माउंट आबू-आबूरोड मार्ग पर एक गहरी खाई में आज एक युवक का शव मिला। घटना की सूचना मिलने पर माउंट आबू पुलिस मौके पर पहुंची। थानाधिकारी दलपत सिंह ने अपनी टीम के साथ घटनास्थल का जायजा लिया। इसके बाद, नगर पालिका के आपदा दल को सूचित किया गया। पालिका अधिकारी राज किशोर शर्मा के निर्देश पर आपदा दल के कार्मिक अल्केश गोयर, समाजसेवी राजकुमार परमार और अन्य संगठनों के सदस्यों ने मौके पर पहुंचकर शव को खाई से बाहर निकालने का अभियान शुरू किया। पुलिस और इन सभी की मदद से मृत युवक के शव को गहरी खाई से निकाला गया। शव को राजकीय अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया। पुलिस ने मृतक की पहचान प्रशांत शाह (35), निवासी धंधूका, गुजरात के रूप में की है। पुलिस ने मृतक के परिजनों को सूचना दे दी है, जो माउंट आबू के लिए रवाना हो गए हैं। बताया जा रहा है कि प्रशांत शाह कल गुजरात से माउंट आबू घूमने आए थे। उनकी एक्टिवा सड़क पर मिली थी, जिसकी सूचना लोगों ने पुलिस को दी थी। लोकेशन के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की, जिसके बाद लोगों से मिली सूचना के आधार पर टीम को खाई में युवक का शव मिला। फिलहाल, पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।
IPl 2026 से पहले गुजरात को करारा झटका, KKR का स्टार खिलाड़ी बुरी तरह चोटिल, जानें पूरा मामला
IPL 2026: आईपीएल के 19वें संस्करण की शुरूआत होने में अब सब 2 महीनों का समय रह गया है. इससे पहले टीम इंडिया 7 फरवरी को टी20 विश्व कप खेलेगी, लेकिन कोलकाता नाईटराईडर्स की फ्रेंचाइजी को बड़ा झटका लगा है.बैंगलुरू में मौजूद बीसीसीई के सेंटर ऑफ एक्सलेंस में इलाज करवा रहे हैं.
प्रतापगढ़: मोबाइल थोक व्यापार के नाम पर लाखों की साइबर ठगी, गुजरात से दबोचा गया मुख्य शातिर
प्रतापगढ़ साइबर पुलिस ने मोबाइल थोक व्यापार के नाम पर 2.75 लाख की ठगी करने वाले मुख्य अभियुक्त पटेल फेजल अहमद को गुजरात के भरूच से गिरफ्तार किया है। आरोपी ने अब तक 25 लाख रुपये की साइबर ठगी करना स्वीकार किया है। जिला पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य के निर्देशन में हुई इस बड़ी कार्रवाई की पूरी जानकारी के लिए पढ़ें यह विशेष रिपोर्ट।
कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव रेहाना रियाज बुधवार को जोधपुर पहुंचीं, जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। पूर्व विधायक मनीषा पंवार के नेतृत्व में उनका स्वागत-अभिनंदन किया गया। जोधपुर पहुंचने पर रेहाना रियाज ने सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा का “कांग्रेस मुक्त भारत” का सपना कभी साकार नहीं होगा। कांग्रेस बेहद मजबूत पार्टी है और भाजपा दिन में सपना देख रही है,जो कभी पूरा नहीं होगा क्योंकि कांग्रेस हमारे डीएनए में है। यह 140 साल पुरानी पार्टी है, जिसे खत्म करने की सोच रखना ही गलत है। कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का मिल रहा मौका उन्होंने कहा कि कांग्रेस में धीरे-धीरे बदलाव होते हैं। मेरे जैसे लोग जो जमीन स्तर से उठे हैं, उनको अगर राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी ने मौका दिया है। कांग्रेस के जो कार्यकर्ता लगातार काम काम कर रहे हैं उन्हें अवसर मिलता है। तो कांग्रेस को कमजोर होने की बात ही नहीं है। राहुल गांधी जी दिन रात मेहनत करते हैं। पद यात्रा से आम आदमी की समस्याओं को समझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी की बात पर प्रतिक्रिया देना बेकार है, वह सत्ता के नशे में कुछ भी बोलते हैं। कांग्रेस ने इस देश को एकजुट रखने के लिए जो कुछ किया था बीजेपी उसका उल्टा कर रही है। कांग्रेस ने इस देश के लिए जो कुछ भी संजोकर रखा, बीजेपी उसे मिटा रही है। उद्योगपतियों को दिया जा रहा सबकुछरेहाना रियाज ने कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह गुजरात से हैं। अंबानी और अडानी भी गुजरात से हैं। दो गुजरात के नेता, दो गुजरात के उद्योगपतियों को देश बेच रहे हैं। इससे बड़ी शर्मिंदगी क्या है? बाकी देश की जनता गौण हो चुकी है और दो लोगों के लिए पूरे देश को बेच रहे हैं और इनको सबक जनता ही सिखाएगी। जनता के हक में आम लोगों के लिए हमारे पुराने नेताओं ने जो किया है उसको बेचने का काम यह कर रहे हैं । अरावली बचाने के लिए खड़ी हुई जनता अरावली पर बोलते हुए उन्होंने कहा- पार्लियामेंट में वंदे मातरम् पर जो बहस कराई उसमें आने वाली पंक्ति “सुजलाम सुफलाम” का यदि भाजपा नेताओं को सही अर्थ पता होता, तो वे कभी ऐसे कार्य नहीं करते। धरती का श्रृंगार फूलों, फलों से, जल से और पहाड़ से है उसको नष्ट करने का जो आधुनिक दुशासन की तरह करने का काम इन्होंने जो किया है तो राजस्थान सहित जहां-जहां से अरावली गुजरती है वहां जनता खड़ी हो गई कृष्ण की तरह। ये लोग देश की जनता के लिए नहीं सोच रहे, ये अपने उद्योगपति मित्रों को अपने सोच रहे हैं देश की जनता के लिए यह नहीं सोच रहे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर्यावरण, संविधान और देश की मूल भावना की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी। इस दौरान शहर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष ओमकार वर्मा, पूर्व अध्यक्ष नरेश जोशी ,फिरोज खान, धनपत गुर्जर, राकेश चौधरी, महिला कांग्रेस की प्रदेश महासचिव रूबीना खान सहित कांग्रेस महिला नेता विजयलक्ष्मी पटेल, रेखा लोहिया, मुन्नी देवी गोदारा, फरजाना चौहान, दिव्या गहलोत, दि सपना सांखला, शबनम अब्बासी, अंजुला रोपिया, अनीता कुमारी आदि मौजूद रहीं।
Gujarat High Court ने आमिर खान के बेटे की पहली फिल्म महाराज की रिलीज पर लगी रोक हटाई
गुजरात उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को बॉलीवुड स्टार आमिर खान के बेटे जुनैद की पहली फिल्म महाराज की रिलीज पर लगी अंतरिम रोक हटाते हुए कहा कि फिल्म में कुछ भी अपमानजनक नहीं है और यह पुष्टिमार्ग संप्रदाय को निशाना नहीं बनाती है, जैसा कि याचिका में आरोप लगाया गया है। यह फिल्म 1862 के एक मानहानि मामले पर आधारित है, जिसमें वैष्णव धार्मिक नेता एवं समाज सुधारक करसनदास मुलजी शामिल थे। पुष्टिमार्ग संप्रदाय के कुछ सदस्यों ने नेटफ्लिक्स पर इस फिल्म की रिलीज के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें दावा किया गया था कि यह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। न्यायमूर्ति संगीता विशेन ने 13 जून को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्म की रिलीज पर अंतरिम रोक लगा दी थी।न्यायाधीश ने शुक्रवार को अपने आदेश में कहा कि फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा प्रमाणित किया गया है और यह उक्त संप्रदाय को निशाना नहीं बनाती है।
Gujarat HC ने Netflix को Maharaj रिलीज करने की अनुमति दी, कहा- इससे भावनाएं आहत नहीं होतीं
गुजरात उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को स्ट्रीमिंग दिग्गज नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘महाराज’ की रिलीज पर लगी अपनी अस्थायी रोक हटा ली, जिसमें कहा गया कि फिल्म महाराज 1862 के महाराज मानहानि मामले से जुड़ी घटनाओं पर आधारित है और इसका उद्देश्य किसी समुदाय की भावनाओं को आहत करना नहीं है। न्यायमूर्ति संगीता के. विशेन, जिन्होंने 13 जून को फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई थी, ने फिल्म देखने के बाद शुक्रवार को नेटफ्लिक्स को फिल्म स्ट्रीम करने की अनुमति देने का फैसला किया। इसे भी पढ़ें: Swara Bhasker के साथ कोई भी निर्माता-निर्देशक नहीं करना चाहता काम? एक्ट्रेस ने खुद किए चौंकाने वाले खुलासे अदालत ने कहा “यह अदालत प्रथम दृष्टया इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि फिल्म महाराज उन घटनाओं पर आधारित है, जिनके कारण मानहानि का मामला दायर किया गया और इसका उद्देश्य पुष्टिमार्गी समुदाय की भावनाओं को आहत करना नहीं है। फिल्म को संबंधित दिशा-निर्देशों पर विचार करने के बाद विशेषज्ञ निकाय केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा प्रमाणित किया गया था… 13 जून को दी गई अंतरिम राहत रद्द कर दी गई है। मूल रूप से 14 तारीख को रिलीज होने वाली इस फिल्म को हाईकोर्ट ने नेटफ्लिक्स पर रोक लगा दी थी, क्योंकि व्यापारियों के एक समूह ने इस आधार पर कोर्ट में याचिका दायर की थी कि इसमें वैष्णव समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की क्षमता है। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | नमक-मिर्च लगाकर कच्ची केरी के चटकारे ले रहीं परिणीति चोपड़ा, मिर्जापुर 3 का जबरदस्त ट्रेलर रिलीज फिल्म महाराज गुजराती लेखक सौरभ शाह की 2013 की किताब पर आधारित है, जो 1862 के ऐतिहासिक मानहानि मामले पर आधारित है, जो एक प्रमुख वैष्णव व्यक्ति, जदुनाथजी द्वारा समाज सुधारक करसनदास मुलजी के खिलाफ दायर किया गया था, जिन्होंने सर्वशक्तिमान महाराज द्वारा यौन शोषण के खिलाफ लिखा था। मुलजी ने अपनी पत्रिका सत्यप्रकाश में शोषणकारी प्रथा का खुलासा किया, जिसके कारण मानहानि का मामला चला, जो प्रसिद्ध महाराज मानहानि मामला बन गया। न्यायमूर्ति विशन ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की प्राथमिक शिकायत कि फिल्म वैष्णव समुदाय को बदनाम करती है, बदनाम करती है और उसका अपमान करती है, में कोई दम नहीं है। “इस प्रकार उनकी अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए बाध्य है कि याचिकाकर्ताओं की आशंका अनुमानों पर आधारित है। चूंकि फिल्म को अभी सार्वजनिक रूप से देखने के लिए जारी नहीं किया गया है, इसलिए केवल अनुमान के आधार पर संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित नहीं किया जा सकता है, अदालत ने कहा। उन्होंने खुली अदालत में आदेश सुनाते हुए कहा फिल्म का मुख्य संदेश, जैसा कि प्रतिवादी ने सही कहा है, यह है कि फिल्म सामाजिक बुराई और करसनदास मुलजी द्वारा सामाजिक सुधार के लिए लड़ाई पर केंद्रित है, जो स्वयं वैष्णव समुदाय से थे। उन्होंने कहा, फिल्म किसी भी तरह से धार्मिक भावनाओं को प्रभावित या आहत नहीं करती है। फिल्म यह निष्कर्ष निकालती है कि संप्रदाय किसी भी व्यक्ति या घटना से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। इस घटना को अपवाद मानते हुए वैष्णव संप्रदाय और उसके अनुयायी बढ़ते रहे और भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक ताने-बाने का गौरवपूर्ण और अभिन्न अंग बने रहे। यह आशंका जताई जा रही है कि इससे सांप्रदायिक विद्वेष पैदा होने की संभावना है। हालांकि, उसी मानहानि मामले के आधार पर 2013 में पुस्तक प्रकाशित हुई थी और किसी घटना की सूचना नहीं दी गई है। उन्होंने कहा, यहां तक कि याचिकाकर्ताओं ने भी यह दावा नहीं किया है कि पुस्तक से सांप्रदायिक विद्वेष पैदा हुआ है।
Salman Khan फायरिंग केस मेंक्राइम ब्रांच को गुजरात से मिला बड़ा कनेक्शन, मामले में हुआ अबतक का सबसे सनसनीखेज खुलासा
जेल से रिहा होने पर Elvish Yadav ने गुजरात में खेलीजबरदस्त होली, 'राव साहब' को अपने बीच देख क्रेजी हुए फैन्स

