पर्दा शिक्षा और सपनों के बीच नहीं होनी चाहिए। अगर परिवार साथ दें, तो एक लड़की पर्दा में रह कर दुनिया जीत सकती है। लोगों को लगता है कि लड़की पर्दे में रह कर क्या ही करेगी। मैंने भी भेद भाव झेला है। लोग कहते थे कि ये स्कूल जाकर क्या करेगी। ये कहना बेंगलुरु में एक मस्जिद में इमाम की बेटी नाहिद का है। जिन्होंने मैट्रिक की परीक्षा में स्टेट में दूसरा स्थान हासिल किया है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से जारी 10वीं के नतीजों में बेगूसराय की नाहिद सुल्तान ने अपनी मेधा का परचम लहराया है। इन्होंने 489 नंबर लाकर पूरे प्रदेश में द्वितीय स्थान हासिल किया है। भगवानपुर प्रखंड के बनवारीपुर हाई स्कूल की छात्रा नाहिद की ये जीत केवल अंकों की नहीं, बल्कि उन सामाजिक बेड़ियों के खिलाफ भी है जो अक्सर बेटियों की राह रोकती हैं। नाहिद सुल्तान ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता के बाद मुस्लिम समाज में व्याप्त पर्दा प्रथा और लड़कियों की शिक्षा को लेकर कड़ा संदेश दिया है। नाहिद ने कहा कि उनके समाज में आज भी लड़कियों को घर की दहलीज तक सीमित रखने की कोशिश की जाती है। मुस्लिम समाज में पर्दा प्रथा एक बहुत बड़ा अंधविश्वास बन चुका है। पर्दे में रह कर दुनिया जीत सकती लड़की उन्होंने कहा है कि आज भी लोग सोचते हैं कि लड़कियां पर्दे में रहकर क्या करेंगी या वे बाहर नहीं निकल सकती। मेरा मानना है कि पर्दा संस्कारों और आंखों में होना चाहिए, न कि हमारी शिक्षा और सपनों के बीच होनी चाहिए। पर्दे में रहकर भी एक लड़की दुनिया जीत सकती है, बस उसे परिवार का साथ मिलना चाहिए। तैयार होकर स्कूल जाना, स्कूल जाते समय मुस्लिम लड़की के संबंध में तरह-तरह की बातें सुनना, रोज होता था। महिलाएं कहती थी कि स्कूल जाकर क्या करोगी, लेकिन हमने सभी की बात को नजर अंदाज किया और नियमित स्कूल जाती रही। सुबह 5:30 बजे उठ जाती थी, फिर 2 घंटा पढ़ने के बाद नाश्ता करती थी। उसके बाद ऑनलाइन क्लास और ऑफलाइन क्लास होता था। फिर खाना खाकर सेल्फ स्टडी करते थे। शाम में थोड़ा घूमने के बाद फिर दिन भर पढ़ी गई चीजों का रिवीजन करते थे, यही मेरा रोज का रूटीन रहा। नाहिद ने आगे कहा कि उनके समाज के लोगों को यह समझना होगा कि शिक्षा पर सबका बराबर हक है और बेटियां भी परिवार के साथ-साथ देश का नाम रोशन कर सकती हैं। पिता सोहराब आलम बेंगलुरु में इमाम नाहिद सुल्तान के पिता सोहराब आलम बेंगलुरु में एक मस्जिद में इमाम हैं। अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर वे बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं। नाहिद तीन भाइयों के बीच इकलौती बहन है। उसकी मां नूर सबा एक गृहिणी हैं। नाहिद ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता के अटूट विश्वास और स्कूल के शिक्षकों को दिया है। भविष्य के बारे में बात करते हुए नाहिद ने बताया कि वह डॉक्टर बनना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान देखा कि किस तरह इलाज के अभाव में लोग असमय मौत के मुंह में चले गए। उस बेबसी ने मुझे बहुत आहत किया। मैं मेडिकल की पढ़ाई कर गरीब और जरूरतमंद मरीजों की सेवा करना चाहती हूं। नाहिद ने किसी बड़े कोचिंग संस्थान की मदद नहीं ली। उन्होंने बताया कि वह रोजाना 6 से 7 घंटे की सेल्फ स्टडी करती थीं। उन्होंने डिजिटल इंडिया का फायदा उठाते हुए ऑनलाइन क्लासेस और यूट्यूब के जरिए अपनी तैयारी को धार दी। सोशल साइंस में मिले 100 नंबर बोर्ड के इंटरव्यू के दौरान उसकी राइटिंग चेक की गई और कुछ गहन प्रश्न पूछे गए, जिनका उसने बिना किसी हिचकिचाहट आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया। अगर नाहिद को विभिन्न विषयों में मिले मिले नंबर की बात करें तो उर्दू में 99 नंबर और गणित में 99 नंबर मिले हैं। जबकि साइंस में 95 नंबर और हिंदी में 96 नंबर हासिल हुए है। जबकि, सोशल साइंस इसने पूरे 100 नंबर हासिल किए हैं। नाहिद ने यह साबित कर दिया कि यदि हौसले बुलंद हो तो कोई भी सामाजिक परंपरा या रुकावट शिक्षा के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती। उन्होंने अपनी सफलता से उन तमाम लोगों को जवाब दिया है, जो बेटियों की शिक्षा को सीमित दायरे में देखते हैं। नाहिद की यह कहानी बिहार के उन हजारों छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा है, जो अभावों और सामाजिक चुनौतियों के बीच अपने सपनों को हकीकत में बदलने की हिम्मत रखते हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने हरियाणा के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) कुरुक्षेत्र के डायरेक्टर प्रो. बी वी रमाना रेड्डी से प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार वापस ले लिए हैं। मंत्रालय ने इसको लेकर एक नोटिस जारी किया है और फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। नोटिस के मुताबिक, अगली सूचना आने तक डायरेक्टर अपने सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। आदेश में NIT एक्ट 2007 के तहत मिलने वाली शक्तियों का जिक्र करते हुए उन्हें अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। हालांकि, नोटिस में पावर छीनने का कारण नहीं बताया गया है, लेकिन सूत्रों की मानें तो कर्मचारियों की नाराजगी इसकी बड़ी वजह है। नोटिस में चेयरपर्सन-रजिस्ट्रार को मिला ये निर्देश शिक्षा मंत्रालय के नोटिस में NIT कुरुक्षेत्र के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की चेयरपर्सन और रजिस्ट्रार को निर्देश दिए गए हैं कि इस आदेश का सख्ती से पालन करवाया जाए। हालांकि, प्रो. रेड्डी डायरेक्टर पद पर बने रहेंगे, लेकिन कोई प्रशासनिक फैसला नहीं ले सकेंगे। किसी वित्तीय फाइल पर साइन नहीं कर पाएंगे। इस कारण शिक्षा मंत्रालय ने लिया फैसला सूत्रों के मुताबिक, संस्थान के गैर-शिक्षण कर्मचारियों में लंबे समय से नाराजगी थी। कर्मचारियों ने अपनी कई मांगों को लेकर डायरेक्टर और पूर्व रजिस्ट्रार को पत्र लिखे थे। इन शिकायत की जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय तक भी पहुंचाई गई। इनमें DPC (पदोन्नति), पोस्टिंग और तैनाती और फैकल्टी को लेकर कर्मचारियों में रोष पनप रहा था। रेड्डी बोले- अभी आदेश समझने में टाइम लगेगा इस मामले को लेकर NIT कुरुक्षेत्र के डायरेक्टर प्रो. रेड्डी ने कहा कि मैं इसमें कुछ कह नहीं सकता हूं, जब तक बात समझ नहीं आती। इसको समझने में टाइम लगेगा। एक-दो दिन के बाद देखते हैं। उसके बाद ही कुछ पता चल पाएगा। हालांकि उनके पास कोई लेटर भी नहीं आया है।
बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को मैन्युअल छुट्टी लेने पर रोक लग गई है। अब छुट्टी के लिए शिक्षकों को ई शिक्षा कोष पोर्टल पर आवेदन देना होगा। पोर्टल पर छुट्टी का कारण, दिन और अन्य जानकारी देनी होगी। छुट्टी के लिए मैन्युअल आवेदन करने वाले शिक्षकों की छुट्टी मान्य नहीं होगी। इसके तहत इमरजेंसी लीव से लेकर अदेय अवकाश तक दिया जाएगा। ई शिक्षा कोष पोर्टल पर छुट्टी के आवेदन के बाद उसकी मंजूरी भी डिजिटल ही होगी। इस दौरान डीईओ, प्रधानाध्यापक, शिक्षक के साथ ही मुख्यालय स्तर पर अधिकारी भी उसे देख सकेंगे। इस दौरान महिलाओं को मातृत्व अवकाश के दौरान हर महीने वेतन दिया जाएगा। पहले अवकाश से आने के बाद वेतन दिया जाता था। प्रधान शिक्षक और प्रभारी प्रधानाध्यापक की छुट्टियों की मंजूरी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी करेंगे। सहायक और विशेष शिक्षक की छुट्टी की मंजूरी प्रधान शिक्षक देंगे। ई शिक्षा कोष पोर्टल पर छुट्टी के लिए शिक्षकों का आवेदन करना होगा। इससे छुट्टी मिलने में शिक्षकों का आसानी होगी। इसके साथ ही पारदर्शिता भी बनी रहेगी। छ़ुट्टी का कारण पता चलते ही ऑनलाइन उसे स्वीकृत दिया जाएगा। -सुनील कुमार, शिक्षा मंत्री, बिहार
सलूम्बर में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) की जिला स्तरीय बैठक रविवार को दूदर स्थित जिला कार्यालय में आयोजित हुई। इसमें शिक्षकों की समस्याओं, संगठन विस्तार और आगामी कार्ययोजना पर गहन विचार-विमर्श किया गया। जिलाध्यक्ष हिमांशु भट्ट ने बैठक की अध्यक्षता की, जबकि संभाग संगठन मंत्री राजेन्द्र सिंह सारंगदेओत मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे। सारंगदेओत ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक समाज का दर्पण होता है। उन्होंने संगठन की मजबूती को शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा की नींव बताया। उन्होंने 'राष्ट्र हित में शिक्षा' के ध्येय को अपनाते हुए कार्य करने का आह्वान किया। सदस्यता पंजिकाओं का वितरण बैठक में आगामी सत्र के लिए सदस्यता अभियान की शुरुआत की गई। सारंगदेओत ने सदस्यता पंजिकाओं का वितरण किया और हर विद्यालय तक संगठन की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया। जिला मंत्री कमल आमेटा ने जानकारी दी कि 31 मार्च, 3 अप्रैल और 5 अप्रैल को विभिन्न खंडों में संकुल कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संगठन विस्तार के तहत संकुल संयोजक और सह-संयोजकों की नियुक्ति पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान 'नव संवत्सर' और 'प्रधानाचार्य संवाद' जैसे हालिया कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। साथ ही, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए आगामी योजनाओं की रूपरेखा भी तय की गई। समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया जिलेभर के शिक्षकों की व्यावहारिक और विभागीय समस्याओं का संकलन कर उनके शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया गया। जिलाध्यक्ष और कार्यकारिणी ने आश्वासन दिया कि शिक्षकों की समस्याओं को लेकर सक्षम अधिकारियों से संवाद स्थापित कर समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। बैठक में विभिन्न खंडों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। अंत में सभी सदस्यों ने संगठन के अनुशासन और उद्देश्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का संकल्प लिया। खंड स्तर पर दस्तावेज एवं कोष हस्तांतरण प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई।
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) आज रविवार को मैट्रिक यानी 10वीं का रिजल्ट जारी करने जा रहा है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार दोपहर 1:15 में पटना स्थित बिहार बोर्ड कार्यालय में आधिकारिक रूप से रिजल्ट घोषित करेंगे। इस मौके पर बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर भी मौजूद रहेंगे। नालंदा में कुल 45,324 परीक्षार्थियों ने एग्जाम दिया है। जिसमें छात्र और छात्राओं की भागीदारी लगभग बराबर रही। 22,666 छात्र और 22,658 छात्राएं शामिल हुए थे। एग्जाम के लिए 36 सेंटर बने थे। जिनमें बिहारशरीफ में 18, राजगीर में 9 और हिलसा में 9 केंद्र शामिल रहे। छात्राओं की विशेष सुविधा के लिए 15 केंद्र और छात्रों के लिए 21 अलग-अलग केंद्र निर्धारित किए गए थे। पूरे प्रदेश भर में करीब 15 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया था। 17 फरवरी से 26 फरवरी के बीच आयोजित हुई इस परीक्षा के लिए राज्य भर में कुल 1762 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। स्टूडेंट इन वेबसाइट्स पर देख सकते हैं रिजल्ट रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र ऑनलाइन इन वेबसाइट्स पर अपना परिणाम देख सकेंगे। biharboardonline.bihar.gov.in results.biharboardonline.com bsebexam.com matricbiharboard.com SMS से भी देख सकेंगे रिजल्ट जिन छात्रों के पास इंटरनेट या स्मार्टफोन की सुविधा नहीं है, वे SMS के जरिए भी अपना रिजल्ट देख सकते हैं। इसके लिए मोबाइल के मैसेजिंग ऐप में जाकर टाइप करें– BIHAR10 ROLLNUMBER (उदाहरण: BIHAR10 123456)। इसे 56263 नंबर पर भेज दें। कुछ ही समय में स्कोरकार्ड आपके मोबाइल पर आ जाएगा।
मप्र के स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी विंग में एक के बाद एक बड़े खरीदी घोटाले सामने आ रहे हैं। लगातार शिकायतों और विभागीय मंत्री उदय प्रताप सिंह की सख्ती के बाद पांच मामलों में से पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा जारी किए गए करीब 100 करोड़ के टेंडर को निरस्त कर दिया गया है। इसके तहत फर्नीचर खरीदा जाना था, जबकि 149 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच शुरू करवा दी गई। लेकिन अभी माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा की गई 95 करोड़ रुपए की खरीदी, लोक शिक्षण संचालनालय में हुई करीब 86 करोड़ रुपए के इंटरएक्टिव पैनल की खरीदी में जांच तक शुरू हो नहीं हो पाई। जानकारी मिली है कि इन मामलों की जांच के लिए पहले एक सीनियर आईएएस की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जानी थी, लेकिन अब मामला पेंडिंग कर दिया गया है। अब जानकारी सामने आ रही है कि लगातार गड़बडिय़ों के चलते स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव संजय गोयल और लोक शिक्षण संचालनालय की आयुक्त शिल्पा गुप्ता को हटाया जा सकता है। इसके पहले स्कूल शिक्षा मंत्री द्वारा नोटशीट लिखने के बाद बमुश्किल डीपीआई संचालक डीएस कुशवाह को हटाकर राज्य शैक्षिक प्रबंधन प्रशिक्षण संस्थान भेजा गया है। वहीं प्रमोद कुमार सिंह को नया संचालक बनाया और उप संचालक पी.के. सिंह बघेल को भी हटा दिया गया। इन पांच मामलों में आई गड़बड़ी सामने
शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालयों को दी गई कंपोजिट ग्रांट राशि खर्च करने के लिए सख्त टाइमलाइन जारी कर दी गई है। विभागीय निर्देशों के अनुसार स्कूलों को अब महज 3 दिन के भीतर करीब 1 करोड़ 55 लाख रुपए की राशि खर्च करनी होगी। वहीं, शनिवार को सर्वर न चलने से स्कूलों के संस्था प्रधान भी परेशान हैं कि बिना सर्वर कैसे इतने समय में काम हो सकेगा। वहीं, आदेश के बाद विद्यालय प्रशासन में हलचल तेज हो गई है और वे आवश्यक कार्यों को तेजी से पूरा करने की जुगत में जुट गए हैं। कार्यक्रम अधिकारी जेपी शर्मा ने बताया कि 27 मार्च की दोपहर 12:30 बजे सीनियर सैकंडरी स्कूलों के खातों में कंपोजिट ग्रांट की राशि पहुंची। इसके बाद से ही विद्यालय स्तर पर खर्च की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। वहीं दूसरी ओर 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होना है, जिसे लेकर शिक्षक नामांकन, कक्षा व्यवस्था, पाठ्यपुस्तक वितरण और अन्य शैक्षणिक तैयारियों में भी जुटे हुए हैं। कंपोजिट ग्रांट के तहत विद्यालयों में मरम्मत कार्य, स्वच्छता व्यवस्था, पेयजल सुविधा, खेल सामग्री, फर्नीचर, बिजली व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक संसाधनों पर खर्च किया जाना है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय सीमा में राशि का उपयोग कर ऑनलाइन पोर्टल पर बिल एवं विवरण अपलोड करना होगा। निर्धारित समय सीमा में राशि खर्च नहीं करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध जवाबदेही तय की जाएगी। वहीं अचानक मिली कम समय सीमा के कारण प्रधानाध्यापक एवं विद्यालय स्टाफ आवश्यक सामग्री की खरीद और कार्यों को पूरा कराने में जुट गए हैं। इस राशि का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से स्वच्छता एक्शन प्लान पर खर्च करना होगा। ग्रांट का उपयोग दरी-पट्टी, बिजली बिल, पेयजल व्यवस्था, स्टेशनरी, चॉक-डस्टर, खेल सामग्री, प्रयोगशाला रखरखाव और इंटरनेट संबंधी कार्यों के लिए किया जा सकेगा। “ग्रांट जुलाई, अगस्त तक आ जानी चाहिए। तभी जाकर इस ग्रांट का सही उपयोग हो पाएगा। आखिरी समय पर ग्रांट आने से संस्था प्रधान फर्जी बिल लगाने का काम करेंगे, जो चीजें उपयोग में नहीं है उसके भी बिल तैयार किए जाएंगे। आखिरी समय पर सर्वर भी दिक्कत करने लगता है।” -होतीलाल जेमन, सियाराम संगठन, जिलाध्यक्ष
शिक्षा मंत्री दिलावर 31 को आएंगे
उदयपुर | शिक्षा मंत्री मदन दिलावर 31 मार्च को उदयपुर दौरे पर रहेंगे। वे 30 मार्च की रात जयपुर से ट्रेन से रवाना होंगे। उनके सुबह 6:55 बजे उदयपुर पहुंचने की संभावना है। प्रवास के दौरान मंत्री आईआईएफएल फाउंडेशन द्वारा निर्मित राउमावी वाटी, राबाउमावि बड़गांव और राबाउमावि बेदला के नए भवनों का उद्घाटन करेंगे। साथ ही गौरेश्वर स्थित राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय में कक्षा-कक्ष, कंप्यूटर लैब और लाइब्रेरी का लोकार्पण भी करेंगे। यह कार्यक्रम दोपहर 2 बजे होगा। कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहेंगे। दिलावर रात 9:50 बजे उदयपुर से जयपुर के लिए रवाना होंगे। प्रशासन ने दौरे को लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं।
सीबीईओ पर कार्रवाई को लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक के विरोध में उतरे शिक्षक
जयपुर| शिक्षा विभाग के अधिकारी फिर अपने आदेश को लेकर चर्चा में हैं। ताजा मामले में माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट के आदेश पर बवाल मच गया। जाट अपने ही पिछले आदेश को भूल गए और उन्हीं के आदेश का पालना कर रहे सांगानेर ग्रामीण ब्लॉक के सीबीईओ को निलंबित करने के निर्देश जारी कर दिए। इसको लेकर शिक्षक संगठनों ने विरोध शुरू किया है और निलंबन आदेश नहीं निकालने की मांग की है। मामले के अनुसार निदेशक सीताराम जाट ने 13 फरवरी को आदेश निकाला था कि वाक्पीठ संगोष्ठियों का आयोजन 27-28 मार्च को किया जाएगा। इसी आदेश की पालना में सांगानेर ग्रामीण के सीबीईओ सीताराम गुप्ता ने 27 मार्च को संगोष्ठी का आयोजन कर लिया। इस दिन जब निदेशक सीताराम जाट प्रवेशोत्सव का निरीक्षण करने सांगानेर ग्रामीण ब्लॉक में पहुंचे तो वाक्पीठ संगोष्ठी के आयोजन पर नाराज हो गए। वे भूल गए कि यह आदेश उन्हीं का है। उन्होंने वाक्पीठ संगोष्ठी के आयोजन को प्रवेशोत्सव में लापरवाही मानते हुए सीबीईओ को निलंबित करने के निर्देश जारी कर दिए। इसके बाद जाट के आदेश का विरोध शुरू हो गया।
मेधावी छात्रों के लिए PM-USP छात्रवृत्ति योजना: 12वीं में 80वें परसेंटाइल से ऊपर वाले छात्रों को मिलेगी ₹20,000 तक की सहायता। जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया।
पटना में दैनिक भास्कर वुमन प्राइड अवॉर्ड-2026 का शनिवार को आयोजन हुआ। समारोह में 29 महिलाओं को सम्मानित किया गया। किसी ने जरूरतमंद मरीजों और उनके परिजनों को बेहद कम कीमत में खाना उपलब्ध कराया, तो किसी ने दूरदराज इलाकों के वंचित बच्चों को शिक्षा से जोड़कर उनके भविष्य को नई दिशा दी। वहीं शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा, उद्यमिता, कला, साहित्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में काम करने वाली कई महिलाओं ने समाज में सकारात्मक बदलाव की मिसाल पेश की है। इन महिलाओं की सफलता की कहानियां सिर्फ उपलब्धियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह समाज के प्रति जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और सेवा भावना का भी उदाहरण हैं। इन्होंने छोटे प्रयासों से बड़े बदलाव किए हैं। मुख्य अतिथि बिहार सरकार के कला, संस्कृति युवा सह पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने समारोह का उद्घाटन किया। वहीं, विशिष्ट अतिथि में योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन विजयालक्ष्मी और पुलिस अधीक्षक (ERSS-112) शीला ईरानी मौजूद रहीं। देखें तस्वीरें… समारोह का उद्देश्य नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा देना ये वार्षिक समारोह समाज-देश के लिए योगदान देने वाली, चुनौतियों से ऊपर उठकर सफलता पाने वाली महिलाओं के लिए है। मंच विभिन्न क्षेत्रों- जैसे उद्यमिता, चिकित्सा, शिक्षा, खेल, और समाजसेवा में कार्य करने वाली महिलाओं के संघर्ष और सफलता की कहानियों को चिह्नित करता है। इसका उद्देश्य नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा देना और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन लाने वाली महिलाओं को प्रोत्साहित करना है। भास्कर के समारोह में सम्मानित होने वालीं महिलाएं… अमृता सिंह-पल्लवी सिंह : पिछले 8 वर्षों से ‘साईं की रसोई' से PMCH में मरीजों और उनके परिजन को मात्र 5 रुपए में खाना उपलब्ध कराकर मानवता की मिसाल पेश की है। अनुरंजना भारद्वाज: सीमित संसाधनों के बावजूद दूरदराज क्षेत्र में अपनी संस्था स्थापित की। इनके प्रयासों से कई वंचित बच्चों को शिक्षा का अवसर और उज्जवल भविष्य की दिशा मिली है। अमरीन खान: पूर्णिया की शिक्षिका, जिन्होंने पिछले 18 साल से स्कूल को सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि बच्चों के सपनों को उड़ान देने वाला परिवार बनाया है। Kidzee Johnny Kids और Mount Litera Zee School की प्रिंसिपल के रूप में सैकड़ों बच्चों के भविष्य को दिशा दे रही हैं। आशा अनुरागिनी पोद्दार: ‘Bamboo Art' से परंपरा-प्रकृति से जुड़ी कला को नई पहचान देने वाली एक महिला उद्यमी हैं। बांस की कला को हजारों महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाया है। डॉ. आयशा फातिमा: वनस्पति विज्ञान में पीएचडी सहित उच्च शिक्षा प्राप्त डॉ. आयशा फातिमा ने शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। गया इंजीनियरिंग कॉलेज और ICMR-NIE, चेन्नई में अपनी सेवाओं के साथ-साथ वे समाज सेवा में भी सक्रिय हैं। वंचित बच्चों को किताबें उपलब्ध कराना और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी में सहयोग करना उनकी संवेदनशीलता का उदाहरण है। डॉ. आयुषी सिन्हा: बेगूसराय की युवा डॉक्टर डॉ. आयुषी सिन्हा ने मात्र 2 साल में 1700 से अधिक सफल सर्जरी कर पहचान बनाई है। इसके साथ ही 15,000 से अधिक मरीजों को निःशुल्क परामर्श देकर समाज सेवा की मिसाल पेश की है। अपनी सेवा-समर्पण से वे स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रेरणा बनकर उभरी हैं। डॉ. बंदना तिवारी: MBBS, MS के साथ पूर्व रजिस्ट्रार, IGIMS की अनुभवी नेत्र विशेषज्ञ हैं। कैटरेक्ट, कॉर्निया और रिफ्रैक्टिव सर्जरी की विशेषज्ञ के रूप में हजारों मरीजों की दृष्टि में नई रोशनी ला रही हैं। वर्तमान में Drishtipunj Eye Hospital की डायरेक्टर हैं। डॉ. दीपशिखा: MBBS और DNB (पीडियाट्रिक्स) से प्रशिक्षित डॉ. दीप्तिशिखा नवजात और बच्चों की सेहत के लिए समर्पित एक संवेदनशील चिकित्सक हैं। उनकी देखभाल और विशेषज्ञता ने कई नन्हीं जिंदगियों को नई उम्मीद और स्रक्षित भविष्य दिया है। अपनी सेवा और समर्पण से वे चाइल्ड केयर के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी मिसाल हैं। डॉ. जूली बनर्जी: 22 वर्षों से कॉरपोरेट नेतृत्व और सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में सक्रिय डॉ. जूली बनर्जी महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देने के लिए उनका योगदान प्रेरणादायी रहा है। अपने कार्यों से वे समाज में बदलाव की एक मजबूत आवाज बनी हैं। कुमारी बबिता: LIC बिहार में 'बेस्ट बिजनेस परफॉर्मर' के रूप में एक अलग पहचान बनाया है। अपनी लगन और अच्छे प्रदर्शन से उन्होंने सफलता की नई मिसाल कायम की है। वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में उनका योगदान प्रेरणादायी है। वैदय लीला गुप्ता: प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद की शक्ति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए वैदय लीला गुप्ता ने लोगों को प्राकृतिक तरीके से स्वस्थ रहने की प्रेरणा दी है। समाज के स्वास्थ्य जागरूकता के लिए उनका योगदान सराहनीय है। डॉ. ममता सिंह: नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। शिक्षा और चिकित्सा दोनों क्षेत्रों में डॉ. ममता सिंह योगदान दे रहीं हैं। इसके साथ ही GOAL Institute की जॉइंट डायरेक्टर हैं। अपने ज्ञान और समर्पण से वे नई पीढ़ी को प्रेरित कर रही हैं। ममता सिंह: अशीर्वाद एंगिकॉन की ममता सिंह कम बजट वाले प्रॉपर्टी प्रोजेक्ट्स से निम्न वर्गीय परिवारों के लिए आवास उपलब्ध कराने का कार्य कर रही हैं। उनके प्रयासों से कई परिवारों को अपने सपनों का घर मिला है। डॉ. मनीषा सिन्हा: पिछले 3 दशकों से शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. मनीषा सिन्हा Radiant International School की प्रिंसिपल हैं। अपने नेतृत्व और अनुभव से उन्होंने विद्यार्थियों के लिए सीखने का माहौल तैयार किया है। मनीषा श्रीवास्तव: भोजपुरी लोक संगीत की लोकप्रिय गायिका हैं। अपनी पारंपरिक और शुद्ध विधाओं- विवाह गीत, सोहर और अन्य लोक गीतों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने शुद्ध और बिना वल्गर भोजपुरी संगीत को बढ़ावा देकर बिहार और हिंदी भाषी क्षेत्रों में अपनी खास पहचान बनाई है। नीलम देवी: मॉरल एजुकेशन आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने और बेटियों की पढ़ाई को समाज की प्राथमिकता बनाने के लिए हमेशा समर्पित रहीं। नीलम देवी अपने प्रयासों से बेटियों के सपनों को शिक्षा से नई उड़ान दे रही हैं। उनका समर्पण समाज में सकारात्मक और स्थायी बदलाव की मिसाल है। निर्मला कुमारी: एलआईसी बिहार में 'बेस्ट बिजनेस परफॉर्मर' के रूप में अपनी मेहनत और अच्छे प्रदर्शन से खास पहचान बनाई है। निर्मला कुमारी ने लगन-समर्पण से वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में सफलता की मिसाल कायम की है। डॉ. नीतू कुमारी नवगीत: लोक गायिका डॉ. नीतू कुमारी नवनीत अपनी आवाज से लोगों के दिलों में खास पहचान बना चुकी हैं। पटना नगर निगम की ब्रांड एम्बेसडर के रूप में वे गीतों से स्वच्छता अभियान का संदेश जन-जन तक पहुंचा रही हैं। कला और सामाजिक जागरूकता को जोड़ने का उनका प्रयास प्रेरणादायी है। पिंकी देवी: एलआईसी बिहार में 'बेस्ट बिजनेस परफॉर्मर' के रूप में अपनी मेहनत और उत्कृष्ट प्रदर्शन से खास पहचान बनाई है। पिंकी देवी ने वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में सफलता हासिल की है। प्रीति सिंह: राजनीतिक परिवार से संबंध होने के बावजूद समाज के प्रति उनका समर्पण और सक्रियता काबिल-ए-तारीफ है। शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उन्होंने अपनी मेहनत और पहल से एक अलग पहचान बनाई है। प्रियंका कुमारी: कंचनजंघा फाउंडेशन फॉर हायर एजुकेशन में असिस्टेंट डायरेक्टर हैं। विदद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और धार्मिक-संवेदनशील व्यक्तित्व के साथ वे जरूरतमंद और गरीब छात्रों की मदद के लिए हमेशा आगे रहती हैं। एक सशक्त महिला के रूप में परिवार और समाज दोनों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। पूनम कुमारी: एलआईसी बिहार में 'बेस्ट बिजनेस परफॉर्मर' के रूप में अपनी मेहनत और बेहतर प्रदर्शन से अलग पहचान बनाने वाली पूनम कुमारी ने सफलता पाई है। ऋतिका गुप्ता: एमबीए (मार्केटिंग) के साथ 16 साल का अंतरराष्ट्रीय अनुभव है। अनुभवी बिजनेस लीडर ऋतिका गुप्ता ने अमेरिका, चीन और भारत जैसे देशों में काम करते हुए नेतृत्व और उद्यमिता की मजबूत पहचान बनाई है। सीमा कुमारी: एलआईसी बिहार में 'बेस्ट बिजनेस परफॉर्मर' के रूप में खास पहचान बनाई है। सीमा कुमारी ने वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में सफलता पाई है। डॉ. सुनीता कुमारी: जहानाबाद में जन्मीं डॉ. सुनीता कुमारी ने मनोविज्ञान के क्षेत्र में शोध किया है। इसके अलावा कामकाजी महिलाओं की समस्याओं को आवाज दी है। उनके प्रयासों से सरकारी कार्यालयों में महिलाओं के लिए रेस्ट रूम की व्यवस्था संभव हो सकी। आज सचिवालय के कई भवनों में ये सुविधा उनके प्रयासों की देन हैं। श्वेता कुमारी: बिहार का अपना डिजिटल प्लेटफॉर्म The Arch Go, जहां घर बैठे चुटकियों में ऑर्डर की सुविधा उपलब्ध है। उद्यमिता और इनोवेशन से लोगों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल है। वीणा अमृत: हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वर्तमान में आरा के डीके कॉलेज की प्राचार्या के हैं। उनका कार्य नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। डॉ. विजया सिंह: प्रोफेसर हैं। विवाह के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आज RK College, मधुबनी में राजनीति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष HOD हैं।
शेखपुरा में जिलाधिकारी शेखर आनंद ने शनिवार को शिक्षा विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की। समाहरणालय में आयोजित इस बैठक में जिले की शैक्षणिक व्यवस्था और छात्र-हित से जुड़ी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान जिलाधिकारी शेखर आनंद ने छात्र-छात्राओं को मिलने वाली छात्रवृत्ति की वर्तमान स्थिति पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रवृत्ति के भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार्य नहीं होगी। संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया इसके अतिरिक्त, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं को पोशाक, पाठ्य-पुस्तकें और अन्य आवश्यक संसाधनों जैसी मूलभूत सुविधाएँ सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। सरकारी विद्यालयों में पठन-पाठन का माहौल बेहतर बनाने के उद्देश्य से, जिलाधिकारी ने पेयजल और विद्युत आपूर्ति को दुरुस्त करने के लिए संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया। उन्होंने विद्यालय भवनों और अन्य भौतिक सुविधाओं की समस्याओं के समाधान हेतु ठोस कार्ययोजना बनाने को भी कहा। संतोषजनक उत्तर नहीं दिए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की समीक्षा के दौरान, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (सर्व शिक्षा अभियान) द्वारा योजनाओं की अद्यतन स्थिति पर संतोषजनक उत्तर नहीं दिए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने पदाधिकारी को पूरी तैयारी के साथ अगली बैठक में उपस्थित होने का निर्देश दिया। इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना), जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (सर्व शिक्षा अभियान), जिले के सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, जिनमें मो. तनवीर आलम भी शामिल थे, और अन्य संबंधित विभागीय कर्मी उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में एक रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी दामोदर सिंह राजपूत पिछले 8 दिनों से लापता हैं। पुलिस को अब तक रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी का कोई सुराग नहीं मिला है। परिवार वाले किसी अनहोनी की आशंका से चिंतित हैं और अब सामाजिक स्तर पर उग्र आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। यह मामला लोरमी थाना क्षेत्र का है। झाफल निवासी 62 वर्षीय दामोदर सिंह राजपूत 21 मार्च की सुबह अचानक लापता हो गए थे। वे शिक्षा विभाग में वरिष्ठ लेखा परीक्षक के पद से कुछ महीने पहले ही रिटायर हुए थे और अपनी पत्नी के साथ मुंगेली में रहते थे। नवरात्रि में दुर्गा पूजा के दौरान, दामोदर सिंह 21 मार्च की सुबह लगभग 10 बजे अपने गांव झाफल जाने के लिए मोटरसाइकिल से निकले थे। उन्होंने सुबह 10 बजकर 52 मिनट पर अपने बड़े भाई बलबीर सिंह से बात की और जल्द ही गांव पहुंचने की जानकारी दी थी। मनोहरपुर के पास लावारिस मिली बाइक हालांकि, जब देर शाम तक दामोदर घर नहीं पहुंचे, तो परिवार वालों ने उनके फोन पर कॉल किया, लेकिन उनका मोबाइल बंद बताने लगा। देर रात तक उनका कहीं कोई पता नहीं चला। अगले दिन उनकी खोजबीन करने पर उनकी बाइक मनोहरपुर के पास लावारिस हालत में पड़ी मिली। मोटरसाइकिल में एक बैग भी लटका हुआ था, जिसे दामोदर सिंह अपने साथ लेकर घर से निकले थे। पुलिस ने मोटरसाइकिल जब्त कर थाने ले आई। बेटे से संपत्ति को लेकर चल रहा था विवाद परिवार वालों ने मामले की रिपोर्ट लालपुर थाना में दर्ज कराई है। दामोदर के भाइयों के अनुसार, लापता दामोदर सिंह का अपने इकलौते बेटे संजय सिंह से संपत्ति को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। इस विवाद को लेकर पहले भी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। 21 मार्च से लापता हुए दामोदर का 8 दिन गुजर जाने के बाद भी कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। पुलिस की साइबर टीम दामोदर के मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल्स खंगाल रही है। परिवार वाले अब इस मामले पर उग्र आंदोलन करने की बात कह रहे हैं, जबकि पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच करने का भरोसा दिला रही है।
डूंगरपुर में रामकृष्ण विवेकानंद सेवा संस्थान का 33वां दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन शनिवार को प्रारंभ हुआ। रामकृष्ण विवेकानंद भाव प्रचार परिषद के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के प्रथम सत्र में विभिन्न संत-महात्माओं का स्वागत किया गया। सम्मेलन में रामकृष्ण आश्रम खेतड़ी के स्वामी आत्मनिष्ठानंद महाराज, रामकृष्ण आश्रम शिमला के स्वामी रत्नमिहिरानंद महाराज और रामकृष्ण आश्रम सादड़ी के स्वामी कृष्णानंदपुरी महाराज उपस्थित रहे। संस्था पदाधिकारियों ने माल्यार्पण एवं उपरना पहनाकर उनका स्वागत किया। राजस्थान सरकार के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर के.के. गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। डॉ. विश्वनाथ दास, कनु भाई और जितेंद्र ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर वासुदेव पडया भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में वागड़ गांधी स्वर्गीय भोगीलाल पंड्या को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मुख्य अतिथि के.के. गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि वे स्वामी विवेकानंद के आशीर्वाद और प्रेरणा से ही अपने जीवन में कार्य कर पा रहे हैं। स्वामी आत्मनिष्ठानंद ने रामकृष्ण परमहंस के जीवन और उनके आध्यात्मिक संदेशों पर प्रकाश डालते हुए सत्संग के महत्व को बताया। स्वामी रत्नमिहिरानंद ने स्वामी विवेकानंद के जीवन आदर्शों पर चर्चा करते हुए महिला शिक्षा को राष्ट्र के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। वहीं, स्वामी कृष्णानंदपुरी ने माता शारदा के जीवन पर प्रकाश डाला और सभी में अच्छाई देखने तथा भक्ति-ध्यान के माध्यम से जीवन को श्रेष्ठ बनाने का संदेश दिया। इस वार्षिक सम्मेलन में उदयपुर, किशनगढ़, कोटा, सादड़ी, जालोर, गंगानगर, अजमेर, बीकानेर और जोधपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। संस्था अध्यक्ष ललित शुक्ला ने आभार व्यक्त किया।
भुसावर: 1 अप्रैल से शुरू होगा नया शिक्षा सत्र, नामांकन के लिए घर-घर पहुंच रहे शिक्षक
भरतपुर के भुसावर में प्रवेशोत्सव अभियान के तहत शिक्षक 03 से 18 वर्ष के बच्चों का डेटा 'प्रवेशोत्सव ऐप' में दर्ज कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं।
जयपुर: निदेशक माध्यमिक शिक्षा का औचक निरीक्षण, सीबीईओ समेत कई अधिकारी निलंबित
निदेशक सीताराम जाट ने सांगानेर और चाकसू के स्कूलों में प्रवेशोत्सव अभियान में लापरवाही मिलने पर सीबीईओ, प्रधानाचार्यों और शिक्षकों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी आज अपना वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करने जा रही है। इस बजट में धर्म प्रचार, शिक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर खास फोकस रहेगा। अमृतसर के SGPC दफ्तर में स्थित तेजा सिंह समुंदरी हाल में दोपहर 12 बजे बजट इजलास शुरू होगा। इसकी अध्यक्षता एसजीपीसी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी करेंगे, जबकि महासचिव शेर सिंह मंडवाला बजट पेश करेंगे। बजट में 9% की बढ़ोतरी, 1500 करोड़ का अनुमान इस बार का बजट पिछले साल के मुकाबले करीब 9 प्रतिशत ज्यादा बताया जा रहा है। 2025-26 में जहां बजट 1386 करोड़ रुपय था, वहीं अब करीब 1500 करोड़ रुपय हो सकता है। बजट में धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ शिक्षा संस्थानों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। धर्म, शिक्षा और सेवा को मजबूत करने का बड़ा कदम साथ ही सच्चखंड श्री हरिमंदिर साहिब समेत अन्य गुरुद्वारों से जुड़ी सरायों के निर्माण और विस्तार को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। कुल मिलाकर, यह बजट धर्म, शिक्षा और सेवा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
समस्तीपुर के मोरवा प्रखंड स्थित मल्लाहों के तीर्थ स्थल बाबा केबल धाम में राजकीय मेले का आयोजन किया जा रहा है। वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी रामनवमी के अवसर पर शुक्रवार देर रात केवल धाम पहुंचे। विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। बाबा के चरणों में मत्था टेककर देश की खुशहाली, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। पूजा-अर्चना के बाद मुकेश सहनी ने आम जनता को संबोधित किया। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि एक रोटी कम खाइए, लेकिन अपने बच्चों को जरूर पढ़ाइए। पढ़ाई बहुत जरूरी है। शिक्षा से बढ़कर कोई हथियार नहीं है। सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया मुकेश सहनी ने आगे कहा कि बाबा केबल महाराज ने अपनी वीरता से अनेक खतरों का सामना किया। समाज को एक नई दिशा दी। उनका जीवन हिन्दू- मुस्लिम एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है । विशेष बात यह है की बाबा केबल महाराज का जन्म और निर्वाण दोनों ही रामनवमी के दिन ही हुआ था।
योग शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों का धरना पांचवें दिन भी जारी
सागर | स्वर्ण जयंती सभागार के सामने योग शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों की क्रमिक भूख हड़ताल शुक्रवार को पांचवें दिन भी जारी रही। विद्यार्थियों का कहना है कि विभाग को जर्जर भवन में स्थानांतरित किए जाने के निर्णय के विरोध में वे धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन के रुख से उनमें असंतोष बढ़ रहा है। आंदोलनकारियों ने बताया कि वे संयम बनाए रखने के लिए आध्यात्मिक परंपरा के तहत सद्बुद्धि यज्ञ के बाद हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं और विभाग की अस्मिता बचाए रखने की मांग पर डटे हैं। इसी क्रम में विद्यार्थियों ने सागर लोकसभा क्षेत्र की सांसद लता वानखेड़े से मुलाकात कर पूर्व में सौंपे गए ज्ञापन की याद दिलाई और आंदोलन की चरणबद्ध रूपरेखा से अवगत कराया। सांसद ने बताया कि उन्होंने पहले भी कुलपति से चर्चा कर विभाग के हित में आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया था। इसके बावजूद विभाग खाली करने के आदेश जारी होने और भूख हड़ताल की जानकारी मिलने पर उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि अब इस मुद्दे पर उच्च अधिकारियों और मंत्रालय स्तर पर चर्चा कर कार्रवाई का प्रयास किया जाएगा। प्रदर्शन स्थल पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों ने पहुंचकर विद्यार्थियों से समस्याओं पर बातचीत की और उनके स्वास्थ्य व हालचाल की जानकारी ली। विद्यार्थियों ने शिक्षकों के संगठन से भी सहयोग की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। भूख हड़ताल को पूर्व छात्रों का समर्थन भी मिला।
माता कर्मा की जयंती पर विधायक ने शिक्षा पर जोर देने के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया
भास्कर न्यूज | खरोरा धरसीवां विधानसभा के ग्राम मुरा बंगोली में भक्त माता कर्मा की जयंती का पर्व बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर क्षेत्रीय विधायक अनुज शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने माता कर्मा की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि माता कर्मा केवल साहू समाज की आराध्य देवी नहीं हैं, बल्कि वे पूरी मानवता के लिए भक्ति और साहस की प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में इतनी शक्ति होती है कि ईश्वर भी भक्त के अधीन हो जाते हैं। जैसे माता कर्मा ने भगवान जगन्नाथ को खिचड़ी खिलाई, यह प्रमाण है कि यदि भक्ति सच्ची हो, तो ईश्वर भी भक्त के वश में होते हैं। विधायक ने कहा कि माता कर्मा ने हमें अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा दी है। आज के समय में हमें अपनी छत्तीसगढ़ी संस्कृति, परंपराओं और बोली-भाषा पर गर्व होना चाहिए। जिस समाज ने अपनी संस्कृति को भुला दिया, उसने अपना अस्तित्व खो दिया। उन्होंने साहू समाज की सराहना करते हुए कहा कि यह समाज न केवल अपनी परंपराओं को सहेजकर रखे हुए है, बल्कि शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विधायक अनुज शर्मा ने नशापान और सामाजिक कुरीतियों को त्याग कर एक स्वस्थ समाज की नींव रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, समाज की असली उन्नति तब होगी जब हमारे हर बेटे और बेटी के हाथ में किताब होगी। आज हम सब मिलकर यह प्रण लें कि हम माता कर्मा के बताए सत्य, भक्ति और सेवा के मार्ग पर चलेंगे। समाज के अंतिम व्यक्ति की मदद करना ही माता के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धा होगी। इस अवसर पर विधायक ने प्रदेश की खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि माता कर्मा का आशीर्वाद छत्तीसगढ़ के हर किसान और नागरिक पर बना रहे। साथ ही विधायक ने साहू समाज भवन में शेड निर्माण की घोषणा की। इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, साहू समाज के पदाधिकारी, ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
देवास : केपी कॉलेज में पीएम एक्सीलेंस का असर, शिक्षा स्तर में आया बड़ा सुधार
मध्य प्रदेश के देवास में स्थित केपी कॉलेज के पीएम एक्सीलेंस होने के बाद शिक्षा के स्तर में काफी सुधार आया है
मंडला जिला मुख्यालय में जनसुनवाई के दौरान एक युवक ने सीधे आईएएस अधिकारी बनने की मांग की थी। प्रशासन ने अब उसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आवश्यक अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई है। यह युवक बिछिया तहसील के ग्राम मांद निवासी अंकित श्रीवास है। अंकित श्रीवास ने जनसुनवाई में बताया था कि वह बीएससी स्नातक है और कई वर्षों से यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करना चाहता है। उसने पूर्व में भी 2-3 बार प्रशासन से किताबें उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। अंकित बोला- किताबों के अभाव में पढ़ाई प्रभावित संसाधनों के अभाव के कारण उसकी पढ़ाई प्रभावित हुई और लगभग 9 वर्ष व्यर्थ हो गए। आर्थिक तंगी के चलते वह इस वर्ष यूपीएससी परीक्षा में शामिल नहीं हो पाया था। युवक की मांग पर कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने सहयोग देने के निर्देश दिए। इन निर्देशों के बाद गुरुवार को शिक्षा विभाग और राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम युवक के घर पहुंची। टीम ने अंकित को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी पुस्तकें प्रदान कीं। आईएएस बनकर मंडला विकास कार्य करना चाहता इस टीम में तहसीलदार अंजनिया अजय श्रीवास्तव, सहायक संचालक शिक्षा विभाग एल.एस. मसराम और एपीसी मुकेश पांडेय शामिल थे। अंकित ने अपनी मंशा व्यक्त करते हुए कहा था कि वह आईएएस बनकर मंडला जिले में रहकर विकास कार्य करना चाहता है। उसका उद्देश्य बेहतर सड़क, स्वास्थ्य सेवाएं और आम लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। ये खबर भी पढ़े… युवक की मांग, सीधे IAS अधिकारी बनाएं: UPSC की तैयारी के लिए किताबें नहीं मंडला जिला मुख्यालय में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान एक अजीब मामला सामने आया। बिछिया तहसील के ग्राम मांद से आए एक युवक ने कलेक्टर से मांग की है कि उसे सीधे आईएएस अधिकारी बना दिया जाए। युवक ने अपना नाम अंकित श्रीवास बताया और कहा कि वह बीएससी कर चुका है। पढ़े पूरी खबर…
मास्टर कैडर यूनियन पंजाब ने सामाजिक शिक्षा की ऑनलाइन मार्किंग रद्द करने की मांग की
भास्कर न्यूज | लुधियाना सामाजिक शिक्षा के ऑनलाइन स्क्रीनिंग पेपर मार्किंग में परेशानियों को देखते हुए टीचर्स ने रद्द करने की मांग की है। मास्टर कैडर यूनियन पंजाब के स्टेट उप प्रधान जगजीत सिंह साहनेवाल और जिला इकाई लुधियाना के महासचिव गुरप्रीत सिंह दोराहा ने बताया कि शिक्षा विभाग समय-समय पर शिक्षा क्रांति के नाम पर नए तजुर्बे कर रहा है, जिसके तहत पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की 10वीं बोर्ड परीक्षा के सामाजिक शिक्षा विषय की उत्तर पत्रिकाओं की ऑनलाइन मार्किंग के बारे में निर्देश जारी किए गए हैं। इस मौके पर जिला लुधियाना इकाई के सीनियर उप प्रधान नवदीप सिंह, उप प्रधान राजविंदर सिंह, वित्त सचिव स्वर्ण सिंह और प्रेस सचिव मनोज कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि अध्यापकों को ऑनलाइन मार्किंग के दौरान कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें मुख्य रूप से इंटरनेट प्रॉब्लम, पेपर मार्किंग की स्लो स्पीड और कई दूसरी टेक्निकल दिक्कतों की वजह से अध्यापकों को मानसिक परेशानी हो रही है। मास्टर कैडर यूनियन के ब्लॉक अध्यक्ष प्रभजोत सिंह, हरजिंदर सिंह खन्ना, नवीन कपिला, हरविंदर सिंह पुरैन, जगमीत सिंह, सिमरजोत सिंह, जिला महिला इकाई की वरिष्ठ उप प्रधान कंवलजीत कौर, सुपरजीत कौर, जसवीर कौर, मनजीत कौर, सुषमा शर्मा ने शिक्षा मंत्री पंजाब और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस ऑनलाइन प्रक्रिया को रद्द कर दिया जाए और केवल ऑफलाइन प्रक्रिया के माध्यम से पेपरों की मार्किंग की जाए, ताकि पेपरों की मार्किंग समय पर और सुचारू रूप से हो सके।
परिक्षेत्र झेरिया यादव समाज के अधिवेशन में समाज के विकास के लिए शिक्षा पर दिया जोर
भास्कर न्यूज | लाहोद लवन परिक्षेत्र झेरिया यादव समाज का वार्षिक अधिवेशन ग्राम चंगोरी पुरीधाम में हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में सामाजिक एकता संगठन की मजबूती और शिक्षा के स्तर को सुधारने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई अधिवेशन के दौरान समाज के भविष्य को संवारने के लिए शिक्षा को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया। समाज ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि आगामी सत्र से कक्षा 10वीं और 12वीं में सर्वोच्च (अधिकतम) अंक प्राप्त करने वाले यादव समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा ताकि युवाओं में शिक्षा के प्रति उत्साह बढ़े कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दुजेराम यादव (वकील) एवं संरक्षक झेरिया यादव समाज जिला बलौदाबाजार- भाटापारा रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता शंकर लाल यादव ने की इस अवसर पर मेलाराम यादव (उपाध्यक्ष, जिला बलौदाबाजार भाटापारा), रामनाथ यादव (अध्यक्ष), लच्छमण यादव (उपाध्यक्ष), रामनारायण यादव (कोषाध्यक्ष), मुन्ना यादव (सचिव) ,कृष्ण कुमार, मल्होच्छ राम, मोहन यादव, मदन यादव, राम यादव, कोमल यादव, कंडे राम यादव,भोज यादव, राजाराम यादव, चिंतामणी यादव सहित बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन सुशील यादव एवं डॉ. गन्नू यादव द्वारा किया गया।
बीपीएस के निदेशक कैप्टन रामचंद्र यादव का निधन, शिक्षा जगत में शोक
सिटी रिपोर्टर | बोकारो बोकारो पब्लिक स्कूल सेक्टर-3 के संस्थापक निदेशक सह शिक्षाविद कैप्टन रामचंद्र यादव का गुरुवार को पटना स्थित पारस हॉस्पिटल में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की खबर से बोकारो सहित पूरे शैक्षणिक क्षेत्र में गहरा शोक है। कैप्टन यादव एक अनुशासित सैनिक, दूरदर्शी शिक्षाविद और समर्पित समाजसेवी के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने भारतीय सेना में कैप्टन के पद पर रहते हुए देश की सेवा की और 1962 के भारत-चीन युद्ध के साथ-साथ 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों में सक्रिय भूमिका निभाई। सेवानिवृति के बाद उन्होंने शिक्षा क्षेत्र को अपनी कर्मभूमि बनाया। बोकारो पब्लिक स्कूल की स्थापना कर उन्होंने हजारों विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखी। पटना स्थित रामकृष्णा चेस्ट हॉस्पिटल में रखे उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग पहुंचे। विद्यार्थियों, शिक्षकों आदि ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। परिवार के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार पटना में गंगा तट पर धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा। इसके बाद 13 दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान बोकारो स्थित उनके निवास पर संपन्न होंगे। विद्यालय की प्राचार्या डॉ. सुधा शेखर ने शोक व्यक्त किया है।
चंपारन सत्याग्रह महोत्सव का आयोजन:स्कूली बच्चों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, शिक्षा पर विशेष ध्यान
मोतिहारी के कोटवा प्रखंड स्थित पट्टी जसौली गांव में चंपारण सत्याग्रह महोत्सव का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और स्कूली बच्चों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। महोत्सव का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह की ऐतिहासिक स्मृतियों को ताजा करना और नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ना था। लोकनृत्य और देशभक्ति नाटकों की प्रस्तुतियां हुईं महोत्सव के दौरान विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने पारंपरिक गीत-संगीत, लोकनृत्य और देशभक्ति नाटकों की प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया और स्वतंत्रता आंदोलन की यादें ताजा कीं। बच्चों द्वारा प्रस्तुत नाटकों में चंपारण सत्याग्रह के संघर्ष और महात्मा गांधी के नेतृत्व को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। छात्राओं ने लगाई पेंटिंग प्रदर्शनी मध्य विद्यालय सुंदरापुर की छात्राओं ने अपनी कला प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए एक पेंटिंग प्रदर्शनी भी लगाई। इन पेंटिंग्स के जरिए चंपारण सत्याग्रह के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया। छात्राओं ने गांधी जी की चंपारण यात्रा, पट्टी जसौली गांव में उनके भ्रमण और प्रवास के दौरान उनके साथियों के चित्रों को चित्रित किया। इन चित्रों ने दर्शकों का ध्यान खींचा और ऐतिहासिक पलों को प्रस्तुत किया। ग्रामीणों ने स्टॉलों से जानकारी प्राप्त की इस महोत्सव में शिक्षा और संस्कृति के साथ-साथ जन जागरूकता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। कार्यक्रम स्थल पर कृषि, बाल विकास, बिजली, सौर ऊर्जा और स्वास्थ्य सहित लगभग 20 विभागों ने अपने स्टॉल लगाए थे। इन स्टॉलों के माध्यम से लोगों को सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीकों और स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई गईं। ग्रामीणों ने इन स्टॉलों में सक्रिय रूप से जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन और आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि ऐसे आयोजन समाज में जागरूकता लाने और युवाओं को देश के इतिहास से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। महोत्सव ने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ विकास और जागरूकता का संदेश भी दिया।
यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने आजमगढ़ जिले के बरदह थाना क्षेत्र में छापेमारी की है। यहां शिक्षा बोर्ड और यूनिवर्सिटी की मार्कशीट सर्टिफिकेट रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर सर्टिफिकेट के साथ दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 217 विभिन्न फर्जी शिक्षा बोर्ड यूनिवर्सिटी की मार्कशीट सर्टिफिकेट रजिस्ट्रेशन और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बरामद किया गया है। उनके पास से 42 फर्जी मोहर और 10 मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है। जिन्हें गिरफ्तार किया गया है उनकी पहचान आजमगढ़ के बरहद थाना के शशि प्रकाश राय उर्फ राजन शर्मा उर्फ शनि पुत्र हरिशंकर राय और ठेकमा गांव के मनीष कुमार राय पुत्र महेन्द्र राय के रूप में हुई है। फर्जी वेबसाइट बनाकर किया रिजल्ट अपलोड किया जाता था यूपी एसटीएफ के अधिकारियों ने बताया की माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट www.upmsp.edu.in है। जबकि कतिपय अवांछित तत्वों / व्यक्तियों की ओर से फर्जी वेबसाइट www.upmsp-edu.in एवं www.upms ponline.in चलाई जा रही थी। इस बेवसाइट को अधिकारिक बेवसाइट से मिलता-जुलता बनाया गया था। इससे आमजन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती थी। इस सम्बन्ध में सचिव, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से प्रयागराज के साइबर थाना में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसी कड़ी में एसटीएफ के डीएसपी शुधान्शु शेखर की निगरानी में टीम गठित कर अभिसूचना संकलन किया जा रहा था। इसी कड़ी में STF की टीम आजमगढ़ पहुंची। यहां विश्वनीय सूत्रों से सूचना प्राप्त हुई कि विभिन्न प्रकार के फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह का सरगना शशि प्रकाश राय है, जो अपने घर पर मौजूद है। इस सूचना पर एसटीएफ टीम ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली से बीएससी पास, उसके बाद बनाया कॉल सेंटर गिरफ्तार अभियुक्त शशि प्रकाश राय ने पूछताछ पर बताया कि उसने दिल्ली से B.Sc किया है। इसका एक गिरोह है। जो विभिन्न प्रकार के फर्जी / कूटरचित दस्तावेज तैयार करता है। इसके पहले यह आगरा में भी काम कर चुका है। वर्ष 2022 में जनपद जौनपुर में एक काॅल सेंटर खोला, जिसमें सोशल मीडिया के माध्यम इस तरह के दस्तावेज बनाने आदि का पोस्ट डाला जाता था। लोग सम्पर्क करते थे, जिसके बाद शशि प्रकाश अपने ममेरे भाई मनीष राय को आवश्यकता अनुसार डिटेल बताता था। इसके बता डिटेल के अनुसार मनीष राय फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। फर्जी बेवसाइट पर कूटरचित मार्कशीट का रिजल्ट भी अपलोड कर दिया जाता था। जिससे लोग वेबसाइट पर रोल नंबर डालकर रिजल्ट ऑनलाइन चेक करते थे, जो वह दस्तावेज (शिक्षा बोर्ड / यूनिर्वसिटी) असली प्रतीत होता था। फर्जी मार्कशीट के आधार पर लोग विभिन्न संस्थानों में नौकरी पा जाते है तो उनका ऑनलाइन / ऑफलाइन वेरीफिकेशन भी कर देता था। फर्जी डॉक्यूमेंट बनाने के लिए नाम पर होती थी 15 से 20 हजार की वसूलीफर्जी मार्कशीट व अन्य प्रपत्र आदि बनवाने के लिए 15 से 20 हजार रुपये लेता था। जिसे सभी लोग आपस में बांट लेते थे। लोगों को फर्जी दस्तावेज कोरियर के माध्यम से भेजते थे। अब तक लगभग 6-7 हजार से अधिक विभिन्न प्रकार के फर्जी दस्तावेज तैयार किया जा चुका है। यूपी एसटीएफ आरोपियों के लिंकेज की भी तलाश कर रही है।
बूंदी में शिक्षा एवं पंचायतीराज मंत्री ने डाइट परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को जीवन में उतारने का संदेश दिया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश विरोधी शिक्षा देने वाली शिक्षण संस्थाओं को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने बूंदी के शिक्षकों व शिक्षाविदों द्वारा रचित पुस्तक 'हाड़ी रानी गमक' का विमोचन भी किया। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। अपने संबोधन में मंत्री ने छुआछूत और जातिवादी मानसिकता को पूरी तरह खत्म करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के मंदिर में सभी वर्गों का समान अधिकार है और यहां कोई ऊंचा या नीचा नहीं होता। उन्होंने समाज के पिछड़े और दलित वर्गों को मुख्यधारा में साथ लेकर चलने का आह्वान किया। इसके साथ ही, उन्होंने देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी उत्पाद खरीदने पर जोर दिया।
स्कूल शिक्षा विभाग के डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों के बाद अब ट्राइबल के 65 हजार शिक्षकों की नौकरी भी शिक्षक पात्रता परीक्षा के कारण खतरे में आ गई है। जनजातीय कार्य विभाग के कमिश्नर ने स्कूल शिक्षा विभाग की तर्ज पर ट्राइबल में पदस्थ शिक्षकों की परीक्षा के निर्देश जारी कर दिए हैं। जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त तरुण राठी द्वारा आज जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी संभागीय उपायुक्त, सहायक आयुक्त और जिला संयोजक जनजातीय कार्य विभाग व अनुसूचित जाति विभाग इस परीक्षा की जानकारी ट्राइबल के शिक्षकों को देंगे। निर्देशों में कहा गया है कि प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य है और इसे दो वर्षों में पास करना होगा। यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश (सिविल अपील क्रमांक 1385/2025, 1386/2025 व अन्य याचिकाएं) के पालन में लिया गया है। साथ ही शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधानों के अंतर्गत यह व्यवस्था लागू की जा रही है। निर्देशों का कड़ाई से पालन करने पर जोर जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त ने कहा है कि आयुक्त लोक शिक्षण द्वारा 2 मार्च को जारी निर्देश में जुलाई-अगस्त 2026 में विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित कराने की योजना बनाई गई है। इसलिए विभाग के सभी संभागीय उपायुक्तों, सहायक आयुक्तों एवं जिला संयोजकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों की परीक्षा में भागीदारी तय कराएंं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए, ताकि पात्रता परीक्षा में सभी अपात्र शिक्षक शामिल होकर नियमानुसार योग्यता प्राप्त कर सकें। सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन की तैयारी दूसरी ओर ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगोर ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में इसको लेकर रिव्यू पिटीशन दायर की जा रही है। इसके लिए आरएस झा रिटायर्ड हाईकोर्ट जस्टिस पंजाब और हरियाणा को संगठन की ओर से दस्तावेज सौंपे जा चुके हैं। सिंगोर ने कहा कि ट्राइबल में 95 हजार शिक्षक हैं, जिसमें से 65 हजार शिक्षकों को परीक्षा देना होगी। सिंगोर ने कहा कि चूंकि हमारा एसोसिएशन वेलफेयर के रूप में काम करता है और आदिवासी बच्चों के हितों के लिए एक्टिव है। इसलिए कोर्ट में यह भी दलील दी जा रही है कि सरकार के निर्णय से ट्राइबल के स्कूल खाली हो जाएंगे। अनुभवी शिक्षक बाहर हो जाएंगे और अतिथि शिक्षकों के चलते शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होगी। सिंगोर ने कहा कि अगले तीन दिन के अवकाश खत्म होते ही पिटीशन दायर हो जाएगी।
अयोध्या की बीकापुर विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुने गए डॉ. अमित कुमार सिंह चौहान ने अपने चार वर्षों के कार्यकाल को विकास के लिहाज से ऐतिहासिक बताया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में सड़कों, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में व्यापक काम हुए हैं, जिससे आम जनता को सीधा लाभ मिला है। बीकापुर, मसौधा, सोहावल और हैरिंग्टनगंज के गांवों को जोड़ने के लिए 100 से अधिक सड़कों का निर्माण कराया। इसके अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से जरूरतमंद मरीजों के इलाज के लिए चार वर्षों में 3.50 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता दिलाई गई। उन्होंने कहा कि हैरिंग्टनगंज में डिग्री कॉलेज का निर्माण, बीकापुर में ड्रग वेयर हाउस की स्थापना और एक मानसिक मंदित प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना उनके प्रमुख कार्यों में शामिल है। विधायक का दावा है कि उनके कार्यकाल में बिकापुर विधानसभा क्षेत्र में जितना विकास काम हुआ है, उतना पिछले कई वर्षों में कभी नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि जनता ने उनके कामकाज पर भरोसा जताते हुए उन्हें विजयी बनाया था। उन्होंने यह भी कहा कि कई ऐतिहासिक काम पूरे हो चुके हैं, जबकि कुछ योजनाओं के लिए शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं। पढ़िए सवाल-जवाब में डॉ. अमित सिंह चौहान का इंटरव्यू… सवाल: अपने चार साल के कार्यकाल को आप 10 में से कितने अंक देंगे?जवाब: 2017 से पहले और उसके बाद के समय में बड़ा अंतर आया है। पहले जनप्रतिनिधि और जनता के बीच दूरी रहती थी, जिसे हमने खत्म करने का काम किया। पिछले नौ वर्षों (माता शोभा सिंह चौहान के कार्यकाल सहित) में हमने लगातार जनता के बीच रहकर काम किया है। हम खुद को अंक नहीं दे सकते, यह जनता तय करेगी। हैरिंग्टनगंज में डिग्री कॉलेज बनकर तैयार है। बीकापुर में ड्रग वेयर हाउस बन गया है, जहां पूरे जिले की दवाएं स्टोर हो रही हैं। इसके अलावा मानसिक मंदित प्रशिक्षण केंद्र भी स्थापित किया गया है, जहां दिव्यांग बच्चों के रहने की सुविधा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी हमने महत्वपूर्ण कार्य किया है। मेरी कोशिश रही कि कोई भी गरीब परिवार इलाज से वंचित न रहे। जिनके पास आर्थिक संसाधन नहीं थे, उन्हें मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता दिलाई गई। चार वर्षों में 3.50 करोड़ रुपए की मदद जरूरतमंदों को दिलाई गई। सवाल: आपके क्षेत्र में सबसे बड़ा काम कौन सा रहा?जवाब: पहले क्षेत्र में अधिकांश सड़कें कच्ची थीं और गांवों के बीच संपर्क का अभाव था। हमारी प्राथमिकता कनेक्टिविटी बढ़ाना थी। ढेमवा पुल से सोहावल तक सड़क निर्माण कराया गया। सुचित्तागंज बाजार की सड़क का चौड़ीकरण किया गया। बड़ा गांव-ढेवड़ी होते हुए मिल्कीपुर मार्ग का विस्तार हुआ। सोहावल-ढेवड़ी-रौनाही मार्ग का निर्माण हुआ। इसके अलावा सुचित्तागंज से मसौधा चीनी मिल तक सड़क का चौड़ीकरण और उच्चीकरण किया गया। बीकापुर में जलालपुर-चनहा और जलालपुर-शाहगंज मार्ग का निर्माण कराया गया।कुल मिलाकर 100 से अधिक सड़कों का निर्माण हुआ, जिससे आम जनता और व्यापारियों को बड़ी राहत मिली। सवाल: ऐसा कौन सा काम है जो अभी पूरा नहीं हो सका?जवाब: विकास कार्यों की कोई सीमा नहीं होती। पिलखांवा से ढेवड़ी जाने वाले मार्ग और भरतकुंड से जुड़ने वाली सड़क का निर्माण अभी बाकी है। रूसिया माफी पुल भी एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जिससे मसौधा से भदरसा होते हुए बीकापुर की दूरी 10 से 14 किलोमीटर कम हो जाएगी। इसके अलावा लखनऊ-अयोध्या रोड से देवराकोट, सारंगापुर, रामकोट ग्रंट, सीबार से हनुमान मंदिर तक और बड़ा गांव बाजार की सड़क पर जल्द काम शुरू होगा। इसके अलावा कुछ और कार्य शासन को भेजे गए है। सवाल: क्या 2027 में पार्टी आपको फिर से उम्मीदवार बनाएगी?जवाब: मैं भारतीय जनता पार्टी का एक कार्यकर्ता हूं। 2022 में पार्टी ने मुझे मौका दिया और जनता ने आशीर्वाद दिया। 2027 में पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, उसे पूरी पिष्ठा और ईमानदारी से निभाऊंगा। सवाल: क्षेत्र के पौराणिक और आध्यात्मिक स्थलों का कितना विकास हुआ?जवाब: हमारी विधानसभा में कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं, जहां देशभर से श्रद्धालु आते हैं। भरतकुंड के विकास के लिए 2 करोड़ रुपए स्वीकृत कराए गए हैं। सीता कुंड का विकास कार्य जारी है। मां ज्वाला देवी मंदिर और महादेवपुर मंदिर का भी विकास कराया गया है। महादेवपुर में गेस्ट हाउस की सुविधा भी विकसित की गई है। इसके अलावा कई अन्य मंदिरों और पौराणिक स्थलों का भी विकास हुआ है। सवाल: रसोई गैस की किल्लत को लेकर लोग परेशान हैं?जवाब: इस समस्या को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। जल्द ही समस्या का समाधान होने की उम्मीद है। सवाल: UGC को लेकर सामान्य वर्ग में विरोध की स्थिति दिख रही है?जवाब: भाजपा सरकार सर्व समाज के हित में काम करती है। किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। सरकार इस मुद्दे पर बातचीत कर रही है और सभी वर्गों का ध्यान रखा जाएगा। डॉ. अमित सिंह चौहान का दावा है कि बीकापुर विधानसभा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। वहीं, अधूरे कार्यों को जल्द पूरा करने का भरोसा भी उन्होंने जताया है।
सम्भल में बुजुर्गों के सम्मानजनक जीवन और उनकी बेहतर देखभाल को लेकर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। “गरिमा और देखभाल के लिए शिक्षा” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में सामाजिक कल्याण विभाग के अधिकारियों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने भाग लिया। इस दौरान वरिष्ठ नागरिकों से जुड़ी चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान की रिसर्च ऑफिसर तान्या सेन गुप्ता ने कहा कि बुजुर्गों को गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर दिया कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी निभाए, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। सेन गुप्ता ने यह भी बताया कि बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता की शुरुआत परिवार से होनी चाहिए, ताकि यह सोच पूरे समाज में प्रसारित हो सके। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें प्रस्तुत शोध पत्रों और निष्कर्षों के आधार पर भविष्य की कार्ययोजना का निर्धारण होगा। सम्मेलन में वक्ता नेहा ठाकुर ने चिंता जताई कि आज के समय में कई बुजुर्गों को अकेला छोड़ दिया जाता है अथवा उन्हें वृद्धाश्रम भेजा जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को स्कूली स्तर से ही बुजुर्गों के सम्मान और देखभाल की शिक्षा दी जानी चाहिए। इससे नई पीढ़ी में संवेदनशीलता विकसित होगी और पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी को कम किया जा सकेगा। इस दौरान वक्ताओं ने 'एजिंग इन प्लेस' की अवधारणा पर भी बल दिया, जिसका अर्थ है कि बुजुर्गों को अपने घर और परिवार के बीच सम्मानपूर्वक जीवन जीने की सुविधा मिलनी चाहिए। सम्मेलन में यह भी कहा गया कि तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी और घटती सक्रिय जनसंख्या के बीच संतुलन स्थापित करना एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। सम्मेलन का निष्कर्ष यह रहा कि बुजुर्गों की देखभाल केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक कर्तव्य है। सामूहिक प्रयासों से वरिष्ठ नागरिकों का जीवन अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और खुशहाल बनाया जा सकता है।
सिंगरौली जिले में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के वितरण के लिए प्रशासन ने एक नई प्राथमिकता व्यवस्था लागू की है। यह व्यवस्था अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी, जिसका मुख्य उद्देश्य आवश्यक सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करना है। जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, कमर्शियल गैस वितरण को चार श्रेणियों में बांटा गया है। पहली प्राथमिकता में 30 प्रतिशत आवंटन शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थानों को दिया जाएगा। इन संस्थानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस, जेल और जरूरी सेवाओं को 35% गैस आवंटन दूसरी प्राथमिकता में 35 प्रतिशत गैस पुलिस, जेल, सुरक्षा बल, महिला एवं बाल विकास और सामाजिक न्याय विभाग के आवासीय संस्थानों, एयरपोर्ट, रेलवे सेवाओं और दीनदयाल रसोई योजना को उपलब्ध कराई जाएगी। तीसरी प्राथमिकता के तहत 25 प्रतिशत गैस होटल, रेस्टोरेंट, केटरिंग सेवाओं, ढाबों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए निर्धारित की गई है। वहीं, चौथी प्राथमिकता में 5 प्रतिशत गैस फार्मास्युटिकल, फूड प्रोसेसिंग, पोल्ट्री फीड और बीज प्रसंस्करण उद्योगों को दी जाएगी। अन्य संस्थानों और उद्योगों के लिए आवश्यकतानुसार अलग से निर्णय लिया जाएगा। गैस कालाबाजारी पर सख्ती, नियमित जांच के निर्देश कलेक्टर गौरव बैनल ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के अवैध भंडारण, कम वजन, कालाबाजारी और घरेलू उपयोग में अवैध डायवर्जन पर कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभाग नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करें, ताकि आमजन को कोई परेशानी न हो और व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।
अमृतसर ग्रुप ऑफ कॉलेजेस में शिक्षा रत्न सम्मान समारोह
अमृतसर| अमृतसर ग्रुप ऑफ कॉलेजेस और सहोदया स्कूल कॉम्प्लेक्स के सहयोग से श्री गुरु रामदास ऑडिटोरियम में ‘शिक्षा रत्न सम्मान समारोह’ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पंजाब विधानसभा के स्पीकर सरदार कुलतार सिंह संधवां और सीबीएसई लुधियाना के क्षेत्रीय अधिकारी संजय कुमार बिष्ट विशेष रूप से शामिल हुए। इस अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए एमवीएन स्कूल की प्रिंसिपल रीना ठाकुर को ‘शिक्षा रत्न सम्मान' से नवाजा गया। समारोह में शिक्षा जगत की कई नामी हस्तियों ने भाग लिया और शिक्षकों के समर्पण की सराहना की।
शाजापुर में 16 मई से 1 जून तक संघ शिक्षा वर्ग
शाजापुर | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मालवा प्रांत का संघ शिक्षा वर्ग 16 मई से 1 जून तक होगा। वर्ग स्थल सरस्वती विद्या मंदिर, दुपाड़ा रोड रहेगा। मालवा प्रांत के संघचालक डॉ. प्रकाश शास्त्री ने शिक्षा वर्ग की तैयारियों की शुरुआत कर भूमिपूजन किया। संघ शिक्षा वर्ग देशभर में कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण के लिए लगाए जाते हैं। इन वर्गों में संघ की कार्य पद्धति का प्रशिक्षण दिया जाता है। शारीरिक प्रशिक्षण होता है।
शिक्षा समिति की बैठक में सीसीटीवी की मांग
भास्कर न्यूज | समस्तीपुर प्रखंड के मध्य विद्यालय बेला पंचरुखी में विद्यालय शिक्षा समिति की बैठक अध्यक्ष अनीता देवी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में विद्यालय की सुरक्षा, पोषण वाटिका निर्माण और मध्याह्न भोजन व्यवस्था सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।इस दौरान समिति की सचिव कंचन देवी ने विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। सदस्यों ने प्रधानाध्यापक मुकेश कुमार से विद्यालय परिसर में सीसीटीवी कैमरा लगाने की मांग की, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। बैठक में शिक्षिका खुशबू राय द्वारा पोषण वाटिका के नवनिर्माण में सहयोग का आग्रह किया गया, जिसे सभी सदस्यों ने सहमति दी। साथ ही सहजन के पौधे विद्यालय परिसर के बाहर भी लगाने का निर्णय लिया गया, ताकि अधिक हरियाली और पोषण का लाभ मिल सके। गैस की समस्या के बावजूद मध्याह्न भोजन योजना को बाधित नहीं होने दें।
किताबों से आगे बढ़ी शिक्षा...अब स्किल, रिसर्च व वैल्यू पर फोकस
गैप को भर पाना आसान नहीं हमारे पास अभी जो एजुकेशन पॉलिसी है, आने वाले समय में वह एजुकेशन पॉलिसी बदल जाएगी। साल 2047 तक जब हम एनईपी 2020 को अचीव कर लेंगे, तब विश्व कोई दूसरा एजुकेशन पॉलिसी में आगे बढ़ चुका होगा। इस गैप को भर पाना आसान नहीं है। -एसके सिन्हा, डिप्टी डायरेक्टर, चिरंजीवी कंसेप्ट स्कूल बच्चों-पेरेंट्स की काउंसलिंग बच्चों में मेंटल हेल्थ की समस्या का सबसे बड़ा कारण स्क्रीन टाइम है। बच्चें आज रील्स देखते हैं जिससे उनकी मेमोरी शॉर्ट हो गई है और वे अकेला महसूस करते है। बच्चे फोन का इस्तेमाल सिर्फ एक घंटे करें व पेरेंट्स की निगरानी में करें। स्कूलों में भी बच्चों और पेरेंट्स की काउंसलिंग होती है। -रंजना स्वरूप, डायरेक्टर एकेडमिक्स, शारदा ग्लोबल स्कूल फीमेल रोल मॉडल की कमी नहीं हमारे समाज में फीमेल रोल मॉडल की कोई कमी नहीं है, हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी क्षमता साबित की है। जरूरत सिर्फ इस बात की है कि उनकी शिक्षा को और मजबूत किया जाए, ताकि वे आगे बढ़कर समाज को नई दिशा दे सकें। -किरण यादव, प्रिंसिपल, नीरजा सहाय डीएवी स्कूल पेरेंट्स पढ़ाई में भागीदार हों एनईपी के तहत स्कूल बाल-वाटिका के माध्यम से बच्चों को जादुई-पिटारा की तरह पढ़ा रहे है। बच्चों पर पढ़ाई का दबाव नहीं है। पैरेंट्स भी बच्चो की पढ़ाई में भागीदारी निभा रहे है। आज सीनियर क्लास के ज्यादातर बच्चे एआई, यूट्यूब से चीजें देख रहे हैं। बाल वाटिका से पेरेंट्स की भागीदारी हो। -शालिनी विजय, प्रिंसिपल, गुरुगोविंद सिंह स्कूल मानसिक स्वास्थ्य जरूरी बच्चों की शिक्षा में स्कूल के साथ-साथ पैरेंट्स का भी योगदान होता है। पैरेंट्स अपने बच्चों के साथ समय बिताएं। उनके साथ रात का खाना खाएं और पूरे दिन क्या-क्या हुआ उसपर बात करें। इससे मानसिक स्वास्थ्य की समस्या को कम किया जा सकता है। -सूरज लाल, वाइस प्रिंसिपल, सलूजा गोल्ड स्कूल वैल्यू आधारित एजुकेशन नई शिक्षा नीति वैल्यू आधारित शिक्षा को बढ़ावा देती है। इसमें समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखती है। नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए सरकार, विश्वविद्यालय, शिक्षक और छात्रों के बीच बेहतर समन्वय के साथ-साथ पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होगा। -कुमार अभिषेक, अरका जैन यूनिवर्सिटी स्कूलों में बुनियादी सुविधा हो झारखंड के अनेक ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। पर्याप्त कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और स्वच्छ पेयजल जैसी सुविधाओं की कमी शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। -डॉ. रवि प्रकाश तिवारी, प्रिंसिपल, डीएवी नंदराज अपनी मातृभाषा जानना जरूरी एनईपी में मातृभाषा में शिक्षा देने की बात कही गई है लेकिन एक क्लास में इतने सारे बच्चे होते हैं, सबकी मातृभाषा समान नहीं होती है। ऐसे में मातृभाषा में पढ़ा पाना टीचर और स्कूल दोनों के लिए संभव नहीं है। सभी को अपनी मातृभाषा जानना जरूरी है लेकिन आज के दौर में अंग्रेजी जानना सबसे ज्यादा जरूरी है। -अभिषेक हरित, लेडी केसी रॉय मेमोरियल स्कूल बच्चे बगैर डरे अपनी बात रखें स्कूलों में बच्चों को लाइफ स्किल व इमोशनल एजुकेशन देने की बहुत ज्यादा जरूरत है। वर्तमान समय में बच्चे जिस तरह से सोशल मीडिया से जुड़े हुए हैं, बहुत कुछ सीख रहे हैं अच्छा-बुरा। हमें बच्चों को अच्छा माहौल देने की जरूरत है, ताकि बच्चे अपनी समस्या बता सकें। -मोनिका श्रीवास्तव, सच्चिदानंद मॉडल पब्लिक स्कूल शिक्षक शोध पर ध्यान दें नई नीति में शोध को प्राथमिकता दी गई है। लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संस्थानों को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है। शिक्षकों को प्रशासनिक कार्यों से मुक्त कर उन्हें शिक्षण और शोध पर अधिक ध्यान देने का अवसर देना चाहिए। टीचिंग क्षमता बढ़ाने कार्यक्रमों में शामिल करना चाहिए। -शारदा सिन्हा, एचआर विशेषज्ञ, एक्सएलआरआई सॉफ्ट स्किल पर ध्यान दें नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में समन्वय की कमी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने सॉफ्ट स्किल के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि छात्रों के समग्र विकास के लिए इसे पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाना जरूरी है। वर्तमान में हार्ड स्किल पर अधिक फोकस दिया जाता है। -डॉ अभिषेक त्रिपाठी, एमिटी यूनिवर्सिटी मल्टीपल एंट्री व एक्जिट सिस्टम नई शिक्षा नीति 2020 शिक्षा व्यवस्था की पुरानी कमियों-खामियों को दूर करने का प्रयास है। सिर्फ सख्ती के साथ कार्यान्वित करने की जरूरत है। इसमें सिलेबस को उद्योग जगत की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे छात्रों को बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। -प्रो. गोपाल पाठक, डायरेक्टर जनरल, सरला बिरला यूनिवर्सिटी पढ़ाई से संबंधित कई योजनाएं हैं एजुकेशन कॉन्क्लेव-2026 में चर्चा करते विभिन्न स्कूलों के प्रिंसिपल-डायरेक्टर। शहरी व ग्रामीण स्कूल में काफी फर्क है एआई का कब और कितना इस्तेमाल करें सुविधा के अनुसार पढ़ाई जारी रख सकेंगे आज लड़कियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। पढ़ाई से संबंधित सरकार की बहुत सारी योजनाएं है उन योजनाओं के बारे में उन्हें जागरूक रहने की जरूरत है, ताकी भविष्य में उन्हें परेशानी ना हो और वे हर क्षेत्र का नेतृत्व करें। -नेहा दास, एकेडमिक हेड, ओडीएम सफायर ग्लोबल स्कूल ग्रामीण क्षेत्र में स्थित स्कूल और शहरी क्षेत्रों में मौजूद स्कूल की शिक्षण प्रणाली में फर्क देखने को मिलता है। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में पैरेंट्स भी ज्यादा जागरूक नहीं होते है ऐसे में बच्चों के साथ-साथ पैरेंट्स को भी समझाने में ज्यादा समय लगता है। -सीमा चितलांगिया, प्रिंसिपल, सृजन वैली स्कूल आज स्कूलों में लोवर क्लास से ही एआई का इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन ऐसे में स्कूलों की जिम्मेदारी बनती है कि एआई के इस्तेमाल पर सीमाएं भी हों। यह टीचर के साथ पेरेंट्स को बताना होगा कि एआई का कब और कितना इस्तेमाल करें। -संतोष कुमार, संत जेवियर्स स्कूल, डोरंडा मल्टीपल एंट्री और एक्जिट सिस्टम शिक्षा को अधिक लचीला बनाएगा। इससे छात्र अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ाई जारी रख सकेंगे। एजुकेशन के लेकर बच्चे या शिक्षक ही नहीं पेरेंट्स को भी कॉन्शस होना होगा। मदद करनी होगी। -प्रो. एसपी अग्रवाल, कुलपति, साईंनाथ यूनिवर्सिटी झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि इंसान को बेहतर इंसान बनाना है। सच्ची शिक्षा वह है, जो भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता, समानता और संवेदनशीलता की सीख दे।बालिका शिक्षा में आए बदलाव की सराहना करते हुए कहा कि साइकिल से स्कूल जाती बच्चियां नए भारत की तस्वीर पेश करती हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार पर चिंता जताते हुए कहा कि त्वरित लाभ की मानसिकता से विकास कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिसका असर आम लोगों को भुगतना पड़ता है। स्कूल जाती बच्चियां नए भारत की तस्वीर सिटी रिपोर्टर} भारतीय शिक्षा व्यवस्था एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी है। अब किताबों तक सीमित ज्ञान के बजाय स्टूडेंट्स को वास्तविक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। बदलते समय में यह साफ हो गया है कि केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं, बल्कि कौशल, नवाचार, रिसर्च और मानवीय मूल्यों से लैस शिक्षा ही भविष्य की जरूरत है। ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ इसी सोच को केंद्र में रखकर तैयार की गई है, जो शिक्षा को न केवल लचीला और समावेशी बनाती है, बल्कि इसे रोजगार और समाज से भी सीधे जोड़ती है। बुधवार को रांची के होटल बीएनआर चाणक्य में दैनिक भास्कर रांची ने ‘एजुकेशन कॉन्क्लेव-2026’ के तहत नई शिक्षा नीति 2020 या ‘एनईपी-2020’ विषयक कार्यक्रम में वित्त मंत्री, कुलपतियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने इस नीति के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। दैनिक भास्कर एजुकेशन कॉन्क्लेव-2026
गीता की शिक्षाओं से जीवन में संतुलन का संदेश दिया
भास्कर न्यूज | लुधियाना बीसीएम आर्य स्कूल, ललतों में भगवद गीता फॉर यूथ पुस्तक का भव्य विमोचन किया गया। इस पुस्तक की लेखिका शिक्षाविद कृतिका सेठ हैं, जो बीसीएम आर्य स्कूल, ललतों की प्रिंसिपल हैं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सीबीएसई लुधियाना के क्षेत्रीय अधिकारी संजय कुमार बिष्ट उपस्थित रहे। इसके अलावा राकेश जैन स्कूल अध्यक्ष, हरमीत वरियाच सिटी कोऑर्डिनेटर, संजय खोसला स्कूल मैनेजर, विनोद सहगल उपाध्यक्ष, डॉ. परमजीत कौर निदेशक साथ ही प्रबंधन समिति के मौजूद रहे। मुख्य अतिथि संजय कुमार बिष्ट ने अपने संबोधन में इस पहल की सराहना की और युवाओं के निर्माण में मूल्य आधारित शिक्षा के महत्व पर बल दिया। लेखिका कृतिका सेठ ने पुस्तक के पीछे अपनी सोच साझा करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य विद्यार्थियों को भावनात्मक रूप से मजबूत और आध्यात्मिक रूप से जागरूक बनाना है। उन्होंने बताया कि गीता की शिक्षाएं युवाओं को एक सार्थक और संतुलित जीवन जीने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। कार्यक्रम का समापन प्रेरणादायक संदेश के साथ हुआ, जिसमें विद्यार्थियों और शिक्षकों को अपने दैनिक जीवन में भगवद गीता की शिक्षाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
मंदसौर में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) परिसर में बुधवार को एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल के तहत उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने बुधवार देर शाम 1 करोड़ 86 लाख 27 हजार रुपये की लागत से बनने वाले सर्वसुविधायुक्त ऑडिटोरियम का भूमिपूजन किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियो की उपस्थिति रही। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि डाइट संस्थान में ऑडिटोरियम की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसके निर्माण से न केवल शैक्षणिक गतिविधियों को गति मिलेगी, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी एक नया मंच मिलेगा। उन्होंने कहा कि मंदसौर का डाइट पहले से ही प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है और इस नई सुविधा से इसकी प्रतिष्ठा और अधिक बढ़ेगी। विद्यार्थियों को दिया प्रेरणादायक संदेश उप मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे प्रदेश की पहचान बनें और अपने कार्यों से जिला, प्रदेश एवं देश का नाम रोशन करें। उन्होंने अभिभावकों को शुभकामनाएं देते हुए शिक्षकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया और उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों का सम्मान किया। गुणवत्ता से समझौता नहीं करने के निर्देश निर्माण कार्य को लेकर जगदीश देवड़ा ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि ऑडिटोरियम निर्माण में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए। यदि आवश्यकता हो तो संशोधित प्राक्कलन (रिवाइज एस्टीमेट) प्रस्तुत किया जाए, ताकि कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जा सके। इस दौरान राज्य स्तरीय ओलंपियाड में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र एवं शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कलेक्टर अदिति गर्ग, जिला पंचायत अध्यक्ष दुर्गा विजय पाटीदार, विधायक विपिन जैन, जिला योजना समिति सदस्य राजेश दीक्षित, पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया, नगर पालिका अध्यक्ष रमादेवी बंशीलाल गुर्जर, जिला पंचायत उपाध्यक्ष मनु प्रिया विनीत यादव सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। डाइट में बनने वाला यह आधुनिक ऑडिटोरियम न केवल शैक्षणिक गतिविधियों को सुदृढ़ करेगा, बल्कि जिले में शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में भी सहायक सिद्ध होगा।
उत्तर प्रदेश सरकार के 9 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा अटल सभागार में जनपद स्तरीय ‘हमारा आंगन-हमारे बच्चे’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि राज्य मंत्री (ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा) डॉ. सोमेंद्र तोमर ने मां शारदा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में विभाग की 9 वर्षों की उपलब्धियों को वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से दर्शाया गया। इस दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने मुख्य अतिथि डॉ. सोमेंद्र तोमर को बुके, पौधा एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया, जबकि जिला परियोजना अधिकारी सुनील कुमार ने प्रतीक चिन्ह देकर अभिनंदन किया। कार्यक्रम के तहत जनपद के विभिन्न विकास क्षेत्रों से उत्कृष्ट कार्य करने वाले एक-एक नोडल शिक्षक, शिक्षक संकुल, आंगनबाड़ी, सुपरवाइजर एवं शिक्षामित्र सहित कुल 65 प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। इसके अलावा प्रत्येक विकास क्षेत्र से एक-एक बीआरपी (कुल 13) को मीना मंच गतिविधियों के बेहतर संचालन के लिए सम्मान मिला। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय के शिक्षकों को भी उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। आगे बढ़ते हुए प्रत्येक विकास क्षेत्र से तीन-तीन उत्कृष्ट शिक्षकों (कुल 39) को भी मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित किया गया। साथ ही एकेडमिक रिसोर्स पर्सन को भी जनपद एवं विकास क्षेत्र स्तर पर सराहनीय कार्य के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर एसआरजी नीलम पंकज, विनीत गोयल और मनोज वशिष्ठ को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने मुख्य अतिथि का आभार व्यक्त करते हुए सभी शिक्षकों को उनके समर्पण और उत्कृष्ट कार्य के लिए बधाई दी तथा भविष्य में इसी प्रकार निष्ठा से कार्य करने का आह्वान किया।
बेसिक शिक्षा विभाग ने सरकार के नवनिर्माण के 9 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय स्थित अटल सभागार में जनपद स्तरीय 'हमारा आंगन-हमारे बच्चे' कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर ने मां शारदा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के 9 वर्ष की उपलब्धियों को एक वीडियो के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने डॉ. सोमेंद्र तोमर को बुके, पौधा और शॉल भेंट कर सम्मानित किया। इसी क्रम में, जिला परियोजना अधिकारी सुनील कुमार ने भी मंत्री का अभिनंदन प्रतीक चिन्ह देकर किया। कार्यक्रम में कुल 65 व्यक्तियों को सम्मानित किया गया, जिनमें प्रत्येक विकास क्षेत्र से एक नोडल शिक्षक संकुल, एक उत्कृष्ट शिक्षक संकुल, एक उत्कृष्ट आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एक उत्कृष्ट सुपरवाइजर और एक उत्कृष्ट शिक्षामित्र शामिल थे। इसके अतिरिक्त, मीना मंच संबंधी गतिविधियों के उत्कृष्ट संचालन के लिए प्रत्येक विकास क्षेत्र से एक बीआरपी सहित कुल 13 लोगों को सम्मानित किया गया। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय के उत्कृष्ट शिक्षकों को भी इस कड़ी में सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि ने प्रत्येक विकास क्षेत्र से तीन उत्कृष्ट शिक्षकों सहित कुल 39 शिक्षकों को भी सम्मानित किया। इसी क्रम में, उत्तर प्रदेश शासन के श्रम एवं सेवायोजन विभाग की दिशा-दृष्टि के अनुसार क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय, मेरठ द्वारा एक दिवसीय रोजगार मेले का भी आयोजन किया गया। इस रोजगार मेले में तकनीकी क्षेत्र की 9 प्रतिष्ठित कंपनियों, जिनमें श्रीराम पिस्टन एंड रिंग्स, सारू कॉपर, हाईबोन एलिवेटर्स प्रा. लि. और जैन क्लीनटेक प्रमुख थीं, ने भाग लिया। इन कंपनियों ने 84 अभ्यर्थियों के साक्षात्कार संपन्न किए और चयन के प्रथम स्तर पर 49 अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया। रोजगार मेले में चयनित अभ्यर्थियों को ऊर्जा मंत्री सोमेंद्र तोमर ने बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उपस्थित 12 चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए। युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्होंने कहा कि शुरूआत जरूरी है, छोटी हो या बड़ी, क्योंकि तभी मंजिल तक पहुंचा जा सकता है।
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बुधवार को मेगा पेरेंट-टीचर मीटिंग (पीटीएम) का आयोजन किया गया। इस दौरान छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच खुला संवाद हुआ, जिसमें बच्चों की पढ़ाई, उनकी कमजोरियों और सुधार के उपायों पर चर्चा की गई। कई स्कूलों में बड़ी संख्या में अभिभावक पहुंचे और अपने बच्चों की शैक्षणिक प्रगति की जानकारी ली। हालांकि कुछ स्कूलों में अभिभावकों की उपस्थिति कम रहने पर शिक्षा मंत्री ने नाराजगी भी जताई। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने जयपुर के कुछ सरकारी स्कूलों में आयोजित पीटीएम का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने गणगौरी बाजार और ब्रह्मपुरी स्थित सरकारी स्कूलों का दौरा किया और वहां अभिभावकों तथा छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। शिक्षा मंत्री ने गणगौरी बाजार स्थित पीएम श्री स्कूल और ब्रह्मपुरी के राजकीय विद्यालय में शिक्षकों और अभिभावकों के साथ संवाद करते हुए शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के सुझाव भी दिए। उन्होंने स्कूलों की व्यवस्थाओं और शिक्षकों की कार्यप्रणाली को भी नजदीक से देखा। सरकारी स्कूलों की स्थिति में हो रहा सुधार इस दौरान दैनिक भास्कर से खास बातचीत में दिलावर ने कहा कि शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित की गई पेरेंट-टीचर मीटिंग फिलहाल अव्यवस्थित नजर आई है। इसे और बेहतर तरीके से आयोजित करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं। दिलावर ने कहा कि निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्कूल के प्रिंसिपल से लेकर स्टाफ तक सभी की कार्यप्रणाली को समझा है। जो कर्मचारी अपने दायित्वों का ठीक से निर्वहन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों की दशा और दिशा दोनों में सुधार हो रहा है और कई स्कूलों में बेहतर परिणाम भी सामने आ रहे हैं। हालांकि कुछ जगहों पर लापरवाही भी देखने को मिली है, जिसे जल्द ठीक किया जाएगा। कई स्कूलों में नहीं मिले टीचर निरीक्षण के दौरान कई स्कूलों में कुछ शिक्षक अनुपस्थित भी पाए गए, जिस पर शिक्षा मंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कई शिक्षक अन्य सरकारी ड्यूटी का हवाला देकर स्कूल में मौजूद नहीं रहते, जबकि उन्हें अपनी जिम्मेदारी के अनुसार स्कूल में समय देना चाहिए। दिलावर ने बताया कि कई शिक्षकों की चुनाव से जुड़ी जिम्मेदारी के तहत बीएलओ की ड्यूटी लगाई जाती है, लेकिन यह आधे दिन की ड्यूटी होती है। ऐसे में शिक्षकों को आधे दिन स्कूल में उपस्थित रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में शिक्षा विभाग ने चुनाव आयोग को प्रस्ताव भेजा है कि शिक्षकों से पहले स्कूल में पूरा दिन काम लिया जाए, उसके बाद ही उन्हें अन्य जिम्मेदारियां दी जाएं। निरीक्षण के दौरान ब्रह्मपुरी स्थित एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल के साथ उनकी बहस भी हो गई। हालांकि इस मामले में उन्होंने कहा कि प्रिंसिपल ने अपनी बात उन्हें बता दी है और पूरे मामले को समझ लिया गया है।
मध्य प्रदेश राज्य शिक्षा केंद्र ने बुधवार को कक्षा 5वीं और 8वीं का वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने वल्लभ भवन में एक कार्यक्रम में बटन दबाकर परिणाम जारी किए। इस बार प्रदेश में 5वीं का उत्तीर्ण प्रतिशत 95.14% और 8वीं का 93.83% रहा। हालांकि, शिवपुरी जिला दोनों कक्षाओं में प्रदेश के टॉप-10 जिलों से बाहर रहा। प्रदेश स्तर पर जारी इन परिणामों में छात्राओं ने छात्रों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। कक्षा 8वीं के परिणाम में शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह का गृह जिला नरसिंहपुर प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। शिवपुरी जिले के प्रदर्शन की बात करें तो कक्षा 5वीं में जिले का प्रदर्शन औसत से बेहतर रहा। यहां कुल 37,755 छात्र परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें से 36,614 छात्र उत्तीर्ण हुए। इस प्रकार जिले का उत्तीर्ण प्रतिशत 96.98% दर्ज किया गया और इसे प्रदेश में 16वां स्थान मिला। वहीं, कक्षा 8वीं में जिले का प्रदर्शन कमजोर रहा। इस कक्षा में कुल 30,287 छात्र परीक्षा में बैठे, जिनमें से 28,411 छात्र सफल हुए। जिले का उत्तीर्ण प्रतिशत 93.81% रहा और इसे प्रदेश में 32वां स्थान प्राप्त हुआ, जिसके कारण शिवपुरी टॉप-10 जिलों की सूची से बाहर रहा। प्रदेश स्तर पर जहां 5वीं में 95.14% और 8वीं में 93.83% छात्र पास हुए हैं, वहीं शिवपुरी का 5वीं में प्रदर्शन राज्य औसत से बेहतर रहा। हालांकि, 8वीं कक्षा के परिणामों में जिले को सुधार की आवश्यकता दिखाई दे रही है। जिला शिक्षा केंद्र के डीपीसी दफेदार सिंह सिकरवार ने सभी सफल छात्रों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बताया कि 5वीं में पोहरी विकासखंड और 8वीं में शिवपुरी विकासखंड ने बेहतर प्रदर्शन किया है। सिकरवार ने इन परिणामों को शिक्षकों और विद्यार्थियों की मेहनत का फल बताया और आगामी सत्र में और बेहतर परिणाम लाने के लिए शिक्षकों से अधिक मेहनत तथा गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
भिलाई नगर निगम का आज विशेष बजट सत्र चल रहा है। जिसमें महापौर नीरज पाल वित्तीय वर्ष 2026–27 का बजट पेश करेंगे। बीजेपी पार्षद पीयूष मिश्रा ने शिक्षा उपकर की राशि का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि, नियम विरुद्ध काम हुआ। आर्थिक अपराध की श्रेणी में पूरा मामला आएगा। जिस पर महापौर नीरज पाल ने जवाब दिया। वहीं, कांग्रेस पार्षद के. जगदीश ने कहा कि, अगर भ्रष्टाचार हुआ है, तो कार्रवाई करें। बीजेपी की सरकार है। सिर्फ बोलने से नहीं होता कि भ्रष्टाचार हुआ है। आयुक्त राजीव पांडेय ने कहा कि, आगे से शिक्षा उपकर की राशि का शिक्षा के लिए ही खर्च करेंगे। 4 करोड़ के आस पास राशि मिली है। बीएसपी से इस बार 3 करोड़ रुपए भवन अनुज्ञा की राशि मिली है। बीजेपी पार्षद पीयूष मिश्रा ने कहा कि, बजट की जानकारी सभा में नहीं रखी गई। सभी जानकारी के साथ दोबारा सभा शुरू करने की मांग की थी। जिससे सदन में गहमागहमी का माहौल बन गया। कई पार्षदों ने सभा स्थगित करने की मांग की। वहीं, नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा 4 साल के भ्रष्टाचार का हिसाब लेकर पहुंचे। उन्होंने मीना बाजार मैदान बेचने समेत कई मुद्दे उठाए। कांग्रेस पार्षद राजेश ने विधायक प्रतिनिधि से कहा कि, इस सदन का कोई नियम है या नहीं। सदन का मान सम्मान है या नहीं। मिनट-टू-मिनट अपडेट के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
पीथमपुर महिला एवं बाल विकास परियोजना नालछा के सेक्टर सागौर में बुधवार को 'विद्यारंभ प्रमाण पत्र' वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम उन बच्चों के लिए था जिन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों में अपनी प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ECCE) का पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अब ये बच्चे आगामी सत्र में औपचारिक विद्यालयों में प्रवेश के लिए पात्र हो गए हैं। कार्यक्रम में बच्चों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए, जिससे उन्हें स्कूल जाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में शिक्षा के प्रति उत्साह जगाना और प्रारंभिक शिक्षा के क्षेत्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व महिला बाल विकास विभाग के प्रयासों को पहचान दिलाना था। कार्यक्रम में पर्यवेक्षक चंद्रिका सोनी ने प्रारंभिक शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि बच्चों की नींव जितनी मजबूत होगी, उनका भविष्य उतना ही उज्ज्वल होगा। सोनी ने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए उन्हें नियमित रूप से आंगनबाड़ी भेजने की सलाह दी। इस अवसर पर बच्चों के लिए 'बाल चौपाल' का भी आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न मनोरंजक खेल और गतिविधियां शामिल थीं, जिससे बच्चों ने खेल-खेल में सीखने का आनंद लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अनिता सोनगरा, चंद्रकांता, दुर्गा, किरण सोनी, ज्योति जाटवा और अन्य विभागीय सदस्य मौजूद रहे।
बुरहानपुर जिले के नेपानगर क्षेत्र स्थित 10 हजार की आबादी वाले वन ग्राम बाकड़ी में हाईस्कूल न होने के कारण पिछले 8 सालों में 200 से अधिक बालिकाएं शिक्षा से वंचित रह गई हैं। जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर पहाड़ी इलाकों से सटे इस गांव में केवल पहली से आठवीं तक का ही सरकारी स्कूल है, जिससे आगे की पढ़ाई के लिए 5 से 12 किलोमीटर दूर जाने में असमर्थ छात्राएं पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं और कई बालिकाओं का विवाह भी हो गया है। वर्तमान में इस समस्या को लेकर नेपानगर पालिका की पूर्व अध्यक्ष मधु चौहान ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हाईस्कूल खोलने की मांग की है, वहीं जनजातीय विभाग के सहायक आयुक्त ने विचार कर शासन को प्रस्ताव भेजने की बात कही है। 5 से 12 किमी दूर हैं स्कूल, सुरक्षा और आर्थिक स्थिति के कारण छूट रही पढ़ाई गांव में केवल पहली से आठवीं कक्षा तक का स्कूल संचालित है। नौवीं कक्षा की पढ़ाई के लिए छात्राओं को करीब 5 किमी दूर सीवल या लगभग 12 किमी दूर नावरा जाना पड़ता है। इतनी अधिक दूरी होने के कारण अभिभावक अपनी बेटियों को आगे की पढ़ाई के लिए बाहर भेजने से कतराते हैं। बालक तो दूर के स्कूलों में चले जाते हैं, लेकिन बालिकाओं के लिए यह संभव नहीं हो पाता। केवल वही छात्राएं आगे पढ़ पाती हैं जिनका चयन उत्कृष्ट या एकलव्य विद्यालयों में होता है, जिनकी संख्या बहुत सीमित होती है। अधिकांश बच्चे आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण भी आठवीं के बाद अपनी पढ़ाई वहीं छोड़ देते हैं। 12 किमी के दायरे में 2 हायर सेकंडरी और 1 हाईस्कूल क्षेत्र में महज 12 किमी की दूरी पर 2 हायर सेकंडरी और एक हाईस्कूल है, लेकिन जहां आदिवासी बच्चों को हाईस्कूल की आवश्यकता सबसे अधिक है वहां स्कूल नहीं खोला जा रहा है। भातखेड़ा में हायर सेकंडरी और पलासुर में हाईस्कूल है, जिनकी दूरी बाकड़ी से महज 5 किमी है। वहीं, 10 किमी दूर नावरा में हायर सेकंडरी और हाईस्कूल दोनों संचालित हैं। इसी तरह डाभियाखेड़ा में भी हाईस्कूल है, लेकिन बाकड़ी में हाईस्कूल नहीं है। 2018 में हुआ था सर्वे, पौने दो एकड़ जमीन भी मिली थी बाकड़ी में हाईस्कूल खोलने के लिए वर्ष 2018 में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) के माध्यम से एक सर्वेक्षण किया गया था। यह सर्वे जन शिक्षक राजेश कापड़े ने नावरा स्कूल के प्राचार्य के साथ मिलकर किया था। उस समय एक व्यक्ति ने स्कूल निर्माण के लिए पौने दो एकड़ जमीन देने की सहमति भी दी थी, लेकिन यह प्रस्ताव बाद में ठंडे बस्ते में चला गया। शिक्षा विशेषज्ञों का सुझाव- 8वीं के बाद 9वीं की पात्रता दें शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अगर जनजातीय विभाग के सहायक आयुक्त चाहें तो कक्षा आठवीं के बाद उसी स्कूल में कक्षा नौवीं शुरू करा सकते हैं। इसके लिए उन्हें सिर्फ डाइस कोड को लेकर प्रक्रिया करनी होगी। इसके बाद हाईस्कूल खोला जाना खुद ही जरूरी हो जाएगा और क्षेत्र की बालिकाएं हर साल शिक्षा से वंचित होने से बच जाएंगी। जयस ने उठाए सवाल, पूर्व नपा अध्यक्ष ने सीएम को लिखा पत्र जयस कार्यकर्ता सुरेश जमरा ने बताया कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे होते हैं, लेकिन बाद में उन पर अमल नहीं होता है। वे लंबे समय से हाईस्कूल की मांग कर रहे हैं, जो अब तक पूरी नहीं हुई है। वहीं, नेपानगर पालिका की पूर्व अध्यक्ष मधु चौहान ने हाल ही में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि बाकड़ी में हाईस्कूल खोला जाना चाहिए। सहायक आयुक्त बोले- विभाग को भेजेंगे प्रस्ताव इस पूरे मामले पर जनजातीय विभाग के सहायक आयुक्त भरत जांचपुरे ने कहा, बाकड़ी में हाईस्कूल के लिए प्रयास करेंगे। वैसे भातखेड़ा, नावरा, डाभियाखेड़ा में हाईस्कूल है, लेकिन फिर भी अगर विद्यार्थियों को समस्या आती है तो इस पर विचार कर विभाग को अगवत कराया जाएगा और प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा।
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से राज्य के सभी सरकारी स्कूलों नामांकन के अनुसार पूरे सत्र में होने वाले कार्यों के लिए बजट दिया जाता है। लेकिन इस बार वित्तीय वर्ष समाप्त होने में 7 दिन पहले बजट जारी हुआ जिसको 31 मार्च तक खर्च करना होगा नहीं तो लैप्स हो जाएगा। परिषद की ओर से सत्र 2025-26 के लिए जारी इस कंपोजिट स्कूल ग्रांट में राज्य भर के 50 हजार 318 स्कूलों के लिए नामांकन अनुसार कुल 118.43 करोड़ रुपए जारी की गई है। जिसमें भरतपुर और डीग जिले के 1119 स्कूलों के लिए 3.10 करोड़ रुपए जारी किए गए है। जिसमें भरतपुर के 598 स्कूलों के 1.55 करोड़ और डीग के 521 स्कूलों लिए भी 1.55 करोड़ रुपए जारी किए गए है। इस बजट का सही उपयोग के लिए राज्य परियोजना निदेशक अनुपमा जोरवाल ने गाइडलाइन जारी की है। इस राशि का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से स्वच्छता एक्शन प्लान पर खर्च करना होगा। ग्रांट का उपयोग दरी-पट्टी, बिजली बिल, पेयजल व्यवस्था, स्टेशनरी, चॉक-डस्टर, खेल सामग्री, प्रयोगशाला रखरखाव और इंटरनेट संबंधी कार्यों के लिए किया जा सकेगा। स्वच्छता पर 10 प्रतिशत खर्च करना अनिवार्य शिक्षा परिषद ने साफ किया है कि राज्य के सभी स्कूलों को कुल ग्रांट का न्यूनतम 10 प्रतिशत हिस्सा स्वच्छता एक्शन प्लान पर खर्च करना होगा। इसमें शौचालय की सफाई, फिनाइल,टॉयलेट क्लीनर, साबुन, सैनिटाइजर और कचरा पात्र जैसी वस्तुओं पर खर्च करना अनिवार्य है। बालिकाओं के लिए डिसपेंसर और इन्सीनरेटर के रखरखाव को भी प्राथमिकता दी गई है। इस राशि से स्टाफ या ऑफिस के लिए फर्नीचर, जलपान, उत्सव आयोजन या फोटोग्राफी पर खर्च नहीं कर सकेंगे। यदि बजट का दुरुपयोग पाया गया, तो संस्था प्रधान से वसूली की जाएगी। नामांकन के अनुसार स्कूलों को बजट आवंटन की संख्या शिक्षा सत्र के शुरुआत में ही जारी हो राशि: मोहर सिंह शिक्षा परिषद द्वारा सरकारी स्कूलों को जारी की जाने वाली ग्रांट की राशि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में सात दिन शेष जब जारी हुई है। जिसके कारण सभी स्कूल संस्था प्रधानों द्वारा भुगतान किया जाएगा। राशि पूरी खर्च नहीं हो पाएगी शिक्षा सत्र की शुरुआत यानी जुलाई माह में ही जारी करनी चाहिए जिससे स्कूलों में आवश्यकतानुसार सामग्री खरीदी जा सके।
रायन स्कूल की प्रिं. कंचन मल्होत्रा ‘शिक्षा रत्न' से सम्मानित
अमृतसर| रायन इंटरनेशनल स्कूल, अमृतसर की प्रिंसिपल कंचन मल्होत्रा को ‘शिक्षा रत्न सम्मान 2026' से सम्मानित किया गया है। अमृतसर ग्रुप ऑफ कॉलेजेस द्वारा आयोजित एक भव्य समारोह में पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान ने उन्हें इस सम्मान से नवाजा। इस अवसर पर सीबीएसई लुधियाना के अवर सचिव महेश कुमार सतीजा, अमृतसर के मेयर जतिंदर सिंह मोती भाटिया और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आदर्श पाल विज सहित कई दिग्गज शिक्षाविद मौजूद रहे। प्रधानाचार्या कंचन मल्होत्रा ने रायन संस्थान के अध्यक्ष डॉ. एएफ पिंटो और प्रबंध निदेशक डॉ. ग्रेस पिंटो का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग का परिणाम है। उन्होंने कहा कि स्कूल भविष्य के लिए तैयार शिक्षार्थियों के पोषण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए मानक स्थापित करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहेगा।
पेसिफिक यूनिवर्सिटी : सुवर्णा पुरोहित को पीएचडी, जनजातीय शिक्षा पर किया शोध
उदयपुर | शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए सुवर्णा पुरोहित ने पेसिफिक यूनिवर्सिटी से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। उनका शोध विषय ‘जनजाति क्षेत्र के विद्यार्थियों की अध्ययन आदतों, शैक्षिक समायोजन एवं शैक्षिक उपलब्धि के मध्य संबंध’ रहा, जिसे शिक्षा क्षेत्र में समसामयिक और उपयोगी माना जा रहा है। शोध कार्य डॉ. सुयश चतुर्वेदी और डॉ. प्रहलाद सोनी के मार्गदर्शन में पूरा हुआ।
यूपी के 1.86 लाख शिक्षक अब शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) दे सकेंगे। मंगलवार को शिक्षा सेवा चयन आयोग ने यूपीटेट के विज्ञापन और निर्देश पुस्तिका में तीन बड़े संशोधन किए हैं। इन संशोधनों के बाद बीएड पास अभ्यर्थी सिर्फ उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिए ही शिक्षक पात्रता परीक्षा ही दे सकेंगे। वे प्राथमिक (1 से 5) के लिए अब पात्र नहीं होंगे। इसके अलावा बीएड/बीटीसी में अध्ययनरत छात्र भी अब इस परीक्षा में बैठ सकेंगे। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 20 मार्च को प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5 तक) और उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8 तक) की परीक्षा का कार्यक्रम घोषित किया था। यूपी में ये परीक्षा चार साल बाद होने जा रही है। इस बार की परीक्षा में 15 से 20 लाख आवेदकों के शामिल होने का अनुमान है। इसमें प्रदेश के 1.86 लाख प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय के टीचर भी शामिल हैं, जो अब तक टीईटी पास नहीं कर पाए हैं। हालांकि इन टीचरों में 50 हजार ऐसे शिक्षक भी थे, जो टीईटी की परीक्षा में बैठने के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यता नहीं रखते हैं। इन शिक्षकों के सामने संकट ये है कि सितंबर 2027 से पहले उन्होंने टीईटी पास नहीं किया तो उनकी नौकरी छिन जाएगी। दैनिक भास्कर ने 23 मार्च को यूपी के 1.86 लाख शिक्षकों की नौकरी पर 'संकट': शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसमें टीईटी परीक्षा के लिए अपात्र 50 हजार शिक्षकों के दर्द को प्रमुखता से उठाया था। अब मंगलवार को शिक्षा सेवा चयन आयोग ने तीन संशोधनों के माध्यम से इन 50 हजार शिक्षकों को भी टीईटी परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया है। आयोग ने ये तीन महत्वपूर्ण संशोधन किए तीन से चार लाख आवेदकों को बड़ी राहत राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के महामंत्री शिवशंकर सिंह ने बताया कि आयोग के तीन बड़े संशोधनों से टीईटी के लिए अपात्र 50 हजार सहायक अध्यापकों के साथ ही तीन से चार लाख उन अभ्यर्थियों को भी बड़ी राहत मिली है, जो अभी बीएड या बीटीसी में प्रवेश लिए होंगे। --------------------- ये खबर भी पढ़ें- यूपी के 1.86 लाख शिक्षकों की नौकरी पर 'संकट':TET परीक्षा दें या फिर SIR और जनगणना के टारगेट पूरे करें यूपी में 1.86 लाख शिक्षक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास नहीं हैं। ये शिक्षक प्राथमिक (कक्षा 1 से 5 तक) और उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8 तक) विद्यालयों के हैं। इनमें 50 हजार तो ऐसे हैं, जो न्यूनतम योग्यता न होने के कारण परीक्षा में बैठ भी नहीं सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने TET पास करने के लिए सितंबर, 2027 की समय सीमा तय कर रखी है। ऐसे में यूपी में चार साल बाद जुलाई में होने वाली UPTET-2026 शिक्षकों के लिए एक बड़ा मौका है। मुश्किल ये है कि SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की गुत्थी में उलझे इन शिक्षकों को समझ नहीं आ रहा है कि मई में होने वाले राष्ट्रीय जनगणना की ड्यूटी के बीच वे परीक्षा की तैयारी कब करेंगे? परीक्षा का शेड्यूल क्या है, शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना क्यों जरूरी है? सेवा चयन आयोग ने यूपी टीईटी में शिक्षकों के लिए क्या शर्तें जोड़ी हैं? शिक्षक संघ क्यों 2011 से पहले कार्यरत शिक्षकों के लिए अनिवार्य किए जा चुके टीईटी का विरोध कर रहे हैं? पढ़िए ये रिपोर्ट…
गाजियाबाद में दो महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य शहर के विकास, फिटनेस और श्रमिकों के हितों को बढ़ावा देना रहा। इन कार्यक्रमों में उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण शामिल हुए। उन्होंने दोनों कार्यक्रमों में भाग लेकर लोगों को फिटनेस, शिक्षा और सुरक्षा के प्रति जागरूक होने का संदेश दिया। विकास भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंडियन ऑयल गाजियाबाद हेरिटेज रन 2026 की आधिकारिक टी-शर्ट लॉन्च की गई। इस दौरान राज्यमंत्री असीम अरुण भी मौजूद रहे।जानकारी दी गई कि यह रन 11 अप्रैल 2026 को आयोजित होगा। इसे उत्तर प्रदेश का पहला नाइट हेरिटेज रन बताया जा रहा है, जिसमें प्रतिभागी रात के समय दौड़ का अनुभव ले सकेंगे। यह दौड़ गाजियाबाद के एलिवेटेड रोड और ग्रीन सिटी फॉरेस्ट क्षेत्र में आयोजित होगी। इस बड़े आयोजन में 21.1 किमी हाफ मैराथन, 10 किमी, 5 किमी, 3 किमी वॉक और 2 किमी व्हीलचेयर रेस जैसी अलग-अलग श्रेणियां रखी गई हैं। अनुमान है कि इसमें 10 हजार से ज्यादा लोग भाग लेंगे। प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के लिए लगभग 28.91 लाख रुपये के नगद इनाम भी रखे गए हैं। इस आयोजन का उद्देश्य लोगों को फिट रहने के लिए प्रेरित करना और गाजियाबाद को खेल और फिटनेस के क्षेत्र में आगे बढ़ाना है। इसके अलावा दुर्गावती सभागार में राज्यमंत्री असीम अरुण की मौजूदगी में श्रमिकों के साथ संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस दौरान श्रमिकों को उनके अधिकारों और सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई। राज्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक सबसे पहले अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखें और काम करते समय हेलमेट, बेल्ट और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करें। उन्होंने यह भी कहा कि श्रमिकों के बच्चों को समाज कल्याण विभाग के स्कूलों में दाखिला दिलाया जाएगा, ताकि उन्हें बेहतर शिक्षा मिल सके |श्रमिकों से अपील की गई कि वे खुद भी जागरूक बनें और अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करें। साथ ही कंपनियों और फैक्ट्रियों से कहा गया कि वे श्रमिकों को समय पर वेतन और जरूरी सुविधाएं दें। इन दोनों कार्यक्रमों का उद्देश्य गाजियाबाद में फिटनेस, शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर जीवन को बढ़ावा देना है।
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की 10वीं कक्षा का रिजल्ट का प्रतिशत कोरोना काल के बाद हर साल बढ़ रहा है। पिछले साल के मुकाबले इस साल भी 1.17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अगर वर्ष 2020 के रिजल्ट से तुलना करें तो इसमें 13.59 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसको लेकर दैनिक भास्कर ने एक्सपर्ट से बात की। एक्सपट्र्स ने रिजल्ट बढ़ने के कई कारण बताए। इसका सबसे बड़ा कारण नई शिक्षा नीति और पेपर पैटर्न में बदलाव है। नई शिक्षा नीति में सिलेबस कम करने के साथ कोर्स भी सरल किया गया। उसे बच्चों के इंटरेस्ट का बनाया गया, जिससे पढ़ाई का बोझ घटा और स्कोर करना आसान हुआ। ऐसे में रिजल्ट प्रतिशत बढ़ा। साथ ही पेपर में मल्टीपल चॉइस प्रश्नों की संख्या व स्टूडेंट्स का डिजिटल आईक्यू बढ़ना भी बताया है। इसके अलावा बोर्ड की ओर से जारी ब्ल्यू प्रिंट बेस्ड मॉडल पेपर है। जो अब समय से जारी हो रहा है, जिससे स्टूडेंट्स और टीचर्स उन्हीं चैप्टर पर फोकस कर रहे हैं, जो ज्यादा मार्क्स के हैं। वहीं साइंस और इंग्लिश में सवालों की बढ़ी संख्या, सरल पैटर्न व रेग्यूलर एग्जाम से भी परिणाम में सुधार हुआ है। एक्सपर्ट ने बताए ये कारण… नई शिक्षा नीति कोरोना काल के बाद नई शिक्षा नीति लागू की गई और इसमें कई बदलाव हुए। इसमें सिलेबस को कम करने के साथ कोर्स भी सरल किया गया है। उसे बच्चों के इंटरेस्ट का बनाया गया, जिससे पढ़ाई का बोझ घटा और स्कोर करना आसान हुआ। ऐसे में रिजल्ट प्रतिशत बढ़ा। ब्लूप्रिंट और मॉडल पेपर बोर्ड पहले से पेपर पैटर्न, मार्किंग स्कीम और सैंपल पेपर जारी करता रहा था, लेकिन कुछ वर्षों से ब्ल्यू प्रिंट बेस्ड मॉडल पेपर समय पर दे रहा है। इससे टीचर्स और स्टूडेंट्स को तैयारी करने का समय मिल रहा है। इस कारण भी रिजल्ट में सुधार हुआ। इससे बच्चों को तैयारी की स्पष्ट दिशा मिलती है। ऑब्जेक्टिव और MCQ आधारित सवाल ज्यादापेपर में ऑब्जेक्टिव और बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQ) की संख्या बढ़ी है। पहले चार प्रश्न ही आते थे। अब इनकी संख्या 18 की गई है। ऐसे में स्कोर करना आसान हो गया है। इनमें अनुमान और एलिमिनेशन से भी अंक मिल जाते हैं। इसके अलावा फिल इन द ब्लैंक यानी खाली स्थान भरने वाले ज्यादा प्रश्न आने लगे हैं। डिजिटल आईक्यू में बढ़ोतरी बच्चों में कोरोनाकाल के बाद बच्चे टेक्नो फ्रेंडली हो गए हैं। जिससे डिजिटल आईक्यू में भी बढ़ोतरी हुई है। पेरेंट्स भी जागरूक हुए हैं। स्कूल के अलावा खुद पढ़ा रहे या कोचिंग करवाई जाती है। बच्चों में प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ी है। रेग्यूलर टेस्ट और मार्गदर्शन स्कूलों ने अपने परिणाम में सुधार करने के लिए नियमित टेस्ट लेना शुरू किया है। वहीं स्टूडेंट्स पर फोकस भी बढ़ाया है, ताकि जिन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा तो उन पर विशेष ध्यान दे सकें। स्मार्ट क्लास और विजुअल लर्निंगवीडियो, एनीमेशन और प्रेजेंटेशन से कठिन सब्जेक्ट भी आसानी से समझ में आते हैं। कई स्कूलों में जिन बच्चों को कम समझ में आता है, उनके लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की जाती है। इससे परिणाम में सुधार हुआ। अब जानते हैं कि किस साल कितना रहा रिजल्ट…. राजस्थान बोर्ड - 10वीं के टॉप 5 जिले …………. पढे़ं ये खबर भी… 10वीं में जुड़वा बहनों के 98 % नंबर आए:सब्जी बेचने वाले की बेटी के 98.67 प्रतिशत; कोटा में परिणाम देख डांस करने लगे स्टूडेंट कॉन्स्टेबल की बेटी ने AI से सुलझाए सवाल:10वीं में किसान की बेटी के 99.83% नंबर आए; मजदूर मां के बेटे ने भी चौंकाया
माध्यमिक शिक्षा मंडल की अध्यक्ष और प्रमुख सचिव स्मिता भारद्वाज 31 मार्च को रिटायर हो जाएंगी। उनके रिटायरमेंट के बाद प्रशासन अकादमी में पदस्थ प्रमुख सचिव सचिन सिन्हा नए अपर मुख्य सचिव बनेंगे। इसके साथ ही राज्य सरकार को माध्यमिक शिक्षा मंडल में नए अध्यक्ष की नियुक्ति करनी होगी। यह जिम्मेदारी अपर मुख्य सचिव स्तर के ही किसी अफसर को सौंपी जाएगी। अपर मुख्य सचिव स्मिता भारद्वाज 31 मार्च को रिटायर होंगी। उसके बाद अपर मुख्य सचिव स्तर का एक पद रिक्त हो जाएगा और 1 अप्रैल से इस पद पर नई अफसर की पदस्थापना होगी। सीनियारिटी के हिसाब से सचिन सिन्हा अपर मुख्य सचिव पद के दावेदार हैं, इसलिए सामान्य प्रशासन विभाग 31 मार्च या 1 अप्रैल को उनके पदोन्नति करने का आदेश जारी करेगा। सिन्हा से पहले शिवशेखर शुक्ला अपर मुख्य सचिव बनाए गए थे। इस साल रिटायर होंगे ये अफसर साल 2026 में जिन अन्य आईएएस अफसरों का रिटायरमेंट होना है, उसमें राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सचिव अलका उपाध्याय का नाम शामिल है, जो मई में रिटायर होंगी। केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी आशीष श्रीवास्तव अक्टूबर में रिटायर होंगे। वे वर्तमान में गृह मंत्रालय में पदस्थ हैं। एमपी कैडर के प्रमुख सचिव स्तर के एक अन्य अधिकारी उमाकांत उमराव 1 अगस्त को रिटायर होंगे। वहीं लोकायुक्त संगठन में सचिव अरुणा गुप्ता अक्टूबर और खादी ग्रामोद्योग के महाप्रबंधक पद पर पदस्थ माल सिंह भयडिया जून में सेवानिवृत्त होंगे।
कानपुर देहात, 24 मार्च 2026 को जिलाधिकारी कपिल सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित मां मुक्तेश्वरी देवी सभागार में जनपद स्तरीय आधार अनुश्रवण समिति की बैठक हुई। इसमें आधार नामांकन, अपडेट, प्रमाणीकरण और डीबीटी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने बताया कि अधिकांश सरकारी योजनाओं का लाभ आधार से जुड़ा है, इसलिए प्रत्येक नागरिक का आधार अपडेट और सक्रिय होना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद में आधार नामांकन और अद्यतन (अपडेट) की गति बढ़ाई जाए, ताकि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बैठक में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों के आधार नामांकन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने बेसिक शिक्षा, बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग को समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि सभी बच्चों का नामांकन समय पर पूरा हो सके। डीएम ने सभी आधार सेवा केंद्रों पर सूचना बोर्ड लगाने के निर्देश भी दिए। इन बोर्डों पर सेवाओं, प्रक्रिया और शिकायत निवारण की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होनी चाहिए। डीबीटी योजनाओं में आधार प्रमाणीकरण की स्थिति की समीक्षा करते हुए वंचित लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें शीघ्र लाभ से जोड़ने पर बल दिया गया। जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की कि वे अपने आधार को समय-समय पर अपडेट कराते रहें, क्योंकि निर्धारित अवधि के बाद इसे अपडेट कराना आवश्यक होता है। उन्होंने सेवा प्रदाताओं को गुणवत्तापूर्ण और सरल सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। इसके अतिरिक्त, 100 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के आधार सत्यापन और प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के आधार नामांकन को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए गए। बैठक में एक नए मोबाइल ऐप की जानकारी भी दी गई, जिससे नागरिक वर्चुअल आईडी बना सकते हैं और अपने विवरणों में संशोधन कर सकते हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि नागरिक नजदीकी आधार केंद्र की जानकारी और शिकायत निवारण के लिए UIDAI पोर्टल तथा हेल्पलाइन नंबर 1947 का उपयोग कर सकते हैं।
बैतूल में महिला एवं बाल विकास विभाग के तत्वावधान में मंगलवार को बाल मंदिर सभाकक्ष में विद्यारंभ प्रमाण पत्र एवं ग्रेजुएशन सेरेमनी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आंगनवाड़ी में शाला पूर्व शिक्षा पूर्ण करने वाले बच्चों को प्रमाण पत्र प्रदान कर उन्हें औपचारिक स्कूली शिक्षा की ओर अग्रसर किया गया। कार्यक्रम में नगर पालिका उपाध्यक्ष महेश राठौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। जिला कार्यक्रम अधिकारी गौतम अधिकारी ने बताया कि मध्य प्रदेश में यह पहल पहली बार की जा रही है। इसके तहत 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को ‘विद्यारंभ प्रमाण पत्र’ देकर उनके शैक्षणिक जीवन की औपचारिक शुरुआत को मान्यता दी जा रही है। 23 हजार 245 बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्रबैतूल जिले में यह कार्यक्रम बड़े स्तर पर आयोजित हुआ, जहां जिले की 12 परियोजनाओं के 90 सेक्टर और 2348 आंगनवाड़ी केंद्रों में एक साथ समारोह आयोजित किए गए। जिले में कुल 23 हजार 245 बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस दौरान आंगनवाड़ी केंद्रों में बाल चौपाल का आयोजन भी किया गया, जिसमें जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और अभिभावकों की सहभागिता रही। बच्चों को प्रमाण पत्र मिलते देख अभिभावकों और बच्चों में उत्साह देखा गया। बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दींबाल मंदिर सभाकक्ष में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं। लाडली बिटिया ज्ञानवी गुरबाने ने देशभक्ति कविता “सरफरोशी की तमन्ना” और “इंकलाब जिंदाबाद” की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में सहायक संचालक विवेक ऊईके और सीडीपीओ निरंजन सिंह सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस पहल का उद्देश्य आंगनवाड़ी में मिलने वाली प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत बनाना, बच्चों को सहज रूप से स्कूल में प्रवेश दिलाना और समाज में शाला पूर्व शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह आयोजन प्रदेशभर में एक साथ आयोजित किया गया, जिससे आंगनवाड़ी केंद्रों को प्रारंभिक शिक्षा के मजबूत आधार के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
RBSE 10वीं का रिजल्ट जारी, 94.23% छात्र पास:शिक्षा मंत्री ने की घोषणा, पिछले साल से बेहतर रहा परिणाम
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ने 10वीं कक्षा का परिणाम जारी कर दिया है। इस वर्ष 94.23 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं, जो पिछले साल के 93.06 प्रतिशत से 1.17 प्रतिशत अधिक है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अजमेर स्थित कार्यालय से शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने परिणाम की घोषणा की। इस बार लड़कों का उत्तीर्ण प्रतिशत 93.63 रहा, जबकि लड़कियों ने 94.20 प्रतिशत के साथ बेहतर प्रदर्शन किया। यह पहली बार है जब 10वीं का परिणाम 12वीं के परिणाम से पहले घोषित किया गया है। बोर्ड के इतिहास में भी यह पहला अवसर है जब मार्च माह में परिणाम जारी किया गया है। राज्य सरकार द्वारा 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू करने के निर्देश दिए गए थे। इसी के मद्देनजर परिणामों से संबंधित कार्यों को समय पर पूरा किया गया ताकि नए सत्र की तैयारियां सुचारु रूप से चल सकें। इस वर्ष बोर्ड की परीक्षाएं 12 फरवरी को शुरू हुई थीं। 10वीं की परीक्षा में कुल 10 लाख 68 हजार 109 विद्यार्थियों ने भाग लिया था।
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान, अजमेर ने 10वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम मंगलवार को जारी किया। इसके साथ ही जिले में 24 हजार से अधिक विद्यार्थियों का इंतजार खत्म हो गया। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बोर्ड के अजमेर ऑफिस से परिणा जारी किया। इस वर्ष जिले में माध्यमिक (10वीं) परीक्षा के लिए कुल 24,674 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। इन छात्रों के लिए 109 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जहां परीक्षाएं शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुईं। जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) इन्द्रेश तिवाड़ी ने बताया कि परीक्षा के सफल आयोजन के बाद अब परिणाम घोषित किया जा रहा है। विद्यार्थी परिणाम घोषित होने के बाद बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकेंगे।
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर ने दसवीं क्लास का परीक्षा परिणाम मंगलवार को घोषित किया गया। शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर दोपहर 1 बजे अजमेर स्थित बोर्ड कार्यालय से परिणाम जारी किया। इसके साथ ही मंत्री पांचवीं और आठवीं बोर्ड के परिणाम भी जारी किए। इस वर्ष राजस्थान बोर्ड सीबीएसई बोर्ड से पहले मार्च माह में ही नतीजे घोषित कर एक रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। यह पहली बार होगा, जब राजस्थान बोर्ड का सेकेंडरी परीक्षा परिणाम मार्च माह में जारी किया गया है। उल्लेखनीय है कि सेकेंडरी बोर्ड परीक्षा-2026 में लगभग 10 लाख विद्यार्थी पंजीकृत हुए थे। परीक्षा परिणाम बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in पर उपलब्ध होगा।
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 10वीं का रिजल्ट जारी कर दिया गया है। ऐसा पहली बार है, जब 10वीं क्लास का रिजल्ट 12वीं कक्षा से पहले जारी हुआ है। छात्र अपना परीक्षा परिणाम बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं। जोधपुर जिले के उन विद्यार्थियों के लिए एक जरूरी सूचना है, जिन्होंने परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इनमें 95% से अधिक अंक हासिल करने वाले स्टूडेंट्स की फोटो और उनका रिजल्ट 'भास्कर डिजिटल' प्लेटफॉर्म पर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। इसके माध्यम से जिले के प्रतिभावान छात्र अपनी सफलता की कहानी सबके साथ साझा कर सकेंगे। 95% से ज्यादा नंबर लाने वाले होनहारों की फोटो दैनिक भास्कर पर प्रकाशित होगी 95% से ज्यादा नंबर लाने वाले छात्र अपनी फोटो और मार्कशीट नीचे दिए गए प्रारूप में वॉट्सएप नंबर 9414176786 पर भेज सकते हैं। इस फॉर्मेट में भेजें जानकारी… नाम : स्कूल का नाम और शहर/एरिया : कितने प्रतिशत : मार्कशीट की फोटो फोटो/वीडियो : बच्चे की परिवार के साथ, जश्न मनाते हुए एक्शन फोटो या वीडियो। विशेष अपील: छात्र और अभिभावक कृपया ध्यान दें कि दिए गए वॉट्सएप नंबर पर कॉल न करें, केवल निर्धारित फॉर्मेट में मैसेज ही भेजें।
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 10वीं का रिजल्ट जारी कर दिया है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की ओर से बोर्ड कार्यालय से यह रिजल्ट जारी किया गया है। इसके साथ ही 10 लाख 68 हजार 109 स्टूडेंट्स का इंतजार खत्म हो गया है। बोर्ड इतिहास में यह पहला मौका है, जब मार्च में रिजल्ट घोषित किया जा रहा है, दसवीं का रिजल्ट 12वीं से पहले जारी किया गया है। इस साल बोर्ड की परीक्षाएं 12 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित की गई थी। पिछले साल अजमेर जिले का रिजल्ट 94.45% रहा था। भास्कर एप पर फोटो होगी पब्लिश अजमेर जिले के 95% या उससे ज्यादा नंबर लाने वाले स्टूडेंट्स की फोटो भास्कर एप पर पब्लिश होगी। ऐसे स्टूडेंट्स को अपना नाम, फोटो, मार्कशीट की कॉपी, माता-पिता और स्कूल का नाम इस मोबाइल नंबर 9166112143 पर इस फॉर्मेट में वॉट्सऐप करें। इस फॉर्मेट में भेजें जानकारी… नाम : स्कूल का नाम और शहर/एरिया : कितने प्रतिशत : मार्कशीट की फोटो फोटो/वीडियो : बच्चे की परिवार के साथ, जश्न मनाते हुए एक्शन फोटो या वीडियो।
बेहतर शिक्षा के लिए विद्यालयों का चयन करते हैं अभिभावक : पाठक
गढ़वा | प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव एस.एन. पाठक ने कहा कि वर्तमान समय में सरकार द्वारा सरकारी विद्यालयों के विकास पर व्यापक खर्च किया गया है। मॉडल विद्यालयों की स्थापना के साथ-साथ सरकारी स्कूलों में आधारभूत संरचनाओं को मजबूत किया गया है। वहीं बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति भी की गई है। इसके बावजूद यदि अभिभावक इन विद्यालयों को छोड़कर निजी विद्यालयों की ओर रुख कर रहे हैं, तो इसे केवल व्यवस्था की विफलता के रूप में देखना उचित नहीं होगा। बल्कि अभिभावकों की अपनी प्राथमिकताओं और अपेक्षाओं को भी समझना होगा। उन्होंने कहा कि समाज में कुछ ऐसे लोग भी सक्रिय हैं। जिनका निजी विद्यालयों से प्रत्यक्ष रूप से कोई सरोकार नहीं है और न ही वे इनके उपभोक्ता हैं। फिर भी वे निजी विद्यालयों के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे लोग निजी शिक्षा व्यवस्था को खलनायक के रूप में प्रस्तुत कर समाज में भ्रम और द्रोह फैलाना चाहते हैं, जो उचित नहीं है। पाठक ने कहा कि बड़ी संख्या में अभिभावक ऐसे हैं, जो अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से विद्यालयों का चयन करते हैं। ये अभिभावक वास्तविक उपभोक्ता हैं और अपने अनुभव के आधार पर निर्णय लेते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अभिभावक निष्पक्ष हैं और निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली तथा शिक्षा की गुणवत्ता को देखते हुए उनका समर्थन कर रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना उद्देश्य : महासचिव पाठक ने यह भी स्पष्ट किया कि निजी विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और सरकारी प्रयासों के समानांतर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे रहे हैं। निजी और सरकारी विद्यालयों के बीच प्रतिस्पर्धा से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। जिससे अंततः छात्रों को ही लाभ मिलेगा। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे शिक्षा के मुद्दे को राजनीति या व्यक्तिगत विचारधाराओं से ऊपर उठकर देखें और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सकारात्मक सोच के साथ निर्णय लें। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल संस्थानों की तुलना करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना होना चाहिए।
शिक्षा विभाग में भत्ता घोटाले का आरोप, युवा कांग्रेस ने प्रमुख सचिव से की शिकायत
बिलासपुर के जिला शिक्षा कार्यालय में विभाग में वित्तीय गड़बड़ी, अनुकंपा नियुक्ति में फर्जीवाड़ा और 200 मामलों में संशोधन के आरोप लगे हैं। युवा कांग्रेस ने प्रभारी डीईओ और जूनियर ऑडिटर के खिलाफ शिकायत की है। युवा कांग्रेस प्रदेश महासचिव अंकित गौरहा ने प्रमुख सचिव को शिकायत सौंपकर प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी और जूनियर ऑडिटर पर वित्तीय गबन, अनियमित नियुक्ति और नियमों को दरकिनार करने के आरोप लगाए हैं। युवा कांग्रेस प्रदेश महासचिव गौरहा ने कहा कि कोटा में पदस्थ रहते हुए टांडे ने एक कर्मचारी को अन्य भत्ता और वर्दी धुलाई के नाम पर सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच करीब 30 लाख रुपए दिलवाए। हर महीने 4-4.5 लाख भुगतान पर मिलीभगत के आरोप लगे हैं। अनुकंपा नियुक्तियों में अपात्रों को लाभ देने और युक्तियुक्तकरण में करीब 200 मामलों में बिना समिति अनुमति संशोधन का भी आरोप है।
आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं
महिला दिवस पर विशेष:- अजमेर राजस्थान आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं:- देश-प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध ओर इन अपराधों में पिछले वर्षो में अपराध की दर तीव्र ही हुई है ओर “भारत मे अपराध ” नामक रिपोर्ट बताती है ... Read more
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समर्थन से भारत शिक्षा के सभी स्तरों पर एआई शिक्षण और रिसर्च को एकीकृत करके खुद को एक वैश्विक एआई महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है
शिक्षा को हिंसक नहीं, संवेदनशील बनाना होगा
देश में इन दिनों बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं और सामान्य परीक्षाएं भी शुरू होने वाली हैं। हर साल की तरह इस बार भी परीक्षा का मौसम केवल प्रश्नपत्रों और परिणामों का नहीं, बल्कि मानसिक दबाव, चिंता और असुरक्षा का मौसम बनता जा रहा है। छात्रों के चेहरों पर भविष्य की चिंता साफ पढ़ी जा ... Read more
गला घोटिया शिक्षा का विश्वगुरु बन चुका देश
पिछले 12 सालों से देश को विश्वगुरु बनाने का जो झूठ फैलाया जा रहा था, अब उसका गुबार ऐसा फूटा है कि दुनिया भर में शर्मिंदगी का सबब बन गया है।
शिक्षा में समता या नई असमानताः यूजीसी नियमों पर न्यायिक विराम
नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर लागू किए गए नए नियमों ने देश के शैक्षिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बार फिर गहरी हलचल पैदा कर दी है। जिस नीति को ‘समता’, ‘समान अवसर’ और ‘समावेशी शिक्षा’ की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया ... Read more
शिक्षा खौफनाक नहीं, बल्कि स्नेह एवं हौसलों का माध्यम बने
जीवन को दिशा देने वाली शिक्षा यदि भय, हिंसा और दमन का पर्याय बन जाए तो वह सभ्यता की सबसे बड़ी विडंबना कही जाएगी। हाल के वर्षों में पढ़ाई के नाम पर बच्चों पर बढ़ते दबाव, घर और स्कूल में हिंसक व्यवहार तथा प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ ने शिक्षा की आत्मा पर गहरा आघात किया ... Read more
विश्व शिक्षा दिवसः 24 जनवरी 2026 ? शिक्षा रोजगार का टिकट नहीं, जीवन का दर्शन बने
विश्व शिक्षा दिवस कोरा उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है, यह सोचने का क्षण कि शिक्षा क्या है, किसके लिए है और किस दिशा में समाज को ले जा रही है। भारत इस संदर्भ में केवल एक देश नहीं, बल्कि एक जीवित सभ्यता है, जिसने शिक्षा को कभी भी मात्र रोजगार या सूचना का ... Read more
सावित्रीबाई फुलेः शिक्षा से सामाजिक क्रांति तक
-बाबूलाल नागा 3 जनवरी भारतीय सामाजिक इतिहास का वह महत्वपूर्ण दिन है, जो शिक्षा, समानता और महिला सशक्तिकरण के संघर्ष की प्रतीक सावित्रीबाई फुले की जयंती के रूप में मनाया जाता है। सावित्रीबाई फुले केवल पहली महिला शिक्षिका ही नहीं थीं, बल्कि वे उस सामाजिक क्रांति की धुरी थीं, जिसने सदियों से जकड़ी रूढ़ियों, जातिवाद ... Read more
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
NEET UG रिजल्ट को लेकर अभी भी जारी है गुस्सा, छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के पास किया विरोध प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए छात्रों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। आइए जानते हैं, क्या है पूरा म
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का 10 फीसदी भी डाटा नहीं हुआ अपलोड
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का डाटा अपलोड करने में जिले के कई स्कूल ढील दे रहे हैं, वे 10 फीसदी छात्रों का भी डाटा अभी तक अपलोड नहीं कर पाए हैं। डाटा अपलोड करने में आधार कार्ड की अनिवार्यता के बाद से छ
बेसिक शिक्षा : दो महीने बाद भी 1.38 लाख छात्रों का डेटा नहीं हुआ अपडेट
बेसिक शिक्षा विभाग के यू डायस पोर्टल पर डेटा अपडेट करने का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। हाल ये है कि दो महीने में महज 1.38 लाख छात्रों डेटा भी अपडेट नहीं हुआ। विभाग ने अब 5 जून तक इसे पूरा करने क
स्कूलों में कैसे पढ़ा रहे हैं शिक्षक, वीडियो में देखेगा शिक्षा विभाग, होगी रिकॉर्डिंग
शिक्षा विभाग वीडियो के जरिए देखेगा कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षक छात्रों को कैसे पढ़ाते हैं। बता दें. छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षकों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। आइए जानते हैं विस्तार से।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति : यूपी बोर्ड ने दिए निर्देश, एनईपी लागू करने को स्कूल बनाएंगे प्लान
यूपी बोर्ड से जुड़े 27 हजार से अधिक स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू करने के लिए स्कूल स्तर पर योजना बनाई जाएगी। एनईपी 2020 के विषय में विद्यालयों में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
बॉलीवुड का ये सुपरस्टार युवाओं को IAS बनाने के लिए मुफ्त में देगा शिक्षा, योजना से अबतक जुड़ चुके है7000 युवा
राम बनने के लिएधनुष-बाण चलाने की शिक्षा ले रहे है Ranbir Kapoor, एक्टर केआर्चरी ट्रेनर ने शेयर की तस्वीरें

