अनशन पर सोनम वांगचुक: शिक्षा मुद्दे पर भरोसा मिला तो ही तोड़ेंगे उपवास
कॉकरोच जनता पार्टी के साथ अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती करवाया है। एक तरफ 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी मार्च करने वाले हैं तो वहीं दिल्ली पुलिस ने आगाह किया है कि इसकी अनुमति नहीं है
मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (नीट) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों को लेकर पूर्णिया में कांग्रेस, युवा कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने संयुक्त रूप से एक मशाल जुलूस निकाला। जुलूस तीनों संगठनों की देखरेख में निकाला गया। इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय छात्रों और युवाओं ने हिस्सा लिया, जिन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई। मशाल जुलूस छात्रों की गूंज अभियान के तहत गिरजा चौक से शुरू होकर आरएन साह चौक तक निकाला गया। युवा कांग्रेस के पूर्णिया जिला अध्यक्ष शेख सद्दाम ने बताया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में पूरे भारत के 28 चुनिंदा जिलों में छात्रों की गूंज अभियान चलाया जा रहा है। बिहार से इस अभियान के लिए केवल दो जिलों का चयन हुआ है, जिसमें पूर्णिया और पटना शामिल है। 10,000 से अधिक छात्र इस अभियान से जुड़े युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष शेख सद्दाम ने कहा कि पिछले 10 दिनों से हम पूर्णिया में छात्रों का लगातार रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं और अब तक 10,000 से अधिक छात्र इस अभियान से जुड़ चुके हैं। यह मशाल जुलूस पूरी तरह से गैर-राजनीतिक था, जिसमें किसी बड़े नेता या पार्टी के बजाय सिर्फ और सिर्फ आम छात्रों और पीड़ित युवाओं ने अपनी आवाज बुलंद की। पेपर लीक पर पूर्ण रोक की मांगमशाल जुलूस के माध्यम से प्रदर्शकारियों ने मांग रखते हुए कहा कि देश में बार-बार हो रहे पेपर लीक और परीक्षा धांधली पर तुरंत कड़ा नियंत्रण लगाया जाए ताकि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न हो। इसके अलावा बार-बार हो रही गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तुरंत अपने पद से इस्तीफा देने की मांग रखी। प्रदर्शनकारियों ने मांग रखते हुए कहा कि सभी राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक पारदर्शी वार्षिक कैलेंडर (Annual Examination Calendar) जारी किया जाए, ताकि छात्रों को समय पर परीक्षा और परिणाम की सही जानकारी मिल सके। पैसा ऐंठने का जरिया बनी व्यवस्था, छात्र कर रहे आत्महत्याप्रदर्शन में शामिल कांग्रेस ज़िला अध्यक्ष (ग्रामीण) अफरोज आलम ने कहा कि सरकार बार-बार फॉर्म भरवाकर छात्रों से मोटी रकम वसूलती है, लेकिन बाद में पेपर लीक हो जाता है। NEET परीक्षा के विवादित नतीजों के बाद से देश भर में कई मासूम छात्रों ने मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या कर ली है। एक बार फॉर्म भरने की व्यवस्था हो और उसी के तहत बिना किसी धांधली के निष्पक्ष तरीके से परीक्षाएं आयोजित की जाएं। धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि उन्होंने बच्चों का भविष्य बर्बाद कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन यहीं थमने वाला नहीं है। पूर्णिया और देश के अन्य हिस्सों में इस अभियान को 9 अगस्त तक पूरी ताकत के साथ चलाया जाएगा। इसके बाद 9 अगस्त को देश भर से छात्र और युवा दिल्ली कूच करेंगे, जहाँ एक बड़े विरोध प्रदर्शन के साथ इस देशव्यापी आंदोलन का समापन किया जाएगा।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी (सपा) और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच जुबानी जंग एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। इस बार टकराव का मुख्य केंद्र रामपुर की बहुचर्चित जौहर यूनिवर्सिटी (Jauhar University) बनी है। सपा प्रमुख और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने यूनिवर्सिटी के वर्तमान हालातों, प्रशासनिक कार्रवाइयों और छात्रों के अधर में लटके भविष्य को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। अखिलेश यादव ने जौहर यूनिवर्सिटी के हजारों विद्यार्थियों और उनके परिजनों को संबोधित करते हुए एक बेहद भावुक और राजनीतिक रूप से आक्रामक 'खुला पत्र' (Open Letter) लिखा है। इस पत्र में उन्होंने साफ किया है कि सपा हर स्तर पर इस उच्च शिक्षण संस्थान को बचाने की लड़ाई में छात्रों के साथ खड़ी है।'एक्स' (X) पर फूटा गुस्सा: सपनों पर बुलडोजर चलाने की निकृष्ट कोशिशअखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस पत्र को साझा करते हुए भाजपा सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने लिखा, इस दुर्भावनापूर्ण और पक्षपाती फैसले के खिलाफ हमारे साथ हमारा छोटे से छोटा कार्यकर्ता, समर्थक, बड़े से बड़ा नेता और वे सब हजारों बच्चे व उनके मेहनतकश माता-पिता भी हैं, जिनके सपनों पर बुलडोजर चलाने की निकृष्ट कोशिश भाजपा सरकार कर रही है।सपा प्रमुख ने देश भर के प्रबुद्ध नागरिकों और शिक्षाविदों से अपील की है कि वे शिक्षा के इस मंदिर को राजनीतिक प्रतिशोध से बचाने के लिए आगे आएं। उन्होंने सवाल उठाया कि इस विश्वविद्यालय में हर वर्ग और समाज के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं, तो क्या भाजपा अब पूरे समाज के युवाओं के भविष्य के विरुद्ध खड़ी हो गई है?कागजी कमी है तो उसे पूरा करें, यूनिवर्सिटी बंद करना समाधान नहींअपने खुले पत्र में अखिलेश यादव ने सरकार के रवैये को अहंकारी बताते हुए एक व्यावहारिक विकल्प भी सुझाया। उन्होंने कहा:कागजी कार्रवाई पूरी हो: यदि तकनीकी या कानूनी तौर पर यूनिवर्सिटी के दस्तावेजों में कोई कमी (Paperwork Deficiencies) है भी, तो सरकार को उसे पूरा कराने का समय देना चाहिए, न कि सीधे संस्थान को बंद करने या ढहाने की कार्रवाई करनी चाहिए।गरीबों के बच्चों का हवाला: अखिलेश ने भावुक रुख अपनाते हुए कहा कि इस यूनिवर्सिटी में मध्यमवर्ग और बेहद गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं। उनके माता-पिता के पास इतना पैसा नहीं होता कि वे अपने बच्चों को भाजपा नेताओं की तरह महंगे प्राइवेट विश्वविद्यालयों या विदेशों में पढ़ा सकें।बिना परिवार वाले क्या जानें दर्द: उन्होंने मुख्यमंत्री पर सीधा तंज कसते हुए कहा कि जिनके न परिवार हैं और न बच्चे, वे भला एक आम परिवार के बच्चों के भविष्य के उजड़ने का दर्द और माता-पिता की तड़प क्या समझेंगे।भाजपा की 'भूमिगत योजना' पर अखिलेश का बड़ा दावा: शिक्षा के ही खिलाफ है सत्तासपा प्रमुख ने अपने पत्र में भाजपा और उसके वैचारिक संगठनों पर एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा मूल रूप से शिक्षा और जागरूकता के ही खिलाफ है। अखिलेश यादव के मुताबिक, शिक्षित युवा जागरूक और प्रगतिशील होते हैं, जो सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते हैं और रोजगार पर सवाल पूछते हैं, जो दमनकारी सोच वाली सत्ता को रास नहीं आता।उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपाई अंदरूनी तौर पर गांवों के प्राथमिक विद्यालयों (Primary Schools) से लेकर बड़े विश्वविद्यालयों को बंद करवाने की एक 'भूमिगत योजना' पर काम कर रहे हैं, ताकि युवाओं को नौकरी-रोजगार न देना पड़े, क्योंकि भर्ती करना भाजपा के एजेंडे में है ही नहीं।'PDA पाठशाला' की तर्ज पर लड़ेंगे जौहर यूनिवर्सिटी की लड़ाईअखिलेश यादव ने अपने शुभचिंतकों को याद दिलाते हुए कहा कि जब इससे पहले उत्तर प्रदेश में सरकारी प्राइमरी स्कूलों को बंद करने की साजिश रची गई थी, तब समाज के जागरूक लोगों ने 'पीडीए (PDA) पाठशाला' खोलकर सरकार के मंसूबों को नाकाम कर दिया था। अब वही साजिश यूनिवर्सिटी स्तर पर दोहराई जा रही है। उन्होंने अखाड़े के दूसरे पक्षों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ अपंजीकृत लोगों के अपने स्कूल-संस्थान धड़ल्ले से चल रहे हैं, लेकिन विपक्ष से जुड़े संस्थानों पर प्रतिशोध की भावना से एकतरफा षड्यंत्र रचा जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है। सपा प्रमुख के इस पत्र के बाद रामपुर से लेकर लखनऊ तक की राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है।
सतना में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में रविवार देर शाम युवाओं ने मशाल जुलूस निकाला। यह प्रदर्शन दिल्ली में वांगचुक के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के समर्थन में आयोजित किया गया था। युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, कथित नीट परीक्षा लीक और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग की। जुलूस के दौरान छात्र-छात्राओं ने सरकार से छात्रों की आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दों पर जवाब मांगा। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की, आरोप लगाया कि पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद हो रहा है। शाम करीब 6:30 बजे सिविल लाइन चौपाटी से शुरू हुआ यह मशाल जुलूस सर्किट हाउस, मुख्य बाजार और सिटी कोतवाली रोड होते हुए संपन्न हुआ। रैली में शामिल युवाओं के हाथों में सोनम वांगचुक के पोस्टर और मशालें थीं। पूरे मार्ग में इंकलाब जिंदाबाद, शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो और पेपर लीक बंद करो जैसे नारे गूंजते रहे। युवाओं ने आरोप लगाया कि देश की परीक्षा प्रणाली लगातार सवालों के घेरे में है, जिससे लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने, पेपर लीक रोकने और छात्रों के हितों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।
बिहार सरकार ने सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 'सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय)' योजना शुरू की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को राज्य स्तरीय कार्यक्रम के माध्यम से इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ किया।इसी क्रम में बांका जिले के सभी 11 प्रखंडों में एक-एक आदर्श विद्यालय का उद्घाटन किया गया। जिले के चयनित विद्यालयों में एमडीएन उच्च विद्यालय डुमरामा (अमरपुर),आरएमके उच्च विद्यालय बांका,एसएनएस उच्च विद्यालय मोहनपुर (बाराहाट),उच्च माध्यमिक विद्यालय टेंगरा (बेलहर), श्री दुर्गा उच्च विद्यालय शक्तिनगर (बौंसी),प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय भैरोगंज(चान्दन), एसएलजीपीए उच्च विद्यालय पटवा श्रीपाथर (धोरैया),राष्ट्रीय उच्च विद्यालय धौनी(रजौन),उच्च विद्यालय कटोरिया और उच्च विद्यालय कुर्माडीह (शंभुगंज)शामिल हैं।इन सभी विद्यालयों में राज्य स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दिखाया गया,जिसमें जनप्रतिनिधि,प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। शिक्षा पदाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों ने भाग लियाआरएमके उच्च विद्यालय,बांका में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल,उप विकास आयुक्त और जिला शिक्षा पदाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर विद्यालय की छात्राओं ने स्वागत गान और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया। आदर्श विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति की गई है।विज्ञान,गणित और कंप्यूटर सहित विभिन्न प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ किया गया है।विद्यालय भवनों का रंग-रोगन कर उन्हें आकर्षक स्वरूप दिया गया है,तथा प्रत्येक विद्यालय में आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक मॉडल कक्षा विकसित की गई है। इन मॉडल कक्षाओं में राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएस) के तहत और पोषक क्षेत्र के मेधावी विद्यार्थियों का मेरिट के आधार पर चयन किया गया है।प्रत्येक विद्यालय में 40 विद्यार्थियों का नामांकन किया गया है। विद्यालयों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में प्रेरणा मिलेगी सरस्वती विद्या निकेतन राष्ट्रीय उच्च विद्यालय धौनी (मॉडल स्कूल)का उद्घाटन बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को वर्चुअल माध्यम से किया। इस अवसर पर बीडीओ अंतिमा कुमारी,बीईओ स्वयं चक्रपाणि कनिष्क,प्रधानाध्यापक राकेश रंजन, मुखिया प्रतिनिधि टिंकू सिंह सहित शिक्षक और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। शिक्षा विभाग के अनुसार आदर्श विद्यालय योजना का उद्देश्य ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्रों के विद्यार्थियों को निजी विद्यालयों के समान गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। इस पहल से सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण बेहतर होगा तथा जिले के अन्य विद्यालयों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में प्रेरणा मिलेगी।
आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ताओं ने रविवार शाम मैहर के घंटाघर चौराहे पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। उन्होंने शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का साथ देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। यह मांग प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक के मामलों को लेकर उठाई गई। इस प्रदर्शन की अगुवाई प्रदेश सह-सचिव उमेश चौधरी ने की। इसमें महेंद्र सनाढ्य, राजेश शुक्ला, एडवोकेट आनंद श्रीवास्तव समेत पार्टी के दूसरे पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यकर्ताओं ने बताया कि सोनम वांगचुक शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षाओं में पारदर्शिता (साफ-सुथरे तरीके) के लिए लंबे समय से शांतिपूर्ण भूख हड़ताल पर बैठे थे। उन्होंने हाल ही में वांगचुक को आंदोलन वाली जगह से अस्पताल ले जाने की घटना पर चिंता जताई, जिससे देश भर के छात्रों और युवाओं के बीच फिक्र का माहौल है। 'पेपर लीक बंद करो' के लगे नारे प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो और पेपर लीक बंद करो जैसे नारे लगाए। उन्होंने परीक्षा के पूरे सिस्टम को साफ-सुथरा और निष्पक्ष बनाने की मांग की। यह प्रदर्शन शांति से खत्म हुआ। कार्यकर्ताओं ने सरकार से अपील की कि वे छात्रों के भले के लिए ठोस कदम उठाएं।
मंदसौर में आम आदमी पार्टी (आप) की जिला इकाई ने रविवार शाम को विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन शिक्षाविद एवं वैज्ञानिक सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर से पुलिस द्वारा हटाए जाने के विरोध में था। कार्यकर्ताओं ने हाथों पर काली पट्टी बांधकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। विरोध मार्च गांधी चौराहे से शुरू होकर बस स्टैंड और घंटाघर होते हुए वापस गांधी चौराहे पर समाप्त हुआ। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए और इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया। आप पदाधिकारियों ने कहा कि देशभर में लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और अन्य मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को बलपूर्वक हटाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। पार्टी ने कहा कि वह इस तरह की कार्रवाई का विरोध करती रहेगी। इस प्रदर्शन में प्रदेश संगठन मंत्री यशवंत धाकड़, जिला अध्यक्ष गंगाराम पाटीदार, मीडिया प्रभारी प्रकाश दोसावत, संगठन सचिव जितेंद्र कारपेंटर, मजदूर यूनियन अध्यक्ष असलम शेख, उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सोनगरा, अल्पसंख्यक मोर्चा शहर अध्यक्ष कमरुद्दीन नियारगर और मयंक परमार सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के मॉडल विद्यालयों का उद्घाटन किया। इसी क्रम में शेखपुरा जिले के छह मॉडल विद्यालयों का भी वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया गया। शेखपुरा जिले में जिन विद्यालयों का उद्घाटन हुआ, उनमें उच्च माध्यमिक विद्यालय ऐझी मुरारपुर, श्री जगदम्बा +2 उच्च विद्यालय बरबीघा, नव उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय करकी (अरियरी), राजकीय एम०एम० उच्च माध्यमिक विद्यालय एकाढ़ा (चेवाड़ा), उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय गगौर (घाटकुसुम्भा) और उच्च माध्यमिक विद्यालय निमी (शेखोपुरसराय) शामिल हैं। इन मॉडल विद्यालयों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण शैक्षणिक विकास के लिए आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें आईसीटी लैब, आईएसएम लैब, आधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, पुस्तकालय, गुणवत्तापूर्ण फर्नीचर और स्मार्ट कक्षाएँ शामिल हैं। अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गयाउच्च माध्यमिक विद्यालय ऐझी मुरारपुर में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में शेखपुरा विधायक रणधीर कुमार सोनी, बरबीघा विधायक कुमार पुष्पंजय, एडीएम लखींद्र पासवान, कटारी पंचायत की मुखिया रिंकी कुमारी, डीईओ तनवीर आलम, शिक्षकगण, जनप्रतिनिधि, छात्र-छात्राएँ और स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी अतिथियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर शेखपुरा विधायक रणधीर कुमार सोनी ने कहा कि बिहार सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार बेहतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि जिले के छह प्रखंडों के विभिन्न विद्यालयों में एक साथ उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया है। सरकार का उद्देश्य है कि छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन न करना पड़े और उन्हें अपने जिले में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। आधुनिक सुविधाओं से युक्त विद्यालय खोले जा रहे वहीं, बरबीघा विधायक डॉ. कुमार पुष्पंजय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं से युक्त विद्यालय खोले जा रहे हैं। कटारी पंचायत की मुखिया रिंकी कुमारी ने इस उद्घाटन को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार ऐझी मुरारपुर में इस प्रकार के आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय का उद्घाटन हुआ है। उन्होंने सभी ग्रामीणों से अपने बच्चों को शिक्षित करने की अपील की। जिले के सभी चयनित मॉडल विद्यालयों में वरीय पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई थी, जिनकी उपस्थिति में कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन संपन्न हुआ।
बिहार सरकार के सात निश्चय-3 (2025-2030) के तहत उन्नत शिक्षा, उज्ज्वल भविष्य अभियान के अंतर्गत रविवार को सीवान जिले के सभी 19 प्रखंडों में सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर जिले के सभी विद्यालयों में उत्साहपूर्ण माहौल रहा। कार्यक्रम के दौरान बेगूसराय में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह का सीधा प्रसारण सभी प्रखंडों के सरस्वती विद्या निकेतन में दिखाया गया, जिसे जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों, अभिभावकों, छात्र-छात्राओं और स्थानीय लोगों ने देखा। राज्यस्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के 551 सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालयों) का एक साथ लोकार्पण किया। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी तथा शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी भी उपस्थित रहे। सीवान जिले का मुख्य कार्यक्रम सरस्वती विद्या निकेतन, सीवान सदर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला परिषद अध्यक्ष संगीता देवी, नगर परिषद की उपसभापति किरण गुप्ता, उप विकास आयुक्त, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) सहित कई प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद, शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों के रूप में विकसित करना है, ताकि विद्यार्थियों को निजी विद्यालयों के समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके। इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित शिक्षा, अत्याधुनिक विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाएं, समृद्ध पुस्तकालय, खेलकूद की बेहतर सुविधाएं तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों से पढ़ाई को अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनाया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है, जिससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सकें। इस पहल से शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद जताई गई। जिला प्रशासन ने कार्यक्रम में शामिल सभी जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, अभिभावकों और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रशासन ने विश्वास जताया कि सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) सीवान जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए मानक स्थापित करेंगे और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी शिक्षा योजना के तहत रविवार का दिन अररिया जिले के लिए महत्वपूर्ण रहा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वर्चुअल माध्यम से जिले के नौ प्रखंडों में विकसित किए गए मॉडल स्कूलों का उद्घाटन किया। इस पहल को जिले में गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। उद्घाटन के बाद जिले के विभिन्न मॉडल स्कूलों में समारोह आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में शिक्षक-शिक्षिकाओं, छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उपस्थित लोगों ने मॉडल स्कूलों की शुरुआत को क्षेत्र के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। समर्पण के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य करने की अपील कीग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को अब आधुनिक सुविधाओं और बेहतर शैक्षणिक माहौल में पढ़ाई का अवसर मिलेगा। समारोह में वक्ताओं ने शिक्षकों से निष्ठा और समर्पण के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य करने की अपील की। विद्यार्थियों को भी मन लगाकर पढ़ाई करने, अनुशासन बनाए रखने और शिक्षा के माध्यम से क्षेत्र व राज्य का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) एसएसए प्रवीण कुमार ने जानकारी दी कि अररिया जिले में कुल 12 मॉडल स्कूल स्थापित किए गए हैं। इनमें से नौ मॉडल स्कूलों का उद्घाटन रविवार को मुख्यमंत्री द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया गया। औपचारिक उद्घाटन फिलहाल नहीं हो सकाडीपीओ प्रवीण कुमार ने बताया कि शेष तीन मॉडल स्कूलों का चयन हाल ही में हुआ है। इन विद्यालयों में अभी कुछ आवश्यक कार्य और संसाधनों की पूर्ति की प्रक्रिया चल रही है, जिसके कारण उनका औपचारिक उद्घाटन फिलहाल नहीं हो सका है। उन्होंने आश्वस्त किया कि बाकी तीनों मॉडल स्कूलों में भी जल्द सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर दी जाएंगी और उन्हें नियमित रूप से संचालित किया जाएगा। वर्तमान में उद्घाटन किए गए नौ मॉडल स्कूल जिले के नौ अलग-अलग प्रखंडों में शुरू हो चुके हैं। इससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और प्रतिस्पर्धी शिक्षा का लाभ मिलेगा। बिहार सरकार की इस पहल से जिले की शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में पहुंचे आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद तीखा हमला बोला है। सिसोदिया ने आरोप लगाया कि 20 दिनों तक सोनम वांगचुक के आंदोलन को नजरअंदाज करने के बाद, जब सरकार ने देखा कि आंदोलन में युवाओं और लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है, तो प्रधानमंत्री ने कल एक 'जादूगर' की तरह खेल दिखाया। “सफेद चादर वाले गुंडे भेजकर किया गायब” मनीष सिसोदिया ने मंच से जनता को संबोधित करते हुए कहा- कल प्रधानमंत्री जी ने उसी स्टेट (धरना स्थल) पर अपने गुंडे भेजकर सफेद चादर वाला जादू दिखाया। जैसे हम बचपन में जादूगर का खेल देखते थे ना... कि जादूगर आता था, चादर दिखाता था और उसके पीछे से बंदा गायब हो जाता था! कल प्रधानमंत्री जी ने वही किया। सफेद चादर वाले गुंडे भेजे और जादू दिखाकर सोनम वांगचुक जी को वहां से गायब कर दिया, उन्हें छूमंतर करके अस्पताल भेज दिया। शिक्षा मंत्री की कुर्सी पर भी तंज मनीष सिसोदिया ने देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और हालिया विवादों को लेकर भी प्रधानमंत्री पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि वह वीडियो देखते हुए बस यही सोच रहे थे कि, नरेंद्र मोदी जी, काश यह सफेद चादर वाला जादू आप देश के शिक्षा मंत्री की कुर्सी के सामने दिखा देते! ताकि उस कुर्सी से भी वो बंदा (शिक्षा मंत्री) गायब हो जाता। मनीष सिसोदिया के इस बयान के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद भीड़ ने जोरदार नारेबाजी की। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि सरकार लद्दाख की आवाज को दबाने के लिए पुलिस और सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रही है।
बीकानेर में शिक्षा विभाग की ओर से निजी स्कूलों की हर महीने अनिवार्य जांच के आदेश के विरोध में आंदोलन तेज हो गया है। वहीं सोमवार को निजी स्कूल बंद रखने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दरअसल, एक निजी स्कूल संगठन ने बंद का आह्वान किया है, जबकि दूसरे प्रमुख संगठन ने इससे दूरी बना ली है। ऐसे में शहर के स्कूल संचालक देर शाम तक स्कूल खोलने या बंद रखने को लेकर मंथन लगातार जारी है। हालांकि कुछ स्कूलों ने शाम होते-होते छुट्टी की घोषणा कर दी है। हर महीने निजी स्कूलों की जांच होगी माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने शिक्षा संबल योजना के तहत आदेश जारी कर शिक्षा अधिकारियों को हर महीने अपने क्षेत्र के निजी स्कूलों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। जांच में स्कूल की मान्यता सहित विभिन्न बिंदुओं की पड़ताल होगी। इसके लिए विभाग ने एक ऐप भी तैयार किया है, जिसमें निरीक्षण रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड करनी होगी। 24 जुलाई तक निर्णय लेने का आश्वासन निजी स्कूल संगठन पैपा ने बताया- इस मुद्दे पर उनकी निदेशक और अतिरिक्त शिक्षा सचिव से वार्ता हो चुकी है। संगठन के प्रदेश पदाधिकारी गिरिराज खैरीवाल ने कहा कि सरकार ने 24 जुलाई तक निर्णय लेने का आश्वासन दिया है, इसलिए तब तक इंतजार किया जाना चाहिए। इसी कारण पैपा ने 20 जुलाई के बंद का समर्थन नहीं किया है। सेवा संगठन ने बंद का आह्वान किया वहीं सेवा संगठन ने 20 जुलाई को स्कूल बंद रखने और शिक्षा निदेशालय पर बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है। संगठन के कोडाराम भादू ने कहा कि निजी स्कूल संचालक सरकार के इस आदेश का विरोध करेंगे और आंदोलन के लिए तैयार हैं। कुछ स्कूलों ने की छुट्टी घोषित दोनों संगठनों के अलग-अलग रुख के चलते बीकानेर में निजी स्कूल संचालक असमंजस में रहे। हालांकि देर शाम कुछ स्कूलों ने सोमवार की छुट्टी घोषित करते हुए अभिभावकों को इसकी सूचना भेज दी, जबकि कई स्कूल अंतिम समय तक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार करते रहे।
रविवार, 19 जुलाई 2026 को नवादा जिले के नरहट प्रखंड स्थित दरगाही बिगहा गांव में शिक्षा जागरूकता प्रभातफेरी का आयोजन किया गया। बुद्धिजीवी विचार मंच के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना था। यह इस गांव में मंच द्वारा चलाया गया तीसरा ऐसा अभियान था। प्रभातफेरी में चंदेश्वर यादव, रामबिलास प्रसाद, मथुरा पासवान, दिलीप पासवान, अजय कुमार और व्यास जी सहित बुद्धिजीवी विचार मंच के कई सदस्यों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने गांव की गलियों में भ्रमण करते हुए शिक्षा-जागरण गीत प्रस्तुत किए और जोशीले नारों के साथ लोगों को बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर आयोजकों ने अभिभावकों से बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा ही उनका सबसे बड़ा धन और सुरक्षित भविष्य है। प्रत्येक माता-पिता को अपने बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए, उन्हें विद्यालय भेजना चाहिए और सीखने के लिए प्रेरित करना चाहिए। मंच के सदस्यों ने जोर दिया कि शिक्षित परिवार ही सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही अज्ञानता, गरीबी और सामाजिक बुराइयों के अंधकार को दूर करने का एकमात्र साधन है। कार्यक्रम में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सक्रिय भागीदारी देखी गई, जो शिक्षा के प्रति उनके सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है। ग्रामीणों के सहयोग और उत्साह ने आयोजकों को इस जन-जागरण अभियान को आगे बढ़ाने के लिए नई ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम का समापन हर बच्चा विद्यालय जाए, शिक्षित होकर देश बनाए के संकल्प के साथ हुआ।
जहानाबाद जिले में रविवार को विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल की शुरुआत हुई। सदर प्रखंड के केशरबाग-खैरा स्थित सरस्वती विद्या निकेतन परिसर में जिले के सातों आदर्श विद्यालयों का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस दौरान राज्य स्तरीय उद्घाटन समारोह का सीधा प्रसारण भी देखा गया। केशरबाग-खैरा में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया, उप विकास आयुक्त आदित्य कुमार पीयूष, जिला शिक्षा पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार सहित कई प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, शिक्षक, अभिभावक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान जिले के सातों आदर्श विद्यालयों के शिलापट्ट का अनावरण किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पदाधिकारी ने कहा कि आदर्श विद्यालयों की स्थापना से ग्रामीण और प्रखंड स्तर के विद्यार्थियों को आधुनिक संसाधनों के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर मिलेंगे। उन्होंने बताया कि इन विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाएं बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक होंगी और उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखेंगी। जिला पदाधिकारी ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी आदर्श विद्यालयों का संचालन उच्च गुणवत्ता के साथ सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए आवश्यक शैक्षणिक और आधारभूत सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। जहानाबाद जिले में इन सात आदर्श विद्यालयों की शुरुआत से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल और आधुनिक शिक्षा सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। अब इन विद्यालयों के प्रभावी संचालन पर सभी की नजर रहेगी।
हरियाणा के हांसी में रविवार को इनसो छात्र नेता हरिकेश ढांडा के नेतृत्व में युवाओं ने सोनम वांगचुक के समर्थन में पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की और पेपर लीक व जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक की हिरासत का विरोध किया। इस मार्च में रोहित बेरवाल, अमित सिवाच, दीपक ठाकुर, जीवन, राहुल, कामराज, निशा और वैशाली सहित बड़ी संख्या में छात्र-युवा शामिल हुए। पैदल मार्च जाट धर्मशाला से शुरू होकर पुरानी सब्जी मंडी, उमरा गेट, बड़सी गेट, पुराना बस स्टैंड और अंबेडकर चौक होते हुए पुनः जाट धर्मशाला पर समाप्त हुआ। 'शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हो रही' छात्र नेता हरिकेश ढांडा और अमित सिवाच ने कहा कि वे सोनम वांगचुक के समर्थन में सड़कों पर उतरे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है और बड़े पैमाने पर पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था की खामियों और छात्रों के हितों को लेकर सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। हालांकि, उन्हें सरकार के निर्देश पर पुलिस ने जबरन हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया। 'जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों की आवाज को दबाया' प्रदर्शनकारी दीपक ठाकुर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर छात्रों की समस्याओं का समाधान करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि यदि शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है, तो शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और उनकी जगह ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया जाए जो छात्रों के हित में प्रभावी ढंग से कार्य कर सके। प्रदर्शनकारियों ने पेपर लीक की घटनाओं पर तत्काल रोक लगाने की मांग की, क्योंकि ऐसी घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों की आवाज को दबाया गया, जिसे उन्होंने लोकतंत्र की हत्या करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है।
सरगरा एज्युकेशन सोसायटी पाली की ओर से शिक्षा को बढ़ावा देने को लेकर रविवार को समाज की एक होनहार छात्रा को बीएसटीसी द्वितीय वर्ष की फीस के लिए रुपए का चेक दिया गया, जिससे वह अपनी फीस भरकर बीएसटीसी कर सके। सोसायटी के अध्यक्ष डीआर सागर ने बताया कि संस्था का उद्देश्य आर्थिक तंगी के कारण समाज का कोई भी स्टूडेंट शिक्षा से वंचित न रहे। इसी सोच के साथ सरगरा एज्युकेशन सोसायटी का गठन किया गया, जिसका संचालन सदस्यों के सहयोग से किया जाता है। संस्था जरूरतमंद और होनहार स्टूडेंट्स की फीस बिना ब्याज सीधे संबंधित शिक्षण संस्थान के नाम जमा करवाती है। संस्था के कोषाध्यक्ष प्रदीप कुमार कच्छवाह और सोसायटी के सचिव कन्हैयालाल चौहान ने बताया कि संस्था अब तक अनेक स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स को बिना ब्याज फीस सहायता उपलब्ध करा चुकी है। कई स्टूडेंट्स ने सहायता राशि समय पर संस्था के खाते में वापस जमा कराई है, जिससे अन्य जरूरतमंद स्टूडेंट्स की भी मदद की जा रही है। उन्होंने समाज के अधिक से अधिक लोगों से शिक्षा कोष में सहयोग करने और सोसायटी से जुड़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर संस्था के उपाध्यक्ष बद्रीलाल चौहान, बाबूलाल चौहान एवं जितेंद्र कच्छवाह सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
कटनी जिले के बरही नगर में रविवार को पर्यावरण और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के समर्थन में युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण, उसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर एकजुटता दिखाई। रविवार दोपहर नगर के व्यस्त बस स्टैंड क्षेत्र में बड़ी संख्या में युवा और स्थानीय नागरिक एकत्रित हुए। उन्होंने करीब एक घंटे तक हाथों में तख्तियां लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। तख्तियों पर लद्दाख के पर्यावरण को बचाने और सोनम वांगचुक की मांगों को पूरा करने के नारे लिखे थे। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने कहा कि सोनम वांगचुक देश की शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने और प्रकृति को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, जिसका समर्थन करना हर जागरूक नागरिक का कर्तव्य है। बस स्टैंड पर प्रदर्शन के बाद, प्रदर्शनकारियों ने एक शांति मार्च निकाला। यह मार्च नगर के मुख्य बाजार की विभिन्न गलियों और चौक-चौराहों से होकर गुजरा। इस दौरान नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने की अपील भी की गई। मार्च का समापन नगर के ऐतिहासिक आजाद चौक पर हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वांगचुक के स्वास्थ्य और उनके आंदोलन की सफलता की कामना की। उल्लेखनीय है कि सोनम वांगचुक नीट परीक्षा रद्द होने और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ-साथ लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा देने तथा वहां के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को औद्योगिक दोहन से बचाने के लिए दिल्ली में भूख हड़ताल पर थे। स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्हें पुलिस प्रशासन द्वारा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसी के विरोध में और उनकी मांगों के समर्थन में अब देश के अलग-अलग हिस्सों से आवाजें उठने लगी हैं, जिसकी गूंज कटनी के बरही नगर में भी दिखाई दी। इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में नगर के सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वर्चुअल माध्यम से भागलपुर के सभी 17 सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल) का शुभारंभ किया। जिला मुख्यालय सहित सभी चयनित स्कूलों में उद्घाटन समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। जिले में प्रत्येक प्रखंड से एक विद्यालय को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया गया है। इनमें जगदीशपुर, नाथनगर, सबौर, शाहकुंड, सुलतानगंज, गोराडीह, कहलगांव, पीरपैंती, सन्हौला, खरीक, बिहपुर, गोपालपुर, इस्माइलपुर, नारायणपुर, नवगछिया, रंगरा चौक और नगर निगम क्षेत्र के प्लस टू जिला स्कूल को शामिल किया गया है। इन विद्यालयों में आधुनिक शैक्षणिक संसाधन, तकनीक आधारित शिक्षण व्यवस्था और बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी। ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिलेगी मुख्य समारोह पी. झा उच्च विद्यालय परिसर में आयोजित हुआ, जहां जिलाधिकारी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने विद्यालय का निरीक्षण कर उपलब्ध कराई गई शैक्षणिक और आधारभूत सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की यह पहल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। मॉडल स्कूलों में आधुनिक शिक्षण पद्धति, अनुशासित वातावरण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जिलाधिकारी ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें नियमित अध्ययन, अनुशासन और उच्च लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज और राष्ट्र के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है। यदि विद्यार्थी समर्पण और मेहनत के साथ पढ़ाई करें तो वे जीवन में हर लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की शिक्षा में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। शिक्षकों से कहा कि वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यार्थियों में नैतिक, सामाजिक और मानवीय मूल्यों का भी विकास करें, ताकि वे जिम्मेदार नागरिक बन सकें। उद्घाटन समारोह के दौरान विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रम और स्वागत समारोह का भी आयोजन किया गया। छात्र-छात्राओं ने रंगारंग प्रस्तुतियां देकर अतिथियों का स्वागत किया। उपस्थित लोगों ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए राज्य सरकार की इस पहल की सराहना की। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का समापन हुआ। जिला प्रशासन ने विश्वास जताया कि जिले के सभी 17 सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल) भविष्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में विकसित होंगे और नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मनेन्द्रगढ़ में छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन की महासभा संपन्न हुई। इस महासभा में शादियों में 'प्री-वेडिंग शूट' पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके अतिरिक्त, आवारा पशुओं के लिए गौठान संचालन सहित समाज सेवा और संगठन विस्तार को लेकर कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई। कार्यक्रम में प्रदेश एवं जिला स्तर के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में अग्रवाल समाज के लोग शामिल हुए। महासभा का मूल उद्देश्य समाज सेवा ही हमारा संकल्प, अग्रवाल समाज का सर्वांगीण विकास हमारा लक्ष्य बताया गया। इसी के तहत 'प्री-वेडिंग शूट' पर प्रतिबंध और गौवंश के लिए गौठान संचालन जैसे निर्णय पारित किए गए। सामाजिक योजनाओं की दी जानकारी सामाजिक उत्थान के लिए विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। इनमें मंगल परिणय योजना के तहत युवाओं के लिए वैवाहिक संपर्क मंच, विधवा-विधुर पुनर्विवाह योजना, श्री अग्रसेन कन्या विवाह योजना और श्री अग्रसेन सामूहिक कन्या विवाह योजना शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को सहयोग प्रदान करना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। उच्च शिक्षा के लिए ब्याज मुक्त ऋण योजना शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण पहल की गई। श्री अग्रसेन ब्याज मुक्त उच्च शिक्षा ऋण योजना के तहत विद्यार्थियों को दो लाख रुपS तक का ब्याज मुक्त शिक्षा ऋण उपलब्ध कराने की योजना पर प्रकाश डाला गया। यह योजना उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक छात्रों के लिए सहायक होगी। महासभा में अग्र पंचायत समिति, अग्र अलंकरण योजना, रक्तदान, देहदान एवं नेत्रदान अभियान जैसे सेवा कार्यों में अधिक से अधिक सहभागिता का आह्वान किया गया। इसके साथ ही गो सेवा और पशु-पक्षी सेवा जैसे परोपकारी कार्यों में भी समाज के लोगों को सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
रायबरेली में शिक्षा प्रणाली में सुधार और पर्यावरण वैज्ञानिक सोनम वांगचुक के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन रविवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। शहर के डिग्री कॉलेज चौराहे पर दोपहर 12:30 बजे यह विरोध प्रदर्शन हुआ। सामाजिक कार्यकर्ता राम मोहन श्रीवास्तव रामू दादा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार और पेपर लीक कराने वाले माफियाओं के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने शिक्षा मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में हुई घटना की कड़ी निंदा की, जहाँ दिल्ली पुलिस ने 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को जबरन हटा दिया था। इस घटना को लोकतंत्र की हत्या बताया गया। राम मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा न देना यह दर्शाता है कि वे बच्चों के भविष्य के प्रति गंभीर नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप जनता प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग भी कर सकती है। श्रीवास्तव ने दोहराया कि यह उनका पांचवां दिन है और वे सोनम वांगचुक के समर्थन में बैठे हैं, जो भ्रष्टाचार और पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश की जनता सब देख रही है और यदि सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह आक्रोश बड़ा रूप ले सकता है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक यह विरोध जारी रहेगा।
कानपुर देहात डायट बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस:आधुनिक कंप्यूटर लैब का लोकार्पण; शिक्षा विभाग का ऐलान
कानपुर देहात में शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) पुखरायाँ में अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के शिक्षा विभाग ने कानपुर देहात की डायट को 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित इस कंप्यूटर लैब का उद्घाटन राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, उत्तर प्रदेश के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान ने किया। इस लैब को ह्यूमना पीपल टू पीपल इंडिया और रिस्ट संस्था के सहयोग से तैयार किया गया है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. पवन सचान ने कहा कि डिजिटल संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बढ़ाया जाएगा। उन्होंने डायट प्रशिक्षुओं के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की विशेष तैयारी कराने के निर्देश भी दिए, ताकि डीएलएड पूरा करते ही अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो सकें। ह्यूमना पीपल टू पीपल इंडिया की सीईओ स्नोरा वेस्टगार्ड ने डिजिटल शिक्षा को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि कानपुर देहात में मिली सफलता के बाद अब प्रदेश के आठ अन्य जिलों में भी इसी मॉडल पर तकनीकी सशक्तिकरण का कार्य किया जाएगा। डायट प्राचार्य, जिला विद्यालय निरीक्षक ब्रजभूषण चौधरी और बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार पांडेय ने बताया कि नई कंप्यूटर लैब से शिक्षकों को डिजिटल टीचिंग, ई-कंटेंट तैयार करने और ऑनलाइन प्रशिक्षण की बेहतर सुविधा मिलेगी। इसके अतिरिक्त, डीएलएड प्रशिक्षुओं के साथ-साथ वंचित वर्ग के मेधावी छात्र भी इस आधुनिक लैब का लाभ उठा सकेंगे। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के अधिकारी, रिस्ट हंस फाउंडेशन के प्रतिनिधि, समाजसेवी, प्रवक्ता, डायट का समस्त स्टाफ और बड़ी संख्या में डीएलएड प्रशिक्षु उपस्थित रहे।
नीट पेपर लीक मामला: अंकुर गुप्ता ने की शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
अमृतसर| सामाजिक कार्यकर्ता एवं एडवोकेट अंकुर गुप्ता ने देश की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली पर गहरी चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से आंदोलनरत छात्रों व कार्यकर्ताओं के साथ तत्काल संवाद शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नीट समेत सामने आए पेपर लीक मामलों ने करोड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा दिया है, इसलिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। एडवोकेट अंकुर गुप्ता ने मांग की कि नीट व अन्य पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। उन्होंने 20 जुलाई के शांतिपूर्ण आंदोलन में अभिभावकों, शिक्षकों और युवाओं से शामिल होने की अपील की है।
टीईटी पर शिक्षा विभाग का इनकार, भड़के शिक्षक
भास्कर न्यूज | जांजगीर छत्तीसगढ़ में कार्यरत शिक्षकों के लिए सेवा सुरक्षा के तहत विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने की मांग को शिक्षा विभाग ने स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा में शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव और उनके ओएसडी से मुलाकात कर इस संबंध में ज्ञापन सौंपा था। चर्चा के दौरान विभाग की ओर से साफ किया गया कि विभागीय टीईटी आयोजित करने का वर्तमान में कोई प्रस्ताव नहीं है। विभाग का कहना है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमानुसार केवल व्यापम के माध्यम से ही आयोजित की जाएगी और आवश्यकता होने पर इसे वर्ष में तीन बार भी कराया जा सकता है। शिक्षा विभाग के इस रुख के बाद कार्यरत शिक्षकों में असंतोष बढ़ गया है। फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र राठौर ने विभाग के इस निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कार्यरत शिक्षकों के हित में विभागीय टीईटी ही सबसे व्यावहारिक और न्यायसंगत समाधान है। यदि सरकार इस जायज मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो प्रदेश के सभी प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षकों को एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से एक मजबूत और निर्णायक संघर्ष का रास्ता चुनना होगा। इस दौरान फेडरेशन के प्रदेश सचिव राजू टंडन, प्रदेश उपाध्यक्ष देवेंद्र हरमुख, संगठन मंत्री हेम साहू, पीताम्बर बंजारे, मनोज साहू, दीपक साहू, रमेश कोठारी, पुष्पेंद्र बनाफर, युवराज बेलचंदन, ओमप्रकाश साहू, लोकेश धृतलहरे और पारथ ध्रुव सहित बड़ी संख्या में शिक्षक प्रतिनिधि उपस्थित थे।
शिक्षा में एआई और तकनीक की भूमिका पर विशेषज्ञों ने रखे अपने विचार
लुधियाना| बीसीएम आर्य इंटरनेशनल स्कूल में क्रॉसबैंडिंग सीजन 8 का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के विभिन्न स्कूलों के प्राचार्यों और शिक्षा नेतृत्व से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आरंभ में आर्य समाज ग्रुप ऑफ स्कूल्स की निदेशक डॉ. परमजीत कौर ने स्वागत संबोधन में अतिथियों का अभिनंदन किया और बदलते शैक्षिक परिदृश्य में सहयोगात्मक सीख तथा नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद विद्यालय के विद्यार्थियों ने स्पेनिश भाषा में समूह गीत प्रस्तुत कर सांस्कृतिक रंग भरा और अपनी भाषाई व कलात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया। मुख्य सत्र में ऑरिबाइसेस टेक्नोलॉजीज के निदेशक ईशांत कुमार ने मुख्य वक्ता के रूप में प्रस्तुति दी। उन्होंने शिक्षा में तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका, उत्पादकता बढ़ाने और शिक्षकों के कार्य में सहयोग पर अपने विचार रखे। समापन पर विद्यालय की प्राचार्य डॉ. जसनीव सेठ ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। अंतिम चरण में विद्यार्थियों की नृत्य प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
20 जुलाई से बिहार विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। इसमें सरकार उच्च शिक्षा विधेयक (बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026) लाने वाली है। यूनिवर्सिटी को ऑटोनॉमस माना जाता है, राज्यपाल इसके कुलाधिपति होते हैं। नए विधेयक के पास होने से कॉलेजों को यूनिवर्सिटी के कंट्रोल से हटाने से राज्यपाल के अधिकार कम होंगे। कॉलेजों के प्रोफेसर की भर्ती, ट्रांसफर-पोस्टिंग समेत दूसरे कंट्रोल सरकार के पास होंगे। उच्च शिक्षा विधेयक पास होने से क्या असर होगा? सरकार यह विधेयक क्यों ला रही है? पढ़िए रिपोर्ट..। विश्वविद्यालय के प्रशासनिक नियंत्रण बाहर आएंगे 481 सरकारी डिग्री कॉलेज सरकार बिहार के 481 सरकारी डिग्री कॉलेजों को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक नियंत्रण से हटाना चाहती है। इसे उच्च शिक्षा विभाग से कंट्रोल करना चाहती है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 पास होने के बाद बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 खत्म हो जाएंगे। विश्वविद्यालयों से डिग्री कॉलेज को मुक्त कर इनके संचालन की जवाबदेही उच्च शिक्षा विभाग के पास चली जाएगी। विभाग इसका संचालन, प्रशासन व अन्य फैसले ले सकेगा। यानी स्नातक कॉलेजों का प्रबंधन सरकार के अधीन हो जाएगा। विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर (PG) की पढ़ाई, शोध आदि ही करा सकेंगे। सरकार क्यों ला रही नया विधेयक? कारण 1- कॉलेजों की बदहाल शिक्षा व्यवस्था स्कूली शिक्षा की स्थिति में तो सरकार बड़ा बदलाव कर रही है, लेकिन यूनिवर्सिटी-कॉलेजों की शिक्षा को लेकर बदनामी हो रही है। कॉलेजों में छात्र कम आ रहे हैं। पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी सवाल हैं। कारण 2- कई कुलपतियों पर गंभीर आरोप लगे पिछले 10 वर्षों में बिहार में राज्य के बाहर से कुलपति आने लगे। कई विश्वविद्यालय को पैसे कमाने का केंद्र बना दिया गया। कुलपतियों पर गंभीर आरोप लगे। सरकार इस स्थिति को बदलना चाहती है। अब जानिए बदलाव का क्या असर पड़ेगा? बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 सदन से पास होकर राज्यपाल की मंजूरी के बाद कानून बनता है तो स्नातक स्तर के शिक्षकों की नियुक्ति, ट्रांसफर, प्रमोशन आदि से जुड़े फैसले विश्वविद्यालय से नहीं होंगे। ये सारे काम उच्च शिक्षा विभाग करेगा। कॉलेज के प्रोफेसर स्कूलों के शिक्षकों की तरह सरकारी कर्मी बन जाएंगे। एक्सपर्ट ने कहा- चुनाव लड़ने की छूट हर किसी को मिलनी चाहिए भास्कर रिपोर्टर ने भागलपुर विश्वविद्यालय के रिटायर प्रोफेसर डॉ. योगेन्द्र से बात की। वे कहते हैं, ‘सरकार जो डिग्री कॉलेज खोल रही है वे राजकीय कॉलेज होंगे और विश्वविद्यालय के अंदर नहीं होंगे। मेरा तो यह कहना है कि देश के हर शिक्षक या कर्मचारी को राजनीतिक अधिकार रहने चाहिए। उन्हें भी छुट्टी लेकर चुनाव लड़ने की छूट मिलनी चाहिए। यह देश सबका है।’ ‘सरकार शिक्षकों के साथ नौकर वाला व्यवहार करना चाहती है। यह सही नहीं है। अब डिग्री कॉलेजों की परीक्षा भी विश्वविद्यालय नहीं लेगा। विरोध तो संविदा पर शिक्षक बहाली का भी होना चाहिए। जब पद है तो परमानेंट बहाली होनी चाहिए।’ आधा दर्जन MLC ने आपत्ति दर्ज की, CM को पत्र लिखा बिहार विधान परिषद के आधा दर्जन एमएलसी ने इसको लेकर विरोध किया है। आपत्ति दर्ज करने वालों में सत्ता पक्ष से जुड़े एमएलसी भी हैं। इन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलकर चिंता जाहिर की। इन MLC में संजीव कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह, नवल किशोर यादव, वीरेन्द्र नारायण यादव, जीवन कुमार और आफाक अहमद शामिल हैं। इन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों, शिक्षक संगठनों, शिक्षाविदों और छात्र प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारकों से विचार किए बिना ऐसे किसी विधेयक को अंतिम रूप न दिया जाए जो उच्च शिक्षा व्यवस्था की प्रशासनिक संरचना में मूलभूत परिवर्तन करता हो। डिग्री कॉलेजों पर सवाल भी उठ रहे हैं राज्य में 5 तरह के डिग्री कॉलेज चल रहे हैं। डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की काफी कमी है। विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने जुलाई में कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला है। छात्रों का भविष्य दांव पर न लगाए सरकार टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के पूर्व डीन और प्रोफेसर पुष्पेंद्र ने कहा कि कॉलेज में ग्रेजुएशन स्तर की पढ़ाई को यूनिवर्सिटी के ढांचे से बाहर निकालकर सीधे उच्च शिक्षा विभाग के अधीन लाने का प्रस्ताव बिहार की पहले से ही चरमराई उच्च शिक्षा के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा। उन्होंने कहा, ‘विश्वविद्यालय की स्वायत्तता का शिक्षा की गुणवत्ता से सीधा संबंध है। यह प्रस्ताव विश्वविद्यालय की पूरी व्यवस्था को विभाजित कर देगी।’
राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में ऑटोमोबाइल कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने कैंपस प्लेसमेंट के माध्यम से मोटर मैकेनिक व्हीकल (MMV) एवं मैकेनिक डीजल ट्रेड के 18 प्रशिक्षार्थियों का चयन कर उन्हें लेटर ऑफ इंटेंट (Letter of Intent) जारी किए। बैंक ऑफ बड़ौदा के 119वें स्थापना दिवस के अवसर पर आज क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से एम्स जोधपुर के सहयोग से पाल लिंक रोड स्थित क्षेत्रीय कार्यालय परिसर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इसमें लगभग 51 कर्मचारियों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। वहीं जिला प्रभारी मंत्री मदन दिलावर और जोगाराम कल जिले में विभिन्न इलाकों के कार्यक्रमों में शामिल होंगे। पढ़ें शहर की प्रमुख खबरें लाइव ब्लॉग में..
जहानाबाद जिले के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से एक पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण 20 से 24 जुलाई 2026 तक जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), जहानाबाद में होगा, जिसमें कक्षा 3 से 5 तक के कुल 220 शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल होंगे। 19 जुलाई की शाम 5 बजे तक रिपोर्ट करें शिक्षक जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान) द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, सभी चयनित शिक्षकों को 19 जुलाई की शाम 5 बजे तक डायट, जहानाबाद में अनिवार्य रूप से रिपोर्ट करना होगा। निर्धारित समय पर योगदान न देने वाले शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्रशिक्षण के पहले दिन सभी प्रतिभागियों का प्री-टेस्ट और अंतिम दिन पोस्ट-टेस्ट लिया जाएगा, जिसमें शामिल होना अनिवार्य है। शिक्षकों को यात्रा भत्ता (टीए) के भुगतान के लिए अपनी बैंक पासबुक की छायाप्रति साथ लाने का निर्देश दिया गया है। पीटी-योग सत्र को सफेद टी-शर्ट और नीले रंग की पैंट प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रतिभागियों के लिए औपचारिक परिधान निर्धारित किए गए हैं। पुरुष शिक्षकों को पैंट, शर्ट और टाई तथा महिला शिक्षकों को सलवार-कुर्ता या साड़ी जैसे सौम्य रंगों के परिधान पहनने होंगे। पीटी और योग सत्र के लिए सफेद टी-शर्ट और नीले रंग की पैंट अनिवार्य है। महिला शिक्षकों को योग एवं पीटी सत्र में साड़ी का उपयोग न करने की सलाह दी गई है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो शिक्षक डीएलएड परीक्षा में प्रतिनियुक्त हैं, वे इस प्रशिक्षण में भाग नहीं लेंगे। उन्हें इसकी सूचना संबंधित कार्यालय को देनी होगी। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की शैक्षणिक दक्षता बढ़ाना, उन्हें नवीन शिक्षण विधियों से अवगत कराना और कक्षा में बच्चों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाना है।
शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख का एक और मामला सामने आया है। कोटा में तबादलों के नाम पर पैसे वसूलने वाले एक आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मामला सांगोद पंचायत समिति से जुड़ा है, जहां पदस्थापित ग्राम विकास अधिकारी(VDO) मंजुला बैरागी ने मंत्री मदन दिलावर के आवास पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि बारां निवासी नरोत्तम बड़ारिया ने उनका तबादला करवाने के नाम पर उनसे पैसों की मांग की और राशि भी ली। शिक्षा मंत्री दिलावर ने जीरो एफआईआर दर्ज करने के दिए निर्देश शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मंत्री मदन दिलावर ने तत्काल महावीर नगर थाना प्रभारी को बुलाकर आरोपी के खिलाफ नामजद जीरो एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद महावीर नगर थाने में जीरो एफआईआर दर्ज की गई, जिसे सांगोद पुलिस को भेजा गया। सांगोद थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी नरोत्तम बड़ारिया को बारां से गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उसने कितने लोगों से तबादलों के नाम पर ठगी की है। इस मामले में केवल मंजुला बैरागी ही नहीं, बल्कि दो अन्य ग्राम विकास अधिकारियों भूपेंद्र सिंह और संदीप सिंह चौहान ने भी आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस को आशंका है कि आरोपी ने कई अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया हो सकता है। फिलहाल पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और आरोपी के नेटवर्क तथा उसके संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है।
मैहर में भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को शहर के घंटाघर चौराहे पर कार्यकर्ताओं ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान भीम आर्मी ने देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की वकालत करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग बुलंद की। साथ ही विभिन्न सरकारी भर्ती परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक और घोटालों को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में हो रही धांधलियों की वजह से देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। उन्होंने मांग की कि सरकार को शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाने चाहिए। परीक्षा घोटालों से युवाओं का टूटा भरोसा, न्यायिक जांच की मांग धरने का नेतृत्व कर रहे भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष एडवोकेट विक्रम सूर्यवंशी ने कहा कि परीक्षाओं में हो रही लगातार गड़बड़ियों के चलते युवाओं का सिस्टम से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि इन घोटालों से परेशान होकर कई होनहार छात्र आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाने को मजबूर हुए हैं। प्रदर्शन के बाद भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने नायब तहसीलदार को राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट खुद इस मामले में संज्ञान (सुओ मोटू) ले और NEET व SSC जैसी बड़ी भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधलियों की जांच न्यायिक निगरानी में कराई जाए। सोनम वांगचुक की मांगों पर विचार करने की अपील ज्ञापन के जरिए कार्यकर्ताओं ने पूरी परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार करने, पेपर लीक रोकने के लिए फूलप्रूफ और सुरक्षित व्यवस्था बनाने, भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने और प्रभावित परीक्षाओं को एक तय समय के भीतर दोबारा आयोजित कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने लद्दाख और शिक्षा सुधारों को लेकर आवाज उठा रहे सोनम वांगचुक की मांगों पर भी केंद्र सरकार से गंभीरता से विचार करने की अपील की। यह पूरा धरना-प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से खत्म हुआ और प्रशासन ने ज्ञापन को आगे भेजने का भरोसा दिया है।
अपार आईडी निर्माण में यूपी नंबर-1, स्कूल और उच्च शिक्षा में बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड
UP ranks first in APAAR ID: उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर शिक्षा के डिजिटलीकरण के क्षेत्र में देशभर में अपनी अग्रणी भूमिका साबित की है। डिजिटल इंडिया के तहत अपार (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) आईडी निर्माण में उत्तर प्रदेश ने स्कूल शिक्षा ...
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटाकर हॉस्पिटल में भर्ती कराने की कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा- सरकार संवाद के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है। सरकार ने वांगचुक से गांधीवादी तरीके से बातचीत करने के बजाय जबरन उठाकर हॉस्पिटल में भर्ती कराया है। पायलट ने कहा- वांगचुक की मांगों पर विचार किया जा सकता था, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। पायलट ने आरोप लगाया कि संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले इस मुद्दे को दबाने के लिए यह कार्रवाई की गई। यह लोकतांत्रिक मूल्यों का सीधा हनन है और देश का हर युवा इस घटनाक्रम से दुखी है। पायलट ने कहा- कांग्रेस लगातार छात्रों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुन रही है। राहुल गांधी भी युवाओं से संवाद कर रहे हैं और देश का नौजवान सरकार से जवाब मांग रहा है। इसके बावजूद सरकार संवाद करने के बजाय विरोध की आवाज को दबाने में लगी हुई है। सचिन पायलट जयपुर के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में एनएसयूआई की ओर से आयोजित छात्र संविधान संवाद कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ भी मौजूद रहें। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम में भाग लेकर शिक्षा, पेपर लीक और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछे। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं लेना चाहती सरकार पायलट ने कहा- पूरे देश में भर्ती परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर आक्रोश है। छात्र जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठा रहे हैं, लेकिन सरकार इस्तीफा लेने के बजाय विरोध कर रहे लोगों को जबरन हटाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार का कोई प्रतिनिधि सोनम वांगचुक से मिलकर बातचीत करता और उनकी मांगों पर चर्चा करता तो समाधान निकल सकता था लेकिन बातचीत करने के बजाय उन्हें जबरन उठाकर हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। पायलट ने कहा कि सरकार को पहले उन मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए थी, जिनको लेकर वांगचुक अनशन पर बैठे थे। अगर मांगें मान ली जातीं तो वे खुद अनशन समाप्त कर देते। शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करना जरूरी सचिन पायलट ने कहा कि देशभर में शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है। इसे बहाल करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि छात्र जवाबदेही चाहते हैं और सरकार को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। कांग्रेस का रुख पूरी तरह साफ है कि शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए और सरकार को इसमें कोई संकोच नहीं करना चाहिए। पंचायत-निकाय चुनाव टालने पर भी साधा निशाना पायलट ने राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर भी राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार चुनाव इसलिए नहीं करा रही क्योंकि उसे जनादेश अपने खिलाफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट भी इस मामले में पहले टिप्पणी कर चुका है, लेकिन सरकार हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर चुनाव टाल रही है। UPSC जैसा मॉडल अपनाने की सलाह कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने पेपर लीक की घटनाओं पर सवाल पूछे। इस पर सचिन पायलट ने कहा कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा देश की सबसे पारदर्शी परीक्षाओं में शामिल है और आज तक उसके पेपर लीक होने की खबर नहीं आई। उन्होंने कहा कि जिस तरह यूपीएससी की कार्यप्रणाली और स्वायत्त व्यवस्था है। उसी तर्ज पर अन्य भर्ती परीक्षाओं के लिए भी स्वतंत्र और मजबूत व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। अगर सरकार इच्छा शक्ति दिखाए तो किसी की हिम्मत नहीं होगी कि पेपर लीक कर सके। उन्होंने भाजपा सरकार के कार्यकाल में छात्र नेताओं पर दर्ज मुकदमों का भी मुद्दा उठाया। पायलट ने कहा कि जो मुकदमे प्रतिशोध या दुर्भावना से दर्ज किए गए हैं, कांग्रेस की सरकार बनने पर उन्हें हटाया जाएगा। टीकाराम जूली ने संविधान और लोकतंत्र पर जताई चिंता नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि भारत में लोकतंत्र की मजबूती का आधार संविधान है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संविधान की संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने राजनीतिक दलों को तोड़ने, सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग, चुनाव आयोग और सूचना के अधिकार (RTI) जैसे कानूनों को कमजोर करने के आरोप लगाए। जूली ने कहा कि राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनाव टालना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला है। उन्होंने पुलवामा आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि आज तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक वहां कैसे पहुंचा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने शहीदों के नाम पर राजनीति की है। 9 अगस्त को दिल्ली चलो अभियान एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि संगठन देशभर में छात्रों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुन रहा है और छात्र सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री अभी भी पद पर बने हुए हैं, जबकि छात्र लगातार इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई छात्र या संगठन शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करता है तो उसे जबरन हटाया जा रहा है, जैसा दिल्ली में देखने को मिला। जाखड़ ने कहा कि एनएसयूआई पहले देशभर में जिला कलेक्टरों के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपेगी। इसके बाद 9 अगस्त को दिल्ली चलो अभियान चलाया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल होंगे।
स्कूल शिक्षा विभाग में सचिवालय और उप संचालक, सहायक संचालक, संयुक्त संचालक स्तर पर पदोन्नति की कार्यवाही होने के बाद अब व्याख्याता, प्राचार्य और अध्यापकों के प्रमोशन की तैयारी है। इस बीच प्रमोशन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभाग अपने स्तर पर काम कर रहा है और शिक्षक संगठनों ने भी इसके लिए विभाग को सुझाव देकर कहा है कि सीनियर पदों पर प्रमोशन की कार्यवाही पहले की जाए ताकि सभी पात्र प्रमोशन का लाभ पा सकें। शासकीय शिक्षक संगठन ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को न्यायसंगत, पारदर्शी एवं व्यावहारिक बनाने के लिए इसे शीर्ष स्तर से निचले स्तर तक चरणबद्ध क्रम में संचालित किया जाए। संगठन का मानना है कि इस व्यवस्था से हर स्तर पर रिक्त पदों का एक एक करके सृजन होगा, जिससे अधिक से अधिक पात्र शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ मिल सकेगा। इसको लेकर संगठन ने विभाग को सुझाव भी दिए हैं। संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने स्कूल शिक्षा विभाग से इस पर ध्यान देेने का आग्रह किया है। सुझाव में यह कहा संगठन ने समानांतर प्रक्रिया अपनाई तो नहीं मिलेगा सबको मौका संगठन का कहना है कि यदि पदोन्नति प्रक्रिया शीर्ष स्तर से प्रारंभ की जाती है, तो हर चरण में रिक्त पद स्वाभाविक रूप से निर्मित होते जाएंगे। इससे अधीनस्थ संवर्गों में पदों की संख्या बढ़ेगी तथा अधिकतम पात्र शिक्षकों को पदोन्नति का अवसर मिलेगा। इसके विपरीत अव्यवस्थित या समानांतर प्रक्रिया अपनाने से अनेक पद रिक्त होने के बावजूद पात्र कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पाता। शासकीय शिक्षक संगठन ने शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि पदोन्नति की संपूर्ण प्रक्रिया इसी चरणबद्ध क्रम में संचालित की जाए, ताकि सभी संवर्गों के हित सुरक्षित रहें, प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी एवं न्यायसंगत बनी रहे तथा किसी भी वर्ग के साथ अन्याय की स्थिति उत्पन्न न हो।
लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के दिल्ली में चल रहे आंदोलन और भूख हड़ताल के समर्थन में पन्ना में भी युवा और राजनीतिक दल सड़कों पर उतर आए। शनिवार को समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में गांधी चौक पर प्रदर्शन किया। इस दौरान युवाओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने देश की शिक्षा व्यवस्था में कमियों, नीट (NEET) परीक्षा विवाद और छात्रों की आत्महत्या के मामलों को लेकर भारी नाराजगी जताई। हाथों में तख्तियां लिए प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। पन्ना के हर गांव से निकलेंगे सोनम वांगचुक प्रदर्शन के दौरान युवा एडवोकेट सोनेलाल ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि पन्ना का पूरा युवा वर्ग सोनम वांगचुक के साथ खड़ा है। उन्होंने मांग की कि दिल्ली में अनशन पर बैठे वांगचुक की सुरक्षा पक्की की जाए। सोनेलाल ने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो पन्ना के हर घर और गांव से सोनम वांगचुक निकलेंगे। उन्होंने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ रोकने के लिए शिक्षा मंत्री से तुरंत पद छोड़ने की मांग की। समाजवादी पार्टी का मिला पूरा समर्थन आंदोलन की अगुवाई कर रहे समाजवादी पार्टी के पन्ना जिला अध्यक्ष जयराम यादव ने कहा कि सपा युवाओं और सोनम वांगचुक की मांगों का पूरी तरह समर्थन करती है। देश के नौजवानों के अधिकारों के लिए यह लड़ाई लड़ी जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने युवाओं के भविष्य और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए जल्द ही कोई कदम नहीं उठाया, तो इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। गांधी चौक पर हुए इस प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है। अगर छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की आवाज दबाने की कोशिश की गई, तो पन्ना सहित पूरे प्रदेश में चक्का जाम और जेल भरो आंदोलन किया जाएगा।
करौली जिला स्थापना दिवस पर विकास का रोडमैप:शिक्षा-रोजगार से रेल कनेक्टिविटी तक उठीं अहम मांगें
करौली के 29वें जिला स्थापना दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में जिले के समग्र विकास का व्यापक खाका सामने आया। वक्ताओं ने उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी, स्थानीय रोजगार सृजन, रेल कनेक्टिविटी, कृषि, उद्योग, पर्यटन और आधारभूत सुविधाओं जैसे अहम मुद्दों पर ठोस सुझाव दिए। उन्होंने प्रशासन से इन सुझावों को योजनाओं में शामिल कर प्रभावी ढंग से लागू करने की अपील की गई। जिले के विकास पर व्यापक मंथन पंचायत समिति सभागार में आयोजित संगोष्ठी में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लखन सिंह सहित शहर के गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हुए। सभी ने जिले के समग्र विकास को लेकर अपने सुझाव रखे। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ऐसे आयोजनों में आने वाले सुझाव केवल औपचारिकता बनकर न रह जाएं, बल्कि उन्हें योजनाओं का हिस्सा बनाकर जमीन पर उतारा जाए। उच्च शिक्षा के लिए मजबूत संस्थानों की जरूरत आशीष कांत शर्मा ने जिला मुख्यालय पर उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी को बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि राजकीय महाविद्यालय में कई स्नातकोत्तर विषय उपलब्ध नहीं हैं। करौली का इंजीनियरिंग कॉलेज भी भरतपुर से संचालित हो रहा है, जबकि जिला गठन के 29 वर्ष बाद भी विधि महाविद्यालय की स्थापना नहीं हो सकी है। शर्मा ने कहा कि बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं के अभाव में विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। स्थानीय रोजगार बढ़ाने पर जोर भूपेन्द्र भारद्वाज ने कहा कि जिले के विकास के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने औषधीय गुणों वाली फसलों को बढ़ावा देने का सुझाव दिया, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर भी तैयार होंगे। रेल कनेक्टिविटी में तेजी लाने की मांग वेणु गोपाल शर्मा ने करौली को रेल नेटवर्क से जोड़ने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि रेलवे लाइन को स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन परियोजना के कार्यों में तेजी लाकर इसे जल्द पूरा किया जाना चाहिए, ताकि जिले के विकास को नई गति मिल सके। पर्यटन, उद्योग और कृषि में बड़ी संभावनाएं संगोष्ठी में जिले के सैंडस्टोन उद्योग, कृषि, ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक स्थलों और प्राकृतिक पर्यटन की संभावनाओं को रोजगार और आर्थिक विकास से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं का मानना था कि इन क्षेत्रों का सुनियोजित विकास करौली की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। प्रभावी क्रियान्वयन पर रही सबसे बड़ी अपेक्षा वक्ताओं ने प्रशासन से विकास कार्यों की नियमित निगरानी और सुझावों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार संगोष्ठी में आए सुझावों पर गंभीरता से विचार कर उन्हें अमल में लाया जाएगा। संगोष्ठी में चंद्रेश गुप्ता, मदन मोहन स्वामी, राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रफीक अहमद, अमित शर्मा, व्याख्याता राम अवतार मीणा सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
खैरथल-तिजारा के राजकीय कॉलेज में बी.ए. फर्स्ट ईयर के नए स्टूडेंट्स के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) और विभिन्न सह-शैक्षणिक गतिविधियों से परिचित कराना था। उज्जवल भविष्य बनाने का किया आह्लान कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विजय वर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय जीवन व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण काल होता है। प्राचार्य ने विद्यार्थियों से नियमित अध्ययन, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने का आह्वान किया। निरंतर पढ़ाई के लिए किया प्रेरित डॉ. महेश गोठवाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रमुख प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बहुविषयक शिक्षा, कौशल विकास, क्रेडिट बैंक और रोजगारपरक शिक्षा की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। डॉ. जाकिर हुसैन ने विद्यार्थियों को स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। शैक्षणिक अवसरों की जानकारी दी डॉ. सरस्वती मीणा ने अंग्रेजी विषय के महत्व और इसके अध्ययन से मिलने वाले शैक्षणिक एवं व्यावसायिक अवसरों की जानकारी दी। डॉ. राहुल वर्मा ने राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की गतिविधियों का परिचय देते हुए विद्यार्थियों से समाजसेवा और व्यक्तित्व विकास के लिए इससे जुड़ने का आग्रह किया। अनुशासन बनाए रखने का संदेश दिया राजवीर सिंह मीणा ने विद्यार्थियों को अनुशासन बनाए रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपक कुमार ने किया। अंत में, अंगदान और दहेज प्रथा उन्मूलन विषय पर आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया।
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पूर्व शिक्षा मंत्री और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर कोटा में जमकर निशाना साधा। मंत्री दिलावर ने कहा-डोटासरा झूठा और महाभ्रष्ट आदमी है। अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के नाम पर प्रदेश के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ और भ्रष्टाचार किया है। शिक्षा मंत्री शनिवार को कोटा जिले के अलग-अलग स्कूलों में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हुए। अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोलने का झूठा प्रचार किया राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, लखावा में आयोजित नव-निर्मित क्लासरूम के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने राजस्थान भर में अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोलने का झूठा प्रचार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि डोटासरा ने कोई नए अंग्रेजी स्कूल नहीं खोले, बल्कि चल रहे हिंदी माध्यम के स्कूलों पर जबरन अंग्रेजी के बोर्ड लगवा दिए। न तो वहां अंग्रेजी माध्यम के टीचर दिए गए, न ही कोई बुनियादी ढांचा या व्यवस्था की गई। दिलावर ने कहा- इस फैसले से हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों के बच्चों का भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अंग्रेजी भाषा या किसी भी भाषा को सीखने के विरोधी नहीं हैं लेकिन इसके लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा तैयार किया जाना चाहिए था। भ्रष्टाचार साबित हो जाए तो राजनीति छोड़ दूंगा गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा वर्तमान सरकार और शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों पर पलटवार करते हुए दिलावर ने उन्हें खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि डोटासरा ने कहा था कि शिक्षा विभाग में ट्रांसफर के नाम पर भ्रष्टाचार हो रहा है। आप मदन दिलावर पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप साबित कर दें, तो मैं उसी दिन राजनीति छोड़ दूंगा। दिलावर ने कहा कि अगर उनके स्टाफ या विभाग में किसी अन्य के खिलाफ भी भ्रष्टाचार का कोई सबूत सामने आता है, तो वे उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और वे खुद भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करते। टीचर्स ने कहा था-डोटासरा ट्रांसफर के पैसे लेते हैं मदन दिलावर ने डोटासरा पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस राज में खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने टीचरों के एक बड़े सम्मेलन में सरेआम मंच से पूछा था कि 'डोटासरा जी ट्रांसफर के पैसे तो नहीं लेते हैं। तब हॉल में मौजूद हजारों शिक्षकों ने एक सुर में कहा था हाँ, पैसे चलते हैं।' दिलावर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के सामने जनता और टीचरों ने खुद माना था कि डोटासरा के कार्यकाल में किस तरह तबादला उद्योग फल-फूल रहा था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिसके खुद के कार्यकाल पर उनके ही मुख्यमंत्री ने मुहर लगाई हो, वह आज दूसरों के चरित्र पर सवाल उठा रहे हैं।
बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। राज्य में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा का चेहरा पूरी तरह बदलने जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 19 जुलाई को राज्य भर में नवनिर्मित 551 सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) का एक साथ भव्य उद्घाटन करेंगे। इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम का मुख्य आयोजन बेगूसराय जिले से होगा। जहां से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ऑनलाइन(वर्चुअल मोड) माध्यम से इन सभी हाई-टेक स्कूलों का लोकार्पण करेंगे। उद्घाटन के तुरंत बाद ही इन स्कूलों में नियमित रूप से पठन-पाठन और शैक्षणिक गतिविधियां शुरू कर दी जाएगी। 9वीं से 12वीं के छात्रों को सीधा फायदा शिक्षा विभाग के अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य 9वीं से 12वीं में पढ़ रहे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और समग्र शिक्षा उपलब्ध कराना है। इन आदर्श विद्यालयों को इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के बच्चों को भी निजी स्कूलों जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं मिल सके। शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन की ओर से राज्य के सभी DM को निर्देश जारी किए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि बच्चों की पढ़ाई शुरू हो जानी चाहिए। डीएम को निर्देश दिया है कि वे व्यक्तिगत स्तर पर समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी स्कूल में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा कोई काम लंबित नहीं रहे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि 18 जुलाई की शाम तक सभी 551 विद्यालयों में आधारभूत संरचनात्मक और प्रशासनिक तैयारियां 100 प्रतिशत पूरी हो जानी चाहिए। अधिकारियों को आगाह किया गया है कि वे खुद जमीन पर उतरकर इसकी व्यवस्था देखें। जिससे 19 जुलाई को शैक्षणिक गतिविधियों के निर्बाध संचालन में कोई बाधा न आए। इन 9 प्रमुख बिंदुओं पर नजर रखेंगे DM स्कूल का मुख्य भवन, पूरा परिसर और सभी कक्षाएं पूरी तरह तैयार हो। शुद्ध पेयजल, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, साफ-सुथरे शौचालय, स्वच्छता और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था। कार्यालय की व्यवस्था, छात्रों के लिए बेंच-डेस्क और कक्षा संचालन के लिए आवश्यक सभी शिक्षण सामग्री। स्कूलों में कंप्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट और अन्य जरूरी आईटी सुविधाओं की उपलब्धता हो। पूरे परिसर की सघन साफ-सफाई की व्यवस्था रहे। सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन (Fire Safety) उपकरण और अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाएं रहे। सीएम के कार्यक्रम को लाइव देखने के लिए स्कूलों में बड़ी स्क्रीन और ऑडियो-विजुअल का प्रबंध। स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, अभिभावकों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की गरिमामय उपस्थिति। लोकार्पण होते ही तत्काल कक्षाओं का संचालन करना है। समारोह को जन-उत्सव बनाने की तैयारी सरकार ने इस लोकार्पण कार्यक्रम को सिर्फ प्रशासनिक आयोजन न मानकर इसे जन-उत्सव के रूप में मनाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य आम जनमानस में उच्च माध्यमिक शिक्षा के प्रति एक सकारात्मक और भरोसेमंद वातावरण का निर्माण करना है। संबंधित सांसद, विधायक, विधान पार्षद एक-एक आदर्श विद्यालय में उपस्थित होकर ऑनलाइन कार्यक्रम से जुड़ेंगे।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने प्राविधिक शिक्षा विभाग में विभिन्न विषयों के व्याख्याता पदों पर भर्ती का परिणाम शुक्रवार शाम को जारी कर दिया है। कुल 26 रिक्त पदों के लिए आयोजित लिखित परीक्षा में 228 अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिनमें से 67 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए सफल घोषित किया गया है। इस भर्ती का विज्ञापन आयोग द्वारा 15 सितंबर 2021 को जारी किया गया था। इसमें व्याख्याता टेक्सटाइल केमिस्ट्री के तीन पद, टेक्सटाइल इंजीनियरिंग के छह पद, पेंट टेक्नोलॉजी के 11 पद और लेदर टेक्नोलॉजी के छह पद सहित कुल 26 पद शामिल हैं। इन पदों के लिए लिखित परीक्षा 26 नवंबर 2025 को आयोजित की गई थी, जिसके परिणाम अब घोषित किए गए हैं। आयोग के सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी ने बताया कि 228 अभ्यर्थियों में से 67 को 26 पदों के सापेक्ष साक्षात्कार के लिए योग्य पाया गया है। साक्षात्कार कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जल्द ही उपलब्ध कराई जाएगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे नवीनतम अपडेट के लिए आयोग की वेबसाइट http://uppsc.up.nic.in का नियमित रूप से अवलोकन करते रहें।
गाजियाबाद स्थित सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर परिसर में दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान का रजत जयंती समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल के अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल मुख्य अतिथि और भाजपा राजस्थान के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य हरिशचंद्र सिंह जसोल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि किशन सिंह जसोल ने गुरुकुल शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार बताया। विशिष्ट अतिथि हरिशचंद्र सिंह जसोल ने संस्कारयुक्त शिक्षा के विस्तार पर बल दिया। समारोह की अध्यक्षता सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर, जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता और दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष महंत नारायण गिरि महाराज ने की। इस अवसर पर देशभर से आए संत-महात्मा, धर्माचार्य, शिक्षाविद, जनप्रतिनिधि और विशिष्ट अतिथि भी मौजूद रहे। विद्यालय के 25 सालों की यात्रा दिखाईकार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्ज्वलन, मंगलाचरण, राष्ट्रगान और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। दूधेश्वर वेद विद्यालय के छात्रों ने वैदिक परंपरा और भारतीय संस्कृति पर आधारित स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया। एक चलचित्र के माध्यम से स्कूल की स्थापना से लेकर अब तक की 25 वर्षों की यात्रा, प्रमुख उपलब्धियों, वैदिक शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों और समाजसेवा से जुड़े विभिन्न प्रकल्पों का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया गया। समारोह में दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान की रजत जयंती स्मारिका का विधिवत विमोचन भी किया गया। स्मारिका में संस्थान की गौरवपूर्ण यात्रा, वैदिक शिक्षा के विविध आयाम, संतों के प्रेरक संदेश, छात्रों की उपलब्धियां और संस्थान के विकास का विस्तृत विवरण प्रकाशित किया गया है। मुख्य अतिथि किशन सिंह जसोल ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की आत्मा उसकी सनातन संस्कृति, ऋषि परंपरा, वैदिक ज्ञान एवं गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था में निहित है। संस्कारयुक्त शिक्षा से ही श्रेष्ठ नागरिक, सुदृढ़ समाज और समर्थ राष्ट्र का निर्माण संभव है। दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान छात्रों को वेद, शास्त्र एवं संस्कृत के अध्ययन के साथ धर्म, अनुशासन, चरित्र, सेवा, कर्तव्यबोध और राष्ट्रभक्ति के संस्कार प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि परम पूज्य श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने अपने तप, त्याग, दूरदर्शी नेतृत्व एवं सतत पुरुषार्थ से वैदिक शिक्षा के संरक्षण का जो महायज्ञ प्रारम्भ किया, वो आज विशाल स्वरूप प्राप्त कर चुका है। विद्यालय के विद्यार्थी देश-विदेश में भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपरा का गौरव बढ़ा रहे हैं। ऐसे गुरुकुल भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विशिष्ट अतिथि हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि वैदिक शिक्षा भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान में विद्यार्थियों का शैक्षिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक विकास किया जा रहा है। यहाँ प्राप्त ज्ञान और संस्कार विद्यार्थियों को समाज एवं राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि परम पूज्य श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज जैसे तपस्वी, दूरदर्शी एवं राष्ट्रचिंतक संतों के मार्गदर्शन से सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपराएं नई पीढ़ी तक पहुंच रही हैं। दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान ने वैदिक अध्ययन, संस्कृत संवर्धन, गुरुकुल परंपरा एवं भारतीय जीवन मूल्यों के संरक्षण में अनुकरणीय स्थान स्थापित किया है। यह संस्थान आने वाले समय में भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक विस्तार का सशक्त माध्यम बनेगा। समारोह में आचार्य महामंडलेश्वर श्री विश्वेश्वरानन्द गिरि महाराज, कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम महाराज, महामंडलेश्वर चेतना माता, महामण्डलेश्वर स्वामी विद्याचैतन्य महाराज (अंतर्राष्ट्रीय सनातन धर्म संस्थान, नैमिषारण्य), महामंडलेश्वर श्रद्धा माता, जूना अखाड़ा के सचिव एवं दिल्ली संत महामंडल के संगठन मंत्री महंत कंचन गिरि महाराज, दिल्ली संत महामंडल के कोषाध्यक्ष महंत धीरेंद्र पुरी महाराज, सिद्धेश्वर वेद विद्यालय के संस्थापक महंत मुकेशानन्द गिरि महाराज तथा प्रख्यात आध्यात्मिक चिंतक गुरु पवन सिन्हा की गरिमामयी उपस्थिति रही। विशिष्ट अतिथियों में महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन के सचिव प्रो. विरूपाक्ष वी. जड्डीपाल, विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, गाजियाबाद विधायक संजीव शर्मा, शिक्षाविद राम अवतार जिंदल एवं समाजसेवी नवरत्न सोनी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। समारोह को संबोधित करते हुए संतों एवं वक्ताओं ने कहा- परम पूज्य महंत नारायण गिरि महाराज के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान वैदिक शिक्षा, भारतीय संस्कृति, धर्म, संस्कार, नैतिक मूल्यों एवं राष्ट्रभावना का प्रमुख केंद्र बन चुका है। विद्यालय के विद्यार्थी अपने ज्ञान, अनुशासन, आचरण एवं संस्कारों के माध्यम से भारतीय गुरुकुल परंपरा की श्रेष्ठता का परिचय दे रहे हैं। इस अवसर पर धर्म, शिक्षा, साहित्य, मीडिया एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अनेक व्यक्तित्वों को प्रशस्ति-पत्र, स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र एवं पुष्पमालाओं से सम्मानित किया गया। इनमें श्री दूधेश्वर नाथ मठ मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष अनुज गर्ग, विनय संकोची, अजय चोपड़ा, श्रृंगार समिति के अध्यक्ष विजय मित्तल, धर्मेंद्र चौधरी, मंदिर के सोशल मीडिया संयोजक सांवलाराम सुथार, अमित प्रकाश, मीडिया प्रभारी बी.के. शर्मा, अधिवक्ता हर्ष पाण्डेय, लेखा परीक्षक संजीव गुप्ता, नितिन कुमार तथा प्रख्यात कवि राज कौशिक शामिल रहे। समापन अवसर पर परम पूज्य महंत नारायण गिरि महाराज ने देशभर से पधारे संत-महात्माओं, अतिथियों, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों, सहयोगियों, आचार्यगण, विद्यार्थियों, मीडिया प्रतिनिधियों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। रजत जयंती समारोह का समापन वैदिक मंगलकामनाओं, संतों के आशीर्वचनों तथा भारतीय संस्कृति, वैदिक शिक्षा एवं राष्ट्र की उन्नति के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
बांग्लादेशी शिक्षा मंत्री का इस्तीफा क्यों मांगा जा रहा है?
भारत में नीट समेत कई परीक्षाओं के पेपर लीक होने के विरोध में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग के बीच पड़ोसी बांग्लादेश में भी नाराज छात्र शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की, कानून व्यवस्था को बताया विफल
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट दो दिवसीय दौरे पर शुक्रवार को टोंक विधानसभा क्षेत्र पहुंचे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया। कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। मीडिया से बातचीत में पायलट ने राज्य और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने तबादला नीति, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरा। कहा कि बिल्कुल, मुझे लगता है कि प्रतिशोध की भावना से तबादले किए जाते हैं। एक विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए सरकार काम कर रही है। यह बहुत गलत है। कोई नीति, कानून, मापदंड होने चाहिए। किस प्रकार आप ट्रांसफर कर रहे हैं। लेकिन राजनीतिक हित साधने के लिए कर्मचारियों का ट्रांसफर करें। प्रतिशोध की भावना, दुश्मनी की भावना से ट्रांसफर करते हैं। जनता बहुत दिनों तक बर्दाश्त नहीं करती। सरकार सबकी होती है। चुनाव के बाद जिम्मेदारियां होती हैं कि सरकार सबको साथ रखे। कर्मचारियों के साथ इस प्रकार दुश्मनी निकालना बहुत दुखदायी है। पहले ऐसा नहीं होता था। सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। यह बड़े दुख की बात है। पायलट ने कहा कि शिक्षा, चिकित्सा और कानून-व्यवस्था किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारियां होती हैं। राज्य सरकार इन तीनों मोर्चों पर पूरी तरह असफल साबित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल बड़े-बड़े आयोजनों और प्रचार में व्यस्त है। सचिन पायलट का सोहेला मोड़ पर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सऊद सईदी सहित कई पदाधिकारियों ने स्वागत किया। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई : पायलट ने सोनम वांगचुक के जंतर-मंतर पर चल रहे अनशन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। पिछले 19-20 दिनों से सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे हैं। वह देश के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। मुझे लगता है कि सरकार को उनकी मांग को गंभीरता से लेना चाहिए। जिस मुद्दे को लेकर वह अनशन कर रहे हैं, उस मुद्दे के साथ-साथ पूरी शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने की जरूरत है। पेपर लीक हुए। घोटाले हुए। चोरियां पकड़ी गईं। इन सबके विरोध में हमारी पूरी पार्टी ने राहुल गांधी के नेतृत्व में मुहिम छेड़ी है। कुछ दिन पहले कोटा में इस अभियान को शुरू किया था। उसी को लेकर राहुल गांधी उत्तराखंड के देहरादून गए हैं। लाखों-करोड़ों छात्र अपने आप को बड़ा वंचित महसूस करते हैं, जब व्यवस्था में विश्वास खत्म होता है। कोई जवाबदेही किसी की नहीं है। मुझे लगता है कि शिक्षा एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। नौजवान पीढ़ी को भविष्य में आगे ले जाने के लिए यह जरूरी है। इसमें केंद्र सरकार को बिल्कुल भी चिंता नहीं है। न परवाह है। एथेनॉल नीति पर भी उठाए सवाल : एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के मुद्दे पर पायलट ने कहा कि पर्याप्त तकनीकी तैयारी के बिना नीति लागू कर दी गई। वाहन कंपनियों को भी विश्वास में नहीं लिया गया। इससे लोगों के वाहनों के इंजन खराब होने और माइलेज कम होने की शिकायतें बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आगामी मानसून सत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, एथेनॉल नीति और अन्य जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी। पीपलू । पायलट का स्वागत करते कार्यकर्ता।
शिक्षा के साथ संस्कार जरूरी, नशे और मोबाइल पर रखें नजर
भास्कर न्यूज|ब्यावर राजस्थान पेंशन समाज, सेवा यतन ब्यावर मानवाधिकार समिति ब्यावर ने शुक्रवार को कार्यालय में बैठक की। बैठक में विद्यालय में शिक्षा के साथ संस्कार विषय पर चर्चा हुई। सत्यनारायण सांखला ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार देना जरूरी है। छोटू लाल कुमावत, ओम सिंह रावत, सोहनलाल मेघवाल ने कहा कि बढ़ती नशा प्रवृत्ति के कारण बच्चे कई अनैतिक कामों की ओर जा रहे हैं। रोकथाम के लिए संस्कार जरूरी हैं। मोबाइल के दुरुपयोग को रोकने के लिए पेरेंट्स सजग रहें। संस्कार को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जोर दिया। ओमप्रकाश अग्रवाल ने धन्यवाद दिया। बैठक में सत्यनारायण सांखला, ओम सिंह रावत, ओम प्रकाश अग्रवाल, छोटू लाल कुमावत, सोहनलाल मेघवाल, के. एल. बागड़ी, राधेश्याम शर्मा सहित अनेक पेंशनरों ने भाग लिया।
जयपुर में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की ओर से एक स्कूल के निरीक्षण के दौरान महिला शिक्षक का मोबाइल देखने पर सियासी विवाद हो गया। कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री पर महिला शिक्षक के मोबाइल देखने को निजता के अधिकार का हनन बताते हुए सवाल उठाए हैं। उधर, कांग्रेस की आपत्ति पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पलटवार करते हुए दावा किया कि महिला शिक्षक मोबाइल में विभागीय आदेश देखने को मोबाइल चेक करना बताना विपक्ष का दिवालियापन है। बता दें कि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने गुरुवार को जयपुर की तीन स्कूलों का निरीक्षण किया था। इस दौरान महात्मा गांधी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जेदिया कॉलोनी राज भवन में एक महिला शिक्षिका का मोबाइल देखने पर यह विवाद हुआ। शिक्षा मंत्री अपनी नाकामियों की फाइल चैक करें कांग्रेस ने दिलावर पर सवाल उठाते हुए एक्स पर लिखा- शिक्षा मंत्री मानसिक दिवालियापन के शिकार हैं। इसका एक और रूप देखिए। आखिर शिक्षा मंत्री को किसी भी शिक्षिका का मोबाइल चैक करने का अधिकार किसने दिया? ये केवल निजता का सवाल नहीं, बल्कि सम्मान और गरिमा का भी प्रश्न है। कांग्रेस ने आगे लिखा- शिक्षा मंत्री को शिक्षकों के मोबाइल नहीं, अपनी नाकामियों की फाइल चैक करनी चाहिए। असली सच्चाई वहीं मिलेगी। दिलावर बोले- मोबाइल में विभागीय आदेश देख रहा था मदन दिलावर ने एक्स पर कांग्रेस को जवाब देते हुए पलटवार किया। दिलावर ने कांग्रेस के एक्स हैंडल पर जवाब में लिखा- शिक्षिका के मोबाइल में विभागीय आदेश देखने को विपक्ष ने मोबाइल चेक करना बता दिया। यह विपक्ष की राजनीतिक दिवालियापन का प्रमाण है। सत्य को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना विपक्ष की राजनीति हो सकती है, लेकिन इससे तथ्य कभी नहीं बदलते। महिला शिक्षक ने मोबाइल में विभागीय आदेश दिखाए थे दिलावर ने लिखा- विद्यालय निरीक्षण के दौरान शिक्षकों से विभागीय कार्यों, ऑनलाइन पोर्टल, आदेशों, एप और अन्य डिजिटल प्रक्रियाओं की जानकारी लेना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसी क्रम में शिक्षिका ने मोबाइल पर विभागीय आदेश दिखाए थे। इसे शिक्षिका का मोबाइल चेक करना बताकर भ्रामक और तथ्यहीन प्रचार करना केवल जनता को गुमराह करने का प्रयास है। यह किसी भी प्रकार से निजी मोबाइल की जांच, निजता में हस्तक्षेप या सम्मान को ठेस पहुंचाने का मामला नहीं था। शिक्षा में सकारात्मक बदलाव विपक्ष को हजम नहीं हो रहा दिलावर ने लिखा- राजस्थान आज शिक्षा क्षेत्र में निरंतर नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है। विद्यालयों में गुणवत्ता, नवाचार, जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर किए जा रहे प्रयासों की चर्चा पूरे देश में हो रही है। यही सकारात्मक परिवर्तन विपक्ष को असहज कर रहा है। झूठ और भ्रम फैलाकर विकास की गति नहीं रोकी जा सकती। जनता सच्चाई जानती है और शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने के हर प्रयास के साथ मजबूती से खड़ी है।
शिक्षा निदेशालय मिनिस्टीरियल संघ के पदाधिकारियों ने ली शपथ:विकास और कर्मचारी हितों पर दिया जोर
शिक्षा निदेशालय मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ का शपथ ग्रहण समारोह शुक्रवार को प्रयागराज स्थित निदेशालय परिसर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर शहर उत्तरी के विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी, फाफामऊ के विधायक गुरु प्रसाद मौर्य और फूलपुर के विधायक दीपक पटेल ने संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। सभी पदाधिकारियों ने कर्मचारी हित में कार्य करने का संकल्प लिया। समारोह की अध्यक्षता निवर्तमान अध्यक्ष घनश्याम यादव ने की। शपथ ग्रहण के बाद आशुतोष शुक्ल ने अध्यक्ष और सुधीर सिंह यादव ने महामंत्री का पदभार संभाला। उपाध्यक्ष पद पर ध्रुपराज सिंह, दीपक कुमार श्रीवास्तव, अजीत कुमार सिंह (उच्च शिक्षा) और गुलशन सिंह (शिविर कार्यालय) ने शपथ ली। संयुक्त मंत्री पद पर सुल्तान सिंह, नरेन्द्र कुमार सिंह, सम्पूर्णानन्द त्रिपाठी और आशीष कुमार (उच्च शिक्षा) ने शपथ ग्रहण किया। कोषाध्यक्ष पद पर मो. शमसुद्दीन ने शपथ ली, जबकि कार्यकारिणी सदस्य के रूप में मंजीत कुशवाहा, दीपक कुमार, ऐश्वर्या गुप्ता, पल्लवी शर्मा, मनीष देव यादव, अजय कुमार सिंह, बसन्त सिंह, अवधेश कुमार त्रिपाठी और शिशिर श्रीवास्तव ने शपथ ग्रहण किया। इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) कामता राम पाल, अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) मनोज कुमार द्विवेदी और अपर शिक्षा निदेशक (पत्राचार) सीएल चौरसिया भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के भविष्य और कर्मचारियों की मांगों को लेकर सार्थक चर्चा हुई। अतिथियों ने अपने उद्बोधन में इस बात पर जोर दिया कि कर्मचारी संघ और विभागीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय ही शिक्षा व्यवस्था की नींव को मजबूत करेगा। यह नई कार्यकारिणी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से चुनी गई है। संघ के चुनाव 3 जून को प्रयागराज और 4 जून को लखनऊ में मतदान के साथ संपन्न हुए थे। 5 जून को मतगणना के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी दीपक जायसवाल ने परिणामों की विधिवत घोषणा की थी। शुक्रवार के शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही, इस नवनिर्वाचित टीम का विधिवत कार्यकाल प्रारंभ हो गया है, जिससे निदेशालय के कर्मचारियों में अपनी समस्याओं के समाधान के प्रति नई उम्मीदें जगी हैं।
समस्तीपुर में शिक्षक पात्रता परीक्षा(टीईटी) से पूर्व बहाल शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग को लेकर जिला प्राथमिक शिक्षक संघ का एक प्रतिनिधि मंडल केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर से मिला। इसके लिए सांसद को सवाल उठाने की मांग की। मांगों से संबंधित एक ज्ञापन भी उन्हें सौंपा। संघ के अध्यक्ष अनंत कुमार राय एवं प्रधान सचिव अनिल कुमार ने कहा कि नि: शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम,2009 एवं संशोधित अधिनियम,2017 की नियमावली में संशोधन कर टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा)की अनिवार्यता को लागू किया गया है। संघ की ओर से राज्यसभा सांसद एवं केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर को ज्ञापन सौंपा गया है। संघ ने माननीय मंत्री से मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे को संसद में उठाकर केन्द्र सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने का आग्रह किया है। संघ के अध्यक्ष एवं प्रधान सचिव ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के कारण शिक्षा अधिकार अधिनियम,2009(संशोधित 2017) में संशोधन किए जाने से वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षक शिक्षिकाओं पर भी टीईटी की अनिवार्यता लागू होने की स्थिति बन गई है। संघ का कहना है कि यह उन शिक्षकों के साथ अन्याय है जिनकी नियुक्ति तत्कालीन सरकारी नियमों, विज्ञापनों और निर्धारित शर्तों के आधार पर हुई थी। अनेक शिक्षक तीन दशक से अधिक समय से सेवा दे रहे हैं और अब उन पर टीईटी की अनिवार्यता लागू करना न्याय के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत है। ऐसे शिक्षकों ने सालों तक विद्यालयों में अपनी सेवा दी है और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जिला प्राथमिक शिक्षक संघ ने मंत्री से मांग की है कि संसद में इस विषय को प्रमुखता से उठाकर केन्द्र सरकार से आर टी ई नियमावली में आवश्यक संशोधन कराने और साल 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त अथवा शिथिलता प्रदान करने की दिशा में पहल की जाय। दिल्ली में सांसदों के घरों का होगा घेराव संघ के सचिव ने कहा कि अभी ज्ञापन सौंपा गया है कि सरकार इस नियम को बनाए इसके लिए दिल्ली में सभी संसदों के घरों पर घेरा डालो डेरा डालो कार्यकर्म की जल्द शुरूआत की जाएगी। सरकार को हम मजबूर करेंगे कि इसको लेकर सांसद नियम बनाया जाय। जरूर हुई जंतरमंतर भी धरना प्रदर्शन किया जाएगा। जिसमें पूरे देश के नि: शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम,2009 के तहत बहाल शिक्षक शामिल होंगे।
सलूंबर जिले में 'हरियालो राजस्थान अभियान' के प्रभावी क्रियान्वयन और लक्ष्य पूर्ति की समीक्षा के लिए एक बैठक आयोजित की गई। अतिरिक्त जिला कलक्टर डॉ. दिनेश राय सापेला ने जिला कलेक्ट्रेट परिसर स्थित वीसी कक्ष में इसकी अध्यक्षता की। अधिकारी और कर्मचारी हुए शामिल इस बैठक में जिले के सभी उपखंड अधिकारी, तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी और विभिन्न विभागों के जिला एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। बैठक में अभियान की प्रगति, विभागवार पौधारोपण लक्ष्य, जियो-टैगिंग की स्थिति और आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई। पौधारोपण को लेकर दिए निर्देश डॉ. सापेला ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि उन्हें आवंटित लक्ष्य के अनुरूप समयबद्ध तरीके से पौधारोपण कार्य पूरा किया जाए। उन्होंने जोर दिया कि लगाए गए प्रत्येक पौधे का संरक्षण और नियमित निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अतिरिक्त जिला कलक्टर ने कहा कि सभी पौधों की जियो-टैगिंग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए, ताकि अभियान की पारदर्शी निगरानी और वास्तविक प्रगति का आकलन हो सके। उन्होंने उपखंड अधिकारियों को अपने अधीनस्थ अधिकारियों और संबंधित विभागों की नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए। डॉ. सापेला ने जनभागीदारी के साथ अभियान को सफल बनाने के लिए आवश्यक समन्वय स्थापित करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी तालमेल से काम करते हुए अभियान को जिले में प्रभावी बनाएं। शिक्षा विभाग की धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी बैठक में शिक्षा विभाग की धीमी प्रगति पर डॉ. सापेला ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे शीघ्र लक्ष्य प्राप्त करें। सभी सीबीईओ को अपने-अपने क्षेत्र में पौधारोपण कार्य में तेजी लाने और निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरा करने के लिए कहा गया। अतिरिक्त जिला कलक्टर ने सभी विभागों को आगामी पांच दिनों के भीतर पौधारोपण और जियो-टैगिंग की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट जिला प्रशासन को अनिवार्य रूप से भेजने का निर्देश दिया। यह रिपोर्ट अभियान की प्रभावी समीक्षा और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने में सहायक होगी। बैठक में 'हरियालो राजस्थान अभियान' को जनआंदोलन का रूप देने, पौधों के संरक्षण, नियमित निगरानी और विभागीय समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
चूरू में राजस्थान शिक्षक संघ के बैनर तले शुक्रवार को शिक्षकों ने तबादलों के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षकों ने संयुक्त निदेशक कार्यालय के सामने शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका और सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी शिक्षक शहर के इंद्रमणि पार्क में एकत्रित हुए। वहां से उन्होंने संयुक्त निदेशक कार्यालय तक एक आक्रोश रैली निकाली। रैली के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कार्यालय के मुख्य द्वार पर नोकझोंक भी हुई, जिसके बाद शिक्षक सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि स्थानांतरण प्रक्रिया में मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी की गई है। उनका कहना था कि बेहतर कार्य करने वाले शिक्षकों को भी दूर-दराज के क्षेत्रों में भेज दिया गया है, जिससे प्रदेश भर के स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हुई है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को खत्म करने में लगे हैं और उन्होंने आज तक शिक्षक संगठनों से कोई बातचीत नहीं की है। कई स्कूल अब केवल तृतीय श्रेणी शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। शिक्षकों ने मांग की है कि सभी विवादास्पद तबादला आदेशों को तुरंत रद्द किया जाए। इसके साथ ही, सभी संवर्गों के लिए एक स्थायी स्थानांतरण नीति लागू करने और पिछले 8 वर्षों से लंबित तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले तुरंत करने की मांग की गई। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो आगामी 25 अगस्त को बीकानेर स्थित शिक्षा निदेशालय का घेराव कर प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
भगवान बुद्ध की तपोस्थली, भगवान महावीर की निर्वाण स्थली और विश्व प्रसिद्ध नालंदा महाविहार की धरती अब एक नए और आधुनिक युग में प्रवेश करने को तैयार है। बिहार सरकार ने अगले बीस वर्षों के भीतर इस संपूर्ण क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन, शिक्षा और ज्ञान केंद्र बनाने के लिए 'राजगीर रीजनल प्लानिंग एरिया (आरआरपीए) मास्टर प्लान-2045' का विस्तृत मसौदा तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया के तहत नालंदा कलेक्ट्रेट स्थित हरदेव भवन सभागार में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रमंडलीय आयुक्त मयंक वरवड़े ने की। इस बैठक में जन प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय नीति-निर्माताओं ने मास्टर प्लान के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-मंथन किया, ताकि विकास की राह में आने वाली चुनौतियों का समय रहते समाधान निकाला जा सके। सुनियोजित विकास का रोडमैप इस मास्टर प्लान की सबसे बड़ी विशेषता इसका विकेंद्रीकृत विकास मॉडल है, जिसके तहत पांच अलग-अलग नगरों को उनकी विशिष्टता के आधार पर विकसित किया जाएगा। योजना के अनुसार, राजगीर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और संस्थागत हब के रूप में स्थापित किया जाएगा, जबकि नालंदा को विश्व धरोहर और वेलनेस टूरिज्म के मुख्य केंद्र के रूप में संवारा जाएगा। सिलाव को क्षेत्रीय व्यापार और थोक वाणिज्यिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। वहीं, पावापुरी को शिक्षा और उच्च स्तरीय सेवाओं का हब बनाया जाएगा और गिरियक को इको-टूरिज्म के आकर्षण केंद्र के रूप में पहचान दी जाएगी। इस योजना में न केवल ये शहर, बल्कि इनके आसपास के सौ से अधिक गांवों को भी शामिल किया गया है, ताकि पूरे क्षेत्र का समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके। बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण और भविष्य की जरूरतें आने वाले दो दशकों में आबादी के दोगुने होने के अनुमान को देखते हुए, यातायात और सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तृत खाका खींचा गया है। क्षेत्र की प्रमुख सड़कों को 45 मीटर तक चौड़ा करने के साथ ही राजगीर, सिलाव और नालंदा रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प किया जाएगा। यातायात के दबाव को कम करने के लिए ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बाईपास के पास एक नया अंतरराज्यीय बस टर्मिनल और सिलाव में ट्रांसपोर्ट नगर के साथ ट्रक टर्मिनल का निर्माण प्रस्तावित है। साथ ही, राजगीर और पावापुरी जैसे प्रमुख स्थलों पर मल्टीलेवल पार्किंग और आधुनिक ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली लागू की जाएगी। पर्यटकों की सुविधा के लिए ई-बस सेवा, गोल्फ कार्ट और डिजिटल गाइड सिस्टम जैसे नवाचारों को भी योजना का हिस्सा बनाया गया है। स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक विकास पर विशेष जोर आर्थिक प्रगति के लिए इस मास्टर प्लान में पर्यटन के साथ-साथ औद्योगिक विकास को भी प्राथमिकता दी गई है। घोसरावां और सैदी जैसे क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योग, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां और कोल्ड चेन हब स्थापित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 500 और 200 बेड वाले कई अत्याधुनिक अस्पतालों व ट्रॉमा सेंटरों के निर्माण का प्रस्ताव है। वहीं, शिक्षा के क्षेत्र में भी नए अनुसंधान और नवाचार संस्थानों की स्थापना पर ध्यान दिया गया है, ताकि नालंदा विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सके। पर्यावरण संरक्षण और किसानों के हितों का संतुलन विकास की इस दौड़ में प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण को सरकार ने विकास का आधार माना है। कुल भूमि का लगभग 46.7 प्रतिशत हिस्सा कृषि उपयोग के लिए सुरक्षित रखने का प्रस्ताव है, ताकि अनियंत्रित शहरीकरण से खेती की जमीन को बचाया जा सके। आहर-पईन प्रणाली के पुनर्जीवन, भूजल पुनर्भरण और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन के जरिए क्षेत्र को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने की प्रतिबद्धता भी इस योजना में दिखाई गई है। राजगीर वन क्षेत्र और जल स्रोतों को संरक्षित करने के लिए इको-सेंसिटिव जोन में निर्माण कार्यों को कड़े पर्यावरणीय नियमों के दायरे में रखा जाएगा। जनभागीदारी से तैयार होगा अंतिम खाका बैठक के दौरान प्रमंडलीय आयुक्त मयंक वरवड़े ने स्पष्ट किया कि फंडिंग इस योजना की सबसे बड़ी चुनौती है, जिसे देखते हुए अंतिम मसौदे को व्यावहारिक बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों के सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी। सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने मसौदे में हवाई अड्डे के प्रावधान पर जोर दिया, जबकि स्थानीय प्रतिनिधियों ने स्थानीय लोगों की समस्याओं और पहाड़ों से पानी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित न करने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव रखे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अभी एक प्रारूप है और अंतिम अधिसूचना जारी करने से पहले आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों से आपत्तियां व सुझाव मांगे जाएंगे, ताकि एक सर्वमान्य और प्रभावी मास्टर प्लान लागू किया जा सके। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी उदिता सिंह, पुलिस अधीक्षक भारत सोनी समेत जिले के तमाम वरिष्ठ अधिकारी और प्रमुख जन प्रतिनिधि मौजूद रहे।
सांभर लेक में स्कूल शिक्षा परिवार की बैठक हुई। इस बैठक में संगठन को अधिक सक्रिय, सशक्त और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। सर्वसम्मति से सूरजभान डोड़वाड़िया को स्कूल शिक्षा परिवार, सांभर का अध्यक्ष चुना गया। वहीं आशीष खारड़िया को महासचिव और अरुण व्यास को कोषाध्यक्ष मनोनीत किया गया। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का उपस्थित सदस्यों का स्वागत किया। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ शिक्षाविद् राजेश कचावटिया ने की। इस दौरान संगठन के पुनर्गठन, निजी स्कूलों की समस्याओं के समाधान और शिक्षा के क्षेत्र में आपसी समन्वय बढ़ाने सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। सभी सदस्यों ने संगठन की एकता बनाए रखने, शिक्षा के स्तर में सुधार लाने और निजी स्कूलों के हितों की रक्षा के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने संगठन के संविधान, नियमों एवं सर्वसम्मत निर्णयों का पूर्ण पालन करने और सभी सदस्य संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का विश्वास दिलाया। इस अवसर पर यह भी निर्णय लिया गया कि संगठन से जुड़े सभी सदस्य उसके नियमों और निर्णयों का पालन करेंगे। यदि कोई सदस्य संगठन के निर्णयों के विपरीत कार्य करता है, तो उसे संगठन के संरक्षण और सहयोग का लाभ नहीं दिया जाएगा। इस प्रस्ताव पर उपस्थित सभी सदस्यों ने सहमति जताई। बैठक में क्षेत्र के अनेक निजी स्कूलों के संचालकों एवं सदस्यों ने भाग लिया। सभी ने शिक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने, निजी विद्यालयों के सामने आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होकर प्रयास करने तथा संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया। सदस्यों ने विश्वास व्यक्त किया कि नवगठित कार्यकारिणी के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा परिवार, सांभर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, निजी स्कूलों के हितों की प्रभावी पैरवी तथा सदस्य संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएगा।
मांगें पूरी न होने पर भड़के सफाई कर्मचारी:संगरूर में CM मान, शिक्षा मंत्री और विधायक का पुतला फूंका
पंजाब भर में चल रही सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बीच, संगरूर में कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान, शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस और स्थानीय विधायक नरिंदर कौर भराज का पुतला फूंका। वे अपनी मांगों को पूरा न किए जाने से नाराज हैं। यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब शहर में सफाई कर्मचारियों की लगातार हड़ताल के कारण कचरे का ढेर लग गया था। शहर में बढ़ती गंदगी और बदबू के कारण लोगों का गुजरना मुश्किल हो गया था। इसे देखते हुए, प्रशासन ने बीते दिन शहर से कचरा हटाने के लिए निजी कर्मचारियों को काम पर रखा था। इस दौरान सफाई कर्मचारियों और पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई थी। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासन का यह कदम गलत था। कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग उनकी मुख्य मांगें कच्चे कर्मचारियों को स्थायी करना और महंगाई भत्ते (DA) की किश्तें जारी करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कर्मचारियों ने स्थानीय विधायक नरिंदर कौर भराज पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि विधायक बनने से पहले नरिंदर कौर उनके धरनों में शामिल होती थीं और सरकार बनने पर उनकी मांगें पूरी करने का वादा करती थीं। हालांकि, अब वह उनसे मिलना भी पसंद नहीं करतीं और न ही उन्होंने उनकी समस्याओं पर कोई ध्यान दिया है। सफाई कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो वे सड़कों पर कचरा बिखेर देंगे। उन्होंने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप कर उनकी समस्याओं का समाधान करने की अपील की।
शिक्षा के क्षेत्र में पूर्णिया जिले का नवाचार अब पूरे बिहार के लिए एक मॉडल बनने जा रहा है। 'पूर्णिया लाइव क्लासेस' की सफलता को देखते हुए, इसे अब पूरे राज्य में 'बिहार लाइव क्लासेस' के रूप में विस्तारित किया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने गुरुवार को पूर्णिया लाइव क्लासेस का डेमो देखा। इससे प्रभावित होकर मुख्यमंत्री ने इसे 15 अगस्त तक सम्पूर्ण बिहार के सभी स्कूलों में लागू करने का निर्देश दिया है। पहले चरण में पूर्णिया स्थित अत्याधुनिक हब स्टूडियो से लाइव कक्षाओं का प्रसारण पटना जिले के 150 सरकारी विद्यालयों में किया गया। आने वाले समय में इसे राज्य के सभी जिलोंके सरकारी स्कूलों तक पहुंचाने की योजना है। इसका उद्देश्य सरकारीविद्यालयों के विद्यार्थियों को विषय विशेषज्ञ शिक्षकों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। हजारों छात्रों को मिल रही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार ने बताया कि वर्तमान में पूर्णिया के 265 विद्यालय इस व्यवस्था से जुड़े हुए हैं। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से कक्षा 9, 10 और 12वीं के विद्यार्थियों के साथ-साथ आईआईटी (IIT) और नीट (NEET) जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कराई जा रही है। इस पहल का परिणाम वर्ष 2024 की परीक्षाओं में साफ दिखा है। पूर्णिया के छात्रों ने न केवल बोर्ड और इंटर की परीक्षाओं में बिहार टॉपर बनकर जिले का नाम रोशन किया, बल्कि मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में भी उत्कृष्ट सफलता हासिल की है। जिला स्कूल परिसर में नए पुस्तकालय का निर्माण लाइव क्लासेस के निरीक्षण के बाद, जिलाधिकारी ने जिला स्कूल परिसर में निर्माणाधीन पुस्तकालय के कार्यों का जायजा लिया। काम की गति और गुणवत्ता को देखते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए । पुस्तकालय का उद्घाटन आगामी 25 जुलाई 2026 को किया जाएगा । पुस्तकालय में छात्रों के लिए सभी आवश्यक संसाधनों की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें अध्ययन के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
शुभारंभ:खानपुर में ‘शिक्षा सेतु’ निशुल्क कोचिंग शुरू
सामाजिक संस्था मातृ शक्ति की ओर से संचालित ‘शिक्षा सेतु’ निशुल्क कोचिंग का शुभारंभ गुरुवार शाम गोवर्धननाथ मंदिर हॉल में हुआ। मुख्य अतिथि एसडीएम रजत कुमार विजयवर्गीय ने उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा देने की पहल सराहनीय है। प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग देने की बात भी कही गई। विशिष्ट अतिथि शकुंतला उपाध्याय ने संस्था के सामाजिक कार्यों का उल्लेख करते हुए कोचिंग के संचालन में सहयोग का भरोसा दिलाया। गायत्री शक्तिपीठ की मुख्य ट्रस्टी हेमा गोयल ने कहा कि यह पहल जरूरतमंद बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मविश्वास देगी। संस्था के अनुसार कोचिंग शुक्रवार से नियमित रूप से चलेगी। अभी तक करीब 36 विद्यार्थियों का पंजीयन हो चुका है। छह शिक्षित महिलाएं निशुल्क अध्यापन करेंगी। कार्यक्रम में विद्यार्थी, अभिभावक और नगर के नागरिक मौजूद रहे।
उच्च शिक्षा विभाग:यूजी-पीजी में प्रवेश 31 जुलाई तक ले सकेंगे
हरदा | उच्च शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए द्वितीय चरण की कॉलेज लेवल काउंसलिंग (सीएलसी) की अंतिम तारीख बढ़ा दी है। अब विद्यार्थी प्रदेश के शासकीय, अनुदान प्राप्त अशासकीय, अशासकीय महाविद्यालयों में यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों में 31 जुलाई तक प्रवेश ले सकेंगे। वहीं प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित अन्य सभी नियम, शर्तें और दिशा-निर्देश पूर्ववत लागू रहेंगे।
शिक्षा विभाग में 19395 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मनचाहे स्थान पर पोस्टिंग मिलेगी। उन्हें पोस्टिंग के लिए नेताओं के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। विभाग की ओर से काउंसलिंग के जरिए इनको पोस्टिंग मिलेगी। काउंसलिंग के दौरान वे इच्छित स्कूल का चयन कर सकेंगे। विभाग उन्हें उसी स्कूल में पोस्टिंग देगा। अन्य विभागों में काउंसलिंग का सिस्टम नहीं है। इसलिए वहां मनचाही पोस्टिंग के लिए चयनितों को नेताओं के चक्कर काटने पड़ेंगे। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती से विभाग को 19395 चयनित आवंटित हुए हैं। इनमें से 16411 नॉन टीएसपी के है और 2984 टीएसपी के हैं। काउंसलिंग से पहले विभाग इनको मेरिट के आधार पर जिला आवंटन करेगा। जिला आवंटन के लिए चयनितों से जिले का विकल्प मांगा गया है। चयनित अभ्यर्थी 17 से 21 जुलाई तक अॉनलाइन जिले का विकल्प भर सकेंगे। विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जिला आवंटन के लिए शाला दर्पण पोर्टल के जरिए अॉनलाइन विकल्प भरा जा सकता है। अभ्यर्थी प्राथमिकता के आधार पर जिले का चयन कर सकेंगे। अगर कोई चयनित जिले का विकल्प नहीं भरता है तो विभाग उसको जिला आवंटन के लिए स्वतंत्र रहेगा। जिला विकल्प भरते समय चयनित के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी जाएगा। अगर ओटीपी नहीं जाता है तो अभ्यर्थी माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को एक प्रार्थना पत्र व स्वहस्ताक्षरित आधार कार्ड का छाया प्रति विभाग की ओर से जारी की गई मेलआईडी पर भिजवानी पड़ेगी। विकल्प भरने की अंतिम तिथि के दो दिन के भीतर चयनितों को जिला आवंटन कर दिया जाएगा। आवंटित जिले में काउंसलिंग के जरिए पोस्टिंग दी जाएगी। निदेशक सीताराम जाट के अनुसार विभाग सभी जिलों में 31 जुलाई तक नियुक्ति आदेश जारी कर देगा। यह है टाइम फ्रेम यह होती है काउंसलिंग प्रक्रिया काउंसलिंग की प्रक्रिया में चयनितों को स्कूलों के खाली पद बताए जाते हैं। उन्हीं से पूछा जाता है कि इनमें से वे कहां पोस्टिंग चाहते हैं। वे जिस स्कूल का चयन करते हैं। उसी में उसको पोस्टिंग दी जाती है। काउंसलिंग में जितने चयनितों को पोस्टिंग दी जाएगी। उससे अधिक स्कूलों के खाली पद दर्शाए जाते हैं। मेरिट के आधार पर चयनितों को स्कूल चयन के लिए बुुलाया जाता है। सबसे पहले विधवा, परित्यक्ता, दिव्यांगों को वरियता दी जाती है। फिर महिला अभ्यर्थी और अंत में पुरुष अभ्यर्थियों को मेरिट के आधार पर बुलाया जाता है। इस व्यवस्था में चयनित खुद मेरिट के आधार पर स्कूल का चयन करते हैं। उन्हें किसी की सिफारिश कराने की जरूरत नहीं पड़ती।
कटिहार के जिला अस्पताल स्थित सभागार में गुरुवार को किशोर शिक्षा एवं किशोर स्वास्थ्य विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. एस सरकार ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस प्रशिक्षण का आयोजन डीपीएम-डीएपीसीयू, कटिहार के सहयोग से किया गया था। YRGCARE/बीएससी पटना के टेक्निकल एक्सपर्ट अजय कुमार बरनवाल ने मुख्य प्रशिक्षक के रूप में शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया। इस कार्यक्रम में दो बैचों में कुल 130 शिक्षकों ने भाग लिया, जिसमें प्रत्येक बैच में 65 प्रतिभागी शामिल थे। प्रशिक्षण के दौरान किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक परिवर्तनों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि किशोरों के समग्र विकास के लिए सही मार्गदर्शन, सकारात्मक संवाद और वैज्ञानिक एवं आयु-उपयुक्त जानकारी अत्यंत आवश्यक है। अजय कुमार बरनवाल ने इस अवसर पर कहा कि विद्यालयों में शिक्षक केवल शिक्षा देने का कार्य नहीं करते, बल्कि किशोरों के विश्वासपात्र मार्गदर्शक भी होते हैं। उन्होंने जोर दिया कि यदि शिक्षक किशोर स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति जागरूक होंगे, तो वे विद्यार्थियों को सही दिशा दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागी शिक्षकों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। जिला स्वास्थ्य समिति ने जानकारी दी कि किशोरों को विद्यालय स्तर पर ही सही जानकारी और सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से इस तरह के प्रशिक्षण आगे भी आयोजित किए जाएंगे।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा - गोविंद सिंह डोटासरा जब शिक्षा मंत्री थे, तब ट्रांसफर में पैसे चलते थे। उस समय के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने डोटासरा की मौजूदगी में शिक्षकों से पूछा था कि क्या तबादलों में पैसे लिए जा रहे हैं, तो शिक्षकों ने खड़े होकर जोर-जोर से कहा था कि हाँ, भ्रष्टाचार हो रहा है। इसलिए जो व्यक्ति जैसा होता है, वैसा ही दूसरों के बारे में सोचता है। उन्होंने सोचा होगा कि उनके समय पैसे लिए जा रहे थे तो बीजेपी में भी लिए जा रहे होंगे। लेकिन हमारे यहाँ ऐसा नहीं है, हमारे यहाँ ट्रांसपेरेंसी (पारदर्शिता) है। जरूरतमंद व्यक्ति का काम किया जा रहा है, सबके काम नहीं हो पा रहे हैं, यह बात बिल्कुल सही है। लेकिन हमारी यथासंभव कोशिश रहती है कि अध्यापकों को संतुष्ट किया जा सके। मदन राठौड़ ने आज ये बातें प्रदेश बीजेपी कार्यालय में कहीं। मदन राठौड़ ने कहा- हम संविधान के रक्षक हैं, हमारे यहां विधिवत आम आदमी के मौलिक अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाता है। कानून-व्यवस्था मजबूत है और विकास हो रहा है। हमारी स्थिति कांग्रेस की तरह नहीं है। हम बहुत मजबूत स्थिति में हैं और व्यवस्थित तरीके से सरकार चला रहे हैं। उनके समय में जो टांग-खिंचाई होती थी, वैसी हमारे यहाँ नहीं है। डोटासरा भी आरएसएस जॉइन कर सकते हैं मदन राठौड़ ने कहा कि डोटासरा आरएसएस और बीजेपी के बारे में क्या जानें, आरएसएस एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है, जो राष्ट्रीय चरित्रयुक्त नागरिक तैयार करता है। उन्होंने कहा कि डोटासरा चाहें तो आरएसएस जॉइन कर सकते हैं। वे एक बार आरएसएस जाएं और देखें कि वहाँ क्या काम होता है। महात्मा गांधी भी आरएसएस के कार्यक्रम में गए थे और उन्होंने वहाँ जाकर आरएसएस की तारीफ की थी। पंचायत-निकाय चुनाव को लेकर मदन राठौड़ ने कहा कि हम पूरी तरह से चुनाव के लिए तैयार हैं। हम कोर्ट की अवमानना नहीं करते हैं, कोर्ट का सम्मान करना अपना कर्तव्य समझते हैं। हमें चुनाव से भागने की ज़रूरत नहीं है। जो लोग ऐसा कह रहे हैं, वे अब तक हुए उपचुनावों के परिणामों को देख लें; बीजेपी ने अब तक हुए उपचुनावों में 85 प्रतिशत सीटों पर जीत दर्ज की है।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर से शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाने की मांग रख कर युवाओं के अंदर उम्मीद की नई किरण जगा दी है। गुरुवार को उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनके संघर्ष का समर्थन किया। उन्होंने पीएम मोदी से कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाया जाए। लेकिन पीएम मोदी ऐसा करेंगे नहीं, क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं सोनम वांगचुक शिक्षा में कोई क्रांति न ला दें। देश की सड़ चुकी शिक्षा व्यवस्था को एक क्रांतिकारी कदम ही ठीक कर सकता है। इसलिए देश को सोनम वांगचुक जैसा एक क्रांतिकारी शिक्षा मंत्री के साथ ही क्रांतिकारी कदम दोनों की जरूरत है। इस दौरान सांसद संजय सिंह समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। 'टीचर्स को तरह-तरह से टॉर्चर किया गया' अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए पूरे देश के युवा जो कॉकरोच आंदोलन के बैनर तले इकट्ठे हुए हैं, मैं उन सब लोगों को सलाम करता हूं। मैं सोनम वांगचुक को सलाम करता हूं जो अपने लिए नहीं, बल्कि युवाओं और हमारे देश के बच्चों के लिए अपनी जान दांव पर लगाकर पिछले 19 दिन से अनशन कर रहे हैं। अरविंद केजरीवाल ने बताया कि हमारे देश में ऐसे बहुत सारे टीचर्स हैं जिन्होंने पेपर लीक के खिलाफ अपने-अपने शहर से आवाज उठाई, लेकिन उनको गिरफ्तार कर लिया गया। उन टीचर्स को तरह-तरह से टॉर्चर किया गया और उनके खिलाफ एफआईआर की गई, मैं उन सब लोगों को भी सलाम करता हूं। सोनम वांगचुक एक बहुत बड़े शिक्षाविद् हैं। उन्होंने पहले भी लद्दाख और देश के लिए कई बार अनशन किए हैं और आज उन्होंने देश के लिए अपनी जान दांव पर लगाई हुई है। 'अपनी बुद्धिमत्ता के बल पर अपना भविष्य बनाएंगे' अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जब कोई बच्चा कॉम्पिटिटिव एग्जाम देने जाता है तो वह सिर्फ एक एग्जाम नहीं, बल्कि उसके लिए एक सपना होता है। जब वह एग्जामिनेशन हॉल में घुसता है तो उसे विश्वास होता है कि मैं अपनी मेहनत और अपनी बुद्धिमत्ता के बल पर अपना भविष्य बनाऊंगा। मैंने भी आईआईटी के पेपर दिए थे और उसमें सफल होकर आईआईटी गया था, लेकिन उन दिनों पेपर लीक नहीं होते थे। अगर उन दिनों पेपर लीक हो रहे होते तो शायद मेरा आईआईटी देने का विश्वास ही नहीं बनता। मेरे दोनों बच्चे भी आईआईटी से हैं और उनके समय पर भी पेपर लीक नहीं होते थे। 'बच्चों का यह लड़खड़ाता हुआ आत्म विश्वास सही नहीं है' अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले कुछ सालों से जिस तरह से देश में पेपर लीक होने लगे हैं, उससे बच्चे का वह आत्म विश्वास लड़खड़ाने लगा है कि अगर वह मेहनत करेगा और इंटेलिजेंट है तो अमीरों के बच्चों को भी पीछे छोड़ देगा। आज बच्चों का यह लड़खड़ाता हुआ आत्म विश्वास सही नहीं है और देश के लिए बहुत खतरनाक बात है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अब हर साल पेपर लीक हो रहे हैं। साल 2024 में जो पेपर लीक हुआ था, सरकार ने उसके मास्टरमाइंड को बेल दिला दी। अब यह एक सिस्टम बन गया है कि हर साल पेपर लीक होते हैं, कमेटी बैठती हैं, जांच होती है, एफआईआर होती है, गिरफ्तारी होती है, बेल हो जाती है और अगले साल के पेपर लीक होने की फिर तैयारी शुरू हो जाती है। देश का युवा और ये बच्चे इसे कब तक बर्दाश्त करेंगे? 'जो बच्चे सुसाइड कर रहे हैं वे हमारे घरों के बच्चे थे' अरविंद केजरीवाल ने कहा कि नीट पेपर लीक के बाद 20 से ज्यादा बच्चों ने सुसाइड कर लिया, लेकिन सरकार को कोई अक्ल नहीं आई। इनके कान पर जूं तक नहीं रेंगती, चाहे जितने बच्चे सुसाइड कर लें। जो बच्चे सुसाइड कर रहे हैं वे हमारे घरों के बच्चे थे, लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया। सीबीएसई में पूरा इवैल्यूएशन सिस्टम गड़बड़ा गया, गिरफ्तार करना तो दूर की बात है, सरकार ने जिम्मेदार कंपनी के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं की। इतने बड़े स्तर पर पूरे देश में आंदोलन चल रहा है, फिर भी सरकार ने कोई ऐसा सिस्टम में बदलाव नहीं किया, जिससे अगले साल पेपर लीक न हों। अगले साल फिर पेपर लीक होंगे और हमारे बच्चे फिर मरेंगे, फिर आत्महत्या करेंगे। यह सिस्टम कब बदलेगा? इस सिस्टम को बदलना ही पड़ेगा। 'युवाओं के कॉकरोच आंदोलन और सोनम वांगचुक की बात सुन ले सरकार' अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यही जंतर-मंतर था, 4 अप्रैल 2011 का दिन था और यहीं अन्ना हजारे बैठे हुए थे। उस वक्त की सरकार को भी बड़ा अहंकार था, लेकिन तीन साल के बाद वह सरकार अपने अहंकार की वजह से नहीं बची और डूब गई। आज 2026 है और मैं सरकार को कहना चाहता हूं कि वह युवाओं के कॉकरोच आंदोलन और सोनम वांगचुक की बात सुन ले, नहीं तो आज से तीन साल बाद उनका भी यही हश्र होगा, जो 2014 में उस अहंकारी सरकार का हुआ था। इस सरकार को अक्ल नहीं आ रही है और ये भी बहुत ज्यादा अहंकार में डूबे हुए हैं। 'सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाना चाहिए' अरविंद केजरीवाल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को तो इस्तीफा देना ही चाहिए, लेकिन सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाना चाहिए। मैं पीएम मोदी जी से कहना चाहता हूं कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाओ और सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाओ। मुझे पता है कि पीएम मोदी सुनने वाले नहीं हैं। पीएम मोदी सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री नहीं बनाएंगे, क्योंकि उन्हें डर लगता है कि कहीं सोनम वांगचुक कोई क्रांतिकारी चीज न कर दे। आज शिक्षा व्यवस्था जितनी खराब हो गई है, उसे ठीक करने के लिए हमें क्रांतिकारी कदम ही चाहिए। बिना क्रांति के शिक्षा व्यवस्था ठीक नहीं होने वाली है। इसके लिए हमें सोनम वांगचुक जैसा एक क्रांतिकारी शिक्षा मंत्री और क्रांतिकारी कदम दोनों की जरूरत है। उन्होंने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि 20 जुलाई को ज्यादा से ज्यादा संख्या में जंतर-मंतर आना है और शांतिपूर्ण संसद मार्च को सफल बनाना है। संजय सिंह ने लोगों से की जंतर-मंतर आने की अपील इस दौरान “आप” के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह श्दिनकर’ की पंक्तियों ‘समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध, जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध’ का जिक्र करते हुए घरों में बैठे लोगों से अपील की कि वे बाहर निकलकर जंतर-मंतर पहुंचें। लोगों को सोनम वांगचुक की आवाज में आवाज मिलाकर भारत सरकार और नरेंद्र मोदी को झुकने के लिए मजबूर करना है। संजय सिंह ने आगे कहा कि मोदी जी से बड़ा नौटंकीबाज पूरी दुनिया में कोई नहीं मिलेगा। जब देश में कोरोना आया और नोटबंदी में लोग मर गए, तब वे रोने लगे। देश के पीएम मोदी दिन-रात सिर्फ झूठ बोलने का काम करते हैं। इसलिए मैं यकीन दिलाकर जा रहा हूं कि 20 जुलाई से संसद के अंदर सभी साथी सांसदों से बात करके हम लोग युवाओं के लिए लड़ाई लड़ने का काम करेंगे। 20 जुलाई को सोनम वांगचुक के आह्वान पर मैं भी एक कार्यकर्ता और साथी के रूप में इस आंदोलन में शामिल होने के लिए जंतर-मंतर आऊंगा और हमारे अन्य साथी भी यहां पहुंचेंगे। आंदोलन को हर तरीके से अपना समर्थन देंगे- संजय संजय सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने भरोसा दिलाया है कि हम इस आंदोलन को हर तरीके से अपना समर्थन देंगे। हम अन्य राजनीतिक दलों और जन आंदोलनों से भी इस आंदोलन को समर्थन देने की अपील करते हैं, क्योंकि सोनम वांगचुक कोई अपनी निजी लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि देश के करोड़ों नौजवानों, हिंदुस्तान के भविष्य और आने वाले कल की लड़ाई लड़ रहे हैं।
बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल ने गुरुवार को कटिहार समाहरणालय के सामने वित्त रहित शिक्षा नीति के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान वित्त रहित डिग्री कॉलेज, इंटर कॉलेज सहित अन्य शिक्षण संस्थानों के समायोजन की मांग उठाई गई। कार्यक्रम का संचालन जुनैद खान ने किया। शिक्षकों के हितों की रक्षा की उठाई मांग धरने को संबोधित करते हुए बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के मुख्य संगठन डॉ. संजय यादव ने कहा कि वित्त रहित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी वर्षों से आर्थिक उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त करने, संस्थानों का समायोजन करने तथा शिक्षकों और कर्मचारियों को नियमित वेतनमान, सेवा सुरक्षा, पेंशन एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। कांग्रेस नेताओं और शिक्षकों की रही मौजूदगी धरना-प्रदर्शन में जिला कांग्रेस अध्यक्ष संजय कुमार सिंह, नगर अध्यक्ष पुतुल सिंह, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रो. विनोद यादव, अफरोज खान, संजय कुमार, सुतापा भदुरी, लक्ष्मी कुमारी, अहमद राजा खान सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी और समर्थक शामिल हुए। राज्य सरकार के नाम सौंपा ज्ञापन धरना समाप्त होने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त करने, वित्त रहित शिक्षण संस्थानों के समायोजन तथा शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की लंबित मांगों पर शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की गई।
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ सहायक संचालक पूनम तिवारी चैन स्नैचिंग का शिकार हो गईं। थाने के सामने बाइक सवार दो बदमाशों ने उनके गले से करीब 3 तोला वजनी सोने की चैन झपट ली और फरार हो गए। चैन की कीमत करीब 4 लाख रुपए आंकी गई है। पूरी वारदात पास में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई, जिसमें बदमाश वारदात को अंजाम देकर भागते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि सहायक संचालक पूनम तिवारी लंच के बाद घर से दफ्तर जा रही थीं, तभी वे चैन स्नैचिंग का शिकार हो गईं। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है। स्कूटी खड़ी करते ही बदमाशों ने झपटी चैन जानकारी के अनुसार, पूनम तिवारी गुरुवार दोपहर में लंच के लिए घर गई थीं। दोपहर करीब 2:45 से 3 बजे के बीच वे स्कूटी से वापस जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचीं। स्कूटी खड़ी करने के बाद जैसे ही वे पैदल कार्यालय की ओर बढ़ीं, तभी बाइक सवार दो युवक उनके पास पहुंचे। बदमाशों ने बाइक की रफ्तार धीमी की और उनके गले से सोने की चैन झपटकर फरार हो गए। वारदात इतनी तेजी से हुई कि पूनम तिवारी कुछ समझ पातीं, उससे पहले ही दोनों आरोपी गुरुनानक चौक की ओर भाग निकले। थाने के सामने वारदात घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कोतवाली थाना और सीएसपी कार्यालय के सामने स्थित है। ऐसे में थाने के सामने दिनदहाड़े हुई चैन स्नैचिंग की घटना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। CCTV खंगाल रही पुलिस पुलिस ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में हेलमेट पहने बाइक सवार बदमाश चैन छीनकर फरार होते नजर आए। साइबर सेल की मदद से शहर के अन्य कैमरों की भी जांच की गई। कुछ स्थानों पर संदिग्ध नकाबपोश युवकों की तस्वीरें मिली हैं। पुलिस उनकी पहचान कर आरोपियों की तलाश में जुटी है। कीमत करीब 4 लाख पूनम तिवारी के पति और शिक्षक मनोज तिवारी ने बताया कि उन्होंने सोने की चैन का बिल पुलिस को सौंप दिया है और मामले की शिकायत भी दर्ज करा दी गई है। उनके अनुसार, चैन करीब 3 तोले की थी, जिसकी वर्तमान कीमत लगभग 4 लाख रुपए है। पुलिस बोली- आरोपियों की तलाश जारी इस मामले में कोतवाली थाना पुलिस ने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। जल्द ही पुलिस दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लेगी। …………………… क्राइम से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… गोलबाजार में मासूम के गले से चेन चोरी... VIDEO: मां की गोद में थी बच्ची, CCTV में कैद हुई संदिग्ध महिला; तलाश में जुटी पुलिस राजधानी रायपुर के सबसे व्यस्त बाजारों में शामिल गोलबाजार में चेन स्नेचिंग की चौंकाने वाली घटना सामने आई है। खरीदारी करने पहुंची एक महिला पत्रकार की मासूम बेटी के गले से एक अज्ञात महिला ने सोने की चेन चोरी कर ली। पूरी वारदात बाजार में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसके आधार पर पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी हुई है। पढ़ें पूरी खबर…
डिंडौरी के चंद्र विजय कॉलेज में भारतीय शिक्षा दिवस के अवसर पर 'आत्मनिर्भर भारत में युवाओं की भूमिका' विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने युवाओं को कौशल विकास और नवाचार से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। अतिरिक्त संचालक बोले- रोजगार देने वाले बनें युवा मुख्य अतिथि और जबलपुर संभाग के उच्च शिक्षा अतिरिक्त संचालक डॉ. अल्केश चतुर्वेदी ने कहा कि आत्मनिर्भरता का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब देश के युवा नौकरी मांगने के बजाय रोजगार देने वाले बनेंगे। उन्होंने छात्रों से स्टार्टअप संस्कृति को अपनाने की अपील की। नई शिक्षा नीति है मजबूत नींव मुख्य वक्ता डॉ. नीलेश पाण्डेय ने नई शिक्षा नीति को आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बताया। उन्होंने कहा कि यह नीति युवाओं को कौशल और उद्यमिता से जोड़ती है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय मूल्यों के साथ राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाने का आग्रह किया। स्वावलंबी युवा तैयार करना लक्ष्य कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ए.एस. उददे ने कहा कि महाविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि ऐसे युवाओं को तैयार करना है जो स्वावलंबी हों और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
राजस्थान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार पर कई मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री के करीबी तबादलों के नाम पर पैसे की वसूली कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जो बातें कही हैं, वे सही हैं। डोटासरा ने बेनीवाल समर्थकों पर मुकदमे दर्ज करने के तरीके पर भी सवाल उठाते हुए इसे गलत बताया और सरकार से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। डोटासरा जयपुर में कांग्रेस ओबीसी विभाग के सम्मेलन के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। डोटासरा ने शिक्षा विभाग में हुए तबादलों में भ्रष्टाचार का लगाया आरोप डोटासरा ने शिक्षा विभाग में हुए तबादलों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और सरकार पर निशाना साधा है। डोटासरा ने कहा- तबादलों में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। शिक्षा विभाग का हाल सबसे खराब है, शिक्षा मंत्री के नजदीकी लोग तबादलों में जमकर वसूली में लगे हैं। शिक्षक तबादलों में जमकर पैसा लिया गया है। सरकार में हिम्मत है तो शिक्षा मंत्री के पीए, पीएसओ के नजदीक रहने वालों के फोन टैप करवाकर देख लीजिए पता लग जाएगा। डोटासरा ने कहा- शिक्षा मंत्री के दलाल बने हुए हैं, वे ट्रांसफर में लूट रहे हैं। स्कूल बर्बाद हो रही हैं। तबादला उद्योग में आरएसएस तांडव नृत्य कर रहा है। पैसे ले लेकर भ्रष्टाचार चल रहा है इससे बड़ा दुर्भाग्य कुछ नहीं हो सकता। समसा में इंटरव्यू की पोस्टों में पैसा लेकर पोस्टिंग दी जा रही है। मंत्री के इर्द गिर्द के लोग खुलेआम पैसे ले रहे हैं। भ्रष्टाचार का खुला नाच हो रहा है,कोई सुनने पूछने वाला नहीं है। बीजेपी के विधायक तक रो रहे हैं। वसुंधरा राजे दुखी आत्मा, उन्होंने ने कल अच्छी बातें कहीं पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के राजनीति से सामाकि रिश्तों को अलग रखने के बयान पर डोटासरा ने कहा- वसुंधराजी दुखी आत्मा हैं, दुखी आत्मा से जो निकलता है, वो सच निकलता है। कल उन्होंने राजेंद्र राठौड़ और सीएम की तरफ देखा, उनकी क्या बात चुभ गई? उनके खिलाफ कौन षडयत्र कर रहा है, लेकिन वसुंधरा राजे ने कल जो कहा वे अच्छी बाते हैं। हमें राजनीति में इतना भी वैर भाव नहीं रखना चाहिए कि हम आंख भी नहीं मिला सकें। मेरे परिवार और रिश्तेदार कर्मचारियों का बांसवाड़ा-बाड़मेर किया ट्रांसफर डोटासरा ने कहा- पूर्व विधायक पंडित रामकिशन शर्मा ने भी कल सही कहा कि पहले विरोध में बोलकर भी साथ बैठकर चाय पीते थे, लेकिन आजकल तो एक्सीडेंट करवा दें। आजकल तो मैंने मुख्यमंत्री के खिलाफ कुछ बोल दिया तो मेरे सभी पहचान वालों और रिश्तेदारों तक सबके ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि तबादलों से मैं झुकने वाला नहीं हूं। 2028 में इनका नाम लेने वाला बच जाए तो मुझे बता देना। बेनीवाल के लोगों के खिलाफ रंजिश निकालने दर्ज किए जा रहे मुकदमे डोटासरा ने कहा- विपक्ष की आवाज को आप दबाना चाहते हैं। विपक्ष के लोगों को परेशान करो,उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर दो, बताइए यह कौनसा तरीका है? आज हनुमान बेनीवाल और उनके लोगों पर कितने मुकदमे दर्ज करवा दिए? बेनीवाल मेरे लिए अच्छा बोले ना बोले कोई फर्क नहीं पड़ता। बेनीवाल ने दो साल पहले भी कहीं आंदोलन किया तो दो साल बाद भी आज उनके खिलाफ और उनके लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। अगर बेनीवान का नाम लिखा हुआ गाड़ी पर मिल गया तो उनको भी अंदर डाल दो, यह कौन सी राजनीति है ? इनको पता है कि कांग्रेस पार्टी बदले की राजनीति नहीं करती इसका ये नाजायज फायदा उठाते हैं।
लखीसराय जिले के बरियारपुर से घोंघी-कोडाशी को जोड़ने वाली मुख्य सड़क बंद होने से क्षेत्र के कई गांवों का जनजीवन प्रभावित हो गया है। कजरा सोलर पावर प्लांट के निर्माण कार्य के दौरान यह मार्ग बंद किया गया है। बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने इसके विरोध में प्रदर्शन किया और प्रशासन से सड़क को तत्काल चालू करने या वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की। 2 दिन पहले डीएम को लिखित आवेदन दिया ग्रामीणों को जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार के क्षेत्र में आने की सूचना मिली, वे बंद सड़क पर एकत्र होकर विरोध-प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि उन्होंने दो दिन पहले भी जिलाधिकारी को लिखित आवेदन देकर समस्या से अवगत कराया था, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क बंद होने से घोंघी-कोडाशी सहित आसपास के कई गांवों का संपर्क बाधित हो गया है। इससे लोगों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे उन्हें भारी असुविधा हो रही है। सड़क बंद होने स्कूली बच्चों को दिक्कत ग्रामीण धेना सोरेन ने बताया कि यह मार्ग गांव तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता था। सड़क बंद होने के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो सकती है, जिससे आपात स्थिति में गंभीर परेशानी उत्पन्न होने की आशंका है। सोरेन ने यह भी कहा कि स्कूली बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है, क्योंकि विद्यालय तक पहुंचना कठिन हो गया है। स्थानीय महिला मतिया देवी ने बताया कि बरियारपुर स्थित विद्यालय जाने का यही मुख्य मार्ग था, और इसके बंद होने से छात्र-छात्राओं की नियमित उपस्थिति प्रभावित हो रही है। दैनिक आवागमन में लोगों को परेशानी मतिया देवी ने बताया कि बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दैनिक आवागमन करने वाले लोगों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आंगनबाड़ी सेविका संजू कुमारी ने जानकारी दी कि सड़क बाधित होने के कारण सोमवार से आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन प्रभावित है, जिससे बच्चों का पोषण और प्रारंभिक शिक्षा संबंधी गतिविधियां रुक गई हैं। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि विकास परियोजनाओं के साथ आम लोगों की मूलभूत सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र सड़क चालू नहीं की गई या वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
पंजाब को हर क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज होशियारपुर के मुकेरियां में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। सीएम मान ने साफ शब्दों में कहा कि उनका लक्ष्य सत्ता का सुख भोगना नहीं, बल्कि पंजाब के लोगों के जीवन में खुशहाली लाना है। जनता के भारी जनसमर्थन के बीच उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और समाज कल्याण के क्षेत्र में किए गए हर वादे को ज़मीनी स्तर पर सच कर दिखाया है। विरोधी दलों पर बोला तीखा हमला मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल पर जमकर राजनीतिक तीर चलाए। उन्होंने विपक्षी दलों की अंदरूनी कलह और उनके पिछले शासनकाल पर सवाल खड़े किए: कांग्रेस की अंतर्कलह पर तंज: कांग्रेस केवल सत्ता की मलाई चाटने के लिए लड़ रही है। इनके नेता एक-दूसरे के साथ खड़े होने को तैयार नहीं हैं क्योंकि हर किसी को सिर्फ सीएम की कुर्सी चाहिए। राहुल गांधी जिस बस यात्रा को हरी झंडी दिखाएंगे, उसमें सवार नेता आपस में ही लड़कर ज़ख्मी हो जाएंगे। सीएम मान ने यह भी दावा किया कि कांग्रेसी नेताओं ने सत्ता में आने पर जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद करने की बात कही है। अकालियों को घेरा: अकाली दल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब के समझदार लोगों ने अकालियों को राजनीतिक गुमनामी में धकेल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अकालियों ने अपने निजी स्वार्थों के लिए धर्म का दुरुपयोग किया, माफियाओं और गैंगस्टरों को पनाह दी और युवाओं को नशे के दलदल में धकेला। उन्होंने संकल्प दोहराया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के ज़िम्मेदार लोगों को कभी माफ नहीं किया जाएगा और वे सलाखों के पीछे जाएंगे। नीति आयोग के आंकड़ों का हवाला: शिक्षा में पंजाब देश में अव्वल मुख्यमंत्री ने शिक्षा को गरीबी और सामाजिक समस्याओं का एकमात्र स्थायी समाधान बताते हुए कहा कि - नीति आयोग द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब ने केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पछाड़कर देश में पहला स्थान हासिल किया है। यह पिछले चार वर्षों में शिक्षकों के आधुनिक प्रशिक्षण, स्मार्ट क्लासरूम और बेहतर बुनियादी ढांचे पर किए गए हमारे काम का नतीजा है। 'आप' सरकार की प्रमुख उपलब्धियां और योजनाएं सीएम भगवंत मान ने मंच से अपनी सरकार की रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए कई बड़ी घोषणाओं और आंकड़ों को जनता के सामने रखा: 'मांवां-धीयां सत्कार योजना' पर बड़ा अपडेट महिलाओं के सशक्तिकरण का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को 1,000 रुपये और अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं। उन्होंने घोषणा की कि… जो महिलाएं जुलाई महीने में किसी कारणवश पंजीकरण (Registration) नहीं करा सकीं, उन्हें घबराने की ज़रूरत नहीं है। अगस्त में उन्हें तीन महीने की राशि एक साथ दी जाएगी। जब तक हमारी सरकार है, यह योजना कभी बंद नहीं होगी। 'एक्स' (Twitter) पर साझा किया जनता के प्रति आभार जनसभा के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा— “मुकेरियां की पवित्र धरती पर मुझे जो प्रेम, स्नेह और विश्वास मिला है, वही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। मुफ्त बिजली, बेहतर स्कूल, महिलाओं को वित्तीय सहायता और स्वास्थ्य सेवाएं अब पंजाब की वास्तविकता बन चुके हैं। आइए, हम सब मिलकर पंजाब को फिर से देश का नंबर एक राज्य बनाने की इस यात्रा को आगे बढ़ाएं।”
पटना के 150 सरकारी स्कूलों में आज से स्मार्ट क्लास की शुरुआत हुई है। पटना के राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय शास्त्री नगर के स्कूल से CM सम्राट चौधरी ने इसकी शुरुआत की। मुख्यमंत्री स्टूडेंट्स के साथ क्लास में बैठे और कोशिका-सेल के फंक्शन को समझा। इसके बाद क्लास में मौजूद स्टूडेंट्स ने विषय से जुड़े सवाल किए। शिक्षकों ने छात्रों के सवालों के जवाब दिए। इसके बाद मुख्यमंत्री स्कूल के अलग-अलग क्लासरूम में पहुंचे। यहां स्टूडेंट्स ने मुख्यमंत्री को अपने प्रजेंटेशन के बारे में जानकारी दी। CM ने भी छात्रों से सवाल किए। मुख्यमंत्री करीब 7 से 8 क्लासरूम में गए। 30 मिनट तक वे छात्रों से मिले। इस दौरान शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी भी CM के साथ रहे, लेकिन उन्होंने किसी छात्र से ना कोई सवाल किया ना किसी का प्रजेंटेशन देखा। वो। वो क्लासरूम में अपनी घड़ी में टाइम देखते नजर आए। कक्षा 9 से 12 के छात्रों को मिलेगी डिजिटल शिक्षा इस योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों के छात्रों को भी प्राइवेट स्कूलों जैसी आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके माध्यम से छात्रों को लाइव ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल कंटेंट और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का लाभ मिलेगा। इस योजना के तहत कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए लाइव और इंटरैक्टिव क्लासेज आयोजित की जाएंगी। छात्र विशेषज्ञ शिक्षकों से सीधे ऑनलाइन जुड़कर पढ़ाई कर सकेंगे और अपनी स्ट्रीम का समाधान भी कर पाएंगे। इसके अलावा डिजिटल स्टडी मैटेरियल, नोट्स, रिकॉर्डेड लेक्चर और नियमित मॉक टेस्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे छात्रों की पढ़ाई अधिक आसान और प्रभावी होगी। JEE, NEET और CUET की तैयारी भी स्कूल से होगी बिहार स्कूल लाइव क्लासेज के जरिए केवल बोर्ड परीक्षा ही नहीं, बल्कि JEE, NEET और CUET जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कराई जाएगी। विशेषज्ञ शिक्षकों की मदद से छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं का पाठ्यक्रम, अभ्यास प्रश्न और टेस्ट उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी स्कूलों के छात्र भी देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग, मेडिकल और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने में सफल हों। गरीब और ग्रामीण छात्रों को मिलेगी मुफ्त कोचिंग सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्रों के मेधावी छात्रों के लिए भी बड़ी घोषणा की है। पटना के 10 मॉडल स्कूलों में JEE और NEET की पूरी तरह निःशुल्क कोचिंग शुरू की जा रही है। बताया जा रहा है कि आने वाले समय में इस सुविधा का विस्तार राज्य के 146 मॉडल स्कूलों तक किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक गरीब छात्रों को इसका लाभ मिल सके। पटना के 150 सरकारी स्कूलों से शुरूआत वहीं, बिहार स्कूल लाइव क्लासेज योजना का पहला चरण फिलहाल पटना के 150 सरकारी स्कूलों में शुरू किया गया है। सरकार का लक्ष्य जुलाई के अंत तक इसे पटना के सभी 422 हाई स्कूलों तक पहुंचाना है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इस मॉडल को पूरे बिहार में लागू करने की योजना है। सरकार का मानना है कि इस पहल से सरकारी स्कूलों की शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का समान अवसर मिलेगा। -------------- ये खबर भी पढ़िए… बिहार के 211 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज की शुरुआत:अपराधियों को सम्राट की चेतावनी- बिहार छोड़ना होगा; 5 साल में 1 करोड़ राशन कार्ड बनेंगे भागलपुर से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को बिहार के 211 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज की शुरुआत की। काशील गांव में मंच से CM ने लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ये आजादी के बाद सबसे बड़ा कदम है। इन डिग्री कॉलेजों की लगातार मॉनिटरिंग होगी। अगले 1 साल में नई जगह पर विक्रमशिला यूनिवर्सिटी की स्थापना की जाएगी। भागलपुर में AI और कंप्यूटर साइंड के लिए एक और कॉलेज खोलेंगे। मुख्यमंत्री ने बिहार से बाहर रह रहे लोगों से लौटने की अपील की। CM ने अपराधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि आप लोगों के लिए एक ही ऑप्शन है भागलपुर जेल या बिहार छोड़कर चले जाइए। पूरी खबर पढ़िए
शिक्षा मंत्री का पुतला जलाकर शिक्षकों ने जताया आक्रोश, 17 को संभाग मुख्यालय पर रैली निकालेंगे
राजस्थान शिक्षक संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर बुधवार को शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री का पुतला जलाकर आक्रोश जताया तथा कलेक्ट्रेट के आगे प्रदर्शन कर सीएम के नाम ज्ञापन दिया। इससे पहले जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सीगड़ की अध्यक्षता में हुई सभा में वक्ताओं ने सरकार की मनमानी, प्रतिशोधात्मक व अमानवीय स्थानांतरण नीति की आलोचना करते हुए सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का सुनियोजित प्रयास बताया। प्रांतीय महामंत्री विजय पोटलिया ने कहा कि सरकार ने तबादलों के नाम पर पारदर्शिता और मानवीय संवेदनाओं को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है। ऐसी नीतियां शिक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं, बल्कि कमजोर करती हैं। प्रांतीय उपाध्यक्ष भंवरलाल कस्वा ने कहा कि सीकर के लक्ष्मणगढ़ की घटना सरकार की नीतियों पर करारा तमाचा है। जिस शिक्षक ने एक साधारण स्कूल को मॉडल स्कूल बनाया, नामांकन को 75 से बढ़ाकर 250 तक पहुंचाया, उसका स्थानान्तरण किए जाने से ग्रामीण व छात्राएं सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर है। प्रांतीय संयुक्त मंत्री शुभकरण नैण ने कहा कि सरकार ने स्थानांतरण को प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रताड़ना का माध्यम बना दिया है। उन्होंने बताया कि अब 17 जुलाई को संभाग मुख्यालय चूरू में इंद्रमणि पार्क से संयुक्त निदेशक कार्यालय तक रैली निकालकर शिक्षा मंत्री का पुतला जलाया जाएगा। जिला मंत्री वेदपाल मलिक ने कहा कि सरकार यदि समय रहते नहीं चेती, तो इसका खामियाजा लाखों विद्यार्थियों को भुगतना पड़ेगा। इस दौरान प्रांतीय संगठन मंत्री रतनसिंह पूनिया, प्रांतीय समिति सदस्य गौरीशंकर सिहाग, रणवीर सारण, लिखमाराम नायक, निहाल सिंह स्वामी, महेंद्र पूनिया, चौथमल चीनिया व गुरुदेव गोदारा आदि ने भी विचार व्यक्त किए तथा अन्यायपूर्ण आदेश वापस नहीं लिए जाने पर आंदोलन को तेज करने की चेतावनी दी। जिला सभाध्यक्ष हवासिंह, संघर्ष समिति संयोजक यूनुस अली ने 17 जुलाई को अधिकाधिक संख्या में संभाग मुख्यालय पहुंचने का आह्वान किया। इस मौके पर जिला कार्यकारिणी सदस्य अमरचंद सांडेला, राजेंद्र धेतरवाल, सरदारशहर ब्लॉक अध्यक्ष माया चौधरी, मंत्री गजानंद मेघवाल, तारानगर अध्यक्ष बनवारी फगेडिया, मंत्री इंद्राज स्वामी, राजगढ़ अध्यक्ष संजय खीचड़, चूरू अध्यक्ष अनिल लांबा, मंत्री खादिम अली, रतनगढ़ मंत्री मुरलीधर अजमेरिया, संघर्ष समिति संयोजक बजरंग बिस्सू, उपाध्यक्ष राकेश खीचड़, सुजानगढ़ मंत्री शिवपाल थालोड़, सुधींद्र जोशी, वरिष्ठ शिक्षक नेता ओमप्रकाश पूनिया, ओमप्रकाश मुहाल, गोपीचंद खीचड़ आदि मौजूद रहे।
शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव(ACS) राजेश यादव ने बुधवार को दौसा क्षेत्र के दौरे पर रहे। उन्होंने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भण्डाना और पालावास का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्कूल भवनों की सुरक्षा, निर्माण गुणवत्ता, कक्षाओं और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लेकर निर्देश दिए। एसीएस ने एक स्कूल की छत पर चढ़कर निरीक्षण किया। इससे पहले कलक्ट्रेट में शिक्षा अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर स्कूलों की सुरक्षा, शैक्षणिक गुणवत्ता और आधारभूत सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बच्चों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भवनों की गुणवत्ता जांच के लिए एनडीटी कराए बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जर्जर स्कूल भवनों को तत्काल ध्वस्त किया जाए, क्षतिग्रस्त भवनों की मरम्मत कर उन्हें सुरक्षित बनाया जाए और निर्माणाधीन भवनों की गुणवत्ता जांच के लिए नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्ट (एनडीटी) कराया जाए। यदि कोई भवन गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो उसका पुनर्निर्माण कराया जाएगा। प्राइवेट स्कूलों की डिजिटल मॉनिटरिंग करें एसीएस ने सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने, किसी भी बच्चे को स्कूल से बाहर नहीं रहने देने, शौचालयों की नियमित साफ-सफाई और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं हर समय उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि राजशाला संबलन ऐप के माध्यम से प्राइवेट स्कूलों की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाए, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रभावी मूल्यांकन हो सके। साथ ही 'एसीएस एजुकेशन संपर्क फॉर्म' के जरिए क्यूआर कोड स्कैन कर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा का भी अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए। इस दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
जोधपुर में निजी स्कूल संचालकों ने राइट टू एजुकेशन (आरटीई) की बकाया राशि और शाला संबलन मोबाइल ऐप से आ रही समस्याओं के विरोध में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। समिति के सदस्यों ने दावा किया कि बुधवार को शहर की सभी निजी स्कूल बंद रही। गैर सरकारी विद्यालय बचाओ समिति के बैनर तले बुधवार शाम को निजी स्कूल संचालक कलेक्ट्रेट में इकट्ठे हुए और आदेश के विरोध में नारेबाजी की। इसके बाद एडीएम को मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। समिति के सदस्य जोगेन्द्र सिंह गौड़ ने बताया कि शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार शाला संबलन मोबाइल एप के माध्यम से गैर-सरकारी विद्यालयों का निरीक्षण,अवलोकन एवं विभिन्न बिंदुओं पर जांच किए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह आदेश व्यवहारिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। इससे प्रदेश के हजारों गैर-सरकारी विद्यालयों में अनावश्यक भय, असमंजस एवं प्रशासनिक बोझ उत्पन्न होगी। गैर-सरकारी विद्यालयों को विभाग द्वारा सभी आवश्यक मानकों, नियमों एवं अधिनियमों की जांच के बाद ही मान्यता प्रदान की जाती है। विद्यालयों की मान्यता के समय भवन, भूमि, आधारभूत सुविधाएं, स्टाफ, सुरक्षा सहित अन्य सभी आवश्यक मापदण्डों का विस्तृत परीक्षण किया जाता है। ऐसे में पुनः उन्हीं विषयों पर बार-बार विस्तृत निरीक्षण एवं जांच करना न केवल अव्यवहारिक है बल्कि शिक्षा के मूल उद्देश्य से भी भटकाने वाला कदम है। इंस्पेक्टर राज को मिलेगा बढ़ावा उन्होंने कहा कि यह आदेश लागू होने से इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिलेगा, अनावश्यक हस्तक्षेप एवं भ्रष्टाचार की संभावनाएं बढ़ेगी। इससे विद्यालय संचालकों का समय विद्यार्थियों की शिक्षा, शिक्षण व्यवस्था एवं विद्यालय विकास के बजाय कागजी औपचारिकताओं एवं निरीक्षणों में व्यतीत होगा, जिसका प्रतिकूल प्रभाव शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा। प्रशासनिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इस प्रकार की अनावश्यक जांच एवं औपचारिकताओं में उन्हें उलझाना शिक्षा व्यवस्था के हित में नहीं है, बल्कि इससे छोटे विद्यालयों का संचालन और अधिक कठिन हो जाएगा। भय का नहीं, विश्वास एवं संवाद का हो वातावरण गौड़ ने कहा- हमारा मानना है कि विभाग एवं गैर-सरकारी विद्यालयों के मध्य सहयोग, विश्वास एवं संवाद का वातावरण होना चाहिए। न कि भय एवं अनावश्यक निरीक्षण का। यदि किसी विद्यालय के विरुद्ध कोई विशिष्ट एवं प्रमाणित शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी नियमानुसार जांच की जा सकती है लेकिन सभी विद्यालयों पर इस प्रकार का व्यापक निरीक्षण थोपना न्यायोचित एवं व्यवहारिक नहीं है। ज्ञापन में रखी ये मांग
बक्सर में बुधवार, 15 जुलाई को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण दिन रहा। चक्की, चौगाई, केसठ और ब्रह्मपुर प्रखंडों में चार नए डिग्री महाविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र का विधिवत शुभारंभ किया गया। इन कॉलेजों से ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों, विशेषकर छात्राओं को स्नातक की पढ़ाई के लिए अब दूर शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। राज्य स्तर पर आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के कुल 211 नए डिग्री कॉलेजों में एक साथ शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ किया। इसी कड़ी में बक्सर जिले के इन चारों नए महाविद्यालयों में भी पढ़ाई शुरू हुई। जिले का मुख्य उद्घाटन समारोह केसठ प्रखंड की रघुनाथपुर पंचायत स्थित केएचके प्लस-2 उच्च विद्यालय परिसर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी साहिला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। जिला पदाधिकारी साहिला ने कहा कि इन नए डिग्री कॉलेजों की शुरुआत से जिले में उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ेगा। ग्रामीण विद्यार्थियों को अब अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण स्नातक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं को होने वाले लाभ पर जोर दिया। अब उन्हें उच्च शिक्षा के लिए दूर के शहरों में नहीं जाना पड़ेगा, जिससे शिक्षा के साथ-साथ बेटियों की उच्च शिक्षा में भागीदारी भी बढ़ेगी। जिला पदाधिकारी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि ये चारों नए डिग्री महाविद्यालय भविष्य में बक्सर जिले को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, सहायक समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी डुमरांव और विशेष कार्य पदाधिकारी सहित कई जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे। जिले के चारों प्रखंडों में भी स्थानीय स्तर पर उत्साह के साथ उद्घाटन समारोह आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक और स्थानीय नागरिक शामिल हुए।
निजी स्कूल संघ खैरथल-तिजारा जिले ने मुख्य सचिव शिक्षा विभाग राजेश यादव के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में निजी स्कूलों की प्रस्तावित जांच प्रक्रिया पर रोकने की मांग की गई है। सही नियम बनाकर निरीक्षण करवाने की मांग संघ के पदाधिकारियों ने बताया- निजी स्कूलों की जांच शुरू करने से पहले स्कूल संगठनों के साथ चर्चा की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि व्यवहारिक नियम बनाए जाने के बाद ही निरीक्षण की कार्रवाई की जानी चाहिए। शिक्षा विभाग द्वारा जारी जांच संबंधी निर्देशों में कई ऐसे प्रावधान शामिल हैं, जिनका पालन व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। संघ का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था के कारण निजी स्कूल संचालकों में अनावश्यक भय और असमंजस का माहौल बना हुआ है। बच्चों की पढ़ाई पर पड़ सकता है असर संघ ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं, जिनमें लाखों स्टूडेंट पढ़ते हैं। ऐसे में चर्चा के बिना जांच अभियान चलाने से शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। संगठन ने मांग की है कि जब तक निजी स्कूल संगठनों के साथ चर्चा करके स्पष्ट और व्यवहारिक दिशा-निर्देश तय नहीं किए जाते, तब तक जांच की कार्रवाई स्थगित रखी जाए। इस दौरान निजी स्कूल संघ के पदाधिकारियों और विद्यालय संचालकों ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर अपनी सहमति व्यक्त की और मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
समस्तीपुर के पांच प्रखंडों खानपुर, कल्याणपुर, सिंघिया, विथान और विद्यापतिनगर में बुधवार को नए महाविद्यालयों का विधिवत शुभारंभ हो गया। बिहार सरकार की पहल पर स्थापित इन महाविद्यालयों में आज से नियमित पठन-पाठन भी प्रारंभ हो गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों छात्र-छात्राओं को अब अपने ही प्रखंड में उच्च शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा। राज्यस्तरीय कार्यक्रम के तहत माननीय मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इन नवस्थापित महाविद्यालयों का उद्घाटन किया। इसके साथ ही, सभी जिलों में स्थानीय स्तर पर भी उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किए गए। पांचों महाविद्यालयों में भी समारोहपूर्वक कार्यक्रम हुए, जिनमें जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों, छात्र-छात्राओं और स्थानीय लोगों ने भाग लिया। जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल विद्यापतिनगर स्थित नवस्थापित महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने मुख्यमंत्री के उद्घाटन कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा और उसके बाद फीता काटकर महाविद्यालय का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने महाविद्यालय परिसर का निरीक्षण किया और उपलब्ध शैक्षणिक और आधारभूत सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और यह सुनिश्चित करने पर बल दिया कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रखंड स्तर पर महाविद्यालयों की स्थापना राज्य सरकार की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों और छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को भी अब कम खर्च में अपने क्षेत्र में ही स्नातक स्तर की पढ़ाई का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ेगा, छात्राओं की शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और जिले का शैक्षणिक वातावरण और अधिक मजबूत होगा। शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भी नए महाविद्यालयों के शुभारंभ पर खुशी जताते हुए इसे क्षेत्र के विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से इन प्रखंडों में महाविद्यालय की मांग की जा रही थी, जिसके पूरा होने से अब युवाओं को बेहतर शैक्षणिक अवसर मिलेंगे और उच्च शिक्षा तक उनकी पहुंच आसान होगी।
संभल में राज्य कर विभाग के जिला स्तरीय कार्यालय एवं आवासीय परिसर का मंगलवार को वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच भूमि पूजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार की माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी मुख्य अतिथि रहीं। भाजपा जिलाध्यक्ष चौधरी हरेंद्र सिंह रिंकू समेत विभागीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। जनपद की तहसील संभल के गांव किसौली में एक हेक्टेयर (करीब 16 बीघा) भूमि पर बनने वाले इस कार्यालय और आवासीय परिसर के निर्माण पर 13.70 करोड़ रुपये खर्च होंगे। शासन ने निर्माण कार्य के लिए कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी, मुरादाबाद को पहली किस्त के रूप में 3.45 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। उपायुक्त (प्रशासन) राज्य कर लल्लन प्रसाद यादव ने बताया कि भूमि पूजन के साथ ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। कार्यक्रम में मंत्री गुलाब देवी, भाजपा जिलाध्यक्ष और मेंथा उद्योगपति फूल प्रकाश ने शिलान्यास किया। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य अवधेश प्रताप सिंह, जिला कोषाध्यक्ष अंकित जैन, मंडल अध्यक्ष अंकुर अग्रवाल सहित कई अधिकारी एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि जनवरी 2023 में तत्कालीन जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कार्यालय निर्माण के लिए भूमि की पैमाइश कराई थी। ग्राम समाज से भूमि हस्तांतरित होने के बाद कार्यालय और आवासीय भवन का नक्शा तैयार किया गया। वर्तमान में राज्य कर विभाग के जिला स्तरीय कार्यालय संभल और चंदौसी से संचालित हो रहे हैं। संभल कार्यालय किराए के भवन में संचालित है। नया परिसर बनने के बाद चंदौसी कार्यालय को यहां स्थानांतरित किया जाएगा, जबकि संभल कार्यालय यथावत रहेगा। राज्यमंत्री गुलाब देवी ने कहा कि यह जिला स्तरीय राज्य कर कार्यालय जनपद के केंद्र बिंदु पर बन रहा है, जिससे सभी विधानसभा क्षेत्रों के लोगों और व्यापारियों को सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाला यह परिसर विभागीय कार्यों को अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाएगा।
शेखपुरा जिले में छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बुधवार को चार प्रखंडों में राजकीय डिग्री महाविद्यालयों का समारोहपूर्वक शिलान्यास और शुभारंभ किया गया। राज्य सरकार के इस कदम से स्थानीय युवाओं को अब उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। मुख्य कार्यक्रम शेखोंपुरसराय प्रखंड की बेलाव पंचायत में आयोजित किया गया। यहां बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री अशोक चौधरी ने राजकीय डिग्री महाविद्यालय का विधिवत शिलान्यास किया। इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने और इसे हर घर तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री चौधरी ने आश्वासन दिया कि महाविद्यालय में पठन-पाठन का कार्य यथाशीघ्र शुरू करा दिया जाएगा, जिससे स्थानीय बच्चों का भविष्य संवरेगा। कार्यक्रम के दौरान जिला पदाधिकारी शेखर आनंद ने मंत्री को अंगवस्त्र और 'जल-जीवन-हरियाली' अभियान के प्रतीक चिन्ह के रूप में पौधा भेंट कर सम्मानित किया। इस मौके पर जिला परिषद अध्यक्ष निर्मला सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। मंत्री ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए महाविद्यालय परिसर में एक पौधा भी लगाया। बेलाव के साथ-साथ जिले के तीन अन्य प्रखंडों में भी इन उच्च शिक्षा केंद्रों की आधारशिला रखी गई। घाटकुसुभा प्रखंड स्थित बाऊघाट में विधान पार्षद ललन महतो और एसडीओ प्रियंका कुमारी की मौजूदगी में महाविद्यालय का शुभारंभ हुआ। वहीं, अरियरी प्रखंड की ससवहना पंचायत में शेखपुरा के विधायक रणधीर कुमार सोनी और डीडीसी राकेश कुमार ने राजकीय डिग्री महाविद्यालय का शिलान्यास किया। चेवाड़ा में एडीएम लखींद्र पासवान और डीटीओ बेबी कुमार की उपस्थिति में नगर पंचायत के चेयरमैन लट्टू यादव ने इसका शुभारंभ किया। जिले के विभिन्न चार प्रखंडों में आयोजित इन शुभारंभ समारोहों में कई प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।
खगड़िया जिले के मानसी, बेलदौर और चौथम प्रखंडों को मंगलवार को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई सुविधा मिली। मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से तीनों नवस्थापित राजकीय डिग्री कॉलेजों का उद्घाटन किया। इससे अब हजारों छात्र-छात्राओं को स्नातक की पढ़ाई के लिए जिला मुख्यालय या दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। मानसी प्रखंड के घरारी स्थित नवस्थापित राजकीय डिग्री कॉलेज के उद्घाटन समारोह में खगड़िया सदर विधायक बबलू कुमार मंडल ने इसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान मानसी में डिग्री कॉलेज खोलने का वादा किया था, जिसे विधानसभा में लगातार उठाने और सरकार से आग्रह के बाद पूरा किया जा सका है। विधायक मंडल ने जोर दिया कि शिक्षा किसी भी समाज के विकास की सबसे मजबूत नींव होती है। स्थानीय स्तर पर कॉलेज खुलने से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को सर्वाधिक लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि अब आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए खगड़िया या अन्य शहरों में जाने की मजबूरी नहीं रहेगी, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी। बबलू मंडल ने अपनी प्राथमिकताओं में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सिंचाई और रोजगार जैसे जनहित के मुद्दों पर लगातार काम करने की बात कही। कार्यक्रम के बाद विधायक ने मानसी में महिलाओं के लिए संचालित पिंक बस सेवा को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उद्घाटन समारोह में जिलाधिकारी विक्रम विरकर, उप विकास आयुक्त श्वेता भारती, जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार गोंड, प्रखंड एवं अंचल प्रशासन के अधिकारी, भाजपा जिलाध्यक्ष शत्रुघ्न भगत, जदयू प्रदेश महासचिव उमेश सिंह पटेल, जदयू प्रखंड अध्यक्ष राजनीति प्रसाद, भाजपा नेता जितेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद रहे। इसी क्रम में बेलदौर और चौथम प्रखंडों में भी राजकीय डिग्री कॉलेजों का शुभारंभ हुआ। बेलदौर में आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय विधायक पन्नालाल सिंह पटेल सहित प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। जनप्रतिनिधियों ने इन कॉलेजों को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। प्रखंडों में डिग्री कॉलेज शुरू होने से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों विद्यार्थियों को अपने घर के आसपास ही उच्च शिक्षा का अवसर मिलेगा और शिक्षा के क्षेत्र में खगड़िया को नई पहचान मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने आज बिहार में 211 डिग्री कॉलेजों का एक साथ उद्घाटन किया। इसी कड़ी में पूर्वी चंपारण जिले के 15 प्रखंडों में भी डिग्री कॉलेजों का शुभारंभ हुआ है। इससे जिले में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे। पूर्वी चंपारण में तुरकौलिया प्रखंड के जयसिंहपुर में उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें पूर्व मंत्री और स्थानीय विधायक कृष्णनंदन पासवान तथा जिला पदाधिकारी सौरभ सुमन यादव सहित कई प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सामूहिक उद्घाटन मुख्यमंत्री ने पटना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी कॉलेजों का सामूहिक उद्घाटन किया, जबकि स्थानीय कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि और छात्र-छात्राएं मौजूद थे। वक्ताओं ने इसे ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया। पूर्व मंत्री कृष्णनंदन पासवान ने कहा कि 15 प्रखंडों में एक साथ डिग्री कॉलेजों का उद्घाटन शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए अब दूर के शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। इस पहल से शिक्षा का स्तर बेहतर होगा-DM जिला पदाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने कहा कि इस पहल से शिक्षा का स्तर बेहतर होगा। उन्होंने यह भी बताया कि इन कॉलेजों से स्थानीय युवाओं को अच्छी शैक्षणिक सुविधाएं मिलेंगी। यह पहल पूर्वी चंपारण और पूरे बिहार में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे हजारों छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
हनुमानगढ़ में शिक्षा संबलन योजना के तहत निजी स्कूलों की प्रस्तावित विशेष जांच के विरोध में बुधवार को जिले के अधिकांश निजी स्कूल बंद रहे। एसआरएस प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने जिला कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री सहित उच्चाधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन ने विशेष जांच के आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए इसे स्कूलों पर अनावश्यक प्रशासनिक बोझ बताया, जिससे शैक्षणिक कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई। विशेष जांच पर जताई आपत्ति एसोसिएशन ने ज्ञापन में बताया कि माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने 3 जुलाई 2026 को राजएप के माध्यम से निजी शिक्षण संस्थानों की विशेष जांच के निर्देश जारी किए थे। संगठन का कहना है कि निजी स्कूल पहले से ही विभिन्न विभागीय नियमों का पालन कर रहे हैं। ऐसे में बार-बार निरीक्षण और अतिरिक्त जांच से शिक्षण कार्य की बजाय समय कागजी औपचारिकताओं में अधिक खर्च होगा। आरटीई सत्यापन का दिया हवाला पदाधिकारियों ने कहा कि आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत निजी स्कूलों का प्रतिवर्ष भौतिक सत्यापन पहले से किया जाता है। ऐसे में अलग से विशेष जांच की आवश्यकता नहीं है। उनका कहना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों को अनावश्यक प्रशासनिक दबाव से मुक्त रखा जाना चाहिए। प्री-प्राइमरी भुगतान का मुद्दा भी उठाया एसोसिएशन ने ज्ञापन में आरटीई के अंतर्गत संचालित प्री-प्राइमरी कक्षाओं के भुगतान का मुद्दा भी उठाया। संगठन ने मांग की कि पूर्व व्यवस्था के अनुसार इन कक्षाओं का भुगतान नियमित रूप से जारी रखा जाए, ताकि निजी स्कूलों पर आर्थिक दबाव न बढ़े और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलती रहें। सरकार से पुनर्विचार की मांग संगठन ने राज्य सरकार से शिक्षा संबलन योजना के तहत प्रस्तावित विशेष जांच संबंधी आदेश पर पुनर्विचार कर उसे तत्काल वापस लेने का आग्रह किया। पदाधिकारियों ने कहा कि निजी शिक्षण संस्थान प्रदेश में शिक्षा के विस्तार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए सरकार को सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए स्कूलों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। ये रहे मौजूद इस दौरान प्रदेशाध्यक्ष बाबूलाल जूनेजा, जिला अध्यक्ष सुरेश चंद शर्मा, जिला महासचिव भारत भूषण कौशिक, अशोक सुथार, संगठन मंत्री राजेश मिढ्ढा सहित जिले की विभिन्न तहसीलों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
नालंदा के छात्रों के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन है। जिले के नौ अलग-अलग प्रखंडों में नवनिर्मित राजकीय डिग्री कॉलेजों में आज से विधिवत शैक्षणिक गतिविधियों का शुभारंभ हो गया है। भागलपुर से बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मंत्री विजय चौधरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इन कॉलेजों का शुभारंभ किया। इस विशेष अवसर पर जिले के सभी नौ डिग्री कॉलेजों में उद्घाटन समारोह का लाइव प्रसारण किया गया, जिससे ग्रामीण अंचल के छात्र भी इस महत्वपूर्ण क्षण के साक्षी बनें। स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा का सपना साकार लंबे समय से इन नौ प्रखंडों के छात्र उच्च शिक्षा के लिए जिला मुख्यालय बिहारशरीफ या अन्य शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर थे। अब इन प्रखंडों—रहूई, नूरसराय, नगरनौसा, बिंद, कतरीसराय, थरथरी, करायपरसुराय, परवलपुर और सरमेरा—में राजकीय डिग्री कॉलेजों के खुलने से हजारों छात्रों को अपने घर के नजदीक ही स्नातक स्तर की पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा। पहले चरण में इन कॉलेजों में 400 से अधिक छात्र-छात्राओं ने अपना नामांकन भी करा लिया है, जो स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा के प्रति छात्रों के उत्साह को दर्शाता है। कॉलेजों में पढ़ाई को सुचारू बनाने के लिए बेंच-डेस्क और जरूरी फर्नीचर की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। मात्र तीन स्टाफ के भरोसे शुरू हुई व्यवस्था हालांकि, इन कॉलेजों की शुरुआत एक बड़े प्रशासनिक संकट के साथ हुई है। फिलहाल हर कॉलेज को चलाने के लिए मात्र एक हेड मास्टर, एक शिक्षक और एक क्लर्क की प्रतिनियुक्ति की गई है। यह स्थिति तब है जब इन कॉलेजों में छह विषयों की पढ़ाई होनी है। इतने सीमित स्टाफ के साथ सभी विषयों की नियमित और गुणवत्तापूर्ण कक्षाएं संचालित करना शिक्षा विभाग के लिए एक गंभीर चुनौती साबित हो रही है। जानिए कहां कौन प्रतिनिधि रहे मौजूद… नूरसराय और थरथरी डिग्री कॉलेज में सांसद कौशलेंद्र कुमार,नगरनौसा कॉलेज में विधायक हरिनारायण सिंह, रहुई कॉलेज में डॉक्टर सुनील कुमार और कतरीसराय, बिंद और सरमेरा राजकीय डिग्री कॉलेज में विधायक डॉक्टर जितेंद्र कुमार कार्यक्रम में शामिल हुए। नगरनौसा डिग्री कॉलेज में विधायक हरिनारायण रहे मौजूद राजकीय डिग्री महाविद्यालय नगरनौसा जो शुरू से हैं काफी विवादों में रहा आज उसका भी लोदीपुर में शुभारंभ हो गया। इस मौके पर पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि मनोज कुमार, हरनौत विधायक हरिनारायण सिंह, राजकीय डिग्री महाविद्यालय के प्रचार्य डॉक्टर संजय कुमार समेत कॉलेज के छात्र-छात्राएं एवं शिक्षक गण मौजूद रहे। हरनौत विधायक हरि नारायण सिंह ने बिहार के 211 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज के उद्घाटन को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल अस्थाई व्यवस्था के तहत कॉलेज शुरू किए गए हैं, जिन्हें भविष्य में भूमि उपलब्ध होने पर स्थायी भवन में स्थानांतरित किया जाएगा। शिक्षकों की कमी पर उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार और आयोग ने नियुक्ति प्रक्रिया तय कर ली है, और अगस्त महीने तक सभी नए कॉलेजों में शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी जाएगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को राज्य के 211 नए डिग्री कॉलेजों में पठन-पाठन कार्यों का वर्चुअल शुभारंभ किया। यह कदम बिहार सरकार की उच्च शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में उठाया गया है। इसी कड़ी में जहानाबाद जिले में भी एक नए डिग्री कॉलेज का विधिवत उद्घाटन किया गया। जहानाबाद में आयोजित उद्घाटन समारोह में बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन, खान एवं भूतत्व तथा कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री प्रमोद कुमार (चंद्रवंशी) उपस्थित रहे। इनके साथ जहानाबाद के सांसद सुरेंद्र प्रसाद यादव और जिलाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया सहित कई जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे। अतिथियों ने फीता काटकर महाविद्यालय का विधिवत उद्घाटन किया। उपस्थित मंत्रियों ने कहा कि बिहार सरकार शिक्षा के क्षेत्र में आधारभूत ढांचे को लगातार मजबूत कर रही है। नए डिग्री कॉलेजों के खुलने से अब आसपास के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे जिलों या शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय और आर्थिक संसाधनों की बचत होगी, साथ ही अधिक छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिलेगा। मंत्रियों ने जानकारी दी कि फिलहाल इस महाविद्यालय में छह विषयों में पठन-पाठन शुरू किया जा रहा है। आने वाले समय में नए विषयों को भी जोड़ा जाएगा और आवश्यकतानुसार शिक्षकों की बहाली की जाएगी। बिहार सरकार इस पहल को उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मान रही है। जहानाबाद में नए महाविद्यालय के शुरू होने से स्थानीय छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे, जो विकसित बिहार के निर्माण में सहायक होगा।
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। इंदौर निवासी सौरभ त्रिपाठी ने 2025 की कैग (CAG) रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि प्रदेश के 1,895 सरकारी स्कूलों में एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है, जिससे लाखों बच्चों का शिक्षा का मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहा है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता सौरभ त्रिपाठी ने याचिका में कहा कि प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था गंभीर अव्यवस्थाओं से जूझ रही है। वर्ष 2025 की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार 7 हजार करोड़ रुपए से अधिक का बजट होने के बावजूद हजारों स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। इससे बच्चों के शिक्षा के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। हाईकोर्ट ने सरकार और शिक्षा विभाग को भेजा नोटिस मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने की। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। सरकार से शिक्षक नियुक्ति, बजट के उपयोग और कैग रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर विस्तृत जवाब मांगा गया है। परीक्षा परिणामों पर भी पड़ा असर याचिका में कहा गया है कि शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का असर छात्रों के परीक्षा परिणामों पर भी साफ दिखाई देता है। सत्र 2018-19 में हाईस्कूल का पास प्रतिशत 67.74% था, जो 2021-22 में घटकर 38.53% रह गया। अब सरकार को देना होगा जवाब प्राथमिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब सरकार को अदालत के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि शिक्षक नियुक्तियों, बजट खर्च और सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
भदोही में बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शिवम पांडेय ने मंगलवार देर शाम जिले के सात खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया है। शिक्षा में सुधार और शैक्षिक कार्यों को गति देने के उद्देश्य से यह स्थानांतरण सूची रात 8:15 बजे जारी की गई। बीएसए ने सभी स्थानांतरित खंड शिक्षा अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपने नए तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने और अपने दायित्वों का निर्वहन करने का निर्देश दिया है। जारी सूची के अनुसार, खंड शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव को जनपद मुख्यालय से नगर क्षेत्र भदोही भेजा गया है। यशवंत सिंह को सुरियावां से भदोही, रमाकांत सिंह को औराई से ज्ञानपुर मुख्यालय, और सुमन केसरवानी को जनपद भदोही से अभोली में तैनात किया गया है। इसी क्रम में, वेद प्रकाश यादव को अभोली से औराई, मनोज कुमार सिंह को ज्ञानपुर से डीघ, और चंद्रशेखर आजाद को भदोही से सुरियावां में स्थानांतरित किया गया है।
गुरुगोष्ठी में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर िदया जोर
भरनो|कन्या मध्य विद्यालय के सभागार में प्रखंड स्तरीय शिक्षकों की गुरुगोष्ठी का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (बीईईओ) घनश्याम चौबे ने की, जिसमें प्रखंड के सभी सरकारी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने अनिवार्य रूप से भाग लिया। गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाना था। बीईईओ ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी प्रधानाध्यापक अपने विद्यालयों से संबंधित आवश्यक प्रतिवेदन समय पर उपलब्ध कराएं। बैठक के दौरान छात्र-केंद्रित योजनाओं पर विशेष चर्चा की गई, जिनमें बच्चों के आधार सीडिंग, बैंक खाता विवरण को कक्षावार अपडेट करना और चाइल्ड प्रोफाइल 2026-27 का कार्य शामिल है। इसके अतिरिक्त, यू-डाइस प्लस एंट्री, पुस्तक वितरण, इभीभी पर डेटा एंट्री, एमडीएम (मध्याह्न भोजन) का सुचारू संचालन और अपार आईडी निर्माण को लेकर गंभीरता बरतने का निर्देश दिया गया। पीटीएम लिंक एंट्री, एसआईआर रिपोर्ट, शिक्षकों और छात्रों की ऑनलाइन उपस्थिति (अटेंडेंस), तथा आईसीटी लैब व स्मार्ट क्लास के प्रभावी उपयोग पर भी विस्तृत चर्चा हुई।बीईईओ ने सभी शिक्षकों को विद्यालय प्रबंधन में सुधार और सरकारी योजनाओं का लाभ हर बच्चे तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।
कॉलेज केवल उच्च शिक्षा या डिग्री के लिए नहीं, व्यक्तित्व निर्माण की प्रयोगशाला : प्रो. डागा
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संघटक कॉमर्स कॉलेज में चल रहे स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम के दूसरे दिन नए विद्यार्थियों को कॅरिअर, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास के गुर सिखाए गए। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कुलपति प्रो. कैलाश डागा ने छात्र-छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि कॉलेज सिर्फ उच्च शिक्षा या डिग्री हासिल करने की जगह नहीं है, बल्कि यह छात्र के संपूर्ण व्यक्तित्व निर्माण की एक प्रयोगशाला है। विद्यार्थियों को हमेशा अच्छी संगति, अनुशासन और मजबूत नैतिक संस्कारों को चुनना चाहिए। उन्होंने अपने संबोधन का समापन लक्ष्य में पहुंचे पथिक, बिना पथ में विश्राम कैसा की प्रेरक पंक्तियों से किया। मुख्य अतिथि प्रो. जी.एन. पुरोहित ने विद्यार्थियों को भविष्य के कॉमर्स सेक्टर का लीडर बनने की सीख दी और उन्हें स्टार्टअप व उद्यमिता (एंटरप्रेन्योरशिप) अपनाने के लिए प्रेरित किया। डीन प्रो. शूरवीर एस. भानावत ने कॉलेज लाइफ को कॅरिअर का स्वर्णिम अवसर बताते हुए सभी गतिविधियों में सक्रिय रहने का आह्वान किया। एसोसिएट डीन डॉ. शिल्पा वर्डिया ने नियमित उपस्थिति और समय के सदुपयोग को सफलता की कुंजी बताया। उद्घाटन सत्र का आभार डॉ. देवेंद्र श्रीमाली ने जताया, जबकि मंच संचालन डॉ. गरिमा कोठारी व डॉ. प्रियंका जैन ने किया। सफलता के 3डी, अनुशासन के 7 पिलर्स और सीखे 6 लाइफ हैक्स इंडक्शन प्रोग्राम के तकनीकी सत्रों में नए छात्रों को प्रैक्टिकल और मॉडर्न अप्रोच के साथ भविष्य की राह दिखाई गई। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशा शर्मा ने विद्यार्थियों को सफलता के 3डी (डिटरमिनेशन, डेडिकेशन और डिसिप्लिन) का महत्व समझाया, साथ ही अनुशासित जीवन के 7 पिलर्स की जानकारी दी। वहीं, डॉ. सचिन गुप्ता ने रोचक और इंटरेक्टिव सेशन में 6 लाइफ हैक्स के जरिए प्रभावी ढंग से सीखने और आगे बढ़ने के व्यावहारिक सूत्र साझा किए। छात्रों को कॉलेज के अन्य आयामों से जोड़ते हुए डॉ. देवेन्द्र श्रीमाली ने शैक्षणिक अवसरों, डॉ. रेखा बैरवा ने लाइब्रेरी सुविधाओं और सब लेफ्टिनेंट डॉ. विनोद कुमार मीना ने कॉमर्स में क्रिएटिविटी व एनसीसी कैडेट्स की उपलब्धियों को सामने रखा। डॉ. पुष्पराज मीना व डॉ. रेनु शर्मा ने सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण में एनएसएस की भूमिका से अवगत कराया। एमएलएसयू विज्ञान महाविद्यालय : बीएससी प्रथम सेमेस्टर के लिए एकदिवसीय इंडक्शन कार्यक्रम मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के विज्ञान महाविद्यालय में बीएससी प्रथम सेमेस्टर (सत्र 2026-2027) के नव प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए 16 जुलाई को एकदिवसीय इंडक्शन कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम जीव विज्ञान और गणित समूह के विद्यार्थियों के लिए दो अलग चरणों में आयोजित किया जाएगा। अधिष्ठाता मनोज कुमार जैन के अनुसार इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय व महाविद्यालय की कार्यप्रणाली, शैक्षणिक वातावरण और सह-शैक्षणिक अवसरों से परिचित कराना है। उन्होंने कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत संचालित पाठ्यक्रम, विषय चयन, परीक्षा योजना, क्रेडिट अर्जन और मूल्यांकन प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी दी जाएगी। वरिष्ठ प्राध्यापक अनुशासन, शैक्षणिक उत्कृष्टता, व्यक्तिगत विकास और राष्ट्र विकास में विज्ञान के योगदान पर मार्गदर्शन देंगे।
कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में आयोजित दैनिक भास्कर प्रतिभा सम्मान-2026 समारोह में मंगलवार को 500 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान हुआ। समारोह में सीबीएसई, आईसीएसई और एमपी बोर्ड की कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण विद्यार्थी अपने अभिभावकों के साथ शामिल हुए। मुख्य अतिथि उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष विभाग के मंत्री इंदर सिंह परमार रहे। इस अवसर पर आरएनटीयू की प्रो. चांसलर डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स, सेज ग्रुप की एमडी आर्किटेक्ट शिवानी अग्रवाल, ओरिएंटल ग्रुप की प्रबंध निदेशक सोनिया ठकराल, सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर इंजी. कोपल सलूजा तथा विक्रमादित्य ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के चेयरमैन आदित्य नारोलिया उपस्थित रहे। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि सही दिशा और आदर्श व्यक्तित्व का निर्माण भी है। शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी हैं। छात्रों को परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियां निभाते हुए आगे बढ़ना चाहिए। भारत में शिक्षा के साथ संस्कारों पर भी समान बल दिया जाता है। उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। स्टूडेंट्स ने जीते इनामआयोजन विद्यार्थियों के लिए करियर मार्गदर्शन का प्रभावी मंच भी बना। विशेषज्ञों ने उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार और विभिन्न करियर विकल्पों पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया तथा उन्हें खुलकर सवाल पूछने का अवसर मिला। कार्यक्रम में आयोजित क्विज प्रतियोगिता में भी विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और आकर्षक पुरस्कार जीते। आरएनटीयू प्रेजेंटिंग पार्टनरसमारोह का प्रेजेंटिंग पार्टनर रबींद्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी (आरएनटीयू) रहा, जबकि सेज यूनिवर्सिटी (इंदौर-भोपाल) को-प्रेजेंटिंग पार्टनर रही। ओरिएंटल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स पावर्ड बाय पार्टनर तथा एलएनसीटी यूनिवर्सिटी को-स्पॉन्सर रही। एसआरके एजुकेशन, सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी और विक्रमादित्य ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स पार्टिसिपेटिंग इंस्टीट्यूशन्स के रूप में शामिल रहे।
नालंदा खुला विश्वविद्यालय के लिए आज का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। विश्वविद्यालय परिसर में राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (से.नि.) का आगमन प्रस्तावित है। अपने इस दौरे के दौरान राज्यपाल विश्वविद्यालय में नवनिर्मित दो अत्याधुनिक स्टूडियोज का विधिवत उद्घाटन करेंगे। शिक्षा के डिजिटलीकरण को मिलेगी नई उड़ान विश्वविद्यालय प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्यपाल की ओर से जिन दो स्टूडियो का लोकार्पण किया जाना है, उनमें पहला 'ऑनलाइन क्लास स्टूडियो' और दूसरा 'मास कम्युनिकेशन स्टूडियो' है। इन स्टूडियोज का निर्माण विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने और डिजिटल माध्यम से छात्रों तक शिक्षा की पहुंच को और अधिक सुगम बनाने के उद्देश्य से किया गया है। आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे स्टूडियो 'ऑनलाइन क्लास स्टूडियो' के माध्यम से अब दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले छात्र-छात्राएं भी घर बैठे सीधे कक्षाओं से जुड़ सकेंगे, जिससे ओपन और डिस्टेंस लर्निंग व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। वहीं, 'मास कम्युनिकेशन स्टूडियो' पत्रकारिता और जनसंचार के विद्यार्थियों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। यहां छात्र अत्याधुनिक उपकरणों के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उन्हें मीडिया इंडस्ट्री में करियर बनाने के लिए जरूरी कौशल सीखने में मदद मिलेगी। विश्वविद्यालय में उत्साह का माहौल महामहिम के आगमन और स्टूडियोज के लोकार्पण को लेकर नालंदा खुला विश्वविद्यालय में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इन सुविधाओं के शुरू होने से न केवल पठन-पाठन का माहौल बेहतर होगा, बल्कि तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय एक कदम और आगे बढ़ेगा। उद्घाटन समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारी, शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर शैक्षणिक जगत में भी काफी उत्साह है, क्योंकि इन स्टूडियो के लोकार्पण से बिहार में ओपेन लर्निंग के आधुनिक युग की शुरुआत मानी जा रही है।
छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के सीनेट हॉल में मंगलवार को आधुनिक युग में युवा शक्ति सफलता एवं प्रसन्नता का मार्ग विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। गीता शोधपीठ, दीनदयाल शोध केंद्र, स्कूल ऑफ लैंग्वेजस और स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम हुआ। जिसमें चिन्मय मिशन के स्वामी प्रबुद्धानंद ने विद्यार्थियों को सफलता, सकारात्मक सोच और भारतीय जीवन मूल्यों का संदेश दिया। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने स्वामी प्रबुद्धानंद का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और वेदांत की शिक्षाएं आज के युवाओं के लिए होनी चाहिए। कुलपति ने विश्वविद्यालय के सभी विभागों के विद्यार्थियों के लिए वेदांत की क्लास शुरू किए जाने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के साथ नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा भी युवाओं के विकास के लिए जरूरी है। जीवन में सफलता के लिए '3S फॉर्मूला' बताया स्वामी प्रबुद्धानंद ने युवाओं को जीवन में सफलता के लिए '3S फॉर्मूला' बताया। उन्होंने कहा कि हर युवा को गति, कौशल और रणनीति को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गति का मतलब केवल तेजी से आगे बढ़ना नहीं, बल्कि माता-पिता, गुरुजनों और बड़ों के आशीर्वाद के साथ सही दिशा में आगे बढ़ना है। उनका आशीर्वाद ऐसी अदृश्य शक्ति है, जो जीवन की कठिनाइयों को दूर करने में मदद करता है। युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनने पर दिया जोर उन्होंने कहा कि युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनना चाहिए। स्वस्थ शरीर, अनुशासित जीवनशैली को सफलता की ओर ले जाती है। रणनीति को सफलता की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि अच्छा आचरण, सकारात्मक व्यवहार और सही निर्णय लेने की क्षमता ही व्यक्ति को अपने लक्ष्य तक पहुंचाती है। कार्यक्रम में गीता शोधपीठ के निदेशक प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी, प्रो. डी.सी. श्रीवास्तव, डॉ. अमित कुमार और डॉ. उमेश पालीवाल ने स्वामी प्रबुद्धानंद का सम्मान किया। स्वागत भाषण डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी ने दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. मनोज अवस्थी ने किया।
वारिसलीगंज में शिक्षा संवाद आयोजित:छात्रों ने पेपर लीक, व्यवस्था पर उठाई आवाज
नवादा जिले के वारिसलीगंज विधानसभा क्षेत्र में 'शक्ति अभियान' के तहत 'शिक्षा संवाद' का आयोजन किया गया। यह संवाद शिक्षा में बढ़ती धांधली, पेपर लीक की घटनाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर केंद्रित था। रेणु कुमारी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्ष परीक्षाओं तथा बेहतर शैक्षणिक अवसरों की मांग की। इंडियन यूथ कांग्रेस की राष्ट्रीय संयुक्त सचिव और शक्ति अभियान बिहार की स्टेट लीड रीचा सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक और शिक्षा में अनियमितताओं ने युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। रीचा सिंह ने जोर दिया कि शिक्षा व्यवस्था को भ्रष्टाचार और धांधली से मुक्त कर प्रत्येक छात्र-छात्रा को समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रभाकर झा ने कहा कि यह शिक्षा के न्याय की आवाज है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'डबल इंजन' की सरकार ने बिहार सहित देश की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। श्री झा ने छात्र शक्ति को निखारने के लिए सुलभ शिक्षा व्यवस्था, शिक्षा प्रणाली और पद्धति की आवश्यकता पर बल दिया। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष सूरज यादव ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और छात्र-छात्राओं के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही। कार्यक्रम के अंत में इंटक जिला अध्यक्ष मनीष कुमार, जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व उपाध्यक्ष गोपाल कुमार, सत्येंद्र प्रसाद कुशवाहा और वारिसलीगंज प्रखंड अध्यक्ष पंकज कुमार ने युवाओं से शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर संगठित होकर अपनी आवाज उठाने और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।
गुमला जिला के लोहरदगा रोड स्थित समाहरणालय में संचालित जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय में मंगलवार शाम करीब 4 बजे एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने छापेमारी की। इस कार्रवाई से कार्यालय में हड़कंप मच गया। एसीबी टीम ने कार्यालय को सील कर दिया और किसी को भी अंदर आने-जाने की अनुमति नहीं दी गई। छापेमारी के दौरान एसीबी की टीम ने शिक्षा विभाग में कार्यरत प्रधान लिपिक रंजीत कुजूर और सेवानिवृत्त शिक्षक वत्स रविकांत को हिरासत में लिया। उन्हें 50 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। एसीबी टीम दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए रांची ले गई है। जानकारी के अनुसार, सेवानिवृत्त शिक्षकों के एरियर की राशि जारी करने के एवज में मोटी रकम की मांग की गई थी। इसी शिकायत के आधार पर एसीबी ने यह कार्रवाई की। रांची से आई एसीबी टीम का नेतृत्व कर रहे डीएसपी ने बताया कि रिश्वत के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विस्तृत जानकारी रांची स्थित एसीबी कार्यालय से जारी की जाएगी।
छत्तीसगढ़ के अतिथि व्याख्याताओं ने मंगलवार को अपनी 10 मांगों को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा के बंगले पर पहुंचे। व्याख्याताओं का दावा है कि इस दौरान प्रदेशभर से 250 से 300 अतिथि व्याख्याता मौजूद रहे। व्याख्याताओं के प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री के सामने एकमुश्त 57,700 रुपए मासिक मानदेय, सेवा सुरक्षा, 12 महीने का कार्यकाल, 13 वार्षिक सीएल, सम्मानजनक पदनाम और नीति-2024 में संशोधन समेत अपनी मांगें रखीं। लेकिन इन मांगों पर कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिलने के बाद व्याख्याता मंत्री बंगले के बाहर भी नारेबाजी करने लगे। वहीं दूसरी ओर प्रदर्शन से नाराज मंत्री मीडिया के सवालों का जवाब दिए बिना ही बोलन से विधानसभा की ओर निकल गए। व्याख्याताओं का आरोप प्रतिनिधि मंडल का आरोप है कि मंत्री 2,000 रुपए प्रतिदिन मानदेय के प्रस्ताव पर ही कायम रहे। एकमुश्त मासिक मानदेय की मांग पर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला। व्याख्याताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पूरी बात सुने बिना मंत्री वहां से चले गए। इसके बाद उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से नारेबाजी कर विरोध दर्ज कराया। अतिथि शिक्षकों की 10 मांगों को जानिए 1. सेवा सुरक्षा हरियाणा की तरह 3 साल सेवा पूरी करने वाले अतिथि व्याख्याताओं को 65 साल की उम्र तक नौकरी की सुरक्षा दी जाए। 2. एकमुश्त मासिक वेतन और PF कालखंड के हिसाब से भुगतान खत्म कर हर महीने 57,700 रुपए तय मानदेय दिया जाए। साथ ही PF और महंगाई भत्ते (DA) का लाभ भी मिले। 3. छत्तीसगढ़ के युवाओं को प्राथमिकता नई भर्ती में राज्य के मूल निवासियों को पहले अवसर मिले। समान अंक की शर्त हटाकर केवल राज्य के अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने की मांग। 4. मेरिट सूची अलग बने नई भर्ती में दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों की मेरिट सूची अलग बनाई जाए और छत्तीसगढ़ के उम्मीदवारों को पहले मौका मिले। 5. विस्थापन में भी स्थानीय को प्राथमिकता यदि किसी अतिथि व्याख्याता का विस्थापन होता है तो नई मेरिट में भी छत्तीसगढ़ के उम्मीदवारों को पहले अवसर दिया जाए। 6. सवैतनिक अवकाश संविदा कर्मचारियों की तरह हर सत्र में आकस्मिक (CL) और अन्य सवैतनिक छुट्टियों की सुविधा मिले। 7. एक समान सेवा अवधि सभी विश्वविद्यालयों में नियुक्ति और सेवा समाप्ति का एक जैसा कैलेंडर हो। सेवा अवधि 1 जुलाई से 31 मई तक तय की जाए। 8. 25% आरक्षण सहायक प्राध्यापक, क्रीड़ाधिकारी और ग्रंथपाल की भर्ती में अनुभवी अतिथि व्याख्याताओं के लिए 25% क्षैतिज आरक्षण दिया जाए। 9. PSC भर्ती में आयु सीमा में छूट सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में अतिथि व्याख्याताओं को उनके अध्यापन अनुभव के आधार पर अधिकतम 10 साल तक आयु सीमा में छूट मिले। 10. ऑनलाइन पोर्टल और एक जैसा प्रारूप भर्ती, चॉइस फिलिंग और रिक्त पदों के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाए। साथ ही सभी कॉलेजों में जॉइनिंग लेटर और अनुभव प्रमाण पत्र का एक समान प्रारूप लागू किया जाए। हरियाणा की तर्ज पर नियम बनाने की मांग हरियाणा सरकार ने हरियाणा एक्सटेंशन लेक्चरर्स एंड गेस्ट लेक्चरर्स (सिक्योरिटी ऑफ सर्विस) एक्ट, 2024 लागू किया है। इसके प्रमुख प्रावधान हैं:1. 5 साल की सेवा पूरी करने वाले पात्र गेस्ट/एक्सटेंशन लेक्चरर्स को सेवानिवृत्ति (58 वर्ष) तक सेवा सुरक्षा। 2. यदि किसी 240 दिन काम किया है, तो उसे पूरे वर्ष की सेवा माना जाएगा। 3. पात्र गेस्ट लेक्चरर्स को ₹57,700 प्रतिमाह समेकित (Consolidated) मानदेय देने का प्रावधान। बाद के संशोधन प्रस्ताव में DA के अनुसार बढ़ोतरी और वार्षिक इंक्रीमेंट का भी प्रावधान जोड़ा गया। छत्तीसगढ़ में भी अतिथि व्याख्याता इसी तरह से नियम बनाने की मांग कर रहे हैं। मध्य प्रदेश में मोहन यादव की सरकार ने 13 CL मांग पूरी की प्रदेश में व्याख्याताओं की प्रमुख मांगों में से 13 CL की मांग है। व्याख्याताओं का कहना है कि मध्य प्रदेश में भी भाजपा की सरकार है। वहां मोहन यादव की सरकार ने अतिथि शिक्षकों की व्याख्याताओं को देखते हुए इन मांगों को पूरा किया है। मध्य प्रदेश सरकार ने 13 आकस्मिक अवकाश, 3 ऐच्छिक अवकाश, प्रसूति अवकाश और स्थानांतरण सुविधा अपने यहां के अतिथि व्याख्याताओं को दी है। जबकि छत्तीसगढ़ सरकार में ऐसी कोई सुविधा नहीं है। आंदोलन जारी रहेगा व्याख्याताओं का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। उनका दावा है कि यह संघर्ष उच्च शिक्षा में कार्यरत अतिथि व्याख्याताओं की सेवा शर्तों और मांगों को लेकर है। उनका कहना है कि मांगों पर निर्णय नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
अखिल विश्व गायत्री परिवार शांति कुंज हरिद्वार और राज्य सरकार के तत्वावधान में आयोजित होने वाली भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के लिए गायत्री शक्ति पीठ ओसियां ने स्थानीय विद्यालयों में पुस्तकों का वितरण किया। यह वितरण अभियान विद्यालयों से संपर्क स्थापित कर किया गया। टीचर और छात्रों को नैतिक शिक्षा का महत्व बताया इस अवसर पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य मनमोहन पुरोहित ने उपस्थित अध्यापकों और छात्रों को नैतिक शिक्षा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की प्रथम और देव संस्कृति है, जो 'जियो और जीने दो' के सिद्धांत पर आधारित है। मोबाइल पर ज्यादा निर्भरता पर जताई चिंता पुरोहित ने आधुनिक युग में युवा वर्ग के सोशल मीडिया और मोबाइल पर अत्यधिक निर्भरता पर चिंता व्यक्त की, जिससे उनमें सामान्य ज्ञान की कमी हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि समय बदल रहा है और पूर्वजों की पुरानी संस्कृति धीरे-धीरे वापस आ रही है। स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन के लिए अपनी संस्कृति को अपनाना आवश्यक है। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में भाग लेने की अपील इस दौरान परीक्षा संयोजक मोतीलाल सोनी ने सभी छात्रों से गायत्री परिवार द्वारा आयोजित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में भाग लेने का आग्रह किया। गायत्री परिवार के सांगीदान पालीवाल ने पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा लिखित 'नव युग का संविधान' भी वितरित किया। ये रहे मौजूद कार्यक्रम में विद्यालय के राधेश्याम मेघवाल, गिरीराज पुरोहित, विकास वैष्णव, सत्यनारायण पालीवाल, बंशीलाल जयपाल, अशोक बिश्नोई, मीना जोशी सहित समस्त अध्यापक और छात्र उपस्थित थे।
प्रदेश कांग्रेस द्वारा इंदौर से शुरू की गई साइक्लोथॉन यात्रा मंगलवार को देवास पहुंची। यात्रा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित पार्टी के कई पदाधिकारी शामिल रहे। देवास पहुंचने पर रसलपुर से भोपाल चौराहे तक 50 से अधिक मंचों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। देवास में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि राहुल गांधी ने देश में शिक्षा को लेकर जन-जागरूकता का अभियान शुरू किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि प्रदेश और देश में केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा लागू की जाए, क्योंकि यह वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि इन मामलों में बार-बार भाजपा से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। उनके अनुसार, पेपर लीक की घटनाओं के कारण कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, जिससे लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ। मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मध्य प्रदेश में पिछले 25 वर्षों से भाजपा की सरकार है, लेकिन आज भी गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को सरल और मुफ्त शिक्षा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में करीब 50 प्रतिशत पद खाली हैं, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना चुनौती बना हुआ है। पटवारी ने भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस लगातार मुख्यमंत्री से सवाल पूछ रही है, लेकिन जवाब नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार सरकार की कार्यप्रणाली का हिस्सा बन चुका है और जनता के सामने इसकी सच्चाई उजागर होना चाहिए। पटवारी ने कहा कि साइक्लोथॉन यात्रा का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की जनता तक यह संदेश पहुंचाना है कि हर परिवार के बच्चों को केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग भी की।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा दे सकता है। इससे व्यापार बढ़ेगा, निवेश के नए अवसर बनेंगे और भारतीय कंपनियों के लिए न्यूजीलैंड के साथ ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत क्षेत्र के बाजारों तक पहुंच आसान होगी। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। वहीं न्यूजीलैंड कृषि, डेयरी, शिक्षा, तकनीक और सुशासन के लिए जाना जाता है। दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं। ऐसे में FTA दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है। भारतीय कंपनियों को मिलेगा नया बाजार ग्लोबल फाइनेंस सर्विसेज लिमिटेड केसंस्थापक एवं निदेशक अजय कुमार के मुताबिक, FTA लागू होने पर भारतीय IT, फार्मा, इंजीनियरिंग, मेडिकल उपकरण, टेक्सटाइल, फाइनेंशियल सर्विसेज और स्टार्टअप सेक्टर को न्यूजीलैंड के बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी। साथ ही भारतीय कंपनियां न्यूजीलैंड के जरिए ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत क्षेत्र के अन्य देशों में भी कारोबार बढ़ा सकेंगी। वहीं न्यूजीलैंड की कृषि, डेयरी, फूड प्रोसेसिंग, शिक्षा, पर्यटन और हाई-टेक कंपनियों को भारत जैसे बड़े उपभोक्ता बाजार तक पहुंच मिलेगी। भारतीय युवाओं के लिए बढ़ सकते हैं रोजगार के अवसर अजय कुमार कहते हैं- न्यूजीलैंड में स्वास्थ्य, शिक्षा, इंजीनियरिंग, निर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में कुशल पेशेवरों की कमी है। अगर FTA के तहत पेशेवर योग्यताओं को पारस्परिक मान्यता मिलती है और वर्क परमिट की प्रक्रिया आसान होती है, तो भारतीय डॉक्टर, नर्स, इंजीनियर, शिक्षक और IT प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं। कृषि और डेयरी में मिलेगा तकनीकी सहयोग न्यूजीलैंड आधुनिक डेयरी प्रबंधन, पशुपालन और टिकाऊ कृषि तकनीक के लिए दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन तकनीकों का उपयोग भारत में होने से किसानों की उत्पादकता बढ़ सकती है, डेयरी सेक्टर मजबूत होगा और फूड प्रोसेसिंग उद्योग को भी गति मिलेगी। तकनीक और स्टार्टअप सेक्टर में बढ़ेगा सहयोग दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फिनटेक, साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल पेमेंट और स्टार्टअप इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर सकते हैं। इससे दोनों देशों के स्टार्टअप और रिसर्च संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ेगा। निवेश बढ़ने की भी उम्मीद न्यूजीलैंड राजनीतिक स्थिरता, पारदर्शी प्रशासन और निवेशकों के अनुकूल नीतियों के लिए जाना जाता है। ऐसे में भारतीय उद्योगपतियों और निवेशकों के लिए वहां कारोबार बढ़ाने और वैश्विक विस्तार के नए अवसर बन सकते हैं। छोटे उद्योगों और किसानों के हितों का भी रखना होगा ध्यान विशेषज्ञों का कहना है कि FTA का पूरा लाभ तभी मिलेगा, जब सरकार घरेलू उद्योगों, MSME, किसानों और सेवा क्षेत्र के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। साथ ही गुणवत्ता मानकों, सीमा शुल्क प्रक्रिया और नियमों को भी सरल बनाना होगा। प्रवासी भारतीय निभा सकते हैं अहम भूमिका न्यूजीलैंड में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, व्यापार और सेवा क्षेत्र में काम कर रहे हैं। यह समुदाय दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। क्या है FTA? मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement-FTA) दो देशों के बीच ऐसा व्यापारिक समझौता होता है, जिसमें आयात-निर्यात पर लगने वाले शुल्क (टैरिफ) और अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम या खत्म किया जाता है। इसका उद्देश्य व्यापार बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना होता है। (लेखक अजय कुमार, ग्लोबल फाइनेंस सर्विसेज लिमिटेड, ऑकलैंड (न्यूज़ीलैंड) के संस्थापक एवं निदेशक हैं। आर्टिकल में व्यक्त विचार उनके निजी हैं।)

