अमरावती, 17 अक्टूबर . Madhya Pradesh के Chief Minister मोहन यादव ने Saturday को आंध्र प्रदेश के Chief Minister एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण से शिष्टाचार…
मध्य प्रदेश के सिंगरौली में भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर 3.5 रही तीव्रता
सिंगरौली, 17 अक्टूबर . Madhya Pradesh के सिंगरौली जिले में Saturday दोपहर 2:12 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए. प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर…
भाजपा के राष्ट्रीय मोर्चों और प्रकोष्ठों में मध्य प्रदेश के नेताओं की भागीदारी बढ़ सकती है। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में पहले ही मध्य प्रदेश के नेताओं को आठ पद मिले हुए हैं।
हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़... एक ही दिन में तीन प्रदेशों में लगे भूकंप के झटके
17 अक्टूबर 2026 को भारत के हिमाचल प्रदेश के शिमला, मध्य प्रदेश के सिंगरौली और छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर के पास भूकंप के झटके महसूस किए गए। शिमला में भूकंप की तीव्रता 4.1, जबकि सिंगरौली और अंबिकापुर के पास 3.5 मापी गई.
कोटा में दर्दनाक हादसा: खाई में गिरी खाटू श्याम जा रही बस, मध्य प्रदेश के 8 यात्रियों की मौत
राजस्थान के कोटा में शनिवार को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर भोपाल से खाटू श्याम जा रही एक बस 15 फीट गहरी खाई में गिर गई। इस भीषण हादसे में मध्य प्रदेश के 8 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि कई गंभीर रूप से घायल लोगों का अस्पताल में इलाज जारी है।
MP News: मध्य प्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत हार्ट, लिवर और लंग ट्रांसप्लांट का खर्च उठाने की तैयारी, इलाज की सीमा 10 लाख करने का प्रस्ताव
ग्वालियर-चंबल में औद्योगिक विकास की व्यापक संभावनाएं: सीएम मोहन यादव
मुरैना, 16 अक्टूबर . Madhya Pradesh के Chief Minister मोहन यादव ने कहा कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में औद्योगिक विकास की व्यापक संभावनाएं हैं. इन संभावनाओं का लाभ उठाने…
MP Weather: मध्य प्रदेश के 21 जिलों में बारिश का अलर्ट, इंदौर से लेकर ग्वालियर तक झमाझम बरसेंगे बादल
MP Weather 17th October: उत्तरी पंजाब के ऊपर बने पश्चिमी विक्षोभ और हरियाणा व दक्षिणी राजस्थान पर सक्रिय ऊपरी हवा के चक्रवात के कारण प्रदेश के मौसम में यह बदलाव आया है।
संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह करने का फैसला किया है कि वे कुछ राज्यों के मुख्य सचिवों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाएं।
MP Weather Update: मध्य प्रदेश में अगले 4 दिन बदलेगा मौसम, ग्वालियर-चंबल समेत कई संभागों में बारिश के आसार
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या तक ‘सनातन धर्म यात्रा’ का किया समर्थन
Bhopal , 16 अक्टूबर . स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कांग्रेस नेता और Madhya Pradesh के पूर्व Chief Minister दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या तक प्रस्तावित ‘सत्य सनातन…
Bhopal , 16 अक्टूबर . Madhya Pradesh के नर्मदा पुरम जिले की बिलाश टांटी शर्मा (शिवानी) भले ही इस दुनिया से विदा हो गई हो, मगर वे तीन…
सिंधिया 16 से 18 अक्टूबर तक गुना संसदीय क्षेत्र का दौरा करेंगे, विकास परियोजनाओं की करेंगे शुरुआत
ग्वालियर, 15 अक्टूबर . केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया 16 से 18 अक्टूबर तक Madhya Pradesh में अपने गुना Lok Sabha क्षेत्र का दौरा करेंगे. इस दौरान वे…
मध्य प्रदेश के छतरपुर में बागेश्वर धाम रथ यात्रा के दौरान नशे के खिलाफ युवा आंदोलन को मिली गति
छतरपुर, 15 अक्टूबर . Madhya Pradesh के छतरपुर में बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में हाल ही में निकली “सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा 3.0”…
मध्य प्रदेश में सोयाबीन के लिए भावांतर योजना को कैबिनेट की मंजूरी
Bhopal , 15 अक्टूबर . Madhya Pradesh की मोहन यादव Government की कैबिनेट ने सोयाबीन उत्पादक किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना को लागू करने को मंजूरी दी. Chief Minister मोहन यादव की अध्यक्षता में Thursday को मंत्री परिषद की बैठक हुई. इस बैठक में 27000 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों ... Read more
ग्वालियर में सजेगा कला और संस्कृति का अंतर्राष्ट्रीय महाकुंभ
ग्वालियर, 15 अक्टूबर . संगीत और सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्व में विशिष्ट पहचान रखने वाले Madhya Pradesh के ग्वालियर में कला और संस्कृति का अंतरराष्ट्रीय महाकुंभ होने जा रहा है. इसमें दुनिया के कई देशों और India के कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे. उद्भव सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान और आईटीएम विश्वविद्यालय के संयुक्त ... Read more
मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना को 3000 रुपए मिलने का वादा अब भी अधूरा : जीतू पटवारी
Bhopal , 15 अक्टूबर कांग्रेस की Madhya Pradesh ईकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने Prime Minister Narendra Modi को पत्र लिखकर कहा है कि राज्य की लाडली बहनाओं को 3000 रुपए प्रति माह दिए जाने का वादा अब भी अधूरा है . कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पटवारी द्वारा Prime Minister को लिखे गए पत्र में कहा ... Read more
जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के विकास के लिए कंपनी गठित
Bhopal 15 अक्टूबर Madhya Pradesh में जबलपुर-Bhopal -इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के विकास को लेकर मोहन कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना के क्रियान्वयन के लिए उद्योग विभाग के माध्यम से एक नई कंपनी का गठन किया गया है. मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए Chief ... Read more
अजनाला क्षेत्र के सीमावर्ती गांव रूड़ेवाल के लांस नायक प्रताप सिंह का मध्य प्रदेश में ड्यूटी के दौरान दिल का दौरा पड़ने से मंगलवार को निधन हो गया। गुरुवार को उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, जहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। परिवार ने सरकार से आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। लांस नायक प्रताप सिंह के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में राजनीतिक नेताओं, समाजसेवियों और ग्रामीणों ने शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर सांसद गुरजीत सिंह औजला के भाई और कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह सुख औजला, हलका विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल, शिरोमणि अकाली दल के हलका इंचार्ज जोध सिंह समरा और कांग्रेस नेता कंवरप्रताप सिंह अजनाला सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। पत्नी और तीन छोटे बच्चों को छोड़ गए देश सेवा को समर्पित प्रताप सिंह अपने पीछे पत्नी और 3 बच्चे छोड़ गए हैं। प्रताप सिंह 18 सिखली रेजिमेंट में वॉलीबॉल के खिलाड़ी भी रह चुके थे। विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने शहीद के परिवार के साथ दुख साझा किया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार की ओर से नियमों के अनुसार परिवार को मिलने वाली सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। शहीद के परिवार को सभी जरूरी सुविधाएं दी जाएं वहीं, सुखजिंदर सिंह सुख औजला, जोध सिंह समरा और कंवरप्रताप सिंह अजनाला ने भी सरकार से मांग की कि शहीद के परिवार को सभी जरूरी सुविधाएं दी जाएं, ताकि उनके तीन मासूम बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने में मदद मिल सके। योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग शहीद के पिता वीर सिंह और पत्नी दर्शो ने सरकार से अपील की कि परिवार को आर्थिक सहायता के साथ सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएं। उन्होंने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए परिवार के किसी योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी उठाई।
कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी क्रिकेट स्पर्धा में मध्य प्रदेश ने पंजाब को उसके ही घर में हराया
दूसरी पारी में भी मेजबान पंजाब टीम की बल्लेबाजी खराब रही। पूरी टीम 61.4 ओवर में 196 रनों पर सिमट गई।
मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों फिर वही पुराना सवाल सिर उठाने लगा है कि क्या सूबे की राजनीति में शिवराज सिंह चौहान का दखल अब भी उतना ही दमदार है, या मुख्यमंत्री मोहन यादव अपनी अलग लकीर खींचने में जुटे हैं? ऊपर से सब कुछ भाजपा के अनुशासित कुनबे जैसा दिखता है, लेकिन बुधनी के कोसमी गांव से लेकर किसानों की मूंग खरीदी और लाड़ली बहना योजना तक, कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने भोपाल के सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। उल्लेखनीय है कि ताजा चिंगारी सीहोर जिले के कोसमी गांव से उठी है। यह वही इलाका है, जहां शिवराज सिंह चौहान की बरसों पुरानी राजनीतिक जमीन रही है। गांव में आदिवासी परिवारों के मकान हटाए जाने, फसलों को नुकसान पहुंचने और कुओं को मिट्टी से भरने की शिकायतों पर शिवराज ने अपनी ही पार्टी की सरकार के अधिकारियों को कठघरे में खड़ा कर दिया। उनका रुख साफ था कि सरकार किसी की भी हो, गरीब और आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की और मुख्यमंत्री मोहन यादव से बात करने की बात कही। इसे भी पढ़ें: अपनी ही पार्टी की मध्य प्रदेश सरकार के खिलाफ Shivraj Singh Chouhan ने क्यों खोला मोर्चा? Madhya Pradesh BJP में सब ठीक है? देखा जाये तो राजनीति में बात सिर्फ इतनी नहीं है कि किसी गांव में मकान टूटे और एक नेता ने नाराजगी जता दी। सवाल यह है कि शिवराज ने यह आवाज उस सरकार के खिलाफ उठाई है, जिसके मुखिया उनकी ही पार्टी के मुख्यमंत्री हैं। मोहन यादव ने भी मामले को हल्के में नहीं लिया। उन्होंने मुख्य सचिव से जांच कराने और प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आवास तथा भोजन की व्यवस्था करने की बात कही। दूसरी तरफ, कलेक्टर की रिपोर्ट में वन भूमि पर अतिक्रमण और सागौन के पौधों को नुकसान पहुंचाने के आरोप सामने आए। यानी मामला केवल सियासी बयानबाजी का नहीं, बल्कि वन संरक्षण, प्रशासनिक कार्रवाई और आदिवासी परिवारों के अधिकारों का भी है। लेकिन मध्य प्रदेश की राजनीति में हर घटना का एक स्थानीय और एक राजनीतिक अर्थ होता है। कोसमी का मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि शिवराज ने जिस इलाके में लंबे समय तक अपनी राजनीतिक पकड़ बनाई, वहीं की घटना पर उनका इस तरह सामने आना कई सवाल खड़े करता है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल अपने पुराने मतदाताओं के प्रति जवाबदेही है, या इसके पीछे भोपाल की सत्ता के साथ तालमेल का कोई बड़ा सवाल भी छिपा है? इस कहानी का दूसरा सिरा लाड़ली बहना योजना से भी जुड़ता है। शिवराज की राजनीति की पहचान बनी इस योजना ने प्रदेश में महिलाओं के बीच उनकी अलग छवि बनाई। अब मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से योजना के खर्च को भारी बताने वाली टिप्पणी ने पुरानी राजनीतिक विरासत और मौजूदा सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं पर बहस छेड़ दी है। शिवराज के लिए यह योजना महज सरकारी खर्च का हिसाब नहीं, उनकी राजनीतिक पहचान का भी हिस्सा है। वहीं, मौजूदा सरकार के सामने बजट, दूसरी योजनाओं और विकास कार्यों के बीच संतुलन बैठाने की चुनौती है। तीसरा मोर्चा किसानों का है। मूंग की खरीदी को लेकर जब किसान परेशान हुए, तब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर खरीद तेज करने की मांग की। राज्य सरकार को आखिरकार खरीदी बढ़ाने की मांग पर सहमति देनी पड़ी। देखा जाये तो यहां भी तस्वीर दिलचस्प है। केंद्र में मंत्री शिवराज, राज्य में मुख्यमंत्री मोहन यादव और बीच में किसान, जिनकी फसल और भुगतान का सवाल सीधे सरकार की जवाबदेही से जुड़ा है। शिवराज का हस्तक्षेप किसानों के लिए मददगार हो सकता है, लेकिन राजनीतिक तौर पर यह राज्य सरकार पर दबाव भी बनाता है। यही वजह है कि शिवराज बनाम मोहन की चर्चा बार-बार लौट आती है। एक तरफ शिवराज हैं, जिनकी पहचान लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल, जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रदेश के गांव-गांव में बने पुराने संपर्कों से जुड़ी है। दूसरी तरफ मोहन यादव हैं, जिन्हें अपनी सरकार की नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और नेतृत्व की अलग पहचान स्थापित करनी है। दोनों की भूमिकाएं अलग हैं, मगर प्रदेश की राजनीति में उनका असर एक-दूसरे से पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता। फिर भी, हर मतभेद को मुख्यमंत्री की कुर्सी की लड़ाई मान लेना जल्दबाजी होगी। भाजपा में संगठन का अपना अनुशासन और केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका है। अभी तक सामने आई घटनाएं प्रशासन, किसान नीति और राजनीतिक विरासत पर मतभेद दिखाती हैं; मगर वे किसी औपचारिक सत्ता-संघर्ष को साबित नहीं करतीं। फिलहाल मध्य प्रदेश की राजनीति का असली इम्तिहान बयानों से आगे होगा। कोसमी की जांच में क्या कार्रवाई होती है, प्रभावित परिवारों को क्या राहत मिलती है, लाड़ली बहना योजना को लेकर राज्य सरकार क्या फैसला करती है और किसानों की खरीदी व्यवस्था कितनी दुरुस्त होती है, इन सवालों के जवाब ही आगे की तस्वीर साफ करेंगे। बहरहाल, भोपाल की सियासत में मामा शिवराज की हुंकार अब भी गूंज रही है, तो मुख्यमंत्री मोहन यादव भी अपने फैसलों से सत्ता पर अपनी पकड़ और नेतृत्व की लकीर खींचने में जुटे हैं। दोनों के बीच सियासी खिंचाव की आहट साफ सुनाई दे रही है, लेकिन इसे खुली जंग का नाम देना अभी जल्दबाजी होगी। असली तस्वीर तब खुलेगी जब यह सामने आये कि कोसमी के मामले में सरकार के कदम क्या होते हैं, लाड़ली बहना योजना पर क्या रुख अपनाया जाता है और किसानों के सवाल पर किसका पलड़ा भारी पड़ता है। क्योंकि मध्य प्रदेश की राजनीति में सियासी इरादे सिर्फ बयानों से जाहिर नहीं होते, उनका असली रंग फैसलों में दिखता है। भोपाल में फिलहाल बयान गूंज रहे हैं, लेकिन निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अगली चाल कौन चलता है और बाजी किस करवट बैठती है? -नीरज कुमार दुबे
मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डा. एल. मुरुगन के अपने मंत्री पद और राज्यसभा की सदस्यता दोनों से इस्तीफा देने से राज्यसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव होगा।
केंद्रीय सूचना व प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने मंगलवार को मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्यसभा सदस्यता छोड़ने की भी इच्छा जताई। वे मप्र से सांसद हैं। मुरुगन ने कहा कि वे तमिलनाडु लौटकर गांव-गांव भाजपा को मजबूत करेंगे और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी करेंगे। उनके इस्तीफे से केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। मुरुगन से पहले जून में जॉर्ज कुरियन और जुलाई में रवनीत सिंह बिट्टू इस्तीफा दे चुके हैं। कुरियन और बिट्टू को भाजपा ने दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा। वहीं केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और राज्य मंत्री बीएल वर्मा अभी मंत्रिपरिषद में हैं। मुरुगन ने पत्र में लिखा कि दिहाड़ी मजदूरों के बेटे से केंद्रीय मंत्री बनना जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। मुरुगन को भाजपा ने फरवरी 2024 में दोबारा मप्र के कोटे से राज्यसभा भेजा था। उनका कार्यकाल 3 अप्रैल 2030 तक था।
भिवानी की थाना साइबर क्राइम पुलिस ने टास्क इन्वेस्टमेंट के नाम पर 3 लाख 29000 रुपए की साइबर धोखाधड़ी करने के मामले में आरोपी गिरफ्तार किया गया है। भिवानी के सेक्टर-13 निवासी शिकायतकर्ता पुनीत ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसके मोबाइल फोन पर टेलीग्राम के माध्यम से टास्क इन्वेस्टमेंट के नाम पर निवेश करने का प्रस्ताव आया था। आरोपियों ने उसे अधिक मुनाफे का लालच देकर टास्क पूरे करने के नाम पर रुपए निवेश करने के लिए कहा। शिकायतकर्ता ने उनके झांसे में आकर अलग-अलग बैंक खातों में रुपए ट्रांसफर कर दिए। आरोपियों ने टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से टास्क इन्वेस्टमेंट के नाम पर शिकायतकर्ता से कुल 3,29,000 रुपए की धोखाधड़ी की। शिकायत के आधार पर थाना साइबर क्राईम भिवानी में संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू की गई। मध्य प्रदेश का रहने वाला आरोपी थाना साइबर क्राइम के मुख्य सिपाही अजीत ने टास्क इन्वेस्टमेंट के नाम पर साइबर धोखाधड़ी करने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मध्य प्रदेश के जिला सागर के छोटी मस्जिद के नजदीक, थाना बीना निवासी राहुल पुत्र राजेश के रूप में हुई है। रेहड़ी लगाता है आरोपी पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी राहुल ने बताया कि वह जिला सागर (मध्य प्रदेश) में रेहड़ी लगाने का कार्य करता है। उसने अपना बैंक खाता आरोपियों को बेच दिया था, जिसका इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी की राशि के लेन-देन के लिए किया गया। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी राहुल को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जिला कारागार भेजने के आदेश दिए गए हैं। मामले में संलिप्त अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। उन्हें भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
हिंदी मेटा डिस्क्रिप्शन: मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने समूह तीन उपयंत्री और अन्य पदों की भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया आज, 13 अक्तूबर 2026 से दोबारा शुरू कर दी है।
विपक्षी नेता किसी सरकार पर हमला बोलें तो समझ आता है, लेकिन मध्य प्रदेश में तो राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी ही पार्टी की सरकार के मुख्यमंत्री मोहन यादव को घेरकर पूरी भाजपा को सकते में डाल दिया है। हम आपको बता दें कि आदिवासियों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाने के मुद्दे पर शिवराज की नाराजगी ने मध्य प्रदेश की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है। सवाल सिर्फ आदिवासी परिवारों के घरों को तोड़े जाने का नहीं है, बल्कि यह भी है कि क्या भारतीय जनता पार्टी के भीतर सत्ता और नेतृत्व को लेकर कोई ऐसी खींचतान चल रही है, जिसकी झलक अब सार्वजनिक रूप से दिखाई देने लगी है? मुख्यमंत्री मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान के बीच कथित मतभेदों की चर्चाओं के बीच इस घटनाक्रम के राजनीतिक मायने तलाशे जा रहे हैं। हम आपको बता दें कि मामला सीहोर जिले के कोसमी गांव का है, जहां 11 अक्टूबर को वन विभाग और वन विकास निगम की कार्रवाई में बारेला आदिवासी समुदाय के 12 परिवारों के घर तोड़े जाने की खबर सामने आई। आरोप है कि इस कार्रवाई में खेतों में खड़ी मक्का और अरहर की फसलें भी नष्ट हुईं और पानी के लिए इस्तेमाल होने वाले कुएं को मिट्टी से भर दिया गया। अधिकारियों की दलील वन भूमि पर कथित अतिक्रमण हटाने की है, लेकिन कार्रवाई के तरीके ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसे भी पढ़ें: Rahul Gandhi के आरोपों पर Shivraj का पलटवार, अराजकता से सत्ता पाना चाहती है Congress शिवराज सिंह चौहान को इसकी जानकारी मिली तो वह सीधे गांव पहुंच गए। पीड़ित परिवारों से मुलाकात की, उनके साथ धरने पर बैठे और मौके से ही मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल तथा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से बात की। शिवराज ने प्रभावित परिवारों को नए मकान बनवाने और तब तक रहने-खाने की व्यवस्था कराने का भरोसा दिया। उन्होंने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गरीब आदिवासियों के साथ हुआ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन शिवराज के बयान का सबसे अहम हिस्सा वह था, जिसमें उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों के वोट से भाजपा को जीत मिलती है, उन्हीं के घर क्यों उजाड़े जा रहे हैं? उन्होंने यह आशंका भी जताई कि कुछ अधिकारी मुख्यमंत्री मोहन यादव की छवि खराब करने की साजिश कर रहे हो सकते हैं। यानी शिवराज ने एक तरफ मुख्यमंत्री के प्रति अपनी चिंता जताई, तो दूसरी तरफ उनके अधीन काम करने वाले प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया। सवाल उठता है कि क्या यह शिवराज बनाम मोहन यादव की लड़ाई है? देखा जाये तो राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध तक सीमित करके नहीं देखा जा रहा है। दिसंबर 2023 में शिवराज सिंह चौहान की जगह मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद से ही दोनों नेताओं की राजनीतिक भूमिका और उनके बीच संबंधों को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं। शिवराज लंबे समय तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं और बुधनी उनकी पुरानी राजनीतिक कर्मभूमि रही है। ऐसे क्षेत्र में आदिवासी परिवारों के घर उजड़ना और फिर उनका खुद मौके पर पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ खड़ा होना, उनकी स्थानीय राजनीतिक पकड़ और जननेता की छवि से भी जुड़ा है। ऐसे में उनकी प्रतिक्रिया को जनहित की चिंता और अपने राजनीतिक प्रभाव को बनाए रखने, दोनों संभावित संदर्भों में भी देखा जा सकता है। उधर, कांग्रेस ने इस प्रकरण को भाजपा के अंदरूनी मतभेदों से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा की अंदरूनी खींचतान का खामियाजा आदिवासी परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि, भाजपा के लिए असली चुनौती विपक्ष के आरोपों से ज्यादा इस सवाल का जवाब देना है कि कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, आजीविका और बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखा गया या नहीं। अगर केंद्रीय मंत्री को अपनी ही राज्य सरकार के अधिकारियों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से हस्तक्षेप करना पड़ रहा है, तो प्रशासनिक समन्वय और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। वैसे यह पहली बार नहीं है जब शिवराज ने मध्य प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हों। उन्होंने पहले भी आदिवासियों से जुड़े मामलों और मूंग की खरीद के मुद्दे पर हस्तक्षेप किया था। अब निगाहें मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्रतिक्रिया और प्रभावित परिवारों को मिलने वाली राहत पर हैं। शिवराज का कहना है कि वह मुख्यमंत्री के सामने पूरा मामला उठाएंगे। यदि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होती है और परिवारों का पुनर्वास सुनिश्चित किया जाता है, तो विवाद का प्रशासनिक समाधान निकल सकता है। लेकिन यदि मामला लंबा खिंचता है, तो भाजपा के भीतर समन्वय और नेतृत्व की कार्यशैली पर बहस और तेज हो सकती है। बहरहाल, कोसमी की घटना को शिवराज और मोहन यादव के बीच टकराव कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना स्पष्ट है कि केंद्रीय मंत्री का सार्वजनिक विरोध राज्य सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा करता है। -नीरज कुमार दुबे
MP High Court Recruitment 2026: मध्य प्रदेश जिला कोर्ट में 418 पदों पर सीधी भर्ती शुरू, देखें डिटेल्स
Madhya Pradesh Famous Devi Temples: मैहर का मां शारदा मंदिर, सलकनपुर का विजयासन देवी मंदिर, उज्जैन का हरसिद्धि मंदिर, दतिया का पीतांबरा पीठ और सतना क्षेत्र का चित्रकूट धार्मिक आस्था के लिहाज से प्रमुख स्थानों में गिने जाते हैं।
Ujjain Minar Demolish: Shahi Masjid के बाद अब मीनार गिराने की तैयारी, उज्जैन सील | Madhya Pradesh
मध्यप्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ 2028 कुंभ के चलते सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रही 650 साल पुरानी शाही मस्जिद के कुछ हिस्से के ध्वस्तीकरण के बाद अब मीनार हटाने की तैयारी शुरू हो गई है। मीनार पर मचान बांधने का काम हो चुका है।
UNESCO की लिस्ट में भारत की 5 नई जगहें, 4 मध्य प्रदेश से
भारत की यूनेस्को टेंटेटिव लिस्ट में 5 नई जगहें जुड़ी हैं। इनमें 4 जगहें मध्य प्रदेश की हैं। इनमें पुरानी गुफाएं, मंदिर और किला शामिल हैं। एक एंट्री महात्मा गांधी के सत्याग्रह से जुड़ी जगहों की है।
Ujjain Khade Hanuman News: उज्जैन में खड़े हनुमान डटे, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब | Madhya Pradesh
महाकाल की नगरी उज्जैन के खड़े हनुमान की चर्चा सड़क से सोशल मीडिया तक हो रही है. दावा किया जा रहा है कि प्रशासन और उनकी मशीनें कई दिनों की कोशिश के बाद भी इस प्रतिमा को हिला नहीं पाईं और श्रद्धालु इसे चमत्कार बता रहे है.
Ujjain Khade Hanuman News: खड़े हनुमान को हटाने की कोशिश नाकाम, नहीं हिली प्रतिमा | Madhya Pradesh
साल 2028 में होने वाले महाकुंभ सिंहस्थ के लिए सड़कें चौड़ी की जा रही हैं. रास्ते में आया 170 साल पुराना खड़े हनुमान जी का मंदिर. प्रशासन ने मंदिर तोड़ा, बुलडोजर मंगाए, भारी-भरकम क्रेन बुलाई... लेकिन जब बात हनुमान जी की मूर्ति को हटाने की आई, तो जो हुआ उसने विज्ञान और प्रशासन दोनों के होश उड़ा दिए
बहुमुखी अभिनेता आशुतोष राणा को गुरुवार सुबह उज्जैन के प्रतिष्ठित महाकालेश्वर मंदिर में पूजा करते देखा गया। वह मंदिर में भस्म आरती में भी शामिल हुए। उन्हें नेहरू जैकेट के साथ सफेद कुर्ता पहने देखा गया और गले में लाल रंग का शॉल भी डाला हुआ था। मंदिर के पुजारियों के मुताबिक परंपरा का पालन करते हुए ब्रह्म मुहूर्त में बाबा महाकाल के पट खोले गए और उसके बाद दूध, दही, घी, चीनी, शहद और पंचामृत से भगवान महाकाल का अभिषेक किया गया। इसके बाद ढोल-नगाड़ों और शंख बजाने के साथ भस्म आरती हुई। इसे भी पढ़ें: Deepika Padukone का Deewani Mastani गाना ऑस्कर के आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज पर हुआ प्रदर्शित | Watch Video आशुतोष राणा दुश्मन और संघर्ष जैसी फिल्मों में अपनी भूमिकाओं के लिए प्रसिद्ध हैं और उन्होंने पठान, वॉर, हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया, धड़क, सिम्बा और राज जैसी कई अन्य फिल्मों में भी काम किया है। इसे भी पढ़ें: क्या सरबजीत के लिए ऐश्वर्या राय बच्चन के पुरस्कार लेकर चले जाने से नाराज थे रणदीप हुडा? जानें उन्होंने क्या कहा आशुतोष राणा के भविष्य के प्रोजेक्ट वह अगली बार निर्देशक अयान मुखर्जी की एक्शन थ्रिलर फिल्म वॉर 2 में दिखाई देंगे, जिसमें ऋतिक रोशन और एनटीआर जूनियर भी मुख्य भूमिकाओं में हैं। अयान मुखर्जी द्वारा निर्देशित, वॉर 2 स्वतंत्रता दिवस 2025 पर सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। हाल ही में, यशराज फिल्म्स ने सलमान खान-कैटरीना कैफ-स्टारर टाइगर 3 के एक पोस्ट-क्रेडिट दृश्य में ऋतिक रोशन के चरित्र को पेश किया, जिससे प्रशंसकों के बीच उत्साह पैदा हुआ। यह फिल्म 2019 की एक्शन थ्रिलर फिल्म वॉर का सीक्वल है, जिसमें ऋतिक, टाइगर श्रॉफ और वाणी कपूर मुख्य भूमिका में थे। इसके अलावा, उनके पास पाइपलाइन में रश्मिका मंदाना-स्टारर छावा और उमेश शुक्ला द्वारा निर्देशित फिल्म भी है। Madhya Pradesh, Ujjain: Actor Ashutosh Rana visits the shrine of Baba Mahakal and sought blessings. pic.twitter.com/a4UPcEN5sz — IANS (@ians_india) April 3, 2024

