कभी हालात ऐसे थे जब जरूरतमंदों के लिए मदद के रास्ते सीमित दिखाई देते थे, लेकिन ऋतुराज पवार ने परिस्थितियों का इंतजार करने के बजाय खुद पहल करने का निर्णय लिया। धमतरी के इस सामाजिक कार्यकर्ता ने अपने अनुभव, संघर्ष और संसाधनों को समाज के हित में समर्पित कर दिया। उनका स्पष्ट मानना है कि यदि व्यवस्था में कमी दिखे तो केवल आलोचना नहीं, बल्कि समाधान का हिस्सा बनना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई पहलें शुरू कीं। जरूरतमंद विद्यार्थियों को सहयोग, स्कूलों में मूलभूत संसाधनों की व्यवस्था, रक्तदान शिविर और स्वास्थ्य जांच कैंप जैसे प्रयासों ने सैकड़ों परिवारों तक राहत पहुंचाई। उनका मिशन केवल तात्कालिक सहायता देना नहीं, बल्कि स्थायी और संगठित सामाजिक बदलाव की नींव रखना है। अब वे अपने अगले कदम के रूप में वृद्धा आश्रम की शुरुआत की तैयारी कर रहे हैं, ताकि बुजुर्गों को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्नेहपूर्ण वातावरण मिल सके। ऋतुराज पवार की यह यात्रा बताती है कि जब इरादे मजबूत हों, तो एक व्यक्ति भी पूरे जिले में परिवर्तन की नई कहानी लिख सकता है।
राज्य में कक्षा 9वीं और 11वीं की समान परीक्षा 7 मार्च से 19 मार्च तक होगी। 9वीं 11वीं समान परीक्षा 7 मार्च से शुरू होने जा रही है और राज्यभर में बोर्ड पैटर्न पर प्रश्नपत्र सुरक्षा के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिलों को एक समान प्रश्नपत्र, समान समय विभाजन और कड़ी गोपनीयता के साथ परीक्षा कराने के आदेश दिए हैं। 28 फरवरी 2026 से प्रश्नपत्रों का वितरण जिला मुख्यालय स्तर पर शुरू हो चुका है और सुरक्षा के लिए प्रशासन और पुलिस को भी दिशा निर्देश दिए गए हैं। एक समान प्रश्नपत्र और समय विभाजन निदेशालय के आदेश के अनुसार इस बार पूरी परीक्षा बोर्ड पैटर्न पर होगी। प्रदेश के सभी राजकीय और निजी स्कूलों के साथ परीक्षा केंद्रों पर एक ही प्रश्नपत्र और एक ही समय विभाजन लागू रहेगा। इस व्यवस्था का मकसद सभी स्टूडेंट्स के लिए समान प्रणाली लागू करना है। 28 फरवरी से प्रश्नपत्रों का हस्तांतरण माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने बताया कि 28 फरवरी 2026 से जिला मुख्यालय के तय राजकीय कार्यालय या स्कूल में जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक शिक्षा या अधिकृत प्रभारी को गोपनीय फर्म के प्रतिनिधि द्वारा प्रश्नपत्रों के पैकेट और बॉक्स सौंपे जा चुके हैं। जिला और ब्लॉक स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था जिला और ब्लॉक स्तर के संग्रहण और वितरण केंद्रों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित पीईईओ, यूसीईईओ, प्रधानाचार्य, संस्थाप्रधान और केंद्राधीक्षक के माध्यम से प्रश्नपत्रों को पुलिस थानों और एकल परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षा के साथ समय पर पहुंचाया जाएगा। कलेक्टर और एसपी को दिए निर्देश निदेशक की ओर से सभी जिला कलेक्टर, जिला पुलिस अधीक्षक और पुलिस आयुक्त को परीक्षा से जुड़े दिशा निर्देश और टाइम टेबल उपलब्ध कराने को कहा गया है। साथ ही परीक्षा के सफल और सुव्यवस्थित संचालन के लिए पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
वेतन कटौती से नाराज शिक्षा विभाग के कर्मचारियों ने गुलक दिखा किया प्रदर्शन
जालंधर| शिक्षा विभाग में पिछले 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे दफ्तरी कर्मचारियों ने रोषपूर्ण प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का आरोप है कि विभाग द्वारा उनके वेतन में प्रति माह 31 हजार रुपए तक की कटौती की जा रही है। कटौती के विरोध में कर्मचारियों ने जिला शिक्षा अधिकारी (प्राइमरी) दफ्तर से डीसी कार्यालय तक रोष मार्च निकाला। इस दौरान कर्मचारियों ने एक गुलक हाथ में लेकर आम जनता से अपील की कि वे सरकार का खजाना भरें, ताकि सरकार कर्मचारियों के वेतन में कटौती का निर्णय वापस ले सके। प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने एडीसी अमनिंदर कौर बराड़ को मांग पत्र सौंपा। यूनियन नेताओं ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने अधिकारियों को वेतन न घटाने के निर्देश दिए थे। लेकिन इसे अमल में नहीं लाया गया। सर्व शिक्षा अभियान मिड डे मील दफ्तरी कर्मचारी यूनियन के नेता शोभित भगत, गगनदीप शर्मा, राजीव शर्मा और गगन स्याल ने चेतावनी दी है कि यदि उक्त फैसला रद्द नहीं हुआ तो कर्मचारी नेताआंे के घर घेरेंगे।
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (BSEH) द्वारा 3 मार्च को 12वीं कक्षा की शारीरिक शिक्षा विषय व डीएलएड प्रथम वर्ष (रि-अपीयर) की परीक्षा आयोजित की जाएगी। बोर्ड द्वारा संचालित होने वाली सीनियर सेकेंडरी (शैक्षिक/मुक्त विद्यालय) की तथा डीएलएड परीक्षा में 95 हजार 705 परीक्षार्थी प्रविष्ट होंगे। वहीं परीक्षा को नकल रहित करवाने के लिए बोर्ड द्वारा दावे किए जा रहे हैं और 320 उड़नदस्ते गठित किए गए हैं। सेकेंडरी व सीनियर सेकेंडरी (शैक्षिक/मुक्त विद्यालय) की वार्षिक परीक्षाओं में प्रदेशभर में करीब 1431 परीक्षा केंद्रों पर लगभग 5 लाख 66 हजार 411 परीक्षार्थी प्रविष्ठ हो रहे हैं। जिसमें 2 लाख 96 हजार 593 लड़के व 2 लाख 69 हजार 818 लड़कियां शामिल हैं। इससे पूर्व सोमवार को आयोजित सीनियर सेकेंडरी (शैक्षिक व मुक्त विद्यालय) भौतिक विज्ञान व अर्थशास्त्र विषय एवं डीएलएड (रि-अपीयर) की परीक्षा में नकल के कुल 28 मामले दर्ज किए। परीक्षा ड्यूटी में कोताही बरतने के कारण 1 केंद्र अधीक्षक, 2 पर्यवेक्षकों व 2 लिपिकों को कार्यभार मुक्त किया। धारा-163 लागूपरीक्षा केंद्रों के आसपास धारा-163 लागू कर दी गई है। इसके तहत परीक्षा केंद्रों के निकट फोटोस्टेट की दुकानें और कोचिंग सेंटर बंद रहेंगे। शिक्षा बोर्ड द्वारा परीक्षार्थियों को सलाह दी गई है कि वे प्रवेश-पत्र पर दिए गए निर्देशों का पालन करें और परीक्षा शुरू होने से 30 मिनट पहले केंद्र पर पहुंचें। प्रवेश-पत्र पर परीक्षार्थी और पर्यवेक्षक के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं, इसलिए इसे लैमिनेट न करवाएं।
एलन शिक्षा संबल के सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों ने कोटा में मनाई होली
कोटा के सुपथ कैम्पस में 126 हिंदी माध्यम विद्यार्थियों के लिए विशेष होली मिलन समारोह आयोजित किया गया, जहाँ नीट की तैयारी कर रहे छात्रों ने फैकल्टी संग त्योहार मनाया।
भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने सोमवार को धार के त्रिमूर्ति चौराहा पर धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन किसानों की विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर किया गया। संगठन ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रशासन को 13 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। भारतीय किसान यूनियन टिकैत के जिला अध्यक्ष राकेश सोलंकी ने बताया कि धार जिले की पांचों तहसीलों में एक साथ धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसानों के अधिकारों और भविष्य की लड़ाई है, जो मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा। किसानों ने कहा-भ्रष्टाचार की जांच कराई जाए किसानों की प्रमुख मांगों में शिक्षा व्यवस्था में समानता, 'एक देश एक किताब एक समान शिक्षा प्रणाली' लागू करना, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक्स-रे व सोनोग्राफी मशीनें चालू करना और ग्राम पंचायतों में हुए भ्रष्टाचार की जांच कराना शामिल है। इसके अतिरिक्त, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीदी सुनिश्चित करने, गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदी लागू करने, एमएसपी गारंटी कानून लागू करने और किसानों को फसली ऋण जमा करने की अंतिम तिथि 1 मई तक बढ़ाने की मांग भी रखी गई। सिंचाई के लिए दिन में 12 घंटे बिजली मांगी धरना प्रदर्शन के दौरान सिंचाई के लिए दिन में 12 घंटे बिजली देने, नीलगाय और जंगली सुअर से फसलों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था करने, रेलवे भूमि अधिग्रहण पर चार गुना मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने, खेत सड़क योजना प्रारंभ करने तथा अमेरिका के साथ की गई ट्रेड डील को निरस्त करने की मांग भी उठाई गई। जिला अध्यक्ष राकेश सोलंकी ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर तेज किया जाएगा।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी आज (सोमवार) को विधानसभा में बतौर वित्त मंत्री वर्ष 2026-27 के लिए ₹2,23,658.17 करोड़ का बजट पेश कर रहे हैं। बजट भाषण के दौरान सदन का माहौल गुरुबाणी और संतों के दोहों से उत्साहित दिखा। वहीं, बजट भाषण के दौरान भाजपा के विधायक और मंत्री काफी खुश दिखे। उनके कई मूवमेंट चर्चा का विषय बने। उधर, मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण की शुरुआत गुरु नानक देव जी के मूल सिद्धांत ‘किरत कर, नाम जप, वंड छक’ (ईमानदारी से काम करो, नाम जपो और मिल-बांटकर छको) से की। इसके तुरंत बाद उन्होंने संत कबीर दास जी का प्रसिद्ध दोहा पढ़ा: काल करे सो आज कर, आज करे सो अब। पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगो कब। इस दोहे के माध्यम से उन्होंने विकास कार्यों में तत्परता दिखाने का संदेश दिया। विधायक धनेश अदलखा का 'कांगो' स्टाइल में टेबल वादन जैसे ही सीएम ने बजट राशि की घोषणा की, पूरे सदन में मेजें थपथपाने की आवाज गूंज उठी। इस दौरान बड़खल से विधायक धनेश अदलखा के उत्साह ने सबका ध्यान खींचा। वे दोनों हाथों से टेबल को किसी 'कांगो' (वाद्य यंत्र) की तरह बजाते नजर आए। टेबल बजाते हुए उनके हाव-भाव ऐसे थे मानो वे बैठे-बैठे ही नृत्य कर रहे हों। ‘बहुत बढ़िया, आप भी टेबल बजाओ’, शिक्षा मंत्री ने बढ़ाया जोश जब मुख्यमंत्री शिक्षा क्षेत्र के लिए नई घोषणाएं कर रहे थे, तो उनके ठीक पीछे बैठे शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा काफी जोश में दिखाई दिए। वे बार-बार 'बहुत बढ़िया' बोलकर सीएम का उत्साह बढ़ा रहे थे और साथ ही अन्य विधायकों को भी इशारा कर रहे थे कि वे मेज थपथपाकर इन घोषणाओं का स्वागत करें। पढ़ें बजट के बड़े अपडेट्स… वीटा बूथों में महिला समूहों को 20 फीसदी रिजर्वेशन CM सैनी ने 2000 नए बीटा बूथ खोलने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इसमें स्वयं सहायता समूह चलाने वाली महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इन बूथों में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को 20% आरक्षण दिया जाएगा। 4 राजकीय पशु अस्पताल खोले जाएंगे किसानों के लिए CM सैनी ने घोषणा की कि प्रदेश में 7 नए पशु औषधालय और 4 नए राजकीय पशु अस्पताल खोले जाएंगे। हिसार में ₹30 करोड़ की लागत से हरियाणा पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान केंद्र बनेगा। देसी कपास की खेती की प्रोत्साहन राशि ₹3,000 से बढ़ाकर ₹4,000 प्रति एकड़ की जाएगी। 12 जिलों में 21 नए खेल स्टेडियम मुख्यमंत्री नायब सैनी ने घोषणा की है कि राज्य के हर जिले में एक सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक बनाया जाएगा। साथ ही, हर जिले में एक खेलो इंडिया सेंटर भी खोला जाएगा, जिसे किसी पूर्व चैंपियन खिलाड़ी द्वारा चलाया जाएगा। इसके अलावा, कैथल, झज्जर, चरखी दादरी, गुरुग्राम, कुरुक्षेत्र, जींद, रोहतक, फरीदाबाद, यमुनानगर, सोनीपत, फतेहाबाद और पलवल में 21 नए खेल स्टेडियम भी बनाए जाएंगे। -------------- यह भी पढ़ें- हरियाणा CM ने ₹2.23 लाख करोड़ का बजट पेश किया:बोले- हांसी मॉडर्न जिला बनेगा, किसानों के लिए अलग से बिजली निगम की घोषणा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को विधानसभा में बतौर वित्त मंत्री ₹2,23,658.17 करोड़ का बजट पेश किया। यह पिछले बजट की तुलना में 10.28 प्रतिशत ज्यादा है। पढ़ें पूरी खबर...
विद्या भारती चिंतन बैठक: राष्ट्रीय शिक्षा नीति और जीवन मूल्य शिक्षा पर मंथन
आदर्श विद्या मंदिर में आयोजित जिला स्तरीय बैठक में 13 विद्यालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जहां प्रांतीय मंत्री ने संस्कारयुक्त शिक्षा और डिजिटल शिक्षण पर जोर दिया।
गोपालगंज। बिहार के शिक्षा मंत्री और भोरे विधानसभा क्षेत्र से जदयू विधायक सुनील कुमार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में लागू शराबबंदी कानून में फिलहाल किसी भी तरह के संशोधन का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार शराबबंदी पर यू-टर्न नहीं लेगी। मंत्री सुनील कुमार भोरे स्थित आईबी परिसर में आयोजित होली मिलन समारोह के दौरान मीडिया और कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं की मांग पर शराबबंदी का फैसला लिया था। शराबबंदी से परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार शिक्षा मंत्री ने दावा किया कि शराबबंदी से बिहार के ग्रामीण और शहरी इलाकों में बड़ा सामाजिक बदलाव आया है। उनके अनुसार, इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और घरेलू हिंसा के मामलों में भी कमी आई है। विपक्ष द्वारा शराबबंदी पर उठाए जा रहे सवालों और हंगामे पर कटाक्ष करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि विपक्ष का काम केवल हंगामा करना रह गया है। उन्होंने दोहराया कि सरकार अपने नीतिगत फैसलों पर अडिग है और शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू रखा जाएगा। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने क्षेत्र की जनता को होली के त्योहार की बधाई दी। समारोह में स्थानीय जदयू नेताओं और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर भाईचारे का संदेश दिया।
छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के तहत निजी स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाए जाने का मामला आंदोलन तक पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि, जब तक प्रतिपूर्ति राशि में बढ़ोतरी नहीं होती, तब तक प्रदेशभर के निजी स्कूल असहयोग आंदोलन जारी रखेंगे। असहयोग आंदोलन के तहत निजी स्कूल स्कूल शिक्षा विभाग के किसी भी कार्य में सहयोग नहीं करेंगे, विभाग से जारी किसी भी पत्र, नोटिस या आदेश का जवाब नहीं देंगे। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक प्रतिपूर्ति राशि उनकी मांग के अनुसार नहीं बढ़ाई जाती। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी फैसला लंबित एसोसिएशन ने बताया कि, स्कूल शिक्षा विभाग ने पिछले 13 साल से प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाई है। इस मुद्दे को लेकर उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका क्रमांक WPC 4988/2025 दायर की गई थी। याचिका पर 19 सितंबर 2025 को दिए गए अंतिम आदेश में हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग को 6 माह के भीतर मांगों पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। प्राथमिक, माध्यमिक हाई और हायर सेकेंडरी की राशि बढ़ाने की मांग एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ से मांग की है कि, प्राथमिक कक्षाओं में प्रति विद्यार्थी प्रतिवर्ष प्रतिपूर्ति राशि 7000 रुपए से बढ़ाकर 18,000 रुपए, माध्यमिक स्तर पर 11,500 रुपए से बढ़ाकर 22,000 रुपए, हाई और हायर सेकेंडरी की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपए की जाए। साथ ही यह बढ़ी हुई राशि पिछले तीन वर्षों से प्रभावी करने की भी मांग रखी गई है। गरीब बच्चों की शिक्षा पर खर्च को लेकर चिंता एसोसिएशन का कहना है कि, यह अत्यंत खेदजनक है कि गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा पर होने वाले वास्तविक खर्च को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग संवेदनहीन रवैया अपना रहा है। निजी स्कूल सीमित संसाधनों में RTE के तहत बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं, लेकिन प्रतिपूर्ति राशि में वर्षों से कोई संशोधन नहीं किया गया है। प्रदेशव्यापी असहयोग आंदोलन का ऐलान आज 1 मार्च को हुई छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि जब तक प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाई जाती, तब तक प्रदेश के सभी निजी स्कूल असहयोग आंदोलन करेंगे।
लखनऊ उच्च न्यायालय के निर्देश पर सुल्तानपुर में प्रधानाचार्यों की खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) पद पर पदोन्नति की वर्षों से लंबित प्रक्रिया अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। यह पदोन्नति सेवा नियमावली 1992 के नियम 5(1) के अंतर्गत वरिष्ठ प्रधानाचार्यों/प्रधानाध्यापकों के लिए है। शिक्षा निदेशालय, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज ने इस संबंध में 23 जनवरी 2024 और 26 फरवरी 2024 को पत्र जारी किए हैं। इन पत्रों के माध्यम से प्रदेश के सभी मंडलों और जनपदों से पात्र अधिकारियों की अद्यतन वरिष्ठता सूची, प्रमाणित सेवा अभिलेख, सेवा पुस्तिका और अन्य आवश्यक दस्तावेज निर्धारित प्रारूप में मांगे गए हैं। यह कार्यवाही इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ द्वारा रिट याचिका संख्या 5943/2024 और संबंधित अवमानना वाद संख्या 4792/2024 में पारित आदेशों के अनुपालन में की जा रही है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि पदोन्नति पर विचार केवल सेवा नियमावली 1992 के प्रावधानों के अनुरूप ही किया जाए। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि पूर्व में निरस्त शासनादेश दिनांक 10 अप्रैल 2003 के आधार पर किए गए दावों को विधिसंगत नहीं माना जाएगा। शासन स्तर से सहमति मिलने के बाद, विभागीय स्तर पर सूचना संकलन, अभिलेखों का परीक्षण, पात्रता का सत्यापन और वरिष्ठता निर्धारण का कार्य सुव्यवस्थित रूप से चल रहा है। सुलतानपुर में वरिष्ठता क्रम के अनुसार सरस्वती बालिका इंटर कॉलेज कटसारी की प्रधानाचार्या ऊषा देवी पाण्डेय प्रथम स्थान पर हैं। उनकी खंड शिक्षा अधिकारी पद पर पदोन्नति वरिष्ठता और पात्रता के आधार पर प्रस्तावित मानी जा रही है। संबंधित प्रधानाध्यापकों के अभिलेख सक्षम प्राधिकारी को अग्रिम कार्यवाही के लिए भेजे जा रहे हैं, ताकि न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप इस लंबित प्रकरण का निष्पक्ष और समयबद्ध निस्तारण हो सके।
कैथल जिले के गांव कोटड़ा में मंगलवार को चहल खाप की प्रदेश कार्यकारिणी की एक मीटिंग हुई। इस बैठक में समाज के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश प्रधान बलबीर सिंह चहल (बड़ौदा) ने की। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि चहल खाप का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन 22 मार्च, 2026 को जींद जिले के गांव अलेवा में किया जाएगा। सम्मेलन को सफल बनाने के लिए तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की गई और विभिन्न समितियों के गठन पर भी विचार-विमर्श हुआ। इस सम्मेलन में समाज के विभिन्न क्षेत्रों जैसे सामाजिक, शैक्षणिक, प्रशासनिक, सेना, तकनीकी, मेडिकल शिक्षा, खेल और सांस्कृतिक जगत में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा। इन विभूतियों को आमंत्रित करने और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कार्यकारिणी सदस्यों को सौंपी गई है। शिक्षा को बढ़ावा देने पर दिया जोर वक्ताओं ने गौत्र और समाज में फैली कुरीतियों पर मंथन किया। उन्होंने सामाजिक एकता को मजबूत करने, शिक्षा के प्रसार को बढ़ावा देने और युवाओं को नशामुक्त व सकारात्मक दिशा में प्रेरित करने पर जोर दिया। सभी वक्ताओं ने चहल गौत्र से जुड़े लोगों से 22 मार्च को अधिक से अधिक संख्या में सम्मेलन में भाग लेने की अपील की। इन लोगों ने विचार साझा किए इस बैठक में बलवान कोटड़ा, दलबीर सिंह चहल (एडवोकेट), प्रताप ग्रहणा, सुरजीत हरपुरा, मुंगत दिल्लोंवाली, अमरनाथ नरड़, सुरेश नरड़, जितेंद्र बड़ौदा, रामफल बोबुआ, सुभाष कोटड़ा, लहणा कोटड़ा, मनजीत चहल (सरपंच), रामरूप चहल (रधाना), रामफल रूखी, पवन महमूपुर और रामकिशन जौली सहित कई अन्य व्यक्तियों ने अपने विचार साझा किए।
राजस्थान के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा ने बृज नगर के पसोपा गांव में एक महिला कॉलेज का भूमि पूजन किया। इस अवसर पर राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म भी मौजूद रहे। उपमुख्यमंत्री बैरवा के आगमन पर क्षेत्र के लोगों में भारी उत्साह देखा गया। हजारों की संख्या में जुटे स्थानीय निवासियों ने उपमुख्यमंत्री बैरवा और राज्य मंत्री बेढ़म का साफा और माला पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान पुष्प वर्षा भी की गई। कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ने पसोपा में नवनिर्मित कॉलेज का शिलान्यास किया। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए 20-20 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था, जिसे देखते हुए यह कॉलेज एक महत्वपूर्ण सौगात है। डॉ. बैरवा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के विजन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार प्रदेश में ऐतिहासिक विकास कार्य करवा रही है। उपमुख्यमंत्री ने मंच से क्षेत्रवासियों को होली महोत्सव की अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने क्षेत्र में विकास के कई कार्य किए हैं। साथ ही, उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश भर में हो रहे कार्यों का ब्यौरा भी जनता के समक्ष रखा। राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने उपमुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके सहयोग से बृज नगर में शिक्षा के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित हुआ है। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर आज इस बड़े शिक्षा मंदिर का शिलान्यास किया गया है, वह पिछले 70 सालों से वंचित इलाका रहा है, जिसकी आज तक किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने उपमुख्यमंत्री की कॉलेज देने की पहल की सराहना की।
क्लास से अंतिम रिवीजन तक शिक्षा-सेवा की मिसाल
जयपुर/नई दिल्ली | सीबीएसई कक्षा 10 विज्ञान परीक्षा के बाद छात्रों ने बताया कि पेपर का बड़ा हिस्सा उन्हीं टॉपिक्स से आया, जिन पर विज्ञान शिक्षक प्रशांत किराड़ मैराथन क्लास और सुबह के लाइव रिवीजन में खास फोकस कराया था। उन्होंने अहम कॉन्सेप्ट्स, डायग्राम और मुख्य बिंदु दोहराकर शंकाएं दूर कीं, जिससे तैयारी आसान रही। छात्र बताते हैं कि उनके ऑनलाइन लेक्चर जटिल विषय भी सरल भाषा में समझाते हैं। शिक्षक होने के साथ-साथ किराड़ एजुकार्ट पब्लिकेशंस की 5 बेस्ट-सेलिंग पुस्तकों के लेखक भी हैं। उनकी निशुल्क पहल से पांच वर्षों में एक करोड़ से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हुए, जबकि अनुमानतः 80% बोर्ड परीक्षार्थी उनके वीडियो देखते हैं।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने इस वर्ष से बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों को दूसरा अवसर देने की व्यवस्था लागू की है। 10वीं और 12वीं की मुख्य बोर्ड परीक्षाएं फिलहाल जारी हैं, जबकि दूसरी परीक्षा अप्रैल में होगी। जिन विद्यार्थियों को पहली परीक्षा में कम अंक आने का अंदेशा हो या कोई पेपर अपेक्षा के अनुसार नहीं गया हो, वे अधिकतम तीन विषयों की दोबारा परीक्षा दे सकेंगे। दूसरी परीक्षा के अंक अंतिम परिणाम में जोड़े जाएंगे। इसका उद्देश्य साल में एक बार होने वाली परीक्षा के दबाव को कम करना और विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन का अवसर देना है। इससे छात्र बिना डर के पहली परीक्षा दे सकेंगे और तैयारी में कमी की भरपाई कर पाएंगे। स्कूल तैयार करेंगे कैंडिडेट्स सूची सीबीएसई ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि पहली परीक्षा पूरी होने के बाद ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इच्छुक विद्यार्थी तीन विषय चुनकर आवेदन कर सकेंगे। स्कूल इन छात्रों की लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स तैयार करेंगे। दूसरी परीक्षा अलग परीक्षा केंद्रों पर होगी। सीबीएसई के अनुसार कक्षा 10वीं की परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू होकर 7 मार्च तक चलेंगी, जबकि 12वीं की परीक्षाएं 14 फरवरी से शुरू होकर 10 अप्रैल तक जारी रहेंगी। सिटी को-ऑर्डिनेटर सीबीएसई पूनम राठौड़ के अनुसार यह व्यवस्था विद्यार्थियों को तीन विषयों में बेहतर स्कोर हासिल करने का अवसर देगी और परीक्षा तनाव कम करेगी।
कोरबा में कोरबा पॉवर लिमिटेड (केपीएल), पताड़ी के प्रस्तावित 1600 मेगावाट क्षमता विस्तार के लिए हाल ही में जनसुनवाई आयोजित की गई। इस जनसुनवाई में बरपाली तहसील के 12 गांवों के हजारों ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और मुख्य रूप से शिक्षा, चिकित्सा, मूलभूत सुविधाओं तथा बेरोजगारों को नौकरी देने की मांग रखी। यह जनसुनवाई छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा आयोजित की गई थी। इसमें पीठासीन अधिकारी के रूप में कोरबा के अतिरिक्त कलेक्टर देवेंद्र पटेल और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, कोरबा के क्षेत्रीय अधिकारी अंकुर साहू मौजूद थे। एसडीएम सरोज कुमार महिलांगे और कार्यपालक अभियंता प्रसन्ना सोनकर सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। अदाणी पॉवर लिमिटेड के पर्यावरण विभाग प्रमुख आर एन शुक्ला ने केपीएल परियोजना के बारे में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। लगभग ढाई घंटे तक चली इस जनसुनवाई में खोड्डल, पताड़ी, सरगबूंदिया, पहंदा, बरीडीह और तिलकेजा सहित कुल 12 गांवों के ग्रामीणों ने अपनी बात रखी। ग्रामीणों ने क्षेत्र के विकास, नौकरी और स्वरोजगार के लिए उचित प्रबंधन सहित कई सुझाव दिए। पीठासीन अधिकारी ने सभी मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और कंपनी के अधिकारियों की उपस्थिति में उन पर विचार करने का आश्वासन दिया। जनसुनवाई में ग्रामीणों ने पावर प्लांट के विस्तार को समर्थन दिया जनसुनवाई में उपस्थित सरपंचों और ग्रामीणों ने अदाणी पॉवर लिमिटेड की केपीएल इकाईयों के 800 मेगावाट की दो इकाइयों के क्षमता विस्तार का समर्थन किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस विस्तार से क्षेत्र में विकास के नए आयाम खुलेंगे और हजारों लोगों को नई नौकरियां तथा स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। जनसुनवाई में गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार की मांग रिसदिहापारा की एक ग्रामीण महिला भारती कुर्रे ने जनसुनवाई के दौरान कहा कि कोरबा पॉवर लिमिटेड के आने से उनके गांव में कई विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं। हालांकि, उन्होंने आने वाले समय में शिक्षा, चिकित्सा, मूलभूत सुविधाओं और बेरोजगारों को नौकरी देने की मांगों पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा क्षेत्र के 100 सीटर कन्या छात्रावास में छात्राओं के अजीब गतिविधियों को लेकर परिजनों में डर फैल गया है। भूत-प्रेत की आशंका जताते हुए कई पेरेंट्स अपनी बेटियों को छात्रावास से घर ले जा रहे हैं। अब तक पांच छात्राओं को उनके परिजन गांव वापस ले जा चुके हैं। बीते कुछ दिनों से छात्रावास की लगभग एक दर्जन छात्राओं की तबीयत बिगड़ने और उनके व्यवहार में बदलाव की खबरें सामने आईं। यह जानकारी फैलते ही आसपास के गांवों से परिजन पोड़ी पहुंचे। ग्रामीण अंचल से आए कुछ अभिभावकों ने इसे भूत-प्रेत से जोड़कर देखा और आशंका के चलते अपनी बेटियों को छात्रावास में रखने से इनकार कर दिया। नाम न छापने की शर्त पर एक रिश्तेदार ने बताया कि पहले भी इस तरह की घटनाएं देखी गई हैं। इसी डर के कारण कुछ परिजन मालवाहन लेकर छात्रावास पहुंचे और अपनी बेटियों को सामान सहित गांव वापस ले गए। यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। डीईओ ने किया छात्रावास का निरीक्षण इस पूरे मामले की जानकारी छात्रावास अधीक्षिका ने प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी टी.पी. उपाध्याय को दी। सूचना मिलने पर शुक्रवार को जिला शिक्षा अधिकारी ने छात्रावास का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान ब्लॉक शिक्षा अधिकारी एचआर दयाल भी उनके साथ थे। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि छात्राएं परीक्षा के दबाव और मानसिक तनाव में थीं। बातचीत और समझाइश के बाद यह स्पष्ट हुआ कि किसी तरह की अलौकिक घटना नहीं हुई है। छात्राओं को समझाया गया कि भूत-प्रेत जैसी बातें अंधविश्वास हैं और उन्हें डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। अधीक्षिका को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अभिभावकों को बुलाकर स्थिति स्पष्ट करें और छात्राओं का मनोबल बढ़ाएं। एग्जाम के प्रेशर से तबीयत में बदलाव स्वाभाविक शिक्षा विभाग का कहना है कि परीक्षा के समय सामूहिक तनाव के कारण छात्राओं की तबीयत और व्यवहार में बदलाव आना स्वाभाविक है। विभाग ने छात्रावास में नियमित निगरानी, आवश्यकतानुसार परामर्श और अभिभावकों से लगातार संवाद बनाए रखने की बात कही है। फिलहाल छात्रावास में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
शाजापुर के भाजपा जिला कार्यालय में शनिवार को पत्रकार वार्ता में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने राज्य के हालिया बजट और 'विकसित मध्यप्रदेश' के विजन को साझा किया। उन्होंने इस बजट को सर्वस्पर्शी बताते हुए किसानों, युवाओं और महिलाओं के हित के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। मंत्री परमार ने बजट की खूबियां गिनाते हुए महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सरकार का पक्ष रखा। कर्ज पर सफाई प्रदेश पर बढ़ते कर्ज के सवाल पर उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश की स्थिति बेहतर है और लिया गया कर्ज सिर्फ विकास कार्यों में लगाया जा रहा है। जनकल्याणकारी योजनाएं 'फ्रीबीज' के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि कमजोर वर्गों को सहायता देना सरकार का दायित्व है ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके। प्राथमिकताएं सरकार वर्तमान में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कालापीपल क्षेत्र के लिए विकास लोक निर्माण विभाग ने कालापीपल विधानसभा क्षेत्र के लिए बुनियादी ढांचे के विस्तार की योजना तैयार की है- 1. प्रमुख सड़क निर्माण परियोजनाएं: पोलायकलां-रनायल-नयापुरा मार्ग 30 किमी लंबी इस सड़क का निर्माण 70 करोड़ रुपए की लागत से होगा। अन्य सड़कें चाकरोद-ढायलास-हुसेनपुर और खड़ी-मोल्टा-केवड़ी मार्ग के लिए करीब 3.77 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। 2. पुल एवं पुलिया निर्माण क्षेत्र की 12 जर्जर पुलियाओं का नए सिरे से निर्माण किया जाएगा। इसमें अकोदिया-सुंदरसी मार्ग, कालापीपल-कुरावर मार्ग और पोलायकलां मार्ग की पुलिया शामिल हैं। इसके अलावा सिरोलिया-साजोद मार्ग पर लसुंदर नदी पर नया पुल बनाया जाएगा। 3. अन्य सुविधाएं: कालापीपल शहर में एक नए शासकीय विश्राम गृह का निर्माण होगा। जटा शंकर महादेव और लकुमड़ी शनि मंदिर के लिए पक्के पहुंच मार्ग बनाए जाएंगे। मोहन बड़ोदिया में बायपास सड़क और भूरिया-खजुरिया, बोरसाली-झुंडाखेड़ी जैसे गांवों के लिए ग्रामीण कनेक्टिविटी तय की जाएगी। इस दौरान शाजापुर विधायक अरुण भीमावद, कालापीपल विधायक घनश्याम चंद्रवंशी और जिला अध्यक्ष रवि पांडे सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
व्यापक यौन शिक्षा का सबसे जरूरी विषय है रिप्रोडक्शन यानी प्रजनन। 8वीं कक्षा में यह विषय है, क्योंकि शारीरिक बदलावों के बीच किशोर-किशोरियों में होने वाली जिज्ञासा को सही दिशा में समझाया जा सके। लेकिन, किताब का पाठ किशोरवय स्टूडेंट्स को ठीक से पढ़ाया नहीं जा रहा। शर्म, सामाजिक संकोच और पारंपरिक सोच बच्चों की जिज्ञासा को रोक रही है, उन्हें गलत ट्रैक से अधूरी या गलत जानकारी लेने पर मजबूर कर रही है। नतीजा- किशोरवय के साथ यौन अपराध या यौन समस्याएं। भास्कर ने 20 सीबीएसई और सरकारी स्कूलों के कक्षा 8वीं के विद्यार्थियों से बातचीत की। शेष | पेज 6 12 स्कूलों में यह पाठ ठीक से पढ़ाया ही नहीं गया। शिक्षकों ने इसे या तो छोड़ दिया या जल्दी-जल्दी पढ़ाकर आगे बढ़ गए। एनसीईआरटी की किताबों में छपी तस्वीरें दिखाकर खुलकर बात नहीं कर रहे। बच्चों से यहां तक कहा जा रहा है कि सही उम्र आने पर खुद समझ जाओगे...इसे घर जाकर पढ़ना। मजबूरन बच्चे इंटरनेट, दोस्तों या सोशल मीडिया से पूछ रहे हैं। यहीं से भ्रामक जानकारी, गलतफहमियां और गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को पढ़ाने में ज्यादा झिझक, नीट में भी केवल 3 प्रतिशत ही वेटेज सरकारी स्कूलों के 5 प्रधानाध्यापकों ने बताया- शिक्षक इसे विषय को पढ़ाने में असहज हैं। महिला शिक्षक चैप्टर बीच में छोड़ देती हैं। पुरुष शिक्षक पढ़ाएं तो बच्चों से अश्लील बातें करने के आरोप लगते हैं। उधर, नीट में 3% प्रश्न ही रिप्रोडक्शन से जुड़े होते हैं। ऐसे में अकादमिक स्तर पर भी इस विषय को सीमित महत्व मिल पाता है। 8वीं के बच्चों की बात सुनिए- मैम सवाल करने से रोकती हैं एक्सपर्ट व्यू- झिझक तोड़नी होगी, को-एजुकेशन स्कूलों में अलग क्लास हो 2012 में सीबीएसई ने एंसीलरी एजुकेशन शुरू की। बच्चों को शारीरिक बदलावों के बारे में बताया जाता है। लाइफ स्किल, फिजिकल एजुकेशन दिया जाता है। नई शिक्षा नीति के तहत यह पाठ पीपीटी, एनिमेटेड वीडियो, ग्राफिक के जरिए भी पढ़ा सकते हैं। सह-शिक्षा (को-एजुकेशन) स्कूलों में इसे अधिक संवेदनशीलता-सहजता से पढ़ाने के लिए छात्र-छात्राओं की अलग कक्षाएं ली जा सकती हैं, ताकि विद्यार्थी बिना झिझक प्रश्न पूछ सकें और विषय को बेहतर ढंग से समझ सकें।
शिक्षा को हिंसक नहीं, संवेदनशील बनाना होगा
देश में इन दिनों बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं और सामान्य परीक्षाएं भी शुरू होने वाली हैं। हर साल की तरह इस बार भी परीक्षा का मौसम केवल प्रश्नपत्रों और परिणामों का नहीं, बल्कि मानसिक दबाव, चिंता और असुरक्षा का मौसम बनता जा रहा है। छात्रों के चेहरों पर भविष्य की चिंता साफ पढ़ी जा ... Read more
प्ले स्कूल पॉलिसी की दरकार, सिलेबस व करिकुलम तय होने से सुधरेगा शिक्षा का स्तर
प्री-प्राइमरी स्कूल की स्थिति को लेकर शुक्रवार को दैनिक भास्कर अॉफिस में टॉक शो का आयोजन किया गया। इसमें शहर के प्रमुख प्ले स्कूल के प्रिंसिपल और डायरेक्टर पहुंचे और अपनी बातें रखीं। उन्होंने प्ले स्कूल के विजन और दर्शन पर अपने विचार रखते हुए बताया कि प्ले स्कूल में पढ़ कर निकलने वाले बच्चे और जो बच्चे प्ले स्कूल में नहीं पढ़ते है उनमें बेसिक क्या अंतर होता है। प्ले स्कूलों में सिलेबस व करिकुलम पर चिंता जताते हुए कहा कि प्ले स्कूलों में भी एक पॉलिसी होनी चाहिए जिसे सारे स्कूल फॉलो करे। अभी तक प्ले स्कूल के लिए कोई गाइडलाइन तय नहीं है। ऐसे में बच्चों को क्या और कितना पढ़ाना है, यह तय नहीं होता है। स्कूल यह खुद तय करते हैं। अगर एक पॉलिसी या गाइडलाइन होगी तो सारे प्ले स्कूल उसे फॉलो करेंगे, इससे स्कूलों को एक दिशा मिलेगी। इसके अलावा मेट्रो सिटी में और रांची के प्ले स्कूल में क्या अंतर है इसपर भी सभी ने अपने विचार रखे। बताया कि मेट्रो सिटी के स्कूलों में बच्चों की पर्सनालिटी पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है लेकिन यहां प्रेप में एडमिशन के लिए हम बच्चों को तैयार करते हैं। प्ले स्कूल को लेकर नजरिया बदलने की जरूरत है। प्ले स्कूल बेहतर होगा अगर हम नेक्स्ट लेवल पर क्वालिटी एजुकेशन और पर्सनालिटी डेवलप करें। सरकार को पॉलिसी लानी चाहिए मेट्रो सिटी के प्ले स्कूलों में बच्चों की पर्सनालिटी पर ज्यादा काम किया जाता है। लेकिन, रांची में देखें तो हमें एकेडमिक पर भी ध्यान देना पड़ता है। क्योंकि, प्ले स्कूल से निकलने के बाद जब बच्चे किसी दूसरे स्कूल में क्लास एक में एडमिशन लेते हैं, तब उन्हें रिटन एग्जाम देना पड़ता है। हमें बच्चों को दूसरों स्कूलों में एडमिशन ले सकें इसके लिए तैयार करना पड़ता है। बड़े स्कूलों की यही डिमांड है, इसलिए हमें भी बच्चों को उसी तरह से तैयार करना पड़ता है। प्ले स्कूल और बड़े स्कूलों के बीच कोई भी ब्रिज नहीं है। प्ले स्कूल के पास ना सिलेबस है और ना करिकुलम इससे बच्चों को क्या पढ़ाना है, यह तय करने में स्कूल को परेशानी होती है। सरकार को ऐसी कोई पॉलिसी लानी चाहिए, जिससे प्ले स्कूल और बड़े स्कूलों के बीच संपर्क बनाया जा सके। -विभा सिंह, मेरे नन्हे कदम एनईपी गाइडलाइन फॉलो नहीं कर रहे हैं प्री-प्राइमरी स्कूल में कई स्कूल एनईपी की गाइडलाइन को फॉलो करते हैं। लेकिन, ऐसे भी कई स्कूल हैं जो इसे पूरी तरह फॉलो नहीं करते हैं। सीबीएसई स्कूल गाइडलाइन को मान रही है, लेकिन अभी भी आईसीएसई बोर्ड के स्कूल इस गाइडलाइन नहीं मानते हैं। इससे क्लास 1 में बच्चों के एडमिशन के समय परेशानी होती है। पेरेंट्स को बच्चों के जन्म तिथि में बदलाव करना पड़ता है। -गरिमा जयंत, यूरो किड्स स्कूल स्कूल में बच्चे ‘सर्व धर्म सम भाव’ सीखते हैं स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के साथ भारत की संस्कृति के बारे में भी सिखाया जाता है। स्कूल में बच्चे हर धर्म के पर्व-त्योहार मनाते हैं। इससे उन्हें देश की संस्कृति का पता चलता है और वे उसका आदर करना सीखते हैं। रक्षाबंधन में खुद से राखी बनाते हैं, राम-सीता बनकर फैंसी ड्रेस कंपीटिशन में हिस्सा लेते हैं। हर कार्यक्रम में सहभागी होते हैं। इसके अलावा जितने भी नेशनल डे होता है, सभी मनाते हैं। -मनीष मिशाल, आदर्श किड्स स्कूल बच्चों का आत्मबल अपने आप बढ़ने लगता है स्कूल में हम पेरेंट्स की काउंसलिंग भी करते हैं। उन्हें सिखाते हैं कि बच्चों को क्वांटिटी टाइम नहीं क्वालिटी टाइम दें। उनके काम को सराहें। इससे बच्चे जो भी कुछ सीखते हैं उसे घर में जाकर दुहराते हैं और जब पेरेंट्स उस काम को सराहते हैं तो बच्चों का आत्मबल अपने आप बढ़ने लगता है। हम पेरेंट्स को बताते हैं कि आप बच्चों को आधा घंटा का ही समय दें, लेकिन पूरा समय दें। -मिंत्रा पांडेय, चिरंजीवी प्ले स्कूल, बैंक कॉलोनी ब्रांच पेरेंट्स की भी काउंसलिंग की जाती है स्कूल में बच्चों को अलग-अलग मुद्दों को लेकर जागरूक किया जाता है। जैसे मोबाइल फोन का प्रयोग कम करें, खाने में क्या खाएं और उन्हें जागरूक करने के लिए स्टोरी टेलिंग, ड्रामा, रोल प्ले कराया जाता है। किसी चीज के लिए मना कर रहे है तो क्यों मना कर रहे हैं बताते हैं। इससे बच्चे चीजों को समझते हैं और मानते हैं। पेरेंट्स की भी काउंसलिंग की जाती है कि बच्चे के लिए क्या सही- गलत है। -वंदना कुमार, क्रेयोन्स मोंटेसरी स्कूल प्ले स्कूल से बच्चे जिम्मेदार बनते हैं प्ले स्कूल बच्चों की नींव को मजबूत करता है। जब बच्चा घर पर होता है तो उसे स्कूल में दोस्त मिलते हैं जिसे देखकर वह कैसे व्यवहार करना है, सीखता है। जब बच्चा घर से स्कूल आता है तो स्कूल में कई टास्क कराए जाते हैं जिससे वह जिम्मेदार बनता है। कहानियों के माध्यम से चीजों की कीमत समझना सिखता है। बच्चों को स्कूल में बताया जाता है कि अगर चीजें करनी है तो क्यों करनी है और अगर नहीं करना है तो क्यों नहीं करना है, उन्हें क्यों का जवाब मिलता है। प्ले स्कूल में हर 10 बच्चे पर एक टीचर और एक दीदी होती है, जो उन्हें हर तरह से गाइड करती है। जो बच्चें प्ले स्कूल जाते है उन्हें खेल-खेल में सिखाया जाता है इससे उनका बचपना जिंदा रहता है। उन्हें घर जैसा माहौल मिलता है। और जो बच्चे प्ले स्कूल से ट्रेंड होकर निकलते है उन्हें एडजस्ट करने में परेशानी नहीं होती है। -वंदना बहल, संत माइकल प्ले स्कूल छोटे बच्चे अब टेक्नोलॉजी सीख रहे हैं दैनिक भास्कर के कार्यालय में आयोजित शिक्षा संवाद में भाग लेते शहर के प्ले और प्री-प्राइमरी स्कूल के प्रिंसिपल और डायरेक्टर। टीचर का ट्रेंड होना सबसे जरूरी है प्री-प्राइमरी स्तर पर टेक्नोलॉजी का प्रयोग हो रहा है। बच्चों को स्मार्ट बोर्ड पर बढ़ाया जाता है। बच्चे पढ़ने से ज्यादा देखकर सीखते हैं इसलिए उन्हें विजुअल क्लास भी दिया जाता है। बच्चों के साथ टीचर भी सोशल मीडिया और बाकी एप्स की मदद से बच्चों को टेक्नोलॉजी के बारे में बता रहे हैं और उससे सीखकर बच्चों को सीखा रहे हैं। टीचरों को अब हर समय करिकुलम ट्रेनर की जरूरत नहीं पड़ती है, वे सोशल मीडिया या चैट जीपीटी से देखकर सीख रहे हैं। थ्री-डी का इस्तेमाल हो रहा है। -संगीता राज, लिटिल चैंप प्ले स्कूल प्ले स्कूल में समय-समय पर टीचरों की ट्रेनिंग होती है, ताकि वे बच्चों को हमेशा नया सीखा पाएं। छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए उन्हें संभालने के लिए ट्रेंड टीचर की जरूरत होती है। प्ले स्कूल में टीचर वैसे चाहिए जो एनर्जेटिक हो, एक्टिव हो और जिसकी चार्मिंग पर्सनालिटी हो। मैच्योर होना बहुत जरूरी है, ताकि बच्चों के पेरेंट्स से बात कर सकें। 23-24 साल के टीचर प्ले स्कूल के लिए सही होते है। नर्सरी टीचर ट्रेनिंग शिक्षकों के लिए बहुत जरूरी है । -डॉ. अर्चना सिन्हा, चिरंजीवी प्ले स्कूल, कुसुम विहार ब्रांच talk show
टीकमगढ़ में शिक्षा का मंदिर शर्मसार:छात्राओं से छेड़छाड़ करने वाला हेडमास्टर गिरफ्तार
ओरछा रोड थाना क्षेत्र के ग्राम धौरी स्थित शासकीय प्राइमरी स्कूल में छात्राओं के साथ गलत व्यवहार का मामला सामने आया है। ग्रामीणों के आक्रोश के बाद पुलिस ने आरोपी प्रधानाध्यापक संजीव कुमार चतुर्वेदी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। दरअसल, स्कूल की बच्चियों ने अभिभावकों से शिकायत की थी कि हेडमास्टर उन्हें गलत तरीके से छूते हैं। मामला सामने आते ही गांव में तनाव फैल गया और करीब 50 से अधिक ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर थाने पहुंचे। डीईओ के निलंबन आदेश के मुताबिक, आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए हैं, जो शिक्षकीय गरिमा के विपरीत और गंभीर आपराधिक श्रेणी के हैं। आरोपी शिक्षक का मुख्यालय अब गौरिहार (छतरपुर) नियत किया गया है।
सहारनपुर में मण्डलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार की अध्यक्षता में शुक्रवार शाम सर्किट हाउस सभागार में सीएम डैशबोर्ड के तहत विकास कार्यों,कर-करेत्तर और राजस्व कार्यों की मण्डलीय समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में विभिन्न विभागों की प्रगति,रैंकिंग और योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तार से समीक्षा की गई। मण्डलायुक्त ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक पात्र युवाओं का पंजीकरण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि यह योजना 1 जुलाई 2025 से प्रभावी होगी। इसके तहत पहली बार नौकरी पाने वाले युवाओं को 15 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दो किस्तों में मिलेगी। नियोक्ताओं को प्रति कर्मचारी 3 हजार रुपये प्रतिमाह तक की सहायता दी जाएगी। सभी विभागों को अपने स्टेकहोल्डर्स को योजना की जानकारी देकर व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा गया। शिक्षा का अधिकार के तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को योजना का पूरा लाभ दिलाने पर जोर दिया गया। मण्डलायुक्त ने निर्देश दिए कि पहली लॉटरी में चयन से वंचित छात्रों को दूसरी बार अवसर दिया जाए और फीस प्रतिपूर्ति समय पर की जाए, ताकि कोई भी पात्र छात्र वंचित न रहे। जल संचयन-जन भागीदारी के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों को बढ़ावा देने और सभी कार्यों को पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश भी दिए गए। खेलों को बढ़ावा देने के लिए तहसील स्तर पर प्रयासों में तेजी लाने, खिलाड़ियों के खाते खुलवाने और मण्डल स्तरीय प्रतियोगिताओं को गति देने पर भी बल दिया गया। मण्डलायुक्त ने विभागों की रैंकिंग पर भी बात की। उन्होंने कहा कि 'ए' श्रेणी वाले विभाग अपनी रैंकिंग बनाए रखें, जबकि 'बी','सी' और 'डी' श्रेणी वाले विभाग अपनी कार्यशैली में सुधार कर रैंकिंग बेहतर करें। आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कर शिकायतकर्ता की संतुष्टि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। पीएम कुसुम,मुख्यमंत्री आवास,जल जीवन मिशन,पर्यटन,शिक्षा और समाज कल्याण सहित अन्य योजनाओं में जिन जनपदों की रैंकिंग खराब है,उन्हें अगले माह तक सुधारने के सख्त निर्देश दिए गए। राजस्व समीक्षा के दौरान लक्ष्य के अनुरूप वसूली बढ़ाने,बैकलॉग समाप्त करने और चकबन्दी मामलों का शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में मण्डल एवं जनपद स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
बजट घोषणा वर्ष 2024–25 की अनुपालना में चरणबद्ध रूप से प्रथम चरण में राजस्थान बालिका सैनिक स्कूल के लिए चयन परीक्षा 2026 का आयोजन 8 मार्च 2026 (रविवार) को प्रातः 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक राज्य के समस्त जिला मुख्यालयों पर किया जाएगा। शिक्षा विभागीय परीक्षाओं के पंजीयक ने बताया कि विभाग द्वारा इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। परीक्षा के माध्यम से पूज्या रामीदेवी रामनारायण राठी बालिका सैनिक स्कूल जयमलसर (बीकानेर) एवं महाराव शेखाजी बालिका सैनिक स्कूल, सीकर में प्रवेश हेतु चयन किया जाएगा। उक्त परीक्षा के प्रवेश पत्र ऑनलाइन जारी कर दिए गए हैं। परीक्षार्थी अपने प्रवेश पत्र शाला दर्पण पोर्टल के बालिका सैनिक स्कूल टेब के माध्यम से डाउनलोड कर सकते हैं। जिन अभ्यर्थियों ने ऑफलाइन आवेदन किया है, वे अपना प्रवेश पत्र संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) (माध्यमिक) कार्यालय से भी प्राप्त कर सकते हैं।
चूरू के सोमासी गांव के दो सगे भाइयों ने मेडिकल शिक्षा और मानव सेवा के लिए मृत्यु उपरांत अपनी देह दान करने का संकल्प लिया है। रामकुमार सुण्डा और रणजीत सिंह सुण्डा ने स्वेच्छा से देहदान के फॉर्म भरकर यह निर्णय लिया। देहदान संकल्प के इस अवसर पर चूरू मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एमएम पुकार ने दोनों भाइयों का स्वागत किया। डॉ. पुकार ने बताया कि यह कदम न केवल मेडिकल विद्यार्थियों के अध्ययन में सहायक होगा, बल्कि समाज में अंगदान और देहदान के प्रति सकारात्मक सोच को भी मजबूत करेगा। डॉ. पुकार ने जानकारी दी कि दोनों भाई अपने गुरुजनों और चूरू में चलाए जा रहे अंगदान जागरूकता अभियान से प्रेरित होकर आगे आए हैं। उनका यह निर्णय समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। डॉ. पुकार के अनुसार, चूरू मेडिकल कॉलेज में अब तक 42 लोग देहदान के लिए पंजीकरण करा चुके हैं। ऐसे संकल्प मेडिकल शिक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ मानव सेवा की भावना को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाते हैं।
राजस्थान शिक्षा सहयोगी संघ (मां-बाड़ी योजना) की जिला स्तरीय बैठक प्रतापगढ़ के टैगोर पार्क में हुई। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष खेमराज मीणा ने की।बैठक में जिले के सभी उपखंडों से मां-बाड़ी और डे-केयर शिक्षा सहयोगियों ने भाग लिया। 13 फरवरी से तालाबंदी बैठक में आंदोलन की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई। शिक्षा सहयोगियों ने बताया कि 13 फरवरी से मां-बाड़ी और डे-केयर केंद्रों पर तालाबंदी और कलमबंदी आंदोलन लगातार जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट सत्र में सरकार ने उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया। इस अनदेखी के कारण प्रदेशभर के लगभग 1 लाख बच्चों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। प्रतापगढ़ जिले में संचालित 408 मां-बाड़ी एवं डे-केयर केंद्रों में अध्ययनरत करीब 10,000 बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई है। शिक्षा सहयोगियों ने कहा कि लगातार बंद पड़े केंद्रों के कारण बच्चों की शिक्षा, पोषण और नियमित गतिविधियों पर गंभीर असर पड़ रहा है। वरिष्ठता के आधार पर कैडर निर्धारण की मांग संघ की प्रमुख मांगों को दोहराते हुए कहा गया कि मां-बाड़ी शिक्षा सहयोगियों को वर्ष 2022 में शामिल किया जाए। वरिष्ठता के आधार पर कैडर निर्धारण किया जाए। प्रतिभागियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द सुनवाई नहीं करती है, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। जिला अध्यक्ष खेमराज मीणा ने कहा कि सरकार की अनदेखी से शिक्षा सहयोगियों में निराशा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी जायज़ मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह आंदोलन केवल सेवा शर्तों के लिए ही नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सरकार से सकारात्मक बातचीत होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
उमरिया के मानपुर स्थित कन्या शिक्षा परिसर के प्रभारी प्राचार्य अमरजीत द्विवेदी को गंभीर आरोपों के बाद निलंबित कर दिया गया है। 20 फरवरी को परिसर की छात्राओं ने प्राचार्य के खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया था। छात्राओं ने आरोप लगाया था कि प्राचार्य का व्यवहार अनुचित था और वह रात के समय भी छात्रावास में घुसकर उनके कमरों में जाते थे। शारीरिक शोषण के लिए दबाव बनाने का था आरोप इसके अलावा, छात्रावास की महिला कर्मचारियों ने भी प्राचार्य पर शारीरिक शोषण के लिए दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने जांच शुरू की थी। मामले की जांच के बाद कलेक्टर ने किया निलंबित जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन ने कार्रवाई का प्रस्ताव संभागीय आयुक्त को भेजा था। शहडोल संभाग की आयुक्त सुरभि गुप्ता ने आरोपों को गंभीर मानते हुए अमरजीत द्विवेदी को निलंबित कर दिया। प्राचार्य पर पहले भी मनमानी और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। नए प्रभारी की नियुक्ति निलंबन के बाद अरनोद कुमार शुक्ला को कन्या शिक्षा परिसर मानपुर का नया प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया गया है। प्रशासन ने यह भी बताया कि इस मामले में आगे की जांच जारी रहेगी।
हरियाणा एजुकेशन मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन (हेमसा), जो सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा से संबद्ध है, ने गुरुग्राम के लघु सचिवालय प्रांगण में एक रोष सभा आयोजित की। सभा की अध्यक्षता जिला प्रधान उदयभान यादव ने की। संगठन ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी गुरुग्राम के माध्यम से निदेशक, सेकेंडरी शिक्षा हरियाणा, पंचकूला को ज्ञापन सौंपा। राज्य कमेटी सदस्य अरविंद चौहान ने बताया कि 11 फरवरी 2026 को पंचकूला स्थित निदेशक, सेकेंडरी शिक्षा हरियाणा के कार्यालय पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान विभाग ने मांग पत्र पर सहमति जताई थी। लेकिन अब तक समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है, जिससे फील्ड मिनिस्ट्रीयल स्टाफ में गहरा असंतोष है। ‘मांग दिवस’ पर सौंपा गया ज्ञापन अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ और सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के आह्वान पर ‘मांग दिवस’ मनाया गया। इसी क्रम में गुरुग्राम में भी ज्ञापन सौंपा गया। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो उच्चस्तरीय आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों की होगी। लिपिक वर्गीय कर्मचारियों की प्रमुख मांगें जिला प्रधान उदयभान यादव ने कहा कि लिपिक वर्गीय कर्मचारियों ने कई बार विभागीय समस्याओं से अधिकारियों को अवगत कराया है, लेकिन समाधान के बजाय केवल आश्वासन ही मिले हैं।संगठन की प्रमुख मांगों में शामिल हैं— ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी की समीक्षा संगठन ने सरकार से भी कुछ महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम बेसिक वेतन 26 हजार रुपये, लिपिक और स्टेनोटाइपिस्ट के लिए 35,400 रुपये तथा सहायक और आंकड़ा सहायक के लिए 56,100 रुi, का वेतनमान 1 जनवरी 2026 से सातवें वेतन आयोग के तहत लागू करने की मांग प्रमुख है। बड़ी संख्या में कर्मचारी रहे मौजूद इस रोष सभा में खंड प्रधान फर्रुखनगर विजय कुमार सहित अनीता, सुनील, संदीप, राजीव श्योराण, दिनेश जून, परविंद्र, बलवान सिंह, संजीव, राकेश, ममता, अजय, मुकेश कुमार, सचिन, सुधीर कुमार, राजेंद्र कुमार समेत अनेक कर्मचारी उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ और हरियाणा के 2 प्रमुख विश्वविद्यालयों के बीच उद्यानिकी-वानिकी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। महात्मा गांधी उद्यानिकी-वानिकी विश्वविद्यालय, दुर्ग और महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी, करनाल ने सोमवार को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। हस्ताक्षर के बाद विशेषज्ञों ने महाविद्यालय के अनुसंधान प्रक्षेत्रों का निरीक्षण किया। कुलपतियों ने विद्यार्थियों से चर्चा कर तकनीकी प्रशिक्षण और विस्तार कार्यक्रमों की जानकारी ली। विद्यार्थियों में शोध और नवाचार के प्रति उत्साह देखा गया। समझौते का मुख्य उद्देश्य संसाधनों का साझा उपयोग और बौद्धिक आदान-प्रदान है। इसके तहत संयुक्त अनुसंधान, कौशल विकास, मूल्य संवर्धन और ज्ञान हस्तांतरण पर विशेष ध्यान रहेगा। उन्नत उद्यानिकी तकनीक, पौध संरक्षण, फसल सुधार, जैविक खेती, छात्र प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, कार्यशालाएं, कृषि उत्पाद प्रसंस्करण और वैज्ञानिक तकनीक को खेतों तक पहुंचाने जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। किसानों को मिलेगा सीधा लाभ कुलपति डॉ. आरआर सक्सेना ने कहा कि यह समझौता केवल औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि छात्रों और किसानों के उज्ज्वल भविष्य की नींव है। ज्ञान के आदान-प्रदान से क्षेत्रीय कृषि विकास को नई पहचान मिलेगी। इस पहल से छत्तीसगढ़ और हरियाणा के किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। उन्नत बीज और आधुनिक खेती के तरीकों से किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को गति मिलेगी। कृषि नवाचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम यह समझौता शैक्षणिक उत्कृष्टता और कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे छात्रों को बेहतर प्रशिक्षण और किसानों को आधुनिक तकनीक का लाभ मिल सकेगा।
विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान पशुधन बीमा योजना के सवाल-जवाब के दौरान जोरदार हंगामा हुआ। सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग व कांग्रेस विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। सदन में भाषा की मर्यादा टूट पीछे छूट गई और बहस तू-तड़ाक तक पहुंच गई। गर्ग ने यहां तक कह दिया कि मंत्री आपके गुलाम नहीं है और सदन में तमीज से बात होनी चाहिए। वहीं ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस विधायकों ने खेल मैदान के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के जवाब को अधूरा बताते हुए वेल में आकर नारेबाजी व हंगामा किया। इसके बाद स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी। कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने पूरक प्रश्न पूछते हुए कहा कि लिखित उत्तर व मंत्री ने जो बोला है, उसमें अंतर है। मंत्री बाड़मेर के प्रभारी भी है। पाली में जाते है तो मदन राठौड़ (भाजपा प्रदेशाध्यक्ष) रहते है। इस पर पटेल ने कहा कि कांग्रेस के काल खंड में ऐसे कारनामे हुए हैं। आपको (हरीश) मंत्रीमंडल से क्यों हटाया था। बीमा का कितना प्रीमियम इन कंपनियों को दिया और कितना क्लेम राजस्थान में मिलेगा? इस पर हरीश चौधरी ने कहा कि जोगाराम जी हुल्लड़ से जवाब नहीं मिलेगा। ये बता दो कि बीमा का कितना प्रीमियम इन कंपनियों को दिया और कितना क्लेम राजस्थान में मिलेगा? मंत्री पटेल जवाब देने लगे तो स्पीकर ने कहा कि एक प्रश्न आधा घंटा नहीं चल सकता। इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि दोनों ही पूरक प्रश्न के जवाब नहीं आए। ऐसे काम नहीं चलेगा। भाजपा व कांग्रेस विधायक के बीच बहस होने लग गई। जोगेश्वर गर्ग बोले- कांग्रेस ने बदतमीजी का ठेका ले रखा है। हर समय बदतमीजी करते हो। तमीज से बात करना चाहिए। यह सदन है, आपके गुलाम नहीं, मंत्री है। इस पर जूली ने कहा कि यानी जवाब नहीं दे सकते। उधर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सदन के बतौर नेता विधानसभा में जवाब देंगे। ट्रेड डील के विरोध में सदन के बाहर टीशर्ट पहनकर पहुंचे कांग्रेसी विधानसभा सत्र से पहले सोमवार सुबह कांग्रेस विधायकों ने अपने सरकारी आवासों से विधानसभा तक पैदल मार्च निकाला। उन्होंने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते का विरोध करते हुए विधानसभा के बाहर नारेबाजी की। कुछ विधायकों ने सफेद टी शर्ट पहने रखी थी, जिस पर लिखा कि पीएम इज कंप्रोमाइज लिखा था। नेता प्रतिपक्ष जूली ने आरोप लगाया कि व्यापार वार्ता में भारत के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं की गई है। खेल मैदान मुद्दे पर वेल में नारेबाजी सीकर स्थित बाजौर के सरकारी स्कूल के खेल मैदान की जमीन निजी फर्म मैसर्स बाजार डेजर्ट सफारी एंड रिजोर्ट को एनओसी देने के मुद्दे पर सदन में हंगामा हुआ। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर शिक्षा मंत्री दिलावर के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायक राजेंद्र पारीक ने शिक्षा मंत्री को मानसिक रूप से भ्रमित तक कह दिया। डोटासर ने पलटवार करते दिलावर को बीमार बोल दिया। दिलावर ने कहा कि शिक्षा विभाग ने खेल मैदान के उपयोग में नहीं लिया, इसलिए आवंटन निरस्त करने के प्रस्ताव प्राप्त हुए। इससे नाराज पारीक व अन्य कांग्रेसी विधायक वेल में आ गए। सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। मंडियों को 50 करोड़ का कॉर्पस फंडप्रदेश की कमजोर वित्तीय हालत वाली कृषि उपज मण्डी समितियों में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए 50 करोड़ रुपए का कॉर्पस फण्ड बनाया गया है। वर्ष 2025 में निदेशालय स्तर पर गठित फंड में 30 करोड़ रुपए जमा हैं। खाद्य मंत्री सुमित गोदारा ने गुरुवार को विधानसभा में इसकी जानकारी दी। प्रश्नकाल के दौरान विधायक समरजीत सिंह के पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए गोदारा ने कहा कि भीनमाल कृषि उपज मण्डी समिति में जिंस रखने की पर्याप्त सुविधा है किन्तु बारिश में भीगने की संभावना रहती है। कॉर्पस फंड से 1.37 करोड़ से नाला बनेगा।
राज्य शिक्षा केंद्र:टेलीग्राम पर फिर पेपर लीक, अब तक 5वीं-8वीं के 8 पेपर आउट
प्रदेश में चल रही 5वीं और 8वीं बोर्ड परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लगातार लीक होने के आरोप सामने आ रहे हैं, लेकिन अधिकारी इसे स्वीकारने से बच रहे हैं। गुरुवार को भोपाल में 8वीं संस्कृत का पेपर परीक्षा केंद्र पर पहुंचने से पहले ही बाहर आ गया। एक जागरूक परिजन ने दैनिक भास्कर को बताया कि प्रश्नपत्र बच्चों तक एक दिन पहले पहुंच चुका था। बाद में वही पेपर वॉट्सएप पर भी उपलब्ध कराया गया। भास्कर ने परीक्षा के बाद एक निजी केंद्र से निकले छात्रों के प्रश्नपत्र से वायरल प्रति का मिलान किया। सेंटर कोड और प्रश्नपत्र कोड समान पाए गए, जिससे स्पष्ट हुआ कि वही प्रश्नपत्र परीक्षा में वितरित हुआ। भोपाल में 8वीं के लिए 263 केंद्र बनाए गए हैं, जहां करीब 34 हजार विद्यार्थी परीक्षा दे रहे हैं। छात्रों ने भी दावा किया कि पेपर पहले से उपलब्ध था। कुछ टेलीग्राम चैनलों पर भुगतान लेकर प्रश्नपत्र बेचने के आरोप हैं। बैरागढ़ में नकल कराने और ड्यूटी वाले शिक्षकों की अनुपस्थिति के आरोपों ने परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य शिक्षा केंद्र से छपे प्रश्नपत्र पहले जन शिक्षा केंद्रों को दिए जाते हैं, वहां से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए जाते हैं। प्रत्येक जन शिक्षा केंद्र के अंतर्गत ग्रामीण में 5-6 और शहरी में 10-12 केंद्र होते हैं। पेपर केंद्राध्यक्ष लाते हैं, सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती। जिलावार कोडिंग की जाती है। किस तारीख को कौन सा पेपर आउट हुआ अफसर मानने को तैयार नहीं, तर्क- जांच करेंगे भोपाल जिले के 32 जन शिक्षा केंद्रों में प्रश्नपत्र प्रभारी की अभिरक्षा में रखे गए थे। पेपर लीक की कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है। सोशल मीडिया पर वायरल प्रश्नपत्र की जांच की जा रही है। लीक की पुष्टि होने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। - रवीश श्रीवास्तव,डीपीसी स्कूल शिक्षा विभाग मामला संज्ञान में आया है। डीपीसी और जिला शिक्षा अधिकारी को जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। -कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर
पटना में आयोजित राज्य स्तरीय प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग (पीबीएल) मेले में खगड़िया जिले के विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता और नवाचार से विशेष पहचान बनाई। इस मेले में बिहार के सभी 38 जिलों से चयनित गणित एवं विज्ञान के सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट्स का प्रदर्शन किया गया। खगड़िया की ओर से विज्ञान विषय में मध्य विद्यालय रामगंज संसारपुर का ‘मिश्रित खेती’ प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया गया। वहीं, मध्य विद्यालय अरैया, मानसी के छात्रों ने ‘ज्यामितीय आकृतियों की पहचान’ नामक प्रोजेक्ट प्रदर्शित किया। इन दोनों प्रोजेक्ट्स ने खेती, पर्यावरण और गणितीय समझ को सरल व व्यावहारिक तरीके से प्रस्तुत कर अतिथियों और शिक्षाविदों का ध्यान आकर्षित किया। बच्चों में सोचने की क्षमता बढ़ रहीकार्यक्रम का उद्घाटन बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि सरकारी विद्यालयों के बच्चे अब नवाचार के साथ सीख रहे हैं, जो राज्य की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंदर ने बताया कि प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा से बच्चों में सोचने, समझने और प्रयोग करने की क्षमता विकसित हो रही है। इससे उनका समग्र विकास संभव हो पा रहा है। खगड़िया से जिला तकनीकी टीम के सदस्य सह मास्टर ट्रेनर शशि शेखर एवं सुमित कुमार, शिक्षिका रेखा सिंह, राजीव कुमार, प्रिया कंचन तथा डायट खगड़िया के व्याख्याता विश्वमोहन राकेश ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई। मानसी अरैया की शिक्षिका रेखा सिंह की प्रेरक कहानी का प्रकाशन ‘छोटे कदम, बड़े बदलाव’ पत्रिका में किया गया। उत्कृष्ट योगदान के लिए शशि शेखर एवं सुमित कुमार को प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राज्य स्तरीय पीबीएल मेले में खगड़िया की प्रभावशाली उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी प्रतिभा, नवाचार और रचनात्मकता में किसी से कम नहीं हैं।
वैशाली के हाजीपुर प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय मुरलिया चक में स्कूल परिसर के भीतर एक आपत्तिजनक नृत्य कार्यक्रम आयोजित किए जाने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। स्कूल परिसर में बना मंच, नर्तकियों का भड़काऊ डांस प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह कार्यक्रम स्कूल की शिक्षा समिति के अध्यक्ष मलाई सिंह की बेटी की शादी के अवसर पर आयोजित किया गया था। वायरल वीडियो में स्कूल परिसर में मंच बनाकर तेज ध्वनि में बज रहे गानों पर नर्तकियों द्वारा भड़काऊ अंदाज में प्रस्तुति देते हुए देखा जा सकता है। कार्यक्रम देर रात तक चलने की बात भी सामने आ रही है। स्कूल के सहायक शिक्षक संजय सिंह ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष मलाई सिंह ने विद्यालय के मुख्य गेट का ताला तोड़कर परिसर में स्टेज कार्यक्रम का आयोजन कराया। उन्होंने यह भी बताया कि स्कूल के नाम और शिक्षा समिति से संबंधित लिखे गए स्लोगन को कार्यक्रम के दौरान कागज से ढक दिया गया था, ताकि पहचान छिपाई जा सके।' देखें, मौके से आई तस्वीरें… थानाध्यक्ष बोले-आवेदन मिलने पर कार्रवाई की जाएगी इस संबंध में सदर थाना अध्यक्ष मुकेश कुमार ने कहा कि विद्यालय की ओर से अब तक कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि आवेदन मिलने पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस वायरल वीडियो के आधार पर मामले की प्रारंभिक जांच कर रही है। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा, जानकारी नहीं घटना को लेकर विद्यालय के प्रधानाध्यापक और अन्य शिक्षक सार्वजनिक रूप से कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। वहीं, जब इस मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी नहीं थी और वे मामले की जानकारी जुटा रहे हैं। स्थानीय लोगों में नाराजगी, कार्रवाई पर नजर स्कूल जैसे शैक्षणिक संस्थान में इस तरह के कार्यक्रम के आयोजन से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या किसी निजी समारोह के लिए सरकारी विद्यालय परिसर का इस तरह उपयोग किया जा सकता है? साथ ही, यदि आरोप सही हैं तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी। इस संबंध में वैशाली जिलाधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनके पर्सनल ओएसडी के द्वारा बताया गया कि इसकी जानकारी प्राप्त नहीं है प्राप्त की जा रही है।
मऊ जिले में टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले सैकड़ों शिक्षकों ने टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जिला कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान उन्होंने काला कानून वापस लो के नारे लगाए और सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। शिक्षकों की मुख्य मांग है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने की तिथि से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी जाए। उनका तर्क है कि उत्तर प्रदेश में यह अधिनियम 27 जुलाई 2011 से प्रभावी हुआ था। नियमों के अनुसार, इसके बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए ही टीईटी अनिवार्य था, जबकि पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को इससे छूट मिली हुई थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उच्चतम न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के बाद, अब सभी राज्यों में अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी सेवा में बने रहने या पदोन्नति के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षकों ने इसे अन्यायपूर्ण बताया और केंद्र सरकार से अध्यादेश लाकर पुराने शिक्षकों को इस अनिवार्यता से छूट देने की मांग की। इस आंदोलन में कृष्णानंद राय और रामविलास भारती सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित थे।
प्रदेश में अतिथि शिक्षकों की सात दिन तक लगातार अनुपस्थिति के बाद उनकी सेवाएं एजुकेशन पोर्टल 3.0 से हटाने संबंधी आदेश के विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर आई है। लोक शिक्षण संचालनालय ने आज जारी आदेश में 20 फरवरी को जारी आदेश को निरस्त कर दिया है और इसके लिए अलग से निर्देश जारी करने की बात कही गई है। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग के 70 हजार अतिथि शिक्षकों पर लटकी कार्यवाही की तलवार फिलहाल हट गई है। आयुक्त लोक शिक्षण कार्यालय के संचालक केके द्विवेदी ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, विकास खंड शिक्षा अधिकारियों, हायर सेकेंडरी और हाई स्कूल के संकुल प्राचार्यों तथा शाला प्रभारियों को दिए निर्देश में कहा है कि 20 फरवरी को लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा अतिथि शिक्षकों की लंबी अनुपस्थिति के संबंध में जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। अब इसको लेकर एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध कराने की कार्यवाही के बाद अलग से निर्देश जारी किए जाएंगे। अतिथि शिक्षकों ने सरकार के इस आदेश का स्वागत किया है। यहां गौरतलब है कि स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कल इस संबंध में विधानसभा में मीडिया द्वारा किए गए सवाल के जवाब में कहा था कि अतिथि शिक्षकों के अवकाश के लिए जो नियम शर्तें तय हैं, अगर उससे अधिक अवधि के लिए वे अनुपस्थित रहते हैं तो नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। यह निर्देश दिए थे 20 फरवरी को जारी आदेश में स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से 20 फरवरी को जारी आदेश में कहा गया था कि यदि कोई अतिथि शिक्षक लगातार सात दिनों तक ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं करता है, तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है। यह व्यवस्था स्कूलों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई है। इसमें कहा गया था कि प्रदेश के जिन शासकीय स्कूलों में स्थायी शिक्षकों की कमी है, वहां पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए अतिथि शिक्षकों (Guest Teachers) की नियुक्ति की गई है। इन शिक्षकों को ई-अटेंडेंस (e-attendance) प्रणाली के माध्यम से अपनी दैनिक उपस्थिति दर्ज करनी होती है। वेतन भी इसी आधार पर जारी किया जाता है। विभाग के अनुसार तकनीकी खराबी, नेटवर्क समस्या या अन्य कारण बताकर बड़ी संख्या में शिक्षक अनुपस्थित पाए गए हैं। इसी को देखते हुए सख्ती की गई है। इस आदेश का अतिथि शिक्षक संगठनों ने विरोध किया था। अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के प्रदेश सचिव रविकांत गुप्ता ने इसे ‘तुगलकी फरमान’ करार दिया। उनका कहना था कि जो शिक्षक जानबूझकर गैरहाजिर रहते हैं, उन पर कार्रवाई उचित है, लेकिन बीमारी, दुर्घटना या अन्य आकस्मिक परिस्थितियों में अनुपस्थित रहने वालों के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं है। ये खबर भी पढ़ें… अतिथि शिक्षक नहीं लगा रहे मोबाइल ऐप से अटेंडेंस मध्यप्रदेश में शिक्षक और अतिथि शिक्षक (गेस्ट टीचर्स) की ई-अटेंडेंस व्यवस्था जुलाई के पहले 15 दिन में पूरी तरह फेल हो गई है। इसी को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने अब सख्त कदम उठाया है। विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 18 जुलाई से जो गेस्ट टीचर ई-अटेंडेंस (ऐप से अटेंडेंस) नहीं लगाएंगे, उन्हें गैरहाजिर माना जाएगा और मानदेय (वेतन) नहीं दिया जाएगा।पूरी खबर पढ़ें
श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत (गढ़पुरा) और समस्त पदाधिकारियों ने राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और चित्तौड़गढ़ सांसद सी. पी. जोशी का विशेष आभार व्यक्त किया है। संगठन ने कहा कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के राज्यारोहण दिवस को स्कूलों में मनाने का निर्णय ऐतिहासिक और दूरदर्शी है। राजस्थान के शिक्षा मंत्री ने 28 फरवरी को प्रदेश के सभी विद्यालयों में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का राज्यारोहण दिवस मनाने का निर्देश दिया है। इस अवसर पर विद्यालयों में विशेष प्रार्थना सभाएं, भाषण, निबंध प्रतियोगिताएं तथा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत ने बताया कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के त्याग, पराक्रम, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरक गाथाओं से अवगत कराया जाएगा। इससे नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम और आत्मगौरव की भावना सुदृढ़ होगी।
पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने मानसा स्थित स्कूल ऑफ एमिनेंस का औचक दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्कूल में बन रही नई बिल्डिंग का निरीक्षण किया। मंत्री ने छात्रों से बातचीत की और स्कूल के पास बने कूड़ा डंप को हटाने के लिए नगर काउंसिल को निर्देश जारी किए। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पेज पर दौरे की वीडियो भी साझा की। स्कूल में कुछ बच्चे टीनशेड के नीचे पढ़ाई करते मिले। इस पर मंत्री ने उनसे माफी मांगी और आश्वासन दिया कि अगले एक महीने में उन्हें नई और आधुनिक सुविधाओं से लैस शानदार स्कूल बिल्डिंग मिलेगी, जहां वे बेहतर माहौल में पढ़ाई कर सकेंगे। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस लगातार राज्य के विभिन्न स्कूलों का दौरा कर रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने मानसा शहर के स्कूल ऑफ एमिनेंस का निरीक्षण किया। दौरे के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से पढ़ाई से संबंधित सवाल-जवाब किए और उनकी तैयारी पर संतोष जताते हुए उन्हें शाबाशी दी। उन्होंने निर्माणाधीन बिल्डिंग का जायजा लिया और स्कूल प्रबंधन के साथ अन्य सुविधाओं को लेकर भी चर्चा की। इस दौरान स्कूल के पास बने कूड़ा डंप को लेकर उन्होंने सख्त रुख अपनाया और नगर काउंसिल अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्ताव पारित कर इसे तुरंत हटाया जाए, क्योंकि स्कूल के पास कूड़ा डंप नहीं होना चाहिए।
ब्यावर की ग्राम पंचायत लसाड़िया के पूर्व सरपंच पप्पू काठात के परिवार ने मृत्यु भोज की परंपरा को त्यागकर शिक्षा के क्षेत्र में एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। परिवार ने लक्ष्मण काठात की पुत्रवधू के आकस्मिक निधन के बाद पारंपरिक मृत्यु भोज आयोजित करने के बजाय, उनकी स्मृति में राजकीय प्राथमिक स्कूल, मांडावास को 51 हजार रुपए की राशि भेंट की। परिवारजनों ने बताया कि मृत्यु भोज पर होने वाले व्यय को जनहित में लगाने का संकल्प लिया गया, ताकि दिवंगत आत्मा की स्मृति समाजोपयोगी कार्य से जुड़ सके। इसी भावना के साथ विद्यालय को यह आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया। स्कूल के कार्यवाहक प्रिंसिपल शेख अल्लाहबक्स और बालूराम सहित समस्त स्टाफ तथा ग्रामवासियों ने इस सहयोग का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि प्राप्त राशि का उपयोग स्कूल के विकास कार्यों, विद्यार्थियों की शैक्षणिक आवश्यकताओं और आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण में किया जाएगा। ग्रामीणों ने इस पहल को सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एक सशक्त संदेश बताया। उनका कहना था कि शिक्षा से बढ़कर कोई पुण्य कार्य नहीं हो सकता। पूर्व सरपंच पप्पू काठात और उनके परिवार के इस निर्णय की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। ग्राम मांडावास के नागरिकों ने परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसे कार्यों से सामाजिक चेतना को बल मिलेगा तथा विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
झारखंड बजट में लातेहार को शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन की मिली बड़ी सौगात
लातेहार | झारखंड सरकार द्वारा पेश बजट में लातेहार जिले को शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन क्षेत्र में तीन बड़ी सौगातें मिली हैं। इन योजनाओं के धरातल पर उतरने से जिले के सामाजिक विकास, रोजगार सृजन और बुनियादी सुविधाओं में व्यापक सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। एक साथ तीन परियोजनाओं का सौगात मिलने से स्थानीय लोगों में हर्ष है। लोगों ने कहा कि यह योजनाएं पूरी होगी है तो स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन के क्षेत्र में बड़ा कदम माना जाएगा। बजट में लातेहार में बालिका आवासीय विद्यालय के निर्माण की घोषणा की गई है। यह विद्यालय खासकर दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। अभी कई बच्चियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या संसाधनों के अभाव में पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ती है। आवासीय विद्यालय बनने से छात्राओं को सुरक्षित वातावरण, नियमित पढ़ाई, पुस्तकालय, खेलकूद सुविधा तथा पोषणयुक्त भोजन मिलेगा। इससे बालिका शिक्षा दर में वृद्धि होगी और गरीब परिवारों की बेटियों को बेहतर शिक्षा का अवसर मिलेगा। बजट में सदर अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा देने की भी घोषणा की गई है, जिसे पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज बनने से जिले के मरीजों को गंभीर इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। यहां विशेषज्ञ डॉक्टर, आधुनिक जांच सुविधा, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर और अधिक बेड उपलब्ध होंगे। इससे समय पर इलाज संभव होगा और गरीब मरीजों का खर्च भी कम होगा। मेडिकल कॉलेज बनने से मेडिकल शिक्षा, नर्सिंग और पैरामेडिकल प्रशिक्षण के अवसर बढ़ेंगे तथा स्थानीय युवाओं के लिए नौकरी के नए रास्ते खुलेंगे।
पुलिस सप्ताह पर बच्चों को मिली शिक्षा किट
ब्रह्मपुर | पुलिस सप्ताह दिवस के अवसर पर ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर थानाध्यक्ष ब्रजेश कुमार के नेतृत्व में क्षेत्र के बच्चों के बीच पढ़ाई से जुड़ी शिक्षा किट का वितरण किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस और आमजन के बीच बेहतर संबंध स्थापित करना तथा बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम में आसपास के गांवों से आए दर्जनों बच्चों को कॉपी, पेन, पेंसिल, रबर, कटर और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री प्रदान की गई। शिक्षा किट पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे।
ब्रह्मपुर में बच्चों को बांटी शैक्षणिक सामग्री, शिक्षा के लिए किया प्रेरित
भास्कर न्यूज | ब्रह्मपुर पुलिस सप्ताह के तहत बुधवार को ब्रह्मपुर नगर पंचायत के वार्ड संख्या 12 स्थित दलित बस्ती में अवस्थित हरिजन प्राथमिक विद्यालय में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों स्कूली बच्चों के बीच कॉपी, पेंसिल, पेन सहित अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री का वितरण किया गया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करना और वंचित वर्गों तक शैक्षणिक सहयोग पहुंचाना था। थानाध्यक्ष ब्रजेश कुमार ने बताया कि पुलिस सप्ताह के अवसर पर बिहार पुलिस द्वारा सामाजिक सरोकार से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में विद्यालय के बच्चों को पढ़ाई से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराई गई, ताकि संसाधनों की कमी उनकी शिक्षा में बाधा न बने। उन्होंने बच्चों को नियमित विद्यालय आने, मन लगाकर पढ़ाई करने और जीवन में अनुशासन अपनाने की सलाह दी। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकों और स्थानीय अभिभावकों ने पुलिस की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाते हैं और पुलिस के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करते हैं। सामग्री प्राप्त कर बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी।
गला घोटिया शिक्षा का विश्वगुरु बन चुका देश
पिछले 12 सालों से देश को विश्वगुरु बनाने का जो झूठ फैलाया जा रहा था, अब उसका गुबार ऐसा फूटा है कि दुनिया भर में शर्मिंदगी का सबब बन गया है।
How to apply for RBI Assistant 2026 : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक और नई भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया है। आरबीआई ने 650 पदों पर असिस्टेंट की रिक्तियां निकाली हैं। इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट opportunities.rbi.org.in पर भर्ती विज्ञापन जारी हो ...
गुरुवार को ही क्यों आरंभ होती हैं शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं?
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं गुरुवार 12 फरवरी 2026 से राज्यभर में आरंभ हो गईं। क्या आपको पता है कि सालों से बोर्ड की परीक्षाएं हर बार गुरुवार से ही क्यों आरंभ होती हैं? हालांकि परीक्षाएँ अक्सर गुरुवार से शुरू होने के पीछे कोई एक आधिकारिक, लिखित “धार्मिक नियम” नहीं है, बल्कि यह परंपरा, ... Read more
शिक्षा में समता या नई असमानताः यूजीसी नियमों पर न्यायिक विराम
नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर लागू किए गए नए नियमों ने देश के शैक्षिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बार फिर गहरी हलचल पैदा कर दी है। जिस नीति को ‘समता’, ‘समान अवसर’ और ‘समावेशी शिक्षा’ की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया ... Read more
शिक्षा खौफनाक नहीं, बल्कि स्नेह एवं हौसलों का माध्यम बने
जीवन को दिशा देने वाली शिक्षा यदि भय, हिंसा और दमन का पर्याय बन जाए तो वह सभ्यता की सबसे बड़ी विडंबना कही जाएगी। हाल के वर्षों में पढ़ाई के नाम पर बच्चों पर बढ़ते दबाव, घर और स्कूल में हिंसक व्यवहार तथा प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ ने शिक्षा की आत्मा पर गहरा आघात किया ... Read more
सावित्रीबाई फुलेः शिक्षा से सामाजिक क्रांति तक
-बाबूलाल नागा 3 जनवरी भारतीय सामाजिक इतिहास का वह महत्वपूर्ण दिन है, जो शिक्षा, समानता और महिला सशक्तिकरण के संघर्ष की प्रतीक सावित्रीबाई फुले की जयंती के रूप में मनाया जाता है। सावित्रीबाई फुले केवल पहली महिला शिक्षिका ही नहीं थीं, बल्कि वे उस सामाजिक क्रांति की धुरी थीं, जिसने सदियों से जकड़ी रूढ़ियों, जातिवाद ... Read more
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
NEET UG रिजल्ट को लेकर अभी भी जारी है गुस्सा, छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के पास किया विरोध प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए छात्रों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। आइए जानते हैं, क्या है पूरा म
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का 10 फीसदी भी डाटा नहीं हुआ अपलोड
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का डाटा अपलोड करने में जिले के कई स्कूल ढील दे रहे हैं, वे 10 फीसदी छात्रों का भी डाटा अभी तक अपलोड नहीं कर पाए हैं। डाटा अपलोड करने में आधार कार्ड की अनिवार्यता के बाद से छ
बेसिक शिक्षा : दो महीने बाद भी 1.38 लाख छात्रों का डेटा नहीं हुआ अपडेट
बेसिक शिक्षा विभाग के यू डायस पोर्टल पर डेटा अपडेट करने का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। हाल ये है कि दो महीने में महज 1.38 लाख छात्रों डेटा भी अपडेट नहीं हुआ। विभाग ने अब 5 जून तक इसे पूरा करने क
स्कूलों में कैसे पढ़ा रहे हैं शिक्षक, वीडियो में देखेगा शिक्षा विभाग, होगी रिकॉर्डिंग
शिक्षा विभाग वीडियो के जरिए देखेगा कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षक छात्रों को कैसे पढ़ाते हैं। बता दें. छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षकों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। आइए जानते हैं विस्तार से।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति : यूपी बोर्ड ने दिए निर्देश, एनईपी लागू करने को स्कूल बनाएंगे प्लान
यूपी बोर्ड से जुड़े 27 हजार से अधिक स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू करने के लिए स्कूल स्तर पर योजना बनाई जाएगी। एनईपी 2020 के विषय में विद्यालयों में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
राम बनने के लिएधनुष-बाण चलाने की शिक्षा ले रहे है Ranbir Kapoor, एक्टर केआर्चरी ट्रेनर ने शेयर की तस्वीरें

