सतलुज फिल्म पर प्रतिबंध लगने के बाद पंजाब आतंकवाद के उस काले और खौफनाक दौर को लेकर बहस छिड़ गई है। विरोधी दल व कट्टरपंथी तात्कालिक मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के दादा बेअंत सिंह को घेर रहे हैं। रवनीत सिंह बिट्टू ने अब फ्रंट पर आकर लोगों को आतंकवाद के दौर के फोटो व वीडियो दिखाने शुरू कर दिए। रवनीत बिट्टू ने आज सोशल मीडिया पर दो पोस्ट की हैं। एक पोस्ट में उन्होंने राजपुरा में सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल कांता और दूसरी पोस्ट में उत्तर प्रदेश रोडवेज की बस में हुए रेडियो बम विस्फोट का वीडियो शेयर किया है। बिट्टू ने चुनौती दी है कि प्रिंसिपल निर्मल कांता की सरेआम स्कूल में की गई हत्या पर भी फिल्म बनाई जानी चाहिए। रवनीत सिंह बिट्टू ने का कहना है कि एकतरफा इतिहास को दिखाना गलत है। उस दौर के दोनों पक्ष दिखाए जाएं। बिट्टू का कहना है कि वो वीडियो व फोटो के जरिए 80 और 90 के दशक की सच्चाई को दिखा रहे हैं। इन पोस्ट्स के जरिए बिट्टू पंजाब के लोगों को यह याद दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि उस समय आतंकवाद की आग में किस तरह बेकसूर और मासूम लोगों की बलि चढ़ाई गई थी। रवनीत बिट्टू ने सोशल मीडिया पोस्ट में कही ये अहम बातें... यूपी रोडवेज की बस में रेडियो बम ब्लास्ट' का खौफ प्रिंसिपल निर्मल कांता की कहानी साझा करने के बाद बिट्टू यहीं नहीं रुके। उन्होंने अपने आधिकारिक हैंडल से एक और भयावह वीडियो साझा किया, जिसने पंजाब और देश के लोगों के जेहन में उस दौर के खौफ को दोबारा जिंदा कर दिया। यह वीडियो उत्तर प्रदेश (यूपी) परिवहन निगम की एक बस में हुए 'रेडियो बम ब्लास्ट' से संबंधित है। 80 और 90 के दशक में आतंकवादियों द्वारा आम जनता में दहशत फैलाने का यह एक बेहद खौफनाक तरीका था। आतंकी अक्सर बसों, ट्रेनों, बाजारों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर खिलौनों, ट्रांजिस्टर या रेडियो के भीतर आईईडी (IED) बम छिपाकर छोड़ देते थे। सफर कर रहे बेकसूर राहगीर, मासूम बच्चे या महिलाएं जैसे ही उत्सुकतावश या लावारिस समझकर उस रेडियो को हाथ लगाते या चालू करते, वैसे ही एक जोरदार धमाका होता था और पूरी बस क्षत-विक्षत हो जाती थी। इस पुराने वीडियो को शेयर कर बिट्टू ने यह दिखाने का प्रयास किया है कि कट्टरपंथ की राह पर चलने वालों का निशाना कोई सरकार या पुलिस नहीं, बल्कि वे आम और गरीब नागरिक थे जो रोजमर्रा की रोजी-रोटी के लिए बसों में सफर करते थे।
आतंकवाद के दौर में मारे गए सिखों की शांति के लिए 14 को हरिके में अरदास
भास्कर न्यूज | अमृतसर आतंकवाद के दौर में लापता और मारे गए 25 हजार सिखों की आत्मिक शांति के लिए 14 जुलाई को सतलुज नदी किनारे हरिके पत्तन में अरदास समारोह आयोजित किया जाएगा। इस संबंधी श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि यह वही स्थान है जहां मारे गए बेगुनाह नौजवानों के शवों को नदी में फेंक दिया गया था। यह आयोजन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के सहयोग से होगा। उन्होंने कहा कि आज तक पंजाब में सरकार और पुलिस के ज़ुल्म का शिकार हुए 25 हजार से अधिक बेगुनाह नौजवानों, महिलाओं, बुज़ुर्गों और बच्चों की आत्मिक शांति के लिए कोई सामूहिक प्रार्थना नहीं हुई है और कई पीड़ित माताओं और बहनों को अभी भी नहीं पता कि उनके बेटों और भाइयों के साथ क्या हुआ। उन्होंने कहा कि यह समय की मांग है कि पंजाब के साथ जो हुआ वह दुनिया के सामने आए और पीड़ित परिवारों को इंसाफ मिले। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह ने उन सभी पीड़ित परिवारों, माताओं, बहनों, भाइयों, एक्टिविस्ट, वकीलों और मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए संघर्ष करने वाली हस्तियों को इस में शामिल होने का खुला न्यौता दिया, जो 1984 और उसके बाद के दशकों में सरकारी जुल्मों के शिकार हुए हैं और जिनके लिए शहीद भाई जसवंत सिंह ने संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि जिन बेगुनाह नौजवानों के मर्डर केस में मोहाली की सीबीआई कोर्ट ने पहले पुलिस अधिकारियों को सजा सुनाई है, उनके परिवारों को भी इस में जरूर शामिल होना चाहिए। जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि 14 जुलाई को शाम 6 बजे सतलुज नदी के किनारे हरिके पत्तन में उनकी आत्मा की शांति और उनके परिवारों के लिए न्याय के लिए प्रार्थना की जाएगी। जहां यह बताया गया था कि मारे गए बेगुनाह नौजवानों के शव नदी में फेंक दिए गए थे। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सहयोग से आयोजित किया जाएगा, जिसके तहत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को पालकी में सुशोभित किया जाएगा और श्री सुखमनी साहिब के पाठ के बाद गुरबानी कीर्तन और अरदास की जाएगी।

