विधानसभा में जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने वाली जौनपुर की मछलीशहर विधानसभा से समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर का कहना है - विपक्ष में होते हुए भी मैं अपने क्षेत्र में स्वास्थ्य, शिक्षा और जनहित के मुद्दों पर लगातार काम कर रही हूं। मेरे कामकाज का मूल्यांकन करने का अधिकार जनता के पास है। शिक्षामित्रों का भला सपा सरकार में हुआ था। भाजपा सरकार में उनके साथ गलत हुआ। भास्कर रिपोर्टर ने विधायक रागिनी सोनकर से खास बातचीत की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: पिछले 4 साल के कामकाज को 10 में से कितने नंबर देंगी? जवाब: मैं लगातार काम कर रही हूं और आगे भी करती रहूंगी। अपने काम का नंबर देने का अधिकार जनता को है और मछलीशहर की जनता ही इसका फैसला करेगी। सवाल: सबसे बड़ा काम आपने कौन सा कराया? जवाब: मछलीशहर में आंखों के अस्पताल का निर्माण कराया जा रहा है, जिसकी नींव समाजवादी पार्टी ने रखी थी। इसके लिए सांसद जया बच्चन ने फंड दिया है। अस्पताल का निर्माण कार्य चल रहा है। पूरा होने के बाद इसमें आधुनिक मशीनें भी लगाई जाएंगी। सवाल: शिक्षामित्रों के मुद्दे पर आपकी पार्टी का क्या रुख है? जवाब : समाजवादी पार्टी ने हमेशा शिक्षामित्रों के मुद्दे को उठाया है। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की सरकार में करीब 40 हजार शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाया गया था। भाजपा सरकार आने के बाद उनकी नौकरियां चली गईं। अगर हमारी सरकार आती है तो शिक्षामित्रों के सम्मान और उनके हित में फैसला लिया जाएगा। सवाल: क्या इस बार भी आप टिकट की दावेदार हैं? जवाब: यह फैसला पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा। मैं पूरी निष्ठा के साथ काम कर रही हूं और उम्मीद है कि पार्टी मुझे फिर मौका देगी। सवाल: यूजीसी और एसआईआर जैसे मुद्दों को आप कैसे देखती हैं? जवाब: इन मुद्दों पर सरकार की नीतियों से विवाद का माहौल बना है। अधिकारियों को निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए, लेकिन कई मामलों में ऐसा नहीं दिखता। इससे जनता का भरोसा कमजोर होता है।
कोटा जिले में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की पदयात्रा के तीसरे दिन, यात्रा सुबह करीब 8 बजे मंदिरगढ़ से शुरू हुई। यह यात्रा मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व क्षेत्र में स्थित केशवपुरा गांव से होते हुए जसपुरा गांव पहुंची। यात्रा के दौरान रास्ते में बबूल का कांटा मंत्री दिलावर के पैर में चुभ गया। सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी तुरंत उनकी ओर दौड़े, लेकिन मंत्री ने उन्हें रोक दिया। खुद ही अपने पैर से कांटा निकाल लिया। इस दौरान मंत्री मदन दिलावर ने कहा- राजनीति फूलों की सेज नहीं है। जनसेवा के मार्ग पर जनता अक्सर उन्हें फूल-मालाओं से स्वागत करती है। ऐसे में अगर जनता के लिए चलते हुए पैरों में कांटे भी चुभ जाएं तो उसे आशीर्वाद की तरह स्वीकार करना चाहिए। मंत्री मदन दिलावर 13 मार्च से अपने विधानसभा क्षेत्र रामगंज मंडी में पदयात्रा कर रहे हैं। मंत्री के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) के अनुसार, लगातार पैदल चलने के कारण पिछले 36 घंटों में उनका लगभग 5 किलो वजन कम हो गया है। धूल-मिट्टी और लगातार भाषण देने के कारण उनका गला भी बैठ गया है। शिक्षा मंत्री की पदयात्रा से जुड़ी PHOTOS… स्कूल क्रमोन्नत करने का दिलावर का वादा जसपुरा गांव में दिलावर ने एक वादा किया। मंत्री ने कहा- यदि सरकारी स्कूल में 25 और बच्चों का नामांकन कराया जाता है, तो वे तुरंत ही स्कूल को सेकेंडरी स्कूल में क्रमोन्नत कर देंगे। छोटे बच्चों के लिए जनजातीय विकास विभाग के माध्यम से बालवाड़ी खोलने के लिए प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए। मुफ्त मकान बनवाने के लिए फॉर्म भरवाए मंत्री मदन दिलावर ने विकास अधिकारी शैलेश रंजन को वन अधिकार कानून के तहत गांव के सभी लोगों को तीन महीने में मकान के पट्टे देने के निर्देश दिए। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर कहा- मंदिर गढ़, केशवपुरा, और जसपुरा में शिविर लगाए जाएं। इन शिविरों का उद्देश्य वंचित सभी पात्र व्यक्तियों तक पहुंचना है। शिविरों में वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, और दिव्यांग पेंशन के लिए आवेदन भरवाए जाएं। साथ ही, खाद्य सुरक्षा योजना में मुफ्त गेहूं प्राप्त करने के लिए भी फॉर्म भर जाएंगे। मंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मुफ्त मकान बनवाने के लिए भी फॉर्म भरवाने के निर्देश दिए। पुराने स्कूल भवन को सामुदायिक भवन के लिए हस्तांतरित करने और मरम्मत कर सुंदर बनाने को कहा। किशनपुरा से जसपुरा को सड़क से जोड़ने के लिए 10 लाख रुपए देने की घोषणा की। कार्यक्रम में गरासिया समुदाय की महिलाओं एवं पुरुषों ने पारंपरिक लोक गीतों पर शानदार सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया।
इला प्रसाद के उपन्यास ‘वह दिन आएगा ज़रूर’ पर अनिल पुष्कर की समीक्षा। यह कृति अमेरिकी शिक्षा व्यवस्था, प्रवासी भारतीयों के संघर्ष और स्कूल सिस्टम की जटिलताओं को गहराई से सामने लाती है।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बिना मान्यता वाले स्कूलों के एडमिशन विज्ञापन के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को इस मामले में पर्सनल एफिडेविट दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही संबंधित स्कूल को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया गया है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। यह सुनवाई जनहित याचिका (WPPIL No. 22/2016) में इंटरवीनर विकास तिवारी द्वारा उठाए गए मुद्दों पर की गई। शिकायतों पर कार्रवाई नहीं, कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट सुनवाई के दौरान इंटरवीनर ने कोर्ट को बताया कि उनकी शिकायतों को 5 फरवरी 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय ने दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारियों को भेजकर एक सप्ताह में कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस पर कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को आदेश का पालन करते हुए अगली सुनवाई तक कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। एडमिशन विज्ञापन पर कोर्ट ने लिया संज्ञान इंटरवीनर ने अदालत के सामने एक पत्रिका में प्रकाशित एडमिशन विज्ञापन भी प्रस्तुत किया। इसमें सत्र 2026–27 के लिए कई निजी स्कूलों में प्रवेश शुरू होने की जानकारी दी गई थी। याचिका में कहा गया कि ये स्कूल आवश्यक मान्यता के बिना संचालित हो रहे हैं इसके बावजूद एडमिशन का विज्ञापन देकर छात्रों को प्रवेश देने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। इसे अदालत के पूर्व आदेशों का उल्लंघन बताया गया। किड्स एकेडमी के पांच ब्रांच शामिल एडमिशन विज्ञापन में जिन स्कूलों का उल्लेख किया गया इनमें तुलसी कृष्णा किड्स एकेडमी, मोवा के अलावा कृष्णा किड्स एकेडमी के ही शंकर नगर, न्यू राजेंद्र नगर, सुंदर नगर और शैलेंद्र नगर ये चार ब्रांच शामिल हैं। कोर्ट ने मामले में कृष्णा पब्लिक स्कूल, तुलसी (रायपुर) को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। शिक्षा सचिव को जवाब देने का आदेश डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को इस मामले में पर्सनल एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि बिना मान्यता के स्कूलों द्वारा एडमिशन का विज्ञापन देना अदालत के वैध आदेशों की अवमानना की श्रेणी में आ सकता है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 तय की है। उस दिन विभाग को कार्रवाई की स्थिति और अपना जवाब अदालत के सामने पेश करना होगा।
वाल्मीकि समाज ने प्रगति और शिक्षा मुद्दों पर की विशेष बैठक
भास्कर न्यूज | अमृतसर वाल्मीकि समाज की सामाजिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में भागीदारी को मजबूत बनाने के उद्देश्य से अमृतसर में बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता भगवान वाल्मीकि आश्रम धूना साहिब ट्रस्ट के चेयरमैन ओम प्रकाश गब्बर ने की। बैठक में वाल्मीकि समाज के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया। खासकर शिक्षा के क्षेत्र में समाज के विद्यार्थियों को हो रहे नुकसान पर चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि कई उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में वाल्मीकि समाज के लिए निर्धारित आरक्षित सीटों का सही ढंग से आवंटन नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण योग्य विद्यार्थियों को उनके अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है। बैठक में समाज से जुड़े वकीलों को पेश आ रही समस्याओं के समाधान पर भी चर्चा हुई। साथ ही यह मुद्दा भी सामने आया कि समाज के अधिकांश बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, लेकिन कई स्थानों पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। कुछ सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की लापरवाही और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। इस अवसर पर नरेश गिल,रिंकू मल्होत्रा, दविंदर कुमार पहलवान, बलबीर सिंह बिट्टू पहलवान, अशोक मल्होत्रा, लक्ष्मण सिंह, अजय पहलवान, बंटी कुमार, पवन कुमार उर्फ पम्मू , सुशील पुरी सहित कई गणमान्य सदस्य मौजूद रहे।
तीन बार नियमावली बदली, अभी भी संशोधन का प्रस्ताव शिक्षा विभाग में लंबित
भास्कर न्यूज | गढ़वा दस वर्षों से झारखंड शिक्षा पात्रता परीक्षा (जेटेट) का आयोजन नहीं किया गया है। ऐसे में अभ्यर्थियों में आक्रोश देखा जा रहा है। इस संबंध में बताया गया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्रतिवर्ष शिक्षक पात्रता परीक्षा होनी है। राज्य में वर्ष 2011 से शिक्षा का अधिकार अधिनियम प्रभावी है। ऐसे में अब तक 15 शिक्षक पात्रता परीक्षा हो जानी चाहिए थी। पर मात्र दो ही परीक्षा हुई है। राज्य में पहली शिक्षक पात्रता परीक्षा 2013 में तथा दूसरी परीक्षा वर्ष 2016 में हुई थी। इस दौरान प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त विद्यार्थी किसी भी शिक्षक नियुक्ति परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। प्राथमिक व मध्य विद्यालय में शिक्षक नियुक्ति के लिए अभ्यर्थी का शिक्षक पात्रता परीक्षा सफल होना अनिवार्य है। अभ्यर्थी निजी विद्यालय में शिक्षक नहीं बन पा रहे हैं। राज्य में भले ही दस वर्ष से जे टेट की परीक्षा नहीं हुई है। पर इस दौरान नियमावली में तीन संशोधन किया गया है।लेकिन अभी तक जे टेट परीक्षा आयोजित नहीं की गई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सभी शिक्षकों को जे टेट परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। लेकिन जब परीक्षा ही आयोजित नहीं होगी तो शिक्षक परीक्षा उत्तीर्ण कैसे करेंगे। 2024 में परीक्षा के लिए भरवाया गया था आवेदन : वर्ष 2024 के जुलाई माह में जे टेट परीक्षा को लेकर आवेदन भरवाया गया था। लेकिन परीक्षा को लेकर जारी सिलेबस का विरोध के बाद इसमें बदलाव का निर्णय लिया गया। वहीं कुछ दिनों के बाद उक्त परीक्षा को रद्द कर दी गई थी। वहीं अभी तक जे टेट परीक्षा को लेकर अधिसूचना जारी नहीं की गई है। पहली नियमावली वर्ष 2012 में बनाई गई थी। जिसके आधार पर वर्ष 2013 और वर्ष 2016 में परीक्षा हुई। इसके बाद नियमावली में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की गई। वर्ष 2019 में नियमावली में संशोधन को कैबिनेट से स्वीकृति मिली। विभाग द्वारा परीक्षा लेने के लिए जैक को प्रस्ताव भेजा गया। जैक ने परीक्षा के विभिन्न विषयों में अंकों में एकरूपता नहीं होने की बात कह शिक्षा विभाग से मार्गदर्शन मांगा। इसके बाद वर्ष 2022 में नियमावली को संशोधित किया गया। परीक्षा के लिए फिर जैक को प्रस्ताव भेजा गया। हालांकि नियमावली में फिर भी विसंगति रह गई। जिसकी वजह से जैक ने फिर मार्गदर्शन मांगा। इसके बाद नियमावली में फिर बदलाव किया गया। इसके बाद फिर नियमावली में बदलाव हुआ। इसके बाद में इसमें भी विसंगति रह गई और फिर संशोधन का प्रस्ताव शिक्षा विभाग स्तर पर लंबित है। परीक्षा नहीं होने के विरोध में निकाला मशाल जुलूस जे टेट परीक्षा आयोजित नहीं होने के विरोध में झारखंड प्रशिक्षित शिक्षक संघ गढ़वा के बैनर तले मशाल जुलूस निकाली गई। मशाल जुलूस चिनियां मोड़ से रंका मोड़ तक निकाली गई। विपिन कुमार चंद्रवंशी के नेतृत्व में निकाली गई जुलूस में छात्रों ने कहा कि सरकार ने पहले जे टेट का नोटिफिकेशन जारी कर छात्रों से फॉर्म भरवाया। जिससे अच्छा-खासा राजस्व भी प्राप्त हुआ। लेकिन इसके बावजूद परीक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे छात्रों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार से अविलंब जे टेट नियमावली को कैबिनेट से पारित कर जल्द परीक्षा आयोजित कराने की मांग की है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 16 मार्च को झारखंड के 24 जिलों के अभ्यर्थी रांची पहुंचकर विधानसभा का घेराव करेंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। लेकिन यदि सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज करती है तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस अवसर पर वीरेंद्र प्रसाद, नईमुद्दीन अंसारी, दिलीप पाल, नंदलाल कुमार, मंगलेश कुमार, वेद प्रकाश शर्मा, गोपाल कुमार, संजय यादव आदि उपस्थित थे।
दयानन्द शिक्षा संस्थान यूपी के मंत्री मानवेन्द्र स्वरुप ने संस्थान के प्रबंधन और परिसंपत्तियों पर अवैध कब्जा करने की साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल से की। जिनके आदेश पर कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्जकर मामले की जांच शुरू की। मानवेन्द्र स्वरुप का आरोप है कि रणजीत सिंह और एनडी मनिहार समेत अन्य लोगों द्वारा संस्थान की संपत्तियों पर द्वारा अवैध कब्जे की साजिश की जा रही है। डॉ. गौर हरि सिंहानिया की मृत्यु प्रमाण पत्र छावनी परिषद कानपुर के अभिलेखों में दर्ज है। वहीं स्व. जागेन्द्र स्वरुप की मृत्यु 30 जुलाई 2014 को दिल्ली के साकेत सिटी अस्पताल में हुई थी। उनका वैध मृत्यु प्रमाण पत्र दक्षिण दिल्ली नगर निगम द्वारी जारी किया गया था। दोनों मृत्यु प्रमाण पत्र नगर निगम कानपुर द्वारा जारी नहीं किए गए है। बावजूद इसके आरोपियों ने झूठी तिथि, स्थान और कारण दर्शाकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कर न्यायिक और प्रशासनिक कार्यवाहियों में प्रस्तुत किया गया है। जिससे संस्थान की संपत्तियों और प्रबंधन पर अवैध कब्जा किया जा सके। कोतवाली थाना प्रभारी जगदीश पांडेय ने बताया कि रिपोर्ट दर्जकर मामले की जांच की जा रही है।
शेखपुरा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 'समृद्धि यात्रा' सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। यात्रा के समापन के बाद शनिवार शाम समाहरणालय में आयोजित प्रेस वार्ता में जिलाधिकारी शेखर आनंद और एसपी बलिराम कुमार चौधरी ने इसे जिले के लिए काफी सफल और उपयोगी बताया। जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री की इस यात्रा के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। सभा स्थल सहित लगभग 200 अन्य स्थानों पर दंडाधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात किया गया था। एसपी बलिराम कुमार चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा और आम लोगों की सुविधा के लिए 6 कंपनी अतिरिक्त पुलिस बल के साथ 200 पुलिस पदाधिकारियों को लगाया गया था। कार्यक्रम के दौरान किसी को कोई परेशानी नहीं हुई। जिलाधिकारी शेखर आनंद ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने जीविका, आंगनवाड़ी और कृषि विभाग सहित अन्य विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का भी अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने गांव के एक विद्यालय में स्थापित एरोबिक्स लैब की प्रशंसा की और छात्र-छात्राओं को इससे लाभान्वित करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर ही अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने निर्देश दिया कि लोगों का जीवन आसान बनाने के लिए सभी सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक त्वरित गति से पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को लोगों की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने जिला प्रशासन को मानकों के अनुसार सभी प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम की सफलता के लिए जिलावासियों के साथ-साथ सभी अधिकारियों और पुलिस प्रशासन को धन्यवाद दिया।
एलन शिक्षा संबल: सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों के लिए नीट की निशुल्क कोचिंग
एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास और एलन द्वारा 126 हिंदी माध्यम विद्यार्थियों को नीट-2027 के लिए निशुल्क कोचिंग, आवास और भोजन की सुविधा दी जाएगी।
लखनऊ पूर्वी भाजपा विधायक ओपी श्रीवास्तव विनय खंड गोमतीनगर में एक शिलान्यस कार्यक्रम में पहुंचे। यहां सवर्ण मोर्चा की टीम ने विधायक से यूजीसी के मुद्दे पर सवाल पूछा। इसपर विधायक ने कहा कि घर आइए, तब जवाब देंगे। साथ ही कहा- युवाओं की पढ़ाई लिखाई से जुड़ा मुद्दा है। धैर्य बनाए रखिए। सर्वोच्य न्यायालय से इसका स्थगन आदेश आया है। इसके बाद विधायक अपनी गाड़ी से निकल गए। सवर्ण मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि सवर्ण समाज के नेता लोग जहां भी मिलेंगे। वहां पर उनसे सवाल पूछा जाएगा। मौके पर लोग सामान्य वर्ग मोर्चा के संयोजक संदीप सिंह के साथ पहुंचे थे। इस दौरान हंगामा करने का भी आरोप लोगों पर लगा। मौके पर पुलिस के साथ स्थानीय लोकल इंटेलीजेंस यूनिट के अधिकारी मौजूद थे। सवर्ण मोर्चा के लोग बोले- इधर उधर की बात की सवर्ण मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि विधायक से जब पूछा गया तो उनकी तरफ से इधर-उधर की बात की। सीधे इस मुद्दे का जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद वह यहां से चले गए। यूजीसी की गाइडलाइन पर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से रोक लगाई गई, लेकिन सरकार की तरफ से इसे खुद वापस नहीं लिया गया है। इससे सवर्ण छात्र-छात्राओं के साथ में विश्वविद्यालयों में अन्याय होगा। पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक इसे वापस नहीं लिया जाएगा। तब तक अभियान चलाकर समाज को जागरूक किया जाता रहेगा। मौके पर सवर्ण मोर्चा की तरफ से प्रवक्ता अभिनव त्रिपाठी, अरविंद पाठक, सर्वजीत सिंह और अभय सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर अपने विधानसभा क्षेत्र रामगंजमंडी में चार दिवसीय जनहिताय–जन सुखाय पदयात्रा के तहत लगातार गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद कर रहे हैं। पदयात्रा के दूसरे दिन शनिवार सुबह 8 बजे ग्राम सोहनपुर से यात्रा की शुरुआत हुई। सोहनपुर में मंत्री मदन दिलावर ने गांव के बीच स्थित जंगल जलेबी के पुराने पेड़ के नीचे बैठकर ग्रामीणों की जनसुनवाई की। इस दौरान ग्रामीणों ने गांव में नाली नहीं होने से पानी फैलने और कीचड़ की समस्या बताई। समस्या सुनते ही मंत्री ने मौके पर समाधान की घोषणा करते हुए अपने विधायक कोष से इंटरलॉकिंग सड़क और नाली निर्माण के लिए 10 लाख रुपए की स्वीकृति दी। मंत्री दिलावर ने कहा कि उनकी पदयात्रा का उद्देश्य सिर्फ यात्रा करना नहीं बल्कि गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याओं को समझना और तुरंत समाधान सुनिश्चित करना है। पदयात्रा के दौरान प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों की पूरी टीम मंत्री के साथ मौजूद रही। इसके बाद पदयात्रा मोहनपुरा गांव पहुंची, जहां मंत्री ने भील बस्ती में जाकर लोगों से मुलाकात की। बस्ती के लोगों ने पानी, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं मंत्री के सामने रखीं। इस दौरान भील समाज की महिलाओं ने भी मंत्री से सीधे संवाद कर अपनी समस्याएं बताईं, जिन पर मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
लखनऊ के जानकीपुरम क्षेत्र से बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और शिक्षामित्र दिलीप कुमार सिंह रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हैं। उनका 23 फरवरी को घर से निकलने के बाद से अब तक कोई पता नहीं चल सका है। मोबाइल फोन तब से स्विच ऑफ है। दिलीप की पत्नी और परिवार के लोग 19 दिन बाद 13 मार्च को देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिलकर मदद की गुहार लगाई है। पढ़िए क्या है पूरा मामला जानकीपुरम क्षेत्र में रहने वाले दिलीप कुमार सिंह बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के रूप में भी कार्य कर रहे थे। 23 फरवरी को वह सुबह घर से निकले थे, लेकिन उसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल सका। परिवार के लोगों का कहना है कि घर से निकलने के कुछ समय बाद से उनका मोबाइल फोन बंद हो गया। वह घर से बाहर जाते हुए CCTV में भी दिखे थे। उन्होंने बीकेटी SDM पर नौकरी से निकालने की धमकी देने की बात भी वॉट्सएप ग्रुप पर कही थी। विधायक योगेश शुक्ला ने परिवार को रक्षा मंत्री से मिलवाया घटना की जानकारी मिलने के बाद बीकेटी क्षेत्र के विधायक योगेश शुक्ला भी दिलीप कुमार सिंह के घर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और हरसंभव मदद का भरोसा दिया। विधायक ने बताया कि वह पिछले तीन दिनों से लगातार प्रशासन के संपर्क में हैं और मामले की जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खोजबीन में तेजी लाई जाए। विधायक ने ही परिवार को रक्षा मंत्री से मिलवाया। रक्षा मंत्री बोले- खोजबीन में तेजी लाई जाए दिलीप कुमार सिंह के लापता होने से परेशान परिजनों ने 13 मार्च को देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर उन्हें पूरी घटना से अवगत कराया। परिवार ने रक्षा मंत्री से अपील की कि मामले में हस्तक्षेप कर पुलिस प्रशासन को खोजबीन तेज करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि दिलीप कुमार सिंह को जल्द से जल्द सकुशल ढूंढकर परिवार के पास लाया जा सके। रक्षा मंत्री ने भी पुलिस महकमे को निर्देश दिए की खोजबीन में तेजी लाई जाए। अब तक क्या-क्या हुआ- आखिरी लोकेशन अनौरा कला के पास मिली पुलिस की शुरुआती जांच में दिलीप कुमार सिंह की आखिरी लोकेशन अनौरा कला क्षेत्र के आसपास मिली है। इसके बाद उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो गया, जिससे आगे की लोकेशन ट्रेस नहीं हो सकी। पुलिस की टीम आसपास के क्षेत्रों में जांच कर रही है और संभावित स्थानों पर खोजबीन की जा रही है। स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि उनके बारे में कोई सुराग मिल सके। SIR कार्य के दबाव की भी सामने आई बात परिवार और परिचितों के अनुसार दिलीप कुमार सिंह इन दिनों एसआईआर (स्पेशल इनरोलमेंट रिव्यू) कार्य में लगे हुए थे और इस काम का उन पर काफी दबाव भी बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है और हर दिशा में जांच आगे बढ़ाई जा रही है। मामा के लड़के को मैसेज किया था जानकीपुरम थाने में दिलीप कुमार सिंह की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसके बाद पुलिस की कई टीमें उनकी तलाश में लगाई गई हैं। पुलिस आसपास के क्षेत्रों में सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और मोबाइल लोकेशन के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। दिलीप सिंह ने अपने ममेरे भाई को मैसेज किया था। उसमें लिखा- भाई मैं तुम्हारा कर्जदार बड़ा भाई। मामा-मामी का ख्याल रखना। हमारे भी माता-पिता हैं। पिंकू गाय जरूर रखना मामा-मामी चाहे जितना गुस्सा करें। पिंकू काम का प्रेशर बहुत है। ऑफिसियल ग्रुप पर भी किए मैसेज उसने ऑफिस के वाट्सऐप ग्रुप पर भी मैसेज भेजा है। उसमें लिखा- सुषमा मैडम सुपरवाइजर साहब भाग संख्या 191 बीएलओ दिलीप सिंह शिक्षा मित्र एसआईआर का कार्य छोड़कर जा रहा हूं। मेरे नोटिस फॉर्म मेरी बाइक के झोले में है। जो मेरे घर पर खड़ी है। जरूरत समझना तो ले लेना गुडबाय। इस पर सुषमा नाम से सेव नंबर से जवाब आया- दिलीप आप कहां हो। उसके बाद दिलीप ने लिखा- हां मैं एक बात कहना भूल गया। अपने एसडीएम बीकेटी से कह दो जाकर नौकरी ले लें। जो बार-बार दबाव बनाने के लिए कहते हैं कि नौकरी ले लूंगा। सिस्टम पर शिक्षामित्र दिलों और कुर्बान। इस पर सुषमा नाम से सेव नंबर से फिर जवाब आता है- आप का काम तो ठीक है। आप ऐसा क्यों कह रहे हैं।
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (BSEH) द्वारा ली जा रही बोर्ड परीक्षाओं का रिजल्ट मई के दूसरे सप्ताह में जारी किए जाएंगे। दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन प्रो. डॉ. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि पहले 12वीं कक्षा का और बाद में 10वीं कक्षा का रिजल्ट जारी किया जाएगा। वहीं अगले सत्र में भीड़-भाड़ वाले परीक्षा केंद्रों को भी बदला जाएगा। जिनकी लिस्ट तैयार की जा रही है। बता दें कि 25 फरवरी से 12वीं एवं 26 फरवरी से 10वीं कक्षा की परीक्षाएं आरंभ हुई थी। सेकेंडरी व सीनियर सेकेंडरी (शैक्षिक/मुक्त विद्यालय) की वार्षिक परीक्षाओं के लिए प्रदेशभर में करीब 1431 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इन परीक्षा केंद्रों पर लगभग 5 लाख 66 हजार 411 परीक्षार्थी प्रविष्ठ हो रहे हैं। जिसमें 2 लाख 96 हजार 593 लड़के व 2 लाख 69 हजार 818 लड़कियां शामिल हैं। एफआर का कार्य प्रगति परहरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन प्रो. डॉ. पवन कुमार शर्मा ने बताया कि 25 फरवरी बोर्ड परीक्षाएं आरंभ हुई हैं। शिक्षा बोर्ड में उत्तर पुस्तिकाएं आना शुरू हो गई है। इनका एफआर (इन पर सिक्रेसी कोड लगाना) लगाते हैं। यह कार्य प्रगति पर है और साथ-साथ चल रहा है। जैसे ही 20 मार्च को 10वीं की परीक्षा खत्म होंगी। उसके बाद मार्किंग का काम शुरू करेंगे। इससे पहले मार्किंग शुरू ना करने का कारण यह भी है कि हमारा ज्यादातर टीचिंग स्टाफ परीक्षा ड्यूटी पर है। मई के दूसरे सप्ताह में जारी करेंगे रिजल्टउन्होंने बताया कि प्रयास रहेगा की मई के दूसरे सप्ताह में रिजल्ट घोषित कर दिया जाए। 12वीं (सीनियर सेकेंडरी) क्लास में रिजल्ट व नंबरों का अधिक महत्व रहता है, क्योंकि उन्हें दूसरे यूनिवर्सिटी या कॉलेज में एडमिशन लेना होता है। अन्य परीक्षाओं में भी मार्कसीट के नंबर अपलोड करने होते हैं। कोशिश यही कर रहे हैं कि 12वीं कक्षा का रिजल्ट पहले जारी करेंगे। उसके बाद 10वीं का रिजल्ट जारी किया जाएगा। फ्लाइंग सेंटरों का डाटा इकट्ठा कर रहीशिक्षा बोर्ड चेयरमैन डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि फ्लाइंग टीम हर रोज लगभग सभी परीक्षा केंद्रों में जाती हैं। उनसे रिपोर्ट मंगवाई है कि कौन-कौन से ऐसे परीक्षा केंद्र हैं, जो भीड़ में हैं, जहां बच्चों, फ्लाइंग व स्टाफ को जाने में दिक्कत होती है। कौन-कौन से ऐसे सेंटर हैं, जहां बच्चों के बैठने की उचित व्यवस्था नहीं हैं। अर्थात ड्यूल डेस्क नहीं हैं और बच्चे टाट पट्टी पर बैठ रहे हैं। अगले सत्र में जो परीक्षा होगी, उस दौरान ये दिक्कत ना हो। अगले सत्र में उन सेंटरों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां तक पहुंच आसान है, खुला एरिया और सीटिंग अरेंजमेंट ठीक है। 15 दिन बाद दोबारा परीक्षा का मौका देंगेउन्होंने कहा कि शिक्षा बोर्ड इन परीक्षाओं के समाप्त होने के 15 दिन के बाद विशेष अवसर देने जा रहा है। जिनका एक या दो पेपर किसी कारणवश अच्छा नहीं हो पाया है। वे दोबारा अप्लाई करके पेपर दे सकते हैं। जिस पेपर में अच्छे अंक आएंगे, वे मार्कसीट में दर्शाए जाएंगे। जिससे उनको कोई नुकसान भी नहीं होगा। परीक्षा समाप्ति के 15 दिन बाद ही बच्चों को यह मौका दिया जाएगा।
राज्य के सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से ही योग की पढ़ाई होगी। वैदिक गणित को पाठ्यक्रम में जोड़ा जाएगा। स्कूलों में आखिरी पीरियड अनिवार्य रूप से खेल का होगा। विधानसभा में शुक्रवार को स्कूल शिक्षा विभाग का 22466 करोड़ रुपए का बजट ध्वनिमत से पास हो गया। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि यह बजट राज्य में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पीएम श्री योजना के अंतर्गत स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इस योजना के लिए बजट में 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन स्कूलों में ग्रीन स्कूल, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, आधुनिक प्रयोगशालाएं, खेल सुविधाएं और कैरियर काउंसिलिंग जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही शिक्षकों को उच्च शिक्षण संस्थानों के माध्यम से प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उत्कृष्ट स्कूलों के लिए 100 करोड़ का प्रावधान स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश में 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों की स्थापना होगी। इन विद्यालयों के लिए बजट में 100 करोड़ का प्रावधान किया गया है। ये स्कूल प्रत्येक ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होंगे, जिससे ग्रामीण विद्यार्थियों को उच्च स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। नवा रायपुर में बनेगा प्रशासनिक भवन स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि शिक्षा विभाग के प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए नवा रायपुर में विभाग का एक आधुनिक प्रशासनिक कॉम्पोजिट भवन बनाया जाएगा। इसके लिए प्रारंभिक रूप से 5 करोड़ 90 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। इस भवन में लोक शिक्षण संचालनालय, समग्र शिक्षा, संस्कृत विद्या मंडल, मदरसा बोर्ड, माध्यमिक शिक्षा मंडल सहित कई कार्यालय संचालित होंगे। सभी दस्तावेजों पर क्यूआर कोड, टीसी भी ऑनलाइन स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि विद्यार्थियों को शैक्षणिक दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत छात्रों की मार्कशीट और ट्रांसफर सर्टिफिकेट को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। नई व्यवस्था में दस्तावेज पर क्यूआर कोड और यूनिक आईडी दी जाएगी, जिसके जरिए उनकी डिजिटल सत्यता की जांच की जा सकेगी। भास्कर एक्सक्लूसिव तीसरी के बच्चों की परीक्षा अब पेन-कागज पर नहीं, टैबलेट पर होगी तीसरी कक्षा के बच्चों की बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान की परीक्षा अब पेन- कागज नहीं, बल्कि टैबलेट पर ली जाएगी। शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति की ओर एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए सीबीएसई ने फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी का निर्णय लिया है। अब तक यह ओएमआर शीट पर होती थी। एनसीईआरटी की इकाई परख मार्च के अंत में यह महा-सर्वेक्षण आयोजित करने जा रही है। सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों के प्राचार्यों को इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है। केंद्र सरकार इसके जरिए देश के कोने-कोने में तीसरी कक्षा में पढ़ रहे बच्चों के शिक्षा के स्तर को मापना चाहती है। इस अभियान के तहत देशभर 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी 776 जिलों के करीब 10 हजार से अधिक सरकारी, अनुदान प्राप्त और निजी स्कूल शामिल है। एक लाख से अधिक छात्र इस प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे। स्कूलों का इसका पालन करना अनिवार्यसीबीएसई ने निर्देश दिए हैं कि जिन स्कूलों का चयन सैंपलिंग के आधार पर हुआ है, उन्हें सर्वे की निर्धारित तारीखों पर स्कूलों का चालू रहना और छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करना जरूरी है। सर्वे के लिए आने वाली टीमों को पूरा प्रशासनिक और तकनीकी सहयोग देना होगा। एनसीईआरटी कर रहा मार्गदर्शनराष्ट्रीय स्तर पर एनसीईआरटी परख के सर्वे के लिए तकनीकी मार्गदर्शन दे रहा है। वहीं राज्यों में समग्र शिक्षा, एससीईआरटी, डाइट और जिला शिक्षा कार्यालयों को इसके कार्यान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब तक ओएमआर शीट पर हुई थी परीक्षा साल 2022 में हुए पिछले सर्वे में ओएमआर शीट का इस्तेमाल किया गया था। अब सीबीएसई ने कहा है कि वर्ष 2026 का यह सर्वे पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगा। सीबीएसई के अनुसार डिजिटल मोड से न केवल डेटा की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि रिजल्ट तैयार करने में भी समय की बचत होगी। इससे सटीक रिपोर्ट जल्द मिल सकेगी।
विद्याभारती संस्थान में तकनीकी, कंप्यूटर शिक्षा समेत अन्य मुद्दों पर चिंतन बैठक
उदयपुर | विद्याभारती संस्थान उदयपुर जिले की योजना अनुसार शुक्रवार को विद्या निकेतन, अशोक नगर में चिंतन बैठक आयोजित की गई। बैठक में शिशु वाटिका को उन्नत करने, प्रभावी शिक्षण व्यवस्था, तकनीकी व कंप्यूटर शिक्षा, नवीन प्रवेश तथा विद्यालय के विकास को लेकर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। बैठक में जिले से विद्या भारती संस्थान के सह मंत्री रमेश चंद्र पुरोहित, सह सचिव प्रभात आमेटा और कोषाध्यक्ष दीपक गोधा उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य शिशु वाटिका को उन्नत करना, प्रभावी शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करना, तकनीकी व कंप्यूटर शिक्षा को और बेहतर बनाना, नवीन प्रवेश के लिए पर्याप्त प्रचार-प्रसार करना और भामाशाहों के सहयोग से विद्यालय का समग्र विकास करना था।
लखनऊ में द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), उत्तर प्रदेश राज्य केंद्र ने शुक्रवार को 'स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता' विषय पर एक तकनीकी व्याख्यान आयोजित किया। आईईआई भवन, रीवर बैंक कॉलोनी में हुए इस कार्यक्रम में इंजीनियरों, शिक्षाविदों और छात्रों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई की संभावनाओं पर चर्चा की। एमिटी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सचिन कुमार मुख्य वक्ता थे। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) स्वास्थ्य सेवाओं को तेज, सटीक और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। एआई तकनीक से रोगों की पहचान अधिक सटीकता से संभव हो रही है, जिससे मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिल पाता है। चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में लगातार सुधार हो रहा डॉ. कुमार ने आगे कहा कि एआई आधारित सिस्टम डॉक्टरों को निर्णय लेने में सहायता करते हैं। इससे गंभीर बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकता है। डेटा विश्लेषण, डिजिटल हेल्थ सर्विसेज और स्मार्ट हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में लगातार सुधार हो रहा है।उन्होंने टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड, रोबोटिक सर्जरी और स्मार्ट हेल्थकेयर सिस्टम जैसे क्षेत्रों में भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डाला। इन तकनीकों से दूरदराज के मरीजों तक भी स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से पहुंच रही हैं। नई तकनीक स्वास्थ्य स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण कार्यक्रम की अध्यक्षता आईईआई उत्तर प्रदेश राज्य केंद्र के अध्यक्ष इं. वी.पी सिंह ने की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ नई तकनीकों और डिजिटल समाधानों के जरिए समाज के स्वास्थ्य स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।कार्यक्रम के संयोजक डॉ. ए.के जौहरी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की । उन्होंने मुख्य वक्ता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था भविष्य में भी ऐसे ज्ञानवर्धक और जनोपयोगी कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी।
दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त हिमांशु कुमार राय की अध्यक्षता में आज प्रमंडलीय सभागार में शिक्षा विभाग की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में दरभंगा प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले जिलों के जिला शिक्षा विभाग के पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान आयुक्त ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों के मानदेय का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में मानदेय भुगतान में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। आयुक्त ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नियमित रूप से इन विद्यालयों का निरीक्षण करने और परिसर की चहारदीवारी, सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरों को सक्रिय रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही छात्राओं को सरकार द्वारा संचालित सभी योजनाओं का फायदा दिलाने का भी निर्देश दिया। बैठक में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर भी आयुक्त ने जानकारी ली और निर्देश दिया कि सभी शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहकर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराएं। उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारियों को विद्यालयों में टॉयलेट, बेंच-डेस्क, पंखा, स्मार्ट टीवी जैसी आवश्यक सुविधाओं की स्थिति की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। जर्जर विद्यालय भवनों का सर्वेक्षण कर रिपोर्ट तैयार करें इसके अलावा आयुक्त ने जर्जर विद्यालय भवनों का सर्वेक्षण कर रिपोर्ट तैयार करने को कहा, ताकि आवश्यकतानुसार मरम्मत या पुनर्निर्माण की कार्रवाई की जा सके। उन्होंने प्रत्येक जिला शिक्षा पदाधिकारी को अपने जिले में कम से कम 10 विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों का नियमित निरीक्षण करने का निर्देश दिया। साथ ही विद्यालय भवनों का रंग-रोगन कराने, सभी विद्यालयों में चहारदीवारी निर्माण और भूमिहीन विद्यालयों के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया तेज करने को कहा। बैठक में उप निदेशक (शिक्षा), क्षेत्रीय विकास पदाधिकारी आकाश ऐश्वर्य सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे। डीएम की अध्यक्षता में जनसुनवाई, कई मामलों का ऑन द स्पॉट निष्पादन बिहार सरकार के “निश्चय पार्ट-3 : सबका सम्मान – जीवन आसान” कार्यक्रम के अंतर्गत जिलाधिकारी कौशल कुमार की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में जनसुनवाई का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि प्रत्येक सप्ताह सोमवार और शुक्रवार को थाना, अंचल, प्रखंड, अनुमंडल, जिला एवं प्रमंडल स्तर के सरकारी कार्यालयों में पदाधिकारी आम नागरिकों की शिकायतों की सुनवाई कर उनके समाधान की दिशा में कार्रवाई करते हैं। शुक्रवार को आयोजित जनसुनवाई में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए लोगों ने अपनी समस्या डीएम के सामने रखीं। डीएम ने सभी आवेदनों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान 20 से अधिक आवेदनों पर विस्तृत सुनवाई की गई, जिनमें से लगभग आधे मामलों का मौके पर ही निष्पादन कर दिया गया। शेष मामलों को संबंधित विभागों को अग्रसारित करते हुए शीघ्र कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। प्राप्त आवेदनों में मुख्य रूप से भूमि विवाद, जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) से संबंधित शिकायतें, बहाली से जुड़े मामले और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल थे। डीएम के जनता दरबार में 30 से अधिक परिवादियों की सुनी गई समस्या जिलाधिकारी कौशल कुमार ने समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित जनता दरबार कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों से आए नागरिकों की समस्याएँ सुनीं। जनता दरबार में कुल 30 से अधिक परिवादी पहुंचे, जिनमें 25 आवेदन ऑनलाइन और 5 आवेदन ऑफलाइन माध्यम से प्राप्त हुए। इस दौरान भू-अर्जन, ग्रामीण विकास, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, आपदा प्रबंधन, परिवहन, पंचायती राज, शिक्षा, पशु एवं मत्स्य और समाज कल्याण विभाग से संबंधित शिकायतें सामने आईं। जिलाधिकारी ने सभी परिवादियों की समस्याओं को संवेदनशीलता और धैर्यपूर्वक सुना। इनमें से आधे से अधिक मामलों का तत्काल समाधान कर दिया गया, जबकि शेष मामलों को संबंधित विभागों को भेजते हुए शीघ्र जांच कर निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। डीएम ने स्पष्ट कहा कि जनता दरबार में हासिल शिकायतों का समाधान सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग करने और आवेदकों को समय-समय पर प्रगति की जानकारी देने का भी निर्देश दिया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों के वरीय पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 'जियोकॉन–2026' का आगाज हो गया है । जिसका विषय 'भूविज्ञान और जलवायु परिवर्तन हेतु सतत पर्यावरण' रहा। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि युद्ध और संसाधनों का अंधाधुंध दोहन नहीं रुका, तो आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ नहीं बचेगा। संगोष्ठी के संयोजक और भू-विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. ध्रुवसेन सिंह ने कहा कि वर्तमान में हो रहे युद्धों में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक अस्त्र-शस्त्र जलवायु परिवर्तन की रफ्तार बढ़ा रहे हैं। इससे ग्लोबल वार्मिंग में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि अगर हम एक 'सस्टेनेबल' पृथ्वी चाहते हैं, तो हमें 'ग्रीन एनर्जी' और 'ग्रीन इकोनॉमी' को अपनाना होगा। पृथ्वी हमें जीवन के लिए ऑक्सीजन, पानी और खनिज दे रही है, लेकिन मानवीय गतिविधियों ने इसे संकट में डाल दिया है। हिमालय में चट्टानों के गिरने का वैज्ञानिक समाधान IIT पटना के निदेशक प्रो. टी.एन सिंह ने पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाले भूस्खलन और चट्टानों के गिरने (Rockfall) पर व्याख्यान दिया। उन्होंने हिमालयी क्षेत्रों में बनने वाली 'अर्ध-सुरंगों' के सुरक्षित निर्माण के लिए डायनेमिक रॉकफॉल एनालिसिस की जरूरत बताई। खास बातें: जो चर्चा में रहीं ब्लू इकोनॉमी: NIO गोवा के निदेशक प्रो. सुनील सिंह ने बताया कि महासागर भविष्य की अर्थव्यवस्था के आधार हैं।एनर्जी सिक्योरिटी: AMD हैदराबाद के निदेशक डॉ. धीरज पांडे ने नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य के लिए रणनीतिक खनिजों के महत्व पर चर्चा की । प्रो. अरविंद मोहन ने कहा कि आज दुनिया में जितने भी अंतरराष्ट्रीय संघर्ष हो रहे हैं, उनके पीछे प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जे की होड़ है। 200 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए सम्मेलन में देश के 29 विश्वविद्यालयों और लगभग 20 प्रमुख राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिक, शिक्षाविद और शोधार्थी भाग ले रहे हैं। पहले दिन आठ विशेष व्याख्यान आयोजित हुए और 200 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।कार्यक्रम में डॉ. स्नेहा रघुवंशी, डॉ. ज्योत्सना दुबे, डॉ. मनोज यादव,प्रो. एमजी ठक्कर, राजिंदर कुमार और प्रो. पंकज श्रीवास्तव समेत कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।
संभल में एलपीजी गैस सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी में उपभोक्ताओं को हो रही परेशानियों के बाद माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री गुलाब देवी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराने को कहा है। शुक्रवार सुबह 11 बजे संभल के चंदौसी कोतवाली कस्बे में स्थित मंत्री गुलाब देवी के आवास पर कई उपभोक्ता एलपीजी गैस बुकिंग न होने की शिकायत लेकर पहुंचे। उपभोक्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने तत्काल जिला आपूर्ति अधिकारी समेत अन्य अधिकारियों से फोन पर बात की। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे व्यवस्था को सुधारें। महिलाओं की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं, गरीब लोग लाइन में लगे हुए हैं। उनकी गैस बुक होनी चाहिए और समय पर मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई भी स्थिति हो, जनता को गैस की कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। घरेलू एलपीजी के सुचारु वितरण को सुनिश्चित करने के लिए संभल में एक महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित की गई। जिलाधिकारी के निर्देश पर एडीएम (वित्त एवं राजस्व) प्रदीप वर्मा की अध्यक्षता में यह बैठक गुरुवार शाम 6 बजे जिला कलेक्ट्रेट बहजोई सभागार में हुई, जो करीब डेढ़ घंटे तक चली। इसमें सभी गैस वितरक, बिक्री अधिकारी और आपूर्ति विभाग के कर्मचारी शामिल हुए। बैठक का समन्वय क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी/प्रभारी जिला पूर्ति अधिकारी कमलेश चंद्र ने किया। एडीएम प्रदीप वर्मा ने गैस वितरकों को निर्देश दिए कि वे उपभोक्ताओं के साथ विनम्रतापूर्ण व्यवहार करें और उन्हें बुकिंग व डिलीवरी की पूरी जानकारी दें। उन्होंने विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) के लिए नियमानुसार प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। बिक्री अधिकारियों ने उपभोक्ताओं को बताया कि वे भीम ऐप, यूपीआई, पेटीएम और गूगल पे जैसे डिजिटल माध्यमों से घर बैठे गैस बुक कर सकते हैं। बीपीसीएल के बिक्री अधिकारी प्रतीक उपाध्याय और आईओसीएल के बिक्री अधिकारी जिवतेश ने बताया कि एलपीजी की दैनिक खपत के मुकाबले पर्याप्त स्टॉक है, दो दिन का स्टॉक हमेशा बना रहता है। उपभोक्ता पूर्व में की गई ओटीपी गैस बुकिंग के 25 दिन बाद दोबारा गैस रिफिल प्राप्त कर सकते हैं।
किशनगंज स्थित माता गुजरी यूनिवर्सिटी में पहला दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर मेडिकल, नर्सिंग और फार्मेसी संकाय के 1198 स्नातक विद्यार्थियों को औपचारिक रूप से डिग्रियां प्रदान की गईं। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार डॉ. इच्छित भारत सहित अन्य पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत किया। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यूनिवर्सिटी की सराहना की दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी थे। उनके साथ बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार और उद्योग एवं सड़क निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल भी उपस्थित रहे। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में माता गुजरी यूनिवर्सिटी की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस सुदूर इलाके में विश्वविद्यालय खोलकर अल्पसंख्यक बच्चों को शिक्षा प्रदान करना एक सराहनीय कार्य है। ''सबसे अधिक पढ़ने वाला बच्चा ही डॉक्टर और इंजीनियर बनता'' उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आयुष्मान कार्ड योजना का भी जिक्र किया, बताया कि पहले बिहार में 50 हजार लोगों के कार्ड बने थे, जो अब 2 करोड़ से अधिक हो गए हैं। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि सबसे अधिक पढ़ने वाला बच्चा ही डॉक्टर और इंजीनियर बनता है, और उन्हें जीवन भर अध्ययन करते रहना चाहिए। उन्होंने डॉक्टरों को 'धरती के भगवान' बताते हुए डॉ. दिलीप जायसवाल को 'भगवान की फैक्ट्री' स्थापित करने के लिए बधाई दी। शिक्षा मंत्री सुनिल कुमार ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा, बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में पिछले वर्षों में बड़े बदलाव हुए हैं और सरकार शिक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। शिक्षा बजट 68 हजार करोड़ तक पहुंचा शिक्षा मंत्री ने कहा कि पहले की सरकारों की तुलना में आज शिक्षा के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बिहार का शिक्षा बजट अब बढ़कर 68 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो राज्य की प्राथमिकताओं को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पहले बिहार में केवल पांच विश्वविद्यालय थे, जबकि आज उनकी संख्या बढ़कर 15 हो चुकी है। इसके अलावा राज्य में 76 हजार से अधिक स्कूल संचालित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य में लगभग 5 लाख 75 हजार से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं और 1 करोड़ 76 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। एक करोड़ से अधिक छात्रों को मिल रहा मध्याह्न भोजन शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में 1 करोड़ 3 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा शुरू की गई साइकिल योजना और पोशाक योजना का भी व्यापक असर देखने को मिला है। इन योजनाओं के कारण बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं स्कूलों से जुड़े हैं और खासकर लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा मिला है। महिलाओं की साक्षरता दर में हुआ बड़ा इजाफा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार में महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में महिलाओं की साक्षरता दर मात्र 34 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर करीब 74 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव सरकार की विभिन्न योजनाओं और शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता का परिणाम है। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड से लाखों छात्रों को मिला लाभ शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना चला रही है। इस योजना के तहत लाखों छात्रों को ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की योजना देश के अन्य राज्यों में नहीं है और इससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को पढ़ाई जारी रखने में बड़ी मदद मिल रही है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में लगभग 2500 प्राध्यापकों की नियुक्ति की जा चुकी है और सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में सभी ब्लॉकों में मॉडल स्कूल और डिग्री कॉलेज खोले जाएं। आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का शिक्षा मंत्री ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है और ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जो इससे अछूता रहेगा। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे नई तकनीकों को अपनाएं और अपने कौशल को विकसित करें, ताकि बदलते समय के साथ खुद को तैयार कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि माता गुजरी यूनिवर्सिटी के विकास के लिए सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी। संघर्षों को याद कर भावुक हुए मंत्री दिलीप जायसवाल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार सरकार में उद्योग सह पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल ने भी डिग्री प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि जब वर्ष 1990 में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की बात हुई थी, तब देश के केवल चार राज्यों आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु में ही निजी मेडिकल कॉलेज मौजूद थे। उन्होंने कहा कि जब वे मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता लेने दिल्ली गए थे, तो कई लोगों ने आश्चर्य जताया था कि जब गुजरात, हरियाणा और राजस्थान जैसे विकसित राज्यों में निजी मेडिकल कॉलेज नहीं खुले हैं, तो बिहार जैसे पिछड़े राज्य में यह कैसे संभव होगा। उन्होंने मेडिकल कॉलेज खोलने के दौरान आए संघर्षों को याद करते हुए कहा कि कठिनाइयों के बावजूद प्रयास जारी रखा गया और आज उसका परिणाम सामने है। डिग्री मिलने के बाद छात्रों में दिखा उत्साह दीक्षांत समारोह में डिग्री प्राप्त करने के बाद छात्र-छात्राओं के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। कई छात्रों ने अपने परिवार और शिक्षकों के साथ इस उपलब्धि का जश्न मनाया। समारोह में बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षक और विश्वविद्यालय के अधिकारी भी मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान छात्रों को भविष्य में कड़ी मेहनत करने और समाज के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।
भूपालसागर: भील समाज की बैठक में शिक्षा और सामाजिक सुधार पर चर्चा
राजस्थान भील समाज विकास समिति ने झाझडो का खेड़ा में बैठक आयोजित कर नाता प्रथा और शराब जैसी कुरीतियों को त्यागने एवं युवाओं को कौशल विकास से जोड़ने का संकल्प लिया।
सेंट जेवियर्स कॉलेज में एआई के युग में मूल्य आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर व्याख्यान
भास्कर न्यूज | सिमडेगा सेंट जेवियर्स कॉलेज में एआई के युग में मूल्य आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उच्च शिक्षा में अवसर और चुनौतियां विषय पर एक दिवसीय विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सेंट जेवियर्स कॉलेज, कोलकाता के रेक्टर फादर जयराज वेलुस्वामी उपस्थित थे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज के दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं और चुनौतियां लेकर आई है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए योग्य और समर्पित शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, जो विद्यार्थियों को सही दिशा प्रदान करते हैं। फादर वेलुस्वामी ने सेंट जेवियर्स कॉलेज कोलकाता के इतिहास का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए बताया कि इसके बाद रांची और सिमडेगा में भी सेंट जेवियर्स कॉलेज की स्थापना की गई, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने विद्यार्थियों को पुस्तकालय और कंप्यूटर लैब का अधिक उपयोग करने, अनुशासन बनाए रखने तथा अपने ज्ञान को निरंतर अद्यतन करते रहने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने कहा कि एआई और चैट जीपीटी जैसे तकनीकी साधनों का सही उपयोग कर छात्र अपनी पढ़ाई को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान कॉलेज के प्राचार्य फादर रोशन बा ने अतिथि का गमछा और पौधा भेंट कर स्वागत किया। मौके पर कॉलेज के शिक्षकगण,छात्र-छात्र ाएं और अन्य अतिथि उपस्थित थे। कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा। कार्यक्रम में भाग लेने वाले अतिथि व प्रतिभागी।
एसआईआर के काम से रिलीव होंगे शिक्षा विभाग के कार्मिक
उदयपुर | गहन मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर) में लगे शिक्षा विभाग के कर्मचारी अब रिलीव किए जाएंगे। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा राजस्थान, बीकानेर के निदेशक सीताराम जाट ने गुरुवार को आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया है कि प्रभावित कार्मिकों का कार्यग्रहण या कार्यमुक्ति सुनिश्चित किया जाए। संबंधित नियंत्रण अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी कार्मिक को चुनाव या जनगणना कार्य का दायित्व सौंपा गया है, तो वह केवल जिला निर्वाचन अधिकारी या सक्षम अधिकारी की अनुमति से ही कार्यमुक्त किया जा सके। निदेशक ने इसे प्राथमिकता देने और समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है।
शहर में जमीन, फिर भी शिक्षा विभाग जाएगा 9 किमी दूर, बढ़ेगी परेशानी
सिटी िरपोर्टर| बेगूसराय अगर आपको शिक्षा विभाग से जुड़ा कोई काम है तो जल्द ही बेगूसराय मुख्यालय के चक्कर लगाने से काम नहीं चलेगा। आने वाले दिनों में आपको शहर से करीब 9 किलोमीटर दूर शाहपुर जाना होगा। यही नहीं, शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी समाहरणालय में होने वाली बैठकों में शामिल होने के लिए पांच मिनट पहले नहीं, बल्कि कम से कम आधे घंटे पहले अपने कार्यालय से निकलना पड़ेगा। वजह है कि जिला शिक्षा विभाग का पूरा कार्यालय अब शहर से दूर शाहपुर स्थित पीटीईसी परिसर में बनाए जा रहे नए शिक्षा भवन में शिफ्ट होने जा रहा है। जानकारी के अनुसार अप्रैल महीने में जिला मुख्यालय से शिक्षा विभाग के कार्यालय को शाहपुर स्थित पीटीईसी कॉलेज परिसर में स्थानांतरित करने की तैयारी चल रही है। सवाल यह उठ रहा है कि जब शिक्षा विभाग की अपनी जमीन शहर में उपलब्ध है तो फिर 9 किलोमीटर दूर भवन निर्माण की जरूरत क्यों पड़ी। शहर की जमीन छोड़, शाहपुर में बना शिक्षा भवन बताया जाता है कि शाहपुर में पीटीईसी कॉलेज संचालित होता है और उसी परिसर की जमीन पर शिक्षा भवन बनाने की अनुमति दी गई थी। इस संबंध में तत्कालीन शिक्षा विभाग के अपर सचिव के. के. पाठक ने शिक्षा भवन निर्माण का प्रस्ताव दिया था, जिस पर तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी शर्मिला राय ने अपनी सहमति प्रदान की थी। दिलचस्प बात यह है कि शिक्षा भवन के लिए शहर में स्थित बेसिक स्कूल की जमीन को भी पहले चिन्हित किया गया था। लेकिन बाद में इस प्रस्ताव को नजरअंदाज कर दिया गया और भवन निर्माण की प्रक्रिया शाहपुर में शुरू कर दी गई। इतना ही नहीं, माध्यमिक शिक्षा कार्यालय जिस स्थान पर वर्तमान में संचालित है, वह जमीन भी शिक्षा विभाग की अपनी है। पूर्व जिलाधिकारी तुषार सिंगला के कार्यकाल में इस परिसर में अन्य कार्यालय खोलने की चर्चा भी हुई थी। लेकिन आज भी वहां खंडहरनुमा भवन में डीपीओ माध्यमिक शिक्षा का कार्यालय चल रहा है। शिक्षा विभाग के शाहपुर शिफ्ट होने से सबसे ज्यादा परेशानी आम लोगों और शिक्षकों को होगी। अभी तक शिक्षक और अभिभावक अपनी समस्याओं को लेकर सीधे जिला शिक्षा पदाधिकारी से मिलने मुख्यालय पहुंच जाते हैं। कई बार देर शाम तक लोग अपनी समस्याओं को लेकर विभागीय कार्यालय में आते हैं। लेकिन शाहपुर जाने की स्थिति में लोगों को अतिरिक्त समय और खर्च दोनों उठाना पड़ेगा।
बेगूसराय जिले के वीरपुर प्रखंड के सभी प्रारंभिक विद्यालयों में गुरुवार से वार्षिक परीक्षा शुरू हो गई है। यह परीक्षा प्रखंड के कुल 43 प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में दो पालियों में आयोजित की जा रही है, जो 19 मार्च तक चलेगी। परीक्षा के पहले दिन, प्रथम पाली में कक्षा तीन से आठ तक के विद्यार्थियों ने पर्यावरण अध्ययन विषय की परीक्षा दी। वहीं, दूसरी पाली में कक्षा एक और दो के बच्चों के लिए हिंदी एवं उर्दू विषय की मौखिक परीक्षा आयोजित की गई। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) स्नेहलता वर्मा ने बताया कि इस वर्ष प्रश्न पत्र ई-शिक्षा कोष के माध्यम से डाउनलोड किए जा रहे हैं और ब्लैकबोर्ड पर लिखकर परीक्षा कराई जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि परीक्षा को शांतिपूर्ण और नकलमुक्त बनाने के लिए एक विद्यालय के शिक्षकों को दूसरे विद्यालय में वीक्षक के रूप में तैनात किया गया है। पहले दिन कई विद्यालयों का निरीक्षण किया गया, जहां परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संचालित होती पाई गई।
बिहार के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए कक्षा 1 से 8 तक की वार्षिक परीक्षाएं आज से शुरू हो गई हैं। शिक्षा विभाग के नए दिशानिर्देशों के तहत मुजफ्फरपुर सहित राज्यभर के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में ये परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। इस साल की परीक्षा में प्रश्नपत्रों के वितरण में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। शिक्षा विभाग ने पहली बार 'ई-शिक्षाकोष' पोर्टल के माध्यम से डिजिटल प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए हैं। मुजफ्फरपुर के सकरा प्रखंड स्थित मंडई खुर्द गांव के प्रधान शिक्षक पंकज कुमार ने बताया कि प्रश्नपत्र रोजाना सुबह 9:15 बजे पोर्टल पर अपलोड होते हैं। शिक्षक इन्हें डाउनलोड कर सुबह 10:00 बजे तक ब्लैकबोर्ड पर लिखते हैं, जिसके बाद छात्र उत्तर पुस्तिकाओं में अपने जवाब दर्ज करते हैं। लिखित परीक्षा 19 मार्च तक जारी रहेगी विभाग के निर्देशों के अनुसार, कक्षा 1 और 2 के छात्रों का केवल मौखिक मूल्यांकन किया जाएगा। वहीं, कक्षा 3 से 8 तक के छात्रों की लिखित परीक्षा 19 मार्च तक जारी रहेगी। परीक्षाएं समाप्त होने के बाद, उत्तर पुस्तिकाओं की जांच संकुल संसाधन केंद्र (CRC) स्तर पर 24 मार्च तक पूरी की जाएगी। मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, छात्र अपनी जांची हुई उत्तर पुस्तिकाएं घर ले जा सकेंगे। परीक्षा का अंतिम परिणाम 30 मार्च को घोषित किया जाएगा। इसी दिन सभी स्कूलों में 'शिक्षक-अभिभावक बैठक' (PTM) का आयोजन भी होगा, जहाँ बच्चों को उनके प्रगति पत्रक (रिपोर्ट कार्ड) सौंपे जाएंगे। प्रधान शिक्षक पंकज कुमार के अनुसार, इस नई व्यवस्था और समयबद्ध प्रक्रिया से बच्चों और शिक्षकों में उत्साह देखा जा रहा है। शिक्षा विभाग की इस पहल का उद्देश्य जमीनी स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता और मूल्यांकन प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना है।
नई शिक्षा नेतृत्व की दिशा:IIM इंदौर उद्यम संवाद से मिली रणनीतिक सोच और मैनेजमेंट की समझ
जब शिक्षा में आधुनिक प्रबंधन और नई तकनीकों का समावेश होता है, तब संस्थान छात्रों के समग्र विकास का मजबूत आधार बनते हैं। कृष्णकेशव ग्रुप ऑफ स्कूल्स के वाइस चेयरमैन अनुराग सिंह चौहान अजमेर, राजस्थान से शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय हैं और नर्सरी से सीनियर सेकेंडरी स्तर तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्किल-बेस्ड लर्निंग पर विशेष ध्यान देते हैं। IIM इंदौर में दैनिक भास्कर द्वारा आयोजित उद्यम संवाद बिजनेस लीडरशिप प्रोग्राम उनके लिए एक उत्कृष्ट सीख का अवसर रहा। कार्यक्रम में मेंटर्स ने प्रैक्टिकल केस स्टडी के माध्यम से टीम मैनेजमेंट, ब्रांड बिल्डिंग और संस्थान को रणनीतिक रूप से आगे बढ़ाने के महत्वपूर्ण पहलुओं को समझाया। इस अनुभव ने उन्हें अपने संस्थान के विकास के लिए अधिक संरचित और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा दी। अनुराग सिंह चौहान के अनुसार भविष्य के सफल लीडर के लिए तीन गुण अत्यंत आवश्यक हैं—एडैप्टेबिलिटी, स्ट्रेटेजिक विजन और मजबूत टीम कोऑर्डिनेशन। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल टेक्नोलॉजी शिक्षा क्षेत्र में छात्रों की प्रगति का बेहतर आकलन और प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उनका संदेश है—निरंतर सीखते रहें, बदलाव के साथ विकसित होते रहें और स्पष्ट उद्देश्य के साथ टीम को साथ लेकर आगे बढ़ें।
ग्रामीण शिक्षा से नेतृत्व तक:IIM इंदौर उद्यम संवाद से मिली प्रबंधन और भविष्य की नई समझ
जब शिक्षा को मिशन बनाकर काम किया जाए, तो उसका प्रभाव केवल संस्थान तक नहीं बल्कि पूरे समाज तक पहुंचता है। कृष्णकेशव ग्रुप ऑफ स्कूल्स के चेयरमैन भानु प्रताप सिंह चौहान अजमेर, राजस्थान से शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कार्य कर रहे हैं। IIM इंदौर में दैनिक भास्कर द्वारा आयोजित उद्यम संवाद बिजनेस लीडरशिप प्रोग्राम में भाग लेना उनके लिए एक समृद्ध अनुभव रहा। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के प्रोफेशनल्स और अनुभवी मेंटर्स के साथ संवाद से उन्हें शिक्षा संस्थानों के प्रबंधन और भविष्य की संभावनाओं को समझने का अवसर मिला। भानु प्रताप सिंह चौहान के अनुसार भविष्य के सफल लीडर के लिए तीन गुण अत्यंत महत्वपूर्ण हैं—स्पष्ट विजन, मजबूत नेतृत्व क्षमता और प्रभावी कम्युनिकेशन स्किल्स। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में कार्यक्षमता और प्रभावशीलता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनका संदेश है स्पष्ट लक्ष्य तय करें, कड़ी मेहनत करें और निरंतर सीखते हुए अपने उद्देश्य को हासिल करें।
नई शिक्षा नेतृत्व की सोच:IIM इंदौर उद्यम संवाद से मिली प्रबंधन और डिजिटल लर्निंग की समझ
जब शिक्षा क्षेत्र में नेतृत्व और प्रबंधन की आधुनिक समझ जुड़ती है, तो संस्थान छात्रों के लिए बेहतर अवसरों का माध्यम बनते हैं। इंदिरा हैप्पी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, करतल से जुड़े डायरेक्टर पंकज खुराना के लिए IIM इंदौर का उद्यम संवाद लीडरशिप प्रोग्राम एक महत्वपूर्ण सीख का अनुभव रहा। दैनिक भास्कर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से आए शिक्षा और विभिन्न क्षेत्रों के प्रोफेशनल्स के साथ संवाद ने उन्हें संस्थान प्रबंधन, पैरेंट्स कम्युनिकेशन और लीडरशिप के नए दृष्टिकोण समझने का अवसर दिया। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने जाना कि यदि इस सीख का आधा भी संस्थान में लागू किया जाए तो स्कूल के विकास में बड़ा बदलाव संभव है। कार्यक्रम के दौरान डिजिटल लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के महत्व को भी करीब से समझने का अवसर मिला। उनका मानना है कि आज के समय में स्कूलों में डिजिटल क्लासरूम, पीपीटी आधारित शिक्षण और आधुनिक तकनीक का उपयोग शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पंकज खुराना का संदेश है सीखना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है उस सीख को व्यवहार में उतारना।
डॉ. पवन कुमार ने तीसरी बार हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष के पद पर कार्य ग्रहण कर लिया है। अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के लिए डॉ. पवन कुमार ने मुख्यमंत्री नायब सैनी एवं शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन पर जो विश्वास जताया वह उसे सार्थक सिद्ध करेंगे। उन्होंने कहा कि बोर्ड उपाध्यक्ष, बोर्ड सचिव व अधिकारियों के साथ मिलकर बोर्ड को और उच्च मुकाम पर ले जाएंगे। इस अवसर पर बोर्ड के अधिकारियों व कर्मचारियों, शिक्षा जगत से जुड़े विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों व शिक्षाविदों ने बोर्ड अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार का फूल-मालाओं से स्वागत किया। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार ने बोर्ड की लॉबी में स्थापित मां सरस्वती की पूजा अर्चना करने उपरांत कार्यग्रहण किया। उन्होंने शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष पद पर पुन: कार्यभार ग्रहण करने उपरांत कहा कि बोर्ड परीक्षाओं में नकल रोको अभियान व बोर्ड की कार्यप्रणाली में उल्लेखनीय सुधार लाने के अथक प्रयास किए जाएंगे। शैक्षिक क्षेत्र में अभूतपूर्व दीर्घकालीन अनुभवों के चलते हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार ने कहा कि प्रदेश की शैक्षिक क्षेत्र में बहुआयामी व सार्थक सुधार लाकर इसका स्तर और ऊंचा उठाएंगे। गुणात्मक सुधार के सार्थक प्रयास रहेंगे उन्होंने कहा कि शिक्षा-परीक्षा में गुणात्मक सुधार, परीक्षाओं में नकल पर पूर्ण अंकुश लगाने तथा शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली को ओर अधिक उत्तरदायी, त्वरित, पारदर्शी व विद्यार्थियों/शिक्षकों के लिए संतुष्टिपूर्ण बनाने के लिए सतत व सार्थक प्रयास जारी रहेंगे। नकल रहित परीक्षा करवाना उद्देश्य बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान में बोर्ड की परीक्षाएं सुचारू रूप से चल रही है और जो भी नकल से संबंधित मामले हमारे सामने आ रहे हैं उन पर बोर्ड तुरन्त प्रभाव से कड़ी कार्रवाई कर रहा है। वर्तमान में चल रही परीक्षाओंं में कुछ जगहों पर जहां भी नकल के मामले सामने आ रहे हैं, आरोपी लोगों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करवाई जा रही है। इसके अलावा संलिप्त कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के लिए लिखा जा रहा है। शिक्षा बोर्ड का उद्देश्य बोर्ड परीक्षाओं को पूर्णतया नकल रहित संचालित करवाना है। शिक्षा प्रणाली को लचीचा बनाएंगे उन्होंने कहा कि भारत सरकार की नई शिक्षा नीति पर सक्रिय रूप से कार्य करते हुए शिक्षा प्रणाली को आधुनिक, लचीला और समावेशी बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि परिक्षार्थियों के भविष्य को सशक्त बनाने के लिए तकनीकी कौशल शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा।
चंडीगढ़ के कई निजी स्कूलों में तय की गई किताबों को लेकर अभिभावकों की परेशानी बढ़ रही है। पेरेंट्स एसोसिएशन ने इस मामले में चंडीगढ़ प्रशासन के शिक्षा विभाग के डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन को शिकायत भेजकर आरोप लगाया है कि कुछ निजी स्कूल अपनी बुक लिस्ट तो वेबसाइट पर डाल रहे हैं, लेकिन ऐसे कम जाने-पहचाने पब्लिशर्स की किताबें निर्धारित कर रहे हैं जो खुले बाजार में उपलब्ध ही नहीं हैं। इससे अभिभावकों को मजबूरन उन्हीं चुनिंदा दुकानों से किताबें खरीदनी पड़ रही हैं जिनसे स्कूलों का टाईअप है। एसोसिएशन का कहना है कि शिक्षा विभाग के आदेशों के बावजूद कई स्कूल जानबूझकर ऐसी व्यवस्था बना रहे हैं जिससे किताबें केवल एक-दो दुकानों पर ही उपलब्ध हों और बाकी बुक सैलर्स को सप्लाई ही नहीं मिलती। शिक्षा विभाग के आदेश का नहीं हुआ पालन चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन गोयल ने बताया कि प्रशासन का उद्देश्य था कि स्कूल पहले से बुक लिस्ट सार्वजनिक करें, ताकि शहर के अलग-अलग बुक सैलर्स किताबें मंगाकर स्टॉक कर सकें और अभिभावकों को आसानी से उपलब्ध हो सकें। लेकिन कुछ स्कूल ऐसे पब्लिशर्स की किताबें लगाकर इस व्यवस्था को ही बेअसर करने की कोशिश कर रहे हैं। एसोसिएशन के मुताबिक कई स्थानीय बुक सैलर्स ने भी बताया है कि वे स्कूलों को कमीशन देने की बजाय अभिभावकों को डिस्काउंट देने को तैयार हैं, लेकिन कुछ पब्लिशर्स उन्हें किताबों की सप्लाई देने से ही मना कर रहे हैं। इससे फिर वही स्थिति बन जाती है कि किताबें सिर्फ एक तय दुकान पर ही उपलब्ध होती हैं। चार अलग-अलग बुकशॉप्स के नाम बताने की मांग चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि स्कूलों को कम से कम चार अलग-अलग बुकशॉप्स के नाम बताने के लिए बाध्य किया जाए, जहां निर्धारित किताबें उपलब्ध हों। इसके साथ ही जिन स्कूलों ने कम जाने-पहचाने पब्लिशर्स की किताबें लगाई हैं, उनसे लिखित एफिडेविट लिया जाए कि वे शहर के किसी भी बुकसेलर को किताबों की सप्लाई देंगे। एसोसिएशन ने यह भी मांग की है कि ऐसे पब्लिशर्स की किताबें निर्धारित करने से बचने के निर्देश दिए जाएं जिनकी सप्लाई केवल एक ही दुकान तक सीमित हो। स्कूल एजुकेशन डायरेक्टर की 3 बड़ी बातें… नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर जानकारी देना जरूरी: स्कूल एजुकेशन चंडीगढ़ की डायरेक्टर नितिश सिंघला ने कहा कि सभी प्राइवेट स्कूलों को किताबों और यूनिफॉर्म को लेकर गाइडलाइन जारी कर दी गई है। स्कूलों को यह जानकारी नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर देना अनिवार्य किया गया है। 24 घंटे के भीतर कार्रवाई होगी: उन्होंने कहा कि यदि कोई स्कूल अभिभावकों को किसी निश्चित दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर करता है, तो अभिभावक इसकी शिकायत सीधे जिला शिक्षा अधिकारी से कर सकते हैं। ऐसे मामलों में 24 घंटे के भीतर कार्रवाई कर रिपोर्ट शिक्षा सचिव को भेजनी होगी। स्कूल की मान्यता भी रद्द हो सकती है: डायरेक्टर ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर स्कूल की मान्यता रद्द करने के साथ भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। हर साल प्राइवेट स्कूलों में किताबों और यूनिफॉर्म को लेकर अभिभावकों को परेशान करने की शिकायतें आती रही हैं। इस बार प्रशासन ने ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई करने का फैसला लिया है।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की 13 से 16 मार्च तक मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व एरिया निकलने वाली पद यात्रा विवादों में आ गई है। वन विभाग ने फिलहाल यात्रा की अनुमति नहीं दी है। उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा है। दरअसल मंत्री के पद यात्रा टाइगर रिजर्व के उन गांवों से गुजरेगी, जहां पर बाघों का मूवमेंट है। वाइल्ड लाइफ एक्ट के जानकारों के अनुसार, कोर एरिया से पद यात्रा निकालना तो दूर, किसी एक व्यक्ति की आवाजाही की अनुमति भी शर्तों के साथ होती है। ऐसे में मंत्री की ओर से कोर एरिया में पूरे लवाजमे के साथ पद यात्रा निकालना गैरकानूनी है। इलाका संवेदनशील है, क्योंकि 4 बाघ-बाघिन और एक शावक का मूवमेंट है। एसपी को लिखा-वन क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करें पद यात्रा के लिए मंत्री ने रूट चार्ट जारी किया है। कोटा ग्रामीण एसपी सहित सभी विभागों को भेजे गए पत्र में उन्होंने साफ लिखा है कि इस क्षेत्र का अधिकांश इलाका वन क्षेत्र में आता है। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। यह पत्र उन्होंने कोटा और मुकंदरा टाइगर रिजर्व के उप वन संरक्षक सहित 14 विभागों को भेजा है। इसमें उन्होंने सभी अधिकारियों को यह भी लिखा है कि आप अपने अधीनस्थ सभी कर्मचारी-अधिकारियों को अपने स्तर पर यात्रा में उपस्थित रहने के लिए भी पाबंद करें। 13 मार्च - नयागांव से शुरू होकर डोबडा,पदमपुरा कोथला,धोलपुरा,डडवाड़ा, भंवरिया, कंवरपुरा, हरिपुरा, रांवठा और सोहनपुरा तक 14 किलोमीटर सोहनपुरा में भोजन और रात्रि विश्राम होगा। 14 मार्च - सोहनपुरा, मोहनपुरा मंदरगढ़, देवनली, दामोदरपुरा तक 12 किलोमीटर भोजन व रात्रि विश्राम देवनली, दामोदरपुरा में होगा। 15 मार्च देवनली दामोदरपुरा,से केशवपुरा, जसपुरा,किशनपुरा, डोलिया, गुर्जर ढाणी, चांद बावड़ी, गिरधरपुरा तक की 21 किलोमीटर भोजन व रात्रि विश्राम गिरधरपुरा में है। 16 मार्च - गिरधरपुरा से कोलीपुरा,भेरूपुरा, बोराबास,कोटा डेम की टपरिया, जामुनिया बावड़ी और बलिंडा तक 23 किलोमीटर। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का कहना है कि यह पद यात्रा पैदल इसलिए रखी है, ताकि गांव की समस्याओं का समाधान किया जा सके। दामोदरपुरा, कोलीपुरा और गिरधरपुरा में वन विभाग संबंधी इश्यू है तो देखेंगे। मुथु एस, डीसीएफ, मुकंदरा का कहना है कि चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन से मार्गदर्शन मांगा है। वहां से अनुमति नहीं आई है। गिरधरपुरा, कोलीपुरा और दामोदरपुरा गांव मुकंदरा टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में हैं। यहां पदयात्रा निकालना मुश्किल है।
गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर नगर पहुंचे पूर्व शिक्षा मंत्री
जालंधर | पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. दलजीत सिंह चीमा गुरुद्वारा नवमी पातशाही दुख निवारण साहिब गुरु तेग बहादुर नगर में नतमस्तक हुए। गुरुद्वारा साहिब की प्रबंधक कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष कंवलजीत सिंह टोनी ने धर्म प्रचार और गुरु तेग बहादुर चैरिटेबल अस्पताल में किए जा रहे कार्यों संबंधी जानकारी दी। यहां मनजीत सिंह ठुकराल, गगनदीप सिंह गग्गी आदि मौजूद रहे।
लुधियाना| 1158 सहायक प्रोफेसर और लाइब्रेरियन फ्रंट के आह्वान पर बुधवार को एससीडी कॉलेज के गेट के सामने सरकारी राजिंद्रा कॉलेज बठिंडा सहित लुधियाना जोन के छह सरकारी कॉलेजों के सहायक प्रोफेसरों और लाइब्रेरियनों ने पंजाब सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और पुतला फूंका। प्रदर्शन के दौरान प्रोफेसरों ने आरोप लगाया कि सरकार 1158 सहायक प्रोफेसर और लाइब्रेरियन भर्ती को बचाने के लिए गंभीर प्रयास नहीं कर रही है। प्रो. जसप्रीत सिवियां ने कहा कि पिछले शनिवार शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या करते हुए 1158 पदों पर नई भर्ती करने का बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी तरीके से भर्ती हुए 1158 सहायक प्रोफेसरों और लाइब्रेरियनों के स्थायी रोजगार की सुरक्षा के लिए सरकार ने न तो ईमानदारी से समीक्षा याचिका दायर की है और न ही कोई ठोस कानूनी कार्रवाई शुरू की है। प्रो. अश्मनी ने कहा कि विभाग द्वारा सेवाओं को सांकेतिक रूप से 17 फरवरी 2026 तक सीमित करने और प्रसूता अवकाश सहित वैधानिक अधिकारों पर पाबंदी लगाने से पंजाब सरकार का जन-विरोधी रवैया पहले ही उजागर हो चुका है। वहीं प्रो. गुरजंट सिंह ने कहा कि सरकार के इस रवैये के कारण 1158 भर्ती अब उनके लिए जीवन-मरण का प्रश्न बन चुकी है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द बैठक कर 1158 सहायक प्रोफेसरों और लाइब्रेरियनों के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाती, तो 15 मार्च 2026 को गंभीरपुर में शिक्षा मंत्री के निवास के सामने राज्य स्तरीय रोष प्रदर्शन किया जाएगा। एससीडी कॉलेज के बहार पंजाब सरकार के खिलाफ प्रदर्शन ।
महिला सशक्तिकरण, नेतृत्व और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व पर जोर दिया
लुधियाना| हेलो किड्स प्लेवे में कर्नाटक की प्रमुख प्री-स्कूल चेन हेलो किड्स ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक विशेष लाइव इंटरएक्टिव सत्र का आयोजन किया। इस सत्र में पंजाब सरकार के खाद्य प्रसंस्करण विभाग की प्रिंसिपल सेक्रेटरी राखी गुप्ता भंडारी (आईएएस) मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुईं। इस सत्र का विषय शिक्षा और समाज में परिवर्तन की वाहक के रूप में महिलाएं था। कार्यक्रम के दौरान हेलो किड्स के संस्थापक प्रीतम कुमार अग्रवाल ने राखी गुप्ता भंडारी से बातचीत की और शिक्षा, नेतृत्व व समाज के निर्माण में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की। सत्र में देशभर से हेलो किड्स के 1100 से अधिक ब्रांच ओनर्स, टीचर और अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने सत्र के दौरान ध्यानपूर्वक विचार सुने और बातचीत में हिस्सा लिया, जिससे कार्यक्रम काफी रोचक और ज्ञानवर्धक बना। राखी गुप्ता भंडारी ने अपने प्रशासनिक और सार्वजनिक सेवा के अनुभव साझा करते हुए महिला सशक्तिकरण, नेतृत्व, दृढ़ता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने टीचरों और अभिभावकों को बच्चों में बचपन से ही आत्मविश्वास, रचनात्मकता और नेतृत्व के गुण विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
छत्तीसगढ़ के गठन को 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस दौरान उच्च शिक्षा के 8 मंत्री बने। सरकारें बदलीं, मंत्री बदले लेकिन शासकीय कॉलेजों में स्थायी प्रोफेसर भर्ती का संकट जस का तस बना रहा। हैरानी की बात यह है कि इनते वर्षों में प्रोफेसर के लिए केवल एक बार वर्ष 2021 में, जब कांग्रेस सत्ता में थी और मंत्री उमेश पटेल थे, तब भर्ती निकाली गई, लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। दस्तावेज सत्यापन के बाद पांच महीने से पात्र-अपात्र अभ्यर्थियों की लिस्ट जारी नहीं हुई है। इंटरव्यू की प्रक्रिया भी लंबित है। इसकी वजह से कई कॉलेजों में नए विषय, पीजी कोर्स, रिसर्च सेंटर शुरू नहीं कर पा रहे। वहीं नैक और एनआईआरएफ रैंकिंग पर असर पड़ा है। शेष|पेज 11 कॉलेजों की संख्या बढ़ाते गए, लेकिन नियमित फैकल्टी पर ध्यान नहीं :प्रदेश में शासकीय कॉलेजों की संख्या साल दर साल बढ़ती गई, उसकी तुलना में नियमित फैकल्टी की संख्या कम है। अभी राज्य में 335 शासकीय काॅलेज हैं। जबकि 2008-09 में 154 कॉलेज हैं। 10 साल में यानी 2018-19 तक 100 नए कॉलेज बने और संख्या 254 हो गई। इसके बाद 2024-25 तक 81 और कॉलेज खुल गए। इनकी तुलना में यदि प्रोफेसर की बात करें तो सीधी भर्ती में कुल स्वीकृत पद 779 हैं, यह सभी खाली है। इसी तरह असिस्टेंट प्रोफेसर के 5335 पद में से 2302 पोस्ट खाली है। 2021 में निकली थी प्राेफेसर की वैकेंसी प्रदेश के शासकीय कॉलेजों में प्रोफेसरों की सीधी भर्ती के लिए 2021 में वैकेंसी निकली थी। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) के माध्यम से 13 सितंबर से 12 अक्टूबर 2021 तक आवेदन मंगाए गए, लेकिन विभिन्न विवादों के चलते भर्ती प्रक्रिया स्थगित कर दी गई। फिर 2024 में प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई, लेकिन अब इसमें भी लगातार देरी हो रही है। पिछले साल सितंबर तक विभिन्न विषयों के लिए दस्तावेज सत्यापन हुआ। इसके बाद संभावना बनी थी कि कुछ दिनों में पात्र-अपात्र की लिस्ट जारी हो जाएगी और फिर इंटरव्यू होगा। लेकिन मार्च 2026 शुरू है, अब तक पात्र अपात्र की लिस्ट नहीं आई है। प्रोफेसर की इन विषयों- अंग्रेजी, माइक्रोबॉयोलॉजी, लोक प्रशासन, प्राचीन भारतीय इतिहास, बायोटेक्नोलॉजी, सैन्य विज्ञान, ज्योतिष, दर्शन शास्त्र, मानव शास्त्र, इतिहास, संस्कृत, विधि, गृह विज्ञान, वनस्पति शास्त्र, भौतिक शास्त्र, हिन्दी, रसायन शास्त्र, प्राणीशास्त्र, भूगोल, समाज शास्त्र, गणित, अर्थशास्त्र भूगर्भशास्त्र, मनोविज्ञान आदि के लिए भर्ती होगी। प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर की कमी से यह असर असि. प्रोफेसर भर्ती सुस्त सिस्टम की भेंटप्रदेश में प्रोफेसर भर्ती की प्रक्रिया जहां पिछले पांच वर्षों से अधर में लटकी है, वहीं असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती भी अब सरकारी सिस्टम की सुस्ती का शिकार हो गई है। छह साल बाद सितंबर 2025 में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की घोषणा तो हुई, लेकिन मार्च शुरू होने के बावजूद अब तक विज्ञापन जारी नहीं हो सका। इसका सीधा नुकसान अभ्यर्थियों को हुआ है, कई योग्य उम्मीदवार एज बार हो चुके हैं। भास्कर एक्सपर्ट - डॉ. जवाहर सूरिसेट्टी, शिक्षाविद स्थायी शिक्षकों का अभाव, उच्च शिक्षा के लिए चुनौतीछत्तीसगढ़ में पिछले दो दशकों से स्थायी प्रोफेसरों की नियुक्ति का अभाव और एड-हॉक (तदर्थ) व्यवस्था पर निर्भरता, राज्य की उच्च शिक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती है। अब जबकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू की जा रही है, यह कमी शिक्षा की गुणवत्ता को कई तरीके से प्रभावित करेगी।
मप्र में अब विषय बदलकर अंडर ग्रेजुएट (यूजी) करने वाले छात्रों को पात्रता परीक्षा देनी होगी। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य स्तरीय एकीकृत परीक्षा कराने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ने बुधवार को आयुक्त और सभी विश्वविद्यालयों को सर्कुलर जारी कर शैक्षणिक सत्र 2026-27 और 2027-28 के लिए परीक्षा आयोजन की जिम्मेदारी सम्राट विक्रमादित्य विवि, उज्जैन को सौंपी है। परीक्षा में सफल छात्र प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध कॉलेज में प्रवेश ले सकेंगे। नई व्यवस्था के अनुसार यदि किसी छात्र ने 12वीं गणित या विज्ञान विषय से की है और वह यूजी में आर्ट्स या किसी अन्य संकाय से पढ़ाई करना चाहता है, तो उसे संबंधित विषय की पात्रता परीक्षा पास करनी होगी। यह निर्णय यूजीसी रेगुलेशन-2025 के आधार पर विवि समन्वय समिति की स्थायी समिति की अनुशंसा पर लिया है। पिछले सत्र से ही पीजी में भी यह व्यवस्था लागू है, लेकिन विवि स्तर पर कोई परीक्षा नहीं हो सकी। विशेषज्ञ डॉ. एचएस त्रिपाठी के अनुसार 25% छात्र 12वीं के बाद विषय बदलते हैं। इसलिए यूजी में व्यवस्था लागू करने से पहले अध्यादेश संशोधन जरूरी है। 28 जनवरी 2026 की बैठक में राज्य स्तरीय परीक्षा कराने पर सहमति बनी थी। समिति के अनुसार परीक्षा चक्रानुक्रम से विश्वविद्यालय कराएंगे और एक विश्वविद्यालय लगातार दो साल तक परीक्षा आयोजित करेगा। प्रदेश में उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत 18 विश्वविद्यालय हैं। 1 जनवरी को कहा था- सभी विवि अपने स्तर पर कराएं परीक्षा...उच्च शिक्षा विभाग 1 जनवरी 2026 को सभी विश्वविद्यालयों को सिर्फ पीजी के लिए अपने-अपने स्तर पात्रता परीक्षा कराने के निर्देश दिए थे। इसके अनुसार यह परीक्षा मार्च में आयोजित होनी है और 1 मई से परीक्षा होनी है। कुछ विश्वविद्यालयों ने इसके लिए तैयारी करना शुरू कर दिया था लेकिन विश्वविद्यालयों ने इस संबंध में कोई सूचना जारी नहीं की है। यूजी के अध्यादेश में अभी प्रावधान नहीं, पीजी में यह व्यवस्था मौजूद
संस्कृति स्कूल को बनाया जाएगा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मॉडल: एसपी गोयल
उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में बुधवार को सीएसआई एजुकेशनल सोसाइटी की कार्यकारी समिति की बैठक आयोजित की गई
जिलाधिकारी अतुल वत्स ने हाथरस में बेसिक शिक्षा विभाग की योजनाओं की समीक्षा की। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में उन्होंने परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता, छात्र-छात्राओं के नामांकन और मूलभूत सुविधाओं की प्रगति का जायजा लिया। अपेक्षित प्रगति न मिलने पर जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारी मुरसान को कारण बताओ नोटिस और खंड शिक्षा अधिकारी सिकंदराराऊ को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए। अन्य खंड शिक्षा अधिकारियों को भी चेतावनी पत्र जारी करने के आदेश दिए गए। जिलाधिकारी ने परिषदीय विद्यालयों में नामांकित छात्र-छात्राओं की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर उन्हें फिर से विद्यालय से जोड़ने का निर्देश दिया। खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित रूप से विद्यालयों का निरीक्षण कर नामांकन और उपस्थिति की समीक्षा करने तथा सुधारात्मक कदम उठाने के लिए कहा गया। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों में चल रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने 19 निर्धारित बिंदुओं के अनुरूप मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा। इनमें स्वच्छ शौचालय, शुद्ध पेयजल, विद्युत व्यवस्था, कक्षाओं की साफ-सफाई, फर्नीचर, हैंडवॉश यूनिट, बाउंड्रीवाल, रसोईघर और खेल मैदान जैसी सुविधाएं शामिल हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन विद्यालयों में इन सुविधाओं की कमी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि बच्चों को स्वच्छ, सुरक्षित और अनुकूल वातावरण मिल सके। मिड-डे मील योजना की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने बच्चों को समय पर पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने को कहा और स्पष्ट किया कि इस योजना के संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को विद्यालयों का औचक निरीक्षण कर भोजन की गुणवत्ता की जांच करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक, बेसिक शिक्षा अधिकारी, सभी खंड शिक्षा अधिकारी और अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
बक्सर में शिक्षा विभाग पर पूर्व आईपीएस और भाजपा विधायक आनंद मिश्रा ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि विभाग में 'शिक्षा माफिया' सक्रिय है, जो ब्लैकमेलिंग के जरिए पूरे सिस्टम को प्रभावित कर रहा है। आनंद मिश्रा ने बताया कि उन्हें शिक्षा विभाग से जुड़ी शिकायतें लगातार मिल रही थीं, जिसके बाद उन्हें इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में अजय सिंह और अरविंद सिंह जैसे कुछ 'माफिया' किस्म के लोग सक्रिय हैं। मिश्रा के अनुसार, इन पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को ब्लैकमेल कर दबाव बनाने का आरोप है। ''पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए खुद जांच की'' विधायक मिश्रा ने इस पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए खुद जांच की। उन्होंने समझने की कोशिश की कि ये लोग कौन हैं और किस तरह विभाग के हर काम में हस्तक्षेप करते हैं। जब वे शिक्षा विभाग पहुंचे, तो कुछ अधिकारियों ने गोपनीय तरीके से उन्हें ब्लैकमेलिंग के तरीके के बारे में जानकारी दी। मिश्रा के मुताबिक, ये 'शिक्षा माफिया' उन मामलों को पकड़ते हैं जहां किसी शिक्षक की अनुपस्थिति हो या कोई गलती हुई हो। इसके अलावा, यदि कोई गोपनीय दस्तावेज बाहर आता है, तो वे उसी आधार पर अधिकारियों पर दबाव बनाते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभाग के कुछ कर्मचारियों के साथ इनकी सांठगागांठ है, जिसके कारण कई गोपनीय दस्तावेज जारी होने से पहले ही इनके पास पहुंच जाते हैं। एक-दो वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी सामने आए आनंद मिश्रा ने यह भी बताया कि जांच के दौरान एक-दो वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं, जिनका खुलासा सही समय पर किया जाएगा। उन्होंने एक सेवानिवृत्त अधिकारी का भी जिक्र किया, जो कथित तौर पर इन लोगों के साथ सचिवालय तक घूमते हैं। आनंद मिश्रा ने कहा कि लोक शिकायत निवारण मंच को आम लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए बनाया गया है, लेकिन कुछ लोग इसका भी दुरुपयोग कर रहे हैं और इसे ब्लैकमेलिंग का माध्यम बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा को प्राथमिकता दे रही है और उनका उद्देश्य है कि “बक्सर पढ़े, बिहार पढ़े और आगे बढ़े।” मिश्रा ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा को व्यवसाय बनाने की कोशिश करने वाले लोगों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पंजाब में 1158 असिस्टेंट प्रोफेसर और लाइब्रेरियन की भर्ती को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है। लुधियाना के जगराओं में बुधवार को 1158 असिस्टेंट प्रोफेसर और लाइब्रेरियन फ्रंट पंजाब के नेतृत्व में असिस्टेंट प्रोफेसरों और लाइब्रेरियन्स ने रोष मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने बस स्टैंड चौक पर पंजाब सरकार और शिक्षा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुतला फूंका। प्रदर्शनकारी परमजीत सिंह और करमजीत सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 14 जुलाई 2025 को भर्ती रद्द करने के फैसले से उन्हें गहरी चिंता है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल भर्ती हुए उम्मीदवारों और उनके परिवारों के लिए, बल्कि पंजाब की उच्च शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य के लिए भी हानिकारक हो सकता है। फ्रंट के प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी है। ऐसे में पहले से कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसरों और लाइब्रेरियनों की सेवाएं समाप्त करना उचित नहीं है। उन्होंने पंजाब सरकार से मांग की कि 1158 भर्ती के तहत नियुक्त सभी असिस्टेंट प्रोफेसरों और लाइब्रेरियनों की नौकरी को स्थायी किया जाए। हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट द्वारा जारी लेटर रद्द करने की मांग इसके अतिरिक्त, फ्रंट ने हायर एजुकेशन विभाग द्वारा 4 नवंबर 2025 को जारी किए गए पत्र को तत्काल रद्द करने की मांग की। उन्होंने इन कर्मचारियों की नियमित छुट्टियां बहाल करने और दूरस्थ स्टेशनों पर कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसरों व लाइब्रेरियनों के लिए नजदीकी स्टेशनों पर तबादले हेतु ट्रांसफर पोर्टल खोलने की भी अपील की। फ्रंट के नेताओं ने पंजाब के मुख्यमंत्री से सार्वजनिक बयान जारी कर यह आश्वासन देने की मांग की कि भर्ती किए गए 1158 प्रोफेसरों और लाइब्रेरियनों की नौकरी सुरक्षित रहेगी। साथ ही, उन्होंने कॉलेजों में प्रिंसिपल और प्रशासन द्वारा इन कर्मचारियों के साथ हो रहे भेदभाव को तुरंत बंद करने की भी अपील की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लेती है, तो वे अपने संघर्ष को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।
डीडवाना-कुचामन जिले में सरकारी स्कूल की टॉपर छात्राओं को हेलिकॉप्टर से हवाई सैर करवाई गई। प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रिंसिपल ने भामाशाह के सहयोग से यह अनूठी पहल की। गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल, ललासरी की 12वीं क्लास की 5 छात्राओं ने बुधवार को हेलिकॉप्टर से ललासरी, खाखोली और डीडवाना क्षेत्र के ऊपर उड़ान भरी। प्रिंसिपल डॉ. हरवीर सिंह जाखड़ ने बताया- पिछले पांच वर्षों में कक्षा 12 में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं को हेलिकॉप्टर से हवाई यात्रा कराई गई। यह विशेष आयोजन भामाशाह ओमप्रकाश पावड़िया के सहयोग से संभव हो पाया। इन छात्राओं ने किया हवाई सफर हेलिकॉप्टर में हवाई सैर करने वाली छात्राओं में जिंकल जांगिड़, लक्ष्मी गुर्जर, गीतांजली मेघवाल, कोमल गुर्जर और मुन्नी मेघवाल शामिल थीं। जिंकल जांगिड़ ने वर्ष 2022-23 में 96.60 प्रतिशत अंक, लक्ष्मी गुर्जर ने वर्ष 2023-24 में 96 प्रतिशत और गीतांजली मेघवाल ने वर्ष 2024-25 में 92 प्रतिशत अंक अर्जित किए। कोमल गुर्जर और मुन्नी मेघवाल को वर्ष 2025-26 की संभावित टॉपर मानते हुए उन्हें भी प्रोत्साहन स्वरूप यह हवाई सैर करवाई गई। स्कूल परिसर में उतारा हेलिकॉप्टर प्रिंसिपल जाखड़ के अनुसार छात्राओं को हवाई यात्रा का अवसर देने के लिए हेलिकॉप्टर को सीधे स्कूल परिसर में उतारा गया था। हेलिकॉप्टर ने ललासरी, खाखोली और डीडवाना क्षेत्र के ऊपर उड़ान भरी। इस दौरान स्कूल स्टाफ, विद्यार्थियों और आसपास के ग्रामीणों में काफी उत्साह देखा गया। 5 वर्षों से बोर्ड परीक्षा का शत-प्रतिशत परिणाम प्रिंसिपल ने बताया कि स्कूल में वर्तमान में लगभग 200 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। पिछले पांच वर्षों से यहां का बोर्ड परीक्षा परिणाम 100 प्रतिशत रहा है। नवाचार, उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम, भामाशाहों का सहयोग और प्रतिभा प्रोत्साहन जैसे प्रयासों के कारण यह स्कूल पहले भी सुर्खियों में रहा है। विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति बढ़ेगी प्रेरणा प्रिंसिपल जाखड़ ने उम्मीद जताई कि इस पहल से विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति प्रेरणा बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि यह मॉडल प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है। इस आयोजन में हेलिकॉप्टर की व्यवस्था पर लगभग 2 से 3 लाख रुपए का खर्च आया।
उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने लोकसभा में नियम 377 के जरिए आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों के बच्चों के लिए बड़ी मांग उठाई है। उन्होंने जिले की पांच प्रमुख पंचायत समितियों-ओगणा, सुलाव, देवला, नाई और कल्याणपुर में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) खोलने का प्रस्ताव संसद में रखा। डॉ. रावत ने जोर देकर कहा कि इन दुर्गम क्षेत्रों में जनजातीय आबादी की बहुलता होने के बावजूद अभी तक एक भी एकलव्य स्कूल संचालित नहीं है, जिससे यहां के प्रतिभाशाली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए दर-बदर भटकना पड़ता है। सांसद ने सदन के पटल पर आंकड़े रखते हुए बताया कि जनगणना 2011 के अनुसार इन सभी पांचों पंचायत समितियों में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या का प्रतिशत बहुत अधिक है। सुलाव में 95 प्रतिशत, देवला में 98 प्रतिशत, ओगणा में 68 प्रतिशत, नाई में 86 प्रतिशत और कल्याणपुर में 88 प्रतिशत जनजाति आबादी निवास करती है। डॉ. रावत ने तर्क दिया कि ये सभी क्षेत्र एकलव्य मॉडल स्कूल खोले जाने की हर तरह की पात्रता रखते हैं, फिर भी अब तक इन्हें इस सुविधा से वंचित रखा गया है। संसद में डॉ. मन्नालाल रावत ने कहा कि ये पंचायत समितियां भौगोलिक दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण और दुर्गम इलाकों में स्थित हैं। पहाड़ों और जंगलों के बीच बसे इन गांवों में रहने वाले जनजाति बालक-बालिकाओं के पास बेहतर आवासीय शिक्षा के समुचित अवसर नहीं हैं। इस वजह से आदिवासी छात्र उच्च शिक्षा की दौड़ में पिछड़ रहे हैं और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर भी बुरा असर पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीण और समाज के लोग लंबे समय से यहां सरकारी आवासीय स्कूलों की मांग कर रहे हैं ताकि उनके बच्चों का भविष्य संवर सके। डॉ. रावत ने केंद्र सरकार से मांग की है कि संविधान के अनुच्छेद 275 (1) के तहत इन पांचों पंचायत समितियों में नवीन एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की तुरंत स्वीकृति प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों के खुलने से न केवल जनजाति विद्यार्थियों को सुलभ और मुफ्त शिक्षा मिलेगी, बल्कि उनके समग्र विकास का मार्ग भी प्रशस्त होगा। सांसद की इस पहल के बाद अब इन पिछड़े क्षेत्रों के हजारों आदिवासी परिवारों में अपने बच्चों की बेहतर पढ़ाई और भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगी है।
सागर के नरयावली रोड पर जेरई के पास स्थित ज्ञानवीर यूनिवर्सिटी का उद्घाटन करने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11 मार्च बुधवार को सागर आ रहे हैं। इस दौरान सीएम रोजगार मेले का भी शुभारंभ करेंगे। वे करीब 1.25 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेंगे। कार्यक्रम में डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार भी शामिल होंगे। सीएम के प्रस्तावित दौरे को लेकर तैयारियां कर ली गई हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने अधिकारियों के साथ कार्यक्रम की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने हेलीपैड, मंच, बैठक व्यवस्था, पार्किंग, आवागमन मार्ग समेत अन्य व्यवस्थाओं को देखा। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि ज्ञानवीर यूनिवर्सिटी सागर जिले और आसपास के क्षेत्रों के लिए विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के क्षेत्र बेहतर सुविधा देगी। अब विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा। बल्कि उन्हें आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सागर में ही उपलब्ध हो सकेगी। प्रतिवर्ष रोजगार मेले और प्लेसमेंट के माध्यम से युवाओं का रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। रोजगार मेले में इंटरव्यू से होगा युवाओं को चयन युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर दिलाने बुधवार को रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। रोजगार मेला ज्ञानवीर यूनिवर्सिटी परिसर में सुबह 11 बजे से शुरू होगा। मेले का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। मेले में देश और प्रदेश की कंपनियां हिस्सा लेंगी। जिसमें कंपनियों की प्रतिनिधि युवाओं का इंटरव्यू लेकर अलग-अलग पदों के लिए चयन करेंगे।
खेलों में छात्रों ने दिखाया दम, शिक्षा के साथ फिटनेस का संदेश दिया
छात्रों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लिया. ● एथलेटिक्स: 50 मीटर, 100 मीटर, 200 मीटर और रिले रेस। ● शक्ति और कौशल: टग-ऑफ-वार (रस्साकशी), आर्म रेसलिंग (पंजालड़ा), शॉट पुट (गोला फेंक) और लॉन्ग जंप। ● मनोरंजक खेल: विभिन्न फन रेस और अन्य गतिविधियां। मुख्य अतिथि सरदार गुरदर्शन सिंह ने छात्रों की ऊर्जावान भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि खेल युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व के गुण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने छात्रों को शिक्षा और शारीरिक फिटनेस के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया। डॉ. एसपी सिंह (अध्यक्ष,जीकेईसी और पूर्व कुलपति, जीएनडीयू) ने जोर देकर कहा कि खेल छात्रों के व्यक्तित्व को आकार देने और उनमें दृढ़ता और टीम वर्क जैसे मूल्यों को स्थापित करने के लिए आवश्यक हैं। प्रो. मंजीत सिंह छाबड़ा (निदेशक, जीजीएनआईएमटी) ने कहा कि एंथुसिया छात्रों के लिए अपनी शारीरिक क्षमताओं और प्रतिस्पर्धी भावना को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। खेल उत्सव का समापन पुरस्कार वितरण समारोह के साथ हुआ, जहां विजेताओं को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पदक और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। भास्कर न्यूज | लुधियाना गुजरांवाला गुरु नानक इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी ने अपने परिसर के विशाल मैदान में वार्षिक खेल उत्सव एंथुसिया 2026 का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में छात्रों और संकाय सदस्यों के बीच भारी उत्साह देखा गया, जो खेल भावना, टीम वर्क और शारीरिक फिटनेस का उत्सव मनाने के लिए एकत्रित हुए थे। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि सरदार गुरदर्शन सिंह, आईपीएस के औपचारिक स्वागत के साथ हुई। समारोह का शुभारंभ खेल ध्वज फहराने के साथ हुआ। खेल उत्सव की औपचारिक घोषणा के बाद, छात्रों ने प्रतियोगिताओं के दौरान निष्पक्ष खेल, अखंडता और खेल कौशल के मूल्यों को बनाए रखने की शपथ ली। मार्च पास्ट के दौरान दर्शकों ने विभिन्न विभागों के छात्रों को पूरे आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ कदमताल करते देखा।
स्कूल ही बच्चियों के लिए डर और असुरक्षा का कारण बन जाएं, तो यह सिस्टम की लाचारी और विफलता की कहानी बन जाती है। विधानसभा में शिक्षा विभाग ने बताया है कि वर्ष 2020 से 2024 तक सरकारी स्कूलों में 61 जगह बच्चियों के साथ शिक्षकों द्वारा छेड़छाड़, दुष्कर्म जैसे मामले आए हैं। भास्कर पड़ताल में आया कि कई बच्चियों को मजबूरी में पढ़ाई छोड़नी पड़ी, तो शर्मिंदगी से बचने के लिए कई परिवारों को घर बदलना पड़ा। इन्हीं बच्चियों का दर्द पढ़ें इस स्पेशल रिपोर्ट में : झिझक के कारण 3 बच्चियों ने छोड़ दिया स्कूल सीकर के एक गांव में हेडमास्टर तीन सहेलियों से अश्लील हरकत करता था। उन्हें गलत तरीके से छूता था। इससे बच्चियां डर गईं। उन्होंने स्कूल जाने से मना कर दिया। परिवारों ने कारण पूछा, तो उन्हें हेडमास्टर की करतूत का पता लगा। इसके बाद परिजनों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से शिकायत की। घटना के बाद तीनों बच्चियों की जिंदगी बदल गई है। वे स्कूल जाने से मना करती हैं। मां स्कूल जाने के लिए कहती हैं, तो रोने लगती हैं। समझा-बुझाकर उन्हें स्कूल भेजा जाता है, तो वे वहां दूसरी बच्चियों से बात करने में हिचकिचाती हैं। दिनभर गुमसुम रहती हैं। ऐसी दिनचर्या से एक बच्ची का स्वास्थ्य भी बिगड़ चुका है। रात के समय वह अचानक डरकर रोने लगती है। डर ऐसा कि साढ़े चार साल बाद भी डिप्रेशन में है बेटी अक्टूबर 2021 में झुंझुनूं के स्कूल के प्रधानाध्यापक ने बच्ची से स्कूल में दरिंदगी की। सदमे के कारण उसका व्यवहार बदल गया है और वह घुट-घुटकर जी रही है। घरवालों ने स्कूल बदल दिया, लेकिन वह लगातार स्कूल भी नहीं जा पा रही है। शर्मिंदगी के कारण रिश्तेदारी में जाने से भी संकोच करती है।
शिक्षा सत्र समाप्ति के 20 दिन शेष, अब तक एक रुपया भी जारी नहीं
डूंगरपुर| प्रदेश में शिक्षा सत्र समाप्त होने में करीब 20 दिन ही शेष हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों को मिलने वाली कंपोजिट स्कूल ग्रांट अब तक जारी नहीं होने से स्कूलों के सामने गंभीर वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। स्वच्छता अभियान और स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार उपलब्धियां गिनाने में जुटी है, जबकि जमीनी स्तर पर स्कूलों में झाडू-पोछा, साबुन, स्टेशनरी और अन्य आवश्यक सामग्री के लिए भी बजट उपलब्ध नहीं है। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के नियमों के अनुसार कंपोजिट स्कूल ग्रांट की 70 प्रतिशत राशि दिसंबर तक खर्च करना अनिवार्य है। इसके बावजूद चालू शिक्षा सत्र में जिले के 498 सहित प्रदेश के 19,772 सरकारी सीनियर स्कूलों को अब तक एक भी किस्त जारी नहीं की गई है। इससे स्कूलों के नियमित संचालन पर असर पड़ रहा है। कई संस्थाप्रधान और शिक्षक आवश्यक खर्चों के लिए उधार लेकर या शाला विकास कोष से काम चला रहे हैं। कंपोजिट ग्रांट के तहत स्कूलों में 1 से 30 विद्यार्थी पर 10 हजार रुपए, 31-100 विद्यार्थी 25 हजार, 101-250 विद्यार्थी 50 हजार, 251-1000 विद्यार्थी 75 हजार और 1000 से अधिक पर एक लाख रुपए की राशि का प्रावधान है। अब सत्र समाप्त होने जा रहा है और ग्रांट को लेकर एक रुपया भी जारी नहीं किया गया है बल्कि इसमें दिसंबर तक 70 फीसदी खर्च का प्रावधान है। ग्रांट जारी नहीं होने से जिले के स्कूलों में व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं और शिक्षा सत्र के अंतिम दौर में भी विद्यालयों को राहत का इंतजार है। ग्रांट नहीं मिलने से कई विद्यालयों में बिजली-पानी के बिल, समाचार पत्र, स्टेशनरी और दैनिक जरूरतों का भुगतान करना मुश्किल हो गया है। कई स्थानों पर छोटे-छोटे कार्य भी रुके पड़े हैं या फिर शिक्षकों को अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा है। कंपोजिट स्कूल ग्रांट से विद्यालयों में स्वच्छता, पेयजल व्यवस्था, चॉक-डस्टर, पत्र-पत्रिकाएं, स्टेशनरी और अन्य शैक्षिक सामग्री की व्यवस्था की जाती है। ग्रांट नहीं मिलने से इन बुनियादी सुविधाओं पर सीधा असर पड़ रहा है। राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) के प्रदेश उपाध्यक्ष ऋषिन चौबीसा, जिला अध्यक्ष शंकरलाल कटारा ने निदेशक स्कूल शिक्षा जयपुर के माध्यम से मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर जिले के सभी विद्यालयों में कंपोजिट स्कूल ग्रांट व खेल मद की राशि शीघ्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष विद्यालयों के नियमित खर्च के लिए यह राशि समय पर जारी होती है, लेकिन इस सत्र में अधिकांश विद्यालयों को अभी तक राशि नहीं मिली है। इससे सफाई, स्टेशनरी, बिजली बिल व परीक्षा सामग्री तक उधारी में खरीदनी पड़ रही है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षा मित्रों की सेवा नियमित करने के मामले में राज्य सरकार को निर्णय लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के जागो व श्रीपाल केस में दिये गये फैसले के आधार पर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि 115 याचीगण अपना अलग अलग प्रत्यावेदन तीन हफ्ते में अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा उ प्र लखनऊ को देंगे और वह दो माह में विचार कर सहायक अध्यापक के पद पर शिक्षा मित्रों के नियमितीकरण मामले में फैसला लेंगे। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान की एकलपीठ ने तेज बहादुर मौर्य व 114 अन्य शिक्षा मित्रों की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याचिका पर कहना था कि याचीगण बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा मित्र के रूप में वर्षों से कार्यरत हैं।लंबी सेवा को देखते हुए उन्हें सहायक अध्यापक के रूप में नियमित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश व केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के आदेश 11 जून 25 के अनुसार याचीगण नियमित किए जाने के हकदार हैं। सरकार की तरफ से कहा गया कि ऐसे ही मामले में विशेष अपील हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। यह सरकार का नीतिगत मामला है।कोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। याची अधिवक्ता ने कहा कि बदली परिस्थितियों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आलोक में याचीगण नियमित होने के हकदार हैं। विचार किया जाना चाहिए। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को दो माह में निर्णय लेने का आदेश दिया है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की डॉ. मल्लिका सक्सेना को 'सक्षम भारत अवार्ड 2026' से सम्मानित किया गया। उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु यह सम्मान प्रदान किया गया। यह सम्मान समारोह लेट्स गिव होप फाउंडेशन की ओर से कैसरबाग स्थित राय उमनाथ बली ऑडिटोरियम में आयोजित 'लीडरशिप स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम फॉर वुमेन' के दौरान हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आईपीएस अधिकारी प्रकाश डी. रहे, जबकि डिप्टी डायरेक्टर दिव्यांगजन सशक्तिकरण डॉ. अमित राय विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। शैक्षणिक संसाधनों को सुलभ बनाने की दिशा में सक्रिय इस अवसर पर वक्ताओं ने समाज में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित कर उनके योगदान की सराहना की गई। डॉ. मल्लिका सक्सेना वर्तमान में डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के इतिहास एवं पुरातत्व विभाग की विभागाध्यक्ष हैं। वह लंबे समय से समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक संसाधनों को सुलभ बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उनके प्रयासों से कई विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिला है।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
महिला शिक्षा की अलख जगाने वाली और आधुनिक भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि के अवसर पर मंगलवार को चिड़ावा कॉलेज में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज में शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता के स्वर मुखर हुए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सांसद संतोष अहलावत उपस्थित रहीं, जिन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संघर्ष और साहस का प्रतीक है सावित्रीबाई का जीवन: संतोष अहलावत पूर्व सांसद संतोष अहलावत ने सावित्रीबाई फुले के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने उस दौर में महिलाओं और वंचितों के लिए शिक्षा के द्वार खोले, जब समाज में इसके प्रति घोर विरोध था। उनके द्वारा जलाया गया शिक्षा का दीप आज भी करोड़ों महिलाओं के जीवन को रोशन कर रहा है। अहलावत ने वर्तमान पीढ़ी को सचेत करते हुए कहा कि आज के युवाओं को मोबाइल की आभासी दुनिया और समय की बर्बादी से बाहर निकलना होगा। यदि हम वास्तव में सावित्रीबाई फुले को श्रद्धांजलि देना चाहते हैं, तो हमें कुछ नया और सकारात्मक करने का संकल्प लेना चाहिए। युवाओं की ऊर्जा ही समाज में वास्तविक परिवर्तन का आधार बनेगी। प्रतियोगिताओं के विजेताओं का हुआ सम्मान यह कार्यक्रम सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (भारत सरकार) के अधीन बाबू जगजीवन राम नेशनल फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया गया था। इस अवसर पर हाल ही में आयोजित हुई निबंध लेखन और चित्रकला प्रतियोगिताओं के परिणामों की घोषणा की गई। मुख्य अतिथियों ने विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया और उनके कौशल की सराहना की। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां महाविद्यालय की छात्राओं ने सावित्रीबाई फुले के जीवन संघर्ष और उनके साहसी व्यक्तित्व पर आधारित कई मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। नाटकों और गीतों के माध्यम से दर्शाया गया कि किस प्रकार सावित्रीबाई ने सामाजिक कुरीतियों का सामना करते हुए नारी शिक्षा की नींव रखी। इन प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद जनसमूह को भावुक करने के साथ-साथ प्रेरित भी किया। प्राचार्या रेखा कुलश्रेष्ठ ने कार्यक्रम अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई का जीवन समर्पण की एक अद्भुत मिसाल है और विद्यार्थियों को उनके आदर्शों को अपने चरित्र में ढालना चाहिए। पवन पूनिया (उपनिदेशक, सामाजिक न्याय विभाग) ने सरकारी योजनाओं और शिक्षा के माध्यम से सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने पर बल दिया। हिंमाशु सिंह (जिला जनसंपर्क अधिकारी) ने विद्यार्थियों को सूचना और सही ज्ञान के महत्व से अवगत कराया। सामूहिक संकल्प के साथ समापन कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी गणमान्य नागरिकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने समाज में शिक्षा के प्रचार-प्रसार और समानता की भावना को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार प्रभुशरण तिवारी, शंभु पंवार, मनोज शर्मा, महेश आजाद, निर्मला शर्मा, पूनम जांगिड़, पूनम नुनिया, गुड्डी सोमरा, अभिषेक मुरारका सहित भारी संख्या में विद्यार्थी और नागरिक उपस्थित रहे।
ग्लोबल लेवल पर जारी जीयो-पॉलिटिकल टेंशन की वजह से कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति में बाधा आ रही है। इसका सीधा असर भारत में एलपीजी की उपलब्धता पर पड़ा है। स्थिति को देखते हुए भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय और प्रमुख तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने बड़ा फैसला लिया है। अब घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं और अस्पतालों जैसे अनिवार्य संस्थानों को गैस आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाएगी। इंडियन ऑयल (IOCL) की ओर से शेयर की गई जानकारी के मुताबिक मौजूदा ग्लोबल कंडिशन ने एलपीजी की सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही उथल-पुथल से देश में स्टॉक की कमी नहीं हो, इसके लिए राशनिंग और प्राथमिकता की नीति अपनाई जा रही है। रसोई गैस की सप्लाई को बिना किसी बाधा के जारी रखने का लक्ष्य नई गाइडलाइंस के अनुसार, तेल कंपनियों ने अपनी प्राथमिकता तय कर दी है। आम जनता के घरों में इस्तेमाल होने वाले रसोई गैस की सप्लाई को बिना किसी बाधा के जारी रखने का लक्ष्य रखा गया है। अनिवार्य गैर-घरेलू क्षेत्र अस्पताल, नर्सिंग होम और शैक्षणिक संस्थानों (स्कूल-कॉलेज) को भी प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है, जिससे स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं प्रभावित नहीं हो। अन्य गैर-घरेलू क्षेत्रों होटल, रेस्तरां, कारखाने आदि के लिए गैस की सप्लाई अब इतनी आसान नहीं होगी। तेल कंपनियों ने हाई लेवल कमेटी का किया गठन तेल कंपनियों ने एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है, जिसमें तीन कार्यकारी निदेशक (Executive Directors) इंडियन ऑयल से के. शैलेंद्र, भारत पेट्रोलियम से टी.वी. पांडियन एवं हिंदुस्तान पेट्रोलियम से ध्रुव कपिल को शामिल किया गया है। यदि किसी अन्य क्षेत्र को गैस की तत्काल आवश्यकता है, तो उन्हें इन अधिकारियों को सीधे ई-मेल के माध्यम से आवेदन करना होगा। यह कमेटी मेरिट और स्टॉक की उपलब्धता के आधार पर ही आपूर्ति का फैसला करेगी। राहत की बात यह है कि सरकार का पूरा जोर घरेलू बजट को बचाने पर है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि आयातित उत्पादों की कमी के कारण गैर-घरेलू सेक्टर में सप्लाई में देरी हो सकती है। बरौनी रिफाइनलरी ने अफवाहों से बचने की अपील की बरौनी रिफाइनरी ने अपील किया है कि अफवाहों से बचें। मंत्रालय ने घरों में घरेलू एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता दी है। जमाखोरी/कालाबाजारी से बचने के लिए 25 दिन की अंतर-बुकिंग अवधि शुरू की है। अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक गैर-घरेलू क्षेत्रों को आयातित एलपीजी से गैर-घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है।
भिंड जिले के गोहद कस्बे में स्थित सीएम राइज स्कूल से मध्यान्ह भोजन के राशन को प्राचार्य द्वारा बेचे जाने के संदेह में पुलिस ने ई-रिक्शा सहित अनाज को पकड़कर थाने में रखवा दिया है। मामले की शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू कर दी गई है। शिक्षा विभाग ने मंगलवार को विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से स्कूल के प्राचार्य को नोटिस थमाकर उनका पक्ष मांगा है। पड़ोसी ने वीडियो बनाकर की शिकायत मामला सोमवार दोपहर का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार गोहद स्थित सीएम राइज स्कूल से मध्यान्ह भोजन के लिए आए गेहूं की बोरियां एक ई-रिक्शा में लोड कर ले जाई जा रही थीं। उसी दौरान आसपास रहने वाले एक व्यक्ति ने इसका वीडियो बनाकर पुलिस को सूचना दे दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और ई-रिक्शा में रखी गेहूं की बोरियों को जब्त कर थाने में रखवा दिया। बताया जा रहा है कि राशन स्कूल परिसर से करीब कुछ दूरी तक ले जाया जा रहा था। शिकायतकर्ता को संदेह था कि मध्यान्ह भोजन का राशन बेचने के लिए बाहर भेजा जा रहा है। इसी संदेह के आधार पर पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए राशन और ई-रिक्शा को थाने ले जाया गया। शिक्षा विभाग ने शुरू कराई जांच घटना की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग भी सक्रिय हो गया। विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल के प्राचार्य को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में उनसे पूरे घटनाक्रम को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि राशन को किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था और इसमें किसी तरह की अनियमितता हुई है या नहीं। दैनिक भास्कर से चर्चा करते हुए गोहद ब्लॉक के विकासखंड शिक्षा अधिकारी विजय शर्मा ने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। स्कूल के प्राचार्य को नोटिस थमाकर उनका पक्ष मांगा गया है। जांच के बाद जो भी निष्कर्ष सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अब तक प्राचार्य से हुई बातचीत में उन्होंने कहा है कि स्कूल परिसर में राशन रखने की पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। इसी कारण राशन को साफ कराने और गेहूं पिसवाने के लिए स्कूल के चपरासी के साथ भेजा गया था। इसी दौरान शिकायत मिलने पर पुलिस ने कार्रवाई की। उनका कहना है कि शिकायत में राशन बेचने के लिए ले जाने का संदेह जताया गया है, लेकिन जांच के बाद ही पूरा मामला स्पष्ट हो सकेगा।
आज उच्च शिक्षा को विश्व इकोनॉमी से जोड़ना जरूरी
बड़वानी | ग्राम करी स्थित शासकीय आदर्श कॉलेज में सोमवार को सुबह 10 बजे पीएम नरेंद्र मोदी के संबोधन का वेबिनार प्राध्यापकों व विद्यार्थियों को लाइव दिखाया गया। प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित ने बताया पीएम ने व्याख्यान में युवा शक्ति को राष्ट्र शक्ति बनाने के लिए अनुशासन, संयम व ऊर्जा के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा आज उच्च शिक्षा को विश्व इकोनॉमी से जोड़ना बहुत जरूरी है। इसलिए एआई, डिजाइन, ऑटोमेशन व डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना होगा। वेबिनार में प्राध्यापकों व विद्यार्थियों से सुझाव प्राप्त कर फीडबैक भी तैयार किया। वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. बीएस मुझाल्दा ने विद्यार्थियों को सुझाव दिया कि वे वेबिनार में विषय-विशेषज्ञों दी गई जानकारी को नोट्स के रूप में संकलित करें और यह विचार करें कि वे अपने क्षेत्र में क्या बेहतर कर सकते हैं।
शिकायत के बाद शिक्षा विभाग के दो कर्मचारियों की वेतन वृद्धि रोकी गई
बिलासपुर | विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिल्हा में पदस्थ दो कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत मिलने पर विभाग ने विभागीय कार्रवाई की है। चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल को रोकने से संबंधित बातचीत का एक ऑडियो वायरल होने के बाद यह मामला सामने आया था। इस मामले में सहायक ग्रेड-2 अनुपम शुक्ला को पहले निलंबित किया गया था। उनकी एक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोक दी गई है। डीईओ विजय टांडे ने बताया कि निलंबन समाप्त करते हुए अनुपम शुक्ला को शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय केन्दा, विकासखंड कोटा में पदस्थ किया गया है। इसी मामले में सहायक ग्रेड-3 शिल्पा शर्मा के खिलाफ भी शिकायत मिली थी। जांच में उनका जवाब भी संतोषजनक नहीं पाया गया। विभाग ने उनकी भी एक वेतन वृद्धि प्रभाव से रोक दी है। निलंबन से बहाल करते हुए उन्हें हाई स्कूल सिंधी कॉलोनी जरहाभाठा में पदस्थ किया गया है। वहीं संकुल समन्वयक साधेलाल पटेल की जांच जारी है।
शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश के लिए शिक्षा विभाग आयु सीमा में छूट देना भूल गया। विभाग को पहली कक्षा में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को आयु सीमा में 4 महीने की छूट देनी थी और 31 जुलाई तक आयु सीमा में आ रहे विद्यार्थियों से आवेदन लेने थे, लेकिन विभाग छूट देना भूल गया। पहली कक्षा के लिए 6 से 7 साल तक का विद्यार्थी ही आवेदन कर सकता है। आरटीई गाइडलाइन में 31 मार्च को आधार मानकर आयुसीमा की गणना की जा रही है, जबकि विभाग को 4 महीने की छूट देते हुए 31 जुलाई तक आयु सीमा में आ रहे विद्यार्थियों से भी आवेदन लेने थे। इस गलती से करीब 50 हजार बच्चों के आवेदन से वंचित होने की संभावना है। शिक्षा विभाग की 1 दिसंबर को तैयारी बैठक हुई थी। इसमें शिक्षा सचिव, राज्य परियोजना निदेशक, शिक्षा निदेशालय बीकानेर सहित आरटीई से जुड़े अधिकारी और निजी स्कूल संचालक मौजूद थे। बैठक में पहली कक्षा में प्रवेश के लिए आयु सीमा में शिथिलता देने का निर्णय हुआ। कार्यवाही विवरण में भी उल्लेख है। निदेशालय ने आरटीई गाइडलाइन जारी की तो प्रवेश के लिए आयु सीमा में छूट ही नहीं दी। बच्चे का जन्म 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 के मध्य (दोनों तिथियों को शामिल करते हुए) हुआ हो तो वह पहली कक्षा में आवेदन का पात्र है। पिछले साल पहली कक्षा के लिए आए थे 1.75 लाख आवेदन पिछले साल शिक्षा विभाग ने केवल दो कक्षाओं पीपी 3 प्लस और पहली कक्षा में प्रवेश के लिए आवेदन मांगे थे। तब आयु सीमा की गणना 31 जुलाई 2025 के आधार पर की गई थी। पिछले साल पहली कक्षा में प्रवेश के लिए 1.75 लाख आवेदन हुए थे। इस साल आयु सीमा में छूट नहीं मिलने के कारण अभी तक पहली कक्षा में प्रवेश के लिए 1.25 लाख आवेदन ही जमा हुए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर आयु सीमा में छूट मिलने पर करीब 50 हजार विद्यार्थी और आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि आज, अब तक 5.77 लाख आवेदन निदेशालय ने 20 फरवरी से आरटीई में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया प्रारंभ की थी। आवेदन की अंतिम तिथि 10 मार्च है। सोमवार शाम तक करीब 5.77 लाख विद्यार्थी आवेदन कर चुके थे। प्रवेश का वरियता क्रम तय करने के लिए 12 मार्च को लाटरी निकाली जाएगी। इस साल विभाग ने चार कक्षाओं, पीपी 3 प्लस, पीपी 4 प्लस, पीपी 5 प्लस और पहली कक्षा में प्रवेश के लिए आवेदन मांगे है।
प्रदेश में संचालित महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में प्रवेश की प्रक्रिया 12वीं बोर्ड परीक्षा के बाद शुरू की जाएगी। 12वीं बोर्ड की परीक्षा 11 मार्च को खत्म होगी। नया शिक्षा सत्र 2026 -27 एक अप्रैल से शुरू होने के कारण इस बार महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में भी प्रवेश की प्रक्रिया पिछले सत्र के मुकाबले दो माह पहले शुरू की जा रही है। प्रदेश के 3737 महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में प्रवेश के लिए आवेदन की प्रक्रिया 14 मार्च से शुरू की जाएगी। अभ्यर्थी 23 मार्च तक आवेदन कर सकेंगे। निर्धारित सीटों से अधिक आवेदन आने पर 25 मार्च को लॉटरी के जरिए अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। प्रदेश में संचालित 3737 स्कूलों में से अनेक में 50% से अधिक सीटें रिक्त हैं। इंग्लिश मीडियम स्कूलों में प्रवेश के संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सोमवार को टाइम फ्रेम घोषित कर दिया है। इंग्लिश स्कूलों में प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों को आवेदन करने के लिए 10 दिन का समय दिया गया है। दरअसल, राज्य सरकार ने निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश और विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूलों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन स्कूलों में नया शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से शुरू हो रहा है। लेकिन बोर्ड परीक्षा और होम एग्जाम होने के कारण महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में प्रवेश की प्रक्रिया 11 मार्च के बाद शुरू की जाएगी। यह रहेगा प्रवेश का शेड्यूल 3737 इंग्लिश मीडियम स्कूलों 6.81 लाख अभ्यर्थी अध्ययनरत : प्रदेश के 3737 महात्मा गांधी स्कूलों में लगभग 6.81 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। लगभग 50% से अधिक रिक्त सीटों को भरने के लिए 14 मार्च से आवेदन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पिछले साल शिक्षा निदेशालय की ओर से इन स्कूलों में प्रवेश के लिए आवेदन की प्रक्रिया 7 मई से शुरू हुई थी। इस बार आवेदन मार्च में ही लिए जाएंगे। बीकानेर जिले में 171 महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल संचालित किया जा रहा है। शहरी क्षेत्र के स्कूलों को छोड़कर ब्लॉक और ग्रामीण क्षेत्र में संचालित किए जा रहे महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में अनेक सीटें रिक्त हैं। बीकानेर में सबसे अधिक नामांकन वर्तमान में मुरलीधर व्यास नगर में स्थित महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल में 679 विद्यार्थियों का है। जिले के ब्लॉकों में कई स्कूल ऐसे भी संचालित हैं जहां 50 से कम नामांकन है।
विधानसभा में सोमवार को महात्मा गांधी स्कूलों में पद सृजन और डूंगरपुर में पुलिस के रवैये को लेकर सदन में कांग्रेस व भाजपा विधायकों के बीच नोकझोंक हुई। भाजपा व कांग्रेस विधायकों ने एक दूसरे पर आरोप -प्रत्यारोप लगाए। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने यहां तक कह दिया कि जीरो बच्चों पर भी विद्यालय चलते हैं क्या? दस बच्चों पर भी विद्यालय चलते हैं क्या? पूर्व सरकार के समय भांग खा कर विद्यालय खोल दिए। डोटासरा ने भांग खाई हुई थी। इस पर पलटवार करते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि मंत्री जिस प्रकार से बात कर रहे हैं भांग खा कर...। आप प्रदेश के शिक्षा मंत्री हो, जवाब तो आप भांग खाकर दे रहे हो। इस पर दिलावर और जूली व डोटासरा के बीच बहुत देर तक तीखी नोकझोंक हुई। प्रश्नकाल के दौरान पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान खोले गए अंग्रेजी माध्यम और स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूलों में रिक्त पदों को लेकर भी सदन में बहस हुई। भाजपा विधायक बालकनाथ के प्रश्न के जवाब में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि पिछली सरकार ने 3,737 स्कूलों को महात्मा गांधी सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूल में बदल दिया, लेकिन एक भी नया शिक्षक पद सृजित नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति की गई जो खुद अंग्रेजी माध्यम से पढ़े हुए नहीं थे। वहीं जूली ने कहा कि 10–20 छात्रों वाले स्कूलों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार है और सरकार पर ड्रॉपआउट बढ़ने का आरोप लगाया। इस पर दिलावर ने जवाब देते हुए कहा कि जब डोटासरा शिक्षा मंत्री थे, तब उन्होंने लक्ष्मणगढ़ में ही 203 स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में बदल दिया, लेकिन उनके लिए पद सृजित नहीं किए। वर्तमान सरकार अब पदों को स्वीकृत कर योग्य शिक्षकों की नियुक्ति कर स्थिति सुधार रही है। 140 स्थायी और 700 अस्थायी कोच भर्ती होंगे खेल विभाग में 140 स्थायी और 700 अस्थायी कोच की भर्ती होगी। निर्दलीय विधायक युनूस खान के सवाल के जवाब में खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि खेल विभाग ने 2012 के बाद पहली बार भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब 140 स्थाई कोच की भर्ती के लिए वित्त विभाग से मंजूरी मिल चुकी है। कर्मचारी चयन बोर्ड आगे कार्यवाही कर रहा है। अब 700 अस्थाई कोच भी लेंगे, जिससे प्रदेश के ज्यादातर खेल प्रशिक्षण केंद्रों पर कोच लग जाएंगे।
समानता और शिक्षा की क्रांतिकारी मशाल: सावित्रीबाई फुले
10मार्च सावित्रीबाई फुले महापरिनिर्वाण दिवस भारतीय समाज में जब भी शिक्षा,समानता और सामाजिक न्याय की बात उठती है,तो एक नाम इतिहास के पन्नों से निकलकर हमारे सामने खड़ा हो जाता है—सावित्रीबाई फुले।10मार्च को उनका महापरिनिर्वाण दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है,बल्कि यह दिन उस सामाजिक चेतना को याद करने का अवसर है,जिसने सदियों ... Read more
आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं
महिला दिवस पर विशेष:- अजमेर राजस्थान आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं:- देश-प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध ओर इन अपराधों में पिछले वर्षो में अपराध की दर तीव्र ही हुई है ओर “भारत मे अपराध ” नामक रिपोर्ट बताती है ... Read more
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समर्थन से भारत शिक्षा के सभी स्तरों पर एआई शिक्षण और रिसर्च को एकीकृत करके खुद को एक वैश्विक एआई महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है
शिक्षा को हिंसक नहीं, संवेदनशील बनाना होगा
देश में इन दिनों बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं और सामान्य परीक्षाएं भी शुरू होने वाली हैं। हर साल की तरह इस बार भी परीक्षा का मौसम केवल प्रश्नपत्रों और परिणामों का नहीं, बल्कि मानसिक दबाव, चिंता और असुरक्षा का मौसम बनता जा रहा है। छात्रों के चेहरों पर भविष्य की चिंता साफ पढ़ी जा ... Read more
गला घोटिया शिक्षा का विश्वगुरु बन चुका देश
पिछले 12 सालों से देश को विश्वगुरु बनाने का जो झूठ फैलाया जा रहा था, अब उसका गुबार ऐसा फूटा है कि दुनिया भर में शर्मिंदगी का सबब बन गया है।
गुरुवार को ही क्यों आरंभ होती हैं शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं?
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं गुरुवार 12 फरवरी 2026 से राज्यभर में आरंभ हो गईं। क्या आपको पता है कि सालों से बोर्ड की परीक्षाएं हर बार गुरुवार से ही क्यों आरंभ होती हैं? हालांकि परीक्षाएँ अक्सर गुरुवार से शुरू होने के पीछे कोई एक आधिकारिक, लिखित “धार्मिक नियम” नहीं है, बल्कि यह परंपरा, ... Read more
शिक्षा में समता या नई असमानताः यूजीसी नियमों पर न्यायिक विराम
नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर लागू किए गए नए नियमों ने देश के शैक्षिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बार फिर गहरी हलचल पैदा कर दी है। जिस नीति को ‘समता’, ‘समान अवसर’ और ‘समावेशी शिक्षा’ की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया ... Read more
शिक्षा खौफनाक नहीं, बल्कि स्नेह एवं हौसलों का माध्यम बने
जीवन को दिशा देने वाली शिक्षा यदि भय, हिंसा और दमन का पर्याय बन जाए तो वह सभ्यता की सबसे बड़ी विडंबना कही जाएगी। हाल के वर्षों में पढ़ाई के नाम पर बच्चों पर बढ़ते दबाव, घर और स्कूल में हिंसक व्यवहार तथा प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ ने शिक्षा की आत्मा पर गहरा आघात किया ... Read more
विश्व शिक्षा दिवसः 24 जनवरी 2026 ? शिक्षा रोजगार का टिकट नहीं, जीवन का दर्शन बने
विश्व शिक्षा दिवस कोरा उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है, यह सोचने का क्षण कि शिक्षा क्या है, किसके लिए है और किस दिशा में समाज को ले जा रही है। भारत इस संदर्भ में केवल एक देश नहीं, बल्कि एक जीवित सभ्यता है, जिसने शिक्षा को कभी भी मात्र रोजगार या सूचना का ... Read more
सावित्रीबाई फुलेः शिक्षा से सामाजिक क्रांति तक
-बाबूलाल नागा 3 जनवरी भारतीय सामाजिक इतिहास का वह महत्वपूर्ण दिन है, जो शिक्षा, समानता और महिला सशक्तिकरण के संघर्ष की प्रतीक सावित्रीबाई फुले की जयंती के रूप में मनाया जाता है। सावित्रीबाई फुले केवल पहली महिला शिक्षिका ही नहीं थीं, बल्कि वे उस सामाजिक क्रांति की धुरी थीं, जिसने सदियों से जकड़ी रूढ़ियों, जातिवाद ... Read more
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
NEET UG रिजल्ट को लेकर अभी भी जारी है गुस्सा, छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के पास किया विरोध प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए छात्रों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। आइए जानते हैं, क्या है पूरा म
बेसिक शिक्षा : दो महीने बाद भी 1.38 लाख छात्रों का डेटा नहीं हुआ अपडेट
बेसिक शिक्षा विभाग के यू डायस पोर्टल पर डेटा अपडेट करने का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। हाल ये है कि दो महीने में महज 1.38 लाख छात्रों डेटा भी अपडेट नहीं हुआ। विभाग ने अब 5 जून तक इसे पूरा करने क
स्कूलों में कैसे पढ़ा रहे हैं शिक्षक, वीडियो में देखेगा शिक्षा विभाग, होगी रिकॉर्डिंग
शिक्षा विभाग वीडियो के जरिए देखेगा कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षक छात्रों को कैसे पढ़ाते हैं। बता दें. छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षकों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। आइए जानते हैं विस्तार से।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति : यूपी बोर्ड ने दिए निर्देश, एनईपी लागू करने को स्कूल बनाएंगे प्लान
यूपी बोर्ड से जुड़े 27 हजार से अधिक स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू करने के लिए स्कूल स्तर पर योजना बनाई जाएगी। एनईपी 2020 के विषय में विद्यालयों में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
बॉलीवुड का ये सुपरस्टार युवाओं को IAS बनाने के लिए मुफ्त में देगा शिक्षा, योजना से अबतक जुड़ चुके है7000 युवा
राम बनने के लिएधनुष-बाण चलाने की शिक्षा ले रहे है Ranbir Kapoor, एक्टर केआर्चरी ट्रेनर ने शेयर की तस्वीरें

