उमरिया जिले में 110 निजी स्कूलों ने जिला शिक्षा केंद्र (डीईसी) के निर्देशों की अनदेखी की है। दो माह पहले फीस, पुस्तकों और शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत प्रवेश संबंधी जानकारी मांगी गई थी, लेकिन स्कूलों ने अभी तक विवरण उपलब्ध नहीं कराया है। अब डीईसी ने ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। जिले में, जिसमें जिला मुख्यालय भी शामिल है, लगभग 190 निजी स्कूल संचालित हैं। जिला शिक्षा केंद्र ने सभी स्कूलों को पत्र जारी कर वार्षिक फीस, छात्रों को दी जाने वाली पुस्तकों और आरटीई के तहत हुए प्रवेशों की विस्तृत जानकारी मांगी थी। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में स्कूलों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर यह जानकारी नहीं भेजी डीपीसी द्वारा कई बार स्मरण पत्र (रिमाइंडर) भी भेजे गए। इसके बावजूद, 110 स्कूलों ने कोई जवाब नहीं दिया। इससे विभागीय अधिकारियों में नाराजगी है। अधिकारियों का कहना है कि स्कूल संचालकों की मनमानी के कारण आवश्यक जानकारी संकलित नहीं हो पा रही है। जिला परियोजना समन्वयक के.के. डेहरिया ने बताया कि जिन स्कूलों ने अब तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को कलेक्टर के संज्ञान में लाया जाएगा और संबंधित समिति के माध्यम से कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। विभाग का कहना है कि निजी स्कूलों की फीस संरचना, पुस्तक वितरण और आरटीई प्रवेशों की निगरानी के लिए यह जानकारी आवश्यक है। समय पर जानकारी उपलब्ध न कराने वाले स्कूलों के विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
मैनपुरी में अहिल्याबाई होलकर जयंती समारोह का आयोजन किया गया। इसमें केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने समाज को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया और इसे सबसे मजबूत हथियार बताया। शनिवार को शहर के गोला बाजार स्थित अहिल्याबाई होलकर चौक पर पहुंचकर केंद्रीय मंत्री बघेल ने माल्यार्पण किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध करानी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि 5 बीघा जमीन बेचकर बच्चों को अच्छी डिग्री मिलती है, तो ऐसा अवश्य करना चाहिए। डिग्री और नौकरी हासिल होने के बाद बच्चा 5 बीघा से 50 बीघा भूमि भी खरीद सकेगा। केंद्रीय मंत्री ने अहिल्याबाई होलकर के जीवन परिचय पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अहिल्याबाई ने शासनकाल में राज किया और उनके ससुर ने उन्हें आगे बढ़ाया। नारी सशक्तिकरण के लिए उनकी एक अलग पहचान बनी है। बघेल ने समाज से अच्छी शिक्षा, अच्छे संस्कार और अच्छी उपलब्धि हासिल करने की आशा व्यक्त की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल के साथ पर्यटन मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह, विधायक रामनरेश गंगोत्री, टूंडला विधायक प्रेमपाल सिंह धनगर, पूर्व मंत्री अयोध्या प्रसाद पाल, महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष परम प्रकाश पाल, हौसला प्रसाद पाल, राजेंद्र सिंह पाल, संध्या सिंह धनगर, गगन पाल, संयोजक बलवीर सिंह पाल, आलोक गुप्ता, ममता राजपूत, रोड पाल, आसान सिंह पाल, महेश सिंह पाल, प्रमोद पाल, मुनेंद्र पाल, निर्भय सिंह पाल, इनाम सिंह, रविंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, रामवीर सिंह, शेर सिंह, महेश चंदपाल, मनोज कुमार और साक्षी सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। देश के विभिन्न राज्यों और जिलों से बड़ी संख्या में युवा और छात्र दिल्ली पहुंचे। इसी क्रम में सोनीपत से भी युवाओं का एक दल नारेबाजी करते हुए दिल्ली के लिए रवाना हुआ। रवाना होने से पहले युवाओं ने बेरोजगारी, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। युवाओं का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों का समय और मेहनत लगाने के बावजूद बार-बार होने वाली अनियमितताओं से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। दिल्ली में हुए प्रदर्शन को लेकर युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला और उन्होंने अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाने का संकल्प लिया। NEET पेपर लीक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 5 घंटे प्रदर्शन किया। पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा कि मंत्री 5 दिन के अंदर इस्तीफा दें, नहीं तो अगले शनिवार, यानी 13 जून को जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन करेंगे। पेपर लीक मामलों पर युवाओं ने जताया रोष कॉकरोच जनता पार्टी को समर्थन देने के लिए दल का नेतृत्व कर रहे विमल किशोर ने बातचीत में कहा कि आज का युवा लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों से बेहद परेशान है। उन्होंने कहा कि लाखों अभ्यर्थी दिन-रात मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा से पहले या बाद में पेपर लीक होने की घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। उनका कहना है कि इससे युवाओं का मनोबल टूटता है और भविष्य को लेकर असुरक्षा बढ़ती है। सरकार पर लगाए ठोस कार्रवाई न करने के आरोप विमल किशोर ने आरोप लगाया कि बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आने के बावजूद सरकार प्रभावी और सख्त कार्रवाई करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाए जाने के कारण ऐसी घटनाएं लगातार दोहराई जा रही हैं। युवाओं का मानना है कि यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई होती तो परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठते। दिल्ली में बुलंद होगी युवाओं की आवाज उन्होंने कहा कि दिल्ली में होने वाला प्रदर्शन केवल विरोध दर्ज कराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके माध्यम से युवा अपनी मांगों को मजबूती से सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्र और युवा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग उठाएंगे। सख्त कानून और जवाबदेही तय करने की मांग युवाओं का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पेपर लीक मामलों पर सख्त कानून लागू किए जाने चाहिए। साथ ही संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर सोनीपत से रवाना हुए युवाओं ने केवल पेपर लीक का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि रोजगार के अवसर बढ़ाने और भर्ती प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि लंबे समय से विभिन्न विभागों में भर्ती प्रक्रियाएं लंबित हैं, जिससे योग्य युवाओं को नौकरी मिलने में देरी हो रही है और उनमें निराशा बढ़ रही है। वहीं, CJP के प्रदर्शन के मद्देनजर इंदिरा गांधी एयरपोर्ट, मुख्य रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और दिल्ली के बॉर्डर पॉइंट्स पर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। 1000 से ज्यादा पुलिस जवान पहले से तय पॉइंट्स पर तैनात किए गए थे। बाजारों और संवेदनशील इलाकों में कानून व्यवस्था बनाए रखने की हिदायत दी गई थी। मंत्री के इस्तीफे के लिए 5 दिन की समय सीमा अभिजीत ने कहा- कॉकरोच जनता पार्टी अपनी मांग पर अड़ी है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। उन्होंने धमेंद्र को इस्तीफे के लिए 5 दिन का अल्टीमेटम दिया है। अगर कॉकरोच जनता पार्टी की बात नहीं मानी जाती है, तो 13 जून को जंतर-मंतर पर दोबारा प्रदर्शन किया जाएगा।
अभिजीत दिपके ने उस सुबह इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अपने पहुंचने को याद करते हुए कहा कि उनकी फ्लाइट लैंड होने से ठीक पहले, उन्हें ऐसा लगा जैसे वह अपनी आज़ादी के आखिरी पल जी रहे हैं।
दिल्ली में शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के बीच आगरा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक युवक आगरा कॉलेज के सामने हाथ में पोस्टर लेकर खड़ा दिखाई दे रहा है। पोस्टर पर शिक्षा मंत्री रिजाइन दो लिखा है, जबकि सड़क के डिवाइडर पर लगे पोस्टरों में जागो आगरा, जागो आगरा और Stop Playing With The Life Studies जैसे संदेश नजर आ रहे हैं। साथ ही वीडियो में आगरा कॉलेज के 7 से 8 युवक भी एक साथ खड़े नजर आ रहे है। सोशल मीडिया पर दी जा रही जानकारी के अनुसार यह वीडियो 28 मई का बताया जा रहाा। वीडियो को आदित्य शर्मा नामक युवक द्वारा पोस्ट किया गया बताया जा रहा है और वीडियो में दिखाई देने वाला युवक भी आदित्य शर्मा ही बताया जा रहा है। जिस अकाउंट से वीडियो पोस्ट किया गया है उसके फॉलोअर्स 22.2K हैं, वीडियो पर 5,549 व्यूज हैं। और करीब 300 लोगों ने इस लाइक किया है। वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कमेंट सेक्शन में कई यूजर CJP जिंदाबाद और छात्रों के समर्थन में नारे लिखते दिखाई दे रहे हैं। कुछ यूजर्स ने शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी राय व्यक्त की है। वीडियो ऐसे समय वायरल हुआ है जब दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी कारण सोशल मीडिया पर कई लोग आगरा के इस वीडियो को भी उसी बहस का हिस्सा मानकर साझा कर रहे हैं। वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक रूप से शेयर किया जा रहा है और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
गुरुग्राम जिले के एसजीटी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ नर्सिंग ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के नेशनल रिसोर्स सेंटर फॉर इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड स्टैंडर्ड्स (NRCeS) और सी-डैक, पुणे के सहयोग से एक तीन दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का आयोजन किया। यह कार्यक्रम 3 से 5 जून तक हेल्थ इंफॉर्मेशन एंड डिजिटल टेक्नोलॉजीज इन हेल्थकेयर विषय पर आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न स्वास्थ्य एवं शिक्षा क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन एसजीटी विश्वविद्यालय के प्रॉ-वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) अतुल नासा ने किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल परिवर्तन के दौर में शिक्षकों और स्वास्थ्य पेशेवरों का आधुनिक तकनीकों से दक्ष होना समय की आवश्यकता है। उन्होंने डिजिटल तकनीकों को स्वास्थ्य शिक्षा और सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण बताया। इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड की जानकारी दी गई स्कूल ऑफ नर्सिंग के डीन डॉ. सुनील कुमार दुलार के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में मेडिकल, नर्सिंग, डेंटल, फिजियोथेरेपी, एलाइड हेल्थ साइंसेज, आयुर्वेद, नेचुरोपैथी तथा एसजीटी अस्पताल के संकाय सदस्यों एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी की। एफडीपी के दौरान NRCeS एवं सी-डैक, पुणे के विशेषज्ञ डॉ. सुरेश कुमार शर्मा, सुश्री सयाली सटोकर, चिन्मय भुताड एवं सुश्री प्रीतम तांबे ने विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। इनमें इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR), डिजिटल हेल्थ स्टैंडर्ड्स, SNOMED CT, ICD-10, नर्सिंग डॉक्यूमेंटेशन स्टैंडर्ड्स, डेटा एनालिटिक्स, क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम, LOINC, FHIR, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM), नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (NHCX), DICOM स्टैंडर्ड्स तथा स्वास्थ्य डेटा की गोपनीयता एवं सुरक्षा शामिल थे। हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम में स्वास्थ्य सूचना प्रणालियों के व्यावहारिक प्रदर्शन और हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी शामिल था। इससे प्रतिभागियों को डिजिटल हेल्थ तकनीकों एवं इंटरऑपरेबिलिटी मानकों की व्यवहारिक समझ विकसित करने का अवसर मिला। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम की उपयोगिता और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन की सराहना की। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। आयोजकों ने बताया कि यह पहल स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल तकनीकों के प्रभावी उपयोग, क्षमता निर्माण और भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।
वाराणसी के रामनगर स्थित राधा किशोरी राजकीय बालिका इंटर कॉलेज को केंद्र सरकार की पीएम श्री योजना के तहत चयनित किया गया है। इसके साथ ही यह विद्यालय अब पीएम श्री विद्यालय के रूप में जाना जाएगा। इस दर्जे के मिलने से विद्यालय में आधुनिक शैक्षिक सुविधाओं का विस्तार होगा और छात्राओं को नई शिक्षा नीति के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। पीएम श्री योजना के तहत विद्यालय में डिजिटल बोर्ड, आधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं, आईसीटी (ICT) लैब और टिंकरिंग लैब जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप यहां रटने की बजाय समझ और प्रयोग आधारित शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही खेल आधारित शिक्षण पद्धति को भी बढ़ावा मिलेगा। कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा पर रहेगा फोकस विद्यालय की छात्राओं को कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा से भी जोड़ा जाएगा, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें। विद्यालय के विकास और संसाधनों को मजबूत करने के लिए सरकार की ओर से विशेष अनुदान भी उपलब्ध कराया जाएगा। करीब 2400 छात्राएं कर रही हैं अध्ययन विद्यालय की प्रधानाचार्य साधना राय ने बताया कि राधा किशोरी राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में कक्षा 5 से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई होती है और वर्तमान में करीब 2400 छात्राएं अध्ययनरत हैं। प्रदेश के तीन विद्यालयों को मिला दर्जा राधा किशोरी राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के अलावा राजकीय बालिका इंटर कॉलेज संभल और राजकीय इंटर कॉलेज तकसारा, अयोध्या को भी पीएम श्री का दर्जा प्रदान किया गया है। वाराणसी में बढ़ी पीएम श्री विद्यालयों की संख्या इससे पहले वाराणसी में पीएम श्री राजकीय प्रभु नारायण इंटर कॉलेज, पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज जक्खिनी, पीएम श्री राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज, पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज मलदहिया और पीएम श्री राजकीय अभिनव इंटर कॉलेज को यह दर्जा मिल चुका है। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) भोलेंद्र प्रताप सिंह ने इसे जिले के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि पीएम श्री का दर्जा मिलने से विद्यालय को विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट मिलेगा। इससे छात्राओं को आधुनिक, तकनीकी और कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
शिक्षा व पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
चंदनकियारी | विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर चंदनकियारी क्षेत्र चन्द्रा पंचायत सचिवालय के समीप शिक्षा सेवा समर्पण संस्थान की ओर से शुक्रवार को पौधरोपण व पर्यावरण जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान सदस्यों, कार्यकर्ताओं व ग्रामीणों की सहभागिता से 200 पौधों का रोपण किया गया। मुख्य अतिथि बनगड़िया ओपी प्रभारी शुभम कुमार ने कहा कि पर्यावरण मानव जीवन का आधार है और इसकी रक्षा करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
शिक्षाविद आचार्य श्यामलाल कुमावत की पुण्यतिथि मनाई
राष्ट्र निर्माण, शिक्षा और सामाजिक जागरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले आलोक संस्थान के संस्थापक आचार्य श्यामलाल कुमावत की आठवीं पुण्यतिथि पर गुरुवार को स्मारक स्थल पर श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। समारोह का शुभारंभ प्रतिमा के दुग्धाभिषेक से हुआ। इसके बाद पहली बार 51 किलो गुलाब की पंखुड़ियों से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पुष्पाभिषेक किया गया। स्मरणांजलि सभा में उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन ने कहा कि कश्मीर आंदोलन के दौरान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ संघर्ष करने वाले उदयपुर के प्रमुख कार्यकर्ताओं में आचार्य कुमावत भी शामिल थे। धारा 370 हटने से उनके संकल्प को पूर्णता मिली है। ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने उन्हें संगठन निर्माण का अग्रदूत बताया, जबकि राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति कर्नल प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि नई शिक्षा नीति जिन जीवन मूल्यों की बात करती है, उन्हें आचार्य कुमावत ने दशकों पहले अपने शैक्षिक कार्यों में अपनाया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता आलोक संस्थान के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमावत ने की।
शिक्षा विभाग की यह कैसी व्यवस्था... एक साल पहले पदोन्नत प्रिंसिपल को अब तक पोस्टिंग नहीं
शिक्षा विभाग में पदोन्नति हो रही है, लेकिन पोस्टिंग नहीं मिल रही। इस कारण पदोन्नति के बावजूद उन्हें उच्च पद नहीं मिल रहा और यथा स्थान कार्यग्रहण करा दिया गया। अधिकारियों की लापरवाही के कारण पदोन्नत कर्मचारी लंबे समय से पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं। पिछले एक साल में विभाग में डीईओ, प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल के पद पर पदोन्नतियां तो की गई, लेकिन पोस्टिंग अब तक नहीं दी गई। पदोन्नत कर्मचारी आज भी उसी स्थान पर काम कर रहे हैं जहां से उनको पदोन्नत किया गया था। इससे पदोन्नत कर्मचारियों में विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। विभाग में पिछले साल मई में पदोन्नति के बाद 3800 नए प्रिंसिपल मिले थे। इनको यथा स्थान कार्यग्रहण कराया। इसके बाद इनकी पोस्टिंग के लिए 3 बार काउंसलिंग का शेड्यूल जारी किया। तीनों ही बार ऐनवक्त पर शेड्यूल को वापस ले लिया। अधिकारी बार-बार आदेश पर यू-टर्न ले रहे हैं। वहीं, प्रिंसिपल पोस्टिंग को लेकर भी विभाग ने यू-टर्न ले लिया। सितंबर 2025 में पदोन्नत हुए करीब 11 हजार वाइस प्रिंसिपल भी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं। इनके वरिष्ठता निर्धारण में भी गड़बड़ी हुई। इसके बाद मामला कोर्ट में चला गया। पदोन्नति 144 जिला शिक्षा अधिकारी भी पोस्टिंग के अभाव में अपने पुराने पद पर ही काम कर रहे हैं। इसी तरह से कई अन्य पदों पर भी पोस्टिंग लंबित पड़ी है। अखिल राजस्थान विद्यालय शिक्षक संघ के प्रवक्ता देवकरण गुर्जर और राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा का कहना है कि अप्रैल से नया सत्र प्रारंभ हो गया है। विभाग को चाहिए कि पोस्टिंग में आ रही अड़चनों को दूर करे, ताकि ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद पदोन्नति कर्मचारियों की पोस्टिंग का रास्ता खुल सके। पोस्टिंग नहीं होने से यह पड़ रहा है असर पोस्टिंग नहीं होने से कर्मचारी पुराने पद पर काम कर रहा है। वेतन पदोन्नति वाला ले रहा है। यानी सरकार काम निम्न पद का करा रही है और वेतन उच्च पद का दे रही है। इसके अलावा एक स्कूल में एक से अधिक वाइस प्रिंसिपल व प्रिंसिपल काम कर रहे हैं। इससे इनका सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। अगर पोस्टिंग मिले तो स्कूलों में खाली पड़े इनके पद भर सकेंगे और स्कूलों की मॉनिटरिंग सही तरीके से हो सकेगी।
कॉलेज शिक्षा विभाग की भर्ती के साक्षात्कार में प्रार्थी को भी शामिल करें
हाईकोर्ट ने आरपीएससी की कॉलेज शिक्षा विभाग की भर्ती में प्रार्थी अंतिम वर्ष के छात्र को राहत देते हुए उसे फिजिकल इंस्ट्रक्टर के साक्षात्कार में शामिल करने का निर्देश दिया है। वहीं मामले में प्रमुख उच्च शिक्षा सचिव, कॉलेज शिक्षा आयुक्त व आरपीएससी सचिव से जवाब देने के लिए कहा है। हाईकोर्ट ने यह निर्देश विवेक कुमार मिश्रा की याचिका पर दिया। अधिवक्ता राम प्रताप सैनी ने बताया कि प्रार्थी ने भर्ती में फिजिकल इंस्ट्रक्टर पद के लिए आवेदन किया था। उस समय वह अंतिम वर्ष का छात्र था। उसने भर्ती परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली। लेकिन उसे साक्षात्कार में शामिल करने से यह कहते हुए मना कर दिया कि आवेदन पत्र जमा कराने की तिथि तक उसका अंतिम वर्ष का परिणाम घोषित नहीं हुआ था। इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि अंतिम वर्ष की परीक्षा में शामिल हो चुके अथवा शामिल होने वाले अभ्यर्थी आवेदन के लिए पात्र होंगे। इसलिए परीक्षा में सफल होने के बाद भी उसे साक्षात्कार से वंचित करना उसके वैधानिक अधिकारों का हनन है। इसलिए उसे साक्षात्कार सहित भर्ती परीक्षा में शामिल किया जाए। अदालत ने मामले में प्रार्थी को राहत देते हुए उसे साक्षात्कार में शामिल करने के लिए कहा।
मुफ्त शिक्षा के लिए दान की जगह पर बना डाली कोठी; घर से निकाला तो बुजुर्ग एनआरआई दंपती ने बिछाई दरी
पीड़ित एनआरआई प्रोफेसर दविंदर सिंह ग्रेवाल और उनकी पत्नी ने रुंधे गले से कहा इस उम्र में अब हमारी कोई ख्वाहिश नहीं बची है। हमें न तो धन-दौलत चाहिए और न ही कोई ऐश-ओ-आराम। हम तो बस अपने दिवंगत बेटे की याद में एक ऐसा एजुकेशन सेंटर बनाना चाहते हैं, जहां गरीब बच्चे मुफ्त में पढ़-लिख सकें। हमारा मकसद सिर्फ इतना है कि यहां से शिक्षा पाकर बच्चे जिंदगी में एक कामयाब और अच्छे इंसान बनें। लेकिन हमें क्या पता था कि भगवान के घर (धार्मिक संस्था) में ही हमारे साथ ऐसा धोखा हो जाएगा और हमारी भावना का तमाशा बना दिया जाएगा। भास्कर न्यूज | लुधियाना बाड़ेवाल रोड स्थित पंजाब कॉलोनी से रिश्तों को शर्मसार करने और एक तथाकथित धार्मिक संस्था के बाबा द्वारा बुजुर्गों से धोखाधड़ी का बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। एक पढ़े-लिखे एनआरआई बुजुर्ग प्रोफेसर दंपति, जिनकी उम्र 80 साल हो चुकी है, आज न्याय के लिए अपने ही घर के बाहर दरी बिछाकर धरने पर बैठने को मजबूर हैं। दिल के मरीज इस बुजुर्ग दंपति का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने अपने दिवंगत बेटे की याद में बच्चों की मुफ्त शिक्षा के लिए करोड़ों रुपये की जमीन दान कर दी थी। शुक्रवार को इस प्रताड़ना और धोखे से तंग आकर आज उन्होंने न्याय की गुहार लगाते हुए अपने ही घर के बाहर दरी बिछा दी और पुलिस विभाग के खिलाफ रोष जाहिर किया। प्रोफेसर ग्रेवाल ने बताया कि उन्होंने इस धोखाधड़ी और कब्जे के खिलाफ अदालत में केस भी दायर कर दिया है। मामले का संज्ञान लेते हुए डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने लुधियाना पुलिस को तुरंत सख्त निर्देश जारी किए हैं। डीसी ने पुलिस को मार्क करते हुए कहा है कि दोनों बुजुर्गों को तुरंत पूर्ण न्याय दिलाया जाए और उन्हें सम्मानजनक तरीके से उनके घर के अंदर बिठाया जाए। मेरे दो बेटे थे। एक बेटे का कुछ समय पहले देहांत हो चुका है, जबकि दूसरा बेटा मुझे व मेरी पत्नी को बेसहारा छोड़कर अपनी पत्नी के साथ दिल्ली में रह रहा है। हम दोनों पति पत्नी ने मृत बेटे की याद को जिंदा रखने के लिए बाड़ेवाल रोड की पंजाब कॉलोनी वाला 512 गज का करोड़ों रुपये का प्लॉट बारुंदी की एक धार्मिक संस्था के बाबा को दान कर दी थी। दान की शर्त यह थी कि बाबा वहां गरीब बच्चों के लिए एक एजुकेशन सेंटर बनाएंगे, जहां बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाएगी। लेकिन मुझे तब गहरा सदमा लगा, जब पता चला कि बाबा ने वहां कोई एजुकेशन सेंटर नहीं बनाया, बल्कि उस जमीन पर एक आलीशान कोठी खड़ी कर दी और उसे कमाई का साधन बनाते हुए किसी दूसरे को रहने के लिए दे दिया। जब मैं और पत्नी सच्चाई जानने बाबा के पास गए, तो उसने मिलने तक से मना कर दिया। मैंने मामले की शिकायत डीसी से की। प्रशासन के दखल के बाद हम दोनों अपने घर के अंदर तो चले गए, लेकिन वहां मौजूद लोगों ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया। हम दोनों को मेरे ही घर के मुख्य हिस्से से हटाकर एक छोटे से स्टोर रूम में रहने को मजबूर किया , जहां न तो सांस लेने के लिए पंखा है और न ही लेटने के लिए बेड। मुझे अपने ही घर में अंदर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है।- दविंदर सिंह ग्रेवाल पीड़ित प्रोफेसर
सोशल मीडिया पर एक मजाक के तौर शुरू हुई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज अपना पहला प्रदर्शन करेगी। CJP का प्रदर्शन NEET-UG, CBSE, CUET और SSC-GD जैसी परिक्षाओं में हुई धांधलियों और पेपर लीक के खिलाफ है। पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करेगी। CJP ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले समर्थकों के लिए एक गाइडलाइन भी जारी की है। इसमें समर्थकों से सनस्क्रीन लगाकर, नाश्ता करके आने, हाथ में तिरंगा, फूल और किताब लाने जैसी 8 अपील की गई हैं। CJP फाउंडर अभिजीत दीपके सुबह 8 बजे भारत पहुंचेंगे। वे शुक्रवार को अमेरिका से रवाना हुए थे। उन्होंने X पर लिखा- अपना भाग्य संविधान के हाथों में छोड़कर भारत के लिए निकल रहा हूं। दीपके दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरेंगे। वहां से सीधे पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाएंगे और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत लेगें। अभिजीत ने समर्थकों से पुलिस स्टेशन पहुंचने की अपील की है। उन्होंने समर्थकों से कहा है कि एयरपोर्ट पर भीड़ जुटाने की जरूरत नहीं है। CJP ने समर्थकों को बताया- क्या करें, क्या न करें 5 जून की CJP से जुड़ीं अपडेट्स CJI का बयान, चर्चा में CJP 15 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा- कॉकरोच की तरह ऐसे युवा हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। इनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया और कुछ RTI तथा अन्य तरह के एक्टिविस्ट बन रहे हैं। ये हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं। इस बयान के अगले दिन, 16 मई को इंस्टाग्राम पर कॉकरोच जनता पार्टी नाम से एक प्लेटफॉर्म बनाया गया था। अभिजीत बोले- मजाक अब आगे निकल चुका दीपके 19 मई को एक मीडिया इंटरव्यू में कहा था- यह आंदोलन एक मजाक के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन अब यह मजाक से आगे निकल चुका है। युवाओं की बेरोजगारी और व्यवस्था से निराशा ने आंदोलन को बड़ा बनाया। CJP को अब तक सोशल एक्टिविक्ट सोनम वांगचुक, एक्टर अतुल कुलकर्णी, दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) पूर्व प्रेसिडेंट रौनक खत्री समेत अन्य लोगों का समर्थन मिला है। सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में भी शामिल होंगे। CJP इंस्टाग्राम फॉलोअर्स में भाजपा-कांग्रेस, AAP से आगे 4 जून: CJP की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की दिल्ली में पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। पार्टी की तरफ से तीन सौरव दास (मुख्य प्रवक्ता), प्रवक्ता विजेता दहिया और आशुतोष रांका ने पार्टी की मांग रखीं। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफे मांगा। कहा कि CJP सरकार और विपक्ष दोनों से बातचीत को तैयार है। सौरव ने CBSE चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता के तबादले को सिर्फ दिखावा बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय होनी चाहिए और केवल तबादलों से समस्या का समाधान नहीं होगा। पूरी खबर पढ़ें… महाराष्ट्र में दीपके के घर के बाहर पुलिस तैनात दीपके का परिवार महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में रहता है। वर्तमान में उनके घर पर 24 घंटे पुलिस की तैनाती है। पुलिस के मुताबिक, यह तैनाती एहतियान की गई है, क्योंकि सोशल मीडिया पर CJP का मुद्दा ट्रेंड कर रहा है, इसलिए उनके घर के बाहर भीड़ न जुटे, इसे देखते हुए यह कदम उठाया गया। अब जानिए उन पार्टियों के बारे में जो जन आंदोलन से जन्मी कॉकरोच जनता पार्टी के पॉलिटिकल पार्टी बनेगी या नहीं फिलहाल यह तय नहीं है। पार्टी को सोशल मीडिया पर जनता का भारी समर्थन है। लेकिन देश में 6 ऐसी पार्टियां रहीं, जो केंद्र और राज्य की मौजूदा सरकार का विरोध करके चर्चा में आई और राजनीति पार्टी बन गईं। जानिए ऐसी ही 6 पाटियों के बारे में… AAP और CJP की समानता और अंतर
नई दिल्ली। देश के तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए आईआईटी दिल्ली ने देशभर के 18 राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एनआईटी) के साथ शैक्षणिक और शोध सहयोग नेटवर्क की शुरुआत की है। इस पहल के तहत संस्थानों के बीच छात्र एवं फैकल्टी एक्सचेंज, संयुक्त शोध, रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करने और उच्च शिक्षा के नए अवसर विकसित किए जाएंगे। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आईआईटी दिल्ली परिसर में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त सचिव सौम्या गुप्ता, आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी और विभिन्न एनआईटी के निदेशक शामिल हुए। इस दौरान 18 एनआईटी के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें एनआईटी राउरकेला, वारंगल, तिरुचिरापल्ली, कालीकट, जालंधर, कुरुक्षेत्र, इलाहाबाद, जयपुर, भोपाल और नागपुर समेत कई प्रमुख संस्थान शामिल हैं। मेधावी छात्रों को मिलेगा आईआईटी दिल्ली में पढ़ने का मौका नई व्यवस्था के तहत भागीदार एनआईटी के मेधावी स्नातक छात्र अपने अंतिम वर्ष में विशेष एक्सचेंज स्टूडेंट के रूप में आईआईटी दिल्ली में पढ़ाई और रिसर्च कर सकेंगे। वहीं स्नातकोत्तर छात्रों को भी रिसर्च इमर्शन और अकादमिक सहयोग का अवसर मिलेगा। इसके अलावा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को गेट जैसी राष्ट्रीय परीक्षा के बिना एमटेकए एमएस (रिसर्च) और पीएचडी कार्यक्रमों में प्रवेश का अवसर दिया जाएगा। क्रेडिट ट्रांसफर से कम होगा डिग्री पूरा करने का समय सहयोग ढांचे में क्रेडिट ट्रांसफर और क्रेडिट शेयरिंग की व्यवस्था भी शामिल की गई है। इससे छात्र अपने संस्थान और आईआईटी दिल्ली दोनों जगह पढ़ाई कर प्राप्त क्रेडिट का उपयोग कर सकेंगे। इससे उच्च डिग्री पूरी करने में लगने वाला समय कम होगा और शैक्षणिक गुणवत्ता भी बरकरार रहेगी। आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने कहा कि यह पहल संस्थान-केंद्रित विकास से आगे बढ़कर सहयोग आधारित राष्ट्रीय उच्च शिक्षा मॉडल की दिशा में कदम है।
संस्कार शिविर में नैतिक शिक्षा पर दिया जोर
पानीपत| जिनवाणी विद्या भारती स्कूल में वर्धमान श्वेतांबर जैन सभा अग्रवाल मंडी द्वारा आयोजित दस दिवसीय संस्कार शिविर के पांचवें दिन नैतिक शिक्षा पर विचार व्यक्त किए गए। डॉ. एपी जैन ने कहा कि शिक्षा से प्राप्त बुद्धि भरोसेमंद साथी है, लेकिन गलत दिशा में जाने पर विनाशकारी हो सकती है। उन्होंने विश्व में बढ़ते युद्ध और विनाशकारी हथियारों का उल्लेख करते हुए मानवता आधारित नैतिकता की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में राजेंद्र जैन और सुशील जैन उपस्थित रहे।
सांसद निधि का 99.08% बजट विकास कार्यों में स्वीकृत, 82.14% शिक्षा पर खर्च
भास्कर न्यूज | बाड़मेर बाड़मेर-जैसलमेर-बालोतरा संसदीय क्षेत्र के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने अपने कार्यकाल के दो साल पूरे होने पर सांसद निधि के उपयोग का ब्यौरा जारी किया। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में कुल 10 करोड़ रुपए की सांसद निधि स्वीकृत हुई। इसमें से 9.80 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हुई। 9.71 करोड़ रुपए के कार्य स्वीकृत या प्रगतिरत हैं। यह कुल का 99.08 प्रतिशत है। बेनीवाल के अनुसार कुल खर्च का 82.14 प्रतिशत, करीब 7.98 करोड़ रुपए शिक्षा क्षेत्र में लगाया गया। इस राशि से स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड, भवन निर्माण, अतिरिक्त कक्षाओं का विस्तार और आधारभूत सुविधाओं के काम कराए गए। शेष 17.86 प्रतिशत राशि अन्य विकास कार्यों पर खर्च की गई। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तीन जिला अस्पतालों में एम्बुलेंस सेवा से जुड़े कार्यों पर करीब 27 लाख रुपए खर्च किए गए। धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों पर 77 लाख रुपए स्वीकृत किए गए।
आदर्श विद्या मंदिर में संघ शिक्षा वर्ग, तीन सौ स्वयंसेवक शामिल
बाड़मेर. संघ शिक्षा वर्ग के तहत पथ संचलन निकालते हुए। भास्कर न्यूज | बाड़मेर बाड़मेर में आदर्श विद्या मंदिर लंगेरा रोड पर 22 मई से चल रहा संघ शिक्षा वर्ग शालेय विद्यार्थी कार्यक्रम जारी है। इसके तहत विद्यार्थियों ने आदर्श विद्या मंदिर से लंगेरा गांव तक अभ्यास पथ संचलन किया। इसमें 300 से अधिक विद्यार्थी, शिक्षक और स्वयंसेवक शामिल हुए। कार्यक्रम का समारोप शुक्रवार शाम 6 बजे होगा। समारोप में 15 दिन के वर्ग के दौरान सीखी गई गतिविधियों का प्रदर्शन किया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता मोहनलाल प्रजापति करेंगे। मुख्य वक्ता क्षेत्र प्रचारक निंबाराम रहेंगे। विभाग संघ चालक मनोहरलाल बंसल के अनुसार पर्यावरण गतिविधि के तहत 5021 बीजारोपण किए गए। बीजारोपण नारियल के खोल में किया गया। 5000 बीज बॉल तैयार कर वर्ग में आए शिक्षार्थियों को वितरित किए गए। विद्यालय परिसर में 600 पौधों का सघन वन भी लगाया गया। नारियल के खोल में तैयार पौधों का रोपण लंगेरा गांव के तालाब क्षेत्र में किया जाएगा। संघ के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में पंच परिवर्तन संदेश पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण और संगठन की गतिविधियों से जुड़े विषय शामिल रहे। सेवा कोने के माध्यम से सेवा भारती के कार्यों का प्रदर्शन किया गया। आयोजकों के अनुसार वर्ग दर्शन कराया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की आवश्यकता के अनुसार नए महाविद्यालय प्रारंभ किए जाएं। जिन सघन आबादी वाले क्षेत्रों में महाविद्यालय संचालित हैं, वहां विद्यार्थी संख्या बढ़ने पर शिफ्ट व्यवस्था लागू कर शैक्षणिक सुविधा देने पर विचार किया जाए। इसके साथ ही राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की तर्ज पर राज्य परिषद अर्थात सैक के गठन की कार्यवाही प्रारंभ की जाए। उन्होंने कहा कि रोजगार परक पाठ्यक्रमों पर फोकस किया जाए। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि आने वाला वर्ष युवा वर्ष होगा, इस नाते अन्य संबंधित विभागों के साथ विद्यार्थियों के हित में नए कार्यक्रमों और प्रकल्पों को लागू करने की तैयारी भी की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उच्च शिक्षा विभाग के कामों की समीक्षा करते हुए प्रदेश में कृषि के स्नातक पाठ्क्रम की व्यवस्था सुनिश्चित कर इस विषय को लोकप्रिय बनाने के प्रयासों पर खुशी जताई है। उन्होंने कृषि पाठ्यक्रम से प्रदेश के लगभग 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों को जोड़ने की सफलता के लिए उच्च शिक्षा विभाग को बधाई भी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छिन्दवाड़ा के राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय में अच्छे विषयों का समावेश करें। इसके लिए राज्य सरकार आवश्यक आर्थिक सहयोग देगी। विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण, आर्किटेक्चर और कृषि विज्ञान के कोर्स के लिए व्यवस्था की जाए। विद्यार्थियों की रूचि के अनुरूप नए पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएं। प्रदेश में इंदौर, उज्जैन और चित्रकूट में तीन वर्षीय विमानन पाठ्यक्रम बीबीए प्रारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता में निरंतर सुधार के कदम उठाए जाएं। पीएमश्री महाविद्यालयों में भी इस दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं। अन्य सभी शासकीय महाविद्यालयों में भी शिक्षण और अन्य गतिविधियों का सुचारू संचालन होता रहे, इस पर ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नए पाठ्यक्रमों को प्रारंभ करने की दिशा में हुए कार्यों की जानकारी प्राप्त की। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में इंदौर, उज्जैन और चित्रकूट में तीन वर्षीय विमानन पाठ्यक्रम बीबीए प्रारंभ किया गया है। प्रदेश की तीन अन्य उच्च शिक्षण संस्थाओं को भी नेशनल इन्स्टिट्यूशनल रैंकिंग फ्रेम वर्क (एनआईआर एफ) द्वारा श्रेष्ठ व्यवस्थाओं के लिए सराहा गया है। स्वयं पोर्टल पर उपलब्ध पाठ्यक्रमों में पंजीयन के कार्य में मध्यप्रदेश ने जुलाई 2025 में 3 लाख 52 हजार 931 पंजीयन कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। जुलाई 2026 के सेमेस्टर में यह संख्या 2 लाख 73 हजार 266 हो गई है। प्रदेश में गुना, खरगौन और सागर में नए विश्वविद्यालय और आगर मालवा में लॉ कॉलेज प्रारंभ किया गया। प्रदेश के 8 महाविद्यालयों में 28 विषयों में पीजी कक्षाएं प्रारंभ की गईं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश
Excellence in Education Award: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 के लिए आवेदन ...
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भगवंत मान सरकार की तारीफ करते हुए कहा है कि महज 4 साल में ही शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब को नंबर वन बना दिया। केजरीवाल ने गुरुवार को कहा कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा में कभी 27वें स्थान पर रहा पंजाब आज पहले स्थान पर पहुंच गया है। यह सर्वे केंद्र सरकार के नीति आयोग का है, जिसके अनुसार, पंजाब ने केरल को भी पीछे छोड़ दिया है। दिल्ली में शिक्षा क्रांति के बाद अब पंजाब के सरकारी स्कूलों में भी ऐतिहासिक बदलाव हो रहा है। उन्होंने मान सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि यह मुख्यमंत्री भगवंत मान की बड़ी उपलब्धि है कि महज 4 साल में ही शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब को नंबर वन बना दिया। आज पंजाब के शिक्षा व्यवस्था में जबरदस्त आत्मविश्वास आने की वजह से सरकारी स्कूलों के बच्चे नीट और जेईई पास कर रहे हैं। '2020 में शिक्षा के मामले में 27वें स्थान पर था पंजाब' आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पंजाब ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नीति आयोग के ताजा सर्वे में पंजाब पूरे देश में पहले स्थान पर आया है। उन्होंने बताया कि यह कोई निजी सर्वे नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के नीति आयोग द्वारा किया गया सर्वे है, जिसमें सभी राज्यों की शिक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन किया जाता है। केजरीवाल ने कहा कि वर्ष 2020 में पंजाब शिक्षा के मामले में 27वें स्थान पर था, लेकिन अब राज्य ने बड़ी छलांग लगाते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया है। उन्होंने इसे पंजाब सरकार, शिक्षकों और विद्यार्थियों की मेहनत का परिणाम बताया। 'NEET-JEE जैसी परीक्षाएं पास कर रहे सरकारी स्कूलों के छात्र' उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी शिक्षा और स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा महत्व देती है। पंजाब में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। इसका असर अब दिखाई देने लगा है। सरकारी स्कूलों के छात्र NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं पास कर डॉक्टर और इंजीनियर बन रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि यह उपलब्धि पूरे शिक्षा तंत्र में नया आत्मविश्वास लेकर आई है। शिक्षक, प्रिंसिपल और विद्यार्थी उत्साह के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी बहुत काम बाकी है, लेकिन पंजाब का नंबर-1 बनना एक बड़ी सफलता है और यह साबित करता है कि सही नीयत और प्रयास से बड़े बदलाव संभव हैं।
रेवाड़ी में नीट परीक्षा रद्द होने और सीबीएसई परीक्षा में कथित धांधली के विरोध में युवाओं ने प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक यूथ ऑर्गनाइजेशन (एआईडीवाईओ) सहित कई सामाजिक संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार से खाली पदों को तुरंत भरने सोशल मीडिया पर बनी कॉकरोच जनता पार्टी पर अंकुश लगाने और रोजगार को संविधान में मौलिक अधिकार बनाने की भी मांग की। जान गंवाने वाले छात्रों को दी श्रद्धांजलि शहर की ब्रास मार्केट में विरोध प्रदर्शन के दौरान, नीट परीक्षा रद्द होने से प्रभावित परीक्षार्थियों और कथित तौर पर जान गंवाने वाले छात्रों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व अजय सिंह, सुरेंद्र कुमार रोहिल्ला और सोमेंद्र ने किया। कॉमरेड राजेंद्र सिंह, खेमचंद, हेमंत पिलानी, हरिओम, संजय शर्मा, कैलाश चंद, धर्मबीर बुलडोदिया, राजकुमार जलवा, गोविंद, संदीप, प्रदीप, सूबे सिंह, करतार सिंह, संतोष, सुमन देवी और रणबीर सिंह सहित कई अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखे। वक्ता बोले- आज देश का युवा और छात्र परेशान वक्ताओं ने कहा कि आज देश और प्रदेश के छात्र तथा युवा परेशान हैं। उनकी मेहनत का फल नहीं मिल रहा है और उनके करियर को कथित तौर पर सुनियोजित तरीके से बर्बाद किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बेरोजगारी इतनी अधिक है कि उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को भी चतुर्थ श्रेणी की नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं। वक्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकारों की जनविरोधी नीतियों को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया। कहा कि भारत में बड़ी संख्या में युवा डिप्रेशन का शिकार होकर आत्महत्या कर रहे हैं। वक्ताओं ने बेरोजगारी का मूल कारण पूंजीवादी व्यवस्था को बताया और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा बेरोजगार युवाओं को 'कॉकरोच' और 'परजीवी' कहे जाने पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों ने इन मुद्दों को लेकर आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया और एआईडीवाईओ ने जनता से युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए आगे आने की अपील की।
सरगुजा जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार झा ने जिले के सभी सेजेस, पीएमश्री और डीपीआई पब्लिक स्कूलों के प्राचार्यों की समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में वर्ष 2026 के बोर्ड परीक्षा परिणामों की समीक्षा की गई। साथ ही डीईओ ने स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए। बैठक में डीईओ ने उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम देने वाले विद्यालयों के प्राचार्यों को बधाई देते हुए अन्य विद्यालयों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सभी प्राचार्यों को विद्यालयों में सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण बेहतर बनाने, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के साथ समन्वय बनाकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था देने के निर्देश दिए। खराब रिजल्ट पर जताई चिंता समीक्षा के दौरान कुछ विद्यालयों के परीक्षा परिणाम संतोषजनक नहीं मिलने पर डीईओ ने चिंता जताई। डीईओ ने विद्यार्थियों की दर्ज संख्या बढ़ाने, पालकों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से नामांकन में वृद्धि करने और उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित करने कहा। साथ ही शिक्षण कार्य में रुचि नहीं लेने वाले शिक्षकों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने कहा गया। बैठक में ड्रॉपआउट विद्यार्थियों का सर्वेक्षण कर उन्हें पुनः विद्यालय से जोड़ने और कक्षा 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ चुके विद्यार्थियों को ओपन स्कूल के माध्यम से कक्षा 10वीं की परीक्षा दिलाने के प्रयास करने पर विशेष जोर दिया गया। सीट बढ़ाने के लिए मंगाया गया प्रस्ताव कुछ प्रिंसिपलों ने स्कूलों में सीटों की कमी के कारण प्रवेश में कठिनाइयों की जानकारी दिए जाने पर डीईओ ने सीट बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त विद्यालयों में नशामुक्ति अभियान चलाने, वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित करने और विद्यालय परिसरों में अनिवार्य रूप से ग्रीन फेंसिंग कराने के निर्देश भी दिए गए। अंत में डीईओ ने सभी प्रिंसिपलों से निर्देशों का गंभीरता से पालन करने एवं बेहतर रिजल्ट के लिए कार्य करने का निर्देश दिया।
भोपाल के ऐतिहासिक बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव पर मध्य प्रदेश की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा इसका नाम बदलकर 'वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' करने का प्रस्ताव पारित कर राज्यपाल मंगू भाई पटेल को भेजे जाने के बाद से ही इस पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। एक तरफ जहां विपक्ष इसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के अपमान से जोड़ रहा है, वहीं सरकार इस दिशा में कदम आगे बढ़ाती दिख रही है। इसी कड़ी में आज गुरुवार को प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने राज्यपाल से मुलाकात भी की है। सबसे पहले उच्च शिक्षा मंत्री ने क्या कहा वो पढ़िए उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद कहा: कल कार्यपरिषद की बैठक में यह प्रस्ताव आया है। वो प्रस्ताव सरकार और हमारे विभाग के पास आने वाला है उसके बाद हम उस पर विचार करेंगे। विश्वविद्यालय ऑटोनॉमस बॉडी है कार्यपरिषद अपने निर्णय लेती है। उनका प्रस्ताव अभी हमारे पास आया नहीं है उसको देखकर मुख्यमंत्री जी से विमर्श करके फिर आगे निर्णय करेंगे। अभी ये कार्यपरिषद का निर्णय है। उस निर्णय का हम समग्र अध्ययन करेंगे। नीट के मुद्दे से भटकाने का काम किया: कांग्रेस विधायक कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा बरकतउल्लाह विश्वाविद्यालय नाम बदलना ये एक बहुत अफसोस जनक निर्णय है। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है। एक महान क्रांतिकारी का नाम बदलना है तो होना यह चाहिए था कि नीट परीक्षा के बच्चों पर चर्चा होती है उनके भविष्य पर चर्चा होती। उनके साथ जो घटनायें हुई उसको लेकर सरकार और विश्वाविद्यालयों और शिक्षा मंत्री को विचार करना था। ये ना करके उसको उलझाने का काम किया है और उसमें जो पत्र लिखा वो और अफसोस जानक है जिसकी मैं निंदा करता हूं। वाग्देवी के नाम पर नया विश्वविद्यालय बना देते विधायक ने कहा- वाग्देवी के नाम पर आप नया विश्वाविद्यालय बना देते थे। उसमें क्या बुराई है सब स्वागत करेंगे। एक बनी-बनाई संस्था के 38 साल से चलते हुए नाम को आप हटाना चाहते हैं और यह कहना कि वो कौन थे? वो व्यक्ति था जो आजाद भारत का भारत का प्रधानमंत्री था। राजा महेंद्र सिंह राष्ट्रपति थे। उसने एक बड़ा आंदोलन देश के लिए किया और इस प्रदेश के लिए किया। ऐसे व्यक्ति के नाम को बदलना गलत है। मैंने राज्यपाल महोदय से समय मांगा है जैसे ही समय मिलता है उनसे मुलाकत करेंगे क्योंकि इसके मुखिया राज्यपाल होते हैं। मैं मोहन यादव जी से भी कहना चाहता हूं कि आज कल आप बड़े सिध्दांत की बातें कर रहे हैं। सुना है बहुत सिद्धांत वादी मुख्यमंत्री बनने का प्रयास कर रहे हैं आप तो अगर वास्तव में सिद्धांतवादी हैं तो आप उसका परिचय दें कि एक महान क्रांतिकारी बरकतउल्लाह भोपाली का नाम इस तरह बदनाम ना किया जाए और ना बदला जाए। क्रांतिकारी का नाम कैसे बदल देंगे विधायक आरिफ मसूद ने कहा- मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि कांग्रेस को भी इसमें साथ होना चाहिए और एक महान क्रांतिकारी का नाम को आप कैसे बदल दोगे? 38 साल से चल रहे एक इंस्टीट्यूट का नाम आप बेवजह बदल रहे हो। कोई वजह नहीं है तो आपको इस तरह बदलने का अधिकार जनता ने सरकार बनाकर दे जरुर दिया लेकिन आप उसका ध्यान रखिए इस गरिमा का और संविधान का ध्यान रखें। उच्च शिक्षा मंत्री के प्रस्ताव का अध्ययन करने के बाद फैसला लेने के बयान पर विधायक मसूद ने कहा- राज्यपाल महोदय इसके मुखिया होते हैं मैं उनसे मिलने जा रहा हूं लेकिन यह तो तय करना पड़ेगा शिक्षा मंत्री जी को कि जो एग्जीक्यूटिव कमेटी ने बरकतउल्लाह भोपाली के नाम पर जो टिप्पणी की है वो निंदनीय है या नहीं है। एग्जीक्यूटिव काउंसिल बच्चों का भविष्य बनाने और विश्वाविद्यालय का नाम बढ़ाने की बात करेगी या घटाने की करेगी। बरकतुल्लाह ने विदेश में भारत का झंडा बुलंद किया विधायक ने कहा- बरकतुल्लाह भोपाली पहले व्यक्ति हैं जिसने विदेश में रहकर अंग्रेजों के खिलाफ झंडा बुलंद करके सरकार बना ली थी, राजा महेंद्र राष्ट्रपति बने और ये प्रधानमंत्री बने थे। लेकिन, असल में ये जो एग्जीक्यूटिव काउंसिल है इनके जो पुरोधा हैं जिस संस्था से ये निकलकर आते हैं उनका आज़ादी में योगदान नहीं था इसलिए इनको क्रांतिकारियों की गरिमा का एहसास नहीं है जिन्होने देश के लिए खून बहाया है उनको एहसास होता है। भोज यूनिवर्सिटी का किसी ने विरोध नहीं किया कांग्रेस की सरकार में पहले नाम बदले को लेकर विधायक ने कहा- ये बात सही है लेकिन उससे पहले सागर में जाता था भोपाल, वो 15-20 साल चला उसके बाद एक क्रांतिकारी के नाम पर रखा जाए जिसने इतना बड़ा योगदान दिया तो अब इसका नाम हटाने का उचित कारण बताएं। आप वाग्देवी के नाम पर कर रहे हैं हम तो विरोध नहीं कर रहे। हम कह रहे हैं कि एक नया विश्वविद्यालय बनाईए। आपने बहुत विश्वविद्यालय बनाए आपने भोज यूनिवर्सिटी बनाई तो किसी ने विरोध किया क्या?
समस्तीपुर के शिवाजीनगर प्रखंड मुख्यालय स्थित सभागार में आज पंचायत समिति की सामान्य बैठक हुई। प्रखंड प्रमुख डॉ. गोविंद कुमार ने बैठक की अध्यक्षता की, जबकि प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) आलोक कुमार सिंह ने इसका संचालन किया। इसमें प्रखंड क्षेत्र के पंचायत प्रतिनिधियों, पंचायत समिति सदस्यों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में प्रखंड क्षेत्र में संचालित विकास योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति पर चर्चा हुई, जिसमें अधिकारियों ने संबंधित योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। बता दें कि मीटिंग के दौरान शिक्षा व्यवस्था में सुधार का आदेश दिया गया है। साथ ही प्राथमिक और उप प्राथमिक केंद्रों पर गरीब मरीजों के लिए चिकित्सा सुविधा और विभिन्न पंचायतों में जर्जर सड़क को जल्द मरम्मती का निर्देश है। इसके अलावा राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं पर विशेष निगरानी देकर क्रियान्वयन करने को लेकर आदेश पारित किया गया है। सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा इसके अलावा, पंचायत स्तर पर चल रहे विकास काम, पेयजल व्यवस्था, स्वच्छता अभियान, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क निर्माण, आवास योजना और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने पंचायत क्षेत्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने ग्रामीण सड़कों की मरम्मत, जलजमाव, पेयजल आपूर्ति, आवास योजना के लंबित मामलों और अन्य विकास संबंधी आवश्यकताओं को अधिकारियों के समक्ष रखा। जनप्रतिनिधियों ने लंबित योजनाओं को शीघ्र पूरा करने और विकास काम में तेजी लाने की मांग की। योजनाओं का फायदा अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का आदेश प्रखंड प्रमुख डॉ. गोविंद कुमार ने कहा कि पंचायत समिति की बैठक जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनता से जुड़े मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करें और विकास योजनाओं का फायदा अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं। बीडीओ आलोक कुमार सिंह ने विभिन्न विभागों की योजनाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की योजनाओं का पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन प्रशासन की प्राथमिकता है और विकास काम में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पंजाब में लड़कियों की शिक्षा, किशोर स्वास्थ्य और लैंगिक-संवेदनशील शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम उठाए है। सीएम भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में पढ़ रही लड़कियों के लिए भारत की सबसे बड़ी स्कूल-आधारित मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा पहलों में से एक की शुरुआत की है। 28 मई को मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर पंजाब सरकार ने राज्य के सभी 23 जिलों के सरकारी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में “मासिक धर्म स्वच्छता पाठ्यक्रम” के चरणबद्ध राज्य स्तरीय विस्तार की घोषणा की। पाठ्यक्रम का पहला सत्र इन सरकारी स्कूलों में 29 मई को आयोजित किया गया। इस पहल से 3,600 से अधिक सरकारी स्कूलों में पढ़ रही छठी से 10वीं कक्षा की 3.4 लाख से अधिक छात्राओं को सीधे तौर पर लाभ मिलने की उम्मीद है। मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा को कक्षाओं तक पहुंचाया यह पहल भगवंत मान सरकार द्वारा सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को आधुनिक और सभी के लिए सुलभ बनाने की दिशा में दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाती है। जहां लड़कियों को जागरूकता, आत्मविश्वास, सम्मान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य जानकारी तक पहुंच प्रदान की जा रही है। मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा को इतने बड़े स्तर पर कक्षाओं तक पहुंचाकर पंजाब सरकार ने एक ऐसे विषय को संबोधित करने का प्रयास किया है, जो पारंपरिक रूप से चुप्पी, झिझक, मिथकों और सामाजिक भय से घिरा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मासिक धर्म कभी भी लड़कियों की शिक्षा, आत्मविश्वास, भागीदारी, कल्याण या स्कूल जीवन में बाधा न बने। यह कार्यक्रम भारत के सर्वोच्च न्यायालय की उन टिप्पणियों के अनुरूप है, जिनमें यह स्वीकार किया गया है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता सीधे तौर पर किशोर लड़कियों की गरिमा, शिक्षा और समानता से जुड़ी हुई है। पंजाबी भाषा में तैयार किया “मेनस्ट्रुअल हाइजीन मैनेजमेंट” भगवंत मान सरकार ने यह कार्यक्रम वॉश यूनाइटेड के सहयोग से शुरू किया है, जो मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता के क्षेत्र में कार्यरत एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्था है। इस पहल के तहत “मेनस्ट्रुअल हाइजीन मैनेजमेंट” नामक एक संरचित पाठ्यक्रम के माध्यम से विशेष रूप से तैयार किए गए कक्षा सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिन्हें पंजाबी भाषा में तैयार किया गया है ताकि छात्राएं विषयवस्तु को बेहतर ढंग से समझ सकें। इस सत्र के अंतर्गत गाइड के मुख्य पात्र के रूप में 10 वर्षीय लड़की रूबी की कहानी प्रस्तुत की जाती है। साथ ही छात्राओं के लिए सीखने की प्रक्रिया को रोचक, सहभागितापूर्ण और सुरक्षित बनाने हेतु कक्षा में विचार-विमर्श तथा भागीदारी आधारित गतिविधियां भी शामिल की गई हैं। यह सत्र छात्राओं को मासिक धर्म और शारीरिक परिवर्तनों को समझने, स्वच्छता एवं स्वयं की देखभाल संबंधी आदतों के बारे में जानकारी देने, आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ाने तथा स्कूल एवं साथियों के बीच सहयोगी वातावरण तैयार करने पर केंद्रित हैं। 7,200 शिक्षकों को पहले ही प्रशिक्षण दिया राज्यभर में इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा लगभग 7,200 शिक्षकों को पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है ताकि वे इन सत्रों को कक्षाओं में सहज तरीके से संचालित कर सकें। यह कार्यक्रम एक संरचित तीन-सत्रीय हस्तक्षेप मॉडल के तहत कार्य करता है, जिसमें कहानी-आधारित शिक्षण और आयु-उपयुक्त मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा शामिल है। 100 स्टेट रिसोर्स पर्सन्स को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया भगवंत मान सरकार द्वारा राज्यभर में कार्यक्रम शुरू करने से पहले शिक्षकों को व्यापक स्तर पर तैयार किया गया है। लगभग 100 स्टेट रिसोर्स पर्सन्स को पहले मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया, जिसके बाद हजारों सरकारी स्कूल शिक्षकों को तैयार करने के लिए जिलों में क्रमिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। अधिकारियों ने कहा कि यह शिक्षक प्रशिक्षण सुरक्षित कक्षा वातावरण तैयार करने में मदद करेगा, जहां लड़कियां खुलकर सवाल पूछ सकेंगी और बिना शर्म या डर के सही जानकारी प्राप्त कर सकेंगी। 23 जिलों के 100 से अधिक सरकारी स्कूलों में शुरुआत इस पहल की शुरुआत पंजाब के सभी 23 जिलों के 100 से अधिक सरकारी स्कूलों में चलाए गए एक पूर्व पायलट कार्यक्रम के उत्साहजनक परिणामों को देखते हुए की गई है, जिसमें 45,000 से अधिक छात्र शामिल थे। पंजाब सरकार द्वारा साझा किए गए परिणामों के अनुसार, इस पायलट कार्यक्रम में शामिल 97 प्रतिशत शिक्षकों ने कहा कि वे नए पाठ्यक्रम के माध्यम से पीरियड्स संबंधी शिक्षा प्रदान करने में सहज महसूस करते हैं, जबकि 94 प्रतिशत ने सिफारिश की कि इस कार्यक्रम का विस्तार पूरे पंजाब में किया जाना चाहिए। लगभग 88 प्रतिशत शिक्षकों ने पाठ्यक्रम को पहले के तरीकों की तुलना में अधिक सरल और प्रभावशाली बताया, जबकि 80 प्रतिशत ने कक्षा सत्रों के दौरान छात्राओं की सक्रिय भागीदारी देखी। 'पाठ्यक्रम के माध्यम से लड़कियां खुलकर चर्चा कर सकीं' पायलट कार्यक्रम से जुड़े शिक्षकों ने कहा कि पाठ्यक्रम के माध्यम से लड़कियां बिना किसी झिझक के माहवारी के बारे में खुलकर चर्चा कर सकीं और उन्हें माहवारी से जुड़े सामाजिक भय को दूर करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। फरीदकोट की एक अध्यापिका जसप्रीत कौर ने कहा, “माहवारी के दौरान स्वच्छता संबंधी यह पाठ्यक्रम लड़कियों के लिए सवाल पूछने और अपने अनुभव साझा करने हेतु एक सुरक्षित वातावरण तैयार करता है। जिससे माहवारी से जुड़े मिथकों को प्रभावी ढंग से दूर किया जा सकता है। कहानियों, खेलों और दृश्य सामग्री के माध्यम से अपनाई गई इंटरैक्टिव पद्धति सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज और आत्मीय बनाती है तथा डर और झिझक की भावना को कम करती है। यह निश्चित रूप से आत्मसम्मान और सहभागिता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।” 'कार्यक्रम के कारण कक्षाओं में माहवारी पर खुलकर बातचीत करना संभव हुआ' अमृतसर की एक अन्य अध्यापिका मोनिका सूद ने कहा कि लड़कियों ने सत्रों में उत्साहपूर्वक भाग लिया और खुलकर यह साझा किया कि घरों और समुदायों में माहवारी को किस प्रकार देखा और समझा जाता है। उन्होंने कहा कि माहवारी स्वच्छता के प्रति जागरूकता की कमी किशोरियों के लिए कई स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां पैदा कर सकती है, जबकि यह मार्गदर्शन उन्हें अपने शरीर को आत्मविश्वास और सम्मान के साथ समझने में सहायता करता है। शिक्षकों ने यह भी बताया कि इस कार्यक्रम के कारण कक्षाओं में माहवारी पर खुलकर बातचीत करना संभव हो पाया है। मोगा की एक अध्यापिका सिल्वी ने कहा कि लड़कियाँ ही नहीं, बल्कि वे अध्यापिकाएँ भी जो पहले माहवारी पर बात करने में झिझक महसूस करती थीं, अब सत्रों के दौरान खुलकर और आत्मविश्वास के साथ इस विषय पर चर्चा करने लगी हैं। इन सत्रों ने छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ाया कार्यक्रम में भाग लेने वाली छात्राओं ने भी सत्रों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। संगरूर की 9वीं कक्षा की छात्रा कोमल प्रीत कौर ने कहा कि इन सत्रों ने उसका आत्मविश्वास बढ़ाया और उसे यह समझने में मदद की कि माहवारी एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है, कोई बीमारी नहीं। मोगा की एक अन्य छात्रा डिंपल रानी ने कहा कि उसे ये सत्र बहुत रोचक लगे और उसने घर जाकर अपनी मां के साथ अपने सीखने के अनुभव साझा किए। 10वीं कक्षा की छात्रा तनीशा ने कहा कि पाठ्यक्रम के कारण लड़कियां सत्रों के दौरान बिना शर्म महसूस किए खुलकर बात कर सकीं, क्योंकि इससे उनमें आत्मविश्वास विकसित हुआ। 'विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और कल्याण को बेहतर बनाना उद्देश्य' अधिकारियों ने बताया कि इस पहल के माध्यम से पंजाब न केवल माहवारी स्वास्थ्य जागरूकता का विस्तार कर रहा है, बल्कि किशोरियों के लिए अधिक संवेदनशील, प्रगतिशील और सहयोगात्मक शिक्षा व्यवस्था का निर्माण भी कर रहा है। सरकारी स्कूलों में माहवारी स्वास्थ्य शिक्षा को संस्थागत रूप देने के जरिए पंजाब सरकार विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और कल्याण को बेहतर बनाने, शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी को मजबूत करने तथा पूरे राज्य में अधिक जागरूक और सशक्त युवा पीढ़ी तैयार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इस पहल को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में किए जा रहे व्यापक शिक्षा सुधारों का हिस्सा भी माना जा रहा है, जिसके अंतर्गत पंजाब सरकार ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढाँचे के विकास, अध्यापक प्रशिक्षण, विद्यार्थियों के कल्याण तथा आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा आज, गुरुवार (4 जून) को अपने गृहक्षेत्र और पानीपत ग्रामीण विधानसभा के लोगों की शिकायतों तथा समस्याओं का निवारण करने के लिए एक विशेष जनता दरबार का आयोजन कर रहे हैं। इस जनता दरबार में पानीपत जिले के तमाम प्रशासनिक अधिकारी मुख्य रूप से मौजूद रहेंगे, ताकि जनता की समस्याओं का मौके पर ही त्वरित निपटारा किया जा सके। शिक्षा मंत्री का यह जनसुनवाई कार्यक्रम सेक्टर 13-17 स्थित BJP जिला कार्यालय श्याम कमल में आयोजित किया जा रहा है। गृहक्षेत्र में सीधे संवाद करेंगे मंत्री कैबिनेट मंत्री बनने के बाद महिपाल ढांडा लगातार अपने क्षेत्र की जनता से जुड़े रहने और उनके मुद्दों को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। इसी कड़ी में आज गुरुवार को आयोजित होने वाला यह जनता दरबार बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें पानीपत ग्रामीण और शहरी विधानसभा क्षेत्र के सैकड़ों लोग बिजली, पानी, सड़क, सफाई, परिवार पहचान पत्र (PPP), और शिक्षा से जुड़ी अपनी-अपनी शिकायतें लेकर पहुंचेंगे। शिक्षा मंत्री खुद एक-एक करके लोगों की समस्याएं सुनेंगे। चूंकि शिकायतें सीधे तौर पर प्रशासनिक विभागों से जुड़ी होती हैं, इसलिए सरकार के निर्देशों पर जिले के तमाम विभागों के बड़े अधिकारी (जैसे बिजली निगम, नगर निगम, जनस्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन के प्रतिनिधि) इस दौरान वहीं मौजूद रहेंगे। मौके पर ही समस्याओं का समाधान करने के निर्देश भाजपा कार्यालय श्याम कमल में सुबह से ही कार्यकर्ताओं और आम जनता के जुटने की उम्मीद है। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने पहले ही प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि जनता दरबार में आने वाली ऐसी शिकायतें जिनका समाधान तुरंत संभव है, उन्हें मौके पर ही निपटाया जाए और जिन समस्याओं में नीतिगत फैसले की जरूरत है, उनकी फाइलें तैयार कर उच्च स्तर पर भेजी जाए। जनता दरबार के जरिए आम लोगों को अपनी बात सीधे सरकार और प्रशासन के सामने रखने का एक बड़ा मंच मिलेगा।
हरियाणा में सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने राज्य के 582 सरकारी हाई और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों की बाउंड्री वॉल की मरम्मत के लिए संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) से विस्तृत रिपोर्ट और लागत अनुमान तलब किया है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय, पंचकूला द्वारा प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। निदेशालय के अनुसार हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) से प्राप्त सूची के परीक्षण में पाया गया कि 582 स्कूल ऐसे हैं, जहां बाउंड्री वॉल की मरम्मत की आवश्यकता है, लेकिन सूची में मरम्मत की अनुमानित लागत का उल्लेख नहीं किया गया है। इसके चलते अब संबंधित स्कूलों की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि मरम्मत कार्य के लिए सही लागत का आकलन किया जा सके। PWD करेगा लागत का आकलन पत्र में कहा गया है कि जियो टैगिंग और अन्य दस्तावेज मिलने के बाद हरियाणा पीडब्ल्यूडी (भवन एवं सड़क) विभाग द्वारा मरम्मत कार्य की लागत का अनुमान तैयार किया जाएगा। CCWF फंड से भी हो सकती है मरम्मत निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी स्कूल की बाउंड्री वॉल मरम्मत की लागत एक लाख रुपए से कम है और कंसोलिडेटेड चाइल्ड वेलफेयर फंड (CCWF) में पर्याप्त राशि उपलब्ध है, तो मरम्मत कार्य उसी फंड से कराया जा सकेगा। यदि फंड उपलब्ध नहीं है तो संबंधित अनुमान और दस्तावेज निदेशालय को भेजे जाएंगे। 3 दिन में मांगी रिपोर्ट शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि मांगे गए दस्तावेज और जानकारी तीन दिन के भीतर उपलब्ध कराई जाए, ताकि आगे की कार्रवाई जल्द शुरू की जा सके।
गुरमत कैंप : राग और शबद के मेल से नई पीढ़ी सीख रही सिख धर्म की मूल शिक्षाएं
कोरा ज्ञान इंसान के दिमाग तक जाता है, लेकिन जब वही ज्ञान ‘राग’ (संगीत) और ‘शबद’ (शब्द) के मेल से कीर्तन बनकर निकलता है, तो वह सीधे इंसान के दिल और आत्मा को छूता है। इसीलिए इसे धुर की बाणी (परमात्मा के घर से आई वाणी) कहा जाता है। कुछ इस तरह सेंट्रल टाउन स्थित गुरुद्वारा दीवान अस्थान में निशुल्क गुरमत कैंप के दौरान सिख धर्म की मूल शिक्षाओं और कलाओं से रूबरू करवाया गया। गुरमत कैंप में 5 साल के छोटे बच्चों से लेकर 20 साल तक के किशोरों ने बढ़-चढ़कर अपना पंजीकरण करवाया है। आयोजकों ने बताया कि इस आयु वर्ग में बच्चों का मानसिक विकास तेजी से होता है, इसलिए उन्हें अपनी संस्कृति और धर्म की सही जानकारी देना बेहद जरूरी है। गुरुद्वारा साहिब का परिसर बच्चों की रौनक और उत्साह से सराबोर नजर आया। मौके पर प्रबंधक कमेटी के प्रधान मोहन सिंह ढींडसा, जनरल सेक्रेटरी गुरमीत सिंह बिट्टू, सुरिंदर सिंह विरदी, मक्खन सिंह, बावा गाबा, जसकीरत जस्सी, हरमनजोत सिंह, गुरनीत सिंह, अनमोल सिंह, परमिंदर सिंह, हरप्रीत सिंह, जसदीप मौजूद रहे। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी केवल एक आध्यात्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह संगीत और अध्यात्म का एक अनूठा संगम है। सभी 31 रागों का अपना एक विशेष समय, मिजाज और भावना होती है। गुरु साहिबान ने हर भावना को ईश्वर से जोड़ने के लिए सही राग का चुनाव किया। जैसे- राग आसा : यह सुबह के समय गाया जाता है, जो मन में आशा और उत्साह जगाता है। राग बिलावल : यह खुशी और आनंद को व्यक्त करता है। राग सारंग : यह ईश्वर के विरह और तड़प को दर्शाता है। गुरु ग्रंथ साहिब जी में यह कड़ा नियम है कि जो बाणी जिस राग के नीचे दर्ज है, उसे उसी राग के सुरों में ही गाया जाना चाहिए। हार्मोनियम व तबला : बच्चों को गुरबानी कीर्तन से जोड़ने के लिए पेशेवर शिक्षक हरमोनियम और तबला बजाना सिखा रहे। दस्तारबंदी : लड़कों को दस्तार सजाने की ट्रेनिंग मिल रही है। गुरमुखी और नितनेम क्लास: बच्चों को गुरमुखी लिपि का शुद्ध उच्चारण और लेखन सिखाया जा रहा है, ताकि वे खुद ‘नितनेम’ का पाठ शुद्धता के साथ कर सकें। गौरवशाली इतिहास : बच्चों को सिख गुरु साहिबान के जीवन, उनके महान बलिदानों से अवगत कराया जा रहा है, ताकि वे अपने इतिहास पर गर्व कर सकें।
लक्ष्मण डामोर को संघ शिक्षा वर्ग में सर्वाधिकारी दायित्व
भास्कर न्यूज़ | बांसवाड़ा वागड़ क्षेत्र के सुरजीपाड़ा आंबापुरा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण डामोर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चित्तौड़ प्रांत के संघ शिक्षा वर्ग में सर्वाधिकारी का दायित्व सौंपा गया है। संगठन में सर्वाधिकारी को वर्ग संचालन, अनुशासन, व्यवस्था और प्रशिक्षण गतिविधियों के समन्वय की प्रमुख जिम्मेदारी निभानी होती है। डामोर वर्ष 1974 में नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर्वोच्च प्रशिक्षण तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।वे लंबे समय से जनजाति समाज में राष्ट्रभावना, सामाजिक समरसता और संगठन निर्माण के कार्य से जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे आंबापुरा खंड संघ चालक के रूप में स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। वर्ग में चित्तौड़ प्रांत के विभिन्न जिलों से 200 से अधिक प्रशिक्षणार्थी शामिल हुए। संचालन के लिए 12 सदस्यों की टोली, 90 शिक्षक व प्रबंधक जुटे रहे और 327 लोगों के ठहराव, भोजन व औषधालय की व्यवस्था की गई। समापन समारोह में नारायण गमेती मुख्य वक्ता रहे।
बात खरी है... इसमें आप देखेंगे बिहार के नेताओं और अफसरों के बीच अंदरखाने क्या चल रहा है, और दिनभर की ऐसी बड़ी हलचल जो आपको हंसाएगी भी और जिम्मेदारों को आइना भी दिखाएंगी। ऊपर VIDEO पर क्लिक करें...
प्रयागराज में कोचिंग संस्थानों पर हुई कार्यवाही को लेकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने पढ़ा और फायर डिपार्टमेंट पर कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है उन्होंने ट्वीट कर दोनों ही विभागों की फायर ऑडिट की मांग की है उन्होंने लगातार तीन ट्वीट किया जिसमें उन्होंने कहा हम आज ही ‘प्रयागराज विकास प्राधिकरण’ व ‘अग्निशमन विभाग’ के FIRE AUDIT की मांग करते हैं। ट्वीट के बाद ही प्रयागराज के मेजा विधानसभा के विधायक संदीप पटेल और सपा नेता संदीप यादव और महानगर जिला अध्यक्ष इफ्तार हुसैन और अन्य कार्यकर्ता पड़ा दफ्तर पहुंचे जहां उन्होंने बिल्डिंग में लगे अग्निशमन उपकरणों की जांच की और साथ ही पीडिए के उपाध्यक्ष ऋषिराज से मिलकर आपत्ति दर्ज कराई । अब पूरा ट्वीट पढ़िए जिस घपले-घोटाले की सज़ा शिक्षामंत्री को मिलनी चाहिए उसकी सज़ा शिक्षक को क्यों दी जा रही है। भाजपा अपनी कमियों, कमज़ोरियों और भ्रष्टाचार के लिए हमेशा ही किसी और को निशाना बनाती है। कभी ‘दानाजीवी’ तथाकथित पत्रकारों से मीडियाबाज़ी करवाकर शिक्षा से जुड़े यूट्यूबर्स पर बेबुनियाद आरोप लगवाती है और कभी उनके शैक्षिक संस्थान बंद करवाती है। इसके लिए भाजपा संस्थान के भवनों के अवैध निर्माण का बहाना बनाती है। अगर कोई अवैध निर्माण हुआ है तो हम ‘प्रयागराज विकास प्राधिकरण’ के उन सभी अधिकारियों के निलंबन और उनसे वसूली की मांग करते हैं, जिनके समय में ये निर्माण हुआ या फिर जिन्होंने आज तक उस पर आपत्ति नहीं की। 24 घंटे में इस कार्रवाई की रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाए। भाजपा शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थियों की विरोधी है। देश के इतिहास में अब ये पहली बार होगा कि शिक्षा के मुद्दे पर चुनाव लड़ा जाएगा। प्राइमरी के सरकारी स्कूलों को बंद करने; यूनिफ़ॉर्म, स्टेशनरी, मिड-डे मील जैसे घोटालों से लेकर कॉपी की हेराफेरी व भ्रष्ट-मूल्यांकन, पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में आरक्षण की हक़मारी, हर संभव परीक्षा धांधली, रिजल्ट में बेईमानी व कोर्ट में परिणाम फँसाने की भाजपाई चालबाज़ी जैसे विषयों पर चुनाव होगा और जनता भाजपा को हमेशा के लिए बाहर कर देगी। हम उप्र की विधानसभा, प्रमुख सचिव से लेकर सभी छोटे-बड़े सरकारी कार्यालयों व फ़ायर ब्रिगेड के सभी स्टेशनों के फ़ायर ऑडिट की पुरज़ोर मांग करते हैं। भाजपा सरकार लोगों के काम-कारोबार-व्यापार को अग्निशमन के नियम-क़ानून न मानने के नाम पर ब्लैकमेल करती है और ख़ुद उनका उल्लंघन करती है। अगर कहीं कोई कमी है भी तो सुधार के लिए कुछ समय का नोटिस दिया जाए न कि तालाबंदी कर दी जाए। ये अन्याय है। भाजपा और उनके अनरजिस्टर्ड संगी-साथियों के कार्यालयों की भी जन-प्रतिनिधियों व विश्वसनीय निष्पक्ष मीडिया के सामने वैध-अवैध की जांच हो। कमीशनख़ोर भाजपा व्यापार नहीं, भ्रष्टाचार की हिमायती है। पढ़िए प्रयागराज में सपा नेता क्या बोले मेजा विधायक संदीप पटेल का कहना है कि वर्तमान सरकार तानाशाही रवैया अपनाकर जनता की आवाज को दबाना चाहती है। प्रशासन ने नियमों का हवाला देकर भेदभावपूर्ण तरीके से कोचिंगों पर तालाबंदी की है, जिससे हज़ारों नौजवानों का भविष्य और रोजगार दांव पर लग गया है। कोचिंग संचालकों को सुधार का मौका दिया जाना चाहिए था। इसके साथ ही, उन्होंने पीडीए की खुद की बिल्डिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। उन्होंने मांग की कि दूसरों पर कार्रवाई करने से पहले खुद पीडीए की बिल्डिंग का फायर ऑडिट होना चाहिए और इसके निर्माण व नक्शे की पूरी ईमानदारी से जांच की जानी चाहिए। सपा नेता संदीप यादव ने कहा कि ने PDA खुद सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहा है; उनके अपने फायर ब्रिगेड और गैस उपकरणों में कमियां हैं। उनका कहना है कि यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित है। चूंकि ये कोचिंग संचालक नीट (NEET) पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन में खड़े थे, इसलिए सरकार उन्हें निशाना बना रही है। नेता ने चेतावनी दी कि राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर इन दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त जांच की जाएगी। उन्होंने अंत में कहा कि इलाहाबाद (प्रयागराज) शिक्षा का एक बड़ा केंद्र है, जहां लाखों छात्र अपने भविष्य का सपना लेकर आते हैं। कोचिंग संस्थानों को बंद करना युवाओं के रोजगार और शिक्षा के अधिकार पर हमला है।
'छात्राएं घर से बाहर रहकर पढ़ाई कर रही हैं तो उन्हें अपनी शिक्षा और करियर को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। किसी भी प्रकार के प्रलोभन, गलत संगति और ऑनलाइन ठगी से सावधान रहना चाहिए। किसी भी प्रकार की छेड़खानी, अभद्र टिप्पणी, उत्पीड़न या मानसिक प्रताड़ना की स्थिति में चुप नहीं रहना चाहिए। ऐसी घटनाओं की तुरंत पुलिस को सूचना देनी चाहिए ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।' ये बातें औरंगाबाद में कुटुंबा थाना की महिला दरोगा अंजली कुमार ने बुधवार को छात्राओं से कही। दरअसल, कुटुंबा प्रखंड मुख्यालय के अंबा स्थित महिला कॉलेज मुड़िला में पुलिस दीदी एवं नारी सशक्तिकरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को शिक्षा, सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य दिनेश कुमार सिंह ने की, जबकि संचालन प्रो. सबीता सिंह ने किया। दरोगा बोलीं- सोशल मीडिया का प्रभाव युवाओं के लिए चुनौती अंजली कुमारी ने छात्राओं से कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव युवाओं के लिए चुनौती बनता जा रहा है। उन्होंने छात्राओं को फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसी सोशल मीडिया साइटों के अनावश्यक उपयोग से बचने और अपने भविष्य और निर्धारित लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए अनुशासन, शिक्षा और आत्मविश्वास बेहद जरूरी हैं। दारोगा अंजली कुमारी ने कहा कि प्रत्येक बेटी के लिए उसके माता-पिता सबसे बड़े शुभचिंतक और भरोसेमंद मार्गदर्शक होते हैं। महिला सुरक्षा कानून और अधिकारों की दी जानकारी कार्यक्रम के दौरान महिला सुरक्षा और नारी सशक्तिकरण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। दारोगा अंजली कुमारी ने कहा कि छात्राओं को महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों, हेल्पलाइन नंबरों तथा पुलिस विभाग की ओर से उपलब्ध कराई जा रही विभिन्न सहायता सेवाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अंजली ने कहा कि ‘पुलिस दीदी’ कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं और पुलिस के बीच विश्वास का संबंध स्थापित करना और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना है। कार्यक्रम में नारी शिक्षा के महत्व पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि एक शिक्षित महिला न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शिक्षा, आत्मविश्वास और कानूनी जागरूकता महिलाओं को हर चुनौती का सामना करने की शक्ति प्रदान करती है।
उन्नाव को मिली नई प्रभारी मंत्री:उच्च शिक्षा मंत्री रजनी तिवारी को मिली जनपद की जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्नाव जनपद के लिए नई प्रभारी मंत्री की नियुक्ति की है। हरदोई की शाहाबाद विधानसभा सीट से विधायक और उच्च शिक्षा मंत्री रजनी तिवारी को उन्नाव का प्रभारी मंत्री बनाया गया है। बुधवार को भाजपा सरकार द्वारा जारी सूची में उनके नाम की घोषणा की गई। इस घोषणा के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक महकमे में नई जिम्मेदारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रभारी मंत्री के तौर पर रजनी तिवारी जनपद में सरकारी योजनाओं की समीक्षा, विकास कार्यों की निगरानी और विभिन्न विभागों के कार्यों का मूल्यांकन करेंगी। वह जिला योजना समिति की बैठकों की अध्यक्षता भी करेंगी और जनपद में संचालित विकास परियोजनाओं की प्रगति पर विशेष ध्यान देंगी। सूत्रों के अनुसार, प्रभारी मंत्री के रूप में उनका पहला उन्नाव दौरा गुरुवार को संभावित है। हालांकि, अभी तक आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं हुआ है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जिला प्रशासन उनके संभावित आगमन को देखते हुए आवश्यक व्यवस्थाओं में जुट गया है। उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी रजनी तिवारी प्रदेश की राजनीति में एक सक्रिय और अनुभवी जनप्रतिनिधि हैं। वह कई बार विधायक चुनी जा चुकी हैं और वर्तमान में योगी सरकार में उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। अब उन्नाव जिले की जिम्मेदारी मिलने के बाद विकास योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। जनपद के भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रजनी तिवारी को प्रभारी मंत्री बनाए जाने का स्वागत किया है। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि उनके अनुभव का लाभ जिले को मिलेगा और केंद्र व प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो सकेगा। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, प्रभारी मंत्री के आगमन पर विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सड़क और अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की समीक्षा बैठकें आयोजित की जा सकती हैं। इसके अलावा जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ संवाद कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं।
सीकर में स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आज सीकर में आक्रोश रैली निकाली गई। आक्रोश रैली सीकर के ढाका भवन से शुरू होकर कल्याण सर्किल होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट में घुसने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। SFI के जिलाध्यक्ष महिपाल गुर्जर ने कहा कि पिछले एक महीने में नीट, CUET, SSC जैसी बड़ी परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के मामले सामने आए है। नीट परीक्षा में तो 22 लख स्टूडेंट्स के साथ धोखा हुआ। SSC परीक्षा में कई सेंटर्स पर कंप्यूटर हैक करके नकल करवाने के मामले सामने आए लेकिन कोई भी सुध लेने वाला नहीं है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करके आराम से बैठे हैं। उन्हें शर्मिंदा होकर नैतिकता मानते हुए अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। एसएफआई की ओर से आज हस्ताक्षर अभियान भी शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत हजारों युवाओं से हस्ताक्षर करवाकर इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा साथ ही मांग की जाएगी कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। शेखावाटी यूनिवर्सिटी की इकाई अध्यक्ष सुशील चौधरी ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामले सामने आने के बाद शिक्षा मंत्रालय के ऑफिस में आगजनी की घटना सामने आई। इसका एक ही मतलब है कि अब सबूत मिटाने का काम हो रहा है।
सहरसा के विकास भवन में जिला बीस सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिले के प्रभारी मंत्री एवं बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने की। इसमें जिले के जनप्रतिनिधियों, विधायकों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में विकास योजनाओं की प्रगति, बाढ़ पूर्व तैयारियों और शिक्षा व्यवस्था सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि सभी विभागों की योजनाओं और कार्यों की समीक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि आगामी तीन महीनों के बाद फिर से समीक्षा बैठक आयोजित कर योजनाओं की प्रगति का आकलन किया जाएगा, ताकि विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके। अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रभारी मंत्री ने जिले में संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों की पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने का निर्देश दिया, ताकि आपदा की स्थिति में लोगों को परेशानी न हो। शिक्षा व्यवस्था को लेकर मंत्री ने बताया कि बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए गुरुकुलम विद्यापीठ की स्थापना की दिशा में रणनीति तैयार की जा रही है। इस संबंध में जल्द ही व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श कर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना उद्देश्य संस्कृत विद्यालयों और मदरसों के संबंध में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग का उद्देश्य दोनों संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना है, ताकि सभी शिक्षण संस्थान समान रूप से आगे बढ़ सकें। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में कुछ संस्कृत विद्यालयों को बंद किया गया है और मदरसों की जांच भी कराई जा रही है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच का उद्देश्य किसी संस्था को निशाना बनाना नहीं, बल्कि धरातल पर उपलब्ध सुविधाओं, संसाधनों और वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त करना है। शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सरकारी सहायता और संसाधनों का सही उपयोग हो तथा सभी शैक्षणिक संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वातावरण विकसित किया जा सके।
प्रशासनिक फेरबदल के तुरंत बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इसे 'कवर-अप' (मामले को दबाने की कवायद) करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे अधिकारियों पर गाज गिराकर असल दोषी, यानी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बचाने की कोशिश की जा रही है।
शिक्षा निदेशालय में मचा हड़कंप:जोधपुर की विवादित जमीन के मामले में जेडी एलीमेंट्री कमला निलंबित
शिक्षा निदेशालय में उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय की संयुक्त निदेशक कमला कालेर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। अतिरिक्त मुख्य सचिव (शिक्षा) राजेश यादव ने निलंबन के ये आदेश जारी किए हैं। मामला जोधपुर विकास प्राधिकरण की 10 बीघा विवादित जमीन और उसकी जांच रिपोर्ट में कुछ गलत तथ्य देने का है। चूंकि कमला कालेर संयुक्त निदेशक स्तर की अधिकारी हैं, इसलिए उनका निलंबन सरकार के स्तर से किया गया है। लेकिन चर्चा है कि इस खेल में अभी कई और चेहरों का बेनकाब होना और निलंबित होना तय है। अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव ने ‘भास्कर’ से बातचीत में कमला कालेर के निलंबन की पुष्टि की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच कमेटी में शामिल बाकी लोगों को भी निलंबित करने के लिए सक्षम स्तर को निर्देश दे दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, पूरा विवाद जोधपुर की एक 10 बीघा की कीमती जमीन से जुड़ा है, जो जेडीए और अन्य पक्षों के बीच विवादित चल रही थी। इस जमीन पर एक स्कूल का होना भी बताया जा रहा था। मामले की हकीकत जानने के लिए शिक्षा विभाग ने संयुक्त निदेशक कमला कालेर की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने मौके का मुआयना किया और अपनी रिपोर्ट तैयार की, लेकिन इस रिपोर्ट ने मामले को सुलझाने के बजाय और उलझा दिया। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में ऐसे तथ्य दिए, जिसका शिक्षा विभाग से कोई लेना-देना नहीं था। जैसे ही यह रिपोर्ट मुख्यालय पहुंची, उच्च अधिकारी तमतमा गए। विभाग का मानना था कि रिपोर्ट में जानबूझकर गलत तथ्य दिए गए। इन पर भी लटकी निलंबन की तलवार कमला कालेर की अगुवाई वाली इस जांच कमेटी में दो अन्य विभागीय कर्मचारी भी शामिल थे, जिन पर अब गाज गिरना तय माना जा रहा है। इसमें एक सेक्शन ऑफिसर, एक सहायक प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हैं। सूत्र बताते हैं कि इन दो के अलावा भी कुछ और कार्मिक सरकार के निशाने पर हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव के कड़े रुख के बाद माना जा रहा है कि इन दोनों के अलावा भी विभाग के कुछ अन्य रसूखदारों पर इस विवादित जमीन मामले में गाज गिर सकती है। इधर निदेशालय का रवैया दिलचस्प बात यह है कि राजधानी से संयुक्त निदेशक के निलंबन के इतने बड़े आदेश जारी होने के बावजूद बीकानेर स्थित शिक्षा निदेशालय इस पूरे मामले और आदेश की कॉपी को मीडिया और जनता से दबाने की पुरजोर कोशिश में जुटा रहा। लेकिन ‘भास्कर’ के खोजी रुख के आगे अफसरों की यह गोपनीयता धरी की धरी रह गई।
गुणात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कार्यशाला शुरू
लुधियाना |बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और गुणात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नोबल फाउंडेशन की ओर से वार्षिक शिक्षक कार्यशाला के 12वें संस्करण का भव्य शुभारंभ किया गया। तीन दिनों तक चलने वाली इस विशेष कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि पीसीएस अधिकारी व लुधियाना की असिस्टेंट कमिश्नर जनरल पायल गोयल ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस बार कार्यशाला में संस्था के विभिन्न स्कूलों से करीब 130 अध्यापिकाएं हिस्सा ले रही हैं। तीन दिवसीय सत्र के दौरान शिक्षिकाओं को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, बाल मनोविज्ञान, प्रभावी कक्षा प्रबंधन और नवीन तकनीकों की जानकारी दी जाएगी ताकि वे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास कर सकें। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पायल गोयल ने कहा कि बच्चों के भविष्य निर्माण और शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए संस्था जिस समर्पण भावना से जमीनी स्तर पर कार्य कर रही है वह वास्तव में प्रेरणादायक है।
बात खरी है... इसमें आप देखेंगे बिहार के नेताओं और अफसरों के बीच अंदरखाने क्या चल रहा है, और दिनभर की ऐसी बड़ी हलचल जो आपको हंसाएगी भी और जिम्मेदारों को आइना भी दिखाएंगी। ऊपर VIDEO पर क्लिक करें...
सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की मांगों और विचारधारा का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मंगलवार को खुद इसकी जानकारी दी। वांगचुक ने वीडियो मैसेज जारी कर कहा- मैंने CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके से बात की। उनसे बात करके मुझे लगा कि उनकी मंशा गलत नहीं है। वे एक देशप्रेमी हैं और बदलाव चाहते हैं। वांगचुक ने कहा- अभिजीत 6 जून को दिल्ली में लोगों को बुला रहे हैं। अगर 5 जून तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया तो मैं भी जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन में शामिल होऊंगा। 6 जून को भारत लौटेंगे अभिजीत, एयरपोर्ट से सीधे थाने जाएंगे अभिजीत दिपके 6 जून को अमेरिका से भारत लौटेंगे। उन्होंने 1 जून को सोशल मीडिया पर बताया था कि वे जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करेंगे। अभिजीत ने बताया कि वे एयरपोर्ट से सीधे पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाएंगे और प्रदर्शन की इजाजत मांगेंगे। उन्होंने लोगों से एयरपोर्ट पर मिलने और प्रदर्शन में शामिल होने की अपील भी की। अभिजीत अमेरिका में पढ़ रहे, AAP में काम कर चुके 30 साल के अभिजीत दिपके महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल वो अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। अभिजीत 2020 से 2022 तक केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट रहे हैं। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में अभिजीत AAP के लिए वायरल मीम बेस्ड ऑनलाइन प्रचार का मटेरियल बनाते थे। एक इंटरव्यू में अभिजीत ने बताया कि उन्होंने निजी जिंदगी और आर्थिक स्थिरता के लिए AAP छोड़कर बोस्टन यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया था। एडमिशन मिल गया, तो वे अमेरिका शिफ्ट हो गए।अभिजीत किसान आंदोलन से लेकर महंगाई जैसे राजनीतिक मुद्दों पर X अकाउंट पर केंद्र सरकार और पीएम पर निशाना साधते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच कराने की याचिका खारिज की सुप्रीम कोर्ट ने 24 मई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े व्यक्तियों की गतिविधियों की CBI से जांच करवाने की मांग पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील एनके गोस्वामी ने कहा कि CJP, ज्यूडीशियरी की इमेज खराब कर रही है। इसके बाद CJI और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने कहा, ‘इसे इतनी भावुकता से मत लें।’ पूरी खबर पढ़ें.. --------------------- यह खबर भी पढ़ें…. बेरोजगारों को कॉकरोच कहना क्या सही:पूर्व CJI बोले- जज भी इंसान, कोई शब्द निकल जाता है, सोशल मीडिया पर गलत मतलब निकाला जाता है पूर्व सीजेआई बीआर गवई ने गुरुवार को दैनिक भास्कर को इंटरव्यू दिया। इस दौरान उनसे पूछा गया कि सुप्रीम कोर्ट में बेरोजगारों को 'कॉकरोच' और 'पैरासाइट' जैसे शब्द कहे गए, आप इसे कैसे देखते हैं? इस पर उन्होंने कहा- इस बात को बेवजह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। जज भी इंसान हैं। सुनवाई के दौरान बिना किसी बुरे इरादे के अनजाने में कोई शब्द निकल जाता है। पूरी खबर पढ़ें…
NEET-CUET विवाद- NSUI ने किया प्रदर्शन:शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका, पुलिस से झड़प भी हुई
मथुरा में मंगलवार शाम करीब 6 बजे एनएसयूआई और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नीट-यूजी 2026 और सीयूईटी-यूजी 2026 परीक्षाओं से जुड़े विवादों के विरोध में प्रदर्शन किया। मथुरा के होली गेट पर हुए इस प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की झड़प भी हुई। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। उनका आरोप था कि इन परीक्षाओं में धांधली हुई है, जिससे छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की कार्यकर्ताओं ने जैसे ही शिक्षा मंत्री का पुतला जलाने का प्रयास किया, मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। पुलिस ने पुतला छीनने का प्रयास किया, जिससे दोनों पक्षों के बीच छीना-झपटी हुई। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच काफी देर तक खींचतान दिखाई दे रही है। पुलिस के प्रयासों के बावजूद, प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री का पुतला दहन कर दिया। इसके बाद उन्होंने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उन पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। कार्रवाई होने तक आंदोलन चलता रहेगा उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव अनाम धन्य तिवारी एडवोकेट ने कहा कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी अनियमितताओं से छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर हुआ है। युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष दुर्गेश बघेल और एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष हर्ष चौरसिया ने संयुक्त रूप से कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा और दोषियों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन चलता रहेगा। इस प्रदर्शन में दीपक पाठक, उदय तिवारी, गौरव कश्यप, शिवम चतुर्वेदी, राहुल पाल, राजू फारूकी, पूरन सिंह, अनवर फारूकी, दीपक मौर्य सहित बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ता मौजूद थे।
पंजाब पुलिस में बड़े स्तर पर हुए फेरबदल के बाद अब राज्य सरकार ने सात आईएएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। जारी आदेशों के अनुसार, मनजीत बराड़ को मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं, कुलवंत सिंह को स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक पद से हटाकर उच्च शिक्षा (हायर एजुकेशन) विभाग का निदेशक नियुक्त किया गया है। सरकार ने प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह फेरबदल किया है। आदेश की कॉपी अब जानिए कहा दी गई इन अधिकारियों को तैनाती 1. मनजीत सिंह बरार को स्थानीय सरकार विभाग के प्रशासनिक सचिव पद से हटाकर सचिव, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग नियुक्त किया गया है। 2.घनश्याम थोरी को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) पंजाब के मिशन निदेशक व चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर प्रशासनिक सचिव, स्थानीय सरकार विभाग बनाया गया है। 3. कुलवंत सिंह को निदेशक, स्थानीय सरकार, पंजाब के पद से हटाकर निदेशक, उच्च शिक्षा, पंजाब नियुक्त किया गया है। 4.साक्षी साहनी को मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), पंजाब नियुक्त किया गया है। वह अपने मौजूदा पद मुख्य प्रशासक, पंजाब शहरी नियोजन एवं विकास प्राधिकरण (पुडा) का अतिरिक्त प्रभार भी संभालती रहेंगी। 5.जसप्रीत सिंह को निदेशक, उद्योग एवं वाणिज्य के साथ-साथ प्रबंध निदेशक, पंजाब सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी निगम लिमिटेड (पंजाब इन्फोटेक) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। 6.हरसुहिंदर पाल सिंह बराड़ को निदेशक, उच्च शिक्षा और पंजाब इन्फोटेक के अतिरिक्त प्रभार से हटाकर निदेशक, स्थानीय सरकार, पंजाब नियुक्त किया गया है। 7.रुबिंदरजीत सिंह बरार को प्रबंध निदेशक, पंजाब लघु उद्योग निर्यात निगम के साथ-साथ प्रबंध निदेशक, पंजाब राज्य औद्योगिक विकास निगम (PSIDC) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वह अतिरिक्त सचिव, स्थानीय सरकार विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी संभालते रहेंगे
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच शिक्षा, पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तीकरण, भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था, ग्रामीण विकास और स्थानीय स्वशासन को अधिक प्रभावी बनाने के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों नेताओं ने राज्यों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, विद्यालयी शिक्षा के सुदृढ़ीकरण, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और पंचायतों को मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। नई शिक्षा नीति और डिजिटल शिक्षा पर हुई चर्चा मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड में नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और विद्यालयी शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों तक आधुनिक संसाधन पहुंचाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। पंचायतों और स्थानीय स्वशासन को मजबूत बनाने पर जोर बैठक में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को अधिक प्रभावी बनाने के विषय पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने पंचायतों को विकास की मुख्य इकाई के रूप में मजबूत करने की आवश्यकता बताई। संस्कृत और भारतीय संस्कृति के संरक्षण पर विचार-विमर्श मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा और पारंपरिक ज्ञान की विरासत को संरक्षित और संवर्धित करने के लिए राज्यों के बीच अनुभव साझा करना महत्वपूर्ण है। इस दिशा में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। राजस्थान मंत्री ने उत्तराखंड के प्रयासों की सराहना की राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर ने शिक्षा, संस्कृति संरक्षण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उत्तराखंड सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने दोनों राज्यों के बीच शिक्षा, संस्कृति और स्थानीय स्वशासन से जुड़े विषयों पर सहयोग और समन्वय को और मजबूत बनाने पर बल दिया।
सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने जिले के 59 भवनविहीन विद्यालयों के लिए नवीन भवनों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की है। ये स्कूल अब तक जुगाड़ में किराये पर या दूसरे स्कूल व आंगनबाड़ी भवनों में संचालित थे। नए स्कूल भवन का निर्माण डीएमएफ, समग्र शिक्षा व स्कूल शिक्षा विभाग के मद से बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा पर्यटन व संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के भवनविहीन स्कूलों के लिए नए भवन की स्वीकृति दी गई है। शिक्षा व्यवस्था सुधारने शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अवसर प्रदान करने प्रशासन प्रयास कर रहा है। DMF मद से बनेंगे 25 स्कूल भवन जिला खनिज न्यास (डी.एम.एफ.) मद से उदयपुर में 4, लखनपुर में 6 तथा मैनपाट में 15 स्कूल भवनों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है। इनमें उदयपुर ब्लॉक के प्रायमरी स्कूल कुडेली एवं साल्ही तथा मिडिल स्कूल जजगी एवं मतरेंगा शामिल हैं। इसी प्रकार लखनपुर ब्लॉक में प्रायमरी स्कूल मुकुन्दपुर, उरांवपारा, लेदराडांड, पटकुरा तथा मिडिल स्कूल मांजा एवं पर्री शामिल है। मैनपाट ब्लॉक में प्रायमरी स्कूल कोटछाल, ढोढ़ाडीह, मेछारवना, चौनपुर, रंगुवापारा, बैगापारा तथा मिडिल स्कूल भेलतराई, ढकनापारा, कदनई, रोपाखार, मालतीपुर, बरिमा, महारानीपुर, समनिया, उड़ूममकेला शामिल हैं। समग्र शिक्षा मद से बनेंगे 20 भवन समग्र शिक्षा मद अंतर्गत लुंड्रा ब्लॉक के 11, बतौली ब्लॉक के 4 तथा सीतापुर ब्लॉक के 5 स्कूल भवन बनेंगे। लुंड्रा ब्लॉक के प्रायमरी स्कूल कोसमपारा, खालपारा, चिटकानीडाड़, पडलीपारा, कोरवापारा, बालक आश्रम ससोली, जटासेमर, भिलाईकला, बदगरी, गंगापुर तथा मिडिल स्कूल पतरा डीह शामिल हैं। बतौली ब्लॉक के प्रायमरी स्कूल बाघपानी एवं पथरई तथा मिडिल स्कूल ललाती एवं घोड़ापारा को भवन स्वीकृति मिली है। सीतापुर ब्लॉक के प्रायमरी स्कूल तेंदूडांड, केनापारा, टोकोपारा एवं होकड़ोपारा तथा मिडिल स्कूल छत्रीकोना के लिए नवीन भवन स्वीकृत किए गए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग मद से बनेंगे 14 भवन स्कूल शिक्षा विभाग (डी.पी.आई.) से 4 प्रायमरी व 10 मिडिल स्कूल भवन स्वीकृत किए गए हैं। इसमें अंबिकापुर ब्लॉक के प्रायमरी स्कूल जगदीशपुर तथा मिडिल स्कूल नवपाराकला, नवानगर, केदारपुर शामिल हैं। लखनपुर ब्लॉक के मिडिल स्कूल खर्राडाड तथा सीतापुर ब्लॉक में मिडिल स्कूल सोनतराई शामिल है। मैनपाट ब्लॉक अंतर्गत मिडिल स्कूल रजखेता, उडुमकेला, जामडीह में नए भवन स्वीकृत किए गए हैं। वहीं उदयपुर ब्लॉक में प्रायमरी स्कूल कवलगिरी एवं मिडिल स्कूल बासेन तथा बतौली ब्लॉक अंतर्गत प्रायमरी स्कूल नवापारा तथा लुण्ड्रा ब्लॉक अंतर्गत प्रायमरी स्कूल मंजुरघुटरा एवं मिडिल स्कूल करगिडीह शामिल हैं। समय सीमा में निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश कलेक्टर अजीत वसंत ने संबंधित निर्माण एजेंसियों को गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य समय सीमा छह माह में पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों के निर्माण के लिए ग्राम पंचायत एवं आरईएस को निर्माण एजेंसी बनाया गया है।
बिहार में मदरसों को मिलने वाले सरकारी अनुदान, शिक्षकों के वेतन भुगतान और शैक्षणिक गतिविधियों की जांच के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देशों का सहरसा के विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता उर्फ आईपी गुप्ता ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी सहायता वास्तविक संस्थानों तक पहुंचे और शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो, इसके लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है। विधायक आईपी गुप्ता ने मदरसों में सरकारी अनुदान, शिक्षकों के वेतन भुगतान और शैक्षणिक गतिविधियों की पारदर्शी जांच की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रखंड स्तर पर विशेष समितियां गठित की जाएं, जो स्थलीय निरीक्षण कर सरकार को वास्तविक रिपोर्ट सौंपें। शैक्षणिक वातावरण की भी समीक्षा की जानी चाहिएउन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मदरसों को निर्धारित सरकारी सहायता समय पर मिल रही है या नहीं और उसका उपयोग छात्रों तथा शिक्षा के विकास में हो रहा है या नहीं। साथ ही, मदरसों में पढ़ाई की गुणवत्ता, छात्रों की उपस्थिति और शैक्षणिक वातावरण की भी समीक्षा की जानी चाहिए। आईपी गुप्ता ने कहा कि मदरसे शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उन्हें सरकार से पर्याप्त सहायता मिलनी चाहिए। उन्होंने मदरसों की आधारभूत संरचना को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। राज्य सरकार की कार्यशैली को लेकर सवाल भी उठाएविधायक ने कहा कि सरकार की मंशा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की है, जिसका सभी को समर्थन करना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष, तथ्यात्मक और सकारात्मक परिणाम देने वाली होगी। हालांकि, इसी दौरान उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को आवंटित सरकारी आवास खाली कराने की प्रक्रिया पर राज्य सरकार की कार्यशैली को लेकर सवाल भी उठाए। आईपी गुप्ता ने आरोप लगाया कि जब सरकार विभिन्न मुद्दों पर घिरती है, तो जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे कदम उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि राबड़ी देवी के आवास को लेकर अपनाया जा रहा रवैया जनता के बीच गलत संदेश दे रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सलाह दी कि सरकार को टकराव की राजनीति से बचते हुए जनहित के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) के कथित पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में राजनीतिक माहौल गर्म है। इसी मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार को घेरते हुए मोगा में जोरदार प्रदर्शन किया। जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका गया और उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की गई। इस प्रदर्शन की अगुवाई जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरि सिंह खाई और विधानसभा क्षेत्र मोगा की प्रभारी मालविका सूद ने की। इस अवसर पर कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा का पेपर लीक होना देश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के समान है। हरि सिंह खाई ने कहा कि केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था को संभालने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक हो जाता है, तो यह व्यवस्था की बड़ी नाकामी है। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। मालविका सूद ने शिक्षामंत्री पर साधा निशाना मालविका सूद ने भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक मामला सीधे तौर पर विद्यार्थियों के साथ धोखाधड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब छात्र-छात्राएं दिन-रात मेहनत कर अपने सपनों को साकार करने की तैयारी करते हैं, तब इस तरह के घोटाले उनकी मेहनत पर पानी फेर देते हैं। उन्होंने मांग की कि नीट पेपर लीक के लिए जिम्मेदार मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर अपना रोष व्यक्त किया। इस मौके पर पूर्व विधायक विजय साथी, विनोद बांसल (पूर्व चेयरमैन, नगर सुधार ट्रस्ट मोगा), मनजीत सिंह मान, स्वर्ण सिंह आदीवाल, मिक्की हुंदल, लाली बुट्टर, जसपाल डरोली, गुरबचन सिंह बराड़, जगसीर सिंह कालेके, उपिंदर गिल, गुरनूर मान दौधर सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस सड़कों पर संघर्ष जारी रखेगी। साथ ही सरकार से मांग की गई कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं।
सत्र 2015-16 से 2019-20 के बीच प्रमोट हुए करीब 8 हजार प्रधानाचार्य आज भी अपनी प्रमोशन तिथि दर्ज होने का इंतजार कर रहे हैं। राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (प्रधानाचार्य) का कहना है कि प्रमोशन तिथि दर्ज नहीं होने से वेतन निर्धारण की जांच में प्रधानाचार्यों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसे लेकर परिषद ने सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि तय समय में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 8 जून को शिक्षा निदेशालय बीकानेर का घेराव किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। एडीएम को सौंपा ज्ञापन, मुख्यमंत्री तक पहुंचाई मांगराजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (प्रधानाचार्य) जिला शाखा टोंक ने मंगलवार को शिक्षा मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा विभाग और निदेशक माध्यमिक शिक्षा राजस्थान बीकानेर के नाम अलग-अलग ज्ञापन अतिरिक्त जिला कलेक्टर रामरतन सौकरिया को सौंपे। ज्ञापन में सत्र 2015-16 से 2019-20 तक प्रमोट हुए प्रधानाचार्यों की प्रमोशन तिथि दर्ज करने की मांग की गई है। मंत्री के निर्देशों के बावजूद काम अधूराप्रधानाचार्यों का कहना है कि शिक्षा मंत्री द्वारा कई बार निर्देश दिए जाने और शासन स्तर से आदेश जारी होने के बावजूद प्रमोशन तिथि दर्ज करने का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है। उनका आरोप है कि यह मामला लंबे समय से माध्यमिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर में लंबित पड़ा है, जिससे प्रधानाचार्य वर्ग में नाराजगी बढ़ रही है। 1970 प्रधानाचार्यों को मिला लाभ, 8 हजार अब भी वंचितजिला मंत्री निपुण सक्सेना ने बताया कि इस अवधि में प्रमोट हुए प्रधानाचार्यों में से केवल 1970 प्रधानाचार्यों की प्रमोशन तिथि दर्ज की गई है। इनमें 1410 प्रधानाध्यापक पद से और 560 प्राध्यापक पद से प्रमोट प्रधानाचार्य शामिल हैं, जो सत्र 2017-18 में पदोन्नत हुए थे। इनके लिए 1 अप्रैल 2017 की प्रमोशन तिथि दर्ज करने के आदेश 7 दिसंबर 2022 को जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि 3 मार्च 2015 को वित्त विभाग ने 4999 प्रधानाचार्य पदों की स्वीकृति दे दी थी, लेकिन इसके बावजूद करीब 8 हजार प्रधानाचार्य आज भी इस लाभ से वंचित हैं। वेतन जांच में हो सकता है आर्थिक नुकसानसक्सेना ने बताया कि वित्त विभाग द्वारा 5 मई को जारी परिपत्र और निदेशक माध्यमिक शिक्षा राजस्थान के 22 मई के आदेश के अनुसार विभागीय कर्मचारियों के वेतन निर्धारण की दोबारा जांच की जानी है। ऐसे में जिन प्रधानाचार्यों की प्रमोशन तिथि दर्ज नहीं हुई है, उन्हें वित्तीय नुकसान होने की आशंका है। 7 दिन का समय, फिर होगा धरना-घेरावपरिषद ने मांग की है कि सात दिन के भीतर सभी लंबित मामलों में प्रमोशन तिथि दर्ज कर प्रधानाचार्यों को लाभ दिया जाए। ऐसा नहीं होने पर 8 जून को शिक्षा निदेशालय बीकानेर के बाहर एक दिवसीय धरना और घेराव किया जाएगा। संगठन ने यह भी चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन से आमरण अनशन और धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। ये रहे मौजूदज्ञापन सौंपने वालों में जिलाध्यक्ष कुम्माराम चौधरी, जिला मंत्री निपुण सक्सेना, कृष्ण गोपाल, उमा हाड़ा, विनोद शर्मा, कैलाश चंद्र मीणा, किशनलाल मीणा, चन्द्रप्रकाश विजय, महेश दाधीच, प्रेमलता सिंह, महेश शर्मा, राजाराम मीणा सहित अन्य प्रधानाचार्य शामिल रहे।
पंजाब में छात्रा की आत्महत्या मामले में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने आज सख्त रुख अपनाया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। मंत्री ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही स्कूल प्रशासन की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि छात्रा को न्याय दिलाने के लिए किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। क्या था पूरा मामला? अमृतसर की अमजोत कौर (17 साल) जो 12वीं कक्षा में पढ़ती थी ने 22 मई को जहरीला पदार्थ निगल लिया था। उसकी हालत बिगड़ने पर परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां कई दिनों तक इलाज चला। इलाज के दौरान उसने एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया, जिसमें उसने स्कूल प्रबंधन पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए। 30 मई को उसकी मौत हो गई। फीस को लेकर बनाया जा रहा था दबाव अमजोत फतेहगढ़ चूड़ियां रोड स्थित एक निजी स्कूल की छात्रा थी और अपनी मौसी सरबजीत कौर के पास रहकर पढ़ाई कर रही थी। परिजनों के अनुसार स्कूल की करीब 20 हजार रुपए फीस बकाया थी। इसी फीस को लेकर स्कूल प्रबंधन लगातार उस पर दबाव बना रहा था। मौत से पहले बनाए गए वीडियो में अमजोत ने कहा था कि 11 मई को उसे स्कूल बुलाया गया, जहां उसे काफी मानसिक रूप से परेशान किया गया। उसका आरोप था कि उसे क्लास के ग्रुप से हटा दिया गया और अलग कमरे में ले जाकर बात की गई। वीडियो में उसने अपनी हालत के लिए स्कूल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराते हुए न्याय की मांग भी की। फीस किस्तों में जमा करवाने की अनुमति मांगी थी मौसी सरबजीत कौर ने आरोप लगाया कि स्कूल की प्रिंसिपल शबनम शर्मा और क्लास टीचर आकांक्षा शर्मा फीस को लेकर लगातार दबाव बना रही थीं। उन्होंने स्कूल से फीस किस्तों में जमा करवाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन इसके बावजूद बच्ची पर दबाव जारी रहा। अमजोत को मेडिकल स्ट्रीम लेने की अनुमति नहीं परिजनों का यह भी आरोप है कि अमजोत को मेडिकल स्ट्रीम लेने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि उससे कम अंक पाने वाली अन्य छात्राओं को मेडिकल स्ट्रीम दे दी गई थी। इसके अलावा उसे क्लास के अतिरिक्त काम करवाए जाते थे। कई बार बाथरूम जाने के बाद भी कक्षा में प्रवेश नहीं दिया जाता था। 10वीं में 86 प्रतिशत अंक हासिल किए अमजोत पढ़ाई में काफी होनहार थी। परिवार के अनुसार वह हर कक्षा में अच्छे अंक लाती थी और 10वीं में उसने 86 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। परिजनों का आरोप है कि स्कूल ने उसका रिजल्ट भी रोक रखा था और फीस न जमा होने के कारण नाम काटने की बात कही थी। परिवार ने पुलिस प्रशासन से इंसाफ की मांग करते हुए स्कूल प्रबंधन और संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। शिक्षिका बोली- किसी छात्र पर दबाव नहीं बनाया दूसरी तरफ, स्कूल की एक शिक्षिका ने मीडिया से बातचीत में अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। शिक्षिका का कहना है कि अमजोत कौर पिछले कई महीनों से स्कूल नहीं आ रही थी। स्कूल की ओर से केवल नियमित प्रक्रिया के तहत उसके परिवार से संपर्क किया जाता था। उन्होंने कहा कि स्कूल ने कभी भी फीस या किसी अन्य कारण से किसी छात्र पर दबाव नहीं बनाया। शिक्षिका ने दावा किया कि स्कूल प्रबंधन के पास सभी आवश्यक रिकॉर्ड और दस्तावेज मौजूद हैं। वे जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देंगे। एसीपी बोले- जांच की जा रही है इस संबंध में एसीपी गगनदीप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि फोर्टिस अस्पताल से सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। छात्रा के पिता रविंदर सिंह के बयानों के आधार पर मुकदमा नंबर 115 के तहत बीएनएस की धारा 108 में मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा छात्रा को उसके दस्तावेज नहीं दिए जा रहे थे और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। पुलिस ने स्कूल के प्रिंसिपल और एक स्टाफ सदस्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच जारी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।
नीट यूजी पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्रालय ने शुरू की कार्रवाई
नीट-यूजी प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके साथ ही मामले की गहन जांच जारी है।
तकनीक आधारित कृषि शिक्षा का नया केंद्र : एलपीयू
भास्कर न्यूज | जालंधर कृषि क्षेत्र के तकनीक-आधारित और नवाचार-संचालित होने के बीच लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में कृषि शिक्षा को प्रयोगात्मक सीख, उद्योग अनुभव, अनुसंधान और उद्यमिता के साथ जोड़ा गया है। विश्वविद्यालय के अनुसार इसके एडु-रेव्लयूशन सीख मॉडल के तहत छात्रों को शैक्षणिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक विशेषज्ञता देने पर जोर है, ताकि वे प्रिसिजन एग्रीकल्चर, एग्रीबिजनेस, बायोटेक्नोलॉजी, फूड प्रोसेसिंग और उभरते एग्रीटैक क्षेत्रों में करियर के लिए तैयार हो सकें। यूजीसी मान्यता, नेक ए++ एक्रेडिटेशन और आईसीएआर-एनएईएबी की मंजूरी का उल्लेख करते हुए एलपीयू ने बताया कि रिसर्च फार्म, उन्नत लैब, पॉलीहाउस, बागवानी सुविधाएं और मधुमक्खी पालन इकाइयों के जरिए छात्रों को आधुनिक कृषि पद्धतियों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण मिलता है। कार्यक्रमों में बीएससी (ऑनर्स) एग्रीकल्चर, एमएससी स्तर पर एग्रोनॉमी, जेनेटिक्स व प्लांट ब्रीडिंग, सॉयल साइंस, एंटोमोलॉजी, प्लांट पैथोलॉजी, बागवानी तथा फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी जैसी विशेषज्ञताएं शामिल हैं। पाठ्यक्रम में रूरल एग्रीकल्चर वर्क एक्सपीरियंस, फार्म स्कूल, लाइव प्रोजेक्ट, उद्योग सहयोग और इनक्यूबेशन सहायता को जोड़ा गया है। विश्वविद्यालय ने गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेस और हैज़र्ड एनालिसिस क्रिटिकल कंट्रोल पॉइंट्स'' जैसे सर्टिफिकेशन तथा महिंद्रा, सिंजेंटा, अदानी, अमेजन और रिलायंस के साथ सहयोग के जरिए इंटर्नशिप व प्लेसमेंट अवसरों का भी उल्लेख किया।
नई शिक्षा नीति के तहत भाषा समर कैंप का शुभारंभ
सीहमा | राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सोमवार को नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय भाषा समर कैंप की शुरुआत हुई। कैंप सात जून तक चलेगा। उद्घाटन करते हुए प्राचार्य कृष्ण कुमार ने कहा कि भारतीय भाषाएं सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं और ऐसे कैंप विद्यार्थियों के भाषा कौशल, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ाते हैं। कैंप के दौरान भाषा आधारित अंताक्षरी, शब्द खेल, प्रश्नोत्तरी, कहानी लेखन, कविता पाठ और भाषण प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी। शिक्षकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं की परंपरा से जोड़ना, संवाद कौशल विकसित करना और आत्मविश्वास बढ़ाना है। कार्यक्रम में प्रवक्ता मधु यादव, पूनम ग्रोवर, भीम सिंह, मनोज कुमार, धर्मेंद्र, देवदत्त, राजसिंह, राजकुमार सहित अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।
झेरिया धोबी समाज के शपथ ग्रहण समारोह में युवाओं की उच्च शिक्षा पर दिया गया जोर
झेरिया धोबी बरेठ समाज सेवा समिति (संभाग बिलासपुर) के तत्वावधान में ''पान पानी, पालगी संस्कारधानी'' सारंगढ़ में एक भव्य और गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस विशेष समारोह में समाज के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली, वहीं समाज के होनहार छात्र-छात्राओं को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत सदस्य संजय पांडे और तुलसी कौशिक उपस्थित रहे, जिन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। समारोह के मुख्य आकर्षणों में से एक रहा संभागीय पदाधिकारियों का आधिकारिक शपथ ग्रहण। मुख्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों ने पूरी निष्ठा, लगन और ईमानदारी के साथ समाज हित और सामाजिक उत्थान के लिए कार्य करने का दृढ़ संकल्प लिया। प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि तुलसी कौशिक व संजय पांडे ने सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को नए दायित्वों के लिए बधाई व शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि समाज के समग्र विकास के लिए शिक्षा सबसे मजबूत स्तंभ है। युवाओं को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए और अपने माता-पिता के साथ-साथ पूरे समाज का नाम रोशन करना चाहिए। इस अवसर पर मंच पर और दीर्घा में समाज के वरिष्ठ जन, प्रबुद्ध नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्वजातीय बंधु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में समिति द्वारा सभी अतिथियों और आगंतुकों का आत्मीय स्वागत और अभिनंदन करते हुए आभार व्यक्त किया गया। समाज को शैक्षणिक रूप से सुदृढ़ बनाने और नई पीढ़ी का हौसला बढ़ाने के उद्देश्य से ''प्रतिभा सम्मान समारोह'' का विशेष आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत समाज के मेधावी और प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक व अन्य विधाओं में उपलब्धियों के लिए मंच पर स्मृति चिन्ह (शील्ड) और पारितोषिक देकर सम्मानित किया गया।
सेना शिक्षा कोर स्थापना दिवस, वेटेरंस ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि
जयपुर | सेना शिक्षा कोर (एईसी) के 106वें स्थापना दिवस पर ऑल इंडिया मशाल वेटेरंस एसोसिएशन द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर जनपथ स्थित अमर जवान ज्योति पर शहीदों को पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। दक्षिण पश्चिम कमांड ने भी वेटेरंस को विशेष रूप से आमंत्रित किया। वैशाली नगर स्थित महल रजवाड़ा रिसोर्ट में परिवारजनों के साथ ‘बड़ा खाना’ आयोजित हुआ। इसमें महेंद्र सिंह राठौड़, बजरंग सिंह, आनंद सिंह जोधा सहित कई सेवानिवृत्त सैनिक उपस्थित रहे।
मध्यप्रदेश में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों की प्रक्रिया सोमवार से औपचारिक रूप से शुरू हो गई। राज्य सरकार की नई तबादला नीति के तहत 15 जून तक विभाग स्वैच्छिक और प्रशासनिक आधार पर तबादला आदेश जारी कर सकेंगे। इस बीच सबसे बड़े स्कूल शिक्षा विभाग ने अपनी अलग कार्ययोजना मुख्यमंत्री समन्वय को भेजी है। जानकारी के अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग में 3 जून से 30 जून के बीच तबादलों की प्रक्रिया चलाने का प्रस्ताव है। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। लोक शिक्षण संचालनालय ने पोर्टल अपडेट करने का काम शुरू कर दिया है, जो जल्द लाइव हो सकता है। विभाग में बड़ी संख्या में शिक्षकों और कर्मचारियों के आवेदन आने की संभावना है। उधर, पुलिस मुख्यालय ने आरक्षक से लेकर सब-इंस्पेक्टर स्तर तक के तबादलों के लिए 5 जून तक की समय-सीमा तय की है। इसके बाद जिलों के पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों ने अपने स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने संविदा कर्मचारियों से 2 जून तक ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं, जबकि उच्च शिक्षा विभाग ने अपनी अलग तबादला नीति जारी कर दी है। संख्या के आधार पर तय होगा कोटा : सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों को 9 दिनों के भीतर विभागीय नीति जारी करने और आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों की संख्या के आधार पर तबादला कोटा तय किया गया है। 200 तक कर्मचारियों वाले विभागों में 20%, 200 से 1000 तक में 15%, 1000 से 2000 तक में 10% और 2001 से अधिक कर्मचारियों वाले विभागों में 5% तक तबादले किए जा सकेंगे। दावा है कि इससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और संतुलित रहेगी।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा सोमवार को एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने पंचकूला स्थित उच्चतर शिक्षा और मौलिक शिक्षा विभाग के कार्यालयों का औचक निरीक्षण कर कार्यप्रणाली का जायजा लिया। इस दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति, फाइलों के निपटान तथा लंबित मामलों की समीक्षा की गई। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और समयबद्धता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग का पूरा डाटा प्रतिदिन ऑनलाइन अपडेट किया जाए। उन्होंने लंबित फाइलों और जवाबों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सभी पेंडिंग मामलों का निपटारा एक सप्ताह के भीतर सुनिश्चित किया जाए। तय समय सीमा में कार्य पूरा नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाएगी। मेडिकल बिलों में देरी पर जताई नाराजगी शिक्षा मंत्री ने कर्मचारियों के मेडिकल बिलों के भुगतान में देरी पर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को उनके वैध भुगतान के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। यदि मेडिकल बिलों के निपटान में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित विभागाध्यक्ष और संबंधित शाखा के कर्मचारी सीधे जिम्मेदार होंगे। हर 15 दिन में होगी समीक्षा ढांडा ने कहा कि यह केवल एक बार का निरीक्षण नहीं है। अब हर 15 दिन में विभागीय कार्यों की समीक्षा की जाएगी। समीक्षा के दौरान यह देखा जाएगा कि अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिए गए निर्देशों का कितना पालन किया है। काम में कोताही बरतने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया, माध्यमिक शिक्षा निदेशक जितेंद्र दहिया, उच्चतर शिक्षा निदेशक एस. नारायणन सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
उत्तर प्रदेश सरकार ने माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग में अहम बदलाव करते हुए दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की नई तैनाती दी है। माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-6 द्वारा जारी आदेश के मुताबिक प्रताप सिंह बघेल अब प्रभारी शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), उत्तर प्रदेश बनाए गए हैं। पहले वे बेसिक शिक्षा विभाग में प्रभारी शिक्षा निदेशक के पद पर तैनात थे। वहीं, श्री अनिल भूषण चतुर्वेदी को प्रभारी शिक्षा निदेशक (बेसिक), लखनऊ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा के प्रभारी निदेशक थे। दोनों अधिकारियों को तत्काल नई पोस्टिंग पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब प्रदेश में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग दोनों ही सुधार, शिक्षक भर्ती और गुणवत्ता बढ़ाने को लेकर लगातार सक्रिय हैं। एक दिन पहले ही थोक में बीएसए और जिला विद्यालय निरीक्षकों के तबादले हुए थे। कई को नई जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
दिल्ली के विकास मार्ग स्थित स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) के दफ्तर में सोमवार सुबह लगी आग अब एक बड़े सियासी विवाद में बदल गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता व पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया और पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी द्वारा सीबीएसई के ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) सिस्टम से जुड़े जरूरी दस्तावेज जलने की आशंका जताए जाने पर भाजपा ने तीखा हमला बोला है। प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी प्रवीण शंकर कपूर ने पोस्टर जारी कर 'आप' नेतृत्व को आड़े हाथों लिया और कहा कि राजनीति लाभ के लिए झूठ फैलाना आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं की आदत बन चुकी है। सिसोदिया-आतिशी का दावा: OSM विवाद के बीच आग लगना संदेहास्पद दरअसल, मनीष सिसोदिया और आतिशी ने एक संयुक्त बयान में आशंका जताई थी कि कहीं इस आग की आड़ में सीबीएसई के ओएसएम (OSM) सिस्टम से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज तो
प्रताप सिंह बघेल बने माध्यमिक शिक्षा के निदेशक:बेसिक शिक्षा निदेशक का पद अब अनिल चतुर्वेदी के पास
उत्तर प्रदेश शासन के माध्यमिक शिक्षा अनुभाग ने राज्य के स्कूल शिक्षा प्रशासन में बड़ा फेरबदल करते हुए दो वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में परिवर्तन किया है। आधिकारिक अधिसूचना संख्या 7/10/15-6-2026 के अनुसार यह आदेश विशेष सचिव कृष्ण कुमार गुप्ता के डिजिटल हस्ताक्षर से जारी किया गया है। प्रताप सिंह बघेल को तत्काल प्रभाव से प्रभारी शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), उत्तर प्रदेश, प्रयागराज/लखनऊ के रूप में तैनात किया गया। वे वर्तमान में प्रभारी शिक्षा निदेशक (बेसिक), उत्तर प्रदेश, लखनऊ के पद पर कार्यरत थे। अनिल भूषण चतुर्वेदी को तत्काल प्रभाव से प्रभारी शिक्षा निदेशक (बेसिक), उत्तर प्रदेश, लखनऊ के रूप में तैनात किया गया। वे वर्तमान में प्रभारी निदेशक, साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के पद पर थे। आदेश में दोनों अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे नई तैनाती स्थान पर तुरंत कार्यभार ग्रहण करेंगे और कार्यभार ग्रहण का प्रमाणक शासन को उपलब्ध कराएं। इस आदेश की प्रतिलिपियां माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा विभागों के मंत्रियों के निजी सचिवों, महानिदेशक (स्कूल शिक्षा), तथा प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और कोषाधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई हैं।
चेंजमेकर ऑफ मेवाड़:शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा से बदलाव की नई इबारत लिख रहे राहुल अग्रवाल
मेवाड़ की विकास गाथा में कुछ ऐसे नाम हैं, जिन्होंने केवल संस्थान नहीं बनाए, बल्कि समाज की दिशा बदलने का कार्य किया। ऐसे ही दूरदर्शी और संवेदनशील चेंजमेकर हैं राहुल अग्रवाल, जिन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और समाजसेवा के माध्यम से हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का काम किया है। यही योगदान उन्हें चेंजमेकर ऑफ मेवाड़ की विशिष्ट पहचान दिलाता है। पेसिफिक यूनिवर्सिटी और पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के माध्यम से राहुल अग्रवाल ने उदयपुर को आधुनिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका मानना है कि गुणवत्तापूर्ण और किफायती शिक्षा व चिकित्सा सुविधाएं समाज के हर वर्ग तक पहुंचनी चाहिए। इसी सोच के साथ उनके संस्थान युवाओं को बेहतर अवसर और आमजन को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य से आगे बढ़कर वे पर्यावरण संरक्षण, कौशल विकास, कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम और सामाजिक कल्याण के कई अभियानों से जुड़े हैं। निःशुल्क कॉक्लियर इम्प्लांट जैसी पहल से उन्होंने कई बच्चों के जीवन में सुनने और बोलने की नई उम्मीद जगाई है, वहीं आशाधाम के माध्यम से दिव्यांग, बुजुर्ग और बेसहारा लोगों को सम्मानजनक जीवन का सहारा दिया है। सरलता, सेवा और समाज के प्रति समर्पण के बल पर राहुल अग्रवाल आज मेवाड़ के उन चेंजमेकर्स में शामिल हैं, जो विकास को केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में महसूस होने वाले बदलाव में देखते हैं।
मेवाड़ की प्रगति केवल बुनियादी विकास की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की भी यात्रा है जिन्होंने शिक्षा के माध्यम से समाज को नई दिशा दी। ऐसे ही प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं हरीश राजानी, जिन्होंने गुणवत्तापूर्ण और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देकर दक्षिण राजस्थान में बदलाव की मजबूत नींव रखी है। यही योगदान उन्हें चेंजमेकर ऑफ मेवाड़ की विशिष्ट पहचान दिलाता है। सनराइज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के माध्यम से हरीश राजानी ने शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे राष्ट्र निर्माण और सामाजिक विकास का सशक्त माध्यम बनाया। उनके नेतृत्व में आरआर डेंटल कॉलेज सहित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों ने हजारों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर करियर के अवसर प्रदान किए हैं। आज यहां से शिक्षित छात्र-छात्राएं देशभर में स्वास्थ्य और विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूर्व राज्य मंत्री हरीश राजानी शिक्षा के साथ सामाजिक दायित्वों को भी समान महत्व देते हैं। छात्रवृत्ति योजनाओं, जागरूकता अभियानों और सामाजिक सहयोग कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने जरूरतमंद विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया है। उनका मानना है कि बदलते दौर में कौशल, अनुशासन और सकारात्मक सोच ही सफलता की असली कुंजी है। शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में उनका योगदान उन्हें मेवाड़ के प्रभावशाली चेंजमेकर्स में शामिल करता है।
हरियाणा के सरकारी और सहायता प्राप्त कॉलेजों में स्नातक (यूजी) पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए इस बार विद्यार्थियों का जबरदस्त रुझान देखने को मिल रहा है। उच्चतर शिक्षा विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण की संख्या 80 हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है। बड़ी संख्या में आए आवेदनों और इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं में उत्तीर्ण विद्यार्थियों की बढ़ी संख्या को देखते हुए विभाग ने आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार कर शिक्षा मंत्री को भेज दिया है। सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव पर एक जून को निर्णय लिया जा सकता है। यदि मंजूरी मिलती है, तो दाखिला प्रक्रिया के कार्यक्रम में भी आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि बड़ी संख्या में छात्र अभी भी आवेदन प्रक्रिया में हैं, इसलिए उन्हें अवसर देने के लिए अंतिम तिथि बढ़ाई जा सकती है। पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना पंजीकरण हरियाणा के उच्चतर शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस बार पिछले शैक्षणिक सत्र की तुलना में लगभग दोगुना ऑनलाइन पंजीकरण दर्ज किया गया है। प्रदेश के सरकारी और एडेड कॉलेजों में विभिन्न स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में आवेदन किए हैं। रजिस्ट्रेशन की इन संख्या को लेकर उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी काफी खुश हैं। उनका कहना है कि यह बोर्ड के अच्छे परिणाम का नतीजा है। आवेदन पत्रों में संशोधन का अवसर वर्तमान कार्यक्रम के अनुसार 1 जून तक विद्यार्थियों को आवेदन पत्रों में संशोधन का अवसर दिया गया है। इसके बाद, 2 जून को आवेदकों की प्रारंभिक सूची जारी होगी। 6 जून तक दस्तावेजों का सत्यापन और आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा। 10 जून को पहली प्रोविजनल मेरिट सूची जारी होगी। 11 जून को अंतिम मेरिट सूची जारी की जाएगी। चयनित विद्यार्थियों को 12 से 15 जून तक फीस जमा कराने का अवसर मिलेगा। दूसरे चरण की दाखिला प्रक्रिया पहले चरण के बाद खाली सीटों के लिए दूसरे चरण की प्रक्रिया चलाई जाएगी। 16 और 17 जून को दूसरे चरण की मेरिट सूची जारी होगी। चयनित अभ्यर्थी 18 से 22 जून तक फीस जमा कर सकेंगे। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने का निर्णय लिया जाता है, तो दस्तावेज सत्यापन, मेरिट सूची जारी करने और फीस जमा कराने सहित पूरी दाखिला प्रक्रिया की तिथियों में संशोधन किया जा सकता है। अंतिम निर्णय शिक्षा मंत्री की मंजूरी के बाद घोषित किया जाएगा।
पंजाब बदल रहा है... और इसकी सबसे बड़ी पहचान बन रही है शिक्षा। कभी पंजाब के सरकारी स्कूलों की हालत देश में सबसे पिछड़े राज्यों में गिनी जाती थी। 2016-17 में पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में 22वें स्थान पर था, 2018-19 में 26वें और 2020 में 27वें स्थान तक फिसल गया था। उस समय लाखों माता-पिता के मन में एक ही सवाल था कि आखिर उनके बच्चों का भविष्य कैसे बदलेगा। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे संसाधनों की कमी, कमजोर बुनियादी ढांचे और सीमित अवसरों के बीच अपने सपनों को बचाने की कोशिश कर रहे थे। नीति आयोग की रिपोर्ट में दिखी ऐतिहासिक सफ़लता लेकिन 2022 में पंजाब की जनता ने बदलाव का फैसला किया और आम आदमी पार्टी की सरकार को जिम्मेदारी सौंपी। आज सिर्फ चार वर्षों के भीतर पंजाब ने वह कर दिखाया है जिसकी कल्पना भी मुश्किल मानी जाती थी। नीति आयोग की शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार पंजाब ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों को पीछे छोड़ते हुए देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है। यह सिर्फ एक रैंकिंग नहीं है। यह लाखों पंजाबी परिवारों के सपनों की जीत है। यह उन माता-पिता की जीत है जो चाहते थे कि उनका बच्चा गरीब हो या अमीर, उसे भी विश्वस्तरीय शिक्षा मिले। यह उन शिक्षकों की मेहनत की जीत है जिन्हें नई सोच और नए संसाधनों के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिला। बुनियादी शिक्षा और शैक्षणिक प्रदर्शन में केरल को पछाड़ा नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि तीसरी कक्षा के भाषा स्तर में पंजाब के बच्चों ने 82 प्रतिशत दक्षता हासिल की है, जबकि केरल 75 प्रतिशत पर रहा। गणित में पंजाब ने 78 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जबकि केरल 70 प्रतिशत पर रहा। नौवीं कक्षा के गणित में पंजाब का प्रदर्शन 52 प्रतिशत रहा, जबकि केरल केवल 45 प्रतिशत तक पहुंच पाया। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में बच्चों की बुनियादी शिक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। आज पंजाब के 99.9 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में बिजली उपलब्ध है। 99 प्रतिशत स्कूलों में चालू कंप्यूटर मौजूद हैं। 80 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बनाए जा चुके हैं। स्मार्ट क्लासरूम की उपलब्धता में पंजाब 80.1 प्रतिशत पर है जबकि हरियाणा 50.3 प्रतिशत पर है। इंटरनेट सुविधा के मामले में पंजाब 88.9 प्रतिशत पर है जबकि हरियाणा 78.9 प्रतिशत पर है। यह अंतर सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि सोच और प्राथमिकताओं का अंतर है। हरियाणा और गुरुग्राम से तुलना: सोच और प्राथमिकताओं का अंतर सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि हरियाणा के सबसे समृद्ध और साइबर सिटी शहर गुरुग्राम के सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन भी पंजाब के सबसे निचले पायदान वाले जिलों से बहुत पीछे है। यह उस मॉडल की ताकत दिखाता है जिसने सरकारी स्कूलों को राजनीति का विषय नहीं बल्कि भविष्य निर्माण का मिशन बनाया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब ने शिक्षा को सरकारी फाइलों से निकालकर जन आंदोलन बनाया है। शिक्षकों को फिनलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया ताकि पंजाब के बच्चे भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मॉडल का लाभ उठा सकें। यही कारण है कि सरकारी स्कूलों के 786 छात्रों ने जेईई मेन और 1284 छात्रों ने नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं पास की हैं। यह उपलब्धि बताती है कि प्रतिभा सिर्फ निजी स्कूलों की संपत्ति नहीं होती, अवसर मिलने पर सरकारी स्कूलों के बच्चे भी देश का भविष्य बन सकते हैं। 3 लाख छात्रों के लिए इंग्लिश एज कार्यक्रम चलाया राज्य सरकार 13 हजार से अधिक नए शिक्षकों और स्टाफ की भर्ती कर चुकी है। 3 लाख छात्रों के लिए इंग्लिश एज कार्यक्रम चलाया जा रहा है ताकि पंजाब का बच्चा दुनिया के किसी भी मंच पर आत्मविश्वास के साथ खड़ा हो सके। राज्य में 118 अत्याधुनिक स्कूल ऑफ एमिनेंस स्थापित किए गए हैं जो आने वाले वर्षों में पंजाब की नई पहचान बनने जा रहे हैं। आज पंजाब के सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चे सिर्फ किताबें नहीं पढ़ रहे, बल्कि आधुनिक लैब, डिजिटल तकनीक, स्मार्ट क्लासरूम और वैश्विक स्तर की शिक्षा का अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। यह वही सपना है जो विकसित देशों जैसे अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और जापान में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाता है। पंजाब उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पंजाब कई मानकों में हरियाणा से आगे दूसरी तरफ कई ऐसे राज्य हैं जहां वर्षों से एक ही सरकारें चल रही हैं, लेकिन सरकारी शिक्षा व्यवस्था अब भी अपेक्षित बदलाव का इंतजार कर रही है। हरियाणा में पिछले 12 वर्षों से बीजेपी सरकार है, लेकिन शिक्षा के कई मानकों पर पंजाब उससे काफी आगे निकल चुका है। यह दिखाता है कि सिर्फ लंबे समय तक सत्ता में रहना पर्याप्त नहीं होता, नीयत और प्राथमिकताएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं। पंजाब के गांवों में अब माता-पिता गर्व से कहते हैं कि उनका बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़ता है। यह बदलाव किसी विज्ञापन या नारे से नहीं आया। यह बदलाव स्कूलों की नई इमारतों, स्मार्ट क्लासरूम, प्रशिक्षित शिक्षकों, बेहतर परिणामों और बच्चों के उज्जवल भविष्य के रूप में दिखाई दे रहा है। सरकार की प्राथमिकता शिक्षा, बदला इतिहास पंजाब ने साबित कर दिया है कि जब सरकार की प्राथमिकता शिक्षा होती है तो कुछ ही वर्षों में इतिहास बदला जा सकता है। जो राज्य कभी देश में 27वें स्थान पर था, वही आज देश में नंबर-1 बनकर खड़ा है। यह सिर्फ शिक्षा की कहानी नहीं, बल्कि नए पंजाब की कहानी है। ऐसा पंजाब जहां हर बच्चे का सपना मायने रखता है, जहां सरकारी स्कूल उम्मीद का दूसरा नाम बन चुके हैं और जहां भविष्य को राजनीति नहीं, शिक्षा की ताकत से लिखा जा रहा है।
रोहतक में मिड-डे मील वर्करों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन की घोषणा करते हुए 5 जून को पानीपत में शिक्षामंत्री महिपाल ढांडा के आवास का घेराव करने का निर्णय लिया। साथ ही प्रदेशभर में 5000 स्कूलों को बंद करके कर्मचारियों को बेरोजगार करने का विरोध किया। मिड-डे मील वर्कर एसोसिएशन की जिला प्रधान बबीता ने बताया कि हरियाणा में 30 हजार वर्कर स्कूलों में खाना बनाने का कार्य कर रही है। 25 साल से यह योजना लागू है, लेकिन भाजपा की केंद्र व राज्य सरकार जो महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करती है। अपने 12 साल के राज में उसने अभी तक एक रुपए की बढ़ोतरी नहीं की। उल्टा स्कूलों को बंद किया जा रहा और मर्ज किया जा रहा है। प्रदेश के 5 हजार स्कूलों को कर चुके बंद प्रकाशचंद्र ने बताया कि सरकार 5000 स्कूलों को बंद कर चुकी है, इनमें से अधिकतर स्कूल लड़कियों के प्राथमिक स्कूल है। चिराग योजना के नाम पर सरकारी स्कूलों को ताला लगाने की तैयारी है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। केंद्र सरकार व राज्य सरकार के खिलाफ मिड डे मील वर्करों में भारी गुस्सा है। शिक्षामंत्री ने दिया था आश्वासन, नहीं किया पूरा प्रकाशचंद्र ने बताया कि 3 अगस्त 2025 को पानीपत में शिक्षा मंत्री के आवास पर प्रदर्शन किया था, जिसमें शिक्षा मंत्री ने मांगों पर सहमति जताते हुए आश्वासन दिया था कि वर्कर्स की मांगों व समस्याओं का जल्दी हल किया जाएगा, लेकिन एक साल के करीब हो गया, अभी तक मांगों व समस्याओं का हल नहीं किया। ऐसे में दोबारा 5 जून को शिक्षा मंत् आवास का घेराव किया जाएगा। कर्मचारियों की यह हैं मांगे 1. न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपए दिया जाए। वेतन 12 महीने देने व बकाया वेतन जारी किया जाए। 2. सरकारी स्कूलों को मर्ज व बंद ना किया जाए। 3. छंटनी न की जाए, छंटनी ग्रस्त वर्करों को काम पर वापस लिया जाए। 4. रिटायरमेंट उम्र 65 साल व 3 लाख रुपए एकमुश्त दिए जाएं। 5. वर्दी भत्ता 1500 रुपए लागू करने, घायल होने पर 50 हजार रुपए व मृत्यु होने पर आश्रितों को 5 लाख रुपए मुआवजा दिया जाए। 6. सभी मिड डे मील वर्करों को पक्का करने, ईएसआई व पीएफ लागू करने की मांग। 7. मिड डे मील योजना 12वीं कक्षा तक लागू की जाए ।8. बेगार लेना बंद करे, महीने में दो अवकाश दिए जाए। 9. शिक्षा व सरकारी क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाई जाए।
हरियाणा अतिथि अध्यापक संघ की स्टेट कार्यकारिणी और सदस्यों ने अपनी नियमितीकरण व नियुक्ति की मांग को लेकर पानीपत में शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा के आवास पर दस्तक दी। पूरे प्रदेश से सैकड़ों की संख्या में पहुंचे गेस्ट टीचरों ने शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय के अनुसार पत्र लागू करने और स्कूल खुलने से पहले नियुक्ति पत्र जारी करने की गुहार लगाई। अतिथि अध्यापकों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार उनके प्रति सकारात्मक है और जल्द ही मुख्यमंत्री के साथ बैठक कर इस विषय का उचित समाधान निकाला जाएगा। विद्यालय खुलने से पहले चाहते हैं नियुक्ति पत्र शिक्षा मंत्री के आवास पर पहुंचे अतिथि अध्यापकों ने एक स्वर में कहा कि वे अपनी नियुक्ति पत्र जारी करवाने की मांग को लेकर पूरी तरह एकजुट हैं और आगे की लड़ाई एक होकर लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि आगामी दिनों में सरकारी विद्यालय खुलने से पहले सभी प्रभावित साथियों को विभाग द्वारा नियुक्ति पत्र जारी कर दिए जाए। अध्यापकों का कहना है कि अगर समय रहते पत्र जारी होते हैं, तो वे स्कूल खुलने पर पूरे मान-सम्मान के साथ विद्यालयों में अपनी हाजिरी दर्ज करवा सकेंगे और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। एजी ऑफिस से भी लेंगे राय- शिक्षा मंत्री अतिथि अध्यापकों की मांगों को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने कहा कि सरकार गेस्ट टीचरों की समस्याओं को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा, हम लोग कल ही चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री के साथ बैठकर इन सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यदि इस मामले में कानूनी पेचीदगियों को सुलझाने के लिए एडवोकेट जनरल (AG) ऑफिस से कोई कानूनी राय लेनी होगी, तो वह भी ली जाएगी। मंत्री ने गेस्ट टीचरों को दिलाया भरोसा शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर इस मामले को अमलीजामा पहनाने के लिए कैबिनेट की मंजूरी की आवश्यकता पड़ी, तो वे इस विषय को कैबिनेट की बैठक में भी लेकर जाएंगे। उन्होंने गेस्ट टीचरों को भरोसा दिलाया कि जल्द ही सभी संबंधित अधिकारियों और मुख्यमंत्री से चर्चा कर जो भी इन अतिथि अध्यापकों के हित में सबसे बेहतर होगा, वह फैसला लिया जाएगा।
दैनिक भास्कर न्यूज एप पर आमजन की समस्याओं को सीधे प्रशासन तक पहुंचाने वाला ‘भास्कर समाधान’ सेगमेंट अब जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर और सीकर जिले में भी शुरू हो गया है। जयपुर में सफलता के बाद इस सेगमेंट को प्रदेश के इन 5 और जिलों में विस्तार दिया गया है। खास बात यह है कि जनता जो समस्या पोस्ट करेगी, जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी उसका समाधान करेंगे। यह पूरी प्रक्रिया आम लोगों को भी दिखाई देगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बनी रहेगी। इस सेगमेंट की शुरुआत उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, शिक्षा मंत्री और जोधपुर जिले के प्रभारी मंत्री मदन दिलावर, वन मंत्री और सीकर जिले के प्रभारी मंत्री संजय शर्मा, विधि एवं न्यायिक कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने की। सभी ने भास्कर के इस प्रयोग की सराहना की और कहा- एप का ये फीचर पब्लिक और सरकार के बीच सेतु का काम करेगा। मीडिया का काम जनता की समस्याओं को सामने लाना है। इस सेगमेंट की खासियत यह है कि सभी जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को भास्कर एप पर ही अथॉरिटी अकाउंट मिलेगा। इसमें वे अपने विभाग की समस्या का समाधान करते हैं तो एक क्लिक पर समाधान दिखा सकते हैं या समाधान जारी है… के बारे में जानकारी दे सकते हैं। आमजन भी पोस्ट की गई समस्या के समाधान पर फीडबैक दे सकेंगे। देश की मीडिया इंडस्ट्री में ऐसा पहला प्रयोग है, जहां लोग सीधे आवाज उठा सकेंगे और अधिकारी समस्या का समाधान कर सकेंगे। सामाजिक सरोकार की कड़ी में लोगों की आवाज को प्रमुखता से उठाने की दिशा में दैनिक भास्कर ने इस प्रयोग की शुरुआत जयपुर से की थी। सेगमेंट की लॉन्चिंग की PHOTOS… डिप्टी सीएम ने कहा- आम आदमी के लिए फायदेमंद उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार सुशासन के लिए प्रयासरत है। जनता की समस्याओं को चौपाल लगाकर सुना जा रहा है। दैनिक भास्कर न्यूज एप की यह पहल आम आदमी के लिए फायदेमंद होगी। ऐसी कई समस्याएं हैं, जो प्रशासन और सरकार तक नहीं पहुंच पातीं। हर व्यक्ति इस एप के माध्यम से अपनी समस्याएं पहुंचा सकता है। इस कड़ी में भास्कर समाधान जनता और प्रशासन के बीच सेतु का काम करेगा। शिक्षा मंत्री बोले- अधिकारी और कर्मचारी और गंभीरता से काम करेंगे जोधपुर के प्रभारी और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि सरकार लगातार जनसेवा से जुड़े कामों को प्राथमिकता दे रही है। ऐसे में मीडिया के माध्यम से आमजन की समस्या सरकार तक पहुंचेगी तो अधिकारी-कर्मचारी और गंभीरता से काम करेंगे। सीकर के प्रभारी, वन और पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि जयपुर के बाद पांच शहरों में समाधान को शुरू करने से ज्यादा समस्याएं सामने आ सकेंगी। कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि मीडिया चौथा स्तंभ है। आमजन की समस्याओं को सही प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने का मीडिया ही एक माध्यम है। जल्दी ही पूरे राजस्थान में लॉन्च होगा दैनिक भास्कर राजस्थान के स्टेट एडिटर किरण राजपुरोहित ने कहा- कुछ महीने पहले ये जयपुर में लॉन्च किया गया था। पाठकों की डिमांड के बाद राजस्थान के अन्य शहरों में इसे शुरू किया जा रहा है। जल्द ही पूरे राजस्थान में ये लॉन्च होगा। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से पहले से ही जयपुर के लोग सड़क, पानी, बिजली, सफाई, ट्रैफिक, स्ट्रीट लाइट, अतिक्रमण जैसी रोजमर्रा की समस्याओं को आसानी से साझा कर रहे हैं। भास्कर समाधान का उद्देश्य : जनता और प्रशासन के बीच सेतु स्टेट एडिटर किरण राजपुरोहित कहते हैं- इस सेगमेंट को शुरू करने के पीछे भास्कर एप की सोच है कि आमजन और अधिकारियों के बीच सेतु का काम कर सकें। शहर के हर इलाके से आमजन की समस्याएं अधिकारियों तक पहुंचे, ये संभव नहीं है, लेकिन मीडिया ये काम आसानी से कर सकता है। दैनिक भास्कर एप के जरिए हर व्यक्ति अपनी छोटी-बड़ी समस्याएं पोस्ट कर सकता है। यदि सरकार और अधिकारी इसे सकारात्मक रूप में लेकर समाधान के लिए काम करेंगे तो शहर में बदलाव लाया जा सकता है। सेगमेंट की 5 खास बातें… अधिकारी कॉल कर सकेंगे आपकी हर समस्या, बड़ा मुद्दा बनेगी अब गली-मोहल्लों, सड़कों और सरकारी दफ्तरों में अटकी आपकी परेशानियों पर कार्रवाई भी होगी। दैनिक भास्कर एप के इस सेगमेंट के जरिए आपकी आवाज सीधे उस मंच तक पहुंचेगी, जहां से असर होता है। आपके द्वारा पोस्ट की गई हर शिकायत सीधे दैनिक भास्कर डेस्क तक पहुंचेगी। डेस्क की टीम आपकी शिकायत की फैक्ट चेकिंग और वेरिफिकेशन करेगी ताकि सही और वास्तविक समस्याएं ही सामने आएं। वेरिफिकेशन के बाद, कुछ ही मिनटों में आपकी समस्या आपके क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी, ताकि वे तुरंत कार्रवाई कर सकें। हालांकि एक बार पोस्ट की गई समस्या का समाधान होने में लगभग 72 घंटे लग सकते हैं। जनता के काम करने वालों के लिए स्टार ऑफिसर या पब्लिक स्टार बनने का मौका इस सेगमेंट के तहत जन समस्याओं का जिम्मेदारी के साथ समाधान करवाने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित भी किया जाएगा। जनता से जुड़ने वाले अधिकारियों की न्यूज ‘स्टार ऑफिसर’ और ‘पब्लिक के स्टार’ के रूप में भास्कर न्यूज एप और अखबार में पब्लिश की जाएगी। इसका मकसद यही है कि ज्यादा से ज्यादा अधिकारी शहरवासियों से जुड़ सकें। -------- ये खबरें भी पढ़िए… 1- सीएम ने एमपी में लॉन्च किया 'भास्कर समाधान':सरकार-जनता के बीच सेतु बनेगा भास्कर, पहले चरण में भोपाल और इंदौर के पाठक कर सकेंगे समस्या पोस्ट दैनिक भास्कर न्यूज एप पर आमजन की समस्याओं को सामने लाने और उनके समाधान की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सोमवार को नया सेगमेंट ‘भास्कर समाधान’ लॉन्च किया गया। पढ़ें पूरी खबर... 2- भास्कर एप का आमजन की समस्याओं वाला सेगमेंट लॉन्च, दीया कुमारी ने अधिकारियों को तुरंत समाधान करने के निर्देश दिए दैनिक भास्कर एप का आमजन की समस्याओं से जुड़ा नया सेगमेंट आज से लॉन्च हो गया है। डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने इसकी शुरुआत की। सेगमेंट की शुरुआत होते ही लोगों ने समस्या से जुड़ी फोटो और उसकी जानकारी शेयर करना शुरू कर दिया है। पढ़ें पूरी खबर...
खगड़िया जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से उर्दू प्राथमिक विद्यालय, सबलपुर में 'स्टूडेंट ऑफ द मंथ अवॉर्ड' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस पहल के तहत, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया, जिससे उनमें उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा। इस अवसर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) अमरेन्द्र कुमार गोंड, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) आकांक्षा चौधरी, प्रधानाध्यापक दिवाकर कुमार और शिक्षिका मिकी कुमारी सहित विद्यालय परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित थे। शिक्षा केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाने तक सीमित नहीं कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीईओ अमरेन्द्र कुमार गोंड ने कहा कि 'स्टूडेंट ऑफ द मंथ' जैसी पहल बच्चों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करेगी। उन्होंने बताया कि यह विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई, अनुशासन, उपस्थिति और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगी। गोंड ने जोर दिया कि शिक्षा केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास का माध्यम है। डीपीओ आकांक्षा चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यार्थियों की छोटी-छोटी उपलब्धियों को पहचान और सम्मान मिलने से उनका मनोबल बढ़ता है। इससे वे और बेहतर करने के लिए प्रेरित होते हैं। कार्यक्रम प्रत्येक माह आयोजित किया जाएगा विद्यालय प्रशासन ने जानकारी दी कि यह कार्यक्रम प्रत्येक माह आयोजित किया जाएगा। इसमें विभिन्न मानकों के आधार पर उत्कृष्ट विद्यार्थियों का चयन कर उन्हें सम्मानित किया जाएगा। इस पहल की अभिभावकों और शिक्षकों ने भी सराहना की है, इसे बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
अयोध्या जिले के रुदौली क्षेत्र स्थित श्री लालाराम आदर्श इंटर कॉलेज और श्री साहब सरन स्मारक प्राइवेट आईटीआई में मेधावी सम्मान समारोह और निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रुदौली विधायक रामचंद्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक और क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद रहे। समारोह के दौरान हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र और सम्मान पत्र देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया। विधायक रामचंद्र यादव ने मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। शिक्षा को बताया विकास की नींव विधायक रामचंद्र यादव ने कहा कि शिक्षा समाज और राष्ट्र के विकास का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से कठिन परिश्रम, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मेधावी छात्रों की उपलब्धियां अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती हैं। उन्होंने जनपद में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा कु. पल्लवी कौशल (500 में से 472 अंक, 94.4%) और कु. रूपाली यादव (500 में से 455 अंक, 91%) को विशेष रूप से सम्मानित किया। उन्होंने दोनों छात्राओं की सफलता को पूरे जनपद के लिए गर्व का विषय बताया। स्वास्थ्य शिविर का किया अवलोकन कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का भी विधायक ने निरीक्षण किया। शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा क्षेत्रवासियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और आवश्यक परामर्श व दवाएं निःशुल्क प्रदान की गईं। विधायक ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के स्वास्थ्य शिविर लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य को समाज के विकास के दो प्रमुख स्तंभ बताया और कहा कि ये दोनों मिलकर नई पीढ़ी को सशक्त बनाते हैं तथा समाज के समग्र विकास की आधारशिला रखते हैं।
शाजापुर में रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मालवा प्रांत के 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग (व्यवसायी) का समापन प्रकट उत्सव के साथ हुआ। छत्रपति शिवाजी स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने अपने प्रशिक्षण का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। शाम 5 बजे से शुरू हुए इस कार्यक्रम में शिक्षार्थियों ने योग, दंड-योग, समता और व्यायाम की विभिन्न रचनाओं का प्रदर्शन किया। घोष दल (बैंड) की धुन और सामूहिक गीतों ने पूरे मैदान को देशभक्ति के माहौल से भर दिया। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि बीच में तेज आंधी और बारिश होने के बावजूद करीब 300 शिक्षार्थी अपने स्थान पर अडिग डटे रहे, जिसकी लोगों ने काफी सराहना की। संघ का ध्येय: व्यक्ति निर्माण और समाज संगठन मुख्य वक्ता मध्य क्षेत्र कार्यवाह अशोक अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि संघ का मूल उद्देश्य व्यक्ति निर्माण के जरिए समाज को संगठित करना है। उन्होंने स्वयंसेवकों को अनुशासन, सेवा और समर्पण का पाठ पढ़ाया। साथ ही, उन्होंने संघ के पंच परिवर्तन-परिवार प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य और स्वदेशी भाव-को अपनाने का आह्वान किया। भारत की वैश्विक भूमिका पर चर्चा अशोक अग्रवाल ने जोर दिया कि अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के दम पर भारत विश्व का मार्गदर्शन करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए भारत का विश्वगुरु बनना जरूरी है। मुख्य अतिथि गोवर्धनलाल गुवाहाटिया ने भी राष्ट्रभक्ति और सामाजिक समरसता के लिए संघ के प्रयासों की प्रशंसा की। ईंधन बचत और पर्यावरण का संदेश इस आयोजन के जरिए समाज को ईंधन संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का संदेश भी दिया गया। संघ के आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों के बजाय बसों और सामूहिक वाहनों से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे, जो सामाजिक सहभागिता की एक अनूठी मिसाल रही। कार्यक्रम में वर्ग कार्यवाह राधेश्याम पाटीदार ने प्रतिवेदन पढ़ा, जबकि वर्ग सर्वाधिकारी प्रवीण सैनी और जिला संघ चालक हुकम धनगर सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
मोतिहारी में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने रविवार को शिक्षकों की बहाली को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने बताया कि TRE-4 (शिक्षक भर्ती परीक्षा) से संबंधित अधिसूचना जून माह में जारी कर दी जाएगी। विभाग ने इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं और प्रक्रिया को शीघ्र शुरू करने की दिशा में कार्य तेज कर दिया गया है। शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में प्रति वर्ष न्यूनतम 20 हजार शिक्षकों की भर्ती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए थे, जिसके बाद विभाग ने अपनी तैयारियां और गति प्रदान की है। अफवाहों या भ्रामक जानकारियों पर ध्यान न दें उन्होंने अभ्यर्थियों को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें किसी भी प्रकार की अफवाहों या भ्रामक जानकारियों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। छात्रों को अपनी पढ़ाई पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करना चाहिए, क्योंकि बिना कड़ी मेहनत के सफलता प्राप्त करना संभव नहीं है। मंत्री ने परीक्षा में सफलता के लिए नियमित अध्ययन और अनुशासन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति पर विशेष बल शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल शिक्षकों की भर्ती करना नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना भी है। इसके लिए योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति पर विशेष बल दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में और भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में भारतीय आदिवासी गिहार महासभा की बुन्देलखण्ड स्तरीय बैठक रविवार को एक मैरिज हॉल में आयोजित की गई। इस बैठक में सर्वसम्मति से राजेश गिहार को भारतीय आदिवासी गिहार महासभा उत्तर प्रदेश का नया प्रदेश अध्यक्ष चुना गया। बैठक की अध्यक्षता जिलेदार सिंह ने की, जबकि संचालन श्री रामबाबू गिहार ने किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश गिहार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने समाज को संबोधित किया। उन्होंने शिक्षा को समाज की उन्नति का सबसे बड़ा माध्यम बताया। गिहार ने प्रत्येक परिवार से अपने बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। संगठन को मजबूत करने का संकल्प लिया ओम प्रकाश गिहार ने कहा कि विभिन्न सरकारें लंबे समय से गिहार समाज को जनजाति का दर्जा देने का केवल आश्वासन देती रही हैं, जिससे समाज के लोगों में निराशा और असंतोष है। उन्होंने नव निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष राजेश गिहार को बधाई देते हुए युवा नेतृत्व के माध्यम से संगठन को गांव-गांव तक मजबूत करने का कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने समाज की एकजुटता पर बल देते हुए कहा कि संगठन और समाज के बिखराव के कारण राजनीतिक दल भी समाज की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते हैं। उन्होंने युवाओं से समाज को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आगे आने का आह्वान किया। यह लोग बैठक में रहे मौजूद बैठक के दौरान समाज के हितों और संगठन के विस्तार से जुड़े लगभग आठ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। संगठन को मजबूत बनाने के लिए कई प्रस्ताव भी पारित किए गए। इस अवसर पर हंसराज गिहार, जिलेदार सिंह, रामशंकर गिहार, सोनू भारती गिहार, धर्मेन्द्र गिहार, अजय सिंह गिहार उर्फ बाबा, नवीन गिहार, जयचन्द्र गिहार, बीरन गिहार, रामबाबू उर्फ गुड्डू गिहार, जयपाल गिहार, गुड़िया गिहार, लाल सिंह गिहार, विशुन गिहार, देवटानी गिहार, आर्मन गिहार, रामसिंह गिहार, विशुनलाल गिहार, विजय गिहार और मनीष गिहार सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब मंत्रिमंडल ने दशकों पुरानी ठेकेदारी रोजगार प्रणाली (आउटसोर्सिंग) को हमेशा के लिए समाप्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। सरकार ने विभिन्न विभागों में कार्यरत 65,048 आउटसोर्स कामगारों को सीधे सरकारी नियंत्रण में लाने और उन्हें रेगुलर करने की रूपरेखा को मंजूरी दे दी है। इस क्रांतिकारी कदम से निजी बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इसके लिए कैबिनेट ने वर्ष 2016 के पुराने अधिनियम को निरस्त कर दो नए अध्यादेशों—'पंजाब राज्य आउटसोर्स्ड पर्सनल बिल, 2026' और 'पंजाब कॉन्ट्रैक्टुअल पर्सनल बिल, 2026' को स्वीकृति दी है। स्थायी रोजगार और सुरक्षा का नया फॉर्मूला नई नीति के तहत 51 सरकारी विभागों के कुल 65,048 कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से लाभ मिलेगा, जिसमें पहले चरण में 26,000 से अधिक कामगार लाभान्वित होंगे। ग्रुप-सी और डी के जिन आउटसोर्स्ड कर्मचारियों ने 5 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें सीधे सरकारी कॉन्ट्रैक्ट पर लाया जाएगा, और इस कॉन्ट्रैक्ट पर 10 साल पूरे होने के बाद स्वीकृत खाली पदों पर रेगुलर किया जाएगा। इसके अलावा, फायर सर्विसेज, पीएसपीसीएल लाइनमैन, सीवर व सेनिटेशन वर्कर जैसी जोखिम भरी श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए इस समयसीमा को घटाकर मात्र 3 वर्ष कर दिया गया है। इन प्रमुख विभागों के कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ इस बड़े सुधार के दायरे में बिजली विभाग के 15,753, स्थानीय सरकार के 8,436, सहकारी संस्थाओं के 8,373, स्कूल शिक्षा के 7,704 और परिवहन विभाग के 4,746 कर्मचारी मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य (2,688), जल आपूर्ति (1,575), पीडब्लूडी (1,570), कृषि (1,533), फायर ब्रिगेड (1,472), सामान्य प्रशासन (1,322), जेल (1,311), तकनीकी शिक्षा (1,251) और मेडिकल शिक्षा (1,231) के कर्मचारियों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा। बैंक खातों में सीधे आएगा वेतन, मिलेंगी छुट्टियां मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों का वेतन बिना किसी कमीशन या कटौती के सीधे उनके बैंक खातों में जमा होगा। कर्मचारियों को प्रति वर्ष 10 दिनों की आकस्मिक छुट्टी (कैजुअल लीव) और कानूनी प्रसूति लाभ मिलेगा। साथ ही, उन्हें बायोमेट्रिक हाजिरी और IHRMS प्रणाली से जोड़ा जाएगा। नौकरी की पूरी सुरक्षा देते हुए यह प्रावधान किया गया है कि किसी भी कर्मचारी को बिना ठोस लिखित कारण और सुनवाई का मौका दिए सेवा से नहीं हटाया जा सकेगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी इस फैसले को 45 दिनों के भीतर लागू करना शुरू कर देगी। डी.ए. और पेंशन बकाए के लिए कैबिनेट पैनल का पुनर्गठन कर्मचारियों के वित्तीय हितों को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने एक विशेष सब-कमेटी का पुनर्गठन किया है। इस पैनल में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और डॉ. बलजीत कौर शामिल हैं। यह समिति 1 जनवरी 2016 से 30 जून 2021 के बीच के संशोधित वेतन-पेंशन बकाए और 1 जुलाई 2021 से 31 मार्च 2024 तक के पेंडिंग महंगाई भत्ते (डी.ए.) व महंगाई राहत के मुद्दों का अध्ययन कर जल्द समाधान निकालेगी। इसके साथ ही, 'पंजाब सुपीरियर जुडिशियल सर्विस रूल्स, 2007' में संशोधन को भी मंजूरी दी गई है जिससे उच्च न्यायिक अधिकारियों की तरक्की के अवसर मजबूत होंगे। भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: स्थापित होंगी 7 विशेष अदालतें प्रशासनिक शुचिता सुनिश्चित करने के लिए पंजाब कैबिनेट ने 'भ्रष्टाचार निवारक कानून, 1988' के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए राज्य में 7 नई विशेष अदालतें स्थापित करने की मंजूरी दी है। इनमें से तीन अदालतें एस.ए.एस. नगर (मोहाली) में और एक-एक अदालत जालंधर, लुधियाना, अमृतसर व पटियाला में खोली जाएगी। इन अदालतों के संचालन के लिए एडिशनल जिला एवं सेशन जजों के 7 पदों सहित सहायक स्टाफ की 63 नई रिक्तियों को भी हरी झंडी दी गई है। मुख्यमंत्री ने गर्व से कहा कि जहां अन्य राज्य ठेकेदारी प्रथा की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं पंजाब इसे समाप्त कर देश के सामने मिसाल पेश कर रहा है।
सरकारी ड्यूटी से बाहर होने के बावजूद बोलेरो पर लालनीली- बत्ती और पुलिस मोनोग्राम बने रहे। मामला सामने आने के बाद नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। यह गाड़ी कोटा में शिक्षा मंत्री के काफिले से जुड़ी थी। गाड़ी मालिक उसका परिवार इसे अपने निजी कार्यों में इस्तेमाल कर रहा है। शिक्षा मंत्री ने हटाई सभी गाड़ियां जहां एक ओर शिक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री के फ्यूल बचत संदेश पर अमल करते हुए अपने काफिले की सभी गाड़ियों का उपयोग सीमित कर दिया और खुद भी सादगी का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर उनके काफिले में लग चुकी एक बोलेरो गाड़ी निजी उपयोग में चलती हुई नजर आई। शिक्षा विभाग में लगाई थी बोलेरो जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग के लिए अनुबंधित यह बोलेरो पहले शिक्षा मंत्री के काफिले में शामिल थी। लेकिन पिछले करीब एक महीने से पेट्रोल-डीजल की बचत के चलते गाड़ी काफिले में उपयोग नहीं हो रही थी। इसके बावजूद गाड़ी पर लगी लाल बत्ती और पुलिस का मोनोग्राम नहीं हटाया गया। गाड़ी मालिक का बेटा लेकर घूम रहा था गाड़ी का मालिक और उसके परिवार के सदस्य इसी वाहन का निजी कार्यों और शहर में घूमने के लिए उपयोग कर रहे थे। शनिवार की रात इस गाड़ी में दो युवक और दो युवतियां मौजूद थे। गाड़ी मालिक पीरूलाल ने बताया कि उनकी गाड़ी शिक्षा विभाग में लगी हुई थी, जिसे बाद में शिक्षा मंत्री के काफिले में शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने से गाड़ी खड़ी थी और कल उनका बेटा दीपक किसी काम से इसे गुमानपुरा क्षेत्र में लेकर गया था। पीरूलाल का दावा है कि अधिकारियों ने उन्हें निजी काम के लिए गाड़ी उपयोग करने की अनुमति दी थी, लेकिन लाल बत्ती को कपड़े से ढकने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि जब वाहन सरकारी ड्यूटी पर नहीं था तो उस पर लाल बत्ती और पुलिस मोनोग्राम क्यों बने रहे। मामला सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। शिक्षा विभाग के एडीपीसी अधिकारी नवल किशोर महावर ने बताया कि मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है। पता करके ही बता पाऊंगा, क्योंकि मैंने अभी 1 महीने पहले ही एडिशनल चार्ज लिया है। वहीं गाड़ी मालिक ने बताया कि एक महीने से गाड़ी खड़ी है। 1 जून को पता लगेगा कि यह गाड़ी दोबारा लगती है या नहीं। इसलिए मैंने अभी तक गाड़ी से नीली और लाल बत्ती और पुलिस का मोनोग्राम को नहीं हटाया। अगर गाड़ी दोबारा लगती है तो मुझे दोबारा इसे लगवाना पड़ता। --- ये खबर भी पढ़ें… मंत्री-अफसरों की विदेश यात्राओं पर रोक:अधिकारियों-कर्मचारियों को कार पुलिंग के निर्देश, सरकारी खर्च घटाने का सर्कुलर जारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने सहित सात तरह की अपील के बाद राज्य सरकार ने सर्कुलर जारी किया है। मंत्रियों, अफसरों और कर्मचारियों की सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा पर रोक लगा दी है।वित्त विभाग ने फ्यूल बचाने के साथ सरकारी विभागों में खर्च घटाने के लिए गाइड लाइन भी जारी की है। सभी विभागों को इसका कठोरता से पालन करने का आदेश दिया गया हैं। (पूरी खबर पढ़ें)
दमोह में शिक्षा विभाग के बाबू पर चाकू से हमला:शराब के पैसे न देने पर बदमाश ने किया वार
दमोह के बड़ापुरा में शनिवार रात शिक्षा विभाग के एक बाबू पर चाकू से हमला किया गया। आरोपी ने शराब के लिए पैसे मांगने पर हमला किया। घायल को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, और पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घायल की पहचान 56 वर्षीय देवेंद्र राज के रूप में हुई है, जो बड़ापुरा के निवासी हैं। देवेंद्र बटियागढ़ के शासकीय हाई स्कूल में सहायक ग्रेड 3 के पद पर कार्यरत हैं। देवेंद्र राज ने बताया कि शनिवार रात करीब 10 बजे जब वह अपने घर लौट रहे थे, तभी अरविंद कोरी नामक व्यक्ति ने उनसे शराब के लिए पैसे मांगे। पैसे न होने की बात कहने पर आरोपी ने उनकी जांघ में चाकू से हमला कर दिया और मौके से फरार हो गया। हमले के बाद स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए और उन्होंने तत्काल परिजनों को सूचित किया। परिजन घायल देवेंद्र को इलाज के लिए जिला अस्पताल ले गए। सूचना मिलने पर कोतवाली टीआई मनीष कुमार भी जिला अस्पताल पहुंचे। टीआई मनीष कुमार ने बताया कि आरोपी अरविंद कोरी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और उसकी तलाश की जा रही है।
त्रिभाषा फार्मूला है भारत की शिक्षा का नया क्षितिज
भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि भाषाओं, बोलियों, संस्कृतियों और परंपराओं का विराट संगम है। यहां भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान, संस्कृति, संवेदना और सामाजिक चेतना का आधार भी है। ऐसे बहुभाषी देश में शिक्षा व्यवस्था को किस भाषा में संचालित किया जाए और बच्चों को कौन-कौन सी भाषाएं पढ़ाई जाएं, यह ... Read more
शिक्षा ही मनुष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है- यादव
भास्कर संवाददाता | आगर मालवा नवीन आचार्य वर्ग एवं अंग्रेजी स्पोकन वर्ग के तृतीय दिवस शनिवार को आयोजित वंदना सत्र में बालिका शिक्षा, संस्कार एवं भारतीय संस्कृति पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में आगर ग्राम भारती जिला समिति की जिला कोषाध्यक्ष पूनम बैरागी, वर्ग संयोजक गोपाल गिरि गोस्वामी, आगर बीएसी ओमप्रकाश यादव एवं जिला कार्यालय प्रमुख राजू शर्मा अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती, प्रणव अक्षर ओम’ एवं मां भारती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। अतिथि परिचय सुरेश बैरागी ने दिया। वंदना राजेश शर्मा एवं चैन सिंह द्वारा प्रस्तुत की गई। पूनम बैरागी ने कहा कि वर्तमान समय में बालिका शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। आज बालिकाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं तथा दो कुलों को रोशन करती हैं। बीएसी ओमप्रकाश यादव ने कहा कि शिक्षा का दान सबसे बड़ा दान होता है और शिक्षा ही मनुष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है। द्वितीय सत्र में उज्जैन विभाग के सामाजिक समरसता संयोजक सुंदर शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि भारत केवल भूमि नहीं, बल्कि हमारी माता है। विश्व में भारत ही ऐसा देश है जिसने भूमि को माता का दर्जा दिया है। उन्होंने भारतीय संस्कृति और संस्कारों को विश्व में श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि भारत प्राचीन काल से ही गौरवशाली रहा है। कार्यक्रम में कालूराम कुंभकार, बगदु सिंह, विनोद नायक, मुकेश जैन, देवेंद्र उपाध्याय, किशोर शर्मा, करण सिंह ओसारा, अशोक शर्मा, घनश्याम शर्मा, विष्णु सेन, शंकर सिंह, बरदी दांगी, ज्योति गोड, दिलीप दांगी, दिनेश भिलाला, तोफान सिंह एवं शंभूदयाल सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। संचालन मुकेश नागर ने किया। जानकारी जयनारायण यादव ने दी।
ललित सुरजन की कलम से - शिक्षा और परीक्षा
'जब हम पढ़ रहे थे, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, आईआईएम तब भी थे।
सरकारी स्कूलों की चुनौतियां और बदलता शिक्षा परिदृश्य
शिक्षा किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति, सामाजिक गतिशीलता और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की आधारशिला है।
Fact Check: क्या बिहार के शिक्षा मंत्री ने कहा लड़कियों को शिक्षा की जरूरत नहीं? सच जानिए
बूम ने पाया कि बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने Agitation शब्द का इस्तेमाल किया था जिसे एजुकेशन समझकर गलत दावा किया जा रहा है.
पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु का रिश्वत लेते हुए वीडियो फर्जी और एआई जनरेटेड है
बूम ने पाया कि ब्रात्य बसु का वीडियो गूगल के SynthId का उपयोग करके एआई द्वारा जनरेट किया गया है.
समानता और शिक्षा की क्रांतिकारी मशाल: सावित्रीबाई फुले
10मार्च सावित्रीबाई फुले महापरिनिर्वाण दिवस भारतीय समाज में जब भी शिक्षा,समानता और सामाजिक न्याय की बात उठती है,तो एक नाम इतिहास के पन्नों से निकलकर हमारे सामने खड़ा हो जाता है—सावित्रीबाई फुले।10मार्च को उनका महापरिनिर्वाण दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है,बल्कि यह दिन उस सामाजिक चेतना को याद करने का अवसर है,जिसने सदियों ... Read more
आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं
महिला दिवस पर विशेष:- अजमेर राजस्थान आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं:- देश-प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध ओर इन अपराधों में पिछले वर्षो में अपराध की दर तीव्र ही हुई है ओर “भारत मे अपराध ” नामक रिपोर्ट बताती है ... Read more
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समर्थन से भारत शिक्षा के सभी स्तरों पर एआई शिक्षण और रिसर्च को एकीकृत करके खुद को एक वैश्विक एआई महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है
शिक्षा को हिंसक नहीं, संवेदनशील बनाना होगा
देश में इन दिनों बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं और सामान्य परीक्षाएं भी शुरू होने वाली हैं। हर साल की तरह इस बार भी परीक्षा का मौसम केवल प्रश्नपत्रों और परिणामों का नहीं, बल्कि मानसिक दबाव, चिंता और असुरक्षा का मौसम बनता जा रहा है। छात्रों के चेहरों पर भविष्य की चिंता साफ पढ़ी जा ... Read more
गला घोटिया शिक्षा का विश्वगुरु बन चुका देश
पिछले 12 सालों से देश को विश्वगुरु बनाने का जो झूठ फैलाया जा रहा था, अब उसका गुबार ऐसा फूटा है कि दुनिया भर में शर्मिंदगी का सबब बन गया है।
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
NEET UG रिजल्ट को लेकर अभी भी जारी है गुस्सा, छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के पास किया विरोध प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए छात्रों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। आइए जानते हैं, क्या है पूरा म
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का 10 फीसदी भी डाटा नहीं हुआ अपलोड
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का डाटा अपलोड करने में जिले के कई स्कूल ढील दे रहे हैं, वे 10 फीसदी छात्रों का भी डाटा अभी तक अपलोड नहीं कर पाए हैं। डाटा अपलोड करने में आधार कार्ड की अनिवार्यता के बाद से छ
बेसिक शिक्षा : दो महीने बाद भी 1.38 लाख छात्रों का डेटा नहीं हुआ अपडेट
बेसिक शिक्षा विभाग के यू डायस पोर्टल पर डेटा अपडेट करने का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। हाल ये है कि दो महीने में महज 1.38 लाख छात्रों डेटा भी अपडेट नहीं हुआ। विभाग ने अब 5 जून तक इसे पूरा करने क
स्कूलों में कैसे पढ़ा रहे हैं शिक्षक, वीडियो में देखेगा शिक्षा विभाग, होगी रिकॉर्डिंग
शिक्षा विभाग वीडियो के जरिए देखेगा कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षक छात्रों को कैसे पढ़ाते हैं। बता दें. छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षकों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। आइए जानते हैं विस्तार से।

