मध्य प्रदेश जूनियर हॉकी टीम की नजर खिताबी जीत पर, फाइनल में ओडिशा से होगा मुकाबला
कोयंबटूर में चल रही हॉकी इंडिया जूनियर बालक राष्ट्रीय चैंपियनशिप के फाइनल में शनिवार को मध्य प्रदेश का मुकाबला ओडिशा से होगा।
Agra News: हॉकी के जादूगर को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मुहिम से जुड़ा आगरा
भारतीय हॉकी के शताब्दी वर्ष (1926-2026) के अवसर पर हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को मरणोपरांत भारत रत्न दिए जाने की देशव्यापी मुहिम से अब आगरा भी जुड़ गया है।
Varanasi News: जूनियर नेशनल हॉकी के फाइनल में आमने-सामने होंगे वाराणसी मंडल के खिलाड़ी
Players from the Varanasi Division will face off in the Junior National Hockey final.
Palwal News: चिराग धारीवाल का भारतीय जूनियर हॉकी टीम में चयन
चिराग धारीवाल का भारतीय जूनियर हॉकी टीम में चयन
Bahraich News: हॉकी का अभ्यास मैच 3-3 पर ड्राॅ
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हॉकी विश्व कप में 28 साल बाद कोई भारतीय अंपायर नहीं
भारतीय दिग्गजों ने नीदरलैंड्स और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू हो रहे हॉकी विश्व कप में तीन दशक बाद एक भी भारतीय अंपायर नहीं होने पर निराशा व्यक्त की है।
Hockey World Cup के लिए FIH ने नहीं चुना कोई भारतीय अंपायर, पूर्व अधिकारियों ने जताई निराशा
हॉकी अंपायरिंग को बेहद कठिन और संघर्षपूर्ण कैरियर बताते हुए भारतीय दिग्गजों ने नीदरलैंड और बेल्जियम में 15अगस्त से शुरू हो रहे विश्व कप में करीब तीन दशक बाद एक भी भारतीय अंपायर नहीं होने पर निराशा जताते हुए कहा कि अंपायरों की संख्या बढाने की बजाय गुणवत्ता पर फोकस करना होगा। नीदरलैंड के यूट्रेक्ट में 1998 में हुए विश्वकप के बाद पहली बार टूर्नामेंट के अंपायरों या तकनीकी अधिकारियों में किसी भारतीय को जगह नहीं मिली है और सूची में यूरोपीय देशों का बोलबाला है। भारत के आरवी रघु प्रसाद (2010, 2014, 2018, 2023) , सतिंदर शर्मा (2002, 2006, 2010) , तरलोक सिंह भुल्लर (1994) और अमरजीत सिंह बावा (1990) विश्व कप में अंपायरिंग कर चुके हैं। पिछले साल 47 वर्ष की उम्र होने पर रिटायर होने से पहले ओलंपिक समेत 200 मैचों में अंपायरिंग करने वाले पहले एशियाई रघुप्रसाद ने से बातचीत में कहा ,‘‘ बड़े टूर्नामेंटों में अंपायरों की नियुक्तियां एफआईएच अंपायरिंग समिति करती है जिसके लिये पिछले बड़े टूर्नामेंटों, प्रो लीग वगैरह में प्रदर्शन मानदंड रहता है।’’ वहीं कई ओलंपिक और विश्व कप में अंपायरिंग कर चुके शर्मा ने कहा ,‘‘ बावा सर, भुल्लर सर के बाद मैने और रघु ने यह सिलसिला कायम रखा था। हमने यूरोपीयों के बीच जाकर अपनी पहचान बनाई थी जो आसान नहीं थी।’’ उन्होंने कहा ,‘‘ बीजिंग ओलंपिक 2008 में हमारी टीम क्वालीफाई नहीं कर सकी थी लेकिन मैं अकेला अधिकारी था जो भारतीय हॉकी का प्रतिनिधि था। चयन के लिये प्रदर्शन में निरंतरता और अनुभव काफी मायने रखता है जहां मुझे लगता है कि अब हम पिछड़ रहे हैं।’’ हॉकी इंडिया की वेबसाइट पर मई 2025 में अपडेट की गई सूची के अनुसार अंपायरों की चार श्रेणियां ‘कोर लीडिंग पैनल’, ‘लीडिंग पैनल’, ‘हाई पोटेंशियल’ और ‘नेशनल अंपायर’ हैं जिनमें पुरूष वर्ग में क्रमश: 100 से अधिक और महिला वर्ग में 70 से अधिक नाम दर्ज हैं। इसे भी पढ़ें: Esports World Cup में उतरेंगे 4 भारतीय ग्रैंडमास्टर, कार्लसन से होगी टक्कर पुरूष वर्ग में छह एफआईएच पैनल के अंपायर हैं जिनमें से रघुप्रसाद पिछले साल रिटायर हो चुके हैं। वहीं महिला वर्ग में एफआईएच पैनल की चार अंपायर हैं। तकनीकी अधिकारियों में महिला वर्ग में इन्हीं चार श्रेणियों में 50 से अधिक नाम हैं लेकिन एफआईएच पैनल में सिर्फ दो अधिकारी रोहिणी बोपन्ना और सोनिया बाथला हैं। पुरूष वर्ग में करीब 70 नाम हैं लेकिन एफआईएच पैनल के चार ही अधिकारी इसमें शामिल हैं। शर्मा ने कहा कि संख्या की बजाय गुणवत्ता पर फोकस करना जरूरी है और इसके लिये अंपायरों को अधिक एक्सपोजर देना होगा। उन्होंने कहा ,‘‘घरेलू अंपायर बड़े टूर्नामेंटों में अंपायरिंग नहीं करेंगे तो अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव कैसे मिलेगा। इसे भी पढ़ें: Hockey World Cup में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे Mohit HS, संयोग से बने थे गोलकीपर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय अंपायरिंग में जमीन आसमान का फर्क है। भारतीय टीमों के शिविर में भी अंपायरों को साथ रखा जाना चाहिये।हमारे पास प्रतिभा की कमी नहीं है लेकिन अंपायरों को भी मेहनत करनी होगी और महासंघ को इसमें सहयोग देना होगा।’’ उन्होंने कहा ,‘‘ अंपायरों के विकास के लिये सही प्लानिंग और ढांचे की जरूरत है ताकि अगले विश्व कप या ओलंपिक में हमारा प्रतिनिधित्व रहे।’’ 1994 में अंपायरिंग से विदा ले चुके बावा भारतीय टीम के साथ दौरों पर जाते थे जिसमें 1981 का यूरोप दौरा और 1983 में पाकिस्तान में टेस्ट श्रृंखला शामिल है। लाहौर विश्व कप 1990 और सियोल ओलंपिक 1988 में अंपायरिंग कर चुके बावा ने कनाडा से से कहा ,‘‘उस दौर में अंपायरों को खेल का हिस्सा नहीं माना जाता था लेकिन मैने हालात बदलने की कोशिश की। जब मैने शुरूआत की जब 20 रूपये रोज भत्ता मिलता था जिसे केपीएस गिल के दौर में मैने बढवाकर 100 रूपये कराया।’’ उन्होंने बताया ,‘‘ तब अंपायरों को कोई पदक या सोवेनियर नहीं दिये जाते थे लेकिन 1977 में अमृतसर में रणजीत सिहं टूर्नामेंट के दौरान हमने सुनिश्चित कराया कि अंपायरों को भी सम्मान और स्मृति चिन्ह दिये जायें।’’ तीनों दिग्गजों ने कहा कि इस पेशे में वित्तीय सुरक्षा नहीं है और महज जुनून के लिये वे इससे जुड़े रहे। शर्मा ने कहा ,‘‘ हमारे समय में 150 या 200 रूपये रोज और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में 40 . 50 डॉलरभत्ता मिलता था जो हमारा महासंघ ही देता था। अगर आप किसी टूर्नामेंट में तटस्थ हैं तो टूर्नामेंट का मेजबान बोर्डिंग, लॉजिंग और 40 . 50 डॉलर दैनिक भत्ता देता है। इसे भी पढ़ें: जर्सी का रंग बदलने से बदलेगी भारतीय हॉकी की तस्वीर? हमारे अधिकांश अंपायरों के पास नौकरी नहीं है और घरेलू टूर्नामेंटों पर ही काम चल रहा है।’’ पिछले साल संन्यास के बाद काफी प्रयासों के बाद निजी नौकरी कर रहे रघु ने कहा ,‘‘ जब तक अंपायरिंग की, उसी पर फोकस रहा और नौकरी के बारे में सोचा नहीं। केएसएचए में नौकरी निजी कारणों से छोड़नी पड़ी। अभी अपने प्रयासों से एक निजी नौकरी शुरू की है लेकिन उतनी कमाई नहीं है। कोई भी मां बाप ऐसे हालात में बच्चे को अंपायर क्यो बनाना चाहेंगे।’’ उन्होंने कहा ,‘‘खिलाड़ियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद पुरस्कार और सरकारी नौकरी मिल जाती है लेकिन अंपायरों को कोई पुरस्कार या वेतन नहीं मिलता। जो अंपायर नौकरी कर रहे हैं, उन्हें कभी कभार टूर्नामेंटों के लिये छुट्टी नहीं मिलती। एक महिला अधिकारी ने तो यह भी कहा कि कई बार महासंघ से सहयोग नहीं मिलता और पक्षपात के कारण आगे की संभावना खत्म हो जाती है।
कभी दुनिया सुनती थी भारत की सीटी... अब विश्व कप में सन्नाटा है
15 अगस्त से नीदरलैंड और बेल्जियम में शुरू हो रहे हॉकी विश्व कप में भारतीय टीम तो उतरेगी, लेकिन 28 साल में पहली बार एक भी भारतीय अंपायर या तकनीकी अधिकारी नजर नहीं आएगा. कभी विश्व हॉकी में अपनी निष्पक्षता और पहचान बनाने वाले भारतीय अंपायर आज सिस्टम, अवसर और आर्थिक असुरक्षा के कारण हाशिये पर पहुंच गए हैं. आखिर भारतीय सीटी की गूंज विश्व कप से क्यों गायब हो गई?
मध्य प्रदेश की जूनियर पुरुष हॉकी टीम ने 16वीं हॉकी इंडिया जूनियर पुरुष राष्ट्रीय चैंपियनशिप-2026 के फाइनल में जगह बनाकर नया इतिहास रच दिया है। कोयंबटूर में खेले गए दूसरे सेमीफाइनल में टीम ने मजबूत मानी जा रही झारखंड को 2-0 से हराकर खिताबी मुकाबले का टिकट हासिल किया। पूरे मैच में अनुशासित खेल, मजबूत रक्षा पंक्ति और अंतिम क्षणों में आक्रामक रणनीति ने मध्य प्रदेश को यादगार जीत दिलाई। मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। पहले तीन क्वार्टर तक किसी भी टीम को गोल करने का मौका नहीं मिला। झारखंड ने कई बार हमला बोला, लेकिन मध्य प्रदेश की डिफेंस लाइन और गोल कीपर ने उसे सफल नहीं होने दिया। मैच का फैसला अंतिम क्वार्टर में हुआ, जब मध्य प्रदेश ने लगातार दबाव बनाकर विपक्षी टीम की रणनीति को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। मैच के 56वें मिनट में राजवीर सिंह ने शानदार फील्ड गोल कर मध्य प्रदेश का खाता खोला और टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। इसके दो मिनट बाद ही 58वें मिनट में आशिर आदिल खान ने दूसरा गोल दागकर झारखंड की वापसी की सभी उम्मीदों पर विराम लगा दिया। निर्धारित समय तक मध्य प्रदेश ने 2-0 की बढ़त कायम रखी और फाइनल में प्रवेश कर लिया। जीत में गोल कीपर जतिन वर्मा की भूमिका भी बेहद अहम रही। उन्होंने पूरे मुकाबले में कई शानदार बचाव किए, जिसके लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया। अब मध्य प्रदेश की टीम 8 अगस्त को होने वाले फाइनल मुकाबले में हॉकी ओडिशा से भिड़ेगी। राष्ट्रीय खिताब के लिए होने वाले इस मुकाबले पर पूरे प्रदेश की निगाहें रहेंगी। मध्य प्रदेश की इस उपलब्धि पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और सहयोगी स्टाफ को बधाई देते हुए कहा कि टीम ने अपने प्रदर्शन से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि खिलाड़ी इसी आत्मविश्वास के साथ फाइनल में भी दमदार प्रदर्शन कर राष्ट्रीय खिताब मध्य प्रदेश की झोली में डालेंगे। खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने भी टीम को फाइनल में पहुंचने पर शुभकामनाएं देते हुए इसे प्रदेश में विकसित हो रही खेल संस्कृति, बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्था और खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत का परिणाम बताया। विभाग ने विश्वास जताया कि टीम फाइनल में भी जीत दर्ज कर राष्ट्रीय चैंपियन बनने का गौरव हासिल करेगी।
बिलासपुर के खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की दो खिलाड़ियों गीता यादव और मधु सिदार का चयन भारत की जूनियर महिला हॉकी टीम में हुआ है।
जूनियर एशिया कप हॉकी:भारतीय टीम में झारखंड की 3 बेटियां पार्वती, रोशनी और विनिमा शामिल
हॉकी इंडिया ने एएचएफ जूनियर महिला एशिया कप-2026 के लिए 18 सदस्यीय भारतीय टीम की घोषणा कर दी है। टीम में झारखंड की तीन खिलाड़ियों पार्वती टोपनो (डिफेंडर), रोशनी आइंद (मिडफील्डर) और विनिमा धान को जगह मिली है। तीनों खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन के दम पर टीम में स्थान बनाया है। एएचएफ जूनियर महिला एशिया कप का आयोजन 30 अगस्त से 13 सितंबर तक चीन के मोकी में होगा, जिसमें एशिया की शीर्ष जूनियर टीमें हिस्सा लेंगी। इसे युवा खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने और भविष्य में सीनियर भारतीय टीम में जगह बनाने का अहम अवसर माना जा रहा है। तीन खिलाड़ियों के चयन पर हॉकी झारखंड और खेल विभाग ने खुशी जताते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि झारखंड की बेटियां अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन कर देश और राज्य का नाम रोशन करेंगी।
हॉकी इंडिया ने बृहस्पतिवार को एशियाई हॉकी महासंघ (एएचएफ) ने जूनियर एशिया कप के लिए जूनियर महिला हॉकी टीम घोषित कर दी है। इसमें हरहुआ के चक्का गांव निवासी पूर्णिमा यादव का चयन हुआ है।
हॉकी विश्व कप में भारत के मैच को ड्रॉ कराकर खुश होना चाहती है पाकिस्तान टीम, चयनकर्ता ने बताया प्लान
पाकिस्तान के मुख्य चयनकर्ता समीउल्लाह खान ने कहा है कि उनकी टीम हॉकी विश्व कप में भारत के खिलाफ होने वाले मैच ड्रॉ करवाना चाहती है। भारत और पाकिस्तान के बीच 19 अगस्त को मुकाबला होगा।
कोयंबटूर, 6 अगस्त (आईएएनएस)। तमिलनाडु के कोयंबटूर में जारी 16वीं हॉकी इंडिया जूनियर पुरुष नेशनल चैंपियनशिप 2026– डिवीजन 'ए' में गुरुवार को 'हॉकी एसोसिएशन ऑफ ओडिशा' और 'हॉकी मध्य प्रदेश' ने अपने-अपने सेमीफाइनल मैच को जीतकर फाइनल में जगह सुनिश्चित की।
हॉकी के शताब्दी वर्ष पर खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने पीएमओ को भेजी अपील, हॉकी के जादूगर को सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की उठाई मांग।
बेटे अशोक ध्यानचंद बोले- आगरा कॉलेज के मैदान पर कई बार खेल चुके थे पिता, झांसी क्लब को अपने खेल से बनाया था चैंपियन।
जूनियर पुरुष नेशनल हॉकी: ओडिशा के साथ पंजाब, झारखंड और एमपी ने बनाई सेमीफाइनल में जगह
कोयंबटूर, 5 अगस्त (आईएएनएस)। 16वीं हॉकी इंडिया जूनियर पुरुष नेशनल चैंपियनशिप 2026 में बुधवार को डिवीजन 'ए' के सेमीफाइनल लाइन-अप की पुष्टि हो गई। ओडिशा, पंजाब, झारखंड और मध्य प्रदेश की टीमें चार रोमांचक क्वार्टर फाइनल मुकाबलों में विजयी रहते हुए अगले दौर में पहुंच गई हैं।
Hockey World Cup में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे Mohit HS, संयोग से बने थे गोलकीपर
नयी दिल्ली, पांच अगस्त संयोग से गोलकीपर बने कर्नाटक के 24 वर्षीय मोहित एचएस का भारत के लिए हॉकी विश्व कप खेलने का सपना आखिरकार पूरा होने जा रहा है। वह 15 से 30 अगस्त तक नीदरलैंड और बेल्जियम की संयुक्त मेजबानी में होने वाले एफआईएच हॉकी विश्व कप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करेंगे। अनुभवी गोलकीपर सूरज करकेरा के साथ मोहित भारतीय टीम के दो गोलकीपरों में शामिल हैं। यह उपलब्धि उनके अब तक के प्रेरणादायक सफर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोहित का अनुभव करकेरा जितना नहीं है, लेकिन हाल के महीनों में उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से सभी का ध्यान आकर्षित किया है। खासकर एफआईएच प्रो लीग के अंतिम चरण में उनके दमदार खेल ने चयनकर्ताओं का भरोसा और मजबूत किया। दिलचस्प बात यह है कि मोहित का गोलकीपर बनने का सफर पूरी तरह संयोग से शुरू हुआ था। स्कूल की हॉकी टीम में गोलकीपर नहीं होने के कारण उनके कोच ने उनकी लंबाई को देखते हुए उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए चुना। यह अप्रत्याशित मौका धीरे-धीरे उनके सफल करियर की नींव बन गया। इसके बाद उन्होंने जूनियर विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया और फिर सीनियर राष्ट्रीय टीम में जगह बनाते हुए लगातार आगे बढ़ते गए। हॉकी इंडिया की ओर से जारी बयान में मोहित ने कहा, ‘‘मेरी हमेशा से यही सोच रही है कि भारत के लिए बड़े टूर्नामेंट खेलूं। जूनियर विश्व कप में हम पदक नहीं जीत सके थे और चौथे स्थान पर रहे थे। तभी से मेरा सपना था कि भारत के लिए कुछ बड़ा करूं।’’मोहित ने भारतीय हॉकी के महान गोलकीपर पी.आर. श्रीजेश से मिली सीख का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘हमने श्रीजेश से बहुत कुछ सीखा है। लेकिन उनके जैसा प्रदर्शन करने का दबाव हम पर नहीं है। उन्होंने भारत के लिए शानदार योगदान दिया है। हम मैदान पर अपना शत-प्रतिशत देंगे और फिर परिणाम जो होगा, उसे स्वीकार करेंगे।’’भारतीय टीम हाल ही में समाप्त हुए एफआईएच प्रो लीग अभियान में नीदरलैंड और जर्मनी जैसी मजबूत टीमों को हराने के बाद नए आत्मविश्वास के साथ विश्व कप में उतर रही है। टीम की तैयारियों पर मोहित ने कहा, ‘‘नीदरलैंड और जर्मनी को हराने के बाद हमारा आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। मुझे लगता है कि विश्व कप से पहले हमारी तैयारियां सही दिशा में हैं।’’मोहित के लिए विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व करना सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। उनका लक्ष्य मैदान पर हर मैच में अपना सर्वश्रेष्ठ देना और भारत को फिर से विश्व चैंपियन बनाने में योगदान देना है। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे लिए सबसे बड़ा पैमाना यही है कि जब भी मैं मैदान पर उतरूं, देश के लिए अपना सौ प्रतिशत दूं। मेरे सीनियर करियर में इससे बड़ा अवसर अब तक नहीं मिला है। मैं भारत को एक बार फिर विश्व चैंपियन बनाने की पूरी कोशिश करूंगा।’’गौरतलब है कि भारत ने एफआईएच हॉकी विश्व कप का अपना एकमात्र स्वर्ण पदक वर्ष 1975 में कुआलालंपुर में पाकिस्तान को हराकर जीता था।
भारत और पाकिस्तान का 19 अगस्त को होगा आमना-सामना, हॉकी वर्ल्ड कप के लिए हुआ टीम का ऐलान
हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के लिए पाकिस्तान के स्क्वॉड का ऐलान हो गया है। इस टूर्नामेंट के लिए पाकिस्तान ने 20 सदस्यीय टीम का ऐलान किया है। टीम की कप्तानी अबु बकर करेंगे।
चक दे इंडिया की एक्ट्रेस ने वायरल रील पर अपना वीडियो बनाकर शेयर किया है। करीब 20 साल बाद इन एक्ट्रेस को ऐसे देख इनके फैंस खुश हैं। सालों में इतनी बदल गई हैं हॉकी खेलने वाली ये एक्ट्रेसेज। एक तो आप पहचान भी नहीं पाओगे।
Mansukh Mandaviya: ग्लास्गो CWG में भारत का प्रदर्शन 10 साल के काम का नतीजा
नयी दिल्ली, पांच अगस्त खेलमंत्री मनसुख मांडविया ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के मनपसंद खेल नहीं होने के बावजूद खिलाड़ियों के असाधारण प्रदर्शन पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि पिछले एक दशक में सरकार के प्रयासों के नतीजे अब मिलने लगे हैं। ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में बजट में कटौती के कारण सिर्फ 10 खेल शामिल किये गए थे जिसमें से भारत ने नौ खेलों में भाग लेकर 13 स्वर्ण समेत 39 पदक जीते। खेलमंत्री मांडविया ने बुधवार को एनडीए संसदीय दल की बैठक में बैठक में पिछले एक दशक में खेलों के क्षेत्र में हुई प्रगति खासकर ओलंपिक, एशियाई खेल और ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के प्रदर्शन का ब्यौरा दिया। भारत ने ग्लास्गो में जिन खेलों में भाग लिया उनमें 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में 30 और 2018 में गोल्ड कोस्ट में 22 पदक जीते थे। मांडविया ने कहा ,‘‘ सरकार ने 2014 से खेलों के क्षेत्र में जितने प्रयास किये हैं, उनके नतीजे अब मिलने लगे हैं। भारत ने 1947 से 2012 तक कुल 21 ओलंपिक पदक जीते थे लेकिन पिछले तीन ओलंपिक में ही 15 पदक मिल चुके हैं। इसी तरह 2022 एशियाई खेलों में पहली बार 100 पदकों का आंकड़ा पार किया।’भारतीय खिलाड़ी अब सितंबर अक्टूबर में जापान में एशियाई खेलों में भाग लेंगे। इसमें निशानेबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन, क्रिकेट, हॉकी जैसी स्पर्धायें शामिल होंगी जिसमें भारत का दबदबा रहता है। खेलमंत्री ने इस प्रदर्शन का श्रेय पिछले एक दशक में खेलों में सरकार की पहल के जरिये खेलों का इकोसिस्टम तैयार करने को दिया जिसमें खेलो इंडिया योजना, फिट इंडिया मुहिम, टारगेट ओलंपिक पोडियम (टॉप्स) और अस्मिता लीग जैसी पहल शामिल हैं।
हॉकी इंडिया जूनियर बालक राष्ट्रीय चैंपियनशिप में राजवीर के गोल ने एमपी को अंतिम आठ में दिलाई जगह
राजवीर सिंह के 2 गोल की मदद से मध्य प्रदेश की जूनियर हॉकी टीम ने 16वीं हॉकी इंडिया जूनियर बालक राष्ट्रीय चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है।
एशियन चैंपियंस के कारण सुरजीत हॉकी टूर्नामेंट नवंबर में
भास्कर न्यूज | जालंधर एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी-2026 के मद्देनजर 43वां सुरजीत हॉकी टूर्नामेंट इस वर्ष अक्टूबर की जगह नवंबर के दूसरे सप्ताह में सुरजीत हॉकी स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। डिप्टी कमिश्नर एवं सोसाइटी अध्यक्ष वरजीत सिंह वालिया, आईएएस की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। डीसी ने बताया कि अगस्त में एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी प्रस्तावित है। इसके मैच सुरजीत हॉकी स्टेडियम में ही होने हैं। ऐसे में टूर्नामेंट को आगे शिफ्ट करने पर सहमति बनी है। बैठक में सीईओ इकबाल सिंह संधू भी मौजूद रहे। एनआरआई अमोलक सिंह गाखल (गाखल ग्रुप, यूएसए) विजेता टीम को नकद 6 लाख रुपए बतौर ईनाम देंगे। इंडियन ऑयल पिछले 35 वर्षों की तरह इस बार भी टाइटल स्पॉन्सर रहेगा। इसके अलावा दर्शकों के लिए सुरजीत हॉकी देखें- अल्टो कार जीतें योजना जारी रहेगी। फाइनल मैच के दौरान 1980 मॉस्को ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। डिप्टी कमिश्नर और सुरजीत हॉकी सोसाइटी के प्रेसिडेंट वरजीत सिंह वालिया, आईएएस और इकबाल सिंह संधू (सीईओ)। वर्किंग प्रेसिडेंट एलआर नैयर और लखविंदर पाल सिंह खैरा, राम प्रताप (सीनियर वाइस प्रेसिडेंट), सुरिंदर सिंह भापा (जनरल सेक्रेटरी), नरिंदर पाल सिंह जज (वाइस प्रेसिडेंट) और करनदीप सिंह घोषणा करते हुए।
Kurukshetra News: द्रोणाचार्य स्टेडियम के पास बनेगा हॉकी एस्ट्रोटर्फ
द्रोणाचार्य स्टेडियम के पास बनेगा हॉकी एस्ट्रोटर्फ
पठानकोट के अधीन आते गांव पंगोली में पुरानी रंजिश के चलते गुंडागर्दी और खूनी संघर्ष का मामला सामने आया है। गांव की वाटर सप्लाई टंकी के पास एक युवक पर तेजधार हथियारों और हॉकी से लैस होकर हमला कर दिया गया। जब पीड़ित के भाई और एक अन्य युवक ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो हमलावरों ने उनकी भी जमकर पिटाई कर दी। इतना ही नहीं, दिन में हुई वारदात के बाद आरोपियों ने उसी रात पीड़िता के घर पर धावा बोल दिया। घर का गेट तोड़कर अंदर घुसे हमलावरों ने परिवार को मारने की धमकियां दीं, जातिसूचक शब्द कहे और बरामदे में खड़ी स्कूटी में तोड़फोड़ कर फरार हो गए। पुलिस ने शिकायत और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।आरोपियों की पहचान अंकुश उर्फ अभी, ध्रुव, वरुण और मानिक के तौर पर हुई है। पुलिस ने 2 से 3 अन्य अज्ञात युवकों पर भी मामला दर्ज किया है। शाम को कंटीली तार ठीक करने गया था युवक, घेरकर किया हमला शिकायतकर्ता महिला इकबाल देवी के अनुसार बीती शाम करीब 6:30 बजे उनका बेटा मनीष कुमार गांव की वाटर सप्लाई टंकी के पास लगी कंटीली तार को ठीक करने गया हुआ था। कुछ देर बाद गांव के ही नरिंदर सिंह ने आकर परिजनों को सूचना दी कि टंकी के पास मनीष के साथ कुछ लोग हाथापाई और मारपीट कर रहे हैं। जब परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि आरोपी दातर और हॉकी से लैस होकर मनीष और उसके भाई सुरेश कुमार पर हमला कर रहे थे। जब ग्रामीणों और परिजनों ने शोर मचाया, तो सभी आरोपी अपने हथियारों समेत मौके से फरार हो गए। इसके बाद घायलों (मनीष कुमार, सुरेश कुमार और नरिंदर सिंह) को तुरंत इलाज के लिए CHC घरोटा में भर्ती करवाया गया। रात को घर पर बोला धावा, स्कूटी तोड़ी और दी धमकियां इकबाल देवी ने पुलिस को बताया कि दिन में हुई इस घटना के बाद मामला यहीं नहीं शांत हुआ। रात करीब 8:15 बजे, जब परिवार घर पर था, तो आरोपियों ने रंजिश के तहत उनके घर के मुख्य दरवाजे पर लातें मारनी शुरू कर दीं और गंदी-गंदी गालियां बकने लगे। शोर सुनकर जब परिवार बाहर आया, तो आरोपी मुंह पर रुमाल बांधकर घर का गेट तोड़ते हुए जबरन अंदर घुस आए। उन्होंने घर में मौजूद लोगों को जातिसूचक गालियां दीं और जान से मारने की धमकियां दीं। इस दौरान हमलावरों ने बरामदे में खड़ी एक्टिवा स्कूटी PB-35-V-5468 को भी तोड़कर भारी नुकसान पहुंचाया। पुलिस की कार्रवाई: केस दर्ज, जांच जारी मामले की गंभीरता को देखते हुए घरोटा पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारी एएसआई बलविंदर सिंह ने घायलों के मेडिकल और शिकायतकर्ता के बयानों के आधार पर नामजद आरोपियों तथा उनके अज्ञात साथियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी की जा रही है और जल्द ही सभी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
इस महीने महिला हॉकी विश्व कप का आयोजन होना है, लेकिन टीम के मुख्य कोच स्जोर्ड मरीन छुट्टियां मना रहे हैं। मरीन के इस तरह अवकाश पर होने से सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
Nainital News: नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में उत्तराखंड की शानदार शुरुआत
प्रदेश की टीम ने केरल, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर को दी शिकस्त
हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलना गलत
भारतीय हॉकी टीम की जर्सी के रंग में बदलाव को लेकर विवाद गलत नहीं। यह केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि टीम की पहचान और खेल परंपरा से जुड़ी गंभीर चिंताओं का संकेत है। जर्सी के रंग बदलने का विरोध वाजिब है और…
जर्सी का रंग बदलने से बदलेगी भारतीय हॉकी की तस्वीर?
भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम की पारंपरिक नीली जर्सी को बदलकर 15 अगस्त से शुरू हो रहे एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 में केसरिया रंग की मुख्य जर्सी पहनाने के निर्णय ने देशभर में नई बहस छेड़ दी है। यह बहस केवल खेल तक सीमित नहीं रही है बल्कि राजनीति, संस्कृति, राष्ट्रीय पहचान और खेल परंपरा तक पहुंच गई है। एक पक्ष इसे खिलाड़ियों की सुविधा और तकनीकी आवश्यकता से जुड़ा निर्णय बता रहा है तो दूसरा पक्ष इसे भारतीय खेलों के कथित ‘भगवाकरण’ के रूप में देख रहा है। सवाल यह है कि क्या वास्तव में जर्सी का रंग बदलना इतना बड़ा मुद्दा है या यह विवाद मूल प्रश्नों से ध्यान भटका रहा है? सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि हॉकी इंडिया ने जर्सी का रंग बदलने का निर्णय किन आधारों पर लिया। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और भारतीय हॉकी के महान खिलाड़ी रहे दिलीप तिर्की के अनुसार, आज अधिकांश अंतर्राष्ट्रीय हॉकी मुकाबले नीले सिंथेटिक एस्ट्रो टर्फ पर खेले जाते हैं। ऐसे में नीली जर्सी कई बार मैदान की पृष्ठभूमि में घुल-मिल जाती है, जिससे तेज गति वाले खेल में खिलाड़ियों को अपने साथी खिलाड़ियों की पहचान करने में कठिनाई होती है। आधुनिक हॉकी में खेल की गति अत्यंत तेज हो चुकी है, जहां एक सैकेंड का निर्णय मैच का परिणाम बदल सकता है। पासिंग, पोजिशनिंग और त्वरित निर्णय के लिए खिलाड़ियों की स्पष्ट दृश्यता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसी कारण खिलाड़ियों, कप्तानों, कोचों और सहयोगी स्टाफ से विचार-विमर्श के बाद अधिक स्पष्ट दिखाई देने वाले रंग के रूप में केसरिया को चुना गया। यदि यही वास्तविक कारण है तो इसे केवल तकनीकी दृष्टि से देखने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। विश्व खेलों में जर्सी के रंग समय-समय पर बदले जाते रहे हैं। फुटबॉल, रग्बी, क्रिकेट, बास्केटबॉल और हॉकी जैसी लगभग सभी खेल प्रतियोगिताओं में टीमें प्रतियोगिता, दृश्यता, प्रायोजकों, प्रसारण गुणवत्ता और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुसार अपनी जर्सियों में परिवर्तन करती रहती हैं। भारतीय हॉकी टीम इससे पहले 2014 विश्व कप में पीली तथा 2018 में हल्के नीले रंग की जर्सी पहन चुकी है। इसलिए रंग परिवर्तन स्वयं में कोई असाधारण घटना नहीं है। विवाद इसलिए बढ़ा है क्योंकि भारतीय हॉकी की पहचान पिछले कई दशकों से नीली जर्सी के साथ जुड़ चुकी है। जैसे ब्राजील की फुटबॉल टीम पीली जर्सी, अर्जेंटीना आसमानी-सफेद धारियों, न्यूजीलैंड ‘ऑल ब्लैक्स’ और ऑस्ट्रेलिया हरे-पीले रंग से पहचाने जाते हैं, उसी प्रकार भारतीय हॉकी की पहचान भी नीली जर्सी रही है। ओलंपिक स्वर्णिम इतिहास, विश्व कप की उपलब्धियां और अनेक ऐतिहासिक मुकाबलों की स्मृतियां इसी नीली जर्सी से जुड़ी रही हैं। यही कारण है कि पूर्व कप्तान धनराज पिल्लै, परगट सिंह और वीरेन रासकिन्हा जैसे खिलाड़ियों ने चिंता व्यक्त की कि कहीं यह परिवर्तन भारतीय हॉकी की स्थापित पहचान को कमजोर न कर दे। इसे भी पढ़ें: PR Sreejesh ने हॉकी जर्सी विवाद को नकारा, टीम से 50 साल बाद पदक जीतने पर फोकस को कहा पूर्व दिग्गज हॉकी खिलाड़ियों की चिंता को भी खारिज नहीं किया जा सकता। खेल केवल तकनीक नहीं, भावनाओं और विरासत का भी विषय होता है। जर्सी केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं बल्कि करोड़ों प्रशंसकों की स्मृतियों, खिलाड़ियों के गौरव और राष्ट्रीय खेल संस्कृति का प्रतीक होती है। इसलिए ऐसे किसी भी बड़े परिवर्तन से पहले व्यापक संवाद और पारदर्शिता अपेक्षित थी। यदि हॉकी इंडिया खिलाड़ियों और विशेषज्ञों के साथ-साथ पूर्व खिलाड़ियों तथा खेल समुदाय को भी इस निर्णय प्रक्रिया से जोड़ती तो शायद विवाद की तीव्रता कम होती। दूसरी ओर इस पूरे विवाद का राजनीतिक स्वरूप भी कम चिंताजनक नहीं है। विपक्षी दलों ने इसे ‘खेलों का भगवाकरण’ करार दिया है जबकि कई समर्थकों ने इसे राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक बताया। वस्तुतः दोनों अतिवादी दृष्टिकोण खेल भावना के अनुकूल नहीं हैं। किसी भी रंग का अपना कोई धर्म नहीं होता। रंग प्रतीकों का अर्थ समय, संस्कृति और संदर्भ के अनुसार बदलता रहता है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में केसरिया रंग त्याग, साहस और समर्पण का प्रतीक है। भारतीय सेना, राष्ट्रीय ध्वज, अनेक विश्वविद्यालयों, सांस्कृतिक परंपराओं तथा आध्यात्मिक जीवन में भी केसरिया का सम्मानजनक स्थान है। वहीं इस्लामी परंपराओं, सूफी परंपरा और अनेक एशियाई संस्कृतियों में भी यह रंग विभिन्न रूपों में प्रयुक्त होता रहा है। इसलिए किसी रंग को किसी एक धर्म या विचारधारा का स्थायी प्रतीक मान लेना ऐतिहासिक दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। हालांकि यह भी उतना ही सत्य है कि वर्तमान राजनीतिक वातावरण में रंगों के प्रतीकात्मक अर्थ अत्यधिक संवेदनशील हो चुके हैं। इसलिए जब किसी राष्ट्रीय टीम की दशकों पुरानी पहचान बदली जाती है तो राजनीतिक प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठते हैं। ऐसी परिस्थितियों में खेल संस्थाओं का दायित्व और बढ़ जाता है कि वे अपने निर्णयों के पीछे के सभी तथ्य, वैज्ञानिक अध्ययन और खिलाड़ियों की राय सार्वजनिक करें ताकि अनावश्यक विवाद की गुंजाइश कम हो। इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि क्या वास्तव में नीली जर्सी खिलाड़ियों के प्रदर्शन में बाधा बन रही थी? कुछ पूर्व खिलाड़ियों ने इस तकनीकी तर्क पर प्रश्न उठाए हैं। उनका कहना है कि कई वर्षों से नीले एस्ट्रो टर्फ पर प्रतियोगिताएं हो रही हैं और कभी ऐसी गंभीर समस्या सामने नहीं आई। यदि वास्तव में दृश्यता का प्रश्न था तो क्या इस संबंध में अंतर्राष्ट्रीय हॉकी महासंघ का कोई वैज्ञानिक अध्ययन उपलब्ध है? यदि हॉकी इंडिया इस विषय में विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक करे तो बहस अधिक तथ्यपरक हो सकती है। हालांकि आधुनिक खेल विज्ञान यह स्वीकार करता है कि रंगों का खिलाड़ियों की दृश्य पहचान, प्रतिक्रिया समय और निर्णय क्षमता पर प्रभाव पड़ सकता है। कई खेलों में उच्च कंट्रास्ट वाले रंगों का चयन इसी कारण किया जाता है। प्रसारण तकनीक, कैमरा एंगल और दर्शकों की दृश्य सुविधा भी अब जर्सी डिजाइन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। इसलिए तकनीकी आधार को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता। पूरे विवाद का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पक्ष यह है कि चर्चा खिलाड़ियों की तैयारी, रणनीति और पदक की संभावनाओं से हटकर जर्सी के रंग तक सीमित हो गई है। भारत की पुरुष और महिला दोनों हॉकी टीमें पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय सुधार कर चुकी हैं। टोक्यो ओलंपिक में पुरुष टीम ने कांस्य पदक जीतकर चार दशक का सूखा समाप्त किया जबकि महिला टीम ने भी शानदार प्रदर्शन कर विश्व का ध्यान आकर्षित किया। अब जब विश्व कप जैसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंट सामने हैं, तब खिलाड़ियों का ध्यान केवल अपने प्रदर्शन पर केंद्रित रहना चाहिए, किसी भी प्रकार का राजनीतिक या वैचारिक विवाद खिलाड़ियों पर अनावश्यक मानसिक दबाव डाल सकता है। बहरहाल, वास्तविक प्रश्न यह नहीं है कि नीली हो या केसरिया बल्कि यह है कि क्या भारतीय हॉकी विश्व विजेता बनने की तैयारी कर रही है? क्या हमारे खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, फिटनेस सुविधाएं, खेल विज्ञान, मनोवैज्ञानिक सहयोग, आधुनिक विश्लेषण तकनीक और मजबूत घरेलू प्रतियोगिताएं उपलब्ध हैं? क्या जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को पर्याप्त अवसर मिल रहे हैं? यदि इन प्रश्नों के उत्तर सकारात्मक नहीं हैं तो केवल जर्सी बदल देने से भारतीय हॉकी का भविष्य नहीं बदल सकता। इतिहास बताता है कि महान टीमें अपने रंग से नहीं, अपने खेल से अमर होती हैं। खेल में पहचान रंग से नहीं, उपलब्धियों से बनती है। यदि भारतीय टीम केसरिया जर्सी पहनकर विश्व कप जीतती है तो यही जर्सी नई गौरवगाथा का प्रतीक बन जाएगी। और यदि प्रदर्शन निराशाजनक रहा तो रंग चाहे कोई भी हो, आलोचना फिर भी होगी। खेल का सबसे बड़ा धर्म राष्ट्र का सम्मान है। मैदान पर खिलाड़ी न किसी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते हैं और न किसी दल का; वे केवल भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए जर्सी का रंग चाहे नीला हो, केसरिया हो या कोई और, देश की अपेक्षा केवल यही है कि भारतीय तिरंगा विश्व हॉकी के सर्वोच्च मंच पर सबसे ऊंचा लहराना चाहिए। वही किसी भी रंग की सबसे बड़ी सार्थकता होगी। - योगेश कुमार गोयल (लेखक 36 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार और ‘सागर से अंतरिक्ष तक: भारत की रक्षा क्रांति’ सहित कई पुस्तकों के लेखक हैं)
एकतरफा मैच में झारखंड को 12-3 से हराया
भास्कर न्यूज | जालंधर 16वीं हॉकी इंडिया जूनियर पुरुष राष्ट्रीय हॉकी चैंपियनशिप में पंजाब ने झारखंड को 12-3 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। तमिलनाडु के कोयंबटूर में हॉकी इंडिया की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में पंजाब ने पूल सी में शीर्ष स्थान हासिल कर अंतिम आठ में प्रवेश किया। हॉकी पंजाब के अध्यक्ष नितिन कोहली और महासचिव अमरीक सिंह पुआर के अनुसार, शाम को खेले गए इस मुकाबले में पंजाब ने शुरू से ही बढ़त बनाते हुए एकतरफा जीत दर्ज की। पंजाब के लिए मनदीप सिंह ने चार गोल दागे और हैट्रिक पूरी की, उन्हें मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया। चरणजीत सिंह और हर्षदीप सिंह ने दो-दो गोल किए। जोबनप्रीत सिंह, ओम रजनीश सैनी, प्रिंस सिंह और अमनदीप ने एक-एक गोल जोड़ा। झारखंड की ओर से हैमरम टिंटस ने दो और सबीन किरो ने एक गोल किया। इससे पहले पंजाब ने दिल्ली को 6-2 से हराकर छह अंक के साथ पूल सी में पहला स्थान पक्का किया था। क्वार्टर फाइनल मुकाबले 5 अगस्त को खेले जाएंगे।
'भगवा' जर्सी विवाद पर हॉकी इंडिया में दो फाड़, तिर्की ने पूछे कड़े सवाल
हॉकी इंडिया ने क्या राष्ट्रीय टीम की पहचान से जुड़े इतने अहम फैसले में अपने संविधान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन किया था, ये अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है. अगर दिलीप तिर्की का दावा सही साबित होता है, तो आने वाले दिनों में हॉकी इंडिया को सिर्फ जर्सी के रंग पर नहीं, बल्कि फैसले लेने के तरीके और पारदर्शिता पर भी जवाब देना पड़ सकता है.
आगामी 30 जुलाई से पवित्र श्रावण मास की कांवड़ यात्रा की शुरुआत होने जा रही है, जो 11 अगस्त को श्रावण शिवरात्रि के दिन जलाभिषेक के साथ संपन्न होगी। इस दौरान देश भर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पैदल या वाहनों के माध्यम से हरिद्वार, ऋषिकेश और गंगोत्री धाम पहुंचकर पवित्र गंगाजल लाते हैं और अपने स्थानीय शिव मंदिरों में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। यात्रा को सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली के सीमावर्ती जिलों की पुलिस ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। तीर्थ मार्गों पर भारी-भरकम डीजे सेटअप, किसी भी तरह के हथियारों और मांसाहारी दुकानों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।यात्रा के दौरान क्या करें और क्या न करें?प्रशासन ने कांवड़ियों और शिविर आयोजकों की सुविधा व सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यात्रा के दौरान सभी श्रद्धालुओं को अपना वैध पहचान पत्र (ID Proof) हमेशा साथ रखना अनिवार्य है। श्रद्धालुओं से केवल प्रशासन द्वारा निर्धारित एवं सुरक्षित कांवड़ मार्ग का ही उपयोग करने की अपील की गई है। वहीं, यात्रा के दौरान हॉकी स्टिक, बेसबॉल बैट, लाठी-डंडे, तलवार या किसी भी प्रकार का हथियार ले जाना पूरी तरह वर्जित है। दोपहिया वाहनों पर मॉडिफाइड साइलेंसर और तेज प्रेशर हॉर्न का प्रयोग प्रतिबंधित रहेगा। मार्ग में लगे शिविर आयोजकों के लिए सीसीटीवी कैमरे, अग्निशमन उपकरण और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा, ढाबों और होटलों में भोजन या पानी लेने से पहले तय रेट लिस्ट जरूर जांचने की सलाह दी गई है।डीजे और कांवड़ की ऊंचाई को लेकर शहरों में तय नियमविभिन्न जिलों में कांवड़ और डीजे साउंड की सीमा तय कर दी गई है। बागपत पुलिस ने कांवड़ और डीजे सेटअप की अधिकतम ऊंचाई 10 फीट तथा चौड़ाई 12 फीट तय की है। इसके साथ ही डीजे और साउंड सिस्टम का आवाज स्तर 75 डेसिबल से अधिक नहीं होना चाहिए। आगरा में पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार की अध्यक्षता में हुई समन्वय बैठक में कांवड़ की अधिकतम ऊंचाई 12 फीट तय की गई है और डीजे की आवाज तय मानकों के भीतर रखने के निर्देश दिए गए हैं। कांवड़ मार्गों और प्रमुख शिव मंदिरों के आसपास की सभी मीट-मांस की दुकानें यात्रा अवधि के दौरान पूरी तरह बंद रहेंगी।मेरठ के NH-58 डायवर्जन से हस्तिनापुर-चांदपुर मार्ग पर भारी जामकांवड़ यात्रा के मद्देनजर 28 जुलाई से 10 अगस्त के बीच मेरठ के NH-58 पर भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है। इसके विकल्प के रूप में ट्रकों और भारी कॉमर्शियल वाहनों को हस्तिनापुर खादर क्षेत्र के संकरे रास्ते से निकाला जा रहा है। इस नए डायवर्जन की वजह से हस्तिनापुर-चांदपुर मार्ग पर घंटों लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है। सड़क की खस्ताहाल स्थिति और भारी ट्रैफिक के कारण स्थानीय निवासियों, व्यापारियों, किसानों और स्कूल जाने वाले बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस मार्ग पर अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस तैनात करने की मांग की है।विभिन्न शहरों और हाईवे पर रूट डायवर्जन का पूरा प्लानमुजफ्फरनगर (NH-58): 29 जुलाई की मध्यरात्रि से 12 अगस्त तक भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा। 4 अगस्त तक हाईवे की एक लेन कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेगी, जबकि 4 अगस्त के बाद दोनों लेन केवल कांवड़ियों के लिए सुरक्षित रहेंगी।हरिद्वार: सहारनपुर, दिल्ली, मेरठ और यमुनानगर की ओर से आने वाले वाहनों को मंडावर और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम चौक होते हुए बैरागी कैंप पार्किंग में भेजा जाएगा।देहरादून-ऋषिकेश मार्ग: वाहनों को नेपाली तिराहा और दूधाधारी फ्लाईओवर के रास्ते चमगादड़ टापू व लालजीवाला पार्किंग की तरफ डायवर्ट किया जाएगा। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कांवड़ वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी।दिल्ली-एनसीआर सीमावर्ती जिले: मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर और गौतम बुद्ध नगर पुलिस आपस में समन्वय बनाकर काम कर रही है। रियल-टाइम ट्रैफिक अपडेट देने के लिए आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं और अतिरिक्त इमरजेंसी पार्किंग की व्यवस्था की गई है।खान-पान की दुकानों और ढाबों के लिए सख्त गाइडलाइंसखाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) ने यात्रा मार्गों पर स्थित होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट्स की सघन जांच शुरू कर दी है। अकेले हापुड़ जिले में लगभग 130 खान-पान प्रतिष्ठानों की जांच की जा रही है। मुजफ्फरनगर में खाद्य सुरक्षा सहायक आयुक्त अर्चना धीरन के अनुसार, कांवड़ मार्ग पर स्थित सभी भोजनालयों में नॉन-वेज खाना, प्याज और लहसुन का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। खाद्य सुरक्षा विभाग की छह टीमें बासी और मिलावटी खाने की जांच कर रही हैं। श्रद्धालुओं से ओवरचार्जिंग रोकने के लिए 21 आवश्यक खाद्य वस्तुओं के दाम सरकारी स्तर पर तय किए गए हैं। सभी दुकानों पर प्रोपराइटर की जानकारी, लाइसेंस नंबर और फूड-सेफ्टी QR कोड प्रदर्शित करना अनिवार्य है। साथ ही खाना बनाने और परोसने वाले कर्मचारियों के लिए हैंड ग्लव्स पहनना अनिवार्य किया गया है।
जहीर खान और उनकी पत्नी सागरिका घाटगे ने ‘Akutee’ ब्रांड की शुरुआत की
बेंगलुरु। पल्लू, दुपट्टे और जैकेट पर खूबसूरत रंगों में की गई कढ़ाई और पेंटिंग घाटगे शाही परिवार का एक रहस्य रहा होगा, जिसका इस्तेमाल प्रियजनों के कपड़ों को प्यार से सजाने के लिए किया जाता था। हालांकि क्रिकेटर जहीर खान की व्यावसायिक समझ से अब यह एक ब्रांड अकुती में तब्दील हो गया है। अभिनेत्री, मॉडल एवं राष्ट्रीय स्तर की पूर्व हॉकी चैंपियन सागरिका घाटगे अकुती ब्रांड को अपनी मां उर्मिला घाटगे के साथ चलाती हैं। सागरिका घाटगे ने कहा, “हाथ से पेंटिंग मेरे बचपन का हिस्सा रहे हैं। मेरी मां लंबे समय से यह करती रही हैं। हालांकि शुरू में मैं इसे उतनी गंभीरता से नहीं लेती थी, लेकिन मेरे पति (जहीर खान) ने मुझे इसे एक विशेष कलेक्शन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। मां-बेटी की जोड़ी ने बेंगलुरु में ‘फोर सीजन्स’ में अपने कलेक्शन की शुरुआत की। सोलह मई को होटल में एक दिन के लिए साड़ियों, दुपट्टों और ब्लेजर का संग्रह प्रदर्शित किया गया। घाटगे ने कहा कि जब उन्होंने लगभग एक साल पहले इसकी शुरुआत करने का फैसला किया, तो एक ब्रांड नाम के लिए ‘अकुती’ एक स्वाभाविक पसंद बन गई, जिसका मराठी में अर्थ राजकुमारी होता है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival में दिखाई गई श्याम बेनेगल की फिल्म मंथन, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह मौजूद खान ने कहा, ‘‘हां, वह एक राजकुमारी है। घाटगे ने कहा कि यह नाम सिर्फ उनके खानदान का संकेत नहीं है, बल्कि उनके परिवार की सभी महिलाओं के लिए एक सम्मान भी है। घाटगे ने कहा, अकुती समय में पीछे ले जाता है। उन्होंने कहा कि डिज़ाइन की प्रेरणा सीधे कोल्हापुर के शाही घाटगे परिवार के बगीचों से आती है। घाटगे ने कहा, मेरी मां वास्तव में बागवानी में रुचि रखती हैं और हमारे बगीचे में खिलने वाले फूल हमारे कपड़ों पर हाथ से पेंट की गई डिजाइन में तब्दील हो जाते हैं।

