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राजनीतिक आतंकवाद पर जो बाइडन प्रशासन ने बुलाई ग्लोबल समिट, भारत समेत 60 देशों को भेजा सीक्रेट इनविटेशन

दुनिया भर में तेजी से पैर पसार रहे एक नए सुरक्षा संकट से निपटने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका अगले सप्ताह एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) के तत्वावधान में आयोजित होने जा रही इस विशेष बैठक का मुख्य एजेंडा वैश्विक स्तर पर 'राजनीतिक आतंकवाद' (Political Terrorism) के खतरनाक ढंग से फिर से उभरने पर लगाम लगाना है। वाशिंगटन ने इस रणनीतिक विमर्श का हिस्सा बनने के लिए भारत सहित दुनिया भर के 60 प्रमुख देशों को आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया है। इस बैठक को लेकर वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में हलचल काफी ज्यादा तेज हो गई है क्योंकि इसे वैश्विक सुरक्षा ढांचे को नए सिरे से परिभाषित करने वाले एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।16 जुलाई को वाशिंगटन में जुटेगी दुनिया: एशिया, यूरोप और लैटिन अमेरिका के मंत्रियों का लगेगा जमावड़ाप्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार 'वाशिंगटन पोस्ट' (The Washington Post) द्वारा ब्रेक की गई एक विशेष खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह वैश्विक सम्मेलन आगामी 16 जुलाई 2026 को अमेरिकी विदेश विभाग के मुख्यालय में आयोजित किया जाएगा। इस हाई-वोल्टेज बैठक में यूरोप, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और एशिया महाद्वीप के दर्जनों शक्तिशाली देशों के विदेश मंत्रियों और गृह मंत्रियों (Foreign and Home Ministers) के सीधे तौर पर शामिल होने की पूरी उम्मीद है। अमेरिका इस समय दुनिया भर में बढ़ रहे वैचारिक और राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसक आंदोलनों को अपनी आंतरिक और वैश्विक संप्रभुता के लिए एक अत्यंत उभरता हुआ और गंभीर खतरा मान रहा है, जिसे रोकने के लिए वह एक मजबूत बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय सहयोग और खुफिया नेटवर्क तैयार करना चाहता है।हिंसक अति-वामपंथी नेटवर्क से खतरा: अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने एक्स पर किया बड़ा दावाइस महा-सम्मेलन की संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए अमेरिकी विदेश विभाग के आधिकारिक प्रवक्ता टामी पिगाट (Tommy Pigott) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बेहद महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। पिगाट ने स्पष्ट तौर पर कहा, 'वैश्विक पटल पर हिंसक अति-वामपंथी राजनीतिक आतंकवाद (Violent Far-Left Political Terrorism) का यह खतरनाक पुनरुत्थान कोई नई या अचानक उत्पन्न हुई बात नहीं है। यह एक बेहद पुराना और शातिर खतरा है, जो अब डिजिटल युग में मजबूत अंतरराष्ट्रीय संपर्कों, सीमा पार वित्तीय कड़ियों और नए खतरनाक गठजोड़ों के साथ एक बार फिर से दुनिया के सामने आ रहा है।' उनके इस बयान से साफ है कि वाशिंगटन इस बार वैचारिक रूप से प्रेरित उग्रवाद के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करने के मूड में है।भारत के शामिल होने पर सस्पेंस: नई दिल्ली के कूटनीतिक रुख पर टिकी पूरी दुनिया की नजरेंइस पूरी अंतरराष्ट्रीय कवायद के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर एक बेहद दिलचस्प और सस्पेंस से भरा मोड़ सामने आया है। कुछ वरिष्ठ स्वतंत्र विश्लेषकों और यूरोपीय कूटनीतिक सूत्रों से मिली अंदरूनी जानकारी के अनुसार, ऐसी प्रबल संभावनाएं जताई जा रही हैं कि भारत शायद इस विशिष्ट बैठक में अपना कोई आधिकारिक प्रतिनिधि या उच्च स्तरीय कूटनीतिक शिष्टमंडल न भेजे। हालांकि नई दिल्ली ने अभी तक इस आमंत्रण को लेकर अपनी किसी आधिकारिक नीति या फैसले की सार्वजनिक घोषणा नहीं की है, लेकिन भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत आतंकवाद की परिभाषा और पश्चिमी देशों द्वारा वैचारिक उग्रवाद को देखने के चश्मे को लेकर बेहद सतर्क रुख अपनाता रहा है, जिसके चलते इस समिट में भारत की भागीदारी पर सस्पेंस गहरा गया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 11 Jul 2026 7:05 am

रवनीत सिंह बिट्टू का कट्टरपंथियों को जवाब:आतंकवाद के दौर की वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट की; प्रिंसिपल कांता पर फिल्म बनाने की चुनौती

सतलुज फिल्म पर प्रतिबंध लगने के बाद पंजाब आतंकवाद के उस काले और खौफनाक दौर को लेकर बहस छिड़ गई है। विरोधी दल व कट्‌टरपंथी तात्कालिक मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्‌टू के दादा बेअंत सिंह को घेर रहे हैं। रवनीत सिंह बिट्‌टू ने अब फ्रंट पर आकर लोगों को आतंकवाद के दौर के फोटो व वीडियो दिखाने शुरू कर दिए। रवनीत बिट्‌टू ने आज सोशल मीडिया पर दो पोस्ट की हैं। एक पोस्ट में उन्होंने राजपुरा में सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल कांता और दूसरी पोस्ट में उत्तर प्रदेश रोडवेज की बस में हुए रेडियो बम विस्फोट का वीडियो शेयर किया है। बिट्‌टू ने चुनौती दी है कि प्रिंसिपल निर्मल कांता की सरेआम स्कूल में की गई हत्या पर भी फिल्म बनाई जानी चाहिए। रवनीत सिंह बिट्टू ने का कहना है कि एकतरफा इतिहास को दिखाना गलत है। उस दौर के दोनों पक्ष दिखाए जाएं। बिट्टू का कहना है कि वो वीडियो व फोटो के जरिए 80 और 90 के दशक की सच्चाई को दिखा रहे हैं। इन पोस्ट्स के जरिए बिट्टू पंजाब के लोगों को यह याद दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि उस समय आतंकवाद की आग में किस तरह बेकसूर और मासूम लोगों की बलि चढ़ाई गई थी। रवनीत बिट्‌टू ने सोशल मीडिया पोस्ट में कही ये अहम बातें... यूपी रोडवेज की बस में रेडियो बम ब्लास्ट' का खौफ प्रिंसिपल निर्मल कांता की कहानी साझा करने के बाद बिट्टू यहीं नहीं रुके। उन्होंने अपने आधिकारिक हैंडल से एक और भयावह वीडियो साझा किया, जिसने पंजाब और देश के लोगों के जेहन में उस दौर के खौफ को दोबारा जिंदा कर दिया। यह वीडियो उत्तर प्रदेश (यूपी) परिवहन निगम की एक बस में हुए 'रेडियो बम ब्लास्ट' से संबंधित है। 80 और 90 के दशक में आतंकवादियों द्वारा आम जनता में दहशत फैलाने का यह एक बेहद खौफनाक तरीका था। आतंकी अक्सर बसों, ट्रेनों, बाजारों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर खिलौनों, ट्रांजिस्टर या रेडियो के भीतर आईईडी (IED) बम छिपाकर छोड़ देते थे। सफर कर रहे बेकसूर राहगीर, मासूम बच्चे या महिलाएं जैसे ही उत्सुकतावश या लावारिस समझकर उस रेडियो को हाथ लगाते या चालू करते, वैसे ही एक जोरदार धमाका होता था और पूरी बस क्षत-विक्षत हो जाती थी। इस पुराने वीडियो को शेयर कर बिट्टू ने यह दिखाने का प्रयास किया है कि कट्टरपंथ की राह पर चलने वालों का निशाना कोई सरकार या पुलिस नहीं, बल्कि वे आम और गरीब नागरिक थे जो रोजमर्रा की रोजी-रोटी के लिए बसों में सफर करते थे।

दैनिक भास्कर 10 Jul 2026 1:28 pm

आतंकवाद के दौर में मारे गए सिखों की शांति के लिए 14 को हरिके में अरदास

भास्कर न्यूज | अमृतसर आतंकवाद के दौर में लापता और मारे गए 25 हजार सिखों की आ​त्मिक शांति के लिए​ 14 जुलाई को सतलुज नदी किनारे हरिके पत्तन में अरदास समारोह आयोजित किया जाएगा। इस संबंधी श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि यह वही स्थान है जहां मारे गए बेगुनाह नौजवानों के शवों को नदी में फेंक दिया गया था। यह आयोजन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के सहयोग से होगा। उन्होंने कहा कि आज तक पंजाब में सरकार और पुलिस के ज़ुल्म का शिकार हुए 25 हजार से अधिक बेगुनाह नौजवानों, महिलाओं, बुज़ुर्गों और बच्चों की आत्मिक शांति के लिए कोई सामूहिक प्रार्थना नहीं हुई है और कई पीड़ित माताओं और बहनों को अभी भी नहीं पता कि उनके बेटों और भाइयों के साथ क्या हुआ। उन्होंने कहा कि यह समय की मांग है कि पंजाब के साथ जो हुआ वह दुनिया के सामने आए और पीड़ित परिवारों को इंसाफ मिले। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह ने उन सभी पीड़ित परिवारों, माताओं, बहनों, भाइयों, एक्टिविस्ट, वकीलों और मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए संघर्ष करने वाली हस्तियों को इस में शामिल होने का खुला न्यौता दिया, जो 1984 और उसके बाद के दशकों में सरकारी जुल्मों के शिकार हुए हैं और जिनके लिए शहीद भाई जसवंत सिंह ने संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि जिन बेगुनाह नौजवानों के मर्डर केस में मोहाली की सीबीआई कोर्ट ने पहले पुलिस अधिकारियों को सजा सुनाई है, उनके परिवारों को भी इस में जरूर शामिल होना चाहिए। जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि 14 जुलाई को शाम 6 बजे सतलुज नदी के किनारे हरिके पत्तन में उनकी आत्मा की शांति और उनके परिवारों के लिए न्याय के लिए प्रार्थना की जाएगी। जहां यह बताया गया था कि मारे गए बेगुनाह नौजवानों के शव नदी में फेंक दिए गए थे। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सहयोग से आयोजित किया जाएगा, जिसके तहत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को पालकी में सुशोभित किया जाएगा और श्री सुखमनी साहिब के पाठ के बाद गुरबानी कीर्तन और अरदास की जाएगी।

दैनिक भास्कर 9 Jul 2026 5:30 am