दिल्ली में BJP सरकार का एक साल पूरा होने पर आम आदमी पार्टी ने कैंपेन शुरू किया है। इसका नारा है- एक साल, दिल्ली बेहाल, याद आ रहे केजरीवाल। एक मार्च को जंतर-मंतर पर पार्टी BJP के खिलाफ रैली करने वाली थी। इससे दो दिन पहले 27 फरवरी को AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को शराब घोटाले से डिस्चार्ज यानी आरोप तय होने से पहले आरोपमुक्त कर दिया गया। कोर्ट के फैसले के बाद जंतर-मंतर पर होने वाली रैली शक्ति प्रदर्शन की तरह हो गई है। पहले ये सिर्फ दिल्ली तक सीमित थी, अब इसमें देशभर से नेता आ रहे हैं। शराब घोटाले के आरोप की वजह से अरविंद केजरीवाल की ईमानदार वाली छवि पर गहरा दाग लगा और पार्टी विधानसभा चुनाव हार गई थी। ऐसे में तीन सवाल हैं- 1. कोर्ट के फैसले से क्या केजरीवाल की वापसी हो पाएगी?2. दिल्ली में हार के बाद सभी सीनियर लीडर पंजाब शिफ्ट हो गए थे, क्या वे दिल्ली लौटेंगे?3. पंजाब के अलावा दिल्ली और गुजरात में पार्टी का आगे का प्लान क्या होगा? पार्टी नेताओं का कहना है कि अब अरविंद केजरीवाल नेशनल पॉलिटिक्स में अपनी मौजूदगी बढ़ाएंगे। अगले साल पंजाब के अलावा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में गुजरात में पार्टी के 5 और गोवा में 2 विधायक चुने गए थे। एक साल से चुनाव की तैयारी करा रहे केजरीवालआम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज कोर्ट के फैसले को अरविंद केजरीवाल की ईमानदारी पर मुहर बताते हैं। भविष्य की योजनाओं के बारे में वे कहते हैं, ‘मुझे लगता है कि अरविंद केजरीवाल की छवि को बड़ा बूस्ट मिला है। पार्टी को एक नई जिंदगी मिली है। 1 मार्च को हम बड़ी रैली कर रहे हैं। गुजरात, गोवा, पंजाब और दिल्ली से हमारे नेता आ रहे हैं। इस रैली में अरविंद जी पार्टी को नई दिशा देंगे।’ आने वाले विधानसभा चुनावों पर सौरभ कहते हैं कि पिछले एक साल से अरविंद केजरीवाल बहुत माइक्रो लेवल पर गुजरात, गोवा और पंजाब में चुनाव की तैयारियां करा रहे थे।’ दिल्ली में चुनावी हार और पार्टी की इमेज बिगड़ने पर सौरभ कहते हैं, ‘अरविंद केजरीवाल ने पूरी जिंदगी सिर्फ ईमानदारी कमाई है। इसलिए BJP ने इसी पर चोट की। झूठे केस और इमेज खराब करने की कोशिश के बावजूद हमारा सिर्फ 10% वोट ही खिसका। ये फैसला आने से पहले ही लोगों को एहसास हो गया था कि गड़बड़ हो गई है। एक साल से रेखा गुप्ता की सरकार सिर्फ झूठ बोल रही है। लोगों को शर्मिंदगी हो रही है।’ पंजाब, गुजरात और गोवा पर फोकस, संजय सिंह यूपी संभालेंगेलिकर पॉलिसी केस में नाम आने के बाद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया था। हालांकि, उन्हें मुख्यमंत्री रहते ही 177 दिन जेल में रहना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने शर्त रखी थी कि केजरीवाल CM ऑफिस नहीं जाएंगे और न ही किसी फाइल पर साइन करेंगे। यानी मुख्यमंत्री रहते हुए भी उनके पास पावर नहीं थी। केजरीवाल के इस्तीफे के बाद आतिशी मुख्यमंत्री बनी थीं। तब दिल्ली विधानसभा का सिर्फ 5 महीने का कार्यकाल बचा था। चुनाव में आम आदमी पार्टी बुरी तरह हार गई। 70 सीटों वाली विधानसभा में पार्टी सिर्फ 22 सीटें जीत पाई। वोट शेयर भी 10% घटकर 43% रह गया। पार्टी को हरियाणा में उम्मीद थी। उसने 88 सीटों पर कैंडिडेट उतारे, लेकिन सभी हार गए। कोर्ट के फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले कुछ साल से BJP शराब घोटाला-शराब घोटाला कर रही थी। हमारे ऊपर आरोप लगा रही थी। कोर्ट ने सारे आरोप खारिज कर दिए। बुराड़ी से आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा कहते हैं, ‘पार्टी इस मुद्दे को देशभर में लेकर जाएगी। हमारे कार्यकर्ता, अलग-अलग राज्यों के नेता लोगों को बताएंगे कि किस तरह प्रधानमंत्री देश की जनतांत्रिक इकाई को खत्म कर रहे हैं।’ आगे की योजनाओं पर वे कहते हैं, ‘दिल्ली के लोग केजरीवाल को मिस कर रहे हैं। कोर्ट के फैसले ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा दिया है। लोगों के बीच फैलाया गया भ्रम खत्म हो गया है। पार्टी के टॉप लीडर आने वाले दिनों में आगे की योजनाओं पर मीटिंग करेंगे। पंजाब, गुजरात और गोवा पर हम ज्यादा मेहनत कर रहे हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में भी संजय सिंह के नेतृत्व में तैयारी चल रही है।’ अरविंद केजरीवाल की रिहाई से BJP को फायदासीनियर जर्नलिस्ट नीरजा चौधरी कहती हैं, ‘अब अरविंद केजरीवाल की छवि पर पॉजिटिव असर होगा। उन्हें लोगों की सहानुभूति मिलेगी। केजरीवाल की छवि ही उनकी राजनीतिक पूंजी थी। AAP के बारे में कहा जाता था कि वह दूसरी पार्टियों से अलग है।’ ‘देश के इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री को जेल जाना पड़ा था। इससे पार्टी की इमेज और कैडर को धक्का लगा था। चुनाव के बाद या उससे पहले भी केजरीवाल पूरी तरह चुप थे। करप्शन के आरोप ने उनकी इमेज पर असर डाला था, अब फिर से उनकी इमेज बहाल होगी।’ नीरजा मानती हैं कि इस फैसले से चुनावों पर भी फर्क पड़ेगा। वे कहती हैं, ‘पंजाब, गुजरात और गोवा जैसे राज्यों में पार्टी का उभार होगा। गुजरात में अगर पार्टी मजबूत होती है, तो कांग्रेस को नुकसान होगा। इससे आखिरकार BJP को फायदा होगा।’ नीरजा आगे कहती हैं, ‘हो सकता है कि केजरीवाल पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी के लिए प्रचार करने जाएं। उनके संबंध अच्छे हैं। केजरीवाल INDIA ब्लॉक में लौटेंगे या नहीं, इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता। आने वाले समय में अगर कांग्रेस के बिना रीजनल पार्टियां कोई फ्रंट बनाती हैं, तो केजरीवाल की उसमें मजबूत जगह हो सकती है।’ आम आदमी पार्टी को लंबे वक्त से कवर कर रहे जर्नलिस्ट शरद शर्मा कहते हैं कि पार्टी के इतिहास में लिकर पॉलिसी केस सबसे बड़ा कलंक था। इस फैसले से पार्टी का मनोबल जरूर बढ़ेगा। हालांकि, ऐसा नहीं है कि सिर्फ इसी एक वजह से पंजाब या दूसरी जगहों पर पार्टी के लिए सब सही हो जाएगा। ‘पंजाब में आम आदमी पार्टी गवर्नेंस किस तरह दे रही है, ये देखना जरूरी है। गुजरात और गोवा में भी पार्टी ताकत लगा रही है, लेकिन ग्राउंड पर जब तक आप उसे नहीं उतारते, तब तक सब सिर्फ मीडिया की चर्चा बनकर रह जाता है। दिल्ली में भले चर्चा ज्यादा हो, लेकिन अभी यहां चुनाव नहीं हैं।’ शरद कहते हैं कि इस केस का दिल्ली चुनाव में असर तो पड़ा था, लेकिन उसके साथ दूसरे कई मुद्दे भी थे। पंजाब अलग तरह का राज्य है। अगर अरविंद केजरीवाल इस केस में दोषी साबित हो जाते तो पंजाब के लोग ये नहीं कहते कि AAP को वोट नहीं देंगे। वहां अभी AAP की सरकार है। बेशक वहां भी पार्टी का मनोबल बढ़ेगा, लेकिन इसके साथ आपको गवर्नेंस भी देनी पड़ेगी। ‘कोई भी पार्टी 4 साल सरकार में रहती है तो उपलब्धियों के साथ समस्याएं भी रहती हैं। पंजाब में लॉ एंड ऑर्डर की समस्या है। पार्टी ने कहा था कि ड्रग्स की समस्या खत्म कर देगी, लेकिन ये अब भी है। आखिरी साल में पार्टी क्या करेगी, इस पर भी बहुत कुछ निर्भर करेगा।’ मुश्किल अब भी बाकीED हाईकोर्ट में सबूत दे, तो बदल सकता है फैसलाशराब घोटाला केस में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को डिस्चार्ज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल और सिसोदिया को इस केस में शामिल करने के लिए जांच एजेंसी के पास कोई सबूत नहीं हैं। हालांकि इसी केस के आधार पर ED ने केजरीवाल और सिसोदिया पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील आशीष पांडे कहते हैं कि इस केस में कोर्ट ने साफ कहा कि चार्जशीट में केस को ट्रायल पर भेजने लायक सबूत नहीं हैं। ED दो तरीकों से केस दर्ज करती है, एक खुद से और दूसरा पहले से चल रहे मामले में। शराब घोटाले वाला मामला दूसरा वाला ही है।’ क्या ये केस पलट सकता है? आशीष जवाब देते हैं, ‘डिस्चार्ज होने पर केस की फिर से जांच हो सकती है। फिर से पूरी प्रक्रिया दोहराई जा सकती है। अगर भविष्य में एजेंसी कोई सबूत पेश करती है और चार्जशीट दाखिल करती है, तो केस दोबारा चल सकता है। 90% से ज्यादा केस में सेशंस कोर्ट जांच एजेंसियों की चार्जशीट मंजूर कर लेता है। फिर ट्रायल के बाद फैसला होता है।’ ‘इस केस में ऐसा नहीं हुआ है। कानून कहता है कि अगर डिस्चार्ज का ऑर्डर होता है, तो स्टे नहीं लगाया जाना चाहिए, जब तक कि कुछ अपवाद ना हो। कोई व्यक्ति ट्रायल के बाद बरी होता है, तो उस केस का फिर से ट्रायल नहीं हो सकता। डिस्चार्ज किए जाने के बाद जांच एजेंसी के पास ये ताकत है कि वह फिर मामले की जांच करे, फिर से गिरफ्तारी करे, सबूत जुटाए और चार्जशीट फाइल करे।’
सुबह के करीब 6 बजे होंगे। नीलगिरि की पहाड़ियों पर हल्की धुंध थी। मैं खेत से लौटा ही था- हाथों में अभी खेत की मिट्टी लगी थी- कि मंदिर की घंटी की आवाज आई। कोई परिवार इंतजार कर रहा था। परिवार बोला, ‘रवि अन्ना, जरा पूजा कर दीजिए… बेटे का इंटरव्यू है आज’। मैंने तुरंत स्नान किया। धोती संभाली, मंदिर के भीतर गया। वार्सिती अम्मन, मीनाक्षी अम्मन और मधुरई वीरन के सामने दीया जलाया। मंत्र मुझे नहीं आते- यह बात गांव का हर आदमी जानता है। फिर जैसा कि हमेशा करता हूं, दीया घुमाया, धूप जलाई, आंखें बंद कीं। धीरे से कहा, ‘अम्मा, इनका भला करना।’ कुछ दिन बाद वही परिवार मिठाई लेकर आया। बोला- ‘अन्ना, नौकरी लग गई।’ मैं 50 साल का दलित पुजारी रवि हूं। तमिलनाडु के पहाड़ी जिले नीलगिरि की ककंजी कॉलोनी का रहने वाला। हमारे गांव में करीब 200 परिवार हैं। यहीं पैदा हुआ, यहीं पला-बढ़ा। पिता भी यहीं रहे, दादा भी, और उनके भी पिता। कह सकते हैं कि हमारी कई पीढ़ियां इसी मिट्टी में मिली हुई हैं। सच कहूं तो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन अपने ही गांव के मंदिर में पुजारी बनूंगा। न मैं कभी स्कूल गया, न संस्कृत पढ़ी, न कोई मंत्र आता है। पूजा-पाठ की तो हमारे घर में दूर-दूर तक कोई रवायत नहीं थी। लेकिन जब भी किसी मंदिर के सामने से गुजरता, मन में छोटी-सी इच्छा जरूर पलती थी- काश, कभी मैं भी भगवान के सामने खड़ा होकर किसी के लिए आशीर्वाद मांगता। बस इतनी-सी इच्छा। कोई बड़ा सपना नहीं, कोई महत्वाकांक्षा नहीं। सिर्फ मन की एक साध थी। फिर समय बदला। सरकार ने मंदिरों में दलित पुजारियों की नियुक्ति का नियम लागू किया। जिस दिन यह खबर आई, हमारे गांव में कई दिनों तक बैठकें चलीं। चर्चा हुई, मतभेद हुए। कुछ लोग मेरे पुजारी बनने के खिलाफ थे, लेकिन अंत में एकमत हुए और मेरा नाम तय किया। लोगों का कहना था - ‘रवि जो मांगता है, भगवान सुन लेते हैं।' वह सीधा आदमी है। सबका हाल-चाल पूछता है। किसी के दुख-सुख में पीछे नहीं हटता। गांव के मंदिर के लिए सबसे सही आदमी है। मैंने साफ कहा था- ‘मुझे मंत्र नहीं आते।’ गांव वालों ने जवाब दिया- ‘हमें मंत्र नहीं, मन चाहिए।’ बस, उसी दिन से मैं इस मंदिर का पुजारी बन गया। सरकार मुझे इसके लिए 20 हजार रुपए महीने की तनख्वाह देती है। इस मंदिर में तीन देवी-देवता विराजते हैं- वार्सिती अम्मन, मीनाक्षी अम्मन और मधुरई वीरन। मेरी पूजा करने की विधि बहुत सीधी-सादी है। मैं धूप जलाता हूं, दीया-बाती करता हूं। फिर भगवान के सामने खड़ा होकर धीरे-धीरे दीया घुमाता हूं। आंखें बंद करता हूं और मन ही मन कहता हूं- ‘इनका भला करना।’ बस इतना ही। एक बार गांव का एक परिवार मेरे पास आया। सालों से उनके घर बच्चा नहीं हो रहा था। चेहरे पर चिंता साफ थी। उन्होंने कहा, ‘रवि अन्ना, हमारे लिए प्रार्थना कर दो।’ मैंने हमेशा की तरह दीया जलाया, धूप दिखाई, और भगवान से कहा- ‘अम्मा, इनके घर भी किलकारी गूंजे।’ कुछ महीनों बाद वही परिवार खुशखबरी लेकर आया। उनके घर बच्चा हुआ था। वे मिठाई लेकर आए, मेरे पैरों को छूने लगे। मैं थोड़ा संकोच में पड़ गया। मैंने कहा- ‘यह सब भगवान की कृपा है।’ अब आप ही बताइए, इसमें मंत्रों का क्या काम था? सच कहूं तो जब भी मैं किसी के लिए पूजा करता हूं, पूरे मन से करता हूं। मुझे लगता है भगवान मन की भाषा समझते हैं। मैं इतना ही जानता हूं कि मैं जो भी कहता हूं, सच्चे दिल से। शायद उसी सच्चाई की आवाज ऊपर तक पहुंचती होगी। इस मंदिर में हम पूरे महीने में सिर्फ एक दिन सामूहिक पूजा करते हैं। पोंगल, दीवाली, पूर्णमा, तमिल नया साल सब यहीं मनाते हैं। मंदिर में तीन बार सालाना त्यौहार होता है। उस दिन अन्नदान किया जाता है। सालाना त्यौहार पर गांव के जो लोग बाहर रहते हैं, देश-विदेश कहीं भी। उन्हें गांव आना होता है। सालाना हर परिवार से दो से तीन हजार रुपए लिए जाते हैं। इसके अलावा काफी लोग इस मंदिर में खास तरह की पूजा भी करवाते हैं। इन मौको पर गांव के लोगों के सगे-संबंधी और उनके दोस्त भी आ सकते हैं। दरअसल, इस तरह सरकार द्वारा चलाए जा रहे मंदिरों में कोई भी जा सकता है। हालांकि, दलितों के अलावा यहां दूसरे जाति, समुदाय के लोग नहीं आते। इसके अलावा गांवों में कुछ प्राइवेट मंदिर भी हैं, जहां लोग जाते हैं। पहले इन मंदिरों की पूरी व्यवस्था ब्राह्मणों के हाथ में थी। हम जैसे लोगों के लिए मंदिर के भीतर की जगह कुछ अलग-सी लगती थी, लेकिन वहां तक पहुंचने का हमें अधिकार नहीं था। यही परंपरा चली आ रही थी। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। राज्य में मेरी तरह दलित पुजारियों की नियुक्तियां हुई हैं। लेकिन यह बदलाव सभी को रास नहीं आया। ऊंची जाति के लोगों को आज भी अच्छा नहीं लगता कि कोई दलित पूजा कराए। उन्होंने मंदिर आना बंद कर दिया और अपना अलग मंदिर बनवा लिया। अब तमिलनाडु में जगह-जगह लोगों के अपने मंदिर दिखाई देते हैं। लेकिन, मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता। वे अपने तरीके से पूजा करते हैं, हम अपने। हां, एक बात साफ हो गई है। अब हमें कोई किसी भी मंदिर में जाने या पूजा-पाठ करने से नहीं रोक सकता। यह फर्क मैं अपनी आंखों से देख रहा हूं। कुछ बड़े मंदिर जहां ब्राह्मणों के साथ दलित पुजारी बनाए गए हैं, वहां उनके साथ अब भी भेदभाव किया जाता है। उन्हें बड़े विधि-विधान नहीं करने दिए जाते। मानसिक उत्पीड़न किया जाता है। कहा जाता है कि उनमें पूरी योग्यता नहीं है। उन्हें मंत्र ठीक से नहीं आते। अपने मेंदिर मैं ही अकेला हूं, तो मुझे यह सब नहीं झेलना पड़ता। पिछड़े समाज के लोग पहले भी हमारे साथ थे, अब तो हमारी और इज्जत करने लगे हैं। मेरी प्रार्थना से उनका काम हो जाए, तो वे हमें पैसे, कपड़े और मिठाइयां देकर जाते हैं। लेकिन ब्राह्मण और ऊंची जाति के लोग अब भी हमसे दूरी बनाकर रखते हैं। दरअसल, तमिलनाडु के बड़े मंदिरों में आज भी पुजारी ब्राह्मण ही हैं। जब कभी मैं उन मंदिरों में जाता हूं- भीड़ के बीच खड़े होकर, सिर झुकाकर दर्शन करता हूं- तो साफ दिखता है कि वहां की पूरी व्यवस्था अब भी उन्हीं के हाथों में है। गर्भगृह के भीतर कौन जाएगा, पूजा कौन कराएगा, सब वही तय करते हैं। लेकिन वहां दलितों के पुजारी बनने की बात… अभी दूर की चीज है। फिर भी कहूं तो, जितना हुआ है, वह भी कम नहीं है। पहले जहां मंदिरों प्रवेश तक करने नहीं दिया जाता था, आज छोटे मंदिरों में ही सही हम पूजा करा रहे हैं। सरकार ने कम-से-कम शुरुआत तो की है। मंदिरों में पूरी बराबरी भले ही नहीं मिली है, लेकिन बहुत हद तक न्याय हुआ है। बाकी जो रह गया है, शायद वह आने वाले समय हो जाएगा। यहां सरकारी नीति की बात करूं तो कागज पर तो साफ लिखा है- किसी भी जाति का व्यक्ति पुजारी बन सकता है। नियम के हिसाब से हमारी नियुक्ति बड़े मंदिरों में भी होनी चाहिए। लेकिन अगर अचानक बड़े मंदिरों में हमारी नियुक्ति कर दी जाए, तो शायद राज्य में हंगामा खड़ा हो जाएगा। विरोध-प्रदर्शन हो सकते हैं। सुनते हैं कि ब्राह्मण, सरकार की इस व्यवस्था के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी जा चुके हैं। हालांकि, मुझे इस बारे में ज्यादा नहीं मालूम। सुप्रीम कोर्ट में मामला होने की वजह से राज्य में अभी बहुत सारे पद खाली हैं। बहुत सारे मंदिरों में दलितों की नियुक्ति होना बाकी है। लेकिन सोचता हूं- चलो, शुरुआत तो हुई। सच बताऊं, जब अपने ही गांव के मंदिर में दीया जलाता हूं, तो मन गदगद हो जाता है। लगता है जो कभी असंभव था, वह आज सामने हो रहा है। और फिर मन में एक उम्मीद भी पलती है- शायद आने वाले सालों में तस्वीर और बदलेगी। हमारी अगली पीढ़ी बिना किसी डर या विरोध के बड़े मंदिरों में पूजा कराएगी। हालांकि, अभी सरकार ने एक और अच्छा काम कर दिया है। कोई भी किसी भी जाति का हो, अगर वह पुजारी बनना चाहता है तो वह बाकायदा 3 साल की पढ़ाई करके बन सकता है। मैं जानता हूं कि तमिलनाडु के सिवा बाकी राज्यों में ऐसा नहीं है। वहां कोई दलित पुजारी नहीं है। बल्कि वहां तो दलितों के मंदिर जाने पर भी पाबंदी है। इसलिए कहूंगा कि तमिलनाडु इस मामले में एक मॉडल है। तमिलनाडु के मॉडल को फॉलो किया जाए तो वहां के समाज में भी काफी अच्छा हो सकता है। लोग खुश रहेंगे। (दलित पुजारी रवि ने अपने जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए हैं) ------------------------------------------------ 1- संडे जज्बात-दोस्त की प्रेमिका प्रेग्नेंट हुई, रेप केस मुझपर चला:पंचायत ने 6 लाख में सौदा किया, 5 साल जेल में रहा, अब बाइज्जत बरी बिहार के दरभंगा जिले का रहने वाला मैं मुकेश कुशवाहा। मुझ पर 17 साल की लड़की के रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चला। वो लड़की मेरे दोस्त की प्रेमिका थी। दोस्त ने उसे प्रेग्नेंट किया था, लेकिन मुकदमा मुझ पर चला। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-पुलिस ने मेरे प्राइवेट पार्ट पर ईंट बांधी:सिर कुर्सी में बांधकर उल्टा टांगा, मैं वकील बनकर केस खुद लड़ा- 12 साल बाद जीता 18 साल की उम्र में पुलिस ने मुझे हत्या के मामले में आरोपी बना दिया। मैंने अपने केस की खुद पैरवी की और 12 साल बाद बाइज्जत बरी हुआ। अपना केस लड़ने के लिए लॉ किया और अब मैं एडवोकेट अमित चौधरी हूं। मेरठ बार एसोसिएशन का सदस्य भी हूं। मेरी जिंदगी पर जल्द ही एक फिल्म बन रही है, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
अमेरिका और इजराइल के निशाने पर अब ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम नहीं, बल्कि ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू भी ईरान में तख्तापलट चाहते हैं। इसी के चलते शनिवार को ईरान पर हुए हमले के बाद खामेनेई को तेहरान से निकालकर किसी सुरक्षित जगह ले जाया गया। रिपोर्ट्स हैं कि ट्रम्प के सामने खामेनेई और उनके उत्तराधिकारियों को मारने का प्लान पेश किया गया है, जिस पर फैसला लेना बाकी है। नेतन्याहू भी मानते हैं कि खामेनेई की हत्या के बाद क्षेत्र में स्थिरता आ जाएगी। आखिर क्या है अयातुल्ला अली खामेनेई की कहानी, कैसे बने ईरान के सुप्रीम लीडर और अमेरिका-इजराइल उनके पीछे क्यों पड़े; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… ईरान में मॉडलिंग के दौर में पैदा हुए, 11 साल की उम्र में ‘मौलवी’ बने 19 अप्रैल 1939। ईरान का सबसे बड़ा धार्मिक शहर मशहद। एक मौलवी सैयद जावेद खामेनेई के घर आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई का जन्म हुआ। वे 8 भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे। 4 साल की उम्र में खामेनेई को मकतब भेजा गया, जहां उन्होंने कुरान, अरबी और इस्लामी तालीम हासिल की। आयतुल्लाह अली खामेनेई अपनी किताब 'सेल नम्बर 14: द ऑटोबायोग्राफी ऑफ अयातुल्लाह खामेनेई' में लिखते हैं, '1950 के दशक में मेरा दाखिला मशहद के एक नए इस्लामी स्कूल में हुआ। मुझे क्लास में सबसे आगे की सीट पर बैठाया जाता था। मैं मैथ्स और इंग्लिश में अच्छा था और ब्लैकबोर्ड पर लिखे हर सवाल का जवाब सुलझा देता था। एक बार स्कूल में प्रोग्राम हुआ, जिसमें मैंने कुरान की आयतें पढ़कर सुनाईं। मेरी जमकर तारीफ हुई और फिर मैंने अपने पिता की तरह मौलवी बनने की राह चुनी।' इसके बाद वो ईरान के कोम शहर में गए, जहां उन्होंने अयातुल्लाह रूहोल्लाह खोमैनी से तालीम ली और 11 साल की कम उम्र में ही मौलवी बन गए। खामेनेई उस दौर के ईरान में बड़े हो रहे थे जब शाह मोहम्मद रजा पहलवी का शासन था। शाह पंथनिरपेक्ष और पश्चिमी विचारों को बढ़ावा देने वाले राजा माने जाते थे। उस दौर के ईरान में मॉडलिंग, फिल्में, नाइट क्लब पार्टीज और वेस्टर्न कपड़े पहने का चलन था। खामेनेई बचपन में मौलवियों की पोशाक पहनकर अपने हमउम्र बच्चों के साथ सड़कों पर खेलते, तो लोग उनका मजाक उड़ाया करते थे। मोहर्रम में फिल्म दिखाने के विरोध से शुरू की राजनीति, खोमैनी के फॉलोअर बने 'सेल नम्बर 14' में खामेनेई लिखते हैं, '1950 के दशक में ईरान में पश्चिमी कल्चर अपने चरम पर था। उन दिनों मॉर्डनाइजेशन की हवा चल रही थी। हालांकि, मुहर्रम के महीने में और खासतौर से पहले 10 दिनों के लिए सभी सिनेमाघरों और फिल्मों पर रोक लगा दी जाती थी। लेकिन 1955 में सब बदल गया। शहर के गवर्नर ने मुहर्रम के 1 से 12 दिनों के बंद पर पाबंदी हटाने का आदेश जारी किया। इस फैसले का हम लोगों ने विरोध किया। यही फैसला हमारे अंदर चिंगारी बनकर भड़का।' खामेनेई ने किताब में आगे लिखा, ‘मैं, मेरे दोस्त और कुछ लोग इकट्ठा हुए और एक लेटर तैयार किया, जिसमें इस्लामिक गुरुओं से अच्छाई के रास्ते पर चलने और बुराई से बचने का आदेश लिखवाया। हमारे प्रिंटिग मशीन नहीं थी, इसलिए हमने हाथ से लिखकर कई सारी कॉपियां बनाईं। हर एक कॉपी 4 पेज की थी और इसे नकल करने में 2 घंटे लगते थे। यह मेरा राजनीति में पहला कदम था।’ 1960 के दशक में खामेनेई पर ईरान के धर्मगुरु रुहोल्ला खोमैनी का गहरा असर हुआ। खोमैनी ईरान के शासक की नीतियों और 1963 में 'व्हाइट रिवोल्यूशन' के खिलाफ खड़े हो गए थे, जिसके तहत ईरान को पश्चिमी देशों की तरह डेवलप करना था। खोमैनी को लगता था कि यह इस्लाम और ईरानी संस्कृति के खिलाफ है। इस्लाम और राजनीति को अलग नहीं किया जा सकता और देश में विलायत-ए-फकीह यानी इस्लामी धर्मगुरुओं का शासन लाने की बात कही। खामेनेई इससे बहुत प्रभावित हुए। 1962-63 में खोमैनी ने शाह के खिलाफ खुलकर विरोध शुरू कर दिया। खामेनेई ने खोमैनी की बात को मशहद समेत कई शहरों में फैलाने में मदद की। 1963 में खामेनेई ने मशहद की एक मस्जिद में कहा, 'शाह का शासन इस्लाम और लोगों के खिलाफ है। हमें अपने धर्म और देश की हिफाजत करनी होगी।' खामेनेई को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन इससे वे युवाओं और शाह के खिलाफ आंदोलनों में मशहूर हो गए। 1970 का दशक आते-आते खामेनेई राजनीति में माहिर हो गए। उनके गुरु खोमैनी को देश से निकाल दिया गया, तो खामेनेई ही उनके भाषण लोगों तक फैलाते रहे। खामेनेई ने एक सभा में खोमैनी का सीक्रेट टेप चलाया, जिसमें खोमैनी ने कहा, ‘शाह का शासन एक गैर-इस्लामी तानाशाही है और इसे उखाड़ फेंकना हर मुसलमान का फर्ज है।’ 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति आई और शाह की सरकार गिर गई। इस्लामी सत्ता आई, तो खामेनेई सरकार में शामिल हो गए फरवरी 1979... ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद खोमैनी पेरिस से वापस ईरान आए। नई सरकार बनाई और अपने करीबी लोगों को बड़े पदों पर नियुक्त किया। खामेनेई को क्रांतिकारी परिषद यानी रिवोल्यूशनरी काउंसिल में शामिल कर लिया। यह परिषद नई सरकार का आधार थी और प्रशासन को बेहतर करने का काम करती थी। उस समय सांसद और बाद में ईरान के राष्ट्रपति बने हसन रूहानी ने संसद में खामेनेई को उप रक्षामंत्री बनाने का प्रस्ताव देते हुए कहा था, 'हमें ऐसे इंसान की जरूरत है जो इस्लामी क्रांति के लिए आगे बढ़ता रहे और सैन्य मामलों में खोमैनी के नजरिए को बुलंद करे। सैयद अली खामेनेई इस जिम्मेदारी के लिए सबसे बेहतर हैं।' खामेनेई को उप रक्षामंत्री नियुक्त किया गया। उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानी IRGC का गठन करने में बड़ी भूमिका निभाई। IRGC आगे चलकर ईरान की सबसे ताकतवर फौज बनी। IRGC को बनाने का मकसद ऐसी सेना खड़ी करना था जो देश के लिए धार्मिक, राजनीतिक और आर्थिक मोर्चों पर लड़ सके। जो इस्लामिक राष्ट्र ईरान को न सिर्फ बाहरी खतरों, बल्कि देश के अंदर के मामलों को भी सुलझा सके। टेप रिकॉर्डर से खामेनेई की हत्या को कोशिश, दायां हाथ और कान गंवाया 1980 का दशक। ईरान और इराक के बीच जंग छिड़ी हुई थी। तेहरान की जुमा की नमाज के इमाम अयातुल्ला अली खामेनेई जंग के अग्रिम मोर्चे का मुआयना कर लौटे थे। शनिवार, 27 जून 1981 को खामेनेई अपने तय कार्यक्रम के तहत तेहरान की अबुजार मस्जिद गए। इसके बाद वे लोगों के सवालों के जवाब देने लगे। उनके सामने रखी टेबल पर कागजों का पुलिंदा जमा था, जिन पर सवाल लिखे हुए थे। इस बीच एक शख्स ने टेबल पर एक टेप रिकॉर्डर रख दिया। खामेनेई ने जवाब देना शुरू किया। एक मिनट के भीतर ही टेप रिकॉर्डर से सीटी की आवाज आने लगी और तेज ब्लास्ट हुआ। खामेनेई लहूलुहान हो गए। टेप रिकॉर्डर के अंदर लिखा था- 'इस्लामिक रिपब्लिक को फोरकान समूह का एक उपहार।' फोरकान समूह एक ईरानी उग्रवादी विपक्षी संगठन था, जो शिया इस्लामवादी विचारधारा को मानता था। इस समूह को सद्दाम हुसैन का समर्थन मिला हुआ था। सद्दाम ईरान में खोमैनी की सत्ता पलटना चाहता था और IRGC के मुखिया खामेनेई बीच में थे। खामेनेई की दाईं बांह, वोकल कॉर्ड्स और फेफड़े को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। इलाज के लिए उन्हें दक्षिणी तेहरान के बहारलू हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। कई महीनों बाद वे ठीक हुए, लेकिन दाएं हाथ में हमेशा के लिए लकवा मार गया और एक कान से सुनाई देना बंद हो गया। इस हमले को लेकर एक बार खामेनेई ने कहा था, ‘अगर मेरा दिमाग और जीभ काम करे तो मुझे हाथ की जरूरत नहीं पड़ेगी। मेरे लिए मेरा दिमाग और जीभ काफी है।’ बम धमाके में राष्ट्रपति राजाई की मौत हुई, खामेनेई तीसरे राष्ट्रपति बने 30 अगस्त 1981, दोपहर का समय। तेहरान में प्रधानमंत्री कार्यालय में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की एक बैठक चल रही थी। इसमें राष्ट्रपति मोहम्मद अली राजाई और प्रधानमंत्री मोहम्मद जवाद बहरोन भी शामिल थे। तभी MEK का सीक्रेट एजेंट मसूद कश्मीरी कमरे में दाखिल हुआ। khamenei.ir के मुताबिक, कश्मीरी ने कमरे में एक ब्रीफकेस रख दिया, जिसमें बम छिपा हुआ था। कुछ ही देर बाद कमरे में धमाका हुआ और वहां मौजूद सभी लोग मारे गए। राजाई और बहोरन की फौरन मौत हो गई, जिसके बाद सरकार में मुश्किलें बढ़ गईं। एरवंड अब्राहमियन की किताब 'खामेनेईनिज्म: एसे ऑन द इस्लामिक रिपब्लिक' के मुताबिक, देशभर में नए राष्ट्रपति की मांग जोर पकड़ने लगी। खामेनेई इस समय तक IRP के बड़े नेताओं में शामिल हो गए थे। इस वजह से खोमैनी और IRP के नेताओं ने नए राष्ट्रपति के लिए खामेनेई का नाम आगे किया। अकबर हाशमी राफसंजानी ने खामेनेई का नाम बढ़ाते हुए कहा, ‘सैयद अली खामेनेई ने क्रांति के लिए अपनी जान जोखिम में डाली है। वे खोमैनी के भरोसेमंद आदमी हैं और इस मुश्किल वक्त में देश की कमान संभाल सकते हैं।’ इस पर खोमैनी ने कहा, ‘हमें ऐसे नेताओं की जरूरत है जो इस्लामिक रिपब्लिक ईरान की हिफाजत करें। खामेनेई ने बार-बार यह साबित किया है।’ 2 अक्टूबर 1981 को देशभर में राष्ट्रपति के चुनाव हुए और 13 अक्टूबर को नतीजा आया। खामेनेई 95% वोटों से राष्ट्रपति पद का चुनाव जीते और ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने। शपथ लेते हुए खामेनेई ने कहा, ‘मैं इस्लामी क्रांति की हिफाजत और जनता की सेवा के लिए अपनी जान भी दे दूंगा।’ खामेनेई को ‘रहबर’ बनाने के लिए बदला संविधान 1985 में रहबर अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी ने हुसैन अली मोंतजरी को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। लेकिन किसी बात से नाराज होकर फैसला वापस ले लिया। इसी बीच 3 जून 1989 को खोमैनी का निधन हो गया। अगली सुबह 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' की मीटिंग शुरू हुई। तिजोरी में रखा सीलबंद वसीयतनामा लाया गया। राष्ट्रपति खामेनेई ने करीब 2 घंटे में 35 पन्नों की वसीयत पढ़ी। इसके बाद अगले रहबर को लेकर चर्चा शुरू हुई। प्रस्ताव रखा गया कि 'शूरे-ए-रहबरी' यानी एक नेतृत्व परिषद बनाए या 'रहबरी-ए-फरदी' यानी एक व्यक्ति को पूरी कमान सौंपी जाए। नेतृत्व परिषद के लिए तीन ग्रुप बने, जिनमें से 2 के अध्यक्ष खामेनेई और एक के अध्यक्ष रफसंजानी थे। वोटिंग हुई तो 45 वोट 'एक व्यक्ति' पक्ष में और 23 खिलाफ आए। जब तय हो गया कि एक व्यक्ति को ही ईरान की कमान सौंपनी चाहिए तो ग्रैंड अयातुल्ला मोहम्मद-रजा गोलपायगानी और अली खामेनेई ने नॉमिनेशन किया। वोटिंग में खामेनेई को 60 वोट मिले, जबकि गोलपायगानी को महज 14 वोट मिले। यानी खामेनेई अगले रहबर चुन लिए गए। रहबर बनने के लिए जरूरी था कि व्यक्ति मरजा या अयातुल्ला हो। इस मियाद को खत्म करने के लिए ईरानी संविधान में संशोधन किया गया। 6 अगस्त 1989 को फिर से असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की मीटिंग हुई और खामेनेई को 64 में से 60 वोट मिले। खामेनेई के पक्ष में वोट देने वाले इमामी काशानी ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘खामेनेई को चुनने के अलावा हमारे पास कोई अन्य विकल्प नहीं था। खामेनेई खुद सुप्रीम लीडर नहीं बनना चाहते थे, लेकिन रफसंजानी और मैं ये जानते थे कि हमें जल्द ही फैसला करना होगा, क्योंकि सद्दाम हुसैन की सेना ईरान के बॉर्डर पर थी।’ अमेरिकी थिंक टैंक 'कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस' के सीनियर फेलो करीम सादजादपुर के मुताबिक, इतिहास की इस दुर्घटना ने एक कमजोर राष्ट्रपति को शुरुआत में कमजोर सुप्रीम लीडर से सदी के पांच सबसे शक्तिशाली ईरानियों में से एक बना दिया। फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस के एसोसिएट प्रोफेसर एरिक लोब के मुताबिक, '1989 में ईरानी संविधान में संशोधन किया गया ताकि खामेनेई जैसे निचली श्रेणी के मौलवी को यह पद मिल सके। खोमैनी का उत्तराधिकारी बनने के बाद खामेनेई को रातों-रात एक महान अयातुल्ला बना दिया गया। खामेनेई भले ही लंबे समय से वफादार और सत्ता के अंदरूनी व्यक्ति थे, लेकिन उनमें खोमैनी जैसा करिश्मा और धार्मिक ताकत नहीं थी।’ देश में विरोधियों को कुचलने से लेकर पत्रकारों को प्रताड़ित करने, कट्टरपंथ को बढ़ावा देने और महिलाओं की आजादी को खत्म करने की वजह से खामेनेई पर अकसर सवाल उठते हैं। खामेनेई की जान के पीछे क्यों पड़े हैं इजराइल-अमेरिका? पिछले साल जून में अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया। तब हल्ला हुआ कि ईरान में सत्ता परिवर्तन होना चाहिए। फिर 2025 के आखिर में ईरान में आंदोलन हुए, जिनमें भी खामेनेई को हटाने की मांग हुई। अमेरिका-इजराइल ने इसे सपोर्ट किया, लेकिन ईरानी सत्ता ने आंदोलन को कुचल दिया। अब फिर से ईरान पर हमले हुए हैं। ट्रम्प और नेतन्याहू ने ईरान में सत्ता परिवर्तन की बात कही है। दोनों नेताओं ने कहा है कि अब ईरानी लोगों को आगे आकर अपने देश और भाग्य की बागडोर संभालनी चाहिए। दोनों नेताओं के टारगेट पर खामेनेई हैं। दरअसल, ईरान के हर जरूरी मुद्दे या विदेश नीतियों पर आखिरी फैसला सुप्रीम लीडर यानी खामेनेई ही लेते हैं। इजराइल का मानना है कि न्यूक्लियर प्रोग्राम और IRGC के खात्मे के लिए खामेनेई की हत्या जरूरी है। इसके साथ वहां सत्ता परिवर्तन भी होगा। जून 2025 में ट्रम्प ने भी धमकी देते हुए कहा था कि खामेनेई एक आसान निशाना है। हम उसे मारने वाले नहीं हैं, कम से कम अभी तो नहीं। रिपोर्ट्स हैं कि खामेनेई के बाद सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ईरान की सत्ता संभाल सकते हैं। खामेनेई ने हाल ही में लारीजानी की शक्तियां बढ़ाईं, ताकि वे जंग जैसे हालातों में ईरान स्थिति में वे सरकार चला सकें। हालांकि खामेनेई के निधन के बाद नए रहबर का चुनाव इतना आसान नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स हैं कि ईरान में सैन्य, राजनीतिक और धार्मिक लीडरशिप के बीच पावर टसल हो सकता है। वहीं तख्तापलट हुआ तो इस्लामिक क्रांति के बाद देश छोड़कर भागे ईरान के पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी अपने पिता की गद्दी पर दावा कर सकते हैं। वे अभी अमेरिका में हैं। ट्रम्प के चुनाव जीतने के बाद रजा पहलवी ने कहा था कि ईरान में लोकतांत्रिक सत्ता वापस आनी चाहिए, जो पश्चिमी देशों के साथ समृद्ध होगा, इजराइल के साथ शांतिपूर्ण रिश्ते रखेगा और अपने पड़ोसियों से दोस्ती करेगा। दरअसल, इजराइल और ईरान की रंजिश की कई बड़ी वजहें हैं… अमेरिकी थिंकटैंक मिडिल-ईस्ट इंस्टीट्यूट में ईरान प्रोग्राम के डायरेक्टर एलेक्स वतांका का कहना है, 'खामेनेई जितने जिद्दी हैं, उतने ही सतर्क भी हैं। यही वजह है कि वह इतने लंबे समय से सत्ता के केंद्र में बने हुए हैं।' ----------- ईरान से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… जब ईरान ने 53 अमेरिकियों को बंधक बनाया: छुड़ाने गए 8 कमांडोज की लाश लौटी, 444 दिनों तक अमेरिका कैसे गिड़गिड़ाता रहा 46 साल पहले 4 नवंबर 1979 को ईरान के अमेरिकी दूतावास पर हमला हुआ। भीड़ ने दूतावास पर कब्जा कर लिया और अमेरिकी अधिकारियों और लोगों को बंधक बना लिया। यहीं से शुरू हुई इतिहास की सबसे बड़ी 'होस्टेज क्राइसिस'। पूरी खबर पढ़िए…
इजराइल के तेल अवीव में रहने वाले ईटान टाइगर एक्टिविस्ट हैं। 28 फरवरी की सुबह उनकी नींद सायरन की तेज आवाज के साथ खुली। वे उठे और सेफ हाउस की तरफ भागे। सेफ हाउस में पहुंचकर मोबाइल चेक किया। पता चला कि इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया है। ईटान समझ गए कि ये सायरन ईरान के जवाबी हमले से बचने के लिए है। इजराइल की तरह ही ईरान में भी जंग का डर है। कुम शहर में रहने वाले मोहम्मद हुसैन बताते हैं कि देश की इंटेलिजेंस एजेंसी ने कहा है जंग लंबी चलने वाली है। इसके लिए तैयार रहना है। स्कूल-कॉलेज बंद हैं। लोगों से कहा गया है कि आर्मी पर भरोसा रखें। हमला करने वालों को जवाब दिया जाएगा। 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका ने ईरान के 10 शहरों पर एयरस्ट्राइक की है। जवाब में ईरान ने करीब 400 मिसाइलें दागीं। उसने इजराइल के अलावा कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब और UAE में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। साथ ही UAE के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर दुबई पर भी हमला किया। दैनिक भास्कर ने दोनों देशों के लोगों से बात कर वहां के हालात जाने। जगह: तेल अवीव, इजराइलइजराइल पर ईरानी हमले के बाद तेल अवीव में लोग बंकरों में रह रहे हैं। ईटान टाइगर बताते हैं कि होम कमांड से हमें कुछ-कुछ देर में अलर्ट मिल रहे हैं। हालांकि, यहां हालात ठीक हैं। अब तक मिसाइल गिरने या नुकसान की जानकारी नहीं मिली है। ईटान आगे कहते हैं, ‘अमेरिका और इजराइल मिलकर सबसे बड़े दुश्मन ईरान को खत्म करने के लिए लड़ रहे हैं। ईरान सिर्फ इजराइल के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरनाक है। उसकी बैलेस्टिक मिसाइल 4 हजार किमी तक जा सकती हैं। अब ईरान यूरोपीय देशों तक हमला कर सकते हैं। अक्टूबर 2023 के बाद से हम लगातार जंग के साए में जी रहे हैं। हमास के बाद हिजबुल्ला से लड़ाई लड़ी है।’ ईटान हमले की तारीख चुनने के पीछे की वजह बताते हैं। कहते हैं कि यहूदी बहुत पुराना धर्म है। हमारी परंपराएं भी पुरानी हैं। हमारे यहां दो दिन बाद पूरिम फेस्टिवल मनाया जाने वाला है। ये खुशी का त्योहार है, जो बाइबिल की एस्तेर की कहानी पर आधारित है। इसके मुताबिक, फारस (ईरान) में यहूदियों को खत्म करने की साजिश रची गई थी। रानी एस्तेर और उनके चाचा मोर्दकै की वजह से यह साजिश नाकाम हो गई और यहूदी समुदाय बच गया। इसी खुशी में पूरिम फेस्टिवल मनाया जाता है। इजराइल में रह रहे भारतीय बोले- हमें भी जंग की आदत हो गईविकास यादव उत्तर प्रदेश के जौनपुर के रहने वाले हैं। तेल अवीव के पास लोद सिटी में एक कंस्ट्रक्शन साइट पर इलेक्ट्रिशियन का काम करते हैं। इजराइल में रहते हुए करीब 2 साल हो गए। 28 फरवरी की सुबह विकास की नींद अलार्म से नहीं बल्कि सायरन से खुली। पूरे तेल अवीव में अलर्ट अलार्म बज रहे थे। इमरजेंसी अलार्म बजते ही लोगों को बमों से बचाने वाले सेफ हाउस में जाना होता है। इजराइल के वक्त के मुताबिक, सुबह करीब 8.30 बजे इजराइल ने ईरान पर हमला किया। इसके साथ ही तेल अवीव में अलार्म बजने लगे। अलार्म सुनते ही विकास ने सेफ हाउस की तरफ दौड़ लगा दी। अलार्म बजने और सेफ हाउस तक पहुंचने के लिए कुछ मिनट का ही वक्त होता है। इतने वक्त में ही सेफ हाउस में जाना होता है। विकास कहते हैं कि सुबह से शाम तक कई बार यही ड्रिल करनी पड़ी। पूरा दिन सेफ हाउस में पहुंचने और लौटने में बीत गया।’ ‘ईरान का पिछला हमला ज्यादा खतरनाक था’इजराइल में करीब 30 हजार भारतीय कंस्ट्रक्शन का काम करते हैं। गाजा पर हमले के बाद से फिलिस्तीन के मजदूरों का इजराइल में आना बंद हो गया। इस वजह से इजराइल ने बड़े पैमाने पर भारतीयों को काम देना शुरू किया। विकास कहते हैं कि मेरे इजराइल आने के बाद ईरान के साथ संघर्ष हुआ था। तब ज्यादा बड़ा हमला हुआ था। एक दिन में 300 मिसाइल तक आती थीं। इस बार ईरान का अटैक उतना मजबूत नहीं लग रहा है। इस बार ईरान का टारगेट सिर्फ इजराइल नहीं है, बल्कि कई सारे ठिकाने है। ये भी इसकी बड़ी वजह हो सकती है। इजराइल का आयरन डोम इतना मजबूत है कि मिसाइलों को हवा में ही खत्म कर देता है। हम लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। इजराइल में रहने का अनुभव साझा करते हुए विकास कहते हैं कि इजराइली लोग दिमागी तौर पर बहुत मजबूत होते हैं। ये ऐसे हालात में रहने के आदी हो गए हैं। उन्हें जंग की स्थिति में खुद को बचाने की आदत हो चुकी है। इजराइल में रहने वाले भारतीय अभी सुरक्षित हैं। हम यहां ठीक हैं, अभी सरकार से वापस बुलाने की मांग नहीं करना चाहते। विकास आगे कहते हैं, ‘मैंने गाजा में हमास से, लेबनान में हिजबुल्ला से, यमन में हूती से और ईरान से जंग देख ली है। इजराइल में रहते हुए मैं इन सबका आदी हो गया हूं। आगे क्या होगा, मुझे भी नहीं पता, लेकिन यही कह सकता हूं कि अभी तो डर नहीं लग रहा है।’ जगह: कुम, ईरानमोहम्मद हुसैन सूरतवाला ईरान की अल मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। वे बताते हैं, ‘भारत और ईरान के ऐतिहासिक रिश्ते रहे हैं। बड़ी तादाद में भारतीय ईरान जाते हैं। भारतीय स्टूडेंट मेडिकल, इस्लामिक स्टडीज के लिए पढ़ाई करने और बाद में नौकरी करने के लिए जाते हैं। ईरान के तेहरान, कुम, इस्फेहान और अराक जैसे शहरों में हिंदुस्तानी स्टूडेंट्स की अच्छी-खासी तादाद है। ईरान और भारत के बीच ट्रेड की वजह से लोगों का आना-जाना होता है।’ ‘जून में इजराइल के साथ जंग हुई थी। तब भी भारतीयों के इलाकों में हमले या नुकसान की खबर नहीं आई थी। इस बार भी किसी भी भारतीय के हताहत होने की खबर नहीं है।’ मोहम्मद हुसैन बताते हैं, ‘हमें पता चला है कि इस रीजन में आने वाले अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। ये हमला चौंकाने वाला नहीं है, बल्कि अब ये युद्ध की तरह होगा। हमला करने वाले सभी सहयोगियों को भी सबक सिखाने के लिए ईरान तैयार है। इसीलिए कतर, कुवैत, सऊदी अरब, यूएई में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया है। इससे ईरान का नुकसान होगा, इसमें भी कोई दो राय नहीं है।’ ईरान में फंसे स्टूडेंट बोले- हमें बचा लो ईरान यूनिट स्टूडेंट्स एसोसिएशन के कोऑर्डिनेटर फैजान अहमद बताते हैं कि तेहरान और ईरान के दूसरे हिस्सों में हालात खराब हो गए हैं। ईरान में ज्यादातर भारतीय स्टूडेंट MBBS की पढ़ाई करते हैं। हमारे पास उनके पेरेंट्स के फोन आ रहे हैं। वे घबराए हुए हैं। भारत सरकार ने 23 फरवरी को एडवाइजरी जारी कर ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को देश लौटने की सलाह दी थी। स्टूडेंट्स के लिए यह आसान नहीं था। 5 मार्च को दो बड़े एग्जाम ओलंपियाड और प्री-इंटर्नशिप टेस्ट होने हैं। ये दोनों एग्जाम हेल्थ और एजुकेशन मिनिस्ट्री करवाती हैं। एसोसिएशन ने विदेश मंत्रालय और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को लेटर लिखकर संबंधित अधिकारियों से बात करने और छात्रों के लिए कोई समाधान निकालने की अपील की थी। मौजूदा हालात को देखते हुए एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी लेटर लिखा है। उसमें गुजारिश की है कि स्टूडेंट्स की सुरक्षा को ध्यान में रखा जाए और हालात बिगड़ते हैं तो उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। ईरान का मिसाइल प्रोग्राम रोकने के लिए हमलाईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बन गया है। ईरान इस पर समझौता करने को तैयार नहीं है और इसे अपनी रेड लाइन मानता है। उसका कहना है कि यह उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी है। जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु साइट पर हमला किया, तब मिसाइलों ने ही हमें बचाया था। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी। इसे छोड़ना मतलब खुद को कमजोर करना होगा। ईरान कहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी, मिसाइल या रीजनल ग्रुप पर नहीं। इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर हमले की धमकी दी थी। ट्रम्प के मुताबिक, अमेरिकी सेना ईरान की मिसाइलों को तबाह करने और उसके मिसाइल प्रोग्राम को खत्म करने की कोशिश कर रही है। 28 फरवरी को ईरान पर हमला कर दिया गया। इजराइल डिफेंस फोर्सेज ने दावा किया है कि उसने अपने इतिहास का सबसे बड़ा एयर ऑपरेशन चलाया। करीब 200 लड़ाकू विमानों ने ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन विमानों ने एक साथ करीब 500 ठिकानों पर हमला किया।जवाब में ईरान ने भी 9 देशों में अमेरिका के ठिकानों पर हमला किया। ………………………ये खबर भी पढ़ें ईरान पर हमले में 85 स्कूली छात्राओं की मौत, रक्षामंत्री के मारे जाने की खबर ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले में पहले दिन 200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। दक्षिणी ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 85 छात्राओं की मौत हो गई, जबकि 45 घायल हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इजराइली हमले मे ईरानी रक्षामंत्री अमीर नासिरजादेह और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडर मोहम्मद पाकपोर की मौत हो गई। पढ़ें पूरी खबर...
अपने संबोधन में नेतन्याहू ने कहा कि यह कार्रवाई इस्राइल की सुरक्षा को मजबूत करने और संभावित खतरों को रोकने के उद्देश्य से की गई। उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा हालात, इस्राइल की सैन्य रणनीति और ईरान के खिलाफ उठाए जा रहे कदमों पर विस्तार से बात की।
इजरायल का ईरान पर बड़ा हमला, तेहरान में धमाके और आसमान में धुएं का गुबार
मध्य एशिया में तनाव के बीच इजरायल ने एक बार फिर ईरान पर हमला कर दिया है। इजरायल के रक्षा मंत्री ने कहा कि पूरे देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि ईरान की राजधानी तेहरान में धुएं का गुबार उठता देखा गया है।
दिल्ली में संसद भवन से करीब डेढ़ किमी दूर कदीमी मस्जिद है। करीब 114 साल पुरानी छोटी सी ये मस्जिद कृषि भवन के कैंपस में है। वक्फ की प्रॉपर्टी के तौर पर रजिस्टर्ड है। हाई सिक्योरिटी एरिया होने की वजह से आम लोग इसमें नहीं जा सकते, यहां ज्यादातर सरकारी कर्मचारी नमाज पढ़ते हैं। मस्जिद राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक 3 किमी एरिया के रिडेवलपमेंट वाले सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में आ रही है, इसलिए इसके हटाए जाने की आशंका है। सरकार ने इसके सुरक्षित रहने का भरोसा दिया है। फिर भी वक्फ बोर्ड से जुड़े लोगों को यकीन नहीं है, क्योंकि पहले भी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के लिए तीन मजारें और एक मस्जिद तोड़ी जा चुकी है। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के निर्माण पथ पर आने वाली 6 मस्जिदों की हिफाजत के लिए सबसे पहले हाई कोर्ट जाने वाले एडवोकेट मशरूर खान से हमने पूछा कि क्या मस्जिदें सुरक्षित हैं? उन्होंने जवाब दिया, 'नहीं। इसीलिए तो कदीमी मस्जिद के बारे हमने खबरें पढ़ीं तो एक बार फिर कोर्ट के दिए भरोसे और भारत सरकार से लगाई उम्मीद डगमगाने लगी। हम इस मस्जिद से जुड़े कागजात इकट्ठे कर रहे हैं, ताकि अगर इसे गिराने की कोशिश की जाए, तो दावा ठोक सकें।' 1912 में लुटियन के बनाए नक्शे में कदीमी मस्जिद का जिक्रवक्फ बोर्ड में इन दिनों यही बातें हो रही हैं कि कहीं 6, मौलाना आजाद रोड (पुराना उपराष्ट्रपति भवन) पर बनी मस्जिद की तरह चुपचाप एक और मस्जिद ढहाने की तैयारी तो नहीं हो रही। वक्फ बोर्ड की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट मशरूर बताते हैं कि अब तक हमारे पास कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है। छन-छनकर बोर्ड के पास आ रही खबरों से शक तो हो ही रहा है। मशरूर कहते हैं, 'कृषि भवन 1957 में बना था। कदीमी मस्जिद उससे बहुत पहले से है। 1912 में जब ब्रिटिश आर्किटेक्ट लुटियन एडवर्ड दिल्ली को नए सिरे से डिजाइन कर रहे थे, उस वक्त के नक्शे में भी ये मस्जिद है। इसे उस वक्त बनाया नहीं गया, क्योंकि ये पहले से मौजूद थी। इसलिए इसे बिना छेड़े दिल्ली को डिजाइन किया गया।’ ‘ये मस्जिद सिर्फ इस्लामिक ढांचा नहीं, हैरिटेज प्रॉपर्टी है। ब्रिटिश सरकार ने लुटियंस दिल्ली बनाई, तब भी इसे नहीं गिराया। पहली बार भारत सरकार बनी, तब भी ये इमारत सुरक्षित रही। इससे अगर छेड़छाड़ होगी, तो हम कोर्ट जाएंगे।' एडवोकेट मशरूर 1912 में एडविन लुटियन का बनाया नक्शा दिखाते हैं। इसमें दो सर्किल जरिए कहते हैं, 'बड़े सर्किल में सुनहरी मस्जिद है। इसे भी तोड़ा जाना था, लेकिन हमने इसे बचा लिया। हमें सही वक्त पर उसे गिराए जाने की सूचना मिल गई थी। हम कोर्ट चले गए और कोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला दिया। दूसरे छोटे सर्किल में कदीमी मस्जिद है। ये नक्शा सबूत है कि ये दोनों मस्जिदें 1912 से पहले की हैं।' ‘सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की शुरुआत में पिटीशन डाली’एडवोकेट मशरूर कहते हैं, ‘1911 में ब्रिटिश सरकार ने दिल्ली को राजधानी बनाने का फैसला लिया, तो 1911 में सरकारी इमारतें और संसद भवन बनाने के लिए जमीनें खरीदीं। फिर एडवर्ड लुटियन ने पूरी दिल्ली डिजाइन की। उस वक्त कदीमी मस्जिद के अलावा बाकी 5 मस्जिदें भी मौजूद थीं। अभी जहां कृषि भवन है, उसके पास तब रायसीना गांव हुआ करता था। शायद इस मस्जिद में गांव के लोग आते होंगे।’ ‘सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट शुरू हुआ, तब हमने 2021-22 में हाईकोर्ट में पहले ही पिटीशन डाल दी थी, ताकि रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के नक्शे में आने वाली इन 6 मस्जिदों को सुरक्षित कर सकें। कोर्ट ने सरकार से पूछा तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया कि फिलहाल इन्हें ध्वस्त करने की योजना नहीं है। कोर्ट ने भी हमें भरोसा दिया कि मस्जिदें सुरक्षित रहेंगी। अगर आपको इस प्रोजेक्ट के दौरान कुछ आशंका लगे, तो आप वक्फ कोर्ट जा सकते हैं।’ ‘कोर्ट के भरोसे के बाद भी एक मस्जिद चुपचाप हटा दी गई। अब महसूस होता है कि सरकारी वकील के जवाब में जो फिलहाल शब्द था, शायद वही भ्रमित करने वाला था।’ सरकारी वकील ने आपको भ्रमित किया? एडवोकेट मशरूर कहते हैं, ‘हां। उपराष्ट्रपति भवन की मस्जिद हटा दी गई, इससे तो यही लगता है। न कोई सूचना, न कॉन्टैक्ट किया गया। सरकारी वकील का जवाब टालमटोल वाला था। कोई इतनी बड़ी योजना का डिजाइन बनाता है, तो सब कुछ पहले ही तय हो जाता है। इसका मतलब है कि ये तय था कि उपराष्ट्रपति भवन की मस्जिद को गिराया जाएगा।’ ‘इतनी बड़ी योजनाओं में रोज फेरबदल नहीं होता, मतलब हमें बरगलाया गया। अब इसी तरह से कृषि भवन के परिसर में बनी मस्जिद को लेकर भी स्पष्टता नहीं है। हमें जो अलग-अलग सोर्सेज से सूचना मिल रही है कि कृषि भवन और शास्त्री भवन को गिराया जाना है। टेंडर जारी कर दिया गया है। इस टेंडर के लिए जो नक्शा है, उसमें मस्जिद नहीं है।’ ‘हमने सुनहरी बाग मस्जिद बचा ली, क्योंकि इसमें ट्रांसपेरेंसी बरती गई। नई दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने 2023 में सूचना जारी कि इस मस्जिद की वजह से ट्रैफिक बहुत होता है। इसलिए इसे हटाने की योजना हैं। हमने तुरंत एतराज जताया और कोर्ट गए। हमने उसके हेरिटेज प्रॉपर्टी और वक्फ प्रॉपर्टी होने के सारे सबूत दिखाए। हमारा पक्ष सही था, कोर्ट ने इसे माना। आदेश दिया और मस्जिद बच गई। कम से कम इस मस्जिद को चुपचाप नहीं गिराया गया। प्रोसेस को फॉलो किया गया।' सुनहरी बाग मस्जिद को NDMC ने दिया था नोटिसकरीब 174 साल पुरानी सुनहरी बाग मस्जिद 125 वर्गमीटर जगह में बनी है। मस्जिद एक गोलचक्कर पर है, जहां मौलाना आजाद मार्ग, मोतीलाल नेहरू मार्ग, सुनहरी बाग मार्ग और रफी मार्ग मिलते हैं। मस्जिद के एक तरफ उद्योग भवन मेट्रो स्टेशन का गेट और गवर्नमेंट ऑफिस हैं। सुनहरी बाग मस्जिद ऐतिहासिक स्मारक ग्रेड-3 लिस्ट में है और वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी है। ट्रैफिक पुलिस ने दिल्ली नगर निगम, यानी NDMC को एक रिपोर्ट भेजी है कि विदेशियों, VIP और अधिकारियों का इस गोलचक्कर से आना-जाना होता है। सुनहरी मस्जिद की वजह से उन्हें जाम में फंसना पड़ रहा है। इसके बाद NDMC ने नोटिस जारी कर पूछा था कि क्या सुनहरी मस्जिद को हटाकर ट्रैफिक में सुधार किया जा सकता है। एक मस्जिद ही नहीं, तीन मजारें भी हटाई गईंएडवोकेट मशरूर कहते हैं, 'उद्योग भवन के गोलचक्कर में तीन मजारें थीं। ये कब बनीं, ये तो नहीं पता। ये लुटियन दिल्ली में हैं। आजादी के बाद तो किसी ने नहीं बनाई होंगी। जाहिर है ये लुटियन दिल्ली बनने से पहले की होंगी। लुटियन दिल्ली बनाते वक्त इन्हें भी ब्रिटिश गवर्नमेंट ने सुरक्षित रखा। भारत सरकार ने भी इन्हें नहीं छेड़ा। अब अचानक उन्हें हटा दिया गया।' वे आगे कहते हैं कि CPWD ने अब तक नहीं बताया कि कदीमी मस्जिद के बारे में क्या सोचा जा रहा है। इसीलिए चिंता ज्यादा हो रही है। ऐसे ही चुपचाप उपराष्ट्रपति भवन की मस्जिद गिरा दी गई थी। इसीलिए हमने सोचा है कि सारे सबूत जुटाने के बाद हम खुद विभाग से संपर्क साधेंगे। जरूरत हुई तो कोर्ट जाएंगे। कदीमी मस्जिद के हेरिटेज प्रॉपर्टी होने के सबूत 1. 1912 का नक्शा 2. वक्फ बोर्ड का रिकॉर्ड 3. इतिहास की किताबों में कदीमी मस्जिद का जिक्र 4. गजट नोटिफिकेशन गजट नोटिफिकेशन सरकारी डॉक्यूमेंट होता है, जो वक्फ की प्रॉपर्टी के सर्वे के बाद बनता है। ये डॉक्यूमेंट 1970 का है। इसमें ये मस्जिद मौजूद है। ‘उपराष्ट्रपति भवन की मस्जिद को भी यूं ही नहीं जाने देंगे, कोर्ट जाएंगे’एडवोकेट मशरूर आगे कहते हैं, ‘नियम है कि जो प्रॉपर्टी एक बार वक्फ की घोषित हो जाती है, वो हमेशा वक्फ की ही रहती है। नए कानून के हिसाब से भी देखें, तो सरकार ऐसे ही कोई वक्फ प्रॉपर्टी न कब्जे में ले सकती और न गिरा सकती है। कम से कम पब्लिक इंटरेस्ट से जुड़ा कोई कारण तो देना पड़ेगा।' 'वैसे तो वक्फ की जमीन अल्लाह की होती है। सरकार को कुछ जरूरी कंस्ट्रक्शन करना है और उसे वो जमीन चाहिए, तो स्टेकहोल्डर से बात करनी होगी। उसे एतराज जताने का समय देना होता है। 6 मौलाना आजाद रोड यानी उपराष्ट्रपति के आवास पर बनी मस्जिद के गिराने जाने का कारण हम सरकार से पूछेंगे। वाजिब जवाब नहीं मिला तो कोर्ट जाएंगे।' मस्जिद 2024 में गिराई गई थी, फिर इतनी देर क्यों हो रही है? जवाब मिला, ‘क्योंकि हमें कागज इकट्ठा करने में वक्त लगा। दूसरी बात वक्फ बोर्ड के पास पिछले दो साल से सिर्फ एक सेक्शन ऑफिसर है। यहां कम से कम तीन अधिकारी होते हैं। अभी 13-14 फरवरी को एक अधिकारी और दिया गया है।’ ‘हमने उपराष्ट्रपति भवन वाली मस्जिद के लिए RTI डाली है। पूछा है कि आखिर मस्जिद क्यों गिरानी पड़ी। इसका पब्लिक इंटरेस्ट क्या है।' कोर्ट जाने के लिए आपके पास कुछ तो आधार होना चाहिए। हम उस मस्जिद पर भी सवाल करेंगे। पहले डिपार्टमेंट से पूछ लें, फिर उसी जवाब को आधार बनाकर, अपने ऐतिहासिक दस्तावेजों के साथ कोर्ट जाएंगे। नई बिल्डिंग के नक्शे में मस्जिद का जिक्र नहींCPWD ने कृषि भवन और शास्त्री भवन के रीडेवलपमेंट के लिए टेंडर जारी किया है। इसके तहत मौजूदा बिल्डिंग की जगह कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग्स 4 और 5 बनना है। इस प्रोजेक्ट पर करीब तीन हजार करोड़ रुपए खर्च होने हैं। नए प्लान में कृषि भवन परिसर में बनी कदीमी मस्जिद शामिल नहीं है। हमने इस बारे में 25 फरवरी को हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स में डिप्टी डायरेक्टर सुशील कुमार को सवाल भेजे थे। उन्होंने जवाब दिया कि मिनिस्ट्री में संबंधित अधिकारियों को सवाल भेज दिए गए हैं। हालांकि उधर से जवाब नहीं आया। हमने हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स के डायरेक्टर श्यामलाल पुनिया को फोन किए, लेकिन रिसीव नहीं हुआ। हालांकि, CPWD के सोर्स ने बताया है कि नक्शे में मस्जिद का जिक्र नहीं है। ……………………ये खबर भी पढ़ें64 लाख बांग्लादेशियों का दावा, सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर खाली असम में मार्च-अप्रैल में चुनाव हैं। बांग्लादेशी घुसपैठिए मुद्दा हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा दावा कर चुके हैं कि असम की मुस्लिम आबादी में करीब 36% बांग्लादेशी हैं। हालांकि असम का मटिया डिटेंशन सेंटर खाली पड़ा है। हिमंता सरकार इसे होल्डिंग सेंटर कहती है। ऊंची-ऊंची दीवारों और लोहे के भारी-भरकम गेट वाला डिटेंशन सेंटर गुवाहाटी से करीब 120 किमी दूर गोलपाड़ा जिले में है। इसमें कैद 133 विदेशी ‘घुसपैठियों’ में सिर्फ 11 बांग्लादेशी हैं। पढ़ें पूरी खबर...
दिल्ली शराब नीति केस में CBI की जांच को बड़ा झटका लगा है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप साबित करने लायक ठोस सबूत नहीं हैं। कोर्ट ने किन आधारों पर फैसला दिया? क्या सभी मामलों से राहत मिल गई है? और इसका राजनीति पर क्या असर होगा? समझते हैं 6 सवालों में… सवाल-1: शराब घोटाले के मामले में कोर्ट ने केजरीवाल-सिसोदिया को किस आधार पर बरी किया? जवाब: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित शराब घोटाले के मामले में केजरीवाल और सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया। स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने कहा कि चार्जशीट में ‘भ्रामक दावे’ किए गए हैं और साबित करने लायक सबूत नहीं हैं… कोर्ट ने चार्जशीट पर क्या कहा कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल पर क्या कहा कोर्ट ने मुख्य आरोपी कुलदीप सिंह पर क्या कहा कोर्ट ने मनीष सिसोदिया पर क्या कहा सवाल-2: कथित शराब घोटाला आखिर है क्या, इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ? जवाब: दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर 2021 को शराब बिक्री से जुड़ी नई आबकारी नीति लागू की थी। इससे शराब दुकानें प्राइवेट हाथों में चली गईं। तब की केजरीवाल सरकार का दावा था कि इससे माफिया राज खत्म होगा और सरकार के रेवेन्यू में बढ़ोत्तरी होगी। जुलाई 2022 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव ने आबकारी नीति में आर्थिक गड़बड़ी को लेकर एक रिपोर्ट उपराज्यपाल वीके सक्सेना को सौंपी थी। मुख्य सचिव की रिपोर्ट के आधार पर उपराज्यपाल ने CBI जांच की मांग की। 17 अगस्त 2022 को CBI ने केस दर्ज किया। इसमें मनीष सिसोदिया, 3 रिटायर्ड सरकारी अधिकारी, 9 बिजनेसमैन और 2 कंपनियों को आरोपी बनाया गया। विवाद बढ़ता देख 28 जुलाई 2022 को दिल्ली सरकार ने नई शराब नीति रद्द कर दी। 22 अगस्त 2022 को ED ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर लिया। 28 फरवरी 2023 को दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी हुई। 4 अक्टूबर 2023 को राज्यसभा संजय सिंह को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। नवंबर 2023 से मार्च 2024 तक ED ने केजरीवाल को 9 समन जारी किए, केजरीवाल एक भी बार नहीं पहुंचे। 21 मार्च 2024 को ED ने उन्हें उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। 28 मार्च 2024 को केजरीवाल को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने 15 अप्रैल 2024 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 10 मई 2024 को लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उन्हें 21 दिन की जमानत मिली। 2 जून को उन्हें फिर दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया। 20 जून 2024 को केजरीवाल को ट्रायल कोर्ट से तो जमानत मिल गई, लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। CBI के मामले में 13 सितंबर 2024 को जमानत मिलने के बाद ही वह जेल से बाहर आ सके। सवाल-3: केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर क्या आरोप लगे थे? जवाब: अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर मुख्य रूप से दिल्ली की 2021-22 एक्साइज पॉलिसी में गड़बड़ी के चलते आरोप लगे थे। इस नीति को आम आदमी पार्टी की सरकार ने लागू किया था। उन पर ED और CBI ने दो तरह के आरोप लगाए थे… ED का मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप CBI का भ्रष्टाचार का आरोप सवाल-4: क्या कोर्ट के आदेश के बाद केजरीवाल सभी आरोपों से बरी हो गए? जवाब: कोर्ट ने भ्रष्टाचार और घोटाले के जिस मामले में फैसला दिया है, वो CBI ने अगस्त 2022 में दर्ज किया था। CBI ने 2022 में पहली चार्जशीट दाखिल की और बाद में कई पूरक चार्जशीट भी दाखिल कीं। आज का फैसला केवल CBI वाले मामले में आया है, जिसमें केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपी बरी हो गए हैं। हालांकि इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED अलग से मामला दर्ज करके शराब नीति में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रही थी। ED का कहना था कि इस नई शराब नीति में होलसेल बिजनेस ने 12% का कमीशन बुक किया, जिसमें से 6 प्रतिशत आम आदमी पार्टी को दिया गया। ED ने ये भी आरोप लगाया था कि जानबूझकर शराब नीति में ऐसे लूपहोल्स छोड़े गए हैं, ताकि आम आदमी पार्टी को बैकएंड से पैसा मिलता रहे। केजरीवाल पर भी ED ने PMLA यानी पीएमएलए यानी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। इसी मामले में केजरीवाल के अलावा मंत्री मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को भी जेल में रहना पड़ा। चूंकि, दोनों मामले अलग-अलग दर्ज किए गए हैं, इसलिए इनमें केजरीवाल की गिरफ्तारी भी अलग-अलग हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि ED और CBI दोनों के मामले और ट्रायल अलग-अलग तरीके से चले। दोनों मामले अलग-अलग कानून के तहत अलग-अलग जांच एजेंसियां हैंडल कर रही हैं, इसलिए ये मर्ज नहीं किए जा सकते। CBI के मामले में तो केजरीवाल बरी हो गए हैं, लेकिन ED के मामले में चार्जशीट दायर हो चुकी है और केजरीवाल की गिरफ्तारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला रिजर्व हो गया है। इस मामले में आगे की सुनवाई में फैसला सुनाया जा सकता है। सवाल-5: क्या CBI कोर्ट के इस फैसले को चुनौती दे सकती है? जवाब: मीडिया रिपोर्ट्स ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि CBI इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दे सकती है। विराग गुप्ता कहते हैं कि अगर CBI हाई कोर्ट जाती है, तो हाई कोर्ट इस मामले में नए सिरे से सुनवाई शुरू कर सकता है, या फिर राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को बरकरार रख सकता है। सवाल-6: कोर्ट के फैसले से केजरीवाल और AAP की राजनीति पर क्या असर होगा? जवाब: पॉलिटिकल एक्सपर्ट आदेश रावल के मुताबिक केजरीवाल के दिल्ली विधानसभा चुनाव हारने के पीछे ये केस एक बड़ी वजह था। इससे पहले कोयला घोटाला, 2G स्पेक्ट्रम घोटाला और कामनवेल्थ घोटाले के कारण कांग्रेस चुनाव हारी थी और आज तक उभर नहीं पाई। बाद में किसी को सजा नहीं हुई। इन दोनों घटनाओं से फायदा BJP को हुआ। कोर्ट का फैसला आने के बाद मीडिया से बात करते हुए केजरीवाल भावुक होकर रोने लगे। इस दौरान मनीष सिसोदिया उन्हें सहारा देते हुए दिखे। केजरीवाल ने मीडिया से कहा, ‘बीजेपी हमारे ऊपर शराब घोटाले का आरोप लगा रही थी। आज कोर्ट ने हमें बरी कर दिया। हम हमेशा कहते थे कि सत्य की जीत होती है। सत्य की जीत हुई। पीएम मोदी और अमित शाह ने यह सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र रचा। आम आदमी पार्टी के टॉप 4 लीडर को जेल में डाल दिया। सिटिंग मुख्यमंत्री को जेल में डाल दिया। 24 घंटे खबरें दिखाई जाती थीं कि केजरीवाल भ्रष्ट है। मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई।’ अब कोर्ट के इस फैसले को आम आदमी पार्टी अपनी जीत की तरह दिखाएगी। हालांकि अभी ED के मामले में फैसला आना बाकी है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इस फैसले से AAP को राजनीतिक फायदा होगा। 2026 में 5 राज्यों- असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में चुनाव हैं। हालांकि इन राज्यों में AAP की मौजूदगी लगभग नगण्य है। 2027 में पंजाब विधानसभा चुनाव हैं, जहां अभी AAP की सरकार है। दिल्ली में हार के बाद केजरीवाल फिलहाल पंजाब में ज्यादा समय दे रहे हैं। वह पंजाब में भी इस मुद्दे को उठाएंगे और बीजेपी पर राजनीतिक साजिश करके सहानुभूति हासिल करने की कोशिश करेंगे। कोर्ट के फैसले से INDIA गठबंधन के इस आरोप को भी बल मिलेगा, कि केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं को ED जैसी जांच एजेंसियों के जरिए निशाना बनाती है। यानी शुरुआत में ही ऐसा कोई मजबूत सबूत नहीं दिखा जिससे लगे कि उनके खिलाफ केस बनता है। --------- ये खबर भी पढ़िए… जब बागी हिमंता मिलने पहुंचे, राहुल कुत्ते से खेलते रहे:आज नॉर्थ-ईस्ट के 6 राज्यों में बीजेपी सरकार; कांग्रेस कैसे उखड़ गई 2014 से पहले नॉर्थ ईस्ट के 8 राज्यों में से किसी भी राज्य में BJP की सरकार नहीं थी। कुल मिलाकर 9 विधायक और महज 4 सांसद थे। त्रिपुरा, सिक्किम और मिजोरम में तो BJP के पास एक भी सीट नहीं थी। आज नॉर्थ ईस्ट के 6 राज्यों में BJP सत्ता में है। चार राज्यों में उसका मुख्यमंत्री है। कुल 197 विधायक और 13 सांसद हैं। पूरी खबर पढ़िए…
चीन की संसद से नौ वरिष्ठ सैन्य अधिकारी बाहर, शी जिनपिंग के कदम को मिली मंजूरी
2024 के दौरान भी शी जिनपिंग की अध्यक्षता वाले शक्तिशाली केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) से कई शीर्ष अधिकारियों को बाहर किया गया था। यह आयोग चीन की सशस्त्र सेनाओं का सर्वोच्च निर्णयकारी निकाय है और सीधे राष्ट्रपति शी के नेतृत्व में काम करता है।
हिलेरी क्लिंटन का साफ इनकार: एपस्टीन से कभी मुलाकात नहीं
अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने प्रतिनिधि सभा की 'निगरानी एवं सरकारी सुधार समिति' के समक्ष बयान दिया
ट्रंप प्रशासन विदेशी स्टूडेंट्स के लिए ओपीटी वर्क रूट की फिर से करेगा समीक्षा
अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हजारों विदेशी छात्रों पर असर डालने वाला एक बड़ा कदम उठाया गया है
व्हाइट हाउस में सरप्राइज मीटिंग – मेयर ममदानी और ट्रंप आमने-सामने
न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात की
पाकिस्तानी हमलों का अफगान पलटवार – 15 चौकियां कब्जे में
सीमा पर बढ़ा तनाव, अफगानिस्तान ने किया बड़ा दावा रात के अंधेरे में ऑपरेशन, पाक सैनिकों पर भारी पड़ा अफगान हमला यूएन रिपोर्ट: पाक एयर स्ट्राइक में 13 नागरिकों की मौत डूरंड लाइन पर अफगान रणनीतिक बढ़त, हालात संवेदनशील काबुल। अफगानिस्तान ने गुरुवार रात को दावा किया है कि वह हाल में हुए पाकिस्तानी हवाई हमलों के जवाब में पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर रहा है। अफगान अधिकारियों के अनुसार, सीमा क्षेत्र में की गई कार्रवाई के दौरान अब तक दुश्मन की 15 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया है। इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान के उप प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि कार्रवाई के दौरान कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं, जबकि कुछ को जिंदा भी पकड़ लिया गया है। प्रवक्ता के अनुसार, दुश्मन के खिलाफ अभियान लगातार जारी है और सीमा क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त हासिल की जा रही है। उन्होंने कहा कि दुश्मन की कुल 15 पोस्ट पर कब्जा कर लिया गया है तथा कई सैनिक हताहत हुए हैं। अफगान पक्ष ने यह भी बताया कि डूरंड लाइन पर तैनात अत्याधुनिक लेजर उपकरणों से लैस इकाइयों ने भी ऑपरेशन शुरू कर दिया है। बयान में कहा गया है कि रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए दुश्मन की हर गतिविधि को निशाना बनाया जाएगा। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से इन दावों पर अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए क्षेत्र में हालात संवेदनशील बने हुए हैं। बता दें कि अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) ने पुष्टि की थी कि पाकिस्तानी सैन्य बलों द्वारा अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में किए गए हवाई हमलों में 13 नागरिकों की मौत हुई थी। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। स्थानीय मीडिया ने यूएनएएमए के हवाले से मंगलवार को ये खबर प्रकाशित की थी। अफगानिस्तान की प्रमुख न्यूज एजेंसी खामा प्रेस ने यूएनएएमए की एक रिपोर्ट के हवाले से खुलासा किया था कि हालिया हवाई हमलों में 13 अफगान नागरिक मारे गए हैं, जबकि सात घायल हो गए थे। ये हमले नंगरहार के बेहसूद और खोगियानी जिलों में 21-22 फरवरी की दरमियानी रात किए गए थे। पक्तिका के बरमल में एक स्कूल और मस्जिद को निशाना बनाया गया था, जबकि ओर्गुन जिले में एक घर पर एयर स्ट्राइक की गई थी।
भारत में आतंकी बड़ा हमला करने की फिराक में हैं। कश्मीर से लेकर दिल्ली तक कई धार्मिक स्थल निशाने पर हैं। VIP स्पॉट और सेना भी टारगेट लिस्ट में हैं। फरवरी में महज 20 दिन के अंदर सुरक्षा एजेंसियों को इसके इनपुट मिले हैं। ये सीक्रेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट दैनिक भास्कर को भी मिली है। इसके मुताबिक, 10 फरवरी को होने वाला बड़ा हमला टाला जा चुका है, लेकिन खतरा अब भी बरकरार है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से आतंकी एक्टिविटीज बढ़ी हैं। आतंकियों का नेटवर्क पाकिस्तानी कैंपों और बांग्लादेश रूट से ऑपरेट हो रहा है। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा कश्मीर और दिल्ली के आसपास हमले की तैयारी में है। आतंकियों के पास 15-20 किलो RDX और IED होने के इनपुट हैं। 5 आतंकी पाकिस्तान से भारत में घुस चुके हैं। कुछ स्लीपर सेल बांग्लादेश लिंक से ऑपरेट कर रहे हैं। पूरा मामला आखिर क्या है, खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में क्या इनपुट हैं, पाकिस्तान से घुसपैठ करने वाले आतंकी कौन हैं, ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकियों को लेकर बनाई खुफिया एजेंसियों की लिस्ट में क्या है। पढ़िए ये रिपोर्ट… फरवरी में 3 बड़े इंटेलिजेंस अलर्ट पहला: 8 फरवरी को जम्मू-कश्मीर में खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिला, जो लश्कर-ए-तैयबा की धमकी से जुड़ा था। इसके मुताबिक, लश्कर के आतंकी IED ब्लास्ट की तैयारी में हैं। ये ब्लास्ट कश्मीर के नरबल से पट्टन या कुंजेर से नरबल के रास्ते में हो सकता है। इस धमाके के लिए आतंकी 15 से 20 किलो RDX का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये हमला सेना के काफिले पर भी हो सकता है। दूसरा: 18 फरवरी के इनपुट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद ने ओवरग्राउंड नेटवर्क एक्टिव कर दिया है। इसके लोगों ने हाल में जम्मू से कश्मीर को जोड़ने वाली काजीगुंड टनल की रेकी की है। इसमें 10 आतंकियों के दो अलग-अलग ग्रुप साजिश रच रहे हैं। आतंकी फिरदौस अहमद भट्ट रिमोट IED के जरिए सुरक्षा बलों को टारगेट कर रहा है। सुरक्षा बलों के वाहनों को भी निशाना बनाया जा सकता है। तीसरा: 8 से 20 फरवरी के बीच अलग-अलग इनपुट मिले। इसमें से एक इनपुट लश्कर-ए-तैयबा के बारे में है। इसके मुताबिक, आतंकी भारत के बड़े शहरों को निशाना बना सकते हैं। दिल्ली में चांदनी चौक के आसपास के मंदिर निशाने पर हैं। पुरानी दिल्ली भी टारगेट पर है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद की एक मस्जिद पर 6 फरवरी को हुए हमले के बाद भारत में अटैक की साजिश है। जम्मू-कश्मीर को जोड़ने वाली काजीगुंड टनल, भीड़भाड़ वाली जगहों पर अलर्टखुफिया एजेंसियों को मिले अलर्ट में दो ज्यादा संवेदनशील हैं। पहला, जम्मू से कश्मीर के बीच काजीगुंड टनल की रेकी और दूसरा 15-20 किलो RDX के जरिए किसी हाइवे या सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की साजिश। दैनिक भास्कर ने इस पर सुरक्षा एजेंसियों में अपने सोर्स से बात की। वे बताते हैं कि काजीगुंड टनल की रेकी करना बहुत खतरनाक है। ये सुरक्षा के लिहाज से काफी संवेदनशील है, लेकिन हम अलर्ट हैं। पूरे जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ बड़े ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। जैश और लश्कर से जुड़े आतंकी मारे जा चुके हैं। कई एक्टिव आतंकियों की लिस्ट भी तैयार है। जम्मू में कठुआ के रास्ते 5 पाकिस्तानी आतंकी घुसेइसी महीने 5 पाकिस्तानी आतंकियों के भारतीय सीमा में घुसपैठ की इंटेलिजेंस रिपोर्ट मिली है। सोर्स ने बताया कि ट्रेंड पाकिस्तानी आतंकियों ने जम्मू के कठुआ में हीरानगर के रास्ते घुसपैठ की है। आशंका है कि जैश-ए-मोहम्मद के कैंप में ट्रेनिंग लेने वाले ये आतंकी आर्मी कैंप या सेना के वाहनों पर आत्मघाती हमला भी कर सकते हैं। ठीक वैसे ही जैसे 2015 में दिनानगर पुलिस स्टेशन पर हमला हुआ था। जम्मू-कश्मीर में पांचों संदिग्ध आतंकियों की फोटो जारी कर दी गई है। पोस्टर लगाकर लोगों से जानकारी मांगी गई है। सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। सोर्स ने बताया कि इन आतंकियों की घुसपैठ और काजीगुंड टनल को लेकर मिले अलर्ट में काफी बातें एक जैसी हैं। असल में वो अलर्ट भी जैश से जुड़े ओवरग्राउंड वर्कर की तरफ से रेकी करने को लेकर था। अब जैश के आतंकी घुसपैठ कर आए हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों की इन पर नजर है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकियों की दूसरी लिस्ट तैयार पिछले साल पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया। इसके साथ ही पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के लोकल आतंकियों की एक लिस्ट तैयार की गई थी। 17 आतंकियों की लिस्ट में से ज्यादातर आतंकी एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं। आतंकियों की पहचान कर अब दूसरी लिस्ट तैयार की गई है। इसमें पहलगाम हमले के बाद चर्चा में आए अनंतनाग के आतंकी आदिल अहमद ठोकर का नाम था। इस नई लिस्ट में भी उसका नाम है। अभी उसके पाकिस्तान में होने का शक है। नई लिस्ट में दो अलग-अलग कैटेगिरी में 25 आतंकियों के नाम हैं। इसमें एक्टिव और इनएक्टिव आतंकियों की कैटेगिरी भी है। इनमें 5 आतंकियों को सेना ने एनकाउंटर में मार दिया है। बाकी 20 पर सुरक्षा बलों की नजर है। इनमें 4 इनएक्टिव हो चुके हैं, बाकी 16 की लिस्ट दैनिक भास्कर के पास भी है। इनमें फिरदौस अहमद भट्ट का नाम शामिल है, जिसे लेकर हाल में अलर्ट मिला है। इसके बाद से काजीगुंड टनल भी टारगेट पर है। इसके अलावा नसीर अहमद वानी, आदिल रहमान, जाकिर अहमद, मुबाशिर अहमद डार, जुबैर अहमद, हारुन रशीद, आसिफ अहमद, आबिद कयूम, आबिद रमजान, सज्जाद अहमद वानी, जमील, मोहम्मद उमर मीर, बिलाल अहमद मीर और हाशिर रफीक पारे हैं। बांग्लादेश नेटवर्क से दिल्ली और दूसरे शहरों में हमले की तैयारी में आतंकीफरवरी की शुरुआत में ही खुफिया एजेंसियों को दिल्ली और आसपास के इलाके में आतंकी साजिश का अलर्ट मिला था। 7-8 फरवरी को दिल्ली के जनपथ मेट्रो स्टेशन के आसपास कुछ पोस्टर लगे मिले। ये पोस्टर पाकिस्तान के सपोर्ट में थे। इसमें भारत के खिलाफ भड़काने वाली बातें लिखीं थीं। पोस्टर में कश्मीर की आजादी का जिक्र था। आतंकी बुरहान वानी की तारीफ भी थी। 22 फरवरी को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस पोस्टर वाले नेटवर्क का खुलासा किया। कुल 8 आरोपी गिरफ्तार किए गए। इसमें पुलिस ने कोलकाता और तमिलनाडु मॉड्यूल का खुलासा किया। कोलकाता मॉड्यूल में उमर फारूक और रबीउल इस्लाम को अरेस्ट किया। इनमें उमर, पश्चिम बंगाल और इस्लाम, बांग्लादेश का रहने वाला है। तमिलनाडु मॉड्यूल में मोहम्मद मिजानुर रहमान, शफायत हुसैन, जाहिदुल इस्लाम, मोहम्मद लिटन, मोहम्मद उज्जल और उमर को अरेस्ट किया गया। ये सभी बांग्लादेशी हैं। इनका मुख्य हैंडलर शब्बीर अहमद लोन उर्फ राजा है। ये श्रीनगर का रहने वाला है। पाकिस्तान में लश्कर के कैंप में ट्रेनिंग ले चुका है। शब्बीर को 27 जुलाई 2007 को दिल्ली के चांदनी चौक में एक रेस्तरां के पास से गिरफ्तार किया गया था। उसके रूम से विस्फोटक, हैंड ग्रेनेड और हथियार मिले थे। वो एक पॉलिटिकल किलिंग के लिए दिल्ली आया था। यहां सजा काटने के बाद 2018 में जेल से बाहर आया और बांग्लादेश चला गया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद शांत आतंकी फिर एक्टिवआतंकियों का हैंडलर शब्बीर अभी बांग्लादेश से ऑपरेट कर रहा है। वह कई साल तक एक्टिव नहीं था और गुमनाम स्लीपर सेल की तरह काम करता रहा। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी नेटवर्क ने इसे फिर एक्टिव किया। तब इसने कोलकाता और तमिलनाडु नेटवर्क को एक्टिव किया। इसी शब्बीर अहमद के कहने पर दिल्ली और कोलकाता में पाकिस्तान के समर्थन में पोस्टर लगाए गए थे। शब्बीर को लेकर दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के ACP प्रमोद कुशवाह बताते हैं, ‘जनपथ मेट्रो स्टेशन के पास पाकिस्तान के सपोर्ट में पोस्टर लगाए जाने के बाद जांच शुरू हुई। हमें पता चला कि इसमें उमर फारुक और इस्लाम की भूमिका है। इन्होंने कोलकाता में सेफ हाइडआउट बनाया था। पाकिस्तान में दोनों एडवांस्ड ट्रेनिंग लेने के बाद भारत में टारगेट किलिंग करने आए थे।‘ ‘शब्बीर लश्कर का पुराना आतंकी है और उसी ने पोस्टर लगवाए थे। इनका नेटवर्क कोलकाता और तमिलनाडु में एक्टिव है। शब्बीर आत्मघाती हमले का भी मास्टरमाइंड है। अभी ये लश्कर के लिए भारत में खतरनाक स्लीपर सेल तैयार कर रहा है। अब तक कुल 8 लोगों को अरेस्ट किया है। इन लोगों ने दिल्ली और इससे सटे शहरों की रेकी की थी।‘ दिल्ली पुलिस में हमारे सोर्स ने बताया कि इन आतंकियों ने खासकर धार्मिक स्थलों की रेकी की है। उसके वीडियो भी बांग्लादेश में मौजूद आतंकी शब्बीर अहमद को भेजे हैं। सोर्स का दावा है कि दिल्ली के चांदनी चौक के पास के मंदिर के साथ लोटस टेंपल और इस्कॉन टेंपल की भी रेकी की गई है। इसके अलावा अयोध्या, रामेश्वरम और कांचीपुरम में भी रेकी की है। पहले कश्मीरी पंडितों को मारने की धमकी, फिर नई पोस्ट सामने आईदैनिक भास्कर ने हाल ही में कश्मीरी पंडितों को मिली धमकी को लेकर स्टोरी की थी। हमने बताया था कि 3 फरवरी को लश्कर के प्रॉक्सी संगठन फाल्कन स्क्वॉड ने कश्मीरी पंडितों को धमकी दी है। अब उसी फॉल्कन स्क्वॉड के फिर धमकी वाले पोस्टर सामने आए हैं। इसमें कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा के दावे करने वाले जम्मू-कश्मीर के नामी राजनेताओं को मारने की धमकी दी गई है। आतंकियों ने पोस्टर में राजनेता की फोटो के आगे रेड कलर से क्रॉस किया है। इसे लेकर अब कश्मीरी पंडितों से जुड़े संगठन भी अलर्ट हैं। एक कश्मीरी पंडित ने बताया कि हमारी सिक्योरिटी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां चाक-चौबंद हैं लेकिन जिस तरह से खुलेआम धमकियां मिल रही हैं। उसे देखते हुए जल्द बड़ा ऑपरेशन चलाने की जरूरत है। जम्मू-कश्मीर में जैश का ‘इजरायल ग्रुप‘ एक्टिवजम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में हाल ही में मारे गए आतंकी सैफुल्लाह के वीडियो सामने आए हैं। ये आतंकी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा था। इसने 'इजरायल ग्रुप' नाम से एक ग्रुप बनाया था। इसे लेकर जम्मू जोन के IG भीम सेन तुती ने बताया कि पिछले डेढ़ साल में इजरायल ग्रुप के 7 आतंकियों को मार गिराया गया है। ये सभी 7 आतंकी अप्रैल 2024 में घुसपैठ कर जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे। इसके बाद सेना से इनका 17 अलग-अलग मौकों पर एनकाउंटर हुआ लेकिन पिछले 18 महीनों में सभी सात आतंकियों को मार गिराया गया। ये हार्डकोर आतंकी ग्रुप था। इसका मकसद सेना और आम लोगों को टारगेट करना था। …………………..ये खबर भी पढ़ें… घाटी में कौन बना रहा कश्मीरी पंडितों की ‘डेथ लिस्ट’ कश्मीर में पहलगाम के पास मट्टन में कश्मीरी पंडितों की बस्ती है। आबादी करीब 300 की है। यहां की गलियों में दिन के 4 बजते ही सन्नाटा पसर जाता है। मट्टन में रहने वाले रमेश कौल (बदला हुआ नाम) अब अनजान नंबरों से आने वाले फोन नहीं उठाते। वजह पूछने पर बताते हैं, ‘कश्मीरी पंडितों को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। पढ़िए पूरी खबर…
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नेपाल चुनाव 2026 : मेयर से प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे रैपर बालेन शाह
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भारतीय अंदाज़ में नेतन्याहू, डिनर पर मोदी को दिया सरप्राइज़
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर इजरायल में हैं। इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू ने पीएम मोदी का स्वागत किया। वहीं, नेतन्याहू ने पीएम मोदी के लिए रात्रि भोज भी होस्ट किया
ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता का तीसरा दौर: जेनेवा रवाना विदेश मंत्री अराघची
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची बुधवार को अमेरिका के साथ होने वाली नई दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता में हिस्सा लेने के लिए एक राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख के रूप में जेनेवा के लिए रवाना हुए
वसंत महोत्सव के बाद काम पर फोकस: ली छ्यांग की बड़ी बैठक
चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने 24 फरवरी को राज्य परिषद की स्थायी बैठक बुलाकर वसंत त्योहार के बाद सरकारी कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने का इंतजाम किया
‘पापा ने मेरी शादी के लिए दो एकड़ जमीन बेच दी थी। उस समय मैं 20 साल की थी। जून का महीना था जब मेरी शादी हुई और मैं ससुराल आई। सुहागरात के अगले दिन सुबह-सुबह मेरे जेठ और ननदोई मेरे कमरे में आए। उन्होंने पूछा- तुम्हारी पहली रात कैसी रही? कोई परेशानी तो नहीं हुई? सुनते ही मेरी नजर शर्म से झुक गई। मन ही मन सोचने लगी कि कोई इस तरह की निजी बातें कैसे पूछ सकता है! बाद में मुझे पता चला कि मेरे पति को शारीरिक संबंध बनाने से जुड़ी पहले कुछ समस्याएं थीं। मेरे दो बच्चे हैं। मेरे बेटे की उम्र 16 साल है और बेटी की 10 साल। दोनों बच्चे दो अलग-अलग मर्दों से हैं और अब बिना पिता के बड़े हो रहे हैं। इनके लिए अब मैं ही मां-बाप हूं।’, सुनीता आर्या स्याह कहानियों की सीरीज ब्लैकबोर्ड में सुनीता आर्या की कहानी, जिन्हें घूंघट न करने पर जेठ ने निर्वस्त्र करके पीटा। गर्भवती होने के 3 महीने बाद पति ने छोड़ दिया। उसके बाद प्रेमी ने गर्भवती किया और बच्चा स्वीकार नहीं किया। सुनीता आर्या अभी मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के गैरतगंज में रहती हैं। सरकारी जमीन पर बने एक छोटे से घर में उनका गुजारा हो रहा है। मां और दोनों बच्चे भी साथ रहते हैं। जब मैं उनसे बातचीत करने पहुंचा, तो उन्होंने आसपास नजर घुमाई और धीमे से कहा, ‘बच्चों को कमरे में भेज देती हूं। हम बगल के नए घर के बरामदे में बैठकर बात करते हैं। उनके सामने ये सारी बातें करना ठीक नहीं होगा।’ उन्होंने हल्के से इशारा किया, तो बच्चे चुपचाप कमरे के भीतर चले गए। मैं उस बरामदे में उनके साथ आकर बैठा। सुनीता ने गहरी सांस ली, जैसे बीते वर्षों की परतें फिर से खोलने की तैयारी कर रही हों। वह बताती हैं, ‘2007 की बात है। अपने पापा के साथ मध्य प्रदेश के इंदौर में रह रही थी। मां-बाप की इकलौती संतान। एक रिश्तेदार घर आते, तो अक्सर कहते- बेटी जवान हो गई है। अब शादी कर दो। बाद में ढंग का लड़का नहीं मिलेगा। अपनी बिरादरी में तो 13-14 साल की उम्र में ही शादी हो जाती है।’ जवाब में पापा ने कहा, ‘अगर कोई अच्छा लड़का मिले तो बताइए।’ उन्होंने मेरे मामा से भी इस बारे में बात की। कुछ दिनों बाद मामा रायसेन से एक रिश्ता लेकर आए। उन्होंने लड़के और उसके परिवार के बारे में काफी तारीफ की- कहा कि लोग ठीक हैं, खानदान अच्छा है। फिर हमारे परिवार का आपस में मिलने-जुलने का सिलसिला चला। देखते ही देखते बात आगे बढ़ी और रिश्ता पक्का हो गया। शादी हुई और मैं ससुराल आ गई। शुरू-शुरू में सब सामान्य लग रहा था। नए माहौल को समझने और उसमें खुद को ढालने की कोशिश कर रही थी। इसी बीच जब पहली बार गर्भवती हुई, तो मन में एक अजीब-सी खुशी थी। लगा कि शायद अब जिंदगी में कुछ ठहराव आएगा। लेकिन जब मैंने यह बात अपने पति को बताई, तो उनका चेहरा उतर गया। उन्होंने मुझे समझाना शुरू किया- अभी मैं बच्चा पैदा करने के लिए तैयार नहीं हूं, हमारी हालत भी ठीक नहीं है। अगली बार कर लेंगे। इस बार बच्चा गिरवा देते हैं। वह बार-बार यही कहते रहे। मैं दुविधा में थी। एक तरफ मेरे मन में मां बनने की चाह थी, दूसरी तरफ पति की बात और उनका दबाव। आखिरकार, उनके जोर देने पर मैंने गर्भपात करवा लिया। इसी बीच घर के भीतर एक और अजीब स्थिति बन रही थी। जो जेठ मुझे हर वक्त घर में पर्दा करने की नसीहत देते थे, उन्हीं की नजरें मुझ पर ठीक नहीं थीं। वह अक्सर डॉक्यूमेंट बनवाने के बहाने मुझे शहर लेकर जाते। गांव की बस की सीढ़ियां ऊंची होती थीं, तो वह मेरी कमर में हाथ डालकर चढ़ाने का बहाना करते और फिर सीट पर सटकर बैठ जाते। शुरू में मुझे लगता था कि वह मेरा ख्याल रख रहे हैं, लेकिन धीरे-धीरे उनकी हरकतें साफ होने लगीं। एक-दो बार उन्होंने मुझे गलत तरीके से छूने की कोशिश की, यहां तक कि मेरी छाती पर भी हाथ लगा दिया। इन घटनाओं से मैं अंदर ही अंदर परेशान होने लगी थी, लेकिन जो आगे हुआ, उसने मुझे पूरी तरह झकझोर दिया। हमारा शहर में भी एक घर था। एक दिन मैं वहां आराम कर रही थी। दरवाजा भीतर से बंद कर रखा था। गर्मी का मौसम था, इसलिए हल्के कपड़ों में लेटी हुई थी। मेरे जेठ टीचर थे। उस दिन वह घर आए। मुझे सोता हुआ समझकर दरवाजे के ऊपर बनी खिड़की से झांकने लगे। अचानक मेरी नींद खुली, तो देखा- वह दरवाजे पर चढ़े हुए थे। जैसे ही उनकी नजर मुझसे मिली, वह तुरंत नीचे उतर गए, मानो कुछ हुआ ही न हो। उस दिन बहुत डर गई थी, लेकिन सोचती रही कि शायद यह एक बार की बात हो। पर ऐसा नहीं था। इसी तरह एक बार मैं वॉशरूम में नहाने गई थी। मेरे कपड़े कमरे में बेड पर रखे थे। जब वॉशरूम से टॉवल लपेटे बाहर आई, तो देखा- जेठ सामने कमरे में बैठे हैं। मैं घबरा गई। चीखते हुए बोली- आप मेरे कमरे में अचानक कैसे आ गए? वह इधर-उधर देखने लगे और बहाना बनाने लगे कि किसी काम से आए थे। उस समय तो मैंने किसी तरह खुद को संभाला, लेकिन अंदर से टूटती जा रही थी। बाद में हिम्मत करके यह बात अपनी सास और पति को बताई। मुझे उम्मीद थी कि वे मेरा साथ देंगे, लेकिन उल्टा मुझे ही समझाने लगे। कहा- वह ऐसा नहीं कर सकते, तुम गलत समझ रही हो। घर में थोड़ा-बहुत ऊंच-नीच हो जाए तो औरत को बर्दाश्त करना चाहिए। यह सुनकर मुझे पहली बार महसूस हुआ कि इस घर में मेरी बात सुनने वाला कोई नहीं है। मैं उनकी इस तरह की हरकतों से लगातार परेशान थी। हर दिन मुझे यही चिंता सताती रहती थी कि पता नहीं कब, किस बहाने वह फिर से मेरे सामने आ खड़े होंगे। आखिरकार हिम्मत जुटाई और अपनी जेठानी को सारी बातें बताईं। उन्हें बताया कि किस तरह वह मुझे शहर ले जाने के बहाने छूने की कोशिश करते हैं और कमरे में बिना बताए आ जाते हैं। जेठानी ने बात को हल्के में नहीं लिया। उन्होंने जेठ से साफ-साफ पूछा- तुम देवरानी को बार-बार शहर क्यों लेकर जाते हो? उसका पति क्यों नहीं जाता? तुम्हें उससे थोड़ी दूरी बनाकर रहना चाहिए। उस समय मुझे लगा कि शायद अब कुछ बदलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जेठ ने अपनी आदतें नहीं बदलीं। ऊपर से सामान्य व्यवहार करते, लेकिन उनकी नजरें अब भी वैसी ही थीं- टकटकी लगाए, मौका तलाशती हुईं। एक दिन मैं रसोई में खाना बना रही थी। काम करते-करते अनजाने में सिर पर रखा पल्लू थोड़ा नीचे सरक गया। मुझे इसका ध्यान भी नहीं रहा। तभी अचानक जेठ की तेज आवाज सुनाई दी। मेरा खुला सिर देखते ही वह चीखने लगे। गाली देते हुए बोले- ऐसी ही औरत परिवार की इज्जत मिट्टी में मिलाती है। बेशर्म की तरह खुला सिर लेकर पूरे आंगन में घूमती रहती है। उनकी आवाज इतनी ऊंची थी कि घर के बाकी लोग भी पहुंच गए। मैं घबराकर तुरंत पल्लू ठीक करने लगी, लेकिन तब तक वह बात बढ़ा चुके थे। उनकी आवाज इतनी ऊंची थी कि माहौल तनाव से भर गया। समझ ही नहीं पा रही थी कि इतनी सी बात पर इतना गुस्सा क्यों हो रहे हैं। बार-बार पल्लू ठीक करते हुए कह रही थी कि गलती से सरक गया, मेरा कोई गलत इरादा नहीं था। लेकिन जैसे वह सुनने की हालत में ही नहीं थे। यह कहते हुए वह गुस्से में मेरी तरफ बढ़े और अचानक मेरे बाल पकड़कर जोर से खींचने लगे। मैं दर्द से चीख उठी। चीख सुनकर मेरे पति भी आ गए। उन्होंने मुझे बचाने के बजाय अपने भाई का ही साथ दिया। उन्होंने भी मेरा हाथ कसकर पकड़ लिया। दोनों मिलकर मुझे घसीटते हुए कमरे से आंगन की ओर ले जाने लगे। इस खींचतान में मेरी साड़ी ढीली होकर खुलने लगी। खुद को संभालने की कोशिश करती रही, लेकिन उस वक्त कोई मेरी बात सुनने वाला नहीं था। उस वक्त ऐसा लगा कि दुर्योधन द्रौपदी का चीरहरण कर रहा हो। शोर सुनकर आस-पास के घरों के लोग आंगन में जुट गए। लेकिन किसी ने एक शब्द बोलना जरूरी नहीं समझा। साड़ी उतरने से मैं सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में रह गई थी। जेठ और मेरे पति ने मेरे बाल पकड़ लिए और बेल्ट व डंडे से मारना शुरू कर दिया। आंगन में एक बड़ा पत्थर रखा था। उसी पर पटक दिया। तेज चोट लगी और मैं दर्द से कराह उठी। उस वक्त 3 महीने की गर्भवती थी। हाथ-पैर पटकते हुए रहम की भीख मांग रही थी, लेकिन दोनों का कलेजा नहीं पसीजा। उस वक्त लगा कि काश! इस तरह भीड़ के सामने निर्वस्त्र बेइज्जती होने से अच्छा मार दी जाती। मेरा गला घोंट देते। धीरे-धीरे यह बात रिश्तेदारी में भी फैल गई। शायद किसी पड़ोसी ने मेरे मामा के बेटे को सब कुछ बता दिया। जब उसे सच्चाई पता चली, तो वह बिना देर किए आया। उसने मेरी हालत देखी और उसी समय फैसला किया कि अब मुझे वहां नहीं छोड़ सकता। वह मुझे अपने साथ मायके ले आया। उस समय मैं गर्भवती थी और बेहद कमजोर भी। मायके पहुंचकर थोड़ा सुकून मिला। वहां 6 महीने बाद मैंने एक बेटे को जन्म दिया। हॉस्पिटल का पूरा खर्च मेरे मां-बाप ने उठाया। मेरे रिश्तेदार वगैरह देखने आए, लेकिन मेरा पति न तो अस्पताल आया, न कभी बच्चे को देखने। कोई खर्च भी नहीं भेजा। उस दिन मुझे साफ समझ आ गया कि अब यह जिम्मेदारी सिर्फ मेरी है। उसके बाद मैंने बच्चे को अकेले पाला। फिर ये बेटी कैसे हुई? ‘हां, आगे वही बताने वाली हूं। 2011 की बात है। तब तक मैं अपने बेटे के साथ मायके में ही रह रही थी। पापा को एक जमीन बेचनी थी। गैरतगंज में मनीष जैन नाम का एक व्यक्ति था, जो जमीन की खरीद-फरोख्त करता था। जब उसे पता चला कि पापा जमीन बेचना चाहते हैं, तो वह मेरे घर आया। इसी दौरान मेरी उससे पहली मुलाकात हुई। जमीन के सिलसिले में उसका घर आना-जाना बढ़ने लगा। धीरे-धीरे उससे बातचीत होने लगी और वह मुझे अच्छा लगने लगा। मेरा बेटा भी उसे अपनापन देने लगा। उसे ‘पापा’ कहकर बुलाता। ‘पापा’ शब्द सुनकर उसके चेहरे पर एक अलग ही खुशी दिखाई देती थी। हालांकि, वह शादीशुदा था, फिर भी उसका हमारे घर आना-जाना लगातार बना रहा।’ वह इस तरह मेरे मायके आने लगा। कई बार रात-रातभर रुकता था। धीरे-धीरे वह मेरे साथ सोने लगा। एक दिन मैंने उससे साफ पूछा- क्या तुम अपनी पत्नी से झूठ बोलकर मेरे पास आते हो? उसने कहा- नहीं, पत्नी को तुम्हारे बारे में सब पता है। उसे कोई परेशानी नहीं है। उसकी बात पर मुझे भरोसा नहीं हुआ। मैंने उसकी पत्नी को फोन किया और कहा- आपके पति मेरे साथ रहते हैं, क्या आपको एतराज नहीं? उन्होंने जवाब दिया- मुझे मालूम है कि वे आपके पास जाते हैं। आप उनकी दोस्त हैं। यह सब सुनने के बाद मेरे मन का संकोच कुछ कम हुआ। धीरे-धीरे वह भी मुझे अच्छा लगने लगा। इतने संघर्षों के बाद मुझे एक सहारे की जरूरत महसूस होती थी। जब भी वह मुझसे मिलने आता, हम एक-दूसरे के करीब आ जाते और हमारे बीच शारीरिक संबंध बनने लगे। हमारे बीच नजदीकियां बढ़ती गईं और मुलाकातों का सिलसिला चलता रहा। इसी दौरान, 2013 में, मैं उससे गर्भवती हो गई। जब उसे इस बात का पता चला, तो वह घबराया हुआ मेरे पास आया। उसके चेहरे पर बेचैनी थी। उसने कहा- अभी मैं इसके लिए तैयार नहीं हूं। तुम इस बच्चे को गिरा दो। बाद में बच्चा कर लेंगे। अभी अबॉर्शन करवा लो। उसकी बात सुनकर मैं एक बार फिर दुविधा में पड़ गई। मुझे लगा वाकई में कोई परेशान होगी, लेकिन उसके शब्दों ने मुझे अंदर तक हिला दिया। आप उस शादीशुदा आदमी से शादी करना चाहती थीं? ‘नहीं, मैं उससे शादी नहीं करना चाहती थी। लेकिन चाहती थी कि वह इस बच्चे को दुनिया में आने दे। फिर भी, उसकी बातों में आकर आखिरकार गर्भपात करवा लिया। 2 साल बाद फिर से उससे गर्भवती हुई। इस बार जब उसे पता चला, तो उसका रवैया पूरी तरह बदल गया। कहने लगा- यह बच्चा मेरा नहीं है, किसी और का होगा। तुम मेरे पीछे किस-किस से मिलती हो, मुझे क्या पता? मैं तो महीने में एक-दो बार ही तुमसे मिलने आता हूं। तुम्हारे पेट में पल रहा बच्चा मेरा नहीं है। उसकी यह बात सुनकर मुझे गहरा धक्का लगा। जिस रिश्ते को मैं भरोसे के साथ निभा रही थी, उसी पर उसने सवाल खड़े कर दिए। मैं हैरान थी और भीतर से बहुत गुस्से में भी थी। उसकी बातें सुनते ही गहरे तनाव में चली गई। बार-बार यही सोच रही थी कि 4 साल से वह मेरे साथ संबंध बना रहा था। दो बार उससे गर्भवती हुई। पहली बार उसके कहने पर मैंने गर्भपात करवा लिया, और अब वह कह रहा है कि यह बच्चा किसी और का है। उस पल मुझे लगा जैसे मेरे विश्वास की कोई कीमत ही नहीं थी। सोच रही थी कि उसे सिर्फ मेरे शरीर से मतलब था, मेरी भावनाओं से नहीं। यह कहते-कहते सुनीता अपने दोनों हाथों से चेहरा ढक लेती हैं। 15 साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन उन दिनों को याद करते हुए आज भी उनकी आवाज कांपने लगती है। वह कहती हैं, ‘जब भी उन बातों को याद करती हूं तो अंदर तक सिहर जाती हूं।’ वह आगे बताती हैं कि उसके आरोपों और इनकार के बाद मैंने ठान लिया कि अब पीछे नहीं हटूंगी। अपने पेट में पल रहे बच्चे को दुनिया में लाऊंगी। उससे मैंने साफ कहा- इस बच्चे को जन्म दूंगी और अदालत में साबित करूंगी कि यह तुम्हारा है। तब तक पहले पति से मेरा तलाक हो चुका था, इसलिए मुझे किसी और बंधन का डर नहीं था। आखिरकार मैंने एक बेटी को जन्म दिया। बेटी के जन्म के बाद उसका डीएनए टेस्ट करवाया। रिपोर्ट लेकर अदालत पहुंची। जांच हुई और साबित हो गया कि बच्ची उसी की है। 2015 में अदालत का फैसला मेरे पक्ष में आया। साबित हुआ कि बच्ची मनीष जैन की है। लेकिन मनीष ने अदालत का फैसला मानने से इनकार कर दिया। उसने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। 2018 में फिर से अदालत का फैसला मेरे पक्ष में आया। फैसला तो पक्ष मेरे पक्ष में आ गया। इतनी कानूनी लड़ाइयों और संघर्षों के बाद भी मेरी जिंदगी आसान नहीं हुई। आज भी दोनों बच्चों के साथ अकेली रहती हूं। बातचीत के दौरान बार-बार मेरी नजर उनके छोटे कटे बालों पर जा रही थी। मैं कुछ पूछता, उससे पहले ही वह खुद कहने लगीं- ‘2023 में पापा की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई। उनकी इकलौती संतान हूं। मैंने ही उन्हें मुखाग्नि दी। उसके बाद सिर मुंडवा लिया था। गांव वालों ने यहां तक कहा था कि मैं पागल हो गई हूं, लड़की को सिर नहीं मुंडवाना चाहिए। लेकिन नहीं मानी थी।’ यह सच्ची कहानी सुनीता आर्या की अंधेरी जिंदगी की है, लेकिन कहानी हार की नहीं है। जिन हालातों में ज्यादातर लोग टूट जाते हैं, उन हालातों में सुनीता आर्या अकेले खड़ी रहीं। ------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-5 करोड़ मुआवजा शानो-शौकत में उड़ाया:3 करोड़ की जमीन खरीदी, 1 करोड़ का मकान; 80-80 लाख की शादियां- अब रोज कमाने से घर चल रहा एक सच्ची कहानी- ग्रेटर नोएडा के किसान रामेश्वर सिंह की। 12 एकड़ जमीन सरकार ने ली और बदले में उन्हें सवा 5 करोड़ रुपए दिए। पैसा खाते में आते ही जिंदगी बदल गई। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-‘एक्स्ट्रा सर्विस’ न देने पर मारी गई थी अंकिता भंडारी:मां-बाप ने खुद को घर में बंद किया; न कमा रहे, न राशन खरीद पा रहे दिल्ली से आए मीडिया के लोग दिनभर अंकिता भंडारी के माता-पिता से बात करने के लिए उनके घर के बाहर बैठे रहे, लेकिन वे घर पर ताला लगाकर चले गए थे। तब तक नहीं लौटे, जब तक मीडिया के लोग वापस नहीं चले गए। अगले दिन मैं बिना बताए उनके घर पहुंची। वह हड़बड़ा गईं, लेकिन बात करने से पहले एक शर्त रख दी- ‘मनीषा जी, आप पत्रकार बनकर नहीं, मेरी बेटी बनकर सुनेंगी, तभी बात करूंगी,’ मैंने हामी भर दी। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
दिल्ली के पॉश एरिया मालवीय नगर के खिड़की गांव में बनी पांच मंजिला एक इमारत में सन्नाटा पसरा है। इसके चौथे फ्लोर पर रहने वाली अरुणाचल प्रदेश की तीन लड़कियां तीन दिन से बाहर नहीं निकली हैं। ये वही लड़कियां हैं, जिन्हें एसी लगवाने के दौरान हुई बहस के बाद मोमो, पार्लर वाली, धंधा करने वाली कहा गया। आरोप इसी बिल्डिंग में रहने वाले हर्ष और उनकी पत्नी रूबी जैन पर है। SC-ST एक्ट में केस दर्ज होने की वजह से रूबी को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है। इस घटना का वीडियो वायरल हो गया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है, लेकिन तीनों लड़कियां अब भी डरी हुई हैं। पहचान उजागर होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर दिए हैं। डर और प्रेशर की वजह से एक लड़की को परिवारवालों ने पढ़ाई छोड़कर घर वापस आने के लिए कह दिया है। पूरा केस समझने के लिए हमने आरोपी हर्ष और रूबी के अलावा पीड़ित लड़कियों की वकील और चश्मदीद AC मैकेनिक से बात की। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से लड़कियां परेशानहमने पीड़ित लड़कियों से बात करने की कोशिश की। उन्होंने अपनी वकील लीयी मारली नोशी से बात करने के लिए कहा। लीयी बताती हैं कि तीनों लड़कियों की उम्र 20 से 23 साल है। वीडियो वायरल होने के बाद से वे परेशान हैं। उन पर बहुत ज्यादा पब्लिक और सोशल प्रेशर है। सब उनके चेहरे पहचानते हैं। परिवार भी डरे हुए हैं। उनमें से एक को तो परिवार ने वापस बुला लिया है। लड़की को अब पढ़ाई छोड़कर वापस जाना पड़ेगा। लीयी आगे बताती हैं कि लड़कियों को सोशल मीडिया पर लगातार मैसेज आ रहे थे। इसलिए उन्होंने अकाउंट डिलीट कर दिए हैं। AC वाले से बदसलूकी, इसी से शुरू हुआ विवादपीड़ित लड़कियों में एक UPSC एग्जाम की तैयारी कर रही हैं। बाकी दोनों भी स्टूडेंट हैं और खर्च निकालने के लिए फ्रीलांसिंग करती हैं। वे अपने किराए के फ्लैट में AC लगवा रही थीं। घर के अंदर कॉरिडोर में ही AC का कंप्रेसर लगाने की जगह है। इसी से विवाद की शुरुआत हुई। एडवोकेट लीयी बताती हैं, ‘आरोपियों ने AC लगाने वाले से बदसलूकी की। वे कह रहे थे कि ड्रिल करने से गिरी धूल से उनके AC को नुकसान हुआ है। लड़कियों ने कहा कि अगर आपके AC को नुकसान हुआ है, तो हम रिपेयर करवा देंगे।’ ‘राहुल गांधी ने मिलने बुलाया, लेकिन हम नहीं गए’लीयी बताती हैं कि पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश भी हुई है। अलग-अलग पार्टियों के नेताओं ने हमसे बात की है। कांग्रेस लीडर राहुल गांधी और अल्का लांबा का फोन आया था। उन्होंने मुझे और लड़कियों को मिलने बुलाया। मैेंने साफ इनकार कर दिया कि यह राजनीतिक मामला नहीं है। लीयी आरोप लगाती हैं कि आरोपियों ने समझौते का दबाव बनाया था। पहले मकान मालिक के घर माफी मांगकर समझौते की कोशिश हुई, लेकिन उनकी कम्युनिटी पर जैसी बातें बोली गई है, इसके बाद कोई समझौता नहीं होगा। AC वाला चश्मदीद, बोला- मेरी टांगे तोड़ने की धमकी दीपीड़ित लड़कियों ने खिड़की गांव से सलीम (बदला हुआ नाम) को AC फिट कराने के लिए बुलाया था। दोपहर करीब 3:30 बजे AC का कंप्रेसर लगाने के लिए सलीम ने ड्रिलिंग की। इससे कुछ मलबा नीचे के बाकी AC और कॉरिडोर में जाकर गिरा। हम AC मैकेनिक सलीम से मिले। नाम और चेहरा छिपाने की शर्त पर वे बताते हैं, ‘बिल्डिंग पुरानी है, इसलिए थोड़ा कचरा और छोटे पत्थर नीचे गिर गए। नीचे के फ्लैट में रहने वाला शख्स इससे भड़क गया और मुझे गालियां देने लगा। मैंने दो बार माफी मांगी। इस पर उसने कहा कि तेरी टांगें तोड़ दूंगा।’ सलीम आगे कहते हैं, ‘मैं जिन मैडम के यहां एसी लगा रहा था, उन्होंने भी कहा कि एसी लगवाने में थोड़ा बहुत मलबा गिरता है। अगर ज्यादा गिरा है, तो सफाई करवा देंगे। उस शख्स ने उन्हें भी गाली दीं। इसके बाद बहस बढ़ गई।’ सलीम बताते हैं कि शुरुआत में बहस नीचे ही खत्म हो गई। 20 मिनट बाद आरोपी पति-पत्नी पुलिस को बुलाकर ऊपर आ गए। पुलिस के सामने ही नॉर्थ-ईस्ट के बारे में उल्टी-सीधी बातें करने लगे। लड़कियों से बोले कि तुम लोग पार्लर चलाते हो, धंधा करती हो, तुम्हारे यहां ड्रग्स चलता है। गिरफ्तारी से पहले रूबी बोलीं- अपने शब्दों के लिए माफी मांगती हूंआरोपी हर्ष पत्नी रूबी के साथ बिल्डिंग के पहले फ्लोर पर किराए के फ्लैट में रहते हैं। बिल्डिंग में हर फ्लोर पर 4 फ्लैट हैं। इसी बिल्डिंग के चौथे फ्लोर पर पीड़ित लड़कियां भी किराए पर रहती हैं। दोनों के फ्लैट मालिक एक ही हैं। 25 फरवरी को रूबी को अरेस्ट कर लिया गया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि रूबी के खिलाफ SC-ST एक्ट में कार्रवाई की गई है। 24 फरवरी की शाम करीब 6 बजे हम रूबी और हर्ष के घर पहुंचे थे। करीब 7 बजे उनके घर अनिल कुमार नाम के हेड कॉन्स्टेबल आए। उन्होंने रूबी और हर्ष को मालवीय नगर थाने जाकर DCP से मिलने के लिए कहा। थाने में पहले रूबी और फिर हर्ष से अलग-अलग पूछताछ की गई। रूबी गिरफ्तारी को लेकर डरी हुई थीं। हर्ष उन्हें न घबराने की सलाह देते रहे। करीब रात 8 बजे पूछताछ के बाद रूबी और हर्ष वापस घर चले गए। 25 फरवरी की सुबह मालवीय नगर पुलिस ने रूबी को घर से अरेस्ट कर लिया। गिरफ्तारी से पहले रूबी ने हमें बताया कि सोशल मीडिया पर 4 मिनट का वीडियो वायरल हुआ है। ये झगड़े के दूसरे हिस्से का है। इससे पहले चार लड़कियां मेरे फ्लोर पर आई थीं। मैं सीढ़ियों पर खड़े होकर उन्हें जवाब दे रही थी, उसी को रिकॉर्ड कर वायरल किया गया, ताकि हमारे खिलाफ राय बन जाए। वायरल वीडियो में रूबी के हाथ में डंडा दिख रहा है। इस पर वे बोलीं कि हमने पुलिस बुलाई, तब तक लड़कियां हमारे फ्लोर पर आ गई थीं। मैं टीबी की मरीज हूं, मेरे शरीर का एक हिस्सा ठीक से काम नहीं करता। इसलिए मैंने सेल्फ डिफेंस के लिए घर में रखी डॉग स्टिक हाथ में ली थी। ये किसी को मारने के लिए नहीं थी। रूबी आगे कहती हैं कि पुलिस के आने के बाद हमें ऊपर ले जाया गया। वायरल वीडियो उसी समय का है। वहां मुझे और पुलिस को धक्का दिया गया। पुलिस अधिकारी मुझ पर गिरे। उसी दौरान मेरे मुंह से भी भद्दे शब्द निकले। रूबी जैन ने नस्लीय कमेंट के लिए माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि मैं अपने शब्दों के लिए दिल से माफी मांगती हूं। ये सब मैंने तब कहा, जब मेरे लिए धंधे वाली और हिजड़ा जैसे शब्द बोले गए। उस हालत में मुझसे क्या उम्मीद की जाती। फिर भी मैं मानती हूं कि मेरे शब्द गलत थे। हर्ष बोले- नस्लीय कमेंट के लिए हम शर्मिंदाहमने वीडियो में दिख रहे रूबी के पति हर्ष से भी बात की। 35 साल के हर्ष इवेंट मैनेजर हैं। वे बीते एक साल से इस फ्लैट में रह रहे हैं। हर्ष कहते हैं, ‘हमारे AC और कॉरिडोर में बड़े पत्थर गिरने पर मैं बाहर निकला था। AC के ऊपर बड़े पत्थर गिरे थे। दो बार जोर की आवाज आई। ऊपर से एक लड़का झांका। मैंने गुस्से में दिल्ली के स्लैंग में एक-दो बातें कहीं। तभी लड़की आई और बहस शुरू कर दी। दोनों तरफ से गाली-गलौज हुई।’ हर्ष आरोप लगाते हैं कि लड़कियों ने उनकी पत्नी को जातिसूचक शब्द कहे। इसके बाद हमने PCR को कॉल किया। पुलिस दोनों पक्षों की बात सुन रही थी, तभी लड़की ने वीडियो बनाया। वायरल वीडियो सिलेक्टिव है, उसमें सिर्फ उनका हिस्सा दिखाया गया है। मेरी पत्नी के साथ धक्का-मुक्की की गई। हमने उसी दिन लिखित शिकायत तैयार कर वॉट्सएप और ईमेल के जरिए एसएचओ, डीसीपी और जॉइंट सीपी को भेजी थी। गृह मंत्रालय को भी शिकायत भेजी थी। हर्ष नॉर्थ ईस्ट के लोगों पर की गई नस्लीय टिप्पणी के लिए माफी मांगते हैं। कहते हैं कि मैं और मेरी पत्नी इसके लिए शर्मिंदा हैं। सब गुस्से में हुआ, लेकिन यह गलती नहीं बल्कि गुनाह है। मैं कोर्ट में भी अपनी गलती मानूंगा। हर्ष आरोप लगाते हैं कि सोशल मीडिया पर मुझे जान से मारने की धमकी मिल रही है। पत्नी रूबी को रेप की धमकियां मिल रही हैं। हमारे नंबर सार्वजनिक कर दिए गए। हमने इसकी भी शिकायत की है। 4 मिनट के वीडियो में क्या है…वीडियो में पीड़ित लड़कियों के अलावा हर्ष, रूबी, एक पुलिसवाला और कुछ पड़ोसी दिख रहे हैं। शुरुआत में पीड़ित लड़की की आवाज आती है… पीड़ित: तुम क्या बोला, हम दारू पीता है। मेरा रूम चेक करो, अगर एक भी चीज मिला न, उसके बाद देखेंगे। रूबी: ऊंगली पीछे करके बात कर। हर्ष: चल, चल, गंदगी मसाज पार्लर। पीड़ित: मसाज पार्लर तू, बुड्ढा। रूबी: मेरा बेडरूम खाली है, आजमा ले जा। तेरे को पता चलेगा कितना बुड्ढा है। 35 साल का लड़का तेरे यहां बुड्ढा होता होगा, क्योंकि ड्रग्स इतने करते हो तुम लोग, हमारे यहां 35 साल में एक्चुअल जवान होते हैं। पीड़ित: मसाज पार्लर तू चलाती है न। रूबी: चलाती हूं, तेरे को कराना है, नौकरी चाहिए। तेरी औकात नहीं है, जहां से वो आया है। कस्टम ऑफिसर का बेटा है, पॉलिटिशियन है उसका बाप। पुलिसवाला: आप इन्हें अंदर कर दो, जो समझदार हो, वो बाहर रहो रूबी: तेरे यहां आदमी मसाज पार्लर में काम करते होंगे, हमारे यहां नहीं। एक दूसरी लड़की रूबी को समझाती है। रूबी कहती है, वो मेरे को बोली कि तेरा आदमी मसाज पार्लर में मिला होगा। हर्ष के BJP नेताओं के साथ फोटो, बोले- पार्टी से नहीं जुड़ाहर्ष के BJP नेताओं के साथ फोटो वायरल हुए हैं। झगड़े के वीडियो में भी रूबी उन्हें पॉलिटिशियन का बेटा बता रही हैं। इस पर हर्ष कहते हैं, ‘मैं सामान्य परिवार से हूं। मेरा किसी पार्टी से संबंध नहीं है। मैं इवेंट मैनेजर हूं। अलग-अलग नेताओं के साथ मेरी तस्वीरें प्रोफेशनल काम की वजह से हैं। मैंने किसी पार्टी से सीधा पेमेंट नहीं लिया, न किसी पार्टी का सदस्य हूं। मैंने BJP के लिए इवेंट मैनेज किया है। वायरल फोटो भी इसी से जुड़े हैं।' मकान मालिक बोले- नॉर्थ-ईस्ट के लोगों से कभी दिक्कत नहीं हुईइस विवाद पर हमने बिल्डिंग में रहने वाले लोगों से बात करने की कोशिश की, लेकिन वे बात नहीं करना चाहते। इसके बाद हम मालवीय नगर के प्रॉपर्टी कारोबारी विनोद चौहान से मिले। वे कहते हैं कि मेरे मकानों में नॉर्थ-ईस्ट के लोग किराए से रहते हैं। अब तक कोई दिक्कत नहीं आई। इस तरह के नस्लीय कमेंट नहीं होने चाहिए। हमारे बच्चे भी दूसरे राज्यों में पढ़ने और काम करने जाते हैं। अगर उनके साथ वहां भेदभाव हो, तो हमें भी बुरा लगेगा।
22 फरवरी 2026‘रात के करीब 8 बज रहे होंगे। मैं ओरियन मॉल से कुछ काम निपटाकर दोस्त के साथ कैंपस लौट रही थी। जैसे ही मॉल से निकली, मैंने महसूस किया कि बाइक से 3 लोग मेरा पीछा कर रहे हैं। शुरुआत में मैंने इग्नोर किया, लेकिन अचानक बाइक मेरे बगल में आ गई। वो लोग सिर्फ मेरे पीछे ही नहीं चल रहे थे, बल्कि रास्ते भर नस्लीय कमेंट और गंदी बातें बोलते रहे।’ 'उन लड़कों ने डेढ़ किलोमीटर तक मेरा पीछा किया। मैं आर्मी कैंप के पास कॉलेज के गेट नंबर 2 के पास पहुंचीं, तो उनमें से एक लड़का मेरे पास आया। उसने मुझे गलत तरीके से छुआ और अपने कपड़े उतारने लगा। मैं बहुत डर गई थी, मैंने मदद के लिए गुहार लगाई। तभी कैंपस के लोग वहां पहुंच गए। लोगों की भीड़ देखकर लड़के वहां से भाग निकले।' ये गोरखपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की एक रेजिडेंट डॉक्टर की आपबीती है, जो नगालैंड की रहने वाली हैं। घटना के अगले दिन 23 फरवरी को एम्स पुलिस स्टेशन में विक्टिम ने शिकायत दर्ज करवाई। इसके 24 घंटे के अंदर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। दैनिक भास्कर की टीम ने महिला डॉक्टर से कॉन्टैक्ट किया और गोरखपुर पुलिस से पूरा घटनाक्रम सिलसिलेवार जाना। इस घटना के अलावा हमने नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं पर देश भर में हुए नस्लवादी टिप्पणी के मामलों की भी लिस्टिंग की है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… विक्टिम के साथी डॉक्टर बोले- लड़के नीचता की हद तक गिर गएइस घटना के बाद हमने विक्टिम डॉक्टर से संपर्क करने की कोशिश की। हमें बताया गया कि वे घटना के बाद से बहुत परेशान हैं और किसी से बात नहीं करना चाहती। पीड़िता की सुरक्षा और देखभाल से लेकर उसकी कानूनी लड़ाई फिलहाल नेशनल फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया रेजिडेंट डॉक्टर्स (NAFORD) संगठन लड़ रहा हैं। हमें विक्टिम का पक्ष जानने के लिए संगठन के अध्यक्ष डॉ. देवेश दुबे का फोन नंबर दिया गया। डॉ. देवेश कहते हैं, ‘घटना के बाद विक्टिम ने हॉस्टल पहुंचकर सबसे पहले NAFORD के ग्रुप पर मैसेज किया। वो बहुत डरी हुई थी, उसने बताया कि कैसे 3 लड़कों ने उसे रास्ते में परेशान किया।‘ ‘वो लड़के नीचता की उस हद तक गिर गए कि उन्होंने डॉक्टर पर न सिर्फ गंदे कमेंट किए, बल्कि उसके शरीर के पिछले हिस्से पर हाथ मारा। फिर उनमें से एक ने विक्टिम के सामने अपनी टी-शर्ट उतार दी। उन लड़कों की ये हरकत देखकर विक्टिम डरी नहीं, बल्कि बहादुरी से उनका सामना किया।’ NAFORD के मुताबिक, पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि उस रात तीनों लड़कों ने उसका डेढ़ किलोमीटर तक पीछा किया। इस दौरान नस्लवादी कमेंट पास करते हुए उसके साथ अभद्रता की, उसे गलत तरीके से छुआ। यहां तक कि कपड़े उतारकर उसे प्राइवेट पार्ट दिखाने की कोशिश की। ये देख विक्टिम ने मदद के लिए आवाज लगाई, जिसके बाद लड़के वहां से भाग गए। विक्टिम गोरखपुर AIIMS में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में थर्ड ईयर की रेजिडेंट डॉक्टर हैं। दैनिक भास्कर को विक्टिम डॉक्टर का वो मैसेज मिला है, जिसे उसने घटना के बाद NAFORD के ग्रुप में शेयर किया था। आइए जानते हैं कि पीड़िता ने मैसेज में क्या लिखा। ‘क्या मैं तीनों लड़कों को थप्पड़ मार सकती हूं’गोरखपुर एम्स अस्पताल के डॉक्टर अमित राय NAFORD से लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने हमें विक्टिम डॉक्टर की कंडीशन के बारे में बताया, जब वे एम्स पुलिस स्टेशन में बयान दर्ज करवाने गई थीं। डॉ. अमित कहते हैं, ‘घटना के बाद विक्टिम डॉक्टर ने एम्स के सीनियर डॉक्टरों को आपबीती बताई। अगले दिन हम सभी उसे लेकर थाने गए। उसकी शिकायत, CCTV फुटेज और बयानों के आधार पर तीनों आरोपी लड़के गिरफ्तार कर लिए गए।‘ ‘22 फरवरी की रात हुई घटना ने विक्टिम को गहरा सदमा पहुंचाया। वो पुलिस स्टेशन में इतना गुस्सा गई थी कि उसने पुलिस अधिकारी से कहा कि क्या मैं तीनों लड़कों को थप्पड़ मार सकती हूं। उसकी बात सुनकर पुलिस ने भरोसा दिया कि आरोपियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।‘ घटना से आहत डॉक्टर ने कहा- ‘ये बहुत दुखद है कि 2026 में भी महिलाओं को हर दिन ऐसी घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। खासकर नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं को खुलेआम उत्पीड़न और हमले का सामना करना पड़ता है। हम सम्मान और सुरक्षा के हकदार हैं। हम बिना किसी डर के चलने की आजादी के हकदार हैं।‘ कौन हैं तीनों आरोपीगोरखपुर के SP सिटी अभिनव त्यागी के मुताबिक, 23 फरवरी को हमें महिला डॉक्टर की शिकायत मिली। विक्टिम के बयानों के आधार पर एम्स पुलिस स्टेशन में BNS की धारा 74, 296 ए, 352 और 351 C के तहत FIR दर्ज की गई है। SP अभिनव कहते हैं, ‘शिकायत दर्ज होने के बाद हमने आरोपियों को पकड़ने के लिए 4 पुलिस टीमें बनाईं। CCTV फुटेज की मदद से आरोपियों की पहचान की गई और 24 घंटे के अंदर तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान सूरज गुप्ता, आदित्य राजपूत और अमृत विश्वकर्मा के रूप में हुई है, जिनकी उम्र 21 से 24 साल के बीच है। घटना में इस्तेमाल बाइक भी बरामद कर ली गई है।’ गोरखपुर पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में पता चला है कि सूरज और अमृत पड़ोसी हैं। सूरज फलों की दुकान चलाता है, जबकि अमृत देवरिया में ही एक जनरल मर्चेंडाइज स्टोर पर काम करता है। तीसरा आरोपी आदित्य BA सेकेंड ईयर का छात्र है। मेघालय CM बोले- नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं के साथ भेदभाव भुला दिया जाता हैइस घटना पर मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, 'नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं के साथ नस्लीय भेदभाव और सेक्शुअल हैरेसमेंट को सिर्फ सुर्खियां बनाकर भूल नहीं जाना चाहिए। एम्स गोरखपुर में नगालैंड की एक रेजिडेंट डॉक्टर के साथ हुआ नस्लीय और सेक्शुअल उत्पीड़न बेहद शर्मनाक है।' 'किसी सभ्य देश में महिला के सम्मान से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। ये भी आपकी बहनें और बेटियां हैं। मैं अधिकारियों से अपील करता हूं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।' ये छेड़छाड़ नहीं, नस्लीय और यौन उत्पीड़न का मामला: NAFORDइस मामले पर NAFORD सहित कई मेडिकल संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संगठनों ने इस घटना के बाद महिला डॉक्टरों और मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है। संगठन ने इस घटना को गंभीर नस्लीय और यौन उत्पीड़न का मामला बताया है। पोस्ट में कहा गया कि नॉर्थ ईस्ट से होने के कारण डॉक्टर को रूढ़िवादी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा, जिससे उन्हें गहरा सदमा और अपमान महसूस हुआ है। घटना में पुलिस के तुरंत एक्शन लेने और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी पर NAFORD के अध्यक्ष डॉ. देवेश दुबे कहते हैं, ‘विक्टिम डॉक्टर का मैसेज मिलते ही हमारे संगठन ने इसकी सूचना गोरखपुर पुलिस को दी। इसके कुछ घंटों में ही 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। तीसरा आरोपी भी 24 घंटे के अंदर पकड़ा गया। इस मामले पर सख्त एक्शन लेने के लिए हम CM योगी आदित्यनाथ और गोरखपुर पुलिस को धन्यवाद देते हैं।‘ दिल्ली में 'मोमो बेचने वाली' और 'मसाज पार्लर वाली' बोला गयागोरखपुर एम्स की डॉक्टर से जुड़ी घटना के एक दिन पहले दिल्ली के मालवीय नगर में भी नॉर्थ ईस्ट की 3 महिलाओं पर नस्लवादी टिप्पणी किए जाने का मामला सामने आया था। इसमें उन्हें 'मोमो बेचने वाली' और '500 में मसाज पार्लर में धंधा करने वाली' जैसे कमेंट किए गए। इस केस में भी FIR दर्ज हुई है। मामला मालवीय नगर का है, जहां अरुणाचल प्रदेश की 3 महिलाएं चौथी मंजिल पर एक फ्लैट में रह रही थी। इनमें से एक UPSC की तैयारी कर रही थी। उन्होंने अपने फ्लैट में एयर कंडीशनर लगवाने के लिए मैकेनिक बुलाया था। ड्रिलिंग के दौरान धूल और मलबा नीचे की मंजिल पर गिर गया, जिससे नीचे रहने वाले पड़ोसी हर्ष सिंह और उनकी पत्नी रूबी जैन नाराज हो गए। शुरुआत में ये विवाद फ्लैट पर मलबे को लेकर शुरू हुआ, लेकिन बाद में विवाद बढ़ते-बढ़ते नस्लीय और आपत्तिजनक हो गया। घटना के बाद बिल्डिंग के ब्रोकर ने महिलाओं से कहा कि उन्हें 2 महीने में फ्लैट खाली करना होगा। इससे पीड़ित महिलाओं में उनकी सुरक्षा लेकर डर बढ़ गया। मेघालय के CM कोनराड के संगमा ने इस घटना की भी निंदा की थी। उन्होंने X पर इस घटना को लेकर लिखा कि नॉर्थ-ईस्ट के लोगों के साथ भेदभाव बंद होना चाहिए। ……………….ये खबर भी पढ़ें… जैश की महिला जिहादी ब्रिगेड, भारत के लिए नया खतरा जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर ने 8 अक्टूबर 2025 को पहली बार आतंकियों की महिला विंग जमात-उल-मोमिनात का ऐलान किया था। इसके ठीक 31 दिन बाद 10 नवंबर, 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में ब्लास्ट हुआ। 15 लोग मारे गए। NIA ने ब्लास्ट को जैश-ए-मोहम्मद के 'वॉइट कॉलर टेरर मॉड्यूल' का हिस्सा बताया। पढ़िए पूरी खबर…
रूस का सनसनीखेज दावा, ब्रिटेन-फ्रांस यूक्रेन को परमाणु हथियार देने की योजना बना रहे
रूसी विदेश खुफिया सेवा (एसवीआर) ने अपने बयान में कहा कि पश्चिमी शक्तियां युद्ध में यूक्रेन की सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए संवेदनशील हथियारों की आपूर्ति पर विचार कर रही हैं। हालांकि इस दावे के समर्थन में रूस ने कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया है।
रूसी युद्ध के खिलाफ यूक्रेनी हौसला पांचवें साल में भी बरकरार
रूसी हमलों ने यूक्रेनियों के लिए पहले से ही सख्त सर्दियों को और भी मुश्किल बना दिया है. फिर भी, चार साल की जंग के बावजूद ज्यादातर यूक्रेनी लड़ाई जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं
अमेरिकी सांसदों की चेतावनी – चीन की पकड़ से डिफेंस इंडस्ट्री को खतरा
अमेरिका की ओर से 'महत्वपूर्ण खनिजों और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन्स' की ओर बढ़ते कदमों को लेकर सवाल उठ रहे हैं
सूफी बांग्लादेश की रहने वाली हैं। उम्र करीब 25 साल। मार्च 2024 की एक रात पहली बार भारत में कदम रखा था। एक दोस्त भी साथ थी। दोनों बेहतर जिंदगी के लिए छिपते-छिपाते भारत आई थीं। दलाल ने उन्हें 34 हजार में बेच दिया, 18 महीने जेल में कटे। बीते 4 महीने से सूफी का नया पता असम के गोलपाड़ा में बना मटिया डिटेंशन सेंटर है। हिमंता सरकार इसे ट्रांजिट कैंप कहती है। सूफी के साथ मुख्तार, फूल मियां, मानिकजन बेगम भी हैं, जो अपराधी नहीं हैं, लेकिन आजाद भी नहीं हैं। असम में मार्च-अप्रैल में चुनाव हैं। बांग्लादेशी घुसपैठिए मुद्दा हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा दावा कर चुके हैं कि असम की मुस्लिम आबादी में 36% बांग्लादेशी हैं। 20 फरवरी को गृह मंत्री अमित शाह असम में थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राज में, जो भी अवैध रूप से देश में घुसा है, उसे वापस भेजा जाएगा। ऊंची-ऊंची दीवारों और लोहे के भारी-भरकम गेट वाला डिटेंशन सेंटर असम की राजधानी गुवाहाटी से करीब 120 किमी दूर है। इसमें कैद 133 विदेशी ‘घुसपैठियों’ में सिर्फ 11 बांग्लादेशी हैं। दैनिक भास्कर पहला मीडिया हाउस है, जो इस डिटेंशन सेंटर के अंदर पहुंचा। कैसा है भारत का सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटरकरीब 20 बीघा जमीन में बना ये सेंटर ऊंची दीवारों से घिरा है। लोहे के बड़े गेट से एंट्री होती है। अंदर घुसते ही पहले खाली मैदान है। थोड़ा आगे चलने पर एक और बड़ा गेट है। इससे अंदर घुसते ही अफसरों के ऑफिस हैं। फिर एक मैदान है, जिसमें फुटबॉल खेलने की जगह और सब्जियां उगाने के लिए क्यारियां बनी हैं। यहीं चार-चार मंजिला करीब 15 बिल्डिंग हैं। इनमें से सिर्फ 5 इस्तेमाल में हैं। दो बिल्डिंग महिलाओं के लिए और तीन पुरुषों के लिए। यहां 3 हजार लोग रह सकते हैं। कैंपस में स्कूल, हॉस्पिटल, किचन, टॉयलेट और रहने के अलग-अलग ब्लॉक हैं। यह जगह किसी जेल जैसी नहीं, बल्कि स्कूल या हॉस्टल जैसी दिखती है। यहां मैं कुछ किरदारों से मिली। ज्यादातर पैसे देकर बॉर्डर पार आए, पकड़े गए और कभी अपने देश लौट नहीं पाए। पहचान उजागर न हो, इसलिए इन किरदारों के नाम बदले गए हैं। पहली कहानी सूफी की डिटेंशन सेंटर के अंदर कदम रखते ही लगता है, जैसे यहां वक्त थोड़ा धीमा चलता है। न ज्यादा शोर, न पूरी खामोशी। यहां एक कमरे में महिलाएं सिलाई कर रही थीं। एक तरफ सिलाई सिखाने वाली मास्टर खड़ी थीं। पास ही एक महिला पुलिसकर्मी निगरानी कर रही थीं। कमरे में सूट पहने छोटे बालों वाली एक दुबली लड़की पर नजर पड़ी। बहुत शांत और आंखों में गहरी उदासी। यही थी सूफी। कुछ देर की चुप्पी के बाद सूफी ने बोलना शुरू किया। उसकी आवाज में निराशा और बेबाकी दोनों थी। सूफी बताती है, ‘मैं बांग्लादेश की रहने वाली हूं। मार्च, 2024 में पहली बार भारत आई थी। मैं अकेली नहीं थी। मेरी दोस्त रिफत भी साथ थी। अनजान देश में हम दोनों एक-दूसरे के हमदर्द बन गए।’ ‘एक दलाल हमारी मदद कर रहा था। हमें बस से बॉर्डर के पास लाया गया। वहां से सामान ढोने वाली गाड़ियों में छिपाकर बॉर्डर तक पहुंचाया। ऊंचे कंटीले तार पार करना आसान नहीं था। दूसरी तरफ भारतीय दलाल मौजूद था। सुरक्षाबलों की निगरानी के बावजूद फेंसिंग के बीच लकड़ी का पटरा फंसाकर मुझे और रिफत को भारत में दाखिल करा दिया गया।’ ‘मेरे पास स्मार्टफोन था। उसी पर दलाल हमें रास्ते के बारे में बताता रहा। उसकी मदद से हम गुवाहाटी पहुंच गए। उसने फोन पर दिल्ली की ट्रेन के दो टिकट भेज दिए। गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पर हमें बंगाली बोल रहा एक शख्स दिखा। उसका नाम रफीक इस्लाम था। रफीक ने सीट ढूंढने में हमारी मदद की। अनजान देश में मदद करने वाला रफीक हमें भरोसेमंद लगा। हमने उसे बता दिया कि हम बांग्लादेश से आए हैं। रफीक ने कहा कि कभी जरूरत पड़े, तो मुझे फोन कर लेना।’ ‘दो दिन के सफर के बाद हम दिल्ली पहुंच गए। स्टेशन पर एक औरत हमें लेने आई। उसका नाम सुमैया था। वो हमें अपने घर ले गई। एक हफ्ते तक सुमैया हमें ब्यूटी पार्लर ले जाती रही। बाल स्ट्रेट करवाए, आइब्रो बनवाई और मॉल से नए कपड़े दिलवाए। सब बहुत अच्छा लग रहा था। एक दिन सुमैया हमें होटल ले गई।’ यहां सूफी की आवाज टूटने लगी। कुछ पल चुप रही, फिर फूट-फूटकर रोने लगी। बोली- ‘होटल में सब नंगे थे। गलत काम कर रहे थे। सुमैया चाहती थी कि हम भी वही काम करें। हमने इनकार कर दिया। फिर वो हमें घर ले आई। हमें पता चला कि जो दलाल हमारी मदद कर रहा था, उसने मेरा और रिफत का सौदा कर दिया। हमारे बदले में उसे 34 हजार रुपए मिले।’ ‘उस रात खाना खाने के बाद सुमैया और उसका पति सो गए। आधी रात को मैं और रिफत घर से भाग निकले। हमने रेलवे स्टेशन पर मिले रफीक को फोन किया और उसके कहने पर गुवाहाटी आ गए। यहां रफीक हमें बस से कहीं ले जा रहा था। रास्ते में बाइक से आए दो लोग बस के सामने खड़े हो गए। दोनों अंदर आए और 30 हजार रुपए मांगने लगे। इसी दौरान पुलिस आ गई और बाइकवालों को गिरफ्तार कर लिया।’ ‘पुलिसवालों ने मुझसे पूछा- तुम कहां की रहने वाली हो? मैंने जवाब दिया- बांग्लादेश। इसके बाद मेरी जिंदगी अदालतों और जेल के बीच उलझ गई। कोर्ट में केस चला। जज ने 18 महीने की सजा सुनाई। उन्होंने कहा था कि सजा काटने के बाद हम घर जा सकते है। सजा पूरी हुई, तो 28 अक्टूबर 2025 को हमें डिटेंशन सेंटर भेज दिया।’ इतना कहकर सूफी चुप हो गई। उसकी उंगलियां दोबारा सिलाई मशीन पर चलने लगीं, लेकिन आंखों से आंसू नहीं थमे। सूफी की शादी सिर्फ 15 साल की उम्र में हो गई थी। पति सलमान की उम्र 18 साल थी। दोनों ने लव मैरिज की थी। शादी के बाद ससुराल में मारपीट शुरू हो गई। एक दिन सूफी घर छोड़कर भाग निकली। पीछे एक साल का बच्चा छूट गया। यही दर्द आज भी उसे सबसे ज्यादा सताता है। सूफी आगे कहती है, ‘मैं घर जाना चाहती हूं। यहां अच्छा नहीं लगता। बच्चे की बहुत याद आती है। यहां अच्छा खाना नहीं मिलता। जेल में ज्यादा अच्छा था। वहां तो हमें क्लिप, काजल, समोसा, बिस्किट सब मिलता था। महिला सिपाही ही लाकर देती थीं।’ सूफी ये बातें बोल रही थी, तब डिटेंशन सेंटर के अफसर भी मौजूद थे। मतलब साफ था, यहां रहने वाले लोगों पर कोई जोर-जबरदस्ती नहीं होती। वे अपनी बात कह सकते हैं। सूफी के घर लौटने के सवाल पर एक अधिकारी ने बताया कि बांग्लादेश के असिस्टेंट हाई कमिश्नर जनवरी में आने वाले थे। वहां हालात ठीक नहीं होने की वजह से उनका आना कैंसिल हो गया। अब तक नहीं आए, इसलिए बात नहीं बनी। दूसरी कहानी लाल सेर पार और इयांग की डिटेंशन सेंटर में महिलाओं के लिए एक NGO ‘डेवलपमेंट एंड जस्टिस’ काम करता है। NGO के लोग महिलाओं को सिलाई-बुनाई सिखाते हैं। उनके बनाए कपड़े बेचते भी हैं। सूफी के अलावा और भी लड़कियों ने हमें अपने बनाए कपड़े दिखाए। इनमें दो बहनें थीं, इयांग और लाल सेर पार। दोनों बताती हैं, ‘हम म्यांमार से भारत आए थे। साथ में 30 और लोगों ने बॉर्डर पार किया था। हमारे देश में लंबे वक्त से गृह युद्ध चल रहा है।’ म्यांमार से आए लोगों में चार साल का एक बच्चा भी है। वह पेरेंट्स के साथ भारत आया था। ये लोग अपने देश लौटना भी नहीं चाहते, क्योंकि वहां हालात ठीक नहीं है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) इन्हें ऑस्ट्रेलिया भेजना चाहता है। प्रोसेस पूरी होने तक सभी इसी सेंटर में रहेंगे। तीसरी कहानी मुख्तार कीअब शाम के करीब 6 बज रहे थे। सिलाई की क्लास खत्म हो चुकी थी। खाने का वक्त होने वाला था। अब हमें सेंटर के बाकी लोगों से मिलना था। उनसे मिलने के लिए आगे एक दरवाजे से अंदर जाना था। दरवाजे के बायीं ओर एक बोर्ड पर लिखा था- ‘अंदर रहने वालों की संख्या कुल 133 है।’ इन लोगों में अलग-अलग देशों के और कुछ असम के डी-वोटर्स भी शामिल हैं। डी-वोटर्स, यानी डाउटफुल वोटर्स, वे लोग हैं जिनकी नागरिकता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यहां से आगे कैमरा ले जाना मना है। कैमरा बाहर रखकर हम अंदर दाखिल हुए। सामने ग्राउंड दिखा। कुछ लोग फुटबॉल खेल रहे थे। यहीं तीन युवक बैठे मिले। इनमें से एक असम का रहने वाला है। भारत की नागरिकता साबित नहीं कर पाने की वजह से उसे डी-वोटर माना गया। इसके बाद से वह डिटेंशन सेंटर में रह रहा है। बाकी दो बांग्लादेश से अवैध तरीके से भारत में आए थे। इनमें से एक 34 साल के मुख्तार हैं। मुख्तार पढ़े-लिखे नहीं हैं। वे ढाई साल से यहां हैं। मुख्तार बताते हैं, ‘भारत के एक दलाल ने 6 हजार रुपए लेकर बॉर्डर पार करवाया। मैं गुवाहाटी से कोलकाता जाना चाहता था। सोचा था कि पैसे कमाऊंगा, लेकिन स्टेशन पर पुलिस ने पकड़ लिया। 2 साल जेल में रहा, फिर डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया।’ चौथी कहानी फूल मियां कीबांग्लादेश से आए दूसरे शख्स फूल मियां हैं। 5वीं तक पढ़े हैं। बॉर्डर पार करने के लिए भारत के एक दलाल को 25 हजार रुपए दिए थे। फूल मियां के साथ उनके गांव के 2 और लोग आए थे। इनमें एक नाबालिग था। 2 साल बाद नाबालिग बांग्लादेश लौट गया। फूल मियां और उनके दोस्त की रिहाई नहीं हो पाई। फूल मियां से मिलकर हम आगे बढ़े। ग्राउंड के किनारे करीब 15 बिल्डिंग हैं। पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग बिल्डिंग हैं। पहले हम महिलाओं से मिलने पहुंचे। ग्राउंड फ्लोर बिल्कुल खाली था। साथ चल रहे एक अफसर ने हमें ऊपर चलने के लिए कहा। हम लोहे की चौड़ी सीढ़ियों से ऊपर पहुंचे। यहां एक बच्चा साइकिल चलाता मिला। अफसर ने बताया ये बच्चा म्यांमार से आया है और मां के साथ रहता है। पांचवी कहानी बियाखनचमपरमां कीहम बच्चे की मां से मिलने ऊपर चले गए। हमने उनसे बच्चे से मिलवाने की बात कही। पता चला वो पिता के पास गया है। पिता पुरुषों की बिल्डिंग में रहते हैं। उसे माता-पिता दोनों के साथ रहने की इजाजत है। मां बियाखनचमपरमां की उम्र 22 साल है, पिता 32 साल के है। हमने पूछा- बच्चे को लेकर बॉर्डर क्रॉस करने की क्या मजबूरी थी? बिना रुके हल्की मुस्कुराहट के साथ बियाखनचमपरमां ने जवाब दिया- ‘जान बचाने के लिए। और हमें इसका कोई अफसोस नहीं। बच्चा और पति दोनों आंखों के सामने रहते है। पति से भी ग्राउंड में मुलाकात हो जाती है। मै यहां खुश हूं।’ एक कमरे में 4 से 5 लोग, टीचर के जाने से पढ़ाई रुकीहम लड़कियों के कमरे में भीतर गए। एक कमरे में 4 से 5 लोग रहते हैं। रूम से सटा एक छोटा किचन है। एक कमरे में कुछ किताबें रखी दिखीं। पूछने पर पता चला कि पहले यहां पढ़ाई होती थी। कुछ महीनों से मास्टर नहीं आ रही हैं। उनकी नौकरी कहीं और लग गई है। एक लड़की बोली, ‘हमें हिंदी और अंग्रेजी भाषा सीखनी है। इसके लिए मास्टर चाहिए। हम पहले से अच्छी हिंदी और अंग्रेजी बोलने लगे थे, लेकिन अब कोई सिखाने नहीं आता।’ छठवीं कहानी सिंगतावागसियाम कीएक और कमरे में हमें गिटार दिखा। अब तक दिमाग में डिटेंशन सेंटर की तस्वीर किसी उबाऊ जगह जैसी थी। गिटार देखकर लगा कि यहां संगीत भी है। ये गिटार सिंगतावागसियाम का है। वे कहती हैं, ‘बाहर की दुनिया बहुत याद आती है। मां की याद आती है या बहुत खुश होती हूं, तब गिटार बजाती हूं। हमारी बातचीत चल रही थी, तभी लाइट चली गई। साथ मौजूद महिला पुलिसकर्मी और अधिकारी ने फोन का फ्लैश जलाया। उन्होने कहा, ‘बहुत देर हो रही है। ताला बंद करने का टाइम हो चुका है।’ सातवीं कहानी मानिकजन बेगम कीहम महिलाओं की दूसरी बिल्डिंग की तरफ चल पड़े। यहां सबसे ज्यादा असम की डी वोटर महिलाएं थीं। इनमें से एक मानिकजन बेगम की गोद में 17 महीने की बच्ची थी। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से हमें घर से दूर रहना पड़ रहा है। मानिकजन बेगम के बारे में शक है कि वे 1971 के बाद बांग्लादेश से भारत आई हैं। पहले असम के कोकराझार 7 बटालियन में बंद थीं। उन जैसी और भी महिलाएं यहां हैं। सब कहती हैं कि हम बांग्लादेशी नहीं हैं। इनके अलावा नाइजीरियन महिला मिशेल जैंडी भी हैं। पहली बार विजिटर वीजा पर 22 सितंबर, 2017 को दिल्ली आई थीं। 9 अगस्त, 2023 को उन्हें गुवाहाटी एयरपोर्ट पर चेकिंग के दौरान रोक लिया गया। उनका वीजा फर्जी था। मिशेल ने जेल में 2 साल की सजा पूरी कर ली है। आगे की प्रोसेस पूरी करके उन्हें वापस भेज दिया जाएगा। सेंटर में तीन वक्त का खानाहम बाहर निकले, तब तक ताला बंद हो चुका था। कुछ दूर पुरुषों के रहने वाली बिल्डिंग थी। इसमें रहने वाले ज्यादातर लोग बांग्लादेश से बॉर्डर पार करके आए थे, लेकिन पकड़ लिए गए। सभी ने रात का खाना खा लिया था। खाने में दाल, चावल, रोटी, सब्जी मिली। लोगों ने बताया कि तीन वक्त खाना मिलता है। पसंद के हिसाब से मछली, मटन, अंडा भी दिया जाता है। डिटेंशन सेंटर जाने से पहले हमने IG जेल पुलक महंत से बात की थी। उन्होंने कहा था कि डिटेंशन सेंटर कोई जेल नहीं, बल्कि होल्डिंग प्लेस है। विदेशियों को वापस भेजने की कार्रवाई पूरी करने से पहले यहां होल्ड किया जाता है। इस जगह उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती। …………………… ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें...असम में क्या महिलाएं खोलेंगी BJP की जीत का रास्ता, स्कीम से मुस्लिम भी खुश असम में करीब दो महीने बाद चुनाव होने हैं। हर चौक-चौराहे पर सरकारी योजनाओं और उनका फायदा लेने वालों की तस्वीरें हैं, जिनमें CM हिमंता बिस्वा सरमा महिलाओं को चेक देते दिख रहे हैं। ये चेक महिलाओं के खाते में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर के हैं। सीएम हिमंता ने वही दांव खेला है, जो बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान BJP गठबंधन ने खेला था। मध्यप्रदेश, ओडिशा, दिल्ली जैसे 6 राज्यों में BJP के लिए ये जीत का फॉर्मूला रहा है। पढ़ें पूरी खबर...

