यूपी पर कनाडा की नजर: रक्षा, ऊर्जा और शिक्षा में रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम
उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश हब बनाने की दिशा में एक और अहम कदम उठाते हुए कनाडा ने राज्य के साथ रक्षा, ऊर्जा और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने में गहरी रुचि दिखाई है
शिक्षा के बारे में माता-पिता को शिक्षित करना' विषय पर कार्यक्रम आयोजित
भास्कर न्यूज | जालंधर सीबीएसई द्वारा कपूरथला रोड स्थित सेठ हुकम चंद एसडी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षा के बारे में माता-पिता को शिक्षित करना' विषय पर कार्यक्रम करवाया गया। इसका मुख्य फोकस स्कूल और अभिभावकों के बीच एक प्रभावी साझेदारी को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर आईटी नेक्स्ट जेन ग्रुप ऑफ स्कूल के मैनेजमेंट कोऑर्डिनेटर सतपाल और एमजीएन पब्लिक स्कूल, आदर्श नगर के हेड मिस्ट्रेस संगीता भाटिया उपस्थित रहे। स्कूल प्रिंसिपल प्रियंका शर्मा ने उन्हें पौधे भेंट कर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान बच्चे की शिक्षा में स्कूल और माता-पिता की साझा जिम्मेदारी पर विशेष प्रकाश डाला गया। इस दौरान नवीन शिक्षण पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की गई और नई शिक्षा नीति, एसडीजी 4 तथा भारतीय मूल्यांकन प्रणाली में सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई। इस पहल का लक्ष्य बच्चों का न केवल शैक्षणिक विकास करना है, बल्कि उनके शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक, रचनात्मक और आध्यात्मिक पहलुओं का एक साथ संतुलित विकास सुनिश्चित करना भी है।
बच्चों को शिक्षा की अहमियत समझाई
भास्कर न्यूज | जालंधर स्टेट पब्लिक स्कूल में किंडरगार्टन के छोटे बच्चों के अभिभावकों के लिए एक ओरिएंटेशन कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों को स्कूल के वातावरण, पाठ्यक्रम, पढ़ाने के तरीकों और बच्चों के सर्वांगीण विकास से जुड़ी गतिविधियों की पूरी जानकारी देना था। कार्यक्रम की शुरुआत छात्रों द्वारा शबद गायन से हुई, जिसके बाद प्रिंसिपल सवीना बहल ने प्रारंभिक शिक्षा की अहमियत और खेल-आधारित व रचनात्मक शिक्षण पद्धति के बारे में बताया। शिक्षकों ने अभिभावकों को बच्चों की दैनिक दिनचर्या, सुरक्षा व्यवस्था और स्कूल के साथ संवाद करने के माध्यमों के बारे में विस्तार से समझाया । साथ ही, उन्हें यह भी बताया गया कि वे घर पर बच्चों की सीखने की प्रक्रिया में कैसे मदद कर सकते हैं ।
ओबीसी कल्याण का अलग से दफ्तर शिक्षा योजनाओं पर रहेगा फोकस
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई राज्य पिछड़ा वर्ग सलाहकार परिषद की बैठक में राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण के लिए अलग से संचालनालय गठन, नवीन हॉस्टल भवन निर्माण एवं विकास संबंधित अनेक विषयों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री साय ने कहा सरकार पिछड़ा वर्ग समाज के विकास लिए प्रतिबद्ध है। राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग की बड़ी संख्या निवास करती है, जिनमें लगभग 95 जातियां एवं उनके उपसमूह है। सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग के शैक्षणिक एवं सामाजिक आर्थिक विकास की चुनौतियों के प्रति संवेदनशील है। शिक्षा पर फोकस बढ़ाते हुए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति का भुगतान ऑनलाइन सीधे विद्यार्थियों के खातों में किया जा रहा है। इसके लिए 150 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है। वहीं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए युवाओं को आर्थिक सहायता भी दी जाएगी, जिससे वे इंजीनियरिंग, मेडिकल, यूपीएससी, सीजीपीएससी, एसएससी, रेलवे और बैंकिंग जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें। सरकार ने छात्रावास सुविधा बढ़ाने पर भी जोर दिया है। वर्तमान में 55 छात्रावास संचालित हैं, जबकि नए बजट में छह जिलों में नए पोस्ट मैट्रिक छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं। मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना के तहत ऐसे छात्रों को भी आर्थिक मदद मिलेगी, जिन्हें छात्रावास में जगह नहीं मिल पाती। बैठक में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि गण एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।
सुपौल में प्रशासनिक सख्ती के तहत जिला पदाधिकारी सावन कुमार के एक्शन मोड का असर लगातार देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में शिक्षा विभाग में बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, लक्ष्मीनियां (प्रखंड-छातापुर) में पदस्थापित विशिष्ट शिक्षक जयशंकर सिंह को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई उनके खिलाफ लगे गंभीर आरोपों और विभागीय जांच के आधार पर की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जयशंकर सिंह पर विद्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहने, भौतिक रूप से अनुपस्थित रहने के बावजूद प्रधानाध्यापक की मिलीभगत से उपस्थिति दर्ज कराने तथा शिक्षण कार्य छोड़कर सहरसा में मेडिकल दुकान चलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। यह शिकायत लक्ष्मीनियां निवासी अभिषेक झा द्वारा लिखित रूप में विभाग को दी गई थी। निरीक्षण में शिक्षक अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित पाए गए मामले की जांच के दौरान प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, छातापुर द्वारा 16 मार्च 2026 को किए गए निरीक्षण में शिक्षक अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित पाए गए। जब उनसे दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने स्वयं को सुपौल में होने की बात कही, लेकिन लाइव लोकेशन मांगने पर उनका स्थान सहरसा में पाया गया, जिससे आरोप और भी पुख्ता हो गए। इसके अलावा ई-शिक्षा कोष की समीक्षा में भी यह सामने आया कि संबंधित शिक्षक बीते माह और शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान लगातार अनुपस्थित रहे हैं, जबकि रिकॉर्ड में ‘मार्क ऑन ड्यूटी’ दिखाया गया था। इस संबंध में विभाग द्वारा 16 मार्च 2026 को स्पष्टीकरण भी मांगा गया था, लेकिन निर्धारित समय तक कोई जवाब नहीं दिया गया। मुख्यालय प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, किशनपुर निर्धारित किया गया इन सभी तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 की धारा 09 के तहत जयशंकर सिंह को निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, किशनपुर निर्धारित किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों के तहत उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। साथ ही, अलग से आरोप पत्र जारी कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और अन्य कर्मियों को भी स्पष्ट संदेश गया है कि लापरवाही और अनियमितता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
छत्तीसगढ़ में 12वीं बोर्ड परीक्षा का हिंदी पेपर एग्जाम से 10 घंटे पहले लीक हो गया। ये बात उन स्टूडेंट्स ने एक्सेप्ट की है, जिन्होंने टेलीग्राम पर एक लिंक के जरिए आया वायरल पेपर कई स्टडी ग्रुप्स पर शेयर किया था। इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है। लेकिन इस मामले में फिलहाल कोई ठोस कार्रवाई अब तक नहीं की गई है। हालांकि पुलिस का कहना है कि, मामले की जांच की जा रही है। लेकिन इस बीच बुधवार ने NSUI के कार्यकर्ताओं ने प्रभारी महामंत्री हेमंत पाल के नेतृत्व में शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव का पुतला फूंक दिया। NSUI ने पूरे मामले में स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम बनाने की मांग की है। मंत्री ने कहा था- छात्र भ्रम फैला रहे दरअसल, एक मीडिया हाउस को दिए बयान में मंत्री यादव ने यह कह दिया था कि छात्र संगठन पेपर लीक के मामले भ्रम फैला रहा है। इसके बाद NSUI के कार्यकर्ताओं ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ और लापरवाही का आरोप लगाते हुए मंत्री यादव का पुतला दहन किया। मंत्री बंगले का घेराव करेगी NSUI NSUI लीडर हेमंत पाल ने कहा कि, हम पूरी जांच में पुलिस का सहयाेग कर रहे हैं। हमारे कार्यकर्ताओं के सामने और भास्कर डिजिटल पर पब्लिश खबर में छात्रों ने खुद स्वीकारा है पेपर लीक हुआ था। बावजूद शिक्षा मंत्री का ये कहना कि भ्रम फैलाया जा रहा है, उनके खराब और लापरवाह रवैये को दर्शाता है। NSUI ने चेतावनी दी है कि अगर पूरे मामले में जल्द एक्शन नहीं लिया गया तो, NSUI शिक्षा मंत्री के बंगले का घेराव करेगी।
किशनगंज में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधायक गोपाल अग्रवाल ने जिले में शिक्षा संस्थानों की स्थिति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग की मिलीभगत से दर्जनों विद्यालय बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं। विधायक अग्रवाल ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर कोचिंग संस्थानों को विद्यालय का रूप देकर चलाया जा रहा है, जबकि कुछ विद्यालय के नाम पर कोचिंग संस्थान चल रहे हैं। इन अनियमितताओं की कोई जांच या निगरानी नहीं हो रही है। ''बिना मान्यता वाले संस्थानों को चलने देना अपराध'' उन्होंने बताया कि नियमों की पूरी तरह अनदेखी कर ऐसे संस्थान संचालित हो रहे हैं, जिससे छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता पर गहरा असर पड़ रहा है। विधायक ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। अग्रवाल ने घोषणा की कि वे जल्द ही इस संबंध में मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे और विधानसभा में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे। उन्होंने जोर देते हुए कहा, शिक्षा बच्चों का भविष्य है। ऐसे में बिना मान्यता वाले संस्थानों को चलने देना अपराध है। विभाग की जवाबदेही तय होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई हो। सफाई घोटाले जैसी विभागीय अनियमितताओं पर सवाल उठाए यह बयान किशनगंज जिले की शिक्षा व्यवस्था में मौजूद खामियों को उजागर करता है। इससे पहले भी विधायक अग्रवाल ने स्कूल सफाई घोटाले जैसी विभागीय अनियमितताओं पर सवाल उठाए थे। स्थानीय लोग इस मुद्दे पर विधायक के इस कदम का समर्थन कर रहे हैं और विस्तृत जांच की मांग कर रहे हैं।
बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की ओर से आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी प्रतियोगिता परीक्षा को लेकर नालंदा जिला प्रशासन ने तैयारी कर ली है। शहर के 15 चुनिंदा केंद्रों पर आयोजित होने वाली इस परीक्षा में कुल 8,700 परीक्षार्थी शामिल होंगे। त्रिस्तरीय जांच के बाद ही अभ्यर्थियों को परीक्षा हॉल में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने बताया कि बीपीएससी के सचिव से प्राप्त पत्र के आलोक में परीक्षा केंद्रों पर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा केंद्रों पर आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा, जिसमें मोबाइल जैमर लगाना और सीसीटीवी कैमरों से पूरी प्रक्रिया की निगरानी करना शामिल है। परीक्षार्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए हॉल में प्रवेश से पूर्व बायोमेट्रिक सत्यापन भी किया जाएगा। यह परीक्षा आगामी 14 अप्रैल से शुरू होकर विभिन्न चरणों में संपन्न होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पहले चरण में 14 और 15 अप्रैल को परीक्षा ली जाएगी, जिसके बाद 17 और 18 अप्रैल तथा अंतिम चरणों में 20 और 21 अप्रैल को परीक्षार्थी परीक्षा में बैठेंगे। परीक्षार्थियों की संख्या निर्धारित कर दी गई प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, शहर के अलग-अलग शिक्षण संस्थानों में परीक्षार्थियों की संख्या निर्धारित कर दी गई है। सबसे अधिक 1200 परीक्षार्थी सरदार पटेल कॉलेज में परीक्षा देंगे, जबकि नालंदा कॉलेज में 1032 अभ्यर्थियों के बैठने की व्यवस्था की गई है। इसी प्रकार, सोगरा कॉलेज में 516, बिहार टाउन हाई स्कूल शालूगंज में 816, एसएस बालिका स्कूल में 588 और पीएल साहू हाई स्कूल में 396 परीक्षार्थी शामिल होंगे। कहां कितने परीक्षार्थी देंगे एग्जामअन्य केंद्रों में सोगरा हाई स्कूल के लिए 564, बिहार टाउन हाई स्कूल मणिराम अखाड़ा के लिए 588, नेशनल शेखाना के लिए 540, सोहसराय बालिका हाई स्कूल के लिए 600, जवाहर कन्या विद्यालय के लिए 480 और कमरुद्दीनगंज बालिका हाई स्कूल के लिए 636 परीक्षार्थी आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा भैंसासुर आवासीय मॉडल स्कूल में 696, रोजमैरी लैंड में 552 और सनबीम स्कूल कोसुक में 528 परीक्षार्थी अपनी परीक्षा देंगे। प्रशासन ने सभी केंद्रों पर शांतिपूर्ण परीक्षा संचालन के लिए पुख्ता दावों के साथ सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
निवाड़ी जिले में केंद्रीय विद्यालय का सपना 16 महीने बाद भी साकार नहीं हो पाया है। केंद्र सरकार की कैबिनेट बैठक में 7 दिसंबर 2022 को जिले को केंद्रीय विद्यालय की सौगात मिली थी। इसके लिए भूमि भी आवंटित हो चुकी थी और उम्मीद थी कि जल्द ही बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा मिलेगी, लेकिन अब तक विद्यालय का संचालन शुरू नहीं हो सका है। विद्यालय के संचालन को लेकर प्रारंभिक स्तर पर सक्रियता दिखाई गई थी। तत्कालीन डीपीसी राजेश पटेरिया ने इस दिशा में कई कदम उठाए थे। पहले ग्राम कुलुवा के छात्रावास भवन को चुना गया, लेकिन आवश्यक सुविधाओं के अभाव में यह योजना बदल दी गई। बाद में जिला मुख्यालय स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के पुराने भवन का चयन किया गया। निरीक्षण के बाद टीम ने पांच कमरों के निर्माण के निर्देश दिए थे, जो अब पूरे हो चुके हैं। दिसंबर 2022 के बाद से अब तक लगभग छह बार जिला शिक्षा अधिकारी बदले जा चुके हैं। इतना ही नहीं, केंद्रीय विद्यालय के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों को भी बीच में हटा दिया गया। इस कारण हर बार योजना नई शुरुआत करती है और फिर अधूरी रह जाती है, जिससे परियोजना में लगातार देरी हो रही है। प्रदेश में जिन 11 केंद्रीय विद्यालयों को मंजूरी मिली थी, उनमें से अधिकांश स्थानों पर संचालन शुरू हो चुका है, लेकिन निवाड़ी में आज भी इंतजार जारी है। नया शिक्षा सत्र शुरू होने में अब महज 15 दिन शेष हैं, लेकिन न तो रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हुई है और न ही प्रशासन की ओर से कोई तैयारी दिखाई दे रही है। इस पूरे मामले पर जिला पंचायत सीईओ रोहन सक्सेना ने बताया कि केंद्रीय विद्यालय के लिए अस्थाई तौर पर स्कूल शुरू करने हेतु जो आवश्यकताएं मांगी गई थीं, वे पूरी कर दी गई हैं। इसके अलावा, स्थायी विद्यालय के निर्माण के लिए जमीन भी आवंटित कर दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्रीय विद्यालय इसी शैक्षिक सत्र में शुरू कर दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने बालोद में हुए जंबूरी कार्यक्रम में अनियमितता का मुद्दा उठाया। उन्होंने स्कूल शिक्षामंत्री से सवाल पूछा कि आयोजन के लिए टेंडर से पहले काम कैसे शुरू हुआ और 4 दिन के अंदर काम कैसे पूरा हो गया। जवाब में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शायरी पढ़ी और कहा कि नेशनल का काम अलग है और हमारा काम अलग है। इसके साथ ही स्कूलों के युक्तियुक्तकरण पर सरकार से जवाब मांगा गया। अतिथि शिक्षकों के मुद्दे पर विपक्ष ने वॉकआउट किया। बता दें कि आज सरकार भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने और व्यापम को खत्म कर कर्मचारी चयन मंडल (SSB) बनाने से जुड़े अहम विधेयक भी सदन में पेश करेगी। पढ़िए विधानसभा की कार्यवाही 1. जंबूरी कार्यक्रम में अनियमितता का मुद्दा वफा जानते जब तुम, तो मेरी वफा समझा पाताप्रेम में कितना समर्पण था मेरे, यह तुझे मैं बता पाताबार-बार बेगुनाही की अपनी, कितना भरोसा दिलाऊं ऐ हमदमरूठकर बैठ जाते हो हर बार, कैसे मनाऊं ऐ हमदमजानते हो तुम बेदाग हैं हम, तुम्हारी इस महफिल मेंफिर भी इतने सवालात, ज़हन में क्यों आते हैं हमदम 2. MLA सुनील सोनी ने उठाया युक्तियुक्तकरण का मुद्दा 3. विधायक विक्रम मंडावी ने उठाया अतिथि शिक्षकों का मुद्दा ……………………………….. बजट सत्र से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… CM बोले-ऐसा कोई सगा नहीं जिसे कांग्रेसियों ने ठगा नहीं: विधानसभा में अवैध प्लॉटिंग, ‘जी राम जी’ पर हंगामा; भूपेश ने मनरेगा को बताया बेहतर छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र के 12वें दिन सदन में अवैध प्लॉटिंग और ‘जी राम जी’ के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने मनरेगा को बेहतर बताया। जवाब में सत्ता पक्ष से अजय चंद्राकर ने कहा सदन विपक्ष की राजनीति का अड्डा नहीं है। जिसके बाद विपक्ष ने कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। पढ़ें पूरी खबर…
शिक्षा जागरूकता; मोटरसाइकिल यात्रा जयपुर पहुंची
जयपुर | ग्लोबल सिक्ख संस्था की 5 तख्तों की मोटरसाइकिल यात्रा शिक्षा की अलख जगाने के संदेश के साथ जयपुर के गुरद्वारा साहिब राजापार्क पहुंची। यात्रा पटना साहिब से रवाना होकर हजूर साहिब होते हुए यहां पहुंची, जहां सिख संगत ने स्वागत किया। राजस्थान सिख समाज के अध्यक्ष अजयपाल सिंह और यूथ विंग अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह शंटी भी मौजूद रहे। जथे के मुखिया तजिंदर सिंह ने बताया कि आगे यह यात्रा दमदमा साहिब, केसगढ़ साहिब और अकाल तख्त, अमृतसर तक जाएगी। संस्था कई वर्षों से करीब 300 बच्चों की फीस देकर निशुल्क शिक्षा में सहयोग कर रही है।
राजस्थान दिवस महोत्सव के उपलक्ष्य में राजस्थान संस्कृत अकादमी की ओर से आयोजित दो दिवसीय विशेष कार्यक्रम मंगलवार को शास्त्री नगर स्थित क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र एवं विज्ञान पार्क में समापन हुआ। अकादमी के इतिहास में पहली बार आयोजित इस दीक्षांत एवं सम्मान समारोह में प्रदेश के वैदिक शिक्षा परिदृश्य की एक नई तस्वीर उभर कर सामने आई। पहली बार प्रदेश के 37 वेद विद्यालयों के विद्यार्थियों को एक साझा मंच प्रदान कर उन्हें उपाधियां और दीक्षांत संस्कार से जोड़ा गया है। वेदों का संरक्षण गुरु-शिष्य परंपरा को जीवत रखने से होगा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मदन मोहन झा ने अकादमी के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि वेदों का संरक्षण केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा को जीवित रखने से होगा। आज जिन विद्यार्थियों को ‘बाल शंकराचार्य’ सम्मान मिला है, वे भविष्य के धर्म रक्षक और विद्वान हैं। इन श्रेणियों में हुआ पुरस्कार वितरण; राजस्थान संस्कृत अकादमी की निदेशक डॉ. लता श्रीमाली ने बताया कि प्रदेश के 37 वेद विद्यालयों में पंचम वर्ष की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी छात्रों को बाल शंकराचार्य सम्मान प्रदान किया गया। पूरे राजस्थान में निशुल्क वैदिक संस्कार शिविर आयोजित करने वाली संस्थाओं और प्रशिक्षकों को वैदिक संस्कार सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम सेठ श्री सूरजमल तापड़िया आचार्य संस्कृत महाविद्यालय जसवंतगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में प्रो. राजेंद्र प्रसाद शर्मा, डॉ. नरोत्तम पुजारी, राकेश कुमार नेहरा, श्यामसुंदर शर्मा, कौशलेंद्र शास्त्री आदि वैदिक विद्वान मौजूद रहे।
वित्त रहित शिक्षा : अनुदान वृद्धि समेत 4 मांगों को लेकर महाधरना, अगले माह जैक का घेराव
रांची | झारखंड राज्य वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले लंबित मांगों के निराकरण की मांग को लेकर शिक्षकों ने मंगलवार को विधानसभा के सामने महाधरना दिया। कहा कि अनुदान वृद्धि, सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने और शिक्षण संस्थानों के के नाम पर अनावश्यक परेशान किया जा रहा है। मोर्चा के सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह, रघुनाथ सिंह, गणेश महतो, मनीष कुमार समेत अन्य ने संयुक्त रूप से कहा कि 75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि, सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का लाभ देने की मांग पूरी नहीं हो जाती है, तब तक आंदोलन चलता रहेगा। धरना को अरविंद सिंह, देवनाथ सिंह, अनिल तिवारी, मनीष कुमार और गणेश महतो ने संबोधित करते हुए कहा कि कम अनुदान के कारण शिक्षक आर्थिक दबाव में हैं। वहीं फजलुल कदीर अहमद, संजय कुमार और देवराज मिश्र सहित अन्य ने कहा कि विस में घोषणा के बाद भी वेतनमान देने से संबंधित प्रस्ताव लंबित है। मांडू विधायक निर्मल महतो ने मांग का समर्थन किया। धरना स्थल पर हुई बैठक में अप्रैल के पहले सप्ताह में राजभवन के समक्ष महाधरना, दूसरे सप्ताह में जैक का घेराव करने का निर्णय लिया गया।
इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में 5.88 करोड़ रुपए की जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन (एनजीएस) की खरीद को लेकर उठे विवाद के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है और पूरे मामले की जांच के लिए 6 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। इस समिति में अपर संचालक (वित्त) को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि वरिष्ठ संयुक्त संचालक, उपसंचालक, प्रोफेसर और इंजीनियर भी शामिल हैं। समिति को 15 दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में ईओडब्ल्यू और विभागीय स्तर पर पहले ही शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। आदेश के मुताबिक, यह समिति न सिर्फ खरीद प्रक्रिया की परत-दर-परत जांच करेगी, बल्कि तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन से जुड़े हर दस्तावेज की बारीकी से पड़ताल भी करेगी। जांच के दौरान MDRU गाइडलाइंस, भंडार क्रय नियम और सरकारी निर्देशों के पालन की भी सख्ती से जांच होगी। वहीं मामले से जुड़े सभी दस्तावेज भी जब्त करने के लिए अधिकृत होगी। अनुपयोगी मशीन पर खरीदी प्रक्रिया कैसे? पुरानी मशीन के लिए रिजेंट खरीदने का प्रस्ताव स्वशासी समिति की पिछले साल हुई बैठक में मंजूर किया गया था। इसके विपरीत एमजीएम के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने दावा किया था कि मशीन अनुपयोगी हो चुकी है और उसके रिजेंट का उत्पादन बंद हो गया है। हालांकि 9 मार्च 2026 की बैठक में एमजीएम प्रबंधन ने कमिश्नर हेल्थ की मौजूदगी में उसी पुरानी मशीन के लिए सामग्री खरीद प्रक्रिया को प्रचलन में बताया। इस विरोधाभास ने पूरे मामले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि मशीन अनुपयोगी है तो उसके लिए सामग्री खरीद की प्रक्रिया जारी कैसे है और यदि प्रक्रिया चल रही है तो मशीन को बेकार बताने का आधार क्या है? इसे लेकर अब स्पष्ट जवाब की जरूरत है। NGS खरीदी: सर्टिफिकेट और मॉडल नंबर पर सवाल एमजीएम मेडिकल कॉलेज को 4 साल पहले WHO से दान में एनजीएस मशीन मिली थी। जिससे एक भी टेस्ट नहीं किया गया और 5.88 करोड़ में नई मशीन खरीद ली। EOW में दर्ज शिकायत में आरोप लगाए गए थे कि मशीन की खरीदी प्रक्रिया में जमकर गड़बड़ी की गई है वहीं, वैध सर्टिफिकेट भी नहीं है। इसके साथ ही जो मॉडल कागजों में बताया गया था उसकी जगह सप्लाई हुई मशीन पर दूसरा मॉडल नंबर लिखा है। टेंडर कमेटी अध्यक्ष रही डॉ. शिखा घनघोरिया ने सभी दस्तावेज वैध होने का दावा किया था।
राष्ट्र हित, समाज हित, संस्कृति हित एवं शिक्षा के प्रति समर्पित शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के तत्वावधान में शिवाजी नगर स्थित पुरुषार्थ सभागार में “विद्यालयीन शिक्षा में नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन” विषय पर शैक्षिक विमर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राजधानी के सैकड़ों प्राचार्य एवं शिक्षकों की सहभागिता रही। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर ओमजी शर्मा, भरत व्यास, रामसागर मिश्र, धीरेन्द्र सिंह भदौरिया, डॉ. अभय गुप्ता, डॉ. अनित राय, यशवंत गोयल सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई, जिसे विभा दुबे, रश्मि शर्मा, प्रीति लखेरा, सुमन सिंह, अनामिका सेन एवं योगिता दीक्षित ने मधुर स्वर में प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। अतिथि देवो भवः की परंपरा के तहत सभी अतिथियों का सम्मान किया गया। इस दौरान रामकिशोर टेलकर, डी.डी. पवार, राजकुमार जाटव, डंडोतिया जी, रविन्द्र गुप्ता, डॉ. वेदिका, डॉ. अरविंद जैन, विभा दुबे, लक्ष्मी गौड़, गुंजा साहू, प्रीति गुप्ता, अनीता दुबे सहित अन्य सदस्यों ने सम्मान-अभिनंदन किया। अपने उद्बोधन में रामसागर मिश्र ने कहा कि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के उद्देश्यों को साकार करने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। मुख्य अतिथि भरत व्यास ने प्रेरणादायक प्रसंगों के माध्यम से उपस्थितजनों को जागरूक किया। कार्यक्रम में “देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें” गीत को लक्ष्मी गौड़ एवं गुंजा साहू ने अपनी मधुर आवाज में प्रस्तुत कर देशभक्ति का भाव जागृत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मुख्य वक्ता ओमजी शर्मा ने कहा कि राष्ट्र, समाज और शिक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों के हाथ में है, इसलिए नई शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन में सभी को सक्रिय सहभागिता निभानी चाहिए। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन संयोजक डॉ. सी.के. सिंह चौरसिया ने किया। वहीं डॉ. वी.के. सिंह चौरसिया ने घोषणा की कि न्यास द्वारा प्रत्येक माह के चौथे रविवार को बैठक आयोजित कर भोपाल महानगर में शिक्षा, समाज एवं संस्कृति उत्थान के लिए सतत प्रयास किए जाएंगे। कार्यक्रम के अंत में प्रीति गुप्ता एवं साथियों द्वारा राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात स्वल्पाहार एवं न्यास की विभागीय बैठक संपन्न हुई। कार्यक्रम को लेकर उपस्थित शिक्षकों ने इसे प्रेरणादायक बताते हुए शिक्षा एवं समाज के उत्थान की दिशा में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।
बैतूल में एसटी, एससी, ओबीसी संयुक्त मोर्चा और समस्त आदिवासी समाज संगठन ने मंगलवार को रैली निकाली। यह रैली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु विनियम, 2026 के समर्थन में आयोजित की गई थी। रैली के बाद, कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में संगठन ने 13 जनवरी 2026 को यूजीसी द्वारा जारी अधिसूचना का पूर्ण समर्थन किया। उन्होंने इस विनियम को संविधान की भावना के अनुरूप एक ऐतिहासिक कदम बताया। इस ज्ञापन की प्रतियां विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और अन्य संबंधित संस्थाओं को भी भेजी गई हैं। संगठन ने बताया कि यह विनियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15(4), 15(5), 16(4), 21, 38 और 46 में निहित समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को मजबूत करता है। उन्होंने जोर दिया कि आदिवासी समाज लंबे समय से उच्च शिक्षा में भेदभाव और अवसरों की कमी का सामना कर रहा है। ऐसे में, समता प्रकोष्ठ की स्थापना, भेदभाव निवारण तंत्र और निगरानी व्यवस्था जैसे प्रावधान अत्यंत आवश्यक हैं। ज्ञापन में संगठन ने तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें विनियम का स्पष्ट समर्थन, इसके प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए केंद्र व राज्य स्तर पर दिशा-निर्देश जारी करना, और समता प्रकोष्ठों की नियमित निगरानी व सोशल ऑडिट सुनिश्चित करना शामिल है। संगठन का मानना है कि यह पहल उच्च शिक्षा को अधिक न्यायपूर्ण, समतामूलक और संवेदनशील बनाएगी। इससे आदिवासी सहित अन्य वंचित वर्गों के लिए शिक्षा वास्तविक सशक्तिकरण का माध्यम बन सकेगी।
यमुनानगर शहर में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 10वीं कक्षा की परीक्षा के दौरान सामने आए छात्राओं से छेड़छाड़ के गंभीर मामले में अब बड़ा एक्शन लिया गया है। महिला थाना पुलिस ने आरोपी निरीक्षक के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है। मामला मॉडल कॉलोनी स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के परीक्षा केंद्र का है, जहां सोमवार को एसएसटी की परीक्षा के दौरान सात छात्राओं ने ड्यूटी पर तैनात टीचर पर गलत तरीके से छूने और गंदे इशारे करने के आरोप लगाए थे। उधर शिक्षक विभाग ने भी आरोपी पर कार्रवाई शुरू कर दी है। जिला शिक्षा अधिकारी प्रेम लता ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित क्लस्टर इंचार्ज से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद इसे मुख्यालय भेजा जाएगा, जहां से प्राप्त निर्देशों के अनुसार आरोपी शिक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। बैड टच और गंदे इशारों के आरोप 15 से 17 साल की सात छात्राओं का आरोप है कि उनकी बोर्ड परीक्षाएं मॉडल कॉलोनी स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में चल रही थीं। सोमवार को उनका एसएसटी का पेपर था। बताया कि जिस कमरे में वे परीक्षा दे रही थीं, वहां दडवा गांव के राजकीय स्कूल के टीचर सुखदेव की बतौर निरीक्षक ड्यूटी लगी हुई थी। आरोप है कि परीक्षा के दौरान निरीक्षक ने छात्राओं को गलत तरीके से छुआ और आंखों व हाथों से गंदे इशारे किए। परिजनों का सेंटर के बाहर हंगामा छात्राओं ने परीक्षा के दौरान पानी पीने के बहाने बाहर निकलकर अन्य स्टाफ को पूरी घटना की जानकारी दी। स्कूल स्टाफ ने तुरंत पुलिस और छात्राओं के संबंधित स्कूल को सूचना दी। जिसके बाद परिजनों को भी इस बारे में बताया गया। सूचना मिलते ही रामपुरा चौकी और महिला थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई और स्कूल प्रशासन ने आरोपी टीचर को पुलिस के हवाले कर दिया। परीक्षा खत्म होने के बाद जब अभिभावक केंद्र के बाहर पहुंचे, तो छात्राओं ने रोते हुए उन्हें पूरी घटना बताई। इससे गुस्साए परिजनों ने स्कूल के बाहर जमकर हंगामा किया और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज महिला थाना पुलिस ने सातों छात्राओं की शिकायत पर आरोपी टीचर सुखदेव के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। छात्राओं के बयान दर्ज कर साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। वहीं शिक्षा विभाग अपनी कार्रवाई में जुट गया है।
जौनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार को विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और विधिक संगठनों से जुड़े नागरिकों, छात्रों और अभिभावकों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नीतियों के समर्थन में राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से उच्च शिक्षा में समान अवसर, गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की गई। छात्रों ने कहा कि वे समाज के सभी वर्गों- अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और सामान्य वर्ग- के छात्रों के शैक्षणिक भविष्य के प्रति समान रूप से चिंतित और प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने जोर दिया कि UGC भारत सरकार द्वारा स्थापित एक वैधानिक संस्था है, जिसका मुख्य लक्ष्य देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, समान अवसर, पारदर्शिता और शैक्षणिक मानकों को बनाए रखना है। ज्ञापन में UGC की नीतियों से होने वाले सर्वसामान्य लाभों पर प्रकाश डाला गया। इसमें बताया गया कि UGC सभी वर्गों के छात्रों को समान अवसर प्रदान करता है। इसके दिशा-निर्देश यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी भी छात्र के साथ जाति, वर्ग या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव न हो, जिससे योग्य छात्रों को उच्च शिक्षा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। UGC की नीतियों के तहत आरक्षण एवं समावेशन की संतुलित व्यवस्था है। इसके माध्यम से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार अवसर मिलते हैं। साथ ही, आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त होता है, जिससे समाज के हर वर्ग की शिक्षा में भागीदारी सुनिश्चित होती है। ज्ञापन में छात्रवृत्ति, फेलोशिप और आर्थिक सहयोग के महत्व पर भी बल दिया गया। UGC की विभिन्न योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को पढ़ाई जारी रखने में सहायता करती हैं और प्रतिभाशाली छात्रों को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करती हैं, जिससे ड्रॉप-आउट की समस्या कम होती है। इसके अतिरिक्त, UGC उच्च शिक्षण संस्थानों में मनमानी फीस पर नियंत्रण रखता है और निजी एवं डीम्ड विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है, जिससे अभिभावकों और छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं पड़ता। अंत में, ज्ञापन में शिक्षा की गुणवत्ता और डिग्री की विश्वसनीयता को बनाए रखने में UGC की भूमिका को रेखांकित किया गया। UGC द्वारा निर्धारित नीतियां पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली और डिग्री की गुणवत्ता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
नालंदा जिला शिक्षा विभाग में गोपनीय दस्तावेजों के लीक होने का मामला सामने आया है। स्थापना डीपीओ आनंद शंकर ने विभाग की गोपनीयता भंग करने और बाहरी व्यक्तियों को कार्यालय के अभिलेख उपलब्ध कराने के आरोप में चार लिपिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने न केवल इनसे स्पष्टीकरण (शोकॉज) मांगा है, बल्कि तत्काल प्रभाव से इनके मार्च 2026 के वेतन की निकासी पर भी रोक लगा दी है। इन कर्मियों पर गिरी गाज जिन कर्मियों पर कार्रवाई की गई है, उनमें प्रधान लिपिक जावेद हसन मंसूरी के साथ लिपिक फणि मोहन, अरुण कुमार और पुरुषोत्तम कुमार शामिल हैं। जानिए क्या है पूरा मामला स्थापना डीपीओ की ओर से जारी पत्र के अनुसार, विभाग को ऐसी सूचना मिल रही थी कि उक्त लिपिकों द्वारा कार्यालय की गोपनीयता भंग की जा रही है। ये कर्मी अधिकारियों के आदेश के बिना ही बाहरी लोगों को कार्यालय के महत्वपूर्ण पत्र, अभिलेख और सूचनाओं की प्रतियां उपलब्ध करा रहे थे। चेतावनी के बाद भी नहीं सुधरे डीपीओ आनंद शंकर ने स्पष्ट किया कि यह मामला पहली बार सामने नहीं आया है। इससे पहले भी इन चारों लिपिकों को इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर मौखिक रूप से कड़ी चेतावनी दी गई थी। बावजूद इसके, इनके आचरण में कोई सुधार नहीं हुआ, जिसे सरकारी सेवक आचरण नियमावली के प्रतिकूल माना गया है। इन लिपिकों की ओर से बाहरी व्यक्तियों को कागजात उपलब्ध कराए जा रहे थे। जब तक इनका संतोषजनक स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होता, तब तक मार्च माह का वेतन स्थगित रहेगा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर इनके खिलाफ उच्चाधिकारियों को कठोर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी जाएगी। विभाग में मचा हड़कंप इस कार्रवाई के बाद जिला शिक्षा कार्यालय में हड़कंप मच गया है। डीपीओ ने साफ कर दिया है कि कार्यालय की शुचिता और गोपनीयता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब इन कर्मियों को यह साबित करना होगा कि उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई क्यों न की जाए।
वार्षिक सम्मेलन में वरिष्ठजनों का सम्मान और बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए किया प्रेरित गया
मुकडेगा | रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड के ग्राम लिबरा में रविवार को अखिल भारतीय अघरिया केंद्रीय समिति रायगढ़ की ओर से वार्षिक सम्मेलन (बाल सभा) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में अघरिया समाज के लोग, युवा और महिलाएं शामिल हुए। सम्मेलन के दौरान समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई और बच्चों व युवाओं को शिक्षा के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत उपाध्यक्ष दीपक कुमार सिदार मौजूद रहे। वहीं जनपद पंचायत अध्यक्ष ज्योति भगत, मुकडेगा मंडल अध्यक्ष संजय पटेल, पूर्व विधायक चक्रधर सिंह सिदार, रोशन पाणडा सहित समाज के कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अघरिया समाज की केंद्रीय अध्यक्ष उषा पटेल ने समाज के संगठन और शिक्षा के महत्व पर अपने विचार रखे।
एनएसएस शिविर में स्वच्छता, सर्वे और डिजिटल शिक्षा के बारे में दी जानकारी
भास्कर न्यूज | बाड़मेर राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय माल गोदाम रोड में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर के द्वितीय व तृतीय दिवस पर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम अधिकारी चेतना पुरोहित ने बताया कि शिविर के दौरान स्वयंसेविकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए सामाजिक जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों को अंजाम दिया। विकसित राजस्थान रन मैराथन में एनएसएस स्वयंसेविकाओं ने भाग लिया, जिसमें उनका नेतृत्व अरुणा सोलंकी व वीणा डूंगरानी ने किया। शिविर के दौरान स्वयंसेविकाओं ने विद्यालय परिसर में सघन स्वच्छता अभियान चलाकर स्वच्छता का संदेश दिया। साथ ही विद्यालय प्रांगण में लगाए गए पौधों को पानी देकर उनके संरक्षण का संकल्प भी लिया। शिविर के तीसरे दिन स्वयंसेविकाओं ने व्याख्याता अर्जुन कुमार और कार्यक्रम अधिकारी चेतना पुरोहित के मार्गदर्शन में गोद ली गई कच्ची बस्ती रातानाडा गणेश मंदिर क्षेत्र में सर्वे का कार्य किया। इस दौरान बस्ती के लोगों की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी जुटाई गई। उप-प्रधानाचार्य किशनलाल प्रजापत ने छात्राओं को डिजिटल शिक्षा के महत्व और उसके उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और पारंपरिक नृत्य, शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं में आगे बढ़ने का आह्वान
उदयपुर। राजस्थान आदिवासी महासभा भवन, सेक्टर-14 में आदिवासी समाज का होली मिलन समारोह सोमवार को आयोजित हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई। इसके बाद महिलाओं ने ढोल-कुंडी की थाप पर पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया। समारोह में राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया मुख्य अतिथि और पूर्व सांसद अर्जुनलाल मीणा विशिष्ट अतिथि रहे। अतिथियों का स्वागत संस्था अध्यक्ष सोमेश्वर मीणा और कार्यकारिणी सदस्यों ने किया। अतिथियों ने शिक्षा को प्राथमिकता देने और युवाओं से उच्च शिक्षा लेकर प्रशासनिक सेवाओं में जाने का आह्वान किया। कहा कि शिक्षा के बिना उत्थान संभव नहीं है। कार्यक्रम में पूर्व प्रधान जयसमंद गंगाराम मीणा और शंकर तावड़ ने भी विचार रखे। संचालन महासचिव सी.एल. परमार ने किया।
शिक्षा विभाग का एक अप्रैल से नया सत्र प्रारंभ, 20 मार्च को आ सकता है 10वीं बोर्ड का रिजल्ट
विनोद मित्तल | जयपुर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड इस बार दसवीं का रिजल्ट जारी करने को लेकर बड़ी तैयारी में जुटा है। ऐसा पहली बार होगा जब दसवीं का परिणाम मार्च के महीने में जारी होगा। वरन तो अमूमन मार्च के महीने में दसवीं की बोर्ड परीक्षाओं का समापन होता है। इस बार शिक्षा विभाग एक अप्रैल से नया सत्र प्रारंभ कर रहा है। इसको देखते हुए दसवीं बोर्ड का रिजल्ट 20 मार्च को जारी हो सकता है। दसवीं की बोर्ड परीक्षाएं 12 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में करीब 10 लाख विद्यार्थी शामिल हुए थे। राजस्थान बोर्ड ने दसवीं की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए 35 हजार शिक्षकों की ड्यूटी लगा रखी है। सामान्यता दसवीं का परिणाम हमेशा 12वीं कक्षा के बाद जारी होता रहा है। ऐसा भी पहली बार होगा जब 12वीं के पहले 10वीं का परिणाम जारी होगा। विभाग के इस निर्णय का अभिभावकों ने भी स्वागत किया है। उनका कहना है कि परीक्षा के बाद परिणाम जारी होने में देरी से विद्यार्थी भी परेशान रहते हैं। जब तक परिणाम नहीं आता विद्यार्थी स्कूल भी नहीं जा पाते है। अब जल्दी परिणाम आने से बच्चों की आगे की कक्षा की पढ़ाई समय पर प्रारंभ हो सकेगी।
हांसी जिले के नारनौंद उपमंडल के मनवीर सिंह का चयन असिस्टेंट प्रोफेसर (भूगोल) के पद पर हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले मनवीर ने अपनी स्कूली शिक्षा नारनौंद के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद नारनौंद के राजकीय महाविद्यालय से स्नातक और महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (रोहतक) से भूगोल विषय में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। भूगोल में पीएचडी कर रहे मनवीर मनवीर की इस सफलता पर उनके शिक्षकों और मित्रों में खुशी की लहर है। उनके अध्यापक रहे डॉ. अजय लोहान ने बताया कि मनवीर शुरू से ही मेहनती और लक्ष्य के प्रति समर्पित छात्र रहे हैं। वे पढ़ाई के प्रति हमेशा गंभीर रहते थे और अपने लक्ष्य को लेकर बेहद स्पष्ट थे। टीचर बोले- यह गर्व की बात डॉ. लोहान ने कहा कि मनवीर की उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि स्कूल और कॉलेज के लिए भी गर्व की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि मनवीर ने साबित कर दिया है कि सच्ची लगन और मेहनत से छोटे शहरों और कम संसाधनों के बावजूद भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। मनवीर बोले- लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए वहीं, मनवीर ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को दिया है। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए और उसे पाने के लिए लगातार मेहनत करनी चाहिए।
सिरसा जिले के चोपटा के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अली मोहम्मद में साक्षरता अभियान 'उल्लास' के तहत आयोजित परीक्षा का समापन हो गया है। इस परीक्षा में कुल 62 शिक्षार्थियों ने भाग लिया। परीक्षा में 96 वर्षीय हरदेई और 80 वर्षीय विमला पत्नी अमीलाल की भागीदारी विशेष रही। दोनों बुजुर्ग महिलाओं ने परीक्षा देकर अन्य प्रतिभागियों को प्रेरित किया। वयस्कों को साक्षर बनाना उद्देश्य स्कूल के प्राचार्य भूप सिंह ने बताया कि 'उल्लास' परीक्षा का समापन सफलतापूर्वक हुआ। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक शिक्षा पहुंचाना और वयस्कों को साक्षर बनाना है। संदेश फैलाने के लिए किया प्रेरित प्राचार्य ने बताया कि सभी शिक्षार्थियों ने पूरे मनोयोग से परीक्षा में भाग लिया। विद्यालय स्टाफ ने भी अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को शिक्षा से जुड़े रहने और समाज में साक्षरता का संदेश फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 16 मार्च 2026 से 5वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा शुरू हो गई है। केंद्रीकृत वार्षिक परीक्षा के तहत पहले दिन सोमवार को गणित विषय की परीक्षा आयोजित की गई। जिले में कक्षा 5वीं के कुल 5779 विद्यार्थी परीक्षा दे रहे हैं। इनके लिए 621 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। व्यवस्थाओं का जायजा लेने DEO जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने विभिन्न परीक्षा केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने परीक्षा के सुचारु संचालन के लिए केन्द्राध्यक्षों को आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान, उन्होंने विकासखंड गौरेला के मॉर्डन पब्लिक स्कूल, अग्रसेन शिशु मंदिर पेण्ड्रारोड, सेंट मेरी स्कूल, दया शंकर विद्या मंदिर गौरेला और नर्मदा पब्लिक स्कूल पेण्ड्रारोड का दौरा किया। इसके अतिरिक्त, विकासखंड पेंड्रा के कुंजन बाई चौकसे, ओरिएंटल पब्लिक स्कूल और सरस्वती शिशु मंदिर पेण्ड्रा का भी निरीक्षण किया गया।
भारतीय शिक्षण मंडल एवं स्कूल क्रांति संघ के सहयोग से साल 2026 का व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के व्याख्याता गजे सिंह उपस्थित रहे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में सहकार भारती के वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र दवे ने संबोधित किया। मुख्य वक्ता महेंद्र दवे ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र की आत्मा होती है। जिस देश की शिक्षा व्यवस्था कमजोर होती है, वहां विकास की गति भी प्रभावित होती है। वहां के संस्कार की कमी के कारण माता पिता वृद्धावस्था में अभावग्रस्त जीवन जीने को मजबूर हो जाते हैं, उच्च शिक्षा के बाद बच्चे विदेशों में बसते हैं, और माता-पिता के अंतिम संस्कार करने भी नहीं आते। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही देश की रीढ़ है और यही समाज में संस्कार, संस्कृति तथा विकास को दिशा देती है। संयुक्त परिवार बिखर रहे डाइट प्रिंसिपल मंजू शर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जब उन्होंने जोधपुर में अपनी सेवा प्रारंभ की थी, तब यहां कोई वृद्धाश्रम नहीं था, जबकि आज लगभग साठ से सत्तर वृद्धाश्रम संचालित हो रहे हैं। उन्होंने इसे समाज में संस्कारों की कमी और संयुक्त परिवार व्यवस्था के टूटने का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि आज बच्चे मोबाइल पर क्या देख रहे हैं, इस पर अभिभावकों का पर्याप्त ध्यान नहीं है, जिसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। RTE में कई समस्याओं का करना पड़ रहा है सामना वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष जोगेंद्र गौर ने निजी विद्यालयों के संचालन में आ रही समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राइट टू एजुकेशन (Right to Education Act) लागू होने के बाद निजी विद्यालयों को कई प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालयों को समय पर भुगतान नहीं मिल पाता और अनेक सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आरटीई पोर्टल के रखरखाव के नाम पर शुल्क लिया जाता है, लेकिन उसमें आवश्यक सुविधाओं का अभाव है, जबकि सरकारी विद्यालयों को कई सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध हैं। मुख्य अतिथि गजे सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्थानी भाषा, जो राजस्थान के लोगों की मातृभाषा है, उसके साथ उपेक्षा का व्यवहार हो रहा है। उन्होंने कहा कि National Education Policy 2020 में प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में देने की बात कही गई है, लेकिन राजस्थानी भाषा को अभी तक मान्यता नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक शोधों में भी यह सिद्ध हो चुका है कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने से बच्चों का मानसिक विकास अधिक प्रभावी ढंग से होता है। प्रांतीय मंत्री चंडीदान ने भारतीय शिक्षण मंडल की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला और विद्यालय संचालकों को भारतीय शिक्षण मंडल की गतिविधियों से अवगत कराया। कार्यक्रम के अंत में दिनेश शर्मा ने सभी विद्यालय संचालकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं के लिए मदर टेरेसा स्कूल के संचालक धीरेंद्र गहलोत का विशेष धन्यवाद दिया गया। मंच संचालन पूनम ने किया। कार्यक्रम में , डाइट प्रिंसिपल मंजू शर्मा, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष स्कूल क्रांति संघ जोगेंद्र गौड़, प्रांतीय मंत्री चंडीदान तथा दिनेश शर्मा उपस्थित रहे। इसमें धर्मेंद्र कछवाह, रामचंद्र कुड़िया, गोबर सिंह कछवाह, कंवरा राम, महिपाल सोऊ, चिमनाराम देदड़, दीपक चौधरी, नंद सिंह भाटी, मनोहर सिंह खुरियाला, गुलाब राव, रामकिशोर देवड़ा, संपत सुथार, सुरेंद्र मेवाड़ा, धर्मचंद सिशोदिया, महेन्द्र पटेल, नारायण पटेल, डूंगर सिंह गहलोत सहित अनेक विद्यालय संचालकों ने भाग लिया
भिवानी शहर में कामर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में अनियमितता बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके लिए डीसी साहिल गुप्ता की अध्यक्षता में जिला स्तर पर एक समिति का गठन किया गया है, जो व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। डीसी साहिल गुप्ता ने जारी आदेशों के अनुसार हरियाणा सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निर्देशों के तहत जिले में अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों व छात्रावासों जैसी आवश्यक श्रेणियों को प्राथमिकता के आधार पर व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध करवाने के लिए निगरानी समिति का गठन किया गया है। खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक भी करेंगे कार्य साथ ही राज्य सरकार के लिए प्रतिदिन की औसत खपत का 20 प्रतिशत एलपीजी स्टॉक आरक्षित रखने की व्यवस्था को भी सुनिश्चित किया जाएगा। कमेटी में पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी भिवानी और जिला शिक्षा अधिकारी को सदस्य बनाया गया है, जबकि जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक भिवानी सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे। जरूरी रिकार्ड को होगा व्यवस्थित डीसी ने कहा कि यह समिति जिले में आवश्यक सेवाओं के लिए एलपीजी सिलेंडरों की पर्याप्त और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। साथ ही उपलब्धता और प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडरों का आवंटन, विशेष परिस्थितियों में मांगों पर विचार तथा केंद्र व राज्य सरकार के निर्देशों के अनुपालन की निगरानी भी करेगी। जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक समिति के सदस्य सचिव के रूप में बैठकें आयोजित करेंगे और जरूरी रिकार्ड को व्यवस्थित करेंगे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
लसाड़िया के ढोकला तालाब गांव में शिक्षा जागरूकता रात्रि कार्यक्रम आयोजित
प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन ने ग्रामीणों और अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा के महत्व से अवगत कराने के लिए प्रोजेक्टर के माध्यम से शैक्षणिक फिल्में और गतिविधियां प्रदर्शित कीं।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी के 221 रिक्त पदों पर निकाली गई भर्ती में इस बार कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। आंकड़ों के अनुसार, एक-एक पद के लिए करीब 565 उम्मीदवार मैदान में हैं। आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी के अनुसार इस भर्ती के लिए रिकॉर्ड संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं, लेकिन परीक्षा की तिथि नजदीक होने के बावजूद अभी तक आयोग द्वारा विस्तृत पाठ्यक्रम (Syllabus) जारी नहीं किया गया है, जिससे अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी और अनिश्चितता का माहौल है। रिकॉर्ड 1.24 लाख आवेदन आयोग ने स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी के 221 पदों के लिए 22 दिसंबर से 22 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। आरटीआई के माध्यम से अभ्यर्थी अश्वनी शुक्ला को दी गई जानकारी के अनुसार, इस अवधि में कुल 1,24,806 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। यानी प्रत्येक सीट पर औसतन 565 उम्मीदवारों की दावेदारी है। पाठ्यक्रम के अभाव में तैयारी प्रभावित अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्ष 2005 के बाद अब जाकर यह भर्ती निकाली गई है। आवेदन प्रक्रिया पूरी हुए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन आधिकारिक वेबसाइट पर अभी तक विस्तृत और अपडेटेड पाठ्यक्रम अपलोड नहीं किया गया है। बिना सिलेबस के वे अपनी तैयारी को सही दिशा नहीं दे पा रहे हैं। उम्मीदवारों ने आयोग से जल्द से जल्द पाठ्यक्रम जारी करने की मांग की है ताकि वे परीक्षा की योजना बना सकें। शैक्षिक योग्यता और प्राथमिकताएं इस भर्ती के लिए अनिवार्य शैक्षिक अर्हता के रूप में किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र या अन्य सामाजिक विज्ञान विषयों (जैसे मानव विज्ञान, मनोविज्ञान, सामाजिक मनोविज्ञान, राजनीति विज्ञान, भूगोल, इतिहास और अर्थशास्त्र) में स्नातकोत्तर (Master’s Degree) होना आवश्यक है। इसके अलावा, प्रादेशिक सेना में दो वर्ष की सेवा या एनसीसी 'बी' प्रमाणपत्र धारकों को अधिमानी अर्हता दी जाएगी। अक्टूबर में प्रस्तावित है परीक्षा आयोग के परीक्षा कैलेंडर के अनुसार स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी भर्ती की स्क्रीनिंग परीक्षा 4 अक्टूबर को प्रस्तावित है। समय कम होने के कारण अभ्यर्थी अब सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से पाठ्यक्रम जारी करने का दबाव बना रहे हैं।
धर्म की सेवा...:14 वर्षों से हर साल 150 बच्चों को मुफ्त शिक्षा, हर रविवार गुरमत का ज्ञान
भास्कर न्यूज | जालंधर बस्ती शेख मॉडल हाउस क्षेत्र में सती मंदिर के पास संचालित कंवर सतनाम सिंह खालसा स्कूल (जीरो फीस) धर्म और समाज सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है। वर्ष 2012 से संचालित इस विद्यालय में वर्तमान में लगभग 150 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विशेष बात यह है कि यहां बच्चों से किसी प्रकार की फीस नहीं ली जाती, बल्कि उन्हें किताबें, पढ़ाई का पूरा सामान और दस्तारें भी मुफ्त उपलब्ध करवाई जाती हैं। विद्यालय में पंजाब बोर्ड के पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई करवाई जाती है और यह स्कूल दसवीं कक्षा तक संचालित है। विद्यार्थियों को धार्मिक और सांस्कृतिक शिक्षा, गुरमत विद्या, कविश्री, कीर्तन और धार्मिक लेक्चर की ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि उनमें आध्यात्मिकता और समाज सेवा की भावना विकसित हो सके। समय-समय पर धार्मिक मुकाबले करवाए जाते हैं। इससे बच्चों में सिख इतिहास, परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ती है। स्कूल के प्रिंसिपल मनदीप सिंह ने बताया कि हर रविवार को स्कूल में विशेष गुरमत क्लास आयोजित की जाती है, जिसमें गुरबाणी, सिख इतिहास और रहत मर्यादा से संबंधित शिक्षा दी जाती है। इन कक्षाओं में छह साल के छोटे बच्चों से लेकर उनके माता-पिता तक भाग लेते हैं। लगभग 50 बच्चे नियमित रूप से इन क्लासों में आते हैं। संस्था की ओर से एक लाइब्रेरी भी बनाई गई है, जहां धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन किया जा सकता है। पास ही स्थित गुरुद्वारा साहिब में बच्चे जाकर पाठ करके दिन की शुरुआत करते हैं। 25 से ज्यादा सदस्य उठा रहे शिक्षा का खर्च संस्था के सुप्रीम कौंसिल मेंबर बलजीत सिंह ने बताया कि यह संस्था सिख मिशनरी कॉलेज, लुधियाना से संचालित है। जालंधर सर्किल में संस्था के करीब 25 सदस्य सक्रिय रूप से सेवा दे रहे हैं। स्कूल का मासिक खर्च लगभग एक लाख रुपए है, जिसे संस्था के सदस्य और दानी सज्जनों के सहयोग से चलाया जाता है। स्कूल मुख्य रूप से दसवंध की परंपरा के आधार पर चल रहा है। इसके अलावा संस्था अन्य धार्मिक प्रोजेक्ट भी चला रही है। कीर्तन दरबार के दौरान बुक स्टॉल लगाए जाते हैं, जहां धार्मिक साहित्य लोगों तक पहुंचाया जाता है। अलग-अलग स्कूलों में धार्मिक शिक्षा के फॉर्म उपलब्ध करवाकर बच्चों को धर्म से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।
साक्षरता की महापरीक्षा 22 मार्च को, 410 केंद्रों में बैठेंगे जिले के 17 हजार 338 शिक्षार्थी
जिले में निरक्षरता मिटाने के लिए चल रहे उल्लास नवभारत साक्षरता अभियान के तहत 22 मार्च को कबीरधाम में महा परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा में जिले के 17,338 वयस्क शिक्षार्थी शामिल होंगे। इसके लिए पूरे जिले में 410 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं और शिक्षा विभाग ने गांव-गांव अभियान शुरू कर दिया है। दरअसल, जिले में 15 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे लोगों का सर्वे कराया गया था जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते। अब उन्हें बुनियादी साक्षरता से जोड़ने के लिए यह परीक्षा आयोजित की जा रही है। इसे जिले में साक्षरता अभियान का सबसे बड़ा चरण माना जा रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी एफआर वर्मा ने अधिकारियों की बैठक लेकर निर्देश दिए हैं कि परीक्षा से पहले सभी केंद्रों में आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं। उन्होंने कहा कि परीक्षा के एक दिन पहले गांवों में मुनादी कराकर भी शिक्षार्थियों को इसकी विस्तृत जानकारी दी जाए। रैली निकाल परीक्षा देने किया प्रेरित परीक्षा में अधिक से अधिक शिक्षार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग ने अलग रणनीति बनाई थी। योजना के तहत स्कूली छात्रों ने अपने- अपने गांवों में रैली निकाली। अभियान से जुड़े लोग इसके साथ ही घर- घर संपर्क कर लोगों को परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। 17,338 शिक्षार्थियों को शामिल करने का लक्ष्य जिला परियोजना अधिकारी देवराज सिंह ने बताया कि जिले में 17,338 शिक्षार्थियों को परीक्षा में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 410 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। सभी ग्राम प्रभारी प्रधान पाठकों और शिक्षकों से अपील की गई है कि वे चिन्हित सभी शिक्षार्थियों को परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रेरित करें। इस अभियान में स्वयंसेवी शिक्षक वयस्कों को पढ़ना- लिखना सिखा रहे हैं। ताकि वे बुनियादी शिक्षा से जुड़ सकें। 17 हजार लोग देंगे परीक्षा, प्रशासन की बड़ी चुनौती इतनी बड़ी संख्या में वयस्कों को परीक्षा केंद्र तक लाना प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इसलिए इस बार साक्षरता अभियान को उत्सव की तरह चलाने की तैयारी की गई है। रैली, मुनादी और घर-घर संपर्क के जरिए लगातार कोशिश की जा रही है कि कोई भी चिन्हित शिक्षार्थी परीक्षा से छूट न जाए।
सिंधी समाज के 72 शिक्षाविदों का स्मृति चिन्ह देकर सम्मान
भास्कर संवाददाता| भीलवाड़ा सिंधी समुदाय के आराध्य देव भगवान झूलेलाल के अवतरण दिवस के प्रतीक चेटीचंड के 10 दिवसीय महोत्सव के तहत रविवार को स्टेशन चौराहा के पास सिंधी समाज के दादा हेमराजमल भगत झूलेलाल सनातन मंदिर में सिंधी समाज के 72 शिक्षाविदों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। मीडिया प्रभारी मूलचंद बहरवानी ने बताया कि अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा, गुलाबपुरा नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष चेतन पेशवानी, शहर विधायक के कार्यालय प्रभारी बाबूलाल टांक, मेवाड़ यूनिवर्सिटी के निदेशक हरीश गुरनानी, बीमा चिकित्सालय के डॉ. गिरीश दत्ता, पूर्व अतिरिक्त कलेक्टर प्रशासन हुंदल विधानी, मूलचंद पेशवानी, प्रमुख व्यवसायी मनोहर बदलानी, वरिष्ठ समाजसेवी लालचंद नथरानी, वीरूमल पुरसानी रहे। महामंत्री हरीश सखरानी ने बताया कि कविता रामचंदानी की नारी शक्ति पर लिखित नारी तू नारायणी पुस्तक का विमोचन किया। संस्थाध्यक्ष गुलशनकुमार विधानी ने अतिथियों का स्वागत किया। सोनिया टहलानी, द्रोपदी सिंधी, सिंधी समाज के मीडिया प्रभारी मूलचंद बहरवानी, खुशबू लालवानी, पदमा वाधवानी, राम नानकानी, दिव्या खोतानी, दर्शना आडवानी, मधु तेजवानी, मेघा केवलानी, सुनीता नानकानी सहित भारतीय सिंधु सभा व मुस्कान फाउंडेशन की ओर से संचालित शिक्षण गतिविधियों में शामिल कईं स्वयंसेवी शिक्षकों को सम्मानित किया। सब्जी मंडी स्थित झूलेलाल मंदिर के सेवादारियों ने बहराणा साहब का आयोजन किया।
विधानसभा में जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने वाली जौनपुर की मछलीशहर विधानसभा से समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर का कहना है - विपक्ष में होते हुए भी मैं अपने क्षेत्र में स्वास्थ्य, शिक्षा और जनहित के मुद्दों पर लगातार काम कर रही हूं। मेरे कामकाज का मूल्यांकन करने का अधिकार जनता के पास है। शिक्षामित्रों का भला सपा सरकार में हुआ था। भाजपा सरकार में उनके साथ गलत हुआ। भास्कर रिपोर्टर ने विधायक रागिनी सोनकर से खास बातचीत की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: पिछले 4 साल के कामकाज को 10 में से कितने नंबर देंगी? जवाब: मैं लगातार काम कर रही हूं और आगे भी करती रहूंगी। अपने काम का नंबर देने का अधिकार जनता को है और मछलीशहर की जनता ही इसका फैसला करेगी। सवाल: सबसे बड़ा काम आपने कौन सा कराया? जवाब: मछलीशहर में आंखों के अस्पताल का निर्माण कराया जा रहा है, जिसकी नींव समाजवादी पार्टी ने रखी थी। इसके लिए सांसद जया बच्चन ने फंड दिया है। अस्पताल का निर्माण कार्य चल रहा है। पूरा होने के बाद इसमें आधुनिक मशीनें भी लगाई जाएंगी। सवाल: शिक्षामित्रों के मुद्दे पर आपकी पार्टी का क्या रुख है? जवाब : समाजवादी पार्टी ने हमेशा शिक्षामित्रों के मुद्दे को उठाया है। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की सरकार में करीब 40 हजार शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाया गया था। भाजपा सरकार आने के बाद उनकी नौकरियां चली गईं। अगर हमारी सरकार आती है तो शिक्षामित्रों के सम्मान और उनके हित में फैसला लिया जाएगा। सवाल: क्या इस बार भी आप टिकट की दावेदार हैं? जवाब: यह फैसला पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा। मैं पूरी निष्ठा के साथ काम कर रही हूं और उम्मीद है कि पार्टी मुझे फिर मौका देगी। सवाल: यूजीसी और एसआईआर जैसे मुद्दों को आप कैसे देखती हैं? जवाब: इन मुद्दों पर सरकार की नीतियों से विवाद का माहौल बना है। अधिकारियों को निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए, लेकिन कई मामलों में ऐसा नहीं दिखता। इससे जनता का भरोसा कमजोर होता है।
कोटा जिले में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की पदयात्रा के तीसरे दिन, यात्रा सुबह करीब 8 बजे मंदिरगढ़ से शुरू हुई। यह यात्रा मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व क्षेत्र में स्थित केशवपुरा गांव से होते हुए जसपुरा गांव पहुंची। यात्रा के दौरान रास्ते में बबूल का कांटा मंत्री दिलावर के पैर में चुभ गया। सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी तुरंत उनकी ओर दौड़े, लेकिन मंत्री ने उन्हें रोक दिया। खुद ही अपने पैर से कांटा निकाल लिया। इस दौरान मंत्री मदन दिलावर ने कहा- राजनीति फूलों की सेज नहीं है। जनसेवा के मार्ग पर जनता अक्सर उन्हें फूल-मालाओं से स्वागत करती है। ऐसे में अगर जनता के लिए चलते हुए पैरों में कांटे भी चुभ जाएं तो उसे आशीर्वाद की तरह स्वीकार करना चाहिए। मंत्री मदन दिलावर 13 मार्च से अपने विधानसभा क्षेत्र रामगंज मंडी में पदयात्रा कर रहे हैं। मंत्री के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) के अनुसार, लगातार पैदल चलने के कारण पिछले 36 घंटों में उनका लगभग 5 किलो वजन कम हो गया है। धूल-मिट्टी और लगातार भाषण देने के कारण उनका गला भी बैठ गया है। शिक्षा मंत्री की पदयात्रा से जुड़ी PHOTOS… स्कूल क्रमोन्नत करने का दिलावर का वादा जसपुरा गांव में दिलावर ने एक वादा किया। मंत्री ने कहा- यदि सरकारी स्कूल में 25 और बच्चों का नामांकन कराया जाता है, तो वे तुरंत ही स्कूल को सेकेंडरी स्कूल में क्रमोन्नत कर देंगे। छोटे बच्चों के लिए जनजातीय विकास विभाग के माध्यम से बालवाड़ी खोलने के लिए प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए। मुफ्त मकान बनवाने के लिए फॉर्म भरवाए मंत्री मदन दिलावर ने विकास अधिकारी शैलेश रंजन को वन अधिकार कानून के तहत गांव के सभी लोगों को तीन महीने में मकान के पट्टे देने के निर्देश दिए। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर कहा- मंदिर गढ़, केशवपुरा, और जसपुरा में शिविर लगाए जाएं। इन शिविरों का उद्देश्य वंचित सभी पात्र व्यक्तियों तक पहुंचना है। शिविरों में वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, और दिव्यांग पेंशन के लिए आवेदन भरवाए जाएं। साथ ही, खाद्य सुरक्षा योजना में मुफ्त गेहूं प्राप्त करने के लिए भी फॉर्म भर जाएंगे। मंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मुफ्त मकान बनवाने के लिए भी फॉर्म भरवाने के निर्देश दिए। पुराने स्कूल भवन को सामुदायिक भवन के लिए हस्तांतरित करने और मरम्मत कर सुंदर बनाने को कहा। किशनपुरा से जसपुरा को सड़क से जोड़ने के लिए 10 लाख रुपए देने की घोषणा की। कार्यक्रम में गरासिया समुदाय की महिलाओं एवं पुरुषों ने पारंपरिक लोक गीतों पर शानदार सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बिना मान्यता वाले स्कूलों के एडमिशन विज्ञापन के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को इस मामले में पर्सनल एफिडेविट दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही संबंधित स्कूल को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया गया है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। यह सुनवाई जनहित याचिका (WPPIL No. 22/2016) में इंटरवीनर विकास तिवारी द्वारा उठाए गए मुद्दों पर की गई। शिकायतों पर कार्रवाई नहीं, कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट सुनवाई के दौरान इंटरवीनर ने कोर्ट को बताया कि उनकी शिकायतों को 5 फरवरी 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय ने दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारियों को भेजकर एक सप्ताह में कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस पर कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को आदेश का पालन करते हुए अगली सुनवाई तक कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। एडमिशन विज्ञापन पर कोर्ट ने लिया संज्ञान इंटरवीनर ने अदालत के सामने एक पत्रिका में प्रकाशित एडमिशन विज्ञापन भी प्रस्तुत किया। इसमें सत्र 2026–27 के लिए कई निजी स्कूलों में प्रवेश शुरू होने की जानकारी दी गई थी। याचिका में कहा गया कि ये स्कूल आवश्यक मान्यता के बिना संचालित हो रहे हैं इसके बावजूद एडमिशन का विज्ञापन देकर छात्रों को प्रवेश देने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। इसे अदालत के पूर्व आदेशों का उल्लंघन बताया गया। किड्स एकेडमी के पांच ब्रांच शामिल एडमिशन विज्ञापन में जिन स्कूलों का उल्लेख किया गया इनमें तुलसी कृष्णा किड्स एकेडमी, मोवा के अलावा कृष्णा किड्स एकेडमी के ही शंकर नगर, न्यू राजेंद्र नगर, सुंदर नगर और शैलेंद्र नगर ये चार ब्रांच शामिल हैं। कोर्ट ने मामले में कृष्णा पब्लिक स्कूल, तुलसी (रायपुर) को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। शिक्षा सचिव को जवाब देने का आदेश डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को इस मामले में पर्सनल एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि बिना मान्यता के स्कूलों द्वारा एडमिशन का विज्ञापन देना अदालत के वैध आदेशों की अवमानना की श्रेणी में आ सकता है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 तय की है। उस दिन विभाग को कार्रवाई की स्थिति और अपना जवाब अदालत के सामने पेश करना होगा।
वाल्मीकि समाज ने प्रगति और शिक्षा मुद्दों पर की विशेष बैठक
भास्कर न्यूज | अमृतसर वाल्मीकि समाज की सामाजिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में भागीदारी को मजबूत बनाने के उद्देश्य से अमृतसर में बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता भगवान वाल्मीकि आश्रम धूना साहिब ट्रस्ट के चेयरमैन ओम प्रकाश गब्बर ने की। बैठक में वाल्मीकि समाज के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया। खासकर शिक्षा के क्षेत्र में समाज के विद्यार्थियों को हो रहे नुकसान पर चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि कई उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में वाल्मीकि समाज के लिए निर्धारित आरक्षित सीटों का सही ढंग से आवंटन नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण योग्य विद्यार्थियों को उनके अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है। बैठक में समाज से जुड़े वकीलों को पेश आ रही समस्याओं के समाधान पर भी चर्चा हुई। साथ ही यह मुद्दा भी सामने आया कि समाज के अधिकांश बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, लेकिन कई स्थानों पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। कुछ सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की लापरवाही और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। इस अवसर पर नरेश गिल,रिंकू मल्होत्रा, दविंदर कुमार पहलवान, बलबीर सिंह बिट्टू पहलवान, अशोक मल्होत्रा, लक्ष्मण सिंह, अजय पहलवान, बंटी कुमार, पवन कुमार उर्फ पम्मू , सुशील पुरी सहित कई गणमान्य सदस्य मौजूद रहे।
तीन बार नियमावली बदली, अभी भी संशोधन का प्रस्ताव शिक्षा विभाग में लंबित
भास्कर न्यूज | गढ़वा दस वर्षों से झारखंड शिक्षा पात्रता परीक्षा (जेटेट) का आयोजन नहीं किया गया है। ऐसे में अभ्यर्थियों में आक्रोश देखा जा रहा है। इस संबंध में बताया गया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्रतिवर्ष शिक्षक पात्रता परीक्षा होनी है। राज्य में वर्ष 2011 से शिक्षा का अधिकार अधिनियम प्रभावी है। ऐसे में अब तक 15 शिक्षक पात्रता परीक्षा हो जानी चाहिए थी। पर मात्र दो ही परीक्षा हुई है। राज्य में पहली शिक्षक पात्रता परीक्षा 2013 में तथा दूसरी परीक्षा वर्ष 2016 में हुई थी। इस दौरान प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त विद्यार्थी किसी भी शिक्षक नियुक्ति परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। प्राथमिक व मध्य विद्यालय में शिक्षक नियुक्ति के लिए अभ्यर्थी का शिक्षक पात्रता परीक्षा सफल होना अनिवार्य है। अभ्यर्थी निजी विद्यालय में शिक्षक नहीं बन पा रहे हैं। राज्य में भले ही दस वर्ष से जे टेट की परीक्षा नहीं हुई है। पर इस दौरान नियमावली में तीन संशोधन किया गया है।लेकिन अभी तक जे टेट परीक्षा आयोजित नहीं की गई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सभी शिक्षकों को जे टेट परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। लेकिन जब परीक्षा ही आयोजित नहीं होगी तो शिक्षक परीक्षा उत्तीर्ण कैसे करेंगे। 2024 में परीक्षा के लिए भरवाया गया था आवेदन : वर्ष 2024 के जुलाई माह में जे टेट परीक्षा को लेकर आवेदन भरवाया गया था। लेकिन परीक्षा को लेकर जारी सिलेबस का विरोध के बाद इसमें बदलाव का निर्णय लिया गया। वहीं कुछ दिनों के बाद उक्त परीक्षा को रद्द कर दी गई थी। वहीं अभी तक जे टेट परीक्षा को लेकर अधिसूचना जारी नहीं की गई है। पहली नियमावली वर्ष 2012 में बनाई गई थी। जिसके आधार पर वर्ष 2013 और वर्ष 2016 में परीक्षा हुई। इसके बाद नियमावली में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की गई। वर्ष 2019 में नियमावली में संशोधन को कैबिनेट से स्वीकृति मिली। विभाग द्वारा परीक्षा लेने के लिए जैक को प्रस्ताव भेजा गया। जैक ने परीक्षा के विभिन्न विषयों में अंकों में एकरूपता नहीं होने की बात कह शिक्षा विभाग से मार्गदर्शन मांगा। इसके बाद वर्ष 2022 में नियमावली को संशोधित किया गया। परीक्षा के लिए फिर जैक को प्रस्ताव भेजा गया। हालांकि नियमावली में फिर भी विसंगति रह गई। जिसकी वजह से जैक ने फिर मार्गदर्शन मांगा। इसके बाद नियमावली में फिर बदलाव किया गया। इसके बाद फिर नियमावली में बदलाव हुआ। इसके बाद में इसमें भी विसंगति रह गई और फिर संशोधन का प्रस्ताव शिक्षा विभाग स्तर पर लंबित है। परीक्षा नहीं होने के विरोध में निकाला मशाल जुलूस जे टेट परीक्षा आयोजित नहीं होने के विरोध में झारखंड प्रशिक्षित शिक्षक संघ गढ़वा के बैनर तले मशाल जुलूस निकाली गई। मशाल जुलूस चिनियां मोड़ से रंका मोड़ तक निकाली गई। विपिन कुमार चंद्रवंशी के नेतृत्व में निकाली गई जुलूस में छात्रों ने कहा कि सरकार ने पहले जे टेट का नोटिफिकेशन जारी कर छात्रों से फॉर्म भरवाया। जिससे अच्छा-खासा राजस्व भी प्राप्त हुआ। लेकिन इसके बावजूद परीक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे छात्रों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार से अविलंब जे टेट नियमावली को कैबिनेट से पारित कर जल्द परीक्षा आयोजित कराने की मांग की है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 16 मार्च को झारखंड के 24 जिलों के अभ्यर्थी रांची पहुंचकर विधानसभा का घेराव करेंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। लेकिन यदि सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज करती है तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस अवसर पर वीरेंद्र प्रसाद, नईमुद्दीन अंसारी, दिलीप पाल, नंदलाल कुमार, मंगलेश कुमार, वेद प्रकाश शर्मा, गोपाल कुमार, संजय यादव आदि उपस्थित थे।
दयानन्द शिक्षा संस्थान यूपी के मंत्री मानवेन्द्र स्वरुप ने संस्थान के प्रबंधन और परिसंपत्तियों पर अवैध कब्जा करने की साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल से की। जिनके आदेश पर कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्जकर मामले की जांच शुरू की। मानवेन्द्र स्वरुप का आरोप है कि रणजीत सिंह और एनडी मनिहार समेत अन्य लोगों द्वारा संस्थान की संपत्तियों पर द्वारा अवैध कब्जे की साजिश की जा रही है। डॉ. गौर हरि सिंहानिया की मृत्यु प्रमाण पत्र छावनी परिषद कानपुर के अभिलेखों में दर्ज है। वहीं स्व. जागेन्द्र स्वरुप की मृत्यु 30 जुलाई 2014 को दिल्ली के साकेत सिटी अस्पताल में हुई थी। उनका वैध मृत्यु प्रमाण पत्र दक्षिण दिल्ली नगर निगम द्वारी जारी किया गया था। दोनों मृत्यु प्रमाण पत्र नगर निगम कानपुर द्वारा जारी नहीं किए गए है। बावजूद इसके आरोपियों ने झूठी तिथि, स्थान और कारण दर्शाकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कर न्यायिक और प्रशासनिक कार्यवाहियों में प्रस्तुत किया गया है। जिससे संस्थान की संपत्तियों और प्रबंधन पर अवैध कब्जा किया जा सके। कोतवाली थाना प्रभारी जगदीश पांडेय ने बताया कि रिपोर्ट दर्जकर मामले की जांच की जा रही है।
शेखपुरा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 'समृद्धि यात्रा' सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। यात्रा के समापन के बाद शनिवार शाम समाहरणालय में आयोजित प्रेस वार्ता में जिलाधिकारी शेखर आनंद और एसपी बलिराम कुमार चौधरी ने इसे जिले के लिए काफी सफल और उपयोगी बताया। जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री की इस यात्रा के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। सभा स्थल सहित लगभग 200 अन्य स्थानों पर दंडाधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात किया गया था। एसपी बलिराम कुमार चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा और आम लोगों की सुविधा के लिए 6 कंपनी अतिरिक्त पुलिस बल के साथ 200 पुलिस पदाधिकारियों को लगाया गया था। कार्यक्रम के दौरान किसी को कोई परेशानी नहीं हुई। जिलाधिकारी शेखर आनंद ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने जीविका, आंगनवाड़ी और कृषि विभाग सहित अन्य विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का भी अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने गांव के एक विद्यालय में स्थापित एरोबिक्स लैब की प्रशंसा की और छात्र-छात्राओं को इससे लाभान्वित करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर ही अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने निर्देश दिया कि लोगों का जीवन आसान बनाने के लिए सभी सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक त्वरित गति से पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को लोगों की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने जिला प्रशासन को मानकों के अनुसार सभी प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम की सफलता के लिए जिलावासियों के साथ-साथ सभी अधिकारियों और पुलिस प्रशासन को धन्यवाद दिया।
लखनऊ पूर्वी भाजपा विधायक ओपी श्रीवास्तव विनय खंड गोमतीनगर में एक शिलान्यस कार्यक्रम में पहुंचे। यहां सवर्ण मोर्चा की टीम ने विधायक से यूजीसी के मुद्दे पर सवाल पूछा। इसपर विधायक ने कहा कि घर आइए, तब जवाब देंगे। साथ ही कहा- युवाओं की पढ़ाई लिखाई से जुड़ा मुद्दा है। धैर्य बनाए रखिए। सर्वोच्य न्यायालय से इसका स्थगन आदेश आया है। इसके बाद विधायक अपनी गाड़ी से निकल गए। सवर्ण मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि सवर्ण समाज के नेता लोग जहां भी मिलेंगे। वहां पर उनसे सवाल पूछा जाएगा। मौके पर लोग सामान्य वर्ग मोर्चा के संयोजक संदीप सिंह के साथ पहुंचे थे। इस दौरान हंगामा करने का भी आरोप लोगों पर लगा। मौके पर पुलिस के साथ स्थानीय लोकल इंटेलीजेंस यूनिट के अधिकारी मौजूद थे। सवर्ण मोर्चा के लोग बोले- इधर उधर की बात की सवर्ण मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि विधायक से जब पूछा गया तो उनकी तरफ से इधर-उधर की बात की। सीधे इस मुद्दे का जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद वह यहां से चले गए। यूजीसी की गाइडलाइन पर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से रोक लगाई गई, लेकिन सरकार की तरफ से इसे खुद वापस नहीं लिया गया है। इससे सवर्ण छात्र-छात्राओं के साथ में विश्वविद्यालयों में अन्याय होगा। पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक इसे वापस नहीं लिया जाएगा। तब तक अभियान चलाकर समाज को जागरूक किया जाता रहेगा। मौके पर सवर्ण मोर्चा की तरफ से प्रवक्ता अभिनव त्रिपाठी, अरविंद पाठक, सर्वजीत सिंह और अभय सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर अपने विधानसभा क्षेत्र रामगंजमंडी में चार दिवसीय जनहिताय–जन सुखाय पदयात्रा के तहत लगातार गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद कर रहे हैं। पदयात्रा के दूसरे दिन शनिवार सुबह 8 बजे ग्राम सोहनपुर से यात्रा की शुरुआत हुई। सोहनपुर में मंत्री मदन दिलावर ने गांव के बीच स्थित जंगल जलेबी के पुराने पेड़ के नीचे बैठकर ग्रामीणों की जनसुनवाई की। इस दौरान ग्रामीणों ने गांव में नाली नहीं होने से पानी फैलने और कीचड़ की समस्या बताई। समस्या सुनते ही मंत्री ने मौके पर समाधान की घोषणा करते हुए अपने विधायक कोष से इंटरलॉकिंग सड़क और नाली निर्माण के लिए 10 लाख रुपए की स्वीकृति दी। मंत्री दिलावर ने कहा कि उनकी पदयात्रा का उद्देश्य सिर्फ यात्रा करना नहीं बल्कि गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याओं को समझना और तुरंत समाधान सुनिश्चित करना है। पदयात्रा के दौरान प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों की पूरी टीम मंत्री के साथ मौजूद रही। इसके बाद पदयात्रा मोहनपुरा गांव पहुंची, जहां मंत्री ने भील बस्ती में जाकर लोगों से मुलाकात की। बस्ती के लोगों ने पानी, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं मंत्री के सामने रखीं। इस दौरान भील समाज की महिलाओं ने भी मंत्री से सीधे संवाद कर अपनी समस्याएं बताईं, जिन पर मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
लखनऊ के जानकीपुरम क्षेत्र से बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और शिक्षामित्र दिलीप कुमार सिंह रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हैं। उनका 23 फरवरी को घर से निकलने के बाद से अब तक कोई पता नहीं चल सका है। मोबाइल फोन तब से स्विच ऑफ है। दिलीप की पत्नी और परिवार के लोग 19 दिन बाद 13 मार्च को देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिलकर मदद की गुहार लगाई है। पढ़िए क्या है पूरा मामला जानकीपुरम क्षेत्र में रहने वाले दिलीप कुमार सिंह बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के रूप में भी कार्य कर रहे थे। 23 फरवरी को वह सुबह घर से निकले थे, लेकिन उसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल सका। परिवार के लोगों का कहना है कि घर से निकलने के कुछ समय बाद से उनका मोबाइल फोन बंद हो गया। वह घर से बाहर जाते हुए CCTV में भी दिखे थे। उन्होंने बीकेटी SDM पर नौकरी से निकालने की धमकी देने की बात भी वॉट्सएप ग्रुप पर कही थी। विधायक योगेश शुक्ला ने परिवार को रक्षा मंत्री से मिलवाया घटना की जानकारी मिलने के बाद बीकेटी क्षेत्र के विधायक योगेश शुक्ला भी दिलीप कुमार सिंह के घर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और हरसंभव मदद का भरोसा दिया। विधायक ने बताया कि वह पिछले तीन दिनों से लगातार प्रशासन के संपर्क में हैं और मामले की जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खोजबीन में तेजी लाई जाए। विधायक ने ही परिवार को रक्षा मंत्री से मिलवाया। रक्षा मंत्री बोले- खोजबीन में तेजी लाई जाए दिलीप कुमार सिंह के लापता होने से परेशान परिजनों ने 13 मार्च को देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर उन्हें पूरी घटना से अवगत कराया। परिवार ने रक्षा मंत्री से अपील की कि मामले में हस्तक्षेप कर पुलिस प्रशासन को खोजबीन तेज करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि दिलीप कुमार सिंह को जल्द से जल्द सकुशल ढूंढकर परिवार के पास लाया जा सके। रक्षा मंत्री ने भी पुलिस महकमे को निर्देश दिए की खोजबीन में तेजी लाई जाए। अब तक क्या-क्या हुआ- आखिरी लोकेशन अनौरा कला के पास मिली पुलिस की शुरुआती जांच में दिलीप कुमार सिंह की आखिरी लोकेशन अनौरा कला क्षेत्र के आसपास मिली है। इसके बाद उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो गया, जिससे आगे की लोकेशन ट्रेस नहीं हो सकी। पुलिस की टीम आसपास के क्षेत्रों में जांच कर रही है और संभावित स्थानों पर खोजबीन की जा रही है। स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि उनके बारे में कोई सुराग मिल सके। SIR कार्य के दबाव की भी सामने आई बात परिवार और परिचितों के अनुसार दिलीप कुमार सिंह इन दिनों एसआईआर (स्पेशल इनरोलमेंट रिव्यू) कार्य में लगे हुए थे और इस काम का उन पर काफी दबाव भी बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है और हर दिशा में जांच आगे बढ़ाई जा रही है। मामा के लड़के को मैसेज किया था जानकीपुरम थाने में दिलीप कुमार सिंह की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसके बाद पुलिस की कई टीमें उनकी तलाश में लगाई गई हैं। पुलिस आसपास के क्षेत्रों में सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और मोबाइल लोकेशन के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। दिलीप सिंह ने अपने ममेरे भाई को मैसेज किया था। उसमें लिखा- भाई मैं तुम्हारा कर्जदार बड़ा भाई। मामा-मामी का ख्याल रखना। हमारे भी माता-पिता हैं। पिंकू गाय जरूर रखना मामा-मामी चाहे जितना गुस्सा करें। पिंकू काम का प्रेशर बहुत है। ऑफिसियल ग्रुप पर भी किए मैसेज उसने ऑफिस के वाट्सऐप ग्रुप पर भी मैसेज भेजा है। उसमें लिखा- सुषमा मैडम सुपरवाइजर साहब भाग संख्या 191 बीएलओ दिलीप सिंह शिक्षा मित्र एसआईआर का कार्य छोड़कर जा रहा हूं। मेरे नोटिस फॉर्म मेरी बाइक के झोले में है। जो मेरे घर पर खड़ी है। जरूरत समझना तो ले लेना गुडबाय। इस पर सुषमा नाम से सेव नंबर से जवाब आया- दिलीप आप कहां हो। उसके बाद दिलीप ने लिखा- हां मैं एक बात कहना भूल गया। अपने एसडीएम बीकेटी से कह दो जाकर नौकरी ले लें। जो बार-बार दबाव बनाने के लिए कहते हैं कि नौकरी ले लूंगा। सिस्टम पर शिक्षामित्र दिलों और कुर्बान। इस पर सुषमा नाम से सेव नंबर से फिर जवाब आता है- आप का काम तो ठीक है। आप ऐसा क्यों कह रहे हैं।
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (BSEH) द्वारा ली जा रही बोर्ड परीक्षाओं का रिजल्ट मई के दूसरे सप्ताह में जारी किए जाएंगे। दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन प्रो. डॉ. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि पहले 12वीं कक्षा का और बाद में 10वीं कक्षा का रिजल्ट जारी किया जाएगा। वहीं अगले सत्र में भीड़-भाड़ वाले परीक्षा केंद्रों को भी बदला जाएगा। जिनकी लिस्ट तैयार की जा रही है। बता दें कि 25 फरवरी से 12वीं एवं 26 फरवरी से 10वीं कक्षा की परीक्षाएं आरंभ हुई थी। सेकेंडरी व सीनियर सेकेंडरी (शैक्षिक/मुक्त विद्यालय) की वार्षिक परीक्षाओं के लिए प्रदेशभर में करीब 1431 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इन परीक्षा केंद्रों पर लगभग 5 लाख 66 हजार 411 परीक्षार्थी प्रविष्ठ हो रहे हैं। जिसमें 2 लाख 96 हजार 593 लड़के व 2 लाख 69 हजार 818 लड़कियां शामिल हैं। एफआर का कार्य प्रगति परहरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन प्रो. डॉ. पवन कुमार शर्मा ने बताया कि 25 फरवरी बोर्ड परीक्षाएं आरंभ हुई हैं। शिक्षा बोर्ड में उत्तर पुस्तिकाएं आना शुरू हो गई है। इनका एफआर (इन पर सिक्रेसी कोड लगाना) लगाते हैं। यह कार्य प्रगति पर है और साथ-साथ चल रहा है। जैसे ही 20 मार्च को 10वीं की परीक्षा खत्म होंगी। उसके बाद मार्किंग का काम शुरू करेंगे। इससे पहले मार्किंग शुरू ना करने का कारण यह भी है कि हमारा ज्यादातर टीचिंग स्टाफ परीक्षा ड्यूटी पर है। मई के दूसरे सप्ताह में जारी करेंगे रिजल्टउन्होंने बताया कि प्रयास रहेगा की मई के दूसरे सप्ताह में रिजल्ट घोषित कर दिया जाए। 12वीं (सीनियर सेकेंडरी) क्लास में रिजल्ट व नंबरों का अधिक महत्व रहता है, क्योंकि उन्हें दूसरे यूनिवर्सिटी या कॉलेज में एडमिशन लेना होता है। अन्य परीक्षाओं में भी मार्कसीट के नंबर अपलोड करने होते हैं। कोशिश यही कर रहे हैं कि 12वीं कक्षा का रिजल्ट पहले जारी करेंगे। उसके बाद 10वीं का रिजल्ट जारी किया जाएगा। फ्लाइंग सेंटरों का डाटा इकट्ठा कर रहीशिक्षा बोर्ड चेयरमैन डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि फ्लाइंग टीम हर रोज लगभग सभी परीक्षा केंद्रों में जाती हैं। उनसे रिपोर्ट मंगवाई है कि कौन-कौन से ऐसे परीक्षा केंद्र हैं, जो भीड़ में हैं, जहां बच्चों, फ्लाइंग व स्टाफ को जाने में दिक्कत होती है। कौन-कौन से ऐसे सेंटर हैं, जहां बच्चों के बैठने की उचित व्यवस्था नहीं हैं। अर्थात ड्यूल डेस्क नहीं हैं और बच्चे टाट पट्टी पर बैठ रहे हैं। अगले सत्र में जो परीक्षा होगी, उस दौरान ये दिक्कत ना हो। अगले सत्र में उन सेंटरों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां तक पहुंच आसान है, खुला एरिया और सीटिंग अरेंजमेंट ठीक है। 15 दिन बाद दोबारा परीक्षा का मौका देंगेउन्होंने कहा कि शिक्षा बोर्ड इन परीक्षाओं के समाप्त होने के 15 दिन के बाद विशेष अवसर देने जा रहा है। जिनका एक या दो पेपर किसी कारणवश अच्छा नहीं हो पाया है। वे दोबारा अप्लाई करके पेपर दे सकते हैं। जिस पेपर में अच्छे अंक आएंगे, वे मार्कसीट में दर्शाए जाएंगे। जिससे उनको कोई नुकसान भी नहीं होगा। परीक्षा समाप्ति के 15 दिन बाद ही बच्चों को यह मौका दिया जाएगा।
राज्य के सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से ही योग की पढ़ाई होगी। वैदिक गणित को पाठ्यक्रम में जोड़ा जाएगा। स्कूलों में आखिरी पीरियड अनिवार्य रूप से खेल का होगा। विधानसभा में शुक्रवार को स्कूल शिक्षा विभाग का 22466 करोड़ रुपए का बजट ध्वनिमत से पास हो गया। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि यह बजट राज्य में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पीएम श्री योजना के अंतर्गत स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इस योजना के लिए बजट में 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन स्कूलों में ग्रीन स्कूल, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, आधुनिक प्रयोगशालाएं, खेल सुविधाएं और कैरियर काउंसिलिंग जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही शिक्षकों को उच्च शिक्षण संस्थानों के माध्यम से प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उत्कृष्ट स्कूलों के लिए 100 करोड़ का प्रावधान स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश में 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों की स्थापना होगी। इन विद्यालयों के लिए बजट में 100 करोड़ का प्रावधान किया गया है। ये स्कूल प्रत्येक ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होंगे, जिससे ग्रामीण विद्यार्थियों को उच्च स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। नवा रायपुर में बनेगा प्रशासनिक भवन स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि शिक्षा विभाग के प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए नवा रायपुर में विभाग का एक आधुनिक प्रशासनिक कॉम्पोजिट भवन बनाया जाएगा। इसके लिए प्रारंभिक रूप से 5 करोड़ 90 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। इस भवन में लोक शिक्षण संचालनालय, समग्र शिक्षा, संस्कृत विद्या मंडल, मदरसा बोर्ड, माध्यमिक शिक्षा मंडल सहित कई कार्यालय संचालित होंगे। सभी दस्तावेजों पर क्यूआर कोड, टीसी भी ऑनलाइन स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि विद्यार्थियों को शैक्षणिक दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत छात्रों की मार्कशीट और ट्रांसफर सर्टिफिकेट को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। नई व्यवस्था में दस्तावेज पर क्यूआर कोड और यूनिक आईडी दी जाएगी, जिसके जरिए उनकी डिजिटल सत्यता की जांच की जा सकेगी। भास्कर एक्सक्लूसिव तीसरी के बच्चों की परीक्षा अब पेन-कागज पर नहीं, टैबलेट पर होगी तीसरी कक्षा के बच्चों की बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान की परीक्षा अब पेन- कागज नहीं, बल्कि टैबलेट पर ली जाएगी। शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति की ओर एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए सीबीएसई ने फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी का निर्णय लिया है। अब तक यह ओएमआर शीट पर होती थी। एनसीईआरटी की इकाई परख मार्च के अंत में यह महा-सर्वेक्षण आयोजित करने जा रही है। सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों के प्राचार्यों को इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है। केंद्र सरकार इसके जरिए देश के कोने-कोने में तीसरी कक्षा में पढ़ रहे बच्चों के शिक्षा के स्तर को मापना चाहती है। इस अभियान के तहत देशभर 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी 776 जिलों के करीब 10 हजार से अधिक सरकारी, अनुदान प्राप्त और निजी स्कूल शामिल है। एक लाख से अधिक छात्र इस प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे। स्कूलों का इसका पालन करना अनिवार्यसीबीएसई ने निर्देश दिए हैं कि जिन स्कूलों का चयन सैंपलिंग के आधार पर हुआ है, उन्हें सर्वे की निर्धारित तारीखों पर स्कूलों का चालू रहना और छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करना जरूरी है। सर्वे के लिए आने वाली टीमों को पूरा प्रशासनिक और तकनीकी सहयोग देना होगा। एनसीईआरटी कर रहा मार्गदर्शनराष्ट्रीय स्तर पर एनसीईआरटी परख के सर्वे के लिए तकनीकी मार्गदर्शन दे रहा है। वहीं राज्यों में समग्र शिक्षा, एससीईआरटी, डाइट और जिला शिक्षा कार्यालयों को इसके कार्यान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब तक ओएमआर शीट पर हुई थी परीक्षा साल 2022 में हुए पिछले सर्वे में ओएमआर शीट का इस्तेमाल किया गया था। अब सीबीएसई ने कहा है कि वर्ष 2026 का यह सर्वे पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगा। सीबीएसई के अनुसार डिजिटल मोड से न केवल डेटा की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि रिजल्ट तैयार करने में भी समय की बचत होगी। इससे सटीक रिपोर्ट जल्द मिल सकेगी।
छात्राओं को शिक्षा का उपयोग समाज सुधार में करने की दी सलाह
गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स (जीसीजी) में दीक्षांत समारोह बड़े उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। यह समारोह प्रिंसिपल सुमन लता के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसमें छात्राओं, शिक्षकों, अभिभावकों और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। पटियाला स्थित पंजाबी यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ जगदीप सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह के दौरान कुल 836 छात्राओं को उनके शैक्षणिक कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर डिग्रियां प्रदान की गईं। जैसे ही छात्राओं ने मंच पर जाकर अपनी डिग्री प्राप्त की, पूरा परिसर तालियों और उत्साह से गूंज उठा और वातावरण गर्व तथा खुशी से भर गया। समारोह को संबोधित करते हुए डॉ जगदीप सिंह ने छात्राओं को उनकी उपलब्धियों पर बधाई दी और कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए ज्ञान, समर्पण और कड़ी मेहनत को निरंतर अपनाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं को यह भी प्रेरित किया कि वे अपनी शिक्षा का उपयोग समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करें और हमेशा ईमानदारी, अनुशासन और उत्कृष्टता के मूल्यों को अपने जीवन में बनाए रखें। समारोह में कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रही, जिनमें डॉ. मंजू साहनी, डॉ. जसवंत सिंह, सरदार कुलदीप सिंह, सरदार सोही और डॉ. राजीव सहित कॉलेज की पीटीए सदस्य कविता शर्मा भी शामिल थीं। कार्यक्रम के सफल आयोजन में उप रजिस्ट्रार निवेदिता शर्मा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पूरे समारोह के सुचारू संचालन में सहयोग दिया। मंच की कार्यवाही डॉ. हरलीन कौर और डॉ. रूपिंदर कौर ने प्रभावी ढंग से संचालित की, जिससे कार्यक्रम अनुशासित और आकर्षक बना रहा। समारोह के अंत में वाइस प्रिंसिपल सरिता खुराना ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि, अतिथियों, टीचरों, कर्मचारियों और छात्राओं का आभार व्यक्त किया। समारोह ने छात्राओं के जीवन के एक महत्वपूर्ण पड़ाव को उत्सव के रूप में चिन्हित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
लखनऊ में द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), उत्तर प्रदेश राज्य केंद्र ने शुक्रवार को 'स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता' विषय पर एक तकनीकी व्याख्यान आयोजित किया। आईईआई भवन, रीवर बैंक कॉलोनी में हुए इस कार्यक्रम में इंजीनियरों, शिक्षाविदों और छात्रों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई की संभावनाओं पर चर्चा की। एमिटी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सचिन कुमार मुख्य वक्ता थे। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) स्वास्थ्य सेवाओं को तेज, सटीक और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। एआई तकनीक से रोगों की पहचान अधिक सटीकता से संभव हो रही है, जिससे मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिल पाता है। चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में लगातार सुधार हो रहा डॉ. कुमार ने आगे कहा कि एआई आधारित सिस्टम डॉक्टरों को निर्णय लेने में सहायता करते हैं। इससे गंभीर बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकता है। डेटा विश्लेषण, डिजिटल हेल्थ सर्विसेज और स्मार्ट हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में लगातार सुधार हो रहा है।उन्होंने टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड, रोबोटिक सर्जरी और स्मार्ट हेल्थकेयर सिस्टम जैसे क्षेत्रों में भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डाला। इन तकनीकों से दूरदराज के मरीजों तक भी स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से पहुंच रही हैं। नई तकनीक स्वास्थ्य स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण कार्यक्रम की अध्यक्षता आईईआई उत्तर प्रदेश राज्य केंद्र के अध्यक्ष इं. वी.पी सिंह ने की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ नई तकनीकों और डिजिटल समाधानों के जरिए समाज के स्वास्थ्य स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।कार्यक्रम के संयोजक डॉ. ए.के जौहरी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की । उन्होंने मुख्य वक्ता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था भविष्य में भी ऐसे ज्ञानवर्धक और जनोपयोगी कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी।
दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त हिमांशु कुमार राय की अध्यक्षता में आज प्रमंडलीय सभागार में शिक्षा विभाग की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में दरभंगा प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले जिलों के जिला शिक्षा विभाग के पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान आयुक्त ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों के मानदेय का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में मानदेय भुगतान में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। आयुक्त ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नियमित रूप से इन विद्यालयों का निरीक्षण करने और परिसर की चहारदीवारी, सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरों को सक्रिय रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही छात्राओं को सरकार द्वारा संचालित सभी योजनाओं का फायदा दिलाने का भी निर्देश दिया। बैठक में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर भी आयुक्त ने जानकारी ली और निर्देश दिया कि सभी शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहकर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराएं। उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारियों को विद्यालयों में टॉयलेट, बेंच-डेस्क, पंखा, स्मार्ट टीवी जैसी आवश्यक सुविधाओं की स्थिति की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। जर्जर विद्यालय भवनों का सर्वेक्षण कर रिपोर्ट तैयार करें इसके अलावा आयुक्त ने जर्जर विद्यालय भवनों का सर्वेक्षण कर रिपोर्ट तैयार करने को कहा, ताकि आवश्यकतानुसार मरम्मत या पुनर्निर्माण की कार्रवाई की जा सके। उन्होंने प्रत्येक जिला शिक्षा पदाधिकारी को अपने जिले में कम से कम 10 विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों का नियमित निरीक्षण करने का निर्देश दिया। साथ ही विद्यालय भवनों का रंग-रोगन कराने, सभी विद्यालयों में चहारदीवारी निर्माण और भूमिहीन विद्यालयों के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया तेज करने को कहा। बैठक में उप निदेशक (शिक्षा), क्षेत्रीय विकास पदाधिकारी आकाश ऐश्वर्य सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे। डीएम की अध्यक्षता में जनसुनवाई, कई मामलों का ऑन द स्पॉट निष्पादन बिहार सरकार के “निश्चय पार्ट-3 : सबका सम्मान – जीवन आसान” कार्यक्रम के अंतर्गत जिलाधिकारी कौशल कुमार की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में जनसुनवाई का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि प्रत्येक सप्ताह सोमवार और शुक्रवार को थाना, अंचल, प्रखंड, अनुमंडल, जिला एवं प्रमंडल स्तर के सरकारी कार्यालयों में पदाधिकारी आम नागरिकों की शिकायतों की सुनवाई कर उनके समाधान की दिशा में कार्रवाई करते हैं। शुक्रवार को आयोजित जनसुनवाई में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए लोगों ने अपनी समस्या डीएम के सामने रखीं। डीएम ने सभी आवेदनों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान 20 से अधिक आवेदनों पर विस्तृत सुनवाई की गई, जिनमें से लगभग आधे मामलों का मौके पर ही निष्पादन कर दिया गया। शेष मामलों को संबंधित विभागों को अग्रसारित करते हुए शीघ्र कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। प्राप्त आवेदनों में मुख्य रूप से भूमि विवाद, जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) से संबंधित शिकायतें, बहाली से जुड़े मामले और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल थे। डीएम के जनता दरबार में 30 से अधिक परिवादियों की सुनी गई समस्या जिलाधिकारी कौशल कुमार ने समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित जनता दरबार कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों से आए नागरिकों की समस्याएँ सुनीं। जनता दरबार में कुल 30 से अधिक परिवादी पहुंचे, जिनमें 25 आवेदन ऑनलाइन और 5 आवेदन ऑफलाइन माध्यम से प्राप्त हुए। इस दौरान भू-अर्जन, ग्रामीण विकास, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, आपदा प्रबंधन, परिवहन, पंचायती राज, शिक्षा, पशु एवं मत्स्य और समाज कल्याण विभाग से संबंधित शिकायतें सामने आईं। जिलाधिकारी ने सभी परिवादियों की समस्याओं को संवेदनशीलता और धैर्यपूर्वक सुना। इनमें से आधे से अधिक मामलों का तत्काल समाधान कर दिया गया, जबकि शेष मामलों को संबंधित विभागों को भेजते हुए शीघ्र जांच कर निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। डीएम ने स्पष्ट कहा कि जनता दरबार में हासिल शिकायतों का समाधान सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग करने और आवेदकों को समय-समय पर प्रगति की जानकारी देने का भी निर्देश दिया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों के वरीय पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 'जियोकॉन–2026' का आगाज हो गया है । जिसका विषय 'भूविज्ञान और जलवायु परिवर्तन हेतु सतत पर्यावरण' रहा। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि युद्ध और संसाधनों का अंधाधुंध दोहन नहीं रुका, तो आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ नहीं बचेगा। संगोष्ठी के संयोजक और भू-विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. ध्रुवसेन सिंह ने कहा कि वर्तमान में हो रहे युद्धों में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक अस्त्र-शस्त्र जलवायु परिवर्तन की रफ्तार बढ़ा रहे हैं। इससे ग्लोबल वार्मिंग में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि अगर हम एक 'सस्टेनेबल' पृथ्वी चाहते हैं, तो हमें 'ग्रीन एनर्जी' और 'ग्रीन इकोनॉमी' को अपनाना होगा। पृथ्वी हमें जीवन के लिए ऑक्सीजन, पानी और खनिज दे रही है, लेकिन मानवीय गतिविधियों ने इसे संकट में डाल दिया है। हिमालय में चट्टानों के गिरने का वैज्ञानिक समाधान IIT पटना के निदेशक प्रो. टी.एन सिंह ने पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाले भूस्खलन और चट्टानों के गिरने (Rockfall) पर व्याख्यान दिया। उन्होंने हिमालयी क्षेत्रों में बनने वाली 'अर्ध-सुरंगों' के सुरक्षित निर्माण के लिए डायनेमिक रॉकफॉल एनालिसिस की जरूरत बताई। खास बातें: जो चर्चा में रहीं ब्लू इकोनॉमी: NIO गोवा के निदेशक प्रो. सुनील सिंह ने बताया कि महासागर भविष्य की अर्थव्यवस्था के आधार हैं।एनर्जी सिक्योरिटी: AMD हैदराबाद के निदेशक डॉ. धीरज पांडे ने नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य के लिए रणनीतिक खनिजों के महत्व पर चर्चा की । प्रो. अरविंद मोहन ने कहा कि आज दुनिया में जितने भी अंतरराष्ट्रीय संघर्ष हो रहे हैं, उनके पीछे प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जे की होड़ है। 200 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए सम्मेलन में देश के 29 विश्वविद्यालयों और लगभग 20 प्रमुख राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिक, शिक्षाविद और शोधार्थी भाग ले रहे हैं। पहले दिन आठ विशेष व्याख्यान आयोजित हुए और 200 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।कार्यक्रम में डॉ. स्नेहा रघुवंशी, डॉ. ज्योत्सना दुबे, डॉ. मनोज यादव,प्रो. एमजी ठक्कर, राजिंदर कुमार और प्रो. पंकज श्रीवास्तव समेत कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।
संभल में एलपीजी गैस सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी में उपभोक्ताओं को हो रही परेशानियों के बाद माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री गुलाब देवी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराने को कहा है। शुक्रवार सुबह 11 बजे संभल के चंदौसी कोतवाली कस्बे में स्थित मंत्री गुलाब देवी के आवास पर कई उपभोक्ता एलपीजी गैस बुकिंग न होने की शिकायत लेकर पहुंचे। उपभोक्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने तत्काल जिला आपूर्ति अधिकारी समेत अन्य अधिकारियों से फोन पर बात की। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे व्यवस्था को सुधारें। महिलाओं की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं, गरीब लोग लाइन में लगे हुए हैं। उनकी गैस बुक होनी चाहिए और समय पर मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई भी स्थिति हो, जनता को गैस की कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। घरेलू एलपीजी के सुचारु वितरण को सुनिश्चित करने के लिए संभल में एक महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित की गई। जिलाधिकारी के निर्देश पर एडीएम (वित्त एवं राजस्व) प्रदीप वर्मा की अध्यक्षता में यह बैठक गुरुवार शाम 6 बजे जिला कलेक्ट्रेट बहजोई सभागार में हुई, जो करीब डेढ़ घंटे तक चली। इसमें सभी गैस वितरक, बिक्री अधिकारी और आपूर्ति विभाग के कर्मचारी शामिल हुए। बैठक का समन्वय क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी/प्रभारी जिला पूर्ति अधिकारी कमलेश चंद्र ने किया। एडीएम प्रदीप वर्मा ने गैस वितरकों को निर्देश दिए कि वे उपभोक्ताओं के साथ विनम्रतापूर्ण व्यवहार करें और उन्हें बुकिंग व डिलीवरी की पूरी जानकारी दें। उन्होंने विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) के लिए नियमानुसार प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। बिक्री अधिकारियों ने उपभोक्ताओं को बताया कि वे भीम ऐप, यूपीआई, पेटीएम और गूगल पे जैसे डिजिटल माध्यमों से घर बैठे गैस बुक कर सकते हैं। बीपीसीएल के बिक्री अधिकारी प्रतीक उपाध्याय और आईओसीएल के बिक्री अधिकारी जिवतेश ने बताया कि एलपीजी की दैनिक खपत के मुकाबले पर्याप्त स्टॉक है, दो दिन का स्टॉक हमेशा बना रहता है। उपभोक्ता पूर्व में की गई ओटीपी गैस बुकिंग के 25 दिन बाद दोबारा गैस रिफिल प्राप्त कर सकते हैं।
किशनगंज स्थित माता गुजरी यूनिवर्सिटी में पहला दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर मेडिकल, नर्सिंग और फार्मेसी संकाय के 1198 स्नातक विद्यार्थियों को औपचारिक रूप से डिग्रियां प्रदान की गईं। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार डॉ. इच्छित भारत सहित अन्य पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत किया। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यूनिवर्सिटी की सराहना की दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी थे। उनके साथ बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार और उद्योग एवं सड़क निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल भी उपस्थित रहे। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में माता गुजरी यूनिवर्सिटी की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस सुदूर इलाके में विश्वविद्यालय खोलकर अल्पसंख्यक बच्चों को शिक्षा प्रदान करना एक सराहनीय कार्य है। ''सबसे अधिक पढ़ने वाला बच्चा ही डॉक्टर और इंजीनियर बनता'' उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आयुष्मान कार्ड योजना का भी जिक्र किया, बताया कि पहले बिहार में 50 हजार लोगों के कार्ड बने थे, जो अब 2 करोड़ से अधिक हो गए हैं। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि सबसे अधिक पढ़ने वाला बच्चा ही डॉक्टर और इंजीनियर बनता है, और उन्हें जीवन भर अध्ययन करते रहना चाहिए। उन्होंने डॉक्टरों को 'धरती के भगवान' बताते हुए डॉ. दिलीप जायसवाल को 'भगवान की फैक्ट्री' स्थापित करने के लिए बधाई दी। शिक्षा मंत्री सुनिल कुमार ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा, बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में पिछले वर्षों में बड़े बदलाव हुए हैं और सरकार शिक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। शिक्षा बजट 68 हजार करोड़ तक पहुंचा शिक्षा मंत्री ने कहा कि पहले की सरकारों की तुलना में आज शिक्षा के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बिहार का शिक्षा बजट अब बढ़कर 68 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो राज्य की प्राथमिकताओं को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पहले बिहार में केवल पांच विश्वविद्यालय थे, जबकि आज उनकी संख्या बढ़कर 15 हो चुकी है। इसके अलावा राज्य में 76 हजार से अधिक स्कूल संचालित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य में लगभग 5 लाख 75 हजार से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं और 1 करोड़ 76 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। एक करोड़ से अधिक छात्रों को मिल रहा मध्याह्न भोजन शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में 1 करोड़ 3 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा शुरू की गई साइकिल योजना और पोशाक योजना का भी व्यापक असर देखने को मिला है। इन योजनाओं के कारण बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं स्कूलों से जुड़े हैं और खासकर लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा मिला है। महिलाओं की साक्षरता दर में हुआ बड़ा इजाफा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार में महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में महिलाओं की साक्षरता दर मात्र 34 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर करीब 74 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव सरकार की विभिन्न योजनाओं और शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता का परिणाम है। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड से लाखों छात्रों को मिला लाभ शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना चला रही है। इस योजना के तहत लाखों छात्रों को ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की योजना देश के अन्य राज्यों में नहीं है और इससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को पढ़ाई जारी रखने में बड़ी मदद मिल रही है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में लगभग 2500 प्राध्यापकों की नियुक्ति की जा चुकी है और सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में सभी ब्लॉकों में मॉडल स्कूल और डिग्री कॉलेज खोले जाएं। आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का शिक्षा मंत्री ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है और ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जो इससे अछूता रहेगा। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे नई तकनीकों को अपनाएं और अपने कौशल को विकसित करें, ताकि बदलते समय के साथ खुद को तैयार कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि माता गुजरी यूनिवर्सिटी के विकास के लिए सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी। संघर्षों को याद कर भावुक हुए मंत्री दिलीप जायसवाल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार सरकार में उद्योग सह पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल ने भी डिग्री प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि जब वर्ष 1990 में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की बात हुई थी, तब देश के केवल चार राज्यों आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु में ही निजी मेडिकल कॉलेज मौजूद थे। उन्होंने कहा कि जब वे मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता लेने दिल्ली गए थे, तो कई लोगों ने आश्चर्य जताया था कि जब गुजरात, हरियाणा और राजस्थान जैसे विकसित राज्यों में निजी मेडिकल कॉलेज नहीं खुले हैं, तो बिहार जैसे पिछड़े राज्य में यह कैसे संभव होगा। उन्होंने मेडिकल कॉलेज खोलने के दौरान आए संघर्षों को याद करते हुए कहा कि कठिनाइयों के बावजूद प्रयास जारी रखा गया और आज उसका परिणाम सामने है। डिग्री मिलने के बाद छात्रों में दिखा उत्साह दीक्षांत समारोह में डिग्री प्राप्त करने के बाद छात्र-छात्राओं के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। कई छात्रों ने अपने परिवार और शिक्षकों के साथ इस उपलब्धि का जश्न मनाया। समारोह में बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षक और विश्वविद्यालय के अधिकारी भी मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान छात्रों को भविष्य में कड़ी मेहनत करने और समाज के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।
सेंट जेवियर्स कॉलेज में एआई के युग में मूल्य आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर व्याख्यान
भास्कर न्यूज | सिमडेगा सेंट जेवियर्स कॉलेज में एआई के युग में मूल्य आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उच्च शिक्षा में अवसर और चुनौतियां विषय पर एक दिवसीय विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सेंट जेवियर्स कॉलेज, कोलकाता के रेक्टर फादर जयराज वेलुस्वामी उपस्थित थे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज के दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं और चुनौतियां लेकर आई है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए योग्य और समर्पित शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, जो विद्यार्थियों को सही दिशा प्रदान करते हैं। फादर वेलुस्वामी ने सेंट जेवियर्स कॉलेज कोलकाता के इतिहास का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए बताया कि इसके बाद रांची और सिमडेगा में भी सेंट जेवियर्स कॉलेज की स्थापना की गई, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने विद्यार्थियों को पुस्तकालय और कंप्यूटर लैब का अधिक उपयोग करने, अनुशासन बनाए रखने तथा अपने ज्ञान को निरंतर अद्यतन करते रहने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने कहा कि एआई और चैट जीपीटी जैसे तकनीकी साधनों का सही उपयोग कर छात्र अपनी पढ़ाई को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान कॉलेज के प्राचार्य फादर रोशन बा ने अतिथि का गमछा और पौधा भेंट कर स्वागत किया। मौके पर कॉलेज के शिक्षकगण,छात्र-छात्र ाएं और अन्य अतिथि उपस्थित थे। कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा। कार्यक्रम में भाग लेने वाले अतिथि व प्रतिभागी।
उन्मुखीकरण कार्यशाला में शिक्षा सुदृढ़ करने पर जोर
लोहरदगा|ग्राम पंचायत भौरों के पंचायत भवन में गुरुवार को एक दिवसीय ग्राम पंचायत उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन मुखिया सुमंति तिग्गा और प्रजायत्न संस्था के संयुक्त प्रयास से किया गया। कार्यशाला में उप मुखिया, ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, वार्ड सदस्य, विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) के सदस्य, आंगनवाड़ी सेविका-सहायिका तथा ग्रामीणों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के दौरान पंचायत क्षेत्र में बच्चों की शिक्षा की स्थिति, विद्यालय से बाहर रह रहे बच्चों की पहचान, आंगनवाड़ी और विद्यालयों के संचालन व समुदाय की भागीदारी पर विस्तार से चर्चा की। उपस्थित प्रतिनिधियों ने कहा कि पंचायत में ज्ञान केंद्र की स्थापना और संचालन से बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा व उनकी शैक्षणिक प्रगति में सुधार होगा। बैठक में निर्णय लिया गया कि पंचायत क्षेत्र में विद्यालय से बाहर रह रहे बच्चों की पहचान कर उन्हें विद्यालय और ज्ञान केंद्र से जोड़ा जाएगा। इसके लिए सप्ताह में दो दिन घर-घर जाकर बच्चों को चिह्नित किया जाएगा और पंचायत स्तर पर बैठक कर आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
एसआईआर के काम से रिलीव होंगे शिक्षा विभाग के कार्मिक
उदयपुर | गहन मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर) में लगे शिक्षा विभाग के कर्मचारी अब रिलीव किए जाएंगे। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा राजस्थान, बीकानेर के निदेशक सीताराम जाट ने गुरुवार को आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया है कि प्रभावित कार्मिकों का कार्यग्रहण या कार्यमुक्ति सुनिश्चित किया जाए। संबंधित नियंत्रण अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी कार्मिक को चुनाव या जनगणना कार्य का दायित्व सौंपा गया है, तो वह केवल जिला निर्वाचन अधिकारी या सक्षम अधिकारी की अनुमति से ही कार्यमुक्त किया जा सके। निदेशक ने इसे प्राथमिकता देने और समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है।
समानता और शिक्षा की क्रांतिकारी मशाल: सावित्रीबाई फुले
10मार्च सावित्रीबाई फुले महापरिनिर्वाण दिवस भारतीय समाज में जब भी शिक्षा,समानता और सामाजिक न्याय की बात उठती है,तो एक नाम इतिहास के पन्नों से निकलकर हमारे सामने खड़ा हो जाता है—सावित्रीबाई फुले।10मार्च को उनका महापरिनिर्वाण दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है,बल्कि यह दिन उस सामाजिक चेतना को याद करने का अवसर है,जिसने सदियों ... Read more
आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं
महिला दिवस पर विशेष:- अजमेर राजस्थान आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं:- देश-प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध ओर इन अपराधों में पिछले वर्षो में अपराध की दर तीव्र ही हुई है ओर “भारत मे अपराध ” नामक रिपोर्ट बताती है ... Read more
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समर्थन से भारत शिक्षा के सभी स्तरों पर एआई शिक्षण और रिसर्च को एकीकृत करके खुद को एक वैश्विक एआई महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है
शिक्षा को हिंसक नहीं, संवेदनशील बनाना होगा
देश में इन दिनों बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं और सामान्य परीक्षाएं भी शुरू होने वाली हैं। हर साल की तरह इस बार भी परीक्षा का मौसम केवल प्रश्नपत्रों और परिणामों का नहीं, बल्कि मानसिक दबाव, चिंता और असुरक्षा का मौसम बनता जा रहा है। छात्रों के चेहरों पर भविष्य की चिंता साफ पढ़ी जा ... Read more
गला घोटिया शिक्षा का विश्वगुरु बन चुका देश
पिछले 12 सालों से देश को विश्वगुरु बनाने का जो झूठ फैलाया जा रहा था, अब उसका गुबार ऐसा फूटा है कि दुनिया भर में शर्मिंदगी का सबब बन गया है।
How to apply for RBI Assistant 2026 : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक और नई भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया है। आरबीआई ने 650 पदों पर असिस्टेंट की रिक्तियां निकाली हैं। इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट opportunities.rbi.org.in पर भर्ती विज्ञापन जारी हो ...
शिक्षा में समता या नई असमानताः यूजीसी नियमों पर न्यायिक विराम
नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर लागू किए गए नए नियमों ने देश के शैक्षिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बार फिर गहरी हलचल पैदा कर दी है। जिस नीति को ‘समता’, ‘समान अवसर’ और ‘समावेशी शिक्षा’ की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया ... Read more
शिक्षा खौफनाक नहीं, बल्कि स्नेह एवं हौसलों का माध्यम बने
जीवन को दिशा देने वाली शिक्षा यदि भय, हिंसा और दमन का पर्याय बन जाए तो वह सभ्यता की सबसे बड़ी विडंबना कही जाएगी। हाल के वर्षों में पढ़ाई के नाम पर बच्चों पर बढ़ते दबाव, घर और स्कूल में हिंसक व्यवहार तथा प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ ने शिक्षा की आत्मा पर गहरा आघात किया ... Read more
सावित्रीबाई फुलेः शिक्षा से सामाजिक क्रांति तक
-बाबूलाल नागा 3 जनवरी भारतीय सामाजिक इतिहास का वह महत्वपूर्ण दिन है, जो शिक्षा, समानता और महिला सशक्तिकरण के संघर्ष की प्रतीक सावित्रीबाई फुले की जयंती के रूप में मनाया जाता है। सावित्रीबाई फुले केवल पहली महिला शिक्षिका ही नहीं थीं, बल्कि वे उस सामाजिक क्रांति की धुरी थीं, जिसने सदियों से जकड़ी रूढ़ियों, जातिवाद ... Read more
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
NEET UG रिजल्ट को लेकर अभी भी जारी है गुस्सा, छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के पास किया विरोध प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए छात्रों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। आइए जानते हैं, क्या है पूरा म
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का 10 फीसदी भी डाटा नहीं हुआ अपलोड
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का डाटा अपलोड करने में जिले के कई स्कूल ढील दे रहे हैं, वे 10 फीसदी छात्रों का भी डाटा अभी तक अपलोड नहीं कर पाए हैं। डाटा अपलोड करने में आधार कार्ड की अनिवार्यता के बाद से छ
बेसिक शिक्षा : दो महीने बाद भी 1.38 लाख छात्रों का डेटा नहीं हुआ अपडेट
बेसिक शिक्षा विभाग के यू डायस पोर्टल पर डेटा अपडेट करने का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। हाल ये है कि दो महीने में महज 1.38 लाख छात्रों डेटा भी अपडेट नहीं हुआ। विभाग ने अब 5 जून तक इसे पूरा करने क
स्कूलों में कैसे पढ़ा रहे हैं शिक्षक, वीडियो में देखेगा शिक्षा विभाग, होगी रिकॉर्डिंग
शिक्षा विभाग वीडियो के जरिए देखेगा कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षक छात्रों को कैसे पढ़ाते हैं। बता दें. छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षकों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। आइए जानते हैं विस्तार से।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति : यूपी बोर्ड ने दिए निर्देश, एनईपी लागू करने को स्कूल बनाएंगे प्लान
यूपी बोर्ड से जुड़े 27 हजार से अधिक स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू करने के लिए स्कूल स्तर पर योजना बनाई जाएगी। एनईपी 2020 के विषय में विद्यालयों में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
राम बनने के लिएधनुष-बाण चलाने की शिक्षा ले रहे है Ranbir Kapoor, एक्टर केआर्चरी ट्रेनर ने शेयर की तस्वीरें

