जम्मू-कश्मीर में अब आतंकवाद नहीं, विकास की बात हो रही है: दिलीप घोष
न्यूटाउन, 25 अक्टूबर . पश्चिम बंगाल Government के मंत्री दिलीप घोष ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति और फारूक अब्दुल्ला पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला Pakistan से…
जॉर्डन के चर्च पर हमले से दुखी हुए जयशंकर, भारत ने कहा-'आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी'
जॉर्डन के कराक शहर में चर्च पर अंतिम संस्कार के दौरान हुए गोलीबारी हमले में 7 लोगों की मौत और 34 घायल हो गए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दुख जताते हुए आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
चर्च पर हमला जघन्य, आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार नहीं: विदेश मंत्री एस जयशंकर
New Delhi, 24 अक्टूबर . जॉर्डन के करक स्थित एक चर्च पर हुई गोलीबारी की India ने कड़ी निंदा की है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि…
भारत और उज्बेकिस्तान ने आतंकवाद रोधी सहयोग समेत कई क्षेत्रों में रिश्ते मजबूत करने पर की चर्चा
New Delhi, 24 अक्टूबर . New Delhi में भारत-उज्बेकिस्तान आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह के सह-अध्यक्ष तथा उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्रालय में दक्षिण एशिया, निकट एवं मध्य पूर्व और…
वेस्ट बैंक में हालात एक बार फिर गंभीर रूप से बिगड़ गए हैं। इस हफ्ते अपने दो सैनिकों की हत्या के जवाब में, इजरायली सेना (IDF) ने हेब्रोन इलाके में एक 'लक्षित और सीमित आतंकवाद-रोधी' (Targeted and Limited Counter-Terrorism) अभियान शुरू किया है। इजरायल में आगामी चुनावों से ठीक कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस बड़े सैन्य अभियान को हरी झंडी दिखाई। इजरायली रक्षा बलों (IDF) के अनुसार, सैनिक पूरे इलाके में सघन तलाशी अभियान चला रहे हैं। इसका मकसद आतंकवादी ढांचे का पता लगाकर उसे नष्ट करना, उनके हथियार जब्त करना और संदिग्धों से पूछताछ करना है। IDF ने यह भी कहा कि पूछताछ और सुरक्षा जांच के बाद, स्थानीय निवासी तय किए गए तीन निकास बिंदुओं (एग्जिट पॉइंट्स) से इलाके से बाहर जा सकते हैं। साथ ही चेतावनी दी गई कि संदिग्ध व्यक्तियों को आगे की पूछताछ के लिए सुरक्षा बलों के पास भेजा जा सकता है। शनिवार तड़के 'X' (पहले ट्विटर) पर जारी एक बयान में IDF ने कहा, गोलीबारी की उस घटना के जवाब में, जिसमें IDF के 2 सैनिक मारे गए और कई अन्य घायल हो गए, IDF और अन्य सुरक्षा बलों ने हेब्रोन इलाके में एक लक्षित और सीमित आतंकवाद-रोधी अभियान शुरू किया है। इसी इलाके से आतंकवादी आए थे। वेस्ट बैंक में हालात फिर क्यों बिगड़े? शुक्रवार सुबह तब तनाव बढ़ गया, जब फिलिस्तीनी बंदूकधारियों के हमले में इजरायली सेना के दो सैनिक - स्टाफ सार्जेंट रॉन योनातन रॉयटमैन और सार्जेंट युवल शाई स्विलेम - मारे गए। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला हेब्रोन के बाहर येहुदा जंक्शन के पास हुआ। सेना ने बताया कि संदिग्धों के पास M16 राइफल और एक हैंडगन थी और वे इजरायली नागरिकों को निशाना बनाना चाहते थे। सेना के मुताबिक, 20 मिनट तक चली गोलीबारी के बाद इस हमले को नाकाम कर दिया गया। नेतन्याहू ने इस हमले की निंदा की और शुक्रवार को सुरक्षा कैबिनेट की एक आपातकालीन बैठक बुलाई, जिसमें उन्होंने हमास को जिम्मेदार ठहराया। बैठक के दौरान, उन्होंने सेना को निर्देश दिया कि वे तुरंत हेब्रोन की घेराबंदी करें और पूरे वेस्ट बैंक को पूरी तरह से बंद करने की तैयारी करें। नेतन्याहू के निर्देशों के बाद, इजरायली बलों ने वेस्ट बैंक में कई अभियान चलाए, जिसमें हथियार जब्त किए गए और हमास के लिए काम करने के संदेह वाले लोगों को हिरासत में लिया गया। एपी के अनुसार, इज़रायली सेना के चीफ ऑफ स्टाफ एयाल ज़मीर ने कहा, इस गोला-बारूद का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किए जाने वाले हमले में किया जाना था। Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi
इजरायल: हेब्रोन में आतंकवाद विरोधी अभियान तेज, 70 संदिग्ध गिरफ्तार
येरूशलम, 23 अक्टूबर . इजरायल के रक्षा बल (आईडीएफ) ने Friday को वेस्ट बैंक के हेब्रोन क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियान तेज कर दिया. यह कार्रवाई जूडिया क्षेत्र…
भारत ने पाकिस्तान को UN में फिर से धोया, आतंकवाद को लेकर सुनाई खरी-खोटी; कारगिल युद्ध का किया जिक्र
संयुक्त राष्ट्र में भारत की तरफ से बोलते हुए भाविका मंगलानंदन ने आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के लिए पाकिस्तान को खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि यह पड़ोसी देश अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी नाकाम रहा है।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद में 195% का भारी उछाल
पड़ोसी देश पाकिस्तान में आंतरिक आतंकवाद और अशांति का ग्राफ इस कदर बढ़ गया है कि वहां की सरकार और सेना के हाथ से नियंत्रण पूरी तरह छूटता नजर आ रहा है। पाकिस्तान के संवेदनशील प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवादी गतिविधियों और हमलों में हाल ही में रिकॉर्ड 195 प्रतिशत का भयानक इजाफा दर्ज किया गया है। प्रांत के भीतर लगातार हो रहे बम धमाकों, सुरक्षा बलों पर हमलों और अशांति ने पाकिस्तानी हुक्मरानों की नींद उड़ा रखी है। अपनी ही जमीन पर उग्रवाद और आतंकवाद पर लगाम लगाने में बुरी तरह विफल रहने के बाद, पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने हमेशा की तरह अपनी नाकामी का ठीकरा भारत के सिर फोड़ने की पुरानी और घिसी-पिसी चाल चली है। इस सनसनीखेज घटनाक्रम ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के दोहरे चरित्र और उसकी लाचारी को बेनकाब कर दिया है।खैबर पख्तूनख्वा में बेकाबू हालात और चरमपंथियों का बढ़ता दायरापाकिस्तान का खैबर पख्तूनख्वा प्रांत इस समय बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है। स्थानीय प्रशासन और खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में इस क्षेत्र के भीतर आतंकी हमलों की संख्या में लगभग 195% की अभूतपूर्व बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि पाकिस्तानी सेना और पुलिस बल आए दिन आतंकवादियों के आसान शिकार बन रहे हैं। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और अन्य विद्रोही गुटों ने सुरक्षा बलों की नाक में दम कर रखा है। प्रांत के कई इलाकों में अब पाकिस्तानी सरकार का प्रशासनिक नियंत्रण नाममात्र का रह गया है और आतंकवादियों ने खुलेआम अपनी पैठ मजबूत कर ली है। आम नागरिकों का जीवन नर्क बन चुका है और लोग लगातार खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं।अपनी आंतरिक विफलताओं को छुपाने के लिए भारत विरोधी राग का पुराना पैंतराजब भी पाकिस्तान के भीतर हालात पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर होते हैं और वहां की सेना देश की अवाम को सुरक्षा देने में नाकाम साबित होती है, तो रावलपिंडी और इस्लामाबाद के हुक्मरानों को तुरंत भारत की याद आ जाती है। खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद के मामलों में आई इस 195% की बेतहाशा बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने अपनी झल्लाहट मिटाने के लिए भारत पर मनगढ़ंत और बेबुनियाद आरोप लगाने शुरू कर दिए। अपनी विफलताओं का ठीकरा भारत पर फोड़ते हुए उन्होंने भारत के खिलाफ जहर उगला और गीदड़ भभकियां दीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह और कुछ नहीं बल्कि पाकिस्तानी जनता का ध्यान भटकाने और अपनी खुफिया व सैन्य नाकामी को छुपाने का एक बेहद घटिया और पुराना हथकंडा है, जिसे दुनिया अब अच्छी तरह समझ चुकी है।वैश्विक मंचों पर बेनकाब हो रहा पाकिस्तान का आतंकवाद समर्थक चेहरादुनियाभर के देश अब इस सच्चाई से अच्छी तरह वाकिफ हो चुके हैं कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद की फैक्टरी रहा है। खुद अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स यह कहती आई हैं कि पाकिस्तान ने जिस 'आतंकवाद के पालने' की नीति को वर्षों तक बढ़ावा दिया था, आज वही जहरीले सांप उसी के देश को डंस रहे हैं। खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान की सुलगती आग इसी गलत नीतियों का परिणाम है। ऐसे में, जब पश्चिमी देशों और वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान पर आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने का दबाव बढ़ता है, तो वहां के सैन्य जनरल भारत के खिलाफ निराधार बयानबाजी करके अपनी घरेलू जनता को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। भारत सरकार और कूटनीतिक जानकारों ने हमेशा से स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान जब तक अपनी सरजमीं से संचालित होने वाले आतंकवाद को पूरी तरह नेस्तनाबूद नहीं करता, तब तक उसकी इन खोखली धमकियों का कोई मतलब नहीं है।भारत की मजबूत कूटनीति और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीतिप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ हमेशा 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है। नई दिल्ली ने दुनिया के सामने बार-बार यह साबित किया है कि भारत क्षेत्रीय शांति का समर्थक है, लेकिन देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी षड्यंत्र का मुंहतोड़ जवाब देना अच्छी तरह जानता है। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में भड़की हिंसा और वहां के जनरलों की बौखलाहट यह साफ दिखाती है कि पाकिस्तान अपने आंतरिक बोझ के तले खुद ही दबा जा रहा है। भारत के खिलाफ झूठे नैरेटिव गढ़ने से पाकिस्तान के हालात सुधरने वाले नहीं हैं, बल्कि इससे उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रही-सही किरकिरी ही हो रही है। आने वाले समय में पाकिस्तान की यह आंतरिक अस्थिरता और आतंकवाद का यह भयानक विस्फोट उसके अपने वजूद के लिए ही सबसे बड़ा खतरा साबित होने वाला है।
'आतंकवाद मानसिकता को भी डैमेज करता है', UN में भारत ने पाकिस्तान को लताड़ा
यूएन में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी भाविका मंगलानंदन ने कहा कि आतंकवादी न केवल मासूम लोगों को मारता है, बल्कि पूरे देश की मानसिकता को भी नुकसान पहुंचाता है.
रेटिंग: 3.5/5ड्यूरेशन: लगभग 2 घंटे 20 मिनट। ‘धुरंधर’ के बाद अब भारत, पाकिस्तान और जासूसी की दुनिया पर एक और फिल्म आई है, लेकिन इस बार मामला गंभीर नहीं, मजेदार है। उड़ता तीर में एक पाकिस्तानी जासूस को देशभक्ति तो याद रहती है, बस यह भूल जाता है कि उसे किस देश के लिए देशभक्ति दिखानी है। इसके बाद शुरू होती है गलतियों की ऐसी कॉमेडी कि पूरा मिशन गड़बड़ा जाता है और दर्शकों के लिए हंसी रोकना मुश्किल हो जाता है। यहां दिमाग लगाने से ज्यादा पेट पकड़कर हंसने की गुंजाइश है। कहानी: भारत को बर्बाद करने आया जासूस, अपने ही मिशन का दुश्मन बन गया बिलाल अहमद (आयुष्मान खुराना) और उसका दोस्त अशफाक (सुहैल नैय्यर) पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव हैं। दोनों भारत के खिलाफ साजिश रचने और देश को नुकसान पहुंचाने के मिशन पर यहां आते हैं। इसके लिए वे भारतीय काउंटर टेररिज्म स्क्वॉड यानी CTS में घुसपैठ कर लेते हैं। बिलाल ऑफिसर विक्रांत बनता है, जबकि अशफाक ध्रुव की पहचान के साथ यूनिट में जगह बना लेता है। अपने मिशन को आगे बढ़ाने के लिए बिलाल डिफेंस मिनिस्ट्री में काम करने वाली यामिनी (सारा अली खान) को अपने प्यार के जाल में फंसाता है, ताकि अपने मकसद के लिए उसका इस्तेमाल कर सके। लेकिन एक हादसे के बाद बिलाल कोमा में चला जाता है और उसकी याददाश्त चली जाती है। अब उसे याद ही नहीं रहता कि वह पाकिस्तानी जासूस है। वह खुद को भारतीय अफसर विक्रांत समझने लगता है और उसके ऊपर देशभक्ति का ऐसा जुनून सवार होता है कि वह भारत में सक्रिय पाकिस्तानी आतंकियों को एक के बाद एक पकड़वाने लगता है। अब अशफाक की मुश्किल समझिए। उसे पता है कि बिलाल कौन है और दोनों किस मिशन पर भारत आए थे। वह अपने पाकिस्तानी आकाओं को हालात समझाने की कोशिश करता है, लेकिन बिलाल की हरकतों के सामने उसका कोई जोर नहीं चलता। बिलाल को लगता है कि वह देश की सेवा कर रहा है, जबकि अशफाक को अपने ही दोस्त की वजह से मिशन फेल होने का डर सता रहा है। वह न बिलाल को आसानी से रोक सकता है, न अपने आकाओं को संतुष्ट कर पा रहा है। इसी उधेड़बुन से फिल्म में कई मजेदार सिचुएशन पैदा होती हैं। एक्टिंग: आयुष्मान की कॉमिक टाइमिंग, राहुल बोस के एक्सप्रेशंस मजेदार आयुष्मान खुराना फिल्म की जान हैं। एक पाकिस्तानी जासूस का अपनी असली पहचान भूलकर भारतीय अफसर बन जाना कहानी का सबसे बड़ा कॉमिक पॉइंट है। आयुष्मान अपनी कॉमिक टाइमिंग, चेहरे के भाव और बॉडी लैंग्वेज से इस कन्फ्यूजन को मजेदार बनाते हैं। वह पूरे आत्मविश्वास से देश की सुरक्षा में जुटे रहते हैं, जबकि उन्हें पता ही नहीं कि असल में उनका मिशन क्या था। इस विरोधाभास से कई अच्छे सीन बनते हैं। सुहैल नैय्यर ने अशफाक के रूप में अच्छा साथ दिया है। उन्हें पता है कि बिलाल क्या कर रहा है, लेकिन वह उसे रोकने में नाकाम हैं। ऊपर से पाकिस्तानी आकाओं के सवालों का जवाब भी देना है। दोस्त की देशभक्ति और अपनी मजबूरी के बीच फंसे अशफाक के सीन कई बार हंसाते हैं। राहुल बोस CTS चीफ बर्मन के किरदार में खास तौर पर प्रभावित करते हैं। उनके पास ज्यादा डायलॉग नहीं हैं, लेकिन आंखों की हरकत, चेहरे के भाव और हालात पर उनके रिएक्शन कई बार जोरदार हंसी दिलाते हैं। कुछ सीन में उनका बिना कुछ बोले रिएक्ट करना ही काफी है। दिवंगत मुकुल देव आतंकियों के सरगना अजहर मकसूद के रूप में प्रभाव छोड़ते हैं। राम कपूर पाकिस्तानी आर्मी के लेफ्टिनेंट जनरल नियाजी और गुलशन ग्रोवर मीर के किरदार में नजर आते हैं। दोनों अपने हिस्से का काम ठीक करते हैं। सारा अली खान की यामिनी कहानी के मिशन में अहम है, लेकिन उनके किरदार को और मजबूत स्पेस मिल सकता था। वहीं, रघुबीर यादव जैसे अनुभवी कलाकार का मौलाना के किरदार में और बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता था। डायरेक्शन: ‘धुरंधर’ से अलग, जासूसी की दुनिया में कॉमेडी आकाश कौशिक ने फिल्म की कहानी लिखने के साथ निर्देशन भी किया है। आतंकवाद और जासूसी जैसे गंभीर विषय को कॉमेडी में बदलना आसान नहीं है। फिल्म का आइडिया दिलचस्प है। भारत को नुकसान पहुंचाने आया पाकिस्तानी ऑपरेटिव अपनी याददाश्त खोने के बाद भारत की सुरक्षा में जुट जाता है और अपने ही मिशन को नाकाम करने लगता है। जहां धुरंधर जैसी फिल्में जासूसी और आतंकवाद की दुनिया को गंभीर और तनावपूर्ण अंदाज में दिखाती हैं, वहीं उड़ता तीर उसी दुनिया को कॉमेडी के नजरिए से पेश करती है। पहले हाफ में यह आइडिया अच्छा काम करता है। बिलाल की देशभक्ति और अशफाक की मजबूरी से कई मजेदार सीन बनते हैं। हालांकि, दूसरे हाफ में फिल्म थ्रिल और ट्विस्ट की तरफ बढ़ती है। कुछ मोड़ पहले ही समझ आने लगते हैं और गंभीरता बढ़ने के साथ कॉमेडी की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। फिल्म अगर आखिर तक पहले हाफ वाली मस्ती बनाए रखती, तो इसका असर और बेहतर हो सकता था। म्यूजिक: ‘चन्न’ है सुकून देने वाला सचिन जिगर का संगीत कुल मिलाकर अच्छा है। अरिजीत सिंह की आवाज में ‘चन्न’ रोमांटिक और सुकून देने वाला गाना है, जिसे फिल्म से अलग भी सुना जा सकता है। ‘जय हिंद’ ठीक है और आखिर के करीब आने वाला ‘चूज़े’ भी माहौल बनाता है। बाकी गाने भी अच्छे हैं, हालांकि एक दो जगह म्यूजिक कहानी की रफ्तार रोकता है। धर्मा के हिट गानों और खलनायक के बैकग्राउंड स्कोर का इस्तेमाल भी दिलचस्प है। फाइनल वर्डिक्ट: दिमाग नहीं, हंसी चलाइए! उड़ता तीर का पहला हाफ ज्यादा दमदार है। आयुष्मान की कॉमिक टाइमिंग, सुहैल की बेबसी और राहुल बोस के एक्सप्रेशंस कई जगह हंसाते हंसाते लोटपोट कर देते हैं। दूसरे हाफ में कहानी थोड़ी धीमी पड़ती है और ट्विस्ट बहुत चौंकाते नहीं, लेकिन फिल्म का कॉन्सेप्ट और कॉमेडी कई जगह मजा देते हैं। आकाश कौशिक की यह कोशिश आतंकवाद और जासूसी जैसे गंभीर विषय को हल्के फुल्के अंदाज में पेश करती है। धुरंधर की गंभीर स्पाई थ्रिलर वाली दुनिया से उलट, यहां पाकिस्तानी जासूस अपने ही मिशन का बंटाधार कर रहा है और उसका दोस्त अपने आकाओं को जवाब देते देते परेशान है। यही फिल्म का सबसे मजेदार पहलू है। कुल मिलाकर, लॉजिक को थोड़ी छुट्टी दीजिए और कॉमेडी का मजा लीजिए। आखिर जिस जासूस को यह याद न हो कि उसे किस देश के लिए देशभक्ति दिखानी है, उससे मिशन की उम्मीद करना ही सबसे बड़ा मजाक है!
आतंकवाद पर Pakistan और European Union के बीच इस्लामाबाद में 10वें दौर की वार्ता
(सज्जाद हुसैन)इस्लामाबाद, 22 अक्टूबर पाकिस्तान और यूरोपीय संघ (ईयू) ने सभी तरह के आतंकवाद की निंदा की और आतंकवाद से निपटने को लेकर एक समन्वित रणनीति को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सहित बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। यह सहमति इस्लामाबाद में पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के बीच आतंकवाद से निपटने के मुद्दे पर हुई 10वें दौर की द्विपक्षीय वार्ता के दौरान बनी। पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व आतंकवाद निरोधक विभाग की महानिदेशक फरीहा बुगती ने किया जबकि यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई यूरोपीय संघ की विदेश कार्रवाई सेवा की आतंकवाद निरोधक विशेष दूत एना स्ट्रजास्का ने की। दोनों पक्षों ने कहा कि उन्होंने आतंकवाद के खतरे से जुड़ी स्थिति को प्रभावित करने वाले हालिया क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और सभी तरह के आतंकवाद की स्पष्ट रूप से निंदा की। उन्होंने इस खतरे से निपटने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। विदेश कार्यालय ने बताया कि यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान में हाल में हुए आतंकवादी हमलों की निंदा की, इससे प्रभावित निर्दोष नागरिकों की पीड़ा के प्रति एकजुटता जताई और आतंकवाद से निपटने के पाकिस्तान के प्रयासों के महत्व को स्वीकार किया। संघ ने कहा, “आतंकवाद के खिलाफ जारी वैश्विक लड़ाई में एक-दूसरे की भूमिका को स्वीकार करते हुए पाकिस्तान और यूरोपीय संघ ने अफगानिस्तान की स्थिति के सुरक्षा संबंधी प्रभावों पर चिंता जताई।”पाकिस्तान और यूरोपीय संघ ने आतंकवाद से निपटने को लेकर समन्वित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सहित बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई। दोनों पक्षों ने कहा कि आतंकवाद पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थायी सहमति बनाने के लिए प्रभावी बहुपक्षीय सहयोग आवश्यक है। वार्ता के दौरान आतंकवादी खतरों के बदलते स्वरूप पर भी चर्चा हुई।
आतंकवाद पर अमेरिका-भारत की चिंताएं एक जैसी, PAK से रिश्ते पर क्या बोले अमेरिकी विदेश मंत्री?
मार्को रुबियो ने कहा कि पाकिस्तान के साथ रिश्ता किसी भी तरह भारत के साथ हमारे रिश्ते की कीमत पर नहीं है और वॉशिंगटन और नई दिल्ली आतंकवाद को लेकर एक जैसी चिंताएं रखते हैं।
पाकिस्तान से दोस्ती भारत की कीमत पर नहीं; आतंकवाद पर अमेरिकी विदेश मंत्री का दो टूक
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि आतंकवाद को लेकर अमेरिका और भारत दोनों की चिंताएं एक जैसी हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ हमारा रिश्ता किसी भी तरह से भारत के साथ हमारे रिश्ते की कीमत पर नहीं है। आतंकवाद पर हमारी और भारत की चिंताएं एक जैसी हैं।
'दाऊद 2003 से पहले भारत छोड़ चुका था': भारत ने यूएन की रिपोर्ट पर जताई कड़ी आपत्ति, गंभीर गलतियां भी गिनवाई india slams un counter terrorism report bias dawood ibrahim
पैरामिलिट्री फोर्स और पुलिस के अमर जवानों के बलिदान को नमन करने के लिए बुधवार को 'पुलिस स्मृति दिवस' पर पठानकोट एसएसपी कार्यालय में श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। एसएसपी मनप्रीत सिंह की अध्यक्षत में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने अमर शहीदों के यादगारी स्तंभ पर रीथ चढ़ाकर व पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। समारोह में जिले के 13 शहीद परिवारों के अलावा जिला सेशन जज आर.के. गर्ग, एडिशनल सेशन जज एकता उप्पल, शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की और पुलिस वेलफेयर एसोसिएशन के जिला प्रधान रिटायर्ड डीएसपी गुरदयाल सिंह सैनी विशेष रूप से उपस्थित रहे। आतंकवाद के काले दौर में पंजाब पुलिस ने तोड़ी थी आतंक की कमर: SSP समारोह को संबोधित करते हुए एसएसपी मनप्रीत सिंह ने कहा कि पंजाब पुलिस का इतिहास शौर्य और शहादतों से भरा हुआ है। पंजाब में जब आतंकवाद का काला दौर था, उस समय पुलिस जवानों और अधिकारियों ने अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए आतंकवाद की कमर तोड़ी और राज्य में अमन-शांति कायम की। उन्होंने बताया कि आतंकवाद के दौर में पंजाब पुलिस के 1 एडीजीपी, 2 डीआईजी, 3 एसएसपी, 5 एसपी, 12 डीएसपी, 32 इंस्पेक्टर, 112 सब-इंस्पेक्टर, 12 एएसआई, 169 हेड कांस्टेबल, 817 कांस्टेबल, 3 महिला कांस्टेबल, 180 एसपीओ, 297 पीएचजी और 7 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शहीद हुए थे। सशस्त्र टुकड़ी ने दी सलामी, बिगुल की धुन से गूंजा परिसर कार्यक्रम की शुरुआत डीएसपी राजेश कक्कड़ के नेतृत्व में पंजाब पुलिस की टुकड़ी द्वारा शस्त्र उल्टे कर बिगुल की शोक धुन के साथ शहीद जवानों को सलामी देकर की गई। इसके बाद जिला सेशन जज आर.के. गर्ग, एसएसपी मनप्रीत सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने अमर शहीदों के चित्रों के समक्ष ज्योति प्रज्वलित की। डीएसपी राजकुमार ने देश की सुरक्षा में बीते एक वर्ष के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले देशभर के पैरामिलिट्री और पुलिस जवानों के नामों की सूची पढ़कर सुनाई। मुसीबत में भगवान के बाद पुलिस को याद करते हैं लोग: कुंवर विक्की परिषद के महासचिव कुंवर रविंद्र सिंह विक्की ने कहा कि पुलिस बल की ड्यूटी 24 घंटे की होती है ताकि देशवासी अपने त्योहार शांतिपूर्वक मना सकें। उन्होंने कहा कि दीनानगर आतंकी हमले के दौरान पंजाब पुलिस के जांबाज जवानों ने बिना सेना की मदद के फिदायीन आतंकियों को ढेर कर अद्वितीय मिसाल पेश की थी। वहीं, रिटायर्ड डीएसपी गुरदयाल सिंह सैनी ने कहा कि जो कौम और देश अपने शहीदों को भूल जाता है, उसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है। ऐसे आयोजनों से शहीद परिवारों का मनोबल बढ़ता है। 13 शहीद परिवारों का किया गया सम्मान समारोह के अंत में मुख्य अतिथि एसएसपी मनप्रीत सिंह द्वारा जिले के 13 शहीद परिवारों को कंबल, उपहार, मिठाई तथा 21-21 सौ रुपये की आर्थिक सहायता राशि के चेक भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही, शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद द्वारा एसएसपी मनप्रीत सिंह को सिरोपा व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
20 अक्टूबर, मंगलवार: गोपालगंज के सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने आतंकवाद, रासायनिक एवं जैविक हथियारों के दुरुपयोग और सामूहिक विनाश के हथियारों तक आतंकियों की पहुंच रोकने पर जोर दिया।
आतंकवाद को मानवता के खिलाफ अपराध मानने की मांग: यूएन में भारत ने उठाया मुद्दा, 2028 की संधि में क्या होगा?india United Nations terrorism crimes against humanity conventionR Mythili
आतंकवाद पर सख्त: भारत का रूख कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण, अब वैश्विक समुदाय के रवैये में भी बदलाव जरूरी

