मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 से पहले की सरकारों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने बिना नियम-कानून के शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक के रूप में मान्यता देने का कुत्सित प्रयास किया, जो पूरी तरह नियम-विरुद्ध था। उनकी इस ...
कैथल जिले में राजौंद के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रोहेड़ा ईंट भट्ठे पर काम करने वाले गरीब मजदूरों के बच्चों के लिए वरदान साबित हो रहा है। जिन बच्चों ने कभी स्कूल जाने का सपना भी नहीं देखा था, उन्हें यह विद्यालय शिक्षा प्रदान कर रहा है। प्रधानाचार्य वीरेंद्र दयोल ने बताया कि विद्यालय में प्रतिदिन ईंट भट्ठा मजदूरों के बच्चों को पढ़ाया जाता है। कुल 23 लड़के-लड़कियों ने अपना दाखिला करवाया है। इन सभी बच्चों को सुबह भट्ठे से विद्यालय लाने और छुट्टी के बाद वापस छोड़ने का काम प्रधानाचार्य वीरेंद्र दयोल और डीपीई कृष्ण सिंगरोह अपनी निजी गाड़ी से करते हैं। कॉपियां और पेंसिलें भी खरीद कर दी विद्यालय में इन बच्चों की प्रतिदिन पढ़ाई करवाई जाती है। कला अध्यापक राजेश कुमार विशेष रुचि के साथ इन्हें पढ़ाते हैं। इन बच्चों को पढ़ने के लिए कॉपियां और पेंसिलें भी खरीद कर दी गई हैं। दोपहर का भोजन वे मिड-डे मील में करते हैं, और इसके अतिरिक्त उन्हें चॉकलेट और बिस्कुट भी दिए जाते हैं। पैंट-शर्ट और जूते भी उपलब्ध कराए पिछले एक महीने से इन बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय लाया जा रहा है, और इस दौरान वे काफी पढ़ना-लिखना सीख गए हैं। इसके अलावा, विद्यालय स्टाफ द्वारा इन बच्चों को पैंट-शर्ट और जूते भी उपलब्ध कराए जाते हैं। विद्यालय स्टाफ सदस्य सिकंदर सिंह, बलजीत सिंह, राजबीर सिंह और रामबिलास शास्त्री का भी इस पहल में विशेष योगदान है।
गाजियाबाद के लोहिया नगर स्थित हिंदी भवन में शिक्षामित्रों के सम्मान और बढ़े हुए मानदेय वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा, महापौर सुनीता दयाल, शहर विधायक संजीव शर्मा और लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर उपस्थित रहे। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ ने अतिथियों का स्वागत पौधा और गणेश प्रतिमा भेंट कर किया। अपने संबोधन में कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा ने शिक्षामित्रों को शिक्षा व्यवस्था की मजबूत नींव बताया और सरकार द्वारा उनके हितों के लिए किए जा रहे कार्यों पर प्रकाश डाला। महापौर सुनीता दयाल ने शिक्षामित्रों को बच्चों के भविष्य का निर्माता कहा। शहर विधायक संजीव शर्मा ने प्रदेश सरकार के शिक्षा सुधार प्रयासों का उल्लेख किया, जबकि लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर ने शिक्षामित्रों की मेहनत और समर्पण की सराहना की। जिलाधिकारी ने भी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए शिक्षामित्रों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और बेसिक शिक्षा मंत्री का ऑनलाइन संबोधन भी प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर गाजियाबाद के लोनी, रजापुर, मुरादनगर, भोजपुर और नगर क्षेत्र के 451 शिक्षामित्रों को उनके खातों में बढ़ा हुआ मानदेय वितरित किया गया। यह भी बताया गया कि प्रदेश भर में कुल 1.43 लाख शिक्षामित्रों को इस योजना का लाभ मिला है। बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं, जिनमें सरस्वती वंदना, हरियाणवी नृत्य और कजरी शामिल थे। इसके अतिरिक्त, तीन मेधावी छात्राओं गुलाफ्शा खातून, तानिया और बुशरा को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। जिलाधिकारी ने उन्हें लैपटॉप देने की घोषणा की।
बागपत कलेक्ट्रेट में शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राज्यमंत्री कृष्ण पाल मलिक ने शिक्षामित्रों को सांकेतिक चेक प्रदान किए और उनके योगदान की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान मंत्री मलिक ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई बच्चे घरों से मोबाइल फोन छिपाकर स्कूल ले जाते हैं और वहां अनुचित सामग्री देखते हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और उनकी शिक्षा व संस्कारों पर विशेष ध्यान दें। शिक्षामित्रों के मानदेय में की गई वृद्धि को एक बड़ा कदम माना जा रहा है। पहले उन्हें ₹3500 मानदेय मिलता था, जिसे वर्ष 2017 में बढ़ाकर ₹10,000 किया गया था। अब इसे बढ़ाकर ₹18,000 प्रति माह कर दिया गया है। यह वृद्धि न केवल आर्थिक सहायता है, बल्कि वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत शिक्षामित्रों के समर्पण का सम्मान भी है। मंत्री कृष्ण पाल मलिक ने अपने संबोधन में कहा कि गुरुओं का सम्मान और बड़ों का आशीर्वाद एक मजबूत राष्ट्र की नींव रखते हैं। उन्होंने शिक्षकों को समाज को सही दिशा देने वाली महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए उनसे बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार देने का आग्रह किया। इस कार्यक्रम में कुल 376 शिक्षामित्रों को सम्मानित किया गया, जिनके खातों में बढ़ा हुआ मानदेय भेजा गया। सांकेतिक चेक प्राप्त करते समय कई शिक्षामित्र भावुक हो उठे और उनके चेहरों पर खुशी और गर्व साफ दिखाई दिया। सभी सम्मानित शिक्षामित्रों ने सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
लखीमपुर में मंगलवार को शिक्षामित्रों के लिए 'शिक्षामित्र सम्मान एवं बढ़े हुए मानदेय वितरण' कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें कारागार राज्यमंत्री सुरेश राही ने 3191 शिक्षामित्रों के खातों में बढ़ा हुआ मानदेय ट्रांसफर किया और उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया। यह कार्यक्रम बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा रॉयल पैराडाइज में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ राज्यमंत्री सुरेश राही ने विधायक योगेश वर्मा, विनोद शंकर अवस्थी, जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह और सीडीओ अभिषेक कुमार के साथ दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर गोरखपुर से मुख्यमंत्री के राज्य स्तरीय कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया। मुख्यमंत्री ने शिक्षामित्रों के लिए मानदेय वृद्धि, 5 लाख रुपये तक की कैशलेस मेडिकल सुविधा और जीवन बीमा सुरक्षा की घोषणा की, जिसका सभागार में मौजूद लोगों ने तालियों से स्वागत किया। जिले के कुल 3191 शिक्षामित्रों के खातों में बढ़ा हुआ मानदेय सीधे अंतरित किया गया। इसके अतिरिक्त, उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षामित्रों को प्रमाण पत्र और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। मंच से कई शिक्षामित्रों को 18 हजार रुपये मानदेय के प्रतीकात्मक चेक भी प्रदान किए गए। राज्यमंत्री सुरेश राही ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षामित्र शिक्षा व्यवस्था के मजबूत स्तंभ हैं। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षण कार्य को संभाले रखा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बढ़ा हुआ मानदेय शिक्षामित्रों को आर्थिक रूप से सशक्त करेगा और वे और अधिक उत्साह के साथ शिक्षण कार्य कर सकेंगे। विधायक विनोद शंकर अवस्थी और योगेश वर्मा ने भी शिक्षामित्रों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने इस निर्णय को शिक्षामित्रों के जीवन में नई ऊर्जा भरने वाला बताया। कार्यक्रम के अंत में शिक्षामित्रों ने राज्यमंत्री को पुष्पगुच्छ भेंट कर आभार व्यक्त किया। इस दौरान आयोजित टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मटेरियल) प्रदर्शनी में शिक्षकों और शिक्षामित्रों की रचनात्मकता की भी सराहना की गई।
धमतरी में दिव्यांग राइडर्स का एक समूह पहुंचा है। ये राइडर्स रायपुर से 616 किलोमीटर लंबी जागरूकता यात्रा पर निकले हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से दिव्यांगजनों के व्यक्तित्व विकास और आत्मविश्वास को बढ़ावा देना है। यह यात्रा छत्तीसगढ़ ईगल स्पेशली एबल्ड राइडर्स द्वारा रविवार को रायपुर के घड़ी चौक से शुरू की गई थी। यह जगदलपुर स्थित दंतेश्वरी मंदिर तक जाएगी और फिर रायपुर लौटेगी। कुल 616 किलोमीटर की यह यात्रा 3 मई से 5 मई तक पूरी की जाएगी। विभिन्न जिलों से लगभग 35 दिव्यांगजन भाग ले रहे हैं इस अभियान में राज्य के विभिन्न जिलों से लगभग 35 दिव्यांगजन भाग ले रहे हैं, जो बाइक और स्कूटी के माध्यम से यात्रा कर रहे हैं। राइड कॉआर्डिनेटर संदीप कुमार और ऋषि मिश्रा ने बताया कि प्रतिभागी इस यात्रा के जरिए यह संदेश दे रहे हैं कि साहस और आत्मविश्वास के साथ जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है। प्रमुख लक्ष्य समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना आयोजकों के अनुसार, यह सुलभ जागरूकता यात्रा छत्तीसगढ़ ईगल स्पेशली एबल्ड राइडर्स की पहली पहल है, जो समाज में सकारात्मक संदेश देने का कार्य कर रही है। इसका प्रमुख लक्ष्य समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना भी है। धमतरी शहर पहुंचने पर एक्ज़ेक्ट फाउंडेशन द्वारा जागरूकता यात्रा का स्वागत किया गया। सभी दिव्यांगों को रुद्री स्थित आवासीय विद्यालय में भोजन भी कराया गया। संस्था की अध्यक्ष लक्ष्मी सोनी और उपाध्यक्ष देवश्री जोशी ने कहा कि तपती धूप में दिव्यांगों द्वारा निकाली गई यह यात्रा साहस और आत्मविश्वास को बढ़ाएगी और इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
मंगलवार को नेताजी सुभाष चंद्र प्रेक्षाग्रह में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षामित्र सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां शारदा के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद जिलाधिकारी ने अतिथियों को पौधा और भगवान राम की प्रतिमा देकर स्वागत किया। योगी आदित्यनाथ द्वारा गोरखपुर के बाबा गम्भीरनाथ प्रेक्षाग्रह से शिक्षामित्रों के बढ़े हुए मानदेय भुगतान एवं वितरण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया, जिसका सजीव प्रसारण मेरठ में भी देखा गया। गोरखपुर से सीएम के संबोधन के सजीव प्रसारण के बाद मेरठ में 31 शिक्षामित्रों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया, जबकि पांच शिक्षामित्र सुबोध चौधरी, शहजाद, रीमा, शशि सिंह और आरती को चेक प्रदान किए गए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नरेंद्र कश्यप (राज्य मंत्री, दिव्यांगजन सशक्तिकरण एवं पिछड़ा वर्ग) शामिल हुए। उनके साथ लक्ष्मीकांत वाजपेयी , अरुण गोविल , अमित अग्रवाल , गुलाम मोहम्मद , गौरव चौधरी और सुनील भराला समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। समारोह में शिक्षा विभाग की योजनाओं जैसे निपुण भारत मिशन, पीएम श्री विद्यालय, मिशन शक्ति, स्मार्ट कक्षाएं, बालिका शिक्षा और नई शिक्षा नीति पर आधारित स्टॉल भी लगाए गए। विभिन्न विकास खंडों के एआरपी द्वारा इन योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया गया। मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षामित्र शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके बिना शिक्षा का प्रवाह सुचारु रूप से आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से शिक्षामित्रों के लिए सहयोग जारी रहेगा। कार्यक्रम के अंत में जिलाधिकारी ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर सीडीओ नूपुर गोयल सहित कई अधिकारी और शिक्षा विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन नीलम पंकज ने किया, जबकि आयोजन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देशन में संपन्न हुआ।
शाहजहांपुर में शिक्षा मित्रों के मानदेय वृद्धि को लेकर गन्ना शोध संस्थान में एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना जिले के विधायकों के साथ उपस्थित रहे। वित्त मंत्री ने 300 शिक्षा मित्रों के साथ मुख्यमंत्री का लाइव कार्यक्रम देखा। उन्होंने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा मित्रों को 18 हजार रुपये और अनुदेशकों को 17 हजार रुपये मानदेय देगी। शिक्षा मित्रों ने मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री का आभार व्यक्त किया। शिक्षामित्रों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अभिभावक जिस अटूट विश्वास के साथ अपने बच्चों को उनके पास भेजते हैं, उन बच्चों के भविष्य को संवारने और उन्हें आदर्श नागरिक बनाने की जिम्मेदारी शिक्षामित्रों पर है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों को उनके निकट के विद्यालय में कार्य करने का अवसर देने का निर्णय लिया है। इसके अतिरिक्त, उनके लिए 5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की व्यवस्था भी की गई है। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने अपने संबोधन में शिक्षकों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज को सही दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी शिक्षकों से कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने कार्यों को करने का आग्रह किया और अच्छी आदतें अपनाने की सलाह दी, ताकि बच्चे भी उनसे प्रेरित हों। मंत्री ने पुनः दोहराया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर 18,000 रुपये और अनुदेशकों का 17,000 रुपये कर दिया है, और भविष्य में भी इसमें वृद्धि जारी रहेगी। इस अवसर पर वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने शिक्षामित्रों को मानदेय वृद्धि का प्रतीकात्मक चेक भी सौंपा। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विधानसभाओं के विधायक और जिलाधिकारी सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
बहराइच में शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि को लेकर एक शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गोरखपुर में हुए शिक्षामित्र सम्मान समारोह का सजीव प्रसारण भी दिखाया गया। प्रदेश सरकार ने शिक्षा मित्रों का मानदेय 10 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये करने का निर्णय लिया है। यह कार्यक्रम नगर के कपूरथला परिसर स्थित उत्थान ऑडिटोरियम में हुआ। इसका शुभारंभ विधान परिषद सदस्य डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी, पयागपुर विधायक सुभाष त्रिपाठी, बलहा विधायक सरोज सोनकर और नानपारा विधायक राम निवास वर्मा ने किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी, मुख्य विकास अधिकारी सुनील कुमार धनवंता और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार सिंह भी उपस्थित रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गोरखपुर में आयोजित शिक्षामित्र सम्मान समारोह का सीधा प्रसारण किया गया। इस प्रसारण को उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और बड़ी संख्या में शिक्षा मित्रों ने देखा और सुना। बलहा विधायक सरोज सोनकर ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार हमेशा शिक्षकों और शिक्षामित्रों के सम्मान तथा हितों के प्रति संवेदनशील रही है। उन्होंने मानदेय वृद्धि के निर्णय को शिक्षा मित्रों के परिश्रम का सम्मान बताया और कहा कि शिक्षा मित्र गांव-गांव में शिक्षा की रोशनी फैला रहे हैं। पयागपुर विधायक सुभाष त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा मित्र केवल शिक्षक नहीं, बल्कि समाज निर्माण के शिल्पी हैं। उन्होंने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में उनकी भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। विधायक त्रिपाठी ने विश्वास व्यक्त किया कि मानदेय वृद्धि से शिक्षा मित्रों में नई ऊर्जा का संचार होगा। एमएलसी डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शिक्षा मित्रों का सम्मान और उनके जीवन स्तर में सुधार सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने सभी शिक्षा मित्रों को बधाई देते हुए कहा कि यह निर्णय उनके धैर्य और सेवा भावना की जीत है। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा मित्र जनपद की शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में उनका योगदान है। मुख्य विकास अधिकारी धनवंता ने कहा कि शिक्षा मित्र राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं। उनके योगदान से ही समाज में जागरूकता और प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष सिंह ने कहा कि शिक्षा मित्रों का समर्पण और अनुशासन सदैव प्रेरणादायक रहा है। सरकार के इस निर्णय से उनमें उत्साह बढ़ेगा और विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक वातावरण बनेगा। सम्मान समारोह कार्यक्रम के दौरान 10 चयनित शिक्षा मित्रों को प्रतीकात्मक रूप से डेमो चेक प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर खण्ड शिक्षा अधिकारी, शिक्षा मित्र संघ के विभिन्न पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में शिक्षा मित्र मौजूद रहे।
यूपी : शिक्षामित्र के कार्यक्रम में बोले सीएम योगी- संवाद से समाधान, टकराव से नहीं
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में शिक्षामित्र सम्मान समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मानदेय बढ़ोतरी के फैसले को सरकार की संवेदनशीलता का उदाहरण बताते हुए शिक्षामित्रों को सकारात्मक सोच और जिम्मेदारी के साथ काम करने की नसीहत दी।
उन्नाव शहर के निराला प्रेक्षागृह में शिक्षामित्र सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले भर से आए शिक्षामित्रों को सम्मानित किया गया। जिलाधिकारी घनश्याम मीणा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में शिक्षामित्र मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और अतिथि स्वागत के साथ हुई। जिलाधिकारी घनश्याम मीणा ने अपने संबोधन में बताया कि प्रदेश स्तर पर मुख्यमंत्री ने गोरखपुर से इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी, जिसके क्रम में यह आयोजन जिला स्तर पर किया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि जिले में लगभग 1300 शिक्षामित्र कार्यरत हैं, जिन्हें इस अवसर पर सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम राज्य सरकार द्वारा शिक्षामित्रों के मानदेय में की गई वृद्धि के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। समारोह के दौरान कुछ चयनित शिक्षामित्रों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया और उन्हें प्रतीकात्मक रूप से डेमो चेक भी प्रदान किए गए। इस अवसर पर मौजूद विधायक और एमएलसी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने शिक्षामित्रों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वे शिक्षा व्यवस्था की मजबूत कड़ी हैं और उनके प्रयासों से प्राथमिक शिक्षा को मजबूती मिल रही है। जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे आयोजनों से शिक्षामित्रों का मनोबल बढ़ता है और उन्हें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यक्रम से सकारात्मक संदेश जाएगा और जिले की शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। आयोजन के दौरान शिक्षामित्रों में उत्साह देखने को मिला और उन्होंने सरकार के इस कदम की सराहना की। यह कार्यक्रम शिक्षामित्रों के सम्मान और प्रोत्साहन के लिए एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
गोंडा जिले के जिला पंचायत सभागार में आज मंगलवार को शिक्षामित्र सम्मान समारोह आयोजित किया गया था जहां इस कार्यक्रम में जिले के 2834 शिक्षामित्रों को बढ़े हुए मानदेय का प्रतीकात्मक चेक देकर सम्मानित किया गया है जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन और विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम के दौरान परिषदीय विद्यालयों की छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टालों का निरीक्षण किया। उन्होंने विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली और उनकी सराहना की है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाए जाने के बाद, उन्हें 18,000 रुपये का प्रतीकात्मक चेक प्रदान किया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम मिश्रा, गोंडा सांसद प्रतिनिधि राजेश सिंह, कैसरगंज सांसद प्रतिनिधि संजीव सिंह और प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी सुशील कुमार श्रीवास्तव ने शिक्षामित्रों को ये चेक सौंपकर सम्मानित किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने शिक्षामित्रों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने उन्हें एक बड़ी सौगात दी है। उन्होंने शिक्षामित्रों द्वारा बच्चों को उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान करने में निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। डीएम ने बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा एक प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। इसमें विभिन्न कक्षाओं के बच्चों के लिए शिक्षण सामग्री (टीचर लर्निंग मटेरियल) और उन्हें बेहतर शिक्षा देने की तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। इसका उद्देश्य बच्चों को अच्छी शिक्षा और नई तकनीकों की जानकारी देना था। गोंडा प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष अवधेश मणि मिश्रा ने सरकार को धन्यवाद दिया और इस पहल की सराहना की है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शिक्षामित्र सम्मान कार्यक्रम के तहत बुलंदशहर में एक समारोह आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। बुलंदशहर के विकास भवन सभागार में आयोजित इस समारोह में राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर उपस्थित रहे। उनके साथ जिलाधिकारी कुमार हर्ष, बेसिक शिक्षा अधिकारी लक्ष्मीकांत पांडेय, डिबाई विधायक चंद्रपाल सिंह लोधी, विधायक लक्ष्मीराज सिंह, विधायक मीनाक्षी सिंह, बुलंदशहर नगर पालिका अध्यक्ष दीप्ति मित्तल, जिला पंचायत अध्यक्ष अतुल तेवतिया और भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष विकास चौहान सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने ऑनलाइन संबोधन में शिक्षामित्रों के योगदान की सराहना की। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उनके समर्पण और परिश्रम को महत्वपूर्ण बताया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षामित्रों के समर्पण और शिक्षा के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान को सम्मानित करना था।
झज्जर जिले के बहादुरगढ़ में पीएम श्री राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें स्कूली छात्राओं से लकड़ी के ड्यूल डेस्क से भरी गाड़ी अनलोड कराई जाती दिखाई दे रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और स्कूल प्रबंधन पर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, विद्यालय परिसर में फर्नीचर से भरी गाड़ी पहुंचने के बाद मजदूरों की बजाय छात्राओं से ही डेस्क उतारने का काम कराया गया। इस दौरान कई छात्राएं भारी फर्नीचर उठाती नजर आई। मामला सामने आते ही अभिभावकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली। शिक्षा विभाग पर कार्रवाई का दबाव लोगों का कहना है कि स्कूल शिक्षा का मंदिर है, जहां छात्राओं से पढ़ाई के बजाय इस तरह का श्रम कराना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि उनकी सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है। यदि किसी छात्रा को चोट लगती, तो जिम्मेदारी किसकी होती। वीडियो वायरल होने के बाद अब शिक्षा विभाग पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। अभिभावकों ने मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं। प्रशासन से जवाब मांग रही जनता हालांकि मामले के सामने आने के बाद अब तक न तो स्कूल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी गई है और न ही शिक्षा विभाग के किसी अधिकारी ने इस पर खुलकर बयान दिया है। वीडियो वायरल होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है और लोग प्रशासन से जवाब की मांग कर रहे हैं। स्कूल प्रशासन को देंगे नोटिस- अधिकारी डीसी स्वप्निल रविन्द्र पाटिल ने तुरंत संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी रतेंद्र सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि आज स्कूल प्रशासन को नोटिस जारी किया जाएगा और जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में मानदेय वृद्धि के बाद शिक्षामित्रों का सम्मान करेंगे। उसके बाद तारामंडल क्षेत्र में बनाए गए टू लेन पुल का लोकार्पण करेंगे। दोपहर बाद माधव नगर वार्ड के जंगल बेनी माधव मोहल्ले में बने कल्याण मंडपम (कन्वेंशन सेंटर) जनता को समर्पित करेंगे। इसके अलावा CM एकीकृत मंडलीय कार्यालय, कुश्मी एन्क्लेव और गोरखपुर सोनौली मार्ग पर बनने वाले प्रवेश द्वार के निर्माण का शिलान्यास भी करेंगे। मंगलवार को मुख्यमंत्री के हाथों गोरखपुर महानगर को कुल 71 विकास परियोजनाओं की सौगात मिलेगी। लोकार्पण की 26 और शिलान्यास की 45 परियोजनाओं पर 612 करोड़ 31 लाख 84 हजार रुपये की लागत आ रही है। ये सभी परियोजनाएं गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) की हैं। लोकार्पण और शिलान्यास के लिए दो कार्यक्रम स्थल बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री मंगलवार को पहले तारामंडल क्षेत्र के वसुंधरा एंक्लेव द्वितीय व तृतीय के मध्य स्थित वाटर बॉडी के ऊपर बनाए गए टूलेन ब्रिज का लोकार्पण करेंगे। इस पुल के निर्माण पर 14.33 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस ब्रिज के जन समर्पित हो जाने से दो हिस्सों में बंटे तारामंडल क्षेत्र की आपसी कनेक्टिविटी मजबूत और सुगम हो जाएगी। अमरावती निकुंज, वसुंधरा फेज 1, 2 व 3, सिद्धार्थ एंक्लेव, सिद्धार्थ एंक्लेव विस्तार, सिद्धार्थपुरम, सिद्धार्थपुरम विस्तार, सिद्धार्थ विहार, गौतम विहार, बुद्ध विहार, बुद्ध विहार कामर्शियल, बुद्ध विहार पार्ट ए, बी और सी, लेक व्यू, वैशाली, विवेकपुरम, जैमिनी गार्डेनिया तथा आसपास के विस्तृत आवासीय क्षेत्रों के निवासियों के आवागमन के लिए यह ब्रिज काफी सहूलियत देगा। 112 मीटर लंबे टूलेन ब्रिज है पर दोनों ओर 1.5 मीटर चौड़े फुटपाथ भी बनाए गए हैं। लोकार्पण और शिलान्यास का दूसरा कार्यक्रम जंगल बेनी माधव के कल्याण मंडपम में होगा। कल्याण मंडपम के साथ ही सीएम योगी यहां अन्य कई परियोजनाओं का भी लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। यह शहर का छठवां क्रियाशील कल्याण मंडपम होगा। इसके निर्माण पर 5 करोड़ 3 लाख रुपये की लागत आई है। जीडीए द्वारा बनवाए गए इस कल्याण मंडपम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विधायक निधि का भी उपयोग किया गया है। जीडीए के उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन के अनुसार कल्याण मंडपम, अल्प और मध्यम आय वर्ग के लोगों के मांगलिक व अन्य आयोजनों को उनके बजट के अनुरूप शानदार बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन का साकार रूप है। महानगर में अब तक सीएम योगी के हाथों पांच कल्याण मंडपम (खोराबार, सूरजकुंड, मानबेला, राप्तीनगर विस्तार और बिछिया) का लोकार्पण हो चुका है। कल्याण मंडपम बनाने में सीमित आय वाले परिवारों को विवाह, तिलक, मुंडन, बर्थडे और अन्य सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए किफायती दरों पर मैरिज हाउस जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री इन प्रमुख परियोजनाओं का करेंगे शिलान्यास-एकीकृत मंडलीय कार्यालय का निर्माण, लागत 269.63 करोड़ रुपये।-लच्छीपुर में कुश्मी एवेन्यू अपार्टमेंट का निर्माण, 172.86 करोड़ रुपये।-गोरखपुर सोनौली मार्ग पर प्रवेश द्वार का निर्माण, लागत 10.11 करोड़ रुपये।-वसुंधरा एंक्लेव से पैडलेगंज चौराहा तक सड़क चौड़ीकरण, आरसीसी नाला व सौंदर्यीकरण कार्य, लागत 22.58 करोड़ रुपये।-रामगढ़ताल रिंग रोड पर आरकेबीके से सहारा एस्टेट वाले हिस्से में रिटेनिंग वाल की ऊंचाई बढ़ाने का कार्य, लागत 13.33 करोड़ रुपये।-गुरुकुल सिटी योजना फेज-1 के तहत सड़क निर्माण, 19.17 करोड़ रुपये।-गुलरिहा थाना से भटहट मोड़ तक डेकोरेटिव लाइटिंग, लागत 10.11 करोड़ रुपये। राज्य के सभी जिलों में होगा शिक्षा मित्रों के सम्मान का कार्यक्रम शिक्षामित्रों के मानदेय में 80 प्रतिशत वृद्धि का उपहार देकर मान बढ़ाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेसिक शिक्षा की सुदृढ़ता में उनके योगदान के लिए सम्मान भी देने जा रहे हैं। शिक्षामित्रों को सम्मानित करने के लिए प्रदेशस्तरीय भव्य आयोजन योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में होगा। इस अवसर पर सीएम योगी शिक्षामित्रों को वृद्धि के बाद नियत मानदेय का प्रतीकात्मक चेक भी शिक्षामित्रों को सौंपेंगे। प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में तैनात 1.43 लाख शिक्षामित्रों को प्रतिमाह 10 हजार रुपये मानदेय मिलता था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों की शैक्षिक सेवा को सराहते हुए इसे बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया है। नया मानदेय अप्रैल माह से लागू हो गया है। मानदेय वृद्धि को सम्मान के साथ वितरित करने का शुभारंभ मंगलवार को समारोहपूर्वक गोरखपुर में सीएम योगी के सानिध्य में होगा। पहले मानदेय वृद्धि और अब सेवा के सम्मान की योगी सरकार की पहल से शिक्षामित्रों में उत्साह का जबरदस्त संचार देखा जा रहा है। शिक्षमित्रों के सम्मान समारोह को भव्य बनाने को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग ने जोरदार तैयारी की है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में पूर्वाह्न 11 बजे से होने वाले समारोह में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह भी मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री, 10 शिक्षामित्रों को नए मानदेय (18 हजार रुपये) की धनराशि का प्रतीकात्मक चेक वितरित करेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिक्षा विभाग के उपलब्धिपरक स्टालों का अवलोकन करने के साथ ही विद्यार्थी नेतृत्व आधारित प्रार्थना सभा की गतिविधियों पर आधारित ‘अरुणोदय’ कैलेंडर का विमोचन भी करेंगे। मुख्यमंत्री की सहभागिता वाले भव्य समारोह के समानांतर राज्य के सभी जिलों में भी आयोजन किए जाएंगे। गोरखपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री जी का आशीर्वचन प्राप्त करने के लिए शिक्षामित्रों में खासा उत्साह का माहौल है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों की सहभागिता रहेगी। उन्होंने कहा कि मानदेय वृद्धि के जरिये मुख्यमंत्री जी ने शिक्षामित्रों की शैक्षिक सेवा का मान बढ़ाया है। उनकी पहचान और प्रतिष्ठित हुई है और वे अब आर्थिक रूप से मजबूत भी होंगे। सरकार की तरफ से पहले मानदेय वृद्धि और अब सम्मान की पहल से शिक्षामित्रों का मनोबल बढ़ेगा और इससे शिक्षा की गुणवत्ता को भी नई ऊंचाई मिलेगी।
दमोह में लोकायुक्त सागर की टीम ने सोमवार रात शिक्षा विभाग के तीन कर्मचारियों को 80 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। यह रिश्वत एक शिक्षक की मनचाही पोस्टिंग करने और उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच को खत्म करने के एवज में मांगी गई थी। पीड़ित शिक्षक नवेंद्र अठ्या, जो पटेरा के शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में पदस्थ थे, उन्हें सितंबर 2025 में एक विवाद के बाद निलंबित कर दिया गया था। बहाली के बाद उन्हें तेंदूखेड़ा अटैच किया गया था। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ अनिल साहू और मनोज श्रीवास्तव ने उनसे पदस्थापना में संशोधन करने और जांच समाप्त करने के नाम पर एक लाख रुपए की मांग की थी, जिसमें सौदा 80 हजार रुपए में तय हुआ। पॉलिटेक्निक कॉलेज के पास बिछाया जाल आरोपियों को पकड़वाने के लिए नवेंद्र ने 13 अप्रैल को लोकायुक्त सागर में शिकायत की थी। योजना के अनुसार, सोमवार रात करीब 9 बजे शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के सामने मुख्य सड़क पर जैसे ही अनिल साहू ने रिश्वत की राशि ली, लोकायुक्त टीम ने उसे पकड़ लिया। बाद में इस साजिश में शामिल लिपिक नीरज सोनी और मनोज श्रीवास्तव को भी पकड़ा गया। तीन कर्मचारी चढ़े लोकायुक्त के हत्थे लोकायुक्त निरीक्षक मंजू किरण तिर्की के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई में माध्यमिक शिक्षक अनिल साहू, सहायक ग्रेड-2 मनोज कुमार श्रीवास्तव और सहायक ग्रेड-3 नीरज कुमार सोनी को हिरासत में लिया गया। इन तीनों आरोपियों को जबलपुर नाका चौकी ले जाया गया, जहां उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की गई। जांच टीम की मुस्तैदी से पकड़े गए आरोपी इस कार्रवाई में लोकायुक्त निरीक्षक मंजू किरण तिर्की, रंजीत सिंह और उनकी टीम के करीब 12 सदस्य शामिल रहे। पुलिस ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटा लिए गए हैं और मामले की जांच की जा रही है।
गया जिले की शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार की अध्यक्षता में गया जिला अतिथि गृह सभागार में हुई। इसमें शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्रोफेसर और अन्य शिक्षा विशेषज्ञों ने भाग लिया और शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि गया के छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराना प्रशासन और समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले के बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए और वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता और विद्यालयों में सकारात्मक वातावरण बनाने पर विशेष जोर दिया। डॉ. प्रेम कुमार ने शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी और मतगणना जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में अनावश्यक रूप से न लगाने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना था कि इससे शिक्षकों का ध्यान पढ़ाई से हटता है और बच्चों के समग्र विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। परीक्षा में नकल रोकने को कहा प्रेम कुमार ने विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति करने, शिक्षकों और छात्रों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने और नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देने की बात भी कही। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए, डॉ. प्रेम कुमार ने विश्वविद्यालयों में परीक्षा के दौरान कदाचार (नकल) पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली से ही छात्रों की वास्तविक क्षमता का सही मूल्यांकन संभव है। इसके अलावा गयाजी में एक स्टडी सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया, जो जिले की पौराणिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व से जुड़े विषयों पर शोध को प्रोत्साहित करेगा। बैठक में गया जी राजकीय लाइब्रेरी परिसर में एक अत्याधुनिक और पृथक लाइब्रेरी के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया, जिससे छात्रों और शोधार्थियों को बेहतर अध्ययन सुविधाएं मिल सकें। समन्वित समिति का गठन इसके साथ ही प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा के समग्र विकास के लिए एक समन्वित समिति का गठन किया गया। इस समिति के अध्यक्ष स्वयं डॉ. प्रेम कुमार बनाए गए हैं। संयोजक के रूप में पूर्व कुलपति प्रोफेसर रंजीत कुमार वर्मा को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि सचिव के रूप में डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह और डॉ. अवधेश कुमार सिंह को शामिल किया गया है। सदस्य के रूप में प्रोफेसर उपेंद्रनाथ वर्मा, प्रोफेसर मनोरंजन सिंह, प्रोफेसर डॉ. प्रमोद कुमार सिंह, प्रोफेसर विकास मोहन सहाय तथा छात्र प्रतिनिधियों में विक्की शर्मा, विराज कुमार और विकास कुमार को शामिल किया गया है। बैठक में उपस्थित सभी शिक्षाविदों ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए और सामूहिक प्रयासों के जरिए गया जिले को शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाने का संकल्प लिया।
12वीं के बाद करियर को लेकर कन्फ्यूजन में पड़े विद्यार्थियों के लिए सुनहरा अवसर आने वाला है। शहर में ‘दैनिक भास्कर एजुकेशन एंड करियर फेयर’ 7 व 8 मई को मिलन मैरिज गार्डन, पिपराली रोड, सीकर में आयोजित होगा, जिसमें देश की 20 से अधिक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी एवं शैक्षणिक संस्थान भाग लेंगे। इस महोत्सव में विद्यार्थियों को एडमिशन, स्कॉलरशिप, करियर काउंसलिंग एवं विभिन्न कोर्स से जुड़ी विस्तृत जानकारी एक ही मंच पर मिलेगी। साथ ही विशेषज्ञों द्वारा 12वीं के बाद उपलब्ध करियर विकल्पों पर मार्गदर्शन के लिए विशेष सेमिनार भी आयोजित किए जाएंगे। फेयर में रजिस्ट्रेशन कर भाग लेने वाले विद्यार्थियों को आकर्षक उपहार एवं गिफ्ट पैक दिए जाएंगे, वहीं 12वीं कक्षा में 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। फेयर में प्रवेश पूर्णतः निशुल्क रहेगा एवं क्यूआर कोड स्कैन कर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जा सकेगा। साथ ही, 7 एवं 8 मई को शहर के मुख्य चौराहों से Rideslo की ओर से विद्यार्थियों के लिए इवेंट स्थल तक पहुंचने की निशुल्क परिवहन सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। महोत्सव में मोदी यूनिवर्सिटी (लक्ष्मणगढ़) एवं पारुल यूनिवर्सिटी (वडोदरा) के साथ अमिटी यूनिवर्सिटी, श्री जेजेटी यूनिवर्सिटी सहित वीआईटी वेल्लोर, पं. दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी, एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (पुणे), एसआरएम यूनिवर्सिटी, प्रेस्टीज यूनिवर्सिटी (इंदौर), पीसीईटी्स पिंपरी चिंचवड यूनिवर्सिटी (पुणे), ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी (देहरादून), विश्वकर्मा यूनिवर्सिटी, आईटीएम यूनिवर्सिटी, आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी (जयपुर), जेके लक्ष्मीपत यूनिवर्सिटी, निरवान यूनिवर्सिटी (जयपुर) सहित कई अन्य संस्थान भाग लेंगे। आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को संस्थानों के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा, जिससे वे एडमिशन प्रक्रिया, फीस, स्कॉलरशिप एवं प्लेसमेंट से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। एजुकेशन लोन पार्टनर के रूप में पंजाब नेशनल बैंक एवं एसबीआई बैंक, नॉलेज पार्टनर के रूप में प्रिंस एजु हब व मैट्रिक्स जेईई एकेडमी, रेडियो पार्टनर के रूप में एफएम सीकर 89.6, स्टे पार्टनर के रूप में लोहिया रिजॉर्ट एवं बी पब्लिकेशंस इस आयोजन से जुड़े हैं। अधिक जानकारी के लिए 9772801234 पर संपर्क किया जा सकता है।
रोहतक में हरियाणा के शिक्षामंत्री महिपाल ढांडा ने जिला प्रशासन द्वारा शुरू किए गए सुपर 40 कार्यक्रम को सरकारी शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तनकारी पहल बताते हुए कहा कि यह मॉडल प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को संसाधनों के अभाव से मुक्त कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं JEE–NEET के लिए तैयार करेगा। प्रदेश सरकार का संकल्प है कि कोई भी बच्चा अभाव में नहीं रहेगा। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने हिसार रोड स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सुपर 40 कार्यक्रम के नए सत्र का शुभारंभ करते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों के लिए लेवल प्लेइंग फील्ड, कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता की कोचिंग देना, विद्यार्थियों के बीच प्रतिस्पर्धात्मक माहौल बनाना है, ताकि वे निजी कोचिंग संस्थानों के विद्यार्थियों के साथ समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। सुपर-40 के स्टूडेंट्स से किया संवादशिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने सुपर-40 में शामिल स्टूडेंट्स के साथ संवाद किया और कहा कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास की बढ़ोतरी हुई है। सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थी किसी से कम नहीं हैं। उनमें अपार प्रतिभा है। जरूरत केवल सही मार्गदर्शन और निरंतर परिश्रम की है। सुपर 100 की तर्ज पर जिला स्तरीय मॉडलDC सचिन गुप्ता ने बताया कि यह कार्यक्रम हरियाणा सरकार के सुपर 100 मॉडल से प्रेरित है। सुपर 40 उन विद्यार्थियों के लिए अवसर का मंच है, जो किसी कारणवश सुपर 100 का हिस्सा नहीं बन पाते। यहां उन्हें उसी स्तर की कोचिंग और तैयारी करवाई जा रही है। विद्यार्थियों को JEE–NEET दोनों परीक्षाओं की तैयारी करवाई जा रही है। आगामी सत्र में योजना का किया जाएगा विस्तारDC सचिन गुप्ता ने बताया कि अगले सत्र से कक्षा 11वीं व 12वीं के लिए एक वर्षीय कोर्स, दो वर्षों में स्ट्रक्चर्ड तैयारी मॉडल, NCERT आधारित कॉन्सेप्ट बिल्डिंग, नियमित टेस्ट एवं प्रदर्शन मूल्यांकन लागू किया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स को AIIMS, IIT जैसे संस्थानों तक पहुंचाना है। यह धारणा समाप्त करनी है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल निजी संस्थानों में ही उपलब्ध है।
रोहतक पहुंचे शिक्षामंत्री महिपाल ढांडा ने पश्चिम बंगाल व अन्य राज्यों से आए चुनावी रूझानों को लेकर कहा कि जनता ने भाजपा पर विश्वास दिखाया है। जो लोग गलत वोट बनाकर भारत के लोकतंत्र से खिलवाड़ करते थे, SIR से उन लोगों के पेट में दर्द होने लगा, जिसकी दवा आज पीएम नरेंद्र मोदी ने दे दी। शिक्षामंत्री महिपाल ढांडा ने पश्चिम बंगाल चुनाव में आए भाजपा के पक्ष में रूझानों पर कहा कि भाजपा बहुत बड़े अंतर से जीत रही है। भाजपा ने कोई चाल नहीं चली, बल्कि बूथ स्तर पर जाकर कार्यकर्ताओं को खड़ा किया है। बंगाल की जनता समझदार है और पीएम नरेंद्र मोदी की नीतियों पर विश्वास जताया है। पश्चिम बंगाल में ममता का था महाजंगलराज शिक्षामंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का महा जंगलराज चल रहा था। ममता ने कार्यकर्ताओं को गुंडागर्दी के साथ लाचार व बेबस बनाकर ठगी की थी। कार्यकर्ताओं के साथ खेला गया, उन्हें मारा गया, उन सबके खिलाफ लोगों ने अपना वोट भाजपा को पूरे विश्वास के साथ दिया है। कम्युनिस्ट ने बंगाल को बनाया लाचार व बीमार महिपाल ढांडा ने कहा कि ममता से पहले कम्युनिस्ट का राज बंगाल में रहा। 35 साल तक कम्युनिस्ट ने बंगाल को बीमार व लाचार बना दिया। लोगों को उम्मीद थी कि मां माटी व मानुष की बात करने वाली ममता जरूर अपने ममतामयी हृदय के साथ कुछ बदलाव करेगी, लेकिन वह दानव रूपी व्यक्तित्व में आकर अनाचार, दुराचार व अत्याचार करने पर उतारू हो गईं। जंगलराज के बीच खिला कमल महिपाल ढांडा ने कहा कि ममता के ठेकेदारों ने जिस प्रकार आतंक मचाया, लोगों को लूटने का काम किया। उस महा लूट व जंगलराज के खिलाफ लोगों ने कमल की सुगंध को लेना ही सही समझा। एक बार जहां भाजपा की सरकार बनती है, वहां बार-बार बनती है। इसको कुछ तो कारण होगा। असम में कांग्रेस ने केवल लूटने का काम किया महिपाल ढांडा ने कहा कि मैं असम में दो माह रहा। असम में तीसरी बार बड़े अंतर से भाजपा जीत रही है। यहां पहले बम धमाके होते थे। अपहरण करके बम बांधकर उड़ा देते थे। आईएएस व आईपीएस भी सुरक्षित नहीं थे। कांग्रेस ने केवल असम की जनता को लूटने का काम किया, जबकि भाजपा ने 10 साल में असम की तस्वीर बदल दी।
सुपौल के प्रख्यात शिक्षाविद एवं विलियम्स हाई स्कूल सुपौल के पूर्व प्रधानाचार्य लगभग 100 वर्षीय कालीचरण मिश्रा का निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को लेकर उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका था। वे लंबे समय तक विद्यालय में अपनी सेवा देकर हजारों छात्रों के जीवन को नई दिशा देने के लिए जाने जाते थे। कालीचरण मिश्रा ने अपने कार्यकाल में शिक्षा की ऐसी नींव रखी, जिससे सुपौल का नाम बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर में ऊंचा हुआ। उनके मार्गदर्शन में पढ़े छात्र आज देश-विदेश के विभिन्न क्षेत्र क्रमशः चिकित्सा, इंजीनियरिंग, सिविल सेवा, राजनीति और अन्य पेशों में अपनी पहचान बना रहे हैं। उनके निधन को शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि उनके निधन पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। कांग्रेस नेता मिन्नत रहमानी ने इसे सुपौल के लिए बेहद दुखद क्षण बताया। उन्होंने कहा कि कालीचरण मिश्रा जैसे शिक्षाविद विरले ही होते हैं, जिन्होंने न केवल शिक्षा का स्तर ऊंचा किया बल्कि समाज को भी नई दिशा दी। मिन्नत रहमानी ने बिहार सरकार से मांग की है कि कालीचरण मिश्रा की अंतिम विदाई राजकीय सम्मान के साथ की जाए। उन्होंने इस संबंध में सुपौल के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से भी आग्रह किया है कि उनके सम्मान में उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। स्थानीय लोगों, शिक्षकों और पूर्व छात्रों ने भी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। सभी ने एक स्वर में कहा कि कालीचरण मिश्रा का योगदान सदैव याद रखा जाएगा और वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।
पीलीभीत में भारत में पर्यावरण शिक्षा की मौजूदा स्थिति पर किए गए एक शोध ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के शिक्षा विभाग के शोधार्थी मोहम्मद सैफ कुरैशी के अध्ययन को यूनाइटेड किंगडम की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी द्वारा ‘ऑस्ट्रेलियन जर्नल ऑफ एनवायरनमेंटल एजुकेशन’ (2026) में प्रकाशित किया गया है। रटने और परीक्षा तक सीमित पढ़ाईपीलीभीत निवासी सैफ कुरैशी के शोध पत्र “टीचिंग द पॉलिटिक्स ऑफ अर्थ: रीइमैजिनिंग एनवायरनमेंटल एजुकेशन फॉर प्लैनेटरी जस्टिस इन इंडिया” में बताया गया है कि भारतीय स्कूलों में पर्यावरण की पढ़ाई रटने और परीक्षा पास करने तक सीमित रह गई है। समस्याओं के कारणों से अनजान छात्रअध्ययन में पाया गया कि छात्र प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसे शब्दों से परिचित हैं, लेकिन इनके पीछे छिपे राजनीतिक, आर्थिक और प्रशासनिक कारणों को नहीं समझ पाते। यह सैद्धांतिक ज्ञान और जमीनी हकीकत के बीच बड़ी खाई को दर्शाता है। स्कूल बनाम सामुदायिक मॉडल में अंतरशोध के दौरान दिल्ली-एनसीआर के एक आधुनिक स्कूल और झारखंड के एक सामुदायिक शिक्षण केंद्र का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया। निष्कर्षों में सामने आया कि स्कूलों में पर्यावरण को ‘गैर-राजनीतिक’ विषय के रूप में पढ़ाया जाता है, जिससे छात्र नीतियों और शासन की भूमिका से अनभिज्ञ रहते हैं। वहीं सामुदायिक केंद्रों में बच्चे पर्यावरण को अपने अधिकारों, संसाधनों और जीवन से जोड़कर समझते हैं, जिससे उनमें भागीदारी और जागरूकता अधिक पाई गई। तुरंत बदलाव की जरूरत: शोधशोध में चेतावनी दी गई है कि यदि शिक्षा प्रणाली में जल्द सुधार नहीं किए गए, तो भविष्य की पीढ़ी समस्याओं को जानने के बावजूद उनके समाधान निकालने में सक्षम नहीं होगी। सैफ ने पाठ्यक्रम में स्थानीय मुद्दों, नीति विश्लेषण और प्रोजेक्ट आधारित अध्ययन को शामिल करने की सिफारिश की है। पीलीभीत का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशनइस उपलब्धि ने न सिर्फ एएमयू बल्कि उनके गृह जनपद पीलीभीत का नाम भी अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक जगत में रोशन किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध भारत में पर्यावरणीय साक्षरता की दिशा बदलने के लिए एक ठोस आधार प्रदान कर सकता है।
ब्यावर | राजस्थान चीता-मेहरात काठात महासभा की महत्वपूर्ण बैठक सेदरिया रोड स्थित महासभा भवन में हुई। अध्यक्षता कर्नल मोहम्मद सलीम ने की। बैठक में कार्यकारिणी और संरक्षक मंडल के पदाधिकारी शामिल हुए। समाज के उत्थान को लेकर कई फैसले लिए गए। आगामी आम अधिवेशन 31 मई को सारणिया गांव में कराने का निर्णय हुआ। इसी दिन प्रतिभा सम्मान समारोह भी होगा। शिक्षा के प्रसार को बढ़ावा देने के लिए 20 बीघा जमीन खरीदने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ। सदस्यों ने हाथ खड़े कर समर्थन किया। समाज हित में भामाशाह आलम काठात, जालिया सरपंच ने महासभा को नई एम्बुलेंस भेंट की। एम्बुलेंस का संचालन महासभा की स्वास्थ्य समिति करेगी। बैठक के अंत में दुआ की गई। मुल्क में खुशहाली और अमन-चैन की कामना की गई। बैठक में मुख्य संरक्षक प्रो. जलालुद्दीन काठात, सचिव माधू काठात, उपाध्यक्ष अमजद काठात, डांग अध्यक्ष अशोक चीता, एडवोकेट वाजिद खान चीता, रफीक काठात, रोशन काठात, सायर काठात, दीन मोहम्मद, सुभान काठात, सुवा काठात सहित कई लोग मौजूद रहे। जालियां प्रथम गांव की प्रशासक आमना आलम काठात ने राजस्थान चीता मेहरात (काठात) महासभा को एक एंबुलेंस भेंट की। इसका उद्देश्य आपात स्थिति में जरूरतमंद लोगों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। इस पहल के पीछे रोशन काठात को मुख्य प्रेरणा बताया गया। लोकार्पण के दौरान महासभा के पदाधिकारियों ने आमना आलम काठात और आलम काठात के परिवार का आभार जताया। आलम काठात ने कहा कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचने में देरी होती थी। एंबुलेंस शुरू होने से समय पर परिवहन संभव होगा।
बच्चों को जैन धर्म की मूल शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत व जीवन मूल्यों से जोड़ना ही उद्देश्य
भास्कर संवाददाता | विदिशा अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन एवं अखिल भारतीय जैन महिला फेडरेशन, विदिशा के संयुक्त तत्वावधान में ‘द्वितीय जिनदेशना जैन बाल-युवा शिक्षण शिविर’ का आयोजन 3 से 9 मई तक किया जा रहा है। यह शिविर श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर ट्रस्ट, अंदर किला, विदिशा परिसर में संपन्न होगा। प्रवक्ता शोभित जैन के अनुसार शिविर का मुख्य उद्देश्य बाल एवं युवा वर्ग को जैन धर्म की मूल शिक्षाओं, सांस्कृतिक विरासत, जीवन मूल्यों से जोड़ना है। इससे उनमें नैतिकता और संस्कारों का विकास हो सके। आयोजकों ने बताया कि शिविर में विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों के लिए पांच अलग-अलग कक्षाएं संचालित की जाएंगी। इनमें धार्मिक शिक्षा, व्यावहारिक ज्ञान, जीवन शैली से जुड़े विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शिविर के दौरान प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार भी वितरित किए जाएंगे। अल्पाहार और आवागमन व्यवस्था निःशुल्क शिविरार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अध्ययन सामग्री, आवागमन (यातायात) एवं अल्पाहार की व्यवस्था पूर्णतः निःशुल्क रखी गई है। शिविर की दैनिक दिनचर्या सुव्यवस्थित रूप से निर्धारित की गई है। प्रातःकालीन सत्र में सुबह 7 से 8:15 बजे तक पूजन-प्रक्षाल होगा। 8:15 से 8:40 बजे तक अल्पाहार होगा। 8:40 से 9:30 बजे तक कक्षाएं एवं प्रवचन आयोजित होंगे। वहीं रात्रिकालीन सत्र में 7:30 से 8:15 बजे तक भक्ति होगी। 8:15 से 9:15 बजे तक कक्षाएं एवं प्रवचन होंगे। 9:15 से 9:45 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं पुरस्कार वितरण किया जाएगा। शिविर संचालक चिरंतन बड़्कुल ने जानकारी दी कि शिविर में करेली से पधारे विद्वान पंडित अनुभव शास्त्री सहित स्थानीय विद्वानों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इससे प्रतिभागियों को गहन ज्ञान और प्रेरणा मिलेगी। यह आयोजन समस्त दिगंबर जैन समाज, विदिशा के सहयोग से संपन्न हो रहा है। श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष मलूकचंद जैन एवं समस्त ट्रस्ट पदाधिकारियों ने अभिभावकों से अपने बच्चों को इस शिविर में भाग दिलाने की अपील की है। इससे वे धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों से समृद्ध हो सकेंगे।
शिक्षा, संस्कार व व्यसन मुक्ति अभियान की बनाई रूपरेखा
भास्कर संवाददाता | बड़वानी गायत्री शक्तिपीठ साली टांडा में जिला स्तरीय एकदिनी जन्म शताब्दी अनुयाज कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में शांतिकुंज, हरिद्वार से शिक्षा, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, व्यसन मुक्ति जैसे रचनात्मक अभियानों को वर्ष 2026 के जन्म शताब्दी वर्ष में जन-जन तक पहुंचाने की रूपरेखा तैयार की गई। कार्यक्रम की शुरुआत ओंकारेश्वर उपजोन समन्वयक पन्नालाल बिरला, जिला समन्वयक विक्रम जमरे, प्रबंधन ट्रस्टी नरेंद्र डावर, सुनीता पाटीदार सहित अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन व देव पूजन के साथ की। अतिथियों का स्वागत तिलक लगाकर, अतिथि देवो भव परंपरा के अनुसार किया गया। दो सत्रों में आयोजित कार्यशाला में प्रज्ञा संस्थान की स्थापना, अर्थ अनुशासन, युवा जोड़ो अभियान, स्वास्थ्य, पर्यावरण व जल संरक्षण, साहित्य विस्तार, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा, नारी जागरण, संस्कारवान पीढ़ी निर्माण, साधना-स्वाध्याय, मंडल निर्माण जैसे विषयों पर चर्चा हुई। पन्नालाल बिरला, डॉ. सोहन गुर्जर, सुनीता पाटीदार, जोगीलाल मुजाल्दे, रामलाल पटेल, केशरीलाल, योगेश पाटीदार ने मार्गदर्शन दिया। योजनाओं के प्रभावी संचालन के तरीके बताए। जन्म शताब्दी अनुयाज संकल्प के तहत तहसीलवार संकल्प लिए गए। जिला व तहसील समन्वय समितियों के नवनिर्वाचित सदस्यों की उपस्थिति में इन संकल्पों के क्रियान्वयन की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम में अनूप जमरे, ज्ञान प्रसाद डावर, राजेंद्र व कांता चौहान ने प्रज्ञा गीत की संगीतमय प्रस्तुति दी। आशीर्वचन में गायत्री धाम के पंडित मेवालाल पाटीदार ने कहा व्यक्ति को अपने आचरण से प्रेरणा देनी चाहिए। यदि हम व्यसन मुक्ति की बात करें, स्वयं उसका पालन न करें, तो समाज पर उसका प्रभाव नहीं पड़ेगा। जिला समन्वयक विक्रम जमरे ने युग निर्माण योजना को गति देने के लिए सभी कार्यकर्ताओं से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। कार्यशाला में सहायक समन्वयक दिनेश चौधरी, रूपसी, मगनलाल डुडवे, शीला अहिरे, कन्हैयालाल, गायत्री दासोंधी, निर्मला वर्मा, दुर्गा गुप्ता सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। संचालन महेंद्र भावसार ने किया। अंत में शक्ति पीठ प्रबंधन ट्रस्टी नरेंद्र डावर ने सद्संकल्प पाठ कराया और आभार प्रदर्शन किया।
जिला शिक्षा केंद्र में इंजीनियरों से खुलेआम उगाही का खेल चल रहा है। इसका कोड वर्ड है लड्डू और मिठाई। इंजीनियरों से कभी डीपीसी के नाम पर दीपावली पर मिठाई बांटने के नाम पर, तो कभी भोपाल मिठाई भेजने के नाम पर खुलेआम रुपए देने के लिए कहा जाता है। जिला शिक्षा केंद्र के अंतर्गत सभी इंजीनियरों के वाट्सएप ग्रुप जेडएसके इंजीनियर सूचना ग्रुप की ऐसी कई चैटिंग सामने आई है, जिसमें खुलेआम रुपयों की बातचीत हो रही है। इसके अलावा जानबूझकर मान्यता की फाइलें अटकाने, मिठाई के रुपए भेजने के लिए यूपीआई स्कैनर की फोटो भेजने सहित कई ऐसे मैसेज और पोस्ट भी सामने आई है, जो यह साबित करती है कि रुपयों का खेल खुलेआम चल रहा है। जिला शिक्षा केंद्र के अंतर्गत पूरे जिले में कुल 13 इंजीनियर हैं। इधर, डीपीसी ने इंजीनियरों के इस मैसेज पर हैरानी जताते हुए कार्रवाई की बात कही है। इस संबंध में जब इंजीनियर संदीप जैन से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि लड्डू के लिए रुपए लेने जैसी कोई बात ही नहीं है। वहीं इंजीनियर वल्लभसिंह राठौर भी मुकर गए। बोले- मैंने मिठाई या लड्डू के डिब्बे का कोई मैसेज पोस्ट नहीं किया है। ग्रुप पर इस तरह कोड वर्ड से हो रही रुपयों की डिमांड इंजीनियर संदीप जैन ने इंजीनियर मनीष शर्मा के मैसेज को टैग करते हुए पोस्ट किया। जैन साहब भोपाल की मिठाई का बोल रहे हैं। क्या करना है सभी बताओ। राशि 214.67 लाख रुपए है। इस लिस्ट के नीचे लिखा है- इसके अनुसार करना है। इंजीनियर संदीप जैन ने ग्रुप पर यूपीआई स्कैनर की फोटो भेजकर मैसेज पोस्ट किया। उसके नीचे लिखा कि मिठाई के 800 रुपए इस पर भेज दो सभी। इंजीनियर वल्लभ राठौर ने ग्रुप पर एक मैसेज फॉरवर्ड किया है। लिखा- डीपीसी सर द्वारा भोपाल से प्राप्त निर्देश अनुसार 20 डिब्बे 500-500 ग्राम इच महाकाल प्रसाद के भेजना है। उसकी जवाबदारी निर्माण शाखा को दी है। आज ही खरीदकर कल सुबह की ट्रेन से भेजना है। तो जो भी फंड जमा है, जैन साहब के पास, उसमें से खरीद लें? यदि कोई आपत्ति हो तो जैन साहब/डीपीसी साहब से बात कर लें प्लीज। हमने कभी भी किसी को लड्डू के लिए शेयर कलेक्ट करने को नहीं कहा। हमें लड्डू बांटना होंगे तो हम अपने रुपयों से बांटेंगे। अगर किन्हीं इंजीनियरों ने मेरा नाम का इस्तेमाल कर इस तरह से कोई मैसेज भेज रुपए लिए हैं तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। - अशोक कुमार त्रिपाठी, डीपीसी
शिक्षा में नवाचार के लिए डॉ. छतलानी सम्मानित
उदयपुर | शिक्षण, शोध व आईटी के क्षेत्र में योगदान के लिए राजस्थान विद्यापीठ के डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी को ड्रॉप ऑफ चेंज संस्था द्वारा सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान शिक्षा जगत में नवाचार और सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयासों के लिए प्रदान किया गया। संस्था के संस्थापक शुभम सक्सेना ने प्रमाणपत्र प्रदान करते हुए डॉ. छतलानी के समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनकी विशेषज्ञता न अकादमिक क्षेत्र बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणादायक है।
ब्रह्मऋषि खेतेश्वर वेद विज्ञान गुरुकुल का वार्षिकोत्सव धरोहर 2026 का आयोजन 10 मई को खेतेश्वर गुरुकुल मायलावास में किया जाएगा। अखिल भारतीय राजपुरोहित समाज विकास संस्थान की ओर से यह गुरुकुल संचालित किया जा रहा है। इसमें राज्यपाल हरिभाऊ बागडे मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। कार्यक्रम को लेकर ब्रह्मधाम आसोतरा के वेदांताचार्य डॉक्टर ध्यानाराम महाराज ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समाज में शिक्षा के साथ संस्कारों का पाठ पढ़ाने के उद्देश्य से सबसे पहले 2 जुलाई 2016 को मायलावास में गुरुकुल की स्थापना की गई थी। वर्तमान में समाज के पांच गुरुकुल संचालित किया जा रहे हैं। जो मायलावास (बालोतरा), बिजरोल खेड़ा, सायला, रायथल, (जालोर) ओर सवाई छोटी चूरू में स्थापित हैं। इनके माध्यम से नई शिक्षा नीति के तहत समाज के बच्चों को हिंदी, इंग्लिश के साथ ही वेदों का अध्ययन संस्कृत भाषा में करवाया जा रहा है। वेदांताचार्य डॉक्टर ध्यानाराम ने बताया- वार्षिकोत्सव में पांचों गुरुकुल के ऋषि कुमार शामिल होंगे। इसमें ब्रह्म धाम आसोतरा के सदगुरुदेव तुलसाराम महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर निर्मल दास महाराज मौजूद रहेंगे। वहीं भारतीय प्रशासनिक सेवा के गुजरात कैडर के IAS गंगा सिंह दण्डाली, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक निंबाराम भी शामिल होंगे। पौराणिक शिक्षा अच्छे व्यक्तित्व के निर्माण के लिए आवश्यक वेदांताचार्य डॉक्टर ध्यानाराम ने बताया- आज के समय में आधुनिक शिक्षा भी जरूरी है, लेकिन हमारे ऋषि मुनियों की पौराणिक शिक्षा भी एक अच्छे व्यक्तित्व के निर्माण के लिए आवश्यक है। इसलिए इन गुरुकुलों में वेद विज्ञान की पौराणिक पढ़ाई के साथ ही ऋषि कुमारों को हिंदी और अंग्रेजी की पढ़ाई भी करवाई जा रही है। इससे यह अपने क्षेत्र में कीर्तिमान गढ़ सकें। इसके अलावा उन्हें नित्य योग, प्राणायाम, ध्यान के अलावा उन्हें नैतिक शिक्षा संस्कारों का पाठ भी पढ़ाया जा रहा है। आगामी वर्षों में इन गुरुकुलों की संख्या में और भी बढ़ोतरी करने का लक्ष्य रखा गया है। इस साल 530 विद्यार्थी पढ़ रहे गुरुकुल के 11 ऋषि कुमारों ने अलग-अलग खेल प्रतियोगिताओं में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर गुरुकुल का नाम रोशन किया। वर्ष 2026-27 सत्र में इन गुरुकुल में 530 विद्यार्थी हैं, जो 13 जिलों से यहां पढ़ने के लिए आए हैं।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में रविवार को मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कई नए निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें फिजियोथेरेपी कॉलेज भवन, 100 बिस्तर वाले मातृ एवं शिशु अस्पताल के लिए स्टाफ क्वार्टर और 10 बिस्तरीय योग व प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र शामिल हैं। इन निर्माण कार्यों के लिए अलग-अलग राशि स्वीकृत की गई है। फिजियोथेरेपी कॉलेज भवन के लिए 1393.71 लाख रुपए, 100 बिस्तर वाले MCH अस्पताल के स्टाफ क्वार्टर के लिए 393.79 लाख रुपए और 10 बिस्तरीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र के लिए 280.57 लाख रुपए की मंजूरी दी गई है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कार्यक्रम में कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ अच्छी चिकित्सा शिक्षा और वेलनेस को भी बढ़ावा दे रही है। उन्होंने बताया कि रायगढ़ में जिन परियोजनाओं का भूमिपूजन किया गया है, वे आने वाले समय में पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत बनाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या बढ़ाई गई है, जिससे पैरामेडिकल शिक्षा को बढ़ावा मिला है। योग और प्राकृतिक चिकित्सा के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल उपचार पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने का संपूर्ण विज्ञान है। आने वाले समय में इसे और बड़े स्तर पर विकसित किया जाएगा, ताकि लोग दवाओं पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक तरीके से स्वस्थ रह सकें। रायगढ़ के भविष्य को नई दिशा मिलेगी वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि रायगढ़ में स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में तेजी से और योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आज जिन परियोजनाओं का भूमिपूजन किया गया है, वे रायगढ़ के भविष्य को नई दिशा देंगी। आने वाले समय में रायगढ़ स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश के प्रमुख जिलों में शामिल होगा। कार्यक्रम में लोगों को आयुष्मान कार्ड और सिकल सेल कार्ड भी दिए गए, जिससे उन्हें विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ मिल सके।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय ने चौबे कॉलोनी स्थित विश्व शांति भवन में समर कैम्प का उद्घाटन किया। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने कहा कि, हर बच्चे में विशेष प्रतिभा होती है, जिसे पहचानकर सही दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है। समर कैम्प बच्चों को अपनी क्षमताओं को निखारने का अवसर देता है और मेडिटेशन जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के डायरेक्टर डॉ. ओमप्रकाश व्यास ने कहा कि आज के डिजिटल दौर में बच्चे पढ़ाई से ज्यादा मोबाइल में समय बिता रहे हैं, जो एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि राजयोग मेडिटेशन से बच्चों की एकाग्रता बढ़ेगी और जीवन मूल्यों की शिक्षा उन्हें सही दिशा देगी। अच्छे संस्कार अपनाकर बनें आदर्श नागरिक जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारतीय ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि, वे अच्छे संस्कार अपनाएं और अपने माता-पिता का नाम रोशन करें। उन्होंने बताया कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि जीवन के अनुभवों से भी सीखना जरूरी है। संस्कारों की पाठशाला बना समर कैम्प ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि, यह समर कैम्प बच्चों को नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का माध्यम है। ब्रह्माकुमारी अंशु दीदी ने बताया कि चौबे कॉलोनी में यह कैम्प पिछले 20 वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य बच्चों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी वनिषा दीदी ने किया।
58 शिक्षकों ने सीखे समावेशी शिक्षा के गुर
लुधियाना |मॉडल टाउन स्थित गुरु नानक इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के संरक्षण में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में संस्थान के 58 शिक्षकों ने भाग लिया। इस सत्र का उद्देश्य स्कूली माहौल में लैंगिक समानता के प्रति समझ और जागरूकता विकसित करना था।इस सत्र का नेतृत्व प्रतिष्ठित विशेषज्ञ हरनीत सिंह प्रिंसिपल पोदार इंटरनेशनल स्कूल और किरणजीत कौर कटारिया प्रिंसिपल गुरु हरकिशन आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल, लुधियाना ने किया। उन्होंने पारंपरिक सोच से हटकर एक लैंगिक रूप से संवेदनशील मानसिकता अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे ज्ञान, कौशल और शिक्षण पद्धतियों से सुसज्जित करना था, जिनकी मदद से वे अपनी कक्षाओं में समावेशिता को बढ़ावा दे सकें। कार्यक्रम की शुरुआत में, प्रत्येक शिक्षक को हैंडआउट्स दिए गए और उन्होंने विभिन्न व्यक्तिगत व सामूहिक गतिविधियों में बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। चर्चाओं के दौरान लैंगिक रूप से संवेदनशील संस्कृति के महत्व पर ज़ोर दिया गया, जिसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को भी शामिल करने की बात कही गई। पाठ्यक्रम में शामिल की जा सकने वाली कई पद्धतियों पर भी प्रकाश डाला गया।
मूल्य आधारित शिक्षा पर जोर दिया
लुधियाना| दृष्टि डॉ. आरसी जैन इनोवेटिव पब्लिक स्कूल में शनिवार को संस्था के संस्थापकों डॉ. आरसी जैन और ज्ञान देवी की स्मृति में सृजन धारा कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्कूल प्रशासन के अनुसार यह आयोजन पूर्णता से अधिक प्रगति के सिद्धांत और मूल्य-आधारित शिक्षा की प्रतिबद्धता को रेखांकित करने के उद्देश्य से किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में एसएमसी के उपाध्यक्ष रविंदर जैन ने अतिथियों को पौधे भेंट कर सम्मानित किया। निदेशिका अहलावत ने डॉ. जैन के साहस, विद्वता और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान का उल्लेख किया तथा ज्ञान देवी के सहयोग को स्मरण किया। मुख्यातिथि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष और एसएमसी अध्यक्ष प्रो. वेद प्रकाश रहे। उन्होंने कहा कि “संस्थाएं तभी फलती-फूलती हैं जब वे मूल्यों पर आधारित हों और उद्देश्य से संचालित हों।” सम्मानित अतिथि अमृतपाल सिंह, पाली खादिम और विशेषातिथि प्रो. इंद्रपाल सिंह ने छात्र संवाद में सेवा, पंजाबियत, भाषा व तकनीक की भूमिका पर विचार रखे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बाद स्कूल की नई रोबोटिक्स लैब का उद्घाटन प्रो. वेद प्रकाश ने किया और कहा, ‘मूल्यों को नवाचार से जोड़ना ही डॉ. आरसी जैन को सच्ची श्रद्धांजलि है।’
शिक्षकों को वैश्विक शिक्षा पर मार्गदर्शन
भास्कर न्यूज | लुधियाना न्यू सुभाष नगर स्थित ग्रीन लैंड कॉन्वेंट स्कूल में शिक्षकों के लिए कैम्ब्रिज ग्लोबल पर्सपेक्टिव पर एक सेमिनार आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य शिक्षण पद्धतियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप सुदृढ़ बनाना तथा छात्रों में आलोचनात्मक चिंतन, जिज्ञासा आधारित शिक्षण और वैश्विक समझ विकसित करना था। सत्र का संचालन कैम्ब्रिज असेसमेंट इंटरनेशनल एजुकेशन, यूके की विशेषज्ञ मनीषा नंदा द्वारा किया गया। यह सत्र संवादात्मक रहा, जिसमें शिक्षकों को बताया गया कि किस प्रकार वैश्विक विषयों को वास्तविक जीवन के उदाहरणों के साथ कक्षा शिक्षण में प्रभावी ढंग से शामिल किया जा सकता है। ग्रीनलैंड श्रृंखला के विभिन्न शाखाओं के शिक्षकों ने इसमें उत्साहपूर्वक भाग लिया। चेयरमैन डॉ. राजेश रुद्रा ने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि छात्रों में वैश्विक दृष्टिकोण विकसित होना चाहिए। प्रधानाचार्या डॉ. ज्योति पुजारा ने शिक्षकों के निरंतर प्रशिक्षण को आवश्यक बताते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति स्कूल की प्रतिबद्धता दोहराई, ताकि छात्र जिम्मेदार वैश्विक नागरिक बन सकें।
बालिकाओं को शिक्षा और सशक्तिकरण का संदेश दिया
बड़वानी | शहर के वार्ड क्रमांक 20 स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में शनिवार को लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत आयोजित उत्सव में बालिकाओं को प्रमाण पत्र वितरित किए। कार्यक्रम में योजना के लाभों और बालिका शिक्षा पर जोर दिया गया। पर्यवेक्षक बसंती भिड़े उपस्थित रहीं। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और स्थानीय महिलाएं शामिल हुई। पात्र बालिकाओं को लाड़ली लक्ष्मी योजना के प्रमाण पत्र वितरित किए। साथ ही अभिभावकों को योजना से मिलने वाले आर्थिक व सामाजिक लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई, जिससे वे अपनी बेटियों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए जागरूक हो सकें। भिड़े ने कहा बालिकाओं की शिक्षा सबसे बड़ा सशक्तिकरण का माध्यम है और लाड़ली लक्ष्मी योजना इसी दिशा में मजबूत पहल है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बेटियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करें।
जनजातीय सशक्तिकरण की कुंजी शिक्षा: मोहन भगवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भगवत ने शनिवार को शिक्षा को सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली साधन बताया
लखीमपुर खीरी के बेहजम में राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश और राजरानी माता शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में 20 दिवसीय ग्रीष्मकालीन ललित कला कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ हुआ। विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन खंड शिक्षा अधिकारी देवेश राय, ब्लॉक प्रमुख रामशंकर राज, व्यवस्थापक उमेश कुमार गुप्ता और प्रधानाचार्य आलोक कुमार सैनी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी देवेश राय ने कहा कि यह विद्यालय न केवल अपने शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम के लिए जाना जाता है, बल्कि क्षेत्र में कला एवं संस्कृति के संवर्धन में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने जोर दिया कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक होती हैं और उनकी सृजनात्मकता व आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं। ब्लॉक प्रमुख रामशंकर राज ने ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी कला कार्यशालाओं के आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों को अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है। विद्यालय के प्रधानाचार्य आलोक कुमार सैनी ने अकादमी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को नई दिशा देते हैं। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे प्रयासों को जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई। कार्यशाला के संयोजक संजीव गुप्ता ने बताया कि इस 20 दिवसीय कार्यशाला में विद्यार्थियों को क्ले मॉडलिंग, मंडला आर्ट, दृश्य चित्रण और रचनात्मक ड्राइंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे और उनकी कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि अकादमी के सदस्य अभिनव दीप के विशेष प्रयासों से जनपद में कला एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। इससे ग्रामीण प्रतिभाओं को एक मंच मिल रहा है और विद्यार्थियों में कला के प्रति रुचि बढ़ रही है। यह कार्यशाला न केवल विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारेगी, बल्कि क्षेत्र में कला एवं संस्कृति के प्रति नई ऊर्जा का संचार भी करेगी।
बालोतरा के सरवड़ी पुरोहितान स्थित पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल में नई लाइब्रेरी भवन का लोकार्पण किया गया। ब्रह्मधाम आसोतरा तीर्थ के गादीपति संत तुलछाराम महाराज ने फीता काटकर इसका उद्घाटन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, शिक्षक, छात्र और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समारोह को संबोधित करते हुए संत तुलछाराम महाराज ने शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही समाज के विकास का मजबूत आधार है। उन्होंने छात्रों को मन लगाकर अध्ययन करने, अनुशासित रहने और उज्ज्वल भविष्य बनाने के लिए प्रेरित किया। संत ने पुस्तकालय को ज्ञान का मंदिर बताया, जहां से छात्रों को नई दिशा और प्रेरणा मिलती है। लाइब्रेरी के साथ ही स्कूल परिसर में अन्य निर्माण कार्यों का भी लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर शिक्षा क्षेत्र में सहयोग देने वाले भामाशाहों का सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। समाजसेवियों और दानदाताओं को साफा पहनाकर एवं माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया। सम्मानित भामाशाहों में बादरसिंह राजपुरोहित (सरवड़ी), हिम्मताराम पटेल (बागलोप), विशन सिंह राजपुरोहित, रणवीर सिंह राजपुरोहित, उम्मेदसिंह राजपुरोहित, घेवरराम सुथार, अर्जुनसिंह, भेरूसिंह और हनुमान सिंह प्रमुख रूप से शामिल थे। ग्रामीणों और अभिभावकों ने स्कूल में लाइब्रेरी शुरू होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों को अध्ययन सामग्री मिलेगी और शिक्षा का स्तर बेहतर होगा। कार्यक्रम के अंत में संत तुलछाराम महाराज ने स्कूल के छात्र-छात्राओं को आशीर्वाद दिया।
डीएम सौरभ जोरवाल ने छात्रों को पढ़ाया:मोतिहारी मॉडल स्कूल में शिक्षा व्यवस्था का लिया जायजा
पूर्वी चंपारण में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक नई पहल की गई है। जिला पदाधिकारी सौरभ जोरवाल स्वयं शिक्षक की भूमिका में मोतिहारी के लखौरा स्थित मॉडल विद्यालय श्री रामदवन विभीषण उच्च माध्यमिक +2 विद्यालय पहुंचे। उन्होंने कक्षा में जाकर विद्यार्थियों को पढ़ाया और उनसे संवाद किया। इस दौरान डीएम ने छात्रों से पढ़ाई, अनुशासन और विद्यालय की व्यवस्था से संबंधित प्रश्न पूछे, साथ ही उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। 27 प्रखंडों में मॉडल विद्यालय स्थापित किए जा रहे डीएम ने शिक्षण कार्य के साथ-साथ विद्यालय की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सुझाव दिए। इस पहल से प्रशासन की शिक्षा की गुणवत्ता के प्रति गंभीरता और बच्चों के भविष्य के लिए प्रतिबद्धता सामने आई है। यह पहल बिहार सरकार के शिक्षा विभाग की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है। इसके तहत पूर्वी चंपारण जिले के 27 प्रखंडों में एक-एक मॉडल विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा इन विद्यालयों का मुख्य उद्देश्य कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और नवाचार-आधारित शिक्षा प्रदान करना है। प्रत्येक विद्यालय में आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि छात्रों को प्रतिस्पर्धात्मक माहौल मिल सके। इन मॉडल विद्यालयों में माध्यमिक स्तर (कक्षा 9-10) के लिए संगीत, ललित कला, नृत्य और शारीरिक शिक्षा सहित कुल 8 शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। उच्च माध्यमिक स्तर (कक्षा 11-12) के लिए 16 शिक्षकों की तैनाती होगी। शिक्षकों का चयन शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और साक्षात्कार के आधार पर पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया से होगा। मेधावी छात्रों को मेरिट के आधार पर नामांकन इन मॉडल विद्यालयों से जिले के लाखों छात्रों को अपने ही प्रखंड में उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इसके अतिरिक्त, NMMS परीक्षा में 50 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले मेधावी छात्रों को मेरिट के आधार पर नामांकन दिया जाएगा। डीएम सौरभ जोरवाल ने बताया कि ये विद्यालय केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं होंगे, बल्कि आसपास के अन्य सरकारी विद्यालयों के लिए भी शैक्षणिक मार्गदर्शन और संसाधन साझा करने का कार्य करेंगे। उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इन विद्यालयों को शैक्षणिक उत्कृष्टता का मॉडल बनाया जाएगा। अब पूर्वी चंपारण के छात्रों का सपना सरकारी विद्यालयों में ही साकार होता नजर आ रहा है।
शेखपुरा में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर जिला पदाधिकारी शेखर आनंद ने 'प्रोजेक्ट स्वाभिमान' के तहत 'अक्षर लर्निंग सेंटर' का विधिवत शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य ईंट भट्ठों पर काम करने वाले प्रवासी और स्थानीय मजदूरों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पदाधिकारी ने कहा कि ईंट भट्ठों पर कार्यरत मजदूरों के बच्चे अक्सर शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। 'प्रोजेक्ट स्वाभिमान' का लक्ष्य इन बच्चों को केवल साक्षर बनाना ही नहीं, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करना भी है। अंत्योदय योजना का लाभ दिलाना उद्देश्य जिला पदाधिकारी ने बताया कि जिला प्रशासन इन परिवारों को सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने मजदूरों के लिए लेबर कार्ड, राशन कार्ड और जीविका समूह से जुड़ाव सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि अंत्योदय योजना का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। डीएम ने जानकारी दी कि वर्तमान में जिले के 5 अलग-अलग स्किल सेंटरों पर 'अक्षर लर्निंग सेंटर' का संचालन शुरू किया जा रहा है। उन्होंने स्वयं इन केंद्रों का निरीक्षण किया और बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता का जायजा लिया। उन्होंने इस कार्य में सभी विभागों के समन्वय और सहयोग की सराहना भी की। जनप्रतिनिधि और पदाधिकारीगण रहे उपस्थित कार्यक्रम की शुरुआत में जिला पदाधिकारी के साथ अपर समाहर्ता लखींद्र पासवान, उप विकास आयुक्त संजय कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी प्रियंका कुमारी और अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिला परिषद अध्यक्ष निर्मला सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि और पदाधिकारीगण उपस्थित थे।
झालावाड़ में निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर महंगी किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कई स्कूल एनसीईआरटी की सस्ती किताबों की बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें चला रहे हैं, जो बाजार भाव से कई गुना महंगी बेची जा रही हैं। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार तिवारी ने डीईओ (माध्यमिक) को ज्ञापन सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। एनसीईआरटी छोड़ निजी किताबों का दबाव ज्ञापन में बताया गया कि जिले के कई निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की निर्धारित किताबों की जगह निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाई जा रही हैं। इन किताबों की कीमत सामान्य पुस्तकों की तुलना में काफी ज्यादा है। जहां आमतौर पर किताबें 70 से 100 रुपए तक उपलब्ध हैं, वहीं निजी स्कूलों में यही किताबें 600 से 800 रुपए तक में बेची जा रही हैं। तय दुकानों से खरीदारी के लिए मजबूर करने का आरोप अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि कई स्कूल प्रबंधन बच्चों के लिए किताबें और यूनिफॉर्म केवल तय दुकानों से खरीदने का दबाव बनाते हैं। जबकि शिक्षा विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी अभिभावक को किसी विशेष दुकान से सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद कई स्कूल खुलेआम नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। शिक्षा विभाग को सौंपे महंगी किताबों के बिल सुनील कुमार तिवारी ने बताया कि इस मामले से जुड़े कई महंगी किताबों के बिल भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए हैं। इसके बावजूद अभी तक किसी प्रकार की जांच शुरू नहीं की गई है। उन्होंने जिला प्रशासन से भी हस्तक्षेप कर शिक्षा विभाग को कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है। जरूरतमंद परिवारों पर आर्थिक बोझ तिवारी ने कहा कि जिले के कई जरूरतमंद परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से निजी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। लेकिन निजी स्कूल संचालक महंगी किताबें, ड्रेस और अलग-अलग शुल्क लगाकर ऐसे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। इससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। लंबे समय से जांच नहीं, बढ़े हौसले ज्ञापन में कहा गया है कि निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ लंबे समय से कोई ठोस जांच या कार्रवाई नहीं हुई है। इसी कारण उनके हौसले बढ़ते जा रहे हैं। साथ ही सरकारी स्तर पर भी शिक्षा को कम खर्चीला और सुलभ बनाने की दिशा में अपेक्षित प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं। यह मांगें उठीं ज्ञापन में मांग की गई है कि जिले के निजी स्कूलों को केवल अधिकृत पुस्तकों को ही पाठ्यक्रम में शामिल करने के निर्देश दिए जाएं और महंगी किताबें बेचने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
हाथरस जिला कल 3 मई को अपनी 29वीं वर्षगांठ मनाएगा। इस जिले का गठन 3 मई 1997 को अलीगढ़ और मथुरा जनपदों से अलग कर किया गया था। अपने 29 साल के इतिहास में इस जिले का नाम चार बार बदला गया है। तत्कालीन ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के प्रयासों से 3 मई 1997 को हाथरस को जिले का दर्जा मिला। इसमें अलीगढ़ की हाथरस, सिकंदराराऊ व इगलास तहसीलें और मथुरा की सादाबाद तहसील शामिल की गई थीं। हालांकि, स्थानीय विरोध के बाद इगलास तहसील को वापस अलीगढ़ जिले में मिला दिया गया। इसके बाद सासनी को तहसील का दर्जा मिला और इस समय हाथरस जिले में चार तहसीलें हैं। सपा सरकार में खत्म कर दिया था जिले का दर्जा.. जिला सर्जन के बाद जिले में जिला स्तरीय कार्यालयों का निर्माण शुरू हुआ, लेकिन वर्ष 2004 में तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार ने जिले का दर्जा समाप्त कर दिया। इस दौरान जनपद न्यायालय तो हाथरस में ही संचालित रहा, लेकिन पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्थाएं फिर से अलीगढ़ और मथुरा से संचालित होने लगीं। हाथरस को जिला बनाए रखने के लिए शहर के समाजसेवियों, वकीलों और व्यापारिक संगठनों ने 'जनपद बचाओ आंदोलन' शुरू किया। लगभग तीन साल के संघर्ष के बाद, वर्ष 2007 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर जिले का दर्जा बहाल कर दिया गया। चार बार बदला गया जिले का नाम... जिले के नामकरण को लेकर भी खूब राजनीति हुई। जब बसपा सरकार ने हाथरस को जिला घोषित किया, तो इसका नाम 'महामाया नगर' रखा गया। बाद में भाजपा सरकार आने पर इसका नाम बदलकर 'हाथरस' कर दिया गया। फिर बसपा सरकार बनने पर इसे 'महामायानगर' और समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर पुनः 'हाथरस' कर दिया गया। उद्योग धंधों का नहीं हो पाया विकास.. जिला बनने के बाद लोगों को यह उम्मींद थी कि उद्योग धंधों का विकास होगा। हाथरस की पहचान पहले की औद्योगिक शहर के रूप में होगी। शहर में रंग-गुलाल उद्योग, दाल उद्योग, हैंडीक्राफ्ट उद्योग के अलावा सिकंदराराऊ के पुरदिलनगर का मूंगा मोती उद्योग, सासनी का कांच उद्योग, बिसावर का चांदी उद्योग को सरकारी प्रोत्साहन नहीं मिला। ट्रांसपोर्ट नगर की लोगों को दरकार… हाथरस में अभी भी ट्रांसपोर्ट नगर नहीं बन सका है। इसका सीधा असर जनपद के उद्योग धंधों पर पड़ा है। एक जनपद एक उत्पाद में हींग उद्योग व रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग शामिल हुए हैं। हसायन के इत्र, गुलकंद, गुलाब जल उद्योग को जीआई टैग मिला है। हालांकि जिले के बनने के बाद यह जिला कई नेशनल हाईवे से जुड़ गया है और लोगों को आवागमन में बेहतर सुविधा मिली है। जिले में अभी तक नहीं बना मेडिकल कॉलेज...हाथरस जिला सबसे ज्यादा स्वास्थ्य सेवाओं में फिसड्डी है। जिला स्तरीय सरकारी अस्पताल हैं। हाथरस में अभी तक मेडिकल कॉलेज नहीं बना है। हाथरस से बाद में जो जनपद बने, वहां मेडिकल कॉलेज खुल गए, लेकिन 29 साल बाद भी हाथरस जिले में मेडिकल कॉलेज नहीं बना। स्थिति यह है की छोटी बीमारियों के मरीजों को भी उपचार के लिए बाहर जाना पड़ता है। यहां सरकारी व्यवसायिक शिक्षा के नाम पर कोई उच्च संस्थान नहीं है। 70 साल पुराने एमजी पॉलीटेक्निक को भी इंजीनियरिंग कॉलेज का दर्जा नहीं मिला। अभी भी इस जिले में कई जिला स्तरीय कार्यालय नहीं है। अभी भी यहां अलीगढ़ और हाथरस की सहकारी बैंक ही संचालित है। जिला बनने के बाद महिला थाना व साइबर थाना की बात छोड़ दें तो जिले में कोई नया थाना नहीं बना। कोई नई नगर पंचायत नहीं बनी। कोई नया ब्लॉक सृजित नहीं हुआ। जब के वहां के लोगों द्वारा लगातार इसे लेकर मांग भी की जा रही है। अलबत्ता हाथरस में जिला न्यायालय के नए भवन और जेल का निर्माण इस समय चल रहा है।
यूपी सरकार ने इस साल डेढ़ लाख युवाओं को नौकरी देने का टारगेट रखा है। पुलिस विभाग में करीब 80 हजार, शिक्षा विभाग में 50 हजार भर्ती हो सकती हैं। इसके अलावा राजस्व, मेडिकल, न्याय, महिला एवं बाल विकास विभाव में भर्तियां प्रस्तावित हैं। कई भर्तियों के विज्ञापन भी सामने आ गए हैं। ‘सरकार 10 साल में 10 लाख नौकरी’ का लक्ष्य हासिल करना चाहती है। यूपी में फरवरी-मार्च 2027 में विधानसभा चुनाव होने तय हैं। जनवरी में आचार संहिता लग जाएगी। इस हिसाब से मौजूदा बीजेपी सरकार के पास 8 महीने का समय बचा है। इसी में भर्तियों का ऐलान, परीक्षाएं और रिजल्ट देना है। किस विभाग में कौन-सी भर्ती है, उसके लिए क्या योग्यता चाहिए, भर्ती कैसे होगी? पढ़िए इस रिपोर्ट में… होमगार्ड के एक पद के लिए 46 दावेदार हैं यूपी में होमगार्ड के 41,424 पदों के लिए 25, 26 और 27 अप्रैल को परीक्षा हुई। इसमें 19 लाख 29 हजार 155 कैंडिडेट शामिल हुए। यानी होमगार्ड के एक पद के लिए 46 दावेदार हैं। लिखित परीक्षा का रिजल्ट 15 से 30 जून तक आ सकता है। लिखित परीक्षा पास हुए कैंडिडेट को ही शारीरिक परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। 15 लाख कैंडिडेट्स ने UPSI की परीक्षा दी पिछले महीने 14 और 15 मार्च को UPSI के 4,543 पदों के लिए परीक्षा कराई गई। इसमें करीब 15 लाख कैंडिडेट्स शामिल हुए थे। सभी 75 जिलों में सेंटर बने थे। इसका 10 मई तक रिजल्ट आ सकता है। यूपी पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा जून में यूपी पुलिस में 32,679 पदों पर 31 दिसंबर 2025 को भर्ती का ऐलान हुआ। मेल कैंडिडेट्स के लिए सिविल पुलिस में 10,469 और पीएसी में 15,131 पद हैं। महिला पीएसी के लिए अलग से 1341 पद हैं। जेल वॉर्डन के कुल 3385 पद हैं, इसमें 106 पद महिलाओं के लिए हैं। एप्लीकेशन फॉर्म 31 दिसंबर 2025 से 30 जनवरी 2026 तक भरा गया। 8, 9 और 10 जून 2026 को लिखित परीक्षा होगी। कैंडिडेट की उम्र कितनी होनी चाहिए? लेखपाल भर्ती में 100 सवाल पूछे जाएंगे यूपी में इस वक्त लेखपाल के 7994 पदों पर भर्ती चल रही है। इस भर्ती के लिए 28 जनवरी तक फॉर्म भरा गया। 21 मई को परीक्षा होगी। 100 नंबर की इस परीक्षा में 100 सवाल होंगे। परीक्षा का पैटर्न ऑब्जेक्टिव होगा। गलत जवाब पर 0.25 नंबर कटेंगे। इसमें UP PET-2025 पास कैंडिडेट्स ही अप्लाई कर पाए हैं। ऐसे कैंडिडेट्स की संख्या करीब 3.66 लाख है। कैंडिडेट की उम्र कितनी होनी चाहिए? ASO-ARO के 929 पदों पर भर्ती UPSSSC ने असिस्टेंट स्टैटिस्टिकल ऑफिसर (ASO) और असिस्टेंट रिसर्च ऑफिसर (ARO) के लिए आवेदन मांगे हैं। इनमें 929 पदों में ASO के 916 पद हैं, ARO के 13 पद हैं। नोटिफिकेशन 21 अप्रैल को जारी हुआ। एप्लीकेशन फॉर्म भरने की आखिरी तारीख 11 मई है। परीक्षा की तारीख अभी डिक्लेयर नहीं हुई है। कैंडिडेट की उम्र कितनी होनी चाहिए? असिस्टेंट बोरिंग टेक्नीशियन के 402 पदों पर भर्ती UPSSSC ने असिस्टेंट बोरिंग टेक्नीशियन के 402 पदों पर भर्ती निकाली है। 15 अप्रैल से 5 मई के बीच कैंडिडेट फॉर्म भर सकते हैं। कैंडिडेट 10वीं पास हो। वह मशीनिस्ट, फिटर, टर्नर, वायरमैन से आईटीआई पास हो। इसके अलावा UP-PET- 2025 परीक्षा में पास होना जरूरी है। लिखित परीक्षा के बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होगा, फिर ज्वाइनिंग प्रक्रिया शुरू होगी। कैंडिडेट की उम्र कितनी होनी चाहिए? अब उन भर्तियों की बात, जो प्रस्तावित हैं… लोवर पीसीएस के लिए 29 मई से आवेदन UPSSSC ने 2285 पदों पर भर्ती का ऐलान किया है। इनमें 548 पद असिस्टेंट ट्रेजरी अकाउंटेंट के लिए है। ऑडिटर के 419 पद, अमीन के 323 पद, एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के 238 पद और क्लर्क के 229 पदों पर भर्ती होनी है। इन पदों के लिए 29 मई से आवेदन किया जा सकेगा। कैंडिडेट ग्रेजुएट होना चाहिए। UP PET-2025 की परीक्षा में पास हुआ हो। परीक्षा जुलाई में कराई जा सकती है। फॉरेस्ट गार्ड के लिए आवेदन 30 जून से शुरू UPSSSC ने फॉरेस्ट गार्ड यानी वन रक्षक के 708 पदों पर भर्ती की घोषणा की है। इस भर्ती के लिए 30 जून से आवेदन किया जा सकेगा। आवेदन की आखिरी तारीख 20 जुलाई को है। सितंबर-अक्टूबर में हो सकती है शिक्षक भर्ती 17 फरवरी, 2026 को विधानसभा में शिक्षा मंत्री ने बताया था कि यूपी में अभी शिक्षकों के 46,944 पद खाली हैं। यूपी में 2018 के बाद बेसिक शिक्षा (कक्षा 1 से 8 तक) के स्तर पर कोई भर्ती नहीं आई। सरकार 2, 3 और 4 जुलाई को टीईटी की परीक्षा करवाने जा रही है। करीब 35 हजार पदों पर सितंबर-अक्टूबर तक विज्ञापन जारी होने की संभावना है। माध्यमिक शिक्षा विभाग में भी 25 हजार पदों पर भर्ती की संभावना यूपी में माध्यमिक शिक्षा विभाग में अगले कुछ महीने में करीब 25 हजार पदों पर भर्ती हो सकती है। अभी 4513 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय हैं। इसमें करीब 23 हजार टीजीटी-पीजीटी के तहत भर्तियों की संभावना है। इसके अलावा सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में 1200 से ज्यादा असिस्टेंट प्रोफेसर और प्रिंसिपल के पदों पर भर्ती की संभावना है। इस भर्ती का ऐलान जून-जुलाई के महीने में हो सकता है। यूपी में सरकारी नौकरियों के अलावा संविदा के पदों पर भी भर्तियां जारी हैं… आंगनवाड़ी के 10 हजार पदों पर भर्ती इस वक्त आंगनवाड़ी में करीब 10,478 पदों पर भर्ती हो रही है। ये भर्ती अलग-अलग जिलों में हो रही है। इनमें लखनऊ के 1106 पद, बाराबंकी में 22 पद, सुल्तानपुर में 809, तो इटावा में सिर्फ 8 पदों पर भर्ती हो रही है। आपके जिले में कितने पद खाली हैं, इसे upanganwadibharti.in पर जाकर देख सकते हैं। भर्ती से जुड़ी सारी डिटेल भी वहीं मिल जाएगी। डॉक्टर्स के करीब 4500 पद भरे जाएंगे यूपी में अगले 5 महीनों में डॉक्टर्स के करीब 4500 पदों पर भर्ती हो सकती है। स्पेशलिस्ट डॉक्टर के करीब 2 हजार पद भरे जाने की संभावना है। सरकार ने विभागों से खाली पदों की जानकारी पहले ही मांग ली थी। प्लस प्वाइंट ये है कि पिछले 2 सालों में कोई पेपर लीक नहीं हुआ। इसलिए तेजी से भर्ती कराई जा सकती है। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें… ISC, ICSE रिजल्ट 2026 जारी:10वीं में 98%, 12वीं में 99% स्टूडेंट्स पास, टॉपर्स की लिस्ट इस साल भी नहीं की गई रिलीज काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन यानी सीआइएससीई ने ICSE क्लास 10वीं और ISC 12वीं एग्जाम के रिजल्ट जारी कर दिए हैं। CISCE 10वीं में 98.18% स्टूडेंट्स पास हुए। यह एग्जाम 2.6 लाख स्टूडेंट्स ने दिया था। वहीं 12वीं में 99.13% स्टूडेंट्स पास हुए हैं।पूरी खबर पढें…
शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार लाने की जरूरत
बालोद | हाल ही में जारी 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणामों में बालोद जिले का टॉप टेन सूची से बाहर होना शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल हैं। शिक्षकों एवं उच्चाधिकारियों के बीच समुचित तालमेल की कमी के कारण विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर पर असर पड़ा है। यदि शिक्षण व्यवस्था में सुधार और लापरवाह शिक्षकों पर नकेल कसा जाए तो पढ़ाई व परीक्षा परिणामों में सुधार हो सकता है। -आरआर यदु, बालोद
दो वरिष्ठ शिक्षकों को विदाई दी...शिक्षा क्षेत्र में योगदान को किया गया सम्मानित
भास्कर न्यूज | महादेवडांड बगीचा विकासखंड शिक्षा विभाग के सभागार में आयोजित समारोह में दो वरिष्ठ शिक्षकों को विदाई दी गई। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कालिया के प्रधान पाठक अमृत राम खलखो और शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सिहारडांड़ के शिक्षक नारायण यादव को सेवानिवृत्ति पर पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) प्रदान किया गया। कार्यक्रम में उनके लंबे सेवाकाल और शिक्षा क्षेत्र में योगदान को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि दोनों शिक्षकों ने न केवल विद्यार्थियों को शिक्षित किया, बल्कि उनके व्यक्तित्व और संस्कार निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में कई छात्र आज विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर रहे हैं। समारोह के दौरान दोनों शिक्षकों को शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। सहकर्मियों ने उनके सरल स्वभाव और सहयोगी कार्यशैली को याद करते हुए भावुक माहौल में विदाई दी। विकासखंड शिक्षा अधिकारी सुदर्शन पटेल ने कहा कि ऐसे शिक्षक समाज की मजबूत नींव होते हैं। समारोह में विभागीय अधिकारी, कर्मचारी और शिक्षक उपस्थित रहे और सभी ने उनके स्वस्थ व सुखमय जीवन की कामना की। इस अवसर पर सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी दिलीप टोप्पो, लेखाकार शैलेश अम्बस्ट, प्रधान लिपिक अमृत किस्पोट्टा, तिलक श्रीवास, मनोज बाखला, एमआईएस समन्वयक ममता शर्मा सहित विभागीय कर्मचारी एवं शिक्षक उपस्थित रहे।
पात्रता में बदलाव, 1 लाख रु. का सहयोग करने वालों को भी मिलेगा शिक्षा श्री सम्मान
शिक्षा में सुधार को लेकर सहयोग करने वाले भामाशाहों को आकर्षित करने के लिए शिक्षा विभाग ने जिला स्तर के भामाशाह सम्मान की शर्त में बड़ा बदलाव किया है। अब एक लाख से अधिक के सहयोग पर भी जिला स्तर पर सम्मान मिलेगा। विभाग की ओर से अब जिला स्तर पर सम्मान की पात्रता 1 लाख से 29,99,999 रुपए तक तय की है। पहले यह राशि 5 लाख से 29,99,999 रुपए तक तक थी। अब इसकी न्यूनतम सीमा 4 लाख रुपए घटा दी है। जिला स्तर पर भामाशाहों को शिक्षा श्री सम्मान प्रदान किया जाता है। शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026 के भामाशाह सम्मान समारोह की गाइडलाइन जारी कर दी। इसके अनुसार राज्य स्तर पर सम्मान की पात्रता में कोई बदलाव नहीं किया है। समारोह में 1 अप्रैल, 2025 से लेकर 31 मार्च, 2026 तक शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए प्रदान किया जाएगा। राज्य स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह 29 जून को जयपुर में होगा। शिक्षा विभाग ने इसकी तैयारी प्रारंभ कर दी है। समारोह के आयोजन को लेकर शिक्षा संकुल में शुक्रवार को आवश्यक बैठक हुई। संयुक्त निदेशक मंजू शर्मा ने कहा कि यह प्रथम चरण की बैठक थी। इसमें सभी से समारोह को लेकर सुझाव लिए हैं। राज्य स्तर पर यह है पात्रता राज्य स्तर पर भामाशाहों के सम्मान के लिए शिक्षा विभाग ने दो कैटेगरी बनाई है। इसमें 30 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपए से कम के सहयोग पर शिक्षा भूषण सम्मान और 1 करोड़ रुपए या इससे अधिक के सहयोग पर शिक्षा विभूषण के सम्मान से सम्मानित किया जाता है। इसमें कोई बदलाव नहीं किया है। ऑनलाइन आवेदन 19 मई तक सम्मान के लिए ऑनलाइन आवेदन 19 मई तक किया जा सकता है। इसके बाद 21 मई से 1 जून तक निदेशालय स्तर पर आवेदनों की जांच की जाएगी। चयनित भामाशाहों की सूची का अनुमोदन 8 से 10 जून के बीच होगा। समारोह का आयोजन 29 जून को होगा। सरकारी स्कूलों में सहयोग के लिए भामाशाह प्रेरित होंगे पूर्व उपनिदेशक राधेश्याम जाट का कहना है कि जिला स्तर पर सहयोग की सीमा 5 लाख से घटाकर 1 लाख रुपए से अधिक करने पर बड़ी संख्या में भामाशाह सहयोग के लिए आगे आएंगे। पहले 5 लाख से कम वाले सहयोग करने के बावजूद सम्मानित नहीं होते थे। सम्मान मिलने पर भामाशाह भी सहयोग के लिए प्रेरित होंगे और इससे शिक्षा के विकास के लिए बजट मिलेगा। इस सहयोग से स्कूलों में आधारभूत सुविधाएं विकसित करने में मदद मिलेगी।
स्कूल शिक्षा के भर्ती नियमों में संशोधन:अब संविदाकर्मियों को 50%, ईडब्ल्यूएस को 10% आरक्षण
स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य शिक्षा सेवा एवं अधीनस्थ शिक्षा सेवा (शाला शाखा) भर्ती तथा पदोन्नति नियम-2016 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। विभाग की सीधी भर्ती के पदों में संविदा कर्मचारियों को 50% और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को 10% आरक्षण का लाभ मिलेगा। शुक्रवार को इसका गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया। यह संशोधन तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं, जिससे आगामी भर्तियों में हजारों संविदा कर्मचारियों और ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को सीधा लाभ मिलेगा। संशोधित नियमों के मुताबिक विभाग में सीधी भर्ती के कुल रिक्त पदों का 50% तक उन संविदा अधिकारियों/ कर्मचारियों के लिए आरक्षित रहेगा जिन्होंने न्यूनतम 5 वर्ष की निरंतर सेवा पूरी कर ली है। इस आरक्षण का लाभ सिर्फ एक बार लिया जा सकेगा। यह होगा फायदा आयु सीमा में भी बड़ी राहत : संविदा कर्मचारियों को भर्ती में शामिल होने के लिए आयु में विशेष छूट दी गई है। उनके द्वारा संविदा पर की गई सेवा के वर्षों के बराबर आयु सीमा में छूट मिलेगी, बशर्ते उनकी अधिकतम आयु 55 वर्ष से अधिक न हो। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु सीमा सामान्य प्रशासन विभाग के प्रचलित नियमों के अधीन होगी। ईडब्ल्यूएस के आरक्षण से नहीं बदलेगा एससी-एसटी आरक्षण अब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के नागरिकों के लिए भी सीधी भर्ती में 10% पद आरक्षित रखने का स्पष्ट प्रावधान कर दिया गया है। लेकिन स्पष्ट किया गया है कि इससे अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए मौजूदा आरक्षण व्यवस्था पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, वह पूर्व की तरह ही यथावत लागू रहेगी।
रोहतक की दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (सुपवा) में 4 मई को दूसरे दीक्षांत समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 760 स्टूडेंट को डिग्री दी जाएगी। साथ ही 36 स्टूडेंट को गोल्ड मेडल पहनाकर सम्मानित किया जाएगा। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. अमित आर्य ने बताया कि दीक्षांत समारोह में राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष, सीएम नायब सिंह सैनी व शिक्षामंत्री महिपाल ढांडा मुख्यातिथि के रूप में शिरकत करेंगे। दीक्षांत समारोह में फिल्म एंड टेलीविजन के 2018 बैच के स्टूडेंट को भी डिग्री दी जाएगी, जिनका कोर्स पिछले 6 माह में दिन रात एक करके पूरा करवाया गया है। तरुण तहलानी के साथ काम कर रही पूजा सैनी सुपवा के डिजाइन विभाग की स्टूडेंट पूजा सैनी को डिग्री मिलने वाली है, जो फेमस फैशन डिजाइनर तरुण तहलानी के साथ काम कर रही है। वहीं, गुरुग्राम में सन्नी इंटरनेशनल एक्सपोर्ट हाउस में काम करने वाली दीपांशी व जयपुर में मोदी फर्नीचर में काम करने वाले सुनील को भी डिग्री मिलने जा रही है। 3 मई से लगाई जाएगी विजुअल आर्ट्स में प्रदर्शनी VC डॉ. अमित आर्य ने बताया कि विजुअल आर्ट्स विभाग में 3 मई से प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसका नाम अभिव्यंजना रखा गया है। यह प्रदर्शनी 8 मई तक चलेगी, जिसे पब्लिक के लिए 5 मई को खोला जाएगा। प्रदर्शनी में विजुअल आर्ट्स के बच्चों द्वारा किए गए काम को दर्शाया जाएगा। 2011 में चार कोर्सों से शुरू किया संस्थान बता दें कि कांग्रेस सरकार ने 2011 में 4 कोर्सों के लिए संस्थान की स्थापना की। जिसमें राज्य ललित कला संस्थान, राज्य डिजाइन संस्थान, राज्य फिल्म और टेलीविजन संस्थान, राज्य नगरीय योजना और वास्तुकला संस्थान शामिल रहे। ये संस्थान एमडीयू से संबंधित थे। 2014 में यूनिवर्सिटी का मिला दर्जा हरियाणा सरकार ने 2014 में चारों संस्थानों को अपग्रेड करते हुए 5 अगस्त 2014 को यूनिवर्सिटी का दर्जा दे दिया। इसका नाम स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स रखा गया। वहीं, चारों संस्थानों को स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स, स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन, स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन और स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर बनाया गया। 2018 में यूनिवर्सिटी का नाम बदला हरियाणा की भाजपा सरकार ने 2018 में यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर पंडित लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स कर दिया। मार्च 2023 में फिर से सरकार ने नाम में बदलाव कर पंडित की जगह दादा लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स नाम कर दिया। 2021 में हुआ पहला दीक्षांत समारोह, अब दूसरा होगा दादा लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स का पहला दीक्षांत समारोह यूनिवर्सिटी बनने के बाद नवंबर 2021 में करवाया गया। करीब साढ़े चार बाद अब दूसरा दीक्षांत समारोह 4 मई को आयोजित किया जाएगा, जिसमें 2017 बैच से लेकर 2021 बैच के स्टूडेंट को डिग्री प्रदान की जाएंगी।
रोहतक में 69वीं नेशनल स्कूली महिला क्रिकेट चैंपियनशिप का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देशभर से आई 27 टीम भाग ले रही है। टूर्नामेंट खेलने आई टीमों ने व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए थे, जिसके बाद शिक्षा विभाग की तरफ से खिलाड़ियों के रूकने की जगह में कुछ बदलाव किए गए है। नेशनल स्कूली महिला क्रिकेट चैंपियनशिप की ओपनिंग सेरेमनी के दिन मध्य प्रदेश की टीम ने आरोप लगाया था कि उन्हें रात के समय ना पीने का पानी मिला, ना शौचालय व नहाने के लिए पानी मिला। एक कमरे में 16 खिलाड़ियों को रोका गया। गद्दों पर ना चद्दर थी और तकिए। मैस भी केवल एक जगह काफी दूर बनाई, जिससे खिलाड़ियों को परेशानी हुई। मध्य प्रदेश की टीम ने आरोप लगाया कि कमरे में एक कूलर था और रात के समय लाइट तक नहीं थी, जिसके कारण पूरी रात खिलाड़ी सो नहीं सके। खिलाड़ियों को हुई अव्यवस्था के बाद शिक्षा विभाग की तरफ से खिलाड़ियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने पर मंथन किया गया। कंट्रोल रूम व मैस हुई शिफ्ट शिक्षा विभाग की तरफ से पहले मैस व कंट्रोल रूम को वैश्य संस्था में बनाया गया, लेकिन खिलाड़ियों को हुई परेशानी के बाद मैस व कंट्रोल रूम को अब सेक्टर-3 स्थित मार्केट के पास कम्यूनिटी सेंटर में शिफ्ट किया गया है, ताकि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा मिल सके। इन स्कूलों से टीमों को दूसरी जगह किया शिफ्ट शिक्षा विभाग की तरफ से तक्षशिला व मानव रचना स्कूल में ठहरने वाली टीमों को अब नए बस स्टैंड के पास MDN स्कूल में रोका गया है। वहीं, MS सरस्वती स्कूल में रहने वाली टीमों को चेतन्य स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया है, ताकि खिलाड़ियों को एसी रूम व अन्य सुविधाएं मिल सके। खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा देने का प्रयासजिला शिक्षा अधिकारी मंजीत मलिक का कहना है कि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। जिन स्कूलों में खिलाड़ियों को परेशानी हो रही थी, उन खिलाड़ियों को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया है। खिलाड़ियों के खाने व पीने का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। विभाग की टीम हर समय खिलाड़ियों के साथ मौजूद है।
शिक्षा मंत्रीजी ने पकड़ी 'टॉयलेट' वाली खामी:स्टंटबाज लड़की का 'चालान'; AEN के सामने 'सड़क-परीक्षण'
नमस्कार शिक्षा मंत्रीजी दौरे पर निकलते हैं और सरकारी स्कूलों का हाल सामने आ जाता है। श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ में तो टॉयलेट पर सही से महिला और पुरुष तक नहीं लिखा था। जयपुर में स्टंटबाज लड़की की ‘रील’ पुलिस ने बना दी। बारां में ASP साहब का सिंघम अवतार दिखा और फलोदी में AEN जी की बात झूठी साबित हो गई। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. शिक्षामंत्रीजी ने पकड़ी 'टॉयलट' वाली गलती शिक्षा मंत्रीजी जब-जब औचक दौरों पर निकलते हैं, तब-तब कोई न कोई ऐसा गड़बड़झाला सामने आ ही जाता है कि सरकारी स्कूलों की पोल खुल जाती है। पिछले दिनों श्रीगंगानगर में शिक्षामंत्री जी ने 8वीं क्लास के बच्चे से 49 + 2 का सवाल पूछ लिया था। बच्चे के जवाब पर उन्होंने माथा पकड़ लिया था। श्रीगंगानगर के ही सूरतगढ़ में भी व्यवस्थाओं की सूरत उजागर हो गई। शिक्षामंत्रीजी एक उच्च माध्यमिक यानी 12वीं तक के स्कूल का दौरा करने पहुंचे। स्कूल का मेन गेट देख वे चौंके। स्कूल पर माध्यमिक विद्यालय लिखा था। मंत्रीजी ने सोचा गलती से 10वीं तक के स्कूल में तो नहीं पहुंच गए? मंत्रीजी ठीक जगह पहुंचे थे। बस स्कूल वालों ने क्रमोन्नत होने के बाद भी 5 साल तक बोर्ड पर उच्च जोड़ देने का तुच्छ कष्ट नहीं उठाया था। मंत्री जी स्कूल के अंदर दाखिल हुए। यहां टॉयलट चमाचम थे। ताखरांवाली ग्राम पंचायत के सरपंच (प्रशासक) ने टॉयलेट की दीवार पर नीले-पीले-लाल अक्षरों में मोटा-मोटा अपना नाम लिखवा रखा था- सरपंच भारत रतन। एक तरफ लाल तीर बनाकर पुरुष शौचालय लिखा था दूसरी तरफ महिला शौचालय। मंत्रीजी पुरुष शौचालय में घुसे। अंदर जाने पर वह महिला शौचालय निकला। महिला शौचालय के अंदर पुरुष शौचालय का सिस्टम था। मंत्रीजी भी एक ही जिले के दौरे पर कितनी बार माथा पीटते? खामी दुरुस्त करने के निर्देश देकर चुपचाप चल पड़े। 2 स्टंटबाज लड़की की पुलिस ने बनाई ‘रील’ जयपुर पुलिस ने एक वीडियो शेयर किया। वीडियो में एक लड़की जयपुर की सड़कों पर बाइक का स्टंट दिखा रही है। बैकग्राउंड में गाना है। गाने के बोल हैं- हुस्न गली में सैकड़ों दीवाने हो गए गुम। गाने की बीट से भी तीव्र गति से एस लड़की सड़क पर इनफील्ड दौड़ा रही है। कारों को ओवरटेक कर रही है। बसों को ओवरटेक कर रही है। बाइक को रोड पर नागिन की तरह लहरा रही है। चलती बाइक पर खड़ी हो जाती है और हाथों को स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी की तरह खोल देती है। स्क्रीन पर एक तरफ जयपुर पुलिस का लोगो नजर आ रहा है। नीचे लिखा है- पहले- स्टंट दिखाकर लाइक बटोर रहे थे। वीडियो आगे बढ़ता है और लड़की का चालान काटती पुलिस नजर आती है। पोस मशीन से लंबे-चौड़े चालान की रील निकल रही है। स्क्रीन पर लिखा है- अब यातायात पुलिस जयपुर का चालान देखकर सबक मिल गया। 3. ASP साहब का सिंघम अवतार बारां में बदमाशों ने खूब तांडव मचाया। व्यापारी को किडनैप किया। खेत में ले जाकर खूब मारा-पीटा। एक करोड़ की फिरौती मांगी। 14 लाख वसूल भी लिए। 15 लाख और देने का वादा लेकर कब्रिस्तान के पास पटक गए। पुलिस को यह खुली चुनौती थी। पुलिस की टीमों ने एक-एक कर 6 बदमाशों को दबोच लिया। सातवां मुख्य आरोपी फरार। मौके की नजाकत के अनुसार नगर परिषद को मुख्य आरोपी का मकान सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से बना पाया गया। जेसीबी के साथ पुलिस और नगर परिषद टीम मोहल्ले में पहुंची और मकान ढहा दिया। कार्रवाई के बाद एएसपी साहब ने माइक-भोंपू संभाला और सिंघम के लहजे में पूरे मोहल्ले को चेतावनी दी-बदमाशी करके ये मत सोचना कि बच जाओगे। यही हश्र होगा। 4. चलते-चलते.. हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े-लिखे को फारसी क्या। हाथ में पहने कंगन को देखने के लिए आईने के क्या जरूरत है। वह तो प्रत्यक्ष दिख ही रहा है। कभी कभी प्रत्यक्ष होते हुए भी चीजें नहीं दिखती। जैसे फलोदी नगर परिषद के AEN साहब को नहीं दिखी। हुआ यूं कि लंबे समय से लोग सड़क की मांग कर रहे थे। सड़क बनने लगी। लोग खुश। लेकिन सड़क का हाल देखकर लोगों का माथा ठनका। सड़क हाथों से उखड़ रही थी। लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। AEN साहब को मौके पर बुलाया गया। एक अति उत्साही ने पूछा- साहब, क्या आपके हिसाब से सड़क में जो मैटेरियल डाला है वो ठीक है? साहब बोले- ठीक है। इसके बाद एईएन साहब की आंखों के सामने ही सड़क की अग्नि परीक्षा हो गई। लोगों ने हाथों से सड़क उखाड़कर कहा- ये ठीक है? आप भी भ्रष्टाचारी हैं। इनपुट सहयोग- काका सिंह (श्रीगंगानगर), शुभम निमोदिया (बारां)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी।
दक्षता आधारित शिक्षा प्रणाली पर हुआ मंथन
लुधियाना| लुधियाना के काकोवाल रोड स्थित जीएमटी इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में वीरवार को स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा विषय पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में मुख्य संसाधन व्यक्तित्व मिस नफीस भांमी और मिस कनिका सचदेवा रहीं। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की नई नीतियों से अवगत कराना और दक्षता-आधारित वाले प्रश्नों के निर्माण की आवश्यकता पर चर्चा करना रहा। सत्रों में इस बात पर जोर दिया गया कि ऐसी प्रश्न-पद्धति से छात्रों में रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच विकसित करने में सहायता मिलती है। कार्यशाला के समापन पर स्कूल की प्रिंसिपल अमरजीत धालीवाल ने मुख्य संसाधन व्यक्तित्वों को फूलों के गुलदस्ते भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने शिक्षकों से नए पाठ्यक्रम के प्रावधानों को अभ्यास में लागू करने की अपील की।
बैठक में अच्छी शिक्षा को लेकर की गई चर्चा
बोकारो | डॉ. राजेंद्र प्रसाद पब्लिक स्कूल रानीपोखर में कक्षा 8वीं, नवीं व 10वीं के विद्यार्थियों के लिए गुरुवार को शिक्षक-अभिभावक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक प्राचार्य डॉ. मुकेश कुमार की उपस्थिति में हुई। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति पर विस्तार से चर्चा करना व अभिभावकों के साथ समन्वय स्थापित करना था।
सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया छत्तीसगढ़ इकाई द्वारा सिंधी एकेडमी की पहली महिला अध्यक्ष सुषमा जेठानी का स्वागत और सम्मान किया गया। यह स्वागत प्रदेश अध्यक्ष ललित जैसिंघ ने अपने कार्यालय में किया। इस मौके पर सुषमा जेठानी ने कहा कि वे पूरे छत्तीसगढ़ में सिंधी समाज के बच्चों की शिक्षा के लिए बड़े स्तर पर काम करेंगी। प्रदेश अध्यक्ष ललित जैसिंघ ने बताया कि पहली बार महिला अध्यक्ष बनने से पूरे सिंधी समाज में खुशी का माहौल है और सभी उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं। इस अवसर पर उपाध्यक्ष धनेश मटलानी, रितेश वाधवा और सिंधु सभा के महामंत्री मुरलीधर शादीजा भी मौजूद रहे।
कोंडागांव जिले के खुटपारा सोनाबाल स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में शिक्षण सत्र की समाप्ति पर प्रगति प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बच्चों को उनके वार्षिक परिणाम सौंपे गए और 'न्यौता भोज' के माध्यम से पारंपरिक ग्रामीण संस्कृति का भी अनुभव कराया गया। यह कार्यक्रम जिला शिक्षा अधिकारी कोंडागांव के निर्देशानुसार आयोजित किया गया था। इसमें ग्राम के वरिष्ठजन टेड़ूराम नेताम, जो वन विकास समिति, दक्षिण वन मंडल कोंडागांव के अध्यक्ष हैं, और पूर्व पंच जगतराम नेताम ने विद्यार्थियों को प्रगति प्रमाण पत्र वितरित किए। प्रमाण पत्र प्राप्त कर बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। इस दौरान स्कूल के बच्चों को 'न्यौता भोज' भी दिया गया। प्रधान अध्यापक हितेंद्र कुमार श्रीवास, सहायक शिक्षक रूखमणी साहू, स्वीपर देवकी मंडावी और जगती नेताम ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह आयोजन न केवल बच्चों के लिए यादगार रहा, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि जब शिक्षा के प्रयासों में समाज का सहयोग जुड़ता है, तो हर पहल और भी विशेष बन जाती है।
हिसार के सीसवाला के सीएससी केंद्र पर आज इलेक्ट्रिक स्कूटी वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा के बेटे संजीव गंगवा ने लाभार्थी छात्राओं को स्कूटी की चाबियां सौंपीं। उनका कहना था कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि परिवहन की समस्या के कारण छात्राओं को पढ़ाई में अक्सर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिसे दूर करने के लिए यह योजना शुरू की गई है। स्कूटी मिलने से अब छात्राओं को भीड़भाड़ वाली बसों में यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। वे समय पर और सुरक्षित तरीके से कॉलेज पहुंच सकेंगी, जिससे उनके समय की बचत होगी और वे अपनी पढ़ाई पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाएंगी। सरकार की इस योजना के तहत, हरियाणा श्रम विभाग में पंजीकृत मजदूरों की बेटियों को इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदने के लिए 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक तंगी उनकी शिक्षा में बाधा न बने। इस अवसर पर रामचंद्र नंबरदार, छाजूराम महला, बीजेपी कार्यकारिणी सदस्य सतबीर खोवाल, डॉ. राजेश, सतबीर भाकर, जगदीश घोडेला, सतबीर जांगड़ा, राममूर्ति, रामनिवास, सतबीर, सतपाल, नेकीराम, सुरेंद्र, संजय, दिनेश, संदीप और प्रवीण घोड़ला सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। केंद्र संचालक राजकुमार घोड़ेला ने योजना की पात्रता शर्तें बताईं। इसके अनुसार, श्रमिक का श्रम विभाग में पंजीकरण और कम से कम एक साल की सदस्यता अनिवार्य है। आवेदक बेटी हरियाणा के किसी कॉलेज में अध्ययनरत हो, उसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक हो और वह अविवाहित हो। साथ ही, परिवार में किसी के नाम पर पहले से कोई वाहन पंजीकृत नहीं होना चाहिए।
भिवानी स्थित हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (BSEH) में हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (HTET) 2024 का रिकॉर्ड डिस्ट्रॉय करने को लेकर वीरवार हंगामा हो गया। एक तरफ बोर्ड प्रशासन रिकॉर्ड डिस्ट्रॉय करना चाहता है। वहीं कर्मचारियों ने इसका विरोध किया। जिसके कारण कर्मचारियों ने हड़ताल पर कर दी। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड कर्मचारी संगठन के महासचिव सोमबीर पूनिया ने कहा कि एचटेट 2024 की ओएमआर सीट को डिस्ट्रॉय करने पर रोक लगाई जाए। जिसका सभी कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। इसलिए उन्होंने हड़ताल की है। जबकि बोर्ड प्रशासन द्वारा गलत तरीके से रिकॉर्ड डिस्ट्रॉय किया जा रहा है। जब बोर्ड कर्मचारियों को इसका पता लगा तो उन्होंने विरोध दर्ज कराया। इसलिए सभी कर्मचारियों ने हड़ताल की और कहां की गलत तरीके से रिकॉर्ड डिस्ट्रॉय ना किया जाए। बता दें कि HTET-2024 के तीनों लेवल में कुल 3.31 लाख परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। जिसका रिजल्ट करीब 14 प्रतिशत रहा। इनमें से जिनमें से करीब 47 हजार परीक्षार्थियों को को सफलता मिली थी। रिजल्ट 101 दिन बाद जारी किया गया था। लेवल-1 यानी प्राइमरी टीचर व लेवल-2 यानी ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर में क्रमशः 16.2 व 16.4% विद्यार्थी सफल हुए। जबकि लेवल-3 यानी पोस्ट ग्रेजुएट टीचर की परीक्षा में सिर्फ 9.6 प्रतिशत को ही सफलता मिली। HTET पास करने का मतलब सरकारी नौकरी की गारंटी नहीं है, बल्कि सरकारी भर्ती में आवेदन करने की पात्रता भर है। अगले महीने से HTET-2025 की आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। हम समाचार को लगातार अपडेट कर रहे है…
राजस्थान में लगातार बढ़ती गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए शिक्षा विभाग ने सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में किसी भी तरह की आउटडोर गतिविधियां नहीं करने के आदेश दिए हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने आदेश जारी कर स्कूल प्रशासन को विद्यार्थियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। गाइडलाइन के अनुसार भीषण गर्मी के दौरान किसी भी प्रकार की आउटडोर खेल गतिविधि, ड्रिल या कैंप आयोजित नहीं किए जाएंगे। प्रार्थना सभा भी खुले मैदान के बजाय छायादार स्थान या कक्षाओं में कम समय के लिए आयोजित करनी होगी। विद्यार्थियों को भारी स्कूल बैग से राहत देने के लिए केवल आवश्यक पाठ्यपुस्तकें ही लाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूलों में पेयजल और प्राथमिक उपचार की विशेष व्यवस्था शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों में शुद्ध और ठंडे पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा है। इसके लिए वाटर कूलर, मटके या अन्य उपयुक्त साधनों का उपयोग किया जाएगा। विद्यार्थियों को नियमित अंतराल पर पानी पीने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही, प्रत्येक स्कूल में फर्स्ट एड किट, ओआरएस और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध रखना अनिवार्य किया गया है। परिवहन और यूनिफॉर्म में भी राहत निर्देशों के तहत स्कूल बसों और वैन में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने पर रोक लगाई गई है। वाहनों में पीने के पानी और फर्स्ट एड किट की उपलब्धता भी अनिवार्य होगी। विद्यार्थियों को टोपी, गमछा और पानी की बोतल साथ रखने की सलाह दी गई है। गर्मी को देखते हुए स्कूल यूनिफॉर्म में भी ढील दी गई है। छात्र-छात्राएं सूती, हल्के और आरामदायक कपड़े पहन सकेंगे। चमड़े के जूतों के स्थान पर कैनवास या कपड़े के जूते पहनने की अनुमति दी गई है। कक्षाओं और छात्रावासों में विशेष इंतजाम स्कूलों को सभी कक्षाओं में पंखों की कार्यशीलता सुनिश्चित करने, पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखने और आवश्यकतानुसार वैकल्पिक बिजली व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। छात्रावासों में भी पानी, बिजली, नींबू पानी, छाछ और मौसमी फलों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। खेलकूद गतिविधियां केवल शाम के समय आयोजित की जाएंगी। अभिभावकों और विद्यार्थियों को भी किया जाएगा जागरूक शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन समितियों, एसएमसी, एसडीएमसी और पीटीएम के माध्यम से अभिभावकों और विद्यार्थियों को लू से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने इन निर्देशों की अक्षरश: पालना सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा है। क्या करें, क्या न करें
बिहार में शिक्षा विभाग के अंदर फर्जीवाड़े की जड़ें कितनी गहरी है, इसका अंदाजा विजिलेंस जांच की ताजा रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने राज्य भर के उन 1,346 नियोजित शिक्षकों की सूची जारी की है, जिन्होंने 2006 से 2015 के बीच फर्जी या इनवैलिड इंस्टीट्यूट के प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की है। इस मामले में विजिलेंस के महानिदेशक ने कड़ा रुख अपनाते हुए नालंदा के नौ और शेखपुरा के पांच शिक्षकों समेत सभी संदिग्धों का पूरा ब्योरा जिला शिक्षा पदाधिकारियों से तलब किया है। निगरानी विभाग की जांच में देशभर के 10 ऐसे संस्थानों को चिन्हित किया गया है जिनकी डिग्रियां अमान्य हैं, लेकिन उनके आधार पर बिहार में एक बड़ी संख्या में शिक्षक वर्षों से वेतन उठा रहे हैं। नालंदा जिले में मंदार विद्यापीठ के प्रमाणपत्रों पर सात और प्रयाग महिला विद्यापीठ के प्रमाणपत्रों पर दो शिक्षक कार्यरत पाए गए हैं। इसी तरह शेखपुरा में मंदार विद्यापीठ से तीन, प्रयाग महिला विद्यापीठ से एक और हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद से एक फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए बहाली का मामला सामने आया है। डीईओ से सैलरी और सेवामुक्त करने की जानकारी मांगी गई है विजिलेंस ने सभी डीईओ को भेजे पत्र में स्पष्ट रूप से पूछा है कि इन शिक्षकों के खिलाफ अब तक नियोजन इकाइयों ने क्या कार्रवाई की है। महानिदेशक ने वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने को कहा है कि ये शिक्षक अभी भी विद्यालय में तैनात हैं या उन्हें सेवामुक्त कर दिया गया है। साथ ही उनके वेतन भुगतान की वर्तमान स्थिति की भी जानकारी मांगी गई है। आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा हिंदी विद्यापीठ देवघर के प्रमाणपत्रों पर हुआ है, जहां से 702 शिक्षकों ने डिग्रियां ली थीं। इसके अलावा दक्षिण भारती हिंदी प्रचार सभा मद्रास, काशी विद्यापीठ वाराणसी और हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद जैसे संस्थानों के नाम पर भी सैकड़ों शिक्षकों ने अमान्य सर्टिफिकेट पेश किए हैं। रिपोर्ट विजिलेंस को भेजा जाएगा नालंदा के जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने पुष्टि की है कि विजिलेंस की टीम ने जिले के नौ शिक्षकों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि ये शिक्षक अमान्य संस्थानों के दस्तावेजों पर बहाल हुए थे, अब विभाग उन पर की गई अब तक की कार्रवाई और उनके वर्तमान स्टेटस की रिपोर्ट तैयार कर विजिलेंस को भेजने की तैयारी में है। इस खुलासे के बाद से शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है और आने वाले दिनों में इन शिक्षकों पर प्राथमिकी के साथ-साथ वेतन रिकवरी की तलवार भी लटक रही है।
समग्र शिक्षा के कर्मचारियों को 2-3 महीने बाद मिल रहा वेतन
बारां| पूर्व लोक जुम्बिश कर्मचारी, जो वर्तमान में समग्र शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं, उन्हें वेतन के लिए परेशान होना पड़ रहा है। भारतीय मजदूर संघ की अगुवाई में बुधवार को पूर्व लोक जुम्बिश कर्मचारी समग्र शिक्षा जिला बारां इकाई ने कलेक्टर के माध्यम से राज्य परियोजना निदेशक स्कूल शिक्षा परिषद जयपुर के नाम ज्ञापन दिया। ज्ञापन में संघ अध्यक्ष राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि वेतन भुगतान नियमित नहीं हो रहा है। बजट 2-3 महीने गुजरने के बाद आता है। इसी वजह से कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। ज्ञापन में वेतन आहरण के दिशा-निर्देश जारी करने की मांग रखी गई। नियमित रूप से वेतन भुगतान कराने की मांग भी की गई। इस दौरान भारतीय मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष शंकरलाल सुमन, महामंत्री पंकज राठौर, पूर्व लोक जुम्बिश समग्र शिक्षा कर्मचारी संघ अध्यक्ष राजेश कुमार वर्मा, मंत्री रामचंद्र बैरवा मौजूद रहे। बारां जिले के सभी पूर्व लोक जुम्बिश कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
शिक्षा निदेशक के आदेश, अब 30 मिनट का लंच:दफ्तर में गप्पे मारना व बिना बताए गायब रहना पड़ेगा भारी
सरकारी दफ्तरों में लेटलतीफी और सीट से गायब रहने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर अब गाज गिरने वाली है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने एक कड़ा आदेश जारी कर साफ कर दिया है कि ड्यूटी के दौरान लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई कार्मिक या तो समय पर ऑफिस नहीं आते या फिर वर्किंग ऑवर्स के दौरान सीट से नदारद रहकर गप्पे मारते रहते हैं, जिससे आमजन के जरूरी काम अटक जाते हैं। आदेश के अनुसार अब सभी अधिकारी-कर्मचारियों को ऑफिस आते ही सबसे पहले उपस्थिति पंजिका (अटेंडेंस रजिस्टर) में हस्ताक्षर करने होंगे। इसके साथ ही, पूरे समय अपनी सीट पर मौजूद रहना अनिवार्य कर दिया गया है। अक्सर देखा जाता है कि भोजनावकाश (लंच ब्रेक) के नाम पर कर्मचारी घंटों बाहर रहते हैं। अब सरकार के नियमों के अनुसार केवल 30 मिनट का ही समय लंच के लिए मिलेगा। ये हैं निर्देश लापरवाही पर कार्रवाई होगी: निदेशक सीताराम जाट ने चेतावनी दी है कि इन निर्देशों की पालना कठोरता से की जाए। यदि किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी पाई गई तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी और कार्रवाई होगी। यह आदेश पिछले निर्देशों की निरंतरता में जारी किया गया है।
शिक्षा विभाग के पोर्टल पर दाखिलों के शुरुआती आंकड़े दर्ज, बढ़ेगी संख्या
भास्कर न्यूज | जालंधर पंजाब शिक्षा विभाग के अलग-अलग विभागीय पोर्टल के अनुसार शहर के सरकारी स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया जारी है और अभी तक के आंकड़े शुरुआती स्थिति को दिखाते हैं। पिछले वर्षों के आंकड़े पूरे सत्र के हैं, जबकि मौजूदा सत्र 2026-27 के आंकड़े 29 अप्रैल तक के हैं, इसलिए आगे और दाखिले जुड़ सकते हैं और संख्या बढ़ सकती है, लेकिन फिलहाल स्थिति इसी आधार पर देखी जा रही है। नेहरू गार्डन स्थित अमर शहीद लाला जगत नारायण राजकीय कन्या सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल में सत्र 2023-24 में 2759 और 2024-25 में 2634 छात्राएं दर्ज थीं, जबकि 29 अप्रैल 2026 तक 1511 छात्राओं का डेटा पोर्टल पर दिख रहा है और इसमें 11वीं कक्षा के दाखिले अभी शामिल नहीं हैं। लाडोवाली रोड के स्कूल ऑफ एमीनेस में 2023-24 में 576 लड़के और 71 लड़कियां (कुल 647) तथा 2024-25 में 537 लड़के और 114 लड़कियां (कुल 651) दर्ज किए गए थे, जबकि मौजूदा सत्र में 29 अप्रैल तक 271 लड़के और 65 लड़कियां (कुल 336) का आंकड़ा सामने आया है। गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, लाडोवाली में 2023-24 में 333 लड़के और 262 लड़कियां (कुल 595) और 2024-25 में 330 लड़के और 275 लड़कियां (कुल 605) थे, जबकि इस सत्र में अब तक 249 लड़के और 200 लड़कियां (कुल 449) दर्ज किए गए हैं। वहीं गवर्नमेंट हाई स्कूल, रैनक बाजार में 2023-24 में 105 लड़के और 41 लड़कियां (कुल 146) तथा 2024-25 में 96 लड़के और 48 लड़कियां (कुल 144) थे, जबकि 29 अप्रैल 2026 तक 77 लड़के और 41 लड़कियां (कुल 118) का आंकड़ा पोर्टल पर दर्ज है। कुल मिलाकर, अभी तक की स्थिति के अनुसार दाखिले जारी हैं और आने वाले समय में इसमें और इजाफा हो सकता है।
राजस्थान के राज्यपाल हरिभाउ बागडे ने कहा कि बालिका शिक्षा से देश प्रदेश व समाज की प्रगति अधिक सुसंगत और मजबूत होती है। इसलिए बालिकाओं को अच्छी शिक्षा दिलाएं जिससें समाज और परिवार प्रगति करें। यह बात उन्होंने बुधवार को पाली जिले के रोहट के चेंडा गांव में श्री राजेश्वर भगवान आंजणी माता गुरुकुल कन्या कॉलेज के छात्रावास के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि बालिका शिक्षा से दो परिवार शिक्षित होते है। महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है और आगे है। बालक हो या बालिका उन्हें अच्छी शिक्षा दिलानी चाहिए जिससे कि वे जीवन में आगे बढे और देश प्रदेश का नाम रोशन करे। उन्होंने साध्वी भगवती बाई के छात्रावास गुरुकुल निर्माण के लिए योगदान को सराहा। साथ ही कहा कि हमारे यहां पहले गुरुकुल पद्धति थी जिसमें हमारी संस्कृति, देव, सनातन धर्म की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि यहां पर महिला शिक्षा, संस्कारित समाज, नैतिकता, ईमानदार लोग तैयार हो। राज्यपाल ने महिलाओं की भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारे धर्म समाज में महिलाओं को देवी का रूप माना जाता रहा है उन्हें दुर्गा, सरस्वती, मॉ काली, लक्ष्मी का रूप माना गया है। सरकारी योजनाओं के बारे में भी बतायाइस अवसर पर उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की योजना बेटी बचाओं बेटी पढाओ के बारे में बालिकाओं के जागरूकता के लिए लाई गई है। उन्होंने कहा कि बालिकाओं की जन्म दर कम होना हमारे लिए चिंता का विषय है। लड़का हो या लड़की सभी एक समान है यह भाव मन में रखना होगा।उन्होंने राजस्थान के वीरों, कला, धर्म, सस्कृति व विदेशी आक्रातांओं के आक्रमण के बारे में बताया साथ ही यहां के वीरता को बप्पा रावल की बहादुरी का उदाहरण दिया। दीप प्रज्ज्वलित कर किया शुभारम्भइससे पहले कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलन कर राज्यपाल ने शुभांरभ किया। भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर राज्यपाल का जनप्रतिनिधियों व संस्था के पदाधिकारियों द्वारा स्वागत किया गया। इससे पूर्व राज्यपाल का जिला कलक्टर डॉ रविन्द्र गोस्वामी, पुलिस अधीक्षक मोनिका सैन ने गुलदस्ता देकरस्वागत किया। साथ ही पुलिस जवानों द्वारा राज्यपाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस अवसर पर पाली भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील भंडारी, जिला महामंत्री दिग्विजय सिंह राठौड़, नारायण कुमावत, जिला उपाध्यक्ष देवीलाल मेघवाल, जिला मंत्री प्रतापसिंह जोधा, सिरोही सांसद लूंबाराम चौधरी, पूर्व सांसद देवजी पटेल, पूर्व मंत्री अमराराम, पाली विधायक भीमराज भाटी, पुखराज पटेल, त्रिलोक चौधरी, राहुल मेवाड़ा, अतिरिक्त जिला कलक्टर डॉ बजरंगसिंह, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुकेश चौधरी, नगर परिषद आयुक्त नवीन भारद्वाज, उपखण्ड अधिकारी रोहट, सहित कॉलेज का स्टाफ व बालिकाएं, पुलिस प्रशासन के अलावा अधिकारी व आमजन मौजूद रहे। कल आएंगे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, 10 किलोमीटर क्षेत्र में ड्रोन उड़ाने पर रहेगा प्रतिबंधमुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गुरुवार को जिला पाली के रोहट क्षेत्र के नया चेण्डा में आना प्रस्तावित है। कार्यक्रम के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था एवं कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन मुस्तेद है। जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए आदेश जारी किया है कि ग्राम नया चेण्डा, तहसील रोहट के 10 किलोमीटर के परिधीय क्षेत्र में ड्रोन (यूएवी) के संचालन पर पूर्णतः प्रतिबंध रहेगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होकर 01 मई 2026 तक प्रभावी रहेगा। आदेश का उद्देश्य वीवीआईपी सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा क्षेत्र में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी गुरूवार को पाली जिले के रोहट क्षेत्र के नया चैण्डा गॉव के दौरे पर रहेंगे।
'बेटे-बेटियों को एक समान समझो और ऊंची शिक्षा दिलाओ':गज सिंह ने कहा- शिक्षा ही समाज को आगे ले जाएगी
जोधपुर के पूर्व राजघराने के गज सिंह ने कहा- शिक्षा ही समाज को आगे प्रगति के पथ पर ले जाएंगी। इसलिए बेटे-बेटियों को एक समान समझो दोनों उच्च शिक्षित करो ताकि वे अच्छे मुकाम पर पहुंचकर समाज का नाम रोशन कर सके। वे बुधवार को पाली के इंद्रा कॉलोनी वीर दुर्गादास छात्रावास में दुर्गादास शिक्षा समिति पाली की ओर से नवनिर्मित कार्यालय भवन उद्घाटन एवं भवन विस्तार शिलान्यास कार्यक्रम में आए थे। लाखोटिया भजन संध्या में भी आ चुके है कार्यक्रम संयोजक अजयपाल सिंह हेमावास ने बताया- इससे पहले वे भैरूघाट पर राधा कृष्ण मंदिर के लोकार्पण समारोह में अतिथि के रूप में आए थे। नेमीचंद देवड़ा ने बताया कि साल 1989 में जोधपुर के पूर्व राजघराने के गज सिंह लाखोटिया भजन संध्या में भी अतिथि के रूप में आए थे। पाली पहुंचने पर रास्ते में जैन समाज, मुस्लिम समाज सहित कई समाजों और संगठनों से जुड़े लोगों ने उन पर फूल बरसाकर स्वागत किया। इस अवसर पर छात्रावास में पराक्रमी सिंह चोटिला, कानसिंह चिमनपुरा, लूण सिंह दूदीया, मनोहर सिंह रामासिया, चेतन सिंह झाला आदि भामाशाहों का सम्मान किया गया है। ये रहे मौजूद कार्यक्रम में सेक्रेटरी राजेंद्र सिंह डिंगाई, नारायण सिंह माणकलाव, बाली विधायक पुष्पेंद्र सिंह राणावत, पूर्व विधायक मारवाड़ जंक्शन खुशवीर सिंह जोजावर, समाजसेवी भंवर सिंह मंडली और संस्था अध्यक्ष गुलाब सिंह गिरवर और जगपाल सिंह बाला भी मौजूद रहे। इस अवसर पर कार्यकारिणी अध्यक्ष गुलाब सिंह सोनगरा गिरवर, उपाध्यक्ष प्रहलाद सिंह कुंपावत उतवण, सचिव राजेन्द्र सिंह उदावत, डिंगाई, विक्रम सिंह सोनगरा, गिरवर, जवान सिंह कुंपावत, मानी, परबतसिंह कुंपावत, टेवाली, जवान सिंह जैतावत सरदार समंद, भवानी सिंह सोनगरा, सादड़ा, गजेन्द्र सिंह मेड़तिया, खौड़, जगपाल सिंह सोनगरा, बाला, राघवेन्द्र सिंह भाटी, बाबरा कार्यक्रम के दौरान व्यवस्था में जुटे रहे। इसके साथ ही कार्यक्रम में डॉ त्रिभुवन सिंह, छोटू सिंह उदावत, पुष्पेंद्र सिंह कुड़की, महीराज सिंह चाणोद, गोपाल सिंह शेखावत, महेंद्र सिंह ठाटा, विक्रम सिंह माताजी गुड़ा, वीरेंद्र सिंह नरूका, सवाई सिंह जैतावत, भीम सिंह सोनिया,पर्बत सिंह वेलार, चंद्रेशपाल सिंह रातडी, मनोहर सिंह निंबली, पर्बत सिंह बागल, जितेंद्र सिंह थरासनी, झुंरार सिंह देनोक, महेंद्र सिंह बाता, प्रताप सिंह सोनाई मांझी, देवेंद्र सिंह मेंवी, प्रतापसिंह बिठिया, लक्ष्मण सिंह हेमावास, पुष्पेंद्र सिंह हेमावास, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष इंद्रसिंह भाटी, मानवेंद्र सिंह भाटी सहित बड़ी संख्या में राजपूत समाज के महिला-पुरुष कार्यक्रम में शामिल हुए।
भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को केवल व्यापारिक नजरिए से नहीं, बल्कि मानव क्षमता निर्माण के एक मजबूत आधार के रूप में देखा जाना चाहिए। यह बात शोभित विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और एसोचैम राष्ट्रीय शिक्षा परिषद के अध्यक्ष कुंवर शेखर विजेंद्र ने कही। भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित सेक्टोरल राउंड टेबल में उन्होंने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते की सफलता केवल शुल्क में कमी, बाजार पहुंच या आर्थिक लाभ से नहीं आंकी जानी चाहिए, बल्कि यह देखा जाना चाहिए कि उसने मानव संसाधन, ज्ञान और संस्थागत विश्वास को कितना मजबूत किया। कुंवर शेखर विजेंद्र ने कहा कि भारत अपने विशाल जनसंख्या आधार और मजबूत उच्च शिक्षा प्रणाली के कारण एक बड़ी ताकत है, वहीं न्यूज़ीलैंड अनुप्रयुक्त शिक्षा, व्यावसायिक गुणवत्ता, सतत कृषि और शोध आधारित व्यावहारिक प्रणालियों में अग्रणी है। दोनों देशों की ये खूबियां एक-दूसरे के लिए पूरक हैं और यही इस समझौते की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस समझौते के केंद्र में शिक्षा और कौशल विकास को रखा जाना चाहिए। इसके तहत संयुक्त डिग्री और डिप्लोमा कार्यक्रम, अकादमिक क्रेडिट ट्रांसफर, योग्यता की पारस्परिक मान्यता, क्षेत्रीय कौशल साझेदारी और डिजिटल प्रमाणन प्रणाली जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने कृषि, डेयरी विज्ञान, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य सेवाएं और पर्यावरणीय प्रणालियों को सहयोग के प्रमुख क्षेत्र बताते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में भारत और न्यूज़ीलैंड मिलकर व्यावहारिक और प्रभावी परिणाम दे सकते हैं। कुंवर शेखर विजेंद्र ने यह भी कहा कि इस समझौते में योग और आयुष को शामिल किया जाना खास महत्व रखता है। इससे भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर पहचान और विस्तार मिलेगा, जो निवारक और समेकित स्वास्थ्य प्रणाली के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
कैथल पहुंचे प्रदेश के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा:स्टंबल लैब का उद्घाटन किया, डीसी का ड्रीम प्रोजेक्ट
कैथल में हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने पूंडरी के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से डीसी कैथल के ड्रीम प्रोजेक्ट स्टंबल लैब का उद्घाटन किया। इस लैब से प्रशिक्षित बच्चों के आत्मविश्वास को देखते हुए शिक्षा मंत्री प्रभावित दिखे और मौके पर ही घोषणा की कि स्टंबल लैब प्रोजेक्ट पूरे प्रदेश में लागू करने के लिए योजना बनाई जाएगी। इससे छोटे-छोटे बच्चों का भी इतना आत्मविश्वास बढ़ा है कि वे सभी से पूरे उत्साह से बातचीत कर रहे हैं। स्टंबल लैब की कल्पना डीसी अपराजिता ने की कैथल डीसी अपराजिता के प्रयासों की सराहना करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को इससे काफी लाभ मिलेगा। स्टंबल लैब की कल्पना डीसी अपराजिता ने की थी। तीन माह पहले सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट में बच्चों को मुख्य रूप से किसी एक काम में असफल होने पर निराश होने की बजाए, दोगुने उत्साह के साथ फिर से अगली गतिविधि में भाग लेकर सफल होने की प्रेरणा देना ही इसका मुख्य उद्देश्य है। प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया मंत्री महीपाल ढांडा दोपहर बाद स्कूल में पहुंचे। जहां डीसी अपराजिता सहित विधायक सतपाल जांबा ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मंत्री ने इस प्रोजेक्ट का विधिवत रूप से उद्घाटन किया। जिला शिक्षा अधिकारी सुभाष ने प्रोजेक्ट की जानकारी दी। इसके बाद डीसी अपराजिता ने पूरे प्रोजेक्ट के बारे में बताया। साथ ही मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी दिव्यता ने प्रोजेक्टर के माध्यम से अब तक हुई गतिविधियों, उनके परिणाम, स्टंबल लैब के तहत भविष्य में किए जाने वाले कार्यों, उद्देश्य के बारे में विस्तार से बताया। प्रोजेक्ट को पूरे प्रदेश में लागू करने का ऐलान इसके बाद मंत्री ने चार कक्षाओं में जाकर स्टंबल लैब के तहत की जा रही गतिविधियों में भाग लिया। बच्चों से सवाल पूछे। मंत्री बच्चों के आत्मविश्वास से इतना प्रभावित हुए कि प्रोजेक्ट को पूरे प्रदेश में लागू करने का ऐलान कर दिया। डीसी अपराजिता का विजन है कि हम सभी को जीवन में कभी न कभी असफलता का सामना करना पड़ता है। उनका प्रयास है कि हमारे बच्चों को जब कभी किसी भी काम में असफलता का सामना करना पड़े तो वे उसे घबराकर सफलता का प्रयास करना बंद न करें। वे उस काम में रुचि लें और उस बाधा को पहचानें, जिस बाधा या स्टंबल या अवरोध के कारण वे उस काम में सफल नहीं हो सके। उस कारण को जानकर उसे दूर करें। अपने प्रयास में सुधार करें, निश्चित तौर पर उन्हें सफलता मिलेगी। साथ ही हर बच्चा कक्षा में उत्सुकता के साथ गतिविधियों में भाग ले।
पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु का रिश्वत लेते हुए वीडियो फर्जी और एआई जनरेटेड है
बूम ने पाया कि ब्रात्य बसु का वीडियो गूगल के SynthId का उपयोग करके एआई द्वारा जनरेट किया गया है.
स्कूलों में बनेंगी नशा मुक्ति समितियां कलेक्टर ने ली शिक्षा समीक्षा बैठक
श्रीगंगानगर। कलेक्टर डॉ. अमित यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला निष्पादन समिति की बैठक हुई। इसमें शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्कूलों में नशा मुक्ति अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक विद्यालय में पांच विद्यार्थियों की जागरूकता समिति बनाई जाए। ‘नशा मुक्ति कॉर्नर’ स्थापित हों। बच्चों में पढ़ने की रुचि बढ़ाने के लिए सभी को पुस्तकालय से किताबें उपलब्ध कराई जाएं।
स्कूलों में बनेंगी नशा मुक्ति समितियां, कलेक्टर ने ली शिक्षा व स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा बैठक
श्रीगंगानगर। कलेक्टर डॉ. अमित यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला निष्पादन समिति की बैठक हुई। इसमें शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्कूलों में नशा मुक्ति अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक विद्यालय में पांच विद्यार्थियों की जागरूकता समिति बनाई जाए। ‘नशा मुक्ति कॉर्नर’ स्थापित हों। बच्चों में पढ़ने की रुचि बढ़ाने के लिए सभी को पुस्तकालय से किताबें उपलब्ध कराई जाएं। इसके अलावा बैठक में स्वास्थ्य स्क्रीनिंग, एचपीवी वैक्सीनेशन, स्कूलों में नामांकन, मिड-डे मील, पीएमश्री विद्यालय और टैबलेट वितरण जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई। प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए।
शिक्षाविद सीताराम की प्रथम पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि
विदिशा| प्रतिभा विकास संस्थान, लिंक रोड-3, एलबीएस नगर में संस्थापक सचिव, शिक्षाविद स्व. सीताराम गुप्त की प्रथम पुण्यतिथि 27 अप्रैल को श्रद्धा, गरिमा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सहायक जिला शिक्षा अधिकारी पुष्कर राव पवार ने की। पूर्व जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अध्यक्ष श्यामसुंदर शर्मा मौजूद रहे। उद्योगपति, नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि राकेश शर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। आयोजन पूरनपुरा स्थित प्रतिभा विकास भवन में हुआ। दीप प्रज्ज्वलन हुआ। वैदिक मंत्रों के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। वक्ताओं ने स्व. गुप्त के व्यक्तित्व, कृतित्व पर बात रखी। भावभीनी श्रद्धांजलि दी। पुष्कर राव पवार ने कहा, सीताराम गुप्त के साथ उनका 50 वर्षों का संबंध रहा। वे समर्पित शिक्षक थे। उन्होंने शासकीय स्कूल में संसाधनों की कमी दूर करने के लिए जनसहयोग से कक्ष निर्माण कराया। बाउंड्री निर्माण में भी भूमिका निभाई। वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए 1996 में प्रतिभा विकास संस्थान की स्थापना में उनका योगदान बताया गया।
शिक्षा विभाग: दागी और व्यसनी शिक्षकों की बनेगी ब्लैक लिस्ट
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक माहौल सुधारने और शिक्षकों की छवि को स्वच्छ बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने क्लीन-अप ड्राइव शुरू की है। इसे लेकर प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने आदेश जारी किया है, जिससे हड़कंप मचा हुआ है। अब ऐसे शिक्षकों और कार्मिकों को चिह्नित किया जा रहा है जो शराब, तंबाकू, गुटखा जैसे व्यसनों के आदी हैं या जिनका आचरण अशोभनीय व आपराधिक प्रवृत्ति का है। विभागीय सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित नहीं रहेगी। स्कूल स्तर पर प्रधानाध्यापकों और साथी स्टाफ के माध्यम से गोपनीय रूप से जानकारी जुटाई जा रही है। विभाग यह पता लगा रहा है कि कौन से शिक्षक स्कूल परिसर या अपने निजी जीवन में ऐसी गतिविधियों में संलिप्त हैं, जो शिक्षक की गरिमा को धूमिल करती हैं। मायने साफ हैं कि आने वाले दिनों में राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अनुशासन को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति प्रभावी होगी। यानी अनुशासनहीनत को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अप्रैल अंत तक भेजना होगी सूची इस मुहिम के पीछे विभाग का तर्क है कि शिक्षक समाज का दर्पण और बच्चों का आदर्श होता है। यदि शिक्षक स्वयं नशे का शिकार होगा या उसका आचरण संदिग्ध होगा, तो विद्यार्थियों के भविष्य पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। शिक्षा मंत्री कार्यालय के निर्देशानुसार जिला शिक्षा अधिकारियों को पाबंद किया गया है कि वे अपने अधीनस्थ दागी कार्मिकों की सूची निर्धारित प्रारूप में अप्रैल के अंत तक अनिवार्य रूप से भेजें। सूची में मुख्य रूप से इन बिंदुओं को शामिल किया गया है- कार्मिक का नाम एवं एम्प्लॉई आईडी। पद और वर्तमान पदस्थापन स्थान। व्यसन का विवरण (शराब, नशा, तंबाकू या अश्लीलता) और पूर्व में की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई का ब्योरा। कदम स्वागत योग्य, सूची बनवा रहे -डॉ. लोकेश भारती, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक), उदयपुर
यूपी बोर्ड में फेल होकर भी पास हुए 2.51 लाख छात्र क्या है माध्यमिक शिक्षा परिषद का वो जादुई नियम?
शिक्षाप्रद कहानी: बालक राम से 'परशुराम' बनने की गाथा
बहुत पुरानी बात है, महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के एक बहुत ही आज्ञाकारी पुत्र थे, जिनका नाम था 'राम'। राम बचपन से ही बहुत शांत, बुद्धिमान और बलवान थे। वे अपने माता-पिता की सेवा करना अपना सबसे बड़ा धर्म मानते थे।
समानता और शिक्षा की क्रांतिकारी मशाल: सावित्रीबाई फुले
10मार्च सावित्रीबाई फुले महापरिनिर्वाण दिवस भारतीय समाज में जब भी शिक्षा,समानता और सामाजिक न्याय की बात उठती है,तो एक नाम इतिहास के पन्नों से निकलकर हमारे सामने खड़ा हो जाता है—सावित्रीबाई फुले।10मार्च को उनका महापरिनिर्वाण दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है,बल्कि यह दिन उस सामाजिक चेतना को याद करने का अवसर है,जिसने सदियों ... Read more
आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं
महिला दिवस पर विशेष:- अजमेर राजस्थान आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं:- देश-प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध ओर इन अपराधों में पिछले वर्षो में अपराध की दर तीव्र ही हुई है ओर “भारत मे अपराध ” नामक रिपोर्ट बताती है ... Read more
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समर्थन से भारत शिक्षा के सभी स्तरों पर एआई शिक्षण और रिसर्च को एकीकृत करके खुद को एक वैश्विक एआई महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है
शिक्षा को हिंसक नहीं, संवेदनशील बनाना होगा
देश में इन दिनों बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं और सामान्य परीक्षाएं भी शुरू होने वाली हैं। हर साल की तरह इस बार भी परीक्षा का मौसम केवल प्रश्नपत्रों और परिणामों का नहीं, बल्कि मानसिक दबाव, चिंता और असुरक्षा का मौसम बनता जा रहा है। छात्रों के चेहरों पर भविष्य की चिंता साफ पढ़ी जा ... Read more
गला घोटिया शिक्षा का विश्वगुरु बन चुका देश
पिछले 12 सालों से देश को विश्वगुरु बनाने का जो झूठ फैलाया जा रहा था, अब उसका गुबार ऐसा फूटा है कि दुनिया भर में शर्मिंदगी का सबब बन गया है।
शिक्षा में समता या नई असमानताः यूजीसी नियमों पर न्यायिक विराम
नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर लागू किए गए नए नियमों ने देश के शैक्षिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बार फिर गहरी हलचल पैदा कर दी है। जिस नीति को ‘समता’, ‘समान अवसर’ और ‘समावेशी शिक्षा’ की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया ... Read more
शिक्षा खौफनाक नहीं, बल्कि स्नेह एवं हौसलों का माध्यम बने
जीवन को दिशा देने वाली शिक्षा यदि भय, हिंसा और दमन का पर्याय बन जाए तो वह सभ्यता की सबसे बड़ी विडंबना कही जाएगी। हाल के वर्षों में पढ़ाई के नाम पर बच्चों पर बढ़ते दबाव, घर और स्कूल में हिंसक व्यवहार तथा प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ ने शिक्षा की आत्मा पर गहरा आघात किया ... Read more
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
NEET UG रिजल्ट को लेकर अभी भी जारी है गुस्सा, छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के पास किया विरोध प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए छात्रों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। आइए जानते हैं, क्या है पूरा म
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का 10 फीसदी भी डाटा नहीं हुआ अपलोड
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का डाटा अपलोड करने में जिले के कई स्कूल ढील दे रहे हैं, वे 10 फीसदी छात्रों का भी डाटा अभी तक अपलोड नहीं कर पाए हैं। डाटा अपलोड करने में आधार कार्ड की अनिवार्यता के बाद से छ
बेसिक शिक्षा : दो महीने बाद भी 1.38 लाख छात्रों का डेटा नहीं हुआ अपडेट
बेसिक शिक्षा विभाग के यू डायस पोर्टल पर डेटा अपडेट करने का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। हाल ये है कि दो महीने में महज 1.38 लाख छात्रों डेटा भी अपडेट नहीं हुआ। विभाग ने अब 5 जून तक इसे पूरा करने क
स्कूलों में कैसे पढ़ा रहे हैं शिक्षक, वीडियो में देखेगा शिक्षा विभाग, होगी रिकॉर्डिंग
शिक्षा विभाग वीडियो के जरिए देखेगा कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षक छात्रों को कैसे पढ़ाते हैं। बता दें. छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षकों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। आइए जानते हैं विस्तार से।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति : यूपी बोर्ड ने दिए निर्देश, एनईपी लागू करने को स्कूल बनाएंगे प्लान
यूपी बोर्ड से जुड़े 27 हजार से अधिक स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू करने के लिए स्कूल स्तर पर योजना बनाई जाएगी। एनईपी 2020 के विषय में विद्यालयों में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
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