करनाल जिले के मोर माजरा स्थित आर्य कन्या गुरुकुल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में प्रार्थना व सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए नए शेड का शिलान्यास किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने छात्राओं के परीक्षा परिणाम की सराहना की। उन्होंने दसवीं और बारहवीं में मेरिट में स्थान पाने वाली छात्राओं व उनके अभिभावकों को बधाई दी। समारोह में गुरुकुल परिवार, गणमान्य लोग और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में गुरुकुल के प्रधान सुखबीर सिंह मान (एडवोकेट) ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि नया शेड छात्राओं के सर्वांगीण विकास में मदद करेगा। यहां प्रार्थना सभाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम बेहतर तरीके से हो सकेंगे। वर्तमान में करीब 2500 छात्राएं गुरुकुल में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। भारतीय संस्कृति के साथ आधुनिक शिक्षा पर जोर सुखबीर सिंह मान ने कहा कि गुरुकुल में भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा और आधुनिक शिक्षा का संतुलन बनाया जा रहा है। इसी के चलते छात्राएं हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं और उनका भविष्य मजबूत बन रहा है। प्रदेश में पांचवां स्थान, जिले में भी दबदबा प्रधान सुखबीर सिंह मान ने मंत्री कृष्ण लाल पंवार को परीक्षा परिणाम की जानकारी देते हुए बताया कि दसवीं कक्षा के नतीजों में विद्यालय ने हरियाणा में पांचवां स्थान हासिल किया है। वहीं करनाल जिले की टॉप-10 मेरिट सूची में से 6 छात्राएं इसी गुरुकुल की हैं। यह सुनकर मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने प्रधान, स्टाफ और छात्राओं को शुभकामनाएं दी और उनकी उपलब्धियों की सराहना की।
शेखपुरा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सामान्य शिक्षा वर्ग-1 (प्रथम वर्ष) में शामिल होने के लिए गुरुवार को शेखपुरा से 15 स्वयंसेवक मुंगेर के लिए रवाना हुए। यह प्रशिक्षण शिविर 15 दिनों तक चलेगा। नगर के मडपसौना स्थित संघ कार्यालय से जिला कार्यवाह अभय कुमार ने स्वयंसेवकों को तिलक लगाकर और मिठाई खिलाकर विदा किया। इस अवसर पर कई अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे। प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला जिला संघचालक राधेश्याम वर्णवाल ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि वे 15 दिनों तक अनुशासन की आग में तपकर राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और विभिन्न विद्याओं में दक्ष होने जा रहे हैं। उन्होंने प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। वर्णवाल ने स्वयंसेवक और कार्यकर्ता के बीच का अंतर भी स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि स्वयंसेवक वह होता है जो शाखा में शामिल होकर संघ के जीवन दर्शन का पालन करता है। वहीं, संघ के शिविरों में पांच कठोर स्तरों को पार करने के बाद एक आरएसएस कार्यकर्ता तैयार होता है। इस प्रशिक्षण शिविर को 'संघ शिक्षा वर्ग' के नाम से जाना जाता है। तीन स्वयंसेवक टाटा रवाना हुए जिला कार्यवाह ने बताया कि संघ शिक्षा वर्ग सामान्य-2 के लिए दो स्वयंसेवक और संघ शिक्षा वर्ग विशेष में भाग लेने के लिए तीन स्वयंसेवक टाटा रवाना हुए हैं। इसके अतिरिक्त, सामान्य शिक्षा वर्ग-1 के लिए 12 और घोष वर्ग में शामिल होने के लिए एक स्वयंसेवक मुंगेर गए हैं। इस मौके पर जिला पर्यावरण प्रमुख विकास कुमार, डॉ. सत्यदेव कुमार और नगर सेवा प्रमुख दीपक कुमार भी उपस्थित थे। प्रशिक्षण में भाग लेने वाले स्वयंसेवकों में चंदन कुमार, गोपाल ठाकुर, अधिवक्ता जयशंकर सिंह, राजीव रंजन राय, राजीव कुमार पंकज, संतोष कुमार, आर्यन कुमार, प्रियांशु कुमार, मनीष कुमार, कुश कुमार, सौरव कुमार, छोटू कुमार, कुणाल कुमार, दिलखुश कुमार, रिशव, अमन, नमन कुमार, आकाश कुमार और शिवम कुमार शामिल हैं।
सीबीएसई ओएसएम विवाद पर शिक्षा मंत्री का बड़ा बयान, किसी भी छात्र की शिकायत अनसुलझी नहीं रहेगी
CBSE OSM विवाद पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों को भरोसा दिलाया है कि किसी भी शिकायत को अनसुलझा नहीं छोड़ा जाएगा। पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और तकनीकी सुधार के लिए IIT व बैंकों की मदद ली जाएगी।
भिवानी जिले के महम गेट स्थित हरियाणा शेखावाटी ब्रह्मचर्य संस्कृत कॉलेज में विभिन्न सामाजिक, शैक्षिक एवं कर्मचारी संगठनों द्वारा हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार शर्मा के कार्यकाल पूर्ण होने पर सम्मान एवं विदाई समारोह आयोजित किया गया। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के पूर्व चेयरमैन प्रो. डॉ. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि पूरे प्रदेश से प्रबुद्ध शिक्षकों, विभिन्न संस्थाओं व समितियों के अध्यक्षों द्वारा सम्मान समारोह आयोजित किया, जिससे वे आभारी हैं। जो इतना प्यार व सम्मान मिल रहा है। उसका 33 साल का बतौर टीचर का कार्यकाल रहा है। जिसमें सीमित क्षेत्र होता है, लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री ने उन्हें यह मौका दिया। हमें कर्म करना चाहिए उन्होंने कहा कि जैसे श्रीमद्भागवत गीता में लिखा गया है कि हमें कर्म करना चाहिए। मनुष्य का जीवन ही इसलिए मिला है कि ना केवल अपने लिए बल्की पूरे समाज, प्रकृति व सभी जीवों के लिए अपना कर्तव्य समझते हुए कर्म करना चाहिए। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड में रहते हुए जैसे शिक्षा नीति के मामले में, स्कूल में विद्यार्थियों की समस्याएं होती है, स्कूल पास होने के बाद विद्यार्थियों की जो समस्या होती है, चाहे वह कैरियर गाइडेंस से संबंधित हो या फिर किसी प्रकार की मार्कशीट में त्रुटी आदि होती है। उसको लेकर वे विद्यार्थी व अभिभावक के मन में अमिट छाप छोड़ते हैं। समाज के प्रति उनके रवैये को भी निर्धारित करते हैं। यह नैतिकता है कि जो विद्यार्थी या अभिभावक अपनी समस्या लेकर शिक्षा बोर्ड में आता है, तो उस समस्या का समाधान होना चाहिए। विद्यार्थियों को दिया गुरुमंत्र विद्यार्थियों को गुरु मंत्र देते हुए डॉ. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए गुरुमंत्र यह है कि वे अपने टीचरों में पूरी श्रद्धा रखें। क्षमाशीलता अपने अंदर बनाए रखें। अपने कैरियर के प्रति सचेत रहें। लेकिन किसी भी बात का अपने दिमाग पर दबाव (प्रेशर) ना बनाएं कि वह आपके सोचने व निर्णय लेने की क्षमता को ही प्रभावित कर दे। सबसे पहले बात जितने विद्यार्थी या युवा हैं वे समाज की अमूल्य धरोहर हैं। समाज को कुछ अपेक्षाएं हैं। स्वयं अपने आप को समाज के प्रति इस प्रकार से तैयार करें, कि आप समाज को कुछ दे सके।
NEET मुद्दे को लेकर गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर एक हाईलेवल मीटिंग चल रही है। इस बैठक में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, NTA के DG अभिषेक सिंह और PMO के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद हैं। इधर, परीक्षा रद्द होने के बाद, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने फीस रिफंड के लिए बैंक खाते की जानकारी जमा करने की डेडलाइन 22 जून को रात 11:50 बजे तक बढ़ा दी है। पिछली डेडलाइन 27 मई थी। उम्मीदवारों को रिफंड लिंक तक पहुंचने और अपने बैंक खाते की जानकारी जमा करने के लिए अपने क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके लॉग इन करना होगा। NEET एग्जाम 3 मई को भारत के 551 और विदेश के 14 शहरों में हुआ था, जिसमें 22 लाख से ज्यादा स्टूडेंट शामिल हुए थे। पेपर लीक के बाद 12 मई को इसे कैंसिल कर दिया गया। सुसाइड करने वाले स्टूडेंट के परिवार से मिले राहुल गांधी कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को NEET की तैयारी कर रहे छात्र प्रदीप मेघवाल के परिवार से मुलाकात की। प्रदीप ने परीक्षा के 'क्वेश्चन बैंक' लीक होने के बाद आत्महत्या कर ली थी। राहुल ने केंद्र सरकार पर कुप्रबंधन का आरोप लगाया और कहा, मोदी-प्रधान की जोड़ी इस परिवार के लिए जवाबदेह है। X पर एक पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा प्रदीप की मौत आत्महत्या नहीं, एक टूटी हुई, भ्रष्ट व्यवस्था की देन है। जिन्होंने परीक्षा प्रणाली को माफ़ियाओं के हवाले कर दिया, और आज भी अपनी कुर्सी से चिपके हैं, मोदी-प्रधान की जोड़ी इस परिवार के सामने जवाबदेह है। आरोपी 5 दिन की CBI रिमांड पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को NEET UG पेपर लीक मामले के सिलसिले में डॉ. मनोज शिरुरे और तेजस हर्षद कुमार शाह को 1 जून तक CBI की पुलिस हिरासत में भेज दिया। स्पेशल जज विद्या प्रकाश ने प्रह्लाद कुलकर्णी और शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को भी 10 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। CBI ने अब तक अलग-अलग जगहों पर 49 स्थानों पर तलाशी ली और कई अहम दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त किए। इस मामले में अब तक कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 3 मई को हुई परीक्षा 12 मई को रद्द NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित हुई थी। इसमें करीब 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। NTA के अनुसार 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिली थी। इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया। 12 मई को परीक्षा रद्द की गई और री-एग्जाम का फैसला लिया गया।
बरेली में बेसिक शिक्षा विभाग का एक आदेश चर्चा का विषय बन गया है। विभाग ने प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों को निराश्रित गोवंश के लिए भूसा दान करने के निर्देश दिए हैं। जारी आदेश के मुताबिक, प्रत्येक विद्यालय को 46 किलोग्राम भूसा जमा करना होगा। भूसा खंड विकास अधिकारी या पशु चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में जमा कराया जाएगा। इसकी रसीद भी विभाग को देनी होगी। प्रशासन ने इस काम को एक सप्ताह के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि आदेश का पालन न करने वाले विद्यालयों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। पूरा मामला नवाबगंज तहसील का है। अब जानिए पूरा मामला…. नवाबगंज खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से 22 मई को एक लेटर जारी किया गया था। नवाबगंज ब्लॉक को जिला प्रशासन की ओर से कुल 100 कुंतल भूसा एकत्र करने का लक्ष्य दिया गया है। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने क्षेत्र के सभी सरकारी विद्यालयों को जिम्मेदारी सौंपी है। आदेश जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के पत्र और जिलाधिकारी के निर्देश के क्रम में जारी किया गया है। विभाग ने साफ कहा है कि सभी विद्यालय अपने स्तर से भूसे की व्यवस्था कर निर्धारित कार्यालयों में जमा कराएं। भूसा जमा होने के बाद उसकी रसीद कार्यालय में उपलब्ध कराना भी अनिवार्य किया गया है, ताकि लक्ष्य की निगरानी की जा सके। वहीं, आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी विद्यालय ने लापरवाही बरती या तय समय सीमा में लक्ष्य पूरा नहीं किया, तो संबंधित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। इसे लेकर शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है।
शिक्षा मंत्री ने 12वीं और 10वीं की मेधावी छात्रा को सम्मानित किया
अम्बाला | राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, नन्यौला में कक्षा 12वीं नॉन मेडिकल संकाय की अनहद कौर अंटाल को सीबीएसई परीक्षा परिणाम में 98.2 प्रतिशत और राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, शहजादपुर की वृंदा को 10वीं में 98 प्रतिशत अंक हासिल करने पर सम्मानित किया गया। पंचकूला स्थित शिक्षा सदन में मेधावी छात्रा अनहद कौर को 11 हजार और वृंदा को 8100 रुपये की नकद राशि पुरुस्कार के रूप में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने प्रदान की। अनहद कौर ने प्रदेश के 468 राजकीय मॉडल संस्कृति और पीएमश्री स्कूलों पहला स्थान पाया था जबकि वृंदा ने प्रदेश में दूसरा स्थान पाया था। डीईओ सुधीर कालड़ा ने कहा कि अनहद कौर ने इंग्लैंड में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई का लक्ष्य बताया।
जरूरतमंद छात्र की शिक्षा का जिम्मा उठाया
पानीपत | गरीब परिवार सहायता समिति ने एक सामाजिक पहल के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के प्रतिभाशाली बच्चे का पानीपत स्थित एसडी विद्या मंदिर स्कूल में चौथी कक्षा में प्रवेश कराया। समिति ने बच्चे की पहचान गोपनीय रखते हुए उसकी शिक्षा की जिम्मेदारी ली और पूरे वर्ष की फीस व अन्य शैक्षणिक खर्च छात्रवृत्ति के रूप में उठाने का निर्णय किया। समिति के अनुसार यह अभियान उन जरूरतमंद बच्चों के लिए है, जो मेहनत और अच्छे अंकों के बावजूद संसाधनों की कमी से पढ़ाई जारी नहीं रख पाते। उद्देश्य यह है कि आर्थिक अभाव किसी होनहार की शिक्षा में बाधा न बने। कार्यक्रम के दौरान समिति सदस्य सरदार रविंद्र सिंह सीए और पवन अरोड़ा उपस्थित रहे।
ललित सुरजन की कलम से - शिक्षा और परीक्षा
'जब हम पढ़ रहे थे, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, आईआईएम तब भी थे।
हरियाणा के विभिन्न कॉलेजों में स्नातक कक्षाओं में दाखिले की ऑनलाइन प्रक्रिया जारी है। उच्चतर शिक्षा विभाग के एडमिशन पोर्टल पर विद्यार्थी 31 मई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस वर्ष भी सभी दाखिले नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत होंगे। पुरानी शिक्षा नीति के अंतिम बैच के पास आउट होने के बाद अब सभी कक्षाओं की पढ़ाई नई नीति के अनुसार होगी। राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू महाविद्यालय, झज्जर के मीडिया प्रभारी डॉ. अमित भारद्वाज ने बताया कि वर्ष 2024 से हरियाणा के सभी कॉलेजों में नई शिक्षा नीति पूरी तरह लागू हो गई है। इसके कारण उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों के बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। पहले स्नातक प्रथम वर्ष में विद्यार्थियों को चार विषय पढ़ने होते थे, जबकि नई व्यवस्था के तहत अब आठ विषय पढ़ने होंगे। तालमेल बैठाने में आ रही दिक्कत एक ओर जहां कॉलेजों में नई शिक्षा नीति लागू हो रही है, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालयों के सामने परीक्षा संचालन और परिणाम घोषित करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। नई और पुरानी दोनों शिक्षा नीतियों के तहत अलग-अलग व्यवस्थाओं के कारण विश्वविद्यालयों को तालमेल बैठाने में कठिनाई आ रही है। उदाहरण के तौर पर, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू), रोहतक में पहले अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक परीक्षाएं शुरू हो जाती थीं। लेकिन इस बार पुरानी और नई दोनों स्कीमों के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाओं के कारण परीक्षाएं 18 मई से शुरू हो सकीं। दिसंबर में हुई परीक्षाओं के परिणाम भी मई तक जारी होते रहे। वर्तमान में नए सत्र की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि पिछले सत्र की परीक्षाएं अभी भी चल रही हैं। पिछले सत्र के दौरान खाली सीटों को भरने के लिए 27 अक्टूबर तक दाखिले किए गए थे और इसके एक महीने बाद ही दिसंबर में परीक्षाएं शुरू हो गई थीं। दाखिलों की दौड़ और परीक्षाओं के इस 'चक्रव्यूह' के बीच नई और पुरानी व्यवस्थाओं के बीच तालमेल बिठाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। बदल गई है परिभाषा अब डिग्री को प्रोग्राम के नाम से जाना जाता है और सब्जेक्ट अब कोर्स के नाम से पुकारा जाता है। अब बीए (पास कोर्स) को बीए (मल्टी डिसिप्लिनरी), बीएससी (मेडिकल) को बीएससी (लाइफ साइंस) और बीएससी (नॉन मेडिकल) को बीएससी (फिजिकल साइंस ) के नाम से जाना जाता है। चार साल में मिलेगी डिग्री पुराने 03 वर्षीय यूजी प्रोग्राम को अब 04 वर्ष का कर दिया गया है। पुराना तीन वर्षीय ऑनर्स प्रोग्राम भी 04 साल के सिंगल मेजर प्रोग्राम में बदल गया है। हालांकि विद्यार्थी विभिन्न चरण पूरा करने के बाद पढ़ाई बीच में छोड़ सकते हैं और संबंधित विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार सभी शर्तों को पूरा करने के बाद योग्यता प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं। एक साल के बाद यूजी सर्टिफिकेट, दो साल के बाद यूजी डिप्लोमा, तीन साल के बाद प्रमुख विषय में यूजी डिग्री, चार साल के बाद प्रमुख विषय में यूजी ऑनर्स या ऑनर्स के साथ रिसर्च डिग्री देने का प्रावधान किया गया है। पढ़ने होंगे कई विषय हर चार साल के मल्टी डिसिप्लिनरी यूजी प्रोग्राम में मेजर कोर्स (डीएससी), माइनर कोर्स (एमआईसी), मल्टी डिसिप्लिनरी कोर्स (एमडीसी), एबिलिटी एन्हांसमेंट कोर्स (एईसी), स्किल एन्हांसमेंट कोर्स (एसईसी), वैल्यू एडेड कोर्स (वीएसी) तथा इंटर्नशिप और शोध का प्रावधान है। स्नातक कक्षाओं के पहले सेमेस्टर में विद्यार्थियों को तीन मेजर कोर्स, एक माइनर कोर्स, एक स्किल एनहांसमेट कोर्स, एक मल्टी डिसिप्लिनरी कोर्स, एक एबिलिटी एन्हांसमेंट कोर्स और एक वैल्यू एडेड कोर्स यानि कुल आठ पेपर पढ़ने पड़ते हैं। लचीली है नई शिक्षा नीति नई शिक्षा नीति बहुत लचीली है। अब कला, विज्ञान और वाणिज्य की पारम्परिक सीमायें टूट रही हैं। आर्ट्स का विद्यार्थी कॉमर्स का विषय पढ़ सकता है और विज्ञान का विद्यार्थी संगीत का ज्ञान प्राप्त कर सकता है। हर विद्यार्थी को अपनी एबीसी आईडी बनवानी पड़ती है, जिसे एकेडेमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट कहा जाता है, जिससे विद्यार्थियों का शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित हो जाता है।
पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड द्वारा हाल ही में संपन्न हुई कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पठानकोट जिले के मेधावी छात्रों को जिला शिक्षा कार्यालय ने सम्मानित किया। इस अवसर पर जिले के शीर्ष 10 स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को मोमेंटो देकर प्रोत्साहित किया गया। यह सम्मान समारोह जिला शिक्षा अधिकारी पठानकोट कमलदीप कौर के नेतृत्व में आयोजित किया गया। समारोह में छात्रों के अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका की भी सराहना की गई, जिन्होंने विद्यार्थियों की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। जिला शिक्षा अधिकारी कमलदीप कौर ने इस अवसर पर कहा कि छात्रों ने यह सफलता कड़ी मेहनत, अनुशासन और शिक्षकों के सही मार्गदर्शन से ही हासिल की है। उन्होंने सभी सफल विद्यार्थियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। इस कार्यक्रम में डिप्टी डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर सेकेंडरी अमनदीप कुमार और डिप्टी डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर एलिमेंट्री डी.जी. सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
बालवाटिका से बदल रही यूपी में बुनियादी शिक्षा की तस्वीर
UP Basic Education Reform: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार शिक्षा सुधार को प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के साथ-साथ प्री-प्राइमरी स्तर तक मजबूत करने में जुटी हुई है। प्रदेश के समस्त को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में 3 से 6 वर्ष ...
महेंद्रगढ़ के राजकीय महाविद्यालय में इस साल से एमएससी गणित का कोर्स शुरू हो गया है। इसको लेकर विधायक कंवर सिंह यादव ने बुधवार को चंडीगढ़ में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा से मुलाकात की। उन्होंने कोर्स को लेकर शिक्षा मंत्री का आभार व्यक्त किया। विधायक यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार सुधार और विस्तार कर रही है। कॉलेज में मैथ से एमएमसी होने से विद्यार्थियों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने यह भी बताया कि महेंद्रगढ़ शिक्षा के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान रखता है। यहां के कई विद्यार्थियों ने आईएएस, आईपीएस सहित विभिन्न उच्च पदों पर पहुंचकर क्षेत्र और प्रदेश का नाम रोशन किया है। 40 सीटों पर होगा प्रवेश उन्होंने बताया कि इसके लिए 40 सीटों की स्वीकृति मिली है। इस पहल से महेंद्रगढ़ के विद्यार्थियों को अब उच्च शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे और उन्हें अपने जिले में ही बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकेंगी। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने विधायक कंवर सिंह यादव को आश्वस्त किया कि महेंद्रगढ़ क्षेत्र के शिक्षा विकास और विद्यार्थियों के हितों में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
बालवाटिका से बदल रही बुनियादी शिक्षा की तस्वीर, यूपी सरकार प्री-प्राइमरी शिक्षा की मजबूत कर रही नींव
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार शिक्षा सुधार को प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के साथ-साथ प्री-प्राइमरी स्तर तक मजबूत करने में जुटी हुई है। प्रदेश के समस्त को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए गतिविधि आधारित आधुनिक शिक्षण सामग्री का वितरण शुरू किया गया है।
CBSE और शिक्षा मंत्रालय को भेजा लीगल नोटिस, छात्र का आरोप- ‘बदल गई इंग्लिश की कॉपी’
। छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि बोर्ड की ऑनलाइन प्रणाली (OSM) में तकनीकी खामियों के कारण कई छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी तक समय पर पहुंच नहीं मिल पाई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कई अभिभावक और छात्र दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित CBSE के रीजनल ऑफिस पहुंचकर अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं।
हरियाणा सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए शंकर लाल धुपड़ को हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। जारी आदेश के अनुसार, राज्यपाल की मंजूरी के बाद शंकर लाल धुपड़ की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। आदेश 26 मई 2026 को पंचकूला से जारी किया गया। आदेश में कहा गया है कि उनकी नियुक्ति की शर्तें एवं नियम मुख्य सचिव कार्यालय के राजनीतिक एवं संसदीय कार्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू होंगे। पवन शर्मा की जगह शंकर लाल की नई नियुक्ति हुई है। ऑर्डर की कॉपी... परीक्षा संबंधी गतिविधियों को लेकर चर्चा में यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड विभिन्न शैक्षणिक और परीक्षा संबंधी गतिविधियों को लेकर चर्चा में है। नए चेयरमैन के रूप में शंकर लाल धुपड़ पर बोर्ड की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने की जिम्मेदारी रहेगी।यह आदेश स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया, आईएएस द्वारा जारी किया गया है। आदेश की प्रतियां मुख्य सचिव, सभी प्रशासनिक सचिवों तथा संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई हैं। यहां पढ़िए कौन हैं शंकर लाल धुपड़ 1961 में भिवानी में जन्मे शंकर धुपड़ पेशे से वकील हैं। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा भिवानी में पूरी करने के बाद जयपुर विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की। उनकी राजनीतिक शुरुआत 1973 में उस समय हुई, जब उन्होंने भिवानी पहुंची विजयलक्ष्मी पंडित का शहर के मुख्य घंटाघर चौक पर फूल मालाओं से स्वागत किया। इन फूल मालाओं का प्रबंध उन्होंने वैश्य महाविद्यालय में छात्र नेता रहते हुए कक्षा से चंदा इकट्ठा करके किया था। इसके बाद वे जनता पार्टी युवा मोर्चा के वाइस प्रेसिडेंट बने। भिवानी के नवनियुक्त जिला अध्यक्ष शंकर धुपड़ 1988 में बीजेपी को जॉइन किया। जिसके बाद वे पार्टी के लिए निरंतर मेहनत करते रहे 1995 में वे मंडल कार्यकारिणी सदस्य बने और बाद में उन्हें मंडल उपाध्यक्ष बनाया गया। निरंतर पार्टी के लिए कड़ी मेहनत करते रहे। उनके कार्य को देखते हुए उन्हें जिला सचिव बनाया गया। जिसके बाद जिला मीडिया प्रमुख तथा बाद में प्रदेश सह मीडिया प्रमुख बनाया गया। तीन बार जिला महामंत्री बनाए जाने के बाद साल 02015 में उन्हें ओबीसी मोर्चा का प्रदेश महामंत्री बीजेपी द्वारा बनाया गया। 19 अगस्त 2020 को ओम प्रकाश धनखड़ ने उनकी नियुक्ति जिला प्रधान के रूप में की थी।
नारायणपुर का जीएनएम प्रशिक्षण केंद्र बना युवाओं के लिए रोजगार व शिक्षा का जरिया
नारायणपुर| जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा स्थानीय युवाओं को नर्सिंग शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से वर्ष 2014 में एएनएम प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की गई थी। क्षेत्र में बढ़ती आवश्यकता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2017 में इस संस्थान का उन्नयन कर इसे जीएनएम प्रशिक्षण केंद्र के रूप में संचालित किया जा रहा है। जीएनएम प्रशिक्षण केंद्र में वर्तमान में कुल 40 सीटों पर प्रवेश की व्यवस्था है। यहां प्रत्येक वर्ष अक्टूबर-नवंबर में प्रशिक्षण सत्र प्रारंभ किया जाता है। यह तीन वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम है, जिसमें प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं विज्ञान विषय से उत्तीर्ण होना निर्धारित है तथा अभ्यर्थी की आयु कम से कम 18 वर्ष होना आवश्यक है। प्रशिक्षण केंद्र पूर्णतः आवासीय स्वरूप में संचालित किया जा रहा है। वर्तमान में यहां 108 छात्राएं अध्ययनरत हैं। विद्यार्थियों को शासन द्वारा छात्रवृत्ति की सुविधा भी प्रदान की जाती है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की छात्राओं को नर्सिंग शिक्षा प्राप्त करने में सहायता मिल रही है। वर्ष 2017 से सत्र 2023-24 तक इस प्रशिक्षण केंद्र से कुल 182 विद्यार्थी सफलतापूर्वक उत्तीर्ण हो चुके हैं। जिले के लिए यह गौरव की बात है कि इनमें से लगभग 90 प्रतिशत विद्यार्थी वर्तमान में शासकीय, अर्धशासकीय एवं निजी संस्थानों में स्टाफ नर्स के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इससे न केवल जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिली है, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर भी प्राप्त हुए हैं। जीएनएम प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर भी उपलब्ध हैं। छात्राएं आगे बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम में प्रवेश लेकर व्यावसायिक कौशल को विकसित कर सकती हैं।
NEET पेपर लीक पर NSUI का उबाल: भाजपा प्रदेश कार्यालय घेरा, शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग
नीट पेपर लीक मामले को लेकर मंगलवार को एनएसयूआई का आक्रोश सड़क पर फूट पड़ा। महानगर इकाई के नेतृत्व में हरमू मैदान से भाजपा प्रदेश कार्यालय तक आक्रोश मार्च निकाला और घेराव कर केंद्र सरकार व एनटीए के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदेश अध्यक्ष विनय उरांव और महानगर अध्यक्ष सतीश केसरी के नेतृत्व प्रदर्शन में शामिल छात्र-युवाओं ने हाथों में तख्तियां लेकर शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों को न्याय दिलाने की मांग उठाई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए चेतावनी दी कि 10 दिनों के भीतर इस्तीफा नहीं होने पर दिल्ली स्थित आवास का घेराव किया जाएगा। मौके पर मुख्य रूप से महासचिव पवन नाग, प्रवक्ता संजीत साह, सचिव अंकिता शिकार, निश्चल सोय, मेराज खान, तल्हा अफरोज, चांद अंसारी, रोहन तिर्की समेत अन्य मौजूद थे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की समीक्षा बैठक की। शिक्षक नियुक्ति और ड्रॉप आउट रोकने पर जोर दिया। शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया तेज करने का निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि सभी खाली पद भरना सरकार की प्राथमिकता है। पिछले कुछ महीने में हजारों शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। यह प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए। नवनियुक्त शिक्षकों के वेरिफिकेशन का काम इस महीने के अंत तक पूरा करें। उन्हें समय पर वेतन दें। छह महीने बाद राज्य का कोई भी स्कूल सिंगल टीचर के भरोसे नहीं रहना चाहिए। हर पंचायत तक क्वालिटी एजुकेशन पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं के साथ आधुनिक तकनीक आधारित संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे है। ड्रॉप आउट में लगातार सुधार हो रहा है। इस मामले में झारखंड राष्ट्रीय औसत से आगे है। रिजल्ट में भी सुधार हो रहा है। इसे और बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण और शिक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना होगा। अधिकारियों ने बताया कि विभाग की ओर से विशेष अभियान चलाकर स्कूल छोड़ चुके बच्चों का दोबारा एडमिशन कराया जा रहा है। श्रम विभाग के सहयोग से मजदूरी या अन्य काम में लगे बच्चों की पहचान कर उन्हें शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। किताब, साइकिल और अन्य शैक्षणिक सामग्री का वितरण भी समय पर हो रहा है। जिन स्कूलों का रिजल्ट कमजोर रहा, वहां विशेष सुधार कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने स्कूलों में खेल गतिविधियां बढ़ाने और खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को आगे बढ़ाने को कहा। सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की संख्या 5000 होगी मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की संख्या बढ़ाकर पांच हजार करने की योजना पर काम करें। हर पंचायत तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन समितियों के सहयोग से स्थानीय युवाओं को शिक्षण कार्य से जोड़ने का सुझाव भी दिया। दिशोम गुरु स्कूल का डीपीआर एक सप्ताह में बनाने का निर्देश जगुआर कैंपस में प्रस्तावित दिशोम गुरु शिबू सोरेन विद्यालय की स्थापना पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि स्कूल के लिए छह एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। इस पर मुख्यमंत्री ने एक सप्ताह के भीतर डीपीआर बनाने का निर्देश दिया। समाज कल्याण विभाग के खाली पद भी तत्काल भरें समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सीडीपीओ के 106, महिला पर्यवेक्षिका के 433 और आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका के 1480 पर खाली हैं। सीएम ने ये पद भरने का भी निर्देश दिया।
नूंह जिले में हरियाणा बोर्ड परीक्षाओं में खराब प्रदर्शन करने वाले सरकारी स्कूल अब शिक्षा विभाग के निशाने पर आ गए हैं। जिन स्कूलों का बोर्ड परीक्षा परिणाम 40 प्रतिशत से कम रहा है, उन स्कूलों के शिक्षकों और संबंधित स्टाफ को जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) राजेंद्र शर्मा ने नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। शिक्षा विभाग ने कमजोर परीक्षा परिणाम को गंभीरता से लिया है। विभाग का मानना है कि लगातार खराब प्रदर्शन विद्यार्थियों के भविष्य पर सीधा असर डालता है, इसलिए इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। ऐसे स्कूलों के अध्यापकों को एक बैठक में उपस्थित होने के निर्देश भी दिए गए हैं। 'लापरवाही मिलने पर कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई' डीईओ राजेंद्र शर्मा ने स्पष्ट किया कि बोर्ड परीक्षाओं में खराब नतीजों को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। जिन स्कूलों का परिणाम बेहद कमजोर रहा है, वहां पढ़ाई की व्यवस्था, शिक्षकों की कार्यशैली और विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति की समीक्षा की जाएगी। जांच में लापरवाही सामने आने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है। खराब परिणाम देने वाले स्कूलों की जवाबदेही आवश्यक शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई से जिले के सरकारी स्कूलों में हड़कंप मच गया है। शिक्षक अपने परीक्षा रिकॉर्ड और परिणाम संबंधी दस्तावेज तैयार करने में जुट गए हैं। वहीं, अभिभावकों का कहना है कि बोर्ड परीक्षाओं में लगातार खराब परिणाम देने वाले स्कूलों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है, ताकि शिक्षा का स्तर सुधर सके। शिक्षा विभाग के इस कदम को कमजोर परिणाम वाले स्कूलों पर एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई माना जा रहा है। इससे आने वाले शैक्षणिक सत्र में बेहतर प्रदर्शन का दबाव बढ़ेगा और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।
बेगूसराय सदर प्रखंड के चांदपूरा पंचायत स्थित +2 विद्यालय चांदपूरा के जर्जर खपरैल भवन को लेकर मंगलवार को छात्रों, युवाओं और ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा गया। सभी ने विद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर शिक्षा विभाग के खिलाफ आवाज बुलंद की और नए विद्यालय भवन निर्माण की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों पुराना विद्यालय भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। भवन की दीवारें टूट रही हैं तथा छत भी कमजोर हो गई है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद छात्र-छात्राएं जान जोखिम में डालकर उसी भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। छात्रों और युवाओं ने प्रधानाध्यापक अनिल कुमार चौधरी को आवेदन सौंपते हुए जर्जर भवन में कक्षाएं तत्काल बंद करने की मांग की। छात्र संगठन के इकाई मंत्री शशि राज ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। इस दौरान पंचायत मुखिया अरविंद कुमार साह और सरपंच कृष्ण कुमार ने भी छात्रों की मांग का समर्थन किया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और शिक्षा विभाग को अविलंब नए भवन निर्माण की दिशा में कार्रवाई करनी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी गई। वहीं सांसद गिरिराज सिंह को भेजने के लिए आवेदन तैयार कर हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो विद्यालय में तालाबंदी कर शिक्षा विभाग कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा आज पंचकूला स्थित शिक्षा सदन पहुंचे। जहां उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि वर्ष 2026 में 10वीं कक्षा के टॉप 100 विद्यार्थियों, चयनित शिक्षकों और अन्य मेधावी छात्रों को इसरो केंद्रों का भ्रमण कराने का अवसर मिलेगा। शिक्षामंत्री ने कहा कि हरियाणा में जिन विद्यार्थियों ने 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए टॉप किया है, उन मेधावी बच्चों को सरकार द्वारा सम्मानित किया जाएगा। प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नए प्रयास कर रही है ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़ा जा सके। उन्होंने बताया कि इस बार हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बजट में विशेष प्रावधान करते हुए मेधावी विद्यार्थियों को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की दुनिया से रूबरू कराने की घोषणा की है। तकनीक को जान सकेंगे छात्र मंत्री ने कहा कि चयनित विद्यार्थियों को इसरो के विभिन्न केंद्रों का शैक्षणिक भ्रमण कराया जाएगा, जहां वे अंतरिक्ष विज्ञान, सैटेलाइट तकनीक और रॉकेट प्रणाली जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्रत्यक्ष रूप से हासिल कर सकेंगे। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए यह विशेष योजना तैयार की गई है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में विज्ञान, तकनीक और नवाचार के प्रति रुचि बढ़ाना है। समारोह में 22 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। मंत्री ने परीक्षा में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को क्रमश 11 हजार, 8100 व 5100 रुपये से सम्मानित किया। हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया, माध्यमिक शिक्षा के निदेशक जितेंद्र दहिया, डायरेक्टर मनिता मलिक, स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर हरियाणा स्कूल, शिक्षा परियोजना परिषद स्वपनिल रवींद्र पाटिल व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
नमस्कार शिक्षामंत्रीजी ने पाली से कोटा तक रोडवेज बस में सफर करके ईंधन बचाने का संदेश दिया। डीग में गृह राज्यमंत्रीजी और कलेक्टर महोदय ने मिलकर पदयात्री के तलवों में मेहंदी लगाई। जयपुर में पीसीसी चीफ और सीनियर बीजेपी नेता ने एक-दूसरे पर वार-पलटवार किया। जोधपुर के बीजेपी ट्रेनिंग कैंप में मंत्रीजी और विधायकजी ने बॉलीवुड गीतों पर जुगलबंदी की। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. बस में शिक्षामंत्री मदन दिलावर सईद कादरी साहब ने खूबसूरत गीत लिखा। इसे जुबिन नौटियाल ने उतने ही सुरीले ढंग से गाया। जूनियर श्राफ की फिल्म बागी-2 में यह गीत था, जिसके बोल थे- लो सफर शुरू हो गया। इस वक्त यह सफर रोमांटिज्म वाला नहीं, बल्कि ईंधन बचाने के लिए ट्रेन, बस और ईवी का है। प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद सिलसिलेवार ढंग से यह सफर चल रहा है। इसी कड़ी में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पाली से कोटा तक रोडवेज बस में सफर किया। हालांकि विधायकों व मंत्रीगण को रोडवेज बसों में फ्री यात्रा का अधिकार मिलता है। किंतु मंत्रीजी ने विशाल हृदय दिखाते हुए टिकट खरीदकर कंडक्टर और रोडवेज को भी निहाल किया। नेतागण जब भी आमजन की तरह सफर करते हैं तो आम जन को सूचना देने के लिए सफर को शूट करने के लिए कैमरामैन जरूर मौजूद रहते हैं। उनका मौजूद रहना लाजिमी भी है। क्योंकि किसी हस्ती का आम आदमी की तरह व्यवहार करना आम आदमी को यह हौसला देता है कि वह आम आदमी की तरह व्यवहार कर सके। तो आम आदमी तक संदेश पहुंचाने के लिए मंत्रीजी का बस में चढ़ना, विधायक सीट पर बैठे सज्जन को उठाकर मंत्रीजी को बैठाना, मंत्रीजी का टिकट लेना, मंत्रीजी का सफर करते हुए मोबाइल देखना, अन्य यात्रियों से संवाद करना और सकुशल मुकाम तक पहुंचना…सब कुछ तस्वीरों-दृश्यों में कैद किया गया। मंत्रीजी मुकाम पर पहुंचे तो खिड़की से जनता का अभिवादन किया। मंत्रीजी सीट से उठने ही वाले थे कि एक पत्रकार बंधु को याद आया कि उसका कैमरामैन अभी तक मौके पर नहीं पहुंचा है। उसने उठ रहे मंत्रीजी महोदय से वापस बैठने की गुहार लगाई। ताकि मंत्रीजी के रोडवेज वाले सफर को उनका कैमरामैन भी शूट कर सके और अपने सर्कुलर वाले आम जन तक तस्वीर-दृश्य पहुंचा सके। 2. मंत्रीजी और कलेक्टर साहब की ‘मेहंदी सेवा’ कुछ लोग सदियों से ईंधन बचा रहे हैं। इन्हें धार्मिक पदयात्री कहा जाता है। ये पैदल ही चलकर अब तक धर्म कमाते थे। ताजा जानकारी के अनुसार ये सदियों से ईंधन भी बचाते आ रहे हैं। ब्रज में चौरासी कोस की परिक्रमा का दौर चल रहा है। यात्रा सुगम रहे और यात्रियों को किसी तरह तरह की परेशानी न हो, इसका जायजा लेने गृह राज्यमंत्रीजी डीग के एक कैंप में पहुंच गए। जहां यात्रियों के लिए विश्राम स्थल बनाया गया था। कलेक्टर साहब भी मंत्रीजी के साथ थे। मंत्रीजी ने देखा कि एक युवक ने बाल्टी में मेहंदी कलर का गाढ़ा घोल भर रखा है। युवक थके-मांदे यात्रियों के पैरों पर उस घोल का लेप लगा रहा है। यह घोल सच में मेहंदी ही था। पता चला कि परिक्रमा लगाते यात्रियों के पांव छालों और आंटन (गांठ) से भर जाते हैं। मेहंदी लगाने से उन्हें राहत मिलती है। मंत्रीजी को इस भाव ने आनंदित किया। वे एक बुजुर्ग यात्री के पास बैठे और हाथ में मेहंदी का गाढ़ा घोल लेकर खुद भी यात्री के तलवों पर लगाने लगे। प्रशासन को चाहिए कि वह शासन को फॉलो करे। इसी नियम के आधार पर कलेक्टर महोदय भी वहीं मंत्रीजी के पास पालथी मारकर बैठ गए और बुजुर्ग के दूसरे पैर पर मेहंदी का लेप लगाने लगे। बुजुर्ग को आधे रास्ते में ही चौरासी कोस परिक्रमा का फल मिल गया। एक पैर मंत्रीजी लेकर बैठे हैं। दूसरा पैर कलेक्टर साहब लेकर बैठे हैं। मेहंदी सेवा हो रही है। इससे बढ़कर सुख क्या होगा। यात्रा धन्य हो गई। साथ ही साथ मंत्रीजी और कलेक्टर महोदय ने भी धर्म-लाभ कमा लिया। इस सुअवसर के लिए भी वहां हमेशा की तरह कैमरामैन मौजूद था, जिसने इस सेवा-भाव को आम जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया। 3. डोटासरा VS राठौड़ शेखावाटी के धुरंधरों में जब टकराव होता है तो जबरदस्त होता है। इन दिनों बीजेपी के सीनियर नेता राजेंद्र राठौड़ और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के बीच वाक-युद्ध चल रहा है। एक-दूसरे पर जमकर पलटवार किए जा रहे हैं। पक्ष-विपक्ष का काम भी यही है। एक-दूसरे की नाकामी उजागर करना। एक-दूसरे के गलत काम को सामने लाने का प्रयास करना। यह करने के लिए आमतौर पर आरोप लगाए जाते हैं। फिर आरोपों की सफाई में पलटकर आरोप लगाते हुए वार किया जाता है। इस तरह मुख्य मुद्दा गौण हो जाता है और शब्द बाण की गर्जना भर रह जाती है। शास्त्रों में इसी को राजनीति कहा जाता है। पत्रकार के सामने पीसीसी चीफ बैठे थे। विषय था- 'बंगाल चुनाव में भाजपा की जीत के पीछे राजेंद्र राठौड़ की भूमिका' विषय को ही डोटासराजी ने सिरे से नकारते हुए कहा- राजेंद्र राठौड़ क्या हैं? वे तो फरारी काट रहे हैं। फ्री हैं इसलिए इधर-उधर घूमते हैं। पार्टी काम देती है तो मन लगा रहता है। पत्रकार ने सवाल दूसरे ढंग से फिर दोहराया। कहा- बंगाल में मंच से कहा गया कि राजेंद्र राठौड़ और सात-आठ विधायकों ने बढ़िया काम किया। डोटासराजी ने जवाब में आरोपों की बौछार की- तो क्या राजेंद्र राठौड़ ने बंगाल में सरकार बना दी? सरकार तो वहां पैसे ने, ईडी ने, इनकम टैक्स ने, सीआरपीएफ ने, धन-बल ने, एसआईआर ने, चुनाव आयोग ने मिलकर बनाई है। इधर, डोटासराजी मानें या न मानें, लेकिन बंगाल चुनाव के बाद पार्टी में राठौड़ साहब की वकत बढ़ गई। पत्रकार ने राठौड़ जी से पेपरलीक से जुड़ा सवाल कर दिया। उन्होंने डोटासराजी पर पिट्ठू बैठाने का प्रयास किया। कहा- डोटासरा जी भूल गए जब पिछली सरकार के समय उनकी सरपरस्ती थी और किस प्रकार सीकर से गारंटेड बैच निकला करते थे। 4. चलते-चलते.. मशहूर विज्ञापनकार पीयूष पांडेजी ने एक राष्ट्रीय महत्व का गीत लिखा था। 1988 में इसे स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पहली बार प्रसारित किया गया था। यह गीत था- मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा। महान आत्मा पांडेजी पिछले वर्ष फानी जहान को अलविदा कह गए। लेकिन उनका लिखा यह गीत अमर हो गया। इस गीत का प्रयोग राजनीति में विविध भांति से आज भी किया जाता है। जोधपुर में पंडित दीनदयाल प्रशिक्षण महा अभियान के तहत जिला वर्ग की ट्रेनिंग चल रही थी। ट्रेनिंग में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और जोधपुर शहर विधायक अतुल भंसाली मौजूद थे। अन्य नेतागण, पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी शामिल थे। शक्तिशाली संगठन ही शक्तिशाली पार्टी का आधार होता है। संगठन को शक्तिशाली बनाए रखने के लिए जरूरी है कि सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का सुर मिले। अगर नेतागण-पदाधिकारी-कार्यकर्ता अपना-अपना राग अलापने लगेंगे तो संगठन कमजोर होगा। इसलिए जरूरी है कि ‘मिले सुर इनका और उनका, तो सुर बने सबका’ इसी नियम का पालन करते हुए केंद्रीय मंत्रीजी और विधायक महोदय ने माइक थामे और गीतकार राजेंद्र कृष्ण का लिखा मशहूर फिल्मी गीत गाया- पल-पल दिल के पास ‘तुम’ रहती हो। यहां 'तुम' से तात्पर्य पार्टी से है। इसके बाद दोनों नेताओं ने संतोष आनंद साहब की अमर रचना का गायन किया- जिंदगी की न टूटे लड़ी, प्यार कर ले घड़ी दो घड़ी। यहां भी जिंदगी का तात्पर्य पार्टी से है। अंत में सभी ने साहिर लुधियानवी साहब का लिखा गीत मिलकर गाया- ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का। यहां भी देश का तात्पर्य पार्टी से है। इनपुट सहयोग- मुकेश कुमार जांगिड़ (डीग), गौरव माथुर (भरतपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
विद्यालयों में लौटेंगी लोरियां, शिक्षा विभाग ने मांगी रचनाएं
उदयपुर | मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन के दौर में बच्चों का बचपन तेजी से भारतीय कविताओं और बाल गीतों से दूर होता जा रहा है। ऐसे समय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षा मंत्रालय ने बचपन की कविता पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य बच्चों को फिर से मातृभाषा, लोकगीतों, लोरियों और तुकांत कविताओं से जोड़ना है। इसके लिए प्रदेश के सभी डाइट संस्थानों को बालगीत, लोरियां और लोक कविताओं का संग्रह तैयार कर राजस्थान के शिक्षा मंत्रालय को 25 मई तक भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इस पहल के तहत स्कूलों में स्थानीय बोलियों, नानी-दादी की कहानियों और पारंपरिक बाल साहित्य को शिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि मातृभाषा में सीखने से बच्चों की भाषा क्षमता, स्मरण शक्ति और रचनात्मकता बेहतर होती है। साथ ही स्थानीय संस्कृति से भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होता है। राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डाइट) को स्थानीय भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी में कम से कम 10 बालगीत, लोरियां या तुकांत कविताओं का संकलन तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इन रचनाओं में स्थानीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक जीवन की झलक शामिल की जाएगी। इस कार्य में जनजातीय अनुसंधान संस्थानों और महिला एवं बाल विकास विभाग का सहयोग भी लिया जाएगा, ताकि आंगनबाड़ी केंद्रों में प्रचलित पारंपरिक बाल रचनाओं को भी संरक्षित किया जा सके। घर-स्कूल में तालमेल, सीखने की क्षमता सुधरेगी शिक्षा विभाग के अनुसार शुरुआती उम्र में मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चे विषयों को अधिक आसानी से समझते हैं और आत्मविश्वास भी बढ़ता है। तुकांत कविताएं, लोकगीत और लोरियां बच्चों की भाषा समझ विकसित करने के साथ सीखने की प्रक्रिया को रोचक बनाती हैं। स्थानीय शब्दों और कविताओं के उपयोग से घर के माहौल और स्कूल के बीच की भाषाई दूरी खत्म होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, मातृभाषा में पढ़ने से बच्चों में तेजी से सीखने की क्षमता का विकास होता है।
शिक्षामंत्री के खिलाफ आंदोलनशिक्षकों पर एफआईआर दर्ज कराने का विरोध
जयपुर | राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) के बैनर तले ग्रीष्मावकाश में मनमानी कटौती वापस लेने की मांग को लेकर शिक्षामंत्री के विधानसभा क्षेत्र में आंदोलन करने पर कई शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। इसका विरोध शुरू हो गया है। आरोप है कि रामगंजमंडी थाने में संगठन के मुख्य संरक्षक सियाराम शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री रामदयाल मीणा, कोषाध्यक्ष हेमंत कुमार जांगिड़ सहित अन्य पदाधिकारियों पर एक महिला भाजपा कार्यकर्ता के जरिए झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई है। शर्मा ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्वक था।
लखनऊ में यासीनगंज स्थित मदरसा जामिया हफ्सा लिलबनात में कार्यक्रम का आयोजन हुआ । 26 वें वार्षिक 'खत्म बुखारी शरीफ' कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मुस्लिम धर्म गुरु मौजूद रहे । इस अवसर पर मदरसे की छात्राओं, अभिभावकों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया । कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मुफ्ती सैयद मोहम्मद उबैदुल्ला आबदी शामिल हुए जिन्होंने शिक्षा और उसकी महत्वता पर चर्चा किया इस अवसर पर मदरसे की छात्राओं को सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाया गया । कारी, आलिम और फाजिल की पढ़ाई पूरी करने वाली छात्राओं को रिजल्ट वितरित कर भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं । सैयद मोहम्मद उबैदुल्ला ने कहा की सभी बच्चों के लिए शिक्षा बेहद जरूरी है। हमें बिना किसी भेदभाव के अपने बच्चों को शिक्षित बनाना चाहिए । समाज में बेटा और बेटी में बिल्कुल भी फर्क नहीं होना चाहिए। शिक्षा पर दोनों का बराबर अधिकार है। मौलाना ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने हमेशा शिक्षित होकर समाज की मदद की बात कही है। यह हम सभी लोगों के लिए जरूरी है कि अच्छी बातों को अपने जीवन में लागू करें। धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ मेडिकल और साइंस की शिक्षा भी हासिल करें। समाज और राष्ट्र निर्माण में अपना पूरा योगदान दें। वतन से मोहब्बत करना हमारे लिए बेहद जरूरी है। वतन से मोहब्बत का सबसे बड़ा प्रमाण यही है कि उसकी तरक्की के लिए काम करें और देश में रहने वाले लोगों की निस्वार्थ सेवा करें। धर्म और जाति के भेदभाव से ऊपर उठकर एकता के सूत्र में बंधकर कर काम करने की जरूरत है।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के विरोध में सोमवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर में NSUI कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने केंद्र सरकार और NTA के खिलाफ नारेबाजी करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री ध्रमेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। NSUI पदाधिकारियों और छात्रों ने कहा कि NEET जैसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षा में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों का विश्वास तोड़ा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर जवाबदेही तय करने में विफल रही है। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने हाथों में तख्तियां लेकर “पेपर लीक बंद करो” और “शिक्षा व्यवस्था बचाओ” और ध्रमेंद्र प्रधान इस्तीफा दो जैसे नारे लगाए। NSUI नेताओं ने कहा कि देशभर के लाखों छात्र दिन-रात मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत और सपनों पर पानी फेर देती हैं।छात्र नेताओं ने कहा कि युवाओं की मेहनत, विश्वास और भविष्य की रक्षा करना सरकार और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई और परीक्षा प्रणाली में सुधार नहीं किया गया, तो छात्र संगठन आंदोलन को और तेज करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि NEET परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए। इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और NSUI कार्यकर्ता मौजूद रहे।
जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत सोमवार शाम स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह विवेकानंद घाट पहुंचे। मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से सेठानी घाट के पहले मिलने वाले नाले और नर्मदा प्रदूषण को लेकर सवाल पूछे गए। सवाल पर मंत्री ने कहा कि यह एक सतत प्रक्रिया है और ऐसे बदलाव एक साल या एक कार्यकाल में पूरी तरह संभव नहीं होते। उन्होंने कहा कि विकास और सुधार लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और सरकार प्राथमिकता के आधार पर काम कर रही है। “नर्मदा का जल निर्मल रहे, इस पर सरकार की नजर” नर्मदालोक परियोजना और नालों के पानी को सीधे नर्मदा में जाने से रोकने को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने कहा कि सरकार, अधिकारी और समाजसेवी सभी इस दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि नर्मदा का जल स्वच्छ बना रहे और नदी का प्रवाह बाधित न हो। “अभियानों को लोग लंबे समय तक याद रखेंगे” जल गंगा संवर्धन अभियान पर मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भागीदारी से लोगों में जागरूकता बढ़ती है। उन्होंने स्वच्छता अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि समय के साथ ऐसे अभियानों का असर दिखाई देता है और लोग इन्हें लंबे समय तक याद रखते हैं। कॉकरोच जनता पार्टी पर भी दिया बयान सोशल मीडिया पर चर्चित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा कि राजनीति और जनसेवा में आगे बढ़ने के लिए तय प्रक्रियाओं और मापदंडों से गुजरना पड़ता है। समय और परिस्थितियां तय करती हैं कि कौन किस उद्देश्य से आगे बढ़ रहा है। घाट पर पांच मिनट सफाई कीघाट पर स्वच्छता अभियान के तहत करीब 100 फीट के दायरे में पांच मिनट तक ही सफाई की गई। इसके बाद मंत्री और अधिकारी घाट क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों का निरीक्षण करते नजर आए। उनके साथ राज्यसभा सांसद माया नारोलिया, विधायक ठाकुरदास नागवंशी, नगर पालिका अध्यक्ष नीतू यादव, जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन सहित प्रशासनिक अधिकारी और भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे।
गोरखपुर में शिक्षा और संस्कार पर हुई चर्चा:विद्वत परिषद की बैठक संपन्न, राष्ट्र निर्माण पर दिया जोर
गोरखपुर के सरस्वती शिशु मंदिर (10+2) रेल विहार, राप्ती नगर में रविवार को विद्वत परिषद की वार्षिक समीक्षा एवं कार्ययोजना बैठक आयोजित की गई। बैठक में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने, भारतीय संस्कारों को बढ़ावा देने और समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत की ओर से हुई, जिसमें गोरक्ष प्रांत के अलग-अलग विद्यालयों से आए आचार्य, शिक्षाविद और विद्वतजन शामिल हुए। मुख्य अतिथि क्षेत्रीय सह संयोजिका डॉ. रिचा सिंह ने कहा कि विद्वत परिषद के विचारों और कार्यों को सिर्फ विद्यालयों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इन्हें समाज और प्रांत स्तर तक पहुंचाने की जरूरत है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि परिषद केवल योजना बनाने वाला मंच नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षा के जरिए समाज को सही दिशा देने का काम किया जा रहा है। शिक्षा दर्शन और संस्कार आधारित शिक्षा पर दिया जोर बैठक की अध्यक्षता कर रहे शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत के मंत्री डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने कहा कि परिषद का मुख्य उद्देश्य शिक्षा दर्शन को मजबूत करना, शिक्षकों को सही मार्गदर्शन देना और संस्कार आधारित शिक्षा को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देना भी जरूरी है। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय निधि के संरक्षण और भारतीय शिक्षा पद्धति को मजबूत करने पर भी जोर दिया। भारतीय संस्कृति और परंपरा को आगे बढ़ाने की बात विशिष्ट अतिथि एवं प्रदेश निरीक्षक राम सिंह ने कहा कि विद्वत परिषद समाज और राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर काम करता है। उन्होंने कहा कि हमारी पुरानी शिक्षा पद्धति, भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा दुनिया भर में अपनी अलग पहचान रखती है। नई पीढ़ी को इन मूल्यों से जोड़ना जरूरी है। परिषद इसी दिशा में लगातार काम कर रहा है।
कटनी के रीठी स्थित सांदिपनि विद्यालय में एक महिला ने प्राचार्य पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालने का गंभीर आरोप लगाया है। जिला शिक्षा विभाग की कार्रवाई से असंतुष्ट होकर पीड़िता सोमवार को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंची। पीड़िता ने आरोपी प्राचार्य को तत्काल बर्खास्त करने और उनके खिलाफ आपराधिक मामला (FIR) दर्ज करने की मांग की है। पीड़िता ने रीठी के सांदिपनि विद्यालय के प्राचार्य हेमराज कारपेंटर पर शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डालने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले की विभागीय जांच कराई। जांच पूरी होने पर विभाग ने प्राचार्य के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की, बल्कि उन्हें सांदिपनि विद्यालय से हटाकर बहोरीबंद के एक अन्य विद्यालय में संबद्ध कर दिया। सोमवार को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंची पीड़िता ने विभाग की इस कार्रवाई पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। पीड़िता का आरोप है कि शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मामले को दबाने और आरोपी प्राचार्य को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। विभाग को अपनी साख की चिंता, छात्राओं की नहीं पीड़िता ने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें सूचित किया कि पुलिस मामला दर्ज होने से विद्यालय और शिक्षा विभाग की छवि खराब होगी। पीड़िता ने चिंता व्यक्त की कि विभाग अपनी साख को लेकर चिंतित है, लेकिन विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं की सुरक्षा और भविष्य की परवाह नहीं कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरोपी पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में विद्यालय की छात्राओं के साथ भी अप्रिय घटना हो सकती है। दोबारा करवा लेंगे जांच जिला शिक्षा अधिकारी राजेश अग्रहरी ने विभाग का कहना है कि विभाग द्वारा की गई कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार है। शिकायत प्राप्त होने के बाद हमने तत्काल एक जांच दल गठित कर मामले की विधिवत जांच कराई थी, जिसके आधार पर प्राचार्य को वहां से हटाया गया है। यदि शिकायतकर्ता इस जांच और कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं, तो हम पुनः एक बार और दूसरी टीम गठित कर मामले की निष्पक्ष जांच करवा लेंगे।
बड़वानी जिले की स्थापना को 28 वर्ष पूरे हो गए हैं, लेकिन आज भी यहां के ग्रामीण पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। जिले के लोग दशकों से रेल मार्ग की मांग कर रहे हैं, जो अभी तक पूरी नहीं हुई है। मध्य प्रदेश के अंतिम छोर पर महाराष्ट्र सीमा पर स्थित बड़वानी जिला अपने पुराने किलों और इमारतों के लिए 'निमाड़ का पेरिस' कहलाता था। हालांकि, वर्तमान में कई रियासतकालीन भवन और किले जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। जिले में स्कूल-कॉलेजों और अस्पतालों की भी कमी है। अंचलों में स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा व्यवस्था बदहाल समाजसेवी अजीत जैन ने बताया कि आजादी के सात दशक और जिले की स्थापना के 28 साल बाद भी ग्रामीण तथा पहाड़ी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की कमी है, जबकि कई स्कूल अतिथि शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। जिले के कई सरकारी स्कूलों में बिजली नहीं है। पहाड़ी क्षेत्रों में चार पहिया वाहनों की आवाजाही भी मुश्किल है। गड्ढे खोदकर 'झीरी' से पानी निकाल रहे रहवासी पाटी विकासखंड के खेरवानी, सेमलेट, पीपरकुंड, चेरवी, सागमाल जैसे कई पहाड़ी गांवों के निवासी आज भी गड्ढे खोदकर 'झीरी' से पानी निकालते हैं। उन्हें दूषित नदी-नालों का पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ता है। रेल लाइन की मांग अधिवक्ता शिवपाल सिंह सिसोदिया बताया कि जिले की स्थापना के बाद से ही रेल लाइन की मांग सबसे प्रमुख रही है, क्योंकि इसके बिना विकास की गति धीमी है। बड़वानी की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है, जहां केला, मिर्च, टमाटर और कपास जैसी फसलें उगाई जाती हैं, जिनका निर्यात देश-विदेश में होता है। कई गांवों में पानी की समस्या नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने कहा कि विकेंद्रीकरण केवल शहर स्तर पर नहीं, बल्कि गांव-गांव तक होना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि 'जल जीवन योजना' के बावजूद कई गांवों में पानी की समस्या बनी हुई है। बड़वानी जिले के 28 वें स्थापना दिवस पर जश्न के बीच ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी से जूझ रहे हैं। जिले के दूरदराज इलाकों में आज भी शुद्ध पेयजल की किल्लत, स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, शिक्षा की खराब स्थिति और जर्जर सड़कें स्थानीय लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। आपात स्थिति एंबुलेंस का पहुंचना मुश्किल दूरदराज के गांवों में उच्च शिक्षा, स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी शैक्षणिक सुविधाओं की लचर व्यवस्था के कारण बच्चों के भविष्य पर असर पड़ रहा है। अधिकांश ग्रामीण इलाकों में कनेक्टिविटी की समस्या है। कई गांवों और फलियों तक पक्की सड़कें (CC Road) न होने के कारण आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस या अन्य वाहन पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। हर गांव तक पानी पहुंचने का प्रयास प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने बताया कि हमारी टीम द्वारा पेयजल की समस्याओं को लेकर समाधान कर रहे हैं। धरातल पर पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। मां नर्मदा का आशीर्वाद हमें मिल रहा है। शुद्ध पानी हर मजरे, टोले हर फलिये में मिले। इसको लेकर सरकार लगातार प्रयास कर रही है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रयास कलेक्टर जयति सिंह ने बताया कि जिले में डाक्टरों और स्टॉप की कमी है। लेकर हम प्रयास कर रहे कि जिले को स्पेशल डॉक्टर मिल जाए तो स्वास्थ्य व्यवस्था और बेहतर होगी।
झालावाड़ में महिला एवं बाल विकास विभाग और रॉकेट लर्निंग संस्था ने 'मिशन बुनियाद' कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों पर पूर्व प्राथमिक शिक्षा को प्रभावी बनाना और बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम का नेतृत्व उपनिदेशक रविंद्र कुमार मीणा और संस्थापन अधिकारी अहमद हसन कुरैशी ने किया। इसका मुख्य लक्ष्य ऑनलाइन मॉनिटरिंग के माध्यम से शिक्षण गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करना है। इस अवसर पर जिले की सभी महिला सुपरवाइजर और विभागीय कार्मिक उपस्थित रहे। रॉकेट लर्निंग संस्था की ओर से चितरंजन नामा, भुवनेश पंकज, बसंतीलाल प्रजापत और आफताब नूर ने कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर पूर्व प्राथमिक शिक्षा गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने, बच्चों में प्रारंभिक सीखने की क्षमताओं का विकास करने तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के कौशल संवर्द्धन पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि 'मिशन बुनियाद' के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों को नवाचार आधारित शिक्षण गतिविधियों से जोड़ा जाएगा, जिससे बच्चों के सीखने के स्तर में गुणात्मक सुधार आएगा। उन्होंने इस पहल को गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और सभी संबंधित कार्मिकों से सक्रिय सहयोग का आह्वान किया।
हाल ही में एक एजेंसी के सर्वे में सामने आया कि दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में इंडिया के 97 शहर है। देश में इतनी गर्मी बढ़ने के पीछे जिम्मेदार भी हम ही है। उन्होंने कहा राजस्थान में प्रति व्यक्ति 472 पेड़ की आवश्यकता है और वर्तमान में प्रति व्यक्ति सिर्फ 25 पेड़ है। पर्यावरण का संतुलन नहीं है। हमने निर्मम तरीकों से पेड़ों की कटाई की लेकिन पेड़ लगाए नहीं है। यह बात रविवार को पाली शहर के गोल निम्बड़ा के निकट शनिधाम में आयोजित प्रतिभावान सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्र मदन दिलावर ने कही। उन्होंने अपने संबोधन में जल-पर्यावरण और गायों के संरक्षण की बात कही। साथ ही प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने की सलाह दी। बोले - हमने निर्मत तरीकों से पेड़ों की कटाई की, इसलिए गर्मी बढ़ रहीमंत्री मदन दिलावर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में हम बहुत पिछड़े हुए है। कनाडा में प्रति व्यक्ति 10163 पेड़ है।, अफ्रीम में 3 हजार, ऑस्टेलिया में 6 हजार, चाईना में 130, यूके में 47, भारत में 28 और राजस्थान में प्रति व्यक्ति सिर्फ 25 पेड़ है। जो बहुत कम है। पेड़ कम होने के चलते बरसात कम हो रही भूजल नीचे जा रहा है। जमीन की नमी कम हो रही। जिससे गर्मी बढ़ रही है। पॉलिथीन हमारा दुश्मनउन्होंने कहा कहा कि पॉलिथिन जानवरों से लेकर इंसानों के लिए बहुत घातक है। इसे खाने से गायें मर रही है। नाले में जाती है तो नाली डट जाती है। जलाते है तो जहरीली गैस निकलती है जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक की थैलियां खाने से गायों की मौत हो रही है। उन्होंने सभी को संकल्प दिलाया कि पॉलिथिन का उपयोग न करें। उन्होंने कहा कि इसका उपयोग करने वाले को गौ माता की हत्या का पाप लगेगा। सरकारी स्कूल के बच्चे आ रहे मेरीट में, भारत सरकार ने सहाराउन्होंने कहा कि सरकारी स्कूल के बच्चे अब मेरीट में आ रहे है जो दिखाने के लिए अच्छा है कि राजस्थान में सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने भी प्रदेश की सरकारी स्कूलों में शिक्षा प्रणाली में हुए बदलाव को सराहा। उन्होंने बताया कि 65 लाख बच्चों का स्वास्थ्य प्रशिक्षण भी करवाया। पहले वर्ण व्यवस्था थी जात-पात नहीं, हमें बांटने के लिए जातियां बनाईमंत्री मदन दिलावर ने कहा कि हम सभी के लिए देश हित सबसे पहले होना चाहिए। क्योंकि देश प्रगति करेगा तो हम प्रगति करेंगे। उन्होंने बताया कि पहले काम के आधार पर व्यवस्था थी। क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य और शुद्र। लेकिन हम पर अंग्रेजों, मुगलों ने शासन किया। मुगलों ने इस्लाम स्वीकार करने के लिए कहा। जिन्होंने स्वीकार नहीं किया उन्हें गंदगी उठाने, मरे जानवर उठाने जैसे छोटे काम दिए। जिन्हें बाद में जातियों में बदल दिया गया। जबकि पहले देश में जात-पात नहीं होती थी। भगवान श्रीराम ने शबरी के झूठे बेर खाए जो बताते है कि जात-पात नहीं होती थी।
बांसवाड़ा दौरे पर पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा- मैं हमेशा ‘अकबर महान’ पढ़ता था, जिससे मन में पीड़ा होती थी। जिस आक्रांता ने इस राष्ट्र पर आक्रमण किया, उसे हम महान कहेंगे? इसलिए शिक्षा मंत्री बनते ही मैंने पाठ्यक्रम में बदलाव किया और ‘अकबर महान’ को हटाकर ‘प्रताप महान’ किया और पाठ्यक्रम में शामिल किया। उन्होंने कहा- अभी तक पढ़ रहे होंगे कि भारत की खोज किसने की? तो वास्कोडिगामा का नाम आता है। यानी अंग्रेजों ने और उनसे पहले इस देश पर शासन करने वालों ने हमें हमारी जड़ों से काटा। भारत कितना पुराना है? शायद सनातन 5 हजार या 10 हजार साल पुराना है, उसको वास्कोडिगामा खोजेगा? हमने विश्व को खोजा है, हमको किसी ने नहीं खोजा। GGTU में अध्ययन पीठ का शुभारंभ वासुदेव देवनानी रविवार को बांसवाड़ा दौरे पर पहुंचे। गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय (GGTU) में पंडित दीनदयाल उपाध्याय अध्ययन पीठ का शुभारंभ किया। विश्वविद्यालय पहुंचने पर कुलपति केशव ठाकुर ने गुलदस्ता भेंट कर उनका स्वागत किया। कार्यक्रम में गढ़ी विधायक कैलाश मीणा, पूर्व कुलपति एवं संरक्षक कैलाश सोडाणी सहित कई प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इतिहास पर बोले- ‘हमने विश्व को खोजा है, हमें किसी ने नहीं खोजा’ कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कृति और भारतीय चिंतन को लेकर चर्चा के दौरान वासुदेव देवनानी ने कहा- भारत हजारों साल पुरानी सनातन संस्कृति वाला देश है। हमने विश्व को खोजा है, हमें किसी ने नहीं खोजा। उन्होंने कहा कि विदेशी शासकों ने भारतीय इतिहास और संस्कृति को कमजोर करने का काम किया। बांसवाड़ा के विकास कार्यों की सराहना की कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में देवनानी ने कहा-मुझे अच्छी तरह याद है कि जब मैं पहली बार 1970-71 में बांसवाड़ा आया था, तब यहां का बस स्टैंड, सड़कें और हालात बिल्कुल अलग थे। आज बांसवाड़ा में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बीच की सरकारों ने भी काम किया और वर्तमान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्राथमिकता में भी बांसवाड़ा का चौतरफा विकास शामिल है। त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में दर्शन, प्रशासन रहा अलर्ट GGTU के कार्यक्रम और स्थानीय मुलाकातों के बाद विधानसभा अध्यक्ष के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए जाने का कार्यक्रम तय हुआ। वीआईपी दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर रहा। विश्वविद्यालय परिसर से लेकर मंदिर तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।
शिक्षा मंत्री ने 421 स्टूडेंट्स को किया सम्मानित:बोले-शिक्षा से ही खुद का और समाज का विकास संभव
पाली शहर के निकट गोल निबड़ा खेतावास रोड स्थित शनिधाम में रविवार को बाबा साहेब प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शनिधाम के महामंडलेश्वर स्वामी निजस्वरूपानंदपुरी के सान्निध्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर मौजूद रहे। आयोजन दाती सेवा संस्थान एवं वादी नट भाट जागृति संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। समारोह में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 421 छात्र-छात्राओं को बाबा साहेब शिक्षा रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। शिक्षा मंत्री और संत निजस्वरूपानंदपुरी ने विद्यार्थियों को सम्मान प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस दौरान शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा के जरिए न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामाजिक विकास भी संभव है, इसलिए विद्यार्थियों को पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित करना चाहिए। 9 जिलों के 421 प्रतिभावान विद्यार्थियों का हुआ सम्मान इस सम्मान समारोह में पाली, जोधपुर, जालोर, सिरोही, बाड़मेर, सांचौर, बालोतरा, नागौर और ब्यावर जिलों के करीब 421 प्रतिभावान विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य विशेष पिछड़ा वर्ग, वादी नट भाट, मेघवाल, रैगर (जीनगर), भील, खटिक, वाल्मीकि, दमामी, सरगरा और कामड़ समाज के होनहार विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाना रहा। मंच संचालन गजेंद्र गर्ग ने किया। संतों और गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी कार्यक्रम में सीओ ग्रामीण अमरसिंह रत्नू, समाजसेवी मेघराज सिंह, हरजेश नाराणीया, सागर नाराणीया, मुकेश भाटी, जयेश सोलंकी, मुकेश मेघवंसी, श्रीमहंत श्रद्धापुरी, श्रीमहंत दयापुरी, मां शिवानी, प्रज्ञानंद, ओम महाराज, लाल महाराज, पहलाद कंडारा, नरेंद्र, कालू मारू, सुंगनाराम, ओम फौजी, फोजाराम, मांगीलाल चेराई, घेवरराम, प्रकाश कुमार, भंवर राजपुरा, शिवजीसिंह जेतावत, कन्नू भीलवाड़ा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
नालंदा के नगरनौसा प्रखंड में बहुप्रतीक्षित डिग्री कॉलेज की स्थापना तो हो गई है, लेकिन इसके स्थान चयन को लेकर अब विवाद गहराता जा रहा है। कॉलेज के संचालन को लेकर दो खेमे आमने-सामने हैं। एक पक्ष जहां लोदीपुर स्थित मगध विद्यापीठ उच्च विद्यालय में ही पढ़ाई जारी रखने की मांग कर रहा है, तो दूसरा पक्ष कॉलेज को नगरनौसा बाजार स्थित बालिका उच्च विद्यालय में शिफ्ट कराने के लिए दबाव बना रहा है। लोदीपुर में ही कॉलेज रखने के पक्ष में उठ रही आवाज स्थानीय लोगों और विद्यार्थियों का एक बड़ा वर्ग लोदीपुर के पक्ष में खड़ा है। उनका तर्क है कि यहां कॉलेज के लिए पर्याप्त आधारभूत संरचना मौजूद है। स्थानीय निवासी कवीन्द्र पासवान ने बताया कि स्कूल के पास 4 एकड़ 63 डिसमिल जमीन है। कॉलेज संचालन के लिए 20 कमरे उपलब्ध हैं। कई जगहों पर प्रखंड मुख्यालय से दूर कॉलेज का संचालन सफलतापूर्वक किया जा रहा है, इसलिए सुविधा के लिहाज से लोदीपुर ही सबसे उपयुक्त स्थान है। सुरक्षा और शांत वातावरण है प्राथमिकता कॉलेज को बाजार ले जाने के प्रस्ताव पर छात्राओं में भारी नाराजगी है। छात्रा चांदनी कुमारी और आरती कुमारी ने कहा कि बाजार में शोर-शराबे और यातायात की समस्या के कारण पढ़ाई बाधित होगी। बाजार में असामाजिक तत्वों द्वारा छेड़खानी का डर बना रहता है, जबकि लोदीपुर का वातावरण सुरक्षित और शांत है। जो उच्च शिक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। परीक्षा के दौरान भीड़ बढ़ने पर बाजार में जाम की समस्या भी विकराल रूप ले लेगी, जिससे आम लोगों और छात्रों को भारी परेशानी होगी। राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए कॉलेज को बाजार शिफ्ट कराने की कोशिश कर रहे हैं। शिक्षा के केंद्र को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। राजनीति करना छात्र हित में ठीक नहीं है। डॉ. प्रोफेसर संजय कुमार बने प्रिंसिपल नगरनौसा में डिग्री कॉलेज की लंबे समय से मांग चल रही थी। इस दिशा में पहल करते हुए बीते 11 मई को पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय अंतर्गत 'कॉलेज ऑफ कॉमर्स, आर्ट्स एंड साइंस, पटना' के राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रोफेसर संजय कुमार ने डिग्री महाविद्यालय के प्राचार्य के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। वर्तमान में कॉलेज का शुभारंभ लोदीपुर स्थित उच्च विद्यालय परिसर से ही किया गया है। अब सबकी निगाहें प्रशासनिक निर्णय पर टिकी है। क्या कॉलेज लोदीपुर में ही रहेगा या इसे बाजार शिफ्ट करने के दबाव को स्वीकार किया जाएगा।
शिक्षा विभाग ने ग्रीष्म अवकाश 28 जून तक बढ़ाया
श्रीगंगानगर| शिक्षक संगठनों के दबाव और प्रदेशभर में हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद शिक्षा विभाग ने बैकफुट पर आते हुए ग्रीष्मावकाश कटौती के फैसले में आंशिक बदलाव किया है। राजस्थान के स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां 20 जून के स्थान पर अब 28 जून तक बढ़ा दी गई हैं। पहले स्कूल 22 जून से खुलने थे। अब 29 जून को खुलेंगे। सरकार ने प्रिंसिपल पावर की छुट्टियों में की गई कटौती भी वापस ले ली है। इस सत्र में दो छुट्टियों को घटाकर एक किया था।
डॉ. प्रदीप कुमावत को भारत शिक्षा रत्न अवार्ड
उदयपुर | शिक्षा, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवादी शिक्षा दृष्टि के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उदयपुर के शिक्षाविद् डॉ. प्रदीप कुमावत को भारत शिक्षा र| अवार्ड से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली स्थित कंस्टीटूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित समारोह में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने उन्हें रजत पट्टिका और प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में राजाराम लक्ष्मण सिंह, जनार्दन सिंह सिगरीवाल और सुरेंद्र चौधरी विशिष्ट अतिथि रहे। स्वागत उद्बोधन में ज्ञानेंद्र विश्वकर्मा ने कहा कि डॉ. कुमावत ने शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और महाराणा प्रताप के शौर्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
लखनऊ में उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड का रिजल्ट जारी किया गया। मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा संचालित अरबी एवं फारसी की मुंशी/मौलवी (सेकेंडरी) और आलिम (सीनियर सेकेंडरी) बोर्ड परीक्षा-2026 का परिणाम शुक्रवार को घोषित कर दिया गया। प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ मंत्री ओम प्रकाश राजभर और राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी इस मौके पर मौजूद रहे। ओम प्रकाश राजभर ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई दिया। मंत्रियों ने बताया कि परीक्षाफल मदरसा बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट madarsaboard.upsdc.gov.in पर देखा जा सकता है। वर्ष 2026 की परीक्षा में कुल 80,933 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे, जिनमें से 63,211 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 17,722 अनुपस्थित रहे। परीक्षा को नकलविहीन और पारदर्शी बनाने के लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की गई थी, जिसकी निगरानी सीधे मदरसा बोर्ड मुख्यालय से की गई। सेकेंडरी (मुंशी-मौलवी) परीक्षा में 62,232 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। इनमें से 47,036 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए। इस स्तर पर दीनियात, फारसी/अरबी, उर्दू साहित्य, जनरल इंग्लिश और जनरल हिंदी अनिवार्य विषय रहे, जबकि गणित, गृह विज्ञान, लॉजिक एंड फिलॉसफी, सोशल स्टडीज, साइंस और तिब को वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल किया गया। वहीं सीनियर सेकेंडरी (आलिम) परीक्षा में 18,701 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 16,175 परीक्षार्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए। इस स्तर पर पारंपरिक धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक विषयों का समन्वय सुनिश्चित किया गया। मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं 9 फरवरी से 14 फरवरी 2026 तक प्रदेशभर के 277 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में आयोजित की गई थीं। परीक्षा केंद्रों का निर्धारण जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया गया। मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने असफल विद्यार्थियों से निराश न होने और दोबारा प्रयास कर सफलता हासिल करने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि प्रदेश सरकार मदरसा शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सरकारी स्कूलों के बच्चों को भविष्य की आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। शनिवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में समग्र शिक्षा (माध्यमिक) विभाग और टाटा एंटरप्राइज की कंपनी नेल्को लिमिटेड के बीच एक बड़ा समझौता ज्ञापन (MoU) साइन हुआ। इसके तहत प्रदेश के 600 राजकीय माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अत्याधुनिक 'ड्रीम लैब्स' स्थापित की जाएंगी, जहाँ बच्चे अब किताबों के साथ-साथ रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बनाना सीखेंगे। क्या हैं 'ड्रीम लैब्स' और इनमें बच्चे क्या सीखेंगे? ये ड्रीम लैब्स (डिजाइन, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग) स्कूलों में आधुनिक नवाचार और कौशल विकास केंद्र के रूप में काम करेंगी। इसमें कक्षा 9 से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं को निम्नलिखित एडवांस कोर्सेज का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। आधुनिक तकनीक: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)। फ्यूचर स्किल्स: 3D प्रिंटिंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग। ग्रीन एनर्जी: बैटरी चालित इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) और मॉडर्न एग्रीकल्चर साइंस। 'हब एंड स्पोक' मॉडल: तीन चरणों में बिछेगा लैब्स का जाल तकनीकी शिक्षा को हर इलाके तक पहुंचाने के लिए सरकार इस परियोजना को हब एवं स्पोक मॉडल पर लागू कर रही है। इसके तहत पूरे प्रदेश में 150 हब स्कूल और उनके साथ 450 स्पोक स्कूल जोड़े जाएंगे। यह पूरा प्रोजेक्ट तीन फेज में पूरा होगा: प्रथम चरण: 18 हब और 54 स्पोक स्कूल (कुल 72 स्कूल) द्वितीय चरण: 36 हब और 108 स्पोक स्कूल (कुल 144 स्कूल) तृतीय चरण: 96 हब और 288 स्पोक स्कूल (कुल 384 स्कूल) 'यह उत्तर प्रदेश के युवाओं के भविष्य में निवेश है' एमओयू साइन होने के दौरान बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा, तेजी से बदलती औद्योगिक आवश्यकताओं को देखते हुए राज्य के विद्यार्थियों को इंडस्ट्री 4.0 के कौशलों से लैस करना समय की मांग है। यह समझौता केवल एक स्कूल प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि यूपी के भविष्य में बड़ा निवेश है। वहीं, स्कूल शिक्षा की महानिदेशक मोनिका रानी ने कहा कि यह पहल नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) और स्किल इंडिया मिशन के अनुरूप है। विशेषकर आकांक्षी (पिछड़े) जनपदों के स्कूलों में इस योजना को प्राथमिकता से लागू किया जाएगा ताकि गरीब बच्चों को भी ग्लोबल लेवल की शिक्षा मिल सके। 5 साल तक टाटा ग्रुप की कंपनी रखेगी ख्याल, ग्लोबल ब्रांड्स भी शामिल यह पार्टनरशिप 5 साल के मॉडल पर आधारित है। नेल्को लिमिटेड और उसके सहयोगी औद्योगिक समूह इन लैब्स के लिए अत्याधुनिक मशीनें, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सॉफ्टवेयर और मेंटेनेंस का पूरा खर्च उठाएंगे। इतना ही नहीं, दुनिया की जानी-मानी टेक कंपनियां जैसे यास्कावा, मास्टरकैम, 3डी सिस्टम्स, अज्नालेंस और एसीई माइक्रोमैटिक के इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स खुद सरकारी स्कूलों में आकर बच्चों को ट्रेनिंग देंगे और सरकारी शिक्षकों का भी क्षमता निर्माण (ट्रेनिंग) करेंगे। इस योजना के जमीन पर उतरने के बाद उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों से निकलने वाली नई पीढ़ी सीधे रोजगार और उद्यमिता के वैश्विक अवसरों से जुड़ सकेगी।
रोहतक में जिला परिषद के वार्ड-8 से पार्षद व इनेलो कार्यकर्ता धीरज मलिक ने शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के उस बयान की निंदा की, जिसमें शिक्षामंत्री ने सरकारी स्कूलों में बच्चों से श्रमदान करवाने की बात कही है। धीरज मलिक ने कहा कि सरकारी स्कूल में बच्चों से टॉयलेट साफ करवाने को शिक्षा मंत्री श्रमदान का नाम दे रहे है, जो गलत है। जिला पार्षद धीरज मलिक ने कहा कि एक अनपढ़ व्यक्ति को भाजपा ने शिक्षा मंत्री बना दिया है, जो सरकारी स्कूल में बच्चों द्वारा टॉयलेट साफ करने को श्रमदान का नाम दे रहा है। एक तरफ तो सरकार बाल मजदूरी के खिलाफ अभियान चला रही है, दूसरी तरफ स्कूलों में बच्चों से बाल मजदूरी करवा रहे है। शिक्षा मंत्री कह रहे हैं कि स्कूल में बच्चों से श्रमदान करवा रहे हैं। सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग हो चुकी खंडहर धीरज मलिक ने कहा कि भाजपा के मंत्री उन स्कूलों में जाते हैं, जहां नई बिल्डिंग बनी होती है। कभी भाजपा के किसी मंत्री ने खंडहर हो चुके सरकारी स्कूलों में जाकर देखा है। भाजपा नेता सिर्फ वायदे बड़े-बड़े करते है, जबकि शिक्षा की तरफ उनका कोई ध्यान नहीं है। स्कूलों के अंदर बच्चों से करवाया जा रहा काम धीरज मलिक ने कहा कि बच्चों को सरकारी स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजते है, लेकिन वहां बच्चों से श्रमदान की बोलकर काम करवाया जाता है। शिक्षा मंत्री को खुद सरकारी स्कूल में जाकर काम करना चाहिए। बच्चों से टॉयलेट साफ करवाते हैं, कभी खुद भी करके देखें। बच्चों के लिए टैंक में पानी, खुद आरओ का पीते शिक्षक धीरज मलिक ने कहा कि नया बांस स्कूल में बच्चे जमीन में बनाए टैंक से निकालकर पानी पीते हैं, जो पानी पीने लायक भी नहीं है। वहीं, शिक्षक अपने लिए कैंपर व आरओ लगवा रहे हैं। वहीं, बच्चों के टायलेट की हालत खराब है, जबकि शिक्षकों के टॉयलेट साफ सुधरे हैं। बच्चों को स्कूल में शिक्षी नहीं, बल्कि बीमारियां दी जा रही है।
देवघर जिले में झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) द्वारा जारी मैट्रिक परीक्षा के खराब परिणामों को जिला शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया है। लगातार गिरते परीक्षा परिणाम के मद्देनजर, जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार ने जिले के 24 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए गए हैं। जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन लगातार स्कूलों को शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने, बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई कराने के निर्देश देता रहा है। इसके बावजूद मैट्रिक और इंटर परीक्षा के परिणाम संतोषजनक नहीं रहे, जो चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी बताया कि जिले के लगभग 40 से 50 प्रतिशत स्कूलों का परिणाम काफी कमजोर रहा है। मधुकर कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार द्वारा स्कूलों में स्मार्ट क्लास, मिड डे मील और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके बावजूद यदि छात्र स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं और उनका प्रदर्शन खराब हो रहा है, तो यह स्कूल प्रबंधन की लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्कूलों की जवाबदेही तय की जाएगी। अन्य स्कूलों से भी स्पष्टीकरण मांगा जाएगा उन्होंने जानकारी दी कि प्रारंभिक चरण में 24 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को बुलाकर उनसे खराब परिणामों का कारण पूछा जाएगा। इसके बाद उन अन्य स्कूलों से भी स्पष्टीकरण मांगा जाएगा, जहां छात्रों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा है। पूरे मामले की विभागीय समीक्षा के बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। छात्रों के कमजोर प्रदर्शन में सुधार लाने के लिए जल्द ही रिमेडियल कक्षाएं शुरू की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, छुट्टी के दिनों में बड़े छात्रों की सहायता से छोटे बच्चों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं भी संचालित की जाएंगी। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाना और उनकी शैक्षणिक स्थिति में सुधार लाना है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में जारी जैक मैट्रिक परीक्षा परिणामों में देवघर जिला राज्य स्तर पर 14वें-15वें स्थान पर खिसक गया है। पिछले वर्ष जिले की रैंकिंग 9वें-10वें स्थान के आसपास थी। जिले की इस गिरती शैक्षणिक स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग अब सख्त कार्रवाई की तैयारी में है।
राजस्थान के स्कूलों में गर्मी की छुटि्टयां (ग्रीष्मावकाश) 28 जून तक बढ़ा दी गई हैं। 22 जून से स्कूल खुलने थे। अब स्कूल 29 जून को खुलेंगे। छुट्टियां बढ़ाने को लेकर राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) के बैनर तले शिक्षकों का आंदोलन चल रहा था। सरकार ने शिक्षकों की मांगें मान ली हैं। संघ और शिक्षा विभाग के बीच शनिवार को समझौता हुआ। समझौता पत्र पर शिक्षा मंत्री के विशिष्ट सहायक के हस्ताक्षर किए गए हैं। उधर, इस संबंध में अभी तक शिक्षा निदेशालय की ओर से कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही औपचारिक आदेश जारी किया जा सकता है। पहली बार जारी किए थे आदेशगर्मी की छुट्टियां इस सेशन में कम कर दी गई थीं। सरकार ने आदेश में कहा था कि स्कूल 22 जून से खुलेंगे। इसके बाद से शिक्षकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था। करीब 15 दिनों से शिक्षक आंदोलन पर थे। ब्लॉक लेवल तक शिक्षक धरना दे रहे थे। इस बीच, शनिवार सुबह शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के साथ हुई बैठक में समझौता हुआ। प्रिंसिपल पावर की भी छुटि्टयां बढ़ाईंइस सेशन में सरकार ने पहली बार प्रिंसिपल पावर की दो छुट्टियों को घटाकर एक कर दिया था। इसका भी शिक्षक विरोध कर रहे थे। अब प्रिंसिपल पावर की भी छुटि्टयों की संख्या दो कर दी गई हैं। शिक्षा मंत्री के घर कल रात हुई थी बैठकजयपुर में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के घर पर शुक्रवार देर रात मीटिंग हुई थी। जिसके आधार पर शनिवार सुबह समझौते पर हस्ताक्षर हुए। बैठक में शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेशाध्यक्ष रमेश पुष्करणा, प्रदेश महामंत्री महेंद्र लखारा, संघर्ष समिति के सदस्य और प्रदेश उपाध्यक्ष रवि आचार्य भी शामिल हुए।
राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने रूसी सेना में शामिल होकर पिछले 8 महीनों से लापता एक पंजाबी युवक का मामला केंद्रीय विदेश मंत्री के समक्ष उठाया है। अमृतसर जिले की नवदीप कौर ने निर्मल कुटिया, सुल्तानपुर लोधी में संत सीचेवाल से मिलकर अपने पति हीरा सिंह का पता लगाने की गुहार लगाई है। नवदीप कौर ने बताया कि उनके पति हीरा सिंह अक्टूबर, 2024 में उच्च शिक्षा के लिए मॉस्को गए थे। उन्हें अगस्त 2025 में रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया था। परिवार के अनुसार, भर्ती के समय हीरा सिंह को तुरंत 14 लाख रुपये और प्रति माह ढाई लाख रुपये वेतन देने का आश्वासन दिया गया था। 15 दिनों के सैन्य प्रशिक्षण के बाद युद्ध में भेजा नवदीप कौर के मुताबिक, हीरा सिंह को केवल 15 दिनों के सैन्य प्रशिक्षण के बाद ही युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया। जबकि भर्ती के समय यह कहा गया था कि उनसे केवल सेना के लिए भोजन पहुंचाने और बंकर बनाने जैसे गैर-लड़ाकू कार्य ही लिए जाएंगे। परिवार का कहना है कि हीरा सिंह मानसिक रूप से युद्ध लड़ने के लिए तैयार नहीं थे। सितंबर 2025 को आखिरी बार हुई बात उन्होंने बताया कि सितंबर 2025 में उनकी अपने पति से आखिरी बार बात हुई थी। उसके बाद से पिछले 8 महीनों से उनका कोई संपर्क नहीं हो पाया है। नवदीप कौर का 6 वर्षीय बड़ा बेटा सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, जिसका इलाज फिलहाल पूरी तरह संभव नहीं माना जाता। यह बीमारी बच्चे की गतिविधियों, मांसपेशियों और आवाज को प्रभावित करती है और उम्र बढ़ने के साथ दिमाग पर इसका असर बढ़ता जाता है। उनका दूसरा बच्चा ढाई साल का और तीसरा केवल एक साल का है। बड़ा बेटा न बोल सकता है, न सुन सकता है, न बैठ सकता है और न ही चल-फिर सकता है। प्रधानमंत्री राहत कोष से बीमार बच्चे के इलाज की व्यवस्था करवाने का प्रयास संत सीचेवाल ने नवदीप कौर को भरोसा दिलाया कि उनके लापता पति का पता लगाने के लिए विदेश मंत्रालय और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री राहत कोष से बीमार बच्चे के इलाज की व्यवस्था करवाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही उन्होंने परिवार को आश्वासन दिया कि बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाया जाएगा और वे जहां तक पढ़ना चाहेंगे, उनकी शिक्षा जारी रखी जाएगी।
इटावा में समाजवादी पार्टी के बदायूं सांसद आदित्य यादव ने पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था, महंगाई, रोजगार और व्यापार जैसे मुद्दों को लेकर केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। सैफई स्थित अपने आवास पर आयोजित जनता दरबार में उन्होंने कहा कि शिक्षा से लेकर आर्थिक मोर्चे तक सरकार की नीतियां लगातार सवालों के घेरे में हैं, लेकिन युवाओं, किसानों, व्यापारियों और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर ठोस जवाब नहीं दिए जा रहे हैं। बोले- पेपर लीक शिक्षा व्यवस्था की गंभीर समस्या आदित्य यादव ने कहा कि वर्ष 2024 में पेपर लीक मामलों के बाद सीबीआई जांच और सख्त कार्रवाई के बड़े दावे किए गए थे, लेकिन 2026 में भी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खत्म नहीं हुए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक अब सामान्य घटना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की गंभीर समस्या बन चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों ने लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, क्या उन तक कार्रवाई पूरी तरह पहुंच पाई है। नीट विवाद और छात्रों के मानसिक दबाव का मुद्दा उठाया नीट परीक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि हालिया पेपर लीक और विवादों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने यूपी के एक युवक की तनाव में आत्महत्या का जिक्र करते हुए कहा कि परीक्षा व्यवस्था की अनिश्चितता युवाओं को मानसिक दबाव में धकेल रही है। सरकार को सिर्फ परीक्षा दोबारा कराने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसे मामलों के सामाजिक और मानसिक प्रभावों पर भी गंभीरता से काम करना चाहिए। रोजगार और शिक्षा नीति पर भी सवाल सपा सांसद ने कहा कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के बाद मेधावी छात्रों के लिए रोजगार और कौशल आधारित अवसर तैयार होने चाहिए, ताकि युवा अपनी क्षमता का सही उपयोग कर सकें। उन्होंने कहा कि पढ़ाई पूरी होने के बाद अवसर नहीं मिलने से युवाओं में निराशा बढ़ना स्वाभाविक है। ऑनलाइन शिक्षा पर संतुलित नीति की मांग ऑनलाइन शिक्षा को समय की जरूरत बताते हुए आदित्य यादव ने कहा कि इसके नाम पर मूलभूत शैक्षणिक व्यवस्था और शिक्षकों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार से ऑनलाइन और ऑफलाइन शिक्षा के बीच संतुलित नीति बनाने की मांग की। महंगाई और ईंधन कीमतों पर सरकार को घेरा महंगाई और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर किसान, व्यापारी और आम आदमी पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ईंधन महंगा होने से खेती, परिवहन और बाजार की लागत बढ़ रही है, जिसका बोझ आखिरकार जनता पर ही आता है। सरकार राहत देने के बजाय आंकड़ों और बयानों के जरिए हालात को हल्का दिखाने की कोशिश कर रही है। सोना कारोबार को लेकर भी टिप्पणी प्रधानमंत्री के सोना नहीं खरीदने संबंधी बयान का जिक्र करते हुए आदित्य यादव ने कहा कि देश में करीब एक करोड़ लोग सोना कारोबार से जुड़े हैं और करोड़ों परिवारों की आजीविका इसी क्षेत्र पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर सोच-समझकर बयान देना चाहिए। 2027 चुनाव पर कही बड़ी बात आदित्य यादव ने कहा कि भाजपा सरकार जमीनी मुद्दों से ज्यादा छवि आधारित राजनीति में उलझी हुई दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार, महंगाई और व्यापार जैसे सवाल अब भी जनता के बीच मौजूद हैं और विपक्ष इन मुद्दों को लगातार उठाता रहेगा। उनके मुताबिक, 2027 विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता इन सवालों पर भाजपा को जवाब देगी।
फीस वृद्धि के खिलाफ कांग्रेस काहल्लाबोल: शिक्षा कार्यालय में ताला
शासकीय स्कूलों की बढ़ी फीस के विरोध में शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने शुक्रवार को बैरन बाजार स्थित शिक्षा विभाग के जॉइंट डायरेक्टर कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने नारेबाजी करते हुए भाजपा सरकार पर महंगाई के दौर में जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 22 मदों में फीस बढ़ाकर सरकार ने लाखों पालकों को परेशानी में डाल दिया है। खेलकूद, प्रायोगिक परीक्षा, लैब और निजी परीक्षा शुल्क तक बढ़ाए गए हैं। पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा ने शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, जबकि विकास उपाध्याय ने शिक्षा व्यवस्था बदहाल होने का मुद्दा उठाया। करीब तीन घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लगाया। बाद में शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर फीस वृद्धि वापस लेने और इस वर्ष शासकीय स्कूलों की फीस पूरी तरह माफ करने की मांग की।
नए विश्वविद्यालय एक्ट से उच्च शिक्षा व्यवस्था में आएगी रफ्तार : शिक्षा मंत्री
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित दो दिनी वीसी कांफ्रेंस के अंतिम दिन विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक ढांचे, नए विवि अधिनियम, प्रस्तावित स्टैच्यूट, क्लस्टर सिस्टम, विवि सेवा आयोग, वित्तीय प्रबंधन, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। समापन सत्र में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि नए एक्ट और स्टैच्यूट को बहुत सोच-समझकर तैयार किया गया है और इससे विश्वविद्यालयों में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी। झारखंड का जीआईआर अभी 18.8 है, जिसे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने छात्र संघ चुनाव को लेकर भी साफ संदेश दिया। कहा, कैंपस में किसी राजनीतिक दल का रंग नहीं दिखना चाहिए। पढ़ाई से कटे छात्र केवल चुनाव लड़ने के उद्देश्य से कैंपस राजनीति में न आएं। इससे पहले प्रधान सचिव राहुल पुरवार ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य नए एक्ट के अनुरूप बनने वाले स्टैच्यूट और प्रशासनिक ढांचे पर सुझाव लेना था। कांफ्रेंस में नए विवि एक्ट के तहत तैयार किए जा रहे स्टैच्यूट व रेगुलेशन के प्रारूप पर कुलपतियों, कुलसचिवों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सुझाव दिए। यह बात सामने आई कि कई प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में अब वित्त सलाहकार (एफए) की भूमिका अधिक प्रभावी होगी। वित्तीय मामलों को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए फीस संग्रह सहित कई प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करने पर जोर दिया गया। 4 वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूरा करने वाले छात्रों के लिए एक वर्षीय पीजी कोर्स के नामांकन का के लिए अभी तक रेगुलेशन नहीं बना है। इस पर विभाग ने कहा कि मामला संज्ञान में है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बलौदाबाजार के करहीबाजार में आयोजित समाधान शिविर में कई विकास परियोजनाओं की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार का मुख्य उद्देश्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। मुख्यमंत्री ने करहीबाजार में सांस्कृतिक भवन के लिए 25 लाख रुपए और सुकालू के घर से सिद्ध बाबा मार्ग तक सीसी रोड के लिए 25 लाख रुपए की घोषणा की। इसके अतिरिक्त, हायर सेकेंडरी स्कूल करहीबाजार और कोदवा में भवन निर्माण, भाटापारा में एसडीएम-तहसील के लिए संयुक्त कार्यालय भवन, मिडिल स्कूल गुड़ेलिया का हाई स्कूल में उन्नयन, विटकुली में मांगलिक भवन के लिए 20 लाख रुपये और छह ग्राम पंचायतों में 10-10 लाख रुपए की लागत से सीसी रोड निर्माण की भी घोषणा की गई। शिविर के दौरान कुल 147 हितग्राहियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 10 लाख आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है। किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा गया है और उन्हें दो वर्षों का बकाया बोनस भी दिया गया है। महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे अंतरित की गई है। मुख्यमंत्री ने लखपति दीदी अभियान का भी जिक्र किया, जिसके माध्यम से महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य की 6000 से अधिक पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं। जल्द ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन भी शुरू की जाएगी, जिससे नागरिक ऑनलाइन या टोल-फ्री नंबर पर अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे। इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, कलेक्टर कुलदीप शर्मा और पुलिस अधीक्षक ओपी शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
NEET पेपर लीक मामले को लेकर आम आदमी पार्टी ने आज रायपुर में प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अंबेडकर चौक पर विरोध प्रदर्शन कर कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की गई। आप नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ परीक्षा में गड़बड़ी का मामला नहीं, बल्कि 22 लाख से ज्यादा छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है। पार्टी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक बड़े स्तर की मिलीभगत और राजनीतिक संरक्षण के बिना संभव नहीं है। हर बार पेपर लीक, फिर भी कार्रवाई नहीं प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि 2017, 2021, 2024 और अब 2026 में भी NEET पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन अब तक जिम्मेदार लोगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में देशभर में 89 बार विभिन्न परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और 48 परीक्षाएं दोबारा करानी पड़ीं। आप नेताओं ने कहा कि लाखों छात्र सालभर मेहनत करते हैं, लेकिन एक रात में उनका भविष्य दांव पर लग जाता है। छात्रों की आत्महत्या का भी मुद्दा उठाया आम आदमी पार्टी ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं का भी मुद्दा उठाया। नेताओं ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गोवा और ग्वालियर में कई छात्रों ने तनाव और भविष्य को लेकर अनिश्चितता के कारण आत्महत्या कर ली। पार्टी नेताओं ने कहा कि परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों और उनके परिवारों में भारी मानसिक दबाव बना हुआ है। इसके लिए केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय जिम्मेदार है। पंजाब सरकार के फैसले का किया जिक्र प्रदर्शन के दौरान पंजाब सरकार के फैसले का भी उल्लेख किया गया। नेताओं ने कहा कि पुनः परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए पंजाब सरकार ने 20, 21 और 22 जून को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा देने का फैसला लिया है। ये हैं आम आदमी पार्टी की मांगें - केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें। - NEET पेपर लीक मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) बनाई जाए। - प्रभावित छात्रों को मुआवजा दिया जाए। - परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाए।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को शिक्षा विभाग के साथ बैठक की। सूत्रों के मुताबिक, TRE-4 को लेकर बैठक में सम्राट चौधरी ने शिक्षा मंत्री को निर्देश देते हुए कहा है कि अगले 1 सप्ताह के अंदर नोटिफिकेशन जारी किया जाए। बताया जा रहा कि TRE-4 का नोटिफिकेशन अगले 4 से 5 दिन के अंदर जारी हो सकता है। इसके अलावा बैठक में अगले पांच सालों में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति, शिक्षकों के पारदर्शी तबादले और जीविका समूहों के जरिए विद्यालय पोशाक वितरण जैसे कई अहम फैसले लिये गए। सीएम ने शिक्षक बहाली को लेकर चर्चा की और नोटिफिकेशन को लेकर अधिकारियों से फीडबैक भी लिया है। 5 साल में एक लाख शिक्षकों की होगी बहाली सम्राट चौधरी ने राज्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अगले 5 सालों में 1 लाख शिक्षकों की नियुक्ति की जायेगी जिसके अन्तर्गत प्रत्येक वर्ष कम से कम लगभग 20 हजार शिक्षकों की नियुक्ति की जायेगी। इसके लिए हर वर्ष जुलाई महीने में नियुक्ति संबंधी विज्ञापन जारी किया जायेगा। हर साल होगी 20 हजार शिक्षकों की नियुक्ति मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि अगले पांच सालों में राज्य में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इसके तहत हर साल कम से कम 20 हजार शिक्षकों की बहाली सुनिश्चित की जाएगी। सरकार ने नियुक्ति प्रक्रिया को नियमित और समयबद्ध बनाने के लिए यह भी तय किया है कि हर साल जुलाई महीने में शिक्षक नियुक्ति का विज्ञापन जारी किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस फैसले से सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर होगी और पढ़ाई व्यवस्था मजबूत होगी। महिला शिक्षकों को गृह क्षेत्र के पास पोस्टिंग देने की तैयारी बैठक में शिक्षकों की ट्रांस्फर पोस्टिंग को लेकर भी निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को पारदर्शी और सरल ट्रांसफर नीति तैयार करने का निर्देश दिया। नई नीति के तहत महिला शिक्षकों का स्थानांतरण उनके गृह जिले में, अपने प्रखंड के गृह पंचायत के समीप वाले पंचायत में करने पर जोर दिया गया है। पुरुष शिक्षकों को उनके गृह प्रखंड के बगल वाले प्रखंड में पदस्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे शिक्षकों को पारिवारिक और सामाजिक सुविधा मिलेगी तथा विद्यालयों में उनकी कार्यक्षमता भी बढ़ेगी। जीविका के माध्यम से मिलेगी स्कूल पोशाक सरकार ने विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को मिलने वाली पोशाक की व्यवस्था में भी बदलाव का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि अब राज्य के सभी विद्यालयों में पोशाक की आपूर्ति जीविका समूहों के माध्यम से कराई जाए। सरकार का कहना है कि इससे पोशाक की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होगी और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार एवं स्वावलंबन का अवसर मिलेगा। बैठक में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के साथ-साथ शिक्षा विभाग के सभी बड़े अधिकारी मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान शिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा भी की गई। अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी बता दें कि TRE-4 को लेकर बिहार में अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। छात्र संगठन और अभ्यर्थी लंबे समय से चौथे चरण की शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जारी करने की मांग कर रहे हैं। इसी को लेकर पटना समेत कई जगहों पर प्रदर्शन भी हुए हैं।
यूपी में शिक्षा मित्रों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल किए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। कई शिक्षा मित्रों ने सहायक शिक्षकों की तरह सेवा विस्तार देने की मांग शासन से की थी। इसके बाद महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों से सुझाव मांगे हैं। अपर राज्य परियोजना निदेशक प्रेम रंजन सिंह ने 21 मई को औरैया, बस्ती, बलिया, कानपुर नगर, लखनऊ, रायबरेली, जौनपुर, गोंडा, लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर समेत कई जिलों के बीएसए को पत्र भेजा है। इसमें 60 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षा मित्रों के सेवाकाल बढ़ाने पर राय मांगी गई है। यूपी में 1.43 लाख शिक्षा मित्र हैं। 1 अप्रैल से शिक्षा मित्रों का मानदेय मौजूदा सरकार ने 10 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपए कर दिया है। सहायक शिक्षकों की तर्ज पर मांगशिक्षा मित्रों की नियुक्ति आदेश में 60 वर्ष की आयु पूरी करने पर रिटायरमेंट देने का जिक्र है। 26 शिक्षा मित्रों ने शासन को पत्र लिखा। उन्होंने तर्क दिया है कि सहायक शिक्षकों को भी पहले 60 वर्ष की आयु में रिटायर किया जाता था। शासन ने उन्हें सेवा विस्तार देते हुए अब 62 वर्ष की आयु में रिटायर करने का नियम बनाया है। शिक्षा मित्र भी सहायक शिक्षक की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में उनके रिटायरमेंट की आयु सीमा भी 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष की जानी चाहिए। इन 26 शिक्षा मित्रों ने लिखा लेटरगोंडा से इमरा खातून, लखनऊ से अंजू द्विवेदी, उन्नाव से निजामुद्दीन, अंबेडकर नगर से कौशिल्या, जौनपुर से गायत्री सिंह, हाथरस से देवेंद्र कुमार, लखनऊ बीकेटी से सीमा मिश्रा ने शासन को लेटर लिखा है। इनके अलावा लखीमपुर खीरी से शारदा प्रसाद, गोंडा से रामनाथ सिंह, बदायूं से नाजिम अली, ललितपुर से शशि प्रभा, शाहजहांपुर से सुरेश चंद, कानपुर देहात से देवकी देवी, महाराजगंज से रामजतन प्रसाद, फिरोजाबाद से शांता देवी, मुरादाबाद से ईश्वर सिंह, जौनपुर से हिरावती, शिकोहाबाद से लाखन सिंह, गोंडा से उर्मिला, बदायूं से राजपाल, बस्ती से राजेंद्र, जौनपुर से राजेश कुमार, हमीरपुर से लालमन, औरैया से प्रेमवती और महाराजगंज से हरिप्रकाश शामिल हैं। इन शिक्षा मित्रों ने कहा कि उनकी तरह कई अन्य शिक्षा मित्र भी हैं, जो 60 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले हैं। जानिए यूपी की सियासत में शिक्षा मित्र कितने अहम? दरअसल, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एक शिक्षामित्र यूपी में 10 वोटरों पर असर डालता है। इस तरह 1.68 लाख शिक्षामित्रों और अनुदेशकों से भाजपा करीब 17 लाख वोटर्स को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है। इतना ही नहीं, भाजपा की कोशिश सरकारी स्कूलों के मर्जर पर उठ रहे सवालों की काट खोजने की है। वहीं, राजनीतिक जोखिम को भांपते हुए सपा इसके खिलाफ नैरेटिव सेट करने में जुटी है। 43 विधानसभा सीटों पर समीकरण बदलने की क्षमताशिक्षामित्र अपने परिवार और सामाजिक नेटवर्क के सहारे प्रदेश की 43 से ज्यादा सीटों पर निर्णायक असर रखते हैं। यूपी में शिक्षामित्र और अनुदेशकों की संख्या करीब 1.68 लाख है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एक शिक्षामित्र अपने परिवार, रिश्तेदार और आस-पड़ोस के समेत 10 वोटर्स पर असर रखता है। इस हिसाब से शिक्षामित्र और अनुदेशकों का असर 16.80 लाख वोटर्स पर है। मतलब, हर विधानसभा सीट पर औसतन 4 हजार वोटर्स इनके प्रभाव वाले हैं। 2022 विधानसभा चुनाव में करीब 43 ऐसी सीटें थी, जहां जीत-हार का मार्जिन 4 हजार से कम था। इनमें से 25 सीटों पर भाजपा, तो 18 पर सपा ने जीत दर्ज की थी। शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को बढ़ा हुआ मानदेय, बीमा और कैशलेश इलाज की सुविधा देकर भाजपा ने चुनाव से पहले ऐसी टक्कर वाली सीटों पर समीकरण दुरुस्त करने की कोशिश कर रही है। ------------------- ये खबर भी पढ़ें- धनंजय के गढ़ में बेटा लॉन्च करने को तैयार बृजेश:पर्दे के पीछे से दो नेता कर रहे प्लानिंग; धनंजय कह चुके- मैं डरने वाला नहीं 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में अभी 8 महीने से ज्यादा का समय है। लेकिन, पूर्वांचल की सियासत में नई जंग छिड़ती दिख रही है। चर्चा है, बाहुबली नेता धनंजय सिंह के गढ़ जौनपुर में उनके विरोधी बृजेश सिंह एंट्री लेने वाले हैं। पढ़िए पूरी खबर
रायपुर में सरकारी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी के खिलाफ कांग्रेस ने बैरन बाजार स्थित शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक कार्यालय का घेराव किया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए शिक्षा विभाग और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन ने किया। कांग्रेस नेताओं ने कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला लगाकर विरोध जताया और शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। “महंगाई के बीच फीस बढ़ाना गलत” कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पहले से महंगाई से परेशान जनता पर अब स्कूल फीस बढ़ाकर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। उनका कहना है कि पेट्रोल-डीजल, गैस, बिजली और राशन की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार को फीस बढ़ाने की बजाय राहत देनी चाहिए थी। कांग्रेस का आरोप है कि शिक्षा विभाग ने हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर पर विभिन्न मदों में फीस बढ़ा दी है। खेलकूद, प्रायोगिक परीक्षा, लैब, स्काउट-गाइड और निजी परीक्षा शुल्क में भी वृद्धि की गई है। फीस माफी की मांग शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन ने मांग की कि इस साल सरकारी स्कूलों की पूरी फीस माफ की जाए, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने कोरोना काल में फीस माफ की थी और स्वामी आत्मानंद स्कूल जैसे मॉडल शुरू किए थे। “शिक्षा व्यवस्था बदहाल” पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी का आरोप लगाया। वहीं पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा ने शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार बढ़ने का दावा करते हुए सरकार को जिम्मेदार ठहराया।करीब तीन घंटे तक चले प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शिक्षा विभाग कार्यालय के बाहर धरना दिया और फीस वृद्धि वापस लेने की मांग की।
डीडवाना के बांगड़ कॉलेज के विद्यार्थियों ने प्रवेश आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है। इस संबंध में आयुक्तालय उच्च शिक्षा, राजस्थान को एक ज्ञापन सौंपा गया है। यह ज्ञापन कॉलेज की प्रिंसिपल मनीषा गोदारा के माध्यम से भेजा गया। ज्ञापन में बताया गया है कि बीए, बीएससी और बीकॉम प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 22 मई निर्धारित की गई है। हालांकि, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं तकनीकी समस्याओं, आवश्यक दस्तावेजों की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट सुविधा के अभाव के कारण आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। छात्र प्रतिनिधि तनवीर कुमार ने बताया कि निर्धारित समय सीमा कम होने के कारण कई विद्यार्थी आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं। इससे उनके शैक्षणिक भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। विद्यार्थियों ने आयुक्तालय से मांग की है कि छात्रहित को देखते हुए प्रवेश आवेदन की अंतिम तिथि को कम से कम 7 से 10 दिनों तक बढ़ाया जाए। इससे सभी पात्र विद्यार्थियों को आवेदन करने का पर्याप्त अवसर मिल सकेगा। छात्र प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि आवेदन की समय सीमा नहीं बढ़ाई जाती है, तो बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रवेश से वंचित रह सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से इस संबंध में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।
जयपुर अब सिर्फ पर्यटन नगरी नहीं, बल्कि देश का तेजी से उभरता शिक्षा हब बन गया है। बेहतरीन कनेक्टिविटी, शांतिप्रिय माहौल, मजबूत कानून-व्यवस्था और अच्छी नौकरी के अवसरों के कारण UP, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र समेत देशभर के लाखों छात्र दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों को छोड़कर जयपुर आ रहे हैं। यहां 30 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज और बेहतर शिक्षा के वातावरण ने जयपुर को नई राह दिखाई है। दीपशिखा ग्रुप ऑफ कॉलेजेस और यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ने इस सफर में अहम भूमिका निभाई है। 1976 में एक छोटे से पौधे की तरह शुरू हुआ यह ग्रुप आज 13 कॉलेजेस और एक यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित हो चुका है। 2 लाख से ज्यादा एलुमनी देश-विदेश में अच्छी पोजीशन पर हैं। डॉ. प्रेम सुराना के नेतृत्व में ग्रुप छात्रों को आधुनिक शिक्षा दे रहा है। AI कोर्सेस चलाए गए हैं और वॉयस एआई एजेंट बनाकर छात्रों की समस्याओं का 24x7 तुरंत समाधान किया जा रहा है। ग्रुप थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल नॉलेज पर विशेष जोर देता है। डॉ. सुराना का मानना है कि नई पीढ़ी बहुत होशियार है और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग से ये बच्चे देश का भविष्य संवारेंगे।
राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जमकर जुबानी हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी विदेश में जाकर देश की बदनामी करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गद्दार कहते हैं। लेकिन राहुल गांधी से नीच और निकम्मा आदमी कोई हो ही नहीं सकता। ये देश विरोधियों के सरगना हैं। मंत्री दिलावर ने यह बात रामगंजमंडी में बनने वाले जिला अस्पताल के भूमि पूजन कार्यक्रम में कही। शिलान्यास के बाद दिलावर ने सभा को संबोधित किया। इस दौरान राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी को लेकर भड़क गए। आतंकवादियों की मौत पर मां रातभर रोती रहीं उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के बारे में एक अदना सा आदमी जो आतंकवादियों का पक्षधर है। वो देश को तोड़ने, विदेश में जाकर देश की बुराई करने, देश को नीचा दिखाने का काम करता है। ऐसा आदमी जिसकी मां बटला एनकाउंटर में मारे गए आतंकवादियों की मौत पर रातभर रोती हैं। राहुल गांधी ने भी कहा था आतंकवादियों की मौत पर मेरी मां रात भर रोती रहीं, उनको नींद नहीं आई। देश की धरती पर रहने का अधिकार नहीं देश के दुश्मनों के साथ रहने वाले, उनका समर्थन करने वाले लोगों के सरगना राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री को गद्दार, चोर, बेईमान कहते हैं। इससे (राहुल गांधी) नीच और निकम्मा इस देश में कोई और दूसरा व्यक्ति हो ही नहीं सकता। जिस प्रकार राहुल गांधी ने बात कही यह देश के साथ गद्दारी है। इसलिए ऐसे लोगों को देश की धरती पर रहने का अधिकार नहीं। दिलावर ने कहा राहुल गांधी अपनी हरकतों से बाज आएं अन्यथा देश की जनता ने किसी को छोडा नहीं है। अभी तो पश्चिम बंगाल में मिट्टी पलीत करवा कर आए हैं। कई राज्यों के चुनाव में मात खा कर आए हैं। यह बौखलाहट है कि देश में देशभक्त लोग कैसे पनप रहे हैं। जनता गद्दारों के हाथ में देश की बागडोर नहीं देगी देशभक्त लोगों का बेड़ा कैसे बढ़ता जा रहा है। देश की सरकार कैसे देशभक्त लोगों के हाथों में है। यह चाहते थे कि देश की सरकार आतंकवादियों के हाथ में हो। लेकिन जनता कभी भी गद्दार और आतंकवादियों के हाथों में देश की बागडोर नहीं देगी। उन्होंने कहा राम मंदिर 500 साल पहले आक्रांताओं ने तोड़ा था। मंदिर के पुनर्निर्माण में हमारे देश के पूर्वज लग रहे हैं। 3 लाख लोगों ने बलिदान दिया। लेकिन मंदिर नहीं बना। नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद राम मंदिर बनने का रास्ता प्रशस्त हुआ। कांग्रेस ने मंदिर निर्माण को रोकने की बहुत कोशिश की। आखिर में राम मंदिर का निर्माण हुआ। आज करोड़ों लोग भगवान राम की जन्मस्थली पर बने मंदिर में दर्शन कर रहे हैं। यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है। जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं को वोट का अधिकार मिला जम्मू-कश्मीर में धारा 370 समाप्त की, अनुसूचित जाति के लोगों को आरक्षण मिलने लगा है। महिलाओं को आरक्षण मिलने लगा है। हिंदुओं को वोट देने का अधिकार मिल गया। जबकि पहले न तो आरक्षण का अधिकार था और न ही वोट देने का अधिकार डेढ़ साल में बनेगा हॉस्पिटल इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला व शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने दोपहर करीब 12 बजे हॉस्पिटल का भूमि पूजन किया। रामगंजमंडी में 63.60 करोड़ रुपए की लागत से 200 बेड का नया जिला अस्पताल बनेगा। जो डेढ़ साल में बनकर तैयार हो जाएगा।
शिक्षक भर्ती नोटिफिकेशन TRE 4 को लेकर लगातार हो रहे प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ी बैठक बुलाई है। सीएम सम्राट चौधरी आज शिक्षा विभाग के मंत्री और अधिकारियों के साथ शाम 5 बजे बड़ी बैठक करेंगे। बैठक में शिक्षक भर्ती के नोटिफिकेशन पर प्रमुख तौर पर चर्चा होगी। शिक्षक बहाली को लेकर इस बैठक में चर्चा होगी और नोटिफिकेशन को लेकर अधिकारियों से फीडबैक लिया जाएगा। बैठक में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के साथ-साथ शिक्षा विभाग के सभी बड़े अधिकारी मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारी मौजूद होंगे। इस दौरान शिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा भी की जाएगी।
शिक्षा महंगी कर रही सरकार, एससी-एसटी छात्र परेशान, फीस वृद्धि वापस ले : ठाकुर
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि 10वीं-12वीं की परीक्षा फीस और 22 अन्य मदों में दोगुनी बढ़ोतरी कर सरकार ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। नियमित परीक्षा शुल्क 460 रुपए से बढ़ाकर 800 रुपए, नामांकन शुल्क 80 से 200 रुपए और अतिरिक्त विषय शुल्क 110 से 250 रुपए कर दिया गया है। इस शिक्षा विरोधी फैसले को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। राज्य में पहले से शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। स्कूलों में शिक्षकों की कमी, जर्जर भवन, किताबों की देरी और स्कूल बंद होने जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।
उच्च शिक्षा की स्थिति खराब, समय पर परीक्षा और रिजल्ट दे विश्वविद्यालय
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में अब सिर्फ बैठक और चर्चाओं का दौर नहीं चलेगा। परिणाम दिखना चाहिए। उन्होंने उच्च शिक्षा में कम सकल नामांकन अनुपात (जीईआर), बढ़ते ड्रॉपआउट, समय पर परीक्षा व रिजल्ट जारी न होने और छात्रों के पलायन पर भी चिंता जताई। वे गुरुवार को दो दिवसीय कुलपति कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। रिसर्च, स्किल और स्टार्टअप पर फोकस करने की सलाह राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा, रिसर्च, नवाचार, स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप और इंडस्ट्री लिंक से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को दिशा देने के लिए झारखंड राज्य विवि अधिनियम-2026 लागू किया गया है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता, जवाबदेही और शैक्षणिक उत्कृष्टता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कुलपतियों और अधिकारियों को इस अधिनियम का अध्ययन करने की सलाह दी।
स्टेट यूनिवर्सिटीज... टेक्नोलॉजी आधारित और एकरूपता के ढांचे से बदलेगी शिक्षा व्यवस्था
रांची झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक और शैक्षणिक ढांचे में बड़े बदलाव की पटकथा लिखी जा रही है। राजधानी के एक होटल में गुरुवार से शुरू हुई दो दिवसीय वीसी कॉन्फ्रेंस में सरकार ने विश्वविद्यालयों के सामने नया यूनिवर्सिटी मॉडल रखा। इसमें झारखंड विवि अधिनियम-2026, क्लस्टर सिस्टम, केंद्रीकृत ऑनलाइन एडमिशन, डिजिटल मॉनिटरिंग, विवि सेवा आयोग और शैक्षणिक-गैर शैक्षणिक पदों के पुनर्गठन को केंद्र में रखा गया। कांफ्रेंस में साफ संकेत दिया गया कि सरकार उच्च शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित और एकरूपता के ढांचे में बदलना चाहती है। हालांकि क्लस्टर सिस्टम को लेकर उठ रहे विरोध और सवालों के बीच सुझावों के आधार पर ड्राफ्ट में बदलाव की बात भी सामने आई। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन गवर्नर संतोष कुमार गंगवार ने किया। अवर सचिव नीति मदन कुलकर्णी, विभागीय प्रधान सचिव राहुल पुरवार, आरयू वीसी प्रो. सरोज शर्मा, डीएसपीएमयू वीसी प्रो. राजीव मनोहर समेत अन्य विवि के वीसी, डीएसडब्ल्यू, रजिस्ट्रार, प्राचार्य और अधिकारी शामिल हुए। क्लस्टर सिस्टम को लेकर भी मंथन कॉन्फ्रेंस में क्लस्टर सिस्टम सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना रहा। कई कुलपतियों और शिक्षाविदों ने इसके व्यावहारिक पक्ष, कॉलेजों की स्वतंत्रता और विषयों के पुनर्गठन को लेकर सवाल उठाए। इसके बावजूद अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार ने क्लस्टर मॉडल को बेहतर बताया। विश्वविद्यालयों से मिले सुझावों के आधार मुख्य विषय के अलावा छात्रों की संख्या वाले विषय को भी शामिल किया जाएगा। सम्मेलन में यह भी बताया गया कि एडमिशन प्रक्रिया पूरी तरह चांसलर पोर्टल से संचालित की जाएगी। इसके लिए विषयवार मैपिंग, सीट निर्धारण और कॉलेजों की क्षमता का डिजिटल इंटीग्रेशन किया जाएगा। इससे एडमिशन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। भविष्य में परीक्षा, रिजल्ट और छात्रवृत्ति से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी इसी डिजिटल सिस्टम से जोड़ने की तैयारी है। विश्वविद्यालय सेवा आयोग की संरचना को लेकर भी कई सवाल उठे। प्रतिभागियों ने पूछा कि आयोग में शिक्षकों की भागीदारी सीमित रखी गई है। वहीं रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स को ज्यादा महत्व दिया गया है। इस पर अधिकारियों ने कहा कि कई राष्ट्रीय चयन संस्थानों में इसी तरह की संरचना होती है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि आयोग में शिक्षकों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। इस दौरान यह भी बताया गया कि चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है।
सरकारी स्कूलों की चुनौतियां और बदलता शिक्षा परिदृश्य
शिक्षा किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति, सामाजिक गतिशीलता और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की आधारशिला है।
Fact Check: क्या बिहार के शिक्षा मंत्री ने कहा लड़कियों को शिक्षा की जरूरत नहीं? सच जानिए
बूम ने पाया कि बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने Agitation शब्द का इस्तेमाल किया था जिसे एजुकेशन समझकर गलत दावा किया जा रहा है.
कन्नड़ मूवी 'केडी: द डेविल' के गाने 'सरके चुनर' पर विवाद अभी भी जारी है। इस गाने के बोल और फिल्मांकन पर बढ़ते विवाद के बाद नोरा फतेही को राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के समक्ष पेश होना पड़ा। नोरा ने न केवल अपनी स्थिति स्पष्ट की, बल्कि भविष्य के लिए एक ...
पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु का रिश्वत लेते हुए वीडियो फर्जी और एआई जनरेटेड है
बूम ने पाया कि ब्रात्य बसु का वीडियो गूगल के SynthId का उपयोग करके एआई द्वारा जनरेट किया गया है.
समानता और शिक्षा की क्रांतिकारी मशाल: सावित्रीबाई फुले
10मार्च सावित्रीबाई फुले महापरिनिर्वाण दिवस भारतीय समाज में जब भी शिक्षा,समानता और सामाजिक न्याय की बात उठती है,तो एक नाम इतिहास के पन्नों से निकलकर हमारे सामने खड़ा हो जाता है—सावित्रीबाई फुले।10मार्च को उनका महापरिनिर्वाण दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है,बल्कि यह दिन उस सामाजिक चेतना को याद करने का अवसर है,जिसने सदियों ... Read more
आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं
महिला दिवस पर विशेष:- अजमेर राजस्थान आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं:- देश-प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध ओर इन अपराधों में पिछले वर्षो में अपराध की दर तीव्र ही हुई है ओर “भारत मे अपराध ” नामक रिपोर्ट बताती है ... Read more
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समर्थन से भारत शिक्षा के सभी स्तरों पर एआई शिक्षण और रिसर्च को एकीकृत करके खुद को एक वैश्विक एआई महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है
शिक्षा को हिंसक नहीं, संवेदनशील बनाना होगा
देश में इन दिनों बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं और सामान्य परीक्षाएं भी शुरू होने वाली हैं। हर साल की तरह इस बार भी परीक्षा का मौसम केवल प्रश्नपत्रों और परिणामों का नहीं, बल्कि मानसिक दबाव, चिंता और असुरक्षा का मौसम बनता जा रहा है। छात्रों के चेहरों पर भविष्य की चिंता साफ पढ़ी जा ... Read more
गला घोटिया शिक्षा का विश्वगुरु बन चुका देश
पिछले 12 सालों से देश को विश्वगुरु बनाने का जो झूठ फैलाया जा रहा था, अब उसका गुबार ऐसा फूटा है कि दुनिया भर में शर्मिंदगी का सबब बन गया है।
शिक्षा में समता या नई असमानताः यूजीसी नियमों पर न्यायिक विराम
नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर लागू किए गए नए नियमों ने देश के शैक्षिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बार फिर गहरी हलचल पैदा कर दी है। जिस नीति को ‘समता’, ‘समान अवसर’ और ‘समावेशी शिक्षा’ की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया ... Read more
शिक्षा खौफनाक नहीं, बल्कि स्नेह एवं हौसलों का माध्यम बने
जीवन को दिशा देने वाली शिक्षा यदि भय, हिंसा और दमन का पर्याय बन जाए तो वह सभ्यता की सबसे बड़ी विडंबना कही जाएगी। हाल के वर्षों में पढ़ाई के नाम पर बच्चों पर बढ़ते दबाव, घर और स्कूल में हिंसक व्यवहार तथा प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ ने शिक्षा की आत्मा पर गहरा आघात किया ... Read more
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
NEET UG रिजल्ट को लेकर अभी भी जारी है गुस्सा, छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के पास किया विरोध प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए छात्रों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। आइए जानते हैं, क्या है पूरा म
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का 10 फीसदी भी डाटा नहीं हुआ अपलोड
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का डाटा अपलोड करने में जिले के कई स्कूल ढील दे रहे हैं, वे 10 फीसदी छात्रों का भी डाटा अभी तक अपलोड नहीं कर पाए हैं। डाटा अपलोड करने में आधार कार्ड की अनिवार्यता के बाद से छ
बेसिक शिक्षा : दो महीने बाद भी 1.38 लाख छात्रों का डेटा नहीं हुआ अपडेट
बेसिक शिक्षा विभाग के यू डायस पोर्टल पर डेटा अपडेट करने का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। हाल ये है कि दो महीने में महज 1.38 लाख छात्रों डेटा भी अपडेट नहीं हुआ। विभाग ने अब 5 जून तक इसे पूरा करने क
स्कूलों में कैसे पढ़ा रहे हैं शिक्षक, वीडियो में देखेगा शिक्षा विभाग, होगी रिकॉर्डिंग
शिक्षा विभाग वीडियो के जरिए देखेगा कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षक छात्रों को कैसे पढ़ाते हैं। बता दें. छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षकों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। आइए जानते हैं विस्तार से।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति : यूपी बोर्ड ने दिए निर्देश, एनईपी लागू करने को स्कूल बनाएंगे प्लान
यूपी बोर्ड से जुड़े 27 हजार से अधिक स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू करने के लिए स्कूल स्तर पर योजना बनाई जाएगी। एनईपी 2020 के विषय में विद्यालयों में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
बॉलीवुड का ये सुपरस्टार युवाओं को IAS बनाने के लिए मुफ्त में देगा शिक्षा, योजना से अबतक जुड़ चुके है7000 युवा
राम बनने के लिएधनुष-बाण चलाने की शिक्षा ले रहे है Ranbir Kapoor, एक्टर केआर्चरी ट्रेनर ने शेयर की तस्वीरें

