सुर्खियां: आतंकवाद पर पाकिस्तान को भारत की खरी-खरी; बिहार के डीजीपी ने वीआरएस लिया; असम में युवती का शव बरामद- Top headlines India Pakistan un terrorism imd Bihar DGP vrs young woman recovered in Assam weather apple
भारत आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करेगा: संयुक्त राष्ट्र में जयशंकर
जयशंकर ने कहा कि दुनिया वित्त और बाजार पहुंच से लेकर आपूर्ति श्रृंखलाओं और प्रौद्योगिकी तक, हर चीज के 'हथियारीकरण' का सामना कर रही है।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र अपने गठन के नौवें दशक में प्रवेश कर चुका है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना और इसके लिए ...
जयशंकर ने कहा कि दुनिया के मौजूदा हालात को देखते हुए, UN के हर सदस्य को खुद से यह पूछना चाहिए कि वे क्या कर सकते हैं? जहां तक भारत की बात है, इसके समावेशी विकास और सर्वांगीण प्रगति ने दुनिया की एक-छठी आबादी के लिए बेहतर भविष्य की उम्मीदें जगाई हैं.
आतंकवाद को पालने वाला, पाकिस्तान पर जमकर बरसे जयशंकर; UN में दुनिया के सामने खूब सुनाया
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने पाकिस्तान को एक बार फिर लताड़ लगाई। उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद का पालक बताया।
'आतंकवाद के जनक को ही अपनी हरकतें सुधारनी होंगी', UN में जयशंकर ने पाकिस्तान को लताड़ा
जयशंकर ने कहा कि कि आतंकवाद शांति के लिए एक लगातार खतरा बना हुआ है। यह खतरा राज्य-प्रायोजित हो सकता है और इसका मकसद सीमा-पार की गतिविधियों को अंजाम देना हो सकता है, जो इसे वैश्विक व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती बनाता है।
'आतंकवाद पर हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी', UNGA में बोले विदेश मंत्री जयशंकर
'यूक्रेन युद्ध दुनिया के लिए चिंता का विषय', UNGA में बोले जयशंकर
वैश्विक कूटनीति के सबसे बड़े मंच संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें वार्षिक उच्चस्तरीय सत्र में पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी अंतरराष्ट्रीय फजीहत कराने की पुरानी रिवायत दोहरा दी। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों के समक्ष अपने संबोधन में घरेलू राजनीतिक मजबूरियों के तहत कश्मीर का पुराना और घिसा-पिटा राग अलापा। शहबाज शरीफ ने दावा किया कि उनका मुल्क कश्मीर के लोगों को तब तक राजनीतिक, राजनयिक और नैतिक समर्थन देता रहेगा जब तक उन्हें तथाकथित आत्मनिर्णय का अधिकार नहीं मिल जाता। दुनिया जब जलवायु परिवर्तन, युद्ध संकट और आर्थिक स्थिरता जैसे गंभीर मसलों पर चर्चा कर रही थी, तब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का यह अप्रसांगिक भाषण वैश्विक मंच पर उपहास का पात्र बन गया।भारत ने इस झूठे प्रोपेगेंडा का जवाब देने में रत्ती भर भी देर नहीं की। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने 'राइट टू रिप्लाई' के तहत पाकिस्तान के एक-एक झूठ की धज्जियां उड़ा दीं। भारतीय राजनयिक ने बेहद सधे हुए और तीखे लहजे में कहा कि आज इस प्रतिष्ठित महासभा ने पाकिस्तानी प्रतिनिधि के विचित्र और बेबुनियाद दावे सुने हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब न्यूयॉर्क और पूरा विश्व मानवता के सबसे भीषण आतंकी हमले 9/11 की 25वीं बरसी मना रहा है। पेटल गहलोत ने पूरी दुनिया को याद दिलाया कि इस वीभत्स हमले का मास्टरमाइंड और दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी ओसामा बिन लादेन पाकिस्तानी सेना की प्रमुख काकुल मिलिट्री अकादमी के ठीक बगल में एबटाबाद में वर्षों तक महफूज पनाह पाए हुए था। उन्होंने दो टूक कहा कि जिस पाकिस्तानी सेना और उसकी संस्थाओं के सामने आज के हुक्मरान नतमस्तक हैं, वही असल में वैश्विक आतंकवाद की मुख्य नर्सरी रही है।1948 से आज तक: कश्मीर पर भारत का अटूट रुख और पाकिस्तान की ऐतिहासिक हारभारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर के मुद्दे का संयुक्त राष्ट्र के पन्नों में एक लंबा और ऐतिहासिक रिकॉर्ड रहा है। जनवरी 1948 में जब पहली बार इस मसले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ले जाया गया था, तब से ही भारत ने हर बार यह सिद्ध किया है कि पूरा जम्मू, कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न, अविभाज्य और संप्रभु हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। पाकिस्तान ने 1947-48 में कबायलियों की आड़ में हमला करके जिस हिस्से पर गैर-कानूनी ढंग से कब्जा किया था, वह आज भी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के रूप में उसकी अवैध घुसपैठ का प्रत्यक्ष गवाह है। भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को यह समझाया है कि शिमला समझौते और लाहौर घोषणापत्र के तहत यह विशुद्ध रूप से द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी तीसरे पक्ष या संस्था के दखल की कोई गुंजाइश नहीं है।इसके विपरीत, पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दशकों पुराने और अप्रासंगिक हो चुके प्रस्तावों की दुहाई देकर विश्व का ध्यान अपनी अंदरूनी नाकामियों से भटकाने का प्रयास करता आया है। लेकिन 5 अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से जम्मू-कश्मीर में जिस तेजी से लोकतंत्र की बहाली, ऐतिहासिक मतदान और अभूतपूर्व बुनियादी ढांचागत विकास हुआ है, उसने पाकिस्तान के हर झूठे नैरेटिव की जड़ें हिला दी हैं। यूएन के गलियारों में अब जब भी पाकिस्तान कश्मीर का नाम लेता है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसे एक हताश और दिवालिया मुल्क के राजनीतिक स्टंट के तौर पर ही देखता है।जुलाई 2025 में सुरक्षा परिषद का दुरुपयोग और राजदूत हरीश का कूटनीतिक जवाबपाकिस्तान जब भी किसी मंच की अस्थाई व्यवस्था या अध्यक्षता संभालता है, वह अपने निहित स्वार्थों के लिए उसका दुरुपयोग करने से पीछे नहीं हटता। पिछले साल जुलाई 2025 में जब पाकिस्तान को सुरक्षा परिषद की मासिक अध्यक्षता का अवसर मिला, तो उसने अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने के लिए सिंधु जल संधि और कश्मीर का बेजा इस्तेमाल करने की असफल कोशिश की। उस समय संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वथानेनी हरीश ने सुरक्षा परिषद के खुले सत्र में पाकिस्तान की इन हरकतों का जोरदार और आधिकारिक खंडन किया था।राजदूत हरीश ने तथ्यों और कानूनी दस्तावेजों के आधार पर सुरक्षा परिषद को अवगत कराया कि भारत अपनी संप्रभुता के साथ कभी कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि को लेकर भारत का रुख पूरी तरह विधिक और पारदर्शी है, जबकि पाकिस्तान तकनीकी बदलावों पर सहयोग करने के बजाय हर जल समझौते को राजनीतिक रंग देने का आदी रहा है। भारत के इस सख्त और तर्कसंगत प्रतिरोध ने पाकिस्तान को सुरक्षा परिषद में पूरी तरह अलग-थलग कर दिया था और उसके समर्थक देशों को भी बैकफुट पर जाने के लिए मजबूर कर दिया था।वैश्विक आतंकवाद का केंद्र और 20 से अधिक यूएन प्रतिबंधित आतंकियों की पनाहगाहभारत ने दुनिया के सामने समय-समय पर यह अकाट्य तथ्य उजागर किया है कि पाकिस्तान किस तरह आतंकवाद को अपनी राजकीय नीति के औजार के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। फरवरी 2025 की यूएनएससी की बैठक में भारत ने पाकिस्तान को दुनिया में 'आतंकवाद का वैश्विक उपरिकेंद्र' (Global Epicenter of Terrorism) करार दिया था। जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे दुर्दांत आतंकी संगठनों के सरगना आज भी रावलपिंडी और इस्लामाबाद के साए में सुरक्षित जीवन बिता रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी पाकिस्तान की धरती पर खुलेआम जलसे करते हैं और फंड इकट्ठा करते हैं।भारत ने 2001 का संसद हमला, 26/11 मुंबई नरसंहार और पहलगाम में बेकसूर पर्यटकों पर हुए कायराना हमलों के डिजिटल और फॉरेंसिक सबूत यूएन काउंटर-टेररिज्म कमेटी को सौंपे हैं। मई 2025 में जब भारतीय सुरक्षा बलों ने सीमा पार से घुसपैठ करने वाले आतंकियों को 'ऑपरेशन सिंदूर' में ढेर किया था, तो पाकिस्तानी सेना के उच्च अधिकारियों द्वारा उन आतंकियों के शवों पर अपनी सेना का झंडा लपेटकर राजकीय सम्मान दिए जाने की तस्वीरें सामने आई थीं। भारत ने इन तस्वीरों को संयुक्त राष्ट्र में पेश कर पाकिस्तान के उस पाखंड का पर्दाफाश किया था जिसमें वह खुद को आतंकवाद का शिकार बताता फिरता है।आईएमएफ के कर्ज पर जिंदा मुल्क और बाल अधिकारों पर ढोंग का पर्दाफाशसंयुक्त राष्ट्र के मंचों पर पाकिस्तान का दोहरा चरित्र उस समय और अधिक उजागर हो जाता है जब वह आंतरिक मानवाधिकारों पर उपदेश देने लगता है। जून 2025 में जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बच्चों और सशस्त्र संघर्ष पर खुली परिचर्चा चल रही थी, तब पाकिस्तान ने कश्मीर में बच्चों के अधिकारों को लेकर मनगढ़ंत आरोप लगाए थे। भारत ने तत्काल पलटवार करते हुए बताया कि जो मुल्क अपने खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में मासूम बच्चों को जबरन गायब करवाता है और मदरसों में कट्टरपंथ की भट्टी में झोंकता है, उसे मानवाधिकारों पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।जुलाई 2025 में संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर पर भारत ने वैश्विक समुदाय को यह आईना दिखाया कि एक तरफ भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती आर्थिक व लोकतांत्रिक महाशक्ति के रूप में अंतरिक्ष से लेकर डिजिटल तकनीक तक मानवता का नेतृत्व कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान दिवालिया होने की कगार पर खड़ा है। पाकिस्तान अपनी दैनिक अर्थव्यवस्था को ऑक्सीजन देने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कर्ज और मित्र देशों की आर्थिक खैरात पर निर्भर है। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि कर्ज की बैसाखियों पर चलने वाला और कट्टरता में आकंठ डूबा देश भारत की लोकतांत्रिक परिपक्वता पर सवाल उठाने की स्थिति में नहीं है।भारत की आक्रामक 'राइट टू रिप्लाई' नीति: झूठ के खिलाफ कूटनीतिक सर्जिकल स्ट्राइकसंयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के हर प्रोपेगेंडा को ध्वस्त करने के लिए भारत ने पिछले कुछ वर्षों में एक बेहद आक्रामक, तथ्य-आधारित और अचूक कूटनीतिक रणनीति विकसित की है। इस रणनीति की रीढ़ भारत के युवा राजनयिक हैं, जो बिना किसी लाग-लपेट के दुनिया के सामने पाकिस्तान के नकाब को उतार देते हैं। जब भी पाकिस्तान का कोई नेता या प्रतिनिधि भारत के खिलाफ झूठे आरोप लगाता है, भारत तुरंत 'राइट टू रिप्लाई' का उपयोग करता है और कुछ ही मिनटों में आंकड़ों, अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और ऐतिहासिक संदर्भों के जरिए उनके दावों को ध्वस्त कर देता है।भारत कोरे बयानों पर भरोसा नहीं करता बल्कि सीमा पार घुसपैठ, बरामद चीनी और तुर्किये हथियारों के सीरियल नंबर, जीपीएस ट्रैकर्स और पकड़े गए आतंकियों के कबूलनामे संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद निरोधक समितियों के टेबल पर रखता है। इसके साथ ही भारत पाकिस्तान की आंतरिक बदहाली—सिंध और बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का हनन, हिंदू, सिख और ईसाई अल्पसंख्यकों की बेटियों का जबरन धर्मांतरण और राजनीतिक विरोधियों के दमन—को रिकॉर्ड पर लाता है। नतीजतन, आज आलम यह है कि संयुक्त राष्ट्र में जब भी पाकिस्तान भारत के खिलाफ बोलने के लिए माइक ऑन करता है, दुनिया पहले से ही समझ जाती है कि यह एक असफल देश का नया ड्रामा भर है।
'आतंकी देश ही पूछ रहा है सवाल', UN में आतंकवाद पर एस जयशंकर ने की पाक पत्रकार की बोलती बंद
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र में हिस्सा लेने न्यूयोर्क पहुंचे भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर एक पाकिस्तानी पत्रकार को सख्त जवाब दिया है।
एस. जयशंकर के जवाब के बाद मनीष तिवारी बोले, आतंकवाद फैलाना पाकिस्तान की पुरानी नीति
चंडीगढ़, 26 सितंबर . विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा आतंकवाद के मुद्दे पर एक Pakistanी पत्रकार के आरोपों का जवाब दिए जाने के बाद कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने Saturday को कहा कि Pakistan लगातार India और पूरे दक्षिण एशिया के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है. उन्होंने कहा कि Pakistan की यह नीति ... Read more
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से आतंकवाद को लेकर सीधे सवाल किए गए, लेकिन उन्होंने जवाब देने की बजाय वहां से भाग जाना ही बेहतर समझा। इसके एक दिन बाद संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के सामने जब पाकिस्तानी पत्रकार ने भारत पर आतंकवाद प्रायोजित करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया, तो जयशंकर ने पलटकर ऐसा करारा जवाब दिया कि सवाल पूछने वाला ही कठघरे में खड़ा हो गया। जयशंकर ने दो टूक कहा, “एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। चलिए भी।” उधर, जयशंकर के बयान से गर्म हुए माहौल के बीच ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से पाकिस्तान पर एक और करारा हमला कर डाला। हम आपको बता दें कि भारत ने पाकिस्तान को एक ‘‘कठपुतली शासन’’ करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र में उसके ‘‘झूठ’’ और ‘‘छल’’ पर तीखा प्रहार किया तथा चेतावनी दी कि इस्लामाबाद की ओर से लगातार जारी आतंकवाद के गंभीर परिणाम होंगे। दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर अपने संबोधन के दौरान एक बार फिर कश्मीर मामले को उठाया और 2025 में भारत के साथ हुए सैन्य संघर्ष को रोकने का श्रेय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘‘समय पर हस्तक्षेप’’ को दिया। शहबाज शरीफ के संबोधन के बाद भारत ने शुक्रवार रात ‘जवाब के अपने अधिकार’ का इस्तेमाल किया। इसे भी पढ़ें: 'पाकिस्तान को आतंकवाद के नतीजे भुगतने होंगे', संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने शहबाज़ शरीफ़ को दिया करारा जवाब संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने कहा, ‘‘हमने एक ऐसे शासन से लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों पर कुछ पाखंडपूर्ण उपदेश सुने हैं, जिसकी राजधानी को अपने ही लोगों से बचाने के लिए इसी समय किलेबंद किया जा रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘और ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि यह सेना का, सेना द्वारा और सेना के लिए शासन है। उसकी कठपुतलियां आती-जाती रह सकती हैं, लेकिन इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि असल में फैसले कौन करता है। पाकिस्तान की वास्तविकता उसके 27वें संविधान संशोधन और उसके असली शासक को दी गई आजीवन कानूनी छूट से जाहिर होती है।’’ गहलोत ने पिछले साल नवंबर में शहबाज शरीफ सरकार द्वारा पारित उस 27वें संविधान संशोधन का उल्लेख करते हुए यह बात की जिसके तहत पाकिस्तान के ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को किसी भी कानूनी मुकदमे से आजीवन छूट दी गई है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें विश्वास है कि यह महासभा पाकिस्तान और उसकी नीतियों को उनके वास्तविक स्वरूप में देखेगी, न कि उस रूप में जैसे उसके प्रतिनिधि झूठे तरीके से पेश करते हैं। साल-दर-साल झूठ दोहराने से वह सच नहीं हो जाता। पाकिस्तान का आतंकवाद, छल और दोहरा रवैया न तो उसके लिए और न ही दुनिया के लिए फायदेमंद होगा।’’ हम आपको बता दें कि शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में ट्रंप को उनके ‘‘दृढ़तापूर्ण और दूरदर्शी नेतृत्व’’ के लिए धन्यवाद देते हुए कहा था कि अमेरिका के राष्ट्रपति के ‘‘समय पर हस्तक्षेप’’ ने दक्षिण एशिया में करोड़ों लोगों की जान बचाई। शहबाज शरीफ ने करीब 23 मिनट के अपने संबोधन में कश्मीर मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कश्मीर मुद्दे का न्यायसंगत और निष्पक्ष समाधान जरूरी है कि दक्षिण एशिया फिर कभी 2025 के संघर्ष जैसी स्थिति में न पहुंचे। उधर, भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को याद दिलाया कि शहबाज शरीफ ने ये ‘‘विचित्र टिप्पणियां’’ ऐसे समय में की हैं जब महज दो सप्ताह पहले न्यूयॉर्क और दुनिया ने 11 सितंबर के भीषण आतंकवादी हमले की 25वीं बरसी मनाई थी। गहलोत ने कहा, ‘‘इस संदर्भ को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि उस हमले का मुख्य साजिशकर्ता ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सेना की प्रमुख अकादमी के बिल्कुल पास रह रहा था।’’ गहलोत ने शरीफ द्वारा कश्मीर मुद्दा उठाए जाने को लेकर उनकी आलोचना करते हुए कहा कि केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने कहा, ‘‘और यह हमेशा ऐसा ही रहेगा। लेकिन अगर हमें कश्मीर की ही बात करनी है तो आइए, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर पर ध्यान देते हैं। रावलाकोट के लोगों से बेमतलब की उन हत्याओं, बर्बर हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने के बारे में पूछिए जिनका वे लंबे समय से सामना कर रहे हैं।’’ हम आपको बता दें कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विवादित सीट को लेकर पिछले कई महीनों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसे लेकर सुरक्षा बलों ने कार्रवाई भी की और हाल में तथाकथित विधानसभा के लिए हुए चुनावों में धांधली के आरोप भी लगे। गहलोत ने सीमा पार आतंकवाद की पाकिस्तान की ‘‘लंबे समय से बरकरार नीति’’ की आलोचना करते हुए कहा कि भारत ने पिछले साल दिखा दिया था कि ‘‘आतंकवादियों के पास न भागने की जगह होगी और न छिपने की।’’ गहलोत ने कहा, ‘‘हम आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद जारी रहने के परिणाम होंगे। इससे स्वाभाविक रूप से उन व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठेंगे, जिनकी बुनियाद मित्रता और सद्भावना पर रखी गई थी।’’ उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में शहबाज शरीफ द्वारा व्यक्त किए गए विचार ‘‘ऐसे लोगों की ओर से आए हैं जिनका कट्टरता और नफरत का लंबा इतिहास रहा है।’’ गहलोत ने कहा, ‘‘इस महासभा में धार्मिक असहिष्णुता पर उस शासन की ओर से टिप्पणियां की गईं, जिसकी व्यवस्था का एक प्रमुख आधार ईशनिंदा कानून हैं। दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। कोई भी दिखावटी खोखली बात दुनिया को गुमराह नहीं कर सकती।’’ दूसरी ओर, जयशंकर के बयान की बात करें तो आपको बता दें कि मामला शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में उस समय गरमा गया, जब जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेइसोलो न्यान्ती समुद्री परिवहन और नाविकों की सुरक्षा को लेकर बनाए गए ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ की जानकारी दे रहे थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद एक पाकिस्तानी पत्रकार ने जयशंकर से सवाल किया कि भारत पाकिस्तान में कथित आतंकवाद को प्रायोजित करना कब बंद करेगा? सवाल पूरा होते ही जयशंकर ने पलटवार किया, “एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। चलिए भी।” भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि हरिश पर्वतनेनी ने भी साफ कर दिया कि जवाब सुना जा चुका है और वह बिल्कुल स्पष्ट है। उधर, संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में बड़ी बड़ी बातें करने वाले शहबाज शरीफ से आतंकवाद के मुद्दे पर सवाल हुआ तो वह भाग खड़े हुए। हम आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में प्रवेश करते समय पत्रकारों ने उनसे सीधे पूछा— “प्रधानमंत्री, आप आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?” इस पर शहबाज शरीफ ने कोई जवाब नहीं दिया। बाद में बाहर निकलते समय उनसे लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद पर कार्रवाई को लेकर सवाल किया गया। इस सवाल पर भी उन्होंने चुप्पी साधी और भाग खड़े हुए। बहरहाल, संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान भारत पर आतंकवाद के आरोप लगाने पहुंचा, लेकिन सवाल जब उसके अपने दरवाजे पर पहुंचा तो जवाब गायब हो गया।
UN में भारत का पाकिस्तान को करारा जवाब, आतंकवाद पर जमकर घेरा
UN के मंच पर भारत ने पाकिस्तान के झूठे प्रचार का मुंहतोड़ जवाब दिया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जब कश्मीर का मुद्दा उठाया, तो भारत की प्रतिनिधि पेटल गहलोत ने आतंकवाद के मुद्दे पर उन्हें पूरी दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया. भारत ने याद दिलाया कि ९/११ हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सैन्य अकादमी के ठीक पास रह रहा था.
UNGA 81 में शहबाज शरीफ के बयान के बाद भारत ने राइट टू रिप्लाई में पाकिस्तान को जवाब दिया। पेटल गहलोत ने आतंकवाद, कश्मीर और मानवाधिकारों पर भारत का पक्ष रखा।
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच पर भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान के झूठ और दोहरे रवैये की हवा निकाल दी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ द्वारा भारत के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी और जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के बाद भारत ने अपने 'राइट-ऑफ-रिप्लाई' (जवाब देने के अधिकार) के तहत बेहद तीखी और करारी प्रतिक्रिया दी। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए आतंकवाद, मानवाधिकार, लोकतंत्र और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर उसे जमकर लताड़ा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के भाषण का जवाब देते हुए, गहलोत ने पाकिस्तान पर सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और जम्मू-कश्मीर के बारे में उसकी बातों को खारिज कर दिया। उन्होंने लोकतंत्र, मानवाधिकारों और धार्मिक असहिष्णुता के मामले में पाकिस्तान के रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए। उन्होंने देश के 27वें संशोधन और उसके असली शासक को मिली आजीवन छूट का भी ज़िक्र किया। नीचे दिए गए बयान गहलोत द्वारा 'राइट-ऑफ-रिप्लाई' में कही गई बातें और लगाए गए आरोप हैं। आतंकवाद और पाकिस्तान पर भारत का रुख गहलोत ने कहा कि मुख्य मुद्दा पाकिस्तान की सीमा-पार आतंकवाद की पुरानी आदत है। पिछले साल आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवादियों के पास भागने या छिपने की कोई जगह नहीं बची है। गहलोत ने कहा, आतंकवाद के खिलाफ खुद का बचाव करने के हमारे अधिकार का इस्तेमाल जारी रहेगा। उन्होंने आगे कहा, पाकिस्तान के आतंकवाद के नतीजे भुगतने होंगे। इसे भी पढ़ें: Pakistan: Imran Khan की रिहाई के लिए PTI का इस्लामाबाद मार्च अब 4 अक्टूबर को होगा उन्होंने यह भी कहा कि भारत को उम्मीद है कि जनरल असेंबली पाकिस्तान और उसकी नीतियों का आकलन उनके असल स्वरूप के आधार पर करेगी, न कि उसके प्रतिनिधि द्वारा किए गए दावों के आधार पर। उन्होंने कहा, हमें भरोसा है कि यह असेंबली पाकिस्तान और उसकी नीतियों को वैसा ही समझेगी जैसी वे असल में हैं, न कि वैसा जैसा उसका प्रतिनिधि झूठ बोलकर दिखाता है। हर साल झूठ दोहराने से वे सच नहीं हो जाते। गहलोत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद, धोखे और दोहरेपन का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि इससे न तो उसे और न ही दुनिया को कोई फायदा होगा। गहलोत ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया जम्मू-कश्मीर के बारे में की गई बातों का जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि भारत का रुख यह है कि यह केंद्र शासित प्रदेश देश का अटूट और अभिन्न हिस्सा है। इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की ओर ध्यान दिलाया और असेंबली से वहां के हालात पर विचार करने को कहा। उन्होंने कहा, अगर हमें कश्मीर पर बात करनी ही है, तो आइए पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर पर ध्यान दें। इसके बाद उन्होंने उस इलाके के लोगों द्वारा झेली जा रही बेवजह हत्याओं, क्रूर हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने का ज़िक्र किया। भारत ने पाकिस्तान के लोकतांत्रिक रिकॉर्ड पर सवाल उठाए गहलोत ने लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों पर पाकिस्तान की टिप्पणियों का भी कड़ा जवाब दिया। उन्होंने इन टिप्पणियों को पाखंडपूर्ण उपदेश बताया और पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, हमने लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों के बारे में ऐसे शासन से पाखंडपूर्ण उपदेश सुने हैं, जिसकी राजधानी में इस समय अपने ही लोगों के खिलाफ़ किलेबंदी की जा रही है। इसे भी पढ़ें: UPITS 2026 | 'अब कट्टा नहीं, ब्रह्मोस मिसाइल बनाता है यूपी'! Amit Shah का सपा-बसपा पर तीखा हमला, कहा- 'पाकिस्तान की नींद उड़ी' इसके बाद गहलोत ने पाकिस्तान पर सेना का, सेना द्वारा और सेना के लिए चलने वाला शासन होने का आरोप लगाया। उन्होंने तर्क दिया कि भले ही राजनीतिक चेहरे बदलते रहें, लेकिन असल में सेना ही निर्णायक ताकत बनी रहती है। उन्होंने कहा, उनके कठपुतली नेता आ-जा सकते हैं, लेकिन हमें इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि असल में फैसले कौन लेता है। उन्होंने अपनी बात को पाकिस्तान के 27वें संशोधन से जोड़ा और उसके असली शासक को दी गई आजीवन छूट का ज़िक्र किया। धार्मिक असहिष्णुता पर टिप्पणियों का भारत ने जवाब दिया गहलोत ने धार्मिक असहिष्णुता के बारे में पाकिस्तान की बातों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियां कट्टरता और नफरत के रिकॉर्ड वाले देश की तरफ़ से आई हैं। उन्होंने कहा, वे दिन में सुरक्षा बनाए रखने का दावा करते हैं; असल में वे रात में आतंकवाद फैलाते हैं। उन्होंने पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों और अल्पसंख्यकों के साथ किए जाने वाले व्यवहार का भी ज़िक्र करते हुए कहा: दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। कोई भी पवित्र-सी लगने वाली बात दुनिया को गुमराह नहीं कर सकती। इसके बाद गहलोत ने जनरल असेंबली में पाकिस्तान की टिप्पणियों का ज़िक्र किया, उन्हें अजीब बताया और उन्हें 11 सितंबर के हमलों की 25वीं बरसी से जोड़ा। इसे भी पढ़ें: UPITS 2026 Greater Noida: उत्तर प्रदेश का BrahMos उड़ा रहा पाकिस्तान की नींद, ग्रेटर नोएडा से शाह की हुंकार उन्होंने कहा, आज दोपहर, जनरल असेंबली ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि की कुछ अजीब टिप्पणियां सुनीं। गहलोत ने कहा कि यह घटना न्यूयॉर्क शहर और दुनिया द्वारा भयानक 9/11 आतंकवादी हमले के 25 साल पूरे होने के कुछ हफ़्ते बाद हुई है। उन्होंने पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी का ज़िक्र करते हुए कहा कि वह पाकिस्तानी सेना की प्रमुख अकादमी के ठीक दरवाज़े पर रह रहा था। उन्होंने उस संस्थान की पाकिस्तानी प्रतिनिधि द्वारा की गई तारीफ़ का भी ज़िक्र किया और अपनी बात यह कहते हुए ख़त्म की कि पाकिस्तान को ख़ुद पाकिस्तानी ही फॉर्म 47 सरकार कहते हैं। गहलोत की ये बातें जनरल असेंबली में पाकिस्तान के बयानों पर भारत का औपचारिक जवाब थीं। Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi #WATCH | New York | First Secretary in India's Permanent Mission to the UN, Petal Gahlot says, At the heart of the issue is the long-standing practice of cross-border terrorism by Pakistan. We demonstrated last year that terrorists will have nowhere to run and nowhere to hide.… pic.twitter.com/AW75mY3ulj — ANI (@ANI) September 26, 2026
पाकिस्तानी पत्रकार ने एस जयशंकर से आतंकवाद पर पूछा सवाल, विदेश मंत्री ने दिया गजब जवाब
UN में पाकिस्तानी पत्रकार ने भारत को घेरना चाहा, लेकिन जयशंकर ने ऐसा जवाब दिया कि सवाल ही उल्टा पड़ गया। जयशंकर ने मुस्कुराते हुए आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को आईना दिखा दिया।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक पाकिस्तानी पत्रकार के आतंकवाद से जुड़े सवाल पर तीखी प्रतिक्रिया दी। पत्रकार ने भारत पर पाकिस्तान में आतंकवाद को कथित तौर पर प्रायोजित करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया था। जयशंकर ...
पाकिस्तानी पत्रकार ने आतंकवाद पर जयशंकर से पूछा सवाल, मिला ऐसा जवाब कि जिंदगी भर याद रखेगा
आपकी सरकार पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देना कब बंद करेगी? पाकिस्तानी पत्रकार के इस सवाल के जवाब में एस भारत के विदेश मंत्री ने करारा जवाब दिया। जयशंकर ने कहा-एक आतंकवादी देश ये सवाल पूछ रहा है।
आतंकवाद के सवाल पर चुप्पी साधकर निकले शहबाज शरीफ, हुई फजीहत
न्यूयॉर्क में एक बार फिर पाकिस्तान के दोहरे चरित्र की पोल खुल गई है. जब संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर न्यू यॉर्क की सड़कों पर एक पत्रकार ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से आतंकवाद को लेकर सीधा सवाल पूछा, तो वे बिना कोई जवाब दिए वहाँ से चुपचाप निकल गए. पत्रकार ने उनसे पूछा कि पाकिस्तान कब तक आतंकवादियों को पनाह देना बंद करेगा. इस तीखे सवाल पर शहबाज शरीफ ने पूरी तरह से चुप्पी साध ली.
UN में आतंकी हाफिज सईद पर घिरे पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ: पत्रकारों के 'आतंकवाद पर पनाह' वाले तीखे सवालों से बचकर भागे
संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद पर सवालों से बचते नजर आए शहबाज शरीफ, हाफिज सईद पर नहीं दिया जवाब
न्यूयॉर्क, 25 सितंबर . Pakistan के Prime Minister शहबाज शरीफ 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेने के लिए संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मुख्यालय पहुंचे थे लेकिन वहां आतंकवाद को लेकर पूछे गए सवालों से बचते नजर आए. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद को लेकर पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं ... Read more
आईबीएसए विदेश मंत्रियों की बैठक; पहलगाम आतंकी हमले की निंदा और आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस' का संकल्प
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला और ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा से मुलाकात की। तीनों नेताओं ने पिछले साल हुए पहलगाम आतंकी हमले की मिलकर कड़ी निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस यानी बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की नीति को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
आईबीएसए विदेश मंत्रियों की बैठक; पहलगाम आतंकी हमले की निंदा और आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का संकल्प
न्यूयॉर्क, 25 सितंबर . विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला और ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा से मुलाकात की. तीनों नेताओं ने पिछले साल हुए पहलगाम आतंकी हमले की मिलकर कड़ी निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस यानी बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की नीति को ... Read more
Video: न्यूयॉर्क में आतंकवाद पर सवाल सुनते ही भागे शहबाज शरीफ
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को एक बेहद असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है. आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया भर में घिरे पाकिस्तान की पोल एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुल गई है. न्यूयॉर्क की सड़कों पर जब एक विदेशी पत्रकार ने शहबाज शरीफ को सामने देखकर घेर लिया और उनसे आतंकवाद को लेकर तीखे सवाल पूछे, तो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के पास इसका कोई जवाब नहीं था.
UNGA81: ईरान ने आतंकवाद के आरोपों को किया ख़ारिज, दोहरे मापदंडों की आलोचना
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियाँ ने यूएन महासभा में अपने सम्बोधन की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के आरोपों को ख़ारिज करते हुए की. अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक दिन पहले ईरान को“आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रायोजक”क़रार दिया था.
UNGA में पेजेश्कियन का अमेरिका-इजरायल पर हमला, बोले- ईरान आतंकवादी नहीं, आतंकवाद का पीड़ित
पेजेश्कियन ने अमेरिका और इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान की आलोचना करने वालों को आतंकवादी कहकर खारिज करने की कोशिश की जाती है।
मोतिहारी के नगर थाना क्षेत्र में सार्वजनिक जगह पर आपत्तिजनक बातें लिखे जाने का मामला सामने आया है। नरसिंह बाबा मंदिर परिसर में बने गांधी संग्रहालय की दीवार पर अज्ञात लोगों ने भड़काऊ और आपत्तिजनक बातें लिख दी हैं। दीवार पर ‘RSS एक आतंकवादी संगठन है’ समेत कई आपत्तिजनक शब्द लिखे गए हैं। सुबह स्थानीय लोगों की नजर दीवार पर लिखी इन बातों पर पड़ी। इसके बाद लोगों में नाराजगी फैल गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांधी संग्रहालय एक प्रतिष्ठित जगह है, जहां हर दिन बड़ी संख्या में लोग आते हैं। ऐसे स्थान की दीवार पर इस तरह की बातें लिखे जाने से सामाजिक माहौल प्रभावित हो सकता है। लोगों ने साजिश की आशंका जताई स्थानीय लोगों ने दीवार पर आपत्तिजनक बातें लिखे जाने को साजिश बताया है। उनका कहना है कि प्रशासन को मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि इसके पीछे कौन लोग हैं। दीवार साफ कराने और कार्रवाई की मांग लोगों ने प्रशासन से दीवार पर लिखे आपत्तिजनक शब्दों को तत्काल हटाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दीवार पर ये बातें किसने और कब लिखीं। मामले में पुलिस या प्रशासन की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि दीवार पर लिखने वालों की पहचान कैसे हुई और घटना के पीछे क्या वजह थी।
MBBS की 4 सीटें अब आतंकवाद पीड़ितों के पत्नी-बच्चों को, NEET अनिवार्य, 3 कैटेगरी में प्राथमिकता
केंद्र सरकार ने केंद्रीय पूल से MBBS की 4 सीटें आतंकवाद के शिकार नागरिकों के जीवनसाथी और बच्चों के लिए आवंटित की हैं। इनके लिए निर्धारित विभिन्न मेडिकल कॉलेजों या संस्थानों में प्रवेश में उन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी
आतंकवाद पर सख्त: भारत का रूख कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण, अब वैश्विक समुदाय के रवैये में भी बदलाव जरूरी

