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UP-MP Connectivity: ताजमहल से ग्वालियर का किला मात्र 75 मिनट में! आज ही जानें ₹4,613 करोड़ के नए 'आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे' का पूरा रूट और खूबियां

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh), राजस्थान (Rajasthan) और मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बीच कनेक्टिविटी को एक नई और हाई-स्पीड रफ्तार मिलने जा रही है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा आगरा और ग्वालियर के बीच 88 किलोमीटर लंबा आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे (Agra-Gwalior Expressway) तैयार किया जा रहा है.यह अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे न केवल इन तीन राज्यों के बीच व्यापारिक और पर्यटन संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि रोजाना सफर करने वाले लाखों मुसाफिरों के कीमती समय और ईंधन की भी भारी बचत करेगा.2.5 घंटे का सफर मात्र 75 मिनट में होगा पूरावर्तमान में यदि कोई व्यक्ति आगरा से ग्वालियर की यात्रा करता है, तो उसे धौलपुर (राजस्थान) और मुरैना (मध्य प्रदेश) के संकरे रास्तों और भारी शहरी ट्रैफिक से होकर गुजरना पड़ता है, जिसके कारण इस सफर में 2.5 से 3 घंटे का लंबा समय बर्बाद हो जाता है.120 की रफ्तार से फर्राटा: इस नए 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू हो जाने के बाद, गाड़ियां बिना किसी रुकावट के 100 से 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगी.दूरी आधी रह जाएगी: एक्सप्रेसवे के जरिए आगरा से ग्वालियर के बीच की यह दूरी घटकर महज 75 से 80 मिनट (करीब सवा घंटा) में सिमट जाएगी.आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे का रूट मैप और संरचनायह एक्सप्रेसवे बेहद अनूठी संरचना और भविष्य की जरूरतों (Future Expansion) को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है:शुरुआत और अंत: यह नया हाईवे आगरा के देवरी गांव से शुरू होकर मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित सुसेरा गांव (बाईपास) पर जाकर समाप्त होगा.8 लेन तक विस्तार संभव: इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि आने वाले समय में ट्रैफिक बढ़ने पर इसे आसानी से 8 लेन तक चौड़ा किया जा सकेगा.पुल और फ्लाईओवर: 88 किलोमीटर के इस पैच में यात्रा को सुगम बनाने के लिए 8 बड़े पुल, 23 छोटे पुल, 6 बड़े फ्लाईओवर और 1 रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण किया जा रहा है.वन्यजीवों की सुरक्षा का विशेष ध्यान (Chabal Eco-System):एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा संवेदनशील चंबल क्षेत्र से गुजरता है. इसलिए, चंबल वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी (Chambal Wildlife Sanctuary) के पास पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष 'ग्रीन बेल्ट' और वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए अत्याधुनिक अंडरपास (Animal Underpasses) बनाए जाएंगे ताकि पारिस्थितिकी तंत्र को कोई नुकसान न पहुंचे.दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ेगा रूट; जानिए बजटइस मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को बनाने में लगभग ₹4,613 करोड़ की भारी लागत आने का अनुमान है.चंबल एक्सप्रेसवे से जुड़ाव: यह एक्सप्रेसवे केवल दो शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगे चलकर इसे मुरैना के पास प्रस्तावित 'चंबल एक्सप्रेसवे' से भी इंटरकनेक्ट किया जाएगा.कोटा-दिल्ली-मुंबई रूट: इस जुड़ाव के कारण यात्रियों को राजस्थान के कोटा के रास्ते सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (Delhi-Mumbai Expressway) पर चढ़ने की सीधी और निर्बाध कनेक्टिविटी मिल जाएगी, जिससे उत्तर से पश्चिम भारत का सफर बेहद सुगम हो जाएगा.कब तक पूरा होगा काम और क्या होगा फायदा?एनएचएआई (NHAI) के ताजा अपडेट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के सिविल कंस्ट्रक्शन के लिए 93% से अधिक भूमि का अधिग्रहण (Land Acquisition) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है. वर्तमान में आगरा के कुछ गिने-चुने पॉकेट्स में मुआवजे की रकम को लेकर स्थानीय किसानों के साथ प्रशासनिक स्तर पर बातचीत चल रही है, जिसे जल्द ही सुलझा लिया जाएगा. प्राधिकरण का लक्ष्य है कि सभी बचे हुए निर्माण कार्यों को पूरा करके वर्ष 2027-2028 तक इसे आम जनता के यातायात के लिए पूरी तरह से खोल दिया जाए.टूरिज्म को मिलेगा बड़ा बूस्ट: यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के पर्यटन उद्योग के लिए एक गेमचेंजर साबित होने वाला है. आगरा में ताजमहल (Taj Mahal) देखने आने वाले देश-विदेश के पर्यटक अब महज सवा घंटे में ग्वालियर के ऐतिहासिक किलों, महलों और सिंधिया संग्रहालय का दीदार करने आसानी से आ-जा सकेंगे, जिससे पूरे बुंदेलखंड और चंबल क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को एक नई संजीवनी मिलेगी.

न्यूज़ इंडिया लाइव 13 Jul 2026 8:15 am

जल्दबाजी में न करें सोयाबीन-धान की बुवाई! मध्य प्रदेश कृषि विभाग ने जारी की खरीफ सीजन के लिए जरूरी एडवाइजरी

खरीफ सीजन की बुवाई का समय शुरू हो चुका है, लेकिन मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में अभी भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है. ऐसे में खेतों में नमी कम होने के बावजूद जल्दबाजी में सोयाबीन और धान की बुवाई करना किसानों के लिए भारी नुकसानदायक साबित हो सकता है. इसी को देखते हुए कृषक कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, मध्य प्रदेश ने कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के आधार पर किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है.कृषि विभाग के संचालक उमाशंकर भार्गव ने मैदानी अमले को निर्देश दिए हैं कि वे किसानों के लगातार संपर्क में रहें और उन्हें मौसम की स्थिति के अनुसार ही कृषि कार्य करने के लिए जागरूक करें. विभाग का कहना है कि जिन जिलों में अभी तक सामान्य से कम बारिश हुई है, वहां पर्याप्त नमी आने तक बुवाई टालना ही सबसे बेहतर फैसला रहेगा.खेत में कब करें खरीफ फसलों की बुवाई?कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, बुवाई का निर्णय केवल कैलेंडर की तारीखें देखकर नहीं, बल्कि खेत की वास्तविक नमी को परखकर लेना चाहिए.'बतर' की स्थिति का करें इंतजार: विशेषज्ञों का कहना है कि जब मिट्टी में लगभग 4 इंच (करीब एक बालिश्त) की गहराई तक पर्याप्त नमी पहुंच जाए और खेत में 'बतर' की स्थिति बन जाए, तभी बुवाई करना सुरक्षित माना जाता है.कम नमी से नुकसान: यदि कम नमी में बीज बो दिए जाएं, तो अंकुरण प्रभावित हो सकता है. कई बार बीज मिट्टी के अंदर ही सड़ जाते हैं, जिससे किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ती है और लागत दोगुनी हो जाती है.सिंचाई की सुविधा वाले किसान अभी से करें ये तैयारीजिन किसानों के पास सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं, वे इस समय का उपयोग अपने खेत की उपजाऊ क्षमता (उर्वरता) बढ़ाने में कर सकते हैं.हरित खाद का उपयोग: कृषि विभाग ने सलाह दी है कि खेतों में ढैंचा या सनई जैसी हरित खाद वाली फसलों की बुवाई करें, ताकि मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ सके.उचित पोषण: इसके अलावा खेत तैयार करते समय गोबर की सड़ी खाद, वर्मी कम्पोस्ट, सिंगल सुपर फॉस्फेट, म्यूरेट ऑफ पोटाश, जिंक सल्फेट और जिप्सम का उपयोग मिट्टी परीक्षण (Soil Test) और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार करना बेहद लाभदायक रहेगा.सोयाबीन और धान की खेती के लिए 4 वैज्ञानिक सलाहअंकुरण परीक्षण है जरूरी: सोयाबीन की बुवाई से पहले बीजों का अंकुरण परीक्षण जरूर करें. केवल 70 प्रतिशत या उससे अधिक अंकुरण क्षमता वाले बीजों का ही बुवाई के लिए उपयोग करें.बीजोपचार (Seed Treatment): बुवाई से ठीक पहले बीजों को फफूंदनाशक (Fungicide) और जैव उर्वरकों से उपचारित करना जरूरी है, ताकि शुरुआती अवस्था में फसल को कीटों और रोगों से सुरक्षित रखा जा सके. इसके साथ ही कम पानी की आवश्यकता वाली तथा रोग प्रतिरोधी किस्मों का ही चयन करें.धान के लिए आधुनिक तकनीक: धान की खेती करने वाले किसानों को पारंपरिक रोपाई (Manual Transplanting) के बजाय श्री पद्धति (SRI) या डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR - सीधी बुवाई) तकनीक अपनाने की सलाह दी गई है. इन तकनीकों से पानी की भारी बचत होती है और उत्पादन लागत भी कम आती है.आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग: विभाग ने किसानों को रिज एंड फरो सीड ड्रिल, ब्रॉड बेड एंड फरो (BBF) सीड ड्रिल तथा हस्तचालित सीड डिब्लर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग की सलाह दी है. इन तकनीकों से खेत में जल निकास बेहतर रहता है और सूखा या अत्यधिक जलभराव जैसी विपरीत परिस्थितियों में भी फसल सुरक्षित रहती है.जोखिम कम करने के लिए अपनाएं इंटरक्रॉपिंग और फसल बीमामौसम की अनिश्चितता को देखते हुए कृषि विभाग ने अंतरवर्ती खेती (इंटरक्रॉपिंग) अपनाने पर जोर दिया है. एक ही खेत में दो या दो से अधिक फसलों (जैसे सोयाबीन के साथ अरहर) अथवा एक ही फसल की अलग-अलग किस्मों की बुवाई करने से मौसम संबंधी जोखिम कम होता है. यदि किसी कारणवश एक फसल प्रभावित होती है, तो दूसरी फसल से किसानों को सहारा मिल जाता है. इसके साथ ही, प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा समय पर जरूर कराएं.किसान क्या करें और क्या न करें (Quick Guide)क्या करेंक्या न करेंपर्याप्त नमी (4 इंच गहराई) होने के बाद ही बुवाई करें.पहली हल्की फुहार या पहली बारिश के तुरंत बाद बुवाई न करें.बुवाई से पहले बीजों का उचित बीजोपचार जरूर करें.बिना अंकुरण क्षमता जांचे (कम से कम 70%) बीज न बोएं.कम अवधि में पकने वाली और कीट-प्रतिरोधी किस्में चुनें.पूरी तरह सूखी या कम नमी वाली मिट्टी में बीज डालने से बचें.मौसम विभाग के पूर्वानुमान और अलर्ट पर लगातार नजर रखें.जल्दबाजी में एक साथ पूरे खेत की बुवाई करने की गलती न करें.अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)प्रश्न 1: सोयाबीन और धान की बुवाई का सबसे सही समय क्या है?उत्तर: कृषि विभाग के अनुसार, जब खेत की मिट्टी में लगभग 4 इंच तक पर्याप्त नमी पहुंच जाए और खेत में 'बतर' (बुवाई योग्य स्थिति) बन जाए, तभी बुवाई करनी चाहिए.प्रश्न 2: क्या कम बारिश में या सूखी मिट्टी में बुवाई की जा सकती है?उत्तर: बिल्कुल नहीं. अपर्याप्त नमी में बुवाई करने से बीजों का अंकुरण ठीक से नहीं होता, जिससे पौधों की संख्या कम रह जाती है और किसानों को दोबारा बुवाई का भारी खर्च उठाना पड़ सकता है.प्रश्न 3: धान की सीधी बुवाई (DSR) तकनीक के क्या फायदे हैं?उत्तर: डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक से धान की खेती करने पर नर्सरी तैयार करने और रोपाई का खर्च बचता है. इससे पानी की भारी बचत होती है और कम लागत में अच्छा उत्पादन मिलता है.

न्यूज़ इंडिया लाइव 12 Jul 2026 7:00 pm

इंदौर में आज जुटेंगे प्रदेशभर के 5 हजार युवा:‘माय यूथ माय प्राइड कॉन्क्लेव-2026’ में गूंजेगा विकसित मध्य प्रदेश का संकल्प; मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव होंगे शामिल

मध्य प्रदेश के युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और नेतृत्व क्षमता को नई दिशा देने के उद्देश्य से 11 जुलाई को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में ‘माय यूथ माय प्राइड कॉन्क्लेव-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। 'वन स्टेट, वन जनरेशन, वन संकल्प' थीम पर आधारित इस आयोजन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगभग 5 हजार युवा शामिल होंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विशेष रूप से उपस्थित रहकर युवाओं का मार्गदर्शन करेंगे। सुबह 10 बजे से शुरू होने वाले इस कॉन्क्लेव में युवाओं को प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार और सुझाव रखने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री दोपहर 12 बजे कार्यक्रम में पहुंचकर युवाओं को संबोधित करेंगे और उन्हें विकसित, आत्मनिर्भर एवं समृद्ध मध्यप्रदेश के निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेंगे। युवाओं के विचारों से बनेगा विकास का रोडमैप कॉन्क्लेव में शिक्षा, कौशल विकास, खेल, स्टार्टअप, एमएसएमई, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण, संस्कृति, पर्यटन और जनभागीदारी जैसे प्रमुख क्षेत्रों से जुड़े युवा भाग लेंगे। विभिन्न संवाद सत्रों और कार्यशालाओं के माध्यम से प्रतिभागी अपने क्षेत्रों की चुनौतियों, संभावनाओं और समाधान पर चर्चा करेंगे। कार्यक्रम की विशेषता पांच समानांतर विषयगत कार्यशालाएं होंगी, जिनमें युवा खुद व्यवहारिक और क्रियान्वयन योग्य सुझाव तैयार करेंगे। इन सुझावों को संकलित कर प्रदेश के युवाओं का सामूहिक ‘युवा संकल्प’ तैयार किया जाएगा, जो मध्यप्रदेश के भविष्य के विकास का विजन प्रस्तुत करेगा। रैली, सम्मान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और युवा संवाद होंगे आकर्षण कॉन्क्लेव में मोटर साइकिल और साइकिल रैली, प्रेरणादायी उद्बोधन, युवा उपलब्धि सम्मान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, संवादात्मक सत्र, म्यूजिक स्टेज, इंदौरी फूड स्ट्रीट और सामूहिक युवा संकल्प कार्यक्रम जैसे अनेक आकर्षण होंगे। कार्यक्रम के अंत में 5 हजार युवा एक साथ विकसित मध्य प्रदेश के निर्माण का संकल्प लेंगे।

दैनिक भास्कर 11 Jul 2026 9:15 am

मुकुंदरा में ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटी, ड्राइवर की दबकर मौत:लेबर लेने जा रहा था, मध्य प्रदेश से कोटा मजदूरी करने आया था

कोटा के आरकेपुरम थाना क्षेत्र स्थित मुकुंदरा कॉलोनी में एक हादसे में ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक की मौत हो गई। ट्रैक्टर पुलिया के पास अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे चालक उसके नीचे दब गया। हादसे की सूचना मिलते ही आरकेपुरम थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से चालक को ट्रैक्टर के नीचे से बाहर निकाला। मध्यप्रदेश से कोटा मजदूरी करने आया गंभीर हालत में उसे तुरंत मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां ड्यूटी डॉक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान मुकेश कुमार के रूप में हुई है, जो मूल रूप से मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले का रहने वाला था और कोटा के लखवा में रहता था। वह यहां ठेकेदार के पास काम करता था। मुकुंदरा में लेबर लेने आया था आरकेपुरम थाना एसआई बाबूलाल ने बताया कि सोमवार की रात को मुकेश ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर मुकुंदरा क्षेत्र में लेबर लेने आया था। पुलिया के पास अचानक ट्रैक्टर का संतुलन बिगड़ गया, जिससे वाहन पलट गया और चालक उसके नीचे दब गया। हादसे में उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने मृतक के परिजनों को झाबुआ (मध्य प्रदेश) में सूचना दे दी है। परिजनों के कोटा पहुंचने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। फिलहाल पुलिस हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह ट्रैक्टर का अनियंत्रित होकर पलटना सामने आई है।

दैनिक भास्कर 7 Jul 2026 4:22 pm

अस्मिता लीग साउथ जोन कैनोइंग-कयाकिंग में मध्य प्रदेश ओवरऑल चैंपियन:38 पदक जीतकर किया दबदबा कायम, इनमें 16 स्वर्ण, 17 रजत और 5 कांस्य पदक शामिल

मध्यप्रदेश राज्य कैनोइंग एवं कयाकिंग अकादमी के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अस्मिता लीग साउथ ज़ोन कैनोइंग एवं कयाकिंग चैंपियनशिप-2026 में ओवरऑल चैंपियन का खिताब अपने नाम किया है। आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित गंबरमगेड्डा रिजर्वायर में 4 और 5 जुलाई को आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 38 पदक जीते। इनमें 16 स्वर्ण, 17 रजत और 5 कांस्य पदक शामिल हैं। प्रतियोगिता में मध्य प्रदेश ने सर्वाधिक पदक जीतकर पदक तालिका में पहला स्थान हासिल किया। खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में तकनीकी दक्षता, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिचय देते हुए अन्य राज्यों को पीछे छोड़ दिया। लगातार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मिल रही सफलताओं ने एक बार फिर साबित किया है कि प्रदेश की कैनोइंग एवं कयाकिंग अकादमी देश की अग्रणी खेल अकादमियों में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत के साथ-साथ अकादमी में उपलब्ध उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाओं और सुनियोजित तैयारी का परिणाम है। पिछले कुछ वर्षों में जल क्रीड़ाओं में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है, जिसका असर अब राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इस उपलब्धि पर प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और सहयोगी स्टाफ को बधाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश के खिलाड़ी भविष्य में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी मध्यप्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे। प्रदेश के खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणादायी माना जा रहा है। यह उपलब्धि बताती है कि समर्पण, अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट सफलता हासिल की जा सकती है।

दैनिक भास्कर 7 Jul 2026 3:56 pm

24 जून: मध्य प्रदेश में आज मनेगा रानी दुर्गावती गौरव दिवस, जानें उनके बलिदान की कहानी

Rani Durgavati death anniversary: आज 24 जून को रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस मनाया जा रहा है। उनका त्याग भारतीय इतिहास में वीरता, आत्मसम्मान और राष्ट्रभक्ति की अमर मिसाल माना जाता है। जब रानी दुर्गावती को लगा कि वे शत्रुओं के हाथों बंदी बन सकती हैं, ...

वेब दुनिया 24 Jun 2026 10:05 am

मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश में तूफान, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की

भोपाल स्थित भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के केंद्र ने मध्य प्रदेश में मौसम में महत्वपूर्ण बदलाव की चेतावनी जारी की है

देशबन्धु 30 Apr 2026 11:08 pm

दिग्गज अभिनेता आशुतोष राणा ने उज्जैन के प्रतिष्ठित महाकालेश्वर मंदिर में शिव का लिया आशीर्वाद | वीडियो देखें

बहुमुखी अभिनेता आशुतोष राणा को गुरुवार सुबह उज्जैन के प्रतिष्ठित महाकालेश्वर मंदिर में पूजा करते देखा गया। वह मंदिर में भस्म आरती में भी शामिल हुए। उन्हें नेहरू जैकेट के साथ सफेद कुर्ता पहने देखा गया और गले में लाल रंग का शॉल भी डाला हुआ था। मंदिर के पुजारियों के मुताबिक परंपरा का पालन करते हुए ब्रह्म मुहूर्त में बाबा महाकाल के पट खोले गए और उसके बाद दूध, दही, घी, चीनी, शहद और पंचामृत से भगवान महाकाल का अभिषेक किया गया। इसके बाद ढोल-नगाड़ों और शंख बजाने के साथ भस्म आरती हुई। इसे भी पढ़ें: Deepika Padukone का Deewani Mastani गाना ऑस्कर के आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज पर हुआ प्रदर्शित | Watch Video आशुतोष राणा दुश्मन और संघर्ष जैसी फिल्मों में अपनी भूमिकाओं के लिए प्रसिद्ध हैं और उन्होंने पठान, वॉर, हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया, धड़क, सिम्बा और राज जैसी कई अन्य फिल्मों में भी काम किया है। इसे भी पढ़ें: क्या सरबजीत के लिए ऐश्वर्या राय बच्चन के पुरस्कार लेकर चले जाने से नाराज थे रणदीप हुडा? जानें उन्होंने क्या कहा आशुतोष राणा के भविष्य के प्रोजेक्ट वह अगली बार निर्देशक अयान मुखर्जी की एक्शन थ्रिलर फिल्म वॉर 2 में दिखाई देंगे, जिसमें ऋतिक रोशन और एनटीआर जूनियर भी मुख्य भूमिकाओं में हैं। अयान मुखर्जी द्वारा निर्देशित, वॉर 2 स्वतंत्रता दिवस 2025 पर सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। हाल ही में, यशराज फिल्म्स ने सलमान खान-कैटरीना कैफ-स्टारर टाइगर 3 के एक पोस्ट-क्रेडिट दृश्य में ऋतिक रोशन के चरित्र को पेश किया, जिससे प्रशंसकों के बीच उत्साह पैदा हुआ। यह फिल्म 2019 की एक्शन थ्रिलर फिल्म वॉर का सीक्वल है, जिसमें ऋतिक, टाइगर श्रॉफ और वाणी कपूर मुख्य भूमिका में थे। इसके अलावा, उनके पास पाइपलाइन में रश्मिका मंदाना-स्टारर छावा और उमेश शुक्ला द्वारा निर्देशित फिल्म भी है। Madhya Pradesh, Ujjain: Actor Ashutosh Rana visits the shrine of Baba Mahakal and sought blessings. pic.twitter.com/a4UPcEN5sz — IANS (@ians_india) April 3, 2024

प्रभासाक्षी 4 Apr 2024 1:00 pm