बुलंदशहर में 1 जुलाई से स्कूल चलो अभियान:बेसिक शिक्षा विभाग करेगा अधिक बच्चों का नामांकन
बुलंदशहर में बेसिक शिक्षा विभाग ने नए सत्र के लिए बच्चों के नामांकन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। एक जुलाई से जिलेभर में 'स्कूल चलो अभियान' चलाया जाएगा, जिसके तहत घर-घर संपर्क कर बच्चों का विद्यालयों में प्रवेश सुनिश्चित किया जाएगा। बेसिक शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि जिले में कुल 1862 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें अब तक लगभग दो लाख बच्चों ने नए सत्र में प्रवेश लिया है। विभाग का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है, जिन्होंने किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ दी है या कभी स्कूल नहीं गए। इस अभियान में शिक्षकों, शिक्षा मित्रों, अनुदेशकों, ग्राम प्रधानों, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संगठनों का सहयोग लिया जाएगा। विद्यालयों में रैलियां, जागरूकता कार्यक्रम, अभिभावक बैठकें और विशेष नामांकन अभियान चलाकर अधिक से अधिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ पाठ्यक्रम आधारित गतिविधियों को भी प्रभावी बनाया जाएगा। विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों का समय पर विद्यालयों में नामांकन कराएं और उन्हें नियमित रूप से स्कूल भेजें। संबंधित अधिकारियों और शिक्षकों को स्कूल खोलने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। गौरतलब है कि 16 जून को विद्यालय खुले थे, लेकिन भीषण गर्मी के कारण 24 जून तक के लिए अवकाश घोषित कर दिया गया था।
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत आवेदन मंगवाए
बलरामपुर| अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों से आवेदन मांगे गए हैं। योजना छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग की है। मकसद श्रमिक परिवारों के बच्चों को राज्य के प्रतिष्ठित निजी आवासीय स्कूलों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक गुणवत्तापूर्ण, निःशुल्क शिक्षा देना है। जिला श्रम अधिकारी के मुताबिक आवेदन 22 जून से लिए जा रहे हैं।
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के लिए 3 तक करें आवेदन
बेनूर| श्रम विभाग जिला नारायणपुर द्वारा संचालित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों से 22 जून से 3 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। योजना का लाभ छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों को मिलेगा। चयनित विद्यार्थियों को उत्कृष्ट आवासीय विद्यालयों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निशुल्क शिक्षा, आवास एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। विद्यार्थियों पर होने वाले समस्त निर्धारित व्यय का वहन मंडल कार्यालय रायपुर द्वारा किया जाएगा। विभाग ने पात्र हितग्राहियों से निर्धारित अवधि में आवेदन करने की अपील की है।
युवा, शिक्षा के मुद्दों पर कल कांग्रेस का जन प्रस्तुति कार्यक्रम
दौसा| शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली की विसंगतियों, बढ़ती बेरोजगारी तथा युवाओं और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी दौसा की ओर से 26 जून को जिला स्तरीय जन प्रस्तुति कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम सुबह 10 बजे कांग्रेस कार्यालय, खान भाकरी रोड स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष रामजीलाल ओढ़ करेंगे। इसमें दौसा सांसद मुरारी लाल मीणा, जिला प्रभारी राकेश पारीक, पूर्व मंत्री परसादीलाल मीणा, ममता भूपेश, दौसा विधायक दीनदयाल बैरवा तथा पूर्व विधायक ओमप्रकाश हुड़ला सहित कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता भाग लेंगे।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को बारहखड़ी और 20 तक के पहाड़े, जबकि माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को 25 तक के पहाड़े याद होने चाहिए। इसके साथ ही बच्चों की हिंदी और अंग्रेजी में फ्लूएंट रीडिंग सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। मंत्री ने कहा कि स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं और इसकी नियमित निगरानी हो। मंत्रालय में आयोजित संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों की समीक्षा बैठक में मंत्री ने स्कूलों की साफ-सफाई, मरम्मत, पाठ्यपुस्तक वितरण, गणवेश और साइकिल वितरण जैसे कार्य समय पर पूरा करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों को शासन की सभी सुविधाएं तय समय-सीमा में मिलनी चाहिए। बैठक में स्कूल छोड़ चुके बच्चों को फिर से शिक्षा से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को 31 जुलाई तक विशेष अभियान चलाकर ड्रॉपआउट बच्चों का दोबारा प्रवेश सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जुलाई से VSK ऐप पर उपस्थिति के आधार पर वेतनविभाग ने शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति के लिए VSK ऐप के उपयोग को अनिवार्य करने का फैसला लिया है। हालांकि जून माह की उपस्थिति के आधार पर किसी का वेतन नहीं काटा जाएगा। शिक्षकों और कर्मचारियों को ऐप पर पंजीयन के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। विभाग के अनुसार जुलाई से सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों का VSK ऐप पर पंजीयन अनिवार्य होगा। जुलाई माह का वेतन ऐप में दर्ज उपस्थिति के आधार पर ही जारी किया जाएगा।कार्यालयों में अटैच शिक्षकों की होगी वापसी बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी और विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में संलग्न शिक्षकों को उनके मूल स्कूलों में वापस भेजने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा अधिकारियों को नियमित स्कूल निरीक्षण कर पढ़ाई और व्यवस्थाओं की निगरानी करने को कहा गया। जर्जर भवनों की बनेगी सूची राज्यभर के जर्जर स्कूल भवनों की सूची तैयार कर चरणबद्ध तरीके से उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वहीं भवनविहीन स्कूलों की समीक्षा जिला कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी करेंगे। 2027-28 से 1 अप्रैल से शुरू होगा नया सत्रबैठक में एक बड़ा फैसला लेते हुए तय किया गया कि शैक्षणिक सत्र 2027-28 से प्रदेश के सभी स्कूलों में नया सत्र 1 अप्रैल से शुरू होगा। इसी दिन विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक, गणवेश और साइकिल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। शिक्षा मंत्री का कहना है कि इससे सरकारी स्कूलों में भी निजी स्कूलों की तरह समय पर पढ़ाई शुरू होगी, पाठ्यक्रम समय पर पूरा होगा और परीक्षा परिणामों में सुधार आएगा।
राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ के प्रज्ञा सागर पब्लिक स्कूल में बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से राजगढ़ जिले के स्कूलों में मरम्मत और खरीदी राशि में कथित घोटाले को लेकर सवाल किया गया। मंत्री ने कहा कि सरकार को इन गड़बड़ियों की जानकारी मिली है और पूरे प्रदेश में इसकी जांच कराई जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि अगर राजगढ़ में भी इस तरह की गड़बड़ी सामने आई तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने पूछे सवाल मंत्री बुधवार को नरसिंहगढ़ स्थित प्रज्ञा सागर पब्लिक स्कूल के नए बने भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान पत्रकारों ने उनसे राजगढ़ जिले, खासकर नरसिंहगढ़ ब्लॉक में शिक्षा विभाग के तहत स्कूलों में मरम्मत और खरीदी के लिए जारी राशि में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल किया। इस पर मंत्री ने कहा कि सरकार ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस (भ्रष्टाचार पर कोई छूट नहीं) की नीति पर काम कर रही है। मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा, “हमारे पास इसकी जानकारी आई है। पूरे मध्यप्रदेश में इसकी जांच के आदेश दिए गए हैं। शुरुआती तौर पर जो तथ्य सामने आए हैं, उनकी जांच आईएएस स्तर के अधिकारी से कराई जा रही है। अगर राजगढ़ में भी इस तरह का मामला हुआ है तो किसी भी दोषी व्यक्ति को नहीं बख्शा जाएगा। कानून अपना काम करेगा और जिन लोगों ने कोई घोटाला या गड़बड़ी की है, उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार काम कर रही है और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर ढील नहीं बरती जाएगी। स्कूल के नए भवन का हुआ उद्घाटन बुधवार को प्रज्ञा सागर पब्लिक स्कूल में नए बने भवन के उद्घाटन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें मंत्री राव उदय प्रताप सिंह मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे। कार्यक्रम में राजगढ़ सांसद रोडमल नागर, नरसिंहगढ़ विधायक मोहन शर्मा, स्कूल अध्यक्ष नवरंग धाकड़, डायरेक्टर हरीश मुलानी और अन्य अतिथि भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने पौधे लगाए। स्वागत भाषण नवरंग धाकड़ ने दिया, जबकि हरीश मुलानी ने आभार व्यक्त किया। संचालन पूजा धाकड़ और हर्चिता मुलानी ने किया।
भदोही में जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में हरिहरपुर (सुरियावां) में छात्र-युवा संवाद एवं कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें बड़ी संख्या में छात्र, युवा, कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल हुए। सम्मेलन में शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और संगठन की मजबूती जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। राहुल गांधी के निर्देशन में चलाए जा रहे छात्रों की गूंज अभियान पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोऑर्डिनेटर एवं भदोही प्रभारी दयाशंकर पांडेय ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि देश का युवा आज शिक्षा, रोजगार और अवसरों के संकट से जूझ रहा है। कांग्रेस पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से युवाओं की आवाज बुलंद कर रही है। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी का छात्रों की गूंज अभियान छात्रों और युवाओं की समस्याओं को सीधे सुनने और उन्हें संघर्ष की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास है। पांडेय ने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव और घर-घर जाकर युवाओं को संगठन से जोड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी भदोही के अध्यक्ष वसीम अंसारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा युवाओं, किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए लड़ती रही है। उन्होंने देश में बढ़ती बेरोजगारी, महंगी शिक्षा और सामाजिक असमानता को गंभीर चिंता का विषय बताया। अंसारी ने कार्यकर्ताओं से जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने और संगठन को बूथ स्तर तक सशक्त बनाने का आग्रह किया। कार्यक्रम के संयोजक प्रेम बिहारी उपाध्याय ने सभी अतिथियों, छात्रों, युवाओं और कार्यकर्ताओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि संगठन की वास्तविक ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता होते हैं। प्रेम बिहारी उपाध्याय ने जोर दिया कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही कांग्रेस का जनाधार और मजबूत होगा तथा जनसरोकारों की लड़ाई को नई ऊर्जा मिलेगी।
कांग्रेस पार्टी ने शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा है। देशव्यापी अभियान के तहत उदयपुर देहात और शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने तितरड़ी स्थित कॉलेज परिसर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान कोटा में आयोजित रैली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रस्तुत मूल प्रस्तुति को प्रोजेक्टर के माध्यम से छात्रों को दिखाया गया। ‘देश का युवा शिक्षा और रोजगार के गंभीर संकट से जूझ रहा’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उदयपुर देहात जिला कांग्रेस अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा ने कहा कि देश का युवा शिक्षा और रोजगार के गंभीर संकट से जूझ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक, परीक्षाओं का रद्द होना, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और बढ़ती बेरोजगारी ने करोड़ों युवाओं के भविष्य को अनिश्चित बना दिया है। मीणा ने केंद्र और राज्य सरकार पर इन मुद्दों पर गंभीर न होने का आरोप लगाया। उदयपुर देहात और शहर जिला कांग्रेस सह-प्रभारी डिंपल कुंवर राठौड़ ने अपने संबोधन में कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं और संस्थागत विफलताओं से छात्रों में निराशा और असुरक्षा का माहौल बना है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस पार्टी इन मुद्दों को लेकर राज्यभर में जनजागरण अभियान चला रही है। जिला अध्यक्ष बोले- पेपर लीक से छात्रों के सपने टूट रहे उदयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ ने कहा कि पेपर लीक, परीक्षा कुप्रबंधन, बढ़ती फीस और निजीकरण जैसी समस्याओं से छात्रों के सपने टूट रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों की गूंज केवल एक अभियान नहीं, बल्कि युवाओं के अधिकारों और बेहतर भविष्य के लिए एक जनआंदोलन है। इस कार्यक्रम में पीसीसी उपाध्यक्ष हीरालाल दरांगी, लोकसभा प्रत्याशी ताराचंद मीणा, पूर्व विधायक प्रीति गजेंद्र सिंह शक्तावत, पीसीसी महासचिव पंकज शर्मा, पीसीसी सचिव भीम सिंह चुंडावत सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता और छात्र उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ सरकार की अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को मुफ्त आवासीय शिक्षा दी जाएगी। इस योजना में बच्चों को जिले के अच्छे आवासीय स्कूलों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक पढ़ने का अवसर मिलेगा। योजना के तहत प्रवेश शुल्क, स्कूल फीस, यूनिफॉर्म, किताब-कॉपी, छात्रावास और भोजन सहित पढ़ाई से जुड़े सभी खर्च सरकार वहन करेगी। इसका लाभ उन बच्चों को मिलेगा जिन्होंने कक्षा 5वीं पास कर ली है और उनके माता-पिता निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीकृत हैं।चॉइस सेंटर के माध्यम से आवेदन सहायक श्रमायुक्त देवेन्द्र देवांगन ने बताया कि योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन 22 जून से शुरू हो चुके हैं। इच्छुक श्रमिक 3 जुलाई 2026 तक श्रम विभाग की वेबसाइट या नजदीकी लोक सेवा केंद्र और चॉइस सेंटर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।चयन मेरिट आधार पर होगा चयन बच्चों का चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा। आवेदन के लिए श्रमिक का पंजीयन कार्ड, निवास प्रमाण-पत्र, छात्र का आधार कार्ड, पिछली कक्षा की अंकसूची, अध्ययन प्रमाण-पत्र और स्वघोषणा पत्र जरूरी होंगे। अधिक जानकारी के लिए जिला श्रम कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
टोंक जिले की गलोद संस्कृत विद्यालय की तीन छात्राओं को डीडवाना-कुचामन जिले के 'सुप्रीम फाउंडेशन' जसवंतगढ़ द्वारा सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान इन्हें संस्कृत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिया जाएगा। सम्मान में हर छात्रा को 2100 रुपए और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाएगा। इन होनहार छात्राओं का सम्मान विद्यालय विकास एवं प्रबन्धन समिति (SDMC) के विशेष सहयोग से 30 जून को सुप्रीम फाउंडेशन, जसवंतगढ़ द्वारा आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में किया जाएगा। जिला शिक्षा कार्यालय के आर्यन खंडेलवाल ने बताया कि राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय गलोद की तीन छात्राओं को बोर्ड परीक्षा में संस्कृत विषय में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर सम्मानित किया जाएगा। गलोद के संस्कृत स्कूल की सोफिया (95.60%), आरती प्रजापत (91.20%) और कृष्णा बैरवा (90.40%) ने 90 प्रतिशत से अधिक प्राप्त कर विद्यालय व क्षेत्र का नाम रोशन किया है। विद्यालय के प्रधानाचार्य जगदीश प्रसाद शर्मा,SDMC सचिव आर. पी. मीना, समन्वयक विष्णु शर्मा और स्वयंसेवक योगेश यादव ने भी खुशी जाहिर की है। खंडेलवाल ने बताया कि इनका चयन परिजनों और विद्यालय प्रशासन की ओर से आवेदन करने पर किया है। 31 संस्कृत स्कूलों में चल रहा शिक्षा उन्नयन कार्यक्रम फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य राजकीय स्कूलों में अध्ययनरत छात्र- छात्राओं को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2016 से लाडनूं ,सुजानगढ़ व बीदासर तहसील के समस्त सामान्य शिक्षा के स्कूलों सहित डीडवाना-कुचामन, अजमेर, भीलवाडा, टोंक, नागौर, बीकानेर, झुंझुनू, चुरू, हनुमानगढ़, गंगानगर के राजकीय संस्कृत स्कूलों व राजस्थान के 31 कॉलेजों में शिक्षा उन्नयन का कार्यक्रम चल रहा है। सुप्रीम फाउंडेशन के मुख्य संरक्षक बजरंगलाल तापडिया एवं महावीर प्रसाद तापडिया नें शिक्षा के स्तर को गिरते हुए देखा, तब उन्होंने इसको संबल प्रदान करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम की रूपरेखा बनाकर 11 नवम्बर 2016 को राजस्थान सरकार के साथ अनुबंध कर सरकारी स्कूलों व संस्कृत कॉलेजों में शिक्षा उन्नयन की परियोजना शुरू की, जो फिलहाल चल रही है।
पीलीभीत में आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद, एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राम सिंह राठौर के नेतृत्व में मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह को सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से शिक्षामित्रों ने अपनी समस्याओं के तत्काल निस्तारण और भविष्य को सुरक्षित करने की गुहार लगाई है। शिक्षामित्रों ने बताया कि वे साल 2001 से बेसिक शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, और उन्हें कार्य करते हुए लगभग 26 वर्ष बीत चुके हैं। अब अधिकांश शिक्षामित्र सेवानिवृत्ति की उम्र के करीब पहुँच चुके हैं, लेकिन उनका अध्यापक बनने का सपना आज भी अधूरा है। संगठन ने मांग की है कि जो शिक्षामित्र टीईटी पास नहीं हैं, उन्हें या तो टीईटी से छूट दी जाए अथवा एक विशेष विभागीय टीईटी परीक्षा आयोजित कराकर उन्हें अध्यापक बनाया जाए। वहीं, जो शिक्षामित्र पहले से टीईटी पास हैं, उन्हें शीघ्र ही सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किया जाए। एसोसिएशन का तर्क है कि प्राथमिक विद्यालयों में नियमित अध्यापक और शिक्षामित्र एक ही छत के नीचे समान रूप से शिक्षण कार्य करते हैं, ऐसे में दोनों के बीच सौतेला व्यवहार न्यायसंगत नहीं है। शिक्षामित्रों ने मांग की है कि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत उन्हें केवल मानदेय देने के बजाय पूर्ण वेतनमान दिया जाए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने नियमित अध्यापकों की भांति 12 महीने का वेतन और 62 वर्ष की आयु तक सेवा करने का अवसर दिए जाने की मांग की। शिक्षामित्रों ने सुपर टीईटी परीक्षा में पूर्व की तरह भारांक का लाभ देने और साल भर में अध्यापकों की तरह ही 14 आकस्मिक अवकाश स्वीकृत करने की भी मांग की है। सरकार से न्याय की उम्मीदजिला अध्यक्ष राम सिंह राठौर ने कहा कि वर्तमान शासनकाल में समाज के सभी वर्गों को समान न्याय मिल रहा है, इसलिए उन्हें पूरा विश्वास है कि मुख्यमंत्री शिक्षामित्रों के हित में सकारात्मक निर्णय लेकर उनके भविष्य को सुरक्षित और संरक्षित करेंगे। इस दौरान मुख्य रूप से रवि कुमार, विनय पांडेय, हर प्रसाद राठौर और गिरिजा शंकर सहित बड़ी संख्या में शिक्षामित्र उपस्थित रहे।
हरदा बुधवार को कांग्रेस कार्यालय में नीट (NEET-UG) पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहन साई, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष हेमंत टाले और कांग्रेस प्रवक्ता आदित्य गार्गव ने केंद्र सरकार के काम करने के तरीके की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में पारदर्शिता (साफ-सुथरी व्यवस्था) और विश्वसनीयता सबसे जरूरी होती है, लेकिन लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों के कारण देश के लाखों छात्रों और उनके माता-पिता का भरोसा टूट रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग जिलाध्यक्ष मोहन साई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि दोबारा कराई गई परीक्षा में जिस तरह से वायु सेना की मदद ली गई है, उससे साफ पता चलता है कि केंद्र सरकार का शिक्षा मंत्रालय पूरी तरह से फेल हो चुका है। ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है। करोड़ों रुपये की वसूली और छात्रों की आत्महत्या का आरोप जिला प्रवक्ता आदित्य गार्गव ने आंकड़े सामने रखते हुए बताया कि परीक्षा निरस्त (कैंसिल) होने के चलते देश में अब तक करीब 21 होनहार छात्र-छात्राओं ने डिप्रेशन (अवसाद) में आकर आत्महत्या कर ली है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि साल 2014 से 2016 तक करीब 93 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। फीस का गणित समझाते हुए गार्गव ने बताया कि एक बार की परीक्षा के लिए लगभग 22 लाख छात्रों ने फॉर्म भरे थे। इसमें सामान्य वर्ग से 1700 रुपये, पिछड़े वर्ग से 1600 रुपये और एससी/एसटी वर्ग के छात्रों से 1000 रुपये लिए गए। इस हिसाब से परीक्षा के नाम पर छात्रों से करोड़ों रुपये की वसूली की गई है। 25 जून से कांग्रेस चलाएगी 'गूंज अभियान' जिलाध्यक्ष मोहन साई ने एलान किया कि नीट और अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस और एनएसयूआई (NSUI) मिलकर 25 जून से 9 अगस्त तक पूरे देश में 'गूंज अभियान' चलाएंगे। इस अभियान के तहत कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता जनता के बीच जाएंगे और छात्रों के भविष्य के साथ हुए इस खिलवाड़ को लेकर चौपाल लगाकर चर्चा करेंगे। पूर्व नपा अध्यक्ष बोले- 2029 के चुनाव में युवा देंगे जवाब पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष हेमंत टाले ने कहा कि आज देश का युवा जागरूक हो चुका है और वह शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर सरकार से सीधे जवाब मांग रहा है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि युवाओं के अंदर बढ़ रहा यह गुस्सा आने वाले समय में लोकतांत्रिक तरीके से सामने आएगा और साल 2029 के आम चुनाव में युवा वोटर्स इसका करारा जवाब देंगे।
नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और शिक्षा माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आज नगर निगम टाउन हॉल में छात्र युवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर ने कहा- युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ पर कांग्रेस अब चुप नहीं बैठेगी और सड़क पर उतरकर एक बड़ा आंदोलन खड़ा करेगी। केंद्र सरकार ने देश के युवाओं के सपनों को तार-तार करने का काम किया है। लड़ाई कांग्रेस-भाजपा की नहीं धीरज गुर्जर ने दावा किया, जिस दिन नीट का पेपर लीक हुआ, राहुल गांधी ने उससे दो साल पहले ही सचेत कर दिया था कि सरकार इस गंभीर विषय पर ध्यान दे। लेकिन जब-जब राहुल गांधी ने युवाओं के हक में आवाज उठाई, तब तब भारत सरकार ने उसे नजरअंदाज किया। यह लड़ाई राजनीतिक नफे नुकसान या कांग्रेस भाजपा की नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ी है। शिक्षा व्यवस्था सिलेक्शन की नहीं, रिजेक्शन की व्यवस्था जब कोई युवा सालों तक लगन से पढ़ाई करता है और परिणाम आने से पहले ही पेपर लीक हो जाता है, तो उसके सारे सपने धरे रह जाते हैं। युवाओं का कीमती समय और उम्र बर्बाद हो रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कोटा में दिए बयान को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था अब सिलेक्शन की नहीं, बल्कि रिजेक्शन की व्यवस्था बन चुकी है। जवाबदारी लेने वाला कोई नहीं गुर्जर ने कहा कि पहले रेल हादसों पर जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए मंत्री इस्तीफा दे देते थे, लेकिन आज सरेआम पेपर लीक हो रहे हैं। कोचिंग में हादसे हो रहे और जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस का यह अभियान महज फोटो खिंचाने, नारे लगाने या राजनीति के लिए नहीं है, बल्कि युवाओं के हक के लिए सड़क पर आर-पार की लड़ाई होगी। शिक्षा मंत्री बर्खास्त हों, एनटीए भंग करे सरकार जिला प्रभारी पूर्व शिक्षा मंत्री नसीम अख्तर इंसाफ ने कहा कि नीट पेपर बार-बार लीक हो रहे। इसे रोकने की जिम्मेदारी सरकार की है। छात्रों के हितों पर केंद्र सरकार कुठाराघात कर रही। एनटीए (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) भंग होनी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करना चाहिए। शिक्षा का व्यवसायीकरण रुके, अच्छी और क्वालिटी वाली शिक्षा मिले, इसके लिए अच्छे इंस्टीट्यूट खुलने चाहिए। पूर्व मंत्री नसीम अख्तर ने राहुल गांधी के विजन को समर्थन देने के लिए सबके हाथ खड़े करवाए। उन्होंने सबसे छात्रों व युवाओं के साथ खड़े होने का आह्वान किया। नगर निगम चुनाव में कांग्रेस बोर्ड बनाएगी कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष शिवराम जीपी खटीक ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि आने वाले नगर निगम चुनाव में कांग्रेस बोर्ड बनाएगी।अगले विधानसभा चुनाव में भीलवाड़ा की सीट कांग्रेस की झोली में डालेंगे। युवाओं ने लहराए तिरंगे कार्यक्रम में लोकसभा सचेतक राहुल गांधी के गत दिनों कोटा में छात्र संवाद में दिए संदेश को एलईडी स्क्रीन पर सभी को दिखाया सुनाया गया। युवाओं ने हाथों में तिरंगे लहराए। आयोजन में पूर्व नगर परिषद सभापति मंजू पोखरना, पीसीसी मेंबर मनोज पालीवाल, याकूब मोहम्मद, महिला जिलाध्यक्ष रेखा हिरण सहित कार्यकर्ता एवं छात्र, युवा मौजूद रहे।
ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त के बाद स्कूल खुलने की तैयारियों का जायजा लेने के लिए शिक्षा विभाग की डिप्टी डायरेक्टर अनीता चौधरी बुधवार को उकलाना ब्लॉक पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने गांव कंडूल तथा उकलाना के विभिन्न राजकीय विद्यालयों का औचक निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का गहनता से अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान डिप्टी डायरेक्टर अनीता चौधरी ने स्कूल परिसर की साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था, शौचालयों की स्थिति, भवनों के रखरखाव तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यालय स्टाफ को निर्देश दिए कि नए शैक्षणिक सत्र के आरंभ से पहले सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाएं, ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। अनीता चौधरी ने कहा कि प्रदेशभर में स्कूल खुलने से पूर्व सभी सरकारी विद्यालयों की मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा की जा रही है। निरीक्षण के दौरान अधिकांश व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं, हालांकि कुछ विद्यालयों में कमरों एवं सफाई कर्मियों की कमी का मुद्दा सामने आया है। संबंधित अधिकारियों को इन समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान विद्यालयों के प्राचार्यों एवं शिक्षकों से भी विभिन्न आवश्यकताओं और सुविधाओं से संबंधित मांग पत्र प्राप्त किए गए हैं, जिन पर विभागीय स्तर पर विचार किया जाएगा। उकलाना ब्लॉक के प्रधानाचार्यों संग की मीटिंग इस अवसर पर उकलाना ब्लॉक के स्कूल प्रधानाचार्यों के साथ एक समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में शिक्षकों को आगामी सत्र में शैक्षणिक गुणवत्ता और परीक्षा परिणामों को और बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मेहनत और विद्यार्थियों की लगन के कारण इस वर्ष सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम काफी बेहतर रहा है और आने वाले समय में इसे और ऊंचाई तक ले जाने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए। अभिभावकों से बच्चों का दाखिला कराने की अपील डिप्टी डायरेक्टर ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में करवाएं। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में प्रशिक्षित एवं योग्य शिक्षकों के साथ-साथ बेहतर भवन, आधुनिक सुविधाएं, स्वच्छ वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाई जा रही है। नाममात्र शुल्क में विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी स्कूल मिलकर नए शैक्षणिक सत्र को सफल बनाएंगे और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध करवाएंगे।
आईएमएस बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में सर्जरी के लिए उपयोग होने वाली मशीन की खरीद पर सवा उठ रहा है। इस मामले में शिक्षा मंत्रालय, विजलेंस, रजिस्ट्रार सहित कई जगह शिकायत हुई है। आरोप है कि जिस मशीन को दो अन्य मेडिकल कॉलेज में 60 से 66 लाख में खरीदा, उसे आईएमएस में 3.64 करोड़ में क्यों खरीदा गया।सर्जिकल वर्क के लिए आईएमएस बीएचयू ने टेंडर निकाला था। शिकायतकर्ता ने शिक्षा मंत्रालय को लिखा है पत्र दिल्ली की एक कंपनी के माध्यम से छह मशीनें खरीदी गई हैं। शिकायतकर्ता सत्येंद्र कुमार का आरोप है कि शेर-ए-कश्मीर मेडिकल कॉलेज में ये मशीन 60 लाख और एम्स में यही मशीन 66 लाख रुपये में खरीदी गई है। यही मशीन आईएमएस में 3.64 करोड़ रुपये में खरीदी गई है। आरोप है कि इस तरह छह मशीनें 21.89 करोड़ रुपये में खरीदी गईं। हालांकि जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। आरोप है कि कई विभागों में वित्त मंत्रालय और सीवीसी के आदेशों को दरकिनार कर टेंडर एवं भुगतान कराया गया है। डायरेक्टर बोले- छवि को धूमिल किया जा रहा प्रो. एसएन संखवार ने कहा - आईएमएस की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। जो भी आरोप हैं, वे गलत हैं। जो कंपनी मशीन उपलब्ध कराती है वह लिखकर देती है कि इससे कम में मैंने कहीं मशीन नहीं दी है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने, गुणवत्तापूर्ण और परिणामोन्मुख (Result-oriented) बनाने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू हो गया है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव ( ACS), बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने एक विशेष यूट्यूब लाइव सत्र के माध्यम से प्रदेशभर के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स से सीधा संवाद किया और सरकार की आगामी प्राथमिकताओं को साझा किया।इस संवाद के दौरान उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों (सरकारी स्कूलों) के संचालन, शिक्षकों के कल्याण और छात्र नामांकन को लेकर कई बड़े और ऐतिहासिक फैसलों की घोषणा की गई है।गर्मी के कारण पढ़ाई के नुकसान की भरपाई: अब हर साल 25 जून से खुलेंगे स्कूलअपर मुख्य सचिव ने बताया कि अक्सर अत्यधिक गर्मी और लू के कारण बार-बार स्कूलों की छुट्टियां बढ़ानी पड़ती हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई का भारी नुकसान होता है।220 शिक्षण दिवस का लक्ष्य: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मानदंडों के अनुरूप बच्चों के लिए न्यूनतम 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करना अनिवार्य है।नया नियम: इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब उत्तर प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालय प्रत्येक वर्ष 25 जून से संचालित होंगे (यानी आज से स्कूल खुल चुके हैं)। उन्होंने शिक्षकों से अपील की है कि वे स्कूल आने वाले बच्चों का आत्मीय स्वागत करें और भीषण गर्मी को देखते हुए उनके स्वास्थ्य व सुरक्षा का विशेष प्रबंध करें।1 जुलाई से 'स्कूल चलो अभियान' का दूसरा चरण: ड्रॉपआउट रोकने पर विशेष जोरराज्य में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने और बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले (Dropout) बच्चों की संख्या को शून्य पर लाने के लिए सरकार नई रणनीति अपना रही है:स्थानीय डेटा की मदद: 1 जुलाई से शुरू हो रहे 'स्कूल चलो अभियान' के दूसरे चरण में स्कूल से बाहर (Out of School) रह गए बच्चों की पहचान की जाएगी। इसके लिए आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं के पास उपलब्ध जन्म रिकॉर्ड और स्थानीय सूचनाओं की मदद ली जाएगी।निर्बाध प्रवेश: कक्षा 5 पास करने वाले प्रत्येक छात्र का कक्षा 6 में निर्बाध और अनिवार्य दाखिला सुनिश्चित किया जाएगा। जो बच्चे सीखने में पीछे रह गए हैं, उनके लिए विशेष 'कैच-अप शिक्षण' (Catch-up Classes) संचालित किए जाएंगे।निपुण भारत मिशन का कक्षा 5 तक विस्तार: 6 जुलाई को 'निपुण संकल्प'बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को मजबूत करने वाले 'निपुण भारत मिशन' को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है:दायरा बढ़ा: पहले यह मिशन शुरुआती कक्षाओं के लिए था, लेकिन अब इसका दायरा कक्षा 5 तक बढ़ा दिया गया है। अब कक्षा 5 तक के बच्चों के लिए भाषा, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन (EVS) के स्पष्ट लर्निंग आउटकम (अधिगम लक्ष्य) तय किए गए हैं।शिक्षकों की ट्रेनिंग: इसके लिए राज्य स्तर पर एसआरजी और डायट मेंटर्स का प्रशिक्षण शुरू हो चुका है, जो ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों को ट्रेंड करेंगे। आगामी 6 जुलाई को प्रदेश के सभी जिलों में 'निपुण संकल्प कार्यशाला' का आयोजन होगा, जिसमें पूरे प्रशासनिक और अकादमिक तंत्र को झोंककर 'निपुण जनपद' बनाने का संकल्प लिया जाएगा।'DEAR' अभियान और वर्ष में दो बार मिलेगी होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्टअपर मुख्य सचिव ने स्कूलों में पठन-पाठन का माहौल बेहतर करने के लिए कई नए निर्देश दिए हैं:DEAR अभियान: स्कूलों में ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड’ (DEAR) जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, जहां एक निश्चित समय के लिए सभी काम रोककर सिर्फ किताबें पढ़ने की संस्कृति विकसित की जाएगी।अभिभावक सहभागिता: बच्चों की 'होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्ट' (Holistic Progress Report) को अब और अधिक प्रभावी बनाकर वर्ष में दो बार अभिभावकों (Parents) के साथ अनिवार्य रूप से साझा किया जाएगा ताकि वे भी बच्चे की प्रगति का हिस्सा बन सकें।शिक्षकों के लिए बड़ी सौगात: ₹5 लाख की कैशलेस इलाज सुविधा और 21,000 नई भर्तियांमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शिक्षा विभाग के मानव संसाधन को मजबूत करने और शिक्षकों की सामाजिक सुरक्षा के लिए दो अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं:श्रेणी / योजनामुख्य विवरण और लाभकैशलेस चिकित्सा सुविधासभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और उनके परिवारों को सालाना ₹5 लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा।नगरीय क्षेत्रों में नई भर्तीशहरी क्षेत्रों के स्कूलों में मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए लगभग 11 हजार शिक्षकों और 10 हजार अनुदेशकों की भर्ती प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।मुंशी प्रेमचंद का संदेश: संवाद के अंत में पार्थ सारथी सेन शर्मा ने महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद का उल्लेख करते हुए सभी शिक्षकों से निरंतर अध्ययन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक बेहतर शिक्षक वही है जो खुद हमेशा पढ़ता रहता है। उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षकों की निष्ठा के दम पर उत्तर प्रदेश की बुनियादी शिक्षा पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरेगी।
नई शिक्षा नीति:पढ़ाई छोड़ चुकी बेटियों को वापस स्कूलों से जोड़ेंगे मातृ समूह
बेटियों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित करने और स्कूल से उनका ड्रॉप- आउट रोकने के लिए शिक्षा विभाग इस सत्र से पीएम श्री स्कूलों में नई पहल कर रहा है। इसके तहत स्कूलों में मातृ समूह बनेंगे। इस समूह में शामिल महिलाएं न केवल पढ़ाई छोड़ चुकी छात्राओं को वापस स्कूल से जोड़ेंगी बल्कि उनसे लगातार जुड़ी रहेंगी। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षाधिकारियों को दिशा निर्देश भेजे हैं। निर्देशों के अनुसार प्रदेश की सभी 649 पीएमश्री विद्यालयों में इस बार स्थानीय स्तर पर विशेष 'मातृ समूहों' का गठन किया जाएगा। इसका उद्देश्य माताओं को सीधे स्कूल की गतिविधियों और निर्णयों से जोड़ना भी है, ताकि वे अपनी बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और नियमितता को लेकर जागरूक हो सकें। साथ ही लड़कियों के लिए सीखने का एक सुरक्षित माहौल तैयार किया जा सके। विभाग ने इस पहल को 'आपणी लाडो' गति विधि के साथ जोड़ा है। जिसके तहत प्रवेशोत्सव के दौरान स्कूलों में संवाद सत्र, एसएमसी की साधारण सभा की बैठकें आयोजित की जाएंगी। इस अभियान में पंचायतीराज सदस्यों, सरपंचों, मातृ-समूहों, बुजुर्गों और जनप्रतिनिधियों को एक साथ शामिल किया जाएगा। ताकि बालिका शिक्षा को लेकर जन जागृति पैदा की जा सके। बालिकाओं को प्रोत्साहित करने के लिए स्कूलों में होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक व शैक्षणिक कार्यक्रमों में मंच संचालन का पूरा जिम्मा अब स्कूल की बालिकाओं को ही सौंपा जाएगा। जिससे बेटियों में नेतृत्व क्षमता, आत्म-विश्वास और संवाद कौशल का विकास हो सके। इस दौरान ग्रामीण व स्थानीय स्तर पर उन महिलाओं या बेटियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा, जिन्होंने शिक्षा, करियर या किसी भी अन्य क्षेत्र में कोई बड़ी उपलब्धि हासिल की हो। ताकि वे इन मातृ-समूहों और स्कूल की अन्य बच्चियों के सामने एक रोल मॉडल के रूप में अपनी कहानी साझा कर उन्हें प्रेरित कर सकें। शिक्षा विभाग ने आपणी लाडो और मातृ समूह गतिविधियों के प्रभावी संचालन के लिए हरेक विद्यालय को एक-एक हजार रुपए के बजट का प्रावधान भी रखा है। सबसे ज्यादा स्कूलों वाले जिले में जयपुर के 30, सीकर के 28, भीलवाड़ा के 23, उदयपुर के 22 व झुंझुनूं के 21 स्कूल हैं। जबकि योजना में सबसे कम जैसलमेर में 9, सलूंबर में 8 और डीग जिले के 7 स्कूल शामिल हैं। स्कूल प्रबंधन समिति में भी एक महिला सदस्य जरूरी शिक्षा मंत्रालय की नई गाइडलाइन के अनुसार पीएमश्री विद्यालयों की विद्यालय प्रबंधन समिति में महिलाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना गया है। कमेटी में कम से कम एक महिला सदस्य जरूर होती है। वहीं, स्कूल में पढ़ने वाले प्रत्येक विद्यार्थी की माता अनिवार्य रूप से एसएमसी की साधारण सभा की सदस्य होती हैं। इन सदस्यों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी। प्रत्येक विद्यालय से 6 प्रतिभागी चुने जाएंगे, उनमें कम से कम एक महिला सदस्य का होना अनिवार्य किया गया है।
नई शिक्षा नीति को समझें, छात्र-छात्राओं पर विषय चयन का दबाव न डालें : प्राचार्य
सिटी रिपोर्टर | बोकारो एमजीएम हायर सेकेंड्री स्कूल, सेक्टर-4 एफ में शनिवार को अभिभावक परिचय सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य फादर डॉ. जोशी वर्गीस ने किया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिन्हें अभिभावकों के लिए समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार करें और उनकी रुचि के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता दें। सत्र में विषय विशेषज्ञों ने सीबीएसई की 10वीं बोर्ड परीक्षा में होने वाले बदलावों की जानकारी दी। बताया गया कि वर्ष 2027 से 10वीं बोर्ड परीक्षा वर्ष में दो बार आयोजित होगी। पहला चरण फरवरी-मार्च और दूसरा चरण मई-जून में होगा। दोनों परीक्षाएं पूरे सिलेबस पर आधारित रहेंगी। अंक सुधारने के इच्छुक विद्यार्थी अधिकतम तीन विषयों में दोबारा परीक्षा दे सकेंगे। अंतिम मार्कशीट में दोनों परीक्षाओं में प्राप्त सर्वोत्तम अंक शामिल किए जाएंगे। विशेषज्ञों ने 75 प्रतिशत उपस्थिति की अनिवार्यता, बच्चों के स्वास्थ्य, खान-पान और भावनात्मक विकास पर भी चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता में अभिभावकों और शिक्षकों की समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मौके पर उप प्राचार्य राखी बनर्जी, हेडमिस्ट्रेस सपना जोशी, शिक्षिका ममता कुमारी, संगीता सिंह, चंदा कुमारी सहित बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित थे।
नाराजगी . विधानसभा समिति ने सूचना, सेवा व शिक्षा के अधिकार की समीक्षा की
सिटी रिपोर्टर | बोकारो मंगलवार को सर्किट हाउस के सभागार में झारखंड विधानसभा की प्रत्यायुक्त विधान समिति की बैठक विधायक सह समिति अध्यक्ष सरयू राय की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में सूचना का अधिकार, सेवा की गारंटी और शिक्षा के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर समीक्षा की गई। इसके साथ ही जिले के अस्पतालों की स्थिति, पेयजल सुविधा, कचरा निष्पादन और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कार्यों की भी विस्तृत जानकारी ली गई। बैठक के दौरान समिति के अध्यक्ष सरयू राय ने बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कचरा निस्तारण, सीवरेज ट्रीटमेंट और दामोदर नद के प्रदूषण को लेकर बीएसएल का रवैया सहयोगात्मक नहीं है। बोकारो में प्रदूषण नियंत्रण के विभिन्न मानकों पर सही तरीके से काम नहीं हो रहा है। बोकारो इस्पात संयंत्र ने दामोदर नद में रासायनिक पानी के डिस्चार्ज को शून्य करने का वादा किया था, लेकिन इसके बावजूद गाहे-बगाहे रासायनिक पानी छोड़े जाने की खबरें सामने आती रहती हैं। कागजी दावों और खुले में कचरा फेंकने पर खिंचाई सरयू राय ने कहा कि बीएसएल की विभिन्न सेक्टरों में बंटी एक बड़ी टाउनशिप है, लेकिन इसके सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को लेकर धरातल पर कुछ नहीं किया गया है। हर बार केवल कागजी बातें की जाती हैं। इसके अतिरिक्त, प्रबंधन द्वारा खुले में कचरा फेंककर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ा जा रहा है। बैठक में अन्य उद्योगों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि सुंदरम स्टील प्लांट की शिकायत क्षेत्र भ्रमण के दौरान सही नहीं पाई गई, वहीं बीटीपीएस (बीटीपीएस) ने छाई निस्तारण की समस्या को दूर कर लिया है।
उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा विभाग में कार्यरत हजारों सहायक अध्यापकों के लिए प्रवक्ता पद पर पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है। शासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पदोन्नति संबंधी व्यावहारिक बाधाओं को दूर कर दिया है। अब 09 सितंबर 2025 से पहले नियुक्त सहायक अध्यापक बिना किसी असमंजस के प्रवक्ता पद पर पदोन्नति के पात्र होंगे। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि इस संबंध में शासन ने 18 जून 2026 को एक शासनादेश जारी किया है। दरअसल, माध्यमिक शिक्षा परिषद के प्रस्ताव पर शासन ने 09 सितंबर 2025 को शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अर्हताओं को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के मानकों के अनुरूप करने का निर्णय लिया था। इस नए बदलाव के लागू होने के बाद उन शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएँ उत्पन्न हो गई थीं, जिनकी नियुक्ति उस तिथि से पहले तत्कालीन प्रचलित नियमों के आधार पर हुई थी। शिक्षक लंबे समय से इस असमंजस में थे कि क्या वे नई अर्हताओं के दायरे में आएंगे या नहीं। शासन ने इस समस्या का संज्ञान लिया और अब यह स्पष्ट कर दिया है कि जिन सहायक अध्यापकों की नियुक्ति 09 सितंबर 2025 से पहले हुई है, वे पूर्व में प्रचलित व्यवस्था के तहत ही पदोन्नति पाने के लिए पूरी तरह अर्ह (Eligible) माने जाएंगे। इस निर्णय से प्रदेश के हजारों शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित हो गया है, जो पात्रता संबंधी नियमों के कारण पदोन्नति की प्रक्रिया से बाहर होने की आशंका जता रहे थे। परिषद ने इस आशय की सूचना सभी संबंधित अधिकारियों, जिला विद्यालय निरीक्षकों और मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को भेज दी है, ताकि पदोन्नति की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके।
मंदसौर जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में युवक कांग्रेस और एनएसयूआई 25 जून से 9 अगस्त तक जिले में 'छात्रों की गूंज' अभियान चलाएगी। यह अभियान नीट पेपर लीक प्रकरण और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर होगा। इस दौरान शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, पेपर लीक माफिया से संबंधों की निष्पक्ष जांच और परीक्षा एवं भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग उठाई जाएगी। यह जानकारी मंगलवार देर शाम जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्रसिंह गुर्जर ने दी। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर देशभर में यह अभियान चलाया जा रहा है। हाल ही में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कोटा में छात्रों से संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना था। जिलाध्यक्ष बोले- छात्रों पर मानसिक बोझ डालाजिला अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव छात्रों पर मानसिक और आर्थिक बोझ डाल रहा है। कई विद्यार्थी परीक्षा में असफलता के भय और तनाव के कारण मानसिक परेशानियों से गुजर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में परिवारों का भारी आर्थिक खर्च हो रहा है। कोचिंग, हॉस्टल, भोजन और अध्ययन सामग्री पर होने वाला व्यय आम परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। महेंद्र गुर्जर ने कहा कि नीट की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों पर होने वाला निजी खर्च लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपए है, जबकि केंद्र सरकार का शिक्षा बजट करीब 1.4 लाख करोड़ रुपए है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे 'वसूली तंत्र' का रूप लेती जा रही है। आत्महत्या, रोजगार संकट जैसे मुद्दों को भी उठायाकांग्रेस नेताओं ने पेपर लीक, पुनर्मूल्यांकन संबंधी समस्याएं, बढ़ती छात्र आत्महत्याएं और रोजगार संकट जैसे मुद्दों को भी उठाया। अभियान के दौरान छात्र संवाद, जनसंपर्क अभियान, सोशल मीडिया गतिविधियां, सार्वजनिक प्रस्तुतियां और प्रेस वार्ताओं का आयोजन किया जाएगा। पत्रकार वार्ता में संगठन महासचिव अजय लोढ़ा ने कहा कि अभियान के माध्यम से छात्रों और अभिभावकों से सुझाव भी आमंत्रित किए जाएंगे। साथ ही ऐसी शिक्षा व्यवस्था की मांग उठाई जाएगी जो युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का अवसर प्रदान करे तथा कम लागत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराए। शहर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष इष्टा भाचावत ने भी शिक्षा पर बढ़ते निजी खर्च का मुद्दा उठाते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता बताई। इस दौरान जिला युवक कांग्रेस अध्यक्ष दुर्गेश पटेल, कांग्रेस नेता प्रवीण मांगरिया, शहर ब्लॉक युवक कांग्रेस अध्यक्ष सम्यक जैन सहित अन्य कांग्रेस पदाधिकारी उपस्थित रहे।
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की शिक्षा प्रणाली के आधुनिकीकरण को आगे बढ़ाते हुए, भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी) से जुड़े स्कूलों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली में शामिल करने की प्रक्रिया में तेजी ला रही है। इसके लिए यूडीआईएसई+ (शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली) कोड आवंटित किए जा रहे हैं और स्कूलों की श्रेणियों को अपग्रेड किया जा रहा है।
चंदौली जिला मुख्यालय पर मंगलवार को कांग्रेस की जिला और शहर कमेटी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बैठक हुई। जिलाध्यक्ष अरुण द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक का मुद्दा उठाया गया। कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि 3 मई 2026 को आयोजित नीट परीक्षा में बड़े पैमाने पर प्रश्न पत्र लीक हुए थे। इस परीक्षा में 22 लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल हुए थे। सोशल मीडिया के माध्यम से यह खबर पूरे देश में सार्वजनिक होने के बाद केंद्र सरकार को दबाव में आकर परीक्षा रद्द करनी पड़ी और दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लेना पड़ा। जिलाध्यक्ष अरुण द्विवेदी ने कहा कि वर्ष 2018 से 2026 के बीच कई बार नीट परीक्षा में गड़बड़ियां और पेपर लीक हुए हैं। इससे पहले 2015 में एआईपीएमटी (वर्तमान में नीट) का पेपर भी लीक हो चुका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नीट के अलावा सीबीएसई की उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन में गड़बड़ियों, लेखपाल भर्ती परीक्षा, यूपी एसआई, आरओ-एआरओ भर्ती परीक्षा, एसएससी जीडी भर्ती परीक्षा और सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा जैसी कई प्रतियोगी परीक्षाएं भी पेपर लीक के कारण भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई हैं। कहा कि नीट पेपर लीक से पैदा हुए मानसिक तनाव के कारण देश के विभिन्न राज्यों से अब तक 12 छात्रों ने अपनी जान गंवाई है। कांग्रेस पार्टी इसे आत्महत्या नहीं, बल्कि सरकार उत्प्रेरित हत्या मानती है। दावा किया कि नीट पेपर लीक के बाद कांग्रेस द्वारा आवाज उठाने और सड़कों पर संघर्ष करने के चलते ही सरकार को पुनः परीक्षा करानी पड़ी। बताया कि पिछले 12 वर्षों में 23 प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं, लेकिन दोषियों को सजा मिलने के मामले न के बराबर हैं। इस त्रासदी के बावजूद केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे न देने पर सवाल उठाया। इस बैठक में नगर अध्यक्ष बृजेश गुप्ता, मधु राय, दयाराम पटेल, मुनीर खान, माधवेंद्र मूर्ति ओझा, शिवेंद्र मिश्रा, मो. आजम, अमरदेव राम, मदन लाल, ज्ञानप्रकाश तिवारी और संतोष चौबे सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
गाजीपुर में कांग्रेस ने NEET और अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। मंगलवार को सकलेनाबाद कैंप कार्यालय में एक प्रेस वार्ता के दौरान जिलाध्यक्ष सुनील राम और शहर अध्यक्ष संदीप विश्वकर्मा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। जिलाध्यक्ष सुनील राम ने आरोप लगाया कि 2015 में AIPMT का पेपर लीक हुआ था, और उसके बाद 2018, 2021, 2022, 2024 तथा 2026 में NEET परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियां सामने आईं। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद होना चाहिए। राम ने NEET पेपर लीक के मानसिक तनाव से 12 छात्रों की मौत का जिक्र करते हुए इसे सरकार की गलत नीतियों से प्रेरित 'हत्या' करार दिया। उन्होंने मांग की कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा दें। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के सड़क पर उतरने के बाद ही सरकार को परीक्षा दोबारा कराने के लिए मजबूर होना पड़ा। सुनील राम ने केंद्र सरकार पर शिक्षा बजट आधा करने का भी आरोप लगाया, जिससे गरीब छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। शहर अध्यक्ष संदीप विश्वकर्मा ने कहा कि पिछले 12 सालों में 23 राष्ट्रीय परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं और 90 से ज्यादा मामले सामने आए, लेकिन किसी को सजा नहीं मिली। उन्होंने इसे सरकार की नाकामी बताया। विश्वकर्मा ने इस दौरान लखनऊ अग्निकांड में मारे गए छात्रों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि देश में शिक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा बजट में कटौती से गरीब छात्रों का भविष्य अंधकार में है। प्रेस वार्ता में प्रमुख रूप से अजय कुमार श्रीवास्तव, चंद्रिका सिंह, हामिद अली, गुलबास यादव, वीरेंद्र यादव और आलोक जी सहित कांग्रेस के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
राहुल गांधी के ‘शिक्षा न्याय संवाद अभियान’ के तहत मंगलवार को झालावाड़ के गांधी भवन स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं ने महंगी होती शिक्षा, शिक्षा ऋण का बढ़ता बोझ, युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताएं और कोचिंग संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार से इन समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशीलता के साथ ठोस कदम उठाने की मांग की। कोटा में राहुल गांधी के संवाद का किया उल्लेख जिला कांग्रेस अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह गुर्जर ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कोटा में राहुल गांधी द्वारा छात्रों से किए गए संवाद का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देशभर के छात्र आज कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जिन पर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। इस दौरान इन मुद्दों पर आधारित एक प्रस्तुतिकरण भी प्रोजेक्टर के माध्यम से दिखाया गया। महंगी शिक्षा और शिक्षा ऋण पर जताई चिंता गुर्जर ने कहा कि शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है, जिससे छात्रों और उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। वहीं शिक्षा ऋण का बोझ भी युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण और सस्ती शिक्षा हर छात्र का अधिकार है। बेरोजगारी और परीक्षा अनियमितताओं का मुद्दा कार्यक्रम में युवाओं के सामने रोजगार के सीमित अवसरों और प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आ रही अनियमितताओं पर भी चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि परीक्षाओं में गड़बड़ियों के कारण युवाओं का विश्वास कमजोर हो रहा है और उनमें निराशा बढ़ रही है। छात्र आत्महत्याओं को बताया गंभीर चिंता कांग्रेस नेताओं ने कोचिंग हब सहित देशभर में छात्रों की आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को गंभीर चिंता का विषय बताया। उनका कहना था कि बढ़ते मानसिक तनाव और प्रतिस्पर्धा के दबाव के कारण कई छात्र मानसिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में छात्रों के लिए बेहतर परामर्श और सहयोग तंत्र विकसित करने की जरूरत है। युवाओं के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने का दावा वीरेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि राहुल गांधी लगातार युवाओं और छात्रों के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी शिक्षा में समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण एवं सस्ती शिक्षा, रोजगार सृजन और युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष जारी रखेगी। ये रहे मौजूद कार्यक्रम में विधायक सुरेश गुर्जर, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष रघुराज सिंह हाड़ा, वरिष्ठ नेता रामलाल चौहान, देवकीनंदन वर्मा, मोहम्मद सिद्दीक गोरी, संगठन सचिव राजेंद्र शर्मा, ब्लॉक अध्यक्ष पूरीलाल दांगी, रोड सिंह परमार, नरेंद्र सिंह, इम्तियाज हुसैन, सेवादल अध्यक्ष डॉ. नंद सिंह राठौड़, महिला कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा शर्मा, अंबेश मीणा, ओम पाठक, विष्णु दांगी सहित युवक कांग्रेस और एनएसयूआई के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
बिहार के प्रशासनिक और शैक्षणिक गलियारों से इस वक्त की एक बेहद बड़ी, सनसनीखेज और सुधारवादी खबर सामने आ रही है। राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त करने और भ्रष्टाचार व लापरवाही के खिलाफ जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति अपनाते हुए बिहार के शिक्षा मंत्री ने एक बहुत बड़ा और कड़क एक्शन लिया है। विभाग में लंबे समय से चल रही अनियमिताओं और कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोपों में कुल छह बड़े शिक्षा अधिकारियों पर एक साथ गाज गिरी है। इस बड़ी कार्रवाई के तहत एक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है, जबकि अन्य दागी और लापरवाह अधिकारियों की सीधे नौकरी से बर्खास्तगी (Dismissal) के लिए सक्षम प्राधिकार को कड़ी सिफारिश भेज दी गई है। एक वरिष्ठ प्रशासनिक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो इस ऐतिहासिक कार्रवाई ने पूरे सूबे के शिक्षा महकमे में हड़कंप मचा दिया है और कामचोर कर्मचारियों के हौसले पूरी तरह पस्त हो गए हैं।औचक निरीक्षण में खुली पोल: गायब मिले साहब और फाइलों में मिली भारी गड़बड़ीइस पूरे हाई-प्रोफाइल प्रशासनिक एक्शन की इनसाइड स्टोरी को समझें तो शिक्षा मंत्री के निर्देश पर विभाग की उच्च स्तरीय टीमों ने राज्य के विभिन्न जिलों और प्रखंडों (ब्लॉक्स) के शिक्षा कार्यालयों और सरकारी स्कूलों का अचानक औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) किया था। इस विशेष चेकिंग अभियान के दौरान कई चौंकाने वाली हकीकतें सामने आईं। जांच टीम को पता चला कि कई अधिकारी बिना किसी पूर्व सूचना या आधिकारिक छुट्टी के अपने दफ्तरों से गायब थे, जिससे आम जनता और शिक्षकों के जरूरी काम हफ्तों से लटके पड़े थे। इसके अतिरिक्त, जब कार्यालयों के वित्तीय रिकॉर्ड, छात्रवृत्ति वितरण और मिड-डे मील से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलों को खंगाला गया, तो उनमें व्यापक स्तर पर वित्तीय अनियमितताएं और गंभीर कमियां पाई गईं। इसी पुख्ता जांच रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा मंत्री ने सीधे एक्शन की फाइल पर अपनी मुहर लगा दी।एक बीईओ तत्काल प्रभाव से निलंबित, बाकी अधिकारियों को नौकरी से हटाने की पुरजोर तैयारीशिक्षा विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, कर्तव्य में लापरवाही बरतने, वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने और अपने कार्यक्षेत्र में लगातार अनुपस्थित रहने के ठोस सबूत मिलने पर संबंधित ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) को तुरंत सस्पेंड कर विभागीय मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनके खिलाफ विस्तृत विभागीय जांच (Departmental Inquiry) भी चलाई जाएगी। वहीं, अन्य पांच अधिकारियों का मामला इससे भी अधिक गंभीर पाया गया है। इन अधिकारियों पर सरकारी धन के दुरुपयोग, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और लंबे समय से बिना किसी वैध कारण के ड्यूटी से नदारद रहने (Long Absenteeism) के संगीन आरोप सिद्ध हुए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा मंत्री ने इन्हें सेवा से पूरी तरह बर्खास्त करने की अंतिम सिफारिश सामान्य प्रशासन विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दी है।बिहार की भौगोलिक और सुदूर ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की बड़ी कवायदभौगोलिक और स्थानीय (Geographical Optimization) दृष्टिकोण से देखा जाए तो बिहार के सुदूर ग्रामीण इलाकों जैसे उत्तर बिहार और सीमांचल के जिलों में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। प्रखंड स्तर के अधिकारियों (BEO) और जिला शिक्षा कार्यालयों की सुस्ती के कारण पटना मुख्यालय से जारी होने वाली जनकल्याणकारी योजनाएं धरातल पर सही समय से नहीं पहुंच पाती हैं। शिक्षा मंत्री की इस कड़क कार्रवाई का सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों पर पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर इस कड़े संदेश से यह साफ हो गया है कि अब पटना से दूर बैठे अधिकारी भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों (DM) को भी निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में शिक्षा विभाग के कार्यों की नियमित समीक्षा करें और गड़बड़ी मिलने पर तुरंत रिपोर्ट भेजें।आधुनिक एआई सर्च और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिहाज से क्यों महत्वपूर्ण है यह कदमआधुनिक जेनेरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च) और डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स के लिहाज से 'Bihar Education Department Action' इस वक्त इंटरनेट पर तेजी से सर्च किया जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार राज्य में सुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर लगातार कड़े कदम उठा रही है। शिक्षा मंत्री के इस हालिया फैसले को राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के स्तर को सुधारने और शिक्षकों व अधिकारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के एक बड़े अभियान के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षाविदों और आम जनता ने सरकार के इस साहसिक कदम का स्वागत किया है। अब देखना यह होगा कि इस कड़े हंटर के बाद बिहार की चरमराई शिक्षा व्यवस्था की रफ्तार में कितना बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को दहशतगर्तों की B टीम बताया। NDTV को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा- जिन्हें डेमोक्रेसी में रिजेक्ट कर दिया गया था, वे भेष बदलकर आए हैं और अब सिस्टम के पीछे पड़े हैं। वे उन लोगों के लिए नारे लगाते हैं जो देश को बांटना चाहते हैं। उनकी पहचान हो गई है। दरअसल, सोशल मीडिया संगठन CJP पिछले 4 दिन से दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहा है। फाउंडर अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। प्रधान के इंटरव्यू की खास बातें… राहुल ने कहा- शिक्षा व्यवस्था आज वसूली तंत्र बना राहुल गांधी ने 17 जून को कोटा में स्टूडेंट्स के साथ एक रैली की थी। सुसाइड करने वाले स्टूडेंट्स की फोटो भी मंच पर लगाई गई थी। इस दौरान उन्होंने कहा था- भारत की शिक्षा व्यवस्था वसूली तंत्र बन गई है। देश का एजुकेशन सिस्टम युवाओं के सपने पूरे नहीं करता, सिर्फ उन्हें ऑप्शन देता है। आज लाखों युवा कह रहे हैं - इस व्यवस्था ने हमारे साथ अन्याय किया है। नीट पेपर लीक में अब तक 13 गिरफ्तारी 3 मई 2026 को नीट-यूजी का पेपर हुआ था। कुछ दिन पेपर के लीक होने का मामला सामने आया था। इसके बाद देशभर में विवाद खड़ा हो गया था। कई राज्यों में अभ्यर्थियों और विपक्षी दलों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। सरकार ने 12 मई को मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई ने इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें डॉक्टर, कोचिंग संस्थानों के शिक्षक, स्कूल प्रधानाचार्य और अन्य आरोपी शामिल हैं। --------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… NEET री-एग्जाम; AIIMS से PMCH तक के छात्र सॉल्वर बने, 15-20 लाख में MP-UP समेत 6 राज्यों से मेडिकल स्टूडेंट हायर किए AIIMS, PMCH और गया मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों से MBBS की पढ़ाई कर रहे छात्र बिहार के लखीसराय में फर्जी परीक्षार्थी के रूप में पकड़े गए। जालसाजों ने 40 लाख रुपए में डॉक्टर बनाने का ठेका लिया था। इसका काम असली परीक्षार्थी की जगह फर्जी परीक्षार्थी बैठाना है। पूरी खबर पढ़ें…
स्कूल शिक्षा विभाग की ऑनलाइन स्वैच्छिक तबादला नीति शिक्षकों के लिए राहत के बजाय परेशानी बनती जा रही है। तबादला पोर्टल में कई तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही हैं, जिससे हजारों शिक्षक आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी पति-पत्नी के आधार पर तबादला चाहने वाले शिक्षकों को हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि तबादला नीति में कहीं भी मैरिज सर्टिफिकेट अनिवार्य नहीं बताया गया था। इसके बावजूद पोर्टल पर विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र अपलोड करने की शर्त आ रही है। कई शिक्षकों के पास यह दस्तावेज नहीं है, क्योंकि इसकी पहले कभी जरूरत नहीं पड़ी। आवेदन की अंतिम तारीख 24 जून होने से उनकी चिंता और बढ़ गई है। पहले से ही कई शिक्षक बाहर हो चुके शासकीय शिक्षक संगठन का कहना है कि 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता, जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षकों पर रोक और तीन साल की सेवा अवधि जैसी शर्तों के कारण पहले ही बड़ी संख्या में शिक्षक तबादला प्रक्रिया से बाहर हो चुके हैं। अब पोर्टल की तकनीकी समस्याओं ने बाकी शिक्षकों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। 6 पॉइंट्स में समझिए टीचर्स की प्रमुख दिक्कतें म्युचुअल ट्रांसफर में आ रही तकनीकी दिक्कत रामप्रकाश सिंह और उनकी पत्नी दोनों सरकारी कर्मचारी हैं। वे पति-पत्नी आधार पर तबादला चाहते हैं, लेकिन पोर्टल पर मैरिज सर्टिफिकेट मांगा जा रहा है। उनका कहना है कि सर्विस बुक में पति-पत्नी की पूरी जानकारी दर्ज रहती है, फिर अलग से विवाह प्रमाण पत्र मांगने का औचित्य क्या है। जबलपुर के प्राथमिक शिक्षक दीपक शरणागत पारस्परिक तबादला (म्यूचुअल ट्रांसफर) करना चाहते हैं। लेकिन, जिन शिक्षक के साथ वे तबादला करना चाहते हैं, उनका नाम पोर्टल पर नहीं आ रहा। इससे उनका आवेदन पूरा नहीं हो पा रहा है। आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने मांग की है कि पोर्टल की तकनीकी खामियां तुरंत दूर की जाएं। साथ ही आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाई जाए, ताकि सभी पात्र शिक्षकों को आवेदन का अवसर मिल सके। संगठन का कहना है कि समस्याएं समय पर नहीं सुलझीं तो बड़ी संख्या में शिक्षक तबादला प्रक्रिया से बाहर रह जाएंगे। ……………………………………. ये खबर भी पढ़ें… MP में मिनिस्टर के बंगले पर ट्रांसफर डील, SDO के 15, नर्स के 5 लाख फिक्स मध्य प्रदेश में हाल ही में हुए प्रशासनिक तबादलों में कई विसंगतियां सामने आई हैं। ट्रांसफर-पोस्टिंग में नियमों की अनदेखी का खुलासा दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन में भी हुआ था। स्टिंग में ट्रांसफर के बदले रिश्वत मांगते बाबू कैमरे में कैद हुए थे। भोपाल में 24 पटवारियों ने भी अपने तबादला आदेश निरस्त करवा लिए। नगरीय विकास एवं आवास विभाग में भी ऐसे अधिकारियों के ट्रांसफर कर दिए गए, जो कोर्ट से स्टे लेकर बैठे थे। एक सब-इंजीनियर का दो जगह तबादला कर दिया गया और रिटायरमेंट में दो महीने बचे अधिकारी को भी ट्रांसफर लिस्ट में शामिल किया गया। पूरी खबर पढ़ें…
शिक्षा का महाउत्सव: CM भूपेंद्र पटेल ने PM मोदी के वडनगर स्कूल से किया शाला प्रवेशोत्सव का शुभारंभ
गुजरात में शिक्षा के प्रति जागरूकता लाने और बच्चों का स्वागत करने के लिए 'कन्या केलवणी महोत्सव और शाला प्रवेशोत्सव' के 24वें संस्करण का आज (23 जून) से उत्साहपूर्वक शुभारंभ हो गया है। वर्ष 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र ...
सहरसा विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता उर्फ आईपी गुप्ता ने सोमवार देर शाम वीडियो जारी कर बताया कि उन्होंने बिहार विधानसभा की याचिका समिति की बैठक में भाग लिया। बैठक में पांच महत्वपूर्ण विभागों की समीक्षा की गई, जिसमें सहरसा जिले के विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों को उठाया गया। विधायक ने बताया कि बैठक में उठाए गए मामलों पर विभागीय स्तर से सकारात्मक पहल का आश्वासन मिला है। उन्होंने कहा कि सहरसा के विकास को लेकर विभिन्न योजनाओं और लंबित मुद्दों को प्राथमिकता के साथ रखा गया। हर पंचायत में खेल मैदान निर्माण की पहल विधायक ने बताया कि खेल विभाग की समीक्षा प्रधान सचिव की अनुपस्थिति के कारण नहीं हो सकी। इसके बावजूद सहरसा जिले की प्रत्येक पंचायत में खेल मैदान निर्माण की दिशा में पहल की गई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाएं विकसित होने से युवाओं को बेहतर अवसर मिलेंगे। सहरसा को परिवहन प्रमंडल बनाने की मांग परिवहन विभाग की समीक्षा के दौरान विधायक ने सहरसा को पूर्णिया के स्थान पर अलग परिवहन प्रमंडल बनाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सहरसा को परिवहन प्रमंडल का दर्जा मिलने से कोसी क्षेत्र के लोगों को काफी सुविधा होगी। समिति के माध्यम से इस प्रस्ताव को विभाग को भेजने पर सहमति बनी है। इसके अलावा वर्तमान बस अड्डे के स्थानांतरण और आधुनिक बस टर्मिनल निर्माण का प्रस्ताव भी रखा गया। साथ ही राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने की मांग की गई। पीएम आवास योजना की राशि जल्द मिलने का दावा नगर विकास एवं आवास विभाग की समीक्षा में विधायक ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सहरसा के लिए राशि आवंटन को लेकर आश्वासन मिला है। उन्होंने कहा कि अगले चार से पांच दिनों में राशि उपलब्ध कराई जा सकती है। वहीं बुडको और नगर निगम में एक-एक सहायक अभियंता की तैनाती एक से दो माह के अंदर किए जाने की बात कही गई। वेंडिंग जोन के लिए भी जल्द राशि आवंटित करने का आश्वासन मिला है। स्टॉर्म ड्रेनेज परियोजना और सैटेलाइट टाउनशिप पर चर्चा विधायक ने बताया कि 137 करोड़ रुपये की लागत वाली स्टॉर्म ड्रेनेज परियोजना से जुड़े मामले में कोर्ट से एक से दो माह के अंदर टेंडर निरस्तीकरण संबंधी आदेश प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा सैटेलाइट टाउनशिप के मास्टर प्लान पर भी चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि इससे प्रभावित किसान अपनी जमीन केवल बिहार राज्य आवास बोर्ड को ही बेच सकेंगे। कृषि क्षेत्र में बाजार समिति और ग्रामीण हाट की मांग कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान विधायक ने सहरसा को बाजार समिति निर्माण योजना में शामिल करने की मांग उठाई। इस पर विभाग की ओर से सकारात्मक पहल का भरोसा दिया गया। उन्होंने मुंडन भारती कृषि महाविद्यालय को विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने और जिले में ग्रामीण हाट विकसित करने की बात भी रखी। शिक्षा व्यवस्था सुधार को लेकर रखे प्रस्ताव शिक्षा विभाग की बैठक में विधायक ने बस्ती स्थित उर्दू मध्य विद्यालय को पीएम श्री योजना के तहत अपग्रेड करने का मुद्दा उठाया। इसके अलावा नीट और जेईई मेन्स जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के परीक्षा केंद्र पूर्णिया के बजाय सहरसा में स्थापित करने की मांग भी रखी गई। विधायक ने कहा कि समिति की बैठक में सहरसा के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को मजबूती से रखा गया है और आने वाले समय में इन योजनाओं को धरातल पर उतारने का प्रयास किया जाएगा।
सीटी यूनिवर्सिटी में 30 से अधिक देशों के छात्रों व विशेषज्ञों ने साझा किए वैश्विक शिक्षा के अनुभव
भास्कर न्यूज़ | लुधियाना सीटी यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय मामलों के विभाग ने प्रथम यूनाइटेड वर्ल्ड एजुकेशन कॉन्क्लेव (UWEC) 2026 का सफल आयोजन किया। इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में शिक्षा, उद्योग और सरकारी क्षेत्र से जुड़े विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कॉन्क्लेव का उद्देश्य शिक्षा, कौशल विकास और वैश्विक कार्यबल की तैयारी को लेकर सहयोग, नवाचार और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में 30 से अधिक देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 300 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा प्रणालियों, उभरते औद्योगिक रुझानों, करियर अवसरों और वैश्विक शिक्षण अनुभवों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला। कॉन्क्लेव में जिम्बाब्वे उच्चायोग की मंत्री काउंसलर सोफिया होप तफाद्जवा चिम्बा, तृतीय सचिव निक्सन चिरेका, लेसोथो उच्चायोग के प्रथम सचिव बोहलोएकी त्लहाकु मोरोजेले, सिग्नेट इंस्टीट्यूट ऑस्ट्रेलिया की सीईओ नवदीप कौर रूपन, प्रबंध निदेशक पुष्पिंदर सिंह, बोर्ड निदेशक माइकल कैर तथा उद्योग विशेषज्ञ स्टीफन होहमैन सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम की शुरुआत सीटी यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. नितिन टंडन के उद्घाटन संबोधन से हुई। उन्होंने छात्रों को वैश्विक स्तर की चुनौतियों के लिए तैयार करने में अंतरराष्ट्रीय अनुभव, उद्योग-अकादमिक सहयोग और रोजगारोन्मुखी शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। इस अवसर पर चांसलर सरदार चरणजीत सिंह चन्नी, प्रो-चांसलर डॉ. मनबीर सिंह, वाइस चेयरमैन हरप्रीत सिंह, कुलपति डॉ. नितिन टंडन, रजिस्ट्रार संजय खंडूरी और डीएसडब्ल्यू निदेशक इंजीनियर दविंदर सिंह भी उपस्थित रहे। चांसलर सरदार चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि यूनाइटेड वर्ल्ड एजुकेशन कॉन्क्लेव, सीटी यूनिवर्सिटी की वैश्विक स्तर पर जुड़े शिक्षण वातावरण के निर्माण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वहीं, प्रो-चांसलर डॉ. मनबीर सिंह ने कहा कि आज शिक्षा राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़ चुकी है और ऐसे मंच छात्रों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं तथा उद्योग जगत को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर मिलकर काम करने का अवसर प्रदान करते हैं।
जिले के 86 निजी स्कूलों पर शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत गरीब बच्चों को मुफ्त दाखिला नहीं देने पर बड़ी कार्रवाई होने जा रही है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर के अति-आवश्यक आदेश के बाद पूरे जिले के शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है। दरअसल, इन स्कूलों ने चालाकी दिखाते हुए अपने यहां शुरुआती कक्षाओं में आरटीई के तहत होने वाले दाखिलों को शून्य (0) दिखाया था। इन्हें लगा था कि सरकार से फीस का पैसा (पुनर्भरण राशि) मिलने में देरी होती है। जांच में सामने आया कि इन्हीं स्कूलों ने उसी दौरान मोटी फीस लेकर दूसरे बच्चों को धड़ल्ले से एडमिशन दिए। यानी पैसे वाले बच्चों के लिए सीटें थीं, लेकिन गरीबों के लिए दाखिला बंद कर दिया गया। पूरा मामला हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (उज्ज्वल शर्मा बनाम राजस्थान राज्य) के बाद सामने आया। कोर्ट ने गत 27 मई को आदेश दिया कि आरटीई पोर्टल पर शून्य सीटें दिखाने वाले स्कूलों के पिछले दो सालों के रिकॉर्ड की गहन जांच की जाए। अब जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर टीमें इन स्कूलों में जाकर छात्र उपस्थिति रजिस्टर, परीक्षा परिणाम, फीस रिकॉर्ड और एस.आर. (स्कॉलर रजिस्टर) की आमने-सामने जाकर भौतिक जांच करेंगी। सभी चिन्हित स्कूलों को 7 दिन के भीतर अपनी सही रिपोर्ट विभाग को ईमेल के जरिए भेजने का सख्त निर्देश दिया गया है। शहरी क्षेत्र के सर्वाधिक 53 स्कूलों में गड़बड़ी नियम : गरीब बच्चों की सीटें शून्य नहीं रख सकतेआरटीई-2009 के नियम के तहत हर प्राइवेट स्कूल को अपनी शुरुआती कक्षा (जैसे नर्सरी या क्लास 1) में 25% सीटें गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होती हैं। इन बच्चों की फीस सरकार देती है। नियम यह है कि अगर स्कूल में फीस देकर पढ़ने वाले बच्चों की सीटें भरी हैं तो गरीब बच्चों की सीटें शून्य नहीं रखी जा सकतीं। ऐसा करना सीधे तौर पर बच्चों के अधिकारों का हनन और धोखाधड़ी है। सामान्य बच्चों की फीस का 25 प्रतिशत हिस्सा वसूलेंगे जिन स्कूलों ने यह गड़बड़ी की है, उनसे आरटीई नियमों के तहत भारी जुर्माना वसूला जाएगा। इन स्कूलों ने गरीब बच्चों की जो सीटें छिपाई हैं, उन सीटों पर सामान्य बच्चों से ली जाने वाली फीस का 25% हिस्सा जुर्माने के रूप में वसूला जाएगा। विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है और जल्द ही निदेशालय के निर्देशानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. लोकेश भारती, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक), उदयपुर
हनुमान सिंह राठौड़ बने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान के 41वें अध्यक्ष
अजमेर। शिक्षाविद् हनुमान सिंह राठौड़ ने सोमवार को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान के 41वें अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया। पदभार संभालने के बाद उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 को प्रभावी ढंग से लागू करना बोर्ड की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होगा और इसके लिए शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा शिक्षा जगत के […] The post हनुमान सिंह राठौड़ बने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान के 41वें अध्यक्ष appeared first on Sabguru News .
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश शिक्षा सुधारों को केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भी सक्रिय कदम उठा रहा है। भारत ...
सम्भल में बालश्रम के खिलाफ अभियान:9 नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू कर शिक्षा से जोड़ा
सम्भल में सोमवार को बालश्रम और भिक्षावृत्ति के खिलाफ एक सघन अभियान चलाया गया। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशों पर 'बालश्रम, भिक्षावृत्ति एवं बाल विवाह मुक्त भारत अभियान' के तहत थाना AHT टीम ने सम्भल/नखासा क्षेत्र में यह कार्रवाई की। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बालश्रम और बाल भिक्षावृत्ति जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त कर बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार के आदेश पर अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) मनोज कुमार रावत और क्षेत्राधिकारी बहजोई स्तुति सिंह के निर्देशन में यह अभियान चलाया गया। थाना AHT प्रभारी निरीक्षक पवनवीर सिंह राणा के नेतृत्व में टीम ने श्रम प्रवर्तन अधिकारी मो. आजम और प्रयत्न संस्था (जस्ट राइट एनजीओ) के गौरी शंकर चौधरी की टीम के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की। अभियान के दौरान टीम ने सम्भल/नखासा क्षेत्र के भीड़-भाड़ वाले इलाकों, प्रमुख चौराहों और 10 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान भिक्षावृत्ति का कोई मामला सामने नहीं आया, लेकिन विभिन्न स्थानों से 9 नाबालिग बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराया गया। इन बच्चों को काउंसलिंग दी गई और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अधिकारियों ने प्रतिष्ठान संचालकों को सख्त निर्देश दिए कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से श्रम कराना कानूनन दंडनीय अपराध है। उन्हें बाल अधिकारों और बाल संरक्षण कानूनों के प्रति भी जागरूक किया गया।इस अभियान के तहत आमजन को भी बालश्रम, भिक्षावृत्ति और बाल विवाह जैसी कुरीतियों के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया गया। आपातकालीन सहायता के लिए सरकार द्वारा जारी टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1098, 112, 108, 1076 और 181 की जानकारी भी साझा की गई।अधिकारियों ने बताया कि जिले को बालश्रम और बाल शोषण से पूरी तरह मुक्त करने के लिए ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे।
महासमुंद में छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंघ ने अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और गृह मंत्री को भेजा गया है। महासंघ ने ड्राइवरों के सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की है। महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के हजारों वाहन चालक दिन-रात सड़क परिवहन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उनके हितों और सुरक्षा के लिए पर्याप्त सुविधाएं मुहैया नहीं हैं। अपनी मांगों को लेकर ड्राइवरों ने पहले बस स्टैंड से पोस्टर-बैनर के साथ रैली निकाली। इसके बाद नारेबाजी करते हुए वे कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने संबंधित मंत्रियों के नाम ज्ञापन सौंपा। महासंघ की प्रमुख मांगों में वाहन चालक की दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में 20 लाख रुपए का बीमा शामिल है। इसके अलावा गंभीर रूप से घायल होने पर 10 लाख रुपए तक की सहायता राशि मुहैया कराने की मांग की गई है, ताकि पीड़ित परिवार को आर्थिक संबल मिल सके। सड़क सुरक्षा और विशेष कानून बनाने पर जोर ज्ञापन में सड़क सुरक्षा नियमों को हाईवे पर सख्ती से लागू करने, पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था विकसित करने और नियमित सुरक्षा अभियान चलाने पर जोर दिया गया है। महासंघ ने वाहन चालकों के लिए विशेष सामाजिक सुरक्षा कानून बनाने की भी आवश्यकता बताई है, जिससे उनके अधिकारों और सुरक्षा को कानूनी संरक्षण मिल सके। वर्दी भत्ता और पेंशन सुविधा की मांग ड्राइवर महासंघ ने सभी वाहन चालकों के लिए वर्दी, भत्ता योजना लागू करने और 55 वर्ष की आयु के बाद पेंशन सुविधा देने की मांग की है। संगठन का तर्क है कि लंबे समय तक सेवा देने वाले चालकों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए। हाईवे पर विश्राम गृह और टॉयलेट की व्यवस्था महासंघ ने लंबी दूरी तय करने वाले ड्राइवरों की सुविधा के लिए प्रत्येक 100 किलोमीटर पर विश्राम गृह, शेड और स्वच्छ टॉयलेट की व्यवस्था करने की मांग रखी है। इसके अलावा सार्वजनिक सड़कों पर चालकों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किए जाने की मांग भी की गई है। आवास और बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान की मांग ज्ञापन में प्रधानमंत्री आवास या अन्य आवासीय योजनाओं के तहत वाहन चालकों को घर निर्माण के लिए 5 लाख रुपए की सहायता राशि देने की मांग की गई है। साथ ही ड्राइवरों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा की विशेष व्यवस्था और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है। लाइसेंस शुल्क में राहत और स्थानीय ड्राइवरों को प्राथमिकता महासंघ ने आर्थिक रूप से कमजोर चालकों को राहत देने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित निर्धारित 12 हजार रुपए की राशि समाप्त करने या उसका पुनर्मूल्यांकन करने की मांग की है। इसके अलावा प्रदेश के उद्योगों और संस्थानों में छत्तीसगढ़ के ड्राइवरों को 70 प्रतिशत प्राथमिकता देने की मांग भी उठाई गई है। हर जिले में ट्रेनिंग और फिटनेस सेंटर खोलने की मांग ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान में ड्राइविंग प्रशिक्षण की पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने से चालकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए प्रत्येक जिले में ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जाएं। साथ ही वाहनों की नियमित जांच के लिए फिटनेस सेंटर भी खोले जाएं, जिससे दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। आपातकालीन सेवा और रात्रिकालीन पेट्रोलिंग बढ़ाने की मांग महासंघ ने सड़क दुर्घटनाओं में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक जिले की पुलिस चौकियों में आपातकालीन सेवा वाहन अथवा फायर यूनिट की सुविधा उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है। इसके अलावा हाईवे के संवेदनशील क्षेत्रों में रात्रिकालीन पेट्रोलिंग बढ़ाने की मांग की गई है, ताकि डीजल चोरी और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। 1 सितंबर को ‘ड्राइवर दिवस’ घोषित करने की मांग महासंघ ने 1 सितंबर को राष्ट्रीय स्तर पर ‘ड्राइवर दिवस’ घोषित करने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि देश की परिवहन व्यवस्था में ड्राइवरों की महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मान देने के लिए यह पहल आवश्यक है। मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंघ ने मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और गृह मंत्री से मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। संगठन का कहना है कि मांगें पूरी होने से प्रदेश के लाखों वाहन चालकों और उनके परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा तथा सड़क परिवहन व्यवस्था और अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित बन सकेगी।
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों के साथ दोहरा रवैया अपनाने का आरोप एक बार फिर लगा है। यह स्थिति लोक शिक्षण आयुक्त द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग के सभी कर्मचारियों के लिए एक जुलाई से हमारे एप के माध्यम से ई अटेंडेंस लगाने की अनिवार्यता के चलते बनी है। इसे देखते हुए शिक्षकों और शिक्षक संगठनों का कहना है कि ऐसी ही व्यवस्था शिक्षकों के मामले में भी लागू हो। शिक्षकों की ई-अटेंडेंस के लिए विभाग ने जानबूझकर जनवरी से मार्च 2026 तक का टाइम 90 प्रतिशत तय किया है। जबकि इस अवधि में शिक्षकों द्वारा विद्यालयों में परीक्षा लेने, मूल्यांकन करने, एसआईआर जैसी ड्यूटी की गई है। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी नए आदेश में कहा गया है कि स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले समस्त कार्यालयों एवं प्रशिक्षण संस्थानों में कार्यरत शासकीय कर्मचारियों के लिए 1 जुलाई 2026 से हमारे शिक्षक एप के माध्यम से ई-अटेंडेंस दर्ज करना अनिवार्य है। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने कहा कि आदेश से स्पष्ट हो गया है कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि विभाग के सभी कर्मचारियों एवं अधिकारियों पर समान रूप से लागू होगी। कौशल ने कहा कि जब ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता पूरे विभाग के लिए लागू की जा रही है, तब स्थानांतरण नीति में केवल शिक्षकों पर 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की शर्त लगाना न्यायसंगत नहीं है। जनवरी, फरवरी एवं मार्च माह 2026 के दौरान शिक्षक बोर्ड परीक्षा, मूल्यांकन कार्य, प्रशिक्षण, जनगणना एवं अन्य शासकीय दायित्वों में संलग्न रहे हैं, जिसके कारण तकनीकी एवं व्यावहारिक समस्याओं से उनकी ई-अटेंडेंस प्रभावित हुई है। 'तबादले में ई अटेंडेंस की अनिवार्यता की शर्त पर पुनर्विचार करे सरकार' उपेन्द्र कौशल ने कहा कि शासन से मांग की गई है कि स्वैच्छिक स्थानांतरण नीति में ई-अटेंडेंस संबंधी कठोर एवं अव्यावहारिक शर्तों पर पुनर्विचार किया जाए और शिक्षकों को स्थानांतरण प्रक्रिया से वंचित न किया जाए। संगठन का मानना है कि स्थानांतरण नीति शिक्षक हितैषी, पारदर्शी एवं न्यायपूर्ण होनी चाहिए। शासकीय शिक्षक संगठन ने आशा व्यक्त की है कि प्रदेश सरकार शिक्षकों की समस्याओं एवं सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए स्थानांतरण नीति में आवश्यक संशोधन करेगी, जिससे हजारों शिक्षक अनावश्यक रूप से प्रभावित होने से बच सकें। इसके लिए स्कूल शिक्षा मंत्री और विभाग के सीनियर अफसरों से पुनर्विचार करने को कहा गया है।
भिवानी में सोमवार को कांग्रेस के ग्रामीण अध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी व शहरी अध्यक्ष प्रदीप गुलिया ने पत्रकार वार्ता की। देश भर में नीट परीक्षा रविवार ही समाप्त हो चुकी है। वहीं इसको लेकर कांग्रेस पार्टी ने भाजपा को घेरा। ग्रामीण प्रधान अनिरूद्ध चौधरी व शहरी प्रधान प्रदीप गुलिया ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर नीट परीक्षा लीक होने के विरोध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। भिवानी के शहरी व ग्रामीण जिला प्रधानों ने आरोप लगाया कि नीट में जिस प्रकार से घोटाला हुआ है। उसके लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा दे। पूर्व में हुए इस पेपर के लीक होने के चलते देश के बहुत से प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को सुसाइड करना पड़ा तथा बड़ी संख्या में छात्र दोबारा पेपर के तनाव में रहे, इसकी जिम्मेदार सरकार को लेना चाहिए। हालही में राहुल गांधी ने कोटा में कोचिंग ले रहे परीक्षार्थियों के बीच जाकर उनकी आवाज को उठाया तथा इस बात पर चिंता व्यक्त की कि देश में जितना शिक्षा का बजट है, उससे अधिक धन बच्चों के अभिभावकों को उनकी कोचिंग पर खर्च करना पड़ता है। यह देश की शिक्षा प्रणाली के लिए सोचने का विषय है। जिस प्रकार एयरफोर्स का प्रयोग नीट के दूसरी बार हुए पेपर को लाने-ले जाने में किया गया, यह दर्शाता है कि शिक्षा तंत्र फेल था, इसीलिए एयरफोर्स की मदद लेनी पड़ी। नई शिक्षा नीति पर पुनर्विचार की आवश्यकता ग्रामीण प्रधान अनिरूद्ध चौधरी ने कहा कि राहुल गांधी देश में रोजगार व अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जता चुके है कि देश का पैसा ऐसी जगह निवेश किया जाता है, जहां लेबर आधारित उद्योग नहीं है। जिसके चलते बेरोजगारी बढ़ी है। हालांकि इस व्यवस्था से अल्पकालीन तौर पर अर्थव्यवस्था के आंकड़े भले ही दिखे, परन्तु दीर्घकालीन में इससे बेरोजगारी बढ़ेगी। जो कि भविष्य के लिए चिंता की बात है। अनिरूद्ध चौधरी ने कहा कि नई शिक्षा नीति में फिर से पुनर्विचार की आवश्यकता है। क्योंकि नई शिक्षा नीति में बच्चों में 8वीं से ही बोर्ड लाना शुरू किया गया है तथा परीक्षाओं का दबाव बढ़ने से उनका नैचुरल टैलेंट दब रहा है। बच्चे गलत कदम ना उठाएंजिला शहरी प्रधान प्रदीप गुलिया ने परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चों से अपील की कि वे परीक्षाओं के लिए तैयारी भले ही करें, परन्तु इसके साथ चिंता ना ले। चिंता करना बात का हल नहीं है तथा सुसाइड जैसे कदम बच्चों के अभिभावकों सहित पूरे परिवार को पीड़ित करते है। ऐसे में बच्चों को ऐसे कदम उठाने से दूर रहना चाहिए तथा तनाव मुक्त तरीके से परीक्षाओं की तैयारी करनी चाहिए तथा जीवन के विभिन्न पहलुओं पर गौर करना चाहिए।
हरियाणा के सेकेंडरी शिक्षा विभाग ने टीचिंग और नॉन टीचिंग कर्मचारियों के कैजुअल पेड लीव (CPL) से जुड़े एक विवादित आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। महानिदेशक सेकेंडरी शिक्षा कार्यालय की ओर से जारी नए आदेश में 9 मार्च 2026 के निर्देशों को निरस्त कर दिया गया है। पहले जारी आदेश के तहत कर्मचारियों की CPL से संबंधित फाइलों को जिला उपायुक्त (DC) की अनुशंसा के बाद मुख्यालय भेजने की व्यवस्था की गई थी। विभाग ने अब इस शर्त को वापस लेते हुए पुराने आदेश को समाप्त कर दिया है। क्या था पुराने आदेश में 9 मार्च 2026 को जारी आदेश में कहा गया था कि शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के CPL से जुड़े मामलों को जिला स्तर पर उपायुक्त की अनुशंसा के बाद ही मुख्यालय भेजा जाएगा। इस व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और संगठनों में असंतोष था। उनका तर्क था कि इससे अवकाश संबंधी मामलों में अनावश्यक देरी और अतिरिक्त प्रशासनिक प्रक्रिया बढ़ रही है। अब क्या बदला 18 जून को महानिदेशक सेकेंडरी शिक्षा जितेंद्र कुमार द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि, 09 मार्च 2026 के आदेश के तहत शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों के CPL से संबंधित मामलों को जिला उपायुक्त की अनुशंसा के बाद मुख्यालय भेजने संबंधी आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाते हैं। यानी अब CPL मामलों में DC की अनुशंसा वाली बाध्यता समाप्त हो गई है। आदेश की कॉपी किन अधिकारियों को भेजी नए आदेश की प्रतियां राज्य के सभी उपायुक्तों, जिला शिक्षा अधिकारियों, एससीईआरटी निदेशक, स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और निदेशालय की विभिन्न शाखाओं को भेजी गई हैं, ताकि तत्काल प्रभाव से इसका पालन सुनिश्चित किया जा सके।
शिक्षा-रोजगार के मुद्दों पर राज्यव्यापी अभियान चलाएगी कांग्रेस
सोनीपत | सुभाष चौक स्थित कांग्रेस भवन में शनिवार को प्रेस वार्ता हुई। अध्यक्षता ग्रामीण जिला अध्यक्ष संजीव दहिया ने की। मुख्य वक्ता सांसद सतपाल ब्रह्मचारी रहे। ब्रह्मचारी ने कहा कि युवा शिक्षा और रोजगार के दोहरे संकट से जूझ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं, पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और एनटीए से जुड़े विवादों ने छात्रों व अभिभावकों की चिंता बढ़ाई है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस इन मुद्दों पर राज्यव्यापी जनजागरण अभियान शुरू करेगी। अभियान में राहुल गांधी के कोटा फैक्ट्री कार्यक्रम के बिंदुओं को छात्रों और अभिभावकों तक पहुंचाया जाएगा।
माध्यमिक शिक्षा विभाग में वर्ष 2015 में लागू किए गए स्टाफिंग पैटर्न की पिछले 11 वर्षों से समीक्षा नहीं होने का असर अब सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। नियमों के अनुसार हर दो वर्ष में समीक्षा होनी चाहिए थी, लेकिन विभाग ने अब तक एक बार भी संशोधन नहीं किया। इसके चलते कई विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने के बावजूद शिक्षक नहीं हैं, जबकि कुछ स्कूलों में नामांकन घटने से शिक्षक अधिशेष हो गए हैं। राज्य में 2021-22 में 475 उच्च प्राथमिक स्कूलों को माध्यमिक स्तर तक क्रमोन्नत किया गया। फिर बजट 2022-23 की घोषणा के तहत सभी 3833 माध्यमिक विद्यालयों को उच्च माध्यमिक स्तर तक क्रमोन्नत कर दिया गया। इससे पूर्व तथा इसके पश्चात सैकड़ों स्कूलों को क्रमोन्नत किया गया, नए संकाय और नए विषय खोले गए। मगर इन स्कूलों में स्टाफिंग पैटर्न के मुताबिक आज तक सभी शैक्षिक पद स्वीकृत नहीं किए जा सके हैं। पिछले 5 साल से लगातार नामांकन में गिरावट आ रही है। साल-दर-साल सरकारी स्कूलों में घटता-बढ़ता नामांकन न्यू स्टाफिंग पैटर्न में पदों का प्रावधान स्टाफिंग पैटर्न 30 अप्रैल 2015 के तहत नव क्रमोन्नत उच्च माध्यमिक स्कूलों में 1 प्रधानाचार्य, 3 व्याख्याता, 3 वरिष्ठ अध्यापक सहित 3 अध्यापक लेवल-द्वितीय, 1 शारीरिक शिक्षा अध्यापक, 2 अध्यापक लेवल प्रथम पद आवश्यक हैं। वहीं न्यू स्टाफिंग पैटर्न 2015 लागू करते समय यह प्रावधान किया गया था कि दो वर्ष बाद कक्षा 11 और 12 में निर्धारित छात्र संख्या होने पर अनिवार्य हिंदी तथा अनिवार्य अंग्रेजी के व्याख्याता पद स्वीकृत किए जाएंगे, लेकिन ये पद भी स्वीकृत नहीं किए जा सके हैं। पिछले साल सरकार को भेजे प्रस्ताव, मंजूरी नहीं शिक्षा विभाग ने वर्ष 2022-23 में क्रमोन्नत किए गए 3833 स्कूलों में 11,499 व्याख्याताओं सहित टीचिंग-नॉन टीचिंग के स्टाफ के 20,803 पदों के प्रस्ताव शिक्षा निदेशालय ने पिछले साल राज्य सरकार को भिजवाए थे। लेकिन वित्त विभाग से अभी तक पदों की मंजूरी नहीं मिली है। 13 हजार उच्च माध्यमिक विद्यालयों में हिंदी-अंग्रेजी व्याख्याता नहीं प्रदेश में वर्ष 2013 के बाद क्रमोन्नत किए गए किसी भी विद्यालय में अनिवार्य विषय हिंदी और अंग्रेजी के व्याख्याता पद स्वीकृत नहीं किए गए। वर्तमान में प्रदेश के लगभग 19 हजार उच्च माध्यमिक विद्यालयों में से केवल 6 हजार विद्यालयों में ही इन विषयों के व्याख्याता पद स्वीकृत हैं। शेष 13 हजार विद्यालयों में केवल वैकल्पिक विषयों के व्याख्याता पद स्वीकृत हैं, जिससे भाषा विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 29 जून से स्कूल खुलेंगे। राज्य सरकार को चाहिए कि सभी स्कूलों में स्टाफिंग पैटर्न के मुताबिक शैक्षिक पद स्वीकृत किए जाएं। इस संबंध में राज्य सरकार को संगठन की ओर से ज्ञापन भेजा गया है। -महेंद्र पांडे, मुख्य महामंत्री, राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ
दो साल तक पोर्टल पर चलता रहा बंद स्कूल:एक तबादले ने उजागर की शिक्षा विभाग की बड़ी चूक
मप्र का स्कूल शिक्षा विभाग अक्सर अपने अजीबोगरीब कारनामों के लिए चर्चा में रहता है। अशोकनगर जिले से सामने आए एक मामले में स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने जो स्कूल सालों पहले डूब क्षेत्र में आकर पूरी तरह बंद हो चुका था, उसे सरकारी रिकॉर्ड और पोर्टल पर सक्रिय दिखाकर वहां बकायदा एक शिक्षक का तबादला कर दिया। जब पीड़ित शिक्षक ने इस अस्तित्वहीन स्कूल में जाने से मना किया, तो अधिकारियों ने अपनी गलती सुधारने के बजाय उसे परेशान करना शुरू कर दिया। यह प्रशासनिक तानाशाही तब थमी जब मामला कोर्ट और कलेक्टर की चौखट पर पहुंचा। जबकि विभाग ने दिसंबर 2025 में एक साथ 11 सरकारी और 27 निजी स्कूलों के साथ ही पगरा स्कूल को पोर्टल से बंद किया जहां शिक्षक का ट्रांसफर किया गया था। शिक्षक बोलता रहा जहां भेज रहे हो वह स्कूल अस्तित्व में ही नहीं फिर भी कर दिया ट्रांसफर यह पूरा मामला प्राथमिक शिक्षक रामगोपाल शिवहरे से जुड़ा है, जो शासकीय प्राथमिक विद्यालय मढ़ी तूमैन (विकासखंड अशोकनगर) में पदस्थ थे। 11 दिसंबर 2023 को विभाग द्वारा जारी एक मनमाने आदेश के तहत उनका तबादला शासकीय प्राथमिक विद्यालय पगरा विकासखंड चंदेरी (डाइस कोड: 23460509701) में कर दिया। हकीकत में शासकीय प्राथमिक विद्यालय पगरा कोई चलता हुआ स्कूल नहीं था। कम नामांकन और डूब क्षेत्र में आ जाने के कारण यह स्कूल पूरी तरह से बंद हो चुका था और धरातल पर इसका कोई वजूद ही नहीं बचा था। लेकिन विभाग के एजुकेशन पोर्टल पर बैठे जिम्मेदारों ने बिना किसी भौतिक सत्यापन के इस बंद हो चुके स्कूल को जीवित दर्शा रखा था। । पोर्टल पर चालू थे 11 सरकारी, 27 निजी स्कूल जिले में पगरा प्राथमिक शाला अकेला ऐसा स्कूल नहीं था, जो चालू हो। जिले के विभिन्न विकासखंडों में कुल 11 सरकारी स्कूल पूरी तरह बंद हो चुके थे, लेकिन वे सभी पोर्टल पर चालू थे। इसके पीछे बीआरसीसी द्वारा बरती जा रही ढील थी, जो काम 2 साल पहले हो जाना था उसकी फाइल अफसरों तक 2 साल बाद पहुंचाई। इसके चलते पीएस माधोपुर, एमएस एन लिधोरा, पीएस आदिवासी लिधोरा, पीएस चक महोली, पीएस पगरा, पीएस ब्रजपुरा, पीएस गोकुलपुरा चक्क, पीएस ओखारीखेड़ा, पीएस रामनगर कॉलोनी इंडोर, पीएस शीतलपुर, पीएस ओझरपुर स्कूल जो बंद हो चुके थे पोर्टल पर चालू दिखाई दे रहे थे। इनकी प्रक्रिया 2 साल से चल रही थी 11 शालाएं शासकीय और 27 शालाएं अशासकीय थी जहां 0 नामांकन था। इन स्कूलों को बंद कर दिया था। इनकी प्रक्रिया 2 साल से चल रही थी जिसकी नोटशीट सभी बीआरसीसी ने बढ़ाई थी, डीईओ साहब के सिग्नेचर करके अस्थाई रूप से इन शालाओं को दिसंबर 2025 में बंद कर दिया। -राहुल शर्मा, डीपीसी अशोकनगर।
सोनीपत में कांग्रेस पार्टी ने देश में बढ़ते शिक्षा और रोजगार संकट को लेकर सरकार के खिलाफ राज्यव्यापी जनजागरण अभियान शुरू करने की घोषणा की है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर पार्टी जल्द ही युवाओं के समर्थन में यह अभियान चलाएगी। इस अभियान के तहत कांग्रेस राहुल गांधी के 'कोटा फैक्ट्री' कार्यक्रम के प्रमुख बिंदुओं को आधार बनाकर लचर परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों पर छात्रों व अभिभावकों को एकजुट करेगी। युवाओं की आवाज को व्यापक स्तर पर उठाने के लिए कांग्रेस की जिला इकाइयां जमीनी स्तर पर मोर्चा संभालेंगी। रविवार को सुभाष चौक स्थित कांग्रेस भवन में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कांग्रेस के ग्रामीण जिला अध्यक्ष संजीव दहिया ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में सांसद सतपाल ब्रह्मचारी मौजूद रहे। प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के अवसरों को लेकर केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की और इसे युवा विरोधी करार दिया। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सांसद सतपाल ब्रह्मचारी ने कहा कि देश का युवा आज शिक्षा और रोजगार के दोहरे संकट का सामना कर रहा है। विभिन्न प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में लगातार हो रही अनियमितताओं, प्रश्नपत्र लीक होने तथा भर्ती प्रक्रियाओं में जानबूझकर की जा रही देरी के कारण युवाओं में भारी निराशा और आक्रोश का माहौल है। उन्होंने विशेष रूप से नीट (NEET) परीक्षा, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़े हालिया विवादों और विभिन्न सरकारी भर्ती परीक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन घोटालों ने देश के लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों की रात की नींद उड़ा दी है। ग्रामीण जिला अध्यक्ष संजीव दहिया ने कहा कि कांग्रेस युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दों को संसद से लेकर सड़क तक मजबूती से उठाती रहेगी। उन्होंने जिला इकाइयों को आगामी अभियान से संबंधित सभी कार्यक्रमों और गतिविधियों की रिपोर्ट संगठन के निर्धारित प्लेटफार्म पर नियमित रूप से अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रेस वार्ता में सरकार के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए विधायक इंदुराज नरवाल, पूर्व विधायक जयबीर बाल्मीकि, पूर्व विधायक पदम सिंह दहिया, सुरेंद्र शर्मा, जयवीर अंतिल, जयभगवान आंतिल, प्रशांत शर्मा, मुकेश पन्नालाल, जयकवार खत्री, प्रेम नारायण गुप्ता, नीटू दहिया और सुनील दहिया सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
नीट (NEET) परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोपों को लेकर कांग्रेस पार्टी और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने शनिवार को शिवहर में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने शिवहर जीरोमाइल चौक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन कर विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने नीट परीक्षा में पारदर्शिता की मांग करते हुए सरकार पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। कार्यकर्ताओं ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को भंग करने और प्रभावित छात्रों को न्याय व मुआवजा देने की मांग उठाई। जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष अधिवक्ता मोहम्मद अफरोज आलम ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि नीट जैसी देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ी से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है मामला : कांग्रेस कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहम्मद अफरोज आलम ने कहा कि नीट परीक्षा में सामने आए विवादों से छात्र और अभिभावक परेशान हैं। उन्होंने कहा कि बिहार सहित देश के कई राज्यों में छात्र और युवा इस मुद्दे को लेकर आवाज उठा रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में छात्रों की समस्याओं को लेकर देशभर में अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेडिकल शिक्षा में प्रवेश के लिए होने वाली परीक्षा में अगर पारदर्शिता नहीं रहेगी तो मेहनत करने वाले छात्रों के साथ अन्याय होगा। “क्या अब बच्चों को परीक्षा देने विदेश जाना पड़ेगा?” कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने नीट री-एग्जाम को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई छात्रों के परीक्षा केंद्र विदेशों तक में दिए गए हैं। उन्होंने सवाल करते हुए कहा, “क्या अब देश के बच्चों को परीक्षा देने के लिए यूएई के अबू धाबी जाना पड़ेगा? यह छात्रों के साथ अन्याय है। सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।” उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे छात्रों को परेशानी न हो और सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिले। एनटीए को भंग करने की मांग प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मांग की कि नीट परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि जब लाखों छात्रों के करियर का सवाल हो तो सरकार को जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। साथ ही परीक्षा संचालन करने वाली संस्था एनटीए की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए। कार्यकर्ताओं ने कहा कि छात्रों का विश्वास बनाए रखने के लिए सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने होंगे। पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि देश के युवाओं को निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था मिलना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल बयान देने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे भविष्य में इस तरह के विवाद दोबारा न हों। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर छात्रों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
नंदपुरी स्थित राजपुरोहित समाज भवन में रविवार को 1008 संत खेताराम महाराज मंदिर की स्थापना वर्षगांठ श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर मंदिर में नई ध्वजा चढ़ाई गई और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजबंधुओं ने भाग लेकर संत खेताराम महाराज के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। समारोह में पूर्व कोषाध्यक्ष भागीरथ सिंह ने लगातार तीसरी बार मंदिर में नई ध्वजा चढ़ाकर परंपरा का निर्वहन किया। विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना के बाद समाजबंधुओं ने दिव्य ज्योति के दर्शन किए और समाज में सुख, समृद्धि और शांति की कामना की। बताया गया कि इसी दिन नंदपुरी स्थित राजपुरोहित समाज भवन में मंदिर की स्थापना की गई थी। वर्षगांठ के अवसर पर ध्वजा परिवर्तन की परंपरा सालों से निभाई जा रही है। भागीरथ सिंह ने कहा कि समाज की ओर से उन्हें आजीवन मंदिर में वर्षगांठ के मौके पर नई ध्वजा चढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे वे पूरी श्रद्धा से निभाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनके बाद उनके पुत्र और आने वाली पीढ़ियां भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समाज और मंदिर के प्रति अपना दायित्व निभाएंगी। कार्यक्रम के दौरान समाजबंधुओं ने महिला शिक्षा को बढ़ावा देने का संकल्प भी लिया। वक्ताओं ने समाज में शिक्षा के प्रसार और विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। समारोह में ओपी राजपुरोहित, बाबू सिंह, जालम सिंह, भंवर सिंह, दिलीप सिंह, अमर सिंह, गोपाल सिंह खेड़ी, रत्न सिंह रूपावास, लालसिंह मथानियां सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि भागीरथ सिंह का शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इससे पूर्व उन्होंने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय वणदार के विद्यार्थियों को वर्षभर की शिक्षण सामग्री वितरित की थी। उनके इस योगदान की विद्यालय प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने सराहना की थी। उन्होंने विद्यालय को भविष्य में भी हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया था।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अंशकालिक अनुदेशक और शिक्षामित्रों को बड़ी राहत दी है। उन्हें जून महीने का मानदेय 15 दिन के बजाय पूरे महीने का मिलेगा। बलिया के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) मनीष कुमार सिंह ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समग्र शिक्षा के तहत कार्यरत अनुदेशक और शिक्षामित्रों के जून व जुलाई माह के मानदेय की लिमिट राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा जारी कर दी गई है। राज्य परियोजना कार्यालय के निर्देशों के अनुसार, अनुदेशक और शिक्षामित्रों को जून माह का मानदेय पूरे महीने का दिया जाएगा। 15 दिन की अतिरिक्त धनराशि जुलाई माह की जारी लिमिट से समायोजित की जाएगी। बीएसए ने यह भी बताया कि पूरे जून माह का मानदेय 25 जून 2026 तक अनिवार्य रूप से भुगतान कर दिया जाएगा।
जन्म से नहीं, शिक्षा के कर्म से पिता:1000 बच्चों का सहारा बने ‘बाबूजी’, सपनों को दे रहे हैं उड़ान
पिता सिर्फ वह नहीं होता, जो उंगली पकड़कर अपने बच्चे को चलना सिखाए। पिता वह भी होता है, जो उन बच्चों का हाथ थाम ले, जिनके पास सहारा देने वाला कोई नहीं होता। शहर की स्लम बस्तियों में रहने वाले एक हजार से अधिक बच्चों के लिए राकेश श्रीवास्तव ऐसे ही बाबूजी हैं। 67 वर्षीय बाबूजी कोरोना के समय अनाथ बच्चों का जीवन संवारने का संकल्प लिया। यही से शुरू हुआ उनका सफर। वह अभी तक एक हजार से ज्यादा बच्चों को पढ़ चुके हैं। उन्होंने बताया कि साल 2021 में राज्य स्वास्थ्य प्रबंधन एवं संचार संस्थान में मैनेजमेंट की नौकरी से रिटायर होने के बाद बेसहारा बच्चों को पढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। उनकी कक्षाएं सिकंदर कंपू, कैंसर पहाड़िया, चंद्रवदनी का नाका सहित शहर में पांच स्थानों पर चलती हैं। उन्होंने स्लम बस्तियों में रहने वाली बेटियों का दाखिला कॉलेजों में अपने खर्चे से कराया। अब वे 8 बेटियां शहर के अलग-अलग स्थानों पर संचालित कक्षाओं में पढ़ाती हैं। बाबूजी ने जब इस काम की शुरुआत की तो उनके साथ 3 से 4 लोग थे। धीरे-धीरे उनके पढ़ाए बच्चे ही इस कार्य में जुड़ गए। जिसकी बदौलत करीब एक हजार से ज्यादा बच्चों को शिक्षा से जोड़ा है। उनके गुरुकुल से निकलकर कई बच्चे कॉलेजों में पहुंच रहे हैं।
फोरम की बैठक में शिक्षा व लीज नीति पर चर्चा
सिटी रिपोर्टर | बोकारो बोकारो अनएडेड स्कूल्स मैनेजमेंट फोरम की जनरल बॉडी मीटिंग सेक्टर-1 स्थित एक होटल में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। बैठक में शहर के विभिन्न प्रतिष्ठित विद्यालयों के प्राचार्यों, प्रबंधकों एवं शिक्षा जगत से जुड़े सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में फोरम के अध्यक्ष एसपी सिंह, सचिव डॉ. डीएन प्रसाद, कोषाध्यक्ष अक्षत गुप्ता, समन्वयक महेश त्रिपाठी तथा अन्य सम्मानित सदस्यों की उपस्थिति रही। शुभारंभ अभिषेक कुमार प्राचार्य जीजीपीएस बोकारो ने अतिथियों के स्वागत के साथ किया। पिछली बैठक की समीक्षा की गई। इस दौरान शिक्षा संस्थानों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेष रूप से चल रहे न्यायालयीन मामलों तथा सेल नई लीज नवीनीकरण नीति पर विचार-विमर्श किया गया। उपस्थित सदस्यों ने अपने विचार साझा किए तथा विद्यालयों के हितों की रक्षा के लिए संभावित समाधान और रणनीतियों पर चर्चा की। इसके अलावा वार्षिक सदस्यता शुल्क, नए सदस्यों के स्वागत तथा शिक्षा एवं प्रशासन से जुड़े समसामयिक मुद्दों पर भी सार्थक संवाद हुआ। अंत में सभी सदस्यों ने बोकारो के शैक्षिक विकास एवं अनएडेड विद्यालयों के हितों की सुरक्षा हेतु सामूहिक प्रयास जारी रखने का संकल्प दोहराया।
बैठक में शिक्षा गुणवत्ता, एप पर हाजिरी व पौधरोपण पर हुई चर्चा
भास्कर न्यूज | कुकदूर नए शैक्षणिक सत्र को सुव्यवस्थित व गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से कुई संकुल में संचालित शासकीय, अशासकीय प्राथमिक तथा माध्यमिक विद्यालयों के प्रधान पाठकों की समीक्षा बैठक संकुल प्राचार्य ने ली। शिक्षक जितेंद्र कुमार कश्यप ने बताया कि समीक्षा बैठक का उद्देश्य नए शिक्षा सत्र की तैयारी की समीक्षा करना तथा विद्यालयों में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाना था। बैठक में शाला प्रवेश उत्सव व संकुल स्तरीय प्रवेश अभियान को सफल बनाने पर जोर दिया गया। पाठ्यपुस्तकों की स्कैनिंग, वितरण तथा शेष बची पुस्तकों के समुचित प्रबंधन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए। विद्यालय परिसर की साफ-सफाई, सभी आवश्यक पंजी को अद्यतन रखने तथा यू-डाइस पोर्टल पर विद्यार्थियों के प्रोग्रेस की समय पर प्रविष्टि सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए पौधरोपण, वाटर हार्वेस्टिंग एवं सोखता गड्ढों के निर्माण, न्योता भोजन कार्यक्रम व 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के सफल आयोजन की रूपरेखा पर भी चर्चा की गई। वीएसके एप में उपस्थिति दर्ज करें: वीएसके एप के माध्यम से शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की प्रतिदिन ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने, मध्याह्न भोजन (एमडीएम) की ऑनलाइन एंट्री नियमित रूप से करने तथा ऑनलाइन अवकाश प्रणाली का पालन सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। जर्जर विद्यालय भवनों में शाला संचालन नहीं करने तथा भवन एवं किचन शेड के रंगरोगन कार्य को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए गए। छात्रवृत्ति, आईपीआर अपलोड, शिक्षक दैनंदिनी का नियमित संधारण, पाठ्यक्रम विभाजन पंजी, जाति, निवास व आय प्रमाण पत्र संबंधी कार्य पर चर्चा की।
शिक्षा ग्रहण कर बेहतर करियर बनाने किया प्रेरित
भास्कर न्यूज | कुकदूर शासकीय नवीन कॉलेज कुई-कुकदूर ने संस्थागत सामाजिक दायित्व (आईएसआर) के तहत ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के प्रति जागरूक और प्रेरित करने के उद्देश्य से शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल ग्राम कामठी में विशेष अकादमिक कार्यक्रम किया। प्राचार्य डॉ.जीए घनश्याम के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने स्कूली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और बेहतर करियर की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। प्राध्यापकों एवं स्टाफ ने विद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों पर विशेष कक्षाओं के माध्यम से मार्गदर्शन दिया। अंग्रेजी सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों की जटिल अवधारणाओं को सरल एवं सहज भाषा में समझाया गया, जिससे विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और विषयों के प्रति रुचि बढ़ी। विद्यार्थियों के लिए करियर काउंसिलिंग सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें उच्च शिक्षा के विभिन्न विकल्पों, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार के अवसरों तथा व्यक्तित्व विकास के महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर मेहनत करने और शिक्षा को सफलता का सबसे प्रभावी माध्यम मानने के लिए प्रेरित किया गया। संयुक्त बैठक में शिक्षा संबंधित हुई चर्चा: अकादमिक सत्र के बाद शासकीय नवीन कॉलेज कुई-कुकदूर के प्राध्यापकों व ग्राम कामठी स्कूल के प्रबंधन और शिक्षकों के बीच संयुक्त बैठक हुई। स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, विद्यार्थियों को कॉलेज जीवन के लिए तैयार करने तथा उनके सर्वांगीण विकास के लिए साझा प्रयासों पर विस्तृत चर्चा की गई। दोनों संस्थानों ने भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की।
किशनगंज में शनिवार शाम को जिला कांग्रेस कमिटी ने महंगाई, बेरोजगारी और NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन किया। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के निर्देश पर आयोजित इस विरोध मार्च में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कांग्रेस अध्यक्ष सहाबुल अख्तर ने की। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जिला कांग्रेस कार्यालय राजीव आश्रम से गांधी चौक तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन किया। गांधी चौक पहुंचकर शिक्षा मंत्री का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया गया। सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। वक्ताओं ने कहा कि देश में लगातार बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से आम जनता परेशान है, जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं की घटनाओं ने छात्रों का विश्वास कमजोर किया है। नेताओं ने NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की भी मांग की। इस विरोध प्रदर्शन में किशनगंज सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद, विधायक कमरूल हुदा, बहादुरगंज विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी प्रो. मोसब्बीर आलम, युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष मो. आजाद साहिल, पूर्व जिलाध्यक्ष इमाम अली चिंटू तथा नगर अध्यक्ष सजल कुमार साह सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि जनता से जुड़े इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर पार्टी का संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने जनहित के सवालों को लेकर आंदोलन को और तेज करने की बात कही।
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कोटपूतली-बहरोड़ जिले के पावटा उपखंड स्थित ग्राम सुजातनगर में नट समाज उत्थान सेवा समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने नट समुदाय को शिक्षा के माध्यम से अपने कौशल को निखारने और उत्थान की ओर बढ़ने का आह्वान किया। राज्यपाल ने इस अवसर पर श्री दादी रूपा सती के वार्षिक मेले में भी शिरकत की। कार्यक्रम में नट समाज उत्थान सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञान सिंह और प्रदेश अध्यक्ष कुशाल नट सहित समाज के प्रतिनिधियों ने राज्यपाल का 51 किलो फूलों की माला, साफा और प्रतीक चिह्न भेंट कर अभिनंदन किया। अपने संबोधन में राज्यपाल बागडे ने घुमंतू समुदायों के ऐतिहासिक योगदान को सराहा। उन्होंने कहा कि नट समाज ने महाराणा प्रताप के संघर्षों और स्वतंत्रता आंदोलन सहित विभिन्न ऐतिहासिक परिस्थितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्यपाल ने नट समुदाय की पारंपरिक कला और कौशल को देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग बताया। युवा कलाकारों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों की प्रशंसा राज्यपाल ने नट समाज के युवा कलाकारों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों और उनके एकाग्रता कौशल की प्रशंसा की, जिससे उनका उत्साहवर्धन हुआ। उन्होंने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह बौद्धिक क्षमता विकसित करने, रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर प्रदान करने का माध्यम है। राज्यपाल ने समुदाय के लोगों से अपने बच्चों को नियमित रूप से शिक्षा से जोड़ने और सरकारी स्कूलों व छात्रावासों में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने भारतीय इतिहास, संस्कृति और परंपराओं के महत्व पर भी प्रकाश डाला। युवाओं से सांस्कृतिक पहचान से जुड़ने का आह्वान उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक पहचान और मूल्यों से जुड़े रहने का आह्वान किया, साथ ही परंपराओं को संजोते हुए आधुनिकता के साथ आगे बढ़ने को सशक्त समाज और राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। इस अवसर पर राज्यपाल ने नट समुदाय की विभिन्न मांगों को भी सुना। उन्होंने चिकित्सा, आवास और शिक्षा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
होशियारपुर की प्रसिद्ध लेखिका, अध्यापिका और समाज सेविका श्रीमती अंजू वी. रत्ती को कनाडा की धरती पर एक विशेष अंतरराष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया है। उन्हें कनाडा की सांसद रूबी सहोता द्वारा उनके ब्रैम्पटन स्थित कार्यालय में 'सर्टिफिकेट ऑफ रिकॉग्निशन' (Certificate of Recognition) प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें पंजाबी साहित्य, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में दिए गए उनके बहुमूल्य योगदान के लिए मिला है। सांसद रूबी सहोता द्वारा सौंपे गए सम्मान पत्र में अंजू वी. रत्ती की उत्कृष्ट सेवाओं की भरपूर सराहना की गई है। उन्हें एक समर्पित अध्यापिका, प्रतिभाशाली लेखिका और समाज के प्रति प्रतिबद्ध नेतृत्वकर्ता के रूप में मान्यता दी गई है, जिन्होंने अपने ज्ञान और रचनात्मकता से समाज को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। अंजू वी. रत्ती की इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि से उनके गृह जिले होशियारपुर, मित्रों और पूरे पंजाबी साहित्य व शिक्षा जगत में खुशी की लहर है। इस विशेष मुलाकात के दौरान अंजू वी. रत्ती ने अपनी लिखी हुई पुस्तकें भी सांसद रूबी सहोता को भेंट कीं। सांसद ने विशेष रूप से उनके द्वारा बाल साहित्य और शिक्षा के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों की तारीफ की और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। 25 वर्षों से क्षेत्र में सक्रिय हैं अंजू रत्ती उल्लेखनीय है कि अंजू वी. रत्ती पिछले करीब 25 वर्षों से साहित्य सृजन, अध्यापन और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं। इस लंबे सफर में उन्हें देश और विदेश की कई प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा पहले भी सम्मानित किया जा चुका है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर खुशी जताते हुए अंजू रत्ती ने कहा कि कनाडा की धरती पर सांसद के हाथों यह सम्मान पाना उनके लिए बेहद गर्व की बात है। इस सम्मान ने साहित्य और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी को और बढ़ा दिया है। उन्होंने अपनी इस सफलता के लिए अपने परिवार, मित्रों, पाठकों और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त किया।
मोतिहारी में जिला कांग्रेस कमेटी ने नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के विरोध में प्रदर्शन किया। कचहरी चौक पर आयोजित इस एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता, कार्यकर्ता और युवा शामिल हुए। कार्यक्रम का नेतृत्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि भूषण राय उर्फ गप्पू राय ने किया। धरना के दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने नीट परीक्षा में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों पर चिंता व्यक्त की। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य खतरे में है, और सरकार इस गंभीर मुद्दे पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही है। ''देश का युवा कई मोर्चों पर संकट का सामना कर रहा'' जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि भूषण राय ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश का युवा कई मोर्चों पर संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने बेरोजगारी के चरम पर होने और महंगाई से आम लोगों की कमर टूटने का जिक्र किया। राय ने शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं, विशेषकर प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, को युवाओं के विश्वास पर गहरा आघात बताया। उन्होंने कहा कि इससे मेहनती छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है और उनकी वर्षों की तैयारी व्यर्थ जा रही है। नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की भी मांग उठाई धरना-प्रदर्शन के अंत में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया। कार्यकर्ताओं ने दोनों नेताओं के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की भी मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि इस मुद्दे पर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
मुजफ्फरपुर में NEET परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और छात्र हितों की अनदेखी के विरोध में आज जिला कांग्रेस कमेटी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरैयागंज टावर पर शिक्षा मंत्री का पुतला दहन कर उनके इस्तीफे की मांग उठाई। इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई। कार्यक्रम का नेतृत्व जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अरविंद कुमार ने किया। प्रदर्शन से पूर्व कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला कांग्रेस कार्यालय से सरैयागंज टावर तक विरोध मार्च निकाला। मार्च में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक शामिल मार्च में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग की। सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि NEET समेत अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, लेकिन सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास कर रही है। निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी वक्ताओं ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि परीक्षा संचालन में गड़बड़ियां हुई हैं, तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से इस्तीफा देना चाहिए। कार्यक्रम में जूही प्रीतम समेत कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने छात्र हितों की रक्षा, परीक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग की। पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस भी मौके पर मौजूद रही। कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
कांग्रेस पार्टी ने आज गयाजी में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों के विरोध में प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष रजनीश कुमार झुना के नेतृत्व में राजेंद्र आश्रम स्थित कांग्रेस कार्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय तक एक विशाल विरोध मार्च निकाला गया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता, कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा भगाओ, देश बचाओ, महंगाई पर लगाम लगाओ और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो जैसे नारे लगाए। जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा, जिसमें विभिन्न जनसमस्याओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई। केंद्र सरकार पर हमला बोला सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रजनीश कुमार झुना ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती महंगाई ने आम जनता का जीवन कठिन कर दिया है। खाद्य पदार्थों, गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि से गरीब और मध्यम वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है। झुना ने बेरोजगारी की समस्या को भी गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि लाखों युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन सरकार उनके लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं कर पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र बार-बार लीक हो रहे हैं, जिससे छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। देश के युवाओं का विश्वास तोड़ा उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं ने देश के युवाओं का विश्वास तोड़ा है। छात्र सालों तक मेहनत करते हैं, लेकिन परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक होने से उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है। झुना ने इसे केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ बताया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए इस मामले में जवाबदेही तय करने की बात कही। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के कारण आम लोगों का जीवन संकट में है। सरकार को जनता की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने महंगाई, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो कांग्रेस पूरे बिहार में व्यापक जनआंदोलन चलाएगी। प्रदर्शन के अंत में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जनता के हितों की लड़ाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में राज्यभर में सड़क पर उतरकर चक्का जाम और बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस भाई ओमकार, विद्या शर्मा, युगल किशोर सिंह, सुनील पासवान, नवाव अली, मोहम्मद समालदूण, अशोक प्रसाद भारती समेत कई कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।
शिक्षा के क्षेत्र में कीर्तिमान रचने वाले स्कूलों को दैनिक भास्कर प्रदान करेगा एक्सीलेंस अवार्ड
झुंझुनूं | दैनिक भास्कर सामाजिक दायित्वों में सदैव अग्रणी रहा है। इसी कड़ी में भास्कर परिवार शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली झुंझुनूं जिले की शिक्षण संस्थाओं को स्कूल एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित करने जा रहा है। इसमें उच्च शिक्षा, अनुकूल वातावरण, सामाजिक-सांस्कृतिक क्रियाकलापों के साथ बेहतर परिणाम देने वाली शिक्षण संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा। इनमें शिक्षा के क्षेत्र में झुंझुनूं की देश में अलग पहचान स्थापित करने वाली शिक्षण संस्थाएं शामिल होंगी। दूसरे राज्यों से विद्यार्थियों के झुंझुनूं में अध्ययन के लिए आने में योगदान देने वाली संस्थाओं को भी सम्मानित किया जाएगा। दैनिक भास्कर ने अवार्ड के लिए शिक्षण संस्थाओं से रजिस्ट्रेशन लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा के प्रति समर्पित शिक्षण संस्थानों को प्रेरणा स्वरूप प्रस्तुत करना है।
कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) राजस्थान में विकास का अहम माध्यम बनकर उभर रही है। कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की ओर से जारी वित्त वर्ष 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार राज्य की 1,851 कंपनियों ने सामाजिक और विकास परियोजनाओं पर 1,145.67 करोड़ रुपए खर्च किए। यह राशि शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और खेल सहित 10 प्रमुख क्षेत्रों में निवेश की गई। राज्य के सभी 37 जिलों को सीएसआर गतिविधियों का लाभ मिला, लेकिन सबसे अधिक निवेश जयपुर और उदयपुर को प्राप्त हुआ। 248.24 करोड़ रुपए के सीएसआर निवेश के साथ जयपुर राज्य का सबसे बड़ा लाभार्थी जिला रहा, जबकि उदयपुर 97.57 करोड़ रुपए के साथ दूसरे स्थान पर रहा। उदयपुर-जयपुर को 345.81 करोड़ रुपए का निवेश मिला। यानी कुल फंड का 30% हिस्सा इन दोनों जिलों में खर्च किया गया। अजमेर (87.26 करोड़), अलवर (68.54 करोड़) और भीलवाड़ा (49.71 करोड़) भी शीर्ष 5 जिलों में शामिल हैं। पिछले दो वर्षों में ही राज्य में 2,268 करोड़ खर्च हुए। 10 साल में 300 करोड़ से 1,146 करोड़ पहुंचा
युवा महाधिवेशन आज, 3 सत्रों में 7 घंटे चर्चा; शिक्षा-रोजगार पर फोकस
शिक्षा, रोजगार और सामाजिक पहचान जैसी चुनौतियों से जूझ रहे घुमंतू समुदाय के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से शनिवार को जयपुर में घुमंतू युवा महाधिवेशन-2026 आयोजित किया जाएगा। बदलते समय में शिक्षा और कौशल विकास को सामाजिक उन्नति का आधार मानते हुए यह पहल युवाओं को नई दिशा देने के लिए की जा रही है। घुमंतू जाति उत्थान न्यास एवं बड़ पीपली बालाजी धाम के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को सीकर रोड स्थित मौजमहल रिसोर्ट में सुबह 10 से शाम 5 बजे तक महाधिवेशन होगा। इसमें तीन सत्रों में करीब सात घंटे तक विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में मदद करेंगे वॉलंटियर्स महाधिवेशन में 500 वॉलंटियर्स तैयार किए जाएंगे, जिन्हें शहर के आसपास बसी घुमंतू समाज की बस्तियों में भेजा जाएगा। ये वॉलंटियर्स बच्चों और उनके परिजनों को शिक्षा, चिकित्सा, आध्यात्मिकता, योग और रोजगार से जोड़ने में मदद करेंगे। वॉलंटियर्स का चयन बस्तियों के युवाओं में से ही किया जाएगा। व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी महानगर टोली के कार्यकर्ताओं को पंजीकरण, जल-विहार व्यवस्था, अल्पाहार, मंच संचालन, बैठक व्यवस्था, अतिथि सत्कार, मध्यान्ह भोजन और समापन की जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। शिक्षा, करियर, उद्यमिता और स्वास्थ्य पर होगा मंथन महाधिवेशन में शिक्षा, करियर, रोजगार, उद्यमिता, स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी। युवाओं को यह समझाने का प्रयास होगा कि बदलते दौर में केवल नौकरी ही नहीं, बल्कि कौशल, स्वरोजगार और सामाजिक नेतृत्व भी सफलता के महत्वपूर्ण रास्ते हैं। अलग-अलग संवाद सत्र में मिलेगा मार्गदर्शन कार्यक्रम संयोजक सर्वेश्वर शर्मा के अनुसार युवक और युवतियों के लिए अलग-अलग संवाद सत्र आयोजित होंगे, जहां वे अपने सवाल रख सकेंगे और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जयपुर प्रांत प्रचारक बाबूलाल तथा बड़ पीपली बालाजी धाम के महंत प्रमेन्द्र नाथ महाराज युवाओं का मार्गदर्शन करेंगे।
NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे। इससे पहले अभिजीत ने 6 जून को जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट किया था। CJP अब तक पुणे, लखनऊ, अमृतसर, हैदराबाद, बेंगलुरु, जयपुर और नागपुर में भी प्रदर्शन कर चुकी है। दीपके ने शुक्रवार को पीएम मोदी को पत्र लिखकर सुसाइड करने वाले NEET स्टूडेंट्स के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा देने की मांग की है। इसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की। उन्होंने लिखा कि देश का माहौल युवाओं के जीवन और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। रीएग्जाम होने के बावजूद स्टूडेंट्स के सुसाइ़ड नहीं रुके हैं और सरकार को असल समस्या पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि कार्रवाई नहीं होने पर छात्रों और अभिभावकों में निराशा और बढ़ सकती है। दीपके ने राहुल गांधी से छात्रों के समर्थन में आगे आने की अपील 36 दिनों में 12 छात्रों ने सुसाइड किया देश में पिछले 36 दिनों में NEET एग्जाम से जुड़े 12 छात्र-छात्राएं सुसाइड कर चुके। इंदौर में NEET की तैयारी कर रही छात्रा गुरुवार देर रात तीसरी मंजिल से नीचे आ गिरी। गंभीर हालत में उसे पहले निजी अस्पताल और फिर एमवाय हॉस्पिटल पहुंचाया गया। शुक्रवार सुबह उसकी मौत हो गई। छात्रा के गिरने का वीडियो भी सामने आया है। CJI की टिप्पणी के बाद बनी CJP, युवाओं को कॉकरोच कहा था कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद हुई। 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा था कि कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जो बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करते हैं। इस टिप्पणी के अगले दिन, 16 मई को अमेरिका में रह रहे अभिजीत दीपके ने CJP की शुरुआत की और सोशल मीडिया पर पार्टी के अकाउंट बनाए। 22 मई को उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर एक ऑनलाइन याचिका शुरू की, जिसे 8 लाख से अधिक लोगों का समर्थन मिलने का दावा किया गया। 10 जून तक CJP ते इंस्टाग्राम पर 2.27 करोड़ फॉलोअर्स थे। अब इसमें दो लाख की गिरावट आई है। फिर भी यह संख्या भाजपा के 94 लाख और कांग्रेस के 1.37 करोड़ फॉलोअर्स से ज्यादा है। एक्स पर CJP के 2.79 लाख फॉलोअर्स हैं। महाराष्ट्र के रहने वाले अभिजीत AAP से जुड़े रहे 30 साल के अभिजीत महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल, अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। ----------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… दीपके बोले- जयपुर में RSS के लोगों ने हमला किया, जो उनके खिलाफ, उसका यही अंजाम; कॉकरोच पार्टी के 2 लाख फॉलोअर्स घटे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने मंगलवार को आरोप लगाया कि जयपुर में उन पर हुए हमले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS के लोगों का हाथ था। अभी दीपके नागपुर में है। यहां 4 बजे संविधान चौक पर पार्टी का प्रदर्शन है। पूरी खबर पढ़ें…
तेलंगाना को शिक्षा और खेलों का केंद्र बनाएंगे: सीएम रेवंत रेड्डी
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने कहा कि राज्य सरकार ने तेलंगाना को देश का शिक्षा और खेल केंद्र बनाने का संकल्प लिया है।
गाजियाबाद जिला मुख्यालय पर शुक्रवार को समाजसेवी सतपाल सिंह ने दंडवत प्रणाम करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर सरकार को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने तपती धूप के बीच जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाया। विद्या ज्योति सेवा संस्थान से जुड़े सतपाल सिंह ने दोपहर की भीषण गर्मी और लगभग 40 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच कलेक्ट्रेट परिसर के मुख्य द्वार से लेकर डीएम कार्यालय तक दंडवत प्रणाम किया। सतपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने यह तरीका देश और प्रदेश की आम जनता की समस्याओं को प्रशासन तथा सरकार के सामने प्रभावी ढंग से रखने के लिए अपनाया है। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि जनता की आवाज को जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाना है। ज्ञापन में उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आम लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मांग की, साथ ही युवाओं के लिए अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने की अपील की ताकि बेरोजगारी कम हो सके। समाजसेवी ने कहा कि दंडवत प्रणाम करते हुए ज्ञापन देने का उद्देश्य अपनी पीड़ा और जनता की भावनाओं को प्रशासन तक पहुंचाना है। उनका मानना है कि जब तक आम लोगों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक समाज का समग्र विकास संभव नहीं है। डीएम कार्यालय में एसडीएम अरुण दीक्षित ने सतपाल सिंह का ज्ञापन प्राप्त किया और इसे संबंधित स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया।
अमृतसर में सिख रेजिमेंट ने अपने अग्निवीरों को उच्च शिक्षा और आधुनिक कौशल विकास के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए देश की प्रतिष्ठित गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (GNDU), अमृतसर के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। राष्ट्र-निर्माण की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा यह एमओयू (MoU) 16 जून 2026 को रेजिमेंट की ओर से सिख रेजिमेंटल सेंटर के कमांडेंट द्वारा औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित किया गया। इस अनूठी साझेदारी के बाद अब सिख रेजिमेंट के अग्निवीर देश की सीमाओं की रक्षा करने के साथ-साथ अपनी उच्च शिक्षा के सपने को भी पूरा कर सकेंगे। स्नातक डिग्री और 6 महीने के डिप्लोमा कोर्स का मिलेगा विकल्प इस विशेष शैक्षणिक पहल के तहत, सेवारत अग्निवीरों को उनकी रुचि और करियर की योजनाओं के अनुसार कई तरह के कोर्सेज उपलब्ध कराए जाएंगे। तीन वर्षीय स्नातक डिग्री कार्यक्रम: अग्निवीर अपनी सैन्य सेवा के दौरान ही बैचलर ऑफ आर्ट्स (BA), बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (BCA) और बैचलर ऑफ कॉमर्स (B.Com) जैसे डिग्री कोर्सेज की पढ़ाई कर सकेंगे। शॉर्ट-टर्म डिप्लोमा कोर्सेज: तकनीकी और व्यावसायिक कौशल को मजबूत करने के लिए छह महीने की अवधि वाले विभिन्न विशिष्ट डिप्लोमा कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं। अग्निवीरों के सर्वांगीण विकास और दीर्घकालिक करियर पर फोकस सिख रेजिमेंट और विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य अग्निवीरों की शैक्षणिक योग्यता, व्यावसायिक क्षमता और भविष्य में उनके दीर्घकालिक करियर की संभावनाओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
छत्तीसगढ़ के स्कूलों में संचालित व्यावसायिक शिक्षा एक बार फिर शिक्षकों की कमी को लेकर चर्चा में है। प्रदेश में स्वीकृत 1507 व्यावसायिक प्रशिक्षकों के पदों में से 478 पद लंबे समय से खाली हैं। वहीं नीटकॉम कंपनी के तहत काम कर रहे 86 व्यावसायिक शिक्षकों की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं। इसे लेकर प्रभावित शिक्षकों ने समग्र शिक्षा कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की तस्वीरें… इस प्रदर्शन को NSUI ने लीड किया। करीब 3 घंटे का तक प्रदर्शन चला। इसके बाद तीन दिन का अल्टीमेटम देकर NSUI कार्यकर्ता और पीड़ित शिक्षक कार्यालय से रवाना हुए । शिक्षकों का आरोप: एक्सटेंशन देने की बात हुई थी, अब नौकरी से निकाला प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा दे रहे थे। अचानक सेवा समाप्त होने से न केवल उनकी आजीविका प्रभावित हुई है। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि निजी कंपनी की ओर उन्हें कुछ महीनों का वेतन भी अब तक नहीं मिला है। शिक्षकों का आरोप है कि पहले मौखिक रूप से बताया गया था कि उनकी नौकरी आगे बढ़ाई जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब स्थिति यह है कि स्कूलों के प्राचार्य उन्हें लगातार पढ़ाने के लिए बुला रहे हैं, लेकिन एजेंसी की ओर से स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं। शिक्षकों का कहना है कि एजेंसी ने उन्हें कहा है कि स्कूल जाना या नहीं जाना उनकी अपनी इच्छा है, लेकिन इसके लिए उन्हें कोई भुगतान नहीं किया जाएगा। वहीं कई बार समग्र शिक्षा कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला। समग्र शिक्षा का जवाब: एक शैक्षणिक सत्र के लिए ही की गई थी भर्ती इस पूरे मामले पर समग्र शिक्षा की आयुक्त किरण कौशल ने कहा कि ये शिक्षक सीधे तौर पर समग्र शिक्षा के कर्मचारी नहीं हैं। उनकी नियुक्ति निजी एजेंसी के माध्यम से हुई थी। जो केवल एक शैक्षणिक सत्र के लिए ही थी और यह बात पहले से स्पष्ट की गई। उन्होंने यह भी कहा कि यदि एजेंसी की ओर से किसी शिक्षक का वेतन रोका गया है, तो उसका समाधान किया जाएगा और बकाया वेतन दिलाने की प्रक्रिया की जाएगी। साथ ही बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए शिक्षकों के एक्सटेंशन को लेकर शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। नया टेंडर भी जारी किया गया है और नई एजेंसी चाहे तो इन्हीं शिक्षकों को दोबारा नियुक्त कर सकती है।
देवरिया के दीनानाथ पांडे राजकीय महिला महाविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से आठ नए शिक्षकीय पदों का सृजन किया गया है। इस निर्णय से क्षेत्र की छात्राओं को उच्च शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे और महाविद्यालय के शैक्षणिक विकास को गति मिलेगी। नवसृजित पदों में समाजशास्त्र, हिंदी और गृह विज्ञान विषयों में परास्नातक स्तर पर दो-दो पद शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, वाणिज्य संकाय में स्नातक स्तर पर दो पद सृजित किए गए हैं, जिससे महाविद्यालय में वाणिज्य संकाय की स्थापना का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है। महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इन नए विषयों के शुरू होने से छात्राओं को अब उच्च शिक्षा के लिए अन्य जिलों या दूरस्थ संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे विशेषकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की छात्राओं को अपने ही जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिलेगा। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नए पदों और विषयों की शुरुआत से संस्थान को एक नई पहचान मिलेगी और छात्राओं के प्रवेश में वृद्धि होने की संभावना है। उन्होंने इसे महाविद्यालय के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। प्राचार्य डॉ. कुमार ने इस उपलब्धि के लिए सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी के सहयोग और प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों के योगदान की भी सराहना की। महाविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह कदम न केवल संस्थान के विकास को गति देगा, बल्कि महिला शिक्षा को बढ़ावा देने और छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
शेखपुरा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को NEET पेपर लीक, ग्रेस मार्क्स में गड़बड़ी और महंगाई के विरोध में आक्रोश मार्च निकाला। जिला कांग्रेस अध्यक्ष आनंदी कुमार यादव और युवा नेता राहुल कुमार के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका। उन्होंने दोनों से इस्तीफे की मांग की। कार्यकर्ता जिला कांग्रेस कार्यालय, आजाद हिंद आश्रम में एकत्र हुए। जिला अध्यक्ष आनंदी यादव ने कहा कि NEET में हुई धांधली से देश के 24 लाख छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार शिक्षा का निजीकरण कर रही है। NEET में घोटाला बंद करो के नारे इसके बाद, NEET में घोटाला बंद करो, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो और मोदी सरकार हाय-हाय जैसे नारे लगाते हुए मार्च आजाद हिंद आश्रम से शुरू होकर पटेल चौक तक पहुंचा। कार्यकर्ताओं के हाथों में स्लोगन लिखी तख्तियां थीं। मार्च के दौरान दुकानदारों और राहगीरों ने भी छात्रों के प्रति समर्थन व्यक्त किया। पटेल चौक पर कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का संयुक्त पुतला दहन किया। युवा नेता राहुल कुमार ने मशाल जलाकर पुतले में आग लगाई। पत्रकारों से बात करते हुए राहुल कुमार ने आरोप लगाया कि बीजेपी की डबल इंजन सरकार ने शिक्षा माफिया को खुली छूट दे दी है। ''ग्रेस मार्क्स का खेल केंद्र सरकार की साजिश'' उन्होंने कहा कि NEET पेपर लीक, 67 छात्रों को 720/720 अंक मिलना और ग्रेस मार्क्स का खेल केंद्र सरकार की साजिश है। उन्होंने आगे कहा कि इससे गरीब किसान के बेटे के डॉक्टर बनने का सपना टूट जाता है, जबकि अमीर छात्र पैसे देकर सीट खरीद लेते हैं। कांग्रेस ने NEET परीक्षा रद्द करने, CBI जांच कराने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की। शेखपुरा से हर साल सैकड़ों छात्र NEET की तैयारी करते हैं। उनके माता-पिता अक्सर फीस भरने के लिए अपनी जमीन तक बेच देते हैं। और इधर भाजपा के लोग पेपर बेच रहे हैं। राहुल गांधी जी ने कहा था नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोलो। हम भी कह रहे हैं - शिक्षा के बाजार में दलाली बंद करो। शिक्षा बचाओ, देश बचाओ आंदोलन और होगा तेज जब तक न्याय नहीं मिलेगा, कांग्रेस सड़क पर उतरेगी। जिला अध्यक्ष आनंदी यादव ने ऐलान किया कि अगर 7 दिन में सरकार ने मांग नहीं मानी तो शेखपुरा में छात्रों के साथ मिलकर शिक्षा बचाओ, देश बचाओ आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस मौके पर कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष कुमार सत्यजीत, कार्यकारी जिला अध्यक्ष रौशन कुमार, राजेश रंजन उर्फ़ गुरु मुखिया,, महेंद्र कुशवाहा, पप्पू राज मंडल,गोरेलाल कुशवाहा,आमिर राज मंडल,विपिन चौरसिया, गोल्डन खान,शंकर प्रसाद भैया जी ,दानी प्रसाद,प्रेम गुप्ता सहित अन्य शामिल थे।
पलवल में मिड-डे मील वर्कर्स और किसान संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया। ताऊ देवीलाल पार्क में हुए प्रदर्शन के बाद उन्होंने शिक्षा मंत्री का पुतला जलाया। यूनियन नेताओं ने सरकार पर वायदाखिलाफी और गरीब वर्ग के शोषण का आरोप लगाया है। प्रदर्शन की अध्यक्षता सीटू की जिला प्रधान रामरती चौहान, अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान रूपराम तेवतिया और रिटायर्ड कर्मचारी संघ के जिला प्रधान बलजीत शास्त्री ने की। शिक्षा मंत्री की कार्यशैली से नाराज प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री की कार्यशैली पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार मिड-डे मील वर्कर्स की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज कर रही है। उनकी प्रमुख मांगों में वर्कर्स को 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन देना शामिल है। उन्होंने वर्तमान मानदेय को बहुत कम बताते हुए इसे बढ़ाकर 12 महीने का भुगतान सुनिश्चित करने और सेवानिवृत्ति पर उचित लाभ व सुविधाएं प्रदान करने की मांग की। वर्कर्स के मानदेय में कोई वृद्धि नहीं सीटू की प्रधान रामरती चौहान और सचिव उर्मिला रावत ने बताया कि जब मिड-डे मील वर्कर्स का मानदेय तय किया गया था, तब हरियाणा का न्यूनतम वेतन 9,000 रुपए था। अब यह बढ़कर 15,220 रुपए हो गया है, लेकिन इन वर्कर्स के मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की गई है। किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान और धर्मचंद ने सरकार की बिजली नीति की आलोचना की। सरकार बिजली का निजीकरण कर रही उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिजली का निजीकरण कर रही है और 'एग्री डिस्काम' नाम से पांचवीं कंपनी बना रही है। इससे किसानों को मिलने वाली क्रॉस सब्सिडी समाप्त हो जाएगी। उन्होंने स्मार्ट और प्रीपेड मीटरों को जबरन थोपे जाने का भी कड़ा विरोध किया। नेताओं ने तेल, गैस और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे गरीब जनता के साथ अन्याय बताया। प्रदर्शन में ये रहे शामिल प्रदर्शन के दौरान सर्वसम्मति से भविष्य की रणनीति तय की गई। इसके तहत, 4 अगस्त को कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री आवास का घेराव और पड़ाव किया जाएगा। दस अगस्त को जिला स्तर पर जेल भरो आंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रदर्शन को संबोधित करने वालों में किसान नेता दरियाब सिंह, किशनचंद शर्मा, समयराम कुंडू, हरिचंद वर्मा, रमेशचंद, भागीरथ, कर्ण सिंह आर्य व नंद किशोर शर्मा आदि मौजूद रहे।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शिक्षा विभाग की ओर से खरीदी गई कुर्सियों को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि GeM पोर्टल के जरिए 200 रुपए की कुर्सी 2000 रुपए में खरीदी गई। इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने सोशल मीडिया पर फैलाई गई जानकारी पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि विभाग ने 200 रुपए वाली प्लास्टिक कुर्सी की कोई खरीद नहीं की है। 1500-1500 रुपए में 100 स्टील फ्रेम कुशन चेयर खरीदी गईं। वहीं, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कांग्रेस के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि बिना जांच के इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है। बाजार में सामान्य कुर्सियों की कीमत भी हजार रुपये से अधिक होती है। जानिए क्या है पूरा मामला ? जानकारी के मुताबिक दुर्ग शिक्षा विभाग ने अक्टूबर 2025 को कुर्सी खरीदी थी। इसके ठीक 9 महीने बाद यानी 16 जून 2026 को कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा- 'दुर्ग शिक्षा विभाग में GeM पोर्टल के जरिए 200 रुपए की कुर्सी 2000 रुपए में खरीदने का मामला भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार के पाल खोल रहा है। एक तरफ जनता महंगाई से पिस रही है। दूसरी तरफ पारदर्शिता के नाम पर बनाए गए GeM पोर्टल के जरिए सरकारी खजाने को खुलआम लूटने का काम चल रहा है'। DEO बोले- आरोप पूरी तरह गलत जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाई गई जानकारी पूरी तरह गलत और भ्रामक है। विभाग ने 200 रुपये वाली प्लास्टिक कुर्सी की कोई खरीद नहीं की है। 27 जून 2025 को कलेक्टर और आयुक्त ने जिला ग्रंथालय का निरीक्षण किया था। उस समय बैठने की व्यवस्था अपर्याप्त पाई गई, जिसके बाद अतिरिक्त कुर्सियों की खरीद का प्रस्ताव तैयार किया गया। स्टील कुशन चेयर खरीदी का दावा शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार ग्रंथालय के लिए 100 स्टील फ्रेम कुशन चेयर खरीदी गईं। हर चेयर की कीमत 1500 रुपए तय की गई। पूरी खरीद GeM पोर्टल के जरिए नियमों के अनुसार की गई। विभाग ने कहा कि इस खरीद से जुड़े सभी दस्तावेज, भुगतान रिकॉर्ड, फोटो और वीडियो उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर इनका परीक्षण किया जा सकता है। शिक्षा मंत्री बोले- बिना जांच आरोप लगाना गलत शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कांग्रेस के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि बिना जांच के इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है। बाजार में सामान्य कुर्सियों की कीमत भी हजार रुपये से अधिक होती है। संबंधित कुर्सी स्टील फ्रेम और कुशन वाली है, जिसकी कीमत 1500 रुपये या उससे अधिक रहती है। मंत्री ने यह भी कहा कि मामले की जानकारी लेने के बाद उन्हें पूरा भरोसा है कि खरीद नियमों के अनुसार हुई है। उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि किसी भी आरोप से पहले तथ्य जांचे जाएं। …………….. यह खबर भी पढ़िए… बिना CGMC मंजूरी छत्तीसगढ़ में काम कर सकेंगे बाहरी डॉक्टर: जूडा बोला- फर्जीवाड़ा बढ़ेगा, लोकल्स की नौकरी खतरे में; स्वास्थ्य मंत्री बोले- व्यवस्था सुधरेगी छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल काउंसिल की ओर से जारी नोटिफिकेशन के बाद प्रदेश में विवाद छिड़ गया है। दोनों नोटिफिकेशन 15 दिन के भीतर जारी किए हैं। पहला नोटिफिकेशन 27 मई को छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल ने जारी किया। पढ़ें पूरी खबर…
शिक्षा में एक नये युग एवं शैक्षिक क्रांति की आहट
आज पूरी दुनिया शिक्षा के एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां ज्ञान का विस्तार तो अभूतपूर्व हुआ है, लेकिन जीवन मूल्यों का क्षरण भी उतनी ही तेजी से दिखाई देता है। विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को सुविधासंपन्न बनाया है, लेकिन मानसिक तनाव, हिंसा, प्रतिस्पर्धा, नैतिक संकट और मानवीय संवेदनाओं के क्षय जैसी ... Read more
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों को बीच में ही पढ़ाई छोड़ने (ड्रॉपआउट) से रोकने के लिए केजरीवाल सरकार के शिक्षा निदेशालय ने एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। नए नियमों के मुताबिक, अब परीक्षाओं में असफल या फेल होने वाले छात्रों को स्कूल से बाहर नहीं निकाला जाएगा और न ही उनकी पढ़ाई अधूरी छूटेगी। अक्सर देखा जाता था कि नौवीं या ग्यारहवीं कक्षा में फेल होने के बाद छात्र निराश होकर स्कूल छोड़ देते थे या स्कूल प्रशासन उन्हें दोबारा दाखिला देने में आनाकानी करता था। इस गंभीर समस्या को खत्म करने के लिए सरकार ने अब नीतिगत स्तर पर बड़ा बदलाव कर दिया है।क्लास में फेल होने वाले हर बच्चे को मिलेगा दोबारा रेगुलर एडमिशन दिल्ली शिक्षा निदेशालय (Directorate of Education) द्वारा जारी किए गए नए सर्कुलर के अनुसार, अब राजधानी के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रिंसिपलों को यह कड़ा निर्देश दिया गया है कि वे फेल होने वाले किसी भी छात्र को री-एडमिशन (दोबारा दाखिला) देने से मना नहीं कर सकते। इन बच्चों को भी अन्य नियमित छात्रों की तरह ही स्कूल आने, कक्षाओं में बैठने और सभी शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेने का पूरा अधिकार होगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के मन से असफलता का डर निकालना और उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़े रखना है।कमजोर छात्रों के लिए स्कूलों में चलेंगी स्पेशल रेमेडियल क्लासेज सिर्फ दोबारा दाखिला देना ही इस नियम का हिस्सा नहीं है, बल्कि फेल हुए छात्रों की पढ़ाई को मजबूत करने के लिए स्कूलों को विशेष रणनीति बनाने को कहा गया है। इन बच्चों के लिए स्कूल के समय के दौरान या बाद में स्पेशल रेमेडियल क्लासेज (अतिरिक्त कक्षाएं) आयोजित की जाएंगी। इसमें शिक्षकों द्वारा उन विषयों पर खास ध्यान दिया जाएगा जिनमें छात्र कमजोर हैं या फेल हुए हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यक्तिगत ध्यान और अतिरिक्त सहयोग से छात्र न केवल अपनी कमियों को सुधार सकेंगे, बल्कि अगली परीक्षा में बेहतर अंकों के साथ पास भी हो सकेंगे।ड्रॉपआउट रेट को जीरो पर लाने के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा मास्टरस्ट्रोक शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली सरकार का यह फैसला नई शिक्षा नीति (NEP) और शिक्षा के अधिकार (RTE) के मूल सिद्धांतों को जमीन पर उतारने जैसा है। अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे एक बार फेल होने के बाद मजदूरी या अन्य कामों में लग जाते थे, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता था। इस नए नियम के आने के बाद दिल्ली के सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट रेट में भारी गिरावट आने की उम्मीद है। दिल्ली के अभिभावकों और शिक्षक संगठनों ने सरकार के इस छात्र-हितैषी फैसले का स्वागत किया है और इसे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने वाला कदम बताया है।
बचपन को श्रम नहीं, शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का अधिकार मिलें
बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस-12 जून 2026 हर वर्ष 12 जून को मनाया जाने वाला बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि मानवता के अंतःकरण को झकझोरने वाला अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि दुनिया का कोई भी बच्चा मजदूर बनने के लिए पैदा नहीं होता। ... Read more
त्रिभाषा फार्मूला है भारत की शिक्षा का नया क्षितिज
भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि भाषाओं, बोलियों, संस्कृतियों और परंपराओं का विराट संगम है। यहां भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान, संस्कृति, संवेदना और सामाजिक चेतना का आधार भी है। ऐसे बहुभाषी देश में शिक्षा व्यवस्था को किस भाषा में संचालित किया जाए और बच्चों को कौन-कौन सी भाषाएं पढ़ाई जाएं, यह ... Read more
ललित सुरजन की कलम से - शिक्षा और परीक्षा
'जब हम पढ़ रहे थे, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, आईआईएम तब भी थे।
सरकारी स्कूलों की चुनौतियां और बदलता शिक्षा परिदृश्य
शिक्षा किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति, सामाजिक गतिशीलता और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की आधारशिला है।
Fact Check: क्या बिहार के शिक्षा मंत्री ने कहा लड़कियों को शिक्षा की जरूरत नहीं? सच जानिए
बूम ने पाया कि बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने Agitation शब्द का इस्तेमाल किया था जिसे एजुकेशन समझकर गलत दावा किया जा रहा है.
कन्नड़ मूवी 'केडी: द डेविल' के गाने 'सरके चुनर' पर विवाद अभी भी जारी है। इस गाने के बोल और फिल्मांकन पर बढ़ते विवाद के बाद नोरा फतेही को राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के समक्ष पेश होना पड़ा। नोरा ने न केवल अपनी स्थिति स्पष्ट की, बल्कि भविष्य के लिए एक ...
पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु का रिश्वत लेते हुए वीडियो फर्जी और एआई जनरेटेड है
बूम ने पाया कि ब्रात्य बसु का वीडियो गूगल के SynthId का उपयोग करके एआई द्वारा जनरेट किया गया है.
समानता और शिक्षा की क्रांतिकारी मशाल: सावित्रीबाई फुले
10मार्च सावित्रीबाई फुले महापरिनिर्वाण दिवस भारतीय समाज में जब भी शिक्षा,समानता और सामाजिक न्याय की बात उठती है,तो एक नाम इतिहास के पन्नों से निकलकर हमारे सामने खड़ा हो जाता है—सावित्रीबाई फुले।10मार्च को उनका महापरिनिर्वाण दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है,बल्कि यह दिन उस सामाजिक चेतना को याद करने का अवसर है,जिसने सदियों ... Read more
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समर्थन से भारत शिक्षा के सभी स्तरों पर एआई शिक्षण और रिसर्च को एकीकृत करके खुद को एक वैश्विक एआई महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है
शिक्षा को हिंसक नहीं, संवेदनशील बनाना होगा
देश में इन दिनों बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं और सामान्य परीक्षाएं भी शुरू होने वाली हैं। हर साल की तरह इस बार भी परीक्षा का मौसम केवल प्रश्नपत्रों और परिणामों का नहीं, बल्कि मानसिक दबाव, चिंता और असुरक्षा का मौसम बनता जा रहा है। छात्रों के चेहरों पर भविष्य की चिंता साफ पढ़ी जा ... Read more
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
NEET UG रिजल्ट को लेकर अभी भी जारी है गुस्सा, छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के पास किया विरोध प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए छात्रों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। आइए जानते हैं, क्या है पूरा म
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का 10 फीसदी भी डाटा नहीं हुआ अपलोड
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का डाटा अपलोड करने में जिले के कई स्कूल ढील दे रहे हैं, वे 10 फीसदी छात्रों का भी डाटा अभी तक अपलोड नहीं कर पाए हैं। डाटा अपलोड करने में आधार कार्ड की अनिवार्यता के बाद से छ
बेसिक शिक्षा : दो महीने बाद भी 1.38 लाख छात्रों का डेटा नहीं हुआ अपडेट
बेसिक शिक्षा विभाग के यू डायस पोर्टल पर डेटा अपडेट करने का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। हाल ये है कि दो महीने में महज 1.38 लाख छात्रों डेटा भी अपडेट नहीं हुआ। विभाग ने अब 5 जून तक इसे पूरा करने क
स्कूलों में कैसे पढ़ा रहे हैं शिक्षक, वीडियो में देखेगा शिक्षा विभाग, होगी रिकॉर्डिंग
शिक्षा विभाग वीडियो के जरिए देखेगा कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षक छात्रों को कैसे पढ़ाते हैं। बता दें. छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षकों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। आइए जानते हैं विस्तार से।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति : यूपी बोर्ड ने दिए निर्देश, एनईपी लागू करने को स्कूल बनाएंगे प्लान
यूपी बोर्ड से जुड़े 27 हजार से अधिक स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू करने के लिए स्कूल स्तर पर योजना बनाई जाएगी। एनईपी 2020 के विषय में विद्यालयों में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
बॉलीवुड का ये सुपरस्टार युवाओं को IAS बनाने के लिए मुफ्त में देगा शिक्षा, योजना से अबतक जुड़ चुके है7000 युवा
राम बनने के लिएधनुष-बाण चलाने की शिक्षा ले रहे है Ranbir Kapoor, एक्टर केआर्चरी ट्रेनर ने शेयर की तस्वीरें

