स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों और शिक्षा विभाग के कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए नया आदेश जारी किया है। अब हर कार्मिक को शाला दर्पण पोर्टल पर दर्ज अपनी पूरी जानकारी खुद जांचनी होगी और उसे प्रपत्र-10 में लॉक करना होगा। इसके बाद विभाग उस जानकारी का सरकारी रिकॉर्ड से मिलान करेगा। टोंक समेत पूरे प्रदेश के करीब साढ़े तीन लाख कार्मिक इस प्रक्रिया के दायरे में आएंगे। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने इसके आदेश जारी किए हैं। अगर कोई कार्मिक तय प्रक्रिया पूरी नहीं करता या गलत जानकारी देता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। 10 जुलाई तक अपनी पूरी जानकारी जांचकर करनी होगी लॉक शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार सभी राजकीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के साथ ही शिक्षा विभाग के कार्यालयों में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी शाला दर्पण पोर्टल पर अपने स्टाफ लॉगिन में जाकर स्टाफ प्रोफाइल के तहत उपलब्ध प्रपत्र-10 की सभी जानकारियां अपनी सेवा पुस्तिका और व्यक्तिगत रिकॉर्ड के अनुसार जांचेंगे। इसके बाद व्यक्तिगत, शैक्षणिक, सेवा, पदोन्नति, पारिवारिक, बैंक, प्रशिक्षण समेत 15 अलग-अलग फॉर्मेट को 10 जुलाई तक लॉक करना होगा। 15 जुलाई तक अधिकारी करेंगे रिकॉर्ड से मिलान कार्मिक द्वारा जानकारी लॉक करने के बाद उसकी जांच होगी। प्रारंभिक शिक्षा के स्कूलों में पीईईओ और यूसीईईओ, जबकि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में संस्था प्रधान प्रपत्र-10 में दर्ज जानकारी का सेवा रिकॉर्ड से मिलान करेंगे। शिक्षा विभाग के कार्यालयों में संबंधित कार्यालयाध्यक्ष यह सत्यापन करेंगे। यह पूरी प्रक्रिया 15 जुलाई तक पूरी करनी होगी। सत्यापन के बाद रिकॉर्ड में हमेशा के लिए रखा जाएगा प्रपत्र सत्यापन पूरा होने के बाद प्रपत्र-10 की प्रिंट कॉपी निकाली जाएगी। इस पर कार्मिक और संस्था प्रधान के हस्ताक्षर होंगे और इसे मूल व्यक्तिगत पत्रावली में रखा जाएगा। इसमें सत्यापन करने वाले अधिकारी का नाम और तारीख भी दर्ज होगी। यह दस्तावेज रिकॉर्ड का स्थायी हिस्सा रहेगा। बाद में यदि किसी जानकारी में बदलाव होता है तो उसकी संशोधित प्रति भी रिकॉर्ड में जोड़नी होगी। रिकॉर्ड और पोर्टल की जानकारी एक जैसी करना है उद्देश्य शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बताया - विभाग चाहता है कि शाला दर्पण पोर्टल पर दर्ज सभी जानकारियां सेवा पुस्तिका और व्यक्तिगत रिकॉर्ड से पूरी तरह मेल खाएं। इसी उद्देश्य से सभी कार्मिकों को पहले अपनी जानकारी जांचकर लॉक करने और फिर विभागीय स्तर पर उसका सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। लॉक होने के बाद सीधे नहीं बदल सकेंगे रिकॉर्ड एक बार प्रपत्र-10 लॉक और सत्यापित होने के बाद उसमें सीधे कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। यदि भविष्य में किसी जानकारी में बदलाव की जरूरत पड़ती है तो संस्था प्रधान या कार्यालयाध्यक्ष को संबंधित ब्लॉक कार्यालय में दस्तावेजों के साथ आवेदन देकर पहले प्रपत्र-10 अनलॉक कराना होगा। इसके बाद ही नई जानकारी दर्ज कर दोबारा लॉक और सत्यापन किया जाएगा। इसलिए विभाग ने सभी कार्मिकों को जानकारी सावधानी से भरने और जांचने के निर्देश दिए हैं। प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत कर्मचारियों पर भी लागू होंगे नियम जो कर्मचारी नियम-144 (क) के तहत दूसरे विभागों में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं, उन्हें भी शाला दर्पण के स्टाफ लॉगिन से अपनी जानकारी भरनी होगी। उनके प्रपत्र-10 का सत्यापन उनके अंतिम विद्यालय या कार्यालय के संस्था प्रधान, कार्यालयाध्यक्ष या पीईईओ द्वारा किया जाएगा।
भारतीय शिक्षा दिवस पर राष्ट्रीय विमर्श:पंचकोष आधारित चरित्र निर्माण पर हुई चर्चा
लखनऊ के गोमतीनगर स्थित राकेश कुमार मित्तल सभागार, स्मृति भवन में गुरुवार को भारतीय शिक्षा दिवस के अवसर पर एक राष्ट्रीय विमर्श का आयोजन किया गया। इस विमर्श का मुख्य विषय 'पंचकोष आधारित चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास: भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में' था। इसका आयोजन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, अवध प्रांत, एकम नॉलेज फाउंडेशन, अयोध्या और कबीर शांति मिशन के सहयोग में किया गया। इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों,विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों, शोधार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, लोक सेवकों और बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लिया। विमर्श का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती वंदना के साथ किया गया। पंचकोष आधारित ध्यान और नाम-संकीर्तन किया त्रिवेणी कला संगम, अवध की नितिका शर्मा और उनकी टीम ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी।इसके बाद, भाग्य मंदिर की साधिका रजनी शुक्ला और उनकी टीम ने पंचकोष आधारित ध्यान और नाम-संकीर्तन का आयोजन किया, जिससे सभागार में आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हुआ। मुख्य अतिथि पूर्व प्रमुख सचिव (राज्यपाल) जी.बी पटनायक ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्रदान करना नहीं, बल्कि संस्कारित,चरित्रवान और राष्ट्रनिष्ठ नागरिक तैयार करना है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में भारतीय जीवन मूल्यों को समाहित करने पर जोर दिया। भारतीय ज्ञान परंपरा शिक्षा की आधारशिला मुख्य वक्ता और सीबीएसई के पूर्व अध्यक्ष अशोक गांगुली ने इस बात पर बल दिया कि भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शिक्षा ही विकसित भारत की मजबूत आधारशिला बन सकती है।उन्होंने पंचकोष आधारित शिक्षा प्रणाली को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का एक वैज्ञानिक और प्रभावी माध्यम बताया। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के केंद्रीय अधिकारी नितिन कासलीवाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और भारतीय शिक्षा दर्शन की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। प्रांत संयोजक प्रमिल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय शिक्षा दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय शिक्षा दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने का एक राष्ट्रीय अभियान है। चरित्र निर्माण को भारतीय चिंतन की अमूल्य धरोहर प्रख्यात पत्रकार और साहित्यकार डॉ. मत्स्येंद्र प्रभाकर ने पंचकोष आधारित चरित्र निर्माण को भारतीय चिंतन की अमूल्य धरोहर बताया। चिंतामणि कौशिक ने व्यक्तित्व विकास की व्यावहारिक कार्ययोजना प्रस्तुत की। कनाडा से अंतरराष्ट्रीय मनोवैज्ञानिक डॉ. अमरेश श्रीवास्तव का एक विशेष ऑडियो संदेश भी प्रसारित किया गया।
नवादा समाहरणालय सभा कक्ष में जिला पदाधिकारी रवि प्रकाश की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक सात निश्चय-3 के चतुर्थ संकल्प उच्च शिक्षा–उज्ज्वल भविष्य के अंतर्गत प्रस्तावित छह डिग्री महाविद्यालयों की तैयारियों से संबंधित थी। बैठक के दौरान जिला शिक्षा पदाधिकारी ने प्रस्तावित छह डिग्री महाविद्यालयों में की जा रही तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाविद्यालयों के संचालन हेतु भवनों की मरम्मत, रंग-रोगन, विद्युत एवं प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई, गृह-व्यवस्था (हाउसकीपिंग) तथा अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। छात्राओं के सुरक्षित एवं सुगम आवागमन के लिए चार महाविद्यालयों में पिंक बस की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। साथ ही, सुरक्षा एवं रख-रखाव के लिए चौकीदारों की प्रतिनियुक्ति भी की गई है। समीक्षा के क्रम में जिला पदाधिकारी ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि महाविद्यालयों में उपलब्ध कराई जा रही सभी सामग्रियों, फर्नीचर एवं अन्य संसाधनों की गुणवत्ता की विधिवत जांच एवं सत्यापन के उपरांत ही उनका अधिष्ठापन/उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी प्रस्तावित डिग्री महाविद्यालयों में शत-प्रतिशत बेंच-डेस्क की उपलब्धता समयबद्ध रूप से सुनिश्चित की जाए, ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। जिला पदाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि शेष कार्यों एवं औपचारिकताओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण करते हुए सभी व्यवस्थाएं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि सात निश्चय-3 के अंतर्गत उच्च शिक्षा–उज्ज्वल भविष्य राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को उनके निकट गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रस्तावित महाविद्यालयों के संचालन की दिशा में सभी तैयारियां समय पर पूर्ण करने का निर्देश दिया। बैठक में गोपनीय शाखा प्रभारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला योजना पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (शिक्षा), संबंधित विभागों के पदाधिकारी, प्रस्तावित डिग्री महाविद्यालयों के प्राचार्य तथा अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।
नई दिल्ली। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शिक्षा जगत, सरकार, उद्योग और थिंक टैंकों के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि साक्ष्य आधारित नीति-निर्माण, शोध आधारित नवाचार और संस्थागत सहयोग ही देश की दीर्घकालिक विकास यात्रा की मजबूत नींव बनेंगे। उन्होंने विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से समकालीन नीतिगत चुनौतियों पर व्यावहारिक सुझाव तैयार कर सरकार के साथ सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। डॉ. लाहिड़ी दिल्ली में रिसर्च एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज (आरआईएस) दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और एमएसएमई फॉर 2047 की ओर से आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। प्रशासन और सार्वजनिक वित्त के क्षेत्र में योगदान की सराहना कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल, आरआईएस के महानिदेशक प्रो. सचिन कुमार शर्मा, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक प्रो राम सिंह सहित कई वरिष्ठ अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और उद्योग जगत के प्रतिनिधि मौजूद रहे। वक्ताओं ने डॉ. लाहिड़ी के आर्थिक नीति, प्रशासन और सार्वजनिक वित्त के क्षेत्र में योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके अनुभव से देश की विकास रणनीतियों को नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम में एमएसएमई क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने, तकनीकी नवाचार, नीतिगत सुधार और शिक्षा-उद्योग सहयोग को भी विकसित भारत की आधारशिला बताया गया। डॉ. लाहिड़ी ने कहा, शिक्षा जगत, उद्योग, थिंक टैंक और सरकार के बीच निरंतर संवाद व शोध आधारित नीति-निर्माण ही विकसित भारत के लक्ष्य को गति देगा।
छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए सरकार ने नौकरियों का पिटारा खोल दिया है। राज्य के कॉलेजों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री ने एक बहुत बड़ा एलान किया है। सरकार जल्द ही प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में 700 प्राध्यापकों (प्रोफेसर्स) की सीधी भर्ती करने जा रही है। इस घोषणा के बाद से ही नेट, सेट और पीएचडी पास कर चुके अभ्यर्थियों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने इस मेगा भर्ती अभियान को लेकर अपनी तैयारियां भी तेज कर दी हैं।उच्च शिक्षा मंत्री के एलान से युवाओं को मिली बड़ी राहतउच्च शिक्षा मंत्री ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद इस बात की आधिकारिक जानकारी दी कि कॉलेजों में शैक्षणिक गुणवत्ता को सुधारने के लिए शिक्षकों की कमी को दूर करना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि वित्त विभाग से मंजूरी मिलने के बाद भर्ती प्रक्रिया के नियमों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि इस भर्ती को पूरी तरह से पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए ताकि नए सत्र में छात्रों को सभी विषयों के विशेषज्ञ प्राध्यापक मिल सकें।जानिए क्या होगी इस पूरी भर्ती की चयन प्रक्रियाविभाग से मिल रही शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इन 700 पदों पर भर्ती की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) को सौंपी जा सकती है। इसके लिए तय शैक्षणिक योग्यता के तहत उम्मीदवारों का यूजीसी (UGC) के नियमों के अनुसार नेट (NET), सेट (SET) या पीएचडी (Ph.D) पास होना अनिवार्य होगा। भर्ती के लिए लिखित परीक्षा और साक्षात्कार (इंटरव्यू) के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी। छत्तीसगढ़ के स्थानीय युवाओं को नियमानुसार आयु सीमा और आरक्षण का पूरा लाभ मिलेगा।छत्तीसगढ़ के सरकारी कॉलेजों की बदलेगी सूरतग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित शासकीय कॉलेजों में लंबे समय से प्राध्यापकों की भारी कमी चल रही थी, जिसके कारण अतिथि शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई हो रही थी। इस नियमित भर्ती के होने से न सिर्फ कॉलेजों का एकेडमिक स्तर सुधरेगा, बल्कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) की ग्रेडिंग में भी छत्तीसगढ़ के कॉलेजों को बेहतर अंक मिल सकेंगे। उच्च शिक्षा मंत्री ने साफ किया है कि इस भर्ती के तुरंत बाद अन्य तकनीकी और गैर-शैक्षणिक पदों पर भी नियुक्तियों का रास्ता साफ हो जाएगा।
संभागीय आयुक्त एवं जिला प्रभारी सचिव वी. सरवण कुमार ने हाल ही में कोटपूतली-बहरोड़ क्षेत्र के बजरंगपुरा स्थित सरकारी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, पोषण, आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उनकी शैक्षणिक प्रगति, सीखने की क्षमता, खेल गतिविधियों और स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। संभागीय आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर जिला कलेक्टर अपर्णा गुप्ता भी उपस्थित रहीं। स्कूल परिसर, क्लास रूम की व्यवस्था का अवलोकन कियाप्रभारी सचिव ने स्कूल परिसर की स्वच्छता, कक्षा-कक्षों की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, खेल सामग्री, स्टाफ की उपस्थिति, छात्र नामांकन और नियमित उपस्थिति सहित अन्य आधारभूत सुविधाओं का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि स्कूल केवल शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं है, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला है। इसलिए प्रत्येक छात्र को स्वच्छ, सुरक्षित, प्रेरणादायक और सीखने के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है। स्वास्थ्य और पोषण स्तर की निगरानी के निर्देशआंगनबाड़ी केंद्र में उन्होंने बच्चों को दिए जा रहे पूरक पोषाहार, वजन मापन, पोषण ट्रैकिंग, प्री-स्कूल गतिविधियों और उपस्थिति रजिस्टर का निरीक्षण किया। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे प्रत्येक बच्चे के स्वास्थ्य और पोषण स्तर की नियमित निगरानी करें तथा कुपोषण की रोकथाम के लिए विशेष प्रयास करें। साथ ही, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को विभागीय योजनाओं का समय पर लाभ सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को शिक्षाप्रद खिलौने और फल भी वितरित किए। स्कूल में मिड-डे-मील योजना की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए संभागीय आयुक्त ने भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण और निर्धारित मेन्यू के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था का जायजा लिया। संभागीय आयुक्त विभिन्न कक्षाओं में भी पहुंचे और विद्यार्थियों की पाठ्य-पुस्तकों, कॉपियों एवं गृहकार्य का निरीक्षण कर उनकी शैक्षणिक स्थिति का आकलन किया। इस निरीक्षण के अवसर पर एसडीएम पावटा बृजेश चौधरी, एसडीएम विराटनगर लालाराम यादव, तहसीलदार विराटनगर मेनका, उप निदेशक आईसीडीएस सतपाल यादव सहित विद्यालय एवं आंगनबाड़ी का स्टाफ उपस्थित रहा।
नई शिक्षा नीति, महाविद्यालय की सुविधाओं से परिचित हुए विद्यार्थी
राजगढ़ |शासकीय आदर्श महाविद्यालय में नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अवसर पर प्रवेश उत्सव एवं दीक्षारंभ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन और दीप प्रज्वलन से हुआ। प्राचार्य डॉ. कल्पना शर्मा ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों का स्वागत करते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन और शैक्षणिक परंपराओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में प्रो. डॉ. सुभाष कुमार दांगी ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, स्नातक पाठ्यक्रमों और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध नए अवसरों की जानकारी दी। वहीं मयंक पटेल ने स्मार्ट क्लास, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल एवं आईसीटी सुविधाओं से अवगत कराया। डॉ. केशव शर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, तनाव प्रबंधन और छात्र कल्याण योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में नवप्रवेशित विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
जेएसडब्ल्यू को शिक्षा योगदान के लिए भामाशाह सम्मान
नागौर| शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान और ग्रामीण विद्यालयों के आधारभूत विकास में कार्यों के लिए जेएसडब्ल्यू सीमेंट को राज्य स्तरीय भामाशाह सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान राजस्थान सरकार के आयोजन में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश कुमार यादव और शिक्षा विभाग के निदेशक सीताराम जाट ने प्रदान किया। कंपनी की ओर से यूनिट हेड नवनीत चौहान और सीएसआर प्रतिनिधि रामचरण चौधरी ने सम्मान ग्रहण किया। कंपनी ने नागौर क्षेत्र के राजकीय विद्यालयों में कक्षा-कक्ष निर्माण, सौर पैनल, शिक्षा आधारित पेंटिंग, छत की वाटरप्रूफिंग और फर्नीचर उपलब्ध कराने सहित कई पहल की हैं। नवनीत चौहान ने कहा कि यह उपलब्धि टीम, स्थानीय समुदाय, जनप्रतिनिधियों, शिक्षा विभाग और विद्यालय परिवारों के सहयोग से संभव हुई।
व्यावसायिक, शिक्षा ऋण के आवेदन शुरू
उदयपुर। अल्पसंख्यक मामलात विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए व्यावसायिक एवं शिक्षा ऋण योजनाओं के तहत ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी और जैन समुदाय के पात्र आवेदक आवेदन कर सकते हैं। व्यावसायिक ऋण के लिए आयु सीमा 18 से 54 वर्ष तथा शिक्षा ऋण के लिए 16 से 32 वर्ष निर्धारित है।
देवेंद्र यादव का हमला: भाजपा सरकार शिक्षा पर वार
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने दिल्ली की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षकों की भारी कमी के बावजूद प्रशिक्षित शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय प्रशासनिक कार्यों में लगाया जा रहा है
उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षामंत्री योगेन्द्र उपाध्याय से बुधवार शाम को उनके सरकारी आवास पर राज्य सूचना आयुक्त डॉ. दिलीप अग्निहोत्री ने शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच शिक्षा, संस्कृति और देश में हो रहे सांस्कृतिक पुनर्जागरण से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर डॉ. दिलीप अग्निहोत्री ने अपनी पुस्तक 'सनातन चेतना का जागरण' उच्च शिक्षामंत्री को भेंट की। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक पिछले कुछ वर्षों में देश में हुए सांस्कृतिक जागरण, राष्ट्रीय चेतना के उत्थान और भारतीय परंपराओं के पुनर्स्थापन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को समेटे हुए है। श्रीराम मंदिर देशवासियों की आस्था का नया आयाम डॉ. अग्निहोत्री के अनुसार, उनकी पुस्तक में अयोध्या में लगभग पांच सौ वर्षों के बाद हुए भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण को एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्शाया गया है। उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर निर्माण ने देशवासियों की आस्था को नया आयाम दिया है और अयोध्या के समग्र विकास को भी गति प्रदान की है। उन्होंने यह भी बताया कि अयोध्या धाम का विकास अब विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप किया जा रहा है। आधुनिक सुविधाओं और सांस्कृतिक विरासत के समन्वय से अयोध्या को वैश्विक पहचान मिली है। यह सनातन धर्म में आस्था रखने वाले करोड़ों लोगों के लिए गौरव और श्रद्धा का विषय है।
राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए शिक्षकों की कम रुचि के कारण 19 जिलों से अभी तक कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। इसे देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 30 जून से बढ़ाकर 7 जुलाई कर दी है। बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि 30 जून की अंतिम तिथि तक प्रदेश के 19 जिलों से एक भी शिक्षक ने आवेदन नहीं किया था। शिक्षकों की इस सुस्ती को देखते हुए विभाग ने आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने का फैसला लिया है। राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 7 जून से शुरू हुई थी। इसके लिए परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों, उच्च प्राथमिक विद्यालयों या अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत शिक्षक/शिक्षिकाएं पात्र हैं। आवेदन केवल प्रेरणा वेब पोर्टल (www.prernaup.in) के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। आवेदन की स्थिति शून्य पाए जाने के बाद शिक्षा विभाग ने इसे प्राथमिकता पर लिया है। प्रयागराज के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार ने समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को पुरस्कार की गरिमा और महत्व के बारे में जागरूक करें और उन्हें आवेदन के लिए प्रेरित करें। अब शिक्षक 7 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
शिक्षा, खेल, पेयजल और सामाजिक विकास के क्षेत्र में योगदान के लिए आकृति फाउंडेशन को 'शिक्षा श्री ' सम्मान से नवाजा गया है। शिक्षा विभाग की ओर से सम्मान मधुबन, उदयपुर स्थित राजकीय बालिका वरिष्ठ माध्यमिक आवासीय स्कूल में आयोजित जिला स्तरीय समारोह में प्रदान किया गया। फाउंडेशन ने राजस्थान के विभिन्न जिलों में शिक्षा और छात्र हित में कई कार्य किए हैं। इनमें 250 सरकारी स्कूलों में खेल सामग्री, खेल अवसंरचना, खेल टूर्नामेंट और खिलाड़ियों का प्रोत्साहन शामिल है। संस्था ने 6 स्कूलों में नाइट फ्लडलाइट युक्त खेल मैदान, 25 स्कूलों में शीतकालीन स्वेटर वितरण, 16 में फर्नीचर और स्टेशनरी किट उपलब्ध कराए हैं। 12 स्कूलों में आर.ओ. जल शुद्धिकरण प्रणाली स्थापित की गई है, जबकि 28 स्कूलों में पौधारोपण किया। संस्था के प्रमुख प्रकल्पों में 'लेवलिंग द प्लेइंग फील्ड' (खेल विकास), 'वॉर्म्थ' (वस्त्र वितरण), 'नीर' (स्वच्छ पेयजल), 'सक्षम शिक्षा', 'नवपाठशाला', 'स्वास्थ्य सहेली' और ‘धरा श्रृंगार’ शामिल हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, पर्यावरण और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसी समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए कानोड़ के शिक्षाविद् चंद्रशेखर स्वर्णकार को 'प्रेरक सम्मान' से सम्मानित किया गया। संस्था के संस्थापक अमन वया ने बताया कि वर्तमान कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। भविष्य में सरकारी स्कूलों में आधारभूत संरचना और निर्माण संबंधी कार्यों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। इस अवसर पर राहुल जैन और अलीशा शर्मा सहित न्यूएज टीम के अन्य सदस्यों को भी सम्मानित किया गया। संस्था ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने सहयोगियों, स्वयंसेवकों, दानदाताओं और सभी साझेदार संस्थाओं को दिया।
मोतिहारी के जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने बुधवार को पर्यवेक्षण गृह का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने वहां रह रहे बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का विस्तृत जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान डीएम ने आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और अन्य आधारभूत व्यवस्थाओं का गहन मूल्यांकन किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। डीएम ने पर्यवेक्षण गृह के विभिन्न कक्षों, शयन कक्षों, रसोईघर और स्वच्छता व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने साफ-सफाई और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के रहने का वातावरण पूरी तरह सुरक्षित, स्वच्छ और अनुकूल होना चाहिए। प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश जिलाधिकारी ने मौजूद पदाधिकारियों और कर्मियों को किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 तथा प्रचलित नियमों के अनुरूप सभी व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने निर्देश दिया कि पर्यवेक्षण गृह में रह रहे प्रत्येक बच्चे को आवश्यक पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं और उनकी नियमित पढ़ाई सुनिश्चित की जाए। डीएम ने यह भी कहा कि बच्चों के शैक्षणिक विकास में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए और इसके लिए समुचित शैक्षणिक माहौल तैयार किया जाए। रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए इसके अतिरिक्त, डीएम ने बच्चों के सर्वांगीण विकास पर बल दिया। उन्होंने नियमित परामर्श सत्र, खेलकूद गतिविधियां और अन्य रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों से बच्चों का मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक विकास बेहतर तरीके से हो सकेगा। निरीक्षण के दौरान भवन में पाई गई कमियों पर जिलाधिकारी ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने भवन निर्माण विभाग के संबंधित अधिकारियों को आवश्यक मरम्मत कार्य और अन्य आधारभूत कमियों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। डीएम ने स्पष्ट किया कि बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अंत में, डीएम सौरभ सुमन यादव ने कहा कि पर्यवेक्षण गृह में रह रहे प्रत्येक बच्चे के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने सभी आवश्यक सुविधाएं समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से उपलब्ध कराने पर जोर दिया, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल बन सके।
देश के शासकीय और स्वशासी मेडिकल कॉलेजों के शिक्षकों के संगठन प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (PMTA), मध्य प्रदेश ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर देश में चिकित्सा शिक्षा की गिरती गुणवत्ता, बिना पर्याप्त संसाधनों के खुल रहे मेडिकल कॉलेजों और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन ने कहा कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो इसका सीधा असर देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा पर पड़ेगा। PMTA ने पत्र में कहा कि देशभर में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन आवश्यक फैकल्टी, अस्पताल, प्रयोगशालाएं, आधुनिक उपकरण और क्लिनिकल प्रशिक्षण जैसी बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है। संगठन का कहना है कि केवल एमबीबीएस सीटें बढ़ाना समाधान नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण डॉक्टर तैयार करना अधिक जरूरी है। पत्र में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का हवाला देते हुए कहा गया है कि वर्तमान में भारत में डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात बेहतर स्थिति में है, इसलिए संख्या से अधिक गुणवत्ता पर ध्यान देने की आवश्यकता है। श्योपुर मेडिकल कॉलेज का उदाहरण दिया एसोसिएशन ने मध्यप्रदेश के श्योपुर शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थिति को चिकित्सा शिक्षा की बदहाल व्यवस्था का उदाहरण बताया है। पत्र में कहा गया कि विद्यार्थियों के खुले पत्र में पर्याप्त फैकल्टी, प्रैक्टिकल प्रशिक्षण और मरीजों की कमी का उल्लेख किया गया है। दावा किया गया कि पिछले एक वर्ष में निर्धारित करीब 180 प्रैक्टिकल कक्षाओं के मुकाबले केवल एक कक्षा आयोजित हुई। ऐसी स्थिति में छात्रों का व्यावहारिक प्रशिक्षण गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है, जो भविष्य में मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। NMC की मान्यता प्रक्रिया पर सवाल PMTA ने पत्र में कहा कि हाल में केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा NMC के कुछ अधिकारियों और निरीक्षण टीम से जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर से मान्यता प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं। एसोसिएशन का आरोप है कि निरीक्षण से पहले तिथियां लीक होने, घोस्ट फैकल्टी और कागजी मरीज दिखाकर मान्यता लेने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। यदि ये आरोप सही हैं तो यह देश की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर मामला है। राष्ट्रीय आयोग में अधिकांश पद खाली पत्र में यह भी कहा गया कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के चार स्वायत्त बोर्डों में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। एसोसिएशन का कहना है कि देशभर के 850 से अधिक मेडिकल कॉलेजों की मान्यता और निगरानी करने वाले आयोग में विशेषज्ञों के पद खाली होना नियामक व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है। PMTA की तीन प्रमुख मांगें एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री से तीन प्रमुख मांगें की हैं। पहली, देश और मध्यप्रदेश के नवस्थापित मेडिकल कॉलेजों का स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति से फिजिकल, शैक्षणिक और बायोमेट्रिक ऑडिट कराया जाए। दूसरी, मान्यता प्रक्रिया में अनियमितता के दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए NMC के रिक्त पदों पर ईमानदार और अनुभवी चिकित्सकों की नियुक्ति की जाए। तीसरी, पर्याप्त भवन, फैकल्टी, अस्पताल और अन्य संसाधन उपलब्ध होने के बाद ही नए मेडिकल कॉलेजों को अनुमति देने की नीति लागू की जाए।
सिरोही के पीएम श्री राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल में इस शैक्षणिक सत्र में पीएम श्री योजना का सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। स्कूल में अब तक 190 बालिकाओं ने नवीन प्रवेश लिया है, जबकि प्रतिदिन बड़ी संख्या में अभिभावक अपनी बेटियों का दाखिला कराने पहुंच रहे हैं। आधुनिक सुविधाओं, नवाचारों, हरित परिसर और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण के कारण स्कूल के प्रति अभिभावकों का विश्वास लगातार मजबूत हुआ है। आधुनिक सुविधाओं से बढ़ा आकर्षण प्रिंसिपल हीरा खत्री और पीएम श्री प्रभारी गोपाल सिंह राव ने बताया कि पीएम श्री योजना के तहत स्कूल में योग एवं क्राफ्ट लैब तथा बाल वाटिका विकसित की गई है। विधायक निधि से लगभग 12 लाख रुपए की लागत से टिन शेड का निर्माण भी पूरा हो चुका है, जिसका लोकार्पण शीघ्र प्रस्तावित है। भवन का सौंदर्यीकरण और हरित परिसर भामाशाहों और विभिन्न राजकीय मदों के सहयोग से प्रिंसिपल कक्ष, संगीत कक्ष और स्टाफ रूम सहित स्कूल भवन का सौंदर्यीकरण किया गया है। वहीं उप प्रिंसिपल देवी लाल के नेतृत्व में परिसर में औषधीय, फलदार, सब्जी एवं छायादार पौधों का रोपण कर स्कूल को हरा-भरा और आकर्षक स्वरूप दिया गया है। शिक्षकों की व्यवस्था से पढ़ाई को मजबूती पीएम श्री योजना के तहत संचालित एलईपी योजना से प्राप्त राशि का उपयोग रिक्त पदों पर व्याख्याता, वरिष्ठ अध्यापक और अन्य कार्मिकों की व्यवस्था के लिए किया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम नियमित रूप से पूरा हो रहा है और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार आया है। बढ़ता विश्वास, बढ़ते प्रवेश स्कूल प्रशासन का कहना है कि आधुनिक संसाधनों और बेहतर शिक्षण व्यवस्था के कारण अभिभावकों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि इस वर्ष प्रवेश संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। स्कूल को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ेगी तथा पीएम श्री योजना के माध्यम से बालिकाओं को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और संस्कारयुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने का उद्देश्य और मजबूत होगा।
मध्य प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की भारी कमी को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। बुधवार को जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए दोनों सरकारों को 17 अगस्त तक अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह जनहित याचिका सेंधवा के सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता बीएल जैन द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अभिषेक तुगनावत ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है और लाखों विद्यार्थियों को संविधान एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत मिलने वाली मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश में मंजूर 2.89 लाख शिक्षकों के पदों में से 1.15 लाख पद रिक्त हैं, यानी लगभग 40% पद खाली पड़े हैं। स्थिति यह है कि 1,895 स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। याचिका में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की 2025 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि प्रदेश के 83,514 स्कूलों में से लगभग 5 हजार स्कूलों के भवन जर्जर और बच्चों के लिए असुरक्षित हैं। 3,400 स्कूलों में शौचालय नहीं हैं, जबकि करीब 10 हजार स्कूल बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से भी वंचित हैं। 40 हजार स्कूलों में बाउंड्रीवाल नहीं है और हजारों विद्यालयों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं है। कई स्कूल आज भी झोपड़ियों में संचालित हो रहे हैं। प्रदेश में 59 हजार से अधिक स्कूलों में कंप्यूटर सुविधा नहीं याचिका में यह भी कहा गया कि डिजिटल शिक्षा की बात करने वाले प्रदेश में 59 हजार से अधिक स्कूलों में कंप्यूटर सुविधा उपलब्ध नहीं है। वहीं पिछले दस वर्षों में सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से बारहवीं तक के विद्यार्थियों की संख्या में 22 लाख से अधिक की कमी दर्ज की गई है, जबकि इसी अवधि में प्रदेश की आबादी बढ़ी है। इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था में गिरते विश्वास का संकेत बताया गया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को यह भी अवगत कराया कि सुप्रीम कोर्ट जनवरी 2026 में सभी सरकारी और निजी स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए पृथक शौचालय तथा छात्राओं के लिए निःशुल्क सैनिटरी पैड की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अनेक स्कूलों में इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। सरकारी धन के दुरुपयोग का भी मुद्दा उठाया गया याचिका में आरोप लगाया गया है कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी आवश्यकताओं पर पर्याप्त खर्च नहीं किया जा रहा, जबकि अन्य मदों में बड़े पैमाने पर राशि खर्च की जा रही है। साथ ही निर्माण और मरम्मत कार्यों में भ्रष्टाचार तथा सरकारी धन के दुरुपयोग का भी मुद्दा उठाया गया है। कोर्ट से प्रदेश के बच्चों के शिक्षा संबंधी संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और स्कूलों में आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित कराने की मांग की गई है।अगली सुनवाई में केंद्र और राज्य सरकार को 17 अगस्त तक अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा।
मधेपुरा के बीएन मंडल विश्वविद्यालय में बुधवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने धरना-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन नई शिक्षा नीति-2020, चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम (FYUP) और सातवें सेमेस्टर में नामांकन के लिए 7.5 सीजीपीए की अनिवार्यता के विरोध में था। प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि नई शिक्षा नीति छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक और शैक्षणिक बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में नियमित कक्षाएं नहीं चल रही हैं, पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो रहा है, और परीक्षाओं व परिणामों में भी देरी हो रही है। इसके बावजूद छात्रों पर लगातार नई शर्तें और अतिरिक्त शुल्क का बोझ बढ़ाया जा रहा है। सातवें सेमेस्टर में प्रवेश के लिए शर्त लागू करना अनुचित आइसा के जिला सचिव पावेल कुमार ने 7.5 सीजीपीए की अनिवार्यता को हजारों छात्रों के साथ अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि 2023-27 बैच नई व्यवस्था का पहला बैच है, और ऐसे में सातवें सेमेस्टर में प्रवेश के लिए यह शर्त लागू करना अनुचित है। पावेल कुमार ने चेतावनी दी कि इस अनिवार्यता से बड़ी संख्या में छात्र चौथे वर्ष में प्रवेश से वंचित हो जाएंगे, जिससे उनकी उच्च शिक्षा और शोध के अवसर प्रभावित होंगे। छात्र नेताओं ने इंटर्नशिप के नाम पर निजी कंपनियों द्वारा कथित अवैध वसूली का भी विरोध किया और इसे तत्काल बंद करने की मांग की। आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी धरने को संबोधित करते हुए आइसा के अन्य नेताओं ने कहा कि संगठन छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर लगातार आंदोलन करता रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान आइसा ने मुख्य रूप से चार वर्षीय स्नातक (एफवाईयूपी) व्यवस्था वापस लेने, सातवें सेमेस्टर में 7.5 सीजीपीए की अनिवार्यता समाप्त करने, इंटर्नशिप के नाम पर कथित अवैध वसूली रोकने और सेमेस्टर प्रणाली के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूली बंद करने की मांग की। इस प्रदर्शन में आइसा के राजकिशोर राज, संतोष कुमार सियोटा, आशीष कुमार, कृष्ण कुमार, शिव कुमार, नवल कुमार, प्रदीप कुमार, विशाल कुमार, सौरभ कुमार, मनीष कुमार, अंकु कुमार, मधुसूदन कुमार, ज्योतिष कुमार, हर्ष कुमार सहित बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए।
कौशांबी में 'स्कूल चलो' अभियान रैली:बच्चों का रोली-चंदन से स्वागत, शिक्षा के लिए जागरूक किया
कौशांबी जनपद में 'स्कूल चलो अभियान' के दूसरे चरण के अंतर्गत बुधवार को विकास खंड कड़ा के प्राथमिक विद्यालय हिसामपुर परसखी में जागरूकता रैली निकाली गई। इसका मुख्य उद्देश्य शत-प्रतिशत बच्चों का नामांकन और उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना था। रैली निकालने से पहले, विद्यालय पहुंचे सभी बच्चों का शिक्षकों ने रोली-चंदन का टीका लगाकर और पुष्प अर्पित कर आत्मीय स्वागत किया। शिक्षकों ने बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय आने, मन लगाकर पढ़ाई करने और अन्य बच्चों को भी स्कूल से जोड़ने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान विद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला। प्रधानाध्यापक रामकृष्ण साहू के नेतृत्व में निकली इस रैली में विद्यालय के शिक्षक, छात्र-छात्राएं और ग्रामवासी शामिल हुए। उन्होंने गांव की गलियों में भ्रमण कर शिक्षा का संदेश दिया। बच्चों ने हाथों में रंग-बिरंगे बैनर, पोस्टर और तख्तियां ले रखी थीं। शिक्षकों ने घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क किया और उन्हें बच्चों के नामांकन व नियमित उपस्थिति के लिए प्रेरित किया। रैली के दौरान बच्चों ने हर घर का यह है अरमान, पढ़-लिखकर बने महान और स्कूल चलें हम, सपनों को सच करें हम जैसे शिक्षा से जुड़े आकर्षक नारे लगाए, जिससे पूरे गांव में सकारात्मक माहौल बना। प्रधानाध्यापक रामकृष्ण साहू ने बताया कि 'स्कूल चलो अभियान' का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसके लिए विद्यालय परिवार लगातार अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को विद्यालय से जोड़ने और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है। इस अवसर पर ग्राम प्रधान शिव प्रताप सिंह, विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष महेंद्र कुमार, शिक्षिका माया सिंह, रिया सेठी, शिक्षामित्र बीरेंद्र कुमार व संध्या देवी पटेल सहित विद्यालय के छात्र-छात्राएं और ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने बच्चों की शिक्षा के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
पूर्णिया जिले के धमदाहा श्रीनगर में आयोजित एक समारोह में मध्य विद्यालय कठबजरा की प्रधानाध्यापिका सुजीता कुमारी को सम्मानित किया गया। उन्हें विद्यालय में नवाचार और उत्कृष्ट शैक्षणिक कार्यों के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी ने यह सम्मान प्रदान किया। जिला शिक्षा पदाधिकारी रविंद्र कुमार प्रकाश ने प्रधानाध्यापिका सुजीता कुमारी को मोमेंटो, प्रशस्ति पत्र और हरियाली के प्रतीक पौधे से सम्मानित किया। यह सम्मान विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए दिया गया। इसी समारोह में धमदाहा प्रखंड के अन्य शिक्षकों को भी उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में भावना कुमारी, चंदन कुमार, जुली कुमारी, अलका कुमारी, इला कुमारी, प्रिया कुमारी, जयप्रकाश कुमार, असीम चक्रवर्ती और प्रियंका रानी शामिल थे। सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रधानाध्यापिका सुजीता कुमारी जब अपने विद्यालय मध्य विद्यालय कठबजरा पहुंचीं, तो विद्यालय परिवार ने उनका स्वागत किया। सहकर्मी शिक्षकों, विद्यालय शिक्षा समिति के सदस्यों और अभिभावकों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उन्हें बधाई दी। इस अवसर पर शिक्षकों और अभिभावकों ने सुजीता कुमारी के नेतृत्व में विद्यालय द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यालय भविष्य में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में नए आयाम स्थापित करेगा।
रीवा में संभागायुक्त (कमिश्नर) शीलेन्द्र सिंह ने स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि अगर निरीक्षण के दौरान चौथी या पांचवीं कक्षा का कोई भी बच्चा पढ़ना-लिखना नहीं जानता मिला, तो इसे गंभीर लापरवाही माना जाएगा। ऐसे मामलों में सीधे स्कूल के प्रिंसिपल और संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कमिश्नर ने कहा कि स्कूलों में बच्चों का सिर्फ नामांकन कर लेना (एडमिशन देना) ही काफी नहीं है। असली मकसद हर बच्चे को बुनियादी शिक्षा देना और उसे पढ़ने-लिखने लायक बनाना है। शासन की मंशा बच्चों को आधुनिक और प्रभावी शिक्षा देने की है। बच्चों का भविष्य इसी पर टिका है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कागजी आंकड़ों से नहीं, जमीनी काम से होगा सुधारअधिकारियों और शिक्षकों को दो टूक संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार सिर्फ कागजी आंकड़ों से नहीं होगा। इसके लिए जमीनी स्तर पर काम करना होगा। शिक्षकों को यह तय करना होगा कि हर बच्चा सीखे। कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान देकर उन्हें अलग से पढ़ाई में मदद (एक्स्ट्रा क्लास) दी जाए। खुद स्कूलों का औचक निरीक्षण करेंगे कमिश्नरकमिश्नर शीलेन्द्र सिंह ने बताया कि स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग और मूल्यांकन की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। वे खुद भी स्कूलों का निरीक्षण कर पढ़ाई की जमीनी हकीकत का जायजा लेंगे। अगर कहीं पढ़ाई का स्तर कमजोर मिला या बच्चों की सीखने की क्षमता ठीक नहीं पाई गई, तो जिम्मेदारों पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।
हरियाणा सरकार ने स्कूल सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEO) को ‘फाइनल रिमाइंडर’ भेजा है।रिमांइडर में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अप्रैल-जून 2026 की स्कूल सेफ्टी क्वार्टरली प्रोग्रेस रिपोर्ट (QPR) और लंबित एक्शन टेकन रिपोर्ट 48 घंटे के भीतर हर हाल में विभाग को भेजी जाए। विभाग ने चेतावनी दी है कि यह मामला 'मोस्ट अर्जेंट एंड टाइम बाउंड' श्रेणी का है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 30 जून 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि कई जिलों ने अभी तक निर्धारित प्रारूप में स्कूल सुरक्षा रिपोर्ट नहीं भेजी है, जबकि यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की स्कूल सुरक्षा नीति के तहत अनिवार्य है। चार तिमाहियों से अटकी रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय ने अपने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि कई जिलों की पिछली चार तिमाहियों की Quarterly Progress Reports (QPRs) अभी भी लंबित हैं। इसके कारण स्कूलों में सुरक्षा संबंधी गतिविधियों की वास्तविक स्थिति का आकलन नहीं हो पा रहा है और ज्वाइंट मॉनिटरिंग कमेटी (JMC) की समीक्षा प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। विभाग ने अधिकारियों से कहा है कि लंबित रिपोर्टों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल तैयार कर निर्धारित प्रारूप में भेजा जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन अनिवार्य पत्र में उल्लेख किया गया है कि 'अविनाश मेहरोत्रा बनाम भारत संघ' (सिविल रिट याचिका संख्या-483/2004) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में सुरक्षा मानकों को लागू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद NDMA School Safety Policy-2016 लागू की गई, जिसके तहत प्रत्येक जिले से स्कूल सुरक्षा गतिविधियों की नियमित तिमाही रिपोर्ट मांगी जाती है। जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाने के निर्देश निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जिला प्रशासन के साथ मिलकर सभी सरकारी एवं सहायता प्राप्त स्कूलों में निर्धारित स्कूल सुरक्षा गतिविधियां सुनिश्चित करें। इसके बाद निर्धारित प्रोफार्मा में प्रत्येक तिमाही की रिपोर्ट समय पर विभाग को भेजी जाए। साथ ही भविष्य में रिपोर्ट भेजने में देरी न हो, इसके लिए प्रत्येक जिले में स्थायी मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। क्यों महत्वपूर्ण है यह रिपोर्ट? स्कूल सुरक्षा रिपोर्ट केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि इससे यह तय होता है कि प्रदेश के स्कूल किसी भी आपदा, दुर्घटना या आपात स्थिति से निपटने के लिए कितने तैयार हैं। रिपोर्ट के आधार पर राज्य और केंद्र स्तर पर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा होती है और कमियों को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना 3 जुलाई तक करें आवेदन
कवर्धा| अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आवेदन मंगाए गए हैं। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट आवासीय विद्यालयों में निशुल्क शिक्षा मिलेगी। इच्छुक पात्र अभिभावक 3 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं।
राशन, शिक्षा व बिजली के लिए जूझ रहे ग्रामीण 398 परिवारों को पीएम आवास देने सर्वे किया
भास्कर न्यूज | सुकमा कभी दुर्दांत नक्सली कमांडरों के प्रभाव और नक्सली गतिविधियों के कारण भय का पर्याय रहा सुकमा जिले का ग्राम पंचायत पालाचलमा अब नक्सल मुक्त होकर विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। जिला मुख्यालय से लगभग 170 किलोमीटर दूर, दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसे इस गांव में पहली बार राज्य महिला आयोग की सदस्य एवं अधिवक्ता दीपिका शोरी पहुंचीं। ग्रामीणों ने पारंपरिक लोकनृत्य, ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजे के साथ उनका आत्मीय स्वागत किया। स्थानीय आराध्य देवी माता मुतेलम्मा मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद उन्होंने ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद किया। दीपिका शोरी ने औपचारिक मंच के बजाय गांव के पुजारी, पेरमा, पटेल, सरपंच, पूर्व सरपंच, महिलाओं और युवाओं के बीच जमीन पर बैठकर चर्चा की। उन्होंने ग्रामीणों से नक्सल प्रभाव वाले दौर और वर्तमान नक्सल मुक्त वातावरण के बीच अंतर जानना चाहा। ग्रामीणों ने बताया कि पहले भय और असुरक्षा का माहौल था। अब वे खुलकर अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचा पा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि आज भी उन्हें राशन लेने के लिए 9 किलोमीटर दूर किस्टाराम जाना पड़ता है। गांव में उचित मूल्य की दुकान खोलने की मांग की। बताया कि 2009 के आसपास नक्सलियों ने आश्रमशाला, आंगनबाड़ी और अन्य भवनों को नुकसान पहुंचाया था। आज भी सौ से अधिक बच्चों को दूर-दराज के क्षेत्रों में पढ़ने जाना पड़ता है। गांव में पुनः आश्रमशाला शुरू करने की मांग रखी। ग्रामीणों ने बिजली की समस्या को सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि किस्टाराम से पालाचलमा मार्ग पर वर्षों पहले लगाए गए बिजली के खंभे आज भी खड़े हैं। संवाद के दौरान गांव में कुछ परिवारों के धर्म परिवर्तन की जानकारी मिलने पर दीपिका शोरी ने ग्रामीणों से अपनी परंपरा, संस्कृति और सामाजिक पहचान बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने लोगों से किसी भी प्रकार के बहकावे में न आने, सामाजिक एकता बनाए रखने और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का आह्वान किया। दौरे के दौरान दीपिका शोरी ने गांव में चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण भी किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कार्य में जुटी एजेंसियों को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए दीपिका शोरी ने कहा कि शासन की प्राथमिकता नक्सल मुक्त क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पालाचलमा जैसे गांवों को विकास के नए मॉडल के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
परीक्षार्थियों को नई शिक्षा नीति व उत्तर लेखन की बारीकियां समझाई
शहर के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस एसबीएन शासकीय पीजी कॉलेज में मंगलवार को स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ की ओर से प्राइवेट परीक्षार्थियों के लिए विशेष परीक्षा मार्गदर्शन सत्र आयोजित किया गया। प्राचार्य डॉ. धीरज कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस सत्र का उद्देश्य नियमित विद्यार्थियों के साथ प्राइवेट परीक्षार्थियों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप परीक्षा प्रणाली, विषय चयन, उत्तर लेखन कौशल व प्रभावी अध्ययन पद्धति की जानकारी देना था। इसका लक्ष्य परीक्षा के प्रति उनका आत्मविश्वास बढ़ाना था। कार्यक्रम में प्रकोष्ठ के कार्यकर्ता भोला बामनिया व दिव्या जमरे ने बताया कि प्राइवेट परीक्षार्थियों को नियमित कक्षाओं का लाभ नहीं मिल पाता। इससे उन्हें पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली और उत्तर लेखन से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यह विशेष मार्गदर्शन सत्र आयोजित किया गया। इससे विद्यार्थी परीक्षा की बेहतर तैयारी कर सकें। अच्छे परिणाम प्राप्त कर सकें। डॉ. मधुसूदन चौबे ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों व विषयों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की उपयोगिता, व्यक्तित्व विकास विषय, जैविक खेती, फील्ड स्टडी, मेजर व माइनर, इलेक्टिव विषय और आधार पाठ्यक्रम की परीक्षा प्रणाली को सरल, सहज भाषा में समझाया। परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रकृति, अंक-विभाजन व उत्तर प्रस्तुत करने की प्रभावी शैली पर चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को सीमित समय में प्रभावी तैयारी की रणनीतियाँ बताईं। महत्वपूर्ण बिंदुओं की पहचान, नियमित पुनरावृत्ति, संक्षिप्त नोट्स तैयार करना, समय प्रबंधन व विषयवार अध्ययन योजना बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि परीक्षा में उत्तर लिखते समय शीर्षकों व उपशीर्षकों का उचित उपयोग, आवश्यकतानुसार बिंदुवार प्रस्तुति, सरल व शुद्ध भाषा, निर्धारित समय में उत्तर पूरा करना बेहतर अंक प्राप्त करने में अहम भूमिका निभाते हैं। मार्गदर्शन सत्र के दौरान विद्यार्थियों से विभिन्न प्रकार के प्रश्नों के उत्तर लिखवाकर व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। उत्तर लेखन के दौरान होने वाली सामान्य त्रुटियों की जानकारी दी गई। प्रभावशाली, क्रमबद्ध उत्तर लिखने की तकनीक भी सिखाई गई। हंसा धनगर, जोया खान, सुखदेव डावर, दिलीप व आरती धनगर का विशेष सहयोग रहा।
हाजिरी 75 प्रतिशत से कम तो नहीं दे सकेंगे परीक्षा झारखंड में उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होगा। राज्य सरकार ने स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम के लिए रेगुलेशन (ड्राफ्ट) तैयार कर लिया है। नया नियम लागू होते ही विश्वविद्यालयों में परीक्षा व्यवस्था, आंतरिक मूल्यांकन, विषय परिवर्तन और मॉनिटरिंग की व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी। प्रथम वर्ष का रिजल्ट घोषित होने के तीन सप्ताह के भीतर छात्र मेजर (मुख्य) विषय बदल सकेंगे। इसके लिए प्रथम वर्ष में न्यूनतम 7.5 सीजीपीए या 75 प्रतिशत अंक अनिवार्य होगा। यह बदलाव तभी संभव होगा, जब संबंधित विभाग में सीटें खाली होंगी। ड्राफ्ट के अनुसार प्रथम, तृतीय, पंचम और सप्तम यानी सभी विषम सेमेस्टर में विद्यार्थियों को पदोन्नति दी जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया ई-समर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन होगी, जिससे छात्र अपने आवेदन को ट्रैक कर सकेंगे। यही नहीं, अब 75 प्रतिशत उपस्थिति के बिना छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। छात्र और अभिभावक इसे ई-समर्थ पोर्टल पर देख सकेंगे। सरकार का उद्देश्य उच्च शिक्षा को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणाम आधारित बनाना है। नई व्यवस्था में निरंतर मूल्यांकन को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही पूरी अकादमिक प्रक्रिया को डिजिटल ट्रैकिंग से जोड़ने का प्रस्ताव है। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी हैएक सेमेस्टर में एक आंतरिक परीक्षाड्राफ्ट के अनुसार मेजर, माइनर और रिसर्च कोर्स में हर सेमेस्टर में सिर्फ एक आंतरिक परीक्षा होगी। अभी दो परीक्षा का प्रावधान है। नए नियम के अनुसार नॉन प्रैक्टिकल विषयों में 25 अंक और प्रैक्टिकल विषयों में 15 अंक का इंटरनल मूल्यांकन होगा। इसमें लिखित परीक्षा, असाइनमेंट, प्रोजेक्ट और ट्यूटोरियल के साथ उपस्थिति व प्रदर्शन को भी शामिल किया गया है।अधिकतम हाजिरी पर 5 अंकआंतरिक मूल्यांकन में उपस्थिति के लिए अधिकतम पांच अंक निर्धारित किए गए हैं। नई व्यवस्था के अनुसार 45 प्रतिशत तक उपस्थिति पर एक अंक, 45 से 55 प्रतिशत पर दो अंक देने का प्रावधान किया गया है। वहीं 55 से 65 प्रतिशत पर तीन अंक दिए जाएंगे। जबकि 65 से 75 प्रतिशत पर चार अंक का नियम है। इसी प्रकार 75 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति पर पूरे पांच अंक मिलेंगे। हर कोर्स के लिए अलग मूल्यांकनएबिलिटी इनहांसमेंट और वैल्यू एडेड कोर्स 50-50 अंकों के होंगे। स्किल इनहांसमेंट और मल्टी डिस्पिलनरी कोर्स 75-75 अंकों के होंगे। मेजर, माइनर और रिसर्च कोर्स 100 अंकों के होंगे। इसमें 25 अंक इंटरनल और 75 अंक एंड सेमेस्टर परीक्षा के होंगे। प्रैक्टिकल विषयों में 15 अंक इंटरनल थ्योरी, 25 अंक की थ्योरी परीक्षा और 60 अंक प्रायोगिक परीक्षा के लिए निर्धारित किए गए हैं।समर टर्म अब सिर्फ छुट्टी नहींजून-जुलाई का समर टर्म अब केवल अवकाश नहीं रहेगा। इसी दौरान अनिवार्य इंटर्नशिप, फील्ड प्रोजेक्ट, सामुदायिक आउटरीच और अलाउड टू कीप टर्म्स (एटीकेटी) परीक्षाएं होंगी। शिक्षकों के लिए इसी अवधि में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी), शोध कार्य और मूल्यांकन का कार्यक्रम तय किया गया है। इधर, उपस्थिति नियम पर अफसरों ने उठाए सवाल ड्राफ्ट पर सुझाव के लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी विवि के अधिकारियों के साथ वर्चुअल मोड में बैठक हुई। इसमें अधिकारियों ने कहा कि उपस्थिति पर प्रावधान विरोधाभासी है। ड्राफ्ट में 45 प्रतिशत उपस्थिति पर अंक देने का प्रावधान है, वहीं 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले छात्रों को परीक्षा में शामिल न करने का नियम है। अगर छात्र परीक्षा में शामिल ही नहीं हो सकेंगे तो कम उपस्थिति पर अंक देने का क्या औचित्य है। दोनों प्रावधानों में एकरूपता लानी चाहिए।
पीके रैकवार को छतरपुर का नया जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) बनाया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में मंगलवार को आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश के अनुसार, पीके रैकवार को रायसेन के जिला शिक्षा केंद्र में जिला परियोजना अधिकारी (डीपीओ) के पद से स्थानांतरित कर सहायक संचालक शिक्षा बनाया गया है। इसके साथ ही उन्हें छतरपुर के जिला शिक्षा अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। अब तक जिला शिक्षा अधिकारी का प्रभार डिप्टी कलेक्टर कौशल सिंह के पास था। पीके रैकवार के पदभार ग्रहण करने के बाद जिले के शिक्षा विभाग की प्रशासनिक जिम्मेदारी उनके पास होगी। छतरपुर में पहले भी दे चुके हैं सेवाएं पीके रैकवार का छतरपुर से पुराना जुड़ाव रहा है। वे इससे पहले जिले में जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) और प्राचार्य के पद पर भी सेवाएं दे चुके हैं। जिले की शैक्षणिक व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली का अनुभव होने के कारण उनके कार्यकाल से शिक्षा विभाग में बेहतर समन्वय और कार्यों में गति आने की उम्मीद है।
सरकारी स्कूलों में स्टूडेंट्स और कार्मिकों की शाला दर्पण पोर्टल पर शत प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य करके शिक्षा विभाग राजस्थान ने सख्ती बढ़ा दी है। इसके लिए राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद,जयपुर की अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक सीमा शर्मा ने इसके आदेश गत दिनों जारी किए है। आदेश में राज्य के सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों और कार्मिकों की शाला दर्पण पोर्टल पर शत प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य किया है। इसके लिए टोंक समेत राज्य के समस्त मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों एवं पदेन जिला परियोजना समन्वयक समसा को आदेशित किया है। आदेश में कहा गया है कि एनसीईआरटी के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय विद्या समीक्षा केंद्र (आरवीएसके) के लिए राज्यभर के सभी विद्यालयों की उपस्थिति संबंधी जानकारी शाला दर्पण पोर्टल से संकलित की जाती है। हाल ही में किए गए डेटा विश्लेषण में सामने आया है कि कई विद्यालयों में विद्यार्थियों और कार्मिकों की उपस्थिति नियमित रूप से दर्ज नहीं की जा रही है। इसके कारण राजस्थान एवं राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध आंकड़े अपूर्ण और असंगत हो रहे हैं। नई व्यवस्था से कार्मिक और स्टूडेंट लापरवाही नहीं कर पाएंगे। हर कार्य दिवस पर ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य विभागीय निर्देशों के अनुसार प्रत्येक कार्य दिवस पर सभी विद्यार्थियों और कार्मिकों की उपस्थिति शाला दर्पण पोर्टल पर दर्ज करनी अनिवार्य होगी। किसी भी कर्मचारी, कक्षा या सेक्शन की उपस्थिति प्रविष्टि लंबित नहीं छोड़ी जा सकेगी। साथ ही अनुपस्थित एवं अवकाश पर रहने वाले विद्यार्थियों और कार्मिकों की जानकारी भी सही एवं नवीन (अपडेट) उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य होगा। जिला स्तर पर होगी नियमित समीक्षा राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने जिला कार्यालयों को उपस्थिति डेटा की नियमित समीक्षा करने और इसकी प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि विद्यालय स्तर पर उपस्थिति प्रविष्टियां निर्धारित समयावधि में पूरी कर ली जाएं। परिषद ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि उपस्थिति डेटा के संधारण में लापरवाही, गलत प्रविष्टि अथवा नियमित अपडेट नहीं किए जाने की स्थिति में संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी स्वयं उत्तरदायी होंगे। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी। शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष बोले- निर्णय सहीशिक्षक संघ रेसटा,राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बताया कि राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद जयपुर द्वारा राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में शाला दर्पण पोर्टल पर विद्यार्थियों एवं कार्मिकों की शत प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है, जो स्वागत योग्य निर्णय है। इससे शाला दर्पण पर सटीक और अपडेट उपस्थिति दर्ज होने से विद्यालयों की निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी, विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति का आकलन संभव होगा तथा राष्ट्रीय स्तर की शैक्षिक मॉनिटरिंग प्रणालियों को विश्वसनीय डेटा उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे शिक्षा योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और नीति निर्धारण में भी मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने बुनियादी शिक्षा सुधारों को नई ऊंचाई देते हुए अब कक्षा-कक्ष में होने वाले वास्तविक अधिगम को शिक्षा नीति का केंद्र बना दिया है। प्रदेश में पहली बार शिक्षकों के अनुभव, बच्चों के सीखने के ...
प्रयागराज में 30 जनवरी मंगलवार शाम 7 बजे सलोरी में अंबेडकर छात्रावास के छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों ने जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सोनम वांगचुक, नेहा, मनीष कुमार समेत छह कार्यकर्ताओं के आमरण अनशन के समर्थन में मार्च निकाला। इस दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका गया और प्रतीकात्मक अर्थी भी निकाली गई। प्रदर्शन के दौरान छात्र नेताओं ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे भ्रष्ट और गैर-जवाबदेह संस्था बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार पेपर लीक की घटनाओं के बावजूद एजेंसी पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। छात्रों ने NTA को समाप्त करने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। छात्र नेता श्रीकांत अंबेडकर ने कहा कि NTA में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव है। उनका कहना था कि लगातार हो रहे पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, इसलिए इस संस्था को खत्म किया जाना चाहिए। आइसा उत्तर प्रदेश के सचिव शशांक ने कहा कि डबल इंजन सरकार के कार्यकाल में लेखपाल, यूपीएसआई, नीट सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियां और पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्रालय इन मामलों में अपनी जिम्मेदारी तय नहीं कर रहा है। आइसा उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष विवेक ने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन शिक्षा और रोजगार बचाने तथा परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित कराने के लिए है। उन्होंने कहा कि सरकार जवाबदेही से बच रही है, इसलिए शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पेपर चोर गद्दी छोड़, पेपर लीक बंद करो और धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो जैसे नारे लगाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो प्रयागराज में और बड़ा आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन में विवेक, भूपेंद्र, सुमित, महेंद्र, आर्यन, उमेश चौधरी, बृजेश, अशोक, अंकुर समेत अंबेडकर छात्रावास के सैकड़ों छात्र शामिल रहे।
सिरसा जिले के सरकारी स्कूलों में भवनों की स्थिति को लेकर शिक्षा विभाग गंभीर है। मुख्यमंत्री स्तर पर हुई समीक्षा और मुख्यालय के अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद को शिक्षा विभाग की टीम ने गांव भरोखा और खैरपुर के राजकीय स्कूलों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खैरपुर के 12 कमरों को कंडम घोषित कर दिया गया। ऐसे में 1 जुलाई से स्कूल खुलने से पहले छात्रों के बैठने की व्यवस्था को लेकर नई चुनौती खड़ी हो गई है। निरीक्षण टीम में जिला शिक्षा अधिकारी सुभाष फुटेला, समग्र शिक्षा अभियान के जिला परियोजना समन्वयक कृष्ण कुमार, बीईओ सरसा रमेश कुमार, एसडीओ मनमीत सिंह और विभागीय जेई शामिल थे। हालांकि, मुख्यालय से एक विशेष टीम के आने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन वह टीम मौके पर नहीं पहुंची। वर्षों पुरानी तकनीकी चूक बनी परेशानी जांच के दौरान सामने आया कि खैरपुर स्कूल में वर्षों पहले बनाए गए 12 कमरों और बरामदों में निर्माण संबंधी तकनीकी खामियां अब बड़ी समस्या बन चुकी हैं। कुछ वर्ष पहले कमरों की पुरानी छतों को कंडम घोषित कर बदल दिया गया था, लेकिन साथ लगते बरामदों की छतों को नहीं बदला गया। अब बरामदों के स्तर और कमरों की ऊंचाई में अंतर होने के कारण मरम्मत संबंधी प्रस्ताव तकनीकी रूप से उलझ गया है। सूत्रों के अनुसार जब बरामदों की मरम्मत की फाइल मुख्यालय पहुंची तो अधिकारियों ने इस पर आपत्ति जताई। बैठक में इंजीनियरों ने बताया कि कमरों की छतों को पहले ही ऊंचा किया जा चुका है, जबकि बरामदों को उसी स्तर पर नहीं लाया गया। अधिकारियों ने इसे गंभीर तकनीकी त्रुटि माना और मौके की रिपोर्ट तलब की। बहुमंजिला भवन निर्माण की दिशा में सोच रही सरकार शिक्षा विभाग अब पुराने और जर्जर भवनों की मरम्मत पर खर्च करने की बजाय नए बहुमंजिला भवनों के निर्माण की दिशा में विचार कर रहा है। सरकार की योजना है कि कंडम भवनों को हटाकर आधुनिक सुविधाओं से युक्त बहुमंजिला स्कूल भवन बनाए जाएं, ताकि भविष्य में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। इसी उद्देश्य से मौके पर भवनों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा रहा है, ताकि मरम्मत या पुनर्निर्माण को लेकर अंतिम निर्णय लिया जा सके। मुख्यमंत्री की बैठक के बाद तेज हुई कार्रवाई हाल ही में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेशभर के कंडम स्कूल भवनों की स्थिति को लेकर शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी। बैठक में जर्जर भवनों की ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करने और उनकी स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए गए थे। इन्हीं निदेर्शों के तहत जिला स्तर पर निरीक्षण शुरू किया गया है। मुख्यालय से निरीक्षण दल आने की सूचना के चलते अवकाश के दिन भी संबंधित स्कूलों में जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर प्राचार्य और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। अब विभागीय रिपोर्ट के आधार पर खैरपुर स्कूल सहित अन्य भवनों के भविष्य को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
समाज, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रियल एस्टेट, महिला सशक्तिकरण, राजनीति एवं अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली छत्तीसगढ़ की विशिष्ट हस्तियों को सम्मानित करने के लिए दैनिक भास्कर की ओर से ‘एमिनेंस अवॉर्ड-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। यह सम्मान समारोह 1 जुलाई, 2026 को रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह होंगे। उनके हाथों उन प्रतिभाओं और व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने अपने समर्पण, दूरदृष्टि, नवाचार और नेतृत्व क्षमता के बल पर अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल की हैं और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह प्रतिष्ठित समारोह शाम 5 बजे से शुरू होगा। कुणाल गांजावाला की लाइव परफॉर्मेंस समारोह का विशेष आकर्षण बॉलीवुड सिंगर कुणाल गांजावाला और उनके बैंड की लाइव प्रस्तुति होगी। अपनी मधुर आवाज और शानदार प्रस्तुतियों के लिए प्रसिद्ध कुणाल की परफॉर्मेंस इस शाम को यादगार बनाने वाली है। इस आयोजन में डीबी पावर लिमिटेड मुख्य सहयोगी हैं, जबकि नारायणा एमएमआई हॉस्पिटल-हेल्थ पार्टनर हैं। भास्कर का यह आयोजन केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि उत्कृष्टता, प्रेरणा और उपलब्धियों का उत्सव है। यह उन व्यक्तित्वों के कार्यों को समाज के सामने लाने का मंच है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूते हुए दूसरों के लिए प्रेरणा का मार्ग प्रशस्त किया है।
समस्तीपुर के शिवाजीनगर प्रखंड की प्रतिभा कुमारी ने मिथिला आइडल-2026 प्रतियोगिता के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाकर जिले का मान बढ़ाया है। अपनी मधुर आवाज और संगीत के प्रति समर्पण के बल पर उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। प्रतिभा कुमारी शिवाजीनगर प्रखंड के बल्लीपुर पंचायत अंतर्गत वार्ड संख्या-13 स्थित नौआपोखर गांव निवासी प्रधान शिक्षक उमेश प्रसाद राय और गृहिणी शमता कुमारी की बेटी हैं। वह अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। 200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था यह प्रतियोगिता मिथिलांचल की लोक एवं सांस्कृतिक प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मधुबनी के झंझारपुर में आयोजित की गई थी। इसमें लगभग 200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच प्रतिभा ने अपनी सुरीली आवाज, सुर-ताल पर मजबूत पकड़ और प्रभावशाली प्रस्तुति से निर्णायक मंडल को प्रभावित किया। दूसरे राउंड में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने क्वार्टर फाइनल में अपना स्थान सुरक्षित किया। इस उपलब्धि पर उन्हें प्रमाण-पत्र, मेडल और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। प्रतिभा कुमारी वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज में संगीत ऑनर्स थर्ड ईयर की छात्रा हैं। उन्होंने बताया कि संगीत के प्रति उनका लगाव बचपन से ही रहा है। मध्य विद्यालय बल्लीपुर में अध्ययन के दौरान वह रोजाना चेतना सत्र में हारमोनियम बजाकर प्रार्थना सभा का संचालन करती थीं। वहीं से संगीत के प्रति उनका रुझान और अधिक मजबूत हुआ। इसके बाद उन्होंने रोसड़ा के संगीत गुरु निराला से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा हासिल की। वर्तमान में वह दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रख्यात संगीत शिक्षक प्रोफेसर राजपाल सिंह के मार्गदर्शन में शास्त्रीय एवं सुगम संगीत की बारीकियां सीख रही हैं। तीन बहनों और एक भाई में प्रतिभा ने अपनी मेहनत, अनुशासन और लगन के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल प्रतियोगिता जीतना नहीं, बल्कि मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक संगीत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों और परिवार के सहयोग को दिया।
मंडला जिले के कन्या शिक्षा परिसर चटुआमार की छात्राओं और अभिभावकों ने मंगलवार को गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन के साथ प्रदर्शन किया। सभी बैगा-बैगी चौक पर एकत्र हुए और नारेबाजी के बाद कलेक्टर के नाम जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में शिक्षिका एवं छात्रावास अधीक्षिका सिंधिया चौकसे को पद से हटाने की मांग की गई है। कामकाज को लेकर लगाए आरोपज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि अधीक्षिका नियमित रूप से देरी से स्कूल पहुंचती हैं और परिसर में कम समय तक रहती हैं। छात्राओं का यह भी कहना है कि उनसे अभद्र भाषा में बात की जाती है। साथ ही स्टाफ और सुरक्षा गार्ड के साथ भी विवाद की स्थिति बनी रहती है। जादू-टोने का भी आरोपछात्राओं और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल परिसर में नारियल, धागा लिपटा मटका और बोतल जैसी सामग्री मिली है। उनका दावा है कि बच्चों को डराने और उनकी आवाज दबाने के लिए जादू-टोना कराया जाता है। इन आरोपों के बाद अभिभावकों में नाराजगी है। कार्रवाई नहीं हुई तो स्कूल छोड़ने की चेतावनीअभिभावकों ने कहा कि यदि शिकायत पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे अपने बच्चों का नाम स्कूल से कटवा देंगे। विभाग ने जांच की बात कहीआदिवासी कार्य विभाग के सहायक संचालक कुलदीप कटहल ने बताया कि विभाग को शिकायत मिल गई है। उन्होंने कहा कि संबंधित शिक्षिका के खिलाफ पहले भी कार्रवाई हुई थी, लेकिन न्यायालय से स्थगन आदेश मिलने के बाद संभागीय उपायुक्त के निर्देश पर उनकी पदस्थापना की गई थी। वर्तमान शिकायत की जांच के निर्देश दिए गए हैं और जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जादू-टोने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
शिक्षा के लिए किया सहयोग समाज के भविष्य को संवारता है : कलेक्टर
भास्कर न्यूज| झालावाड़ शिक्षा विभाग के जरिए जिले में स्कूलों के विकास के लिए आर्थिक मदद देने वाले भामाशाहों के सम्मान में सोमवार को मिनी सचिवालय सभागार में सम्मान समारोह हुआ। कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ मुख्य अतिथि रहे। कलेक्टर ने कहा कि शिक्षा में दिया योगदान समाज के भविष्य को संवारता है। स्कूलों के विकास के लिए आर्थिक सहयोग दान नहीं, यह पुण्य है। यह सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भामाशाहों के सहयोग से स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं बढ़ती हैं। विद्यार्थियों को बेहतर पढ़ाई का माहौल मिलता है। कलेक्टर ने कहा कि समाज और प्रशासन के साथ मिलकर शिक्षा में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने भामाशाहों का आभार जताया। अन्य लोगों से भी शिक्षा के लिए आगे आने की अपील की। सीडीईओ रामसिंह मीणा ने अतिथियों और भामाशाहों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जिले में कई भामाशाह स्कूलों के विकास में बढ़-चढ़कर योगदान दे रहे हैं। सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल रही है। उन्होंने सहयोगकर्ताओं के प्रति कृतज्ञता जताई। इनका भी रहा योगदान प्रेरक श्रेणी में भी भामाशाहों को सम्मानित किया गया। राजेन्द्र कुमार सामरिया ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सरोलाकला, खानपुर में दो कक्ष और बरामदा निर्माण के लिए 22.60 लाख रुपए के दान के लिए भामाशाह को प्रेरित किया। मोहम्मद नावेद अंसारी की ओर से राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय मंगलपुरा, झालावाड़ के विकास के लिए 7 लाख रुपए के सहयोग के लिए भामाशाह को प्रेरित किया गया। विनय मालव ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सारोलाकला,खानपुर में दो कक्ष मय बरामदा निर्माण के लिए 22.60 लाख रुपए का सहयोग दिया। फरनिश कुमार विजय ने महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय पचपहाड़ के विकास में 3.20 लाख रुपए का सहयोग किया। सत्यनारायण लोहार ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गंगधार डग में जल मंदिर निर्माण और विद्यालय विकास के लिए 2.00 लाख रुपए दिए। परमानन्द गुर्जर ने राउप्रावि नलखेड़ी, राउमावि झीझनी, राउमावि मिश्रोली, पीएमश्री भवानीमंडी विद्यालय में 1.63 लाख रुपए का सहयोग किया। मोरसिंह ने राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पिपलोदी-मनोहरथाना के लिए 1.08 लाख रुपए दिए। कैलाश बाई लोधा ने स्वामी श्री रामेश्वर आश्रम राउमावि गुरूकुल बकानी के विकास के लिए 1.04 लाख रुपए का सहयोग किया। घनश्याम गुर्जर ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भूमाड़ा़-बकानी के विकास के लिए 1.00 लाख रुपए दिए।
गर्मी की छुट्टियां खत्म होने के बाद सोमवार से प्रदेशभर के सरकारी स्कूल खुल गए हैं। इसके साथ ही मानसून भी आने को तैयार है, जिसके लिए शिक्षा विभाग ने छात्र-छात्राओं और स्कूली स्टाफ की सुरक्षा को लेकर निर्देश जारी किए हैं। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के निदेशक सीताराम जाट और मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विद्यार्थियों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। इसके लिए हिदायत दी गई है कि किसी भी हाल में बच्चों को जर्जर, असुरक्षित या छत टपकने वाले कमरों में नहीं बैठाया जाए। ऐसे जर्जर भवनों को तुरंत बांस, रस्सी या खतरे का निशान लगाकर बैरीकेड किया जाए, ताकि बच्चे वहां न जा सकें। शिक्षा विभाग की गाइडलाइन, इन 6 बिंदुओं पर होगा फोकस 1. छतों की सफाई-जलभराव से मुक्ति : स्कूल खुलते ही सबसे पहले भवनों की छतों और बरसाती नालों की सफाई की जाएगी, ताकि पानी जमा न हो। भवन की नींव के पास भी पानी नहीं इकट्ठा होने दिया जाएगा। 2. जर्जर भवन गिराने की मॉनिटरिंग : जो स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, उन्हें नियमानुसार तुरंत सुरक्षित तरीके से जमींदोज (ध्वस्त) करने के निर्देश दिए गए हैं। 3. बिजली के खुले तारों पर टेपिंग : स्कूल परिसरों में बिजली की वायरिंग दुरुस्त की जाएगी। कहीं भी खुले तार दिखने पर तुरंत टेपिंग होगी ताकि करंट का खतरा न रहे। 4. पानी के स्रोतों पर पाबंदी : बच्चे पेयजल के लिए बनी टंकियों, कुओं या अन्य जल स्रोतों के पास अकेले नहीं जा सकेंगे। टंकियों की नियमित सफाई कर उस पर तारीख लिखी जाएगी। 5. शौचालयों में रनिंग वाटर : सभी स्कूलों, विशेषकर छात्राओं के शौचालयों में नियमित साफ-सफाई, दरवाजों की मरम्मत और रनिंग वॉटर (बहते पानी) की व्यवस्था अनिवार्य की गई”है। 6. आपदा प्रबंधन-सुरक्षित निकास मैप : हर स्कूल में प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए एक सुरक्षित निकास योजना का मानचित्र (मैप) बनाया जाएगा और बच्चों को ट्रेनिंग दी जाएगी। खुले में या पेड़ के नीचे क्लास लगी तो डीईओ होंगे जिम्मेदार आदेश में सख्त लहजे में कहा गया है कि जिन स्कूलों के पास खुद का भवन नहीं है, वे वैकल्पिक सुरक्षित भवनों में चलेंगे। यदि कोई भी स्कूल खुले में, झोपड़ी में या पेड़ के नीचे संचालित होता पाया गया, तो इसके लिए सीधे संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी जिम्मेदार होंगे। अधिकारियों को केवल कागजी रिपोर्ट न देखकर खुद फील्ड में जाकर रैंडम निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्राकृतिक आपदा या किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्कूल के सूचना पट्ट पर निकटतम अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र, पुलिस स्टेशन और फायर ब्रिगेड के फोन नंबर और जिम्मेदार अधिकारियों के मोबाइल नंबर लिखना अनिवार्य कर दिया गया है। उदयपुर के जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. लोकेश भारती के अनुसार हमने तैयारियां शुरू कर दी है। सभी सीबीईओ को कहा गया है कि सतर्कता बरतने के लिए एक्टिव रहें।
भोज से मोहभंग:दूरस्थ शिक्षा में किताबें भी दूर; 4 माह में भी छात्रों को नहीं मिला स्टडी मटेरियल
मध्यप्रदेश भोज (मुक्त) विश्वविद्यालय से विद्यार्थियों का मोहभंग हो रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि यहां अध्ययनरत हजारों विद्यार्थियों को स्टडी लर्निंग मटेरियल (एसएलएम) मिलने में चार-चार महीने तक देरी हो रही है। कई छात्र परीक्षा नजदीक आने तक किताबों का इंतजार करते रहते हैं। ये समस्या पिछले कई सालों से लगातार बनी हुई है। इसका नतीजा यह है कि विश्वविद्यालय की छात्र संख्या में भी लगातार गिरावट आ रही है। वर्तमान में विश्वविद्यालय में यूजी, पीजी समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों में करीब 80 हजार विद्यार्थी हैं, जो पहले 1 लाख से ऊपर हुआ करते थे। प्रवेश के समय विद्यार्थियों से स्टडी मटेरियल की राशि भी ली जाती है। नियम कहता है कि सामान्य स्थिति में एडमिशन के एक महीने के भीतर छात्रों तक अध्ययन सामग्री पहुंच जानी चाहिए, लेकिन भोज में हर सत्र में हजारों छात्र किताबों के लिए चक्कर लगाते रहते हैं। इससे दूरस्थ शिक्षा मॉडल ही कठघरे में आ रहा है। हिंदी ग्रंथ अकादमी से मिलती हैं किताबें, प्रकाशन में देरी ऑनलाइन सामग्री भी नहीं दे पा रहा विवि बड़ा सवाल यह है कि डिजिटल युग में भी विश्वविद्यालय छात्रों को ऑनलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। जबकि दूरस्थ शिक्षा संस्थानों में डिजिटल स्टडी मटेरियल उपलब्ध कराना सामान्य व्यवस्था बन चुकी है। छात्र चाहते हैं कि जब तक प्रिंटेड किताबें नहीं मिलतीं, उन्हें वेबसाइट या ई-मेल के माध्यम से एसएलएम उपलब्ध कराया जाए लेकिन ये भी नहीं मिल पाती। दरअसल, यूजी कोर्सेस में विवि स्वयं एसएलएम तैयार नहीं करता। इसके लिए हिंदी ग्रंथ अकादमी से किताबें प्रकाशित कराई जाती हैं। इनका कॉपीराइट अकादमी के पास होने के कारण विवि इन्हें पीडीएफ स्वरूप में विद्यार्थियों को उपलब्ध नहीं करा पाता। हालांकि दोनों संस्थाएं राज्य सरकार के अधीन हैं फिर भी अब तक कोई व्यावहारिक व्यवस्था नहीं बन सकी है। यही समस्या सरकारी कॉलेजों के अजा- अजजा वर्ग के विद्यार्थियों के सामने भी आती है। इनको हिंदी ग्रंथ अकादमी की किताबें निशुल्क देने की व्यवस्था है, लेकिन पुस्तक वितरण में देरी के कारण उन्हें भी पढ़ाई में परेशानी आती है। विशेषज्ञ बोले- सामग्री तुरंत मिलना चाहिए जानकारों का कहना है कि यदि अध्ययन सामग्री को समय पर उपलब्ध कराने और ऑनलाइन एक्सेस की व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो आने वाले समय में दूरस्थ शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों का भरोसा और कमजोर हो सकता है। पिछले शैक्षणिक सत्रों में प्रवेश की स्थिति इस समस्या का समाधान निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी से यूजी के विद्यार्थियों के लिए स्टडी मटेरियल लिया जाता है। अकादमी पर वर्कलोड भी अधिक हो सकता है। पीजी के लिए एसएलएम तैयार कराते हैं। कई बार सभी चेप्टर एक साथ तैयार नहीं हो पाते, इसलिए प्रकाशन में दिक्कत आती है। नए शैक्षणिक सत्र में यह दिक्कत न आए, इसको ध्यान में रखकर कार्यवाही की जा रही है। -डॉ. रतन सूर्यवंशी, निदेशक, भोज (मुक्त) विवि
कोटपूतली में शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले भामाशाहों और प्रेरकों के सम्मान में सोमवार को जिला स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह सरदार राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के सभागार में हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अतिरिक्त जिला कलक्टर ओमप्रकाश सहारण रहे, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक शिक्षा) प्रकाश चंद मीणा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। विशिष्ट अतिथियों में विद्यालय के प्रधानाचार्य नरेश बंसल और एसीबीईओ-प्रथम कोटपूतली पूर्णचंद कसाना मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर और माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद विद्यालय की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों, भामाशाहों और प्रेरकों का स्वागत किया। प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिह्न देकर किया सम्मानित समारोह में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए शिक्षा सहयोगियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान 21 भामाशाहों और 12 प्रेरकों को माल्यार्पण, प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिह्न देकर जिला स्तरीय सम्मान प्रदान किया गया। अतिरिक्त जिला कलक्टर ओमप्रकाश सहारण ने कहा कि विद्यालयों के विकास में समाज की भागीदारी बहुत महत्वपूर्ण है। भामाशाहों के सहयोग से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल और आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने सभी भामाशाहों से भविष्य में भी शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग जारी रखने की अपील की। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक शिक्षा) प्रकाश चंद मीणा ने सभी अतिथियों और भामाशाहों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों के लिए समाज का सहयोग शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है और इससे विद्यार्थियों को सीधे लाभ मिल रहा है। कार्यक्रम का संचालन प्रधानाचार्य हंसराज यादव ने किया। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के अधिकारी, विद्यालय स्टाफ, भामाशाह, प्रेरक और बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।
रोपड़ में कांग्रेस के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह वैद की अध्यक्षता में एक कार्यकर्ता बैठक आयोजित की गई। इस दौरान उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों और देश के मौजूदा हालातों पर तीखी टिप्पणी की। वैद ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय मीडिया के रवैये पर निशाना साधा। वैद ने नीट (NEET) परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक मामले पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार की नाकामियों और सिस्टम की खामियों के कारण 21 छात्रों को मानसिक तनाव के चलते आत्महत्या करनी पड़ी। वैद के अनुसार, कानूनन इसे खुदकुशी कहा जा सकता है, लेकिन असल में यह केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा बच्चों की 'संस्थागत हत्या' है। उन्होंने शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देने की मांग की और राहुल गांधी के शिक्षा प्रणाली बचाने के प्रयासों की सराहना की। केंद्र सरकार की आलोचना की केंद्र की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए वैद ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 130 डॉलर से घटकर लगभग 69 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं। इसके बावजूद सरकार ने पेट्रोल, डीजल या रसोई गैस की कीमतों में कोई कटौती नहीं की है, जिससे आम जनता की जेब पर बोझ पड़ रहा है। मीडिया की भूमिका पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि देश का राष्ट्रीय मीडिया जनता के वास्तविक मुद्दों से मुंह मोड़े हुए है। बड़े मीडिया हाउस विपक्ष की आवाज और जनता की समस्याओं को प्रमुखता से दिखाने में विफल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब का मीडिया फिर भी जनता की आवाज उठाता है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की खबरों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जाता है। इस अवसर पर कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और स्थानीय कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
समाजसेवी और बैंक से रिटायर्ड तोषपाल उपाध्याय कपसदा वाले ने छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण समाज को 1 करोड़ रुपए का दान दिया है। छत्तीसगढ़ युवा विकास संगठन के अध्यक्ष ज्ञानेश शर्मा ने इसे समाज के इतिहास का सबसे बड़ा व्यक्तिगत दान बताया। रायपुर के विप्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में तोषपाल उपाध्याय ने 1 करोड़ रुपए का चेक विप्र सांस्कृतिक भवन प्रबंध समिति के अध्यक्ष नरेंद्र तिवारी को सौंपा। इस मौके पर पूर्व न्यायाधीश टी.पी. शर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस एस.के. तिवारी, अनुराग पांडेय, अरुण शर्मा, सुरेंद्र शुक्ला, नटराज शर्मा, कुसुम शर्मा, संजय दीवान सहित समाज के कई लोग मौजूद रहे।पीढ़ियों के लिए बनी प्रेरणा तोषपाल उपाध्याय ने कहा कि समाज से उन्हें हमेशा प्यार, सम्मान और सहयोग मिला। इसी के प्रति आभार जताने के लिए उन्होंने यह दान दिया है। उनके इस फैसले पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाईं और उनका सम्मान किया। समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि यह दान सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि शिक्षा, समाज को मजबूत बनाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा देने वाला कदम है। इस राशि का उपयोग समाज के विकास और जनहित के कार्यों में किया जाएगा।
आम कबीर पंथी वैष्णव समाज नवयुवक मंडल पाली की और से सोमवार को कबीर जयंती महोत्सव के सुबह गाजे-बाजे के साथ शहर में संत कबीर की शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें झांकियों के जरिए वैष्णव समाज ने बेटा-बेटी में भेद नहीं करने, बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इससे पहले सुबह इन्द्रा कॉलोनी रोड स्थित कबीर द्वारे से गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा रवाना हुई। पूरे रास्ते जोश से लबरेज युवा डांस करते हुए चल रहे थे। आकर्षक ड्रेस में सजे समाज के महिला-पुरुष संत कबीर के जैकारे लगाते हुए चल रहे थे। शोभायात्रा कबीर द्वारे से रवाना होकर लोढा स्कूल रोड, सूरजपोल, सोमनाथ मंदिर, सर्राफा बाजार, पानी दरवाजा, भैरूघाट, गांधी मूर्ति, आदर्श नगर, नहर पुलिया होते हुए इंद्रा कॉलोनी रोड स्थित कबीर द्वारे पहुंच सम्पन्न हुई। इससे पहले रविवार शाम को भक्ति संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें भजन गायकों ने संत कबीर की स्तुति में मनमोहक भजनों की प्रस्तुति दी। प्रतिभाओं और भामाशाहों का किया सम्मान आम कबीर पंथी वैष्णव समाज नवयुवक मंडल पाली के प्रवक्ता एडवोकेट परमेश्वर वैष्णव ने बताया कि यहां आयोजित सम्मान समारोह में 8वीं, 10वीं और 12वीं के प्रतिभावान स्टूडेंट को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही समाज के भामाशाहों को भी सम्मानित किया गया। उसके बाद महाप्रसादी का आयोजन किया गया। पूरे प्रोग्राम में बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने भाग लिया। व्यवस्थाओं में जुटे समाजबंधु कार्यक्रम के दौरान आम कबीर पंथी वैष्णव समाज नवयुवक मंडल पाली के अध्यक्ष राजवर्धन वैष्णव, अर्जुन दास वैष्णव, संजय वैष्णव, पवन दास वैष्णव, टीकम दास, एडवोकेट लक्ष्मी नारायण वैष्णव, एडवोकेट चंद्र प्रकाश वैष्णव, पूनम दास वैष्णव, ताराचंद वैष्णव, नितेश वैष्णव, गजेंद्र वैष्णव, भारत भूषण वैष्णव, नितेश वैष्णव, आनंद वैष्णव आदि का सहयोग रहा।
किशनगंज के प्रतिष्ठित व्यवसायी और समाजसेवी राजेन्द्र तोषनीवाल को राजस्थान सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया है। उन्हें राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित 30वें राज्य स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह में 'शिक्षा भूषण भामाशाह सम्मान' प्रदान किया गया। यह सम्मान राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा और शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने प्रदान किया। राजस्थान सरकार शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सहयोग और अभूतपूर्व योगदान देने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को इस सम्मान से नवाजती है। राजेन्द्र तोषनीवाल लंबे समय से शिक्षा और सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं। शिक्षा के प्रसार, विद्यार्थियों के सहयोग और शैक्षणिक संस्थानों के विकास में उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया है। किशनगंज में सम्मान मिलने की खबर पहुंचने पर विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक संगठनों के लोगों ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने इसे जिले के लिए गौरव का विषय बताया। समाजसेवा और शिक्षा के क्षेत्र में अहम पहचान राजेन्द्र तोषनीवाल एक ऐसे परिवार से आते हैं, जिसकी समाजसेवा और शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से पहचान रही है। उनके पिता जुगलकिशोर तोषनीवाल किशनगंज के जाने-माने समाजसेवी हैं। वे एमजीएम मेडिकल कॉलेज किशनगंज के सचिव और बाल मंदिर स्कूल के ट्रस्टी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, राजेन्द्र तोषनीवाल को मिला यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि किशनगंज जिले के लिए भी गर्व का क्षण है। उनका मानना है कि शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान से अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करने, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के विरोध में आंदोलन चल रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलनरत छात्र-युवा संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की। वहीं, इस आंदोलन के समर्थन में आरा सहित बिहार और देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक दिवसीय सामूहिक उपवास और भूख हड़ताल आयोजित की। पूर्व विधायक शिव प्रकाश रंजन ने कहा कि नीट सहित विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में लगातार अनियमितताओं ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 से अधिक छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी सरकार और शिक्षा मंत्रालय को लेनी चाहिए। उनका कहना था कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से आमरण अनशन चल रहा है, जिसके समर्थन में देशभर में छात्र और युवा संगठन सड़कों पर उतरकर सामूहिक उपवास कर रहे हैं। दोबारा परीक्षा आयोजित करना समाधान नहीं उन्होंने कहा कि केवल दोबारा परीक्षा आयोजित कर देना समाधान नहीं है। जिन छात्रों ने कथित अव्यवस्थाओं के कारण मानसिक तनाव झेला या आत्महत्या जैसा कदम उठाया, उन्हें न्याय कौन देगा। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर आज भी छात्रों के मन में संशय बना हुआ है। इसी कारण शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि बिहार में आईसा और इंकलाबी नौजवान सभा छात्रों के सवालों और पेपर लीक के मुद्दे पर लगातार आंदोलन कर रहे हैं और आगे भी यह संघर्ष जारी रहेगा। आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में कुव्यवस्था के खिलाफ है छात्र नेत्री वर्षा कुमारी ने कहा कि यह आंदोलन केवल नीट परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में कुव्यवस्था के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही का अभाव है और छात्रों को लगातार मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि परीक्षा केंद्रों की दूरी, बार-बार बदलती परिस्थितियां और परीक्षा प्रक्रिया में खामियों के कारण छात्रों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई छात्र मानसिक अवसाद से जूझ रहे हैं। आंदोलनकारियों ने कहा कि जब तक परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह नहीं बनाया जाता और छात्रों के हितों की रक्षा नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक मामलों की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।
हरियाणा सरकार ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बड़ा फैसला लेनी जा रही है। सरकार अब आईटीआई में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को हर महीने करीब 2,000 रुपए का वजीफा देगी। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों को आर्थिक मदद देकर उन्हें तकनीकी शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के लिए प्रोत्साहित करना है। कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के अनुसार, इस योजना से आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों की संख्या कम होगी और अधिक युवा उद्योगों की जरूरत के अनुरूप कौशल हासिल कर सकेंगे। आर्थिक मदद के साथ स्किल डेवलपमेंट विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य में निवेश है। इससे छात्रों की नियमित उपस्थिति बढ़ेगी और तकनीकी शिक्षा को अधिक आकर्षक व रोजगारोन्मुख बनाया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि वित्तीय सहायता और उद्योग आधारित प्रशिक्षण के इस मॉडल से हरियाणा में कुशल युवाओं की नई पीढ़ी तैयार होगी, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा। प्रदेश में 377 ITI, करीब 1 लाख सीटें सत्र 2026-27 में हरियाणा के 377 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया जारी है। इनमें 197 सरकारी ITI, 180 निजी ITI, करीब 1 लाख सीटें, 89 से अधिक इंजीनियरिंग और गैर-इंजीनियरिंग ट्रेड इन संस्थानों में पारंपरिक तकनीकी ट्रेडों के साथ आधुनिक तकनीकों से जुड़े कोर्स भी उपलब्ध हैं। ड्यूल सिस्टम ऑफ ट्रेनिंग (DST) पर जोर सरकार प्रशिक्षण की ड्यूल सिस्टम ऑफ ट्रेनिंग (DST) व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है। इसके तहत छात्रों को कक्षा में पढ़ाई के साथ-साथ उद्योगों में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी मिलेगा। इससे प्रशिक्षु मशीनों, सुरक्षा मानकों और औद्योगिक कार्यप्रणाली का वास्तविक अनुभव हासिल कर सकेंगे और रोजगार के लिए बेहतर तैयार होंगे। 8वीं, 10वीं, 12वीं पास कर सकते हैं आवेदन सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया जारी है। 8वीं, 10वीं और 12वीं पास विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए विभाग ने सभी आईटीआई में विशेष हेल्प सेंटर बनाए हैं, जहां छात्रों को रजिस्ट्रेशन, दस्तावेज और सीट आवंटन से जुड़ी सहायता दी जा रही है। उद्योगों के साथ व्यावहारिक ट्रेनिंग (DST) पर सरकार का जोर है। 2026-27 प्रवेश प्रक्रिया जारी हैं, हेल्प सेंटर भी शुरू हो गए हैं।
शिक्षामंत्री मदन दिलावर ने दावा किया कि पूरे देश में राजस्थान ऐसा एकमात्र प्रदेश है, जहां सरकारी स्कूल प्रदर्शन के मामले में प्राइवेट स्कूलों से आगे हैं। उन्होंने कहा कि नीति आयोग ने भी इस बात का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों के शिक्षक, स्टूडेंट्स और अधिकारियों की मेहनत से यह बदलाव संभव हुआ है। दिलावर सोमवार को जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित 30वें राज्य स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह-2026 को संबोधित कर रहे थे। एक लाख जर्जर कमरों को चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा ठीक दिलावर ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में स्कूल भवनों की समय पर मरम्मत नहीं होने से कई भवन जर्जर हो गए। इसका दुखद परिणाम झालावाड़ की घटना के रूप में सामने आया, जिसमें बच्चों की जान गई। उन्होंने कहा कि सरकार ने संकल्प लिया है कि ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी। प्रदेशभर में जर्जर स्कूल भवनों की पहचान कर ली गई है। जो भवन पूरी तरह अनुपयोगी थे, उन्हें हटाया गया है और जिनकी मरम्मत संभव है, उन्हें चरणबद्ध तरीके से ठीक कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब एक लाख स्कूल कक्ष जर्जर हैं, इसलिए सभी काम एक साथ संभव नहीं है। इसमें समाज और भामाशाहों के सहयोग की भी जरूरत है। सरकारी स्कूलों के बच्चों का प्रदर्शन बेहतर शिक्षामंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी बेहतर परिणाम देकर यह साबित कर रहे हैं कि वे किसी भी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के ऐसे निजी स्कूल, जिनकी सालाना फीस एक, दो या तीन लाख रुपए तक है, वे भी कई मामलों में सरकारी स्कूलों की बराबरी नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने शिक्षकों, विद्यार्थियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बधाई दी। नीति आयोग ने भी माना राजस्थान मॉडल दिलावर ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों का असर अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग के अनुसार देश में सामान्य रूप से प्राइवेट स्कूल सरकारी स्कूलों से आगे हैं, लेकिन राजस्थान इसका अपवाद है। यहां सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन निजी स्कूलों से बेहतर है और यह पूरे देश के लिए एक मॉडल बन रहा है। 40 नंबर से कम परिणाम पर शिक्षक की होगी जवाबदेही शिक्षामंत्री ने कहा कि पहले विद्यार्थी 33 अंक लाकर पास हो जाता था, जिसमें 20 अंक सत्रांक और 13 अंक लिखित परीक्षा के होते थे। अब शिक्षकों से कहा गया है कि यदि उनके विद्यार्थियों का प्रदर्शन 40 प्रतिशत से कम रहता है तो संबंधित शिक्षक की जवाबदेही तय की जाएगी। जरूरत पड़ने पर उनका इंक्रीमेंट रोका जा सकता है, निलंबन या दूरस्थ स्थान पर ट्रांसफर भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने इस चुनौती को स्वीकार किया और इसका सकारात्मक परिणाम आज देखने को मिल रहा है। अच्छा काम करने वाले शिक्षकों का 5 साल तक नहीं होगा ट्रांसफर दिलावर ने कहा कि जो शिक्षक अच्छा काम करेंगे, उनका पांच साल तक स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। वहीं जिनके काम में कमी मिलेगी, उनका ट्रांसफर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य शिक्षकों को बेहतर काम के लिए प्रोत्साहित करना और शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना है। 276 से अधिक भामाशाहों और दानदाताओं का हुआ सम्मान समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले 276 से अधिक भामाशाह, प्रेरक और एनआरआई दानदाताओं का सम्मान किया गया। इनमें 154 भामाशाह, 99 प्रेरक और 23 एनआरआई दानदाता शामिल हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में इन सहयोगियों से शिक्षा विभाग को 318 करोड़ रुपए का सहयोग मिला, जिससे सरकारी स्कूलों में भवन निर्माण, अतिरिक्त कक्ष, आधारभूत सुविधाओं और अन्य विकास कार्यों को गति मिली।
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में शिक्षाशास्त्री (बी.एड.) सत्र 2025-27 के प्रथम वर्ष और सत्र 2024-26 के द्वितीय वर्ष की वार्षिक परीक्षा सोमवार से शुरू हो गई। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार परीक्षा शांतिपूर्ण और कदाचारमुक्त वातावरण में आयोजित की जा रही है। परीक्षा का आयोजन विश्वविद्यालय मुख्यालय स्थित बहुद्देशीय भवन में किया जा रहा है, जो 3 जुलाई तक चलेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जा रही है। प्रथम पाली सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक तथा दूसरी पाली दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित की गई है। पहली पाली में प्रथम वर्ष के छात्र और दूसरी पाली में द्वितीय वर्ष के छात्र परीक्षा दे रहे हैं। पहले दिन इतने छात्र होंगे शामिल विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, शिक्षाशास्त्री पाठ्यक्रम में प्रत्येक सत्र के लिए 100-100 सीटें निर्धारित हैं। परीक्षा के पहले दिन प्रथम पाली में प्रथम वर्ष के 75 परीक्षार्थी तथा द्वितीय पाली में द्वितीय वर्ष के 95 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे। प्रवेश से पहले जांच, पहचान पत्र अनिवार्य परीक्षा केंद्र पर विद्यार्थियों की सुविधा और अनुशासन बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। परीक्षा शुरू होने से पहले मुख्य प्रवेश द्वार पर सभी परीक्षार्थियों की जांच की गई। प्रवेश पत्र के साथ वैध पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य किया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही छात्रों को निर्धारित परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया जायेगा। कदाचारमुक्त परीक्षा पर विशेष निगरानी विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा निष्पक्ष, शांतिपूर्ण एवं कदाचारमुक्त परीक्षा संचालन सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है। केंद्राधीक्षक डॉ. घनश्याम मिश्र ने बताया, ‘परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुचारु रूप से संचालित हो रही है। सभी परीक्षा कक्षों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। परीक्षा संचालन में विश्वविद्यालय के सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है।’ परीक्षा केंद्र पर विशेष कार्य पदाधिकारी (शैक्षणिक) डॉ. रामसेवक झा, डॉ. रामानंद झा, डॉ. निशा, डॉ. ऋद्धिनाथ झा, डॉ. संजीव, गोपाल महतो,अवन कुमार राय, पवन सहनी एवं श्रीधर सहित कई अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे।
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से निकाली गई माध्यमिक शिक्षा विभाग में लेक्चरर (विशेष शिक्षा) के 121 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की लास्ट डेट कल (30 जून) है। कैंडिडेट की उम्र 1 जनवरी 2027 को 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। कैंडिडेट का सिलेक्शन एग्जाम के माध्यम से होगा। परीक्षा तिथि और परीक्षा केंद्रों की जानकारी बाद में अलग से जारी की जाएगी। यह रहेगा परीक्षा शुल्क अब जानिए आरपीएससी की इन भर्तियों के बारे में भी…. आरएएस-2026 का आवेदन प्रोसेस जारी, 3 जुलाई लास्ट डेट राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से निकाली गई राजस्थान राज्य और अधीनस्थ सेवाएं (RAS) संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा-2026 के 607 पदों के लिए आवेदन 4 जून से जारी हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 3 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा 29 नवंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। इस भर्ती में राज्य सेवा के 192 पद और अधीनस्थ सेवा के 415 पद शामिल हैं। 1 जनवरी 2027 को अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष होनी चाहिए। सहायक अभियोजन अधिकारी के 371 पदों पर भर्ती जारी सहायक अभियोजन अधिकारी-एपीपी (गृह विभाग-अभियोजन) के 371 पदों पर भर्ती के लिए प्रोसेस जारी है। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन की लास्ट डेट 7 जुलाई है। इस भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन 2 सितंबर को किया जाना प्रस्तावित है। आयु सीमा 1 जनवरी 2027 को न्यूनतम 21 साल और अधिकतम 40 साल से कम होनी चाहिए। आयोग द्वारा यह पद साल 2024 में विज्ञापित किए गए थे। इसके बाद आयु की गणना 1 जनवरी 2025 को आधार मानकर की गई। हालांकि इन पदों के लिए कोई विज्ञापन जारी नहीं किया। इसलिए अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में एक साल की अतिरिक्त छूट दी जाएगी। अभ्यर्थियों का सिलेक्शन प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। प्रतियोगी परीक्षा दो चरणों में प्रारम्भिक परीक्षा व मुख्य परीक्षा के रूप में ली जाएगी। वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी भर्ती- 10 जुलाई लास्ट डेट राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला में वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी (Senior Scientific Officer) के कुल 3 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया जारी है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा निकाली गई इस भर्ती के तहत टॉक्सिकोलॉजी, फिजिक्स और बैलिस्टिक्स डिवीजन में 1-1 पद शामिल हैं। योग्य अभ्यर्थी 10 जुलाई की रात 12 बजे तक इसके लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। यदि कोई अभ्यर्थी एक से अधिक डिवीजन (पद) के लिए योग्यता रखता है और आवेदन करना चाहता है, तो उसे प्रत्येक पद के लिए अलग-अलग आवेदन फॉर्म भरना होगा। परीक्षा-2026 का आयोजन 13 अक्टूबर 2026 से 17 अक्टूबर 2026 के बीच में किया जाएगा। आयोग ने परीक्षा कम्पयूटर बेस्ड रिक्रूटमेंट टेस्ट (सीबीआरटी) के माध्यम से आयोजित की जाएगी, जिसका विस्तृत कार्यक्रम यथासमय जारी कर दिया जाएगा।
47% पद खाली, फिर भी बढ़ा सोशल ऑडिट का दायरा: अब पेंशन और समग्र शिक्षा की भी जांच
सरकारी योजनाओं में गड़बड़ियों पर नजर रखने वाली राज्य की सामाजिक अंकेक्षण इकाई (सोशल ऑडिट यूनिट) खुद कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रही है। स्थिति यह है कि इकाई के 586 स्वीकृत पदों में से 274 पद खाली हैं। यानी करीब 47% पद रिक्त हैं। इसके बावजूद अब इस इकाई को समाज कल्याण विभाग की पेंशन योजनाओं और समग्र शिक्षा के सामाजिक अंकेक्षण की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंप दी गई है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के लेखा परीक्षण नियम-2011 के तहत गठित इस स्वतंत्र एवं स्वशासी इकाई का गठन सितंबर 2013 में किया गया था। शुरुआत में इसका दायरा केवल मनरेगा तक सीमित था। बाद में प्रधानमंत्री आवास योजना और स्कूलों की पीएम पोषण (मध्याह्न भोजन) योजना का सोशल ऑडिट भी इसी संस्था को सौंपा गया। अब पेंशन योजनाएं और समग्र शिक्षा भी इसके दायरे में शामिल हो गई हैं। सामाजिक अंकेक्षण के दौरान योजनाओं के कार्यों का भौतिक सत्यापन, दस्तावेजों का मिलान, हितग्राहियों से मौखिक सत्यापन और जनसुनवाई के माध्यम से वित्तीय गड़बड़ी, प्रक्रिया के उल्लंघन तथा अन्य अनियमितताओं की जांच की जाती है। कर्मचारियों की कमी के कारण मनरेगा के तहत हुए सभी कार्यों का भी समय पर सामाजिक अंकेक्षण नहीं हो पा रहा है। सबसे अधिक रिक्तियां विलेज सोशल ऑडिटर और ब्लॉक सोशल ऑडिटर के पदों पर हैं, जो फील्ड में जाकर जांच की मुख्य जिम्मेदारी निभाते हैं। बताया जा रहा है कि वर्ष 2017 के बाद इस इकाई में नियमित भर्ती नहीं हुई है।
NEET विवाद: कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री से इस्तीफा मांगा
भास्कर न्यूज. कोंडागांव| देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट को लेकर उठे विवाद के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज की। कांग्रेस भवन में प्रेस वार्ता हुई। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि लगातार पेपर लीक हो रहे हैं। परीक्षा में अनियमितताएं हो रही हैं। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। इसकी नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री को लेनी चाहिए। मरकाम ने राजस्थान के कोटा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के छात्रों के बीच दिए संबोधन का हवाला दिया। कहा कि देश की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के बजाय युवाओं को निराशा की ओर धकेल रही है। कहा कि राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था को सेलेक्शन सिस्टम के बजाय रिजेक्शन सिस्टम बताया। आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था छात्रों के सपनों को पूरा करने के बजाय उन्हें मानसिक दबाव और तनाव में डाल रही है। मरकाम ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों का भरोसा कमजोर किया है। कहा कि परीक्षाओं की तैयारी में परिवार अपनी बड़ी कमाई कोचिंग, किताबों, फीस पर खर्च करते हैं। अनियमितताओं के कारण छात्रों का भविष्य संकट में पड़ जाता है। कहा कि कांग्रेस छात्रों की आवाज राष्ट्रीय स्तर पर उठाती रहेगी। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करती रहेगी। मरकाम ने केंद्र सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की। छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की बात कही। कांग्रेस ने कहा कि नीट सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता, पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं होगा। इस मौके पर कांग्रेस जिला महामंत्री जयप्रकाश यादव मौजूद रहे। बड़ी संख्या में कांग्रेसी नेता भी पहुंचे।
सरकारी स्कूलों के 14.16 करोड़ के शिक्षा सहयोगियों का सम्मान आज
भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनों को मजबूत बनाने के लिए आर्थिक सहयोग देने वाले भामाशाहों और शिक्षा प्रेरकों का जिला स्तरीय सम्मान समारोह सोमवार को दोपहर 3 बजे महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय लेबर कॉलोनी में होगा। समारोह में 7 भामाशाहों को शिक्षा श्री सम्मान तथा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले एक प्रेरक को शाला प्रेरक सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) माध्यमिक राजेंद्र कुमार गग्गड़ ने बताया कि वर्ष 2025-26 में जिले के राजकीय विद्यालयों को भामाशाहों की ओर से 14 करोड़ 16 लाख 37 हजार 981 रुपए का आर्थिक सहयोग मिला, जिससे विद्यालयों के विकास कार्यों को नई गति मिली। जिला स्तरीय समारोह में भीलवाड़ा राउंड टेबल (22.32 लाख), कृष्णा राजावत (10 लाख), रतनलाल जाट (13.29 लाख), मदन गोपाल माहेश्वरी (3.50 लाख), जगदीश चंद्र सुथार (1 लाख), शंकरलाल जैन (1 लाख) और राकेश रोशन शर्मा (1 लाख 500 रुपए) को ‘शिक्षा श्री सम्मान’ दिया जाएगा। वहीं, बुद्धि प्रकाश त्रिपाठी को ‘शाला प्रेरक सम्मान’ से नवाजा जाएगा। 30 लाख रुपए से अधिक सहयोग देने वाले अंकित अग्रवाल, सत्यनारायण लढ़ा, राम मुरारी और शशांक दीक्षित का राज्य स्तरीय सम्मान के लिए चयन हुआ है। अनिल कुमार शर्मा और आईजीआरएफ को भी राज्य स्तरीय ‘शाला प्रेरक सम्मान’ प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान शिक्षा में जनभागीदारी और सामाजिक सहयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। 4 भामाशाह व 2 प्रेरक राज्य स्तर पर होंगे सम्मानित
सूरजपुर के जिला मुख्यालय स्थित ऑडिटोरियम में शनिवार को जिला स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव 2026-27 का आयोजन किया गया। सांसद चिंतामणि महाराज ने शिक्षा की घंटी बजाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस उत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद चिंतामणि महाराज और प्रेमनगर विधायक भूलन सिंह मरावी शामिल हुए। उन्होंने नवप्रवेशी बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया और उन्हें गणवेश तथा पाठ्यपुस्तकें वितरित कीं। जनप्रतिनिधियों ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला और सभी बच्चों से मन लगाकर पढ़ाई करने की अपील की। कार्यक्रम के समापन अवसर पर सरस्वती साइकिल योजना के तहत छात्राओं को साइकिलें वितरित की गईं। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि इस योजना से छात्राओं को विद्यालय आने-जाने में सुविधा मिलेगी और बालिका शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। प्रेमनगर विधायक भूलन सिंह मरावी ने बताया कि उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के उन विद्यार्थियों को 25-25 हजार रुपये देने की घोषणा की थी, जिन्होंने कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 90 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं। उन्होंने ऐसे मेधावी विद्यार्थियों की सूची सूरजपुर कलेक्टर को सौंप दी है। कलेक्टर के माध्यम से पात्र विद्यार्थियों को चेक प्रदान किए जाएंगे। विधायक भूलन सिंह मरावी ने शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए अपने विधानसभा क्षेत्र के एक छात्र को गोद लिया। उन्होंने घोषणा की कि वे उस छात्र की पढ़ाई-लिखाई और शिक्षा से संबंधित सभी खर्च स्वयं वहन करेंगे, ताकि आर्थिक अभाव उसके उज्ज्वल भविष्य में बाधा न बने। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक, अभिभावक और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय युवा कांग्रेस और एनएसयूआई ने NEET पेपर लीक सहित छात्र हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। इस अभियान को 'छात्रों की गूंज' नाम दिया गया है, जिसके माध्यम से छात्रों की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा। इसकी जानकारी एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष ने मनेन्द्रगढ़ में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान दी। इस अवसर पर कांग्रेस की प्रदेश महामंत्री पूनम सिंह भी मौजूद रहीं। NEET विवाद से छात्रों का भरोसा टूटा: पूनम सिंह कांग्रेस प्रदेश महामंत्री पूनम सिंह ने कहा कि NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रहे गड़बड़ी के मामलों से छात्रों और अभिभावकों का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने दावा किया कि इन परिस्थितियों के चलते 20 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, भारतीय युवा कांग्रेस और एनएसयूआई मिलकर छात्रों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाएंगी। छात्रों तक पहुंचेगा 'छात्रों की गूंज' अभियान एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय ने बताया कि अभियान के तहत छात्र-छात्राओं के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनी जाएंगी। साथ ही परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग को प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जाएगी। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग नीरज पांडेय ने केंद्र सरकार पर छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि कांग्रेस छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर लगातार संघर्ष करती रहेगी और देशभर के विद्यार्थियों को इस अभियान से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
बालाघाट में रविवार को नीट पेपर लीक मामले को लेकर युवा कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया की मौजूदगी में कार्यकर्ताओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया। कई मुद्दों को लेकर विरोध यह प्रदर्शन केवल नीट पेपर लीक तक सीमित नहीं रहा। इसमें किसानों की खाद और बिजली की समस्या, युवाओं को रोजगार, लाडली बहना योजना, महंगाई और आदिवासियों की जमीन से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। कार्यकर्ताओं ने इन समस्याओं को लेकर सरकार पर नाराजगी जताई। कार्यक्रम में देरी और कम भीड़ कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष और स्थानीय विधायक देरी से पहुंचे। कुछ नेता और विधायक इसमें शामिल नहीं हुए। इस कारण कार्यक्रम में भीड़ कम नजर आई और कई कुर्सियां खाली रहीं। इसे लेकर कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा भी होती रही। सरकार पर साधा निशाना प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष यश घनघोरिया ने कहा कि नीट जैसी परीक्षा में गड़बड़ी गंभीर मामला है। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। साथ ही कहा कि किसानों को समय पर खाद और बिजली नहीं मिल रही है, जिससे हालात खराब हैं। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार दोनों पर जनविरोधी होने का आरोप लगाया और कहा कि हर वर्ग परेशान है। बयान को लेकर प्रतिक्रिया मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर भी घनघोरिया ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान गंभीरता को कमजोर करते हैं और नेताओं को जिम्मेदारी से बोलना चाहिए। घनघोरिया ने दावा किया कि जनता सरकार के रवैये को समझ रही है और आने वाले समय में बदलाव देखने को मिलेगा।
देवरिया में कांग्रेस का 'युवा अधिकार' कार्यक्रम:बेरोजगारी, पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
देवरिया में जिला कांग्रेस कमेटी ने रविवार के दिन में दो बजे मेहड़ा पुरवा में 'युवा अधिकार' कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और छात्रों के अधिकारों पर चर्चा करना था। इसकी अध्यक्षता जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय शेखर मल्ल 'रोशन' ने की। कार्यक्रम के दौरान छात्रों को एक एलईडी स्क्रीन पर 'लाखों-करोड़ों छात्रों के टूटे सपनों की कीमत – कोटा गूंज' विषय पर आधारित वीडियो दिखाया गया। इस वीडियो में बेरोजगारी, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के कारण युवाओं के भविष्य पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों को दर्शाया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष विजय शेखर मल्ल 'रोशन' ने कहा कि देश का युवा आज अपने भविष्य को लेकर असमंजस और चिंता में है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों की मेहनत के बाद भी युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है और लगातार हो रहे पेपर लीक से परीक्षा व्यवस्था पर छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी युवाओं के अधिकारों और उनके भविष्य की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। जिला प्रवक्ता संजीव कुमार मिश्रा ने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार छात्रों और युवाओं के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर सरकार को जवाबदेह बनाना समय की आवश्यकता है। कांग्रेस पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखेगी। इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष भरत मणि त्रिपाठी, अब्दुल जब्बार, जिला कोषाध्यक्ष चंदन वर्मा, जिला महासचिव रत्नेश मल्ल 'पिंटू', कुलदीप सिंह यादव, शिव शंकर सिंह, एनएसयूआई जिला अध्यक्ष धनंजय यादव, जिला सचिव विनोद दुबे तथा वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुभाष राय सहित अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने युवाओं के अधिकार, निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था और रोजगार के मुद्दों को गांव-गांव तथा बूथ स्तर तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल ने रविवार को पानीपत के गांव नौलथा में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत की। अंत्योदय फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों की 276 जरूरतमंद और मेधावी छात्राओं को स्कूल आने-जाने की सुविधा के लिए साइकिलें वितरित कीं। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से तीन नए स्किल डेवलपमेंट सेंटरों का भी भव्य उद्घाटन किया। हमारा लक्ष्य 1000 साइकिलें बांटने का: मनोहर लाल छात्राओं को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि बेटियों की शिक्षा में दूरी या संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं बननी चाहिए। उन्होंने बताया कि अंत्योदय फाउंडेशन के माध्यम से इस क्षेत्र में इससे पहले भी 500 साइकिलें वितरित की जा चुकी हैं। संस्था और हमारा संकल्प इस अभियान के तहत कुल 1000 साइकिलें वितरित करने का है। केंद्रीय मंत्री ने मंच से भरोसा दिलायार कि यदि लक्ष्य पूरा होने के बाद भी ग्रामीण अंचल की कोई भी बेटी या गरीब परिवार की बच्ची ऐसी बचती है जिसे स्कूल जाने के लिए साइकिल की नितांत आवश्यकता है, तो उसे भी समाज और सरकार के सहयोग से साइकिल मुहैया कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यही है कि किसी भी गरीब बच्चे की उच्च शिक्षा में कोई रुकावट न आए। कंप्यूटर, सिलाई और ब्यूटी पार्लर सेंटर से बेटियां बनेंगी आत्मनिर्भर ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने नौलथा गांव में तीन महत्वपूर्ण स्किल (कौशल) सेंटरों का उद्घाटन किया। इन सेंटरों में एक सिलाई सेंटर, एक ब्यूटी पार्लर सेंटर और एक आधुनिक कंप्यूटर सेंटर शामिल है। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के खुलने से गांव की बेटियों और युवाओं को घर के पास ही तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण मिल सकेगा, जिससे वे खुद का रोजगार शुरू कर आत्मनिर्भर बन सकेंगी। उन्होंने बताया कि शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए गांवों में आधुनिक लाइब्रेरी भी बनाई गई हैं और कंप्यूटर सेंटर खोले जा रहे हैं। जुनैद गांव के जल विवाद पर बोले- सरकार समाधान निकालने में जुटी कार्यक्रम के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने क्षेत्र के जुनैद गांव में पानी की समस्या और उसे लेकर चल रहे आपसी विवाद पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन इस पूरे मामले पर बेहद गंभीरता से नजर बनाए हुए है। विभाग और सरकार इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस मामले में सभी पक्षों की सहमति से कोई बेहतर और सकारात्मक रास्ता निकाल लिया जाएगा।
कार्यशाला: शिक्षा में एआई की भूमिका पर हुआ मंथन
बोकारो | चिन्मय विद्यालय, बोकारो में शनिवार को सीबीएसई के तत्वावधान में जिला स्तरीय विचार-विमर्श (डीएलडी) कार्यशाला का आयोजन किया गया। कंप्यूटेशनल थिंकिंग और एआई की समझ विषय पर आयोजित कार्यशाला में जिले के 14 विद्यालयों के प्रतिनिधि शिक्षकों ने भाग लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटेशनल थिंकिंग पर अपने विचार पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुत किए। कार्यशाला में निर्णायक मंडल में डॉ. एसके सिंह, सुरेश कुमार और बीके सिंह शामिल रहे। इस अवसर पर विद्यालय के सचिव महेश त्रिपाठी, प्राचार्य सूरज शर्मा, वरीय उपप्राचार्य नरमेंद्र कुमार तथा उपप्राचार्य डॉ. रोशन शर्मा उपस्थित थे।
नीट पेपर लीक:कांग्रेस ने केंद्र व शिक्षा प्रणाली पर खड़े किए सवाल
भास्कर न्यूज | जालंधर नीट पेपर लीक मामले को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी (शहरी और देहाती) की बैठक जालंधर में हुई। जिला प्रधान पूर्व विधायक राजिंदर बेरी और विधायक स. हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया की अगुवाई में आयोजित इस बैठक में कांग्रेस ने केंद्र सरकार और वर्तमान शिक्षा प्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोला। इस दौरान मंच पर वीडियो स्क्रीन के जरिए राहुल गांधी का बच्चों से उनके भविष्य को लेकर संवाद भी दिखाया गया। कांग्रेस का यह राष्ट्रव्यापी अभियान 25 जून से शुरू होकर 9 अगस्त तक कुल 40 दिनों तक चलेगा। कांग्रेसी कार्यकर्ता इस संदेश को जन आंदोलन बनाकर गांव-गांव और शहर-शहर के घर-घर तक पहुंचाएंगे। आने वाले दिनों में यह आंदोलन सड़कों पर भी दिखाई देगा ताकि देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार किया जा सके। बैठक में पहुंचे ऑब्जर्वर व पूर्व मंत्री अनिल जोशी ने सीनियर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा शुरू किए गए छात्रों की गूंज अभियान को पंजाब के जमीनी स्तर तक ले जाने का ऐलान किया। उन्होंने नीट पेपर लीक मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को तुरंत भंग करने की मांग की। जोशी ने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों में लगभग 60-70 बार विभिन्न पेपर लीक हुए हैं, जो सरकारी तंत्र की पूरी तरह विफलता को दर्शाता है।उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के खिलाफ उनका अभियान लगातार जारी रहेगा। पूर्व मंत्री अनिल जोशी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश का कुल शिक्षा बजट मात्र 1.35 से 1.4 लाख करोड़ रुपये है। इसके विपरीत, देश के साढ़े तीन करोड़ छात्रों के माता-पिता कर्ज लेकर कोचिंग और रहने-खाने पर अपनी जेब से करीब 3.54 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं। यह राशि सरकारी बजट से तीन गुना ज्यादा है। उन्होंने मांग की कि इस शिक्षा माफिया पर लगाम लगाने के लिए बच्चों को मुफ्त शिक्षा और कोचिंग मिलनी चाहिए। पूर्व मंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि परीक्षा के दबाव और पेपर लीक के मानसिक तनाव के कारण देश में अब तक लगभग 20-21 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। उन्होंने तंज कसा कि एक निजी कंपनी को ठेका देने के बाद अब पेपर सुरक्षित रखने के लिए फौज का सहारा लिया जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक है। इस मौके पर विधायक सुखविंदर सिंह कोटली, डॉ. नवजोत सिंह दाहिया, सुरिंदर कौर, पूर्व एसएसपी राजिंदर सिंह, बलराज ठाकुर, अमृत भोसले और यूथ कांग्रेस प्रधान अंगद दत्ता सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
ब्राइट माइंड्स पंजाब:332 होनहार विद्यार्थी सम्मानित, शिक्षा मंत्री, सिसोदिया हुए शामिल
भास्कर न्यूज | अमृतसर गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के दशमेश ऑडिटोरियम में शनिवार को ‘ब्राइट माइंड्स पंजाब-2026' के तहत आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में 12वीं बोर्ड परीक्षा में 95 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले अमृतसर जिले के 332 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शामिल हुए। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि पंजाब स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में देश में पहले स्थान पर पहुंचा है। उन्होंने दावा किया कि नीति आयोग की 2026 की रिपोर्ट और केंद्र सरकार की पीजीआई 2.0 रैंकिंग में राज्य के स्कूल शीर्ष स्थान पर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की पहचान अब ‘उड़ता पंजाब’ नहीं बल्कि ‘पढ़ता पंजाब’ के रूप में बनेगी। बैंस ने कहा कि राज्य सरकार ने पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट में संशोधन संबंधी अध्यादेश को मंजूरी दी है। इसके तहत निजी स्कूल फीस और अन्य फंड में सालाना अधिकतम 5 प्रतिशत तक ही वृद्धि कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में अनुचित फीस वृद्धि करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और अतिरिक्त वसूली गई राशि अभिभावकों को वापस कराई जाएगी। नई दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि देश के विकास के लिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली रटने के बजाय समझ आधारित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में सुधार कर सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं में बदलाव किया है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने शिक्षा नीति और परीक्षा प्रणाली को लेकर सुझाव भी दिए। स्कूल ऑफ एमिनेंस मॉल रोड अमृतसर की छात्रा टिया को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि टिया का चयन इसरो के एक अंतरराष्ट्रीय छात्र कार्यक्रम के लिए हुआ है। इस अवसर पर विधायक डॉ. जसबीर सिंह संधू, डायरेक्टर स्कूल शिक्षा (सेकेंडरी) सकत्तर सिंह बल, अतिरिक्त उपायुक्त (जनरल) पल्लवी शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी कंवलजीत सिंह, उप जिला शिक्षा अधिकारी राजेश खन्ना सहित शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक उपस्थित रहे। स्टूडेंट्स को सम्मानित करने के दौरान शिक्षा मंत्री बैंस, मनीष सिसोदिया ।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने छात्रों की गूंज कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को कचरा तक कह दिया। डोटासरा ने कहा कि कचरे की बात ही मत करो। यह तो लोगों को खुद जज कर लेना चाहिए कि वह किस प्रकार का आदमी है? डोटासरा बोले कि मंत्री खर्रा ने कहा है कि भाजपा संगठन और CM मदन दिलावर को संयमित आचरण की सलाह देते हैं। फिर भी असर नहीं हो रहा तो किसी डॉक्टर को दिखाना चाहिए नहीं, तो फिर इनकी मंत्रिमंडल से छुट्टी कर दो। क्योंकि मदन दिलावर CM और राज्य सरकार का नाम बदनाम कर रहे हैं। मदन दिलावर का आचरण तो जैसा है वैसा ही है। मदन दिलावर ने लक्ष्मणगढ़ में महिला की मौजूदगी में अशोभनीय शब्दों का इस्तेमाल किया। दिलावर लक्ष्मणगढ़ आए तो उन्हें वहां पर क्षेत्र के एजुकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की बात करनी चाहिए थी, लेकिन अब उनके बारे में ज्यादा बोलना कुछ ठीक भी नहीं है। डोटासरा शनिवार शाम को सीकर के कांग्रेस कार्यालय में जिला कांग्रेस कार्यालय में छात्रों की गूंज अभियान के तहत संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में सीकर विधायक राजेंद्र पारीक, फतेहपुर विधायक हाकम अली, कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुनीता गठाला, निवर्तमान सभापति जीवण खां, NSUI जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश नागा समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद थे। स्टूडेंट बोले- नई शिक्षा नीति में कई विसंगतियां संवाद के दौरान स्टूडेंट्स ने न्यू एजुकेशन पॉलिसी की विसंगतियों के बारे में भी जानकारी दी। स्टूडेंट के जवाब में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि 2028 में राजस्थान और 2029 में केंद्र में जब कांग्रेस की सरकार आएगी तो न्यू एजुकेशन पॉलिसी को रिव्यू किया जाएगा और स्टूडेंट की सहूलियत के हिसाब से संशोधन कर नए और बेहतर नियम लागू किए जाएंगे। डोटासरा बोले- इतिहास मंत्री खर्रा को माफ नहीं करेगा डोटासरा ने कहा कि अगर खर्रा के UDH विभाग का मंत्री होते हुए भी सीकर को नगर निगम का दर्जा नहीं मिला तो इतिहास उनको कभी माफ नहीं करेगा। प्रदेश जिसको शिक्षा का श नहीं आता वह शिक्षा मंत्री है। जिसको शुद्ध रूप से उच्च लिखना नहीं आता, वह उच्च शिक्षा मंत्री है और जिसको कुछ नहीं आता वह प्रदेश का मुख्यमंत्री है। जो व्यक्ति कृषि विभाग में करोड़ों की घोटाले पर एक शब्द नहीं बोल सकता वो किसानों को बर्बाद करने वाला कृषि मंत्री है। पीड़ित परिवारों के लिए राहत पैकेज की मांग करेंगे डोटासरा ने कहा कि सरकार को खुद को आत्महत्या करने वाले NEET स्टूडेंट्स के परिवारों की मदद करनी चाहिए थी। जब लोकसभा और विधानसभा चलेगी तब पीड़ित परिवारों के बड़े पैकेज के लिए पीड़ित परिवारों के लिए बड़े राहत पैकेज के लिए और उनके परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी देने के लिए मांग की जाएगी। ताकि वे इस सदमें से उबर सके और अपना जीवन यापन कर सके। मास्टर प्लान लागू नहीं करना तो 80 गांवों को क्यों जोड़ा? मास्टर प्लान को लेकर UDH राज्य मंत्री झाबर सिंह खर्रा के दिए बयान के जवाब में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि शिक्षा नगरी सीकर का विकास होना चाहिए। अगर मास्टर प्लान की जरूरत नहीं है तो झाबर खर्रा इसी विभाग के मंत्री हैं तो उन्हें मास्टर प्लान को पूरी तरह निरस्त ही कर देना चाहिए। खर्रा का कहना है कि मास्टर प्लान को 2047 के विजन के हिसाब से तैयार करेंगे। भाजपा सरकार को यदि सीकर का मास्टर प्लान लागू ही नहीं करना था तो फिर 80 गांव को UIT में जोड़ना भी नहीं चाहिए था। ऐसा करके सरकार ने उन 80 गांव की सुविधाओं को भी बंद कर दिया। सरकार नहीं चाहती तो फिर इस नगर परिषद को उल्टा नगर पालिका ही बना दो। छात्रों की गूंज राजनैतिक नहीं, PM को सुझाव देंगे गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज कार्यक्रम इसीलिए लॉन्च किया है, ताकि स्टूडेंट्स को उनके अधिकारों के बारे में पता चल सके। देश की 5 बड़ी परीक्षाओं पर इतना बजट खर्च हो जाता है जितना शिक्षा और चिकित्सा विभाग का कुल राष्ट्रीय बजट है। ऐसे में इतने बड़े स्तर पर खर्चा होने के बावजूद पेपर लीक हो जाता है तो बच्चे निराश हो जाते हैं। हमें देश में यह सोच डेवलप करनी है कि सिर्फ 5 बड़ी परीक्षाओं के ऊपर ही कैरियर निर्धारित नहीं होता है बच्चों को अन्य दिशाओं में भी आगे बढ़ाने की जरूरत है। डोटासरा ने कहा कि छात्रों की गूंज कार्यक्रम में किसी प्रकार की राजनीतिक आलोचना नहीं की जाएगी। बल्कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी यह सुझाव दिए जाएंगे कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में किस प्रकार से सुधार किया जा सकता है और बच्चों की आत्महत्या रोकी जा सकती हैं।
डिजिटल और ऑनलाइन पढ़ाई के मामले में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) ने पूरे प्रदेश में अपना परचम लहराया है। यूनिवर्सिटी को डिजिटल उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने के लिए इस साल भी 'स्वयम्-एनपीटीईएल एप्रिसिएशन अवॉर्ड' से नवाजा गया है। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश के सभी राज्य (सरकारी) विश्वविद्यालयों में सीएसजेएमयू का प्रदर्शन सबसे ऊपर रहा। उत्तर प्रदेश से इस लिस्ट में अवध यूनिवर्सिटी और गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने भी नए संस्थानों के रूप में अपनी जगह बनाई है। आईआईटी कानपुर में मिला सम्मान, नोडल अफसर ने लिया पुरस्कार यह प्रतिष्ठित सम्मान शनिवार की शाम 6 बजे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया गया। सीएसजेएमयू की तरफ से स्वयम्-एनपीटीईएल की नोडल अधिकारी और एसपीओसी डॉ. अंशु सिंह ने यह पुरस्कार लिया। यूनिवर्सिटी ने ऑनलाइन पढ़ाई के इस सरकारी प्लेटफॉर्म पर अपनी भागीदारी लगातार मजबूत की है, जिसका नतीजा है कि इसे दोबारा यह सम्मान मिला है। हजारों छात्रों ने कराया रजिस्ट्रेशन, यूनिक लर्नर्स की संख्या भी बढ़ी यूनिवर्सिटी के छात्रों में ऑनलाइन कोर्स को लेकर जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2025 के सत्र में कैंपस और इससे जुड़े कॉलेजों के 9400 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जबकि जुलाई 2025 के सत्र में 6971 छात्रों ने इन कोर्स में हिस्सा लिया। वहीं, जनवरी 2026 के सत्र में भी छात्रों ने 1064 अलग-अलग कोर्स चुने, जिसमें 5406 यूनिक लर्नर्स (अकेले छात्रों) के जरिए कुल 7622 कोर्स एनरोलमेंट दर्ज किए गए। कमाल की उपलब्धि 4 छात्रों को मिली एनपीटीईएल इंटर्नशिप, 2 का आईआईटी में चयन इस साल यूनिवर्सिटी के लिए एक और बड़ी खुशखबरी रही। एनपीटीईएल की योजनाओं के तहत सीएसजेएमयू के चार छात्रों को प्रतिष्ठित इंटर्नशिप मिली है। इनमें से दो छात्रों का चयन तो सीधे देश के सबसे टॉप आईआईटी संस्थानों में 'एनपीटीईएल समर इंटर्नशिप' के लिए हुआ है। इसमें से एक छात्र स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज का है और दूसरा छात्र एमसीए डिपार्टमेंट का है। यह कामयाबी दिखाती है कि कानपुर यूनिवर्सिटी के छात्र नेशनल लेवल पर अपनी पहचान बना रहे हैं। घर बैठे मिल रही देश के बड़े दिग्गजों से सीखने की सुविधायूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस बड़ी कामयाबी का पूरा श्रेय अपने शिक्षकों, छात्रों, समन्वयकों और संबद्ध कॉलेजों की पूरी टीम की मेहनत को दिया है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए छात्रों को घर बैठे देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों के बड़े प्रोफेसरों और विशेषज्ञों से ऑनलाइन पढ़ने का मौका मिल रहा है। डॉ. अंशु सिंह ने कहा कि यह सम्मान हमारी डिजिटल शिक्षा की कोशिशों को और मजबूत करता है। आने वाले समय में यूनिवर्सिटी का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा कॉलेजों और छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई की मुख्यधारा से जोड़ना है।
ग्वालियर में NEET परीक्षा में पेपर लीक और अनियमितताओं के विरोध में युवक कांग्रेस ने शनिवार को जोरदार प्रदर्शन किया। बारादरी चौराहे पर आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान शिक्षा मंत्री का पुतला जलाने का प्रयास भी किया गया, जिसे पुलिस ने विफल कर दिया। गड़बड़ियों से लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव मितेंद्र दर्शन सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता बारादरी चौराहे पर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि NEET परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि इसी मुद्दे को लेकर देश के 22 से अधिक शहरों में छात्रों की गूंज अभियान चलाया जा रहा है और जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री अपना इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वाटर कैनन से प्रदर्शनकारी तितर-बितर जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 लागू होने के कारण बिना अनुमति धरना, रैली और जुलूस पर प्रतिबंध है। ऐसे में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका। जब कार्यकर्ताओं ने पुतला दहन का प्रयास किया तो पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल कर उन्हें तितर-बितर कर दिया। कुछ समय तक चौराहे पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन समाप्त करा दिया। भीड़ को मौके से हटा दिया गयासीएसपी अतुल सोनी ने बताया कि युवक कांग्रेस ने NEET मामले की जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। धारा 163 प्रभावी होने के कारण मौके पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। लगभग 150 प्रदर्शनकारी मौजूद थे, जिन्होंने पुतला दहन का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने वाटर कैनन का उपयोग कर उसे रोक दिया और भीड़ को मौके से हटा दिया।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रविवार को प्रयागराज पहुंचेंगे। वे 29 जून को प्रयागराज के होटल रेडिसन में सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक 'विजन इंडिया' पर बुद्धिजीवियों से संवाद करेंगे। इस संवाद का मुख्य विषय 'शिक्षा-परीक्षा: क्यों ध्वस्त हुई व्यवस्था' होगा। इस दौरान अखिलेश यादव वर्तमान सरकार की नीतियों की आलोचना करेंगे। उनका मानना है कि सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण शिक्षा और परीक्षा प्रणाली पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने पेपर लीक और लगातार रद्द हो रही परीक्षाओं को युवाओं के भविष्य के लिए हानिकारक बताया है। इसके अतिरिक्त, सरकारी विभागों में रिक्त पदों को न भरना, मूल्यांकन और आरक्षण नीतियों में बदलाव, शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ, और प्राथमिक विद्यालयों के बंद होने जैसे मुद्दों पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की है। यादव ने स्पष्ट किया है कि दिखावटी सुधारों से काम नहीं चलेगा, बल्कि व्यवस्था में मूलभूत परिवर्तन की आवश्यकता है। अखिलेश यादव ने 'विजन इंडिया' को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नवाचार, सहयोग और प्रगति का प्रतीक बताया है। इस पहल का उद्देश्य भारत को 'नियो इंडिया' में बदलना है। वे कार्यक्रम में 'प्लान, डेवलप और एसेंट' के माध्यम से अपनी कार्ययोजना प्रस्तुत करेंगे। 'प्लान' के तहत भारत के भविष्य की बेहतर परिकल्पना करना और उन महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान करना है जहाँ अवसर मौजूद हैं या चुनौतियाँ खड़ी हैं। 'डेवलप' के लिए संवाद और साझेदारी-आधारित समाधानों को बढ़ावा देना है, ताकि भारत जल्द ही विकसित देशों की श्रेणी में अपना स्थान सुनिश्चित कर सके। वहीं, 'एसेंट' का लक्ष्य नवाचार और अत्याधुनिक तकनीक का लाभ उठाकर भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर करना है।
शाजापुर में शनिवार शाम नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर बस स्टैंड पर युवक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार के खिलाफ उग्र नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ताओं ने शहरी हाईवे पर चक्का जाम करने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस ने पहले से ही बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक लिया। वाटर कैनन से रोका, पुतला छीनने की कशमकश स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन (फायर वाहन) का इस्तेमाल कर कार्यकर्ताओं पर पानी की बौछारें कीं। करीब 10 मिनट तक युवा कांग्रेस कार्यकर्ता पुलिस से भिड़ते हुए सड़क पर बैठने की कोशिश करते रहे। तनावपूर्ण माहौल के बीच जब कार्यकर्ता गिरफ्तारी देने के लिए पुलिस के वज्र वाहन में बैठने लगे, तभी एक कार्यकर्ता ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंक दिया। पुलिस ने तुरंत पुतला छीनकर पानी से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन कार्यकर्ता जलता हुआ पुतला लेकर दोबारा भाग निकले। लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़, इस्तीफा दें शिक्षा मंत्री युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष जयंत सिकरवार ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि नीट पेपर लीक कांड से देश के लाखों होनहार छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की है और उन्हें पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है, वे तत्काल इस्तीफा दें। सिकरवार ने चेतावनी दी कि यदि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं हुआ, तो युवक कांग्रेस शाजापुर की हर गली में उग्र प्रदर्शन करेगी। मृत छात्रों को दी श्रद्धांजलि, बैनर लेकर दर्ज कराया विरोध प्रदर्शन के दौरान युवक कांग्रेस के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने नीट परीक्षा लीक होने के बाद हताशा में आत्महत्या करने वाले 21 छात्र-छात्राओं को मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यकर्ता अपने हाथों में मोदी सरकार पेपर लीक की हत्यारी लिखे हुए बैनर व तख्तियां लेकर चल रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि इस पूरे महाघोटाले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। इस दौरान बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस के सदस्य और छात्र उपस्थित रहे। देखें तस्वीरें…
पीलीभीत कांग्रेस ने शिक्षा प्रणाली पर साधा निशाना:बोली- देश की शिक्षा 'रिजेक्शन सिस्टम' बन चुकी है
पीलीभीत में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के देशव्यापी अभियान के तहत शनिवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इसमें छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों, पेपर लीक और बेरोजगारी को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की गई। जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरप्रीत पाल सिंह चब्बा ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विजन के अनुसार, युवा भारत का भविष्य हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था छात्रों के साथ क्रूर मजाक कर रही है। नीट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं के पेपर लीक होने से देश का युवा गहरे तनाव में है, और कई छात्रों ने आत्महत्या जैसे कदम उठाए हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय के रवैये को संवेदनहीन और अन्यायपूर्ण बताया। हरप्रीत सिंह ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यह प्रणाली 'सिलेक्शन' नहीं, बल्कि 'रिजेक्शन' सिस्टम बन चुकी है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता इतनी कड़ी है कि 3000 बच्चों में से केवल एक आईएएस बनता है, 30 आईआईटी में जाते हैं और मात्र 180 डॉक्टर बन पाते हैं। 691 युवा मनरेगा जैसे अनौपचारिक कार्यों पर निर्भर उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था को 'वसूली तंत्र' की तरह काम करने वाला बताया। उनके अनुसार, स्कूल सिस्टम में आने वाले 1000 छात्रों में से केवल 12 युवाओं को ही सैलरी वाला औपचारिक रोजगार मिलता है, जबकि 691 युवा मनरेगा जैसे अनौपचारिक कार्यों पर निर्भर हैं। कांग्रेस प्रवक्ता हेमंत मिश्रा एडवोकेट ने जानकारी दी कि राहुल गांधी ने पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, भर्तियों में देरी और बेरोजगारी के मुद्दों को देश के सामने मजबूती से रखा है। इसी क्रम में युवाओं को जोड़ने के लिए अगले दिन न्यूरिया नगर में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर शहर अध्यक्ष श्रीकृष्ण गंगवार, हरीश मौर्य, मुनेंद्र सक्सेना, सुशील कुमार एडवोकेट, छात्र कांग्रेस अध्यक्ष राजेश वर्मा, नरेश शुक्ला, रवि लोधी, करनजीत सिंह, इरफान, हरिशंकर, कमल कुमार गौड़ और आशु पटेल सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
देश भर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) को लेकर उपजे विवाद के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। कोंडागांव के कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मरकाम ने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक, परीक्षा में अनियमितताओं और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ की नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री को लेनी चाहिए। उन्होंने इन घटनाओं को छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया। मोहन मरकाम ने हाल ही में राजस्थान के कोटा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा छात्रों के बीच दिए गए संबोधन का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के बजाय युवाओं को निराशा की ओर धकेल रही है। 'रिजेक्शन सिस्टम' बन गई है शिक्षा व्यवस्था: मोहन मरकाम मरकाम ने राहुल गांधी के बयान को दोहराते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को सिलेक्शन सिस्टम की बजाय रिजेक्शन सिस्टम बताया था। उनका आरोप था कि मौजूदा प्रणाली छात्रों के सपनों को पूरा करने के बजाय उन्हें मानसिक दबाव और तनाव में डाल रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों का भरोसा कमजोर किया है। मरकाम ने बताया कि परिवार अपनी गाढ़ी कमाई कोचिंग, किताबों और फीस पर खर्च करते हैं, लेकिन अनियमितताओं के कारण छात्रों का भविष्य संकट में पड़ जाता है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह छात्रों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर उठाती रहेगी। पार्टी ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मरकाम ने केंद्र सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने और छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। कांग्रेस का मानना है कि नीट सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस अवसर पर कांग्रेस जिला महामंत्री जयप्रकाश यादव सहित कई कांग्रेसी नेता उपस्थित थे।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' अभियान के तहत शनिवार को अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने जनकपुरी गंज क्षेत्र में बैठक आयोजित की। बैठक में कांग्रेस नेताओं ने NEET पेपर लीक और देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। अजमेर शहर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल ने कहा- राहुल गांधी छात्रों के भविष्य को लेकर बेहद गंभीर हैं, जबकि भाजपा सरकार छात्रों के भविष्य के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि NEET पेपर लीक ने देश के लाखों विद्यार्थियों की वर्षों की कड़ी मेहनत पर पानी फेर दिया है। कांग्रेस डॉ. जयपाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस जल्द ही अजमेर के स्कूलों और कॉलेजों में जाकर छात्रों से सीधा संवाद करेगी। इसके लिए अलग-अलग टीमें बनाई जा रही हैं, जो राहुल गांधी का संदेश विद्यार्थियों तक पहुंचाएंगी। वरिष्ठ कांग्रेस नेता धर्मेंद्र राठौड़ ने कहा कि वर्तमान सरकार की गलत शिक्षा नीति और बढ़ते निजीकरण के कारण आम और गरीब विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। राठौड़ ने दावा किया कि यूपीए (UPA) सरकार के समय शिक्षा पर भारी बजट खर्च किया जाता था, जबकि वर्तमान सरकार ने शिक्षा के बजट में कटौती कर दी है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने शनिवार को जिले की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन किया। परिषद के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर नारेबाजी की और जिला कलेक्टर के नाम 8 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। उन्होंने इन मुद्दों पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में एबीवीपी ने आरोप लगाया कि जिले में कई निजी विद्यालय निर्धारित मान्यता से अधिक कक्षाओं का अवैध संचालन कर रहे हैं। इन विद्यालयों में न तो पर्याप्त भवन हैं और न ही योग्य शिक्षकों की व्यवस्था है। परिषद ने ऐसे विद्यालयों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। एबीवीपी ने जिले में संचालित कुछ बीएड और डीएड संस्थानों पर डिग्रियों के व्यापारीकरण तथा विद्यार्थियों से मनमानी फीस वसूलने का आरोप लगाया। परिषद ने इन संस्थानों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इसके अतिरिक्त, बेसमेंट एवं असुरक्षित स्थानों पर संचालित निजी कोचिंग संस्थानों की जांच कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठाई गई। शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं पहुंचते परिषद ने शासकीय विद्यालयों के शिक्षकों और प्राचार्यों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। एबीवीपी का कहना है कि कई शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं पहुंचते या केवल उपस्थिति दर्ज कराकर चले जाते हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऐसे मामलों की जांच कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है। एबीवीपी ने यह भी बताया कि शासन के निर्देशों के बावजूद कई निजी विद्यालय विद्यार्थियों पर निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें खरीदने का दबाव बना रहे हैं। परिषद ने इस पर तत्काल रोक लगाने और दोषी विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। ज्ञापन में शासकीय महाविद्यालय में लंबे समय से अधूरे पड़े रेस ट्रैक निर्माण, निर्माणाधीन चेंजिंग रूम में कथित अनियमितताओं की जांच तथा कार्य को शीघ्र पूरा कराने की मांग भी शामिल थी। साथ ही, महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और बड़ौदा तहसील में निर्माणाधीन शासकीय महाविद्यालय का निर्माण कार्य जल्द शुरू कर पूरा कराने की मांग की गई। ज्ञापन के अंत में एबीवीपी ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो विद्यार्थी हित में संगठन उग्र एवं चरणबद्ध आंदोलन करेगा।
राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (RUHS) मेडिकल कॉलेज, रिम्स और इससे अटैच हॉस्पिटल में एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर की भर्ती के लिए सरकार की बनाई स्क्रीनिंग कमेटी का विरोध शुरू हो गया। राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (RMCTA) अध्यक्ष ने एक पत्र लिखकर इस भर्ती प्रक्रिया का विरोध जताते हुए मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री से इस कमेटी को निरस्त करने और इस तरह भर्ती करने की प्रक्रिया को भविष्य में न करने की मांग की है। दरअसल, मेडिकल एज्युकेशन ने 3 सीनियर डॉक्टरों की एक स्क्रीनिंग कमेटी बनाई है। इस कमेटी में SMS मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी, RUHS मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. मोहनीश ग्रोवर और रिम्स ओएसडी डॉ. अजीत सिंह को शामिल किया है। ये कमेटी RUHS कॉलेज, रिम्स में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के लिए स्क्रीनिंग करेगी। इसके लिए ग्रुप-2 के प्रिंसिपल स्पेशलिस्ट और सीनियर स्पेशलिस्ट कैडर के डॉक्टर आवेदन कर सकते है। लेटरल एंट्री बताकर जताया विरोध RMCTA के अध्यक्ष डॉ. धीरज जैफ ने बताया- एक तरफ सरकार रिम्स जैसे उच्च स्तरीय संस्थान विकसित करने की बात कर रही है। जहां उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा, उच्च गुणवत्ता की मेडिकल शिक्षा और विश्वस्तरीय शोध की अपेक्षा की जाती है। साथ ही भविष्य में गंभीर रोगियों का रेफरल भी ऐसे संस्थान में होगा। लेकिन दूसरी तरफ ऐसे संस्थानों में केवल लंबे कार्यानुभव के आधार पर जिनका कोई शैक्षणिक अनुभव नहीं है (ग्रुप-2 के डॉक्टर्स) को सीधे प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर बनाना उचित नहीं है। यह मेडिकल शिक्षा को धूमिल करने वाला है। इससे तो मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता, शोध की उत्कृष्टता और संस्थान की अकेडमिक विश्वसनियता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सक शिक्षकों की नियुक्ति सदैव राजस्थान लोकसेवा आयोग के माध्यम से होती है। फिर सीधे प्रोफेसर बनाना कहां तक उचित है? इससे नए युवा चिकित्सकों के अवसर कम होंगे और उनका मनोबल गिरेगा।
राजस्थान में तबादलों से बैन हटने के बाद मंत्रियों के आवास व ऑफिस में कर्मचारियों और उनके परिजनों की भीड़ लग गई। कोटा में शिक्षा एव पंचायती राज्य मंत्री मदन दिलावर ने रामचरण सर्कल स्थित जनसंवाद कार्यालय पर जनसुनवाई की। इस दौरान कार्यालय के बाहर लंबी लाइन देखने को मिली। बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी व आमजन तबादलों की अर्जियां लेकर पहुंचे। जनसुनवाई के दौरान तबादला चाहने वाले सरकारी कर्मचारी व उनके परिजन लाइन में लगे रहे। मंत्री ने लोगों से मिलकर उनकी अर्जियां लीं और उनकी समस्याएं सुनकर प्राथमिकता के आधार पर ट्रांसफर करने का आश्वासन दिया। ज्यादातर लोग कोटा बूंदी बारां व झालावाड़ जिले से आए। मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि ज्यादातर लोग तबादला चाहते हैं। इसी कारण अपनी तबादलों की अर्जियां लेकर पहुंचे हैं। इनमें कुछ खुद को बीमार बता रहे हैं। कुछ पिता को बीमार बता रहे हैं। कुछ छोटे-छोटे बच्चे होने की बात कह रहे हैं। कोशिश रहेगी कि जो ज्यादा लंबे समय से दूर हैं, उन्हें राहत देने का प्रयास किया जाएगा। बता दें राजस्थान सरकार ने करीब कुछ समय पहले सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग से बैन हटा दिया था। इनमें एकल महिला, विधवा, तलाकशुदा और गंभीर बीमार कर्मचारियों (कैंसर, दिमाग की बीमारी, हार्ट की बीमारी, फेफड़े और किडनी की बीमारी से ग्रसित) को प्राथमिकता दी जाएगी। यह आदेश सरकारी कर्मचारियों के अलावा निगमों, बोर्डों और स्वायत्तशासी संस्थाओं पर भी लागू है। हालांकि, सरकार ने थर्ड ग्रेड शिक्षकों और चिकित्सा विभाग में तबादलों से बैन नहीं हटाया है।
वित्त रहित शिक्षा : 75% अनुदान वृद्धि लंबित रहने से शिक्षकों में आक्रोश
वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने सरकार से लंबित मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की रणनीति तेज करने का निर्णय लिया है। मोर्चा के अध्यक्ष मंडल की बैठक शुक्रवार को चंदेश्वर पाठक की अध्यक्षता में हुई, जिसमें 27 जून को रांची के सर्वोदय बाल निकेतन उच्च विद्यालय, धुर्वा में आयोजित राज्यस्तरीय बैठक की तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक में राज्यभर के 600 संस्थानों के प्राचार्यों और शिक्षक प्रतिनिधियों के शामिल होंगे। रघुनाथ सिंह, चंदेश्वर पाठक, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, फजलुल कादरी अहमद, अरविंद सिंह, नरोत्तम सिंह, गणेश महतो, पशुपति महतो, देवनाथ सिंह, मनीष कुमार, मनोज तिर्की, विनय उरांव, संजय कुमार ने संयुक्त रुप से कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के 223 संस्थानों का लंबित अनुदान, 75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि, एनईपी 2020 के क्रियान्वयन, शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देने और 16 जून को विभागीय सचिव के साथ हुई वार्ता में बनी सहमति पर अब तक कार्रवाई नहीं होने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। मोर्चा ने निर्णय लिया कि 27 जून की बैठक में इन सभी मुद्दों पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
बिलासपुर में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने न्यायालयीन आदेश की अवहेलना के एक मामले में स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने बिलासपुर संभाग के संयुक्त संचालक (JD) शिक्षा आर.पी. आदित्य को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता संजय साहू की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मामला मुंगेली जिले में पदस्थ रहे सहायक कार्यक्रम समन्वयक (समग्र शिक्षा) संजय साहू के निलंबन और बहाली से संबंधित है। संजय साहू को 18 सितंबर 2024 को निलंबित किया गया था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि बिना विभागीय जांच शुरू किए उन्हें लंबे समय तक निलंबित रखा गया और उनका पक्ष भी नहीं सुना गया। हाईकोर्ट ने दिया था 45 दिन में फैसला लेने का निर्देश संजय साहू ने अपने निलंबन आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल को आदेश पारित करते हुए संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता द्वारा 12 मार्च को दिए गए आवेदन पर 45 दिनों के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लिया जाए। आदेश के बावजूद नहीं हुआ निर्णय याचिकाकर्ता का कहना है कि न्यायालय के आदेश की प्रति प्राप्त होने और निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी संयुक्त संचालक कार्यालय, बिलासपुर ने उनके बहाली संबंधी आवेदन पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया। इसे हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना बताया गया है। भेदभाव का भी लगाया आरोप याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि संयुक्त संचालक ने एक अन्य गंभीर मामले में, जिसमें एक शिक्षक पर बालिका से छेड़छाड़ का आरोप था, उसे मात्र छह दिनों में बहाल कर दिया था। वहीं, उनके मामले में हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। अवमानना याचिका पर नोटिस समय-सीमा में आदेश का पालन नहीं होने पर संजय साहू ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए संयुक्त संचालक आर.पी. आदित्य के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया है। अब संयुक्त संचालक को हाईकोर्ट के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि न्यायालय के आदेश का निर्धारित समय के भीतर पालन क्यों नहीं किया गया।
देशभर में छात्रों और युवाओं के अधिकारों को लेकर चल रहे कांग्रेस के छात्रों की गूंज अभियान के तहत गोरियाकोठी विधानसभा क्षेत्र के मुस्तफाबाद स्थित आजाद शिखर पॉइंट कोचिंग सेंटर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ती अनियमितताओं, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग उठाई। डॉ. ख्वाजा एहतेशाम अहमद ने कहा कि देश का युवा लगातार पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी से परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों की आवाज को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने का काम कर रही है और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा व्यवस्था की खामियों के कारण कई युवाओं का भविष्य अंधकारमय हुआ है, जिसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। सालों की मेहनत के बाद झटका कोचिंग संस्थान के निदेशक सोनू ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि परीक्षा रद्द होने की पीड़ा वही समझ सकता है जिसने वर्षों की मेहनत के बाद ऐसा झटका झेला हो। उन्होंने कहा कि आज भी लाखों छात्र इसी मानसिक तनाव और अनिश्चितता से गुजर रहे हैं। जवाहर राम ने कहा कि देश का युवा केवल निष्पक्ष परीक्षा और अपनी मेहनत का सम्मान चाहता है। उन्होंने कहा कि बार-बार पेपर लीक जैसी घटनाओं से छात्रों का विश्वास कमजोर हो रहा है और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। छात्रों के हितों को प्राथमिकता दे सरकार कार्यक्रम के दौरान कई छात्र-छात्राओं ने भी अपनी बात रखी। छात्रों ने कहा कि उन्हें केवल निष्पक्ष परीक्षा, समान अवसर और पारदर्शी व्यवस्था चाहिए ताकि उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके। उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय और जवाबदेह बनाने की मांग करते हुए कहा कि देश के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
नीट पेपर लीक प्रकरण, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और अन्य जन मुद्दों को लेकर करौली में कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। नेताओं ने शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने नीट पेपर लीक की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और शिक्षा सुधार के लिए प्रदेशभर में जनजागरण अभियान चलाने का ऐलान किया। शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नीट पेपर लीक युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है। उनका आरोप था कि लगातार हो रही अनियमितताओं से विद्यार्थियों का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रदेशभर में चलेगा जनजागरण अभियान नेताओं ने बताया कि युवाओं को जागरूक करने और शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की मांग को लेकर प्रदेशभर में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। अभियान के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। स्थानीय मुद्दों पर भी सरकार को घेरा कांग्रेस नेताओं ने स्थानीय समस्याओं को लेकर जिला प्रशासन और राज्य सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने संगठन को मजबूत करने और जनहित के मुद्दों पर लगातार आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया। ये रहे मौजूद इस दौरान करौली-धौलपुर सांसद भजनलाल जाटव, टोडाभीम विधायक एवं कांग्रेस जिला अध्यक्ष घनश्याम महर, हिंडौन विधायक अनीता जाटव, पूर्व जिला अध्यक्ष अलका मीणा सहित कांग्रेस के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा ने सहरसा स्थित अपने पैतृक आवास पर एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले, भरत तिवारी एनकाउंटर और बिहार की शिक्षा व्यवस्था सहित विभिन्न मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। महाकाल के बाद अब राम मंदिर राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले पर मनोज झा ने कहा कि यह सिर्फ विपक्ष का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने इसे श्रद्धा के साथ धोखाधड़ी का मामला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले उज्जैन के महाकाल मंदिर और अब राम मंदिर से जुड़े ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। झा ने कहा कि राम और शिव हिंदू आस्था के सबसे बड़े प्रतीक हैं, लेकिन उन्हें भी नहीं बख्शा गया। सरकार मामले की लीपापोती कर रही उन्होंने टिप्पणी की कि इंसानों के साथ धोखाधड़ी तो सुनी थी, अब भगवान के साथ भी धोखाधड़ी हो रही है। उनका आरोप था कि सरकार पूरे मामले की लीपापोती करने में लगी है, जिसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा। एफआईआर दर्ज होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसी सैकड़ों एफआईआर देखी हैं, जो केवल मामले को रफा-दफा करने के लिए दर्ज की जाती हैं। नीतीश को सीएम बनाने का जनादेश भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर मनोज झा ने बिहार सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि राज्य में सच को दबाने के लिए एनकाउंटर का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने के लिए जनादेश दिया था, लेकिन राजनीतिक षड्यंत्रों के जरिए उन्हें कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। इस दौरान उन्होंने सम्राट चौधरी पर भी निशाना साधा। सरकारी शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हुई ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी के निदेशक रोशन आनंद और खान सर के बीच चल रहे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मनोज झा ने कहा कि बिहार की शिक्षा और कानून व्यवस्था दोनों गंभीर संकट से गुजर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है,जिसके कारण निजी कोचिंग संस्थानों का विस्तार हो रहा है। उनका मानना था कि जब तक सरकारी शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होगी,तब तक ऐसे विवाद और समस्याएं सामने आती रहेंगी।
NCRT की ओर से नकली और पायरेटेड किताबों को लेकर जारी चेतावनी के बाद कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की है। पत्र में लिखा कि पेपर लीक के बाद अब किताबों के लीक होने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि शिक्षा माफियाओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अभिभावकों और विद्यार्थियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। साथ ही पार्टी ने शिक्षा माफियाओं के खिलाफ सख्त कानून बनाने और राष्ट्रपति से प्रतिनिधिमंडल को मिलने का समय देने की मांग भी की गई है और छात्रों को न्याय दिलाने के लिए 'छात्रों की गूंज' अभियान शुरू किया है। एनसीईआरटी के सर्कुलर पर उठाए सवाल पत्र में कहा गया है कि जब देश की सबसे बड़ी शैक्षणिक संस्था एनसीईआरटी को अपनी ही किताबों की पायरेसी को लेकर चेतावनी जारी करनी पड़ रही है तो यह शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस का आरोप है कि केवल सर्कुलर जारी करना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा माफियाओं पर लगाए आरोप कांग्रेस ने आरोप लगाया कि निजी स्कूलों की मनमानी फीस, निर्धारित दुकानों से किताबें और ड्रेस खरीदने की मजबूरी तथा शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण से अभिभावक परेशान हैं। ऐसी परिस्थितियों से शिक्षा माफियाओं को फायदा मिल रहा है। 'छात्रों की गूंज' अभियान शुरू कांग्रेस ने शिक्षा माफियाओं और परीक्षा से जुड़े मामलों के विरोध में 'छात्रों की गूंज' अभियान शुरू किया है। पार्टी का कहना है कि यह अभियान विद्यार्थियों और अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए चलाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की समिति से जांच की मांग कांग्रेस ने राष्ट्रपति से पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली स्वतंत्र समिति से कराने की मांग की है। साथ ही शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सख्त राष्ट्रीय नीति और कानून बनाने की भी अपील की है। पेपर लीक पर सख्त सजा की मांग पत्र में मांग की गई है कि पेपर लीक करने वाले शिक्षा माफियाओं के लिए मृत्युदंड और पेपर खरीदने वालों के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान किया जाए। कांग्रेस का कहना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल होगा। राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा विवेक त्रिपाठी ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि इस विषय पर विस्तृत जानकारी देने के लिए कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को मिलने का समय दिया जाए। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने स्वैच्छिक तबादलों को लेकर शिक्षकों के विरोध को दरकिनार करते हुए अब संभावित कानूनी चुनौती से निपटने की तैयारी भी शुरू कर दी है। विभाग ने स्थानांतरण आदेश जारी करने से पहले हाईकोर्ट में कैविएट दायर कर दी है। इसके साथ ही संयुक्त संचालक, प्राचार्य और अन्य अधिकारियों के तबादला आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। इससे पहले सहायक संचालकों की पदस्थापना के आदेश जारी किए जा चुके हैं। अब 24 जून तक ऑनलाइन प्राप्त स्वैच्छिक तबादला आवेदनों के आधार पर भी जल्द आदेश जारी किए जाएंगे। हाईकोर्ट में याचिकाओं की आशंका, इसलिए पहले दायर की कैविएट लोक शिक्षण संचालनालय ने विभागीय स्थानांतरण नीति-2026 के तहत संभावित कानूनी विवादों को देखते हुए कैविएट सूचना जारी की है। विभाग के अनुसार प्रशासनिक एवं स्वैच्छिक आधार पर स्थानांतरण आदेश 28 से 30 जून 2026 के बीच जारी किए जाएंगे। विभाग को आशंका है कि तबादलों के बाद कई कर्मचारी हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में न्यायालय विभाग का पक्ष सुने बिना कोई अंतरिम आदेश जारी न करे, इसके लिए पहले से ही कैविएट दायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। संचालनालय ने 25 जून को इस संबंध में आधिकारिक सूचना जारी कर कर्मचारियों और आमजन को भी अवगत कराया है। क्या होता है कैविएट कैविएट एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसके तहत कोई भी पक्ष अदालत से यह आग्रह करता है कि यदि उसके खिलाफ कोई याचिका दायर हो तो बिना उसका पक्ष सुने कोई आदेश पारित न किया जाए। इससे विभाग को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा और एकतरफा स्थगन आदेश की संभावना कम होगी। संयुक्त संचालकों के तबादले, कई अफसरों को नई जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग ने संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारियों के तबादले भी जारी कर दिए हैं। इनमें प्रमुख रूप से— 10 प्राचार्यों के भी तबादले विभाग ने 10 प्राचार्यों के तबादला आदेश भी जारी किए हैं। इससे पहले कई सहायक संचालकों को जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) बनाया जा चुका है। वहीं कई प्राचार्यों को विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और अन्य प्रशासनिक पदों पर पदस्थ किया गया है। कई जिलों में जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) के तबादले भी पहले ही हो चुके हैं। सस्पेंड रह चुके अफसर को सौंपी ग्वालियर संयुक्त संचालक की कमान लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी तबादला आदेशों पर भी सवाल उठने लगे हैं। आयुक्त कार्यालय से जारी सूची में धर्मेंद्र शर्मा को भोपाल का संयुक्त संचालक बनाया गया है, जबकि भोपाल डीपीसी की जिम्मेदारी सहायक संचालक सिद्धार्थ जैन को सौंपी गई है। वहीं, ग्वालियर में जिला शिक्षा अधिकारी रहते हुए आयुक्त कार्यालय द्वारा निलंबित किए जा चुके एक सहायक संचालक को उच्च पद का प्रभार देते हुए प्रभारी संयुक्त संचालक, ग्वालियर पदस्थ किया गया है। इसके अलावा जबलपुर में प्रभारी संयुक्त संचालक बनाए गए घनश्याम सोनी के विरुद्ध भी विभागीय जांच लंबित होने की जानकारी सामने आई है। जल्द जारी होंगे स्वैच्छिक तबादला आदेश विभाग ने 24 जून तक स्वैच्छिक तबादलों के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए थे। इन आवेदनों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब स्वैच्छिक तबादलों की सूची भी जारी की जाएगी। विभाग का कहना है कि सभी आदेश निर्धारित समय-सीमा के भीतर जारी किए जाएंगे। शिक्षकों के विरोध के बीच आगे बढ़ी प्रक्रिया गौरतलब है कि स्वैच्छिक तबादला नीति को लेकर प्रदेशभर में शिक्षकों के एक वर्ग ने विरोध दर्ज कराया था। इसके बावजूद विभाग ने स्थानांतरण प्रक्रिया जारी रखी और अब आदेश जारी करने से पहले कानूनी मोर्चे पर भी तैयारी पूरी कर ली है। इससे साफ है कि इस बार तबादला प्रक्रिया को किसी भी न्यायिक बाधा से बचाने के लिए विभाग पहले से सतर्क है।
सोनीपत में ग्रीवेंस कमेटी की मासिक बैठक का आयोजन शुक्रवार को किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता हरियाणा सरकार के शिक्षा मंत्री एवं कमेटी के अध्यक्ष महिपाल ढांडा करेंगे। इस दौरान वे आमजन की विभिन्न प्रकार की समस्याओं को मौके पर सुनेंगे और उनके समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे। सुबह 10:30 बजे होगी बैठक उपायुक्त नेहा सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि 26 जून, शुक्रवार को ग्रीवेंस कमेटी की मासिक बैठक सुबह करीब 10:30 बजे मिनी सचिवालय की तीसरी मंजिल पर आयोजित होगी। बैठक में हरियाणा सरकार के शिक्षा मंत्री एवं कमेटी के अध्यक्ष महिपाल ढांडा मौजूद रहेंगे। आमजन की समस्याएं सुनेंगे मंत्री बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा आमजन की अलग-अलग प्रकार की समस्याओं को मौके पर सुनेंगे। प्राप्त शिकायतों के समाधान के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए जाएंगे, ताकि लोगों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके। सभी विभागों के अधिकारी रहेंगे मौजूद ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में सभी विभागों के अधिकारी मौजूद रहेंगे। बैठक में प्रस्तुत होने वाली शिकायतों पर संबंधित विभागों की ओर से रिपोर्ट पेश की जाएगी और मौके पर ही समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने, गुणवत्तापूर्ण और परिणामोन्मुख (Result-oriented) बनाने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू हो गया है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव ( ACS), बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने एक विशेष यूट्यूब लाइव सत्र के माध्यम से प्रदेशभर के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स से सीधा संवाद किया और सरकार की आगामी प्राथमिकताओं को साझा किया।इस संवाद के दौरान उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों (सरकारी स्कूलों) के संचालन, शिक्षकों के कल्याण और छात्र नामांकन को लेकर कई बड़े और ऐतिहासिक फैसलों की घोषणा की गई है।गर्मी के कारण पढ़ाई के नुकसान की भरपाई: अब हर साल 25 जून से खुलेंगे स्कूलअपर मुख्य सचिव ने बताया कि अक्सर अत्यधिक गर्मी और लू के कारण बार-बार स्कूलों की छुट्टियां बढ़ानी पड़ती हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई का भारी नुकसान होता है।220 शिक्षण दिवस का लक्ष्य: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मानदंडों के अनुरूप बच्चों के लिए न्यूनतम 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करना अनिवार्य है।नया नियम: इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब उत्तर प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालय प्रत्येक वर्ष 25 जून से संचालित होंगे (यानी आज से स्कूल खुल चुके हैं)। उन्होंने शिक्षकों से अपील की है कि वे स्कूल आने वाले बच्चों का आत्मीय स्वागत करें और भीषण गर्मी को देखते हुए उनके स्वास्थ्य व सुरक्षा का विशेष प्रबंध करें।1 जुलाई से 'स्कूल चलो अभियान' का दूसरा चरण: ड्रॉपआउट रोकने पर विशेष जोरराज्य में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने और बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले (Dropout) बच्चों की संख्या को शून्य पर लाने के लिए सरकार नई रणनीति अपना रही है:स्थानीय डेटा की मदद: 1 जुलाई से शुरू हो रहे 'स्कूल चलो अभियान' के दूसरे चरण में स्कूल से बाहर (Out of School) रह गए बच्चों की पहचान की जाएगी। इसके लिए आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं के पास उपलब्ध जन्म रिकॉर्ड और स्थानीय सूचनाओं की मदद ली जाएगी।निर्बाध प्रवेश: कक्षा 5 पास करने वाले प्रत्येक छात्र का कक्षा 6 में निर्बाध और अनिवार्य दाखिला सुनिश्चित किया जाएगा। जो बच्चे सीखने में पीछे रह गए हैं, उनके लिए विशेष 'कैच-अप शिक्षण' (Catch-up Classes) संचालित किए जाएंगे।निपुण भारत मिशन का कक्षा 5 तक विस्तार: 6 जुलाई को 'निपुण संकल्प'बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को मजबूत करने वाले 'निपुण भारत मिशन' को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है:दायरा बढ़ा: पहले यह मिशन शुरुआती कक्षाओं के लिए था, लेकिन अब इसका दायरा कक्षा 5 तक बढ़ा दिया गया है। अब कक्षा 5 तक के बच्चों के लिए भाषा, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन (EVS) के स्पष्ट लर्निंग आउटकम (अधिगम लक्ष्य) तय किए गए हैं।शिक्षकों की ट्रेनिंग: इसके लिए राज्य स्तर पर एसआरजी और डायट मेंटर्स का प्रशिक्षण शुरू हो चुका है, जो ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों को ट्रेंड करेंगे। आगामी 6 जुलाई को प्रदेश के सभी जिलों में 'निपुण संकल्प कार्यशाला' का आयोजन होगा, जिसमें पूरे प्रशासनिक और अकादमिक तंत्र को झोंककर 'निपुण जनपद' बनाने का संकल्प लिया जाएगा।'DEAR' अभियान और वर्ष में दो बार मिलेगी होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्टअपर मुख्य सचिव ने स्कूलों में पठन-पाठन का माहौल बेहतर करने के लिए कई नए निर्देश दिए हैं:DEAR अभियान: स्कूलों में ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड’ (DEAR) जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, जहां एक निश्चित समय के लिए सभी काम रोककर सिर्फ किताबें पढ़ने की संस्कृति विकसित की जाएगी।अभिभावक सहभागिता: बच्चों की 'होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्ट' (Holistic Progress Report) को अब और अधिक प्रभावी बनाकर वर्ष में दो बार अभिभावकों (Parents) के साथ अनिवार्य रूप से साझा किया जाएगा ताकि वे भी बच्चे की प्रगति का हिस्सा बन सकें।शिक्षकों के लिए बड़ी सौगात: ₹5 लाख की कैशलेस इलाज सुविधा और 21,000 नई भर्तियांमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शिक्षा विभाग के मानव संसाधन को मजबूत करने और शिक्षकों की सामाजिक सुरक्षा के लिए दो अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं:श्रेणी / योजनामुख्य विवरण और लाभकैशलेस चिकित्सा सुविधासभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और उनके परिवारों को सालाना ₹5 लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा।नगरीय क्षेत्रों में नई भर्तीशहरी क्षेत्रों के स्कूलों में मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए लगभग 11 हजार शिक्षकों और 10 हजार अनुदेशकों की भर्ती प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।मुंशी प्रेमचंद का संदेश: संवाद के अंत में पार्थ सारथी सेन शर्मा ने महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद का उल्लेख करते हुए सभी शिक्षकों से निरंतर अध्ययन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक बेहतर शिक्षक वही है जो खुद हमेशा पढ़ता रहता है। उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षकों की निष्ठा के दम पर उत्तर प्रदेश की बुनियादी शिक्षा पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरेगी।
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों को बीच में ही पढ़ाई छोड़ने (ड्रॉपआउट) से रोकने के लिए केजरीवाल सरकार के शिक्षा निदेशालय ने एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। नए नियमों के मुताबिक, अब परीक्षाओं में असफल या फेल होने वाले छात्रों को स्कूल से बाहर नहीं निकाला जाएगा और न ही उनकी पढ़ाई अधूरी छूटेगी। अक्सर देखा जाता था कि नौवीं या ग्यारहवीं कक्षा में फेल होने के बाद छात्र निराश होकर स्कूल छोड़ देते थे या स्कूल प्रशासन उन्हें दोबारा दाखिला देने में आनाकानी करता था। इस गंभीर समस्या को खत्म करने के लिए सरकार ने अब नीतिगत स्तर पर बड़ा बदलाव कर दिया है।क्लास में फेल होने वाले हर बच्चे को मिलेगा दोबारा रेगुलर एडमिशन दिल्ली शिक्षा निदेशालय (Directorate of Education) द्वारा जारी किए गए नए सर्कुलर के अनुसार, अब राजधानी के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रिंसिपलों को यह कड़ा निर्देश दिया गया है कि वे फेल होने वाले किसी भी छात्र को री-एडमिशन (दोबारा दाखिला) देने से मना नहीं कर सकते। इन बच्चों को भी अन्य नियमित छात्रों की तरह ही स्कूल आने, कक्षाओं में बैठने और सभी शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेने का पूरा अधिकार होगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के मन से असफलता का डर निकालना और उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़े रखना है।कमजोर छात्रों के लिए स्कूलों में चलेंगी स्पेशल रेमेडियल क्लासेज सिर्फ दोबारा दाखिला देना ही इस नियम का हिस्सा नहीं है, बल्कि फेल हुए छात्रों की पढ़ाई को मजबूत करने के लिए स्कूलों को विशेष रणनीति बनाने को कहा गया है। इन बच्चों के लिए स्कूल के समय के दौरान या बाद में स्पेशल रेमेडियल क्लासेज (अतिरिक्त कक्षाएं) आयोजित की जाएंगी। इसमें शिक्षकों द्वारा उन विषयों पर खास ध्यान दिया जाएगा जिनमें छात्र कमजोर हैं या फेल हुए हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यक्तिगत ध्यान और अतिरिक्त सहयोग से छात्र न केवल अपनी कमियों को सुधार सकेंगे, बल्कि अगली परीक्षा में बेहतर अंकों के साथ पास भी हो सकेंगे।ड्रॉपआउट रेट को जीरो पर लाने के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा मास्टरस्ट्रोक शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली सरकार का यह फैसला नई शिक्षा नीति (NEP) और शिक्षा के अधिकार (RTE) के मूल सिद्धांतों को जमीन पर उतारने जैसा है। अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे एक बार फेल होने के बाद मजदूरी या अन्य कामों में लग जाते थे, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता था। इस नए नियम के आने के बाद दिल्ली के सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट रेट में भारी गिरावट आने की उम्मीद है। दिल्ली के अभिभावकों और शिक्षक संगठनों ने सरकार के इस छात्र-हितैषी फैसले का स्वागत किया है और इसे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने वाला कदम बताया है।
विमान दुर्घटना स्थल को नयी पहचान ,स्वास्थ्य-शिक्षा केंद्र बनाने की तैयारी :प्रफुल पंशेरिया
गांधीनगर/अहमदाबाद गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार उस जगह पर दो बड़े संस्थान विकसित करेगी, जहां पिछले साल हुए विमान हादसे में 260 लोगों की मौत हो गई थी और अहमदाबाद में आस-पास के मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा था।
बचपन को श्रम नहीं, शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का अधिकार मिलें
बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस-12 जून 2026 हर वर्ष 12 जून को मनाया जाने वाला बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि मानवता के अंतःकरण को झकझोरने वाला अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि दुनिया का कोई भी बच्चा मजदूर बनने के लिए पैदा नहीं होता। ... Read more
त्रिभाषा फार्मूला है भारत की शिक्षा का नया क्षितिज
भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि भाषाओं, बोलियों, संस्कृतियों और परंपराओं का विराट संगम है। यहां भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान, संस्कृति, संवेदना और सामाजिक चेतना का आधार भी है। ऐसे बहुभाषी देश में शिक्षा व्यवस्था को किस भाषा में संचालित किया जाए और बच्चों को कौन-कौन सी भाषाएं पढ़ाई जाएं, यह ... Read more
ललित सुरजन की कलम से - शिक्षा और परीक्षा
'जब हम पढ़ रहे थे, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, आईआईएम तब भी थे।
सरकारी स्कूलों की चुनौतियां और बदलता शिक्षा परिदृश्य
शिक्षा किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति, सामाजिक गतिशीलता और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की आधारशिला है।
Fact Check: क्या बिहार के शिक्षा मंत्री ने कहा लड़कियों को शिक्षा की जरूरत नहीं? सच जानिए
बूम ने पाया कि बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने Agitation शब्द का इस्तेमाल किया था जिसे एजुकेशन समझकर गलत दावा किया जा रहा है.
कन्नड़ मूवी 'केडी: द डेविल' के गाने 'सरके चुनर' पर विवाद अभी भी जारी है। इस गाने के बोल और फिल्मांकन पर बढ़ते विवाद के बाद नोरा फतेही को राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के समक्ष पेश होना पड़ा। नोरा ने न केवल अपनी स्थिति स्पष्ट की, बल्कि भविष्य के लिए एक ...
पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु का रिश्वत लेते हुए वीडियो फर्जी और एआई जनरेटेड है
बूम ने पाया कि ब्रात्य बसु का वीडियो गूगल के SynthId का उपयोग करके एआई द्वारा जनरेट किया गया है.
समानता और शिक्षा की क्रांतिकारी मशाल: सावित्रीबाई फुले
10मार्च सावित्रीबाई फुले महापरिनिर्वाण दिवस भारतीय समाज में जब भी शिक्षा,समानता और सामाजिक न्याय की बात उठती है,तो एक नाम इतिहास के पन्नों से निकलकर हमारे सामने खड़ा हो जाता है—सावित्रीबाई फुले।10मार्च को उनका महापरिनिर्वाण दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है,बल्कि यह दिन उस सामाजिक चेतना को याद करने का अवसर है,जिसने सदियों ... Read more
आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं
महिला दिवस पर विशेष:- अजमेर राजस्थान आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं:- देश-प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध ओर इन अपराधों में पिछले वर्षो में अपराध की दर तीव्र ही हुई है ओर “भारत मे अपराध ” नामक रिपोर्ट बताती है ... Read more
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समर्थन से भारत शिक्षा के सभी स्तरों पर एआई शिक्षण और रिसर्च को एकीकृत करके खुद को एक वैश्विक एआई महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है

