ट्रंप प्रशासन को पहला बड़ा झटका तब लगा जब ईरान ने कतर के रास लाफान गैस हब को निशाना बनाया। यह दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) उत्पादन केंद्रों में से एक है और वैश्विक गैस आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा यहीं से संचालित होता है।
ईरान ने तुर्की-ओमान हमलों से किया इनकार
Iran Denies Trkiye-Oman Attacks
ईरान राष्ट्रपति पेजेश्कियान बोले – मुस्लिम देशों से नहीं चाहते युद्ध
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने स्पष्ट किया है कि उनका देश मुस्लिम देशों के साथ किसी भी तरह का युद्ध या टकराव नहीं चाहता
ईरान का ब्रिटेन को सख्त संदेश – बढ़ी भागीदारी तो मिलेगा जवाब
इजरायल-अमेरिका के साथ जारी संघर्ष के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने यूनाइटेड किंगडम को कड़ी चेतावनी दी है
दक्षिण कोरिया: ऑटो पार्ट्स फैक्ट्री आग में 10 की मौत, 59 घायल
दक्षिण कोरिया के डेजॉन में एक कार पार्ट्स फैक्ट्री में लगी भीषण आग में 10 लोगों की मौत हो गई जबकि चार अन्य अब भी लापता हैं
होर्मुज जलडमरूमध्य में नेपाली नागरिक हिरासत में
नेपाल सरकार ने पुष्टि की कि होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री मार्ग में चल रहे एक जहाज पर कार्यरत एक नेपाली नागरिक को ईरानी अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है
‘हमारे मुख्यमंत्री हमें पहचानते तक नहीं, हमें गालियां देते हैं। बांग्लादेश जाने को कहते हैं। हम बांग्लादेश के नहीं, असम के हैं। हमारे पास सारे कागज हैं, लेकिन क्या कर सकते हैं। वे मुख्यमंत्री हैं, बड़े आदमी हैं। हम तो कुछ भी नहीं’ ये बेबसी असम के कामरूप जिले के सोंताली गांव में रहने वाले मोफिज अली की है। वे परिवार के साथ ब्रह्मपुत्र नदी के बीचों-बीच एक टापू पर रहते हैं। इस जगह को चर इलाका कहते हैं। यहां की लगभग पूरी आबादी बांग्ला बोलने वाले मुस्लिमों की है, जिन्हें असम में मियां मुस्लिम कहते हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अपने भाषणों में मियां मुस्लिमों को निशाने पर रखते हैं। पिछले कुछ भाषण और सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने मियां मुस्लिमों पर ऐसे बयान दिए, जिससे मुख्यमंत्री और मियां मुस्लिम दोनों विवादों में आ गए। असम की 126 सीटों पर 9 अप्रैल को वोटिंग होगी। हिमंता जलुकबाड़ी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने 20 मार्च को नामांकन दाखिल कर दिया है। BJP जीती तो वे दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। CM पद की शपथ लेते हुए उन्होंने कहा था, ‘मैं भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा, भारत की संप्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूंगा, भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना, संविधान और विधि के अनुसार सभी लोगों के प्रति न्याय करूंगा’ हालांकि उनके बयान इस शपथ से मेल नहीं खाते। कभी वे कहते हैं कि मियां मुस्लिमों को इतना परेशान करो कि असम छोड़कर चले जाएं। कभी कहते हैं, मियां मुस्लिम किडनी दे देंगे, पर वोट नहीं देंगे। आखिर क्या हो गया कि हिमंता एक समुदाय के बारे में आक्रामक बयान दे रहे हैं। यही समझने दैनिक भास्कर की टीम दूसरे पक्ष यानी मियां मुस्लिमों के पास पहुंची। कामरूप का सोंताली गांवयहां 95% आबादी मियां मुस्लिमसबसे पहले हम गुवाहाटी से करीब 75 किलोमीटर दूर कामरूप जिले के सोंताली गांव पहुंचे। सोंताली समारिया विधानसभा सीट में है। समारिया विधानसभा क्षेत्र में करीब 1.3 लाख लोग रहते हैं, इनमें करीब 95% मियां मुस्लिम हैं। सोंताली के बाजार में अशरफ से मिले। उम्र करीब 35 साल। अशरफ कहते हैं, ‘यहां माहौल अच्छा नहीं है। हमारे मुख्यमंत्री हिटलर और डोनाल्ड ट्रम्प की तरह शासन चला रहे हैं। सीधे बोलते हैं कि मुसलमानों को हटाओ और बांग्लादेश भेजो।’ साेंताली से करीब 5 किमी दूर ब्रह्मपुत्र नदी का किनारा है। मियां मुस्लिमों की कहानी इसी जगह से जुड़ी है। यहां के ज्यादातर मर्द लुंगी पहने नजर आएंगे। कुछ महिलाएं नथुनों के निचले हिस्से में नथ पहनती हैं। इनका मुख्य पेशा खेती, मछली पकड़ना और बेचना है। हम नाव से एक आईलैंड पर पहुंचे। इसे बोको गांव कहते हैं। मियां मुस्लिम यहां रहकर खेती करते हैं। बाढ़ आती है, तब उसी बाजार की तरफ चले जाते हैं, जहां से हम यहां आए थे। ये मिट्टी वाला एरिया है। कुछ-कुछ दूरी पर झोपड़ियां बनी हैं। दोपहर हो चुकी थी। खेतों में काम करके थक चुकी कुछ महिलाएं और पुरुष ऊंचे चबूतरे पर बैठकर आराम कर रहे थे। हमने इन लोगों से पूछा कि मुख्यमंत्री आपके बारे में बयान देते हैं, क्या आपने सुने हैं? जवाब कुद्दुस अली देते हैं। कहते हैं, ‘मुख्यमंत्री हमारे बारे में बहुत खराब बोलते हैं। वे पहले कांग्रेस में थे, तब यहां आते थे। तब हम भी उन्हें पसंद करते थे, लेकिन अब नहीं करते। BJP में जाने के बाद उन्होंने हिंदू-मुस्लिम की राजनीति शुरू कर दी है।’ ‘असम में 60% हिंदू और 40% मुस्लिम आबादी है। हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करने से उन्हें ज्यादा हिंदू वोट मिलेंगे और वे जीत सकते हैं। इसीलिए बांग्लादेश का मुद्दा उठा रहे हैं। हमारे पास आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी सब है। फिर भी हमें बांग्लादेशी बता रहे हैं। वे बोलते हैं कि मियां हटाओ, देश बचाओ।’ महिलाएं बोलीं- CM ने पैसे दिए, लेकिन घर तोड़ दियाअसम सरकार अरुणोदय योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 1,450 रुपए देती है। मुफ्त राशन भी मिलता है। हमने योजना का फायदा लेने वाली मुस्लिम महिलाओं से बात की। वे अरुणोदय योजना के अलावा सेल्फ हेल्प ग्रुप को मिलने वाले 10 हजार रुपए से खुश हैं। वे कहती हैं कि मुख्यमंत्री अच्छे हैं। हालांकि, एक महिला शिकायती लहजे में बोलीं, ‘मुझे कुछ नहीं दिया, तो मैं उन्हें क्यों अच्छा कहूं। हमारा तो घर तोड़ दिया। वो मुझे बिल्कुल पसंद नहीं हैं।’ हिमंता कब और कैसे मियां मुस्लिमों के खिलाफ होते गए1979 से 1985 के बीच असम में बांग्लादेश से आए घुसपैठियों के खिलाफ अखिल असम छात्र संघ के नेतृत्व में आंदोलन हुआ था। इस पर ‘इन्फिल्ट्रेशन-जेनेसिस ऑफ असम मूवमेंट’ किताब लिखने वाले प्रो. अब्दुल मन्नान बताते हैं कि पहले हिमंता इस तरह नहीं बोलते थे। वे कांग्रेस में थे, तब उन्होंने कहा था कि गुजरात में पानी के पाइप में मुस्लिमों का खून बहता है। और अब कहते हैं कि मुस्लिमों ने असम को बर्बाद कर दिया। वे सिर्फ सत्ता पाने के लिए ये सब कर रहे हैं। 1. मुस्लिम विवाह कानून रद्द कियाअसम सरकार ने 23 फरवरी, 2024 को करीब 89 साल पुराने असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम 1935 को रद्द कर दिया। तब हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था कि इस कानून में निकाह को रजिस्टर्ड करने की परमिशन देने वाले प्रावधान शामिल थे, भले ही दूल्हा और दुल्हन 18 और 21 साल की कानूनी उम्र तक न पहुंचे हों। इससे सरकार को बाल विवाह रोकने में मदद मिलेगी।2. एक से ज्यादा शादी करने पर रोकअसम विधानसभा ने बहुविवाह पर रोक लगाने के लिए 27 नवंबर, 2025 को विधेयक पारित किया। इस कानून के तहत एक पत्नी के रहते हुए दूसरी शादी करने पर 7 साल तक की सजा हो सकती है। असम में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 लागू है। इसके तहत हिंदू दो शादी नहीं कर सकते। 3. 1,281 मदरसे बंद किएहिमंता सरकार ने 27 जनवरी 2021 को असम मदरसा शिक्षा (प्रांतीयकरण) अधिनियम, 1995 और असम मदरसा शिक्षा (शिक्षकों की सेवाओं का प्रांतीयकरण और शैक्षणिक संस्थानों का पुनर्गठन) अधिनियम, 2018 को निरस्त कर दिया। इससे 1,281 मदरसों को मिडिल इंग्लिश यानी ME स्कूल में बदल दिया गया। इसका असर अहमद की कहानी से समझिए। अहमद 8वीं में पढ़ता है। सरकारी मदरसा बंद होने के बाद उसे कुरान सीखने के लिए 150 किमी दूर दूसरे जिले होजाई जाता है। अहमद का मदरसा अब मिडिल स्कूल है। उसमें कुरान नहीं पढ़ाई जाती। इसलिए वह निजी मदरसे में जाता है। इस मसले पर असमिया परिषद के जनरल सेक्रेटरी मुक्तार मंडल कहते हैं, ‘देश का कानून समान है, लेकिन हिमंता सरकार ने मुसलमानों को टारगेट करके कानून लागू किया है, ताकि मुस्लिम कोर्ट- कचहरी में दौड़ते रह जाएं।’ 4. 5 समुदायों को असमिया मुस्लिम का दर्जा, मियां मुस्लिम इससे बाहरहिमंता 5 मुस्लिम समुदायों को खिलंजिया, यानी भूमि पुत्र बताते हैं। इसमें गोरिया, मोरिया, जोलहा, देशी और सैयद शामिल हैं। ये सभी असमिया भाषा बोलते हैं। गोरिया, मोरिया, जोलहा चाय बागानों के आसपास बसे हैं। देशी मुसलमान निचले असम में रहते हैं। सैयद को असमिया मुसलमान कहा जाता है। एक फैसला चुनाव आयोग काबाकी राज्यों में SIR, लेकिन असम में SRदेशभर में वोटर की पहचान के लिए स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन, यानी SIR की प्रोसेस चल रही है। असम को इससे बाहर रखा गया। चुनाव आयोग ने कहा कि राज्य में चल रही NRC, यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है। इसके बाद सिर्फ 10 दिन के अंदर 17 नवंबर 2025 को चुनाव आयोग ने असम में स्पेशल रिवीजन यानी SR कराने का आदेश जारी कर दिया। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने असम की बेदखली पर जारी रिपोर्ट में बताया था कि दरांग में 1,300, लखीमपुर में 500 और नगांव में 1 हजार से ज्यादा परिवार बेघर हुए। प्रभावितों में 90% से ज्यादा मियां मुस्लिम हैं। कांग्रेस लीडर और गुवाहाटी हाईकोर्ट के सीनियर वकील हाफिज रशीद अहमद चौधरी इस पर सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं, ‘राज्य में जहां-जहां सरकार ने अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया है, वहां अब लोग नहीं रहते। घर टूटने की वजह से वे दूसरी जगह शिफ्ट हो गए। बीएलओ उनके वेरिफिकेशन के लिए जाएंगे, लेकिन वहां कोई नहीं मिलेगा। इससे सैकड़ों नाम कट सकते हैं।’ असमिया मुस्लिम बोले- मियां मुस्लिम हमारी जमीन हड़प रहेकामरूप जिले के सोयगांव में रहने वाले अबुल कासिम असमिया मुस्लिम हैं। वे कहते हैं, ‘हमारे गांव में बांग्लादेशी घुसपैठिए (मियां मुस्लिम) रहते हैं। उन लोगों ने हमारी जमीन हड़प ली। कोर्ट में केस चल रहा है। जमीनों का टैक्स हम भरते हैं, लेकिन रहते वे हैं। हम सब हिंदू-मुस्लिम गोरिया- मोरिया भाई-भाई हैं, लेकिन मियां मुस्लिम के साथ नहीं हैं।’ मंजू बीबी गोरिया मुस्लिम समुदाय से हैं। वे कहती हैं, कुछ मियां लोगों की वजह से हमें परेशानी होती है। चोरी-डकैती की घटनाओं से डर का माहौल रहता है। खासकर लड़कियां असुरक्षित महसूस करती हैं। हालांकि, मोहम्मद तमीज अली अबुल और मंजू बीबी से अलग राय रखते हैं। वे कहते हैं ‘मुख्यमंत्री सिर्फ दिखावा करते हैं। हमारे लिए कुछ नहीं करते। ये कई साल से चल रहा है। मुख्यमंत्री गोरिया मुस्लिम के साथ नहीं हैं। वे मियां के साथ हैं। हिमंता असमिया मुस्लिम के नाम पर राजनीति कर रहे हैं।’ ‘मियां मुस्लिमों को सभी योजनाओं का फायदा क्यों मिलता है। वे बांग्लादेशी हैं तो उन्हें हमसे ज्यादा फायदा क्यों मिल रहा है। मुख्यमंत्री के बोलने से नहीं होगा, करना पड़ेगा। हम खिलंजिया (स्वदेशी) मुस्लिम, मियां मुस्लिम से अलग हैं। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री हमारी जमीन लौटाएं और हमें बसाएं।’ ‘मुस्लिमों को आपस में लड़ाने की कोशिश’वहीं, प्रो. अब्दुल मन्नान कहते हैं, ‘मुस्लिमों को आपस में लड़ाने की कोशिश की जा रही है। गोरिया, मोरिया को कितना खिलंजिया माना गया है, इसका जवाब मुख्यमंत्री को देना होगा। हजारों खिलंजिया का नाम वोटर लिस्ट से काटा गया। ये BJP की स्ट्रैटजी है कि मियां मुस्लिम के खिलाफ दूसरे ग्रुप को खड़ा करे।’ ‘हिमंता बिस्वा सरमा स्ट्रैटजी बनाने में माहिर हैं। उन्होंने पहले एजेंडा चलाया कि झारखंड में घुसपैठिए हैं। अगर BJP की सरकार आई, तो सबको भगा देंगे। दो महीने वहां खूंटा गाड़कर बैठे रहे, लेकिन क्या हुआ। वे कुछ समय तक कुछ लोगों को मूर्ख बना सकते हैं, लेकिन हमेशा नहीं बना सकते।’ कांग्रेस से BJP में आए हिमंता, असम में सरकार बनवाई …………………….. असम से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ेंक्या महिलाएं खोलेंगी BJP की जीत का रास्ता, स्कीम से मुस्लिम भी खुश कामरूप जिले में एक महिला साइकिल पर बेटी को लेकर जा रही थी। हमने पूछा- सरकारी योजनाओं के पैसे मिले क्या? जवाब मिला- ‘हां, मिले हैं।’ हमने पूछा, अबकी बार किसकी सरकार? वे मुस्कुराकर बोलीं- ‘BJP की।’ असम में करीब हर चौक-चौराहे पर सरकारी योजनाओं और उनका फायदा लेने वालों की तस्वीरें हैं, जिनमें CM हिमंता बिस्वा सरमा महिलाओं को चेक देते दिख रहे हैं। इन योजनाओं से मुस्लिम महिलाएं भी खुश हैं। पढ़िए पूरी खबर...
Cuba Crisis: क्यूबा पर मंडराते संकट के बादल, ट्रंप की 'आसन्न कार्रवाई' की चेतावनी से हड़कंप
ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा की घेराबंदी तेज कर दी है। आम जनता बुनियादी संसाधनों की कमी से जूझ रही है। अमेरिकी प्रतिबंधों, तेल की किल्लत के कारण पूरे क्यूबा में ब्लैकआउट (बिजली कटौती) की स्थिति है।
US Iran War: अमेरिकी F-35 लाइटनिंग विमान पर हमले का दावा, आपात लैंडिंग की पुष्टि
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि मिसाइल हमले के बाद संबंधित एफ-35 को आपात स्थिति में लैंडिंग करनी पड़ी, लेकिन विमान और पायलट दोनों सुरक्षित हैं।
नेतन्याहू बोले- US को युद्ध में हमने नहीं घसीटा, दावा- ईरान की परमाणु-मिसाइल क्षमता लगभग खत्म
पत्रकारों से बातचीत में नेतन्याहू ने कहा, “हम जीत रहे हैं और ईरान तबाह हो रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडार को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है और इन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा।
तुलसी गबार्ड ने कहा, ईरान में अमेरिका एवं इजरायल के युद्ध के उद्देश्य एक जैसे नहीं
गबार्ड के बयान से यह स्पष्ट हुआ कि भले ही अमेरिका और इजराइल एक ही मोर्चे पर खड़े हों, लेकिन उनके सैन्य लक्ष्य अलग-अलग हैं। इजराइल ने हाल के हमलों में ईरान के धार्मिक नेताओं और सैन्य कमांडरों को सीधे निशाना बनाया है।
अमेरिकी कांग्रेस में 200 बिलियन डॉलर युद्ध फंडिंग पर तीखी बहस
ईरान युद्ध की बढ़ती लागत और इसके वैश्विक बाजारों पर प्रभाव ने अमेरिकी कांग्रेस में विभाजन को और गहरा कर दिया है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के बीच व्हाइट हाउस में हुई बैठक ने वैश्विक राजनीति में एक अहम संदेश दिया
2026 में अधिक सक्रिय राजकोषीय नीति का कार्यान्वयन जारी रहेगा : चीनी वित्त मंत्रालय
चीनी वित्त मंत्रालय ने '2025 में चीन की राजकोषीय नीति के कार्यान्वयन पर रिपोर्ट' जारी की है, जिसमें बताया गया है कि वर्ष 2025 में चीन की अर्थव्यवस्था ने समग्र रूप से स्थिर और सुचारू प्रगति बनाए रखी तथा राजकोषीय संचालन व्यवस्थित और संतुलित रहा
हालात ठीक नहीं, युद्ध को रोकने की जरूरत: तेहरान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर
मिडिल ईस्ट तनाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ने लगा है। पहले यूएस-इजरायल की ईरान पर एयर स्ट्राइक फिर जवाबी कार्रवाई इसके बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनातनी, खार्ग पर अमेरिका के हमले से होते हुए अब बात ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले तक पहुंच गई है
चीन-यूरोप रेलवे एक्सप्रेस खुली विश्व अर्थव्यवस्था को गति दे रही है : सीजीटीएन सर्वे
इस वर्ष के पहले दो महीनों में चीन-यूरोप रेलवे एक्सप्रेस ने कुल 3,501 रेलगाड़ियों का संचालन किया और 3 लाख 52 हजार टीईयू (टीईयू) माल का परिवहन किया
चीन-यूएई संबंधों को नई मजबूती देने पर जोर, तिंग श्वेएश्यांग ने यूएई दूत से की मुलाकात
चीन की राजधानी पेइचिंग में सीपीसी केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य और चीनी राज्य परिषद के उप प्रधानमंत्री तिंग श्वेएश्यांग ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति के चीन मामलों के विशेष दूत खालदून खलीफा अल मुबारक से मुलाकात की
शी चिनफिंग ने तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रीय नेता से मुलाकात की
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने राजधानी पेइचिंग स्थित त्याओयुथाई स्टेट गेस्टहाउस में तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रीय नेता और पीपुल्स काउंसिल के अध्यक्ष गुरबांगुली बर्दिमुहामेदोव से मुलाकात की
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में चीनी प्रतिनिधि ने भाषण दिया
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र में मानवाधिकार मुद्दों पर आम बहस आयोजित की गई
चीन-अमेरिका व्यापार परामर्श तंत्र की भूमिका का लाभ उठाना जारी रखें : चीनी वाणिज्य मंत्रालय
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने आयोजित नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेरिस में हुई चीन-अमेरिका व्यापार वार्ता पर जानकारी दी
बेटी के घर जाना बना अली लारीजानी की मौत का कारण, कैसे ईरानी सुरक्षा प्रमुख को इजरायली सेना ने खोजा
खामेनेई के मारे जाने के बाद इजरायल के लिए लारीजानी सबसे बड़ा लक्ष्य बन गए थे। इजरायली खुफिया एजेंसियां लगातार उनकी लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश कर रही थीं। हालांकि, लारीजानी को भी इस खतरे का पूरा अंदाजा था। इसी वजह से उन्होंने अपनी सुरक्षा बढ़ा दी थी और लगातार ठिकाना बदल रहे थे।
हमलों से ईरान हुआ कमजोर, लेकिन खतरा अभी खत्म नहीं: अमेरिकी इंटेलिजेंस
अमेरिकी इंटेलिजेंस अधिकारियों ने सीनेटरों को बताया कि हाल के अमेरिकी अभियानों से ईरान की सैन्य और रणनीतिक क्षमताएं काफी कम हो गई हैं
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने ईंधन आपूर्ति के लिए की टास्क फोर्स की घोषणा
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बेनेस ने गुरुवार को घोषणा की कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच संघीय सरकार ने ईंधन सुरक्षा टास्क फोर्स का गठन किया है
अमेरिका में इमिग्रेशन पर सख्त रुख, मार्कवेन मुलिन बोले-कानून तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
अमेरिका के गृह सुरक्षा सचिव पद के नामित मार्कवेन मुलिन ने कहा कि वे कानूनी आव्रजन का समर्थन करते हैं
पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने ईद के अवसर पर की युद्धविराम की घोषणा
पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने ईद-उल-फ़ितर के अवसर पर शत्रुता में “अस्थायी विराम” की घोषणा की। यह कदम सऊदी अरब, तुर्की और क़तर की अपीलों के बाद उठाया गया
पेंटागन की चेतावनी: रूस-चीन को एक साथ रोकना ‘अभूतपूर्व चुनौती’
वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों ने विधायकों को बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका को एक ही समय में दो परमाणु शक्तियों को रोकने की “अभूतपूर्व चुनौती” का सामना करना पड़ रहा है
चिलचिलाती धूप में दूर तक फैला नमक का मैदान इतनी तेज चमक रहा है कि आंखों में चुभ रहा है। दूर तक कहीं छांव नहीं। अचानक एक महिला, रमिला, काम छोड़कर धीरे से कहती है- ‘दिन में हम शौच नहीं जाते… लोग देख लेंगे। इसलिए खाना भी कम खाते हैं… ताकि बार-बार जाना न पड़े। सरकारी पानी का टैंकर महीने में सिर्फ एक बार आता है। उसमें भी खारा पानी होता है। जब पीने के लिए पानी नहीं, तो नहाने के लिए कहां से मिलेगा। महीने में एक बार… और वो भी पीरियड के बाद ही नहाती हूं। पीरियड में तो नहाना जरूरी होता है न! लगता है… नमक में पैदा हुए हैं… और नमक में ही मर जाएंगे।' स्याह कहानियों की सीरीज ‘ब्लैकबोर्ड’ में नमक की खेती करने वाले किसानों की कहानी। ये किसान 8 महीने तंबू में रहते हैं। महीनों नहा नहीं पाते। उनके पैरों की चमड़ी खराब हो जाती है और एक किलो नमक के सिर्फ 30 पैसे मिलते हैं। मैं गुजरात के सुरेंद्रनगर से करीब 70 किलोमीटर दूर ‘लिटिल रण ऑफ कच्छ’ में हूं। यहां देश का करीब 30 फीसदी नमक पैदा होता है। सुबह के 8 बजे ही लगभग 12 लाख एकड़ यानी 5,000 वर्ग किमी में फैले रण में सूरज सिर के ऊपर जलता हुआ दिखाई दे रहा है। इसी मैदान में रमिला अपनी मां सोनल के साथ नमक का ढेर समेट रही हैं। रमिला के पैरों में चप्पल और मोजे हैं, जबकि उनकी मां नंगे पैर लकड़ी के फावड़े से नमक समेट रही हैं। मेरे कुछ पूछने से पहले ही रमिला कहती हैं, ‘खाली पैर रहने पर तलवों में घाव हो जाता है। ये घाव सालों-साल नहीं सूखते। हमेशा खुजली और जलन बनी रहती है। कभी-कभी तलवा इतना नोच देती हूं कि खून आ जाता है। मन करता है, पैर काटकर फेंक दूं।’ ‘मां को तो नंगे पैर रहने की आदत हो गई है। मुझसे नहीं हो पाता। जूते पहनती हूं, तो उनमें नमक के मोटे दाने फंस जाते हैं। इससे और खुजली होने लगती है। इसलिए मोजे ही पहनती हूं। अब नमक पक चुका है। 15-20 दिन में पूरा खेत खाली हो जाएगा।’ रमिला बताती हैं, ‘साल के 12 में से 8 महीने हमें इसी नमकीन दलदली रण के बीच रहना पड़ता है। अगस्त-सितंबर आते-आते पूरा गांव तंबू लेकर यहीं आ जाता है। जब हम आते हैं, तो यह पूरा इलाका दलदल होता है। इसी में तंबू गाड़कर रहना पड़ता है।’ ‘नमक की खेती शुरू होने से पहले ही आंधी-तूफान, चिलचिलाती धूप और फिर शून्य डिग्री तापमान… हर मौसम की मार झेलनी पड़ती है।’ कब से नमक की खेती कर रही हैं?' रमिला की जवाब देतीं उससे पहले ही उनकी मां सोनल बोल पड़ीं, 'पैदा होते ही नमक के खेत में आ गए। रमिला को मैं अपनी पीठ पर साड़ी में बांधकर खेती करती थी। पति इतना शराब पीता था कि एक-एक रुपए की मोहताज रहती थी। जब ये 5-6 साल की हुई, तो मेरे साथ खेत में आने लगी। अब इसकी 4 महीने की बेटी है। इसी तंबू में ही पैदा हुई है। यहीं खेलते-कूदते बड़ी हो जाएगी और हमारी तरह खेत में नमक तैयार करने लगेगी।’ मां की बात सुनते ही रमिला तुरंत टोकती हैं, ‘नहीं चाहती हूं कि मेरे बच्चे भी नमक की खेती करें। इस खेती से जख्म के अलावा क्या मिलता है। अगर दूसरा काम होता, तो यहां यूं जिंदगी नहीं खपा रहे होते। हम तो साल का बड़ा हिस्सा इसी नमक में गुजार देते हैं। आप मेरे तंबू में चलिए, दिखाती हूं हम कैसे रहते हैं।’ ये बातें कर ही रही थीं कि 21 साल की रमिला की गोद में उनकी 4 महीने की बेटी आ जाती है। पड़ोसन अभी-अभी उसे तंबू से उठाकर लाई है। बातचीत के बीच रमिला उसे दूध पिलाने लगती हैं। कहती हैं, ‘हमें तो दूध भी नसीब नहीं होता। अब ये नवजात है, तो अपना दूध तो पिलाना पड़ेगा न… बहुत देर से भूखी होगी।’ उसके बाद रमिला मेरे साथ अपने तंबू की ओर चल पड़ती हैं। धूप और तेज होती जा रही है। रमिला चलते-चलते कहती हैं, ‘काम न करूं, तो मालिक दिहाड़ी काट लेगा। तेज धूप में काम रोकना पड़ता है। सफेद नमक पर धूप पड़ती है, तो और खतरनाक हो जाता है। हमें त्वचा और आंखों की बीमारी हो जाती है।’ तंबू के पास उनकी पड़ोसन बर्तन धो रही हैं। रमिला वहीं सोलर प्लेट की छांव में बेटी को खाट पर सुला देती हैं। खुद बैठते हुए कहती हैं, ‘यही हमारा ठिकाना है। रण में पानी का टैंकर 20-30 दिन में एक बार आता है। वही पानी पीना पड़ता है। जब पीरियड्स आता है, तभी हम महिलाएं नहाती हैं। पीने का पानी नहीं, तो नहाने का कहां से आएगा… आप यकीन नहीं करेंगे, हम कम खाते हैं, ताकि रात में ही शौच जाना पड़े।’ ‘रात में?’ ‘क्या करूं… हमारी भी तो इज्जत है। यहां दूर-दूर तक घास का तिनका नजर नहीं आएगा। दिन में कहां जाएं? कोई देख लेगा। इसलिए खाना भी कम खाते हैं, ताकि दिन में न जाना पड़े। बरसात में चूल्हे की लकड़ी भीग जाती है, तो भूखे रहना पड़ता है। उस समय आटा घोलकर पी लेते हैं। छप्पर से पानी टपकता है, तो रातभर जागकर गुजारनी पड़ती है। गोद में छोटा बच्चा है… कहीं कोई जानवर आकर उसे न ले जाए, यही डर लगा रहता है।’ तंबू के एक कोने में रखी गुदड़ियों की ओर इशारा करते हुए रमिला कहती हैं, ‘अभी जितनी गर्मी है, उससे भी ज्यादा कड़ाके की ठंड पड़ती है। पेट की खातिर रहना तो है ही यहांं। यही गुदड़ियां ओढ़कर रात काटती हूं, फिर भी ठंड से कांपती रहती हूं। उस वक्त मोबाइल पर देखती हूं- देश में क्या-क्या हो रहा है… हमारी जिंदगी तो पहले जैसी थी, आज भी वैसी ही है। हां, कुछ साल पहले तक जेनरेटर चलाकर रहना पड़ता था। जमीन से पानी खींचते थे, बल्ब जलाना पड़ता था। अब सरकार ने सोलर लगवा दिए हैं।’ लेकिन सोलर सिस्टम खराब हो जाए, तो मोमबत्ती भी यहां नहीं टिकती। तेज हवा चलती है। तब टॉर्च की रोशनी में खाना बनाना पड़ता है।’ जिस खेत में रमिला काम कर रही हैं, वहां मालिक जोर-जोर से आवाज देने लगता है। बातचीत करते-करते वह नमक का ढेर लगाने वापस चली जाती हैं। खेत में पहुंचते ही उनकी मां सोनल कहती हैंकि जल्दी-जल्दी काम खत्म करो। बात करने से थोड़े न पेट भरेगा। धूप तेज हो रही है, चमड़ी जलने लगेगी। सोनल की उम्र 60 के करीब लगती है। पूछने पर तंज कसते हुए कहती हैं- ‘आपको तो हर चीज खाने-पीने को मिलता होगा। हमें दूध-दही नसीब नहीं होता। बस पेट भरने के लिए जो मिल जाए, खा लेते हैं। मेरी उम्र 45 साल है। अब 8 महीने घर से दूर रहूंगी। कड़कड़ाती धूप में नमक पकाती हूं, तो उम्र तो घटेगी ही न। हाथ-पैर की चमड़ी बीमारी फैल गई है। जैसे मछली की चमड़ी उखड़ती है, वैसे ही हमारे हाथ-पैर की चमड़ी उखड़ती है। खुजली भी बनी रहती है। हर साल का यही हाल है।’ अब रमिला और सोनल खेत में नमक का ढेर खींचने में लग जाती हैं। तीन-चार लोग ट्रैक्टर और फावड़े से ढेर जमा रहे हैं। यहीं पास में जगदीश सवारियां ट्रैक्टर चला रहे हैं। वह कहते हैं, ‘मेरी उम्र देख लीजिए- 30 साल का हूं। आप भी करीब 30 के होंगे, लेकिन हम दोनों में कितना फर्क दिख रहा है। इसी से आप हमारी मेहनत समझ सकते हैं। 10वीं तक पढ़ा हूं। एक महीने पहले तक मेरी गर्भवती पत्नी इसी तंबू में रहती थी। अचानक उसे दर्द हुआ, तो एंबुलेंस बुलाकर अस्पताल ले गया। बच्चा होने के बाद से गांव में है। कुछ दिन बाद फिर यहीं आ जाएगी। अभी बच्चे को यहां नहीं ला रहा। कुछ हो गया तो… आप देख ही रहे हैं कि कितनी गर्मी है। बाद में बच्चा भी आएगा और मां उसे पीठ पर बांधकर काम करेगी। ऐसे ही हमारे बच्चों की जिंदगी नमक के खेत से शुरू होती है। अब नमक तैयार हो चुका है। कुछ समय बाद रण में पानी भर जाएगा, इसलिए नमक को इकट्ठा करके शहर में स्टॉक किया जा रहा है। अगर रोज खेत में फावड़ा और दंतालो नहीं चलाओ, तो नमक खराब हो जाता है। सेठ से कर्ज लेकर खेती करता हूं। नुकसान हो गया, तो कैसे चुकाऊंगा।’ सामने दो बड़े टैंकर ट्रक खड़े हैं। इनमें नमक बनने के बाद बचा हुआ पानी खींचा जा रहा है। जगदीश कहते हैं- यह पानी फैक्ट्री में जाता है। इससे केमिकल बनता है। एक टैंकर के हजार रुपए मिलते हैं। करीब 50 फीट गहराई से बोरवेल के जरिए पानी निकाला जाता है। इसी पानी में नमक होता है, जिसे क्यारियां बनाकर जमाते हैं और नमक तैयार करते हैं।’ कितना मुनाफा होता है? जगदीश हंसते हुए कहते हैं, ‘यह पूरा रण पाटड़ी के दरबार जैसा है। हम सेठ से खेत लीज पर लेकर नमक जमाते हैं। हर साल अलग-अलग जगह पर तीन-चार बोरवेल डालने पड़ते हैं। जहां ज्यादा पानी निकलता है, वहीं खेती करने लगते हैं। एक किलो नमक के करीब 30 पैसे मिलते हैं। इससे क्या होने वाला है? हम सेठ से ही पैसा लेकर खेती करते हैं। फिर जो नमक बिकता है, उसका आधा हिस्सा सेठ को देना होता है। एक सीजन में मुश्किल से 50 हजार रुपए बचते हैं। वो भी खाने-पीने में खर्च हो जाते है। फिर अगले सीजन में सेठ से दोबारा कर्ज लेना पड़ता है। ऐसे ही यहां जिंदगी चलती है।’ इतनी मुश्किल है, तो क्यों करते हो नमक की खेती? पूछते ही जगदीश कहते हैं, ‘हम लोगों के पास खेती की एक धुर जमीन भी नहीं है। फिर क्या करें? कोई दूसरा काम नहीं आता। पुरखों से यही काम सीखा है। मैं तो नमक के खेत में ही पैदा हुआ था। यहां पढ़ने का कोई साधन नहीं है। हम लोग सिर्फ 4 महीने ही गांव में रह पाते हैं, फिर 70 किलोमीटर दूर इस रण में आ जाते हैं। कुछ सालों से सरकार ने ‘बस वाला स्कूल’ शुरू किया है। यहां 7वीं तक के बच्चे पढ़ पाते हैं। इसके बाद पढ़ने का कोई साधन नहीं है। अब हम अपने बच्चों को शहर भेजने की सोच रहे हैं।’ धूप तेज हो चुकी है। मेरे लोकल साथी भरत भाई कहते हैं, ‘दूसरे तंबू में चलते हैं। 12 बजे के बाद यहां रुकना मुश्किल हो जाएगा।’ हम यहां से पास के दूसरे तंबू की ओर चल पड़ते हैं। यहां 15 साल का राकेश नमक के खेत में दंतालो नाम का एक औजार चला रहा है। उसके पैर में काला बूट है। वह कहता है, ‘खाली पैर नमक के खेत में चलेंगे, तो पैर सड़ जाएंगे। इसलिए जूते पहनने पड़ते हैं। नमक की खेती की वजह से पढ़ाई छोड़ दी। अब 8 महीने यही रहूंगा। पूरे खेत में दंतालो न चलाऊं, तो नमक जमकर पीला पड़ जाता है। फिर व्यापारी दाम नहीं देते। दंतालो चलाने से ही नमक छोटे-छोटे टुकड़ों में जमकर इकट्ठा होता है।’ राकेश के सामने ही खेत की मेड़ पर कालू सुरेला खड़े हैं। वह कहते हैं, ‘शुरू से हम लोग यही करते आ रहे हैं। दूसरा कोई काम करने का रास्ता नहीं है। इस इलाके में नमक की खेती और फैक्ट्री के अलावा कुछ नहीं है। इस तरह रण में करीब 4,800 से ज्यादा परिवार नमक की खेती करते हैं। हमने अपनी जवानी नमक में खपा दी। अब नहीं चाहते कि हमारी अगली पीढ़ी भी यही करे। इसमें पूरी जिंदगी तबाह हो जाती है। मुनाफा तो व्यापारियों को होता है। व्यापारी हमारा नमक 30 पैसे में खरीदकर उसे प्रॉसेस करके 30 रुपए में बेचते हैं। हमें मिलता है बस- बेउम्र बुढ़ापा। 40-45 की उम्र पार करते ही फेफड़ों की बीमारी हो जाती है। आंखों से कम दिखने लगता है। चमड़ी सूखने से शरीर काला पड़ जाता है। यही हमारी किस्मत है।’ सामने नजर डालने पर एक ‘बस स्कूल’ दिखाई देता है। मैं उसकी ओर चल पड़ता हूं। बिना इंजन की एक बस खड़ी है। इसमें 20 से ज्यादा बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इसी में 10 साल की अरुणा भी पढ़ रही है। वह सहमी हुई आवाज में वह कहती है, ‘सर! मैं नहीं चाहती कि बड़ी होकर नमक की खेती करूं, इसलिए पढ़ रही हूं। मां-पापा को देखती हूं कि वे कितना दुख सहकर नमक पकाते हैं। अभी 7वीं में हूं। इसके बाद यहां पढ़ाई नहीं होती। इस ‘बस स्कूल’ में भी नाम भर की पढ़ाई होती है। मैं क्या कर सकती हूं… कोई सुनने वाला नहीं है।’ अब धूप और तेज हो रही है। सफेद चमकते नमक की ओर देखना भी मुश्किल हो गया है। खेत में काम कर रहे सभी किसान अपने तंबुओं की ओर लौटने लगे हैं। मैं भी इन बच्चों की आंखों में नमक की खेती का स्याह भविष्य देखकर वहां से वापस चल पड़ता हूं। जाते-जाते मन में यही सवाल उठता है- शायद ही इन बच्चों के पढ़ने का सपना सच हो पाए। जिस नमक को हम खाते हैं, उसकी कितनी बड़ी कीमत ये किसान और उनके बच्चे अपनी जिंदगी से चुकाते हैं! ---------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड- भूख के बजाय, दवाओं के ट्रायल से मरना अच्छा:बच्चों को तो 25 लाख मिल जाएंगे; उन्हें रिसर्च के लिए खून चाहिए, हमें पैसा ‘किसे अच्छा लगता है कि वह पैसे के लिए अपनी जान की बाजी लगाए, लेकिन मुझे लगानी पड़ती है। अगर मर भी गई तो बच्चों को 20-25 लाख मिलेंगे। कम से कम उनकी जिंदगी तो बेहतर हो जाएगी। अभी तक खुद पर दवाओं के ट्रायल में 4 बार पास हुई हूं।’ पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-5 करोड़ मुआवजा शानो-शौकत में उड़ाया:3 करोड़ की जमीन खरीदी, 1 करोड़ का मकान; 80-80 लाख की शादियां- अब रोज कमाने से घर चल रहा एक सच्ची कहानी- ग्रेटर नोएडा के किसान रामेश्वर सिंह की। 12 एकड़ जमीन सरकार ने ली और बदले में उन्हें सवा 5 करोड़ रुपए दिए। पैसा खाते में आते ही जिंदगी बदल गई। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
यूपी के जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट आपके सफर के लिए तैयार है। फर्स्ट फेज में 3300 एकड़ में बने एक टर्मिनल और रनवे का काम पूरा हो चुका है। बस फिनिशिंग बाकी है। एक रनवे के साथ इस टर्मिनल की सालाना क्षमता 3 करोड़ पैसेंजर संभालने की होगी। एयरपोर्ट के फर्स्ट फेज की लागत करीब 11 हजार करोड़ है। 28 मार्च को PM मोदी इसका उद्घाटन करेंगे। सभी 4 फेज का काम पूरा हो जाने के बाद ये एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का छठा बड़ा एयरपोर्ट होगा। हालांकि पूरा बनने की डेडलाइन 2040 है। भास्कर सबसे पहले इस एयरपोर्ट के अंदर पहुंचा है। पढ़िए आपके काम की सारी बातें… 1. टर्मिनल बिल्डिंग 2. एंट्री गेट 3. डिपार्चर एरिया 4. सेल्फ बैगेज ड्रॉप फैसिलिटी 5. सिक्योरिटी चेक 6. बोर्डिंग एरिया 7. लाउंज एरिया 8. टेंपल ऑफ बेल्स 9. एयरोब्रिज 10. सुरक्षा नोएडा एयरपोर्ट की खास बातें 1. रनवे के लिहाज से एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 5 रनवे बनाए जाने हैं। यहां छठवां रनवे भी बनाया जा सकता है। इसके बाद ये एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का छठवें नंबर का एयरपोर्ट होगा। रनवे के लिहाज से एशिया में चीन का शंघाई पुडोंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट सबसे बड़ा है। 2. एरिया के लिहाज से भी एशिया में सबसे बड़ानोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कुल 52 स्क्वायर किमी में बनना प्रस्तावित है। अगर ऐसा हुआ तो एरिया वाइज भी ये एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन जाएगा। अभी एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट चीन का बीजिंग डेक्सिंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। इसका एरिया 47 स्क्वायर किमी है। 3. पूरा बनने के बाद देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगानोएडा एयरपोर्ट के पहले स्टेज के लिए यमुना डेवलपमेंट अथॉरिटी ने 3300 एकड़ जमीन अलॉट की है। ये एरिया करीब 13.35 स्क्वायर किमी है। दूसरे स्टेज में एयरपोर्ट का कुल एरिया बढ़कर करीब 7200 एकड़ या 29 स्क्वायर किमी हो जाएगा। अभी देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट हैदराबाद का राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो करीब 5500 एकड़ यानी 22.25 स्क्वायर किमी में बना है। 28 मार्च को उद्घाटन, अप्रैल में पहली उड़ाननोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन PM मोदी 28 मार्च को करेंगे। हालांकि फ्लाइट अप्रैल से शुरू होंगी। नोएडा एयरपोर्ट अथॉरिटी से जुड़े अफसरों ने बताया कि किराया अभी तय नहीं है, लेकिन ये दिल्ली एयरपोर्ट मुकाबले कम हो सकता है क्योंकि यहां एयरलाइंस के लिए डेवलपमेंट चार्ज कम रखा गया है।
ट्रंप का बड़ा बयान: ईरान का बचा-कुचा नेतृत्व भी खत्म करेंगे!
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान की मौजूदा शासन व्यवस्था के बचे-कुचे हिस्से को 'खत्म' कर सकता है
इजराइल-ईरान तनाव में बड़ा दावा, ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब मारे गए
इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज के मुताबिक, रात में किए गए एयरस्ट्राइक में ईरान के शीर्ष खुफिया अधिकारी इस्माइल खातिब को निशाना बनाया गया। उन्होंने इसे ईरान की सुरक्षा संरचना पर बड़ा प्रहार बताया है।
ईरान में मोसाद के लिए जासूसी के आरोप में व्यक्ति को फांसी, युद्ध के बीच सख्त संदेश
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी को पिछले साल जून में सवजबलाघ शहर से गिरफ्तार किया गया था। उस समय ईरान और इजरायल के बीच 12 दिन तक चला संघर्ष जारी था, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ था।
US Iran War: खाड़ी देशों ने अमेरिका को चेताया, ईरान को 'घायल' छोड़ना होगी बड़ी भूल
खाड़ी देशों ने अमेरिका से कहा है कि यदि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जा रही है, तो उसे निर्णायक स्तर तक ले जाना जरूरी है। उनका तर्क है कि आधे-अधूरे कदम ईरान को दोबारा ताकत हासिल करने का मौका देंगे, जिससे वह क्षेत्रीय ऊर्जा ढांचे को फिर निशाना बना सकता है।
जोसेफ केंट ने अपने इस्तीफे पत्र और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखे संदेश में आरोप लगाया कि अमेरिका ने यह युद्ध स्वतंत्र निर्णय के तहत नहीं, बल्कि बाहरी दबाव में शुरू किया।
परमाणु ऊर्जा की ओर लौटने के खिलाफ हैं जर्मन चांसलर
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेय लाएन यूरोपीय संघ में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने के प्रस्ताव के पक्ष में हैं, लेकिन जर्मन चांसलर मैर्त्स ने इसे नामुमकिन बताया है, आखिर क्यों
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मनाया आयरलैंड के साथ संबंधों का जश्न
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अमेरिका और आयरलैंड के गहरे संबंधों का जश्न मनाया। उन्होंने आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन की मेजबानी की
रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच अमेरिकी मतदान विधेयक को लेकर टकराव
अमेरिकी सीनेट में तीखी राजनीतिक लड़ाई शुरू हो गई, जब रिपब्लिकन ने सेव एक्ट को चुनावों की सुरक्षा के लिए एक उपाय के रूप में आगे बढ़ाया जबकि डेमोक्रेट्स ने इसे मतदाता दमन का कदम बताते हुए कहा कि इससे लाखों पात्र अमेरिकी नागरिकों को मतदान करने से रोका जा सकता है।
ट्रंप का बड़ा दावा: ईरान अब परमाणु हथियार नहीं बना सकता
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई इसलिए की, ताकि वह परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उनका दावा है कि इस कार्रवाई से ईरान की सैन्य ताकत को काफी नुकसान पहुंचा है।
क्यूबा में ब्लैकआउट पर अमेरिका का सख्त बयान, ट्रंप ने दिए कार्रवाई के संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने क्यूबा में हुए देशव्यापी बिजली संकट के बाद वहां की सरकार पर तीखा हमला बोला है
होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी हमला, ईरानी मिसाइल ठिकाने ध्वस्त
अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के मिसाइल ठिकानों पर नए हमले किए हैं। सेना के अधिकारियों का कहना है कि ये ठिकाने अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे। यह कार्रवाई “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत की जा रही है, जो अब और तेज हो गया है।
23 फरवरी 2026, तमिलनाडु के वेल्लोर से सटे नेशनल हाईवे-48 पर हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई। इतना ट्रैफिक की 4 घंटे तक गाड़ियां अपनी जगह से हिल नहीं पाईं। भगदड़ या किसी तरह की अनहोनी के डर से प्रशासन को 900 पुलिसवालों को मौके पर लगाना पड़ा। ये दीवानगी साउथ फिल्मों के सुपरस्टार थलापति विजय की पब्लिक रैली के लिए थी। वेल्लोर रैली में थलापति विजय ने पहली बार ऐलान किया कि 2026 का विधानसभा चुनाव 'विजय बनाम स्टालिन' की लड़ाई है। तमिलनाडु CM और DMK प्रमुख एमके स्टालिन पर आरोप लगाते हुए विजय ने कहा- राज्य में अभी एक स्टैंड-अप कॉमेडी वाली सरकार राज कर रही है। मुख्यमंत्री के असली दोस्त रिश्वत-भ्रष्टाचार हैं। अगर दम है तो वे चुनाव से पहले अपनी संपत्ति का खुलासा करें। तमिलनाडु की 234 सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी। उससे पहले विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम यानी TVK को सत्ताधारी DMK-कांग्रेस के गठबंधन के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है। दूसरी तरफ BJP, स्टालिन और विजय की तकरार को चुनाव में भुनाना चाहती है। सोर्स बताते हैं कि TVK को NDA में लाने लिए BJP लीडरशिप पूरा जोर लगा रही है। यहां तक कि एक दूसरे राज्य के उपमुख्यमंत्री के जरिए विजय को मनाने की कोशिशें चल रही हैं। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले क्या विजय BJP से हाथ मिलाने वाले हैं? NDA अलांयस में शामिल होने से TVK को कितना फायदा होगा? सत्तारूढ़ DMK और कांग्रेस का गठबंधन विजय के खिलाफ क्या रणनीति बना रहा है? ये सवाल हमने तमिलनाडु की पॉलिटिकल पार्टियों और एक्सपर्ट्स से पूछे। विजय को NDA में लाने के लिए इतनी खलबली क्यों? दो साल पहले तक तमिलनाडु में मेन मुकाबला DMK-कांग्रेस के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) और AIADMK-BJP के NDA गठबंधन के बीच माना जा रहा था। 2 फरवरी 2024 को साउथ फिल्मों के सुपरस्टार विजय ने अपनी पॉलिटिकल पार्टी TVK की ऑफिशियल घोषणा कर दी। अब 2026 विधानसभा चुनाव में TVK थर्ड फ्रंट के तौर पर उभरी है। विजय का इम्पैक्ट कम करने के लिए DMK ने कांग्रेस और वामपंथी दलों सहित 23 पार्टियों को अपने अलायंस में शामिल किया है। मुख्यमंत्री स्टालिन की अगुआई वाले SPA का रुख साफ है कि वो विजय के साथ किसी भी सूरत में हाथ नहीं मिलाएंगे। दूसरी तरफ, NDA ब्लॉक में AIADMK, BJP, पट्टाली मक्कल काची (PMK) और AMMK जैसी दूसरी पार्टियां शामिल हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में DMK ने 234 सीटों में से 133 सीटें जीती थीं और सहयोगियों की मदद के बिना ही सरकार बनाई थी। वहीं, NDA गठबंधन महज 75 सीटों पर ही सिमट गया था। इसमें AIADMK 66 और BJP महज 4 सीट ही जीत पाई थी। BJP चुनाव से पहले इस नुकसान की भरपाई के लिए विजय से लगातार संपर्क कर रही है। तमिलनाडु के चेन्नई, कांचीपुरम, कोयंबटूर, मदुरै और तंजावुर में विजय की अच्छी फैन फॉलोइंग है। करूर में 18 से 35 साल के वोटर्स सबसे ज्यादा हैं। विजय यहां आकर फिल्म रिलीज और सोशल मीडिया कैंपेन जैसे इवेंट में शामिल हो चुके हैं। 27 सितंबर 2025 को करूर में ही विजय की रैली में भगदड़ के दौरान 41 लोगों की मौत हुई थी। इसकी जांच CBI कर रही है। BJP को लगता है कि अगर उसके 2-3% वोट भी TVK के साथ जुड़ते हैं, तो ये NDA के लिए निर्णायक हो सकता है। एक इंटरनल रिपोर्ट ने तमिलनाडु BJP को एक्टिव कियातमिलनाडु और केरल विधानसभा चुनाव पर करीब से नजर रख रहे सीनियर जर्नलिस्ट केए शाजी कहते हैं, ‘इलेक्शन से पहले वोटर्स का मूड जानने के लिए कई सर्वे किए गए, जिनमें NDA गठबंधन के लिए बहुत पॉजिटिव तस्वीर पेश नहीं की गई। यही वजह है कि BJP विजय को साथ लाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है।’ कुछ दिनों पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पास भी इलेक्शन से जुड़े कई प्री-सर्वे मिलाकर एक इंटरनल रिपोर्ट भेजी गई। इसमें चुनाव से पहले AIADMK और BJP की हालत पतली बताई गई।रिपोर्ट में बताया गया कि तमिलनाडु की कई सीटों पर NDA गठबंधन तीसरे नंबर पर भी रह सकता है। इन आकलनों के बाद से ही पार्टी की लीडरशिप नाराज है। ’विजय को मनाने के लिए साउथ फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े बड़े चेहरों के साथ-साथ उनके दोस्तों और दूसरे राज्य के एक उपमुख्यमंत्री से दबाव बनाया जा रहा है।’ तमिलनाडु BJP से जुड़े सोर्स के मुताबिक, BJP ने TVK के सामने पेशकश की है कि अगर NDA गठबंधन चुनाव जीतता है कि वो विजय को तमिलनाडु के डिप्टी CM का पद और पार्टी के प्रस्तावित सीट-बंटवारे में लगभग 55 सीटें देने को तैयार है। फिलहाल इस बात को लेकर दोनों पार्टियों की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है। विजय की पर्सनल लाइफ और तलाक DMK के लिए चुनावी मुद्दातमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले थलापति विजय से जुड़ा तलाक का विवाद भी राजनीतिक समीकरणों का मुद्दा बना हुआ है। विजय से अलग रह रही उनकी पत्नी संगीता सोरनलिंगम ने दिसंबर 2025 में चेंगलपट्टू कोर्ट में तलाक की याचिका दायर कर गुजारे भत्ते की मांग की थी। संगीता ने अंतरिम राहत के लिए एक और याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने कोर्ट से पनयूर वाले घर में रहने की इजाजत मांगी। ये मामला अब भी चल रहा है। सीनियर जर्नलिस्ट डॉ. बसवराज इटनाल कहते हैं, ‘विजय की निजी जिंदगी के उतार-चढ़ाव और उनके तलाक को DMK चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। मेरा मानना है कि इससे DMK को राजनीतिक तौर पर कोई फायदा होने की संभावना नहीं है।’ ‘हालांकि, कुछ हद तक पत्नी को घर से बेदखल करने का मामला विजय की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है क्योंकि इससे लोगों (खासकर महिला वोटर्स) के मन में संगीता के प्रति सहानुभूति पैदा होगी। DMK विजय को कट्टर विरोधी के तौर पर देखती है। करूर भगदड़ के मुद्दे पर स्टालिन थलापति को घेरते रहे हैं।‘ TVK-NDA गठबंधन के चांसेज की 3 बड़ी वजहें1. कानूनी और सेंट्रल एजेंसियों का दबाव विजय पहले से ही इनकम टैक्स केस, तलाक और करूर भगदड़ मामले में घिरे हुए हैं। तमिलनाडु की राजनीति में ये एक पुराना पैटर्न रहा है कि जब भी कोई नया नेता उभरता है, तो केंद्र की एजेंसियां एक्टिव हो जाती हैं। पॉलिटिकल एनालिस्ट इसे 'दबाव की राजनीति' मानते हैं, जिससे नई पार्टियों को गठबंधन के लिए मनाया जाता है। लिहाजा, खुद पर प्रेशर कम करने के लिए विजय गठबंधन में शामिल हो सकते हैं। 2. TVK और NDA का एक समान विरोधी विजय का सीधा मुकाबला सत्ताधारी DMK से है। तमिलनाडु में स्टालिन को चुनौती देने के लिए TVK को एक ऐसे साथी की जरूरत है, जो DMK को सीधी चुनौती दे सकता हो। मौजूदा वक्त में NDA गठबंधन ही DMK-कांग्रेस अलायंस की सबसे बड़ी विरोधी है। 3. पहला चुनाव,TVK को स्टेबिलिटी की उम्मीद 2026 विधानसभा चुनाव TVK के लिए पहली परीक्षा है। अपने दम पर 234 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने से पार्टी पर फाइनेंशियल प्रेशर बढ़ सकता है। ऐसे में BJP और AIADMK जैसी पार्टियों का साथ विजय को वो स्टेबिलिटी दे सकता है, जो एक नई पार्टी के पास नहीं होती। एक्सपर्ट बोले- BJP और विजय की दोस्ती से AIADMK को नुकसानतमिलनाडु और साउथ की पॉलिटिक्स पर 25 साल से नजर रख रहे पॉलिटिकल एनालिस्ट टीएस सुधीर कहते हैं, 'विजय महज 10 या 20 सीटों के लिए NDA में नहीं आएंगे, क्योंकि वे खुद को CM पद का दावेदार मानते हैं। इसलिए वे ज्यादा सीटें मांगेंगे। NDA अगर विजय को अपने साथ लाता है, तो उसे AIADMK के खाते से सीटें देनी पड़ेंगी। सोचने लायक बात है कि क्या एडप्पाडी पलानीस्वामी इस बात के लिए तैयार होंगे? अभी ये बड़ा सवाल होगा।' 'इस चुनाव में AIADMK की सीधी लड़ाई DMK से है। DMK तकरीबन 175-180 सीटों पर लड़ेगी। अगर NDA अलायंस TVK को 70 सीटें देता है, तो क्या AIADMK सिर्फ 120 या 130 सीटों पर ही लड़ेगी? अगर ऐसा हुआ तो ये तमिलनाडु की 60 साल पुरानी AIADMK पार्टी के लिए बड़ा साइकोलॉजिकल नुकसान होगा।' उनकी पर्सनल लाइफ को लेकर सुधीर कहते हैं, '20 अप्रैल को विजय को तलाक के मामले में कोर्ट में पेश होना है। 3 दिन बाद यानी 23 अप्रैल को वोटिंग होगी।' पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं…BJP: स्टालिन के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी, TVK पर कुछ बोलना जल्दबाजी तमिलनाडु BJP के स्टेट स्पोक्सपर्सन नरायणन तिरुपाठी कहते हैं, ‘बीते 5 साल में DMK और कांग्रेस ने तमिलनाडु के लोगों को धोखे में रखा है। DMK अलायंस को लेकर तमिलनाडु में जबरदस्त एंटी-इनकम्बेंसी है। BJP पिछले चुनाव से ज्यादा सीटें लाएगी।’ क्या चुनाव से पहले NDA-TVK के साथ एलायंस कर सकती है? इस सवाल के जवाब में नरायणन कहते हैं, ‘तमिलनाडु का विकास ही NDA गठबंधन का मकसद है। BJP ऐसी विचारधारा रखने वाली हर पार्टी के साथ खड़ी है। थलापति विजय की TVK के साथ अलायंस होगा या नहीं? इस पर कुछ भी बोलना अभी जल्दबाजी होगी।’ TVK: हमारा किसी से अलायंस नहीं, DMK भ्रम फैला रही TVK के संयुक्त महासचिव निर्मल कुमार कहते हैं, ’DMK लोगों के बीच भ्रम पैदा करके चुनावी फायदा लेना चाहती है। सोशल मीडिया पर जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है कि हमारी पार्टी BJP-AIADMK के नेताओं के साथ बातचीत कर रही है। ये महज अफवाहें हैं, जनता को इन पर ध्यान नहीं देना चाहिए।’ TVK के साथ जोड़कर किसी भी पार्टी के गठबंधन की बातचीत पूरी तरह निराधार है। DMK: TVK की रैलियों में आने वाले लोग फैन हैं, वोटर नहींDMK के सीनियर लीडर और स्टेट स्पोक्सपर्सन सलेम धरणीधरन कहते हैं, 'भीड़ का मतलब वोट नहीं होता। TVK की रैलियों में आने वाले लोग सिर्फ उनके फैन हैं, वोटर नहीं। DMK का 2019, 2021, 2024 चुनावों में जीत का ट्रैक रिकॉर्ड ये साबित करता है कि जनता को हमारे प्रशासन पर भरोसा है, न कि किसी फिल्मस्टार के भाषणों पर। एक राजनेता के तौर पर हम सभी जनता के सेवक हैं, लेकिन TVK पार्टी में शामिल लोग विजय के सेवक हैं।' ………….ये खबर भी पढ़ें… क्या साउथ बंगाल से निकलेगा BJP की जीत का रास्ता 7 मार्च को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में BJP की परिवर्तन यात्रा पहुंची। यहां रघुनाथपुर इंडस्ट्रियल एरिया है इसलिए हिंदी भाषी और आदिवासी आबादी ज्यादा है। यहां से BJP के ही विधायक हैं, फिर भी रैली में भीड़ कम पहुंची। यहीं रास्ते में अवधेश राम मिले। वो रैली में नहीं आए लेकिन चाहते हैं कि राज्य में सरकार जरुर बदले। पढ़िए पूरी खबर…

