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हम मिलकर आतंकवाद से कैसे लड़ सकते हैं, इसकी बेहतरीन मिसाल कैप्टन स्मित ने पेश की: इजरायली राजदूत (आईएएनएस एक्सक्लूस

New Delhi, 1 अक्टूबर . India में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कैप्टन स्मित मच्छार के शौर्य की तारीफ की है. उन्होंने कहा, “हम कैसे आतंकवाद का मिल कर सामना कर सकते हैं और आतंक के सामने घुटने नहीं टेकते उसकी ये ‘बेहतरीन मिसाल’ है.” Thursday को से विशेष साक्षात्कार में रूवेन ने अपने ... Read more

डेली किरण 1 Oct 2026 1:13 pm

हम मिलकर आतंकवाद से कैसे लड़ सकते हैं, इसकी बेहतरीन मिसाल कैप्टन स्मित ने पेश की: इजरायली राजदूत (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

हम मिलकर आतंकवाद से कैसे लड़ सकते हैं, इसकी बेहतरीन मिसाल कैप्टन स्मित ने पेश की: इजरायली राजदूत (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

समाचार नामा 1 Oct 2026 1:06 pm

मारा गया पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मोस्ट वांटेड आतंकवादी मूसा

इंटरनेट डेस्क। पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मोस्ट वांटेड आतंकवादी सुलेमान शाह उर्फ 'मूसा' राष्ट्रीय राइफल्स के साथ मुठभेड़ में ढेर हो गया है। ये आतंकी मंगलवार रात कश्मीर के बडगाम जिले के ऊंचाई वाले इलाके में मारा गया। लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर मूसा जम्मू-कश्मीर में कई हमलों में शामिल होने के कारण वांछित था। मूसा का मारा जाना जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। वह 5 सितंबर को यूसमर्ग की पहाड़ियों में हुई मुठभेड़ से बच निकला था, हालांकि इस दौरान उसका करीबी साथी यासिर मारा गया था। हालांकि, मारे गए आतंकवादी के बारे में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। खबरों के अनुसार, सेना ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस संबंध में जानकारी दी कि अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिलकर मध्य कश्मीर के कोराग, यूसमर्ग के सामान्य क्षेत्र में अभियान शुरू किया था। जवानों द्वारा चुनौती दिए जाने पर आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद एक आतंकवादी को मारा गया। PC:livehindustan अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें

समाचार जगत 30 Sep 2026 1:10 pm

आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराध से निपटने के मुद्दे पर बिम्सटेक बैठक, भारत ने की मेजबानी

भारत ने 28 और 29 सितंबर को नई दिल्ली में आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने के लिए बिम्सटेक ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप की 11वीं बैठक की मेजबानी की।

जागरण 29 Sep 2026 11:15 pm

नई दिल्ली में बिम्सटेक जॉइंट वर्किंग ग्रुप की 11वीं बैठक संपन्न, आतंकवाद पर लगाम लगाने को लेकर हुआ गहन विमर्श

New Delhi, 29 सितंबर . India Government की मेजबानी में, आतंकवाद और ट्रांसनेशनल क्राइम पर नियंत्रण को लेकर बिम्सटेक जॉइंट वर्किंग ग्रुप (जेडब्ल्यूजी-सीटीटीसी) यानि संयुक्त कार्य समूह की 11वीं बैठक 28-29 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित की गई. इस बैठक में बिम्सटेक के सभी सदस्य देशों (बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और ... Read more

डेली किरण 29 Sep 2026 6:48 pm

'आतंकवाद पर सहानुभूति नहीं, तो रिश्ते प्रभावित होंगे': अमेरिका और पाकिस्तान की नज़दीकियों पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर का दो टूक बयान

भारतीय कूटनीति और विदेश नीति के मोर्चे पर पिछले कुछ महीनों से वैश्विक स्तर पर चल रहे समीकरणों के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका की धरती से बहुत ही स्पष्ट, कड़े और दो टूक शब्दों में अपनी बात रखी है। अमेरिका के अपने आधिकारिक दौरे के दौरान न्यूयॉर्क में 'एशिया सोसायटी' (Asia Society) द्वारा आयोजित एक उच्च स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने भारत और अमेरिका के बीच पिछले डेढ़ वर्षों से द्विपक्षीय रिश्तों में आ रहे तनाव और असहजता पर खुलकर अपनी राय रखी।एस. जयशंकर ने अपने संबोधन में मुख्य रूप से दो सबसे बड़े और संवेदनशील मुद्दों—व्यापारिक मतभेदों (Trade Differences) और पड़ोसी देश पाकिस्तान द्वारा पोषित आतंकवाद (Cross-Border Terrorism)—पर भारत के दृष्टिकोण को बेहद दृढ़ता के साथ दुनिया के सामने रखा। उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व और पश्चिमी देशों को स्पष्ट संदेश दिया कि यदि रणनीतिक साझेदार देश भारत की सुरक्षा और प्राथमिक संवेदनाओं का सम्मान नहीं करते हैं, तो इसका सीधा असर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की गहराई पर पड़ेगा।'आतंकवाद पर हमारी संवेदनाओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं'आतंकवाद के मुद्दे को भारत के लिए सबसे सर्वोच्च और संवेदनशील प्राथमिकता करार देते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि दुनिया में ऐसे बहुत ही कम देश होंगे जिन्होंने अपने पड़ोसी राष्ट्र की ओर से प्रायोजित और जान-बूझकर पोषित आतंकवाद को उस हद तक झेला है, जितना भारत ने भुगता है।उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, एक-दूसरे की संवेदनाओं का ख्याल रखना किसी भी मजबूत साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण आधार होता है। आतंकवाद एक ऐसा मुद्दा है जो हमारे लिए अत्यंत संवेदनशील है। जो विषय हमारे राष्ट्रीय हित और सुरक्षा के लिए इतना महत्वपूर्ण है, यदि कोई हमारा साझेदार देश हमारी इन प्रमुख चिंताओं और चेतावनियों का पर्याप्त ख्याल नहीं रखता है, तो यह स्वाभाविक है कि इसका नकारात्मक असर हमारे द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि विदेश मंत्री का यह बयान परोक्ष रूप से अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा पाकिस्तान के साथ बढ़ रहे सैन्य व कूटनीतिक मेल-मिलाप पर भारत की गहरी असहमति और चिंता को दर्शाता है।अमेरिका-पाकिस्तान के बढ़ते रिश्तों और अमेरिकी रुख पर भारत की पैनी नजरविदेश मंत्री का यह तीखा और स्पष्ट बयान इसलिए भी अत्यधिक सामयिक और महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ समय में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर नज़दीकियां बढ़ती हुई दिखाई दी हैं। हाल के वर्षों में वाशिंगटन द्वारा उठाए गए कुछ कदमों, जैसे कि ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के दावे और अमेरिकी व्हाइट हाउस में पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का स्वागत किया जाना, ने नई दिल्ली में रणनीतिक हलकों को असहज किया है।भारत इन घटनाक्रमों को बहुत बारीकी से देखता रहा है, लेकिन अब तक सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की मुखर प्रतिक्रिया देने से परहेज करता रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग करने की भारत की कूटनीति को हाल के दिनों में तब धक्का लगता दिखा जब अमेरिका के साथ-साथ कई प्रमुख यूरोपीय देशों ने भी पाकिस्तान के साथ अपने आर्थिक और कूटनीतिक रिश्तों को दोबारा पटरी पर लाना शुरू कर दिया। नई दिल्ली की सबसे बड़ी आशंका यह है कि पश्चिमी देशों के इस नरम रुख का फायदा उठाकर पाकिस्तान एक बार फिर अपनी पुरानी हरकतों यानी सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने की गुंजाइश तलाश सकता है।व्यापारिक समझौतों पर दो टूक: 'भारत अपने छोटे उत्पादकों और किसानों के हितों से समझौता नहीं कर सकता'केवल सुरक्षा और आतंकवाद ही नहीं, बल्कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौतों (Trade Deals) के पेंच पर भी विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने देश के आर्थिक हितों की रक्षा करते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं में भारत अपने घरेलू हितों, छोटे उत्पादकों, लघु उद्योगों और कृषि क्षेत्र से जुड़े किसानों के अधिकारों से किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हट सकता।जयशंकर ने स्वीकार किया कि भारत और अमेरिका की आर्थिक संरचना में बहुत बड़ा अंतर है। उन्होंने समझाया, हमें इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि भारत मुख्य रूप से छोटे उत्पादकों, छोटे कृषि उत्पादकों और छोटी फैक्ट्रियों व कुटीर उद्योगों का एक विशाल समाज है। भारत और अमेरिका के बीच प्रति व्यक्ति आय का भारी अंतर होने के अलावा उत्पादन का स्वरूप और हमारे सामाजिक-आर्थिक ढांचे की प्रकृति भी पूरी तरह भिन्न है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में इसलिए देरी हुई क्योंकि जमीनी हकीकत की जटिलताएं बहुत गहरी थीं, और अब इस दिशा में अमेरिकी कानून की धारा 301 (Section 301) की प्रक्रिया के तहत आगे की रूपरेखा तय की जा रही है।इस बीच, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के भी अमेरिका दौरे पर होने की खबर है, जहां वे मिलवाकी में जी-20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे और दोनों देशों के बीच अटके अंतरिम व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी समकक्षों के साथ उच्च स्तरीय वार्ता करेंगे। विदेश मंत्री के इस स्पष्ट और दो टूक संदेश ने यह साबित कर दिया है कि नया भारत अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों और आर्थिक संप्रभुता के मामले में अपने मित्रों और साझेदारों से भी स्पष्ट संवाद करने से पीछे नहीं हटता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Sep 2026 5:12 pm

आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने अमेरिका को घेरा: पाक से नजदीकी बढ़ाने पर जताया ऐतराज, कहा— इससे भारत-US रिश्तों पर असर

आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने अमेरिका को घेरा: पाक से नजदीकी बढ़ाने पर जताया ऐतराज, कहा— इससे भारत-US रिश्तों पर असर

समाचार नामा 29 Sep 2026 1:45 pm

संयुक्त राष्ट्र में एस जयशंकर का कड़ा संदेश: आतंकवाद पर पाकिस्तान बेनकाब

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आतंकवाद और वैश्विक कूटनीति के मुद्दे पर दुनिया को आईना दिखाया है। न्यूयॉर्क में दिए गए अपने प्रभावशाली भाषण में उन्होंने बिना नाम लिए पाकिस्तान को 'आतंकवाद का मुख्य केंद्र' और 'सीरियल प्रैक्टीशनर' करार देते हुए उसकी पोल खोल दी। इसके साथ ही, उन्होंने चीन और अन्य महाशक्तियों को भी चेताया कि भू-राजनीतिक स्वार्थों के लिए वैश्विक नियमों और व्यापारिक मार्गों से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।आतंकवाद पर पाकिस्तान को दो टूक: नहीं चलेगी ड्रामेबाजीविदेश मंत्री ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो देश आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं या सीमा पार से प्रायोजित हिंसा करते हैं, उन्हें अब वैश्विक मंचों पर जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और दोस्ती की बातें एक साथ नहीं चल सकतीं। भारत ने साफ कर दिया है कि देश अपनी सुरक्षा के लिए आतंकवाद के खिलाफ हर जरूरी कदम उठाने के अपने अधिकार का पूरी तरह से पालन करेगा। आतंकवाद को सामान्य ठहराने और इसके नतीजों से बचने की कोई भी कोशिश अब कामयाब नहीं होने वाली।ग्लोबल साउथ की आवाज और चीन की नीतियों पर परोक्ष प्रहारभाषण के दौरान एस जयशंकर ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और आधुनिक तकनीक के दुरुपयोग पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बिना नाम लिए चीन की तरफ इशारा करते हुए कहा कि गैर-बाजार प्रथाओं और मार्केट डिनायल (बाजार तक पहुंच रोकने) के जरिए विकासशील देशों और 'ग्लोबल साउथ' के औद्योगीकरण के अधिकार को कमजोर किया जा रहा है। तकनीक जो कभी उम्मीद की किरण हुआ करती थी, आज वह चिंता और अविश्वास का स्रोत बनती जा रही है। उन्होंने सप्लाई चेन को बाधित करने और संसाधनों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति की भी कड़ी आलोचना की।भू-राजनीतिक संकट और दुनिया के सामने मंडराता खतराविदेश मंत्री ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालातों पर चिंता जताते हुए कहा कि दुनिया आज खड्ड के मुहाने पर खड़ी है। युद्ध और संघर्षों का खामियाजा उन देशों को भुगतना पड़ रहा है जिनका उन लड़ाइयों से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। खाद्य सुरक्षा, ईंधन, उर्वरक और वित्त (4F संकट) को लेकर दुनिया गंभीर दौर से गुजर रही है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाए जाने को उन्होंने पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया, जो सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार और स्थिरता को चुनौती देता है।महात्मा गांधी के संदेश से शांति का आह्वानअपने ऐतिहासिक संबोधन के अंत में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा और उनके संदेश को याद किया। उन्होंने दुनिया को याद दिलाते हुए कहा कि 'शांति का कोई रास्ता नहीं है, बल्कि शांति ही एकमात्र रास्ता है'। भारत ने एक बार फिर दोहराया कि युद्ध और हिंसा के दौर को पीछे छोड़कर संवाद और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का समय आ गया है, और वैश्विक संस्थाओं को अधिक पारदर्शी तथा जवाबदेह बनना होगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Sep 2026 12:35 pm

'आतंकवाद के खतरे को समझे बिना...' US-पाक रिश्तों पर बोले जयशंकर

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका और पाकिस्तान के बढ़ते संबंधों पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा, खासकर सीमा पार आतंकवाद को लेकर पश्चिमी देशों का रुख साफ नहीं होने तक द्विपक्षीय रिश्तों में मजबूती नहीं आ सकती. जयशंकर ने आतंकवाद को सबसे अहम मुद्दा बताया और कहा कि साझेदारों को भारत की संवेदनशीलता समझनी होगी.

आज तक 29 Sep 2026 11:44 am

आतंकवाद पर भारत की चिंताओं पर अमेरिका की असंवेदनशीलता आपसी रिश्तों के लिए समस्या : जयशंकर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि आतंकवाद को लेकर भारत की च‍िंताओं के प्रत‍ि अमेर‍िका का असंवेदनशील होना दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक समस्या है।

खास खबर 29 Sep 2026 11:24 am

अमेरिका में ही जयशंकर ने ट्रंप सरकार को सुनाया, कहा- पाकिस्तानी आतंकवाद पर हमारी नहीं सुनोगे तो...

जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप सरकार का दूसरा कार्यकाल शुरू होने के कुछ ही महीनों बाद अमेरिका और पाकिस्तान के संंबंधों में सुधार देखा गया है. ऐसे में भारत से अमेरिका के रिश्तों पर इसका क्या प्रभाव पड़ा है? इसका जवाब भारत के विदेश मंत्री के बयान में देखने को मिला.

NDTV इंडिया 29 Sep 2026 11:23 am

आतंकवाद पर अमेरिका को जयशंकर की दो टूक, बोले- हमारी सुरक्षा चिंताओं को न समझना रिश्तों के लिए समस्या

एस. जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों की चुनौतियों पर कहा कि भारत की सुरक्षा चिंताओं को पर्याप्त गंभीरता से न समझना रिश्तों को प्रभावित करता है। आतंकवाद और व्यापार पर भी बोले।

देशबन्धु 29 Sep 2026 10:36 am

आतंकवाद के खिलाफ भारत का 'प्रहार' : अमित शाह ने लॉन्च किया नया प्रत्यर्पण पोर्टल, 36 देशों से लाए गए 288 भगोड़े

गृह मंत्री अमित शाह ने भारत की पहली आतंकरोधी नीति 'प्रहार' को मजबूत करने पर जोर दिया और एक नया प्रत्यर्पण पोर्टल लॉन्च किया।

जागरण 28 Sep 2026 9:28 pm

Amit Shah ने आतंकवाद रोधी 'प्रहार' नीति के तहत हर स्तर पर स्वचालित प्रतिक्रिया तंत्र बनाने पर दिया जोर

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आतंक-रोधी अभियानों में बिना किसी देरी के कदम उठाने पर जोर देते हुए सोमवार को देश के आतंकवाद रोधी ढांचे ‘प्रहार’ के हर स्तर पर एक ‘स्वचालित प्रतिक्रिया तंत्र’ को संस्थागत रूप देने का आह्वान किया। शाह ने ‘प्रहार-आतंकवाद रोधी नीति और रणनीति’ सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए भगोड़ों को भारत वापस लाने के प्रयासों में तेजी लाने के उद्देश्य से एक विशेष प्रत्यर्पण पोर्टल भी शुरू किया। सूत्रों ने बताया कि नया पोर्टल प्रत्यर्पण के प्रयासों में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और राज्य एजेंसियों को एक मंच पर लाता है। जब कोई भगोड़ा विदेश में पकड़ा जाता है और सक्षम अदालत की मंजूरी के बाद संबंधित देश को प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा जाना होता है, तब यह पोर्टल प्रक्रिया में मदद करेगा। शाह ने आतंकवाद रोधी अभियान में ‘सक्रिय और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण’ अपनाने की जरूरत पर जोर दिया तथा एजेंसियों से हर स्तर पर ‘स्वचालित प्रतिक्रिया तंत्र’ को संस्थागत रूप देने का आग्रह किया। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, गृह मंत्री ने ‘आतंकवादी घटनाओं के निरंतर विश्लेषण’ के जरिए ‘प्रहार’ रणनीति को लगातार मजबूत और बेहतर बनाने के प्रयासों की जरूरत पर भी जोर देते हुए अगले 10 वर्षों के लिए एक मजबूत और ठोस तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता बताई। ‘प्रहार’ के सिद्धांतों को थाना स्तर तक पहुंचाने पर जोर देते हुए शाह ने इस पहल के हर पहलू के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फरवरी में देश की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी नीति ‘प्रहार’ की शुरुआत की थी। इसमें आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने, खुफिया जानकारी के आधार पर रोकथाम और चरमपंथी हिंसा से निपटने के लिए समन्वित कार्रवाई पर आधारित बहुस्तरीय रणनीति की रूपरेखा दी गई है। बयान में कहा गया कि सोमवार को आयोजित सम्मेलन में शाह ने आतंकवादी खतरों को कम करने के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों का उल्लेख किया। शाह ने ‘प्रहार’ के हर हिस्से के लिए नतीजे पर केंद्रित नजरिए की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि कार्रवाई में जरा भी देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों के बीच तालमेल को जरूरी बताया और इस बात पर जोर दिया कि इस रणनीति के हर हिस्से में नतीजे पर केंद्रित नजरिया अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने उल्लेख किया कि एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के परिणामस्वरूप सीमा पार हथियार, विस्फोटक और मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल शहजाद भट्टी नेटवर्क के 40 से अधिक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया, 100 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की गईं और 15 राज्यों में 350 लोगों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इसी दौरान सरकार ने गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत शहजाद भट्टी नेटवर्क को आतंकवादी संगठन घोषित किया। उन्होंने कहा कि 2019 से 2026 के बीच केंद्र सरकार ने 36 देशों से 288 भगोड़े अपराधियों को सफलतापूर्वक भारत वापस लाया। सम्मेलन में केंद्रीय गृह सचिव, विदेश सचिव, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुखों, 15 राज्यों के पुलिस महानिदेशकों तथा सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के आतंकवाद रोधी दस्तों (एटीएस) के प्रमुखों ने भाग लिया। अन्य राज्यों के पुलिस प्रमुखों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भाग लिया।

प्रभासाक्षी 28 Sep 2026 9:03 pm

सर्जिकल स्ट्राइक के 10 वर्ष: उरी हमले ने पाकिस्तान के खिलाफ भारत की आतंकवाद विरोधी नीति में किया बदलाव

29 सितंबर 2016 को 'लाइन ऑफ कंट्रोल' (एलओसी) को पार कर सेना ने सैन्य ऑपरेशन के जरिए भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में एक निर्णायक बदलाव किया। इससे पाकिस्तान की ओर से प्रायोजित सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ सटीक प्रहार करने वाले 'डिटरेंस मॉडल' (रोकथाम का मॉडल) को स्थापित किया गया।

खास खबर 28 Sep 2026 6:01 pm

आतंकवाद विरोधी अभियानों में दिखेगा भारत-कजाकिस्तान की सेनाओं का तालमेल

New Delhi, 28 सितंबर India और कजाकिस्तान की सेनाएं एक बार फिर संयुक्त सैन्य अभ्यास के मैदान में साथ उतरने जा रही हैं. भारत-कजाकिस्तान के संयुक्त सैन्य अभ्यास कजिंद-2026 में हिस्सा लेने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों का 60 सदस्यीय दल Monday को कजाकिस्तान के ओस्केमेन के लिए रवाना हो चुका है. अभ्यास के दौरान ... Read more

डेली किरण 28 Sep 2026 2:24 pm

UN में Pakistan की जबरदस्त फजीहत, Terrorism पर पूछा गया सवाल तो भाग खड़े हुए Shehbaz Sharif, Jaishankar ने पाकिस्तान को चारों खाने किया चित

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से आतंकवाद को लेकर सीधे सवाल किए गए, लेकिन उन्होंने जवाब देने की बजाय वहां से भाग जाना ही बेहतर समझा। इसके एक दिन बाद संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के सामने जब पाकिस्तानी पत्रकार ने भारत पर आतंकवाद प्रायोजित करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया, तो जयशंकर ने पलटकर ऐसा करारा जवाब दिया कि सवाल पूछने वाला ही कठघरे में खड़ा हो गया। जयशंकर ने दो टूक कहा, “एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। चलिए भी।” उधर, जयशंकर के बयान से गर्म हुए माहौल के बीच ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से पाकिस्तान पर एक और करारा हमला कर डाला। हम आपको बता दें कि भारत ने पाकिस्तान को एक ‘‘कठपुतली शासन’’ करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र में उसके ‘‘झूठ’’ और ‘‘छल’’ पर तीखा प्रहार किया तथा चेतावनी दी कि इस्लामाबाद की ओर से लगातार जारी आतंकवाद के गंभीर परिणाम होंगे। दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर अपने संबोधन के दौरान एक बार फिर कश्मीर मामले को उठाया और 2025 में भारत के साथ हुए सैन्य संघर्ष को रोकने का श्रेय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘‘समय पर हस्तक्षेप’’ को दिया। शहबाज शरीफ के संबोधन के बाद भारत ने शुक्रवार रात ‘जवाब के अपने अधिकार’ का इस्तेमाल किया। इसे भी पढ़ें: 'पाकिस्तान को आतंकवाद के नतीजे भुगतने होंगे', संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने शहबाज़ शरीफ़ को दिया करारा जवाब संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने कहा, ‘‘हमने एक ऐसे शासन से लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों पर कुछ पाखंडपूर्ण उपदेश सुने हैं, जिसकी राजधानी को अपने ही लोगों से बचाने के लिए इसी समय किलेबंद किया जा रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘और ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि यह सेना का, सेना द्वारा और सेना के लिए शासन है। उसकी कठपुतलियां आती-जाती रह सकती हैं, लेकिन इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि असल में फैसले कौन करता है। पाकिस्तान की वास्तविकता उसके 27वें संविधान संशोधन और उसके असली शासक को दी गई आजीवन कानूनी छूट से जाहिर होती है।’’ गहलोत ने पिछले साल नवंबर में शहबाज शरीफ सरकार द्वारा पारित उस 27वें संविधान संशोधन का उल्लेख करते हुए यह बात की जिसके तहत पाकिस्तान के ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को किसी भी कानूनी मुकदमे से आजीवन छूट दी गई है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें विश्वास है कि यह महासभा पाकिस्तान और उसकी नीतियों को उनके वास्तविक स्वरूप में देखेगी, न कि उस रूप में जैसे उसके प्रतिनिधि झूठे तरीके से पेश करते हैं। साल-दर-साल झूठ दोहराने से वह सच नहीं हो जाता। पाकिस्तान का आतंकवाद, छल और दोहरा रवैया न तो उसके लिए और न ही दुनिया के लिए फायदेमंद होगा।’’ हम आपको बता दें कि शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में ट्रंप को उनके ‘‘दृढ़तापूर्ण और दूरदर्शी नेतृत्व’’ के लिए धन्यवाद देते हुए कहा था कि अमेरिका के राष्ट्रपति के ‘‘समय पर हस्तक्षेप’’ ने दक्षिण एशिया में करोड़ों लोगों की जान बचाई। शहबाज शरीफ ने करीब 23 मिनट के अपने संबोधन में कश्मीर मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कश्मीर मुद्दे का न्यायसंगत और निष्पक्ष समाधान जरूरी है कि दक्षिण एशिया फिर कभी 2025 के संघर्ष जैसी स्थिति में न पहुंचे। उधर, भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को याद दिलाया कि शहबाज शरीफ ने ये ‘‘विचित्र टिप्पणियां’’ ऐसे समय में की हैं जब महज दो सप्ताह पहले न्यूयॉर्क और दुनिया ने 11 सितंबर के भीषण आतंकवादी हमले की 25वीं बरसी मनाई थी। गहलोत ने कहा, ‘‘इस संदर्भ को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि उस हमले का मुख्य साजिशकर्ता ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सेना की प्रमुख अकादमी के बिल्कुल पास रह रहा था।’’ गहलोत ने शरीफ द्वारा कश्मीर मुद्दा उठाए जाने को लेकर उनकी आलोचना करते हुए कहा कि केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने कहा, ‘‘और यह हमेशा ऐसा ही रहेगा। लेकिन अगर हमें कश्मीर की ही बात करनी है तो आइए, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर पर ध्यान देते हैं। रावलाकोट के लोगों से बेमतलब की उन हत्याओं, बर्बर हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने के बारे में पूछिए जिनका वे लंबे समय से सामना कर रहे हैं।’’ हम आपको बता दें कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विवादित सीट को लेकर पिछले कई महीनों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसे लेकर सुरक्षा बलों ने कार्रवाई भी की और हाल में तथाकथित विधानसभा के लिए हुए चुनावों में धांधली के आरोप भी लगे। गहलोत ने सीमा पार आतंकवाद की पाकिस्तान की ‘‘लंबे समय से बरकरार नीति’’ की आलोचना करते हुए कहा कि भारत ने पिछले साल दिखा दिया था कि ‘‘आतंकवादियों के पास न भागने की जगह होगी और न छिपने की।’’ गहलोत ने कहा, ‘‘हम आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद जारी रहने के परिणाम होंगे। इससे स्वाभाविक रूप से उन व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठेंगे, जिनकी बुनियाद मित्रता और सद्भावना पर रखी गई थी।’’ उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में शहबाज शरीफ द्वारा व्यक्त किए गए विचार ‘‘ऐसे लोगों की ओर से आए हैं जिनका कट्टरता और नफरत का लंबा इतिहास रहा है।’’ गहलोत ने कहा, ‘‘इस महासभा में धार्मिक असहिष्णुता पर उस शासन की ओर से टिप्पणियां की गईं, जिसकी व्यवस्था का एक प्रमुख आधार ईशनिंदा कानून हैं। दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। कोई भी दिखावटी खोखली बात दुनिया को गुमराह नहीं कर सकती।’’ दूसरी ओर, जयशंकर के बयान की बात करें तो आपको बता दें कि मामला शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में उस समय गरमा गया, जब जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेइसोलो न्यान्ती समुद्री परिवहन और नाविकों की सुरक्षा को लेकर बनाए गए ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ की जानकारी दे रहे थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद एक पाकिस्तानी पत्रकार ने जयशंकर से सवाल किया कि भारत पाकिस्तान में कथित आतंकवाद को प्रायोजित करना कब बंद करेगा? सवाल पूरा होते ही जयशंकर ने पलटवार किया, “एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। चलिए भी।” भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि हरिश पर्वतनेनी ने भी साफ कर दिया कि जवाब सुना जा चुका है और वह बिल्कुल स्पष्ट है। उधर, संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में बड़ी बड़ी बातें करने वाले शहबाज शरीफ से आतंकवाद के मुद्दे पर सवाल हुआ तो वह भाग खड़े हुए। हम आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में प्रवेश करते समय पत्रकारों ने उनसे सीधे पूछा— “प्रधानमंत्री, आप आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?” इस पर शहबाज शरीफ ने कोई जवाब नहीं दिया। बाद में बाहर निकलते समय उनसे लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद पर कार्रवाई को लेकर सवाल किया गया। इस सवाल पर भी उन्होंने चुप्पी साधी और भाग खड़े हुए। बहरहाल, संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान भारत पर आतंकवाद के आरोप लगाने पहुंचा, लेकिन सवाल जब उसके अपने दरवाजे पर पहुंचा तो जवाब गायब हो गया।

प्रभासाक्षी 26 Sep 2026 11:52 am

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लाइव हिन्दुस्तान 5 Sep 2026 6:09 am

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अमर उजाला 2 Sep 2026 10:06 am