भारत व कंबोडिया काउंटर टेररिज्म ऑपरेशंस पर फोकस करने जा रहे हैं। यह भारत की सैन्य कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक महत्वपूर्ण आयाम है। इसके तहत रविवार को भारतीय सैन्य दल, भारत–कंबोडिया संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास ‘सिनबैक्स–टी 2026’ के लिए कंबोडिया रवाना हुआ है।
शिवशक्ति धाम डासना के पीठाधीश्वर व श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने फिर बयान दिया है। अपना वीडियो जारी करके केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर गहरी आपत्ति की है।यति नरसिंहानंद ने कहा आजकल केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का एक बयान बहुत वायरल हो रहा है, जिसमें वह कह रहे हैं कि आतंकवाद का ना को धर्म होता है। और ना ही कोई देश होता है। राजनाथ सिंह के बयान पर बोले यति यति नरसिंहानंद गिरी ने कहा संघ और भाजपा से जुड़ा हर व्यक्ति पागलपन की पराकाष्ठा को पार करके उन्माद को प्राप्त हो चुका है क्योंकि कोई भी सामान्य ऐसी बात नहीं कर सकते, राजनाथ का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस भावना के अनुरूप है जिसके तहत हो भारतीय मुसलमानों का तृप्तिकरण करना चाहते हैं। इस्लाम की आधारभूत नियमावली कुरान और हदीस के अनुसार मुसलमानों का तृप्तिकरण तभी संभव है। जब वो सारी दुनिया के काफिरों, मुशरिको और अन्य दूसरे फिरके के मुसलमानों की हत्या करके उन सबकी महिलाओं को सामूहिक बलात्कार के बाद या तो मंडियों में बेच दें। उनके सभी मठ मंदिरों को तोड़ कर उन पर कब्जा कर ले और उनकी सभी धन सम्पत्ति को कब्जा ले। इससे पहले मुसलमानों का तृप्तिकरण संभव ही नहीं है। अब उसी गाइडलाइन का अनुसरण कर रहे हैं। सारी दुनिया आज समझ चुकी है यति नरसिंहानंद ने कहा राजनाथ सिंह का यह बयान भी उसी दिशा में एक और कदम है। आज सारी दुनिया अच्छी तरह से समझ चुकी है कि भारत के कायर और कमीने नेता जिसे आतंकवाद कहते हैं वो वास्तव में जिहाद है। यह जिहाद कुरान और हदीस के अनुसार इस्लाम का सबसे बड़ा पवित्र कार्य है जिसे किए बिना किसी मुस्लमान को अल्लाह की कृपा प्राप्त नहीं हो सकती। यह किसी भी मुसलमान का सबसे बड़ा कर्तव्य है और दुनिया का हर इस्लामिक देश इसे सर्वोपरि मानता है। केवल किसी कारण से दुनिया का हर इस्लामिक देश जिहाद का पूरी तरह से समर्थन करता है और जेहादियों को हर तरह का सहयोग देता है। आज हर सामान्य व्यक्ति समझ चुका है कि आतंकवाद का असली नाम जिहाद है जो इस्लाम के उसूलों पर आधारित है और सऊदी अरब, ईरान, इराक, कतर, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से लेकर भारत तक का एक एक सच्चा मुसलमान इसका समर्थन और सहयोग करता है।

