्पलाइन नंबरों का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। राज्य स्तर पर बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति का कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर 104 भी चालू रहेगा। सभी जिलों को स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन तैयारियों की दैनिक रिपोर्ट राज्य स्वास्थ्य समिति को भेजनी होगी। स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा है, ताकि दीपावली और छठ के दौरान किसी भी आपात स्थिति में लोगों को समय पर इलाज मिल सके।
Bihar News LIVE: आगामी 21 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित वैशाली आगमन को लेकर प्रशानिक तैयारियां जोरों पर हैं। एनडीए के सभी दल कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जुट गए हैं। मोकामा विधायक अनंत सिंह प्रयागराज जा रहे हैं। सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक कार्यक्रम और रूट मैप जारी किया गया है।
वैभव के बिना बिहार बेहाल! कप्तान बदला पर नहीं थमा हार का सिलसिला
लगातार चार हार के बाद बिहार की टीम के सामने अब अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में सुधार करने की चुनौती है. वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ी की गैरमौजूदगी के बीच टीम के अन्य खिलाड़ियों को आगे आकर जिम्मेदारी उठानी होगी.
मोकामा में राजेंद्र सेतु के समानांतर गंगा नदी पर बने नए डबल ट्रैक रेल ब्रिज पर ट्रेनों का परिचालन शुरू होने के साथ ही उत्तर बिहार से दक्षिण बिहार होते यूपी और दिल्ली रूट पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है। रेलवे की योजना के अनुसार, वर्ष 2027 तक मिथिलांचल से मगध होते दिल्ली के बीच नई अमृत भारत ट्रेन चलाई जाएगी। इसके अलावा अगले दो-तीन वर्षों में इस नए ट्रैक से वंदे भारत समेत तीन-चार अतिरिक्त एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों के परिचालन की रूपरेखा तैयार की गई है। पुराना राजेंद्र सेतु सिंगल ट्रैक होने और सुरक्षा कारणों से ट्रेनों की गति महज 50 किमी प्रति घंटे तक सीमित थी। क्रॉसिंग के लिए ट्रेनों को घंटों आउटर सिग्नल पर रुकना पड़ता था। नए डबल-ट्रैक ब्रिज के चालू होने से अब दोनों दिशाओं में ट्रेनें 100 से 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से निर्बाध दौड़ रही हैं। ट्रैक क्षमता बढ़ने से ट्रेनों की लेटलतीफी खत्म हुई है और नए रूटों के विस्तार का रास्ता साफ हो गया है। बिहार में गंगा नदी पर रेल ब्रिज डबल ट्रैक ब्रिज से फायदे
Ghazipur News: अगले साल बिहार तक फर्राटा भरने में होगी सहूलियत
Next year, it will be easier to travel to Bihar.
Bijnor News: पंजाब से बिहार जा रही 30 लाख की शराब पकड़ी, दो गिरफ्तार
Liquor worth ₹30 lakh, being transported from Punjab to Bihar, seized; two arrested
भोजपुर में गिरफ्तार चंदन तिवारी उत्तर बिहार में कारतूस तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क चला रहा था। वह मुजफ्फरपुर में 10 साल से सक्रिय था और पीजी थ्री हॉस्टल से कानून की पढ़ाई करते हुए इस धंधे को संचालित कर रहा था।
बिहार के सरकारी स्कूलों में रील्स बनाने पर रोक, शिक्षकों के लिए नए सोशल मीडिया दिशानिर्देश जारी
Bihar Teachers Reels Ban: बिहार शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और कर्मियों द्वारा रील्स बनाने और सोशल मीडिया पर अपलोड करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम बच्चों की निजता और सरकारी छवि को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
मुजफ्फरपुर में कार्यपालक पदाधिकारी के ठिकानों पर निगरानी की छापेमारी, आय से अधिक संपत्ति का खुलासा
Bihar Vigilance Bureau Action: मुजफ्फरपुर में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने माधोपुर सुस्ता नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी सुशील कुमार के तीन ठिकानों पर छापेमारी की है। उन पर एक करोड़ रुपये से अधिक की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।
Bihar CM Samrat Choudhary के Crime वाले बयान पर Prashant Kishor, Tej Pratap Yadav ने लिए मजे
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक ऐसा बयान दिया, जिस पर अब सियासी तंज शुरू हो गए हैं. उन्होंने कहा कि बिहार में क्राइम हो सकता है, लेकिन अपराध नहीं. उनके इस बयान पर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के साथ-साथ तमाम बिहार के नेताओं ने ना सिर्फ सवाल उठाए हैं बल्कि, सीएम को घेर भी लिया है
Bhupender Yadav ने कहा, Bihar की अटकी परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी पर मंत्रालय देगा ध्यान
पटना, पांच नवंबर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बृहस्पतिवार को कहा कि बिहार में पर्यावरणीय मंजूरी के अभाव में लंबित विकास एवं बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के प्रस्तावों पर उनका मंत्रालय गौर करेगा और इनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। ‘पीटीआई-भाषा’ द्वारा बिहार की उन विभिन्न परियोजनाओं के बारे में पूछे जाने पर, जिनका काम पर्यावरणीय मंजूरी नहीं मिलने के कारण अटका हुआ है, यादव ने कहा, “हम इन पर ध्यान देंगे। मेरे निजी सचिव बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। मैं उनसे इस मामले को देखने के लिए कहूंगा।”अधिकारियों के अनुसार, बिहार में पांच हजार एकड़ से अधिक वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग से जुड़े प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रालय में लंबित हैं। राज्य की करीब 5,778.62 एकड़ वन भूमि के अपवर्तन की मंजूरी नहीं मिलने के कारण कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इस सिलसिले में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस सप्ताह की शुरुआत में नयी दिल्ली में भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर विभिन्न विकास एवं बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से संबंधित लंबित प्रस्तावों को जल्द मंजूरी देने का अनुरोध किया था। लंबित प्रस्तावों में गया जी में चिड़ियाघर का निर्माण, जमुई में सौर ऊर्जा परियोजनाओं एवं इस्पात उद्योगों का विकास, डोभी में औद्योगिक विनिर्माण क्लस्टर की स्थापना और भीमबांध सहित विभिन्न पर्यटन स्थलों पर ईको-टूरिज्म सुविधाओं का विकास शामिल है। गया जी में करीब 45.9 हेक्टेयर वन भूमि पर चिड़ियाघर बनाने की योजना है। इसके लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) और पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार है। वहीं, जमुई में सौर ऊर्जा एवं इस्पात उद्योगों के विकास के लिए वन भूमि के उपयोग संबंधी प्रस्ताव भी लंबित हैं। इसके अलावा, डोभी में औद्योगिक निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से प्रस्तावित विनिर्माण क्लस्टर तथा भीमबांध समेत अन्य पर्यटन स्थलों पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत ईको-टूरिज्म सुविधाएं विकसित करने की योजनाओं को भी मंजूरी मिलनी बाकी है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भी वन भूमि के अपवर्तन की आवश्यकता है। इनसे संबंधित प्रस्ताव मंत्रालय में जांच और समीक्षा के विभिन्न चरणों में हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन परियोजनाओं को मंजूरी मिलने से औद्योगिक विकास, निवेश, पर्यटन और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, सड़क एवं अन्य बुनियादी ढांचे के विस्तार में भी तेजी आएगी।
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश कुमार ने स्कूलों में रील्स और वीडियो बनाने वाले शिक्षकों को कड़ी चेतावनी दी है.
दीपावली और छठ पर बिहार के अस्पताल अलर्ट मोड में, स्वास्थ्यकर्मियों के अवकाश पर रोक
Patna, 5 नवंबर . बिहार में दीपावली और छठ महापर्व के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी Governmentी अस्पतालों को अलर्ट…
विशेष निगरानी इकाई ने पथ निर्माण अंचल के अधीक्षण अभियंता विजय कुमार को नोटिस भेजा है।
बिहार के 3 प्रमुख विश्वविद्यालयों में वित्त पदाधिकारियों के पदस्थापन पर रोक, राजभवन का रुख सख्त
Bihar University Finance Officer Appointment: राजभवन ने बिहार के तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों में वित्त पदाधिकारियों की नियुक्ति पर रोक लगा दी है। वित्त विभाग द्वारा जारी पदस्थापन आदेश को कुलाधिपति के नियमों का उल्लंघन मानते हुए तत्काल स्थगित करने का निर्देश दिया गया है।
Bihar BPSC TRE-4 भर्ती में अभूतपूर्व प्रतिस्पर्धा, 10 लाख से अधिक आवेदन
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित TRE-4 शिक्षक भर्ती में अभूतपूर्व प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है, जिसमें 10 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया है। इस भर्ती में 33,320 पदों के लिए लगभग 30 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होगा। पिछले भर्ती अभियानों की तुलना में यह संख्या काफी अधिक है। परीक्षा में महत्वपूर्ण बदलाव भी किए गए हैं, जैसे कि गलत उत्तर पर अंक काटना और OMR पैटर्न में नया विकल्प शामिल करना। जानें इस भर्ती के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
गाजियाबाद में 8वीं वाहिनी एनडीआरएफ परिसर में आयोजित द्वितीय राष्ट्रीय एसडीआरएफ सीबीआरएन प्रतियोगिता-2026 का गुरुवार को समापन हुआ। तीन दिन चली प्रतियोगिता में तमिलनाडु की टीम पहले, उत्तराखंड दूसरे और बिहार तीसरे स्थान पर रही। समापन समारोह में एनडीआरएफ के महानिदेशक पीयूष आनंद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। प्रतियोगिता 2 से 4 नवंबर तक हुई। इसका उद्देश्य रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (सीबीआरएन) आपात स्थितियों से निपटने के लिए एसडीआरएफ जवानों की तैयारी और काम करने की क्षमता परखना था। प्रतियोगिता में जवानों की तकनीकी जानकारी, तुरंत कार्रवाई और बचाव दलों के बीच तालमेल को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया गया। राष्ट्रीय प्रतियोगिता के क्षेत्रीय चरण में 19 राज्यों की एसडीआरएफ टीमों ने हिस्सा लिया था। इनमें से राजस्थान, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और गुजरात की टीमों को अंतिम चरण के लिए चुना गया। तीन दिन तक टीमों ने अलग-अलग परिस्थितियों में बचाव कार्यों का अभ्यास किया। उनके प्रदर्शन के आधार पर शीर्ष तीन टीमों को विजेता घोषित किया गया। पहले स्थान पर रही तमिलनाडु एसडीआरएफ टीम को एक लाख रुपये और ट्रॉफी दी गई। उत्तराखंड एसडीआरएफ को 75 हजार रुपये और ट्रॉफी, जबकि बिहार एसडीआरएफ को 50 हजार रुपये और ट्रॉफी मिली। पीयूष आनंद ने समापन समारोह में कहा कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ का उद्देश्य लोगों की जान बचाना और आपदा के समय उनकी सुरक्षा करना है। उन्होंने कहा कि सभी आपदा मोचन बल एक टीम की तरह काम करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संयुक्त अभ्यास से जवानों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और अपनी कमियां दूर करने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि सीबीआरएन आपदाओं में खतरे का शुरुआती संकेत आसानी से दिखाई नहीं देता। ऐसे में जवानों को नियमित अभ्यास और प्रशिक्षण की जरूरत है, ताकि आपात स्थिति में वे बिना देरी किए सुरक्षित तरीके से बचाव कार्य कर सकें। कार्यक्रम में एनडीआरएफ के महानिरीक्षक नरेंद्र सिंह बुंदेला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी, जवान और मीडिया प्रतिनिधि मौजूद रहे।
5 नवंबर, गुरुवार: दरभंगा में राजद नेता तेजस्वी यादव ने बिहार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अपराध बढ़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में हत्या और दुष्कर्म की घटनाएं लगातार हो रही हैं और पुलिस से आम लोग परेशान हैं।
Bhupender Yadav का विपक्ष पर हमला, Bihar SIR पर 60 हजार BLA ने दीं महज 2 आपत्तियां
पटना, पांच नवंबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बृहस्पतिवार को बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष एसआईआर की आड़ में हंगामा कर सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहा है। यादव दरभंगा में भाजपा की ओर से आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ मार्च’ में शामिल होने के बाद पटना पहुंचे। उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में विपक्षी गठबंधन की राजनीतिक रणनीति और उसके थिंक टैंक पर सवाल उठाए। केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों की रणनीति तैयार करने वाले समूहों का आम जनता से सीधा जुड़ाव नहीं है। उन्होंने राजद के थिंक टैंक में आइसा के पूर्व नेतृत्व, कांग्रेस के युवा नेतृत्व में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रभाव और समाजवादी पार्टी के रणनीतिक समूह में जामिया के पूर्व नेतृत्व का उल्लेख किया। यादव ने कहा कि विपक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बिहार में एसआईआर का उल्लेख करते हुए कहा, “ राज्य में 12 राजनीतिक दलों के कुल एक लाख 60 हजार बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त थे। इनमें विपक्षी दलों के 60 हजार से अधिक बीएलए शामिल थे, लेकिन पुनरीक्षण के दौरान उनकी ओर से महज दो आपत्तियां दर्ज कराई गईं। ”उन्होंने सवाल किया कि जब विपक्ष मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगा रहा था, तो उसके प्रतिनिधियों ने आपत्तियां दर्ज कराने में सक्रियता क्यों नहीं दिखाई? केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एसआईआर कोई नई या असंवैधानिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाने के लिए अपनाई जाने वाली संवैधानिक प्रक्रिया है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 324 और 326 तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची के पुनरीक्षण का अधिकार प्राप्त है और देश में इससे पहले भी 10 बार विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। यादव ने बताया कि बिहार में घर-घर सत्यापन के दौरान 21 लाख 53 हजार नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए। उन्होंने कहा, “वहीं, 25 लाख मृत मतदाता, 36 लाख स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके मतदाता और सात लाख दोहरे नाम वाले मतदाता चिह्नित किए गए। ’’केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बीएलओ को मतदाताओं के घर तीन बार जाकर सत्यापन करने का निर्देश दिया गया था और इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों की भूमिका भी सुनिश्चित की गई थी। यादव ने ईवीएम और चुनावी नतीजों पर विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवालों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव में हार के बाद विपक्ष चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाने लगता है, जबकि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिहार लोकतांत्रिक चेतना और जन आंदोलनों की ऐतिहासिक भूमि रहा है। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में लोकतंत्र की रक्षा के लिए हुए आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ के संकल्प को दोहराया। यादव ने विधान परिषद के दो निर्दलीय सदस्यों को भाजपा में शामिल कराने से संबंधित सवाल पर कहा कि इस मामले में विधान परिषद के सभापति निर्णय लेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों विधान पार्षदों ने केवल भाजपा को समर्थन दिया है, पार्टी की सदस्यता ग्रहण नहीं की है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जन सुराज ने निर्दलीय सदस्यों बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। दोनों पर भाजपा में शामिल होने का आरोप लगाते हुए राजद और ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने विधान परिषद के सभापति को ज्ञापन सौंपा था।
Kal Ka Mausam 6 November: धनतेरस के दिन कैसा रहेगा उत्तर बिहार का मौसम? पूर्वानुमान जारी
Bihar Weather IMD Forecast:उत्तर बिहार में धनतेरस (6 नवंबर) को मौसम साफ रहेगा और बारिश की कोई संभावना नहीं है। अधिकतम तापमान 28 डिग्री और न्यूनतम 16 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है, सुबह हल्का कोहरा छा सकता है।
राजनांदगांव पुलिस की बिहार में कार्रवाई, टाटा पावर सोलर के नाम पर ठगी के दो आरोपी गिरफ्तार
राजनांदगांव पुलिस ने इंस्टाग्राम पर टाटा पावर सोलर कंपनी का फर्जी विज्ञापन दिखाकर ग्यारह लाख रुपये से अधिक की ऑनलाइन ठगी करने वाले बिहार के दो साइबर ठगों को पकड़ा।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने बताया कि विपक्ष के 1.60 लाख बीएलए ने केवल दो आपत्तियां दर्ज कराईं।
5 नवंबर, गुरुवार: लखीसराय के अशोक धाम हॉल में 2 दिसंबर को दिव्यांगजनों का राज्यस्तरीय समारोह आयोजित होगा। इसमें बिहार के विभिन्न जिलों से दिव्यांगजन शामिल होकर एकजुट होंगे।
BIHAR NEWS: राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर निकला प्रचार रथ
5 गुरुवार, नवंबर: राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर प्रचार रथ निकला, जो गांव-गांव जाकर लोगों को लोक अदालत के लाभों के बारे में जागरूक करेगा।
खेत बेचने को तैयार थे पिता, बेटी बनीं बिहार टॉपर; अब IAS बनने दिल्ली पहुंची गया की निशु
खिजरसराय की निशु कुमारी ने बिहार इंटरमीडिएट कला संकाय में 479 अंक हासिल कर प्रदेश में टॉप किया है। अब वह दिल्ली में रहकर स्नातक की पढ़ाई के साथ यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं, जो ग्रामीण बेटियों के लिए प्रेरणा बनी हैं।
Delhi to Bihar Diwali Chhath Special Trains: त्योहारों पर दिल्ली से बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जाने वाले प्रवासियों के लिए भारतीय रेलवे ने 2 नई स्पेशल ट्रेनें चलाने का ऐलान किया है. जानिए इन स्पेशल ट्रेनों के संचालन की तारीखें, रूट और स्टॉपेज से जुड़ी पूरी रिपोर्ट.
लालू परिवार की वह सबसे चर्चित शादी जिसने बढ़ाई थी बिहार की सियासत
बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सर्वोच्च नेता लालू प्रसाद यादव का परिवार हमेशा से देश की मीडिया और राजनीतिक गलियारों की सुर्खियों में बना रहता है। लेकिन बिहार के सियासी इतिहास के पन्नों को पलटा जाए तो एक ऐसा भी अध्याय सामने आता है जब लालू परिवार में हुई एक शादी केवल भव्यता या व्यंजनों के लिए नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी केंद्रीय जांच एजेंसियों के भारी शिकंजे के लिए याद की जाती है। यह कहानी है उस ऐतिहासिक और चर्चित विवाह समारोह की जिसने पूरे देश के राजनीतिक और प्रशासनिक तंत्र में भूचाल ला दिया था। इस भव्य आयोजन के बाद आयकर विभाग (Income Tax Department) ने ऐसी अभूतपूर्व कार्रवाई की कि एक-दो नहीं, बल्कि देश भर के करीब 125 बड़े दिग्गजों और राजनेताओं को सीधे कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर दिया गया था। उस दौर में इस कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई ने न केवल बिहार बल्कि पूरी दिल्ली की राजनीति का तापमान चरम पर पहुंचा दिया था।#1 क्या था लालू परिवार की उस सबसे चर्चित और बहुचर्चित शादी का पूरा मामला?बात उस दौर की है जब बिहार में लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सत्ता का दौर हुआ करता था। लालू परिवार में विवाह का यह भव्य आयोजन पटना में बेहद शाही अंदाज में आयोजित किया गया था। इस शादी में देश भर के कई राज्यों से वीवीआईपी मेहमान, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक और दिग्गज उद्योगपति शरीक होने के लिए पहुंचे थे। शादी में की गई सजावट, मेहमानों के स्वागत के लिए बनाए गए विशाल पंडाल, गाड़ियों के लंबे काफिले और भव्य खान-पान का नजारा किसी सपने जैसा नजर आ रहा था। लेकिन जैसे ही यह शादी समारोह संपन्न हुआ, शादी पर हुए बेहिसाब खर्च, महंगे उपहारों और वित्तीय लेन-देन की खबरें मीडिया की मुख्य सुर्खियां बन गईं। इस बेहिसाब खर्च को लेकर आयकर विभाग और वित्त मंत्रालय की निगाहें तुरंत इस आयोजन पर टिक गईं।#1 आयकर विभाग का बड़ा एक्शन: 125 राजनेताओं को एक साथ जारी हुआ कारण बताओ नोटिसविवाह समारोह की भव्यता और उसमें हुए कथित बेहिसाब वित्तीय खर्चों की शुरुआती पड़ताल के बाद आयकर विभाग ने बेहद आक्रामक और सख्त रुख अपनाया। जांच एजेंसी ने शादी में शामिल हुए उन तमाम रसूखदार मेहमानों और राजनेताओं की सूची तैयार की जिन्होंने इस शादी के आयोजन में महंगे उपहार (Gifts), चांदी-सोने के आभूषण या वित्तीय योगदान दिया था। देखते ही देखते आयकर विभाग ने देश के अलग-अलग राज्यों से इस शादी में शामिल हुए लगभग 125 वरिष्ठ राजनेताओं, विधायकों और राजनीतिक हस्तियों को नोटिस थमा दिए। नोटिस में उन सभी से शादी में दिए गए उपहारों के स्रोत, उनकी मौद्रिक कीमत और अपने आयकर विवरण (IT Return) में उनके उल्लेख को लेकर कड़े सवाल पूछे गए थे। एक साथ 125 दिग्गजों को मिले इस नोटिस ने पूरे देश की राजनीति में खलबली मचा दी थी।#1 राजनीतिक गलियारों में मची थी भारी हलचल और वित्तीय जांच का दायराजब 125 राजनेताओं को आयकर विभाग के नोटिस मिलने की खबर सार्वजनिक हुई, तो लालू परिवार और उनके सहयोगी दलों में हड़कंप मच गया। विपक्षी दलों ने उस समय की सरकार और लालू प्रसाद यादव पर सत्ता के दुरुपयोग और काले धन के इस्तेमाल के गंभीर आरोप लगाए थे। वहीं दूसरी ओर, राजद और उनके समर्थकों ने इस पूरी कार्रवाई को केंद्र सरकार द्वारा संचालित राजनीतिक बदले की भावना और बदले की कार्रवाई करार दिया था। जांच अधिकारियों ने शादी का ठेका लेने वाले टेंट हाउस मालिकों, कैटरिंग सर्विस प्रोवाइडरों, आभूषण विक्रेताओं और अन्य इवेंट आयोजकों के खातों की भी गहनता से जांच की थी ताकि शादी में खर्च हुई असली राशि का सटीक ब्योरा निकाला जा सके।#1 भारतीय राजनीति और जांच एजेंसियों के इतिहास में दर्ज हुई यह अनोखी घटनालालू परिवार की इस शादी के बाद हुई आयकर विभाग की यह कार्रवाई भारतीय राजनीति के इतिहास में एक अनोखी मिसाल मानी जाती है। आमतौर पर किसी शादी समारोह में शिरकत करने वाले मेहमानों या गिफ्ट देने वालों पर इस तरह इतने बड़े पैमाने पर आयकर विभाग की गाज गिरना बहुत दुर्लभ माना जाता है। इस घटना ने यह साबित कर दिया था कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं के व्यक्तिगत और पारिवारिक आयोजन भी कड़े वित्तीय मानकों और जांच एजेंसियों की पैनी नजर से बाहर नहीं हैं। आज इतने वर्षों के बाद भी जब भी बिहार के सियासी इतिहास या हाई-प्रोफाइल राजनीतिक शादियों के खर्चों का जिक्र होता है, तो 125 नेताओं को मिले इस आयकर नोटिस का किस्सा प्रमुखता से याद किया जाता है।
Bihar Weather Update: अररिया में ठंड के साथ बढ़ा कोहरे का असर, सुबह 9 बजे तक सड़कों पर छाई रही धुंध
अररिया में ठंड के साथ कोहरे का असर बढ़ने लगा है। गुरुवार सुबह जिला मुख्यालय और आसपास के इलाकों में घनी धुंध छाई रही। कम दृश्यता के कारण वाहन चालक हेडलाइट जलाकर चलते दिखे। सुबह करीब 9 बजे कोहरा छंटने के बाद लोगों को राहत मिली।
शराब कंपनियों पर ऐक्शन नहीं ले रहे अफसर , बिहार के मद्य निषेध मंत्री ने की सम्राट चौधरी से शिकायत
बिहार में मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री अपने ही विभाग के अफसरों की कार्यशैली से नाखुश हैं। मंत्री का कहना है कि विभाग के अफसर शराब जब्त होने के बाद शराब कंपनियों पर ऐक्शन लेने में हिचक रहे हैं।
बिहार में शिक्षकों के लिए सोशल मीडिया गाइडलाइन जारी, अनुमति लेकर खास मौकों पर ही बना सकेंगे रील्स
Bihar Teachers Social Media Guidelines : शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों और कार्यालय परिसरों में रील्स व वीडियो बनाने पर सख्ती की है। बिना सक्षम प्राधिकार की अनुमति के सरकारी परिसर में वीडियो अपलोड करने पर रोक लगाई गई है।
Bihar News Today Live: बिहार ब्रेकिंग न्यूज़, पढ़ें 5 नवम्बर के मुख्य और ताजा समाचार
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टोल प्लाजा पर लाइन में लगने का झंझट होगा खत्म; एनएचएआई ला रहा नया सिस्टम, बिहार से शुरुआत
अब सड़कों के ऊपर गेंट्री पोल्स और ओवरहेड सेंसर्स लगाए जा रहे हैं। वर्तमान व्यवस्था में फास्टैग होने के बावजूद कई बार स्कैनर की धीमी गति या वाहनों की अधिकता के कारण टोल पर रुकना पड़ता है। नई तकनीक में इन समस्याओं को दूर कर दिया जाएगा।
केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत संचालित 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' (PM-GKAY) देश के गरीब, मजदूर और वंचित तबके के लिए सबसे बड़ी जीवन रेखा साबित हो रही है। केंद्र सरकार ने इस योजना की समय-सीमा को दिसंबर 2028 तक विस्तार दिया है, जिससे देशभर के 81.35 करोड़ से अधिक पात्र लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न (चावल, गेहूं व मोटे अनाज) का निरंतर लाभ दिया जा रहा है। पहले जहां सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत ₹1 से ₹3 प्रति किलो की रियायती दर पर अनाज उपलब्ध कराया जाता था, वहीं अब इस एकीकृत योजना के तहत शत-प्रतिशत मुफ्त अनाज दिया जा रहा है, यानी उचित मूल्य की दुकान (कोटेदार) पर लाभार्थी को ₹0 भुगतान करना होता है। राशन वितरण की प्रणाली में अक्सर लोगों के मन में यह भ्रम रहता है कि 35 किलो राशन किसे मिलता है और प्रति यूनिट 5 किलो का क्या नियम है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के नियमों के अनुसार राशन कार्ड धारकों को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिसके आधार पर मासिक अनाज का कोटा तय होता है। जो परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं और अभी तक राशन कार्ड नहीं बनवा पाए हैं, वे राज्य सरकारों के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति पोर्टल के जरिए नया डिजिटल राशन कार्ड बनवाकर इस योजना का सीधा लाभ ले सकते हैं।35 किलो प्रति माह बनाम 5 किलो प्रति यूनिट: जानिए राशन वितरण का आधिकारिक गणितमुफ्त राशन योजना के तहत खाद्यान्न का आवंटन कार्ड की श्रेणी और परिवार के सदस्यों की संख्या के आधार पर कड़ाई से लागू किया गया है:अंत्योदय अन्न योजना (AAY - पीला/गुलाबी राशन कार्ड): यह कार्ड समाज के सबसे निर्धन और असहाय परिवारों (Poorest of the Poor) को जारी किया जाता है। इस श्रेणी के अंतर्गत पंजीकृत प्रत्येक परिवार को परिवार के सदस्यों की संख्या चाहे जो भी हो, प्रति माह एकमुश्त 35 किलोग्राम मुफ्त खाद्यान्न (सामान्यतः 21 किलो चावल और 14 किलो गेहूं अथवा क्षेत्रीय उपलब्धता के अनुसार मोटा अनाज) प्रदान किया जाता है।प्राथमिकता वाले परिवार (PHH - सफेद/खाकी राशन कार्ड): गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले अन्य पात्र परिवारों को पीएचएच श्रेणी में रखा जाता है। इस कार्ड पर परिवार के प्रति सदस्य (प्रति यूनिट) के हिसाब से 5 किलोग्राम मुफ्त अनाज प्रति माह आवंटित किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी परिवार में 6 सदस्य दर्ज हैं, तो उन्हें हर महीने कुल 30 किलोग्राम अनाज पूरी तरह मुफ्त मिलेगा।35 किलो राशन के लिए कौन हैं पात्र? अंत्योदय कार्ड की प्रमुख शर्तेंअंत्योदय राशन कार्ड का आवंटन बेहद सख्त सामाजिक व आर्थिक मानकों के आधार पर किया जाता है ताकि केवल वास्तविक जरूरतमंदों को ही इसका लाभ मिले। निम्नलिखित श्रेणियों में आने वाले परिवार अंत्योदय कार्ड के लिए पात्र माने जाते हैं:ऐसे भूमिहीन खेतिहर मजदूर, सीमांत किसान, ग्रामीण कारीगर (जैसे कुम्हार, बुनकर, बढ़ई, मोची) और झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले दिहाड़ी मजदूर जिनकी कोई निश्चित मासिक आय नहीं है।ऐसे परिवार जिनका संचालन 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्ग, विधवा महिलाएं अथवा गंभीर रूप से दिव्यांग व्यक्ति कर रहे हों और उनके पास भरण-पोषण का कोई अन्य नियमित वित्तीय सहारा न हो।आदिम और घुमंतू जनजातीय समुदाय (Primitive Tribal Households) के परिवार।एचआईवी/एड्स या अन्य गंभीर असाध्य बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति जो मजदूरी करने में पूरी तरह असमर्थ हैं।जिन परिवारों की वार्षिक आय राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अति-गरीबी सीमा (सामान्यतः ₹15,000 से ₹25,000 वार्षिक) के नीचे दर्ज है। (अपात्रता नियम: यदि परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में कार्यरत है, आयकर दाखिल करता है, परिवार के पास चार पहिया वाहन, ट्रैक्टर अथवा पांच एकड़ से अधिक सिंचित कृषि भूमि है, तो वह अंत्योदय या बीपीएल राशन कार्ड के लिए पात्र नहीं होगा।)नया राशन कार्ड बनवाने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की चेकलिस्टनए राशन कार्ड के लिए आवेदन करते समय परिवार के सभी सदस्यों के वैध दस्तावेज संलग्न करना आवश्यक है:मुखिया की जानकारी: परिवार की सबसे वरिष्ठ महिला (18 वर्ष या उससे अधिक आयु) को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत परिवार का कानूनी मुखिया माना जाता है। मुखिया की तीन हालिया पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो।पहचान व पते का प्रमाण: परिवार के सभी वयस्क व नाबालिग सदस्यों के पहचान पत्र (नागरिक पहचान पत्र) की प्रमाणित प्रति।निवास प्रमाण पत्र: बिजली का बिल, पानी का बिल, गैस कनेक्शन पासबुक या स्थानीय निकाय द्वारा जारी निवास प्रमाण।आय प्रमाण पत्र: तहसील के राजस्व अधिकारी (तहसीलदार/एसडीएम) द्वारा जारी चालू वर्ष का वैध आय प्रमाण पत्र।बैंक खाता पासबुक: परिवार की मुखिया महिला के बैंक खाते का विवरण और आईएफएससी कोड (डीबीटी सक्षम)।शपथ पत्र: इस आशय का स्व-घोषणा पत्र कि परिवार के पास पहले से देश के किसी अन्य राज्य या जिले में राशन कार्ड नहीं बना हुआ है।नया राशन कार्ड कैसे बनवाएं? ऑनलाइन व ऑफलाइन आवेदन की पूरी प्रक्रियाराशन कार्ड जारी करने और उसकी सूची संकलित करने का संवैधानिक अधिकार संबंधित राज्य सरकारों के पास होता है। नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं:1. राज्य खाद्य पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदनकेंद्र सरकार के राष्ट्रीय खाद्य पोर्टल (nfsa.gov.in) पर जाएं अथवा अपने राज्य के खाद्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (जैसे fcs.up.gov.in, epds.bihar.gov.in आदि) खोलें।होमपेज पर 'Citizen Services' सेक्शन में जाकर 'Apply for New Ration Card' विकल्प का चयन करें।अपना मोबाइल नंबर दर्ज करके ओटीपी सत्यापन के जरिए पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करें।आवेदन फॉर्म में अपने जिले, ब्लॉक/तहसील, ग्राम पंचायत या वार्ड और नजदीकी उचित मूल्य दुकान (राशन कोटेदार) का चयन करें।परिवार की मुखिया महिला का व्यक्तिगत विवरण और बैंक खाता संख्या भरें।'Add Family Member' विकल्प पर क्लिक करके परिवार के अन्य सभी सदस्यों के नाम, उम्र, लिंग और पहचान पत्र विवरण सही-सही जोड़ें।सभी आवश्यक दस्तावेजों की स्पष्ट स्कैन कॉपी (पीडीएफ या जेपीजी फॉर्मेट में) अपलोड करें।फॉर्म सबमिट करते ही स्क्रीन पर एक एप्लीकेशन रेफरेंस नंबर जारी होगा। इस रसीद का प्रिंटआउट निकाल लें।2. कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या खाद्य आपूर्ति कार्यालय से ऑफलाइन आवेदनग्रामीण या सुदूर इलाकों के नागरिक अपने नजदीकी जनसेवा केंद्र (CSC) पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरवा सकते हैं। इसके अलावा, ब्लॉक या तहसील स्थित आपूर्ति निरीक्षक (Supply Inspector) अथवा क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी के कार्यालय से निःशुल्क राशन कार्ड आवेदन प्रपत्र प्राप्त कर सकते हैं। फॉर्म को साफ अक्षरों में भरकर सभी दस्तावेजों की स्व-प्रमाणित प्रतियों के साथ कार्यालय में जमा करें और पावती रसीद अवश्य प्राप्त करें।सत्यापन और 'वन नेशन वन राशन कार्ड' (Mera Ration) की सुविधाआवेदन जमा होने के बाद खाद्य विभाग के क्षेत्रीय लेखपाल या आपूर्ति निरीक्षक द्वारा आवेदक के घर और आय का भौतिक सत्यापन किया जाता है। सत्यापन रिपोर्ट सकारात्मक पाए जाने पर 15 से 30 कार्य दिवसों के भीतर राशन कार्ड स्वीकृत कर दिया जाता है और डिजिटल राशन कार्ड पोर्टल पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध हो जाता है। इसके अलावा, केंद्र सरकार की 'वन नेशन वन राशन कार्ड' (ONORC) प्रणाली के तहत यदि कोई कार्डधारक रोजी-रोटी के सिलसिले में अपने गृह राज्य से किसी दूसरे राज्य में प्रवास करता है, तो उसे नया कार्ड बनवाने की कोई आवश्यकता नहीं है। लाभार्थी गूगल प्ले स्टोर से 'Mera Ration' आधिकारिक मोबाइल ऐप डाउनलोड करके अपने आधार या राशन नंबर से नजदीकी राशन डीलर का पता लगा सकते हैं और बायोमेट्रिक ई-पॉस (e-PoS) मशीन पर फिंगरप्रिंट लगाकर देश के किसी भी कोने में अपने हिस्से का मुफ्त राशन प्राप्त कर सकते हैं। राशन प्राप्त करने में किसी भी अनियमितता या डीलर द्वारा पैसे मांगने की स्थिति में राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1967 पर तुरंत शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
Bihar Weather Update: अगले छह दिनों तक शुष्क रहेगा बिहार का मौसम, सुबह-रात में हल्की ठंड
बिहार में अगले छह दिनों तक मौसम शुष्क और सामान्य रहेगा, सुबह-रात में हल्की ठंड महसूस होगी। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात मुरासु का प्रदेश पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा, तापमान में खास बदलाव नहीं होगा।
Bihar News LIVE: धारदार हथियार से मां-बेटे की हत्या, बिहार का इंजीनियर धनकुबेर; बड़ी खबरें
Bihar News LIVE: बिहार में निगरानी विभाग ने भ्रष्ट इंजीनियर विजय कुमार के ठिकानों पर रेड डाली है। जांच टीम को लाखों रुपये कैश मिले हैं। इधर बिहार सरकार राज्य के टीचरों के सर्टिफिकेट की जांच करेगी।
एनआईए ने औरंगाबाद के जाली भारतीय नोट तस्करी मामले में बुधवार को बड़ी कार्रवाई की। एजेंसी ने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में कुल 8 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। तलाशी के दौरान डिजिटल उपकरण, आपत्तिजनक दस्तावेज और बांग्लादेशी मुद्रा जब्त की गई। एनआईए की टीमों ने बिहार के औरंगाबाद में 2 और गयाजी में 3 ठिकानों पर छापेमारी की। वहीं, झारखंड के हजारीबाग में 2 और पश्चिम बंगाल के मालदा में 1 जगह तलाशी ली गई। हजारीबाग के सदर थाना क्षेत्र के बड़ा बाजार ओपी अंतर्गत हुरहुरू बाबा पथ स्थित शहीद सुभाष बारला मार्ग में दो घरों की घेराबंदी की गई। यहां प्रदीप साव और उदय साव के घर पर छापेमारी हुई। दोनों जाली नोट के कारोबार से जुड़े मामले में आरोपी हैं। दोनों ममेरे भाई हैं और बिहार के गया जिले के बाराचट्टी के रहने वाले हैं।
बिहार में अब दो से ज्यादा बच्चे वाले भी मेयर और वार्ड पार्षद बन सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद उम्मीद जग गई है। बिहार के किन-किन चुनावों में दो से ज्यादा बच्चे वालों के लड़ने पर रोक है, सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा, कब से प्रतिबंध खत्म हो सकता है, जानेंगे; आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में…। सवाल-1ः दो से ज्यादा बच्चों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? जवाबः सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने महाराष्ट्र की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव की याचिका पर सुनवाई की। 4 नवंबर 2026 को कोर्ट ने भीमराव को राहत देते हुए कहा, 'दो से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव लड़ने से रोकने वाले कानून अब प्रासंगिक नहीं रह गए हैं।' कोर्ट ने बताया कि भारत की कुल प्रजनन दर 2003 में 3 थी, जो अब घटकर 1.9 रह गई है। 2.1 की प्रजनन दर को रिप्लेसमेंट रेट माना जाता है। इससे कम प्रजनन दर का मतलब है कि एक पीढ़ी अपनी जगह अगली पीढ़ी को पूरी तरह नहीं ले पाएगी। कोर्ट ने कहा कि प्रजनन दर में गिरावट से बुजुर्गों की आबादी बढ़ सकती है और कामकाजी लोगों की संख्या घट सकती है। इन बदलावों को नजरअंदाज करने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इस टिप्पणी के साथ बेंच ने 2003 के उस फैसले पर दोबारा विचार के लिए मामला बड़ी बेंच के पास भेज दिया, जिसमें दो बच्चों की शर्त को सही ठहराया गया था। ‘मौजूदा कानून राजनीतिक अधिकारों से वंचित करते हैं’ बेंच ने कहा कि दो से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव लड़ने से रोकने वाले कानून नागरिकों के एक पूरे वर्ग को राजनीतिक प्रतिनिधित्व से बाहर कर देते हैं। इसका किसी व्यक्ति की सार्वजनिक पद संभालने की क्षमता से कोई खास संबंध नहीं है। कोर्ट के मुताबिक, ऐसे कानून लोगों को बच्चे पैदा करने या लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर करते हैं। इससे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले प्रजनन से जुड़े फैसले लेने की आजादी के अधिकार का उल्लंघन होता है। सवाल-2ः …तो क्या दो से ज्यादा बच्चे वाले चुनाव लड़ पाएंगे? जवाबः अभी सुप्रीम कोर्ट ने कोई स्पष्ट फैसला नहीं दिया है। सिर्फ मंगला भीमाराव को राहत देते हुए कोर्ट ने मामले को बड़ी बेंच के पास 2003 के अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए भेज दिया। दो जजों की बेंच ने पुराने फैसले पर पुनर्विचार करने के पक्ष में अपनी राय भी दी है। चूंकि, 2003 में जावेद बनाम हरियाणा राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 में दो बच्चों की शर्त को संवैधानिक रूप से सही ठहराया था। इस कानून के तहत दो से ज्यादा जीवित बच्चे होने पर कोई व्यक्ति स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं लड़ सकता था। तब से यह नियम बिहार सहित देश के कई राज्यों में लागू है। कानून के जानकारों के मुताबिक, चूंकि यह आदेश 2003 में तीन जजों की बेंच ने फैसला सुनाया था। अभी की मौजूदा बेंच सिर्फ दो जजों वाली थी। इसलिए कोर्ट ने फैसला ना सुनाते हुए टिप्पणी करके बड़ी बेंच को भेज दिया। अब बड़ी बेंच इस मामले पर सुनवाई करेगी और अंतिम फैसला देगी। सवाल-3ः नियम बदलने से बिहार में किसे फायदा हो सकता है? जवाबः इसका सीधे तौर पर 3 तरह के लोगों को फायदा होगा। चूंकि, 2007 में नीतीश सरकार ने नगर निकाय (नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत) के चुनाव में 2 से अधिक जीवित बच्चे वाले उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। 5 अप्रैल 2007 को बिहार नगर पालिका अधिनियम-2007 लागू किया गया। अधिनियम की धारा 18(1)(m) में स्पष्ट कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति के दो से अधिक जीवित बच्चे हैं तो वह नगर निकाय चुनाव नहीं लड़ सकता है। अधिनियम लागू होने 5 अप्रैल 2007 से एक साल की छूट दी गई थी। यानी 5 अप्रैल 2008 की कट-ऑफ तिथि के बाद यदि किसी व्यक्ति का तीसरा जीवित बच्चा पैदा हुआ है, तो वह चुनाव नहीं लड़ सकता। इसी नियम के आधार पर राज्य में 2012, 2017 और 2022 नगर निकाय चुनाव हुए। बच्चे को गोद दिया तब भी अयोग्य 2022 नगर निकाय चुनाव के समय बच्चे को गोद देने का मामला सामने आया। चुनाव से पूर्व उम्मीदवारों ने तर्क दिया था कि यदि वे अपने तीसरे बच्चे को किसी रिश्तेदार या अन्य व्यक्ति को कानूनी रूप से गोद दे देते हैं, तो उनके जीवित बच्चों की संख्या दो रह जाएगी। ऐसा ही केस पटना हाईकोर्ट पहुंचा। भोला प्रसाद बनान बिहार सरकार केस में 4 अक्टूबर 2022 को पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए राज्य निर्वाचन आयोग के पत्र/निर्देश को बरकरार रखा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चे को गोद दे देने से जैविक माता-पिता का नाता खत्म नहीं होता। ऐसे उम्मीदवार को अयोग्य ही माना जाएगा। छपरा मेयर राखी गुप्ता की चली गई थी कुर्सी सवाल-4ः क्या दो से ज्यादा बच्चे वाले पंचायत चुनाव लड़ सकते हैं? जवाबः बिल्कुल, लड़ सकते हैं। अभी तक बिहार में पंचायत चुनाव लड़ने वालों पर ऐसी कोई रोक नहीं है। अब तक दो से ज्यादा बच्चे वाले भी चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि, 2021 में तत्कालीन पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने पंचायत चुनाव में भी दो से ज्यादा बच्चे वाले पैरेंट्स के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की बातें कही थी। लेकिन नियम लागू नहीं हो सका।
Varanasi News: काशी विद्यापीठ ने साउथ बिहार को दोगुने से भी ज्यादा अंतर से हराया
Kashi Vidyapith defeated South Bihar by a margin of more than double.
दिवाली और छठ पर्व पर घर जाने वाले यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उत्तर रेलवे ने दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।
Bihar Farmer Modern Technology Training: मुजफ्फरपुर में किसानों और ग्रामीण युवाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने के लिए एक एकीकृत कृषि केंद्र स्थापित किया जा रहा है। यह केंद्र कृषि यांत्रिकीकरण प्रशिक्षण, मरम्मत और लघु खाद्य प्रसंस्करण इकाई के साथ आय बढ़ाएगा।
BRABU में विद्यार्थियों से शुल्क लेकर जमा नहीं करने वाले 16 कालेजों पर होगी कार्रवाई
BRA Bihar University Action: बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में 16 कॉलेजों ने छात्रों से परीक्षा शुल्क वसूल कर विश्वविद्यालय के खाते में जमा नहीं किया। इस गंभीर वित्तीय लापरवाही पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित कॉलेजों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी की है।
मुजफ्फरपुर के MIT में मारपीट मामले की सुनवाई, बुआ और भाभी को साथ लेकर पहुंचे छात्र
Ragging Action Bihar: मुजफ्फरपुर एमआईटी में छात्रों के बीच हुई मारपीट की सुनवाई में अनुशासन समिति ने कई छात्रों को अभिभावक के बजाय रिश्तेदारों के साथ उपस्थित होने पर आपत्ति जताई।
Bihar Board 10th Dummy Admit Card 2027: नाम, जन्मतिथि और फोटो में गलती? ऐसे कराएं ऑनलाइन सुधार
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा मैट्रिक वार्षिक परीक्षा 2027 में शामिल होने वाले छात्र-छात्राओं के लिए डमी एडमिट कार्ड जारी करने की व्यवस्था एक अनिवार्य प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य परीक्षा फॉर्म और पंजीकरण रिकॉर्ड में दर्ज विवरणों का सत्यापन कराना होता है। कई बार साइबर कैफे या विद्यालय स्तर पर परीक्षा फॉर्म भरते समय लिपिकीय भूल (Clerical Error) के कारण छात्र का नाम, माता या पिता के नाम की स्पेलिंग, जन्मतिथि (DOB), लिंग, जाति कोटि या फोटो और हस्ताक्षर में गंभीर गलतियां दर्ज हो जाती हैं।यदि इन गलतियों को डमी एडमिट कार्ड चरण के दौरान ठीक नहीं कराया जाता है, तो वही अशुद्धियां छात्र के मुख्य प्रवेश पत्र (Final Admit Card), अंकपत्र (Marksheet) और मूल प्रमाण पत्र (Original Certificate) में दर्ज हो जाती हैं। आगे चलकर उच्च कक्षाओं में प्रवेश, सरकारी नौकरियों के सत्यापन और पासपोर्ट जैसे जरूरी दस्तावेज बनवाते समय प्रमाण पत्रों में दर्ज गलत नाम या जन्मतिथि के कारण कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ता है। इसलिए डमी एडमिट कार्ड मिलते ही उसकी एक-एक प्रविष्टि का बारीकी से मिलान करना प्रत्येक परीक्षार्थी के लिए बेहद जरूरी है।नाम और माता-पिता के नाम की स्पेलिंग में सुधार की प्रक्रियाडमी एडमिट कार्ड में सबसे ज्यादा गलतियां विद्यार्थियों और उनके माता-पिता के नाम के अक्षरों (Spelling) में देखने को मिलती हैं। बिहार बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार, नाम में केवल स्पेलिंग की गलतियों को ठीक करने की अनुमति दी जाती है; किसी छात्र के स्थान पर किसी दूसरे छात्र का पूरा नाम बदलने (पूर्ण प्रतिस्थापन) की अनुमति बिल्कुल नहीं होती।यदि आपके नाम, माता के नाम या पिता के नाम में कोई अक्षर गलत है, तो सुधार कराने की विधि इस प्रकार है:डमी एडमिट कार्ड का प्रिंट निकालें: बोर्ड के आधिकारिक पोर्टल से अपने डमी एडमिट कार्ड की दो साफ प्रतियां (Photocopies) निकालें।गलती को चिह्नित करें: जहां अशुद्ध नाम मुद्रित है, उस हिस्से को पेन से रेखांकित (Underline) या हल्के हाथ से काटें और उसके ठीक सामने साफ अक्षरों में अंग्रेजी के कैपिटल लेटर्स (Capital Letters) में सही नाम लिखें।सहायक दस्तावेज संलग्न करें: सुधार के प्रमाण के रूप में अपने 9वीं कक्षा के रजिस्ट्रेशन कार्ड (Registration Slip), स्कूल एडमिशन रजिस्टर (SR) की प्रति या पूर्व में जारी वैध पहचान पत्र की स्व-प्रमाणित फोटोकॉपी संलग्न करें।प्रार्थना पत्र लिखें: अपने विद्यालय प्रधान (Headmaster/Principal) के नाम एक औपचारिक आवेदन लिखें, जिसमें रजिस्ट्रेशन नंबर और रोल कोड का हवाला देते हुए नाम की सही स्पेलिंग दर्ज करने का अनुरोध करें।जन्मतिथि (Date of Birth) में विसंगति को कैसे ठीक कराएं?मैट्रिक के प्रमाण पत्र में दर्ज जन्मतिथि को ही जीवनभर के लिए आधिकारिक आयु प्रमाण माना जाता है। यदि डमी एडमिट कार्ड पर आपकी जन्मतिथि गलत अंकित हो गई है, तो इसे सुधारने के लिए बोर्ड के नियम काफी सख्त हैं क्योंकि जन्मतिथि में मनमाना बदलाव स्वीकार्य नहीं होता।आवश्यक प्रमाण: जन्मतिथि में संशोधन के लिए विद्यालय के एडमिशन रजिस्टर (स्कॉलर रजिस्टर) की प्रमाणित प्रति, आठवीं कक्षा की टीसी (Transfer Certificate) या नगर निगम/ग्राम पंचायत द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) अनिवार्य रूप से संलग्न करना होता है।प्रक्रिया: छात्र को आवेदन के साथ जन्म प्रमाण पत्र की छायाप्रति संलग्न कर विद्यालय में प्रस्तुत करना होता है। विद्यालय प्रधान स्कूल रिकॉर्ड (SR Book) से उस तारीख का मिलान करेंगे। यदि स्कूल रिकॉर्ड और डमी कार्ड में अंतर पाया जाता है, तो प्रधान अपने स्तर से बोर्ड पोर्टल पर जन्मतिथि में तत्काल संशोधन दर्ज करेंगे।धुंधली, कटी हुई या गलत फोटो और हस्ताक्षर को बदलने का तरीकाकई परीक्षार्थियों के डमी एडमिट कार्ड पर फोटो बिल्कुल काली, अत्यधिक धुंधली या किसी अन्य छात्र की फोटो छप जाती है। इसी प्रकार हस्ताक्षर (Signature) के स्थान पर खाली जगह छूट जाना या किसी दूसरे का साइन प्रदर्शित होना एक आम तकनीकी समस्या है। परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के समय बायोमेट्रिक और फोटो मिलान किया जाता है, इसलिए गलत फोटो होने पर केंद्र में प्रवेश से रोका जा सकता है।फोटो और हस्ताक्षर में सुधार कराने का क्रम इस प्रकार है:नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो: छात्र अपनी दो हालिया पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो (सफेद या हल्के पृष्ठभूमि वाली) तैयार रखें।हस्ताक्षर का नमूना: एक सादे सफेद कागज पर काले या नीले बॉल पेन से स्पष्ट हस्ताक्षर करें।विद्यालय प्रधान द्वारा सत्यापन: आवेदन पत्र और डमी कार्ड की प्रति पर नई फोटो चिपकाएं। विद्यालय प्रधान उस फोटो पर अपनी मुहर और हस्ताक्षर करके उसे सत्यापित (Attest) करेंगे।ऑनलाइन पोर्टल पर री-अपलोड: विद्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर या प्रधान अपने आधिकारिक पोर्टल लॉगिन के जरिए छात्र के प्रोफाइल में जाकर पुरानी अमान्य फोटो और हस्ताक्षर की जगह नई स्कैन की गई फाइल (तय जेपीजी/पीएनजी साइज में) अपलोड कर देंगे।स्कूल स्तर से बोर्ड पोर्टल पर ऑनलाइन करेक्शन: छात्र स्वयं क्यों नहीं कर सकते?बिहार बोर्ड के स्पष्ट नियमों के तहत, डमी एडमिट कार्ड केवल छात्र स्वयं डाउनलोड करके देख सकते हैं, लेकिन पोर्टल पर संशोधन (Correction) करने का डिजिटल अधिकार केवल संबंधित विद्यालय के प्रधान के पास ही सुरक्षित होता है।संशोधन प्रक्रिया: छात्र द्वारा भौतिक रूप से जमा किए गए संशोधित आवेदन के आधार पर विद्यालय प्रधान बोर्ड के माध्यमिक परीक्षा पोर्टल (secondary.biharboardonline.com) पर अपने आधिकारिक यूजर आईडी (User ID) और पासवर्ड की मदद से लॉगिन करते हैं।पोर्टल के 'Correction Panel' में जाकर छात्र का यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज किया जाता है।इसके बाद स्क्रीन पर छात्र का डिजिटल फॉर्म खुल जाता है, जहां नाम, जन्मतिथि, जाति, लिंग या फोटो में वांछित बदलाव करके 'Save & Submit' कर दिया जाता है।पावती रसीद (Receiving): आवेदन जमा करते समय छात्र को अपने आवेदन की दूसरी प्रति पर स्कूल की मुहर और हस्ताक्षर युक्त रिसीविंग अवश्य लेनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई तकनीकी चूक होने पर आपके पास ठोस साक्ष्य मौजूद रहे।सुधार के बाद 2nd और 3rd डमी एडमिट कार्ड का मिलान जरूर करेंबोर्ड द्वारा निर्धारित करेक्शन विंडो समाप्त होने के बाद विद्यालय द्वारा भेजे गए संशोधित डेटा के आधार पर द्वितीय डमी एडमिट कार्ड (2nd Dummy Admit Card) जारी किया जाता है।छात्रों की यह जिम्मेदारी होती है कि वे दोबारा पोर्टल पर जाकर अपना दूसरा डमी एडमिट कार्ड डाउनलोड करें और यह सुनिश्चित करें कि उनके द्वारा दिए गए संशोधन (नाम, जन्मतिथि या फोटो) सिस्टम में पूरी तरह अपडेट हो चुके हैं या नहीं। यदि द्वितीय डमी कार्ड में भी कोई त्रुटि रह जाती है, तो बोर्ड द्वारा दिए गए अंतिम अवसर (3rd Dummy Card) के दौरान तुरंत प्रधानाध्यापक से मिलकर उसे दुरुस्त कराया जा सकता है। तय समय सीमा बीत जाने के बाद मुख्य एडमिट कार्ड जारी होने पर किसी भी प्रकार का बदलाव संभव नहीं होता।
त्रिपुरा निकाय चुनाव से पहले हथियारों की खेप बरामद, बिहार के दो आरोपी गिरफ्तार
त्रिपुरा निकाय चुनाव से पहले हथियारों की खेप बरामद, बिहार के दो आरोपी गिरफ्तार
धनतेरस, दीपावली, भाईदूज और छठ पूजा पर घर जाने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने 86 स्पेशल ट्रेन सेवाओं का प्लान तैयार किया है। मुरादाबाद रेल मंडल ने 19 नियमित ट्रेन सेवाओं में अतिरिक्त कोच लगाने की भी तैयारी की है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त रैक से नई ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। त्योहारों पर दिल्ली, पंजाब और उत्तराखंड से बड़ी संख्या में लोग बरेली और पूर्वांचल के रास्ते बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश जाते हैं। यात्रियों के लिए आनंद विहार, दिल्ली, अमृतसर, चंडीगढ़, हरिद्वार और योगनगरी ऋषिकेश से पटना, मुजफ्फरपुर, गोरखपुर और वाराणसी समेत कई शहरों के लिए स्पेशल ट्रेनें तय की गई हैं। इनमें से कई ट्रेनें बरेली, मुरादाबाद और शाहजहांपुर से होकर गुजरेंगी। भीड़ कम करने के लिए प्रमुख स्टेशनों पर आरक्षित और अनारक्षित टिकट काउंटर बढ़ाए जाएंगे। ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीनों और मोबाइल अनारक्षित टिकटिंग की सुविधा भी मिलेगी। RailOne एप के लिए क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। प्लेटफॉर्म, फुटओवर ब्रिज और स्टेशन परिसर में आरपीएफ, जीआरपी और डॉग स्क्वाड तैनात रहेंगे। यात्रियों की मदद के लिए हेल्प डेस्क और मेडिकल बूथ भी बनाए जाएंगे। मंडल नियंत्रण कक्ष में 24 घंटे वार रूम चलेगा। यहां से स्टेशनों पर भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जाएगी। डीआरएम विनीता श्रीवास्तव तैयारियों की समीक्षा कर रही हैं। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक महेश यादव के मुताबिक, रेलवे का उद्देश्य त्योहारों पर यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक सफर देना है।
एसपी भानु प्रताप सिंह हटाए गए, शैलेंद्र को शिवहर से खगड़िया भेजा; बिहार में IPS ट्रांसफर
पत्नी से विवाद के चलते सुर्खियों बने हुए खगड़िया के एसपी भानु प्रताप सिंह को बिहार सरकार ने पद से हटा दिया है। उनकी जगह शिवहर के पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह को खगड़िया का नया एसपी बनाया गया है। छपरा में भी नए सिटी एसपी की तैनाती की गई है।
केंद्रिय रेल मंत्री से मिले सीएम सम्राट चौधरी:दिवाली-छठ पर बिहार के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने की मांग
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर दिवाली और छठ महापर्व के दौरान बिहार के लिए विशेष ट्रेनें चलाने का अनुरोध किया। बैठक में बिहार की लंबित रेल परियोजनाओं में तेजी लाने, रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और यात्री सुविधाओं के विस्तार पर चर्चा हुई। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी और औद्योगिक निवेश बढ़ाने से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श हुआ। बैठक में बिहार के मढ़ौरा और मधेपुरा स्थित रेल इंजन निर्माण कारखानों के आधुनिकीकरण और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। मौजूदा उत्पादन व्यवस्था वर्ष 2028 में समाप्त होने के करीब छह महीने बाद नए स्वरूप में उत्पादन दोबारा शुरू करने और दोनों कारखानों की क्षमता दोगुनी करने की दिशा में पहल करने पर चर्चा हुई। सम्राट चौधरी ने बिहार में रेल नेटवर्क के विस्तार और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत बताई। बैठक में कई प्रस्तावों पर सकारात्मक सहमति बनने के साथ विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया।
IPS Transfer Bihar: भानु प्रताप सिंह को खगड़िया SP पद से हटाया, पत्नी से विवाद के कारण चर्चा में
बिहार सरकार ने पांच आईपीएस अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया है. खगड़िया के एसपी भानु प्रताप सिंह को पुलिस मुख्यालय पटना बुलाया गया है. पत्नी के आरोपों और धरने को लेकर चर्चा में रहे अधिकारी की जगह शैलेन्द्र सिंह को खगड़िया का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है.
पत्नी से विवाद के कारण चर्चा में रहे खगड़िया एसपी भानु प्रताप सिंह को पद से हटा दिया गया है। बिहार गृह विभाग ने चार आईपीएस समेत पांच पुलिस अधिकारियों का तबादला किया है, जिसमें शैलेंद्र सिंह खगड़िया के नए एसपी बने।
Bihar में नशीले पदार्थों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, पुलिस ने 46,549 किलो Ganja और हेरोइन पकड़ी
पटना, चार नवंबर बिहार में इस साल के दौरान मादक पदार्थों की जब्ती में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने 27 अक्टूबर तक 46,549 किलोग्राम से अधिक गांजा, 149.696 किलोग्राम हेरोइन और 11.56 लाख से अधिक मादक टैबलेट एवं कैप्सूल जब्त किए हैं। अधिकारियों के अनुसार मादक पदार्थों की जब्ती के मामले में अररिया, सुपौल और मधुबनी जिले सबसे आगे रहे, जबकि हेरोइन की बरामदगी में पटना और पूर्णिया शीर्ष पर रहे। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में बुधवार को हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत कुल 4,232 मामले दर्ज किए गए और 6,104 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में 2,583 मामले दर्ज हुए थे और 3,562 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। इस दौरान राज्य पुलिस ने 4.92 लाख मादक पदार्थों के इंजेक्शन और कोडीन युक्त कफ सिरप की 5.11 लाख से अधिक बोतलें भी जब्त कीं। जब्त मादक पदार्थों को नष्ट करने की कार्रवाई में भी पिछले वर्ष की तुलना में 10.1 गुना वृद्धि हुई है। वर्ष 2026 में अब तक 25,247 किलोग्राम जब्त मादक पदार्थों को नष्ट किया गया है। जिलावार आंकड़ों के अनुसार, गांजे की सबसे अधिक जब्ती अररिया में 10,573 किलोग्राम, सुपौल में 8,813 किलोग्राम और मधुबनी में 4,483 किलोग्राम दर्ज की गई। वहीं, हेरोइन की बरामदगी में पटना 24.1 किलोग्राम के साथ पहले और पूर्णिया 20 किलोग्राम के साथ दूसरे स्थान पर रहा। बैठक में अफीम की अवैध खेती के खिलाफ की गई कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। वर्ष 2025-26 के फसल चक्र के दौरान कुल 512.235 एकड़ में फैली अवैध अफीम की फसल को नष्ट किया गया। इसमें अकेले गया जिले में 508.755 एकड़ में फैली फसल शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2021 से अगस्त 2026 के बीच अदालतों ने एनडीपीएस अधिनियम से जुड़े 1,652 मामलों में दोषसिद्धि की है, जिसके परिणामस्वरूप 2,225 आरोपियों को सजा सुनाई गई। राज्य में फिलहाल 10 विशेष अदालतें काम कर रही हैं। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने, मामलों में प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करने और पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण को और सुदृढ़ करने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों में नशामुक्ति के लिए विशेष वार्ड स्थापित करने को भी कहा। राज्य में 27 अक्टूबर से 26 नवंबर तक नशामुक्त बिहार अभियान-2026 चलाया जा रहा है। इसके तहत शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्रों को नशामुक्त क्षेत्र घोषित करने का निर्देश दिया गया है। बैठक में पुलिस महानिदेशक प्रीता वर्मा, गृह विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार, पुलिस महानिदेशक (विधि-व्यवस्था) रत्ना संजय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
Viral Video: बिहार के ASI को ब्लैक कॉफी पीने का शौक पड़ा भारी, महिला के घर आने-जाने की चर्चा से मचा हड़कंप
बिहार में मानसून की वापसी के बाद मौसम पूरी तरह साफ और शुष्क बना हुआ है, अगले सात दिनों तक बारिश की कोई संभावना नहीं है।
Dr N Vijayalakshmi ने की समीक्षा, Bihar के विकास मॉडल को NITI Aayog से जोड़ेगा SDG फ्रेमवर्क
योजना एवं विकास विभाग, बिहार सरकार द्वारा यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से SDG नोडल पदाधिकारियों के लिए एक दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया। आयोजन का शुभारंभ योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉo एनo विजयलक्ष्मी एवं सचिव श्री कॅवल तनुज के करकमलों संपन्न हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति हेतु विभागीय समन्वय को मजबूत करना तथा राज्य संकेतक रूपरेखा (State Indicator Framework-SIF) की समीक्षा एवं अद्यतन करना था। इसे भी पढ़ें: Valmiki Tiger Reserve और गयाजी चिड़ियाघर के लिए भूपेंद्र यादव से मिले Samrat Chaudhary अपने संबोधन में अपर मुख्य सचिव महोदया ने कहा कि वर्ष 2030 तक SDGs की प्राप्ति में प्रत्येक विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन Indicators में सकारात्मक प्रगति एवं Growth परिलक्षित हो रही है, उनसे संबंधित विभाग Success Stories तैयार कर उपलब्ध कराएँ, ताकि उन्हें नीति आयोग (NITI Aayog) के साथ साझा किया जा सके। इसे भी पढ़ें: ASI के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज, गिरफ्तारी में सहयोग करने वाले को मिलेगा ₹25 हजार का इनाम उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि बिहार की अंतर्देशीय मत्स्यपालन (Inland Fisheries) के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अच्छी स्थिति को देखते हुए SDG-14 (Life Below Water) से संबंधित उपयुक्त Indicators को भी State Indicator Framework में शामिल करने की संभावना पर विचार किया जाए। तकनीकी सत्रों में विभागवार Indicators की प्रासंगिकता, मापनीयता एवं डेटा उपलब्धता की समीक्षा की गई तथा आवश्यकतानुसार नए Indicators जोड़ने, संशोधन करने एवं अनुपयोगी Indicators को हटाने के संबंध में सुझाव प्राप्त किए गए। कार्यशाला में विभिन्न विभागों के SDG नोडल पदाधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी की। यूनिसेफ की टीम ने तकनीकी सहयोग एवं विशेषज्ञ सुझाव प्रदान किए। कार्यशाला का समापन विभागों से प्राप्त सुझावों के आधार पर समयबद्ध कार्रवाई एवं नियमित अनुश्रवण सुनिश्चित करने के संकल्प के साथ हुआ।
Ranji Trophy में विदर्भ ने मध्यप्रदेश को तो गोवा ने बिहार को थामाई पारी से हार
पार्थ रेखड़े और हर्ष दुबे (पांच-पांच विकेट) के बेहतरीन गेंदबाजी प्रदर्शन की बदौलत विदर्भ ने बुधवार को रणजी ट्रॉफी एलीट ग्रुप ए मुकाबले के तीसरे दिन मध्यप्रदेश को पारी और 20 रनों से करारी शिकस्त दी। इस मुकाबले में हर्ष दुबे ने कुल 14 विकेट झटके और ...
इस ट्रेन में सभी सीटें अनारक्षित, जनरल टिकट लेकर गुजरात से बिहार पहुंचे
Special Train Patna: इस स्पेशल ट्रेन के चलने से उत्तर प्रदेश और बिहार की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों को कन्फर्म सीट की चिंता से राहत मिलेगी और वे आसानी से अपने घर पहुंच सकेंगे.
बेलसंड से लोजपा (रामविलास) के विधायक अमित रानू ने आर्थिक रूप से संपन्न लोगों से 125 यूनिट मुफ्त बिजली की सुविधा स्वेच्छा से छोड़ने की अपील की है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की इस अपील का समर्थन करते हुए कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को बिहार के विकास में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। संपन्न लोगों से की सहयोग की अपील अमित रानू ने कहा कि मुख्यमंत्री ने संपन्न और आयकर देने वाले लोगों से स्वेच्छा से मुफ्त बिजली का लाभ छोड़ने की अपील की है। वे मुख्यमंत्री की इस सोच से सहमत हैं। बिहार हम सभी का है और राज्य को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक रूप से मजबूत लोगों को भी योगदान देना चाहिए। रानू ने कहा, “मैं बिहार के सभी संपन्न लोगों से अपील करता हूं कि वे 125 यूनिट मुफ्त बिजली की सुविधा छोड़ दें। इससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ कम होगा और बिहार की तरक्की के लिए संसाधन बचेंगे। हमें राज्य के विकास में भागीदारी निभानी चाहिए।” बाढ़ के दौरान एक महीने का वेतन दिया था विधायक ने बाढ़ के दौरान जनप्रतिनिधियों की भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बाढ़ से भारी नुकसान होने पर मुख्यमंत्री ने विधायकों और सांसदों से मुख्यमंत्री राहत कोष में सहयोग करने की अपील की थी। इसके बाद उन्होंने अपना एक महीने का वेतन राहत कोष में दिया था। रानू ने कहा कि बिहार के विकास और जरूरतमंदों की मदद के लिए सभी को सामूहिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने एक नवंबर को की थी अपील मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक नवंबर को पटना में आयोजित पाटलिपुत्र राष्ट्रीय युवा संसद-2.0 में आर्थिक रूप से संपन्न और आयकरदाताओं से 125 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ स्वेच्छा से छोड़ने की अपील की थी। उन्होंने बताया था कि राज्य सरकार बिजली सब्सिडी पर सालाना करीब 23 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है।
बालगृहों के बच्चों को हुनरमंद बनाएगी बिहार सरकार, सीतामढ़ी में खुला दूसरा प्रशिक्षण केंद्र
बिहार सरकार बालगृहों के बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष आवासीय प्रशिक्षण केंद्र खोल रही है। पटना के बाद सीतामढ़ी में दूसरा केंद्र शुरू हुआ, जिसका उद्देश्य बच्चों को हुनरमंद बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
बाढ़ से बचाएगी नदी की गाद! बिहार में मिट्टी से बनेंगी सड़कें, CM का प्लान
बिहार में हर साल बाढ़ से होने वाली तबाही रोकने के लिए सम्राट चौधरी सरकार ने नई गाद प्रबंधन नीति 2026 लागू की है. इसके तहत नदियों, बैराजों और जलाशयों से गाद निकालकर सड़क, राष्ट्रीय राजमार्ग और तटबंध निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा. इस योजना को लेकर बिहार सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के बीच MoU हुआ है.
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने बिहार में करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये तक निवेश करने की इच्छा जताई है, जिसमें एल्युमिनियम और कॉपर की बड़ी फैक्ट्री स्थापित करने की योजना है। उनका विजन झारखंड से कच्चा माल लाकर बिहार में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है, साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण पर भी जोर दिया जाएगा।
New Delhi, 4 नवंबर . बिहार के पूर्णिया में भाजपा ने Wednesday को ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा का आयोजन किया. इस कार्यक्रम में असम के Chief Minister…
बिहार के पूर्णिया में भाजपा ने बुधवार को 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने हिस्सा लिया। उनके साथ बिहार सरकार के मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल और रत्नेश सदा, कई भाजपा नेता और पार्टी कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
'मैं उन्हें बांग्लादेश भेज दूंगा, वहां चुनाव जीतते रहो', बिहार के पूर्णिया से मुख्यमंत्री सरमा का करारा तंज
वोट नहीं मोदी दिल चोरी कर रहे; बिहार में बोले असम के सीएम हिमंता- राहुल को बांग्लादेश भेज देंगे
असम के सीएम ने हिमंता बिस्वा सरमा ने पूर्णिया में कहा कि कांग्रेस कहती है कि ईवीएम से चुनाव खराब है। तब तो पप्पू यादव को इस्तीफा देना चाहिए। पप्पू यादव ईवीएम से चुनाव जीते हैं या बैलेट से। राहुल गांधी भी तो ईवीएम से ही जीते हैं। अरे, आप जीतते हैं तो अच्छा है और हम जीतते हैं तो खराब हैं।

