भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार अगले एक दशक में तीन गुना होने का अनुमान: जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डिमन
अमेरिकी बैंक जेपी मॉर्गन चेस के सीईओ जेमी डिमन ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था का आकार अगले एक दशक में करीब तीन गुना हो सकता है और कंपनी देश में अपना विस्तार कर रही है।
Stock Market Today 22 September, 2026: मामूली तेजी के साथ खुला शेयर बाजार, आईटी स्टॉक्स में गिरावट
हफ्ते के दूसरे ट्रेडिंग सेशन में ट्रेंट, इंडिगो, एशियन पेंट्स जैसी प्रमुख कंपनियों के शेयर बढ़त लेकर खुले।
Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा पॉजिटिव शुरुआत के संकेत, यूएस, एशिया बाजारों में तेजी
Stock Market Live Update:भारतीय शेयर बाज़ार की शुरुआत सकारात्मक रहने की उम्मीद है, क्योंकि मंगलवार, 22 सितंबर को गिफ्ट निफ्टी गैप-अप ओपनिंग का संकेत दे रहा है।मंगलवार को एशियाई बाजार बढ़त के साथ खुले, जबकि अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे पिछले हफ़्ते हुए नुकसान की भरपाई हो गई। गिफ्ट निफ्टी 23,521.50 के स्तर के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स की पिछली क्लोजिंग से लगभग 75.20 अंक ऊपर है, जो भारतीय शेयर बाज़ार के इंडेक्स के लिए सकारात्मक शुरुआत का संकेत है।सोमवार को बेंचमार्क इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। सेंसेक्स में 564 अंकों की बढ़त हुई और निफ्टी ने लगातार चौथे सेशन में अपनी बढ़त का सिलसिला जारी रखा। इस तेज़ी को कच्चे तेल की कीमतों में कमी, विदेशी फंड के नए इनफ़्लो और ग्लोबल इक्विटी बाज़ारों में बढ़त का समर्थन मिला।30-शेयर वाला BSE सेंसेक्स 564.03 अंक या 0.76% बढ़कर 74,858.99 पर बंद हुआ, जो एक हफ़्ते से ज़्यादा समय में इसका सबसे ऊंचा स्तर है। सेशन के दौरान, इंडेक्स 692.44 अंक या 0.93% तक चढ़कर 74,987.40 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया।
Stock Market Update: शेयर बाजार की आज की हलचल, सेंसेक्स और निफ्टी पर नजर
Stock Market Update: शेयर बाजार की आज की हलचल, सेंसेक्स और निफ्टी पर नजर
Stock Market Today: सेंसेक्स 500 अंक तक उछला, निफ्टी 23,400 के पार; NSE IPO पर भी नजर
Stock Market Today: सेंसेक्स 500 अंक तक उछला, निफ्टी 23,400 के पार; NSE IPO पर भी नजर
हफ्ते के पहले ट्रेडिंग सेशन में अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, इंडिगो, टाइटन जैसी प्रमुख कंपनियों के शेयर अच्छी बढ़त लेकर खुले।
Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत
Stock Market Live Update: GIFT Nifty के ट्रेंड्स भारत में ब्रॉडर इंडेक्स के लिए फ्लैट से नेगेटिव शुरुआत का संकेत दे रहे हैं, जिसमें 17 पॉइंट्स या 0.07 प्रतिशत की गिरावट दिख रही है। निफ्टी फ्यूचर्स 23,344 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहे थे। शुक्रवार को FIIs की कैश में हल्की खरीदारी रही। लेकिन वायदा में बिकवाली हुई। उधर शुक्रवार को अमेरिकी बाजार मिले-जुले थे । डाओ जोंस में हल्का दबाव दिखा। लेकिन नैस्डैक और S&P में बढ़त हुई। सुबह एशिया में कॉस्पी डेढ़ परसेंट ऊपर ट्रेड करता नजर आया। इधर जापान के बाजार में आज छुट्टी है।
वैश्विक वित्तीय तंत्र की धुरी माने जाने वाले अमेरिकी शेयर बाजार यानी वॉल स्ट्रीट (Wall Street) के लिए आने वाला पूरा कारोबारी सप्ताह बेहद हलचल भरा और महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है। दुनिया भर के इक्विटी मार्केट्स, संस्थागत फंड मैनेजर्स और खुदरा निवेशकों की नजरें इस समय सीधे अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े प्रमुख व्यापक आर्थिक संकेतकों (Macroeconomic Indicators) पर टिकी हुई हैं। इस सप्ताह अमेरिका के रियल एस्टेट व हाउसिंग सेक्टर से जुड़े बहुप्रतीक्षित नए आंकड़े सामने आने वाले हैं, जो सीधे तौर पर फेडरल रिजर्व (US Fed) की ब्याज दरों की दिशा और उपभोक्ताओं की वास्तविक क्रय क्षमता का रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे। इसके साथ ही, यूएस लेबर डिपार्टमेंट द्वारा बेरोजगारी भत्ते से जुड़े साप्ताहिक आंकड़े भी सार्वजनिक किए जाएंगे, जिससे वॉल स्ट्रीट पर डाउ जोन्स (Dow Jones), एसएंडपी 500 (S&P 500) और नैस्डैक (Nasdaq) में तेज उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकता है।नए घरों की बिक्री के आंकड़े तय करेंगे हाउसिंग सेक्टर का भविष्य: गुरुवार को जारी होगी अमेरिकी रिपोर्टवॉल स्ट्रीट के विश्लेषकों के अनुसार, इस पूरे सप्ताह का सबसे बड़ा आर्थिक ट्रिगर गुरुवार को आने वाली अमेरिकी न्यू होम सेल्स (New Home Sales) की आधिकारिक मासिक रिपोर्ट होगी। यह रिपोर्ट अमेरिका के संपूर्ण आवासीय रियल एस्टेट क्षेत्र की अंतर्निहित सेहत को समझने के लिए सबसे सटीक पैमाना मानी जाती है। इसमें नए निर्मित मकानों की वास्तविक बिक्री के साथ-साथ उन निर्माणाधीन आवासीय इकाइयों के बिक्री अनुबंधों (Sales Contracts) का व्यापक ब्योरा शामिल होता है, जिनका निर्माण कार्य अभी प्रगति पर है। यह डेटा पहले से निर्मित और इस्तेमाल किए जा चुके मौजूदा घरों की बिक्री रिपोर्ट (Existing Home Sales) से बिल्कुल अलग होता है। जहां मौजूदा घरों की बिक्री केवल द्वितीयक बाजार के लेन-देन को दर्शाती है, वहीं नए घरों की बिक्री के आंकड़े सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था में नई पूंजी के निवेश, होमबिल्डर्स की कारोबारी स्थिति, सीमेंट, स्टील व लकड़ी जैसे बुनियादी निर्माण सामग्रियों की मांग और हाउसिंग सप्लाई-चेन के चक्र की सटीक जानकारी प्रदान करते हैं।महंगे मॉर्गेज लोन के बावजूद अगस्त में हल्की रिकवरी की उम्मीद: वॉल स्ट्रीट अर्थशास्त्रियों का पूर्वानुमानअमेरिका के प्रमुख आर्थिक अनुसंधान संस्थानों और वॉल स्ट्रीट अर्थशास्त्रियों का प्राथमिक आकलन है कि अगस्त महीने के दौरान नए घरों की बिक्री के आंकड़ों में मामूली सुधार या हल्की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। यह संभावित बढ़ोतरी इसलिए बेहद उल्लेखनीय मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में जारी हुई मौजूदा घरों की बिक्री की रिपोर्ट में लगातार संकुचन और गिरावट दर्ज की गई थी। अमेरिकी आवासीय बाजार लंबे समय से रिकॉर्ड तोड़ ऊंची मॉर्गेज दरों (Mortgage Rates) और आसमान छूती अचल संपत्ति की कीमतों के दोहरे दबाव से जूझ रहा है। यदि अत्यधिक ब्याज दरों के इस चुनौतीपूर्ण दौर में भी नए घरों की बिक्री में सकारात्मक रुझान दिखाई देता है, तो इससे निर्माण क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के शेयरों में मजबूत तेजी लौटने की उम्मीद है, अन्यथा किसी भी नकारात्मक आंकड़े से हाउसिंग इंडेक्स में भारी बिकवाली का जोखिम भी बन सकता है।मॉर्गेज दरों पर चौतरफा दबाव: तेल संकट, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक जियोपॉलिटिकल तनाव की मारअमेरिकी नागरिकों के लिए होम लोन की लागत यानी मॉर्गेज दरों का ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तरों पर बने रहना इस समय अर्थव्यवस्था का सबसे संवेदनशील बिंदु बन चुका है। साल 2026 की शुरुआत से पहले ही मॉर्गेज दरें दशकों के उच्चतम स्तर पर थीं, लेकिन मौजूदा वर्ष के दौरान इनमें और अधिक उछाल दर्ज किया गया है। इस वित्तीय दबाव की जड़ें केवल घरेलू मौद्रिक नीति में नहीं, बल्कि जटिल अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनावों में भी गहराई से समाई हुई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य व कूटनीतिक तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति शृंखला पर गहरा दबाव बना हुआ है। तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार हो रहे इजाफे ने मुद्रास्फीति (Inflation) की आशंकाओं को फिर से भड़का दिया है, जिसके चलते अमेरिकी ट्रेजरी की लंबी अवधि वाली 10-वर्षीय और 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड्स (Treasury Bond Yields) में तेज उछाल देखा जा रहा है। चूंकि अधिकांश अमेरिकी बैंक और निजी ऋणदाता अपने 30-वर्षीय फिक्स्ड होम लोन की ब्याज दरें इन्हीं बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड्स को आधार बनाकर तय करते हैं, इसलिए आम अमेरिकी नागरिक के लिए मकान खरीदना लगातार महंगा होता जा रहा है।गुरुवार को आएंगे बेरोजगारी भत्ते के साप्ताहिक दावे: लेबर मार्केट की मजबूती पर टिकी फेड की नजरेंहाउसिंग डेटा के समानांतर, गुरुवार का दिन अमेरिकी जॉब मार्केट के लिहाज से भी अत्यंत निर्णायक होने वाला है, जब अमेरिकी श्रम विभाग वीकली इनिशियल जॉबलेस क्लेम्स (Initial Jobless Claims) की ताजा रिपोर्ट जारी करेगा। वित्तीय विश्लेषक इन दावों को कॉरपोरेट अमेरिका में हो रही संभावित छंटनियों और श्रम बाजार में नरमी का सबसे सटीक और तात्कालिक संकेतक मानते हैं। इन आंकड़ों पर केंद्रीय बैंक और वॉल स्ट्रीट के रणनीतिकार विशेष रूप से इसलिए नजर गड़ाए रहते हैं, क्योंकि रोजगार का स्तर सीधे तौर पर यह तय करता है कि फेडरल रिजर्व आने वाली बैठकों में ब्याज दरों में कटौती का चक्र जारी रखेगा या सख्त मौद्रिक रुख बरकरार रखेगा। यदि जॉबलेस क्लेम्स अप्रत्याशित रूप से बढ़ते हैं, तो यह लेबर मार्केट में संभावित मंदी का संकेत होगा, जबकि स्थिर आंकड़े अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित मजबूती को प्रमाणित करेंगे।अमेरिकी जॉब मार्केट की जमीनी हकीकत: लगातार महंगाई के बावजूद रोजगार का मजबूत किलापिछले एक साल के समग्र रुझानों का विश्लेषण करें तो यह साफ नजर आता है कि अमेरिकी बेरोजगारी भत्ते के साप्ताहिक दावे अधिकांश समय ऐतिहासिक रूप से अपने निचले दायरे के भीतर ही स्थिर बने रहे हैं। उच्च जीवनयापन लागत और लगातार बनी हुई कोर महंगाई ने जहां आम अमेरिकी उपभोक्ताओं के घरेलू बजट और छोटे-बड़े व्यवसायों के परिचालन मुनाफे पर कड़ा दबाव डाला हुआ है, वहीं व्यापक अमेरिकी रोजगार बाजार ने अभूतपूर्व लचीलापन (Resilience) प्रदर्शित किया है। स्वास्थ्य सेवा, तकनीक, लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में श्रम की सतत मांग के कारण बड़े पैमाने पर स्थायी बेरोजगारी की नौबत नहीं आई है। हालांकि, निवेशक इस बात को लेकर सतर्क हैं कि क्या यह लचीलापन आने वाले महीनों में भी बरकरार रहेगा या महंगे कर्जों का दबाव अंततः नौकरियों के नए सृजन को धीमा कर देगा, जिसका सीधा असर पूरे सप्ताह अमेरिकी शेयर बाजार की चाल पर देखने को मिलेगा।
विदेशी निवेशकों ने Stock Market से की भारी निकासी, सितंबर में निकाले 20,974 करोड़ रुपये
वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और बढ़ता बॉण्ड प्रतिफल, महंगे कच्चे तेल तथा कमजोर होते रुपये के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार से दूरी बनानी शुरू कर दी हैं। एफपीआई ने सितंबर में अबतक भारतीय शेयरों से 20,974 करोड़ रुपये निकाले हैं। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (सीडीएसएल) के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में हुई बिकवाली से पहले विदेशी निवेशकों ने जुलाई और अगस्त में भारतीय शेयरों में क्रमशः 20,200 करोड़ रुपये और 29,630 करोड़ रुपये का निवेश किया था। सितंबर की बिकवाली के साथ ही 2026 में एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से कुल 2.45 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। यह आंकड़ा 2025 में पूरे साल के दौरान हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से भी अधिक है। हालांकि, इस दौरान प्राथमिक या आईपीओ बाजार के जरिये एफपीआई का निवेश जारी रहा। वहीं, विदेशी निवेशकों ने भारतीय ऋण या बॉण्ड बाजार में भी बिकवाली की। उन्होंने पूर्ण पहुंच मार्ग (एफएआर) के जरिये 10,296 करोड़ रुपये, स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (वीआरआर) के तहत 1,817 करोड़ रुपये और सामान्य मार्ग से 1,068 करोड़ रुपये की निकासी की। चॉइस वेल्थ के मुख्य निवेश रणनीति अधिकारी धीरज गौड़ के मुताबिक, एफपीआई की हालिया बिकवाली के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और ऊंचा बॉण्ड प्रतिफल, भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतें तथा भारतीय रुपये में कमजोरी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें 3.75-4 प्रतिशत के स्तर पर हैं। इससे भारत और अमेरिका के बीच ब्याज दरों का अंतर कम हुआ है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय परिसंपत्तियों का आकर्षण घटा है। दूसरी ओर, ब्रेंट कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने महंगे तेल को लेकर चिंता और बढ़ा दी है, जिसका असर भारत के आयात बिल और महंगाई पर पड़ सकता है। रुपये पर भी दबाव बना हुआ है। पिछले सप्ताह रुपये में 1.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो चार महीने में उसकी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट रही। रुपया 95.92-95.96 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के आसपास कारोबार करता रहा और कारोबार के दौरान 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को भी पार कर गया। ‘ट्रैक’ के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वेदांत गुप्ते ने कहा कि सितंबर की एफपीआई बिकवाली को मुख्य रूप से कच्चे तेल और डॉलर की स्थिति से जोड़कर देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी का असर केवल भारत पर नहीं, बल्कि उभरते बाजारों पर व्यापक रूप से पड़ रहा है।
Stock Market Update: सेंसेक्स लगभग सपाट, निफ्टी में हल्की बढ़त; IT शेयरों पर दबाव
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भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत तक रहने की उम्मीद: वित्त वर्ष 2027
नई दिल्ली, भारत चालू वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5-7 प्रतिशत हासिल करने की राह पर है।
'Smell Test' में फेल हुआ GDP का दावा! PM Modi के GDP Growth आंकड़ों पर जनता को भरोसा क्यों नहीं?
'आशुतोष की बात' में वरिष्ठ पत्रकार राजेश महापात्रा ने सरकार के जीडीपी आंकड़ों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ये आंकड़े अर्थशास्त्रियों के बुनियादी 'स्मेल टेस्ट' में पूरी तरह फेल हो चुके हैं।
GDP Growth vs. Reality: 7.8% growth—yet why aren't people's earnings rising?
'राजेश का अर्थ राज' में वरिष्ठ पत्रकार राजेश महापात्रा ने सवाल उठाया है कि हाई जीडीपी ग्रोथ के बावजूद आम आदमी की जेब खाली क्यों है? स्लम इलाकों की घटती खपत, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी का जिक्र करते हुए उन्होंने सरकार से देश की असली आर्थिक तस्वीर पेश करने वाले आंकड़े जारी करने की मांग की है।
India's GDP Row: पहले Subhash Garg अब Shankar Sharma ने उठाए GDP Growth पर सवाल
पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने GDP के आधिकारिक आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। अब दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा ने ‘Real Feel GDP’ का मुद्दा उठाते हुए कहा है कि आंकड़ों में ग्रोथ भले ही 7% से ज्यादा दिख रही हो, लेकिन आम लोगों को इसका असर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में उतना महसूस नहीं होता।
Economy Boom or Fake Data? GDP Growth 7.8% की असली सच्चाई क्या है?
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% जीडीपी (GDP) ग्रोथ के आंकड़ों पर जहां पीएम मोदी और सरकार अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, वहीं देश के जाने-माने अर्थशास्त्रियों ने इसकी सच्चाई पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
Stock Market Opening : हफ्ते की शानदार शुरुआत! 189 अंक चढ़कर खुला Nifty, सेंसेक्स 788 अंक ऊपर
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Stock Market Timing Change: निवेशकों के लिए बड़ी खबर! आज से बदल गई NSE-BSE की ट्रेडिंग टाइमिंग, देखें नया शेड्यूल

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