लखीसराय के पुरानी बाजार स्थित मध्य विद्यालय महिला विद्या मंदिर परिसर में संचालित स्थापना शाखा में सोमवार को विवाद और मारपीट की घटना हुई। कंप्यूटर ऑपरेटर अमित कुमार और चानन प्रखंड के नवसृजित प्राथमिक विद्यालय रायकुंडी के शिक्षक कैलाश कुमार के बीच कार्यालयी कार्य को लेकर शुरू हुआ विवाद गाली-गलौज और मारपीट में बदल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना उस समय हुई जब कंप्यूटर ऑपरेटर अमित कुमार अपना कार्यालयी कार्य समाप्त कर भोजन की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान शिक्षक कैलाश कुमार किसी काम से स्थापना शाखा पहुंचे। बातचीत के दौरान दोनों के बीच किसी मुद्दे पर कहासुनी शुरू हो गई, जो जल्द ही हाथापाई में बदल गई। मारपीट की घटना से कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। कार्यालय में मौजूद अन्य कर्मियों और लोगों ने हस्तक्षेप कर दोनों को अलग किया और स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। दोनों पक्षों को नगर थाना ले जाकर पूछताछ की गईघटना की सूचना तत्काल डायल-112 पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद दोनों पक्षों को नगर थाना ले जाकर पूछताछ की गई। स्थापना शाखा के प्रधान लिपिक आशुतोष कुमार ने भी मारपीट की घटना की पुष्टि की है। नगर थाना अध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि दोनों व्यक्तियों की चिकित्सीय जांच और शराब जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में शिक्षक कैलाश कुमार के शराब के नशे में होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगीपुलिस कंप्यूटर ऑपरेटर अमित कुमार द्वारा दिए गए आवेदन के आधार पर लगाए गए आरोपों की भी जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद शिक्षा विभाग के कार्यालयों में भी इस मामले की चर्चा बनी हुई है।
प्रदेशभर के विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। शिक्षा विभाग ने गर्मी की छुट्टियां बढ़ाने का आदेश जारी कर दिया है। अब राज्य के सरकारी और निजी स्कूलों में 28 जून तक अवकाश रहेगा और स्कूल 29 जून से पुनः संचालित होंगे। इससे पहले शिक्षा विभाग ने 20 जून तक ग्रीष्मावकाश घोषित किया था। 21 जून को रविवार होने के कारण स्कूल 22 जून से खुलने थे, लेकिन लगातार पड़ रही गर्मी और शिक्षक संगठनों की मांग के बाद सरकार ने अवकाश अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया है। 43 दिन का होगा ग्रीष्मावकाश नए आदेश के अनुसार इस वर्ष स्कूलों में ग्रीष्मावकाश की कुल अवधि बढ़कर 43 दिन हो गई है। शिक्षा विभाग ने इसके लिए आधिकारिक आदेश जारी कर सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। शिक्षक संगठनों की मांग लाई रंग हाल ही में जयपुर में शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर गर्मी की छुट्टियां बढ़ाने की मांग रखी थी। उस दौरान शिक्षा मंत्री ने सकारात्मक आश्वासन दिया था। इसके बाद शिक्षा विभाग स्तर पर प्रस्ताव तैयार किया गया और शासन सचिव की स्वीकृति के बाद आदेश जारी कर दिया गया। संस्था प्रधानों को भी राहत आदेश में संस्था प्रधानों के लिए अधिकृत अवकाश को लेकर भी संशोधन किया गया है। पूर्व व्यवस्था में एक दिन का अधिकृत अवकाश निर्धारित था, जिसे बढ़ाकर पुनः दो दिन कर दिया गया है। भीषण गर्मी बनी वजह राजस्थान में इस बार मई और जून के दौरान कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया था। गर्मी और लू के कारण विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अवकाश बढ़ाने का फैसला लिया है। स्कूल खुलने के बाद शुरू होगी नियमित पढ़ाई अब सभी सरकारी और निजी विद्यालय 29 जून से नियमित रूप से संचालित होंगे। इसके साथ ही नए शैक्षणिक सत्र की गतिविधियां भी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शुरू की जाएंगी।
भिवानी स्थित हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड कार्यालय पर सोमवार को हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (HTET) के अभ्यर्थियों ने बॉयोमैट्रिक मिसमैच की समस्या को लेकर घेराव किया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि वे कई बार बोर्ड कार्यालय के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन उनकी बॉयोमैट्रिक सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही। इसके कारण करीब 3 से 4 हजार अभ्यर्थियों का परीक्षा परिणाम रुका हुआ है। बोर्ड ने 8 और 9 जून को बॉयोमैट्रिक सत्यापन के लिए बुलाया था, लेकिन सोमवार को भी कई अभ्यर्थियों की बॉयोमैट्रिक मिसमैच रही। प्रदर्शन में हरियाणा के अलावा पंजाब, यूपी, गुजरात और चंडीगढ़ आदि प्रदेशों से आए अभ्यर्थी शामिल हुए। मौके पर पुलिस बल तैनात रहा। गुजरात से पहुंची अभ्यार्थीगुजरात से पहुंची अभ्यार्थी सीमा ने कहा कि पहले जब लिस्ट लगी थी, तब भी वे आई थी, अब भी बॉयोमैट्रिक के लिए आई हैं। उस समय भी फिंगर प्रिंट नहीं हो पाए। आज भी फिंगर प्रिंट नहीं आ रहा। 2 बच्चों के साथ यहां पहुंची हैं, जो परेशान हो रखे हैं इतनी गर्मी में। अधिकारी तो अंदर आराम से बैठे हैं, लेकिन हमें परेशानी हो रही है, उसका क्या। या तो हमें बुलाया क्यों, अगर बुलाया तो यह नहीं सोचा कि जिनकी बॉयोमैट्रिक नहीं होगी, उनका समाधान क्या है। इतने बच्चे बुला लिए और अभी भी कोई समाधान नहीं कर रहे। इतनी दूर से कैसे पहुंचे। उन्हें यहां पहुंचने में दो दिन का समय लगता है। वे 6 जून को ट्रेन में बैठकर हरियाणा आए और 7 जून को पहुंचे। बच्चे छोटे होने के कारण रिजर्वेशन करवानी पड़ती है। यूपी से पहुंचा बिहार का शिक्षकउत्तर प्रदेश के हाथरस जिला निवासी अभ्यार्थी लखन सिंह ने बताया कि वह फिलहाल बिहार में टीचर की नौकरी करता है। वह अपने जिले से काफी दूर है, इसलिए चाहता है कि हरियाणा में नौकरी मिल जाए। जिसके बाद उसने एचटेट की परीक्षा 2025 में दी। वहां पर बॉयोमैट्रिक ली, लेकिन अब वैरिफिकेशन के लिए दोबारा करवाते हैं। कुछ महीने के बाद वैरिफिकेशन के लिए बुलाया, लेकिन उस समय बॉयोमैट्रिक वैरिफिकेशन नहीं हुआ। नवंबर के महीने में दोबारा बुलाया तो वह यहां शिक्षा बोर्ड में आया, लेकिन बॉयोमैट्रिक नहीं हुआ, लेकिन उस समय एप्लीकेशन लिखवाई थी। 5-6 हजार रुपए किराया लगाकर पहुंचालखन सिंह ने कहा कि अब फिर से बॉयोमैट्रिक के लिए मैसेज आया। वे अब शिक्षा बोर्ड में पहुंचे और आज भी नहीं हुई। अब शिक्षा बोर्ड के अधिकारी व कर्मचारी कुछ भी स्पष्ट नहीं बता रहे। उन्होंने कहा कि जब भी वे आते हैं तो उन्हें छुट्टी भी लेनी पड़ती है और आने-जाने का करीब 5-6 हजार रुपए किराया भी लग जाता है। उनका समाधान किया जाए। बॉयोमैट्रिक नहीं होने से रिजल्ट अटकाजिला कैथल निवासी अजय सिंह ने बताया कि एचटेट-2024 का नवंबर में रिजल्ट जारी किया गया था। जिसमें करीब 3-4 हजार अभ्यार्थी रह गए थे, जो बिना बॉयोमैट्रिक के थे। उनका रिजल्ट जारी नहीं हुआ था। एक सप्ताह का समय पहले दिया गया था। बॉयोमैट्रिक होने के बाद रिजल्ट जारी कर दिया था, जिनमें से करीब 3 हजार बच्चे बचे थे। उनको 6 महीने के बाद आज समय दिया गया है कि 8 व 9 जून को अंतिम बार है। इस दौरान काफी अभ्यार्थियों की बॉयोमैट्रिक नहीं हुई। अगले एचटेट की तैयारी करे या बोर्ड के चक्कर काटेंअजय सिंह ने कहा कि इन अभ्यार्थियों की बॉयोमैट्रिक या तो आधार कार्ड से डाटा उठाकर करवा लें। या फिर जो परीक्षा के दौरान वीडियोग्राफी हुई थी, उससे करवा लें। या फिर हस्ताक्षर, आंख या फिंगर प्रिंट से उठाएं। किसी भी तरीके से समाधान किया जाए। समाधान नहीं होने तक वे उठने वाले नहीं हैं। यह प्रशासन का फेलियर है। अब अगले एचटेट की डेट दे दी है, अब अभ्यार्थी उसकी तैयारी करें या फिर बोर्ड में धक्के खाएं। जब तक रिजल्ट घोषित नहीं होगा, तब तक शांतिपूर्वक विरोध जारी रहेगा। सचिव बोले- कर रहे समाधानहरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के सचिव मुनीश शर्मा ने कहा कि कुछ अभ्यार्थियों का बॉयोमैट्रिक डाटा कैप्चर नहीं हुआ था। काफी जगह बारिश थी, जिससे बॉयोमैट्रिक के लिए अंगूठे के निशान लिए थे, वे मैच नहीं हो रहे। इसके अलावा हमारे पास दूसरा तरिका भी है। हमारे पास वीडियो रिकॉर्ड है, जिससे हम अभ्यार्थी फेस देखकर फोटो से मिलान करके रिजल्ट जारी कर सकते हैं। यह अंतिम मौका शिक्षा बोर्ड के खर्चे पर दिया गया था। पहले भी 2 बाद मौका दिया गया है। इसके बाद कोई दिक्कत है और इन डेट पर उपस्थित रहा है तो उससे फाइन चार्ज नहीं करेंगे। लेकिन कोई कोई नहीं आया तो उसको 10 हजार रुपए फीस ली जाएगी। वह पहले भी ली जाती है। अब तक 2 मौके दिए जाते रहे हैं, लेकिन अबकी बार तीन मौके दिए गए हैं। जिनका मैच हो जाएगा उनका रिजल्ट लाइव हो जाएगा। जिनका नहीं हुआ, उनको फॉरेंसिक लैब में भेजा जाएगा। जिस एजेंसी ने पेपर करवाया था, उसको शिक्षा बोर्ड द्वारा भुगतान नहीं किया गया।
समर वेकेशन के बाद प्रदेश के स्कूल 16 जून से फिर से खुलने जा रहे हैं, लेकिन निजी स्कूलों के सामने पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने इस मामले में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर निजी स्कूलों के लिए समय पर किताबें उपलब्ध कराने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि पाठ्यपुस्तक निगम ने सरकारी स्कूलों में किताबों की आपूर्ति शुरू कर दी है, लेकिन निजी स्कूलों के लिए अब तक कोई स्पष्ट शेड्यूल जारी नहीं किया गया है। ऐसे में नए सत्र की शुरुआत से पहले विद्यार्थियों को किताबें उपलब्ध कराना मुश्किल हो सकता है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि स्कूल शिक्षा विभाग निजी स्कूलों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपना रहा है। संकुल स्तर पर ही पहुंचाई जा रही किताबें उनके मुताबिक सरकारी स्कूलों को संकुल स्तर पर ही किताबें पहुंचाई जा रही हैं। जबकि निजी स्कूलों को पाठ्यपुस्तक निगम के डिपो से स्वयं किताबें प्राप्त करनी पड़ेंगी। पत्र में कहा गया है कि प्रदेश के कई निजी स्कूलों को किताबें लेने के लिए 150 से 200 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे समय और परिवहन लागत दोनों बढ़ेंगी। किताबें पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण साथ ही स्कूल खुलने से पहले सभी विद्यार्थियों तक किताबें पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण होगा। एसोसिएशन ने शिक्षा सचिव से मांग की है कि निजी स्कूलों के लिए भी जल्द पुस्तक वितरण का शेड्यूल जारी किया जाए और किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि 16 जून से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
बालाघाट के कुम्हारी गांव में ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए एक निःशुल्क आधुनिक लाइब्रेरी का शुभारंभ किया गया है। यह पहल जीएसटी कमिश्नर भोपाल लोकेश लिल्हारे ने अपनी माताश्री शांति बाई लिल्हारे की चौथी पुण्यतिथि पर की। इसका उद्देश्य ग्रामीण अंचल के छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद करना है। रविवार देर शाम बालाघाट मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत कुम्हारी में इस लाइब्रेरी का उद्घाटन हुआ। कार्यक्रम में बालाघाट रेंज के आईजी ललित कुमार शाक्यवार, जीएसटी कमिश्नर लोकेश लिल्हारे और एसपी आदित्य मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर अतिथियों ने परिसर में भगवान बिरसा मुंडा और गौ-माता की प्रतिमाओं का अनावरण भी किया। साथ ही, क्षेत्र के कक्षा 10वीं और 12वीं के प्रतिभावान छात्रों को शील्ड और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। युवाओं का मनोबल बढ़ता है आईजी ललित कुमार शाक्यवार ने कमिश्नर लिल्हारे के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जब ग्रामीण अंचल से कोई अधिकारी बनता है, तो वह पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल देता है। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण युवाओं का मनोबल बढ़ता है और देश का नाम रोशन करने की ललक पैदा होती है। समाज की तस्वीर बदलेगी एसपी आदित्य मिश्रा ने शिक्षा और खेलकूद के क्षेत्र में इस पहल को अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि जिस दिन लोग अन्य चीजों के बजाय लाइब्रेरी की मांग करने लगेंगे, उसी दिन समाज की तस्वीर बदल जाएगी। उन्होंने छात्रों से इस सुविधा का लाभ उठाकर अपने लक्ष्य हासिल करने का आग्रह किया। जीएसटी कमिश्नर लोकेश लिल्हारे ने कार्यक्रम और खेलकूद के क्षेत्र में चलाए जा रहे निःशुल्क अभियानों की जानकारी दी। उन्होंने मीडिया से चर्चा में कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, उन्हें केवल सही मार्गदर्शन और आत्मबल देने की आवश्यकता है। उन्होंने संकल्प लिया कि उनकी टीम भविष्य में भी इस दिशा में उत्साह के साथ कार्य करती रहेगी।
संस्कृत विश्वविद्यालय प्रशासन ने आचार्य और शिक्षाशास्त्री पाठ्यक्रमों की परीक्षाओं की तिथि घोषित कर दी है। विश्वविद्यालय मुख्यालय में 23 जून से 3 जुलाई तक परीक्षा आयोजित की जाएगी। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) डॉ. निशिकांत ने बताया कि आचार्य द्वितीय सेमेस्टर (सत्र 2024-26), शिक्षा शास्त्री प्रथम वर्ष (सत्र 2025-27) और शिक्षा शास्त्री द्वितीय वर्ष (सत्र 2024-26) की परीक्षा विश्वविद्यालय मुख्यालय स्थित शिक्षा शास्त्र विभाग में होगी। परीक्षा दो पालियों में होगी। पहली पाली सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। आचार्य द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा 23 जून से होगी उन्होंने बताया कि आचार्य द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा 23 जून से शुरू होगी। 23 जून को पहली पाली में सीसी-05 और दूसरी पाली में सीसी-06, 24 जून को सीसी-07, सीसी-08 और 25 जून को पहली पाली में सीसी-09 और दूसरी पाली में एईसीसी-02 पत्र की परीक्षा ली जाएगी। वहीं, शिक्षा शास्त्री प्रथम और द्वितीय वर्ष की परीक्षा 28 जून से 03 जुलाई तक होगी। 28 जून को पहली पाली में प्रथम वर्ष के प्रथम पत्र और दूसरी पाली में द्वितीय वर्ष के प्रथम पत्र की परीक्षा होगी। इसके बाद 29 जून से 02 जुलाई तक दोनों वर्षों के शेष पत्रों की परीक्षा होगी। 03 जुलाई को प्रथम पाली में प्रथम वर्ष के षष्ठ पत्र और दूसरी पाली में सप्तम पत्र की परीक्षा संपन्न होगी। दोबारा एग्जाम नहीं होगा परीक्षा नियंत्रक डॉ. निहार रंजन सिन्हा ने परीक्षा कार्यक्रम जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी परिस्थिति में पुनर्परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि लंबित सत्रों को नियमित करने के लिए लगातार परीक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र समय पर संचालित हो सके।
शिक्षा का उत्सव:सफलता मार्च... ट्रैक्टर ट्रॉली में बैठे मेधावी, फूल बरसाता चला पूरा गांव
उज्जैन जिले के ताजपुर की गलियों में रविवार शाम बैंड-बाजे गूंज रहे थे। घरों के बाहर रंगोलियां सजी थीं, रास्तों पर तोरण-द्वार लगे थे और लोग उत्सव के कपड़ों में सड़कों पर उमड़ पड़े थे। देखने वालों को लगा मानो गांव में कई शादियां एक साथ हो रही हों, लेकिन यहां कोई दूल्हा घोड़ी पर नहीं था। इस बार सम्मान की सवारी पर बैठे थे गांव के 38 मेधावी छात्र-छात्राएं और उनके माता-पिता। इस गांव ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों के सम्मान में ‘सफलता मार्च’ निकाला। इमली चौराहा से शुरू हुई यात्रा श्री वैष्णव गार्डन तक पहुंची। पूरे रास्ते गांव बाराती बना रहा। जगह-जगह फूलों की बारिश हुई, लस्सी व स्वल्पाहार के स्टॉल लगे। गांव ने यह संदेश दिया कि किसी बच्चे की सफलता केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि परिवार और समाज के सामूहिक प्रयास का परिणाम होती है। ताजपुर पहले से ही अपनी अनूठी ‘बेटी की छांव’ पहल के लिए जाना जाता है। यहां बेटियों की शादी के समय उनसे एक पौधा लगवाया जाता है। समाज को लौटाने की दी सीखकार्यक्रम में गांव की बेटी एवं लोक निर्माण विभाग की एसडीओ नेहा राठौर और प्रधान आरक्षक सुनील पाटीदार ने बच्चों को सम्मानित किया। दोनों ने विद्यार्थियों से अपनी जड़ों से जुड़े रहने और समाज को लौटाने का संदेश दिया। पूरा गांव एक परिवार यह पहल ऐसे समय में आई है, जब शिक्षा को अक्सर केवल अंकों और प्रतिस्पर्धा के नजरिए से देखा जाता है। गांव ने दिखाया कि जब पूरा समाज बच्चों की मेहनत को सम्मान देता है, तब शिक्षा सामूहिक गर्व और प्रेरणा का उत्सव बन जाती है। टेंट-पानी मुफ्त, चंदा इतना आया कि मना करना पड़ापूरा आयोजन जनसहयोग से हुआ। टेंट व्यवसायियों ने निःशुल्क टेंट लगाए, पानी व्यवसायियों ने ठंडे पानी की व्यवस्था संभाली और ग्रामीणों ने आर्थिक सहयोग के लिए बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। स्थिति यह रही कि पर्याप्त राशि जुट जाने के बाद आयोजकों को लोगों से अतिरिक्त सहयोग नहीं लेने की अपील करनी पड़ी। गांव के लोगों ने पारंपरिक तरीके से घर-घर जाकर निमंत्रण दिया। गलियों को ध्वज और तोरण से सजाया गया। आयोजन को डिजिटल मंचों से भी जोड़ा गया। सफलता मार्च का फेसबुक और यूट्यूब पर लाइव प्रसारण हुआ, जिसे गांव से बाहर रहने वाले लोगों ने भी देखा।
शिक्षाविद गर्ग ने राष्ट्रीय मंच पर उठाई श्रमिकों की आवाज
भास्कर न्यूज | कवर्धा विश्व पर्यावरण दिवस पर भोपाल के गांधी भवन में व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ। कार्यक्रम में कबीरधाम की शिक्षाविद मालती गर्ग ने पर्यावरण संरक्षण और श्रमिकों के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनके सुझावों को सम्मेलन की रणनीतिक कार्ययोजना में शामिल किया गया, जिससे कबीरधाम की भागीदारी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बनी। सम्मेलन में कबीरधाम जिले का प्रतिनिधित्व शिक्षाविद मालती गर्ग और सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रकांत यादव ने किया। मालती गर्ग ने कहा कि पर्यावरणीय असंतुलन और असुरक्षित कार्यस्थलों का सबसे अधिक प्रभाव ग्रामीण और श्रमिक वर्ग पर पड़ रहा है। उन्होंने श्रमिकों के स्वास्थ्य अधिकार को मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण को विकास नीति का अनिवार्य हिस्सा बनाने की आवश्यकता बताई। 12 राज्यों से जुटे विशेषज्ञ: जन स्वास्थ्य अभियान (जेएसए) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में 12 राज्यों के विशेषज्ञ जुटे थे। इनमें छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, बिहार, जम्मू-कश्मीर, असम, ओडिशा, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और मणिपुर सहित अन्य शामिल है। जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य पर चर्चा की गई सम्मेलन के पर्यावरणीय सत्र में खनन, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से उत्पन्न स्वास्थ्य संकट पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि वायु प्रदूषण, जल संकट और जैव विविधता के क्षरण का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। साथ ही पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय समुदायों द्वारा संरक्षित प्राकृतिक संसाधनों को टिकाऊ विकास का आधार बनाने पर भी जोर दिया गया। सम्मेलन में 12 राज्यों से पहुंचे विशेषज्ञों ने भविष्य की रणनीति बनाई।
टूट रही जाति की जंजीर...:शिक्षा, शहरीकरण और नई सोच से बढ़ रहे अंतरजातीय विवाह
छत्तीसगढ़ में विवाह को लेकर सामाजिक बदलाव की नई तस्वीर उभर रही है। विवाह के सबसे बड़ा आधार ‘जाति’ की जंजीर धीरे-धीरे टूटने लगी है। अब युवा शिक्षा, रोजगार और वैचारिक सामंजस्य को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी का असर अंतर्जातीय विवाहों के बढ़ते आंकड़ों में दिख रहा है। पिछले छह वर्ष में प्रदेश में 4490 ऐसे विवाह हुए, जिनमें पति या पत्नी में से एक अनुसूचित जाति और दूसरा सामान्य या अन्य पिछड़ा वर्ग से है। ऐसे विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने अब तक 112.57 करोड़ रुपए की सहायता राशि दी है। अनुसूचित जाति वर्ग के युवक या युवती से विवाह करने वाले जोड़े को 2.50 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षित और आर्थिक रूप से सक्षम दंपती भी हैं, जो अंतरजातीय विवाह के बाद प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन नहीं करते। नतीजा उनका रिकॉर्ड शासन तक नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार अब युवाओं के लिए जाति से ज्यादा शिक्षा, करियर, जीवनशैली और आपसी समझ का महत्व हो गया है। नतीजा पहले जिन रिश्तों का परिवार और समाज विरोध करता था, उन्हें अब स्वीकार्यता मिलने लगी है। रायपुर, भिलाई और बिलासपुर में सबसे अधिक आवेदन आते हैं। वहीं बस्तर, कांकेर, दंतेवाड़ा और गरियाबंद जैसे जिलों में इनकी संख्या काफी कम है। अंतरजातीय शादी की वजह...उच्च शिक्षा संस्थानों में बढ़ता मेलजोल। {सरकारी व निजी नौकरियों में सामाजिक मिश्रण। {सोशल मीडिया और डिजिटल संवाद । {आर्थिक आत्मनिर्भरता में वृद्धि। {युवाओं की बदलती प्राथमिकताएं। {परिवारों की बढ़ती सामाजिक स्वीकार्यता। {कानूनी संरक्षण और सरकारी प्रोत्साहन। {शहरीकरण और शिक्षा का प्रसार। केस-1: जनवरी 2026 कोरबा निवासी अभिनव आदिले अनुसूचित जाति समुदाय से हैं। उन्होंने जांजगीर-चांपा की 20 वर्षीय सुनीता देवांगन से शादी की। सुनीता ओबीसी वर्ग से हैं। उनके इस रिश्ते को दोनों के परिवारों ने सम्मान के साथ स्वीकार किया। केस-2: सितंबर 2025 दुर्ग निवासी दिनेश कुमार साहू ने गरियाबंद की पायल बेलदार से शादी की। पायल अनुसूचित जाति वर्ग से हैं। दोनों शिक्षित और सरकारी नौकरी में है। शादी के लिए घरवाले राजी नहीं थे। दोनों ने मिलकर समझाया तो परिजन मान गए। अंतर्जातीय विवाहों में वृद्धि सामाजिक दूरियों के कम होने और जातीय स्वीकार्यता बढ़ने का संकेत है। समाज में यह सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है।-डॉ. निस्टर कुजूर, समाजशास्त्री, प्रोफेसर, रविवि आज के युवा जाति से ज्यादा वैचारिक तालमेल, करियर और जीवनशैली को महत्व दे रहे हैं। यही बदलाव विवाह संबंधों में भी दिख रहा है।-डॉ. प्रियंवदा श्रीवास्तव, मनोवैज्ञानिक, प्रोफेसर, रविवि शहरों में अंतरजातीय विवाह के ज्यादा मामले आते रहे हैं। शिक्षित व्यक्तियों में शादी को लेकर जाति का बंधन नहीं है। यह बड़ा बदलाव है। - जितेंद्र गुप्ता, अपर संचालक, एससी-एसटी विभाग
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी एलोइना रोड्रिगेज गोमेज ने रविवार को प्रशांति निलयम में स्थित श्री सत्य साईं इंस्टीट्यूट ऑफ हायर लर्निंग (एसएसएसआईएचएल) का दौरा किया
क्या शिक्षा का अधिकार कानून समान शिक्षा का सपना पूरा कर पाया?
भारतीय शिक्षा व्यवस्था में नवउदारवाद, शिक्षा के अधिकार कानून, निजीकरण और समान शिक्षा के संवैधानिक प्रश्नों पर प्रेम सिंह का विस्तृत विश्लेषण
उच्च शिक्षा राज्य मंत्री ने सुनीं जन-समस्याएं:हरदोई के ग्राम मंसूर नगर में रात्रि चौपाल का आयोजन
हरदोई के पिहानी ब्लॉक स्थित ग्राम मंसूर नगर में रविवार देर शाम एक रात्रि चौपाल का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना था। इस चौपाल में प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। मंसूर नगर के जूनियर हाई स्कूल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में मंसूर नगर सहित आसपास के कई गांवों से सैकड़ों ग्रामीण अपनी शिकायतें और समस्याएं लेकर पहुंचे। कार्यक्रम की शुरुआत में ब्लॉक प्रमुख कुशी वाजपेई ने राज्य मंत्री को पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया। इसके बाद चौपाल की औपचारिक कार्यवाही शुरू हुई, जहां ग्रामीणों ने एक-एक करके अपनी बुनियादी समस्याएं राज्य मंत्री के समक्ष रखीं। मुख्य रूप से बिजली, पानी, सड़क, राशन और स्थानीय विकास कार्यों से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराई गईं। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने प्रत्येक ग्रामीण की समस्या को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने मौके पर मौजूद शाहाबाद के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) एस.के. मिश्र और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी प्रार्थना पत्रों को सूचीबद्ध कर समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से निस्तारित करने के आदेश दिए। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के खंड स्तरीय अधिकारी, कई ग्राम पंचायतों के प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। चौपाल के सफल आयोजन से ग्रामीणों में अपनी समस्याओं के शीघ्र समाधान की उम्मीद जगी है।
रायसेन में वाल्मीकि समाज ने मृत्यु भोज पर लगाई रोक:संभागीय बैठक में शिक्षा और सामाजिक सुधार पर जोर
रायसेन शहर के सांची रोड स्थित एक निजी होटल में रविवार शाम वाल्मीकि समाज मोहाल साढ़े बारह गांव पंचायत की संभागीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने, बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। समाजजनों ने सर्वसम्मति से मृत्यु भोज जैसी कुप्रथा को तत्काल प्रभाव से बंद करने का संकल्प लिया। बैठक की अध्यक्षता समाज के वरिष्ठ सदस्य रामविलास सरसवाल ने की। इस दौरान सुनील वाल्मीकि, नरेंद्र चौहान और हरिप्रकाश ने समाज में फैली कुरीतियों को समाप्त करने पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने विशेष रूप से मृत्यु भोज जैसी परंपराओं को तत्काल प्रभाव से बंद करने के निर्णय पर जोर दिया। बैठक में यह भी तय किया गया कि समाज के जो बच्चे शिक्षा से वंचित हैं, उन्हें विद्यालयों से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। इसके साथ ही युवाओं को नशे से दूर रखने और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों को रोकने पर भी सहमति बनी। भारतीय संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। समाजजनों ने एक स्वर में कहा कि अब सामाजिक सुधार और शिक्षा को प्राथमिकता देने का समय है। आने वाली पीढ़ी को शिक्षित और जागरूक बनाकर समाज को नई दिशा देने का संकल्प लिया गया। इस बैठक में ओपी गोदिया, रमेश चावरिया, संतोष नहरिया, पीके चावला, निलेश सरवन, विनोद परोचे, आदित्य चावला, प्रभात चावला, संजय चावला और तरुण चावला सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।
सहरसा में ईस्ट एंड वेस्ट टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज (TTC) के चेयरमैन डॉ. रजनीश रंजन ने रविवार को कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं से संवाद किया। यह कार्यक्रम सहरसा के प्रेक्षागृह में आयोजित किया गया था। इस अवसर पर उन्होंने स्नातक मतदाताओं से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याओं, अपेक्षाओं और सुझावों को सुना, साथ ही अपनी भावी कार्ययोजना भी साझा की। मतदाताओं को संबोधित करते हुए डॉ. रजनीश रंजन ने कहा कि वर्ष 1952 से अब तक कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित कोई भी विधान पार्षद क्षेत्र की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सका। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से इस क्षेत्र के स्नातकों और शिक्षित युवाओं की उपेक्षा की गई है। डॉ. रंजन ने बताया कि वर्ष 1952 में इस निर्वाचन क्षेत्र में मात्र 222 मतदाता थे, जो अब बढ़कर लगभग 80 हजार हो गए हैं। इसके बावजूद स्नातक मतदाताओं की समस्याओं के समाधान के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए। प्राथमिकताएं जनता के सुझावों पर आधारित होंगीउन्होंने अपनी प्रस्तावित कार्ययोजना की जानकारी देते हुए कहा कि यदि उन्हें मतदाताओं का समर्थन मिलता है, तो उनकी प्राथमिकताएं जनता के सुझावों पर आधारित होंगी। उनकी एक प्रमुख योजना स्नातक पास बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए 10 वर्षों तक पांच लाख रुपये का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराने हेतु सरकार पर दबाव बनाना है। इसके अतिरिक्त, स्नातक युवाओं, शिक्षकों, अधिवक्ताओं और पत्रकारों के लिए जीवन बीमा एवं कैशलेस इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का भी प्रयास किया जाएगा। पुस्तकालयों की आधारभूत संरचना को मजबूत किया जाएगाडॉ. रंजन ने कहा कि सभी वकालतखानों और प्रमंडलीय पुस्तकालयों की आधारभूत संरचना को मजबूत किया जाएगा। साथ ही, जिला, अनुमंडल और प्रखंड स्तर पर आधुनिक पुस्तकालयों एवं ई-लाइब्रेरी की स्थापना को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार का भी वादा किया। सहरसा के एमएलटी कॉलेज, पूर्णिया कॉलेज, टीएनबी कॉलेज भागलपुर और आरडी एंड डीजे कॉलेज मुंगेर की शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पहल की जाएगी। साथ ही, सहरसा स्थित बीएड कॉलेज में सात माह के भीतर पुनः नियमित पढ़ाई शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।
गोपालगंज में बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री सह बैकुंठपुर विधायक मिथिलेश तिवारी ने रविवार को बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र के महम्मदपुर स्थित त्रिगुणा मैरेज हॉल में जनता दर्शन कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र के लोगों की समस्याएं सुनीं और उनके त्वरित समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इस कार्यक्रम में विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों और गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत और जनहित से जुड़ी समस्याओं को सीधे मंत्री के समक्ष रखा। जनता दर्शन के दौरान सड़क, शिक्षा, बिजली, पेयजल, राजस्व, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, भूमि विवाद और स्वास्थ्य जैसी जनसुविधाओं से संबंधित मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई। शिक्षा मंत्री श्री तिवारी ने प्रत्येक आवेदन और शिकायत को गंभीरता से लिया। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। जनता की सेवा ही जनप्रतिनिधि का सबसे बड़ा दायित्वइस अवसर पर श्री तिवारी ने कहा कि जनता की सेवा ही जनप्रतिनिधि का सबसे बड़ा दायित्व है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए जनता और प्रशासन के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है। मंत्री ने बताया कि जनता दर्शन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक भटकना न पड़े और प्रशासनिक व्यवस्था उनके द्वार तक पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनता से जुड़े मामलों के निष्पादन में संवेदनशीलता और पारदर्शिता बरती जाए। साथ ही, प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। मंत्री ने यह भी कहा कि विकास कार्यों के साथ-साथ आम लोगों की समस्याओं का निराकरण उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। समाधान की पहल करने के लिए मंत्री का आभार व्यक्त कियाकार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने अपनी बात सीधे मंत्री के समक्ष रखी। उन्होंने समस्याओं को गंभीरता से सुनने और समाधान की पहल करने के लिए मंत्री का आभार व्यक्त किया। जनता दर्शन के दौरान कई मामलों का मौके पर ही निष्पादन भी किया गया, जिससे लोगों में संतोष और उत्साह देखने को मिला। यह जनता दर्शन कार्यक्रम एक बार फिर इस बात का संदेश देता है कि सरकार जनता की समस्याओं के समाधान और सुशासन की भावना के साथ निरंतर कार्य कर रही है, तथा आम नागरिकों की आवाज को प्राथमिकता दे रही है।
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने रविवार को अपने विधानसभा क्षेत्र जनकपुरी में आयोजित भव्य साइक्लिंग अभियान पैडल द बीट – संडे ऑन साइकिल में हिस्सा लिया। उन्होंने इस साइकिल रैली का नेतृत्व किया। फिटनेस, स्वास्थ्य जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। यह साइक्लिंग रैली एसकेवी (ए-ब्लॉक, जनकपुरी) से शुरू होकर सीएम श्री स्कूल (सी-4ई, जनकपुरी, गेट नं. 3) पर संपन्न हुई। अभियान में बच्चों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और फिटनेस प्रेमियों ने बड़ी संख्या में शामिल होकर स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली का संदेश दिया। स्वस्थ जीवन-जिम्मेदार नागरिकता की पहचान साइक्लिंग: मंत्री इस अवसर पर शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा- साइक्लिंग केवल एक खेल या व्यायाम नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ जीवन, स्वच्छ पर्यावरण और जिम्मेदार नागरिकता की पहचान है। आज के दौर में जब लोग मोटापा और विभिन्न बीमारियों का शिकार हो रहे हैं, ऐसे में स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना बेहद आवश्यक है। 'दैनिक जीवन में साइक्लिंग को जरूर शामिल करें' उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से फिटनेस को एक जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया है और 'संडे ऑन साइकिल' उसी सोच को आगे बढ़ाने का एक सार्थक प्रयास है। आशीष सूद ने दिल्लीवासियों, विशेषकर युवाओं से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में साइक्लिंग और अन्य शारीरिक गतिविधियों को जरूर शामिल करें। इससे न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य बेहतर होगा, बल्कि शहर में प्रदूषण और ईंधन की खपत को कम करने में भी मदद मिलेगी।
शहर की पढ़ाई-लिखाई को वर्ल्ड क्लास (विश्वस्तरीय) बनाने और पैरेंट्स की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करने के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। 'मुस्कुराए कानपुर' मुहिम के तहत शहर में 'कानपुर एजुकेशन कमेटी' का गठन किया गया है। आवास विकास के एक होटल में शहर के नामचीन शिक्षाविदों और प्रशासनिक चेहरों ने मिलकर इस कमेटी का शुभारंभ किया। इस कमेटी का सबसे बड़ा मकसद एक ऐसा 'कानपुर मॉडल' तैयार करना है, जो न सिर्फ बच्चों को अच्छी और नैतिक शिक्षा दे, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक मिसाल बन सके। प्राइमरी से लेकर टेक्निकल एजुकेशन तक के 21 एक्सपर्ट्स शामिल इस खास कमेटी में कोई साधारण लोग नहीं, बल्कि शिक्षा जगत के उन 21 दिग्गजों को शामिल किया गया है जो जमीन से जुड़े हैं। इसमें प्राइमरी, माध्यमिक, उच्च और तकनीकी (टेक्निकल) शिक्षा से जुड़े अनुभवी प्रिसिंपल, मैनेजर, प्रोफेसर्स और ट्रेनर्स शामिल हैं। कमेटी में स्मार्ट सिटी के ब्रांड एंबेसडर डॉ. सिधांशु राय, भारत स्काउट एंड गाइड के सहायक राज्य आयुक्त डॉ. आर.सी. शर्मा, डॉ. अवध बिहारी मिश्रा, पी.सी. अग्निहोत्री, अमित अग्रवाल, प्रो. टी.एन. अग्रवाल, डॉ. राकेश राम त्रिपाठी, डॉ. बृजमोहन सिंह और डॉ. वनिता मेहरोत्रा जैसी हस्तियां शामिल हैं। इनके अलावा सुबोध कटियार, डॉ. सी डेनियल, गुरुशरण सिंह, डॉ. भक्ति विजय शुक्ला, प्रो. जी.एल. श्रीवास्तव, डॉ. संगीता सिंह, राजेश ग्रोवर, डॉ. माहे तलत, शाहिद कामरान, मनप्रीत सिंह, मलिका गुप्ता, डॉ. शिवा मिश्रा और किरण प्रजापति को भी इस मिशन से जोड़ा गया है। रोजगार और बजट में फीस दिलाएगी पैरेंट्स को संतुष्टि कमेटी के समन्वयक (कोऑर्डिनेटर) बनाए गए डॉ. आर.सी. शर्मा ने साफ किया कि इस पूरी मुहिम का असली फोकस तीन चीजों पर रहेगा। पहला रोजगार, दूसरा बजट में आने वाला फीस स्ट्रक्चर और तीसरा अभिभावकों (पैरेंट्स) की संतुष्टि। आज के दौर में पैरेंट्स बच्चों की महंगी फीस और भविष्य में नौकरी न मिलने की चिंता से सबसे ज्यादा परेशान रहते हैं, कमेटी इसी गैप को खत्म करेगी। वही, कमेटी के संस्थापक डॉ. सिधांशु राय का कहना है कि किसी भी शहर का भविष्य वहां की शिक्षा व्यवस्था से तय होता है। यह कमेटी सरकारी प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए वर्तमान दौर की जरूरतों के हिसाब से काम करेगी। क्या है यह 'कानपुर मॉडल'?अमित अग्रवाल, डॉ. जी.एल. श्रीवास्तव और राजेश ग्रोवर ने बताया कि 'कानपुर मॉडल' के जरिए एक ऐसी प्रैक्टिकल शिक्षा प्रणाली का ढांचा तैयार किया जा रहा है, जो बच्चों को किताबी कीड़ा बनाने के बजाय उनमें नैतिक सोच और हुनर (स्किल्स) पैदा करे। डॉ. अवध बिहारी मिश्रा और प्रेमचंद अग्निहोत्री ने भी इसे शहर के विकास के लिए एक अनोखी और बेहद जरूरी पहल बताया है। आने वाले दिनों में यह कमेटी शहर के स्कूलों और कॉलेजों के लिए नए सुझाव और ब्लूप्रिंट तैयार करेगी।
पीएयू में चल रही खुली पाठशाला में 25 बच्चे, अब तक 150 से अधिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ा
पुशांत मोदगिल | लुधियाना एक तरफ गुरुद्वारा साहिब से आती गुरबाणी की सुरीली आवाजें, दूसरी तरफ खुली हवा में कॉपी-किताब लिए बैठे वो बच्चे जिनके हाथों में कभी किताब की जगह मिट्टी और मांगकर खाने की मजबूरी हुआ करती थी। पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू) परिसर में पिछले 12 सालों से चल रही यह खुली पाठशाला किसी सरकारी योजना का हिस्सा नहीं बल्कि एक इंसान के दिल से उठी आवाज का नतीजा है। यही बात इस पूरे सामाजिक प्रयास को बाकी सब से अलग और खास बनाती है। वह बच्चे खुली पाठशाला में पढ़ाई की अपना भविष्य बना रहे हैं। इस पूरे सामाजिक प्रयास की कहानी साल 2014 से शुरू होती है। पीएयू के एंटोमोलॉजी विभाग में कार्यरत सिमरजीत सिंह पंघेर ने बताया कि उस समय यूनिवर्सिटी परिसर में नए हॉस्टल का निर्माण कार्य चल रहा था। वहां काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के छोटे-छोटे बच्चे कॉपियों की जगह हाथों में मिट्टी और बालू लिए घूमते रहते थे। सिमरजीत सिंह ने इन बच्चों को इस आदत से हटाकर शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की सोची। शुरुआत में उन्होंने महज 5 बच्चों को इकट्ठा किया। उन्हें पढ़ाई से जोड़ने के लिए कभी प्यार का सहारा लिया तो कभी खेल-खेल में बिस्कुट व खाने-पीने की चीजों से पेड़ की छांव तले बिठाना शुरू किया। धीरे-धीरे ये बच्चे अक्षर पहचानने लगे तो इस टीम ने इनके आधार कार्ड बनवाने का काम किया ताकि सरकारी स्कूलों के जरिए मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जा सके। इस खुली पाठशाला की सबसे खूबसूरत और प्रभावशाली बात इसका समर्पित टीचिंग स्टाफ है। यहां बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई पेशेवर या वेतनभोगी शिक्षक नहीं आते बल्कि यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे देश के होनहार छात्र खुद आगे आकर अपनी सेवाएं देते हैं। जब ये छात्र शाम के समय गुरुद्वारा साहिब में नतमस्तक होने आते हैं तो खुली हवा में पढ़ते इन बच्चों को देखकर प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाते और खुद ब्लैकबोर्ड का चॉक थाम लेते हैं। मौजूदा समय में यूनिवर्सिटी के तीन होनहार छात्र अपनी बेहद कठिन और व्यस्त पढ़ाई के बीच से रोज़ समय निकालकर इन बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रहे हैं। इनमें रीना ठाकुर एमएससी इन बायोटेक्नोलॉजी के द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं, प्रभदीप सिंह बीएससी एग्रीकल्चर के तृतीय वर्ष में पढ़ाई कर रहे हैं और गुरवीर सिंह गडवासु से बीएससी फिशरीज साइंस के द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। इनसे पहले भी यूनिवर्सिटी के कई पीएचडी स्कॉलर्स लंबे समय तक इस मिशन का हिस्सा रह चुके हैं। समय के साथ यूनिवर्सिटी के हॉस्टल बनकर तैयार हो गए और वहां काम करने वाली पुरानी लेबर आगे मूव कर गई, लेकिन यह खुली पाठशाला कभी बंद नहीं हुई। अब तक इस खुली पाठशाला से पढ़कर करीब 150 से अधिक बच्चे बुनियादी शिक्षा लेकर आगे बढ़ चुके हैं। वर्तमान में भी यहां करीब 25 बच्चे नियमित रूप से पढ़ रहे हैं। अब पीएयू कैंपस के अलावा बाहर के इलाकों से भी जो जरूरतमंद छात्र हैं वे भी इस खुली पाठशाला की जानकारी मिलने पर यहां आकर नियमित रूप से कक्षाएं ले रहे हैं। इस पूरी मुहिम में गुरुद्वारा साहिब की प्रबंधकीय कमेटी का विशेष सहयोग रहता है। बच्चों के बैठने की कुर्सियां, ब्लैकबोर्ड, अलमारी और नई कॉपियां व स्टेशनरी का सारा सामान गुरुद्वारा साहिब परिसर के अंदर ही सुरक्षित रखा जाता है। सिमरजीत सिंह पंघेर बताते हैं कि इस खुली पाठशाला का मकसद सिर्फ बच्चों को बुनियादी ज्ञान देना नहीं बल्कि उन्हें अच्छी शिक्षा के लिए तैयार करना भी है। शुरुआती पंजाबी और बुनियादी ज्ञान देने के बाद इन बच्चों का दाखिला पीएयू के ही सरकारी स्कूल में करवा दिया जाता है। इस प्रयास की सबसे बड़ी सफलता का चेहरा कंचन नाम की बच्ची है। कंचन कभी इसी पेड़ की छांव तले पहली बार वर्णमाला सीखने आई थी और आज वह अपनी मेहनत के दम पर 12वीं कक्षा में पढ़ रही है। कंचन का परिवार अब यूनिवर्सिटी परिसर से काफी दूर शिफ्ट हो चुका है लेकिन वह आज भी हफ्ते में दो-तीन दिन विशेष तौर पर खुली पाठशाला में आती है।
होम स्टेट कोटा खत्म होने पर शिक्षा मंत्री से मिलेगा चैंबर प्रतिनिधिमंडल
सिटी रिपोर्टर | रांची फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की एजुकेशन उप समिति की बैठक में बीआईटी मेसरा द्वारा झारखंड के छात्रों के लिए 50 प्रतिशत होम स्टेट कोटा समाप्त किए जाने पर चिंता व्यक्त की गई। सदस्यों ने इसे राज्य के विद्यार्थियों के हितों के विपरीत और उनके भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला बताया। उप समिति के चेयरमैन पारस अग्रवाल ने कहा कि इस सत्र से सभी सीटों पर ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर नामांकन लेने का निर्णय अत्यंत चिंताजनक है। अब तक होम स्टेट कोटा के तहत झारखंड के विद्यार्थियों के लिए लगभग 650 सीटें आरक्षित थीं। ऑल इंडिया कोटा और होम स्टेट कोटा के कट-ऑफ में अंतर होने के कारण राज्य के कई प्रतिभाशाली और निम्नवर्गीय परिवारों के बच्चों को इस प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ने का अवसर मिलता था। चैम्बर का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही राज्य के उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री और विभागीय सचिव से मुलाकात करेगा। प्रतिनिधिमंडल राज्य सरकार से बीआईटी मेसरा के साथ आवश्यक पहल कर होम स्टेट कोटा पुनः बहाल कराने का आग्रह करेगा। बैठक में उपाध्यक्ष प्रवीण लोहिया, राम बांगड़, मुकेश अग्रवाल और आलोक सिंह सहित कई सदस्य उपस्थित थे।
समालखा में सैनी सेवा ट्रस्ट ने शिक्षा को बढ़ावा देने और जरूरतमंद बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक सम्मान समारोह आयोजित किया। जिसमें क्षेत्र के 45 बच्चों को कॉपी, किताबें, पेन और अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई। इस अवसर पर सैनी सेवा ट्रस्ट की चेयरपर्सन माया देवी ने कहा कि शिक्षा ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की शक्ति रखती है। उन्होंने कहा कि, किताबों में ही बुलंदियों की उड़ान छुपी है। माया देवी ने बच्चों को बेहतर शिक्षा और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास करते रहने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान ट्रस्ट ने जरूरतमंद परिवारों को दैनिक जीवन में उपयोग आने वाली आवश्यक वस्तुएं भी वितरित कीं। इसके अतिरिक्त, एक दिव्यांग व्यक्ति को व्हीलचेयर भेंट कर मानवीय सेवा का संदेश दिया गया। क्षेत्रवासियों ने ट्रस्ट के इन प्रयासों की सराहना की और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक पहल बताया। हर जरुरतमंद को मिलना चाहिए सम्मान : मोहन लाल मोहन लाल ने इस मौके पर कहा कि समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब हर बच्चा शिक्षा से जुड़े और हर जरूरतमंद व्यक्ति को सम्मान के साथ सहायता मिले। उन्होंने बताया कि सैनी सेवा ट्रस्ट का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि लोगों में आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की प्रेरणा जगाना भी है। बच्चों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया। ट्रस्ट के सदस्यों ने शिक्षा के महत्व और सामाजिक सेवा के प्रति लोगों को जागरूक किया। उपस्थित सभी लोगों ने भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी कार्यों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया। इस अवसर पर मोहन लाल, नितीश, निशा, करण सिंह सैनी, अनिल सैनी, ममता, तमन्ना सहित ट्रस्ट के अनेक सदस्य, गणमान्य व्यक्ति और क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
टोंक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जयपुर प्रान्त के संघ शिक्षा वर्ग-2026 का शनिवार को समापन हुआ। कार्यक्रम में धन्ना पीठाधीश्वर श्रीश्री 1008 बजरंगदेवाचार्य महाराज, पूज्य संत कोमलराम महाराज रामद्वारा टोंक के सान्निध्य एवं रिटायर्ड सहायक कस्टम कमिश्नर राजेन्द्र महावर उपस्थित रहे। समापन समारोह के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र कार्यवाह जसवंत खत्री थे। भारत सीना तानकर खड़ा है मुख्यवक्ता जसवंत खत्री ने दुनिया के वर्तमान हालातों की चर्चा करते हुए कहा- भारत अपनी ताकत के बल से दुनिया के सामने विपरीत परिस्थितियों में भी सीना तानकर खड़ा है। भारत न सिर्फ राजनीतिक दृष्टि से बल्कि आर्थिक, सामाजिक एवं सैन्य दृष्टि से बड़ी मजबूती से दुनिया की बड़ी शक्तियों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका में है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विश्व युद्ध के हालातों में दुनिया भारत की तरफ निहार रही है। खत्री ने अराष्ट्रवादी शक्तियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा- कुछेक ऐसी ताकते हैं जो भारत को तोड़ना चाहती हैं जिनसे सावधान होना पड़ेगा। भारतीयों को ऐसी ताकतों से सावधान होना पड़ेगा। समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम होने चाहिए संघ शिक्षा वर्ग सर्वाधिकारी अशोक कुमार मित्तल ने संघ शिक्षा वर्ग का प्रतिवेदन देते हुए कहा- श्रीमद् भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने सात्विककर्ता के लक्षण बताते हुए स्वयं कहा है कि जो कर्ता अनुराग से रहित अहंकार शून्य धैर्य एवं उत्साह से युक्त होता है तथा सफलता एवं असफलता में निर्विकार रहता है। वही सात्विककर्ता है। कार्यकर्ताओं में ऐसे उत्कृष्ट गुणों का विकास करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रतिवर्ष समय-समय पर प्रशिक्षण वर्गों का आयोजन करता है। देश समाज का कार्य करने के लिए राष्ट्रीय चिंतन और आचरण वाले ध्येय समर्पित कार्यकर्ताओं की सहज निर्मिति के लिए संघ शिक्षा वर्गों की महती भूमिका है। तीन वर्ग आयोजित हुए वर्ग प्रमुख ने बताया- जयपुर प्रान्त में तीन वर्ग आयोजित किए गए हैं। जिनमें पहला विद्यालय विद्यार्थी वर्ग टोंक में जिसमें 10वीं, 11वीं, 12वीं की परीक्षा में प्रविष्ट विद्यार्थियों का, दूसरा महाविद्यालय विद्यार्थी व तरूण व्यवसायी वर्ग का जामडोली जयपुर में ,तीसरा प्रौढ व्यवसायी वर्ग राजापार्क जयपुर 40 से 65 वर्ष तक के व्यवसायियों का किया है। टोंक में चल रहे संघ शिक्षा वर्ग का जिक्र करते हुए बताया- टोंक में 22 मई को वर्ग का उद्घाटन डीएसपी मृत्यूंजय मिश्रा व सह प्रांत प्रचारक विशाल ने किया। 123 शिक्षार्थियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया इस वर्ग में जयपुर प्रान्त के 24 जिलों के 123 शिक्षार्थियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इनमें मुख्य शिक्षक व शाखा कार्यवाह एवं ऊपर के दायित्ववान कार्यकर्ताओं की सहभागिता भी रही। वर्ग में 21 शिक्षक एवं 20 प्रबंधकों तथा 10 जिला प्रमुख ने पूरा समय रहकर वर्ग के सुचारू रूप से संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस 15 दिवसीय वर्ग में अखिल भारतीय सम्पर्क प्रमुख रामलाल का 4 दिन पावन सानिध्य प्राप्त हुआ। प्रान्तीय अधिकारियों के अतिरिक्त क्षेत्र कार्यवाह जसवंत खत्री, क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम , प्रांत सह संघचालक हेमन्त सेठिया, प्रांत कार्यवाह रमेश पारीक, प्रांत प्रचारक बाबूलाल,सह प्रांत प्रचारक विशाल कुमार का सानिध्य भी वर्ग में मिला। समारोह में जलदाय मंत्री कन्हैया लाल चौधरी,मंत्री कन्हैया लाल चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष चंद्रवीर सिंह चौहान, पंडित सुरेश दुबे,सेंट सोल्जर शिक्षा समिति टोंक के निदेशक बाबूलाल शर्मा, सहित काफी संख्या में महिला, पुरुष मौजूद थे।
बाड़मेर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) जोधपुर प्रांत का 15 दिन का संघ शिक्षा वर्ग (2026) पूरा हुआ। शनिवार को ज्येष्ठ कृष्ण पंचमी को हुए समापन कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने देश की सेवा और सामाजिक संगठन का संकल्प लिया। इस दौरान उन्होंने शारीरिक व्यायाम का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में क्षेत्र प्रचारक मुख्य वक्ता निंबाराम ने कहा- संघ के काम को समझना है तो संघ में आकर देखिए, यहां रहकर अनुभव कीजिए। 21 जिलों के 316 स्वयंसेवकों ने ली ट्रेनिंग जानकारी के अनुसार- 21 मई से शुरू हुए कैंप में जोधपुर प्रांत के 7 विभागों और 21 जिलों के कुल 316 स्वयंसेवकों ने ट्रेनिंग ली। कैंप की दिनचर्या में सभी स्वयंसेवकों ने सुबह 4 बजे से रात 10:10 बजे तक कड़े अनुशासन का पालन किया। समापन समारोह की शुरुआत ध्वजारोहण और प्रार्थना के साथ हुई। इसके बाद स्वयंसेवकों ने व्यायाम किया। 15 दिन तक प्लास्टिक मुक्त रहा कैंप जानकारी के अनुसार- कैंप 15 दिन तक पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त रहा। इस दौरान पानी बचाने का संदेश देते हुए स्वयंसेवकों ने अपने भोजन के बर्तन रेत से मांझे। समापन कार्यक्रम में आए गेस्ट को 5021 सीड बॉल बांटे गए। गोबर से बने गमले में 500 तुलसी के पौधों बांटे गए। कैंप के दौरान 5000 नारियल के खोल में बीज बोए गए। सामाजिक जुड़ाव के लिए बाड़मेर शहर और नजदीकी गांवों से 15 दिन तक दोनों वक्त के भोजन के लिए रोटियों का संग्रह किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता धोरीमन्ना के उद्योगपति-समाजसेवी मोहनलाल प्रजापति ने की। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जोधपुर क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक निंबाराम रहे। निंबाराम बोले-सिर्फ इमरजेंसी और कोविड काल में नहीं हुआ कैंप मुख्य वक्ता निंबाराम ने कहा- 1927 में पहला शिक्षा वर्ग (कैंप) लगा था। तब से सिर्फ इमरजेंसी और कोविड काल के दौरान कैंप नहीं लगा। बाकी यह लगातार जारी रहा। वर्तमान में राजस्थान में 14 जगह और देशभर में 77 जगह ट्रेनिंग कैंपों में करीब 20 हजार स्वयंसेवक ट्रेनिंग ले रहे हैं। शाखा व्यक्ति निर्माण का केंद्र है। जिसमे देश और हिंदू धर्म के जागरण का काम किया जाता है। राजस्थान में वर्तमान में 11 हजार शाखाएं लग रही हैं। संघ का टारगेट- समाज जागरण करना है निंबाराम ने हर गांव में संस्कार पाठशाला, व्यायाम शाला और हर साल उनके महोत्सव की व्यवस्था की बात की। कहा- वर्तमान में शाखा के माध्यम से यह कार्य स्वयंसेवक कर रहे हैं। संघ शताब्दी वर्ष के दौरान व्यापक ग्रह संपर्क के निमित्त सभी विचारधारा के व्यक्तियों से संपर्क किया गया। हिंदू समाज के जागरण का कार्य किया गया। संघ का लक्ष्य सभी को संघ का स्वयंसेवक बनाना नहीं है, बल्कि समाज जागरण का कार्य करना है। जो तन, मन, धन से देश हित का कार्य करता है, वहीं संघ का कार्य है। इससे पहले वर्ग कार्यवाह ने वर्ग का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया- कैंप में 316 स्वयंसेवक, 46 ट्रेनर, 79 प्रबंधक लगातार 15 दिन तक काम करते रहे। बाड़मेर नगर से प्रतिदिन अलग-अलग श्रेणीयों के 753 नागरिक वर्ग दर्शन के लिए आए। इस समारोह कार्यक्रम में बाड़मेर नगर एवं आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में मातृशक्ति एवं पुरुष उपस्थित रहे।
मैनपुरी में अहिल्याबाई होलकर जयंती समारोह का आयोजन किया गया। इसमें केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने समाज को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया और इसे सबसे मजबूत हथियार बताया। शनिवार को शहर के गोला बाजार स्थित अहिल्याबाई होलकर चौक पर पहुंचकर केंद्रीय मंत्री बघेल ने माल्यार्पण किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध करानी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि 5 बीघा जमीन बेचकर बच्चों को अच्छी डिग्री मिलती है, तो ऐसा अवश्य करना चाहिए। डिग्री और नौकरी हासिल होने के बाद बच्चा 5 बीघा से 50 बीघा भूमि भी खरीद सकेगा। केंद्रीय मंत्री ने अहिल्याबाई होलकर के जीवन परिचय पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अहिल्याबाई ने शासनकाल में राज किया और उनके ससुर ने उन्हें आगे बढ़ाया। नारी सशक्तिकरण के लिए उनकी एक अलग पहचान बनी है। बघेल ने समाज से अच्छी शिक्षा, अच्छे संस्कार और अच्छी उपलब्धि हासिल करने की आशा व्यक्त की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल के साथ पर्यटन मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह, विधायक रामनरेश गंगोत्री, टूंडला विधायक प्रेमपाल सिंह धनगर, पूर्व मंत्री अयोध्या प्रसाद पाल, महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष परम प्रकाश पाल, हौसला प्रसाद पाल, राजेंद्र सिंह पाल, संध्या सिंह धनगर, गगन पाल, संयोजक बलवीर सिंह पाल, आलोक गुप्ता, ममता राजपूत, रोड पाल, आसान सिंह पाल, महेश सिंह पाल, प्रमोद पाल, मुनेंद्र पाल, निर्भय सिंह पाल, इनाम सिंह, रविंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, रामवीर सिंह, शेर सिंह, महेश चंदपाल, मनोज कुमार और साक्षी सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। देश के विभिन्न राज्यों और जिलों से बड़ी संख्या में युवा और छात्र दिल्ली पहुंचे। इसी क्रम में सोनीपत से भी युवाओं का एक दल नारेबाजी करते हुए दिल्ली के लिए रवाना हुआ। रवाना होने से पहले युवाओं ने बेरोजगारी, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। युवाओं का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों का समय और मेहनत लगाने के बावजूद बार-बार होने वाली अनियमितताओं से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। दिल्ली में हुए प्रदर्शन को लेकर युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला और उन्होंने अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाने का संकल्प लिया। NEET पेपर लीक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 5 घंटे प्रदर्शन किया। पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा कि मंत्री 5 दिन के अंदर इस्तीफा दें, नहीं तो अगले शनिवार, यानी 13 जून को जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन करेंगे। पेपर लीक मामलों पर युवाओं ने जताया रोष कॉकरोच जनता पार्टी को समर्थन देने के लिए दल का नेतृत्व कर रहे विमल किशोर ने बातचीत में कहा कि आज का युवा लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों से बेहद परेशान है। उन्होंने कहा कि लाखों अभ्यर्थी दिन-रात मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा से पहले या बाद में पेपर लीक होने की घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। उनका कहना है कि इससे युवाओं का मनोबल टूटता है और भविष्य को लेकर असुरक्षा बढ़ती है। सरकार पर लगाए ठोस कार्रवाई न करने के आरोप विमल किशोर ने आरोप लगाया कि बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आने के बावजूद सरकार प्रभावी और सख्त कार्रवाई करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाए जाने के कारण ऐसी घटनाएं लगातार दोहराई जा रही हैं। युवाओं का मानना है कि यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई होती तो परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठते। दिल्ली में बुलंद होगी युवाओं की आवाज उन्होंने कहा कि दिल्ली में होने वाला प्रदर्शन केवल विरोध दर्ज कराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके माध्यम से युवा अपनी मांगों को मजबूती से सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्र और युवा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग उठाएंगे। सख्त कानून और जवाबदेही तय करने की मांग युवाओं का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पेपर लीक मामलों पर सख्त कानून लागू किए जाने चाहिए। साथ ही संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर सोनीपत से रवाना हुए युवाओं ने केवल पेपर लीक का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि रोजगार के अवसर बढ़ाने और भर्ती प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि लंबे समय से विभिन्न विभागों में भर्ती प्रक्रियाएं लंबित हैं, जिससे योग्य युवाओं को नौकरी मिलने में देरी हो रही है और उनमें निराशा बढ़ रही है। वहीं, CJP के प्रदर्शन के मद्देनजर इंदिरा गांधी एयरपोर्ट, मुख्य रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और दिल्ली के बॉर्डर पॉइंट्स पर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। 1000 से ज्यादा पुलिस जवान पहले से तय पॉइंट्स पर तैनात किए गए थे। बाजारों और संवेदनशील इलाकों में कानून व्यवस्था बनाए रखने की हिदायत दी गई थी। मंत्री के इस्तीफे के लिए 5 दिन की समय सीमा अभिजीत ने कहा- कॉकरोच जनता पार्टी अपनी मांग पर अड़ी है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। उन्होंने धमेंद्र को इस्तीफे के लिए 5 दिन का अल्टीमेटम दिया है। अगर कॉकरोच जनता पार्टी की बात नहीं मानी जाती है, तो 13 जून को जंतर-मंतर पर दोबारा प्रदर्शन किया जाएगा।
अभिजीत दिपके ने उस सुबह इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अपने पहुंचने को याद करते हुए कहा कि उनकी फ्लाइट लैंड होने से ठीक पहले, उन्हें ऐसा लगा जैसे वह अपनी आज़ादी के आखिरी पल जी रहे हैं।
दिल्ली में शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के बीच आगरा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक युवक आगरा कॉलेज के सामने हाथ में पोस्टर लेकर खड़ा दिखाई दे रहा है। पोस्टर पर शिक्षा मंत्री रिजाइन दो लिखा है, जबकि सड़क के डिवाइडर पर लगे पोस्टरों में जागो आगरा, जागो आगरा और Stop Playing With The Life Studies जैसे संदेश नजर आ रहे हैं। साथ ही वीडियो में आगरा कॉलेज के 7 से 8 युवक भी एक साथ खड़े नजर आ रहे है। सोशल मीडिया पर दी जा रही जानकारी के अनुसार यह वीडियो 28 मई का बताया जा रहाा। वीडियो को आदित्य शर्मा नामक युवक द्वारा पोस्ट किया गया बताया जा रहा है और वीडियो में दिखाई देने वाला युवक भी आदित्य शर्मा ही बताया जा रहा है। जिस अकाउंट से वीडियो पोस्ट किया गया है उसके फॉलोअर्स 22.2K हैं, वीडियो पर 5,549 व्यूज हैं। और करीब 300 लोगों ने इस लाइक किया है। वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कमेंट सेक्शन में कई यूजर CJP जिंदाबाद और छात्रों के समर्थन में नारे लिखते दिखाई दे रहे हैं। कुछ यूजर्स ने शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी राय व्यक्त की है। वीडियो ऐसे समय वायरल हुआ है जब दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी कारण सोशल मीडिया पर कई लोग आगरा के इस वीडियो को भी उसी बहस का हिस्सा मानकर साझा कर रहे हैं। वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक रूप से शेयर किया जा रहा है और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
गुरुग्राम जिले के एसजीटी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ नर्सिंग ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के नेशनल रिसोर्स सेंटर फॉर इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड स्टैंडर्ड्स (NRCeS) और सी-डैक, पुणे के सहयोग से एक तीन दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का आयोजन किया। यह कार्यक्रम 3 से 5 जून तक हेल्थ इंफॉर्मेशन एंड डिजिटल टेक्नोलॉजीज इन हेल्थकेयर विषय पर आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न स्वास्थ्य एवं शिक्षा क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन एसजीटी विश्वविद्यालय के प्रॉ-वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) अतुल नासा ने किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल परिवर्तन के दौर में शिक्षकों और स्वास्थ्य पेशेवरों का आधुनिक तकनीकों से दक्ष होना समय की आवश्यकता है। उन्होंने डिजिटल तकनीकों को स्वास्थ्य शिक्षा और सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण बताया। इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड की जानकारी दी गई स्कूल ऑफ नर्सिंग के डीन डॉ. सुनील कुमार दुलार के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में मेडिकल, नर्सिंग, डेंटल, फिजियोथेरेपी, एलाइड हेल्थ साइंसेज, आयुर्वेद, नेचुरोपैथी तथा एसजीटी अस्पताल के संकाय सदस्यों एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी की। एफडीपी के दौरान NRCeS एवं सी-डैक, पुणे के विशेषज्ञ डॉ. सुरेश कुमार शर्मा, सुश्री सयाली सटोकर, चिन्मय भुताड एवं सुश्री प्रीतम तांबे ने विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। इनमें इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR), डिजिटल हेल्थ स्टैंडर्ड्स, SNOMED CT, ICD-10, नर्सिंग डॉक्यूमेंटेशन स्टैंडर्ड्स, डेटा एनालिटिक्स, क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम, LOINC, FHIR, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM), नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (NHCX), DICOM स्टैंडर्ड्स तथा स्वास्थ्य डेटा की गोपनीयता एवं सुरक्षा शामिल थे। हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम में स्वास्थ्य सूचना प्रणालियों के व्यावहारिक प्रदर्शन और हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी शामिल था। इससे प्रतिभागियों को डिजिटल हेल्थ तकनीकों एवं इंटरऑपरेबिलिटी मानकों की व्यवहारिक समझ विकसित करने का अवसर मिला। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम की उपयोगिता और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन की सराहना की। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। आयोजकों ने बताया कि यह पहल स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल तकनीकों के प्रभावी उपयोग, क्षमता निर्माण और भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपना पहला प्रदर्शन करेगी। यह प्रदर्शन NEET-UG पेपर लीक और CBSE, CUET SSC-GD जैसी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ है। इसके समर्थन में पटना में भी प्रदर्शन किया जाएगा। इसी आह्वान को आगे बढ़ाते हुए ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) पटना यूनिवर्सिटी इकाई द्वारा आज कारगिल चौक पर शाम 5 बजे एकजुटता प्रदर्शन किया जाएगा। मोदी सरकार की भ्रष्ट और विफल शिक्षा व्यवस्था AISA की ओर से कहा गया कि मोदी सरकार की भ्रष्ट और विफल शिक्षा व्यवस्था के कारण देश के लगभग 50 से 60 लाख छात्रों को पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और प्रशासनिक अव्यवस्था का सामना करना पड़ा है। हाल के वर्षों में हुई परीक्षाओं में भारी अनियमितताओं ने छात्रों के भविष्य को गंभीर संकट में डाल दिया है। NEET पेपर लीक से लगभग 22 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए, CBSE बोर्ड की अव्यवस्थाओं से 17 लाख से अधिक छात्र प्रभावित हुए। CUET-UG की गड़बड़ियों से लगभग 16 लाख अभ्यर्थियों को परेशानी झेलनी पड़ी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग इन घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय छात्रों के भविष्य की सुरक्षा करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस विफलता की जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। आज के इस प्रदर्शन के माध्यम से छात्र-युवा शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार, पेपर लीक और लगातार बढ़ती अव्यवस्थाओं के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगे तथा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करेंगे।
वाराणसी के रामनगर स्थित राधा किशोरी राजकीय बालिका इंटर कॉलेज को केंद्र सरकार की पीएम श्री योजना के तहत चयनित किया गया है। इसके साथ ही यह विद्यालय अब पीएम श्री विद्यालय के रूप में जाना जाएगा। इस दर्जे के मिलने से विद्यालय में आधुनिक शैक्षिक सुविधाओं का विस्तार होगा और छात्राओं को नई शिक्षा नीति के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। पीएम श्री योजना के तहत विद्यालय में डिजिटल बोर्ड, आधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं, आईसीटी (ICT) लैब और टिंकरिंग लैब जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप यहां रटने की बजाय समझ और प्रयोग आधारित शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही खेल आधारित शिक्षण पद्धति को भी बढ़ावा मिलेगा। कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा पर रहेगा फोकस विद्यालय की छात्राओं को कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा से भी जोड़ा जाएगा, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें। विद्यालय के विकास और संसाधनों को मजबूत करने के लिए सरकार की ओर से विशेष अनुदान भी उपलब्ध कराया जाएगा। करीब 2400 छात्राएं कर रही हैं अध्ययन विद्यालय की प्रधानाचार्य साधना राय ने बताया कि राधा किशोरी राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में कक्षा 5 से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई होती है और वर्तमान में करीब 2400 छात्राएं अध्ययनरत हैं। प्रदेश के तीन विद्यालयों को मिला दर्जा राधा किशोरी राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के अलावा राजकीय बालिका इंटर कॉलेज संभल और राजकीय इंटर कॉलेज तकसारा, अयोध्या को भी पीएम श्री का दर्जा प्रदान किया गया है। वाराणसी में बढ़ी पीएम श्री विद्यालयों की संख्या इससे पहले वाराणसी में पीएम श्री राजकीय प्रभु नारायण इंटर कॉलेज, पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज जक्खिनी, पीएम श्री राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज, पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज मलदहिया और पीएम श्री राजकीय अभिनव इंटर कॉलेज को यह दर्जा मिल चुका है। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) भोलेंद्र प्रताप सिंह ने इसे जिले के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि पीएम श्री का दर्जा मिलने से विद्यालय को विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट मिलेगा। इससे छात्राओं को आधुनिक, तकनीकी और कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
शिक्षा व पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
चंदनकियारी | विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर चंदनकियारी क्षेत्र चन्द्रा पंचायत सचिवालय के समीप शिक्षा सेवा समर्पण संस्थान की ओर से शुक्रवार को पौधरोपण व पर्यावरण जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान सदस्यों, कार्यकर्ताओं व ग्रामीणों की सहभागिता से 200 पौधों का रोपण किया गया। मुख्य अतिथि बनगड़िया ओपी प्रभारी शुभम कुमार ने कहा कि पर्यावरण मानव जीवन का आधार है और इसकी रक्षा करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
शिक्षा विभाग की यह कैसी व्यवस्था... एक साल पहले पदोन्नत प्रिंसिपल को अब तक पोस्टिंग नहीं
शिक्षा विभाग में पदोन्नति हो रही है, लेकिन पोस्टिंग नहीं मिल रही। इस कारण पदोन्नति के बावजूद उन्हें उच्च पद नहीं मिल रहा और यथा स्थान कार्यग्रहण करा दिया गया। अधिकारियों की लापरवाही के कारण पदोन्नत कर्मचारी लंबे समय से पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं। पिछले एक साल में विभाग में डीईओ, प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल के पद पर पदोन्नतियां तो की गई, लेकिन पोस्टिंग अब तक नहीं दी गई। पदोन्नत कर्मचारी आज भी उसी स्थान पर काम कर रहे हैं जहां से उनको पदोन्नत किया गया था। इससे पदोन्नत कर्मचारियों में विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। विभाग में पिछले साल मई में पदोन्नति के बाद 3800 नए प्रिंसिपल मिले थे। इनको यथा स्थान कार्यग्रहण कराया। इसके बाद इनकी पोस्टिंग के लिए 3 बार काउंसलिंग का शेड्यूल जारी किया। तीनों ही बार ऐनवक्त पर शेड्यूल को वापस ले लिया। अधिकारी बार-बार आदेश पर यू-टर्न ले रहे हैं। वहीं, प्रिंसिपल पोस्टिंग को लेकर भी विभाग ने यू-टर्न ले लिया। सितंबर 2025 में पदोन्नत हुए करीब 11 हजार वाइस प्रिंसिपल भी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं। इनके वरिष्ठता निर्धारण में भी गड़बड़ी हुई। इसके बाद मामला कोर्ट में चला गया। पदोन्नति 144 जिला शिक्षा अधिकारी भी पोस्टिंग के अभाव में अपने पुराने पद पर ही काम कर रहे हैं। इसी तरह से कई अन्य पदों पर भी पोस्टिंग लंबित पड़ी है। अखिल राजस्थान विद्यालय शिक्षक संघ के प्रवक्ता देवकरण गुर्जर और राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा का कहना है कि अप्रैल से नया सत्र प्रारंभ हो गया है। विभाग को चाहिए कि पोस्टिंग में आ रही अड़चनों को दूर करे, ताकि ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद पदोन्नति कर्मचारियों की पोस्टिंग का रास्ता खुल सके। पोस्टिंग नहीं होने से यह पड़ रहा है असर पोस्टिंग नहीं होने से कर्मचारी पुराने पद पर काम कर रहा है। वेतन पदोन्नति वाला ले रहा है। यानी सरकार काम निम्न पद का करा रही है और वेतन उच्च पद का दे रही है। इसके अलावा एक स्कूल में एक से अधिक वाइस प्रिंसिपल व प्रिंसिपल काम कर रहे हैं। इससे इनका सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। अगर पोस्टिंग मिले तो स्कूलों में खाली पड़े इनके पद भर सकेंगे और स्कूलों की मॉनिटरिंग सही तरीके से हो सकेगी।
कॉलेज शिक्षा विभाग की भर्ती के साक्षात्कार में प्रार्थी को भी शामिल करें
हाईकोर्ट ने आरपीएससी की कॉलेज शिक्षा विभाग की भर्ती में प्रार्थी अंतिम वर्ष के छात्र को राहत देते हुए उसे फिजिकल इंस्ट्रक्टर के साक्षात्कार में शामिल करने का निर्देश दिया है। वहीं मामले में प्रमुख उच्च शिक्षा सचिव, कॉलेज शिक्षा आयुक्त व आरपीएससी सचिव से जवाब देने के लिए कहा है। हाईकोर्ट ने यह निर्देश विवेक कुमार मिश्रा की याचिका पर दिया। अधिवक्ता राम प्रताप सैनी ने बताया कि प्रार्थी ने भर्ती में फिजिकल इंस्ट्रक्टर पद के लिए आवेदन किया था। उस समय वह अंतिम वर्ष का छात्र था। उसने भर्ती परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली। लेकिन उसे साक्षात्कार में शामिल करने से यह कहते हुए मना कर दिया कि आवेदन पत्र जमा कराने की तिथि तक उसका अंतिम वर्ष का परिणाम घोषित नहीं हुआ था। इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि अंतिम वर्ष की परीक्षा में शामिल हो चुके अथवा शामिल होने वाले अभ्यर्थी आवेदन के लिए पात्र होंगे। इसलिए परीक्षा में सफल होने के बाद भी उसे साक्षात्कार से वंचित करना उसके वैधानिक अधिकारों का हनन है। इसलिए उसे साक्षात्कार सहित भर्ती परीक्षा में शामिल किया जाए। अदालत ने मामले में प्रार्थी को राहत देते हुए उसे साक्षात्कार में शामिल करने के लिए कहा।
मुफ्त शिक्षा के लिए दान की जगह पर बना डाली कोठी; घर से निकाला तो बुजुर्ग एनआरआई दंपती ने बिछाई दरी
पीड़ित एनआरआई प्रोफेसर दविंदर सिंह ग्रेवाल और उनकी पत्नी ने रुंधे गले से कहा इस उम्र में अब हमारी कोई ख्वाहिश नहीं बची है। हमें न तो धन-दौलत चाहिए और न ही कोई ऐश-ओ-आराम। हम तो बस अपने दिवंगत बेटे की याद में एक ऐसा एजुकेशन सेंटर बनाना चाहते हैं, जहां गरीब बच्चे मुफ्त में पढ़-लिख सकें। हमारा मकसद सिर्फ इतना है कि यहां से शिक्षा पाकर बच्चे जिंदगी में एक कामयाब और अच्छे इंसान बनें। लेकिन हमें क्या पता था कि भगवान के घर (धार्मिक संस्था) में ही हमारे साथ ऐसा धोखा हो जाएगा और हमारी भावना का तमाशा बना दिया जाएगा। भास्कर न्यूज | लुधियाना बाड़ेवाल रोड स्थित पंजाब कॉलोनी से रिश्तों को शर्मसार करने और एक तथाकथित धार्मिक संस्था के बाबा द्वारा बुजुर्गों से धोखाधड़ी का बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। एक पढ़े-लिखे एनआरआई बुजुर्ग प्रोफेसर दंपति, जिनकी उम्र 80 साल हो चुकी है, आज न्याय के लिए अपने ही घर के बाहर दरी बिछाकर धरने पर बैठने को मजबूर हैं। दिल के मरीज इस बुजुर्ग दंपति का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने अपने दिवंगत बेटे की याद में बच्चों की मुफ्त शिक्षा के लिए करोड़ों रुपये की जमीन दान कर दी थी। शुक्रवार को इस प्रताड़ना और धोखे से तंग आकर आज उन्होंने न्याय की गुहार लगाते हुए अपने ही घर के बाहर दरी बिछा दी और पुलिस विभाग के खिलाफ रोष जाहिर किया। प्रोफेसर ग्रेवाल ने बताया कि उन्होंने इस धोखाधड़ी और कब्जे के खिलाफ अदालत में केस भी दायर कर दिया है। मामले का संज्ञान लेते हुए डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने लुधियाना पुलिस को तुरंत सख्त निर्देश जारी किए हैं। डीसी ने पुलिस को मार्क करते हुए कहा है कि दोनों बुजुर्गों को तुरंत पूर्ण न्याय दिलाया जाए और उन्हें सम्मानजनक तरीके से उनके घर के अंदर बिठाया जाए। मेरे दो बेटे थे। एक बेटे का कुछ समय पहले देहांत हो चुका है, जबकि दूसरा बेटा मुझे व मेरी पत्नी को बेसहारा छोड़कर अपनी पत्नी के साथ दिल्ली में रह रहा है। हम दोनों पति पत्नी ने मृत बेटे की याद को जिंदा रखने के लिए बाड़ेवाल रोड की पंजाब कॉलोनी वाला 512 गज का करोड़ों रुपये का प्लॉट बारुंदी की एक धार्मिक संस्था के बाबा को दान कर दी थी। दान की शर्त यह थी कि बाबा वहां गरीब बच्चों के लिए एक एजुकेशन सेंटर बनाएंगे, जहां बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाएगी। लेकिन मुझे तब गहरा सदमा लगा, जब पता चला कि बाबा ने वहां कोई एजुकेशन सेंटर नहीं बनाया, बल्कि उस जमीन पर एक आलीशान कोठी खड़ी कर दी और उसे कमाई का साधन बनाते हुए किसी दूसरे को रहने के लिए दे दिया। जब मैं और पत्नी सच्चाई जानने बाबा के पास गए, तो उसने मिलने तक से मना कर दिया। मैंने मामले की शिकायत डीसी से की। प्रशासन के दखल के बाद हम दोनों अपने घर के अंदर तो चले गए, लेकिन वहां मौजूद लोगों ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया। हम दोनों को मेरे ही घर के मुख्य हिस्से से हटाकर एक छोटे से स्टोर रूम में रहने को मजबूर किया , जहां न तो सांस लेने के लिए पंखा है और न ही लेटने के लिए बेड। मुझे अपने ही घर में अंदर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है।- दविंदर सिंह ग्रेवाल पीड़ित प्रोफेसर
सोशल मीडिया पर एक मजाक के तौर शुरू हुई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज अपना पहला प्रदर्शन करेगी। CJP का प्रदर्शन NEET-UG, CBSE, CUET और SSC-GD जैसी परिक्षाओं में हुई धांधलियों और पेपर लीक के खिलाफ है। पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करेगी। CJP ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले समर्थकों के लिए एक गाइडलाइन भी जारी की है। इसमें समर्थकों से सनस्क्रीन लगाकर, नाश्ता करके आने, हाथ में तिरंगा, फूल और किताब लाने जैसी 8 अपील की गई हैं। CJP फाउंडर अभिजीत दीपके सुबह 8 बजे भारत पहुंचेंगे। वे शुक्रवार को अमेरिका से रवाना हुए थे। उन्होंने X पर लिखा- अपना भाग्य संविधान के हाथों में छोड़कर भारत के लिए निकल रहा हूं। दीपके दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरेंगे। वहां से सीधे पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाएंगे और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत लेगें। अभिजीत ने समर्थकों से पुलिस स्टेशन पहुंचने की अपील की है। उन्होंने समर्थकों से कहा है कि एयरपोर्ट पर भीड़ जुटाने की जरूरत नहीं है। CJP ने समर्थकों को बताया- क्या करें, क्या न करें 5 जून की CJP से जुड़ीं अपडेट्स CJI का बयान, चर्चा में CJP 15 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा- कॉकरोच की तरह ऐसे युवा हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। इनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया और कुछ RTI तथा अन्य तरह के एक्टिविस्ट बन रहे हैं। ये हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं। इस बयान के अगले दिन, 16 मई को इंस्टाग्राम पर कॉकरोच जनता पार्टी नाम से एक प्लेटफॉर्म बनाया गया था। अभिजीत बोले- मजाक अब आगे निकल चुका दीपके 19 मई को एक मीडिया इंटरव्यू में कहा था- यह आंदोलन एक मजाक के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन अब यह मजाक से आगे निकल चुका है। युवाओं की बेरोजगारी और व्यवस्था से निराशा ने आंदोलन को बड़ा बनाया। CJP को अब तक सोशल एक्टिविक्ट सोनम वांगचुक, एक्टर अतुल कुलकर्णी, दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) पूर्व प्रेसिडेंट रौनक खत्री समेत अन्य लोगों का समर्थन मिला है। सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में भी शामिल होंगे। CJP इंस्टाग्राम फॉलोअर्स में भाजपा-कांग्रेस, AAP से आगे 4 जून: CJP की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की दिल्ली में पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। पार्टी की तरफ से तीन सौरव दास (मुख्य प्रवक्ता), प्रवक्ता विजेता दहिया और आशुतोष रांका ने पार्टी की मांग रखीं। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफे मांगा। कहा कि CJP सरकार और विपक्ष दोनों से बातचीत को तैयार है। सौरव ने CBSE चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता के तबादले को सिर्फ दिखावा बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय होनी चाहिए और केवल तबादलों से समस्या का समाधान नहीं होगा। पूरी खबर पढ़ें… महाराष्ट्र में दीपके के घर के बाहर पुलिस तैनात दीपके का परिवार महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में रहता है। वर्तमान में उनके घर पर 24 घंटे पुलिस की तैनाती है। पुलिस के मुताबिक, यह तैनाती एहतियान की गई है, क्योंकि सोशल मीडिया पर CJP का मुद्दा ट्रेंड कर रहा है, इसलिए उनके घर के बाहर भीड़ न जुटे, इसे देखते हुए यह कदम उठाया गया। अब जानिए उन पार्टियों के बारे में जो जन आंदोलन से जन्मी कॉकरोच जनता पार्टी के पॉलिटिकल पार्टी बनेगी या नहीं फिलहाल यह तय नहीं है। पार्टी को सोशल मीडिया पर जनता का भारी समर्थन है। लेकिन देश में 6 ऐसी पार्टियां रहीं, जो केंद्र और राज्य की मौजूदा सरकार का विरोध करके चर्चा में आई और राजनीति पार्टी बन गईं। जानिए ऐसी ही 6 पाटियों के बारे में… AAP और CJP की समानता और अंतर
नई दिल्ली। देश के तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए आईआईटी दिल्ली ने देशभर के 18 राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एनआईटी) के साथ शैक्षणिक और शोध सहयोग नेटवर्क की शुरुआत की है। इस पहल के तहत संस्थानों के बीच छात्र एवं फैकल्टी एक्सचेंज, संयुक्त शोध, रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करने और उच्च शिक्षा के नए अवसर विकसित किए जाएंगे। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आईआईटी दिल्ली परिसर में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त सचिव सौम्या गुप्ता, आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी और विभिन्न एनआईटी के निदेशक शामिल हुए। इस दौरान 18 एनआईटी के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें एनआईटी राउरकेला, वारंगल, तिरुचिरापल्ली, कालीकट, जालंधर, कुरुक्षेत्र, इलाहाबाद, जयपुर, भोपाल और नागपुर समेत कई प्रमुख संस्थान शामिल हैं। मेधावी छात्रों को मिलेगा आईआईटी दिल्ली में पढ़ने का मौका नई व्यवस्था के तहत भागीदार एनआईटी के मेधावी स्नातक छात्र अपने अंतिम वर्ष में विशेष एक्सचेंज स्टूडेंट के रूप में आईआईटी दिल्ली में पढ़ाई और रिसर्च कर सकेंगे। वहीं स्नातकोत्तर छात्रों को भी रिसर्च इमर्शन और अकादमिक सहयोग का अवसर मिलेगा। इसके अलावा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को गेट जैसी राष्ट्रीय परीक्षा के बिना एमटेकए एमएस (रिसर्च) और पीएचडी कार्यक्रमों में प्रवेश का अवसर दिया जाएगा। क्रेडिट ट्रांसफर से कम होगा डिग्री पूरा करने का समय सहयोग ढांचे में क्रेडिट ट्रांसफर और क्रेडिट शेयरिंग की व्यवस्था भी शामिल की गई है। इससे छात्र अपने संस्थान और आईआईटी दिल्ली दोनों जगह पढ़ाई कर प्राप्त क्रेडिट का उपयोग कर सकेंगे। इससे उच्च डिग्री पूरी करने में लगने वाला समय कम होगा और शैक्षणिक गुणवत्ता भी बरकरार रहेगी। आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने कहा कि यह पहल संस्थान-केंद्रित विकास से आगे बढ़कर सहयोग आधारित राष्ट्रीय उच्च शिक्षा मॉडल की दिशा में कदम है।
हरियाणा सरकार युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने और तकनीकी शिक्षा को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश के पॉलिटेक्निक संस्थानों में कई नए डिप्लोमा और तकनीकी कोर्स शुरू किए जाएंगे। इन नए कोर्सों में वीएलएसआई डिजाइन, साइबर फोरेंसिक और सूचना सुरक्षा, टेलीकॉम इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल ट्रेड, पर्यावरण इंजीनियरिंग, जीआईएस और सर्वे तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक, एक्स-रे तकनीक, पत्रकारिता एवं जनसंचार, शुगर टेक्नोलॉजी तथा फैशन डिजाइनिंग जैसे विषय शामिल हैं। हर कोर्स में 60 स्टूडेंट्स को मिलेगा एडमिशन महिपाल ढांडा ने कहा कि ये कोर्स उद्योगों की मौजूदा और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं, ताकि युवाओं को पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार से जुड़े और व्यावहारिक कौशल भी मिल सकें। उन्होंने कहा कि आज के समय में तेजी से बदलती तकनीक के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षित करना जरूरी है। जिससे उन्हें नौकरी पाने में आसानी हो। हर कोर्स में 60 विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाएगा। नई शिक्षा नीति के तहत फैसला इन कार्यक्रमों के जरिए छात्रों को आधुनिक तकनीक, डिजिटल सुरक्षा, ग्रीन टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य सेवाओं और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण मिलेगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और इंडस्ट्री 4.0 की जरूरतों के अनुरूप है। इससे प्रदेश के युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी और हरियाणा में उद्योगों के लिए कुशल और प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होगा।
संस्कार शिविर में नैतिक शिक्षा पर दिया जोर
पानीपत| जिनवाणी विद्या भारती स्कूल में वर्धमान श्वेतांबर जैन सभा अग्रवाल मंडी द्वारा आयोजित दस दिवसीय संस्कार शिविर के पांचवें दिन नैतिक शिक्षा पर विचार व्यक्त किए गए। डॉ. एपी जैन ने कहा कि शिक्षा से प्राप्त बुद्धि भरोसेमंद साथी है, लेकिन गलत दिशा में जाने पर विनाशकारी हो सकती है। उन्होंने विश्व में बढ़ते युद्ध और विनाशकारी हथियारों का उल्लेख करते हुए मानवता आधारित नैतिकता की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में राजेंद्र जैन और सुशील जैन उपस्थित रहे।
सांसद निधि का 99.08% बजट विकास कार्यों में स्वीकृत, 82.14% शिक्षा पर खर्च
भास्कर न्यूज | बाड़मेर बाड़मेर-जैसलमेर-बालोतरा संसदीय क्षेत्र के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने अपने कार्यकाल के दो साल पूरे होने पर सांसद निधि के उपयोग का ब्यौरा जारी किया। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में कुल 10 करोड़ रुपए की सांसद निधि स्वीकृत हुई। इसमें से 9.80 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हुई। 9.71 करोड़ रुपए के कार्य स्वीकृत या प्रगतिरत हैं। यह कुल का 99.08 प्रतिशत है। बेनीवाल के अनुसार कुल खर्च का 82.14 प्रतिशत, करीब 7.98 करोड़ रुपए शिक्षा क्षेत्र में लगाया गया। इस राशि से स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड, भवन निर्माण, अतिरिक्त कक्षाओं का विस्तार और आधारभूत सुविधाओं के काम कराए गए। शेष 17.86 प्रतिशत राशि अन्य विकास कार्यों पर खर्च की गई। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तीन जिला अस्पतालों में एम्बुलेंस सेवा से जुड़े कार्यों पर करीब 27 लाख रुपए खर्च किए गए। धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों पर 77 लाख रुपए स्वीकृत किए गए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की आवश्यकता के अनुसार नए महाविद्यालय प्रारंभ किए जाएं। जिन सघन आबादी वाले क्षेत्रों में महाविद्यालय संचालित हैं, वहां विद्यार्थी संख्या बढ़ने पर शिफ्ट व्यवस्था लागू कर शैक्षणिक सुविधा देने पर विचार किया जाए। इसके साथ ही राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की तर्ज पर राज्य परिषद अर्थात सैक के गठन की कार्यवाही प्रारंभ की जाए। उन्होंने कहा कि रोजगार परक पाठ्यक्रमों पर फोकस किया जाए। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि आने वाला वर्ष युवा वर्ष होगा, इस नाते अन्य संबंधित विभागों के साथ विद्यार्थियों के हित में नए कार्यक्रमों और प्रकल्पों को लागू करने की तैयारी भी की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उच्च शिक्षा विभाग के कामों की समीक्षा करते हुए प्रदेश में कृषि के स्नातक पाठ्क्रम की व्यवस्था सुनिश्चित कर इस विषय को लोकप्रिय बनाने के प्रयासों पर खुशी जताई है। उन्होंने कृषि पाठ्यक्रम से प्रदेश के लगभग 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों को जोड़ने की सफलता के लिए उच्च शिक्षा विभाग को बधाई भी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छिन्दवाड़ा के राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय में अच्छे विषयों का समावेश करें। इसके लिए राज्य सरकार आवश्यक आर्थिक सहयोग देगी। विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण, आर्किटेक्चर और कृषि विज्ञान के कोर्स के लिए व्यवस्था की जाए। विद्यार्थियों की रूचि के अनुरूप नए पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएं। प्रदेश में इंदौर, उज्जैन और चित्रकूट में तीन वर्षीय विमानन पाठ्यक्रम बीबीए प्रारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता में निरंतर सुधार के कदम उठाए जाएं। पीएमश्री महाविद्यालयों में भी इस दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं। अन्य सभी शासकीय महाविद्यालयों में भी शिक्षण और अन्य गतिविधियों का सुचारू संचालन होता रहे, इस पर ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नए पाठ्यक्रमों को प्रारंभ करने की दिशा में हुए कार्यों की जानकारी प्राप्त की। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में इंदौर, उज्जैन और चित्रकूट में तीन वर्षीय विमानन पाठ्यक्रम बीबीए प्रारंभ किया गया है। प्रदेश की तीन अन्य उच्च शिक्षण संस्थाओं को भी नेशनल इन्स्टिट्यूशनल रैंकिंग फ्रेम वर्क (एनआईआर एफ) द्वारा श्रेष्ठ व्यवस्थाओं के लिए सराहा गया है। स्वयं पोर्टल पर उपलब्ध पाठ्यक्रमों में पंजीयन के कार्य में मध्यप्रदेश ने जुलाई 2025 में 3 लाख 52 हजार 931 पंजीयन कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। जुलाई 2026 के सेमेस्टर में यह संख्या 2 लाख 73 हजार 266 हो गई है। प्रदेश में गुना, खरगौन और सागर में नए विश्वविद्यालय और आगर मालवा में लॉ कॉलेज प्रारंभ किया गया। प्रदेश के 8 महाविद्यालयों में 28 विषयों में पीजी कक्षाएं प्रारंभ की गईं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भगवंत मान सरकार की तारीफ करते हुए कहा है कि महज 4 साल में ही शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब को नंबर वन बना दिया। केजरीवाल ने गुरुवार को कहा कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा में कभी 27वें स्थान पर रहा पंजाब आज पहले स्थान पर पहुंच गया है। यह सर्वे केंद्र सरकार के नीति आयोग का है, जिसके अनुसार, पंजाब ने केरल को भी पीछे छोड़ दिया है। दिल्ली में शिक्षा क्रांति के बाद अब पंजाब के सरकारी स्कूलों में भी ऐतिहासिक बदलाव हो रहा है। उन्होंने मान सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि यह मुख्यमंत्री भगवंत मान की बड़ी उपलब्धि है कि महज 4 साल में ही शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब को नंबर वन बना दिया। आज पंजाब के शिक्षा व्यवस्था में जबरदस्त आत्मविश्वास आने की वजह से सरकारी स्कूलों के बच्चे नीट और जेईई पास कर रहे हैं। '2020 में शिक्षा के मामले में 27वें स्थान पर था पंजाब' आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पंजाब ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नीति आयोग के ताजा सर्वे में पंजाब पूरे देश में पहले स्थान पर आया है। उन्होंने बताया कि यह कोई निजी सर्वे नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के नीति आयोग द्वारा किया गया सर्वे है, जिसमें सभी राज्यों की शिक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन किया जाता है। केजरीवाल ने कहा कि वर्ष 2020 में पंजाब शिक्षा के मामले में 27वें स्थान पर था, लेकिन अब राज्य ने बड़ी छलांग लगाते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया है। उन्होंने इसे पंजाब सरकार, शिक्षकों और विद्यार्थियों की मेहनत का परिणाम बताया। 'NEET-JEE जैसी परीक्षाएं पास कर रहे सरकारी स्कूलों के छात्र' उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी शिक्षा और स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा महत्व देती है। पंजाब में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। इसका असर अब दिखाई देने लगा है। सरकारी स्कूलों के छात्र NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं पास कर डॉक्टर और इंजीनियर बन रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि यह उपलब्धि पूरे शिक्षा तंत्र में नया आत्मविश्वास लेकर आई है। शिक्षक, प्रिंसिपल और विद्यार्थी उत्साह के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी बहुत काम बाकी है, लेकिन पंजाब का नंबर-1 बनना एक बड़ी सफलता है और यह साबित करता है कि सही नीयत और प्रयास से बड़े बदलाव संभव हैं।
रेवाड़ी में नीट परीक्षा रद्द होने और सीबीएसई परीक्षा में कथित धांधली के विरोध में युवाओं ने प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक यूथ ऑर्गनाइजेशन (एआईडीवाईओ) सहित कई सामाजिक संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार से खाली पदों को तुरंत भरने सोशल मीडिया पर बनी कॉकरोच जनता पार्टी पर अंकुश लगाने और रोजगार को संविधान में मौलिक अधिकार बनाने की भी मांग की। जान गंवाने वाले छात्रों को दी श्रद्धांजलि शहर की ब्रास मार्केट में विरोध प्रदर्शन के दौरान, नीट परीक्षा रद्द होने से प्रभावित परीक्षार्थियों और कथित तौर पर जान गंवाने वाले छात्रों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व अजय सिंह, सुरेंद्र कुमार रोहिल्ला और सोमेंद्र ने किया। कॉमरेड राजेंद्र सिंह, खेमचंद, हेमंत पिलानी, हरिओम, संजय शर्मा, कैलाश चंद, धर्मबीर बुलडोदिया, राजकुमार जलवा, गोविंद, संदीप, प्रदीप, सूबे सिंह, करतार सिंह, संतोष, सुमन देवी और रणबीर सिंह सहित कई अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखे। वक्ता बोले- आज देश का युवा और छात्र परेशान वक्ताओं ने कहा कि आज देश और प्रदेश के छात्र तथा युवा परेशान हैं। उनकी मेहनत का फल नहीं मिल रहा है और उनके करियर को कथित तौर पर सुनियोजित तरीके से बर्बाद किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बेरोजगारी इतनी अधिक है कि उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को भी चतुर्थ श्रेणी की नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं। वक्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकारों की जनविरोधी नीतियों को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया। कहा कि भारत में बड़ी संख्या में युवा डिप्रेशन का शिकार होकर आत्महत्या कर रहे हैं। वक्ताओं ने बेरोजगारी का मूल कारण पूंजीवादी व्यवस्था को बताया और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा बेरोजगार युवाओं को 'कॉकरोच' और 'परजीवी' कहे जाने पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों ने इन मुद्दों को लेकर आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया और एआईडीवाईओ ने जनता से युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए आगे आने की अपील की।
सरगुजा जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार झा ने जिले के सभी सेजेस, पीएमश्री और डीपीआई पब्लिक स्कूलों के प्राचार्यों की समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में वर्ष 2026 के बोर्ड परीक्षा परिणामों की समीक्षा की गई। साथ ही डीईओ ने स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए। बैठक में डीईओ ने उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम देने वाले विद्यालयों के प्राचार्यों को बधाई देते हुए अन्य विद्यालयों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सभी प्राचार्यों को विद्यालयों में सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण बेहतर बनाने, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के साथ समन्वय बनाकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था देने के निर्देश दिए। खराब रिजल्ट पर जताई चिंता समीक्षा के दौरान कुछ विद्यालयों के परीक्षा परिणाम संतोषजनक नहीं मिलने पर डीईओ ने चिंता जताई। डीईओ ने विद्यार्थियों की दर्ज संख्या बढ़ाने, पालकों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से नामांकन में वृद्धि करने और उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित करने कहा। साथ ही शिक्षण कार्य में रुचि नहीं लेने वाले शिक्षकों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने कहा गया। बैठक में ड्रॉपआउट विद्यार्थियों का सर्वेक्षण कर उन्हें पुनः विद्यालय से जोड़ने और कक्षा 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ चुके विद्यार्थियों को ओपन स्कूल के माध्यम से कक्षा 10वीं की परीक्षा दिलाने के प्रयास करने पर विशेष जोर दिया गया। सीट बढ़ाने के लिए मंगाया गया प्रस्ताव कुछ प्रिंसिपलों ने स्कूलों में सीटों की कमी के कारण प्रवेश में कठिनाइयों की जानकारी दिए जाने पर डीईओ ने सीट बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त विद्यालयों में नशामुक्ति अभियान चलाने, वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित करने और विद्यालय परिसरों में अनिवार्य रूप से ग्रीन फेंसिंग कराने के निर्देश भी दिए गए। अंत में डीईओ ने सभी प्रिंसिपलों से निर्देशों का गंभीरता से पालन करने एवं बेहतर रिजल्ट के लिए कार्य करने का निर्देश दिया।
केंद्र सरकार के 12 साल पूरे होने पर कानपुर के प्रभारी और उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सरकार की उपलब्धियां गिनाई। उनसे नीट समेत कई बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक और अन्य मुद्दों पर सवाल किया गया। तब मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार में पेपर लीक कम हुआ है, जबकि इससे पहले पेपर लीक ज्यादा होते थे। इतना ही नहीं मंत्री ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के सवाल पर कहा कि जिन्होंने पेपर लीक कराया, सबके खिलाफ कड़ा एक्शन हो रहा है। मंत्री का पेपर लीक कराने में कोई इन्वॉलमेंट होता तो उन्हें भी जेल भेज दिया जाता। इससे पहले किसी नेता ने इस्तीफा दिया है क्या, जो उनसे इस्तीफे की मांग की जा रही है। विपक्ष इसे जबरन मुद्दा बनाकर तूल दे रहा है। कहा- मर्डर करे दाड़ी वाला और जेल जाए मूछों वाला मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा- पेपर लीक सरकार की नाकामी नहीं है, पहले कितने ज्यादा पेपर लीक होते थे, अब पेपर लीक कम हो रहे हैं। आप पिछली सरकारों से तुलना कीजिए, पहले 100 पेपर लीक होते थे तो अब महज 10 पेपर लीक हो रहे हैं। 90 की कमी आई है और आगे भी कमी आएगी। पहले लोग अपराधियों और पेपर लीक कराने वाले को संरक्षित करते थे और हमारी सरकार दंडित करती है। मंत्री का इस्तीफा क्यों हो, इससे पहले किसी मंत्री ने इस्तीफा दिया है क्या? मंत्री जिम्मेदार नहीं हैं। दाड़ी वाला मर्डर करे और मूछ वाला पकड़ा जाए। मंत्री जी तो इसमें शामिल नहीं थे, अगर मंत्री जी शामिल होते तो जेल जाते। भारत आर्थिक मंदी की चपेट में है? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि पहले भी आर्थिक मंदी आई थी और मोदी जी ने बहुत खूबसूरती से निपटा था। मौजूदा समय में यूक्रेन-रूस का युद्ध, ईरान और अमेरिका का युद्ध के चलते यह मंदी है। एक फिल्म का उदाहरण देते हुए बताया कि मंदी का असर विश्वव्यापी है, लेकिन मोदी जी हर चुनौती को स्वीकार करते हैं। मोदी है तो मुमकिन है। विश्व में जिस हिसाब से पेट्रोल की कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन भारत में यह अनुपात बेहद कम है। आयुष्मान योजना को बेहतर बताया आयुष्मान योजना 70 साल के व्यक्ति को क्यों नहीं मिलती…? इस पर प्रभारी ने कहा कि पहले की सरकारों में तो 60 साल के लोगों को भी मुफ्त इलाज नहीं मिल रहा था। अब कम से कम इलाज तो मिल रहा है। आज उत्तर प्रदेश के हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज है, जबकि पहले प्रदेश में सिर्फ 14 मेडिकल थे। आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में पहले कोई सुविधा नहीं थी, लेकिन मौजूदा समय में हमारा मेडिकल कॉलेज एम्स को टक्कर दे रहा है। कॉकरोच पार्टी के सवाल पर कहा कि यह एक बुलबुला पार्टी है। इस पार्टी का कोई संविधान और अस्तित्व नहीं है।
भोपाल के ऐतिहासिक बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव पर मध्य प्रदेश की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा इसका नाम बदलकर 'वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' करने का प्रस्ताव पारित कर राज्यपाल मंगू भाई पटेल को भेजे जाने के बाद से ही इस पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। एक तरफ जहां विपक्ष इसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के अपमान से जोड़ रहा है, वहीं सरकार इस दिशा में कदम आगे बढ़ाती दिख रही है। इसी कड़ी में आज गुरुवार को प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने राज्यपाल से मुलाकात भी की है। सबसे पहले उच्च शिक्षा मंत्री ने क्या कहा वो पढ़िए उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद कहा: कल कार्यपरिषद की बैठक में यह प्रस्ताव आया है। वो प्रस्ताव सरकार और हमारे विभाग के पास आने वाला है उसके बाद हम उस पर विचार करेंगे। विश्वविद्यालय ऑटोनॉमस बॉडी है कार्यपरिषद अपने निर्णय लेती है। उनका प्रस्ताव अभी हमारे पास आया नहीं है उसको देखकर मुख्यमंत्री जी से विमर्श करके फिर आगे निर्णय करेंगे। अभी ये कार्यपरिषद का निर्णय है। उस निर्णय का हम समग्र अध्ययन करेंगे। नीट के मुद्दे से भटकाने का काम किया: कांग्रेस विधायक कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा बरकतउल्लाह विश्वाविद्यालय नाम बदलना ये एक बहुत अफसोस जनक निर्णय है। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है। एक महान क्रांतिकारी का नाम बदलना है तो होना यह चाहिए था कि नीट परीक्षा के बच्चों पर चर्चा होती है उनके भविष्य पर चर्चा होती। उनके साथ जो घटनायें हुई उसको लेकर सरकार और विश्वाविद्यालयों और शिक्षा मंत्री को विचार करना था। ये ना करके उसको उलझाने का काम किया है और उसमें जो पत्र लिखा वो और अफसोस जानक है जिसकी मैं निंदा करता हूं। वाग्देवी के नाम पर नया विश्वविद्यालय बना देते विधायक ने कहा- वाग्देवी के नाम पर आप नया विश्वाविद्यालय बना देते थे। उसमें क्या बुराई है सब स्वागत करेंगे। एक बनी-बनाई संस्था के 38 साल से चलते हुए नाम को आप हटाना चाहते हैं और यह कहना कि वो कौन थे? वो व्यक्ति था जो आजाद भारत का भारत का प्रधानमंत्री था। राजा महेंद्र सिंह राष्ट्रपति थे। उसने एक बड़ा आंदोलन देश के लिए किया और इस प्रदेश के लिए किया। ऐसे व्यक्ति के नाम को बदलना गलत है। मैंने राज्यपाल महोदय से समय मांगा है जैसे ही समय मिलता है उनसे मुलाकत करेंगे क्योंकि इसके मुखिया राज्यपाल होते हैं। मैं मोहन यादव जी से भी कहना चाहता हूं कि आज कल आप बड़े सिध्दांत की बातें कर रहे हैं। सुना है बहुत सिद्धांत वादी मुख्यमंत्री बनने का प्रयास कर रहे हैं आप तो अगर वास्तव में सिद्धांतवादी हैं तो आप उसका परिचय दें कि एक महान क्रांतिकारी बरकतउल्लाह भोपाली का नाम इस तरह बदनाम ना किया जाए और ना बदला जाए। क्रांतिकारी का नाम कैसे बदल देंगे विधायक आरिफ मसूद ने कहा- मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि कांग्रेस को भी इसमें साथ होना चाहिए और एक महान क्रांतिकारी का नाम को आप कैसे बदल दोगे? 38 साल से चल रहे एक इंस्टीट्यूट का नाम आप बेवजह बदल रहे हो। कोई वजह नहीं है तो आपको इस तरह बदलने का अधिकार जनता ने सरकार बनाकर दे जरुर दिया लेकिन आप उसका ध्यान रखिए इस गरिमा का और संविधान का ध्यान रखें। उच्च शिक्षा मंत्री के प्रस्ताव का अध्ययन करने के बाद फैसला लेने के बयान पर विधायक मसूद ने कहा- राज्यपाल महोदय इसके मुखिया होते हैं मैं उनसे मिलने जा रहा हूं लेकिन यह तो तय करना पड़ेगा शिक्षा मंत्री जी को कि जो एग्जीक्यूटिव कमेटी ने बरकतउल्लाह भोपाली के नाम पर जो टिप्पणी की है वो निंदनीय है या नहीं है। एग्जीक्यूटिव काउंसिल बच्चों का भविष्य बनाने और विश्वाविद्यालय का नाम बढ़ाने की बात करेगी या घटाने की करेगी। बरकतुल्लाह ने विदेश में भारत का झंडा बुलंद किया विधायक ने कहा- बरकतुल्लाह भोपाली पहले व्यक्ति हैं जिसने विदेश में रहकर अंग्रेजों के खिलाफ झंडा बुलंद करके सरकार बना ली थी, राजा महेंद्र राष्ट्रपति बने और ये प्रधानमंत्री बने थे। लेकिन, असल में ये जो एग्जीक्यूटिव काउंसिल है इनके जो पुरोधा हैं जिस संस्था से ये निकलकर आते हैं उनका आज़ादी में योगदान नहीं था इसलिए इनको क्रांतिकारियों की गरिमा का एहसास नहीं है जिन्होने देश के लिए खून बहाया है उनको एहसास होता है। भोज यूनिवर्सिटी का किसी ने विरोध नहीं किया कांग्रेस की सरकार में पहले नाम बदले को लेकर विधायक ने कहा- ये बात सही है लेकिन उससे पहले सागर में जाता था भोपाल, वो 15-20 साल चला उसके बाद एक क्रांतिकारी के नाम पर रखा जाए जिसने इतना बड़ा योगदान दिया तो अब इसका नाम हटाने का उचित कारण बताएं। आप वाग्देवी के नाम पर कर रहे हैं हम तो विरोध नहीं कर रहे। हम कह रहे हैं कि एक नया विश्वविद्यालय बनाईए। आपने बहुत विश्वविद्यालय बनाए आपने भोज यूनिवर्सिटी बनाई तो किसी ने विरोध किया क्या?
समस्तीपुर के शिवाजीनगर प्रखंड मुख्यालय स्थित सभागार में आज पंचायत समिति की सामान्य बैठक हुई। प्रखंड प्रमुख डॉ. गोविंद कुमार ने बैठक की अध्यक्षता की, जबकि प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) आलोक कुमार सिंह ने इसका संचालन किया। इसमें प्रखंड क्षेत्र के पंचायत प्रतिनिधियों, पंचायत समिति सदस्यों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में प्रखंड क्षेत्र में संचालित विकास योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति पर चर्चा हुई, जिसमें अधिकारियों ने संबंधित योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। बता दें कि मीटिंग के दौरान शिक्षा व्यवस्था में सुधार का आदेश दिया गया है। साथ ही प्राथमिक और उप प्राथमिक केंद्रों पर गरीब मरीजों के लिए चिकित्सा सुविधा और विभिन्न पंचायतों में जर्जर सड़क को जल्द मरम्मती का निर्देश है। इसके अलावा राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं पर विशेष निगरानी देकर क्रियान्वयन करने को लेकर आदेश पारित किया गया है। सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा इसके अलावा, पंचायत स्तर पर चल रहे विकास काम, पेयजल व्यवस्था, स्वच्छता अभियान, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क निर्माण, आवास योजना और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने पंचायत क्षेत्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने ग्रामीण सड़कों की मरम्मत, जलजमाव, पेयजल आपूर्ति, आवास योजना के लंबित मामलों और अन्य विकास संबंधी आवश्यकताओं को अधिकारियों के समक्ष रखा। जनप्रतिनिधियों ने लंबित योजनाओं को शीघ्र पूरा करने और विकास काम में तेजी लाने की मांग की। योजनाओं का फायदा अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का आदेश प्रखंड प्रमुख डॉ. गोविंद कुमार ने कहा कि पंचायत समिति की बैठक जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनता से जुड़े मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करें और विकास योजनाओं का फायदा अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं। बीडीओ आलोक कुमार सिंह ने विभिन्न विभागों की योजनाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की योजनाओं का पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन प्रशासन की प्राथमिकता है और विकास काम में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पंजाब में लड़कियों की शिक्षा, किशोर स्वास्थ्य और लैंगिक-संवेदनशील शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम उठाए है। सीएम भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में पढ़ रही लड़कियों के लिए भारत की सबसे बड़ी स्कूल-आधारित मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा पहलों में से एक की शुरुआत की है। 28 मई को मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर पंजाब सरकार ने राज्य के सभी 23 जिलों के सरकारी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में “मासिक धर्म स्वच्छता पाठ्यक्रम” के चरणबद्ध राज्य स्तरीय विस्तार की घोषणा की। पाठ्यक्रम का पहला सत्र इन सरकारी स्कूलों में 29 मई को आयोजित किया गया। इस पहल से 3,600 से अधिक सरकारी स्कूलों में पढ़ रही छठी से 10वीं कक्षा की 3.4 लाख से अधिक छात्राओं को सीधे तौर पर लाभ मिलने की उम्मीद है। मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा को कक्षाओं तक पहुंचाया यह पहल भगवंत मान सरकार द्वारा सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को आधुनिक और सभी के लिए सुलभ बनाने की दिशा में दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाती है। जहां लड़कियों को जागरूकता, आत्मविश्वास, सम्मान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य जानकारी तक पहुंच प्रदान की जा रही है। मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा को इतने बड़े स्तर पर कक्षाओं तक पहुंचाकर पंजाब सरकार ने एक ऐसे विषय को संबोधित करने का प्रयास किया है, जो पारंपरिक रूप से चुप्पी, झिझक, मिथकों और सामाजिक भय से घिरा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मासिक धर्म कभी भी लड़कियों की शिक्षा, आत्मविश्वास, भागीदारी, कल्याण या स्कूल जीवन में बाधा न बने। यह कार्यक्रम भारत के सर्वोच्च न्यायालय की उन टिप्पणियों के अनुरूप है, जिनमें यह स्वीकार किया गया है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता सीधे तौर पर किशोर लड़कियों की गरिमा, शिक्षा और समानता से जुड़ी हुई है। पंजाबी भाषा में तैयार किया “मेनस्ट्रुअल हाइजीन मैनेजमेंट” भगवंत मान सरकार ने यह कार्यक्रम वॉश यूनाइटेड के सहयोग से शुरू किया है, जो मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता के क्षेत्र में कार्यरत एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्था है। इस पहल के तहत “मेनस्ट्रुअल हाइजीन मैनेजमेंट” नामक एक संरचित पाठ्यक्रम के माध्यम से विशेष रूप से तैयार किए गए कक्षा सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिन्हें पंजाबी भाषा में तैयार किया गया है ताकि छात्राएं विषयवस्तु को बेहतर ढंग से समझ सकें। इस सत्र के अंतर्गत गाइड के मुख्य पात्र के रूप में 10 वर्षीय लड़की रूबी की कहानी प्रस्तुत की जाती है। साथ ही छात्राओं के लिए सीखने की प्रक्रिया को रोचक, सहभागितापूर्ण और सुरक्षित बनाने हेतु कक्षा में विचार-विमर्श तथा भागीदारी आधारित गतिविधियां भी शामिल की गई हैं। यह सत्र छात्राओं को मासिक धर्म और शारीरिक परिवर्तनों को समझने, स्वच्छता एवं स्वयं की देखभाल संबंधी आदतों के बारे में जानकारी देने, आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ाने तथा स्कूल एवं साथियों के बीच सहयोगी वातावरण तैयार करने पर केंद्रित हैं। 7,200 शिक्षकों को पहले ही प्रशिक्षण दिया राज्यभर में इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा लगभग 7,200 शिक्षकों को पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है ताकि वे इन सत्रों को कक्षाओं में सहज तरीके से संचालित कर सकें। यह कार्यक्रम एक संरचित तीन-सत्रीय हस्तक्षेप मॉडल के तहत कार्य करता है, जिसमें कहानी-आधारित शिक्षण और आयु-उपयुक्त मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा शामिल है। 100 स्टेट रिसोर्स पर्सन्स को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया भगवंत मान सरकार द्वारा राज्यभर में कार्यक्रम शुरू करने से पहले शिक्षकों को व्यापक स्तर पर तैयार किया गया है। लगभग 100 स्टेट रिसोर्स पर्सन्स को पहले मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया, जिसके बाद हजारों सरकारी स्कूल शिक्षकों को तैयार करने के लिए जिलों में क्रमिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। अधिकारियों ने कहा कि यह शिक्षक प्रशिक्षण सुरक्षित कक्षा वातावरण तैयार करने में मदद करेगा, जहां लड़कियां खुलकर सवाल पूछ सकेंगी और बिना शर्म या डर के सही जानकारी प्राप्त कर सकेंगी। 23 जिलों के 100 से अधिक सरकारी स्कूलों में शुरुआत इस पहल की शुरुआत पंजाब के सभी 23 जिलों के 100 से अधिक सरकारी स्कूलों में चलाए गए एक पूर्व पायलट कार्यक्रम के उत्साहजनक परिणामों को देखते हुए की गई है, जिसमें 45,000 से अधिक छात्र शामिल थे। पंजाब सरकार द्वारा साझा किए गए परिणामों के अनुसार, इस पायलट कार्यक्रम में शामिल 97 प्रतिशत शिक्षकों ने कहा कि वे नए पाठ्यक्रम के माध्यम से पीरियड्स संबंधी शिक्षा प्रदान करने में सहज महसूस करते हैं, जबकि 94 प्रतिशत ने सिफारिश की कि इस कार्यक्रम का विस्तार पूरे पंजाब में किया जाना चाहिए। लगभग 88 प्रतिशत शिक्षकों ने पाठ्यक्रम को पहले के तरीकों की तुलना में अधिक सरल और प्रभावशाली बताया, जबकि 80 प्रतिशत ने कक्षा सत्रों के दौरान छात्राओं की सक्रिय भागीदारी देखी। 'पाठ्यक्रम के माध्यम से लड़कियां खुलकर चर्चा कर सकीं' पायलट कार्यक्रम से जुड़े शिक्षकों ने कहा कि पाठ्यक्रम के माध्यम से लड़कियां बिना किसी झिझक के माहवारी के बारे में खुलकर चर्चा कर सकीं और उन्हें माहवारी से जुड़े सामाजिक भय को दूर करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। फरीदकोट की एक अध्यापिका जसप्रीत कौर ने कहा, “माहवारी के दौरान स्वच्छता संबंधी यह पाठ्यक्रम लड़कियों के लिए सवाल पूछने और अपने अनुभव साझा करने हेतु एक सुरक्षित वातावरण तैयार करता है। जिससे माहवारी से जुड़े मिथकों को प्रभावी ढंग से दूर किया जा सकता है। कहानियों, खेलों और दृश्य सामग्री के माध्यम से अपनाई गई इंटरैक्टिव पद्धति सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज और आत्मीय बनाती है तथा डर और झिझक की भावना को कम करती है। यह निश्चित रूप से आत्मसम्मान और सहभागिता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।” 'कार्यक्रम के कारण कक्षाओं में माहवारी पर खुलकर बातचीत करना संभव हुआ' अमृतसर की एक अन्य अध्यापिका मोनिका सूद ने कहा कि लड़कियों ने सत्रों में उत्साहपूर्वक भाग लिया और खुलकर यह साझा किया कि घरों और समुदायों में माहवारी को किस प्रकार देखा और समझा जाता है। उन्होंने कहा कि माहवारी स्वच्छता के प्रति जागरूकता की कमी किशोरियों के लिए कई स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां पैदा कर सकती है, जबकि यह मार्गदर्शन उन्हें अपने शरीर को आत्मविश्वास और सम्मान के साथ समझने में सहायता करता है। शिक्षकों ने यह भी बताया कि इस कार्यक्रम के कारण कक्षाओं में माहवारी पर खुलकर बातचीत करना संभव हो पाया है। मोगा की एक अध्यापिका सिल्वी ने कहा कि लड़कियाँ ही नहीं, बल्कि वे अध्यापिकाएँ भी जो पहले माहवारी पर बात करने में झिझक महसूस करती थीं, अब सत्रों के दौरान खुलकर और आत्मविश्वास के साथ इस विषय पर चर्चा करने लगी हैं। इन सत्रों ने छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ाया कार्यक्रम में भाग लेने वाली छात्राओं ने भी सत्रों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। संगरूर की 9वीं कक्षा की छात्रा कोमल प्रीत कौर ने कहा कि इन सत्रों ने उसका आत्मविश्वास बढ़ाया और उसे यह समझने में मदद की कि माहवारी एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है, कोई बीमारी नहीं। मोगा की एक अन्य छात्रा डिंपल रानी ने कहा कि उसे ये सत्र बहुत रोचक लगे और उसने घर जाकर अपनी मां के साथ अपने सीखने के अनुभव साझा किए। 10वीं कक्षा की छात्रा तनीशा ने कहा कि पाठ्यक्रम के कारण लड़कियां सत्रों के दौरान बिना शर्म महसूस किए खुलकर बात कर सकीं, क्योंकि इससे उनमें आत्मविश्वास विकसित हुआ। 'विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और कल्याण को बेहतर बनाना उद्देश्य' अधिकारियों ने बताया कि इस पहल के माध्यम से पंजाब न केवल माहवारी स्वास्थ्य जागरूकता का विस्तार कर रहा है, बल्कि किशोरियों के लिए अधिक संवेदनशील, प्रगतिशील और सहयोगात्मक शिक्षा व्यवस्था का निर्माण भी कर रहा है। सरकारी स्कूलों में माहवारी स्वास्थ्य शिक्षा को संस्थागत रूप देने के जरिए पंजाब सरकार विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और कल्याण को बेहतर बनाने, शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी को मजबूत करने तथा पूरे राज्य में अधिक जागरूक और सशक्त युवा पीढ़ी तैयार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इस पहल को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में किए जा रहे व्यापक शिक्षा सुधारों का हिस्सा भी माना जा रहा है, जिसके अंतर्गत पंजाब सरकार ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढाँचे के विकास, अध्यापक प्रशिक्षण, विद्यार्थियों के कल्याण तथा आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है।
हरियाणा में सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने राज्य के 582 सरकारी हाई और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों की बाउंड्री वॉल की मरम्मत के लिए संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) से विस्तृत रिपोर्ट और लागत अनुमान तलब किया है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय, पंचकूला द्वारा प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। निदेशालय के अनुसार हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) से प्राप्त सूची के परीक्षण में पाया गया कि 582 स्कूल ऐसे हैं, जहां बाउंड्री वॉल की मरम्मत की आवश्यकता है, लेकिन सूची में मरम्मत की अनुमानित लागत का उल्लेख नहीं किया गया है। इसके चलते अब संबंधित स्कूलों की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि मरम्मत कार्य के लिए सही लागत का आकलन किया जा सके। PWD करेगा लागत का आकलन पत्र में कहा गया है कि जियो टैगिंग और अन्य दस्तावेज मिलने के बाद हरियाणा पीडब्ल्यूडी (भवन एवं सड़क) विभाग द्वारा मरम्मत कार्य की लागत का अनुमान तैयार किया जाएगा। CCWF फंड से भी हो सकती है मरम्मत निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी स्कूल की बाउंड्री वॉल मरम्मत की लागत एक लाख रुपए से कम है और कंसोलिडेटेड चाइल्ड वेलफेयर फंड (CCWF) में पर्याप्त राशि उपलब्ध है, तो मरम्मत कार्य उसी फंड से कराया जा सकेगा। यदि फंड उपलब्ध नहीं है तो संबंधित अनुमान और दस्तावेज निदेशालय को भेजे जाएंगे। 3 दिन में मांगी रिपोर्ट शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि मांगे गए दस्तावेज और जानकारी तीन दिन के भीतर उपलब्ध कराई जाए, ताकि आगे की कार्रवाई जल्द शुरू की जा सके।
गुरमत कैंप : राग और शबद के मेल से नई पीढ़ी सीख रही सिख धर्म की मूल शिक्षाएं
कोरा ज्ञान इंसान के दिमाग तक जाता है, लेकिन जब वही ज्ञान ‘राग’ (संगीत) और ‘शबद’ (शब्द) के मेल से कीर्तन बनकर निकलता है, तो वह सीधे इंसान के दिल और आत्मा को छूता है। इसीलिए इसे धुर की बाणी (परमात्मा के घर से आई वाणी) कहा जाता है। कुछ इस तरह सेंट्रल टाउन स्थित गुरुद्वारा दीवान अस्थान में निशुल्क गुरमत कैंप के दौरान सिख धर्म की मूल शिक्षाओं और कलाओं से रूबरू करवाया गया। गुरमत कैंप में 5 साल के छोटे बच्चों से लेकर 20 साल तक के किशोरों ने बढ़-चढ़कर अपना पंजीकरण करवाया है। आयोजकों ने बताया कि इस आयु वर्ग में बच्चों का मानसिक विकास तेजी से होता है, इसलिए उन्हें अपनी संस्कृति और धर्म की सही जानकारी देना बेहद जरूरी है। गुरुद्वारा साहिब का परिसर बच्चों की रौनक और उत्साह से सराबोर नजर आया। मौके पर प्रबंधक कमेटी के प्रधान मोहन सिंह ढींडसा, जनरल सेक्रेटरी गुरमीत सिंह बिट्टू, सुरिंदर सिंह विरदी, मक्खन सिंह, बावा गाबा, जसकीरत जस्सी, हरमनजोत सिंह, गुरनीत सिंह, अनमोल सिंह, परमिंदर सिंह, हरप्रीत सिंह, जसदीप मौजूद रहे। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी केवल एक आध्यात्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह संगीत और अध्यात्म का एक अनूठा संगम है। सभी 31 रागों का अपना एक विशेष समय, मिजाज और भावना होती है। गुरु साहिबान ने हर भावना को ईश्वर से जोड़ने के लिए सही राग का चुनाव किया। जैसे- राग आसा : यह सुबह के समय गाया जाता है, जो मन में आशा और उत्साह जगाता है। राग बिलावल : यह खुशी और आनंद को व्यक्त करता है। राग सारंग : यह ईश्वर के विरह और तड़प को दर्शाता है। गुरु ग्रंथ साहिब जी में यह कड़ा नियम है कि जो बाणी जिस राग के नीचे दर्ज है, उसे उसी राग के सुरों में ही गाया जाना चाहिए। हार्मोनियम व तबला : बच्चों को गुरबानी कीर्तन से जोड़ने के लिए पेशेवर शिक्षक हरमोनियम और तबला बजाना सिखा रहे। दस्तारबंदी : लड़कों को दस्तार सजाने की ट्रेनिंग मिल रही है। गुरमुखी और नितनेम क्लास: बच्चों को गुरमुखी लिपि का शुद्ध उच्चारण और लेखन सिखाया जा रहा है, ताकि वे खुद ‘नितनेम’ का पाठ शुद्धता के साथ कर सकें। गौरवशाली इतिहास : बच्चों को सिख गुरु साहिबान के जीवन, उनके महान बलिदानों से अवगत कराया जा रहा है, ताकि वे अपने इतिहास पर गर्व कर सकें।
लक्ष्मण डामोर को संघ शिक्षा वर्ग में सर्वाधिकारी दायित्व
भास्कर न्यूज़ | बांसवाड़ा वागड़ क्षेत्र के सुरजीपाड़ा आंबापुरा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण डामोर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चित्तौड़ प्रांत के संघ शिक्षा वर्ग में सर्वाधिकारी का दायित्व सौंपा गया है। संगठन में सर्वाधिकारी को वर्ग संचालन, अनुशासन, व्यवस्था और प्रशिक्षण गतिविधियों के समन्वय की प्रमुख जिम्मेदारी निभानी होती है। डामोर वर्ष 1974 में नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर्वोच्च प्रशिक्षण तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।वे लंबे समय से जनजाति समाज में राष्ट्रभावना, सामाजिक समरसता और संगठन निर्माण के कार्य से जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे आंबापुरा खंड संघ चालक के रूप में स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। वर्ग में चित्तौड़ प्रांत के विभिन्न जिलों से 200 से अधिक प्रशिक्षणार्थी शामिल हुए। संचालन के लिए 12 सदस्यों की टोली, 90 शिक्षक व प्रबंधक जुटे रहे और 327 लोगों के ठहराव, भोजन व औषधालय की व्यवस्था की गई। समापन समारोह में नारायण गमेती मुख्य वक्ता रहे।
बात खरी है... इसमें आप देखेंगे बिहार के नेताओं और अफसरों के बीच अंदरखाने क्या चल रहा है, और दिनभर की ऐसी बड़ी हलचल जो आपको हंसाएगी भी और जिम्मेदारों को आइना भी दिखाएंगी। ऊपर VIDEO पर क्लिक करें...
राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने शहर में NEET पेपर लीक मामले, बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान भ्रष्टाचार, छात्र, किसान और मजदूर विरोधी नीतियों का भी विरोध किया गया। यह कार्यक्रम NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर जिला अध्यक्ष जयदीप सिंह राठौड़ और पूर्व पार्षद भुवनेश शर्मा के नेतृत्व में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-युवा कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया। उन्होंने NEET पेपर लीक प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग उठाई। इसके उपरांत NSUI कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा। ज्ञापन में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, किसानों को राहत प्रदान करने तथा महंगाई पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई। इस अवसर पर पूर्व पार्षद भुवनेश शर्मा ने कहा कि देश का छात्र वर्ग अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। उन्होंने बताया कि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों युवाओं की मेहनत और विश्वास को ठेस पहुंचाई है, जबकि बढ़ती बेरोजगारी के कारण शिक्षित युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। शर्मा ने यह भी कहा कि किसान अपनी उपज का उचित मूल्य न मिलने से परेशान हैं और महंगाई ने आमजन का जीवन कठिन बना दिया है। NSUI जिला अध्यक्ष जयदीप सिंह राठौड़ ने इस दौरान कहा कि जब तक छात्रों को न्याय, युवाओं को रोजगार, किसानों को सम्मान और आम जनता को राहत नहीं मिलेगी, तब तक संगठन अपना संघर्ष जारी रखेगा।
प्रयागराज में कोचिंग संस्थानों पर हुई कार्यवाही को लेकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने पढ़ा और फायर डिपार्टमेंट पर कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है उन्होंने ट्वीट कर दोनों ही विभागों की फायर ऑडिट की मांग की है उन्होंने लगातार तीन ट्वीट किया जिसमें उन्होंने कहा हम आज ही ‘प्रयागराज विकास प्राधिकरण’ व ‘अग्निशमन विभाग’ के FIRE AUDIT की मांग करते हैं। ट्वीट के बाद ही प्रयागराज के मेजा विधानसभा के विधायक संदीप पटेल और सपा नेता संदीप यादव और महानगर जिला अध्यक्ष इफ्तार हुसैन और अन्य कार्यकर्ता पड़ा दफ्तर पहुंचे जहां उन्होंने बिल्डिंग में लगे अग्निशमन उपकरणों की जांच की और साथ ही पीडिए के उपाध्यक्ष ऋषिराज से मिलकर आपत्ति दर्ज कराई । अब पूरा ट्वीट पढ़िए जिस घपले-घोटाले की सज़ा शिक्षामंत्री को मिलनी चाहिए उसकी सज़ा शिक्षक को क्यों दी जा रही है। भाजपा अपनी कमियों, कमज़ोरियों और भ्रष्टाचार के लिए हमेशा ही किसी और को निशाना बनाती है। कभी ‘दानाजीवी’ तथाकथित पत्रकारों से मीडियाबाज़ी करवाकर शिक्षा से जुड़े यूट्यूबर्स पर बेबुनियाद आरोप लगवाती है और कभी उनके शैक्षिक संस्थान बंद करवाती है। इसके लिए भाजपा संस्थान के भवनों के अवैध निर्माण का बहाना बनाती है। अगर कोई अवैध निर्माण हुआ है तो हम ‘प्रयागराज विकास प्राधिकरण’ के उन सभी अधिकारियों के निलंबन और उनसे वसूली की मांग करते हैं, जिनके समय में ये निर्माण हुआ या फिर जिन्होंने आज तक उस पर आपत्ति नहीं की। 24 घंटे में इस कार्रवाई की रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाए। भाजपा शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थियों की विरोधी है। देश के इतिहास में अब ये पहली बार होगा कि शिक्षा के मुद्दे पर चुनाव लड़ा जाएगा। प्राइमरी के सरकारी स्कूलों को बंद करने; यूनिफ़ॉर्म, स्टेशनरी, मिड-डे मील जैसे घोटालों से लेकर कॉपी की हेराफेरी व भ्रष्ट-मूल्यांकन, पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में आरक्षण की हक़मारी, हर संभव परीक्षा धांधली, रिजल्ट में बेईमानी व कोर्ट में परिणाम फँसाने की भाजपाई चालबाज़ी जैसे विषयों पर चुनाव होगा और जनता भाजपा को हमेशा के लिए बाहर कर देगी। हम उप्र की विधानसभा, प्रमुख सचिव से लेकर सभी छोटे-बड़े सरकारी कार्यालयों व फ़ायर ब्रिगेड के सभी स्टेशनों के फ़ायर ऑडिट की पुरज़ोर मांग करते हैं। भाजपा सरकार लोगों के काम-कारोबार-व्यापार को अग्निशमन के नियम-क़ानून न मानने के नाम पर ब्लैकमेल करती है और ख़ुद उनका उल्लंघन करती है। अगर कहीं कोई कमी है भी तो सुधार के लिए कुछ समय का नोटिस दिया जाए न कि तालाबंदी कर दी जाए। ये अन्याय है। भाजपा और उनके अनरजिस्टर्ड संगी-साथियों के कार्यालयों की भी जन-प्रतिनिधियों व विश्वसनीय निष्पक्ष मीडिया के सामने वैध-अवैध की जांच हो। कमीशनख़ोर भाजपा व्यापार नहीं, भ्रष्टाचार की हिमायती है। पढ़िए प्रयागराज में सपा नेता क्या बोले मेजा विधायक संदीप पटेल का कहना है कि वर्तमान सरकार तानाशाही रवैया अपनाकर जनता की आवाज को दबाना चाहती है। प्रशासन ने नियमों का हवाला देकर भेदभावपूर्ण तरीके से कोचिंगों पर तालाबंदी की है, जिससे हज़ारों नौजवानों का भविष्य और रोजगार दांव पर लग गया है। कोचिंग संचालकों को सुधार का मौका दिया जाना चाहिए था। इसके साथ ही, उन्होंने पीडीए की खुद की बिल्डिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। उन्होंने मांग की कि दूसरों पर कार्रवाई करने से पहले खुद पीडीए की बिल्डिंग का फायर ऑडिट होना चाहिए और इसके निर्माण व नक्शे की पूरी ईमानदारी से जांच की जानी चाहिए। सपा नेता संदीप यादव ने कहा कि ने PDA खुद सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहा है; उनके अपने फायर ब्रिगेड और गैस उपकरणों में कमियां हैं। उनका कहना है कि यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित है। चूंकि ये कोचिंग संचालक नीट (NEET) पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन में खड़े थे, इसलिए सरकार उन्हें निशाना बना रही है। नेता ने चेतावनी दी कि राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर इन दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त जांच की जाएगी। उन्होंने अंत में कहा कि इलाहाबाद (प्रयागराज) शिक्षा का एक बड़ा केंद्र है, जहां लाखों छात्र अपने भविष्य का सपना लेकर आते हैं। कोचिंग संस्थानों को बंद करना युवाओं के रोजगार और शिक्षा के अधिकार पर हमला है।
'छात्राएं घर से बाहर रहकर पढ़ाई कर रही हैं तो उन्हें अपनी शिक्षा और करियर को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। किसी भी प्रकार के प्रलोभन, गलत संगति और ऑनलाइन ठगी से सावधान रहना चाहिए। किसी भी प्रकार की छेड़खानी, अभद्र टिप्पणी, उत्पीड़न या मानसिक प्रताड़ना की स्थिति में चुप नहीं रहना चाहिए। ऐसी घटनाओं की तुरंत पुलिस को सूचना देनी चाहिए ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।' ये बातें औरंगाबाद में कुटुंबा थाना की महिला दरोगा अंजली कुमार ने बुधवार को छात्राओं से कही। दरअसल, कुटुंबा प्रखंड मुख्यालय के अंबा स्थित महिला कॉलेज मुड़िला में पुलिस दीदी एवं नारी सशक्तिकरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को शिक्षा, सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य दिनेश कुमार सिंह ने की, जबकि संचालन प्रो. सबीता सिंह ने किया। दरोगा बोलीं- सोशल मीडिया का प्रभाव युवाओं के लिए चुनौती अंजली कुमारी ने छात्राओं से कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव युवाओं के लिए चुनौती बनता जा रहा है। उन्होंने छात्राओं को फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसी सोशल मीडिया साइटों के अनावश्यक उपयोग से बचने और अपने भविष्य और निर्धारित लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए अनुशासन, शिक्षा और आत्मविश्वास बेहद जरूरी हैं। दारोगा अंजली कुमारी ने कहा कि प्रत्येक बेटी के लिए उसके माता-पिता सबसे बड़े शुभचिंतक और भरोसेमंद मार्गदर्शक होते हैं। महिला सुरक्षा कानून और अधिकारों की दी जानकारी कार्यक्रम के दौरान महिला सुरक्षा और नारी सशक्तिकरण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। दारोगा अंजली कुमारी ने कहा कि छात्राओं को महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों, हेल्पलाइन नंबरों तथा पुलिस विभाग की ओर से उपलब्ध कराई जा रही विभिन्न सहायता सेवाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अंजली ने कहा कि ‘पुलिस दीदी’ कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं और पुलिस के बीच विश्वास का संबंध स्थापित करना और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना है। कार्यक्रम में नारी शिक्षा के महत्व पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि एक शिक्षित महिला न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शिक्षा, आत्मविश्वास और कानूनी जागरूकता महिलाओं को हर चुनौती का सामना करने की शक्ति प्रदान करती है।
उन्नाव को मिली नई प्रभारी मंत्री:उच्च शिक्षा मंत्री रजनी तिवारी को मिली जनपद की जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्नाव जनपद के लिए नई प्रभारी मंत्री की नियुक्ति की है। हरदोई की शाहाबाद विधानसभा सीट से विधायक और उच्च शिक्षा मंत्री रजनी तिवारी को उन्नाव का प्रभारी मंत्री बनाया गया है। बुधवार को भाजपा सरकार द्वारा जारी सूची में उनके नाम की घोषणा की गई। इस घोषणा के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक महकमे में नई जिम्मेदारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रभारी मंत्री के तौर पर रजनी तिवारी जनपद में सरकारी योजनाओं की समीक्षा, विकास कार्यों की निगरानी और विभिन्न विभागों के कार्यों का मूल्यांकन करेंगी। वह जिला योजना समिति की बैठकों की अध्यक्षता भी करेंगी और जनपद में संचालित विकास परियोजनाओं की प्रगति पर विशेष ध्यान देंगी। सूत्रों के अनुसार, प्रभारी मंत्री के रूप में उनका पहला उन्नाव दौरा गुरुवार को संभावित है। हालांकि, अभी तक आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं हुआ है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जिला प्रशासन उनके संभावित आगमन को देखते हुए आवश्यक व्यवस्थाओं में जुट गया है। उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी रजनी तिवारी प्रदेश की राजनीति में एक सक्रिय और अनुभवी जनप्रतिनिधि हैं। वह कई बार विधायक चुनी जा चुकी हैं और वर्तमान में योगी सरकार में उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। अब उन्नाव जिले की जिम्मेदारी मिलने के बाद विकास योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। जनपद के भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रजनी तिवारी को प्रभारी मंत्री बनाए जाने का स्वागत किया है। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि उनके अनुभव का लाभ जिले को मिलेगा और केंद्र व प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो सकेगा। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, प्रभारी मंत्री के आगमन पर विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सड़क और अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की समीक्षा बैठकें आयोजित की जा सकती हैं। इसके अलावा जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ संवाद कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं।
सहरसा के विकास भवन में जिला बीस सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिले के प्रभारी मंत्री एवं बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने की। इसमें जिले के जनप्रतिनिधियों, विधायकों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में विकास योजनाओं की प्रगति, बाढ़ पूर्व तैयारियों और शिक्षा व्यवस्था सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि सभी विभागों की योजनाओं और कार्यों की समीक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि आगामी तीन महीनों के बाद फिर से समीक्षा बैठक आयोजित कर योजनाओं की प्रगति का आकलन किया जाएगा, ताकि विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके। अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रभारी मंत्री ने जिले में संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों की पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने का निर्देश दिया, ताकि आपदा की स्थिति में लोगों को परेशानी न हो। शिक्षा व्यवस्था को लेकर मंत्री ने बताया कि बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए गुरुकुलम विद्यापीठ की स्थापना की दिशा में रणनीति तैयार की जा रही है। इस संबंध में जल्द ही व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श कर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना उद्देश्य संस्कृत विद्यालयों और मदरसों के संबंध में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग का उद्देश्य दोनों संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना है, ताकि सभी शिक्षण संस्थान समान रूप से आगे बढ़ सकें। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में कुछ संस्कृत विद्यालयों को बंद किया गया है और मदरसों की जांच भी कराई जा रही है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच का उद्देश्य किसी संस्था को निशाना बनाना नहीं, बल्कि धरातल पर उपलब्ध सुविधाओं, संसाधनों और वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त करना है। शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सरकारी सहायता और संसाधनों का सही उपयोग हो तथा सभी शैक्षणिक संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वातावरण विकसित किया जा सके।
प्रशासनिक फेरबदल के तुरंत बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इसे 'कवर-अप' (मामले को दबाने की कवायद) करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे अधिकारियों पर गाज गिराकर असल दोषी, यानी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बचाने की कोशिश की जा रही है।
शिक्षा निदेशालय में मचा हड़कंप:जोधपुर की विवादित जमीन के मामले में जेडी एलीमेंट्री कमला निलंबित
शिक्षा निदेशालय में उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय की संयुक्त निदेशक कमला कालेर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। अतिरिक्त मुख्य सचिव (शिक्षा) राजेश यादव ने निलंबन के ये आदेश जारी किए हैं। मामला जोधपुर विकास प्राधिकरण की 10 बीघा विवादित जमीन और उसकी जांच रिपोर्ट में कुछ गलत तथ्य देने का है। चूंकि कमला कालेर संयुक्त निदेशक स्तर की अधिकारी हैं, इसलिए उनका निलंबन सरकार के स्तर से किया गया है। लेकिन चर्चा है कि इस खेल में अभी कई और चेहरों का बेनकाब होना और निलंबित होना तय है। अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव ने ‘भास्कर’ से बातचीत में कमला कालेर के निलंबन की पुष्टि की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच कमेटी में शामिल बाकी लोगों को भी निलंबित करने के लिए सक्षम स्तर को निर्देश दे दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, पूरा विवाद जोधपुर की एक 10 बीघा की कीमती जमीन से जुड़ा है, जो जेडीए और अन्य पक्षों के बीच विवादित चल रही थी। इस जमीन पर एक स्कूल का होना भी बताया जा रहा था। मामले की हकीकत जानने के लिए शिक्षा विभाग ने संयुक्त निदेशक कमला कालेर की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने मौके का मुआयना किया और अपनी रिपोर्ट तैयार की, लेकिन इस रिपोर्ट ने मामले को सुलझाने के बजाय और उलझा दिया। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में ऐसे तथ्य दिए, जिसका शिक्षा विभाग से कोई लेना-देना नहीं था। जैसे ही यह रिपोर्ट मुख्यालय पहुंची, उच्च अधिकारी तमतमा गए। विभाग का मानना था कि रिपोर्ट में जानबूझकर गलत तथ्य दिए गए। इन पर भी लटकी निलंबन की तलवार कमला कालेर की अगुवाई वाली इस जांच कमेटी में दो अन्य विभागीय कर्मचारी भी शामिल थे, जिन पर अब गाज गिरना तय माना जा रहा है। इसमें एक सेक्शन ऑफिसर, एक सहायक प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हैं। सूत्र बताते हैं कि इन दो के अलावा भी कुछ और कार्मिक सरकार के निशाने पर हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव के कड़े रुख के बाद माना जा रहा है कि इन दोनों के अलावा भी विभाग के कुछ अन्य रसूखदारों पर इस विवादित जमीन मामले में गाज गिर सकती है। इधर निदेशालय का रवैया दिलचस्प बात यह है कि राजधानी से संयुक्त निदेशक के निलंबन के इतने बड़े आदेश जारी होने के बावजूद बीकानेर स्थित शिक्षा निदेशालय इस पूरे मामले और आदेश की कॉपी को मीडिया और जनता से दबाने की पुरजोर कोशिश में जुटा रहा। लेकिन ‘भास्कर’ के खोजी रुख के आगे अफसरों की यह गोपनीयता धरी की धरी रह गई।
गुणात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कार्यशाला शुरू
लुधियाना |बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और गुणात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नोबल फाउंडेशन की ओर से वार्षिक शिक्षक कार्यशाला के 12वें संस्करण का भव्य शुभारंभ किया गया। तीन दिनों तक चलने वाली इस विशेष कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि पीसीएस अधिकारी व लुधियाना की असिस्टेंट कमिश्नर जनरल पायल गोयल ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस बार कार्यशाला में संस्था के विभिन्न स्कूलों से करीब 130 अध्यापिकाएं हिस्सा ले रही हैं। तीन दिवसीय सत्र के दौरान शिक्षिकाओं को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, बाल मनोविज्ञान, प्रभावी कक्षा प्रबंधन और नवीन तकनीकों की जानकारी दी जाएगी ताकि वे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास कर सकें। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पायल गोयल ने कहा कि बच्चों के भविष्य निर्माण और शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए संस्था जिस समर्पण भावना से जमीनी स्तर पर कार्य कर रही है वह वास्तव में प्रेरणादायक है।
वित्त रहित शिक्षा: नियमावली 2026 की प्रतियां जलाईं, वार्ता के बाद धरना टला
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत कक्षा 9 से 12 के संचालन के लिए प्रस्तावित नियमावली-2026 के विरोध में राज्य में कई गतिविधि आयोजित की जा रही है। इसके तहत मंगलवार को वित्त रहित संघर्ष मोर्चा के बैनर तले प्रिंसिपल और शिक्षकों ने राज्य के सभी संस्थानों में नियमावली की ड्राफ्ट की प्रतियां जलाईं और नारेबाजी की। रघुनाथ सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, चंदेश्वर पाठक, देवनाथ सिंह, अरविंद सिंह, गणेश महतो, फजलुल कादरी, मनीष कुमार, नरोत्तम सिंह, संजय कुमार, मनोज तिर्की, विनय उरांव, मुरारी प्रसाद सिंह, रेशमा बेक समेत अन्य ने कहा कि प्रस्तावित नियमावली ऐसी शर्तें थोप रही हैं, जिन्हें पूरा करना अधिकांश संस्थानों के लिए संभव नहीं है। विरोध के बीच माध्यमिक निदेशक से मोर्चा प्रतिनिधियों से बातचीत हुई। निदेशक ने कई मांगों को जायज बताते सुधार का आश्वासन दिया है। इसके बाद 20 जून को होने वाले धरना को स्थगित कर दिया गया है। वित्त रहित शिक्षण संस्थानों के प्रिंसिपल और शिक्षकों की कई बिंदुओं पर आपत्ति है। इसमें दो एकड़ भूमि की अनिवार्यता, सुरक्षा कोष में कई गुना वृद्धि, 1000-1000 वर्गफीट के चार लैब, बड़ा पुस्तकालय पर आपत्ति जताते हुए वापस लेने की मांग की है। निदेशक ने माना कि सुरक्षा राशि में अत्यधिक वृद्धि की आवश्यकता नहीं है। 1000 वर्गफीट का लैब भी व्यावहारिक नहीं है।
बात खरी है... इसमें आप देखेंगे बिहार के नेताओं और अफसरों के बीच अंदरखाने क्या चल रहा है, और दिनभर की ऐसी बड़ी हलचल जो आपको हंसाएगी भी और जिम्मेदारों को आइना भी दिखाएंगी। ऊपर VIDEO पर क्लिक करें...
सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की मांगों और विचारधारा का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मंगलवार को खुद इसकी जानकारी दी। वांगचुक ने वीडियो मैसेज जारी कर कहा- मैंने CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके से बात की। उनसे बात करके मुझे लगा कि उनकी मंशा गलत नहीं है। वे एक देशप्रेमी हैं और बदलाव चाहते हैं। वांगचुक ने कहा- अभिजीत 6 जून को दिल्ली में लोगों को बुला रहे हैं। अगर 5 जून तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया तो मैं भी जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन में शामिल होऊंगा। 6 जून को भारत लौटेंगे अभिजीत, एयरपोर्ट से सीधे थाने जाएंगे अभिजीत दिपके 6 जून को अमेरिका से भारत लौटेंगे। उन्होंने 1 जून को सोशल मीडिया पर बताया था कि वे जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करेंगे। अभिजीत ने बताया कि वे एयरपोर्ट से सीधे पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाएंगे और प्रदर्शन की इजाजत मांगेंगे। उन्होंने लोगों से एयरपोर्ट पर मिलने और प्रदर्शन में शामिल होने की अपील भी की। अभिजीत अमेरिका में पढ़ रहे, AAP में काम कर चुके 30 साल के अभिजीत दिपके महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल वो अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। अभिजीत 2020 से 2022 तक केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट रहे हैं। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में अभिजीत AAP के लिए वायरल मीम बेस्ड ऑनलाइन प्रचार का मटेरियल बनाते थे। एक इंटरव्यू में अभिजीत ने बताया कि उन्होंने निजी जिंदगी और आर्थिक स्थिरता के लिए AAP छोड़कर बोस्टन यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया था। एडमिशन मिल गया, तो वे अमेरिका शिफ्ट हो गए।अभिजीत किसान आंदोलन से लेकर महंगाई जैसे राजनीतिक मुद्दों पर X अकाउंट पर केंद्र सरकार और पीएम पर निशाना साधते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच कराने की याचिका खारिज की सुप्रीम कोर्ट ने 24 मई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े व्यक्तियों की गतिविधियों की CBI से जांच करवाने की मांग पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील एनके गोस्वामी ने कहा कि CJP, ज्यूडीशियरी की इमेज खराब कर रही है। इसके बाद CJI और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने कहा, ‘इसे इतनी भावुकता से मत लें।’ पूरी खबर पढ़ें.. --------------------- यह खबर भी पढ़ें…. बेरोजगारों को कॉकरोच कहना क्या सही:पूर्व CJI बोले- जज भी इंसान, कोई शब्द निकल जाता है, सोशल मीडिया पर गलत मतलब निकाला जाता है पूर्व सीजेआई बीआर गवई ने गुरुवार को दैनिक भास्कर को इंटरव्यू दिया। इस दौरान उनसे पूछा गया कि सुप्रीम कोर्ट में बेरोजगारों को 'कॉकरोच' और 'पैरासाइट' जैसे शब्द कहे गए, आप इसे कैसे देखते हैं? इस पर उन्होंने कहा- इस बात को बेवजह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। जज भी इंसान हैं। सुनवाई के दौरान बिना किसी बुरे इरादे के अनजाने में कोई शब्द निकल जाता है। पूरी खबर पढ़ें…
NEET-CUET विवाद- NSUI ने किया प्रदर्शन:शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका, पुलिस से झड़प भी हुई
मथुरा में मंगलवार शाम करीब 6 बजे एनएसयूआई और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नीट-यूजी 2026 और सीयूईटी-यूजी 2026 परीक्षाओं से जुड़े विवादों के विरोध में प्रदर्शन किया। मथुरा के होली गेट पर हुए इस प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की झड़प भी हुई। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। उनका आरोप था कि इन परीक्षाओं में धांधली हुई है, जिससे छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की कार्यकर्ताओं ने जैसे ही शिक्षा मंत्री का पुतला जलाने का प्रयास किया, मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। पुलिस ने पुतला छीनने का प्रयास किया, जिससे दोनों पक्षों के बीच छीना-झपटी हुई। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच काफी देर तक खींचतान दिखाई दे रही है। पुलिस के प्रयासों के बावजूद, प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री का पुतला दहन कर दिया। इसके बाद उन्होंने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उन पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। कार्रवाई होने तक आंदोलन चलता रहेगा उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव अनाम धन्य तिवारी एडवोकेट ने कहा कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी अनियमितताओं से छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर हुआ है। युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष दुर्गेश बघेल और एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष हर्ष चौरसिया ने संयुक्त रूप से कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा और दोषियों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन चलता रहेगा। इस प्रदर्शन में दीपक पाठक, उदय तिवारी, गौरव कश्यप, शिवम चतुर्वेदी, राहुल पाल, राजू फारूकी, पूरन सिंह, अनवर फारूकी, दीपक मौर्य सहित बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ता मौजूद थे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच शिक्षा, पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तीकरण, भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था, ग्रामीण विकास और स्थानीय स्वशासन को अधिक प्रभावी बनाने के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों नेताओं ने राज्यों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, विद्यालयी शिक्षा के सुदृढ़ीकरण, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और पंचायतों को मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। नई शिक्षा नीति और डिजिटल शिक्षा पर हुई चर्चा मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड में नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और विद्यालयी शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों तक आधुनिक संसाधन पहुंचाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। पंचायतों और स्थानीय स्वशासन को मजबूत बनाने पर जोर बैठक में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को अधिक प्रभावी बनाने के विषय पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने पंचायतों को विकास की मुख्य इकाई के रूप में मजबूत करने की आवश्यकता बताई। संस्कृत और भारतीय संस्कृति के संरक्षण पर विचार-विमर्श मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा और पारंपरिक ज्ञान की विरासत को संरक्षित और संवर्धित करने के लिए राज्यों के बीच अनुभव साझा करना महत्वपूर्ण है। इस दिशा में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। राजस्थान मंत्री ने उत्तराखंड के प्रयासों की सराहना की राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर ने शिक्षा, संस्कृति संरक्षण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उत्तराखंड सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने दोनों राज्यों के बीच शिक्षा, संस्कृति और स्थानीय स्वशासन से जुड़े विषयों पर सहयोग और समन्वय को और मजबूत बनाने पर बल दिया।
सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने जिले के 59 भवनविहीन विद्यालयों के लिए नवीन भवनों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की है। ये स्कूल अब तक जुगाड़ में किराये पर या दूसरे स्कूल व आंगनबाड़ी भवनों में संचालित थे। नए स्कूल भवन का निर्माण डीएमएफ, समग्र शिक्षा व स्कूल शिक्षा विभाग के मद से बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा पर्यटन व संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के भवनविहीन स्कूलों के लिए नए भवन की स्वीकृति दी गई है। शिक्षा व्यवस्था सुधारने शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अवसर प्रदान करने प्रशासन प्रयास कर रहा है। DMF मद से बनेंगे 25 स्कूल भवन जिला खनिज न्यास (डी.एम.एफ.) मद से उदयपुर में 4, लखनपुर में 6 तथा मैनपाट में 15 स्कूल भवनों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है। इनमें उदयपुर ब्लॉक के प्रायमरी स्कूल कुडेली एवं साल्ही तथा मिडिल स्कूल जजगी एवं मतरेंगा शामिल हैं। इसी प्रकार लखनपुर ब्लॉक में प्रायमरी स्कूल मुकुन्दपुर, उरांवपारा, लेदराडांड, पटकुरा तथा मिडिल स्कूल मांजा एवं पर्री शामिल है। मैनपाट ब्लॉक में प्रायमरी स्कूल कोटछाल, ढोढ़ाडीह, मेछारवना, चौनपुर, रंगुवापारा, बैगापारा तथा मिडिल स्कूल भेलतराई, ढकनापारा, कदनई, रोपाखार, मालतीपुर, बरिमा, महारानीपुर, समनिया, उड़ूममकेला शामिल हैं। समग्र शिक्षा मद से बनेंगे 20 भवन समग्र शिक्षा मद अंतर्गत लुंड्रा ब्लॉक के 11, बतौली ब्लॉक के 4 तथा सीतापुर ब्लॉक के 5 स्कूल भवन बनेंगे। लुंड्रा ब्लॉक के प्रायमरी स्कूल कोसमपारा, खालपारा, चिटकानीडाड़, पडलीपारा, कोरवापारा, बालक आश्रम ससोली, जटासेमर, भिलाईकला, बदगरी, गंगापुर तथा मिडिल स्कूल पतरा डीह शामिल हैं। बतौली ब्लॉक के प्रायमरी स्कूल बाघपानी एवं पथरई तथा मिडिल स्कूल ललाती एवं घोड़ापारा को भवन स्वीकृति मिली है। सीतापुर ब्लॉक के प्रायमरी स्कूल तेंदूडांड, केनापारा, टोकोपारा एवं होकड़ोपारा तथा मिडिल स्कूल छत्रीकोना के लिए नवीन भवन स्वीकृत किए गए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग मद से बनेंगे 14 भवन स्कूल शिक्षा विभाग (डी.पी.आई.) से 4 प्रायमरी व 10 मिडिल स्कूल भवन स्वीकृत किए गए हैं। इसमें अंबिकापुर ब्लॉक के प्रायमरी स्कूल जगदीशपुर तथा मिडिल स्कूल नवपाराकला, नवानगर, केदारपुर शामिल हैं। लखनपुर ब्लॉक के मिडिल स्कूल खर्राडाड तथा सीतापुर ब्लॉक में मिडिल स्कूल सोनतराई शामिल है। मैनपाट ब्लॉक अंतर्गत मिडिल स्कूल रजखेता, उडुमकेला, जामडीह में नए भवन स्वीकृत किए गए हैं। वहीं उदयपुर ब्लॉक में प्रायमरी स्कूल कवलगिरी एवं मिडिल स्कूल बासेन तथा बतौली ब्लॉक अंतर्गत प्रायमरी स्कूल नवापारा तथा लुण्ड्रा ब्लॉक अंतर्गत प्रायमरी स्कूल मंजुरघुटरा एवं मिडिल स्कूल करगिडीह शामिल हैं। समय सीमा में निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश कलेक्टर अजीत वसंत ने संबंधित निर्माण एजेंसियों को गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य समय सीमा छह माह में पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों के निर्माण के लिए ग्राम पंचायत एवं आरईएस को निर्माण एजेंसी बनाया गया है।
बिहार में मदरसों को मिलने वाले सरकारी अनुदान, शिक्षकों के वेतन भुगतान और शैक्षणिक गतिविधियों की जांच के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देशों का सहरसा के विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता उर्फ आईपी गुप्ता ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी सहायता वास्तविक संस्थानों तक पहुंचे और शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो, इसके लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है। विधायक आईपी गुप्ता ने मदरसों में सरकारी अनुदान, शिक्षकों के वेतन भुगतान और शैक्षणिक गतिविधियों की पारदर्शी जांच की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रखंड स्तर पर विशेष समितियां गठित की जाएं, जो स्थलीय निरीक्षण कर सरकार को वास्तविक रिपोर्ट सौंपें। शैक्षणिक वातावरण की भी समीक्षा की जानी चाहिएउन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मदरसों को निर्धारित सरकारी सहायता समय पर मिल रही है या नहीं और उसका उपयोग छात्रों तथा शिक्षा के विकास में हो रहा है या नहीं। साथ ही, मदरसों में पढ़ाई की गुणवत्ता, छात्रों की उपस्थिति और शैक्षणिक वातावरण की भी समीक्षा की जानी चाहिए। आईपी गुप्ता ने कहा कि मदरसे शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उन्हें सरकार से पर्याप्त सहायता मिलनी चाहिए। उन्होंने मदरसों की आधारभूत संरचना को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। राज्य सरकार की कार्यशैली को लेकर सवाल भी उठाएविधायक ने कहा कि सरकार की मंशा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की है, जिसका सभी को समर्थन करना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष, तथ्यात्मक और सकारात्मक परिणाम देने वाली होगी। हालांकि, इसी दौरान उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को आवंटित सरकारी आवास खाली कराने की प्रक्रिया पर राज्य सरकार की कार्यशैली को लेकर सवाल भी उठाए। आईपी गुप्ता ने आरोप लगाया कि जब सरकार विभिन्न मुद्दों पर घिरती है, तो जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे कदम उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि राबड़ी देवी के आवास को लेकर अपनाया जा रहा रवैया जनता के बीच गलत संदेश दे रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सलाह दी कि सरकार को टकराव की राजनीति से बचते हुए जनहित के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) के कथित पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में राजनीतिक माहौल गर्म है। इसी मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार को घेरते हुए मोगा में जोरदार प्रदर्शन किया। जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका गया और उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की गई। इस प्रदर्शन की अगुवाई जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरि सिंह खाई और विधानसभा क्षेत्र मोगा की प्रभारी मालविका सूद ने की। इस अवसर पर कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा का पेपर लीक होना देश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के समान है। हरि सिंह खाई ने कहा कि केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था को संभालने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक हो जाता है, तो यह व्यवस्था की बड़ी नाकामी है। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। मालविका सूद ने शिक्षामंत्री पर साधा निशाना मालविका सूद ने भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक मामला सीधे तौर पर विद्यार्थियों के साथ धोखाधड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब छात्र-छात्राएं दिन-रात मेहनत कर अपने सपनों को साकार करने की तैयारी करते हैं, तब इस तरह के घोटाले उनकी मेहनत पर पानी फेर देते हैं। उन्होंने मांग की कि नीट पेपर लीक के लिए जिम्मेदार मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर अपना रोष व्यक्त किया। इस मौके पर पूर्व विधायक विजय साथी, विनोद बांसल (पूर्व चेयरमैन, नगर सुधार ट्रस्ट मोगा), मनजीत सिंह मान, स्वर्ण सिंह आदीवाल, मिक्की हुंदल, लाली बुट्टर, जसपाल डरोली, गुरबचन सिंह बराड़, जगसीर सिंह कालेके, उपिंदर गिल, गुरनूर मान दौधर सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस सड़कों पर संघर्ष जारी रखेगी। साथ ही सरकार से मांग की गई कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं।
छत्तीसगढ़ में टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को लेकर शिक्षा विभाग में तैयारियां शुरू हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सेवाकालीन (इन-सर्विस) शिक्षकों को TET पास करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है। इसके बाद अब राज्य में TET परीक्षा कराने की कवायद तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने TET परीक्षा जल्द कराने, शिक्षकों को ज्यादा मौके देने और पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने कहा है। एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि विभाग के अधिकारियों ने परीक्षा आयोजन को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। साथ ही विभाग के अंदर इसकी तैयारियों पर काम भी शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की मंशा के मुताबिक शिक्षकों को TET पास करने के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। इन-सर्विस टीचर्स के लिए अलग TET की मांग टीचर्स एसोसिएशन ने शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग से मांग की है कि लंबे समय से स्कूलों में पढ़ा रहे इन-सर्विस टीचर्स के लिए अलग से लिमिटेड डिपार्टमेंटल TET कराने पर विचार किया जाए। संगठन का कहना है कि नौकरी के साथ सामान्य TET की तैयारी करना कई शिक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, इसलिए उनके लिए अलग व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। हर साल जारी हो TET का कैलेंडर एसोसिएशन ने यह भी मांग रखी है कि TET परीक्षा का वार्षिक कैलेंडर जारी किया जाए और तय समय पर नियमित रूप से परीक्षा कराई जाए। इससे शिक्षकों को पहले से तैयारी का समय मिलेगा और पात्रता हासिल करने में परेशानी नहीं होगी। संजय शर्मा ने भरोसा जताया कि शिक्षा विभाग शिक्षकों के हित और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए जल्द फैसला लेगा और TET परीक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाएगा।
सत्र 2015-16 से 2019-20 के बीच प्रमोट हुए करीब 8 हजार प्रधानाचार्य आज भी अपनी प्रमोशन तिथि दर्ज होने का इंतजार कर रहे हैं। राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (प्रधानाचार्य) का कहना है कि प्रमोशन तिथि दर्ज नहीं होने से वेतन निर्धारण की जांच में प्रधानाचार्यों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसे लेकर परिषद ने सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि तय समय में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 8 जून को शिक्षा निदेशालय बीकानेर का घेराव किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। एडीएम को सौंपा ज्ञापन, मुख्यमंत्री तक पहुंचाई मांगराजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (प्रधानाचार्य) जिला शाखा टोंक ने मंगलवार को शिक्षा मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा विभाग और निदेशक माध्यमिक शिक्षा राजस्थान बीकानेर के नाम अलग-अलग ज्ञापन अतिरिक्त जिला कलेक्टर रामरतन सौकरिया को सौंपे। ज्ञापन में सत्र 2015-16 से 2019-20 तक प्रमोट हुए प्रधानाचार्यों की प्रमोशन तिथि दर्ज करने की मांग की गई है। मंत्री के निर्देशों के बावजूद काम अधूराप्रधानाचार्यों का कहना है कि शिक्षा मंत्री द्वारा कई बार निर्देश दिए जाने और शासन स्तर से आदेश जारी होने के बावजूद प्रमोशन तिथि दर्ज करने का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है। उनका आरोप है कि यह मामला लंबे समय से माध्यमिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर में लंबित पड़ा है, जिससे प्रधानाचार्य वर्ग में नाराजगी बढ़ रही है। 1970 प्रधानाचार्यों को मिला लाभ, 8 हजार अब भी वंचितजिला मंत्री निपुण सक्सेना ने बताया कि इस अवधि में प्रमोट हुए प्रधानाचार्यों में से केवल 1970 प्रधानाचार्यों की प्रमोशन तिथि दर्ज की गई है। इनमें 1410 प्रधानाध्यापक पद से और 560 प्राध्यापक पद से प्रमोट प्रधानाचार्य शामिल हैं, जो सत्र 2017-18 में पदोन्नत हुए थे। इनके लिए 1 अप्रैल 2017 की प्रमोशन तिथि दर्ज करने के आदेश 7 दिसंबर 2022 को जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि 3 मार्च 2015 को वित्त विभाग ने 4999 प्रधानाचार्य पदों की स्वीकृति दे दी थी, लेकिन इसके बावजूद करीब 8 हजार प्रधानाचार्य आज भी इस लाभ से वंचित हैं। वेतन जांच में हो सकता है आर्थिक नुकसानसक्सेना ने बताया कि वित्त विभाग द्वारा 5 मई को जारी परिपत्र और निदेशक माध्यमिक शिक्षा राजस्थान के 22 मई के आदेश के अनुसार विभागीय कर्मचारियों के वेतन निर्धारण की दोबारा जांच की जानी है। ऐसे में जिन प्रधानाचार्यों की प्रमोशन तिथि दर्ज नहीं हुई है, उन्हें वित्तीय नुकसान होने की आशंका है। 7 दिन का समय, फिर होगा धरना-घेरावपरिषद ने मांग की है कि सात दिन के भीतर सभी लंबित मामलों में प्रमोशन तिथि दर्ज कर प्रधानाचार्यों को लाभ दिया जाए। ऐसा नहीं होने पर 8 जून को शिक्षा निदेशालय बीकानेर के बाहर एक दिवसीय धरना और घेराव किया जाएगा। संगठन ने यह भी चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन से आमरण अनशन और धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। ये रहे मौजूदज्ञापन सौंपने वालों में जिलाध्यक्ष कुम्माराम चौधरी, जिला मंत्री निपुण सक्सेना, कृष्ण गोपाल, उमा हाड़ा, विनोद शर्मा, कैलाश चंद्र मीणा, किशनलाल मीणा, चन्द्रप्रकाश विजय, महेश दाधीच, प्रेमलता सिंह, महेश शर्मा, राजाराम मीणा सहित अन्य प्रधानाचार्य शामिल रहे।
पंजाब में छात्रा की आत्महत्या मामले में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने आज सख्त रुख अपनाया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। मंत्री ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही स्कूल प्रशासन की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि छात्रा को न्याय दिलाने के लिए किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। क्या था पूरा मामला? अमृतसर की अमजोत कौर (17 साल) जो 12वीं कक्षा में पढ़ती थी ने 22 मई को जहरीला पदार्थ निगल लिया था। उसकी हालत बिगड़ने पर परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां कई दिनों तक इलाज चला। इलाज के दौरान उसने एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया, जिसमें उसने स्कूल प्रबंधन पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए। 30 मई को उसकी मौत हो गई। फीस को लेकर बनाया जा रहा था दबाव अमजोत फतेहगढ़ चूड़ियां रोड स्थित एक निजी स्कूल की छात्रा थी और अपनी मौसी सरबजीत कौर के पास रहकर पढ़ाई कर रही थी। परिजनों के अनुसार स्कूल की करीब 20 हजार रुपए फीस बकाया थी। इसी फीस को लेकर स्कूल प्रबंधन लगातार उस पर दबाव बना रहा था। मौत से पहले बनाए गए वीडियो में अमजोत ने कहा था कि 11 मई को उसे स्कूल बुलाया गया, जहां उसे काफी मानसिक रूप से परेशान किया गया। उसका आरोप था कि उसे क्लास के ग्रुप से हटा दिया गया और अलग कमरे में ले जाकर बात की गई। वीडियो में उसने अपनी हालत के लिए स्कूल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराते हुए न्याय की मांग भी की। फीस किस्तों में जमा करवाने की अनुमति मांगी थी मौसी सरबजीत कौर ने आरोप लगाया कि स्कूल की प्रिंसिपल शबनम शर्मा और क्लास टीचर आकांक्षा शर्मा फीस को लेकर लगातार दबाव बना रही थीं। उन्होंने स्कूल से फीस किस्तों में जमा करवाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन इसके बावजूद बच्ची पर दबाव जारी रहा। अमजोत को मेडिकल स्ट्रीम लेने की अनुमति नहीं परिजनों का यह भी आरोप है कि अमजोत को मेडिकल स्ट्रीम लेने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि उससे कम अंक पाने वाली अन्य छात्राओं को मेडिकल स्ट्रीम दे दी गई थी। इसके अलावा उसे क्लास के अतिरिक्त काम करवाए जाते थे। कई बार बाथरूम जाने के बाद भी कक्षा में प्रवेश नहीं दिया जाता था। 10वीं में 86 प्रतिशत अंक हासिल किए अमजोत पढ़ाई में काफी होनहार थी। परिवार के अनुसार वह हर कक्षा में अच्छे अंक लाती थी और 10वीं में उसने 86 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। परिजनों का आरोप है कि स्कूल ने उसका रिजल्ट भी रोक रखा था और फीस न जमा होने के कारण नाम काटने की बात कही थी। परिवार ने पुलिस प्रशासन से इंसाफ की मांग करते हुए स्कूल प्रबंधन और संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। शिक्षिका बोली- किसी छात्र पर दबाव नहीं बनाया दूसरी तरफ, स्कूल की एक शिक्षिका ने मीडिया से बातचीत में अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। शिक्षिका का कहना है कि अमजोत कौर पिछले कई महीनों से स्कूल नहीं आ रही थी। स्कूल की ओर से केवल नियमित प्रक्रिया के तहत उसके परिवार से संपर्क किया जाता था। उन्होंने कहा कि स्कूल ने कभी भी फीस या किसी अन्य कारण से किसी छात्र पर दबाव नहीं बनाया। शिक्षिका ने दावा किया कि स्कूल प्रबंधन के पास सभी आवश्यक रिकॉर्ड और दस्तावेज मौजूद हैं। वे जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देंगे। एसीपी बोले- जांच की जा रही है इस संबंध में एसीपी गगनदीप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि फोर्टिस अस्पताल से सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। छात्रा के पिता रविंदर सिंह के बयानों के आधार पर मुकदमा नंबर 115 के तहत बीएनएस की धारा 108 में मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा छात्रा को उसके दस्तावेज नहीं दिए जा रहे थे और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। पुलिस ने स्कूल के प्रिंसिपल और एक स्टाफ सदस्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच जारी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।
नीट यूजी पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्रालय ने शुरू की कार्रवाई
नीट-यूजी प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके साथ ही मामले की गहन जांच जारी है।
ललित सुरजन की कलम से - शिक्षा और परीक्षा
'जब हम पढ़ रहे थे, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, आईआईएम तब भी थे।
सरकारी स्कूलों की चुनौतियां और बदलता शिक्षा परिदृश्य
शिक्षा किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति, सामाजिक गतिशीलता और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की आधारशिला है।
Fact Check: क्या बिहार के शिक्षा मंत्री ने कहा लड़कियों को शिक्षा की जरूरत नहीं? सच जानिए
बूम ने पाया कि बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने Agitation शब्द का इस्तेमाल किया था जिसे एजुकेशन समझकर गलत दावा किया जा रहा है.
कन्नड़ मूवी 'केडी: द डेविल' के गाने 'सरके चुनर' पर विवाद अभी भी जारी है। इस गाने के बोल और फिल्मांकन पर बढ़ते विवाद के बाद नोरा फतेही को राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के समक्ष पेश होना पड़ा। नोरा ने न केवल अपनी स्थिति स्पष्ट की, बल्कि भविष्य के लिए एक ...
पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु का रिश्वत लेते हुए वीडियो फर्जी और एआई जनरेटेड है
बूम ने पाया कि ब्रात्य बसु का वीडियो गूगल के SynthId का उपयोग करके एआई द्वारा जनरेट किया गया है.
समानता और शिक्षा की क्रांतिकारी मशाल: सावित्रीबाई फुले
10मार्च सावित्रीबाई फुले महापरिनिर्वाण दिवस भारतीय समाज में जब भी शिक्षा,समानता और सामाजिक न्याय की बात उठती है,तो एक नाम इतिहास के पन्नों से निकलकर हमारे सामने खड़ा हो जाता है—सावित्रीबाई फुले।10मार्च को उनका महापरिनिर्वाण दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है,बल्कि यह दिन उस सामाजिक चेतना को याद करने का अवसर है,जिसने सदियों ... Read more
आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं
महिला दिवस पर विशेष:- अजमेर राजस्थान आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं:- देश-प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध ओर इन अपराधों में पिछले वर्षो में अपराध की दर तीव्र ही हुई है ओर “भारत मे अपराध ” नामक रिपोर्ट बताती है ... Read more
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समर्थन से भारत शिक्षा के सभी स्तरों पर एआई शिक्षण और रिसर्च को एकीकृत करके खुद को एक वैश्विक एआई महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है
गला घोटिया शिक्षा का विश्वगुरु बन चुका देश
पिछले 12 सालों से देश को विश्वगुरु बनाने का जो झूठ फैलाया जा रहा था, अब उसका गुबार ऐसा फूटा है कि दुनिया भर में शर्मिंदगी का सबब बन गया है।
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
NEET UG रिजल्ट को लेकर अभी भी जारी है गुस्सा, छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के पास किया विरोध प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए छात्रों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। आइए जानते हैं, क्या है पूरा म
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का 10 फीसदी भी डाटा नहीं हुआ अपलोड
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का डाटा अपलोड करने में जिले के कई स्कूल ढील दे रहे हैं, वे 10 फीसदी छात्रों का भी डाटा अभी तक अपलोड नहीं कर पाए हैं। डाटा अपलोड करने में आधार कार्ड की अनिवार्यता के बाद से छ
बेसिक शिक्षा : दो महीने बाद भी 1.38 लाख छात्रों का डेटा नहीं हुआ अपडेट
बेसिक शिक्षा विभाग के यू डायस पोर्टल पर डेटा अपडेट करने का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। हाल ये है कि दो महीने में महज 1.38 लाख छात्रों डेटा भी अपडेट नहीं हुआ। विभाग ने अब 5 जून तक इसे पूरा करने क
स्कूलों में कैसे पढ़ा रहे हैं शिक्षक, वीडियो में देखेगा शिक्षा विभाग, होगी रिकॉर्डिंग
शिक्षा विभाग वीडियो के जरिए देखेगा कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षक छात्रों को कैसे पढ़ाते हैं। बता दें. छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षकों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। आइए जानते हैं विस्तार से।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति : यूपी बोर्ड ने दिए निर्देश, एनईपी लागू करने को स्कूल बनाएंगे प्लान
यूपी बोर्ड से जुड़े 27 हजार से अधिक स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू करने के लिए स्कूल स्तर पर योजना बनाई जाएगी। एनईपी 2020 के विषय में विद्यालयों में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
बॉलीवुड का ये सुपरस्टार युवाओं को IAS बनाने के लिए मुफ्त में देगा शिक्षा, योजना से अबतक जुड़ चुके है7000 युवा
राम बनने के लिएधनुष-बाण चलाने की शिक्षा ले रहे है Ranbir Kapoor, एक्टर केआर्चरी ट्रेनर ने शेयर की तस्वीरें

