छत्तीसगढ़ के 1 हजार से ज्यादा अतिथि शिक्षक अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। दुर्ग में हिंदी भवन के सामने पिछले 20 दिनों से धरने पर बैठे शिक्षक सोमवार को संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान वेतन और मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निवास का घेराव करने पहुंचे। बारिश के बीच रैली निकाली, शाम को फ्लैशलाइट जलाकर विरोध जताया और देर रात शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर सड़क पर ही रात बिताई। शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले 11 साल से दूर-दराज और नक्सल प्रभावित इलाकों के स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, लेकिन आज भी केवल मानदेय के भरोसे काम कर रहे हैं। पहले देखें तस्वीरें… ‘20 हजार में घर चलाना मुश्किल’ राज्य अतिथि शिक्षक संघ के हड़ताल प्रमुख और मुख्य संरक्षक धर्मेंद्र दास वैष्णव ने कहा कि उन्हें हर महीने सिर्फ 20 हजार रुपए मानदेय मिलता है। इसी राशि में किराया, बिजली-पानी, आने-जाने का खर्च और परिवार की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है कि माता-पिता की मदद करने के बजाय खुद उन्हें घर से पैसे मांगकर लौटना पड़ता है। अगर परिवार में कोई बीमार पड़ जाए तो आर्थिक संकट और बढ़ जाता है। धर्मेंद्र दास ने कहा कि हम आदिवासी क्षेत्र के शिक्षक हैं। हमने नक्सल प्रभावित इलाकों में शिक्षा का प्रसार कर नक्सलवाद को खत्म करने में भूमिका निभाई है। लोगों को बंदूक की जगह कलम पकड़ना सिखाया है। पिछले 11 सालों से हमारा शोषण हो रहा है। संविलियन या समायोजन पर ठोस फैसले की मांग धर्मेंद्र दास वैष्णव ने बताया कि उनकी पोस्टिंग कोंडागांव जिले के केशकाल ब्लॉक के एक नक्सल प्रभावित गांव के स्कूल में है। वहां उन्होंने पिछले 11 साल से पढ़ाया है। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी सड़क तक नहीं थी, वहां शिक्षक बच्चों को पढ़ाकर उन्हें इंजीनियर, वकील और दूसरे पेशों तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में कोई फैसला नहीं ले रही है। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि संविलियन या समायोजन पर ठोस फैसला चाहिए। हम बच्चों का भविष्य बना रहे है, लेकिन हमारा कौन बनाएगा। आत्मानंद और विवेकानंद स्कूलों का दिया उदाहरण प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने कहा कि पिछली सरकार ने आत्मानंद स्कूलों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को बेहतर वेतन और अन्य सुविधाएं दी थीं। उनका आरोप है कि वर्तमान सरकार विवेकानंद स्कूलों में भी इसी तरह की व्यवस्था कर रही है, लेकिन सालों से काम कर रहे विद्यामितान शिक्षकों के लिए अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया। शिक्षकों का कहना है कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि समान कार्य के लिए समान वेतन और सेवा सुरक्षा चाहते हैं। पहले भी खून से लिखा था पत्र बता दें कि इससे पहले अतिथि शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग भी की थी। उनका कहना था कि अगर सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकती तो उन्हें सम्मान के साथ जीने का अधिकार भी नहीं मिल रहा है। अब आंदोलन के 20 दिन पूरे होने के बाद शिक्षकों ने सीधे शिक्षा मंत्री के निवास तक पहुंचकर अपनी मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की है। इधर, दुर्ग पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विद्यामितान के मामले में जो भी सही होगा वो निर्णय लिया जाएगा। ………………. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… अतिथि शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री को खून से लिखा पत्र: भिलाई में इच्छामृत्यु मांगी, रोते हुए बोले- संविलियन नहीं तो मौत ही सही छत्तीसगढ़ के भिलाई में राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) अपनी मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन आंदोलन पर बैठे हैं। आंदोलन के नौवें दिन हुई कैबिनेट बैठक में संविलियन और समायोजन को लेकर कोई घोषणा नहीं होने से शिक्षकों में नाराजगी और बढ़ गई। पढ़ें पूरी खबर…
नीट पेपर लीक और शिक्षा नीति के विरोध में सीटू का प्रदर्शन
भास्कर संवाददाता | गुना देश की शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं, नीट पेपर लीक, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के विरोध में सीटू (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस) के राष्ट्रीय आह्वान पर रविवार को गुना में प्रदर्शन किया गया। कार्यकर्ताओं ने नगरपालिका परिसर के सामने सभा आयोजित कर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की और बाद में रैली निकालकर राष्ट्रपति के नाम संयुक्त कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। सभा को संबोधित करते हुए सीटू के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. विष्णु शर्मा, जिला अध्यक्ष सुरेंद्र सैनी, महासचिव गिरीश कश्यप, ज्ञानेश मेर सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। उनका आरोप था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में विफल रही है। वक्ताओं ने कहा कि जलवायु कार्यकर्ता एवं शिक्षक सोनम वांगचुक को शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान हिरासत में लेना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने इसे असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास बताते हुए उनकी तत्काल बिना शर्त रिहाई की मांग की। सभा के बाद सीटू कार्यकर्ताओं ने नगरपालिका से हनुमान चौराहा होते हुए कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकाली। कलेक्टर की अनुपस्थिति में संयुक्त कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को वापस लेने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में व्यापक सुधार कर प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग शामिल है। संचालन कल्याण सिंह लोधी ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सीटू पदाधिकारी, कार्यकर्ता मौजूद थे।
गांधी सर्किल पर धरना, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
जेएलएन मार्ग स्थित गांधी सर्किल पर सोमवार को गिरधारी सिंह बापना के नेतृत्व में शिक्षा सुधार व परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए शांतिपूर्ण धरना दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने नीट पेपर लीक व अनियमितताओं के विरोध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। संजय बापना व कुसुम लता जैन ने परीक्षा प्रणाली में तकनीकी व प्रशासनिक सुधार की मांग की। प्रदर्शन दिल्ली में सोनम वांगचुक के आंदोलन के समर्थन में हुआ।
मप्र में छह महीने में ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट 70 प्रतिशत बेरोजगार बढ़ गए। दिसंबर 2025 में प्रदेश में उच्च शिक्षित यानी ग्रेजुएट 6,17, 231 थी, जबकि जून 2026 में यह संख्या बढ़कर 7,29,708 यानी यह संख्या 1 लाख 12 हजार बढ़ गई। वहीं, दिसंबर 2025 में 12 वीं पास बेरोजगारों की संख्या 12 लाख 95 हजार थी जो जून 2026 में घटकर 6 लाख 72 हजार रह गई, यानी 6 लाख 22 हजार 12 वीं पास बेरोजगार कम हो गए। यह जानकारी सोमवार को विधानसभा में तकनीकी शिक्षा, कौशल एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल ने विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी है। उन्होंने बताया कि 30 जून 2026 को प्रदेश रोजगार पोर्टल पर 17,71,132 युवा रोजगार की प्रतीक्षा में पंजीकृत हैं। टेटवाल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 2025 दिसंबर तक बेरोजगारों में 50 प्रतिशत 12 वीं पास थे जून 2026 तक इनकी संख्या घटकर 30 प्रतिशत रह गई और उच्च शिक्षित बेरोजगारों की संख्या 70 प्रतिशत हो गई। इधर, इस दरम्यान ही महाविद्यालयों में छात्रों के प्रवेश कम होते जा रहे हैं। पढ़े लिखे शिक्षितों की बेरोजगारी की वजह उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार काम नहीं मिल पा रहा है। प्रदेश में पिछले 6 महीनों में 8.25 लाख बेरोजगार कम हुए हैं। दिसंबर 2025 में प्रदेश में 25 लाख 95 हजार बेरोजगार थे। प्रदेश में बेरोजगारों की छह महीने में संख्या कम होने पर सवाल उठ रहे हैं। प्रदेश में रीवा, सागर, जबलपुर, सतना और छिंदवाड़ा सबसे ज्यादा पंजीकृत बेरोजगार हैं। रीवा सबसे टॉप पर है, जबकि पांढुर्णा में सबसे कम पंजीकृत बेरोजगार हैं। मंत्रियों के जिले भी पिछड़े सबसे ज्यादा पंजीकृत बेरोजगार वाले जिलों में डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल का रीवा, मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और राकेश सिंह का सागर भी शामिल है। टेटवाल के जिले राजगढ़ में भी 50 हजार से ज्यादा पंजीकृत बेरोजगार हैं। 31 दिसंबर 2025 तक ओबीसी वर्ग के 10 लाख से ज्यादा, सामान्य वर्ग के 6.51 लाख, एससी के 4.70 लाख और एसटी के 4.18 लाख युवा पोर्टल पर पंजीकृत थे। सारंग बोले- मप्र में सूखे की बात झूठ, अल्पवर्षा की स्थिति, नेता प्रतिपक्ष ने कहा- साथ चलो, हकीकत पता चल जाएगी सदन में नियम 139 के तहत मप्र में किसानों को मिलने वाली खाद, बीज समेत दूसरी समस्याओं को लेकर चर्चा हुई। कांग्रेस ने कहा कि पूरे प्रदेश में हालात खराब हैं। जवाब में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना और सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कहीं कोई कमी नहीं है। सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि प्रदेश में सूखे की स्थिति बनाकर क्या पैनिक बनने की कोशिश की जा रही है। प्रदेश में केवल अल्प वर्षा की स्थिति है, न कि सूखे की। उन्होंने बताया कि 20 जुलाई तक प्रदेश में सामान्य से 16% कम बारिश हुई है, हालांकि अभी सूखे जैसी स्थिति नहीं बनी है और सरकार लगातार निगरानी कर रही है। इसके बाद सारंग ने खाद और बीज को लेकर भी विपक्ष को झूठा बताया और कहा कि प्रदेश में अभी 27.10 लाख मीट्रिक टन खाद का स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर अनियमितता मिलने पर लाइसेंस निरस्त किए गए हैं और एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। कंषाना ने तो यहां तक कह दिया कि सामने बैठे मित्रों के लोग लाइनों में घुसकर पत्थरबाजी करते थे। अब नहीं कर पा रहे हैं तो परेशान हैं। इस पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि क्यों न प्रदेश के प्रत्येक जिले में दोनों पार्टियों के नेता भ्रमण कर लें। मुखौटों में पहुंचे कांग्रेसी विधायक, बोले- वादे याद दिलाने आए हैं... विधानसभा सत्र की शुरुआत सोमवार को कांग्रेस के आक्रामक प्रदर्शन के साथ हुई। कांग्रेस विधायक गांधी प्रतिमा के सामने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना के मुखौटे पहनकर पहुंचे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के साथ सिर्फ फाइल-फाइल खेल रही है, जबकि उन्हें समय पर खाद और बीज तक नहीं मिल रहे।हम सरकार को उसके वादे याद दिलाने आए हैं। प्रदर्शन में शामिल विधायकों ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ रही है, किसान आत्महत्या को मजबूर हैं और शराब व भू-माफिया हावी हैं। इसी दौरान जौरा विधायक पंकज उपाध्याय कैलारस शक्कर कारखाने से जुड़े सवाल को लगातार तीन बार खारिज किए जाने के विरोध में धरने पर बैठ गए। उन्होंने भाजपा नेता सूबेदार सिंह सिकरवार पर दलालों के जरिए शक्कर कारखाने की जमीन पर प्लॉटिंग कराने का आरोप भी लगाया।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा बचाओ आंदोलन के समर्थन में सोमवार को गयाजी में प्रदर्शन हुआ। मगध विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों ने आक्रोश जताया। विश्वविद्यालय के गेट नंबर-1 पर विभिन्न छात्र संगठनों ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की प्रतीकात्मक अर्थी यात्रा निकाली गई। इसके बाद अर्थी का दाह संस्कार कर उनके इस्तीफे की मांग की गई। प्रदर्शन में कौटिल्य छात्रावास, कर्पूरी ठाकुर छात्रावास समेत विश्वविद्यालय के कई विभागों और छात्रावासों के छात्र-छात्राएं शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ नारेबाजी की। यूनिवर्सिटी परिसर पेपर लीक बंद करो, शिक्षा बचाओ-देश बचाओ और छात्र विरोधी सरकार मुर्दाबाद के नारों से गूंजता रहा। 'मजबूर होकर सड़क पर उतरना पड़ रहा' इंकलाबी छात्र संगठन के संयोजक दीपक कुमार दांगी ने कहा कि लगातार पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली से छात्रों का भविष्य अंधकार में जा रहा है। युवाओं को मजबूर होकर सड़क पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को बचाने में विफल रही है। यदि शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं देते और पेपर लीक के दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती तो आंदोलन और तेज होगा। 'करोड़ों युवाओं के भविष्य की लड़ाई' कहा कि छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश की गई तो देशभर के विश्वविद्यालयों में चरणबद्ध आंदोलन, घेराव और लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। यह किसी एक संगठन की नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के भविष्य की लड़ाई है। आंदोलन के संरक्षक कमलेश यादव ने कहा कि लाखों छात्र वर्षों की मेहनत के बाद भी पेपर लीक और भ्रष्ट व्यवस्था की वजह से अपने सपनों से दूर हो रहे हैं। सरकार ने समय रहते शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया तो छात्र आरपार की लड़ाई लड़ेंगे। कार्रवाई न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी एनएसयूआई मगध विश्वविद्यालय अध्यक्ष संतोष कुमार सोनू ने कहा कि शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर सरकार पूरी तरह विफल रही है। जब तक पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू नहीं होगी और छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा। प्रदर्शन के दौरान गोपेश कुमार ने प्रतीकात्मक रूप से अर्थी को मुखाग्नि दी। मौके पर प्रिंस कुमार, आलोक कुमार, चंदन, मानस, विक्रम, राजेश, सुजीत, अविनाश समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।प्रदर्शन के अंत में छात्र संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि पेपर लीक पर स्थायी रोक, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
नालंदा में एक घर में चोरी हुई है। घर के सभी लोग काम पर निकले हुए थे। इसी दौरान चोर घर में घुसे थे, आसपास के लोगों को घटना की भनक तक नहीं लगी। पीड़िता सुषमा कुमारी चौधरी, जो शिक्षा विभाग नवादा में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि वह रोज की तरह सुबह 9 बजे अपनी ड्यूटी पर नवादा गई थीं। जब वह दोपहर तीन बजे वापस लौटीं, तो उन्होंने बाहर से मुख्य दरवाजे को खुला हुआ पाया। दरवाजा खुला देख वह दौड़कर अंदर गईं। घर के अंदर रखे सभी गोदरेज और बक्से खुले हुए थे और सारा सामान बिखरा पड़ा था। अगले साल बेटी की शादी होने वाली थी, उसके लिए जेवर जुटाए थे, जिसे चोर ले गए। घटना लहेरी थाना क्षेत्र अंतर्गत बैंक कॉलोनी मोहल्ले की है। 15 लाख के जेवरात ले गए चोर पीड़िता के अनुसार, चोरों ने घर से करीब 15 लाख रुपए मूल्य के आभूषण और दो लाख रुपए नगद पर हाथ साफ कर दिया है। आसपास के लोगों को इस घटना की कोई जानकारी नहीं थी। पीड़िता ने बताया कि बगल में कोचिंग चलने और आसपास के लोगों की आवाजाही के बावजूद चोरों ने इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे दिया। घटना की सूचना मिलते ही लहेरी थाना की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। लहेरी थानाध्यक्ष रंजीत कुमार रजक ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल की टीम को बुलाया गया। पुलिस अज्ञात बदमाशों की पहचान करने का प्रयास कर रही है और लिखित आवेदन मिलने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर स्थित डॉ. संपूर्णानंद शोध छात्रावास के जीर्णोद्धार के बाद लोकार्पण किया। उच्च शिक्षा मंत्री ने फीता काटकर छात्रावास का लोकार्पण किया और भवन की सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने कमरों, अध्ययन कक्ष, मेस, सुरक्षा व्यवस्था आदि का निरीक्षण किया। इस मौके पर उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि डॉ. संपूर्णानंद जी शिक्षा और प्रशासन दोनों के आदर्श थे। उनके नाम पर बने इस छात्रावास से काशी की विद्वत परंपरा को नई ऊर्जा मिलेगी। कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा में शोध और नवाचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि शोधार्थी राष्ट्र-निर्माण के आधार स्तंभ हैं। यहां रहकर वे न केवल शोध करें, बल्कि ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प में अपना योगदान भी दें। इससे पहले काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी, कुलसचिव डॉ. सुनीता पाण्डेय एवं मुख्य गृहपति डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह ने उच्च शिक्षा मंत्री को पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। मुख्य गृहपति ने बताया कि डॉ. संपूर्णानंद शोध छात्रावास में कुल 50 कक्ष हैं, जिसमें शोधार्थियों के लिए सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस अवसर पर कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह, प्रभारी अभियंत्रण विभाग प्रो. राकेश तिवारी, सम्पत्ति अधिकारी डॉ. एस.एन. सिंह आदि उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ के धमतरी में सामाजिक कार्यकर्ता मितेश जैन ने प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के समर्थन में गांधी मैदान में एक दिवसीय अनशन किया। अनशन स्थल पर एक दिवसीय अनशन- सोनम वांगचुक के समर्थन में का बैनर लगाया गया था। इस दौरान शहर के कई लोग भी समर्थन देने पहुंचे। मितेश जैन ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और न्याय का व्यापारीकरण बंद होना चाहिए। पर्यावरण और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए। उन्होंने बच्चों की आत्महत्या और नीट परीक्षा पेपर लीक जैसी घटनाओं पर चिंता जताते हुए ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की, जिससे छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे और उन्हें बिना परेशानी परीक्षा देने का मौका मिले। मितेश जैन ने उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का जिक्र करते हुए कहा कि जनता के विरोध के बाद सरकार को फैसला बदलना पड़ा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण से जुड़े मामलों पर शासन और प्रशासन को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। साथ ही राष्ट्रपति से शिक्षा, स्वास्थ्य और न्याय के व्यापारीकरण को रोकने की अपील की। सोनम वांगचुक की मांगों का समर्थन मितेश जैन ने कहा कि सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से देश और युवाओं को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने वांगचुक को महान वैज्ञानिक, पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् बताते हुए कहा कि वे शिक्षा में सुधार और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी उनकी मांगों का पूरा समर्थन करते हैं। रौनक अग्रवाल बोले- पर्यावरण और शिक्षा दोनों खतरे में गांधी मैदान पहुंचे रौनक अग्रवाल ने कहा कि देश में पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है। शिक्षा का निजीकरण और व्यवसायीकरण बढ़ रहा है, जिसके विरोध में यह अनशन किया गया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा में भी परियोजनाओं के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं। वहीं उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में भी लोग इसका विरोध कर रहे हैं। पेपर लीक और सरकारी स्कूलों का मुद्दा उठाया रौनक अग्रवाल ने कहा कि देश में पेपर लीक की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। उनका दावा है कि वर्ष 2021 से अब तक करीब 80 पेपर लीक हो चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश में 90 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी मुद्दों को लेकर मितेश जैन अनशन पर बैठे हैं और वे उनका समर्थन करने पहुंचे हैं। सरकार हर आवाज को गंभीरता से सुने रौनक अग्रवाल ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का आंदोलन नहीं है। सरकार को एक व्यक्ति की आवाज हो या एक करोड़ लोगों की, सभी की बात समान रूप से सुननी और उस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि तभी सकारात्मक बदलाव संभव होगा।
राजधानी रायपुर में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में शुरू हुआ आंदोलन सोमवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर अलग-अलग छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न पृष्ठभूमि से जुड़े युवाओं ने धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान NSUI के 5 कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए।हंगर स्ट्राइक करने वालों में हेमंत पाल, अनुज शुक्ला, इंडिया घृतलहरे, ड्रिंकल और सोनम शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शामिल होने नहीं जा सके। इसलिए रायपुर में रहकर ही सोनम वांगचुक और शिक्षा सुधार की मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर सरकार से कार्रवाई की मांग धरने में शामिल छात्रों और युवाओं ने कहा कि देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों का भविष्य प्रभावित किया है। कई युवाओं को बार-बार परीक्षाएं देनी पड़ रही हैं, जिससे उनका समय, मेहनत और आर्थिक संसाधन प्रभावित हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। सरकार को परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। इसके साथ ही पेपर लीक के मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने की मांग की गई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग धरने में शामिल युवाओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। उनका कहना है कि लगातार हो रहे पेपर लीक और परीक्षा संबंधी विवादों की नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे देश के करोड़ों युवाओं से जुड़े हैं। इसलिए केंद्र सरकार को इन मुद्दों पर गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम का भी जिक्र किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों के साथ की गई कार्रवाई उचित नहीं है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए। पहले दिन 500 से ज्यादा लोग हुए थे शामिल रविवार को आंदोलन के पहले दिन भी डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर 500 से अधिक छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि जुटे थे। करीब दो घंटे तक चले प्रदर्शन में नारेबाजी की गई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई गई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा था। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें प्रदर्शन में शामिल युवाओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक लोकतांत्रिक तरीके से उनका आंदोलन जारी रहेगा। NSUI के कार्यकर्ताओं ने भी स्पष्ट किया कि उनकी भूख हड़ताल मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी।
टीकमगढ़ में सोमवार शाम करीब 5 बजे अस्पताल चौराहे पर छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर में हो रहे आंदोलन के समर्थन में था। छात्रों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। अस्पताल चौराहे पर बिना किसी पूर्व सूचना के बड़ी संख्या में छात्र इकट्ठा हुए। हाथों में बैनर-पोस्टर लिए कॉलेज छात्रों ने नीट परीक्षा पेपर लीक मामले के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने सोनम वांगचुक का समर्थन करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हटाने से बच रही है। छात्रों ने कहा कि सरकार ने अब तक नीट परीक्षा पेपर लीक मामले में दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। उनके अनुसार, इस लापरवाही से देश के लाखों छात्र-छात्राओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। छात्र-छात्राओं ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से सार्थक बातचीत करने के बजाय तानाशाही तरीके से अनशन समाप्त कराने पर तुली है। करीब आधे घंटे चले इस प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कॉलेज छात्र अस्पताल चौराहे पर मौजूद रहे। घटना की जानकारी मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची। प्रदर्शन के बाद छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन समाप्त किया और चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द ही सोनम वांगचुक की मांगों को पूरा नहीं करती है, तो वे बड़े स्तर पर फिर से प्रदर्शन करेंगे।
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) ने सोमवार को करनाल में प्रदर्शन कर तहसीलदार के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान सीटू के जिला सचिव जगपाल राणा ने बताया कि संगठन की अखिल भारतीय कार्यसमिति की बैठक 17 से 19 जुलाई तक रांची में आयोजित की गई थी। जिसमें देश की शिक्षा प्रणाली को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया। ज्ञापन में कहा गया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पूरी तरह विफल रही है और इसमें संरचनात्मक भ्रष्टाचार देखने को मिल रहा है। शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) सहित विभिन्न परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक की घटनाओं ने छात्रों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं की उम्मीदों को तोड़ दिया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कारण शिक्षा का व्यवसायीकरण और केंद्रीकरण बढ़ने की बात भी कही गई। सोनम वांगचुक के समर्थन में प्रस्ताव सीटू की कार्यसमिति ने जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षक सोनम वांगचुक द्वारा जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के प्रति एकजुटता जताई है। संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे या बर्खास्तगी की मांग भी उठाई। ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से अपील की गई कि देश की शिक्षा प्रणाली के वैज्ञानिक, धर्मनिरपेक्ष और संघीय स्वरूप की रक्षा के लिए इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप किया जाए, ताकि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।
बक्सर जिले के डुमरांव में सोमवार को भाकपा माले, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) ने 'आक्रोश दिवस' मनाया। यह प्रदर्शन पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और छात्रों की विभिन्न मांगों को लेकर किया गया। कार्यकर्ताओं ने नगर के मुख्य मार्गों पर जुलूस निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की। जुलूस का नेतृत्व कामरेड अजीत कुमार सिंह, नवीन कुमार, धर्मेंद्र सिंह यादव, बाबूलाल राम और प्रभात ने किया। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करो, नई शिक्षा नीति 2020 वापस लो तथा पेपर लीक की जवाबदेही तय करो जैसे नारे लगाए। यह जुलूस नगर पालिका परिसर के सामने एक सभा में परिवर्तित हो गया। जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दियासभा की अध्यक्षता और संचालन भाकपा माले के केंद्रीय कमेटी सदस्य तथा बक्सर जिला सचिव नवीन कुमार ने किया। इस दौरान आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह, राज्य कमेटी सदस्य धर्मेंद्र यादव, सर्वेश पांडेय और सीपीआई नेता एवं जिला परिषद सदस्य केदार यादव ने सभा को संबोधित किया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि देश में लगातार हो रहे पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। वक्ताओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। सरकार द्वारा वार्ता करने की भी मांग उठाई गईसभा में वक्ताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी छात्र परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक पर रोक और अपनी अन्य मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके साथ ही, पर्यावरणविद सोनम वांगचुक और भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से सरकार द्वारा वार्ता करने की भी मांग उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई करने की अपील की। कार्यक्रम में आइसा जिला सचिव अखिलेश ठाकुर, लक्ष्मण भारती, बाबूलाल राम, प्रभात, रिंकू कुरैशी, पीयूष यादव, मुखिया कृष्णा राम, देवेंद्र कुशवाहा, बंटी पटेल, मनोज राम, अखलाक, अरविंद यादव, शैलेन्द्र पासवान, नासिर हसन, ऊषा देवी, पूजा कुमारी सहित बड़ी संख्या में छात्र-युवा एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
पलवल में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक के विरोध में अनशन कर रहे वैज्ञानिक सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल भेजे जाने और छात्रों पर लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की है। इस घटना के विरोध में पलवल की जाट धर्मशाला में एक सभा का आयोजन किया गया। जिसमें केंद्र सरकार के रवैये को तानाशाही बताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ किसान नेता रूपराम तेवतिया ने की, जबकि मंच संचालन रिटायर्ड कर्मचारी संघ के जिला सचिव हरिचंद वर्मा ने किया। सभा को संबोधित करते हुए किसान नेता रूप राम तेवतिया और सीटू की जिला प्रधान रामरति चौहान ने कहा कि जंतर-मंतर पर 20 जून से छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने पुलिस द्वारा वैज्ञानिक सोनम वांगचुक को जबरदस्ती उठाने को अलोकतांत्रिक बताया। 'छात्रों की जायज मांगों को हल करने से बच रही सरकार' वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार बातचीत के बजाय दमन का सहारा लेकर छात्रों की जायज मांगों को हल करने से बच रही है। किसान मोर्चा के नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान और धर्म चन्द ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाएं कराने में बार-बार विफल रही है। 'चुप्पी साधे हुए हैं प्रधानमंत्री' उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार के कारण लगातार पेपर लीक हो रहे हैं, जिससे देश के करोड़ों छात्रों और उनके अभिभावकों में भारी निराशा और आक्रोश है। परीक्षाओं में धांधली के कारण कई छात्र आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हुए हैं, लेकिन प्रधानमंत्री इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साधे हुए हैं। 'छात्र आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा' सभा में मौजूद वक्ताओं ने जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। इसके साथ ही किसान नेताओं ने एलान किया कि आगामी 22 जुलाई को संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय आह्वान पर अमेरिका के साथ प्रस्तावित जनविरोधी व्यापार समझौते के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के आवास पर प्रदर्शन कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा जाएगा।
दिल्ली के जंतर-मंतर में चल रहे प्रदर्शन के समर्थन में छत्तीसगढ़ के किसान भी सड़कों पर उतर आए। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बैनर तले गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर में किसानों ने मानव श्रृंखला बनाकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इसके बाद राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में किसानों ने कहा कि सोनम वांगचुक विद्यार्थियों के हित, पर्यावरण संरक्षण और देश के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। संगठन का आरोप है कि उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक रोकने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग भारतीय किसान यूनियन ने केंद्र सरकार को शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर भी घेरा। संगठन ने कहा कि देश में लगातार पेपर लीक, नीट समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताएं सामने आ रही हैं। ऐसे में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाएं। पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा उठाया ज्ञापन में पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। किसानों ने कहा कि विकास के नाम पर जल, जंगल और जमीन का लगातार दोहन किया जा रहा है, जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है और स्थानीय समुदायों का विस्थापन हो रहा है। संगठन ने मांग की कि जिन परियोजनाओं का स्थानीय स्तर पर विरोध हो रहा है, उन्हें तत्काल निरस्त किया जाए। लोकतांत्रिक आंदोलनों के सम्मान की अपील भारतीय किसान यूनियन ने केंद्र सरकार से लोकतांत्रिक आंदोलनों का सम्मान करने, पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, छात्रों, किसानों और आम जनता की आवाज को गंभीरता से सुनने की अपील की। प्रदर्शन में भारतीय किसान यूनियन छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही, गरियाबंद जिलाध्यक्ष मदनलाल साहू, महासमुंद जिला पंचायत सदस्य एवं किसान नेता जागेश्वर जुगनू चंद्राकर, फिंगेश्वर ब्लॉक अध्यक्ष रेखराम साहू सहित बड़ी संख्या में किसान और संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।
देवरिया में समाजवादी पार्टी के युवा संगठनों ने सोमवार को शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और भर्ती परीक्षाओं में धांधली को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए जिला मुख्यालय पर ज्ञापन सौंपा। यह प्रदर्शन दोपहर एक बजे शुरू हुआ। समाजवादी युवजन सभा, लोहिया वाहिनी, यूथ ब्रिगेड और छात्र सभा के कार्यकर्ताओं ने सुभाष चौक से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान कार्यकर्ता हाथों में बैनर और स्लोगन लिखी तख्तियां लिए हुए थे। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षाओं की शुचिता बहाल करने की मांग को लेकर नारेबाजी की। यह कार्यक्रम दिल्ली में जंतर-मंतर से संसद तक आयोजित 'संसद मार्च' के समर्थन में किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने कथित पेपर लीक की घटनाओं का भी विरोध किया। सभा को संबोधित करते हुए समाजवादी युवजन सभा के जिलाध्यक्ष रणवीर यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियों के कारण शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से युवाओं में निराशा बढ़ रही है और बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है, जबकि सरकार रोजगार के लिए प्रभावी कदम नहीं उठा रही है। यूथ ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष खुर्शीद आलम ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की मांग की। छात्र सभा के जिलाध्यक्ष मनोज यादव ने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में लगातार समस्याएं आ रही हैं, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने और युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। इस कार्यक्रम में हृदय नारायण जायसवाल, रामप्रकाश चौधरी, हरिओम लाला, शिवानंद, संजीव, गिरीश जायसवाल, सुनैना कुशवाहा, लारेब रहमान, अंकुल, रामविश्वास, धर्मेंद्र, विजय यादव, सत्यपाल, अंकित श्रीवास्तव, हरिकेवल, विराट, दुर्गेश, अजय, विकास, धीरज, अवनीश गोलू, बलवंत, आलोक प्रजापति, अजीत सिंटू, मनोज और सुहैल सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
जमुई में सोमवार को भाकपा माले, छात्र संगठन आइसा और आरवाईए के कार्यकर्ताओं ने कचहरी चौक पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करने और नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) वापस लेने की मांग की। यह प्रदर्शन नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। प्रतिरोध सभा की अध्यक्षता नौजवान सभा के जिला संयोजक राहुल यादव ने की। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए छात्र-युवाओं के हितों की रक्षा की मांग उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट का सामना कर रही है। करोड़ों छात्र-युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआभाकपा माले के जिला सचिव शंभू शरण सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था के गंभीर मुद्दों पर संवेदनशीलता नहीं दिखा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों के कारण करोड़ों छात्र-युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। भाकपा माले के राज्य कमेटी सदस्य बाबू साहब सिंह ने बताया कि पर्यावरणविद सोनम वांगचुक और आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा वोरा दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय से आंदोलन और भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उनकी मांगों पर बातचीत करने के बजाय आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है। सिंह ने दिल्ली पुलिस द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र-युवाओं पर बल प्रयोग को लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। व्याप्त भ्रष्टाचार ने युवाओं का विश्वास कमजोर किया उन्होंने कहा कि देशभर में पेपर लीक की घटनाओं और परीक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार ने युवाओं का विश्वास कमजोर किया है। बाबू साहब सिंह ने नीट पेपर लीक मामले में निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई। सभा को बासुदेव राय और जयराम तुरी ने भी संबोधित किया, जिन्होंने केंद्र सरकार की छात्र-युवा विरोधी नीतियों की आलोचना करते हुए शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की। इस कार्यक्रम में मोहम्मद हैदर, किरण गुप्ता, ब्रह्मदेव ठाकुर, दामोदर पासवान, संगीत कुमारी, सविता देवी, अनिता देवी सहित बड़ी संख्या में भाकपा माले, आइसा और आरवाईए के कार्यकर्ता उपस्थित थे।
NEET पेपर लीक के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन:रायबरेली में पीएम और शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका
रायबरेली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नीट पेपर लीक मामलों और शिक्षा व्यवस्था की कथित बदहाली के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। सोमवार शाम को चार बजे शहीद चौक पर हुए इस प्रदर्शन में केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया। यह प्रदर्शन सोमवार शाम 4:00 बजे डिग्री कॉलेज चौराहा स्थित शहीद चौक पर आयोजित किया गया। इसका नेतृत्व जिला पंचायत सदस्य और कांग्रेस कमेटी के सदस्य वीरेंद्र यादव ने किया। इस दौरान सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद थे। वीरेंद्र यादव ने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब से देश में भाजपा की सरकार आई है, कोई भी परीक्षा पेपर लीक होने से अछूता नहीं रहा है। यादव ने सरकार को शिक्षा, युवा, छात्र, महिला, किसान और मजदूर विरोधी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के सभी कदम आम जनता के हितों के खिलाफ होते हैं और यह केवल कुछ पूंजीपतियों के लिए काम कर रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। यादव ने कहा कि राज्य में लाखों की संख्या में प्राथमिक विद्यालय बंद कर दिए गए हैं, जबकि कोई नया विश्वविद्यालय नहीं खोला जा रहा है।
दरभंगा में पेपर लीक, शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार को लेकर सोमवार को पोलो मैदान स्थित धरनास्थल पर 'छात्र-युवा आक्रोश दिवस' मनाया गया। कार्यक्रम आइसा, आरवाईए (RYA) और भाकपा (माले) के संयुक्त आह्वान पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन आइसा नेता मिथिलेश कुमार और अध्यक्षता आरवाईए के राज्य सह सचिव संदीप कुमार चौधरी ने की। आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षा व्यवस्था को सुधारने में विफल रही हैं। लगातार हो रहे पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता और भ्रष्टाचार के कारण लाखों छात्रों और युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने मांग की कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाया जाए।पेपर लीक की सभी घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने, प्रभावित छात्रों को न्याय दिलाने और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। मांगों की अनदेखी हुई तो आंदोलन तेज होगा सभा में वक्ताओं ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। उनका दावा था कि वहां पिछले 22 दिनों से आइसा की नेत्री नेहा, मनीष समेत कई छात्र आंदोलन का नेतृत्व करते हुए भूख हड़ताल पर बैठे हैं।आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों और युवाओं की मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कार्यक्रम में ये रहे मौजूद धरना में भाकपा (माले) के जिला सचिव बैद्यनाथ यादव, राज्य कमेटी सदस्य शनिचरी देवी, नेयाज अहमद, अभिषेक कुमार, वरिष्ठ नेता आरके साहनी, आरवाईए के राज्य सह सचिव संदीप कुमार चौधरी, जिलाध्यक्ष ओणम सिंह, नंदलाल ठाकुर, अशोक पासवान, कमरे आलम, सबा रौशनी, कामेश्वर पासवान, बसंती देवी, गंगा मंडल, अवधेश सिंह, मोहम्मद शौकत, प्रो. कल्याण भारती, हरिश्चंद्र पासवान, धर्मेश यादव, उमेश साह, अमरजीत पासवान, हरि पासवान, जिला परिषद सदस्य सुमित्रा देवी, केशरी यादव, नागमणि यादव, प्रिंस राज सहित बड़ी संख्या में छात्र-युवा एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सुल्तानपुर में समाजवादी पार्टी की मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने सोमवार शाम केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष शाहज़ाद अहमद के नेतृत्व में कार्यकर्ता प्रतीकात्मक पुतला लेकर डीएम कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। इस दौरान पुलिस ने रास्ते में ही पुतला अपने कब्जे में ले लिया। मौके पर सीओ सिटी राघवेंद्र सिंह, नगर कोतवाल सुरेश नारायण मिश्र सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रदर्शन NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और धांधली के विरोध में किया गया। कलेक्ट्रेट के पास एकत्र हुए कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। जिलाध्यक्ष शाहज़ाद अहमद ने आरोप लगाया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और विपक्षी नेताओं की आवाज दबाई जा रही है। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह समेत कई नेताओं और छात्रों को हिरासत में लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि सपा सांसद डिंपल यादव को सोनम वांगचुक के समर्थन में दिल्ली में हिरासत में लिया गया था। शाहज़ाद अहमद ने कहा कि यदि छात्रों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो देशभर के युवा बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर युवाओं की आवाज दबाने का आरोप लगाया। सपा अधिवक्ता सभा के प्रदेश सचिव अशोक सिंह बिसेन ने भी प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण मार्च के दौरान सपा सांसद डिंपल यादव को हिरासत में लिया गया, जिसके विरोध में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया।
पश्चिम चंपारण के बेतिया में सोमवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यालय से सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली, जो शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए इमली चौक पहुंची। यहां प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया। छात्र-नौजवानों के देशव्यापी आंदोलन का समर्थन इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की और छात्र-नौजवानों के देशव्यापी आंदोलन का समर्थन किया। भाकपा नेताओं ने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार संकट का सामना कर रही है और छात्रों तथा युवाओं की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। नेताओं ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है। उनका आरोप था कि असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है तथा लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित किया जा रहा है। छात्र,किसान, मजदूर के अधिकारों की रक्षा को संघर्ष वक्ताओं ने बताया कि छात्र, युवा, किसान, मजदूर और आम नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हालांकि, सरकार उनकी मांगों पर ध्यान देने के बजाय विरोध को दबाने में लगी है। उन्होंने जोर दिया कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सर्वोपरि होती है और सरकार को संविधान एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप कार्य करना चाहिए। भाकपा नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जनता की आवाज को दबाने का प्रयास करेगी तो पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से सड़क से लेकर सदन तक अपना संघर्ष और तेज करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि देशभर में चल रहा छात्र-युवा आंदोलन केवल शिक्षा से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं है। लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा का आंदोलन बल्कि संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा का भी आंदोलन है। पार्टी ने छात्र-युवा आंदोलनों के साथ मजबूती से खड़े रहने और जनहित से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने की घोषणा की। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में मौजूद कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प भी लिया।
छतरपुर में सोमवार को CJP के समर्थन में युवाओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन छत्रसाल चौक से शुरू हुआ, जहां बड़ी संख्या में युवा एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर लिए हुए थे, जिनमें 'अंधा कानून' लिखे पोस्टर विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि छात्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए सरकार से गंभीरता से कदम उठाने की मांग की। युवाओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा देने की भी मांग की। छत्रसाल चौक से शुरू होकर प्रदर्शनकारी पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान पूरे रास्ते सरकार और शिक्षा मंत्री के खिलाफ नारे लगाए गए। कलेक्ट्रेट पहुंचकर युवाओं ने धरना दिया और अपनी मांगों को दोहराया। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक छात्रों से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं होगा, उनका विरोध जारी रहेगा। विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और पूरे प्रदर्शन पर कड़ी नजर रखी गई ताकि कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से हुआ और कानून-व्यवस्था सामान्य बनी रही। प्रदर्शन के बाद सभी युवा शांतिपूर्वक वहां से चले गए। देखिए प्रदर्शन की तस्वीरें…
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक, शिक्षा और परीक्षा में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चल रहा है। जिसमें समर्थन में बेगूसराय में भाकपा-माले और छात्र संगठन आइसा और अन्य सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता ने शहर में प्रतिरोध मार्च निकाला। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की। भाकपा-माले के जिला सचिव उमेश कुमार के नेतृत्व में शहर के हॉस्पिटल गोलंबर से प्रतिरोध मार्च निकला। जो शहर के मोहनपुर, काशीपुर, स्टेडियम मार्केट होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचा। जहां लोगों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान लोगों ने कहा कि पूरे भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं , जिससे छात्रों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। पूरे प्रकरण के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री दोषी हैं लंबे समय से लोग इस्तीफा की मांग कर रहे हैं। जंतर मंतर पर लंबे समय से इसके लिए सामाजिक कार्यकर्ता अनशन पर बैठे हुए हैं, लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। आंदोलनकारियों को कुचलना का काम किया जा रहा है। माले के जिला सचिव उमेश कुमार ने कहा कि अगर सरकार जल्द केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा नहीं लिया तो आने वाले दिनों में और भी उग्र आंदोलन किया जाएगा । समस्तीपुर समेत पूरे देश में आंदोलन आज संसद मार्च को देखते हुए पूरे भारत में भाकपा-माले और आइसा के कार्यकर्ता प्रतिरोध मार्च का आयोजन किया है। यह प्रतिरोध मार्च समस्तीपुर समेत पूरे देश में आज निकाला जा रहा है उन्होंने आम लोगों से भी आह्वान किया है कि केंद्र सरकार को उखाड़ फेंकने में सहयोग करें। इस मौके पर माले के वरीय नेता महावीर पोद्दार, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, राष्ट्रीय जनता दल के नेता सूरज कुमार दास, छात्र संगठन के नेता रौशन यादव समेत बड़ी संख्या में वाम दल समेत विभिन्न संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता मौजूद थे।
दरभंगा में सोमवार को मिथिला स्टूडेंट यूनियन (एमएसयू) की केवटी इकाई के बैनर तले अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू हो गया है। सात सूत्री मांगों को लेकर रैयाम चौक पर अनशन चल रहा है। आंदोलन का शुभारंभ एमएसयू के प्रदेश संयोजक प्रवीण कुमार झा ने अनशनकारियों को माला पहनाकर किया। प्रदेश संयोजक प्रवीण कुमार झा ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि केवटी क्षेत्र के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात और बुनियादी जनसुविधाओं से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए है। वर्षों से केवटी की जनता अपनी मूलभूत समस्याओं के समाधान की मांग कर रही है, लेकिन सरकार और प्रशासन की ओर से ठोस पहल नहीं की गई। चेतावनी दी कि यदि मांगें जल्द पूरी नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा। आमरण अनशन पर अमित मिश्रा, ब्रजेश कुमार, शशि झा, आदर्श कुमार और जाहिद खान बैठे हैं। रैयाम चीनी मिल के लिए तिथि घोषित करने की मांग अनशनकारी अमित मिश्रा ने कहा कि रैयाम चीनी मिल के नाम पर वर्षों से जनता को केवल आश्वासन दिया जा रहा है। अधिकारी और जनप्रतिनिधि समय-समय पर निरीक्षण कर चले जाते हैं, लेकिन मिल चालू करने की कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की जाती। सरकार स्पष्ट रूप से बताए कि किस तारीख और किस महीने से रैयाम चीनी मिल का संचालन शुरू होगा। उन्होंने कहा कि रैयाम जैसे बड़े बाजार में आज तक सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था नहीं है। केवटी प्रखंड में सरकारी डिग्री कॉलेज नहीं होने से छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। डिग्री कॉलेज के लिए भूमि चिह्नित करने की मांगइधर, एमएसयू के प्रदेश संयोजक प्रवीण कुमार झा ने बिहार सरकार से केवटी में सरकारी डिग्री कॉलेज की स्थापना करने और अंचलाधिकारी (सीओ) को इसके लिए उपयुक्त सरकारी भूमि चिह्नित करने का निर्देश देने की मांग की है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से 211 नए डिग्री कॉलेज खोलने का निर्णय स्वागतयोग्य है, लेकिन इतनी बड़ी आबादी वाले केवटी प्रखंड को इस योजना से वंचित रखना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार कॉलेज नहीं होने के कारण हजारों छात्र-छात्राओं को दरभंगा सहित अन्य शहरों में पढ़ाई के लिए जाना पड़ता है और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के कई विद्यार्थी बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे लोकतांत्रिक प्रदर्शन के समर्थन में सोमवार को हनुमानगढ़ में माकपा और अन्य संगठनों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन बाद राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई की मांग की गई। कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन, फिर सौंपा ज्ञापन ज्ञापन सौंपने से पहले माकपा और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के प्रति समर्थन जताते हुए सरकार से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सकारात्मक पहल करने की अपील की। शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई। साथ ही शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा पर जोर ज्ञापन में संविधान प्रदत्त अधिकारों—अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और संगठन बनाने के अधिकार—की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया। साथ ही लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने, जनता की आवाज का सम्मान करने और संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान करने पर बल दिया गया। 'लोकतंत्र में असहमति का सम्मान जरूरी' प्रतिनिधिमंडल में शामिल माकपा नेता रघुवीर वर्मा ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिकों की आवाज सुनी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि असहमति लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है और शांतिपूर्ण आंदोलनों का सम्मान किया जाना चाहिए। राष्ट्रपति से शीघ्र कार्रवाई का आग्रह ज्ञापन में राष्ट्रपति से अनुरोध किया गया कि इन सभी मांगों को भारत सरकार तक शीघ्र पहुंचाकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए। ज्ञापन सौंपने वालों ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनभावनाओं और शांतिपूर्ण आंदोलनों का सम्मान होना चाहिए तथा शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।
जिला कलेक्ट्रेट के पास अंडरब्रिज के नीचे सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता भैराराम मकवाना ने सोमवार को वरिष्ठ वैज्ञानिक सोनम वांगचुक के समर्थन में उपवास और धरना शुरू किया। धरने में उनके समर्थकों के साथ-साथ सोनम वांगचुक के समर्थन में आए कई लोगों ने भी भाग लिया। राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन, कई मांगें उठाईं धरने के दौरान एडवोकेट भैराराम मकवाना ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा। ज्ञापन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) को समाप्त करने और युवाओं के लिए रोजगार की गारंटी सुनिश्चित करने की मांग की गई। राजनीतिक षड्यंत्र रोकने की मांग ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के खिलाफ किसी भी प्रकार के कथित राजनीतिक षड्यंत्र को रोका जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों की आवाज को सम्मान मिलना चाहिए और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। धरना-प्रदर्शन में सामाजिक कार्यकर्ता शीशपाल विश्नोई, विजय नोखड़ा, याकुब खान, राहुल चौधरी, प्रकाश सैन, मोहनराम, गोपाल गोगलू, नटवर लाल पंवार, शांति मेघवाल, गोपाल शेखासर और प्रेमाराम मेघवाल सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा गया।
मधेपुरा में सोमवार को RYA और आइसा के बैनर तले छात्र-युवा आक्रोश मार्च निकाला गया। मार्च पीएस कॉलेज परिसर से शुरू होकर कॉलेज चौक स्थित टीपी कॉलेज तक पहुंचा। बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े। इस दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई गई। आरवाईए के जिला संयोजक कृष्ण कुमार ने कहा कि छात्र-युवा देश में निष्पक्ष और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांगों पर सरकार बातचीत करने के बजाय दमनात्मक रवैया अपना रही है। न्याय और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था नहीं मिलेगीआइसा के जिला सचिव पावेल कुमार ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार गड़बड़ियां सामने आ रही हैं और परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जब तक छात्रों को न्याय और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था नहीं मिलेगी, आंदोलन जारी रहेगा। आइसा के जिला उपाध्यक्ष राजकिशोर राज ने कहा कि यह आंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के विश्वविद्यालयों और जिला मुख्यालयों में छात्र अपनी आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को भ्रष्टाचार मुक्त और सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों की आलोचना की प्रदर्शन के दौरान आइसा नेता अंकु कुमार, खुशबू प्रवीण और नीतीश कुमार समेत अन्य वक्ताओं ने भी केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों की आलोचना की और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग दोहराई। मार्च में दिलखुश कुमार, ज्योतिष कुमार, सोनू कुमार, गुलशन कुमार, बिट्टू राजा, दीपक, निशा कुमारी, कोमल कुमारी, रूपक राज, अनुप्रिया, स्वीटी राज, राधा कुमारी, चंपा कुमारी, निधि कुमारी, सिंपल कुमारी, निहारिका राज सहित बड़ी संख्या में छात्र-युवा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में सोमवार को जैसलमेर की सड़कों पर भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। हनुमान चौराहा स्थित गांधी दर्शन के सामने बड़ी संख्या में छात्र और आम जनता इकट्ठा हुए। सभी लोगों ने वांगचुक की मांगों को जायज बताते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पैदल मार्च निकाला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने देश की शिक्षा व्यवस्था में चल रही गड़बड़ियों को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला भी जलाया। इसके बाद प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला कलेक्टर के जरिए राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। सर्व समाज व स्टूडेंट ने किया प्रदर्शन इस प्रदर्शन में युवाओं और समाज के हर वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। गांधी दर्शन से शुरू हुआ यह पैदल मार्च जिला कलेक्ट्रेट दफ्तर पर जाकर खत्म हुआ। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सोनम वांगचुक जिन मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, वे पूरे देश के लिए बेहद जरूरी हैं। प्रदर्शनकारियों ने जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। सोनम वांगचुक का किया समर्थन यह पूरा आंदोलन बेहद शांतिपूर्ण तरीके से पूरा हुआ। कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन कर रहे युवाओं और नागरिकों ने अपनी सहमति जताने के लिए ज्ञापन पर अपने हस्ताक्षर भी किए। प्रदर्शन में शामिल एक आंदोलनकारी हाकमदान ने कहा कि लद्दाख के पर्यावरण और देश के संवैधानिक अधिकारों को बचाने की यह लड़ाई अब सिर्फ लद्दाख तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश की जनता सोनम वांगचुक के साथ खड़ी है। जब तक उनकी जायज मांगें पूरी नहीं होतीं, देश के अलग-अलग हिस्सों में इसी तरह आवाज उठती रहेगी।
प्राइवेट स्कूलों में हर महीने निरीक्षण के शिक्षा विभाग के आदेश के विरोध में सोमवार को बीकानेर के करीब 300 निजी स्कूल बंद रहे। प्राइवेट स्कूल संचालकों, शिक्षकों और स्टाफ ने कलेक्ट्रेट से शिक्षा निदेशालय तक पैदल मार्च निकालकर प्रदर्शन किया। बाद में अतिरिक्त निदेशक शैलेंद्र देवड़ा के साथ वार्ता हुई, जिसमें एक-एक बिन्दू पर चर्चा हुई। इस दौरान शिक्षा मंत्री और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शन के चलते शिक्षा निदेशालय का मुख्य गेट भी बंद कर दिया गया, जिससे अपने काम से पहुंचे अभ्यर्थियों और अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह 11 बजे कलेक्ट्रेट से निकाला पैदल मार्च हर महीने प्राइवेट स्कूलों के निरीक्षण के आदेश के विरोध में सोमवार सुबह करीब 11 बजे दो हजार से अधिक स्कूल संचालक, शिक्षक और स्टाफ कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र हुए। यहां से सभी रैली के रूप में शिक्षा निदेशालय पहुंचे और मुख्य द्वार के बाहर धरना देकर सरकार के आदेशों के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बीच निदेशालय का गेट बंद, कई लोग नहीं जा सके अंदर प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सदर थाना पुलिस ने शिक्षा निदेशालय के मुख्य गेट पर ताला लगवा दिया। इसके बाद निजी सुरक्षा गार्डों ने किसी भी व्यक्ति को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। इससे अपने काम से पहुंचे लोगों को भी परेशानी हुई। भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा एक अभ्यर्थी हाईकोर्ट का आदेश लेकर निदेशालय पहुंचा था, लेकिन उसे भी अंदर नहीं जाने दिया गया। वहीं, आरटीई के तहत प्रवेश नहीं मिलने की शिकायत लेकर आई एक महिला अभ्यर्थी भी मुख्य द्वार बंद होने के कारण अधिकारियों से नहीं मिल सकी। आदेश वापस नहीं हुआ तो प्रदेशभर में हड़ताल की चेतावनी प्रदर्शन के दौरान प्राइवेट स्कूल संगठन सेवा के प्रदेशाध्यक्ष कोडाराम भादू ने कहा - यदि हर महीने स्कूलों के निरीक्षण का आदेश वापस नहीं लिया गया तो प्रदेशभर के निजी स्कूल अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। उन्होंने बताया कि संगठन की मांगों में निरीक्षण का आदेश वापस लेना, आरटीई की बकाया राशि का भुगतान, बिना फीस ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) देने का आदेश रद्द करना, नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का भुगतान करना तथा कोचिंग संस्थानों पर प्रभावी नियंत्रण या पाबंदी लगाना शामिल है।
मैहर जिले के अमरपाटन में सोमवार को छात्र-छात्राओं और युवाओं ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की। दो घंटे तक चला प्रदर्शन रामनगर रोड चौराहे स्थित संदीपनी विद्यालय के सामने बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और युवा एकत्र हुए। हाथों में तख्तियां लेकर उन्होंने इस्तीफा तो तुमको देना होगा, वरना रोज धरना होगा सहित अन्य नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से छात्रों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने की मांग की। राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन करीब दो घंटे तक चले शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद छात्रों ने तहसीलदार आर.डी. साकेत को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में शिक्षा व्यवस्था में सुधार, छात्रों के हितों की रक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग सरकार तक पहुंचाने का आग्रह किया गया। प्रदर्शन के दौरान किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। प्रशासन ने पूरे कार्यक्रम की निगरानी की।
राजधानी में सोमवार को शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के विरोध में लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों का प्रदर्शन उस समय तेज हो गया, जब छात्र परिवर्तन चौक से हजरतगंज तक मार्च निकालने के लिए आगे बढ़े। पुलिस ने मार्च को बीच रास्ते में रोक दिया और प्रदर्शन कर रहे छात्रों को हिरासत में लेकर बसों के जरिए इको गार्डन धरना स्थल भेज दिया। इस दौरान परिवर्तन चौक और आसपास के इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा। हजरतगंज कूच से पहले ही पुलिस ने रोका मार्च प्रदर्शनकारी छात्र शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और पेपर लीक की घटनाओं के विरोध में परिवर्तन चौक पर एकत्र हुए थे। यहां से हजरतगंज तक मार्च निकालने की घोषणा की गई थी, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए मार्च को आगे बढ़ने नहीं दिया। छात्रों और पुलिस के बीच कुछ देर तक नोकझोंक भी हुई, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। बसों में बैठाकर इको गार्डन भेजे गए छात्र हिरासत में लिए गए छात्रों को पुलिस ने बसों में बैठाकर इको गार्डन धरना स्थल भेज दिया। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी के जवान तैनात रहे। पुलिस की कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे और अपनी मांगों पर अड़े रहे। राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि देश में लगातार पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते भ्रष्टाचार से छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। ज्ञापन में सरकार से जवाबदेह और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू करने की मांग की गई। छात्रों ने उठाईं ये प्रमुख मांगें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग कर नई पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षा प्रणाली लागू करने की मांग। नई शिक्षा नीति-2020 को वापस लेने की मांग। पेपर लीक और शिक्षा क्षेत्र में भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई की मांग। सभी छात्रों के लिए सस्ती, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की गारंटी सुनिश्चित करने की मांग। सरकार पर लगाए गंभीर आरोप प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना था कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है। उनका आरोप है कि सरकार शिक्षा से जुड़े बुनियादी सवालों का समाधान करने के बजाय आंदोलन कर रहे छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
सोनभद्र के गुरमा स्थित ग्राम पंचायत मारकुंडी के टोला बल्लही के ग्रामीण आज भी पेयजल, विद्युत और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को एक प्रार्थना पत्र सौंपकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि केंद्र सरकार की 'हर घर जल' योजना का लाभ उनके टोले को नहीं मिला है। उनके अनुसार, न तो पाइपलाइन बिछाई गई और न ही नल कनेक्शन दिए गए। कार्यदायी संस्था और ठेकेदार से कई बार संपर्क करने पर आश्वासन मिला, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि बिना कार्य पूरा किए ही योजना पूर्ण होने की रिपोर्ट ब्लॉक कार्यालय को भेज दी गई है। प्रार्थना पत्र में बताया गया है कि टोला बल्लही एक पठारी क्षेत्र में स्थित है, जहां अभी तक विद्युतीकरण नहीं हो सका है। 'सौभाग्य योजना' के तहत बिजली के खंभे लगाए जाने थे, लेकिन यह कार्य भी अधूरा रह गया। बिजली के अभाव में ग्रामीण अंधेरे में रहने को मजबूर हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त की है। टोला बल्लही में कोई प्राथमिक विद्यालय नहीं है। छोटे बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे टोलों में स्थित विद्यालयों तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। जंगल और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण बच्चों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी शिक्षा बाधित हो रही है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि टोला बल्लही में 'हर घर जल' योजना का लाभ, विद्युतीकरण और एक प्राथमिक विद्यालय की स्थापना शीघ्र सुनिश्चित की जाए, ताकि क्षेत्र के निवासियों और बच्चों को मूलभूत सुविधाएं मिल सकें।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आगरा शहर कांग्रेस कमेटी ने सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने सुभाष पार्क से पैदल मार्च निकालकर एमजी रोड पर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता ज्ञापन सौंपने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने गेट बंद कर उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इस पर कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह जनता दरबार है, किसी के घर का दरवाजा नहीं है जिसे बंद कर दिया जाए। करीब आधे घंटे की नोकझोंक के बाद कुछ प्रतिनिधियों को डीएम मनीष बंसल से मिलने की अनुमति दी गई। डीएम को ज्ञापन सौंपने के बाद सभी कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से वापस लौट गए। आगरा शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमित सिंह ने केंद्र सरकार पर पेपर लीक को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में 100 से ज्यादा पेपर लीक हो चुके हैं। इससे लाखों छात्र और अभिभावक परेशान हैं। कई छात्रों ने आत्महत्या कर ली, कई परिवारों के खेत तक बिक गए और लोग ब्याज पर कर्ज लेकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। अमित सिंह ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है, इसलिए देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे एक शिक्षक और साइंटिस्ट के साथ पुलिस ने बदतमीजी की और उन्हें गिरफ्तार कर प्रताड़ित किया जा रहा है। अमित सिंह ने कहा कि अब हर जगह जनता में सरकार के खिलाफ गुस्सा है।
किशनगंज शहर के टाउन हॉल के पास रविवार को CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों का एक बड़ा जमावड़ा हुआ। कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नीट पेपर लीक के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन हुआ। आयोजकों के अनुसार, इस कार्यक्रम में 500 से अधिक कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। सुबह से ही लोगों का कार्यक्रम स्थल पर पहुंचना शुरू हो गया था और दिन बढ़ने के साथ भीड़ लगातार बढ़ती गई। कार्यक्रम स्थल टाउन हॉल के आसपास पार्टी के झंडे, बैनर और पोस्टर लगाए गए थे। कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया, जो पार्टी के पक्ष में नारेबाजी कर रहे थे। उन्होंने संगठन की मजबूती और आगामी रणनीति पर भी चर्चा की। इस आयोजन में बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोग मौजूद थे। प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें देखिए… विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भी कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी इसमें भाग लिया। शहर के कई चिकित्सकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मंच से अपने विचार व्यक्त करते हुए आयोजन का समर्थन किया। वक्ताओं ने जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न वर्गों के एक मंच पर आने को सकारात्मक बताया। मुख्य उद्देश्य संगठन को मजबूत करना - आयोजक आयोजकों ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और नीट पेपर लीक जैसे मुद्दों को सरकार के सामने उठाना था। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी आम जनता के बढ़ते समर्थन को दर्शाती है। कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं ने कार्यकर्ताओं से संगठन के विस्तार और जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस तैनात कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क रहा। कार्यक्रम स्थल के आसपास सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था। पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और किसी अप्रिय घटना की कोई सूचना नहीं मिली।
देशभर में सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में सोमवार को दोपहर 12 बजे समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ताओं ने वाराणसी में विरोध प्रदर्शन किया। सड़क से लेकर संसद तक अभियान के तहत कार्यकर्ताओं ने लंका थाना क्षेत्र के नारिया स्थित BHU गेट के पास प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने पोस्टर और होर्डिंग लगाकर दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में 19 बड़े पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। होर्डिंग पर सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की तस्वीर भी लगाई गई। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बार-बार हो रहे पेपर लीक से करोड़ों छात्रों और युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है तथा भर्ती और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस से हुई धक्का मुक्की प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता BHU सिंह द्वार की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं के बीच धक्का मुक्की भी हुई। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हुए प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान पर ही रोक दिया। राष्ट्रपति के नाम लिखे पत्र का दिया ज्ञापन प्रदर्शन के बाद सपा कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और परिणामों में अनियमितताओं की घटनाओं ने देश के करोड़ों छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। अभ्यर्थी वर्षों तक कठिन परिश्रम और आर्थिक संसाधन लगाकर परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं से उनका भविष्य संकट में पड़ जाता है। सपा की 6 मांग • सभी प्रमुख परीक्षा अनियमितताओं एवं पेपर लीक मामलों की सर्वोच्च स्तर पर निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। • दोषी व्यक्तियों, अधिकारियों एवं संगठित गिरोहों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। • राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाएं। • छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पारदर्शी एवं जवाबदेह परीक्षा प्रणाली लागू की जाए। • नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें अथवा उन्हें पद से हटाया जाए। • भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए प्रभावी एवं सख्त कानून तथा तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।
दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे CJP कार्यकर्ताओं के संसद मार्च के बीच सोमवार को नागौर जिले के युवाओं, स्टूडेंट्स, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, राष्ट्रीय भाषा के सम्मान, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के लिए रोजगार बढ़ाने की मांग की गई। कलेक्टर को सौंपा प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन युवाओं, स्टूडेंट्स, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें प्रधानमंत्री तक पहुंचाने की अपील की। यह ज्ञापन दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे CJP कार्यकर्ताओं के संसद मार्च के बीच सौंपा गया। NEET परीक्षा को लेकर उठाए सवाल ज्ञापन में कहा गया कि देश में लगातार NEET परीक्षा को लेकर सामने आ रही कथित गड़बड़ियों और विवादों से लाखों स्टूडेंट्स और अभिभावकों का भरोसा प्रभावित हुआ है। प्रतिनिधियों ने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने की मांग की। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की। राष्ट्रीय भाषा और शिक्षा सुधार की मांग ज्ञापन में राष्ट्रीय भाषा को उचित सम्मान देने, शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने और स्टूडेंट्स को समान अवसर उपलब्ध कराने की मांग रखी गई। इसके साथ ही शिक्षा नीति में जरूरी सुधार करने की भी बात कही गई। युवाओं के लिए रोजगार बढ़ाने की मांग प्रतिनिधियों ने युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री तक मांग पहुंचाने की अपील ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से आग्रह किया कि उनकी सभी मांगों को प्रधानमंत्री तक पहुंचाया जाए, ताकि स्टूडेंट्स, युवाओं और अभिभावकों से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी निर्णय लिए जा सकें।
बड़वानी जिला मुख्यालय पर सोमवार दोपहर नीट परीक्षा में कथित विसंगतियों और पेपर लीक के विरोध में छात्रों ने प्रदर्शन किया। कलेक्टर कार्यालय पहुंचे छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की। कलेक्टर से ज्ञापन नहीं लेने पर छात्र कार्यालय के गेट पर धरने पर बैठ गए। 3 तस्वीरें देखिए कलेक्टर से मिलने की मांग पर धरना प्रदर्शनकारी छात्र ज्ञापन देने कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे। नायब तहसीलदार सोनू गोयल ज्ञापन लेने बाहर आईं, लेकिन छात्रों ने कलेक्टर से ही ज्ञापन लेने की मांग की। इस दौरान उन्होंने शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो और पेपर लीक बंद करो के नारे लगाए। करीब आधे घंटे बाद छात्रों ने नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंप दिया। एनएसयूआई ने उठाए परीक्षा व्यवस्था पर सवाल एनएसयूआई जिला अध्यक्ष बादल गिरासे ने कहा कि नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में कथित पेपर लीक और परिणामों में विसंगतियों से छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने की मांग की। छात्रा राधा सूर्यवंशी ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की। पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग छात्र योगेश ने कहा कि यह आंदोलन परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर है। ज्ञापन में छात्रों ने भविष्य की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पारदर्शी और सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना था कि इससे अभ्यर्थियों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा बना रहेगा।
चंडीगढ़ के पूर्व मेयर और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद के पिता शांति नाथ सूद का रविवार देर रात निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और उनका पीजीआई में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही भाजपा कार्यकर्ताओं और परिचितों ने गहरा दुख जताया। शांति नाथ सूद शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने कई वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दीं। वह अनुशासनप्रिय शिक्षक के रूप में जाने जाते थे। सेवानिवृत्ति के बाद भी वह सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे। बड़ी संख्या में शुभचिंतकों के शामिल होंगे परिवार के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार सोमवार को सेक्टर-25 स्थित श्मशान घाट में दोपहर 3 बजे किया जाएगा। अंतिम यात्रा में भाजपा के वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षा विभाग के अधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में शुभचिंतकों के शामिल होंगे। प्रशासन के अधिकारी भी उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देंगे भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी भी उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देंगे। संभावना जताई जा रही है कि चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया भी अंतिम संस्कार में शामिल होकर श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं। शांति नाथ सूद के निधन पर भाजपा नेताओं और सामाजिक संगठनों ने दुख जताया। उन्होंने कहा कि शांति नाथ सूद ने शिक्षा और समाज की सेवा में लंबा समय दिया।
भिवानी में सोमवार को लघु सचिवालय के बाहर विभिन्न संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया और उपवास रखा। उन्होंने दिल्ली में जंतर-मंतर पर चले रहे धरना प्रदर्शन व भूख हड़ताल का समर्थन किया। इस दौरान भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को जबरन उठाने का विरोध किया। प्रदर्शन कर रहे विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ेगा। विरोध प्रदर्शन कर रहे ओमप्रकाश कामरेड, सीटू के जिला सचिव अनिल कुमार, किसान सभा की तहसील प्रधान संतोष देशवाल, सीटू के उप प्रधान सुखदेव सिंह ने कहा कि दिल्ली के जंतर मंतर पर नीट परीक्षा को लेकर छात्र धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका समर्थन करते हुए वैज्ञानिक व पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल शुरू की थी। उनकी मांग थी कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें और जो बार-बार पेपर लीक हो रहे हैं, उस पर भी रोक लगाया जाए। आधे से ज्यादा पेपर रद्द किए उन्होंने कहा कि इस सरकार के कार्यकाल में आधे से ज्यादा एग्जाम लीक होने व अन्य कारणों से रद्द करने पड़े हैं। जो छात्रों के हितों के साथ खिलवाड़ है। वहीं भविष्य भी अंधकार में आ गया है। सरकार को मामले में निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और आगे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कभी भी पेपर लीक ना हो। नीट पेपर लीक होने के कारण कई छात्रों ने आत्महत्या की है। वहीं पेपरों की तैयारी में युवाओं के लाखों रुपए व समय खर्च होता है। इसके बाद भी पेपर लीक हो जाते हैं और सरकार उन पेपर को रद्द करके छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करती है। लोकतंत्र का किया जा रहा हनन उन्होंने कहा कि दिल्ली में संसद कूच करने जा रहे लोगों को भी रोका जा रहा है। जो लोकतंत्र में गलत है अर्थात लोकतंत्र का हनन किया जा रहा है। लोकतंत्र में सभी का हक प्रदर्शन करने का होता है, लेकिन यह सरकार अघोषित आपातकाल लगाकर लोगों को प्रदर्शन करने से भी रोक रही है। अगर समय रहते केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया, तो पीएम को इसका जवाब देना हो।
नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी के विजन को आगे बढ़ाते हुए हाल ही में कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह में एक विशेष मिलन समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के 'ग्लोबल फैमिली' को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। जिसमें संस्थान के पूर्व छात्रों और वर्तमान विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में शिरकत की। भारतीय राजदूत की गरिमामयी उपस्थिति आयोजन की शोभा कंबोडिया में भारत के राजदूत महामहिम वनलालववना बविटलुंग ने बढ़ाई। अपने संबोधन में उन्होंने भारत और कंबोडिया के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों को रेखांकित करते हुए शिक्षा और संवाद को साझा प्रगति का आधार बताया। भारतीय दूतावास द्वारा इस कार्यक्रम को दिए गए सहयोग की विश्वविद्यालय प्रशासन ने विशेष सराहना की। वैश्विक क्षितिज पर नालंदा की नई पहचान समारोह के दौरान नालंदा विश्वविद्यालय की ओर से हाल ही में हासिल की गई उपलब्धियों, नई शैक्षणिक पहलों और उभरते शोध अवसरों पर विस्तृत चर्चा की गई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे नालंदा अपनी गौरवशाली विरासत को आधुनिक युग के अनुरूप ढालकर वैश्विक पटल पर एक ज्ञान केंद्र के रूप में फिर से स्थापित हो रहा है। इस दौरान उपस्थित छात्रों और पूर्व विद्यार्थियों ने अपने अनुभवों को साझा किया और पुरानी यादों को ताजा किया। भारत-कंबोडिया के बीच शैक्षिक और सांस्कृतिक मजबूती विद्यार्थियों के उत्साह और सक्रिय भागीदारी ने इस मिलन समारोह को अत्यंत यादगार बना दिया। इस आयोजन ने न केवल भारत-कंबोडिया के बीच शैक्षिक और सांस्कृतिक सेतु को और मजबूत किया है, बल्कि विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों के वैश्विक नेटवर्क को भी नई गति प्रदान की है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में भारतीय दूतावास, विदेश मंत्रालय और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
सलूम्बर जिले के जयसमंद स्थित श्री कल्लाजी विकास संस्था ने रविवार को प्रतिभावान सम्मान समारोह आयोजित किया। समारोह में मेवल-छप्पन क्षेत्र सहित उदयपुर, अहमदाबाद और विभिन्न उपशाखाओं से हजारों समाजजन शामिल हुए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रांत धर्म जागरण संयोजक महिपाल सिंह राठौड़ रहे। विशिष्ट अतिथियों में लाल सिंह जावद, सभा अध्यक्ष भैरूसिंह राठौड़ (गुड़), संस्था अध्यक्ष नाथूसिंह राठौड़ (पानी कोटड़ा) और युवा अध्यक्ष कूर सिंह बस्सी शामिल रहे। 321 विद्यार्थी हुए सम्मानित समारोह में शिक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने वाली 176 बालिकाओं और 145 बालकों सहित कुल 321 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इसके अलावा 22 राजकीय सेवा में चयनित युवाओं, 12 बीएसटीसी उत्तीर्ण विद्यार्थियों और राज्य स्तरीय सॉफ्टबॉल प्रतियोगिता में चयनित 7 खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया। समाजसेवा के लिए भामाशाह तख्त सिंह, उदय सिंह, विजय सिंह सारण जावद और डूले सिंह गुड़ को भी सम्मानित किया गया। दसवीं कक्षा की 57 बालिकाओं और 45 बालकों तथा बारहवीं की 76 बालिकाओं और 54 बालकों को प्रशस्ति-पत्र, स्मृति चिन्ह और उपरना ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। बारहवीं बोर्ड में 92.20 प्रतिशत अंक लाकर मेवल-छप्पन दोनों मंडलों में पहला स्थान पाने वाली मीनाक्षी सिसोदिया (सल्लाड़ा), दसवीं में 84.60 प्रतिशत अंक लाने वाली यशवंत कुंवर (बस्सी), बारहवीं में 89.41 प्रतिशत अंक लाने वाले कुलदीप सिंह (गुड़ेल) और दसवीं में 90.83 प्रतिशत अंक लाने वाले देवेंद्र सिंह (बामणिया) को विशेष सम्मान दिया गया। इंद्र हवन के साथ हुई शुरुआत समारोह की शुरुआत पंडित जयंतीलाल शर्मा के सानिध्य में इंद्र हवन के साथ हुई। विभिन्न यजमानों ने आहुतियां दीं। मुख्य अतिथि महिपाल सिंह राठौड़ ने कहा कि शिक्षा और संस्कार व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करते हैं और समाज व राष्ट्र को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। संस्था अध्यक्ष नाथूसिंह राठौड़ ने युवाओं और विद्यार्थियों से रोजाना हनुमान चालीसा और श्रीमद्भगवद्गीता जैसे धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करने का संकल्प दिलाया। साथ ही उन्होंने माता-पिता की सहमति के बिना विवाह या रिश्ते तय न करने और नशामुक्त जीवन अपनाने की अपील की। युवा अध्यक्ष कूर सिंह बस्सी ने युवाओं से समाज, संगठन और राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। समारोह में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने, मोबाइल फोन के सही इस्तेमाल, बच्चों को मोबाइल से दूर रखने, पौधरोपण, नशामुक्ति अभियान और वीरों के बलिदान की कहानियां नई पीढ़ी तक पहुंचाने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। संस्था सचिव लक्ष्मण सिंह जावद ने बताया कि कार्यक्रम में मेवल-छप्पन क्षेत्र की सभी उपशाखाओं सहित उदयपुर, अहमदाबाद और अन्य जगहों से बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन हड़मत सिंह भाणपुर ने किया।
जननायक जनता पार्टी (JJP) के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला ने नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे धरने प्रदर्शन को लेकर कहा कि सरकार घबराई हुई है। सरकार डरी हुई है, इस पूरे मामले से। इसलिए पुलिस को भेजकर सोनम वांगचुक को उठाया गया। अब और संगठित होने की आवश्यकता है। अगर देश के अंदर शिक्षा व्यवस्था का भगवाकरण होने से रोकना है, जो 21 बच्चों ने आत्महत्या करके जान दी, कल यह आंच आपके घरों तक ना आए, इसलिए समय निकालकर वहां पहुंचे। देश की सरकार में बैठे लोगों को महसूस होना चाहिए कि जनता जागी हुई सोई हुई नहीं है। सोनम वांगचुक को वहां से उठाना गलत है। मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। जबरन ले जाया गया और परिवार को मिलने नहीं दिया जा रहा तथा फोन पर बात नहीं करने दी जा रही। इन्हीं हरकतों के कारण कांग्रेस से पीछा छुड़ावाया, वही सरकार कर रहीदिग्विजय चौटाला ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह हमारा कैसा देश हो गया। इसी से तो हमने कांग्रेस पीछा छुड़वाया था। इन्हीं व्यवस्थाओं से तो हम कांग्रेस से तंग थे, आपमें और कांग्रेस में क्या फर्क रह गया। यह सवाल है सरकार से। आज जो सोमन वांगचुक के साथ वह बहुत गलत है। इसलिए जेजेपी पार्टी के नेता खुद जंतर मंतर पर जाकर आए थे। सरकार शिक्षा व्यवस्था अपने हिसाब से बदलना चाहती है- दिग्विजयदिग्विजय चौटाला ने पेपर लीक को लेकर कहा कि एजुकेशन व्यवस्था को ये अपने हिसाब से बदलना चाहते हैं। ये चाहते हैं कि इनकी भगवाकरण की जो नीति है उसके तहत पूरी व्यवस्था को अपने हिसाब से करें। हम ऐसा नहीं होने देंगे। हम उसके लिए कम से कम लड़ेंगे तो जरूर। जेजेपी नीट परीक्षा को लेकर चल रहे आंदोलन के समर्थन में है। आगे का फैसला तो आंदोलन को लीड करने वाले लोगों को लेना है।
अनशन पर सोनम वांगचुक: शिक्षा मुद्दे पर भरोसा मिला तो ही तोड़ेंगे उपवास
कॉकरोच जनता पार्टी के साथ अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती करवाया है। एक तरफ 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी मार्च करने वाले हैं तो वहीं दिल्ली पुलिस ने आगाह किया है कि इसकी अनुमति नहीं है
मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (नीट) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों को लेकर पूर्णिया में कांग्रेस, युवा कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने संयुक्त रूप से एक मशाल जुलूस निकाला। जुलूस तीनों संगठनों की देखरेख में निकाला गया। इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय छात्रों और युवाओं ने हिस्सा लिया, जिन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई। मशाल जुलूस छात्रों की गूंज अभियान के तहत गिरजा चौक से शुरू होकर आरएन साह चौक तक निकाला गया। युवा कांग्रेस के पूर्णिया जिला अध्यक्ष शेख सद्दाम ने बताया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में पूरे भारत के 28 चुनिंदा जिलों में छात्रों की गूंज अभियान चलाया जा रहा है। बिहार से इस अभियान के लिए केवल दो जिलों का चयन हुआ है, जिसमें पूर्णिया और पटना शामिल है। 10,000 से अधिक छात्र इस अभियान से जुड़े युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष शेख सद्दाम ने कहा कि पिछले 10 दिनों से हम पूर्णिया में छात्रों का लगातार रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं और अब तक 10,000 से अधिक छात्र इस अभियान से जुड़ चुके हैं। यह मशाल जुलूस पूरी तरह से गैर-राजनीतिक था, जिसमें किसी बड़े नेता या पार्टी के बजाय सिर्फ और सिर्फ आम छात्रों और पीड़ित युवाओं ने अपनी आवाज बुलंद की। पेपर लीक पर पूर्ण रोक की मांगमशाल जुलूस के माध्यम से प्रदर्शकारियों ने मांग रखते हुए कहा कि देश में बार-बार हो रहे पेपर लीक और परीक्षा धांधली पर तुरंत कड़ा नियंत्रण लगाया जाए ताकि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न हो। इसके अलावा बार-बार हो रही गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तुरंत अपने पद से इस्तीफा देने की मांग रखी। प्रदर्शनकारियों ने मांग रखते हुए कहा कि सभी राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक पारदर्शी वार्षिक कैलेंडर (Annual Examination Calendar) जारी किया जाए, ताकि छात्रों को समय पर परीक्षा और परिणाम की सही जानकारी मिल सके। पैसा ऐंठने का जरिया बनी व्यवस्था, छात्र कर रहे आत्महत्याप्रदर्शन में शामिल कांग्रेस ज़िला अध्यक्ष (ग्रामीण) अफरोज आलम ने कहा कि सरकार बार-बार फॉर्म भरवाकर छात्रों से मोटी रकम वसूलती है, लेकिन बाद में पेपर लीक हो जाता है। NEET परीक्षा के विवादित नतीजों के बाद से देश भर में कई मासूम छात्रों ने मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या कर ली है। एक बार फॉर्म भरने की व्यवस्था हो और उसी के तहत बिना किसी धांधली के निष्पक्ष तरीके से परीक्षाएं आयोजित की जाएं। धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि उन्होंने बच्चों का भविष्य बर्बाद कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन यहीं थमने वाला नहीं है। पूर्णिया और देश के अन्य हिस्सों में इस अभियान को 9 अगस्त तक पूरी ताकत के साथ चलाया जाएगा। इसके बाद 9 अगस्त को देश भर से छात्र और युवा दिल्ली कूच करेंगे, जहाँ एक बड़े विरोध प्रदर्शन के साथ इस देशव्यापी आंदोलन का समापन किया जाएगा।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी (सपा) और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच जुबानी जंग एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। इस बार टकराव का मुख्य केंद्र रामपुर की बहुचर्चित जौहर यूनिवर्सिटी (Jauhar University) बनी है। सपा प्रमुख और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने यूनिवर्सिटी के वर्तमान हालातों, प्रशासनिक कार्रवाइयों और छात्रों के अधर में लटके भविष्य को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। अखिलेश यादव ने जौहर यूनिवर्सिटी के हजारों विद्यार्थियों और उनके परिजनों को संबोधित करते हुए एक बेहद भावुक और राजनीतिक रूप से आक्रामक 'खुला पत्र' (Open Letter) लिखा है। इस पत्र में उन्होंने साफ किया है कि सपा हर स्तर पर इस उच्च शिक्षण संस्थान को बचाने की लड़ाई में छात्रों के साथ खड़ी है।'एक्स' (X) पर फूटा गुस्सा: सपनों पर बुलडोजर चलाने की निकृष्ट कोशिशअखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस पत्र को साझा करते हुए भाजपा सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने लिखा, इस दुर्भावनापूर्ण और पक्षपाती फैसले के खिलाफ हमारे साथ हमारा छोटे से छोटा कार्यकर्ता, समर्थक, बड़े से बड़ा नेता और वे सब हजारों बच्चे व उनके मेहनतकश माता-पिता भी हैं, जिनके सपनों पर बुलडोजर चलाने की निकृष्ट कोशिश भाजपा सरकार कर रही है।सपा प्रमुख ने देश भर के प्रबुद्ध नागरिकों और शिक्षाविदों से अपील की है कि वे शिक्षा के इस मंदिर को राजनीतिक प्रतिशोध से बचाने के लिए आगे आएं। उन्होंने सवाल उठाया कि इस विश्वविद्यालय में हर वर्ग और समाज के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं, तो क्या भाजपा अब पूरे समाज के युवाओं के भविष्य के विरुद्ध खड़ी हो गई है?कागजी कमी है तो उसे पूरा करें, यूनिवर्सिटी बंद करना समाधान नहींअपने खुले पत्र में अखिलेश यादव ने सरकार के रवैये को अहंकारी बताते हुए एक व्यावहारिक विकल्प भी सुझाया। उन्होंने कहा:कागजी कार्रवाई पूरी हो: यदि तकनीकी या कानूनी तौर पर यूनिवर्सिटी के दस्तावेजों में कोई कमी (Paperwork Deficiencies) है भी, तो सरकार को उसे पूरा कराने का समय देना चाहिए, न कि सीधे संस्थान को बंद करने या ढहाने की कार्रवाई करनी चाहिए।गरीबों के बच्चों का हवाला: अखिलेश ने भावुक रुख अपनाते हुए कहा कि इस यूनिवर्सिटी में मध्यमवर्ग और बेहद गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं। उनके माता-पिता के पास इतना पैसा नहीं होता कि वे अपने बच्चों को भाजपा नेताओं की तरह महंगे प्राइवेट विश्वविद्यालयों या विदेशों में पढ़ा सकें।बिना परिवार वाले क्या जानें दर्द: उन्होंने मुख्यमंत्री पर सीधा तंज कसते हुए कहा कि जिनके न परिवार हैं और न बच्चे, वे भला एक आम परिवार के बच्चों के भविष्य के उजड़ने का दर्द और माता-पिता की तड़प क्या समझेंगे।भाजपा की 'भूमिगत योजना' पर अखिलेश का बड़ा दावा: शिक्षा के ही खिलाफ है सत्तासपा प्रमुख ने अपने पत्र में भाजपा और उसके वैचारिक संगठनों पर एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा मूल रूप से शिक्षा और जागरूकता के ही खिलाफ है। अखिलेश यादव के मुताबिक, शिक्षित युवा जागरूक और प्रगतिशील होते हैं, जो सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते हैं और रोजगार पर सवाल पूछते हैं, जो दमनकारी सोच वाली सत्ता को रास नहीं आता।उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपाई अंदरूनी तौर पर गांवों के प्राथमिक विद्यालयों (Primary Schools) से लेकर बड़े विश्वविद्यालयों को बंद करवाने की एक 'भूमिगत योजना' पर काम कर रहे हैं, ताकि युवाओं को नौकरी-रोजगार न देना पड़े, क्योंकि भर्ती करना भाजपा के एजेंडे में है ही नहीं।'PDA पाठशाला' की तर्ज पर लड़ेंगे जौहर यूनिवर्सिटी की लड़ाईअखिलेश यादव ने अपने शुभचिंतकों को याद दिलाते हुए कहा कि जब इससे पहले उत्तर प्रदेश में सरकारी प्राइमरी स्कूलों को बंद करने की साजिश रची गई थी, तब समाज के जागरूक लोगों ने 'पीडीए (PDA) पाठशाला' खोलकर सरकार के मंसूबों को नाकाम कर दिया था। अब वही साजिश यूनिवर्सिटी स्तर पर दोहराई जा रही है। उन्होंने अखाड़े के दूसरे पक्षों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ अपंजीकृत लोगों के अपने स्कूल-संस्थान धड़ल्ले से चल रहे हैं, लेकिन विपक्ष से जुड़े संस्थानों पर प्रतिशोध की भावना से एकतरफा षड्यंत्र रचा जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है। सपा प्रमुख के इस पत्र के बाद रामपुर से लेकर लखनऊ तक की राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है।
सतना में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में रविवार देर शाम युवाओं ने मशाल जुलूस निकाला। यह प्रदर्शन दिल्ली में वांगचुक के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के समर्थन में आयोजित किया गया था। युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, कथित नीट परीक्षा लीक और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग की। जुलूस के दौरान छात्र-छात्राओं ने सरकार से छात्रों की आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दों पर जवाब मांगा। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की, आरोप लगाया कि पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद हो रहा है। शाम करीब 6:30 बजे सिविल लाइन चौपाटी से शुरू हुआ यह मशाल जुलूस सर्किट हाउस, मुख्य बाजार और सिटी कोतवाली रोड होते हुए संपन्न हुआ। रैली में शामिल युवाओं के हाथों में सोनम वांगचुक के पोस्टर और मशालें थीं। पूरे मार्ग में इंकलाब जिंदाबाद, शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो और पेपर लीक बंद करो जैसे नारे गूंजते रहे। युवाओं ने आरोप लगाया कि देश की परीक्षा प्रणाली लगातार सवालों के घेरे में है, जिससे लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने, पेपर लीक रोकने और छात्रों के हितों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।
बिहार सरकार ने सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 'सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय)' योजना शुरू की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को राज्य स्तरीय कार्यक्रम के माध्यम से इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ किया।इसी क्रम में बांका जिले के सभी 11 प्रखंडों में एक-एक आदर्श विद्यालय का उद्घाटन किया गया। जिले के चयनित विद्यालयों में एमडीएन उच्च विद्यालय डुमरामा (अमरपुर),आरएमके उच्च विद्यालय बांका,एसएनएस उच्च विद्यालय मोहनपुर (बाराहाट),उच्च माध्यमिक विद्यालय टेंगरा (बेलहर), श्री दुर्गा उच्च विद्यालय शक्तिनगर (बौंसी),प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय भैरोगंज(चान्दन), एसएलजीपीए उच्च विद्यालय पटवा श्रीपाथर (धोरैया),राष्ट्रीय उच्च विद्यालय धौनी(रजौन),उच्च विद्यालय कटोरिया और उच्च विद्यालय कुर्माडीह (शंभुगंज)शामिल हैं।इन सभी विद्यालयों में राज्य स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दिखाया गया,जिसमें जनप्रतिनिधि,प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। शिक्षा पदाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों ने भाग लियाआरएमके उच्च विद्यालय,बांका में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल,उप विकास आयुक्त और जिला शिक्षा पदाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर विद्यालय की छात्राओं ने स्वागत गान और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया। आदर्श विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति की गई है।विज्ञान,गणित और कंप्यूटर सहित विभिन्न प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ किया गया है।विद्यालय भवनों का रंग-रोगन कर उन्हें आकर्षक स्वरूप दिया गया है,तथा प्रत्येक विद्यालय में आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक मॉडल कक्षा विकसित की गई है। इन मॉडल कक्षाओं में राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएस) के तहत और पोषक क्षेत्र के मेधावी विद्यार्थियों का मेरिट के आधार पर चयन किया गया है।प्रत्येक विद्यालय में 40 विद्यार्थियों का नामांकन किया गया है। विद्यालयों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में प्रेरणा मिलेगी सरस्वती विद्या निकेतन राष्ट्रीय उच्च विद्यालय धौनी (मॉडल स्कूल)का उद्घाटन बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को वर्चुअल माध्यम से किया। इस अवसर पर बीडीओ अंतिमा कुमारी,बीईओ स्वयं चक्रपाणि कनिष्क,प्रधानाध्यापक राकेश रंजन, मुखिया प्रतिनिधि टिंकू सिंह सहित शिक्षक और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। शिक्षा विभाग के अनुसार आदर्श विद्यालय योजना का उद्देश्य ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्रों के विद्यार्थियों को निजी विद्यालयों के समान गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। इस पहल से सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण बेहतर होगा तथा जिले के अन्य विद्यालयों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में प्रेरणा मिलेगी।
खगड़िया में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) की परबत्ता अंचल इकाई ने रविवार को शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। अंचल अध्यक्ष बिट्टू मिश्रा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया। यह मार्च तोरण द्वार गेट से शुरू होकर बाजार और थाना चौक होते हुए प्रखंड कार्यालय के सामने तक निकाला गया। प्रदर्शन के दौरान AISF नेताओं ने शिक्षा के निजीकरण, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और छात्रों की समस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग की। कई परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए संगठन ने सरकार से छात्रों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने और परीक्षाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी बनाने की मांग की। अंचल सह सचिव नीतीश कुमार ने आरोप लगाया कि सरकार के कार्यकाल में कई परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, लेकिन इस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों की आवाज उठाने वालों के साथ दमनकारी रवैया अपनाया जा रहा है। अंचल सचिव ऋषि कुमार शर्मा ने चेतावनी दी कि प्रदर्शनकारियों और छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार छात्रों की मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। छात्र हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगीअंचल अध्यक्ष बिट्टू मिश्रा ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं में लगातार अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और वैज्ञानिकों के धरने को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन AISF का आंदोलन जारी रहेगा। अंचल उपाध्यक्ष रितेश शर्मा ने सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि छात्र हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने जोर दिया कि संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेगा। इस कार्यक्रम में संजय कुमार, अमृत कुमार, प्रकाश कुमार, राहुल कुमार, कृष्णा, अंकित, मोहित, प्रिंस, संदीप, सुंदर शर्मा सहित बड़ी संख्या में AISF कार्यकर्ता और छात्र मौजूद रहे।
मंदसौर में आम आदमी पार्टी (आप) की जिला इकाई ने रविवार शाम को विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन शिक्षाविद एवं वैज्ञानिक सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर से पुलिस द्वारा हटाए जाने के विरोध में था। कार्यकर्ताओं ने हाथों पर काली पट्टी बांधकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। विरोध मार्च गांधी चौराहे से शुरू होकर बस स्टैंड और घंटाघर होते हुए वापस गांधी चौराहे पर समाप्त हुआ। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए और इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया। आप पदाधिकारियों ने कहा कि देशभर में लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और अन्य मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को बलपूर्वक हटाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। पार्टी ने कहा कि वह इस तरह की कार्रवाई का विरोध करती रहेगी। इस प्रदर्शन में प्रदेश संगठन मंत्री यशवंत धाकड़, जिला अध्यक्ष गंगाराम पाटीदार, मीडिया प्रभारी प्रकाश दोसावत, संगठन सचिव जितेंद्र कारपेंटर, मजदूर यूनियन अध्यक्ष असलम शेख, उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सोनगरा, अल्पसंख्यक मोर्चा शहर अध्यक्ष कमरुद्दीन नियारगर और मयंक परमार सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के मॉडल विद्यालयों का उद्घाटन किया। इसी क्रम में शेखपुरा जिले के छह मॉडल विद्यालयों का भी वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया गया। शेखपुरा जिले में जिन विद्यालयों का उद्घाटन हुआ, उनमें उच्च माध्यमिक विद्यालय ऐझी मुरारपुर, श्री जगदम्बा +2 उच्च विद्यालय बरबीघा, नव उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय करकी (अरियरी), राजकीय एम०एम० उच्च माध्यमिक विद्यालय एकाढ़ा (चेवाड़ा), उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय गगौर (घाटकुसुम्भा) और उच्च माध्यमिक विद्यालय निमी (शेखोपुरसराय) शामिल हैं। इन मॉडल विद्यालयों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण शैक्षणिक विकास के लिए आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें आईसीटी लैब, आईएसएम लैब, आधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, पुस्तकालय, गुणवत्तापूर्ण फर्नीचर और स्मार्ट कक्षाएँ शामिल हैं। अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गयाउच्च माध्यमिक विद्यालय ऐझी मुरारपुर में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में शेखपुरा विधायक रणधीर कुमार सोनी, बरबीघा विधायक कुमार पुष्पंजय, एडीएम लखींद्र पासवान, कटारी पंचायत की मुखिया रिंकी कुमारी, डीईओ तनवीर आलम, शिक्षकगण, जनप्रतिनिधि, छात्र-छात्राएँ और स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी अतिथियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर शेखपुरा विधायक रणधीर कुमार सोनी ने कहा कि बिहार सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार बेहतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि जिले के छह प्रखंडों के विभिन्न विद्यालयों में एक साथ उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया है। सरकार का उद्देश्य है कि छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन न करना पड़े और उन्हें अपने जिले में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। आधुनिक सुविधाओं से युक्त विद्यालय खोले जा रहे वहीं, बरबीघा विधायक डॉ. कुमार पुष्पंजय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं से युक्त विद्यालय खोले जा रहे हैं। कटारी पंचायत की मुखिया रिंकी कुमारी ने इस उद्घाटन को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार ऐझी मुरारपुर में इस प्रकार के आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय का उद्घाटन हुआ है। उन्होंने सभी ग्रामीणों से अपने बच्चों को शिक्षित करने की अपील की। जिले के सभी चयनित मॉडल विद्यालयों में वरीय पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई थी, जिनकी उपस्थिति में कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन संपन्न हुआ।
बिहार सरकार के सात निश्चय-3 (2025-2030) के तहत उन्नत शिक्षा, उज्ज्वल भविष्य अभियान के अंतर्गत रविवार को सीवान जिले के सभी 19 प्रखंडों में सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर जिले के सभी विद्यालयों में उत्साहपूर्ण माहौल रहा। कार्यक्रम के दौरान बेगूसराय में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह का सीधा प्रसारण सभी प्रखंडों के सरस्वती विद्या निकेतन में दिखाया गया, जिसे जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों, अभिभावकों, छात्र-छात्राओं और स्थानीय लोगों ने देखा। राज्यस्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के 551 सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालयों) का एक साथ लोकार्पण किया। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी तथा शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी भी उपस्थित रहे। सीवान जिले का मुख्य कार्यक्रम सरस्वती विद्या निकेतन, सीवान सदर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला परिषद अध्यक्ष संगीता देवी, नगर परिषद की उपसभापति किरण गुप्ता, उप विकास आयुक्त, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) सहित कई प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद, शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों के रूप में विकसित करना है, ताकि विद्यार्थियों को निजी विद्यालयों के समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके। इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित शिक्षा, अत्याधुनिक विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाएं, समृद्ध पुस्तकालय, खेलकूद की बेहतर सुविधाएं तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों से पढ़ाई को अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनाया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है, जिससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सकें। इस पहल से शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद जताई गई। जिला प्रशासन ने कार्यक्रम में शामिल सभी जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, अभिभावकों और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रशासन ने विश्वास जताया कि सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) सीवान जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए मानक स्थापित करेंगे और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी शिक्षा योजना के तहत रविवार का दिन अररिया जिले के लिए महत्वपूर्ण रहा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वर्चुअल माध्यम से जिले के नौ प्रखंडों में विकसित किए गए मॉडल स्कूलों का उद्घाटन किया। इस पहल को जिले में गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। उद्घाटन के बाद जिले के विभिन्न मॉडल स्कूलों में समारोह आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में शिक्षक-शिक्षिकाओं, छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उपस्थित लोगों ने मॉडल स्कूलों की शुरुआत को क्षेत्र के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। समर्पण के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य करने की अपील कीग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को अब आधुनिक सुविधाओं और बेहतर शैक्षणिक माहौल में पढ़ाई का अवसर मिलेगा। समारोह में वक्ताओं ने शिक्षकों से निष्ठा और समर्पण के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य करने की अपील की। विद्यार्थियों को भी मन लगाकर पढ़ाई करने, अनुशासन बनाए रखने और शिक्षा के माध्यम से क्षेत्र व राज्य का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) एसएसए प्रवीण कुमार ने जानकारी दी कि अररिया जिले में कुल 12 मॉडल स्कूल स्थापित किए गए हैं। इनमें से नौ मॉडल स्कूलों का उद्घाटन रविवार को मुख्यमंत्री द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया गया। औपचारिक उद्घाटन फिलहाल नहीं हो सकाडीपीओ प्रवीण कुमार ने बताया कि शेष तीन मॉडल स्कूलों का चयन हाल ही में हुआ है। इन विद्यालयों में अभी कुछ आवश्यक कार्य और संसाधनों की पूर्ति की प्रक्रिया चल रही है, जिसके कारण उनका औपचारिक उद्घाटन फिलहाल नहीं हो सका है। उन्होंने आश्वस्त किया कि बाकी तीनों मॉडल स्कूलों में भी जल्द सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर दी जाएंगी और उन्हें नियमित रूप से संचालित किया जाएगा। वर्तमान में उद्घाटन किए गए नौ मॉडल स्कूल जिले के नौ अलग-अलग प्रखंडों में शुरू हो चुके हैं। इससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और प्रतिस्पर्धी शिक्षा का लाभ मिलेगा। बिहार सरकार की इस पहल से जिले की शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में पहुंचे आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद तीखा हमला बोला है। सिसोदिया ने आरोप लगाया कि 20 दिनों तक सोनम वांगचुक के आंदोलन को नजरअंदाज करने के बाद, जब सरकार ने देखा कि आंदोलन में युवाओं और लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है, तो प्रधानमंत्री ने कल एक 'जादूगर' की तरह खेल दिखाया। “सफेद चादर वाले गुंडे भेजकर किया गायब” मनीष सिसोदिया ने मंच से जनता को संबोधित करते हुए कहा- कल प्रधानमंत्री जी ने उसी स्टेट (धरना स्थल) पर अपने गुंडे भेजकर सफेद चादर वाला जादू दिखाया। जैसे हम बचपन में जादूगर का खेल देखते थे ना... कि जादूगर आता था, चादर दिखाता था और उसके पीछे से बंदा गायब हो जाता था! कल प्रधानमंत्री जी ने वही किया। सफेद चादर वाले गुंडे भेजे और जादू दिखाकर सोनम वांगचुक जी को वहां से गायब कर दिया, उन्हें छूमंतर करके अस्पताल भेज दिया। शिक्षा मंत्री की कुर्सी पर भी तंज मनीष सिसोदिया ने देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और हालिया विवादों को लेकर भी प्रधानमंत्री पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि वह वीडियो देखते हुए बस यही सोच रहे थे कि, नरेंद्र मोदी जी, काश यह सफेद चादर वाला जादू आप देश के शिक्षा मंत्री की कुर्सी के सामने दिखा देते! ताकि उस कुर्सी से भी वो बंदा (शिक्षा मंत्री) गायब हो जाता। मनीष सिसोदिया के इस बयान के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद भीड़ ने जोरदार नारेबाजी की। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि सरकार लद्दाख की आवाज को दबाने के लिए पुलिस और सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रही है।
बीकानेर में शिक्षा विभाग की ओर से निजी स्कूलों की हर महीने अनिवार्य जांच के आदेश के विरोध में आंदोलन तेज हो गया है। वहीं सोमवार को निजी स्कूल बंद रखने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दरअसल, एक निजी स्कूल संगठन ने बंद का आह्वान किया है, जबकि दूसरे प्रमुख संगठन ने इससे दूरी बना ली है। ऐसे में शहर के स्कूल संचालक देर शाम तक स्कूल खोलने या बंद रखने को लेकर मंथन लगातार जारी है। हालांकि कुछ स्कूलों ने शाम होते-होते छुट्टी की घोषणा कर दी है। हर महीने निजी स्कूलों की जांच होगी माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने शिक्षा संबल योजना के तहत आदेश जारी कर शिक्षा अधिकारियों को हर महीने अपने क्षेत्र के निजी स्कूलों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। जांच में स्कूल की मान्यता सहित विभिन्न बिंदुओं की पड़ताल होगी। इसके लिए विभाग ने एक ऐप भी तैयार किया है, जिसमें निरीक्षण रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड करनी होगी। 24 जुलाई तक निर्णय लेने का आश्वासन निजी स्कूल संगठन पैपा ने बताया- इस मुद्दे पर उनकी निदेशक और अतिरिक्त शिक्षा सचिव से वार्ता हो चुकी है। संगठन के प्रदेश पदाधिकारी गिरिराज खैरीवाल ने कहा कि सरकार ने 24 जुलाई तक निर्णय लेने का आश्वासन दिया है, इसलिए तब तक इंतजार किया जाना चाहिए। इसी कारण पैपा ने 20 जुलाई के बंद का समर्थन नहीं किया है। सेवा संगठन ने बंद का आह्वान किया वहीं सेवा संगठन ने 20 जुलाई को स्कूल बंद रखने और शिक्षा निदेशालय पर बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है। संगठन के कोडाराम भादू ने कहा कि निजी स्कूल संचालक सरकार के इस आदेश का विरोध करेंगे और आंदोलन के लिए तैयार हैं। कुछ स्कूलों ने की छुट्टी घोषित दोनों संगठनों के अलग-अलग रुख के चलते बीकानेर में निजी स्कूल संचालक असमंजस में रहे। हालांकि देर शाम कुछ स्कूलों ने सोमवार की छुट्टी घोषित करते हुए अभिभावकों को इसकी सूचना भेज दी, जबकि कई स्कूल अंतिम समय तक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार करते रहे।
रविवार, 19 जुलाई 2026 को नवादा जिले के नरहट प्रखंड स्थित दरगाही बिगहा गांव में शिक्षा जागरूकता प्रभातफेरी का आयोजन किया गया। बुद्धिजीवी विचार मंच के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना था। यह इस गांव में मंच द्वारा चलाया गया तीसरा ऐसा अभियान था। प्रभातफेरी में चंदेश्वर यादव, रामबिलास प्रसाद, मथुरा पासवान, दिलीप पासवान, अजय कुमार और व्यास जी सहित बुद्धिजीवी विचार मंच के कई सदस्यों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने गांव की गलियों में भ्रमण करते हुए शिक्षा-जागरण गीत प्रस्तुत किए और जोशीले नारों के साथ लोगों को बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर आयोजकों ने अभिभावकों से बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा ही उनका सबसे बड़ा धन और सुरक्षित भविष्य है। प्रत्येक माता-पिता को अपने बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए, उन्हें विद्यालय भेजना चाहिए और सीखने के लिए प्रेरित करना चाहिए। मंच के सदस्यों ने जोर दिया कि शिक्षित परिवार ही सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही अज्ञानता, गरीबी और सामाजिक बुराइयों के अंधकार को दूर करने का एकमात्र साधन है। कार्यक्रम में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सक्रिय भागीदारी देखी गई, जो शिक्षा के प्रति उनके सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है। ग्रामीणों के सहयोग और उत्साह ने आयोजकों को इस जन-जागरण अभियान को आगे बढ़ाने के लिए नई ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम का समापन हर बच्चा विद्यालय जाए, शिक्षित होकर देश बनाए के संकल्प के साथ हुआ।
राजधानी रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर रविवार को स्टूडेंट्स, यूथ और अलग-अलग सामाजिक संगठनों के बैनर तले 500 से ज्यादा लोग सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में सड़क पर उतरे। शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान शिक्षा व्यवस्था में सुधार, देशभर में लगातार हो रहे पेपर लीक पर सख्त रोक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई गई। प्रदर्शन में शामिल स्टूडेंट्स और यूथ ने कहा कि शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है। उनका कहा नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा और युवाओं के मुद्दों पर सोनम वांगचुक के साथ देशभर का यूथ खड़ा है। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का भी विरोध जताया और इसे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार पर सवाल बताया। करीब दो घंटे तक चले इस प्रदर्शन में जमकर नारेबाजी हुई। शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग दोहराई। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन के माध्यम से छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने, पेपर लीक पर प्रभावी रोक लगाने और यूथ से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार से गंभीर पहल करने की मांग की गई। यूथ ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश के स्टूडेंट्स और यूथ की आवाज है। उनका कहना है कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधार नहीं होते, तब तक लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाई जाती रहेगी।
हरियाणा के हांसी में रविवार को इनसो छात्र नेता हरिकेश ढांडा के नेतृत्व में युवाओं ने सोनम वांगचुक के समर्थन में पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की और पेपर लीक व जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक की हिरासत का विरोध किया। इस मार्च में रोहित बेरवाल, अमित सिवाच, दीपक ठाकुर, जीवन, राहुल, कामराज, निशा और वैशाली सहित बड़ी संख्या में छात्र-युवा शामिल हुए। पैदल मार्च जाट धर्मशाला से शुरू होकर पुरानी सब्जी मंडी, उमरा गेट, बड़सी गेट, पुराना बस स्टैंड और अंबेडकर चौक होते हुए पुनः जाट धर्मशाला पर समाप्त हुआ। 'शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हो रही' छात्र नेता हरिकेश ढांडा और अमित सिवाच ने कहा कि वे सोनम वांगचुक के समर्थन में सड़कों पर उतरे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है और बड़े पैमाने पर पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था की खामियों और छात्रों के हितों को लेकर सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। हालांकि, उन्हें सरकार के निर्देश पर पुलिस ने जबरन हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया। 'जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों की आवाज को दबाया' प्रदर्शनकारी दीपक ठाकुर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर छात्रों की समस्याओं का समाधान करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि यदि शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है, तो शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और उनकी जगह ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया जाए जो छात्रों के हित में प्रभावी ढंग से कार्य कर सके। प्रदर्शनकारियों ने पेपर लीक की घटनाओं पर तत्काल रोक लगाने की मांग की, क्योंकि ऐसी घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों की आवाज को दबाया गया, जिसे उन्होंने लोकतंत्र की हत्या करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है।
सरगरा एज्युकेशन सोसायटी पाली की ओर से शिक्षा को बढ़ावा देने को लेकर रविवार को समाज की एक होनहार छात्रा को बीएसटीसी द्वितीय वर्ष की फीस के लिए रुपए का चेक दिया गया, जिससे वह अपनी फीस भरकर बीएसटीसी कर सके। सोसायटी के अध्यक्ष डीआर सागर ने बताया कि संस्था का उद्देश्य आर्थिक तंगी के कारण समाज का कोई भी स्टूडेंट शिक्षा से वंचित न रहे। इसी सोच के साथ सरगरा एज्युकेशन सोसायटी का गठन किया गया, जिसका संचालन सदस्यों के सहयोग से किया जाता है। संस्था जरूरतमंद और होनहार स्टूडेंट्स की फीस बिना ब्याज सीधे संबंधित शिक्षण संस्थान के नाम जमा करवाती है। संस्था के कोषाध्यक्ष प्रदीप कुमार कच्छवाह और सोसायटी के सचिव कन्हैयालाल चौहान ने बताया कि संस्था अब तक अनेक स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स को बिना ब्याज फीस सहायता उपलब्ध करा चुकी है। कई स्टूडेंट्स ने सहायता राशि समय पर संस्था के खाते में वापस जमा कराई है, जिससे अन्य जरूरतमंद स्टूडेंट्स की भी मदद की जा रही है। उन्होंने समाज के अधिक से अधिक लोगों से शिक्षा कोष में सहयोग करने और सोसायटी से जुड़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर संस्था के उपाध्यक्ष बद्रीलाल चौहान, बाबूलाल चौहान एवं जितेंद्र कच्छवाह सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
कटनी जिले के बरही नगर में रविवार को पर्यावरण और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के समर्थन में युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण, उसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर एकजुटता दिखाई। रविवार दोपहर नगर के व्यस्त बस स्टैंड क्षेत्र में बड़ी संख्या में युवा और स्थानीय नागरिक एकत्रित हुए। उन्होंने करीब एक घंटे तक हाथों में तख्तियां लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। तख्तियों पर लद्दाख के पर्यावरण को बचाने और सोनम वांगचुक की मांगों को पूरा करने के नारे लिखे थे। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने कहा कि सोनम वांगचुक देश की शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने और प्रकृति को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, जिसका समर्थन करना हर जागरूक नागरिक का कर्तव्य है। बस स्टैंड पर प्रदर्शन के बाद, प्रदर्शनकारियों ने एक शांति मार्च निकाला। यह मार्च नगर के मुख्य बाजार की विभिन्न गलियों और चौक-चौराहों से होकर गुजरा। इस दौरान नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने की अपील भी की गई। मार्च का समापन नगर के ऐतिहासिक आजाद चौक पर हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वांगचुक के स्वास्थ्य और उनके आंदोलन की सफलता की कामना की। उल्लेखनीय है कि सोनम वांगचुक नीट परीक्षा रद्द होने और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ-साथ लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा देने तथा वहां के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को औद्योगिक दोहन से बचाने के लिए दिल्ली में भूख हड़ताल पर थे। स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्हें पुलिस प्रशासन द्वारा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसी के विरोध में और उनकी मांगों के समर्थन में अब देश के अलग-अलग हिस्सों से आवाजें उठने लगी हैं, जिसकी गूंज कटनी के बरही नगर में भी दिखाई दी। इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में नगर के सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वर्चुअल माध्यम से भागलपुर के सभी 17 सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल) का शुभारंभ किया। जिला मुख्यालय सहित सभी चयनित स्कूलों में उद्घाटन समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। जिले में प्रत्येक प्रखंड से एक विद्यालय को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया गया है। इनमें जगदीशपुर, नाथनगर, सबौर, शाहकुंड, सुलतानगंज, गोराडीह, कहलगांव, पीरपैंती, सन्हौला, खरीक, बिहपुर, गोपालपुर, इस्माइलपुर, नारायणपुर, नवगछिया, रंगरा चौक और नगर निगम क्षेत्र के प्लस टू जिला स्कूल को शामिल किया गया है। इन विद्यालयों में आधुनिक शैक्षणिक संसाधन, तकनीक आधारित शिक्षण व्यवस्था और बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी। ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिलेगी मुख्य समारोह पी. झा उच्च विद्यालय परिसर में आयोजित हुआ, जहां जिलाधिकारी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने विद्यालय का निरीक्षण कर उपलब्ध कराई गई शैक्षणिक और आधारभूत सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की यह पहल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। मॉडल स्कूलों में आधुनिक शिक्षण पद्धति, अनुशासित वातावरण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जिलाधिकारी ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें नियमित अध्ययन, अनुशासन और उच्च लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज और राष्ट्र के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है। यदि विद्यार्थी समर्पण और मेहनत के साथ पढ़ाई करें तो वे जीवन में हर लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की शिक्षा में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। शिक्षकों से कहा कि वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यार्थियों में नैतिक, सामाजिक और मानवीय मूल्यों का भी विकास करें, ताकि वे जिम्मेदार नागरिक बन सकें। उद्घाटन समारोह के दौरान विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रम और स्वागत समारोह का भी आयोजन किया गया। छात्र-छात्राओं ने रंगारंग प्रस्तुतियां देकर अतिथियों का स्वागत किया। उपस्थित लोगों ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए राज्य सरकार की इस पहल की सराहना की। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का समापन हुआ। जिला प्रशासन ने विश्वास जताया कि जिले के सभी 17 सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल) भविष्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में विकसित होंगे और नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मनेन्द्रगढ़ में छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन की महासभा संपन्न हुई। इस महासभा में शादियों में 'प्री-वेडिंग शूट' पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके अतिरिक्त, आवारा पशुओं के लिए गौठान संचालन सहित समाज सेवा और संगठन विस्तार को लेकर कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई। कार्यक्रम में प्रदेश एवं जिला स्तर के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में अग्रवाल समाज के लोग शामिल हुए। महासभा का मूल उद्देश्य समाज सेवा ही हमारा संकल्प, अग्रवाल समाज का सर्वांगीण विकास हमारा लक्ष्य बताया गया। इसी के तहत 'प्री-वेडिंग शूट' पर प्रतिबंध और गौवंश के लिए गौठान संचालन जैसे निर्णय पारित किए गए। सामाजिक योजनाओं की दी जानकारी सामाजिक उत्थान के लिए विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। इनमें मंगल परिणय योजना के तहत युवाओं के लिए वैवाहिक संपर्क मंच, विधवा-विधुर पुनर्विवाह योजना, श्री अग्रसेन कन्या विवाह योजना और श्री अग्रसेन सामूहिक कन्या विवाह योजना शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को सहयोग प्रदान करना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। उच्च शिक्षा के लिए ब्याज मुक्त ऋण योजना शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण पहल की गई। श्री अग्रसेन ब्याज मुक्त उच्च शिक्षा ऋण योजना के तहत विद्यार्थियों को दो लाख रुपS तक का ब्याज मुक्त शिक्षा ऋण उपलब्ध कराने की योजना पर प्रकाश डाला गया। यह योजना उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक छात्रों के लिए सहायक होगी। महासभा में अग्र पंचायत समिति, अग्र अलंकरण योजना, रक्तदान, देहदान एवं नेत्रदान अभियान जैसे सेवा कार्यों में अधिक से अधिक सहभागिता का आह्वान किया गया। इसके साथ ही गो सेवा और पशु-पक्षी सेवा जैसे परोपकारी कार्यों में भी समाज के लोगों को सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
रायबरेली में शिक्षा प्रणाली में सुधार और पर्यावरण वैज्ञानिक सोनम वांगचुक के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन रविवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। शहर के डिग्री कॉलेज चौराहे पर दोपहर 12:30 बजे यह विरोध प्रदर्शन हुआ। सामाजिक कार्यकर्ता राम मोहन श्रीवास्तव रामू दादा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार और पेपर लीक कराने वाले माफियाओं के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने शिक्षा मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में हुई घटना की कड़ी निंदा की, जहाँ दिल्ली पुलिस ने 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को जबरन हटा दिया था। इस घटना को लोकतंत्र की हत्या बताया गया। राम मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा न देना यह दर्शाता है कि वे बच्चों के भविष्य के प्रति गंभीर नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप जनता प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग भी कर सकती है। श्रीवास्तव ने दोहराया कि यह उनका पांचवां दिन है और वे सोनम वांगचुक के समर्थन में बैठे हैं, जो भ्रष्टाचार और पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश की जनता सब देख रही है और यदि सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह आक्रोश बड़ा रूप ले सकता है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक यह विरोध जारी रहेगा।
कानपुर देहात डायट बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस:आधुनिक कंप्यूटर लैब का लोकार्पण; शिक्षा विभाग का ऐलान
कानपुर देहात में शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) पुखरायाँ में अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के शिक्षा विभाग ने कानपुर देहात की डायट को 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित इस कंप्यूटर लैब का उद्घाटन राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, उत्तर प्रदेश के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान ने किया। इस लैब को ह्यूमना पीपल टू पीपल इंडिया और रिस्ट संस्था के सहयोग से तैयार किया गया है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. पवन सचान ने कहा कि डिजिटल संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बढ़ाया जाएगा। उन्होंने डायट प्रशिक्षुओं के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की विशेष तैयारी कराने के निर्देश भी दिए, ताकि डीएलएड पूरा करते ही अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो सकें। ह्यूमना पीपल टू पीपल इंडिया की सीईओ स्नोरा वेस्टगार्ड ने डिजिटल शिक्षा को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि कानपुर देहात में मिली सफलता के बाद अब प्रदेश के आठ अन्य जिलों में भी इसी मॉडल पर तकनीकी सशक्तिकरण का कार्य किया जाएगा। डायट प्राचार्य, जिला विद्यालय निरीक्षक ब्रजभूषण चौधरी और बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार पांडेय ने बताया कि नई कंप्यूटर लैब से शिक्षकों को डिजिटल टीचिंग, ई-कंटेंट तैयार करने और ऑनलाइन प्रशिक्षण की बेहतर सुविधा मिलेगी। इसके अतिरिक्त, डीएलएड प्रशिक्षुओं के साथ-साथ वंचित वर्ग के मेधावी छात्र भी इस आधुनिक लैब का लाभ उठा सकेंगे। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के अधिकारी, रिस्ट हंस फाउंडेशन के प्रतिनिधि, समाजसेवी, प्रवक्ता, डायट का समस्त स्टाफ और बड़ी संख्या में डीएलएड प्रशिक्षु उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सोच अच्छी, लेकिन जमीनी अमल अभी बहुत धीमा : सुकृति सूरी
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को समावेशी शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए दृष्टिबाधित छात्रा सुकृति सूरी ने कहा कि नीति की सोच और उद्देश्य सकारात्मक हैं, लेकिन इसका प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब इसे जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा
टीईटी पर शिक्षा विभाग का इनकार, भड़के शिक्षक
भास्कर न्यूज | जांजगीर छत्तीसगढ़ में कार्यरत शिक्षकों के लिए सेवा सुरक्षा के तहत विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने की मांग को शिक्षा विभाग ने स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा में शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव और उनके ओएसडी से मुलाकात कर इस संबंध में ज्ञापन सौंपा था। चर्चा के दौरान विभाग की ओर से साफ किया गया कि विभागीय टीईटी आयोजित करने का वर्तमान में कोई प्रस्ताव नहीं है। विभाग का कहना है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमानुसार केवल व्यापम के माध्यम से ही आयोजित की जाएगी और आवश्यकता होने पर इसे वर्ष में तीन बार भी कराया जा सकता है। शिक्षा विभाग के इस रुख के बाद कार्यरत शिक्षकों में असंतोष बढ़ गया है। फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र राठौर ने विभाग के इस निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कार्यरत शिक्षकों के हित में विभागीय टीईटी ही सबसे व्यावहारिक और न्यायसंगत समाधान है। यदि सरकार इस जायज मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो प्रदेश के सभी प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षकों को एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से एक मजबूत और निर्णायक संघर्ष का रास्ता चुनना होगा। इस दौरान फेडरेशन के प्रदेश सचिव राजू टंडन, प्रदेश उपाध्यक्ष देवेंद्र हरमुख, संगठन मंत्री हेम साहू, पीताम्बर बंजारे, मनोज साहू, दीपक साहू, रमेश कोठारी, पुष्पेंद्र बनाफर, युवराज बेलचंदन, ओमप्रकाश साहू, लोकेश धृतलहरे और पारथ ध्रुव सहित बड़ी संख्या में शिक्षक प्रतिनिधि उपस्थित थे।
शिक्षा में एआई और तकनीक की भूमिका पर विशेषज्ञों ने रखे अपने विचार
लुधियाना| बीसीएम आर्य इंटरनेशनल स्कूल में क्रॉसबैंडिंग सीजन 8 का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के विभिन्न स्कूलों के प्राचार्यों और शिक्षा नेतृत्व से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आरंभ में आर्य समाज ग्रुप ऑफ स्कूल्स की निदेशक डॉ. परमजीत कौर ने स्वागत संबोधन में अतिथियों का अभिनंदन किया और बदलते शैक्षिक परिदृश्य में सहयोगात्मक सीख तथा नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद विद्यालय के विद्यार्थियों ने स्पेनिश भाषा में समूह गीत प्रस्तुत कर सांस्कृतिक रंग भरा और अपनी भाषाई व कलात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया। मुख्य सत्र में ऑरिबाइसेस टेक्नोलॉजीज के निदेशक ईशांत कुमार ने मुख्य वक्ता के रूप में प्रस्तुति दी। उन्होंने शिक्षा में तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका, उत्पादकता बढ़ाने और शिक्षकों के कार्य में सहयोग पर अपने विचार रखे। समापन पर विद्यालय की प्राचार्य डॉ. जसनीव सेठ ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। अंतिम चरण में विद्यार्थियों की नृत्य प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
20 जुलाई से बिहार विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। इसमें सरकार उच्च शिक्षा विधेयक (बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026) लाने वाली है। यूनिवर्सिटी को ऑटोनॉमस माना जाता है, राज्यपाल इसके कुलाधिपति होते हैं। नए विधेयक के पास होने से कॉलेजों को यूनिवर्सिटी के कंट्रोल से हटाने से राज्यपाल के अधिकार कम होंगे। कॉलेजों के प्रोफेसर की भर्ती, ट्रांसफर-पोस्टिंग समेत दूसरे कंट्रोल सरकार के पास होंगे। उच्च शिक्षा विधेयक पास होने से क्या असर होगा? सरकार यह विधेयक क्यों ला रही है? पढ़िए रिपोर्ट..। विश्वविद्यालय के प्रशासनिक नियंत्रण बाहर आएंगे 481 सरकारी डिग्री कॉलेज सरकार बिहार के 481 सरकारी डिग्री कॉलेजों को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक नियंत्रण से हटाना चाहती है। इसे उच्च शिक्षा विभाग से कंट्रोल करना चाहती है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 पास होने के बाद बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 खत्म हो जाएंगे। विश्वविद्यालयों से डिग्री कॉलेज को मुक्त कर इनके संचालन की जवाबदेही उच्च शिक्षा विभाग के पास चली जाएगी। विभाग इसका संचालन, प्रशासन व अन्य फैसले ले सकेगा। यानी स्नातक कॉलेजों का प्रबंधन सरकार के अधीन हो जाएगा। विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर (PG) की पढ़ाई, शोध आदि ही करा सकेंगे। सरकार क्यों ला रही नया विधेयक? कारण 1- कॉलेजों की बदहाल शिक्षा व्यवस्था स्कूली शिक्षा की स्थिति में तो सरकार बड़ा बदलाव कर रही है, लेकिन यूनिवर्सिटी-कॉलेजों की शिक्षा को लेकर बदनामी हो रही है। कॉलेजों में छात्र कम आ रहे हैं। पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी सवाल हैं। कारण 2- कई कुलपतियों पर गंभीर आरोप लगे पिछले 10 वर्षों में बिहार में राज्य के बाहर से कुलपति आने लगे। कई विश्वविद्यालय को पैसे कमाने का केंद्र बना दिया गया। कुलपतियों पर गंभीर आरोप लगे। सरकार इस स्थिति को बदलना चाहती है। अब जानिए बदलाव का क्या असर पड़ेगा? बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 सदन से पास होकर राज्यपाल की मंजूरी के बाद कानून बनता है तो स्नातक स्तर के शिक्षकों की नियुक्ति, ट्रांसफर, प्रमोशन आदि से जुड़े फैसले विश्वविद्यालय से नहीं होंगे। ये सारे काम उच्च शिक्षा विभाग करेगा। कॉलेज के प्रोफेसर स्कूलों के शिक्षकों की तरह सरकारी कर्मी बन जाएंगे। एक्सपर्ट ने कहा- चुनाव लड़ने की छूट हर किसी को मिलनी चाहिए भास्कर रिपोर्टर ने भागलपुर विश्वविद्यालय के रिटायर प्रोफेसर डॉ. योगेन्द्र से बात की। वे कहते हैं, ‘सरकार जो डिग्री कॉलेज खोल रही है वे राजकीय कॉलेज होंगे और विश्वविद्यालय के अंदर नहीं होंगे। मेरा तो यह कहना है कि देश के हर शिक्षक या कर्मचारी को राजनीतिक अधिकार रहने चाहिए। उन्हें भी छुट्टी लेकर चुनाव लड़ने की छूट मिलनी चाहिए। यह देश सबका है।’ ‘सरकार शिक्षकों के साथ नौकर वाला व्यवहार करना चाहती है। यह सही नहीं है। अब डिग्री कॉलेजों की परीक्षा भी विश्वविद्यालय नहीं लेगा। विरोध तो संविदा पर शिक्षक बहाली का भी होना चाहिए। जब पद है तो परमानेंट बहाली होनी चाहिए।’ आधा दर्जन MLC ने आपत्ति दर्ज की, CM को पत्र लिखा बिहार विधान परिषद के आधा दर्जन एमएलसी ने इसको लेकर विरोध किया है। आपत्ति दर्ज करने वालों में सत्ता पक्ष से जुड़े एमएलसी भी हैं। इन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलकर चिंता जाहिर की। इन MLC में संजीव कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह, नवल किशोर यादव, वीरेन्द्र नारायण यादव, जीवन कुमार और आफाक अहमद शामिल हैं। इन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों, शिक्षक संगठनों, शिक्षाविदों और छात्र प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारकों से विचार किए बिना ऐसे किसी विधेयक को अंतिम रूप न दिया जाए जो उच्च शिक्षा व्यवस्था की प्रशासनिक संरचना में मूलभूत परिवर्तन करता हो। डिग्री कॉलेजों पर सवाल भी उठ रहे हैं राज्य में 5 तरह के डिग्री कॉलेज चल रहे हैं। डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की काफी कमी है। विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने जुलाई में कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला है। छात्रों का भविष्य दांव पर न लगाए सरकार टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के पूर्व डीन और प्रोफेसर पुष्पेंद्र ने कहा कि कॉलेज में ग्रेजुएशन स्तर की पढ़ाई को यूनिवर्सिटी के ढांचे से बाहर निकालकर सीधे उच्च शिक्षा विभाग के अधीन लाने का प्रस्ताव बिहार की पहले से ही चरमराई उच्च शिक्षा के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा। उन्होंने कहा, ‘विश्वविद्यालय की स्वायत्तता का शिक्षा की गुणवत्ता से सीधा संबंध है। यह प्रस्ताव विश्वविद्यालय की पूरी व्यवस्था को विभाजित कर देगी।’
राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में ऑटोमोबाइल कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने कैंपस प्लेसमेंट के माध्यम से मोटर मैकेनिक व्हीकल (MMV) एवं मैकेनिक डीजल ट्रेड के 18 प्रशिक्षार्थियों का चयन कर उन्हें लेटर ऑफ इंटेंट (Letter of Intent) जारी किए। बैंक ऑफ बड़ौदा के 119वें स्थापना दिवस के अवसर पर आज क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से एम्स जोधपुर के सहयोग से पाल लिंक रोड स्थित क्षेत्रीय कार्यालय परिसर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इसमें लगभग 51 कर्मचारियों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। वहीं जिला प्रभारी मंत्री मदन दिलावर और जोगाराम कल जिले में विभिन्न इलाकों के कार्यक्रमों में शामिल होंगे। पढ़ें शहर की प्रमुख खबरें लाइव ब्लॉग में..
जहानाबाद जिले के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से एक पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण 20 से 24 जुलाई 2026 तक जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), जहानाबाद में होगा, जिसमें कक्षा 3 से 5 तक के कुल 220 शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल होंगे। 19 जुलाई की शाम 5 बजे तक रिपोर्ट करें शिक्षक जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान) द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, सभी चयनित शिक्षकों को 19 जुलाई की शाम 5 बजे तक डायट, जहानाबाद में अनिवार्य रूप से रिपोर्ट करना होगा। निर्धारित समय पर योगदान न देने वाले शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्रशिक्षण के पहले दिन सभी प्रतिभागियों का प्री-टेस्ट और अंतिम दिन पोस्ट-टेस्ट लिया जाएगा, जिसमें शामिल होना अनिवार्य है। शिक्षकों को यात्रा भत्ता (टीए) के भुगतान के लिए अपनी बैंक पासबुक की छायाप्रति साथ लाने का निर्देश दिया गया है। पीटी-योग सत्र को सफेद टी-शर्ट और नीले रंग की पैंट प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रतिभागियों के लिए औपचारिक परिधान निर्धारित किए गए हैं। पुरुष शिक्षकों को पैंट, शर्ट और टाई तथा महिला शिक्षकों को सलवार-कुर्ता या साड़ी जैसे सौम्य रंगों के परिधान पहनने होंगे। पीटी और योग सत्र के लिए सफेद टी-शर्ट और नीले रंग की पैंट अनिवार्य है। महिला शिक्षकों को योग एवं पीटी सत्र में साड़ी का उपयोग न करने की सलाह दी गई है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो शिक्षक डीएलएड परीक्षा में प्रतिनियुक्त हैं, वे इस प्रशिक्षण में भाग नहीं लेंगे। उन्हें इसकी सूचना संबंधित कार्यालय को देनी होगी। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की शैक्षणिक दक्षता बढ़ाना, उन्हें नवीन शिक्षण विधियों से अवगत कराना और कक्षा में बच्चों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाना है।
शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख का एक और मामला सामने आया है। कोटा में तबादलों के नाम पर पैसे वसूलने वाले एक आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मामला सांगोद पंचायत समिति से जुड़ा है, जहां पदस्थापित ग्राम विकास अधिकारी(VDO) मंजुला बैरागी ने मंत्री मदन दिलावर के आवास पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि बारां निवासी नरोत्तम बड़ारिया ने उनका तबादला करवाने के नाम पर उनसे पैसों की मांग की और राशि भी ली। शिक्षा मंत्री दिलावर ने जीरो एफआईआर दर्ज करने के दिए निर्देश शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मंत्री मदन दिलावर ने तत्काल महावीर नगर थाना प्रभारी को बुलाकर आरोपी के खिलाफ नामजद जीरो एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद महावीर नगर थाने में जीरो एफआईआर दर्ज की गई, जिसे सांगोद पुलिस को भेजा गया। सांगोद थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी नरोत्तम बड़ारिया को बारां से गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उसने कितने लोगों से तबादलों के नाम पर ठगी की है। इस मामले में केवल मंजुला बैरागी ही नहीं, बल्कि दो अन्य ग्राम विकास अधिकारियों भूपेंद्र सिंह और संदीप सिंह चौहान ने भी आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस को आशंका है कि आरोपी ने कई अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया हो सकता है। फिलहाल पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और आरोपी के नेटवर्क तथा उसके संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है।
मैहर में भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को शहर के घंटाघर चौराहे पर कार्यकर्ताओं ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान भीम आर्मी ने देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की वकालत करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग बुलंद की। साथ ही विभिन्न सरकारी भर्ती परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक और घोटालों को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में हो रही धांधलियों की वजह से देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। उन्होंने मांग की कि सरकार को शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाने चाहिए। परीक्षा घोटालों से युवाओं का टूटा भरोसा, न्यायिक जांच की मांग धरने का नेतृत्व कर रहे भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष एडवोकेट विक्रम सूर्यवंशी ने कहा कि परीक्षाओं में हो रही लगातार गड़बड़ियों के चलते युवाओं का सिस्टम से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि इन घोटालों से परेशान होकर कई होनहार छात्र आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाने को मजबूर हुए हैं। प्रदर्शन के बाद भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने नायब तहसीलदार को राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट खुद इस मामले में संज्ञान (सुओ मोटू) ले और NEET व SSC जैसी बड़ी भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधलियों की जांच न्यायिक निगरानी में कराई जाए। सोनम वांगचुक की मांगों पर विचार करने की अपील ज्ञापन के जरिए कार्यकर्ताओं ने पूरी परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार करने, पेपर लीक रोकने के लिए फूलप्रूफ और सुरक्षित व्यवस्था बनाने, भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने और प्रभावित परीक्षाओं को एक तय समय के भीतर दोबारा आयोजित कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने लद्दाख और शिक्षा सुधारों को लेकर आवाज उठा रहे सोनम वांगचुक की मांगों पर भी केंद्र सरकार से गंभीरता से विचार करने की अपील की। यह पूरा धरना-प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से खत्म हुआ और प्रशासन ने ज्ञापन को आगे भेजने का भरोसा दिया है।
छतरपुर जिले के बड़ामलहरा विकासखंड स्थित शासकीय हाई स्कूल मुंगवारी में शनिवार को एक अजीबोगरीब घटना सामने आई। विद्यालय की प्राचार्य स्कूल परिसर के बाहर जमीन पर लेट गईं, जिससे परिसर में तनाव का माहौल बन गया। शिक्षकों और कर्मचारियों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सूचना दी, लेकिन उनके अनुसार कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्होंने मामले की जानकारी एसडीएम अखिल राठौर को दी। एसडीएम ने तत्काल विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सुन्दरलाल प्रजापति को विद्यालय पहुंचकर जांच करने के निर्देश दिए, लेकिन शाम करीब 6 बजे तक भी वे मौके पर नहीं पहुंचे। अधिकारियों के मौके पर न पहुंचने से नाराज होकर विद्यालय का पूरा स्टाफ एसडीएम कार्यालय पहुंचा। कर्मचारियों ने प्राचार्य के व्यवहार, विद्यालय की कार्यप्रणाली और पूरे घटनाक्रम को लेकर शिकायत दर्ज कराई और निष्पक्ष जांच की मांग की। एसडीएम अखिल राठौर ने बताया कि विद्यालय की घटना की जानकारी मिलते ही विकासखंड शिक्षा अधिकारी को तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। अब इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की जांच और प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटाकर हॉस्पिटल में भर्ती कराने की कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा- सरकार संवाद के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है। सरकार ने वांगचुक से गांधीवादी तरीके से बातचीत करने के बजाय जबरन उठाकर हॉस्पिटल में भर्ती कराया है। पायलट ने कहा- वांगचुक की मांगों पर विचार किया जा सकता था, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। पायलट ने आरोप लगाया कि संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले इस मुद्दे को दबाने के लिए यह कार्रवाई की गई। यह लोकतांत्रिक मूल्यों का सीधा हनन है और देश का हर युवा इस घटनाक्रम से दुखी है। पायलट ने कहा- कांग्रेस लगातार छात्रों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुन रही है। राहुल गांधी भी युवाओं से संवाद कर रहे हैं और देश का नौजवान सरकार से जवाब मांग रहा है। इसके बावजूद सरकार संवाद करने के बजाय विरोध की आवाज को दबाने में लगी हुई है। सचिन पायलट जयपुर के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में एनएसयूआई की ओर से आयोजित छात्र संविधान संवाद कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ भी मौजूद रहें। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम में भाग लेकर शिक्षा, पेपर लीक और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछे। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं लेना चाहती सरकार पायलट ने कहा- पूरे देश में भर्ती परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर आक्रोश है। छात्र जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठा रहे हैं, लेकिन सरकार इस्तीफा लेने के बजाय विरोध कर रहे लोगों को जबरन हटाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार का कोई प्रतिनिधि सोनम वांगचुक से मिलकर बातचीत करता और उनकी मांगों पर चर्चा करता तो समाधान निकल सकता था लेकिन बातचीत करने के बजाय उन्हें जबरन उठाकर हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। पायलट ने कहा कि सरकार को पहले उन मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए थी, जिनको लेकर वांगचुक अनशन पर बैठे थे। अगर मांगें मान ली जातीं तो वे खुद अनशन समाप्त कर देते। शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करना जरूरी सचिन पायलट ने कहा कि देशभर में शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है। इसे बहाल करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि छात्र जवाबदेही चाहते हैं और सरकार को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। कांग्रेस का रुख पूरी तरह साफ है कि शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए और सरकार को इसमें कोई संकोच नहीं करना चाहिए। पंचायत-निकाय चुनाव टालने पर भी साधा निशाना पायलट ने राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर भी राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार चुनाव इसलिए नहीं करा रही क्योंकि उसे जनादेश अपने खिलाफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट भी इस मामले में पहले टिप्पणी कर चुका है, लेकिन सरकार हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर चुनाव टाल रही है। UPSC जैसा मॉडल अपनाने की सलाह कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने पेपर लीक की घटनाओं पर सवाल पूछे। इस पर सचिन पायलट ने कहा कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा देश की सबसे पारदर्शी परीक्षाओं में शामिल है और आज तक उसके पेपर लीक होने की खबर नहीं आई। उन्होंने कहा कि जिस तरह यूपीएससी की कार्यप्रणाली और स्वायत्त व्यवस्था है। उसी तर्ज पर अन्य भर्ती परीक्षाओं के लिए भी स्वतंत्र और मजबूत व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। अगर सरकार इच्छा शक्ति दिखाए तो किसी की हिम्मत नहीं होगी कि पेपर लीक कर सके। उन्होंने भाजपा सरकार के कार्यकाल में छात्र नेताओं पर दर्ज मुकदमों का भी मुद्दा उठाया। पायलट ने कहा कि जो मुकदमे प्रतिशोध या दुर्भावना से दर्ज किए गए हैं, कांग्रेस की सरकार बनने पर उन्हें हटाया जाएगा। टीकाराम जूली ने संविधान और लोकतंत्र पर जताई चिंता नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि भारत में लोकतंत्र की मजबूती का आधार संविधान है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संविधान की संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने राजनीतिक दलों को तोड़ने, सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग, चुनाव आयोग और सूचना के अधिकार (RTI) जैसे कानूनों को कमजोर करने के आरोप लगाए। जूली ने कहा कि राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनाव टालना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला है। उन्होंने पुलवामा आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि आज तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक वहां कैसे पहुंचा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने शहीदों के नाम पर राजनीति की है। 9 अगस्त को दिल्ली चलो अभियान एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि संगठन देशभर में छात्रों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुन रहा है और छात्र सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री अभी भी पद पर बने हुए हैं, जबकि छात्र लगातार इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई छात्र या संगठन शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करता है तो उसे जबरन हटाया जा रहा है, जैसा दिल्ली में देखने को मिला। जाखड़ ने कहा कि एनएसयूआई पहले देशभर में जिला कलेक्टरों के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपेगी। इसके बाद 9 अगस्त को दिल्ली चलो अभियान चलाया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल होंगे।
स्कूल शिक्षा विभाग में सचिवालय और उप संचालक, सहायक संचालक, संयुक्त संचालक स्तर पर पदोन्नति की कार्यवाही होने के बाद अब व्याख्याता, प्राचार्य और अध्यापकों के प्रमोशन की तैयारी है। इस बीच प्रमोशन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभाग अपने स्तर पर काम कर रहा है और शिक्षक संगठनों ने भी इसके लिए विभाग को सुझाव देकर कहा है कि सीनियर पदों पर प्रमोशन की कार्यवाही पहले की जाए ताकि सभी पात्र प्रमोशन का लाभ पा सकें। शासकीय शिक्षक संगठन ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को न्यायसंगत, पारदर्शी एवं व्यावहारिक बनाने के लिए इसे शीर्ष स्तर से निचले स्तर तक चरणबद्ध क्रम में संचालित किया जाए। संगठन का मानना है कि इस व्यवस्था से हर स्तर पर रिक्त पदों का एक एक करके सृजन होगा, जिससे अधिक से अधिक पात्र शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ मिल सकेगा। इसको लेकर संगठन ने विभाग को सुझाव भी दिए हैं। संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने स्कूल शिक्षा विभाग से इस पर ध्यान देेने का आग्रह किया है। सुझाव में यह कहा संगठन ने समानांतर प्रक्रिया अपनाई तो नहीं मिलेगा सबको मौका संगठन का कहना है कि यदि पदोन्नति प्रक्रिया शीर्ष स्तर से प्रारंभ की जाती है, तो हर चरण में रिक्त पद स्वाभाविक रूप से निर्मित होते जाएंगे। इससे अधीनस्थ संवर्गों में पदों की संख्या बढ़ेगी तथा अधिकतम पात्र शिक्षकों को पदोन्नति का अवसर मिलेगा। इसके विपरीत अव्यवस्थित या समानांतर प्रक्रिया अपनाने से अनेक पद रिक्त होने के बावजूद पात्र कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पाता। शासकीय शिक्षक संगठन ने शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि पदोन्नति की संपूर्ण प्रक्रिया इसी चरणबद्ध क्रम में संचालित की जाए, ताकि सभी संवर्गों के हित सुरक्षित रहें, प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी एवं न्यायसंगत बनी रहे तथा किसी भी वर्ग के साथ अन्याय की स्थिति उत्पन्न न हो।
लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के दिल्ली में चल रहे आंदोलन और भूख हड़ताल के समर्थन में पन्ना में भी युवा और राजनीतिक दल सड़कों पर उतर आए। शनिवार को समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में गांधी चौक पर प्रदर्शन किया। इस दौरान युवाओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने देश की शिक्षा व्यवस्था में कमियों, नीट (NEET) परीक्षा विवाद और छात्रों की आत्महत्या के मामलों को लेकर भारी नाराजगी जताई। हाथों में तख्तियां लिए प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। पन्ना के हर गांव से निकलेंगे सोनम वांगचुक प्रदर्शन के दौरान युवा एडवोकेट सोनेलाल ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि पन्ना का पूरा युवा वर्ग सोनम वांगचुक के साथ खड़ा है। उन्होंने मांग की कि दिल्ली में अनशन पर बैठे वांगचुक की सुरक्षा पक्की की जाए। सोनेलाल ने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो पन्ना के हर घर और गांव से सोनम वांगचुक निकलेंगे। उन्होंने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ रोकने के लिए शिक्षा मंत्री से तुरंत पद छोड़ने की मांग की। समाजवादी पार्टी का मिला पूरा समर्थन आंदोलन की अगुवाई कर रहे समाजवादी पार्टी के पन्ना जिला अध्यक्ष जयराम यादव ने कहा कि सपा युवाओं और सोनम वांगचुक की मांगों का पूरी तरह समर्थन करती है। देश के नौजवानों के अधिकारों के लिए यह लड़ाई लड़ी जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने युवाओं के भविष्य और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए जल्द ही कोई कदम नहीं उठाया, तो इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। गांधी चौक पर हुए इस प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है। अगर छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की आवाज दबाने की कोशिश की गई, तो पन्ना सहित पूरे प्रदेश में चक्का जाम और जेल भरो आंदोलन किया जाएगा।
करौली जिला स्थापना दिवस पर विकास का रोडमैप:शिक्षा-रोजगार से रेल कनेक्टिविटी तक उठीं अहम मांगें
करौली के 29वें जिला स्थापना दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में जिले के समग्र विकास का व्यापक खाका सामने आया। वक्ताओं ने उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी, स्थानीय रोजगार सृजन, रेल कनेक्टिविटी, कृषि, उद्योग, पर्यटन और आधारभूत सुविधाओं जैसे अहम मुद्दों पर ठोस सुझाव दिए। उन्होंने प्रशासन से इन सुझावों को योजनाओं में शामिल कर प्रभावी ढंग से लागू करने की अपील की गई। जिले के विकास पर व्यापक मंथन पंचायत समिति सभागार में आयोजित संगोष्ठी में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लखन सिंह सहित शहर के गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हुए। सभी ने जिले के समग्र विकास को लेकर अपने सुझाव रखे। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ऐसे आयोजनों में आने वाले सुझाव केवल औपचारिकता बनकर न रह जाएं, बल्कि उन्हें योजनाओं का हिस्सा बनाकर जमीन पर उतारा जाए। उच्च शिक्षा के लिए मजबूत संस्थानों की जरूरत आशीष कांत शर्मा ने जिला मुख्यालय पर उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी को बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि राजकीय महाविद्यालय में कई स्नातकोत्तर विषय उपलब्ध नहीं हैं। करौली का इंजीनियरिंग कॉलेज भी भरतपुर से संचालित हो रहा है, जबकि जिला गठन के 29 वर्ष बाद भी विधि महाविद्यालय की स्थापना नहीं हो सकी है। शर्मा ने कहा कि बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं के अभाव में विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। स्थानीय रोजगार बढ़ाने पर जोर भूपेन्द्र भारद्वाज ने कहा कि जिले के विकास के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने औषधीय गुणों वाली फसलों को बढ़ावा देने का सुझाव दिया, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर भी तैयार होंगे। रेल कनेक्टिविटी में तेजी लाने की मांग वेणु गोपाल शर्मा ने करौली को रेल नेटवर्क से जोड़ने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि रेलवे लाइन को स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन परियोजना के कार्यों में तेजी लाकर इसे जल्द पूरा किया जाना चाहिए, ताकि जिले के विकास को नई गति मिल सके। पर्यटन, उद्योग और कृषि में बड़ी संभावनाएं संगोष्ठी में जिले के सैंडस्टोन उद्योग, कृषि, ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक स्थलों और प्राकृतिक पर्यटन की संभावनाओं को रोजगार और आर्थिक विकास से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं का मानना था कि इन क्षेत्रों का सुनियोजित विकास करौली की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। प्रभावी क्रियान्वयन पर रही सबसे बड़ी अपेक्षा वक्ताओं ने प्रशासन से विकास कार्यों की नियमित निगरानी और सुझावों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार संगोष्ठी में आए सुझावों पर गंभीरता से विचार कर उन्हें अमल में लाया जाएगा। संगोष्ठी में चंद्रेश गुप्ता, मदन मोहन स्वामी, राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रफीक अहमद, अमित शर्मा, व्याख्याता राम अवतार मीणा सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
खैरथल-तिजारा के राजकीय कॉलेज में बी.ए. फर्स्ट ईयर के नए स्टूडेंट्स के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) और विभिन्न सह-शैक्षणिक गतिविधियों से परिचित कराना था। उज्जवल भविष्य बनाने का किया आह्लान कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विजय वर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय जीवन व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण काल होता है। प्राचार्य ने विद्यार्थियों से नियमित अध्ययन, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने का आह्वान किया। निरंतर पढ़ाई के लिए किया प्रेरित डॉ. महेश गोठवाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रमुख प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बहुविषयक शिक्षा, कौशल विकास, क्रेडिट बैंक और रोजगारपरक शिक्षा की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। डॉ. जाकिर हुसैन ने विद्यार्थियों को स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। शैक्षणिक अवसरों की जानकारी दी डॉ. सरस्वती मीणा ने अंग्रेजी विषय के महत्व और इसके अध्ययन से मिलने वाले शैक्षणिक एवं व्यावसायिक अवसरों की जानकारी दी। डॉ. राहुल वर्मा ने राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की गतिविधियों का परिचय देते हुए विद्यार्थियों से समाजसेवा और व्यक्तित्व विकास के लिए इससे जुड़ने का आग्रह किया। अनुशासन बनाए रखने का संदेश दिया राजवीर सिंह मीणा ने विद्यार्थियों को अनुशासन बनाए रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपक कुमार ने किया। अंत में, अंगदान और दहेज प्रथा उन्मूलन विषय पर आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया।
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पूर्व शिक्षा मंत्री और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर कोटा में जमकर निशाना साधा। मंत्री दिलावर ने कहा-डोटासरा झूठा और महाभ्रष्ट आदमी है। अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के नाम पर प्रदेश के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ और भ्रष्टाचार किया है। शिक्षा मंत्री शनिवार को कोटा जिले के अलग-अलग स्कूलों में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हुए। अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोलने का झूठा प्रचार किया राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, लखावा में आयोजित नव-निर्मित क्लासरूम के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने राजस्थान भर में अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोलने का झूठा प्रचार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि डोटासरा ने कोई नए अंग्रेजी स्कूल नहीं खोले, बल्कि चल रहे हिंदी माध्यम के स्कूलों पर जबरन अंग्रेजी के बोर्ड लगवा दिए। न तो वहां अंग्रेजी माध्यम के टीचर दिए गए, न ही कोई बुनियादी ढांचा या व्यवस्था की गई। दिलावर ने कहा- इस फैसले से हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों के बच्चों का भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अंग्रेजी भाषा या किसी भी भाषा को सीखने के विरोधी नहीं हैं लेकिन इसके लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा तैयार किया जाना चाहिए था। भ्रष्टाचार साबित हो जाए तो राजनीति छोड़ दूंगा गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा वर्तमान सरकार और शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों पर पलटवार करते हुए दिलावर ने उन्हें खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि डोटासरा ने कहा था कि शिक्षा विभाग में ट्रांसफर के नाम पर भ्रष्टाचार हो रहा है। आप मदन दिलावर पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप साबित कर दें, तो मैं उसी दिन राजनीति छोड़ दूंगा। दिलावर ने कहा कि अगर उनके स्टाफ या विभाग में किसी अन्य के खिलाफ भी भ्रष्टाचार का कोई सबूत सामने आता है, तो वे उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और वे खुद भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करते। टीचर्स ने कहा था-डोटासरा ट्रांसफर के पैसे लेते हैं मदन दिलावर ने डोटासरा पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस राज में खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने टीचरों के एक बड़े सम्मेलन में सरेआम मंच से पूछा था कि 'डोटासरा जी ट्रांसफर के पैसे तो नहीं लेते हैं। तब हॉल में मौजूद हजारों शिक्षकों ने एक सुर में कहा था हाँ, पैसे चलते हैं।' दिलावर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के सामने जनता और टीचरों ने खुद माना था कि डोटासरा के कार्यकाल में किस तरह तबादला उद्योग फल-फूल रहा था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिसके खुद के कार्यकाल पर उनके ही मुख्यमंत्री ने मुहर लगाई हो, वह आज दूसरों के चरित्र पर सवाल उठा रहे हैं।
बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। राज्य में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा का चेहरा पूरी तरह बदलने जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 19 जुलाई को राज्य भर में नवनिर्मित 551 सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) का एक साथ भव्य उद्घाटन करेंगे। इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम का मुख्य आयोजन बेगूसराय जिले से होगा। जहां से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ऑनलाइन(वर्चुअल मोड) माध्यम से इन सभी हाई-टेक स्कूलों का लोकार्पण करेंगे। उद्घाटन के तुरंत बाद ही इन स्कूलों में नियमित रूप से पठन-पाठन और शैक्षणिक गतिविधियां शुरू कर दी जाएगी। 9वीं से 12वीं के छात्रों को सीधा फायदा शिक्षा विभाग के अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य 9वीं से 12वीं में पढ़ रहे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और समग्र शिक्षा उपलब्ध कराना है। इन आदर्श विद्यालयों को इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के बच्चों को भी निजी स्कूलों जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं मिल सके। शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन की ओर से राज्य के सभी DM को निर्देश जारी किए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि बच्चों की पढ़ाई शुरू हो जानी चाहिए। डीएम को निर्देश दिया है कि वे व्यक्तिगत स्तर पर समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी स्कूल में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा कोई काम लंबित नहीं रहे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि 18 जुलाई की शाम तक सभी 551 विद्यालयों में आधारभूत संरचनात्मक और प्रशासनिक तैयारियां 100 प्रतिशत पूरी हो जानी चाहिए। अधिकारियों को आगाह किया गया है कि वे खुद जमीन पर उतरकर इसकी व्यवस्था देखें। जिससे 19 जुलाई को शैक्षणिक गतिविधियों के निर्बाध संचालन में कोई बाधा न आए। इन 9 प्रमुख बिंदुओं पर नजर रखेंगे DM स्कूल का मुख्य भवन, पूरा परिसर और सभी कक्षाएं पूरी तरह तैयार हो। शुद्ध पेयजल, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, साफ-सुथरे शौचालय, स्वच्छता और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था। कार्यालय की व्यवस्था, छात्रों के लिए बेंच-डेस्क और कक्षा संचालन के लिए आवश्यक सभी शिक्षण सामग्री। स्कूलों में कंप्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट और अन्य जरूरी आईटी सुविधाओं की उपलब्धता हो। पूरे परिसर की सघन साफ-सफाई की व्यवस्था रहे। सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन (Fire Safety) उपकरण और अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाएं रहे। सीएम के कार्यक्रम को लाइव देखने के लिए स्कूलों में बड़ी स्क्रीन और ऑडियो-विजुअल का प्रबंध। स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, अभिभावकों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की गरिमामय उपस्थिति। लोकार्पण होते ही तत्काल कक्षाओं का संचालन करना है। समारोह को जन-उत्सव बनाने की तैयारी सरकार ने इस लोकार्पण कार्यक्रम को सिर्फ प्रशासनिक आयोजन न मानकर इसे जन-उत्सव के रूप में मनाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य आम जनमानस में उच्च माध्यमिक शिक्षा के प्रति एक सकारात्मक और भरोसेमंद वातावरण का निर्माण करना है। संबंधित सांसद, विधायक, विधान पार्षद एक-एक आदर्श विद्यालय में उपस्थित होकर ऑनलाइन कार्यक्रम से जुड़ेंगे।
डीडवाना-कुचामन में 'मिशन बुनियाद' का शुभारंभ:प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को मिलेगा नया आधार
डीडवाना-कुचामन जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग और रॉकेट लर्निंग के संयुक्त तत्वावधान में 'मिशन बुनियाद' का शुभारंभ किया गया। इस पहल के साथ, डीडवाना-कुचामन राजस्थान का 41वां जिला बन गया है, जहां प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ECE) और प्री-प्राइमरी शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए यह कार्यक्रम शुरू किया गया है। कार्यक्रम में जिला उपनिदेशक गौरव चौधरी, जिले के सभी सीडीपीओ (बाल विकास परियोजना अधिकारी) और पर्यवेक्षक मौजूद रहे। इस दौरान मिशन बुनियाद के उद्देश्यों, प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा के विभिन्न घटकों और आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। कार्यक्रम के दौरान जिले के सभी सेक्टरों के लिए व्हाट्सएप समूह बनाए गए हैं। इनके माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा से संबंधित गतिविधियां नियमित रूप से साझा की जाएंगी। पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण मॉड्यूल और कार्यक्रम के क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी भी प्रदान की गई। रॉकेट लर्निंग की ओर से वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक धीरज जांगिड़, कार्यक्रम प्रबंधक अक्षय शर्मा, हनुमानगढ़ जिला समन्वयक मीनाक्षी स्वामी और नागौर जिला समन्वयक आशीष सिन्हा ने कार्यक्रम के संचालन और सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महिला एवं बाल विकास विभाग और रॉकेट लर्निंग का यह संयुक्त प्रयास जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और बच्चों के समग्र विकास को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
गाजियाबाद स्थित सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर परिसर में दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान का रजत जयंती समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल के अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल मुख्य अतिथि और भाजपा राजस्थान के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य हरिशचंद्र सिंह जसोल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि किशन सिंह जसोल ने गुरुकुल शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार बताया। विशिष्ट अतिथि हरिशचंद्र सिंह जसोल ने संस्कारयुक्त शिक्षा के विस्तार पर बल दिया। समारोह की अध्यक्षता सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर, जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता और दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष महंत नारायण गिरि महाराज ने की। इस अवसर पर देशभर से आए संत-महात्मा, धर्माचार्य, शिक्षाविद, जनप्रतिनिधि और विशिष्ट अतिथि भी मौजूद रहे। विद्यालय के 25 सालों की यात्रा दिखाईकार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्ज्वलन, मंगलाचरण, राष्ट्रगान और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। दूधेश्वर वेद विद्यालय के छात्रों ने वैदिक परंपरा और भारतीय संस्कृति पर आधारित स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया। एक चलचित्र के माध्यम से स्कूल की स्थापना से लेकर अब तक की 25 वर्षों की यात्रा, प्रमुख उपलब्धियों, वैदिक शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों और समाजसेवा से जुड़े विभिन्न प्रकल्पों का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया गया। समारोह में दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान की रजत जयंती स्मारिका का विधिवत विमोचन भी किया गया। स्मारिका में संस्थान की गौरवपूर्ण यात्रा, वैदिक शिक्षा के विविध आयाम, संतों के प्रेरक संदेश, छात्रों की उपलब्धियां और संस्थान के विकास का विस्तृत विवरण प्रकाशित किया गया है। मुख्य अतिथि किशन सिंह जसोल ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की आत्मा उसकी सनातन संस्कृति, ऋषि परंपरा, वैदिक ज्ञान एवं गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था में निहित है। संस्कारयुक्त शिक्षा से ही श्रेष्ठ नागरिक, सुदृढ़ समाज और समर्थ राष्ट्र का निर्माण संभव है। दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान छात्रों को वेद, शास्त्र एवं संस्कृत के अध्ययन के साथ धर्म, अनुशासन, चरित्र, सेवा, कर्तव्यबोध और राष्ट्रभक्ति के संस्कार प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि परम पूज्य श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने अपने तप, त्याग, दूरदर्शी नेतृत्व एवं सतत पुरुषार्थ से वैदिक शिक्षा के संरक्षण का जो महायज्ञ प्रारम्भ किया, वो आज विशाल स्वरूप प्राप्त कर चुका है। विद्यालय के विद्यार्थी देश-विदेश में भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपरा का गौरव बढ़ा रहे हैं। ऐसे गुरुकुल भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विशिष्ट अतिथि हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि वैदिक शिक्षा भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान में विद्यार्थियों का शैक्षिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक विकास किया जा रहा है। यहाँ प्राप्त ज्ञान और संस्कार विद्यार्थियों को समाज एवं राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि परम पूज्य श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज जैसे तपस्वी, दूरदर्शी एवं राष्ट्रचिंतक संतों के मार्गदर्शन से सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपराएं नई पीढ़ी तक पहुंच रही हैं। दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान ने वैदिक अध्ययन, संस्कृत संवर्धन, गुरुकुल परंपरा एवं भारतीय जीवन मूल्यों के संरक्षण में अनुकरणीय स्थान स्थापित किया है। यह संस्थान आने वाले समय में भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक विस्तार का सशक्त माध्यम बनेगा। समारोह में आचार्य महामंडलेश्वर श्री विश्वेश्वरानन्द गिरि महाराज, कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम महाराज, महामंडलेश्वर चेतना माता, महामण्डलेश्वर स्वामी विद्याचैतन्य महाराज (अंतर्राष्ट्रीय सनातन धर्म संस्थान, नैमिषारण्य), महामंडलेश्वर श्रद्धा माता, जूना अखाड़ा के सचिव एवं दिल्ली संत महामंडल के संगठन मंत्री महंत कंचन गिरि महाराज, दिल्ली संत महामंडल के कोषाध्यक्ष महंत धीरेंद्र पुरी महाराज, सिद्धेश्वर वेद विद्यालय के संस्थापक महंत मुकेशानन्द गिरि महाराज तथा प्रख्यात आध्यात्मिक चिंतक गुरु पवन सिन्हा की गरिमामयी उपस्थिति रही। विशिष्ट अतिथियों में महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन के सचिव प्रो. विरूपाक्ष वी. जड्डीपाल, विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, गाजियाबाद विधायक संजीव शर्मा, शिक्षाविद राम अवतार जिंदल एवं समाजसेवी नवरत्न सोनी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। समारोह को संबोधित करते हुए संतों एवं वक्ताओं ने कहा- परम पूज्य महंत नारायण गिरि महाराज के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान वैदिक शिक्षा, भारतीय संस्कृति, धर्म, संस्कार, नैतिक मूल्यों एवं राष्ट्रभावना का प्रमुख केंद्र बन चुका है। विद्यालय के विद्यार्थी अपने ज्ञान, अनुशासन, आचरण एवं संस्कारों के माध्यम से भारतीय गुरुकुल परंपरा की श्रेष्ठता का परिचय दे रहे हैं। इस अवसर पर धर्म, शिक्षा, साहित्य, मीडिया एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अनेक व्यक्तित्वों को प्रशस्ति-पत्र, स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र एवं पुष्पमालाओं से सम्मानित किया गया। इनमें श्री दूधेश्वर नाथ मठ मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष अनुज गर्ग, विनय संकोची, अजय चोपड़ा, श्रृंगार समिति के अध्यक्ष विजय मित्तल, धर्मेंद्र चौधरी, मंदिर के सोशल मीडिया संयोजक सांवलाराम सुथार, अमित प्रकाश, मीडिया प्रभारी बी.के. शर्मा, अधिवक्ता हर्ष पाण्डेय, लेखा परीक्षक संजीव गुप्ता, नितिन कुमार तथा प्रख्यात कवि राज कौशिक शामिल रहे। समापन अवसर पर परम पूज्य महंत नारायण गिरि महाराज ने देशभर से पधारे संत-महात्माओं, अतिथियों, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों, सहयोगियों, आचार्यगण, विद्यार्थियों, मीडिया प्रतिनिधियों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। रजत जयंती समारोह का समापन वैदिक मंगलकामनाओं, संतों के आशीर्वचनों तथा भारतीय संस्कृति, वैदिक शिक्षा एवं राष्ट्र की उन्नति के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
बांग्लादेशी शिक्षा मंत्री का इस्तीफा क्यों मांगा जा रहा है?
भारत में नीट समेत कई परीक्षाओं के पेपर लीक होने के विरोध में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग के बीच पड़ोसी बांग्लादेश में भी नाराज छात्र शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की, कानून व्यवस्था को बताया विफल
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट दो दिवसीय दौरे पर शुक्रवार को टोंक विधानसभा क्षेत्र पहुंचे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया। कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। मीडिया से बातचीत में पायलट ने राज्य और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने तबादला नीति, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरा। कहा कि बिल्कुल, मुझे लगता है कि प्रतिशोध की भावना से तबादले किए जाते हैं। एक विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए सरकार काम कर रही है। यह बहुत गलत है। कोई नीति, कानून, मापदंड होने चाहिए। किस प्रकार आप ट्रांसफर कर रहे हैं। लेकिन राजनीतिक हित साधने के लिए कर्मचारियों का ट्रांसफर करें। प्रतिशोध की भावना, दुश्मनी की भावना से ट्रांसफर करते हैं। जनता बहुत दिनों तक बर्दाश्त नहीं करती। सरकार सबकी होती है। चुनाव के बाद जिम्मेदारियां होती हैं कि सरकार सबको साथ रखे। कर्मचारियों के साथ इस प्रकार दुश्मनी निकालना बहुत दुखदायी है। पहले ऐसा नहीं होता था। सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। यह बड़े दुख की बात है। पायलट ने कहा कि शिक्षा, चिकित्सा और कानून-व्यवस्था किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारियां होती हैं। राज्य सरकार इन तीनों मोर्चों पर पूरी तरह असफल साबित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल बड़े-बड़े आयोजनों और प्रचार में व्यस्त है। सचिन पायलट का सोहेला मोड़ पर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सऊद सईदी सहित कई पदाधिकारियों ने स्वागत किया। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई : पायलट ने सोनम वांगचुक के जंतर-मंतर पर चल रहे अनशन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। पिछले 19-20 दिनों से सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे हैं। वह देश के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। मुझे लगता है कि सरकार को उनकी मांग को गंभीरता से लेना चाहिए। जिस मुद्दे को लेकर वह अनशन कर रहे हैं, उस मुद्दे के साथ-साथ पूरी शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने की जरूरत है। पेपर लीक हुए। घोटाले हुए। चोरियां पकड़ी गईं। इन सबके विरोध में हमारी पूरी पार्टी ने राहुल गांधी के नेतृत्व में मुहिम छेड़ी है। कुछ दिन पहले कोटा में इस अभियान को शुरू किया था। उसी को लेकर राहुल गांधी उत्तराखंड के देहरादून गए हैं। लाखों-करोड़ों छात्र अपने आप को बड़ा वंचित महसूस करते हैं, जब व्यवस्था में विश्वास खत्म होता है। कोई जवाबदेही किसी की नहीं है। मुझे लगता है कि शिक्षा एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। नौजवान पीढ़ी को भविष्य में आगे ले जाने के लिए यह जरूरी है। इसमें केंद्र सरकार को बिल्कुल भी चिंता नहीं है। न परवाह है। एथेनॉल नीति पर भी उठाए सवाल : एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के मुद्दे पर पायलट ने कहा कि पर्याप्त तकनीकी तैयारी के बिना नीति लागू कर दी गई। वाहन कंपनियों को भी विश्वास में नहीं लिया गया। इससे लोगों के वाहनों के इंजन खराब होने और माइलेज कम होने की शिकायतें बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आगामी मानसून सत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, एथेनॉल नीति और अन्य जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी। पीपलू । पायलट का स्वागत करते कार्यकर्ता।
शिक्षा के साथ संस्कार जरूरी, नशे और मोबाइल पर रखें नजर
भास्कर न्यूज|ब्यावर राजस्थान पेंशन समाज, सेवा यतन ब्यावर मानवाधिकार समिति ब्यावर ने शुक्रवार को कार्यालय में बैठक की। बैठक में विद्यालय में शिक्षा के साथ संस्कार विषय पर चर्चा हुई। सत्यनारायण सांखला ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार देना जरूरी है। छोटू लाल कुमावत, ओम सिंह रावत, सोहनलाल मेघवाल ने कहा कि बढ़ती नशा प्रवृत्ति के कारण बच्चे कई अनैतिक कामों की ओर जा रहे हैं। रोकथाम के लिए संस्कार जरूरी हैं। मोबाइल के दुरुपयोग को रोकने के लिए पेरेंट्स सजग रहें। संस्कार को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जोर दिया। ओमप्रकाश अग्रवाल ने धन्यवाद दिया। बैठक में सत्यनारायण सांखला, ओम सिंह रावत, ओम प्रकाश अग्रवाल, छोटू लाल कुमावत, सोहनलाल मेघवाल, के. एल. बागड़ी, राधेश्याम शर्मा सहित अनेक पेंशनरों ने भाग लिया।
जयपुर में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की ओर से एक स्कूल के निरीक्षण के दौरान महिला शिक्षक का मोबाइल देखने पर सियासी विवाद हो गया। कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री पर महिला शिक्षक के मोबाइल देखने को निजता के अधिकार का हनन बताते हुए सवाल उठाए हैं। उधर, कांग्रेस की आपत्ति पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पलटवार करते हुए दावा किया कि महिला शिक्षक मोबाइल में विभागीय आदेश देखने को मोबाइल चेक करना बताना विपक्ष का दिवालियापन है। बता दें कि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने गुरुवार को जयपुर की तीन स्कूलों का निरीक्षण किया था। इस दौरान महात्मा गांधी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जेदिया कॉलोनी राज भवन में एक महिला शिक्षिका का मोबाइल देखने पर यह विवाद हुआ। शिक्षा मंत्री अपनी नाकामियों की फाइल चैक करें कांग्रेस ने दिलावर पर सवाल उठाते हुए एक्स पर लिखा- शिक्षा मंत्री मानसिक दिवालियापन के शिकार हैं। इसका एक और रूप देखिए। आखिर शिक्षा मंत्री को किसी भी शिक्षिका का मोबाइल चैक करने का अधिकार किसने दिया? ये केवल निजता का सवाल नहीं, बल्कि सम्मान और गरिमा का भी प्रश्न है। कांग्रेस ने आगे लिखा- शिक्षा मंत्री को शिक्षकों के मोबाइल नहीं, अपनी नाकामियों की फाइल चैक करनी चाहिए। असली सच्चाई वहीं मिलेगी। दिलावर बोले- मोबाइल में विभागीय आदेश देख रहा था मदन दिलावर ने एक्स पर कांग्रेस को जवाब देते हुए पलटवार किया। दिलावर ने कांग्रेस के एक्स हैंडल पर जवाब में लिखा- शिक्षिका के मोबाइल में विभागीय आदेश देखने को विपक्ष ने मोबाइल चेक करना बता दिया। यह विपक्ष की राजनीतिक दिवालियापन का प्रमाण है। सत्य को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना विपक्ष की राजनीति हो सकती है, लेकिन इससे तथ्य कभी नहीं बदलते। महिला शिक्षक ने मोबाइल में विभागीय आदेश दिखाए थे दिलावर ने लिखा- विद्यालय निरीक्षण के दौरान शिक्षकों से विभागीय कार्यों, ऑनलाइन पोर्टल, आदेशों, एप और अन्य डिजिटल प्रक्रियाओं की जानकारी लेना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसी क्रम में शिक्षिका ने मोबाइल पर विभागीय आदेश दिखाए थे। इसे शिक्षिका का मोबाइल चेक करना बताकर भ्रामक और तथ्यहीन प्रचार करना केवल जनता को गुमराह करने का प्रयास है। यह किसी भी प्रकार से निजी मोबाइल की जांच, निजता में हस्तक्षेप या सम्मान को ठेस पहुंचाने का मामला नहीं था। शिक्षा में सकारात्मक बदलाव विपक्ष को हजम नहीं हो रहा दिलावर ने लिखा- राजस्थान आज शिक्षा क्षेत्र में निरंतर नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है। विद्यालयों में गुणवत्ता, नवाचार, जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर किए जा रहे प्रयासों की चर्चा पूरे देश में हो रही है। यही सकारात्मक परिवर्तन विपक्ष को असहज कर रहा है। झूठ और भ्रम फैलाकर विकास की गति नहीं रोकी जा सकती। जनता सच्चाई जानती है और शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने के हर प्रयास के साथ मजबूती से खड़ी है।
शिक्षा निदेशालय मिनिस्टीरियल संघ के पदाधिकारियों ने ली शपथ:विकास और कर्मचारी हितों पर दिया जोर
शिक्षा निदेशालय मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ का शपथ ग्रहण समारोह शुक्रवार को प्रयागराज स्थित निदेशालय परिसर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर शहर उत्तरी के विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी, फाफामऊ के विधायक गुरु प्रसाद मौर्य और फूलपुर के विधायक दीपक पटेल ने संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। सभी पदाधिकारियों ने कर्मचारी हित में कार्य करने का संकल्प लिया। समारोह की अध्यक्षता निवर्तमान अध्यक्ष घनश्याम यादव ने की। शपथ ग्रहण के बाद आशुतोष शुक्ल ने अध्यक्ष और सुधीर सिंह यादव ने महामंत्री का पदभार संभाला। उपाध्यक्ष पद पर ध्रुपराज सिंह, दीपक कुमार श्रीवास्तव, अजीत कुमार सिंह (उच्च शिक्षा) और गुलशन सिंह (शिविर कार्यालय) ने शपथ ली। संयुक्त मंत्री पद पर सुल्तान सिंह, नरेन्द्र कुमार सिंह, सम्पूर्णानन्द त्रिपाठी और आशीष कुमार (उच्च शिक्षा) ने शपथ ग्रहण किया। कोषाध्यक्ष पद पर मो. शमसुद्दीन ने शपथ ली, जबकि कार्यकारिणी सदस्य के रूप में मंजीत कुशवाहा, दीपक कुमार, ऐश्वर्या गुप्ता, पल्लवी शर्मा, मनीष देव यादव, अजय कुमार सिंह, बसन्त सिंह, अवधेश कुमार त्रिपाठी और शिशिर श्रीवास्तव ने शपथ ग्रहण किया। इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) कामता राम पाल, अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) मनोज कुमार द्विवेदी और अपर शिक्षा निदेशक (पत्राचार) सीएल चौरसिया भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के भविष्य और कर्मचारियों की मांगों को लेकर सार्थक चर्चा हुई। अतिथियों ने अपने उद्बोधन में इस बात पर जोर दिया कि कर्मचारी संघ और विभागीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय ही शिक्षा व्यवस्था की नींव को मजबूत करेगा। यह नई कार्यकारिणी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से चुनी गई है। संघ के चुनाव 3 जून को प्रयागराज और 4 जून को लखनऊ में मतदान के साथ संपन्न हुए थे। 5 जून को मतगणना के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी दीपक जायसवाल ने परिणामों की विधिवत घोषणा की थी। शुक्रवार के शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही, इस नवनिर्वाचित टीम का विधिवत कार्यकाल प्रारंभ हो गया है, जिससे निदेशालय के कर्मचारियों में अपनी समस्याओं के समाधान के प्रति नई उम्मीदें जगी हैं।
समस्तीपुर में शिक्षक पात्रता परीक्षा(टीईटी) से पूर्व बहाल शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग को लेकर जिला प्राथमिक शिक्षक संघ का एक प्रतिनिधि मंडल केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर से मिला। इसके लिए सांसद को सवाल उठाने की मांग की। मांगों से संबंधित एक ज्ञापन भी उन्हें सौंपा। संघ के अध्यक्ष अनंत कुमार राय एवं प्रधान सचिव अनिल कुमार ने कहा कि नि: शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम,2009 एवं संशोधित अधिनियम,2017 की नियमावली में संशोधन कर टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा)की अनिवार्यता को लागू किया गया है। संघ की ओर से राज्यसभा सांसद एवं केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर को ज्ञापन सौंपा गया है। संघ ने माननीय मंत्री से मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे को संसद में उठाकर केन्द्र सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने का आग्रह किया है। संघ के अध्यक्ष एवं प्रधान सचिव ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के कारण शिक्षा अधिकार अधिनियम,2009(संशोधित 2017) में संशोधन किए जाने से वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षक शिक्षिकाओं पर भी टीईटी की अनिवार्यता लागू होने की स्थिति बन गई है। संघ का कहना है कि यह उन शिक्षकों के साथ अन्याय है जिनकी नियुक्ति तत्कालीन सरकारी नियमों, विज्ञापनों और निर्धारित शर्तों के आधार पर हुई थी। अनेक शिक्षक तीन दशक से अधिक समय से सेवा दे रहे हैं और अब उन पर टीईटी की अनिवार्यता लागू करना न्याय के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत है। ऐसे शिक्षकों ने सालों तक विद्यालयों में अपनी सेवा दी है और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जिला प्राथमिक शिक्षक संघ ने मंत्री से मांग की है कि संसद में इस विषय को प्रमुखता से उठाकर केन्द्र सरकार से आर टी ई नियमावली में आवश्यक संशोधन कराने और साल 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त अथवा शिथिलता प्रदान करने की दिशा में पहल की जाय। दिल्ली में सांसदों के घरों का होगा घेराव संघ के सचिव ने कहा कि अभी ज्ञापन सौंपा गया है कि सरकार इस नियम को बनाए इसके लिए दिल्ली में सभी संसदों के घरों पर घेरा डालो डेरा डालो कार्यकर्म की जल्द शुरूआत की जाएगी। सरकार को हम मजबूर करेंगे कि इसको लेकर सांसद नियम बनाया जाय। जरूर हुई जंतरमंतर भी धरना प्रदर्शन किया जाएगा। जिसमें पूरे देश के नि: शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम,2009 के तहत बहाल शिक्षक शामिल होंगे।
सलूंबर जिले में 'हरियालो राजस्थान अभियान' के प्रभावी क्रियान्वयन और लक्ष्य पूर्ति की समीक्षा के लिए एक बैठक आयोजित की गई। अतिरिक्त जिला कलक्टर डॉ. दिनेश राय सापेला ने जिला कलेक्ट्रेट परिसर स्थित वीसी कक्ष में इसकी अध्यक्षता की। अधिकारी और कर्मचारी हुए शामिल इस बैठक में जिले के सभी उपखंड अधिकारी, तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी और विभिन्न विभागों के जिला एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। बैठक में अभियान की प्रगति, विभागवार पौधारोपण लक्ष्य, जियो-टैगिंग की स्थिति और आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई। पौधारोपण को लेकर दिए निर्देश डॉ. सापेला ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि उन्हें आवंटित लक्ष्य के अनुरूप समयबद्ध तरीके से पौधारोपण कार्य पूरा किया जाए। उन्होंने जोर दिया कि लगाए गए प्रत्येक पौधे का संरक्षण और नियमित निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अतिरिक्त जिला कलक्टर ने कहा कि सभी पौधों की जियो-टैगिंग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए, ताकि अभियान की पारदर्शी निगरानी और वास्तविक प्रगति का आकलन हो सके। उन्होंने उपखंड अधिकारियों को अपने अधीनस्थ अधिकारियों और संबंधित विभागों की नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए। डॉ. सापेला ने जनभागीदारी के साथ अभियान को सफल बनाने के लिए आवश्यक समन्वय स्थापित करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी तालमेल से काम करते हुए अभियान को जिले में प्रभावी बनाएं। शिक्षा विभाग की धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी बैठक में शिक्षा विभाग की धीमी प्रगति पर डॉ. सापेला ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे शीघ्र लक्ष्य प्राप्त करें। सभी सीबीईओ को अपने-अपने क्षेत्र में पौधारोपण कार्य में तेजी लाने और निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरा करने के लिए कहा गया। अतिरिक्त जिला कलक्टर ने सभी विभागों को आगामी पांच दिनों के भीतर पौधारोपण और जियो-टैगिंग की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट जिला प्रशासन को अनिवार्य रूप से भेजने का निर्देश दिया। यह रिपोर्ट अभियान की प्रभावी समीक्षा और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने में सहायक होगी। बैठक में 'हरियालो राजस्थान अभियान' को जनआंदोलन का रूप देने, पौधों के संरक्षण, नियमित निगरानी और विभागीय समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
सीकर जिले के कटराथल में स्थित शेखावाटी यूनिवर्सिटी में 18 जुलाई को आयोजित होने वाली शेखावाटी ज्ञान सभा में राज्यपाल और विधानसभा स्पीकर सहित कई विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कार और विकसित भारत जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर 3 अलग-अलग सत्र आयोजित किए जाएंगे। ज्ञान सभा का उद्देश्य शिक्षा जगत, युवाओं और समाज के बीच राष्ट्र निर्माण से जुड़े विचारों का आदान-प्रदान करना और भारतीय मूल्यों पर आधारित विकास की दिशा में संवाद को आगे बढ़ाना है। शेखावाटी यूनिवर्सिटी और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में शेखावाटी ज्ञान सभा आयोजित होगी। शेखावाटी ज्ञान सभा की अध्यक्षता करेंगे राज्यपाल यूनिवर्सिटी के VC डॉ. अनिल कुमार राय ने बताया कि 18 जुलाई को सुबह 10 बजे होने वाले उद्घाटन समारोह होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े करेंगे और मुख्य अतिथि राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी होंगे। सभा में होंगे कुल तीन सत्र, मुख्य वक्ता होंगे RSS के बाबूलाल VC प्रोफेसर अनिल राय ने बताया कि सभा में कुल 3 सत्र होंगे। मुख्य वक्ता RSS के जयपुर प्रांत प्रचारक बाबूलाल होंगे। पहले सत्र में शेखावाटी की शिक्षा-संस्कृति का पुनरूत्थान, दूसरे सत्र में व्यापार में शेखावाटी का योगदान और आज के युवाओं की सहभागिता और तीसरे सत्र में शिक्षा के क्षेत्र में उभरता शेखावाटी: शिक्षा संस्थानों की भूमिका पर मंथन होगा। सभी सत्र में भारतीय भाषा अभियान के राष्ट्रीय संयोजक जयदीप राय मौजूद रहेंगे। शेखावाटी ज्ञान सभा को शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, जयपुर प्रांत के अध्यक्ष प्रो. राजीव सक्सेना, संरक्षक दुर्गाप्रसाद अग्रवाल, प्रांत सहसंयोजक धर्मवीर फौजदार व मनमोहन सिंह, नितिन कासलीवाल, ईश्वर सृष्टि, कमलेश पारीक और JNVU जोधपुर के पूर्व VC डॉ. लोकेश सिंह शेखावत संबोधित करेंगे।
चूरू में राजस्थान शिक्षक संघ के बैनर तले शुक्रवार को शिक्षकों ने तबादलों के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षकों ने संयुक्त निदेशक कार्यालय के सामने शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका और सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी शिक्षक शहर के इंद्रमणि पार्क में एकत्रित हुए। वहां से उन्होंने संयुक्त निदेशक कार्यालय तक एक आक्रोश रैली निकाली। रैली के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कार्यालय के मुख्य द्वार पर नोकझोंक भी हुई, जिसके बाद शिक्षक सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि स्थानांतरण प्रक्रिया में मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी की गई है। उनका कहना था कि बेहतर कार्य करने वाले शिक्षकों को भी दूर-दराज के क्षेत्रों में भेज दिया गया है, जिससे प्रदेश भर के स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हुई है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को खत्म करने में लगे हैं और उन्होंने आज तक शिक्षक संगठनों से कोई बातचीत नहीं की है। कई स्कूल अब केवल तृतीय श्रेणी शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। शिक्षकों ने मांग की है कि सभी विवादास्पद तबादला आदेशों को तुरंत रद्द किया जाए। इसके साथ ही, सभी संवर्गों के लिए एक स्थायी स्थानांतरण नीति लागू करने और पिछले 8 वर्षों से लंबित तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले तुरंत करने की मांग की गई। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो आगामी 25 अगस्त को बीकानेर स्थित शिक्षा निदेशालय का घेराव कर प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
भगवान बुद्ध की तपोस्थली, भगवान महावीर की निर्वाण स्थली और विश्व प्रसिद्ध नालंदा महाविहार की धरती अब एक नए और आधुनिक युग में प्रवेश करने को तैयार है। बिहार सरकार ने अगले बीस वर्षों के भीतर इस संपूर्ण क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन, शिक्षा और ज्ञान केंद्र बनाने के लिए 'राजगीर रीजनल प्लानिंग एरिया (आरआरपीए) मास्टर प्लान-2045' का विस्तृत मसौदा तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया के तहत नालंदा कलेक्ट्रेट स्थित हरदेव भवन सभागार में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रमंडलीय आयुक्त मयंक वरवड़े ने की। इस बैठक में जन प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय नीति-निर्माताओं ने मास्टर प्लान के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-मंथन किया, ताकि विकास की राह में आने वाली चुनौतियों का समय रहते समाधान निकाला जा सके। सुनियोजित विकास का रोडमैप इस मास्टर प्लान की सबसे बड़ी विशेषता इसका विकेंद्रीकृत विकास मॉडल है, जिसके तहत पांच अलग-अलग नगरों को उनकी विशिष्टता के आधार पर विकसित किया जाएगा। योजना के अनुसार, राजगीर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और संस्थागत हब के रूप में स्थापित किया जाएगा, जबकि नालंदा को विश्व धरोहर और वेलनेस टूरिज्म के मुख्य केंद्र के रूप में संवारा जाएगा। सिलाव को क्षेत्रीय व्यापार और थोक वाणिज्यिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। वहीं, पावापुरी को शिक्षा और उच्च स्तरीय सेवाओं का हब बनाया जाएगा और गिरियक को इको-टूरिज्म के आकर्षण केंद्र के रूप में पहचान दी जाएगी। इस योजना में न केवल ये शहर, बल्कि इनके आसपास के सौ से अधिक गांवों को भी शामिल किया गया है, ताकि पूरे क्षेत्र का समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके। बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण और भविष्य की जरूरतें आने वाले दो दशकों में आबादी के दोगुने होने के अनुमान को देखते हुए, यातायात और सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तृत खाका खींचा गया है। क्षेत्र की प्रमुख सड़कों को 45 मीटर तक चौड़ा करने के साथ ही राजगीर, सिलाव और नालंदा रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प किया जाएगा। यातायात के दबाव को कम करने के लिए ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बाईपास के पास एक नया अंतरराज्यीय बस टर्मिनल और सिलाव में ट्रांसपोर्ट नगर के साथ ट्रक टर्मिनल का निर्माण प्रस्तावित है। साथ ही, राजगीर और पावापुरी जैसे प्रमुख स्थलों पर मल्टीलेवल पार्किंग और आधुनिक ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली लागू की जाएगी। पर्यटकों की सुविधा के लिए ई-बस सेवा, गोल्फ कार्ट और डिजिटल गाइड सिस्टम जैसे नवाचारों को भी योजना का हिस्सा बनाया गया है। स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक विकास पर विशेष जोर आर्थिक प्रगति के लिए इस मास्टर प्लान में पर्यटन के साथ-साथ औद्योगिक विकास को भी प्राथमिकता दी गई है। घोसरावां और सैदी जैसे क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योग, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां और कोल्ड चेन हब स्थापित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 500 और 200 बेड वाले कई अत्याधुनिक अस्पतालों व ट्रॉमा सेंटरों के निर्माण का प्रस्ताव है। वहीं, शिक्षा के क्षेत्र में भी नए अनुसंधान और नवाचार संस्थानों की स्थापना पर ध्यान दिया गया है, ताकि नालंदा विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सके। पर्यावरण संरक्षण और किसानों के हितों का संतुलन विकास की इस दौड़ में प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण को सरकार ने विकास का आधार माना है। कुल भूमि का लगभग 46.7 प्रतिशत हिस्सा कृषि उपयोग के लिए सुरक्षित रखने का प्रस्ताव है, ताकि अनियंत्रित शहरीकरण से खेती की जमीन को बचाया जा सके। आहर-पईन प्रणाली के पुनर्जीवन, भूजल पुनर्भरण और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन के जरिए क्षेत्र को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने की प्रतिबद्धता भी इस योजना में दिखाई गई है। राजगीर वन क्षेत्र और जल स्रोतों को संरक्षित करने के लिए इको-सेंसिटिव जोन में निर्माण कार्यों को कड़े पर्यावरणीय नियमों के दायरे में रखा जाएगा। जनभागीदारी से तैयार होगा अंतिम खाका बैठक के दौरान प्रमंडलीय आयुक्त मयंक वरवड़े ने स्पष्ट किया कि फंडिंग इस योजना की सबसे बड़ी चुनौती है, जिसे देखते हुए अंतिम मसौदे को व्यावहारिक बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों के सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी। सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने मसौदे में हवाई अड्डे के प्रावधान पर जोर दिया, जबकि स्थानीय प्रतिनिधियों ने स्थानीय लोगों की समस्याओं और पहाड़ों से पानी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित न करने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव रखे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अभी एक प्रारूप है और अंतिम अधिसूचना जारी करने से पहले आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों से आपत्तियां व सुझाव मांगे जाएंगे, ताकि एक सर्वमान्य और प्रभावी मास्टर प्लान लागू किया जा सके। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी उदिता सिंह, पुलिस अधीक्षक भारत सोनी समेत जिले के तमाम वरिष्ठ अधिकारी और प्रमुख जन प्रतिनिधि मौजूद रहे।

