यमुनानगर के कैंप क्षेत्र में एक युवक ने अपने ही दोस्त पर उसकी पत्नी को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता पति का कहना है कि वह गुजरात में काम करता है और उसकी गैरमौजूदगी में आरोपी उसकी पत्नी को अपने साथ ले गया। आरोप है कि महिला घर से सोने के गहने, मंगलसूत्र और 20 हजार रुपये नकद भी साथ ले गई, जबकि अपने मासूम बच्चे को घर पर ही छोड़ गई। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। दोस्त का घर पर था आना-जाना शिकायतकर्ता नवीन मिश्रा निवासी जम्मू कॉलोनी-बी ने बताया कि उसकी शादी करीब छह वर्ष पहले से हुई थी। यह उसकी पत्नी की दूसरी शादी थी। उन दोनों का तीन वर्षीय बेटा भी है। वह गुजरात के एक पावर प्लांट में का करता है और वहीं पर रहता है, जबकि उसकी पत्नी व बच्चा यमुनानगर में रहते हैं। नवीन के अनुसार आरोपी सतप्रकाश पहले उसका दोस्त था और उसके घर आता-जाता था। इसी दौरान उसकी पत्नी से भी बातचीत करने लगा। ऐसे ही बातों-बातों में आरोपी ने उसकी पत्नी को अपनी बातों में फंसा लिया। आरोप है कि 25 जून को जब वह गुजरात में नौकरी पर था, तभी सतप्रकाश अपने पिता की मदद से उसकी पत्नी को बहला-फुसलाकर अपने साथ भगा ले गया। लोन लेकर बनवाया मंगलसूत्र भी साथ ले गई शिकायतकर्ता का कहना है कि सूचना मिलने पर वह 29 जून को घर पहुंचा तो पता चला कि उसकी पत्नी घर में रखे सोने के गहने, मंगलसूत्र और 20 हजार रुपये नकद भी साथ ले गई है। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसकी पत्नी ने हाल ही में एक लाख रुपये का बैंक लोन लेकर मंगलसूत्र बनवाया था, जिसकी किस्त अब उससे मांगी जा रही है। नवीन ने बताया कि वह अपने स्तर पर पत्नी की तलाश करता रहा लेकिन दोनाें का कोई सुराग नहीं लगा। शिकायत में यह भी कहा गया है कि पत्नी के जाने के बाद उसके सास-ससुर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। वहीं आरोपी के परिवार को भी पूरी जानकारी होने के बावजूद वे कोई जानकारी नहीं दे रहे हैं। पीड़ित ने इस संबंध में एसपी को शिकायत सौंप कार्रवाई की मांग की है।
मैन ऑफ द सीरीज का पुरस्कार मकराना निवासी गुजरात टाइटंस टीम के भरत चौधरी 292 रन को दिया
नागौर जिले के क्रिकेट खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए शुरू की गई आईपीएल के तर्ज पर मिनी आईपीएल के दूसरे सीजन का खिताब गुजरात टाइटंस को मिला। नागौर जिले के क्रिकेट खिलाड़ियों को आईपीएल जैसा मंच देने के लिए मिनी आईपीएल की शुरुआत की गई है। आयोजन सचिव धर्मेंद्र पंचोली ने बताया कि फाइनल मुकाबला गुजरात टाइटंस और मुंबई इंडियंस के मध्य खेला गया जिसमें मुंबई इंडियंस ने पहले खेलते हुए शौर्य बिश्नोई के 103 रन की बदौलत 172 रन का लक्ष्य दिया। जवाब में गुजरात टाइटंस ने कृष्ण कायत 77 व कृष्णा पारीक के 54 के बदौलत सात विकेट से जीत दर्ज की मिनी आईपीएल प्रतियोगिता का मैन ऑफ द सीरीज का पुरस्कार मकराना निवासी गुजरात टाइटंस टीम के भरत चौधरी 292 रन को दिया गया। प्रतियोगिता आयोजक बीसीसीआई लेवल ए कोच आरिफ खान ने बताया मिनी आईपीएल में खिलाड़ियों की भामाशाहों का सहयोग लिया गया प्रत्येक टीम को स्पॉन्सरशिप के लिए नागौर के खेल प्रेमी लोगों को शामिल किया गया। इस प्रतियोगिता को सफल बनाने के लिए पार्षद शिवकुमार राव, कृषि मंडी से विक्रम कासट, मनीष भुरट, कांग्रेस जिला अध्यक्ष हनुमान बांगड़ा, सचिन भाटी, व्यापारी मनोज भाटी, उद्योगपति कैलाश रिनवा को मिनी आईपीएल की टीमों का मालिक बनाया गया। प्रतियोगिता में पूरे नागौर जिले के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
दुर्ग जिले में ऑनलाइन ठगी के एक मामले में भिलाई नगर थाना पुलिस ने साइबर सेल की मदद से व्हाट्सऐप पर APK फाइल भेजकर 4.02 लाख रुपए की ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के दो आरोपियों को गुजरात से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को ट्रांजिट प्रक्रिया पूरी करने के बाद दुर्ग लाकर कोर्ट में पेश किया गया। मामले की जांच अभी भी जारी है। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। भिलाई के सेक्टर-5 निवासी संजय झा ने 25 फरवरी 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से व्हाट्सऐप मैसेज आया था। उस मैसेज में एक APK फाइल भेजी गई थी। फाइल को डाउनलोड और इंस्टॉल करने के बाद उनके मोबाइल में आने वाले ओटीपी और दूसरे जरूरी मैसेज अपने आप किसी दूसरे नंबर पर जाने लगे। इसके बाद उनके बैंक खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 4 लाख 2 हजार 728 रुपए निकाल लिए गए। जब उन्हें इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने तुरंत भिलाई नगर थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। गुजरात गई दुर्ग पुलिस,आरोपियों को पकड़ाशिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर सेल की मदद से जांच शुरू की। जांच के दौरान बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच की गई। तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस को आरोपियों की लोकेशन गुजरात में मिली। इसके बाद भिलाई नगर थाना की एक टीम गुजरात रवाना हुई। वहां जांच और पहचान के बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में मामले में एक से ज्यादा लोगों की भूमिका सामने आने पर पुलिस ने केस में संबंधित धाराएं भी बढ़ा दीं। पुलिस ने मोबाइल और डिजिटल सबूत को किया जब्तगिरफ्तार आरोपियों की पहचान 37 वर्षीय अच्छे लाल यादव और 49 वर्षीय जोखन प्रसाद यादव के रूप में हुई है। दोनों दादरा एवं नगर हवेली के सिलवासा के रहने वाले हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, डिजिटल सबूत और जांच से जुड़े अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। व्हाट्सऐप पर भेजता था एपीके फाइलपुलिस का कहना है कि आरोपी लोगों को व्हाट्सऐप पर APK फाइल भेजते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति उसे डाउनलोड और इंस्टॉल करता था, उसके मोबाइल का एक्सेस गिरोह के पास पहुंच जाता था। इसके बाद मोबाइल पर आने वाले ओटीपी और दूसरे मैसेज उनके पास पहुंचने लगते थे। इसी का फायदा उठाकर वे बैंक खाते से रकम निकाल लेते थे। पुलिस का कहना है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK फाइल, लिंक या मोबाइल ऐप को बिना जांचे डाउनलोड न करें। बैंक खाते, ओटीपी, यूपीआई पिन या दूसरी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। अगर किसी के साथ साइबर ठगी होती है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें या नजदीकी पुलिस थाने में इसकी सूचना दें।
बिना सात फेरे के कैसा विवाह? गुजरात हाईकोर्ट ने शून्य घोषित की शादी, मैरिज सर्टिफिकेट को किया खारिज
landmark verdict Gujarat High Court: गुजरात हाई कोर्ट ने हिंदू विवाह की वैधता को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि विवाह के दौरान 'सप्तपदी' (सात फेरे) जैसी पारंपरिक और अनिवार्य धार्मिक रीतियां नहीं ...
मुंबई, हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल 'लगान' को रिलीज हुए 25 साल पूरे हो चुके हैं। इस खास मौके पर फिल्म में अंग्रेज अफसर कैप्टन एंड्रयू रसेल का दमदार किरदार निभाने वाले ब्रिटिश अभिनेता पॉल ब्लैकथॉर्न ने कई दिलचस्प किस्से साझा किए।
फॉरेक्स घोटाले में गुजरात का आरोपी गिरफ्तार, साइबर नेटवर्क का खुलासा
गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' के तहत साइबर धोखाधड़ी करने वाले एक गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है
उदयपुर पुलिस ने गुजरात सप्लाई होने वाली करीब 25 लाख रुपए की अवैध अंग्रेजी शराब को जब्त किया। शराब को ट्रक में भरकर लेकर जाया जा रहा था, जिसे एक क्रेटा कार एस्कॉर्ट कर रही थी। पुलिस को चकमा देने के लिए ट्रक में पौधे भरे हुए थे और शराब सीक्रेट बॉक्स में रखी थी। फलासिया थाना पुलिस ने हाईवे पर नाकाबंदी के दौरान ये कार्रवाई की। इस दौरान अंधेरे का फायदा उठाकर आरोपी भाग गए। पुलिस को चकमा देने ट्रक में भरे थे पौधे थानाधिकारी सीताराम ने बताया कि एरिया डोमिनेशन के दौरान हाईवे मोबाइल टीम में तैनात हेड कॉन्स्टेबल कांतिलाल से अवैध शराब तस्करी की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस टीम ने नाकाबंदी कर ट्रक और उसे एस्कॉर्ट कर रही कार को रोका। ट्रक की तलाशी में शराब की पेटियां मिली। तस्करों ने ट्रक को मॉडिफाई कराते हुए सीट के नीचे सीक्रेट बॉक्स बनाए हुए थे। आगे की तरफ भी सीक्रेट बॉक्स थे। इनमें शराब की पेटियां छिपाई गई थी। तलाशी के दौरान पुलिस को शक न हो, इसके लिए ट्रक के पीछे के खाली हिस्से में पौधे भरे हुए थे। ताकि पुलिस को भ्रमित कर सके कि ट्रक में पौधे भरकर सप्लाई करने जा रहे है। हरियाणा-राजस्थान निर्मित 288 शराब की पेटियां मिली पुलिस को तलाशी के दौरान 288 पेटी हरियाणा और राजस्थान निर्मित अवैध अंग्रेजी शराब बरामद की। प्रीमियम ब्रांड्सकी बोतल भी मिलीं। जांच सहायक उप निरीक्षक कालूलाल को सौंपी गई है। यह कार्रवाई खेरवाड़ा की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजना सुखवाल और झाड़ोल डीएसपी विवेक सिंह राव के सुपरविजन में की गई। पुलिस अब फरार हुए तस्करों की तलाश करते हुए उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
ऐसा नहीं कि गुजरात में गरीबी नहीं, पर इसका असली मतलब पूर्वांचल में समझ आया: अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा शुरू किए गए सुधारों ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए कल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी में होने वाली लीकेज को खत्म कर दिया है
गुरुग्राम में पुलिस ने वजन कम करने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने उद्योग विहार में छापा मारकर तीन लड़कियों को पकड़ा है। इनके कब्जे से 102 मोबाइल, 150 सिम कार्ड व 12 लैपटॉप बरामद हुए हैं। आरोपियों की पहचान मंदीप निवासी आया नगर, दिल्ली हाल निवासी चक्करपुर, नेहा निवासी रंगपुरी, दिल्ली तथा वर्षा निवासी मैनपुरी, उत्तर-प्रदेश हाल निवासी सुशांत लोक के रूप में हुई। इनके खिलाफ कॉल सेंटर संचालित करके धोखाधड़ी करने पर साइबर क्राइम वेस्ट में संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। हर्बल दवाइयां बेचने के विज्ञापन से फंसाते थे एसीबी साइबर क्राइम गौरव फोगाट ने बताया कि, पुलिस पूछताछ व जांच में पता चला कि क्योरस्ट साइंस एंड वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड के नाम से फेसबुक व इंस्टाग्राम पेज बनाकर उन पर वजन कम करने की हर्बल दवाइयां बेचने के विज्ञापन चलाए जाते थे। जब कोई व्यक्ति इन विज्ञापनों को देखकर उस पेज पर क्लिक करता तो उसके बाद कॉल सेंटर से आरोपियों द्वारा उस व्यक्ति से बात की जाती थी तथा उनको वजन कम करने की दवाइयां बेची जाती थी। दवाइयों से वजन नहीं हुआ कम इन दवाइयां से वजन कम नहीं होता था तथा लोगों को वजन कम नहीं होने पर 100% रिफंड देने की बात कही जाती थी, लेकिन उसके बाद लोगों को रिफंड नहीं दिया जाता है तथा उनको ब्लॉक कर दिया जाता था। गुजरात के लोग टारगेट पुलिस जांच में यह भी पता चला कि इस कॉल सेंटर से आरोपियों द्वारा गुजरात में लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी की गई थी तथा विभिन्न राज्यों में भी वजन कम करने की दवाइयों के नाम पर ठगी की वारदातों को अंजाम दिया गया था। खुद ही ब्यूटीशियन बनती थी आरोपियों द्वारा स्वयं को ब्यूटीशियन, डाइटिशियन तथा डॉक्टर होने की बात कह कर लोगों को गुमराह करके ठगी की वारदात को अंजाम दिया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि धोखाधड़ी में प्रयोग किए गए मोबाइल नंबर कंपनी के कर्मचारियों को आवंटित किए गए थे तथा पूरे संचालन का नियंत्रण कंपनी के मैनेजर, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (CAO), डायरेक्टर, मालिक एवं अन्य सहयोगियों द्वारा किया जा रहा था।
टेंडर घोटाला केस में फंसने के बाद से IAS अधिकारी संजीव हंस फरार हैं। बिहार पुलिस को उनकी तलाश है। इस बीच उनकी परेशानी 24 साल पुराने दोस्त और राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के नेता सुनील कुमार सिन्हा ने बढ़ा दी है। संजीव हंस के कई राज जानने वाले सुनील अब उनके दुश्मन बन गए हैं। उन्होंने सरकारी गवाह बनकर संजीव हंस के कई राज खोल दिए हैं। यहीं नहीं, IAS अधिकारी की गर्लफ्रेंड गायत्री के खिलाफ 90 लाख रुपए नहीं देने के चलते केस किया है। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने सुनील का कोर्ट में बयान दर्ज कराया है। इसमें कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए, सरकारी टेंडर और कमीशन के खेल में IAS अधिकारी का साथ देने वाला उसका साथी क्यों अलग हुआ? क्यों उसने संजीव हंस और गायत्री देवी के खिलाफ केस किया? पहले जानिए सुनील कुमार सिन्हा कौन हैं? सुनील कुमार सिन्हा मूल रूप से पटना सिटी के रहने वाले हैं। पेशे से ठेकेदार और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रहे हैं। लोक जनशक्ति पार्टी में टूट हुई तो वह पशुपति कुमार पारस के साथ हो गए। पूर्व सांसद प्रिंस राज राष्ट्रीय लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने तो सुनील कुमार सिन्हा को कोषाध्यक्ष बनाया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2024 में भ्रष्टाचार और मनी लांड्रिंग के मामले में IAS संजीव हंस और राजद के पूर्व विधायक गुलाब यादव पर शिकंजा कसा था। उनके ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस केस में सुनील कुमार सिन्हा से भी पूछताछ हुई थी। ED ने अपने पटना ऑफिस में इन्हें दो बार बुलाया था और कई घंटों तक पूछताछ की थी। सुनील ने कबूल किया था कि संजीव हंस के साथ उनका बहुत पुराना रिश्ता है। 4 साल पहले कॉल पर SVU के SP को हड़काया था बात 26 जुलाई 2022 की है। भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले में SVU ने नगर विकास विभाग के तहत आने वाले बुडको के इंजीनियर अनिल कुमार यादव के ठिकानों पर छापेमारी की थी। करीब 400 करोड़ के टेंडर में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की बात थी। SVU की टीम छापेमारी कर रही थी उसी समय सुनील ने सीधे उसके SP को कॉल किया था। उन्हें हड़काने की कोशिश की थी। पूछा था कि इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई क्यों कर रहे हैं? इसके बाद डीएसपी बिपिन बिहारी ने नोटिस जारी कर सुनील कुमार सिन्हा को 2 अगस्त 2022 को SVU के ऑफिस बुलाया। SP को कॉल करने के मामले पर करीब 2 घंटे तक उनसे पूछताछ हुई थी। सुनील ने खुद का बचाव करते हुए कहा था कि इंजीनियर को वह नहीं जानते हैं। किसी के कहने पर कॉल कर दिया था। तब से लेकर आज तक इस सवाल का जवाब नहीं मिला कि जब सुनील इंजीनियर को नहीं जानते थे तो किसी के कहने पर कॉल क्यों किया? अब जानिए संजीव हंस से कैसे दोस्ती हुई और उनकी गर्लफ्रेंड तक कैसे पहुंचा… 20 जून को सुनील कुमार सिन्हा ने अपना बयान ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया। इसके अनुसार वह संजीव हंस को साल 2002 से जानते हैं। पहली बार पटना एयरपोर्ट पर एक-दूसरे से परिचय हुआ था। बाद में दोस्ती हुई और फिर पारिवारिक संबंध बन गए। भ्रष्टाचार के जरिए टेंडर घोटाला केस में जेल में बंद ठेकेदार रिशु श्री को भी वह 10 साल से जानते हैं। गायत्री के जरिए बदनाम करवाना चाहता है गुलाब यादवसुनील के बयान के मुताबिक प्रयागराज (इलाहाबाद) की रहने वाली महिला एडवोकेट गायत्री देवी का संजीव हंस के साथ काफी लगाव था। इन दोनों का एक बच्चा भी है। संजीव हंस ने बताया था, ‘गुलाब यादव (पूर्व विधायक) गायत्री को उकसा रहा है। मुझे बदनाम करना चाहता है।’ संजीव और गायत्री के बीच विवाद हो गया था। इसके बाद गायत्री ने संजीव हंस के खिलाफ पटना के रूपसपुर थाना में बलात्कार का केस किया था। रिशु श्री से लेना पड़ा था 20 लाख रुपए उधार सुनील ने बताया, ‘केस दर्ज होने के बाद भी संजीव मामले को आगे बढ़ने नहीं देना चाहते थे। इसके लिए गायत्री देवी के साथ एक समझौता हुआ। मां-बेटे के भरण-पोषण और रहने के लिए एक फ्लैट को मिलाकर कुल 5 करोड़ रुपए की डील हुई।’ ‘इसमें 90 लाख रुपए बिल्डर को व्हाइट मनी देनी थी। संजीव हंस ने मुझसे कहा कि बिल्डर को 90 लाख रुपया दे दीजिए। उस वक्त मेरे पास पूरे रुपए नहीं थे। मैंने 20 लाख रुपए रिशु श्री से उधार लिया था। इसके बाद गायत्री के पंजाब नेशनल बैंक के अकाउंट में 90 लाख रुपए ट्रांसफर किए थे। उसने वो रुपए बिल्डर मिस्टर बघेल को ट्रांसफर किए थे।’ सुपौल में टेंडर दिलाकर किया एडजस्टमेंट अपने बयान में सुनील सिन्हा ने बताया, ‘संजीव हंस ने रिशु श्री को व्हाट्सएप कॉल किया था। कहा था कि सुनील को 20 लाख रुपए दे दो। मैं इसका एडजस्टमेंट कर दूंगा।’ अपने वादे को पूरा करते हुए संजीव हंस ने सुपौल में रिशु श्री की कंपनी मातृस्वा को एक बड़ा टेंडर दिलवा दिया। उस टेंडर में संजीव हंस, कंपनी के डायरेक्टर पवन कुमार और संतोष कुमार ने मिलकर मोटी राशि का बंदरबांट किया। गायत्री या संजीव हंस ने 90 लाख वापस नहीं किए तो कर दिया केस सुनील ने बताया है कि उसने गायत्री को 90 लाख रुपए देने के लिए रिशु श्री से जो 20 लाख रुपए लिए थे उसे बाद में लौटा दिया था। इस बात की जानकारी संजीव हंस को दी थी। मेसर्स एक्स आर्मी मैन प्रोटेक्शन सर्विस प्राइवेट लिमिटेड नाम की उनकी कंपनी है। HDFC बैंक में इसका अकाउंट है। इसी अकाउंट से 90 लाख रुपए उन्होंने गायत्री देवी के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया था। जब पैसे संजीव हंस या गायत्री देवी ने वापस नहीं किए तो सुनील सिन्हा ने पटना के CJM कोर्ट में इन दोनों के खिलाफ केस कर दिया। इसका जिक्र उन्होंने अपने बयान में किया है। कई शहरों में संजीव हंस ने खरीदी प्रॉपर्टी कोर्ट में दर्ज कराए अपने बयान में सुनील ने दावा किया कि संजीव हंस ने कई शहरों में करोड़ों रुपए की प्रॉपर्टी खरीदी है। बिहार में कमीशन की बात लीक न हो इस बात का ध्यान संजीव हंस खास तौर पर रखते थे। इसलिए ज्यादातर बाहर की कंपनियों को काम देते थे। 2018 में संजीव हंस जल संसाधन विभाग के सचिव बनाए गए। इनके माध्यम से रिशु श्री ने सुपौल में जल संसाधन विभाग का एक बड़ा टेंडर गुजरात की सेवरॉक्स कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिलवाया था। फिर गुजरात की कंपनी से रिशु श्री ने अपनी कंपनी मातृस्वा को ठेका दिलवाया। इसमें भी संजीव हंस, संतोष और पवन ने मिलकर सरकारी रुपयों का बंदरबांट किया था। क्यों खास है सुनील कुमार सिन्हा का बयान? सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुनील का कोर्ट में दर्ज बयान कितना खास है? इसका केस पर क्या असर होगा? जवाब जानने के लिए हमने जांच एजेंसी से बात की। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अभियुक्तों को सजा दिलाने में सुनील का बयान बेहद महत्वपूर्ण है। दरअसल, IAS अधिकारी संजीव हंस के खिलाफ स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने दो अलग-अलग केस दर्ज किए हैं। पहली FIR 5/2024 है। इसमें संजीव हंस के साथ ही सुनील कुमार सिन्हा भी नामजद हैं। चेन ऑफ क्राइम और साजिश में ये भी शामिल हैं। अब सरकारी गवाह बन गए हैं। इनकी गवाही से आरोपों की पुष्टि हुई है।
रेऊना क्षेत्र के कटरी गांव में एक युवक ने शुक्रवार देर शाम घर के अन्दर कमरा बंद कर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। काफी देर तक युवक के कमरे से बाहर न निकलने पर मां ने उसे आवाज लगाई। फिर भी कोई आहट न होने पर मां काफी देर तक दरवाजा खोलने को खटखटाती रही। पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़कर जब मां कमरे के अन्दर घुसी तो बेटे को फांसी पर झूलता देख बदहवास हो गई। घटना के समय मृतक की पत्नी बच्चे के साथ मायके में थी। रेउना थाना क्षेत्र के कटरी निवासी जयरानी पत्नी स्व. पप्पू निषाद ने पुलिस को बताया कि देर शाम बड़े बेटे लोकेंद्र (25) ने घर के कमरे में लगे पंखे पर लटकर आत्महत्या कर ली। लोकेंद्र की शादी चार वर्ष पहले हुई थी। पत्नी पूजा दो वर्ष के बेटे सूर्यांश के साथ मायके बाराबीघा थाना जहानाबाद में है। मृतक का छोटा भाई छोटू बाहर गुजरात में है। जयरानी ने पुलिस को बताया कि लोकेंद्र भी दो दिन पहले ही गुजरात से वापस परिवार के लाखन निषाद की बेटी की शादी में शामिल होने गांव आया था । मां ने झगड़े जैसी किसी बात से भी इनकार किया। पुलिस ने फॉरेंसिक टीम के साथ सारे मामले की जांच के साथ शव को पोस्ट मार्टम केलिए भेजा है। रेउना थाना प्रभारी अनुज राजपूत ने बताया कि युवक के शव को पोस्टमार्टम भेजकर आगे की कार्यवाही की जा रही है। 3 तस्वीरें देखिए…
ललित सुरजन की कलम से - दिल्ली में गुजरात !
'यूं देखा जाए तो गुजराती भोजनालय भारत के कोने-कोने में मिल जाएंगे। देश में जो प्रमुख पर्यटन स्थल हैं, खासकर तीर्थस्थान, वहां गुजराती भोजनालय होना मानों अनिवार्य ही है।
Gujarat High Court ने आमिर खान के बेटे की पहली फिल्म महाराज की रिलीज पर लगी रोक हटाई
गुजरात उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को बॉलीवुड स्टार आमिर खान के बेटे जुनैद की पहली फिल्म महाराज की रिलीज पर लगी अंतरिम रोक हटाते हुए कहा कि फिल्म में कुछ भी अपमानजनक नहीं है और यह पुष्टिमार्ग संप्रदाय को निशाना नहीं बनाती है, जैसा कि याचिका में आरोप लगाया गया है। यह फिल्म 1862 के एक मानहानि मामले पर आधारित है, जिसमें वैष्णव धार्मिक नेता एवं समाज सुधारक करसनदास मुलजी शामिल थे। पुष्टिमार्ग संप्रदाय के कुछ सदस्यों ने नेटफ्लिक्स पर इस फिल्म की रिलीज के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें दावा किया गया था कि यह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। न्यायमूर्ति संगीता विशेन ने 13 जून को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्म की रिलीज पर अंतरिम रोक लगा दी थी।न्यायाधीश ने शुक्रवार को अपने आदेश में कहा कि फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा प्रमाणित किया गया है और यह उक्त संप्रदाय को निशाना नहीं बनाती है।
Gujarat HC ने Netflix को Maharaj रिलीज करने की अनुमति दी, कहा- इससे भावनाएं आहत नहीं होतीं
गुजरात उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को स्ट्रीमिंग दिग्गज नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘महाराज’ की रिलीज पर लगी अपनी अस्थायी रोक हटा ली, जिसमें कहा गया कि फिल्म महाराज 1862 के महाराज मानहानि मामले से जुड़ी घटनाओं पर आधारित है और इसका उद्देश्य किसी समुदाय की भावनाओं को आहत करना नहीं है। न्यायमूर्ति संगीता के. विशेन, जिन्होंने 13 जून को फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई थी, ने फिल्म देखने के बाद शुक्रवार को नेटफ्लिक्स को फिल्म स्ट्रीम करने की अनुमति देने का फैसला किया। इसे भी पढ़ें: Swara Bhasker के साथ कोई भी निर्माता-निर्देशक नहीं करना चाहता काम? एक्ट्रेस ने खुद किए चौंकाने वाले खुलासे अदालत ने कहा “यह अदालत प्रथम दृष्टया इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि फिल्म महाराज उन घटनाओं पर आधारित है, जिनके कारण मानहानि का मामला दायर किया गया और इसका उद्देश्य पुष्टिमार्गी समुदाय की भावनाओं को आहत करना नहीं है। फिल्म को संबंधित दिशा-निर्देशों पर विचार करने के बाद विशेषज्ञ निकाय केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा प्रमाणित किया गया था… 13 जून को दी गई अंतरिम राहत रद्द कर दी गई है। मूल रूप से 14 तारीख को रिलीज होने वाली इस फिल्म को हाईकोर्ट ने नेटफ्लिक्स पर रोक लगा दी थी, क्योंकि व्यापारियों के एक समूह ने इस आधार पर कोर्ट में याचिका दायर की थी कि इसमें वैष्णव समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की क्षमता है। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | नमक-मिर्च लगाकर कच्ची केरी के चटकारे ले रहीं परिणीति चोपड़ा, मिर्जापुर 3 का जबरदस्त ट्रेलर रिलीज फिल्म महाराज गुजराती लेखक सौरभ शाह की 2013 की किताब पर आधारित है, जो 1862 के ऐतिहासिक मानहानि मामले पर आधारित है, जो एक प्रमुख वैष्णव व्यक्ति, जदुनाथजी द्वारा समाज सुधारक करसनदास मुलजी के खिलाफ दायर किया गया था, जिन्होंने सर्वशक्तिमान महाराज द्वारा यौन शोषण के खिलाफ लिखा था। मुलजी ने अपनी पत्रिका सत्यप्रकाश में शोषणकारी प्रथा का खुलासा किया, जिसके कारण मानहानि का मामला चला, जो प्रसिद्ध महाराज मानहानि मामला बन गया। न्यायमूर्ति विशन ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की प्राथमिक शिकायत कि फिल्म वैष्णव समुदाय को बदनाम करती है, बदनाम करती है और उसका अपमान करती है, में कोई दम नहीं है। “इस प्रकार उनकी अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए बाध्य है कि याचिकाकर्ताओं की आशंका अनुमानों पर आधारित है। चूंकि फिल्म को अभी सार्वजनिक रूप से देखने के लिए जारी नहीं किया गया है, इसलिए केवल अनुमान के आधार पर संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित नहीं किया जा सकता है, अदालत ने कहा। उन्होंने खुली अदालत में आदेश सुनाते हुए कहा फिल्म का मुख्य संदेश, जैसा कि प्रतिवादी ने सही कहा है, यह है कि फिल्म सामाजिक बुराई और करसनदास मुलजी द्वारा सामाजिक सुधार के लिए लड़ाई पर केंद्रित है, जो स्वयं वैष्णव समुदाय से थे। उन्होंने कहा, फिल्म किसी भी तरह से धार्मिक भावनाओं को प्रभावित या आहत नहीं करती है। फिल्म यह निष्कर्ष निकालती है कि संप्रदाय किसी भी व्यक्ति या घटना से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। इस घटना को अपवाद मानते हुए वैष्णव संप्रदाय और उसके अनुयायी बढ़ते रहे और भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक ताने-बाने का गौरवपूर्ण और अभिन्न अंग बने रहे। यह आशंका जताई जा रही है कि इससे सांप्रदायिक विद्वेष पैदा होने की संभावना है। हालांकि, उसी मानहानि मामले के आधार पर 2013 में पुस्तक प्रकाशित हुई थी और किसी घटना की सूचना नहीं दी गई है। उन्होंने कहा, यहां तक कि याचिकाकर्ताओं ने भी यह दावा नहीं किया है कि पुस्तक से सांप्रदायिक विद्वेष पैदा हुआ है।
Salman Khan फायरिंग केस मेंक्राइम ब्रांच को गुजरात से मिला बड़ा कनेक्शन, मामले में हुआ अबतक का सबसे सनसनीखेज खुलासा
जेल से रिहा होने पर Elvish Yadav ने गुजरात में खेलीजबरदस्त होली, 'राव साहब' को अपने बीच देख क्रेजी हुए फैन्स

