भारतीय कूटनीति और वैश्विक कूटनीतिक गलियारों (Global Diplomacy) से इस वक्त देश के लिए एक बहुत ही गर्व और उत्साह से भर देने वाली खबर सामने आ रही है। भारत के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और वैश्विक मंचों पर उसकी मजबूत होती दावेदारी को एक और बड़ी सफलता हासिल हुई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यता की आवाज को पूरी दुनिया में लगातार समर्थन मिल रहा है। इसी कड़ी में, यूरोप के एक प्रमुख और बेहद प्रभावशाली देश लिकटेंस्टीन (Liechtenstein) ने आधिकारिक रूप से वर्ष 2028-2029 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की गैर-स्थायी सीट पर भारत की दावेदारी का खुला समर्थन कर दिया है। लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलियोस की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान यह बड़ा कूटनीतिक ऐलान किया गया है। इसके साथ ही दोनों देशों ने सीमापार आतंकवाद और अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता पर जोर दिया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि भारत और लिकटेंस्टीन के बीच हुई इस उच्च-स्तरीय बैठक के क्या मायने हैं और वैश्विक कूटनीति के लिहाज से यह क्यों इतना महत्वपूर्ण है।लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलियोस की भारत यात्रा और UNSC की उम्मीदवारी पर समर्थनभारत की राजधानी नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक हैदराबाद हाउस (Hyderabad House) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलियोस (Prince Alois) और प्रिंसेस सोफी की आधिकारिक मेजबानी की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने तथा आपसी हितों से जुड़े विभिन्न क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बेहद सकारात्मक और विस्तृत चर्चा हुई।चर्चा के दौरान सबसे बड़ा कूटनीतिक मोड़ तब आया जब लिकटेंस्टीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की गैर-स्थायी सदस्यता (2028-2029 कार्यकाल) के लिए भारत की उम्मीदवारी को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अहम समर्थन के लिए लिकटेंस्टीन के प्रिंस का हार्दिक धन्यवाद किया। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यूरोपीय देशों द्वारा भारत की इस दावेदारी का लगातार समर्थन किया जाना इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति कितनी मजबूत और भरोसेमंद हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र जैसे सर्वोच्च वैश्विक निकाय में सुधार और प्रतिनिधित्व के मामले में भारत का दावा अब दुनिया भर के देशों द्वारा स्वीकार किया जा रहा है।सीमापार आतंकवाद और पहलगाम हमले की कड़ी निंदा, न्याय के कठघरे में लाने पर जोरइस उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठक के बाद जारी किए गए संयुक्त वक्तव्य (Joint Statement) में दोनों देशों ने आतंकवाद के नासूर के खिलाफ बिना किसी दोटूक के अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारत और लिकटेंस्टीन ने स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवाद और उग्रवाद का कोई भी रूप मानवता के लिए स्वीकार्य नहीं है और सीमापार आतंकवाद (Cross-Border Terrorism) वैश्विक शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा है।खास तौर पर, दोनों पक्षों ने अप्रैल 2025 में भारत के पहलगाम (Pahalgam Terror Attack) में हुए कायराना आतंकी हमले की एक स्वर में तीव्र भर्त्सना की। इस दौरान इस बात पर भी गहरी एकजुटता दिखाई गई कि आतंकवादियों और इस घटना के असली साजिशकर्ताओं तथा इसके वित्तपोषकों को जल्द से जल्द न्याय के कठघरे में खड़ा किया जाना बेहद जरूरी है। दोनों देशों ने आतंकवाद की फंडिंग (Terror Financing) को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुफिया जानकारी साझा करने और सख्त सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएंअपनी इस राजकीय यात्रा के दौरान लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलियोस और प्रिंसेस सोफी ने देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) से भी शिष्टाचार भेंट की। राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति मुर्मू ने मेहमान शाही मेहमानों के सम्मान में एक विशेष राजकीय भोज (Banquet) का आयोजन किया।राष्ट्रपति मुर्मू ने इस अवसर पर कहा कि भारत और लिकटेंस्टीन के बीच पारंपरिक रूप से भले ही भौगोलिक दूरियां हों, लेकिन आपसी मूल्यों और सहयोग के मोर्चे पर दोनों देशों के संबंध बेहद प्रगाढ़ हैं। राष्ट्रपति ने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि दोनों देश आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अनुसंधान, कौशल विकास (Skill Development) और स्वच्छ हरित तकनीक (Clean Technology) के क्षेत्रों में आपसी सहयोग की अपार संभावनाओं को मिलकर तलाश सकते हैं।विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार एवं निवेश, अत्याधुनिक नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, तथा दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संबंधों (People-to-People Ties) को मजबूत करने को लेकर भी कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी है। इसके साथ ही, प्रिंस एलियोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिकटेंस्टीन आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया है।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नियमन और वैश्विक सुशासन पर बनी सहमतिआज के इस आधुनिक और तकनीकी युग में डिजिटल सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। भारत और लिकटेंस्टीन ने अपनी इस बैठक के दौरान इस बात पर पूर्ण सहमति व्यक्त की कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विकास और उसका संचालन पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय मूल्यों पर आधारित होना चाहिए, ताकि तकनीक का दुरुपयोग रोका जा सके और वैश्विक मानवाधिकारों की रक्षा की जा सके।लिकटेंस्टीन जैसे यूरोपीय देश द्वारा भारत की संप्रभुता, आतंकवाद के खिलाफ उसकी लड़ाई और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उसकी दावेदारी का समर्थन करना यह साबित करता है कि दुनिया का हर बड़ा राष्ट्र आज भारत को एक जिम्मेदार और शक्तिशाली वैश्विक महाशक्ति के रूप में देख रहा है। यह कूटनीतिक सफलता आने वाले वर्षों में भारत के अंतरराष्ट्रीय रसूख को और अधिक ऊंचाई पर ले जाने का काम करेगी।
'दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे', BRICS संसदीय मंच ने की सीमापार आतंकवाद की निंदा
ब्रिक्स देशों ने पहलगाम हमले सहित सभी आतंकी घटनाओं की निंदा की और पश्चिम एशिया में तनाव पर चिंता व्यक्त की।
ब्रिक्स के संसदीय मंच ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की, सीमा पार आतंकवाद से मुकाबले का आह्वान
New Delhi, 27 अक्टूबर . ब्रिक्स सदस्य देशों ने Tuesday को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 2025 में हुए आतंकवादी हमले की एक बार फिर कड़ी निंदा की और…
New Delhi में BRICS मंच ने उठाई Global South की आवाज, संयुक्त राष्ट्र में बदलाव की अपील
नई दिल्ली में मंगलवार को 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का समापन हुआ। इसमें सदस्य देशों के पीठासीन अधिकारियों और संसदीय प्रतिनिधियों ने जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को बढ़ावा देना (Fostering Parliaments for People-Centric Development) विषय के तहत एक व्यापक संयुक्त घोषणा-पत्र जारी किया। दो दिवसीय इस शिखर सम्मेलन में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के विधायी नेताओं ने हिस्सा लिया। 'नई दिल्ली घोषणा-पत्र' (NDD) की सहमति को दोहराते हुए, सदस्य देशों की संसदों ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा ढांचे में सुधार की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की मांग की, ताकि इसे अधिक न्यायपूर्ण, समान, लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिमूलक, प्रभावी और कुशल बनाया जा सके। इस संदर्भ में उन्होंने विशेष रूप से NDD के पैराग्राफ 13 का उल्लेख किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वैश्विक शासन व्यवस्था में 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की आवाज बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित हो। इसे भी पढ़ें: 1 नवंबर की Congress रैली पर बोले Shashi Tharoor, नागरिकों के अधिकारों पर पार्टी चुप नहीं रहेगी एक बदली हुई वैश्विक व्यवस्था की इस मांग को आगे बढ़ाते हुए, प्रतिनिधियों ने वैश्विक शासन में सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने एक ऐसी बहुपक्षीय प्रणाली को बढ़ावा देने पर जोर दिया जो अधिक न्यायपूर्ण, समान, चुस्त, प्रभावी, उत्तरदायी, प्रतिनिधिमूलक, वैध, लोकतांत्रिक और जवाबदेह हो। उन्होंने सकारात्मक बदलाव लाने में 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की भूमिका को रेखांकित किया और अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने, मानवाधिकारों की रक्षा करने तथा एकजुटता को बढ़ावा देने में संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया। घोषणापत्र में आतंकवाद की सभी घटनाओं को आपराधिक और अनुचित बताते हुए उनकी कड़ी निंदा की गई है; इसमें आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' (शून्य सहनशीलता) की नीति अपनाई गई है और दोहरे मानदंडों को पूरी तरह खारिज किया गया है। सुरक्षा संबंधी विशिष्ट खतरों का जिक्र करते हुए, मंच ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हो गए थे। नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के भीतर 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक कन्वेंशन' (Comprehensive Convention on International Terrorism) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने और अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित सभी आतंकवादियों और संगठनों के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करने का आग्रह किया, और इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद से लड़ते समय अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों का पालन करना अनिवार्य है। इसे भी पढ़ें: United Nations में बड़े सुधारों की मांग: भारत चाहता है कि UNSC के सभी स्थायी सदस्यों के पास वीटो पावर हो- जानें इसका क्या है कूटनीतिक और वैश्विक अर्थ आर्थिक और भू-राजनीतिक दबावों पर चर्चा करते हुए, घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत, एकतरफा और दबाव डालने वाले उपायों की निंदा की गई है। इसमें कहा गया है कि इस तरह के एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और 'सेकेंडरी सैंक्शंस' (अन्य देशों पर लगाए गए प्रतिबंध) का मानवाधिकारों, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और विकास के अधिकार पर बहुत बुरा असर पड़ता है। क्षेत्रीय संघर्षों के संदर्भ में, मंच ने मध्य पूर्व/पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई। साथ ही, अधिकतम संयम बरतने, स्थिति को और बिगाड़ने वाले कदमों से बचने, और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया। इसके अलावा, प्रतिनिधियों ने इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपने अटूट समर्थन को दोहराया। उन्होंने 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' (दो-राज्य समाधान) का समर्थन किया, जिसमें दोनों देश शांति और सुरक्षा के साथ एक-दूसरे के बगल में रह सकें। साथ ही, फिलिस्तीनियों के आत्मनिर्णय के अधिकार, स्वतंत्रता और एक स्वतंत्र व संप्रभु राज्य के अधिकार पर जोर दिया। घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के सभी उल्लंघनों की कड़ी निंदा की गई है—जिसमें नागरिकों, नागरिक बुनियादी ढांचे और मानवीय सहायता कर्मियों पर जानबूझकर किए गए हमले शामिल हैं—और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
ब्रिक्स संसदीय मंच: आतंकवाद और UNSC सुधार पर जोर, 2027 की अध्यक्षता चीन को
नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के संयुक्त घोषणा-पत्र में सीमापार आतंकवाद की निंदा और ग्लोबल साउथ के प्रतिनिधित्व पर जोर दिया गया है।
ब्रिक्स संसदीय मंच से आतंकवाद के खिलाफ समन्वित कार्रवाई का आह्वान, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दिया
नई दिल्ली। 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की दो दिवसीय बैठक के समापन सत्र में सदस्य और भागीदार देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों की कड़े शब्दों में निंदा की। इस मंच से संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित सभी आतंकवादियों तथा आतंकवादी संगठनों के खिलाफ एकजुट, समन्वित और ठोस वैश्विक कार्रवाई करने का जोरदार आह्वान किया गया। […] The post ब्रिक्स संसदीय मंच से आतंकवाद के खिलाफ समन्वित कार्रवाई का आह्वान, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दिया ‘संवाद और सहयोग’ का संदेश first appeared on Sanjeevni Today .
PC: Anandabazar दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में न सिर्फ़ लड़ाइयां चल रही हैं, बल्कि आतंकवाद भी शांति के लिए रुकावटों में से एक है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बार फिर इसका ज़िक्र किया। रविवार को नई दिल्ली में चिन्मय मिशन की 75वीं सालगिरह पर हुए एक इवेंट में जयशंकर ने आरोप लगाया कि कुछ लोग आतंकवाद से समझौता कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन माना जा रहा है कि विदेश मंत्री ने एक बार फिर पड़ोसी पाकिस्तान पर निशाना साधा है। जयशंकर ने कहा, आतंकवाद शांति के लिए खतरनाक है। इसे देश की स्ट्रैटेजी के तौर पर इस्तेमाल करना किसी भी तरह से मंज़ूर नहीं है। इसके पक्ष में कोई तर्क नहीं हो सकता। साथ ही, विदेश मंत्री ने आगे कहा, आतंकवाद अभी भी मौजूद है क्योंकि सभी देश बिना समझौता वाला रुख नहीं अपना रहे हैं। हालांकि इतिहास ने कई सबक सिखाए हैं, लेकिन कुछ लोग सुविधा के लिए पॉलिटिकल हिसाब-किताब कर रहे हैं। जयशंकर ने दुनिया के सभी देशों से आतंकवाद को रोकने के लिए आगे आने की अपील की। पिछले महीने, यूनाइटेड नेशंस में एक पाकिस्तानी पत्रकार का सवाल सुनकर जयशंकर नाराज़ हो गए थे। एक पाकिस्तानी पत्रकार ने उनसे पूछा, भारत सरकार पाकिस्तान में आतंकवाद को सपोर्ट करना कब बंद करेगी? यह सवाल सुनते ही भारतीय विदेश मंत्री अपना आपा खो बैठे। उन्होंने तुरंत पत्रकार पर पलटवार किया, एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल फिर से पूछ रहा है? रविवार को नई दिल्ली में इसी इवेंट में जयशंकर ने कहा था कि दुनिया के दो छोर पर चल रही दो लड़ाइयों पर इंटरनेशनल कम्युनिटी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ सकती। पूर्वी यूरोप में रूस और यूक्रेन और पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जंग को रोकने के लिए सभी को कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने जंग पर भारत का रुख एक बार फिर साफ किया। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की लड़ाई को रोकने का एकमात्र तरीका बातचीत और डिप्लोमेसी है। जयशंकर के शब्दों में, इस समय दुनिया में दो बड़ी लड़ाइयाँ चल रही हैं। एक यूक्रेन में, दूसरी पश्चिम एशिया में। जिनका इस लड़ाई से कोई लेना-देना नहीं है, वे इसके नतीजे भुगत रहे हैं। जिनका इससे कोई लेना-देना नहीं है, वे ही जंग की कीमत चुका रहे हैं।
कोटकपूरा में जैतो बठिंडा बाईपास के पास एके-47 राइफल के तीन मैगजीन और 82 कारतूस मिलने से पुलिस महकमे में हलचल मच गई।
फरीदकोट में थाना सिटी कोटकपूरा पुलिस ने एके-47 राइफल के 3 मैगजीन और 82 कारतूस लावारिस हालत में बरामद किए हैं। पुलिस ने इन्हें कब्जे में लेकर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में इन मैगजीन और कारतूसों के आतंकवाद के काले दौर के होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, थाना सिटी कोटकपूरा के एएसआई गुरजीत सिंह के नेतृत्व में पुलिस पार्टी रविवार देर शाम जैतो-बठिंडा बाईपास पर चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान सूचना मिली कि बाईपास पर स्थित रब्ब वाले खूह के पास रजबाहे की कच्ची पटरी पर किसी ने कारतूस छिपाकर रखे हुए हैं। पुलिस टीम ने मौके पर तलाशी लीसूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर तलाशी ली, तो वहां से एके-47 राइफल के तीन मैगजीन बरामद हुए, जिनमें 7.62 एमएम के 82 कारतूस भरे हुए थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कारतूसों पर काफी पुरानी तारीखें अंकित हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि ये आतंकवाद के दौर के हो सकते हैं। हालांकि, कारतूस यहां किसने और किन परिस्थितियों में छिपाए या फेंके, इसका पता जांच के बाद ही चल सकेगा। आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज इस मामले में डीएसपी कोटकपूरा संजीव कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की गहनता से जांच की जा रही है। बरामद कारतूसों व मैगजीन के स्रोत का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
गरुड़ शक्ति : भारत-इंडोनेशिया की स्पेशल फोर्स का आतंकवाद विरोधी अभियान
New Delhi, 25 अक्टूबर . India और इंडोनेशिया के विशेष बल जंगलों में आतंकवाद विरोधी अभियानों और उग्रवाद से निपटने की रणनीतियों का संयुक्त अभ्यास करेंगे. इसके लिए…
आतंकवाद से निपटने के लिए भारत और ऑस्ट्रेलिया का जंगल से समुद्र तक संयुक्त सैन्य अभ्यास
New Delhi, 25 अक्टूबर India और ऑस्ट्रेलिया के सैनिक जंगलों, द्वीपीय क्षेत्रों और समुद्र तटों पर एक साथ युद्धाभ्यास कर रहे हैं. इस दौरान दोनों देशों के सैनिक…
'कुछ देश आतंकवाद को अपनी राजनीति...', जयशंकर की दो टूक
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र दिवस पर आयोजित 'चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन' में आतंकवाद को शांति के लिए गंभीर खतरा बताया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद को राज्य नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करना पूरी तरह अस्वीकार्य है और इसके लिए कोई तर्क नहीं दिया जा सकता.
'आतंकवाद और वैश्विक संकटों पर मूकदर्शक न बनें', जयशंकर की संयुक्त राष्ट्र को दो टूक
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र स्थापना दिवस पर यूएन को वैश्विक संकटों और आतंकवाद पर मूकदर्शक न रहने की कड़ी फटकार लगाई।
S Jaishankar ने कहा, राष्ट्रीय नीतियों के लिए Terrorism का इस्तेमाल किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को कहा कि आतंकवाद का इस्तेमाल ‘‘किसी देश की नीतियों को आगे बढ़ाने के साधन’’ के रूप में करना पूरी तरह अस्वीकार्य है तथा इसे कभी उचित नहीं ठहराया जा सकता और न ही इसके पक्ष में कोई तर्क दिया जा सकता है। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद का खतरा इसलिए बना हुआ है, क्योंकि ‘‘सभी देश इसे बिल्कुल न बर्दाश्त करने की नीति वास्तव में नहीं अपनाते हैं।’’उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में किसी देश का नाम लिए बगैर कहा कि इतिहास में आतंकवाद से जुड़े कई सबक मिलने के बावजूद ‘‘कुछ देश अब भी राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देते हैं।’’चिन्मय मिशन की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने शांति के महत्व पर जोर दिया, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संघर्ष हो रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘आइए, शांति की अविभाज्यता पर विचार करें। कहीं भी युद्ध होना, हर जगह शांति के लिए खतरा है।’’उन्होंने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत जब यह कहता है कि संवाद और कूटनीति ही एकमात्र समाधान हैं, तो वह वैश्विक भावना को व्यक्त करता है। जयशंकर ने कहा, ‘‘आतंकवाद शांति के लिए एक और घातक खतरा है। आतंकवाद का इस्तेमाल किसी देश की नीतियों और उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के साधन के रूप में करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। इसे कभी उचित नहीं ठहराया जा सकता और न ही इसके पक्ष में कोई तर्क दिया जा सकता है। इसके बावजूद आतंकवाद जारी है, क्योंकि सभी देश इसे बिल्कुल न बर्दाश्त करने का रुख वास्तव में नहीं अपनाते। इतिहास में इतने सबक मिलने के बावजूद कुछ देश अब भी राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देते हैं।’’उन्होंने कहा कि इसलिए दुनिया को इस साझा खतरे के प्रति अधिक सजग होना चाहिए और आतंकवाद के सभी रूपों से मुकाबला करने के लिए अधिक दृढ़ संकल्प के साथ एकजुट होना चाहिए।
आतंकवाद को मानवता के खिलाफ अपराध मानने की मांग: यूएन में भारत ने उठाया मुद्दा, 2028 की संधि में क्या होगा?india United Nations terrorism crimes against humanity conventionR Mythili
आतंकवाद पर सख्त: भारत का रूख कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण, अब वैश्विक समुदाय के रवैये में भी बदलाव जरूरी

