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ईरान के खार्ग द्वीप पर अमेरिका का बड़ा हवाई हमला, ट्रंप का दावा- सभी सैन्य ठिकाने नष्ट; तेल ढांचे को जानबूझकर छोड़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस कार्रवाई की जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की। उन्होंने कहा कि यह हमला मध्य पूर्व के इतिहास में किए गए सबसे शक्तिशाली बमबारी अभियानों में से एक था।

देशबन्धु 14 Mar 2026 11:52 am

रोजाना 75 लाख LPG सिलेंडर की बुकिंग, डिलीवरी 50 लाख:भारत के पास कितनी रसोई गैस बची, आगे के लिए सरकार ने क्या इंतजाम किए

ईरान जंग की आंच आपकी रसोई तक पहुंच गई है। सरकार का कहना है कि लोग पैनिक में रोजाना 75 लाख LPG सिलेंडर की बुकिंग कर रहे हैं। देशभर के शहरों-कस्बों से LPG के लिए लंबी कतारें दिख रही हैं। आलम ये है कि लोग अब रेस्टोरेंट में जाकर मेन्यू से पहले पूछते हैं- गैस है या नहीं? ईरान जंग की आंच आपकी रसोई तक कैसे पहुंची, देश में कितने दिन की LPG बची है और अगर जंग खिंची तो सरकार कहां से लाएगी रसोई गैस; भास्कर एक्सप्लेनर में ऐसे 6 जरूरी सवालों के जवाब... सवाल-1: LPG क्या है और भारत को इसकी कितनी जरूरत है? जवाबः LPG यानी लिक्विड पेट्रोलियम गैस मुख्य रूप से दो गैसों का मिश्रण है- प्रोपेन और ब्यूटेन। इसका इस्तेमाल रसोई गैस के रूप में होता है। LPG कोई ऐसी चीज नहीं है, जो सीधे जमीन से निकलती है। ये पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की रिफाइनिंग के दौरान निकलने वाले बाय-प्रोडक्ट से तैयार होती है। जैसे- दही से घी निकालने में मट्ठा भी बनता है। ऐसे ही ऑयल रिफाइनरी और नेचुरल गैस की प्रोसेसिंग में LPG बनती है। इसी तरह एक और अहम गैस है LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस। इसके नेचुरल गैस के भंडार होते हैं। इसका इस्तेमाल बिजली, फर्टिलाइजर बनाने और इंडस्ट्रीज में होता है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच भारत में 30.8 मिलियन मीट्रिक टन यानी MMT एलपीजी की खपत हुई। घरेलू गैस सिलेंडर के हिसाब से रोजाना औसतन 65 लाख सिलेंडर। LPG का 88% इस्तेमाल घरेलू और 12% कॉमर्शियल होता है। देश में 33.21 करोड़ एक्टिव कनेक्शन हैं। सवाल-2: भारत के जरूरत की गैस कहां से आती है? जवाबः भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG खरीददार है। ईरान जंग से पहले 67% एलपीजी विदेशों से आती थी, लेकिन 11 मार्च को पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया कि 60% LPG विदेशों से इम्पोर्ट हो रही है। बाकी की गैस घरेलू रिफाइनरियां बना रही हैं। गैस सप्लाई करने के दो तरीके होते हैं- शिप और पाइपलाइन। भारत में शिप्स के जरिए गैस इम्पोर्ट होती है। खाड़ी, अफ्रीकी और अमेरिकी देशों से LPG और LNG खरीदी जाती है… सवाल-3: गैस आने के बाद भारत में उसका डिस्ट्रीब्यूशन कैसे होता है? जवाबः LPG और LNG से लदे जहाज जैसे ही बंदरगाह पर पहुंचते हैं, प्रोडक्ट्स के हिसाब से उन्हें अलग-अलग कर प्लांट्स में भेज दिया जाता है। लाल-नीले सिलेंडर में भरी जाती है LPG पाइपलाइंस से ट्रांसपोर्ट होती है LNG इन्वेस्टमेंट इन्फॉर्मेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ के मुताबिक, 'भारत के लिए अच्छी बात है कि यह किल्लत उर्वरकों के इस्तेमाल के ऑफ-सीजन में हुई है। खेती अभी हो नहीं रही है और किसानों को फिलहाल फर्टिलाइजर्स की जरूरत नहीं है।' सवाल-4: होर्मुज बंद होने से भारत की गैस सप्लाई पर कितना असर पड़ा है? जवाबः ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में UAE, कतर, कुवैत, सऊदी अरब जैसे दर्जनभर खाड़ी देशों को निशाना बनाया है। इसके चलते यहां के गैस प्लांट का प्रोडक्शन बंद हो गया या प्रभावित हुआ। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल के हमले जारी रहे तो हॉर्मुज स्ट्रेट से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे। यूएई, कतर, सऊदी अरब, कुवैत जैसे खाड़ी देशों से भारत की विदेश एलपीजी सप्लाई का 90% और एलएनजी का 70% खरीदता है। यहां से शिप महज 4-5 दिन में भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच जाते हैं। ये सारा शिपमेंट होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते भारत आता है, लेकिन अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते हॉर्मुज स्ट्रेट बंद पड़ा है। 1 मार्च से पहले इस जलमार्ग से रोजाना औसतन 153 शिप्स निकलते थे, लेकिन अब ये आंकड़ा 13 के करीब है। 11 मार्च को शिपिंग मिनिस्ट्री के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि फारस की खाड़ी में भारत के झंडे वाले 28 जहाज हैं। इनमें से 24 जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में हैं, जिन पर 677 क्रू मेंबर हैं। वहीं होर्मुज स्ट्रेट पर 4 जहाज हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक हैं। जंग शुरू होने के बाद 12 मार्च को पहली बार एक टैंकर होर्मुज के रास्ते मुंबई बंदरगाह पहुंचा है। सवाल-5: भारत के पास कितने दिन की LPG मौजूद है? जवाबः भारत के पास इमरजेंसी के लिए 2 LPG स्टोरेज हैं, जहां कुल 1.4 लाख टन LPG स्टोर है। 80 हजार टन LPG कर्नाटक के मंगलुरू में और 60 हजार टन आंध्र प्रदेश के विशाखापतनम में स्टोर है। कंपनियों के बॉटलिंग प्लांट्स और भरे जा चुके सिलेंडरों में भी काफी एलपीजी जमा है। हालांकि देश की जरूरतों के हिसाब से ये काफी कम है। वहीं, LNG के मामले में भारत के पास कोई स्पेशल स्टोरेज नहीं है। क्योंकि इसका सेटअप महंगा और कठिन है। इसके लिए क्रायोजेनिक यानी बेहद ठंडे टैंकर्स की जरूरत होती है। ऐसे में जितनी LNG गैस ग्रिड, पाइपलाइंस और बंदरगाहों के रिगैसिफिकेशन टर्मिनल्स में है, केवल उतनी ही LNG देश में मौजूद है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के पास 25-30 दिन की LPG और 10 दिन की LNG बची है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि घरों तक गैस की डिलीवरी ज्यादातर सामान्य है और औसत डिलीवरी समय करीब ढाई दिन है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक न करें। सवाल-6: मौजूद गैस के संकट से निपटने के लिए सरकार क्या कर रही है? जवाबः सरकार की ओर से गैस-तेल की कमी को दूर करने के लिए कुछ कदम उठाए जा रहे हैं… 1. सप्लाई रूट्स बदलना: पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के मुताबिक, ‘हम करीब 40 देशों से क्रूड इम्पोर्ट करते हैं। तेल कंपनियों ने अलग-अलग सोर्सेस से तेल मंगाया है। इसके कारण हमारा 70% क्रूड इम्पोर्ट होर्मुज स्ट्रेट के बाहर के रास्ते आ रहा है। ये पहले 55% था।’ 2. घरेलू उत्पादन बढ़ाना: पेट्रोलियम मंत्रालय ने घरेलू रिफाइनरियों को LPG प्रोडक्शन बढ़ाने को कहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक घरेलू प्रोडक्शन 28% बढ़ा है। रोजाना 50 लाख घरेलू LPG सिलेंडर बांटे जा रहे हैं। 3. होर्मुज के लिए बातचीत: भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बीते कुछ दिनों में 3 बार ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची से बात की है। वहीं, 12 मार्च की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से बात की। भारत चाहता है कि मिडिल-ईस्ट में हालात सामान्य हों और भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से निकलने की छूट मिले। 4. आवश्यक वस्तु अधिनियम: LPG सिलेंडरों की जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1995’ लागू किया है। साथ ही अलग-अलग इस्तेमाल के हिसाब से सप्लाई की प्राथमिकता तय की गई है। रसोई गैस को पहली प्राथमिकता दी गई है। वहीं कॉमर्शियल गैस हर महीने की औसतन सप्लाई की 20% ही डिलीवर की जा रही है। ग्लोबल एनर्जी थिंकटैंक एम्बर के एनालिस्ट और भारत की सरकारी तेल-गैस कंपनी के पूर्व अधिकारी दत्तत्रेय दास मानते हैं कि जंग शुरू होने बाद एक हफ्ते तक हालात अनिश्चित थे और तब सरकार ने LPG को तरजीह नहीं दी। सरकार की गलती है कि उसने रिफाइनरियों को LPG प्रोडक्शन बढ़ाने के निर्देश देने में 7 दिनों की देरी की। सवाल-7: अगर जंग लंबी छिड़ी, तो भारत कहां से गैस लाएगा? जवाबः केंद्र सरकार नए गैस सप्लायर्स से डील कर रही है। अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा और रूस जैसे देशों से से LPG खरीदी जा रही है। शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, करीब 2.2 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल लिए जहाज इस हफ्ते के आखिर तक भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया और कई अफ्रीकी देशों से भी सरकार भी गैस कारोबार कर सकती है। अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि आमतौर पर यहां से शिपमेंट आने में ज्यादा वक्त लगता है। इसके चलते LPG की घरेलू खपत में कुछ समय की किल्लत हो सकती है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में कहा कि खाड़ी देशों के अलावा अब अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस से भी गैस के कार्गो लाने की व्यवस्था की जा रही है। रूस को 3 करोड़ बैरल तेल के ऑर्डर दिए गए हैं। ------------ एलपीजी संकट से जुड़ी ये भी खबर पढ़िए… भारत के पास कितने दिन की LPG बची: जंग लंबी छिड़ी तो सरकार कहां से लाएगी रसोई गैस; आपको क्या करना चाहिए भोपाल के रहने वाले आदित्य ने 6 मार्च को IVRS कॉल से एक LPG सिलेंडर बुक किया। आमतौर पर 1 दिन बाद सिलेंडर की होम डिलीवरी हो जाती थी। जब 3 दिन बाद भी सिलेंडर घर नहीं पहुंचा, तो उन्होंने वापस IVRS डायल किया। नंबर इनवैलिड बताने लगा। आदित्य गैस एजेंसी के दफ्तर पहुंचे। वहां अफरा-तफरी मची थी। काफी मशक्कत के बाद एक सिलेंडर मिला। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 14 Mar 2026 5:03 am

जिन्हें कपड़े उतारकर घुमाया, वो मणिपुरी लड़कियां कहां गईं:3 साल से सुनवाई जारी, विक्टिम बोलीं-जिंदा हूं, पर दुनिया मुझे भूल गई

करीब 3 साल पहले। साल 2023 का जुलाई महीना। मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच चल रही हिंसा से जुड़ा एक वीडियो सामने आया। वीडियो में दो लड़कियां थीं, जिनकी न्यूड परेड कराई जा रही थी। इस वीडियो ने पूरे देश को झकझोर दिया। मणिपुर में हिंसा तो 3 मई से शुरू हो गई थी, लेकिन इस दौरान ऐसी दरिंदगी हुई होगी, किसी ने नहीं सोचा था। ये घटना मैतेई आबादी वाले थौबल जिले में 4 मई, 2023 को हुई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। वीडियो दिखाने पर बैन लगा दिया गया। जुलाई, 2023 में CBI को जांच सौंप दी गई। इसके बाद भी उस घटना का पूरा सच सामने नहीं आया। न उस दरिंदगी का दर्द किसी को पता चला। 26 फरवरी, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने CBI को आदेश दिया कि वो पीड़ित परिवारों को चार्जशीट दे। 24 मार्च को इस केस की अगली सुनवाई होगी। दैनिक भास्कर ने कोर्ट में दाखिल CBI की 47 पेज की चार्जशीट की पड़ताल की। हम पहली बार उन दो लड़कियों के बयान से उस दिन की आपबीती बताएंगे। ये भी बताएंगे कि जिन दो लड़कियों के साथ दरिंदगी हुई, उनकी जिंदगी अब कैसे गुजर रही है। इस घटना की इकलौती गवाह महिला अब कहां हैं। वे उस दिन कैसे भीड़ से बच निकली थीं। ‘भीड़ ने गांव पर हमला किया, पुलिस मौजूद थी, लेकिन मदद नहीं की’CBI की चार्जशीट में तीन महिलाओं का जिक्र है। उन्हें विक्टिम नंबर 1, 2 और 3 नाम दिया गया है। न्यूड परेड के वीडियो में दिखीं महिलाएं विक्टिम नंबर 1 और 2 हैं। ये घटना बी. फैनम गांव में हुई थी। घटना का ब्योरा पेज नंबर 10 से शुरू होता है। आरोप है कि मैतेई समुदाय के लोगों ने दोपहर करीब 3 बजे कुकी और जो समुदाय के घरों पर हमला किया था। उनके पास राइफल, लाठी, कुल्हाड़ी और चाकू थे। भीड़ ने घरों और चर्च में आग लगा दी। गांव के लोग छिपने के लिए जंगलों की तरफ भाग गए। इन्हीं में तीन पुरुष, तीन महिलाएं और ढाई साल की एक बच्ची भी थी। सभी जंगल में छिपे थे, लेकिन भीड़ ने उन्हें देख लिया। एक-एक करके जंगल में छिपे सभी लोग बाहर निकाले गए। महिलाओं और पुरुषों को अलग-अलग कर दिया। भीड़ ने पुरुषों को बुरी तरह पीटा। हालांकि, इसी भीड़ में शामिल कुछ लोगों की मदद से 3-4 विक्टिम गांव के पास सड़क किनारे खड़ी पुलिस की गाड़ी तक पहुंच गए। पेज नंबर 15 पर लिखा है कि भीड़ से बचने के लिए दो लड़कियां पुलिस की गाड़ी में बैठ गईं। उसमें दो पुलिसवाले और ड्राइवर मौजूद थे। गाड़ी के बाहर 3-4 पुलिसवाले थे। एक लड़की ने ड्राइवर से कहा कि जल्दी गाड़ी स्टार्ट करो। ड्राइवर ने जवाब दिया कि मेरे पास चाबी नहीं है। पीड़ितों ने कई बार मदद मांगी, लेकिन पुलिस से मदद नहीं मिली। भीड़ चिल्लाकर पुलिस वालों से कह रही थी कि इन्हें वापस करो। कुछ देर बाद भीड़ बढ़ने लगी। दोनों लड़कियों को बाल पकड़कर गाड़ी से बाहर खींच लिया। भीड़ देखकर पुलिसवाले भाग गए। भीड़ ने लड़कियों के कपड़े फाड़ दिए। उन्हें बिना कपड़ों के सड़क पर घुमाया। चार्जशीट के पेज नंबर-16 पर लड़कियों से हुई दरिंदगी का पूरा जिक्र है। भीड़ में से कुछ लोगों ने लड़कियों से कहा कि अपने कपड़े उतारो, वरना तुम्हें जिंदा जला देंगे। विक्टिम 1 के भाई और पिता ने उसे बचाने की कोशिश की, तो भीड़ ने लाठियों और कुल्हाड़ी से हमला कर उनकी हत्या कर दी। इसके बाद लड़कियों के कपड़े फाड़ने शुरू कर दिए। इसी दौरान विक्टिम नंबर-1 ने भीड़ में शामिल अरुण खुंडोनगबम और लोया को पहचान लिया। लोया ने ही उनके परिवार के पुरुष सदस्यों को बुरी तरह पीटा था। चार्जशीट में आगे लिखा है, भीड़ में शामिल लोग दोनों लड़कियों के ब्रेस्ट टच कर रहे थे। उन्हें नोंच रहे थे। विक्टिम नंबर-1 के प्राइवेट पार्ट को छू रहे थे। बार-बार थप्पड़ मार रहे थे। इसी दौरान आरोपी विक्टिम नंबर-1 को खेत में ले गए। उसका गला दबाने की कोशिश की। उससे गैंगरेप किया। आरोपियों ने कहा- जिसे रेप करना है, खेत में आ जाएCBI ने घटना की दूसरी विक्टिम का बयान भी दर्ज किया है। विक्टिम नंबर-2 के बारे में चार्जशीट में लिखा है- आरोपियों ने कहा कि जान बचाने के लिए तुम्हारे पास एक ही रास्ता है। या तो खुद सारे कपड़े उतार दो या फिर हम खुद ये काम करेंगे। इसके बाद भीड़ ने कपड़े फाड़ने शुरू कर दिए। इस लड़की की भी न्यूड परेड कराई गई थी। विक्टिम नंबर-1 से जहां दरिंदगी हो रही थी, उससे थोड़ी दूरी पर ही विक्टिम नंबर-2 को भी भीड़ ने घेरा हुआ था। भीड़ से कुछ लोग आवाज लगा रहे थे कि जिन लोगों को इससे रेप करना है, वे आ जाएं। इसके बाद उससे गैंगरेप किया। इस दौरान विक्टिम बेहोश हो गई। काफी देर बाद उसे थोड़ा होश आया। उसकी हालत बहुत बुरी थी। विक्टिम नंबर-2 ने बताया कि मैंने विक्टिम नंबर-1 के चीखने की आवाज सुनी थी। उसे देखा भी था। उसके आसपास काफी भीड़ थी। मैंने उस भीड़ में चिंगलेन और इनओतोन नाम के दो लोगों को पहचान लिया। इसके बाद दोनों को गांव के मेन रोड तक बिना कपड़ों के लाया गया था। भीड़ में कुछ लोग लड़कियों की मदद करना चाहते थे। उन्होंने दोनों को कपड़े देने चाहे, लेकिन आरोपियों ने उन्हें धमकाया कि दोबारा मदद करने आए तो तुम्हारा भी बुरा हाल करेंगे। चार्जशीट में लिखा है कि विक्टिम नंबर-3 भी वहीं पास में थीं। उसने पूरी घटना देखी थी। परिवारवालों की डेडबॉडी देखीं, पूरी रात जंगल में छिपी रहींजांच रिपोर्ट के मुताबिक, भीड़ दोनों लड़कियों को दूसरी जगह ले जाने लगी। रास्ते में विक्टिम नंबर-2 को अपने कपड़े बिखरे हुए मिले। उसने कुछ कपड़े उठा लिए, लेकिन फटे होने की वजह से उन्हें पहन नहीं सकीं। विक्टिम नंबर-1 ने कपड़े पहनने में उसकी मदद की। दोनों अब भी भीड़ से घिरीं हुई थीं। उन्होंने हिम्मत जुटाकर जान की भीख मांगी। इस पर भीड़ ने दोनों को छोड़ दिया। दोनों थोड़ा आगे बढ़ीं, तो उनके परिवार के दो पुरुष सदस्यों की लाशें एक दूसरे के ऊपर पड़ी देखीं। कुछ आगे गांव के पास सूखे नाले में विक्टिम नंबर 1 के भाई की डेडबॉडी मिली। उसकी खोपड़ी फटी हुई थी। आसपास कई लोग लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी लेकर खड़े हैं। कुछ के हाथ में बड़े-बड़े चाकू भी थे। ये लोग विक्टिम को रुका देखकर मारने के लिए दौड़े। कुछ बुजुर्गों ने भीड़ को रोक दिया। भीड़ का गुस्सा देखकर लड़कियां तेजी से जंगल की तरफ भागीं। आगे उन्हें गांव के दो लोग मिले। उनमें से एक के पास फोन था। विक्टिम नंबर-2 ने फोन से अपने परिचितों को घटना के बारे में बताया। इसके बाद पैदल चलते हुए दोनों इरॉन्ग तांगखुल गांव पहुंची। वहां विक्टिम नंबर-1 का दोस्त मिल गया। उसने दोनों को पहनने के लिए कपड़े दिए। वहां खतरा था, इसलिए दोस्त दोनों लड़कियों को जंगलों में ले गया। वहां उनके समुदाय के लोग छिपे थे। दोनों लड़कियों ने जंगल में ही रात बिताई। जांच के दौरान गवाहों ने माना कि दोनों के शरीर पर कपड़े नहीं थे। पोती को लेकर घर से भागी, जिंदा हूं इसलिए सब भूल गएबी. फैनोम गांव में भीड़ ने अटैक किया, तब विक्टिम नंबर 3 वहीं मौजूद थीं। उन्होंने ढाई साल की पोती को उठाया, पीठ से बांधा और घर से भागीं। भीड़ ने उसे घेरकर मारने की कोशिश की थी। कपड़े भी खींचे थे। अब ये महिला परिवार के साथ दिल्ली में रहतीं हैं। हमने उनसे बात करने वाले एक सोशल एक्टिविस्ट से विक्टिम की आपबीती समझी। विक्टिम की उम्र 55 साल है। वे घटना के बारे में बताती हैं, ‘वो डर आज भी दिलोदिमाग में है। मेरी पोती को भी सब याद है। उस समय वो ढाई साल की थी, अब 5 साल की हो चुकी है। उससे पूछो कि हम कैसे भागे थे। वो सब बता देगी।’ विक्टिम बताती हैं, ‘न्यूड परेड का जो वीडियो वायरल हुआ था, मैं उस घटना की गवाह हूं। उस दिन हमारे घरों में आग लगाई गई। हम 10 लोग बचने के लिए जंगल में भागे थे। भीड़ ने हमें खोज निकाला। मुझे भी पीटा। शायद मेरी पोती को देखकर उन्होंने मुझे छोड़ दिया था। अगर मेरी पोती न होती, तो शायद मैं भी जिंदा नहीं बच पाती। या मेरे साथ भी वैसी ही दरिंदगी होती।’ ‘मैं कई किमी तक पोती को पीठ पर बांधकर जंगल की ओर भागती रही। पूरी रात जंगल में छिपकर बिताई। बच्ची भूख से रोती रही। उस रात लगा कि अब नहीं बच पाएंगे। भूख से ही मर जाएंगे। फिर अगली सुबह पास के एक गांव में पहुंची। एक खाली घर में खाने का सामान मिल गया। इसके बाद हम राहत शिविर में पहुंचे। वहां कुछ महीने रही। मेरा 7 लोगों का परिवार है। सभी के साथ दिल्ली आ गई। यहां दो कमरे का मकान किराये पर लिया है। सब उसी में रह रहे हैं।’ पीड़ित आज भी घर से नहीं निकलतीं, आरोपी पकड़े गए, लेकिन डर बाकीजिन लड़कियों का वीडियो वायरल हुआ था, उनके बारे में गवाह बताती हैं, ‘वे अभी मणिपुर में ही रहती हैं। उस खौफ की वजह से आज भी घर से बाहर नहीं निकलती हैं। किसी से बात नहीं करतीं हैं। परिवारवालों और करीबियों से थोड़ी बात कर लेतीं हैं। डर इतना है कि आज भी कई दिन तक खाना नहीं खाती हैं। इस बात से भी डरती हैं कि वो वीडियो फिर से सोशल मीडिया पर कभी सामने न आ जाए।’ ‘घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक कमेटी बनी। 12 लाख रुपए मुआवजा मिला, आरोपियों को जेल भेज दिया गया, लेकिन इससे हमारा दर्द खत्म नहीं हुआ। इसलिए मैं कभी मणिपुर वापस नहीं जाना चाहती। हम बेशक जिंदा हैं, लेकिन सब हमें भूल गए हैं। हमें दिल्ली में भी काफी दिक्कत हो रही है, लेकिन मणिपुर जाने से डर लगता है। हमारे पास यहां घर नहीं है।’ ‘मणिपुर में हम बहुत खुश रहते थे। साल भर का धान उगाते थे। चावल मिलता था। उस घटना के बाद से दिमाग काम नहीं करता। बस टेंशन रहती है। मणिपुर लौट गए, तो वही डरावनी यादें फिर ताजा हो जाएंगी। इसलिए अब यहीं रहना है।’ दैनिक भास्कर ने इस केस की अपडेट जानने के लिए गृह मंत्रालय और CBI से कॉन्टैक्ट किया। पहले हमने गुवाहाटी में CBI ऑफिस फोन किया। वहां बताया गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए इसका जवाब आपको हेडक्वॉर्टर से मिलेगा। हमने दिल्ली में CBI हेड क्वॉर्टर में संपर्क किया। 9 मार्च को CBI और गृह मंत्रालय की ऑफिशियल ईमेल आईडी पर ये सवाल भेजे। 1. CBI ने मणिपुर हिंसा में जितनी FIR दर्ज की हैं, उनमें कितने मामलों में दोषियों को सजा हो पाई है? 2. न्यूड परेड निकालने की घटना में पीड़ित परिवार का दावा है कि उन्हें जांच से जुड़ी जानकारी नहीं दी जा रही है। ऐसा क्यों हुआ?3. कई लोगों के बयान दर्ज नहीं किए गए हैं। ऐसा क्यों हो रहा है। अब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिला है। जवाब आते ही स्टोरी अपडेट की जाएगी। …………………………..ये रिपोर्ट पढ़ें मुस्लिम से की शादी, भाई की पढ़ाई और राशन बंद, मंदिर में एंट्री नहीं पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मेटला गांव में रहने वाली मीता घोष (बदला हुआ नाम) का परिवार सोशल बायकॉट झेल रहा है। मीता ने दो साल पहले एक मुस्लिम लड़के से लव मैरिज की थी। शादी ज्यादा दिन नहीं चली, लेकिन अलग धर्म में शादी करने की ‘सजा’ मीता और उनके परिवार को अब तक मिल रही है। गांववालों का कहना है कि मीता मुसलमान हो गई है। दो साल बाद इसलिए गांव आई है, ताकि लड़के-लड़कियों का धर्म बदलवा सके। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 14 Mar 2026 5:02 am

ईरान युद्ध से भारत‑चीन‑यूरोप पर तगड़ा असर, रूस को फायदा

ईरान युद्ध के चलते दुनिया के लिए ऊर्जा की आवाजाही का सबसे अहम रास्ता बंद हो गया है. चीन, यूरोप और भारत के सामने आपूर्ति की बड़ी चुनौती है

देशबन्धु 13 Mar 2026 10:56 am

जर्मनी में हिजाब पहनने वाली महिलाओं ने झेला ज्यादा भेदभाव

जर्मनी में रहने वाले कई लोग मानते हैं कि उन्हें रोजमर्रा में भेदभाव झेलना पड़ता है. एक हालिया सर्वे में सामने आया है कि हिजाब पहनने वाली महिलाओं के साथ ऐसा और भी ज्यादा होता है

देशबन्धु 13 Mar 2026 10:53 am

ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खमेनेई कौन हैं?

ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने अली खमेनेई के बेटे मोजतबा खमेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया है. ये दिखाता है कि अमेरिका और इस्राएल के साथ युद्ध में घिरा ईरान आगे भी उन्हें टक्कर देने का ही इरादा रखता है.

देशबन्धु 13 Mar 2026 10:51 am

पेरू में भारी बारिश के चलते 283 जिलों में आपातकाल की घोषणा

पेरू ने 283 जिलों में आपातकाल की घोषणा की है, ताकि सार्वजनिक सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव डालने वाली तीव्र वर्षा के उच्च जोखिमों को कम किया जा सके और उसके प्रभावों से निपटा जा सके।

देशबन्धु 13 Mar 2026 9:47 am

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को सुरक्षा देने के लिए पूरी तरह तैयार अमेरिका: व्हाइट हाउस

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को नौसैनिक सुरक्षा (एस्कॉर्ट) देने के लिए पूरी तरह तैयार है

देशबन्धु 13 Mar 2026 9:40 am

अमेरिकी विश्वविद्यालयों में चीन के प्रभाव की सीनेट कर रही है गहन जांच

अमेरिकी सांसदों ने चेतावनी दी कि चीन संवेदनशील शोध और तकनीक तक पहुंच पाने के लिए अमेरिकी विश्वविद्यालयों का दुरुपयोग कर सकता है

देशबन्धु 13 Mar 2026 9:34 am

इराक में अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त, खोज अभियान जारी

पश्चिमी इराक में ईरान से जुड़े युद्ध अभियान के दौरान अमेरिका की वायुसेना का एक हवाई रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अमेरिकी सेना ने इस घटना की पुष्टि की है

देशबन्धु 13 Mar 2026 9:32 am

ईरान की आग लगाने की धमकी से दहला तेल बाजार, 100 डॉलर पार पहुंचा कच्चा तेल; अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर दी अस्थायी राहत

ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों या बंदरगाहों पर हमला किया गया, तो वह पूरे क्षेत्र के तेल और गैस ढांचे को निशाना बना सकता है। ईरानी सेना के केंद्रीय ऑपरेशन कमांड खातम अल-अंबिया के प्रवक्ता ने कहा कि किसी भी हमले की स्थिति में ईरान क्षेत्रीय ऊर्जा संरचना को जवाबी कार्रवाई का लक्ष्य बना सकता है।

देशबन्धु 13 Mar 2026 9:15 am

ईरान आतंक और नफरत फैलाने वाला देश है : ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की कड़ी आलोचना करते हुए उसे “आतंक और नफरत फैलाने वाला देश” बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में ईरान को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है

देशबन्धु 13 Mar 2026 9:04 am

पाकिस्तानी वायुसेना ने कई अफगानी शहरों में की एयरस्ट्राइक, कंधार में फ्यूल डिपो पर भी हमला

अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने कंधार हवाई अड्डे के पास स्थित निजी एयरलाइन ‘काम एयर’ (Kam Air) के फ्यूल डिपो पर हमला किया। यह एयरलाइन न केवल नागरिक उड़ानों को सेवाएं देती है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के विमानों को भी ईंधन की आपूर्ति करती है।

देशबन्धु 13 Mar 2026 8:33 am

‘UP में अविमुक्तेश्वरानंद केस और UGC का काउंटर करे BJP’:RSS का मैसेज- योगी ही चेहरा, अनुशासनहीन लोगों को बाहर करें

‘शंकराचार्य विवाद सनातन एकता की मुहिम को प्रभावित कर रहा है। योगी सरकार हर तरीके से इस मुद्दे को काउंटर करे, ताकि समाज में सनातन को लेकर पॉजिटिव मैसेज जाए। ये विषय लाखों लोगों की आस्था से जुड़ा है, इसे बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए।' RSS का ये मैसेज यूपी में BJP के शीर्ष नेतृत्व के लिए है। 6 मार्च को कानपुर में संघ और BJP की मीटिंग हुई। सोर्स बताते हैं कि CM योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में हुई बैठक में यूपी के राजनीतिक माहौल, संगठन में बड़े बदलावों के साथ-साथ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद को लेकर भी चर्चा हुई। बैठक में साफ कहा गया है कि शंकराचार्य मामले से सरकार और पार्टी को लेकर पैदा हुई निगेटिविटी दूर करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जाएगी। ताकि लोगों के बीच ये मैसेज जाए कि सरकार सनातन और संतों के साथ खड़ी है। मीटिंग से पहले 24 नवंबर 2025 को RSS चीफ मोहन भागवत और CM योगी आदित्यनाथ अयोध्या में मिले थे। इस साल लखनऊ में दोनों के बीच हुई मुलाकातों को संगठनात्मक तालमेल के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। लिहाजा, BJP लीडरशिप को ये मैसेज दे दिया गया है कि विधानसभा चुनाव में योगी ही पार्टी के सबसे बड़े चेहरे होंगे। इसलिए किसी भी तरह की निगेटिव कैंपेनिंग का सख्ती से जवाब दिया जाएगा। क्या 2027 विधानसभा चुनाव में शंकराचार्य विवाद BJP की स्ट्रैटजी पर बड़ा इम्पैक्ट डाल सकता है? क्या RSS इस मुद्दे पर योगी के साथ है? ये सवाल हमने दिल्ली और यूपी में RSS से जुड़े पदाधिकारियों, BJP नेताओं और एक्सपर्ट से पूछे। कानपुर में करीब पौने तीन घंटे मीटिंग यूपी में RSS का स्ट्रक्चर 6 प्रांतों- पश्चिम, ब्रज, अवध, काशी, गोरक्ष और कानपुर-बुंदेलखंड में बंटा हुआ है। होली के एक दिन बाद कानपुर में RSS और BJP लीडरशिप ने विधानसभा चुनाव को लेकर पहली कोऑर्डिनेशन मीटिंग की। सुबह 11 बजे CM योगी आदित्यनाथ दीनदयाल विद्यालय पहुंचे। उनके साथ BJP प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल भी बैठक में शामिल हुए। इसमें संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल और प्रांत प्रचारक श्रीराम, डॉ. अनुपम समेत कई सीनियर पदाधिकारी थे। राजनीतिक हलकों में इसे BJP के 'ट्रिपल-S मॉडल' यानी सरकार, संगठन और संघ की स्ट्रैटजी मीटिंग के तौर पर देखा जा रहा है। 2019 लोकसभा और 2022 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले भी इस तरह की कई मीटिंग हुईं थीं, जिसके बाद BJP को चुनाव में बड़ी सफलता मिली। RSS के सोर्स बताते हैं, ‘बैठक करीब पौने तीन घंटे चली। इसकी शुरुआत में लोकसभा चुनावों में कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में पार्टी को हुए नुकसान, लोकल नेताओं-कार्यकर्ताओं के बीच खींचतान और बढ़ती अनुशासनहीनता को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए कहा गया। इसके साथ 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में बड़े बदलाव और चुनावी रणनीति पर भी चर्चा हुई।‘ ‘बैठक के दौरान BJP नेताओं ने मुख्यमंत्री के सामने UGC के नए नियमों के कारण लोगों में असंतोष और शंकराचार्य विवाद का मुद्दा भी उठाया। इस पर संघ का साफ मैसेज था कि ऐसे मुद्दों से पार्टी की छवि प्रभावित हो रही है इसलिए शंकराचार्य मामले को हर तरीके से काउंटर किया जाना चाहिए। ताकि समाज में सनातन धर्म को लेकर पॉजीटिव मैसेज जाए।‘ BJP-संघ की बैठक में क्यों उठा ‘शंकराचार्य’ का टॉपिकयूपी में RSS और BJP की पॉलिटिक्स पर नजर रखने वाले सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद गोस्वामी कहते हैं, ‘BJP, योगी और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा मामला प्रयागराज के माघ मेले से शुरू हुआ, जब प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद के रथ को संगम तक जाने से रोक दिया था। विवाद तब और बढ़ गया, जब उनके अनुयायियों और बटुकों को चोटी खींचकर बुरी तरह मारा गया।‘ इस घटना को लेकर सनातनी समाज में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। लोगों ने इसे सरकार की निरंकुशता माना। BJP और संघ को डर है कि एक प्रमुख धार्मिक पीठ के शंकराचार्य का सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने से ब्राह्मण वोट बैंक और कट्टर हिंदू समर्थकों में भ्रम पैदा हो सकता है। ‘विपक्षी दल (जैसे सपा और कांग्रेस) इस विवाद को हवा दे रहे हैं ताकि BJP के हिंदुत्व वाले नैरेटिव को तोड़ा जा सके। यही वजह है कि पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ-साथ कार्यकर्ता तक इसे लेकर परेशान हैं।‘ ‘शंकराचार्य विवाद की शुरुआत से लेकर अब तक CM योगी के तेवर में कोई कमी नहीं आई है। वो जब भी संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिले या फिर कानपुर में जो बात हुई, उसमें शंकराचार्य विवाद को प्रमुखता से रखा गया। इसलिए RSS का रुख साफ है कि अगर अब इस मुद्दे पर पार्टी पीछे हटी तो उसे चुनाव में बड़ा नुकसान हो सकता है। यही वजह है कि इस मुद्दे पर योगी भी एग्रेसिव नजर आ रहे हैं।‘ अविमुक्तेश्वरानंद Vs योगी विवाद बढ़ने की 3 मुख्य वजहें 1. माघ मेले में शाही स्नान से पहले रोका गयाशंकराचार्य विवाद जनवरी 2026 में शुरू हुआ, जब प्रयागराज माघ मेले में यूपी पुलिस ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम पर 'राजसी स्नान' के लिए जाने से रोक दिया। उनके शिष्यों के साथ बदसलूकी भी हुई। पुलिस ने इसके पीछे भगदड़ और सुरक्षा का हवाला दिया, जिसे शंकराचार्य ने 'संतों का अपमान' और सरकारी अहंकार बताया। 2. 'शंकराचार्य' पद की वैधता पर कानूनी नोटिसप्रयागराज प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर पूछा कि वे 'शंकराचार्य' उपाधि का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं, जबकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है। बात तब बढ़ी जब विधानसभा में CM योगी ने नाम लिए बगैर कहा कि कोई भी खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता, कानून सबके लिए बराबर है। इस पर पलटवार करते हुए अविमुक्तेश्वानंद ने कहा- ‘कोई राजनेता ये तय नहीं कर सकता कि धर्म का सर्वोच्च पद कौन संभालेगा।‘ 3. 'योगी बनाम स्वामी' की तीखी बयानबाजीदोनों ओर से शब्दों की मर्यादा की सीमाएं कई बार लांघी गईं। CM योगी ने नाम लिए बगैर 'कालनेमी' शब्द का जिक्र किया, जिसके जवाब में शंकराचार्य ने योगी की तुलना 'औरंगजेब' से की और कहा कि मुख्यमंत्री 'खलीफा' बनना चाहते हैं। हाल ही में उन्होंने योगी सरकार को 40 दिन की चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यूपी में गौ-हत्या पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगा, तो वे योगी के 'हिंदू' होने पर सवाल उठाएंगे। अविमुक्तेश्वानंद के संघ प्रमुख पर बयान के बाद उनका विरोध बढ़ाक्या संघ भी स्वामी अविमुक्तेश्वानंद से नाराज हैं? ये सवाल हमने कानपुर में हुई बैठक में मौजूद BJP नेता से पूछा। नाम न जाहिर करने की गुजारिश पर वो कहते हैं, 'स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती यूपी के अलग-अलग जिलों में यात्रा कर रहे हैं। इस दौरान वो मीडिया से भी बात कर रहे हैं। वो पहले भी मुख्यमंत्री योगी से लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत पर विवादित टिप्पणी कर चुके हैं।' आप खुद बताइए क्या ऐसी भाषा का इस्तेमाल कोई शंकराचार्य कर सकता है। यही कारण है कि जनता के बीच अविमुक्तेश्वरानंद का विरोध बढ़ता जा रहा है। 'पिछले महीने 20 फरवरी को वाराणसी में अविमुक्तेश्वरानंद ने संघ प्रमुख के लिए कहा था कि वो हिंदुओं को बच्चे पैदा करने की सलाह देने से पहले खुद शादी करें। जो व्यक्ति बच्चा पैदा करने वाली प्रक्रिया या जिम्मेदारी का हिस्सा ही नहीं है, उसे इन संवेदनशील बातों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।' RSS से जुड़े संगठन विद्या भारती से जुड़े भास्कर दुबे कहते हैं, ‘विधानसभा चुनाव से पहले संघ और सरकार के बीच 'ट्रिपल-S मॉडल' बैठकें हो रही हैं। इन मीटिंग्स का एजेंडा पार्टी के अंदर मौजूद नाराजगी दूर करना है।‘ ‘संघ की यही कोशिश रहती है कि किसी भी तरह के ज्वलंत मुद्दों को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच टकराव न हों। ऐसे मुद्दों का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है ताकि चुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता बनी रहे। समन्वय बैठक में बूथ स्तर के संगठन, क्षेत्र और प्रांत प्रचारकों को मुख्यमंत्री से सीधे संवाद करने का मौका मिला। एक्सपर्ट बोले- BJP में शंकराचार्य और UGC को लेकर अंदरूनी मतभेद सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद गोस्वामी कहते हैं, ‘शंकराचार्य विवाद के तूल पकड़ते ही डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने बटुकों को घर बुलाकर सम्मानित किया। केशव प्रसाद मौर्य भी उन्हें भगवान कहते हैं। दूसरी तरफ पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह भी UGC के नए नियमों का विरोध करते हुए इसे समाज को बांटने वाला और असंतुलित कानून बता रहे हैं।‘ ‘इन बातों से ये साफ हो गया है कि शंकराचार्य और UGC विवाद को लेकर BJP में अंदरूनी मतभेद की स्थिति है। जिसे खत्म करने के लिए अब पैचवर्क किया जा रहा है। इसी वजह से संघ और BJP की लीडरशिप भी परेशान है कि वो 2027 के चुनाव में किस मुंह से जनता के सामने वोट मांगने जाएंगे। 2019 लोकसभा चुनाव में BJP को यूपी में 62 सीटें मिलीं थीं। 2024 में ये घटकर 33 रह गईं।’ ‘संघ के लिए योगी फ्यूचर PM कैंडिडेट, इसलिए साथ खड़ा’ संघ मामलों के जानकार और सीनियर जर्नलिस्ट कुमार भवेश चंद्र कहते हैं, ’स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद ने समाज में 'शंकराचार्य परंपरा' को लेकर नए सवाल पैदा कर दिए हैं। कुछ लोग इसके समर्थन में हैं, तो एक धड़ा विरोध कर रहा है। मामले के तूल पकड़ने के बाद संघ-BJP दोनों अपनी-अपनी तरह से इसे काउंटर कर रहे हैं।’ ‘योगी आदित्यनाथ मौजूदा दौर में BJP के बड़े नेता माने जाते हैं, कई बार उनके लिए बोला जाता है कि वे अगले PM कैंडिडेट भी हैं। CM योगी के खिलाफ अविमुक्तेश्वरानंद के जैसे बयान आ रहे हैं, ऐसे में अब संघ के लिए ये बड़ा सवाल बन गया है कि वो अपने नेता को बीच मझधार में कैसे छोड़ सकती है।‘ वो 4 बड़े मामले, जिनमें RSS ने दिया BJP का साथ… 1. वक्फ संशोधन विधेयकRSS ने वक्फ संशोधन विधेयक मुद्दे पर केंद्र सरकार के रुख का पूरी तरह समर्थन किया था। संघ के एक सीनियर पदाधिकारी के मुताबिक, 'संघ का मानना है कि वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन पारदर्शी होना चाहिए। इसलिए बीते साल हुए कॉर्डिनेशन बैठकों में ये तय हुआ कि RSS इस मुद्दे को 'तुष्टिकरण बनाम सुधार' के रूप में जनता के बीच ले जाए।‘ ‘इसे लेकर खास रणनीति भी बनाई गई, जिसमें पसमांदा मुस्लिम कम्युनिटी और गरीब तबके को ये समझाने का जिम्मा स्वयंसेवकों को दिया गया है कि ये कानून उनके हक में लाया जा रहा है।’ 2. UGC रेगुलेशन 2026 और आरक्षण विवादजनवरी 2026 में नए UGC नियमों को लेकर सवर्ण और दलित दोनों समुदायों में नाराजगी देखी गई थी। तब संघ ने सरकार को सलाह दी थी कि वो दलित समुदायों (विशेषकर जाटव) के बीच जा रही नकारात्मकता को रोकने के लिए संत रविदास की 650वीं जयंती को बड़े स्तर पर मनाए। संघ इसके लिए 'सामाजिक समरसता' अभियान चला रहा है कि BJP आरक्षण के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करेगी। 3. धर्मांतरण और अवैध मदरसों-मजारों पर बुलडोजर एक्शनपश्चिमी यूपी और पीलीभीत, लखीमपुर खीरी जैसे तराई क्षेत्रों में धर्मांतरण की रिपोर्टों पर संघ ने चिंता जताई थी। इस पर RSS ने योगी सरकार के 'अवैध मजारों' को हटाने, धर्मांतरण विरोधी कानून को और सख्ती से लागू करने के फैसलों का खुलकर समर्थन किया। 4. मथुरा और काशी का मुद्दाअयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद संघ अब मथुरा और काशी के मुद्दों पर BJP को फ्री हैंड दिया है। हालांकि, अगस्त 2025 में संघ प्रमुख मोहन भगवत ने कहा कि RSS मथुरा हो या काशी, किसी भी मंदिर आंदोलन में भाग नहीं लेगा। अगर स्वयंसेवक मंदिरों के आंदोलन में शामिल होना चाहते हैं, तो संगठन उन्हें नहीं रोकेगा। ……………….ये खबर भी पढ़ें… पूरी तरह बदलने वाला है RSS 40 लाख सदस्य और 83 हजार से ज्यादा शाखाओं वाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव करने वाला है। इसके मुताबिक अब अलग-अलग प्रांत प्रचारकों की जगह एक राज्य प्रचारक होगा। क्षेत्र प्रचारकों की संख्या भी कम होगी। जिला, तहसील, ब्लॉक और गांवों तक कार्यकर्ताओं को ज्यादा अधिकार मिलेंगे। इस बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी? पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 13 Mar 2026 5:15 am

ईरान ने रखीं युद्ध खत्म करने की 3 शर्तें, राष्ट्रपति पेजेशकियन बोले- तभी रुकेगी US-इजरायल से जंग

ईरान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से बताया है कि वह किन शर्तों पर अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे इस युद्ध को समाप्त करने के लिए तैयार हो सकता है।

देशबन्धु 12 Mar 2026 1:18 pm

West Asia Crisis: इराक में हुए हमले में भारतीय की मौत, ईरानी सुसाइड बोट से टक्कर के बाद अमेरिकी तेल टैंकर में लगी आग

जिस जहाज पर हमला हुआ उसका नाम ‘सेफसी विष्णु’ है। यह कच्चा तेल ले जाने वाला एक बड़ा टैंकर है। जहाज अमेरिका से जुड़ा हुआ है, हालांकि उस पर मार्शल आइलैंड्स का झंडा लगा हुआ था। हमले के समय जहाज पर कुल 28 लोग मौजूद थे।

देशबन्धु 12 Mar 2026 12:51 pm

ईरान से भारतीय छात्रों की निकासी शुरू, पहला समूह आर्मेनिया सीमा की ओर रवाना होने की तैयारी में

छात्रों का पहला समूह गुरुवार को आर्मेनिया सीमा की ओर रवाना होने की संभावना है। धीरे-धीरे निकासी योजनाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है और भारतीय छात्रों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने के लिए समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।

देशबन्धु 12 Mar 2026 10:56 am

ट्रंप का दावा: 1 घंटे में खत्म कर सकते हैं तेहरान की बिजली

ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल का संघर्ष अब भी जारी है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि ईरान पूरी तरह से खत्म हो रहा है

देशबन्धु 12 Mar 2026 9:30 am

ईरान पर सख्त हुआ यूएनएससी, खाड़ी देशों पर हमलों की निंदा वाला प्रस्ताव पास 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने बुधवार को खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के खिलाफ प्रस्ताव को पारित कर दिया

देशबन्धु 12 Mar 2026 9:20 am

दवाओं के लिए चीन पर अमेरिका की निर्भरता 'खतरनाक', लॉमेकर्स और विशेषज्ञों ने जताई चिंता

सीनेट की चर्चा के दौरान सीनेट मेंबर्स और एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी कि यूनाइटेड स्टेट्स अपनी कई आम दवाओं में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और इंग्रीडिएंट्स के लिए चीन पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गया है और ये स्थिति अमेरिका के लिए खतरनाक हो सकती है

देशबन्धु 12 Mar 2026 9:18 am

डिजिटल उपकरणों की शक्ति को पूरी मानवता तक पहुंचाने से मानवाधिकारों को मिलता है बढ़ावा : भारत

भारत के अनुसार डिजिटल उपकरणों की शक्ति को पूरी मानवता तक पहुंचाना मानवाधिकारों को बढ़ावा देने में मदद करता है, क्योंकि सभी लोगों के जीवन में सुधार करना इसकी वास्तविक क्षमता को साकार करने के लिए आवश्यक है।

देशबन्धु 12 Mar 2026 9:14 am

ट्रंप ने ईरान पर हमलों को तेल की कीमतों में कमी से जोड़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से वैश्विक तेल कीमतों को कम करने में मदद मिलेगी

देशबन्धु 12 Mar 2026 9:11 am

भारत के पास कितने दिन की LPG बची है:जंग लंबी छिड़ी तो सरकार कहां से लाएगी रसोई गैस; आपको क्या करना चाहिए

भोपाल के रहने वाले आदित्य ने 6 मार्च को IVRS कॉल से एक LPG सिलेंडर बुक किया। आमतौर पर 1 दिन बाद सिलेंडर की होम डिलीवरी हो जाती थी। जब 3 दिन बाद भी सिलेंडर घर नहीं पहुंचा, तो उन्होंने वापस IVRS डायल किया। नंबर इनवैलिड बताने लगा। आदित्य गैस एजेंसी के दफ्तर पहुंचे। वहां अफरा-तफरी मची थी। किसी की शिकायत थी कि गैस बुक नहीं हो रही, किसी ने बताया बुकिंग के हफ्तेभर बाद भी डिलीवरी नहीं हुई। लोग एक अदद सिलेंडर के लिए चक्कर काट रहे थे। एक्स्ट्रा पैसे देने को तैयार थे। काफी मशक्कत के बाद आदित्य को एक सिलेंडर मिल सका। इस वक्त ये आपबीती देश के लाखों लोगों की है। ईरान जंग की आंच आपकी रसोई तक कैसे पहुंच गई, देश में कितने दिन की LPG बची है और अगर जंग खिंची तो सरकार कहां से लाएगी रसोई गैस; भास्कर एक्सप्लेनर में ऐसे 6 जरूरी सवालों के जवाब... सवाल-1: भारत रसोई गैस या LPG पर कितना निर्भर है, कहां किल्लत दिख रही? जवाब: भारत को सालाना करीब 33 मिलियन मीट्रिक टन LPG की जरूरत होती है। घरेलू गैस सिलेंडर के हिसाब से हर साल करीब 235 करोड़ सिलेंडर। यानी रोजाना 64 लाख सिलेंडर। इसका 88% हिस्सा घरों में इस्तेमाल होता है। बाकी की 12% गैस कमर्शियल यानी होटल, रेस्टोरेंट, इंडस्ट्री वगैरह में यूज होती है। भारत अपनी खपत की 60% LPG विदेशों से खरीदता है। बाकी भारतीय रिफाइनरियों में तैयार होती है। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते विदेशों से होने वाली LPG सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके चलते भारत में LPG की किल्लत देखी जा रही है… सवाल-2: LPG होती क्या है, कैसे बनती है? जवाब: LPG यानी लिक्विड पेट्रोलियम गैस मुख्य रूप से दो गैसों का मिश्रण है- प्रोपेन और ब्यूटेन। LPG कोई ऐसी चीज नहीं है, जो सीधे जमीन से निकलती है। ये पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की रिफाइनिंग के दौरान निकलने वाले बाय-प्रोडक्ट से तैयार होती है। बाय-प्रोडक्ट को ऐसे समझिए कि दही से घी निकालने में मट्ठा भी बनता है। ऐसे ही पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की रिफाइनिंग में LPG बनती है। इसे बनाने के दो तरीके हैं… 1. तेल और गैस के कुओं से 2. तेल रिफाइनरियों में तैयार गैस को हाई-प्रेशर के साथ सिलेंडर भरा जाता है, जिससे गैस के अणु इतने करीब आ जाते है कि वे पानी की तरह लिक्विड बन जाते हैं। इससे कम जगह में ज्यादा LPG आ जाती है। LPG को जलाने पर लकड़ी जलाने जैसा धुआं नहीं होता, लेकिन कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है। LPG हवा से ज्यादा भारी होती है। अगर ये लीक हुई तो ऊपर नहीं, बल्कि नीचे बैठ जाती है। इसी के चलते LPG में प्रोपेन और ब्यूटेन के अलावा एथिल मरकैप्टन नाम का एक केमिकल मिलाया जाता है। ताकि LPG लीक होने पर तुरंत पता चल जाए और बड़ा हादसा न हो। प्रोपेन और ब्यूटेन में नेचुरली कोई गंध-रंग नहीं होती। इसलिए इसमें एथिरल मरकैप्टन मिलाते हैं, जिससे LPG को अजीब सी गंध मिलती है। जब LPG लीक होती है, तब ये गंध हमें पता चलती है। सवाल-3: ईरान जंग से भारत में LPG की सप्लाई कैसे बाधित हुई? जवाब: UAE, कतर, सऊदी अरब, कुवैत जैसे खाड़ी देशों से गैस या पेट्रोलियम को भारत आने के लिए हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरना पड़ता है। लेकिन अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते हॉर्मुज स्ट्रेट बंद पड़ा है। जंग से पहले इस जलमार्ग से रोजाना औसतन 153 शिप्स निकलते थे, लेकिन अब ये आंकड़ा 13 के करीब है। 11 मार्च को शिपिंग मिनिस्ट्री के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि फारस की खाड़ी में भारत के झंडे वाले 28 जहाज हैं। इनमें से 24 जहाज हॉर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में हैं, जिन पर 677 क्रू मेंबर हैं। वहीं हॉर्मुज स्ट्रेट पर 4 जहाज हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक हैं। ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में UAE, कतर, कुवैत, सऊदी अरब जैसे दर्जनभर खाड़ी देशों को निशाना बनाया है। इसके चलते यहां के गैस प्लांट का प्रोडक्शन बंद हो गया या प्रभावित हुआ। ईरान का तर्क है कि इन देशों पर मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों से ईरान पर हमले हो रहे हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल के हमले जारी रहे तो हॉर्मुज स्ट्रेट से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे। 11 मार्च को थाईलैंड के एक कार्गो शिप पर होर्मुज स्ट्रेट में हमला हुआ। ये शिप भारत आ रहा था। हमले के बाद शिप के इंजन रूम में आग लग गई। ओमान की नौसेना ने शिप के 23 में से 20 क्रू मेंबर्स को रेस्क्यू कर लिया। हालांकि हमला किसने किया, इसकी जानकारी नहीं है। सवाल-4: भारत के पास कितने दिन का स्टॉक मौजूद है? जवाब: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के पास 10 दिन का LPG बफर स्टॉक है, जो जल्द ही खत्म हो सकता है। इसी के चलते केंद्र सरकार ने ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1995’ लागू कर दिया है, जिसके तहत LPG सिलेंडरों की जमाखोरी रोकी गई है। साथ ही अलग-अलग इस्तेमाल के हिसाब से प्राथमिकता तय की गई है। साथ ही तमाम सरकारी और निजी रिफाइनरियों को प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कहा गया है। 11 मार्च को पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया कि घरेलू एलपीजी प्रोडक्शन में 25% की बढ़त हुई है। भारत के LPG स्टॉक के 2 अनुमान लगाए जा रहे हैं… हालांकि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी ने कहा है कि घरेलू इस्तेमाल के लिए LPG सप्लाई में कोई कमी नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। सवाल-5: जंग लंबी चली, तो भारत कहां से LPG लाएगा? जवाब: केंद्र सरकार नए गैस सप्लायर्स के बारे में सोच रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, नॉर्वे और अमेरिका जैसे गैस सप्लायर्स से गैस खरीदने की संभावना है। अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ को सूत्रों ने बताया कि आमतौर पर यहां से शिपमेंट आने में ज्यादा वक्त लगता है। इसके चलते LPG की घरेलू खपत में कुछ समय की किल्लत हो सकती है। शिपिंग इंडस्ट्री का अनुमान है कि जहाजों को अमेरिका या नॉर्वे जाने और वहां से भारत तक गैस लाने में करीब 2 महीने का वक्त लगता है। इसके अलावा भारत ने रूस को कच्चे तेल के बड़े ऑर्डर दिए हैं। शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, करीब 2.2 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल लिए जहाज इस हफ्ते के आखिर तक भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं। 3 करोड़ बैरल कच्चे तेल का ऑर्डर भी दिया है। रिलायंस और IOCL जैसी तेल कंपनियों ने एग्रीमेंट किया है। नए गैस सप्लायर्स की फेहरिस्त में ऑस्ट्रेलिया और कई अफ्रीकी देशों जैसे अल्जीरिया, नाइजीरिया और अंगोला का भी नाम है। सरकार इनसे भी करोबार कर सकती है। पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया, ‘हम करीब 40 देशों से क्रूड इम्पोर्ट करते हैं। तेल कंपनियों ने अलग-अलग सोर्सेस से तेल मंगाया है। इसके कारण हमारा 70% क्रूड इम्पोर्ट हॉर्मुज स्ट्रेट के बाहर के रास्ते आ रहा है। ये पहले 55% था।’ वहीं 5 मार्च को पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी देश की सभी रिफाइनरियों को निर्देश जारी किया है कि वे मैक्सिमम कैपेसिटी में प्रोडक्शन करें। किसी भी तरीके से मिलने या तैयार होने वाली ब्यूटेन और प्रोपेन गैस का इस्तेमाल LPG प्रोडक्शन में करें। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडियन नेवी हॉर्मुज स्ट्रेट में फंसे कार्गो शिप्स को एस्कॉर्ट कर सकती है। हालांकि जून 2019 से खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए नेवी का ऑपरेशन संकल्प जारी है। वहीं 10 मार्च की रात भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची से बात की। वेस्ट एशिया के हालातों और हॉर्मुज स्ट्रेट के शिपमेंट्स पर चर्चा हुई। A detailed conversation this evening with Foreign Minister @araghchi of Iran on the latest developments regarding the ongoing conflict. We agreed to remain in touch.— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) March 10, 2026 सवाल-6: LPG की किल्लत के बीच आपके पास क्या ऑप्शन हैं? जवाब: रसोई गैस की मारा-मारी के बीच आप कुछ विकल्प अपना सकते हैं… ----------- ईरान जंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… तेल से जेब भर रहा रूस, अब भारत को भी महंगा बेचेगा; अमेरिका-ईरान जंग से पुतिन कैसे बन रहे विनर, 5 फैक्टर्स अमेरिका-ईरान जंग से दुनिया के ज्यादातर देश परेशान हैं। लेकिन रूस के राष्ट्रपति पुतिन मुस्कुरा रहे हैं। इस जंग ने अचानक उन्हें फिर से बेहद रेलिवेंट बना दिया है। भारत पर रूसी तेल खरीदने की वजह से पनिशमेंट टैरिफ लगाने वाला अमेरिका, खुद रूस से तेल खरीदने के लिए कह रहा है। रूस का भी कहना है कि तेल तो हम दे देंगे, लेकिन पहले जैसा डिस्काउंट भूल जाइए। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 12 Mar 2026 5:13 am

ब्लैकबोर्ड- भूख के बजाय, दवाओं के ट्रायल से मरना अच्छा:बच्चों को तो 25 लाख मिल जाएंगे; उन्हें रिसर्च के लिए खून चाहिए, हमें पैसा

'किसे अच्छा लगता है कि वह पैसे के लिए अपनी जान की बाजी लगाए, लेकिन मुझे लगानी पड़ती है। अगर मर भी गई तो बच्चों को 20-25 लाख मिलेंगे। कम से कम उनकी जिंदगी तो बेहतर हो जाएगी। अभी तक खुद पर दवाओं के ट्रायल में 4 बार पास हुई हूं। मुझ पर कैंसर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी की दवाओं के ट्रायल हो चुके हैं…अब हर तीन महीने में लैब के चक्कर लगाती हूं। पूछती रहती हूं कोई नया ट्रायल होने वाला है क्या?’, बिस्मिल्लाह स्याह कहानियों की सीरीज ब्लैकबोर्ड में ऐसे लोगों की कहानी, जो पैसों के लिए अपनी जान दांव पर लगाकर क्लिनिकल ट्रायल का हिस्सा बन रहे हैं। खुद पर दवाएं टेस्ट करा रहे हैं। अपनी झोपड़ी में बैठी 6 बच्चों की मां बिस्मिल्लाह खुद पर हुए क्लिनिकल ट्रायल की कहानी बता रही हैं। वह बातचीत करने के लिए तैयार नहीं थी, काफी समझाने के बाद राजी हुईं। बिस्मिल्लाह गुजरात के अहमदाबाद शहर से 20 किलोमीटर दूर बसे गणेश नगर इलाके की झुग्गी-बस्ती में रहती हैं। अभी रमजान चल रहे हैं। जिस वक्त मैं बिस्मिल्लाह के घर गया, वह शाम के इफ्तार की तैयारी कर रही थीं। तपती गर्मी में यहां एक मिनट भी ठहरना मुश्किल है। मैंने बिस्मिल्लाह से पूछा- क्लिनिकल ट्रायल के लिए आप लैब कैसे गई थी? दुपट्टे में पसीना पोंछते हुए बोलीं- ‘यहां 100 से ज्यादा परिवार रहते हैं। चार साल पहले की बात है। बस्ती की कई महिलाएं शहर जा रही थीं। मुझे किसी ने बताया कि सभी दवा के ट्रायल के लिए जा रही हैं। बदले में पैसे मिलते हैं। मैं भी उनके पीछे-पीछे ऑटो में बैठ गई। करीब एक घंटे बाद सभी लोग एक लैब के बाहर जाकर रुक गए। उस दिन पता चला कि वहां हम इंसानों पर दवाओं का ट्रायल किया जाता है। क्लिनिकल स्टडी के लिए खून लिया जाता है। लैब में काम करने वाले से जब मैंने पूछा, तो उन्होंने कहा- कैंसर की दवा बनाने का टेस्ट चल रहा है। तुम्हें क्लिनिकल स्टडी करवानी है? इसमें पास हो जाओगी, तो पैसे मिलेंगे। लेकिन अगर तुम्हें कुछ हो गया, तो उसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं होगी। मैं सोचने लगी- वैसे भी गरीबी में मर ही रही हूं। स्टडी के दौरान मर गई तो बच्चों को 20-25 लाख तो मिल जाएंगे, ट्रायल करा ही लेती हूं। मैंने हां कह दिया। ‘आपको लैब वालों ने बताया था कि जान भी जा सकती है?’ बिस्मिल्लाह फौरन बोलीं, 'उन लोगों ने एक फॉर्म भरवाया। उसमें गुजराती में लिखा था- अपनी मर्जी से स्टडी में हिस्सा ले रही हूं। अगर मेरी मौत हो गई, तो उसकी जिम्मेदारी खुद की होगी। लैब की कोई जवाबदेही नहीं होगी। उस दिन मेरे शरीर पर दवा का पहला ट्रायल किया गया और 20 हजार रुपए मिले। 6 महीने किसी के यहां चूल्हा-चौका करती, तब भी इतने पैसे नहीं मिलते। हमें क्या… हमें तो बस पैसा चाहिए और उन्हें इंसानों का खून। पैसों के लालच में मौत से खेलती हूं। बच्चे मना करते हैं। कहते हैं- अगर मुझे कुछ हो गया, तो उनका क्या होगा? मैं समझाती हूं- इंसान की क्या ही कीमत है। पैसे रहेंगे, तो जिंदगी कट ही जाएगी।' ये कहते हुए बिस्मिल्लाह की आंखें भर आती हैं। कितने पैसे मिलते हैं? 35 हजार रुपए तक मिलते हैं। जैसी स्टडी, वैसा पैसा। पहले मैं तीन-चार दिन की स्टडी में ही जाती थी। अब तो 24 घंटे तक चलने वाली स्टडी में जाती हूं। पहले घर पर छोटे-छोटे बच्चे थे, तो उनकी भी देखभाल करनी पड़ती थी। पड़ोस के दो बच्चों को गोद ले रखा है। दरअसल, उनका बाप मर गया, तो मां ने दूसरी शादी कर ली। बच्चे अनाथ रह रहे थे। मैं उनकी देखभाल करने लगी। दवाओं की यह जांच कई हिस्सों में होती है। एक बार तो मैंने तीन हिस्से पूरे किए थे, चौथे हिस्से में शामिल होने से पहले कुत्ते ने काट लिया। तब लैब वालों ने मेरे पैसे काट लिए। 35 हजार के बदले 25 हजार रुपए ही दिए। एक तो जान की बाजी लगाओ, ऊपर से स्टडी पूरी न होने पर पैसे भी कट जाते हैं, लेकिन हमारे हाथ में कुछ भी नहीं। ट्रायल से पहले मेरे पूरे शरीर का चेकअप किया जाता है, फिर मेरा खून लेते हैं। दो बार में 500 ml तक खून निकाल लेते हैं। कुछ दवाएं खिलाकर एक कमरे में बंद रखते हैं। कोई रिएक्शन या दिक्कत नहीं होती है, तो घर भेज देते हैं। उसके बाद अगर मुझे कुछ हो जाए, तो उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं। ट्रायल के बाद वे कहते हैं- घर जाकर ताकत वाली चीजें खाना, लेकिन फल-सब्जियां कहां से खाऊं। दो वक्त का दाल-भात मिल जाए, वही बहुत है। एक बार ऐसी ही स्टडी के लिए पुणे गई थी। 20 हजार रुपए मिले थे। उस दिन लैब वालों ने मुझे कैश में पैसा दिया था। पैसा एक बैग में रखा लिया था, किसी ने बैग चुरा लिया। पूरी मेहनत पानी में चली गई थी। कई बार तो ऐसा होता है कि मेरी रिपोर्ट स्टडी के मुताबिक नहीं होती, तो हमें घर वापस भेज दिया जाता है। तब लगता है कि अगर स्टडी हो जाती, तो पैसे मिल जाते। लेकिन अब घर जाकर बच्चों के खाने-पीने की व्यवस्था कैसे करूंगी।’ 'यहां कब से रह रही हैं?' बिस्मिल्लाह कहती हैं, 'हम लोग पिछले 17 साल से यहां रह रहे हैं। बरसात में पूरा इलाका पानी से भर जाता है। आंधी आती है तो छप्पर उड़ जाते हैं। यहां न कोई रोजगार है, न कोई धंधा। पैसे के लिए दवाओं के ट्रायल में हिस्सा लेना पड़ता है। पेट के लिए हम इंसानों को खुद को बेचना पड़ता है। मैं तो सिर्फ खून बेचती हूं। इस बस्ती में इतनी गंदगी है कि आप कुछ देर भी यहां ठहर नहीं सकते। साबरमती रीवरफ्रंट डेवलपमेंट के दौरान राज्य सरकार ने हमें वहां से हटाकर यहां बसा दिया, लेकिन आज भी यहां कोई सुविधा नहीं है।' ‘घर में और कौन-कौन रहता है?’ 'मैं और मेरे तीन बच्चे…। करीब 30 साल पहले की बात है। पहले शौहर से एक बेटी हुई थी। ससुराल वालों ने कहा- तुमने बेटी जनी है, तुम जानो। हमारा इससे कोई मतलब नहीं। डिलीवरी के 6 दिन बाद ही घर से निकाल दिया। मेरे मां-बाप ने भी मुझे रखने से मना कर दिया। मैं अपने नाना-नानी के घर चली गई। कुछ सालों बाद एक हिंदू आदमी से प्यार हो गया। मैंने शादी कर ली। उससे मुझे 5 बच्चे हुए, लेकिन उसने भी मुझे तलाक दे दिया और 3 बच्चे अपने पास रख लिए। तीन बच्चों के साथ मैं अलग रहने लगी। दो बच्चों की शादी हो गई है, एक की नहीं हुई है। उसके दिल में छेद है। अब मेरे पास खाने तक के पैसे नहीं हैं, तो उसका इलाज कहां से कराऊं। किसी मामले में पुलिस उसे उठा ले गई है। मेरे पास तो केस लड़ने के भी पैसे नहीं हैं।’ मजबूरी का यह दंश सिर्फ बिस्मिल्लाह ही नहीं झेल रही हैं। यहां लगभग हर परिवार की यही कहानी है। ज्यादातर परिवार बातचीत के लिए कैमरे पर नहीं आना चाहते हैं। उन्हें डर है कि अगर बात करेंगे, खबर फैल जाएगी तो लैब वाले ट्रायल में लेने से इनकार कर देंगे। बिस्मिल्लाह के बाद बड़ी मुश्किल से 64 साल की मंजू बेन बातचीत के लिए राजी हुईं। वो अकेले रहती हैं। परिवार के बारे में बताती हैं कि एक पोता और एक पोती है। दोनों शहर में रहते हैं। 6 साल पहले पति की मौत हुई थी, फिर एक दुर्घटना में बेटे की मौत हो गई। वह सूरत में रहता था। वहां पर ही वह क्लिनिकल ट्रायल में हिस्सा लेने जाता था। अब घर में कोई कमाने वाला नहीं बचा है। इसलिए मैं क्लिनिकल ट्रायल के लिए जाती हूं। इसी से हमारा घर चलता है। बेटे की मौत के बाद तुरंत बाद ही मैंने एक ट्रायल में हिस्सा लिया था। 20 हजार रुपए मिले थे। उसी से यह टॉफी-बिस्किट की दुकान खोली। इससे दिनभर में 50 रुपए की कमाई हो पाती है। इतने से क्या ही होने वाला है। मेरी तो उम्र भी हो चुकी है। हर दिन सोचती हूं कि एक और स्टडी मिल जाती, तो इस घर की मरम्मत करवा लेती। एक साल में अगर कोई और स्टडी नहीं मिली, तो यह काम नहीं करा पाऊंगी। मेरी उम्र पूरी हो जाएगी। ऐसे भी मर ही जाऊंगी। यदि स्टडी के दौरान मर गई, तो मेरे पोता-पोती को 25 लाख रुपए तो मिलेंगे। यही सोचकर स्टडी के लिए चली जाती हूं। मेरे पोते-पोती को नहीं पता होता कि मैं स्टडी के लिए गई हूं। उन्हें बिना बताए जाती हूं। घर चलाने के लिए पैसे तो चाहिए ही न। यहां कोई काम-धंधा भी नहीं है। किसी के घर काम करने जाऊं, तो 1500 से 2 हजार रुपए ही मिलते हैं। अब काम करने लायक उम्र भी नहीं रही। क्या ही कर सकती हूं।’ बिस्मिल्लाह और मंजू बेन से बातचीत के बाद अभी तक मुझे यही लग रहा था कि क्लिनिकल ट्रायल में सिर्फ महिलाएं जा रही हैं। तभी एक शख्स ने बताया कि पास में रहने वाले जनकभाई भी क्लिनिकल ट्रायल के लिए जाते हैं। मैं उनके पास पहुंचा। खाट पर एक कपड़ा बांधकर अपने बेटे को सुला रहे हैं। पूछने पर कहते हैं, ‘यहां जमालपुर की फूल मंडी है। वहां मजदूरी करता था। धीरे-धीरे धंधा चौपट होने लगा, तो किसी ने बताया कि क्लिनिकल स्टडी में पैसे मिल जाते हैं। मैं और मेरी पत्नी अनशा दोनों स्टडी के लिए गए। पत्नी का वजन कम था, तो उसे स्टडी में लेने से मना कर दिया गया। मैं पास हो गया। पहली स्टडी से जो पैसा मिला, उसी से मैंने इस घर की दीवार खड़ी की। नहीं तो पहले यह पूरी तरह झोपड़ी था। क्या करें, पैसों के लिए स्टडी में जाना पड़ता है। यहां कोई दूसरा काम-धंधा नहीं मिलता। पिछले चार साल में दर्जनों से भी ज्यादा बार स्टडी के लिए गया, लेकिन 4 बार ही पास हो पाया। अभी एक ट्रायल के लिए टेस्ट देकर आया हूं। यह उसी का डॉक्यूमेंट है। इस बार भी फेल हो गया। अब तीन महीने बाद नंबर आएगा।’ सामने जनकभाई की पत्नी अनशा बेन जमीन पर बैठी हमारी बातें सुन रही हैं। कहती हैं, ‘यदि मैं स्टडी में पास हो जाती, तो इन्हें स्टडी नहीं कराने देती। लेकिन मैं तो पहली बार में ही फेल हो गई थी। मेरा वजन कम था। जब ये स्टडी पर जाते हैं, तो हर वक्त मन उधर ही लगा रहता है। जब तक इनका फोन नहीं आ जाता, नींद नहीं आती। डर लगता रहता है कि इन्हें कुछ हो गया तो… मैं तो विधवा हो जाऊंगी, लेकिन पैसे के लिए सब कुछ दांव पर लगाना पड़ता है।’ ------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-5 करोड़ मुआवजा शानो-शौकत में उड़ाया:3 करोड़ की जमीन खरीदी, 1 करोड़ का मकान; 80-80 लाख की शादियां- अब रोज कमाने से घर चल रहा एक सच्ची कहानी- ग्रेटर नोएडा के किसान रामेश्वर सिंह की। 12 एकड़ जमीन सरकार ने ली और बदले में उन्हें सवा 5 करोड़ रुपए दिए। पैसा खाते में आते ही जिंदगी बदल गई। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-‘एक्स्ट्रा सर्विस’ न देने पर मारी गई थी अंकिता भंडारी:मां-बाप ने खुद को घर में बंद किया; न कमा रहे, न राशन खरीद पा रहे दिल्ली से आए मीडिया के लोग दिनभर अंकिता भंडारी के माता-पिता से बात करने के लिए उनके घर के बाहर बैठे रहे, लेकिन वे घर पर ताला लगाकर चले गए थे। तब तक नहीं लौटे, जब तक मीडिया के लोग वापस नहीं चले गए। अगले दिन मैं बिना बताए उनके घर पहुंची। वह हड़बड़ा गईं… पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 12 Mar 2026 5:13 am

पूरी तरह बदलने वाला है RSS:प्रांत प्रचारक पद खत्म होगा, यूपी चुनाव में पहला टेस्ट; जानिए कैसा होगा नया स्ट्रक्चर

40 लाख सदस्य और 83 हजार से ज्यादा शाखाओं वाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव करने वाला है। इसके मुताबिक अब अलग-अलग प्रांत प्रचारकों की जगह एक राज्य प्रचारक होगा। क्षेत्र प्रचारकों की संख्या भी कम होगी। जिला, तहसील, ब्लॉक और गांवों तक कार्यकर्ताओं को ज्यादा अधिकार मिलेंगे। बदलाव का प्रस्ताव हरियाणा में पानीपत के समालखा गांव में 13, 14 और 15 मार्च को होने वाली बैठक में पेश होगा। इसकी जरूरत क्यों पड़ी? इसका जवाब बैठक के आयोजकों में से एक RSS के पदाधिकारी देते हैं। वे कहते हैं, 'दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन को पहले से ज्यादा टारगेट और रिजल्ट ओरिएंटेड बनाने के लिए ये बदलाव जरूरी हैं। ये एक तरह से डिसेंट्रलाइजेशन है। संघ की ताकत बिल्कुल निचले स्तर तक पहुंचाने और देश के हर व्यक्ति तक संघ की पहुंच बनाने की प्रक्रिया है।' सोर्स के मुताबिक, बैठक में सभी सुझावों के साथ एक प्रस्ताव बनेगा, जिसे सितंबर 2026 की बैठक में पारित किया जाएगा। फिर जनवरी-फरवरी 2027 तक सभी जगह लागू किया जाएगा। इस पूरी कवायद का सबसे पहला टेस्ट 2027 में यूपी के विधानसभा चुनाव में होगा। यहां संघ जमीन पर माइक्रो मैनेजटमेंट स्ट्रैटजी और स्ट्रक्चर के साथ उतरेगा। 100 साल में दूसरी बार इतना बड़ा बदलावक्या इतना बड़ा बदलाव पहली बार हो रहा है? सोर्स ने जवाब दिया, 'बदलाव तो संघ में होते रहे हैं, लेकिन इतना बड़ा बदलाव दूसरी बार है। पहली बार 1949 में हुआ था, जब संघ ने लिखित संविधान बनाकर सरकार को सौंपा था। उसी वक्त संघ ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को भी स्वीकार किया था।' 'उस वक्त ढांचे और काम करने के तरीकों में भी कई बड़े बदलाव किए गए थे। उसके बाद बड़ा बदलाव ड्रेस में किया गया, लेकिन ढांचे में कुछ खास नहीं बदला गया था। पिछले 4 साल से इसी बदलाव के लिए चर्चा चल रही थी, जो अब ठोस रूप में आ गई है।' संघ की रीढ़ प्रांत प्रचारक व्यवस्था खत्म होगीराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अंदर अब तक राज्य कोई इकाई नहीं थी। बड़े राज्य कई प्रांतों में बंटे हैं। इनके प्रांत प्रचारक जमीनी और शीर्ष कार्यकर्ताओं के बीच कड़ी का काम करते थे। अब नए स्ट्रक्चर में प्रांत प्रचारकों की जगह राज्य प्रचारक होंगे। अभी देशभर में करीब 45 प्रांत प्रचारक हैं। नए बदलाव को उत्तर प्रदेश के जरिए समझिए। यहां अभी 6 प्रांत हैं। हर प्रांत में प्रचारक होता है। अब उनकी जगह एक राज्य प्रचारक होगा। यानी 6 प्रांत प्रचारक की बजाय सिर्फ एक राज्य प्रचारक होगा। इसके ऊपर क्षेत्र प्रचारक बने रहेंगे। बड़े राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश में दो क्षेत्र हैं- पूर्वी उत्तर प्रदेश (कानपुर, काशी, गोरक्ष, अवध प्रांत) और पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मेरठ, ब्रज)। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उत्तराखंड भी शामिल है। सोर्स के मुताबिक, प्रांत प्रचारक कम करके जमीनी स्तर के प्रचारक बढ़ाए जाएंगे। हालांकि प्रांत प्रचारकों के पद पर तैनात सदस्यों के लिए नई जिम्मेदारी अभी तय नहीं हुई है। पद खत्म करने के बाद खाली हुए सदस्यों को संघ के दूसरे कामों में लगाया जाएगा। क्षेत्रों की संख्या घटेगी, क्षेत्र प्रचारक कम होंगेअभी देशभर में 11 क्षेत्र हैं। इनमें 11 क्षेत्र प्रचारक हैं। नई व्यवस्था में क्षेत्रों की संख्या घटाकर 9 करने का प्रस्ताव है। लिहाजा क्षेत्र प्रचारकों की संख्या भी घटेगी। अभी ये क्षेत्र है- 1. उत्तर क्षेत्र: दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख2. पश्चिम क्षेत्र: महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा 3. दक्षिण क्षेत्र: तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना4. पूर्व क्षेत्र: बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड5. मध्य क्षेत्र: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़6. उत्तर-पूर्व क्षेत्र: असम, मणिपुर, नगालैंड आदि पूर्वोत्तर राज्य7. पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र: कानपुर, काशी, गोरक्ष, अवध 8. पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र: मेरठ, ब्रज, उत्तराखंड9. उत्तर पश्चिम क्षेत्र या उत्तराखंड सहित पश्चिमी यूपी10. राजस्थान क्षेत्र11. पश्चिमी या दक्षिणी उप-क्षेत्र संभागों की संख्या और उनके पदाधिकारी बढ़ेंगेउच्च पदाधिकारियों की संख्या घटेगी, लेकिन संभाग या डिवीजन स्तर पर नए पदाधिकारी, प्रांत प्रचारक नियुक्त होंगे। ऐसा नहीं है कि संभाग अब तक कहीं भी नहीं थे। कई जगहों पर थे, लेकिन ये व्यवस्था पूरे देश में नहीं थी। ये प्रचारक जैसा अहम पद नहीं था। अब नई व्यवस्था में किसी राज्य की दो प्रशासनिक कमिश्नरी या मंडलों को मिलाकर संभाग या डिवीजन बनेगा। उत्तर प्रदेश में जैसे 18 प्रशासनिक मंडल हैं। इन्हें 9 संभागों में बांटने का प्रस्ताव है। यहां 9 संभाग प्रचारक होंगे। इसी तरह मध्य प्रदेश में 10 मंडल हैं, तो वहां 5 संभाग प्रचारक होंगे। राजस्थान में 7 मंडल हैं। इसलिए वहां 3 से 4 संभाग प्रचारक होंगे। बिहार में 9 मंडल हैं, तो यहां पर 4 से 5 संभाग प्रचारक होंगे। जिला, तहसील, ब्लॉक और गांवों तक पावर का डिस्ट्रीब्यूशनसोर्स ने बताया, 'अभी जिला, तहसील, ब्लॉक और गांव स्तर पर संघ कार्यकर्ता तो हैं, लेकिन उन्हें प्रांत स्तर के पदाधिकारियों के भरोसे रहना पड़ता था। अब ये कार्यकर्ता संभाग प्रचारकों के संपर्क में रहेंगे। साथ ही संघ भी इन कार्यकर्ताओं को ज्यादा शक्तियां देगा।' हमने पूछा कि क्या इस स्तर पर भी प्रचारक होंगे? जवाब मिला, 'हां, यहां कार्यकर्ताओं को ज्यादा पावर मिलेगी, लेकिन पद क्या होगा, बैठक में तय होगा। ये अपने क्षेत्र की जनता के मुद्दों का एनालिसिस करके खुद टारगेट सेट करेंगे। मदद के लिए संभाग प्रचारक मौजूद होगा।' 'पहले भी निचले स्तर तक संघ कार्यकर्ता मौजूद होते थे, फिर अब क्या बदलेगा? सोर्स ने बताया, ‘हां, मौजूद होते थे, लेकिन उन्हें हर मुद्दे और प्रपोजल के लिए प्रांत प्रचारक के पास ही जाना पड़ता था। प्रांत प्रचारक और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच भौगोलिक और पद की दूरी ज्यादा होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।‘ ‘जिले के कार्यकर्ता, संभाग प्रचारक से न तो पद और न ही भौगोलिक स्तर पर बहुत दूर होंगे। इसलिए काम ज्यादा जल्दी और डिस्कशन ज्यादा पारदर्शी होगा।‘ जिले स्तर पर भी प्रचारक बनाए जाने का प्रस्तावसोर्स के मुताबिक, अभी जिला स्तर पर कार्यकर्ता को क्या पद दिया जाएगा, बैठक में इस पर भी चर्चा होगी। उम्मीद है कि जिला स्तर तक हमारे प्रचारक होंगे या सहायक प्रचारक जैसा कोई पद भी बनाया जा सकता है। RSS के माइक्रो मैनेजमेंट वाले स्ट्रक्चर का यूपी विधानसभा चुनाव में टेस्टक्या संघ अब नई व्यवस्था के साथ सबसे पहले पश्चिम बंगाल चुनाव में उतरेगा? सोर्स ने जवाब दिया, ‘अभी तो प्रस्ताव बनेगा, फिर व्यवस्था लागू होगी। हालांकि 2027 की जनवरी-फरवरी तक लागू हो ही जाएगी। यानी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में संघ अपने इस माइक्रो मैनेजमेंट सिस्टम का पहला टेस्ट करेगा? सोर्स मुस्कुराते हुए हां में जवाब देते हैं। टारगेट, रिजल्ट पर फोकस, प्रचारकों का बनेगा रिपोर्ट कार्डबैठक में शामिल होने आ रहे संघ के एक पदाधिकारी ने बताया, ‘पूरी मशक्कत का सिर्फ इतना मतलब है कि संघ रिजल्ट और टारगेट ओरिएंटेड बने। प्रचारकों के हिस्से में उतनी आबादी और क्षेत्र होगा, जितने में वो आसानी से फोकस कर सकें।’ ‘पहले प्रांत प्रचारकों के लिए जमीनी स्तर पर हो रहे हर काम पर नजर रखना मुश्किल होता था। नया स्ट्रक्चर ऐसा बनाया जा रहा है कि जमीनी स्तर पर ज्यादा प्रचारक हों। ये जमीन से सीधे जुड़े होंगे और इनके पास मुद्दों की क्लियर जमीनी समझ होगी।‘ वे आगे कहते हैं, ‘प्रचारकों को अपना रिपोर्ट कार्ड बनाना पड़ेगा। उसका रिव्यू साल में एक या दो बार नहीं, बल्कि इससे ज्यादा बार होगा। ताकि उनके कामों की समीक्षा हो सके। अगर कोई प्रचारक अपने क्षेत्र में संघ के एजेंडे में सफल नहीं हो रहा, तो उसकी मदद के लिए कुछ और लोग भेजे जाएंगे। अगर लगा कि इसके बाद भी वो सफल नहीं हो पा रहा है तो फिर उसकी जगह किसी और को नियुक्त किया जाएगा।‘ ……………….. शराब घोटाले से बरी हुए मनीष सिसोदिया का इंटरव्यू भी पढ़िए… दिल्ली के पूर्व डिप्टी CM बोले- BJP ने अंग्रेजों से ज्यादा बुरा सुलूक किया ‘अंग्रेजों की सरकार हमारे फ्रीडम फाइटर्स को टेररिस्ट कहती थी, लेकिन फिर भी उन्हें जेल में साथ रखती थी। देश आजाद होने के 70-80 साल बाद एक पॉलिटकल पार्टी की सरकार आई। उसने अपने राजनीतिक विरोधियों को ही जेल में डाल दिया। ये भी इंश्योर किया कि हम जेल में भी एक दूसरे से न मिल सकें।‘ ये आरोप दिल्ली के पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया लगा रहे हैं। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…

दैनिक भास्कर 12 Mar 2026 5:11 am

ट्रंप का दावा: ईरान की नौसेना और एयर डिफेंस तबाह

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दावा किया कि अमेरिकी हमलों से ईरान के सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और उसकी नौसेना तथा वायु रक्षा प्रणाली लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुकी है

देशबन्धु 12 Mar 2026 4:43 am

होर्मुज हमले पर भारत की सख्त आवाज: व्यावसायिक जहाजों को निशाना न बनाएं

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत के विदेश मंत्रालय ने 11 मार्च को होर्मुज जलडमरूमध्य में थाई जहाज मयूरी नारे पर हुए हमले की खबरों पर गहरी चिंता जताई है

देशबन्धु 12 Mar 2026 4:39 am

मिडिल ईस्ट संघर्ष: ईरानी मिसाइल-ड्रोन हमलों में 15 नेपाली घायल, एक की मौत

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान द्वारा किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों में अब तक 15 नेपाली नागरिक घायल हुए हैं, जबकि एक नेपाली की मौत हो चुकी है

देशबन्धु 12 Mar 2026 4:14 am

मध्य पूर्व संघर्ष से बढ़ा आर्थिक दबाव, ऊर्जा कीमतों में उछाल से यूरोप चिंतित

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष यूरोप पर भारी आर्थिक बोझ डाल रहा है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को कहा कि इस युद्ध के कारण ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं और आयात बिलों में अरबों यूरो का इजाफा हो रहा है।

देशबन्धु 12 Mar 2026 3:58 am

पा‍क‍िस्‍तान में हर साल दो हजार दुल्‍हनों की मौत, फ‍िर भी दहेज को बैन करने वाला ब‍िल 'अव्यावहारिक': रिपोर्ट

पा‍क‍िस्‍तान में दहेज को बैन करने वाले एक बिल को 'अव्यावहारिक' बताते हुए खारिज कर दिया गया

देशबन्धु 11 Mar 2026 11:02 pm

ट्रंप का बड़ा ऐलान: रिलायंस बनेगी अमेरिकी रिफाइनरी की साझेदार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है उनके देश में पचास साल बाद बनने वाली 300 अरब डॉलर की पहली तेल रिफाइनरी में भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज़ समूह साझेदार होगी।

देशबन्धु 11 Mar 2026 10:19 am

ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए भारत को रूसी तेल खरीदने की छूट : व्हाइट हाउस

व्हाइट हाउस ने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहे यूएस मिलिट्री कैंपेन से पैदा हुई दिक्कतों के बीच ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर करने की एक बड़ी कोशिश के तहत डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए तत्कालीन छूट को मंजूरी दी है।

देशबन्धु 11 Mar 2026 9:24 am

ईरान संघर्ष में 140 अमेरिकी सैनिक घायल: पेंटागन

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को लेकर पेंटागन ने बड़ी जानकारी दी। पेंटागन ने बताया कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान से जुड़े लगातार हमलों के पहले 10 दिनों के दौरान लगभग 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं

देशबन्धु 11 Mar 2026 8:51 am

लक्ष्य हासिल होने के बाद ईरान के खिलाफ अभियान खत्म करने का फैसला राष्ट्रपति ट्रंप करेंगे : व्हाइट हाउस

व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध को तब समाप्त किया जाएगा, जब ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के सभी सैन्य लक्ष्य पूरी तरह हासिल हो जाएंगे

देशबन्धु 11 Mar 2026 8:49 am

अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध : व्हाइट हाउस

व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है

देशबन्धु 11 Mar 2026 8:44 am

ट्रंप की सख्त चेतावनी, ईरान को सैन्य परिणाम भुगतने की धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर ईरान ने होर्मुज जलमार्ग में समुद्री सुरंगें बिछाने की कोशिश की, तो अमेरिका उस पर बड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा

देशबन्धु 11 Mar 2026 8:41 am

मार्च में गर्मी ने 15 साल का रिकॉर्ड तोड़ा:14 शहरों में 40 डिग्री के पार क्यों पहुंचा पारा; अप्रैल-मई में कैसी गर्मी पड़ेगी

2026 की फरवरी पिछले 125 सालों में सबसे गर्म और सूखी रही। अब मार्च में भी मौसम के वही तेवर बरकरार हैं। मार्च की गर्मी ने दिल्ली में 50 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात के 14 शहरों में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। आखिर इतनी जल्दी क्यों पड़ने लगी गर्मी और मार्च इतना गर्म तो अप्रैल-मई में क्या होगा; भास्कर एक्सप्लेनर में 5 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: गर्मी ने मार्च की शुरुआत में ही कहां भीषण दस्तक दी है? जवाब: मौसम विभाग के मुताबिक मार्च के शुरुआती 10 दिनों में ही गर्मी ने अप्रैल-मई जैसे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं… सवाल-2: आखिर इतनी जल्दी मौसम गर्म होने की क्या वजह है? जवाब: प्राइवेट वेदर फॉरकास्ट कंपनी स्काईमेट और जोमैटो के वेदर डिपार्टमेंट में प्रोग्राम मैनेजर नवदीप दहिया, इसके 3 मुख्य कारण बताते हैं… 1. कोई वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव नहीं 2. पश्चिम से गर्म हवाएं आ रही हैं 3. एंटी साइक्लोन सिस्टम एक्टिव है सवाल-3: अगले कुछ दिन किन इलाकों में गर्मी और बढ़ेगी? जवाब: 14 मार्च 2026 से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नए पश्चिमी विक्षोभ के आने की संभावना है। इससे तापमान गिरेगा। मौसम विभाग ने 10 मार्च को बताया कि… सवाल-4: अगर मार्च इतना गर्म है, तो अप्रैल-मई में क्या होगा? जवाब: इंडियन मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट यानी IMD के मुताबिक मार्च से मई 2026 के बीच भारत के ज्यादातर हिस्सों में मैक्सिमम टेम्परेचर सामान्य से ज्यादा रहेगा। इस दौरान हीट वेव भी ज्यादा चलेगी। IMD के डायरेक्टर जनरल मृत्युंजय मोहपात्रा के मुताबिक… इन इलाकों में सबसे ज्यादा असर: पश्चिमी राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, दक्षिण और पूर्वी महाराष्ट्र, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में हीटवेव सामान्य से ज्यादा दिन चलेगी। IMD के मुताबिक, 'गर्मी के दौरान, लू चलने की संभावना बढ़ने से पब्लिक हेल्थ, जल संसाधन, बिजली की मांग और आवश्यक सेवाओं के लिए जोखिम पैदा हो सकते हैं। खासकर बुजुर्ग, बच्चे, बाहर काम करने वाले और पहले से बीमार लोग ज्यादा प्रभावित होंगे। जून में अल-नीनो से मानसून भी प्रभावित होगा वर्ल्ड मेटियोरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन यानी WMO ने मई से जुलाई में भारत में ‘एल-नीनो’ की स्थिति बनने की आशंका जताई है। ‘एल-नीनो’ से बारिश कम होती है और गर्मी बढ़ती है। यह स्थिति भारत में मानसून को प्रभावित करती है… सवाल-5: ज्यादा गर्मी पड़ने से फसलों पर क्या असर पड़ सकता है? जवाब: मार्च में पड़ रही ज्यादा गर्मी से गेहूं की फसल पर खतरा मंडरा रहा है। कैथल हरियाणा में किसान कल्याण विभाग के डिप्टी डायरेक्टर रविंदर सिंह के मुताबिक, मार्च में बढ़ते तापमान से अनाज भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। गेहूं के दाने छोटे और हल्के होंगे, जिससे कुल उत्पादन पर असर पड़ेगा। ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ व्हीट एंड बार्ले रिसर्च’ के डायरेक्टर रतन तिवारी के मुताबिक, अक्टूबर और नवंबर में बोई गई गेहूं की फसल पर मार्च की गर्मी का असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह बीज अभी इतने बड़े हो गए हैं कि गर्मी झेल लें। लेकिन जो फसल दिसंबर में बोई गई है, उन पर असर पड़ सकता है। फसल को बचाने के लिए किसान फसल की अच्छे से सिंचाई करें, जिससे उसमें नमी बनी रहे। जब तेज हवाएं चल रही हों, तब सिंचाई न करें, इससे फसल को नुकसान हो सकता है। मध्य प्रदेश और गुजरात में गेहूं की कटाई शुरू हो गई है। बाकी राज्यों में भी कई इलाकों में कटाई हो रही है। इसलिए अभी देश में किसानों को ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। --------- ये खबर भी पढ़िए… MP में 'लू' जैसी तपिश, उज्जैन-ग्वालियर-चंबल में चढ़ा पारा:टेम्परेचर सामान्य से 4.63 डिग्री ज्यादा; दिन में तेज धूप, रात में रहेगी ठंडक मध्य प्रदेश में इन दिनों दो तरह का मौसम है। दिन इतने गर्म है कि पारा 39 डिग्री के पार पहुंच गया है, जबकि रात और सुबह ठंडक है। एक्सपर्ट के मुताबिक, ये मौसम लोगों की सेहत भी बिगाड़ रहा है। अस्पतालों में सर्दी, जुकाम, एलर्जी के मरीज ज्यादा पहुंच रहे हैं। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 11 Mar 2026 5:21 am

‘हॉस्टल के पास मिसाइलें गिरीं, पता नहीं बचूंगी या नहीं’:तेहरान में हर तरफ बारूद, मिडिल ईस्ट में फंसे 90 लाख भारतीयों को बचाना चुनौती

कश्मीर के अनंतनाग में रहने वाले बिलाल अहमद भट्ट की बेटी ईरान की राजधानी तेहरान में MBBS की पढ़ाई कर रही है। 9 मार्च की रात ३ बजे बिलाल के पास उसका फोन आया। वो रो रही थी। बिलखते हुए बोली- ‘अब्बू, मेरे हॉस्टल के पास मिसाइलें गिरने की आवाज आ रही हैं, बमबारी हो रही है। पता नहीं आज रात बचूंगी या नहीं। मुझे बचा लो’ बिलाल कहते हैं, ‘ऐसे फोन कॉल ईरान में रहने वाले भारतीयों की नियति बन गए है। हर सुबह इस सुकून से होती है कि रात गुजर गई, लेकिन हर पल फिक्र रहती है कि आगे क्या होगा।’ ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे युद्ध का आज 12वां दिन है। ईरान में 1,255 मौतें हो चुकी हैं। युद्ध थमने के आसार नजर नहीं आ रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान से कहा है कि वो बिना शर्त सरेंडर करेे। वहीं ईरान लगातार इजराइल और मिडिल ईस्ट के देशों में बने अमेरिकी बेस पर हमले कर रहा है। 12 हजार भारतीयों ने देश लौटने की अर्जी लगाईइस युद्ध में भारत ने आधिकारिक तौर पर किसी पक्ष का समर्थन नहीं किया है, लेकिन उसके दो हित दांव पर लगे हैं। पहला, मिडिल ईस्ट के देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और उन्हें बाहर निकालना। दूसरा, खाड़ी देशों से आने वाले तेल और गैस की सप्लाई पर संकट। इन देशों में करीब 90 लाख भारतीय रहते हैं। इनमें से करीब 12 हजार ने भारत सरकार के पास देश लौटने की अर्जी लगाई है। वापसी के लिए सबसे ज्यादा एप्लीकेशन संयुक्त राज्य अमीरात यानी UAE से आए हैं। ईरान में फंसे करीब दो हजार कश्मीरी स्टूडेंटलौटते हैं कश्मीर के रहने वाले बिलाल अहमद के पास। बिलाल अपनी बेटी का नाम और पहचान उजागर नहीं करना चाहते। उन्हें डर है कि मीडिया पर दिखने की वजह से बेटी को निशाना बनाया जा सकता है। बिलाल बताते हैं, ‘बेटी नाजिया (बदला हुआ नाम) का 25 फरवरी को एग्जाम था। हम एग्जाम खत्म होने का इंतजार कर रहे थे। 3 मार्च को उसकी वापसी की टिकट थी। उससे पहले ही जंग शुरू हो गई।’ ‘नाजिया तेहरान में फंसी है। पिछले 10 दिन से कभी-कभार ही बात होती है। नाजिया जिस बिल्डिंग में रहती है, वहां भी मिसाइल अटैक हुए थे। उसके बाद से हम बहुत डर गए हैं। सरकार को सभी भारतीय स्टूडेंट्स को एयरलिफ्ट करके वापस लाना चाहिए। हमारे पास आखिरी जानकारी यही है कि भारतीय दूतावास ने नाजिया और उसकी भारतीय दोस्तों को हॉस्टल से निकाल लिया है। उन्हें किसी सुरक्षित जगह शिफ्ट कर दिया है।’ ‘ईरान में अब रहने लायक हालात नहीं’24 साल की महक हसन ईरान की उरमिया यूनिवर्सिटी एंड मेडिकल साइंस में चौथे सेमेस्टर में पढ़ रही हैं। जम्मू-कश्मीर के बडगाम की रहने वाली हैं। महक कहती हैं कि ईरान में अब रहने लायक हालात नहीं हैं। हर पल खौफ में गुजर रहा है। हमसे ज्यादा फैमिली हमारी जान की फिक्र कर रही है। महक बताती हैं, ‘एंबेसी ने कहा है कि जैसे निकल सकते हो, निकल जाओ। अब ये तो हमारे हाथ में नहीं है। हमें नहीं पता कि कैसे निकलें।’ ‘हर दिन के साथ उम्मीद जवाब दे रही’जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के रहने वाले राजा आसिफ की बेटी तेहरान में MBBS की पढ़ाई कर रही है। युद्ध के बीच बीतते हर दिन के साथ उनकी उम्मीद जवाब दे रही है। ईरान के हालात के बारे में बात करते हुए सांसें फूलने लगती हैं। राजा आसिफ कहते हैं, ‘हमारे बच्चे पढ़ने के लिए गए थे। अब मौत के मुंह में हैं। बेटी से बात होती है, तो वो कहती है कि चारों तरफ बारूद ही बारूद है। हम विदेश मंत्री से गुजारिश करते हैं कि स्टूडेंट्स को पहले बचाकर लाया जाए।’ ‘भारतीय छात्र डरे हुए, तुरंत निकाला जाए’जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स यूनियन के नेशनल कन्वीनर नासिर खुलनेमानी बताते हैं कि उरमिया शहर में अभी हवाई हमले हुए हैं। इसके बाद से दहशत का माहौल है। हमने उरमिया यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों से बात की थी। उन्होंने बताया कि मिसाइल हमला उनके हॉस्टल से सिर्फ 300 मीटर दूर हुआ था। धमाके से पूरी बिल्डिंग हिल गई। नासिर कहते हैं कि हालात बहुत नाजुक हैं। छात्रों का कहना है कि आसमान में लड़ाकू विमानों की आवाज सुनाई दे रही है। आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग हमलों के डर से शहर छोड़कर जा रहे हैं। पूरे शहर में खौफ है। हमने विदेश मंत्रालय से कहा है कि ईरान की सरकार से मदद करने के लिए कहे। भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने खाड़ी देशों में अपने दूतावासों से डेटा इकट्ठा करने के लिए कहा था कि कितने भारतीय ईरान छोड़कर भारत आना चाहते हैं। करीब १२ हजार लोगों ने अर्जी दी है। सरकार उन्हें निकालने के अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रही है। विदेश मंत्रालय ने अलग से डेस्क बनाई है। ये डेस्क इन लोगों को निकालने के लिए प्लान तैयार करेगी। ‘ईरान और लेबनान से भारतीयों को निकालना सबसे मुश्किल’अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार मोहसिन रजा खान कहते हैं कि भारत के लिए ईरान में फंसे नागरिकों को निकालना सबसे मुश्किल काम होगा। ईरान में न एयरपोर्ट काम कर रहे हैं, न एयरस्पेस खुला है। ईरान से निकलने के लिए पहले जमीनी रास्ते से अजरबैजान जाना होगा। इसके अलावा इराक वाला रास्ता है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान का रास्ता सुरक्षित नहीं होगा। ईरानी नागरिक भी अजरबैजान के रास्ते देश छोड़ रहे हैं। मोहसिन रजा खान आगे कहते हैं कि भारत की छवि बनी है कि वो इजराइल और अमेरिका के साथ है। ईरान पर हमले से दो दिन पहले भारत के प्रधानमंत्री इजराइल में थे। हालांकि, इससे भारतीयों के रेक्क्यू पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। ये मानवीय आधार पर किया जाएगा। कोई देश इसमें रुकावट पैदा नहीं करेगा। ‘ज्यादा दिन तक नहीं चलेगा युद्ध, सीजफायर हो सकता है’हालांकि, मोहसिन रजा खान कहते हैं, ‘ये युद्ध अब ज्यादा दिन तक नहीं चलेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जंग से बाहर निकलने के रास्ते देख रहे हैं। अमेरिका दो वजहों से जंग में है। पहला, ईरान कोई एग्जिट ऑप्शन नहीं दे रहा। दूसरा- न्यूक्लियर मटीरियल अब तक हासिल नहीं हो सका है।’ ‘अमेरिका अब ईरान में सत्ता बदलने की बात भी उतनी मजबूती के साथ नहीं उठा रहा है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह मुजतबा खामेनेई भी कट्टरपंथी माने जाते हैं।’ ‘भारत को ईरान युद्ध रोकने के लिए एक्टिव भूमिका निभानी होगी’जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्टडीज में प्रोफेसर राजन राज कहते हैं कि पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच फंसे भारतीयों की जान बचाना सबसे बड़ी समस्या है। वहां करीब 90 लाख भारतीय हैं। ये किसी देश की आबादी के बराबर है। इतने लोगों को निकालना नामुमकिन है। खाड़ी देशों जैसे कतर, सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत में ईरान के हमले तेज हो रहे हैं। ‘1990 में खाड़ी युद्ध के वक्त भी भारत के लिए अपने नागरिकों को निकालना सबसे बड़ी चुनौती बन गया था।’ राजन राज आगे कहते हैं, ‘फिलहाल युद्ध रुकने की संभावना नजर नहीं आ रही है। ईरान में रहने वाले लोगों को तुरंत निकालना जरूरी होता जा रहा है। ईरान के अलावा UAE, कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब की सरकारें भारत के साथ सहयोग के लिए तैयार हैं। हालांकि, एयरस्पेस बंद है। होर्मूज की खाड़ी पर ईरान का कंट्रोल है। कोई भी जहाज खाड़ी से नहीं गुजरने दिया जा रहा।’ ‘अपने नागरिकों को बचाने के लिए भारत को दोनों पक्षों पर कुछ वक्त के लिए युद्ध रोकने का दबाव बनाना होगा। यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच भारत ने दोनों सरकार से स्पेशल परमिशन ली थी। हालांकि, यूक्रेन और रूस में भारतीयों की संख्या बहुत कम थी।’ राजन कहते हैं कि भारत को खाड़ी देशों को एकजुट कर युद्ध रोकने की मांग करनी चाहिए। भारत ईरान युद्ध में रूस-यूक्रेन युद्ध की तरह व्यवहार नहीं कर सकता। उसे एक्टिव भूमिका निभानी होगी। अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो भारत के लिए तेल के दाम बढ़ेंगे, रुपया कमजोर होगा। भारत को सीजफायर करवाने के लिए पहल करनी चाहिए। अगर खाड़ी में काम करने वाले लोग स्थायी तौर पर वापस आते हैं, तो उनके रोजगार की बड़ी दिक्कत खड़ी हो सकती है। अब ईरान का हाल दिल्ली जैसी भीड़ वाले तेहरान में सन्नाटातेहरान शहर की आबादी लगभग 96 लाख है। पूरे मेट्रो रीजन को मिला दें तो आबादी करीब 1.6 करोड़ हो जाती है। ये दिल्ली की कुल आबादी 2.2 करोड़ से 60 लाख ही कम है। तेहरान में रहने वाले कियान कहते हैं कि सब बहुत डरे हुए हैं। बाहर जाने में भी डर लगता है और घर के अंदर भी। खाने-पीने की चीजें 30 से 35% तक महंगी हो गई हैं। कियान के मुताबिक, अब हमले से पहले सायरन नहीं बजता। खुद ही अंदाजा लगाना पड़ता है कि हमला हुआ है। ईरान पर इजराइल के पिछले हमले में मिसाइल डिफेंस सिस्टम की आवाज आती थी, इस बार सीधे धमाका होता है और सब तबाह हो जाता है। तेहरान में ही रहने वाले हुसैन बताते हैं कि उनकी नींद सुबह धमाकों से टूटती है। एक अजीब सी गूंज सुनाई दी, ये 3-4 मिनट तक चलती रही और फिर धमाका हुआ। खिड़कियां और पर्दे हिल रहे थे। मैं पहले बीमार रहता था। जंग के तनाव की वजह से बीमारी दोबारा उभर आई है। अब दिन में 9 गोलियां खाता हूं। डॉक्टर ने कहा है कि मेरा तनाव जानलेवा हो गया है। इजराइली हमलों के बाद ईरान में काली बारिशइजराइल और अमेरिका ने ईरान के तेल भंडारों पर हमले किए हैं। तेहरान की रिफाइनरी पर हमलों के बाद आग लग गई। रिफाइनरी से निकला तेल शहर की नालियों में पहुंच गया। इससे सड़कों के किनारे आग लग गई। आसमान में बादल छा गए। तेहरान में काली बारिश हुई। तेल मिला होने की वजह से पानी काला दिखाई दिया। दरअसल, लाखों गैलन कच्चा तेल जलता है, तो वह भारी मात्रा में पार्टिकुलेट मैटर (PM) और कालिख पैदा करता है। आमतौर पर धुआं ऊपर जाकर बिखर जाता है, लेकिन हमलों के दौरान तेहरान के ऊपर से एक्स्ट्रा ट्रॉपिकल स्टॉर्म (तूफान) गुजर रहा था। इसकी वजह से उठने वाली तेज हवा ने धुएं और अधजले तेल के कणों को बादलों के भीतर खींच लिया। बादलों में मौजूद नमी तेल के कणों के चारों ओर जमा हुई, तो वे भारी होकर बारिश बनकर गिरने लगे। इन बूंदों में कार्बन और हाइड्रोकार्बन (तेल) मिला हुआ था, इसलिए इनका रंग काला हो गया। ………………………ये खबर भी पढ़ें अमेरिका बोला- ईरान पर सबसे बड़ा हमला करेंगे, ईरान का जवाब- धमकी से नहीं डरते अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के 11 दिन हो चुके हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान पर अब तक के सबसे बड़े हमले किए जाएंगे। ईरान ने भी जवाब देते हुए कहा कि वह धमकियों से डरने वाला नहीं है और जो लोग ईरान को खत्म करने की बात करते हैं, उन्हें अपने अंजाम के बारे में सोच लेना चाहिए। पढ़िए पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 11 Mar 2026 5:18 am

कतर में फंसे एक हजार भारतीय नागर‍िकों की हुई सुरक्ष‍ित वतन वापसी

भारतीय दूतावास ने कतर में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए कतर एयरवेज और सऊदी अरब के अधिकारियों के साथ समन्वय जारी रखा है

देशबन्धु 11 Mar 2026 4:42 am

अफगानिस्तान पर हमलों को लेकर भारत सख्त, यूएन में उधेड़ दी PAK की बखिया; कहा- निर्दोषों को मारा जा रहा

भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि सीमा पार की सैन्य कार्रवाई से निर्दोष नागरिकों की जान जा रही है और इससे मानवीय संकट और गंभीर होता जा रहा है। इसलिए सभी देशों को संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की जरूरत है।

देशबन्धु 10 Mar 2026 11:31 am

क्या अब थम जाएगा ईरान युद्ध? जानें ट्रंप-पुतिन की बातचीत में किन मुद्दों पर हुई चर्चा

दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष लगातार तेज हो रहा है और वैश्विक स्तर पर इसके असर को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। रूस की ओर से बताया गया कि बातचीत खुली, विस्तृत और रचनात्मक माहौल में हुई, जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

देशबन्धु 10 Mar 2026 10:02 am

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से अमेरिका में राजनीतिक विवाद

अमेरिका में गैसोलीन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच वहां के डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के साथ चल रही जंग की कड़ी आलोचना की है

देशबन्धु 10 Mar 2026 9:40 am

ईरान के खिलाफ सैन्य संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है : ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान में अमेरिका और इजराइल को “निर्णायक बढ़त” मिल रही है

देशबन्धु 10 Mar 2026 9:33 am

मध्य पूर्व संकट: दोहा में फंसे भारतीयों की वापसी जारी, दूतावास ने जारी की एडवाइजरी

दोहा में फंसे भारतीय नागरिकों को भारत वापस लाने के प्रयास तेज हो गए हैं। मध्‍य पूर्व में चल रहे संघर्ष के बीच कतर एयरवेज की सोमवार सुबह दोहा-नई दिल्ली की एक उड़ान ने 300 से ज़्यादा यात्रियों को भारत पहुंचाया।

देशबन्धु 10 Mar 2026 9:15 am

ट्रंप की नई धमकी, होर्मुज स्ट्रेट पर सख्त चेतावनी

ईरान को चेतावनी, तेल मार्ग रोकने पर बीस गुना हमला अमेरिकी नौसेना तैयार, खाड़ी में जहाजों की तैनाती वैश्विक ऊर्जा बाजार पर मंडरा रहा संकट का साया चीन समेत एशियाई देशों के लिए अमेरिका का सुरक्षा वादा वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चेतावनी जारी की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अगर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले महत्वपूर्ण तेल मार्ग को रोकने या उसमें बाधा डालने की कोई भी कोशिश की गई, तो अमेरिका इसका कड़ा जवाब देगा। ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा, “अगर ईरान कुछ ऐसा करता है जिससे होर्मुज स्ट्रेट में तेल का फ्लो रुक जाता है, तो अमेरिका उन पर अब तक हुए हमलों से बीस गुना ज्यादा जोरदार हमला करेगा।” उन्होंने इस चेतावनी के साथ ईरानी इंफ्रास्ट्रक्चर को नष्ट करने की धमकी भी दी और कहा, “इसके अलावा, हम आसानी से नष्ट किए जा सकने वाले टारगेट को खत्म कर देंगे, जिससे ईरान के लिए एक देश के तौर पर फिर से बनना लगभग नामुमकिन हो जाएगा, लेकिन मुझे उम्मीद है और मैं प्रार्थना करता हूं कि ऐसा न हो!” इससे पहले, ट्रंप ने मियामी में ट्रंप नेशनल डोरल में रिपोर्टरों से कहा कि अमेरिका ईरान को दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी कॉरिडोर में से एक को खतरे में डालने की इजाजत नहीं देगा। उन्होंने कहा, “जैसा कि हम ऑपरेशन एपिक फ्यूरी जारी रखे हुए हैं, हम दुनिया में एनर्जी और तेल का फ्लो बनाए रखने पर भी ध्यान दे रहे हैं, और मैं किसी आतंकवादी सरकार को दुनिया को बंधक बनाने और दुनिया की तेल सप्लाई को रोकने की कोशिश नहीं करने दूंगा।” ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट अमेरिकी सुरक्षा के तहत खुला रहेगा। इसलिए होर्मुज स्ट्रेट सुरक्षित रहेगा। वहां हमारी नौसेना के बहुत सारे जहाज हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर पानी के रास्ते को सुरक्षित करने के लिए अमेरिकी नौसेना की ताकत और माइन-क्लियरिंग क्षमता को तैयार किया जा रहा है। हमारे पास दुनिया के सबसे अच्छे उपकरण हैं, जो माइन की जांच कर रहे हैं। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि स्ट्रेट में ईरान की कोई भी हरकत लड़ाई के मैदान से कहीं आगे तक असर डालेगी। उन्होंने कहा, अगर वे कुछ भी करते हैं, तो इसकी कीमत बहुत ज्यादा होगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका कमर्शियल शिपिंग के संचालन को सीधे समर्थन देने के लिए तैयार है। ट्रंप ने कहा, “इस बीच, इस छोटी सी रुकावट के दौरान अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे किसी भी टैंकर को राजनीतिक जोखिम बीमा दे रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि अगर खतरा बढ़ता है तो अमेरिका और उसकी साथी सेनाएं जहाजों को इस पतले पानी के रास्ते से एस्कॉर्ट कर सकती हैं। ट्रंप ने तर्क दिया कि रास्ता खुला रखना खुद अमेरिका की तुलना में एशिया और दूसरे एनर्जी-इम्पोर्ट करने वाले इलाकों के लिए ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा, “इससे हम पर कोई खास असर नहीं पड़ता। हमारे पास बहुत ज्यादा तेल और गैस है, हमारी जरूरत से कहीं ज्यादा।” लेकिन उन्होंने कहा कि कई दूसरे देश इस रास्ते पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं, खासकर चीन। ट्रंप ने कहा, “यह अमेरिका की तरफ से चीन और उन सभी देशों के लिए एक तोहफा है जो होर्मुज स्ट्रेट का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। हम सच में यहां चीन और दूसरे देशों की मदद कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपनी बहुत सारी एनर्जी देशों से मिलती है।” ट्रंप ने कहा कि सरकार तेल बाजारों से जुड़े कुछ समय के लिए लगे प्रतिबंधों में राहत देने पर भी विचार कर रही है ताकि कीमतों में तेजी को रोका जा सके। उन्होंने ईरान के साथ बड़े संघर्ष में होर्मुज स्ट्रेट को एक मुख्य मोर्चे के तौर पर पेश किया और कहा कि वाशिंगटन कमर्शियल शिपिंग के लिए खतरों को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा, हाल के सालों में, सरकार और उसके आतंकी एजेंटों ने सैकड़ों कमर्शियल जहाजों पर हमले किए हैं। हम इस खतरे को हमेशा के लिए खत्म कर रहे हैं। बता दें, होर्मुज स्ट्रेट खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा मार्ग है और इसे दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी के तेल उत्पादक देशों से निर्यात होने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का खतरा वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए बड़ी चिंता पैदा कर सकता है।

देशबन्धु 10 Mar 2026 8:33 am

‘रॉकेट बनाने का सामान’ लेकर चीन से 2 जहाज रवाना:ईरान की मदद क्यों कर रहे जिनपिंग; क्या अमेरिका रास्ते में ही उड़ा सकता है

ईरान की सरकारी शिपिंग कंपनी के दो जहाज चीन के गाओलान पोर्ट से रवाना हुए हैं। भीषण जंग के बीच ईरान की तरफ बढ़ते जहाजों से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन पर ऐसा मिलिट्री केमिकल लदा हो सकता है, जो रॉकेट बनाने में इस्तेमाल होगा। अगर ऐसा हुआ तो ईरानी हमले जारी रह सकते हैं और जंग लंबी खींच सकती है। क्या वाकई इन जहाजों में रॉकेट बनाने का सामान, ईरान की मदद क्यों कर रहे जिनपिंग और क्या अमेरिका इन कंटेनर्स को रास्ते में ही उड़ा सकता है; भास्कर एक्सप्लेनर में 5 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: चीन से रवाना हुए ईरानी जहाजों में क्या लदा है? जवाब: ईरान की सरकारी कंपनी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन्स यानी IRISL के 2 जहाज- शब्दीस और बर्जिन चीन के गाओलान पोर्ट से रवाना हुए हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से इसकी पुष्टि हुई… सवाल-2: क्या अमेरिका इन जहाजों को ईरान तक पहुंचने देगा? जवाब: फिलहाल दोनों जहाज साउथ चाइना सी पार करके मलक्का स्ट्रेट के करीब पहुंच गए हैं… दोनों को ईरान पहुंचने के लिए होर्मुज स्ट्रेट पार करना होगा, जहां अमेरिकी और ईरानी बेड़े तैनात हैं। यहां हमले भी हो रहे हैं। वहीं, चाबहार पोर्ट पर भी हमले हुए हैं। हाल ही में बंदर अब्बास के आसपास काले धुएं के गुबार देखे गए हैं। इसके अलावा 4 मार्च को अमेरिकी नेवी की एक पनडुब्बी ने श्रीलंका के पास हिंद महासागर में ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को Mk-48 टॉरपीडो से डुबो दिया। ये फ्रिगेट युद्धक्षेत्र से करीब 3 हजार किमी दूर था और जंग में शामिल भी नहीं था। फिर भी ऐसा हुआ। अमेरिकी थिंकटैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में एशिया मैरीटाइम ट्रांसपिरेंसी इनिशिएटिव के डिप्टी डायरेक्टर हैरिसन प्रेटैट के मुताबिक, जंग शुरू होने के बाद से हॉर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद है। पहले रोजाना औसतन 153 जहाज गुजरते थे, लेकिन 1 मार्च के बाद से ये आंकड़ा 13 हो गया है। चीन तक के दर्जनों जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हैं। यानी अगर शब्दीस और बर्जिन हॉर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़े तो अमेरिकी नेवी इन पर हमला कर सकती है। इस आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि अगर इन जहाजों पर लदा समान ईरान के लिए इतना अहम है तो फिर संभावना है कि IRGC की नेवल फ्लीट इन्हें एस्कॉर्ट करें। ऐसा हुआ तो अगले हफ्ते तक दोनों जहाज ईरानी बंदरगाहों तक सुरक्षित पहुंच सकते हैं। हाल ही में बंदर अब्बास पोर्ट की ओर जा रहे 3 ईरानी जहाजों- हमुना, अबियान और अर्जिन ने रास्ता बदला है। उन्होंने तय रास्तों से इतर खुले समुद्री रास्तों का इस्तेमाल किया। 7 मार्च को ये ईरान के पास मंडराते हुए दिखे। हालाकिं इसको लेकर अमेरिका के डिफेंस डिपार्टमेंट ‘पेंटागन’, ट्रेजरी डिपार्टमेंट और व्हाइट हाउस ने कोई बयान जारी नहीं किया है। सवाल-3: जंग के बीच ईरान को सोडियम परक्लोरेट क्यों दे रहा है चीन? जवाब: जंग के बीच में चीन की ओर से सोडियम परक्लोरेट की खेप ईरान भेजने के पीछे 4 बड़ी वजहें हो सकती हैं… अमेरिकी थिंकटैंक वाशिंगटन इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो ग्रांट रमली के मानते हैं कि चीन के लिए ईरान केवल एनर्जी सोर्स नहीं, बल्कि रणनीतिक ढाल भी है। अगर ईरान से तेल सप्लाई रुकी, तो चीन की निर्भरता सऊदी अरब या रूस पर बढ़ेगी। ऐसा चीन नहीं चाहता। सवाल-4: तो क्या चीन ने जंग में खुलकर ईरान का खेमा चुन लिया है? जवाब: अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हुए हमले की चीन ने निंदा की थी। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सीजफायर करने और बातचीत से मामला सुलझाने की अपील की थी। ऐसे में चीनी खेप का ईरान के लिए रवाना होना सवाल उठता है कि क्या चीन खुलकर ईरान के साथ है? अमेरिकी थिंकटैंक कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में चाइना स्टडीज के सीनियर फेलो आइसैक कार्डन के मुताबिक, 'चीन इन जहाजों को कुछ और दिन पोर्ट पर रोक सकता था। उनकी वापसी में प्रशासनिक देरी कर सकता था। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। चीन सभी के सामने कहता है कि वो शांति चाहता है, लेकिन युद्ध के समय ऐसे फैसले ले रहा है।' ग्रांट रमली मानते हैं कि चीन ऐसा रुख असमान्य और साहसिक है। क्योंकि अभी ईरान खाड़ी देशों पर मिसाइले दाग रहा है। ऐसे समय में ईरान की मदद करने से चीन के अरब देशों से रिश्ते खराब होने की आशंका है। सवाल-5: आखिर चीन की मिडिल-ईस्ट को लेकर क्या स्ट्रैटजी है? जवाब: चीन की ज्यादा दिलचस्पी इसमें नहीं है कि ईरान की मौजूदा सत्ता बनी रहे। वो ईरान और मिडिल ईस्ट में अपने निवेश सुरक्षित रखना चाहता है। उसकी एनर्जी सप्लाई प्रभावित न हो। चीन का आधा तेल मिडिल ईस्ट से आता है। वो सउदी अरब, कुवैत, इराक, ईरान और UAE से तेल खरीदता है। चीन को चिंता है कि ईरान पूरे मिडिल ईस्ट में रीजनल वॉर छेड़ देगा। इससे खाड़ी देशों से आने वाला तेल प्रभावित होगा। यहां चीन का काफी निवेश है। ईरान के हमलों से इन्हें भी नुकसान होगा। इसके अलावा चीन ने खुद को दुनिया के समाने अमेरिका का ऑप्शन बताया है। दोनों का टकराव किसी से छिपी नहीं है। मिडिल-ईस्ट में चीन ने ईरान से रिश्ते इसलिए बनाए क्योंकि अमेरिका के बाकी अरब देशों से मजबूत हैं और ईरान उसके लिए सबसे बड़ी दिक्कत है। हालांकि चीन कभी खुलकर अमेरिका की निंदा नहीं करता, बल्कि उससे डिप्लोमैटिक रिश्ते बनाकर चलता है। अगले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चीन का दौरा करने वाले हैं। ईरान जंग के चलते अमेरिका की मिलिट्री और फंड्स मिडिल-ईस्ट में शिफ्ट हो गए हैं। चीन यही चाहता है। ब्रिटिश थिंकटैंक चैटम हाउस में मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका प्रोग्राम के असोसिएट फेलो अहमद अबूदू के मुताबिक, 'चीन, ईरान की मिसाइल और ड्रोन स्ट्रैटजी मजबूत करने के लिए जरूरी तकनीक साझा कर सकता है। वो अमेरिका और चीन के मौजूदा रिश्ते खराब किए बिना ईरान की मदद करना चाहता है, जिससे उसके लॉन्ग टर्म गोल पूरे हो सकें।' ------------- ईरान जंग से जुड़ी ये भी खबर पढ़िए… खामेनेई के बेटे को ईरान की कमान, कभी मुजतबा के मरने की दुआएं मांगी गईं; पिता क्यों नहीं बनाना चाहते थे सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के दूसरे बेटे मुजतबा अब ईरान के सुप्रीम लीडर हैं। 17 साल की उम्र में जंग लड़ी, 30 की उम्र में मदरसा पढ़ने गए और 56 साल में ईरान के सर्वोच्च नेता बन गए। मुजतबा को ईरान की राजनीति का सबसे रहस्यमयी चेहरा कहा जाता है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 10 Mar 2026 5:23 am