प्रदेश के आगामी बजट को जन-केंद्रित और धरातल की जरूरतों से जोड़ने के लिए कलेक्ट्रेट सभागार में एक उच्च स्तरीय सुझाव बैठक आयोजित की गई। प्रभारी मंत्री अविनाश गहलोत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में झुंझुनूं के भविष्य की तस्वीर उकेरी गई। स्वास्थ्य, कृषि, तकनीक और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर प्रतिनिधियों ने खुलकर अपनी राय रखी, जिसे मंत्री ने सरकार के 'विजन-2030' की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। झुंझुनूं जिले के प्रभारी मंत्री अविनाश गहलोत ने बैठक को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का आगामी बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब होगा। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री का संकल्प है कि बजट निर्माण में जनता की सीधी भागीदारी हो। झुंझुनूं से प्राप्त ये सुझाव जिले के औद्योगिक विकास, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और युवा सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करेंगे। हम 'राइजिंग राजस्थान' के माध्यम से जिले में निवेश और रोजगार के नए द्वार खोलने की दिशा में काम कर रहे हैं। 1. चिकित्सा: 'कोटा मॉडल' और बुनियादी ढांचे पर जोर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 'कोटा मॉडल' लागू करने का सुझाव प्रमुखता से उठा। आरजीएचएस (RGHS) के तहत निजी अस्पतालों के रुके हुए भुगतान और एनओसी प्रक्रिया के सरलीकरण की मांग की गई। चिड़ावा, बगड़ और सिंघाना में ट्रॉमा सेंटर और उपजिला अस्पतालों में विशेषज्ञों की नियुक्ति को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया। 2. उद्योग और तकनीक: रोबोटिक्स से लेकर एयरपोर्ट तक झुंझुनूं को औद्योगिक हब बनाने के लिए दूरगामी सुझाव दिए गए। बबाई में एयरपोर्ट की स्थापना और हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) को पूरी क्षमता से पुनः संचालित करना। युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए आईटीआई में रोबोटिक्स और एआई (AI) कोर्स की शुरुआत। जिला स्तर पर ही जीएसटी पंजीकरण का विकेंद्रीकरण और औद्योगिक क्षेत्रों में ड्रेनेज व बिजली की पुख्ता व्यवस्था। 3. कृषि और गौ-सेवा: 'गोपालन क्रेडिट कार्ड' की अभिनव पहल खेती और पशुपालन को लाभ का सौदा बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रस्ताव आए। किसान क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर गोपालन क्रेडिट कार्ड जारी करने और जिले में 'एग्रो-टूरिज्म' नीति लागू करने का सुझाव। जैविक खेती के लिए पंजीकरण और भंडारण सुविधा के साथ-साथ चिड़ावा कृषि महाविद्यालय हेतु भूमि आवंटन की प्रक्रिया तेज करने की मांग। 4. महिला सशक्तिकरण: पीरियड लीव और मानदेय वृद्धि आधी आबादी के अधिकारों के लिए प्रतिनिधियों ने मजबूती से पक्ष रखा: कामकाजी महिलाओं के लिए 'पीरियड लीव' का प्रावधान और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि। राजीविका मार्ट की स्थापना और संविदा कर्मियों को आयुष्मान योजना के दायरे में लाने का प्रस्ताव। 5. न्याय और प्रशासन: उपभोक्ता कोर्ट और लैब उपभोक्ता आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने सुझाव दिया कि सांध्यकालीन उपभोक्ता कोर्ट की शुरुआत हो और खाद्य सामग्री में मिलावट की जांच के लिए जिला स्तर पर आधुनिक प्रयोगशाला खोली जाए। ये रहे मौजूद इस महत्वपूर्ण मंथन में झुंझुनूं विधायक राजेंद्र भांबू, जिला प्रमुख हर्षिनी कुलहरी, पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी व सुभाष पूनिया, जिला कलक्टर डॉ. अरुण गर्ग और एसपी बृजेश ज्योति उपाध्याय सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।
Share Market holiday: NSE ने दी बड़ी अपडेट, 15 जनवरी को बंद रहेगा शेयर मार्केट, जानिए क्या है कारण?
NSE, BSE holiday January 15: मुंबई में बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) चुनावों के कारण गुरुवार 15 जनवरी को शेयर बाजार बंद रहेगा. ये जानकारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया द्वारा सोमवार को जारी एक सर्कुलर में आई है.
TCS Q3 Results : मंदी के संकेत या मजबूती? राजस्व बढ़ा पर मुनाफा घटा; जाने विस्तार से
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के Q3 परिणामों की विस्तृत रिपोर्ट: राजस्व ₹67,087 करोड़ के पार, जो अनुमानों से अधिक है। मुनाफे में 11.7% की गिरावट के बावजूद कंपनी ने ₹57 प्रति शेयर के बंपर लाभांश (डिविडेंड) का किया ऐलान। एआई (AI) रणनीति और भविष्य की तकनीकी योजनाओं पर टीसीएस का बड़ा दांव। शेयर बाजार की ताजा स्थिति और वित्तीय विश्लेषण यहाँ पढ़ें।
सवाई माधोपुर के सूरवाल थाना पुलिस ने 'एंटी वायरस' अभियान के तहत शातिर साइबर ठग शिवराज प्रजापत को गिरफ्तार किया है। अभियुक्त निवेश के नाम पर पैसा दोगुना करने का झांसा देकर लोगों से ठगी करता था। पुलिस ने उसके कब्जे से 3 एटीएम, 7 सिम कार्ड और पेन ड्राइव बरामद की है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
सवाई माधोपुर: निवेश के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, पुलिस के हत्थे चढ़ा शातिर साइबर ठग
सवाई माधोपुर पुलिस ने निवेश के नाम पर पैसा चार गुना करने का झांसा देने वाले शातिर साइबर ठग दशरथ मीना को गिरफ्तार किया है। एसपी अनिल कुमार के निर्देशन में मानटाउन थाना पुलिस ने कलेक्ट्री के पीछे से आरोपी को धर दबोचा और मोबाइल जप्त किया। पढ़ें कैसे १८ साल का यह युवक डिजिटल माध्यमों से लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना रहा था और पुलिस ने किस तरह इस नेटवर्क का खुलासा किया।
हफ्ते की शुरुआत में शेयर बाजार को झटका; भारी बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स लाल निशान में खुला
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेतों और निवेशकों की सतर्कता के चलते सेंसेक्स लाल निशान में खुला। बैंकिंग और आईटी शेयरों में दबाव से बाजार की शुरुआत कमजोर रही।
Stock Market: शेयर बाजार में पिछले कुछ दिन से तेज गिरावट का दौर जारी है. दुनियाभर में चल रहे हालात के बीच निवेशक इनवेस्टमेंट के लिए सुरक्षित विकल्प तलाश रहे हैं. ऐसे में एफआईआई (FII) बाजार से तेजी से निकासी कर रहे हैं.
शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली के चलते सेंसेक्स 450 अंक टूट गया और निफ्टी 25,600 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे गिर गया। वैश्विक तनाव और अमेरिकी नीतियों के असर से निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है। इस लेख में जानें बाजार क्रैश के मुख्य कारण, सेक्टर-वार विश्लेषण और निवेशकों पर इसके प्रभाव की पूरी रिपोर्ट।
शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी, सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा टूटा
विदेशों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजारों गिरावट रही और बीएसई का सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 500 अंक से अधिक टूट गया
भारतीय शेयर बाजार आज सीमित दायरे में खुलने के संकेत दे रहा है। शुरुआती संकेतों में अस्थिरता और सतर्कता का माहौल साफ नजर आ रहा है। वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशक फिलहाल बड़ा जोखिम लेने से बचते दिख रहे हैं। जानिए पूरी रिपोर्ट।
स्वच्छ ऊर्जा में भारत दे रहा है 300 अरब डॉलर का निवेश अवसर : प्रल्हाद जोशी
केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने रविवार को कहा कि भारत वर्ष 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन, ग्रिड और विनिर्माण क्षेत्रों में लगभग 300 अरब डॉलर का निवेश अवसर प्रदान करता है
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी और बिजली के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारों के बाद अब राज्य सरकार ने बिहार को उद्योग और निवेश का हब बनाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार अब विकास की पटरी पर तेज़ी से दौड़ रहा है और उद्योगों के माध्यम से राज्य की आर्थिक रफ्तार को नई ऊंचाई दी जाएगी। 15 दिनों में पूरी होगी प्रक्रिया, मिलेगा आसान लोन सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार उद्योग लगाने के लिए भूमि उपलब्ध करा रही है और सभी जरूरी प्रक्रियाएं महज 15 दिनों के भीतर पूरी की जा रही हैं। इसके साथ ही उद्योगों की स्थापना के लिए बैंकों के माध्यम से अधिक से अधिक ऋण उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की गई है, ताकि निवेशकों को किसी तरह की परेशानी न हो। पटना क्लब में बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा आयोजित ‘पधारो म्हारो देश’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए उद्योगों का मजबूत होना बेहद जरूरी है। उद्योग लगेंगे तो बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे, आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और बिहार समृद्धि की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा। निवेशकों को सुरक्षा और भरोसे का माहौल उन्होंने कहा कि अब वह दौर पीछे छूट चुका है जब बिहार को केवल पिछड़े राज्य के रूप में देखा जाता था। आज बिहार में आधारभूत संरचना में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। सड़क, बिजली और पानी की बेहतर व्यवस्था के बाद अब राज्य सरकार की प्राथमिकता औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देना है। सम्राट चौधरी ने उद्योगपतियों और निवेशकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि वे निश्चिंत होकर बिहार में निवेश करें। राज्य सरकार उनकी सुरक्षा और सुविधा की पूरी गारंटी देती है। बिहार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह मजबूत है और किसी को भी उद्योगपतियों या व्यापारियों को परेशान करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। अपराधियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। बिहार अब निवेश और व्यवसाय के लिए पूरी तरह सुरक्षित, भयमुक्त और अनुकूल राज्य बन चुका है। कचरे की सफाई से लेकर सिस्टम की सफाई तक उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में केवल सड़कों और शहरों की सफाई ही नहीं हो रही, बल्कि सिस्टम को भी दुरुस्त किया जा रहा है। जहां-जहां गंदगी या अव्यवस्था है, वहां तेजी से सुधार किया जा रहा है और जरूरत पड़ी तो और भी तेज़ी से सफाई अभियान चलाया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि निवेशकों को सिंगल विंडो सिस्टम के तहत त्वरित मंजूरी मिले और उन्हें दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि उद्योगों के आने से न केवल निवेश बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा। इससे पलायन रुकेगा और बिहार के युवाओं को अपने ही राज्य में बेहतर भविष्य मिलेगा। बिहार सरकार उद्योगों और निवेशकों को हरसंभव सहयोग देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आने वाले समय में बिहार को देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों की कतार में खड़ा किया जाएगा।
वैश्विक संकट का 2026 में भारतीय शेयर बाजार पर क्या होगा असर? जान लीजिए पूरी कहानी
वेनेजुएला-अमेरिका संकट, ईरान में अस्थिरता और भारत के रूसी तेल आयात के बारे में ट्रंप के हालिया बयानों से चिंता पैदा हो गई हैं. इस बात पर भी अनिश्चितता बढ़ गई है कि भारत पर 25% पेनल्टी टैरिफ कम किया जाएगा या लागू रहेगा.
LIC Jeevan Utsav: सिर्फ एक बार का निवेश, लाइफटाइम फायदा! जानिए क्या है इस स्कीम की खासियत?
लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC)ने 'जीवन उत्सव' नाम का एक सिंगल प्रीमियम लाइफ इंश्योरेंस प्रोडक्ट कर दिया है. ये एक नॉन-पार्टिसिपेटिंग, नॉन-लिंक्ड, इंडिविजुअल सेविंग्स और होल लाइफ इंश्योरेंस प्लान है.
यमुनानगर में बायोगैस प्लांट में निवेश कर रकम दोगुनी करने का झांसा देकर 2.50 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित का आरोप है कि पैसे मांगने पर आरोपियों ने पहले चेक दिया, जो बाउंस हो गया, और बाद में जान से मारने व झूठे केस में फंसाने की धमकियां दीं। शिकायत के बाद पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गांधी नगर थाना पुलिस को दी शिकायत में वरिंद्र कुमार, निवासी कुलदीप नगर ने बताया कि जगतार सिंह, उसकी पत्नी संगीता, राजेश लाठर, कृष्ण लाठर और मोहम्मद शाहनवाज द्वारा सरकारी नियंत्रण में चल रहे RNJ बायो ग्रीन सर्विस गुहाण वाबैन रोड, बायोगैस प्लांट में निवेश का झांसा देकर उसकी रकम दोगुनी करने का लालच दिया गया। इसी बहाने आरोपियों ने उससे कुल 2 लाख 50 हजार रुपए ले लिए। बैंक में लगाया चेक हुआ बाउंस शिकायतकर्ता ने बताया कि जब काफी समय बीत जाने के बाद भी उसे न तो कोई लाभ मिला और न ही उसकी मूल रकम वापस की गई, तो उसने इस संबंध में पहले पुलिस अधीक्षक यमुनानगर को शिकायत दी, जिसे जांच के लिए आर्थिक अपराध शाखा भेजा गया। थाना स्तर पर बुलाए जाने पर आरोपियों ने समझौते का आश्वासन देते हुए उसकी पूरी रकम लौटाने की बात कही और बदले में एक चेक दिया। हालांकि जब शिकायतकर्ता ने वह चेक बैंक में लगाया तो खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इस पर जब उसने आरोपियों से संपर्क कर अपने पैसे वापस मांगे, तो उन्होंने न केवल पैसे देने से इनकार कर दिया बल्कि उसके साथ गाली-गलौच की और गंभीर धमकियां दीं। झूठे रेप केस में फंसाने की धमकी शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपियों ने उसे जान से मारने, झूठे रेप के केस में फंसाने और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। उन्होंने कहा कि शिकायत देकर उसने गलती की है और अब उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इन धमकियों के कारण शिकायतकर्ता को अपनी जान का लगातार खतरा महसूस हो रहा है और उसे आशंका है कि आरोपी उसके साथ कोई गंभीर अनहोनी कर सकते हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर शिकायतकर्ता ने पुलिस से मांग की कि उसके साथ हुई धोखाधड़ी, चेक बाउंस और जान से मारने की धमकियों को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी राजेश लाठर व मोहम्मद शाहनवाज के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
आने वाले सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है. देश और दुनिया से जुड़े कई मामले बाजार को प्रभावित कर सकते हैं.
हरियाणा के हिसार में हाउसिंग बोर्ड में रहने वाले रिटायर्ड बैंक मैनेजर से 96 लाख 61 हजार 990 रुपए की साइबर ठगी करने वाले का पता चल गया है। साइबर थाना पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह के एक और सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान गुजरात के सूरत निवासी रोहित शिवाभाई भूटानी के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। जांच अधिकारी उप निरीक्षक नरेंद्र सिंह ने बताया कि साइबर थाना हिसार को NCCRP पोर्टल के माध्यम से एक शिकायत मिली थी। शिकायतकर्ता, जो एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी है, ने बताया कि उसे वॉट्सऐप के जरिए शेयर बाजार में निवेश पर अधिक लाभ का लालच दिया गया था। उससे लालच देकर निवेश करवाया और बाद में रुपए नहीं लौटाए और अब मुंबई के उनके ऑफिस गया तो वहां पता फर्जी निकला था। रिटायर्ड बैंक मैनेजर ने बताया था इस तरह फ्रॉड हुआ... इससे पहले कर्नाटक का आरोपी गिरफ्तार हुआ इससे पहले पुलिस कर्नाटक से आरोपी मेघा मार्डोलकर को गिरफ्तार कर 3 लाख 20 हजार रुपए और एक मोबाइल फोन बरामद कर चुकी है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी फर्जी नामों पर बैंक खाते और सिम कार्ड खुलवाकर गिरोह को उपलब्ध कराते थे, जिसके बदले उन्हें कमीशन मिलता था। गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि गिरोह के तार विदेशों तक जुड़े होने के अहम सबूत मिले हैं और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
निवेश करने पर मोटा मुनाफा होने का झांसा दिया, 10 लाख की ठगी कर ली
साइबर अपराधियों ने आठ लोगों से ठगी की है। सभी मामले साइबर थाने में दर्ज किए गए हैं। बाढ़ के राहुल रौशन से शातिरों ने 10 लाख की ठगी कर ली। राहुल ने पुलिस को बताया कि टेलीग्राम पर शातिरों ने निवेश करने पर मोटा मुनाफा मिलने का झांसा दिया। इसके बाद एक ग्रुप में जोड़ दिया। उस ग्रुप में दर्जनों लोग थे, जो मुनाफा मिलने का स्क्रीनशॉट शेयर कर रहे थे। राहुल भी निवेश करने लगे। 10 लाख निवेश करने के बाद जब रकम निकालनी चाही तो ठगी का अहसास हुआ। बिजली बिल के नाम पर भी शातिर ठगी कर रहे हैं। एसटीएफ जवान जवाहर लाल राय की प|ी के मोबाइल पर बिजली अधिकारी बनकर फोन किया। कहा-आपका कनेक्शन काट दिया जाएगा, नहीं तो तुरंत 10 रुपए का रिचार्ज करें। उन्हें एक एप इंस्टॉल भी करवाया। एप पर जैसे ही 10 रुपए का रिचार्ज किया, उनका मोबाइल हैक हो गया और खाते से 35 हजार की निकासी हो गई। बिजली अधिकारी बनकर ही दीघा के ललन प्रसाद को फोन किया और 125 यूनिट फ्री बिजली के नाम पर 97 हजार की ठगी कर ली। दो को एपीके फाइल भेज खाता साफ किया : बिहटा के राजेश कुमार सचिवालय में कार्यरत हैं। शातिर ने उन्हें एपीके फाइल भेजी। उसमें एफआईआर लिखी थी। उन्होंने एपीके फाइल पर क्लिक कर दिया। उनका मोबाइल हैक हो गया और खाते से 1.24 लाख की निकासी हो गई। इसी तरह कोतवाली इलाके के रहने वाले डॉ. प्रभात को शातिर ने आरटीओ चालान लिखा एपीके फाइल भेजी। उन्होंने भी चालान देखने के लिए फाइल पर क्लिक कर दिया। इसके बाद उनका मोबाइल हैक हो गया और खाते से करीब दो लाख की निकासी हो गई। साइबर अपराधियों ने खाते से 9.42 लाख निकाले थे, सालभर बाद 3.83 लाख लौटेसाइबर अपराधियों ने एक साल पहले राजीवनगर के बुजुर्ग दीपक चंद्र के खाते से 9.42 लाख रुपए की निकासी कर ली थी। पुलिस ने बैंक की मदद से उन्हें 3,82,896 रुपए लौटवा दिए। रकम लौटने के लिए उन्हें साइबर थाने बुलाया गया था। साइबर थाने के डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि बंगाल के साइबर अपराधियों ने ठगी की थी। गेल इंडिया की गैस का बकाया भुगतान करने के लिए लिंक भेजा था। उनके खाते से 9.42 लाख रुपए निकल गए थे। जैसे ही उन्होंने लिंक को टच किया, उनके पांच एफडी टूट गए और रकम साइबर अपराधियों के खाते में चले गई। दीपक को उम्मीद नहीं थी कि इतनी भी रकम लौट पाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस ने बेहतर काम किया है। पिछले साल ठगी के शिकार 160 लोगों को 3.50 करोड़ रुपए लौटाए गए थे। ऐसे बचा पैसा : साइबर थाने में फौरन केस किया साइबर थाने के डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि खाते से निकासी होते ही दीपक ने शिकायत की। साइबर अपराधियों ने कई खातों में छोटी-छोटी रकम भेज दी थी। पुलिस ने बैंकों से संपर्क कर दो खातों को होल्ड कराया,जिनसे रकम अभी नहीं निकाली गई थी। बैंक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 3,82,896 रुपए की वापसी हो गई। जिन दो खातों को होल्ड कराया गया था, वे बंगाल के हावड़ा के हैं। पुलिस ने दोनों खाताधारकों की पहचान करली है। जल्द ही दोनों की गिरफ्तारी होगी। पाटलिपुत्र के सुशील कुमार ने फ्लिप कार्ट से सामान मंगवाया। पसंद नहीं आने पर रिटर्न कर दिया। पैसे की वापसी के लिए उन्होंने गूगल से फ्लिप कार्ट का नंबर लिया। नंबर शातिर का निकला। शातिर ने रिफंड का झांसा देकर उनसे 1.19 लाख की ठगी कर ली। उधर आलमगंज के असर अहमद से करीब 31 हजार और कदमकुआं के सौरव यादव से 98 हजार की ठगी कर ली।
अगले हफ्ते इस दिन आ रहा साल का सबसे बड़ा IPO, BCCL से भी अधिक जुटाएगा पैसा; जानिए 10 बड़ी बातें
Mainboard IPO: Amagi Media Labs का आईपीओ 4,95,46,221 करोड़ शेयरों का बुक बिल्ड इश्यू है. इसके सेल टाइप की बात करें तो यह फ्रेश इश्यू और Offer For Sale दोनों है. यह 2,26,03,878 करोड़ शेयरों का फ्रेश इश्यू और 2,69,42,343 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल है.
टैरिफ पर US सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले गोल्ड पर निवेशकों की नजर, मौका या जोखिम?
2026 में MCX सोने का रेट ₹1,35,447 से बढ़कर ₹1,38,875 प्रति 10 ग्राम हो गया है.गोल्ड में 2026 में निवेशकों को लगभग 2.50% का रिटर्न मिला है.
ट्रंप की तेज चाल से शेयर बाजार धड़ाम, अगले सप्ताह कैसी रहेगी बाजार की चाल?
Share market review Market ki Baat : भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछले 5 दिन बेहद खराब रहे। सेंसेक्स 2185 अंक गिरा तो निफ्टी में भी 684 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। 9 जनवरी को समाप्त हु्ए हफ्ते में सेंसेक्स 83,576 और निफ्टी 25,683 के मनौवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बंद हुआ। जानिए मार्केट ट्रेड और निवेशकों के लिए कैसा रहेगा आने वाला सप्ताह। कैसी रही सेंसेक्स और निफ्टी की चाल : हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सेंसेक्स 322 अंक गिरकर 85,440 पर पहुंचा। निफ्टी 78 अंकों की बढ़त के साथ 26,250 पर बंद हुआ। मंगलवार को सेंसेक्स 376 अंक और निफ्टी 72 गिर गया। बुधवार को लगातार तीसरे दिन भी शेयर बाजार में गिरावट आई। सेंसेक्स 102 अंक की गिरावट के साथ 84,961 के स्तर पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी 77 अंक की गिरावट के साथ 26064 के स्तर पर बंद हुआ। हफ्ते के चौथे दिन गुरुवार को भी शेयर बाजार में भारी गिरावट आई। सेंसेक्स 780 अंक फिसला तो निफ्टी भी 264 अंक लुढ़का। हफ्ते के आखिरी दिन सेंसेक्स 605 अंक की गिरावट के साथ 83576 के स्तर पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी 194 अंक की गिरावट के साथ 25683 के स्तर पर बंद हुआ। गिरावट के चलते सेंसेक्स में निवेशकों के 13 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा डूब गए। इन फैक्टर्स से तय हुई बाजार की चाल : अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के 500 प्रतिशत टैरिफ बिल, वेनेजुएला के तेल पर अमेरिकी कब्जा, रूस और ईरान के साथ अमेरिका के बढ़ते तनाव की वजह से इस हफ्ते बाजार लगातार गिरता चला गया। गिरावट के दौर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में जमकर बिकवाली की। रिलायंस और एचडीएफसी बैंक जैसे बड़े शेयरों में गिरावट और वैश्विक बाजारों से आ रहे कमजोर संकेतों के कारण भी शेयर बाजार में गिरावट आई। आईआरसीटीसी समेत कई कंपनियों के स्टाक्स बीएसई में 52 हफ्ते के अपने निचले स्तर पर पहुंच गए। कैसा रहेगा अगला हफ्ता : बाजार विशेषज्ञ मनीष उपाध्याय ने कहा कि अगले हफ्ते दुनिया भर के शेयर बाजारों की चाल ट्रंप के एक्शन पर निर्भर करेगी। अगर वे ग्रीनलैंड, कोलंबिया या ईरान पर कार्रवाई करते हैं तो इससे तनाव बढ़ेगा और बाजार में और गिरावट दिखाई देगी। अगर रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ बढ़ता है तो भी भारतीय बाजारों पर इसका नकारात्मक असर होगा। वहीं टैरिफ घटना पर बाजार की चाल सकारात्मक हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही उठापटक को देखते हुए निवेशक फिलहाल सतर्क रूख अपनाए हुए हैं। भारत की नजर सोमवार को टैरिफ पर आने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी लगी हुई है। अमेरिकी संसद में आने वाले 500 प्रतिशत टैरिफ संबंधी बिल पर भी सभी की निगाहें हैं। फिलहाल बाजार में मंदड़िए हावी है और आने वाले दिनों में बाजार में बिकवाली का दौर जारी रहने की संभावना है। 15 जनवरी को खुले रहेंगे बाजार : महाराष्ट्र में गुरुवार, 15 जनवरी को नगर निगम के चुनाव होने वाले हैं। लेकिन इस दिन नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर ट्रेडिंग जारी रहेगी। हालांकि स्टॉक एक्सचेंज ने सदस्यों को सूचित किया है कि 15 जनवरी को T+0 सेटलमेंट नंबर 2026511 नहीं होगा। इस वजह से सेटलमेंट प्रभावित हो सकते हैं। अस्वीकरण : यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।
बदलेगा शेयर बाजार का नियम, पहले से आसान हो जाएगा ट्रेडिंग करना; क्या है सेबी का प्रपोजल?
SEBI: सेबी की तरफ से बयान में कहा गया कि करीब 54 नियमों में बदलाव की सिफारिश की गई है. इसमें इक्विटी और कमोडिटी सेगमेंट दोनों को सिंगल स्ट्रक्चर में कवर करने वाले नियम शामिल हैं.
आज शेयर बाजार में HCL Tech, Infosys, TCS, Titan और Maruti Suzuki के शेयरों पर निवेशकों की खास नजर बनी हुई है। वैश्विक संकेतों, सेक्टोरल रुझानों और कंपनियों के हालिया प्रदर्शन के बीच इन दिग्गजों की चाल बाजार की दिशा तय कर सकती है। पढ़ें पूरी खबर।
क्या भारतीय शेयर बाजार में आने वाला है बड़ा भूचाल? आईटी और बैंकिंग शेयरों में मची भारी उथल-पुथल
आज के शेयर बाजार में आईटी, बैंकिंग और सरकारी सेक्टर के शेयरों में जबरदस्त उथल-पुथल देखी गई। बाजार के इन प्रमुख क्षेत्रों में तेजी और गिरावट के दोहरे अटैक ने निवेशकों को उलझन में डाल दिया है। दलाल स्ट्रीट पर मची इस हलचल के पीछे के मुख्य कारण और विस्तृत विश्लेषण को जानने के लिए पढ़ें हमारी यह विशेष रिपोर्ट।
क्या निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है? सेंसेक्स-निफ्टी की आज की नरमी ने बाजार में बढ़ाई बेचैनी
आज के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी नरम रुख के साथ ट्रेड करते नजर आए। वैश्विक संकेतों की अनिश्चितता, ब्याज दरों को लेकर चिंता और निवेशकों की सतर्कता ने बाजार की दिशा को प्रभावित किया। इस रिपोर्ट में जानिए आज की गिरावट के पीछे के कारण, निवेशकों की रणनीति और आने वाले समय के संभावित संकेत।
डगमगाती वैश्विक अर्थव्यवस्था और ब्याज दरों का डर: क्या निवेशकों का भरोसा फिर से हिल रहा है?
वैश्विक कमजोर संकेतों और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच शेयर बाजारों में बिकवाली का दबाव बढ़ता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सुस्ती, केंद्रीय बैंकों की नीतियां और निवेशकों की चिंता ने बाजार को अस्थिर कर दिया है। जानिए इस दबाव के पीछे के कारण और इसका निवेशकों पर असर।
क्या निवेशकों की मेहनत डूब गई? इस सप्ताह शेयर बाजार से गायब हुए ₹13 लाख करोड़, जानिए पूरी कहानी
इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसमें लगभग ₹13 लाख करोड़ की पूंजी साफ हो गई। सेंसेक्स और निफ्टी में कमजोरी, वैश्विक संकेतों का असर और निवेशकों में बढ़ती चिंता ने बाजार को हिला दिया। जानिए इस गिरावट के पीछे के कारण और इसका निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ा।
वॉर्मअप वेंचर्स का एनुअल ईव 2.0; जुटेदेश के स्टार्टअप फाउंडर्स और निवेशक
सिटी रिपोर्टर }जयपुर में वॉर्मअप वेंचर्स की ओर से ‘वॉर्मअप वेंचर्स एनुअल ईव 2.0’ का आयोजन आईटीसी राजपूताना में किया गया। इस एक्सक्लूसिव इवेंट में देशभर से स्टार्टअप फाउंडर्स, निवेशक और वेंचर कैपिटल फर्म्स के प्रतिनिधि शामिल हुए। आयोजन का उद्देश्य इनोवेशन, सहयोग और दीर्घकालिक साझेदारी को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम का नेतृत्व योगेश चौधरी, राजेंद्र लोरा और शरद बंसल ने किया। स्टार्टअप ग्रोथ और फंड परफॉर्मेंस पर चर्चाएं कार्यक्रम की शुरुआत आदित्य गुप्ता (द रग रिपब्लिक) के सत्र ‘फाउंडेशन से स्केल तक’ से हुई। इसके बाद तीन चरणों में स्टार्टअप ग्रोथ जर्नी 0→1x, 1→10x और 10→100x पर पैनल चर्चाएं हुईं। ‘फंड परफॉर्मेंस: आउटकम्स, इनसाइट्स और लर्निंग्स’ सत्र में वॉर्मअप वेंचर्स की निवेश रणनीति और भविष्य की दिशा पर भी विमर्श हुआ।
भोपाल में निवेश की पथरीली जमीन:आईटी पार्क - 12 साल बाद भी ‘नॉट फाउंड’
एरर 404 : फाइल नॉट फाउंड... इंटरनेट पर जब फाइल नहीं खुलती तो यही मैसेज दिखता है। भोपाल के आईटी पार्क की भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। साल 2013 में भोपाल को इसका सपना दिखाया गया था, लेकिन 12 साल बाद भी इसमें 40 आईटी कंपनियां ही आ पाई हैं। दरअसल, पार्क के लिए गांधीनगर क्षेत्र में जो जमीन दी गई, वह ऊबड़-खाबड़ है। निवेशकों को 2-3 साल जमीन समतल करने में ही लग जाते हैं। प्रोजेक्ट डेवलपमेंट की शुरुआती समयसीमा ही 3 साल है। यही वजह है कि यहां नई कंपनियां आने में हिचकिचा रही हैं। आईटी पार्क के डेवलपमेंट का काम मप्र हाउसिंग बोर्ड को मिला था। बोर्ड ने कुछ अंदरूनी रास्ते बनाकर और आधी-अधूरी सीवेज सुविधा देकर पार्क मप्र स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) को यह हैंडओवर कर दिया था। इसमें कई प्लॉट भू स्तर से 30 फीट ऊंचे-नीचे हैं। भोपाल को आईटी सिटी बनाने का दावा, एक आईटी पार्क नहीं बसा सके 21 निवेशक तो कानूनी विवाद में ही उलझे 204 एकड़ के पार्क मेंं बमुश्किल 100 एकड़ जमीन आवंटित हुई है। इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर में 21-22 आईटी मैन्युफैक्चरिंग फर्म हैं। वहीं,18 आईटी फर्म हैं। 21 निवेशक अलग-अलग कोर्ट में एमपी स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के साथ कानूनी विवाद में हैं, क्योंकि इनके जमीन आवंटन को रद्द कर दिया गया था। पानी-बिजली कनेक्शन तक नहीं दिए 1जलापूर्ति व ड्रेनेज व्यवस्था पर्याप्त नहीं। बड़ी कंपनियों को हाईटेंशन लाइन कनेक्शन व पानी की व्यवस्था खुद करनी पड़ी।2 कई निवेशकों को 50 लाख से एक करोड़ रुपए तक की राशि सिर्फ जमीन को समतल करने में ही लगानी पड़ रही है।3 कॉमन फैसिलिटीज अब भी एमपीएसईडीसी के पास ही हैं। इसे उद्योगों को हैंड ओवर नहीं किया गया है। चिंता... ग्वालियर और जबलपुर में भी यही हाल हमने टेंडर में बता दिया था- भूखंड जैसा है, उसी स्थिति में आवंटित होगा निवेशक भूमि सरंचना देखकर बिल्डिंग डिजाइन करते तो अनावश्यक खर्च से बच सकते थे। टेंडर में साफ लिखा था कि भूखंड जैसी स्थिति में है, वैसा ही आवंटित होगा। पार्क में सीमित लोड के एचटी और एलटी कनेक्शन उपलब्ध हैंl भवन निर्माण के लिए पानी का इंतजाम निर्माणकर्ता को स्वयं करना होता है। यहां 40 कंपनियां हैं। इनमें करीब 2500 युवा काम कर रहे हैं।' -आशीष वशिष्ठ, एमडी, एमपीएसईडीसी
देश के लिए फायदेमंद है चाइल्ड केयर में निवेश करना
न्यूयार्क में मेयर का चुनाव जीतने वाले जोहरान ममदानी की जीत का एक बड़ा कारण शहर के सभी बच्चों के लिए राज्य प्रायोजित चाइल्ड केयर की गारंटी देना था।
मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग ने क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से 'G-Hub' पहल शुरू की है। इसी के तहत धार जिले में समग्र आर्थिक विकास और निवेश संभावनाओं पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस पहल के अंतर्गत भोपाल आर्थिक क्षेत्र (BER) और इंदौर आर्थिक क्षेत्र (IER) को विकास के प्रमुख इंजन के रूप में विकसित किया जा रहा है। नीति आयोग, भारत सरकार की प्रिंसिपल इकनॉमिक एडवाइजर एना रॉय के नेतृत्व में 14 सदस्यीय दल ने धार जिले के पीथमपुर मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य की प्रगति संतोषजनक पाई गई। दल ने परियोजना से जुड़ी चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की। कलेक्टर की मौजूदगी में समीक्षा बैठक भी हुईभ्रमण के बाद, कलेक्टर कार्यालय धार में कलेक्टर प्रियंक मिश्रा की उपस्थिति में एक जिला स्तरीय समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में विजन-2047 और दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर (DMIC) के तहत धार जिले में उपलब्ध विकास अवसरों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। कलेक्टर ने बताया कि धार जिले का लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्र DMIC प्रभाव क्षेत्र में आता है। पीथमपुर-धार-महू निवेश क्षेत्र एक पूर्ण विकसित नोड के रूप में कार्य कर रहा है। जिले में औद्योगिक पार्कों की अधिक संख्या के कारण सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण क्षेत्र का योगदान लगभग 60 प्रतिशत है। ऑटोमोबाइल, वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण और डेटा सेंटर को प्रमुख विकास क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया गया। पर्यटन संभावनाओं पर भी चर्चा हुईबैठक में मांडू पर्यटन, इको-टूरिज्म, नर्मदा क्रूज़ पर्यटन सर्किट, बाग क्षेत्र में जियो पार्क जैसी पर्यटन संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त, सौर एवं पवन ऊर्जा परियोजनाएं, कृषि आधारित उद्योग और किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। समन्वित विकास के लिए रेल परियोजनाओं, निजी निवेश, कौशल विकास और उद्योग आधारित आईटीआई की स्थापना पर जोर दिया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी, औद्योगिक प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
पटना AIIMS के कैशियर अनुराग अमन को गबन के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उस पर शेयर बाजार में 70 लाख रुपए डूबने के बाद एम्स के कैश से 42.95 लाख रुपए निकालने का आरोप है। यह राशि अमन ने अपनी पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए थे। जानकारी के अनुसार, अनुराग अमल ने 1 अप्रैल 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच अलग-अलग तारीखों में कुल 44 लाख 50 हजार रुपए निकाले थे। 4 जनवरी 2026 को एम्स के कैश सत्यापन के दौरान कैश वॉल्ट में 1 लाख 51 हजार 280 रुपए नगद पाए गए, जबकि 42 लाख 95 हजार 720 रुपए की कमी दर्ज की गई। आरोपी बोला- पत्नी के खाते में ट्रांसफर कराया था पैसा शुक्रवार को सिटी एसपी पश्चिम भानु प्रताप सिंह ने पीसी की। इस दौरान बताया गया कि पूछताछ के दौरान मुख्य कैशियर अनुराग अमन ने स्वीकार किया कि उन्होंने एम्स के कैश से 42 लाख 99 हजार रुपए की राशि निकाली थी। यह पैसा उन्होंने अपनी पत्नी के बैंक ऑफ इंडिया के खाते में जमा कराया था। साक्ष्य के आधार पर पुलिस उनकी पत्नी से भी पूछताछ कर सकती है। एम्स प्रशासन को 3 किस्तों में वापस किए पैसे मामला सामने आने के बाद एम्स प्रशासन ने अनुराग अमल पर पैसे वापस जमा करने का दबाव बनाया। इसके बाद उन्होंने पटना एम्स के खाते में तीन अलग-अलग किस्तों में 42 लाख 95 हजार रुपए की राशि जमा करा दी। पहली किस्त में 16 लाख 50000 रुपए 5 जनवरी को, दूसरी किस्त में 11 लाख 11 हजार 5 जनवरी 2026 को और तीसरी किस्त में 15 लाख 34 हजार रुपए 6 जनवरी 2026 को जमा कराया गया। इसे वित्तीय अनियमितता मानते हुए 7 जनवरी 2026 को पटना एम्स के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी राजकुमार जालान ने फुलवारी शरीफ थाने में मुख्य कैशियर अनुराग अमन को गबन का आरोपी बनाते हुए मामला दर्ज कराया। इसके बाद फुलवारी शरीफ थाने की पुलिस ने अनुराग अमन को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में यह बात सामने आयी कि अनुराग अमन ने क्रिप्टो करेंसी शेयर मार्केट से लगभग 70 लाख रुपए गंवाने के बाद कर्ज में डूब गए थे। मामले की जांच जारी इसी की भरपाई के लिए उन्होंने पटना एम्स के कैसे राशि की निकासी की थी। इस मामले को लेकर सिटी एसपी पश्चिम भानु प्रताप सिंह ने बताया कि अनुराग अमन को गिरफ्तार कर पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस का यह मानना है कि अगर अनुराग अमन के पत्नी की संलिप्तता इस मामले में सामने आती है तो अनुराग अमन के पत्नी से भी पूछताछ की जा सकती है। दो साल से ओपीडी काउंटर पर तैनात था अनुराग दाे साल से अधिक समय से ओपीडी काउंटर पर तैनात था। इस काउंटर पर जमा की गई राशि एम्स के खाते में नहीं पहुंची थी। यह खुलासा अकाउंट अफसर पीयूष आनंद द्वारा कराई गई आंतरिक ऑडिट के दौरान हुआ। कैश बुक, भुगतान रजिस्टर, रसीदों और बैंक खातों के मिलान में भारी अंतर सामने आया। विस्तृत जांच हाेने पर 44.50 लाख का हिसाब नहीं मिला। ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद पांच दिन पहले ही एम्स प्रशासन को गबन की जानकारी हाे गई थी। जब डॉक्टरों और कर्मियों से लेकर मीडिया में खबर आ गई ताे उसे निलंबित करने के साथ केस दर्ज किया गया। नौकरी से बर्खास्त भी हाे सकता है एम्स प्रशासन ने मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी है। अनुराग को वित्तीय जिम्मेदारी से हटा दिया गया है। आरोप सही पाए जाने पर उसकी बर्खास्तगी भी हाे सकती है। जांच दूसरी एजेंसी से भी कराई जा सकती है।
प्रयागराज में तेलियरगंज के नौसेना कर्मी समेत चार लोगों को साइबर ठगों ने 79.43 लाख रुपए का चूना लगाया। ठगों ने बैंक खाते में पैसे लौटाने और शेयर बाजार में निवेश का लालच देकर लोगों को झांसे में लिया। साइबर थाना और जॉर्जटाउन पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। नौसेना जवान प्रवीन सिंह ने बताया कि फेसबुक के जरिए उनके मोबाइल पर 'एसबीआई सिक्योरिटी' के नाम से मैसेज आया। लिंक क्लिक करने पर वे व्हॉट्सएप ग्रुप में जुड़ गए। वहां 'सरोज गुप्ता' नाम की महिला ने एसबीआई में निवेश के कई प्लान बताए और मोटे मुनाफे का लालच देकर तीन किस्तों में 9.50 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए। शक होने पर फोन किया तो नंबर बंद मिला। सिविल लाइंस के कमला रोड निवासी संयोगिता एंड्रियास ने बताया कि व्हॉट्सएप पर अज्ञात नंबर से मैसेज आया। 'हेमांगी दाते' और 'सुब्रत मुखर्जी' ने 'सिक्योरिटीज ग्रुप' का हवाला देकर शेयर बाजार में निवेश का लालच दिया। झांसे में आकर उन्होंने 50 लाख रुपए अलग-अलग खातों में भेज दिए। अभी भी ठग और पैसे मांग रहे हैं। अयोध्या के पूराबाजार निवासी अभिषेक सिंह (जो जॉर्जटाउन में रहते हैं) के साथ 2 जनवरी सुबह 4 बजे 25 हजार रुपए की ठगी हुई। पैसे कटने का कोई मैसेज नहीं आया। जॉर्जटाउन थाने ने एफआईआर दर्ज की।कैंट थाना क्षेत्र के बैंक कर्मी ने बताया कि 19 जून 2025 को अज्ञात नंबर से फोन आया। राजीव जैन ने खुद को दिल्ली के आरबीआई शिकायत अनुभाग का बताया और खाते से पैसे निकालने का झांसा देकर कई बार में 19.68 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए।
भारत के इंडस्ट्रियलिस्ट अनिल अग्रवाल के इकलौते बेटे अग्निवेश अग्रवाल की 49 साल के उम्र में निधन हो गया है। वह अमेरिका में स्कीइंग के दौरान घायल हो गए थे। न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई में इलाज के दौरान ही उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया और अस्पताल में ही उन्होंने अंतिम सांस ली। अपने बेटे को याद करते हुए अनिल अग्रवाल कहते हैं कि वे अपनी निजी कमाई का 75% हिस्सा दान कर देंगे। अग्निवेश करीब 2.43 लाख करोड़ के वेदांता ग्रुप को छोड़ गए हैं। अब उनकी सिर्फ यादें हैं। उन्हीं यादों में एक है उनकी शाही शादी। दैनिक भास्कर की इस स्टोरी में देखिए कैसे अग्निवेश अग्रवाल की हुई थी भव्य शादी? जिसमें हेलिकॉप्टर से फूल बरसाए गए। चार्टर्ड प्लेन से मेहमानों को लाया गया था गोवा…. बिहार की राजधानी पटना में हुआ था अग्निवेश का जन्म अग्निवेश का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था। उनकी शुरुआती पढ़ाई राजस्थान के अजमेर में हुई। 2001 में उनकी शादी गोवा के फोर्ट अगुआडा के बीच पर पूजा बांगुर से हुई थी। पूजा श्री सीमेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर हरिमोहन बांगुर की बेटी है। अग्निवेश की शादी की गिनती भारत के शाही शादियों में की जाती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इनकी शादी में 100 मिलियन डॉलर खर्च हुए थे। जिसकी वर्तमान में वैल्यू 800 करोड़ से अधिक है। इनकी शादी में शाहरुख खान ने भी डांस किया था। हेलिकॉप्टर से फूल बरसाए गए थे। चार्टर्ड फ्लाइट से कोलकाता और मुंबई से गेस्ट गोवा पहुंचे थे। दो बिजनेसमैन परिवार के बीच शाही शादी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अग्निवेश और पूजा बांगुर की शादी इन दोनों के परिवार वालों की सहमति से हुई। अनिल अग्रवाल और हरिमोहन बांगुर दोनों काफी अच्छे दोस्त हैं। दोनों भारत के बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट है। अग्रवाल और बांगुर परिवार देश के सबसे पुराने और मजबूत कारोबारी घरानों में गिने जाते हैं। दोनों के परिवार के बीच काफी अच्छे संबंध रहे हैं। हरिमोहन बांगुर, सीमेंट सेक्टर में अपनी एक अलग पहचान बना चुके थे। वहीं, अनिल अग्रवाल भी मेटल इंडस्ट्री के बड़े नाम हो चुके थे। अनिल अग्रवाल की कंपनी को अग्निवेश संभालने लगे थे। अग्निवेश ने जैसे ही अपने पिता की कंपनी को संभालना शुरू किया, हरिमोहन बांगर ने खुद अपने बेटी की शादी का प्रस्ताव अनिल अग्रवाल के पास रखा। फिर दोनों के परिवार के बीच आपसी सहमति बनी। हिन्दू रीति रिवाज से दोनों की कुंडली का मिलान हुआ, तब शादी हुई। शाही शादी के लिए गोवा का बीच किया बुक दोनों परिवार ने मिलकर इस शाही शादी के लिए गोवा को चुना। इसके लिए गोवा का फोर्ट अगुआडा का बीच चुना गया। इस पूरे लग्जरी बीच को कई दिनों के लिए बुक किया गया था। शादी में पहले दिन राजस्थानी थीम, ऊंट, लोक नृत्य और पारंपरिक संगीत हुए। दूसरे दिन समुद्र किनारे वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह हुआ। तीसरे दिन ग्रैंड रिसेप्शन रखा गया। इसमें शाहरुख खान ने भी डांस किया था। साथ में कई और सेलिब्रिटी भी पहुंचे थे। शादी के दौरान सजावट में विदेशी फूल, इटालियन लाइटिंग, सोने-चांदी के रंगों का इस्तेमाल हुआ। मेहमानों के लिए प्राइवेट चार्टड प्लेन, ट्रांसपोर्ट, सिक्योरिटी और पर्सनल अटेंडेंट की व्यवस्था थी। यह शादी उस दौर में भारत की सबसे महंगी शादियों में गिना गया। मुंबई, दिल्ली, कोलकत्ता सहित देश के अन्य शहरों से करीब 600 से अधिक मेहमान शादी में पहुंचे थे। इसमें से कई मेहमानों को चार्टर्ड फ्लाइट से बुलाया गया था। शादी का दिन- रस्में, मंडप और शाही माहौल शादी वाले दिन सुबह से ही रस्में शुरू हो गईं थी। समुद्र के किनारे बना मंडप पूरी तरह फूलों से सजा था। अग्निवेश अग्रवाल की शाही अंदाज़ में मंडप में एंट्री हुई। वहीं, पूजा बांगुर पारंपरिक डिजाइन के लहंगे में नजर आईं। मंडप को भी स्पेशल डिजाइनर ने सजाया था। सिर्फ सजावट पर करोड़ों रुपए खर्च हुए थे। हिन्दू रीति रिवाज से दोनों की काफी धूम-धाम से शादी सम्पन्न हुई। शादी वाले दिन सीमित लोग ही थी। करीब 100 से कम लोगों की मौजूदगी में शादी हुई। शादी के अगले दिन ग्रैंड रिसेप्शन रखा गया। रिसेप्शन में देश भर के अलग-अलग शहरों और विदेशों से बड़े-बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट, बड़े-बड़े पॉलिटिशियन और बॉलीवुड के एक्टर पहुंचे थे। रिसेप्शन में मेहमानों के लिए इंटरनेशनल क्यू-जीन, खास तौर पर डिजाइन किए गए गिफ्ट्स और लाइव परफॉर्मेंस रखे गए। यह रिसेप्शन उस समय की सबसे हाई-प्रोफाइल सोशल गैदरिंग में गिना गया। खर्च और व्यवस्थाएं, क्यों बनी यह शादी मिसाल इस शादी का कुल खर्च उस समय करीब 100 मिलियन डॉलर बताया गया। आज की कीमत में यह करीब 800 करोड़ रुपए से अधिक है। खर्च में लोकेशन बुकिंग, सजावट, सिक्योरिटी, मेहमानों की मेजबानी, कलाकारों की फीस और लॉजिस्टिक्स शामिल थे। यही वजह है कि यह शादी आज भी भारत की सबसे महंगी शादियों की सूची में आती है। कौन-कौन से कलाकार आए, किसने कितना लिया मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अग्निवेश के इस शादी और रिसेप्शन में बॉलीवुड और म्यूजिक इंडस्ट्री के बड़े नाम शामिल हुए। इस शादी में लाइव स्टेज परफॉर्मेंस भी हुए थे, जिसमें शाहरुख खान ने स्टेज पर लाइव परफॉरमेंस दिया था। शाहरुख खान के अलावा रानी मुखर्जी, रवीना टंडन, दलेर मेहंदी और अमजद अली खान भी रिसेप्शन में पहुंचे थे और परफॉरमेंस दिया था। इन सभी ने तब के लाखों-करोड़ों रुपए चार्ज लिए थे।
महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर शिकंजा कस दिया है। ED ने बुधवार को जानकारी दी कि इस केस में मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर समेत कई आरोपियों की करीब 92 करोड़ रुपए की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की गई हैं। यह कार्रवाई PMLA के तहत की गई है और इसे अब तक की सबसे अहम कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। क्या-क्या संपत्ति जब्त हुई ED के मुताबिक, अटैच की गई संपत्तियों में 74.28 करोड़ रुपए से अधिक के बैंक डिपॉजिट शामिल हैं। ये डिपॉजिट परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट LLC और एक्सिम जनरल ट्रेडिंग–GZCO के नाम पर थे। जांच में सामने आया है कि इन कंपनियों का सीधा संबंध सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपरिया से है। इसके अलावा 17.5 करोड़ रुपए की संपत्तियां दुबई स्थित कथित हवाला ऑपरेटर और Skyexchange.com से जुड़े गगन गुप्ता की बताई जा रही हैं। ED अफसरों के अनुसार पैसों को ठिकाने इनकी मदद से लगाया गया है। दुबई में बैठे हैं मुख्य आरोपी ED के अनुसार, महादेव ऐप को सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने प्रमोट किया था। दोनों छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और फिलहाल UAE (दुबई) में मौजूद बताए जा रहे हैं। भारत सरकार उनकी प्रत्यर्पण (Extradition) प्रक्रिया के लिए प्रयासरत है। कैसे चला अवैध सट्टेबाजी का खेल जांच एजेंसी का कहना है कि Mahadev Online Book (MOB) ऐप और Skyexchange.com के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी कराई जा रही थी। ऐप में कई रिग्ड गेम्स (ऐसे गेम जिसमें ऐप संचालक अपने मन से हार जीत तय करते है।) थे, जिनमें ग्राहकों की हार पहले से तय रहती थी। इससे कमाई गई काली रकम को इस तरह विदेश पहुंच रहे पैसे जांच अधिकारियों के अनुसार महादेव ऐप सिंडिकेट के सदस्य अपने ग्राहकों से लूटी रकम को हवाला नेटवर्क, ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग, और क्रिप्टो एसेट्स के जरिए विदेश भेजा गया। बाद में इसी पैसे को FPI (Foreign Portfolio Investment) के नाम पर भारतीय शेयर बाजार में लगाया गया। ED ने किया ‘कैशबैक’ रैकेट खुलासा ED ने एक बड़े कैशबैक रैकेट का भी खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि FPI कंपनियां भारतीय लिस्टेड कंपनियों में भारी निवेश करती थीं और बदले में कंपनियों के प्रमोटरों को 30 से 40 प्रतिशत रकम नकद लौटानी पड़ती थी। ED का दावा है कि गगन गुप्ता को सलासर टेक्नो इंजीनियरिंग और टाइगर लॉजिस्टिक्स से जुड़े सौदों में कम से कम 98 करोड़ रुपए का फायदा हुआ। अब तक ये कार्रवाई की जांच अधिकारियों ने अब तक इस मामले में 5 चार्जशीट दाखिल ED ने की है। इसके साथ ही 13 आरोपी गिरफ्तार करके करीब 2,600 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त या अटैच की जा चुकी हैं। ED के अधिकारियों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में छत्तीसगढ़ के कई हाई-प्रोफाइल नेता और अफसर भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसी का कहना है कि महादेव ऐप एक ‘अंब्रेला सिंडिकेट’ की तरह काम करता था, जो अवैध बेटिंग से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग तक की पूरी व्यवस्था उपलब्ध कराता था। मामले में जांच जारी रहने और कई और अहम खुलासे होने की बात ED के अधिकारियों ने कही है। सर्राफा कारोबारी की मदद से पहुंची प्रोटेक्शन मनी महादेव बुक के प्रमोटर्स ने राजनेता, ब्यूराेकेट्स और पुलिस अधिकारियों तक प्रोटेक्शन मनी (कार्रवाई से बचने के लिए पैसा) पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ के सर्राफा कारोबारी की मदद ली है। EOW की जांच में खुलासा हुआ है। इसमें पता चला है कि श्री आभूषण ज्वैलर्स के मालिक सुनील कुमार दम्मानी को हवाला के जरिए प्रोटेक्शन मनी पहुंचती थी। इसे वह चंद्रभूषण वर्मा, राहुल वक्टे के माध्यम से कलेक्ट करता था। इस काम में रितेश कुमार यादव और किशन लाल वर्मा भी मदद करते थे। ये लोग चलाते थे पैनल चालान में अफसरों का नाम नहीं EOW ने कोर्ट में जो चालान पेश किया है। उस चालान में छत्तीसगढ़ के ब्यूरोकेट्स और पुलिस अधिकारियों का नाम नहीं है। अपने चालान में EOW के विवेचना अधिकारियों ने संबंधित ब्यूरोक्रेट्स/ पुलिस अफसर/ OSD पद जैसा नाम लिखा है। किसी भी अधिकारी को मामले में EOW की टीम ने नामजद आरोपी नहीं बनाया है। EOW ने इनके खिलाफ दर्ज किया है केस
अर्थशास्त्रियों ने भारत के वित्त वर्ष 2025-26 के पहले जीडीपी के अग्रिम अनुमानों की सराहना की और कहा कि यूएस के साथ द्विपक्षीय ट्रेड डील से निवेश को बढ़ावा मिलेगा
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का निधन हो गया है। उनकी उम्र केवल 49 साल थी। अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में इसकी जानकारी दी। अनिल अग्रवाल ने बताया कि उनके बेटे अग्निवेश का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था। उन्होंने अपने बेटे को एक खिलाड़ी, संगीतकार और लीडर बताया, जो अपनी गर्मजोशी, विनम्रता और दयालुता के लिए जाने जाते थे। अग्रवाल ने X पर एक पोस्ट में लिखा- 'आज मेरे जीवन का सबसे दुखद दिन है। मेरे प्यारे बेटे अग्निवेश ने हमें बहुत जल्द ही अलविदा कह दिया। वह महज 49 साल के थे, स्वस्थ थे, जीवन से भरपूर थे और उनके सपने भी बहुत थे। अमेरिका में स्कीइंग दुर्घटना के बाद, न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में उनकी सेहत में सुधार हो रहा था। हमें लगा था कि अब सब कुछ ठीक हो गया है, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अचानक हृदय गति रुकने से हमारे बेटे ने हमें उनसे छीन लिया। मेरे लिए, वे सिर्फ मेरे बेटे नहीं थे, वे मेरे दोस्त थे, मेरा गौरव थे, मेरी दुनिया थे, परिवार इस क्षति से व्याकुल हैं। किरण और मैं टूट गए हैं।' अनिल अग्रवाल ने बेटे के साथ तस्वीरें शेयर की हैं... बिहार के पटना से निकलकर ग्लोबल बिजनेस मैन बनने वाले अनिल अग्रवाल आज वेदांता ग्रुप के चेयरमैन हैं। फोर्ब्स की जुलाई 2025 लिस्ट के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति 35,000 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। जिससे वे बिहार के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 में वे 16वें स्थान पर हैं, जबकि एनआरआई वेल्थ क्रिएटर्स में चौथे स्थान पर हैं। मेटल किंग के नाम से मशहूर अनिल अग्रवाल के परिवार की जड़ें राजस्थान में रही हैं। उनके पिता कारोबार के सिलसिले में बिहार चले गए थे। इससे पहले परिवार कुछ समय तक राजस्थान में रहा था। अनिल अग्रवाल का जन्म पटना में हुआ, पर उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई जयपुर के चौमूं और सीकर में की। जानिए कैसे पटना में जन्मे अनिल अग्रवाल ने लंदन तक का सफर पूरा किया। कैसे वो मेटल किंग बने... पटना टु लंदन वाया मुंबई अनिल अग्रवाल का जन्म 1954 में पटना के मारवाड़ी परिवार में हुआ। सरकारी स्कूल में पढ़े। पिता द्वारका प्रसाद अग्रवाल एल्यूमीनियम कंडक्टर के छोटे कारोबारी थे। पिता के बिजनेस में हाथ बंटाया। 19 की उम्र में बेहतर भविष्य की तलाश में मुंबई पहुंचे। वहां 9 बिजनेस किए, सभी फेल रहे। फिर वेदांता की स्थापना की। वेदांता, जिंक, लेड, एल्युमिनियम और सिल्वर बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। इसके फाउंडर अनिल अग्रवाल इंडिया के मेटल मैन के नाम से जाने जाते हैं। कंपनी का मार्केट कैप करीब 83 हजार करोड़ रुपए है। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, ‘मैंने सोचा नहीं था कि साधारण आदमी होते हुए राष्ट्र निर्माण से योगदान दूंगा।’ मालूम हो, वेदांता ने 8 साल में 3.39 लाख करोड़ रुपए टैक्स का योगदान दिया है। एक टिफिन बॉक्स-बिस्तर लेकर मुंबई गए अनिल अग्रवाल चार भाई-बहन थे। पिता की आमदनी बहुत ज्यादा नहीं थी। वे पटना में ही एक छोटी सी एल्युमिनियम कंडक्टर की दुकान चलाते थे। अनिल की शुरुआती पढ़ाई पटना में ही हुई। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें पटना से बाहर जाना था, लेकिन उन्होंने तय किया कि वे पिता के बिजनेस में हाथ बटाएंगे। इसके बाद वे पिता के साथ काम करने लगे। हालांकि कुछ सालों बाद अनिल का मन फिर से बाहर जाने का करने लगा। 19 साल की उम्र में वे पटना से मुंबई आ गए। साथ में था एक टिफिन बॉक्स और बिस्तर। अनिल ने पिता को बिजनेस करते देखा था, इसलिए उन्हें नौकरी की दुनिया पसंद नहीं आई। छोटे-छोटे धंधे में हाथ आजमाया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली मुंबई आने के बाद कुछ सालों तक अनिल अग्रवाल अलग-अलग धंधे में हाथ आजमाते रहे। कुछ समय तक स्क्रैप का भी बिजनेस किया। कैंब्रिज में एक बार बोलते हुए उन्होंने बताया था कि मेरे शुरुआती 30 साल संघर्ष में बीते। सालों तक डिप्रेशन में रहा। उसके बाद मुंबई में एक घर लिया। फिर पत्नी और बेटे को भी बुला लिया। कैंब्रिज में स्पीच के दौरान अनिल ने पत्नी की तारीफ करते हुए कहा था कि उन्होंने उस छोटे से मकान को घर बना दिया। एक बार सोशल मीडिया पर अनिल ने बताया था 'मैंने बहुत उम्मीदों से पहली कंपनी खरीदी, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ। दस साल बहुत मुश्किल हालात में गुजरे। इसके बाद 1976 में शमशेर स्टर्लिंग केबल कंपनी खरीदी। तब मेरे पास वर्कर्स को सैलरी देने और रॉ मटेरियल खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। दिन-दिनभर मैं पेमेंट क्लियर कराने के लिए बैंकों के चक्कर काटता था। इसके बाद मैंने अलग-अलग फील्ड में 9 बिजनेस शुरू किए। हर बिजनेस में असफलता मिली, लेकिन मैंने हार नहीं मानी।' 1976 में शुरू की वेदांता रिसोर्सेज इसके बाद 1976 में अनिल ने एक नई कंपनी शुरू की और नाम रखा वेदांता रिसोर्सेज। शुरुआत में ही इस बिजनेस में उन्हें फायदा होने लगा। इस प्रॉफिट का उन्होंने दूसरी कंपनियों का अधिग्रहण करने में इस्तेमाल किया। 1993 में उन्होंने औरंगाबाद में एल्युमिनियम शीट्स और फॉइल्स बनाने का प्लांट लगाया। इसके साथ ही यह भारत की पहली कॉपर रिफाइनरी प्राइवेट कंपनी बन गई। सरकार के एक फैसले ने अनिल अग्रवाल को भारत का ‘मेटल किंग’ बना दिया 2001 में भारत सरकार ने प्राइवेट कंपनियों को सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी का ऑफर दिया। तब वेदांता रिसोर्सेज ने भारत एल्युमिनियम कंपनी में 51% शेयर खरीद लिए। यह सौदा 551.50 करोड़ रुपए में हुआ। अगले ही साल वेदांता ने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में 65% हिस्सेदारी खरीद ली। इस तरह वेदांता रिसोर्सेज दो पब्लिक सेक्टर कंपनियों में आधे से ज्यादा शेयर की हिस्सेदार बन गई। कहा जाता है कि जब इन दोनों कंपनियों में वेदांता ने हिस्सेदारी खरीदी तब इनकी हालत अच्छी नहीं थी। दोनों ही माइनिंग कंपनियां थीं। वेदांता का भी इसी सेक्टर में बिजनेस था। ऐसे में, अनिल अग्रवाल के इस फैसले से वेदांता को खूब फायदा हुआ। यहीं से मेटल प्रोडक्शन सेक्टर में अनिल अग्रवाल स्थापित हो गए। उन्हें भारत का ‘मेटल मैन’ कहा जाने लगा। पहली भारतीय फर्म जो लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई 2001 में वेदांता की सिस्टर कंपनी स्टरलाइड इंडस्ट्रीज, ब्रोकर हर्षद मेहता के साथ शेयर प्राइज के साथ छेड़छाड़ करने के मामले में फंस गई। इसमें BPL और विडियोकॉन जैसी कंपनियां भी शामिल थीं। शेयर बाजार में नियम-कानूनों को देखने वाली संस्था सिक्योरिटीज एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी SEBI ने तब स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को कैपिटल मार्केट में बैन कर दिया। 2003 में अनिल अग्रवाल लंदन चले गए। यहां कंपनी को नए नाम वेदांता रिसोर्सेज नाम से खड़ा किया। इसी साल उन्होंने वेदांता रिसोर्सेज को लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया। यह पहली बार था जब कोई भारतीय कंपनी लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई थी। इसके बाद दूसरी और भी भारतीय कंपनियां लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुईं। अनिल अग्रवाल को ऑफरिंग से करीब 7 हजार करोड़ रुपए का फायदा भी हुआ। अब जानिए अनिल अग्रवाल की फैमिली को अनिल अग्रवाल अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्नी किरण अग्रवाल को देते हैं। उन्होंने न केवल पारिवारिक मोर्चे पर सहयोग दिया, बल्कि वेदांता समूह की सामाजिक पहलों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। अनिल अग्रवाल के दो बच्चे थे जिसमें बेटे अग्निवेश अग्रवाल ने 49 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। अग्निवेश की शादी श्री सीमेंट की मैनेजिंग डायरेक्टर पूजा बांगुर से हुई थी। अनिल अग्रवाल की बेटी प्रिया अग्रवाल हेब्बर हैं। 2013 में उनकी शादी बैंकर आकर्ष हेब्बर से हुई थी। दोनों की एक बेटी माही है। अग्निवेश अग्रवाल वेदांता ग्रुप की इकाई तलवंडी साबो पावर लिमिटेड में बोर्ड सदस्य थे। वहीं, प्रिया अग्रवाल वेदांता के बोर्ड में शामिल हैं। साथ ही वे हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की चेयरपर्सन हैं। अनिल अग्रवाल के परिवार में कौन-कौन है अनिल अग्रवाल के 2 बच्चे हैं। एक अग्निवेश और दूसरी बेची प्रिया अग्रवाल। अग्निवेश अग्रवाल वेदांता ग्रुप की इकाई तलवंडी साबो पावर लिमिटेड में बोर्ड सदस्य थे। वहीं, प्रिया अग्रवाल वेदांता के बोर्ड में शामिल हैं। साथ ही वे हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की चेयरपर्सन हैं। कौन थे अग्निवेश अग्निवेश का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था। एक मध्यमवर्गीय बिहारी परिवार से आने वाले अग्निवेश ने जीवन में खेल, संगीत और नेतृत्व के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने मेयो कॉलेज, अजमेर से पढ़ाई की, इसके बाद फुजैराह गोल्ड की स्थापना की और हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। अपने पेशेवर योगदान के साथ-साथ वे सरल, संवेदनशील और मानवीय स्वभाव के लिए जाने जाते थे। पूजा बांगुर से अग्निवेश की शादी हुई थी वेदांता ग्रुप के चैयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश की शादी पूजा बांगुर से हुई थी। पूजा बांगुर श्री सीमेंट के प्रबंध निदेशक हरि मोहन बंगुर की बेटी हैं। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दो कारोबारी घराने के बच्चों की ये शादी उस जमाने की सबसे महंगी शादियों में शुमार हुई थी। पूजा ने अग्निवेश अग्रवाल से गोवा के फोर्ट अगुआडा रिसॉर्ट के एक निजी समुद्र तट पर शादी की थी। दोनों की शादी में मुंबई और कोलकाता से जेट एयरवेज के चार्टर्ड विमान से 600 से अधिक मेहमान आए थे। 2013 में बैंकर आकर्ष से हुई बहन प्रिया की शादी अग्निवेश की बहन प्रिया अग्रवाल हेब्बर हैं। उनकी शादी 2013 से बैंकर आकर्ष हेब्बर से हुई थी। उनकी एक बेटी माही है। पूजा वेदांता लिमिटेड में गैर-कार्यकारी निदेशक और हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की अध्यक्ष हैं। वह अनिल अग्रवाल फाउंडेशन की निदेशक भी हैं। उन्होंने ब्रिटेन के वारविक विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान और व्यवसाय प्रबंधन में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है। प्रिया वेदांता लिमिटेड में ईएसजी, निवेशक संबंध, कॉर्पोरेट संचार, मानव संसाधन, डिजिटल और सामाजिक प्रभाव विभागों का संचालन करती हैं। अग्निवेश अग्रवाल का करियर अग्निवेश वेदांता समूह और उससे जुड़ी कंपनियों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। वे हिंदुस्तान जिंक के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे और 2019 में उन्होंने यह पद छोड़ दिया था। इसके अलावा, उन्होंने वेदांता द्वारा समर्थित कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) में निदेशक मंडल के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इतना ही नहीं उन्होंने यूएई में स्थित एक बहुमूल्य धातु शोधन कंपनी, फुजैराह गोल्ड एफजेडसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक की भी जिम्मेदारी निभाई थी। इसके अलावा वे ट्विन स्टार इंटरनेशनल लिमिटेड और स्टेरलाइट डिस्प्ले टेक्नोलॉजीज सहित समूह की अन्य सहायक कंपनियों में निदेशक पद संभाले। ------------------------------------- अनिल अग्रवाल के बेटे के निधन से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे का निधन: अमेरिका में स्कीइंग के दौरान घायल हुए थे; अग्रवाल ने लिखा- जीवन का सबसे अंधकारमय दिन वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का निधन हो गया है। उनकी उम्र केवल 49 साल थी। अग्निवेश वेदांता समूह की कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (TSPL) के बोर्ड में शामिल थे। अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में जानकारी दी कि अग्निवेश अमेरिका में स्कीइंग के दौरान घायल हुए थे। पूरी खबर पढ़ें।
ग्रेटर नोएडा गौर सिटी निवासी एक व्यक्ति से साइबर ठगों ने निवेश के बहाने 35 लाख रुपए ठग लिए। उन्हें वॉट्सऐप ग्रुप पर जोड़कर फर्जी ट्रेनिंग दी गई और फर्जी चोला सिक्योरिटीज कंपनी नाम का ऐप डाउनलोड कराया गया। पीड़ित से दो महिलाओं ने बातचीत कर शेयर मार्केट में निवेश करने के लिए राजी कर लिया। इसके बाद उन्होंने 8 बार में 35 लाख 30 हजार रुपए ठगों के बैंक खाता में ट्रांसफर कर दिए। वहीं निवेश की रकम ऐप पर 1.6 करोड़ मुनाफा दिखाई देने लगी तो पीड़ित ने निकालने की कोशिश की। ठगों ने उनसे 20 प्रतिशत टैक्स जमा करने के लिए बोले। फिर उन्होंने दक्षिण भारत की प्रसिद्ध कंपनी चोला सिक्योरिटीज के ऑफीशियल मोबाइल नंबर के कंस्टमर केयर से बात की। जहां उन्हें जानकारी मिली कि कंपनी की तरफ से कोई ऐप या इंवेस्टमेंट की सेवा नहीं दी जाती है। इसके बाद पीड़ित को ठगी के बारे जानकारी हुई । वॉट्सऐप से किया संपर्कग्रेटर नोएडा गैलेक्सी नर्य ऐवेन्यु गौर सिटी 2 निवासी शिशुपाल सिंह ने बताया कि वह प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। साथ में शेयर मार्केट में निवेश करने की रुचि भी रखते हैं। उन्हें 20 सितंबर को नवीसा सायनयम नाम की महिला ने वॉट्सऐप पर संपर्क किया और अपने एक साथी वैलायन सुमैया नाम की महिला से बातचीत कराई। अगले दिन उन्हें चोला सिक्योरिटीज नाम के वॉट्सऐप ग्रुप से जोड़ लिया गया। पहले दी ट्रेनिंग फिर ऐप डाउनलोड करायावॉट्सऐप ग्रुप पर जोड़कर पहले उनको शेयर मार्केट में निवेश करने की ट्रेनिंग दी गई। साथ ही उन्हें चोला सिक्योरिटीज कंपनी के नाम पर ऐप डाउनलोड कराया गया। झांसे में आने के बाद पीड़ित ने एक लाख रुपए निवेश कर दिए। ऐप पर मुनाफा बढ़ता देख लालच में आने के बाद 8 बार में कुल 35 लाख 30 हजार रुपए ठगों के बैंक अकाउंट में यूपीआई और अन्य माध्यम से ट्रांसफर कर दिए। 20 प्रतिशत मांगा कमीशनपीड़ित का आरोप है कि उनकी रकम ओम साई इंटरप्राइजेज करंट बैंक खाता प्राइवेट बैंक शाखा लालबाग और शाखा नारायणपुरा में गई है। वहीं पीड़ित ने ऐप पर 1.6 करोड़ मुनाफा देखने के बाद निकालने की कोशिश तो उनसे ठगों ने 20 प्रतिशत कमीशन के तौर पर रुपए मांगे। जिसके बाद पीड़ित ने कंपनी से बातचीत की, जहां कंस्टमर केयर की तरफ से जानकारी दी गई कि चोला सिक्योरिटीज कंपनी के नाम से कुछ लोग साइबर ठगी कर रहे हैं।
झारखंड की प्राकृतिक संपदा से रूबरू होंगे निवेशक
यह पहला अवसर होगा, जब 19 से 23 जनवरी तक दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक में झारखंड से जोहार की गूंज सुनाई देगी। झारखंड इसके जरिए क्रिटिकल मिनरल्स, खनन, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चर, इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल और ऑटोमोबाइल, अक्षय ऊर्जा, वस्त्र निर्माण, पर्यटन और वन उत्पाद जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को साझा करेगा। इन कदमों को मजबूती देने, झारखंड को विश्व पटल पर लाने एवं देश में अग्रणी राज्यों में झारखंड को शामिल करने के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झारखंड का प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड स्थित दावोस में आयोजित डब्ल्यूईएफ की वार्षिक बैठक में शामिल होने जा रहा है। इसका उद्देश्य झारखंड को एक प्रमुख निवेश का गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करना, वैश्विक उद्योग जगत के शीर्ष लोगों के साथ संवाद स्थापित करना और राज्य के फोकस एरिया में निवेश के नए अवसरों को आगे बढ़ाना है। इस दौरान बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ निवेश के प्रस्तावों पर चर्चा होगी। साथ ही झारखंड को अपॉरच्युनिटी स्टेट के रूप में प्रस्तुत करने पर विशेष फोकस रहेगा। ‘ग्रोथ इन हार्मनी विद नेचर’ थीम के साथ जुड़ेगा झारखंड इस बैठक में भारत की ओर से केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल एवं अन्य राज्यों का प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होगा। इंडिया पवेलियन में केंद्र सरकार द्वारा झारखंड समेत देश के छह राज्यों को चुना गया है। झारखंड ग्रोथ इन हार्मनी विद नेचर के थीम के साथ इस बैठक में मौजूद रहेगा। बैठक में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हो सकते हैं, इसके अतिरिक्त दुनिया भर के करीब 130 देशों के लगभग 3,000 प्रतिनिधि दावोस 2026 में भाग लेंगे। विश्व आर्थिक मंच 2026 का विषय ए स्पिरिट ऑफ डायलॉग और अन-लॉकिंग न्यू सोर्सेस ऑफ ग्रोथ रखा गया है, जिसके अंतर्गत वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का निधन हो गया है। उनकी उम्र केवल 49 साल थी। अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में जानकारी दी कि अग्निवेश अमेरिका में स्कीइंग के दौरान घायल हुए थे। उन्हें इलाज के लिए माउंट सिनाई अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें बुधवार को कार्डियक अरेस्ट आया। अनिल अग्रवाल ने बुधवार रात करीब 10 बजे X पर पोस्ट कर बेटे के निधन की जानकारी दी। एक भावुक पोस्ट में बेटे के निधन को जीवन का सबसे अंधकारमय दिन बताया। उन्होंने लिखा कि वे अपने बेटे से किए हुए वादे को निभाते हुए अपनी कमाई का 75% समाज को लौटाएंगे। पढ़िए बेटे अग्निवेश के लिए अनिल अग्रवाल का पूरा पोस्ट अनिल अग्रवाल ने बेटे के साथ तस्वीरें शेयर की हैं... अनिल अग्रवाल ने बताया कि उनके बेटे अग्निवेश का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था। अजमेर के मेयो कॉलेज से उसने पढ़ाई की और एक सफल पेशेवर करियर बनाया। फुजैराह गोल्ड की स्थापना में अग्निवेश ने अहम भूमिका निभाई और हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन भी रहे। अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे को एक खिलाड़ी, संगीतकार और लीडर बताया, जो अपनी गर्मजोशी, विनम्रता और दयालुता के लिए जाने जाते थे। अग्निवेश 2019 तक हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के चेयरमैन रहे कॉमर्स में ग्रेजुएट अग्निवेश जिंक उत्पादक कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के 2019 तक चेयरमैन रहे। उन्होंने भारत में माइनिंग में उस समय प्रचलित तकनीक को मॉडर्न बनाया, जिसे इंटरनेशनल बेंचमार्क माना गया। उन्होंने हिंदुस्तान जिंक को विश्व की टॉप कंपनियों में स्थापित करने में अहम रोल अदा किया। इनके साथ ही वे फुजैराह गोल्ड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक रहे हैं, जिसकी स्थापना 2009 में हुई थी और तब से वे अलुवर्क्स लिमिटेड के बोर्ड में शामिल थे। साथ ही वेदांता से जुड़ी पावर कंपनी के बोर्ड में भी शामिल थे। वे 1995 से 2013 तक मद्रास एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड के डायरेक्टर रहे। साथ ही 2009 से स्टरलाइट एनर्जी लिमिटेड के गैर-कार्यकारी निदेशक भी थे। इन कंपनियों में डायरेक्टर - तेंगपानी टी कंपनी लिमिटेड - ट्विन स्टार इंटरनेशनल लिमिटेड - स्टरलाइट इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड - स्टरलाइट इन्फ्रास्ट्रक्चर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड - स्टरलाइट आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड - प्राइमेक्स हेल्थकेयर एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड अब अग्निवेश के पिता और वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बारे में जानें... जन्म पटना में हुआ, परिवार की जड़ें राजस्थान में मेटल किंग के नाम से मशहूर अनिल अग्रवाल के परिवार की जड़ें राजस्थान में रही हैं। उनके पिता मारवाड़ी समाज से थे, जो कारोबार के सिलसिले में बिहार चले गए थे। अनिल अग्रवाल का जन्म 1954 में पटना में हुआ। अनिल की शुरुआती पढ़ाई पटना में ही हुई। पिता की छोटी सी दुकान, आमदनी भी सीमित थी अनिल अग्रवाल के पिता द्वारका प्रसाद अग्रवाल पटना में एल्युमिनियम कंडक्टर की एक छोटी सी दुकान चलाते थे। पिता की आमदनी बहुत ज्यादा नहीं थी। अनिल अग्रवाल चार भाई-बहन थे। वे सरकारी स्कूल में पढ़े, इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें पटना से बाहर जाना था, लेकिन उन्होंने तय किया कि वे पिता के बिजनेस में हाथ बटाएंगे। 9 बिजनेस फेल हुए, फिर वेदांता की स्थापना की पटना में पिता के साथ कुछ साल काम करने के बाद अनिल का मन बाहर जाने का हुआ। 19 साल की उम्र में वे पटना से मुंबई आ गए। साथ में था एक टिफिन बॉक्स और बिस्तर। अनिल ने पिता को बिजनेस करते देखा था, इसलिए उन्हें नौकरी की दुनिया पसंद नहीं आई। मुंबई में उन्होंने 9 बिजनेस शुरू किए, लेकिन सभी फेल रहे। इसके बाद उन्होंने वेदांता की स्थापना की। अब जानिए वेदांता के एंपायर बनने की कहानी वेदांता आज जिंक, लेड, एल्युमिनियम और सिल्वर बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। इसके फाउंडर अनिल अग्रवाल इंडिया के मेटल मैन के नाम से जाने जाते हैं। लेकिन उनका सफर चुनौतियों से भरा रहा है। छोटे-छोटे धंधे में हाथ आजमाया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली मुंबई आने के बाद कुछ साल तक अनिल अलग-अलग धंधे में हाथ आजमाते रहे। कुछ समय तक कबाड़ी का भी बिजनेस किया। कैंब्रिज में एक बार बोलते हुए उन्होंने बताया था कि मेरे शुरुआती 30 साल संघर्ष में बीते। सालों तक डिप्रेशन में रहा। उसके बाद मुंबई में एक घर लिया। फिर पत्नी और बेटे को भी बुला लिया। कैंब्रिज में स्पीच के दौरान अनिल ने पत्नी की तारीफ करते हुए कहा था कि उन्होंने उस छोटे से मकान को घर बना दिया। एक बार सोशल मीडिया पर अनिल ने बताया था, 'मैंने बहुत उम्मीदों से पहली कंपनी खरीदी, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ। दस साल बहुत मुश्किल हालातों में गुजरे। इसके बाद 1976 में शमशेर स्टर्लिंग केबल कंपनी खरीदी। तब मेरे पास वर्कर्स को सैलरी देने और रॉ मटेरियल खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। दिन-दिन भर मैं पेमेंट क्लियर कराने के लिए बैंकों के चक्कर काटता था। इसके बाद मैंने अलग-अलग फील्ड में 9 बिजनेस शुरू किए। हर बिजनेस में असफलता मिली, लेकिन मैंने हार नहीं मानी।' इसके बाद 1976 में अनिल ने एक नई कंपनी शुरू की और नाम रखा वेदांता रिसोर्सेज। शुरुआत में ही इस बिजनेस में उन्हें फायदा होने लगा। इसका इस्तेमाल उन्होंने दूसरी कंपनियों का अधिग्रहण करने में किया। 1993 में उन्होंने औरंगाबाद में एल्युमिनियम शीट्स और फॉइल्स बनाने का प्लांट लगाया। साथ ही वेदांता भारत की पहली कॉपर रिफाइनरी प्राइवेट कंपनी बन गई। सरकार के एक फैसले ने अनिल अग्रवाल को भारत का ‘मेटल किंग’ बना दिया 2001 में भारत सरकार ने प्राइवेट कंपनियों को सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी का ऑफर दिया। तब वेदांता रिसोर्सेज ने भारत एल्युमिनियम कंपनी में 51% शेयर खरीद लिया। यह सौदा 551.50 करोड़ रुपए में हुआ। अगले ही साल वेदांता ने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में 65% हिस्सेदारी खरीद ली। इस तरह वेदांता रिसोर्सेज दो पब्लिक सेक्टर कंपनियों में आधे से ज्यादा शेयर की हिस्सेदार बन गई। कहा जाता है कि जब इन दोनों कंपनियों में वेदांता ने हिस्सेदारी खरीदी तब इनकी हालत अच्छी नहीं थी। दोनों ही माइनिंग कंपनियां थीं। वेदांता का भी इसी सेक्टर में बिजनेस था। ऐसे में, अनिल अग्रवाल के इस फैसले से वेदांता को खूब फायदा हुआ। यहीं से मेटल प्रोडक्शन सेक्टर में अनिल अग्रवाल स्थापित हो गए। उन्हें भारत का ‘मेटल मैन’ कहा जाने लगा। पहली भारतीय फर्म जो लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई 2001 में वेदांता की सिस्टर कंपनी स्टरलाइड इंडस्ट्रीज, ब्रोकर हर्षद मेहता के साथ शेयर प्राइज के साथ छेड़छाड़ करने के मामले में फंस गई। इसमें BPL और विडियोकॉन जैसी कंपनियां भी शामिल थीं। शेयर बाजार में नियम-कानूनों को देखने वाली संस्था सिक्योरिटीज एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी SEBI ने तब स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को कैपिटल मार्केट में बैन कर दिया। 2003 में अनिल अग्रवाल लंदन चले गए। यहां कंपनी को नए नाम वेदांता रिसोर्सेज नाम से खड़ा किया। इसी साल उन्होंने वेदांता रिसोर्सेज को लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया। यह पहली बार था जब कोई भारतीय कंपनी लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई थी। इसके बाद दूसरी और भी भारतीय कंपनियां लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुईं। अनिल अग्रवाल को ऑफरिंग से करीब 7 हजार करोड़ रुपए का फायदा भी हुआ।
महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप (Mahadev App) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर सहित कई आरोपियों की करीब 92 करोड़ रुपए की ताजा संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की हैं। ED ने बताया कि 74.28 करोड़ रुपए से ज्यादा के बैंक डिपॉजिट परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट LLC और एक्सिम जनरल ट्रेडिंग – GZCO में थे। ये कंपनियां सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपरिया से जुड़ी हैं। इसके अलावा, 17.5 करोड़ रुपए की संपत्तियां दुबई स्थित कथित हवाला ऑपरेटर और Skyexchange.com से जुड़े गगन गुप्ता की भी जब्त की गई हैं। UAE में बताए जा रहे हैं सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल महादेव ऐप को सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने प्रमोट किया था। दोनों छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में बताए जा रहे हैं। भारत सरकार उनकी प्रत्यर्पण (Extradition) की कोशिश कर रही है। ED ने बताया कि महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) ऐप और Skyexchange.com के जरिए अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और जाली (रिग्ड) गेम्स के माध्यम से ग्राहक का हारना तय किया जाता था। इस अवैध कमाई को हवाला नेटवर्क, ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग और क्रिप्टो एसेट्स के जरिए विदेश भेजा गया और बाद में FPI (Foreign Portfolio Investment) के नाम पर भारतीय शेयर बाजार में निवेश कराया गया। ED ने एक बड़े कैशबैक रैकेट का भी खुलासा किया है। इसमें FPI कंपनियां भारतीय लिस्टेड कंपनियों में भारी निवेश करती थी और बदले में कंपनियों के प्रमोटरों को निवेश की 30–40% रकम नकद लौटानी पड़ती थी। ED का दावा है कि गगन गुप्ता को सलासर टेक्नो इंजीनियरिंग और टाइगर लॉजिस्टिक्स जैसी कंपनियों से जुड़े सौदों में कम से कम 98 करोड़ रुपए का फायदा मिला। ED ने अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया अब तक ED ने इस मामले में 5 चार्जशीट दाखिल की हैं, 13 लोगों को गिरफ्तार किया है और करीब 2,600 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त या अटैच की है। एजेंसी का कहना है कि इस पूरे मामले में छत्तीसगढ़ के कई हाई-प्रोफाइल नेता और अफसर भी जांच के घेरे में हैं। ED के अनुसार, महादेव ऐप एक ‘अंब्रेला सिंडिकेट’ की तरह काम करता था, जो अवैध बेटिंग वेबसाइट्स के लिए यूजर जोड़ने से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग तक की पूरी व्यवस्था करता था।
सिद्धार्थनगर जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने निवेश को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन के लिए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने उद्योग बंधु-व्यापार बंधु की समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि अब किसी भी व्यापारी या उद्यमी का कोई भी मामला लंबित नहीं रहना चाहिए। बुधवार शाम को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में डीएम ने कहा कि यदि कोई निवेशक जिले में आता है, तो उसकी हर समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उन्होंने पिछली कार्यवृत्ति की समीक्षा करते हुए उपायुक्त उद्योग को निर्देश दिए कि जिन निवेशकों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, उनसे सीधे संपर्क कर उनकी दिक्कतें दूर की जाएं और उन्हें अधिक निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाए। डीएम ने जोर देकर कहा कि निवेश केवल कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर उद्योगों के रूप में दिखना चाहिए। जिलाधिकारी ने व्यापारियों की समस्याओं को सुनते हुए संबंधित विभागों को समन्वय की कमी के लिए फटकार लगाई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समन्वय के अभाव में किसी व्यापारी को परेशानी हुई, तो जिम्मेदारी तय की जाएगी। डीएम ने रोजगार सृजन योजनाओं के तहत शासन से मिले लक्ष्यों को हर हाल में पूरा करने और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना में अधिक से अधिक लाभार्थियों को जोड़ने के निर्देश भी दिए। निवेश मित्र पोर्टल पर लंबित मामलों को लेकर जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर लंबित फाइलें जिले की छवि खराब करती हैं और इन्हें तत्काल निस्तारित किया जाना चाहिए। डीएम ने यह भी निर्देश दिया कि स्वीकृत परियोजनाओं की सब्सिडी लाभार्थियों के बैंक खातों में समय पर भेजी जाए, इसमें किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस बैठक में दुग्ध, पशुपालन, एमएसएमई, उद्यान, पर्यटन, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजनाओं और एक जनपद एक उत्पाद से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। इन पर डीएम ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रजत कुमार चौरसिया, उपायुक्त उद्योग उदय प्रकाश, जिला पंचायत राज अधिकारी वाचस्पति झा, जिला आबकारी अधिकारी वीर अभिमन्यु कुमार, अधीक्षण अभियंता विद्युत अजय कुमार, लीड बैंक अधिकारी आरके सिन्हा सहित अन्य अधिकारी व व्यापारी उपस्थित रहे।
साइबर बदमाश ने यमुनानगर के एक व्यापारी से फर्जी ट्रेडिंग कंपनी बनाकर 10 लाख रुपए ठग लिए हैं। आरोपी ने पीड़ित को तीन गुना रिटर्न देने का लालच दिया और फिर कंपनी का सॉफ्टवेयर ही बंद कर दिया। पीड़ित ने आरोपी से जब इन्वेस्ट की हुई रकम वापिस मांगी तो उसे जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित की शिकायत पर बिलासपुर थाना पुलिस ने आरोपी अनिरुद्ध अन्नत दलवी निवासी मुंबई, महाराष्ट्र के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पंजाब में हुई थी आरोपी से मुलाकात पुलिस को दी शिकायत में राजेश कुमार ने बताया कि आरोपी अनिरुद्ध अन्नत दलवी ने 'ए स्क्वायर वर्ल्ड ट्रेडिंग कंपनी' नाम से एक फर्जी कंपनी चलाई थी। जिसके बारे में उसे अपने किसी जानकार से पता चला था। राजेश कुमार का कहना है कि अक्टूबर 2024 में डेरा बस्सी (पंजाब) में आरोपी अनिरुद्ध से उसकी मुलाकात हुई, जहां आरोपी ने कंपनी के बारे में जानकारी दी और निवेश पर 150 दिनों में तीन गुना रिटर्न देने का वादा किया। रकम लेकर कंपनी का सॉफ्टवेयर किया बंद शिकायत के अनुसार, आरोपी के झांसे में आकर राजेश कुमार ने विभिन्न तारीखों पर कुल 10,02,000 रुपए का निवेश किया। निवेश के कुछ दिन बाद उसे पता चला कि फरवरी 2025 के अंतिम सप्ताह में आरोपी ने कंपनी का सॉफ्टवेयर बंद कर दिया, जिससे उसे बड़ा झटका लगा। राजेश कुमार ने बताया कि उसने अपनी मेहनत की कमाई इस कंपनी में लगाई थी, लेकिन आरोपी भाग गया। जब पीड़ित ने फोन पर संपर्क किया, तो आरोपी ने पहले कंपनी दोबारा शुरू करने और पैसे लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन 6-7 महीने बीत जाने के बाद भी कुछ नहीं किया। आरोपी बोला- बड़े लोगों से भी हड़पे पैसे राजेश का आरोप है कि अब आरोपी पैसे मांगने पर परिवार सहित जान से मारने की धमकी देता है। आरोपी का यह भी कहना है कि उसने बड़े लोगों और अधिकारियों के पैसे भी हड़पे हैं वो भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाए हैं। बिलासपुर थाने से मामले में जांच अधिकारी एसआई नरेश पाल बताया कि आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित की रकम वापस दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।
सोनीपत पुलिस ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर मोटा मुनाफा कमाने का सपना दिखाकर लोगों की मेहनत की कमाई डकारने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने पंजाब और मध्य प्रदेश में छापेमारी कर इस गिरोह के चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने एक फर्जी वेबसाइट और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए सोनीपत के एक व्यक्ति से करीब 1 करोड़ 20 लाख 85 हजार 89 रुपए की धोखाधड़ी की थी। पुलिस आयुक्त ममता सिंह (IPS) और पुलिस उपायुक्त (साइबर) कुशल पाल सिंह के मार्गदर्शन में हुई इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए पुलिस प्रवक्ता ASI रविंद्र सिंह ने बताया कि पुलिस ने शुभम (निवासी फतेहाबाद, हाल जीरकपुर, मोहाली, पंजाब), परविन्द्र (निवासी मानसा, पंजाब), जसप्रीत (निवासी मानसा, पंजाब) और संजय (निवासी इंदौर, मध्य प्रदेश) को गिरफ्तार किया है। व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ कर फंसाया पुलिस के अनुसार, 3 नवम्बर 2025 को जिला सोनीपत निवासी एक व्यक्ति ने थाना साइबर सोनीपत में शिकायत दर्ज कराई कि उनके मोबाइल पर आए एक अंजान लिंक पर क्लिक करने के उपरांत उन्हें F4-Reliance Wealth Academy नामक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया गया। वहां अदविका नामक व्यक्ति ने स्वयं को Reliance Securities से जुड़ा कर्मचारी बताते हुए शेयर मार्केट में बड़ा मुनाफा दिलाने का लालच दिया। 1 करोड़ 20 लाख जमा कराने के बाद धमकी प्राइमरी मार्केट, शेयर ट्रेडिंग एवं आईपीओ के नाम पर शिकायतकर्ता से विभिन्न बैंक खातों में कुल ₹1,20,85,089/- जमा करवाए गए। इसके बाद आरोपियों ने नकली शेयर आवंटन दिखाते हुए और अधिक राशि जमा करवाने का दबाव बनाया तथा रकम न देने पर फंड फ्रीज करने की धमकी दी। शिकायतकर्ता द्वारा पैसे लौटाने का अनुरोध करने पर भी आरोपियों ने रकम वापस करने से मना कर दिया। जांच में यह सम्पूर्ण प्रकरण फर्जी वेबसाइट एवं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर की गई साइबर ठगी पाया गया, जिस पर थाना साइबर सोनीपत में भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत अभियोग दर्ज किया गया। पुलिस ने शिकायत मिलते ही जुटाए सबूत थाना साइबर सोनीपत के प्रभारी इंस्पेक्टर बसंत कुमार ने अपनी टीम (ASI जोगेन्द्र, मुख्य सिपाही गुलशन, EHC विनोद, सिपाही नवीन एवं SPO दिनेश) के साथ कार्यवाही करते हुए ठगों के बारे में जानकारी एकत्रित की और इस गिरोह का भंडाफोड़ किया। चारों साइबर ठगों को पंजाब एवं मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया गया। ये हुआ बरामद पुलिस ने ठगी की गई राशि में से 29 लाख 32 हजार रुपए बैंक में फ्रीज करवाए। ठगों से 9,000 रुपए, वारदात में प्रयोग किए गए 4 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पुलिस बैंक खातों से अब तक 53 हजार 500 रुपए की रिकवरी कर चुकी है।
राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट में फर्स्ट चेक फर्स्ट कन्विक्शन सेशन की चर्चा में कहा गया कि बीते 10 सालों में स्टार्टअप के फर्स्ट चैक के साइज में बड़ा बदलाव आ गया है। केंद्रीय उद्योग संवर्धन में संयुक्त सचिव संजीव सिंह ने कहा कि सरकार ने 2016 से स्टार्टअप्स में निवेश को प्रोत्साहित किया है। केंद्र सरकार एजुटेक, मैन्यूफैक्चरिंग, डीपटेक, माइक्रो वीसी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही हैं। सरकार के प्रयासों एवं स्टार्टअप फाउंडर्स की मेहनत से स्टार्टअप्स को लेकर देश में वातावरण पूरी तरह बदल चुका है। निवेशकों की रुचि स्टार्टअप में लगातार बड़ी है। आज भारत दुनिया में यूनिकॉर्न बनाने वाला तीसरा देश बना है। आइवीकैप वेंचर्स के फाउंडर विक्रम गुप्ता ने कहा कि एक दशक में स्टार्टअप्स के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन हुआ है। स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया जैसे कार्यक्रमों के कारण आज भारत में 2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स चल रहे हैं। पहले स्टार्टअप्स में निवेश पर मन में संशय रहता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। निवेशक उसके विस्तार की संभावना का आकलन करता है। स्टार्टअप में लक्ष्य के क्रियान्वयन की क्षमता, टीम की प्रतिभा व सफलता के लिए उत्साह का भी मूल्यांकन करता है। निवेशक यह भी ध्यान रखते हैं कि वे स्वयं अपने अनुभव के साथ किस स्तर पर स्टार्टअप के विकास में योगदान दे सकते हैं। कंपनी में निवेश करने से पहले स्टार्टअप जिस क्षेत्र से संबंधित है, उस क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह को गंभीरता से लिया जाता है। बड़ी कंपनियां छोटे निवेश से शुरू हुईंयूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स के मैनेजिंग पार्टनर अनिल जोशी ने कहा कि सभी बड़ी कंपनियां छोटे निवेश के साथ ही शुरू हुई हैं। स्टार्टअप फाउंडर की विश्वसनीयता पर ही पहला निवेश निर्भर करता है। जहां पहले नई सोच वाले उद्यमियों के पास कम विकल्प होते थे, वहीं आज निवेशकों का रुझान बढ़ाने से स्टार्टअप फाउंडर को मिलने वाले पहले चेक की राशि भी बढ़ी है।
शेयर मार्केट में निवेश का झांसा, ओडिशा के कारोबारी से रायपुर में 2 करोड़ की ठगी
शेयर मार्केट में निवेश पर बड़े मुनाफे का झांसा देकर ओडिशा के कारोबारी से 2 करोड़ रुपए की ठगी की गई है। मैसेंजर प्लेटफॉर्म पर कारोबारी एक ग्रुप से जुड़ा, जहां शेयर मार्केट में निवेश से संबंधित जानकारियां मिलने लगीं। कारोबारी ने शुरुआत में 1 लाख निवेश किए। इसके एवज में कारोबारी को 13 लाख रुपए का मुनाफा दिया गया। इससे कारोबारी झांसे में आ गया। इसके बाद ठगों ने कहा कि 2 करोड़ रुपए निवेश करने पर पांच दिन में 40 लाख रुपए का मुनाफा मिलेगा। इस ऑफर के साथ ही कारोबारी ठगों के झांसे में आ गया और 2 करोड़ रुपए निवेश कर दिया। इसके लिए कारोबारी को रायपुर बुलाया गया और फाफाडीह के पास उनसे कैश में पैसे लिए गए। कारोबारी रकम देकर वापस चला गया। इसके बाद न तो मुनाफा मिला और न ही मूल रकम वापस मिली। कारोबारी की शिकायत पर पुलिस ने जांच के बाद ठगी का केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने बताया कि ओडिशा निवासी नेमीचंद जैन का बड़ा कारोबार है। कुछ माह पहले नेमीचंद के मोबाइल पर एक लिंक आया था। उसे खोलने पर वह टेलीग्राम के एक ग्रुप से जुड़ गया। ग्रुप में ही टाटा कंसन्टेंसी कंपनी में निवेश से संबंधित मैसेज आने लगे। कुछ लोग लाखों और करोड़ों रुपए का मुनाफा मिलने का मैसेज भी डालने लगे। इसी दौरान कारोबारी के पास अर्चना अग्रवाल, हर्ष, विकास साहू, सुनीता नंदा, अजय त्रिपाठी, अजित पात्रा का फोन आने लगे। नेमीचंद से शुरुआत में 1 लाख निवेश कराए गए और बदले में उन्हें 13 लाख रुपए का मुनाफा दिया गया। शेयर मार्केट में निवेश पर मुनाफे की गारंटी नहीं साइबर एक्सपर्ट मोहित साहू के अनुसार शेयर मार्केट में निवेश पर मुनाफे की कोई गारंटी नहीं होती। शेयरों के दामों में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है और बाजार की स्थिति के अनुसार मुनाफा या नुकसान होता है। यदि कोई व्यक्ति मोटे मुनाफे की गारंटी देकर निवेश कराने की बात करता है तो यह ठगी हो सकती है। शेयर मार्केट में निवेश हमेशा डीमैट अकाउंट के जरिए या रजिस्टर्ड ट्रेडर के माध्यम से करना चाहिए। इसमें कभी भी कैश में निवेश नहीं होता है।
Weekly Numerology Horoscope: वर्ष 2026 का प्रारंभ गुरुवार से हो रहा है जो की देवगुरु है अतः यह वर्ष हर दृष्टि से 2025 की अपेक्षा अच्छा जाने की संभावना है। इस वर्ष मूल्यवान धातुओ और शेयर बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है। प्रचंड गर्मी होने की प्रबल ...
अरशद वारसी पर लगा शेयर मार्केट में बैन, जानिए क्या है मामला
बॉलीवुड एक्टर अरशद वारसी और उनकी पत्नी मारिया गोरेट्टी समेत 57 लोगों पर शेयर बाजार नियामक SEBI ने बैन लगा दिया है। उन्हें 1 साल के लिए सिक्योरिटी मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया है। सेबी का कहना है कि ये लोग मार्केट में धोखाधड़ी जैसे कामों में पाए गए।
काजोल ने किया रियल एस्टेट में निवेश, खरीदी इतने करोड़ की कमर्शियल प्रॉपर्टी
बॉलीवुड एक्ट्रेस काजोल ने इंडस्ट्री में एक अलग मुकाम हासिल किया है। काजोल भले ही फिल्मों में कम नजर आती हो, लेकिन वह सुर्खियों में बनी रहती हैं। काजोल ने अब एक्टिंग के साथ-साथ रियल एस्टेट में भी कदम रख दिया है। काजोल ने मुंबई के गोरेगांव वेस्ट ...
जानिए क्यों पैन इंडिया सुपरस्टार प्रभास पर है 2100 करोड़ रुपए निवेश
पैन इंडिया सुपरस्टार प्रभास अपने करियर के शानदार दौर से गुजर रहे हैं, और निर्विवाद रूप से अखिल भारतीय सुपरस्टार के रूप में अपनी जगह पक्की कर रहे हैं। बाहुबली, सलार, कल्कि 2898 एडी जैसी बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाने वाली फिल्मों के साथ, उन्होंने भारतीय ...
खतरों के खिलाड़ी सीजन 14 के कंटेस्टेंट अभिषेक कुमार जिन्होंने बिग बॉस 17 में अपने कार्यकाल से काफी लोकप्रियता हासिल की, अपने आकर्षक व्यक्तित्व से लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं। विवादित रियलिटी शो में उनकी भागीदारी ने उन्हें स्टार बना दिया और उन्हें रातोंरात सफलता दिलाई। अभिषेक जो वर्तमान में रोहित शेट्टी के शो खतरों के खिलाड़ी 14 में हैं, ने साझा किया कि वह एक प्रोडक्शन हाउस खोलना चाहते हैं। इसे भी पढ़ें: Kartik Aaryan का खुलासा, Pyaar Ka Punchnama की सफलता के बावजूद उनके पास ‘कोई ऑफर नहीं था, कोई पैसा नहीं था ईटाइम्स टीवी के साथ एक इंटरव्यू में, अभिषेक ने खुलासा किया कि वह भविष्य के लिए पैसे बचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता चाहते हैं कि वह मुंबई में एक घर खरीदें, लेकिन वह एक व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। अभिषेक ने कहा कि वह एक उद्यमी बनना चाहते हैं और उनके बड़े सपने हैं जिन्हें वह हासिल करना चाहते हैं। अभिषेक कुमार मुंबई में घर नहीं खरीदना चाहते इंटरव्यू में, अभिषेक ने कहा कि उन्होंने पैसे बर्बाद करना बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह मुंबई में घर नहीं खरीदना चाहते क्योंकि शहर काफी महंगा है और कहा कि किराए पर रहना एक समझदारी भरा फैसला है। उन्होंने यहां तक कहा कि घर खरीदने में बड़ी रकम लगाने और फिर हर महीने लोन के रूप में बैंक को बड़ी EMI चुकाने का कोई मतलब नहीं है। इसे भी पढ़ें: Karan Johar को कोर्ट से मिली राहत, फिल्म Shaadi Ke Director Karan Aur Johar की रिलीज परह लगी रोक अभिषेक ने कहा कि वह अपना पैसा निवेश करना चाहते हैं और उस पर ब्याज पाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह रवि दुबे और सरगुन मेहता की तरह एक प्रोडक्शन हाउस स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि उनका परिवार चंडीगढ़ में घर खरीदे, लेकिन मुंबई में नहीं क्योंकि वे वहीं रह सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह पैसे बचाना चाहते हैं और कोई दूसरा व्यवसाय शुरू करने में निवेश कर सकते हैं। KKK 14 की बात करें तो शिल्पा शिंदे शो से बाहर हो गईं। एक यूट्यूब चैनल के अनुसार, सनी वरुण ने बात की, गश्मीर, करणवीर, अदिति और अभिषेक ने निष्कासन स्टंट किया।
कंगना रनौत के किस बयान पर भड़की CISF की महिला जो सरेआम एक्ट्रेस को जड़ दिया थप्पड़, जानिए पूरा मामला
चंडीगढ़: हिमाचल की मंडी लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी सांसद एवं एक्ट्रेस कंगना रनौत से चंडीगढ़ हवाईअड्डे पर बदसलूकी के पश्चात् हंगामा मचा हुआ है. दरअसल, 6 जून को कंगना दिल्ली जाने के लिए चंडीगढ़ हवाईअड्डे पर पहुंची थीं. तभी सिक्योरिटी चेक के पश्चात् CISF की एक महिला जवान कुलविंदर कौर ने उनको थप्पड़ मार दिया. हालांकि CISF की अपराधी महिला कर्मी को निलंबित कर दिया गया है तथा उनके खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि CISF की जवान ने थप्पड़ क्यों मारा, तो इसका जवाब है कंगना का 4 वर्ष पुराना एक ट्वीट. कंगना रनौत ने इस ट्वीट में 3 कृषि कानूनों के खिलाफ हुए किसान आंदोलन के चलते पंजाब की 80 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला किसान की गलत पहचान करते तथा उन्हें बिलकिस बानो कहा था. कंगना ने जो ट्वीट किया था उसमें एक वृद्ध महिला नजर आ रही थीं, जो भले ही झुककर चल रही थीं, लेकिन उन्होंने किसान आंदोलन का झंडा बुलंद किए हुए था. उनका नाम मोहिंदर कौर था. कंगना ने मोहिंदर कौर की फोटो को ट्वीट करते हुए लिखा था कि ''हा हा. ये वही दादी हैं जिन्हें टाइम मैगज़ीन की 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में सम्मिलित किया गया था.... और ये 100 रुपये में उपलब्ध हैं. हालांकि कंगना रनौत ने बाद में ये ट्वीट डिलीट कर दिया था. बता दें कि कंगना ने जिस बिलकिस बानो का जिक्र किया था, वह 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला हैं तथा उन्होंने दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में CAA प्रोटेस्ट के चलते अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बटोरी थीं. कंगना के इस बयान को लेकर CISF की महिला जवान भड़की हुई थी. चंडीगढ़ हवाईअड्डे पर कंगना से बदसलूकी का वीडियो सामने आया था, इसमें CISF की यह जवान कहती नजर आ रही है कि 'इसने बोला था किसान आंदोलन में 100-100 रुपये में महिलाएं बैठती थीं. वहां मेरी मां भी थी'. राहुल गांधी ने भाजपा पर लगाया शेयर बाजार में हेराफेरी का आरोप, बताया देश का सबसे बड़ा घोटाला उत्तर भारत में भीषण गर्मी का कहर जारी, यूपी के कुछ क्षेत्रों में राहत की उम्मीद बिहार के गया जिले में भीषण सड़क हादसा, तीन लोगों की मौत

5 C
