चाकू घोंपकर युवक की हत्या:साथी मजदूर ने किया मर्डर, डेढ़ महीने पहले गुजरात में हुआ था विवाद
डूंगरपुर जिले में रामसागड़ा थाना क्षेत्र के रेंटा जुड़ा गांव में एक व्यक्ति की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया, जिसे बाद में पुलिस ने डिटेन कर लिया। दोनों गुजरात के भुज में एक साथ मजदूरी करते है। डेढ़ महीने पहले दोनों के बीच आपसी कहासुनी को लेकर विवाद हो गया था। इसी बात को लेकर गांव आने पर भी फिर से विवाद हुआ और हत्या कर दी गई। पुलिस मामले में जांच कर रही है। भुज में साथ करते थे कामरामसागड़ा थानाधिकारी कैलाश कुमार ने बताया कि मृतक सुखराम (40) पुत्र सोना आमलिया निवासी रेटा जुड़ा गुजरात के भुज में मजदूरी का काम करता था। आरोपी विश्राम पुत्र मोतीलाल अहारी निवासी रामपुर वियोला भी उसके साथ ही मजदूरी करता था। डेढ़ महीने पहले हुआ था विवाददोनों के बीच डेढ़ महीने पहले गुजरात में मजदूरी के दौरान विवाद हो गया था। इसके बाद सुखराम अपने गांव आ गया था। आरोपी विश्राम शुक्रवार को सुखराम के घर आ गया। जहां दोनों के बीच डेढ़ महीने पहले हुए विवाद को लेकर फिर से झगड़ा हो गया। घर आकर किया चाकू से ताबड़तोड़ हमलादोनों में विवाद इतना बढ़ गया कि विश्राम ने सुखराम पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। जिसमें सुखराम लहूलुहान होकर गंभीर रूप से घायल हो गया । वारदात के बाद आरोपी विश्राम मौके से भाग गया। आरोपी को पुलिस ने किया डिटेनघटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को डूंगरपुर अस्पताल पहुंचाया। जहां इलाज के दौरान डॉक्टर ने सुखराम को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया। वहीं पुलिस ने आरोपी की तलाश करते हुए विश्राम को डिटेन कर लिया। मामले में हत्या का केस दर्ज कर पुलिस जांच में जुटी है।
हाईवे पर फर्राटा भरती सफेद रंग की चमचमाती लग्जरी कार... अंदर बैठे अच्छे कपड़ों में सलीके दार युवक... इन्हें देखकर पहली नजर में कोई भी यही सोचेगा कि कोई रईस परिवार के लड़के सफर कर रहे हैं। तस्करों ने भी यही सोचा था कि इस 'VIP लुक' को देखकर पुलिस उन्हें हाथ भी नहीं लगाएगी और वे आराम से निकल जाएंगे। लेकिन झुंझुनूं कोतवाली पुलिस की पैनी नजरों के सामने तस्करों का यह 'लग्जरी ड्रामा' पूरी तरह फेल हो गया। पुलिस ने जब इस लग्जरी कार को रुकवाकर तलाशी ली, तो गाड़ी के अंदर का नजारा देखकर खुद पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। कार के अंदर कोई वीआईपी नहीं, बल्कि हरियाणा ब्रांड की अवैध अंग्रेजी शराब का भरी हुई थी। सटीक सूचना पर पुलिस ने हाईवे पर घेरा SHO श्रवण कुमार ने बताया कि पूछताछ में सामने आया कि तस्कर झुंझुनूं के रास्ते गुजरात जाने की फिराक में थे। कोतवाली थाने के उप निरीक्षक (SI) हिदायत अली अपनी टीम के साथ फतेहपुर-चिड़ावा बाईपास पर गश्त कर रहे थे। इसी दौरान एक मुखबिर ने बिल्कुल सटीक इनपुट दिया कि एक सफेद रंग की लग्जरी कार (नम्बर RJ47CA9347) में भारी मात्रा में शराब ले जाई जा रही है। सूचना मिलते ही थानाधिकारी श्रवण कुमार मील के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मण्ड्रेला बाईपास रोड पर 'सारा होटल एण्ड रिसोर्ट' के पास मजबूत नाकाबंदी कर दी। जैसे ही वह कार वहां पहुंची, पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेरकर रुकवा लिया। शराब से भरी हुई थी शराब कार रुकते ही पुलिस ने जब तलाशी शुरू की तो शराब की पेटियां बरामद होने लगीं। पुलिस ने जब कार सवार चारों युवकों से शराब ले जाने का वैध लाइसेंस या परमिट मांगा, तो वे बगले झांकने लगे और कोई भी कानूनी दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। इसके बाद पुलिस ने आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कार और शराब को जब्त कर लिया। इन्हें किया गिरफ्तार सुरेन्द्र सिंह (34 वर्ष) निवासी उद्योग नगर, जोबनेर रोड, फुलेरा (जयपुर ग्रामीण)। कल्याण (33 वर्ष) निवासी रोजड़ी, थाना फुलेरा (जयपुर ग्रामीण)। देवपाल सिंह (21 वर्ष)बनिवासी ठेगड़ी नगर चोपासनी (जोधपुर)। लोकेन्द्र सिंह (28 वर्ष) निवासी इटावा, थाना फुलेरा (जयपुर ग्रामीण)। शानदार कार को बनाया ‘चलता-फिरता गोदाम’ तस्करों ने मारुति विक्टोरियस जैसी महंगी और लग्जरी कार का इस्तेमाल किया। उन्होंने कार की सीटों और डिग्गी के आस-पास की खाली जगहों को इस तरह इस्तेमाल किया कि पूरी कार 'चलते-फिरते अवैध गोदाम' में बदल गई। इस वीआईपी कार में विभिन्न ब्रांड की कुल 29 पेटी अवैध अंग्रेजी शराब ठूंस-ठूंस कर भरी हुई थी। नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस झुंझुनूं एसपी कावेन्द्र सिंह सागर ने बताया कि जिले में अवैध शराब और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्रवाई में कांस्टेबल सुरेन्द्र सिंह और योगेन्द्र सिंह का विशेष योगदान रहा। फिलहाल पुलिस इन चारों लग्जरी तस्करों से कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि हरियाणा में इन्हें यह शराब किसने सप्लाई की थी और गुजरात में यह खेप किस बड़े माफिया को डिलीवर होनी थी।
मानसून में देरी के बीच गुजरात सरकार का बड़ा कदम, किसानों को अब 8 के बजाय मिलेगी 10 घंटे बिजली
राज्य में मानसून की धीमी गति और उम्मीद के मुताबिक बारिश न होने के कारण किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। इस मुश्किल स्थिति में खेती और सिंचाई के काम को आसान बनाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। ...
पंजाब और गुजरात के साथ लंबित जल समझौतों की पड़ताल देश के सबसे जल-संकटग्रस्त राज्यों में शामिल राजस्थान को दशकों बाद भी अपने ही हिस्से के पानी का इंतजार है। एक तरफ राजस्थान में पांचना बांध में पानी के वितरण को लेकर विवाद चल रहा है। 20 साल से सिंचाई का पानी नहीं मिलने पर किसानों ने 28 जून से रेल रोको की चेतावनी दी है। प्रदेश में 13 जिले संकट से जूझ रहे हैं। दूसरी तरफ, राजस्थान अपने हक का 1.87 ट्रिलियन लीटर पानी नहीं ले पा रहा। 60 साल पुराने समझौते के बावजूद गुजरात 40 टीएमसी पानी नहीं छोड़ रहा। 45 साल पहले अस्थायी तौर पर उपयोग के लिए दिया गया 0.60 एमएएफ पानी पंजाब से वापस नहीं मिल पाया है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि दोनों समझौतों की मूल शर्तें पूरी होने के बाद भी राजस्थान को हक नहीं मिल सका। गुजरात के मामले में नर्मदा का पानी खेड़ा जिले तक पहुंचने की शर्त दो दशक पहले (साल 2001) पूरी हो चुकी है। पंजाब के मामले में इंदिरा गांधी नहर परियोजना का विस्तार पूरा होने के बाद राजस्थान के पास अपने पूरे हिस्से के पानी के उपयोग की क्षमता साल 1993 से पहले ही विकसित हो चुकी है। लेकिन राजस्थान बार-बार जल आयोग और राज्यों से अपने पानी की मांग कर रहा है। 1. गुजरात: नर्मदा का पानी खेड़ा पहुंचने के बाद भी राजस्थान को नहीं मिल रहा समझौता: 1966 के समझौते के अनुसार गुजरात को माही बांध से प्रतिवर्ष 40 टीएमसी पानी उपयोग करने का अधिकार दिया गया। शर्त थी कि नर्मदा परियोजना का पानी गुजरात के खेड़ा जिले तक पहुंचने पर गुजरात माही नदी के पानी नहीं लेगा। यह राजस्थान को मिलेगा। हकीकत: भास्कर की पड़ताल के दौरान सामने आया कि नर्मदा परियोजना का पानी वर्ष 2001 में ही खेड़ा जिले तक पहुंच चुका था। भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होता है कि नर्मदा का पानी माही कमांड क्षेत्र में पहुंच रहा है। माही नहर प्रणाली में माही नदी के पानी की जगह कडाणा बांध से निकाली गई सुजलाम-सुफलाम नहर के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है। गुजरात के खेड़ा जिले में वाणक बोरी पिकअप गेयर। इसमें नर्मदा कैनाल जा रही है, उसके नीचे से माही कैनाल निकल रही है, उसके पास ही नर्मदा कैनाल से माही कैनाल में नर्मदा का पानी डालकर खेड़ा जिले के खेतों के लिए सिंचाई किया जा रहा है। 2. पंजाब: नहरी तंत्र होने के बाद भी राजस्थान को नहीं मिला 0.60 एमएएफ पानी समझौता: पंजाब, हरियाणा व राजस्थान के बीच 1981 के समझौते के अनुसार रावी-ब्यास नदियों के अतिरिक्त 17.17 एमएएफ जल का बंटवारा किया गया। इसमें राजस्थान का हिस्सा बढ़ाकर 8.60 एमएएफ निर्धारित किया गया। राजस्थान पूरे 8.60 एमएएफ हिस्से का उपयोग करने की स्थिति में नहीं पहुंच जाता, तब तक अतिरिक्त 0.60 एमएएफ पानी का उपयोग पंजाब करेगा। यह एक अंतरिम व्यवस्था थी। राजस्थान में आवश्यक नहरी ढांचा विकसित होने के बाद यह पानी वापस राजस्थान को उपलब्ध कराया जाएगा। हकीकत: 1981 में राजस्थान के पास पर्याप्त नहरी ढांचा नहीं था। इंदिरा गांधी नहर परियोजना का विस्तार मुख्य रूप से श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और उत्तरी बीकानेर तक सीमित था। भास्कर एक्सपर्ट - अरुण बजाज, पूर्व अध्यक्ष, केंद्रीय जल आयोग पानी राज्यों का विषय है, समाधान का रास्ता भी राज्यों से होकर गुजरता है अंतरराज्यीय जल विवादों का स्थायी समाधान केवल कानूनी आदेशों से नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और राज्यों के बीच सहमति से ही संभव है। संविधान में पानी राज्य सूची का विषय है। इसलिए केंद्र सरकार और केंद्रीय जल आयोग की भूमिका मुख्य रूप से मध्यस्थ की होती है। वे राज्यों के बीच बातचीत और सहमति बनाने में मदद कर सकते हैं। लेकिन किसी राज्य को उसकी इच्छा के विरुद्ध पानी छोड़ने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। ऐसे विवाद कई बार समझौतों के जरिए सुलझ भी जाते हैं।
होर्मुज खुलते ही भारत को राहत, LNG से भरा सुपरटैंकर गुजरात पहुंचा; गैस सप्लाई में होगी सुधार
अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से LNGC Disha सुपरटैंकर भारत के दहेज पोर्ट पहुंचा। 62 हजार टन से अधिक LNG की खेप आने से गैस और LPG सप्लाई में राहत की उम्मीद।
उदयपुर में जिप लाइन राइड के दौरान दो टूरिस्ट 70 फीट ऊंचाई पर फंस गए। नीचे सड़क पर वाहन गुजर रहे थे। यह देख दोनों की सांसें अटक गईं। जान बचाने के लिए चिल्लाने लगे। पहले से वहां मौजूद रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची और ढाई मिनट में दोनों का सुरक्षित वापस ले आई। मामला पिछोला झील के किनारे का बुधवार शाम 6 बजे का है। इसका वीडियो सामने आया है। जिसमें जिप लाइन के बीच में टूरिस्ट लटके नजर आ रहे हैं। पर्यटक गुजरात के रहने वाले थे। संचालक कहना है कि अचानक मौसम बदलने और तेज हवा के कारण ऐसा हुआ। भास्कर टीम गुरुवार को जिप लाइन गई और पूरा मामला जाना। संचालक ने मॉकड्रिल भी करवाकर दिखाई कि किस तरह राइडर को जिप लाइन में भेजा जाता है और कैसे राइडर के फंसने पर रेस्क्यू किया जाता है। गुजरात से आए थे चार दोस्त पिछोला झील के पास रोप-वे के सामने दूधतलाई स्थित जिप लाइन है। इसके संचालक शरद अग्रवाल ने बताया- दीनदयाल पार्क से माणिक्यलाल वर्मा पार्क के बीच जिप लाइन राइड करवाते हैं। इस राइड की कुल दूरी 630 मीटर है, जिसे पार करने में केवल 45 सेकेंड लगते हैं। संचालक ने बताया- बुधवार शाम को गुजरात के चार पर्यटक सुनील,अल्पेश,ऋत्विक और सुमित जिप लाइन राइड करने आए थे। तेज हवा चलने पर फंसे दीनदयाल पार्क से दो-दो के समूह में दोस्त जिप लाइन पर सवार हुए थे। एक ग्रुप को जिप लाइन के दूसरे छोर माणिक्यलाल वर्मा पार्क पहुंचना था। इससे करीब 20 मीटर पहले ही अचानक तेज हवा चलने लगी। जिससे वे जिप लाइन के बीच में अटक गए। इससे दोनों घबरा गए और जान बचाने के लिए चिल्लाने लगे। इसके बाद रेस्क्यू टीम के सदस्य उनके पास पहुंचे और ढाई मिनट में दोनों को रेस्क्यू कर दीनदयाल पार्क वाले प्वाइंट पर वापस लेकर आए। अग्रवाल ने बताया कि ऐसी स्थिती में हमारी रेस्क्यू टीम हमेशा अलर्ट रहती है और राइडर के पास पहुंचकर पास वाले पॉंइट पर रेस्क्यू कर लेकर जाती है। भास्कर टीम जिप लाइन गई इस दौरान संचालक ने मॉकड्रिल भी करवाकर दिखाई। देखिए-मॉकड्रिल के PHOTO…. अब- जानिए जिप लाइन के बारे में…
गुजरात पर मेघ मेहरबान, बालासिनोर में हुई पौने 6 इंच बारिश, किसानों में खुशी की लहर
Gujarat weather update news : गुजरात में मानसून ने एक बार फिर जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कुल 62 तालुकों (तहसीलों) में उल्लेखनीय बारिश हुई। इस बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलजमाव की स्थिति पैदा हो गई, तो दूसरी ...
नवादा जिले में एक पति ने अपनी पत्नी पर चाकू से जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे बेहतर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह घटना गोविंदपुर थाना क्षेत्र के बनिया बीघा गांव में बुधवार को हुई। घायल महिला की पहचान 27 वर्षीय तमन्ना बेगम के रूप में हुई है। हमलावर पति का नाम जहांगीर आलम बताया जा रहा है। तमन्ना बेगम का ससुराल थाली थाना क्षेत्र के छोटकी थली गांव में है। पत्नी अपने मायके बनिया बीघा में रह रही थी जानकारी के अनुसार, जहांगीर आलम गुजरात में काम करता था और अपनी पत्नी को भी साथ रखता था। वहां वह अक्सर तमन्ना के साथ मारपीट करता था। इस प्रताड़ना से परेशान होकर तमन्ना बेगम करीब एक वर्ष से अपने मायके बनिया बीघा में रह रही थी। दोनों की शादी लगभग 12 वर्ष पूर्व हुई थी और उनकी दो बेटियां हैं, जिनमें बड़ी बेटी की उम्र करीब 8 वर्ष है। परिजनों ने बताया कि बुधवार को जहांगीर आलम चुपके से अपने ससुराल पहुंचा। उस समय तमन्ना बेगम घर का काम कर रही थी। इसी दौरान उसने पीछे से आकर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में तमन्ना बेगम के सीने में गंभीर जख्म हुआ है, जबकि जांघ सहित शरीर के अन्य हिस्सों पर भी चाकू के कई वार किए गए। सदर अस्पताल नवादा रेफर कर दिया घटना के बाद परिजनों ने गंभीर रूप से घायल तमन्ना बेगम को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोविंदपुर पहुंचाया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद अत्यधिक रक्तस्राव और हालत नाजुक होने के कारण उसे सदर अस्पताल नवादा रेफर कर दिया। इस घटना के बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है। मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई है, और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
उदयपुर | पश्चिमी राजस्थान में लंबे समय से जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में चल रही सेई बांध टनल विस्तार परियोजना अब अंतिम चरण में है। उदयपुर जिले के कोटड़ा क्षेत्र में पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने सोमवार को निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ 6.7 किमी लंबी टनल के भीतर जाकर कार्य की प्रगति का जायजा लिया। मंत्री कुमावत ने निर्माण की बारीकियों, अब तक हुई खुदाई, शेष कार्य और कंक्रीट लाइनिंग की स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्य की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही श्रमिकों और इंजीनियरों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने के लिए भी अधिकारियों को कहा। 100 करोड़ की लागत से बढ़ाई जा रही क्षमता, 95 प्रतिशत काम पूरा परियोजना के तहत टनल की चौड़ाई बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। पिछले तीन वर्षों से चल रहा यह कार्य लगभग 95 प्रतिशत पूरा हो चुका है। अब केवल करीब 90 मीटर का कार्य शेष है, जिसे 15 जुलाई तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री ने बताया कि टनल विस्तार के बाद इसकी जल निकासी क्षमता 328 क्यूसेक से बढ़कर 1376 क्यूसेक हो जाएगी, यानी लगभग चार गुना वृद्धि होगी। इससे मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी बहकर गुजरात जाने से बच सकेगा। 22 दिनों में भरेगा जवाई बांध, तीन जिलों को राहत : उन्होंने बताया कि वर्तमान में सेई बांध से जवाई बांध तक पानी पहुंचने में 45 से 50 दिन लगते हैं, लेकिन टनल विस्तार के बाद यह अवधि घटकर मात्र 22 दिन रह जाएगी। इससे जवाई बांध को 74 एमसीएफटी पानी अधिक तेजी से मिल सकेगा, जिससे पाली, सिरोही और जालोर जिलों को बड़ी राहत मिलेगी। यह परियोजना मारवाड़ क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी मानी जा रही है, क्योंकि जवाई बांध इसी क्षेत्र की पेयजल और सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करता है। टनल क्षमता बढ़ने से मानसून का अतिरिक्त जल अब व्यर्थ नहीं जाएगा और क्षेत्र में जल संकट काफी हद तक कम होगा। इको-टूरिज्म विकास की भी योजना : मंत्री कुमावत ने कहा कि सरकार इस पूरे क्षेत्र को इको-टूरिज्म और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की भी योजना बना रही है, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकें। निरीक्षण के दौरान किसान संघर्ष समिति सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
उदयपुर के कोटड़ा क्षेत्र में बन रहे सेई बांध टनल से अब बड़ा फायदा होने वाला है। अब वहां बहकर पानी गुजरात नहीं जाएगा। इससे पश्चिमी राजस्थान के 3 जिलों को भरपूर पानी मिलेगा। इस टनल के कार्य को लेकर पशुपालन, गोपालन, डेयरी और देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने निरीक्षण किया। उन्होंने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बहुप्रतीक्षित सेई बांध की टनल (सुरंग) की चौड़ाई बढ़ाने के चल रहे निर्माण कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया। मंत्री कुमावत ने खुद टनल के भीतर जाकर निर्माण कार्य की प्रगति को देखा और अधिकारियों से अब तक हुए कार्य, बची हुई खुदाई और कंक्रीट लाइनिंग के तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी ली। मंत्री कुमावत ने बताया कि सेई बांध से अतिरिक्त पानी को जवाई बांध तक पहुंचाने के लिए बनी 6.7 किलोमीटर लंबी सुरंग को चौड़ा करने के लिए सरकार ने बजट में कुल 100 करोड़ का प्रावधान किया है। पिछले तीन साल से चल रहे इस कार्य का करीब 95 फीसदी हिस्सा पूरा हो चुका है। अब केवल 90 मीटर टनल का कार्य बाकी है, जिसे आगामी 15 जुलाई तक हर हाल में पूरा करने का टारगेट दिया गया है। श्रमिकों और इंजीनियरों की सुरक्षा को लेकर दी हिदायत उन्होंने साफ किया कि पश्चिमी राजस्थान के जल संकट को दूर करने के लिए बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है और निर्माण की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं होगा। साथ ही, उन्होंने टनल के अंदर काम कर रहे श्रमिकों और इंजीनियरों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखने की हिदायत दी। जल निकासी क्षमता होगी 4 गुना, 22 दिन में भरेगा जवाई बांध कैबिनेट मंत्री ने बताया कि इस टनल का विस्तार होने से पानी की निकासी क्षमता 328 क्यूसेक से बढ़कर 1376 क्यूसेक हो जाएगी। क्षमता 4 गुना बढ़ने से मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी व्यर्थ बहकर गुजरात नहीं जाएगा। इससे पाली, सिरोही और जालोर जिलों को भरपूर पानी मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में टनल की चौड़ाई कम होने के कारण सेई बांध से जवाई बांध तक पानी पहुंचने में 45 से 50 दिन का समय लगता है। लेकिन यह कार्य पूरा होने के बाद मात्र 22 दिन में ही जवाई बांध को 74 MCFT पानी मिलने लगेगा, जो इस क्षेत्र के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा। मारवाड़ के लिए संजीवनी है यह परियोजना सेई बांध और इसकी टनल मारवाड़ क्षेत्र, विशेषकर पाली जिले के लिए जीवनदायिनी मानी जाती है। कोटड़ा के सेई बांध से पानी को इस टनल के जरिए जवाई बांध में डाइवर्ट किया जाता है। जवाई बांध पाली और जोधपुर के कई इलाकों की प्यास बुझाता है। इंजीनियरों के अनुसार, वर्तमान में टनल की क्षमता कम होने के कारण मानसून के दौरान सेई बांध का अतिरिक्त पानी बहकर गुजरात चला जाता है। टनल की चौड़ाई बढ़ने से पानी का प्रवाह (डिस्चार्ज क्षमता) तेजी से बढ़ेगा। मानसून का अतिरिक्त पानी व्यर्थ बहने से बचेगा। जवाई बांध कम समय में और अधिक मात्रा में भरा जा सकेगा। पाली सहित पूरे मारवाड़ क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई संकट का स्थाई समाधान होगा। इको-टूरिज्म और सौंदर्यीकरण योजना कैबिनेट मंत्री कुमावत ने कहा कि अब इस बांध क्षेत्र को इको-टूरिज्म और स्थानीय पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत बांध की प्राकृतिक सुंदरता का उपयोग कर पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इस दौरान किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष जयेंद्र सिंह गलथनी, अनोप सिंह राठौड़, पूनम सिंह परमार, निम्बेश्वर महादेव ट्रस्ट के अध्यक्ष जगत सिंह, शिवराज सिंह बिठिया, सुमेरपुर नगर मंडल अध्यक्ष रविकांत रावल सहित कई लोग मौजूद रहे।
पूर्णिया में 2 बच्चों की मां को बेचने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पीड़िता की मौसी ने 2 लाख रुपए में डील की थी, महिला को गुजरात में बेच दिया। जिसके हाथों महिला को बेचा गया था, उससे पीड़िता की शादी भी करा दी गई। वो रोई-गिड़गिड़ाई, लेकिन किसी ने उसकी एक नहीं सुनी। पीड़िता को उसकी मौसी ने झांसा दिया था कि हमलोग गुजरात से घूमकर आते हैं। पहले उसने मना किया था, कहा था कि मैं पति के बगैर नहीं जाऊंगी। इस पर मौसी ने उससे कहा था कि हमलोग हैं न घूमकर आ जाएंगे। जिसके बाद वो तैयार हो गई थी। घटना मीरगंज थाना क्षेत्र का है। 31 मई को गुजरात चलने के लिए कहा था पीड़िता ने 2 दिन पहले पुलिस को आवेदन दिया था। जिसमें उसने बताया है कि वह शादीशुदा हूं। दो बच्चे हैं मेरे। करीब दो महीने पहले मैं मौसी सुलेखा देवी के घर छठी कार्यक्रम में शामिल होने गई थी। कार्यक्रम खत्म होने के बाद वह कुछ दिनों तक मौसी के घर पर ही रुकी हुई थी। 31 मई को उसकी मौसी सुलेखा देवी, मौसी की गोतनी किरण देवी, मीना देवी उर्फ वीणा देवी और उनके परिचित मुकेश ने उसे गुजरात चलने के लिए कहा था। उसके अगले दिन हमलोग गुजरात चले गए थे। भरोसे के जाल में फंसकर गुजरात चली गई। गुजरात में रमेश नाम का एक व्यक्ति मौजूद था। पीड़िता का आरोप है कि उसे कुछ समझने का मौका भी नहीं मिला और जबरन उसकी शादी रमेश से करा दी गई। शादी के बाद रमेश ने उससे कहा कि उसे 2 लाख रुपए देकर खरीदा गया है और अब तुम्हें मेरे साथ रहना होगा। यह सुनकर महिला के होश उड़ गए। उसे तब अहसास हुआ कि वो फंस चुकी है। मां को फोन करके बताई पूरी बात पीड़िता ने बताया कि किसी तरह मौका मिलने पर उसने रमेश के मोबाइल फोन से अपनी मां और रिश्तेदारों को पूरी घटना की जानकारी दी। आरोप है कि इस दौरान रमेश ने साफ कहा कि जब तक उसे दिए गए 2 लाख रुपए वापस नहीं किए जाएंगे, तब तक वो नहीं छोड़ेगा। हालांकि बाद में रमेश का मन बदल गया और संजय नाम के शख्स के साथ पीड़िता को बिहार भेज दिया। कटिहार जंक्शन पहुंचते ही संजय वहां से वापस लौट गया। इसके बाद महिला अपने घर गई। गुजरात में पीड़िता करीब एक सप्ताह तक रही। घर आने के बाद 11 जून को पीड़िता मीरगंज थाना पहुंची और पूरी घटना की शिकायत पुलिस से की। मौसी को पुलिस ने किया गिरफ्तार महिला ने अपने आवेदन में यह भी स्पष्ट किया है कि गुजरात में रहने के दौरान रमेश ने उसके साथ किसी प्रकार का शारीरिक संबंध नहीं बनाया। पीड़िता के आवेदन के आधार पर मीरगंज थाना पुलिस ने सुलेखा देवी, किरण देवी, मीना देवी उर्फ वीणा देवी, मुकेश, संजय और गुजरात निवासी रमेश के खिलाफ 13 जून को मामला दर्ज कर लिया है। इनमें से अभी सिर्फ मौसी सुलेखा की गिरफ्तारी हुई है। अन्य की तलाश की जा रही है डीएसपी संदीप गोल्डी ने बताया कि शुरुआती जांच में शादी के बहाने मानव तस्करी का मामला सामने आया है। पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भुज से दिल्ली तक रेल सेवा शुरू करने के बाद जालोर वासियों को नई ट्रेन मिल सकती है। राजस्थान और गुजरात के रेल यात्रियों के बीच कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए रेल मंत्रालय जल्द ही एक नई ट्रेन सेवा शुरू करने जा रहा है। अहमदाबाद (साबरमती)-बीकानेर (लालगढ़) दैनिक एक्सप्रेस को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। दो राज्यों में मजबूत होगी ट्रेन कनेक्टिविटीलगभग 740 किलोमीटर का सफर तय करने वाली यह नई एक्सप्रेस ट्रेन पश्चिम भारत के दो प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगी। इससे जहां एक तरफ गुजरात के साबरमती रिवरफ्रंट, मोढेरा सूर्य मंदिर और पाटन की रानी की वाव जैसी ऐतिहासिक विरासतों तक पहुंचना आसान होगा, वहीं दूसरी तरफ राजस्थान के भव्य जूनागढ़ किला, करणी माता मंदिर और बीकानेर के मरुस्थलीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। दैनिक सेवा होने के कारण इस रूट पर नियमित यात्रा करने वाले विद्यार्थियों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों को विशेष लाभ होगा। इन जिलों और स्टेशनों को मिलेगा फायदायह ट्रेन गुजरात के अहमदाबाद, महेसाणा, पाटन और बनासकांठा से होते हुए राजस्थान के जालोर, बालोतरा, जोधपुर, नागौर और बीकानेर जिलों को कवर करेगी। प्रमुख ठहराव: साबरमती, महेसाणा, पाटन, भीलड़ी, धानेरा, रानीवाड़ा, मारवाड़ भीनमाल, मोदरान, जालोर, मोकलसर, समदड़ी, लूणी, जोधपुर, गोटन, मेड़ता रोड, नागौर, नोखा, बीकानेर और लालगढ़। हाल ही में मिली हैं कई अन्य सौगातेंबता दें कि हाल ही में जोधपुर-दिल्ली कैंट वंदे भारत एक्सप्रेस को 20 कोचों के साथ संचालित करना, साबरमती-जोधपुर एक्सप्रेस का जैसलमेर तक विस्तार और जैसलमेर में कोच केयर कॉम्प्लेक्स जैसी नई सुविधाएं राजस्थान को दी गई है। इसके अलावा, जालोरवासियों के लिए हाल ही में शुरू की गई भुज-जालोर-पाली-दिल्ली रेल सेवा के बाद, इस नई साबरमती-बीकानेर एक्सप्रेस की घोषणा से भी यात्रियों की दूसरे राज्यों से कनेक्टिविटी बढ़ी है। ये खबर भी पढ़ें… जालोर को दिल्ली के लिए पहली ट्रेन मिली:मंत्री बोले-सिरोही भी रेलवे से जल्द जुड़ेगा, 24 गतिशक्ति कार्गो टर्मिनल बनेंगे
Gujarat High Court ने आमिर खान के बेटे की पहली फिल्म महाराज की रिलीज पर लगी रोक हटाई
गुजरात उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को बॉलीवुड स्टार आमिर खान के बेटे जुनैद की पहली फिल्म महाराज की रिलीज पर लगी अंतरिम रोक हटाते हुए कहा कि फिल्म में कुछ भी अपमानजनक नहीं है और यह पुष्टिमार्ग संप्रदाय को निशाना नहीं बनाती है, जैसा कि याचिका में आरोप लगाया गया है। यह फिल्म 1862 के एक मानहानि मामले पर आधारित है, जिसमें वैष्णव धार्मिक नेता एवं समाज सुधारक करसनदास मुलजी शामिल थे। पुष्टिमार्ग संप्रदाय के कुछ सदस्यों ने नेटफ्लिक्स पर इस फिल्म की रिलीज के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें दावा किया गया था कि यह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। न्यायमूर्ति संगीता विशेन ने 13 जून को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्म की रिलीज पर अंतरिम रोक लगा दी थी।न्यायाधीश ने शुक्रवार को अपने आदेश में कहा कि फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा प्रमाणित किया गया है और यह उक्त संप्रदाय को निशाना नहीं बनाती है।
Gujarat HC ने Netflix को Maharaj रिलीज करने की अनुमति दी, कहा- इससे भावनाएं आहत नहीं होतीं
गुजरात उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को स्ट्रीमिंग दिग्गज नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘महाराज’ की रिलीज पर लगी अपनी अस्थायी रोक हटा ली, जिसमें कहा गया कि फिल्म महाराज 1862 के महाराज मानहानि मामले से जुड़ी घटनाओं पर आधारित है और इसका उद्देश्य किसी समुदाय की भावनाओं को आहत करना नहीं है। न्यायमूर्ति संगीता के. विशेन, जिन्होंने 13 जून को फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई थी, ने फिल्म देखने के बाद शुक्रवार को नेटफ्लिक्स को फिल्म स्ट्रीम करने की अनुमति देने का फैसला किया। इसे भी पढ़ें: Swara Bhasker के साथ कोई भी निर्माता-निर्देशक नहीं करना चाहता काम? एक्ट्रेस ने खुद किए चौंकाने वाले खुलासे अदालत ने कहा “यह अदालत प्रथम दृष्टया इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि फिल्म महाराज उन घटनाओं पर आधारित है, जिनके कारण मानहानि का मामला दायर किया गया और इसका उद्देश्य पुष्टिमार्गी समुदाय की भावनाओं को आहत करना नहीं है। फिल्म को संबंधित दिशा-निर्देशों पर विचार करने के बाद विशेषज्ञ निकाय केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा प्रमाणित किया गया था… 13 जून को दी गई अंतरिम राहत रद्द कर दी गई है। मूल रूप से 14 तारीख को रिलीज होने वाली इस फिल्म को हाईकोर्ट ने नेटफ्लिक्स पर रोक लगा दी थी, क्योंकि व्यापारियों के एक समूह ने इस आधार पर कोर्ट में याचिका दायर की थी कि इसमें वैष्णव समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की क्षमता है। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | नमक-मिर्च लगाकर कच्ची केरी के चटकारे ले रहीं परिणीति चोपड़ा, मिर्जापुर 3 का जबरदस्त ट्रेलर रिलीज फिल्म महाराज गुजराती लेखक सौरभ शाह की 2013 की किताब पर आधारित है, जो 1862 के ऐतिहासिक मानहानि मामले पर आधारित है, जो एक प्रमुख वैष्णव व्यक्ति, जदुनाथजी द्वारा समाज सुधारक करसनदास मुलजी के खिलाफ दायर किया गया था, जिन्होंने सर्वशक्तिमान महाराज द्वारा यौन शोषण के खिलाफ लिखा था। मुलजी ने अपनी पत्रिका सत्यप्रकाश में शोषणकारी प्रथा का खुलासा किया, जिसके कारण मानहानि का मामला चला, जो प्रसिद्ध महाराज मानहानि मामला बन गया। न्यायमूर्ति विशन ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की प्राथमिक शिकायत कि फिल्म वैष्णव समुदाय को बदनाम करती है, बदनाम करती है और उसका अपमान करती है, में कोई दम नहीं है। “इस प्रकार उनकी अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए बाध्य है कि याचिकाकर्ताओं की आशंका अनुमानों पर आधारित है। चूंकि फिल्म को अभी सार्वजनिक रूप से देखने के लिए जारी नहीं किया गया है, इसलिए केवल अनुमान के आधार पर संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित नहीं किया जा सकता है, अदालत ने कहा। उन्होंने खुली अदालत में आदेश सुनाते हुए कहा फिल्म का मुख्य संदेश, जैसा कि प्रतिवादी ने सही कहा है, यह है कि फिल्म सामाजिक बुराई और करसनदास मुलजी द्वारा सामाजिक सुधार के लिए लड़ाई पर केंद्रित है, जो स्वयं वैष्णव समुदाय से थे। उन्होंने कहा, फिल्म किसी भी तरह से धार्मिक भावनाओं को प्रभावित या आहत नहीं करती है। फिल्म यह निष्कर्ष निकालती है कि संप्रदाय किसी भी व्यक्ति या घटना से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। इस घटना को अपवाद मानते हुए वैष्णव संप्रदाय और उसके अनुयायी बढ़ते रहे और भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक ताने-बाने का गौरवपूर्ण और अभिन्न अंग बने रहे। यह आशंका जताई जा रही है कि इससे सांप्रदायिक विद्वेष पैदा होने की संभावना है। हालांकि, उसी मानहानि मामले के आधार पर 2013 में पुस्तक प्रकाशित हुई थी और किसी घटना की सूचना नहीं दी गई है। उन्होंने कहा, यहां तक कि याचिकाकर्ताओं ने भी यह दावा नहीं किया है कि पुस्तक से सांप्रदायिक विद्वेष पैदा हुआ है।
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