डिजिटल समाचार स्रोत

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ईरान के सुरक्षा प्रमुख लारीजानी पर हमला, इस्राइली सेना ने हताहत होने को लेकर दिया बयान

इजराइल ने दावा किया है कि इस ऑपरेशन में बसीज पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडर घोलामरेजा सुलेमानी भी निशाने पर थे। बसीज फोर्स ईरान में आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने और सरकार विरोधी प्रदर्शनों को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है।

देशबन्धु 17 Mar 2026 2:50 pm

पाकिस्तान का अफगानिस्तान के काबुल में बड़ा हमला, एयर स्ट्राइक में 400 लोगों की मौत, 250 घायल

हमले के एक प्रत्यक्षदर्शी 31 वर्षीय ओमिद स्तानिकज़ई जो अस्पताल में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करते हैं ने बताया कि हमले से पहले इलाके में असामान्य हलचल देखी गई थी।

देशबन्धु 17 Mar 2026 10:22 am

बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और सख्त करेगा ईरान के खिलाफ एनर्जी बैन

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ईरान के ऊर्जा क्षेत्र पर बैन को और कड़ा करने के लिए बड़ा कानून पास किया है। तेहरान के साथ चल रहे तनाव के बीच दोनों पार्टियों के प्रतिनिधियों ने और कड़े कदम उठाने पर जोर दिया।

देशबन्धु 17 Mar 2026 9:51 am

ईरान संघर्ष को लेकर ट्रंप पर बरसे डेमोक्रेट हकीम जेफ्रीज, बोले- अमेरिका को बेवजह युद्ध में धकेल दिया

अमेरिका में ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और घरेलू आर्थिक मुद्दों को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है

देशबन्धु 17 Mar 2026 9:40 am

जेडी वेंस ने ईरान के खिलाफ हमलों को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले का किया समर्थन

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के खिलाफ सरकार की सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भरोसा है कि वह इस लड़ाई को संभाल लेंगे और पिछली गलतियों को रोक देंगे।

देशबन्धु 17 Mar 2026 9:34 am

पाकिस्तान सरकार इमरान खान से उनके बेटों सुलेमान और कासिम की मुलाकात रोक रही: जेमिमा गोल्डस्मिथ

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख इमरान की पूर्व पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से दखल देने की अपील की है

देशबन्धु 17 Mar 2026 9:24 am

अमेरिकी फ्लाइट स्कूलों का चीनी पायलटों को ट्रेनिंग देना चिंताजनक: सीनेटर बैंक्स

अमेरिका में एक वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटर ने विमानन सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों को चेतावनी दी है कि अमेरिकी फ्लाइट स्कूलों में चीनी नागरिकों को ऐसी ट्रेनिंग दी जा रही है, जो अप्रत्यक्ष रूप से चीन की सैन्य महत्वाकांक्षाओं को मदद पहुंचा सकती है।

देशबन्धु 17 Mar 2026 8:30 am

ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट पर सहयोगियों के 'ढुलमुल रवैये' पर साधा निशाना

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जो देश होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होने वाली ऊर्जा और तेल की आपूर्ति पर निर्भर हैं

देशबन्धु 17 Mar 2026 8:23 am

ईरान संघर्ष के बीच ट्रंप ने बीजिंग यात्रा टाली

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान से जुड़ा युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस संघर्ष के कारण उन्होंने चीन की अपनी तय यात्रा को फिलहाल टाल दिया है, क्योंकि इस समय उन्हें वॉशिंगटन में रहना जरूरी लग रहा है।

देशबन्धु 17 Mar 2026 7:17 am

बंगाल में ममता की मंदिर पॉलिटिक्स से क्या बदलेगा:एक साल में तीन मंदिरों का शिलान्यास-उद्घाटन, लोग बोले- मंदिर बनाने से क्या होगा

16 जनवरी 2026 को पश्चिम बंगाल की CM ममता बनर्जी ने सिलीगुड़ी में महाकाल महातीर्थ मंदिर का शिलान्यास किया। 17 एकड़ में बनने वाला ये दुनिया के सबसे भव्य शिव मंदिरों में से एक होगा। करीब एक महीने पहले दिसंबर 2025 में ममता ने कोलकाता में दुर्गा आंगन का शिलान्यास किया था। इससे करीब 6 महीने पहले दीघा में पुरी की तर्ज पर जगन्नाथ धाम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की थी। पश्चिम बंगाल के इतिहास में ये पहला मंदिर है, जिसकी प्राण प्रतिष्ठा किसी मुख्यमंत्री ने की हो। सरकार का दावा है कि मंदिर बनने से इन इलाकों में लोकल बिजनेस बढ़ा है। सरकार को भी 100 करोड़ रुपए का फायदा हुआ है। हालांकि BJP इसे चुनावी तुष्टिकरण बता रही है। उसका कहना है कि ममता को कुर्सी जाने का डर है इसलिए मंदिर बना रही हैं। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव होने हैं। चुनाव में ममता की मंदिर पॉलिटिक्स से क्या बदलेगा, आखिर ममता को सॉफ्ट हिंदुत्व की जरूरत क्यों पड़ी? दैनिक भास्कर की टीम ने दीघा में ग्राउंड पर पहुंचकर इसे समझने की कोशिश की। लोग बोले- मंदिर भी मिला और रोजगार भीहम दीघा में मंदिर की बाहर सामान बेचने वाली कुछ महिलाओं से मिले। वे कैमरे पर बात करने से हिचक रही थीं, लेकिन कैमरा हटते ही बातचीत के लिए तैयार हो गईं। इनमें से एक सुमित्रा शंख बेचती हैं। वे कहती हैं, ‘ये मंदिर टूरिस्ट प्लेस पर बना है। दीघा में पूरे साल लोग घूमने आते हैं। इसके बनने से मेरे जैसी महिलाओं को रोजगार मिल गया। सुबह-शाम दो वक्त आती हूं और सामान बेचकर घर चली जाती हूं।’ यहीं मिले पारस रुइदास कहते हैं, ‘ममता बनर्जी ने आम लोगों के लिए मंदिर बनवाया है। लोग दीघा घूमने आते हैं, तो मंदिर भी घूम लेते हैं।‘ चुनाव पर इसके असर के बारे में पूछने पर वो कहते हैं, ‘सरकार तो TMC की ही बनेगी।‘ हालांकि मंदिर पॉलिटिक्स पर संजय शर्मा की राय अलग है। वे कहते हैं- राज्य में लोगों के पास रोजगार नहीं है। फिर मंदिर-मस्जिद बनाने से क्या होगा। लोगों को रोटी, कपड़ा और मकान चाहिए। सामान और रुपए बांटने से कुछ नहीं होने वाला है। यहां काम मिलना बंद हो गया है, कोई इस पर ध्यान नहीं दे रहा है। संजय गुस्से में कहते हैं, ‘BJP और TMC दोनों एक जैसे हैं। इनकी मंदिर-मस्जिद की राजनीति से कुछ नहीं होने वाला है।‘ वहीं, सुगतो मंडल कहते हैं ‘मंदिर बनने से बिजनेस बढ़ा है। लोकल लोगों ने कई छोटे-मोटे काम शुरू किए हैं।’ ममता के प्राण प्रतिष्ठा करने पर BJP के विरोध को लेकर सुगतो कहते हैं, ’ये BJP का उत्तर प्रदेश नहीं है, जहां महिलाओं को घर की चारदीवारी में रखा जाता है। यहां की महिलाएं मजबूत हैं। अगर दीदी पूजा कर रही हैं, तो इसका विरोध क्यों।’ ममता की एंटी-हिंदू छवि तोड़ने की कोशिशपश्चिम बंगाल में मंदिर पॉलिटिक्स ज्यादा पुरानी नहीं है। ये अभी हाल के कुछ साल में शुरू हुई है। इसे लेकर सीनियर जर्नलिस्ट विश्वभंर नेगर कहते हैं, ‘ममता बनर्जी पर हमेशा प्रो-मुस्लिम होने का इल्जाम लगता रहा है। इस छवि से बाहर आने के लिए उन्होंने सॉफ्ट हिंदुत्व का सहारा लिया है। मुस्लिम बहुल इलाकों के छोड़ दें, तो हिंदुओं का वोट ही तय करता है कि सत्ता किसे मिलने वाली है।’ ’ममता बनर्जी ने सिर्फ तीन मंदिरों का ही शिलान्यास नहीं किया, बल्कि गंगासागर में स्नान करने वालों को भी नदी पर पुल का तोहफा दिया है। उन्होंने ही पहली बार दुर्गापूजा कर्निवाल कराया।’ पश्चिम बंगाल में मंदिर पॉलिटिक्स की एंट्री के बारे में पूछने पर वे कहते हैं, ‘ममता बनर्जी की छवि एंटी-हिंदू की रही है। इसके अलावा सरकार के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी है। इसे कम करने के लिए भी मंदिर पॉलिटिक्स की जा रही है। पश्चिम बंगाल में एक नए तरह की राजनीति शुरू हो रही है। ममता से पहले बंगाल में लेफ्ट की सरकार थी और उनके मुद्दों में धर्म कभी नहीं था।‘ इसके असर के बारे में नेगर कहते हैं, ‘दीघा में ओडिया भाषी के अलावा, बांग्ला और हिंदी बोलने वाले रहते हैं। पहले लोग भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पुरी जाते थे, लेकिन अब यहां घूमने के साथ-साथ धार्मिक यात्रा भी होती है। दूसरी ओर गंगासागर में बड़ी संख्या में हिंदी भाषी स्नान करने आते हैं। इसके लिए फेरी घाट से होकर जाना पड़ता है। पुल बन जाने से लोकल लोगों और श्रद्धालुओं को जो फायदा होगा, उसका असर वोट में जरूर दिखेगा।‘ ‘मंदिर बनाने से ज्यादा जरूरी हिंदुओं की सुरक्षा’बंगाल की मंदिर पॉलिटिक्स को लेकर हमने कोलकाता में RSS प्रचारक डॉ. जीशानु बसु से भी बात की। वे कहते हैं, ‘पश्चिम बंगाल में मंदिर बनाने के ज्यादा जरूरी हिंदुओं की सुरक्षा है। ये तय करना जरूरी है कि यहां हिंदू सुरक्षित रह भी पाएंगे या नहीं क्योंकि उन पर लगातार अत्याचार हो रहा है।’ ममता के मंदिर के शिलान्यास और प्राण प्रतिष्ठा करने पर जीशानु सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं, ‘संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति मंदिर का शिलान्यास नहीं कर सकता है।‘ हमने पूछा फिर राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा प्रधानमंत्री ने कैसे की? इसके जवाब में वे कहते हैं, ‘राम मंदिर किसी सरकार ने नहीं बल्कि ट्रस्ट ने बनवाया है। सरकार का मंदिर या मस्जिद कुछ भी बनवाना सही नहीं है। ये समाज का काम है।‘ ‘पुरी का जगन्नाथ मंदिर चार धामों में से एक है। ऐसे में पश्चिम बंगाल में उसी के नाम से एक और मंदिर बनवाना सही नहीं है। ये देश की एकता और अखंडता के लिए भी ठीक नहीं। यही वजह है कि शंकराचार्य ने भी इसका विरोध किया। आप ही सोचिए अगर कोलकाता के कालीघाट मंदिर के नाम पर कहीं और मंदिर बना दिया जाए, तो क्या वो सही होगा।‘ वे आगे कहते हैं, ‘पहली बात मंदिर के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। ये इतिहास और श्रद्धा का विषय है, न की राजनीति का। ममता बनर्जी ने मंदिर का निर्माण और शिलान्यास अगर सियासी फायदे के लिए किया है, तो ये देश और राज्य के लिए बहुत ही गलत है।‘ ‘बंगाल की स्थिति ये है कि नॉर्थ बंगाल के डेवलपमेंट के लिए जो बजट पास किया गया है, उससे ज्यादा बजट मदरसों के लिए है। हिंदू बेवकूफ नहीं है, जो मंदिर निर्माण के झांसे में आ जाएंगे।‘ ममता को हिंदू वोट बैंक के पोलराइजेशन का डर बंगाल के सियासी माहौल को लेकर पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रभाकर मणि तिवारी कहते हैं कि BJP के हिंदुत्व की काट के लिए ममता पिछले कुछ साल से सॉफ्ट हिंदुत्व पर तरफ गई हैं। वे लगातार कई मंदिरों में गई। सबसे बड़ा बदलाव रामनवमी के दौरान देखने को मिला, जब TMC के लोगों ने जोर-शोर से जुलूस निकाला। वो आगे कहते हैं, ‘पश्चिम बंगाल की राजनीति में BJP ने ममता को सिर्फ एंटी हिंदू नहीं बनाया बल्कि लगातार मुस्लिम समर्थक के नाम से प्रचार कर रही है। इसीलिए ममता बनर्जी ने लोकसभा चुनाव के कुछ वक्त पहले ही सॉफ्ट हिंदुत्व का रुख किया है। जहां मंच से उन्होंने दुर्गा चालीसा का पाठ किया है।‘ आखिर ममता बनर्जी को सॉफ्ट हिंदुत्व की जरूरत क्यों पड़ी? इसके जवाब में प्रभाकर कहते हैं, ‘राज्य में ममता बनर्जी का अपना वोट बैंक है, लेकिन इसके अलावा कुछ वोट ऐसा भी है, जिसके बिना सरकार बननी मुश्किल है। जिस तरह अल्पसंख्यक वोट ममता बनर्जी के साथ है, उसी तरह अगर हिंदू वोट BJP के लिए एकजुट हो गया तो TMC के लिए परेशानी का सबब बन जाएगा।‘ ‘इसी हिंदू वोट बैंक को अपनी ओर लाने के लिए पश्चिम बंगाल में TMC भी मंदिर राजनीति पर उतर आई। इसका चुनावों पर कितना असर होगा, फिलहाल कहना मुश्किल है। ममता बनर्जी पहले भी ऐसा कर चुकी हैं, लेकिन उसका कोई खास असर नहीं हुआ।‘ बंगाल की राजनीति में क्या पहले कभी मंदिर-मस्जिद की चर्चा हुई है? इस पर प्रभाकर कहते हैं ‘बंगाल में कांग्रेस और लेफ्ट की सरकार के दौरान कभी ऐसा कुछ नहीं दिखा।‘ पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं…BJP बोली- ममता को कुर्सी जाने का डर, इसलिए मंदिर बना रहींममता बनर्जी के मंदिर का शिलान्यास करने का BJP विरोध करती रही है। राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले 3 मंदिरों के शिलान्यास पर BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता देवजीत सरकार कहते हैं, ‘इन सब मंदिरों में सबसे पहले ममता ने काली मंदिर में अपनी फाइल लगाई, लेकिन वहां फेल हो गईं। उसके बाद बाकी मंदिरों का रुख किया। राज्य में लोगों तक पानी और शौचालय नहीं पहुंच सका है। जनता को सुविधाएं देने के बजाय तुष्टिकरण की राजनीति हो रही है।‘ ‘राज्य में मंदिर की जगह अगर स्कूल और अस्पताल खोला जाता तो जनता को इसका फायदा मिलता। मंदिर बनवाना सरकार का काम नहीं है, ये काम ट्रस्ट के जरिए जनता के पैसे से होना चाहिए। इससे साफ समझ आ रहा है कि ममता बनर्जी के मन में सत्ता जाने की घबराहट है।‘ TMC ने कहा- राजनीति करने में नारायण का अपमान कर रही BJPTMC के राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजु दत्ता BJP पर पलटवार करते हुए कहते हैं, ‘अगर दीदी मंदिर का निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा नहीं करा सकती हैं, तो PM मोदी ने अयोध्या में अधूरे राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कैसे की। वजह साफ थी लोकसभा चुनाव। जगन्नाथ धाम की प्राण प्रतिष्ठा अप्रैल 2025 में हुई, उस वक्त बंगाल में कोई चुनाव भी नहीं था।‘ ‘हम धर्म को लेकर राजनीति नहीं करते और न ही इसे अपने मेनिफेस्टो में रखते हैं। हमारा नारा मां, माटी और मानुष है। बल्कि हिंदुत्व की पॉलिटिक्स करने वाली BJP ने भगवान जगन्नाथ की निंदा की। उनके धाम को एम्यूजमेंट पार्क कहा और उनके महा प्रसाद को हलवा। खुद को धर्म का ठेकेदार बताने वाली पार्टी के लीडर राजनीति के चक्कर में भगवान नारायण का अपमान कर रहे हैं।' …………………ये खबर भी पढ़ें… क्या साउथ बंगाल से निकलेगा BJP की जीत का रास्ता 7 मार्च को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में BJP की परिवर्तन यात्रा पहुंची। यहां रघुनाथपुर इंडस्ट्रियल एरिया है इसलिए हिंदी भाषी और आदिवासी आबादी ज्यादा है। यहां से BJP के ही विधायक हैं, फिर भी रैली में भीड़ कम पहुंची। यहीं रास्ते में अवधेश राम मिले। वो रैली में नहीं आए लेकिन चाहते हैं कि राज्य में सरकार जरुर बदले। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 17 Mar 2026 5:08 am

बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव में 2 एक्स्ट्रा सीटें कैसे जीतीं:अब राज्यसभा में मोदी सरकार बहुमत से 17 ज्यादा, इसका क्या असर पड़ेगा

सोमवार, 16 मार्च को 3 राज्यों की 11 राज्यसभा सीटों पर मतदान हुए। विधायकों ने जमकर क्रॉस-वोटिंग की। इसके चलते ओडिशा में बीजेपी ने 1 एक्स्ट्रा सीट जीत ली। वहीं बिहार में कांग्रेस के 3 और RJD के एक विधायक वोट डालने ही नहीं पहुंचे। इससे बीजेपी की शिवेश राम की जीत आसान हो गई। अब राज्यसभा में NDA ने फिर से बहुमत हासिल कर लिया है। फरवरी-मार्च 2026 में राज्यसभा में 10 राज्यों की 37 सीटें खाली हुई थीं, जिनके लिए 40 कैंडिडेट्स ने पर्चा भरा। इनमें से 7 राज्यों के 26 प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए गए। हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 सीटों पर वोटिंग हुई थी, जिसमें क्रॉस-वोटिंग का खेल हुआ। चुनाव के बाद अब राज्यसभा में कौन-सी पार्टी कितनी ताकतवर है, वोटिंग में कैसे खेल हुआ और मोदी सरकार ज्यादा मजबूत कैसे हुई; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… कैसे होती है राज्यसभा चुनाव की वोटिंग? किसी राज्य में राज्यसभा की जितनी सीटें खाली हैं, उन पर राज्य के विधायकों की संख्या के हिसाब से वोट डाले जाते हैं। ये फॉर्मूला थोड़ा पेचीदा लग सकता है, इसलिए हरियाणा के एग्जांपल से समझिए… बिहार में NDA ने कैसी जीतीं पांचों सीट? बिहार में राज्यसभा की 5 सीटें खाली हुई थीं, जिनके लिए 6 कैंडिडेट्स ने नॉमिनेशन फाइल किया। NDA की ओर से बीजेपी के नितिन नबीन, RLM सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा, JDU के नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर की जीत पहले से तय थी। लेकिन पेंच फंस गया बीजेपी के शिवेश राम की सीट पर। दरअसल, RJD की ओर से एडी सिंह ने भी पर्चा भरा और उनका मुकाबला शिवेश कुमार से हुआ…. ओडिशा में कैसे हुआ क्रॉस वोटिंग का खेल? ओडिशा से राज्यसभा की 4 सीटें खाली हुई थीं। बीजेपी के मनमोहन सामल और सुजीत कुमार की जीत पक्की थी। वहीं BJD के संतृप्त मिश्रा का भी जीतना तय था। मुकाबला हुआ बीजेपी समर्थित कैंडिडेट दिलीप राय और BJD के डॉ. दत्तेश्वर होता के बीच… हरियाणा में देर रात क्यों आए नतीजे? हरियाणा में राज्यसभा की 2 सीटें के लिए चुनाव हुए। बीजेपी ने संजय भाटिया का जीतना पहले से तय था। जबकि बीजेपी समर्थित सतीश नांदल और कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौध के बीच मुकाबला हुआ… नियम होने के बावजूद क्रॉस-वोटिंग पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? बिहार, ओडिशा और हरियाणा में विधायकों ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार को छोड़ दूसरी पार्टी के उम्मीदवार को वोट दिए। जबकि यहां पार्टियों ने व्हिप जारी किए थे, लेकिन राज्यसभा चुनाव में व्हिप लागू नहीं होता। विधायक अपने विवेक से वोट कर सकते हैं, लेकिन इसमें एक पेंच है। राज्यसभा चुनाव में ओपन वोटिंग होती है। यानी विधायकों को मतपत्र पर वरीयता भरने के बाद अपनी पार्टी के तय एजेंट को उसे दिखाना होता है। जो विधायक ऐसा नहीं करते या किसी अन्य व्यक्ति को मतपत्र दिखाते हैं, तो उनका वोट कैंसिल हो सकता है। वहीं जो विधायक अपनी पार्टी के खिलाफ जाते हैं, उन्हें पार्टी से निकालने का प्रावधान है। इसके लिए पॉलिटिकल पार्टी को एक एप्लीकेशन विधानसभा के स्पीकर को देना होता है और उस विधायक की सदस्यता रद्द कर दी जाती है। ऐसे में ये कहना कि राज्यसभा चुनाव में दूसरे दल के उम्मीदवार को वोट करने पर कार्रवाई नहीं होती है, ये सही नहीं है। लेकिन पार्टियां ऐसा करने से बचती हैं। 2003 में बीजेपी के अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने ओपन वोटिंग का प्रावधान इसीलिए बनाया था, ताकि विधायक दूसरे दलों से पैसा लेकर राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं करें। NDA को राज्यसभा में फिर से बहुमत मिलने से कैसे मजबूत होगी मोदी सरकार? राज्यसभा में बीजेपी के 106 सांसदों के साथ अब NDA के कुल सांसदों की संख्या 140 हो गई है। यानी NDA को फिर से बहुमत मिल गया। इसके चलते केंद्र की मोदी सरकार और मजबूत होगी। कोई बड़ा बिल पास कराने के लिए अब उसे BJD, YSRCP या निर्दलीय सांसदों की जरूरत नहीं पड़ेगी। NDA के सांसद इसके लिए काफी होंगे। विपक्ष के वॉकआउट या विरोध के बावजूद बिल अटकेंगे नहीं। हालांकि बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA को पिछले 2 साल से राज्यसभा और लोकसभा में बहुमत हासिल है। इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ कहते हैं कि भारतीय लोकतंत्र में राज्यसभा का चुनाव इस तरह से होता है कि लोकसभा और राज्यसभा में किसी एक दल को एक समय पर स्पष्ट बहुमत मिलना मुश्किल होता है। अगर किसी बड़ी पार्टी के पास बहुमत है तो इसका फायदा यह है कि सरकार को क्षेत्रीय दलों या निर्दलीय सांसदों के समर्थन के बदले उनकी अनुचित मांगों के सामने झुकना नहीं पड़ता। हालांकि इसका नकारात्मक पहलू भी है। जब किसी एक दल के पास लोकसभा और राज्यसभा दोनों जगहों पर बहुमत हो तो संसदीय कामकाज में आम सहमति बनाने की स्थिति कम हो जाती है। बड़ी पार्टी अपने मन से फैसला लेती है। वह छोटे और दूसरे दलों से सलाह नहीं लेती है। यह लोकतंत्र के लिए सेहतमंद स्थिति नहीं है। 1989 तक कांग्रेस पार्टी के पास राज्यसभा में स्पष्ट बहुमत होता था। तब ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस की ही सरकार थी। लेकिन 1989 के बाद की सभी सरकारों को राज्यसभा में अहम बिल पास कराने में छोटे दलों को साधना पड़ा है या विपक्षी दलों के साथ मिलकर आम सहमति बनानी पड़ी है। ******** ये भी खबर पढ़िए… चुनाव से पहले BJP ने मुख्यमंत्री बदलने की स्क्रिप्ट लिखी: नीतीश के नाम पर भ्रम फैलाया, चिराग को ज्यादा सीटें; 4 पॉइंट में BJP की स्ट्रैटजी नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के ऐलान के साथ ही बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना तय है। भले ही नतीजों के लगभग चार महीने बाद ऐसा होने जा रहा है, लेकिन इसकी स्क्रिप्ट बीजेपी ने चुनाव से पहले ही लिख रखी थी। सीटों के बंटवारे से लेकर नीतीश के लिए मजबूती से कैंपेन करना, बीजेपी की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 17 Mar 2026 1:58 am

ईरान का पड़ोसियों पर वार: हमलों की इजाज़त नरसंहार को बढ़ावा

युद्धव‍िराम की मांग वाली बात पर अपनी स्‍थित‍ि स्‍पष्‍ट करने के बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अब पड़ोसी देशों को नसीहत दी है।

देशबन्धु 16 Mar 2026 11:50 pm

दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह ठिकानों पर जमीनी अभियान शुरू : इजरायल

इजरायल रक्षा बल (आईडीएफ) ने दावा क‍िया क‍ि उसने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के प्रमुख ठिकानों के खिलाफ सीमित और लक्षित जमीनी अभियान शुरू कर दिया है।

देशबन्धु 16 Mar 2026 10:39 pm

Hormuz Crisis: होर्मुज संकट से नाटो में दरार? मदद नहीं मिलने पर ट्रंप ने सहयोगी देशों को दे डाली चेतावनी

ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि अमेरिका ने कई मौकों पर अपने सहयोगियों का साथ दिया है, लेकिन अब देखना होगा कि वे अमेरिका की कितनी मदद करते हैं। उन्होंने कहा, हमें यूक्रेन के मामले में उनकी मदद की जरूरत नहीं पड़ी।

देशबन्धु 16 Mar 2026 3:34 pm

होर्मुज पर ट्रंप की उम्मीदों को लगा झटका! जापान-AUS का साफ इनकार, दक्षिण कोरिया बोला- सोचेंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयरफोर्स वन विमान से वाशिंगटन लौटते समय पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने लगभग सात देशों से इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा में योगदान देने के लिए कहा है।

देशबन्धु 16 Mar 2026 9:54 am

‘घर में रसोई गैस खत्म, इंडक्शन भी नहीं मिल रहा’:400 से 500% बढ़ी डिमांड, चीन से 45 दिन में आएगा कच्चा माल

इजराइल-ईरान जंग का देश में LPG सिलेंडर की सप्लाई पर असर पड़ा है। LPG सिलेंडर की कमी के बीच इंडक्शन कुकर की डिमांड अचानक कई गुना बढ़ गई है। हालत ये है कि कई इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानों में इंडक्शन स्टोव का स्टॉक खत्म हो चुका है। कंपनियों के लिए भी डिमांड पूरी करना मुश्किल हो रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स डीलर्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन कुकर की बिक्री में 400 से 500% का इजाफा हुआ है। बाजार के जानकारों का कहना है कि इंडक्शन बनाने में इस्तेमाल होने वाला ज्यादातर कच्चा माल चीन से आता है। इसलिए नई सप्लाई आने में करीब 45 दिन का वक्त लग सकता है। ऐसे में कंपनियों के लिए प्रोडक्शन बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। लोग बोले- ईद में कैसे बनेगा खाना, इंडक्शन का ही सहारा भोपाल के इलेक्ट्रॉनिक्स बाजारों में इंडक्शन स्टोव खरीदने वालों की भीड़ बढ़ गई है। LPG सिलेंडर की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कई परिवार एहतियात के तौर पर इंडक्शन खरीद रहे हैं। इसकी डिमांड जानने के लिए हम सबसे पहले बाजार पहुंचे। यहां मिली नुसरत कहती हैं, ‘हमारा परिवार बड़ा है, इसलिए एक साथ तीन इंडक्शन खरीद रही हूं। सिलेंडर के साथ-साथ इंडक्शन के दाम भी बढ़ गए हैं। पिछले महीने जो इंडक्शन 2200 रुपए में मिल रहा था। अब वही करीब 3000 रुपए का हो गया है। लगता है आने वाले दिनों में दाम और बढ़ेंगे।‘ ‘रमजान का महीना चल रहा है, रोज शाम को इफ्तारी के लिए घर में खाना बनाना जरूरी है। ईद की तैयारी भी करनी है, इसलिए एहतियात के तौर पर इंडक्शन खरीदना पड़ रहा है।‘ वहीं बाजार में मिले कैलाश भी गैस सिलेंडर की सप्लाई न होने से परेशान हैं। उन्होंने बताया कि कई दुकानों पर पूछ चुके लेकिन इंडक्शन नहीं मिल रहा। कैलाश कहते हैं, ‘गैस सिलेंडर के लिए नंबर लगाया है, लेकिन कह रहे हैं कि मिलने में 8–10 दिन लग सकते हैं।’ कई दुकानों में इंडक्शन का स्टॉक भी खत्मइलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में ज्यादातर दुकानों पर इंडक्शन स्टोव का स्टॉक भी खत्म हो चुका है। जिन दुकानों में इंडक्शन की गिनी-चुनी यूनिट्स बची भी हैं, वहां दाम काफी ज्यादा हैं। भोपाल में एक इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम मालिक श्याम बंसल बताते हैं, ‘आमतौर पर जो माल एक हफ्ते या दस दिन में आता था, उसे अब हर दिन मंगाना पड़ रहा है। हम खुद महंगे दाम पर माल खरीद रहे हैं, इसलिए कस्टमर को भी महंगे में ही देना पड़ रहा है। हालांकि कोशिश यही है कि जरूरत के समय ज्यादा मुनाफा न लिया जाए।’ बाजार के जानकार बताते हैं कि आमतौर पर गर्मियों में इंडक्शन स्टोव की बिक्री कम हो जाती है। इस वक्त कस्टमर की जरूरत एयर कंडीशनर, कूलर, फ्रिज और पंखे जैसे प्रोडक्ट रहते हैं। इसलिए दुकानदार भी गर्मियों में इंडक्शन का ज्यादा स्टॉक नहीं रखते। अब की LPG को लेकर बनी अनिश्चितता ने बाजार का ट्रेंड ही बदल दिया है।’ 5 दिन में इंडक्शन की महीने भर से ज्यादा बिक्री फिलिप्स डीए के मुंबई और एमपी में ब्रांच मैनेजर सेल्स विवेक गौर बताते हैं, ‘LPG की कमी की खबरों के बीच इंडक्शन एक बेहतर विकल्प बनकर उभरा है। लोगों ने एहतियात के तौर पर इसे खरीदना शुरू कर दिया है। इसलिए इंडक्शन की डिमांड में करीब 400–500% का इजाफा हुआ है। सप्लाई बनी रहे इसलिए बढ़ती डिमांड पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं।‘ वहीं, उषा इंटरनेशनल लिमिटेड के भोपाल में डिप्टी सेल्स मैनेजर बिनीत शर्मा बताते हैं, अगर किसी महीने में आम तौर पर इंडक्शन की 1,000 यूनिट बिकती हैं, तो इस बार पिछले पांच दिन में ही करीब 8,000 से 10,000 यूनिट बिक चुकी हैं। यानी इसकी डिमांड 8 से 10 गुना तक बढ़ गई है। वे आगे कहते हैं कि फिलहाल इंडक्शन कैटेगिरी में कई ब्रांड कच्चे माल की कमी का सामना कर रहे हैं। बाजार में बड़ी संख्या में छोटे और अनऑर्गनाइज्ड ब्रांड हैं, इसलिए इसका सटीक डेटा नहीं है। कोविड काल जैसे हालात, अचानक बढ़ा बाजारकेनस्टार में एमपी के स्टेट हेड रोहित श्रीवास्तव कहते हैं कि मौजूदा हालात कोविड के दौर की याद दिला रहे हैं, जब इलेक्ट्रॉनिक किचन अप्लायंसेज की डिमांड बढ़ गई थी। वे बताते हैं, ‘इंडक्शन और इंफ्रारेड की बिक्री का ये दौर बिल्कुल कोविड के समय जैसा है, जब अचानक माइक्रोवेव और डिशवॉशर की मांग बढ़ गई थी। अब भी उसी तरह की आर्टिफिशियल ग्रोथ देखने को मिल रही है। पहले ही दिन हमने 7 हजार से ज्यादा यूनिट बेचीं।’ कंपनियों के लिए सप्लाई देना और कच्चा माल जुटाना चैलेंजइंडक्शन बनाने वाली कंपनियों के लिए भी अचानक बढ़ी डिमांड चुनौती बन गई है। प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कच्चा माल, फैक्ट्री क्षमता और सप्लाई चेन की तैयारी पहले से करनी पड़ती है। डीलरों का कहना है कि अगर डिमांड ऐसे ही बढ़ती रही तो कुछ वक्त के लिए बाजार में इंडक्शन की सप्लाई कम हो सकती है। मध्यप्रदेश में उषा इंटरनेशनल लिमिटेड के ब्रांच मैनेजर मोहनीश जैन बताते है, ‘इंडक्शन स्टोव बनाने में इस्तेमाल होने वाला लगभग सारा कच्चा माल चीन से आता है, खासकर हीट प्लेट जैसे बाकी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट। ऐसे में चीन में भी डिमांड बढ़ने का असर भारतीय बाजार पर पड़ रहा है।‘ ‘कंपनियों के लिए ये अप्रत्याशित संकट है। कंपनियां चीन में सप्लाई सेंटर्स से लगातार कॉन्टैक्ट में हैं, लेकिन नए ऑर्डर की शिपमेंट आने में करीब 45 दिन का वक्त लग सकता है।‘ डीलरों के मुताबिक, सिर्फ फिलिप्स ब्रांड में ही एक लाख से ज्यादा यूनिट की डिमांड आ चुकी है। कंपनियां फिलहाल अपने मौजूदा स्टॉक के आधार पर प्रोडक्शन बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं। LPG पर निर्भरता कम करने के लिए कई कंपनियां अब कमर्शियल किचन के लिए बड़े इंडक्शन सिस्टम तैयार करने का भी काम कर रही हैं। उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि होटल और बड़े किचन के लिए अलग से कमर्शियल इंडक्शन यूनिट डेवलप करने की योजना बनाई जा रही है। हालात सामान्य होने पर कम होंगी कीमतें इलेक्ट्रॉनिक्स डीलरों का मानना है कि मौजूदा हालात स्थायी नहीं है। जैसे ही गैस सिलेंडर की सप्लाई सामान्य होगी, लोगों की चिंता कम होने लगेगी। इंडक्शन की डिमांड भी धीरे-धीरे घटने लगेगी।दुकानदार भी मानते हैं कि कई कस्टमर AC या कूलर खरीदने का प्लान बनाकर शॉप पर आ रहे हैं, लेकिन गैस लेकर बने माहौल के कारण पहले इंडक्शन कुकर खरीद रहे हैं। IRCTC और कई ऑर्गनाइजेशन इंडक्शन का कर रहे इस्तेमालLPG संकट और मौजूदा हालात को देखते हुए IRCTC ने भी जरूरत पड़ने पर माइक्रोवेव और इंडक्शन जैसे कुकिंग के तरीकों का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि IRCTC के दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के CRM का कहना है कि फिलहाल उनके पास LPG की कोई कमी नहीं है। पहले की तरह ही इंडक्शन का इस्तेमाल भी किया जाता रहा है। अभी किचन चलाने में किसी खास बदलाव की जरूरत नहीं पड़ी है। वहीं दिल्ली में इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रोफेसर डॉ. के. जी. सुरेश बताते हैं कि उनके संस्थान में भी एहतियात के तौर पर हॉट प्लेट, इलेक्ट्रिक ओवन और अन्य अप्लायंसेज खरीदे जा रहे हैं। वे कहते हैं, ‘सरकार ने साफ किया है कि देश में ऊर्जा संकट नहीं है। अगर फ्यूचर में कोई इमरजेंसी की स्थिति आती है तो हमें उसके लिए तैयार रहना चाहिए।’ …………….ये खबर भी पढ़ें… यूपी में इंडक्शन की डिमांड 40%, रेट भी 10% बढ़ा अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो गई है। यूपी में भी गैस एजेंसियों के बाहर लंबी–लंबी लाइनें हैं। गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी भी हो रही है। ऐसे में विकल्प के तौर पर इंडक्शन कुकटॉप की डिमांड 40% तक बढ़ गई है। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 16 Mar 2026 9:12 am

ईरान ने इजराइल पर सेजिल बैलिस्टिक मिसाइल दागी:इस जंग में पहली बार इस्तेमाल की गई; 2500km तक हिट कर सकती है टारगेट

ईरान की आईआरजीसी ने बयान जारी कर बताया कि इजराइल के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान पहली बार सेजिल मिसाइल दागी गई। यह एक सॉलिड फ्यूल वाली मध्यम दूरी की रणनीतिक बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे ईरान की सबसे उन्नत मिसाइलों में गिना जाता है।

देशबन्धु 16 Mar 2026 9:03 am

अमेरिका का 'लुकास' ड्रोन अरब देशों को बना रहा निशाना: ईरानी विदेश मंत्री

ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल कुछ स्थानों से पश्चिम एशिया में अरब देशों पर हमले कर रहे हैं। यह बात उन्‍होंने पैन-अरब समाचार आउटलेट अल-अरबी अल-जहीद के साथ साक्षात्कार में कही।

देशबन्धु 16 Mar 2026 7:52 am

स्टार्मर-ट्रंप वार्ता: होर्मुज स्ट्रेट खोलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात कर मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक समुद्री व्यापार पर पड़ रहे असर पर चर्चा की।

देशबन्धु 16 Mar 2026 7:45 am

ईरान जंग के बीच लेबनान कब्जाने में जुटे नेतन्याहू:आखिर क्या है 'ग्रेटर इजराइल' का सपना; क्या इसीलिए 29 महीनों से जंग जारी

पूरी दुनिया की नजर ईरान जंग पर टिकी है। उधर इजराइल तेजी से लेबनान पर जमीनी कब्जा करने में जुटा है। पिछले 15 दिनों में ही इजराइल ने लेबनान में करीब 700 लोग मार दिए हैं। 20% जमीन खाली करा ली है और अपने सैन्य ठिकाने जमा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू अपने अल्टीमेट गोल ‘ग्रेटर इजराइल’ को हकीकत बनाने में जुटे हैं। आखिर ग्रेटर इजराइल क्या है और नेतन्याहू मिडिल ईस्ट में क्या करना चाहते हैं; जानेंगे मंडे मेगा स्टोरी में… लेकिन इस सब की शुरुआत क्यों और कैसे हुई? इसे समझने के लिए 4 हजार साल पीछे चलना होगा… ***** ग्राफिक्स: दृगचंद्र भुर्जी और अजीत सिंह -------- ये खबर भी पढ़िए… ईरान समेत 7 देशों पर हमले, आधी दुनिया पर नजर:ट्रम्प की 'सनक' एक सोची-समझी स्ट्रैटजी; क्या ऐसे ही तबाह होती हैं सुपर पावर्स डोनाल्ड ट्रम्प को राष्ट्रपति पद की शपथ लिए 13 महीने हुए हैं। इस दौरान ट्रम्प ने 7 देशों पर सैन्य हमले किए, ईरान के सुप्रीम लीडर को मार गिराया, वेनेजुएला के राष्ट्रपति को तो घर से उठवा लिया, दर्जनों देशों पर अनाप-शनाप टैरिफ लगाए और राष्ट्राध्यक्षों को बेइज्जत किया। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 16 Mar 2026 5:21 am

US Iran War: डोनाल्ड ट्रंप ने ठुकराया युद्धविराम का प्रयास, ईरान ने भी रखीं कड़ी शर्तें

व्हाइट हाउस ने साफ संकेत दिया है कि इस समय उसकी प्राथमिकता सैन्य अभियान जारी रखना है, न कि युद्धविराम पर चर्चा करना। दूसरी ओर ईरान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका और इजरायल के हवाई हमले पूरी तरह बंद नहीं होते, तब तक किसी भी तरह की शांति वार्ता संभव नहीं है।

देशबन्धु 15 Mar 2026 12:16 pm

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का बड़ा बयान: ‘मार्ग खुला है, लेकिन अमेरिका और इस्राइल के जहाजों के लिए बंद’

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है। यह केवल हमारे दुश्मनों—अमेरिका और उसके सहयोगियों—के टैंकरों और जहाजों के लिए बंद है।

देशबन्धु 15 Mar 2026 11:05 am

संडे जज्बात-अपने 4 जवान बेटे-बेटियों को जहर देकर कैसे मारूं:वे सारा दिन बिस्तर पर पड़े रहते हैं; शादी की उम्र में उन्हें चम्मच से खिलाता हूं

मैं रामकृष्ण, ओडिशा के मलकानगिरि जिले के तंडकी गांव का रहने वाला हूं। मेरे चार बच्चे हैं, सभी बिस्तर पर पड़े रहते हैं। हिल-डुल नहीं सकते। सभी जवान हैं, शादी की उम्र के हैं। इन्हें हाइपोटोनिया नाम की बीमारी है। पैदा होने पर ये बच्चे ठीक थे, लेकिन धीरे-धीरे ये इस बीमारी की जद में आते गए। पत्नी इनके गम में बीमार रहने लगी है। 8 हजार कमाता हूं। किसी का इलाज नहीं करा सकता। एक ऐसी परेशानी में हूं, जिसका कोई हल नहीं है। समझ नहीं आता कि मौत किसके लिए मांगू। आज से 23 साल पहले मेरे पहला बच्चा बेटी हुई। हमारे यहां बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं किया जाता। पिता बनकर बहुत खुश था, लेकिन 6 महीने बाद भी मेरी बेटी हिल-डुल नहीं पा रही थी। आवाज देने पर हमारी तरफ देखती भी नहीं थी। ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं हूं, इसलिए कुछ समझ नहीं पा रहा था कि इन्हें क्या हुआ है। पहले लोकल डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन कुछ पता नहीं चला। वैसे भी हमारा इलाका नक्सल प्रभावित है। यहां अस्पताल वगैरह कुछ खास नहीं हैं। डॉक्टरों ने कहा कि इसे भुवनेश्वर लेकर जाओ मलकानगिरि से भुवनेश्वर जाना इतना आसान नहीं था। पंचायत ऑफिस में अनाज बांटने से 8 हजार रुपए महीना कमा पाता हूं। फिलहाल, बेटी को दिखाने के लिए भुवनेश्वर लेकर गया। वहां डॉक्टर ने बताया कि इसे हाइपोटोनिया है। यह बीमारी कभी ठीक नहीं होगी। मैं समझ नहीं पाया कि यह बीमारी होती क्या है। बाद में लोगों से पता चला कि यह जेनेटिक बीमारी होती है। भुवनेश्वर के अलावा आंध्र प्रदेश का विशाखापट्‌टनम शहर हमारे घर से नजदीक पड़ता है, जहां इसका इलाज होता है। लेकिन विशाखापट्‌टनम, भुवनेश्वर से भी ज्यादा मंहगा शहर है। आने-जाने के एक चक्कर में 20 से 25,000 रुपए लग जाते हैं। इतना पैसा चुका नहीं सकता। अब बच्चों का इलाज तो नहीं करा पा रहा, लेकिन इनकी सेवा कर रहा हूं। अब तो मेरी पत्नी बच्चों के बारे में सोच-सोच कर बीमार रहने लगी है। सोचती है कोई तो सामान्य औलाद पैदा हुई होती। तीन साल बाद मेरी पत्नी दोबारा प्रेगनेंट हुई। इस बार बड़ी उम्मीद थी कि भगवान हमारी सुनेगा। लेकिन डरे भी हुए थे कि कहीं यह बच्चा भी बेटी जैसा न हो जाए। खैर, मुझे फिर से एक बेटी हुई। शुरुआत में ठीक थी। सालभर तक पता नहीं चला कि उसे कोई बीमारी है। लेकिन हम सतर्क थे। जब वह चलने लायक हुई तो अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पा रही थी। हमें लगा कुछ बच्चे देर में चलते हैं। इंतजार करते रहे, लेकिन नहीं चली। लगभग दो साल बाद भी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाई। हम पति-पत्नी तो सोचकर ही कांप गए कि यह बच्ची भी पहली बच्ची जैसी हो रही है। हमने उसे चलाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह धीरे-धीरे ठीक वैसे ही होती चली गई, जैसी बड़ी बेटी थी। हम घबराकर उसे भुवनेश्वर लेकर गए। वहां डॉक्टर ने बताया कि यह भी ठीक नहीं होगी। इसी भी हाइपोटोनिया बीमारी है। निराश होकर वापस घर लौट आया। अब हम दो-दो विकलांग बेटियों को पालने लगे। हमारे पास और कोई रास्ता नहीं था। हमें लगा कि शायद भगवान की यही मर्जी हो। मैं सुबह काम पर चला जाता और मेरी पत्नी बेटियों की देखभाल करतीं। उन्हें नहलाती, खिलाती। जैसे-जैसे बेटियां बड़ी होती गईं। उनका वजन बढ़ता गया। खासकर बड़ी बेटी का वजन बढ़ने से पत्नी के लिए इन्हें उठा पाना मुश्किल होने लगा। परेशानी बढ़ गई। दो साल बाद मेरी पत्नी फिर प्रेगनेंट हुई। इस बार उम्मीद थी कि हमारी झोली भरी जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भगवान को कुछ और ही मंजूर था। हमारे दो जुड़वा बेटे हुए। उनके पैदा होते ही हम उन्हें डॉक्टर के पास ले गए। लेकिन डॉक्टर बता नहीं पा रहे थे कि उन्हें कोई बीमारी है या नहीं। सालभर बद बदकिस्मती से मेरे दोनों जुड़वा बेटों को भी वही हाइपोटोनिया बीमारी होने का पता चला। अब मेरे चार बच्चे हैं। पहली बेटी 23 साल की हो गई है। दूसरी 20 साल की और दोनों बेटों की उम्र 19 साल है। चार-चार जवान बच्चे, सभी विकलांग और ऐसी बीमारी जो अब कभी भी ठीक नहीं हो सकती है। अब मैं हार चुका हूं। पत्नी बीमार रहने लगी है, उसका इलाज नहीं करा पा रहा हूं। बच्चों के बारे में सोच-सोचकर वह गुमसुम रहने लगी है। बस खाना बना देती है। उसके बाद सारा दिन चुप बैठी रहती है। सोचता हूं जिस उम्र में पिता बच्चों की शादी के रिश्ते ढूंढ़ता है, मैं उस में में चार-चार जवान बच्चों का मल-मूत्र साफ करने में लगा रहता हूं। सुबह अकेला उठता हूं। चारों बच्चों को शौच और ब्रश कराता हूं। नहालाता-धुलाता हूं। इस दौरान मेरी पत्नी नाश्ता तैयार कर रही होती हैं। चारों बच्चों को नाश्ता कराता हूं और फिर मैं नाश्ता करता हूं। सुबह पंचायत ऑफिस जाते वक्त इन बच्चों को कुर्सी पर बिठाकर चला जाता हूं। साथ में मोबाइल पर गाना लगाकर रख देता हूं। यह बच्चे गाना कितना सुन पाते हैं, पता नहीं। इस दौरान पंचायत का काम छोड़कर हर रोज दोपहर को घर आता हूं। वजन ज्यादा होने से अब मेरी पत्नी इनकी देखभाल नहीं कर पाती। दोपहर आकर इन्हें कुर्सी से उठाकर चटाई पर लिटाता हूं और फिर खाना खिलाता हूं। खाना खिलाने के बाद कुछ देर रुकता हूं। अगर कोई मल-मूत्र करता है तो उसे साफ करता हूं, फिर से ऑफिस चला जाता हूं। मैं अकेला ही घर और बाहर की जिम्मेदारी निभाता हूं। बस यही जिंदगी हो गई है। पंचायत में दिनभर हाथ अनाज उठाने में लगा रहता है और घर आकर बच्चों को उठाकर यहां से वहां करने में। कई बार बच्चे खुद को गंदा कर लेते हैं, लेकिन पत्नी उनकी परेशानी नहीं समझ पातीं। 23 साल हो गए हैं। हम पति-पत्नी न किसी के घर जा पाते हैं और न ही किसी के शादी-ब्याह में। चार-चार विकलांग बच्चों को किसके सहारे छोड़कर जाऊं। अब तो लोग हमारे घर आना भी बंद कर दिए हैं। रात में मेरे बच्चे चीखते हैं। हमें नहीं पता कि क्यों। शायद शरीर में दर्द होता होगा या फिर बैठे या लेटे-लेटे थक जाते होंगे। हमें कई लोगों ने कहा कि इन बच्चों को जहर दे दो। ऐसे ही एक दिन खास जान-पहचान के आदमी मेरे घर आए। मैं इन बच्चों एक-एक करके नहला रहा था। फिर सबको उठाकर चटाई पर लेटा रहा था। उस दिन उन्हें मेरी परेशानी नहीं देखी गई। वह मुझे घर से बाहर ले गए और बोले कि ऐसा कब तक करते रहोगे? तुम्हारा जीवन तो इसी में खत्म हो जाएगा। ऐसा करो, इन बच्चों को जहर दे दो। वो ऐसा कहकर चले गए। उनके जाने के बाद मैं सोचने लगा कि अपनी औलाद भला कैसे मारूं? हमारी किस्मत में इनकी सेवा ही लिखी है और मैंने इसे स्वीकार कर लिया है। (रामकृष्ण ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) ---------------------------------------- 1- संडे जज्बात-दोस्त की प्रेमिका प्रेग्नेंट हुई, रेप केस मुझपर चला:पंचायत ने 6 लाख में सौदा किया, 5 साल जेल में रहा, अब बाइज्जत बरी बिहार के दरभंगा जिले का रहने वाला मैं मुकेश कुशवाहा। मुझ पर 17 साल की लड़की के रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चला। वो लड़की मेरे दोस्त की प्रेमिका थी। दोस्त ने उसे प्रेग्नेंट किया था, लेकिन मुकदमा मुझ पर चला। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-पुलिस ने मेरे प्राइवेट पार्ट पर ईंट बांधी:सिर कुर्सी में बांधकर उल्टा टांगा, मैं वकील बनकर केस खुद लड़ा- 12 साल बाद जीता 18 साल की उम्र में पुलिस ने मुझे हत्या के मामले में आरोपी बना दिया। मैंने अपने केस की खुद पैरवी की और 12 साल बाद बाइज्जत बरी हुआ। अपना केस लड़ने के लिए लॉ किया और अब मैं एडवोकेट अमित चौधरी हूं। मेरठ बार एसोसिएशन का सदस्य भी हूं। मेरी जिंदगी पर जल्द ही एक फिल्म बन रही है, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 15 Mar 2026 5:35 am

क्या साउथ बंगाल से निकलेगा BJP की जीत का रास्ता:5000 किमी की परिवर्तन यात्रा, 237 सीटों तक पहुंची, लोग बोले- बदलाव चाहिए

7 मार्च को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में BJP की परिवर्तन यात्रा पहुंची। यहां रघुनाथपुर इंडस्ट्रियल एरिया है इसलिए हिंदी भाषी और आदिवासी आबादी ज्यादा है। यहां से BJP के ही विधायक हैं, फिर भी रैली में भीड़ कम पहुंची। यहीं रास्ते में अवधेश राम मिले। वो रैली में नहीं आए लेकिन चाहते हैं कि राज्य में सरकार जरुर बदले। वजह पूछने पर कहते हैं, ‘हमें सरकारी घर मिलने वाला था। कई बार पूछताछ भी हुई। यहां तक की BDO भी आए लेकिन घर नहीं मिला। इसलिए चाहता हूं बंगाल में भी डबल इंजन की सरकार आए ताकि हम जैसे गरीबों का भला हो सके। हमें मोदी जी पर पूरा भरोसा है।‘ पश्चिम बंगाल में अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने हैं। BJP ने इसे देखते हुए पूरे राज्य में 5 हजार किलोमीटर की ‘परिवर्तन यात्रा’ निकाली। शुरुआत राज्य के अलग-अलग हिस्सों से 1 और 2 मार्च को हुई।ये 294 सीटों में से 237 तक पहुंची। यात्रा का समापन 14 मार्च को कोलकाता के बिग्रेड मैदान में PM मोदी ने किया। दैनिक भास्कर की टीम ने इस यात्रा को दो हिस्सों साउथ-वेस्ट बंगाल और नॉर्थ बंगाल से कवर किया। परिवर्तन यात्रा के मुद्दे और मकसद क्या रहे। जिन इलाकों से ये गुजरी, वहां पर इसका कितना असर है? विधानसभा चुनाव में इससे BJP को कितना फायदा होने वाला है? ग्राउंड पर पहुंचकर हमने समझने की कोशिश की। 1 मार्च को BJP तो 2 मार्च को TMC के इलाके से शुरुआतBJP ने 1 मार्च को जिन चार जगहों से रैली शुरू की, वहां पार्टी की अच्छी पकड़ है। 2021 के विधानसभा चुनाव में BJP ने यहां सीटें भी जीतीं। कूचबिहार की दोनों और कुल्टी की एक सीट BJP के पास है। वहीं नदिया जिले में 17 सीटों में 9 BJP के पास है। 2 मार्च से TMC के दबदबे वाले इलाकों से यात्रा की शुरुआत हुई। इसमें कोलकाता के मेयर और विधायक फरदीन अहमद की सीट शामिल है। यात्रा का समापन के लिए PM मोदी 14 मार्च को कोलकाता पहुंचे। साउथ बंगाल का ये इलाका TMC के प्रभाव वाला है। यहां से PM मोदी ने कहा, ‘पूरे बंगाल में एक ही चर्चा है कि बदलाव चाहिए। इस जमीन से जब-जब चुनौती आई, तब-तब यहां के लोगों ने सामना किया है। कुछ लोग आपको डराने की कोशिश करेंगे, लेकिन जब जनता ठान लेती है तो कोई भी ताकत उसे रोक नहीं सकती। इस बार चुनाव सिर्फ सरकार बदलने का नहीं, बंगाल की आत्मा को बचाने का है।‘ सबसे पहले साउथ-वेस्ट बंगाल की बात…BJP को वोट देते लेकिन बोलने में जान का खतरापुरुलिया जिले में 7 मार्च को जब यात्रा पहुंची, तो इसमें आम लोग काफी कम दिखे। जबकि रघुनाथपुर विधानसभा सीट BJP के पास है। माइक से लगातार भारत माता की जय, वंदे मातरम्, जय श्री राम के नारे लग रहे थे। रैली में ज्यादातर हिंदी भाषी लोग दिखे। यहां हम ज्योति सिंह से मिले, जो लोकल स्तर पर BJP के लिए काम भी करती हैं। यात्रा के बारे में पूछने पर कहती हैं, ‘स्थिति ये है कि यहां विपक्षी पार्टियों को छोटे-मोटे कार्यक्रमों की भी परमिशन नहीं मिलती। हमें भी रैली की परमिशन नहीं मिली।’ रैली के असर के बारे में पूछने पर कहती हैं, ‘अब जो लोग वोट देने में भी डरते हैं, वे खुलकर बाहर आ सकेंगे। कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम लोगों को हिम्मत मिलेगी कि उनके पीछे कोई खड़ा है। क्योंकि यहां हालात ऐसे हैं कि लोग BJP को खुलकर वोट तो देते हैं, लेकिन बोलने से डरते हैं। क्योंकि जान का खतरा रहता है।’ ’भले ही हमारी CM महिला हैं, लेकिन यहां न तो अस्तपाल में और न ही सड़क पर, कहीं भी महिला सेफ नहीं हैं। यहां रैली का कामकाज देख रहे दिलीप कुमार सिंह से भीड़ कम होने के बारे में पूछा तो जवाब मिला, ‘मेरे हिसाब से इतनी ही भीड़ होनी चाहिए। यात्रा लंबी है इसलिए लोग जगह-जगह खड़े हैं। इससे कार्यकर्ताओं और जनता के बीच उत्साह का माहौल बनेगा। अमित शाह ने हमें 165 सीटों का टारगेट दिया है। उसे पूरा करना है।’ नॉर्थ बंगाल के लोग बोले…डबल पेमेंट छोड़कर रैली में आए, BJP को ही वोट देंगेनॉर्थ के इलाकों में यात्रा के दौरान लोगों की खचाखच भीड़ दिखी। 1 मार्च को जलपाईगुड़ी में बिहार के डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने जनसभा की। उन्होंने कहा कि बिहार में हमने जंगलराज खत्म कर दिया। अब बंगाल में भी सिंडिकेट राज खत्म करने की जरुरत है। यहां घुसपैठियों ने आदिवासियों की जमीन छीनी, जिसे वापस करना होगा। वो जनता से पूछते हैं कि क्या इन सबके लिए BJP को वोट करेंगे। जनता पूरे जोश के साथ हां में जवाब देती है। जलपाईगुड़ी के माल विधानसभा में रहने वाले दीपक विश्वास हमसे रैली में मिले। वे कहते हैं, ‘रविवार को चाय बागान में काम करने वाले कर्मचारियों को डबल पेमेंट मिलती है। इसके बावजूद अगर लोग BJP की रैली में आएं हैं, तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो BJP को वोट करेंगे।‘ पश्चिम बंगाल में सरकार क्यों बदलनी चाहिए? जवाब में दीपक कहते हैं, 15 साल की सरकार में अब हर तरह की गलत नीति है। भ्रष्टाचार सबसे ज्यादा है। बिना पैसे के कोई काम नहीं होता है। यहां की CM राज्य में राष्ट्रपति को भी आने पर सम्मान नहीं दे पाई। आरजी कर में इतनी बड़ी घटना हुई। अब सरकार बदलने के लिए इससे ज्यादा और क्या कारण चाहिए। इसी रैली में सायना राय अपनी 80 साल की सास के साथ पहुंचीं। वे कहती हैं, ‘हमें बदलाव चाहिए।‘ हमने पूछा सभा में अपनी मर्जी से आई हैं या कोई लेकर आया? जवाब मिला, ‘घरवाले आएं हैं इसलिए आ गई।‘ वहीं, मालबाजार में मिलीं सबीना कहती हैं, ‘अगर BJP गांव में कुछ बदलाव कर सकती है, तो ये यात्रा हमारे लिए बहुत अच्छी है, वरना इसका कोई मतलब नहीं। राज्य सरकार 1500 रुपए लक्ष्मी भंडार दे रही है लेकिन इससे कुछ नहीं होता है। हमें रोजगार मिले, नहीं तो बदलाव ही सही है।‘ BJP कार्यकर्ताओं हमले का खौफ कम करने की कोशिशसाउथ के इलाकों में यात्रा के दौरान कम भीड़ पहुंचने को लेकर हमने आसनसोल के सीनियर जर्नलिस्ट सतीश चंद्रा से बात की। वे कहते हैं, ‘आसनसोल की बाराबनी विधानसभा सीट पर BJP कार्यकर्ताओं पर हमला हुआ। ऐसे ही हालात राज्य के बाकी इलाकों में भी देखने को मिले।’ ’कहीं-कहीं नेताओं को भी भगाया गया। इसलिए जनता खुलकर बाहर नहीं आना चाहती है। सत्ता पक्ष भी नहीं चाहता कि लोग रैली तक पहुंचें। इसीलिए लोगों में घबराहट है। अभी न सही लेकिन रैली का असर आने वाले चुनाव में जरुर दिखेगा।’ वे आगे कहते हैं, ’बंगाल में BJP का न तो अच्छा संगठक है और न ही संगठन। जो है, वो लोगों का समर्थन है। यात्रा का लक्ष्य सिर्फ लोगों तक पहुंचना है। जैसे- आसनसोल में BJP के पास दो सीट है। पुरुलिया में भी 9 में से 6 सीट BJP के पास है।’ यात्रा में दिखी कमियों को लेकर सतीश चंद्र कहते हैं, ’ये रैली बहुत कम जगहों पर ही समय से पहुंच सकी। इसका नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ा है। आसनसोल में शाम को 6 बजे सभा होनी थी, वहां यात्रा ही रात 10 बजे पहुंची। आखिर लोग कितनी देर इंतजार करते?’ मतुआ समाज की नाराजगी और हिंसा का भी असरवहीं पॉलिटिकल एक्सपर्ट मेदुल इस्लाम कहते हैं कि PM की सभा को छोड़ दें तो कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में रैली में काफी कम भीड़ दिखी। वजहें कई हैं लेकिन एक बड़ी वजह SIR के दौरान मतुआ समाज के लोगों के नाम कटना भी है। मतुआ समाज में BJP को लेकर गुस्सा है। यही BJP का कोर वोटर भी है, इसलिए नार्थ 24 परगना में लोगों की कम भीड़ आई। वहीं रैली पर नजर रखने वाली टीम के मेंबर न लिखने की शर्त पर कहते हैं, ‘ये बात सच है कि साउथ में भीड़ कम थी लेकिन इसके पीछे वाजिब वजह है। एक कारण TMC कार्यकर्ताओं के हमले और स्टेज तोड़ने जैसी घटनाएं भी हैं।’ ’9 मार्च को साउथ 24 परगना के काकद्वीप में सभा का मंच तोड़ दिया गया और सभा नहीं हो सकी। इन घटनाओं से साफ है साउथ बंगाल में लोगों के बीच में डर का माहौल है। यहां TMC के विधायक भी ज्यादा हैं, इसलिए लोग रैली में नहीं आए।’ BJP के लिए जीत का रास्ता साउथ बंगाल से निकलेगाBJP ने पश्चिम बंगाल में अपनी जीत का रास्ता नॉर्थ बंगाल से बनाया था। 2016 में 3 सीटें जीतीं। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में 8 लोकसभा सीटें में से 6 BJP ने जीतीं। 2021 के विधानसभा चुनाव में 54 सीटें में से 30 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिसमें अलीपुरद्वार की सभी पांच सीटें BJP के खाते में आईं। नॉर्थ बंगाल में यात्रा में आई भीड़ को लेकर सिलीगुड़ी के सीनियर जर्नलिस्ट पवन शुक्ला कहते हैं, ‘यात्रा करना BJP की राजनीति का हिस्सा रहा है। पार्टी का इतिहास देखें तो 90 के दशक में पूरे देश में रथ यात्रा की गई थी। इसके बाद ही BJP का उदय हुआ। बंगाल में भी पार्टी को यही उम्मीदें हैं।‘ यात्रा के असर को लेकर वे कहते हैं, ‘फिलहाल BJP के पास सीटों की संख्या ठीक-ठाक है। यात्रा से वोट शेयर जरूर बढ़ेगा। दूसरी तरफ ये भी हो सकता है कि मालदा और दिनाजपुर के मुस्लिम बहुल इलाकों में पार्टी पैठ बना सके। BJP नॉर्थ में डेवलपमेंट के नाम पर वोट मांगने की तैयारी कर रही है।‘ पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटें हैं। जिसमें 54 सीटें नॉर्थ बंगाल में आती है जो 18% हिस्सा कवर करती हैं। यात्रा का आने वाले चुनाव में कितना असर होगा इस पर पॉलिटिकल एक्सपर्ट मेदुल इस्लाम का कहना है, ‘पश्चिम बंगाल में हार-जीत साउथ बंगाल से तय होती है। भले ही नॉर्थ में BJP ने आधी से ज्यादा सीटें जीती हों लेकिन इससे उसकी जीत तय नहीं हो सकती है।’ ’साउथ के दो बड़े हिस्से नॉर्थ 24 परगना और साउथ 24 परगना में आज भी TMC का राज है। जिसे तोड़ने में BJP अब तक नाकाम रही है।’ ’दूसरी अहम बात ये है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले लोकसभा चुनाव होता है। इसमें जिनकी सीट बढ़ती है, वहीं विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करता है। 2019 लोकसभा और 2021 विधानसभा के नतीजों से ये साफ है। BJP ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 18 सीटें जीतीं। इसका असर 2021 के विधानसभा चुनाव में भी दिखा। 77 सीटें जीतकर BJP ने राज्य से कांग्रेस और लेफ्ट का पत्ता साफ कर दिया था।’ ’वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव को देखें तो BJP की सीटें 18 से 12 हो गईं। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल भी कम हुआ। इसके दो सबसे बड़े उदाहरण 2009 के लोकसभा चुनाव है। 2009 में TMC और उसकी सहयोगी पार्टियों को 42 में 27 सीटों पर जीत हासिल की थी। इसके बाद 2011 में बंगाल में TMC की सरकार बनी।’ यात्रा के असर के बारे में पूछने वे कहते हैं, ’हां, कुछ असर जरुर पड़ेगा। BJP अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम जरुर करेगी।’ TMC बोली: सभा में भीड़ नहीं, सरकार बदलने के दावेTMC के राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजु दत्ता परिवर्तन यात्रा को लेकर कहते हैं, 'BJP ने इस रैली के लिए ज्यादातर नेता और कार्यकर्ता बाहर से बुलाए थे। यात्रा में चलने वाला रथ तक वाराणसी से मंगाया गया था। सभाओं में भीड़ तक नहीं थी और ये बंगाल में सरकार बदलने की बात कर रहे हैं।' PM मोदी के बंगाल को 18 हजार करोड़ रुपए देने के वादे पर रिजु कहते हैं, 'केंद्र सरकार ने अब तक राज्य का मनरेगा, जल जीवन मिशन, मिड डे मील और आवास योजना का दो लाख करोड़ नहीं दिया है और राज्य के लोगों को 18 हजार करोड़ का लॉलीपॉप दे रहे हैं। देश में लोग LPG के लिए परेशान हैं और रैली में एक लाख लोगों के लिए खाना बनाया गया। इतनी LPG कहां से आई।' 'PM मोदी ने दो बार 2019 और 2021 में ब्रिगेड में रैली की, दोनों बार इनकी सीटें घटीं। इस बार BJP की 50 से ज्यादा सीटें नहीं आएंगी। TMC पिछली सीट से भले एक सीट ज्यादा जीते, लेकिन जीतेगी जरूर।'……………………ये खबर भी पढ़ें… मुस्लिम से की शादी, भाई की पढ़ाई और राशन बंद ‘मैं और मेरा परिवार गांव में अकेला हो गया है। शादी मैंने की थी, अब उससे बाहर भी आना चाहती हूं, लेकिन फिर भी सजा मिल रही है। छोटे भाई का स्कूल छूट गया क्योंकि कोई ऑटो वाला उसे ले जाने को तैयार नहीं है। खेतों में लगी आलू की फसल खराब हो गई क्योंकि उसे निकालने के लिए कोई मजदूर तैयार नहीं। मेरा परिवार मुसीबत में है।‘ पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मेटला गांव में रहने वाली मीता घोष (बदला हुआ नाम) का परिवार सोशल बायकॉट झेल रहा है। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 15 Mar 2026 5:33 am

अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हवाई हमलों की भारत ने की कड़ी निंदा

भारत ने अफगानिस्तान के भीतर पाकिस्तान द्वारा किए गए हालिया हवाई हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे संप्रभु अफगानिस्तान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई बताया है। इन हमलों में कई नागरिकों की मौत हुई है और नागरिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।

देशबन्धु 15 Mar 2026 4:50 am

ईरान के खार्ग द्वीप पर अमेरिका का बड़ा हवाई हमला, ट्रंप का दावा- सभी सैन्य ठिकाने नष्ट; तेल ढांचे को जानबूझकर छोड़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस कार्रवाई की जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की। उन्होंने कहा कि यह हमला मध्य पूर्व के इतिहास में किए गए सबसे शक्तिशाली बमबारी अभियानों में से एक था।

देशबन्धु 14 Mar 2026 11:52 am

रोजाना 75 लाख LPG सिलेंडर की बुकिंग, डिलीवरी 50 लाख:भारत के पास कितनी रसोई गैस बची, आगे के लिए सरकार ने क्या इंतजाम किए

ईरान जंग की आंच आपकी रसोई तक पहुंच गई है। सरकार का कहना है कि लोग पैनिक में रोजाना 75 लाख LPG सिलेंडर की बुकिंग कर रहे हैं। देशभर के शहरों-कस्बों से LPG के लिए लंबी कतारें दिख रही हैं। आलम ये है कि लोग अब रेस्टोरेंट में जाकर मेन्यू से पहले पूछते हैं- गैस है या नहीं? ईरान जंग की आंच आपकी रसोई तक कैसे पहुंची, देश में कितने दिन की LPG बची है और अगर जंग खिंची तो सरकार कहां से लाएगी रसोई गैस; भास्कर एक्सप्लेनर में ऐसे 6 जरूरी सवालों के जवाब... सवाल-1: LPG क्या है और भारत को इसकी कितनी जरूरत है? जवाबः LPG यानी लिक्विड पेट्रोलियम गैस मुख्य रूप से दो गैसों का मिश्रण है- प्रोपेन और ब्यूटेन। इसका इस्तेमाल रसोई गैस के रूप में होता है। LPG कोई ऐसी चीज नहीं है, जो सीधे जमीन से निकलती है। ये पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की रिफाइनिंग के दौरान निकलने वाले बाय-प्रोडक्ट से तैयार होती है। जैसे- दही से घी निकालने में मट्ठा भी बनता है। ऐसे ही ऑयल रिफाइनरी और नेचुरल गैस की प्रोसेसिंग में LPG बनती है। इसी तरह एक और अहम गैस है LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस। इसके नेचुरल गैस के भंडार होते हैं। इसका इस्तेमाल बिजली, फर्टिलाइजर बनाने और इंडस्ट्रीज में होता है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच भारत में 30.8 मिलियन मीट्रिक टन यानी MMT एलपीजी की खपत हुई। घरेलू गैस सिलेंडर के हिसाब से रोजाना औसतन 65 लाख सिलेंडर। LPG का 88% इस्तेमाल घरेलू और 12% कॉमर्शियल होता है। देश में 33.21 करोड़ एक्टिव कनेक्शन हैं। सवाल-2: भारत के जरूरत की गैस कहां से आती है? जवाबः भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG खरीददार है। ईरान जंग से पहले 67% एलपीजी विदेशों से आती थी, लेकिन 11 मार्च को पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया कि 60% LPG विदेशों से इम्पोर्ट हो रही है। बाकी की गैस घरेलू रिफाइनरियां बना रही हैं। गैस सप्लाई करने के दो तरीके होते हैं- शिप और पाइपलाइन। भारत में शिप्स के जरिए गैस इम्पोर्ट होती है। खाड़ी, अफ्रीकी और अमेरिकी देशों से LPG और LNG खरीदी जाती है… सवाल-3: गैस आने के बाद भारत में उसका डिस्ट्रीब्यूशन कैसे होता है? जवाबः LPG और LNG से लदे जहाज जैसे ही बंदरगाह पर पहुंचते हैं, प्रोडक्ट्स के हिसाब से उन्हें अलग-अलग कर प्लांट्स में भेज दिया जाता है। लाल-नीले सिलेंडर में भरी जाती है LPG पाइपलाइंस से ट्रांसपोर्ट होती है LNG इन्वेस्टमेंट इन्फॉर्मेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ के मुताबिक, 'भारत के लिए अच्छी बात है कि यह किल्लत उर्वरकों के इस्तेमाल के ऑफ-सीजन में हुई है। खेती अभी हो नहीं रही है और किसानों को फिलहाल फर्टिलाइजर्स की जरूरत नहीं है।' सवाल-4: होर्मुज बंद होने से भारत की गैस सप्लाई पर कितना असर पड़ा है? जवाबः ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में UAE, कतर, कुवैत, सऊदी अरब जैसे दर्जनभर खाड़ी देशों को निशाना बनाया है। इसके चलते यहां के गैस प्लांट का प्रोडक्शन बंद हो गया या प्रभावित हुआ। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल के हमले जारी रहे तो हॉर्मुज स्ट्रेट से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे। यूएई, कतर, सऊदी अरब, कुवैत जैसे खाड़ी देशों से भारत की विदेश एलपीजी सप्लाई का 90% और एलएनजी का 70% खरीदता है। यहां से शिप महज 4-5 दिन में भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच जाते हैं। ये सारा शिपमेंट होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते भारत आता है, लेकिन अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते हॉर्मुज स्ट्रेट बंद पड़ा है। 1 मार्च से पहले इस जलमार्ग से रोजाना औसतन 153 शिप्स निकलते थे, लेकिन अब ये आंकड़ा 13 के करीब है। 11 मार्च को शिपिंग मिनिस्ट्री के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि फारस की खाड़ी में भारत के झंडे वाले 28 जहाज हैं। इनमें से 24 जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में हैं, जिन पर 677 क्रू मेंबर हैं। वहीं होर्मुज स्ट्रेट पर 4 जहाज हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक हैं। जंग शुरू होने के बाद 12 मार्च को पहली बार एक टैंकर होर्मुज के रास्ते मुंबई बंदरगाह पहुंचा है। सवाल-5: भारत के पास कितने दिन की LPG मौजूद है? जवाबः भारत के पास इमरजेंसी के लिए 2 LPG स्टोरेज हैं, जहां कुल 1.4 लाख टन LPG स्टोर है। 80 हजार टन LPG कर्नाटक के मंगलुरू में और 60 हजार टन आंध्र प्रदेश के विशाखापतनम में स्टोर है। कंपनियों के बॉटलिंग प्लांट्स और भरे जा चुके सिलेंडरों में भी काफी एलपीजी जमा है। हालांकि देश की जरूरतों के हिसाब से ये काफी कम है। वहीं, LNG के मामले में भारत के पास कोई स्पेशल स्टोरेज नहीं है। क्योंकि इसका सेटअप महंगा और कठिन है। इसके लिए क्रायोजेनिक यानी बेहद ठंडे टैंकर्स की जरूरत होती है। ऐसे में जितनी LNG गैस ग्रिड, पाइपलाइंस और बंदरगाहों के रिगैसिफिकेशन टर्मिनल्स में है, केवल उतनी ही LNG देश में मौजूद है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के पास 25-30 दिन की LPG और 10 दिन की LNG बची है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि घरों तक गैस की डिलीवरी ज्यादातर सामान्य है और औसत डिलीवरी समय करीब ढाई दिन है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक न करें। सवाल-6: मौजूद गैस के संकट से निपटने के लिए सरकार क्या कर रही है? जवाबः सरकार की ओर से गैस-तेल की कमी को दूर करने के लिए कुछ कदम उठाए जा रहे हैं… 1. सप्लाई रूट्स बदलना: पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के मुताबिक, ‘हम करीब 40 देशों से क्रूड इम्पोर्ट करते हैं। तेल कंपनियों ने अलग-अलग सोर्सेस से तेल मंगाया है। इसके कारण हमारा 70% क्रूड इम्पोर्ट होर्मुज स्ट्रेट के बाहर के रास्ते आ रहा है। ये पहले 55% था।’ 2. घरेलू उत्पादन बढ़ाना: पेट्रोलियम मंत्रालय ने घरेलू रिफाइनरियों को LPG प्रोडक्शन बढ़ाने को कहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक घरेलू प्रोडक्शन 28% बढ़ा है। रोजाना 50 लाख घरेलू LPG सिलेंडर बांटे जा रहे हैं। 3. होर्मुज के लिए बातचीत: भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बीते कुछ दिनों में 3 बार ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची से बात की है। वहीं, 12 मार्च की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से बात की। भारत चाहता है कि मिडिल-ईस्ट में हालात सामान्य हों और भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से निकलने की छूट मिले। 4. आवश्यक वस्तु अधिनियम: LPG सिलेंडरों की जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1995’ लागू किया है। साथ ही अलग-अलग इस्तेमाल के हिसाब से सप्लाई की प्राथमिकता तय की गई है। रसोई गैस को पहली प्राथमिकता दी गई है। वहीं कॉमर्शियल गैस हर महीने की औसतन सप्लाई की 20% ही डिलीवर की जा रही है। ग्लोबल एनर्जी थिंकटैंक एम्बर के एनालिस्ट और भारत की सरकारी तेल-गैस कंपनी के पूर्व अधिकारी दत्तत्रेय दास मानते हैं कि जंग शुरू होने बाद एक हफ्ते तक हालात अनिश्चित थे और तब सरकार ने LPG को तरजीह नहीं दी। सरकार की गलती है कि उसने रिफाइनरियों को LPG प्रोडक्शन बढ़ाने के निर्देश देने में 7 दिनों की देरी की। सवाल-7: अगर जंग लंबी छिड़ी, तो भारत कहां से गैस लाएगा? जवाबः केंद्र सरकार नए गैस सप्लायर्स से डील कर रही है। अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा और रूस जैसे देशों से से LPG खरीदी जा रही है। शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, करीब 2.2 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल लिए जहाज इस हफ्ते के आखिर तक भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया और कई अफ्रीकी देशों से भी सरकार भी गैस कारोबार कर सकती है। अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि आमतौर पर यहां से शिपमेंट आने में ज्यादा वक्त लगता है। इसके चलते LPG की घरेलू खपत में कुछ समय की किल्लत हो सकती है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में कहा कि खाड़ी देशों के अलावा अब अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस से भी गैस के कार्गो लाने की व्यवस्था की जा रही है। रूस को 3 करोड़ बैरल तेल के ऑर्डर दिए गए हैं। ------------ एलपीजी संकट से जुड़ी ये भी खबर पढ़िए… भारत के पास कितने दिन की LPG बची: जंग लंबी छिड़ी तो सरकार कहां से लाएगी रसोई गैस; आपको क्या करना चाहिए भोपाल के रहने वाले आदित्य ने 6 मार्च को IVRS कॉल से एक LPG सिलेंडर बुक किया। आमतौर पर 1 दिन बाद सिलेंडर की होम डिलीवरी हो जाती थी। जब 3 दिन बाद भी सिलेंडर घर नहीं पहुंचा, तो उन्होंने वापस IVRS डायल किया। नंबर इनवैलिड बताने लगा। आदित्य गैस एजेंसी के दफ्तर पहुंचे। वहां अफरा-तफरी मची थी। काफी मशक्कत के बाद एक सिलेंडर मिला। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 14 Mar 2026 5:03 am

जिन्हें कपड़े उतारकर घुमाया, वो मणिपुरी लड़कियां कहां गईं:3 साल से सुनवाई जारी, विक्टिम बोलीं-जिंदा हूं, पर दुनिया मुझे भूल गई

करीब 3 साल पहले। साल 2023 का जुलाई महीना। मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच चल रही हिंसा से जुड़ा एक वीडियो सामने आया। वीडियो में दो लड़कियां थीं, जिनकी न्यूड परेड कराई जा रही थी। इस वीडियो ने पूरे देश को झकझोर दिया। मणिपुर में हिंसा तो 3 मई से शुरू हो गई थी, लेकिन इस दौरान ऐसी दरिंदगी हुई होगी, किसी ने नहीं सोचा था। ये घटना मैतेई आबादी वाले थौबल जिले में 4 मई, 2023 को हुई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। वीडियो दिखाने पर बैन लगा दिया गया। जुलाई, 2023 में CBI को जांच सौंप दी गई। इसके बाद भी उस घटना का पूरा सच सामने नहीं आया। न उस दरिंदगी का दर्द किसी को पता चला। 26 फरवरी, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने CBI को आदेश दिया कि वो पीड़ित परिवारों को चार्जशीट दे। 24 मार्च को इस केस की अगली सुनवाई होगी। दैनिक भास्कर ने कोर्ट में दाखिल CBI की 47 पेज की चार्जशीट की पड़ताल की। हम पहली बार उन दो लड़कियों के बयान से उस दिन की आपबीती बताएंगे। ये भी बताएंगे कि जिन दो लड़कियों के साथ दरिंदगी हुई, उनकी जिंदगी अब कैसे गुजर रही है। इस घटना की इकलौती गवाह महिला अब कहां हैं। वे उस दिन कैसे भीड़ से बच निकली थीं। ‘भीड़ ने गांव पर हमला किया, पुलिस मौजूद थी, लेकिन मदद नहीं की’CBI की चार्जशीट में तीन महिलाओं का जिक्र है। उन्हें विक्टिम नंबर 1, 2 और 3 नाम दिया गया है। न्यूड परेड के वीडियो में दिखीं महिलाएं विक्टिम नंबर 1 और 2 हैं। ये घटना बी. फैनम गांव में हुई थी। घटना का ब्योरा पेज नंबर 10 से शुरू होता है। आरोप है कि मैतेई समुदाय के लोगों ने दोपहर करीब 3 बजे कुकी और जो समुदाय के घरों पर हमला किया था। उनके पास राइफल, लाठी, कुल्हाड़ी और चाकू थे। भीड़ ने घरों और चर्च में आग लगा दी। गांव के लोग छिपने के लिए जंगलों की तरफ भाग गए। इन्हीं में तीन पुरुष, तीन महिलाएं और ढाई साल की एक बच्ची भी थी। सभी जंगल में छिपे थे, लेकिन भीड़ ने उन्हें देख लिया। एक-एक करके जंगल में छिपे सभी लोग बाहर निकाले गए। महिलाओं और पुरुषों को अलग-अलग कर दिया। भीड़ ने पुरुषों को बुरी तरह पीटा। हालांकि, इसी भीड़ में शामिल कुछ लोगों की मदद से 3-4 विक्टिम गांव के पास सड़क किनारे खड़ी पुलिस की गाड़ी तक पहुंच गए। पेज नंबर 15 पर लिखा है कि भीड़ से बचने के लिए दो लड़कियां पुलिस की गाड़ी में बैठ गईं। उसमें दो पुलिसवाले और ड्राइवर मौजूद थे। गाड़ी के बाहर 3-4 पुलिसवाले थे। एक लड़की ने ड्राइवर से कहा कि जल्दी गाड़ी स्टार्ट करो। ड्राइवर ने जवाब दिया कि मेरे पास चाबी नहीं है। पीड़ितों ने कई बार मदद मांगी, लेकिन पुलिस से मदद नहीं मिली। भीड़ चिल्लाकर पुलिस वालों से कह रही थी कि इन्हें वापस करो। कुछ देर बाद भीड़ बढ़ने लगी। दोनों लड़कियों को बाल पकड़कर गाड़ी से बाहर खींच लिया। भीड़ देखकर पुलिसवाले भाग गए। भीड़ ने लड़कियों के कपड़े फाड़ दिए। उन्हें बिना कपड़ों के सड़क पर घुमाया। चार्जशीट के पेज नंबर-16 पर लड़कियों से हुई दरिंदगी का पूरा जिक्र है। भीड़ में से कुछ लोगों ने लड़कियों से कहा कि अपने कपड़े उतारो, वरना तुम्हें जिंदा जला देंगे। विक्टिम 1 के भाई और पिता ने उसे बचाने की कोशिश की, तो भीड़ ने लाठियों और कुल्हाड़ी से हमला कर उनकी हत्या कर दी। इसके बाद लड़कियों के कपड़े फाड़ने शुरू कर दिए। इसी दौरान विक्टिम नंबर-1 ने भीड़ में शामिल अरुण खुंडोनगबम और लोया को पहचान लिया। लोया ने ही उनके परिवार के पुरुष सदस्यों को बुरी तरह पीटा था। चार्जशीट में आगे लिखा है, भीड़ में शामिल लोग दोनों लड़कियों के ब्रेस्ट टच कर रहे थे। उन्हें नोंच रहे थे। विक्टिम नंबर-1 के प्राइवेट पार्ट को छू रहे थे। बार-बार थप्पड़ मार रहे थे। इसी दौरान आरोपी विक्टिम नंबर-1 को खेत में ले गए। उसका गला दबाने की कोशिश की। उससे गैंगरेप किया। आरोपियों ने कहा- जिसे रेप करना है, खेत में आ जाएCBI ने घटना की दूसरी विक्टिम का बयान भी दर्ज किया है। विक्टिम नंबर-2 के बारे में चार्जशीट में लिखा है- आरोपियों ने कहा कि जान बचाने के लिए तुम्हारे पास एक ही रास्ता है। या तो खुद सारे कपड़े उतार दो या फिर हम खुद ये काम करेंगे। इसके बाद भीड़ ने कपड़े फाड़ने शुरू कर दिए। इस लड़की की भी न्यूड परेड कराई गई थी। विक्टिम नंबर-1 से जहां दरिंदगी हो रही थी, उससे थोड़ी दूरी पर ही विक्टिम नंबर-2 को भी भीड़ ने घेरा हुआ था। भीड़ से कुछ लोग आवाज लगा रहे थे कि जिन लोगों को इससे रेप करना है, वे आ जाएं। इसके बाद उससे गैंगरेप किया। इस दौरान विक्टिम बेहोश हो गई। काफी देर बाद उसे थोड़ा होश आया। उसकी हालत बहुत बुरी थी। विक्टिम नंबर-2 ने बताया कि मैंने विक्टिम नंबर-1 के चीखने की आवाज सुनी थी। उसे देखा भी था। उसके आसपास काफी भीड़ थी। मैंने उस भीड़ में चिंगलेन और इनओतोन नाम के दो लोगों को पहचान लिया। इसके बाद दोनों को गांव के मेन रोड तक बिना कपड़ों के लाया गया था। भीड़ में कुछ लोग लड़कियों की मदद करना चाहते थे। उन्होंने दोनों को कपड़े देने चाहे, लेकिन आरोपियों ने उन्हें धमकाया कि दोबारा मदद करने आए तो तुम्हारा भी बुरा हाल करेंगे। चार्जशीट में लिखा है कि विक्टिम नंबर-3 भी वहीं पास में थीं। उसने पूरी घटना देखी थी। परिवारवालों की डेडबॉडी देखीं, पूरी रात जंगल में छिपी रहींजांच रिपोर्ट के मुताबिक, भीड़ दोनों लड़कियों को दूसरी जगह ले जाने लगी। रास्ते में विक्टिम नंबर-2 को अपने कपड़े बिखरे हुए मिले। उसने कुछ कपड़े उठा लिए, लेकिन फटे होने की वजह से उन्हें पहन नहीं सकीं। विक्टिम नंबर-1 ने कपड़े पहनने में उसकी मदद की। दोनों अब भी भीड़ से घिरीं हुई थीं। उन्होंने हिम्मत जुटाकर जान की भीख मांगी। इस पर भीड़ ने दोनों को छोड़ दिया। दोनों थोड़ा आगे बढ़ीं, तो उनके परिवार के दो पुरुष सदस्यों की लाशें एक दूसरे के ऊपर पड़ी देखीं। कुछ आगे गांव के पास सूखे नाले में विक्टिम नंबर 1 के भाई की डेडबॉडी मिली। उसकी खोपड़ी फटी हुई थी। आसपास कई लोग लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी लेकर खड़े हैं। कुछ के हाथ में बड़े-बड़े चाकू भी थे। ये लोग विक्टिम को रुका देखकर मारने के लिए दौड़े। कुछ बुजुर्गों ने भीड़ को रोक दिया। भीड़ का गुस्सा देखकर लड़कियां तेजी से जंगल की तरफ भागीं। आगे उन्हें गांव के दो लोग मिले। उनमें से एक के पास फोन था। विक्टिम नंबर-2 ने फोन से अपने परिचितों को घटना के बारे में बताया। इसके बाद पैदल चलते हुए दोनों इरॉन्ग तांगखुल गांव पहुंची। वहां विक्टिम नंबर-1 का दोस्त मिल गया। उसने दोनों को पहनने के लिए कपड़े दिए। वहां खतरा था, इसलिए दोस्त दोनों लड़कियों को जंगलों में ले गया। वहां उनके समुदाय के लोग छिपे थे। दोनों लड़कियों ने जंगल में ही रात बिताई। जांच के दौरान गवाहों ने माना कि दोनों के शरीर पर कपड़े नहीं थे। पोती को लेकर घर से भागी, जिंदा हूं इसलिए सब भूल गएबी. फैनोम गांव में भीड़ ने अटैक किया, तब विक्टिम नंबर 3 वहीं मौजूद थीं। उन्होंने ढाई साल की पोती को उठाया, पीठ से बांधा और घर से भागीं। भीड़ ने उसे घेरकर मारने की कोशिश की थी। कपड़े भी खींचे थे। अब ये महिला परिवार के साथ दिल्ली में रहतीं हैं। हमने उनसे बात करने वाले एक सोशल एक्टिविस्ट से विक्टिम की आपबीती समझी। विक्टिम की उम्र 55 साल है। वे घटना के बारे में बताती हैं, ‘वो डर आज भी दिलोदिमाग में है। मेरी पोती को भी सब याद है। उस समय वो ढाई साल की थी, अब 5 साल की हो चुकी है। उससे पूछो कि हम कैसे भागे थे। वो सब बता देगी।’ विक्टिम बताती हैं, ‘न्यूड परेड का जो वीडियो वायरल हुआ था, मैं उस घटना की गवाह हूं। उस दिन हमारे घरों में आग लगाई गई। हम 10 लोग बचने के लिए जंगल में भागे थे। भीड़ ने हमें खोज निकाला। मुझे भी पीटा। शायद मेरी पोती को देखकर उन्होंने मुझे छोड़ दिया था। अगर मेरी पोती न होती, तो शायद मैं भी जिंदा नहीं बच पाती। या मेरे साथ भी वैसी ही दरिंदगी होती।’ ‘मैं कई किमी तक पोती को पीठ पर बांधकर जंगल की ओर भागती रही। पूरी रात जंगल में छिपकर बिताई। बच्ची भूख से रोती रही। उस रात लगा कि अब नहीं बच पाएंगे। भूख से ही मर जाएंगे। फिर अगली सुबह पास के एक गांव में पहुंची। एक खाली घर में खाने का सामान मिल गया। इसके बाद हम राहत शिविर में पहुंचे। वहां कुछ महीने रही। मेरा 7 लोगों का परिवार है। सभी के साथ दिल्ली आ गई। यहां दो कमरे का मकान किराये पर लिया है। सब उसी में रह रहे हैं।’ पीड़ित आज भी घर से नहीं निकलतीं, आरोपी पकड़े गए, लेकिन डर बाकीजिन लड़कियों का वीडियो वायरल हुआ था, उनके बारे में गवाह बताती हैं, ‘वे अभी मणिपुर में ही रहती हैं। उस खौफ की वजह से आज भी घर से बाहर नहीं निकलती हैं। किसी से बात नहीं करतीं हैं। परिवारवालों और करीबियों से थोड़ी बात कर लेतीं हैं। डर इतना है कि आज भी कई दिन तक खाना नहीं खाती हैं। इस बात से भी डरती हैं कि वो वीडियो फिर से सोशल मीडिया पर कभी सामने न आ जाए।’ ‘घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक कमेटी बनी। 12 लाख रुपए मुआवजा मिला, आरोपियों को जेल भेज दिया गया, लेकिन इससे हमारा दर्द खत्म नहीं हुआ। इसलिए मैं कभी मणिपुर वापस नहीं जाना चाहती। हम बेशक जिंदा हैं, लेकिन सब हमें भूल गए हैं। हमें दिल्ली में भी काफी दिक्कत हो रही है, लेकिन मणिपुर जाने से डर लगता है। हमारे पास यहां घर नहीं है।’ ‘मणिपुर में हम बहुत खुश रहते थे। साल भर का धान उगाते थे। चावल मिलता था। उस घटना के बाद से दिमाग काम नहीं करता। बस टेंशन रहती है। मणिपुर लौट गए, तो वही डरावनी यादें फिर ताजा हो जाएंगी। इसलिए अब यहीं रहना है।’ दैनिक भास्कर ने इस केस की अपडेट जानने के लिए गृह मंत्रालय और CBI से कॉन्टैक्ट किया। पहले हमने गुवाहाटी में CBI ऑफिस फोन किया। वहां बताया गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए इसका जवाब आपको हेडक्वॉर्टर से मिलेगा। हमने दिल्ली में CBI हेड क्वॉर्टर में संपर्क किया। 9 मार्च को CBI और गृह मंत्रालय की ऑफिशियल ईमेल आईडी पर ये सवाल भेजे। 1. CBI ने मणिपुर हिंसा में जितनी FIR दर्ज की हैं, उनमें कितने मामलों में दोषियों को सजा हो पाई है? 2. न्यूड परेड निकालने की घटना में पीड़ित परिवार का दावा है कि उन्हें जांच से जुड़ी जानकारी नहीं दी जा रही है। ऐसा क्यों हुआ?3. कई लोगों के बयान दर्ज नहीं किए गए हैं। ऐसा क्यों हो रहा है। अब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिला है। जवाब आते ही स्टोरी अपडेट की जाएगी। …………………………..ये रिपोर्ट पढ़ें मुस्लिम से की शादी, भाई की पढ़ाई और राशन बंद, मंदिर में एंट्री नहीं पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मेटला गांव में रहने वाली मीता घोष (बदला हुआ नाम) का परिवार सोशल बायकॉट झेल रहा है। मीता ने दो साल पहले एक मुस्लिम लड़के से लव मैरिज की थी। शादी ज्यादा दिन नहीं चली, लेकिन अलग धर्म में शादी करने की ‘सजा’ मीता और उनके परिवार को अब तक मिल रही है। गांववालों का कहना है कि मीता मुसलमान हो गई है। दो साल बाद इसलिए गांव आई है, ताकि लड़के-लड़कियों का धर्म बदलवा सके। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 14 Mar 2026 5:02 am