शिक्षा विभाग के दो वरिष्ठ अफसरों की विदाई, सम्मानित भी किया गया
भास्कर न्यूज | जांजगीर केरा रोड स्थित कर्मचारी भवन में बलौदा विकासखंड के शिक्षा विभाग द्वारा विदाई सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शिक्षा संभाग बिलासपुर के सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक आरपी आदित्य और राजीव गांधी शिक्षा मिशन जांजगीर के पूर्व जिला परियोजना समन्वयक हरिराम जायसवाल के सम्मान में रखा गया था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वर्तमान संयुक्त संचालक अश्वनी भारद्वाज विशेष रूप से उपस्थित थे। अपने प्रशासनिक अनुभवों को साझा करते हुए आर. पी. आदित्य ने कहा कि यदि आप अनुशासन का पालन करते हैं और दैनिक कार्यों की योजना बनाकर चलते हैं, तो कोई भी काम समय पर पूरा करना कठिन नहीं है। उन्होंने कहा कि लंबे सेवाकाल में विभिन्न उच्च पदों पर रहने के बावजूद उन्हें कभी किसी बड़ी समस्या या शिकायत का सामना नहीं करना पड़ा। वहीं, हरिराम जायसवाल ने अपने 43 वर्षों के दीर्घकालिक और बेदाग शिक्षक जीवन के अनुभव साझा करते हुए सेवामुक्ति पर प्रसन्नता व्यक्त की। वर्तमान संयुक्त संचालक अश्वनी भारद्वाज ने जांजगीर को अपना प्रिय जिला बताते हुए यहां के अधिकारियों और शिक्षकों के आपसी तालमेल की प्रशंसा की। बलौदा बीईओ रवि गौतम ने स्वागत भाषण में कहा कि विभागीय दायित्वों से मुक्त होते समय शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना ही दोनों अधिकारियों के समर्पण को दर्शाता है।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) लागू होने के छह वर्ष बाद छत्तीसगढ़ में इसके क्रियान्वयन की तस्वीर सामने आई है। इस अवधि में राज्य में करीब 1404 करोड़ रुपए खर्च किए गए। सबसे अधिक निवेश कौशल आधारित शिक्षा, बुनियादी साक्षरता और बालिका शिक्षा पर हुआ, लेकिन शिक्षक प्रशिक्षण, प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा और डिजिटल संसाधनों के विस्तार जैसे अहम क्षेत्रों में खर्च अपेक्षाकृत कम रहा। रिपोर्ट यह भी बताती है कि हजारों बच्चे अब भी स्कूल से बाहर हैं और सीखने के स्तर में आई गिरावट दूर करना बड़ी चुनौती बनी हुई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए अब निवेश का फोकस शिक्षक प्रशिक्षण और शुरुआती कक्षाओं पर बढ़ाना होगा। एनईपी के तहत कुल 32,767.34 लाख रुपए के बजट में केंद्र सरकार ने 19,660.43 लाख रुपए (करीब 60%) और राज्य सरकार ने 13,106.92 लाख रुपए (करीब 40%) का योगदान दिया। प्रदेश में ये बदलाव हुए शिक्षाविद की राय: एनईपी पर कई पुस्तकें लिख चुके दानीराम वर्मा के मुताबिक केवल पुरानी व्यवस्था में नए प्रावधान जोड़ने से व्यवस्था नहीं बदलेगी। शिक्षा प्रणाली में व्यापक संरचनात्मक बदलाव जरूरी हैं। छत्तीसगढ़ की शुरुआती उपलब्धियां उत्साहजनक हैं, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता, समावेशिता और शिक्षक क्षमता निर्माण पर लंबा काम बाकी है। जहां सबसे ज्यादा निवेश हुआ जहां सुधार की सबसे ज्यादा जरूरत
उच्च शिक्षा का संकट:रोजगार की गारंटी वाले 32 कोर्स तीसरे साल फ्लॉप, दो कॉलेज बंद होने जा रहे
पहले विश्वविद्यालय छात्रों की मांग देखकर नए कोर्स शुरू करते थे, लेकिन अब कोर्स शुरू कर छात्रों का इंतजार कर रहे हैं। बिलासपुर के अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (एयू) की मौजूदा प्रवेश प्रक्रिया ने उच्च शिक्षा की इस बड़ी विडंबना को उजागर कर दिया है। उद्योग और बाजार की जरूरतों का हवाला देकर तीन साल पहले शुरू किए गए विश्वविद्यालय के 32 डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स छात्रों को आकर्षित करने में नाकाम रहे हैं। अधिकांश पाठ्यक्रमों में महज दो से सात आवेदन ही आए हैं, जबकि कुछ में तो खाता तक नहीं खुला है। यह केवल एक विश्वविद्यालय का संकट नहीं है, बल्कि बदलती छात्र-मानसिकता और उच्च शिक्षा की योजनाओं के बीच बढ़ती दूरी का संकेत है। सरकार जहां एक ओर रोजगार आधारित शिक्षा पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर छात्र उन्हीं पाठ्यक्रमों से दूरी बना रहे हैं जिन्हें ‘रोजगारपरक’ बताकर प्रचारित किया गया था। आधी सीटें भी नहीं भर सकीं, संस्थानों के अस्तित्व पर संकट एयू से संबद्ध 110 कॉलेजों में इस वर्ष कुल 35,255 सीटें उपलब्ध हैं। अब तक 16 हजार के आसपास ही आवेदन ही मिले हैं। यानी आधी सीटों के लिए भी छात्र नहीं जुट पाए हैं। इसके अलावा, यूजी और पीजी की कुल 55,180 सीटों पर पहली मेरिट सूची जारी होने के बाद अब तक सिर्फ 364 छात्रों (कुल सीटों का लगभग 1%) ने ही प्रवेश लिया है। छात्रों की इस घटती संख्या का सीधा असर अब शिक्षण संस्थानों के वजूद पर दिखने लगा है। ओरिएंटल कॉलेज और कोरबा कंप्यूटर कॉलेज ने विश्वविद्यालय से अपनी संबद्धता समाप्त करने (बंद होने) का आवेदन दे दिया है। सरकारी कॉलेजों और सीयू का भी यही हाल रोजगार आधारित पाठ्यक्रमों के प्रति यह उदासीनता केवल एयू तक सीमित नहीं है। पिछले सत्र में बिलासा गर्ल्स कॉलेज में बीएससी क्लीनिकल न्यूट्रीशन की 140 सीटें, बीएससी फूड साइंस की 135 सीटें और फैशन डिजाइनिंग की 25 सीटें खाली रह गईं। बेसिक एंड एडवांस स्पोर्ट्स फिटनेस की 40 सीटों के लिए केवल 17 आवेदन आए। इसी तरह, केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) में भी एमएससी रूरल टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, माइक्रोबायोलॉजी, बीलिब, बीपीएड, एमसीए और फॉरेंसिक साइंस जैसे कोर्स अपनी पूरी क्षमता तक नहीं भर सके। इन प्रमुख कोर्सों से छात्रों ने बनाई दूरी विश्वविद्यालय ने तीन साल पहले साइबर सिक्योरिटी, होटल मैनेजमेंट, फूड प्रोसेसिंग, जीएसटी, ई-कॉमर्स, रिटेल मैनेजमेंट, टूरिज्म, बायोफ्यूल, फूड सेफ्टी और इंग्लिश कम्युनिकेशन जैसे 32 नए कोर्स इस उम्मीद के साथ शुरू किए थे कि हर साल प्रवेश बढ़ेंगे। लेकिन स्थिति साल-दर-साल खराब होती गई। भास्कर एक्सपर्ट - डॉ. सुधीर शर्मा, पूर्व कुलसचिव, एयू छात्रों ने विश्वविद्यालय से ज्यादा बाजार को पढ़ लिया छात्रों ने विश्वविद्यालय से ज्यादा बाजार को पढ़ लिया है। इस बार का सबसे बड़ा संदेश यह है कि छात्र विश्वविद्यालयों की योजना से नहीं, नौकरी के बाजार से अपना भविष्य तय कर रहे हैं। बीए में इसलिए भीड़ है क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं में उपयोगी है। लॉ इसलिए पसंद है, क्योंकि करियर स्पष्ट दिखता है। कंप्यूटर साइंस और बीसीए इसलिए क्योंकि सूचना प्रौद्योगिकी सेक्टर अभी भी अवसर दे रहा है। लेकिन जिन कोर्सों में नौकरी का रास्ता साफ नहीं है। उस दिशा में छात्र जाना ही नहीं चाहते।
चावल और हल्दी से लिखा पहला अक्षर, रॉकवुड्स में नन्हों ने शिक्षा जगत में रखा कदम
उदयपुर | रॉकवुड्स हाई स्कूल में नर्सरी के विद्यार्थियों के लिए पारंपरिक अध्याक्षरम् 2026-27 समारोह का आयोजन उत्साह और उल्लास के साथ किया गया। कार्यक्रम के दौरान नन्हे विद्यार्थियों ने भारतीय परंपरा के अनुसार पहले चावल पर और फिर हल्दी से कागज पर अपना पहला अक्षर लिखकर शिक्षा के क्षेत्र में शुभारंभ किया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात ऑन्कोलोजिस्ट डॉ. मनोज महाजन रहे, जबकि अतिरिक्त जिला न्यायाधीश अंबिका सोलंकी और अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राहुल चौधरी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के प्रमोशन और प्रोन्नत वेतनमान (प्रमोटेड पे-स्केल) को लेकर विधान परिषद सचिवालय ने बेसिक शिक्षा विभाग से जवाब–तलब किया है। प्रदेश के वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर जिलों में पिछले 5 सालों से एक भी शिक्षक को प्रोन्नत वेतनमान नहीं मिला है। ये मामला विधान परिषद की आश्वासन समिति में उठाया गया था। विधान परिषद के संयुक्त सचिव मुनेश कुमार ने बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर इस मामले में एक महीने के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। क्या है पूरा मामला? विधान परिषद सदस्य आशुतोष सिन्हा (वाराणसी खंड स्नातक) ने 13 फरवरी 2026 को सदन में तारांकित प्रश्न संख्या-12 के जरिए बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह से पूछा था कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को प्रोन्नत वेतनमान दिया जा रहा है या नहीं? उन्होंने पिछले 5 वर्षों में वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर में लाभ पाने वाले और लंबित पड़े मामलों का पूरा विवरण मांगा था। सरकार ने कहा था, 5 साल में नहीं दिया प्रोन्नत वेतनमान बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने सदन में जो लिखित उत्तर दिया, वह चौंकाने वाला था। उन्होंने जवाब में कहा था कि वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर जिलों में भी पिछले 5 वर्ष में किसी शिक्षक को प्रोन्नत वेतनमान नहीं दिया गया। सरकार ने सदन को आश्वासन दिया था कि इन चारों जनपदों के लंबित मामलों का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। नियम क्या कहता है?
अयोध्या जिले के परिषदीय विद्यालयों में नए छात्रों के नामांकन की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। प्रेरणा पोर्टल की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 690 परिषदीय विद्यालयों में नए नामांकन 10 से भी कम हैं। इस पर बेसिक शिक्षा अधिकारी लालचंद ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित प्रधानाध्यापकों को अंतिम चेतावनी जारी की है। बीएसए लालचंद ने 11 जुलाई 2026, शनिवार को यह चेतावनी जारी की। प्रेरणा पोर्टल की समीक्षा में सामने आया है कि इन विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और स्टाफ ने नामांकन बढ़ाने के लिए न तो कोई प्रभावी कार्ययोजना बनाई और न ही सार्थक प्रयास किए। विभाग ने इसे शासन के निर्देशों की अवहेलना और कार्य के प्रति गंभीर लापरवाही माना है। बीएसए लालचंद ने बताया कि कम नामांकन वाले विद्यालयों को नोटिस जारी किया जाएगा और संबंधित के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी संबंधित विद्यालयों को प्रधानाध्यापक, शिक्षक, विद्यालय प्रबंध समिति और मातृ समूह के साथ बैठक कर तत्काल नामांकन बढ़ाने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, घर-घर संपर्क अभियान चलाकर नए बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित करने को कहा है। बीएसए ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर नामांकन में संतोषजनक वृद्धि नहीं होती है तो संबंधित प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी तय करते हुए विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसकी संपूर्ण जवाबदेही संबंधित विद्यालय प्रमुख की होगी।
दिल्ली को पानी के संकट से उबारने और पर्यावरण को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता की उपस्थिति में दिल्ली के 75 सीएम श्री (CM SHRI) स्कूलों में वर्षा जल संचयन बुनियादी ढांचा स्थापित करने के लिए एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) शिक्षा निदेशालय और अहसास फाउंडेशन के बीच हुआ है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) पहल के तहत इस पूरी परियोजना को सपोर्ट कर रही है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से चुनिंदा स्कूलों में छतों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली बनाई जाएगी। इससे न केवल बारिश के पानी को बर्बाद होने से रोका जा सकेगा, बल्कि भूजल स्तर को भी मजबूत करने में मदद मिलेगी। विद्यार्थियों में बढ़ेगी जागरूकता इस परियोजना का एक मुख्य उद्देश्य भावी पीढ़ी को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी है। इसके तहत स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों और शिक्षकों के बीच पानी बचाने और उसके सही उपयोग को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। एक हरित और जल-सुरक्षित दिल्ली की ओर कदम यह एक पायलट प्रोजेक्ट (प्रायोगिक परियोजना) है। इस पहल की सफलता के बाद आने वाले समय में दिल्ली के अन्य सभी सरकारी और नगर निगम (MCD) के स्कूलों में भी वर्षा जल संचयन प्रणाली का विस्तार किया जाएगा, जो दिल्ली को अधिक हरित और जल-सुरक्षित बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
उत्तर प्रदेश के 330 अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 2,107 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। प्रयागराज स्थित उच्च शिक्षा निदेशालय ने इन पदों का ऑनलाइन अधियाचन उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) को भेज दिया है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने बताया कि एडेड महाविद्यालयों के रिक्त पदों का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। अब भर्ती का विज्ञापन जारी करने और आवेदन लेने की प्रक्रिया आयोग द्वारा संचालित की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले महाविद्यालयों में प्राचार्य के 111 पदों पर भर्ती का अधियाचन भेजा जा चुका है, जिसका विज्ञापन 15 जुलाई के आसपास जारी होने की संभावना है। वर्तमान में, वर्ष 2022 में जारी विज्ञापन संख्या 51 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के 34 विषयों के लिए 1017 पदों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। राज्य शिक्षा सेवा चयन आयोग ने इसकी परीक्षा के परिणाम हाल ही में जारी किए थे। सफल अभ्यर्थियों के साक्षात्कार 21 जुलाई से शुरू होंगे, जिसके बाद अंतिम परिणाम घोषित किया जाएगा। यह भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नई भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाएगा। 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री होना जरूरी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास संबंधित विषय में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री होना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, नेट (NET) उत्तीर्ण होना भी आवश्यक है। यदि कोई अभ्यर्थी नेट उत्तीर्ण नहीं है, तो यूजीसी के नियमानुसार उसके पास पीएचडी (Ph.D.) की डिग्री होनी चाहिए। प्रदेश में बेसिक से लेकर उच्च शिक्षा संस्थानों तक में शिक्षकों की भर्ती के लिए वर्ष 2023 में गठित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अब चयन प्रक्रिया में तेजी ला रहा है। आयोग वर्तमान में लंबित भर्तियों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसके बाद नई भर्तियों के विज्ञापन जारी किए जाएंगे।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति में की गई गड़बड़ी पर सख्ती दिखाई है। राजनीति शास्त्र के उम्मीदवार की याचिका पर हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा सचिव और पीएससी को जांच कर उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए 120 दिन का समय दिया गया है। याचिका के अनुसार बिना एनओसी के राजनीति शास्त्र के एक असिस्टेंट प्रोफेसर को नियुक्ति दे दी गई है। रायगढ़ जिले के अली हसन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने वर्ष 2019 में सहायक प्राध्यापक (राजनीति शास्त्र) के 59 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। वर्ष 2021 में जारी अंतिम चयन परिणाम में रायगढ़ के अली हसन को अनारक्षित वर्ग की प्रतीक्षा सूची में पहला स्थान मिला। बगैर एनओसी हरियाणा के असिस्टेंट प्रोफेसर को दी नियुक्ति याचिकाकर्ता ने बताया कि, चयन सूची का बारीकी से अध्ययन करने पर हसन को पता चला कि मुख्य सूची में चयनित रंजन तिवारी पहले से ही हरियाणा सरकार के उच्चतर शिक्षा निदेशालय में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। जिस पर याचिकाकर्ता ने सूचना के अधिकार के तहत हरियाणा सरकार से जानकारी मांगी। इसमें पता चला कि रंजन तिवारी 13 फरवरी 2020 से हरियाणा के महेंद्रगढ़ शासकीय महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने सीजीपीएससी की परीक्षा में शामिल होने या कार्यभार ग्रहण करने के लिए अपने नियोक्ता से अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र भी नहीं लिया था। इसके बावजूद, 29 अप्रैल 2022 को रंजन तिवारी की नियुक्ति शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय भाटापारा, जिला बलौदाबाजार में कर दी गई। नियमों की अनदेखी का आरोप जस्टिस राकेश मोहन पांडे की सिंगल बेंच में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से एडवोकेट ने तर्क दिया कि सरकारी या अर्ध-सरकारी विभागों में कार्यरत अभ्यर्थियों के लिए कार्यभार ग्रहण करते समय नियोक्ता का अनापत्ति प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है। नियमों के तहत यदि किसी अभ्यर्थी के प्रमाण पत्र या जानकारियां गलत पाई जाती हैं, तो उन्हें बिना पूर्व सूचना के सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है और आईपीसी के के तहत कार्रवाई हो सकती है। कॉलेज के प्राचार्य ने माना- एनओसी नहीं मिला अली हसन द्वारा 18 मई 2022 को भाटापारा कॉलेज में लगाई गई सूचना के अधिकार के जवाब में प्राचार्य ने स्वीकार किया था कि रंजन तिवारी ने 23 मई 2022 को कार्यभार तो ग्रहण कर लिया, लेकिन कार्यालय में कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र जमा नहीं किया।
टोंक समेत प्रदेशभर में राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व आयोग) के तहत चल रहे ओबीसी सर्वे में लगे शिक्षा विभाग के कार्मिकों को फिलहाल कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने इस संबंध में सभी संभागीय संयुक्त निदेशकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार सर्वे में नोडल अधिकारी, संदर्भ व्यक्ति और प्रगणक के रूप में लगे कार्मिकों को सर्वे पूरा होने या 31 जुलाई 2026 तक, जो भी पहले हो, कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने जारी किए आदेश माध्यमिक शिक्षा, राजस्थान, बीकानेर के निदेशक सीताराम जाट ने राज्य के सभी संयुक्त निदेशक, सभी संभाग और सभी जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक एवं प्रारम्भिक को निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि ओबीसी सर्वे में लगे शिक्षा विभाग के कार्मिकों को वर्तमान में कार्यमुक्त नहीं किया जाए। नोडल अधिकारी, संदर्भ व्यक्ति और प्रगणक के रूप में लगी है ड्यूटी राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व आयोग) की ओर से करवाए जा रहे सर्वे में शिक्षा विभाग के कार्मिकों को नोडल अधिकारी, संदर्भ व्यक्ति और प्रगणक के रूप में लगाया गया है। ऐसे में उनके कार्यमुक्त होने से सर्वे कार्य प्रभावित हो सकता है। हाल ही में हुए हैं शिक्षा विभाग में तबादले ज्ञात रहे कि प्रशासनिक सुधार विभाग के आदेश के बाद शिक्षा विभाग को 3 जुलाई को स्थानान्तरण में शिथिलता दी गई थी। इसके बाद शिक्षा विभाग के सैकड़ों अधिकारियों और कार्मिकों के तबादला आदेश जारी किए गए। इनमें कई ऐसे कार्मिक भी शामिल हैं जिनकी ड्यूटी वर्तमान में ओबीसी सर्वे में लगी हुई है। 31 जुलाई या सर्वे पूरा होने तक नहीं होगी कार्यमुक्ति इसको लेकर निदेशक सीताराम जाट ने शुक्रवार शाम को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया कि ओबीसी सर्वे कार्य में लगे कार्मिकों को सर्वे पूरा होने तक या 31 जुलाई 2026 तक, जो भी पहले हो, कार्यमुक्त नहीं किया जाए और आदेशों की पालना सुनिश्चित की जाए। शिक्षक संघ ने आदेश का किया स्वागत शिक्षक संघ रेसटा राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बताया कि जिन शिक्षकों का तबादला हुआ है और जो वर्तमान में ओबीसी सर्वे में नियुक्त हैं, उन्हें निदेशक के आदेशानुसार सर्वे कार्य पूरा होने अथवा 31 जुलाई तक कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा, जिससे सर्वे का काम तय समय में पूरा हो सके।
बिहार सरकार की ई-शिक्षाकोष आधारित ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था में गंभीर अनियमितता सामने आई है। शिक्षा विभाग ने ठाकुरगंज प्रखंड के पांच शिक्षकों और एक प्रधानाध्यापक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन पर आरोप है कि वे अपने विद्यालयों से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहते हुए भी ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर ऑनलाइन हाजिरी दर्ज कर रहे थे। जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) नासिर हुसैन के निर्देश पर की गई समीक्षा में यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा) द्वारा 14 मई 2026 को ई-शिक्षाकोष पोर्टल के आंकड़ों की विस्तृत जांच की गई थी। इस जांच में कई शिक्षकों की लोकेशन और उपस्थिति संदिग्ध पाई गई। 1097 किलोमीटर दूर रहकर लगाया अटेंडेंस सबसे गंभीर मामला मध्य विद्यालय भोगडाबर के विशिष्ट शिक्षक मो. नाहिद रजा का सामने आया। विभागीय जांच में पाया गया कि उन्होंने विद्यालय से लगभग 1097 किलोमीटर दूर रहते हुए भी पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज की थी। विभाग ने इसे प्रथम दृष्टया फर्जी उपस्थिति मानते हुए मो. नाहिद रजा को निलंबित कर दिया। इसके अतिरिक्त, उत्क्रमित मध्य विद्यालय डांगीबस्ती की शिक्षिका सोनम राय, नया प्राथमिक विद्यालय गिधिन गोला पासवान टोला के विशिष्ट शिक्षक प्रवीण कुमार, उत्क्रमित मध्य विद्यालय दुराघाटी के प्रधानाध्यापक महबूब आलम और उच्च माध्यमिक विद्यालय बरचोंदी के विद्यालय अध्यापक लोकेश कुमार के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई है। सरकारी व्यवस्था के दुरुपयोग का मामला शिक्षा विभाग ने इस कृत्य को गंभीर अनुशासनहीनता, कर्तव्य के प्रति लापरवाही और सरकारी व्यवस्था के दुरुपयोग का मामला माना है। विभाग के आदेश में कहा गया है कि विद्यालय से अत्यधिक दूरी पर रहते हुए ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना बिहार सेवा नियमों और विभागीय अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है। इससे न केवल सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग होता है, बल्कि विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। आरोपित शिक्षकों के खिलाफ आरोप-पत्र गठित विभाग ने बिहार विद्यालय विशिष्ट शिक्षक नियमावली, 2024 के तहत सभी आरोपित शिक्षकों के खिलाफ आरोप-पत्र गठित कर नियमित विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी है। निलंबन अवधि के दौरान संबंधित शिक्षकों और प्रधानाध्यापक का मुख्यालय भी निर्धारित कर दिया गया है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि ई-शिक्षाकोष प्रणाली में किसी भी प्रकार की हेराफेरी या फर्जी उपस्थिति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
औरैया में जिलाधिकारी बृजेश कुमार ने एक दिव्यांग बालिका दीपिका को ट्राईसाइकिल प्रदान की। अजीतमल ब्लॉक के नबले का पुर्वा गांव निवासी जितेंद्र कुमार की पुत्री दीपिका ने कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी से सहायक उपकरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। दीपिका एक दिव्यांग बालिका है, जिसका विद्यालय उसके घर से लगभग दो किलोमीटर दूर है। विद्यालय आने-जाने में उसे काफी कठिनाई होती थी, लेकिन वह नियमित रूप से शिक्षा प्राप्त करना चाहती है। उसकी स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल मामले का परीक्षण कराया। मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए जिलाधिकारी ने अपने कलेक्ट्रेट स्थित कार्यालय कक्ष में दीपिका को यह सहायक उपकरण उपलब्ध कराया। ट्राईसाइकिल मिलने के बाद दीपिका और उसके परिजनों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। दीपिका के माता-पिता ने जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अब उनकी बेटी को स्कूल आने-जाने में सुविधा होगी, जिससे वह अपनी पढ़ाई जारी रख सकेगी। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की मंशा है कि कोई भी बच्चा आर्थिक, सामाजिक या शारीरिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि दिव्यांगजन और जरूरतमंद व्यक्तियों को समय पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं और सहायक उपकरणों का लाभ समय पर मिले, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि पात्र दिव्यांगजन विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए संबंधित विभाग से संपर्क करें। साथ ही, किसी भी समस्या के समाधान के लिए जनता दर्शन और जनसुनवाई व्यवस्था का उपयोग करें।
सीधी जिले के मझौली जनपद शिक्षा केंद्र अंतर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय बंजारी में सड़क पर कक्षा संचालित करने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की है। विद्यालय तक पहुंचने का रास्ता अवरुद्ध होने के कारण शिक्षकों ने छात्रों को सड़क पर बैठाकर पढ़ाया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। वायरल वीडियो और समाचार प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग ने शुक्रवार देर रात दो शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। यह नोटिस जिला परियोजना समन्वयक, जिला शिक्षा केंद्र सीधी द्वारा प्राथमिक शिक्षक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक देवेश कुमार द्विवेदी और माध्यमिक शिक्षक रामदत्त पनिका को जारी किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि शिक्षकों ने विद्यालय पहुंच मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में विभागीय या प्रशासनिक अधिकारियों को पूर्व सूचना दिए बिना बरसात के मौसम में विद्यार्थियों को खुले और असुरक्षित स्थान पर बैठाकर कक्षाएं संचालित कीं। विभाग ने इसे विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत गंभीर लापरवाही माना है। कलेक्टर ने भी बुलाया दोनों शिक्षकों को 13 जुलाई 2026 को शाम 5:30 बजे कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। शिक्षकों ने बताया कि विद्यालय तक पहुंचने वाले दोनों रास्ते भूमि स्वामियों द्वारा बंद कर दिए गए थे। उनका कहना था कि बरसात के दौरान हर वर्ष यही स्थिति बनती है और विद्यालय तक पहुंचने का कोई स्थायी मार्ग नहीं है। कई बार अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिसके कारण मजबूरी में सड़क पर कक्षा लगाकर विरोध दर्ज कराया गया।
शिक्षा रथ ने बढ़ाया विद्यार्थियों का नामांकन
पानीपत | शहर की शिवनगर कॉलोनी में शिक्षा विभाग के शिक्षा रथ ने घर-घर पहुंचकर अभिभावकों से संवाद किया। जिला शिक्षा अधिकारी राकेश बूरा के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ाना और विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के बारे में नागरिकों को जागरूक करना रहा। राकेश बूरा ने कहा कि हरियाणा के सरकारी विद्यालय शिक्षा, खेल, विज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिल कराने की अपील करते हुए नारा दिया, ‘दो रोटी कम खाओ, लेकिन अपने बच्चों को जरूर पढ़ाओ। जिला कल्चरल कोऑर्डिनेटर संदीप रत्तेवाल ने सरकारी विद्यालयों में नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें, वर्दी और छात्रवृत्ति सहित उपलब्ध सुविधाओं का उल्लेख किया।
राजस्थान में खिलाड़ियों के खेल के साथ शिक्षा से भी खिलवाड़ हो रहा है। राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल ने प्रदेश की 25 रेजिडेंशियल खेल एकेडमियों के लिए 816 खिलाड़ियों का चयन 9 से 17 फरवरी के बीच कर लिया, लेकिन एकेडमियां अब तक शुरू नहीं हो सकीं। इन्हें 1 अप्रैल से खोलने की योजना थी, ताकि खिलाड़ियों का स्कूलों में प्रवेश हो सके और गर्मी की छुट्टियों में समर कैंप में अनुभवी कोचों से प्रशिक्षण लें। लेकिन अधिकारी तीन माह से फूड टेंडर की प्रक्रिया में ही उलझे हुए हैं। टेंडर नहीं होने से एकेडमियों पर ताले लगे हैं। स्पोर्ट्स काउंसिल अब पुराने ठेकेदार को ही भोजन व्यवस्था का काम देकर एकेडमियां जल्द शुरू कराने की तैयारी में है। लेकिन उसने बकाया भुगतान के बाद ही काम करने की बात कही है। 25 रेजिडेंशियल एकेडमियां चल रही, इनमें से 10 जयपुर में पहला यूनिट टेस्ट हो चुका, बोर्ड फॉर्म की तारीख भी नजदीक एक कोच ने बताया, ‘एकेडमियां शुरू नहीं हुई हैं। पहला यूनिट टेस्ट हो चुका है और दूसरा इसी माह है। 10 अगस्त से पहले बोर्ड परीक्षाओं के फॉर्म भरे जाने हैं। अगर 20 जुलाई तारीख से भी एकेडमियां शुरू होती हैं तो खिलाड़ी न खेल में आगे बढ़ पाएंगे और न ही शिक्षा में।’ एकेडमियों में चयन को लेकर भी शिकायतें हैं। एक ही क्षेत्र और जाति के खिलाडि़यों का चयन किया। कई एकेडमियां ऐसी हैं, जिनमें उस खेल के कोच ही नहीं हैं। इस सप्ताह एकेडमियां शुरू कर देंगे : मीणा टेंडर प्रक्रिया में अभी थोड़ा समय लगेगा, लेकिन उम्मीद है कि एक सप्ताह में एकेडमियां शुरू कर देंगे। फिलहाल पुराने ठेकेदार को ही भोजन व्यवस्था का काम देने की योजना है, ताकि एकेडमियां जल्द शुरू हो सकें। -राजकेश मीणा, सचिव, राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल
प्रयागराज में देर शाम छात्रों ने शुक्रवार को मशाल जुलूस निकाला। यह प्रदर्शन विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, अंबेडकर छात्रावास में जातिगत उत्पीड़न के आरोपों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों के विरोध में किया गया। छात्रों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पेपर लीक पर रोक, नई शिक्षा नीति-2020 वापस लेने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को समाप्त करने की मांग की। यह जुलूस सलोरी स्थित अंबेडकर छात्रावास से बैंक रोड तक निकाला गया। जुलूस के बाद एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने अपनी मांगों को दोहराया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने बताया कि यूपी लेखपाल, यूपीएसआई, टीजीटी, पीजीटी, नीट और असिस्टेंट प्रोफेसर जैसी कई भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं में लगातार अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। उनका कहना था कि इन गड़बड़ियों से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। छात्रों ने अंबेडकर छात्रावास की अधीक्षिका पर जातिगत उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की। सभा को संबोधित करते हुए आइसा उत्तर प्रदेश के सचिव शशांक ने कहा कि प्रदेश में जातिगत घटनाएं और परीक्षा संबंधी अनियमितताएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कई प्रमुख परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के मामलों पर जवाबदेही तय करने में विफल रही है। शशांक ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। छात्रनेता श्रीकांत अंबेडकर ने उच्च शिक्षा संस्थानों और छात्रावासों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव तथा शिक्षा क्षेत्र में लगातार फंड कटौती पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सरकार से प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया। आइसा इलाहाबाद की अध्यक्ष सोनाली ने बताया कि जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के समर्थन में देशभर के छात्र एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। राजनीतिक विज्ञान के शोध छात्र बृजेश ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं के नियमों में बार-बार बदलाव से अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू करने और युवाओं के हितों की रक्षा करने की मांग की।
बक्सर में आइसा, इनौस और आरवाईए के बैनर तले छात्र-युवाओं ने शुक्रवार को विरोध मार्च निकाला। यह प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और भूख हड़ताल के समर्थन में किया गया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों, पेपर लीक की घटनाओं और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली के खिलाफ आवाज उठाई। विरोध मार्च अंबेडकर चौक से ज्योति चौक तक निकाला गया, जहां एक सभा का आयोजन किया गया। सभा का संचालन आइसा के जिला सचिव अखिलेश ठाकुर ने किया, जबकि आरवाईए के जिला संयोजक राजदेव सिंह ने इसकी अध्यक्षता की। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लें कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डुमरांव के पूर्व विधायक और इनौस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा रहे। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 13 दिनों से जारी भूख हड़ताल का समर्थन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि नीट, यूजीसी-नेट सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार अनियमितताएं और पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और जवाबदेही तय करने की मांग की। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) और NTA की कार्यप्रणाली की भी आलोचना की गई। प्रदर्शनकारियों ने इन्हें समाप्त करने की मांग उठाई। शिक्षा का लगातार निजीकरण हो रहा नेताओं ने कहा कि शिक्षा का लगातार निजीकरण हो रहा है, जिससे गरीब, दलित, मजदूर और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना कठिन होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार संबंधी परीक्षाओं में नियमों में बार-बार बदलाव कर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ऐपवा नेता संध्या पाल ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में फंड में कटौती, छात्रावासों की बदहाल स्थिति और लगातार हो रहे पेपर लीक को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया। प्रदर्शन और सभा में आरवाईए के राज्य नेता बीरन यादव, जिला नेता रवि मौर्या, रविशंकर राम, बलीराम पासवान, कृष्णा यादव, दीपू कुमार, सर्वेश पांडेय, बब्लू कुमार सहित बड़ी संख्या में छात्र-युवा कार्यकर्ता शामिल हुए।
जौनपुर के मछलीशहर से समाजवादी पार्टी (सपा) की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के अगले कुलपति की नियुक्ति को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है। उन्होंने कुलपति पद पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग के किसी योग्य और अनुभवी शिक्षाविद की नियुक्ति किए जाने की मांग की है। 10 जुलाई 2026 को भेजे गए पत्र में डॉ. सोनकर ने कहा कि वर्तमान कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद का कार्यकाल अगस्त 2026 में समाप्त हो रहा है और नए कुलपति के चयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे में सामाजिक न्याय और संविधान की भावना के अनुरूप नियुक्ति की जानी चाहिए। पत्र लिखकर दिए ये तर्क पत्र में उन्होंने दावा किया कि वर्तमान कुलपति के कार्यकाल में आरक्षित वर्ग के 108 शिक्षकीय पदों के सापेक्ष केवल 30 नियुक्तियां की गईं, जबकि 78 पदों को नॉट फाउंड सूटेबल बताकर रिक्त छोड़ दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्य परिषद से स्वीकृत लगभग 100 शिक्षकीय पदों का अब तक विज्ञापन नहीं किया गया और कई अवसरों पर संविदा के माध्यम से नियुक्तियां की गईं। इसलिए की मांग डॉ. रागिनी सोनकर ने पत्र में कहा कि KGMU के 100 से अधिक वर्षों के इतिहास में अब तक अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसी शिक्षाविद को कुलपति बनने का अवसर नहीं मिला है। उन्होंने इसे केवल प्रतिनिधित्व का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और लोकतांत्रिक भागीदारी का विषय बताया। विधायक ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि KGMU के अगले कुलपति के चयन में सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों और समावेशी प्रशासन को प्राथमिकता देते हुए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अथवा अन्य पिछड़ा वर्ग के किसी योग्य, अनुभवी और उत्कृष्ट शिक्षाविद को कुलपति नियुक्त किया जाए। उनका कहना है कि इससे विश्वविद्यालय में सामाजिक प्रतिनिधित्व, पारदर्शिता और न्यायपूर्ण प्रशासन को मजबूती मिलेगी।
वल्लभनगर में राजस्थान पंचायतीराज और माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को सात सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। यह ज्ञापन प्रदेश के राजकीय स्कूलों के सुदृढ़ीकरण और टीचर्स की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए दिया गया है। टीचर्स ने बताया कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और आदर्श स्कूल की संकल्पना को पूरा करने के लिए इन बाधाओं को दूर करना आवश्यक है। बोले- 48 हजार से अधिक पद खाली ज्ञापन में तृतीय श्रेणी टीचर्स के तबादलों को लेकर प्रमुख मांग उठाई गई है, जो सत्र 2018 के बाद से नहीं हुए हैं। संगठन ने इनके शीघ्र ट्रांसफर और टीएसपी से नॉन-टीएसपी क्षेत्र में टीचर्स के समायोजन की मांग की। पिछले छह शिक्षा सत्रों से तृतीय श्रेणी टीचर्स की वरिष्ठ टीचर पद पर पदोन्नति नहीं हुई है, जिससे प्रदेश में 48 हजार से अधिक पद खाली हैं। एडिशनल विषय को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले में सरकार से प्रभावी पैरवी कर डीपीसी प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह भी किया गया है। शिक्षकों ने वित्त विभाग ने 2 जून को जारी सर्कुलर को वापस लेने की मांग की है। इससे तृतीय श्रेणी टीचर्स को उच्च पद पर जाने पर आरएसआर नियम 24 और 26 के तहत 100 प्रतिशत वेतन संरक्षण का लाभ मिल सकेगा। साल 2010 से पूर्व नियुक्त तृतीय श्रेणी टीचर्स के लिए रीट उत्तीर्ण करने की बाध्यता को हटाने की भी मांग की गई है, ताकि उन्हें सेवा अनुभव के मूल्यांकन, विशेष प्रशिक्षण और अतिरिक्त अवसर देकर व्यावहारिक राहत मिल सके। झालावाड़ के पिपलोद में हुई घटना के बाद जमींदोज किए गए जर्जर कक्षा-कक्षों, शौचालयों और रसोईघरों के पुनर्निर्माण के लिए जल्द से जल्द बजट जारी करने की मांग की गई है, ताकि बाधित हो रहा शैक्षणिक कार्य सुचारू हो सके। कर्मचारियों और शिक्षकों के पेंशन प्रकरण, सरेंडर लीव, जीपीएफ और राज्य बीमा राशि के भुगतान पर लगी अघोषित आर्थिक नाकेबंदी को खत्म कर तुरंत भुगतान व्यवस्था शुरू करने की भी अपील की गई है। संघ ने सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या के अनुपात में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए साल 2015 में बनी स्टाफिंग पैटर्न व्यवस्था को लागू करने की मांग की। इसके तहत नवक्रमोन्नत और अतिरिक्त संकाय वाले सभी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। संगठन ने आशा व्यक्त की है की छात्र हित और टीचर हित को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर जल्द ही उचित निर्णय लेगी। इस अवसर पर प्रदेश मंत्री तुलसीराम सुथार, ब्लॉक अध्यक्ष गोपाल लक्षकार, जिला उपाध्यक्ष पुष्कर लोहार, संघर्ष समिति प्रभारी दशरथ सिंह, नरेंद्र अवाना, उदय सिंह सहित कई शिक्षक मौजूद थे।
बलरामपुर में मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से विधि उपाधि प्रदान करने की मान्यता मिल गई है। इस संबंध में शासनादेश 3 जुलाई को जारी हुआ था, जिसे विश्वविद्यालय प्रशासन को शुक्रवार को प्राप्त हुआ। बीसीआई की विधि शिक्षा स्थायी समिति ने विश्वविद्यालय के निरीक्षण और उपलब्ध अभिलेखों पर विचार करने के बाद यह स्वीकृति दी है। यह मान्यता अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 7(1)(i) और विधि शिक्षा नियम, 2008 के प्रावधानों के तहत प्रदान की गई है। बीसीआई द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विश्वविद्यालय को निर्धारित मानकों और शर्तों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। साथ ही, छह माह के भीतर आवश्यक शपथपत्र और अन्य अभिलेख परिषद को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। इन औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद विश्वविद्यालय विधि शिक्षा के क्षेत्र में नियमित रूप से पाठ्यक्रम संचालित कर सकेगा। कुलपति प्रोफेसर रवि शंकर सिंह ने देवीपाटन मंडल के सभी लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया से मिली यह मान्यता मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे बलरामपुर सहित देवीपाटन मंडल और आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण विधि शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जिससे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की भूमिका और अधिक सशक्त होगी।
रोहतक के गांव काहनौर स्थित गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सैकेंडरी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में मंच से पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने सरपंच निशा देवी व उसके पति नवीन को खूब खरी खोटी सुनाई। मनीष ग्रोवर ने मंच से कहा कि सरपंच जो दिल से पार्टी के साथ नहीं, उसके साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए। पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने मंच से कहा कि काहनौर गांव में 9 हजार लोग हैं और 6500 वोट है। दो दिन पहले ही सरपंच की तरफ से कार्यक्रम दिया गया, लेकिन आज कार्यक्रम में सरपंच का एक आदमी भी नहीं आया। सरपंच ने शिक्षामंत्री महिपाल ढांडा को बुलाकर उनका अपमान किया है। सरपंच केवल पैसा लेने के लिए आते है, ऐसे सरपंचों को पहचाने। पैसा लेने के लिए भाजपा, दिल से कांग्रेसीपूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने कहा कि सरपंच बेचारे से होकर नहीं आते। हमें पहचानना होगा कि किस सरपंच को किस मंत्री के पास लेकर जाना है। सरपंच जो दिल से भाजपा पार्टी के साथ नहीं है, उसके साथ वैसा व्यवहार करें। यह नहीं कि सिर्फ पैसे लेकर चले जाएं और दिल किसी ओर के पास हो। पैसे लेने के लिए भाजपा और दिल से कांग्रेसी बने रहे। भाजपा की विचारधारा से जुड़ा व्यक्ति भविष्य में बनेगा सरपंचपूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने कहा कि आने वाले समय में सरपंच भाजपा का बनेगा। जो भाजपा पार्टी की विचारधारा से दिल से जुड़ेगा, सरकार भी दिल खोलकर पैसा देगी। यह नहीं चलेगा कि किसी मंत्री से रिबन कटवाकर बाद में पैसे ले ले और गुणगान दूसरी पार्टी का करे। जिलाध्यक्ष रणवीर ढाका भी ऐसे लोगों से सावधान रहे। कांग्रेस से जुड़े होने का लगाया आरोपपूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने गांव की सरपंच निशा देवी व उनके पति नवीन का कांग्रेस से जुड़ाव बताया। नवीन के पिता भूप सिंह कांग्रेस कार्यकर्ता रहे हैं। ऐसे में शिक्षामंत्री महिपाल ढांडा का कार्यक्रम तो ले लिया, लोगों को कार्यक्रम में नहीं लेकर आए, जिससे मंत्री का भी अपमान किया है।
कोटपूतली जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) माध्यमिक, कोटपूतली-बहरोड़ के पद पर मनोरमा यादव ने कार्यभार ग्रहण किया है। इस अवसर पर राजस्थान राज्य भारत स्काउट व गाइड स्थानीय संघ कोटपूतली ने उनका स्वागत और अभिनंदन किया। स्थानीय संघ के पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंटकर मनोरमा यादव को उनके नए दायित्व के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में जिले में शिक्षा के साथ-साथ स्काउट-गाइड गतिविधियों को भी नई ऊर्जा मिलेगी। पदाधिकारियों ने गुलदस्ता भेंटकर मनोरमा यादव का अभिनंदन किया और उनके सफल कार्यकाल की कामना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रशासन और स्काउट-गाइड जैसी संस्कारमूलक गतिविधियों के बेहतर समन्वय से छात्रों के सर्वांगीण विकास को नई दिशा मिल सकती है। संघ ने विश्वास व्यक्त किया कि मनोरमा यादव के नेतृत्व में जिले में शैक्षिक गुणवत्ता, अनुशासन, नवाचार और छात्र हित से जुड़े कार्यों को मजबूती मिलेगी। इस अवसर पर राजस्थान राज्य भारत स्काउट व गाइड स्थानीय संघ कोटपूतली के सहायक जिला कमिश्नर प्रशिक्षण हंसराज यादव, सचिव रामवीर यादव, सहायक सचिव प्रशिक्षण कमलेश कुम्हार, संदीप कुमार जांगिड़ और अतुल कुमार मौजूद रहे। सभी पदाधिकारियों ने जिला शिक्षा अधिकारी को शुभकामनाएं देते हुए जिले में स्काउट-गाइड गतिविधियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व विकास से जुड़े आयोजनों में सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की।
छत्तीसगढ़ के राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) अपनी मांगों को लेकर पिछले नौ दिनों से अनिश्चितकालीन आंदोलन पर बैठे हैं। गुरुवार को आंदोलन के नौवें दिन कैबिनेट बैठक में संविलियन और समायोजन को लेकर कोई घोषणा नहीं होने से शिक्षकों में नाराजगी और बढ़ गई। इसके विरोध में आंदोलनकारियों ने शिक्षा मंत्री के नाम अपने खून से पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग की। इस दौरान कई शिक्षकों ने रोते हुए तहसीलदार से अपनी पीड़ा बयान की और कहा कि संविलियन नहीं दे सकते तो हमें इच्छा मृत्यु की अनुमति ही दे दीजिए। राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) कल्याण संघ, छत्तीसगढ़ के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हैं। गुरुवार को रैली की शक्ल में सभी आंदोलनकारी शिक्षक कलेक्टोरेट पहुंचे और वहां पर तहसीलदार के सामने अपनी पूरी बात रखी। धरना स्थल पर मौजूद शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले करीब 10 साल से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, लेकिन आज भी उन्हें न तो नौकरी की सुरक्षा मिली है और न ही सम्मानजनक वेतन। खून से लिखा पत्र, कहा- वादा पूरा नहीं कर सकते तो मरने की अनुमति दोआंदोलन के दौरान शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि अगर सरकार वर्षों से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित नहीं कर सकती और उनकी मेहनत का सम्मान नहीं कर सकती, तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी जाए। शिक्षकों ने साफ किया कि यह किसी तरह की धमकी नहीं है, बल्कि उनकी मजबूरी और लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा की पीड़ा है। अतिथि शिक्षक बोले- शिक्षा मंत्री ने अपने ऑफिस बाहर निकालाइधर अतिथि शिक्षक विद्यामितान संघ के प्रदेश अध्यक्ष राज यादव ने कहा कि वे स्कूल शिक्षा मंत्री से मिलने गए थे। मुलाकात भी हुई। हमने पहल किया था कि 8 तारीख के कैबिनेट के लिए कि हमारे लिए कुछ पॉजिटिव आ जाए तो हम हड़ताल समाप्त कर देंगे। लेकिन शिक्षा मंत्री के द्वारा हमसे अच्छे से बात भी नहीं किया गया। उल्टा हमे उन्होंने अपने ऑफिस से बाहर भी निकाल दिया। हमें अधिकारा नहीं मिल रहे हैं, इसलिए हम दुर्ग में आकर अपनी मांग को रख रहे हैं। चुनाव के दौरान संविलियन का किया था वादाशिक्षकों ने कहा कि सरकार और जनप्रतिनिधियों ने कई बार उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला लेने का भरोसा दिया था। चुनाव के दौरान भी संविलियन और समायोजन का वादा किया गया था। उन्हें उम्मीद थी कि हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में इस दिशा में कोई बड़ा फैसला होगा, लेकिन ऐसा नहीं होने से हजारों अतिथि शिक्षकों की उम्मीद टूट गई। नियमित शिक्षकों की तरह कर रहे हैं कामधरना स्थल पर मौजूद शिक्षकों ने बताया कि वे नियमित शिक्षकों की तरह स्कूलों में पढ़ाने का काम करते हैं। इसके बावजूद उन्हें दूसरे शिक्षकों की तुलना में काफी कम मानदेय मिलता है। इससे उनके परिवार आर्थिक तंगी, सामाजिक परेशानियों और मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि समान काम करने के बावजूद वेतन और सेवा शर्तों में इतना बड़ा अंतर उचित नहीं है। संघ ने सरकार से मांग की है कि चुनाव के दौरान किए गए वादों और मोदी की गारंटी के अनुरूप राज्य अतिथि शिक्षकों का संविलियन या समायोजन किया जाए। साथ ही समान कार्य के लिए समान वेतन और सेवा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जल्द फैसला लिया जाए।
खरगोन में बदहाल सड़क से शिक्षा प्रभावित:छात्राएं पैदल स्कूल जाने को मजबूर, 25 साल से सड़क का इंतजार
खरगोन जिले की भगवानपुरा विधानसभा के कुम्हारखेड़ा से कुकडोल तक करीब तीन किलोमीटर लंबी सड़क बारिश के बाद पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो गई है। बदहाल सड़क का सबसे ज्यादा असर स्कूली छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है। 35 से अधिक विद्यार्थी रोज इसी मार्ग से स्कूल पहुंचते हैं, लेकिन कीचड़ और गड्ढों के कारण छात्राओं को सरकारी साइकिल होने के बावजूद पैदल स्कूल जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग पिछले 25 वर्षों से की जा रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। 35 से ज्यादा विद्यार्थी रोज झेल रहे परेशानी कुम्हारखेड़ा से कुकडोल स्थित स्कूल तक पहुंचने के लिए 35 से अधिक विद्यार्थियों को रोज इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। बारिश के कारण सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर गया है और पूरा रास्ता कीचड़ से ढका हुआ है। ऐसे में बच्चों के कपड़े और जूते रोज खराब हो जाते हैं। सरकारी साइकिल बेकार छात्राएं पैदल जाने को मजबूर कक्षा 11वीं की छात्राओं राजनंदिनी, खुशी, साक्षी, वैशाली, वंतराज और तरुण ने बताया कि रास्ता इतना खराब है कि साइकिल चलाना संभव नहीं है। मजबूरी में उन्हें रोज पैदल स्कूल जाना पड़ता है और समय पर पहुंचने के लिए एक घंटा पहले घर से निकलना पड़ता है। वहीं कक्षा 10वीं की छात्राओं वंशिका, खुशी और रानी ने बताया कि कई जगह घुटनों तक कीचड़ होने के कारण उन्हें जूते-चप्पल हाथ में लेकर चलना पड़ता है। सरकार से मिली निशुल्क साइकिलें घर पर ही खड़ी रहती हैं। ग्रामीण बोले 25 साल से कर रहे मांग कुम्हारखेड़ा के पूर्व सैनिक कैप्टन सुरेश चौहान सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए पिछले 25 वर्षों में जिला प्रशासन, विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री तक सैकड़ों आवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन सड़क आज भी बदहाल है। कुकडोल और भसनेर के जनप्रतिनिधियों ने भी बताया कि कई बार लिखित मांग की गई, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। किसानों को भी हो रही भारी परेशानी खराब सड़क का असर केवल विद्यार्थियों पर ही नहीं बल्कि किसानों पर भी पड़ रहा है। खेतों से उपज मंडी तक पहुंचाने में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दोनों ग्राम पंचायतें समय-समय पर गड्ढों में मुरूम और पत्थर डलवाकर अस्थायी मरम्मत कराती हैं, लेकिन बारिश में सड़क फिर खराब हो जाती है। विधायक ने जल्द समाधान का दिया भरोसा भगवानपुरा विधायक केदारसिंह डाबर ने कहा कि किसानों और विद्यार्थियों की समस्या गंभीर है। उन्होंने बताया कि सड़क निर्माण में आ रही तकनीकी बाधाओं को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने प्रदेश के विकास और समसामयिक राजनीतिक मुद्दों को लेकर विपक्ष पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरियाणा को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की सौगात देने की बात कही, वहीं दूसरी तरफ पानी के मुद्दे पर इनेलो और गठबंधन को लेकर जेजेपी (JJP) नेता अजय चौटाला के बयान पर तीखा पलटवार किया। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही हरियाणा के दौरे पर आ रहे हैं, जहां वे देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। उन्होंने कहा कि यह पल न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के लिए गौरवशाली होगा, क्योंकि यह कदम पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक ग्रीन एनर्जी की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा। शिक्षामंत्री की दो अहम बातें… जेजेपी नेता अजय चौटाला के बयान पर पलटवार- BJP एक विश्वविद्यालय है जननायक जनता पार्टी (JJP) के नेता अजय चौटाला द्वारा भाजपा के साथ गठबंधन करने को एक गलती बताने वाले बयान पर शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा के साथ गठबंधन करना कोई गलती नहीं थी, बल्कि जेजेपी ने बीजेपी के साथ रहकर ही शासन चलाने और जनता की सेवा करने का सलीका सीखा है। भारतीय जनता पार्टी एक 'विश्वविद्यालय' की तरह है, जहां जो भी आता है, वह बहुत कुछ सीखकर ही जाता है। जेजेपी ने भी भाजपा के साथ सरकार में रहकर प्रशासन, संगठन और विकास की राजनीति का वास्तविक अनुभव हासिल किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी हमेशा अपने सहयोगियों को साथ लेकर चलने वाली पार्टी रही है, जिसका एकमात्र उद्देश्य सत्ता पाना नहीं बल्कि निस्वार्थ जनसेवा और प्रदेश का समान विकास करना है। शिक्षा मंत्री ने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें इस तरह की अनर्गल राजनीतिक बयानबाजी छोड़कर केवल जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
ई-विद्या वाहिनी व एफएलएन पर आधारित प्रशिक्षण संपन्न, शिक्षा की गुणवत्ता सुदृढ़ करने पर दिया जोर
भास्कर न्यूज|गुमला झारखंड शिक्षा परियोजना, गुमला के तत्वावधान में डायट परिसर में आयोजित चार दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह प्रशिक्षण मुख्य रूप से ई-विद्या वाहिनी आधारित अनुश्रवण प्रणाली और आधारभूत साक्षरता एवं संख्याज्ञान के प्रभावी मूल्यांकन पर केंद्रित था। 06 जुलाई से 09 जुलाई तक चले इस गहन प्रशिक्षण सत्र में जिले के सभी प्रखंडों के प्रखंड साधन सेवियों और संकुल साधन सेवियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्घाटन जिला शिक्षा पदाधिकारी कविता खलखो और अतिरिक्त जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ज्योति खलखो ने संयुक्त रूप से किया। संबोधन में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में शिक्षा के डिजिटलीकरण और डेटा-आधारित निर्णयों का महत्व बढ़ गया है। उन्होंने प्रतिभागियों को ई-विद्या वाहिनी के माध्यम से विद्यालयों में नियमित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण डेटा प्रविष्टि सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। प्रशिक्षण के दौरान डायट के संकाय सदस्य कुमार सुंदरम भारद्वाज और डॉ. रंजना सिंह भी उपस्थित रहे, जिन्होंने शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए आवश्यक रणनीतियों पर प्रकाश डाला। प्रशिक्षण का संचालन व तकनीकी मार्गदर्शन मास्टर ट्रेनर संतोष कुमार और अनिमा रानी टोप्पो ने किया। इस दौरान ई-विद्या वाहिनी ऐप और पोर्टल के प्रभावी उपयोग के तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। राज्य स्तरीय टीम से प्रियंका कुमारी और जिला टीम के सत्यजीत मंडल ने भी प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। सत्र के दौरान एफएलएन मूल्यांकन के तरीकों, सीखने के परिणामों का विश्लेषण और अनुश्रवण के दौरान ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों को सिखाया गया कि कैसे मूल्यांकन के आंकड़ों का उपयोग करके विद्यालयों में शैक्षणिक माहौल को और अधिक जीवंत और परिणामोन्मुखी बनाया जा सकता है। इस चार दिवसीय प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जिले के बीआरपी और सीआरपी में शैक्षणिक नेतृत्व क्षमता का विकास करना है। प्रशिक्षण के माध्यम से न केवल अनुश्रवण प्रणाली को सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया।
शिक्षा मुफ्त, किताब-यूनिफॉर्म की आड़ में वसूली
भास्कर न्यूज| झलप शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत मुफ्त शिक्षा देने का सरकारी दावा झलप में दम तोड़ता दिख रहा है। क्षेत्र के कार्मेल इंग्लिश मीडियम स्कूल (छिदौली) और सेंट थॉमस मिशन स्कूल (झलप) पर आरटीई के तहत पढ़ रहे बच्चों के पालकों से कॉपी, किताब और गणवेश के नाम पर अवैध वसूली का गंभीर आरोप लगा है। विडंबना यह है कि प्रशासन की जांच रिपोर्ट दराजों में कैद है और पालकों का आर्थिक शोषण जारी है। जानकारी के अनुसार, सेंट थॉमस स्कूल में 69 और कार्मेल स्कूल में 133 सीटें आरटीई के अंतर्गत हैं। पालकों का आरोप है कि प्रबंधन द्वारा प्रति बच्चा करीब 2,400 रुपये की अवैध वसूली की जा रही है। जो किताबें सरकार द्वारा मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं, स्कूल प्रबंधन उन्हीं पाठ्यक्रमों की किताबें निजी दुकानों से 600 रुपये तक में खरीदने का दबाव बना रहा है। मजदूरी कर परिवार पालने वाले अभिभावकों के लिए यह खर्च उनके महीने भर के राशन के बराबर है। आरोपों के घेरे में आए दोनों स्कूलों के प्रिंसिपलों ने अपना बचाव करते हुए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कार्मेल स्कूल के प्रिंसिपल का कहना है कि वे किसी से शुल्क नहीं ले रहे, जबकि सेंट थॉमस प्रबंधन का दावा है कि वे किसी पर दबाव नहीं बनाते। इस मामले में प्रशासनिक निष्क्रियता का आलम यह है कि शिकायतें सही पाए जाने के बाद भी कार्रवाई के नाम पर केवल नोटिस का खेल चल रहा है। महासमुंद बीईओ भोपाल सिंह बंजारा ने स्वीकार किया कि 3 जुलाई को जांच में शिकायत सही पाई गई थी और स्कूल प्रबंधन को स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया गया है। प्रबंधन के दावों और पालकों के पास मौजूद रसीदों के बीच का विरोधाभास सीधे तौर पर बड़ी धांधली की ओर इशारा कर रहा है। सवाल यह है कि यदि शिकायत सही साबित हो चुकी है, तो कार्रवाई में इतनी देरी क्यों? क्या यह रसूखदारों का संरक्षण है या शिक्षा विभाग की मिलीभगत? अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इन स्कूलों पर नकेल कसता है।
मां बाड़ी शिक्षा सहयोगियों के मानदेय भुगतान की मांग
जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग की ओर से संचालित स्वच्छ परियोजना के तहत कार्यरत मां बाड़ी के शिक्षा सहयोगियों को पिछले पांच माह से मानदेय नहीं मिला है। शिक्षा सहयोगियों ने जनजाति मंत्री से हस्तक्षेप कर बकाया मानदेय का शीघ्र भुगतान कराने, तत्काल राहत दिलाने की मांग की है। साथ ही, लंबे समय से उठ रही मांग को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि विभाग में मां बाड़ी शिक्षा सहयोगियों के लिए स्पष्ट कैडर निर्धारित किया जाए, ताकि नियुक्ति, दायित्व और भुगतान व्यवस्था पारदर्शी बने।
पटना में गुरुवार को एक ही मंच पर जाने माने एजुकेशनिस्ट और पॉलिसिमेकर्स जुटे। दरअसल, दैनिक भास्कर की ओर से एजुकेशन कॉन्क्लेव सीजन -2 का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में क्लासरूम टू कैरियर, भविष्य के शिक्षा रोडमैप, स्टूडेंट मेंटल हेल्थ और स्ट्रेस मैनेजमेंट, कौशल विकास, डिजिटल लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार विमर्श हुआ। शिक्षा सिर्फ सरकार की नहीं बल्कि समाज की जवाबदेही इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहे बिहार सरकार के मंत्री प्रो. अशोक चौधरी ने कहा कि शिक्षा सिर्फ सरकार की नहीं बल्कि समाज की जवाबदेही है। इसमें जितने लोग पार्टिसिपेट कर पाए उतना बेहतर है। दैनिक भास्कर ने इस सेंसटाइज मुद्दे को सबके सामने रखने की एक पहल की है, जो की बहुत ही सराहनीय है। बिहार में एजुकेशन की क्वालिटी भी बढ़ रही है। देखें आयोजन की कुछ तस्वीरें… हमारे यहां विदेश से बच्चे आकर पढ़ रहे उन्होंने आगे कहा, बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में नीतीश कुमार का बहुत बड़ा योगदान रहा है। आज हमारे यहां विदेश से बच्चे आकर पढ़ रहे हैं। नालंदा यूनिवर्सिटी में 2 साल पहले करीब 30-40 बच्चे पढ़ रहे थे। अब तो उनकी संख्या भी बढ़ी है। अब हमें विक्रमशिला यूनिवर्सिटी को बनाना है। प्रधानमंत्री ने विक्रमशिला के लिए एक्स्ट्रा बजट की बात की है और जल्द ही हम इस पर काम शुरू करेंगे। हमारे वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इसके लिए काफी प्रयत्नशील है। शिक्षा के क्षेत्र में वर्तमान चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा हुई यह काॅन्कलेव शिक्षा के क्षेत्र में वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं के लिए चर्चा का एक सशक्त मंच साबित हुआ। पटना यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो अजय कुमार सिंह, मशहूर एजुकेशनिस्ट केसी सिन्हा, NIFT पटना के डायरेक्टर राहुल शर्मा, CIMP के डायरेक्टर प्रो राणा सिंह, शिक्षा विभाग हायर एजुकेशन के डायरेक्टर प्रो एन के अग्रवाल सहित अन्य शिक्षाविद मौजूद रहे। यह काॅन्कलेव बिहार की शिक्षा प्रणाली को अधिक सुदृढ़, समावेशी और भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में एक पहल है।
कृषि शिक्षा में अध्ययनरत पात्र छात्राओं को मिलेगी प्रोत्साहन राशि
राज किसान साथी पोर्टल पर होंगे ऑनलाइन आवेदन अजमेर। कृषि विभाग की राज्य योजना के अंतर्गत कृषि शिक्षा में अध्ययनरत छात्राओं को प्रोत्साहन राशि प्रदान करने के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया प्रारम्भ हो गई है। पात्र छात्राएं राज किसान साथी पोर्टल के माध्यम से आगामी 31 जनवरी 2027 तक आवेदन कर सकती हैं। कृषि विभाग […] The post कृषि शिक्षा में अध्ययनरत पात्र छात्राओं को मिलेगी प्रोत्साहन राशि appeared first on Sabguru News .
मऊगंज में अतिथि शिक्षकों ने लोक शिक्षण संचालनालय मध्यप्रदेश के आयुक्त के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन बृहस्पतिवार की शाम 4 बजे कलेक्टर कार्यालय मऊगंज पहुंचकर एसडीएम रश्मि चतुर्वेदी के माध्यम से दिया गया। अतिथि शिक्षक समन्वय समिति, जिला मऊगंज ने नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के दौरान आ रही समस्याओं और भर्ती प्रक्रिया में बदलाव के कारण बड़ी संख्या में शिक्षकों के प्रभावित होने की बात कही है। समिति ने ज्ञापन में बताया कि प्रदेश के अतिथि शिक्षक पिछले 17 से 18 वर्षों से स्कूल शिक्षा विभाग में पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ सेवाएं दे रहे हैं। इन शिक्षकों ने लगातार बेहतर परीक्षा परिणाम भी दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। समिति का कहना है कि नियमित शिक्षकों के स्थानांतरण, अतिशेष शिक्षकों के समायोजन, नई भर्ती, पदोन्नति और नई पद संरचना लागू होने के कारण कई विद्यालयों में रिक्त पद समाप्त हो गए हैं। इसके परिणामस्वरूप, सत्र 2025-26 में कार्यरत अनेक अतिथि शिक्षकों की पुनः जॉइनिंग नहीं हो सकी है। अतिथि शिक्षकों ने मांग की है कि उच्च शिक्षा विभाग में अतिथि विद्वानों को दी जाने वाली व्यवस्था की तर्ज पर बाहर हुए शिक्षकों को शाला चयन में प्रथम वरीयता दी जाए। इसके लिए उनके लिए अलग से काउंसलिंग आयोजित की जाए। इसके अतिरिक्त, समिति ने अवकाश व्यवस्था लागू होने तक 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता से राहत देने की मांग की है। उन्होंने कम उपस्थिति के आधार पर बाहर हुए शिक्षकों की पुनः जॉइनिंग कराने और अतिथि शिक्षकों के लिए नियमित अवकाश व्यवस्था लागू करने की भी अपील की है। समिति ने अपनी समस्याओं के शीघ्र समाधान का आग्रह किया है।
अररिया में नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर गुरुवार को जन जागरण शक्ति संगठन की युवा टीम ने एक दिवसीय धरना और सामूहिक भूख हड़ताल की। यह प्रदर्शन समाहरणालय परिसर स्थित धरना स्थल पर आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। सुबह बस स्टैंड से एक रैली शुरू हुई, जो चांदनी चौक होते हुए समाहरणालय पहुंची। यहां रैली एक सभा में बदल गई, जिसके बाद छात्र धरना स्थल पर बैठकर भूख हड़ताल पर चले गए। प्रदर्शनकारी छात्रों और नौजवानों ने दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे भूख हड़ताल और धरने के प्रति एकजुटता व्यक्त की। पेपर लीक के बाद 22 छात्रों ने आत्महत्या की सभा को संबोधित करते हुए अररिया कॉलेज के छात्र सुनील कुमार पासवान ने कहा कि नौजवान कड़ी मेहनत से परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन सिस्टम में घोटाले हो जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट लीक के बाद अब तक 22 छात्रों ने आत्महत्या की है। पासवान ने सरकार से जवाबदेही तय करने और व्यवस्था सुधारने की मांग की। जन जागरण शक्ति संगठन के सचिव आशीष रंजन ने कहा कि दिल्ली के जंतर मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन की गूंज पूरे देश में है। उन्होंने कहा, 'आज हम अररिया से उनकी आवाज में अपनी आवाज जोड़ रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही होगा, अन्यथा यह आंदोलन पूरे देश में फैल जाएगा।' उन्होंने बताया कि 20 जुलाई को होने वाले संसद मार्च में अररिया से भी एक बड़ा जत्था शामिल होगा। घोटाले में शामिल दोषियों पर कार्रवाई की मांग सभा में रंजीत पासवान, अभिषेक, सब्यसाची, मुनाजिर, मांडवी, कन्हैया, लक्ष्मी, ज्योति, पवन कुमार और नारद मुर्मू सहित कई छात्र-नौजवानों ने अपने विचार रखे। छात्रों का आरोप है कि नीट घोटाले में शामिल दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है और दोषी अधिकारियों-नेताओं को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सुनील कुमार, रंजय पासवान, गोपाल, पवन कुमार राम, लक्ष्मी और ज्योति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने मांग की कि पेपर लीक में शामिल सभी लोगों पर तुरंत कार्रवाई हो और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। यह धरना-भूख हड़ताल बिहार सहित पूरे देश में छात्र आंदोलन की बढ़ती लहर का हिस्सा है, जिसमें युवा सरकार से जवाबदेही और न्याय की मांग कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार ने गुरुवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। इस फेरबदल में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले को नया कलेक्टर मिला है। वहीं स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, शहरी विकास और जिला पंचायत महासमुंद में भी नई नियुक्तियां की गई हैं। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से यह आदेश जारी किया गया। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के कलेक्टर संतोष कुमार देवांगन (IAS-2013) को उनके वर्तमान पद से हटाकर विशेष सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग बनाया गया है। जबकि विजय दयाराम के (IAS-2015) को जीपीएम का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे संचालक, तकनीकी शिक्षा, रोजगार-प्रशिक्षण और छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास अभिकरण का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे। पढ़ें आदेश कॉपी- हेमंत नंदनवार को तकनीकी शिक्षा की जिम्मेदारी हेमंत रमेश नंदनवार (IAS-2020) को संचालक, तकनीकी शिक्षा, रोजगार और प्रशिक्षण बनाया गया है। इसके साथ ही उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। सुमित अग्रवाल बने SUDA के CEO सुमित अग्रवाल (IAS-2021) को छत्तीसगढ़ राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) का मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। उनके कार्यभार संभालने के बाद रिमिजियुस एक्का को SUDA के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया जाएगा। हालांकि वे संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास के पद पर पहले की तरह बने रहेंगे। अनुपमा आनंद को मिली नई जिम्मेदारी अनुपमा आनंद (IAS-2023), जो अभी सरायपाली (महासमुंद) में एसडीएम (राजस्व) हैं, उन्हें मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जिला पंचायत महासमुंद बनाया गया है।
रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार को राजधानी के सहकारिता भवन में 'शिक्षक शौर्य दिवस' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन स्ववित्त पोषित विद्यालय प्रबंधक संगठन की ओर से किया गया, जिसमें शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक शामिल हुए। उनके साथ भाजपा लखनऊ महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी सहित कई गणमान्य लोग मंच पर मौजूद रहे। शिक्षकों के योगदान को किया गया सम्मानित कार्यक्रम के दौरान शिक्षा और संस्कार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधकों को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों का भविष्य ही नहीं गढ़ते, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नैतिक मूल्यों को समाज की सबसे बड़ी ताकत बताया। शिक्षा और राष्ट्रसेवा का दिया संदेश कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यालय प्रबंधक, शिक्षक और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। समापन पर सभी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दीर्घायु, स्वस्थ एवं सफल जीवन की कामना की। साथ ही 'शिक्षक शौर्य दिवस' के माध्यम से शिक्षा, संस्कार और राष्ट्रसेवा के मूल्यों को समाज में आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।
भिवानी शहर के चिड़ियाघर रोड़ पर NSUI ने एचटेट को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन शंकर धूपड़ का पुतला फूंका और कहा कि एचटेट में खामियां करने के लिए लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। अन्यथा बड़े स्तर पर आंदोलन होगा। NSUI जिला अध्यक्ष मंजीत लांग्यान ने कहा कि एचटेट पेपर में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा जो गलतियां की हुई थी। कुछ प्रश्न पत्रों में प्रिंटिंग गलती थी ओर कुछ पश्न गलत थे। उसके विरोध में व एग्जाम देने वाले अभ्यार्थियों के समर्थन में आज विरोध प्रदर्शनक या गया है। विरोध स्वरूप शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन शंकर धूपड़ का पुतला फूंका गया है। शिक्षा बोर्ड चेयरमैन पद के लायक नहीं उन्होंने कहा कि जब शंकर धूपड़ शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन बने तो कह रहे थे कि शिक्षा बोर्ड का अच्छा वातावरण रखूंगा। कोई भी गलतियां नहीं होगी, जो पहले एचटेट में गलतियां हो चुकी है, वह नहीं होगी। लेकिन उन्होंने आते ही पहली ही एचटेट परीक्षा में खामियां दिखा दी कि वे शिक्षा बोर्ड चेयरमैन पद के लायक नहीं हैं। शिक्षा मंत्री व सीएम का पुतला फूकेंगे मंजीत लांग्यान ने कहा कि आज केवल शिक्षा बोर्ड चेयरमैन का पुतला फूंका है, क्योंकि शिक्षा बोर्ड चेयरमैन के अंतर्गत आता है। हम सरकार से मांग करते हैं कि जिनके द्वारा पेपर गलत किया गया है, उनके ऊपर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। अगर कार्रवाई नहीं करते हैं, तो हरियाणा के शिक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री का भी पुतला फूंका जाएगा।
मौत के बाद भी 81 देह बनीं मेडिकल शिक्षा की पाठशाला, देहदानी परिवारों का सम्मान
भास्कर न्यूज | झालावाड़ चिकित्सा शिक्षा और मानव सेवा में अमूल्य योगदान देने वाले देहदानी परिवारों का बुधवार को कलेक्टर कार्यालय में सम्मान किया गया। झालावाड़ मेडिकल कॉलेज की ओर से आयोजित इस आयोजन में कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने देहदान करने वाले परिजनों और देहदान के प्रति जनजागरूकता फैलाने वाले समाजसेवियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम संयोजक और मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि स्वर्गीय गिरधारी मोटवानी (भवानीमंडी), स्वर्गीय राजरानी अदलक्खा (छीपाबड़ौद), डॉ. जेएल लोढ़ा (झालावाड़) और मानव प्रभु के देहदान के लिए उनके परिजनों व संबंधित संस्थाओं का सम्मान किया गया। इस अवसर पर शाइन इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. कुलवंत गौड़, कमलेश गुप्ता दलाल, अजय गोयल और नितिन कटारिया को भी देहदान जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय पोरवाल, एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. गोपाल शर्मा, प्रोफेसर डॉ. हेमलता शर्मा सहित अन्य चिकित्सक मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि देहदान चिकित्सा शिक्षा और मानव सेवा का सर्वोच्च उदाहरण है। इससे मेडिकल छात्रों को मानव शरीर की जटिल संरचना का व्यावहारिक अध्ययन करने का अवसर मिलता है और बेहतर चिकित्सक तैयार होते हैं। झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के देहदान कार्यक्रम के नोडल अधिकारी और वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि एनाटॉमी विभाग में अब तक 129 लोगों ने देहदान का संकल्प पत्र भरकर अपनी सहमति दी है। इनमें से 81 लोगों के निधन के बाद उनकी देह अध्ययन के लिए मेडिकल कॉलेज को मिल चुकी है। कॉलेज सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है, जिससे समाज में महादान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हो रही है
विश्रामपुर में शुरू हुई स्मार्ट शिक्षा व्यवस्था
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय विश्रामपुर में विद्यार्थियों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए अस्तित्व फाउंडेशन द्वारा स्मार्ट शिक्षण व्यवस्था का शुभारंभ किया गया। इस पहल से विद्यालय के छात्र-छात्राओं को डिजिटल माध्यम से अध्ययन करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी शिक्षा अधिक रोचक, प्रभावी एवं तकनीक आधारित बनेगी। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। अस्तित्व फाउंडेशन की संस्थापिका अनुपमा दीवान एवं विद्यालय के प्राचार्य एन.एन. देवांगन ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया, वहीं छात्रा निशा राजपूत ने अपनी स्वरचित कविता प्रस्तुत कर उपस्थितजनों का मन मोह लिया। मुख्य अतिथि अनुपमा दीवान ने कहा कि आज के दौर में डिजिटल शिक्षा समय की आवश्यकता है। स्मार्ट पैनल के माध्यम से विद्यार्थियों की विषयों में रुचि बढ़ेगी, उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं एवं उच्च शिक्षा के लिए बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा तथा वे आधुनिक तकनीक से जुड़कर भविष्य के लिए स्वयं को तैयार कर सकेंगे। विद्यालय के प्राचार्य एन.एन. देवांगन ने कहा कि स्मार्ट शिक्षण व्यवस्था विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को विकसित करने के साथ-साथ शिक्षण को सरल, रोचक एवं प्रभावी बनाएगी। उन्होंने शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से नई तकनीक का अधिकतम उपयोग करते हुए नियमित अध्ययन, अनुशासन एवं नवाचार को अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों, एसएमसी सदस्यों, अभिभावकों एवं विद्यार्थियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे विद्यालय की शिक्षा गुणवत्ता को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।
शिक्षा विभाग:डॉ. लोकेश को एक दिन पहले जेडी का जिम्मा दिया, अब सलूंबर डीईओ बनाया
राज्य सरकार के निर्देश पर माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। उदयपुर और नवगठित सलूंबर जिले में सीडीईओ, डीईओ और सीबीईओ स्तर के कई अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। खास बात यह है कि उदयपुर के डीईओ (मुख्यालय) माध्यमिक डॉ. लोकेश भारती को एक दिन पहले ही उदयपुर संभाग का संयुक्त निदेशक (जेडी) नियुक्त किया गया था, लेकिन अब नए आदेश में उन्हें सलूंबर का डीईओ (मुख्यालय) माध्यमिक लगाया गया है। डॉ. भारती के स्थान पर बड़गांव के सीबीईओ दीपक गौड़ को उदयपुर का डीईओ (मुख्यालय) माध्यमिक बनाया गया है। वहीं सिरोही के वीरेंद्र सिंह यादव को उदयपुर का नया मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (सीडीईओ) नियुक्त किया गया है। जिले में भी कई ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों के कार्यक्षेत्र बदले गए हैं। उदयपुर में इन्हें मिली नई जिम्मेदारी वीरेंद्र सिंह यादव : सीडीईओ, सिरोही से सीडीईओ, उदयपुरदीपक गौड़ : सीबीईओ, बड़गांव से डीईओ (मुख्यालय) माध्यमिक, उदयपुरदुर्गेश मेनारिया : सीबीईओ, गिर्वा से डीईओ (मुख्यालय) प्रारंभिक, उदयपुरकिरण कोटिया : सीबीईओ, वल्लभनगर से सीबीईओ, बड़गांव चंद्रशेखर जोशी : डीईओ (मुख्यालय) प्रारंभिक, उदयपुर से सीबीईओ, गिर्वाप्रीति शर्मा : सीबीईओ, जयसमंद (सलूंबर) से सीबीईओ, वल्लभनगरविजय लक्ष्मी सारस्वत : सीबीईओ, कोटड़ा से सीबीईओ, गोगुंदाकुंज बिहारी भारद्वाज : डीईओ कार्यालय (मुख्यालय) प्रारंभिक, बूंदी से एडीपीसी, उदयपुर सलूंबर समेत अन्य जिलों में ये बदलाव डॉ. लोकेश भारती : डीईओ (मुख्यालय) माध्यमिक, उदयपुर से डीईओ (मुख्यालय) माध्यमिक, सलूंबर नानिहाल सिंह चौहान : एडीपीसी (समसा), उदयपुर से सीबीईओ, जयसमंद (सलूंबर)प्रतिभा गुप्ता : सीडीईओ, उदयपुर से आरएससीईआरटी, उदयपुरप्रेरणा नौसालिया : सीबीईओ, गोगुंदा से सीबीईओ, धरियावदनगेन्द्र कुमार मेहता : सीबीईओ, झल्लारा (सलूंबर) से सीबीईओ, बागीदौरा (बांसवाड़ा)
जयपुर | शिक्षा विभाग ने मंगलवार देर रात बंपर तबादला सूचियां जारी की हैं। जिला शिक्षा अधिकारी, वरिष्ठ अध्यापक, बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक सहित विभिन्न पदों पर 8 हजार से अधिक तबादले किए। प्रदेश में 138 जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) के तबादले किए गए, जिनमें से 17 अधिकारियों को जयपुर जिले में पोस्टिंग मिली। इनमें 8 महिला अधिकारी शामिल हैं। डीईओ की नियुक्तियां सीबीईओ, सीमेट, शिक्षा निदेशालय और शिक्षा विभाग मुख्यालय सहित विभिन्न पदों पर की गई हैं। जयपुर जिले में आमेर, जयपुर पूर्व, जयपुर पश्चिम, झोटवाड़ा सिटी, सांभरलेक, तूंगा और आंधी जैसे महत्वपूर्ण ब्लॉकों में सीबीईओ लगाए हैं। साथ ही डीईओ लीगल (प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा), ओएसडी शिक्षा तथा डीईओ प्रारंभिक मुख्यालय जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी नियुक्तियां हुई हैं। पिछले एक वर्ष में डीईओ प्रारंभिक मुख्यालय के पद पर छठे अधिकारी के रूप में गिरिराज कुमार को जिम्मेदारी दी गई है। गिरिराज कुमारडीईओ प्रारंभिक मुख्यालय जयपुर मंडल में सबसे अधिक तबादले; आठ हजार से अधिक तबादलों में 6,167 स्थानांतरण मंडल के भीतर और 2,145 एक मंडल से दूसरे मंडल में किए गए। सबसे अधिक 918 तबादले जयपुर मंडल में हुए। इसके अलावा पाली में 363, अजमेर में 854, बीकानेर में 515, जोधपुर में 616, भरतपुर में 519, चूरू में 789, उदयपुर में 869 और कोटा में 724 शिक्षक-कर्मचारियों के तबादले किए गए।
शोभित विश्वविद्यालय ने प्रबंधन शिक्षा में वैश्विक मानकों की दिशा में बढ़ाया एक परिवर्तनकारी कदम
प्रबंधन शिक्षा में अपने उत्कृष्टता के तीन दशक पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित वर्षव्यापी समारोहों के अंतर्गत शोभित विश्वविद्यालय के नाइस स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज़ ने 7 जुलाई 2026 को आयोजित एएसीएसबी सदस्यता ऑनबोर्डिंग समारोह के माध्यम से एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की
राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष (पीसीसी चीफ) गोविंद सिंह डोटासरा ने शिक्षा विभाग में हुए तबादलों में राजनीतिक रंजिश निकालने का आरोप लगाते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। डोटासरा ने इसे लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र (चिट्ठी) लिखकर कड़ी आपत्ति जताई है। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर भी तीखा निशाना साधा है। डोटासरा ने मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी में कहा- मेरे विधानसभा क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ में शिक्षा विभाग ने बड़े पैमाने पर राजनीतिक दुर्भावना से तबादले किए हैं। मुख्यमंत्री जी, क्या शेखावाटी की जनता ने इसीलिए भाजपा को वोट दिए थे? भाजपा सरकार ने राजनीतिक दुर्भावना और तानाशाही रवैए से सीकर, चूरू और झुंझुनूं में शिक्षकों के जो तबादले किए हैं, वह शिक्षा मंत्री की हठधर्मिता (बेशर्मी) को दर्शाता है। शेखावाटी में शिक्षा विभाग के तबादलों के आंकड़े बेहद चिंताजनक डोटासरा ने लिखा- शेखावाटी में शिक्षा विभाग के तबादलों के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। शिक्षा विभाग में अब तक अकेले लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र से करीब 400 ट्रांसफर किए जा चुके हैं। ये केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनादेश, जनप्रतिनिधित्व और क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का षड्यंत्र भी है। द्वितीय श्रेणी शिक्षकों की तबादला सूची में शिक्षा मंडल चूरू के कुल 808 तबादलों में से 356 ट्रांसफर प्रशासनिक (टीए/डीए) आधार पर किए गए हैं। मेरे विधानसभा क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ (सीकर) में कुल 174 में से 147 तबादले प्रशासनिक आधार पर किए गए, जो कुल ट्रांसफर का करीब 84.48% है। शिक्षकों को तबादलों के जरिए डराने की रणनीति डोटासरा ने लिखा- इससे पहले व्याख्याता तबादला सूची में मेरे विधानसभा क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ से कुल 143 में से 122 ( 85.31%) और प्रधानाचार्य सूची में 81 में से 71 ( 87.65%) ट्रांसफर प्रशासनिक आधार पर किए गए थे। क्या शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय तबादलों के जरिए डराने और प्रताड़ित करने की नीति अपनाई जा रही है? सिर्फ शेखावाटी ही नहीं पूरे प्रदेश का यही हाल जहां से कांग्रेस के जनप्रतिनिधि हैं। एक संभाग,एक विधानसभा क्षेत्र को निशाना बनाना सवालों के घेरे में डोटासरा ने लिखा- लगातार एक ही संभाग और एक ही विधानसभा क्षेत्र को इस प्रकार निशाना बनाना गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अगर सरकार जनहित के मुद्दे उठाने वाले जनप्रतिनिधियों की आवाज़ दबाने के उद्देश्य से इस प्रकार के कदम उठा रही है, तो ये लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। इतिहास गवाह है कि जनता की आवाज़ को दबाने के प्रयास कभी सफल नहीं हुए हैं। मैं अपने क्षेत्र के लोगों, विद्यार्थियों और शिक्षकों के हितों की आवाज़ पहले भी उठाता रहा हूं, और आगे भी पूरी मजबूती से उठाता रहूंगा।
उच्च शिक्षा मंत्री बैरवा से मिले ABVP के पदाधिकारी:छात्रसंघ चुनाव कराने समेत कई मांगें रखीं
जयपुर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रतिनिधिनंडल ने उपमुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा से मिलकर उच्च शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर ज्ञापन सौंपा। राष्ट्रीय मंत्री हर्षित ननोमा के नेतृत्व में परिषद के सदस्यों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के मुताबिक सिलेबस बनाकर उसे लागू करने और मूल्यांकन में प्रभावी समन्वय स्थापित करने, प्रदेशभर में एकेडमिक कैलेंडर लागू करने, नामांकन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, राज्य शिक्षा आयोग के गठन, फीस स्ट्रक्चर, निजी विश्वविद्यालय निगरानी आयोग के गठन करने, अगले सत्र से छात्रसंघ चुनाव कराने समेत कई मांगें रखीं। इसके अलावा हॉस्टल्स के जर्जर भवन के निर्माण और मरम्मत कराने की मांग भी उठाई गई। राष्ट्रीय मंत्री हर्षित ननोमा ने कहा- परिषद का उद्देश्य केवल समस्याओं को सामने रखना नहीं, बल्कि उनके व्यवहारिक और सकारात्मक समाधान भी कराना है। सरकार उनकी मांगें पूरी करे, जिससे राजस्थान की उच्च शिक्षा व्यवस्था अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं विद्यार्थी केंद्रित बन सके। इस अवसर पर क्षेत्रीय संगठन मंत्री अश्वनी शर्मा, जयपुर प्रांत मंत्री शुभेन्द्र सिंह, जोधपुर प्रांत मंत्री दशरथ गर्ग, चित्तौड़ प्रांत मंत्री जितेन्द्र लोधा और जयपुर प्रांत सह मंत्री उमा सैनी उपस्थित रहे।
बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी आज गोपालगंज पहुंचे। इस दौरान उन्होंने थावे मंदिर में पूजा-अर्चना की, समाहरणालय परिसर में विभागीय समीक्षा बैठक में शामिल हुए और भाजपा के जिला सम्मेलन को संबोधित किया। बाद में उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए शिक्षक स्थानांतरण, निजी कोचिंग संस्थानों पर सख्त कानून बनाने और भाजपा उम्मीदवार की जीत के दावों सहित कई मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि राज्य में नई शिक्षक स्थानांतरण नीति के तहत तबादले की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। विभाग अगले कुछ दिनों में स्थानांतरण का विस्तृत शेड्यूल जारी करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक स्थानांतरण पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से होगा। TRE-4 की प्रक्रिया इसी महीने शुरू कर दी जाएगीमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता पहले छात्र-शिक्षक अनुपात को संतुलित करना है। जब तक सभी विद्यालयों में आवश्यक संख्या में शिक्षक उपलब्ध नहीं हो जाते, तब तक स्थानांतरण प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हो चुकी है और सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं। शेड्यूल जारी होने के बाद शिक्षक निर्धारित समय के भीतर ऑनलाइन आवेदन करेंगे और नियमों के अनुरूप उनका स्थानांतरण किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी ताकि किसी भी शिक्षक को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। साथ ही, उन्होंने शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि TRE-4 की प्रक्रिया इसी महीने शुरू कर दी जाएगी और इसकी तैयारी अंतिम चरण में है। संबंधित अधिकारियों को अभ्यर्थियों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया है। पारदर्शी बनाने के लिए सरकार व्यापक तैयारी कर रहीमंत्री के अनुसार, 25 जुलाई तक विभाग अपनी तैयारियां पूरी कर लेगा और TRE-4 की अधियाचना बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) को भेज दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य समयबद्ध तरीके से शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करना है, ताकि राज्य के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को जल्द दूर किया जा सके। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने प्राइवेट कोचिंग संस्थानों को लेकर बड़ा ऐलान किया है। गोपालगंज दौरे पर पहुंचे शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही एक नई और प्रभावी कोचिंग नीति लागू करने जा रही है। इसके तहत सभी निजी कोचिंग संस्थानों के लिए नियम तय होंगे और उन्हें कानून के दायरे में लाया जाएगा। मंत्री ने कहा कि अगले एक से डेढ़ महीने के भीतर नई नीति लागू करने की दिशा में सरकार काम कर रही है। पारदर्शी बनाने के लिए सरकार व्यापक तैयारी कर रहीउन्होंने कहा कि बिहार में संचालित निजी कोचिंग संस्थानों के संचालन को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार व्यापक तैयारी कर रही है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में विभाग ने अध्ययन शुरू कर दिया है और विभिन्न राज्यों की कोचिंग नीतियों का भी गहन परीक्षण किया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि विशेष रूप से राजस्थान सरकार द्वारा वर्ष 2025 में लागू की गई कोचिंग नीति का अध्ययन किया जा रहा है। उस नीति के बेहतर प्रावधानों को बिहार की जरूरतों के अनुसार शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। साथ ही शिक्षा विभाग ने भी अपने स्तर पर कई महत्वपूर्ण सुझाव और मसौदे तैयार किए हैं, जिन्हें नई नीति का हिस्सा बनाया जाएगा। आवश्यक सुविधाओं जैसे विषयों को भी शामिल किया जाएगाउन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ नियम बनाना नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रभावी व्यवस्था लागू करना है जिससे छात्रों के हितों की रक्षा हो, कोचिंग संस्थानों की जवाबदेही तय हो और पूरे सिस्टम में पारदर्शिता आए। इसके लिए सभी निजी कोचिंग संस्थानों के लिए एक मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (आदर्श आचार संहिता) लागू किया जाएगा, जिसका पालन करना अनिवार्य होगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप कोचिंग संस्थानों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी सरकार गंभीरता से काम कर रही है। नई नीति में छात्रों की सुरक्षा, पढ़ाई का माहौल, संस्थानों की जवाबदेही और आवश्यक सुविधाओं जैसे विषयों को भी शामिल किया जाएगा। निजी कोचिंग संस्थानों को कानून के दायरे में लाया जाएगाउन्होंने स्पष्ट कहा कि बिहार में संचालित सभी निजी कोचिंग संस्थानों को कानून के दायरे में लाया जाएगा और भविष्य में निर्धारित नियमों के अनुरूप ही उनका संचालन होगा। सरकार की कोशिश है कि अगले एक से डेढ़ महीने के भीतर नई कोचिंग नीति लागू कर दी जाए। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर भाजपा की जीत का दावा किया। उन्होंने पार्टी के उम्मीदवार की जमकर सराहना की और कहा कि भाजपा ने एक समर्पित कार्यकर्ता पर भरोसा जताया है। इस दौरान उन्होंने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पर भी तंज कसा। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि भाजपा ने ऐसे कार्यकर्ता को उम्मीदवार बनाया है, जो पिछले करीब 16 वर्षों से युवा मोर्चा से लेकर संगठन के विभिन्न दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करता रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने हमेशा मेहनती और समर्पित कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने का काम किया है और इस बार भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाया गया है। इस बार भी नतीजा भाजपा के पक्ष में रहेगामंत्री ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी नेतृत्व और प्रदेश नेतृत्व ने एक जमीनी कार्यकर्ता पर विश्वास जताया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भाजपा प्रत्याशी भारी मतों से जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचेगा। वहीं जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले चुनाव में भी जनता ने उन्हें स्वीकार नहीं किया था और इस बार भी नतीजा भाजपा के पक्ष में रहेगा। उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा बड़े बहुमत से जीत हासिल करेगी। निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से की जा रही कथित अवैध वसूली पर उन्होंने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही सभी निजी स्कूलों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। सभी निजी विद्यालयों को एसओपी भेजी जाएगीशिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से किसी भी प्रकार की अनुचित या अवैध वसूली सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में शिक्षा विभाग एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार कर रहा है। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस दिशा में पहले से कार्रवाई की जा रही है और अब सभी निजी विद्यालयों को एसओपी भेजी जाएगी। इसके तहत स्कूलों को निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कोई निजी विद्यालय तय नियमों का उल्लंघन करता है या अभिभावकों का आर्थिक शोषण करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सरकार की प्राथमिकता छात्रों और अभिभावकों के हितों की रक्षा करना है और किसी भी स्थिति में उनका आर्थिक दोहन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सुगौली में राजकीय डिग्री कॉलेज का उद्घाटन:मोतिहारी में छात्रों को स्थानीय स्तर पर मिलेगी उच्च शिक्षा
मोतिहारी के सुगौली प्रखंड की सुकुल पाकड़ पंचायत में बुधवार को राजकीय डिग्री महाविद्यालय, सुगौली का विधिवत उद्घाटन किया गया। सांसद डॉ. संजय जायसवाल और स्थानीय विधायक राजेश कुमार उर्फ बबलू गुप्ता ने संयुक्त रूप से फीता काटकर कॉलेज का शुभारंभ किया। इस उद्घाटन के साथ ही क्षेत्र में उच्च शिक्षा की नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त हो गया है। फिलहाल यह महाविद्यालय उच्च माध्यमिक विद्यालय सुकुल पाकड़ चिलझपटी के अस्थायी परिसर से संचालित होगा। उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य ने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र एवं फूल-माला देकर स्वागत किया। इस अवसर पर बीडीओ नूतन किरण सहित कई जनप्रतिनिधि, शिक्षक और क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। नई शिक्षा नीति के तहत भवनों का निर्माण उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने बताया कि सरकार की नई शिक्षा नीति के तहत जहां स्थायी भवन उपलब्ध नहीं हैं, वहां आधुनिक स्कूल भवनों में ही डिग्री कॉलेजों का संचालन शुरू किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि सुगौली के धनही शिवालय स्थित ऐतिहासिक परिसर में इस कॉलेज का स्थायी भवन बनाया जाएगा। इसके साथ ही क्षेत्र के सौंदर्यीकरण के लिए लगभग 15 करोड़ रुपये की राशि भी स्वीकृत की गई है। कॉलेज क्षेत्र की सालों पुरानी मांग थी-विधायक वहीं, विधायक बबलू गुप्ता ने कहा कि यह कॉलेज क्षेत्र की वर्षों पुरानी मांग थी, जो अब पूरी हो गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही स्थायी भवन का निर्माण कार्य शुरू होगा और कॉलेज को नए परिसर में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब स्थानीय छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के शहरों में नहीं जाना पड़ेगा, जिससे उनके समय और संसाधनों की बचत होगी।
कुशीनगर के दुदही ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी) में स्कूली बच्चों से नई पाठ्यपुस्तकों की ढुलाई और वाहन में लोडिंग कराए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग सवालों के घेरे में आ गया है। वीडियो सामने आने के बाद विभाग ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। वीडियो में स्कूली बच्चे नई किताबों के बंडल उठाकर वाहन तक ले जाते और उन्हें लोड करते दिखाई दे रहे हैं। जबकि नियमानुसार बीआरसी से परिषदीय विद्यालयों तक पाठ्यपुस्तकों की ढुलाई और वितरण की जिम्मेदारी संबंधित फर्म की होती है। इसके बावजूद विद्यालय में पढ़ने आए बच्चों से यह कार्य कराए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षा ग्रहण करने आए बच्चों से इस प्रकार का श्रम कराना न केवल अनुचित है, बल्कि यह बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा से जुड़े नियमों का भी उल्लंघन है। उनका कहना है कि विद्यालयों में बच्चों का समय पढ़ाई के लिए होना चाहिए, न कि किताबों की ढुलाई जैसे कार्यों में। मामले पर खंड शिक्षा अधिकारी रीता गुप्ता ने बताया कि वह घटना के समय एक बैठक में थीं। उन्होंने कहा कि बीआरसी तक किताबें पहुंचाने और वहां से विद्यालयों तक वितरण कराने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित फर्म की होती है। उन्होंने बताया कि वायरल वीडियो की गहन जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या संबंधित फर्म की लापरवाही अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
देवरिया में बुधवार को मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना और शैक्षिक सत्र की डीबीटी योजना का शुभारंभ किया गया। जनपद स्तरीय यह कार्यक्रम देवरिया क्लब में आयोजित हुआ, जिसका सीधा प्रसारण वाराणसी स्थित हस्तकला संकुल से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन के साथ किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि ग्राम्य विकास राज्य मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम थीं। इस अवसर पर जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी, मुख्य विकास अधिकारी राजेश कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक हरिश्चंद्र नाथ और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राम जियावन मौर्य सहित शिक्षा विभाग व प्रशासन के कई अधिकारी, शिक्षक तथा कर्मचारी उपस्थित रहे। राज्य मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों में परिषदीय विद्यालयों के भौतिक संसाधनों, शैक्षणिक गुणवत्ता और मूलभूत सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों के लिए महत्वपूर्ण है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान राज्य मंत्री ने बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों को प्रतीकात्मक रूप से मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा कार्ड वितरित किए। इसी के साथ शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए डीबीटी योजना का भी शुभारंभ किया गया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राम जियावन मौर्य ने अतिथियों का स्वागत करते हुए योजना की रूपरेखा और उसके लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह योजना शिक्षा विभाग से जुड़े सभी पात्र कार्मिकों को गुणवत्तापूर्ण और कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम का संचालन पंकज शुक्ला ने किया। इस अवसर पर विभागीय अधिकारियों, विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों, बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं की उपस्थिति दर्ज की गई।
यूपी में शिक्षकों को 1 करोड़ रुपए तक का एक्सीडेंटल बीमा मिलेगा। सीएम योगी ने काशी से बुधवार को इसका घोषणा की । कानपुर में भी बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा ने शिक्षकों को मिलने वाले योजना के लाभ से कार्ड वितरित किए। बुधवार सुबह 10 बजे शहर के मर्चेंट चेम्बर हाल में शुरू हुआ। लखनऊ में ऐलान के बाद कानपुर के शिक्षकों 11.45 बजे मंच पर यूपी सरकार में मंत्री राकेश सचान और सांसद रमेश अवस्थी के साथ विधायकों ने कैशलेस उपचार कार्ड दिए । 10 बसिक शिक्षा और 10 माध्यमित शिक्षा के शिक्षकों को कार्ड दिया गया। इस योजना का लाभ शिक्षकों, शिक्षामित्रों और रसोइयों को मिलेगा। इसके लिए भारतीय स्टेट बैंक के साथ समझौता (एमओयू) किया गया है। मंत्री राकेश सचान ने कहा कि कैश लेश उपचार योजना का लाभ यूपी के शिक्षकों को मिल सकेगा। इसके लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद है। प्रदेश के 12 लाख शिक्षकों को इसका लाभ मिलेगा। इस योजना से लाभ में लाभ पाने वाले साथ ही परिवार को भी इसका लाभ मिलेगा। इसके साथ ही पूरे प्रदेश में जो एक करोड से ज्यादा बच्चे पढ़ने वाले बच्चों के मिड्डे मिल की योजना उसकी राशि आज जारी की गई है। इसके अतिरिक्त योजना में एसबीआई के साथ एक एमओयू किया गया है कि एक्सीडेन्टल बीमा कवर्ड किया गया है। हादसा होने की दशा मे इस योजना के लाभ पाने वाले के परिवार को भी भविष्य में बेहतर सुविधा मिल सकेगी। 3 पॉइंट में पढ़िए, किसे कितना एक्सीडेंटल बीमा मिलेगा स्थायी शिक्षक या कर्मचारियों को 10 लाख रुपए का ग्रुप टर्म इंश्योरेंस, 1 करोड़ रुपए का पर्सनल एक्सीडेंट कवर, 1 करोड़ रुपए का स्थायी दिव्यांगता बीमा कवर और 1.60 करोड़ रुपए तक का एयर एक्सीडेंट इंश्योरेंस मिलेगा। कर्मचारी के साथ अनहोनी होने पर बच्चों की पढ़ाई और बेटियों की शादी के लिए भी आर्थिक सहायता मिलेगी। 10 हजार रुपए से अधिक वेतन पाने वाले संविदा कर्मचारियों को 30 लाख से 80 लाख रुपए तक का पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर मिलेगा। स्थायी विकलांगता की स्थिति में 30 लाख रुपए और आंशिक विकलांगता की स्थिति में 15 लाख रुपए का इंश्योरेंस मिलेगा। कर्मचारी के साथ अनहोनी होने पर बच्चों की पढ़ाई और बेटियों की शादी के लिए भी आर्थिक सहायता मिलेगी। 10 हजार रुपए से कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को 2 लाख रुपए का दुर्घटना बीमा मिलेगा।
चंदौली के कलेक्ट्रेट सभागार में बुधवार को प्रदेश सरकार के स्वतंत्र प्रभार मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बेसिक तथा माध्यमिक शिक्षा विभाग में तैनात 20 शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा के स्मार्ट कार्ड के प्रतीक भेंट किए। इस अवसर पर मंत्री जायसवाल ने दावा किया कि प्रदेश सरकार ने शिक्षकों, शिक्षामित्रों और आंगनबाड़ियों के हितों के लिए कैशलेस चिकित्सा प्रणाली लागू की है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के लागू होने के बाद आगामी दिनों में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। उन्होंने बताया कि कैशलेस चिकित्सा प्रणाली लागू होने के बाद शिक्षक समाज के निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे, क्योंकि अब उनके स्वास्थ्य की चिंता प्रदेश सरकार कर रही है। मंत्री ने यह भी कहा कि वर्तमान परिवेश में बेसिक के अलावा माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों में काफी बदलाव देखने को मिला है। शिक्षकों की कार्यप्रणाली और संसाधन अब आधुनिकता की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने इन सभी व्यवस्थाओं को केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं का परिणाम बताया। एक सवाल के जवाब में मंत्री जायसवाल ने राम मंदिर पर सवाल उठाने वाले सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव कभी जामा मस्जिद और चर्च की चर्चा नहीं करते, क्योंकि वह 'लूंगी और टोपी वालों' को खुश रखना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अपने कार्यकाल के दौरान कब्रिस्तान की बाउंड्री करा रहे थे। मंत्री ने यह भी कहा कि राम मंदिर का चढ़ावा चोरी करने वालों को सरकार बख्शेगी नहीं और उन्हें सख्त सजा दिलाई जाएगी। इस कार्यक्रम में जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग, मुख्य विकास अधिकारी आर जगत साई, बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कुमार, सैयदराजा विधायक प्रतिनिधि सुशील सिंह जनौली सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आजमगढ़ में बोले सरकार के मंत्री दारा सिंह चौहान:शिक्षा के क्षेत्र में नित नए काम कर रही है सरकार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा वाराणसी में 12 लाख शिक्षक शिक्षणेत्तर कर्मचारी और उनके आशिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने वाली मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ किया। इस दौरान 1.10 करोड़ विद्यार्थियों के अभिभावकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 1200 प्रति विद्यार्थी का अंतरण इसके साथ ही 10 लाख शिक्षकों और संविदा कर्मियों की सामाजिक सुरक्षा हेतु स्टेट बैंक आफ इंडिया के साथ समझौता किया। इसके तहत यूपी में शिक्षकों को एक करोड रुपए तक का एक्सीडेंटल बीमा मिलेगा। इस कार्यक्रम का आजमगढ़ में भी सजीव प्रसारण किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश सरकार के कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान उपस्थित रहे। जिले के डीएम रविंद्र कुमार और सीडीओ परीक्षित खटाना ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। शिक्षा के क्षेत्र में नया काम कर रही है सरकार प्रदेश सरकार के मंत्री दारा सिंह चौहान ने कहा कि जिस तरह से प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैशलेस इलाज के लिए चर्चा की है इसके साथ ही 12 लाख शिक्षकों के लिए कैशलेस इलाज योजना शुरू की है निश्चित रूप से बड़ी संख्या में शिक्षक इससे लाभान्वित होंगे। कैशलेस इलाज के लिए 4:30 सौ करोड रुपए सालाना खर्च होंगे जिसका भुगतान प्रदेश की सरकार करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह से गुरुजनों से अपील करते हुए कहा कि आप लोगों से गुरु दक्षिणा के रूप में यही मांगते हैं कि आप बच्चों पर ध्यान दें। स्कूल का वातावरण स्कूल जैसा होना चाहिए। निश्चित रूप से पूरे प्रदेश के शिक्षकों शिक्षामित्र की तरफ से इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री का मैं धन्यवाद ज्ञापित कर रहा हूं। शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नए काम हो रहे हैं। निश्चित रूप से आने वाले दिनों में इसके परिणाम सभी को देखने को मिलेंगे।
लखनऊ के ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को डिग्री और मेडल देने के साथ विश्वविद्यालय को कई नई सौगातें भी मिलीं। इस अवसर पर समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं राज्यसभा सदस्य डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि शिक्षा के लिए लोग अमेरिका जाते हैं, लेकिन दीक्षा के लिए भारत आते हैं। इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, 10 अत्याधुनिक फार्मेसी प्रयोगशालाओं, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए दो लिफ्ट और तीन विशेष शौचालय समेत कई परियोजनाओं का लोकार्पण किया। समारोह में 1246 विद्यार्थियों को डिग्री और 110 मेधावियों को 125 मेडल भी प्रदान गए। 5 तस्वीरें देखिए… ……….. 11वें दीक्षांत समारोह कार्यक्रम के पल-पल अपडेट्स के लिए नीचे लाइव व्लॉग से गुजर जाइए…
राजस्थान शिक्षा विभाग में ट्रांसफर का सिलसिला शुरू हो गया है। पहले ही दिन करीब 5 हजार शिक्षकों और कर्मचारियों के ट्रांसफर किए है। आदेश मंगलवार (7 जुलाई) देर रात को जारी किए गए। इनमें सबसे ज्यादा ग्रेड सेकंड शिक्षकों के साथ बेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर और लाइब्रेरियन भी शामिल हैं। विभाग ने ट्रांसफर किए गए कर्मचारियों को 10 दिन में नई जगह जॉइन करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि प्रोबेशन पीरियड वाले और ट्राइबल-नॉन ट्राइबल एरिया से जुड़े कुछ ट्रांसफर पर फिलहाल रोक लगाई गई है। प्रोबेशन और ट्राइबल एरिया से जुड़े ट्रांसफर पर फिलहाल रोकशिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों का नाम तबादला सूची में है लेकिन वे अभी प्रोबेशन पीरियड में हैं, उन्हें नए स्थान पर कार्यभार ग्रहण नहीं कराया जाएगा। इसी तरह ट्राइबल एरिया से नॉन-ट्राइबल एरिया या नॉन-ट्राइबल एरिया से ट्राइबल एरिया में हुए ट्रांसफर के मामलों में भी फिलहाल कार्यभार ग्रहण नहीं कराया जाएगा। 10 दिन में जॉइन करने के निर्देश, कुछ आदेश नहीं होंगे प्रभावीविभाग ने सभी स्थानांतरित कर्मचारियों को आदेश जारी होने के 10 दिन के भीतर नए पदस्थापन स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। वहीं जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति हो चुकी है या जिनकी सेवाएं समाप्त हो चुकी हैं, अगर उनका नाम गलती से तबादला सूची में शामिल हो गया है तो ऐसे आदेश प्रभावी नहीं माने जाएंगे।
कॉलेजों के प्राचार्य संघ ने शिक्षा मंत्री को सौंपा मांग-पत्र
पानीपत | हरियाणा राजकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालय प्रिंसिपल संघ ने प्रधान विक्रम सिंह के नेतृत्व में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा को मांग-पत्र सौंपकर सहायता प्राप्त कॉलेजों की लंबित प्रशासनिक और सेवा संबंधी समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया। सतवीर सिंह ने कहा कि जो एसोसिएट प्रोफेसर प्राचार्य पद का कार्यभार संभालते हैं, उन्हें कार्यभार ग्रहण करते ही प्राचार्य पद से जुड़े सभी वित्तीय और सेवा लाभ मिलें। उन्होंने यह भी मांग रखी कि सेवानिवृत्ति के बाद ऐसे प्राचार्यों के बकाया लाभों का शीघ्र निस्तारण किया जाए। सतवीर सिंह ने बताया कि कई कॉलेजों में शिक्षकीय और गैर-शिक्षकीय पद लंबे समय से खाली हैं। भर्ती प्रक्रिया शुरू होने का स्वागत करते हुए उन्होंने रिक्त पदों पर चयन जल्द पूरा कराने की मांग की, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज बुधवार को दूसरे दिन भी वाराणसी में हैं। वाराणसी से ही ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना’ को हरी झंडी देंगे। शहर के TFC के हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 25 लोगों को कैशलेस चिकित्सा संबंधित प्रतीकात्मक कार्ड देंगे। वाराणसी में आयोजित इस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण सभी जनपद मुख्यालयों पर होगा। साल 2025 में शिक्षक दिवस के मौके पर योगी ने इस योजना की घोषणा की थी। 10 लाख शिक्षकों और संविदा कर्मियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ MoU होगा। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों के 12 प्रधानाचार्यों का सम्मान भी किया जाएगा। इस अवसर पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह और माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी भी मौजूद रहेंगी। 12 लाख शिक्षकों को मिलेगा ‘चिकित्सकीय कवच’ जिलाधिकारी वाराणसी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि शिक्षकों को इलाज की चिंताओं से मुक्त करने के लिए मुख्यमंत्री 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना' का शुभारंभ करेंगे। आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर शुरू हो रही इस योजना से प्रदेश के लगभग 12 लाख शिक्षकों और उनके परिवारों को ₹5 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलेगी। सरकार ने इसमें समानता और सामाजिक सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा है। नियमित शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षामित्र, अनुदेशक, रसोइया और कस्तूरबा विद्यालयों के स्टाफ को भी इस सुरक्षा घेरे में शामिल किया गया है।बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत अकेले वाराणसी जनपद के 1,54,634 विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री प्रदेश भर के 1.10 करोड़ विद्यार्थियों के माता पिता के डीबीटी के जरिए 1200 रुपये भी ट्रांसफर करेंगे। यह धनराशि विद्यार्थियों को ड्रेस, जूते मोजे व स्टेशनरी के सामान आदि के लिए दिए जाते हैं। मंडल के 66,205 शिक्षक-कर्मचारियों को मिलेगा लाभ वाराणसी मंडल के 7,417 बेसिक विद्यालयों में कार्यरत कुल 66,205 पात्र कर्मचारियों को सीधे तौर पर इस कैशलेस चिकित्सा सुविधा से प्रभावित होंगे। इसमें नियमित शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षामित्र, अनुदेशक, रसोइया और कस्तूरबा विद्यालयों के स्टाफ को भी शामिल कर सरकार ने सबको सामाजिक एवं समान सुरक्षा की गारंटी दी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री परिषदीय विद्यालयों के करीब 1.10 करोड़ छात्र छात्राओं के अभिभावकों के खाते में डीबीटी के माध्यम से 1200 रुपये की धनराशि भी भेजेंगे। रसोइया व स्पेशल एजुकेटर्स की भी मौजूदगी इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल नियमित शिक्षक ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था को संभालने वाले हर कर्मचारी का ध्यान रखा गया है। मंडल भर के 22,708 रसोइयों, 8,559 शिक्षामित्रों, 1,904 अनुदेशकों, 811 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की शिक्षिकाओं व स्टाफ व 210 स्पेशल एजुकेटर्स को भी इस योजना का पात्र बनाया गया है। स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से मुक्त होने के बाद शिक्षक और अन्य कर्मचारी पूरी ऊर्जा व समर्पण के साथ नौनिहालों के भविष्य को संवारने में योगदान दे सकेंगे। मुख्यमंत्री के इस कदम से पूरे वाराणसी मंडल के शिक्षा जगत में भारी उत्साह और हर्ष का माहौल है। 8 जुलाई को होने वाले इस भव्य कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक तैयारियां की जा रही हैं। वाराणसी मंडल के लाभार्थियों की संख्या
30 खाद डीलरों को बांटे सर्टिफिकेट, 80 शिक्षार्थियों के नए बैच शुरू
भास्कर न्यूज |लुधियाना पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने मंगलवार को पंजाब कृषि प्रबंधन और विस्तार प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स इन इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले तीसरे बैच के 30 खाद डीलरों को सर्टिफिकेट बांटे। इसके साथ ही कृषि मंत्री ने इनपुट डीलरों के लिए डिप्लोमा इन एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन सर्विसेज के एक वर्षीय कोर्स के दो नए बैचों की भी शुरुआत की, जिसमें कुल 80 शिक्षार्थी हिस्सा ले रहे हैं। समारोह को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि कृषि इनपुट डीलरों और विस्तार कार्यकर्ताओं की क्षमता का लगातार विकास होना आज के समय की मुख्य जरूरत है। चूंकि खाद, बीज और कीटनाशक बेचने वाले डीलर ही किसानों के सबसे पहले संपर्क में आते हैं, इसलिए यदि डीलर खुद तकनीकी और वैज्ञानिक रूप से सक्षम होंगे, तो वे किसानों को सही सलाह दे सकेंगे। इससे पंजाब की खेती आधुनिक, वैज्ञानिक और पर्यावरण के अनुकूल बनेगी। कृषि मंत्री ने सभी खाद डीलरों से अपील की कि वे पंजाब कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया प्रमाणित कृषि साहित्य अपनी दुकानों पर रखें। इससे किसानों को संतुलित खाद प्रबंधन, मिट्टी की सेहत और बेहतर खेती के तरीकों के बारे में भरोसेमंद जानकारी मिलेगी, जिससे फसलों की पैदावार बढ़ेगी और किसानों की आमदन में इजाफा होगा। इससे पहले पामेटी के निदेशक डॉ. केबी सिंह ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और संस्थान की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीएईएसआई प्रोग्राम डीलरों के तकनीकी ज्ञान और वैज्ञानिक सोच को मजबूत करने की एक बड़ी पहल है। इस मौके पर पामेटी की डिप्टी डायरेक्टर वंदना भगत, डिप्टी डायरेक्टर कम प्रोजेक्ट डायरेक्टर (कृषि विस्तार) डॉ. बलविंदर सिंह लखेवाली, डिप्टी डायरेक्टर रवनीत सिंह, डॉ. बलदेव सिंह नॉर्थ, डॉ. दमनजीत कौर सहित संस्थान के कई वरिष्ठ अधिकारी, फैकल्टी मेंबर्स और प्रशिक्षण ले रहे डीलर उपस्थित थे। खाद डीलरों को सम्मानित करते हुए कृषि मंत्री।
वीएमओयू: प्रवेश शुरू, महिलाओं और छात्राओं को देंगे मुफ्त शिक्षा
वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (वीएमओयू) ने जुलाई 2026 सत्र के लिए स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, ऑनलाइन डिप्लोमा और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों में ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है। क्षेत्रीय केंद्र निदेशक डॉ. रश्मि बोहरा ने बताया कि राज्य सरकार की बालिका दूरस्थ शिक्षा योजना के तहत महिला-छात्राओं की फीस प्रवेश के बाद राज्य सरकार पुनर्भरण करेगी, जिससे उनकी पढ़ाई निशुल्क रहेगी। अभ्यर्थी स्वयं या ई-मित्र केंद्र से विवि की आधिकारिक वेबसाइट पर 31 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। विवि में स्नातक स्तर पर कला, विज्ञान, पुस्तकालय विज्ञान और पत्रकारिता, स्नातकोत्तर में अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, पुलिस प्रशासन, हिंदी, इतिहास, अंग्रेजी, संस्कृत, राजस्थानी, गणित, शिक्षा, वाणिज्य, समाजशास्त्र, भूगोल, कंप्यूटर विज्ञान और एमबीए, डिप्लोमा में संस्कृति एवं पर्यटन, जलग्रहण प्रबंधन, मास कम्युनिकेशन आदि में प्रवेश लिया जा सकता है।
स्वर्णकार राष्ट्रीय शिक्षा रत्न सम्मान; मेधावी विद्यार्थी सम्मानित
बिड़ला ऑडिटोरियम में स्वर्णकार सेवा दल की ओर से ‘राष्ट्रीय शिक्षा र| सम्मान-2026’ समारोह आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी शैक्षणिक और खेलकूद उपलब्धियों के लिए प्रमाण पत्र, मेडल, स्मृति चिन्ह और स्टेशनरी भेंट कर सम्मानित किया।दल के संस्थापक निरंजन कड़ेल व प्रदेश अध्यक्ष प्रभुदयाल बूटन ने इसे शिक्षा को बढ़ावा देने वाली पहल बताया। इस मौके पर भामाशाह रूपचंद जालू, लालचन्द भामा व महावीर डावर सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) 2025-26 में स्कूली शिक्षा के मामले में चंडीगढ़ ने देशभर में बाजी मारी है और वह टॉप पर रहा है। वहीं पंजाब, केरल, दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं। क्या है PGI 2.0 और कैसे तय होते हैं ग्रेड? इस बार राज्यों को कोई फिक्स रैंक देने के बजाय अलग-अलग 'ग्रेड्स' यानी परफॉर्मेंस बैंड में बांटा गया है। इसका फायदा यह है कि एक जैसी परफॉर्मेंस वाले कई राज्य एक ही बैंड में आ सकते हैं, जिससे हेल्दी कॉम्पिटिशन बढ़ता है। यह इंडेक्स कुल 70 इंडिकेटर्स (संकेतकों) आधारित है, जिन्हें 2 मुख्य कैटेगरी (आउटकम और गवर्नेंस-मैनेजमेंट) के तहत 6 डोमेन में परखा गया है, इनमें लर्निंग आउटकम और क्वालिटी, एक्सेस (पहुंच), इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं, इक्विटी (समानता), गवर्नेंस प्रोसेस और टीचर्स एजुकेशन और ट्रेनिंग शामिल है। टॉप पर चंडीगढ़, 'उत्कर्ष' और 'उत्तम-1' में कोई नहीं रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार के ग्रेडिंग सिस्टम का नामकरण कुछ इस तरह किया गया है उत्कर्ष: 90% से ज्यादा स्कोर (कोई भी राज्य/UT इस तक नहीं पहुंच सका) उत्तम-1: 81 से 90% (इस कैटेगरी में भी कोई राज्य नहीं) उत्तम-2: 71 से 80% (खाली रहा) उत्तम-3: 61 से 70% (सिर्फ चंडीगढ़ इस कैटेगरी में जगह बना पाया, इसलिए वह टॉप पर है) बाकी राज्यों का हाल: दूसरे नंबर पर रहने वाले पंजाब, दिल्ली, केरल और दादरा-नगर हवेली 'प्रचेश्टा-1' (51-60%) कैटेगरी में रहे। वहीं, सबसे निचले पायदानों यानी आकांक्षी-1 और आकांक्षी-2 में भी कोई राज्य नहीं है। जिलों का रिपोर्ट कार्ड (PGI-D): किसने किया सुधार? जिलों की ग्रेडिंग (PGI-D) कुल 600 अंकों और 70 इंडिकेटर्स पर की गई है, जिन्हें 11 अलग-अलग डोमेन (जैसे डिजिटल लर्निंग, स्कूल सेफ्टी, फंड यूटिलाइजेशन) में बांटा गया था। देश के 462 जिलों ने अपने आउटकम स्कोर में सुधार किया है, जिनमें से 50 जिलों ने अपना ग्रेड लेवल भी सुधारा है। देश के कुल 19 जिलों ने 70% से ज्यादा स्कोर कर 'उत्तम-2' ग्रेड हासिल किया है। 2024-25 में ऐसे जिलों की संख्या 16 थी। कहां के कितने जिले टॉप पर? पंजाब: 7 जिले दिल्ली: 4 जिले केरल: 3 जिले महाराष्ट्र: 2 जिले चंडीगढ़, दीव और हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश): 1-1 जिला
शेखपुरा में मंगलवार को समाहरणालय स्थित मंथन सभागार में जल-जीवन-हरियाली दिवस के अवसर पर शिक्षा विभाग द्वारा एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता शेखपुरा के डीडीसी संजय कुमार ने की। इस अवसर पर डीडीसी, डीआरडीए निदेशक और डीईओ मो तनवीर आलम को जल-जीवन-हरियाली प्रतीक चिन्ह पौधे देकर सम्मानित किया गया। कुल 44,701 पौधे लगाने का लक्ष्य सौंपा गया सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने और पर्यावरण संरक्षण को लेकर विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई। परिचर्चा को संबोधित करते हुए डीडीसी ने बताया कि इस अभियान के तहत शिक्षा विभाग को जिले में कुल 44,701 पौधे लगाने का लक्ष्य सौंपा गया है। इन सभी पौधों को जिले के विभिन्न सरकारी विद्यालयों के परिसरों में लगाया जाएगा। डीडीसी ने सभी बीईओ को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के स्कूलों में वृक्षारोपण कार्य को पूरी गंभीरता और समयबद्ध तरीके से पूरा कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने भूजल स्तर सुधारने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश जारी किए। सरकारी भवनों में अनिवार्य रूप से सोख्ता का निर्माण निर्देशों में कहा गया कि जिले के सभी सरकारी भवनों में अनिवार्य रूप से सोख्ता का निर्माण कराया जाए। साथ ही, सभी सरकारी एवं सार्वजनिक चापाकलों (हैंडपंपों) और कुओं के पास भी सोख्ता निर्माण सुनिश्चित किया जाए, ताकि बेकार बहने वाला पानी वापस जमीन के अंदर जा सके। डीडीसी ने जिले में पानी की लगातार घटती उपलब्धता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह एक संवेदनशील मामला है और इस पर सभी जिलेवासियों को सामूहिक रूप से ध्यान देने तथा जागरूक होने की आवश्यकता है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि पानी की हर एक बूंद कीमती है, इसलिए अधिक से अधिक पानी बचाएं। पर्यावरण को सुरक्षित करने के लिए सभी जिलेवासी 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़ें और अनिवार्य रूप से वृक्षारोपण कर उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी लें।
डीग जिले के गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल, बरौली चौथ के प्रिंसिपल रणधीर सिंह को दुष्कर्म के आरोप में तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए निलंबन के निर्देश दिए। जानकारी के अनुसार प्रिंसिपल रणधीर सिंह के खिलाफ भरतपुर जिले के उद्योग नगर थाने में एक युवती ने दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया है। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट को तत्काल निलंबन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान में कार्यरत अधिकारी या कर्मचारी द्वारा इस प्रकार का अनैतिक और गंभीर कृत्य किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग की गरिमा बनाए रखने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए आरोपी के खिलाफ त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई आवश्यक थी। मंत्री ने यह भी कहा कि नैतिक पतन और विभाग की छवि धूमिल करने वाले कार्मिकों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
किशनगंज में मंगलवार को शहर के मोतीबाग स्थित सरस्वती विद्या मंदिर सैनिक स्कूल के प्रथम शैक्षणिक सत्र का विधिवत शुभारंभ किया गया। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने विद्यालय का उद्घाटन किया। यह आयोजन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्वलित कर संपन्न हुआ। समारोह में बड़ी संख्या में शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान और मां सरस्वती की वंदना से हुई। विद्यालय प्रबंधन ने मुख्य अतिथि सहित अन्य अतिथियों का अंगवस्त्र और स्मृति-चिह्न देकर स्वागत किया। व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगाअपने संबोधन में मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके अनुशासित, संस्कारित और राष्ट्रभक्त युवाओं में निहित होती है। उन्होंने जोर दिया कि सैनिक शिक्षा केवल सेना में भर्ती होने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता विकसित करती है। व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगाउन्होंने बताया कि पहले ऐसे संस्थानों में पढ़ाई के लिए छात्रों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था। अब क्षेत्र के मेधावी विद्यार्थियों को अपने जिले में ही बेहतर अवसर मिल सकेंगे। विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, संस्थान में आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, योग, शारीरिक प्रशिक्षण और व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने का अवसर मिलेगाविद्यार्थियों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार किया जाएगा। स्थानीय शिक्षाविदों का मानना है कि इस संस्थान की शुरुआत सीमांचल में शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इससे क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन ने सभी अतिथियों और अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया और संस्थान की भावी योजनाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर धनंजय जायसवाल, प्रधानाचार्य नागेंद्र तिवारी, अनिल केजरीवाल, देवदास सहित कई गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद् एवं अभिभावक उपस्थित रहे।
सिरसा में गर्मी की छुटि्टयों के बाद स्कूल खुलने के साथ ही स्कूली वाहनों पर भी सख्ती हो गई है। ट्रैफिक पुलिस स्कूल में जाकर वैन की चेकिंग कर रही है तो रोड से गुजरने वाले स्कूल वाहनों की भी रूकवाकर चेकिंग की जा रही है। सर्वे में कुछ स्कूली वैन में सीसीटीवी कैमरे, अग्निशमन यंत्र व दस्तावेजों की खामियां मिल रही है। इस पर कुछ वाहनों का चालान भी किया है। जानकारी के अनुसार, इन दिनों पुलिस ने रानियां और सिरसा ब्लॉक में पांच से छह स्कूलों में स्कूली वाहनों की चेकिंग की है। इस दौरान कई तरह की खामियां मिली है। कुछ वैन के कागज नहीं तो किसी की फिटनेस नहीं मिली। एक वैन के दस्तावेज नहीं थे तो उसका 22 हजार रुपए का चालान किया गया। कुछ वैन में तो अग्निशमन यंत्र तक नहीं मिले, जो कि प्राथमकि है। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि इन स्कूलों वाहनों का रिकॉर्ड शिक्षा विभाग एवं आरटीए से लिया जाएगा। उसी में पता चल पाएगा कि जिले में कितने स्कूली वाहन है। इसे लेकर पुलिस स्कूलों में जाकर अभियान चलाएगा। यदि किसी वाहन के दस्तावेज नहीं मिले तो उसे जब्त भी किया जा सकता है। एसआई शैलेंद्र सिंह की टीम स्कूल और फील्ड से इन स्कूली वाहनों की जांच करेगी। पुलिस ने एक माह पहले दी थी चेतावनी पुलिस के अनुसार, सभी स्कूल संचालकों और वैन ड्राइवर को करीब डेढ माह पहले ही नोटिस जारी कर चेतावनी दी गई थी कि सभी अपने-अपने वाहनों की गर्मियों की छुटि्टयों में फिटनेस एवं दस्तावेज प्रक्रिया पूरी करवा ले। इसके बाद किसी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने कहा था कि बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ सहन नहीं किया जाएगा। सरकार व पुलिस की ओर से जो मापदंड तय किए है, उनको मानकों को पूरा करना होगा। कुछ स्कूल संचालकों ने कराई प्रक्रिया पूरी दरअसल, पिछले दिनों छुट्टियों में कुछ स्कूल संचालकों ने अपने-अपने स्कूली वाहनों की फिटनेस व दस्तावेज प्रक्रिया पूरी करवा ली है। काफी वैन की आरटीए में पासिंग हुई है। इन वाहनों की फिटनेस जांची और दस्तावेज चेक किए। शुरू में आरटीए टीम ने राहत देते हुए मानक एवं दस्तावेज पूरे करने को कहा गया। थाना प्रभारी बोले-सिरसा व रानियां में की जांच ट्रैफिक पुलिस थाना प्रभारी बलराज सिंह ने बताया कि अभी स्कूली वाहनों की चेकिंग चल रही है। हमने रानियां व सिरसा ब्लॉक में कुछ स्कूलों में जाकर वाहनों की जांच की है। उनमें से कुछ वाहनों की फिटनेस व दस्तावेज पूरी नहीं मिली तो उनको चेतावनी दी है। कुछ वाहन का चालान किया है। इस बारे में शिक्षा विभाग से भी जानकारी मांगी जाएगी।
गुना शहर के एक निजी स्कूल द्वारा RTE के तहत एडमिशन होने के बावजूद भी आदिवासी छात्रा की TC नहीं दी जा रही है। छात्रा ने मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचकर आवेदन दिया है। उसका कहना है कि स्कूल वाले फीस भरने का दबाव बना रहे हैं, जबकि RTE के तहत एडमिशन वालों को फीस नहीं भरनी होती है। श्रीराम कॉलोनी में रहने वाली छात्रा सुमोना आदिवासी ने मंगलवार को जनसुनवाई में आवेदन सौंपा। उसने बताया कि उसने दयाल पब्लिक हायर सेकेंड्री स्कूल, श्रीराम कॉलोनी से कक्षा 8वीं उत्तीर्ण कर ली है। अब उसे आगे की पढ़ाई के लिए विद्यालय से टीसी की आवश्यकता है, लेकिन विद्यालय के प्राचार्य द्वारा टीसी देने से मना किया जा रहा है। उसने बताया कि प्रिंसिपल द्वारा पहले फीस जमा करने के लिए कहा जा रहा है। उसका विद्यालय में प्रवेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के अंतर्गत हुआ था। आरटीई के तहत अध्ययनरत विद्यार्थियों से इस प्रकार फीस की मांग करना और टीसी रोकना नियमों के विपरीत है। विद्यालय के इस व्यवहार के कारण उसके आगे के प्रवेश और शिक्षा में अनावश्यक बाधा उत्पन्न हो रही है। कलेक्टर ने जल्द जांच के लिए कहाछात्रा ने आवेदन सौंपकर मामले की जांच कर संबंधित विद्यालय को तत्काल बिना किसी अवैध फीस की मांग किए उसका स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (टीसी) जारी करने की मांग की है। कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को मामले में जांच कर जल्द सुलझाने के निर्देश दिए।
बेगूसराय सदर के राजकीयकृत मध्य विद्यालय, सांख में मंगलवार को प्रार्थना सभा के दौरान एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। यह समारोह समर कैंप के सफल समापन के अवसर पर आयोजित किया गया था, जिसमें शिक्षा सेविकाओं नीतू कुमारी और स्वाति कुमारी को सम्मानित किया गया। विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. जे.पी. ज्योति ने उन्हें सम्मानित किया। इन शिक्षा सेविकाओं को समर कैंप में बच्चों के शैक्षणिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न, विद्यालय का प्रतीक चिह्न (लोगो) और प्रोत्साहन राशि भेंट की गई। दोनों सेविकाओं ने पूरे 30 दिनों तक समर्पण, अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ बच्चों के पठन-पाठन में महत्वपूर्ण सहयोग दिया था। इस अवसर पर प्रधानाध्यापक डॉ. जे.पी. ज्योति ने कहा कि नीतू कुमारी और स्वाति कुमारी का योगदान विद्यालय के लिए प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने उनकी सेवाओं की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। सम्मान समारोह के दौरान उपस्थित शिक्षक-शिक्षिकाओं और छात्र-छात्राओं ने तालियां बजाकर दोनों शिक्षा सेविकाओं का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक अरविंद कुमार ने किया। इस मौके पर समर कैंप समन्वयक संतोष कुमार ठाकुर, गीता कुमारी, नीतीश कुमार, राजीव कुमार, जुबैदा खातून, मंगलम, पूनम कुमारी, कंचन कुमारी, राजकिशोर जी, पूजा भारती सहित विद्यालय परिवार के अन्य सदस्य और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ में स्कूलों के समय को लेकर नई मांग उठी है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर सभी सरकारी स्कूलों की टाइमिंग एक जैसी करने की मांग की है। फेडरेशन ने कहा है कि शनिवार को हायर सेकेंडरी (12वीं तक) स्कूल भी सुबह की पाली (मॉर्निंग शिफ्ट) में चलाए जाएं। फेडरेशन का कहना है कि युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) और संकुल व्यवस्था लागू होने के बाद ज्यादातर प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल, हायर सेकेंडरी स्कूलों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अलग-अलग स्कूलों की अलग-अलग टाइमिंग होने से पढ़ाई और प्रशासनिक काम में दिक्कत हो रही है। इसलिए सभी स्कूलों का समय एक जैसा किया जाए। अलग-अलग टाइमिंग से बढ़ रही दिक्कत फेडरेशन ने कहा है कि प्राचार्य, शिक्षक और कर्मचारी पढ़ाई के साथ-साथ सरकारी योजनाओं का काम, ऑनलाइन एंट्री, परीक्षा, वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी संभालते हैं। इसके अलावा संकुल स्तर की बैठकों में भी शामिल होना पड़ता है। अलग-अलग स्कूलों की अलग-अलग टाइमिंग होने से इन सभी कामों को समय पर करना मुश्किल हो जाता है। शनिवार को मॉर्निंग शिफ्ट से काम होगा आसान फेडरेशन का कहना है कि अगर शनिवार को हायर सेकेंडरी स्कूल भी सुबह की पाली में चलें और सभी स्कूलों का समय एक जैसा हो जाए, तो बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वहीं, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन को बैठकें करने, रिपोर्ट तैयार करने, प्रशासनिक काम निपटाने और अगले सप्ताह की पढ़ाई की योजना बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा। शिक्षा विभाग से जल्द फैसला लेने की मांग फेडरेशन ने शिक्षा सचिव से मांग की है कि हायर सेकेंडरी स्कूलों में भी शनिवार को मॉर्निंग शिफ्ट की अनुमति दी जाए। साथ ही प्राथमिक, माध्यमिक और हायर सेकेंडरी स्कूलों की टाइमिंग एक जैसी करने के लिए जल्द जरूरी आदेश जारी किए जाएं।
शिक्षा का उद्देश्य अच्छे अंक नहीं संस्कार विकसित करना भी है
भास्कर न्यूज | जालंधर कैम्ब्रिज इनोवेटिव स्कूल में आध्यात्मिक मार्गदर्शक, शिक्षाविद् और लेखक पद्मभूषण एमके सान्निध्य में आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया गया।इस दौरान स्कूल परिसर में विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में एमके कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक या नौकरी प्राप्त करना नहीं है, बल्कि व्यक्ति के भीतर आत्मबोध, करुणा, विवेक और अच्छे संस्कार विकसित करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा को आत्म विकास और समाज की सेवा का माध्यम बनाने का आह्वान किया। उनके विचारों ने उपस्थित सभी लोगों को प्रेरित किया। एम को विश्व शांति, राष्ट्रीय एकता और भाईचारे के संदेश के लिए जाना जाता है। उनकी कन्याकुमारी से कश्मीर तक करीब 7,500 किलोमीटर लंबी वॉक ऑफ होप पदयात्रा देश में सद्भाव और एकता का प्रतीक मानी जाती है। इस अवसर पर एलडब्ल्यूईएस की एडवाइजरी काउंसिल के चेयरमैन जे.के. कोहली, प्रबंधन सदस्य मोहिंदर चोपड़ा, एलडब्ल्यूईएस की प्रेसिडेंट मोना भाटिया, कैम्ब्रिज इनोवेटिव स्कूल के प्रबंधन सदस्य सनी सप्रा तथा एलडब्ल्यूईएस की डायरेक्टर (एचआर, मैनेजमेंट एवं एडमिनिस्ट्रेशन) प्रियंका भाटिया भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम के अंत में सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें एम ने जीवन, अध्यात्म और सत्य की खोज से जुड़े विषयों पर उपस्थित लोगों से संवाद किया।
नक्सली विचारधारा की जगह योजना जत्था ने ली, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर जोर
भास्कर न्यूज | सुकमा कभी सुकमा के दूरस्थ गांवों में नक्सलियों की जन नाट्य मंडली सांस्कृतिक कार्यक्रम और नुक्कड़ प्रस्तुतियों से लोगों को अपनी विचारधारा से जोड़ती थी। अब उन्हीं इलाकों में प्रशासन का योजना जत्था पहुंच रहा है। ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, शासकीय योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। इसे जिले के बदलते सामाजिक माहौल और शासन की बढ़ती पहुंच का संकेत माना जा रहा है। पहली बार सुकमा जिले के कोर्रा और सोना कूकानार के राउतपारा में योजना जत्था पहुंचा। गांव में जत्था देखकर ग्रामीण हैरान हुए। कुछ ही देर में वे टीम के सदस्यों से हिल-मिल गए। नीति आयोग के तत्वावधान में संचालित योजना जत्था अभियान के तहत रविवार को सुकमा विकासखंड की ग्राम पंचायत कोर्रा और ग्राम पंचायत सोना कूकानार के राऊतपारा में मॉडल साक्षरता कार्यक्रम हुआ। कोर्रा में 76 ग्रामीण शामिल हुए। राऊतपारा में 155 ग्रामीण पहुंचे। लगातार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में मौजूदगी रही। कार्यक्रम में टीम ने नाटक, संवाद, जनसंपर्क के जरिए जानकारी दी। बरसात में स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बताईं। स्वच्छता के उपाय बताए। मौसमी बीमारियों से बचाव के तरीके समझाए। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। पात्रता बताई। आवेदन प्रक्रिया समझाई। ^अभियान का मुख्य उद्देश्य गांव के अंतिम छोर पर रहने वाले ग्रामीणों तक शासन की योजनाओं की जानकारी पहुंचाना है। लोगों को साक्षरता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना है। योजनाओं से जरूरतमंद ग्रामीणों को जोड़कर ही उनके जीवन में बदलाव लाना संभव है। योजना जत्था इसी उद्देश्य के साथ लगातार संवेदनशील गांवों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है। नक्सल प्रभाव वाले इलाकों में यह पहल विकास और शासन के प्रति ग्रामीणों में विश्वास बढ़ाने की दिशा में कदम है। - अमित कुमार, कलेक्टर सुकमा
टीचर्स एसोसिएशन ने नवपदस्थ डीईओ का किया सम्मान, शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर
भास्कर न्यूज| महासमुंद छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन की जिला इकाई ने बीआरसीसी भवन, महासमुंद में सम्मान समारोह किया। इसमें महासमुंद, रायपुर, गरियाबंद के नवपदस्थ जिला शिक्षा अधिकारियों का एसोसिएशन पदाधिकारियों ने शॉल, स्मृति-चिह्न देकर स्वागत किया। महासमुंद के जिला शिक्षा अधिकारी बी.एल. देवांगन, रायपुर के डीईओ एम.जी. सतीश नायर, गरियाबंद के डीईओ राजेश चंद्राकर को सम्मानित किया गया। नवपदस्थ विकासखंड शिक्षा अधिकारी भोपाल सिंह बंजारा, डाइट प्राचार्य अरुण प्रधान, बीआरसीसी जागेश्वर सिन्हा को भी पुष्पगुच्छ, प्रतीक-चिह्न देकर सम्मान मिला। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष नारायण चौधरी ने की। डीईओ बी.एल. देवांगन, एम.जी. सतीश नायर, राजेश चंद्राकर ने आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा, शैक्षिक दायित्व निभाते हुए ही हम इन पदों तक पहुंचे हैं। प्राथमिकता यह है कि शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचे। प्रदेश में स्वस्थ, गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक माहौल बने। संचालन जिला सचिव नंदकुमार साहू ने किया। मौके पर लालजी साहू, प्रदीप वर्मा, जगदीश सिन्हा, तुलेंद्र सागर, पुष्पलता भार्गव, सम्पा बोस, प्रदीप वर्मा मौजूद रहे। एसोसिएशन के प्रांतीय प्रतिनिधि सुधीर प्रधान और केशवराम साहू ने अधिकारियों को आश्वस्त किया कि शिक्षा के स्तर को सुधारने और उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम लाने के लिए शिक्षक सदैव तत्पर हैं।
शिक्षा सेतु योजना के अंतर्गत कक्षा 10वीं एवं 12वीं में नवीन प्रवेश शुरू
प्रतापगढ़ | निदेशालय महिला अधिकारिता विभाग राजस्थान जयपुर द्वारा महिला शिक्षा को प्रोत्साहित करने, निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने एवं शिक्षा से वंचित, विद्यालय छोड़ चुकी (ड्रॉप आउट) अथवा किसी कारणवश औपचारिक शिक्षा से दूर रह गई महिलाओं एवं बालिकाओं को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से शिक्षा सेतु योजना संचालित की जा रही है। महिला अधिकारिता विभाग की सहायक निदेशक नेहा माथुर ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत महिला अधिकारिता विभाग, राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल के माध्यम से महिलाओं एवं बालिकाओं का कक्षा 10वीं एवं 12वीं में निशुल्क पंजीयन कराता है। इस प्रणाली में वर्ष में दो बार परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं तथा कक्षा उत्तीर्ण करने के लिए अभ्यर्थियों को पांच वर्षों में कुल नौ अवसर प्रदान किए जाते हैं। शिक्षा सेतु योजना के अंतर्गत 45 वर्ष तक की महिलाएं राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल के पोर्टल पर ई-मित्र के माध्यम से अथवा स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। वर्ष 2026 के लिए स्ट्रीम-2 में प्रवेश/पंजीयन की तिथियां 10 जुलाई से 31 जुलाई तक (बिना विलंब शुल्क) व 1 अगस्त से 10 अगस्त तक (250 रुपए विलंब शुल्क सहित) निर्धारित की गई हैं। इसी प्रकार स्ट्रीम-1 में प्रवेश/पंजीयन की तिथियां 1 जुलाई से 31 अगस्त तक (बिना विलंब शुल्क), 1 सितम्बर से 15 सितम्बर तक (250 रुपए विलंब शुल्क सहित), 16 सितम्बर से 30 सितम्बर तक (350 रुपए विलंब शुल्क सहित) तथा 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक (500 रुपए विलंब शुल्क सहित) निर्धारित हैं। महिलाओं एवं बालिकाओं से शिक्षा सेतु योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने एवं समय पर आवेदन करने का आग्रह किया गया है। योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए कार्यालय सहायक निदेशक, महिला अधिकारिता विभाग, बगवास में संपर्क किया जा सकता है।
शिक्षा से बदलेगी जिंदगी: वीएसएसएल हर साल खर्च करेगा 25 लाख रुपए
भास्कर न्यूज | लुधियाना वर्धमान स्पेशल स्टील्स लिमिटेड ने अपने सीएसआर प्रोजेक्ट'दिशा' के तहत झुग्गी-बस्ती में रहने वाले 101 बच्चों को जीवन भर मुफ्त शिक्षा देने की पहल की है। ये बच्चे वर्धमान स्पेशल स्टील्स लिमिटेड की सीएसआर पहल के तहत बीसीएम स्कूल, फोकल पॉइंट में शिक्षा प्राप्त करेंगे। लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन और वर्धमान स्टील्स के सीएसआर, एडमिन हेड अमित धवन ने इन बच्चों की शिक्षा के लिए बीसीएम स्कूल के अधिकारियों को 16.75 लाख रुपये का चेक सौंपा। डिप्टी कमिश्नर ने जरूरतमंद बच्चों के लिए वीएसएसएल की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सौम्या जैन और चेयरमैन सचित जैन द्वारा की गई इस पहल की सराहना की। सीएसआर हेड अमित धवन ने बताया कि वीएसएसएल इन बच्चों की जीवन भर की शिक्षा में मदद कर रहा है और इस प्रोजेक्ट पर हर साल लगभग 25 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
विज्ञान के साथ आत्म तत्व की चेतना जरूरी, शिक्षा में उपनिषद शामिल करना चाहते थे डॉ. कोठारी
उदयपुर। शान्तिपीठ भारत संस्थान की ओर से प्रख्यात वैज्ञानिक और शिक्षाविद् डॉ. दौलत सिंह कोठारी की जयंती पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका विषय ‘व्यवहार में नैतिकता: उपस्थित चुनौतियों की चाबी’ था। कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों ने डॉ. कोठारी की तस्वीर पर माल्यार्पण किया। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कैलाश डागा ने संगोष्ठी की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. कोठारी का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। वे पूरे विश्व के शिक्षा जगत में शीर्ष स्थान रखते हैं। प्रो. डागा ने समन्वय, सच्ची सहिष्णुता और राजकार्य में आचार्य चाणक्य की आचार संहिता को रेखांकित किया। मुख्य अतिथि उदयपुर नगर विधायक तारा चंद्र जैन ने कहा कि डॉ. कोठारी राजस्थान के र| और भारत के मनीषी थे । उन्होंने विश्व को विज्ञान के साथ ही अहिंसा और शांति की राह दिखाई । इस दौरान शान्तिपीठ के संस्थापक अनन्त गणेश त्रिवेदी ने विधायक जैन से शिल्पग्राम के पीछे बने तारामंडल का नामकरण डॉ. कोठारी के नाम पर करने का आग्रह किया, जिस पर विधायक ने आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। प्रमुख वक्ता सामाजिक विज्ञान व मानविकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. नीरज शर्मा ने कहा कि ज्ञान और विज्ञान के समन्वय में हमेशा से नैतिकता की चेतना रही है। उन्होंने कर्म, अकर्म, विक्रम और सद्धर्म की व्याख्या की। शान्तिपीठ के संस्थापक अनंत गणेश त्रिवेदी ने कहा कि डॉ. कोठारी विज्ञान के साथ ही उपनिषद को भी शिक्षा में शामिल करना चाहते थे। वे प्रतिरक्षा विज्ञान और मानवीय संवेदना के आधार पर सशक्त राष्ट्र का सपना देखते थे। सुविवि के भौतिक विज्ञान विभाग अध्यक्ष प्रो. के.बी. जोशी, शांतिपीठ के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पायरोटेक इंटरनेशनल के प्रमुख डॉ. पी.एस. तलेसरा, नगर निगम के पूर्व आयुक्त दिनेश कोठारी, सिंचाई विभाग के पूर्व मुख्य अभियन्ता जी.पी. सोनी, शिक्षाविद् डॉ. परितोष दुग्गड़, एडवोकेट समर्थ लाल साहू, डॉ. हेमलता, पूर्व वन अधिकारी लक्ष्मीकांत जोशी और मांगीलाल मेघवाल ने भी विचार व्यक्त किए।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के यूनेस्को चेयर फॉर पीस एंड इंटरकल्चरल अंडरस्टैंडिंग तथा मालवीय सेंटर फॉर पीस रिसर्च के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विरासत के आलोक में इक्कीसवीं सदी के लिए शैक्षिक सुधार : शिक्षा की पुनर्कल्पना विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ मालवीय मूल्य अनुशीलन केन्द्र में हुआ। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के भारतीय राष्ट्रीय यूनेस्को सहयोग आयोग के सहयोग से आयोजित यह सम्मेलन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 125वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। शिक्षकों को उत्तरदायी भी बनना होगा - राज्यपाल बिहारउद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैय्यद अता हसनैन ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के केन्द्र नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करने वाले रणनीतिक संस्थान हैं। उन्होंने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अनुसंधान, नवाचार, अंतर्विषयी अध्ययन और उद्योग-जगत से सहयोग पर आधारित शैक्षिक सुधारों की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि विश्लेषणात्मक सोच, नैतिक मूल्यों और उत्तरदायी नागरिकों का निर्माण होना चाहिए। जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चुनौती विशिष्ट अतिथि यूनेस्को महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन फॉर पीस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट के निदेशक प्रो. ओबिजियोफोर अगिनम ने शिक्षा को पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि करुणा, सहानुभूति और समालोचनात्मक चिंतन से युक्त नागरिक तैयार करना शिक्षा का मूल उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सराहना करते हुए शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन तथा सामाजिक असमानताओं जैसी चुनौतियों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया। बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तीव्र तकनीकी बदलाव के दौर में शिक्षण पद्धति, पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली तथा कक्षा सहभागिता की पुनर्समीक्षा समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों को शैक्षिक सुधारों का नेतृत्व करने वाला संस्थान बताते हुए विद्यार्थियों के बीच संवाद, शांति और संघर्ष-समाधान की संस्कृति विकसित करने पर जोर दिया।
गोंडा में तैनात तीन खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) का आज सोमवार 2 बजे एक आदेश जारी करके तबादला कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव अवधेश कुमार तिवारी ने आज 6 जुलाई को यह आदेश जारी किया। इन अधिकारियों को पदोन्नति के साथ दूसरे जिलों में भेजा गया है, जबकि तीन नए वरिष्ठ प्रवक्ता गोंडा आए हैं। स्थानांतरित होने वाले अधिकारियों में उपेंद्र कुमार त्रिपाठी शामिल हैं, जिन्हें गोंडा से संत कबीर नगर भेजा गया है। उन्हें वहां जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) संत कबीर नगर में वरिष्ठ प्रवक्ता बनाया गया है। चंद्रभूषण पांडेय का तबादला अयोध्या किया गया है, जहां वे डायट अयोध्या में वरिष्ठ प्रवक्ता का पद संभालेंगे। इसी तरह, रामखेलावन सिंह को भी गोंडा से बाराबंकी भेजा गया है, जहां उन्हें डायट बाराबंकी में वरिष्ठ प्रवक्ता के रूप में पदोन्नत किया गया है। विशेष सचिव के आदेशानुसार, इन तीनों खंड शिक्षा अधिकारियों को तत्काल अपने वर्तमान कार्यस्थल से कार्यमुक्त होकर नवीन तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें खंड शिक्षा अधिकारी से वरिष्ठ प्रवक्ता डायट के पद पर पदोन्नति मिली है। वहीं, रायबरेली में खंड शिक्षा अधिकारी के पद पर तैनात वीरेंद्र नाथ और अयोध्या में तैनात अमित श्रीवास्तव को भी पदोन्नति के बाद गोंडा भेजा गया है। इसके अतिरिक्त, संत कबीर नगर में खंड शिक्षा अधिकारी रहे अर्जुन प्रसाद को भी पदोन्नति देकर गोंडा में वरिष्ठ प्रवक्ता डायट दर्जी कुआं बनाया गया है। गोंडा के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह ने बताया कि तीन खंड शिक्षा अधिकारियों को पदोन्नति मिली थी और उनका गोंडा से तबादला हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि तीन वरिष्ठ प्रवक्ता डायट दर्जीकुआँ, गोंडा में आए हैं। स्थानांतरित हुए अधिकारियों को कार्यमुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जहानाबाद जिला मुख्यालय में सोमवार को वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त करने और शिक्षकों व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के लिए नियमित वेतनमान, सेवा सुरक्षा व पेंशन की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया गया। यह कार्यक्रम बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के राज्यव्यापी महाआंदोलन के छठे चरण का हिस्सा था। प्रदर्शन के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक मांगपत्र सौंपा। इसमें वित्त रहित शिक्षण संस्थानों के समायोजन, कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी मांग की गई। बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष और रामलखन सिंह यादव कॉलेज, जहानाबाद के प्रभारी प्राचार्य डॉ. संजय यादव ने कहा कि वित्त रहित शिक्षा नीति केवल शिक्षकों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह बिहार की शिक्षा व्यवस्था और लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से भी जुड़ा है। उन्होंने सरकार से इन संस्थानों का समायोजन कर कर्मचारियों को सम्मानजनक सुविधाएं देने की अपील की। डॉ. यादव ने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों में इस आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। उन्होंने जहानाबाद के सभी वित्त रहित डिग्री कॉलेजों, इंटर कॉलेजों और विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों, प्राचार्यों, सेवानिवृत्त शिक्षकों, अधिवक्ताओं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं, छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षा प्रेमियों से आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जहानाबाद से उठी यह आवाज पूरे बिहार में शिक्षक सम्मान और शिक्षा न्याय की लड़ाई को नई मजबूती प्रदान करेगी।
जहानाबाद में कांग्रेस का धरना-प्रदर्शन:वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त करने की मांग
जहानाबाद में सोमवार को कांग्रेस सेवा दल के नेतृत्व में कारगिल चौक पर धरना-प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन वित्त रहित शिक्षा नीति को समाप्त करने, वित्त रहित कॉलेजों के समायोजन और शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के लिए सम्मानजनक वेतनमान, सेवा सुरक्षा, पेंशन तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के राज्यव्यापी महाआंदोलन के छठे चरण का हिस्सा था। इस धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी और समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से वर्षों से उपेक्षित शिक्षण संस्थानों को मुख्यधारा में लाने की अपील की। वक्ताओं ने बताया कि वित्त रहित संस्थानों में कार्यरत शिक्षक और कर्मचारी लंबे समय से आर्थिक असुरक्षा और असमानता का सामना कर रहे हैं। बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के संयोजक संजय कुमार ने इस अवसर पर कहा कि वित्त रहित शिक्षा नीति का मुद्दा केवल शिक्षकों और कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिहार की शिक्षा व्यवस्था, लाखों विद्यार्थियों के भविष्य और सामाजिक न्याय से जुड़ा एक गंभीर विषय है। उन्होंने सरकार से वित्त रहित कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों का समायोजन कर वहां कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को नियमित वेतनमान, सेवा सुरक्षा, पेंशन और कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा जैसे लाभ उपलब्ध कराने की मांग की। संजय कुमार ने आरोप लगाया कि वर्षों से वित्त रहित शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षक और कर्मचारी उपेक्षा का शिकार हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी सरकार से इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि जहानाबाद से उठी यह आवाज पूरे बिहार में शिक्षक सम्मान और शिक्षा न्याय की लड़ाई को नई दिशा देगी।
सोनीपत जिले के कुंडली में स्थित राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टम-कुंडली) ने न्यूजीलैंड की मैसी विश्वविद्यालय के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह करार 2 जुलाई 2026 को हुआ, जिसका उद्देश्य खाद्य प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, नवाचार और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अकादमिक और अनुसंधान सहयोग को मजबूत करना है। इस समझौता ज्ञापन पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव एपी दास जोशी, संयुक्त सचिव देवेश देवल और निफ्टम-कुंडली के निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय सहित वरिष्ठ टीम की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। 5 वर्षों तक वैध रहेगा एमओयू सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजनाएं, तृतीय-पक्ष वित्तपोषण के लिए संयुक्त आवेदन, सेमिनारों और अकादमिक बैठकों में भागीदारी, संकाय और शोधकर्ताओं का आदान-प्रदान, और छात्र गतिशीलता कार्यक्रम शामिल हैं। दोनों संस्थानों के समर्पित समन्वयक इन सहयोगात्मक पहलों के कार्यान्वयन में सहायता करेंगे। यह समझौता 5 वर्षों तक वैध रहेगा और आपसी सहमति से इसे अगले 5 वर्षों के लिए नवीनीकृत किया जा सकता है। यह एमओयू दोनों पक्षों के बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा करता है और भविष्य में शैक्षणिक साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए एक गैर-बाध्यकारी ढांचा प्रदान करता है। इस सहयोग से अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग में वृद्धि होने, खाद्य प्रौद्योगिकी और प्रसंस्करण में नवाचार को बढ़ावा मिलने, ज्ञान के आदान-प्रदान में सुगमता आने और दोनों संस्थानों के छात्रों, शोधकर्ताओं और संकाय सदस्यों के लिए अधिक अवसर प्राप्त होने की उम्मीद है।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू होने से पहले कैंपस स्थित श्रीविश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन मौजूद रहा। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ नया सत्र सभी के लिए शुभकारी हो, इसकी भी कामना की गई। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि आज भगवान विश्वनाथ की पूजा-अर्चना कर विश्वविद्यालय की उन्नति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की गई। उन्होंने कहा कि उनकी कामना है कि विश्वविद्यालय पूरे तन, मन और धन से अध्ययन-अध्यापन के कार्य में निरंतर समर्पित रहे। साथ ही, छात्रों, शिक्षकों और सभी कर्मचारियों के हित में कार्य होते रहें तथा विश्वविद्यालय लगातार प्रगति के पथ पर आगे बढ़े। शैक्षणिक माहौल और सुरक्षा होगा बेहतर पिछले महीने हुई छात्र से जुड़ी घटना के संबंध में पूछे गए सवाल पर कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन, छात्र और सभी संबंधित पक्ष मिलकर कार्य कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। उन्होंने विश्वास जताया कि आपसी सामंजस्य और संवाद के माध्यम से विश्वविद्यालय का शैक्षणिक माहौल और अधिक बेहतर बनाया जाएगा। क्षेत्रफल के लिहाज से एशिया का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय BHU क्षेत्रफल के लिहाज ये एशिया का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है। 13 सौ एकड़ में बने इस विश्ववविद्यालय में 6 संस्थान 14 संकाय के साथ ही 140 से अधिक विभाग मौजूदा समय में कार्यरत है। कैंपस के मध्य में भगवान शंकर का विशाल मंदिर है। जिसे मशहूर उद्योगपति युगल किशोर बिरला ने बनवाया है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने, गुणवत्तापूर्ण और परिणामोन्मुख (Result-oriented) बनाने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू हो गया है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव ( ACS), बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने एक विशेष यूट्यूब लाइव सत्र के माध्यम से प्रदेशभर के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स से सीधा संवाद किया और सरकार की आगामी प्राथमिकताओं को साझा किया।इस संवाद के दौरान उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों (सरकारी स्कूलों) के संचालन, शिक्षकों के कल्याण और छात्र नामांकन को लेकर कई बड़े और ऐतिहासिक फैसलों की घोषणा की गई है।गर्मी के कारण पढ़ाई के नुकसान की भरपाई: अब हर साल 25 जून से खुलेंगे स्कूलअपर मुख्य सचिव ने बताया कि अक्सर अत्यधिक गर्मी और लू के कारण बार-बार स्कूलों की छुट्टियां बढ़ानी पड़ती हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई का भारी नुकसान होता है।220 शिक्षण दिवस का लक्ष्य: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मानदंडों के अनुरूप बच्चों के लिए न्यूनतम 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करना अनिवार्य है।नया नियम: इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब उत्तर प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालय प्रत्येक वर्ष 25 जून से संचालित होंगे (यानी आज से स्कूल खुल चुके हैं)। उन्होंने शिक्षकों से अपील की है कि वे स्कूल आने वाले बच्चों का आत्मीय स्वागत करें और भीषण गर्मी को देखते हुए उनके स्वास्थ्य व सुरक्षा का विशेष प्रबंध करें।1 जुलाई से 'स्कूल चलो अभियान' का दूसरा चरण: ड्रॉपआउट रोकने पर विशेष जोरराज्य में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने और बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले (Dropout) बच्चों की संख्या को शून्य पर लाने के लिए सरकार नई रणनीति अपना रही है:स्थानीय डेटा की मदद: 1 जुलाई से शुरू हो रहे 'स्कूल चलो अभियान' के दूसरे चरण में स्कूल से बाहर (Out of School) रह गए बच्चों की पहचान की जाएगी। इसके लिए आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं के पास उपलब्ध जन्म रिकॉर्ड और स्थानीय सूचनाओं की मदद ली जाएगी।निर्बाध प्रवेश: कक्षा 5 पास करने वाले प्रत्येक छात्र का कक्षा 6 में निर्बाध और अनिवार्य दाखिला सुनिश्चित किया जाएगा। जो बच्चे सीखने में पीछे रह गए हैं, उनके लिए विशेष 'कैच-अप शिक्षण' (Catch-up Classes) संचालित किए जाएंगे।निपुण भारत मिशन का कक्षा 5 तक विस्तार: 6 जुलाई को 'निपुण संकल्प'बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को मजबूत करने वाले 'निपुण भारत मिशन' को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है:दायरा बढ़ा: पहले यह मिशन शुरुआती कक्षाओं के लिए था, लेकिन अब इसका दायरा कक्षा 5 तक बढ़ा दिया गया है। अब कक्षा 5 तक के बच्चों के लिए भाषा, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन (EVS) के स्पष्ट लर्निंग आउटकम (अधिगम लक्ष्य) तय किए गए हैं।शिक्षकों की ट्रेनिंग: इसके लिए राज्य स्तर पर एसआरजी और डायट मेंटर्स का प्रशिक्षण शुरू हो चुका है, जो ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों को ट्रेंड करेंगे। आगामी 6 जुलाई को प्रदेश के सभी जिलों में 'निपुण संकल्प कार्यशाला' का आयोजन होगा, जिसमें पूरे प्रशासनिक और अकादमिक तंत्र को झोंककर 'निपुण जनपद' बनाने का संकल्प लिया जाएगा।'DEAR' अभियान और वर्ष में दो बार मिलेगी होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्टअपर मुख्य सचिव ने स्कूलों में पठन-पाठन का माहौल बेहतर करने के लिए कई नए निर्देश दिए हैं:DEAR अभियान: स्कूलों में ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड’ (DEAR) जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, जहां एक निश्चित समय के लिए सभी काम रोककर सिर्फ किताबें पढ़ने की संस्कृति विकसित की जाएगी।अभिभावक सहभागिता: बच्चों की 'होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्ट' (Holistic Progress Report) को अब और अधिक प्रभावी बनाकर वर्ष में दो बार अभिभावकों (Parents) के साथ अनिवार्य रूप से साझा किया जाएगा ताकि वे भी बच्चे की प्रगति का हिस्सा बन सकें।शिक्षकों के लिए बड़ी सौगात: ₹5 लाख की कैशलेस इलाज सुविधा और 21,000 नई भर्तियांमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शिक्षा विभाग के मानव संसाधन को मजबूत करने और शिक्षकों की सामाजिक सुरक्षा के लिए दो अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं:श्रेणी / योजनामुख्य विवरण और लाभकैशलेस चिकित्सा सुविधासभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और उनके परिवारों को सालाना ₹5 लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा।नगरीय क्षेत्रों में नई भर्तीशहरी क्षेत्रों के स्कूलों में मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए लगभग 11 हजार शिक्षकों और 10 हजार अनुदेशकों की भर्ती प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।मुंशी प्रेमचंद का संदेश: संवाद के अंत में पार्थ सारथी सेन शर्मा ने महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद का उल्लेख करते हुए सभी शिक्षकों से निरंतर अध्ययन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक बेहतर शिक्षक वही है जो खुद हमेशा पढ़ता रहता है। उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षकों की निष्ठा के दम पर उत्तर प्रदेश की बुनियादी शिक्षा पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरेगी।
शिक्षा में एक नये युग एवं शैक्षिक क्रांति की आहट
आज पूरी दुनिया शिक्षा के एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां ज्ञान का विस्तार तो अभूतपूर्व हुआ है, लेकिन जीवन मूल्यों का क्षरण भी उतनी ही तेजी से दिखाई देता है। विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को सुविधासंपन्न बनाया है, लेकिन मानसिक तनाव, हिंसा, प्रतिस्पर्धा, नैतिक संकट और मानवीय संवेदनाओं के क्षय जैसी ... Read more
विमान दुर्घटना स्थल को नयी पहचान ,स्वास्थ्य-शिक्षा केंद्र बनाने की तैयारी :प्रफुल पंशेरिया
गांधीनगर/अहमदाबाद गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार उस जगह पर दो बड़े संस्थान विकसित करेगी, जहां पिछले साल हुए विमान हादसे में 260 लोगों की मौत हो गई थी और अहमदाबाद में आस-पास के मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा था।
बचपन को श्रम नहीं, शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का अधिकार मिलें
बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस-12 जून 2026 हर वर्ष 12 जून को मनाया जाने वाला बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि मानवता के अंतःकरण को झकझोरने वाला अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि दुनिया का कोई भी बच्चा मजदूर बनने के लिए पैदा नहीं होता। ... Read more
त्रिभाषा फार्मूला है भारत की शिक्षा का नया क्षितिज
भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि भाषाओं, बोलियों, संस्कृतियों और परंपराओं का विराट संगम है। यहां भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान, संस्कृति, संवेदना और सामाजिक चेतना का आधार भी है। ऐसे बहुभाषी देश में शिक्षा व्यवस्था को किस भाषा में संचालित किया जाए और बच्चों को कौन-कौन सी भाषाएं पढ़ाई जाएं, यह ... Read more
ललित सुरजन की कलम से - शिक्षा और परीक्षा
'जब हम पढ़ रहे थे, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, आईआईएम तब भी थे।
सरकारी स्कूलों की चुनौतियां और बदलता शिक्षा परिदृश्य
शिक्षा किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति, सामाजिक गतिशीलता और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की आधारशिला है।
Fact Check: क्या बिहार के शिक्षा मंत्री ने कहा लड़कियों को शिक्षा की जरूरत नहीं? सच जानिए
बूम ने पाया कि बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने Agitation शब्द का इस्तेमाल किया था जिसे एजुकेशन समझकर गलत दावा किया जा रहा है.
कन्नड़ मूवी 'केडी: द डेविल' के गाने 'सरके चुनर' पर विवाद अभी भी जारी है। इस गाने के बोल और फिल्मांकन पर बढ़ते विवाद के बाद नोरा फतेही को राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के समक्ष पेश होना पड़ा। नोरा ने न केवल अपनी स्थिति स्पष्ट की, बल्कि भविष्य के लिए एक ...
पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु का रिश्वत लेते हुए वीडियो फर्जी और एआई जनरेटेड है
बूम ने पाया कि ब्रात्य बसु का वीडियो गूगल के SynthId का उपयोग करके एआई द्वारा जनरेट किया गया है.
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
NEET UG रिजल्ट को लेकर अभी भी जारी है गुस्सा, छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के पास किया विरोध प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए छात्रों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। आइए जानते हैं, क्या है पूरा म
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का 10 फीसदी भी डाटा नहीं हुआ अपलोड
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का डाटा अपलोड करने में जिले के कई स्कूल ढील दे रहे हैं, वे 10 फीसदी छात्रों का भी डाटा अभी तक अपलोड नहीं कर पाए हैं। डाटा अपलोड करने में आधार कार्ड की अनिवार्यता के बाद से छ

