कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' अभियान के तहत रविवार को मेरठ में छात्रों और युवाओं ने शिक्षा, रोजगार और युवाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्र आक्रोश मार्च निकाला। अभियान के मेरठ शहर संयोजक अवनीश काजला और महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा के नेतृत्व में निकले मार्च में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, युवाओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। मार्च की शुरुआत चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) के मुख्य द्वार से हुई। इसके बाद मार्च तेजगढ़ी होते हुए वापस विश्वविद्यालय परिसर पहुंचकर समाप्त हुआ। पूरे मार्ग में प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर केंद्र सरकार की छात्र एवं युवा विरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो, पेपर लीक बंद करो, युवाओं को रोजगार दो और शिक्षा बचाओ, भविष्य बचाओ जैसे नारे लगाए गए। मार्च को संबोधित करते हुए अभियान के शहर संयोजक अवनीश काजला ने कहा कि देश का छात्र और युवा वर्ग शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, लगातार हो रहे पेपर लीक, बढ़ती बेरोजगारी और अवसरों की कमी से परेशान है। उनका आरोप था कि केंद्र सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि 'छात्रों की गूंज' अभियान छात्रों की आवाज को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुंचाने का माध्यम है और मेरठ में इसे व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। अवनीश काजला ने दावा किया कि मेरठ में अब तक करीब सात हजार छात्र-युवा इस अभियान से जुड़ चुके हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि 9 अगस्त तक चलने वाले अभियान के दौरान जिले से लाखों छात्र-युवा शिक्षा, रोजगार और अपने अधिकारों की लड़ाई में शामिल होंगे। मार्च में जाहिद अंसारी, धूम सिंह गुर्जर, हेमंत प्रधान, अल्तमस त्यागी, सुमित विकल, सहरयाब मुखिया, संजय कटारिया, राज केशरी, विनोद सोनकर, रवि कुमार, रीना शर्मा, मुस्ताजब चौधरी, अजीम प्रधान, सरताज चौधरी, राहत चौहान, यूसुफ अंसारी, इकराम चौधरी, दिनेश उपाध्याय, राजेंद्र जाटव, शिवकुमार शर्मा, विकास शर्मा, सोनम रानी, बबली देवी, अनिल प्रेमी, नसीम राजपूत, निशांत तोमर, शहबाज अली, इकरामुद्दीन अंसारी, हिमांशु शर्मा, जितेंद्र भारद्वाज, प्रवीण कुमार, अवधेश सक्सेना, मुजाहिद और यासिर सैफी समेत बड़ी संख्या में छात्र-युवा एवं कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
भारतीय युवा कांग्रेस के देशव्यापी छात्रों की गूंज अभियान के तहत रविवार शाम ग्वालियर के बैजाताल (मोतीमहल) पर ग्वालियर की GOONJ (Voices Turn Into Movements) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रैप, कविता, शायरी और ओपन माइक के माध्यम से छात्र-छात्राओं और युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक, बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। कार्यक्रम का नेतृत्व भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं अभियान के संयोजक मितेंद्र दर्शन सिंह यादव ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, युवा, कवि, कलाकार और युवा कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। मंच से प्रस्तुत रचनात्मक प्रस्तुतियों के जरिए शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से सामने रखा गया। कार्यक्रम का मुख्य संदेश था— “शब्द नहीं... ये आवाज़ है देश के युवाओं की।” अपने संबोधन में मितेंद्र दर्शन सिंह यादव ने कहा कि देश का युवा अब केवल सुनने वाला नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने वाला युवा है। उन्होंने आरोप लगाया कि NEET, CBSE और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के सपनों को तोड़ा है। उनका कहना था कि जब मेहनत करने वाले छात्रों का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा, तो देश का भविष्य भी सुरक्षित नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि छात्रों की गूंज अभियान का उद्देश्य युवाओं को ऐसा लोकतांत्रिक मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे बिना किसी भय के अपनी बात रख सकें। उनके अनुसार ग्वालियर की GOONJ ने यह साबित किया है कि युवाओं की आवाज़ अब आंदोलन का रूप ले रही है और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग पूरे देश में मजबूती से उठ रही है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों और परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, पेपर लीक के मामलों में कठोर कार्रवाई, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। समापन अवसर पर मितेंद्र दर्शन सिंह यादव ने कहा कि यह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के युवाओं की चेतना और परिवर्तन का मंच है। उन्होंने कहा कि जब तक छात्रों को न्याय, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और उनके भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक छात्रों की गूंज अभियान पूरे देश में जारी रहेगा।
खगड़िया में कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र बिहार विधान परिषद चुनाव-2026 के मद्देनजर रविवार को खगड़िया जिला मुख्यालय स्थित केएन क्लब में एक जिला स्तरीय स्नातक मतदाता संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। आयोजकों के अनुसार, इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखंडों से लगभग पांच हजार स्नातक मतदाता शामिल हुए। इसे कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के 74 वर्षों के इतिहास में पहली बार आयोजित ऐसा संवाद कार्यक्रम बताया गया है। कार्यक्रम में पहुंचते ही हुआ भव्य स्वागत कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही संभावित एमएलसी प्रत्याशी रजनीश रंजन (कोसी पुत्र) का समर्थकों ने भव्य स्वागत किया। बड़ी संख्या में उपस्थित स्नातक मतदाताओं को संबोधित करते हुए रजनीश रंजन ने कहा कि यदि उन्हें कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की जनता का समर्थन मिला, तो वे विधान परिषद में स्नातकों, शिक्षकों, अधिवक्ताओं, पत्रकारों और बेरोजगार युवाओं के हितों की आवाज मजबूती से उठाएंगे। 'सात निश्चय' के जरिए रखीं अपनी प्राथमिकताएं उन्होंने अपने 'सात निश्चय' का उल्लेख करते हुए बताया कि उनकी पहली प्राथमिकता शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराना होगी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 'एक पाठ्यक्रम-एक वेतनमान' लागू करने, वित्तरहित शिक्षा व्यवस्था की समस्या समाप्त करने, सभी स्नातकों के लिए जीवन सुरक्षा बीमा तथा शिक्षकों, अधिवक्ताओं, पत्रकारों, संविदाकर्मियों एवं बेरोजगार स्नातकों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने का भी वादा किया। पुस्तकालय, हेल्थ सेंटर और भत्ते का भी किया जिक्र रजनीश रंजन ने अधिवक्ताओं के लिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थापना, जिला, अनुमंडल एवं प्रखंड स्तर पर आधुनिक पुस्तकालय और ई-लाइब्रेरी की स्थापना तथा बेरोजगार स्नातकों के लिए मासिक भत्ता लागू कराने को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बताया। रोजगार और पलायन जैसे मुद्दों पर पूछे गए सवाल संवाद कार्यक्रम के दौरान स्नातक मतदाताओं ने रोजगार, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनसरोकारों से जुड़े कई प्रश्न पूछे। रजनीश रंजन ने सभी सवालों का विस्तार से जवाब देते हुए कहा कि युवाओं का पलायन रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में सरकार पर लगातार दबाव बनाया जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधि की भूमिका केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि स्नातकों की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर संघर्ष करना भी आवश्यक है। कार्यक्रम में कई अन्य स्नातक मतदाताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए और रजनीश रंजन के प्रति समर्थन जताया। कोर टीम ने जताया भरोसा, मनीषा रंजन ने किया आभार व्यक्त इस दौरान कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विभिन्न जिलों से पहुंचे कोर टीम के सदस्यों ने आगामी चुनाव में उनके पक्ष में मजबूती से काम करने का भरोसा दिलाया। कार्यक्रम के अंत में रेडियो ईस्ट एंड वेस्ट की महानिदेशिका एवं भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय की सीनेट सदस्या मनीषा रंजन ने सभी स्नातक मतदाताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यदि रजनीश रंजन एमएलसी बनते हैं तो वे खगड़िया सहित पूरे कोसी क्षेत्र के स्नातकों के हक और अधिकार की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक मजबूती से लड़ेंगे। कार्यक्रम का संचालन अमरजीत राठौर ने किया। मौके पर वरिष्ठ अधिवक्ता, शिक्षाविद, समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में स्नातक मतदाता मौजूद रहे।
राष्ट्रीय शिक्षा रत्न सम्मान समारोह में उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वालों का सम्मान किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिक्षा ही विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव है और मेधावी विद्यार्थियों को आगे बढ़ाना केवल सरकार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं को शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। स्वर्णकार सेवा दल की ओर से रविवार को बिड़ला सभागार में राष्ट्रीय शिक्षा रत्न सम्मान-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए विभिन्न स्कूल-कॉलेजों के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। समारोह के दौरान विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र, मेडल, स्मृति-चिह्न और स्टेशनरी सामग्री भेंट कर उनकी उपलब्धियों की सराहना की गई। समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक एवं समाज के विभिन्न वर्गों के लोग मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के चेहरे पर सम्मान मिलने की खुशी साफ दिखाई दी, वहीं अभिभावकों ने भी अपने बच्चों की सफलता पर गर्व महसूस किया। दिया कुमारी ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसकी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करती है। शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार, संस्कारी और जागरूक नागरिक बनाने की प्रक्रिया है। आज का विद्यार्थी कल का बनाएगा भारत उन्होंने कहा कि आज का विद्यार्थी ही कल का भारत बनाएगा। इसलिए युवाओं को केवल पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज, संस्कृति और नैतिक मूल्यों के प्रति भी अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा। सिर्फ अंक नहीं, संस्कार भी जरूरी दीया कुमारी ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए मेहनत, अनुशासन और ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे अंक प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी अच्छा इंसान बनना है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने माता-पिता, गुरुजनों और समाज के प्रति सम्मान बनाए रखने तथा अपनी प्रतिभा का उपयोग देश और समाज के विकास में करने का आह्वान किया। डिप्टी सीएम ने की स्वर्णकार सेवा दल की इस पहल की सराहना डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने स्वर्णकार सेवा दल की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज द्वारा प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित करना अत्यंत प्रेरणादायी कार्य है। ऐसे आयोजन न केवल विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि उन्हें भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित भी करते हैं। उन्होंने कहा कि जब समाज अपने मेधावी बच्चों को पहचान देता है, तो वे और अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं और दूसरे विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा बनते हैं। दीया कुमारी ने अपने संबोधन में सभी सामाजिक संगठनों और समाजों से आग्रह किया कि वे भी प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसे सम्मान समारोह आयोजित करें। होनहार बच्चों के सम्मान से शिक्षा का स्तर बेहतर होगा उन्होंने कहा कि अगर हर समाज अपने होनहार बच्चों का सम्मान करेगा, तो निश्चित रूप से शिक्षा का स्तर और बेहतर होगा और युवाओं में आगे बढ़ने की नई ऊर्जा पैदा होगी। समारोह के दौरान सम्मानित होने वाले विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। मेधावी छात्र-छात्राओं ने इसे अपने जीवन का यादगार पल बताया। वहीं अभिभावकों ने कहा कि इस तरह के सम्मान बच्चों को आगे बढ़ने की नई प्रेरणा देते हैं और उनकी मेहनत को नई पहचान मिलती है।
भारतीय जनता पार्टी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती स्मरण पखवाड़े के तहत रविवार को बैतूल के मैरीज गार्डन में जिला स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में प्रदेश के स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। डॉ. मुखर्जी के विचारों को बताया प्रेरणा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्रवाद के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल में रहते हुए भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। जनसंघ की स्थापना कर उन्होंने जिस विचारधारा की शुरुआत की, वही आज भारतीय जनता पार्टी के रूप में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना डॉ. मुखर्जी के सपने को साकार करने वाला कदम है। मंत्री ने कार्यकर्ताओं से वर्ष 2047 तक भारत को विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के लिए पूरी निष्ठा से काम करने की अपील की। राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की सीख केंद्रीय राज्य मंत्री एवं बैतूल सांसद दुर्गादास उइके ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक और देश की एकता व अखंडता के मजबूत पक्षधर थे। उनके जीवन से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और सेवा व समर्पण की प्रेरणा मिलती है। बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने पर जोर जिला संगठन प्रभारी एवं पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता ने स्मरण पखवाड़े के दौरान आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और प्रत्येक बूथ पर प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की टीम तैयार करने पर जोर दिया। औद्योगिक नीति में योगदान का किया उल्लेख भाजपा जिलाध्यक्ष सुधाकर पंवार ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने संविधान निर्माण के साथ स्वतंत्र भारत की औद्योगिक नीति को दिशा देने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने देश की पहली औद्योगिक नीति की रूपरेखा तैयार करने में उनकी भूमिका का उल्लेख किया।
बैतूल में रविवार को स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह एक पार्टी कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों की पात्रता परीक्षा (टीईटी), ई-अटेंडेंस व्यवस्था और परिवहन विभाग के इंटीग्रेटेड चेक पोस्टों को लेकर सरकार का पक्ष रखा। टीईटी पर बोले- सुप्रीम कोर्ट के फैसले का करेंगे पालन शिक्षकों की पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर मंत्री ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट जो भी निर्देश देगा, सरकार उसका पालन करेगी। विभाग इसके लिए तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से पूरी हो। अभी कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आया है। मंत्री ने कहा कि शिक्षकों की मुख्य चिंता यह है कि जिस मापदंड के आधार पर उनकी नियुक्ति हुई थी, अब नए मापदंड क्यों लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार इस मामले में सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट गई थी। सॉलिसिटर जनरल के माध्यम से कोर्ट को बताया गया है कि शिक्षकों का चयन तत्कालीन नियमों के अनुसार हुआ था। इसके बावजूद यदि कोर्ट परीक्षा कराने का निर्देश देता है तो सरकार उसका पालन करेगी। ई-अटेंडेंस पर सख्त रुख ई-अटेंडेंस को लेकर मंत्री ने कहा कि सभी शिक्षकों को तय समय पर स्कूल पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी। उन्होंने कहा कि सुबह स्कूल आना और शाम तक अपनी जिम्मेदारी निभाना सभी के लिए अनिवार्य है। ई-अटेंडेंस का पालन भी ईमानदारी से करना होगा। उन्होंने बताया कि करीब 98 प्रतिशत अतिथि शिक्षक और 90 प्रतिशत नियमित शिक्षक ई-अटेंडेंस दर्ज कर रहे हैं। कुछ लोगों की वजह से पूरी व्यवस्था नहीं रोकी जा सकती। नेटवर्क वाले क्षेत्रों में मिलेगी राहत मंत्री ने कहा कि उपस्थिति मोबाइल या अन्य स्वीकृत माध्यम से दर्ज करना अनिवार्य है। जिन क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या है, वहां छूट दी जा रही है। महिलाओं, बीमारी की स्थिति और मातृत्व अवकाश पर रहने वाली महिला अतिथि शिक्षकों को भी आवश्यक राहत दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के करीब एक हजार गांवों में नेटवर्क की समस्या है। ऐसे लगभग 7 से 8 प्रतिशत शिक्षकों को राहत दी जा रही है। सरकार का उद्देश्य विसंगतियों को दूर कर शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है। इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट फिर शुरू हो सकते हैं परिवहन विभाग के इंटीग्रेटेड चेक पोस्टों को लेकर मंत्री ने कहा कि भविष्य में इन्हें फिर से शुरू किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद सरकार ने रिव्यू पिटिशन दायर की है। मंत्री ने कहा कि सरकार इस पर अध्ययन कर रही है कि जिन चेक पोस्टों पर पहले से बड़ा निवेश हुआ है, वहां परिवहन, खनिज, कृषि और वाणिज्य विभागों का संयुक्त अमला तैनात कर उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए। यदि यह व्यवस्था पारदर्शी और प्रभावी साबित होती है तो इसे लागू करने पर विचार किया जाएगा।
RJD आज रविवार को अपना 30वां स्थापना दिवस पूरे बिहार में उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। पार्टी की ओर से राज्य के सभी 38 जिलों में स्थापना दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर पार्टी के संस्थापक लालू प्रसाद यादव ने बिहार की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के नाम विस्तृत संदेश जारी किया है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव फिलहाल यूरोप दौरे पर हैं। इसलिए उनकी मौजूदगी में मुख्य कार्यक्रम 1 जुलाई को ही पार्टी कार्यालय में आयोजित किया गया था। लालू यादव बोले- 5 जुलाई बिहार की राजनीति का ऐतिहासिक दिन अपने संदेश में लालू प्रसाद यादव ने कहा, ‘5 जुलाई 1997 को राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना गरीबों, शोषितों, दलितों, पिछड़ों, वंचितों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की लड़ाई के लिए की गई थी। यह कोई साधारण दिन नहीं, बल्कि बिहार और देश की राजनीति की दिशा और दशा बदलने वाला ऐतिहासिक दिन है।’ कार्यकर्ताओं के संघर्ष और समर्पण को किया नमन लालू यादव ने कहा, ‘राजद का विस्तार लाखों समर्पित कार्यकर्ताओं के त्याग, संघर्ष और मेहनत की बदौलत हुआ है।’ उन्होंने पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के योगदान को सलाम किया। गरीब की भागीदारी वाला विकास हमारा लक्ष्य- लालू लालू यादव ने अपने संदेश में कहा, 'राजद का विकास मॉडल केवल चमकते हवाई अड्डों, मॉल और बड़े होटलों तक सीमित नहीं है। पार्टी ऐसे विकास में विश्वास करती है, जिसमें समाज के अंतिम व्यक्ति की भागीदारी और हिस्सेदारी सुनिश्चित हो।' उन्होंने आगे कहा, ‘मजदूरों, किसानों, कारीगरों और आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना ही राजद का उद्देश्य है।’ संवैधानिक संस्थाओं और लोकतंत्र पर चिंता जताई लालू यादव ने आरोप लगाया, ‘देश में संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है और लोकतंत्र नई चुनौतियों का सामना कर रहा है।’ उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। राजद सिर्फ चुनाव लड़ने वाली पार्टी नहीं- लालू अपने संदेश में लालू यादव ने कहा, ‘राजद केवल चुनाव लड़ने वाली मशीन नहीं है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का आंदोलन है।’ उन्होंने कार्यकर्ताओं से जनता के बीच लगातार सक्रिय रहने और उनके मुद्दों को संसद से लेकर सड़क तक उठाने की अपील की। जब सदन चलता है, तब तेजस्वी गायब रहते हैं- जमा खान बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के यूरोप दौरे को लेकर सियासत तेज हो गई है। सत्तापक्ष लगातार उनके विदेश दौरे पर सवाल उठा रहा है। इसी कड़ी में बिहार सरकार के मंत्री जमा खान ने भी तेजस्वी यादव पर निशाना साधा है। 1 जुलाई को आयोजित स्थापना दिवस के मुख्य कार्यक्रम की तस्वीरें… लालू यादव बोले- ‘हम लड़े हैं और आगे भी लड़ते रहेंगे’ तेजस्वी यादव के यूरोप दौरे पर रहने के कारण पार्टी ने स्थापना दिवस का मुख्य कार्यक्रम 1 जुलाई को ही पटना स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित किया था। इसे लेकर बीजेपी ने आरोप लगाया था कि तेजस्वी यादव की विदेश यात्रा के कारण कार्यक्रम पहले आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत लालू प्रसाद यादव ने की थी। उन्होंने कहा था कि, ‘पार्टी ने हमेशा संघर्ष किया है और आगे भी जनता के अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखेगी।’ तेजस्वी बोले- लालू नाम नहीं एक विचारधारा है तेजस्वी ने कहा, पार्टी को 30 साल हो गए हैं, लेकिन आज तक कोई इस पर उंगली नहीं उठा सकता। “यह संघर्ष करने वाली पार्टी है और मुझे पूरा विश्वास है कि हम सभी मिलकर लालू जी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाएंगे।” उन्होंने कहा- लालू यादव सिर्फ एक नाम नहीं हैं, बल्कि एक विचारधारा हैं, एक विज्ञान हैं, एक यूनिवर्सिटी हैं। इसलिए उन्हें गालियां दी जाती हैं। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि सभी ओरिजिनल भाजपाई हो जाएं। लालू यादव ने न जाने कितने सांसद और मंत्री बनाए। सबको मौका दिया, सबको आगे बढ़ाया। अब फैशन हो गया है कि जो लालू यादव को गाली देगा, उसे बीजेपी आगे बढ़ाएगी। लालू यादव के बिना बिहार और देश की राजनीति की कल्पना नहीं की जा सकती। तेजस्वी यादव की बड़ी बातें बिहार का खजाना खाली है: तेजस्वी ने भाजपा और मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, “बिहार का खजाना खाली है। कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं, योजनाओं के लिए पैसा नहीं है, यहां तक कि विधायक फंड का पैसा भी रोक दिया गया है। कुछ बेईमान पदाधिकारी ही भ्रष्टाचार में लिप्त हैं।” सम्राट चौधरी को बताया अंगूठाछाप: उन्होंने कहा, सम्राट चौधरी अंगूठाछाप मुख्यमंत्री हैं। यह सरकार दिल्ली से रिमोट कंट्रोल पर चल रही है। जिस मुख्यमंत्री पर हत्या का केस है, जो खुद अपराधी है, उसके शासन में फर्जी एनकाउंटर होना स्वाभाविक है। सम्राट चौधरी को बिहार की चिंता नहीं है, बल्कि सरकार अमित शाह चला रहे हैं। पगड़ी नहीं संभाल पाए, बिहार क्या संभालेंगे: तेजस्वी ने आरोप लगाया, “गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। सम्राट चौधरी अपनी पगड़ी तक नहीं संभाल पाए और जाकर मुंडन करा लिया। जो अपनी पगड़ी नहीं संभाल पाया वो बिहार क्या संभालेगा।” अंतिम सांस तक बीजेपी और RSS से लड़ता रहूंगा: तेजस्वी ने कहा, बेईमान अधिकारी, सरकारी पैसे और स्वतंत्र एजेंसियों का दुरुपयोग करके ये लोग चुनाव जीतते हैं। मैं अंतिम सांस तक बीजेपी और RSS से लड़ता रहूंगा। कोई भी हमेशा सत्ता में नहीं रहता। हर किसी का समय तय है। आपसी लड़ाई मत कीजिए, पार्टी का नुकसान होता है: उन्होंने कहा, विधानसभा चुनाव में सीटें सीमित होती हैं। हमने सभी साथियों से धैर्य रखने को कहा था। सरकार बनने के बाद सभी को उचित सम्मान मिलेगा, लेकिन होता यह है कि लोग एक कान से सुनते हैं और दूसरे कान से निकाल देते हैं। आपसी लड़ाई का नुकसान पार्टी और उन्हें होता है। हमारी पार्टी आज भी मजबूत है। कई लोग आए और गए, लेकिन पार्टी का वोट प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है। भरत एनकाउंटर का मुद्दा भी उठा स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान भरत एनकाउंटर का मुद्दा भी गूंजा। पार्टी कार्यालय पहुंचे समर्थक छोटू छलिया ने कहा कि यदि भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था तो उसे गोली नहीं मारी जानी चाहिए थी। उन्होंने बिहार में जातीय राजनीति का आरोप लगाते हुए विरोध स्वरूप गीत भी प्रस्तुत किया।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल जनपद के भीमताल में स्थित ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के नवनिर्मित एकेडमिक ब्लॉक और अत्याधुनिक ऑडिटोरियम का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने ग्राफिक एरा कौशल ज्योति योजना का भी शुभारंभ किया, ...
एमपी के करीब 70 हजार टीचरों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से राहत दिलाने स्कूल शिक्षा विभाग सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाएगा। विभाग का तर्क है कि साल 2005 से 2009 के बीच भर्ती हुए शिक्षकों ने पहले ही सरकारी चयन परीक्षा पास कर नौकरी हासिल की थी, इसलिए उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। यदि सुप्रीम कोर्ट यह दलील स्वीकार करता है, तो हजारों शिक्षकों को राहत मिल सकती है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2025 के आदेश के बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने अप्रैल में निर्देश जारी कर प्रदेश के स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के उन सभी शिक्षकों के लिए जुलाई-अगस्त में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) आयोजित कराने को कहा है, जिनकी नियुक्ति साल 1998 से 2009 के बीच, यानी शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून लागू होने से पहले हुई थी। इस आदेश से प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षक प्रभावित होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से कम है, उन्हें परीक्षा से छूट मिलेगी। वहीं, पांच साल से अधिक सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना जरूरी होगा। परीक्षा पास नहीं करने वाले टीचरों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ेगा। कोर्ट ने TET पास करने की समयसीमा पहले 31 अगस्त 2027 तय की थी। जिसे बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी गई है। 2005 से 2009 में भर्ती शिक्षकों को राहत दिलाने की तैयारी स्कूल शिक्षा विभाग साल 2005 से 2009 के बीच भर्ती हुए करीब 70 हजार शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से राहत दिलाने के लिए नया कानूनी प्रयास कर रहा है। इन शिक्षकों की नियुक्ति सरकार द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा के आधार पर हुई थी। हालांकि, यह परीक्षा शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) नहीं थी और न ही इसे नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) के निर्धारित मानकों के अनुरूप आयोजित किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, विधि विभाग और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं से राय लेने के बाद राज्य सरकार एक सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर कर सकती है। याचिका में अदालत से अनुरोध किया जाएगा कि साल 2005 से 2009 के बीच भर्ती शिक्षकों ने पहले ही सरकारी चयन परीक्षा पास कर नियुक्ति प्राप्त की है, इसलिए उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा देने से छूट दी जाए। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इस याचिका में राहत मिलने की संभावना सीमित है, लेकिन शिक्षकों के हित को देखते हुए यह कानूनी पहल की जा रही है। यदि सुप्रीम कोर्ट राहत देता है, तो पात्रता परीक्षा के दायरे में आने वाले करीब आधे शिक्षकों को इसका लाभ मिल सकता है। फिलहाल मामला विचाराधीन होने के कारण विभाग के अधिकारी आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी करने से बच रहे हैं। व्यापमं के माध्यम से इन वर्षों में हुई शिक्षक भर्ती स्कूल शिक्षा विभाग ने साल 2005-06 में पहली बार व्यापमं (व्यावसायिक परीक्षा मंडल) के माध्यम से शिक्षकों की भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। इसके बाद 2008-09 में भी व्यापमं के जरिए भर्ती परीक्षा कराकर शिक्षकों की नियुक्तियां की गईं। वहीं 2010-11 और 2012-13 में गुरुजी और अनुदेशकों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की गई, जिसके बाद उन्हें अध्यापक के रूप में नियुक्त किया गया। दोबारा याचिका पर भी नहीं मिली राहत सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने पात्रता परीक्षा कराने के निर्देश जारी किए तो शिक्षक संगठनों ने इसका विरोध किया। इसके बाद विभाग और शिक्षक संगठनों ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर आदेश में राहत की मांग की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कर दिया कि पात्रता परीक्षा देना अनिवार्य होगा और इस शर्त में कोई छूट नहीं दी जा सकती। हालांकि, कोर्ट ने शिक्षकों को आंशिक राहत देते हुए परीक्षा आयोजित करने की समय-सीमा एक साल बढ़ाकर अगस्त 2028 तक कर दी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जो शिक्षक पहली बार में परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाएंगे, उन्हें बाद में होने वाली प्रत्येक पात्रता परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। ऐसे में अब स्कूल शिक्षा विभाग के पास निर्धारित समय-सीमा के भीतर पात्रता परीक्षा आयोजित कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। 65 से अधिक याचिकों का खारिज कर चुका है सुप्रीम कोर्ट शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर सुप्रीम कोर्ट 65 से अधिक पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर चुका है। ये याचिकाएं राज्य सरकारों, शिक्षक संगठनों और व्यक्तिगत शिक्षकों ने दायर की थीं। सभी ने 2025 के फैसले पर पुनर्विचार मांगा था। RTE एक्ट में पहले से न्यूनतम योग्यता हासिल करने की व्यवस्था अलग-अलग पुनर्विचार याचिकों पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि TET परीक्षा कराने में समय और संसाधन लगते हैं, इसलिए दो साल की अवधि बढ़ाकर तीन साल की गई है। मामला उन शिक्षकों से जुड़ा है जिन्हें RTE एक्ट 2009 लागू होने से पहले नियुक्त किया गया था और जिनके रिटारमेंट में पांच साल से अधिक समय बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने 2025 के फैसले में कहा था कि ऐसे शिक्षकों को 1 सितंबर 2025 से दो साल के भीतर TET पास करना होगा। कोर्ट ने कहा कि राइट ऑफ चिल्ड्रन टू फ्री एंड कंपल्सरी एजुकेशन (RTE) एक्ट में पहले से व्यवस्था है कि सेवा में मौजूद शिक्षक भी तय समय में न्यूनतम योग्यता हासिल करें। कानून लागू होने के समय सेवा में रहे शिक्षकों के लिए अलग प्रावधान था और उन्हें आवश्यक योग्यता हासिल करने का समय दिया गया था। इससे स्पष्ट है कि संसद चाहती थी कि सभी शिक्षक न्यूनतम मानकों को पूरा करें। कोर्ट ने कहा कि नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) की अधिसूचनाएं या अधीनस्थ नियम मूल कानून से ऊपर नहीं हो सकते, इसलिए किसी छूट के आधार पर TET की अनिवार्यता खत्म नहीं की जा सकती। बेंच ने कहा कि केवल नौकरी जाने की आशंका के आधार पर फैसला निष्प्रभावी नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे बिना TET योग्यता वाले शिक्षक सेवा में बने रहेंगे और इसका असर आने वाली पीढ़ियों की शिक्षा पर पड़ेगा। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि 2011 के संशोधन से पहले नियुक्त शिक्षकों को करियर के बीच में TET पास करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और इससे सेवा शर्तों में अनुचित बदलाव होगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह दलील भी खारिज कर दी। यह खबर भी पढ़ें… MP के 1.5 लाख शिक्षकों को TET पास करना अनिवार्य:SC ने कहा- बच्चों के भविष्य से समझौता नहीं, पात्रता परीक्षा जरूरी; 1 साल का अतिरिक्त समय मध्यप्रदेश के डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) देनी ही पड़ेगी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रिव्यू पिटीशनों पर फैसला सुनाते हुए कहा कि बच्चों के बेहतर शैक्षणिक विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों का TET पास करना जरूरी है। पढ़ें पूरी खबर…
टोल टैक्स पर मंत्री का ज्ञान:बागेश्वर बाबा की शरण में शिक्षा मंत्री, प्रिंसिपल का 'पॉकेट मनी' प्रेम
बात खरी है... इसमें आप देखेंगे बिहार के नेताओं और अफसरों के बीच अंदरखाने क्या चल रहा है, और दिनभर की ऐसी बड़ी हलचल जो आपको हंसाएगी भी और जिम्मेदारों को आइना भी दिखाएंगी। ऊपर VIDEO पर क्लिक करें...
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना : फॉर्म 12 तक
बलौदाबाजार| कृषि क्षेत्र में नवाचार और उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों के लिए डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार हेतु 31 जुलाई 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। अंतिम तिथि के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। पुरस्कार के लिए चयनित किसानों को 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान 1 नवंबर 2026 को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर दिया जाएगा। महासमुंद| बीएनवाईएस प्रथम व द्वितीय वर्ष की पूरक परीक्षा 20 से 24 जुलाई तक, सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक आयोजित होगी। परीक्षा केंद्र श्री महावीर प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय, नगपुरा निर्धारित है। 2024-25 बैच के छात्र ऑनलाइन और पूर्व छात्र ऑफलाइन आवेदन 9 जुलाई तक कर सकते हैं। महासमुंद| श्रमिकों के बच्चों के लिए संचालित 'अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना' में आवेदन की अंतिम तिथि 3 जुलाई से बढ़ाकर 12 जुलाई कर दी गई है। इस योजना के तहत कक्षा 5वीं उत्तीर्ण विद्यार्थी उत्कृष्ट आवासीय विद्यालयों में निशुल्क शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। इच्छुक अभ्यर्थी पोर्टल shramevjayate. cg. gov .in या चॉइस सेंटर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
शिक्षा, चिकित्सा व पर्यावरण के लिए बढ़ाया सेवा का दायरा
बाड़मेर | महावीर इंटरनेशनल एपेक्स के स्थापना दिवस पर महावीर इंटरनेशनल केंद्र बाड़मेर ने महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय अंग्रेजी माध्यम में कार्यक्रम किया। संस्था ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। एक पौधा मां के नाम अभियान के तहत सघन पौधरोपण किया। नए शिक्षण सत्र में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के स्वागत के लिए विद्यालय प्रवेश कार्यक्रम भी हुआ। महावीर इंटरनेशनल एपेक्स ने इस साल 4 जुलाई को स्थापना दिवस पर पूरे भारत में शिक्षा व पर्यावरण को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। देश के चुनिंदा स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर के विशेष कार्यक्रम में शामिल किया गया। इसमें बाड़मेर के महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय को भी शामिल किया गया। कार्यक्रम को यादगार बनाने के लिए संस्था ने स्कूल के सभी छात्र-छात्राओं को कॉपियां मुफ्त बांटी। महावीर इंटरनेशनल बाड़मेर के अध्यक्ष बाबूलाल संखलेचा ने कहा कि इस साल सेवा कार्यों का दायरा बढ़ाया गया है। पर्यावरण को सुरक्षित रखना है। सचिव गौतम बोथरा ने कहा महावीर इंटरनेशनल समय-समय पर सेवा प्रकल्प चलाता है। सामाजिक कार्यक्रम करता है। यह सेवा यात्रा आगे भी जारी रहेगी।
भारतीय शिक्षा व्यवस्था में संस्कृति को केंद्र में रखना जरूरी
भास्कर संवाददाता | बड़वानी शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास व शासकीय आदर्श कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को न्यास का स्थापना दिवस भारतीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम में भारतीय शिक्षा व्यवस्था, राष्ट्रीय शिक्षा नीति व भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा के केंद्र में रखने पर जोर दिया। मुख्य वक्ता मप्र लोक सेवा आयोग इंदौर के परीक्षा नियंत्रक डॉ. वीरेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा भारतीय संस्कृति व ज्ञान परंपरा को शिक्षा का आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में वैदिक गणित, भारतीय ज्ञान परंपरा, पर्यावरण, शिक्षक शिक्षा व आत्मनिर्भरता जैसे विषयों को शामिल करने में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्थानीय लोकनायकों, लोकभाषाओं व लोक परंपराओं को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ना है। भारतीय ग्रंथों में निहित वैज्ञानिक दृष्टि को लंबे समय तक उचित महत्व नहीं मिला। अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनः स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित ने की। उन्होंने कहा भारतीय शिक्षा दिवस हमारी ज्ञान परंपरा, संस्कृति व संस्कारों के प्रति समर्पण का प्रतीक है। मुख्य अतिथि राजेश गुप्ता ने कहा ज्ञान तभी सार्थक होता है, जब उसके साथ विवेक और संस्कार जुड़े हों। जो जीवन जीने की सही दिशा दे, वही वास्तविक गुरु है। विशिष्ट अतिथि रामसागर मिश्र ने कहा शिक्षा में ज्ञान, स्वाभिमान और स्वावलंबन का समावेश जरूरी है। उन्होंने प्राचीन गुरुकुल परंपरा को व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास का प्रभावी माध्यम बताया। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम्, सरस्वती पूजन व दीप प्रज्ज्वलन से हुई। डॉ. दिनेश पाटीदार ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन डॉ. अनिल पाटीदार ने किया, जबकि आभार डॉ. बीएस मुझाल्दा ने व्यक्त किया। अतिथियों का स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के 10 लाख शिक्षकों और कर्मचारियों को 1 करोड़ तक का बीमा कवच मिलने जा रहा है। 8 जुलाई को वाराणसी में सीएम योगी की मौजूदगी में बेसिक शिक्षा विभाग और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बीच इस पर समझौता होगा। बेसिक शिक्षा विभाग के मुताबिक इस समझौते के तहत विभाग में कार्यरत 4.50 लाख स्थायी और 5.50 लाख संविदा, दोनों तरह के कर्मियों को लाभ मिलेगा। इसके लिए बस इन कर्मचारियों का सैलरी खाता एसबीआई में खोलना होगा। इसका लाभ नियमित शिक्षक, अन्य सहयोगी कर्मचारी, शिक्षा मित्र, अनुदेशक, समग्र शिक्षा अभियान से जुड़े कर्मी, मिड–डे मील से जुड़े कर्मचारियों को मिलेगा। स्थायी कर्मचारियों ये लाभ मिलेंगे– बच्चों के लिए एड-ऑन कवर किसी भी दुर्घटना या अनहोनी की स्थिति में कर्मचारी के बच्चों की पढ़ाई और बेटियों की शादी के लिए अलग से वित्तीय सहायता (एड-ऑन कवर) का प्रावधान भी इस समझौते में किया गया है। योगी सरकार ने संविदा कर्मियों का भी पूरा ध्यान रखा है। इन्हें वेतन के आधार पर दो श्रेणियों में लाभ मिलेगा। श्रेणी 1: 10,000 से अधिक मंथली सैलरी पाने वाले कर्मी श्रेणी 2: 10,000 से कम मंथली सैलरी पाने वाले कर्मी कैसे मिलेगा इस योजना का लाभ?
दंतेवाड़ा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हरीश कवासी ने शुक्रवार (3 जुलाई) को गादीरास में आयोजित छात्र संवाद कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं ने शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और छात्र हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी। संवाद के दौरान NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं का मुद्दा प्रमुखता से उठा। इस पर हरीश कवासी ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि छात्रों को निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिए। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर दिया जोर उन्होंने कहा कि भविष्य में कांग्रेस की सरकार बनने पर छात्रों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। हरीश कवासी ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक छात्र का संवैधानिक अधिकार है और दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि केवल स्कूल खोलना पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों को बेहतर शिक्षक, आधुनिक प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और कंप्यूटर जैसी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। युवाओं की भागीदारी और रोजगार पर चर्चा उन्होंने युवाओं से सामाजिक और लोकतांत्रिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि पंचायत से लेकर विधानसभा तक युवाओं की भागीदारी बढ़ने से क्षेत्र का विकास और मजबूत होगा। रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल डिग्री नहीं, बल्कि कौशल विकास भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। छात्रों ने रखीं ये मांगें कार्यक्रम में छात्रों ने शिक्षकों की कमी दूर करने, छात्रावास सुविधाओं का विस्तार करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग रखी। इस पर हरीश कवासी ने आश्वासन दिया कि जिला कांग्रेस कमेटी छात्रों की मांगों को संबंधित स्तर तक पहुंचाएगी। उन्होंने जिले में युवा संवाद मंच गठित करने की भी बात कही, ताकि छात्रों की समस्याओं और सुझावों पर नियमित रूप से चर्चा हो सके।
प्रयागराज में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (NCZCC) द्वारा आयोजित संवाद श्रृंखला 'विमर्श' के तहत शनिवार को 'कला शिक्षा से रोजगार तक की यात्रा' विषय पर एक परिचर्चा हुई। इस कार्यक्रम में कला शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने जोर दिया कि बदलते समय में कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता का मजबूत आधार बन रही है। कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय, मुख्य वक्ता डॉ. सचिन सैनी और राज्य ललित कला अकादमी के अभिनव दीप ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। डॉ. सचिन सैनी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दृश्य कला विभाग में सहायक आचार्य हैं। मुख्य वक्ता डॉ. सचिन सैनी ने कहा कि कला हमारी सांस्कृतिक धरोहर की पहचान है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कला शिक्षा का उद्देश्य केवल कलाकार तैयार करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, कौशल, संवेदनशीलता और नवाचार की क्षमता विकसित करना भी है। डॉ. सैनी के अनुसार, यदि कला को तकनीक, नवाचार और उद्यमिता से जोड़ा जाए, तो यह युवाओं के लिए सम्मानजनक आजीविका का प्रभावी माध्यम बन सकती है। उन्होंने अपने व्याख्यान में कला शिक्षा की पारंपरिक विरासत से लेकर आधुनिक समय में उसके बदलते स्वरूप पर प्रकाश डाला। डॉ. सैनी ने डिजाइन, डिजिटल आर्ट, एनीमेशन, संग्रहालय, कला संरक्षण, सांस्कृतिक संस्थानों, कला शिक्षण, शोध और रचनात्मक उद्योगों जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार की व्यापक संभावनाएँ बताईं। डॉ. सैनी ने नई शिक्षा नीति के संदर्भ में कला शिक्षा की बढ़ती उपयोगिता पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में कला शिक्षा की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मक क्षमता को व्यावसायिक अवसरों में बदलने के लिए निरंतर प्रयास करने की सलाह दी। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने कला शिक्षा और करियर से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. सैनी ने सरल और तथ्यपरक उत्तर दिए। कार्यक्रम के अंत में केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने मुख्य वक्ता को अंगवस्त्र एवं पौधा भेंटकर सम्मानित किया। इस परिचर्चा में बड़ी संख्या में कला प्रेमी, विद्यार्थी, शोधार्थी और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
शिवहर विधानसभा के पूर्व राजद प्रत्याशी नवनीत कुमार झा ने शनिवार को श्री काशी विश्वनाथ वैदिक गुरुकुलम वेद विद्यालय, बभनटोली का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने गुरुकुल में अध्ययनरत बटुकों से मुलाकात की और वैदिक शिक्षा व्यवस्था का अवलोकन किया। विद्यालय परिसर में नवनीत कुमार झा ने बटुकों से वेद, वेदांग, संस्कृत अध्ययन, दैनिक दिनचर्या और गुरुकुल परंपरा के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने विद्यार्थियों के वैदिक अध्ययन की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, सभ्यता और सनातन ज्ञान परंपरा को जीवंत बनाए रखने में ऐसे गुरुकुलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। झा ने कहा कि शिवहर जैसे जिले में वैदिक शिक्षा का यह केंद्र स्थापित होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। उन्होंने इसे केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने गुरुकुल के संचालकों और आचार्यों के प्रयासों की प्रशंसा की। पूर्व राजद प्रत्याशी ने जोर दिया कि आज के दौर में जहां युवा अपनी सांस्कृतिक विरासत से दूर हो रहे हैं, वहीं इस प्रकार के गुरुकुल उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में यह संस्थान वैदिक शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। गुरुकुल के प्राचार्य पंडित जयकांत शास्त्री ने बताया कि यहां वेद, व्याकरण, धर्मशास्त्र, संस्कार, कर्मकांड, ज्योतिष और संस्कृत सहित अन्य सामान्य विषयों की विशेष तैयारी कराई जाती है। गुरुकुल परिवार ने नवनीत कुमार झा का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। उन्हें संस्थान की गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं से भी अवगत कराया गया। उनके आगमन से बटुकों और गुरुकुल परिवार में उत्साह का माहौल देखा गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पचपदरा रिफाइनरी के लोकार्पण के अवसर पर कोटा में भी जिला स्तरीय समारोह आयोजित किया गया। शहर के सियाम ऑडिटोरियम में हुए आयोजन में शिक्षा एवं पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर मुख्य अतिथि रहे। इस दौरान दक्षिण विधायक संदीप शर्मा, लाडपुरा विधायक कल्पना देवी और भाजपा जिला अध्यक्ष राकेश जैन सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं। समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा- पचपदरा रिफाइनरी राजस्थान के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी। इस परियोजना से करीब 35 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और लगभग एक लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है। इससे प्रदेश के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। मंत्री ने बताया- यमुना जल परियोजना का लाभ शेखावाटी क्षेत्र के कई जिलों तक पहुंचेगा, जिससे लगभग 75 लाख लोगों को पेयजल राहत मिलेगी। अंग्रेजी माध्यम स्कूल बंद नहीं होंगे शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा- अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को बंद किए जाने की खबरों पर लोगों को ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल अफवाहें हैं। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों में विद्यार्थी ही नहीं होंगे, ऐसे विद्यालयों के संबंध में नियमानुसार निर्णय लिया जा सकता है, लेकिन जहां बच्चे पढ़ रहे हैं, वहां के विद्यालय किसी भी स्थिति में बंद नहीं किए जाएंगे। साथ ही उन्होंने बताया कि प्रदेशभर के जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत और आवश्यक निर्माण कार्यों पर सरकार गंभीरता से काम कर रही है और इस संबंध में विभाग को आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं।
मिर्जापुर जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार और मुख्य विकास अधिकारी विशाल कुमार ने शनिवार को मुख्य चिकित्साधिकारी के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) हलिया का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य केंद्र में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवधेश कुमार बिना पूर्व स्वीकृत अवकाश के अनुपस्थित मिले। साथ ही वे बिना अनुमति जिला मुख्यालय से बाहर पाए गए। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए जिलाधिकारी ने उनके विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने के निर्देश दिए। दवा वितरण कक्ष की जांच में फार्मासिस्ट अजय कुमार कुशवाहा द्वारा दवाओं के वितरण का इंडेक्स तैयार न किए जाने तथा अभिलेखों का समुचित रखरखाव न होने की बात सामने आई। इस पर जिलाधिकारी ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए फार्मासिस्ट को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं में सुधार, दवा वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकारी कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी ने हलिया क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय भटवारी का भी निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों से पढ़ाई से संबंधित जानकारी ली और शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने शिक्षकों से विद्यार्थियों के पठन-पाठन पर विशेष ध्यान देने और उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता में निरंतर सुधार सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल ने वित्त रहित शिक्षा नीति को समाप्त करने और शिक्षकों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। यह धरना भभुआ में आयोजित किया गया, जिसका नेतृत्व सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय यादव ने किया। मीडिया से बात करते हुए डॉ. यादव ने बताया कि यह आंदोलन पूरे बिहार में चलाया जा रहा है। इसकी शुरुआत 30 जुलाई को अरवल से हुई थी, जिसके बाद आरा, बक्सर और सासाराम में भी प्रदर्शन किए गए। भभुआ में यह इसी कड़ी का हिस्सा था। ''सही मार्गदर्शन नहीं मिल रहा'' उन्होंने सरकार की वर्तमान शिक्षा नीति पर सवाल उठाए। डॉ. यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री का हर प्रखंड में डिग्री कॉलेज खोलने का सपना है, लेकिन उन्हें सही मार्गदर्शन नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज चार-चार कमरों में डिग्री कॉलेज खोले जा रहे हैं, जबकि वित्त रहित शिक्षकों के पास करोड़ों रुपये की भूमि और भवन उपलब्ध हैं, जो माननीय राज्यपाल के नाम पर पंजीकृत हैं। कांग्रेस सेवा दल की मुख्य मांग है कि सरकार इन कॉलेजों और स्कूलों का अधिग्रहण करे। साथ ही, वित्त रहित शिक्षा नीति को समाप्त कर शिक्षकों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा प्रदान करे। मुख्यमंत्री आवास के सामने कफन पदयात्रा निकाली जाएगी - डॉ. यादव डॉ. यादव ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगें पूरी नहीं करती है, तो सभी 38 जिलों का दौरा पूरा करने के बाद 24 अगस्त को पटना में मुख्यमंत्री आवास के सामने 'कफन पदयात्रा' निकाली जाएगी। उन्होंने कहा कि 40 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षक अब सेवानिवृत्ति के करीब हैं और भुखमरी की कगार पर हैं। इसलिए सरकार या तो उन्हें नियत वेतनमान दे या फिर कफन।
रायपुर के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में जनसंचार शिक्षा और शोध को मजबूत करने के लिए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित किया जाएगा। इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का विशेष दौरा किया। यहां उन्होंने कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई के साथ बैठक की और इस पूरे प्रोजेक्ट पर विस्तार से चर्चा की। जनसंचार में बनेगा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बैठक में दोनों विश्वविद्यालयों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि जनसंचार शिक्षा, उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में मिलकर काम किया जाएगा। इसी के तहत रायपुर विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित करने का निर्णय लिया गया। नई तकनीक और रिसर्च से जुड़ेंगे छात्र चर्चा के दौरान यह भी तय हुआ कि इस सेंटर के जरिए शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जाएगा और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। साथ ही, छात्रों को नई तकनीक, आधुनिक मीडिया और रिसर्च से जोड़ने पर भी जोर रहेगा। कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने कहा कि इस पहल का मकसद जनसंचार शिक्षा में नया रोडमैप तैयार करना है, जिसमें अकादमिक सुधार, रिसर्च को बढ़ावा और रणनीतिक विकास शामिल रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया इंडस्ट्री और अकादमिक क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है, जिससे छात्रों को व्यावहारिक अनुभव मिल सके। इस सहयोग के तहत दोनों विश्वविद्यालयों के बीच संयुक्त शोध परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। इसके साथ ही छात्रों और शिक्षकों के आदान-प्रदान (एक्सचेंज प्रोग्राम) के नए अवसर भी बनाए जाएंगे, जिससे शिक्षा और शोध दोनों स्तरों पर नई संभावनाएं खुलेंगी।
कानपुर सांसद ने परमट के प्राथमिक स्कूल में सपा विधायक अमिताभ बाजपेई के बच्चों को वितरित की गई स्कूल ड्रेस, और हेडमास्टर को सस्पेंड किए जाने पर विधायक पर स्कूल को राजनीतिक अखाड़ा बनाए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक जुलाई को प्रधानाचार्य नवीन कुमार त्रिपाठी को मेरे द्वारा स्कूल में ड्रेस वितरित किए जाने की बात की गई थी। जिसका पेमेंट कर ड्रेस भी मंगा दी गई थी। लेकिन प्रिंसिपल ने कहा कि 1 और 2 जुलाई को स्टाफ बाहर रहेगा, इसलिए दो दिन बाद का कार्यक्रम रख लीजिए। फिर एक जुलाई को अखिलेश का जन्मदिन मनाकर वहां ड्रेस वितरित किया जाना। स्कूल के क्लासरूम में राजनीतिक बैनर लगाकर बर्थ-डे मनाना, ये ठीक नहीं है। दैनिक भास्कर ऐप से कानपुर के सांसद ने शनिवार को दोपहर 12 बजे फोन पर बातचीत में बताया कि परमट के प्राथमिक विद्यालय के हेडमास्टर नवीन से बात हुई थी कि एक जुलाई को विद्यालय में बच्चों को ड्रेस वितरित करनी है। लेकिन हेडमास्टर ने बताया कि स्कूल स्टाफ कहीं ट्रेनिंग पर बाहर जा रहा है, इसलिए उस दिन रहने दीजिए। उन्होंने मुझे 6 जुलाई की तारीख दी, क्योंकि 3 जुलाई को मुझे दिल्ली जाना था। इस पर मैंने कहा ठीक है। ड्रेस की बात भी हो गई थी, पेमेंट कर 30 जून को ही ड्रेस भी मंगा दी गई थी। लेकिन परमट स्थित प्राथमिक स्कूल, जो शिक्षा का मंदिर है, उसे सपा विधायक पॉलिटिक्स का अखाड़ा बना रहे हैं। स्कूल पर राजनीति करने का काम कर रहे हैं। जब इन्हें पता लग गया कि सांसद वहां स्कूल में ड्रेस वितरित करने जा रहे हैं, तो किसी तरह इन्हें खबर लग गई होगी। तो ये खुद ही वहां राजनीति करने पहुंच गए। अगर ड्रेस ही बच्चों के हित में वितरित करनी थी, तो वहां पार्टी और अखिलेश का बैनर लगाने की क्या जरूरत थी। विधायक लगातार उसी स्कूल को लेकर राजनीति कर रहे हैं। बस वो तो चाहते हैं कि बीजेपी नेता सुरेश अवस्थी के घर के सामने पत्थर लग जाए। इस तरह की राजनीति कर रहे हैं। इसलिए केवल परमट स्कूल को राजनीति के लिए केंद्रित कर लिया है। शहर में कई प्राथमिक स्कूल थे, जहां जाकर वो स्कूल ड्रेस वितरित कर सकते थे। सपा विधायक से मेरा यही कहना है कि अगर विकास के कार्यों को देखकर आपका भी उसी तरह से काम करने का मन है, तो करिए, लेकिन इस तरह की राजनीति मत करिए कि बच्चों और एक स्कूल, जो शिक्षा का मंदिर है, उसे केंद्र बनाकर वहां राजनीति की जाए। स्कूल में जब उस दिन गए, तो वहां न नरेंद्र मोदी पढ़ाने की बात पढ़ाई गई थी। वहां तो अचानक पहुंचे, तो बच्चों से बातचीत में भारत के प्रधानमंत्री का नाम पूछा। बच्चों ने प्रधानमंत्री का नाम बताया, वहीं बोर्ड पर लिखा गया। एक स्कूल में अखिलेश यादव का बैनर लगा रहे हो, क्या इस तरह की राजनीति ठीक है? स्कूल के हेडमास्टर की बात की जाए, तो अगर स्कूल में कोई इस तरह से बैनर-पोस्टर अंदर लगा रहा था, तो इसकी सूचना अपने अधिकारी को देने की जिम्मेदारी उनकी थी, लेकिन उन्होंने नहीं दी।
बरेली में शनिवार को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) का तीसरा और आखिरी दिन है। जिले के 17 परीक्षा केंद्रों पर सुबह से ही अभ्यर्थियों की भीड़ देखने को मिली। खास बात यह रही कि इस बार परीक्षा केंद्रों पर सिर्फ शिक्षक बनने का सपना लेकर पहुंचे युवा ही नहीं, बल्कि पहले से कार्यरत शिक्षक और शिक्षा मित्र भी परीक्षा देते नजर आए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद टीईटी को सभी संबंधित शिक्षकों के लिए अनिवार्य किए जाने के कारण इस बार परीक्षा का स्वरूप पहले की तुलना में काफी अलग दिखाई दिया। तीन दिन में 37 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने दी परीक्षातीन दिनों तक चली इस परीक्षा में जिले के 17 केंद्रों पर कुल 37,613 अभ्यर्थियों के शामिल हुए है। पहले और दूसरे दिन दो-दो पालियों में परीक्षा आयोजित की गई, जबकि शनिवार यानी अंतिम दिन केवल एक पाली में परीक्षा कराई जा रही है। सुबह से ही केंद्रों के बाहर अभ्यर्थियों की लंबी कतारें दिखाई दीं। समय से पहले पहुंचने के लिए कई अभ्यर्थी सुबह ही परीक्षा केंद्रों पर पहुंच गए। दूसरे जिलों से भी पहुंचे परीक्षार्थीटीईटी परीक्षा में शामिल होने के लिए बरेली के अलावा आसपास के कई जिलों से भी अभ्यर्थी पहुंचे। रेलवे स्टेशन, रोडवेज बस अड्डे और प्रमुख मार्गों पर सुबह से परीक्षार्थियों की आवाजाही बढ़ी रही। कई अभ्यर्थी अपने परिजनों के साथ परीक्षा केंद्र पहुंचे, जबकि बड़ी संख्या में शिक्षक और शिक्षा मित्र भी परीक्षा देते नजर आए। पहले दो दिन दो पालियां, आखिरी दिन सिर्फ एकपरीक्षा के पहले और दूसरे दिन पहली पाली सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक तथा दूसरी पाली दोपहर 2:30 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की गई। अंतिम दिन केवल एक पाली में परीक्षा संपन्न कराई जा रही है। समय का सख्ती से पालन कराया गया और निर्धारित समय के बाद किसी भी अभ्यर्थी को केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया। नकल रोकने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजामपरीक्षा को पूरी तरह नकलविहीन और पारदर्शी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। सभी परीक्षा केंद्रों पर स्टेटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है। पर्याप्त पुलिस बल के साथ केंद्रों की निगरानी की जा रही है। प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों की गहन जांच की गई और नियमों का पालन सुनिश्चित कराया गया। सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी जा रही है। इन 17 केंद्रों पर हुई परीक्षाजिले में मौलाना आजाद इंटर कॉलेज, साहू गोपीनाथ गर्ल्स इंटर कॉलेज, एफआर इस्लामिया इंटर कॉलेज (ब्लॉक ए और बी), एसवी इंटर कॉलेज, श्री पीसी आजाद इंटर कॉलेज, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, विष्णु इंटर कॉलेज, श्री गुलाब राय इंटर कॉलेज, मनोहर भूषण इंटर कॉलेज, कुंवर रंजीत सिंह इंटर कॉलेज, पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज, बरेली इंटर कॉलेज, बिशप मंडल इंटर कॉलेज, इस्लामिया गर्ल्स इंटर कॉलेज, तिलक इंटर कॉलेज और केपीआरसी कला केंद्र गर्ल्स इंटर कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। अब परिणाम का इंतजारतीन दिन तक शांतिपूर्ण ढंग से परीक्षा संपन्न होने के बाद अब अभ्यर्थियों की निगाहें परिणाम पर टिकी हैं। जिन युवाओं ने शिक्षक बनने के लिए परीक्षा दी है, उनके लिए यह परीक्षा भविष्य तय करने वाली है, जबकि कार्यरत शिक्षक और शिक्षा मित्र भी अब अपने परिणाम का इंतजार करेंगे।
रोहतक के गांव ब्राह्मणवास में गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ की शिकायत इंचार्ज की तरफ से जिला शिक्षा विभाग को दी गई है। इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रिंसिपल से मामले में सभी सबूतों के साथ रिपोर्ट देने के निर्देश दिए है। सूचना अनुसार गांव ब्राह्मणवास के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में एक छात्रा के साथ चपड़ासी द्वारा छेड़छाड़ करने की शिकायत स्कूल इंचार्ज राजरानी ने जिला शिक्षा अधिकारी को दी है। अपनी शिकायत में राजरानी ने कहा कि चपड़ासी एक छात्रा को लेकर छत पर गया हुआ था। शिकायत के अनुसार छत पर जब छात्रा के साथ चपड़ासी को देखा तो वह मौके से फरार हो गया। वहीं, छात्रा से भी इसके बारे में पूछताछ की गई, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। 2 जून से चपड़ासी गायब है, जो 3 जून को भी स्कूल नहीं आया। जबकि इस मामले में एक शिकायत पुलिस को भी दी गई थी। मामले में दोनों पक्षों के बीच हुआ समझौताछात्रा से छेड़छाड़ मामले में गांव ब्राह्मणवास व पास के गांव खिड़वाली की पंचायत सदर थाना पहुंची और दोनों ने आपस में बैठकर समझौता कर लिया। इस मामले में पुलिस को कोई शिकायत छात्रा व उसके परिजनों की तरफ से नहीं दी गई। जबकि स्कूल इंचार्ज की तरफ से थाने में शिकायत दी हुई है। स्कूल इंचार्ज की तरफ से शिकायत मिली खंड शिक्षा अधिकारी अशोक ने बताया कि गांव ब्राह्मणवास स्कूल इंचार्ज राजरानी की तरफ से एक शिकायत मिली है, जिसमें चपड़ासी द्वारा छात्रा से छेड़छाड़ बारे में लिखा गया है। इस मामले में स्कूल की प्रिंसिपल सुशीला को पूरी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए है। मामले में जांच के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। मामला संज्ञान में आया, जांच शुरू की जिला शिक्षा अधिकारी मंजीत मलिक ने बताया कि स्कूल के अंदर एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ की बात सामने आई है। इस मामले में खंड शिक्षा अधिकारी को जांच करने के निर्देश दिए गए है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी। अगर जांच में कोई दोषी मिला तो उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा उत्तराखंड के अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का ड्राफ्ट (आरएडब्ल्यू) मांगे जाने के बाद उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने इसे राज्य की शिक्षा सुधार नीति की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि उत्तराखंड की पहल अब देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रही है
शिक्षा विभाग में रिजल्ट में गड़बड़ी, छात्रों का भविष्य खतरे में
विदिशा|लोक शिक्षण संचालनालय मध्य प्रदेश द्वारा घोषित कक्षा 9वीं और 11वीं के परीक्षा परिणामों में भारी तकनीकी खामियां सामने आई हैं, जिसे छात्र और अभिभावक रिजल्ट घोटाला करार दे रहे हैं। ईएमएस पोर्टल से जारी डिजिटल अंकसूचियों में घोषित फार्मूले 1+2+3 का पालन नहीं किया गया है, जिससे त्रैमासिक और अर्धवार्षिक परीक्षाओं के अंक पूरी तरह गायब हैं। विदिशा के पंकज भार्गव ने आयुक्त को शिकायती आवेदन देते हुए बताया कि मार्कशीट में अंकों का योग भी त्रुटिपूर्ण है। मानवीय क्रॉस-वेरिफिकेशन के बिना ही परिणाम घोषित किए गए। इस रिजल्ट के कारण होनहार छात्र फेल घोषित कर दिए गए हैं या उन्हें कम अंक मिले हैं।
बीयू के शिक्षा संवाद में छलका कुलगुरु का दर्द...:बोले- ‘हाल बेहाल है, नींद और चैन दोनों छिन गए’
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) में शुक्रवार को आयोजित शिक्षा संवाद समस्याओं और सुझावों का मंच बन गया। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार की मौजूदगी में शिक्षकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने वर्षों पुरानी समस्याएं खुलकर उठाईं। कार्यवाहक कुलगुरु प्रो. विवेक शर्मा ने विश्वविद्यालय की स्थिति बताते हुए कहा- “लोग उनका हाल पूछते हैं तो वे कहते हैं, हाल नहीं, बेहाल है। कुलगुरु बनने से पहले जो चैन की नींद आती थी, वो नींद और चैन दोनों छिन गए हैं।” उन्होंने बताया कि कार्यभार संभालने के समय 258 परीक्षाओं के परिणाम लंबित थे, जिन्हें घटाकर 162 कर दिया गया है। हालांकि संबद्धता जारी करने में देरी की बात भी स्वीकार की। उच्च शिक्षा मंत्री ने रिक्त पदों पर भर्ती के निर्देश देते हुए कहा कि सरकार हर जरूरी सहयोग करेगी। उन्होंने एनएसएस स्वयंसेवकों को सरकारी नौकरियों में वेटेज देने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजने की घोषणा भी की। कार्यक्रम में रजिस्ट्रार डॉ. एसबी सिंह, कार्यपरिषद सदस्य, शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी, विद्यार्थी और एबीवीपी पदाधिकारी मौजूद रहे। ईसी मेंबर्स के सुझाव पर बोले- मेरा ही भविष्य नहीं मालूम कार्यपरिषद विवि की सुप्रीम अथॉरिटी होती है। इसके बावजूद राज्यपाल की नॉमिनी सदस्य डॉ. भारती सातनकर ने मंत्री के सामने समस्याएं-सुझाव दिए, जबकि इन्हें खुद ही कार्यपरिषद में निर्णय लेने का अधिकार है। हालांकि, मंत्री ने उन्हें लिखित में देने को कहा। डॉ. सातनकर ने हॉस्टल में असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई और साल में ईसी की दो बैठकें छात्रों पर केंद्रित करने का सुझाव दिया। इस पर कुलगुरु प्रो. शर्मा ने कहा, छात्रों के लिए मैं हमेशा उपलब्ध हूं। ईसी की कितनी बैठकें होंगी, मुझे नहीं मालूम। मैं कार्यवाहक कुलगुरु हूं, मेरा ही भविष्य तय नहीं है कि यहां कब तक हूं। शोध निर्देशक प्रशासनिक कार्य में व्यस्त रहते हैं... शोधार्थियों ने कहा कि प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रहने के कारण शोध निर्देशक उन्हें पर्याप्त समय नहीं दे पाते, जिससे शोध की गुणवत्ता प्रभावित होती है। उन्होंने यह भी बताया कि लाइब्रेरी में किताबें तो हैं, लेकिन शोध और अध्ययन के लिए जरूरी नई व उपयोगी पुस्तकें नहीं हैं। कैंटीन नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया।
आदर्श नगर स्थित जिला शिक्षा कार्यालय की ऐसी है हालत
भास्कर न्यूज | जालंधर मॉनसून की दस्तक के साथ शहर में जलभराव और जर्जर इमारतों को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। ऐसे में रैणक बाजार स्थित सरकारी स्मार्ट हाई स्कूल की स्थिति भी कई सवाल खड़े कर रही है। स्कूल के बाहर बड़े अक्षरों में सरकारी स्मार्ट हाई स्कूल का बोर्ड लगा है और परिसर में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं, लेकिन अंदर की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां करती है। स्कूल परिसर में प्रवेश करते ही एक पुरानी इमारत नजर आती है, जिसकी दीवारों से कई जगह ईंटें बाहर निकल चुकी हैं। आगे बढ़ने पर कुछ विद्यार्थी कक्षाओं के बाहर बैठकर पढ़ाई करते दिखाई देते हैं। यहां तक भवन अपेक्षाकृत ठीक नजर आता है, लेकिन इसके पीछे का हिस्सा पूरी तरह जर्जर स्थिति में है। स्कूल के बाईं ओर, जहां प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों की पढ़ाई होती है, उसके पीछे खंडहरनुमा भवन खड़ा है। भवन की दीवारों पर कई जगह दरारें दिखाई देती हैं और प्लास्टर उखड़ चुका है। छत पर बड़े-बड़े पेड़ और झाड़ियां उग आई हैं, जिनकी शाखाएं भवन पर झुकी हुई हैं। वर्ष 1960 में स्थापित इस स्कूल में वर्तमान में 132 विद्यार्थी (82 लड़के, 50 लड़कियां) और 13 स्टाफ सदस्य हैं। सिर्फ ग्रीन नेट का सहारा, जलभराव से बढ़ेगी मुसीबत प्रशासन ने जर्जर हिस्से को सिर्फ 'ग्रीन नेट' लगाकर अलग किया है, जिससे मॉनसून में खतरा बढ़ सकता है। स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, बारिश में यहां भारी जलभराव होता है। जिला शिक्षा अधिकारी गुरिंदरजीत कौर ने बताया कि पिछले साल की भारी बारिश के कारण स्कूल के दो कमरे असुरक्षित हो गए थे, जिन्हें फिलहाल सुरक्षा के लिहाज से बंद रखा गया है।
बॉर्डर इलाकों से आई लड़कियों को खाना, शिक्षा फ्री
भास्कर न्यूज | जालंधर भारत विकास परिषद जालंधर गौरव ने सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत सरस्वती सिन्धु न्यास, जालंधर में रह रही बेटियों के लिए राशन सामग्री भेंट की। इस न्यास में लेह-लद्दाख के सीमावर्ती (बॉर्डर) क्षेत्रों से आईं लगभग 50 बेसहारा लड़कियां रह रही हैं। न्यास दानी सज्जनों के सहयोग से इन बच्चियों के रहने, खाने-पीने और उच्च शिक्षा का पूरा खर्च उठा रहा है, ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। कार्यक्रम के समापन पर डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर राकेश बब्बर ने सभी दानी सज्जनों और पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर एलके टंडन, गौरव गुप्ता, आरके मेहता, राज कुमार मदान, राजीव गुम्बर, केके शर्मा सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे। व्यवस्था की सराहना और आभार राशन वितरण के अवसर पर पहुंचे रीजनल जॉइंट जनरल सेक्रेटरी इंजीनियर राजिंदर रिषी ने न्यास के प्रबंधकों द्वारा की जा रही निस्वार्थ सेवा और वहां के अनुशासित सिस्टम की सराहना की। उन्होंने कहा कि बॉर्डर एरिया के बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना देश सेवा का सबसे उत्तम मार्ग है। इस सेवा कार्य को सुचारू रूप से सफल बनाने में परिषद के वरिष्ठ सदस्य वीके दुग्गल का विशेष योगदान रहा।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) ने नई शिक्षा नीति 2020, नीट (NEET) जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रहे पेपर लीक और लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आज देर शाम संगठन की बेगूसराय जिला इकाई की ओर से दिनकर टाउन हॉल से कैंटीन चौक तक मशाल जुलूस निकाला। इस दौरान छात्रों और युवा कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मशाल जुलूस का नेतृत्व जिलाध्यक्ष अमरेश कुमार ने किया। मौके पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे। AISF के राष्ट्रीय सचिव अमीन हमजा ने देश की शिक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर तीखे हमले किए। धर्मेंद्र प्रधान के दौर में धूमिल हुई शिक्षा व्यवस्था अमीन हमजा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि जब से उन्होंने कार्यभार संभाला है, तब से देश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से धूमिल हो चुकी है। देश की तमाम महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र धड़ल्ले से लीक हो रहे हैं। NEET जैसे लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षा का पेपर लीक हो जाना शर्मनाक है। हमारी मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। इसके साथ ही उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 और VBSA बिल को शिक्षा विरोधी बताते हुए कहा कि यह नीतियां शिक्षा का पूरी तरह से बाजारीकरण करने और इसे गरीब छात्रों के लिए बेहद महंगा बनाने की साजिश हैं, जिसे संगठन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। सूखे नशे और अपराध की आगोश में बेगूसराय अमीन हमजा ने बेगूसराय जिले की बदहाल कानून व्यवस्था पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पूरा जिला इस समय स्मैक और अन्य ड्रग्स सहित सूखे नशे के कारोबार और बढ़ते अपराध की आगोश में समा रहा है। युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है और पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर भी सवाल उठाए। गलत हुआ भरत तिवारी के साथ उन्होंने कहा कि देश के भीतर संविधान और एक न्यायपालिका का सिस्टम है। सजा तय करना कोर्ट का काम है। कोर्ट के काम के बदले पुलिस खुद ही फैसला कर जहां-तहां गोली चलाएगी या एनकाउंटर करेगी तो यह पूरी तरह गलत है। ऐसी घटनाओं से पुलिसकर्मियों का मनोबल गलत दिशा में बढ़ता है, जिससे कानून का राज खत्म होने का खतरा रहता है। हम इसका कड़ा विरोध करते हैं। बेगूसराय में बढ़ते अपराध और सूखे नशे पर अविलंब लगाम लगाई जाए। बलात्कार पीड़िताओं को तत्काल न्याय दिया जाए। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो और नई शिक्षा नीति 2020 को रद्द किया जाए। सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए। बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिले या बेरोजगारी भत्ता दिया जाए। कॉलेजों में आउटसोर्सिंग बहाली बंद कर स्थायी कर्मचारियों की भर्ती की जाए। राष्ट्रीय सचिव अमीन हमजा और जिलाध्यक्ष अमरेश कुमार सहित सभी ने एक स्वर में सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि उनकी मांगें पूरी नहीं की गई, तो आने वाले 15 तारीख को पूरे बिहार के छात्रों को एकजुट कर पटना में बिहार विधानसभा का घेराव किया जाएगा। सरकार से आंख में आंख डालकर सीधा सवाल पूछा जाएगा।
दरभंगा में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज, राज्य और देश के विकास की सबसे मजबूत आधारशिला है। शिक्षा के बिना समग्र विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। वे शुक्रवार को बेनीपुर विधानसभा क्षेत्र के देवकुली धाम स्थित द्रव्येश्वर नाथ महाविद्यालय परिसर में विधायक ऐच्छिक कोष से निर्मित पंडित हरिनाथ मिश्र सभागार के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उपमुख्यमंत्री ने बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और बेनीपुर के पूर्व विधायक स्वर्गीय पंडित हरिनाथ मिश्र और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय पंडित विनोदानंद झा को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान इन्होंने कहा कि बेनीपुर की धरती महान विभूतियों की कर्मभूमि रही है। यहां से कई ऐसे जनप्रतिनिधि हुए, जिनकी सादगी, ईमानदारी, व्यवहार कुशलता और कर्तव्यनिष्ठा आज भी लोगों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने मिथिला की समृद्ध संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां की सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत पूरे देश में अलग पहचान रखती है, जिस पर हर मिथिलावासी को गर्व होना चाहिए। शिक्षा समाज को जोड़ने की मजबूत कड़ी उपमुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज से जुड़ने और उसकी समस्याओं को समझने की सबसे मजबूत कड़ी है। उन्होंने कहा कि शिक्षित समाज ही विकास की दिशा तय करता है। विधायक विनय चौधरी की सराहना की विजय कुमार चौधरी ने स्थानीय विधायक प्रो. विनय कुमार चौधरी की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे सादगी, ईमानदारी और विकास के प्रति समर्पण के प्रतीक हैं। शिक्षा से जुड़े मुद्दों को विधानसभा और सरकार के स्तर पर मजबूती से उठाने वालों में उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उन्होंने कहा कि इस सभागार के उद्घाटन के लिए उन्हें लंबे समय से आग्रह किया जा रहा था और आज इसका उद्घाटन कर वे स्वयं को संतोष और प्रसन्नता का अनुभव कर रहे हैं। नीतीश सरकार की उपलब्धियां गिनाईं उपमुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में पंचायत स्तर से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक संस्थानों की स्थापना, नियमित पढ़ाई और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। महिलाओं के सशक्तिकरण और विधि-व्यवस्था में सुधार के क्षेत्र में भी बिहार ने उल्लेखनीय कार्य किया है, जिसकी देशभर में सराहना हुई है। विधायकों ने जताया आभार कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दरभंगा ग्रामीण विधायक ईश्वर मंडल ने उपमुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए उन्हें कुशल संगठनकर्ता बताया और क्षेत्र के विकास के लिए उनके योगदान की सराहना की। बेनीपुर विधायक प्रो. विनय कुमार चौधरी ने उपमुख्यमंत्री को अपना अभिभावक बताते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन हमेशा मिलता रहा है। उन्होंने क्षेत्र में विकास योजनाओं की स्वीकृति देने और पंडित हरिनाथ मिश्र सभागार का उद्घाटन करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त किए गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विश्वविद्यालय की विजिटर के रूप में उनके नाम को मंजूरी दे दी है। शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक प्रोफेसर योगेश सिंह का नया पांच वर्षीय कार्यकाल 8 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा। नियुक्ति के साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि उनके कार्यकाल की सभी सेवा शर्तें दिल्ली विश्वविद्यालय अधिनियम, विधियों और अध्यादेशों के अनुरूप पहले की तरह लागू रहेंगी। राष्ट्रपति सचिवालय की स्वीकृति के बाद जारी हुआ आदेश शिक्षा मंत्रालय की उप सचिव श्रेया भारद्वाज द्वारा विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को भेजे गए आधिकारिक पत्र में बताया गया है कि राष्ट्रपति सचिवालय की स्वीकृति के बाद यह आदेश जारी किया गया है। आदेश की प्रतियां विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) और राष्ट्रपति सचिवालय को भी भेजी गई हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन में इसे निरंतरता और स्थिर नेतृत्व के तौर पर देखा जा रहा है। लगातार दूसरा कार्यकाल मिलने से यह संकेत भी मिला है कि विश्वविद्यालय के प्रशासन और शैक्षणिक प्रबंधन में प्रो योगेश सिंह के कार्यों पर केंद्र सरकार ने भरोसा बरकरार रखा है।
खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड स्थित राजकीय कृत जगन्नाथ राम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सलारपुर में भवन की कमी के कारण 1100 छात्र-छात्राएं फर्श पर दरी बिछाकर परीक्षा देने को मजबूर हैं। यह स्थिति विद्यालय में आयोजित प्रथम सावधिक परीक्षा के दौरान सामने आई। विद्यालय में कक्षा 9वीं, 10वीं और 12वीं की प्रथम सावधिक परीक्षा चल रही है। छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन विद्यालय भवन का विस्तार नहीं हो सका है। पर्याप्त कमरों के अभाव में सभी परीक्षार्थियों को बैठाना संभव नहीं हो पा रहा है। परीक्षा कक्षों के बाहर और बरामदों में दरी पर बैठे छात्र-छात्राएं पूरी एकाग्रता से अपनी उत्तर पुस्तिकाएं लिखते दिखे। यह दृश्य एक ओर संसाधनों की कमी को दर्शाता है, तो दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के शिक्षा के प्रति समर्पण को भी उजागर करता है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक नवीन कुमार ने बताया कि वर्तमान में कक्षा 9वीं, 10वीं और 12वीं को मिलाकर लगभग 1100 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। हर वर्ष नामांकन बढ़ रहा है, लेकिन भवन का विस्तार न होने से परेशानी बढ़ रही है। उन्होंने नए भवन निर्माण के लिए शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र भेजा है। प्रधानाध्यापक के अनुसार, विद्यालय परिसर में पर्याप्त सरकारी जमीन उपलब्ध है, जिससे भूमि की कोई समस्या नहीं है। उन्होंने विभाग से जल्द स्वीकृति मिलने पर छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की उम्मीद जताई। जिला परिषद सदस्य जयप्रकाश यादव ने भी विद्यालय की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह विद्यालय पूरे इलाके में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जाना जाता है और आसपास के कई गांवों के विद्यार्थी यहां पढ़ने आते हैं। ऐसे प्रतिष्ठित विद्यालय में भवन की कमी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार और शिक्षा विभाग से शीघ्र नए भवन का निर्माण कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे न केवल छात्रों को सुविधा मिलेगी, बल्कि विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता भी और बेहतर होगी।विद्यालय में बढ़ती छात्र संख्या का अंदाजा छुट्टी के समय लगने वाली भीड़ से भी लगाया जा सकता है। छुट्टी के बाद विद्यालय परिसर का नजारा किसी मेले जैसा दिखाई देता है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चे कठिन परिस्थितियों में भी पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन सरकार को उनकी मूलभूत सुविधाओं की ओर भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते अतिरिक्त भवन और कक्षाओं का निर्माण नहीं कराया गया, तो भविष्य में समस्या और गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने सरकार एवं शिक्षा विभाग से मांग की है कि विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को देखते हुए राजकीय कृत जगन्नाथ राम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सलारपुर में जल्द से जल्द अतिरिक्त भवन का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों को दरी पर बैठकर परीक्षा देने जैसी मजबूरी से छुटकारा मिल सके और उन्हें सम्मानजनक एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्राप्त हो सके।
मुजफ्फरपुर के ऐतिहासिक लंगट सिंह (एलएस) कॉलेज का 127वां स्थापना दिवस शुक्रवार को पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर संगोष्ठी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कॉलेज की गौरवशाली शैक्षणिक विरासत को याद करते हुए भविष्य की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर चर्चा की गई। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. एन.के. अग्रवाल मुख्य अतिथि और बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय अध्यक्ष के रूप में शामिल हुए। नई शिक्षा नीति पर हुआ गंभीर विमर्श कॉलेज के आचार्य जे.बी. कृपलानी सभागार में आयोजित संगोष्ठी का विषय बिहार में शैक्षणिक और सामाजिक विकास को गति प्रदान करने में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भूमिका रखा गया। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति केवल पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक और शोध आधारित शिक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। बिहार के शैक्षणिक विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। गौरवशाली इतिहास को किया गया याद कार्यक्रम के दौरान कॉलेज की 127 साल की गौरवशाली यात्रा को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि एलएस कॉलेज ने देश को अनेक महान शिक्षाविद, साहित्यकार, प्रशासक और जनप्रतिनिधि दिए हैं। देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, स्वतंत्रता सेनानी जे.बी. कृपलानी, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर', पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र सहित अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों का इस संस्थान से जुड़ाव इसकी ऐतिहासिक पहचान को दर्शाता है। उच्च शिक्षा के नए लक्ष्यों पर दिया गया जोर मुख्य अतिथि प्रो. एन.के. अग्रवाल ने कहा कि बदलते समय में उच्च शिक्षण संस्थानों को नवाचार, जांच और कौशल आधारित शिक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहा कि एलएस कॉलेज जैसे ऐतिहासिक संस्थान नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य परंपरा और आधुनिकता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि एलएस कॉलेज की गौरवशाली विरासत नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है और इसे उत्कृष्टता के नए आयाम तक पहुंचाने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन स्थापना दिवस समारोह में छात्रों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम के माध्यम से कॉलेज की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और विद्यार्थियों की प्रतिभा का भी शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। हेड मास्टर ने जताया आभार कॉलेज की प्राचार्य प्रो. कनुप्रिया ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि 127 साल का यह सफर केवल इतिहास नहीं, बल्कि नई उपलब्धियों की ओर बढ़ने का संकल्प भी है। उन्होंने कहा कि कॉलेज शिक्षा, शोध और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उत्कृष्टता की अपनी परंपरा को आगे भी बनाए रखेगा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. समीर कुमार शर्मा, प्रो. टी.के. डे, डॉ. शशिकांत पांडेय, डॉ. नवीन कुमार, डॉ. आनंद कुमार सिंह, संजीव चौधरी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी, पूर्ववर्ती छात्र और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
धार जिले को शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मिली है। केंद्र सरकार ने जिले में दूसरे जवाहर नवोदय विद्यालय की स्थापना को मंजूरी दे दी है। मध्य प्रदेश में धार एकमात्र ऐसा जिला है जिसे इस चरण में दूसरे नवोदय विद्यालय की स्वीकृति मिली है। इसका संचालन शैक्षणिक सत्र 2027-28 से शुरू करने का लक्ष्य है।नवोदय विद्यालय समिति ने मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर विद्यालय के लिए लगभग 30 एकड़ अतिक्रमण मुक्त भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। साथ ही, शुरुआती वर्षों के लिए अस्थायी भवन की व्यवस्था करने को भी कहा गया है। भूमि उपलब्ध होने के बाद स्थायी परिसर का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।धार-महू लोकसभा क्षेत्र की सांसद और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने बताया कि वे वर्ष 2024 से जिले में दूसरे जवाहर नवोदय विद्यालय की स्थापना के लिए लगातार प्रयास कर रही थीं। उनके सतत प्रयासों के बाद केंद्र सरकार से यह स्वीकृति मिली है।सांसद ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार ऐतिहासिक निर्णय लिए जा रहे हैं। नवोदय विद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को निःशुल्क, गुणवत्तापूर्ण और आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने का सशक्त माध्यम हैं।उन्होंने मध्य प्रदेश शासन और जिला प्रशासन से आवश्यक भूमि एवं अस्थायी भवन की व्यवस्था समय पर उपलब्ध कराने का आग्रह किया, ताकि वर्ष 2027-28 से विद्यालय का संचालन शुरू किया जा सके। दूसरे नवोदय विद्यालय की स्थापना से धार जिले के हजारों विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं और उच्च शिक्षा के अवसर मिलेंगे।
हरदा में शुक्रवार दोपहर जिला कांग्रेस कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार को चार प्रमुख मुद्दों पर घेरा। इन मुद्दों में राम मंदिर चंदा चोरी, नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ी और उज्जैन जमीन घोटाला शामिल थे। कांग्रेस ने इन मामलों में भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मोहन साई, जिला प्रवक्ता आदित्य गार्गव, ब्लॉक अध्यक्ष गोविंद व्यास, सुरेंद्र पटेल और गोविंद सुरमा मौजूद रहे। जिलाध्यक्ष साई ने नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर कहा कि इससे देश के लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है, और कई छात्रों ने आत्महत्या कर ली है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने अब तक दोषियों की पहचान नहीं की है और न ही कोई ठोस कार्रवाई की है। साई ने राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों ने मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया, लेकिन ट्रस्ट में बैठे लोगों ने करोड़ों रुपये की हेराफेरी की। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। ब्लॉक अध्यक्ष गोविंद व्यास ने आरोप लगाया कि भाजपा ने साजिश के तहत अयोध्या के श्री राम मंदिर पर आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद का कब्जा कर लिया है, जबकि अयोध्या संतों की नगरी है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा धीरे-धीरे देश के सभी प्रमुख मंदिरों पर कब्जा जमा रही है। जिला प्रवक्ता आदित्य गार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर निशाना साधते हुए उज्जैन में 350 एकड़ जमीन मुख्यमंत्री के परिजनों द्वारा खरीदने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि यह मुद्दा एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र ने उठाया है। गार्गव ने कहा कि जब कांग्रेस ने इस पर मुख्यमंत्री से जवाब मांगा, तो भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का पुतला जलाया। उन्होंने नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की। गार्गव ने आगे कहा कि अयोध्या में जो कार्रवाई हो रही है, वह चंपत राय और उनके करीबियों को बचाने के लिए की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर अब तक कुछ नहीं कहा है और पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
संगरूर में पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं कक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को एक विशेष समारोह में सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए उनके सुझाव भी मांगे। समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि ये प्रतिभावान छात्र देश का भविष्य हैं, जो भविष्य में डॉक्टर, इंजीनियर, वकील और नेता बनेंगे। उन्होंने बताया कि छात्रों के साथ बातचीत में परीक्षा प्रणाली में सुधार, पढ़ाई के दौरान तनाव कम करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए हैं। जिन पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी। 'डिजिटल यूनिवर्सिटी बिल लेकर आई पंजाब सरकार' शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि पंजाब सरकार डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डिजिटल यूनिवर्सिटी बिल लेकर आई है। उन्होंने कहा कि देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने इस पहल में रुचि दिखाई है। 'आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना सरकार का लक्ष्य' शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि उच्च शिक्षा से संबंधित कई नियम राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों द्वारा निर्धारित किए जाते हैं, और उनमें समय के साथ आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। मंत्री ने आगे कहा कि सरकार का लक्ष्य छात्रों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकें।
हरियाणा के उच्चतर शिक्षा विभाग ने विभिन्न कॉलेजों में बीए, बीएससी, बीकॉम, बीबीए और बीसीए आदि स्नातक कक्षाओं के दाखिलों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि को बढाकर 12 जुलाई करने के बाद अब मेरिट लिस्ट जारी करने और फीस भरने का एक बार फिर नया शेड्यूल जारी कर दिया है। राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू महाविद्यालय, झज्जर के जनसंचार विभागाध्यक्ष और मीडिया प्रभारी डॉ. अमित भारद्वाज ने बताया कि यदि विद्यार्थी अपने ऑनलाइन फार्म में कोई संशोधन करना चाहें तो अब 13 जुलाई तक कर सकते हैं। दस्तावेजों की ऑनलाइन वेरिफिकेशन 18 जुलाई तक होगी। ऑनलाइन वेरिफिकेशन के लिए कॉलेज में जाने की जरुरत नहीं है। यदि कोई ऑब्जेक्शन होगा तो एसएमएस से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर सूचना मिल जाएगी। आवेदक को ऑब्जेक्शन दूर करके ऑनलाइन फॉर्म में संशोधन करना होगा। 22 जुलाई को आएगी पहली मेरिट लिस्ट पहली प्रोविजनल मेरिट लिस्ट 21 जुलाई को जारी होगी ताकि कोई आपत्ति हो तो उसे दूर कर दिया जाए। पहली फाइनल मेरिट लिस्ट 22 जुलाई को आयेगी। इस लिस्ट में जिन विद्यार्थियों का नाम आएगा, वे 23 जुलाई से 27 जुलाई तक फीस भर सकेंगे। दूसरी प्रोविजनल मेरिट लिस्ट 28 जुलाई को जारी होगी, जबकि दूसरी फाइनल मेरिट लिस्ट 29 जुलाई को आयेगी। इस लिस्ट में जिन विद्यार्थियों का नाम आएगा, वे 30 जुलाई से 03 अगस्त तक फीस भर सकेंगे। 04 अगस्त से शुरू होगी ओपन काउंसलिंग पहली और दूसरी मेरिट लिस्ट के दाखिलों के बाद खाली बची सीटों को भरने के लिए ओपन काउंसलिंग 04 अगस्त से शुरू होगी। नए आवेदनों के लिए एडमिशन पोर्टल 05 अगस्त से दोबारा खुलेगा तथा 06 अगस्त से 12 अगस्त तक 100 रुपए लेट फीस के साथ दाखिले होंगे। इसके बाद 13 अगस्त से 19 अगस्त तक 100 रूपये लेट फीस के अलावा 100 रूपये प्रतिदिन अतिरिक्त फीस लगेगी। नेहरू कॉलेज में अब तक 1812 आवेदन राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू महाविद्यालय, झज्जर में यूजी कक्षाओं की 1200 सीटों के लिए शुक्रवार शाम तक 1812 आवेदन किए गए हैं। इनमें से बीए की 480 सीटों के लिए 815, बीसीए की 80 सीटों के लिए 282, बीबीए की 80 सीटों के लिए 154, बीकॉम की 140 सीटों के लिए 161, बीएससी फिजिकल साइंस की 300 सीटों के लिए 150, बीएससी लाइफ साइंस की 80 सीटों के लिए 175 और बीएससी गणित की 40 सीटों के लिए 75 आवेदन किए गए हैं। आवेदन से दाखिले तक की प्रक्रिया सबसे पहले विद्यार्थियों को उच्चतर शिक्षा विभाग के एडमिशन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। अपना सही नाम, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर भरें क्योंकि इनको बाद में नहीं बदला जा सकता। रजिस्ट्रेशन के बाद व्यक्तिगत विवरण, शिक्षा, वेटेज, दस्तावेज़, कॉलेज और कोर्स भरे जायेंगे। इसके लिए अपने फोटो और सिग्नेचर की स्कैन कॉपी, दसवीं और बारहवीं कक्षा का सर्टिफिकेट, स्कूल से जारी मूल चरित्र प्रमाण पत्र, परिवार पहचान पत्र, आरक्षण का लाभ लेने के लिए उस केटेगरी के जरूरी प्रमाण पत्र अपने साथ तैयार रखें। हरियाणा के सभी विद्यार्थियों के लिए परिवार पहचान पत्र अनिवार्य है। विद्यार्थी ध्यान से अपना ऑनलाइन आवेदन भरें। बीए जैसे जिन पाठ्यक्रमों में एक से ज्यादा सब्जेक्ट कॉम्बिनेशन हैं, वहां कम से कम पांच कॉम्बिनेशन भरने जरूरी हैं। पांच कॉलेज और प्रत्येक कॉलेज में पांच कोर्स यदि अभी बारहवीं का सर्टिफिकेट नहीं मिला है तो फॉर्म भरते समय ऑनलाइन रिजल्ट की कॉपी अपलोड कर सकते हैं। एक ही यूजर आईडी से अलग-अलग कॉलेजों के लिए आवेदन कर सकते हैं। कोई भी विद्यार्थी अधिकतम पांच कॉलेज और प्रत्येक कॉलेज में अधिकतम पांच कोर्स चुन सकता है। हरियाणा से बाहर के विद्यार्थी अखिल भारतीय कोटे के तहत आवेदन कर सकते हैं। मेरिट से होंगे दाखिले दाखिला मेरिट के आधार पर होगा और बारहवीं के बेस्ट फाइव सब्जेक्ट्स के अंक और निर्धारित वेटेज को जोड़कर आरक्षण नीति के आधार पर मेरिट बनाई जाएगी। वेटेज के लिए मुख्यत: बारहवीं कक्षा का एनएसएस मेरिट प्रमाण पत्र, एनसीसी का 'बी' प्रमाण पत्र, राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त भारत स्काउट एवं गाइड प्रमाण पत्र, राज्य या राष्ट्रीय खेल सर्टिफिकेट, ग्रामीण क्षेत्र से बारहवीं पास होना इत्यादि का लाभ दिया जाएगा। ऑनलाइन जमा होगी फीस एडमिशन पोर्टल पर ‘नो योर रिजल्ट’ टैब से पता लग जाएगा कि दाखिला किस कॉलेज के किस कोर्स में हुआ है। जिन अभ्यर्थियों का नाम मेरिट लिस्ट में आएगा, वे फीस जमा कर सकते हैं। सरकारी कॉलेजों की फीस ऑनलाइन जमा होगी जबकि प्राइवेट कॉलेजों की फीस ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से जमा की जा सकती है। फीस भरने के बाद एडमिशन पोर्टल से रसीद डाउनलोड करें। दाखिला शुरू में अस्थाई होगा और कॉलेज में सभी दस्तावेजों की जांच की जाएगी। कोई कमी मिलने पर कॉलेज दाखिले को रद्द कर सकता है। सीट छोड़ने का विकल्प यदि किसी विद्यार्थी को पहली मेरिट लिस्ट में अपनी पहली पसंद का कॉलेज नहीं मिलता है तो वह सीट छोड़ सकता है और दूसरी मेरिट लिस्ट में उसके आवेदन पर विचार किया जा सकता है। सीट छोड़ने के लिए ऑनलाइन ऑप्शन भरना होगा।
औरंगाबाद जिले में प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक कई अधिकारियों का तबादला और नई पदस्थापना की गई है। इस बदलाव का सबसे अधिक असर शिक्षा, ग्रामीण विकास, राजस्व, खनन और पशुपालन विभाग पर पड़ा है। कई नए अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जबकि कई पदाधिकारियों का अन्य जिलों में ट्रांसफर किया गया है। जिले में नए जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला खनन पदाधिकारी और जिला पशुपालन पदाधिकारी की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा कई प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और अंचलाधिकारी (सीओ) भी बदले गए हैं। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं जनहितकारी बनाना बताया जा रहा है। नए अधिकारियों के पदभार ग्रहण करने के बाद विभिन्न विभागों की कार्यशैली में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। शिक्षा विभाग में बड़ा बदलाव, दया शंकर सिंह बने नए डीईओ शिक्षा विभाग में व्यापक फेरबदल करते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार का तबादला जहानाबाद कर दिया गया है। उनके स्थान पर पूर्व में औरंगाबाद में डीपीओ रहे दया शंकर सिंह को नया जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) बनाया गया है। इसके साथ ही जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों के स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सीतामढ़ी के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मनीष कुमार, वैशाली के संतोष कुमार और रोहतास की प्रियंका कुमारी को औरंगाबाद में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी के रूप में पदस्थापित किया गया है। वहीं, पूर्व से प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत जमुई के अमृतेश आर्यन को नियमित रूप से औरंगाबाद का जिला कार्यक्रम पदाधिकारी बनाया गया है। दूसरी ओर रवि कुमार रोशन का स्थानांतरण रोहतास और भोला कुमार का तबादला नालंदा कर दिया गया है। शिक्षा विभाग में हुए इस बदलाव को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नए अधिकारियों के आने से विभागीय योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। बीडीओ-सीओ सहित खनन और पशुपालन विभाग में भी बदलाव ग्रामीण विकास विभाग में भी कई अहम पदों पर बदलाव किया गया है। औरंगाबाद सदर के प्रखंड विकास पदाधिकारी रमन कुमार सिंह का स्थानांतरण घनश्यामपुर कर दिया गया है। उनकी जगह दुर्गावती की बीडीओ रिचा मिश्रा को औरंगाबाद सदर का नया प्रखंड विकास पदाधिकारी बनाया गया है। वहीं, कलेर के बीडीओ मनोज कुमार का तबादला कर दिया गया है, जबकि अररिया के परवेज आलम को गोह प्रखंड का नया बीडीओ नियुक्त किया गया है। राजस्व विभाग में दाउदनगर के अंचलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार यादव का स्थानांतरण सारण जिले के इसुआपुर कर दिया गया है। उनके स्थान पर वहां कार्यरत सतीश कुमार सिंह को दाउदनगर का नया अंचलाधिकारी बनाया गया है। अन्य विभागों में भी बदलाव किए गए हैं। विकास कुमार को औरंगाबाद का नया जिला खनन पदाधिकारी बनाया गया है, जबकि कामख्या दास को जिला पशुपालन पदाधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक हलकों में इस व्यापक फेरबदल को सरकार की नियमित प्रक्रिया के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यों में गति और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पर्यावरण व शिक्षा के लिए ग्राम विकास समिति कर रही पहल
पंचायत का लेखा-जोखा जनसंख्या : 4000, साक्षरता : 65% जिला मुख्यालय से दूरी : 26 किमी कनेक्टिविटी : सड़क मार्ग। आय का प्रमुख स्त्रोत : कृिष प्रमुख उत्पाद : मक्का और कपास मुख्य पहचान: पहाड़ियों से घिरा गांव। भास्कर संवाददाता| बड़वानी आदिवासी बाहुल्य पाटी ब्लॉक का आंवली गांव अब युवाओं की पहल से आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। शिक्षा का स्तर बढ़ने के साथ गांव के युवाओं ने ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए ग्राम विकास समिति का गठित की है। यह समिति जल, मिट्टी व पर्यावरण संरक्षण के साथ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। युवाओं ने गांव की पहाड़ी को हरा-भरा बनाने का संकल्प लेते हुए एक हजार पौधे लगाने का अभियान शुरू किया है। इसके लिए श्रमदान कर गड्ढे खोद दिए गए हैं। शुक्रवार को सामूहिक पौधारोपण किया जाएगा और पौधों की सुरक्षा के भी इंतजाम किए जाएंगे। समिति सदस्य जितेंद्र खरते ने बताया कि 15 से 25 वर्ष आयु वर्ग के करीब 50 युवाओं को इस अभियान से जोड़ा गया है। सबसे पहले गांव में जल संरक्षण पर काम किया जा रहा है। गांव से गुजरने वाले तीन नालों पर चरणबद्ध तरीके से बोरी बंधान कर बारिश के जल रोकने का लक्ष्य रखा है। भूराड़िया फलिया व पटेल फलिया बोरी बंधान किया। जिससे भूमिगत जल स्तर बढ़ा है। युवा किसानों को खेतों की मेड़ों पर पौधे लगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, ताकि मिट्टी का कटाव रुके और पर्यावरण संरक्षण हो सके। साथ ही किसानों को परंपरागत फसलों के साथ सब्जी उत्पादन अपनाने के लिए भी जागरूक कर रहे हैं। समिति का तीसरा प्रमुख उद्देश्य गांव के हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ना है। इसके लिए ग्रामीणों से बच्चों की नियमित पढ़ाई करने की अपील की जा रही है। युवाओं के इस अभियान को ग्रामीणों का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों और शिक्षा विभाग के कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए नया आदेश जारी किया है। अब हर कार्मिक को शाला दर्पण पोर्टल पर दर्ज अपनी पूरी जानकारी खुद जांचनी होगी और उसे प्रपत्र-10 में लॉक करना होगा। इसके बाद विभाग उस जानकारी का सरकारी रिकॉर्ड से मिलान करेगा। टोंक समेत पूरे प्रदेश के करीब साढ़े तीन लाख कार्मिक इस प्रक्रिया के दायरे में आएंगे। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने इसके आदेश जारी किए हैं। अगर कोई कार्मिक तय प्रक्रिया पूरी नहीं करता या गलत जानकारी देता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। 10 जुलाई तक अपनी पूरी जानकारी जांचकर करनी होगी लॉक शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार सभी राजकीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के साथ ही शिक्षा विभाग के कार्यालयों में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी शाला दर्पण पोर्टल पर अपने स्टाफ लॉगिन में जाकर स्टाफ प्रोफाइल के तहत उपलब्ध प्रपत्र-10 की सभी जानकारियां अपनी सेवा पुस्तिका और व्यक्तिगत रिकॉर्ड के अनुसार जांचेंगे। इसके बाद व्यक्तिगत, शैक्षणिक, सेवा, पदोन्नति, पारिवारिक, बैंक, प्रशिक्षण समेत 15 अलग-अलग फॉर्मेट को 10 जुलाई तक लॉक करना होगा। 15 जुलाई तक अधिकारी करेंगे रिकॉर्ड से मिलान कार्मिक द्वारा जानकारी लॉक करने के बाद उसकी जांच होगी। प्रारंभिक शिक्षा के स्कूलों में पीईईओ और यूसीईईओ, जबकि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में संस्था प्रधान प्रपत्र-10 में दर्ज जानकारी का सेवा रिकॉर्ड से मिलान करेंगे। शिक्षा विभाग के कार्यालयों में संबंधित कार्यालयाध्यक्ष यह सत्यापन करेंगे। यह पूरी प्रक्रिया 15 जुलाई तक पूरी करनी होगी। सत्यापन के बाद रिकॉर्ड में हमेशा के लिए रखा जाएगा प्रपत्र सत्यापन पूरा होने के बाद प्रपत्र-10 की प्रिंट कॉपी निकाली जाएगी। इस पर कार्मिक और संस्था प्रधान के हस्ताक्षर होंगे और इसे मूल व्यक्तिगत पत्रावली में रखा जाएगा। इसमें सत्यापन करने वाले अधिकारी का नाम और तारीख भी दर्ज होगी। यह दस्तावेज रिकॉर्ड का स्थायी हिस्सा रहेगा। बाद में यदि किसी जानकारी में बदलाव होता है तो उसकी संशोधित प्रति भी रिकॉर्ड में जोड़नी होगी। रिकॉर्ड और पोर्टल की जानकारी एक जैसी करना है उद्देश्य शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बताया - विभाग चाहता है कि शाला दर्पण पोर्टल पर दर्ज सभी जानकारियां सेवा पुस्तिका और व्यक्तिगत रिकॉर्ड से पूरी तरह मेल खाएं। इसी उद्देश्य से सभी कार्मिकों को पहले अपनी जानकारी जांचकर लॉक करने और फिर विभागीय स्तर पर उसका सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। लॉक होने के बाद सीधे नहीं बदल सकेंगे रिकॉर्ड एक बार प्रपत्र-10 लॉक और सत्यापित होने के बाद उसमें सीधे कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। यदि भविष्य में किसी जानकारी में बदलाव की जरूरत पड़ती है तो संस्था प्रधान या कार्यालयाध्यक्ष को संबंधित ब्लॉक कार्यालय में दस्तावेजों के साथ आवेदन देकर पहले प्रपत्र-10 अनलॉक कराना होगा। इसके बाद ही नई जानकारी दर्ज कर दोबारा लॉक और सत्यापन किया जाएगा। इसलिए विभाग ने सभी कार्मिकों को जानकारी सावधानी से भरने और जांचने के निर्देश दिए हैं। प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत कर्मचारियों पर भी लागू होंगे नियम जो कर्मचारी नियम-144 (क) के तहत दूसरे विभागों में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं, उन्हें भी शाला दर्पण के स्टाफ लॉगिन से अपनी जानकारी भरनी होगी। उनके प्रपत्र-10 का सत्यापन उनके अंतिम विद्यालय या कार्यालय के संस्था प्रधान, कार्यालयाध्यक्ष या पीईईओ द्वारा किया जाएगा।
भारतीय शिक्षा दिवस पर राष्ट्रीय विमर्श:पंचकोष आधारित चरित्र निर्माण पर हुई चर्चा
लखनऊ के गोमतीनगर स्थित राकेश कुमार मित्तल सभागार, स्मृति भवन में गुरुवार को भारतीय शिक्षा दिवस के अवसर पर एक राष्ट्रीय विमर्श का आयोजन किया गया। इस विमर्श का मुख्य विषय 'पंचकोष आधारित चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास: भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में' था। इसका आयोजन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, अवध प्रांत, एकम नॉलेज फाउंडेशन, अयोध्या और कबीर शांति मिशन के सहयोग में किया गया। इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों,विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों, शोधार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, लोक सेवकों और बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लिया। विमर्श का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती वंदना के साथ किया गया। पंचकोष आधारित ध्यान और नाम-संकीर्तन किया त्रिवेणी कला संगम, अवध की नितिका शर्मा और उनकी टीम ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी।इसके बाद, भाग्य मंदिर की साधिका रजनी शुक्ला और उनकी टीम ने पंचकोष आधारित ध्यान और नाम-संकीर्तन का आयोजन किया, जिससे सभागार में आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हुआ। मुख्य अतिथि पूर्व प्रमुख सचिव (राज्यपाल) जी.बी पटनायक ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्रदान करना नहीं, बल्कि संस्कारित,चरित्रवान और राष्ट्रनिष्ठ नागरिक तैयार करना है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में भारतीय जीवन मूल्यों को समाहित करने पर जोर दिया। भारतीय ज्ञान परंपरा शिक्षा की आधारशिला मुख्य वक्ता और सीबीएसई के पूर्व अध्यक्ष अशोक गांगुली ने इस बात पर बल दिया कि भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शिक्षा ही विकसित भारत की मजबूत आधारशिला बन सकती है।उन्होंने पंचकोष आधारित शिक्षा प्रणाली को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का एक वैज्ञानिक और प्रभावी माध्यम बताया। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के केंद्रीय अधिकारी नितिन कासलीवाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और भारतीय शिक्षा दर्शन की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। प्रांत संयोजक प्रमिल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय शिक्षा दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय शिक्षा दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने का एक राष्ट्रीय अभियान है। चरित्र निर्माण को भारतीय चिंतन की अमूल्य धरोहर प्रख्यात पत्रकार और साहित्यकार डॉ. मत्स्येंद्र प्रभाकर ने पंचकोष आधारित चरित्र निर्माण को भारतीय चिंतन की अमूल्य धरोहर बताया। चिंतामणि कौशिक ने व्यक्तित्व विकास की व्यावहारिक कार्ययोजना प्रस्तुत की। कनाडा से अंतरराष्ट्रीय मनोवैज्ञानिक डॉ. अमरेश श्रीवास्तव का एक विशेष ऑडियो संदेश भी प्रसारित किया गया।
नवादा समाहरणालय सभा कक्ष में जिला पदाधिकारी रवि प्रकाश की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक सात निश्चय-3 के चतुर्थ संकल्प उच्च शिक्षा–उज्ज्वल भविष्य के अंतर्गत प्रस्तावित छह डिग्री महाविद्यालयों की तैयारियों से संबंधित थी। बैठक के दौरान जिला शिक्षा पदाधिकारी ने प्रस्तावित छह डिग्री महाविद्यालयों में की जा रही तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाविद्यालयों के संचालन हेतु भवनों की मरम्मत, रंग-रोगन, विद्युत एवं प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई, गृह-व्यवस्था (हाउसकीपिंग) तथा अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। छात्राओं के सुरक्षित एवं सुगम आवागमन के लिए चार महाविद्यालयों में पिंक बस की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। साथ ही, सुरक्षा एवं रख-रखाव के लिए चौकीदारों की प्रतिनियुक्ति भी की गई है। समीक्षा के क्रम में जिला पदाधिकारी ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि महाविद्यालयों में उपलब्ध कराई जा रही सभी सामग्रियों, फर्नीचर एवं अन्य संसाधनों की गुणवत्ता की विधिवत जांच एवं सत्यापन के उपरांत ही उनका अधिष्ठापन/उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी प्रस्तावित डिग्री महाविद्यालयों में शत-प्रतिशत बेंच-डेस्क की उपलब्धता समयबद्ध रूप से सुनिश्चित की जाए, ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। जिला पदाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि शेष कार्यों एवं औपचारिकताओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण करते हुए सभी व्यवस्थाएं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि सात निश्चय-3 के अंतर्गत उच्च शिक्षा–उज्ज्वल भविष्य राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को उनके निकट गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रस्तावित महाविद्यालयों के संचालन की दिशा में सभी तैयारियां समय पर पूर्ण करने का निर्देश दिया। बैठक में गोपनीय शाखा प्रभारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला योजना पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (शिक्षा), संबंधित विभागों के पदाधिकारी, प्रस्तावित डिग्री महाविद्यालयों के प्राचार्य तथा अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।
नई दिल्ली। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शिक्षा जगत, सरकार, उद्योग और थिंक टैंकों के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि साक्ष्य आधारित नीति-निर्माण, शोध आधारित नवाचार और संस्थागत सहयोग ही देश की दीर्घकालिक विकास यात्रा की मजबूत नींव बनेंगे। उन्होंने विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से समकालीन नीतिगत चुनौतियों पर व्यावहारिक सुझाव तैयार कर सरकार के साथ सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। डॉ. लाहिड़ी दिल्ली में रिसर्च एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज (आरआईएस) दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और एमएसएमई फॉर 2047 की ओर से आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। प्रशासन और सार्वजनिक वित्त के क्षेत्र में योगदान की सराहना कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल, आरआईएस के महानिदेशक प्रो. सचिन कुमार शर्मा, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक प्रो राम सिंह सहित कई वरिष्ठ अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और उद्योग जगत के प्रतिनिधि मौजूद रहे। वक्ताओं ने डॉ. लाहिड़ी के आर्थिक नीति, प्रशासन और सार्वजनिक वित्त के क्षेत्र में योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके अनुभव से देश की विकास रणनीतियों को नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम में एमएसएमई क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने, तकनीकी नवाचार, नीतिगत सुधार और शिक्षा-उद्योग सहयोग को भी विकसित भारत की आधारशिला बताया गया। डॉ. लाहिड़ी ने कहा, शिक्षा जगत, उद्योग, थिंक टैंक और सरकार के बीच निरंतर संवाद व शोध आधारित नीति-निर्माण ही विकसित भारत के लक्ष्य को गति देगा।
संभागीय आयुक्त एवं जिला प्रभारी सचिव वी. सरवण कुमार ने हाल ही में कोटपूतली-बहरोड़ क्षेत्र के बजरंगपुरा स्थित सरकारी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, पोषण, आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उनकी शैक्षणिक प्रगति, सीखने की क्षमता, खेल गतिविधियों और स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। संभागीय आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर जिला कलेक्टर अपर्णा गुप्ता भी उपस्थित रहीं। स्कूल परिसर, क्लास रूम की व्यवस्था का अवलोकन कियाप्रभारी सचिव ने स्कूल परिसर की स्वच्छता, कक्षा-कक्षों की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, खेल सामग्री, स्टाफ की उपस्थिति, छात्र नामांकन और नियमित उपस्थिति सहित अन्य आधारभूत सुविधाओं का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि स्कूल केवल शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं है, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला है। इसलिए प्रत्येक छात्र को स्वच्छ, सुरक्षित, प्रेरणादायक और सीखने के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है। स्वास्थ्य और पोषण स्तर की निगरानी के निर्देशआंगनबाड़ी केंद्र में उन्होंने बच्चों को दिए जा रहे पूरक पोषाहार, वजन मापन, पोषण ट्रैकिंग, प्री-स्कूल गतिविधियों और उपस्थिति रजिस्टर का निरीक्षण किया। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे प्रत्येक बच्चे के स्वास्थ्य और पोषण स्तर की नियमित निगरानी करें तथा कुपोषण की रोकथाम के लिए विशेष प्रयास करें। साथ ही, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को विभागीय योजनाओं का समय पर लाभ सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को शिक्षाप्रद खिलौने और फल भी वितरित किए। स्कूल में मिड-डे-मील योजना की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए संभागीय आयुक्त ने भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण और निर्धारित मेन्यू के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था का जायजा लिया। संभागीय आयुक्त विभिन्न कक्षाओं में भी पहुंचे और विद्यार्थियों की पाठ्य-पुस्तकों, कॉपियों एवं गृहकार्य का निरीक्षण कर उनकी शैक्षणिक स्थिति का आकलन किया। इस निरीक्षण के अवसर पर एसडीएम पावटा बृजेश चौधरी, एसडीएम विराटनगर लालाराम यादव, तहसीलदार विराटनगर मेनका, उप निदेशक आईसीडीएस सतपाल यादव सहित विद्यालय एवं आंगनबाड़ी का स्टाफ उपस्थित रहा।
बक्सर में नए जिला शिक्षा पदाधिकारी की पोस्टिंग:बिहार शिक्षा विभाग ने किया ऑफिसर्स का ट्रांस्फर
बिहार शिक्षा विभाग ने राज्यभर में बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत कई अधिकारियों का तबादला किया है। इसी क्रम में बक्सर जिले को नए जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) मिल गए हैं। इन्द्र कुमार कर्ण को बक्सर का नया जिला शिक्षा पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। जानकारी के अनुसार, इन्द्र कुमार कर्ण इससे पहले मुजफ्फरपुर में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) के पद पर कार्यरत थे। प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए शिक्षा विभाग ने उन्हें अब बक्सर जिले की जिम्मेदारी सौंपी है। इन्द्र कुमार कर्ण मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। किसी प्रकार का अतिरिक्त वेतनमान लाभ नहीं विभाग ने उनकी तैनाती उनके वर्तमान वेतनमान में ही की है, यानी उन्हें पदस्थापन के साथ किसी प्रकार का अतिरिक्त वेतनमान लाभ नहीं दिया गया है। शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि इस तबादले के दौरान उन्हें पारगमन काल (Joining Time) का लाभ नहीं मिलेगा। इसका मतलब है कि उन्हें बिना किसी देरी के तत्काल बक्सर पहुंचकर अपने नए पद का प्रभार ग्रहण करना होगा। विभाग ने निर्देश दिया है कि प्रभार ग्रहण करने के बाद इसकी सूचना बिहार शिक्षा विभाग को अनिवार्य रूप से भेजी जाए। फैसला राज्यपाल की स्वीकृति के बाद लिया गया सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि पदभार ग्रहण करने से संबंधित सभी आवश्यक प्रशासनिक औपचारिकताओं को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि जिले में शिक्षा विभाग के कार्य प्रभावित न हों। यह आदेश शिक्षा विभाग के निदेशक रंजन कुमार द्वारा जारी किया गया है। विभागीय अधिसूचना में उल्लेख किया गया है कि यह फैसला राज्यपाल की स्वीकृति के बाद लिया गया है। बक्सर में नए जिला शिक्षा पदाधिकारी की नियुक्ति से जिले में शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों की मॉनिटरिंग और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि नए डीईओ जिले की शिक्षा व्यवस्था में किस तरह के सकारात्मक बदलाव लेकर आते हैं।
जेएसडब्ल्यू को शिक्षा योगदान के लिए भामाशाह सम्मान
नागौर| शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान और ग्रामीण विद्यालयों के आधारभूत विकास में कार्यों के लिए जेएसडब्ल्यू सीमेंट को राज्य स्तरीय भामाशाह सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान राजस्थान सरकार के आयोजन में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश कुमार यादव और शिक्षा विभाग के निदेशक सीताराम जाट ने प्रदान किया। कंपनी की ओर से यूनिट हेड नवनीत चौहान और सीएसआर प्रतिनिधि रामचरण चौधरी ने सम्मान ग्रहण किया। कंपनी ने नागौर क्षेत्र के राजकीय विद्यालयों में कक्षा-कक्ष निर्माण, सौर पैनल, शिक्षा आधारित पेंटिंग, छत की वाटरप्रूफिंग और फर्नीचर उपलब्ध कराने सहित कई पहल की हैं। नवनीत चौहान ने कहा कि यह उपलब्धि टीम, स्थानीय समुदाय, जनप्रतिनिधियों, शिक्षा विभाग और विद्यालय परिवारों के सहयोग से संभव हुई।
व्यावसायिक, शिक्षा ऋण के आवेदन शुरू
उदयपुर। अल्पसंख्यक मामलात विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए व्यावसायिक एवं शिक्षा ऋण योजनाओं के तहत ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी और जैन समुदाय के पात्र आवेदक आवेदन कर सकते हैं। व्यावसायिक ऋण के लिए आयु सीमा 18 से 54 वर्ष तथा शिक्षा ऋण के लिए 16 से 32 वर्ष निर्धारित है।
देवेंद्र यादव का हमला: भाजपा सरकार शिक्षा पर वार
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने दिल्ली की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षकों की भारी कमी के बावजूद प्रशिक्षित शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय प्रशासनिक कार्यों में लगाया जा रहा है
उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षामंत्री योगेन्द्र उपाध्याय से बुधवार शाम को उनके सरकारी आवास पर राज्य सूचना आयुक्त डॉ. दिलीप अग्निहोत्री ने शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच शिक्षा, संस्कृति और देश में हो रहे सांस्कृतिक पुनर्जागरण से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर डॉ. दिलीप अग्निहोत्री ने अपनी पुस्तक 'सनातन चेतना का जागरण' उच्च शिक्षामंत्री को भेंट की। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक पिछले कुछ वर्षों में देश में हुए सांस्कृतिक जागरण, राष्ट्रीय चेतना के उत्थान और भारतीय परंपराओं के पुनर्स्थापन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को समेटे हुए है। श्रीराम मंदिर देशवासियों की आस्था का नया आयाम डॉ. अग्निहोत्री के अनुसार, उनकी पुस्तक में अयोध्या में लगभग पांच सौ वर्षों के बाद हुए भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण को एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्शाया गया है। उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर निर्माण ने देशवासियों की आस्था को नया आयाम दिया है और अयोध्या के समग्र विकास को भी गति प्रदान की है। उन्होंने यह भी बताया कि अयोध्या धाम का विकास अब विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप किया जा रहा है। आधुनिक सुविधाओं और सांस्कृतिक विरासत के समन्वय से अयोध्या को वैश्विक पहचान मिली है। यह सनातन धर्म में आस्था रखने वाले करोड़ों लोगों के लिए गौरव और श्रद्धा का विषय है।
राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए शिक्षकों की कम रुचि के कारण 19 जिलों से अभी तक कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। इसे देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 30 जून से बढ़ाकर 7 जुलाई कर दी है। बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि 30 जून की अंतिम तिथि तक प्रदेश के 19 जिलों से एक भी शिक्षक ने आवेदन नहीं किया था। शिक्षकों की इस सुस्ती को देखते हुए विभाग ने आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने का फैसला लिया है। राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 7 जून से शुरू हुई थी। इसके लिए परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों, उच्च प्राथमिक विद्यालयों या अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत शिक्षक/शिक्षिकाएं पात्र हैं। आवेदन केवल प्रेरणा वेब पोर्टल (www.prernaup.in) के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। आवेदन की स्थिति शून्य पाए जाने के बाद शिक्षा विभाग ने इसे प्राथमिकता पर लिया है। प्रयागराज के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार ने समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को पुरस्कार की गरिमा और महत्व के बारे में जागरूक करें और उन्हें आवेदन के लिए प्रेरित करें। अब शिक्षक 7 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
शिक्षा, खेल, पेयजल और सामाजिक विकास के क्षेत्र में योगदान के लिए आकृति फाउंडेशन को 'शिक्षा श्री ' सम्मान से नवाजा गया है। शिक्षा विभाग की ओर से सम्मान मधुबन, उदयपुर स्थित राजकीय बालिका वरिष्ठ माध्यमिक आवासीय स्कूल में आयोजित जिला स्तरीय समारोह में प्रदान किया गया। फाउंडेशन ने राजस्थान के विभिन्न जिलों में शिक्षा और छात्र हित में कई कार्य किए हैं। इनमें 250 सरकारी स्कूलों में खेल सामग्री, खेल अवसंरचना, खेल टूर्नामेंट और खिलाड़ियों का प्रोत्साहन शामिल है। संस्था ने 6 स्कूलों में नाइट फ्लडलाइट युक्त खेल मैदान, 25 स्कूलों में शीतकालीन स्वेटर वितरण, 16 में फर्नीचर और स्टेशनरी किट उपलब्ध कराए हैं। 12 स्कूलों में आर.ओ. जल शुद्धिकरण प्रणाली स्थापित की गई है, जबकि 28 स्कूलों में पौधारोपण किया। संस्था के प्रमुख प्रकल्पों में 'लेवलिंग द प्लेइंग फील्ड' (खेल विकास), 'वॉर्म्थ' (वस्त्र वितरण), 'नीर' (स्वच्छ पेयजल), 'सक्षम शिक्षा', 'नवपाठशाला', 'स्वास्थ्य सहेली' और ‘धरा श्रृंगार’ शामिल हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, पर्यावरण और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसी समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए कानोड़ के शिक्षाविद् चंद्रशेखर स्वर्णकार को 'प्रेरक सम्मान' से सम्मानित किया गया। संस्था के संस्थापक अमन वया ने बताया कि वर्तमान कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। भविष्य में सरकारी स्कूलों में आधारभूत संरचना और निर्माण संबंधी कार्यों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। इस अवसर पर राहुल जैन और अलीशा शर्मा सहित न्यूएज टीम के अन्य सदस्यों को भी सम्मानित किया गया। संस्था ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने सहयोगियों, स्वयंसेवकों, दानदाताओं और सभी साझेदार संस्थाओं को दिया।
मोतिहारी के जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने बुधवार को पर्यवेक्षण गृह का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने वहां रह रहे बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का विस्तृत जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान डीएम ने आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और अन्य आधारभूत व्यवस्थाओं का गहन मूल्यांकन किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। डीएम ने पर्यवेक्षण गृह के विभिन्न कक्षों, शयन कक्षों, रसोईघर और स्वच्छता व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने साफ-सफाई और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के रहने का वातावरण पूरी तरह सुरक्षित, स्वच्छ और अनुकूल होना चाहिए। प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश जिलाधिकारी ने मौजूद पदाधिकारियों और कर्मियों को किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 तथा प्रचलित नियमों के अनुरूप सभी व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने निर्देश दिया कि पर्यवेक्षण गृह में रह रहे प्रत्येक बच्चे को आवश्यक पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं और उनकी नियमित पढ़ाई सुनिश्चित की जाए। डीएम ने यह भी कहा कि बच्चों के शैक्षणिक विकास में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए और इसके लिए समुचित शैक्षणिक माहौल तैयार किया जाए। रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए इसके अतिरिक्त, डीएम ने बच्चों के सर्वांगीण विकास पर बल दिया। उन्होंने नियमित परामर्श सत्र, खेलकूद गतिविधियां और अन्य रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों से बच्चों का मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक विकास बेहतर तरीके से हो सकेगा। निरीक्षण के दौरान भवन में पाई गई कमियों पर जिलाधिकारी ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने भवन निर्माण विभाग के संबंधित अधिकारियों को आवश्यक मरम्मत कार्य और अन्य आधारभूत कमियों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। डीएम ने स्पष्ट किया कि बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अंत में, डीएम सौरभ सुमन यादव ने कहा कि पर्यवेक्षण गृह में रह रहे प्रत्येक बच्चे के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने सभी आवश्यक सुविधाएं समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से उपलब्ध कराने पर जोर दिया, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल बन सके।
देश के शासकीय और स्वशासी मेडिकल कॉलेजों के शिक्षकों के संगठन प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (PMTA), मध्य प्रदेश ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर देश में चिकित्सा शिक्षा की गिरती गुणवत्ता, बिना पर्याप्त संसाधनों के खुल रहे मेडिकल कॉलेजों और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन ने कहा कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो इसका सीधा असर देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा पर पड़ेगा। PMTA ने पत्र में कहा कि देशभर में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन आवश्यक फैकल्टी, अस्पताल, प्रयोगशालाएं, आधुनिक उपकरण और क्लिनिकल प्रशिक्षण जैसी बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है। संगठन का कहना है कि केवल एमबीबीएस सीटें बढ़ाना समाधान नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण डॉक्टर तैयार करना अधिक जरूरी है। पत्र में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का हवाला देते हुए कहा गया है कि वर्तमान में भारत में डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात बेहतर स्थिति में है, इसलिए संख्या से अधिक गुणवत्ता पर ध्यान देने की आवश्यकता है। श्योपुर मेडिकल कॉलेज का उदाहरण दिया एसोसिएशन ने मध्यप्रदेश के श्योपुर शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थिति को चिकित्सा शिक्षा की बदहाल व्यवस्था का उदाहरण बताया है। पत्र में कहा गया कि विद्यार्थियों के खुले पत्र में पर्याप्त फैकल्टी, प्रैक्टिकल प्रशिक्षण और मरीजों की कमी का उल्लेख किया गया है। दावा किया गया कि पिछले एक वर्ष में निर्धारित करीब 180 प्रैक्टिकल कक्षाओं के मुकाबले केवल एक कक्षा आयोजित हुई। ऐसी स्थिति में छात्रों का व्यावहारिक प्रशिक्षण गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है, जो भविष्य में मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। NMC की मान्यता प्रक्रिया पर सवाल PMTA ने पत्र में कहा कि हाल में केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा NMC के कुछ अधिकारियों और निरीक्षण टीम से जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर से मान्यता प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं। एसोसिएशन का आरोप है कि निरीक्षण से पहले तिथियां लीक होने, घोस्ट फैकल्टी और कागजी मरीज दिखाकर मान्यता लेने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। यदि ये आरोप सही हैं तो यह देश की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर मामला है। राष्ट्रीय आयोग में अधिकांश पद खाली पत्र में यह भी कहा गया कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के चार स्वायत्त बोर्डों में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। एसोसिएशन का कहना है कि देशभर के 850 से अधिक मेडिकल कॉलेजों की मान्यता और निगरानी करने वाले आयोग में विशेषज्ञों के पद खाली होना नियामक व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है। PMTA की तीन प्रमुख मांगें एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री से तीन प्रमुख मांगें की हैं। पहली, देश और मध्यप्रदेश के नवस्थापित मेडिकल कॉलेजों का स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति से फिजिकल, शैक्षणिक और बायोमेट्रिक ऑडिट कराया जाए। दूसरी, मान्यता प्रक्रिया में अनियमितता के दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए NMC के रिक्त पदों पर ईमानदार और अनुभवी चिकित्सकों की नियुक्ति की जाए। तीसरी, पर्याप्त भवन, फैकल्टी, अस्पताल और अन्य संसाधन उपलब्ध होने के बाद ही नए मेडिकल कॉलेजों को अनुमति देने की नीति लागू की जाए।
मध्य प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की भारी कमी को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। बुधवार को जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए दोनों सरकारों को 17 अगस्त तक अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह जनहित याचिका सेंधवा के सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता बीएल जैन द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अभिषेक तुगनावत ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है और लाखों विद्यार्थियों को संविधान एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत मिलने वाली मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश में मंजूर 2.89 लाख शिक्षकों के पदों में से 1.15 लाख पद रिक्त हैं, यानी लगभग 40% पद खाली पड़े हैं। स्थिति यह है कि 1,895 स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। याचिका में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की 2025 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि प्रदेश के 83,514 स्कूलों में से लगभग 5 हजार स्कूलों के भवन जर्जर और बच्चों के लिए असुरक्षित हैं। 3,400 स्कूलों में शौचालय नहीं हैं, जबकि करीब 10 हजार स्कूल बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से भी वंचित हैं। 40 हजार स्कूलों में बाउंड्रीवाल नहीं है और हजारों विद्यालयों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं है। कई स्कूल आज भी झोपड़ियों में संचालित हो रहे हैं। प्रदेश में 59 हजार से अधिक स्कूलों में कंप्यूटर सुविधा नहीं याचिका में यह भी कहा गया कि डिजिटल शिक्षा की बात करने वाले प्रदेश में 59 हजार से अधिक स्कूलों में कंप्यूटर सुविधा उपलब्ध नहीं है। वहीं पिछले दस वर्षों में सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से बारहवीं तक के विद्यार्थियों की संख्या में 22 लाख से अधिक की कमी दर्ज की गई है, जबकि इसी अवधि में प्रदेश की आबादी बढ़ी है। इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था में गिरते विश्वास का संकेत बताया गया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को यह भी अवगत कराया कि सुप्रीम कोर्ट जनवरी 2026 में सभी सरकारी और निजी स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए पृथक शौचालय तथा छात्राओं के लिए निःशुल्क सैनिटरी पैड की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अनेक स्कूलों में इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। सरकारी धन के दुरुपयोग का भी मुद्दा उठाया गया याचिका में आरोप लगाया गया है कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी आवश्यकताओं पर पर्याप्त खर्च नहीं किया जा रहा, जबकि अन्य मदों में बड़े पैमाने पर राशि खर्च की जा रही है। साथ ही निर्माण और मरम्मत कार्यों में भ्रष्टाचार तथा सरकारी धन के दुरुपयोग का भी मुद्दा उठाया गया है। कोर्ट से प्रदेश के बच्चों के शिक्षा संबंधी संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और स्कूलों में आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित कराने की मांग की गई है।अगली सुनवाई में केंद्र और राज्य सरकार को 17 अगस्त तक अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा।
मधेपुरा के बीएन मंडल विश्वविद्यालय में बुधवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने धरना-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन नई शिक्षा नीति-2020, चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम (FYUP) और सातवें सेमेस्टर में नामांकन के लिए 7.5 सीजीपीए की अनिवार्यता के विरोध में था। प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि नई शिक्षा नीति छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक और शैक्षणिक बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में नियमित कक्षाएं नहीं चल रही हैं, पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो रहा है, और परीक्षाओं व परिणामों में भी देरी हो रही है। इसके बावजूद छात्रों पर लगातार नई शर्तें और अतिरिक्त शुल्क का बोझ बढ़ाया जा रहा है। सातवें सेमेस्टर में प्रवेश के लिए शर्त लागू करना अनुचित आइसा के जिला सचिव पावेल कुमार ने 7.5 सीजीपीए की अनिवार्यता को हजारों छात्रों के साथ अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि 2023-27 बैच नई व्यवस्था का पहला बैच है, और ऐसे में सातवें सेमेस्टर में प्रवेश के लिए यह शर्त लागू करना अनुचित है। पावेल कुमार ने चेतावनी दी कि इस अनिवार्यता से बड़ी संख्या में छात्र चौथे वर्ष में प्रवेश से वंचित हो जाएंगे, जिससे उनकी उच्च शिक्षा और शोध के अवसर प्रभावित होंगे। छात्र नेताओं ने इंटर्नशिप के नाम पर निजी कंपनियों द्वारा कथित अवैध वसूली का भी विरोध किया और इसे तत्काल बंद करने की मांग की। आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी धरने को संबोधित करते हुए आइसा के अन्य नेताओं ने कहा कि संगठन छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर लगातार आंदोलन करता रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान आइसा ने मुख्य रूप से चार वर्षीय स्नातक (एफवाईयूपी) व्यवस्था वापस लेने, सातवें सेमेस्टर में 7.5 सीजीपीए की अनिवार्यता समाप्त करने, इंटर्नशिप के नाम पर कथित अवैध वसूली रोकने और सेमेस्टर प्रणाली के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूली बंद करने की मांग की। इस प्रदर्शन में आइसा के राजकिशोर राज, संतोष कुमार सियोटा, आशीष कुमार, कृष्ण कुमार, शिव कुमार, नवल कुमार, प्रदीप कुमार, विशाल कुमार, सौरभ कुमार, मनीष कुमार, अंकु कुमार, मधुसूदन कुमार, ज्योतिष कुमार, हर्ष कुमार सहित बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए।
कौशांबी में 'स्कूल चलो' अभियान रैली:बच्चों का रोली-चंदन से स्वागत, शिक्षा के लिए जागरूक किया
कौशांबी जनपद में 'स्कूल चलो अभियान' के दूसरे चरण के अंतर्गत बुधवार को विकास खंड कड़ा के प्राथमिक विद्यालय हिसामपुर परसखी में जागरूकता रैली निकाली गई। इसका मुख्य उद्देश्य शत-प्रतिशत बच्चों का नामांकन और उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना था। रैली निकालने से पहले, विद्यालय पहुंचे सभी बच्चों का शिक्षकों ने रोली-चंदन का टीका लगाकर और पुष्प अर्पित कर आत्मीय स्वागत किया। शिक्षकों ने बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय आने, मन लगाकर पढ़ाई करने और अन्य बच्चों को भी स्कूल से जोड़ने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान विद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला। प्रधानाध्यापक रामकृष्ण साहू के नेतृत्व में निकली इस रैली में विद्यालय के शिक्षक, छात्र-छात्राएं और ग्रामवासी शामिल हुए। उन्होंने गांव की गलियों में भ्रमण कर शिक्षा का संदेश दिया। बच्चों ने हाथों में रंग-बिरंगे बैनर, पोस्टर और तख्तियां ले रखी थीं। शिक्षकों ने घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क किया और उन्हें बच्चों के नामांकन व नियमित उपस्थिति के लिए प्रेरित किया। रैली के दौरान बच्चों ने हर घर का यह है अरमान, पढ़-लिखकर बने महान और स्कूल चलें हम, सपनों को सच करें हम जैसे शिक्षा से जुड़े आकर्षक नारे लगाए, जिससे पूरे गांव में सकारात्मक माहौल बना। प्रधानाध्यापक रामकृष्ण साहू ने बताया कि 'स्कूल चलो अभियान' का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसके लिए विद्यालय परिवार लगातार अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को विद्यालय से जोड़ने और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है। इस अवसर पर ग्राम प्रधान शिव प्रताप सिंह, विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष महेंद्र कुमार, शिक्षिका माया सिंह, रिया सेठी, शिक्षामित्र बीरेंद्र कुमार व संध्या देवी पटेल सहित विद्यालय के छात्र-छात्राएं और ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने बच्चों की शिक्षा के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
पूर्णिया जिले के धमदाहा श्रीनगर में आयोजित एक समारोह में मध्य विद्यालय कठबजरा की प्रधानाध्यापिका सुजीता कुमारी को सम्मानित किया गया। उन्हें विद्यालय में नवाचार और उत्कृष्ट शैक्षणिक कार्यों के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी ने यह सम्मान प्रदान किया। जिला शिक्षा पदाधिकारी रविंद्र कुमार प्रकाश ने प्रधानाध्यापिका सुजीता कुमारी को मोमेंटो, प्रशस्ति पत्र और हरियाली के प्रतीक पौधे से सम्मानित किया। यह सम्मान विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए दिया गया। इसी समारोह में धमदाहा प्रखंड के अन्य शिक्षकों को भी उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में भावना कुमारी, चंदन कुमार, जुली कुमारी, अलका कुमारी, इला कुमारी, प्रिया कुमारी, जयप्रकाश कुमार, असीम चक्रवर्ती और प्रियंका रानी शामिल थे। सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रधानाध्यापिका सुजीता कुमारी जब अपने विद्यालय मध्य विद्यालय कठबजरा पहुंचीं, तो विद्यालय परिवार ने उनका स्वागत किया। सहकर्मी शिक्षकों, विद्यालय शिक्षा समिति के सदस्यों और अभिभावकों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उन्हें बधाई दी। इस अवसर पर शिक्षकों और अभिभावकों ने सुजीता कुमारी के नेतृत्व में विद्यालय द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यालय भविष्य में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में नए आयाम स्थापित करेगा।
रीवा में संभागायुक्त (कमिश्नर) शीलेन्द्र सिंह ने स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि अगर निरीक्षण के दौरान चौथी या पांचवीं कक्षा का कोई भी बच्चा पढ़ना-लिखना नहीं जानता मिला, तो इसे गंभीर लापरवाही माना जाएगा। ऐसे मामलों में सीधे स्कूल के प्रिंसिपल और संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कमिश्नर ने कहा कि स्कूलों में बच्चों का सिर्फ नामांकन कर लेना (एडमिशन देना) ही काफी नहीं है। असली मकसद हर बच्चे को बुनियादी शिक्षा देना और उसे पढ़ने-लिखने लायक बनाना है। शासन की मंशा बच्चों को आधुनिक और प्रभावी शिक्षा देने की है। बच्चों का भविष्य इसी पर टिका है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कागजी आंकड़ों से नहीं, जमीनी काम से होगा सुधारअधिकारियों और शिक्षकों को दो टूक संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार सिर्फ कागजी आंकड़ों से नहीं होगा। इसके लिए जमीनी स्तर पर काम करना होगा। शिक्षकों को यह तय करना होगा कि हर बच्चा सीखे। कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान देकर उन्हें अलग से पढ़ाई में मदद (एक्स्ट्रा क्लास) दी जाए। खुद स्कूलों का औचक निरीक्षण करेंगे कमिश्नरकमिश्नर शीलेन्द्र सिंह ने बताया कि स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग और मूल्यांकन की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। वे खुद भी स्कूलों का निरीक्षण कर पढ़ाई की जमीनी हकीकत का जायजा लेंगे। अगर कहीं पढ़ाई का स्तर कमजोर मिला या बच्चों की सीखने की क्षमता ठीक नहीं पाई गई, तो जिम्मेदारों पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।
हरियाणा सरकार ने स्कूल सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEO) को ‘फाइनल रिमाइंडर’ भेजा है।रिमांइडर में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अप्रैल-जून 2026 की स्कूल सेफ्टी क्वार्टरली प्रोग्रेस रिपोर्ट (QPR) और लंबित एक्शन टेकन रिपोर्ट 48 घंटे के भीतर हर हाल में विभाग को भेजी जाए। विभाग ने चेतावनी दी है कि यह मामला 'मोस्ट अर्जेंट एंड टाइम बाउंड' श्रेणी का है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 30 जून 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि कई जिलों ने अभी तक निर्धारित प्रारूप में स्कूल सुरक्षा रिपोर्ट नहीं भेजी है, जबकि यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की स्कूल सुरक्षा नीति के तहत अनिवार्य है। चार तिमाहियों से अटकी रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय ने अपने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि कई जिलों की पिछली चार तिमाहियों की Quarterly Progress Reports (QPRs) अभी भी लंबित हैं। इसके कारण स्कूलों में सुरक्षा संबंधी गतिविधियों की वास्तविक स्थिति का आकलन नहीं हो पा रहा है और ज्वाइंट मॉनिटरिंग कमेटी (JMC) की समीक्षा प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। विभाग ने अधिकारियों से कहा है कि लंबित रिपोर्टों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल तैयार कर निर्धारित प्रारूप में भेजा जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन अनिवार्य पत्र में उल्लेख किया गया है कि 'अविनाश मेहरोत्रा बनाम भारत संघ' (सिविल रिट याचिका संख्या-483/2004) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में सुरक्षा मानकों को लागू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद NDMA School Safety Policy-2016 लागू की गई, जिसके तहत प्रत्येक जिले से स्कूल सुरक्षा गतिविधियों की नियमित तिमाही रिपोर्ट मांगी जाती है। जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाने के निर्देश निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जिला प्रशासन के साथ मिलकर सभी सरकारी एवं सहायता प्राप्त स्कूलों में निर्धारित स्कूल सुरक्षा गतिविधियां सुनिश्चित करें। इसके बाद निर्धारित प्रोफार्मा में प्रत्येक तिमाही की रिपोर्ट समय पर विभाग को भेजी जाए। साथ ही भविष्य में रिपोर्ट भेजने में देरी न हो, इसके लिए प्रत्येक जिले में स्थायी मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। क्यों महत्वपूर्ण है यह रिपोर्ट? स्कूल सुरक्षा रिपोर्ट केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि इससे यह तय होता है कि प्रदेश के स्कूल किसी भी आपदा, दुर्घटना या आपात स्थिति से निपटने के लिए कितने तैयार हैं। रिपोर्ट के आधार पर राज्य और केंद्र स्तर पर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा होती है और कमियों को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।
शीला अग्रवाल सरस्वती विद्या मंदिर में मासांत बैठक संपन्न, शिक्षा पर जोर
लोहरदगा|शीला अग्रवाल सरस्वती विद्या मंदिर लोहरदगा में मासांत बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में गुमला विभाग के विभाग प्रमुख ओमप्रकाश सिन्हा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। बैठक के दौरान ओमप्रकाश सिन्हा ने आगामी शैक्षणिक, सांस्कृतिक व संगठनात्मक कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा करते हुए सभी आचार्यों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व संस्कार आधारित शिक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया। बैठक के द्वितीय सत्र में सुंदरी देवी सरस्वती शिशु मंदिर, लोहरदगा के प्रधानाचार्य सुरेश चंद्र पांडे ने पंचपदी शिक्षण पद्धति पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने शिक्षण को अधिक प्रभावी, रोचक और छात्र-केंद्रित बनाने के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए आचार्यों को व्यवहारिक सुझाव दिए। बैठक में विद्यालय के प्रधानाचार्य संजीव कुमार झा सहित सभी आचार्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर सभी ने आगामी कार्यक्रमों के सफल संचालन तथा गुणवत्तापूर्ण और संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान करने के लिए निर्धारित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का संकल्प लिया। कुडू|अविराम कॉलेज ऑफ एजुकेशन टीको कुडू में हूल दिवस के मौके पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसकी शुरुआत कॉलेज के सचिव इंद्रजीत भारती द्वारा वीर शहीदों के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। मौके पर उपस्थित सभी लोगों ने हूल आंदोलन के वीर सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। मौके पर कॉलेज सचिव इंद्रजीत भारती ने कहा कि हूल दिवस हमें अन्याय, शोषण और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष करने वाले वीर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव तथा फूलो-झानो के अदम्य साहस और बलिदान की याद दिलाता है। उन्होंने युवाओं से उनके आदर्शों को अपनाने तथा समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में कॉलेज के जंग बहादुर, पंकज, अफताब, रेणुका, कुंदन, पवन, ममता, शिव, संदीप, चीनीबास, खुशी, डॉ. सुनीता, डॉ. शशि व शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित थे। सभी ने वीर शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना 3 जुलाई तक करें आवेदन
कवर्धा| अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आवेदन मंगाए गए हैं। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट आवासीय विद्यालयों में निशुल्क शिक्षा मिलेगी। इच्छुक पात्र अभिभावक 3 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं।
परीक्षार्थियों को नई शिक्षा नीति व उत्तर लेखन की बारीकियां समझाई
शहर के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस एसबीएन शासकीय पीजी कॉलेज में मंगलवार को स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ की ओर से प्राइवेट परीक्षार्थियों के लिए विशेष परीक्षा मार्गदर्शन सत्र आयोजित किया गया। प्राचार्य डॉ. धीरज कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस सत्र का उद्देश्य नियमित विद्यार्थियों के साथ प्राइवेट परीक्षार्थियों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप परीक्षा प्रणाली, विषय चयन, उत्तर लेखन कौशल व प्रभावी अध्ययन पद्धति की जानकारी देना था। इसका लक्ष्य परीक्षा के प्रति उनका आत्मविश्वास बढ़ाना था। कार्यक्रम में प्रकोष्ठ के कार्यकर्ता भोला बामनिया व दिव्या जमरे ने बताया कि प्राइवेट परीक्षार्थियों को नियमित कक्षाओं का लाभ नहीं मिल पाता। इससे उन्हें पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली और उत्तर लेखन से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यह विशेष मार्गदर्शन सत्र आयोजित किया गया। इससे विद्यार्थी परीक्षा की बेहतर तैयारी कर सकें। अच्छे परिणाम प्राप्त कर सकें। डॉ. मधुसूदन चौबे ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों व विषयों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की उपयोगिता, व्यक्तित्व विकास विषय, जैविक खेती, फील्ड स्टडी, मेजर व माइनर, इलेक्टिव विषय और आधार पाठ्यक्रम की परीक्षा प्रणाली को सरल, सहज भाषा में समझाया। परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रकृति, अंक-विभाजन व उत्तर प्रस्तुत करने की प्रभावी शैली पर चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को सीमित समय में प्रभावी तैयारी की रणनीतियाँ बताईं। महत्वपूर्ण बिंदुओं की पहचान, नियमित पुनरावृत्ति, संक्षिप्त नोट्स तैयार करना, समय प्रबंधन व विषयवार अध्ययन योजना बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि परीक्षा में उत्तर लिखते समय शीर्षकों व उपशीर्षकों का उचित उपयोग, आवश्यकतानुसार बिंदुवार प्रस्तुति, सरल व शुद्ध भाषा, निर्धारित समय में उत्तर पूरा करना बेहतर अंक प्राप्त करने में अहम भूमिका निभाते हैं। मार्गदर्शन सत्र के दौरान विद्यार्थियों से विभिन्न प्रकार के प्रश्नों के उत्तर लिखवाकर व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। उत्तर लेखन के दौरान होने वाली सामान्य त्रुटियों की जानकारी दी गई। प्रभावशाली, क्रमबद्ध उत्तर लिखने की तकनीक भी सिखाई गई। हंसा धनगर, जोया खान, सुखदेव डावर, दिलीप व आरती धनगर का विशेष सहयोग रहा।
हाजिरी 75 प्रतिशत से कम तो नहीं दे सकेंगे परीक्षा झारखंड में उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होगा। राज्य सरकार ने स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम के लिए रेगुलेशन (ड्राफ्ट) तैयार कर लिया है। नया नियम लागू होते ही विश्वविद्यालयों में परीक्षा व्यवस्था, आंतरिक मूल्यांकन, विषय परिवर्तन और मॉनिटरिंग की व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी। प्रथम वर्ष का रिजल्ट घोषित होने के तीन सप्ताह के भीतर छात्र मेजर (मुख्य) विषय बदल सकेंगे। इसके लिए प्रथम वर्ष में न्यूनतम 7.5 सीजीपीए या 75 प्रतिशत अंक अनिवार्य होगा। यह बदलाव तभी संभव होगा, जब संबंधित विभाग में सीटें खाली होंगी। ड्राफ्ट के अनुसार प्रथम, तृतीय, पंचम और सप्तम यानी सभी विषम सेमेस्टर में विद्यार्थियों को पदोन्नति दी जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया ई-समर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन होगी, जिससे छात्र अपने आवेदन को ट्रैक कर सकेंगे। यही नहीं, अब 75 प्रतिशत उपस्थिति के बिना छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। छात्र और अभिभावक इसे ई-समर्थ पोर्टल पर देख सकेंगे। सरकार का उद्देश्य उच्च शिक्षा को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणाम आधारित बनाना है। नई व्यवस्था में निरंतर मूल्यांकन को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही पूरी अकादमिक प्रक्रिया को डिजिटल ट्रैकिंग से जोड़ने का प्रस्ताव है। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी हैएक सेमेस्टर में एक आंतरिक परीक्षाड्राफ्ट के अनुसार मेजर, माइनर और रिसर्च कोर्स में हर सेमेस्टर में सिर्फ एक आंतरिक परीक्षा होगी। अभी दो परीक्षा का प्रावधान है। नए नियम के अनुसार नॉन प्रैक्टिकल विषयों में 25 अंक और प्रैक्टिकल विषयों में 15 अंक का इंटरनल मूल्यांकन होगा। इसमें लिखित परीक्षा, असाइनमेंट, प्रोजेक्ट और ट्यूटोरियल के साथ उपस्थिति व प्रदर्शन को भी शामिल किया गया है।अधिकतम हाजिरी पर 5 अंकआंतरिक मूल्यांकन में उपस्थिति के लिए अधिकतम पांच अंक निर्धारित किए गए हैं। नई व्यवस्था के अनुसार 45 प्रतिशत तक उपस्थिति पर एक अंक, 45 से 55 प्रतिशत पर दो अंक देने का प्रावधान किया गया है। वहीं 55 से 65 प्रतिशत पर तीन अंक दिए जाएंगे। जबकि 65 से 75 प्रतिशत पर चार अंक का नियम है। इसी प्रकार 75 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति पर पूरे पांच अंक मिलेंगे। हर कोर्स के लिए अलग मूल्यांकनएबिलिटी इनहांसमेंट और वैल्यू एडेड कोर्स 50-50 अंकों के होंगे। स्किल इनहांसमेंट और मल्टी डिस्पिलनरी कोर्स 75-75 अंकों के होंगे। मेजर, माइनर और रिसर्च कोर्स 100 अंकों के होंगे। इसमें 25 अंक इंटरनल और 75 अंक एंड सेमेस्टर परीक्षा के होंगे। प्रैक्टिकल विषयों में 15 अंक इंटरनल थ्योरी, 25 अंक की थ्योरी परीक्षा और 60 अंक प्रायोगिक परीक्षा के लिए निर्धारित किए गए हैं।समर टर्म अब सिर्फ छुट्टी नहींजून-जुलाई का समर टर्म अब केवल अवकाश नहीं रहेगा। इसी दौरान अनिवार्य इंटर्नशिप, फील्ड प्रोजेक्ट, सामुदायिक आउटरीच और अलाउड टू कीप टर्म्स (एटीकेटी) परीक्षाएं होंगी। शिक्षकों के लिए इसी अवधि में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी), शोध कार्य और मूल्यांकन का कार्यक्रम तय किया गया है। इधर, उपस्थिति नियम पर अफसरों ने उठाए सवाल ड्राफ्ट पर सुझाव के लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी विवि के अधिकारियों के साथ वर्चुअल मोड में बैठक हुई। इसमें अधिकारियों ने कहा कि उपस्थिति पर प्रावधान विरोधाभासी है। ड्राफ्ट में 45 प्रतिशत उपस्थिति पर अंक देने का प्रावधान है, वहीं 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले छात्रों को परीक्षा में शामिल न करने का नियम है। अगर छात्र परीक्षा में शामिल ही नहीं हो सकेंगे तो कम उपस्थिति पर अंक देने का क्या औचित्य है। दोनों प्रावधानों में एकरूपता लानी चाहिए।
पीके रैकवार को छतरपुर का नया जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) बनाया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में मंगलवार को आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश के अनुसार, पीके रैकवार को रायसेन के जिला शिक्षा केंद्र में जिला परियोजना अधिकारी (डीपीओ) के पद से स्थानांतरित कर सहायक संचालक शिक्षा बनाया गया है। इसके साथ ही उन्हें छतरपुर के जिला शिक्षा अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। अब तक जिला शिक्षा अधिकारी का प्रभार डिप्टी कलेक्टर कौशल सिंह के पास था। पीके रैकवार के पदभार ग्रहण करने के बाद जिले के शिक्षा विभाग की प्रशासनिक जिम्मेदारी उनके पास होगी। छतरपुर में पहले भी दे चुके हैं सेवाएं पीके रैकवार का छतरपुर से पुराना जुड़ाव रहा है। वे इससे पहले जिले में जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) और प्राचार्य के पद पर भी सेवाएं दे चुके हैं। जिले की शैक्षणिक व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली का अनुभव होने के कारण उनके कार्यकाल से शिक्षा विभाग में बेहतर समन्वय और कार्यों में गति आने की उम्मीद है।
सरकारी स्कूलों में स्टूडेंट्स और कार्मिकों की शाला दर्पण पोर्टल पर शत प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य करके शिक्षा विभाग राजस्थान ने सख्ती बढ़ा दी है। इसके लिए राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद,जयपुर की अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक सीमा शर्मा ने इसके आदेश गत दिनों जारी किए है। आदेश में राज्य के सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों और कार्मिकों की शाला दर्पण पोर्टल पर शत प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य किया है। इसके लिए टोंक समेत राज्य के समस्त मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों एवं पदेन जिला परियोजना समन्वयक समसा को आदेशित किया है। आदेश में कहा गया है कि एनसीईआरटी के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय विद्या समीक्षा केंद्र (आरवीएसके) के लिए राज्यभर के सभी विद्यालयों की उपस्थिति संबंधी जानकारी शाला दर्पण पोर्टल से संकलित की जाती है। हाल ही में किए गए डेटा विश्लेषण में सामने आया है कि कई विद्यालयों में विद्यार्थियों और कार्मिकों की उपस्थिति नियमित रूप से दर्ज नहीं की जा रही है। इसके कारण राजस्थान एवं राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध आंकड़े अपूर्ण और असंगत हो रहे हैं। नई व्यवस्था से कार्मिक और स्टूडेंट लापरवाही नहीं कर पाएंगे। हर कार्य दिवस पर ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य विभागीय निर्देशों के अनुसार प्रत्येक कार्य दिवस पर सभी विद्यार्थियों और कार्मिकों की उपस्थिति शाला दर्पण पोर्टल पर दर्ज करनी अनिवार्य होगी। किसी भी कर्मचारी, कक्षा या सेक्शन की उपस्थिति प्रविष्टि लंबित नहीं छोड़ी जा सकेगी। साथ ही अनुपस्थित एवं अवकाश पर रहने वाले विद्यार्थियों और कार्मिकों की जानकारी भी सही एवं नवीन (अपडेट) उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य होगा। जिला स्तर पर होगी नियमित समीक्षा राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने जिला कार्यालयों को उपस्थिति डेटा की नियमित समीक्षा करने और इसकी प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि विद्यालय स्तर पर उपस्थिति प्रविष्टियां निर्धारित समयावधि में पूरी कर ली जाएं। परिषद ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि उपस्थिति डेटा के संधारण में लापरवाही, गलत प्रविष्टि अथवा नियमित अपडेट नहीं किए जाने की स्थिति में संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी स्वयं उत्तरदायी होंगे। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी। शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष बोले- निर्णय सहीशिक्षक संघ रेसटा,राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बताया कि राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद जयपुर द्वारा राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में शाला दर्पण पोर्टल पर विद्यार्थियों एवं कार्मिकों की शत प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है, जो स्वागत योग्य निर्णय है। इससे शाला दर्पण पर सटीक और अपडेट उपस्थिति दर्ज होने से विद्यालयों की निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी, विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति का आकलन संभव होगा तथा राष्ट्रीय स्तर की शैक्षिक मॉनिटरिंग प्रणालियों को विश्वसनीय डेटा उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे शिक्षा योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और नीति निर्धारण में भी मदद मिलेगी।
प्रयागराज में 30 जनवरी मंगलवार शाम 7 बजे सलोरी में अंबेडकर छात्रावास के छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों ने जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सोनम वांगचुक, नेहा, मनीष कुमार समेत छह कार्यकर्ताओं के आमरण अनशन के समर्थन में मार्च निकाला। इस दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका गया और प्रतीकात्मक अर्थी भी निकाली गई। प्रदर्शन के दौरान छात्र नेताओं ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे भ्रष्ट और गैर-जवाबदेह संस्था बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार पेपर लीक की घटनाओं के बावजूद एजेंसी पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। छात्रों ने NTA को समाप्त करने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। छात्र नेता श्रीकांत अंबेडकर ने कहा कि NTA में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव है। उनका कहना था कि लगातार हो रहे पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, इसलिए इस संस्था को खत्म किया जाना चाहिए। आइसा उत्तर प्रदेश के सचिव शशांक ने कहा कि डबल इंजन सरकार के कार्यकाल में लेखपाल, यूपीएसआई, नीट सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियां और पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्रालय इन मामलों में अपनी जिम्मेदारी तय नहीं कर रहा है। आइसा उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष विवेक ने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन शिक्षा और रोजगार बचाने तथा परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित कराने के लिए है। उन्होंने कहा कि सरकार जवाबदेही से बच रही है, इसलिए शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पेपर चोर गद्दी छोड़, पेपर लीक बंद करो और धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो जैसे नारे लगाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो प्रयागराज में और बड़ा आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन में विवेक, भूपेंद्र, सुमित, महेंद्र, आर्यन, उमेश चौधरी, बृजेश, अशोक, अंकुर समेत अंबेडकर छात्रावास के सैकड़ों छात्र शामिल रहे।
पटियाला में कांग्रेस ने नीट पेपर लीक और दूसरे मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार में तीखा हमला बोला। जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक कुलजीत सिंह नागरा ने केंद्र की मोदी सरकार और पंजाब की 'आप' सरकार पर हर मुद्दे पर फेल होने का आरोप लगाया। उन्होंने शिक्षा, रोजगार, लोकतंत्र और पंजाब के विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर दोनों सरकारों की कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक से जहां कई छात्रों ने जान दी। वहीं कई मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। लेकिन केंद्र सरकार इसकी जिम्मेदारी लेने से बच रही है। पेपर लीक और बेरोजगारी से युवाओं में बढ़ा तनाव नागरा ने कहा कि देश में बार-बार पेपर लीक होना, परीक्षाओं का रद्द होना और भर्ती प्रक्रियाओं में लगातार हो रही देरी सरकारों की सबसे बड़ी विफलता है। उन्होंने NEET, CBSE, PPSC और NDA जैसी बड़ी परीक्षाओं में सामने आ रही गड़बड़ियों का विशेष रूप से जिक्र किया। नागरा ने आरोप लगाया कि इन धांधलियों के कारण देश और पंजाब के विद्यार्थियों में घोर निराशा, मानसिक तनाव और असुरक्षा का माहौल बन चुका है। श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष दिए बयानों की निंद पूर्व विधायक ने बेअदबी कानून को लेकर कुछ जनप्रतिनिधियों द्वारा श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष रखे गए पक्ष पर भी गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सिख कौम की इस सर्वोच्च धार्मिक संस्था के प्रति ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयान देना बेहद निंदनीय है और जनप्रतिनिधियों को इसकी गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। विज्ञापनों पर फिजूलखर्ची और पंचायती राज से खिलवाड़ पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए नागरा ने आरोप लगाया कि राज्य में लोकतंत्र की आवाज को दबाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ यात्राओं और विज्ञापनों पर पंजाब के खजाने से करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रहे हैं। बड़ी बात यह है कि इसका आर्थिक लाभ पंजाब के लोगों या स्थानीय कंपनियों के बजाय दिल्ली की कंपनियों को मिल रहा है। इसके अलावा, गांवों के विकास कार्यों का लेखा-जोखा (ऑडिट) बाहरी कंपनियों को सौंपने पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने इसे पंचायती राज व्यवस्था की मूल भावना के खिलाफ बताया। मीडिया की स्वतंत्रता और विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप नागरा ने राज्य में मीडिया की स्वतंत्रता प्रभावित होने का भी गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज पंजाब के अखबारों और टीवी चैनलों में विपक्ष को अपनी बात और जनता से जुड़े मुद्दे रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है। उन्होंने अंत में दावा किया कि कांग्रेस पार्टी हमेशा पंजाब और पंजाबियों के हितों की पहरेदार रही है, जबकि मौजूदा आम आदमी पार्टी की सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल साबित हुई है।
सिरसा जिले के सरकारी स्कूलों में भवनों की स्थिति को लेकर शिक्षा विभाग गंभीर है। मुख्यमंत्री स्तर पर हुई समीक्षा और मुख्यालय के अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद को शिक्षा विभाग की टीम ने गांव भरोखा और खैरपुर के राजकीय स्कूलों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खैरपुर के 12 कमरों को कंडम घोषित कर दिया गया। ऐसे में 1 जुलाई से स्कूल खुलने से पहले छात्रों के बैठने की व्यवस्था को लेकर नई चुनौती खड़ी हो गई है। निरीक्षण टीम में जिला शिक्षा अधिकारी सुभाष फुटेला, समग्र शिक्षा अभियान के जिला परियोजना समन्वयक कृष्ण कुमार, बीईओ सरसा रमेश कुमार, एसडीओ मनमीत सिंह और विभागीय जेई शामिल थे। हालांकि, मुख्यालय से एक विशेष टीम के आने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन वह टीम मौके पर नहीं पहुंची। वर्षों पुरानी तकनीकी चूक बनी परेशानी जांच के दौरान सामने आया कि खैरपुर स्कूल में वर्षों पहले बनाए गए 12 कमरों और बरामदों में निर्माण संबंधी तकनीकी खामियां अब बड़ी समस्या बन चुकी हैं। कुछ वर्ष पहले कमरों की पुरानी छतों को कंडम घोषित कर बदल दिया गया था, लेकिन साथ लगते बरामदों की छतों को नहीं बदला गया। अब बरामदों के स्तर और कमरों की ऊंचाई में अंतर होने के कारण मरम्मत संबंधी प्रस्ताव तकनीकी रूप से उलझ गया है। सूत्रों के अनुसार जब बरामदों की मरम्मत की फाइल मुख्यालय पहुंची तो अधिकारियों ने इस पर आपत्ति जताई। बैठक में इंजीनियरों ने बताया कि कमरों की छतों को पहले ही ऊंचा किया जा चुका है, जबकि बरामदों को उसी स्तर पर नहीं लाया गया। अधिकारियों ने इसे गंभीर तकनीकी त्रुटि माना और मौके की रिपोर्ट तलब की। बहुमंजिला भवन निर्माण की दिशा में सोच रही सरकार शिक्षा विभाग अब पुराने और जर्जर भवनों की मरम्मत पर खर्च करने की बजाय नए बहुमंजिला भवनों के निर्माण की दिशा में विचार कर रहा है। सरकार की योजना है कि कंडम भवनों को हटाकर आधुनिक सुविधाओं से युक्त बहुमंजिला स्कूल भवन बनाए जाएं, ताकि भविष्य में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। इसी उद्देश्य से मौके पर भवनों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा रहा है, ताकि मरम्मत या पुनर्निर्माण को लेकर अंतिम निर्णय लिया जा सके। मुख्यमंत्री की बैठक के बाद तेज हुई कार्रवाई हाल ही में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेशभर के कंडम स्कूल भवनों की स्थिति को लेकर शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी। बैठक में जर्जर भवनों की ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करने और उनकी स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए गए थे। इन्हीं निदेर्शों के तहत जिला स्तर पर निरीक्षण शुरू किया गया है। मुख्यालय से निरीक्षण दल आने की सूचना के चलते अवकाश के दिन भी संबंधित स्कूलों में जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर प्राचार्य और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। अब विभागीय रिपोर्ट के आधार पर खैरपुर स्कूल सहित अन्य भवनों के भविष्य को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
समाज, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रियल एस्टेट, महिला सशक्तिकरण, राजनीति एवं अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली छत्तीसगढ़ की विशिष्ट हस्तियों को सम्मानित करने के लिए दैनिक भास्कर की ओर से ‘एमिनेंस अवॉर्ड-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। यह सम्मान समारोह 1 जुलाई, 2026 को रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह होंगे। उनके हाथों उन प्रतिभाओं और व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने अपने समर्पण, दूरदृष्टि, नवाचार और नेतृत्व क्षमता के बल पर अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल की हैं और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह प्रतिष्ठित समारोह शाम 5 बजे से शुरू होगा। कुणाल गांजावाला की लाइव परफॉर्मेंस समारोह का विशेष आकर्षण बॉलीवुड सिंगर कुणाल गांजावाला और उनके बैंड की लाइव प्रस्तुति होगी। अपनी मधुर आवाज और शानदार प्रस्तुतियों के लिए प्रसिद्ध कुणाल की परफॉर्मेंस इस शाम को यादगार बनाने वाली है। इस आयोजन में डीबी पावर लिमिटेड मुख्य सहयोगी हैं, जबकि नारायणा एमएमआई हॉस्पिटल-हेल्थ पार्टनर हैं। भास्कर का यह आयोजन केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि उत्कृष्टता, प्रेरणा और उपलब्धियों का उत्सव है। यह उन व्यक्तित्वों के कार्यों को समाज के सामने लाने का मंच है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूते हुए दूसरों के लिए प्रेरणा का मार्ग प्रशस्त किया है।
मंडला जिले के कन्या शिक्षा परिसर चटुआमार की छात्राओं और अभिभावकों ने मंगलवार को गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन के साथ प्रदर्शन किया। सभी बैगा-बैगी चौक पर एकत्र हुए और नारेबाजी के बाद कलेक्टर के नाम जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में शिक्षिका एवं छात्रावास अधीक्षिका सिंधिया चौकसे को पद से हटाने की मांग की गई है। कामकाज को लेकर लगाए आरोपज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि अधीक्षिका नियमित रूप से देरी से स्कूल पहुंचती हैं और परिसर में कम समय तक रहती हैं। छात्राओं का यह भी कहना है कि उनसे अभद्र भाषा में बात की जाती है। साथ ही स्टाफ और सुरक्षा गार्ड के साथ भी विवाद की स्थिति बनी रहती है। जादू-टोने का भी आरोपछात्राओं और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल परिसर में नारियल, धागा लिपटा मटका और बोतल जैसी सामग्री मिली है। उनका दावा है कि बच्चों को डराने और उनकी आवाज दबाने के लिए जादू-टोना कराया जाता है। इन आरोपों के बाद अभिभावकों में नाराजगी है। कार्रवाई नहीं हुई तो स्कूल छोड़ने की चेतावनीअभिभावकों ने कहा कि यदि शिकायत पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे अपने बच्चों का नाम स्कूल से कटवा देंगे। विभाग ने जांच की बात कहीआदिवासी कार्य विभाग के सहायक संचालक कुलदीप कटहल ने बताया कि विभाग को शिकायत मिल गई है। उन्होंने कहा कि संबंधित शिक्षिका के खिलाफ पहले भी कार्रवाई हुई थी, लेकिन न्यायालय से स्थगन आदेश मिलने के बाद संभागीय उपायुक्त के निर्देश पर उनकी पदस्थापना की गई थी। वर्तमान शिकायत की जांच के निर्देश दिए गए हैं और जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जादू-टोने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने, गुणवत्तापूर्ण और परिणामोन्मुख (Result-oriented) बनाने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू हो गया है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव ( ACS), बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने एक विशेष यूट्यूब लाइव सत्र के माध्यम से प्रदेशभर के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स से सीधा संवाद किया और सरकार की आगामी प्राथमिकताओं को साझा किया।इस संवाद के दौरान उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों (सरकारी स्कूलों) के संचालन, शिक्षकों के कल्याण और छात्र नामांकन को लेकर कई बड़े और ऐतिहासिक फैसलों की घोषणा की गई है।गर्मी के कारण पढ़ाई के नुकसान की भरपाई: अब हर साल 25 जून से खुलेंगे स्कूलअपर मुख्य सचिव ने बताया कि अक्सर अत्यधिक गर्मी और लू के कारण बार-बार स्कूलों की छुट्टियां बढ़ानी पड़ती हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई का भारी नुकसान होता है।220 शिक्षण दिवस का लक्ष्य: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मानदंडों के अनुरूप बच्चों के लिए न्यूनतम 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करना अनिवार्य है।नया नियम: इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब उत्तर प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालय प्रत्येक वर्ष 25 जून से संचालित होंगे (यानी आज से स्कूल खुल चुके हैं)। उन्होंने शिक्षकों से अपील की है कि वे स्कूल आने वाले बच्चों का आत्मीय स्वागत करें और भीषण गर्मी को देखते हुए उनके स्वास्थ्य व सुरक्षा का विशेष प्रबंध करें।1 जुलाई से 'स्कूल चलो अभियान' का दूसरा चरण: ड्रॉपआउट रोकने पर विशेष जोरराज्य में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने और बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले (Dropout) बच्चों की संख्या को शून्य पर लाने के लिए सरकार नई रणनीति अपना रही है:स्थानीय डेटा की मदद: 1 जुलाई से शुरू हो रहे 'स्कूल चलो अभियान' के दूसरे चरण में स्कूल से बाहर (Out of School) रह गए बच्चों की पहचान की जाएगी। इसके लिए आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं के पास उपलब्ध जन्म रिकॉर्ड और स्थानीय सूचनाओं की मदद ली जाएगी।निर्बाध प्रवेश: कक्षा 5 पास करने वाले प्रत्येक छात्र का कक्षा 6 में निर्बाध और अनिवार्य दाखिला सुनिश्चित किया जाएगा। जो बच्चे सीखने में पीछे रह गए हैं, उनके लिए विशेष 'कैच-अप शिक्षण' (Catch-up Classes) संचालित किए जाएंगे।निपुण भारत मिशन का कक्षा 5 तक विस्तार: 6 जुलाई को 'निपुण संकल्प'बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को मजबूत करने वाले 'निपुण भारत मिशन' को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है:दायरा बढ़ा: पहले यह मिशन शुरुआती कक्षाओं के लिए था, लेकिन अब इसका दायरा कक्षा 5 तक बढ़ा दिया गया है। अब कक्षा 5 तक के बच्चों के लिए भाषा, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन (EVS) के स्पष्ट लर्निंग आउटकम (अधिगम लक्ष्य) तय किए गए हैं।शिक्षकों की ट्रेनिंग: इसके लिए राज्य स्तर पर एसआरजी और डायट मेंटर्स का प्रशिक्षण शुरू हो चुका है, जो ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों को ट्रेंड करेंगे। आगामी 6 जुलाई को प्रदेश के सभी जिलों में 'निपुण संकल्प कार्यशाला' का आयोजन होगा, जिसमें पूरे प्रशासनिक और अकादमिक तंत्र को झोंककर 'निपुण जनपद' बनाने का संकल्प लिया जाएगा।'DEAR' अभियान और वर्ष में दो बार मिलेगी होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्टअपर मुख्य सचिव ने स्कूलों में पठन-पाठन का माहौल बेहतर करने के लिए कई नए निर्देश दिए हैं:DEAR अभियान: स्कूलों में ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड’ (DEAR) जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, जहां एक निश्चित समय के लिए सभी काम रोककर सिर्फ किताबें पढ़ने की संस्कृति विकसित की जाएगी।अभिभावक सहभागिता: बच्चों की 'होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्ट' (Holistic Progress Report) को अब और अधिक प्रभावी बनाकर वर्ष में दो बार अभिभावकों (Parents) के साथ अनिवार्य रूप से साझा किया जाएगा ताकि वे भी बच्चे की प्रगति का हिस्सा बन सकें।शिक्षकों के लिए बड़ी सौगात: ₹5 लाख की कैशलेस इलाज सुविधा और 21,000 नई भर्तियांमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शिक्षा विभाग के मानव संसाधन को मजबूत करने और शिक्षकों की सामाजिक सुरक्षा के लिए दो अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं:श्रेणी / योजनामुख्य विवरण और लाभकैशलेस चिकित्सा सुविधासभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और उनके परिवारों को सालाना ₹5 लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा।नगरीय क्षेत्रों में नई भर्तीशहरी क्षेत्रों के स्कूलों में मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए लगभग 11 हजार शिक्षकों और 10 हजार अनुदेशकों की भर्ती प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।मुंशी प्रेमचंद का संदेश: संवाद के अंत में पार्थ सारथी सेन शर्मा ने महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद का उल्लेख करते हुए सभी शिक्षकों से निरंतर अध्ययन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक बेहतर शिक्षक वही है जो खुद हमेशा पढ़ता रहता है। उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षकों की निष्ठा के दम पर उत्तर प्रदेश की बुनियादी शिक्षा पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरेगी।
शिक्षा में एक नये युग एवं शैक्षिक क्रांति की आहट
आज पूरी दुनिया शिक्षा के एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां ज्ञान का विस्तार तो अभूतपूर्व हुआ है, लेकिन जीवन मूल्यों का क्षरण भी उतनी ही तेजी से दिखाई देता है। विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को सुविधासंपन्न बनाया है, लेकिन मानसिक तनाव, हिंसा, प्रतिस्पर्धा, नैतिक संकट और मानवीय संवेदनाओं के क्षय जैसी ... Read more
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों को बीच में ही पढ़ाई छोड़ने (ड्रॉपआउट) से रोकने के लिए केजरीवाल सरकार के शिक्षा निदेशालय ने एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। नए नियमों के मुताबिक, अब परीक्षाओं में असफल या फेल होने वाले छात्रों को स्कूल से बाहर नहीं निकाला जाएगा और न ही उनकी पढ़ाई अधूरी छूटेगी। अक्सर देखा जाता था कि नौवीं या ग्यारहवीं कक्षा में फेल होने के बाद छात्र निराश होकर स्कूल छोड़ देते थे या स्कूल प्रशासन उन्हें दोबारा दाखिला देने में आनाकानी करता था। इस गंभीर समस्या को खत्म करने के लिए सरकार ने अब नीतिगत स्तर पर बड़ा बदलाव कर दिया है।क्लास में फेल होने वाले हर बच्चे को मिलेगा दोबारा रेगुलर एडमिशन दिल्ली शिक्षा निदेशालय (Directorate of Education) द्वारा जारी किए गए नए सर्कुलर के अनुसार, अब राजधानी के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रिंसिपलों को यह कड़ा निर्देश दिया गया है कि वे फेल होने वाले किसी भी छात्र को री-एडमिशन (दोबारा दाखिला) देने से मना नहीं कर सकते। इन बच्चों को भी अन्य नियमित छात्रों की तरह ही स्कूल आने, कक्षाओं में बैठने और सभी शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेने का पूरा अधिकार होगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के मन से असफलता का डर निकालना और उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़े रखना है।कमजोर छात्रों के लिए स्कूलों में चलेंगी स्पेशल रेमेडियल क्लासेज सिर्फ दोबारा दाखिला देना ही इस नियम का हिस्सा नहीं है, बल्कि फेल हुए छात्रों की पढ़ाई को मजबूत करने के लिए स्कूलों को विशेष रणनीति बनाने को कहा गया है। इन बच्चों के लिए स्कूल के समय के दौरान या बाद में स्पेशल रेमेडियल क्लासेज (अतिरिक्त कक्षाएं) आयोजित की जाएंगी। इसमें शिक्षकों द्वारा उन विषयों पर खास ध्यान दिया जाएगा जिनमें छात्र कमजोर हैं या फेल हुए हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यक्तिगत ध्यान और अतिरिक्त सहयोग से छात्र न केवल अपनी कमियों को सुधार सकेंगे, बल्कि अगली परीक्षा में बेहतर अंकों के साथ पास भी हो सकेंगे।ड्रॉपआउट रेट को जीरो पर लाने के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा मास्टरस्ट्रोक शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली सरकार का यह फैसला नई शिक्षा नीति (NEP) और शिक्षा के अधिकार (RTE) के मूल सिद्धांतों को जमीन पर उतारने जैसा है। अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे एक बार फेल होने के बाद मजदूरी या अन्य कामों में लग जाते थे, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता था। इस नए नियम के आने के बाद दिल्ली के सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट रेट में भारी गिरावट आने की उम्मीद है। दिल्ली के अभिभावकों और शिक्षक संगठनों ने सरकार के इस छात्र-हितैषी फैसले का स्वागत किया है और इसे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने वाला कदम बताया है।
विमान दुर्घटना स्थल को नयी पहचान ,स्वास्थ्य-शिक्षा केंद्र बनाने की तैयारी :प्रफुल पंशेरिया
गांधीनगर/अहमदाबाद गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार उस जगह पर दो बड़े संस्थान विकसित करेगी, जहां पिछले साल हुए विमान हादसे में 260 लोगों की मौत हो गई थी और अहमदाबाद में आस-पास के मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा था।
बचपन को श्रम नहीं, शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का अधिकार मिलें
बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस-12 जून 2026 हर वर्ष 12 जून को मनाया जाने वाला बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि मानवता के अंतःकरण को झकझोरने वाला अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि दुनिया का कोई भी बच्चा मजदूर बनने के लिए पैदा नहीं होता। ... Read more
त्रिभाषा फार्मूला है भारत की शिक्षा का नया क्षितिज
भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि भाषाओं, बोलियों, संस्कृतियों और परंपराओं का विराट संगम है। यहां भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान, संस्कृति, संवेदना और सामाजिक चेतना का आधार भी है। ऐसे बहुभाषी देश में शिक्षा व्यवस्था को किस भाषा में संचालित किया जाए और बच्चों को कौन-कौन सी भाषाएं पढ़ाई जाएं, यह ... Read more
ललित सुरजन की कलम से - शिक्षा और परीक्षा
'जब हम पढ़ रहे थे, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, आईआईएम तब भी थे।
Fact Check: क्या बिहार के शिक्षा मंत्री ने कहा लड़कियों को शिक्षा की जरूरत नहीं? सच जानिए
बूम ने पाया कि बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने Agitation शब्द का इस्तेमाल किया था जिसे एजुकेशन समझकर गलत दावा किया जा रहा है.
कन्नड़ मूवी 'केडी: द डेविल' के गाने 'सरके चुनर' पर विवाद अभी भी जारी है। इस गाने के बोल और फिल्मांकन पर बढ़ते विवाद के बाद नोरा फतेही को राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के समक्ष पेश होना पड़ा। नोरा ने न केवल अपनी स्थिति स्पष्ट की, बल्कि भविष्य के लिए एक ...
पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु का रिश्वत लेते हुए वीडियो फर्जी और एआई जनरेटेड है
बूम ने पाया कि ब्रात्य बसु का वीडियो गूगल के SynthId का उपयोग करके एआई द्वारा जनरेट किया गया है.
समानता और शिक्षा की क्रांतिकारी मशाल: सावित्रीबाई फुले
10मार्च सावित्रीबाई फुले महापरिनिर्वाण दिवस भारतीय समाज में जब भी शिक्षा,समानता और सामाजिक न्याय की बात उठती है,तो एक नाम इतिहास के पन्नों से निकलकर हमारे सामने खड़ा हो जाता है—सावित्रीबाई फुले।10मार्च को उनका महापरिनिर्वाण दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है,बल्कि यह दिन उस सामाजिक चेतना को याद करने का अवसर है,जिसने सदियों ... Read more
आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं
महिला दिवस पर विशेष:- अजमेर राजस्थान आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं:- देश-प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध ओर इन अपराधों में पिछले वर्षो में अपराध की दर तीव्र ही हुई है ओर “भारत मे अपराध ” नामक रिपोर्ट बताती है ... Read more
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
NEET UG रिजल्ट को लेकर अभी भी जारी है गुस्सा, छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के पास किया विरोध प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए छात्रों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। आइए जानते हैं, क्या है पूरा म
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का 10 फीसदी भी डाटा नहीं हुआ अपलोड
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का डाटा अपलोड करने में जिले के कई स्कूल ढील दे रहे हैं, वे 10 फीसदी छात्रों का भी डाटा अभी तक अपलोड नहीं कर पाए हैं। डाटा अपलोड करने में आधार कार्ड की अनिवार्यता के बाद से छ
बेसिक शिक्षा : दो महीने बाद भी 1.38 लाख छात्रों का डेटा नहीं हुआ अपडेट
बेसिक शिक्षा विभाग के यू डायस पोर्टल पर डेटा अपडेट करने का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। हाल ये है कि दो महीने में महज 1.38 लाख छात्रों डेटा भी अपडेट नहीं हुआ। विभाग ने अब 5 जून तक इसे पूरा करने क
स्कूलों में कैसे पढ़ा रहे हैं शिक्षक, वीडियो में देखेगा शिक्षा विभाग, होगी रिकॉर्डिंग
शिक्षा विभाग वीडियो के जरिए देखेगा कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षक छात्रों को कैसे पढ़ाते हैं। बता दें. छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षकों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। आइए जानते हैं विस्तार से।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति : यूपी बोर्ड ने दिए निर्देश, एनईपी लागू करने को स्कूल बनाएंगे प्लान
यूपी बोर्ड से जुड़े 27 हजार से अधिक स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू करने के लिए स्कूल स्तर पर योजना बनाई जाएगी। एनईपी 2020 के विषय में विद्यालयों में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।

