परिवहन विभाग ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 11 हजार करोड़ रुपए का महत्वाकांक्षी राजस्व लक्ष्य तय कर दिया है, जो पिछले साल के मुकाबले 1400 करोड़ रुपए अधिक है। इस लक्ष्य के साथ ही विभाग ने सभी आरटीओ कार्यालयों को टारगेट आवंटित कर मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 की रेवेन्यू रैंकिंग भी जारी कर दी गई है, जिसमें जयपुर आरटीओ द्वितीय प्रदेश में अव्वल रहा, जबकि जयपुर आरटीओ प्रथम सबसे फिसड्डी साबित हुआ। परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा ने सभी आरटीओ को हर माह लक्ष्य अर्जन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। 11 हजार करोड़ में से 10,235 करोड़ का लक्ष्य प्रदेश के आरटीओ को दिया गया है। इसके अलावा 180 करोड़ का लक्ष्य पुलिस को सीएफ अर्जन से और 320 करोड़ ऑल इंडिया टूरिस्ट व नेशनल परमिट से जुटाने का अनुमान है। रोडवेज से 115 करोड़ रुपए की प्राप्ति का लक्ष्य रखा गया है। जयपुर आरटीओ-प्रथम को सबसे ज्यादा, दौसा को सबसे कम लक्ष्य नए वित्त वर्ष में जयपुर आरटीओ प्रथम को सर्वाधिक 1748.14 करोड़ रुपए का लक्ष्य दिया गया है। जयपुर आरटीओ द्वितीय को 793.64 करोड़ अर्जित करने होंगे। इसके अलावा अजमेर (1033.12 करोड़), जोधपुर (1051.58 करोड़) और उदयपुर (916.28 करोड़) प्रमुख लक्ष्य वाले रीजन हैं। वहीं सबसे कम 350.03 करोड़ का लक्ष्य दौसा आरटीओ को दिया गया है। जयपुर में ही टॉप और फ्लॉप वित्त वर्ष 2025-26 की रैंकिंग में जयपुर आरटीओ द्वितीय 598.26 करोड़ की प्राप्ति के साथ पहले स्थान पर रहा। अजमेर दूसरे और दौसा तीसरे स्थान पर रहे। वहीं जयपुर आरटीओ प्रथम 13वें स्थान पर रहा। बीकानेर 631.02 अचीवमेंट के साथ चौथे नंबर, चित्तौडगढ़ 553.33 करोड़ प्राप्ति के साथ 5वें, जोधपुर 807.07 के साथ छठवें नंबर पर, सीकर 656.66 करोड़ राजस्व के साथ 7वें, उदयपुर 694.84 करोड़ प्राप्ति के साथ 8वें, भरतपुर 300.18 करोड़ अर्जित करने पर नवीं, कोटा 462.37 करोड़ के साथ 10वें नंबर पर रहा। 86.72% लक्ष्य ही हासिल हुआवित्त वर्ष 2025-26 में विभाग को 9600 करोड़ का लक्ष्य मिला था, जिसके मुकाबले 8325 करोड़ रुपए ही प्राप्त हो सके। यानी विभाग केवल 86.72% लक्ष्य ही हासिल कर पाया। बड़े लक्ष्य, लेकिन कमजोर कन्वर्जनपिछले साल विभाग 100% लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया। ऐसे में 1400 करोड़ बढ़ाकर 11 हजार करोड़ का लक्ष्य देना चुनौतीपूर्ण है। बिना सिस्टम सुधार के लक्ष्य हासिल करना मुश्किल दिखता है। जयपुर मॉडल में असंतुलन एक ही शहर के दो आरटीओ में बड़ा अंतर सामने आया है। जहां आरटीओ द्वितीय टॉप पर है, वहीं आरटीओ-प्रथम सबसे नीचे है। यह स्पष्ट करता है कि परफॉर्मेंस पूरी तरह प्रशासनिक क्षमता और मॉनिटरिंग पर निर्भर है।
जिला स्तरीय तकनीकी समिति की बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्केल ऑफ फाइनांस की स्वीकृति
सिटी रिपोर्टर | बोकारो डीसी अजय नाथ झा ने सोमवार को जिला स्तरीय तकनीकी समिति (डीएलटीसी) की बैठक की। बैठक में इस वित्तीय वर्ष के लिए स्केल ऑफ फाइनांस को जिला स्तर पर अनुमोदित किया गया। बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि स्केल ऑफ फाइनेंस को पूर्व में दिनांक 06 अप्रैल को आयोजित राज्य स्तरीय तकनीकी समिति की बैठक में स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। सरकार के निर्देश पर इसे जिला स्तर पर औपचारिक रूप से पारित किया गया। निर्देश दिया कि जिले में सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए तथा किसानों को इसके प्रति जागरूक किया जाए। इसके साथ ही देशी गाय के पालन को प्रोत्साहित करने एवं अंडा उत्पादन हेतु मुर्गी पालन के विस्तार पर भी प्रस्ताव तैयार करने को कहा। पलाश व लाह उत्पादन को बढ़ावा देने की पहल बैठक में जिले में पलाश की खेती नहीं होने का मुद्दा उठाया गया। इस पर निर्णय लिया गया कि डीडीसी की अध्यक्षता में वन विभाग, कृषि विभाग एवं नाबार्ड के साथ समन्वय स्थापित कर पलाश व लाह उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नामकुम स्थित गोंद और राल अनुसंधान संस्थान का भ्रमण किया जाएगा तथा एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जिले में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए निर्देश दिया गया कि उपलब्ध 1711 सरकारी तालाबों का उपयोग किया जाए। बैठक में मधुमक्खी पालन को जिला खनिज फाउंडेशन न्यास (डीएमएफटी) मद से बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया।
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