बड़वानी जिले की स्थापना को 28 वर्ष पूरे हो गए हैं, लेकिन आज भी यहां के ग्रामीण पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। जिले के लोग दशकों से रेल मार्ग की मांग कर रहे हैं, जो अभी तक पूरी नहीं हुई है। मध्य प्रदेश के अंतिम छोर पर महाराष्ट्र सीमा पर स्थित बड़वानी जिला अपने पुराने किलों और इमारतों के लिए 'निमाड़ का पेरिस' कहलाता था। हालांकि, वर्तमान में कई रियासतकालीन भवन और किले जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। जिले में स्कूल-कॉलेजों और अस्पतालों की भी कमी है। अंचलों में स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा व्यवस्था बदहाल समाजसेवी अजीत जैन ने बताया कि आजादी के सात दशक और जिले की स्थापना के 28 साल बाद भी ग्रामीण तथा पहाड़ी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की कमी है, जबकि कई स्कूल अतिथि शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। जिले के कई सरकारी स्कूलों में बिजली नहीं है। पहाड़ी क्षेत्रों में चार पहिया वाहनों की आवाजाही भी मुश्किल है। गड्ढे खोदकर 'झीरी' से पानी निकाल रहे रहवासी पाटी विकासखंड के खेरवानी, सेमलेट, पीपरकुंड, चेरवी, सागमाल जैसे कई पहाड़ी गांवों के निवासी आज भी गड्ढे खोदकर 'झीरी' से पानी निकालते हैं। उन्हें दूषित नदी-नालों का पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ता है। रेल लाइन की मांग अधिवक्ता शिवपाल सिंह सिसोदिया बताया कि जिले की स्थापना के बाद से ही रेल लाइन की मांग सबसे प्रमुख रही है, क्योंकि इसके बिना विकास की गति धीमी है। बड़वानी की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है, जहां केला, मिर्च, टमाटर और कपास जैसी फसलें उगाई जाती हैं, जिनका निर्यात देश-विदेश में होता है। कई गांवों में पानी की समस्या नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने कहा कि विकेंद्रीकरण केवल शहर स्तर पर नहीं, बल्कि गांव-गांव तक होना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि 'जल जीवन योजना' के बावजूद कई गांवों में पानी की समस्या बनी हुई है। बड़वानी जिले के 28 वें स्थापना दिवस पर जश्न के बीच ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी से जूझ रहे हैं। जिले के दूरदराज इलाकों में आज भी शुद्ध पेयजल की किल्लत, स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, शिक्षा की खराब स्थिति और जर्जर सड़कें स्थानीय लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। आपात स्थिति एंबुलेंस का पहुंचना मुश्किल दूरदराज के गांवों में उच्च शिक्षा, स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी शैक्षणिक सुविधाओं की लचर व्यवस्था के कारण बच्चों के भविष्य पर असर पड़ रहा है। अधिकांश ग्रामीण इलाकों में कनेक्टिविटी की समस्या है। कई गांवों और फलियों तक पक्की सड़कें (CC Road) न होने के कारण आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस या अन्य वाहन पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। हर गांव तक पानी पहुंचने का प्रयास प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने बताया कि हमारी टीम द्वारा पेयजल की समस्याओं को लेकर समाधान कर रहे हैं। धरातल पर पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। मां नर्मदा का आशीर्वाद हमें मिल रहा है। शुद्ध पानी हर मजरे, टोले हर फलिये में मिले। इसको लेकर सरकार लगातार प्रयास कर रही है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रयास कलेक्टर जयति सिंह ने बताया कि जिले में डाक्टरों और स्टॉप की कमी है। लेकर हम प्रयास कर रहे कि जिले को स्पेशल डॉक्टर मिल जाए तो स्वास्थ्य व्यवस्था और बेहतर होगी।
झालावाड़ में महिला एवं बाल विकास विभाग और रॉकेट लर्निंग संस्था ने 'मिशन बुनियाद' कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों पर पूर्व प्राथमिक शिक्षा को प्रभावी बनाना और बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम का नेतृत्व उपनिदेशक रविंद्र कुमार मीणा और संस्थापन अधिकारी अहमद हसन कुरैशी ने किया। इसका मुख्य लक्ष्य ऑनलाइन मॉनिटरिंग के माध्यम से शिक्षण गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करना है। इस अवसर पर जिले की सभी महिला सुपरवाइजर और विभागीय कार्मिक उपस्थित रहे। रॉकेट लर्निंग संस्था की ओर से चितरंजन नामा, भुवनेश पंकज, बसंतीलाल प्रजापत और आफताब नूर ने कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर पूर्व प्राथमिक शिक्षा गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने, बच्चों में प्रारंभिक सीखने की क्षमताओं का विकास करने तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के कौशल संवर्द्धन पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि 'मिशन बुनियाद' के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों को नवाचार आधारित शिक्षण गतिविधियों से जोड़ा जाएगा, जिससे बच्चों के सीखने के स्तर में गुणात्मक सुधार आएगा। उन्होंने इस पहल को गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और सभी संबंधित कार्मिकों से सक्रिय सहयोग का आह्वान किया।
हाल ही में एक एजेंसी के सर्वे में सामने आया कि दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में इंडिया के 97 शहर है। देश में इतनी गर्मी बढ़ने के पीछे जिम्मेदार भी हम ही है। उन्होंने कहा राजस्थान में प्रति व्यक्ति 472 पेड़ की आवश्यकता है और वर्तमान में प्रति व्यक्ति सिर्फ 25 पेड़ है। पर्यावरण का संतुलन नहीं है। हमने निर्मम तरीकों से पेड़ों की कटाई की लेकिन पेड़ लगाए नहीं है। यह बात रविवार को पाली शहर के गोल निम्बड़ा के निकट शनिधाम में आयोजित प्रतिभावान सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्र मदन दिलावर ने कही। उन्होंने अपने संबोधन में जल-पर्यावरण और गायों के संरक्षण की बात कही। साथ ही प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने की सलाह दी। बोले - हमने निर्मत तरीकों से पेड़ों की कटाई की, इसलिए गर्मी बढ़ रहीमंत्री मदन दिलावर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में हम बहुत पिछड़े हुए है। कनाडा में प्रति व्यक्ति 10163 पेड़ है।, अफ्रीम में 3 हजार, ऑस्टेलिया में 6 हजार, चाईना में 130, यूके में 47, भारत में 28 और राजस्थान में प्रति व्यक्ति सिर्फ 25 पेड़ है। जो बहुत कम है। पेड़ कम होने के चलते बरसात कम हो रही भूजल नीचे जा रहा है। जमीन की नमी कम हो रही। जिससे गर्मी बढ़ रही है। पॉलिथीन हमारा दुश्मनउन्होंने कहा कहा कि पॉलिथिन जानवरों से लेकर इंसानों के लिए बहुत घातक है। इसे खाने से गायें मर रही है। नाले में जाती है तो नाली डट जाती है। जलाते है तो जहरीली गैस निकलती है जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक की थैलियां खाने से गायों की मौत हो रही है। उन्होंने सभी को संकल्प दिलाया कि पॉलिथिन का उपयोग न करें। उन्होंने कहा कि इसका उपयोग करने वाले को गौ माता की हत्या का पाप लगेगा। सरकारी स्कूल के बच्चे आ रहे मेरीट में, भारत सरकार ने सहाराउन्होंने कहा कि सरकारी स्कूल के बच्चे अब मेरीट में आ रहे है जो दिखाने के लिए अच्छा है कि राजस्थान में सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने भी प्रदेश की सरकारी स्कूलों में शिक्षा प्रणाली में हुए बदलाव को सराहा। उन्होंने बताया कि 65 लाख बच्चों का स्वास्थ्य प्रशिक्षण भी करवाया। पहले वर्ण व्यवस्था थी जात-पात नहीं, हमें बांटने के लिए जातियां बनाईमंत्री मदन दिलावर ने कहा कि हम सभी के लिए देश हित सबसे पहले होना चाहिए। क्योंकि देश प्रगति करेगा तो हम प्रगति करेंगे। उन्होंने बताया कि पहले काम के आधार पर व्यवस्था थी। क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य और शुद्र। लेकिन हम पर अंग्रेजों, मुगलों ने शासन किया। मुगलों ने इस्लाम स्वीकार करने के लिए कहा। जिन्होंने स्वीकार नहीं किया उन्हें गंदगी उठाने, मरे जानवर उठाने जैसे छोटे काम दिए। जिन्हें बाद में जातियों में बदल दिया गया। जबकि पहले देश में जात-पात नहीं होती थी। भगवान श्रीराम ने शबरी के झूठे बेर खाए जो बताते है कि जात-पात नहीं होती थी।
बांसवाड़ा दौरे पर पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा- मैं हमेशा ‘अकबर महान’ पढ़ता था, जिससे मन में पीड़ा होती थी। जिस आक्रांता ने इस राष्ट्र पर आक्रमण किया, उसे हम महान कहेंगे? इसलिए शिक्षा मंत्री बनते ही मैंने पाठ्यक्रम में बदलाव किया और ‘अकबर महान’ को हटाकर ‘प्रताप महान’ किया और पाठ्यक्रम में शामिल किया। उन्होंने कहा- अभी तक पढ़ रहे होंगे कि भारत की खोज किसने की? तो वास्कोडिगामा का नाम आता है। यानी अंग्रेजों ने और उनसे पहले इस देश पर शासन करने वालों ने हमें हमारी जड़ों से काटा। भारत कितना पुराना है? शायद सनातन 5 हजार या 10 हजार साल पुराना है, उसको वास्कोडिगामा खोजेगा? हमने विश्व को खोजा है, हमको किसी ने नहीं खोजा। GGTU में अध्ययन पीठ का शुभारंभ वासुदेव देवनानी रविवार को बांसवाड़ा दौरे पर पहुंचे। गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय (GGTU) में पंडित दीनदयाल उपाध्याय अध्ययन पीठ का शुभारंभ किया। विश्वविद्यालय पहुंचने पर कुलपति केशव ठाकुर ने गुलदस्ता भेंट कर उनका स्वागत किया। कार्यक्रम में गढ़ी विधायक कैलाश मीणा, पूर्व कुलपति एवं संरक्षक कैलाश सोडाणी सहित कई प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इतिहास पर बोले- ‘हमने विश्व को खोजा है, हमें किसी ने नहीं खोजा’ कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कृति और भारतीय चिंतन को लेकर चर्चा के दौरान वासुदेव देवनानी ने कहा- भारत हजारों साल पुरानी सनातन संस्कृति वाला देश है। हमने विश्व को खोजा है, हमें किसी ने नहीं खोजा। उन्होंने कहा कि विदेशी शासकों ने भारतीय इतिहास और संस्कृति को कमजोर करने का काम किया। बांसवाड़ा के विकास कार्यों की सराहना की कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में देवनानी ने कहा-मुझे अच्छी तरह याद है कि जब मैं पहली बार 1970-71 में बांसवाड़ा आया था, तब यहां का बस स्टैंड, सड़कें और हालात बिल्कुल अलग थे। आज बांसवाड़ा में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बीच की सरकारों ने भी काम किया और वर्तमान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्राथमिकता में भी बांसवाड़ा का चौतरफा विकास शामिल है। त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में दर्शन, प्रशासन रहा अलर्ट GGTU के कार्यक्रम और स्थानीय मुलाकातों के बाद विधानसभा अध्यक्ष के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए जाने का कार्यक्रम तय हुआ। वीआईपी दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर रहा। विश्वविद्यालय परिसर से लेकर मंदिर तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।
शिक्षा मंत्री ने 421 स्टूडेंट्स को किया सम्मानित:बोले-शिक्षा से ही खुद का और समाज का विकास संभव
पाली शहर के निकट गोल निबड़ा खेतावास रोड स्थित शनिधाम में रविवार को बाबा साहेब प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शनिधाम के महामंडलेश्वर स्वामी निजस्वरूपानंदपुरी के सान्निध्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर मौजूद रहे। आयोजन दाती सेवा संस्थान एवं वादी नट भाट जागृति संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। समारोह में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 421 छात्र-छात्राओं को बाबा साहेब शिक्षा रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। शिक्षा मंत्री और संत निजस्वरूपानंदपुरी ने विद्यार्थियों को सम्मान प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस दौरान शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा के जरिए न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामाजिक विकास भी संभव है, इसलिए विद्यार्थियों को पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित करना चाहिए। 9 जिलों के 421 प्रतिभावान विद्यार्थियों का हुआ सम्मान इस सम्मान समारोह में पाली, जोधपुर, जालोर, सिरोही, बाड़मेर, सांचौर, बालोतरा, नागौर और ब्यावर जिलों के करीब 421 प्रतिभावान विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य विशेष पिछड़ा वर्ग, वादी नट भाट, मेघवाल, रैगर (जीनगर), भील, खटिक, वाल्मीकि, दमामी, सरगरा और कामड़ समाज के होनहार विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाना रहा। मंच संचालन गजेंद्र गर्ग ने किया। संतों और गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी कार्यक्रम में सीओ ग्रामीण अमरसिंह रत्नू, समाजसेवी मेघराज सिंह, हरजेश नाराणीया, सागर नाराणीया, मुकेश भाटी, जयेश सोलंकी, मुकेश मेघवंसी, श्रीमहंत श्रद्धापुरी, श्रीमहंत दयापुरी, मां शिवानी, प्रज्ञानंद, ओम महाराज, लाल महाराज, पहलाद कंडारा, नरेंद्र, कालू मारू, सुंगनाराम, ओम फौजी, फोजाराम, मांगीलाल चेराई, घेवरराम, प्रकाश कुमार, भंवर राजपुरा, शिवजीसिंह जेतावत, कन्नू भीलवाड़ा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
नालंदा के नगरनौसा प्रखंड में बहुप्रतीक्षित डिग्री कॉलेज की स्थापना तो हो गई है, लेकिन इसके स्थान चयन को लेकर अब विवाद गहराता जा रहा है। कॉलेज के संचालन को लेकर दो खेमे आमने-सामने हैं। एक पक्ष जहां लोदीपुर स्थित मगध विद्यापीठ उच्च विद्यालय में ही पढ़ाई जारी रखने की मांग कर रहा है, तो दूसरा पक्ष कॉलेज को नगरनौसा बाजार स्थित बालिका उच्च विद्यालय में शिफ्ट कराने के लिए दबाव बना रहा है। लोदीपुर में ही कॉलेज रखने के पक्ष में उठ रही आवाज स्थानीय लोगों और विद्यार्थियों का एक बड़ा वर्ग लोदीपुर के पक्ष में खड़ा है। उनका तर्क है कि यहां कॉलेज के लिए पर्याप्त आधारभूत संरचना मौजूद है। स्थानीय निवासी कवीन्द्र पासवान ने बताया कि स्कूल के पास 4 एकड़ 63 डिसमिल जमीन है। कॉलेज संचालन के लिए 20 कमरे उपलब्ध हैं। कई जगहों पर प्रखंड मुख्यालय से दूर कॉलेज का संचालन सफलतापूर्वक किया जा रहा है, इसलिए सुविधा के लिहाज से लोदीपुर ही सबसे उपयुक्त स्थान है। सुरक्षा और शांत वातावरण है प्राथमिकता कॉलेज को बाजार ले जाने के प्रस्ताव पर छात्राओं में भारी नाराजगी है। छात्रा चांदनी कुमारी और आरती कुमारी ने कहा कि बाजार में शोर-शराबे और यातायात की समस्या के कारण पढ़ाई बाधित होगी। बाजार में असामाजिक तत्वों द्वारा छेड़खानी का डर बना रहता है, जबकि लोदीपुर का वातावरण सुरक्षित और शांत है। जो उच्च शिक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। परीक्षा के दौरान भीड़ बढ़ने पर बाजार में जाम की समस्या भी विकराल रूप ले लेगी, जिससे आम लोगों और छात्रों को भारी परेशानी होगी। राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए कॉलेज को बाजार शिफ्ट कराने की कोशिश कर रहे हैं। शिक्षा के केंद्र को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। राजनीति करना छात्र हित में ठीक नहीं है। डॉ. प्रोफेसर संजय कुमार बने प्रिंसिपल नगरनौसा में डिग्री कॉलेज की लंबे समय से मांग चल रही थी। इस दिशा में पहल करते हुए बीते 11 मई को पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय अंतर्गत 'कॉलेज ऑफ कॉमर्स, आर्ट्स एंड साइंस, पटना' के राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रोफेसर संजय कुमार ने डिग्री महाविद्यालय के प्राचार्य के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। वर्तमान में कॉलेज का शुभारंभ लोदीपुर स्थित उच्च विद्यालय परिसर से ही किया गया है। अब सबकी निगाहें प्रशासनिक निर्णय पर टिकी है। क्या कॉलेज लोदीपुर में ही रहेगा या इसे बाजार शिफ्ट करने के दबाव को स्वीकार किया जाएगा।
डॉ. प्रदीप कुमावत को भारत शिक्षा रत्न अवार्ड
उदयपुर | शिक्षा, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवादी शिक्षा दृष्टि के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उदयपुर के शिक्षाविद् डॉ. प्रदीप कुमावत को भारत शिक्षा र| अवार्ड से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली स्थित कंस्टीटूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित समारोह में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने उन्हें रजत पट्टिका और प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में राजाराम लक्ष्मण सिंह, जनार्दन सिंह सिगरीवाल और सुरेंद्र चौधरी विशिष्ट अतिथि रहे। स्वागत उद्बोधन में ज्ञानेंद्र विश्वकर्मा ने कहा कि डॉ. कुमावत ने शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और महाराणा प्रताप के शौर्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
कागजों में ही मॉडल:प्रदेश के 55 ‘पीएम श्री’स्कूलों में शिक्षा से मोहभंग, 9576 नामांकन घटा
शिक्षा विभाग ने इस बार नामांकन बढ़ाने के लिए एक अप्रैल से नया सत्र प्रारंभ किया था। इसको डेढ़ महीना बीतने के बाद जब शिक्षा विभाग ने नामांकन की रिपोर्ट मांगी तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। प्रदेश के 175 स्कूल ऐसे थे, जिनमें पिछले सत्र के मुकाबले नामांकन 100 या इससे अधिक की कमी आई है। इन 175 स्कूलों में 55 पीएम श्री स्कूल है। इन स्कूलों को नई शिक्षा नीति के मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित किया जा रहा है। विभाग ने पीएम श्री स्कूलों में नामांकन बढ़ाने को लेकर जोर लगाया, इसके बावजूद नामांकन घट गया। यहां सर्वाधिक नामांकन घटा अफसर अन्य कामों लगा रहे हैं शिक्षकों की ड्यूटी विभाग के अधिकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए आदेश तो जारी करते हैं, लेकिन ये आदेश जमीनी स्तर पर हवा हो जाते हैं। इसका कारण है कि वे ही अधिकारी शिक्षकों को कई गैर शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त रखते हैं। स्कूलों में तरह-तरह की अनावश्यक योजनाएं संचालित होती है। शाला दर्पण पर मौजूद होते हुए भी तरह-तरह की जानकारियां मांगी जाती है। संस्था प्रधान इन्हीं कामों में उलझे रहते हैं। विभाग के अधिकारियों को चाहिए कि वे स्कूलों में संस्था प्रधान व शिक्षकों को पढ़ाने का पर्याप्त समय दे, ताकि अभिभावक स्कूलों की तरफ आकर्षित हो और बच्चों का प्रवेश करा सके। प्रदेश में 639 पीएम श्री स्कूल; नामांकन घटने के तीन कारण संस्था प्रधानों की उदासीनता संस्था प्रधानों ने सरकार के प्रवेशोत्सव अभियान को गंभीरता से नहीं लिया। इस कारण नामांकन बढ़ाने में विफल रहे। नोटिस जारी किए गए। बुनियादी ढांचे की धीमी रफ्तार कागजों पर स्कूलों को ‘हाई-टेक’ बनाने की योजना तो है, लेकिन बजट आवंटन और प्रशासनिक देरी से डिजिटल लैब, कंप्यूटर व इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव। निजी स्कूलों से प्रतिस्पर्धा सरकारी स्तर पर सुविधाओं के समय पर न पहुंचने के कारण अभिभावकों का मोहभंग हो रहा है और वे बच्चों को निजी माध्यम स्कूलों की तरफ भेज रहे हैं। अफसर अन्य कामों लगा रहे हैं शिक्षकों की ड्यूटी विभाग के अधिकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए आदेश तो जारी करते हैं, लेकिन ये आदेश जमीनी स्तर पर हवा हो जाते हैं। इसका कारण है कि वे ही अधिकारी शिक्षकों को कई गैर शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त रखते हैं। स्कूलों में तरह-तरह की अनावश्यक योजनाएं संचालित होती है। शाला दर्पण पर मौजूद होते हुए भी तरह-तरह की जानकारियां मांगी जाती है। संस्था प्रधान इन्हीं कामों में उलझे रहते हैं। विभाग के अधिकारियों को चाहिए कि वे स्कूलों में संस्था प्रधान व शिक्षकों को पढ़ाने का पर्याप्त समय दे, ताकि अभिभावक स्कूलों की तरफ आकर्षित हो और बच्चों का प्रवेश करा सके। भास्कर एक्सपर्ट - राजेंद्र शर्मा हंस, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी जयपुर
लखनऊ में उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड का रिजल्ट जारी किया गया। मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा संचालित अरबी एवं फारसी की मुंशी/मौलवी (सेकेंडरी) और आलिम (सीनियर सेकेंडरी) बोर्ड परीक्षा-2026 का परिणाम शुक्रवार को घोषित कर दिया गया। प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ मंत्री ओम प्रकाश राजभर और राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी इस मौके पर मौजूद रहे। ओम प्रकाश राजभर ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई दिया। मंत्रियों ने बताया कि परीक्षाफल मदरसा बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट madarsaboard.upsdc.gov.in पर देखा जा सकता है। वर्ष 2026 की परीक्षा में कुल 80,933 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे, जिनमें से 63,211 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 17,722 अनुपस्थित रहे। परीक्षा को नकलविहीन और पारदर्शी बनाने के लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की गई थी, जिसकी निगरानी सीधे मदरसा बोर्ड मुख्यालय से की गई। सेकेंडरी (मुंशी-मौलवी) परीक्षा में 62,232 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। इनमें से 47,036 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए। इस स्तर पर दीनियात, फारसी/अरबी, उर्दू साहित्य, जनरल इंग्लिश और जनरल हिंदी अनिवार्य विषय रहे, जबकि गणित, गृह विज्ञान, लॉजिक एंड फिलॉसफी, सोशल स्टडीज, साइंस और तिब को वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल किया गया। वहीं सीनियर सेकेंडरी (आलिम) परीक्षा में 18,701 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 16,175 परीक्षार्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए। इस स्तर पर पारंपरिक धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक विषयों का समन्वय सुनिश्चित किया गया। मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं 9 फरवरी से 14 फरवरी 2026 तक प्रदेशभर के 277 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में आयोजित की गई थीं। परीक्षा केंद्रों का निर्धारण जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया गया। मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने असफल विद्यार्थियों से निराश न होने और दोबारा प्रयास कर सफलता हासिल करने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि प्रदेश सरकार मदरसा शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सरकारी स्कूलों के बच्चों को भविष्य की आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। शनिवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में समग्र शिक्षा (माध्यमिक) विभाग और टाटा एंटरप्राइज की कंपनी नेल्को लिमिटेड के बीच एक बड़ा समझौता ज्ञापन (MoU) साइन हुआ। इसके तहत प्रदेश के 600 राजकीय माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अत्याधुनिक 'ड्रीम लैब्स' स्थापित की जाएंगी, जहाँ बच्चे अब किताबों के साथ-साथ रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बनाना सीखेंगे। क्या हैं 'ड्रीम लैब्स' और इनमें बच्चे क्या सीखेंगे? ये ड्रीम लैब्स (डिजाइन, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग) स्कूलों में आधुनिक नवाचार और कौशल विकास केंद्र के रूप में काम करेंगी। इसमें कक्षा 9 से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं को निम्नलिखित एडवांस कोर्सेज का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। आधुनिक तकनीक: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)। फ्यूचर स्किल्स: 3D प्रिंटिंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग। ग्रीन एनर्जी: बैटरी चालित इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) और मॉडर्न एग्रीकल्चर साइंस। 'हब एंड स्पोक' मॉडल: तीन चरणों में बिछेगा लैब्स का जाल तकनीकी शिक्षा को हर इलाके तक पहुंचाने के लिए सरकार इस परियोजना को हब एवं स्पोक मॉडल पर लागू कर रही है। इसके तहत पूरे प्रदेश में 150 हब स्कूल और उनके साथ 450 स्पोक स्कूल जोड़े जाएंगे। यह पूरा प्रोजेक्ट तीन फेज में पूरा होगा: प्रथम चरण: 18 हब और 54 स्पोक स्कूल (कुल 72 स्कूल) द्वितीय चरण: 36 हब और 108 स्पोक स्कूल (कुल 144 स्कूल) तृतीय चरण: 96 हब और 288 स्पोक स्कूल (कुल 384 स्कूल) 'यह उत्तर प्रदेश के युवाओं के भविष्य में निवेश है' एमओयू साइन होने के दौरान बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा, तेजी से बदलती औद्योगिक आवश्यकताओं को देखते हुए राज्य के विद्यार्थियों को इंडस्ट्री 4.0 के कौशलों से लैस करना समय की मांग है। यह समझौता केवल एक स्कूल प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि यूपी के भविष्य में बड़ा निवेश है। वहीं, स्कूल शिक्षा की महानिदेशक मोनिका रानी ने कहा कि यह पहल नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) और स्किल इंडिया मिशन के अनुरूप है। विशेषकर आकांक्षी (पिछड़े) जनपदों के स्कूलों में इस योजना को प्राथमिकता से लागू किया जाएगा ताकि गरीब बच्चों को भी ग्लोबल लेवल की शिक्षा मिल सके। 5 साल तक टाटा ग्रुप की कंपनी रखेगी ख्याल, ग्लोबल ब्रांड्स भी शामिल यह पार्टनरशिप 5 साल के मॉडल पर आधारित है। नेल्को लिमिटेड और उसके सहयोगी औद्योगिक समूह इन लैब्स के लिए अत्याधुनिक मशीनें, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सॉफ्टवेयर और मेंटेनेंस का पूरा खर्च उठाएंगे। इतना ही नहीं, दुनिया की जानी-मानी टेक कंपनियां जैसे यास्कावा, मास्टरकैम, 3डी सिस्टम्स, अज्नालेंस और एसीई माइक्रोमैटिक के इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स खुद सरकारी स्कूलों में आकर बच्चों को ट्रेनिंग देंगे और सरकारी शिक्षकों का भी क्षमता निर्माण (ट्रेनिंग) करेंगे। इस योजना के जमीन पर उतरने के बाद उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों से निकलने वाली नई पीढ़ी सीधे रोजगार और उद्यमिता के वैश्विक अवसरों से जुड़ सकेगी।
रोहतक में जिला परिषद के वार्ड-8 से पार्षद व इनेलो कार्यकर्ता धीरज मलिक ने शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के उस बयान की निंदा की, जिसमें शिक्षामंत्री ने सरकारी स्कूलों में बच्चों से श्रमदान करवाने की बात कही है। धीरज मलिक ने कहा कि सरकारी स्कूल में बच्चों से टॉयलेट साफ करवाने को शिक्षा मंत्री श्रमदान का नाम दे रहे है, जो गलत है। जिला पार्षद धीरज मलिक ने कहा कि एक अनपढ़ व्यक्ति को भाजपा ने शिक्षा मंत्री बना दिया है, जो सरकारी स्कूल में बच्चों द्वारा टॉयलेट साफ करने को श्रमदान का नाम दे रहा है। एक तरफ तो सरकार बाल मजदूरी के खिलाफ अभियान चला रही है, दूसरी तरफ स्कूलों में बच्चों से बाल मजदूरी करवा रहे है। शिक्षा मंत्री कह रहे हैं कि स्कूल में बच्चों से श्रमदान करवा रहे हैं। सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग हो चुकी खंडहर धीरज मलिक ने कहा कि भाजपा के मंत्री उन स्कूलों में जाते हैं, जहां नई बिल्डिंग बनी होती है। कभी भाजपा के किसी मंत्री ने खंडहर हो चुके सरकारी स्कूलों में जाकर देखा है। भाजपा नेता सिर्फ वायदे बड़े-बड़े करते है, जबकि शिक्षा की तरफ उनका कोई ध्यान नहीं है। स्कूलों के अंदर बच्चों से करवाया जा रहा काम धीरज मलिक ने कहा कि बच्चों को सरकारी स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजते है, लेकिन वहां बच्चों से श्रमदान की बोलकर काम करवाया जाता है। शिक्षा मंत्री को खुद सरकारी स्कूल में जाकर काम करना चाहिए। बच्चों से टॉयलेट साफ करवाते हैं, कभी खुद भी करके देखें। बच्चों के लिए टैंक में पानी, खुद आरओ का पीते शिक्षक धीरज मलिक ने कहा कि नया बांस स्कूल में बच्चे जमीन में बनाए टैंक से निकालकर पानी पीते हैं, जो पानी पीने लायक भी नहीं है। वहीं, शिक्षक अपने लिए कैंपर व आरओ लगवा रहे हैं। वहीं, बच्चों के टायलेट की हालत खराब है, जबकि शिक्षकों के टॉयलेट साफ सुधरे हैं। बच्चों को स्कूल में शिक्षी नहीं, बल्कि बीमारियां दी जा रही है।
देवघर जिले में झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) द्वारा जारी मैट्रिक परीक्षा के खराब परिणामों को जिला शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया है। लगातार गिरते परीक्षा परिणाम के मद्देनजर, जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार ने जिले के 24 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए गए हैं। जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन लगातार स्कूलों को शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने, बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई कराने के निर्देश देता रहा है। इसके बावजूद मैट्रिक और इंटर परीक्षा के परिणाम संतोषजनक नहीं रहे, जो चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी बताया कि जिले के लगभग 40 से 50 प्रतिशत स्कूलों का परिणाम काफी कमजोर रहा है। मधुकर कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार द्वारा स्कूलों में स्मार्ट क्लास, मिड डे मील और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके बावजूद यदि छात्र स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं और उनका प्रदर्शन खराब हो रहा है, तो यह स्कूल प्रबंधन की लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्कूलों की जवाबदेही तय की जाएगी। अन्य स्कूलों से भी स्पष्टीकरण मांगा जाएगा उन्होंने जानकारी दी कि प्रारंभिक चरण में 24 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को बुलाकर उनसे खराब परिणामों का कारण पूछा जाएगा। इसके बाद उन अन्य स्कूलों से भी स्पष्टीकरण मांगा जाएगा, जहां छात्रों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा है। पूरे मामले की विभागीय समीक्षा के बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। छात्रों के कमजोर प्रदर्शन में सुधार लाने के लिए जल्द ही रिमेडियल कक्षाएं शुरू की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, छुट्टी के दिनों में बड़े छात्रों की सहायता से छोटे बच्चों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं भी संचालित की जाएंगी। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाना और उनकी शैक्षणिक स्थिति में सुधार लाना है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में जारी जैक मैट्रिक परीक्षा परिणामों में देवघर जिला राज्य स्तर पर 14वें-15वें स्थान पर खिसक गया है। पिछले वर्ष जिले की रैंकिंग 9वें-10वें स्थान के आसपास थी। जिले की इस गिरती शैक्षणिक स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग अब सख्त कार्रवाई की तैयारी में है।
राजस्थान के स्कूलों में गर्मी की छुटि्टयां (ग्रीष्मावकाश) 28 जून तक बढ़ा दी गई हैं। 22 जून से स्कूल खुलने थे। अब स्कूल 29 जून को खुलेंगे। छुट्टियां बढ़ाने को लेकर राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) के बैनर तले शिक्षकों का आंदोलन चल रहा था। सरकार ने शिक्षकों की मांगें मान ली हैं। संघ और शिक्षा विभाग के बीच शनिवार को समझौता हुआ। समझौता पत्र पर शिक्षा मंत्री के विशिष्ट सहायक के हस्ताक्षर किए गए हैं। उधर, इस संबंध में अभी तक शिक्षा निदेशालय की ओर से कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही औपचारिक आदेश जारी किया जा सकता है। पहली बार जारी किए थे आदेशगर्मी की छुट्टियां इस सेशन में कम कर दी गई थीं। सरकार ने आदेश में कहा था कि स्कूल 22 जून से खुलेंगे। इसके बाद से शिक्षकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था। करीब 15 दिनों से शिक्षक आंदोलन पर थे। ब्लॉक लेवल तक शिक्षक धरना दे रहे थे। इस बीच, शनिवार सुबह शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के साथ हुई बैठक में समझौता हुआ। प्रिंसिपल पावर की भी छुटि्टयां बढ़ाईंइस सेशन में सरकार ने पहली बार प्रिंसिपल पावर की दो छुट्टियों को घटाकर एक कर दिया था। इसका भी शिक्षक विरोध कर रहे थे। अब प्रिंसिपल पावर की भी छुटि्टयों की संख्या दो कर दी गई हैं। शिक्षा मंत्री के घर कल रात हुई थी बैठकजयपुर में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के घर पर शुक्रवार देर रात मीटिंग हुई थी। जिसके आधार पर शनिवार सुबह समझौते पर हस्ताक्षर हुए। बैठक में शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेशाध्यक्ष रमेश पुष्करणा, प्रदेश महामंत्री महेंद्र लखारा, संघर्ष समिति के सदस्य और प्रदेश उपाध्यक्ष रवि आचार्य भी शामिल हुए।
राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने रूसी सेना में शामिल होकर पिछले 8 महीनों से लापता एक पंजाबी युवक का मामला केंद्रीय विदेश मंत्री के समक्ष उठाया है। अमृतसर जिले की नवदीप कौर ने निर्मल कुटिया, सुल्तानपुर लोधी में संत सीचेवाल से मिलकर अपने पति हीरा सिंह का पता लगाने की गुहार लगाई है। नवदीप कौर ने बताया कि उनके पति हीरा सिंह अक्टूबर, 2024 में उच्च शिक्षा के लिए मॉस्को गए थे। उन्हें अगस्त 2025 में रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया था। परिवार के अनुसार, भर्ती के समय हीरा सिंह को तुरंत 14 लाख रुपये और प्रति माह ढाई लाख रुपये वेतन देने का आश्वासन दिया गया था। 15 दिनों के सैन्य प्रशिक्षण के बाद युद्ध में भेजा नवदीप कौर के मुताबिक, हीरा सिंह को केवल 15 दिनों के सैन्य प्रशिक्षण के बाद ही युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया। जबकि भर्ती के समय यह कहा गया था कि उनसे केवल सेना के लिए भोजन पहुंचाने और बंकर बनाने जैसे गैर-लड़ाकू कार्य ही लिए जाएंगे। परिवार का कहना है कि हीरा सिंह मानसिक रूप से युद्ध लड़ने के लिए तैयार नहीं थे। सितंबर 2025 को आखिरी बार हुई बात उन्होंने बताया कि सितंबर 2025 में उनकी अपने पति से आखिरी बार बात हुई थी। उसके बाद से पिछले 8 महीनों से उनका कोई संपर्क नहीं हो पाया है। नवदीप कौर का 6 वर्षीय बड़ा बेटा सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, जिसका इलाज फिलहाल पूरी तरह संभव नहीं माना जाता। यह बीमारी बच्चे की गतिविधियों, मांसपेशियों और आवाज को प्रभावित करती है और उम्र बढ़ने के साथ दिमाग पर इसका असर बढ़ता जाता है। उनका दूसरा बच्चा ढाई साल का और तीसरा केवल एक साल का है। बड़ा बेटा न बोल सकता है, न सुन सकता है, न बैठ सकता है और न ही चल-फिर सकता है। प्रधानमंत्री राहत कोष से बीमार बच्चे के इलाज की व्यवस्था करवाने का प्रयास संत सीचेवाल ने नवदीप कौर को भरोसा दिलाया कि उनके लापता पति का पता लगाने के लिए विदेश मंत्रालय और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री राहत कोष से बीमार बच्चे के इलाज की व्यवस्था करवाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही उन्होंने परिवार को आश्वासन दिया कि बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाया जाएगा और वे जहां तक पढ़ना चाहेंगे, उनकी शिक्षा जारी रखी जाएगी।
फीस वृद्धि के खिलाफ कांग्रेस काहल्लाबोल: शिक्षा कार्यालय में ताला
शासकीय स्कूलों की बढ़ी फीस के विरोध में शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने शुक्रवार को बैरन बाजार स्थित शिक्षा विभाग के जॉइंट डायरेक्टर कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने नारेबाजी करते हुए भाजपा सरकार पर महंगाई के दौर में जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 22 मदों में फीस बढ़ाकर सरकार ने लाखों पालकों को परेशानी में डाल दिया है। खेलकूद, प्रायोगिक परीक्षा, लैब और निजी परीक्षा शुल्क तक बढ़ाए गए हैं। पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा ने शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, जबकि विकास उपाध्याय ने शिक्षा व्यवस्था बदहाल होने का मुद्दा उठाया। करीब तीन घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लगाया। बाद में शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर फीस वृद्धि वापस लेने और इस वर्ष शासकीय स्कूलों की फीस पूरी तरह माफ करने की मांग की।
शारीरिक शिक्षक संघ ने शिक्षा निदेशक को दी मांगों की चिट्ठी
उदयपुर | राजस्थान शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक सीताराम जाट को विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रदेश महामंत्री भेरू सिंह राठौड़ के अनुसार संघ ने वर्ष 2022 की शारीरिक शिक्षक भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों का स्थायीकरण व नियमितीकरण शीघ्र करने की मांग उठाई। प्रदेशाध्यक्ष हापुराम चौधरी के नेतृत्व में दिए ज्ञापन में ग्रीष्मकालीन अवकाश में की गई कटौती वापस लेने और जून के अंत तक अवकाश बहाल करने की बात भी रखी गई। संघ का कहना है कि 2022 की वरिष्ठ शारीरिक शिक्षक भर्ती में 60 चयनित अभ्यर्थियों को दस्तावेज जांच के नाम पर रोका गया है, जिन्हें तुरंत नियुक्ति दी जाए। उदयपुर जिला अध्यक्ष गोवर्धन सिंह झाला ने कक्षा 6 से 8 तक स्वास्थ्य व शारीरिक शिक्षा की पुस्तकें निशुल्क देने, उपजिला अधिकारी पद सृजित करने, भोजन भत्ता 250 रुपये प्रतिदिन करने, प्रतियोगिता आयोजन राशि 2 लाख करने और पद स्वीकृति बढ़ाने की मांग बताई।
नए विश्वविद्यालय एक्ट से उच्च शिक्षा व्यवस्था में आएगी रफ्तार : शिक्षा मंत्री
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित दो दिनी वीसी कांफ्रेंस के अंतिम दिन विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक ढांचे, नए विवि अधिनियम, प्रस्तावित स्टैच्यूट, क्लस्टर सिस्टम, विवि सेवा आयोग, वित्तीय प्रबंधन, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। समापन सत्र में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि नए एक्ट और स्टैच्यूट को बहुत सोच-समझकर तैयार किया गया है और इससे विश्वविद्यालयों में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी। झारखंड का जीआईआर अभी 18.8 है, जिसे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने छात्र संघ चुनाव को लेकर भी साफ संदेश दिया। कहा, कैंपस में किसी राजनीतिक दल का रंग नहीं दिखना चाहिए। पढ़ाई से कटे छात्र केवल चुनाव लड़ने के उद्देश्य से कैंपस राजनीति में न आएं। इससे पहले प्रधान सचिव राहुल पुरवार ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य नए एक्ट के अनुरूप बनने वाले स्टैच्यूट और प्रशासनिक ढांचे पर सुझाव लेना था। कांफ्रेंस में नए विवि एक्ट के तहत तैयार किए जा रहे स्टैच्यूट व रेगुलेशन के प्रारूप पर कुलपतियों, कुलसचिवों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सुझाव दिए। यह बात सामने आई कि कई प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में अब वित्त सलाहकार (एफए) की भूमिका अधिक प्रभावी होगी। वित्तीय मामलों को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए फीस संग्रह सहित कई प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करने पर जोर दिया गया। 4 वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूरा करने वाले छात्रों के लिए एक वर्षीय पीजी कोर्स के नामांकन का के लिए अभी तक रेगुलेशन नहीं बना है। इस पर विभाग ने कहा कि मामला संज्ञान में है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बलौदाबाजार के करहीबाजार में आयोजित समाधान शिविर में कई विकास परियोजनाओं की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार का मुख्य उद्देश्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। मुख्यमंत्री ने करहीबाजार में सांस्कृतिक भवन के लिए 25 लाख रुपए और सुकालू के घर से सिद्ध बाबा मार्ग तक सीसी रोड के लिए 25 लाख रुपए की घोषणा की। इसके अतिरिक्त, हायर सेकेंडरी स्कूल करहीबाजार और कोदवा में भवन निर्माण, भाटापारा में एसडीएम-तहसील के लिए संयुक्त कार्यालय भवन, मिडिल स्कूल गुड़ेलिया का हाई स्कूल में उन्नयन, विटकुली में मांगलिक भवन के लिए 20 लाख रुपये और छह ग्राम पंचायतों में 10-10 लाख रुपए की लागत से सीसी रोड निर्माण की भी घोषणा की गई। शिविर के दौरान कुल 147 हितग्राहियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 10 लाख आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है। किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा गया है और उन्हें दो वर्षों का बकाया बोनस भी दिया गया है। महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे अंतरित की गई है। मुख्यमंत्री ने लखपति दीदी अभियान का भी जिक्र किया, जिसके माध्यम से महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य की 6000 से अधिक पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं। जल्द ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन भी शुरू की जाएगी, जिससे नागरिक ऑनलाइन या टोल-फ्री नंबर पर अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे। इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, कलेक्टर कुलदीप शर्मा और पुलिस अधीक्षक ओपी शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
NEET पेपर लीक मामले को लेकर आम आदमी पार्टी ने आज रायपुर में प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अंबेडकर चौक पर विरोध प्रदर्शन कर कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की गई। आप नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ परीक्षा में गड़बड़ी का मामला नहीं, बल्कि 22 लाख से ज्यादा छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है। पार्टी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक बड़े स्तर की मिलीभगत और राजनीतिक संरक्षण के बिना संभव नहीं है। हर बार पेपर लीक, फिर भी कार्रवाई नहीं प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि 2017, 2021, 2024 और अब 2026 में भी NEET पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन अब तक जिम्मेदार लोगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में देशभर में 89 बार विभिन्न परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और 48 परीक्षाएं दोबारा करानी पड़ीं। आप नेताओं ने कहा कि लाखों छात्र सालभर मेहनत करते हैं, लेकिन एक रात में उनका भविष्य दांव पर लग जाता है। छात्रों की आत्महत्या का भी मुद्दा उठाया आम आदमी पार्टी ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं का भी मुद्दा उठाया। नेताओं ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गोवा और ग्वालियर में कई छात्रों ने तनाव और भविष्य को लेकर अनिश्चितता के कारण आत्महत्या कर ली। पार्टी नेताओं ने कहा कि परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों और उनके परिवारों में भारी मानसिक दबाव बना हुआ है। इसके लिए केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय जिम्मेदार है। पंजाब सरकार के फैसले का किया जिक्र प्रदर्शन के दौरान पंजाब सरकार के फैसले का भी उल्लेख किया गया। नेताओं ने कहा कि पुनः परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए पंजाब सरकार ने 20, 21 और 22 जून को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा देने का फैसला लिया है। ये हैं आम आदमी पार्टी की मांगें - केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें। - NEET पेपर लीक मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) बनाई जाए। - प्रभावित छात्रों को मुआवजा दिया जाए। - परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाए।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को शिक्षा विभाग के साथ बैठक की। सूत्रों के मुताबिक, TRE-4 को लेकर बैठक में सम्राट चौधरी ने शिक्षा मंत्री को निर्देश देते हुए कहा है कि अगले 1 सप्ताह के अंदर नोटिफिकेशन जारी किया जाए। बताया जा रहा कि TRE-4 का नोटिफिकेशन अगले 4 से 5 दिन के अंदर जारी हो सकता है। इसके अलावा बैठक में अगले पांच सालों में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति, शिक्षकों के पारदर्शी तबादले और जीविका समूहों के जरिए विद्यालय पोशाक वितरण जैसे कई अहम फैसले लिये गए। सीएम ने शिक्षक बहाली को लेकर चर्चा की और नोटिफिकेशन को लेकर अधिकारियों से फीडबैक भी लिया है। 5 साल में एक लाख शिक्षकों की होगी बहाली सम्राट चौधरी ने राज्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अगले 5 सालों में 1 लाख शिक्षकों की नियुक्ति की जायेगी जिसके अन्तर्गत प्रत्येक वर्ष कम से कम लगभग 20 हजार शिक्षकों की नियुक्ति की जायेगी। इसके लिए हर वर्ष जुलाई महीने में नियुक्ति संबंधी विज्ञापन जारी किया जायेगा। हर साल होगी 20 हजार शिक्षकों की नियुक्ति मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि अगले पांच सालों में राज्य में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इसके तहत हर साल कम से कम 20 हजार शिक्षकों की बहाली सुनिश्चित की जाएगी। सरकार ने नियुक्ति प्रक्रिया को नियमित और समयबद्ध बनाने के लिए यह भी तय किया है कि हर साल जुलाई महीने में शिक्षक नियुक्ति का विज्ञापन जारी किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस फैसले से सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर होगी और पढ़ाई व्यवस्था मजबूत होगी। महिला शिक्षकों को गृह क्षेत्र के पास पोस्टिंग देने की तैयारी बैठक में शिक्षकों की ट्रांस्फर पोस्टिंग को लेकर भी निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को पारदर्शी और सरल ट्रांसफर नीति तैयार करने का निर्देश दिया। नई नीति के तहत महिला शिक्षकों का स्थानांतरण उनके गृह जिले में, अपने प्रखंड के गृह पंचायत के समीप वाले पंचायत में करने पर जोर दिया गया है। पुरुष शिक्षकों को उनके गृह प्रखंड के बगल वाले प्रखंड में पदस्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे शिक्षकों को पारिवारिक और सामाजिक सुविधा मिलेगी तथा विद्यालयों में उनकी कार्यक्षमता भी बढ़ेगी। जीविका के माध्यम से मिलेगी स्कूल पोशाक सरकार ने विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को मिलने वाली पोशाक की व्यवस्था में भी बदलाव का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि अब राज्य के सभी विद्यालयों में पोशाक की आपूर्ति जीविका समूहों के माध्यम से कराई जाए। सरकार का कहना है कि इससे पोशाक की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होगी और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार एवं स्वावलंबन का अवसर मिलेगा। बैठक में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के साथ-साथ शिक्षा विभाग के सभी बड़े अधिकारी मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान शिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा भी की गई। अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी बता दें कि TRE-4 को लेकर बिहार में अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। छात्र संगठन और अभ्यर्थी लंबे समय से चौथे चरण की शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जारी करने की मांग कर रहे हैं। इसी को लेकर पटना समेत कई जगहों पर प्रदर्शन भी हुए हैं।
यूपी में शिक्षा मित्रों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल किए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। कई शिक्षा मित्रों ने सहायक शिक्षकों की तरह सेवा विस्तार देने की मांग शासन से की थी। इसके बाद महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों से सुझाव मांगे हैं। अपर राज्य परियोजना निदेशक प्रेम रंजन सिंह ने 21 मई को औरैया, बस्ती, बलिया, कानपुर नगर, लखनऊ, रायबरेली, जौनपुर, गोंडा, लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर समेत कई जिलों के बीएसए को पत्र भेजा है। इसमें 60 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षा मित्रों के सेवाकाल बढ़ाने पर राय मांगी गई है। यूपी में 1.43 लाख शिक्षा मित्र हैं। 1 अप्रैल से शिक्षा मित्रों का मानदेय मौजूदा सरकार ने 10 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपए कर दिया है। सहायक शिक्षकों की तर्ज पर मांगशिक्षा मित्रों की नियुक्ति आदेश में 60 वर्ष की आयु पूरी करने पर रिटायरमेंट देने का जिक्र है। 26 शिक्षा मित्रों ने शासन को पत्र लिखा। उन्होंने तर्क दिया है कि सहायक शिक्षकों को भी पहले 60 वर्ष की आयु में रिटायर किया जाता था। शासन ने उन्हें सेवा विस्तार देते हुए अब 62 वर्ष की आयु में रिटायर करने का नियम बनाया है। शिक्षा मित्र भी सहायक शिक्षक की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में उनके रिटायरमेंट की आयु सीमा भी 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष की जानी चाहिए। इन 26 शिक्षा मित्रों ने लिखा लेटरगोंडा से इमरा खातून, लखनऊ से अंजू द्विवेदी, उन्नाव से निजामुद्दीन, अंबेडकर नगर से कौशिल्या, जौनपुर से गायत्री सिंह, हाथरस से देवेंद्र कुमार, लखनऊ बीकेटी से सीमा मिश्रा ने शासन को लेटर लिखा है। इनके अलावा लखीमपुर खीरी से शारदा प्रसाद, गोंडा से रामनाथ सिंह, बदायूं से नाजिम अली, ललितपुर से शशि प्रभा, शाहजहांपुर से सुरेश चंद, कानपुर देहात से देवकी देवी, महाराजगंज से रामजतन प्रसाद, फिरोजाबाद से शांता देवी, मुरादाबाद से ईश्वर सिंह, जौनपुर से हिरावती, शिकोहाबाद से लाखन सिंह, गोंडा से उर्मिला, बदायूं से राजपाल, बस्ती से राजेंद्र, जौनपुर से राजेश कुमार, हमीरपुर से लालमन, औरैया से प्रेमवती और महाराजगंज से हरिप्रकाश शामिल हैं। इन शिक्षा मित्रों ने कहा कि उनकी तरह कई अन्य शिक्षा मित्र भी हैं, जो 60 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले हैं। जानिए यूपी की सियासत में शिक्षा मित्र कितने अहम? दरअसल, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एक शिक्षामित्र यूपी में 10 वोटरों पर असर डालता है। इस तरह 1.68 लाख शिक्षामित्रों और अनुदेशकों से भाजपा करीब 17 लाख वोटर्स को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है। इतना ही नहीं, भाजपा की कोशिश सरकारी स्कूलों के मर्जर पर उठ रहे सवालों की काट खोजने की है। वहीं, राजनीतिक जोखिम को भांपते हुए सपा इसके खिलाफ नैरेटिव सेट करने में जुटी है। 43 विधानसभा सीटों पर समीकरण बदलने की क्षमताशिक्षामित्र अपने परिवार और सामाजिक नेटवर्क के सहारे प्रदेश की 43 से ज्यादा सीटों पर निर्णायक असर रखते हैं। यूपी में शिक्षामित्र और अनुदेशकों की संख्या करीब 1.68 लाख है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एक शिक्षामित्र अपने परिवार, रिश्तेदार और आस-पड़ोस के समेत 10 वोटर्स पर असर रखता है। इस हिसाब से शिक्षामित्र और अनुदेशकों का असर 16.80 लाख वोटर्स पर है। मतलब, हर विधानसभा सीट पर औसतन 4 हजार वोटर्स इनके प्रभाव वाले हैं। 2022 विधानसभा चुनाव में करीब 43 ऐसी सीटें थी, जहां जीत-हार का मार्जिन 4 हजार से कम था। इनमें से 25 सीटों पर भाजपा, तो 18 पर सपा ने जीत दर्ज की थी। शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को बढ़ा हुआ मानदेय, बीमा और कैशलेश इलाज की सुविधा देकर भाजपा ने चुनाव से पहले ऐसी टक्कर वाली सीटों पर समीकरण दुरुस्त करने की कोशिश कर रही है। ------------------- ये खबर भी पढ़ें- धनंजय के गढ़ में बेटा लॉन्च करने को तैयार बृजेश:पर्दे के पीछे से दो नेता कर रहे प्लानिंग; धनंजय कह चुके- मैं डरने वाला नहीं 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में अभी 8 महीने से ज्यादा का समय है। लेकिन, पूर्वांचल की सियासत में नई जंग छिड़ती दिख रही है। चर्चा है, बाहुबली नेता धनंजय सिंह के गढ़ जौनपुर में उनके विरोधी बृजेश सिंह एंट्री लेने वाले हैं। पढ़िए पूरी खबर
रायपुर में सरकारी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी के खिलाफ कांग्रेस ने बैरन बाजार स्थित शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक कार्यालय का घेराव किया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए शिक्षा विभाग और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन ने किया। कांग्रेस नेताओं ने कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला लगाकर विरोध जताया और शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। “महंगाई के बीच फीस बढ़ाना गलत” कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पहले से महंगाई से परेशान जनता पर अब स्कूल फीस बढ़ाकर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। उनका कहना है कि पेट्रोल-डीजल, गैस, बिजली और राशन की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार को फीस बढ़ाने की बजाय राहत देनी चाहिए थी। कांग्रेस का आरोप है कि शिक्षा विभाग ने हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर पर विभिन्न मदों में फीस बढ़ा दी है। खेलकूद, प्रायोगिक परीक्षा, लैब, स्काउट-गाइड और निजी परीक्षा शुल्क में भी वृद्धि की गई है। फीस माफी की मांग शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन ने मांग की कि इस साल सरकारी स्कूलों की पूरी फीस माफ की जाए, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने कोरोना काल में फीस माफ की थी और स्वामी आत्मानंद स्कूल जैसे मॉडल शुरू किए थे। “शिक्षा व्यवस्था बदहाल” पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी का आरोप लगाया। वहीं पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा ने शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार बढ़ने का दावा करते हुए सरकार को जिम्मेदार ठहराया।करीब तीन घंटे तक चले प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शिक्षा विभाग कार्यालय के बाहर धरना दिया और फीस वृद्धि वापस लेने की मांग की।
जयपुर अब सिर्फ पर्यटन नगरी नहीं, बल्कि देश का तेजी से उभरता शिक्षा हब बन गया है। बेहतरीन कनेक्टिविटी, शांतिप्रिय माहौल, मजबूत कानून-व्यवस्था और अच्छी नौकरी के अवसरों के कारण UP, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र समेत देशभर के लाखों छात्र दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों को छोड़कर जयपुर आ रहे हैं। यहां 30 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज और बेहतर शिक्षा के वातावरण ने जयपुर को नई राह दिखाई है। दीपशिखा ग्रुप ऑफ कॉलेजेस और यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ने इस सफर में अहम भूमिका निभाई है। 1976 में एक छोटे से पौधे की तरह शुरू हुआ यह ग्रुप आज 13 कॉलेजेस और एक यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित हो चुका है। 2 लाख से ज्यादा एलुमनी देश-विदेश में अच्छी पोजीशन पर हैं। डॉ. प्रेम सुराना के नेतृत्व में ग्रुप छात्रों को आधुनिक शिक्षा दे रहा है। AI कोर्सेस चलाए गए हैं और वॉयस एआई एजेंट बनाकर छात्रों की समस्याओं का 24x7 तुरंत समाधान किया जा रहा है। ग्रुप थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल नॉलेज पर विशेष जोर देता है। डॉ. सुराना का मानना है कि नई पीढ़ी बहुत होशियार है और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग से ये बच्चे देश का भविष्य संवारेंगे।
रोहतक में पहुंचे शिक्षामंत्री महिपाल ढांडा ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष कुछ भी कह सकता है। विपक्ष के लोग बेलगाम हो गए। जिनके पास कुछ नहीं होता, वो लोग गलत शब्दों का प्रयोग करते हुए लोगों का ध्यान भटकाने का काम करते है। उनकी बातों को अधिक तूल देने की जरूरत नहीं है। शिक्षामंत्री महिपाल ढांडा जाट भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे और युवाओं को सम्मानित किया। शिक्षामंत्री ने कहा कि कांग्रेस के लोगों को कुछ पता नहीं होता, बस किसी भी बात को लेकर मुद्दा बनाने की कोशिश करते है। सरकार सही तरीके से काम कर रही है। नीट पेपर लीक की सीबीआई कर रही जांच शिक्षामंत्री महिपाल ढांडा ने नीट पेपर लीक मामले में कहा कि सीबीआई के पास केस गया हुआ है और सीबीआई मामले में जांच कर रही है। जिसने भी पेपर लीक का कृत्य किया है, उन्हें दंडित करने का काम सरकार करेगी। कोई भी व्यक्ति नहीं बचेगा और देश की जांच एजेंसियां मामले में जल्द कार्रवाई करेगी। सरकारी स्कूलों में सुपर 500 कार्यक्रम शुरूशिक्षामंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि सरकारी स्कूलों को लेकर सरकार बड़े पैमाने पर काम कर रही है। सरकार ने सुबह 100 कार्यक्रम शुरू किया, जिससे बच्चों को नीट व आईआईटी की तैयारी करवाई जा रही है। 2014 में सरकार बनने के बाद एक नई शुरूआत की गई थी। मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि नायब सैनी सरकार ने सुपर 100 को सुपर 500 करने का निर्णय लिया है। इससे युवाओं को महंगी कोचिंग फ्री में मिल रही है। रोहतक में भी सुपर 40 की शुरूआत की थी, जो अब सुपर 80 हो गया है। सरकार शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने का प्रयास कर रही है। यूपीएससी में चयनित युवाओं को किया सम्मानितमहिपाल ढांडा ने कहा कि यूपीएससी में जिन युवाओं का चयन हुआ है, जाट सभा की तरफ से उन्हें सम्मानित किया गया है। ग्रामीण पृष्ठ भूमि से निकलकर बच्चे मेहनत कर रहे है, जिसका सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगा है। समाज भी अब बच्चों की तरफ ध्यान दे रहा है।
राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जमकर जुबानी हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी विदेश में जाकर देश की बदनामी करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गद्दार कहते हैं। लेकिन राहुल गांधी से नीच और निकम्मा आदमी कोई हो ही नहीं सकता। ये देश विरोधियों के सरगना हैं। मंत्री दिलावर ने यह बात रामगंजमंडी में बनने वाले जिला अस्पताल के भूमि पूजन कार्यक्रम में कही। शिलान्यास के बाद दिलावर ने सभा को संबोधित किया। इस दौरान राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी को लेकर भड़क गए। आतंकवादियों की मौत पर मां रातभर रोती रहीं उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के बारे में एक अदना सा आदमी जो आतंकवादियों का पक्षधर है। वो देश को तोड़ने, विदेश में जाकर देश की बुराई करने, देश को नीचा दिखाने का काम करता है। ऐसा आदमी जिसकी मां बटला एनकाउंटर में मारे गए आतंकवादियों की मौत पर रातभर रोती हैं। राहुल गांधी ने भी कहा था आतंकवादियों की मौत पर मेरी मां रात भर रोती रहीं, उनको नींद नहीं आई। देश की धरती पर रहने का अधिकार नहीं देश के दुश्मनों के साथ रहने वाले, उनका समर्थन करने वाले लोगों के सरगना राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री को गद्दार, चोर, बेईमान कहते हैं। इससे (राहुल गांधी) नीच और निकम्मा इस देश में कोई और दूसरा व्यक्ति हो ही नहीं सकता। जिस प्रकार राहुल गांधी ने बात कही यह देश के साथ गद्दारी है। इसलिए ऐसे लोगों को देश की धरती पर रहने का अधिकार नहीं। दिलावर ने कहा राहुल गांधी अपनी हरकतों से बाज आएं अन्यथा देश की जनता ने किसी को छोडा नहीं है। अभी तो पश्चिम बंगाल में मिट्टी पलीत करवा कर आए हैं। कई राज्यों के चुनाव में मात खा कर आए हैं। यह बौखलाहट है कि देश में देशभक्त लोग कैसे पनप रहे हैं। जनता गद्दारों के हाथ में देश की बागडोर नहीं देगी देशभक्त लोगों का बेड़ा कैसे बढ़ता जा रहा है। देश की सरकार कैसे देशभक्त लोगों के हाथों में है। यह चाहते थे कि देश की सरकार आतंकवादियों के हाथ में हो। लेकिन जनता कभी भी गद्दार और आतंकवादियों के हाथों में देश की बागडोर नहीं देगी। उन्होंने कहा राम मंदिर 500 साल पहले आक्रांताओं ने तोड़ा था। मंदिर के पुनर्निर्माण में हमारे देश के पूर्वज लग रहे हैं। 3 लाख लोगों ने बलिदान दिया। लेकिन मंदिर नहीं बना। नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद राम मंदिर बनने का रास्ता प्रशस्त हुआ। कांग्रेस ने मंदिर निर्माण को रोकने की बहुत कोशिश की। आखिर में राम मंदिर का निर्माण हुआ। आज करोड़ों लोग भगवान राम की जन्मस्थली पर बने मंदिर में दर्शन कर रहे हैं। यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है। जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं को वोट का अधिकार मिला जम्मू-कश्मीर में धारा 370 समाप्त की, अनुसूचित जाति के लोगों को आरक्षण मिलने लगा है। महिलाओं को आरक्षण मिलने लगा है। हिंदुओं को वोट देने का अधिकार मिल गया। जबकि पहले न तो आरक्षण का अधिकार था और न ही वोट देने का अधिकार डेढ़ साल में बनेगा हॉस्पिटल इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला व शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने दोपहर करीब 12 बजे हॉस्पिटल का भूमि पूजन किया। रामगंजमंडी में 63.60 करोड़ रुपए की लागत से 200 बेड का नया जिला अस्पताल बनेगा। जो डेढ़ साल में बनकर तैयार हो जाएगा।
शिक्षक भर्ती नोटिफिकेशन TRE 4 को लेकर लगातार हो रहे प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ी बैठक बुलाई है। सीएम सम्राट चौधरी आज शिक्षा विभाग के मंत्री और अधिकारियों के साथ शाम 5 बजे बड़ी बैठक करेंगे। बैठक में शिक्षक भर्ती के नोटिफिकेशन पर प्रमुख तौर पर चर्चा होगी। शिक्षक बहाली को लेकर इस बैठक में चर्चा होगी और नोटिफिकेशन को लेकर अधिकारियों से फीडबैक लिया जाएगा। बैठक में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के साथ-साथ शिक्षा विभाग के सभी बड़े अधिकारी मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारी मौजूद होंगे। इस दौरान शिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा भी की जाएगी।
शिक्षा महंगी कर रही सरकार, एससी-एसटी छात्र परेशान, फीस वृद्धि वापस ले : ठाकुर
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि 10वीं-12वीं की परीक्षा फीस और 22 अन्य मदों में दोगुनी बढ़ोतरी कर सरकार ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। नियमित परीक्षा शुल्क 460 रुपए से बढ़ाकर 800 रुपए, नामांकन शुल्क 80 से 200 रुपए और अतिरिक्त विषय शुल्क 110 से 250 रुपए कर दिया गया है। इस शिक्षा विरोधी फैसले को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। राज्य में पहले से शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। स्कूलों में शिक्षकों की कमी, जर्जर भवन, किताबों की देरी और स्कूल बंद होने जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।
उच्च शिक्षा की स्थिति खराब, समय पर परीक्षा और रिजल्ट दे विश्वविद्यालय
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में अब सिर्फ बैठक और चर्चाओं का दौर नहीं चलेगा। परिणाम दिखना चाहिए। उन्होंने उच्च शिक्षा में कम सकल नामांकन अनुपात (जीईआर), बढ़ते ड्रॉपआउट, समय पर परीक्षा व रिजल्ट जारी न होने और छात्रों के पलायन पर भी चिंता जताई। वे गुरुवार को दो दिवसीय कुलपति कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। रिसर्च, स्किल और स्टार्टअप पर फोकस करने की सलाह राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा, रिसर्च, नवाचार, स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप और इंडस्ट्री लिंक से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को दिशा देने के लिए झारखंड राज्य विवि अधिनियम-2026 लागू किया गया है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता, जवाबदेही और शैक्षणिक उत्कृष्टता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कुलपतियों और अधिकारियों को इस अधिनियम का अध्ययन करने की सलाह दी।
स्टेट यूनिवर्सिटीज... टेक्नोलॉजी आधारित और एकरूपता के ढांचे से बदलेगी शिक्षा व्यवस्था
रांची झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक और शैक्षणिक ढांचे में बड़े बदलाव की पटकथा लिखी जा रही है। राजधानी के एक होटल में गुरुवार से शुरू हुई दो दिवसीय वीसी कॉन्फ्रेंस में सरकार ने विश्वविद्यालयों के सामने नया यूनिवर्सिटी मॉडल रखा। इसमें झारखंड विवि अधिनियम-2026, क्लस्टर सिस्टम, केंद्रीकृत ऑनलाइन एडमिशन, डिजिटल मॉनिटरिंग, विवि सेवा आयोग और शैक्षणिक-गैर शैक्षणिक पदों के पुनर्गठन को केंद्र में रखा गया। कांफ्रेंस में साफ संकेत दिया गया कि सरकार उच्च शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित और एकरूपता के ढांचे में बदलना चाहती है। हालांकि क्लस्टर सिस्टम को लेकर उठ रहे विरोध और सवालों के बीच सुझावों के आधार पर ड्राफ्ट में बदलाव की बात भी सामने आई। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन गवर्नर संतोष कुमार गंगवार ने किया। अवर सचिव नीति मदन कुलकर्णी, विभागीय प्रधान सचिव राहुल पुरवार, आरयू वीसी प्रो. सरोज शर्मा, डीएसपीएमयू वीसी प्रो. राजीव मनोहर समेत अन्य विवि के वीसी, डीएसडब्ल्यू, रजिस्ट्रार, प्राचार्य और अधिकारी शामिल हुए। क्लस्टर सिस्टम को लेकर भी मंथन कॉन्फ्रेंस में क्लस्टर सिस्टम सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना रहा। कई कुलपतियों और शिक्षाविदों ने इसके व्यावहारिक पक्ष, कॉलेजों की स्वतंत्रता और विषयों के पुनर्गठन को लेकर सवाल उठाए। इसके बावजूद अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार ने क्लस्टर मॉडल को बेहतर बताया। विश्वविद्यालयों से मिले सुझावों के आधार मुख्य विषय के अलावा छात्रों की संख्या वाले विषय को भी शामिल किया जाएगा। सम्मेलन में यह भी बताया गया कि एडमिशन प्रक्रिया पूरी तरह चांसलर पोर्टल से संचालित की जाएगी। इसके लिए विषयवार मैपिंग, सीट निर्धारण और कॉलेजों की क्षमता का डिजिटल इंटीग्रेशन किया जाएगा। इससे एडमिशन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। भविष्य में परीक्षा, रिजल्ट और छात्रवृत्ति से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी इसी डिजिटल सिस्टम से जोड़ने की तैयारी है। विश्वविद्यालय सेवा आयोग की संरचना को लेकर भी कई सवाल उठे। प्रतिभागियों ने पूछा कि आयोग में शिक्षकों की भागीदारी सीमित रखी गई है। वहीं रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स को ज्यादा महत्व दिया गया है। इस पर अधिकारियों ने कहा कि कई राष्ट्रीय चयन संस्थानों में इसी तरह की संरचना होती है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि आयोग में शिक्षकों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। इस दौरान यह भी बताया गया कि चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है।
देवघर जिले के सारवां प्रखंड स्थित आदर्श प्लस टू विद्यालय का गाना चलने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कक्षा में कुछ छात्र हंसी-मजाक करते नजर आ रहे हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था और स्कूल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि घटना के समय स्मार्ट क्लास में कई छात्र मौजूद थे। वीडियो सामने आने के बाद अभिभावक और स्थानीय लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि स्कूल परिसर में ऐसी सामग्री कैसे चलाई गई और उस वक्त कोई शिक्षक या जिम्मेदार कर्मचारी वहां क्यों नहीं था। मामले की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा विभाग सक्रिय हो गया है। इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि उन्हें पूरे मामले की जानकारी मिली है और इसकी गंभीरता से जांच कराई जाएगी। उन्होंने जोर दिया कि विद्यालय शिक्षा का मंदिर है, जहां अनुशासन और मर्यादा सर्वोपरि है। विनोद कुमार ने कहा कि यदि जांच में किसी शिक्षक, कर्मी या छात्र की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भारतीय युवा कांग्रेस, कोरबा (शहर) ने 21 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर गरीब और मजदूर वर्ग के बच्चों के शिक्षा के अधिकार की रक्षा की मांग की है। जिलाध्यक्ष राकेश पंकज के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (RTE) के खुलेआम उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया। कार्यकर्ताओं ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सामने बैठकर प्रदर्शन भी किया। युवा कांग्रेस ने अपने पत्र में बताया कि RTE 2009 के तहत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। इसका उद्देश्य उन्हें बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना है। हालांकि, कोरबा जिले के अधिकांश निजी स्कूल नर्सरी, प्रेप, केजी-1 और केजी-2 कक्षाओं में RTE के तहत प्रवेश देने से इनकार कर रहे हैं, जिससे छोटे बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। ज्ञापन में स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों से संबंधित एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया। गरीब परिवारों के बच्चों की पढ़ाई पर संकट युवा कांग्रेस ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने यह योजना गरीब और असहाय परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा प्रदान करने के लिए शुरू की थी। लेकिन वर्तमान में इन स्कूलों में अनिवार्य शुल्क लागू कर दिया गया है, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। युवा कांग्रेस की प्रमुख मांगें हैं कि सभी निजी विद्यालयों में नर्सरी से केजी-2 तक RTE के 25 प्रतिशत आरक्षण को तुरंत लागू कर प्रवेश सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में लगाया गया अनिवार्य शुल्क तत्काल हटाकर शिक्षा को पूर्णतः निःशुल्क किया जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो युवा कांग्रेस सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगी।इस अवसर पर मधुसूदन दास, अजीत बर्मन, विपिन श्रीवास सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे।
गया जिले के टिकारी और कोंच प्रखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए एक नई पहल की गई है। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) डॉ. अभय रमन के नेतृत्व में, इन स्कूलों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ संगीत और कला की भी शिक्षा दी जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों के मानसिक विकास के साथ-साथ उनकी कलात्मक प्रतिभा को निखारना है। डॉ. अभय रमन स्वयं लगातार विभिन्न विद्यालयों का दौरा कर रहे हैं। इस अभियान के तहत मकपा उच्च विद्यालय टिकारी, महिला उच्च विद्यालय कोंच, गांधी उच्च विद्यालय कोंच और राज इंटर विद्यालय टिकारी जैसे कई विद्यालयों में विशेष गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। पारंपरिक पढ़ाई से बच्चों के ऊबने की समस्या को देखते हुए, डॉ. रमन ने शिक्षा के साथ संगीत और सह-शैक्षणिक गतिविधियों को जोड़ने पर जोर दिया है। स्कूलों में बच्चों को बेहतर पठन सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ संगीत के माध्यम से जीवन के महत्वपूर्ण पाठ भी सिखाए जा रहे हैं। इस रचनात्मक तरीके से बच्चे न केवल खुशी-खुशी स्कूल आ रहे हैं, बल्कि उनकी सीखने की क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है। खेल-खेल में सीखने की यह प्रक्रिया बच्चों को अधिक प्रेरित कर रही है और उनकी उपस्थिति में भी वृद्धि हुई है। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के इस प्रयास की स्थानीय स्तर पर काफी सराहना हो रही है। संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों का कहना है कि इस पहल से विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों के अभिभावक भी संतुष्ट हैं कि उनके बच्चों को अब किताबों के ज्ञान के साथ-साथ संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी अनुभव मिल रहा है, जो उनके सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है।
मोहन सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के अफसर अब शिक्षकों के वेतन से पैसा काटकर उनके लिए कल्याण योजनाएं चलाएंगे। इसको लेकर लोक शिक्षण आयुक्त ने 15 शिक्षक संगठनों को पत्र लिखकर 26 मई को उन्हें बैठक के लिए बुलाया है और उनसे शिक्षकों के वेतन से राशि कटौती कराने का फैसला कराया जाएगा। शिक्षा विभाग के इस पत्र का विरोध भी हो रहा है कि सरकार शिक्षकों के वेतन से कटौती करके किस तरह का कल्याण करना चाह रही है। शिक्षकों के हित में फैसला लेना तो सरकार की जिम्मेदारी है। लोक शिक्षण आयुक्त द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में गठित शिक्षक कल्याण प्रतिष्ठान ने राज्य कार्यकारिणी समिति की 19 नवम्बर को हुई बैठक में निर्णय लिया था कि शिक्षकों के कल्याण के चलाई जाने वाली योजनाओं के संचालन के लिए शिक्षकों से हर साल अंशदान के रूप में वेतन से कटौती की जाएगा। इस फैसले पर सुझाव और सहमति लेने के लिए 26 मई को लोक शिक्षण आयुक्त के सभागार में संगठनों की बैठक बुलाई गई है। बैठक की अध्यक्षता अपर परियोजना संचालक, समग्र शिक्षा एवं पदेन अपर संचालक लोक शिक्षण द्वारा की जाएगी। कर्मचारी संगठनों ने इसका विरोध भी शुरू कर दिया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि शिक्षकों के कल्याण के लिए सरकार को फैसला करना है तो कटोत्रा किस बात का होगा? पहले ही शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है और अतिथि शिक्षक के नाम पर कभी नौकरी पर रखा जा रहा है तो कभी नौकरी से निकाला जा रहा है। न पेंशन मिल रही है और न ही स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ मिल रहा है। अब इस तरह के कटोत्रा के जरिये सरकार वेतन से राशि काटने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री 28 मई को करेंगे कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक उधर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 28 मई को प्रमुख कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक करने वाले हैं। मध्यप्रदेश कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेशचंद्र शर्मा ने इसके लिए मुख्यमंत्री से समय मांगा है और कर्मचारियों की समस्याओं को सुनने के लिए कहा है।
पालक महासंघ ने होम स्कूलिंग नीति की मांग की:शिक्षा को व्यापार नहीं, सेवा बनाने पर जोर दिया
बुरहानपुर में पालक महासंघ जिला इकाई ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर राजेश पाटीदार को सौंपा। महासंघ ने देश में होम स्कूलिंग और वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था के लिए एक स्पष्ट राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली महंगी, अत्यधिक प्रतिस्पर्धी और व्यावसायिक होती जा रही है। महासंघ ने चिंता व्यक्त की कि निजी विद्यालयों और कोचिंग संस्थानों द्वारा ली जा रही बढ़ती फीस, अनिवार्य सामग्री की बिक्री और भारी वार्षिक शुल्क के कारण सामान्य व मध्यम वर्गीय परिवारों पर गंभीर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, भ्रामक विज्ञापनों से अभिभावकों में भय और भ्रम का वातावरण बन रहा है। वर्तमान शिक्षा प्रणाली बच्चों को ज्ञान और व्यक्तित्व विकास के बजाय केवल अंक और रैंक की दौड़ तक सीमित कर रही है। कोचिंग संस्थानों का विशाल व्यावसायिक जाल विद्यार्थियों और अभिभावकों पर मानसिक तथा आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है। लाखों रुपए की फीस लेकर चयनित परिणामों का प्रचार किया जाता है, जिससे यह समस्या और गंभीर हो जाती है। रचनात्मक वातावरण की जरूरतपालक महासंघ का मानना है कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है जो बच्चों की व्यक्तिगत क्षमता, रुचि और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे। होम स्कूलिंग और वैकल्पिक शिक्षा मॉडल विद्यार्थियों को शांत, सुरक्षित और रचनात्मक वातावरण में सीखने का अवसर प्रदान कर सकते हैं। इससे न केवल बच्चों को बेहतर व्यक्तिगत शिक्षा मिलेगी, बल्कि हजारों योग्य शिक्षकों, विषय विशेषज्ञों और स्वतंत्र ट्यूटरों को सम्मानजनक रोजगार और उचित मानदेय भी प्राप्त हो सकेगा। साथ ही, स्थानीय शिक्षण केंद्रों और कौशल आधारित प्रशिक्षण के नए अवसर भी विकसित होंगे। राष्ट्रीय नीति बनाने की मांगमहासंघ ने अपनी मांगों में होम स्कूलिंग और वैकल्पिक शिक्षा के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने, ओपन शिक्षा प्रणालियों को सरल व सुलभ बनाने, निजी विद्यालयों की अत्यधिक फीस और अनिवार्य सामग्री बिक्री पर नियंत्रण लगाने की बात कही। उन्होंने कोचिंग संस्थानों के भ्रामक विज्ञापनों पर सख्त कानून बनाने और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य व कौशल आधारित शिक्षा को प्राथमिकता देने की भी मांग की। इसके अतिरिक्त, स्वतंत्र शिक्षकों और होम ट्यूटरों के लिए पंजीकरण व सहयोग व्यवस्था स्थापित करने तथा डिजिटल शिक्षा प्लेटफॉर्म व सामुदायिक शिक्षण केंद्रों को सरकारी सहयोग प्रदान करने की भी मांग की गई। महासंघ ने जोर देकर कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण होना चाहिए। इस अवसर पर अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनी, सरिता भगत, मंसूर सेवक, अता उल्लाह खान, शोभालाल शर्मा, डॉक्टर युसूफ खान, मोहन दलाल, रियाज उल हक अंसारी, नंदकिशोर वाणे, विनय पुनिवाला, राजिक हुसैन और राजेश भगत सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।
हरियाणा के उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के औपचारिक निरीक्षण के लिए गठित कमेटी संबंधी आदेशों को वापस ले लिया है। विभाग की ओर से जारी पत्र में 21 अप्रैल, 2026 के आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की जानकारी दी गई है। दरअसल, उच्च शिक्षा विभाग ने अप्रैल में एक कमेटी गठित की थी, जिसका उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षण गतिविधियों की गुणवत्ता का निरीक्षण करना था। इस कमेटी में शिक्षा मंत्री के पीएस करण सिंह, हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद (HSHEC) के सदस्य डॉ. सतरूप ढांडा और शिक्षा मंत्री के पीए प्रदीप जागलान को शामिल किया गया था। कमेटी में शामिल शिक्षा मंत्री के पीए प्रदीप जागलान की योग्यता को लेकर विभाग के प्रोफेसर सोशल मीडिया पर मुखर हो रहे थे। उनका कहना था कि शिक्षा मंत्री के PA प्रदीप जागलान के पास कौनसी टेक्निकल दक्षता है, जिसके आधार पर उसके कमेटी में लिया गया है। जबकि विभाग से किसी भी सीनियर अधिकारी को कमेटी में शामिल नहीं किया गया है। विरोध बढ़ता देख विभाग की ओर से फैसला बदला गया है। ये था कमेटी का काम कमेटी हरियाणा के सभी राज्य एवं निजी विश्वविद्यालयों, सरकारी कॉलेजों, सहायता प्राप्त कॉलेजों और सेल्फ फाइनेंसिंग कॉलेजों में औपचारिक निरीक्षण करने वाली थी। आदेश में कहा गया था कि निरीक्षण के जरिए संस्थानों में मूलभूत सुविधाओं और पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित किया जाएगा। अब उच्च शिक्षा विभाग ने नया आदेश जारी कर पूर्व में जारी कमेटी गठन संबंधी आदेश को वापस ले लिया है। विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के रजिस्ट्रार व प्राचार्यों को इसकी जानकारी देते हुए निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने को कहा है।
भिवानी में नीट 2026 परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर NSUI ने चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय के मेन गेट पर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे NSUI जिला अध्यक्ष मंजीत लांग्यान ने केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा में हुई इस भारी धांधली ने देश के 22 लाख से अधिक ईमानदार और मेहनती छात्रों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है। उन्होंने कहा, जो छात्र वर्षों तक दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं, उनके सपनों को कुछ हजार रुपए के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरेआम बेच दिया गया। यह देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा कलंक है। बच्चे अव्यवस्था के कारण मानसिक तनाव में मंजीत लांग्यान ने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक यह साबित करते हैं कि केंद्र सरकार और एनटीए परीक्षाओं को निष्पक्ष तरीके से आयोजित कराने में पूरी तरह विफल हो चुकी हैं। आज गरीब, किसान और मजदूर परिवारों के बच्चे इस अव्यवस्था के कारण भारी मानसिक तनाव में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यवस्था की इस नाकामी के चलते कई छात्र आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं, जिसकी सीधी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की लापरवाही पर आती है। बोले- परीक्षा टालना ही हल नहीं है NSUI नेताओं ने साफ किया कि इस संकट का हल केवल परीक्षा को टालना या रद्द करना नहीं है। जब तक पेपर लीक माफिया, शिक्षा विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों और उन्हें राजनीतिक संरक्षण देने वाले रसूखदारों पर कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। तब तक देश के छात्रों को वास्तविक न्याय नहीं मिल सकेगा। उन्होंने संकल्प दोहराया कि देशभर के विद्यार्थियों की आवाज बनकर इस लड़ाई को सड़क से लेकर संसद तक मजबूती से लड़ेगी। मांग नहीं मानने पर आंदोलन की चेतावनी दी विरोध प्रदर्शन के माध्यम से छात्र संगठन ने सरकार के सामने मांग रखी कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की साख पूरी तरह खत्म हो चुकी है। इसलिए इसे तुरंत भंग किया जाए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस नाकामी की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से तुरंत इस्तीफा दें। पेपर लीक के इस पूरे नेटवर्क की जांच सर्वोच्च न्यायालय की सीधी निगरानी में कराई जाए। इस खेल में शामिल सभी दोषियों, कोचिंग माफियाओं और उन्हें शह देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो। उन्होंने कहा, मानसिक प्रताडऩा और वित्तीय नुकसान झेल रहे पीड़ित छात्रों और उनके परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
मध्य प्रदेश सरकार ड्रॉपआउट विद्यार्थियों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए ‘शिक्षा घर योजना’ शुरू करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को इस योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। अब स्कूल शिक्षा विभाग इसी सत्र से योजना को लागू करने की तैयारी करेगा। यह फैसला मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग की योजनाओं और गतिविधियों की समीक्षा बैठक में लिया गया। कक्षा 8 के बाद पढ़ाई छोड़ने वालों को मिलेगा लाभ अधिकारियों ने बैठक में बताया कि योजना का लाभ उन किशोर-किशोरियों और युवक-युवतियों को मिलेगा, जिन्होंने कक्षा 8 या उससे आगे की पढ़ाई के दौरान अनुत्तीर्ण होने पर पढ़ाई छोड़ दी थी। योजना के जरिए ऐसे विद्यार्थियों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। ड्रॉपआउट दर कम करने पर रहेगा फोकस सरकार का उद्देश्य स्कूल छोड़ चुके विद्यार्थियों की संख्या कम करना है। योजना लागू होने से शिक्षा से दूर हुए विद्यार्थियों को दोबारा पढ़ाई का अवसर मिलेगा। पाठ्यक्रम में शामिल होगी सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने पाठ्यक्रम से जुड़ी प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा। घोषणाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने विभागीय घोषणाओं का जल्द पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से समयबद्ध कार्ययोजना बनाने को कहा। वहीं, स्कूल भवनों की स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने जिलों में आंशिक रूप से जर्जर स्कूलों की तत्काल मरम्मत कराने को कहा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षण व्यवस्था प्राथमिकता है। बैठक में मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा विभाग की 14 योजनाओं को जारी रखने की सहमति दी। अधिकारियों को इनके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश भी दिए गए।
चंदर मोहन 12वीं बार आर्य शिक्षा मंडल के अध्यक्ष बने
भास्कर न्यूज | जालंधर वरिष्ठ पत्रकार चंदर मोहन को फिर से 3 साल के लिए आर्य शिक्षा मंडल का अध्यक्ष चुना गया है। केएमवी में हुई वार्षिक बैठक में उन्हें लगातार 12वीं बार यह जिम्मेदारी दी गई। यह बैठक केएमवी की 140वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित की गई। चंदर मोहन पिछले 32 वर्षों से आर्य शिक्षा मंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। वे खास तौर पर महिला शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। वर्ष 1994 में पहली बार अध्यक्ष बनने के बाद उनके नेतृत्व में केएमवी ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं, जिनमें हेरिटेज स्टेटस, स्वायत्त दर्जा और कई राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग व पुरस्कार शामिल हैं। बैठक में केएमवी की निदेशिका प्रो. (डॉ.) अतिमा शर्मा द्विवेदी, आलोक सोंधी, डॉ. सुषमा चावला, डॉ. सुषमा चोपड़ा, सुरेश सेठ, ध्रुव मित्तल, नीरजा मोहन, अनुराधा सोंधी, प्रो. (डॉ.) अतिमा शर्मा द्विवेदी, डॉ. प्रदीप भंडारी, डॉ. एसपी गुप्ता, डॉ. एसके शर्मा, संजय सभरवाल, भावना सभरवाल, शालिनी गुप्ता,हरीश गुप्ता, ज्योति सग्गी, रचना मोंगा, कविता भारद्वाज और वंदना शर्मा उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि उनके पिता वरिंदर जो महिला शिक्षा के प्रबल समर्थक थे, ने आर्य शिक्षा मंडल के अध्यक्ष के रूप में महिलाओं के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
पूर्ण व्यक्तित्व के लिए शिक्षा के साथ दीक्षा भी आवश्यक : भारती
भास्कर न्यूज | अम्बाला दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से गुरुदेव आशुतोष महाराज के दिव्य मार्गदर्शन में दशहरा ग्राउंड, रामबाग, कैंट में आयोजित श्री राम कथा में श्रद्धालु आध्यात्मिक रस में सराबोर हो रहे हैं। कथा के तृतीय दिवस पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथा व्यास साध्वी श्रेया भारती ने प्रभु श्रीराम के जन्म और जीवन की लीलाओं में निहित गहन आध्यात्मिक संदेशों को सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। साध्वी ने कहा कि रामचरितमानस केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला आध्यात्मिक ग्रंथ है। इसमें निहित संदेश युग, काल और देश की सीमाओं से परे हैं और आज की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने बताया कि जब मानव काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार में फंसकर अपने मार्ग से भटक जाता है, तब धर्म की स्थापना और मानवता के कल्याण के लिए परमात्मा साकार रूप में अवतरित होते हैं। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस में वर्णित प्रभु श्रीराम केवल अयोध्या के राजा नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के नियामक तत्व हैं। निराकार परमात्मा धर्म की पुनर्स्थापना के लिए साकार रूप धारण करता है और मानव को सत्य एवं मर्यादा का मार्ग दिखाता है। इस अवसर पर युवा नेत्री चित्रा सरवारा, सुनीता शास्त्री, राजेश सिंघल, राजकुमार बक्शी, गुलशन कुमार खरबंदा व अनिल सिंघल सहित अनेक व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन प्रभु श्रीराम की पावन आरती के साथ हुआ। वाद्य वृंद के साथ प्रस्तुत किए सुमधुर भजन साध्वी ने प्रभु राम की गुरुकुल शिक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल बाहरी शिक्षा से व्यक्तित्व का पूर्ण विकास संभव नहीं है। इसके लिए शिक्षा के साथ दीक्षा का समन्वय आवश्यक है। जब ज्ञान के साथ आध्यात्मिक संस्कार जुड़ते हैं, तभी मनुष्य का सर्वांगीण विकास होता है। कथा में संस्थान की अन्य साध्वियों ने वाद्य वृंद के साथ श्री रामचरितमानस की चौपाइयों का मधुर गायन प्रस्तुत किया। भजनों और आध्यात्मिक व्याख्या ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
सन वॉच से स्मार्ट शिक्षा तक:130 साल की विरासत संजोए पीजी कॉलेज कैंट
भास्कर न्यूज | अम्बाला राजकीय पीजी कॉलेज कैंट इतिहास, परंपरा और आधुनिक शिक्षा का अद्भुत संगम है। एक ओर 1893 का शिलापट्ट इस संस्थान की 130 वर्ष से अधिक पुरानी विरासत की कहानी सुनाता है। दूसरी ओर दशकों पुरानी सन वॉच आज भी सूर्य की किरणों से समय बताकर विद्यार्थियों को विज्ञान और इतिहास से जोड़ती है। यही वह परिसर है, जहां कभी इंडो मोहम्मडन स्कूल संचालित होता था। आज यह हरियाणा के 25 उत्कृष्ट (एक्सीलेंस) कॉलेजों में शामिल होकर नई पहचान बना चुका है। इसमें अम्बाला की स्पेलिंग ‘A’ की जगह ‘U’ से शुरू होती है। कॉलेज को मॉडल संस्कृति कॉलेज का दर्जा भी प्राप्त है। इसके तहत शैक्षणिक और प्रशासनिक स्तर पर कई प्रकार की स्वायत्तता मिली है। वर्ष 1997 में तत्कालीन हरियाणा सरकार के प्रयासों से इसे राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के रूप में स्थापित किया गया। इससे पहले यहां कैंटोनमेंट स्कूल चलता था। कॉलेज के प्रथम प्राचार्य एमसी महेश्वरी थे। उन्होंने इस संस्थान की शैक्षणिक नींव को मजबूत किया। आज यह कॉलेज शहर का एकमात्र सहशिक्षा (को-एड) सरकारी कॉलेज है। यहां 12 स्नातक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इनमें कुल 1,380 सीटें निर्धारित हैं। कम फीस, अनुभवी प्राध्यापक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के कारण हर वर्ष प्रवेश के दौरान यहां विद्यार्थियों की कतारें लगती हैं। खास बात यह है कि कॉलेज में लगभग 60 प्रतिशत छात्राएं अध्ययनरत हैं। यह बेटियों की उच्च शिक्षा के प्रति बढ़ते विश्वास और जागरूकता का प्रमाण है। शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ कॉलेज सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों में भी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। 48वें जोनल यूथ फेस्टिवल 2025 में विद्यार्थियों ने 16 स्थान हासिल कर फाइन आर्ट्स और साहित्यिक प्रतियोगिताओं की ओवरऑल ट्रॉफी जीती। राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद एवं कविता प्रतियोगिताओं में रनिंग ट्रॉफी हासिल कर छात्रों ने कॉलेज का नाम देशभर में रोशन किया। हरियाणवी समूह नृत्य, रंगोली, पेंटिंग, संस्कृत भाषण और वाद-विवाद जैसी प्रतियोगिताओं में भी विद्यार्थियों ने लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। ^ राजकीय पीजी कॉलेज शहर का एकमात्र सहशिक्षा सरकारी कॉलेज होने के कारण विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। यहां पारंपरिक विषयों के साथ-साथ बीबीए, बीसीए और मास कम्यूनिकेशन जैसे आधुनिक एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। संस्थान शिक्षा और संस्कार की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धा के लिए भी तैयार कर रहा है। - प्रो. देशराज बाजवा, प्राचार्य, राजकीय कॉलेज, कैंट।
एकेडमिक इंग्लिश स्कूल राजनगर के सलाहकार और शिक्षाविद् सदानंद मिश्रा का हुआ निधन
राजनगर| राजनगर एकेडमिक इंग्लिश हाई स्कूल के सलाहकार व शिक्षाविद् सदानंद मिश्रा का निधन हो गया। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। वे 79 वर्ष के थे। वे मूलतः बिहार के मुंगेर जिले के निवासी थे। इलाज के दौरान टीएमएच में उन्होंने अंतिम सांसे ली। उनके पोते व एकेडमिक इंग्लिश हाई स्कूल के प्राचार्य अभिषेक मिश्रा ने बताया कि सदानंद मिश्रा का पार्थिव शरीर मुंगेर जिले के उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उनके दादाजी सदानंद मिश्रा जुलाई 1967 से नवंबर 1995 तक एस एस हाई स्कूल राजनगर में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद दिसंबर 1995 से जून 2006 तक गालूडीह हाई स्कूल में कार्यरत रहे और वहीं से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने शिक्षा से नाता नहीं तोड़ा। अगस्त 2006 से अब तक वे एकेडमिक इंग्लिश हाई स्कूल राजनगर में सलाहकार (एडवाइजर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनका जन्म 30 जून 1946 को हुआ था। उनके निधन पर राजनगर में शिक्षकों, विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं क्षेत्र के लोगों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे शिक्षा जगत की अपूरणीय क्षति बताया है।
शिक्षा के मंदिर में बच्चों से मजदूरी कराना शर्मनाक
सिटी रिपोर्टर | बोकारो बुधवार को बोकारो विकास फोरम के बैनर तले जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) जगन्नाथ लोहरा का पुतला दहन किया गया। आरोप लगाया कि चास स्थित प्रोजेक्ट गर्ल्स हाई स्कूल में बच्चों से पढ़ाई के बजाय मजदूरी और सफाई का काम कराया जा रहा है, जो न केवल शिक्षा व्यवस्था पर कलंक है बल्कि बच्चों के अधिकारों का खुला उल्लंघन भी है। अध्यक्ष अनिल सिंह ने कहा कि जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में उनसे कचरा उठवाना और मजदूरी करवाना बेहद दुखद और शर्मनाक है।
छात्रों को उच्च शिक्षा और करियर विकल्पों के बारे में दी जानकारी
भास्कर न्यूज | लुधियाना दृष्टि डॉ. आरसी जैन इनोवेटिव पब्लिक स्कूल ने स्टूडेंट्स के लिए करियर मार्गदर्शन और उच्च शिक्षा संबंधी जानकारी के लिए एक सेमिनार का आयोजन किया। एडुप्लैनेट के प्रख्यात करियर सलाहकार गौरव चौधरी के नेतृत्व में आयोजित इस सत्र का उद्देश्य कक्षा 11 वीं और 12 वीं के छात्रों को विश्वविद्यालय जीवन में उनकी आगामी शिक्षा के लिए एक रणनीतिक रोडमैप प्रदान करना था। उन्होंने प्रवेश प्रक्रियाओं को समझने, उभरते हुए उच्च-विकास वाले करियर पथों की पहचान करने और अकादमिक छात्रवृत्ति प्राप्त करने के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। इस संवादात्मक सत्र का एक प्रमुख आकर्षण भारत में भौतिक परिसर स्थापित कर रहे अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों की बढ़ती उपस्थिति पर गहन चर्चा थी। इस खंड ने छात्रों और शिक्षकों को देश छोड़े बिना वैश्विक स्तर की शिक्षा और दोहरी डिग्री कार्यक्रमों तक पहुंचने के तरीके की स्पष्ट समझ प्रदान की। प्रधानाचार्य डॉ. मनीषा गंगवार ने कहा कक्षा 12 के बाद हमारे छात्र जो विकल्प चुनते हैं, वे आने वाले वर्षों के लिए उनके पेशेवर पथ को आकार देते हैं। प्रस्तुति का समापन एक जीवंत प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ।
पंजाब में बढ़ रही अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा की मांग टोफेल आईबीटी कर रहा नेटवर्क का विस्तार
अमृतसर| पंजाब के छात्रों में विदेश जाकर पढ़ाई करने की बढ़ती रुचि को देखते हुए ईटीएस इंडिया ने राज्य में टोफेल आईबीटी टेस्ट और तैयारी संसाधनों तक पहुंच को और मजबूत करने का फैसला किया है। इसके तहत अमृतसर में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित कर काउंसलर्स, शिक्षकों और स्टडी अब्रॉड सलाहकारों के साथ चर्चा सत्र आयोजित किए गए। ईटीएस इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर करण ललित ने बताया कि पंजाब के छात्रों में यूके, कनाडा और जर्मनी जैसे देशों में पढ़ाई को लेकर काफी रुझान है। पोस्ट-स्टडी वर्क और बेहतर करियर अवसरों के कारण छात्र वैश्विक शिक्षा की ओर बढ़ रहे हैं। हमारा उद्देश्य उन्हें सही और भरोसेमंद मार्गदर्शन देना है। इक्सोरा अकादमी के एमडी सुमित शर्मा और सोफिया कंसल्टेंट्स के सीईओ गुरजीत अहलूवालिया ने कहा कि छात्र अब रोजगार के अवसरों और यूनिवर्सिटी की आवश्यकताओं को लेकर अधिक जागरूक हैं। ऐसे में बेहतर टेस्टिंग नेटवर्क और सटीक जानकारी छात्रों को सही निर्णय लेने में मदद करेगी।
खेल शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा: प्रिं. मधु
अमृतसर | गोयनका स्पोर्ट्स अकादमी में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से क्रिकेट एकेडमी का शुभारंभ किया गया। अकादमी के संचालन के साथ विद्यार्थियों को पेशेवर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे खेल भावना, अनुशासन और आत्मविश्वास को बढ़ावा मिलने की बात कही गई। अकादमी से जुड़े विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन किया है और अपनी प्रतिभा के माध्यम से विद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं। प्रशिक्षण की जिम्मेदारी अनुभवी कोच आदित्य भंडारी के पास है। विद्यालय के चेयरमैन महाबीर और प्रिंसिपल मधु गांधी ने कहा कि खेल शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
शेखपुरा में बुधवार को जिलाधिकारी शेखर आनंद की अध्यक्षता में उनके कार्यालय प्रकोष्ठ में शिक्षा विभाग के कार्यों की प्रगति की समीक्षा बैठक हुई। इस दौरान जिलाधिकारी ने शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और छात्र-छात्राओं को बेहतर माहौल प्रदान करने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने ई-शिक्षा कोष ऐप पर शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही, नए आई.सी.टी. लैब के निर्माण कार्य में तेजी लाने पर भी बल दिया गया। उन्होंने स्कूलों में साफ-सफाई, निर्बाध बिजली और शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें अविलंब उपलब्ध कराने पर भी जोर शैक्षणिक और छात्र कल्याण योजनाओं के तहत त्रि-मासिक प्रतियोगिताओं का सफल आयोजन कराने, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने तथा पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप का लाभ छात्रों को समय पर दिलाने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, छात्र-छात्राओं को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें अविलंब उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। शिक्षा विभाग के अंतर्गत चल रहे सभी असैनिक निर्माण कार्यों की अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। 'पीएम पोषण' (मिड-डे मील) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, 'प्रोजेक्ट स्वाभिमान' और मॉडल स्कूलों के निर्माण कार्य को गति देने पर भी बल दिया गया। बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए सामाजिक संवेदनशीलता दिखाते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिले के विभिन्न ईंट-भट्टों पर कार्यरत मजदूरों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जाए। इसके लिए शिक्षा विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए हर हाल में बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, सभी विद्यालयों में विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) की बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने और उसकी विस्तृत रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी को अवगत कराने का भी निर्देश दिया गया। बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी डॉ. तनवीर आलम, डीपीओ रवि शास्त्री सहित जिले के सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, कनीय अभियंता और शिक्षा विभाग के अन्य मुख्य कर्मी व पदाधिकारी उपस्थित थे।
मऊ बाल संप्रेषण गृह में रोटरी क्लब का अभियान:बच्चों को स्वास्थ्य और शिक्षा का संदेश दिया
मऊ में रोटरी क्लब मऊ ने बुधवार को बाल संप्रेषण गृह में बच्चों के लिए एक विशेष जागरूकता और स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और रचनात्मक विकास को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम के दौरान बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इसके अतिरिक्त, चित्रकला प्रतियोगिता, प्रेरक भाषण, संगीत कार्यक्रम और जीवन जीने की कला से संबंधित सत्र भी आयोजित किए गए। वक्ताओं ने बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जुड़कर एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रेरित किया। देखें, 2 तस्वीरें… क्लब के वरिष्ठ सदस्यों में डॉ. एस.सी. तिवारी, कंचन तिवारी, ज्योति सिंह, क्लब अध्यक्ष डॉ. ए.के. सिंह और पूर्व अध्यक्ष प्रदीप सिंह शामिल थे। उन्होंने बच्चों को शिक्षा, अनुशासन और सकारात्मक सोच के महत्व के बारे में बताया। पूर्व अध्यक्ष डॉ. असगर अली सिद्दीकी ने बच्चों के दांतों और मुख का परीक्षण किया, साथ ही उन्हें साफ-सफाई और मौखिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया। चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. ए.के. रंजन ने भी बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की और आवश्यक चिकित्सीय सलाह दी। रोटरी क्लब मऊ के सचिव डॉ. एस. खालिद ने सभी अतिथियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चों ने भी इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और रोटरी क्लब के प्रयासों की सराहना की।
सरवनखेड़ा में बाल संरक्षण, 'बेटी बचाओ' पर बैठक:बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा और अधिकारों पर हुई चर्चा
कानपुर देहात के विकासखण्ड सरवनखेड़ा में बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति तथा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत एक बैठक आयोजित की गई। 20 मई 2026 को हुई इस बैठक की अध्यक्षता प्रभारी खण्ड विकास अधिकारी विमल सचान ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य बाल अधिकारों, बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा और संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करना था। प्रभारी खण्ड विकास अधिकारी विमल सचान ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से समाज में लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त करने और बालिकाओं को शिक्षा व सुरक्षा प्रदान करने की अपील की। स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी हर्ष मोहन सचान ने पीसीपीएनडीटी एक्ट-1994 के प्रावधानों और कन्या भ्रूण जांच पर होने वाली दंडात्मक कार्रवाई के बारे में बताया। सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) ने किशोर न्याय अधिनियम-2015 और नियमावली-2016 के तहत बालकों की देखरेख, संरक्षण और पुनर्वास से जुड़े प्रावधानों पर प्रकाश डाला। सामाजिक कार्यकर्ता दीपिका सिंह सेंगर ने पॉक्सो एक्ट-2012, बाल विवाह के दुष्परिणामों और थानों में संचालित महिला हेल्पडेस्क की भूमिका पर जानकारी दी। जिला मिशन समन्वयक प्रतिमा श्रीवास्तव ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के उद्देश्यों पर चर्चा की। उन्होंने गुड टच-बैड टच, बालिकाओं की सुरक्षा और विद्यालयों में जागरूकता अभियान चलाने पर विशेष जोर दिया। जेंडर स्पेशलिस्ट निधि यादव ने महिला कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं जैसे निराश्रित महिला पेंशन, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना और घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाओं को मिलने वाली सहायता के बारे में बताया। इस दौरान आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 181, 1090, 112, 1098 और 1076 के प्रति भी लोगों को जागरूक किया गया। बैठक के समापन पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की शपथ दिलाई गई। योजना के प्रचार-प्रसार के लिए पम्पलेट और स्टीकर भी वितरित किए गए।
पटना में आज राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के छात्र विंग SSAI की ओर से NEET पेपर लीक मामले को लेकर प्रतिरोध मार्च निकाला गया। इस दौरान पुतला दहन किया गया। राजद कार्यालय से पैदल मार्च कर इनकम टैक्स गोलंबर पर पुतला दहन करना था। हालांकि प्रशासन की ओर से परमिशन नहीं दी गई। इसके बाद राजद कार्यालय के बाहर ही छात्र संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया। देखें प्रदर्शन की तस्वीरें… छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का आरोप राजद छात्र विंग का कहना है कि लगातार हो रहे पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। संगठन ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी के कारण मेहनत करने वाले छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है। सरकार के खिलाफ नारेबाजी प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पेपर लीक बंद करो, “छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो” और “नीट परीक्षा में पारदर्शिता लागू करो” जैसे नारे लगाए। इस प्रतिरोध मार्च में बड़ी संख्या में छात्र और राजद कार्यकर्ता शामिल हुए हैं। संगठन ने छात्रों से आंदोलन में शामिल होकर अपनी आवाज उठाने की अपील की है।
हरियाणा में लगातार बढ़ती गर्मी और हीटवेव की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के बीच आज (बुधवार को) एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस मीटिंग में राज्य के सरकारी और निजी स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश (समर वेकेशन) की तारीखों पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, मीटिंग का मुख्य उद्देश्य भीषण गर्मी के बीच स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। प्रदेश के कई जिलों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। ऐसे में छोटे बच्चों को स्कूल आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। CM को सौंपी विभाग ने रिपोर्ट शिक्षा विभाग ने मुख्यमंत्री को मौसम की स्थिति, स्कूलों के संचालन और संभावित छुट्टियों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट के आधार पर स्कूलों में समय परिवर्तन, छुट्टियों की अग्रिम घोषणा और अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर चर्चा होगी। समर वेकेशन जल्दी घोषित होने की संभावना सामान्य तौर पर हरियाणा में स्कूलों की ग्रीष्मकालीन छुट्टियां जून के पहले सप्ताह से शुरू होती हैं, लेकिन इस बार तापमान में असामान्य वृद्धि के कारण सरकार छुट्टियां पहले घोषित कर सकती है। संभावना है कि सरकारी और निजी स्कूलों के लिए एक समान आदेश जारी किया जाए। ईंधन बचत से जुड़े फैसले भी संभव बैठक में केवल छुट्टियों पर ही नहीं, बल्कि ऊर्जा और ईंधन बचत से जुड़े उपायों पर भी चर्चा होगी। यदि स्कूलों को समय से पहले बंद किया जाता है तो स्कूल बसों, परिवहन और बिजली की खपत में कमी आएगी। सरकार इसे प्रशासनिक दक्षता और संसाधनों के बेहतर उपयोग से भी जोड़कर देख रही है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की रहेगी मौजूदगी बैठक में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, मौसम विभाग से प्राप्त इनपुट और जिला स्तर की रिपोर्टों के आधार पर प्रस्तुति देंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री अंतिम निर्णय लेंगे।राज्यभर के लाखों विद्यार्थी, अभिभावक और शिक्षक इस बैठक के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। यदि छुट्टियों की घोषणा होती है तो इसका लाभ लगभग सभी सरकारी और निजी स्कूलों के छात्रों को मिलेगा। जल्द जारी हो सकता है आधिकारिक आदेश बैठक के बाद शिक्षा विभाग द्वारा आधिकारिक आदेश जारी किए जाने की संभावना है। आदेश जारी होते ही स्कूलों को निर्देश भेज दिए जाएंगे और नई समय-सारिणी या छुट्टियों की तिथियां लागू हो जाएंगी। फिलहाल पूरे प्रदेश की नजर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की इस महत्वपूर्ण बैठक पर टिकी हुई है, जिससे छात्रों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में NEET परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में NSUI ने प्रदर्शन किया। इस दौरान जिले के छह ब्लॉकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पुतले फूंके गए। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए जमकर नारेबाजी की। यह प्रदर्शन भखारा, कुरूद, नगरी, बेलर, कुकरेल और मगरलोड सहितजिले के अलग-अलग ब्लॉकों में किया गया। बड़ी संख्या में छात्र-युवाओं ने एकत्रित होकर केंद्र सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में अव्यवस्था, परीक्षा प्रणाली की विफलता और युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे कथित खिलवाड़ को लेकर नारे लगाए। NSUI कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बार-बार हो रहे पेपर लीक से देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र-छात्राओं की वर्षों की मेहनत और अभिभावकों के सपने कथित भ्रष्ट तंत्र के कारण बर्बाद हो रहे हैं। NSUI ने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
दतिया जिले के इंदरगढ़ में मंगलवार रात युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नीट यूजी पेपर लीक मामले के विरोध में मशाल जुलूस निकाला। यह जुलूस हॉस्पिटल चौराहे से शुरू होकर सेवढ़ा रोड तक पहुंचा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। इस प्रदर्शन का नेतृत्व युवा कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष शिवाजी गुर्जर और ब्लॉक उपाध्यक्ष अल्ताफ खान ने किया। बड़ी संख्या में युवाओं ने हाथों में मशाल लेकर केंद्र सरकार और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। जुलूस के दौरान कार्यकर्ताओं ने “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” और “युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो” जैसे नारे लगाए। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांगइस मौके पर युवा कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष रविन्द्र सिंह ‘रामू’ गुर्जर ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा तोड़ दिया है। मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य के साथ अन्याय हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई।
बिहार की सियासत में शिक्षा को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के बयान पर तीखा पलटवार किया है। शिक्षा मंत्री द्वारा सरकारी स्कूल में पढ़ाने की बात कहे जाने के बाद तेजस्वी यादव ने नाराजगी जाहिर करते हुए बीजेपी और एनडीए नेताओं पर निशाना साधा। पहले अपने नेताओं को सरकारी स्कूल में पढ़ाइए- तेजस्वी तेजस्वी यादव ने कहा कि, 'सरकारी स्कूलों से पढ़कर ही कई लोग IAS और IPS बने हैं। तेजस्वी ने कहा कि, आज IAS और IPS की संख्या घट गई है, जिस तादात में लोग पहले जाते थे। सरकारी स्कूलों का मजाक उड़ाना गलत है।’ तेजस्वी यादव ने कहा कि, 'लालू-राबड़ी सरकार के समय शिक्षा मंत्री के परिवार का भी कोई न कोई सदस्य सरकारी स्कूल में जरूर पढ़ा होगा। क्या बोले थे शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी? पिछले दिनों शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने तेजस्वी यादव पर तंज कसते हुए कहा था कि उन्होंने “एजिटेशन” शब्द कहा था, लेकिन तेजस्वी उसे “एजुकेशन” समझ बैठे। मिथिलेश तिवारी ने कहा, “मैं शिक्षा मंत्री हूं, इसलिए तेजस्वी यादव की मैट्रिक तक की पढ़ाई सुनिश्चित कराना भी मेरी जिम्मेदारी है।' राजद के पोस्टर में पीएम मोदी पर तंज इधर, राष्ट्रीय जनता दल ने पटना स्थित पार्टी कार्यालय के बाहर पोस्टर लगाकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पोस्टर में पीएम मोदी के विदेश दौरे को लेकर तंज कसते हुए लिखा, ‘देश की जनता त्रस्त, मोदी जी विदेश यात्रा में मस्त।' पेट्रोल-डीजल की कीमत, सोना और विदेश यात्राओं के खर्च को लेकर भी राजद ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। साथ ही बीजेपी-जेडीयू पर जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है।
बात खरी है... इसमें आप देखेंगे बिहार के नेताओं और अफसरों के बीच अंदरखाने क्या चल रहा है, और दिनभर की ऐसी बड़ी हलचल जो आपको हंसाएगी भी और जिम्मेदारों को आइना भी दिखाएंगी। ऊपर VIDEO पर क्लिक करें...
डिजिटल युग में जहां बच्चे गर्मियों की छुट्टियों में मोबाइल और गेम्स में व्यस्त रहते हैं, वहीं विभिन्न समाजों व धार्मिक संस्थाओं ने संस्कारों की पाठशालाएं शुरू की हैं। इन पाठशालाओं में बच्चों को नैतिक व धार्मिक शिक्षा दी जा रही है। खास बात यह है कि बच्चों को मोबाइल व टीवी से दूरी बनाकर किताबों से जुड़ने का संकल्प दिलवाया जा रहा है। अमरापुर; चरित्र निर्माण का प्रशिक्षण अमरापुर स्थान में 15 दिवसीय बाल संस्कार शिविर का शुभारंभ संत स्वामी मनोहर लाल महाराज, संत मोहन प्रकाश महाराज व संत मंडल द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। अध्यापक जितेन्द्र दाधीच वेदाचार्य ने बताया कि पहले दिन 85 बच्चों ने भाग लिया। शिविर रोजाना सुबह 9 बजे से शुरू हो रहा है। स्वामी मोहन प्रकाश महाराज ने बताया कि नई पीढ़ी को मोबाइल व टीवी से दूर कर संस्कारों से जोड़ने के उद्देश्य से शिविर आयोजित किया है। शिविर में भक्ति, सेवा, योग, सूर्य मंत्र, हनुमान चालीसा, गुरु प्रार्थना व सनातन धर्म से जुड़े विषयों की शिक्षा दी जा रही है। गुप्त वृन्दावन धाम; ‘कल्चर कैंप’ में वैदिक शिक्षा गुप्त वृन्दावन धाम में हर साल की तरह इस बार भी संस्कारों की पाठशाला के तहत ‘कल्चर कैंप’ शुरू हुआ है। पहले बैच में बच्चे 15 दिन तक वैदिक कलाओं की बारीकियां सीखेंगे। कैंप में धार्मिक थिएटर, कीर्तन, भगवद गीता के श्लोक, आर्ट-क्राफ्ट, ड्राइंग, पेंटिंग और कुकिंग सिखाई जा रही है। बच्चों को हरे कृष्ण महामंत्र का जाप भी सिखाया जा रहा है। बच्चों को जयपुर के धार्मिक स्थलों की यात्रा भी करवाई जाएगी। यह कैंप कक्षा 1 से 10 तक के बच्चों के लिए है, समय सुबह 7:30 से दोपहर 12 बजे तक रखा गया है। कक्षा 6 से 12 के लिए निशुल्क पुरुषोत्तम कैंप भी आयोजित किया गया है। राजापार्क; गुरमत समर क्लास में संस्कृति से जुड़ाव राजस्थान सिक्ख समाज व जयपुर स्त्री सत्संग के संयुक्त तत्वावधान में राजापार्क स्थित गुरु नानक देव विद्यालय में 8 से 20 वर्ष के बच्चों के लिए गुरमत समर क्लास शुरू हुई। टीचर सुरजीत सिंह व मनजीत कौर ने बताया कि बच्चों को गुर इतिहास, गुरमुखी, दस्तार बांधना सिखाया जा रहा है। साथ ही हारमोनियम, तबला व ढोलक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बच्चों को मोबाइल व टीवी से दूर रहकर किताबों से जुड़ने की सीख दी जा रही है। कार्यक्रम की शुरुआत मूल मंत्र साहिब के पाठ व माता इंदरजीत कौर की अरदास से हुई। इस दौरान अजयपाल सिंह, जसबीर सिंह, देवेन्द्र सिंह शंटी, जसबीर सिंह, डॉ. विंकी कोर, दविंदर कौर, रणजीत कौर, दलजीत कौर, मीना बग्गा, वीरेंद्र नरूला और हरविंदर सिंह मौजूद रहे। बापू नगर; 10 दिवसीय जैन संस्कार पाठशाला शुरू दिगंबर जैन समाज बापू नगर संभाग द्वारा गणेश मार्ग स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन चैत्यालय में 10 दिवसीय धार्मिक संस्कार पाठशाला का शुभारंभ हुआ। यह पाठशाला श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर की बालिका छात्रावास की छात्राओं द्वारा संचालित की जा रही है। पहले दिन बच्चों को जीवन में संस्कारों के महत्व के बारे में बताया गया। बच्चों को 10 दिनों तक मोबाइल का उपयोग पूरी तरह बंद करने की बात कही गई और सामूहिक शपथ दिलवाई गई। संभाग अध्यक्ष उमरावमल संघी ने विदेश से ऑनलाइन जुड़कर उद्घाटन किया। मुख्य अतिथि संगीता पदम रारा, संयोजिका शकुल बाकलीवाल, अलका बाकलीवाल, रेणु नृपत्या सीमा जैन, बबीता पाटनी व रचना बैद और राजीव जैन मौजूद रहे। पाठशाला प्रतिदिन सुबह 9 बजे से संचालित हो रही है।
अररिया में कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा संचालित आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में गायन, वादन और नृत्य का निःशुल्क प्रशिक्षण शुरू हो गया है। इस केंद्र का उद्देश्य जिले के बच्चों और युवाओं को कला के क्षेत्र में अवसर प्रदान करना तथा उनकी प्रतिभा को निखारना है। पहले आओ, पहले पाओ प्रशिक्षण शुरू होने के साथ ही बच्चों और अभिभावकों में उत्साह देखा जा रहा है। अब तक 20 बच्चों ने केंद्र में नामांकन करा लिया है। नामांकन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किया जा रहा है, जिसके लिए न्यूनतम आयु सीमा 6 वर्ष निर्धारित की गई है। प्रशिक्षण मंगलवार से रविवार तक दोपहर 12 बजे से संध्या 6 बजे तक चलेगा। इच्छुक अभिभावक अपने बच्चों के नामांकन के लिए सीधे केंद्र पर संपर्क कर सकते हैं। आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र द्वितीय तल, विजय एंड संस मार्केट, रानीगंज रोड, अररिया में स्थित है। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी ने बताया कि यह केंद्र बच्चों के समग्र व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और रचनात्मक सोच को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विभाग का लक्ष्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देना है, ताकि वे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें। पदाधिकारी ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन कराकर उन्हें सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ें। यह पहल जिले में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने और नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे केंद्र बच्चों को व्यसनों से दूर रखने में भी सहायक होंगे।
हनुमानगढ़ में मंगलवार को श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय द्वारा गुरु-शिष्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। संगरिया की पंचायती धर्मशाला में हुए इस कार्यक्रम में 12वीं कक्षा में 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 2000 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। यह समारोह विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण क्लब 'स्पंदन' के अंतर्गत संचालित 'सद्भाव क्लब' के संयोजन में आयोजित किया गया। विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए। समारोह को संबोधित करते हुए श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि सफलता केवल अच्छे अंकों से नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए अनुशासन, सकारात्मक सोच, संस्कार और निरंतर मेहनत आवश्यक है। उन्होंने युवाओं को देश की अमूल्य संपत्ति बताते हुए कहा कि मजबूत संकल्प के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त आईजी गिरीश चावला ने विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धा के दौर में स्वयं को लगातार अपडेट रखने की सलाह दी। उन्होंने छात्रों से अपने माता-पिता के संघर्ष और त्याग का सम्मान करने का भी आह्वान किया। विश्वविद्यालय के प्रबंध निदेशक दिनेश जुनेजा ने बताया कि वर्तमान में 12 हजार से अधिक विद्यार्थी विश्वविद्यालय से जुड़े हुए हैं, जिनमें विदेशी छात्र भी शामिल हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि विश्वविद्यालय ने योग के क्षेत्र में एक विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है। इस अवसर पर राजेश गोदारा, नीलम सोनी, राधेश्याम कोटी, देवेंद्र कौर, रजिस्ट्रार मयंक माथुर, पुरुषोत्तम मिड्ढा, पवन मिड्ढा, सीमा भल्ला, कमलेश गोदारा, सतीश गर्ग, संजय जिंदल, सुनील बिरट, डॉ. विक्रम औलख, सुरेंद्र अरोड़ा, डॉ. बाबूलाल पारीक, योगेंद्र स्वामी और मनीष भोबिया सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहे। मंच संचालन अनिल जिज्ञासु एवं मदनलाल शर्मा ने किया।
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) के ट्रेनिग सेशन से गायब रहने वाले एफिलिएटेड स्कूल्स के प्रिंसिपल पर चेयरमैन डॉ अमरपाल ने 1100-1100 रुपए जुर्माना लगा दिया। बोर्ड ने स्कूल प्रिंसिपल्स के लिए आज फिर से ट्रेनिंग सेशन रखा है। पीएसईबी ने प्रिंसिपल्स को चेतावनी दी है कि अगर आज भी गायब रहे तो उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। बोर्ड ने साफ किया है कि एफिलिएशन नियमों के तहत कंटीन्यूअस प्रोफेशनल डेवलपमेंट (CPD) की 50 घंटे की ट्रेनिंग बेहद जरूरी है। पिछले सत्रों में प्रिंसिपलों का शामिल न होना बोर्ड अथॉरिटी ने बेहद गंभीरता से लिया है। इस विशेष ट्रेनिंग और वर्कशॉप में अमृतसर, बठिंडा और बरनाला जिलों को छोड़कर, पंजाब के बाकी सभी जिलों के वे प्रिंसिपल शामिल होंगे जो पिछली बार गैर-हाजिर रहे थे। अनुपस्थित रहे प्रिंसिपलों को अब 1100 रुपए जुर्माना जम करवाने के बाद वर्कशॉप में शामिल हो सकेंगे। बोर्ड ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि आज की ट्रेनिंग में भी कोई प्रिंसिपल नहीं पहुंचता है, तो उसका केस एफिलिएशन नियमों के तहत उचित दंडात्मक कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को भेज दिया जाएगा। प्रिंसिपल नोट कर लें वर्कशॉप का पूरा शेड्यूल पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा तय किए गए नए शेड्यूल के मुताबिक, अनुपस्थित रहे प्रिंसिपलों की आज सुबह 10 बजे से तीन बजे तक ट्रेनिंग चलेगी। प्रिंसिपी सुबह 9:30 बजे रजिस्ट्रेशन करवाएंगे ताकि समय पर ट्रेनिंग शुरू हो सके। ट्रेनिंग पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के ओडिटोरियम, मोहाली में होगी। प्रिंसिपल्स को वर्कशॉप में दी जा रही है ये जानकारियां…
संभाग स्तरीय शारीरिक शिक्षा शिक्षक स्नेह मिलन सम्मेलन
उदयपुर| राजस्थान शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ, चित्तौड़गढ़ के तत्वावधान में उदयपुर संभाग स्तरीय शारीरिक शिक्षा शिक्षक स्नेह मिलन सम्मेलन सांवलियाजी में संपन्न हुआ। इसमें संभाग के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में शिक्षक जुटे। मुख्य अतिथि संघ के प्रदेशाध्यक्ष हापु राम चौधरी रहे। सम्मेलन में शिक्षकों की समस्याओं, संगठन को सुदृढ़ करने, विद्यालयों में खेल गतिविधियों के विस्तार और खेल संस्कृति बढ़ाने पर चर्चा हुई।
शिक्षा मंत्री ने गो विज्ञान परीक्षा का परिणाम घोषित किया
जयपुर| जयपुर प्रान्त की तरफ से हुई गो विज्ञान अनुसंधान एवं सामान्य ज्ञान परीक्षा 2025 का प्रांत स्तरीय परीक्षा परिणाम सोमवार को शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने घोषित किया। प्रांत के परीक्षा प्रभारी अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि इस वर्ष परीक्षा में जयपुर प्रांत से 86 हजार 346 परीक्षार्थियों ने बाल वर्ग, किशोर वर्ग और तरुण वर्ग में हिस्सा लिया। जिला स्तरीय वरीयता प्राप्त 225 परीक्षार्थियों की पुनः परीक्षा 5 मई को स्वास्तिक भवन अंबाबाड़ी में हुई। इसमें तीनों वर्गों के 9 परीक्षार्थियों ने प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किया। बाल वर्ग में शगुन मीणा अलवर ने प्रथम, आयुष मिश्रा सीकर ने द्वितीय तथा अभिनव शर्मा डीग ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। किशोर वर्ग में काजल कंवर चूरू ने प्रथम, रेखा चौधरी अलवर ने द्वितीय तथा यास्मीन सीकर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसी तरह तरुण वर्ग में रुचिका सेवदा श्रीमाधोपुर ने प्रथम, गुंजन यादव खैरथल तिजारा ने द्वितीय तथा किरण प्रजापत दौसा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रत्येक वर्ग में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त परीक्षार्थियों को क्रमश: 15000, 11000 एवं 8000 रुपए नकद तथा प्रशस्ति पत्र, तीनों वर्गों में एक-एक सांत्वना पुरस्कार भी दिया जाएगा। इस अवसर पर परीक्षा संचालन समिति के सह प्रभारी महेंद्र कुमार शर्मा, बाबूलाल वर्मा, प्रेरणा मलिक व परीक्षा से जुड़े लोग मौजूद रहे।
शिक्षा भी हुई महंगी:आरयू ने यूजी-पीजी व पीएचडी की फीस 10 फीसदी बढ़ाई, 10 साल में डबल हुई
राजधानी के लोगों को पेट्रोल-डीजल, गैस के बाद अब पढ़ाई की महंगाई भी झेलनी पड़ेगी। राजस्थान यूनिवर्सिटी (आरयू) ने नए सत्र से 10% फीस बढ़ाने का फैसला लिया है। इसमें यूजी-पीजी कोर्स से लेकर पीएचडी तक शामिल है। पिछले 10 साल की बात करें तो फीस डबल हो गई है। 2016-17 में आरयू में पीएचडी की फीस 29 हजार थी, अब 54,860 लगेंगे। यूजी-पीजी, सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स से लेकर परीक्षा फीस, डुप्लीकेट डिग्री, माइग्रेशन, मार्कशीट तक की फीस बढ़ी है। निजी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में भी कोर्स महंगे हुए हैं। आरयू के इस निर्णय का असर संघटक कॉलेजों व विभागों में पढ़ रहे करीब 30 हजार रेगुलर छात्रों पर सीधा पड़ेगा। करीब 3 लाख से अधिक स्वयंपाठी विद्यार्थी भी प्रभावित होंगे। 58 करोड़ रुपए घाटे का अनुमान यूनिवर्सिटी ने अगले सत्र में 58 करोड़ के घाटे का आकलन किया है। छात्राओं की ट्यूशन फीस हर साल करीब 3.50 करोड़ रुपए होती है। सीनेट में छात्राओं की ट्यूशन फीस राज्य सरकार से देने की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा निदेशक का वेतन रोकने की दी चेतावनी
झारखंड हाईकोर्ट ने एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को कड़ा निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने कहा कि यदि प्रार्थियों को 22 जून तक वैधानिक लाभ नहीं दिया गया, तो उच्च शिक्षा निदेशक का वेतन रोक दिया जाएगा। अदालत ने वसंत कुमार साहू समेत 15 प्रार्थियों की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। सुनवाई के दौरान उच्च शिक्षा निदेशक वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए। इससे पहले हुई तीन सुनवाई में निदेशक की ओर से अदालत को अंडरटेकिंग देकर आश्वासन दिया गया था कि प्रार्थियों को पेंशन और बकाया भुगतान सुनिश्चित कराया जाएगा। निदेशक ने यह भी कहा था कि मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है, जो 16 सप्ताह के भीतर भुगतान सुनिश्चित करेगी। हालांकि अदालत ने 12 सप्ताह के भीतर भुगतान का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक आदेश का पालन नहीं हो सका।
विशेष शिक्षा सहायक शिक्षक परीक्षा स्थगित
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने झारखंड इंटरमीडिएट प्रशिक्षित एवं स्नातक प्रशिक्षित विशेष शिक्षा सहायक शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2025 को परीक्षा से करीब 24 घंटे पहले स्थगित कर दिया है। आयोग ने सोमवार को परीक्षा स्थगित करने से संबंधित नोटिफिकेशन जारी किया। यह परीक्षा 20 से 23 मई तक आयोजित होनी थी, लेकिन अपरिहार्य कारणों की वजह से फिलहाल इसे टाल दिया गया है। जेएसएससी ने कहा है कि परीक्षा की नई तिथि जल्द घोषित की जाएगी। इस परीक्षा के माध्यम से विशेष शिक्षा सहायक शिक्षक के 3451 पदों पर नियुक्ति होनी है।
सरकारी स्कूलों की चुनौतियां और बदलता शिक्षा परिदृश्य
शिक्षा किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति, सामाजिक गतिशीलता और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की आधारशिला है।
Fact Check: क्या बिहार के शिक्षा मंत्री ने कहा लड़कियों को शिक्षा की जरूरत नहीं? सच जानिए
बूम ने पाया कि बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने Agitation शब्द का इस्तेमाल किया था जिसे एजुकेशन समझकर गलत दावा किया जा रहा है.
कन्नड़ मूवी 'केडी: द डेविल' के गाने 'सरके चुनर' पर विवाद अभी भी जारी है। इस गाने के बोल और फिल्मांकन पर बढ़ते विवाद के बाद नोरा फतेही को राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के समक्ष पेश होना पड़ा। नोरा ने न केवल अपनी स्थिति स्पष्ट की, बल्कि भविष्य के लिए एक ...
छत्तीसगढ़ बोर्ड ने जारी किया 10वीं और 12वीं का रिजल्ट, जानिए कितने फीसदी विद्यार्थी हुए उत्तीर्ण?
Chhattisgarh Board Exam Result 2026 : छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) ने आज कक्षा 10वीं और 12वीं के परिणाम घोषित कर दिए हैं। छात्र अपना परीक्षा परिणाम आधिकारिक वेबसाइट cgbse.nic.in और डिजीलॉकर के माध्यम से देख और डाउनलोड कर सकते हैं। ...
पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु का रिश्वत लेते हुए वीडियो फर्जी और एआई जनरेटेड है
बूम ने पाया कि ब्रात्य बसु का वीडियो गूगल के SynthId का उपयोग करके एआई द्वारा जनरेट किया गया है.
समानता और शिक्षा की क्रांतिकारी मशाल: सावित्रीबाई फुले
10मार्च सावित्रीबाई फुले महापरिनिर्वाण दिवस भारतीय समाज में जब भी शिक्षा,समानता और सामाजिक न्याय की बात उठती है,तो एक नाम इतिहास के पन्नों से निकलकर हमारे सामने खड़ा हो जाता है—सावित्रीबाई फुले।10मार्च को उनका महापरिनिर्वाण दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है,बल्कि यह दिन उस सामाजिक चेतना को याद करने का अवसर है,जिसने सदियों ... Read more
आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं
महिला दिवस पर विशेष:- अजमेर राजस्थान आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं:- देश-प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध ओर इन अपराधों में पिछले वर्षो में अपराध की दर तीव्र ही हुई है ओर “भारत मे अपराध ” नामक रिपोर्ट बताती है ... Read more
शिक्षा को हिंसक नहीं, संवेदनशील बनाना होगा
देश में इन दिनों बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं और सामान्य परीक्षाएं भी शुरू होने वाली हैं। हर साल की तरह इस बार भी परीक्षा का मौसम केवल प्रश्नपत्रों और परिणामों का नहीं, बल्कि मानसिक दबाव, चिंता और असुरक्षा का मौसम बनता जा रहा है। छात्रों के चेहरों पर भविष्य की चिंता साफ पढ़ी जा ... Read more
गला घोटिया शिक्षा का विश्वगुरु बन चुका देश
पिछले 12 सालों से देश को विश्वगुरु बनाने का जो झूठ फैलाया जा रहा था, अब उसका गुबार ऐसा फूटा है कि दुनिया भर में शर्मिंदगी का सबब बन गया है।
शिक्षा में समता या नई असमानताः यूजीसी नियमों पर न्यायिक विराम
नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर लागू किए गए नए नियमों ने देश के शैक्षिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बार फिर गहरी हलचल पैदा कर दी है। जिस नीति को ‘समता’, ‘समान अवसर’ और ‘समावेशी शिक्षा’ की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया ... Read more
शिक्षा खौफनाक नहीं, बल्कि स्नेह एवं हौसलों का माध्यम बने
जीवन को दिशा देने वाली शिक्षा यदि भय, हिंसा और दमन का पर्याय बन जाए तो वह सभ्यता की सबसे बड़ी विडंबना कही जाएगी। हाल के वर्षों में पढ़ाई के नाम पर बच्चों पर बढ़ते दबाव, घर और स्कूल में हिंसक व्यवहार तथा प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ ने शिक्षा की आत्मा पर गहरा आघात किया ... Read more
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
NEET UG रिजल्ट को लेकर अभी भी जारी है गुस्सा, छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के पास किया विरोध प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए छात्रों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। आइए जानते हैं, क्या है पूरा म
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का 10 फीसदी भी डाटा नहीं हुआ अपलोड
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का डाटा अपलोड करने में जिले के कई स्कूल ढील दे रहे हैं, वे 10 फीसदी छात्रों का भी डाटा अभी तक अपलोड नहीं कर पाए हैं। डाटा अपलोड करने में आधार कार्ड की अनिवार्यता के बाद से छ
स्कूलों में कैसे पढ़ा रहे हैं शिक्षक, वीडियो में देखेगा शिक्षा विभाग, होगी रिकॉर्डिंग
शिक्षा विभाग वीडियो के जरिए देखेगा कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षक छात्रों को कैसे पढ़ाते हैं। बता दें. छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षकों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। आइए जानते हैं विस्तार से।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति : यूपी बोर्ड ने दिए निर्देश, एनईपी लागू करने को स्कूल बनाएंगे प्लान
यूपी बोर्ड से जुड़े 27 हजार से अधिक स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू करने के लिए स्कूल स्तर पर योजना बनाई जाएगी। एनईपी 2020 के विषय में विद्यालयों में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
बॉलीवुड का ये सुपरस्टार युवाओं को IAS बनाने के लिए मुफ्त में देगा शिक्षा, योजना से अबतक जुड़ चुके है7000 युवा
राम बनने के लिएधनुष-बाण चलाने की शिक्षा ले रहे है Ranbir Kapoor, एक्टर केआर्चरी ट्रेनर ने शेयर की तस्वीरें

