पेंटागन की चेतावनी: रूस-चीन को एक साथ रोकना ‘अभूतपूर्व चुनौती’
वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों ने विधायकों को बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका को एक ही समय में दो परमाणु शक्तियों को रोकने की “अभूतपूर्व चुनौती” का सामना करना पड़ रहा है
चिलचिलाती धूप में दूर तक फैला नमक का मैदान इतनी तेज चमक रहा है कि आंखों में चुभ रहा है। दूर तक कहीं छांव नहीं। अचानक एक महिला, रमिला, काम छोड़कर धीरे से कहती है- ‘दिन में हम शौच नहीं जाते… लोग देख लेंगे। इसलिए खाना भी कम खाते हैं… ताकि बार-बार जाना न पड़े। सरकारी पानी का टैंकर महीने में सिर्फ एक बार आता है। उसमें भी खारा पानी होता है। जब पीने के लिए पानी नहीं, तो नहाने के लिए कहां से मिलेगा। महीने में एक बार… और वो भी पीरियड के बाद ही नहाती हूं। पीरियड में तो नहाना जरूरी होता है न! लगता है… नमक में पैदा हुए हैं… और नमक में ही मर जाएंगे।' स्याह कहानियों की सीरीज ‘ब्लैकबोर्ड’ में नमक की खेती करने वाले किसानों की कहानी। ये किसान 8 महीने तंबू में रहते हैं। महीनों नहा नहीं पाते। उनके पैरों की चमड़ी खराब हो जाती है और एक किलो नमक के सिर्फ 30 पैसे मिलते हैं। मैं गुजरात के सुरेंद्रनगर से करीब 70 किलोमीटर दूर ‘लिटिल रण ऑफ कच्छ’ में हूं। यहां देश का करीब 30 फीसदी नमक पैदा होता है। सुबह के 8 बजे ही लगभग 12 लाख एकड़ यानी 5,000 वर्ग किमी में फैले रण में सूरज सिर के ऊपर जलता हुआ दिखाई दे रहा है। इसी मैदान में रमिला अपनी मां सोनल के साथ नमक का ढेर समेट रही हैं। रमिला के पैरों में चप्पल और मोजे हैं, जबकि उनकी मां नंगे पैर लकड़ी के फावड़े से नमक समेट रही हैं। मेरे कुछ पूछने से पहले ही रमिला कहती हैं, ‘खाली पैर रहने पर तलवों में घाव हो जाता है। ये घाव सालों-साल नहीं सूखते। हमेशा खुजली और जलन बनी रहती है। कभी-कभी तलवा इतना नोच देती हूं कि खून आ जाता है। मन करता है, पैर काटकर फेंक दूं।’ ‘मां को तो नंगे पैर रहने की आदत हो गई है। मुझसे नहीं हो पाता। जूते पहनती हूं, तो उनमें नमक के मोटे दाने फंस जाते हैं। इससे और खुजली होने लगती है। इसलिए मोजे ही पहनती हूं। अब नमक पक चुका है। 15-20 दिन में पूरा खेत खाली हो जाएगा।’ रमिला बताती हैं, ‘साल के 12 में से 8 महीने हमें इसी नमकीन दलदली रण के बीच रहना पड़ता है। अगस्त-सितंबर आते-आते पूरा गांव तंबू लेकर यहीं आ जाता है। जब हम आते हैं, तो यह पूरा इलाका दलदल होता है। इसी में तंबू गाड़कर रहना पड़ता है।’ ‘नमक की खेती शुरू होने से पहले ही आंधी-तूफान, चिलचिलाती धूप और फिर शून्य डिग्री तापमान… हर मौसम की मार झेलनी पड़ती है।’ कब से नमक की खेती कर रही हैं?' रमिला की जवाब देतीं उससे पहले ही उनकी मां सोनल बोल पड़ीं, 'पैदा होते ही नमक के खेत में आ गए। रमिला को मैं अपनी पीठ पर साड़ी में बांधकर खेती करती थी। पति इतना शराब पीता था कि एक-एक रुपए की मोहताज रहती थी। जब ये 5-6 साल की हुई, तो मेरे साथ खेत में आने लगी। अब इसकी 4 महीने की बेटी है। इसी तंबू में ही पैदा हुई है। यहीं खेलते-कूदते बड़ी हो जाएगी और हमारी तरह खेत में नमक तैयार करने लगेगी।’ मां की बात सुनते ही रमिला तुरंत टोकती हैं, ‘नहीं चाहती हूं कि मेरे बच्चे भी नमक की खेती करें। इस खेती से जख्म के अलावा क्या मिलता है। अगर दूसरा काम होता, तो यहां यूं जिंदगी नहीं खपा रहे होते। हम तो साल का बड़ा हिस्सा इसी नमक में गुजार देते हैं। आप मेरे तंबू में चलिए, दिखाती हूं हम कैसे रहते हैं।’ ये बातें कर ही रही थीं कि 21 साल की रमिला की गोद में उनकी 4 महीने की बेटी आ जाती है। पड़ोसन अभी-अभी उसे तंबू से उठाकर लाई है। बातचीत के बीच रमिला उसे दूध पिलाने लगती हैं। कहती हैं, ‘हमें तो दूध भी नसीब नहीं होता। अब ये नवजात है, तो अपना दूध तो पिलाना पड़ेगा न… बहुत देर से भूखी होगी।’ उसके बाद रमिला मेरे साथ अपने तंबू की ओर चल पड़ती हैं। धूप और तेज होती जा रही है। रमिला चलते-चलते कहती हैं, ‘काम न करूं, तो मालिक दिहाड़ी काट लेगा। तेज धूप में काम रोकना पड़ता है। सफेद नमक पर धूप पड़ती है, तो और खतरनाक हो जाता है। हमें त्वचा और आंखों की बीमारी हो जाती है।’ तंबू के पास उनकी पड़ोसन बर्तन धो रही हैं। रमिला वहीं सोलर प्लेट की छांव में बेटी को खाट पर सुला देती हैं। खुद बैठते हुए कहती हैं, ‘यही हमारा ठिकाना है। रण में पानी का टैंकर 20-30 दिन में एक बार आता है। वही पानी पीना पड़ता है। जब पीरियड्स आता है, तभी हम महिलाएं नहाती हैं। पीने का पानी नहीं, तो नहाने का कहां से आएगा… आप यकीन नहीं करेंगे, हम कम खाते हैं, ताकि रात में ही शौच जाना पड़े।’ ‘रात में?’ ‘क्या करूं… हमारी भी तो इज्जत है। यहां दूर-दूर तक घास का तिनका नजर नहीं आएगा। दिन में कहां जाएं? कोई देख लेगा। इसलिए खाना भी कम खाते हैं, ताकि दिन में न जाना पड़े। बरसात में चूल्हे की लकड़ी भीग जाती है, तो भूखे रहना पड़ता है। उस समय आटा घोलकर पी लेते हैं। छप्पर से पानी टपकता है, तो रातभर जागकर गुजारनी पड़ती है। गोद में छोटा बच्चा है… कहीं कोई जानवर आकर उसे न ले जाए, यही डर लगा रहता है।’ तंबू के एक कोने में रखी गुदड़ियों की ओर इशारा करते हुए रमिला कहती हैं, ‘अभी जितनी गर्मी है, उससे भी ज्यादा कड़ाके की ठंड पड़ती है। पेट की खातिर रहना तो है ही यहांं। यही गुदड़ियां ओढ़कर रात काटती हूं, फिर भी ठंड से कांपती रहती हूं। उस वक्त मोबाइल पर देखती हूं- देश में क्या-क्या हो रहा है… हमारी जिंदगी तो पहले जैसी थी, आज भी वैसी ही है। हां, कुछ साल पहले तक जेनरेटर चलाकर रहना पड़ता था। जमीन से पानी खींचते थे, बल्ब जलाना पड़ता था। अब सरकार ने सोलर लगवा दिए हैं।’ लेकिन सोलर सिस्टम खराब हो जाए, तो मोमबत्ती भी यहां नहीं टिकती। तेज हवा चलती है। तब टॉर्च की रोशनी में खाना बनाना पड़ता है।’ जिस खेत में रमिला काम कर रही हैं, वहां मालिक जोर-जोर से आवाज देने लगता है। बातचीत करते-करते वह नमक का ढेर लगाने वापस चली जाती हैं। खेत में पहुंचते ही उनकी मां सोनल कहती हैंकि जल्दी-जल्दी काम खत्म करो। बात करने से थोड़े न पेट भरेगा। धूप तेज हो रही है, चमड़ी जलने लगेगी। सोनल की उम्र 60 के करीब लगती है। पूछने पर तंज कसते हुए कहती हैं- ‘आपको तो हर चीज खाने-पीने को मिलता होगा। हमें दूध-दही नसीब नहीं होता। बस पेट भरने के लिए जो मिल जाए, खा लेते हैं। मेरी उम्र 45 साल है। अब 8 महीने घर से दूर रहूंगी। कड़कड़ाती धूप में नमक पकाती हूं, तो उम्र तो घटेगी ही न। हाथ-पैर की चमड़ी बीमारी फैल गई है। जैसे मछली की चमड़ी उखड़ती है, वैसे ही हमारे हाथ-पैर की चमड़ी उखड़ती है। खुजली भी बनी रहती है। हर साल का यही हाल है।’ अब रमिला और सोनल खेत में नमक का ढेर खींचने में लग जाती हैं। तीन-चार लोग ट्रैक्टर और फावड़े से ढेर जमा रहे हैं। यहीं पास में जगदीश सवारियां ट्रैक्टर चला रहे हैं। वह कहते हैं, ‘मेरी उम्र देख लीजिए- 30 साल का हूं। आप भी करीब 30 के होंगे, लेकिन हम दोनों में कितना फर्क दिख रहा है। इसी से आप हमारी मेहनत समझ सकते हैं। 10वीं तक पढ़ा हूं। एक महीने पहले तक मेरी गर्भवती पत्नी इसी तंबू में रहती थी। अचानक उसे दर्द हुआ, तो एंबुलेंस बुलाकर अस्पताल ले गया। बच्चा होने के बाद से गांव में है। कुछ दिन बाद फिर यहीं आ जाएगी। अभी बच्चे को यहां नहीं ला रहा। कुछ हो गया तो… आप देख ही रहे हैं कि कितनी गर्मी है। बाद में बच्चा भी आएगा और मां उसे पीठ पर बांधकर काम करेगी। ऐसे ही हमारे बच्चों की जिंदगी नमक के खेत से शुरू होती है। अब नमक तैयार हो चुका है। कुछ समय बाद रण में पानी भर जाएगा, इसलिए नमक को इकट्ठा करके शहर में स्टॉक किया जा रहा है। अगर रोज खेत में फावड़ा और दंतालो नहीं चलाओ, तो नमक खराब हो जाता है। सेठ से कर्ज लेकर खेती करता हूं। नुकसान हो गया, तो कैसे चुकाऊंगा।’ सामने दो बड़े टैंकर ट्रक खड़े हैं। इनमें नमक बनने के बाद बचा हुआ पानी खींचा जा रहा है। जगदीश कहते हैं- यह पानी फैक्ट्री में जाता है। इससे केमिकल बनता है। एक टैंकर के हजार रुपए मिलते हैं। करीब 50 फीट गहराई से बोरवेल के जरिए पानी निकाला जाता है। इसी पानी में नमक होता है, जिसे क्यारियां बनाकर जमाते हैं और नमक तैयार करते हैं।’ कितना मुनाफा होता है? जगदीश हंसते हुए कहते हैं, ‘यह पूरा रण पाटड़ी के दरबार जैसा है। हम सेठ से खेत लीज पर लेकर नमक जमाते हैं। हर साल अलग-अलग जगह पर तीन-चार बोरवेल डालने पड़ते हैं। जहां ज्यादा पानी निकलता है, वहीं खेती करने लगते हैं। एक किलो नमक के करीब 30 पैसे मिलते हैं। इससे क्या होने वाला है? हम सेठ से ही पैसा लेकर खेती करते हैं। फिर जो नमक बिकता है, उसका आधा हिस्सा सेठ को देना होता है। एक सीजन में मुश्किल से 50 हजार रुपए बचते हैं। वो भी खाने-पीने में खर्च हो जाते है। फिर अगले सीजन में सेठ से दोबारा कर्ज लेना पड़ता है। ऐसे ही यहां जिंदगी चलती है।’ इतनी मुश्किल है, तो क्यों करते हो नमक की खेती? पूछते ही जगदीश कहते हैं, ‘हम लोगों के पास खेती की एक धुर जमीन भी नहीं है। फिर क्या करें? कोई दूसरा काम नहीं आता। पुरखों से यही काम सीखा है। मैं तो नमक के खेत में ही पैदा हुआ था। यहां पढ़ने का कोई साधन नहीं है। हम लोग सिर्फ 4 महीने ही गांव में रह पाते हैं, फिर 70 किलोमीटर दूर इस रण में आ जाते हैं। कुछ सालों से सरकार ने ‘बस वाला स्कूल’ शुरू किया है। यहां 7वीं तक के बच्चे पढ़ पाते हैं। इसके बाद पढ़ने का कोई साधन नहीं है। अब हम अपने बच्चों को शहर भेजने की सोच रहे हैं।’ धूप तेज हो चुकी है। मेरे लोकल साथी भरत भाई कहते हैं, ‘दूसरे तंबू में चलते हैं। 12 बजे के बाद यहां रुकना मुश्किल हो जाएगा।’ हम यहां से पास के दूसरे तंबू की ओर चल पड़ते हैं। यहां 15 साल का राकेश नमक के खेत में दंतालो नाम का एक औजार चला रहा है। उसके पैर में काला बूट है। वह कहता है, ‘खाली पैर नमक के खेत में चलेंगे, तो पैर सड़ जाएंगे। इसलिए जूते पहनने पड़ते हैं। नमक की खेती की वजह से पढ़ाई छोड़ दी। अब 8 महीने यही रहूंगा। पूरे खेत में दंतालो न चलाऊं, तो नमक जमकर पीला पड़ जाता है। फिर व्यापारी दाम नहीं देते। दंतालो चलाने से ही नमक छोटे-छोटे टुकड़ों में जमकर इकट्ठा होता है।’ राकेश के सामने ही खेत की मेड़ पर कालू सुरेला खड़े हैं। वह कहते हैं, ‘शुरू से हम लोग यही करते आ रहे हैं। दूसरा कोई काम करने का रास्ता नहीं है। इस इलाके में नमक की खेती और फैक्ट्री के अलावा कुछ नहीं है। इस तरह रण में करीब 4,800 से ज्यादा परिवार नमक की खेती करते हैं। हमने अपनी जवानी नमक में खपा दी। अब नहीं चाहते कि हमारी अगली पीढ़ी भी यही करे। इसमें पूरी जिंदगी तबाह हो जाती है। मुनाफा तो व्यापारियों को होता है। व्यापारी हमारा नमक 30 पैसे में खरीदकर उसे प्रॉसेस करके 30 रुपए में बेचते हैं। हमें मिलता है बस- बेउम्र बुढ़ापा। 40-45 की उम्र पार करते ही फेफड़ों की बीमारी हो जाती है। आंखों से कम दिखने लगता है। चमड़ी सूखने से शरीर काला पड़ जाता है। यही हमारी किस्मत है।’ सामने नजर डालने पर एक ‘बस स्कूल’ दिखाई देता है। मैं उसकी ओर चल पड़ता हूं। बिना इंजन की एक बस खड़ी है। इसमें 20 से ज्यादा बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इसी में 10 साल की अरुणा भी पढ़ रही है। वह सहमी हुई आवाज में वह कहती है, ‘सर! मैं नहीं चाहती कि बड़ी होकर नमक की खेती करूं, इसलिए पढ़ रही हूं। मां-पापा को देखती हूं कि वे कितना दुख सहकर नमक पकाते हैं। अभी 7वीं में हूं। इसके बाद यहां पढ़ाई नहीं होती। इस ‘बस स्कूल’ में भी नाम भर की पढ़ाई होती है। मैं क्या कर सकती हूं… कोई सुनने वाला नहीं है।’ अब धूप और तेज हो रही है। सफेद चमकते नमक की ओर देखना भी मुश्किल हो गया है। खेत में काम कर रहे सभी किसान अपने तंबुओं की ओर लौटने लगे हैं। मैं भी इन बच्चों की आंखों में नमक की खेती का स्याह भविष्य देखकर वहां से वापस चल पड़ता हूं। जाते-जाते मन में यही सवाल उठता है- शायद ही इन बच्चों के पढ़ने का सपना सच हो पाए। जिस नमक को हम खाते हैं, उसकी कितनी बड़ी कीमत ये किसान और उनके बच्चे अपनी जिंदगी से चुकाते हैं! ---------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड- भूख के बजाय, दवाओं के ट्रायल से मरना अच्छा:बच्चों को तो 25 लाख मिल जाएंगे; उन्हें रिसर्च के लिए खून चाहिए, हमें पैसा ‘किसे अच्छा लगता है कि वह पैसे के लिए अपनी जान की बाजी लगाए, लेकिन मुझे लगानी पड़ती है। अगर मर भी गई तो बच्चों को 20-25 लाख मिलेंगे। कम से कम उनकी जिंदगी तो बेहतर हो जाएगी। अभी तक खुद पर दवाओं के ट्रायल में 4 बार पास हुई हूं।’ पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-5 करोड़ मुआवजा शानो-शौकत में उड़ाया:3 करोड़ की जमीन खरीदी, 1 करोड़ का मकान; 80-80 लाख की शादियां- अब रोज कमाने से घर चल रहा एक सच्ची कहानी- ग्रेटर नोएडा के किसान रामेश्वर सिंह की। 12 एकड़ जमीन सरकार ने ली और बदले में उन्हें सवा 5 करोड़ रुपए दिए। पैसा खाते में आते ही जिंदगी बदल गई। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
यूपी के जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट आपके सफर के लिए तैयार है। फर्स्ट फेज में 3300 एकड़ में बने एक टर्मिनल और रनवे का काम पूरा हो चुका है। बस फिनिशिंग बाकी है। एक रनवे के साथ इस टर्मिनल की सालाना क्षमता 3 करोड़ पैसेंजर संभालने की होगी। एयरपोर्ट के फर्स्ट फेज की लागत करीब 11 हजार करोड़ है। 28 मार्च को PM मोदी इसका उद्घाटन करेंगे। सभी 4 फेज का काम पूरा हो जाने के बाद ये एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का छठा बड़ा एयरपोर्ट होगा। हालांकि पूरा बनने की डेडलाइन 2040 है। भास्कर सबसे पहले इस एयरपोर्ट के अंदर पहुंचा है। पढ़िए आपके काम की सारी बातें… 1. टर्मिनल बिल्डिंग 2. एंट्री गेट 3. डिपार्चर एरिया 4. सेल्फ बैगेज ड्रॉप फैसिलिटी 5. सिक्योरिटी चेक 6. बोर्डिंग एरिया 7. लाउंज एरिया 8. टेंपल ऑफ बेल्स 9. एयरोब्रिज 10. सुरक्षा नोएडा एयरपोर्ट की खास बातें 1. रनवे के लिहाज से एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 5 रनवे बनाए जाने हैं। यहां छठवां रनवे भी बनाया जा सकता है। इसके बाद ये एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का छठवें नंबर का एयरपोर्ट होगा। रनवे के लिहाज से एशिया में चीन का शंघाई पुडोंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट सबसे बड़ा है। 2. एरिया के लिहाज से भी एशिया में सबसे बड़ानोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कुल 52 स्क्वायर किमी में बनना प्रस्तावित है। अगर ऐसा हुआ तो एरिया वाइज भी ये एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन जाएगा। अभी एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट चीन का बीजिंग डेक्सिंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। इसका एरिया 47 स्क्वायर किमी है। 3. पूरा बनने के बाद देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगानोएडा एयरपोर्ट के पहले स्टेज के लिए यमुना डेवलपमेंट अथॉरिटी ने 3300 एकड़ जमीन अलॉट की है। ये एरिया करीब 13.35 स्क्वायर किमी है। दूसरे स्टेज में एयरपोर्ट का कुल एरिया बढ़कर करीब 7200 एकड़ या 29 स्क्वायर किमी हो जाएगा। अभी देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट हैदराबाद का राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो करीब 5500 एकड़ यानी 22.25 स्क्वायर किमी में बना है। 28 मार्च को उद्घाटन, अप्रैल में पहली उड़ाननोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन PM मोदी 28 मार्च को करेंगे। हालांकि फ्लाइट अप्रैल से शुरू होंगी। नोएडा एयरपोर्ट अथॉरिटी से जुड़े अफसरों ने बताया कि किराया अभी तय नहीं है, लेकिन ये दिल्ली एयरपोर्ट मुकाबले कम हो सकता है क्योंकि यहां एयरलाइंस के लिए डेवलपमेंट चार्ज कम रखा गया है।
ट्रंप का बड़ा बयान: ईरान का बचा-कुचा नेतृत्व भी खत्म करेंगे!
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान की मौजूदा शासन व्यवस्था के बचे-कुचे हिस्से को 'खत्म' कर सकता है
इजराइल-ईरान तनाव में बड़ा दावा, ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब मारे गए
इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज के मुताबिक, रात में किए गए एयरस्ट्राइक में ईरान के शीर्ष खुफिया अधिकारी इस्माइल खातिब को निशाना बनाया गया। उन्होंने इसे ईरान की सुरक्षा संरचना पर बड़ा प्रहार बताया है।
मोजतबा खामेनेई ने ठुकराए युद्धविराम के प्रस्ताव, कहा- अमेरिका-इजरायल पहले हार मानें
एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, दो मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका की ओर से तनाव कम करने और संभावित युद्धविराम के प्रस्ताव तेहरान भेजे गए थे। हालांकि, सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने इन्हें स्पष्ट रूप से ठुकरा दिया।
US Iran War: खाड़ी देशों ने अमेरिका को चेताया, ईरान को 'घायल' छोड़ना होगी बड़ी भूल
खाड़ी देशों ने अमेरिका से कहा है कि यदि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जा रही है, तो उसे निर्णायक स्तर तक ले जाना जरूरी है। उनका तर्क है कि आधे-अधूरे कदम ईरान को दोबारा ताकत हासिल करने का मौका देंगे, जिससे वह क्षेत्रीय ऊर्जा ढांचे को फिर निशाना बना सकता है।
जोसेफ केंट ने अपने इस्तीफे पत्र और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखे संदेश में आरोप लगाया कि अमेरिका ने यह युद्ध स्वतंत्र निर्णय के तहत नहीं, बल्कि बाहरी दबाव में शुरू किया।
परमाणु ऊर्जा की ओर लौटने के खिलाफ हैं जर्मन चांसलर
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेय लाएन यूरोपीय संघ में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने के प्रस्ताव के पक्ष में हैं, लेकिन जर्मन चांसलर मैर्त्स ने इसे नामुमकिन बताया है, आखिर क्यों
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मनाया आयरलैंड के साथ संबंधों का जश्न
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अमेरिका और आयरलैंड के गहरे संबंधों का जश्न मनाया। उन्होंने आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन की मेजबानी की
रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच अमेरिकी मतदान विधेयक को लेकर टकराव
अमेरिकी सीनेट में तीखी राजनीतिक लड़ाई शुरू हो गई, जब रिपब्लिकन ने सेव एक्ट को चुनावों की सुरक्षा के लिए एक उपाय के रूप में आगे बढ़ाया जबकि डेमोक्रेट्स ने इसे मतदाता दमन का कदम बताते हुए कहा कि इससे लाखों पात्र अमेरिकी नागरिकों को मतदान करने से रोका जा सकता है।
ट्रंप का बड़ा दावा: ईरान अब परमाणु हथियार नहीं बना सकता
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई इसलिए की, ताकि वह परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उनका दावा है कि इस कार्रवाई से ईरान की सैन्य ताकत को काफी नुकसान पहुंचा है।
क्यूबा में ब्लैकआउट पर अमेरिका का सख्त बयान, ट्रंप ने दिए कार्रवाई के संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने क्यूबा में हुए देशव्यापी बिजली संकट के बाद वहां की सरकार पर तीखा हमला बोला है
अमेरिका ने 330 अरब डॉलर के हथियार बेचे, तेज प्रणाली के लिए बनाया दबाव
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में संयुक्त राज्य अमेरिका ने 330 अरब डॉलर से अधिक के हथियार निर्यात को मंजूरी दी
23 फरवरी 2026, तमिलनाडु के वेल्लोर से सटे नेशनल हाईवे-48 पर हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई। इतना ट्रैफिक की 4 घंटे तक गाड़ियां अपनी जगह से हिल नहीं पाईं। भगदड़ या किसी तरह की अनहोनी के डर से प्रशासन को 900 पुलिसवालों को मौके पर लगाना पड़ा। ये दीवानगी साउथ फिल्मों के सुपरस्टार थलापति विजय की पब्लिक रैली के लिए थी। वेल्लोर रैली में थलापति विजय ने पहली बार ऐलान किया कि 2026 का विधानसभा चुनाव 'विजय बनाम स्टालिन' की लड़ाई है। तमिलनाडु CM और DMK प्रमुख एमके स्टालिन पर आरोप लगाते हुए विजय ने कहा- राज्य में अभी एक स्टैंड-अप कॉमेडी वाली सरकार राज कर रही है। मुख्यमंत्री के असली दोस्त रिश्वत-भ्रष्टाचार हैं। अगर दम है तो वे चुनाव से पहले अपनी संपत्ति का खुलासा करें। तमिलनाडु की 234 सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी। उससे पहले विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम यानी TVK को सत्ताधारी DMK-कांग्रेस के गठबंधन के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है। दूसरी तरफ BJP, स्टालिन और विजय की तकरार को चुनाव में भुनाना चाहती है। सोर्स बताते हैं कि TVK को NDA में लाने लिए BJP लीडरशिप पूरा जोर लगा रही है। यहां तक कि एक दूसरे राज्य के उपमुख्यमंत्री के जरिए विजय को मनाने की कोशिशें चल रही हैं। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले क्या विजय BJP से हाथ मिलाने वाले हैं? NDA अलांयस में शामिल होने से TVK को कितना फायदा होगा? सत्तारूढ़ DMK और कांग्रेस का गठबंधन विजय के खिलाफ क्या रणनीति बना रहा है? ये सवाल हमने तमिलनाडु की पॉलिटिकल पार्टियों और एक्सपर्ट्स से पूछे। विजय को NDA में लाने के लिए इतनी खलबली क्यों? दो साल पहले तक तमिलनाडु में मेन मुकाबला DMK-कांग्रेस के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) और AIADMK-BJP के NDA गठबंधन के बीच माना जा रहा था। 2 फरवरी 2024 को साउथ फिल्मों के सुपरस्टार विजय ने अपनी पॉलिटिकल पार्टी TVK की ऑफिशियल घोषणा कर दी। अब 2026 विधानसभा चुनाव में TVK थर्ड फ्रंट के तौर पर उभरी है। विजय का इम्पैक्ट कम करने के लिए DMK ने कांग्रेस और वामपंथी दलों सहित 23 पार्टियों को अपने अलायंस में शामिल किया है। मुख्यमंत्री स्टालिन की अगुआई वाले SPA का रुख साफ है कि वो विजय के साथ किसी भी सूरत में हाथ नहीं मिलाएंगे। दूसरी तरफ, NDA ब्लॉक में AIADMK, BJP, पट्टाली मक्कल काची (PMK) और AMMK जैसी दूसरी पार्टियां शामिल हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में DMK ने 234 सीटों में से 133 सीटें जीती थीं और सहयोगियों की मदद के बिना ही सरकार बनाई थी। वहीं, NDA गठबंधन महज 75 सीटों पर ही सिमट गया था। इसमें AIADMK 66 और BJP महज 4 सीट ही जीत पाई थी। BJP चुनाव से पहले इस नुकसान की भरपाई के लिए विजय से लगातार संपर्क कर रही है। तमिलनाडु के चेन्नई, कांचीपुरम, कोयंबटूर, मदुरै और तंजावुर में विजय की अच्छी फैन फॉलोइंग है। करूर में 18 से 35 साल के वोटर्स सबसे ज्यादा हैं। विजय यहां आकर फिल्म रिलीज और सोशल मीडिया कैंपेन जैसे इवेंट में शामिल हो चुके हैं। 27 सितंबर 2025 को करूर में ही विजय की रैली में भगदड़ के दौरान 41 लोगों की मौत हुई थी। इसकी जांच CBI कर रही है। BJP को लगता है कि अगर उसके 2-3% वोट भी TVK के साथ जुड़ते हैं, तो ये NDA के लिए निर्णायक हो सकता है। एक इंटरनल रिपोर्ट ने तमिलनाडु BJP को एक्टिव कियातमिलनाडु और केरल विधानसभा चुनाव पर करीब से नजर रख रहे सीनियर जर्नलिस्ट केए शाजी कहते हैं, ‘इलेक्शन से पहले वोटर्स का मूड जानने के लिए कई सर्वे किए गए, जिनमें NDA गठबंधन के लिए बहुत पॉजिटिव तस्वीर पेश नहीं की गई। यही वजह है कि BJP विजय को साथ लाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है।’ कुछ दिनों पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पास भी इलेक्शन से जुड़े कई प्री-सर्वे मिलाकर एक इंटरनल रिपोर्ट भेजी गई। इसमें चुनाव से पहले AIADMK और BJP की हालत पतली बताई गई।रिपोर्ट में बताया गया कि तमिलनाडु की कई सीटों पर NDA गठबंधन तीसरे नंबर पर भी रह सकता है। इन आकलनों के बाद से ही पार्टी की लीडरशिप नाराज है। ’विजय को मनाने के लिए साउथ फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े बड़े चेहरों के साथ-साथ उनके दोस्तों और दूसरे राज्य के एक उपमुख्यमंत्री से दबाव बनाया जा रहा है।’ तमिलनाडु BJP से जुड़े सोर्स के मुताबिक, BJP ने TVK के सामने पेशकश की है कि अगर NDA गठबंधन चुनाव जीतता है कि वो विजय को तमिलनाडु के डिप्टी CM का पद और पार्टी के प्रस्तावित सीट-बंटवारे में लगभग 55 सीटें देने को तैयार है। फिलहाल इस बात को लेकर दोनों पार्टियों की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है। विजय की पर्सनल लाइफ और तलाक DMK के लिए चुनावी मुद्दातमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले थलापति विजय से जुड़ा तलाक का विवाद भी राजनीतिक समीकरणों का मुद्दा बना हुआ है। विजय से अलग रह रही उनकी पत्नी संगीता सोरनलिंगम ने दिसंबर 2025 में चेंगलपट्टू कोर्ट में तलाक की याचिका दायर कर गुजारे भत्ते की मांग की थी। संगीता ने अंतरिम राहत के लिए एक और याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने कोर्ट से पनयूर वाले घर में रहने की इजाजत मांगी। ये मामला अब भी चल रहा है। सीनियर जर्नलिस्ट डॉ. बसवराज इटनाल कहते हैं, ‘विजय की निजी जिंदगी के उतार-चढ़ाव और उनके तलाक को DMK चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। मेरा मानना है कि इससे DMK को राजनीतिक तौर पर कोई फायदा होने की संभावना नहीं है।’ ‘हालांकि, कुछ हद तक पत्नी को घर से बेदखल करने का मामला विजय की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है क्योंकि इससे लोगों (खासकर महिला वोटर्स) के मन में संगीता के प्रति सहानुभूति पैदा होगी। DMK विजय को कट्टर विरोधी के तौर पर देखती है। करूर भगदड़ के मुद्दे पर स्टालिन थलापति को घेरते रहे हैं।‘ TVK-NDA गठबंधन के चांसेज की 3 बड़ी वजहें1. कानूनी और सेंट्रल एजेंसियों का दबाव विजय पहले से ही इनकम टैक्स केस, तलाक और करूर भगदड़ मामले में घिरे हुए हैं। तमिलनाडु की राजनीति में ये एक पुराना पैटर्न रहा है कि जब भी कोई नया नेता उभरता है, तो केंद्र की एजेंसियां एक्टिव हो जाती हैं। पॉलिटिकल एनालिस्ट इसे 'दबाव की राजनीति' मानते हैं, जिससे नई पार्टियों को गठबंधन के लिए मनाया जाता है। लिहाजा, खुद पर प्रेशर कम करने के लिए विजय गठबंधन में शामिल हो सकते हैं। 2. TVK और NDA का एक समान विरोधी विजय का सीधा मुकाबला सत्ताधारी DMK से है। तमिलनाडु में स्टालिन को चुनौती देने के लिए TVK को एक ऐसे साथी की जरूरत है, जो DMK को सीधी चुनौती दे सकता हो। मौजूदा वक्त में NDA गठबंधन ही DMK-कांग्रेस अलायंस की सबसे बड़ी विरोधी है। 3. पहला चुनाव,TVK को स्टेबिलिटी की उम्मीद 2026 विधानसभा चुनाव TVK के लिए पहली परीक्षा है। अपने दम पर 234 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने से पार्टी पर फाइनेंशियल प्रेशर बढ़ सकता है। ऐसे में BJP और AIADMK जैसी पार्टियों का साथ विजय को वो स्टेबिलिटी दे सकता है, जो एक नई पार्टी के पास नहीं होती। एक्सपर्ट बोले- BJP और विजय की दोस्ती से AIADMK को नुकसानतमिलनाडु और साउथ की पॉलिटिक्स पर 25 साल से नजर रख रहे पॉलिटिकल एनालिस्ट टीएस सुधीर कहते हैं, 'विजय महज 10 या 20 सीटों के लिए NDA में नहीं आएंगे, क्योंकि वे खुद को CM पद का दावेदार मानते हैं। इसलिए वे ज्यादा सीटें मांगेंगे। NDA अगर विजय को अपने साथ लाता है, तो उसे AIADMK के खाते से सीटें देनी पड़ेंगी। सोचने लायक बात है कि क्या एडप्पाडी पलानीस्वामी इस बात के लिए तैयार होंगे? अभी ये बड़ा सवाल होगा।' 'इस चुनाव में AIADMK की सीधी लड़ाई DMK से है। DMK तकरीबन 175-180 सीटों पर लड़ेगी। अगर NDA अलायंस TVK को 70 सीटें देता है, तो क्या AIADMK सिर्फ 120 या 130 सीटों पर ही लड़ेगी? अगर ऐसा हुआ तो ये तमिलनाडु की 60 साल पुरानी AIADMK पार्टी के लिए बड़ा साइकोलॉजिकल नुकसान होगा।' उनकी पर्सनल लाइफ को लेकर सुधीर कहते हैं, '20 अप्रैल को विजय को तलाक के मामले में कोर्ट में पेश होना है। 3 दिन बाद यानी 23 अप्रैल को वोटिंग होगी।' पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं…BJP: स्टालिन के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी, TVK पर कुछ बोलना जल्दबाजी तमिलनाडु BJP के स्टेट स्पोक्सपर्सन नरायणन तिरुपाठी कहते हैं, ‘बीते 5 साल में DMK और कांग्रेस ने तमिलनाडु के लोगों को धोखे में रखा है। DMK अलायंस को लेकर तमिलनाडु में जबरदस्त एंटी-इनकम्बेंसी है। BJP पिछले चुनाव से ज्यादा सीटें लाएगी।’ क्या चुनाव से पहले NDA-TVK के साथ एलायंस कर सकती है? इस सवाल के जवाब में नरायणन कहते हैं, ‘तमिलनाडु का विकास ही NDA गठबंधन का मकसद है। BJP ऐसी विचारधारा रखने वाली हर पार्टी के साथ खड़ी है। थलापति विजय की TVK के साथ अलायंस होगा या नहीं? इस पर कुछ भी बोलना अभी जल्दबाजी होगी।’ TVK: हमारा किसी से अलायंस नहीं, DMK भ्रम फैला रही TVK के संयुक्त महासचिव निर्मल कुमार कहते हैं, ’DMK लोगों के बीच भ्रम पैदा करके चुनावी फायदा लेना चाहती है। सोशल मीडिया पर जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है कि हमारी पार्टी BJP-AIADMK के नेताओं के साथ बातचीत कर रही है। ये महज अफवाहें हैं, जनता को इन पर ध्यान नहीं देना चाहिए।’ TVK के साथ जोड़कर किसी भी पार्टी के गठबंधन की बातचीत पूरी तरह निराधार है। DMK: TVK की रैलियों में आने वाले लोग फैन हैं, वोटर नहींDMK के सीनियर लीडर और स्टेट स्पोक्सपर्सन सलेम धरणीधरन कहते हैं, 'भीड़ का मतलब वोट नहीं होता। TVK की रैलियों में आने वाले लोग सिर्फ उनके फैन हैं, वोटर नहीं। DMK का 2019, 2021, 2024 चुनावों में जीत का ट्रैक रिकॉर्ड ये साबित करता है कि जनता को हमारे प्रशासन पर भरोसा है, न कि किसी फिल्मस्टार के भाषणों पर। एक राजनेता के तौर पर हम सभी जनता के सेवक हैं, लेकिन TVK पार्टी में शामिल लोग विजय के सेवक हैं।' ………….ये खबर भी पढ़ें… क्या साउथ बंगाल से निकलेगा BJP की जीत का रास्ता 7 मार्च को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में BJP की परिवर्तन यात्रा पहुंची। यहां रघुनाथपुर इंडस्ट्रियल एरिया है इसलिए हिंदी भाषी और आदिवासी आबादी ज्यादा है। यहां से BJP के ही विधायक हैं, फिर भी रैली में भीड़ कम पहुंची। यहीं रास्ते में अवधेश राम मिले। वो रैली में नहीं आए लेकिन चाहते हैं कि राज्य में सरकार जरुर बदले। पढ़िए पूरी खबर…
क्या एआई दिग्गज एंथ्रोपिक को अपना सकता है जर्मनी?
अमेरिकी सरकार ने एआई कंपनी एंथ्रोपिक को अपनी सप्लाई चेन से बाहर कर दिया है. जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की गठबंधन सरकार एसपीडी के एक नेता ने इसे जर्मनी और यूरोप के लिए जीवन में एक बार मिलने वाला सुनहरा अवसर बताया
लड़का पैदा होने से क्यों परेशान हैं कुछ माता-पिता?
जर्मनी में कई माता-पिता अब एक लड़की को जन्म देना चाहते हैं. कई तय धारणाएं इसकी वजह हो सकती हैं, जैसे कि यह मानना कि लड़कियां शांत और लड़के शरारती होते हैं. क्या ऐसी सोच लैंगिक बराबरी की बहस में हमें पीछे नहीं खींच रही है
नेतन्याहू का दावा: ईरानी गार्ड्स प्रमुख अली लारिजानी मारे गए
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि हमारी कार्रवाई में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स प्रमुख और बासिज के सीनियर कमांडर अली लारिजानी की मौत हो गई है।
ईरान के सुरक्षा प्रमुख लारीजानी पर हमला, इस्राइली सेना ने हताहत होने को लेकर दिया बयान
इजराइल ने दावा किया है कि इस ऑपरेशन में बसीज पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडर घोलामरेजा सुलेमानी भी निशाने पर थे। बसीज फोर्स ईरान में आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने और सरकार विरोधी प्रदर्शनों को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है।
पाकिस्तान का अफगानिस्तान के काबुल में बड़ा हमला, एयर स्ट्राइक में 400 लोगों की मौत, 250 घायल
हमले के एक प्रत्यक्षदर्शी 31 वर्षीय ओमिद स्तानिकज़ई जो अस्पताल में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करते हैं ने बताया कि हमले से पहले इलाके में असामान्य हलचल देखी गई थी।
बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और सख्त करेगा ईरान के खिलाफ एनर्जी बैन
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ईरान के ऊर्जा क्षेत्र पर बैन को और कड़ा करने के लिए बड़ा कानून पास किया है। तेहरान के साथ चल रहे तनाव के बीच दोनों पार्टियों के प्रतिनिधियों ने और कड़े कदम उठाने पर जोर दिया।
ईरान संघर्ष को लेकर ट्रंप पर बरसे डेमोक्रेट हकीम जेफ्रीज, बोले- अमेरिका को बेवजह युद्ध में धकेल दिया
अमेरिका में ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और घरेलू आर्थिक मुद्दों को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है
पाकिस्तान सरकार इमरान खान से उनके बेटों सुलेमान और कासिम की मुलाकात रोक रही: जेमिमा गोल्डस्मिथ
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख इमरान की पूर्व पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से दखल देने की अपील की है
बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर हमला, धमाकों के बाद परिसर में लगी आग
इराक की राजधानी बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास पर मंगलवार को बड़ा हमला हुआ, जिसके बाद परिसर के अंदर आग लग गई। यह हमला उस समय हुआ जब दो विस्फोटक से लैस ड्रोन दूतावास के परिसर के भीतर गिर गए और उनके विस्फोट से आग भड़क उठी।
अमेरिकी फ्लाइट स्कूलों का चीनी पायलटों को ट्रेनिंग देना चिंताजनक: सीनेटर बैंक्स
अमेरिका में एक वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटर ने विमानन सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों को चेतावनी दी है कि अमेरिकी फ्लाइट स्कूलों में चीनी नागरिकों को ऐसी ट्रेनिंग दी जा रही है, जो अप्रत्यक्ष रूप से चीन की सैन्य महत्वाकांक्षाओं को मदद पहुंचा सकती है।
ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट पर सहयोगियों के 'ढुलमुल रवैये' पर साधा निशाना
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जो देश होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होने वाली ऊर्जा और तेल की आपूर्ति पर निर्भर हैं
ईरान संघर्ष के बीच ट्रंप ने बीजिंग यात्रा टाली
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान से जुड़ा युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस संघर्ष के कारण उन्होंने चीन की अपनी तय यात्रा को फिलहाल टाल दिया है, क्योंकि इस समय उन्हें वॉशिंगटन में रहना जरूरी लग रहा है।
16 जनवरी 2026 को पश्चिम बंगाल की CM ममता बनर्जी ने सिलीगुड़ी में महाकाल महातीर्थ मंदिर का शिलान्यास किया। 17 एकड़ में बनने वाला ये दुनिया के सबसे भव्य शिव मंदिरों में से एक होगा। करीब एक महीने पहले दिसंबर 2025 में ममता ने कोलकाता में दुर्गा आंगन का शिलान्यास किया था। इससे करीब 6 महीने पहले दीघा में पुरी की तर्ज पर जगन्नाथ धाम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की थी। पश्चिम बंगाल के इतिहास में ये पहला मंदिर है, जिसकी प्राण प्रतिष्ठा किसी मुख्यमंत्री ने की हो। सरकार का दावा है कि मंदिर बनने से इन इलाकों में लोकल बिजनेस बढ़ा है। सरकार को भी 100 करोड़ रुपए का फायदा हुआ है। हालांकि BJP इसे चुनावी तुष्टिकरण बता रही है। उसका कहना है कि ममता को कुर्सी जाने का डर है इसलिए मंदिर बना रही हैं। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव होने हैं। चुनाव में ममता की मंदिर पॉलिटिक्स से क्या बदलेगा, आखिर ममता को सॉफ्ट हिंदुत्व की जरूरत क्यों पड़ी? दैनिक भास्कर की टीम ने दीघा में ग्राउंड पर पहुंचकर इसे समझने की कोशिश की। लोग बोले- मंदिर भी मिला और रोजगार भीहम दीघा में मंदिर की बाहर सामान बेचने वाली कुछ महिलाओं से मिले। वे कैमरे पर बात करने से हिचक रही थीं, लेकिन कैमरा हटते ही बातचीत के लिए तैयार हो गईं। इनमें से एक सुमित्रा शंख बेचती हैं। वे कहती हैं, ‘ये मंदिर टूरिस्ट प्लेस पर बना है। दीघा में पूरे साल लोग घूमने आते हैं। इसके बनने से मेरे जैसी महिलाओं को रोजगार मिल गया। सुबह-शाम दो वक्त आती हूं और सामान बेचकर घर चली जाती हूं।’ यहीं मिले पारस रुइदास कहते हैं, ‘ममता बनर्जी ने आम लोगों के लिए मंदिर बनवाया है। लोग दीघा घूमने आते हैं, तो मंदिर भी घूम लेते हैं।‘ चुनाव पर इसके असर के बारे में पूछने पर वो कहते हैं, ‘सरकार तो TMC की ही बनेगी।‘ हालांकि मंदिर पॉलिटिक्स पर संजय शर्मा की राय अलग है। वे कहते हैं- राज्य में लोगों के पास रोजगार नहीं है। फिर मंदिर-मस्जिद बनाने से क्या होगा। लोगों को रोटी, कपड़ा और मकान चाहिए। सामान और रुपए बांटने से कुछ नहीं होने वाला है। यहां काम मिलना बंद हो गया है, कोई इस पर ध्यान नहीं दे रहा है। संजय गुस्से में कहते हैं, ‘BJP और TMC दोनों एक जैसे हैं। इनकी मंदिर-मस्जिद की राजनीति से कुछ नहीं होने वाला है।‘ वहीं, सुगतो मंडल कहते हैं ‘मंदिर बनने से बिजनेस बढ़ा है। लोकल लोगों ने कई छोटे-मोटे काम शुरू किए हैं।’ ममता के प्राण प्रतिष्ठा करने पर BJP के विरोध को लेकर सुगतो कहते हैं, ’ये BJP का उत्तर प्रदेश नहीं है, जहां महिलाओं को घर की चारदीवारी में रखा जाता है। यहां की महिलाएं मजबूत हैं। अगर दीदी पूजा कर रही हैं, तो इसका विरोध क्यों।’ ममता की एंटी-हिंदू छवि तोड़ने की कोशिशपश्चिम बंगाल में मंदिर पॉलिटिक्स ज्यादा पुरानी नहीं है। ये अभी हाल के कुछ साल में शुरू हुई है। इसे लेकर सीनियर जर्नलिस्ट विश्वभंर नेगर कहते हैं, ‘ममता बनर्जी पर हमेशा प्रो-मुस्लिम होने का इल्जाम लगता रहा है। इस छवि से बाहर आने के लिए उन्होंने सॉफ्ट हिंदुत्व का सहारा लिया है। मुस्लिम बहुल इलाकों के छोड़ दें, तो हिंदुओं का वोट ही तय करता है कि सत्ता किसे मिलने वाली है।’ ’ममता बनर्जी ने सिर्फ तीन मंदिरों का ही शिलान्यास नहीं किया, बल्कि गंगासागर में स्नान करने वालों को भी नदी पर पुल का तोहफा दिया है। उन्होंने ही पहली बार दुर्गापूजा कर्निवाल कराया।’ पश्चिम बंगाल में मंदिर पॉलिटिक्स की एंट्री के बारे में पूछने पर वे कहते हैं, ‘ममता बनर्जी की छवि एंटी-हिंदू की रही है। इसके अलावा सरकार के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी है। इसे कम करने के लिए भी मंदिर पॉलिटिक्स की जा रही है। पश्चिम बंगाल में एक नए तरह की राजनीति शुरू हो रही है। ममता से पहले बंगाल में लेफ्ट की सरकार थी और उनके मुद्दों में धर्म कभी नहीं था।‘ इसके असर के बारे में नेगर कहते हैं, ‘दीघा में ओडिया भाषी के अलावा, बांग्ला और हिंदी बोलने वाले रहते हैं। पहले लोग भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पुरी जाते थे, लेकिन अब यहां घूमने के साथ-साथ धार्मिक यात्रा भी होती है। दूसरी ओर गंगासागर में बड़ी संख्या में हिंदी भाषी स्नान करने आते हैं। इसके लिए फेरी घाट से होकर जाना पड़ता है। पुल बन जाने से लोकल लोगों और श्रद्धालुओं को जो फायदा होगा, उसका असर वोट में जरूर दिखेगा।‘ ‘मंदिर बनाने से ज्यादा जरूरी हिंदुओं की सुरक्षा’बंगाल की मंदिर पॉलिटिक्स को लेकर हमने कोलकाता में RSS प्रचारक डॉ. जीशानु बसु से भी बात की। वे कहते हैं, ‘पश्चिम बंगाल में मंदिर बनाने के ज्यादा जरूरी हिंदुओं की सुरक्षा है। ये तय करना जरूरी है कि यहां हिंदू सुरक्षित रह भी पाएंगे या नहीं क्योंकि उन पर लगातार अत्याचार हो रहा है।’ ममता के मंदिर के शिलान्यास और प्राण प्रतिष्ठा करने पर जीशानु सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं, ‘संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति मंदिर का शिलान्यास नहीं कर सकता है।‘ हमने पूछा फिर राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा प्रधानमंत्री ने कैसे की? इसके जवाब में वे कहते हैं, ‘राम मंदिर किसी सरकार ने नहीं बल्कि ट्रस्ट ने बनवाया है। सरकार का मंदिर या मस्जिद कुछ भी बनवाना सही नहीं है। ये समाज का काम है।‘ ‘पुरी का जगन्नाथ मंदिर चार धामों में से एक है। ऐसे में पश्चिम बंगाल में उसी के नाम से एक और मंदिर बनवाना सही नहीं है। ये देश की एकता और अखंडता के लिए भी ठीक नहीं। यही वजह है कि शंकराचार्य ने भी इसका विरोध किया। आप ही सोचिए अगर कोलकाता के कालीघाट मंदिर के नाम पर कहीं और मंदिर बना दिया जाए, तो क्या वो सही होगा।‘ वे आगे कहते हैं, ‘पहली बात मंदिर के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। ये इतिहास और श्रद्धा का विषय है, न की राजनीति का। ममता बनर्जी ने मंदिर का निर्माण और शिलान्यास अगर सियासी फायदे के लिए किया है, तो ये देश और राज्य के लिए बहुत ही गलत है।‘ ‘बंगाल की स्थिति ये है कि नॉर्थ बंगाल के डेवलपमेंट के लिए जो बजट पास किया गया है, उससे ज्यादा बजट मदरसों के लिए है। हिंदू बेवकूफ नहीं है, जो मंदिर निर्माण के झांसे में आ जाएंगे।‘ ममता को हिंदू वोट बैंक के पोलराइजेशन का डर बंगाल के सियासी माहौल को लेकर पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रभाकर मणि तिवारी कहते हैं कि BJP के हिंदुत्व की काट के लिए ममता पिछले कुछ साल से सॉफ्ट हिंदुत्व पर तरफ गई हैं। वे लगातार कई मंदिरों में गई। सबसे बड़ा बदलाव रामनवमी के दौरान देखने को मिला, जब TMC के लोगों ने जोर-शोर से जुलूस निकाला। वो आगे कहते हैं, ‘पश्चिम बंगाल की राजनीति में BJP ने ममता को सिर्फ एंटी हिंदू नहीं बनाया बल्कि लगातार मुस्लिम समर्थक के नाम से प्रचार कर रही है। इसीलिए ममता बनर्जी ने लोकसभा चुनाव के कुछ वक्त पहले ही सॉफ्ट हिंदुत्व का रुख किया है। जहां मंच से उन्होंने दुर्गा चालीसा का पाठ किया है।‘ आखिर ममता बनर्जी को सॉफ्ट हिंदुत्व की जरूरत क्यों पड़ी? इसके जवाब में प्रभाकर कहते हैं, ‘राज्य में ममता बनर्जी का अपना वोट बैंक है, लेकिन इसके अलावा कुछ वोट ऐसा भी है, जिसके बिना सरकार बननी मुश्किल है। जिस तरह अल्पसंख्यक वोट ममता बनर्जी के साथ है, उसी तरह अगर हिंदू वोट BJP के लिए एकजुट हो गया तो TMC के लिए परेशानी का सबब बन जाएगा।‘ ‘इसी हिंदू वोट बैंक को अपनी ओर लाने के लिए पश्चिम बंगाल में TMC भी मंदिर राजनीति पर उतर आई। इसका चुनावों पर कितना असर होगा, फिलहाल कहना मुश्किल है। ममता बनर्जी पहले भी ऐसा कर चुकी हैं, लेकिन उसका कोई खास असर नहीं हुआ।‘ बंगाल की राजनीति में क्या पहले कभी मंदिर-मस्जिद की चर्चा हुई है? इस पर प्रभाकर कहते हैं ‘बंगाल में कांग्रेस और लेफ्ट की सरकार के दौरान कभी ऐसा कुछ नहीं दिखा।‘ पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं…BJP बोली- ममता को कुर्सी जाने का डर, इसलिए मंदिर बना रहींममता बनर्जी के मंदिर का शिलान्यास करने का BJP विरोध करती रही है। राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले 3 मंदिरों के शिलान्यास पर BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता देवजीत सरकार कहते हैं, ‘इन सब मंदिरों में सबसे पहले ममता ने काली मंदिर में अपनी फाइल लगाई, लेकिन वहां फेल हो गईं। उसके बाद बाकी मंदिरों का रुख किया। राज्य में लोगों तक पानी और शौचालय नहीं पहुंच सका है। जनता को सुविधाएं देने के बजाय तुष्टिकरण की राजनीति हो रही है।‘ ‘राज्य में मंदिर की जगह अगर स्कूल और अस्पताल खोला जाता तो जनता को इसका फायदा मिलता। मंदिर बनवाना सरकार का काम नहीं है, ये काम ट्रस्ट के जरिए जनता के पैसे से होना चाहिए। इससे साफ समझ आ रहा है कि ममता बनर्जी के मन में सत्ता जाने की घबराहट है।‘ TMC ने कहा- राजनीति करने में नारायण का अपमान कर रही BJPTMC के राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजु दत्ता BJP पर पलटवार करते हुए कहते हैं, ‘अगर दीदी मंदिर का निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा नहीं करा सकती हैं, तो PM मोदी ने अयोध्या में अधूरे राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कैसे की। वजह साफ थी लोकसभा चुनाव। जगन्नाथ धाम की प्राण प्रतिष्ठा अप्रैल 2025 में हुई, उस वक्त बंगाल में कोई चुनाव भी नहीं था।‘ ‘हम धर्म को लेकर राजनीति नहीं करते और न ही इसे अपने मेनिफेस्टो में रखते हैं। हमारा नारा मां, माटी और मानुष है। बल्कि हिंदुत्व की पॉलिटिक्स करने वाली BJP ने भगवान जगन्नाथ की निंदा की। उनके धाम को एम्यूजमेंट पार्क कहा और उनके महा प्रसाद को हलवा। खुद को धर्म का ठेकेदार बताने वाली पार्टी के लीडर राजनीति के चक्कर में भगवान नारायण का अपमान कर रहे हैं।' …………………ये खबर भी पढ़ें… क्या साउथ बंगाल से निकलेगा BJP की जीत का रास्ता 7 मार्च को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में BJP की परिवर्तन यात्रा पहुंची। यहां रघुनाथपुर इंडस्ट्रियल एरिया है इसलिए हिंदी भाषी और आदिवासी आबादी ज्यादा है। यहां से BJP के ही विधायक हैं, फिर भी रैली में भीड़ कम पहुंची। यहीं रास्ते में अवधेश राम मिले। वो रैली में नहीं आए लेकिन चाहते हैं कि राज्य में सरकार जरुर बदले। पढ़िए पूरी खबर…
सोमवार, 16 मार्च को 3 राज्यों की 11 राज्यसभा सीटों पर मतदान हुए। विधायकों ने जमकर क्रॉस-वोटिंग की। इसके चलते ओडिशा में बीजेपी ने 1 एक्स्ट्रा सीट जीत ली। वहीं बिहार में कांग्रेस के 3 और RJD के एक विधायक वोट डालने ही नहीं पहुंचे। इससे बीजेपी की शिवेश राम की जीत आसान हो गई। अब राज्यसभा में NDA ने फिर से बहुमत हासिल कर लिया है। फरवरी-मार्च 2026 में राज्यसभा में 10 राज्यों की 37 सीटें खाली हुई थीं, जिनके लिए 40 कैंडिडेट्स ने पर्चा भरा। इनमें से 7 राज्यों के 26 प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए गए। हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 सीटों पर वोटिंग हुई थी, जिसमें क्रॉस-वोटिंग का खेल हुआ। चुनाव के बाद अब राज्यसभा में कौन-सी पार्टी कितनी ताकतवर है, वोटिंग में कैसे खेल हुआ और मोदी सरकार ज्यादा मजबूत कैसे हुई; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… कैसे होती है राज्यसभा चुनाव की वोटिंग? किसी राज्य में राज्यसभा की जितनी सीटें खाली हैं, उन पर राज्य के विधायकों की संख्या के हिसाब से वोट डाले जाते हैं। ये फॉर्मूला थोड़ा पेचीदा लग सकता है, इसलिए हरियाणा के एग्जांपल से समझिए… बिहार में NDA ने कैसी जीतीं पांचों सीट? बिहार में राज्यसभा की 5 सीटें खाली हुई थीं, जिनके लिए 6 कैंडिडेट्स ने नॉमिनेशन फाइल किया। NDA की ओर से बीजेपी के नितिन नबीन, RLM सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा, JDU के नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर की जीत पहले से तय थी। लेकिन पेंच फंस गया बीजेपी के शिवेश राम की सीट पर। दरअसल, RJD की ओर से एडी सिंह ने भी पर्चा भरा और उनका मुकाबला शिवेश कुमार से हुआ…. ओडिशा में कैसे हुआ क्रॉस वोटिंग का खेल? ओडिशा से राज्यसभा की 4 सीटें खाली हुई थीं। बीजेपी के मनमोहन सामल और सुजीत कुमार की जीत पक्की थी। वहीं BJD के संतृप्त मिश्रा का भी जीतना तय था। मुकाबला हुआ बीजेपी समर्थित कैंडिडेट दिलीप राय और BJD के डॉ. दत्तेश्वर होता के बीच… हरियाणा में देर रात क्यों आए नतीजे? हरियाणा में राज्यसभा की 2 सीटें के लिए चुनाव हुए। बीजेपी ने संजय भाटिया का जीतना पहले से तय था। जबकि बीजेपी समर्थित सतीश नांदल और कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौध के बीच मुकाबला हुआ… नियम होने के बावजूद क्रॉस-वोटिंग पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? बिहार, ओडिशा और हरियाणा में विधायकों ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार को छोड़ दूसरी पार्टी के उम्मीदवार को वोट दिए। जबकि यहां पार्टियों ने व्हिप जारी किए थे, लेकिन राज्यसभा चुनाव में व्हिप लागू नहीं होता। विधायक अपने विवेक से वोट कर सकते हैं, लेकिन इसमें एक पेंच है। राज्यसभा चुनाव में ओपन वोटिंग होती है। यानी विधायकों को मतपत्र पर वरीयता भरने के बाद अपनी पार्टी के तय एजेंट को उसे दिखाना होता है। जो विधायक ऐसा नहीं करते या किसी अन्य व्यक्ति को मतपत्र दिखाते हैं, तो उनका वोट कैंसिल हो सकता है। वहीं जो विधायक अपनी पार्टी के खिलाफ जाते हैं, उन्हें पार्टी से निकालने का प्रावधान है। इसके लिए पॉलिटिकल पार्टी को एक एप्लीकेशन विधानसभा के स्पीकर को देना होता है और उस विधायक की सदस्यता रद्द कर दी जाती है। ऐसे में ये कहना कि राज्यसभा चुनाव में दूसरे दल के उम्मीदवार को वोट करने पर कार्रवाई नहीं होती है, ये सही नहीं है। लेकिन पार्टियां ऐसा करने से बचती हैं। 2003 में बीजेपी के अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने ओपन वोटिंग का प्रावधान इसीलिए बनाया था, ताकि विधायक दूसरे दलों से पैसा लेकर राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं करें। NDA को राज्यसभा में फिर से बहुमत मिलने से कैसे मजबूत होगी मोदी सरकार? राज्यसभा में बीजेपी के 106 सांसदों के साथ अब NDA के कुल सांसदों की संख्या 140 हो गई है। यानी NDA को फिर से बहुमत मिल गया। इसके चलते केंद्र की मोदी सरकार और मजबूत होगी। कोई बड़ा बिल पास कराने के लिए अब उसे BJD, YSRCP या निर्दलीय सांसदों की जरूरत नहीं पड़ेगी। NDA के सांसद इसके लिए काफी होंगे। विपक्ष के वॉकआउट या विरोध के बावजूद बिल अटकेंगे नहीं। हालांकि बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA को पिछले 2 साल से राज्यसभा और लोकसभा में बहुमत हासिल है। इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ कहते हैं कि भारतीय लोकतंत्र में राज्यसभा का चुनाव इस तरह से होता है कि लोकसभा और राज्यसभा में किसी एक दल को एक समय पर स्पष्ट बहुमत मिलना मुश्किल होता है। अगर किसी बड़ी पार्टी के पास बहुमत है तो इसका फायदा यह है कि सरकार को क्षेत्रीय दलों या निर्दलीय सांसदों के समर्थन के बदले उनकी अनुचित मांगों के सामने झुकना नहीं पड़ता। हालांकि इसका नकारात्मक पहलू भी है। जब किसी एक दल के पास लोकसभा और राज्यसभा दोनों जगहों पर बहुमत हो तो संसदीय कामकाज में आम सहमति बनाने की स्थिति कम हो जाती है। बड़ी पार्टी अपने मन से फैसला लेती है। वह छोटे और दूसरे दलों से सलाह नहीं लेती है। यह लोकतंत्र के लिए सेहतमंद स्थिति नहीं है। 1989 तक कांग्रेस पार्टी के पास राज्यसभा में स्पष्ट बहुमत होता था। तब ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस की ही सरकार थी। लेकिन 1989 के बाद की सभी सरकारों को राज्यसभा में अहम बिल पास कराने में छोटे दलों को साधना पड़ा है या विपक्षी दलों के साथ मिलकर आम सहमति बनानी पड़ी है। ******** ये भी खबर पढ़िए… चुनाव से पहले BJP ने मुख्यमंत्री बदलने की स्क्रिप्ट लिखी: नीतीश के नाम पर भ्रम फैलाया, चिराग को ज्यादा सीटें; 4 पॉइंट में BJP की स्ट्रैटजी नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के ऐलान के साथ ही बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना तय है। भले ही नतीजों के लगभग चार महीने बाद ऐसा होने जा रहा है, लेकिन इसकी स्क्रिप्ट बीजेपी ने चुनाव से पहले ही लिख रखी थी। सीटों के बंटवारे से लेकर नीतीश के लिए मजबूती से कैंपेन करना, बीजेपी की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। पूरी खबर पढ़िए…
ईरान का पड़ोसियों पर वार: हमलों की इजाज़त नरसंहार को बढ़ावा
युद्धविराम की मांग वाली बात पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अब पड़ोसी देशों को नसीहत दी है।
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि अमेरिका ने कई मौकों पर अपने सहयोगियों का साथ दिया है, लेकिन अब देखना होगा कि वे अमेरिका की कितनी मदद करते हैं। उन्होंने कहा, हमें यूक्रेन के मामले में उनकी मदद की जरूरत नहीं पड़ी।
दिल्ली यात्रा के दौरान DGFI प्रमुख राशिद चौधरी ने भारत के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ कई अहम बैठकें कीं। इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के अलावा भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के प्रमुख पराग जैन और सैन्य खुफिया एजेंसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आर.एस. रमन भी शामिल थे।
होर्मुज पर ट्रंप की उम्मीदों को लगा झटका! जापान-AUS का साफ इनकार, दक्षिण कोरिया बोला- सोचेंगे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयरफोर्स वन विमान से वाशिंगटन लौटते समय पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने लगभग सात देशों से इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा में योगदान देने के लिए कहा है।
इजराइल-ईरान जंग का देश में LPG सिलेंडर की सप्लाई पर असर पड़ा है। LPG सिलेंडर की कमी के बीच इंडक्शन कुकर की डिमांड अचानक कई गुना बढ़ गई है। हालत ये है कि कई इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानों में इंडक्शन स्टोव का स्टॉक खत्म हो चुका है। कंपनियों के लिए भी डिमांड पूरी करना मुश्किल हो रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स डीलर्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन कुकर की बिक्री में 400 से 500% का इजाफा हुआ है। बाजार के जानकारों का कहना है कि इंडक्शन बनाने में इस्तेमाल होने वाला ज्यादातर कच्चा माल चीन से आता है। इसलिए नई सप्लाई आने में करीब 45 दिन का वक्त लग सकता है। ऐसे में कंपनियों के लिए प्रोडक्शन बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। लोग बोले- ईद में कैसे बनेगा खाना, इंडक्शन का ही सहारा भोपाल के इलेक्ट्रॉनिक्स बाजारों में इंडक्शन स्टोव खरीदने वालों की भीड़ बढ़ गई है। LPG सिलेंडर की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कई परिवार एहतियात के तौर पर इंडक्शन खरीद रहे हैं। इसकी डिमांड जानने के लिए हम सबसे पहले बाजार पहुंचे। यहां मिली नुसरत कहती हैं, ‘हमारा परिवार बड़ा है, इसलिए एक साथ तीन इंडक्शन खरीद रही हूं। सिलेंडर के साथ-साथ इंडक्शन के दाम भी बढ़ गए हैं। पिछले महीने जो इंडक्शन 2200 रुपए में मिल रहा था। अब वही करीब 3000 रुपए का हो गया है। लगता है आने वाले दिनों में दाम और बढ़ेंगे।‘ ‘रमजान का महीना चल रहा है, रोज शाम को इफ्तारी के लिए घर में खाना बनाना जरूरी है। ईद की तैयारी भी करनी है, इसलिए एहतियात के तौर पर इंडक्शन खरीदना पड़ रहा है।‘ वहीं बाजार में मिले कैलाश भी गैस सिलेंडर की सप्लाई न होने से परेशान हैं। उन्होंने बताया कि कई दुकानों पर पूछ चुके लेकिन इंडक्शन नहीं मिल रहा। कैलाश कहते हैं, ‘गैस सिलेंडर के लिए नंबर लगाया है, लेकिन कह रहे हैं कि मिलने में 8–10 दिन लग सकते हैं।’ कई दुकानों में इंडक्शन का स्टॉक भी खत्मइलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में ज्यादातर दुकानों पर इंडक्शन स्टोव का स्टॉक भी खत्म हो चुका है। जिन दुकानों में इंडक्शन की गिनी-चुनी यूनिट्स बची भी हैं, वहां दाम काफी ज्यादा हैं। भोपाल में एक इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम मालिक श्याम बंसल बताते हैं, ‘आमतौर पर जो माल एक हफ्ते या दस दिन में आता था, उसे अब हर दिन मंगाना पड़ रहा है। हम खुद महंगे दाम पर माल खरीद रहे हैं, इसलिए कस्टमर को भी महंगे में ही देना पड़ रहा है। हालांकि कोशिश यही है कि जरूरत के समय ज्यादा मुनाफा न लिया जाए।’ बाजार के जानकार बताते हैं कि आमतौर पर गर्मियों में इंडक्शन स्टोव की बिक्री कम हो जाती है। इस वक्त कस्टमर की जरूरत एयर कंडीशनर, कूलर, फ्रिज और पंखे जैसे प्रोडक्ट रहते हैं। इसलिए दुकानदार भी गर्मियों में इंडक्शन का ज्यादा स्टॉक नहीं रखते। अब की LPG को लेकर बनी अनिश्चितता ने बाजार का ट्रेंड ही बदल दिया है।’ 5 दिन में इंडक्शन की महीने भर से ज्यादा बिक्री फिलिप्स डीए के मुंबई और एमपी में ब्रांच मैनेजर सेल्स विवेक गौर बताते हैं, ‘LPG की कमी की खबरों के बीच इंडक्शन एक बेहतर विकल्प बनकर उभरा है। लोगों ने एहतियात के तौर पर इसे खरीदना शुरू कर दिया है। इसलिए इंडक्शन की डिमांड में करीब 400–500% का इजाफा हुआ है। सप्लाई बनी रहे इसलिए बढ़ती डिमांड पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं।‘ वहीं, उषा इंटरनेशनल लिमिटेड के भोपाल में डिप्टी सेल्स मैनेजर बिनीत शर्मा बताते हैं, अगर किसी महीने में आम तौर पर इंडक्शन की 1,000 यूनिट बिकती हैं, तो इस बार पिछले पांच दिन में ही करीब 8,000 से 10,000 यूनिट बिक चुकी हैं। यानी इसकी डिमांड 8 से 10 गुना तक बढ़ गई है। वे आगे कहते हैं कि फिलहाल इंडक्शन कैटेगिरी में कई ब्रांड कच्चे माल की कमी का सामना कर रहे हैं। बाजार में बड़ी संख्या में छोटे और अनऑर्गनाइज्ड ब्रांड हैं, इसलिए इसका सटीक डेटा नहीं है। कोविड काल जैसे हालात, अचानक बढ़ा बाजारकेनस्टार में एमपी के स्टेट हेड रोहित श्रीवास्तव कहते हैं कि मौजूदा हालात कोविड के दौर की याद दिला रहे हैं, जब इलेक्ट्रॉनिक किचन अप्लायंसेज की डिमांड बढ़ गई थी। वे बताते हैं, ‘इंडक्शन और इंफ्रारेड की बिक्री का ये दौर बिल्कुल कोविड के समय जैसा है, जब अचानक माइक्रोवेव और डिशवॉशर की मांग बढ़ गई थी। अब भी उसी तरह की आर्टिफिशियल ग्रोथ देखने को मिल रही है। पहले ही दिन हमने 7 हजार से ज्यादा यूनिट बेचीं।’ कंपनियों के लिए सप्लाई देना और कच्चा माल जुटाना चैलेंजइंडक्शन बनाने वाली कंपनियों के लिए भी अचानक बढ़ी डिमांड चुनौती बन गई है। प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कच्चा माल, फैक्ट्री क्षमता और सप्लाई चेन की तैयारी पहले से करनी पड़ती है। डीलरों का कहना है कि अगर डिमांड ऐसे ही बढ़ती रही तो कुछ वक्त के लिए बाजार में इंडक्शन की सप्लाई कम हो सकती है। मध्यप्रदेश में उषा इंटरनेशनल लिमिटेड के ब्रांच मैनेजर मोहनीश जैन बताते है, ‘इंडक्शन स्टोव बनाने में इस्तेमाल होने वाला लगभग सारा कच्चा माल चीन से आता है, खासकर हीट प्लेट जैसे बाकी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट। ऐसे में चीन में भी डिमांड बढ़ने का असर भारतीय बाजार पर पड़ रहा है।‘ ‘कंपनियों के लिए ये अप्रत्याशित संकट है। कंपनियां चीन में सप्लाई सेंटर्स से लगातार कॉन्टैक्ट में हैं, लेकिन नए ऑर्डर की शिपमेंट आने में करीब 45 दिन का वक्त लग सकता है।‘ डीलरों के मुताबिक, सिर्फ फिलिप्स ब्रांड में ही एक लाख से ज्यादा यूनिट की डिमांड आ चुकी है। कंपनियां फिलहाल अपने मौजूदा स्टॉक के आधार पर प्रोडक्शन बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं। LPG पर निर्भरता कम करने के लिए कई कंपनियां अब कमर्शियल किचन के लिए बड़े इंडक्शन सिस्टम तैयार करने का भी काम कर रही हैं। उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि होटल और बड़े किचन के लिए अलग से कमर्शियल इंडक्शन यूनिट डेवलप करने की योजना बनाई जा रही है। हालात सामान्य होने पर कम होंगी कीमतें इलेक्ट्रॉनिक्स डीलरों का मानना है कि मौजूदा हालात स्थायी नहीं है। जैसे ही गैस सिलेंडर की सप्लाई सामान्य होगी, लोगों की चिंता कम होने लगेगी। इंडक्शन की डिमांड भी धीरे-धीरे घटने लगेगी।दुकानदार भी मानते हैं कि कई कस्टमर AC या कूलर खरीदने का प्लान बनाकर शॉप पर आ रहे हैं, लेकिन गैस लेकर बने माहौल के कारण पहले इंडक्शन कुकर खरीद रहे हैं। IRCTC और कई ऑर्गनाइजेशन इंडक्शन का कर रहे इस्तेमालLPG संकट और मौजूदा हालात को देखते हुए IRCTC ने भी जरूरत पड़ने पर माइक्रोवेव और इंडक्शन जैसे कुकिंग के तरीकों का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि IRCTC के दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के CRM का कहना है कि फिलहाल उनके पास LPG की कोई कमी नहीं है। पहले की तरह ही इंडक्शन का इस्तेमाल भी किया जाता रहा है। अभी किचन चलाने में किसी खास बदलाव की जरूरत नहीं पड़ी है। वहीं दिल्ली में इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रोफेसर डॉ. के. जी. सुरेश बताते हैं कि उनके संस्थान में भी एहतियात के तौर पर हॉट प्लेट, इलेक्ट्रिक ओवन और अन्य अप्लायंसेज खरीदे जा रहे हैं। वे कहते हैं, ‘सरकार ने साफ किया है कि देश में ऊर्जा संकट नहीं है। अगर फ्यूचर में कोई इमरजेंसी की स्थिति आती है तो हमें उसके लिए तैयार रहना चाहिए।’ …………….ये खबर भी पढ़ें… यूपी में इंडक्शन की डिमांड 40%, रेट भी 10% बढ़ा अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो गई है। यूपी में भी गैस एजेंसियों के बाहर लंबी–लंबी लाइनें हैं। गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी भी हो रही है। ऐसे में विकल्प के तौर पर इंडक्शन कुकटॉप की डिमांड 40% तक बढ़ गई है। पढ़िए पूरी खबर…
ईरान की आईआरजीसी ने बयान जारी कर बताया कि इजराइल के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान पहली बार सेजिल मिसाइल दागी गई। यह एक सॉलिड फ्यूल वाली मध्यम दूरी की रणनीतिक बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे ईरान की सबसे उन्नत मिसाइलों में गिना जाता है।
अमेरिका का 'लुकास' ड्रोन अरब देशों को बना रहा निशाना: ईरानी विदेश मंत्री
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल कुछ स्थानों से पश्चिम एशिया में अरब देशों पर हमले कर रहे हैं। यह बात उन्होंने पैन-अरब समाचार आउटलेट अल-अरबी अल-जहीद के साथ साक्षात्कार में कही।
स्टार्मर-ट्रंप वार्ता: होर्मुज स्ट्रेट खोलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात कर मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक समुद्री व्यापार पर पड़ रहे असर पर चर्चा की।
पूरी दुनिया की नजर ईरान जंग पर टिकी है। उधर इजराइल तेजी से लेबनान पर जमीनी कब्जा करने में जुटा है। पिछले 15 दिनों में ही इजराइल ने लेबनान में करीब 700 लोग मार दिए हैं। 20% जमीन खाली करा ली है और अपने सैन्य ठिकाने जमा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू अपने अल्टीमेट गोल ‘ग्रेटर इजराइल’ को हकीकत बनाने में जुटे हैं। आखिर ग्रेटर इजराइल क्या है और नेतन्याहू मिडिल ईस्ट में क्या करना चाहते हैं; जानेंगे मंडे मेगा स्टोरी में… लेकिन इस सब की शुरुआत क्यों और कैसे हुई? इसे समझने के लिए 4 हजार साल पीछे चलना होगा… ***** ग्राफिक्स: दृगचंद्र भुर्जी और अजीत सिंह -------- ये खबर भी पढ़िए… ईरान समेत 7 देशों पर हमले, आधी दुनिया पर नजर:ट्रम्प की 'सनक' एक सोची-समझी स्ट्रैटजी; क्या ऐसे ही तबाह होती हैं सुपर पावर्स डोनाल्ड ट्रम्प को राष्ट्रपति पद की शपथ लिए 13 महीने हुए हैं। इस दौरान ट्रम्प ने 7 देशों पर सैन्य हमले किए, ईरान के सुप्रीम लीडर को मार गिराया, वेनेजुएला के राष्ट्रपति को तो घर से उठवा लिया, दर्जनों देशों पर अनाप-शनाप टैरिफ लगाए और राष्ट्राध्यक्षों को बेइज्जत किया। पूरी खबर पढ़िए…
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है। यह केवल हमारे दुश्मनों—अमेरिका और उसके सहयोगियों—के टैंकरों और जहाजों के लिए बंद है।
होर्मुज स्ट्रेट खुला है, पर नियंत्रण हमारे पास है : आईआरजीएस कमांडर
ईरान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बताया है कि दुनिया में तेल ले जाने का एक बहुत महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता होर्मुज स्ट्रेट अभी भी खुला है और उस पर ईरान का नियंत्रण बना हुआ है
मैं रामकृष्ण, ओडिशा के मलकानगिरि जिले के तंडकी गांव का रहने वाला हूं। मेरे चार बच्चे हैं, सभी बिस्तर पर पड़े रहते हैं। हिल-डुल नहीं सकते। सभी जवान हैं, शादी की उम्र के हैं। इन्हें हाइपोटोनिया नाम की बीमारी है। पैदा होने पर ये बच्चे ठीक थे, लेकिन धीरे-धीरे ये इस बीमारी की जद में आते गए। पत्नी इनके गम में बीमार रहने लगी है। 8 हजार कमाता हूं। किसी का इलाज नहीं करा सकता। एक ऐसी परेशानी में हूं, जिसका कोई हल नहीं है। समझ नहीं आता कि मौत किसके लिए मांगू। आज से 23 साल पहले मेरे पहला बच्चा बेटी हुई। हमारे यहां बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं किया जाता। पिता बनकर बहुत खुश था, लेकिन 6 महीने बाद भी मेरी बेटी हिल-डुल नहीं पा रही थी। आवाज देने पर हमारी तरफ देखती भी नहीं थी। ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं हूं, इसलिए कुछ समझ नहीं पा रहा था कि इन्हें क्या हुआ है। पहले लोकल डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन कुछ पता नहीं चला। वैसे भी हमारा इलाका नक्सल प्रभावित है। यहां अस्पताल वगैरह कुछ खास नहीं हैं। डॉक्टरों ने कहा कि इसे भुवनेश्वर लेकर जाओ मलकानगिरि से भुवनेश्वर जाना इतना आसान नहीं था। पंचायत ऑफिस में अनाज बांटने से 8 हजार रुपए महीना कमा पाता हूं। फिलहाल, बेटी को दिखाने के लिए भुवनेश्वर लेकर गया। वहां डॉक्टर ने बताया कि इसे हाइपोटोनिया है। यह बीमारी कभी ठीक नहीं होगी। मैं समझ नहीं पाया कि यह बीमारी होती क्या है। बाद में लोगों से पता चला कि यह जेनेटिक बीमारी होती है। भुवनेश्वर के अलावा आंध्र प्रदेश का विशाखापट्टनम शहर हमारे घर से नजदीक पड़ता है, जहां इसका इलाज होता है। लेकिन विशाखापट्टनम, भुवनेश्वर से भी ज्यादा मंहगा शहर है। आने-जाने के एक चक्कर में 20 से 25,000 रुपए लग जाते हैं। इतना पैसा चुका नहीं सकता। अब बच्चों का इलाज तो नहीं करा पा रहा, लेकिन इनकी सेवा कर रहा हूं। अब तो मेरी पत्नी बच्चों के बारे में सोच-सोच कर बीमार रहने लगी है। सोचती है कोई तो सामान्य औलाद पैदा हुई होती। तीन साल बाद मेरी पत्नी दोबारा प्रेगनेंट हुई। इस बार बड़ी उम्मीद थी कि भगवान हमारी सुनेगा। लेकिन डरे भी हुए थे कि कहीं यह बच्चा भी बेटी जैसा न हो जाए। खैर, मुझे फिर से एक बेटी हुई। शुरुआत में ठीक थी। सालभर तक पता नहीं चला कि उसे कोई बीमारी है। लेकिन हम सतर्क थे। जब वह चलने लायक हुई तो अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पा रही थी। हमें लगा कुछ बच्चे देर में चलते हैं। इंतजार करते रहे, लेकिन नहीं चली। लगभग दो साल बाद भी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाई। हम पति-पत्नी तो सोचकर ही कांप गए कि यह बच्ची भी पहली बच्ची जैसी हो रही है। हमने उसे चलाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह धीरे-धीरे ठीक वैसे ही होती चली गई, जैसी बड़ी बेटी थी। हम घबराकर उसे भुवनेश्वर लेकर गए। वहां डॉक्टर ने बताया कि यह भी ठीक नहीं होगी। इसी भी हाइपोटोनिया बीमारी है। निराश होकर वापस घर लौट आया। अब हम दो-दो विकलांग बेटियों को पालने लगे। हमारे पास और कोई रास्ता नहीं था। हमें लगा कि शायद भगवान की यही मर्जी हो। मैं सुबह काम पर चला जाता और मेरी पत्नी बेटियों की देखभाल करतीं। उन्हें नहलाती, खिलाती। जैसे-जैसे बेटियां बड़ी होती गईं। उनका वजन बढ़ता गया। खासकर बड़ी बेटी का वजन बढ़ने से पत्नी के लिए इन्हें उठा पाना मुश्किल होने लगा। परेशानी बढ़ गई। दो साल बाद मेरी पत्नी फिर प्रेगनेंट हुई। इस बार उम्मीद थी कि हमारी झोली भरी जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भगवान को कुछ और ही मंजूर था। हमारे दो जुड़वा बेटे हुए। उनके पैदा होते ही हम उन्हें डॉक्टर के पास ले गए। लेकिन डॉक्टर बता नहीं पा रहे थे कि उन्हें कोई बीमारी है या नहीं। सालभर बद बदकिस्मती से मेरे दोनों जुड़वा बेटों को भी वही हाइपोटोनिया बीमारी होने का पता चला। अब मेरे चार बच्चे हैं। पहली बेटी 23 साल की हो गई है। दूसरी 20 साल की और दोनों बेटों की उम्र 19 साल है। चार-चार जवान बच्चे, सभी विकलांग और ऐसी बीमारी जो अब कभी भी ठीक नहीं हो सकती है। अब मैं हार चुका हूं। पत्नी बीमार रहने लगी है, उसका इलाज नहीं करा पा रहा हूं। बच्चों के बारे में सोच-सोचकर वह गुमसुम रहने लगी है। बस खाना बना देती है। उसके बाद सारा दिन चुप बैठी रहती है। सोचता हूं जिस उम्र में पिता बच्चों की शादी के रिश्ते ढूंढ़ता है, मैं उस में में चार-चार जवान बच्चों का मल-मूत्र साफ करने में लगा रहता हूं। सुबह अकेला उठता हूं। चारों बच्चों को शौच और ब्रश कराता हूं। नहालाता-धुलाता हूं। इस दौरान मेरी पत्नी नाश्ता तैयार कर रही होती हैं। चारों बच्चों को नाश्ता कराता हूं और फिर मैं नाश्ता करता हूं। सुबह पंचायत ऑफिस जाते वक्त इन बच्चों को कुर्सी पर बिठाकर चला जाता हूं। साथ में मोबाइल पर गाना लगाकर रख देता हूं। यह बच्चे गाना कितना सुन पाते हैं, पता नहीं। इस दौरान पंचायत का काम छोड़कर हर रोज दोपहर को घर आता हूं। वजन ज्यादा होने से अब मेरी पत्नी इनकी देखभाल नहीं कर पाती। दोपहर आकर इन्हें कुर्सी से उठाकर चटाई पर लिटाता हूं और फिर खाना खिलाता हूं। खाना खिलाने के बाद कुछ देर रुकता हूं। अगर कोई मल-मूत्र करता है तो उसे साफ करता हूं, फिर से ऑफिस चला जाता हूं। मैं अकेला ही घर और बाहर की जिम्मेदारी निभाता हूं। बस यही जिंदगी हो गई है। पंचायत में दिनभर हाथ अनाज उठाने में लगा रहता है और घर आकर बच्चों को उठाकर यहां से वहां करने में। कई बार बच्चे खुद को गंदा कर लेते हैं, लेकिन पत्नी उनकी परेशानी नहीं समझ पातीं। 23 साल हो गए हैं। हम पति-पत्नी न किसी के घर जा पाते हैं और न ही किसी के शादी-ब्याह में। चार-चार विकलांग बच्चों को किसके सहारे छोड़कर जाऊं। अब तो लोग हमारे घर आना भी बंद कर दिए हैं। रात में मेरे बच्चे चीखते हैं। हमें नहीं पता कि क्यों। शायद शरीर में दर्द होता होगा या फिर बैठे या लेटे-लेटे थक जाते होंगे। हमें कई लोगों ने कहा कि इन बच्चों को जहर दे दो। ऐसे ही एक दिन खास जान-पहचान के आदमी मेरे घर आए। मैं इन बच्चों एक-एक करके नहला रहा था। फिर सबको उठाकर चटाई पर लेटा रहा था। उस दिन उन्हें मेरी परेशानी नहीं देखी गई। वह मुझे घर से बाहर ले गए और बोले कि ऐसा कब तक करते रहोगे? तुम्हारा जीवन तो इसी में खत्म हो जाएगा। ऐसा करो, इन बच्चों को जहर दे दो। वो ऐसा कहकर चले गए। उनके जाने के बाद मैं सोचने लगा कि अपनी औलाद भला कैसे मारूं? हमारी किस्मत में इनकी सेवा ही लिखी है और मैंने इसे स्वीकार कर लिया है। (रामकृष्ण ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) ---------------------------------------- 1- संडे जज्बात-दोस्त की प्रेमिका प्रेग्नेंट हुई, रेप केस मुझपर चला:पंचायत ने 6 लाख में सौदा किया, 5 साल जेल में रहा, अब बाइज्जत बरी बिहार के दरभंगा जिले का रहने वाला मैं मुकेश कुशवाहा। मुझ पर 17 साल की लड़की के रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चला। वो लड़की मेरे दोस्त की प्रेमिका थी। दोस्त ने उसे प्रेग्नेंट किया था, लेकिन मुकदमा मुझ पर चला। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-पुलिस ने मेरे प्राइवेट पार्ट पर ईंट बांधी:सिर कुर्सी में बांधकर उल्टा टांगा, मैं वकील बनकर केस खुद लड़ा- 12 साल बाद जीता 18 साल की उम्र में पुलिस ने मुझे हत्या के मामले में आरोपी बना दिया। मैंने अपने केस की खुद पैरवी की और 12 साल बाद बाइज्जत बरी हुआ। अपना केस लड़ने के लिए लॉ किया और अब मैं एडवोकेट अमित चौधरी हूं। मेरठ बार एसोसिएशन का सदस्य भी हूं। मेरी जिंदगी पर जल्द ही एक फिल्म बन रही है, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
7 मार्च को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में BJP की परिवर्तन यात्रा पहुंची। यहां रघुनाथपुर इंडस्ट्रियल एरिया है इसलिए हिंदी भाषी और आदिवासी आबादी ज्यादा है। यहां से BJP के ही विधायक हैं, फिर भी रैली में भीड़ कम पहुंची। यहीं रास्ते में अवधेश राम मिले। वो रैली में नहीं आए लेकिन चाहते हैं कि राज्य में सरकार जरुर बदले। वजह पूछने पर कहते हैं, ‘हमें सरकारी घर मिलने वाला था। कई बार पूछताछ भी हुई। यहां तक की BDO भी आए लेकिन घर नहीं मिला। इसलिए चाहता हूं बंगाल में भी डबल इंजन की सरकार आए ताकि हम जैसे गरीबों का भला हो सके। हमें मोदी जी पर पूरा भरोसा है।‘ पश्चिम बंगाल में अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने हैं। BJP ने इसे देखते हुए पूरे राज्य में 5 हजार किलोमीटर की ‘परिवर्तन यात्रा’ निकाली। शुरुआत राज्य के अलग-अलग हिस्सों से 1 और 2 मार्च को हुई।ये 294 सीटों में से 237 तक पहुंची। यात्रा का समापन 14 मार्च को कोलकाता के बिग्रेड मैदान में PM मोदी ने किया। दैनिक भास्कर की टीम ने इस यात्रा को दो हिस्सों साउथ-वेस्ट बंगाल और नॉर्थ बंगाल से कवर किया। परिवर्तन यात्रा के मुद्दे और मकसद क्या रहे। जिन इलाकों से ये गुजरी, वहां पर इसका कितना असर है? विधानसभा चुनाव में इससे BJP को कितना फायदा होने वाला है? ग्राउंड पर पहुंचकर हमने समझने की कोशिश की। 1 मार्च को BJP तो 2 मार्च को TMC के इलाके से शुरुआतBJP ने 1 मार्च को जिन चार जगहों से रैली शुरू की, वहां पार्टी की अच्छी पकड़ है। 2021 के विधानसभा चुनाव में BJP ने यहां सीटें भी जीतीं। कूचबिहार की दोनों और कुल्टी की एक सीट BJP के पास है। वहीं नदिया जिले में 17 सीटों में 9 BJP के पास है। 2 मार्च से TMC के दबदबे वाले इलाकों से यात्रा की शुरुआत हुई। इसमें कोलकाता के मेयर और विधायक फरदीन अहमद की सीट शामिल है। यात्रा का समापन के लिए PM मोदी 14 मार्च को कोलकाता पहुंचे। साउथ बंगाल का ये इलाका TMC के प्रभाव वाला है। यहां से PM मोदी ने कहा, ‘पूरे बंगाल में एक ही चर्चा है कि बदलाव चाहिए। इस जमीन से जब-जब चुनौती आई, तब-तब यहां के लोगों ने सामना किया है। कुछ लोग आपको डराने की कोशिश करेंगे, लेकिन जब जनता ठान लेती है तो कोई भी ताकत उसे रोक नहीं सकती। इस बार चुनाव सिर्फ सरकार बदलने का नहीं, बंगाल की आत्मा को बचाने का है।‘ सबसे पहले साउथ-वेस्ट बंगाल की बात…BJP को वोट देते लेकिन बोलने में जान का खतरापुरुलिया जिले में 7 मार्च को जब यात्रा पहुंची, तो इसमें आम लोग काफी कम दिखे। जबकि रघुनाथपुर विधानसभा सीट BJP के पास है। माइक से लगातार भारत माता की जय, वंदे मातरम्, जय श्री राम के नारे लग रहे थे। रैली में ज्यादातर हिंदी भाषी लोग दिखे। यहां हम ज्योति सिंह से मिले, जो लोकल स्तर पर BJP के लिए काम भी करती हैं। यात्रा के बारे में पूछने पर कहती हैं, ‘स्थिति ये है कि यहां विपक्षी पार्टियों को छोटे-मोटे कार्यक्रमों की भी परमिशन नहीं मिलती। हमें भी रैली की परमिशन नहीं मिली।’ रैली के असर के बारे में पूछने पर कहती हैं, ‘अब जो लोग वोट देने में भी डरते हैं, वे खुलकर बाहर आ सकेंगे। कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम लोगों को हिम्मत मिलेगी कि उनके पीछे कोई खड़ा है। क्योंकि यहां हालात ऐसे हैं कि लोग BJP को खुलकर वोट तो देते हैं, लेकिन बोलने से डरते हैं। क्योंकि जान का खतरा रहता है।’ ’भले ही हमारी CM महिला हैं, लेकिन यहां न तो अस्तपाल में और न ही सड़क पर, कहीं भी महिला सेफ नहीं हैं। यहां रैली का कामकाज देख रहे दिलीप कुमार सिंह से भीड़ कम होने के बारे में पूछा तो जवाब मिला, ‘मेरे हिसाब से इतनी ही भीड़ होनी चाहिए। यात्रा लंबी है इसलिए लोग जगह-जगह खड़े हैं। इससे कार्यकर्ताओं और जनता के बीच उत्साह का माहौल बनेगा। अमित शाह ने हमें 165 सीटों का टारगेट दिया है। उसे पूरा करना है।’ नॉर्थ बंगाल के लोग बोले…डबल पेमेंट छोड़कर रैली में आए, BJP को ही वोट देंगेनॉर्थ के इलाकों में यात्रा के दौरान लोगों की खचाखच भीड़ दिखी। 1 मार्च को जलपाईगुड़ी में बिहार के डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने जनसभा की। उन्होंने कहा कि बिहार में हमने जंगलराज खत्म कर दिया। अब बंगाल में भी सिंडिकेट राज खत्म करने की जरुरत है। यहां घुसपैठियों ने आदिवासियों की जमीन छीनी, जिसे वापस करना होगा। वो जनता से पूछते हैं कि क्या इन सबके लिए BJP को वोट करेंगे। जनता पूरे जोश के साथ हां में जवाब देती है। जलपाईगुड़ी के माल विधानसभा में रहने वाले दीपक विश्वास हमसे रैली में मिले। वे कहते हैं, ‘रविवार को चाय बागान में काम करने वाले कर्मचारियों को डबल पेमेंट मिलती है। इसके बावजूद अगर लोग BJP की रैली में आएं हैं, तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो BJP को वोट करेंगे।‘ पश्चिम बंगाल में सरकार क्यों बदलनी चाहिए? जवाब में दीपक कहते हैं, 15 साल की सरकार में अब हर तरह की गलत नीति है। भ्रष्टाचार सबसे ज्यादा है। बिना पैसे के कोई काम नहीं होता है। यहां की CM राज्य में राष्ट्रपति को भी आने पर सम्मान नहीं दे पाई। आरजी कर में इतनी बड़ी घटना हुई। अब सरकार बदलने के लिए इससे ज्यादा और क्या कारण चाहिए। इसी रैली में सायना राय अपनी 80 साल की सास के साथ पहुंचीं। वे कहती हैं, ‘हमें बदलाव चाहिए।‘ हमने पूछा सभा में अपनी मर्जी से आई हैं या कोई लेकर आया? जवाब मिला, ‘घरवाले आएं हैं इसलिए आ गई।‘ वहीं, मालबाजार में मिलीं सबीना कहती हैं, ‘अगर BJP गांव में कुछ बदलाव कर सकती है, तो ये यात्रा हमारे लिए बहुत अच्छी है, वरना इसका कोई मतलब नहीं। राज्य सरकार 1500 रुपए लक्ष्मी भंडार दे रही है लेकिन इससे कुछ नहीं होता है। हमें रोजगार मिले, नहीं तो बदलाव ही सही है।‘ BJP कार्यकर्ताओं हमले का खौफ कम करने की कोशिशसाउथ के इलाकों में यात्रा के दौरान कम भीड़ पहुंचने को लेकर हमने आसनसोल के सीनियर जर्नलिस्ट सतीश चंद्रा से बात की। वे कहते हैं, ‘आसनसोल की बाराबनी विधानसभा सीट पर BJP कार्यकर्ताओं पर हमला हुआ। ऐसे ही हालात राज्य के बाकी इलाकों में भी देखने को मिले।’ ’कहीं-कहीं नेताओं को भी भगाया गया। इसलिए जनता खुलकर बाहर नहीं आना चाहती है। सत्ता पक्ष भी नहीं चाहता कि लोग रैली तक पहुंचें। इसीलिए लोगों में घबराहट है। अभी न सही लेकिन रैली का असर आने वाले चुनाव में जरुर दिखेगा।’ वे आगे कहते हैं, ’बंगाल में BJP का न तो अच्छा संगठक है और न ही संगठन। जो है, वो लोगों का समर्थन है। यात्रा का लक्ष्य सिर्फ लोगों तक पहुंचना है। जैसे- आसनसोल में BJP के पास दो सीट है। पुरुलिया में भी 9 में से 6 सीट BJP के पास है।’ यात्रा में दिखी कमियों को लेकर सतीश चंद्र कहते हैं, ’ये रैली बहुत कम जगहों पर ही समय से पहुंच सकी। इसका नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ा है। आसनसोल में शाम को 6 बजे सभा होनी थी, वहां यात्रा ही रात 10 बजे पहुंची। आखिर लोग कितनी देर इंतजार करते?’ मतुआ समाज की नाराजगी और हिंसा का भी असरवहीं पॉलिटिकल एक्सपर्ट मेदुल इस्लाम कहते हैं कि PM की सभा को छोड़ दें तो कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में रैली में काफी कम भीड़ दिखी। वजहें कई हैं लेकिन एक बड़ी वजह SIR के दौरान मतुआ समाज के लोगों के नाम कटना भी है। मतुआ समाज में BJP को लेकर गुस्सा है। यही BJP का कोर वोटर भी है, इसलिए नार्थ 24 परगना में लोगों की कम भीड़ आई। वहीं रैली पर नजर रखने वाली टीम के मेंबर न लिखने की शर्त पर कहते हैं, ‘ये बात सच है कि साउथ में भीड़ कम थी लेकिन इसके पीछे वाजिब वजह है। एक कारण TMC कार्यकर्ताओं के हमले और स्टेज तोड़ने जैसी घटनाएं भी हैं।’ ’9 मार्च को साउथ 24 परगना के काकद्वीप में सभा का मंच तोड़ दिया गया और सभा नहीं हो सकी। इन घटनाओं से साफ है साउथ बंगाल में लोगों के बीच में डर का माहौल है। यहां TMC के विधायक भी ज्यादा हैं, इसलिए लोग रैली में नहीं आए।’ BJP के लिए जीत का रास्ता साउथ बंगाल से निकलेगाBJP ने पश्चिम बंगाल में अपनी जीत का रास्ता नॉर्थ बंगाल से बनाया था। 2016 में 3 सीटें जीतीं। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में 8 लोकसभा सीटें में से 6 BJP ने जीतीं। 2021 के विधानसभा चुनाव में 54 सीटें में से 30 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिसमें अलीपुरद्वार की सभी पांच सीटें BJP के खाते में आईं। नॉर्थ बंगाल में यात्रा में आई भीड़ को लेकर सिलीगुड़ी के सीनियर जर्नलिस्ट पवन शुक्ला कहते हैं, ‘यात्रा करना BJP की राजनीति का हिस्सा रहा है। पार्टी का इतिहास देखें तो 90 के दशक में पूरे देश में रथ यात्रा की गई थी। इसके बाद ही BJP का उदय हुआ। बंगाल में भी पार्टी को यही उम्मीदें हैं।‘ यात्रा के असर को लेकर वे कहते हैं, ‘फिलहाल BJP के पास सीटों की संख्या ठीक-ठाक है। यात्रा से वोट शेयर जरूर बढ़ेगा। दूसरी तरफ ये भी हो सकता है कि मालदा और दिनाजपुर के मुस्लिम बहुल इलाकों में पार्टी पैठ बना सके। BJP नॉर्थ में डेवलपमेंट के नाम पर वोट मांगने की तैयारी कर रही है।‘ पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटें हैं। जिसमें 54 सीटें नॉर्थ बंगाल में आती है जो 18% हिस्सा कवर करती हैं। यात्रा का आने वाले चुनाव में कितना असर होगा इस पर पॉलिटिकल एक्सपर्ट मेदुल इस्लाम का कहना है, ‘पश्चिम बंगाल में हार-जीत साउथ बंगाल से तय होती है। भले ही नॉर्थ में BJP ने आधी से ज्यादा सीटें जीती हों लेकिन इससे उसकी जीत तय नहीं हो सकती है।’ ’साउथ के दो बड़े हिस्से नॉर्थ 24 परगना और साउथ 24 परगना में आज भी TMC का राज है। जिसे तोड़ने में BJP अब तक नाकाम रही है।’ ’दूसरी अहम बात ये है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले लोकसभा चुनाव होता है। इसमें जिनकी सीट बढ़ती है, वहीं विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करता है। 2019 लोकसभा और 2021 विधानसभा के नतीजों से ये साफ है। BJP ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 18 सीटें जीतीं। इसका असर 2021 के विधानसभा चुनाव में भी दिखा। 77 सीटें जीतकर BJP ने राज्य से कांग्रेस और लेफ्ट का पत्ता साफ कर दिया था।’ ’वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव को देखें तो BJP की सीटें 18 से 12 हो गईं। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल भी कम हुआ। इसके दो सबसे बड़े उदाहरण 2009 के लोकसभा चुनाव है। 2009 में TMC और उसकी सहयोगी पार्टियों को 42 में 27 सीटों पर जीत हासिल की थी। इसके बाद 2011 में बंगाल में TMC की सरकार बनी।’ यात्रा के असर के बारे में पूछने वे कहते हैं, ’हां, कुछ असर जरुर पड़ेगा। BJP अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम जरुर करेगी।’ TMC बोली: सभा में भीड़ नहीं, सरकार बदलने के दावेTMC के राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजु दत्ता परिवर्तन यात्रा को लेकर कहते हैं, 'BJP ने इस रैली के लिए ज्यादातर नेता और कार्यकर्ता बाहर से बुलाए थे। यात्रा में चलने वाला रथ तक वाराणसी से मंगाया गया था। सभाओं में भीड़ तक नहीं थी और ये बंगाल में सरकार बदलने की बात कर रहे हैं।' PM मोदी के बंगाल को 18 हजार करोड़ रुपए देने के वादे पर रिजु कहते हैं, 'केंद्र सरकार ने अब तक राज्य का मनरेगा, जल जीवन मिशन, मिड डे मील और आवास योजना का दो लाख करोड़ नहीं दिया है और राज्य के लोगों को 18 हजार करोड़ का लॉलीपॉप दे रहे हैं। देश में लोग LPG के लिए परेशान हैं और रैली में एक लाख लोगों के लिए खाना बनाया गया। इतनी LPG कहां से आई।' 'PM मोदी ने दो बार 2019 और 2021 में ब्रिगेड में रैली की, दोनों बार इनकी सीटें घटीं। इस बार BJP की 50 से ज्यादा सीटें नहीं आएंगी। TMC पिछली सीट से भले एक सीट ज्यादा जीते, लेकिन जीतेगी जरूर।'……………………ये खबर भी पढ़ें… मुस्लिम से की शादी, भाई की पढ़ाई और राशन बंद ‘मैं और मेरा परिवार गांव में अकेला हो गया है। शादी मैंने की थी, अब उससे बाहर भी आना चाहती हूं, लेकिन फिर भी सजा मिल रही है। छोटे भाई का स्कूल छूट गया क्योंकि कोई ऑटो वाला उसे ले जाने को तैयार नहीं है। खेतों में लगी आलू की फसल खराब हो गई क्योंकि उसे निकालने के लिए कोई मजदूर तैयार नहीं। मेरा परिवार मुसीबत में है।‘ पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मेटला गांव में रहने वाली मीता घोष (बदला हुआ नाम) का परिवार सोशल बायकॉट झेल रहा है। पढ़िए पूरी खबर…
अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हवाई हमलों की भारत ने की कड़ी निंदा
भारत ने अफगानिस्तान के भीतर पाकिस्तान द्वारा किए गए हालिया हवाई हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे संप्रभु अफगानिस्तान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई बताया है। इन हमलों में कई नागरिकों की मौत हुई है और नागरिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।

