झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य के लिए रविवार की सुबह एक अत्यंत दुखद और स्तब्ध कर देने वाली खबर लेकर आई। हेमंत सोरेन सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के कद्दावर मंत्री और गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र से तेजतर्रार विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का 56 वर्ष की अल्पायु में हृदय गति रुकने (Cardiac Arrest) से असामयिक निधन हो गया। मिली जानकारी के अनुसार, उन्हें देर रात अचानक सीने में तेज दर्द और सांस लेने में भारी तकलीफ महसूस हुई, जिसके बाद उनके परिजन और सुरक्षाकर्मी उन्हें तत्काल नजदीकी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि, डॉक्टरों के भरसक प्रयासों और सीपीआर दिए जाने के बावजूद उनकी नब्ज वापस नहीं लौट सकी और चिकित्सकों के पैनल ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। महज 56 वर्ष की आयु में इस ऊर्जावान, मिलनसार और संघर्षशील नेता के अचानक चले जाने की खबर मिलते ही समूचे झारखंड के प्रशासनिक, राजनीतिक और आम जनमानस में गहरा सन्नाटा पसर गया। राजधानी रांची से लेकर उनके गृह क्षेत्र गिरिडीह तक हर आंख नम हो गई और किसी को भी इस अप्रत्याशित क्षति पर सहसा विश्वास नहीं हो रहा है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खोया अपना सबसे विश्वस्त सिपहसालार: सियासी जगत में छाया मातमसुदिव्य कुमार सोनू के निधन की खबर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) परिवार और राज्य सरकार को असहनीय झटका लगा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे अपनी व्यक्तिगत और अपूरणीय क्षति बताया। भावुक होते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने केवल अपनी कैबिनेट का एक काबिल और कर्मठ शिक्षा मंत्री ही नहीं खोया, बल्कि अपने छात्र जीवन का एक सच्चा भाई, मार्गदर्शक और सबसे भरोसेमंद सिपहसालार खो दिया है। हेमंत सोरेन ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू विपरीत से विपरीत राजनीतिक परिस्थितियों में चट्टान की तरह पार्टी और उनके साथ खड़े रहे। झारखंड के राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष और कैबिनेट के तमाम मंत्रियों ने गहरा दुख जताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। सत्तापक्ष के साथ-साथ विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं, पूर्व मुख्यमंत्रियों और अन्य राजनीतिक दलों के दिग्गजों ने भी दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर सुदिव्य कुमार के असामयिक देहावसान पर शोक संवेदनाएं प्रकट की हैं। राज्य सरकार ने उनके सम्मान में राजकीय शोक (State Mourning) घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके तहत सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज झुका रहेगा और सभी आधिकारिक उत्सव स्थगित कर दिए गए हैं।गिरिडीह के 'सोनू दा' का बेदाग सफर: छात्र आंदोलन से निकलकर कैबिनेट तक बनाई मजबूत पहचानझारखंड के कोयला और अभ्रकंचल क्षेत्र गिरिडीह की जनता के दिलों में 'सोनू दा' के नाम से लोकप्रिय रहे सुदिव्य कुमार का राजनीतिक सफर जमीन से जुड़े एक सच्चे जननायक की मिसाल रहा है। उनका जन्म और पालन-पोषण गिरिडीह के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था, लेकिन उनकी पहचान हमेशा आम जनता के बीच जमीन पर संघर्ष करने वाले नेता की रही। छात्र जीवन से ही वे अविभाजित बिहार के दौर में अलग झारखंड राज्य निर्माण आंदोलन और छात्र राजनीति में सक्रिय रूप से कूद पड़े थे। दिशोम गुरु शिबू सोरेन के विचारों से गहराई से प्रभावित होकर उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा को अपना कर्मक्षेत्र चुना और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में अपनी पूरी जवानी खपा दी। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने गिरिडीह विधानसभा सीट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर अपनी सियासी ताकत का लोहा मनवाया था। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे प्रशासनिक प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना सीधे जनता के दरवाजे तक पहुंचते थे। गिरिडीह के सुदूर ग्रामीण इलाकों में विकास योजनाओं को पहुंचाना, बिजली, सड़क, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करना उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रहा, जिसके चलते वे हर वर्ग और समुदाय के लोगों के चहेते बने रहे।शिक्षा विभाग में क्रांतिकारी बदलाव: शिक्षकों की समस्याओं और सरकारी स्कूलों के उन्नयन पर दिया था जोरस्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का प्रभार संभालने के बाद सुदिव्य कुमार सोनू ने झारखंड की लचर प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में नई जान फूंकने का संकल्प लिया था। वे मानते थे कि राज्य के गरीब, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण आधुनिक शिक्षा दिलाना ही झारखंड के नवनिर्माण का असली रास्ता है। उनके कार्यकाल के दौरान राज्य में 'सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस' (CM School of Excellence) के विस्तार को नई गति मिली, ताकि सरकारी स्कूलों के बच्चे भी कॉन्वेंट की तर्ज पर सीबीएसई पैटर्न पर अंग्रेजी माध्यम में निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर सकें। पारा शिक्षकों (सहायक अध्यापकों) के मानदेय, सेवा शर्तों और लंबित मांगों के स्थायी समाधान के लिए उन्होंने कई उच्च स्तरीय बैठकों की अध्यक्षता की और संवाद के जरिए दशकों पुराना गतिरोध खत्म करने का प्रयास किया। इसके अतिरिक्त, सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता सुधारने, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की सुरक्षा सुदृढ़ करने और शिक्षकों की पारदर्शी पदस्थापना व प्रोन्नति के नियमों को लागू करने में उनकी भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि वे किसी भी फाइल को बेवजह लटकाने के सख्त खिलाफ थे और त्वरित निर्णयों के लिए जाने जाते थे।गिरिडीह में उमड़ा जनसैलाब: पैतृक आवास पर अंतिम दर्शन और राजकीय सम्मान से विदाई की तैयारीमंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन की खबर जैसे ही गिरिडीह शहर और ग्रामीण इलाकों में फैली, हजारों की संख्या में लोग उनके पैतृक आवास की ओर दौड़ पड़े। बाजार, दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्वतः स्फूर्त रूप से बंद हो गए और पूरा शहर शोक में डूब गया। उनके आवास पर विलाप कर रहे परिजनों को सांत्वना देने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों, पार्टी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। रांची में पोस्टमार्टम और अन्य औपचारिकताओं के बाद उनके पार्थिव शरीर को झारखंड विधानसभा परिसर में दर्शनार्थ रखा जाएगा, जहां मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, सभी दलों के विधायक और वरिष्ठ नौकरशाह उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके उपरांत उनके पार्थिव शरीर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ सड़क मार्ग से गिरिडीह ले जाया जाएगा, ताकि उनके गृह क्षेत्र की जनता अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शन कर सके। प्रशासन ने अंतिम यात्रा और दाह संस्कार के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुख्ता सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन के इंतजाम किए हैं। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान (State Honours) के साथ गिरिडीह के मोक्षधाम में संपन्न किया जाएगा, जहां पुलिस बल द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा।50 की उम्र के बाद बढ़ते कार्डियक अरेस्ट के मामले: राजनीतिक तनाव और जीवनशैली पर विशेषज्ञों की चिंतासुदिव्य कुमार सोनू का महज 56 वर्ष की आयु में कार्डियक अरेस्ट से अचानक चले जाना एक बार फिर उस गंभीर स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा करता है जो इन दिनों भारतीय पुरुषों, विशेष रूप से सार्वजनिक जीवन में अत्यधिक सक्रिय लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों (Cardiologists) का कहना है कि राजनीति और सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्तियों पर मानसिक तनाव, लगातार यात्राएं, नींद की अनियमितता और खान-पान में असंतुलन का भारी दबाव रहता है। अक्सर सीने में होने वाली हल्की जलन, भारीपन, जबड़े या बाएं हाथ में होने वाले दर्द को लोग सामान्य गैस्ट्रिक समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में 'मैसिव हार्ट अटैक' या 'सडन कार्डियक अरेस्ट' का रूप ले लेता है। डॉक्टरों की सलाह है कि 40 की उम्र पार करते ही प्रत्येक व्यक्ति को नियमित रूप से लिपिड प्रोफाइल, ईसीजी, टीएमटी और कार्डियक चेकअप कराना चाहिए और तनाव प्रबंधन के साथ 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद सुनिश्चित करनी चाहिए। सुदिव्य कुमार सोनू का असामयिक जाना न केवल झारखंड की राजनीति के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई आने वाले वर्षों में कर पाना बेहद कठिन होगा।
Jharkhand के उच्च शिक्षा मंत्री Sudivya Kumar का 56 वर्ष की आयु में हार्ट अटैक से निधन
रांची, छह सितंबर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता और राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार का निधन हो गया। पार्टी ने शनिवार को यह जानकारी दी। वह 56 वर्ष के थे। झामुमो के एक नेता ने बताया कि कुमार को शनिवार देर रात यहां एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था और आज तड़के करीब चार बजे उनका हृदयाघात के कारण निधन हो गया। गिरिडीह से विधायक कुमार के पास पर्यटन, कला एवं संस्कृति तथा खेल एवं युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की भी जिम्मेदारी थी। उनके परिवार में दो बेटियां और एक बेटा हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो और कई अन्य नेताओं ने कुमार के निधन पर शोक व्यक्त किया है। सोरेन ने कहा, ‘‘ मुझे अपने बड़े भाई और हमारे प्रिय सुदिव्य कुमार जी के निधन की हृदयविदारक खबर मिली। इस खबर को स्वीकार कर पाना मेरे लिए बेहद मुश्किल है। सोनू भैया के चले जाने से मेरी जिंदगी में ऐसी कमी पैदा हो गई है, जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।’’सोरेन ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि कुमार उनके लिए सिर्फ एक वरिष्ठ सहयोगी या राजनीतिक साथी नहीं थे, बल्कि ‘‘एक बड़े भाई की तरह थे - स्नेही, मार्गदर्शन देने वाले और हर मुश्किल समय में मजबूती से मेरे साथ खड़े रहने वाले। उनके साथ बिताए पल और उनसे मिली सीख हमेशा मेरे साथ रहेंगी।’’मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड आंदोलन के दिनों से ही कुमार ने बाबा दिशोम गुरुजी (झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन) के साथ पूरी निष्ठा और मजबूती से कदम से कदम मिलाकर काम किया। उन्होंने कहा कि झामुमो के एक समर्पित सिपाही के रूप में कुमार ने अपना पूरा जीवन झारखंड की पहचान, अधिकार और गौरव की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया। सोरेन ने कहा कि ‘झारखंडियत’ के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और उनका अडिग जज्बा हमेशा याद किया जाएगा। सोरेन ने कहा, ‘‘आज जब मैं उन्हें याद कर रहा हूं, तो मेरा मन बार-बार सोच रहा है कि जिंदगी कितनी नश्वर है। जो आवाज कल तक हमारे बीच थी, वह अब सिर्फ यादों में रह गई है। सोनू भैया, आपका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। आपकी कमी हमेशा महसूस होगी। मैं आपके स्नेह, आपके संघर्ष और झारखंड के प्रति आपकी प्रतिबद्धता को जीवनभर याद रखूंगा।’’झामुमो ने कुमार के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे पार्टी, सरकार और झारखंड के लिए ‘‘अपूरणीय क्षति’’ बताया। पार्टी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘झारखंड मुक्ति मोर्चा परिवार झामुमो के समर्पित साथी और झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार के असामयिक निधन से स्तब्ध और बेहद दुखी है।’’पार्टी ने कुमार के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। कुमार पहली बार 2019 में गिरिडीह से झारखंड विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। मुख्यमंत्री सोरेन के करीबी सहयोगी माने जाने वाले कुमार ने झामुमो के भीतर कई संकटों के हल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इनमें 2024 में कथित भूमि धोखाधड़ी और धन शोधन मामले में सोरेन की गिरफ्तारी के दौरान पार्टी के सामने आया संकट भी शामिल है। कुमार इसी सप्ताह कर्नाटक से लौटे थे, जहां उन्होंने झारखंड में पर्यटन बुनियादी ढांचे के प्रबंधन को बेहतर बनाने के तरीके तलाशने संबंधी राज्य सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। उन्होंने कर्नाटक के पर्यटन मंत्री के. जे. जॉर्ज से मुलाकात की और दोनों राज्यों के बीच पर्यटन तथा वन प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।
बिहार के 5 लाख से ज्यादा टीचरों को शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भेजी चिट्ठी, खत में क्या लिखा
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने टीचरों को खत लिखा है। शिक्षा मंत्री ने खत में लिखा है कि शिक्षकों ने इस पहल के लिए शिक्षा मंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि वे शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करते रहेंगे।
Jharkhand के उच्च शिक्षा मंत्री Sudivya Kumar का 56 साल की उम्र में निधन
रांची, छह सितंबर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता और राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार का निधन हो गया। पार्टी ने शनिवार को यह जानकारी दी। वह 56 वर्ष के थे। झामुमो के एक नेता ने बताया कि कुमार का निधन हृदयाघात के कारण हुआ। गिरिडीह से विधायक कुमार के पास पर्यटन, कला एवं संस्कृति तथा खेल एवं युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की भी जिम्मेदारी थी। झामुमो ने कुमार के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे पार्टी, सरकार और झारखंड के लिए ‘‘अपूरणीय क्षति’’ बताया। पार्टी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘झारखंड मुक्ति मोर्चा परिवार झामुमो के समर्पित साथी और झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार के असामयिक निधन से स्तब्ध और बेहद दुखी है।’’पार्टी ने कुमार के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। कुमार पहली बार 2019 में गिरिडीह से झारखंड विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। उनके परिवार में दो बेटियां और एक बेटा हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी सहयोगी माने जाने वाले कुमार ने झामुमो के भीतर कई संकटों के हल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इनमें 2024 में कथित भूमि धोखाधड़ी और धन शोधन मामले में सोरेन की गिरफ्तारी के दौरान पार्टी के सामने आया संकट भी शामिल है। कुमार इसी सप्ताह कर्नाटक से लौटे थे, जहां उन्होंने झारखंड में पर्यटन बुनियादी ढांचे के प्रबंधन को बेहतर बनाने के तरीके तलाशने संबंधी राज्य सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। उन्होंने कर्नाटक के पर्यटन मंत्री के. जे. जॉर्ज से मुलाकात की और दोनों राज्यों के बीच पर्यटन तथा वन प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। कुमार के अचानक निधन से झामुमो और झारखंड सरकार में शोक की लहर है।
Sudivya Kumar Dies: झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू का शनिवार (5 सितंबर) देर रात निधन हो गया। वह 56 वर्ष के थे। बताया गया कि उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए गिरिडीह के एक निजी अस्पताल मर्सी ले जाया गया। हालांकि, इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। सुदिव्य कुमार गिरिडीह विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे थे। शनिवार रात उनके आवास पर अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। हालांकि डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।हेमंत सोरेन सरकार में संभाली थीं कई अहम जिम्मेदारियांसुदिव्य कुमार झारखंड सरकार में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके पास नगर विकास, पर्यटन, कला एवं संस्कृति, खेल और युवा कार्य जैसे विभाग भी थे। वह झारखंड की राजनीति में JMM के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। सुदिव्य कुमार संगठन के लिए लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।JMM ने जताया गहरा दुखसुदिव्य कुमार के आकस्मिक निधन पर JMM ने गहरा शोक जताया। राज्य में सत्ताधारी पार्टी ने कहा कि अपने समर्पित नेता के असमय निधन से पूरा JMM परिवार स्तब्ध और बेहद दुखी है। पार्टी ने कहा कि सुधिव्या कुमार का जाना पार्टी, सरकार और झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके संघर्ष, सेवा और योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। JMM ने दिवंगत नेता की आत्मा की शांति और उनके परिवार को इस कठिन समय में शक्ति मिलने की प्रार्थना की।JMM के आधिकारिक एक्स हैंडल से कहा गया, जिंदगी की क्षणभंगुरता…कल तक जो साथी हमारे बीच थे, आज उनकी स्मृतियां ही हमारे साथ हैं। जीवन की अनिश्चितता हमें एक बार फिर गहरे दुःख और शोक में छोड़ गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के समर्पित साथी एवं झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार के असामयिक निधन से पूरा झामुमो परिवार स्तब्ध और मर्माहत है। उनका जाना पार्टी, सरकार और झारखंड के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके संघर्ष, सेवा और योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। झारखंड मुक्ति मोर्चा परिवार की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार एवं सभी साथियों को इस कठिन घड़ी में संबल दें। अंतिम जोहार।परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ हुए भावुकझारखंड सरकार के परिवहन मंत्री और JMM नेता दीपक बिरुआ ने भी सुदिव्य सोनू के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अपने सहयोगी और झारखंड सरकार में साथी मंत्री सुधिव्या सोनू के निधन से वह बेहद दुखी हैं। दीपक बिरुआ के मुताबिक, सुदिव्य सोनू की तबीयत रात में अचानक बिगड़ी और अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उन्होंने दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की कामना की।उन्होंने भावुक संदेश में इसे JMM परिवार के लिए बहुत बड़ी क्षति बताया और अपने दिवंगत साथी को अश्रुपूर्ण अंतिम 'जोहार' कहा। सुदिव्य कुमार के अचानक निधन की खबर सामने आने के बाद झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है। महज 56 वर्ष की उम्र में उनका निधन JMM और राज्य सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। उनके निधन से पार्टी ने एक सक्रिय वरिष्ठ नेता और सरकार ने एक महत्वपूर्ण मंत्री खो दिया है।झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने भी जताया शोक, बताया बड़ा भाईझारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने X पर लिखा, देर रात अपने बड़े भाई, हमारे प्रिय सुदिव्य कुमार सोनू जी के निधन का दुःखद समाचार मिला। इस खबर को स्वीकार कर पाना मेरे लिए बेहद कठिन है। सोनू भैया का जाना मेरे जीवन में ऐसी रिक्तता छोड़ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं। सोनू भैया मेरे लिए सिर्फ एक वरिष्ठ साथी या राजनीतिक सहकर्मी नहीं थे। वे बड़े भाई की तरह थे - स्नेह देने वाले, मार्गदर्शन करने वाले और हर कठिन समय में मजबूती से साथ खड़े रहने वाले। उनके साथ बिताए पल और उनसे मिली सीख हमेशा मेरे साथ रहेंगी।मुख्यमंत्री ने आगे लिखा, झारखंड आंदोलन के दौर से ही वे स्मृति-शेष बाबा दिशोम गुरुजी के साथ पूरी निष्ठा और मजबूती से खड़े रहे। झारखंड मुक्ति मोर्चा के एक समर्पित सिपाही के रूप में उन्होंने अपना पूरा जीवन झारखंड की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई को समर्पित किया। झारखंडियत के प्रति उनका समर्पण और उनकी जुझारू भावना हमेशा याद की जाएगी।ये भी पढ़ें- Iran-America War Update: अमेरिका-ईरान की जंग ने लिया खतरनाक मोड़! ईरानी सेना ने बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी युद्धपोतों को बनाया निशानासोरेन ने कहा, आज उन्हें याद करते हुए मन बार-बार यही सोचता है कि ज़िंदगी कितनी क्षणभंगुर है। कल तक जो आवाज़ हमारे बीच थी, आज वह सिर्फ स्मृतियों में रह गई है। सोनू भैया, आपका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। आपकी कमी हमेशा महसूस होगी। आपके स्नेह, आपके संघर्ष और झारखंड के लिए आपकी प्रतिबद्धता को मैं जीवनभर अपने साथ लेकर चलूंगा। आप हमेशा याद आएंगे भैया....
दुखद संयोगः साढ़े तीन साल में झारखंड सरकार में शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों का निधन
रांची, 6 सितंबर . Jharkhand Government के कैबिनेट मंत्री और Jharkhand मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू के Saturday देर रात आकस्मिक निधन के साथ राज्य की राजनीति में एक असामान्य और दुखद संयोग जुड़ गया है. पिछले करीब साढ़े तीन वर्षों में Jharkhand Government के शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों ... Read more
झारखंड के शिक्षा मंत्री का निधन: हेमंत सरकार में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू नहीं रहे, झामुमो ने क्या कहा?
गोरखपुर के जिला कारागार में शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक और शिक्षाविद भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बंदियों को शिक्षा के महत्व के बारे में बताया गया। इस दौरान साक्षर हुए बंदियों को प्रमाण पत्र दिए गए, जबकि अगले बैच में पढ़ाई शुरू करने वाले निरक्षर बंदियों को शैक्षणिक किट वितरित की गई। मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुई शुरुआत कार्यक्रम की शुरुआत कारागार अधीक्षक दिलीप कुमार पाण्डेय ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित करके की। इसके बाद सिद्धदोष बंदी पप्पू राय और उनके सहयोगियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। बंदियों ने देशभक्ति गीत भी प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों से जेल परिसर का माहौल उत्साह और देशभक्ति से भर गया। बंदी सुधार और पुनर्वास अभियान के तहत शिव नाडर फाउंडेशन के सातवें बैच में साक्षर हुए बंदियों को कार्यक्रम में प्रमाण पत्र दिए गए। इन प्रमाण पत्रों का उद्देश्य बंदियों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार करना है। इसके साथ ही आने वाले अष्टम बैच में शामिल होने वाले निरक्षर बंदियों को शैक्षणिक किट भी दी गई। इससे वे जेल में रहकर अपनी पढ़ाई की शुरुआत कर सकेंगे। रिहाई के बाद करियर को लेकर दिया मार्गदर्शन कार्यक्रम में कैरियर काउंसलर अमित आनंद ने बंदियों को संबोधित किया। उन्होंने रिहाई के बाद आगे की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए करियर और रोजगार से जुड़े विकल्पों की जानकारी दी। उन्होंने बंदियों को समझाया कि जेल से बाहर निकलने के बाद वे अपनी शिक्षा, हुनर और मेहनत के जरिए नई शुरुआत कर सकते हैं। शिक्षा और सही दिशा के जरिए जीवन में बदलाव लाया जा सकता है। शिक्षाविदों ने बंदियों को किया प्रेरित कार्यक्रम में कई शिक्षाविद और विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. मोहम्मद हसन, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के क्षसमन्वयक डॉ. प्रवीण कुमार, कैरियर काउंसलर अमित आनंद, सेंट्रल एकेडमी के प्रधानाहैचार्य डॉ. प्रदीप कुमार श्रीवास्तव और शिव नाडर फाउंडेशन के सहायक प्रबंधक कार्तिकेय पांडेय ने बंदियों को संबोधित किया। वक्ताओं ने बंदियों को शिक्षा, नैतिक मूल्यों और अच्छे आचरण के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपने प्रयासों से जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। बंदियों को जेल से बाहर निकलने के बाद समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर बेहतर जीवन शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया। डॉ. राधाकृष्णन के जीवन से सीख लेने की अपील कारागार अधीक्षक दिलीप कुमार पाण्डेय ने अपने संबोधन में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन और उनके विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डॉ. राधाकृष्णन ने शिक्षा और दर्शन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने तिरुत्तनी में जन्म से लेकर ऑक्सफोर्ड में अध्यापन, सोवियत संघ में भारत के राजदूत के रूप में जिम्मेदारी निभाने और उनकी प्रसिद्ध पुस्तक द इंडियन फिलॉसफी सहित उनके कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पढ़ना-लिखना सीखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का सबसे मजबूत माध्यम भी है। बंदियों को शिक्षा से जुड़कर अपने जीवन को नई दिशा देने के लिए प्रेरित किया गया। अतिथियों को अंगवस्त्र देकर किया गया स्वागत कार्यक्रम में पहुंचे सभी विशिष्ट अतिथियों का कारागार अधीक्षक की ओर से अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान बंदियों की ओर से प्रस्तुत सांस्कृतिक और देशभक्ति कार्यक्रमों की भी सराहना की गई। जेल अधिकारियों और कर्मचारियों की रही मौजूदगी कार्यक्रम का मंच संचालन जेल विजिटर अमृताधीर मेहरोत्रा ने किया। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की देखरेख कारागार अध्यापक राजीव चौरसिया ने की। इस अवसर पर जेलर कुंज बिहारी सिंह, उप जेलर विजय कुमार, आदित्य कुमार, कृष्णा कुमारी, कारागार अध्यापक राजीव चौरसिया सहित अन्य कारागार कर्मी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में कारागार अधीक्षक ने सभी अतिथियों का आभार जताया और कार्यक्रम के समापन की घोषणा की। शिक्षक दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि शिक्षा और सही मार्गदर्शन के जरिए बंदियों को सुधार और पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल:शिक्षकों पर पोर्टल में डाटा अपलोड से लेकर सर्वे व एमडीएम तक की जिम्मेदारी
शिक्षक दिवस पर शनिवार को देशभर में शिक्षकों के सम्मान में कार्यक्रम हुए। उन्हें राष्ट्र निर्माण की रीढ़ बताया गया। लेकिन सरकारी प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के शिक्षकों के सामने सवाल कुछ और है- वे बच्चों को पढ़ाएं या विभाग के 86 तरह के काम पूरे करें? शिक्षकों की ओर से बताई गई जिम्मेदारियों की सूची देखें तो शिक्षक सिर्फ कक्षा में पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं रह गया है। उसे ऑनलाइन डाटा भरने, पोर्टल संभालने, सर्वे करने, बैठकों में जाने, अभियान चलाने और एमडीएम का हिसाब देखने वाला भी बनना पड़ रहा है। ऐसे में शिक्षकों का बड़ा समय कक्षा के बाहर के कामों में चला जाता है। बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन देने के लिए उनके पास समय बहुत कम बचता है। डाटा अपलोड का काम ड्रॉप बॉक्स कार्य, यू-डायस प्लस की फैसिलिटी, टीचर और स्टूडेंट मॉड्यूल, छात्रों का आधार सत्यापन, अपार और डीबीटी डाटा के काम करने होते हैं। इसके बाद ईको क्लब पोर्टल, ई-कल्याण, उल्लास ऐप पर असाक्षरों की एंट्री और प्रशस्त एेप से संबंधित जिम्मेदारियां हैं। इनकी जानकारी जुटाने, उसे सत्यापित कर अपलोड करने में समय लगता है। शिक्षक किन कामों में अधिक व्यस्त रहते हैं हर सप्ताह कोई न कोई गतिविधि: शिक्षकों को हर सप्ताह एसएचडब्ल्यूपी कक्षा, दवा वितरण, ईको क्लब बैठक, बाल संसद, एसएमसी और अभिभावक-शिक्षक बैठक करनी होती है। सीपीडी प्रशिक्षण, जूम मीटिंग, मूल्यांकन, रीडिंग कैंपेन और पुस्तकालय संचालन जैसे काम भी जिम्मे हैं। खेल, प्रतियोगिता और प्रदर्शनी का जिम्मा: स्कूल रुआर, डहर कार्य, शिशु गणना, खेलो झारखंड लिटिल चैंपियनशिप, सुब्रतो कप, बैंगल्स डे और इंस्पायर अवॉर्ड जैसी गतिविधियों की जिम्मेदारी भी शिक्षकों पर है। विज्ञान प्रदर्शनी और खेल महोत्सव में बच्चों की तैयारी से लेकर भागीदारी तक करानी होती है। पखवाड़ा खत्म नहीं होता, नया अभियान शुरू: स्वच्छता, स्वास्थ्य और जल पखवाड़े से लेकर पृथ्वी दिवस, ग्लोबल वार्मिंग डे और साक्षरता दिवस तक के आयोजन कराने होते हैं। विकसित भारत बिल्डथॉन, शिक्षा सप्ताह, साधना सप्ताह, ग्राम शिक्षा संगम, पोषण, बाल सुरक्षा सप्ताह जैसे अभियान चलते रहते हैं स्कूल रैंकिंग व प्रमाणन शिक्षकों के अनुसार, मुख्यमंत्री स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार, स्वच्छ हरित विद्यालय रेटिंग और विद्यालय प्रमाणीकरण जैसे कार्य भी वे करते हैं। स्कूल में निर्धारित गतिविधियां कराना, रिकॉर्ड रखना और संबंधित जानकारी उपलब्ध कराना। यानि शिक्षक से सिर्फ यह नहीं पूछा जाता कि बच्चों ने कितना सीखा, बल्कि स्कूल की गतिविधियों का पूरा रिकॉर्ड भी तैयार रखना पड़ता है। टीचर बोले- शिक्षक को हर काम का कर्मचारी बना दिया अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि शिक्षक का मूल दायित्व बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना और उनका सर्वांगीण विकास करना है। लेकिन शिक्षकों को लगातार विभागीय, प्रशासनिक, ऑनलाइन और अभियान आधारित जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। इन गतिविधियों के वीडियो रोज पोस्ट करने का दबाव भी है। शिक्षकों को अनावश्यक बोझ से मुक्त किया जाना चाहिए।
निपुण कक्षा प्रोजेक्ट से बदलेगी प्राथमिक शिक्षा की तस्वीर
प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों की शैक्षणिक नींव मजबूत करने के लिए विदिशा जिले में निपुण कक्षा प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। कलेक्टर अंशुल गुप्ता की पहल पर नीति आयोग से स्वीकृत यह प्रोजेक्ट फिलहाल जिले में ही लागू किया गया है। इसके तहत कक्षा 1 से 3 तक के बच्चों की शैक्षणिक दक्षता का हर तीन माह में स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से मूल्यांकन कराया जाता है। मूल्यांकन में यदि किसी स्कूल के 80 प्रतिशत बच्चे निर्धारित मापदंडों पर दक्ष पाए जाते हैं तो संबंधित स्कूल को 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इस राशि का उपयोग स्कूल में शैक्षणिक सामग्री, टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मटेरियल) और गुणवत्ता सुधार से जुड़े अन्य संसाधन जुटाने में किया जा सकता है। खेल-खेल में पढ़ाई पर जोर : प्रोजेक्ट लागू होने के बाद स्कूलों में पढ़ाई के तरीकों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। शिक्षक बच्चों को खेल-खेल में और रोचक गतिविधियों के माध्यम से पढ़ा रहे हैं, ताकि प्राथमिक स्तर पर सीखना बच्चों के लिए बोझ न बने। वहीं बाहरी एजेंसी से मूल्यांकन होने के कारण बच्चों की दक्षता का आकलन भी पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है। सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं सामने ^कलेक्टर अंशुल गुप्ता के प्रयासों से नीति आयोग से इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिली है। इसके लागू होने के बाद शिक्षकों और बच्चों में उत्साह बढ़ा है। स्कूलों में पढ़ाने के नए और रोचक तरीके अपनाए जा रहे हैं तथा इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। - आरपी लखेर, डीपीसी, विदिशा
Moradabad News: बंद और एक कमरों के स्कूलों से निकला बालिका शिक्षा का संदेश
कुछ वर्ष पहले तक भले ही मूंढापांडे और कुंदरकी ब्लॉक के दो स्कूल बंद और एक कमरे वाले थे, लेकिन वहां कार्यरत शिक्षिकाओं ने हिम्मत नहीं हारी।
Gorakhpur News: 44 केंद्रों पर जिले में आज होगी प्राविधिक शिक्षा अध्यापन परीक्षा
Technical education teaching examination to be held today at 44 centers in the district.
शिक्षा सुधार के साथ शिक्षक कल्याण पर भी जोर : गुलाब देवी
Emphasis on teacher welfare alongside education reform: Gulab Devi
शिक्षक दिवस : जोनल शिक्षा अधिकारी ने चार शिक्षकों को सम्मानित किया
शिक्षक दिवस : जोनल शिक्षा अधिकारी ने चार शिक्षकों को सम्मानित किया
Kaushambi News: बेहतर शिक्षा के प्रयासों ने सुमन कुशवाहा को दिलाया राज्य शिक्षक पुरस्कार
Efforts towards better education earned Suman Kushwaha the State Teacher Award.
Lucknow News: प्राविधिक शिक्षा सेवा परीक्षा आज
प्राविधिक शिक्षा सेवा परीक्षा आज
Sambhal News: टेट पास शिक्षामित्रों ने मांगा नियमितीकरण और आरक्षण
शिक्षक दिवस पर टेट उत्तीर्ण शिक्षामित्र उत्थान समिति ने बहजोई कलक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा।
12 secondary and 50 council school teachers were honored for fostering innovation in education.
Chandauli News: शिक्षक दिवस पर 113 शिक्षा शिल्पियों का किया सम्मान
113 education artists honored on Teachers' Day
Una News: अगले वर्ष से कांगड़ स्कूल में शुरू होंगी संगीत शिक्षा की कक्षाएं
उपमुख्यमंत्री ने विजेता एवं उपविजेता टीमों तथा खिलाड़ियों को पुरस्कार प्रदान किए।
Sultanpur News: 65 शिक्षक-शिक्षामित्रों का सम्मान, ब्लड बैंक में रक्तदान
65 शिक्षक-शिक्षामित्रों का सम्मान, ब्लड बैंक में रक्तदान
Jaunpur News: प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध मौर्य को शिक्षा में योगदान के लिए सम्मान
प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध मौर्य को शिक्षा में योगदान के लिए सम्मान
प्राविधिक शिक्षा अध्यापन परीक्षा-2026 को लेकर गोरखपुर जिला प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। रविवार, 6 सितंबर को जिले के 44 परीक्षा केंद्रों पर 19,496 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। परीक्षा दो पालियों में आयोजित होगी। परीक्षा को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा, निगरानी, यातायात और परीक्षा केंद्रों पर जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था पूरी कर ली है।दो पालियों में होगी परीक्षाबड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के शामिल होने को देखते हुए परीक्षा दो पालियों में कराई जाएगी। दोनों पालियों में परीक्षा केंद्रों की निगरानी के लिए अलग-अलग सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। सेक्टर मजिस्ट्रेट अपने-अपने क्षेत्र के परीक्षा केंद्रों का लगातार निरीक्षण करेंगे। परीक्षा शुरू होने से पहले भी अधिकारी केंद्रों पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की जांच करेंगे। परीक्षा के दौरान किसी तरह की समस्या सामने आने पर संबंधित अधिकारी तत्काल कार्रवाई करेंगे।सीसी कैमरों से होगी निगरानीपरीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसी कैमरों के जरिए निगरानी की व्यवस्था की गई है। परीक्षा के दौरान केंद्रों के अंदर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।नोडल परीक्षा अधिकारी और एडीएम सिटी गजेन्द्र कुमार ने बताया कि परीक्षा को पूरी पारदर्शिता और शुचिता के साथ कराने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। परीक्षा से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारियां बता दी गई हैं।हर केंद्र पर तैनात रहेंगे अधिकारीप्रत्येक परीक्षा केंद्र पर केंद्र व्यवस्थापक, कक्ष निरीक्षक और अन्य कर्मचारियों की तैनाती की गई है। सेक्टर मजिस्ट्रेट अपने निर्धारित केंद्रों पर पहुंचकर परीक्षा व्यवस्था की निगरानी करेंगे।अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही न हो। परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने और निर्धारित नियमों का पालन कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल19 हजार से अधिक अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने को देखते हुए सभी केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा। परीक्षा केंद्रों के आसपास भी पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे।पुलिस की ओर से केंद्रों के आसपास भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। नकल या किसी अन्य अनुचित गतिविधि को रोकने के लिए भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखा गया है।परीक्षा केंद्रों के बाहर भी रहेगी निगरानीपरीक्षा के दौरान सिर्फ केंद्रों के अंदर ही नहीं, बल्कि बाहर भी व्यवस्था पर नजर रखी जाएगी। अभ्यर्थियों के साथ आने वाले लोगों की वजह से परीक्षा केंद्रों के आसपास भीड़ न लगे, इसके लिए पुलिस और प्रशासन की टीम तैनात रहेगी।प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि परीक्षा केंद्रों के आसपास अनावश्यक भीड़ न लगाएं और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।ट्रैफिक व्यवस्था पर भी रहेगा विशेष ध्यानएक साथ हजारों अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्रों पर पहुंचने और परीक्षा खत्म होने के बाद वापस लौटने से शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है। इसे देखते हुए यातायात पुलिस ने भी विशेष इंतजाम किए हैं।प्रमुख परीक्षा केंद्रों और उनके आसपास के रास्तों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। कोशिश रहेगी कि अभ्यर्थियों के आने-जाने के दौरान जाम की स्थिति न बने।प्रशासन ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचें, ताकि अंतिम समय में होने वाली भीड़ और यातायात की परेशानी से बचा जा सके।केंद्रों पर बिजली, पानी और सफाई की व्यवस्थाजिला प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाओं का भी इंतजाम किया है। केंद्रों पर बिजली, पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि परीक्षा के दिन भी इन व्यवस्थाओं पर नजर रखें। किसी केंद्र पर कोई समस्या आती है तो उसे तत्काल दूर कराया जाए।अभ्यर्थियों को इन बातों का रखना होगा ध्यानप्रशासन ने परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों से कहा है कि वे परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से पर्याप्त पहले पहुंचें। अभ्यर्थी अपने साथ जरूरी पहचान पत्र और परीक्षा से जुड़े निर्धारित दस्तावेज जरूर लेकर जाएं।परीक्षा केंद्र पर प्रतिबंधित सामग्री लेकर न पहुंचें और प्रवेश से लेकर परीक्षा समाप्त होने तक सभी निर्धारित नियमों का पालन करें।लापरवाही पर होगी कार्रवाईएडीएम सिटी गजेन्द्र कुमार ने कहा कि प्राविधिक शिक्षा अध्यापन परीक्षा-2026 को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। परीक्षा से जुड़े सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं।उन्होंने कहा कि सुरक्षा, यातायात और परीक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की अनियमितता या अनुचित गतिविधि सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मऊ को अब कट्टे की नहीं कंप्यूटर की जरूरत, शिक्षा की नई इबादत लिखेगी नई पीढ़ी : कैबिनेट मंत्री
Mau now needs computers, not country-made pistols; the new generation will script a new chapter in education: Cabinet Minister.
Budaun News: नवाचार से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने वाले 42 शिक्षक सम्मानित
बदायूं। शिक्षक दिवस के अवसर पर कलक्ट्रेट में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का लाइव प्रसार शिक्षकों दिखाया गया। इसके बाद में बेसिक के 32 और माध्यमिक शिक्षा परिषद के 10 शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
Under-19 sports competition kicks off across six education blocks; 1,708 players are participating.
Srinagar News: सफाई कर्मचारियों के बच्चों के लिए एसएमसी शिक्षा पहल शुरू की
सफाई कर्मचारियों के बच्चों के लिए एसएमसी शिक्षा पहल शुरू की
Una News: सुक्खू सरकार के शिक्षा सुधार के दावों पर उठाए सवाल
विधानसभा में सामने आए ये आंकड़े सरकार के शिक्षा सुधार के दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करते हैं।
गोरखनाथ इलाके के पुराना गोरखपुर मोहल्ले में नौकरी दिलाने के नाम पर महिला से 4 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रबंधकीय कोटे से सहायक अध्यापिका बनाने का लालच देकर 4 लाख रुपये हड़प लिए गए। जब फर्जीवाड़े की पोल खुली तो आरोपी ने पैसे लौटाने से मना कर दिया और जान से मारने की धमकी देने लगा। पीड़िता की तहरीर पर थाना गोरखनाथ पुलिस ने शनिवार को एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है। पड़ोसी महिला ने भतीजे से कराई पहचानगोरखनाथ मोहल्ले के पंकज शुक्ला की पत्नी पीड़िता बिनीता शुक्ला ने बताया कि घर के पास ही किराए पर रहने वाली हेमा श्रीवास्तव से करीब एक साल पहले जान-पहचान हुई थी। हेमा ने अपने भतीजे गीडा के तेनुआ के रहने वाले सत्यम श्रीवास्तव से मिलवाया। हेमा ने बताया कि सत्यम को उसने बचपन से पाला है। वह शिक्षा विभाग में काम करता है और उसकी विभाग में अच्छी पकड़ है। वर्तमान में सत्यम गोरखपुर में ही किराए पर रहता है और भटहट बीआरसी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में तैनात है। जवाहर इंटर कॉलेज के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्रआरोप है कि सत्यम ने बिनीता और उनके पति को झांसे में लेकर प्रबंधकीय कोटे से जवाहर इंटर कॉलेज, पादरी बाजार में सहायक अध्यापिका के पद पर नियुक्ति दिलाने का झांसा दिया। इसके लिए उसने नकद और ऑनलाइन अपने व अपने करीबी के खातों में कुल 4 लाख रुपये ले लिए। कुछ दिन बाद आरोपी ने जवाहर इंटर कॉलेज का नियुक्ति पत्र लाकर दे दिया। पीड़िता जब कॉलेज में ज्वाइनिंग के लिए पहुंची। वहां पता चला कि पूरा नियुक्ति पत्र फर्जी और कूटरचित है। DIOS का फर्जी कार्यमुक्त आदेश भी थमायाजब पीड़िता ने आपत्ति जताई तो आरोपी ने दूसरा दांव चला। उसने जिला विद्यालय निरीक्षक के फर्जी हस्ताक्षर वाला कार्यमुक्त आदेश तैयार कर थमा दिया। जांच में वह आदेश भी फर्जी निकला। इसके बाद जब पीड़िता ने अपना पैसा वापस मांगा तो आरोपी पहले टालमटोल करता रहा। फिर फोन पर गंदी-गंदी गालियां देने लगा और जान से मारने की धमकी देने लगा। पीड़िता का आरोप है कि सत्यम फ्रॉड किस्म का व्यक्ति है और कई लोगों से इसी तरह नौकरी के नाम पर ठगी कर चुका है। इसकी जानकारी उसकी बुआ हेमा और परिवार के अन्य लोगों को भी है। पीड़िता ने एसएसपी को तहरीर देकर FIR दर्ज कर पैसे वापस दिलाने और परिवार की सुरक्षा की मांग की है। मामले की जांच गोरखनाथ थाने के एसआई राजेश कुमार पांडेय को सौंपी गई है।
'विश्वस्तरीय शिक्षा से ही बनेगा विकसित भारत', शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति मुर्मु का संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय शिक्षक दिवस पर कहा कि विश्वस्तरीय शिक्षा व्यवस्था से ही विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव है, जिसमें शिक्षकों की अहम भूमिका है।
बंगाल में भारतीय शिक्षा-दृष्टि को बल देने की अनुकरणीय घोषणा
पश्चिम बंगाल में शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख शैक्षणिक प्रकल्प विद्या भारती के कम से कम एक हजार नए विद्यालय स्थापित करने का लक्ष्य केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ाने की घोषणा नहीं है, बल्कि इसे राज्य की शिक्षा-दृष्टि में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के संकेत के ... Read more
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के चलते सागर के राहतगढ़ में यादव समाज ने प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया। कार्यक्रम से पहले नगर के प्रमुख मार्गों से भव्य रैली निकाली गई। रैली में जिलेभर से बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। रैली का जगह-जगह स्वागत किया गया। इसके बाद आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों के साथ प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत शामिल हुए। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को पुरस्कार व सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि मेहनत, लगन और शिक्षा ही सफलता का सबसे मजबूत आधार है। समाज के प्रतिभाशाली बच्चों को प्रोत्साहित करने से उनमें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास पैदा होता है। यादव समाज अपने बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, यह पूरे समाज के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि राहतगढ़ में जल्द संदीपनी विद्यालय का निर्माण होगा। यह सर्वसुविधायुक्त विद्यालय 35 करोड़ की लागत से बनेगा। समाज की असली ताकत युवा पीढ़ी उन्होंने कहा कि आज के दौर में शिक्षा ही वह माध्यम है, जिसके जरिए बच्चे अपने परिवार, समाज और देश का नाम रोशन कर सकते हैं। उन्होंने सभी समाजों से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों को अधिक से अधिक शिक्षा से जोड़ें और उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग करें। समाज की असली ताकत उसकी युवा पीढ़ी है और जब युवा शिक्षा एवं संस्कार से जुड़ते हैं तो समाज और राष्ट्र दोनों मजबूत होते हैं।इस दौरान पूर्व सांसद लक्ष्मीनारायण यादव, पूर्व मंत्री हर्ष यादव, किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष रामकुमार यादव, शिवशंकर यादव जिलाध्यक्ष, हृदय यादव, जिला उपाध्यक्ष बब्बू यादव प्रमोद यादव पथरिया, अनिरुद्ध यादव, सुनील यादव पढ़ा, वीरसिंह यादव, ब्रजेश यादव, राजकुमार यादव, मनोहर यादव, रामबाबू यादव, अजीत यादव, मुंशीलाल यादव समेत बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद थे।
3 साल में 45 हजार शिक्षक भर्ती, शिक्षा पर 12000 करोड़ होंगे खर्च; कहां हुआ ये ऐलान
ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी ने 45,000 शिक्षक भर्तियों का ऐलान किया है। साथ ही राज्य में 'केजी से पीजी' तक मुफ्त शिक्षा देने की शानदार शुरुआत की है।
उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और भावी शिक्षकों को तैयार करने वाले प्रशिक्षण संस्थानों को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बेहद अहम और बड़ा कदम उठाया है। राज्य में विद्यालयी शिक्षा के स्तर को उन्नत बनाने और शिक्षण संस्थानों के कामकाज में पारदर्शिता और गति लाने के उद्देश्य से बेसिक शिक्षा विभाग ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश के कुल 17 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों यानी डायट (DIET) में वरिष्ठता के आधार पर नए प्रधानाचार्यों की नियुक्तियां की गई हैं और उन्हें इस पद का प्रभार सौंपा गया है। इसके साथ ही प्रशासनिक कार्यों में किसी भी प्रकार की रुकावट न आए, इसके लिए एटा, इटावा और मऊ जनपदों के डायट में तीन अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार के इस दूरदर्शी फैसले से न केवल शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूती मिलेगी, बल्कि प्रदेश के दूरदराज के जिलों में चल रहे शैक्षणिक प्रशिक्षण अभियानों को भी एक नई दिशा और प्रभावी नेतृत्व प्राप्त होगा।एससीईआरटी के निदेशक को जारी किए गए निर्देश, वरिष्ठता क्रम के आधार पर मिला प्रभारइस पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत बेसिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव यतीन्द्र कुमार ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तर प्रदेश के निदेशक को एक आधिकारिक पत्र जारी किया है। इस पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित 17 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में कार्यरत वरिष्ठ प्रवक्ताओं को उनकी वरिष्ठता क्रम के आधार पर प्रधानाचार्य पद का प्रभार तुरंत प्रभाव से सौंपा जाए। शासन स्तर पर इस पूरे मामले पर लंबे समय से मंथन चल रहा था और सम्यक विचारोपरांत ही यह निर्णय लिया गया है कि इन संस्थानों का संचालन बिना किसी बाधा के सुचारु रूप से चलता रहे। निदेशक एससीईआरटी को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे संबंधित वरिष्ठ प्रवक्ताओं को पदभार ग्रहण कराने से जुड़ी सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं समय पर पूरी करें, ताकि अकादमिक सत्र प्रभावित न हो।शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था की रीढ़ हैं डायट, प्रभावी नेतृत्व से मजबूत होगी शैक्षणिक गुणवत्ताशिक्षा विशेषज्ञों का हमेशा से यह मानना रहा है कि किसी भी राज्य में स्कूली शिक्षा की नींव तब तक मजबूत नहीं हो सकती जब तक कि शिक्षकों को तैयार करने वाले संस्थान बेहतरीन स्थिति में न हों। डायट (DIET) यानी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान उत्तर प्रदेश की पूरी शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण और मुख्य कड़ी माने जाते हैं। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से लैस करना, उनके कौशल का विकास करना, शैक्षणिक सहयोग प्रदान करना और विद्यालयी शिक्षा में नित नए नवाचारों (Innovations) को प्रभावी ढंग से लागू करने में इन्हीं संस्थानों की सबसे बड़ी भूमिका होती है। ऐसे प्रमुख संस्थानों में लंबे समय से खाली चल रहे नेतृत्व के पदों पर वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रभार सौंपे जाने से इन संस्थानों की कार्यप्रणाली में तेजी आएगी और संस्थागत रूप से पूरी शिक्षण व्यवस्था को एक मजबूत आधार मिलेगा।जानिए किन 17 जिलों के डायट में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को सौंपी गई है प्रधानाचार्य पद की कमानशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार उत्तर प्रदेश के जिन 17 प्रमुख जिलों के डायट में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है, उनमें कई अनुभवी शिक्षाविद शामिल हैं। इस सूची के मुताबिक राजेश कुमार सिंह को बहराइच डायट, राम प्रताप सिंह कोश्रावस्ती डायट, विनोद कुमार को हमीरपुर डायट, मुक्तेश कुमार को फिरोजाबाद डायट, संजय कुमार को फर्रुखाबाद डायट, नवाब वर्मा को हाथरस डायट, दीपक श्रीवास्तव को ललितपुर डायट, अश्वनी प्रताप सिंह को जालौन डायट और विश्वदीपक त्रिपाठी को चंदौली डायट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा विमलेश कुमार त्रिपाठी (मिर्जापुर), सुश्री रिद्धि पाण्डेय (सोनभद्र), सुनील कुमार (बलिया), कुलदीप नारायण सिंह (देवरिया), दीनानाथ (कुशीनगर), नरेन्द्र सिंह (संतकबीर नगर), आशीष चौहान (शाहजहांपुर) और नन्दित कुमार (झांसी) को भी उनके संबंधित डायट संस्थानों में प्रधानाचार्य पद का प्रभार मिला है।एटा, इटावा और मऊ के डायट में तीन वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा गया है विशेष अतिरिक्त प्रभारमुख्य 17 जिलों के अलावा प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों को बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए तीन अन्य महत्वपूर्ण जनपदों में अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की व्यवस्था की गई है। शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार आराध्य उपाध्याय, जो कि डायट अलीगढ़ में वरिष्ठ प्रवक्ता के रूप में कार्यरत हैं, उन्हें डायट एटा के प्रधानाचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही अतुल कुमार सिंह, जो वर्तमान में इटावा के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) के पद पर सेवा दे रहे हैं, उन्हें डायट इटावा का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इसके अतिरिक्त अतुल कुमार तिवारी, जो डायट मऊ में वरिष्ठ प्रवक्ता के पद पर हैं, उन्हें डायट मऊ के प्रधानाचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के लिए तमाम आवश्यक प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने को कहा गया है। इन नियुक्तियों से यह तय हो गया है कि प्रदेश के हर जिले में भावी शिक्षकों को प्रशिक्षित करने का कार्य पूरी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ता रहेगा।
यह रहा सरकारी शिक्षकों को TET के लिए स्कूल शिक्षा विभाग की अनुमति और आदेश
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उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने स्पेशल शिक्षक पात्रता परीक्षा (Special TET) में शिक्षामित्रों को शामिल करने की मांग की है। संघ ने शनिवार को मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के जरिए भेजा। इसमें चेतावनी दी गई है कि अगर 15 सितंबर तक शासनादेश में बदलाव कर प्रशिक्षित शिक्षामित्रों को शामिल नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करेंगे। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के महामंत्री सुनील तिवारी और अध्यक्ष वसीम अहमद ने बताया कि शिक्षामित्र पिछले 26 सालों से परिषदीय स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। वे जनगणना, बालगणना, चुनाव ड्यूटी, बोर्ड परीक्षा ड्यूटी और दूसरे राष्ट्रीय कामों को भी पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब परिषदीय स्कूलों के दूसरे अध्यापकों, विशेष शिक्षकों, संविदा और डेलीवेजेज पर काम करने वाले स्पेशल एजुकेटर्स को स्पेशल टीईटी में शामिल किया गया है, तो प्रशिक्षित शिक्षामित्रों को इससे बाहर रखना सही नहीं है। संघ ने 2 सितंबर 2026 को जारी शासनादेश में बदलाव की मांग की है। इसमें कहा गया है कि स्नातक और बीटीसी की योग्यता रखने वाले सेवारत शिक्षामित्रों को भी स्पेशल टीईटी परीक्षा में शामिल किया जाए। नेताओं ने फिर चेतावनी दी कि अगर 15 सितंबर तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया, तो शिक्षामित्र अपने हक के लिए आंदोलन करेंगे।
पानसेमल थाना क्षेत्र में कन्या शिक्षा परिसर में एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई। इस मामले में छात्रा के परिजनों ने हंगामा कर गंभीर आरोप लगाए हैं। निष्पक्ष जांच व कार्रवाई के लिए स्वजनों ने मांग की है।
यूपी के शिक्षा विभाग में बड़ा बदलाव, 17 डायट में नए प्रधानाचार्य नियुक्त; 3 को मिला अतिरिक्त प्रभार
उत्तर प्रदेश सरकार ने विद्यालयी शिक्षा और शिक्षक प्रशिक्षण को सुदृढ़ करने के लिए 17 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य का प्रभार सौंपा है। इसके अतिरिक्त, एटा, इटावा और मऊ के डायट में तीन वरिष्ठ प्रवक्ताओं/अधिकारियों को प्रधानाचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।
शिक्षक दिवस पर सुकमा में प्रशासन का संवेदनशील चेहरा देखने को मिला। जिला स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में नक्सल हिंसा में जान गंवाने वाले 4 शिक्षादूतों के परिजनों को सम्मानित किया गया। शबरी ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर अमित कुमार, एसपी मयंक गुर्जर और जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर ने परिजनों को शाल और श्रीफल भेंट कर सम्मान दिया। सम्मानित शिक्षादूतों में प्राथमिक शाला मंडीमरका के स्वर्गीय बारसे लक्ष्मण, प्राथमिक शाला बैनपल्ली के स्वर्गीय मुचाकी लिंगा, प्राथमिक शाला गोंदपल्ली के स्वर्गीय डोडी अर्जुन और प्राथमिक शाला ताड़मेटला के स्वर्गीय कवासी सुक्का शामिल हैं। प्रशासन के मुताबिक, वर्ष 2019 से 2025 के बीच नक्सल हिंसा में इनकी हत्या कर दी गई थी। सम्मान के बाद परिजनों के साथ बैठकर किया भोजन कार्यक्रम के बाद प्रशासन ने सम्मान को औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा। कलेक्टर, एसपी और जिला पंचायत CEO ने सर्किट हाउस में इन शिक्षादूतों के परिजनों के साथ बैठकर भोजन किया। इस दौरान अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनकी पारिवारिक परिस्थितियों, जरूरतों और समस्याओं की जानकारी ली। कलेक्टर, एसपी और CEO ने स्वर्गीय बारसे लक्ष्मण की पत्नी शांति कोरसा, स्वर्गीय मुचाकी लिंगा के भाई मुचाकी महेश, स्वर्गीय डोडी अर्जुन की मां डोडी जोगी और स्वर्गीय कवासी सुक्का की पत्नी कवासी जोगी से चर्चा की। जरूरत के अनुसार मदद का भरोसा अधिकारियों ने परिजनों की बातें सुनने के बाद उनकी जरूरतों के अनुसार हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। यह पहल उन परिवारों के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता को दर्शाती है, जिन्होंने नक्सल हिंसा में अपने करीबी को खोया है। दुर्गम इलाकों में शिक्षा की जिम्मेदारी निभाने वालों को किया याद शिक्षा के लिए दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारी निभाने वाले इन शिक्षादूतों के योगदान और साहस को शिक्षक दिवस पर याद किया गया। सम्मान के साथ अधिकारियों का परिजनों के बीच बैठकर भोजन करना और उनकी समस्याएं सुनना कार्यक्रम का खास पहलू रहा।
योगी सरकार उत्तर प्रदेश के गांवों को आधुनिक डिजिटल सुविधाओं और सामाजिक केंद्रों से जोड़कर 'स्मार्ट' बना रही है। इसके तहत गांवों में डिजिटल लाइब्रेरी और बहुउद्देशीय पंचायत भवन बनाए जा रहे हैं, जिससे युवाओं को शिक्षा और ग्रामीणों को सामाजिक आयोजन के लिए बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
शिक्षा में राजनीति का कोई स्थान नहीं : सीएम योगी
CM Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कि शिक्षा में राजनीति का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। राजनीति के चश्मे से देखने वालों को 2017 के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आया आमूलचूल परिवर्तन दिखाई नहीं देगा। उन्होंने प्रदेशभर के शिक्षकों का ...
अमृतसर: गरीब परिवार के बच्चों की शिक्षा पर जोर, शिक्षकों ने कहा- देश की मजबूत नींव तैयार होगी
अमृतसर, 5 सितंबर . शिक्षक दिवस के अवसर पर अमृतसर के निष्काम सेवा पब्लिक स्कूल के शिक्षकों ने शिक्षा के महत्व और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के भविष्य को लेकर अपने विचार साझा किए. स्कूल की अध्यापिका संतोष और शिक्षक सरदार सिंह ने कहा कि देश की नई पीढ़ी को बेहतर बनाने ... Read more
मऊगंज के शगुन पैलेस बायपास में शनिवार को शासकीय (उत्कृष्ट) उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का एलुमनी मीट और शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक चले इस कार्यक्रम में शिक्षा, पुरानी यादों और पत्रकारिता का अनोखा संगम देखने को मिला, जहां सालों बाद अपने गुरुजनों से मिलकर पूर्व छात्र भावुक हो गए। समारोह में शिक्षा क्षेत्र में अमूल्य योगदान देने वाले रिटायर्ड और सेवारत शिक्षकों के साथ मऊगंज प्रेस क्लब के पत्रकारों को भी सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता डॉ. चंद्रिका प्रसाद चंद्र ने बेहतर व जिम्मेदार पत्रकारिता के लिए पत्रकारों का सम्मान किया। इस दौरान अशोक समरिया, राजेश दुबे, टी.एन. मिश्रा, नसीम खान, संजीत द्विवेदी, उमेश मिश्रा, प्रद्युम्न शुक्ला, विनोद सिंह, सुखवंत मिश्रा, विपिन पांडे, सुभाष पटेल और सागर चतुर्वेदी सहित कई पत्रकार मौजूद रहे। राजनीति से दूर रहा मंच, सिर्फ गुरु और शिष्य का दिखा अटूट रिश्ता मुख्य अतिथि डॉ. चंद्रिका प्रसाद चंद्र ने कहा कि मऊगंज में संभवतः पहली बार शिक्षकों के सम्मान मंच पर कोई नेता नहीं, बल्कि सिर्फ गुरु और उनके शिष्य मौजूद हैं। उन्होंने कहा, सक्रिय शिक्षक कभी नहीं मरता, उसकी शिक्षा और यादें समाज को दिशा देती हैं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डॉ. अमोल 'बटरोही' सहित रिटायर्ड शिक्षक राजबल्लव सिंह, रामसजीवन शर्मा, बी.बी. श्रीवास्तव, कृष्णा श्रीवास्तव, केशव प्रसाद मिश्रा, रामलाल सोनी और गणेश प्रसाद त्रिपाठी उपस्थित रहे। पीढ़ियों को जोड़ने का प्रयास, भविष्य में फिर मिलने का संकल्प एलुमनी एसोसिएशन के विश्वनाथ मिश्रा (विस्सू भैया), आनंदमणि मिश्रा, विकास भारती और लक्ष्मी सिंह परिहार ने बताया कि इस आयोजन का मकसद पुरानी और नई पीढ़ी को जोड़ना और पूर्व छात्रों को स्कूल के विकास के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम का समापन लंच, जलपान और पुरानी यादों को सहेजते हुए भविष्य में दोबारा मिलने के संकल्प के साथ हुआ।
गया शहर के हरिदास सेमिनरी ऑडिटोरियम में शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षक संवाद और सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बिहार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने, स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों की भूमिका को प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई। समारोह में शिक्षा जगत से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया। मुख्य अतिथि के तौर पर अतरी विधायक रोमित कुमार और बिहार विधान परिषद गया शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के सदस्य एमएलसी जीवन कुमार मौजूद रहे। इसके अलावा जगजीवन कॉलेज के पूर्व प्राचार्य सत्येंद्र प्रजापति, मगध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रोफेसर दिलीप कुमार केशरी, कुलसचिव डॉ. प्रोफेसर विनोद कुमार मंगलम, कोंच विधायक अजय दांगी, जिला शिक्षा पदाधिकारी कृष्ण मुरारी गुप्ता, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी माध्यमिक शिक्षा आनंद कुमार, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना सुमित कुमार सौरभ, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी एसएसए एवं प्राथमिक शिक्षा नित्यम कुमार गौरव और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी योजना गौरव राज सहित अन्य अधिकारी व गणमान्य लोग उपस्थित रहे। एमएलसी जीवन कुमार ने शिक्षकों को किया सम्मानित शिक्षक दिवस के मौके पर एमएलसी जीवन कुमार ने मौजूद शिक्षकों को शॉल देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का योगदान समाज और राष्ट्र निर्माण की बुनियाद है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बिना विकसित बिहार की कल्पना नहीं की जा सकती। कार्यक्रम में शिक्षकों से बातचीत करते हुए उनकी भूमिका, चुनौतियों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरतों पर चर्चा की गई। वित्त रहित शिक्षकों को वेतनमान देने की घोषणा को बताया अहम कदम समारोह में बिहार की शिक्षा व्यवस्था में हुए जरूरी बदलावों के बारे में भी जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं। वित्त रहित शिक्षा व्यवस्था से जुड़े शिक्षकों को वेतनमान देने की घोषणा को बड़ा कदम बताया गया। वक्ताओं के अनुसार इस मांग को लेकर करीब 40 वर्षों से संघर्ष चला था। नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा दिए जाने को भी शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव बताया गया। वक्ताओं के अनुसार इससे शिक्षकों की आर्थिक परेशानियां कम हुई हैं और वेतन भुगतान की व्यवस्था में सुधार आया है। हालांकि कुछ शिक्षक अभी भी इस प्रक्रिया से बाहर हैं, जिनके लिए समाधान तलाशने की बात कही गई। स्थानांतरण नीति से शिक्षकों को मिली राहत कार्यक्रम में शिक्षकों की लंबे समय से लंबित स्थानांतरण नीति लागू किए जाने पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि इसके माध्यम से बड़ी संख्या में शिक्षक अपने गृह जिले और प्रखंड में वापस लौट सके हैं। वर्षों से घर से दूर रहकर सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए इसे बड़ी राहत बताया गया। इसके साथ ही प्राचार्यों और अतिथि शिक्षकों को स्थानांतरण नीति में शामिल करने, शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा नियमों की समीक्षा के लिए समिति गठित करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। अगले तीन साल में शिक्षा की गुणवत्ता पर रहेगा फोकस कार्यक्रम में शिक्षा क्षेत्र के लिए आने वाले तीन वर्षों की प्राथमिकताओं पर विशेष जोर दिया गया। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मॉडल स्कूलों का विकास और प्रखंड स्तर पर कॉलेजों का विस्तार प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताए गए। वक्ताओं ने कहा कि प्रखंड स्तर पर उच्च शिक्षा के संस्थानों का विस्तार होने से विशेष रूप से छात्राओं को फायदा होगा। उन्हें उच्च शिक्षा के लिए 50 से 80 किलोमीटर दूर जाने की मजबूरी कम होगी। बेहतर कार्य वातावरण और सुविधाएं देने पर जोर समारोह में इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षकों को सम्मान, बेहतर कार्य वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी जरूरी है। वक्ताओं ने बिहार को देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का बेहतर मॉडल बनाने के लक्ष्य के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया। समारोह ने शिक्षकों में नई ऊर्जा और जिम्मेदारी का संदेश दिया।
शेखपुरा में शिक्षक दिवस पर एक सम्मान समारोह हुआ। इसमें 'प्रोजेक्ट स्वाभिमान' के तहत 12 शिक्षकों और 6 शिक्षा सेवकों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान ईंट भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए दिया गया। यह कार्यक्रम शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर के मंथन सभागार में हुआ। एडीएम लखींद्र पासवान ने सभी सम्मानित लोगों को अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र दिए। एडीएम लखींद्र पासवान ने कहा कि ईंट भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों के बच्चों तक शिक्षा पहुंचाना बहुत मुश्किल काम है। उन्होंने बताया कि 'प्रोजेक्ट स्वाभिमान' के जरिए ये शिक्षक और शिक्षा सेवक इन बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजाला फैला रहे हैं। वे सही मायनों में समाज सुधारक की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने सभी कर्मचारियों के समर्पण और लगन की तारीफ की। जिन शिक्षकों और शिक्षा सेवकों को सम्मानित किया गया, उनमें विमल भारती, गुड़िया खातून और उदय मांझी मुख्य रूप से शामिल थे। इनके अलावा दूसरे शिक्षकों और शिक्षा सेवकों को भी बच्चों की नियमित उपस्थिति और अच्छी शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशस्ति पत्र देकर उनका हौसला बढ़ाया गया। इस कार्यक्रम में जिले के बड़े प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि और कई खास लोग भी शामिल थे।
हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने शनिवार को नारनौल में आयोजित ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सम्मेलन में प्रदेश सरकार पर शिक्षा और खेल नीति को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नायब सैनी सरकार दोनों ही क्षेत्रों में पूरी तरह विफल साबित हुई है। सम्मेलन में उन्होंने सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों के हजारों रिक्त पदों और खिलाड़ियों के साथ हो रहे कथित अन्याय का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। सम्मेलन का आयोजन नारनौल ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मनपाल यादव की ओर से किया गया, जबकि अध्यक्षता जिला कांग्रेस अध्यक्ष सत्यवीर झुकिया ने की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कॉलेजों में शिक्षकों के पद रिक्त राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) से सामने आया है कि प्रदेश के सरकारी डिग्री कॉलेजों में 7,986 स्वीकृत शिक्षण पदों में से केवल 3,354 पदों पर ही नियमित नियुक्तियां हैं, जबकि 4,632 पद खाली पड़े हैं। इन रिक्तियों के कारण शिक्षण व्यवस्था अतिथि और एक्सटेंशन लेक्चररों के भरोसे चल रही है। प्राचार्यों के पद भी पड़े खाली उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 के कार्यभार के अनुसार प्रदेश में 8,572 शिक्षकों की आवश्यकता है। अंग्रेजी, भूगोल, वाणिज्य, गणित और रसायन विज्ञान जैसे प्रमुख विषयों में सैकड़ों पद रिक्त हैं, जबकि पर्यावरण विषय के सभी 22 पद खाली हैं। एडिड कॉलेजों में भी बड़ी संख्या में शिक्षकों और प्राचार्यों के पद रिक्त हैं। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें रिक्त पदों को निर्धारित समय सीमा में भरने और उच्च स्तरीय समिति गठित करने की मांग की गई है। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को प्रस्तावित है। खिलाड़ियों के हितों की अनदेखी राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार खिलाड़ियों के हितों की भी अनदेखी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एचसीएस और एचपीएस में खिलाड़ियों को नियुक्ति का लाभ दिलाने के मामले में सरकार को बार-बार हाईकोर्ट में हार का सामना करना पड़ा, इसके बावजूद सरकार ने भविष्य में खिलाड़ियों को यह लाभ नहीं देने का नीतिगत फैसला कर लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी तथा सरकार से रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां और खिलाड़ियों के साथ हो रहे अन्याय को समाप्त करने की मांग करती है। इस मौके पर महिला जिला अध्यक्ष डा. राजवति यादव भी मौजूद रही।
करौली के जिला मुख्यालय स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले उच्च माध्यमिक स्कूल में शनिवार को शिक्षक दिवस पर एक कार्यक्रम हुआ। इसमें महान शिक्षाविद् और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि दी गई। उनके शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को याद किया गया। संस्था ने विद्यालय के सभी शिक्षकों को पारितोषिक देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम की शुरुआत संस्था निदेशक प्रेमसिंह माली, संस्था प्रधान धर्मसिंह, व्याख्याताओं और शिक्षकों ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर फूलमाला चढ़ाकर की। इस दौरान शिक्षकों ने डॉ. राधाकृष्णन के शिक्षा के प्रति समर्पण और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन में उनके योगदान को याद किया। संस्था निदेशक प्रेमसिंह माली ने कहा कि आज के समय में विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा देने के साथ-साथ उनमें शिक्षक के प्रति सम्मान और शिक्षा के मूल्यों की समझ पैदा करना भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि शिक्षक समाज और विद्यार्थियों का भविष्य बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। प्रेमसिंह माली ने शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यार्थियों की क्षमताओं को पहचानें और उन्हें बेहतर शिक्षा व सही मार्गदर्शन दें। उन्होंने शिक्षक की गरिमा और मर्यादा बनाए रखने पर भी जोर दिया। कार्यक्रम में संस्था ने सभी शिक्षकों को पारितोषिक देकर सम्मानित किया। सम्मान पाकर शिक्षकों ने खुशी जताई और विद्यार्थियों के पढ़ाई व पूरे विकास के लिए लगातार कोशिश करने का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम में संस्था प्रधान धर्मसिंह, व्याख्याता राधामोहन सिंघल, माहिर खान, सीमा, रामकुमार, नरेश, हेमेंद्र, आमिर, जनक सिंह और शिवकुमार समेत विद्यालय का पूरा स्टाफ मौजूद था।
शिक्षकों के समर्थन में नीलम पार्क पहुंचे जीतू पटवारी, शिक्षक अभ्यर्थियों से संवाद किया और मांगों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखने का भरोसा दिया।
आज जब पूरा देश शिक्षक दिवस मना रहा था उस समय गुरदासपुर के मेरिटोरियस स्कूल के शिक्षकों ने पंजाब सरकार का पुतला फूंककर विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षक मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। शिक्षकों ने बताया कि वे पिछले 12 सालों से अस्थायी नौकरी कर रहे हैं। पंजाब के मेरिटोरियस स्कूलों के ये शिक्षक बेहतरीन नतीजे देते हैं, लेकिन उनकी सेवाएं नियमित करने की मांग पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। शिक्षक संदीप सैनी और दविंदर सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार शिक्षा क्रांति के दावे तो करती है, लेकिन उन्हें शिक्षा विभाग में नियमित करने की बजाय सिर्फ टालमटोल कर रही है। शिक्षा मंत्री ने दिया था आश्वासन उन्होंने यह भी बताया कि सरकार बनने के बाद शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने शिक्षकों को 100 दिनों के अंदर नियमित करने का भरोसा दिया था। हालांकि, अब साढ़े चार साल बीत चुके हैं और उनकी मांग पूरी नहीं हुई है। शिक्षक दिवस को 'काला दिवस' के रूप में मनाया मेरिटोरियस स्कूलों के शिक्षक आज शिक्षक दिवस को 'काला दिवस' के रूप में मना रहे हैं। उन्होंने पंजाब सरकार का पुतला फूंका और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने सरकार से जल्द से जल्द अपनी सेवाएं नियमित करने की मांग की।
हरियाणा राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष मीना परमार शनिवार को हांसी पहुंचीं। यहां उन्होंने हांसी प्राइवेट स्कूल संघ द्वारा आयोजित शिक्षक दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया। समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले 96 स्कूलों के शिक्षकों और शिक्षा से जुड़ी हस्तियों को सम्मानित किया गया। मीना परमार ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सबसे ऊपर है। वर्तमान समय में और ज्यादा बढ़ी शिक्षकों की जिम्मेदारी : मीना उन्होंने बताया कि आज सोशल मीडिया, नशे और दूसरी सामाजिक चुनौतियों के समय में शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। शिक्षकों को चाहिए कि वे छात्रों को शिक्षा के साथ संस्कार, देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी भी सिखाएं। परमार ने छात्रों से शिक्षकों का सम्मान करने और उनकी बातों को जीवन में अपनाने की अपील की। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे अपना लक्ष्य तय करें और मेहनत व अनुशासन से आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि युवा सिर्फ नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें। युवाओं से नशे से दूर रहने का आह्वान मीना परमार ने युवाओं को नशे से दूर रहने और नई तकनीक के हिसाब से अपने हुनर को बढ़ाने का संदेश भी दिया। समारोह में छात्रों ने गुरु-शिष्य परंपरा और शिक्षक के महत्व पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए, जिससे सभी प्रभावित हुए। इस मौके पर सीडीएलयू के रजिस्ट्रार सुनील शर्मा, हांसी प्राइवेट स्कूल संघ के प्रधान रविंद्र अत्री के साथ कई शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि, शिक्षक, छात्र, अभिभावक और शिक्षा से जुड़े कई खास लोग मौजूद थे।
Teachers' Day in India: Why did Justice Markandey Katju raise serious questions about the education system and teachers?
कन्नौज के माध्यमिक और प्राइमरी स्कूलों में शिक्षण कार्य कर रहे टीचरों के साथ ही इस बार शिक्षामित्र और अनुदेशक का भी सम्मान किया गया। ये सम्मान उन्हें माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग की ओर जीआईसी उमर्दा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिया गया। सम्मान पाकर शिक्षामित्र ने खुशी का इजहार किया। टीचर्स-डे पर शनिवार दोपहर उमर्दा स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में 11 टीचर माध्यमिक के और 3 टीचर बेसिक शिक्षा विभाग के शामिल हैं। इसके अलावा कन्नौज के प्राथमिक विद्यालय युसुफपुर भगवान की शिक्षामित्र अनीता देवी, उच्चतर प्राथमिक विद्यालय जसौली के अनुदेशक शैलेन्द्र कुमार राणा और हसेरन के विशेष शिक्षक संजीव कुमार को भी सम्मानित किया गया। उन्हें ये सम्मान विभाग की ओर से पहली बार दिया गया। शिक्षामित्र अनीता देवी ने सम्मान पाकर खुशी का इजहार किया। हालांकि यहां मुख्य अतिथि के रूप में ऊर्जा राज्य मंत्री कैलाश राजपूत और डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री को पहुंचना था, लेकिन वह नहीं पहुंचे। ऐसे में डीआईओएस पप्पू सरोज ने शिक्षकों को सम्मानित किया। इन शिक्षकों का हुआ सम्मान- राजकीय हाईस्कूल रामखेड़ा के प्रधानाध्यापक हर्ष दीपांकर तिवारी, भारतीय शिक्षा सदन इंटर कॉलेज सिकंदरपुर के प्रवक्ता डॉ. केके झा, पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कालेज फतेहपुर जसोदा के प्रवक्ता सस्मित कुमार द्विवेदी, राजकीय इंटर कॉलेज उमर्दा की सहायक अध्यापक मंजू वर्मा, गोमती देवी इंटर कॉलेज की सहायक अध्यापक स्नेहलता, राजकीय हाईस्कूल गुगरापुर सहायक अध्यापक रश्मि राठौर, राजकीय अभिनव विद्यालय गंगधरापुर के अध्यापक देवऋषि मिश्रा, पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कालेज बिरौली के व्यायाम शिक्षक कोषांक यादव, पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कालेज फतेहपुर जसोदा के व्यायाम शिक्षक आकाश गुप्ता, राजकीय इंटर कॉलेज उमर्दा के सहायक अध्यापक देवेश गुप्ता, श्याम लाल खंडेलवाल इंटर कॉलेज विशुनगढ़ के अध्यापक अनुज कुमार द्विवेदी शामिल हैं। इसके अलावा उच्चतर प्राथमिक विद्यालय हैबतपुर कटरा की अध्यापक स्नेहलता द्विवेदी, कम्पोजिट विद्यालय फतेहपुर जसोदा के सहायक अध्यापक पंकज त्रिवेदी और प्राथमिक विद्यालय कल्याणपुर की प्रधानाध्यापक पूजा पांडेय को भी सम्मानित किया गया।
शनिवार को कांग्रेस पार्टी द्वारा नारनौल में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की...
धौलपुर में शिक्षक दिवस पर चकोली शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास समिति ने एक सम्मान समारोह किया। यह कार्यक्रम शनिवार को श्याम कॉम्पलेक्स में हुआ। इसमें 80 प्रतिशत या उससे ज्यादा नंबर लाने वाले 36 होनहार छात्रों को छात्रवृत्ति और सम्मान दिया गया। साथ ही शिक्षा, समाजसेवा और खेल के क्षेत्र में अच्छा काम करने वाले खास लोगों को भी सम्मानित किया गया। राजकीय महाविद्यालय धौलपुर के प्रिंसिपल डॉ. गिर्राज सिंह मीणा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि शिक्षक सिर्फ पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज का आइना होता है। शिक्षक अपने व्यवहार और संस्कारों से आने वाली पीढ़ी के साथ पूरे समाज की दिशा तय करते हैं। समाज बनाने में शिक्षक की भूमिका बहुत जरूरी है। 'स्कॉलरशिप देकर हौसला बढ़ाना है अच्छी पहल'पूर्व वाइस चांसलर डॉ. मनरूप सिंह मीणा ने समिति के काम की तारीफ की। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद और होनहार छात्रों को छात्रवृत्ति देकर उनका हौसला बढ़ाना एक बढ़िया पहल है। डॉ. ए.के. बेरी ने कहा कि बदलते समाज में शिक्षकों की जिम्मेदारी ज्यादा हो गई है। छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों, अनुशासन और संस्कारों की शिक्षा देना भी जरूरी है। समिति के कृष्ण कुमार शर्मा ने बताया कि भविष्य में और ज्यादा छात्रों को छात्रवृत्ति देने की योजना है। ताकि पैसे की कमी के कारण किसी भी होनहार छात्र की पढ़ाई पर असर न पड़े। समारोह में पूर्व उप प्राचार्य प्रोफेसर अनिल कुमार बेरी, सेवानिवृत्त शिक्षक विशंभर दयाल शर्मा और जिला फुटबॉल संघ के अध्यक्ष गुरमीत मान को शिक्षा एवं खेल क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थियों में निशा कुमारी, लवी, मनजीत सिंह जादौन, उपासना, कीर्ति चौहान, पूजा, मनोज कुमार, कंचन, छवि सोनी, आशु, शिवानी, खुशबू परमार, रक्षा सैन, मधु कुमारी, राखी प्रजापति, पवन, मधु, सौरभ राजपूत, जानवी मुद्गल, तरंग, राखी, साक्षी, अनु, प्राची, सलोनी, सुखदेवी, अलीशा, नीलम, विष्णु, स्नेहा, वर्षा, खुशी पाराशर, सुधा कुमारी, वैष्णवी और अनन्या शर्मा शामिल रहे।
शिक्षा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक पवित्र ‘राष्ट्रीय धर्म’ है : सीएम पटेल
गांधीनगर, 5 सितंबर . Gujarat के Chief Minister भूपेंद्र पटेल ने Saturday को शिक्षक दिवस के मौके पर कहा कि शिक्षा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक पवित्र ‘राष्ट्रीय धर्म’ है, जो व्यक्ति के जीवन को संवारकर राष्ट्र का निर्माण करता है. उन्होंने ‘शिक्षक दिवस’ के विशेष अवसर पर गांधीनगर में आयोजित एक समारोह में ... Read more
शिक्षक दिवस पर बैतूल जिले के 227 सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए ‘शिक्षा संजीवनी अभियान’ की शुरुआत की गई। जिला स्तरीय कार्यक्रम के तहत भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने विभिन्न स्कूलों में पहुंचकर विकास कार्यों का शुभारंभ किया। बडोरा, कोसमी, जामठी और खेड़ी सांवलीगढ़ के स्कूलों में कार्यक्रम हुए। इस दौरान शिक्षकों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके, कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे सहित जनप्रतिनिधि और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। स्थानीय जरूरत के हिसाब से होंगे काम अभियान का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में स्थानीय जरूरत के अनुसार बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है। इसके तहत भवन और क्लासरूम का सुधार, डेस्क-बेंच, बाउंड्रीवाल, डिजिटल क्लासरूम सहित विद्यार्थियों के लिए जरूरी अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सरकारी बजट के साथ समाज की भागीदारी अभियान में सरकारी बजट के साथ जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, अभिभावकों, सेवानिवृत्त शिक्षकों और अन्य सहयोगियों की भागीदारी पर भी जोर दिया गया है। विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि सरकारी स्कूलों के विकास में समाज की सीधी भागीदारी बढ़नी चाहिए। स्कूलों की व्यवस्थाओं और विकास कार्यों की निगरानी में भी समाज को भूमिका निभानी चाहिए। छात्रों को मिलेगा बेहतर माहौल कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने बताया कि अभियान के पहले चरण में चयनित स्कूलों में उनकी जरूरत के अनुसार विकास कार्य कराए जाएंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बेहतर और सुविधाजनक माहौल उपलब्ध कराना है। केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके ने अभियान को सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में अच्छी पहल बताया।
सुल्तानपुर में TET/CTET पास शिक्षामित्रों ने अपने नियमितीकरण की मांग उठाई है। शनिवार 4 बजे जिले भर के शिक्षामित्र शहर के त्रिकोनिया पार्क में इकट्ठा हुए। उन्होंने फिर कलेक्ट्रेट पहुंचकर डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा। टेट उत्तीर्ण शिक्षामित्र उत्थान समिति, उत्तर प्रदेश (जनपद सुल्तानपुर) के मुताबिक, बेसिक शिक्षा विभाग में पिछले 25 सालों से करीब 80,000 शिक्षामित्र काम कर रहे हैं। ये सभी स्नातक, बीटीसी और TET/CTET पास हैं। NCTE के सभी नियम पूरे करने के बावजूद उन्हें नियमित शिक्षक का दर्जा और समान वेतन नहीं मिल रहा है। संगठन ने मांग की है कि उत्तराखंड की तरह उत्तर प्रदेश सरकार भी एक ठोस नियमावली बनाए। इससे योग्य शिक्षामित्रों को नियमित किया जा सके। शिक्षामित्रों ने अपने मांग पत्र में कई अहम बातें रखी हैं। इसमें उत्तराखंड सरकार की प्रक्रिया का अध्ययन कर तुरंत एक कानूनी नियमावली बनाकर TET/CTET पास शिक्षामित्रों को नियमित करने की मांग शामिल है। इसके अलावा, उन्होंने आने वाली शिक्षक भर्तियों में उम्र में छूट, काम के अनुभव के आधार पर भारांक (अंक) और मध्य प्रदेश की तरह 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की मांग की है। नॉन-टेट शिक्षामित्रों को भी विभागीय TET परीक्षा में शामिल होने का मौका देने की बात कही गई है। ज्ञापन सौंपने और कार्यक्रम के दौरान संगठन के जिला अध्यक्ष विजय सिंह, जिला महामंत्री अंकित श्रीवास्तव, जिला महासचिव मो. अफसर, कोषाध्यक्ष कन्हैया लाल, जिला उपाध्यक्ष प्रमोद मिश्र और जिला संरक्षक राजेश तिवारी मौजूद रहे। इनके साथ इंद्रेश यादव, दीप्ति दुबे, संगीता यादव, शमा परवीन, ममता सिंह, अंजुला तिवारी, प्रमोद वर्मा, प्रमोद कुमार और अमिताभ गौतम भी उपस्थित थे।
शिक्षा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक पवित्र 'राष्ट्रीय धर्म' है : सीएम पटेल
शिक्षा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक पवित्र 'राष्ट्रीय धर्म' है : सीएम पटेल
शिक्षक दिवस पर केरल के मंत्री रोजी एम. जॉन बोले, शिक्षा में इंसानियत और समानता जरूरी
केरल के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन की शिक्षक दिवस पर की गई फेसबुक पोस्ट से विवाद खड़ा हो गया है।
आगरा में मीरा देवी फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा संचालित संतराम बीए सावित्रीबाई फुले निःशुल्क शिक्षा संस्कार केंद्र, आंवलखेड़ा आगरा पर शिक्षक दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रस्ट के संस्थापक धर्मवीर प्रजापति ने बच्चों को शिक्षा के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन को सही दिशा देने, सोचने-समझने की क्षमता विकसित करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम है। उन्होंने बच्चों से मन लगाकर पढ़ाई करने तथा शिक्षा के माध्यम से अपने भविष्य को बेहतर बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जीवन में शिक्षा का मूल्य बहुत अधिक है, क्योंकि शिक्षित व्यक्ति अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझने के साथ-साथ परिवार और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस अवसर पर शिक्षा केंद्र के बच्चों ने अपने शिक्षकों को उपहार भेंट कर उनका सम्मान किया। बच्चों के इस स्नेह और सम्मान से शिक्षक भी भावुक नजर आए। कार्यक्रम के अंत में शिक्षकों ने बच्चों को शिक्षा के प्रति निरंतर मेहनत करने और अपने जीवन में अच्छे संस्कार अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम ने शिक्षा, संस्कार और गुरु सम्मान का सुंदर संदेश दिया।
बुलंदशहर में शिक्षक सम्मान समारोह, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के 78 शिक्षक सम्मानित
बुलंदशहर के विकास भवन सभागार में शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित हुआ, जिसमें बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 78 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। प्रदेश स्तर पर भी जिले की शिक्षिका जूली मलिक को सम्मान मिला।
दिल्ली हाईकोर्ट में 150 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, 15 सितंबर से आवेदन होंगे शुरू
दिल्ली हाईकोर्ट ने सीनियर पर्सनल असिस्टेंट समेत कुल 150 पदों पर योग्य और इच्छुक उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी कर उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं।
5 सितंबर, शनिवार: सीवान के जीरादेई आदर्श राजकीय मध्य विद्यालय की वरीय शिक्षिका वीनस दीक्षित को शिक्षक दिवस पर पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सम्मानित किया। उन्हें शिक्षा में नवाचार और समावेशी शिक्षा के लिए यह सम्मान मिला।
शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में प्रदेश के जेन जी (Gen Z) शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से वन-टू-वन संवाद किया। कार्यक्रम अहिल्या आश्रम क्रमांक-1 में आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के सभी जिलों से वर्ष 1997 के बाद जन्मे शासकीय शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बुलाया गया था। मुख्यमंत्री ने जेन जी शिक्षकों और अधिकारियों से सीधे बातचीत कर यह जाना कि नई पीढ़ी शिक्षा व्यवस्था को किस नजरिए से देखती है। संवाद में शिक्षण पद्धति, विद्यार्थियों की बदलती जरूरतों, तकनीक के इस्तेमाल और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव जैसे विषयों पर चर्चा हुई। प्रदेशभर से पहुंचे जेन जी शिक्षकों और अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के साथ सीधे संवाद किया और अपने अनुभव, विचार और सुझाव साझा किए। इस आयोजन को नई पीढ़ी की सोच और शिक्षा व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल बनाने की पहल के तौर पर देखा गया। जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में जेन जी युवाओं द्वारा किए गए प्रदर्शन के बाद सरकार की ओर से नई पीढ़ी की सोच और अपेक्षाओं को समझने पर भी जोर दिया जा रहा है। सीएम ने शिक्षकों से पूछा- प्लेन कैसे उड़ता है? सीएम ने कहा कि यहां पंचतंत्र की बात हो रही है। कहा जा रहा है कि ऐसा कौन-सा एक तंत्र है, जिसमें बाकी चारों तंत्र समाहित हैं। आकाश में वायु भी है, जल भी है और सूर्य भी है। प्रकृति के हर एक पहलू में सब कुछ विद्यमान है। आवश्यकता केवल हमारी दृष्टि की है, हम किस दृष्टिकोण से उसे देखते हैं और उसमें क्या खोज पाते हैं। इस दौरान शिक्षकों से पूछा कि प्लेन कैसे उड़ता है? शिक्षक ने सीएम डॉ. मोहन यादव से पूछा मुख्यमंत्री जी, एक विशेष और पर्सनलाइज्ड लर्निंग सॉफ्टवेयर को शिक्षा व्यवस्था में प्रभावी रूप से लागू करने के लिए शिक्षकों की ट्रेनिंग किस प्रकार सुनिश्चित की जाएगी? क्या इसके लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण और आवश्यक तकनीकी सहयोग प्रदान करने की कोई योजना है? सीएम बोले- कांग्रेस के बोलने और करने में अंतर है कार्यक्रम के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस के बोलने और करने में बहुत बड़ा अंतर है। इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। लेकिन सवाल यह है कि लगातार तीन बार राहुल गांधी जी और कांग्रेस, नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा की जीत को रोक नहीं पा रही है। कांग्रेस को अब आत्ममंथन करने की जरूरत है कि आखिर कहां कमी रह रही है और कहां गलतियां हो रही हैं। अतीत में कांग्रेस ने जो गलतियां कीं, उन गलतियों से सीखना भी जरूरी है। आज की पीढ़ी से लेकर आने वाली पीढ़ियों तक, जिन लोगों को कांग्रेस के शासनकाल में कई तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिनके अवसर प्रभावित हुए और जो कई अवसरों से वंचित रह गए, इन सभी सवालों पर कांग्रेस को गंभीरता से विचार करना चाहिए। अगर कांग्रेस वास्तव में बदलाव चाहती है, तो उसे केवल बोलने तक सीमित नहीं रहना होगा। उसे अपने अतीत की गलतियों को स्वीकार करना होगा, आत्ममंथन करना होगा और अपने काम तथा अपनी नीतियों के माध्यम से जनता का विश्वास दोबारा हासिल करना होगा। सीएम बोले- दो वर्षों में 18,000 से अधिक पदों पर भर्ती की गई सीएम ने आगे कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने सभी विभागों में नई भर्तियों के माध्यम से नए लोगों को अवसर देने और विभागों में नई ऊर्जा एवं नई कार्यसंस्कृति लाने का काम किया है। लगभग दो वर्षों में 18,000 से अधिक पदों पर भर्ती की गई है। ट्रेनिंग के उपरांत हमने जिला शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयक से लेकर विभिन्न स्तरों के सभी पदों को भरने का काम किया। शिक्षकों की नियुक्तियां भी बड़े स्तर पर की गई हैं। आज हमने यह भी घोषणा की है कि TET की परीक्षा ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन माध्यम से आयोजित की जाएगी। इसके माध्यम से 40,000 से अधिक शिक्षकों को प्रमोशन का अवसर मिलेगा। इससे नए पद सृजित होंगे और भविष्य में नई भर्तियों का रास्ता भी खुलेगा। आज का यह सत्र युवा मित्रों के साथ संवाद का अवसर था। आने वाले 25–30 वर्षों तक हमारे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को दिशा देने में यही युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसी उत्साह और ऊर्जा के साथ हम प्रदेश को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं। ‘गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए मध्य प्रदेश और तेज गति से आगे बढ़ेगा’ सीएम ने कहा- जब देश आगे बढ़ रहा है, तो मध्य प्रदेश भी उसी ताकत और गति के साथ आगे बढ़े, इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है। यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि 28–28 वर्ष की उम्र में युवा जिला शिक्षा अधिकारी बन रहे हैं। इसी तरह 27–28 वर्ष के अनेक युवा शिक्षकों से मिलकर, उनके साथ संवाद करके और उनके विचार जानकर भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हमारे विद्यार्थी बड़े पैमाने पर मेरिट में स्थान बना रहे हैं। आज इन्हीं प्रयासों के बल पर हमारे शिक्षा तंत्र में ड्रॉपआउट दर लगभग शून्य हुई है। हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए मध्य प्रदेश और तेज गति से आगे बढ़ेगा और शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा।
बक्सर के सरकारी स्कूलों में लगातार गलत काम और बच्चों के साथ बुरे बर्ताव के मामले सामने आ रहे हैं। छात्राओं से गलत काम, मारपीट और बुरे बर्ताव के कई मामलों के बाद अब चौसा प्रखंड के बालिका मध्य विद्यालय रामपुर में बच्चों की पिटाई का एक वीडियो वायरल हुआ था। इस मामले में शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की है। विभाग ने स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक विपिन कुमार को निलंबित कर दिया है और उनके खिलाफ जांच शुरू कर दी है। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से शिक्षा विभाग और शिक्षकों में हलचल है। शिक्षा अधिकारी ने टीचर से मांगा था सफाई जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से 3 सितंबर को एक आदेश जारी हुआ था। इसके अनुसार, 29 जुलाई को सोशल मीडिया पर बालिका मध्य विद्यालय रामपुर का एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में स्कूल की छात्राओं और छात्रों के साथ प्रखंड शिक्षिका सुषमा सिंह द्वारा मारपीट और चोट पहुंचाने जैसी हरकतें करने की बात सामने आई थी। वीडियो सामने आने के बाद चौसा के प्रखंड शिक्षा अधिकारी ने 1 अगस्त को स्कूल का दौरा किया। इस दौरान संबंधित शिक्षिका और प्रभारी प्रधानाध्यापक से सफाई मांगी गई। जांच और सफाई मिलने के बाद स्कूल चलाने में लापरवाही, नियमों का पालन न करने और शिक्षक के पद के खिलाफ काम करने के आरोप में प्रभारी प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई की सिफारिश की गई। इसके बाद बिहार सरकारी सेवक नियम, 2005 के तहत विपिन कुमार को निलंबित कर दिया गया। निलंबन के दौरान उनका ऑफिस प्रखंड संसाधन केंद्र, नावानगर तय किया गया है। बक्सर जिले में पिछले कुछ समय से सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं के साथ बुरे बर्ताव और स्कूल चलाने में गलत काम के कई मामले लगातार सामने आए हैं। डुमरांव प्रखंड के नथुनी अहीर के डेरा स्थित मध्य विद्यालय में छात्राओं से गलत काम का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की थी। छात्रा से कंधे की मालिश कराने का आरोप इसी तरह, ब्रह्मपुर प्रखंड के मध्य विद्यालय गरहथा कला में जांच के दौरान एक छात्रा से कंधे की मालिश कराने का आरोप लगा था। इसके साथ ही कई पढ़ाई और कामकाज से जुड़ी गलतियां भी सामने आई थीं। इसके बाद प्रभारी प्रधानाध्यापक समेत चार शिक्षकों को निलंबित किया गया था। इसी तरह बक्सर के आचार्य नरेंद्र देव मध्य विद्यालय में छात्राओं ने प्रधानाध्यापिका और शिक्षिकाओं पर मारपीट व दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे। छात्राओं ने लोहे के स्केल और चप्पल से पिटाई करने की शिकायत की थी। जांच के बाद प्रधानाध्यापिका अंजु कुमारी को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई। अब चौसा के रामपुर विद्यालय के मामले में प्रभारी प्रधानाध्यापक के निलंबन से शिक्षा विभाग की सख्ती एक बार फिर सामने आई है। लगातार हो रही विभागीय कार्रवाई से शिक्षकों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, इन घटनाओं ने सरकारी विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा, अनुशासन और विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बलरामपुर में शनिवार को कलेक्ट्रेट में शिक्षक दिवस और शिक्षक सम्मान समारोह हुआ। यह कार्यक्रम देश के दूसरे राष्ट्रपति, शिक्षाविद् और भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर दोपहर 12 बजे आयोजित किया गया। इस दौरान डीएम डॉ. विपिन कुमार जैन और एसपी मार्तण्ड प्रकाश सिंह ने डॉ. राधाकृष्णन के चित्र पर फूल चढ़ाकर उन्हें याद किया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को भी याद किया गया। जिले के अलग-अलग विकासखंडों के 29 शिक्षक और कर्मियों को सम्मानित किया गया। इन सभी ने शिक्षा और स्कूली गतिविधियों में अच्छे काम किए थे। सम्मान पाकर शिक्षक-कर्मियों के चेहरों पर खुशी दिखी। डीएम ने सभी को बधाई दी और कहा कि वे इसी लगन से काम करते रहें। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों के पूरे विकास पर जोर दिया। डीएम डॉ. विपिन कुमार जैन ने कहा कि शिक्षक सिर्फ बच्चों को किताबें नहीं पढ़ाते। वे उनमें जानने की इच्छा, आत्मविश्वास, अनुशासन और कुछ नया करने का हुनर भी बढ़ाते हैं। शिक्षक बच्चों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए तैयार करते हैं। हर बच्चे की अपनी अलग खूबी और क्षमता होती है। शिक्षक इस खूबी को पहचानकर सही रास्ता दिखाते हैं। इससे बच्चे अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच पाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों में ऐसा अच्छा माहौल बनाना चाहिए। जहां बच्चे बिना किसी डर के सवाल पूछ सकें, नई चीजें सीख सकें और अपनी प्रतिभा को निखार सकें। शिक्षकों को हर बच्चे की पढ़ाई पर खास ध्यान देना चाहिए। यह देखना चाहिए कि कोई भी बच्चा सीखने में पीछे न रह जाए। डीएम ने नए और मजेदार तरीकों से पढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होना चाहिए। अच्छे काम करने वाले शिक्षकों का सम्मान दूसरों को भी प्रेरणा देता है। शिक्षकों को अपने स्कूल को बेहतर भविष्य बनाने का केंद्र बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक की असली जीत उसके छात्रों की सफलता में है। जब छात्र जिम्मेदार नागरिक बनकर आगे बढ़ते हैं, तो वही शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। समारोह में बलरामपुर से प्रियंका तिवारी एवं निर्मला कुमारी, उतरौला से रंजना गुप्ता एवं शशिना वर्मा, हरैया सतघरवा से अवध बिहारी एवं आशा गौतम, पचपेड़वा से मनोज कुमार मिश्र एवं रजनीश, गैसड़ी से राघवेन्द्र सिंह एवं हरिराम गुप्ता तुलसीपुर से शुभम श्रीवास्तव एवं अमित गुप्ता, श्रीदत्तगंज से शिव प्रसाद एवं मो. असरार सिद्दीकी, रेहरा बाजार से रामेश्वर कुमार वर्मा एवं जितेन्द्र कुमार प्रजापति, नगर बलरामपुर से मनीष वर्मा एवं प्रतिमा करौली तथा गैड़ास बुजुर्ग से कुतुबुल्लाह खान एवं शिव कुमार को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। वहीं स्पेशल एजुकेटर के रूप में पचपेड़वा से सत्येन्द्र सिंह, तुलसीपुर से प्रतिमा सिंह, उतरौला से शैलेश कुमार पाण्डेय, नगर बलरामपुर से देव बाबू पाण्डेय, गैड़ास बुजुर्ग से सुरेश चन्द्र चौधरी तथा गैसड़ी से मेराज अहमद को सम्मान मिला। इसके अलावा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में उत्कृष्ट कार्य के लिए गैड़ास बुजुर्ग की ममता यादव, तुलसीपुर की संगीता मिश्र तथा बलरामपुर देहात की कु. स्नेहलता को भी सम्मानित किया गया। अंत में जिलाधिकारी ने सभी सम्मानित शिक्षकों एवं कार्मिकों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि जनपद के शिक्षक इसी समर्पण, नवाचार और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाई देंगे और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखेंगे। समारोह में मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु गुप्ता, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विकास श्रीवास्तव, खंड शिक्षा अधिकारी अशोक पाठक समेत अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
5 सितंबर, शनिवार: बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि अब मुगल का नहीं गूगल का जमाना है। गूगल के साथ एमओयू हुआ है, इससे शिक्षकों की कैपेसिटी बिल्डिंग होगी और उन्हें एआई के साथ ट्रेंड किया जाएगा।
शिक्षकों का सम्मान करने का दिन यानी शिक्षक दिवस हर साल हमारे समाज में एक खास उम्मीद और प्रेरणा लेकर आता है, लेकिन जब बात एक ऐसे शख्स की हो जो हाथों में कानून की किताब और राइफल थामने के साथ-साथ झुग्गी-झोपड़ियों और गरीब बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए किताबें बांटता रहा हो, तो कहानी अपने आप में अद्भुत हो जाती है। बात हो रही है बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) और जाने-माने शिक्षाविद् अभयानंद की, जिनकी पहचान सिर्फ एक कड़क आईपीएस अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि उन अनगिनत इंजिनियरों और डॉक्टरों के गॉडफादर के रूप में भी दर्ज है जिन्होंने कभी अभावों में अपनी जिंदगी बिताई थी। एक वर्दीधारी अधिकारी के तौर पर उन्होंने जिस तरह शिक्षा का संचार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक किया, उसने यह साबित कर दिया कि ज्ञान वह रोशनी है जो हर अंधेरे कोने को रोशन कर सकती है।भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के एक उच्च पद पर आसीन अधिकारी के लिए अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर गणित और भौतिकी के जटिल समीकरणों को पढ़ाना किसी चमत्कार से कम नहीं लगता, लेकिन अभयानंद ने इस असंभव लगने वाले काम को अपनी जिंदगी का मुख्य मकसद बना लिया था। जब वे दिनभर अपराधियों की धरपकड़ और कानून-व्यवस्था की समीक्षा में व्यस्त रहते थे, तब उनकी शामें उन होनहार और गरीब बच्चों के नाम होती थीं जिनके पास महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस भरने के लिए एक फूटी कौड़ी भी नहीं होती थी। फिजिक्स (भौतिकी) के उनके पढ़ाने के अनूठे अंदाज और कॉन्सेप्ट्स को क्लियर करने की उनकी क्षमता ने छात्रों के मन से विज्ञान का डर हमेशा के लिए निकाल दिया। उन्होंने साबित किया कि प्रतिभा किसी की बपौती नहीं होती, उसे बस सही मार्गदर्शन और एक अदद मौके की जरूरत होती है जो उन्होंने अपनी कक्षाओं के माध्यम से हजारों बच्चों को दिया।किसी भी व्यक्ति के जीवन में उसके परिवार का जो प्रभाव होता है, वही उसके भविष्य की नींव तय करता है और अभयानंद के मामले में भी यह बात पूरी तरह सटीक बैठती है। उनका शुरुआती परिवेश बौद्धिक और वैचारिक रूप से बेहद समृद्ध रहा, जहां शिक्षा को ही सबसे बड़ा धन माना जाता था। उनके घर का माहौल हमेशा से ऐसा था जहां किताबों के बीच चर्चाएं होना आम बात थीं और उनके पिता से मिले अनुशासन व समाज सेवा के संस्कारों ने उनके भीतर बचपन से ही एक गहरी सामाजिक जिम्मेदारी का भाव भर दिया था। परिवार से मिले इन्हीं शुरुआती पाठों ने उन्हें यह सिखाया कि प्रशासनिक पद पर रहकर जनता की सेवा करना अपनी जगह एक कर्तव्य है, लेकिन समाज के बौद्धिक स्तर को ऊपर उठाने के लिए ज्ञान का दान सबसे बड़ा पुण्य है। यही कारण था कि उन्होंने अपनी पारिवारिक और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाते हुए शिक्षा के प्रसार को अपना अनौपचारिक मिशन बना लिया।बिहार की धरती से उपजी वह क्रांतिकारी शैक्षिक पहल जिसे आज पूरी दुनिया 'सुपर 30' के नाम से जानती है, उसके शुरुआती संस्थापकों में अभयानंद का नाम अत्यंत आदर के साथ लिया जाता है। गणितज्ञ आनंद कुमार के साथ मिलकर उन्होंने समाज के सबसे गरीब तबके के 30 ऐसे मेधावी बच्चों को चुनना शुरू किया जो आईआईटी (IIT) जैसी दुनिया की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने का सपना तो देखते थे, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण कदम पीछे खींच लेते थे। अभयानंद ने अपने आवास और सीमित संसाधनों के जरिए इन बच्चों को पढ़ाना शुरू किया और अपनी अनूठी रणनीतिक सोच से यह साबित कर दिया कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए, तो संसाधनों की कमी कभी सफलता के आड़े नहीं आ सकती। उनके पहले ही प्रयास में जब इन बच्चों ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की, तो देश-दुनिया का ध्यान इस अनूठे प्रयोग की ओर आकर्षित हुआ और शिक्षा जगत में एक नई क्रांति का सूत्रपात हुआ।वक्त के साथ भले ही शुरुआती संस्थागत साझेदारियों में कुछ वैचारिक अंतर आए और रास्ते अलग हुए, लेकिन अभयानंद के भीतर सुलग रही शिक्षा की वह लौ और अधिक तेज हो गई। उन्होंने अपनी राह खुद चुनी और ग्रामीण क्षेत्रों के उन इलाकों का रुख किया जहां शिक्षा की पहुंच अब भी एक सपना बनी हुई थी। पटना के पास बाढ़ (Barh) अनुमंडल के एक छोटे से ग्रामीण इलाके मसौढ़ी और अन्य सुदूर गांवों में उन्होंने 'आनंद शिक्षा निकेतन' जैसी पहलों की शुरुआत की, जहां उन्होंने सीधे तौर पर समाज के सबसे पिछड़े और मुसहर जैसी जातियों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ा। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि केवल शहरी और संभ्रांत वर्ग के बच्चे ही नहीं, बल्कि खेतों में काम करने वाले और ईंट-भट्ठों पर मजदूरी करने वाले परिवारों के बच्चे भी कलम पकड़ना सीखें और अपने भविष्य की पटकथा खुद लिखें।पुलिस विभाग के सर्वोच्च पद से सेवानिवृत्त होने के बाद जब अमूमन लोग अपने परिवार और विश्राम की जिंदगी चुनते हैं, तब अभयानंद ने अपने इस शैक्षिक आंदोलन को और अधिक विस्तार दे दिया। आज भी वे अपनी कक्षाओं में पूरी तल्लीनता से युवाओं को पढ़ाते नजर आते हैं और उनका यह समर्पण इस बात का प्रमाण है कि एक सच्चा शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता। उनके पढ़ाए हुए छात्र आज देश और दुनिया के नामी-गिरामी तकनीकी संस्थानों, वैज्ञानिक शोध केंद्रों और प्रशासनिक पदों पर देश की सेवा कर रहे हैं, जो उनके द्वारा बोए गए बीज का ही वटवृक्ष रूप है। शिक्षक दिवस के इस पावन अवसर पर उनकी यह कहानी हमें यह याद दिलाती है कि समाज में बदलाव लाने के लिए केवल पदों की नहीं, बल्कि सच्ची नीयत, दृढ़ संकल्प और निस्वार्थ भाव से ज्ञान बांटने की जरूरत होती है।
खेल और शिक्षा जीवन बदल सकती है, ब्राजील फुटबॉल लीजेंड काफू ने युवा लड़कियों को दी सलाह
मुंबई, 5 सितंबर (आईएएनएस)। ब्राजील के दिग्गज फुटबॉलर रहे और टीम को 2 बार विश्व चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले काफू ने शनिवार को मुंबई की जरूरतमंद युवा लड़कियों के साथ फुटबॉल फील्ड पर समय बिताया। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को फुटबॉल के गुर बताने के साथ ही खेल और शिक्षा के जरिए अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और प्राइमरी स्कूलों की बदहाल स्थिति को सुधारने के लिए आजमगढ़ जिले के कलेक्ट्रेट पर कॉकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन करने वाली है जिसको लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए हैं। पूरे कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस और डेढ़ सेक्शन पीएसी भी लगाई गई है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में सिविल ड्रेस में सुरक्षा एजेंसियों के कर्मियों को भी लगाया गया है। कॉकरोच जनता पार्टी के पदाधिकारी को जिले के स्कूल में भी प्रदर्शन की बात सामने आ रही है। हालांकि अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है। जिलों जिलों में जा रहे हैं कार्यकर्ता कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता जिले जिले में जाकर प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार का ध्यान आकृष्ट कर रहे हैं।CJP का प्रमुख मुद्दा परीक्षा व्यवस्था में कथित पेपर लीक, परीक्षा में अनियमितता और छात्रों के भविष्य से जुड़े सवाल रहे हैं। जून 2026 में जंतर-मंतर पर हुए इसके बड़े प्रदर्शन में छात्रों, अभिभावकों और युवाओं ने तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। हालांकि बाद में केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा भी हो गया था जिसके बाद से लगातार सक्रियता बढ़ी हुई है। उनकी मांगों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली पर रोक, परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना, प्रभावित छात्रों को न्याय और राहत देना। शिक्षा व्यवस्था में जिम्मेदारी तय करना। पेपर लीक अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई जैसी प्रमुख मांगे हैं।
सीमित संसाधनों के बीच सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने और बच्चों को सीखने के नए अवसर देने की दिशा में काम करने वाले शिक्षक मकबूल अहमद ने अपने तीन दशक से अधिक लंबे सेवाकाल में अलग पहचान बनाई है।
झारखंड के ग्रामीण इलाकों में बच्चों की शिक्षा के रास्ते में कौन-सी जानलेवा भौगोलिक चुनौतियां खड़ी
देश के एक तरफ जहां डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट क्लासरूम की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, वहीं दूसरी तरफ हमारे देश के कई दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में आज भी मासूम बच्चे बुनियादी सुविधाओं के लिए किस कदर जूझ रहे हैं, इसकी एक बेहद दर्दनाक और डरावनी तस्वीर झारखंड से सामने आई है। झारखंड के एक सुदूर ग्रामीण इलाके में स्थित सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले लगभग 629 बच्चे रोज अपनी जान हथेली पर रखकर स्कूल जाने को मजबूर हैं, क्योंकि उनके रास्ते में कोई सुरक्षित पुल या पक्की सड़क मौजूद नहीं है। मानसून के इस मौसम में जब बारिश के कारण इलाके के स्थानीय नाले और नदियां उफान पर होती हैं, तो इन नौनिहालों को अपने छोटे-छोटे बस्ते कंधे पर लादकर और जान जोखिम में डालकर तेज धार वाले पानी को पार करना पड़ता है। स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि कम से कम बच्चों के आने-जाने के लिए एक सुरक्षित पुल का निर्माण कराया जाए, लेकिन हर बार उन्हें केवल झूठे आश्वासन के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर माता-पिता हर पल दहशत में रहते हैं कि न जाने कब कोई बड़ा हादसा इन मासूमों की जिंदगी पर भारी पड़ जाए।स्कूल जाने वाले 629 बच्चों की इस दैनिक मुश्किल यात्रा के दौरान किन भयानक जोखिमों का सामना करना पड़ता है?जब सुबह के वक्त ये 629 छात्र अपने घरों से शिक्षा ग्रहण करने के लिए निकलते हैं, तो उनके परिजनों की सांसें तब तक अटकी रहती हैं जब तक वे वापस सुरक्षित घर नहीं लौट आते हैं। स्कूल पहुँचने के लिए इन बच्चों के पास या तो घुटनों से ऊपर बहते गंदे पानी और तेज बहाव वाले नाले को पार करने का विकल्प होता है या फिर पढ़ाई छोड़ने का, और ये मासूम भविष्य संवारने की जिद में हर रोज इस मौत के खेल को खेलने के लिए विवश हैं। कई बार बारिश इतनी तेज होती है कि पानी का स्तर इतना बढ़ जाता है कि छोटे बच्चे उसमें बहने से बाल-बाल बचते हैं, जिन्हें बड़े बच्चे या ग्रामीण मिलकर किसी तरह संभालते हैं। स्कूल के शिक्षकों का भी यह कहना है कि इस प्रकार की खतरनाक परिस्थितियों के कारण बच्चों की उपस्थिति (Attendance) पर बहुत बुरा असर पड़ता है, और बारिश के दिनों में कई बच्चे स्कूल ही नहीं आ पाते हैं। शिक्षा का अधिकार (RTE) और बच्चों की सुरक्षा के तमाम बड़े-बड़े सरकारी दावे इस उफनते नाले के सामने पूरी तरह से दम तोड़ते नजर आते हैं, जो हमारी प्रशासनिक व्यवस्था की संवेदनहीनता का एक जीता-जाता प्रमाण है।स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की इस गंभीर समस्या पर चुप्पी से ग्रामीणों में क्यों भड़का हुआ है भारी गुस्सा?लंबे समय से चली आ रही इस अमानवीय और खतरनाक समस्या को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का सब्र अब पूरी तरह से जवाब दे चुका है, जिसके चलते प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े नेता वोट मांगने के लिए इन दुर्गम रास्तों पर आ जाते हैं और पक्का पुल बनवाने का वादा करके चले जाते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई भी सुधि लेने नहीं आता है। जब मीडिया के माध्यम से इन मासूम बच्चों की जानलेवा यात्रा की तस्वीरें और वीडियो सामने आए, तब जाकर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की नींद टूटी है और वे मामले की जांच कराने की रटी-रटाई बात कह रहे हैं। जनता का सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े और अनहोनी हादसे का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद ही उनकी आंखें खुलेगी और यहाँ पुल का निर्माण कराया जाएगा। लोकतंत्र के इस दौर में जहाँ देश विकास की ऊंची उड़ान भर रहा है, वहीं झारखंड के इन 629 बच्चों का इस तरह से जान जोखिम में डालकर पढ़ना हमारे सिस्टम के माथे पर एक बहुत बड़ा कलंक है।इस गंभीर संकट का स्थायी समाधान निकालने के लिए सरकार और शिक्षा विभाग को तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए?झारखंड के इस सुदूर इलाके में सामने आई इस दर्दनाक तस्वीर ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि कागजी विकास और जमीनी हकीकत के बीच अभी भी बहुत बड़ी खाई मौजूद है जिसे पाटना बेहद जरूरी है। राज्य सरकार, जिला प्रशासन और ग्रामीण विकास विभाग को बिना किसी देरी के युद्ध स्तर पर इस नाले या नदी पर एक मजबूत और सुरक्षित पुल के निर्माण का प्रस्ताव पास करना चाहिए ताकि इन बच्चों की जान को हमेशा के लिए सुरक्षित किया जा सके। जब तक स्थायी पुल बनकर तैयार नहीं होता, तब तक बच्चों की आवाजाही के लिए वैकल्पिक और सुरक्षित नाव या अस्थायी पुल की व्यवस्था प्रशासन की जिम्मेदारी होनी चाहिए ताकि शिक्षा का यह सफर मौत का सफर न बने। देश के भविष्य कहे जाने वाले इन 629 मासूमों को उनकी पढ़ाई के अधिकार के साथ-साथ सुरक्षित जीवन जीने का हक मिलना ही चाहिए, और इसके लिए स्थानीय प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वहन करना होगा।
कानपुर में यूपी प्राविधिक शिक्षा (अध्यापन) सेवा परीक्षा-2025 में नकल और किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए इस बार सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। छह सितंबर को जिले के 21 केंद्रों पर 8883 अभ्यर्भी परीक्षा देंगे।
AIIMS Recruitment 2026: एम्स नागपुर ने 72 सीनियर रेजिडेंट पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। संबंधित विषय में एमडी, एमएस, डीएनबी, डीएम या एम.सीएच. डिग्री रखने वाले उम्मीदवार 17 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं।
'शिक्षा के क्षेत्र में हरियाणा को देश का अग्रणी राज्य बनाएं', CM सैनी से शिक्षक दिवस पर मांगा सहयोग
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंचकूला में राज्य शिक्षक पुरस्कार समारोह में शिक्षकों को सम्मानित किया और शिक्षा के क्षेत्र में हरियाणा को देश का अग्रणी राज्य बनाने में सहयोग मांगा।
भोपाल स्थित NCERT की प्रमुख इकाई RIE पिछले छह दशकों से देश में NEP 2020 के तहत मास्टर ट्रेनर्स तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहा है। जानिए RIE भोपाल के इतिहास और शिक्षा क्षेत्र में इसके योगदान के बारे में।
मध्य प्रदेश में प्रशासनिक लापरवाही के चलते दर्जनों स्कूल बंद होने की कगार पर हैं या अतिथि शिक्षकों के सहारे चल रहे हैं। कई स्थानों पर जर्जर भवनों के कारण बच्चे मंदिरों के प्रांगण में या पेड़ों की छांव में बैठने को मजबूर हैं।
शिक्षक दिवस के अवसर पर देश के उत्कृष्ट शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज 21 उच्च शिक्षा और पॉलिटेक्निक शिक्षकों को उनके शिक्षण और शिक्षा क्षेत्र में योगदान के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करेंगी।
Kerala के उच्च शिक्षा संस्थानों में विभाजनकारी एजेंडे पर रोक लगाएं: Roji M John
तिरुवनंतपुरम, पांच सितंबर केरल के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम जॉन ने शिक्षक दिवस पर उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वतंत्र विचारों और संवैधानिक मूल्यों का केंद्र बनाए रखने की वकालत करते हुए शनिवार को कहा कि ऐसे संस्थानों के प्रमुखों का विभाजनकारी एजेंडे को बढ़ावा देने वाले संगठनों से जुड़ना ‘‘लोकतांत्रिक समाज के लिए बिल्कुल भी उचित नहीं है।’’रोजी ने शिक्षक दिवस पर एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘उच्च शिक्षा के जिन संस्थानों को स्वतंत्र विचारों और संवैधानिक मूल्यों का केंद्र होना चाहिए, उनके प्रमुखों द्वारा अपने पद की गरिमा को भूलकर विभाजनकारी एजेंडे को बढ़ावा देने वाले संगठनों के मंचों तक खुद को सीमित कर लेना लोकतांत्रिक समाज के बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है।’’राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘संकीर्ण राजनीतिक हितों के आगे अकादमिक स्वायत्तता के विशेषाधिकार का समर्पण करने वाली ऐसी प्रवृत्तियां शिक्षा और शिक्षण के मूल सार पर ही सवाल खड़ा करती हैं।’’मंत्री की यह टिप्पणी राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति और पीठ सदस्यों को मनोनीत करने सहित विभिन्न मुद्दों पर राज्य सरकार और राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर के बीच जारी मतभेदों के बीच आई है। यह विवाद जून में तब और गहरा गया था जब राज्य के कुछ कुलपतियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जिसे संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संबोधित किया था। रोजी ने तब भी उनकी भागीदारी की आलोचना करते हुए कहा था कि कुलपति का पद अकादमिक और प्रशासनिक तटस्थता का प्रतिनिधित्व करता है। मंत्री ने कहा कि शिक्षक दिवस शिक्षकों के लिए भेदभाव रहित और मानवीय पीढ़ियों का निर्माण करने की अपनी जिम्मेदारी को याद करने का अवसर होना चाहिए। उन्होंने भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का स्मरण करते हुए कहा कि राधाकृष्णन शिक्षण के महत्व में विश्वास रखते थे और चाहते थे कि उनके जन्मदिन को देशभर में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए। रोजी ने जाति के आधार पर छात्रों को अपमानित किए जाने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोग शिक्षण के मूल अर्थ को समझने में पूरी तरह विफल रहे हैं। रोजी ने कहा, ‘‘स्टाफ रूम में बैठकर एक छात्र को उसकी जाति के नाम से अपमानित करने वाले और उसे आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले लोग वे हैं जो शिक्षण के वास्तविक अर्थ को नहीं समझ पाए।’’मंत्री ने उन सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं जो ‘‘ज्ञान से अंधकार को दूर करते हैं’’ और छात्रों को संवैधानिक मूल्यों तथा मानवता को बनाए रखना सिखाते हैं। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर और शिक्षकों के सम्मान में देश में हर साल पांच सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
पत्नी की गई नौकरी, तो बच्चों के सांभर में मिलाया गोबर, आरोपी गिरफ्तार
तमिलनाड़ु के इरोड जिले में अरुमुगम नाम के एक शख्स को पकड़ा गया है. उसपर आरोप है कि उसने एक छात्रा से स्कूल में सांभर में गोबर का पाउडर मिलाने के लिए कहा था. लेकिन जब खाना परोसने से पहले टीचर ने खाना चखा तो उन्हें कुछ गड़बड़ लगी.
शाजापुर के मावि कांजा में पदस्थ शिक्षक हेमंत वैद्य को शिक्षक दिवस पर शनिवार को राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार दिया जाएगा। भोपाल में होने वाले कार्यक्रम में उन्हें विद्यार्थियों की पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन, नए तरीकों से पढ़ाने और स्कूल के विकास में योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। उन्हें प्रशस्ति पत्र, शाल-श्रीफल और 25 हजार रुपए की पुरस्कार राशि मिलेगी। छात्रों ने परीक्षाओं में किया बेहतर प्रदर्शन हेमंत वैद्य के मार्गदर्शन में मावि कांजा के विद्यार्थियों ने पिछले 10 साल में कई परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन किया है। इनमें नेशनल मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति परीक्षा, ओलिंपियाड और विज्ञान मेले जैसी प्रतियोगिताएं शामिल हैं। वैद्य स्कूल में गणित और विज्ञान पढ़ाने के साथ प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। वे डाइट और राज्य स्तर पर दूसरे शिक्षकों को भी पढ़ाने के नए तरीकों को लेकर मार्गदर्शन देते हैं। गांव वालों की मदद से स्कूल में बढ़ीं सुविधाएं ग्रामीण क्षेत्र के इस स्कूल में गांव वालों के सहयोग से कई सुविधाएं जोड़ी गई हैं। स्कूल में कंप्यूटर लैब, 7 किलोवाट का सोलर प्लांट, स्मार्ट बोर्ड, नया फर्नीचर और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। भोपाल में राज्यपाल, सीएम और शिक्षा मंत्री रहेंगे मौजूद शिक्षक दिवस पर 5 सितंबर को भोपाल में होने वाले कार्यक्रम में राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मौजूद रहेंगे। इसी कार्यक्रम में हेमंत वैद्य को राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार दिया जाएगा। उनके चयन पर शिक्षा विभाग और स्कूल परिवार ने खुशी जताई है।
आज की आधुनिक जीवनशैली और प्रतिस्पर्धी दौर में शिक्षा की परिभाषा महज अच्छे अंक हासिल करने, बड़ी डिग्रियों का संग्रह करने और मोटे सैलरी पैकेज वाली नौकरी पाने तक सिमट कर रह गई है। स्कूल से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों तक हर जगह केवल करियर और आर्थिक सफलता की होड़ मची है। लेकिन क्या केवल किताबी ज्ञान और डिग्रियों का ढेर किसी व्यक्ति को वास्तव में शिक्षित बना सकता है? जब समाज में उच्च शिक्षित लोगों द्वारा संवेदनहीनता, लालच और असहिष्णुता जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तब यह बुनियादी सवाल उठना लाजिमी हो जाता है कि आखिर पढ़ाई का असली मकसद क्या है। इसी जटिल प्रश्न का सबसे सटीक और शाश्वत उत्तर भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक और शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के शिक्षा दर्शन में मिलता है।डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का शिक्षा दर्शन: केवल ज्ञान नहीं, चरित्र निर्माण है आधारडॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का स्पष्ट मानना था कि शिक्षा का उद्देश्य केवल मस्तिष्क को सूचनाओं से भरना नहीं है, बल्कि व्यक्ति के अंतःकरण को जागृत करना है। उनका प्रसिद्ध विचार था कि यदि शिक्षा मनुष्य को एक बेहतर, करुणामयी और नैतिक इंसान नहीं बना सकती, तो वह शिक्षा अधूरी और व्यर्थ है। उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि तालीम ऐसी होनी चाहिए जो व्यक्ति को केवल आजीविका कमाना न सिखाए, बल्कि जीवन जीना सिखाए। जब तक शिक्षा में मानवीय मूल्य, दया, सत्य और सहिष्णुता शामिल नहीं होंगे, तब तक समाज का वास्तविक विकास संभव नहीं है। राधाकृष्णन के अनुसार, एक शिक्षित व्यक्ति वह नहीं है जिसके पास डिग्रियों का पुलिंदा है, बल्कि वह है जो समाज के कमजोर वर्ग के प्रति संवेदनशील है और अन्याय के खिलाफ खड़ा होने का नैतिक साहस रखता है।आधुनिक युग में राधाकृष्णन के विचारों की प्रासंगिकता और भविष्य की राहआज के सूचना क्रांति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में राधाकृष्णन के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो चुके हैं। तकनीकी कौशल और पेशेवर दक्षता निसंदेह जीवन यापन के लिए जरूरी हैं, लेकिन तकनीक का सही उपयोग वही व्यक्ति कर सकता है जिसके भीतर मानवीय संवेदनाएं जीवित हों। अगर किसी डॉक्टर के पास बड़ी डिग्री है मगर मरीज के प्रति हमदर्दी नहीं, या किसी इंजीनियर के पास ज्ञान है मगर पर्यावरण और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव नहीं, तो ऐसी शिक्षा अंततः विनाशकारी सिद्ध होती है। इसलिए आधुनिक शिक्षा प्रणाली को अब केवल परिणाम-केंद्रित होने के बजाय मूल्य-आधारित बनना होगा। हमें अपनी आने वाली पीढ़ी को यह सिखाना होगा कि डिग्रियां आपको पद दिला सकती हैं, लेकिन इंसानियत ही आपको सच्चा सम्मान और आत्मिक शांति दिला सकती है।
हिंदुस्तान जिंक के शिक्षा संबल कार्यक्रम से 75 सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को नई दिशा
उदयपुर। हिंदुस्तान जिंक के सहयोग से संचालित शिक्षा संबल कार्यक्रम ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को मजबूत करने की दिशा ... Read more
RSS शिक्षा प्रकोष्ठ Vidya Bharati पश्चिम बंगाल के सभी 345 प्रखंडों में खोलेगी स्कूल
कोलकाता, चार सितंबर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शिक्षा प्रकोष्ठ विद्या भारती पश्चिम बंगाल में अपने स्कूल नेटवर्क के बड़े विस्तार की तैयारी कर रही है। संगठन की योजना अगले कुछ वर्षों में राज्य के सभी 345 प्रखंडों में अपने स्कूल खोलने की है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। विद्या भारती के स्कूलों के विस्तार की यह योजना ऐसे समय में सामने आई है, जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हाल में राज्य में कम से कम 1,000 विद्या भारती संस्थान स्थापित करने का आह्वान किया था। इससे बंगाल में संगठन के शैक्षणिक नेटवर्क का विस्तार हो सकता है। विद्या भारती के संयुक्त संगठन सचिव पार्थ घोष के अनुसार, वर्तमान में संगठन राज्य के 150 प्रखंडों में 313 स्कूल संचालित कर रहा है। घोष ने पीटीआई-से कहा, ‘‘हमारी योजना अगले कुछ वर्षों में 150 प्रखंडों से विस्तार करते हुए राज्य के प्रत्येक प्रखंड में कम से कम एक स्कूल स्थापित करने की है।’’विद्या भारती के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि संगठन की अगले एक साल में 50 और प्रखंडों में पहुंच बनाने की योजना है। विद्या भारती के अधिकारी चिरंजीत महतो ने कहा, ‘‘हम पिछले कुछ वर्षों से विस्तार की दिशा में काम कर रहे हैं। अगले एक साल में राज्य के 50 और प्रखंडों में विस्तार करने की हमारी योजना है।’’यह विस्तार ऐसे राजनीतिक समय में हो रहा है, जब राज्य में नव निर्वाचित भाजपा सरकार शिक्षा प्रशासन में बदलाव और शिक्षा में भारतीय संस्कृति तथा राष्ट्रवादी दृष्टिकोण पर अधिक बल देने की बात कर रही है। विद्या भारती इस विस्तार को वर्ष 2027 से पहले एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देख रही है। वर्ष 2027 में संगठन अपनी शैक्षणिक गतिविधियों के 75 वर्ष पूरे करेगा। महतो ने कहा, ‘‘वर्ष 2027 में विद्या भारती स्कूलों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होंगे। इसलिए हमें उम्मीद है कि तब तक हम काफी विस्तार कर चुके होंगे।’’विद्या भारती के स्कूल आमतौर पर संबंधित राज्य बोर्ड या केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के पाठ्यक्रम का पालन करते हैं। साथ ही इनमें संगठन की ओर से भारतीय संस्कृति, मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना पर विशेष जोर दिया जाता है।
अटल आवासीय विद्यालय योजना, जहां मजदूरों के बच्चों को मिलती है मुफ्त शिक्षा
उत्तर प्रदेश सरकार की अटल आवासीय विद्यालय योजना श्रमिक और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों के लिए मुफ्त आवासीय शिक्षा की अहम पहल है. इसके तहत बच्चों को कक्षा 6 से 12 तक पढ़ाई के साथ हॉस्टल, भोजन, यूनिफॉर्म, किताबें और खेल-कूद जैसी सुविधाएं दी जाती हैं.
45 साल पहले जला शिक्षा का दीया, आज 470 बच्चों के भविष्य की रोशनी बना कुमड़ावाद हाईस्कूल
दुष्यंत कुमार | दुमका दुमका मुख्यालय से करीब 17 किलोमीटर दक्षिण मयूराक्षी नदी किनारे बसे कुमड़ावाद गांव में 45 साल पहले जलाई गई शिक्षा की एक छोटी लौ आज सैकड़ों बच्चों का भविष्य रोशन कर रही है। 1981 में जब इलाके में उच्च शिक्षा की सुविधा बेहद सीमित थी, तब ग्रामीणों ने बच्चों के लिए गांव में ही हाईस्कूल खोलने का फैसला किया। आज उच्च विद्यालय, कुमडावाद में करीब 470 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं और 2026 की मैट्रिक परीक्षा में परिणाम 98 प्रतिशत रहा। मयूराक्षी जलाशय परियोजना के कारण विस्थापन झेल चुके इस इलाके में स्कूल की स्थापना ग्रामीणों की सामूहिक पहल की कहानी है। संस्थापक शिक्षक प्रदीप कुमार दत्ता बताते हैं कि उस समय दुमका मुख्यालय के अलावा करीब 20 किलोमीटर के दायरे में कोई हाईस्कूल नहीं था, जिससे आठवीं-नौवीं के बाद ज्यादातर गरीब परिवारों के बच्चों की पढ़ाई रुक जाती थी। शिक्षक प्रदीप कुमार दत्ता 1981 से स्कूल से जुड़े हैं और सेवानिवृत्ति के बाद भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। लंबे समय तक बिना नियमित वेतन के भी उन्होंने पढ़ाना जारी रखा। उनका कहना है, मैंने शिक्षा सेवा को ही अपना सर्वोत्तम धर्म माना है। दो कमरों से शुरुआत, ग्रामीणों ने खुद खड़ा किया भवन 1981 में बिहार सरकार से अनुमति की प्रक्रिया शुरू हुई और स्थानीय सहयोग से स्कूल का संचालन आरंभ हुआ। शुरुआत में अपना भवन नहीं था, तो ग्रामीणों ने श्रमदान और चंदे से दो कमरों का भवन तैयार किया। बाद में गांव के स्वर्गीय गंगाधर महतो ने विद्यालय के लिए जमीन दान की, जिस पर आगे चलकर तीन कमरों का पक्का भवन बना। ग्रामीणों ने प्रबंध समिति बनाकर वर्षों स्कूल की जरूरतों में सहयोग किया। अब प्लस 2 बनाने की जरूरत बढ़ती छात्र संख्या और बेहतर परिणाम के बीच विद्यालय को प्लस 2 स्तर तक अपग्रेड करने की उम्मीद है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि सरकार और प्रशासन का सहयोग, समय पर अनुदान भुगतान और जरूरी सुविधाएं मिलें तो यह स्कूल आसपास के दर्जनों गांवों के लिए इंटरमीडिएट शिक्षा का बड़ा केंद्र बन सकता है। 1981 में दो कमरों से शुरू यह स्कूल आज 470 बच्चों तक पहुंच चुका है, और इसकी रोशनी इंजीनियरिंग, वायुसेना व एसएसबी तक फैल चुकी है।
एनटीए की तर्ज पर स्टेट टेस्टिंग एजेंसी (एसटीए) बनाने का ड्राफ्ट तैयार है। उच्च शिक्षा विभाग की टीम ने एनटीए के दौरे और संबंधित विभागों से सुझाव पर ड्राफ्ट तैयार किया है। यह एजेंसी विश्वविद्यालयों के एंट्रेंस, पीटीईटी, प्री डीएलएड जैसे एंट्रेंस एग्जाम कराएगी। एसटीए की ओर से सीबीटी (कम्प्यूटर बेस्ड टेस्ट) आधारित एग्जाम्स कराए जाएंगे, जिनके लिए जिला मुख्यालयों पर परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे। ये परीक्षाएं कराएगा एसटीए : राजस्थान में हर साल 18 लाख छात्र यूनिवर्सिटीज से लेकर विभिन्न परीक्षाएं देते हैं। ड्राफ्ट के अनुसार विश्वविद्यालयों के यूजी-पीजी के एंट्रेंस टेस्ट, स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट (सेट), रीट, जॉइंट एंट्रेंस टेस्ट (एग्रीकल्चर), फार्मेसी एंट्रेंस टेस्ट (यूजी), पीटीईटी, प्री पीएचडी एग्जाम (अगर लागू हो) के अलावा टेक्निकल और पॉलिटेक्निक कॉलेजों के एंट्रेंस एग्जाम कराए जाएंगे। एनटीए द्वारा परीक्षाओं के संचालन व्यवस्था के अध्ययन के लिए टीम ने एनटीए का दौरा किया है। एसटीए के लिए ड्राफ्ट तैयार हो गया है।--डॉ. मुकेश कुमार शर्मा, संयुक्त सचिव, उच्च शिक्षा विभाग भास्कर एक्सपर्ट - पेपर लीक पर अंकुश लगेगा पीटीईटी, डीएलडी जैसी परीक्षा अलग-अलग यूनिवर्सिटी कराती है। एक एजेंसी एंट्रेंस एग्जाम कराएगी तो पेपर लीक पर अंकुश लगेगा। समय पर परीक्षाएं होंगी और परिणाम जल्दी आएंगे।-प्रो. कैलाश सोढ़ानी, पूर्व वीसी वीएमओयू
शिक्षक दिवस पर आज प्रदेश के 84 उत्कृष्ट शिक्षकों को उनकी नवाचारी कार्यशैली और समर्पण के लिए सम्मानित किया जाएगा। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू यूपी के 3 शिक्षकों को 'राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार' प्रदान करेंगी। वहीं, गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 81 शिक्षकों को राज्य एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार से नवाजेंगे। सम्मान पाने वाले इन शिक्षकों में कोई प्रकृति को ब्लैकबोर्ड बनाकर कला सिखाता है, कोई गणित के मुश्किल सूत्रों को खेल में बदल देता है, तो कोई 63 साल की उम्र में YouTube और बॉटनिकल गार्डन से साइंस को आसान बना रहा है। यह उन गुरुओं के सम्मान का दिन है जिन्होंने शिक्षा को डर नहीं, बल्कि सीखने का आनंद बनाया। पुरस्कार में किसे क्या मिलेगा अब पढ़िए राष्ट्रपति पुरस्कार पाने वाले तीनों शिक्षकों की खूबी– कौशांबी की शिक्षिका शालिनी कुशवाहा खेल के जरिए पढ़ाती हैं कौशांबी के कम्पोजिट विद्यालय रसूलाबाद कोइलहा में कार्यरत शालिनी कुशवाहा को आज राष्ट्रपति के हाथों 'राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026' मिलेगा। 18 अप्रैल 2018 से स्कूल में तैनात शालिनी वर्तमान में अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। अंग्रेजी से एमए करने वाली शालिनी की कक्षा का नियम अलग है। वह कठिन पाठ्यक्रम या गणित के सवालों को कभी 'मुश्किल' नहीं कहतीं, बल्कि आओ, आज नया खेल खेलते हैं कहकर पढ़ाना शुरू करती हैं। भाषा, गणित और FLN (बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान) पर केंद्रित उनके इस तरीके ने लगभग 333 बच्चों के मन से पढ़ाई का डर दूर कर उनमें आत्मविश्वास जगाया है। शालिनी की मां भी शिक्षिका थीं, उन्हीं की प्रेरणा से वो टीचर बनीं। स्कूल के 6 घंटों के अलावा वह रोज घर पर 2 घंटे नई टीचिंग ट्रिक्स तैयार करती हैं। उनका मानना है कि बच्चे उपदेश से नहीं, उदाहरण से सीखते हैं। कहती हैं कि–बच्चों में जैसा बीज बोएंगे, वैसा ही पौधा तैयार होगा। शिक्षक का काम पढ़ाई का डर नहीं, सीखने का आनंद देना है। बलिया के डॉ. इफ्तेखार की अनोखी क्लास: पेड़-पौधों को बनाया ब्लैकबोर्ड बलिया के राजकीय इंटर कॉलेज के कला शिक्षक डॉ. इफ्तेखार खां भी आज राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक–2026 सम्मान ग्रहण करेंगे। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि राज्य स्तर पर प्रदेश भर से चुने गए 12 शिक्षकों का साक्षात्कार हुआ था, जिनमें से केवल तीन का चयन किया गया। इसके बाद कठिन राष्ट्रीय स्तर के इंटरव्यू प्रक्रिया को पार करते हुए उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। डॉ. खां के पढ़ाने का तरीका अनूठा है। वह बच्चों को केवल किताबों या कॉपियों तक सीमित रखने के बजाय प्रकृति से जोड़कर पढ़ाते हैं। विद्यालय परिसर के पेड़-पौधों और आसपास के प्राकृतिक वातावरण को ही वह शिक्षा का माध्यम बनाते हैं। उनकी कार्यशैली 'लर्निंग बाय डूइंग' पर आधारित है। वे पहले किसी भी गतिविधि को खुद करके दिखाते हैं, फिर बच्चों से करवाते हैं। उनकी इस मेहनत का नतीजा है कि उनके कई पढ़ाए छात्र आज IIT, NIT, BHU, जामिया और DU जैसे देश के शीर्ष संस्थानों में पहुंचे हैं और प्रोफेसर व डिजाइनर जैसे पदों पर सफल हैं। पुराने छात्र जब स्कूल आकर नए बच्चों से अनुभव साझा करते हैं, तो इससे उनका मनोबल भी बढ़ता है। शिक्षक के रूप में अपनी जिम्मेदारी को स्कूल तक सीमित न रखते हुए डॉ. खां पिछले 26 वर्षों से हर रविवार अपने आवास पर बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दे रहे हैं। उनका मानना है कि बच्चों की सफलता ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। बॉटनिकल गार्डन और PPT से विज्ञान की पढ़ाई बनाई आसान गाजियाबाद के विजय नगर स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की 63 वर्षीय विज्ञान शिक्षिका डॉ. रेनू त्रिपाठी को भी आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों सम्मानित होंगी। वर्ष 1987 से अपने करियर की शुरुआत करने वाली और करीब 26 वर्षों से शिक्षण क्षेत्र से जुड़ी डॉ. रेनू त्रिपाठी ने 2006 में इस कॉलेज में कार्यभार संभाला था। उन्होंने विज्ञान जैसे कठिन विषय को सरल व प्रयोगात्मक बनाने के लिए स्मार्ट बोर्ड, PPT, टीचिंग-लर्निंग मटीरियल और स्कूल के बॉटनिकल गार्डन का इस्तेमाल किया। पारंपरिक शिक्षण के साथ-साथ खुद को तकनीक से जोड़ते हुए वह इस उम्र में भी YouTube, ऑनलाइन प्रेजेंटेशन और डिजिटल माध्यमों से छात्राओं को पढ़ा रही हैं। इसके अलावा उन्होंने विज्ञान विषय पर 12 किताबें लिखी हैं और कई रिसर्च पेपर भी तैयार किए हैं। जुलाई 2027 में सेवानिवृत्त होने जा रहीं डॉ. रेनू त्रिपाठी शिक्षा को केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि समाज सेवा मानती हैं और रिटायरमेंट के बाद भी गरीब व जरूरतमंद बच्चों को मुफ़्त पढ़ाने का संकल्प रखती हैं। गोरखपुर में 81 शिक्षकों सीएम योगी करेंगे सम्मानित शिक्षक दिवस पर आज सीएम योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित होने वाले भव्य समारोह में प्रदेश के 81 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित करेंगे। इनमें से 76 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार और 5 को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार के लिए चयनितों में बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षक शामिल हैं। इसमें 33 महिला शिक्षिकाएं भी हैं। इस मौके पर माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह भी मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार पाने वाले 5 शिक्षक राज्य पुरस्कार के लिए इन शिक्षकों का चयन
हिमाचल: शिक्षा के सितारों को सलाम, 32 शिक्षकों को आज मिलेगा पुरस्कार, जानें इनकी उपलब्धियां
पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा हासिल करने की ओर बढ़ रहे हिमाचल में कई शिक्षक सरकारी ड्यूटी से आगे बढ़कर शिक्षा की लौ जला रहे हैं।
Sant Kabir Nagar News: परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को दी जाएगी तकनीकी शिक्षा
परिषदीय विद्यालयों में कक्षा-छह से आठ तक डिजिटल लर्निंग अनिवार्य कर दी गई है। इ

