Stock Market Update: शेयर बाजार में जोरदार वापसी, सेंसेक्स 879 अंक उछला, निफ्टी 22,500 के पार बंद
Stock Market Update: शेयर बाजार में जोरदार वापसी, सेंसेक्स 879 अंक उछला, निफ्टी 22,500 के पार बंद
GDP Growth: खुल कर खर्च कर रहे भारतीय, 7.3% की रफ्तार से बढ़ेगी इकोनॉमी, UN की रिपोर्ट में अनुमान
UNCTAD की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP ग्रोथ रेट 7.3% रह सकती है. घरेलू मांग, मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर को इसकी वजह बताया गया है.
2 दिन की गिरावट के बाद शुक्रवार, 9 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजारों में शानदार तेजी लौटी। सेंसेक्स 879.09 अंकों या 1.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,472.33 पर बंद हुआ। निफ्टी 288.65 अंकों या 1.3 प्रतिशत के उछाल के साथ 22,520.45 पर बंद हुआ। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 3 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया। दिन में सेंसेक्स पिछली क्लोजिंग से 1,075.96 अंक तक चढ़कर 72,669.20 के हाई तक गया। इसी तरह निफ्टी भी पिछली क्लोजिंग से 348.95 अंक तक चढ़कर 22,580.75 के हाई तक गया।गुरुवार को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 462.33 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने के बाद यह 465.33 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। यानि कि 3 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी। ITस्टॉक्स में तेजी, कच्चे तेल की कीमत में गिरावट, रुपये में बढ़त जैसे फैक्टर्स के चलते बाजार में तेजी आई।निफ्टी पर ऑयल एंड गैस को छोड़कर दूसरे सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए हैं। सबसे ज्यादा 3 प्रतिशत की तेजी IT इंडेक्स में दिखी। निफ्टी पर अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज, ITC, आयशर मोटर्स, TCS और HCL टेक्नोलॉजीस टॉप गेनर रहे। वहीं BSE, रिलायंस इंडस्ट्रीज, JSW स्टील और सिप्ला टॉप लूजर रहे।एक दिन पहले क्या रहा था हालगुरुवार, 8 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही थी। यह काफी तगड़ी थी। सेंसेक्स 1,045.46 अंक या 1.44 प्रतिशत का गोता लगाकर ढाई साल से अधिक के निचले स्तर 71,593.24 पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,310.95 अंक तक लुढ़क गया था। निफ्टी 371.25 अंक या 1.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 21 महीने के निचले स्तर 22,231.80 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी 423.15 अंक तक लुढ़का था।कच्चे तेल के दाम में तेजी और घरेलू व वैश्विक स्तर पर मौद्रिक नीति के और सख्त होने की आशंका के चलते ऐसा हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्टूबर की मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू मीटिंग में रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है।Vedanta Share Price: डिविडेंड के ऐलान के बाद माइनिंग कंपनी का शेयर 4% तक चढ़ा, एक साल में 50% मजबूतरुपये की चालशुक्रवार को भारतीय करेंसी रुपये में तेजी रही। यह अमेरिकी मुद्रा डॉलर के मुकाबले 16 पैसे चढ़कर 96.72 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। एक दिन पहले रुपया, अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 13 पैसे की गिरावट के साथ 96.88 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों समेत लगातार बने व्यापक आर्थिक दबाव के कारण रुपये में गिरावट आई।Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Stock Market Update: शेयर बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स 800 अंक से ज्यादा उछला, निफ्टी 22,500 के पार; IT शेयरों में जोरदार तेजी
Stock Market में कैसे लौटी बहार? सेंसेक्स में 800 अंकों की उछाल, इन 3 वजहों से आई तेजी
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को जोरदार वापसी देखने को मिली। सेंसेक्स में 800 से अधिक अंकों का उछाल दर्ज किया गया, वहीं निफ्टी भी 22,500 के स्तर के करीब पहुंच गया। गुरुवार की भारी गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर बिकवाली का शिकार हुए शेयरों में खरीदारी की, जिससे बाजार में यह तेजी आई। खास बात यह रही कि अमेरिकी सरकार द्वारा प्रमुख टेक कंपनियों पर ग्रीन-कार्ड नियमों को लेकर लगाई गई पाबंदियों के बावजूद आईटी शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिली। बाजार में यह रिकवरी काफी हैरान करने वाली रही, क्योंकि गुरुवार की तेज बिकवाली के बाद निवेशकों को आईटी सेक्टर पर और दबाव बढ़ने की आशंका थी। दरअसल, अमेरिकी सरकार ने टीसीएस (TCS), इंफोसिस (Infosys), विप्रो (Wipro) और एचसीएलटेक (HCLTech) जैसी दिग्गज कंपनियों को पर्म (PERM - Permanent Labour Certification) प्रोग्राम से निलंबित कर दिया है, जो एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का एक अहम चरण माना जाता है। हालांकि, US परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम के सीमित इस्तेमाल के बारे में कंपनियों की सफाई, TCS के हालिया तिमाही नतीजे और हालिया गिरावट के बाद सस्ती खरीदारी ने मार्केट के सेंटीमेंट को बेहतर बनाने में मदद की। सुबह 10:11 बजे, BSE सेंसेक्स 804.11 अंक या 1.12% की बढ़त के साथ 72,397.35 पर ट्रेड कर रहा था। इंडेक्स 71,776.67 पर खुला और शुरुआती कारोबार में 72,371.94 के हाई लेवल तक पहुंचा। निफ्टी 50 सुबह 10:13 बजे 22,314.95 पर खुलने के बाद 264.15 अंक या 1.19% बढ़कर 22,495.95 पर पहुंच गया। यह तेज़ी व्यापक थी, जिसमें सभी प्रमुख ब्रॉड-मार्केट इंडेक्स ऊपर कारोबार कर रहे थे। निफ्टी 100 में 1.16%, निफ्टी 200 में 1.21% और निफ्टी 500 में 1.12% की बढ़त हुई। निफ्टी मिडकैप 50 और निफ्टी मिडकैप 100 क्रमशः 1.35% और 1.39% चढ़े, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.64% की बढ़त हुई। IT शेयरों ने रिकवरी की अगुवाई की सबसे बड़ी बढ़त IT शेयरों से मिली, जो US ग्रीन-कार्ड प्रतिबंधों और टेक्नोलॉजी पर खर्च के आउटलुक को लेकर चिंताओं के बीच दबाव में थे। शुरुआती कारोबार में निफ्टी IT इंडेक्स 3.02% बढ़कर 28,574.85 पर पहुंच गया और मार्केट की हालिया स्थिति में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेक्टर इंडेक्स बन गया। TCS के शेयरों में 4.98% की तेज़ी आई, जबकि Infosys में 3.07%, Wipro में 3.23% और Tech Mahindra में 2.13% की बढ़त हुई। Coforge 2.82%, Persistent Systems 2.66%, Mphasis 3.13% और HCLTech 1.95% ऊपर चढ़े। यह तेज़ी इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिकी सरकार द्वारा कई टेक्नोलॉजी कंपनियों को PERM प्रोग्राम से सस्पेंड करने के बाद IT शेयरों पर और दबाव पड़ने की आशंका थी। हालांकि, कंपनियों ने यह साफ़ करना शुरू कर दिया है कि वे इस प्रोग्राम पर कितना निर्भर हैं, जिससे इन्वेस्टर्स को सिर्फ़ हेडलाइन पर प्रतिक्रिया देने के बजाय तुरंत पड़ने वाले असर का आकलन करने में मदद मिल रही है। TCS ने शुक्रवार को स्टॉक एक्सचेंजों को बताया कि पिछले दो सालों में उसके PERM एप्लीकेशन की संख्या सिंगल डिजिट में रही है। कंपनी ने कहा कि उसे उम्मीद नहीं है कि इस रोक से उसकी वर्कफोर्स स्ट्रैटेजी या कस्टमर एंगेजमेंट पर कोई असर पड़ेगा। कंपनी ने अगले पांच सालों में US में 15,000 और लोगों को नौकरी पर रखने की अपनी योजना को भी दोहराया और इस बात पर ज़ोर दिया कि उसकी वर्कफोर्स स्ट्रैटेजी लोकल टैलेंट को नौकरी पर रखने पर आधारित है। माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपने H-1B वीज़ा एप्लीकेशन के बारे में सफाई दी है। हालांकि, H-1B वीज़ा प्रोग्राम और PERM ग्रीन-कार्ड प्रोसेस अलग-अलग हैं, और US की कार्रवाई खास तौर पर परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन एप्लीकेशन से जुड़ी है। इसे भी पढ़ें: US Dollar के मुकाबले Rupee 13 पैसे गिरकर 96.88 पर बंद, Sensex में 1045 अंकों की गिरावट गिरावट के बाद 'बार्गेन बाइंग' शुक्रवार को आई तेज़ी के पीछे एक और अहम वजह 'बार्गेन बाइंग' है। गुरुवार को सेंसेक्स 1,045.46 अंक या 1.44% गिरकर 71,593.24 पर बंद हुआ। निफ्टी 371.25 अंक या 1.64% गिरकर 22,231.80 पर बंद हुआ। इस भारी गिरावट से कई शेयर बिकवाली से पहले के मुकाबले सस्ते हो गए, जिससे उन निवेशकों के लिए मौके बने जो ऐसी कंपनियों के शेयर खरीदना चाहते हैं जिनमें उन्हें लंबे समय में ग्रोथ की संभावना दिखती है। इसे आम तौर पर 'बार्गेन बाइंग' या 'बाइंग द डिप' कहा जाता है। जब कम समय में बाज़ार में तेज़ी से गिरावट आती है, तो कुछ निवेशक कम कीमत पर शेयर खरीदने के लिए आगे आते हैं। उन्हें उम्मीद होती है कि भले ही निकट भविष्य में बाज़ार का मूड कमज़ोर रहे, लेकिन शेयरों का वैल्यूएशन ज़्यादा आकर्षक हो सकता है। इस खरीदारी से बाज़ार में वापसी (रिबाउंड) हो सकती है क्योंकि नई मांग से शेयरों की कीमतों को सहारा मिलता है। इससे 'शॉर्ट कवरिंग' भी हो सकती है, जिसमें जिन ट्रेडर्स ने कीमतों में गिरावट पर दांव लगाया था, वे अपनी पोजीशन बंद करने के लिए शेयर खरीदते हैं, जिससे कीमतों में और तेज़ी आती है। इसे भी पढ़ें: Dollar के मुकाबले Rupee 23 पैसे मजबूत, शुरुआती कारोबार में 96.65 पर पहुंचा TCS के Q2 नतीजों से एक और बढ़ावा मिला गुरुवार को घोषित TCS के सितंबर तिमाही के नतीजों ने भी IT शेयरों के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने में मदद की है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के लिए 13,884 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफ़िट दर्ज किया, जो एक साल पहले के 12,075 करोड़ रुपये से लगभग 15% ज़्यादा है। रेवेन्यू सालाना आधार पर 11.2% बढ़कर 73,188 करोड़ रुपये हो गया। इसका सालाना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रेवेन्यू तिमाही-दर-तिमाही आधार पर लगभग 20% बढ़कर 3.1 बिलियन डॉलर हो गया, जो जुलाई-सितंबर तिमाही में 2.6 बिलियन डॉलर था। AI रेवेन्यू अब कंपनी के कुल रेवेन्यू का 10% से ज़्यादा हो गया है। TCS ने तिमाही के लिए 9.6 बिलियन डॉलर की कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू भी बताई, जिससे निवेशकों को बिज़नेस की रफ़्तार का एक और संकेत मिला। AI परफॉर्मेंस IT कंपनियों में निवेश के नज़रिए से एक अहम हिस्सा बन गई है, क्योंकि क्लाइंट तेज़ी से ऑटोमेशन और AI-आधारित सेवाओं को अपना रहे हैं। कच्चे तेल से थोड़ी राहत, लेकिन जोखिम अब भी बरकरार शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई, जिससे हालिया उछाल के बाद बाजारों को कुछ राहत मिली।सत्र के शुरुआती बाजार आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड 1.31% गिरकर 102.91 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.14% फिसलकर 90.45 डॉलर पर रहा।हालांकि, ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहना भारत के आयात बिल, महंगाई और कॉरपोरेट लागत को लेकर चिंताओं को बनाए रखे हुए है। तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारतीय रुपये पर दबाव डाल सकती है और ब्याज दरों के परिदृश्य को भी जटिल बना सकती है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली भी एक बड़ी चिंता बनी हुई है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड (Geojit Investments Limited) के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी. के. विजयकुमार के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती भारतीय बाजार पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं।
Stock Market Rise: इन 3 वजहों से शेयर बाजार में रौनक! सेंसेक्स 850 अंक उछला, निफ्टी 22500 के पार
Stock Market Rise: गुरुवार के चौतरफा बिकवाली के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने जोरदार बाउंस-बैक किया है। पिछले सत्र में निचले स्तरों पर जाने के बाद ओवरसोल्ड जोन से आई 'वैल्यू बाइंग' और आईटी शेयरों में मची तूफानी खरीदारी के दम पर दोनों मुख्य सूचकांक हरे निशान में ट्रेड कर रहे हैं।सुबह 10:22 बजे, सेंसेक्स 737.26 अंक (1.02%) की मजबूत बढ़त के साथ 72,330.50 और निफ्टी 50 भी 243.20 अंक (1.09%) चढ़कर 22,475.00 के स्तर पर पहुंच गया है।इसके अलावा, निफ्टी बैंक 610 अंक (1.11%) सुधरकर 55,125.50 पर और मिडकैप 100 इंडेक्स 732 अंक (1.26%) चढ़कर 58,615.30 पर आ गया है। अमेरिकी वायदा बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया है।Stock Market Live Update: सेंसेक्स 700 अंक चढ़ा, निफ्टी 22,450 पर, TCS, Apollo Hospitals शेयरों में सबसे ज्यादा तेजीबाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह बदलने की सबसे बड़ी वजह दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के दूसरी तिमाही (Q2 FY27) के शानदार नतीजे रहे, जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स में 3.45% (958 अंक) का उछाल आया। टीसीएस के शेयर में करीब 4% की तेजी ने पूरे बाजार को सहारा दिया।शेयर बाजार में रौनक लौटने की 3 मुख्य वजहें1. आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी: दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में 15% मुनाफा बढ़कर ₹13,884 करोड़ रहने और ₹12 प्रति शेयर डिविडेंड के ऐलान से आईटी शेयरों में शानदार तेजी आई है। टीसीएस का शेयर करीब 4% उछला, जिसने पूरे निफ्टी आईटी इंडेक्स को 3.45% मजबूत कर दिया।2. टेक्निकल बाउंस-बैक: बीते सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी में 1,000 से ज्यादा अंकों की गिरावट के बाद बाजार ओवरसोल्ड जोन में चला गया था। निचले स्तरों पर निवेशकों और संस्थागत खरीदारों की ओर से आई 'वैल्यू बाइंग' ने बाजार को सहारा दिया है।3. वैश्विक बाजारों से मजबूत संकेत: अमेरिकी वायदा बाजारों में 0.5% तक की बढ़त देखी गई, जिसने घरेलू बाजार के सेंटिमेंट को बूस्ट करने का काम किया है।टेक्निकल आउटलुकजिओजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स के अनुसार, सप्ताह की शुरुआत में जिस 22,050 के स्तर की आशंका जताई गई थी, निफ्टी अब उसके बेहद करीब पहुंच गया है, जिससे लंबी अवधि में 19,000 और 16,700 के निचले स्तरों के फिर से एक्टिव होने की संभावना बन गई है। वैसे, सूचकांक के लोअर बोलिंगर बैंड पर मौजूद होने के कारण आज कारोबार की शुरुआत में ऊपरी स्तरों की ओर एक बाउंस-बैक की उम्मीद जताई जा रही है।जब तक निफ्टी 22,290-22,350 के रेजिस्टेंस बैंड के नीचे बना हुआ है, तब तक ऊपरी बढ़त सीमित ही रहेगी; लेकिन अगर यह इस बैंड के ऊपर टिकने में कामयाब रहता है, तो फिर 22,440-22,600 का स्तर देखने को मिल सकता है। वहीं, आज के कारोबारी सत्र के लिए मुख्य गिरावट का स्तर 22,140 के पास रखा जा सकता है।Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Stock Market Today: सेंसेक्स 400 अंक चढ़ा, निफ्टी 22,350 के पार; IT और FMCG शेयरों में खरीदारी
Stock Market Today: सेंसेक्स 400 अंक चढ़ा, निफ्टी 22,350 के पार; IT और FMCG शेयरों में खरीदारी
Stock Market Gain: बाजार में तेजी लौटी, सेंसेक्स 438 अंक तक उछला, निवेशकों की दौलत ₹66563 करोड़ बढ़ी
गुरुवार को भारी बिकवाली के बाद भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को तेजी ने फिर दस्तक दी। सेंसेक्स हरे निशान में खुला और चंद पलों में पिछली क्लोजिंग से 438.43 अंक तक चढ़कर 72,036.03 के हाई तक गया। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 66,563 करोड़ रुपये बढ़ गया। इसी तरह निफ्टी भी बढ़त में खुलने के बाद पिछली क्लोजिंग से 151.65 अंक तक चढ़कर 22,383.45 के हाई तक गया।गुरुवार को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,62,33,248.126 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट खुलने के कुछ ही देर में यह 4,62,99,811.44 करोड़ रुपये हो गया। यानि कि 66,563.314 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी।एक दिन पहले कैसी रही थी चालगुरुवार, 8 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही थी। यह काफी तगड़ी थी। सेंसेक्स 1,045.46 अंक या 1.44 प्रतिशत का गोता लगाकर ढाई साल से अधिक के निचले स्तर 71,593.24 पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,310.95 अंक तक लुढ़क गया था। निफ्टी 371.25 अंक या 1.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 21 महीने के निचले स्तर 22,231.80 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी 423.15 अंक तक लुढ़का था।कच्चे तेल के दाम में तेजी और घरेलू व वैश्विक स्तर पर मौद्रिक नीति के और सख्त होने की आशंका के चलते ऐसा हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्टूबर की मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू मीटिंग में रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है।Stocks to Watch: 9 अक्टूबर को TCS, Wipro, Infosys, JSW Steel, NCC समेत इन शेयरों पर रहेगी नजर, दिख सकती है बड़ी उठापटकरुपये की चालशुक्रवार को भारतीय करेंसी रुपये में तेजी है। यह शुरुआती कारोबार में 23 पैसे मजबूत होकर 96.65 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। एक दिन पहले रुपया, अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 13 पैसे की गिरावट के साथ 96.88 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों समेत लगातार बने व्यापक आर्थिक दबाव के कारण रुपये में गिरावट आई।Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर
Market news : क्रूड और US बॉन्ड यील्ड में नरमी से बाजार को थोड़ी राहत मिली है। गिफ्ट निफ्टी में 60 प्वाइंट से ज्यादा की बढ़त दिख रही है। हालांकि FIIs की कैश और वायदा मिलाकर करीब 13000 करोड़ रुपए की बिकवाली देखने को मिली है। डाओ फ्यूचर्स भी 100 प्वाइंट ऊपर कारोबार कर रहा है। कल अमेरिका में डाओ जोन्स में रिकवरी दिखी लेकिन नैस्डैक और S&P500 गिरकर हुए बंद। एशिया में भी नरमी नजर आ रही है। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।मार्केट ओवरव्यू8 अक्टूबर को निफ्टी 50 में 371 अंक या 1.64 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 22,232 पर बंद हुआ, जबकि बैंक निफ्टी 540.5 अंक या 0.98 प्रतिशत गिरकर 54,515 पर बंद हुआ। बाजार का रुख काफी कमजोर रहा; NSE पर 491 शेयरों में बढ़त के मुकाबले लगभग 2,813 शेयरों में गिरावट देखी गई।मिडटर्म चुनाव से पहले हमले का इरादा नहीं: ट्रंपईरान पर ट्रंप का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा है कि मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान पर हमले का कोई इरादा नहीं है। ईरान के साथ चल रही है बातचीत अच्छे ट्रैक पर है। इस बयान के बाद क्रूड में नरमी आई है। 106 वाला कच्चा तेल 103 डॉलर के करीब आ गया है।अनुमान पर खरे उतरे TCS के Q2 नतीजेTCS के नतीजे अनुमान के मुताबिक रहे हैं। दूसरी तिमाही में कॉन्सटैन्ट करेंसी आय 0.50 फीसदी बढ़ी है। मार्जिन फ्लैट रही है। कंपनी ने इस अवधि में 9.5 अरब डॉलर की डील जीती है। इंटरनेशनल CC आय में 1.2% का उछाल आया है। AI रेवेन्यू ने 3 अरब के आंकड़े को पार कर लिया है।US से 8 IT कंपनियों को झटकाअमेरिका में Infosys, Wipro, TCS, HCLTech समेत 8 IT कंपनियों को झटका लगा है। अमेरिकी सरकार ने माइक्रोसॉफ्ट और एडोब के साथ भारतीय टेक कंपनियों का इमिग्रेशन प्रोग्राम रद्द कर दिया है। शुरूआती गिरावट के बाद IT कंपनियों के ADR निचले स्तरों से संभले हैं।कैंसर दवाओं पर सरकार का बड़ा फैसलाकैंसर की दवाओं को लेकर सरकार का बड़ा फैसला आया है। सूत्रों के मुताबिक गैर-शेड्यूल कैंसर दवाओं पर मार्जिन की सीमा तय की जायेगी। अब ट्रेड मार्जिन दवा की MRP का 30% से ज्यादा नहीं होगा।GST केस में अरेस्ट नहीं होगा कारोबारीGST में बड़ा रिफॉर्म हुआ है। अब GST के मामलों में कारोबारी की गिरफ्तारी नहीं होगी। GST काउंसिल ने अरेस्ट करने का अधिकार वापस ले लिया है। छोटे कारोबारियों को रजिस्ट्रेशन से लेकर रिफंड तक में राहत मिली है। ITC क्लेम समेत GST प्रोसेस में बड़े रिफॉर्म हुए हैं। गुड्स डिलिवरी पर 18% की बजाए 5% GST लगेगा।विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारीविदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 8 अक्टूबर को 12,944 करोड़ रुपये (नेट) के भारतीय शेयर बेचे। यह इस साल एक दिन में हुई बिकवाली की दूसरा सबसे बड़ी घटना है। इससे ज़्यादा बिकवाली सिर्फ़ 29 मई को हुई थी। उस दिन 21,106 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। इस बिक्री की वजह से अक्टूबर में कुल निकासी सिर्फ़ पांच सेशन में 37,929 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। 2026 की नेट FII बिक्री अब 4.41 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि ग्लोबल फंड्स उभरते हुए बाजारों में अपना निवेश कम कर रहे हैं।दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs)ने 8 अक्टूबर को 10,703 करोड़ रुपये की खरीदारी की। उन्होंने महीने के पहले पांच सत्रों में इक्विटी में 35,613 करोड़ रुपये लगाए हैं। स्थानीय खरीदारी ने विदेशी बिकवाली के एक बड़े हिस्से को संभाल लिया है। हालांकि,यह बाजार को गिरने से रोकने के लिए काफी नहीं रहा है।
Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत
Stock Market Live Update: भारतीय शेयर बाज़ार के बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है, क्योंकि GIFT निफ्टी ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को पॉज़िटिव शुरुआत का संकेत दिया है। गिफ्ट निफ्टी 22,370 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स की पिछली क्लोजिंग से लगभग 115 अंक ऊपर था। इससे भारतीय शेयर बाजार इंडेक्स के लिए पॉजिटिव शुरुआत का संकेत मिलता है।वहीं, शुक्रवार को एशियाई बाज़ार सुस्त रहे, जबकि गुरुवार को बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, US-ईरान युद्ध पर डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण US स्टॉक फ्यूचर्स में मिला-जुला कारोबार हुआ।
Stock Market Crash:पिछले 26 साल में भारतीय शेयर बाजार ने छह बड़े झटके झेले हैं। इनमें डॉट-कॉम बबल फूटने से लेकर 2008 की ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस तक शामिल है। इसके बाद यूरोजोन डेट क्राइसिस, कोरोना, रूस-यूक्रेन युद्ध और हालिया ऑयल-बॉन्ड शॉक भी आया।हर संकट की वजह अलग थी। बाजार तक उसका असर पहुंचने का तरीका भी अलग रहा। किसी संकट में टेक शेयर टूटे तो किसी में बैंकिंग सिस्टम दबाव में आया। कहीं ग्लोबल रिस्क एवर्जन वजह बना तो कहीं कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड में बड़ा बदलाव देखने को मिला।1. डॉट-कॉम बबल फूटा, भारतीय बाजार टूटाडॉट-कॉम बबल मेंटेक्नोलॉजी शेयरों की वैल्यूएशन अचानक गिरने लगी। इसका असर दुनियाभर के बाजारों पर पड़ा। भारतीय शेयर बाजार भी इसकी चपेट में आया। निफ्टी अपने शिखर से 53.5% गिर गया। सेंसेक्स में भी करीब 44% की गिरावट आई। टेक्नोलॉजी और न्यू-इकॉनमी शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव दिखा।इस संकट की शुरुआत अमेरिकी टेक्नोलॉजी सेक्टर से हुई थी। नैस्डैक अपने शिखर से करीब 78% टूट गया। निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट से पैसा निकालना शुरू कर दिया। इसका असर अमेरिकी बॉन्ड बाजार पर भी पड़ा। 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड करीब 310 बेसिस प्वाइंट गिर गई।2. 2008 में फाइनेंशियल सिस्टम पर आया संकट2008 में लेहमैन ब्रदर्स के ढहने के बाद हालात तेजी से बिगड़े। ग्लोबल क्रेडिट मार्केट फ्रीज हो गए। दुनियाभर के निवेशकों में डर बढ़ गया। बाजारों में तेज बिकवाली शुरू हो गई। भारतीय बाजार पर भी इसका बड़ा असर पड़ा। निफ्टी 59.9% टूट गया। सेंसेक्स में 60.9% की गिरावट आई। वित्त वर्ष 2009 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब 15 अरब डॉलर निकाल लिए। इससे घरेलू बाजार पर दबाव और बढ़ गया।2008 का संकट सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं था। रुपये और कमोडिटी बाजार पर भी इसका असर पड़ा। रुपया करीब 40 रुपये प्रति डॉलर से कमजोर होकर 52 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 78% गिर गई। क्रूड करीब 147 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर 33 डॉलर तक आ गया। यानी कुछ ही समय में कच्चे तेल की कीमत में भारी गिरावट देखने को मिली।3. 2010-11 में यूरोजोन डेट क्राइसिसइसके कुछ साल बाद यूरोजोन डेट क्राइसिस ने बाजार को झटका दिया। यूरोप में कई देशों के कर्ज को लेकर चिंता बढ़ गई थी। डर था कि कुछ देश डिफॉल्ट कर सकते हैं। बैंकिंग सिस्टम पर भी दबाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही एक और ग्लोबल मंदी की आशंका पैदा हो गई।इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा। निफ्टी करीब 28% गिरा। सेंसेक्स करीब 26% टूट गया। रुपया भी 23% कमजोर हुआ। इस बार भारत तक संकट पहुंचने का मुख्य रास्ता ग्लोबल रिस्क एवर्जन था। यानी दुनिया भर के निवेशक जोखिम वाले बाजारों से पैसा निकाल रहे थे। भारत में कोई बड़ा घरेलू बैंकिंग संकट इसकी मुख्य वजह नहीं था।4. 2020 में आया सबसे तेज बाजार क्रैश2020 में कोरोना महामारी ने बाजार को बहुत तेजी से नीचे ला दिया। भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में यह सबसे तेज गिरावट वाले दौर में से एक था। निफ्टी 39.6% गिर गया। सेंसेक्स में 38.5% की गिरावट आई। निफ्टी को करीब 40% गिरने में सिर्फ दो महीने से थोड़ा ज्यादा समय लगा। विदेशी निवेशकों ने भी जमकर बिकवाली की। मार्च 2020 में ही उन्होंने भारतीय शेयर बाजार से करीब 54,000 करोड़ रुपये निकाल लिए।कोरोना के दौरान दुनियाभर में मांग अचानक घट गई। निवेशक सुरक्षित एसेट की तरफ भागने लगे। इसका असर क्रूड और बॉन्ड मार्केट पर भी दिखा। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 70% गिर गई। वहीं, अमेरिकी 10 साल की ट्रेजरी यील्ड करीब 137 बेसिस प्वाइंट नीचे आ गई। बाजार में ग्लोबल मंदी की आशंका बढ़ गई थी। साथ ही निवेशकों को उम्मीद थी कि सेंट्रल बैंक अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए आक्रामक कदम उठाएंगे।5. 2022 में फिर सामने आई भारत की क्रूड पर निर्भरता2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ तो कमोडिटी की कीमतें अचानक तेज हो गईं। इसका सीधा असर भारत पर भी पड़ा। एक बार फिर देश की आयातित ऊर्जा पर निर्भरता चर्चा में आ गई। क्रूड महंगा होने से महंगाई और आयात बिल को लेकर चिंता बढ़ी।इस दौरान निफ्टी में करीब 17% की गिरावट आई। सेंसेक्स भी लगभग 18% टूट गया। ब्रेंट क्रूड की कीमत 78% तक चढ़ गई। विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर 2021 से जून 2022 के बीच भारतीय शेयर बाजार से करीब 32.5 अरब डॉलर निकाल लिए।6. 2026 में क्रूड, बॉन्ड यील्ड और विदेशी बिकवाली ने दबाव बढ़ाया2026 का ताजा झटका कई मोर्चों से एक साथ आया है। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। क्रूड महंगा है। अमेरिका में ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड ऊपर जा रही है। रुपये पर भी दबाव है। इसके साथ विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं।2026 में अब तक निफ्टी करीब 15% नीचे है। इसमें अकेले सितंबर की गिरावट 6.1% रही। विदेशी निवेशकों ने इस साल अब तक कैश मार्केट में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है। सितंबर में ही उनकी बिकवाली करीब 46,000 करोड़ रुपये रही।भारत के खिलाफ एक साथ चल रहे तीन बड़े फैक्टरइस समय भारत के लिए तीन चीजें एक साथ मुश्किल पैदा कर रही हैं... क्रूड, अमेरिका की बॉन्ड यील्ड और रुपया। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया है। इससे भारत के इंपोर्ट बिल पर दबाव बढ़ता है। साथ ही महंगाई और चालू खाते को लेकर भी चिंता बढ़ती है।दूसरी तरफ अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड 5% के ऊपर पहुंच गई है। इससे ग्लोबल निवेशकों के लिए अमेरिकी बॉन्ड ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं। ऐसे माहौल में उभरते बाजारों से पैसा निकलने का दबाव बढ़ सकता है।तीसरी परेशानी रुपया है। 2026 में अब तक रुपये की कीमत करीब 6.5% कमजोर हुई है। यानी क्रूड महंगा होने के साथ डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर है। दोनों चीजें मिलकर भारत की परेशानी बढ़ा रही हैं।बाजार गिरता तेजी से, लेकिन संभलने में वक्त लगता हैपिछले बड़े बाजार झटकों का इतिहास बताता है कि शेयर बाजार जितनी तेजी से गिरता है, उतनी तेजी से हमेशा वापस नहीं आता। कोरोना क्रैश इसका सबसे तेज उदाहरण रहा। कोरोना के दौरान निफ्टी सिर्फ 63 दिनों में 39.6% गिर गया था। हालांकि, इसके बाद पुराने शिखर तक पहुंचने में 246 दिन लगे।डॉट-कॉम बबल के दौरान निफ्टी को गिरने में 588 दिन लगे थे। लेकिन पुराने स्तर पर लौटने में 773 दिन लग गए। वहीं 2008 के संकट में बाजार 293 दिनों में गिरा और पिछली ऊंचाई तक पहुंचने में 739 दिन लगे। यानी बाजार में गिरावट कुछ ही महीनों में बड़ा नुकसान कर सकती है। लेकिन उस नुकसान की भरपाई में काफी ज्यादा समय लग सकता है।Stock Market Crash: शेयर बाजार में भयंकर सुनामी! इन 5 वजहों से निवेशकों के ₹8 लाख करोड़ साफ
शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। सेंसेक्स और निफ्टी काफी ज्यादा गिर गए हैं।
Stock Market Update: शेयर बाजार में भारी गिरावट, Sensex 1000 अंक से ज्यादा टूटा; Nifty 22,300 के नीचे
भारतीय शेयर बाज़ार के बेंचमार्क इंडेक्स, सेंसेक्स और निफ्टी, ने मिले-जुले रुख के साथ कारोबार शुरू किया। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) द्वारा रेपो रेट को 5.50 प्रतिशत तक बढ़ाने के बाद निवेशक सतर्क बने हुए थे। 30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 29.30 अंक या 0.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,668 पर खुला, जबकि निफ्टी 4 अंक गिरकर 22,599.05 पर खुला। पिछले ट्रेडिंग सेशन में सेंसेक्स 72,638.70 पर और निफ्टी 50 22,603.05 पर बंद हुआ था। इसी तरह, शुरुआती सेशन में अन्य इंडेक्स में भी मिला-जुला कारोबार देखा गया। जहाँ BSE मिडकैप सेलेक्ट इंडेक्स में 42.34 अंकों की गिरावट आई, वहीं BSE स्मॉलकैप सेलेक्ट इंडेक्स 3.48 अंक या 0.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 9,144.51 पर हरे निशान में कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में इंफोसिस, भारती एयरटेल, TCS, टाटा स्टील और HCL टेक में बढ़त देखी गई। शुरुआती कारोबार में इंफोसिस 0.90 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे आगे रही। दूसरी ओर, बजाज फाइनेंस, ट्रेंट, ITC, हिंदुस्तान यूनिलीवर और मारुति में गिरावट रही; बजाज फाइनेंस के शेयरों में लगभग 0.71 प्रतिशत की गिरावट आई। इस बीच, आज शुरुआती कारोबार में पेटीएम के शेयरों में करीब 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में बाजार का रुख नकारात्मक रहा; NSE पर 889 शेयरों में बढ़त के मुकाबले 1,645 शेयरों में गिरावट देखी गई। 143 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसे भी पढ़ें: भारत-UK Financial Markets Dialogue में व्यापार और निवेश बढ़ाने पर सहमति गिफ्ट निफ्टी ने क्या संकेत दिया? निफ्टी 50 के लिए शुरुआती संकेत देने वाले 'गिफ्ट निफ्टी' ने आज सपाट शुरुआत का संकेत दिया। यह पिछले बंद भाव 22,592 के मुकाबले 12.5 अंक गिरकर 22,579.50 पर खुला। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बुधवार को बिकवाली जारी रखी और 7 अक्टूबर, 2026 को 6,121.37 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने खरीदारी जारी रखी और 4,596.57 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर ने कहा, गिफ्ट निफ्टी में हल्की बढ़त और निचले स्तरों पर खरीदारी के संकेतों को देखते हुए निकट भविष्य के लिए बाजार का रुख सावधानी के साथ सकारात्मक लग रहा है। हालांकि, FIIs की हालिया बिकवाली और मिले-जुले वैश्विक संकेतों के कारण बाजार को लेकर भरोसा सीमित बना हुआ है। RBI की पॉलिसी पर भी नजर है, इसलिए जब तक बाजार में किसी खास दिशा में मजबूत भागीदारी नहीं दिखती, तब तक बाजार चुनिंदा शेयरों तक सीमित और एक दायरे में रह सकता है। इसे भी पढ़ें: RBI के संभावित हस्तक्षेप से संभला Rupee, शुरुआती कारोबार में Dollar के मुकाबले 10 पैसे मजबूत वॉल स्ट्रीट के अपने रिकॉर्ड स्तर से नीचे आने के बाद एशियाई शेयरों में गिरावट आई, क्योंकि US 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड कुछ समय के लिए 5.36 प्रतिशत तक पहुँच गई थी और बाद में 5.28 प्रतिशत के आसपास स्थिर हो गई। खबर लिखे जाने के समय जापान का निक्केई 225 सूचकांक 755.71 अंक या 1.08 प्रतिशत गिरकर 69,280 पर था। इसी तरह, हांगकांग का हैंग सेंग 219.50 अंक या 0.92 प्रतिशत नीचे आया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 131.10 अंक या 1.93 प्रतिशत गिरा। शंघाई का SSE कम्पोजिट इंडेक्स 10.35 अंक या 0.27 प्रतिशत ऊपर था।
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बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद अवसरों और चुनौतियों पर मंथन के लिए श्री गुरु गोबिंद सिंह जी राजकीय महाविद्यालय पांवटा साहिब की ओर से दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
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