पाकिस्तान ने अलापा बातचीत का राग, आतंकवाद पर घिरा तो याद आई शांति; सिंधु जल संधि पर लगाई गुहार
पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने भारत से बातचीत की वकालत की है. उन्होंने कहा- युद्ध समाधान नहीं है. सिंधु जल संधि और आतंकवाद जैसे मुद्दे संवाद से सुलझाए जा सकते हैं.
आरोपियों से नहीं हटाई आतंकवाद की धाराएं, बेटे ने कहा- यह न्याय व्यवस्था पर हमारे विश्वास की जीत
हाईकोर्ट से कन्हैयालाल साहू हत्याकांड के आरोपियों से आतंकवाद की धारा नहीं हटाने के फैसले से पीड़ित परिवार को बड़ी राहत मिली है। कन्हैयालाल के बेटे यश साहू ने इसे कोर्ट पर भरोसे की जीत बताया है। उन्होंने फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे परिवार की न्याय की उम्मीद और मजबूत हुई है। इस राहत के बीच यश साहू का दर्द और आक्रोश भी सामने आया। उन्होंने कहा कि पिता की निर्मम हत्या को चार साल से अधिक समय बीत चुका है। लेकिन, परिवार को अब तक पूरा न्याय नहीं मिला है। हत्यारों को अभी तक फांसी की सजा नहीं मिलने से परिवार निराश है। यश ने सरकार और कोर्ट से मामले में जल्द फैसला लेने और हत्यारों को फांसी की सजा देने की मांग की है। बता दें, आरोपियों ने भूत महल (मालदास स्ट्रीट) स्थित दुकान पर कन्हैयालाल टेलर की गला रेतकर हत्या कर दी थी। घटनाक्रम से उपजे आक्रोश के बाद शहर में हालात तनावपूर्ण हो गए थे। आगजनी तक हो गई थी। गिरफ्तार आरोपियों ने खुद के खिलाफ लगाई गई आतंकवाद से संबंधित धारा को हटाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने उनकी इस मांग को अस्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी थी।
कन्हैयालाल हत्याकांड: 8 आरोपियों पर आतंकवाद की धाराओं में ही चलेगा मुकदमा, वीडियो में जाने राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाएं खारिज कीं
प्रधान न्यायाधीश संजय के अग्रवाल और न्यायाधीश समीर जैन की खंडपीठ ने आरोपित मोहम्मद रियाज, मोहम्मद गौस सहित सभी आरोपितों की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि आरोप तय करने के चरण में अदालत मिनी ट्रायल नहीं चला सकती है।
उदयपुर के चर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड में अदालत ने आतंकवाद संबंधी धाराएं हटाने से इनकार करते हुए कहा कि मामले में आरोप तय करने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार मौजूद हैं.
उदयपुर के कन्हैयालाल हत्याकांड के 8 आरोपियों पर आतंकवाद की धाराओं में ही मुकदमा चलेगा। राजस्थान हाईकोर्ट ने सभी 8 आरोपियों की याचिकाओं को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के चार्ज फ्रेम करने के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने मोहम्मद रियाज अत्तारी, मोहम्मद गौस सहित अन्य आरोपियों की याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा- आरोप तय करने के चरण में अदालत 'मिनी-ट्रायल' नहीं चला सकती है। खंडपीठ ने कहा- इस स्टेज पर केवल यह देखना होता है कि क्या अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सबूतों से आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया केस बनता है या नहीं। अगर आरोपियों के खिलाफ 'गंभीर संदेह' मौजूद है तो कोर्ट का आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करना पूरी तरह से सही है। बता दें कि एनआईए की विशेष अदालत ने 12 जनवरी 2024 और 13 फरवरी 2024 को आरोपियों के खिलाफ UAPA, IPC और आर्म्स एक्ट के तहत आरोप तय किए थे। किसी भी आतंकवादी संगठन से संबंध नहीं आरोपियों की ओर से एडवोकेट मोहम्मद सलीम, एडवोकेट सैयत सआदत अली और अन्य ने कोर्ट को बताया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत या सामग्री मौजूद नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी कभी किसी गैरकानूनी या आतंकवादी संगठन के सदस्य रहे हैं या उन्होंने किसी ऐसे संगठन के इशारे पर काम किया है। वहीं यह पूरा मामला कथित तौर पर नूपुर शर्मा की ओर से की गई टिप्पणियों को कन्हैया लाल की ओर से सोशल मीडिया पर शेयर करने के बाद पैदा हुए विवाद से जुड़ा है। मृतक के इस कृत्य से भले ही आरोपी आक्रोशित हुए हों, लेकिन यह कृत्य अपने आप में इतना बड़ा आधार नहीं है कि आरोपियों पर UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) जैसा कड़ा कानून थोप दिया जाए। आरोपियों के वकीलों ने दावा किया कि पुलिस की ओर से बरामद किए गए वीडियो में ऐसा कोई शब्द, अभिव्यक्ति अथवा सबूत नहीं है, जिसे सार्वजनिक शांति भंग करने, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और क्षेत्र की सुरक्षा को खतरा पैदा करने वाला माना जाए। औपचारिक सदस्यता होना जरूरी नहीं मामले में एनआईए के वकीलों ने दलील दी कि UAPA की धाराओं के तहत आपराधिक साजिश का दायरा बेहद बड़ा है। इसमें केवल आतंकवादी कृत्य को अंजाम देना ही शामिल नहीं है, बल्कि उसके लिए की गई साजिश, प्रयास, उकसाना, सलाह देना, सहायता करना और घटना की तैयारी करना भी अपराध के दायरे में आता है। इसके लिए आतंकवादी कृत्य का पूरी तरह पूरा होना जरूरी नहीं है। इस मामले को केवल सोशल मीडिया मैसेज तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता है। आरोपियों की ओर से दी गई धमकी, घटना के बाद उनका आचरण, उनके पास से बरामद वीडियो और जांच में एकत्र सबूत सामूहिक रूप से बड़ी साजिश की ओर इशारा करते हैं। इन सब की जांच ट्रायल के दौरान ही हो सकती है। चार्ज की स्टेज पर इसका फैसला नहीं किया जा सकता है। एनआईए ने कहा- आरोपियों का यह कहना कि वे किसी संगठन के सदस्य नहीं है, उन्हें आरोपों से मुक्त नहीं करता है। आतंकवाद की धाराओं में चलेगा मुकदमा हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसलों को सही ठहराते हुए कहा- केस में मौजूद वीडियो , धमकियों और आरोपियों के बीच संबंधों की जांच ट्रायल के दौरान ही संभव है। इसे इस शुरुआती चरण में खारिज नहीं किया जा सकता है। ऐसे में साफ है कि सभी आरोपियों पर आतंकवाद की धाराओं में ही मुकदमा चलेगा। कन्हैयालाल हत्याकांड में रियाज और गौस समेत 11 आरोपी जयपुर की स्पेशल कोर्ट में पेश चार्जशीट में NIA टीम ने 11 लोगों को आरोपी बनाया है। चार्जशीट में साफ लिखा गया है कि- आरोपियों ने एक आतंकी मॉड्यूल के रूप में काम कर बदला लेने की साजिश रची थी। आरोपी कट्टरपंथी थे और भारत समेत दुनिया भर में आने वाले आपत्तिजनक ऑडियो/वीडियो/ मैसेज से प्रेरित थे। दोनों आरोपियों ने पूरे देश में खौफनाक तरीके से अंजाम देने के लिए चाकू और हथियारों की व्यवस्था की थी। चार्जशीट में साफ लिखा गया है कि- आरोपियों के मन में कन्हैयालाल की फेसबुक पोस्ट को लेकर आक्रोश था। कट्टरपंथी होने के चलते पूरे भारत में आतंक फैलाने के मकसद से आरोपियों ने हत्या का वीडियो बनाया और उसे शेयर किया। उन्होंने भारत के लोगों के बीच इस्लाम के प्रति लिखने पर डरने और आतंक फैलाने के इरादे से एक और धमकी भरा वीडियो भी शूट किया था। NIA को ट्रांसफर हुआ था केस दरअसल, इस केस में सबसे पहले उदयपुर के धानमंडी थाने में FIR दर्ज की गई थी। इसके बाद उसी दिन NIA ने इस केस को री-रजिस्टर्ड कर अपनी जांच शुरू की थी। चार्जशीट से सामने आया है कि आरोपियों एक आतंकी गिरोह-मॉड्यूल के रूप में काम कर बदला लेने की साजिश रची थी। आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 120बी, 449, 302, 307, 324, 153(ए), 153(बी), 295(ए), यूए(पी) अधिनियम की धारा 16, 18 और 20 और धारा के तहत चार्जशीट में दर्ज की गई है। यही नहीं आर्म्स एक्ट के 4/25(1बी) की धारा भी लगाई गई थी। बता दें 28 जून 2022 को दिनदहाड़े दुकान में घुसकर कन्हैयालाल की बेरहमी से गर्दन काट दी थी।
आतंकवाद को मानवता के खिलाफ अपराध मानने की मांग: यूएन में भारत ने उठाया मुद्दा, 2028 की संधि में क्या होगा?india United Nations terrorism crimes against humanity conventionR Mythili
आतंकवाद पर सख्त: भारत का रूख कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण, अब वैश्विक समुदाय के रवैये में भी बदलाव जरूरी

