डिजिटल समाचार स्रोत

...

मारा गया पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मोस्ट वांटेड आतंकवादी मूसा

इंटरनेट डेस्क। पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मोस्ट वांटेड आतंकवादी सुलेमान शाह उर्फ 'मूसा' राष्ट्रीय राइफल्स के साथ मुठभेड़ में ढेर हो गया है। ये आतंकी मंगलवार रात कश्मीर के बडगाम जिले के ऊंचाई वाले इलाके में मारा गया। लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर मूसा जम्मू-कश्मीर में कई हमलों में शामिल होने के कारण वांछित था। मूसा का मारा जाना जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। वह 5 सितंबर को यूसमर्ग की पहाड़ियों में हुई मुठभेड़ से बच निकला था, हालांकि इस दौरान उसका करीबी साथी यासिर मारा गया था। हालांकि, मारे गए आतंकवादी के बारे में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। खबरों के अनुसार, सेना ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस संबंध में जानकारी दी कि अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिलकर मध्य कश्मीर के कोराग, यूसमर्ग के सामान्य क्षेत्र में अभियान शुरू किया था। जवानों द्वारा चुनौती दिए जाने पर आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद एक आतंकवादी को मारा गया। PC:livehindustan अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें

समाचार जगत 30 Sep 2026 1:10 pm

आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराध से निपटने के मुद्दे पर बिम्सटेक बैठक, भारत ने की मेजबानी

भारत ने 28 और 29 सितंबर को नई दिल्ली में आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने के लिए बिम्सटेक ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप की 11वीं बैठक की मेजबानी की।

जागरण 29 Sep 2026 11:15 pm

नई दिल्ली में बिम्सटेक जॉइंट वर्किंग ग्रुप की 11वीं बैठक संपन्न, आतंकवाद पर लगाम लगाने को लेकर हुआ गहन विमर्श

New Delhi, 29 सितंबर . India Government की मेजबानी में, आतंकवाद और ट्रांसनेशनल क्राइम पर नियंत्रण को लेकर बिम्सटेक जॉइंट वर्किंग ग्रुप (जेडब्ल्यूजी-सीटीटीसी) यानि संयुक्त कार्य समूह की 11वीं बैठक 28-29 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित की गई. इस बैठक में बिम्सटेक के सभी सदस्य देशों (बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और ... Read more

डेली किरण 29 Sep 2026 6:48 pm

'आतंकवाद पर सहानुभूति नहीं, तो रिश्ते प्रभावित होंगे': अमेरिका और पाकिस्तान की नज़दीकियों पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर का दो टूक बयान

भारतीय कूटनीति और विदेश नीति के मोर्चे पर पिछले कुछ महीनों से वैश्विक स्तर पर चल रहे समीकरणों के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका की धरती से बहुत ही स्पष्ट, कड़े और दो टूक शब्दों में अपनी बात रखी है। अमेरिका के अपने आधिकारिक दौरे के दौरान न्यूयॉर्क में 'एशिया सोसायटी' (Asia Society) द्वारा आयोजित एक उच्च स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने भारत और अमेरिका के बीच पिछले डेढ़ वर्षों से द्विपक्षीय रिश्तों में आ रहे तनाव और असहजता पर खुलकर अपनी राय रखी।एस. जयशंकर ने अपने संबोधन में मुख्य रूप से दो सबसे बड़े और संवेदनशील मुद्दों—व्यापारिक मतभेदों (Trade Differences) और पड़ोसी देश पाकिस्तान द्वारा पोषित आतंकवाद (Cross-Border Terrorism)—पर भारत के दृष्टिकोण को बेहद दृढ़ता के साथ दुनिया के सामने रखा। उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व और पश्चिमी देशों को स्पष्ट संदेश दिया कि यदि रणनीतिक साझेदार देश भारत की सुरक्षा और प्राथमिक संवेदनाओं का सम्मान नहीं करते हैं, तो इसका सीधा असर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की गहराई पर पड़ेगा।'आतंकवाद पर हमारी संवेदनाओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं'आतंकवाद के मुद्दे को भारत के लिए सबसे सर्वोच्च और संवेदनशील प्राथमिकता करार देते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि दुनिया में ऐसे बहुत ही कम देश होंगे जिन्होंने अपने पड़ोसी राष्ट्र की ओर से प्रायोजित और जान-बूझकर पोषित आतंकवाद को उस हद तक झेला है, जितना भारत ने भुगता है।उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, एक-दूसरे की संवेदनाओं का ख्याल रखना किसी भी मजबूत साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण आधार होता है। आतंकवाद एक ऐसा मुद्दा है जो हमारे लिए अत्यंत संवेदनशील है। जो विषय हमारे राष्ट्रीय हित और सुरक्षा के लिए इतना महत्वपूर्ण है, यदि कोई हमारा साझेदार देश हमारी इन प्रमुख चिंताओं और चेतावनियों का पर्याप्त ख्याल नहीं रखता है, तो यह स्वाभाविक है कि इसका नकारात्मक असर हमारे द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि विदेश मंत्री का यह बयान परोक्ष रूप से अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा पाकिस्तान के साथ बढ़ रहे सैन्य व कूटनीतिक मेल-मिलाप पर भारत की गहरी असहमति और चिंता को दर्शाता है।अमेरिका-पाकिस्तान के बढ़ते रिश्तों और अमेरिकी रुख पर भारत की पैनी नजरविदेश मंत्री का यह तीखा और स्पष्ट बयान इसलिए भी अत्यधिक सामयिक और महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ समय में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर नज़दीकियां बढ़ती हुई दिखाई दी हैं। हाल के वर्षों में वाशिंगटन द्वारा उठाए गए कुछ कदमों, जैसे कि ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के दावे और अमेरिकी व्हाइट हाउस में पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का स्वागत किया जाना, ने नई दिल्ली में रणनीतिक हलकों को असहज किया है।भारत इन घटनाक्रमों को बहुत बारीकी से देखता रहा है, लेकिन अब तक सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की मुखर प्रतिक्रिया देने से परहेज करता रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग करने की भारत की कूटनीति को हाल के दिनों में तब धक्का लगता दिखा जब अमेरिका के साथ-साथ कई प्रमुख यूरोपीय देशों ने भी पाकिस्तान के साथ अपने आर्थिक और कूटनीतिक रिश्तों को दोबारा पटरी पर लाना शुरू कर दिया। नई दिल्ली की सबसे बड़ी आशंका यह है कि पश्चिमी देशों के इस नरम रुख का फायदा उठाकर पाकिस्तान एक बार फिर अपनी पुरानी हरकतों यानी सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने की गुंजाइश तलाश सकता है।व्यापारिक समझौतों पर दो टूक: 'भारत अपने छोटे उत्पादकों और किसानों के हितों से समझौता नहीं कर सकता'केवल सुरक्षा और आतंकवाद ही नहीं, बल्कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौतों (Trade Deals) के पेंच पर भी विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने देश के आर्थिक हितों की रक्षा करते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं में भारत अपने घरेलू हितों, छोटे उत्पादकों, लघु उद्योगों और कृषि क्षेत्र से जुड़े किसानों के अधिकारों से किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हट सकता।जयशंकर ने स्वीकार किया कि भारत और अमेरिका की आर्थिक संरचना में बहुत बड़ा अंतर है। उन्होंने समझाया, हमें इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि भारत मुख्य रूप से छोटे उत्पादकों, छोटे कृषि उत्पादकों और छोटी फैक्ट्रियों व कुटीर उद्योगों का एक विशाल समाज है। भारत और अमेरिका के बीच प्रति व्यक्ति आय का भारी अंतर होने के अलावा उत्पादन का स्वरूप और हमारे सामाजिक-आर्थिक ढांचे की प्रकृति भी पूरी तरह भिन्न है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में इसलिए देरी हुई क्योंकि जमीनी हकीकत की जटिलताएं बहुत गहरी थीं, और अब इस दिशा में अमेरिकी कानून की धारा 301 (Section 301) की प्रक्रिया के तहत आगे की रूपरेखा तय की जा रही है।इस बीच, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के भी अमेरिका दौरे पर होने की खबर है, जहां वे मिलवाकी में जी-20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे और दोनों देशों के बीच अटके अंतरिम व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी समकक्षों के साथ उच्च स्तरीय वार्ता करेंगे। विदेश मंत्री के इस स्पष्ट और दो टूक संदेश ने यह साबित कर दिया है कि नया भारत अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों और आर्थिक संप्रभुता के मामले में अपने मित्रों और साझेदारों से भी स्पष्ट संवाद करने से पीछे नहीं हटता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Sep 2026 5:12 pm

जिनेवा में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान से कहा साफ, ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन आतंकवाद नहीं’

जिनेवा, 29 सितंबर . Pakistan के कब्जे वाले कश्मीर में मानवाधिकार नियमों के उल्लंघन की चर्चा जिनेवा प्रेस क्लब में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में हुई. Tuesday को कई कश्मीरी नेता, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता, पत्रकारों और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने Pakistan को खरी-खरी सुनाई. यह कॉन्फ्रेंस जिनेवा में चल रहे यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स ... Read more

डेली किरण 29 Sep 2026 4:18 pm

आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने अमेरिका को घेरा: पाक से नजदीकी बढ़ाने पर जताया ऐतराज, कहा— इससे भारत-US रिश्तों पर असर

आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने अमेरिका को घेरा: पाक से नजदीकी बढ़ाने पर जताया ऐतराज, कहा— इससे भारत-US रिश्तों पर असर

समाचार नामा 29 Sep 2026 1:45 pm

'आतंकवाद के खतरे को समझे बिना...' US-पाक रिश्तों पर बोले जयशंकर

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका और पाकिस्तान के बढ़ते संबंधों पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा, खासकर सीमा पार आतंकवाद को लेकर पश्चिमी देशों का रुख साफ नहीं होने तक द्विपक्षीय रिश्तों में मजबूती नहीं आ सकती. जयशंकर ने आतंकवाद को सबसे अहम मुद्दा बताया और कहा कि साझेदारों को भारत की संवेदनशीलता समझनी होगी.

आज तक 29 Sep 2026 11:44 am

आतंकवाद पर भारत की चिंताओं पर अमेरिका की असंवेदनशीलता आपसी रिश्तों के लिए समस्या : जयशंकर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि आतंकवाद को लेकर भारत की च‍िंताओं के प्रत‍ि अमेर‍िका का असंवेदनशील होना दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक समस्या है।

खास खबर 29 Sep 2026 11:24 am

अमेरिका में ही जयशंकर ने ट्रंप सरकार को सुनाया, कहा- पाकिस्तानी आतंकवाद पर हमारी नहीं सुनोगे तो...

जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप सरकार का दूसरा कार्यकाल शुरू होने के कुछ ही महीनों बाद अमेरिका और पाकिस्तान के संंबंधों में सुधार देखा गया है. ऐसे में भारत से अमेरिका के रिश्तों पर इसका क्या प्रभाव पड़ा है? इसका जवाब भारत के विदेश मंत्री के बयान में देखने को मिला.

NDTV इंडिया 29 Sep 2026 11:23 am

आतंकवाद पर अमेरिका को जयशंकर की दो टूक, बोले- हमारी सुरक्षा चिंताओं को न समझना रिश्तों के लिए समस्या

एस. जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों की चुनौतियों पर कहा कि भारत की सुरक्षा चिंताओं को पर्याप्त गंभीरता से न समझना रिश्तों को प्रभावित करता है। आतंकवाद और व्यापार पर भी बोले।

देशबन्धु 29 Sep 2026 10:36 am

आतंकवाद के खिलाफ भारत का 'प्रहार' : अमित शाह ने लॉन्च किया नया प्रत्यर्पण पोर्टल, 36 देशों से लाए गए 288 भगोड़े

गृह मंत्री अमित शाह ने भारत की पहली आतंकरोधी नीति 'प्रहार' को मजबूत करने पर जोर दिया और एक नया प्रत्यर्पण पोर्टल लॉन्च किया।

जागरण 28 Sep 2026 9:28 pm

Amit Shah ने आतंकवाद रोधी 'प्रहार' नीति के तहत हर स्तर पर स्वचालित प्रतिक्रिया तंत्र बनाने पर दिया जोर

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आतंक-रोधी अभियानों में बिना किसी देरी के कदम उठाने पर जोर देते हुए सोमवार को देश के आतंकवाद रोधी ढांचे ‘प्रहार’ के हर स्तर पर एक ‘स्वचालित प्रतिक्रिया तंत्र’ को संस्थागत रूप देने का आह्वान किया। शाह ने ‘प्रहार-आतंकवाद रोधी नीति और रणनीति’ सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए भगोड़ों को भारत वापस लाने के प्रयासों में तेजी लाने के उद्देश्य से एक विशेष प्रत्यर्पण पोर्टल भी शुरू किया। सूत्रों ने बताया कि नया पोर्टल प्रत्यर्पण के प्रयासों में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और राज्य एजेंसियों को एक मंच पर लाता है। जब कोई भगोड़ा विदेश में पकड़ा जाता है और सक्षम अदालत की मंजूरी के बाद संबंधित देश को प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा जाना होता है, तब यह पोर्टल प्रक्रिया में मदद करेगा। शाह ने आतंकवाद रोधी अभियान में ‘सक्रिय और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण’ अपनाने की जरूरत पर जोर दिया तथा एजेंसियों से हर स्तर पर ‘स्वचालित प्रतिक्रिया तंत्र’ को संस्थागत रूप देने का आग्रह किया। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, गृह मंत्री ने ‘आतंकवादी घटनाओं के निरंतर विश्लेषण’ के जरिए ‘प्रहार’ रणनीति को लगातार मजबूत और बेहतर बनाने के प्रयासों की जरूरत पर भी जोर देते हुए अगले 10 वर्षों के लिए एक मजबूत और ठोस तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता बताई। ‘प्रहार’ के सिद्धांतों को थाना स्तर तक पहुंचाने पर जोर देते हुए शाह ने इस पहल के हर पहलू के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फरवरी में देश की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी नीति ‘प्रहार’ की शुरुआत की थी। इसमें आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने, खुफिया जानकारी के आधार पर रोकथाम और चरमपंथी हिंसा से निपटने के लिए समन्वित कार्रवाई पर आधारित बहुस्तरीय रणनीति की रूपरेखा दी गई है। बयान में कहा गया कि सोमवार को आयोजित सम्मेलन में शाह ने आतंकवादी खतरों को कम करने के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों का उल्लेख किया। शाह ने ‘प्रहार’ के हर हिस्से के लिए नतीजे पर केंद्रित नजरिए की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि कार्रवाई में जरा भी देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों के बीच तालमेल को जरूरी बताया और इस बात पर जोर दिया कि इस रणनीति के हर हिस्से में नतीजे पर केंद्रित नजरिया अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने उल्लेख किया कि एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के परिणामस्वरूप सीमा पार हथियार, विस्फोटक और मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल शहजाद भट्टी नेटवर्क के 40 से अधिक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया, 100 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की गईं और 15 राज्यों में 350 लोगों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इसी दौरान सरकार ने गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत शहजाद भट्टी नेटवर्क को आतंकवादी संगठन घोषित किया। उन्होंने कहा कि 2019 से 2026 के बीच केंद्र सरकार ने 36 देशों से 288 भगोड़े अपराधियों को सफलतापूर्वक भारत वापस लाया। सम्मेलन में केंद्रीय गृह सचिव, विदेश सचिव, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुखों, 15 राज्यों के पुलिस महानिदेशकों तथा सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के आतंकवाद रोधी दस्तों (एटीएस) के प्रमुखों ने भाग लिया। अन्य राज्यों के पुलिस प्रमुखों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भाग लिया।

प्रभासाक्षी 28 Sep 2026 9:03 pm

Pakistan के भीतर जाकर भारत ने किया आतंकवाद पर करारा प्रहार! Islamabad में SCO Meeting Attend कर India ने चल दिया बड़ा दाँव

भले ही भारत और पाकिस्तान के बीच दुश्मनी की तलवारें खिंची हुई हों, भले ही हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र के दौरान दोनों देशों के बीच चले वाकयुद्ध को पूरी दुनिया ने देखा हो, लेकिन भारत ने पाकिस्तान की अध्यक्षता में हुई शंघाई सहयोग संगठन यानि एससीओ की राष्ट्रीय समन्वयक बैठक में हिस्सा लेकर दुनिया को एक बड़ा कूटनीतिक संदेश दे दिया है। 28 से 30 सितंबर तक इस्लामाबाद में हो रही इस बैठक में भारत की ओर से संयुक्त सचिव आलोक डिमरी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। पाकिस्तान की 2026-27 की अध्यक्षता में यह पहली बड़ी बैठक है, जिसमें संगठन के आगामी कार्यक्रमों और बैठकों का कैलेंडर तय किया जाना है। भारत की इस भागीदारी ने साफ कर दिया है कि नई दिल्ली बहुपक्षीय मंचों से पीछे हटने की बजाय वहां अपनी रणनीतिक मौजूदगी और प्रभाव को और मजबूत करने की नीति पर आगे बढ़ रही है। साथ ही, आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भारत का कड़ा रुख भी बरकरार है। हम आपको बता दें कि पाकिस्तान ने अपनी अध्यक्षता के लिए ‘दृष्टि को कार्रवाई में बदलना: संपर्क, नवाचार और साझा समृद्धि’ का विषय चुना है। इस एजेंडे के जरिए इस्लामाबाद क्षेत्रीय संपर्क, आर्थिक सहयोग, नवाचार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने का संदेश देना चाहता है। लेकिन पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि जिस मंच को वह अपनी कूटनीतिक सक्रियता दिखाने के अवसर के रूप में पेश कर रहा है, उसी मंच पर भारत लगातार आतंकवाद के प्रश्न को केंद्रीय सुरक्षा मुद्दे के रूप में सामने रखता आया है। इसे भी पढ़ें: UN में भारत का पाकिस्तान पर जोरदार पलटवार, कश्मीर से ओसामा तक की याद दिलाई उल्लेखनीय है कि भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय स्तर पर लंबे समय से कोई सार्थक व्यापक संवाद नहीं है। इसके बावजूद भारत ने शंघाई सहयोग संगठन के बहुपक्षीय ढांचे को द्विपक्षीय विवादों से अलग रखा है। यही नई दिल्ली की कूटनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण पहलू है। पाकिस्तान के साथ सामान्य द्विपक्षीय संबंधों की बहाली और बहुपक्षीय मंच पर भारत की भागीदारी, दोनों को अलग-अलग रखा गया है। यहीं पाकिस्तान की कूटनीतिक चुनौती स्पष्ट होती है। इस्लामाबाद को एससीओ की अध्यक्षता मिली है, लेकिन भारत के साथ उसके संबंधों में वह परिस्थितियां अब भी मौजूद हैं जिनके कारण व्यापक द्विपक्षीय संवाद बंद पड़ा है। इसके बावजूद भारत पाकिस्तान की मेजबानी में होने वाली संगठनात्मक बैठकों में भाग लेकर यह संदेश दे रहा है कि बहुपक्षीय संस्थाओं को बंधक बनाकर द्विपक्षीय विवादों का समाधान नहीं किया जा सकता। हम आपको यह भी बता दें कि भारत के एजेंडे में आतंकवाद का मुद्दा एक बार फिर सबसे ऊपर रहने वाला है। खास बात यह है कि इस बार जवाब पाकिस्तान की जमीन पर, उसी के मंच पर दिया जाएगा। पाकिस्तान जब एससीओ के क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे की अध्यक्षता कर रहा है, तब भारत के लिए यह मंच इस्लामाबाद को आतंकवाद के सवाल पर सीधे घेरने का महत्वपूर्ण अवसर है। नई दिल्ली लगातार आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की मांग करती रही है। साथ ही भारत सीमा पार आतंकवाद तथा संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई को पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने की बुनियादी शर्त मानता है। ऐसे में एससीओ के मंच से पाकिस्तान में ही आतंकवाद का मुद्दा उठाना इस्लामाबाद के लिए कहीं अधिक कड़ा कूटनीतिक संदेश होगा। साथ ही कनेक्टिविटी के सवाल पर भी भारत की स्थिति स्पष्ट है। नई दिल्ली एससीओ के संपर्क और क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग से जुड़े प्रयासों का समर्थन करती है, लेकिन उसकी स्पष्ट शर्त है कि ऐसी कोई भी परियोजना सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन नहीं कर सकती। यानी भारत संपर्क के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह संपर्क के नाम पर विवादित क्षेत्रों अथवा संप्रभुता से जुड़े सिद्धांतों को दरकिनार करने के खिलाफ अपनी स्थिति कायम रखता है। भारत की यही नीति पिछले वर्षों में भी दिखाई दी है। 2017 में एससीओ का पूर्ण सदस्य बनने के बाद भारत ने संगठन की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की। अक्टूबर 2024 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर पाकिस्तान में एससीओ के शासनाध्यक्षों की बैठक में शामिल हुए थे। जुलाई 2026 में भी भारतीय प्रतिनिधिमंडल सीमा सुरक्षा से जुड़े एससीओ कार्यक्रम के लिए इस्लामाबाद गया था। भारतीय अधिकारी एससीओ के आतंकवाद-रोधी ढांचे से जुड़े अभ्यासों और विशेषज्ञ बैठकों में भी भाग लेते रहे हैं। अब नजर 2027 पर है। पाकिस्तान अगस्त 2027 में इस्लामाबाद में एससीओ राष्ट्राध्यक्ष शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। पाकिस्तान ने संकेत दिया है कि संगठन के सभी सदस्य देशों के नेताओं को निमंत्रण दिया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। लेकिन निमंत्रण मिलना और प्रधानमंत्री का पाकिस्तान जाना दो अलग-अलग विषय हैं। हम आपको यह भी बता दें कि शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने की थी। भारत और पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य बने थे। बाद में ईरान और बेलारूस भी इसमें शामिल हुए। संगठन का दायरा सुरक्षा से लेकर आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय संपर्क और आतंकवाद, अलगाववाद तथा उग्रवाद के खिलाफ सहयोग तक फैला हुआ है। बहरहाल, इस्लामाबाद की बैठक महज एक प्रशासनिक बैठक नहीं है। पाकिस्तान इसे अपनी अध्यक्षता के प्रभाव को स्थापित करने के अवसर के रूप में देख रहा है, जबकि भारत इसी मंच का इस्तेमाल अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं, आतंकवाद-विरोधी दृष्टिकोण और क्षेत्रीय संपर्क संबंधी सिद्धांतों को मजबूती से रखने के लिए कर रहा है। पाकिस्तान के सामने चुनौती यह है कि संगठन की अध्यक्षता उसके हाथ में होने के बावजूद भारत की भागीदारी उसकी शर्तों पर नहीं, बल्कि भारत की घोषित रणनीतिक प्राथमिकताओं के साथ आगे बढ़ रही है। यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण सामरिक और कूटनीतिक संदेश है। -नीरज कुमार दुबे

प्रभासाक्षी 28 Sep 2026 6:03 pm

सर्जिकल स्ट्राइक के 10 वर्ष: उरी हमले ने पाकिस्तान के खिलाफ भारत की आतंकवाद विरोधी नीति में किया बदलाव

29 सितंबर 2016 को 'लाइन ऑफ कंट्रोल' (एलओसी) को पार कर सेना ने सैन्य ऑपरेशन के जरिए भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में एक निर्णायक बदलाव किया। इससे पाकिस्तान की ओर से प्रायोजित सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ सटीक प्रहार करने वाले 'डिटरेंस मॉडल' (रोकथाम का मॉडल) को स्थापित किया गया।

खास खबर 28 Sep 2026 6:01 pm

ब्रिटेन में RAF फेयरफोर्ड एयरबेस के पास बड़ी आतंकी साजिश नाकाम, अमेरिकी दूतावास ने जारी किया हाई-लेवल सुरक्षा अलर्ट

ब्रिटेन के ग्लॉस्टरशायर स्थित रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रॉयल एयर फोर्स (RAF) फेयरफोर्ड एयरबेस के पास एक बड़ी और खौफनाक आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया गया है। ब्रिटिश आतंकवाद-रोधी पुलिस (Counter Terrorism Policing), ग्लॉस्टरशायर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त अभियान चलाते हुए आतंकी घटना को अंजाम देने की तैयारी के आरोप में 5 संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। यह एयरबेस अमेरिकी वायुसेना के रणनीतिक बॉम्बर्स और ऑपरेशन्स के लिए प्रमुख फॉरवर्ड बेस के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया और पुलिस ने इसे 'मेजर इंसिडेंट' (बड़ी घटना) करार दिया।स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, बेस से महज कुछ दूरी पर स्थित वेलफोर्ड गांव के पास तीन संदिग्ध वैन और चेहरे पर नकाब पहने संदिग्ध युवकों की हलचल देखी गई थी। ग्रामीणों द्वारा अलर्ट किए जाने के तुरंत बाद पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने इलाके को चारों तरफ से घेर लिया। एहतियात के तौर पर गांव के करीब 85 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया और बम निरोधक रोबोट की मदद से संदिग्ध वाहनों की सघन तलाशी ली गई। ब्रिटेन के सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि समय रहते खुफिया जानकारी मिलने से एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय हमला टल गया है।अमेरिकी दूतावास ने जारी किया सुरक्षा अलर्ट, नागरिकों को सतर्क रहने के निर्देशइस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के तुरंत बाद लंदन स्थित संयुक्त राज्य अमेरिका के दूतावास (US Embassy London) ने ब्रिटेन में मौजूद अपने सभी नागरिकों के लिए आधिकारिक सुरक्षा परामर्श (Security Advisory) जारी कर दिया है। दूतावास ने चेतावनी दी है कि ब्रिटिश अधिकारियों के आकलन के मुताबिक यूके में आतंकी खतरे का स्तर 'गंभीर' (Severe) बना हुआ है, जिसका सीधा अर्थ है कि आतंकी हमले की प्रबल संभावना है। दूतावास ने विशेष रूप से यह आगाह किया है कि अमेरिकी हितों, राजनयिक प्रतिष्ठानों, सैन्य ठिकानों और अमेरिकी नागरिकों से जुड़े आयोजनों को निशाना बनाए जाने का खतरा अधिक हो सकता है।अमेरिकी सुरक्षा परामर्श में नागरिकों को कड़े सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। इनमें अपने आस-पास के माहौल पर पैनी नजर रखना, स्थानीय सुरक्षा बलों व आपातकालीन सेवाओं के निर्देशों का कड़ाई से पालन करना, भीड़भाड़ वाले संवेदनशील इलाकों में जाने से बचना और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों से लगातार अपडेट रहना शामिल है। अमेरिकी विदेश विभाग के स्मार्ट ट्रैवलर एनरोलमेंट प्रोग्राम (STEP) के तहत सभी प्रवासियों को अपनी लोकेशन और सुरक्षा स्थिति दर्ज कराने को कहा गया है।RAF फेयरफोर्ड का सामरिक महत्व: ईरान और मध्य पूर्व ऑपरेशन्स से जुड़े तारआरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस पर आतंकी साजिश का खुलासा कोई सामान्य घटना नहीं है। यह एयरबेस अमेरिकी ग्लोबल स्ट्राइक कमांड और 501st कॉम्बैट सपोर्ट विंग का अहम ऑपरेशनल केंद्र माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से खाड़ी युद्ध और इराक युद्ध के दौरान भी अमेरिकी बी-52 और बी-1 लांसर्स जैसे भारी बमवर्षक विमानों ने यहीं से उड़ान भरी थी। हाल के दिनों में मध्य पूर्व और ईरान समर्थित ठिकानों के खिलाफ चले रक्षात्मक अभियानों में फेयरफोर्ड एयरबेस का इस्तेमाल काफी बढ़ गया था, जिसके चलते यह अंतरराष्ट्रीय आतंकियों और प्रॉक्सी गुटों के निशाने पर आ गया था।अमेरिकी नेतृत्व ने इस संयुक्त अभियान की सफलता की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों की खुफिया एजेंसियां इन संदिग्धों की गतिविधियों पर लंबे समय से नजर रखे हुए थीं और वे बड़े ठिकानों को नुकसान पहुंचाने की फिराक में थे। वहीं ब्रिटिश प्रधानमंत्री और गृह मंत्रालय ने सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई की प्रशंसा की और आम जनता से किसी भी प्रकार की अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।यूरोप में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद: भारतीय और विदेशी यात्रियों के लिए क्या हैं दिशा-निर्देश?ब्रिटेन में आतंकी साजिश के पर्दाफाश के बाद लंदन, बर्मिंघम, मैनचेस्टर और अन्य प्रमुख शहरों के रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों और महत्वपूर्ण सरकारी व कूटनीतिक परिसरों के बाहर सुरक्षा पहरा कड़ा कर दिया गया है। भारत, अमेरिका और दुनिया भर से ब्रिटेन में अध्ययन, व्यापार या पर्यटन के सिलसिले में रहने वाले प्रवासियों को भी अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी संदिग्ध बैग, लावारिस वाहन या असामान्य गतिविधि की सूचना तुरंत आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों पर देने की सलाह दी है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Sep 2026 8:53 am

पाखंड की परतें: आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान की पोल खुली, भारत की 'शून्य-सहिष्णुता’ नीति दृढ़ता से रेखांकित

पाखंड की परतें: आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान की पोल खुली, भारत की 'शून्य-सहिष्णुता’ नीति दृढ़ता से रेखांकित

अमर उजाला 28 Sep 2026 8:48 am

मन की बात में आतंकवाद पर बोले मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हफ्ते मन की बात में देश की सुरक्षा और भारतीय सैन्य बलों को शौर्य का जिक्र किया।

नया इंडिया 28 Sep 2026 7:04 am

आतंकवाद के खिलाफ हर जवाब के लिए तैयार भारत, राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को दिया सख्त संदेश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के खिलाफ जवाब देने के लिए तैयार है। जानें उनका पूरा बयान।

देशबन्धु 27 Sep 2026 2:32 pm

आतंकवाद पर किसी भी स्ट्राइक के लिए तैयार है भारत, राजनाथ ने पाक को चेताया

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत बातचीत में विश्वास करता है, लेकिन अगर कोई देश आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो बातचीत वहीं खत्म हो जाएगी। भारत सहयोग चाहता है, लेकिन राष्ट्रीय हित की कीमत पर नहीं।

लाइव हिन्दुस्तान 27 Sep 2026 2:03 pm

भारत के खिलाफ आतंकवाद को हवा देने वाले देश से बातचीत की गुंजाइश खत्म : राजनाथ सिंह

New Delhi, 27 सितंबर . हमारी नीति बहुत स्पष्ट है. India शांति का पक्षधर है, लेकिन अपनी सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा. यह बात Sunday को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कही. उन्होंने कहा कि India बातचीत में विश्वास रखता है. लेकिन यदि कोई देश India के खिलाफ आतंकवाद को ... Read more

डेली किरण 27 Sep 2026 1:38 pm

Mann Ki Baat: PM मोदी बोले- सर्जिकल स्ट्राइक के 10 साल पूरे, आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस

पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने बार-बार अपना रुख स्पष्ट किया है कि आतंकवादी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज का भारत आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर आगे बढ़ रहा है।

देशबन्धु 27 Sep 2026 1:02 pm

2016 Surgical Strike आतंकवाद पर भारत का निर्णायक जवाब थी: PM Narendra Modi

(फाइल फोटो के साथ जारी)नयी दिल्ली, 27 सितंबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि 2016 में की गई ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ आतंकवादी हमलों का दर्द झेल रहे भारत का निर्णायक जवाब थी और इसने आतंकवाद से निपटने की देश की नीति का एक साहसिक उदाहरण दुनिया के सामने पेश किया। मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा कि भारत आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति पर चलता है और देश ने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद का कड़ा एवं निर्णायक जवाब दिया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के उरी में सेना के एक शिविर पर आतंकवादी हमले के बाद 28-29 सितंबर 2016 को नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार आतंकवादियों के ठिकानों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की थी। उन्होंने कहा कि भारत के वीर जवानों ने जिस तरह नियंत्रण रेखा पार कर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की, उससे पूरी दुनिया हैरान रह गई थी। मोदी ने कहा, ‘‘भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद का कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने आतंकवाद से निपटने की भारत की नीति का एक नया साहसिक उदाहरण पूरी दुनिया के सामने पेश किया।’’प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने आतंकवादी हमलों का दर्द लंबे समय तक सहा और ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ इसका निर्णायक जवाब थी। उन्होंने कहा, ‘‘भारत आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति पर चल रहा है।’’भारतीय सेना ने उरी में सेना के शिविर पर आतंकवादी हमले के बाद नियंत्रण रेखा के पार आतंकवादियों के ठिकानों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की थी। मोदी ने जारी जनगणना प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि जनगणना एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है और इसमें हर नागरिक की भूमिका है। उन्होंने लोगों से जनगणना के दौरान ऑनलाइन गणना सुविधा का लाभ उठाने का भी आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई का जिक्र करते हुए कहा कि देश के युवा नशे के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘‘नशा मुक्त युवा अभियान’ के माध्यम से युवा रचनात्मक अभियानों और गतिविधियों के जरिए जागरूकता फैला रहे हैं।’’मोदी ने कहा कि ‘नशा मुक्त युवा अभियान’ के दौरान देशभर में लाखों युवाओं ने नशे और मादक पदार्थों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संकल्प लिया है। उन्होंने कहा, ‘‘युवाओं ने खुद नशे से दूर रहने का संकल्प लिया है और इस संदेश को दूसरों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी ली है।’’प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के दिवंगत नेता अशोक सिंघल की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी और कहा कि उन्होंने समाज के बीच रहते हुए भी एक तपस्वी जैसा जीवन जिया। मोदी ने कहा, ‘‘उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन को जो दिशा दी और उसमें जो ऊर्जा भरी, उसी का परिणाम आज हम अयोध्या में भव्य मंदिर के रूप में अपनी आंखों के सामने देख रहे हैं।

प्रभासाक्षी 27 Sep 2026 12:42 pm

यूएन महासभा: ऑनलाइन स्कैम, आतंकवाद और तस्करी से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाने पर जोर

संयुक्त राष्ट्र, 27 सितंबर . कंबोडिया, India और कई दूसरे देशों ने ऑनलाइन स्कैम सेंटर, आतंकवाद, तस्करी और संगठित अपराध करने वाले नेटवर्क से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत करने की मांग की है. ये आपराधिक नेटवर्क टेक्नोलॉजी और देशों की सीमाओं के पार मौजूद फाइनेंशियल सिस्टम का इस्तेमाल करके ऐसी गतिविधियां चलाते ... Read more

डेली किरण 27 Sep 2026 12:08 pm

UNGA में जयशंकर की दो टूक: आतंकवाद पर जीरो-टॉलरेंस, पाकिस्तान को करारा जवाब और आत्मरक्षा पर बड़ा बयान।|

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के झूठे बयानों का करारा जवाब देते हुए आतंकवाद के प्रति जीरो-टॉलरेंस नीति पर जोर दिया।

प्रातःकाल 27 Sep 2026 11:49 am

यूएनजीए : जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार पर द‍िया जोर

संयुक्त राष्ट्र, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान बड़े स्तर पर शांति की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने स्‍पष्‍ट क‍िया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के अधिकार का इस्तेमाल करेगा। उन्होंने कहा कि गरीब और विकासशील देशों को उन युद्धों और फैसलों की कीमत नहीं चुकानी चाहिए, जिनमें उनकी आवाज या भूमिका बहुत कम होती है।

देशबन्धु 27 Sep 2026 11:40 am

यूएनजीए में जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार पर द‍िया जोर

यूएनजीए में जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार पर दिया जोर

समाचार नामा 27 Sep 2026 11:05 am

विदेश मंत्री जयशंकर का UNGA में पाकिस्तान पर बड़ा हमला, कहा-आतंकवाद के साथ दोस्ती नहीं चल सकती, दी ये नसीहत

विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने 27 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान पाकिस्तान पर बड़ा हमला किया। उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद का बार-बार इस्तेमाल करने वाला देश बताया और कहा कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस वाले रवैये में कोई ढील नहीं दी जानी चाहिए। पाकिस्तान और आतंकवाद पर बात […]

पांचजन्य 27 Sep 2026 7:01 am

आतंकवाद को पालने वाला, पाकिस्तान पर जमकर बरसे जयशंकर; UN में दुनिया के सामने खूब सुनाया

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने पाकिस्तान को एक बार फिर लताड़ लगाई। उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद का पालक बताया।

लाइव हिन्दुस्तान 26 Sep 2026 11:36 pm

UN में Pakistan की जबरदस्त फजीहत, Terrorism पर पूछा गया सवाल तो भाग खड़े हुए Shehbaz Sharif, Jaishankar ने पाकिस्तान को चारों खाने किया चित

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से आतंकवाद को लेकर सीधे सवाल किए गए, लेकिन उन्होंने जवाब देने की बजाय वहां से भाग जाना ही बेहतर समझा। इसके एक दिन बाद संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के सामने जब पाकिस्तानी पत्रकार ने भारत पर आतंकवाद प्रायोजित करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया, तो जयशंकर ने पलटकर ऐसा करारा जवाब दिया कि सवाल पूछने वाला ही कठघरे में खड़ा हो गया। जयशंकर ने दो टूक कहा, “एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। चलिए भी।” उधर, जयशंकर के बयान से गर्म हुए माहौल के बीच ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से पाकिस्तान पर एक और करारा हमला कर डाला। हम आपको बता दें कि भारत ने पाकिस्तान को एक ‘‘कठपुतली शासन’’ करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र में उसके ‘‘झूठ’’ और ‘‘छल’’ पर तीखा प्रहार किया तथा चेतावनी दी कि इस्लामाबाद की ओर से लगातार जारी आतंकवाद के गंभीर परिणाम होंगे। दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर अपने संबोधन के दौरान एक बार फिर कश्मीर मामले को उठाया और 2025 में भारत के साथ हुए सैन्य संघर्ष को रोकने का श्रेय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘‘समय पर हस्तक्षेप’’ को दिया। शहबाज शरीफ के संबोधन के बाद भारत ने शुक्रवार रात ‘जवाब के अपने अधिकार’ का इस्तेमाल किया। इसे भी पढ़ें: 'पाकिस्तान को आतंकवाद के नतीजे भुगतने होंगे', संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने शहबाज़ शरीफ़ को दिया करारा जवाब संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने कहा, ‘‘हमने एक ऐसे शासन से लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों पर कुछ पाखंडपूर्ण उपदेश सुने हैं, जिसकी राजधानी को अपने ही लोगों से बचाने के लिए इसी समय किलेबंद किया जा रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘और ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि यह सेना का, सेना द्वारा और सेना के लिए शासन है। उसकी कठपुतलियां आती-जाती रह सकती हैं, लेकिन इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि असल में फैसले कौन करता है। पाकिस्तान की वास्तविकता उसके 27वें संविधान संशोधन और उसके असली शासक को दी गई आजीवन कानूनी छूट से जाहिर होती है।’’ गहलोत ने पिछले साल नवंबर में शहबाज शरीफ सरकार द्वारा पारित उस 27वें संविधान संशोधन का उल्लेख करते हुए यह बात की जिसके तहत पाकिस्तान के ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को किसी भी कानूनी मुकदमे से आजीवन छूट दी गई है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें विश्वास है कि यह महासभा पाकिस्तान और उसकी नीतियों को उनके वास्तविक स्वरूप में देखेगी, न कि उस रूप में जैसे उसके प्रतिनिधि झूठे तरीके से पेश करते हैं। साल-दर-साल झूठ दोहराने से वह सच नहीं हो जाता। पाकिस्तान का आतंकवाद, छल और दोहरा रवैया न तो उसके लिए और न ही दुनिया के लिए फायदेमंद होगा।’’ हम आपको बता दें कि शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में ट्रंप को उनके ‘‘दृढ़तापूर्ण और दूरदर्शी नेतृत्व’’ के लिए धन्यवाद देते हुए कहा था कि अमेरिका के राष्ट्रपति के ‘‘समय पर हस्तक्षेप’’ ने दक्षिण एशिया में करोड़ों लोगों की जान बचाई। शहबाज शरीफ ने करीब 23 मिनट के अपने संबोधन में कश्मीर मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कश्मीर मुद्दे का न्यायसंगत और निष्पक्ष समाधान जरूरी है कि दक्षिण एशिया फिर कभी 2025 के संघर्ष जैसी स्थिति में न पहुंचे। उधर, भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को याद दिलाया कि शहबाज शरीफ ने ये ‘‘विचित्र टिप्पणियां’’ ऐसे समय में की हैं जब महज दो सप्ताह पहले न्यूयॉर्क और दुनिया ने 11 सितंबर के भीषण आतंकवादी हमले की 25वीं बरसी मनाई थी। गहलोत ने कहा, ‘‘इस संदर्भ को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि उस हमले का मुख्य साजिशकर्ता ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सेना की प्रमुख अकादमी के बिल्कुल पास रह रहा था।’’ गहलोत ने शरीफ द्वारा कश्मीर मुद्दा उठाए जाने को लेकर उनकी आलोचना करते हुए कहा कि केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने कहा, ‘‘और यह हमेशा ऐसा ही रहेगा। लेकिन अगर हमें कश्मीर की ही बात करनी है तो आइए, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर पर ध्यान देते हैं। रावलाकोट के लोगों से बेमतलब की उन हत्याओं, बर्बर हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने के बारे में पूछिए जिनका वे लंबे समय से सामना कर रहे हैं।’’ हम आपको बता दें कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विवादित सीट को लेकर पिछले कई महीनों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसे लेकर सुरक्षा बलों ने कार्रवाई भी की और हाल में तथाकथित विधानसभा के लिए हुए चुनावों में धांधली के आरोप भी लगे। गहलोत ने सीमा पार आतंकवाद की पाकिस्तान की ‘‘लंबे समय से बरकरार नीति’’ की आलोचना करते हुए कहा कि भारत ने पिछले साल दिखा दिया था कि ‘‘आतंकवादियों के पास न भागने की जगह होगी और न छिपने की।’’ गहलोत ने कहा, ‘‘हम आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद जारी रहने के परिणाम होंगे। इससे स्वाभाविक रूप से उन व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठेंगे, जिनकी बुनियाद मित्रता और सद्भावना पर रखी गई थी।’’ उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में शहबाज शरीफ द्वारा व्यक्त किए गए विचार ‘‘ऐसे लोगों की ओर से आए हैं जिनका कट्टरता और नफरत का लंबा इतिहास रहा है।’’ गहलोत ने कहा, ‘‘इस महासभा में धार्मिक असहिष्णुता पर उस शासन की ओर से टिप्पणियां की गईं, जिसकी व्यवस्था का एक प्रमुख आधार ईशनिंदा कानून हैं। दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। कोई भी दिखावटी खोखली बात दुनिया को गुमराह नहीं कर सकती।’’ दूसरी ओर, जयशंकर के बयान की बात करें तो आपको बता दें कि मामला शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में उस समय गरमा गया, जब जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेइसोलो न्यान्ती समुद्री परिवहन और नाविकों की सुरक्षा को लेकर बनाए गए ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ की जानकारी दे रहे थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद एक पाकिस्तानी पत्रकार ने जयशंकर से सवाल किया कि भारत पाकिस्तान में कथित आतंकवाद को प्रायोजित करना कब बंद करेगा? सवाल पूरा होते ही जयशंकर ने पलटवार किया, “एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। चलिए भी।” भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि हरिश पर्वतनेनी ने भी साफ कर दिया कि जवाब सुना जा चुका है और वह बिल्कुल स्पष्ट है। उधर, संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में बड़ी बड़ी बातें करने वाले शहबाज शरीफ से आतंकवाद के मुद्दे पर सवाल हुआ तो वह भाग खड़े हुए। हम आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में प्रवेश करते समय पत्रकारों ने उनसे सीधे पूछा— “प्रधानमंत्री, आप आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?” इस पर शहबाज शरीफ ने कोई जवाब नहीं दिया। बाद में बाहर निकलते समय उनसे लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद पर कार्रवाई को लेकर सवाल किया गया। इस सवाल पर भी उन्होंने चुप्पी साधी और भाग खड़े हुए। बहरहाल, संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान भारत पर आतंकवाद के आरोप लगाने पहुंचा, लेकिन सवाल जब उसके अपने दरवाजे पर पहुंचा तो जवाब गायब हो गया।

प्रभासाक्षी 26 Sep 2026 11:52 am

आतंकवाद पर सख्त: भारत का रूख कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण, अब वैश्विक समुदाय के रवैये में भी बदलाव जरूरी

आतंकवाद पर सख्त: भारत का रूख कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण, अब वैश्विक समुदाय के रवैये में भी बदलाव जरूरी

अमर उजाला 2 Sep 2026 10:06 am