कनाडा के मशहूर हंबोल्ट ब्रोंकोस बस हादसे के गुनहगार पंजाब मूल के ट्रक ड्राइवर जसकीरत सिंह सिद्धू को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सोमवार सुबह उन्हें भारत डिपोर्ट किया जाना था, लेकिन रवानगी से 2 दिन पहले फेडरल कोर्ट ने इस पर इमरजेंसी रोक लगा दी है। कनाडा की मीडिया रिपोट्स के अनुसार जस्टिस जोसलिन गाग्ने ने यह आदेश तब दिया जब जसकीरत सिंह सिद्धू के वकील ने कनाडा बॉर्डर सर्विस एजेंसी के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने अगले आदेशों तक जसकीरत सिंह की डिपोर्टेशन पर रोक लगा दी। दरअसल मूल रूप से संगरूर के रहने वाले ट्रक ड्राइवर के कारण कनाडा के हंबोल्ट ब्रोंकेस में एक रोड एक्सीडेंट हुआ, जिसमें 16 लोगों की मौत हो गई थी और 13 गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस मामले में जसकीरत सिंह को 8 साल की सजा हुई, जिसके बाद कनाडा बॉर्डर सर्विस एजेंसी ने उसे डिपोर्ट करने का आदेश जारी किया था। फेडरल कोर्ट में जसकीरत सिंह सिद्धू की याचिका पर दी गई दलीलें… जसकीरत के वकील (माइकल ग्रीन) की दलीलें 25 अप्रैल को फेडरल कोर्ट में हुई सुनवाई में दोनों पक्षों के बीच बहस हुई। कोर्ट इस बात की समीक्षा कर रहा है कि क्या जसकीरत को 'मानवीय आधार' पर रुकने का मौका दिया जाना चाहिए। दरअसल सिद्धू के वकील माइकल ग्रीन ने कोर्ट में सबसे बड़ी दलील उनके एक साल के बेटे की सेहत को लेकर दी। बच्चे को दिल और फेफड़ों की गंभीर बीमारी है। वकील ने कहा कि भारत की खराब हवा बच्चे के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा हो सकती है। वकील ने तर्क दिया कि हादसे से पहले जसकीरत का रिकॉर्ड एकदम बेदाग था और उन्होंने जेल में अपने किए का गहरा पश्चाताप किया है। सरकारी पक्ष और कानून की दलील: सरकारी वकील ने कोर्कट में दलील दी है कि कि कनाडा के कानून के मुताबिक, अगर किसी पीआर (PR) होल्डर को 6 महीने से ज्यादा की जेल होती है, तो वह देश में रहने का हक खो देता है। जसकीरत को 8 साल की सजा हुई है, इसलिए उन्हें डिपोर्ट करना अनिवार्य है। सरकारी वकील ने दलील दी है कि जिसकी लापरवाही से 16 लोगों की जान चली गई और 13 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। उसे कनाडा में रहने का कोई हक नहीं है। यहीं नहीं सरकारी वकील ने ये भी दलील दी है कि अगर जसकीरत सिंह सिद्धू को अपने बच्चों से अलग नहीं होना तो वो उन्हें लेकर भी जा सकता है। अगर भारत में उन्हें परेशानी है तो वो यहां रह सकते हैं। मृतकों के परिजनों की कोर्ट से गुहार… टोबी बाउलेट (मृतक खिलाड़ी लोगन बाउलेट के पिता): टोबी बाउलेट ने कोर्ट में स्पष्ट कहा— जसकीरत सिंह सिद्धू को डिपोर्ट करना कोई अतिरिक्त सजा नहीं है, बल्कि यह कनाडा के कानून का हिस्सा है। कानून स्पष्ट है कि यदि आप अपराधी हैं, तो आप इस देश में रहने का हक खो देते हैं। हर बार नई अपील और नई तारीख हमारे जख्मों को फिर से कुरेद देती है। क्रिस जोसेफ (मृतक खिलाड़ी जेसन जोसेफ के पिता): क्रिस जोसेफ ने भावुक होते हुए कोर्ट से पूछा— अदालत में बार-बार सिद्धू के परिवार और उनके बच्चों की दुहाई दी जा रही है। लेकिन उन 16 पिताओं के बारे में किसने सोचा जिन्होंने अपने जवान बेटों के जनाजे उठाए? मेरे बेटे का भविष्य छीन लिया गया। सिद्धू का परिवार उनके साथ है, लेकिन हमारे बच्चे कभी वापस नहीं आएंगे। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि कानून अपना काम करे। लापरवाही ने ले ली थी रोड एक्सीडेंट में 16 लोगों की जान ट्रक ड्राइवर जसकीरत सिंह की लापरवाही के कारण 6 अप्रैल 2018 को रोड एक्सीडेंट हुआ। जसकीरत सिंह ने 'स्टॉप साइन' को नजरअंदाज किया और ट्रक की रफ्तार कम नहीं की। ट्रक सीधे 'हंबोल्ट ब्रोंकोस' जूनियर हॉकी टीम की बस से टकरा गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस के तीन टुकड़े हो गए। इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई और 13 लोग घायल हुए। पूरे कनाडा में शोक की लहर दौड़ गई थी। जसकीरत ने अपना गुनाह कबूल किया और उसे 8 साल जेल की सजा सुनाई गई। 2023 में उन्हें जेल से पैरोल मिली। जसकीरत का पंजाब से कनाडा तक का सफर जसकीरत मूल रूप से पंजाब के संगरूर जिले के रहने वाला है। उसके पिता पंजाब में किसान हैं और परिवार के पास करीब 50 एकड़ खेती की जमीन है। जसकीरत ने पंजाब से बी.कॉम की डिग्री ली और साल 2014 में अपनी पत्नी के साथ स्थायी निवासी (PR) के तौर पर कनाडा शिफ्ट हुए थे। जसकीरत सिंह ट्रक चलाता था। केस की टाइम लाइन 6 अप्रैल 2018: भीषण बस हादसा हुआ। 16 घरों के चिराग बुझ गए। 22 मार्च 2019: कोर्ट ने जसकीरत को 8 साल जेल की सजा सुनाई। जनवरी 2023: अच्छे बर्ताव के कारण उन्हें जेल से पैरोल पर रिहा किया गया। 24 मई 2024: इमिग्रेशन बोर्ड ने उनका पीआर स्टेटस रद्द कर डिपोर्ट करने का आदेश दिया। 4 फरवरी 2026: सरकार ने उनकी अंतिम अपील ठुकरा दी और 27 अप्रैल का दिन रवानगी के लिए तय किया। 25 अप्रैल 2026: रवानगी से दो दिन पहले फेडरल कोर्ट ने डिपोर्टेशन पर 'स्टे' (रोक) लगा दिया। अब आगे क्या? जसकीरत के वकील के मुताबिक, यह रोक 1 से 8 महीने तक रह सकती है। अब फेडरल कोर्ट विस्तार से इस बात की जांच करेगा कि क्या मानवीय आधार पर उनके निर्वासन को टाला जा सकता है। फिलहाल, जसकीरत की भारत रवानगी पर ब्रेक लग गया है। एक संघीय न्यायाधीश ने हंबोल्ट ब्रोंकोस (Humboldt Broncos) बस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ट्रक ड्राइवर को आखिरी क्षणों में बड़ी राहत दी है, जिससे उनकी भारत वापसी पर फिलहाल रोक लग गई है। जसकीरत सिंह सिद्धू के वकीलों ने शुक्रवार को फेडरल कोर्ट में अपील की थी ताकि सोमवार सुबह होने वाले उनके निर्वासन (deportation) को रोका जा सके। मामले का विवरण दुर्घटना: अप्रैल 2018 में, कैलगरी के नौसिखिया ट्रक ड्राइवर सिद्धू ने सास्काचेवान के टिस्डेल के पास एक ग्रामीण चौराहे पर स्टॉप साइन की अनदेखी की थी। उनका ट्रक जूनियर हॉकी टीम को ले जा रही बस के रास्ते में आ गया था। परिणाम: इस भीषण हादसे में 16 लोगों की मौत हुई और 13 अन्य घायल हुए, जिससे पूरे कनाडा में शोक की लहर दौड़ गई थी। सजा: सिद्धू ने खतरनाक ड्राइविंग के अपराधों के लिए अपना गुनाह कबूल कर लिया था और उन्हें आठ साल जेल की सजा सुनाई गई थी। कानूनी पेच कनाडा के कानून के अनुसार, यदि किसी स्थायी निवासी (Permanent Resident) को 6 महीने से अधिक की सजा होती है, तो वह देश में रहने का हक खो देता है। सिद्धू को 2023 में पूर्ण पैरोल दे दी गई थी। उनके वकील माइकल ग्रीन ने 'कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी' (CBSA) से अनुरोध किया था कि उनके निर्वासन को 17 महीनों के लिए टाल दिया जाए, ताकि 'मानवीय और करुणामय' आधार पर उनकी स्थायी निवास स्थिति बहाल करने की याचिका पर विचार किया जा सके। अदालत का ताजा फैसला वकील माइकल ग्रीन ने शुक्रवार शाम एक इंटरव्यू में बताया: एजेंसी ने हमारे अनुरोध को खारिज कर दिया था, जिसे हमने संघीय अदालत में चुनौती दी। अदालत ने अब हमारे मुख्य मामले पर फैसला आने तक निर्वासन पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश हमारी दलीलों से सहमत हुए, जो कि एक बहुत ही दुर्लभ फैसला है। राहत के मुख्य बिंदु: समय सीमा: यह स्थगन (Stay) एक से आठ महीने तक का हो सकता है। पारिवारिक स्थिति: सिद्धू के दो बच्चे हैं, जिनमें से एक को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं। खुद सिद्धू को भी स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हैं। महत्व: वर्षों से चल रही इस कानूनी लड़ाई में यह पहली बार है जब कोई फैसला सिद्धू के पक्ष में आया है। जसकीरत सिंह सिद्धू मूल रूप से पंजाब के संगरूर जिले के रहने वाले हैं। उनके बारे में कुछ और जानकारी: शिक्षा: जसकीरत ने भारत (पंजाब) में ही अपनी पढ़ाई पूरी की और कॉमर्स में ग्रेजुएशन (B.Com) की डिग्री हासिल की। कनाडा आगमन: वे 2014 में अपनी पत्नी (जो उस समय उनकी मंगेतर थीं) के साथ स्थायी निवासी (Permanent Resident) के रूप में कनाडा गए थे।
फलौदी की बेटियां बनीं हॉकी में चैंपियन
16वीं जूनियर राज्य स्तरीय महिला हॉकी प्रतियोगिता में फलोदी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। आदर्श नगर स्थित सूरज मैदान में खेले गए फाइनल मुकाबले में फलोदी ने हनुमानगढ़ को 1-0 से हराकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जिसमें दोनों टीमों ने कड़ा संघर्ष दिखाया, लेकिन फलोदी की टीम निर्णायक गोल करने में सफल रही। हनुमानगढ़ की टीम ने भी जोरदार प्रयास किए, पर बराबरी नहीं कर सकी। प्रतियोगिता में सीकर ने तीसरा और नागौर ने चौथा स्थान प्राप्त किया। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हवामहल विधायक बालमुकुंदाचार्य मौजूद रहे, जबकि विशिष्ट अतिथियों ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। समारोह में राजस्थान हॉकी संघ के सचिव डॉ. पवित्र सिंह बिश्नोई ने विजेता और उपविजेता टीमों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं महिला हॉकी को नई दिशा देती हैं और प्रदेश में प्रतिभाओं को निखारने का मंच प्रदान करती हैं। इस प्रतियोगिता में प्रदेशभर की टीमों ने हिस्सा लिया और बड़ी संख्या में दर्शकों ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।
सादुलपुर में पहली बार महिला हॉकी स्टेट टूर्नामेंट 23 से
भास्कर संवाददाता | चूरू राष्ट्रीय खेल हॉकी के शताब्दी वर्ष पर 16वीं राजस्थान सीनियर महिला हॉकी प्रतियोगिता जिले के सादुलपुर में 23 से 26 मई तक होगा। सीनियर महिला हॉकी की ये प्रतियोगिता जिले में पहली बार हो रही है। इससे पहले जूनियर वर्ग की प्रतियोगिता हो चुकी है। प्रतियोगिता में प्रदेश के सभी जिलों से करीब 600 खिलाड़ी भाग लेंगी। प्रतियोगिता के संचालन के लिए गालड़ गांव की ओलिंपियन सोनिका टांडी व भारतीय महिला हॉकी टीम कप्तान रानी रामपाल को बुलाया गया है। आयोजन सचिव नंदकुमार शर्मा ने बताया कि ये प्रतियोगिता अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ के नए नियमों नॉकआउट पद्धति के आधार पर होगी। महिला खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर राज्य सीनियर महिला हॉकी टीम का चयन होगा, जो राष्ट्रीय महिला हॉकी प्रतियोगिता में राज्य टीम का प्रतिनिधित्व करेंगी। तीन दिन तक प्रतियोगिता सादुलपुर के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल के मैदान पर होगी। बतादें कि पिछली बार राज्यस्तरीय सीनियर महिला हॉकी में चूरू की खेलो इंडिया केंद्र की टीम सेमीफाइनल तक पहुंची थी। आयोजन सचिव नंदकुमार ने बताया कि खिलाड़ियों के आवागमन, आवास एवं भोजन आदि की व्यवस्था भामाशाह के सहयोग से होगी। इसमें उड़ीसा ट्रांसपोर्टर गणेश कंदोई, राजगढ़ नागरिक परिषद बेंगलुरु के अध्यक्ष बिहारी लाल सरावगी एवं सांसद राहुल कस्वां, हॉकी के राष्ट्रीय खिलाड़ी सचिन पाडिया सहयोग करेंगे। जिले में महिला हॉकी की पहली एनआईएस कोच अंजना लबानिया का कहना है कि जिले में सीनियर महिला हॉकी की राज्यस्तरीय प्रतियोगिता होने से महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिलेगा। वे हॉकी के नए गुर सीख सकेंगी, वहीं नई महिला खिलाड़ियों की इस खेल में रूचि बढ़ेगी। जिले के महिला हॉकी के खेलो इंडिया केंद्र से तैयार खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।
हनुमानगढ़, फलोदी, सीकर और नागौर सेमीफाइनल में; कल होंगे मुकाबले
16वीं जूनियर राज्य स्तरीय महिला हॉकी प्रतियोगिता जयपुर } आदर्श नगर स्थित सूरज मैदान में 24 अप्रैल 2026 को 16वीं जूनियर राज्य स्तरीय महिला हॉकी प्रतियोगिता-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। राजस्थान हॉकी एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रदेशभर की टीमें हिस्सा ले रही हैं। प्रतियोगिता के दूसरे दिन यानी 25 अप्रैल को खेले गए मुकाबलों में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। परिणाम इस प्रकार रहे : जैसलमेर ने दौसा को 1-0 से हराया। जयपुर ने बाड़मेर पर 3-0 से एकतरफा जीत दर्ज की। बीकानेर ने डीडवाना को 4-0 से मात दी। जोधपुर ने भीलवाड़ा को 1-0 से हराया। सीकर ने अजमेर को 6-0 के बड़े अंतर से हराया। फलोदी ने बीकानेर को 1-0 से हराकर सबको चौंकाया। हनुमानगढ़ ने जोधपुर के खिलाफ 7-0 की बड़ी जीत दर्ज की। सीकर ने जैसलमेर को 1-0 से हराकर जीत हासिल की, जबकि नागौर ने जयपुर को 1-0 से हराकर उलटफेर किया। प्रतियोगिता में कल सुबह सेमीफाइनल मुकाबले खेले जाएंगे, जबकि शाम को फाइनल मैच आयोजित होगा। इस प्रतियोगिता के माध्यम से राजस्थान की जूनियर महिला हॉकी टीम के लिए भविष्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का चयन भी किया जाएगा।
हॉकी इंडिया का कैंप .36 सदस्यों के नाम घोषित
भास्कर न्यूज | जालंधर हॉकी इंडिया की तरफ से गत दिनों सीनियर पुरुष राष्ट्रीय कोचिंग कैंप के लिए 36 खिलाड़ियों के संभावित कोर ग्रुप की घोषणा की। यह कैंप 9 मई तक बेंगलुरु स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया सेंटर में आयोजित किया जाएगा। यह कोचिंग कैंप टीम की रणनीतिक तालमेल, फिटनेस सत्रों पर केंद्रित होगा। टीम का लक्ष्य आगामी व्यस्त अंतरराष्ट्रीय सत्र की तैयारियों को अंतिम रूप देना है, जिसमें एफआईएच प्रो लीग 2025-56 का यूरोपियन चरण, वर्ल्ड कप और एशियन गेम्स शामिल हैं। जालंधर के मनदीप सिंह, सुखजीत सिंह के साथ-साथ मनप्रीत सिंह को भी इस ग्रुप में शामिल किया गया है। मनप्रीत सिंह इस समय 410 इंटरनेशनल मैच के साथ देश में दूसरे नंबर पर मौजूद है, जबकि हॉकी इंडिया के प्रधान ओलिंपियन दिलीप टिर्की सबसे ज्यादा 411 इंटरनेशनल मैच 1995 से 2010 के बीच खेलने वाले खिलाड़ी हैं। अगर मनप्रीत 2 मैच और खेल लेता है तो वह सर्वाधिक इंटरनेशनल हॉकी मैच खेलने वाला देश का खिलाड़ी बन जाएगा। वहीं मनप्रीत सिंह कुल 4 ओलिंपिक खेल चुका है जिसमें 2 ओलिंपिक में कांस्य पदक भी जीते है, एक ओलिंपिक में बतौर कप्तान टीम को कांस्य पदक दिलाया था। एचआईएल में प्रदर्शन कर खींचा ध्यान मनप्रीत ने पिछले महीनों एचआईएल में काफी बेहतर प्रदर्शन कर सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा था। भारतीय हॉकी टीम में वह मिड फील्डर की भूमिका में रहते है, हालांकि हार्दिक भी मिडफील्डर है लेकिन मनप्रीत के पास काफी अनुभव है।
टूट गई ओलिंपियन भाइयों की जोड़ी, गुरबक्श ने दुनिया छोड़ी
जयपुर }1968 ओलिंपिक में हिस्सा लेने वाली दो भाइयों की जोड़ी टूट गई। बड़े भाई गुरबक्श सिंह ग्रेवाल शुक्रवार को दुनिया छोड़ गए। गुरबक्श सिंह और बलबीर सिंह ग्रेवाल दोनों ने 1968 मेक्सिको ओलिंपिक में हिस्सा लिया थे। ये सगे भाइयों की पहली जोड़ी थी जिसने भारत की ओर से हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व किया था। इस ओलिंपिक में भारत ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। गुरबक्श सिंह ने शुक्रवार को जिरकपुर, चंडीगढ़ में अंतिम सांस ली। गुरबक्श सिंह ग्रेवाल वेस्टर्न रेलवे में वरिष्ठ खेल अधिकारी थे।
कानपुर के रेलबाजार थाना क्षेत्र में सगे भाई ने अपने साथियों के साथ मिलकर घर में घुसकर परिवार पर हमला कर दिया। इस घटना में एक दृष्टिहीन बुजुर्ग मां सहित कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हमलावर वारदात के बाद जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गए। मीरपुर तल्लवा के रहने वाले पीड़िता फरजाना बेगम ने बताया कि उनकी मां खुर्शीदा बेगम पूरी तरह दृष्टिहीन हैं। फरजाना का भाई राशिद और उसकी पत्नी अक्सर मां के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार करते थे। हालात बिगड़ने पर फरजाना बुधवार की रात को अपनी मां को अपने घर ले आई थीं। फरजाना के अनुसार, मां को अपने घर लाने की बात राशिद और उसकी पत्नी को नागवार गुजरी। उसी रात करीब 9:30 बजे राशिद अपने साथी सूफियान, रियाज, कल्लू, अपने बेटे अब्दुल राशिद और 10-12 अज्ञात लोगों के साथ पीड़िता के घर पहुंचा। हमलावरों के हाथों में लोहे की रॉड, सरिया, हॉकी और डंडे थे। घर में घुसते ही उन्होंने परिवार पर हमला बोल दिया। आरोप है कि उन्होंने दृष्टिहीन बुजुर्ग महिला को जान से मारने की धमकी भी दी। मलावरों ने महिलाओं के कपड़े फाड़े और अश्लील हरकतें भी कीं इस हमले में पीड़िता फरजाना, उनकी मां खुर्शीदा बेगम, भाई इमरान, बहन शबा, असरार की पत्नी और नाबालिग बच्ची इकरा घायल हो गईं। आरोप है कि हमलावरों ने महिलाओं के कपड़े फाड़े और अश्लील हरकतें भी कीं, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। मारपीट के दौरान मां और भाई के बेहोश होने की बात सामने आई है। आरोपी जाते-जाते पूरे परिवार को जान से मारने और नाबालिग बच्ची को अगवा करने की धमकी देकर मौके से फरार हो गए। थाना रेलबाजार प्रभारी अमान सिंह ने बताया कि पीड़िता की तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा किया गया है।
जहीर खान और उनकी पत्नी सागरिका घाटगे ने ‘Akutee’ ब्रांड की शुरुआत की
बेंगलुरु। पल्लू, दुपट्टे और जैकेट पर खूबसूरत रंगों में की गई कढ़ाई और पेंटिंग घाटगे शाही परिवार का एक रहस्य रहा होगा, जिसका इस्तेमाल प्रियजनों के कपड़ों को प्यार से सजाने के लिए किया जाता था। हालांकि क्रिकेटर जहीर खान की व्यावसायिक समझ से अब यह एक ब्रांड अकुती में तब्दील हो गया है। अभिनेत्री, मॉडल एवं राष्ट्रीय स्तर की पूर्व हॉकी चैंपियन सागरिका घाटगे अकुती ब्रांड को अपनी मां उर्मिला घाटगे के साथ चलाती हैं। सागरिका घाटगे ने कहा, “हाथ से पेंटिंग मेरे बचपन का हिस्सा रहे हैं। मेरी मां लंबे समय से यह करती रही हैं। हालांकि शुरू में मैं इसे उतनी गंभीरता से नहीं लेती थी, लेकिन मेरे पति (जहीर खान) ने मुझे इसे एक विशेष कलेक्शन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। मां-बेटी की जोड़ी ने बेंगलुरु में ‘फोर सीजन्स’ में अपने कलेक्शन की शुरुआत की। सोलह मई को होटल में एक दिन के लिए साड़ियों, दुपट्टों और ब्लेजर का संग्रह प्रदर्शित किया गया। घाटगे ने कहा कि जब उन्होंने लगभग एक साल पहले इसकी शुरुआत करने का फैसला किया, तो एक ब्रांड नाम के लिए ‘अकुती’ एक स्वाभाविक पसंद बन गई, जिसका मराठी में अर्थ राजकुमारी होता है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival में दिखाई गई श्याम बेनेगल की फिल्म मंथन, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह मौजूद खान ने कहा, ‘‘हां, वह एक राजकुमारी है। घाटगे ने कहा कि यह नाम सिर्फ उनके खानदान का संकेत नहीं है, बल्कि उनके परिवार की सभी महिलाओं के लिए एक सम्मान भी है। घाटगे ने कहा, अकुती समय में पीछे ले जाता है। उन्होंने कहा कि डिज़ाइन की प्रेरणा सीधे कोल्हापुर के शाही घाटगे परिवार के बगीचों से आती है। घाटगे ने कहा, मेरी मां वास्तव में बागवानी में रुचि रखती हैं और हमारे बगीचे में खिलने वाले फूल हमारे कपड़ों पर हाथ से पेंट की गई डिजाइन में तब्दील हो जाते हैं।

