हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले भारतीय हॉकी ओलंपिक मेडलिस्ट सुमित कुमार और राजस्थान की रहने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी सोनिका टांडी ने गुपचुप तरीके से शादी रचा ली है। दोनों करीब आठ साल से एक दूसरे को जानते थे। परिवारों की आपसी सहमति से दोनों ने उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित द ऑर्चिड ऋषिवन रिसोर्ट में सात फेरे लिए। इस शादी में कुछ खास बातें भी रही। पहली ये कि यह शादी पूरी तरह बिना दहेज संपन्न हुई। सुमित ने सगाई में केवल 1 रुपया लिया। दूसरी ये कि बारात के स्वागत के दौरान रिबन कटाई और जूते छिपाई की रस्म निभाई गई। इन रस्मों में सुमित ने अपनी सालियों को करीब डेढ़ लाख रुपए दिए। तीसरी बात ये कि शादी के अगले दिन ही सुमित हरियाणा से दिल्ली और फिर बेंगलुरु पहुंचे, जहां 7 से 12 फरवरी तक कैंप में प्रैक्टिस की। इसके बाद 12 फरवरी की रात को हॉकी लीग की तैयारी के लिए ऑस्ट्रेलिया रवाना हो गए, जहां फरवरी के अंतिम सप्ताह में प्रैक्टिस मैच खेले जाने हैं। इस समारोह में कुल करीब 70 लोग शामिल हुए, जिनमें लड़के पक्ष से 25 और लड़की पक्ष से 45 सदस्य मौजूद रहे। शादी की खबर सामने आने के बाद खेल जगत में हैरानी और खुशी का माहौल है। दोनों को साथी खिलाड़ियों और नाते-रिश्तेदारों ने जीवन की इस नई पारी की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं है। सुमित-सोनिका की दोस्ती, प्रेम और शादी तक की कहानी… 6 फरवरी को विदाई, 7 फरवरी को मैदान में वापसी5 फरवरी को फेरे लेने के बाद 6 फरवरी की शाम विदाई की रस्म निभाई गई। भाइयों ने पारंपरिक रीति से विदाई की। दुल्हन सोनिका को लेकर सुमित ऋषिकेश से सोनीपत स्थित अपने घर पहुंचे, जहां पारंपरिक गृह प्रवेश की रस्म निभाई गई। 7 फरवरी सुबह 3:00 बजे सुमित की फ्लाइट थी। वे दिल्ली से बेंगलुरु पहुंचे और 7 से 12 फरवरी तक कैंप में प्रैक्टिस की। इसके बाद 12 फरवरी की रात को हॉकी फ्री लीग की तैयारी के लिए ऑस्ट्रेलिया रवाना हो गए, जहां फरवरी के अंतिम सप्ताह में प्रैक्टिस मैच खेले जाने हैं। वहीं दूसरी ओर सोनिका ने दिल्ली में अपनी नौकरी ज्वाइन कर ली है। बिना दहेज की शादी से दिया सामाजिक संदेशइस विवाह की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि सुमित के परिवार ने दान-दहेज लेने से साफ इनकार कर दिया। पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि शादी बिना दहेज होगी। साधारण और गरीब परिवार से होने के बावजूद सुमित ने समाज को सकारात्मक संदेश देते हुए दहेज प्रथा के खिलाफ उदाहरण पेश किया। समारोह में सुमित के पिता प्रताप सिंह, भाई जय सिंह व उनका परिवार, भाई अमित और अन्य सदस्य मौजूद रहे। वहीं सोनिका के माता-पिता, भाई और रिश्तेदार भी शामिल हुए। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ माहौल उत्साहपूर्ण रहा। कौन हैं ओलंपिक मेडलिस्ट हॉकी खिलाड़ी, 5 पॉइंट में जानिए… माता-पिता, भाइयों ने मजदूरी कर आगे बढ़ायासुमित कुमार सोनीपत जिले के गांव कुराड़ के रहने वाले हैं। उनका जन्म 20 दिसंबर 1996 को हुआ। मजदूर पिता प्रताप सिंह और माता दर्शना देवी के बेटे सुमित ने बचपन में आर्थिक तंगी का सामना किया। परिवार की स्थिति सामान्य नहीं थी, लेकिन माता-पिता और बड़े भाइयों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और आगे बढ़ने का मौका दिया। बड़े भाई जय सिंह और अमित ने खुद मजदूरी कर परिवार की जिम्मेदारी संभाली, ताकि सुमित खेल पर ध्यान दे सकें। 8 साल की उम्र में पहली बार पकड़ी हॉकी स्टिकसिर्फ आठ साल की उम्र में बड़े भाई अमित सुमित को लेकर गांव के एचके वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की हॉकी अकादमी पहुंच गए। यहां पहली बार उन्होंन हॉकी स्टिक पकड़ी। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। शुरुआती दौर में वे घंटों अकेले मैदान में अभ्यास करते थे और अपने खेल को निखारने में जुटे रहते थे। हॉकी के लिए जूते खरीदने के लिए मजदूरी तक कीएक समय ऐसा था जब सुमित के पास जूते खरीदने तक के पैसे नहीं थे। जरूरत पड़ने पर उन्होंने खुद भी मजदूरी की। मां के निधन के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मां की याद में उनकी फोटो वाला लॉकेट पहनकर मैदान में उतरते रहे। कठिन परिस्थितियों ने उन्हें मानसिक रूप से और मजबूत बनाया। मेहनत के दम पर बनाई राष्ट्रीय स्तर पर पहचानकोच नरेश के मार्गदर्शन में उनका खेल तेजी से निखरा। स्कूल स्तर की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन के बाद गुरुग्राम हॉस्टल के लिए ट्रायल हुआ, जहां उनका चयन हो गया। करीब तीन साल तक उन्होंने वहां प्रशिक्षण लिया। इसके बाद भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के उत्तर क्षेत्रीय केंद्र, बहालगढ़ में चयन हुआ, जहां से उनका राष्ट्रीय स्तर तक का सफर मजबूत हुआ। आज भारतीय हॉकी टीम के भरोसेमंद मिडफील्डरसुमित कुमार भारतीय पुरुष हॉकी टीम के भरोसेमंद मिडफील्डर हैं। अपनी तेज खेल शैली, मजबूत डिफेंस और बेहतरीन बॉल कंट्रोल के लिए पहचाने जाने वाले सुमित ने जूनियर स्तर से लेकर सीनियर टीम तक लगातार प्रदर्शन के दम पर पहचान बनाई। वे 2016 जूनियर विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का अहम हिस्सा रहे और 2017 सुल्तान अजलन शाह कप में सीनियर टीम के लिए पदार्पण किया। अब जानिए कौन हैं सोनिका टांड़ी, जो सुमित की हमसफर बनीं… राजस्थान के छोटे से गांव गालड़ में जन्मभारतीय महिला हॉकी टीम की दमदार मिडफील्डर सोनिका टांड़ी का जन्म 20 मार्च 1997 को राजस्थान के चूरू जिले के गालड़ गांव में हुआ। एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशिया कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में पदक जीतने वाली सोनिका ने ग्रामीण परिवेश में ही अपने खेल करियर की शुरुआत की। पिता हरियाणा पुलिस में एसआई रह चुकेबाद में पिता की नौकरी के कारण परिवार हरियाणा के हिसार में आकर रहने लगा। उनके पिता दौलतराम टांडी हरियाणा पुलिस में सब-इंस्पेक्टर रहे और ट्रैफिक इंचार्ज के पद से सेवानिवृत्त हुए। सोनिका के परिवार में दो बहनें मोनिका और दीपका हैं, जबकि एक छोटा भाई मोहित है। तीनों पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी मां संतोष गृहिणी हैं। 11 साल की उम्र में थामी हॉकी स्टिकसोनिका ने मात्र 11 वर्ष की उम्र में छठी कक्षा के दौरान हॉकी स्टिक थामी। उस समय वे हिसार के पुलिस पब्लिक स्कूल में पढ़ाई कर रही थीं। स्कूल टीम की ओर से खेलते हुए उनकी टीम ने साई की टीम को हराया, जिससे उन्हें नई पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने स्टेट और नेशनल स्तर पर गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की। बिना अकादमी के बनी इंटरनेशनल खिलाड़ीग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली सोनिका ने कभी निजी कोचिंग या अकादमी जॉइन नहीं की। उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के अधिकारियों की देखरेख में अभ्यास किया। उनके कोच बलराज सिंह सोढ़ी रहे। लगातार मेहनत और अनुशासन ने उन्हें इंटरनेशनल स्तर तक पहुंचाया। ----------------- ये खबर भी पढ़ें…. हरियाणवी ओलिंपियन पहलवान शादी के बंधन में बंधे, VIDEO:बहादुरगढ़ में पिता के दोस्त की बेटी संग 7 फेरे लिए; टीके में सिर्फ चांदी का सिक्का लिया झज्जर के रहने वाले ओलिंपियन पहलवान दीपक पूनिया मंगलवार रात शादी के बंधन में बंध गए। बहादुरगढ़ के हिल्टन रिजॉर्ट में उन्होंने अपने पिता के दोस्त की बेटी शिवानी संग सात फेरे लिए। इस दौरान दीपक ने क्रीम कलर की शेरवानी और शिवानी ने डार्क रेड कलर का लहंगा पहना था। दोनों ने ड्रेस एक ही डिजाइनर से तैयार करवाई। (पूरी खबर पढ़ें)
शिक्षक विशाल का खेलो इंडिया ट्राइबल में चयन
बगबुड़ा| शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोहरौद मैं पदस्थ व्यायाम शिक्षक विशाल किस्पोट्टा जिनका चयन खेलों इंडिया ट्राइबल गेम्स में हुआ है जिसका प्रशिक्षण शिविर 22 जनवरी से 10 फ़रवरी 2026 तक बी आर यादव हॉकी स्टेडियम बहतराई, बिलासपुर में सम्पन्न हुआ अतः खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स रायपुर में ही आयोजित किया जा रहा है इसके पश्चात इनका चयन ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज हॉकी प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ दल में चाइनीज़ होकर एस.बी.वी अशोकनगर, गुमान हेरा, दिल्ली राष्ट्रीय स्तर की अंतर्विभागीय प्रतियोगिता 17 फ़रवरी से 28 फ़रवरी 2026 में आयोजित होगी में छत्तीसगढ़ राज्य व विद्यालय क्षेत्र का नाम गौरवान्वित करते हुए प्रतियोगिता में भाग लेंगे।
एमपी टीम में बैतूल के 5 खिलाड़ी:खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के लिए भोपाल में लेंगे प्रशिक्षण
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के चयन ट्रायल में बैतूल जिले के पांच खिलाड़ियों का चयन हुआ है। मध्य प्रदेश शासन के खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित इन खेलों के लिए चयनित खिलाड़ी अब भोपाल में प्रशिक्षण लेंगे। इसके बाद वे रायपुर में होने वाले मुकाबलों में मध्य प्रदेश टीम का प्रतिनिधित्व करेंगे। पुरुष वर्ग में पिंटू उइके, फ्लैश कावरे और रोहित कुमरे को टीम में शामिल किया गया है। वहीं, महिला वर्ग में भूमिका पांडरे और देवश्री उइके को मौका मिला है। प्रतियोगिता का क्वालिफायर राउंड रायपुर में 21 से 27 फरवरी तक खेला जाएगा। इसमें शीर्ष आठ टीमें मुख्य ट्राइबल गेम्स में प्रवेश करेंगी, जो 28 फरवरी से शुरू होंगे। चयनित खिलाड़ियों में पिंटू उइके का पिछला अनुभव भी उल्लेखनीय है। वह 2023 में भुवनेश्वर (ओडिशा) में आयोजित ट्राइबल खेल महोत्सव में मध्य प्रदेश टीम के उपकप्तान रह चुके हैं। बैतूल जिले के खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर जिला हॉकी संघ और स्थानीय खेल प्रेमियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।
मध्य प्रदेश के 50 खेल संघों में से 24 संघ के अध्यक्ष पद पर नेता काबिज है, 15 संघ ऐसे हैं जिनकी कमान सरकारी कर्मचारियों के हाथों में हैं। केवल 5 खेल संघ ऐसे हैं जिनके अध्यक्ष खिलाड़ी हैं। दरअसल, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन के चुनावों पर सुनवाई के दौरान एक तीखी टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा, जिन्हें बल्ला पकड़ना नहीं आता, वे क्रिकेट संघ में बैठे हैं। खेल संस्थाओं का नेतृत्व ऐसे लोगों के पास होना चाहिए जो खेलों को समझते हों। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद जब भास्कर ने मप्र के 50 खेल संघों की पड़ताल की तो पाया कि यहां सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, बल्कि लगभग हर खेल की कमान ऐसे लोगों के हाथों में है, जिनका उस खेल से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं रहा। आलम यह है कि हाई बीपी और शुगर के मरीज उन खेल संघों के अध्यक्ष हैं, जिनमें फिटनेस सर्वोपरि होती है। जिन्होंने कभी शूटिंग वाली बंदूक नहीं उठाई, वे शूटिंग एसोसिएशन में निर्णायक पदों पर बैठे हैं। भास्कर ने पड़ताल में ये भी जाना कि इन संघों में आखिरी बार लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कब हुए थे और जमीनी स्तर पर जिला संघों की क्या स्थिति है? साथ ही एक्सपर्ट से समझा कि आखिर खेल संघ नेताओं के कब्जे में क्यों हैं? पढ़िए रिपोर्ट… भास्कर की पड़ताल के बाद ये 5 पॉइंट सामने आए अब सिलसिलेवार जानिए इन खेल संघों के बारे में रमेश मेंदोला 16 साल से अध्यक्षMOA मध्य प्रदेश में खेलों की सर्वोच्च इकाई है। इसकी मान्यता के बिना किसी भी खेल संघ के खिलाड़ी आधिकारिक राष्ट्रीय खेलों में हिस्सा नहीं ले सकते। विक्रम और एकलव्य जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों के लिए खिलाड़ियों के नाम तय करने में भी इसकी भूमिका अहम होती है। इस सर्वोच्च संस्था पर पूरी तरह से राजनीति हावी है। पिछले 16 सालों से अध्यक्ष पद पर रमेश मेंदोला काबिज हैं। इससे पहले भी इस संघ में विश्वास सारंग और वी.डी. शर्मा जैसे बड़े नेता उपाध्यक्ष रह चुके हैं। 22 सालों से सिंधिया परिवार काबिजप्रदेश के सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट की कमान भी खिलाड़ियों के हाथ में नहीं है। पिछले 22 सालों से (2004 के बाद) कोई भी क्रिकेटर MPCA का अध्यक्ष नहीं बना है। वर्तमान में सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी, महाआर्यमान सिंधिया, इसके अध्यक्ष हैं। इससे पहले उनके पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया और दादा माधवराव सिंधिया भी इस पद पर रह चुके हैं। जिला स्तर पर भी स्थिति यही है। हर जिले में प्रभावशाली नेताओं ने क्रिकेट संघों पर अपना वर्चस्व कायम कर रखा है, जबकि योग्य पूर्व खिलाड़ी और प्रशासक मौके का इंतजार ही कर रहे हैं। परिवार में ही अध्यक्ष-सचिव पदमध्य प्रदेश टेबल टेनिस एसोसिएशन परिवारवाद का सबसे बड़ा उदाहरण है। जब नियम आया कि दो कार्यकाल पूरे कर चुके पदाधिकारी दोबारा पद नहीं ले सकते, तो अध्यक्ष ओम सोनी और सचिव जयेश आचार्य को हटना पड़ा, लेकिन उन्होंने सत्ता अपने ही परिवार में रखी। मप्र टेबल टेनिस एसोसिएशन के नए अध्यक्ष प्रमोद सोनी को चुना गया, जो पूर्व अध्यक्ष ओम सोनी के छोटे भाई है। वहीं पूर्व सचिव जयेश आचार्य की पत्नी रिंकू आचार्य नई सचिव चुनी गईं। हालांकि, जयेश और रिंकू आचार्य टेबल टेनिस के अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुके हैं। दोनों टेबल टेनिस की ट्रेनिंग भी देते हैं। एक कुर्सी, दो दावेदार और बीच में पिसते खिलाड़ीमध्य प्रदेश एथलेटिक्स एसोसिएशन की स्थिति तो और भी विचित्र है। यहां एक ही एसोसिएशन के दो गुट हैं, और दोनों ही खुद को आधिकारिक बताते हैं। एक गुट के अध्यक्ष प्रदेश के खेल मंत्री विश्वास सारंग हैं, जिसे मप्र ओलंपिक संघ से मान्यता प्राप्त है। दूसरे गुट के अध्यक्ष कोच अमानत खान हैं, जिसे भारतीय एथलेटिक्स फेडरेशन मान्यता देता है। इस राजनीतिक लड़ाई का नतीजा यह है कि खिलाड़ियों का भविष्य अधर में लटका है। सारंग वाले गुट को ही खेल विभाग स्टेडियम और अन्य सुविधाएं मुहैया कराता है, जबकि दूसरा गुट उपेक्षित रहता है। बाकी खेल संघों पर भी नेताओं का कब्जा यह सूची बहुत लंबी है। चाहे हॉकी हो, बास्केटबॉल हो, जूडो हो या घुड़सवारी, हर जगह अध्यक्ष या सचिव के पद पर कोई नेता, कोई बड़ा व्यापारी या कोई रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी बैठा है, जिसका उस खेल की बारीकियों से कोई लेना-देना नहीं है। खिलाड़ियों को केवल सलाहकार या संयुक्त सचिव जैसे पदों पर रखा गया है, जहां उनकी कोई सुनता नहीं। एक्सपर्ट बोले- जवाबदेही तय होना चाहिए पूर्व ओलंपियन और पूर्व केंद्रीय मंत्री असलम शेर खान का इस मामले में कहना है कि खेलों का भला सिर्फ ईमानदार सोच से हो सकता है। हम दुनिया के किसी भी देश से सिर्फ एक मामले में पीछे हैं, और वह है ईमानदारी। अगर हमारे खेल संघों में बैठे लोग और खिलाड़ी अपने काम के प्रति ईमानदार हो जाएं, तो हमें कोई नहीं पछाड़ सकता। उन्होंने आगे कहा, अभी हालत यह है कि व्यक्तिगत खेलों में लोग अपनी पसंद के लोगों को आगे बढ़ा रहे हैं। अगर खिलाड़ी प्रदर्शन नहीं कर पा रहा है, तो उसे इंजेक्शन देकर प्रदर्शन करवाया जा रहा है। वे राज्य स्तर पर तो जीत जाते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानकों पर टिक नहीं पाते। यही हाल टीम गेम्स का है। हॉकी या फुटबॉल में सबसे मजबूत टीम उतारने के बजाय, अपनी पसंद के दो-तीन कमजोर खिलाड़ियों को टीम में जगह दे दी जाती है, जिससे पूरी टीम का संतुलन बिगड़ता है और हम हार जाते हैं।उन्होंने 1954 के ओलंपिक का एक शानदार उदाहरण दिया, जब भारतीय हॉकी टीम फाइनल में एक गोल से हारकर रजत पदक जीती थी। उस समय हॉकी एसोसिएशन के अध्यक्ष जे.आर.डी. टाटा ने हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। आज के समय में इसी तरह की ईमानदारी और जवाबदेही की सख्त जरूरत है।
जरखड़ एकेडमी ने किला रायपुर को 6-1 से हराया
भास्कर न्यूज | लुधियाना 38वें मॉडर्न रूरल मिनी ओलिंपिक जरखड़ गेम्स में अलग-अलग गेम्स का आयोजन किया जा रहा है। इसमें हॉकी सब-जूनियर कैटेगरी में जरखड़ एकेडमी ने किला रायपुर को 6-1 से, चचराड़ी ने तेहिंग के बीच मैच 3-3 पर ड्रॉ रहा, रामपुर छन्ना ने सजली को 3-1 से, जगतार इलेवन ने संगरूर को 3-2 से हराया। लड़कियों की कैटेगरी में पीआईएस बठिंडा ने मुंडियां कला को 3-0 से, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला ने लुधियाना कोचिंग सेंटर को 4-0 से, लवली यूनिवर्सिटी ने जरखड़ एकेडमी को 4-2 से हराकर अगले राउंड में एंट्री की। हॉकी सीनियर लड़कों की कैटेगरी में जालंधर और किला रायपुर के बीच मैच 5-5 के ड्रा पर खेला गया, जबकि लवली यूनिवर्सिटी जालंधर ने अमरगढ़ को 3-1 से हराया। लड़कियों की कैटेगरी में रस्साकशी में दशमेश पब्लिक स्कूल कैड ने वर्ल्ड मिलेनियम रंजीत को हराया। इस मौके पर खिलाड़ियों को रिफ्रेशमेंट दी गई। गेम्स के चीफ ऑर्गेनाइजर जगरूप सिंह जरखड़ ने बताया कि आज कबड्डी, फुटबॉल गर्ल्स और हॉकी बॉयज गर्ल्स के फाइनल मैच होंगे। इस दौरान अमरीक सिंह मिन्हास, सुखविंदर सिंह चेयरमैन लुधियाना स्पोर्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन, अमरिंदर सिंह, सरपंच संदीप सिंह जरखड़ मौजूद रहे। आज दोपहर 1 बजे पंजाब के पूर्व डीजीपी चंद्रशेखर को खेल प्रमोटर अमरजीत ग्रेवाल अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। पद्म श्री बलदेव सिंह को भगत पूरण सिंह अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने अपनी कोचिंग के तहत 200 से अधिक ओलिंपियन और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों (पुरुष एवं महिला) को तैयार किया है। प्रभदीप सिंह डिप्टी डायरेक्टर, सूचना एवं लोक संपर्क विभाग को पंजाब का मान अवॉर्ड प्रदान किया जाएगा। सिमरनजीत कौर गिल, प्रो वाइस चांसलर, सीटी यूनिवर्सिटी, लुधियाना को पंजाब की धियों का मान अवॉर्ड, दविंदरपाल सिंह चंडीगढ़ को पंजाब की पत्रकारिता का मान अवॉर्ड, साइक्लिस्ट हरश्वीर सिंह सेखों को ओलिंपियन सुरजीत सिंह रंधावा अवॉर्ड, वेटरन हॉकी खिलाड़ी करमजीत सिंह ग्रेवाल (यूएसए) को ओलिंपियन प्रिथीपाल सिंह अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर के बाद दोपहर 3 बजे लोक गायिकाओं सतविंदर बिट्टी, जसवंत संदीला, नीतू विर्क, गुरजान आदि अन्य गायकों का खुला अखाड़ा भी लगेगा।
एफआईएच प्रो लीग: अलेक्जेंडर हेंड्रिक्स का 'डबल धमाका', बेल्जियम ने भारत को 4-2 से हराया
बेल्जियम ने भारत के खिलाफ बिरसा मुंडा हॉकी स्टेडियम में एफआईएच मेंस प्रो लीग 2025-26 के राउरकेला लेग में 4-2 से जीत दर्ज की
38वीं मॉडर्न पेंडू मिनी ओलिंपिक जरखड़ का आगाज, मशाल संग स्टेडियम पहुंचे खिलाड़ी
भास्कर न्यूज | लुधियाना माता साहिब कौर स्पोर्ट्स चैरिटेबल ट्रस्ट पिंड जरखड़ की ओर से 38वीं मॉडर्न पेंडू मिनी ओलिंपिक जरखड़ का शुभारंभ कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सौध ने किया। इस दौरान स्कूलों के बच्चों का मार्च पास्ट किया। जो आकर्षण का केंद्र रहेगा। विभिन्न स्कूलों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी खेल माहौल को और सुंदर बनाया। जरखड़ खेलों की ओलंपिक खेल मशाल जन्नत-ए-जरखड़ म्यूजियम लाहौर (पाकिस्तान वाला लाहौर नहीं) से चली और खिलाड़ियों के काफिले के रूप में जरखड़ खेल स्टेडियम पहुंची। पहले दिन हॉकी और रस्साकसी आदि के मुकाबले हुए। शनिवार को कई अन्य गेम्स के मुकाबले होगे। इस दौरान समारोह की अध्यक्षता हलका गिल के विधायक जीवन सिंह संगोवाल, अमलोह विधायक गुरिंदर सिंह और विधायक दलजीत ग्रेवाल भोला ने की। इस दौरान चेयरमैन नरिंदर पाल सिंह सिद्धू, अमरीक सिंह मिन्हास पूर्व एआईजी पंजाब पुलिस, सरपंच संदीप सिंह जरखड़, सुखविंदर सिंह चेयरमैन लुधियाना स्पोर्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन, तजिंदर सिंह जरखड़, परमजीत सिंह पम्मा ग्रेवाल, अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी बलवंत सिंह बुड्ढेवाल, छिंदा जरखड़ मौजूद रहे। दूसरे दिन हॉकी लड़के और लड़कियां सीनियर वर्ग, हॉकी अंडर 15 साल लड़के, कबड्डी ओपन लुधियाना मलेरकोटला कबड्डी लीग के मुकाबले, कबड्डी बुजुर्गों की 50 साल धर्म सिंह जरखड़ कबड्डी कप, अमरजीत ग्रेवाल की याद में फुटबॉल लड़के अंडर 19 साल लड़कियों के मुकाबले, बाबा सुरजन सिंह सरींह की याद में रस्साकशी सीनियर वर्ग के मुकाबले होंगे। इस वर्ष जरखड़ खेलों के फाइनल समारोह पर 15 फरवरी को दोपहर 1 बजे पंजाब के पूर्व डीजीपी और खेल समर्थक अधिकारी चंद्रशेखर को खेल प्रमोटर अमरजीत ग्रेवाल अवॉर्ड से, पद्म श्री बलदेव सिंह को भगत पूरण सिंह अवॉर्ड से, प्रभदीप सिंह नथोवाल डिप्टी डायरेक्टर सूचना और लोक संपर्क विभाग को पंजाब का मान अवॉर्ड से सिमरनजीत कौर गिल प्रो वाइस चांसलर सीटी यूनिवर्सिटी लुधियाना को पंजाब की धीयां का मान अवॉर्ड से, दविंदरपाल सिंह चंडीगढ़ को पंजाब की पत्रकारिता का मान अवॉर्ड से, साइक्लिस्ट हरश्वीर सिंह सेखों को ओलंपियन सुरजीत सिंह रंधावा अवॉर्ड से, वेटरन हॉकी खिलाड़ी करमजीत सिंह काला ग्रेवाल यूएसए को ओलंपियन प्रिथीपाल सिंह अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।
मुंबई में पुलिस टीम पर हमले के मामले में फरार चल रहा एक आरोपी प्रयागराज से गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई यूपी एसटीएफ और मुंबई पुलिस की टीम ने की। गिरफ्तार युवक कुछ दिन पहले नवी मुंबई में एंटीनाकोटिक्स रेड के दौरान पुलिस टीम पर हमले की घटना में शामिल था, ऐसा दावा पुलिस ने किया है। मऊआइमा का रहने वाला गिरफ्तार आरोपी की पहचान मो. सुहैल पुत्र शकील शेख, निवासी मानखुर्द गेवड़ी, मुंबई के रूप में हुई है। उसे मऊआईमा कस्बे से पकड़ा गया।बताया गया है कि नवी मुंबई के उल्वे इलाके में 31 जनवरी की रात एंटी नारकोटिक्स ऑपरेशन के दौरान ड्रग्स कारोबार से जुड़े लोगों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया था। हमलावरों ने तलवार, चाकू, हॉकी स्टिक और देसी कट्टों की बट से पुलिसकर्मियों पर वार किया। इतना ही नहीं, एक पुलिसकर्मी को बाइक से कुचलने की भी कोशिश की गई थी। इस मामले में थाना उल्वे, नवी मुंबई में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। यूपी में छिपे होने की मिला था इनपुट मुंबई पुलिस को सूचना मिली थी कि वारदात में शामिल मो. सुहैल उत्तर प्रदेश में छिपा हुआ है। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस ने यूपी एसटीएफ से संपर्क किया। एसटीएफ लखनऊ इकाई को इनपुट मिला कि आरोपी प्रयागराज के मऊआईमा क्षेत्र में किसी परिचित से मिलने आने वाला है। गिरफ्तारी के डर से भाग आया था प्रयागराज सूचना पर कार्रवाई करते हुए एसटीएफ की टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह मुंबई में मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ा है और पुलिस की रेड के बाद से फरार चल रहा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह मुंबई से भागकर प्रयागराज आ गया था। गिरफ्तार आरोपी को अदालत में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर मुंबई पुलिस को सौंप दिया गया है। अब आगे की कार्रवाई मुंबई में की जाएगी।
38वीं मॉडर्न पेंडू मिनी ओलिंपिक का जलवा आज से 15 तक
भास्कर न्यूज | लुधियाना माता साहिब कौर स्पोर्ट्स चैरिटेबल ट्रस्ट पिंड जरखड़ की ओर से हर साल आयोजित की जाने वाली जीएसटी ट्रक परमिट, कोका कोला, एवन साइकिल, 38वीं मॉडर्न पेंडू मिनी ओलिंपिक जरखड़ 13, 14 और 15 फरवरी को होगी। जिसको लेकर गुरु नानक स्टेडियम लुधियाना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जरखड़ ट्रस्ट के चेयरमैन नरिंदरपाल सिंह सिद्धू, मुख्य प्रबंधक जगरूप सिंह जरखड़, प्रधान एडवोकेट हरकमल सिंह ने बताया कि 13 फरवरी को खेलों का उद्घाटन सुबह 11 बजे होगा। जिसमें विभिन्न स्कूलों के बच्चों का मार्च पास्ट आकर्षण का केंद्र रहेगा। विभिन्न स्कूलों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी खेल माहौल को और सुंदर बनाएंगी। इस मौके पर जरखड़ खेलों की ओलिंपिक खेल मशाल जन्नत-ए-जरखड़ म्यूजियम लाहौर (पाकिस्तान वाला लाहौर नहीं) से चलेगी और खिलाड़ियों के काफिले के रूप में जरखड़ खेल स्टेडियम पहुंचेगी। जहां राष्ट्रीय और इंटरनेशनल खिलाड़ी खेल मशाल को जलाएंगे। साथ ही खेलों की शुरुआत का ऐलान होगा। खेलों का उद्घाटन कैबिनेट मंत्री तरनप्रीत सिंह सोंद करेंगे। जबकि उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता हलका गिल के विधायक जीवन सिंह संगोवाल करेंगे। प्रेस कॉन्फ्रेस के दौरान चेयरमैन नरिंदर पाल सिंह सिद्धू के अलावा अमरीक सिंह मिन्हास पूर्व एआईजी पंजाब पुलिस, सरपंच संदीप सिंह जरखड़, सुखविंदर सिंह चेयरमैन लुधियाना स्पोर्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन, तजिंदर सिंह जरखड़, परमजीत सिंह पम्मा ग्रेवाल, अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी बलवंत सिंह बुड्ढेवाल, छिंदा जरखड़ मौजूद रहे। 7 व्यक्तित्वों का विशेष सम्मान होगा। इन खेलों में महिंदर प्रताप सिंह ग्रेवाल हॉकी गोल्ड कप और नायब सिंह ग्रेवाल जोधा कबड्डी कप खेलों का मुख्य आकर्षण होगा। उन्होंने बताया कि हॉकी लड़के और लड़कियां सीनियर वर्ग, हॉकी अंडर 15 साल लड़के, कबड्डी ओपन लुधियाना मलेरकोटला कबड्डी लीग के मुकाबले, कबड्डी बुजुर्गों की 50 साल धर्म सिंह जरखड़ कबड्डी कप, अमरजीत ग्रेवाल की याद में फुटबॉल लड़के अंडर 19 साल लड़कियों के मुकाबले, बाबा सुरजन सिंह सरींह की याद में रस्साकशी सीनियर वर्ग के मुकाबले, इसके अलावा प्राइमरी स्कूल के बच्चों की विभिन्न खेलें, रस्साकशी, दौड़, कबड्डी प्राइमरी स्कूल आदि खेलों के मुकाबले करवाए जाएंगे। फाइनल समारोह पर 15 फरवरी को दोपहर 2 बजे नामी लोक गायिका सतविंदर बिट्टी, जसवंत संदीला, नीतू विरक, गुरजान आदि अन्य गायकों का खुला अखाड़ा भी लगेगा। ड्रैगन अकादमी लुधियाना की ओर से सांस्कृतिक गीतों पर कोरियोग्राफी और डांस करके दर्शकों का मनोरंजन किया जाएगा। जरखड़ खेलों के विजेता खिलाड़ियों को जहां एवन साइकिल की ओर से 50 साइकिल दिए जाएंगे। हॉकी के विजेता खिलाड़ियों को भी विशाल साइकिल 20 साइकिल इनाम के रूप में देगी। इसके अलावा बड़े स्तर पर इनामी राशि भी मिलेगी। कबड्डी खिलाड़ियों को ढाई लाख रुपये और फुटबॉल में 10 लाख रुपये की इनामी राशि वितरित की जाएगी।
जमीन की जंग:सीमांकन कर रहे राजस्व अमले और बिल्डर के बेटे पर हमला; बंधक बनाया-कार में तोड़फोड़
एयरपोर्ट रोड के पास गुरुवार को जमीन सीमांकन के दौरान जमकर बवाल हुआ। शहर के बिल्डर नितिन अग्रवाल के बेटे नमन अग्रवाल पर संत आशाराम आश्रम से जुड़े लोगों ने हमला कर दिया। आरोप है कि उन्हें कार में घेर लिया गया। गेट बंद कर बाहर नहीं जाने दिया। फिर हॉकी और डंडों से हमला किया गया। नमन दोपहर करीब 1 बजे राजस्व निरीक्षक प्रदीप यादव की टीम के साथ जमीन का सीमांकन कराने पहुंचे थे। पड़ोसी दिलीप कुकरेजा और अमित भी थे। आरोप है कि आश्रम संचालक रवीन्द्र पटेल के कहने पर महिला साधक और पुरुष सेवादार भड़क गए। नमन और उनके साथियों को घेर लिया गया। मर्सिडीज में तोड़फोड़ की गई। राजस्व अमले को भी घेर लिया गया। टीम जैसे-तैसे वहां से निकली। घटना के बाद थाना गांधीनगर में सीताराम, राघव, नरेंद्र, प्रदीप, हिमांशु और अक्षय के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पटवारी की तरफ से शासकीय कार्य में बाधा का आवेदन भी दिया गया है। इधर, आश्रम प्रबंधन से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। देर रात आरआई और पटवारी ने शासकीय कार्य में बाधा की शिकायत की दो एकड़ पर विवाद... बिल्डर नितिन अग्रवाल का कहना है कि उनकी 2 एकड़ जमीन आश्रम परिसर में आ रही है। महीनों से सीमांकन अटका था। आज हम पहुंचे, तो यह घटना हुई। कानून का डर खत्म हो गया है। आरोपियों पर कार्रवाई हो और सीमांकन के दौरान पुलिस मौजूद रहे। 20-30 लोग आए, खींचकर आश्रम में बंद किया और पीटा मैं दोपहर करीब 1 बजे अपनी जमीन के सीमांकन के लिए राजस्व टीम के साथ पहुंचा था। सीमांकन शुरू होते ही आश्रम पक्ष के लोग विरोध करने लगे। महिलाओं और पुरुषों ने गालियां दीं। धमकी दी कि हाथ-पैर तोड़ देंगे। विवाद बढ़ा तो मैंने वहां से निकलना चाहा। लेकिन आश्रम का गेट बंद कर दिया गया। मुझे बाहर नहीं जाने दिया गया। कहा गया कि संचालक के कहने पर गेट बंद है। मैंने ड्राइवर से कार रिवर्स करने को कहा। तभी 25-30 लोग डंडे और हॉकी लेकर घेरकर खड़े हो गए। मेरी कार के कांच तोड़ दिए। दरवाजा खोलकर मुझे और ड्राइवर मनोज को बाहर खींच लिया। सिर, कान और हाथों पर वार किए गए। अजय अहिरवार को भी पीटा। मैं वहां से नहीं निकलता तो बड़ी घटना हो सकती थी। - जैसा नमन ने भास्कर को बताया जांच के बाद आरोपियों पर सख्त कार्रवाई करेंगेसीमांकन के दौरान मारपीट की शिकायत मिली है। पुलिस मामले की जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। चाहे आरोपी कोई भी हो छोड़ा नहीं जाएगा। -मलकीत सिंह, एडिश्नल डीसीपी जोन 4
हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री और हॉकी खिलाड़ी रह चुके संदीप सिंह और महिला एथलीट यौन उत्पीड़न केस में आज चंडीगढ़ की चीफ ज्यूडीशियल (CJM) कोर्ट में सुनवाई होगी। इससे पहले महिला कोच की याचिका पर चंडीगढ़ जिला एवं सत्र न्यायाधीश एचएस ग्रेवाल ने इस मामले को किसी अन्य न्यायाधीश को ट्रांसफर करने के आवेदन को स्वीकार कर लिया है। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि एसीजेएम राहुल गर्ग उसके प्रति पक्षपाती हैं। अपनी याचिका में पीड़िता ने कहा, कि जज ने उसे केस की फाइल देखने नहीं दी। उसे CRPC की धारा 164 के तहत दिए गए अपने बयान की कॉपी या जानकारी नहीं दी गई। इसके अलावा जज खुद इस केस की सुनवाई कर रहे थे, जबकि वे खुद एक गवाह की सूची में शामिल थे। ऐसे में मुझे न्याय की उम्मीद नहीं है। पूर्व मंत्री पर यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप 26 दिसंबर 2022 को जूनियर महिला कोच ने संदीप सिंह के खिलाफ यौन-उत्पीड़न सहित अन्य आरोप के तहत चंडीगढ़ पुलिस में शिकायत दी थी। जांच के बाद 31 दिसंबर की रात 11 बजे सेक्टर-26 थाने में संदीप सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 342, 354, 354ए, 354बी, 506 के तहत पुलिस ने केस दर्ज किया था। इसमें छेड़छाड़, गलत तरीके से कैद करने, आपराधिक धमकी देने और किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द, हावभाव या कृत्य का इस्तेमाल करने के आरोप थे। पीड़िता की ओर से दी गई शिकायत में बताया था कि मंत्री ने उसे कहा था कि तुम मुझे खुश रखों, मैं तुम्हे खुख रखूंगा। बात न मानने पर ट्रांसफर करा दिया था। हालांकि, संदीप सिंह ने इस आरोपों को पूरी तरह नकार दिया था। यहां पढ़िए महिला कोच के एसीजेएम कोर्ट पर क्या लगाए आरोप...1. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) राहुल गर्ग इस मामले की सुनवाई कर रहे थे, जो पीड़िता के बयान दर्ज करने के चरण तक पहुंच चुका था। हालांकि, सुनवाई से एक दिन पहले 30 जनवरी को जूनियर महिला कोच ने अपने वकील समीर सेठी के माध्यम से एक आवेदन दायर किया।इसमें बताया गया कि एसीजेएम का नाम स्वयं अभियोजन पक्ष के गवाहों की सूची में गवाह संख्या 19 के रूप में दर्ज है। उन्होंने कहा कि इससे उनकी अदालत के लिए मुकदमे को आगे बढ़ाने में एक मूलभूत कानूनी बाधा उत्पन्न होती है।2. जूनियर महिला कोच ने कहा कि हालांकि अदालत के समक्ष मौखिक रूप से और निचली कोर्ट में आवेदन के माध्यम से भी यही आपत्तियां उठाई गई थीं, फिर भी पीठासीन अधिकारी ने स्वयं को इस मामले से अलग नहीं किया और स्पष्ट पूर्वाग्रह के साथ सुनवाई जारी रखी।बताया कि एसीजेएम गर्ग ने पहले संदीप सिंह के खिलाफ चंडीगढ़ पुलिस के झूठ पकड़ने के आवेदन पर सुनवाई की थी, जिसे उन्होंने करने से इनकार कर दिया था और उस संबंध में उन्हें अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में पेश किया गया था।3. जूनियर महिला कोच ने आगे बताया कि अदालत ने धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज उनके बयान की प्रति उन्हें लगातार देने से इनकार कर दिया है। “इसके अलावा, याचिकाकर्ता को उक्त बयान की जांच करने और मामले के रिकॉर्ड से उसकी संगति सुनिश्चित करने का उचित अवसर भी नहीं दिया गया है, जो कि शिकायतकर्ता का अधिकार है। उनके वकील ने कहा, अदालत के पीठासीन अधिकारी ने शिकायतकर्ता को उनके पूर्व न्यायिक बयान को सत्यापित करने की अनुमति दिए बिना मामले में गवाही देने का निर्देश दिया है, जो 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' का घोर उल्लंघन है। ऐसी प्रक्रिया शिकायतकर्ता के हितों के लिए अत्यंत हानिकारक है। महिला कोच के पूर्व मंत्री पर ये 3 गंभीर आरोप...1. मंत्री ने स्नैपचैट व इंस्टाग्राम पर मैसेज भेजे जूनियर महिला कोच ने आरोप लगाया था कि 2016 रियो ओलिंपिक में हिस्सा लेने के बाद वह खेल विभाग में जूनियर कोच के तौर पर भर्ती हुई थी। इसके बाद खेल मंत्री संदीप सिंह ने इंस्टाग्राम और स्नैपचैट पर उसको मैसेज भेजे। फिर मुझे चंडीगढ सेक्टर 7 लेक साइड मिलने के लिए बुलाया।मैं नहीं गई तो वे मुझे इंस्टाग्राम पर ब्लॉक और अनब्लॉक करते रहे। महिला कोच के आरोपों के मुताबिक 1 जुलाई को मंत्री ने उसे स्नैपचैट कॉल किया। जिसमें डॉक्यूमेंट्स वैरिफिकेशन के लिए मुझे सेक्टर 7, चंडीगढ़ में अपने आवास पर आने के लिए कहा।2. मंत्री ने कहा- तुम मुझे खुश रखो, मैं तुम्हें खुश रखूंगा जूनियर महिला कोच ने कहा कि इसके बाद वह मंत्री के सरकारी घर पर पहुंची। वहां वे कैमरे वाले ऑफिस में नहीं बैठना चाहते थे। वह मुझे अलग केबिन में लेकर गए। वहां मेरे पैर पर हाथ रखा। मंत्री ने कहा कि तुम मुझे खुश रखो, मैं तुम्हें खुश रखूंगा। मेरी बात मानने पर आपको सभी सुविधाएं और मनचाही जगह पोस्टिंग मिलेगी।महिला कोच ने संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि शाम करीब 6.50 बजे मंत्री संदीप सिंह ने उससे छेड़छाड़ की। इस दौरान महिला कोच की टी-शर्ट फट गई। किसी तरह वह उनके चंगुल से छूटकर बाहर आ गई।3. बात नहीं मानी तो ट्रांसफर कर दिया पीड़िता ने आरोप लगाया कि जब मैंने मंत्री की बात नहीं मानी तो मेरा ट्रांसफर कर दिया गया। मेरी ट्रेंनिग तक रोक दी गई। मैंने घटना की शिकायत के लिए DGP कार्यालय, CM हाउस और तत्कालीन गृह मंत्री अनिल विज समेत हर स्तर पर प्रयास किया, लेकिन कहीं भी सुनवाई नहीं हुई।पीड़िता ने रेप की कोशिश के भी लगाए थे आरोप इसके बाद महिला कोच ने दावा किया था कि संदीप सिंह ने उसे डॉक्यूमेंट चेक करने के लिए चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास बुलाकर रेप करने की कोशिश की थी। वह उनके घर पहुंची और स्टाफ से वॉशरूम पूछा। स्टाफ ने उसे बैडरुम के वॉशरूम में भेज दिया। जब वह बाहर आई तो मंत्री उसके सामने खड़ा हुआ था। उसने अचानक मेरा हाथ पकड़ कर सामने पड़े बेड पर पुश कर दिया। इसके बाद मैं बेड पर गिर गई और वह भी इस दौरान बेड पर आ गया। कोच ने दावा किया कि उसने उसकी टी-शर्ट पकड़कर ऊपर करने की कोशिश की। इसके बाद मेरे नजदीक आने और मुझे किस करने की कोशिश की। उसने यह भी दावा किया था कि उसके द्वारा मंत्री से छोड़ने की काफी रिक्वेस्ट की गई, लेकिन मंत्री उसे जबरन बाथरुम में लेकर गया, जहां उसने अपना लोअर भी उतार दिया। साथ ही मुझे काफी फोर्स से अपनी ओर खींचा। इस दौरान मंत्री ने बाथरुम की कुंडी भी लगा दी। जब मैंने इसका विरोध किया गया तो वह मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करने लगा। जब मंत्री नहीं माना तो मैंने उनको थप्पड़ मार दिया। इसके बाद मंत्री ने भी मुझे भी थप्पड़ मारा। इस पर मैं रोने लगी। तब मंत्री कहने लगा कि स्पोर्ट्स वाली लड़कियां वर्जिन नहीं होती हैं।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत मंगलवार को सरगुजा में 260 और सूरजपुर में 250 जोड़े परिणय बंधन में बंधे। अंबिकापुर के पीजी कॉलेज हॉकी मैदान में सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया। प्रदेशभर में हुए कन्या विवाह के आयोजन में 6421 जोड़ों का विवाह हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव, महापौर मंजूषा भगत सहित अतिथियों ने नवदंपतियों को आशीर्वाद देकर उनके सुखद, समृद्ध और सफल वैवाहिक जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ऑनलाइन जुड़कर नव दंपतियों को बधाई दी। विधि विधान से कराया गया सामूहिक विवाह सामूहिक विवाह समारोह में 192 जोड़ों का विवाह हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान से संपन्न कराया गया। वहीं, 68 जोड़ों का विवाह ईसाई परंपरा के अनुसार कराया गया। इसके लिए अलग व्यवस्थाएं की गई थी। सूरजपुर में 250 जोड़ों का विवाह सूरजपुर में पूर्व गृहमंत्री राम सेवक पैकरा के मुख्य आतिथ्य में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समाज के 250 जोड़ों का सामूहिक विवाह किया गया। कार्यक्रम में अतिथि विधायक भूलन सिंह मरावी, जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्रमणि पैकरा सहित अन्य अतिथियों ने नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वर्चुअल माध्यम से सभी नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया। उनके उज्ज्वल, सुखमय और मंगलमय दांपत्य जीवन की कामना की। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि, शासन राज्य के कमजोर परिवारों की बेटियों की जिम्मेदारी उठा रहा है। जिससे उनके माता पिता को उनकी शादी को लेकर कोई चिंता न रहे। मुख्य अतिथि रामसेवक पैकरा और विधायक भूलन सिंह मरावी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। आयोजन में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई रीति रिवाज से जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया। आयोजन में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।
जगदलपुर क्षेत्र बना विद्युत फुटबॉल का नया चैम्पियन:कोरबा पश्चिम का 10 साल का वर्चस्व टूटा
राजनांदगांव में आयोजित 'पॉवर कंपनीज अंतरक्षेत्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता 2026' का समापन सोमवार को दिल्ली पब्लिक स्कूल के मैदान में हुआ। इस रोमांचक फाइनल मुकाबले में जगदलपुर क्षेत्र ने 10 वर्षों से लगातार खिताब जीत रही कोरबा पश्चिम की टीम को 2-1 से हराकर चैम्पियन का गौरव हासिल किया। मैच के शुरुआती हाफ से ही दोनों टीमें आक्रामक दिखीं। जगदलपुर ने पहले हाफ में गोल दागकर कोरबा पश्चिम पर दबाव बनाया। हालांकि, गत विजेता कोरबा पश्चिम ने वापसी करते हुए एक गोल कर स्कोर बराबर कर दिया। मैच के अंतिम पलों में जगदलपुर के खिलाड़ियों ने निर्णायक गोल कर इतिहास रच दिया। प्रतियोगिता के सेमीफाइनल मुकाबलों में कोरबा पश्चिम ने अंबिकापुर क्षेत्र को पेनाल्टी शूटआउट में 5-4 से हराया था। वहीं, दूसरे सेमीफाइनल में जगदलपुर क्षेत्र ने रायपुर क्षेत्र को 1-0 से मात देकर फाइनल में अपनी जगह बनाई थी। क्षेत्रीय क्रीड़ा एवं कला परिषद राजनांदगांव के तत्वावधान में आयोजित इस तीन दिवसीय आयोजन के समापन समारोह में मुख्य अतिथि कार्यपालक निदेशक शिरीष सेलट ने विजेता व उपविजेता टीमों को शील्ड और ट्रॉफी प्रदान की। सेलट ने खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि राजनांदगांव की खेलधानी की परंपरा को इन खिलाड़ियों ने अपने कौशल से और समृद्ध किया है। इस दौरान अंतरक्षेत्रीय हॉकी प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया, जिसमें कोरबा की टीम विजेता और राजनांदगांव की टीम उपविजेता रही। इस प्रतियोगिता के प्रदर्शन के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों (कोरबा पूर्व, पश्चिम, मड़वा, बिलासपुर, रायपुर, जगदलपुर, राजनांदगांव, दुर्ग और अंबिकापुर) से 33 बेहतरीन खिलाड़ियों का चयन अखिल भारतीय विद्युत मंडल प्रतियोगिता के लिए किया गया है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में अतिरिक्त मुख्य अभियंता मंगल तिर्की, अधीक्षण अभियंता एस. कंवर, के.सी. खोटे सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। निर्णायक मंडल के सदस्यों को भी उनकी निष्पक्ष भूमिका के लिए सम्मानित किया गया।
हरियाणा के चर्चित महिला एथलीट और पूर्व खेल मंत्री हॉकी खिलाड़ी संदीप सिंह के रेप केस में एक बड़ा अपडेट आया है। महिला एथलीट की याचिका पर चंडीगढ़ जिला एवं सत्र न्यायाधीश, एचएस ग्रेवाल ने हरियाणा के पूर्व मंत्री और पूर्व राष्ट्रीय हॉकी कप्तान संदीप सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले को किसी अन्य न्यायाधीश को ट्रांसफर करने के आवेदन को स्वीकार कर लिया। महिला एथलीट की शिकायत पर चंडीगढ़ पुलिस ने संदीप सिंह के खिलाफ छेड़छाड़, गलत तरीके से कैद करने, आपराधिक धमकी देने और किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द, हावभाव या कृत्य का इस्तेमाल करने का केस दर्ज किया था। यहां पढ़िए किन वजहों से केस हुआ ट्रांसफर... 1. गवाह की लिस्ट में एसीजेएम का नाम इससे पहले, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) राहुल गर्ग इस मामले की सुनवाई कर रहे थे, जो पीड़िता के बयान दर्ज करने के चरण तक पहुंच चुका था। हालांकि, सुनवाई से एक दिन पहले, 30 जनवरी को, एथलीट ने अपने वकील समीर सेठी के माध्यम से एक आवेदन दायर किया, जिसमें बताया गया कि एसीजेएम का नाम स्वयं अभियोजन पक्ष के गवाहों की सूची में गवाह संख्या 19 के रूप में दर्ज है। उन्होंने कहा कि इससे उनकी अदालत के लिए मुकदमे को आगे बढ़ाने में एक मूलभूत कानूनी बाधा उत्पन्न होती है।2. चंडीगढ़ पुलिस के झूठ पकड़ने पर एसीजेएम ने की सुनवाईउन्होंने कहा कि हालांकि अदालत के समक्ष मौखिक रूप से और निचली अदालत में आवेदन के माध्यम से भी यही आपत्तियां उठाई गई थीं, फिर भी पीठासीन अधिकारी ने स्वयं को इस मामले से अलग नहीं किया और स्पष्ट पूर्वाग्रह के साथ सुनवाई जारी रखी। महिला एथलीट ने बताया कि एसीजेएम गर्ग ने पहले संदीप सिंह के खिलाफ चंडीगढ़ पुलिस के झूठ पकड़ने के आवेदन पर सुनवाई की थी, जिसे उन्होंने करने से इनकार कर दिया था, और उस संबंध में उन्हें अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में पेश किया गया था।3. बयानों की प्रति कोर्ट ने देने से इंकार कियाउन्होंने आगे बताया कि अदालत ने धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज उनके बयान की प्रति उन्हें लगातार देने से इनकार कर दिया है। “इसके अलावा, याचिकाकर्ता को उक्त बयान की जांच करने और मामले के रिकॉर्ड से उसकी संगति सुनिश्चित करने का उचित अवसर भी नहीं दिया गया है, जो कि शिकायतकर्ता का अधिकार है। यह निवेदन किया जाता है कि अदालत के पीठासीन अधिकारी ने शिकायतकर्ता को उनके पूर्व न्यायिक बयान को सत्यापित करने की अनुमति दिए बिना मामले में गवाही देने का निर्देश दिया है, जो 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' का घोर उल्लंघन है। ऐसी प्रक्रिया शिकायतकर्ता के हितों के लिए अत्यंत हानिकारक है,” उनके वकील ने कहा।महिला एथलीट ने न्यायाधीश पर लगाए पक्षपात के आरोपपीड़िता ने आरोप लगाया कि न्यायाधीश उसके प्रति पक्षपाती थे, और कहा, मामले की फाइल तक पहुंच से इनकार करने, 164 बयान (सीआरपीसी की धारा 164) से वंचित करने और ऐसे मामले की अध्यक्षता करने का संचयी प्रभाव, जिसमें वह एक सूचीबद्ध गवाह है, ने मामले के निष्पक्ष और न्यायसंगत निर्णय में बाधा उत्पन्न की है। महिला कोच के संदीप पर 5 गंभीर आरोप...1. मंत्री ने स्नैपचैट व इंस्टाग्राम पर मैसेज भेजेजूनियर महिला कोच ने आरोप लगाया था कि 2016 रियो ओलिंपिक में हिस्सा लेने के बाद वह खेल विभाग में जूनियर कोच के तौर पर भर्ती हुई थी। जिसके बाद खेल मंत्री संदीप सिंह ने इंस्टाग्राम और स्नैपचैट पर उसको मैसेज भेजे। फिर मुझे चंडीगढ सेक्टर 7 लेक साइड मिलने के लिए बुलाया।मैं नहीं गई तो वे मुझे इंस्टाग्राम पर ब्लॉक और अनब्लॉक करते रहे। महिला कोच के आरोपों के मुताबिक 1 जुलाई को मंत्री ने उसे स्नैपचैट कॉल किया। जिसमें डॉक्यूमेंट्स वैरिफिकेशन के लिए मुझे सेक्टर 7, चंडीगढ़ में अपने आवास पर आने के लिए कहा।2. मंत्री ने कहा- तुम मुझे खुश रखो, मैं तुम्हें खुश रखूंगामहिला कोच ने कहा कि इसके बाद वह मंत्री के सरकारी घर पर पहुंची। वहां वे कैमरा वाले ऑफिस में नहीं बैठना चाहते थे। वह मुझे अलग केबिन में लेकर गए। वहां मेरे पैर पर हाथ रखा। मंत्री ने कहा कि तुम मुझे खुश रखो, मैं तुम्हें खुश रखूंगा। मेरी बात मानने पर आपको सभी सुविधाएं और मनचाही जगह पोस्टिंग मिलेगी।3. मेरी टी-शर्ट फट गईमहिला कोच ने संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि शाम करीब 6.50 बजे मंत्री संदीप सिंह ने उससे छेड़छाड़ की। इस दौरान महिला कोच की टी-शर्ट फट गई। किसी तरह वह उनके चंगुल से छूटकर बाहर गई।4. बात नहीं मानी तो ट्रांसफर कर दियामहिला कोच ने आरोप लगाया कि जब मैंने मंत्री की बात नहीं मानी तो मेरी ट्रांसफर कर दी गई। मेरी ट्रेंनिग तक रोक दी गई। मैंने घटना की शिकायत के लिए DGP कार्यालय, CM हाउस और तत्कालीन गृह मंत्री अनिल विज समेत हर स्तर पर प्रयास किया, लेकिन कहीं भी सुनवाई नहीं हुई।5. रेप की कोशिश के भी लगाए थे आरोपइसके बाद महिला कोच ने दावा किया था कि संदीप सिंह ने उसे डॉक्यूमेंट चेक करने के लिए चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास बुलाकर रेप करने की कोशिश की थी। वह उनके घर पहुंची और स्टाफ से वॉशरूम पूछा।स्टाफ ने उसे बैडरुम के वॉशरूम में भेज दिया। जब वह बाहर आई तो मंत्री उसके सामने खड़ा हुआ था। उसने अचानक मेरा हाथ पकड़ कर सामने पड़े बेड पर पुश कर दिया। इसके बाद मैं बेड पर गिर गई और वह भी इस दौरान बेड पर आ गया।कोच ने दावा किया कि उसने उसकी टी-शर्ट पकड़कर ऊपर करने की कोशिश की। इसके बाद मेरे नजदीक आने और मुझे किस करने की कोशिश की।उसने यह भी दावा किया था कि उसके द्वारा मंत्री से छोड़ने की काफी रिक्वेस्ट की गई, लेकिन मंत्री उसे जबरन बाथरुम में लेकर गया, जहां उसने अपना लोअर भी उतार दिया। साथ ही मुझे काफी फोर्स से अपनी ओर खींचा।इस दौरान मंत्री ने बाथरुम की कुंडी भी लगा दी। जब मैंने इसका विरोध किया गया तो वह मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करने लगा। जब मंत्री नहीं माना तो मैंने उनको थप्पड़ मार दिया। इसके बाद मंत्री ने भी मुझे भी थप्पड़ मारा। इस पर मैं रोने लगी। तब मंत्री कहने लगा कि स्पोर्ट्स वाली लड़कियां वर्जिन नहीं होती हैं।मंत्री संदीप ने कहा था- आरोप गलत, ट्रांसफर किया तो साजिशखेल मंत्री रहते संदीप ने इन सब आरोपों को खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि उनके खिलाफ साजिश रची गई है। जिसमें उन्हें फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिला कोच पंचकूला में रहने के लिए इस तरह के आरोप लगा रही है। उन्होंने महिला कोच का ट्रांसफर झज्जर कर दिया और वह पंचकूला रहना चाहती थी, इसलिए ऐसे आरोप लगा रही है।
जहीर खान और उनकी पत्नी सागरिका घाटगे ने ‘Akutee’ ब्रांड की शुरुआत की
बेंगलुरु। पल्लू, दुपट्टे और जैकेट पर खूबसूरत रंगों में की गई कढ़ाई और पेंटिंग घाटगे शाही परिवार का एक रहस्य रहा होगा, जिसका इस्तेमाल प्रियजनों के कपड़ों को प्यार से सजाने के लिए किया जाता था। हालांकि क्रिकेटर जहीर खान की व्यावसायिक समझ से अब यह एक ब्रांड अकुती में तब्दील हो गया है। अभिनेत्री, मॉडल एवं राष्ट्रीय स्तर की पूर्व हॉकी चैंपियन सागरिका घाटगे अकुती ब्रांड को अपनी मां उर्मिला घाटगे के साथ चलाती हैं। सागरिका घाटगे ने कहा, “हाथ से पेंटिंग मेरे बचपन का हिस्सा रहे हैं। मेरी मां लंबे समय से यह करती रही हैं। हालांकि शुरू में मैं इसे उतनी गंभीरता से नहीं लेती थी, लेकिन मेरे पति (जहीर खान) ने मुझे इसे एक विशेष कलेक्शन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। मां-बेटी की जोड़ी ने बेंगलुरु में ‘फोर सीजन्स’ में अपने कलेक्शन की शुरुआत की। सोलह मई को होटल में एक दिन के लिए साड़ियों, दुपट्टों और ब्लेजर का संग्रह प्रदर्शित किया गया। घाटगे ने कहा कि जब उन्होंने लगभग एक साल पहले इसकी शुरुआत करने का फैसला किया, तो एक ब्रांड नाम के लिए ‘अकुती’ एक स्वाभाविक पसंद बन गई, जिसका मराठी में अर्थ राजकुमारी होता है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival में दिखाई गई श्याम बेनेगल की फिल्म मंथन, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह मौजूद खान ने कहा, ‘‘हां, वह एक राजकुमारी है। घाटगे ने कहा कि यह नाम सिर्फ उनके खानदान का संकेत नहीं है, बल्कि उनके परिवार की सभी महिलाओं के लिए एक सम्मान भी है। घाटगे ने कहा, अकुती समय में पीछे ले जाता है। उन्होंने कहा कि डिज़ाइन की प्रेरणा सीधे कोल्हापुर के शाही घाटगे परिवार के बगीचों से आती है। घाटगे ने कहा, मेरी मां वास्तव में बागवानी में रुचि रखती हैं और हमारे बगीचे में खिलने वाले फूल हमारे कपड़ों पर हाथ से पेंट की गई डिजाइन में तब्दील हो जाते हैं।

