अगर आप WhatsApp पर आने वाले फर्जी मैसेज, ऑनलाइन ठगी और स्कैम कॉल्स से परेशान हैं, तो जल्द ही आपके लिए एक उपयोगी फीचर आने वाला है। लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp अपने एंड्रॉयड यूजर्स के लिए एक नए ‘Scam Alert’ फीचर की टेस्टिंग कर रहा है, जो संदिग्ध संदेशों की पहचान करने में मदद करेगा। ALSO READ: ममता बनर्जी की TMC में बड़ी टूट, ऋतब्रत बनर्जी के साथ 60 विधायक, चुने गए विपक्ष के नेता, स्पीकर ने बागी गुट को दी मंजूरी क्या है WhatsApp का नया Scam Alert फीचर? रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फीचर WhatsApp के एंड्रॉयड बीटा वर्जन 2.26.22.2 में देखा गया है। इसकी मदद से यदि किसी अनजान व्यक्ति की ओर से कोई संदिग्ध संदेश आता है, तो WhatsApp उसे स्कैन कर संभावित स्कैम की पहचान करेगा। यदि मैसेज संदिग्ध पाया जाता है, तो चैट विंडो में एक चेतावनी (Warning Banner) दिखाई देगी, जिसमें बताया जाएगा कि यह संदेश धोखाधड़ी या स्कैम से जुड़ा हो सकता है। ALSO READ: Lava Bold N2 5G : यह भारत का सबसे सस्ता स्मार्टफोन, 6000mAh बैटरी, Android 16 और 120Hz डिस्प्ले यूजर्स को मिलेंगे दो विकल्प WhatsApp किसी भी संदिग्ध अकाउंट को अपने आप ब्लॉक नहीं करेगा। इसके बजाय यूजर्स को दो विकल्प दिए जाएंगे— Sender को Block और Report करें यदि संदेश भरोसेमंद लगे तो बातचीत जारी रखें इससे यूजर्स को अधिक नियंत्रण मिलेगा और वे अपनी समझ के अनुसार निर्णय ले सकेंगे। प्राइवेसी से नहीं होगा समझौता WhatsApp का कहना है कि स्कैम की जांच सीधे यूजर के मोबाइल डिवाइस पर होगी। इसके लिए किसी भी मैसेज को WhatsApp के सर्वर पर नहीं भेजा जाएगा। इसका मतलब है कि प्लेटफॉर्म की End-to-End Encryption पूरी तरह सुरक्षित रहेगी और WhatsApp आपके निजी संदेशों की सामग्री नहीं देख सकेगा। ALSO READ: BTA से पहले US का बड़ा झटका, 60 देशों की बदनाम लिस्ट में क्यों है भारत का नाम, क्या पड़ेगा असर फीचर रहेगा वैकल्पिक WhatsApp का यह Scam Alert फीचर डिफॉल्ट रूप से बंद रहेगा। जो यूजर्स इसे इस्तेमाल करना चाहेंगे, वे सेटिंग्स में जाकर इसे मैन्युअली ऑन कर सकेंगे। फिलहाल कंपनी ने इस फीचर की आधिकारिक लॉन्च डेट की घोषणा नहीं की है, लेकिन बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर ठगी के मामलों को देखते हुए WhatsApp लगातार नए सुरक्षा फीचर्स पर काम कर रहा है। ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट भी मिल सकती है रिपोर्ट्स के अनुसार, WhatsApp एक नया Transparency Section भी जोड़ सकता है, जहां यूजर्स उन सभी संदिग्ध गतिविधियों की सूची देख सकेंगे जिन्हें ऐप ने स्कैम के रूप में चिन्हित किया है। यह पूरी जानकारी केवल यूजर के डिवाइस में ही स्टोर होगी और किसी बाहरी सर्वर पर साझा नहीं की जाएगी। Edited by: Sudhir Sharma
FIFA World Cup के लिए दक्षिण अफ्रीका की 26 सदस्यीय टीम हुई घोषित
दक्षिण अफ्रीका ने फीफा विश्वकप 2026 के लिए 26 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम की घोषणा कर दी है। टीम के मुख्य कोच ह्यूगो ब्रूज ने बुधवार को देश की राधानी प्रिटोरिया में एक सेंड-ऑफ डिनर के दौरान आधिकारिक रूप से फीफा विश्वकप 2026 के लिए 26 सदस्यीय टीम का ऐलान किया। टीम में घरेलू प्रतिभा पर भरोसा जताया गया है। विश्वकप में दक्षिण अफ्रीका को ग्रुप ए में मेक्सिको, दक्षिण कोरिया और चेक रिपब्लिक के साथ रखा गया है। 11 जून को, दक्षिण अफ्रीका अपने पहले ग्रुप मैच में मेक्सिको सिटी के मशहूर एज़्टेका स्टेडियम में मेजबान मेक्सिको का सामना करेगा, ठीक 16 साल बाद जब दोनों टीमें दक्षिण अफ्रीका में 2010 वर्ल्ड कप के पहले मैच में मिली थीं। यह वर्ल्ड कप फाइनल में दक्षिण अफ्रीका की चौथी मौजूदगी होगी। फीफा विश्वकप 2026 के लिए दक्षिण अफ्रीका की 26 सदस्यीय की टीम इस प्रकार है: गोलकीपर: रॉनवेन विलियम्स (मैमेलोडी सनडाउन्स), रिकार्डो गॉस (सिवेलेले), सिफो चेन (ऑरलैंडो पाइरेट्स); डिफेंडर : खुलिसो मुडाऊ (मामेलोडी सनडाउन्स), नकोसिनाथी सिबिसी (ऑरलैंडो पाइरेट्स), इमे ओकोन (हनोवर 96), खुलुमानी नडामने (मामेलोडी सनडाउन्स), ऑब्रे मोदिबा (मामेलोडी सनडाउन्स), मबेकेज़ेली म्बोकाज़ी (शिकागो फायर), सैमुकेले काबिनी (मोल्डे FK), थबांग माटुलुडी (पोलोकवाने सिटी), ओल्वेथु माखन्या (फिलाडेल्फिया यूनियन), ब्रैडली क्रॉस (काइज़र चीफ्स); मिडफील्डर: तेबोहो मोकोएना (मामेलोडी सनडाउन्स), टैलेंटे मबाथा (ऑरलैंडो पाइरेट्स), स्फेफेलो सिथोले (सीडी टोंडेला), जेडन एडम्स (मामेलोडी सनडाउन्स); फॉरवर्ड: कामोगेलो सेबेलेबेले (ऑरलैंडो पाइरेट्स), ओसविन एपोलिस (ऑरलैंडो पाइरेट्स), इकराम रेनर्स (मैमेलोडी सनडाउन्स), त्सेपांग मोरेमी (ऑरलैंडो पाइरेट्स), एविडेंस माकगोपा (ऑरलैंडो पाइरेट्स), लाइल फोस्टर (बर्नले), रेलेबोहिले मोफोकेंग (ऑरलैंडो पाइरेट्स), थेम्बा ज़्वाने (मैमेलोडी सनडाउन्स), थापेलो मासेको (एईएल लिमासोल)।
गुजरात के प्राथमिक स्कूलों में 1808 मुख्य शिक्षकों की तत्काल होगी भर्ती
Gujarat Primary Teacher Recruitment: गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र भाई पटेल की सरकार ने प्राथमिक शिक्षा क्षेत्र के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। शिक्षा विभाग ने एचटीएटी (HTAT) मुख्य शिक्षकों के लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने के लिए आधिकारिक परिपत्र (circular) जारी कर दिया है। इस परिपत्र के माध्यम से विभाग के सभी संबंधित अधिकारियों को खाली पदों को भरने के लिए तत्काल और उचित कार्रवाई करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। खाली पड़े पदों को तत्काल और तेजी से भरने के निर्देश नए आधिकारिक परिपत्र के अनुसार, राज्य भर के प्राथमिक स्कूलों में खाली पड़े 1808 मुख्य शिक्षकों के पदों को बहुत जल्द भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही, शिक्षा विभाग ने सभी अधिकारियों को आगामी बजट की तैयारियां शुरू होने से पहले स्कूलों में नए पदों की आवश्यकता से संबंधित जरूरी प्रस्ताव तैयार कर भेजने के भी विशेष निर्देश दिए हैं। 1:1:2 रेशियो के आधार पर नियमानुसार होगी भर्ती प्रक्रिया शिक्षा विभाग ने इस बार मुख्य शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया 1:1:2 के तय रेशियो (अनुपात) के अनुसार आयोजित करने का बड़ा फैसला किया है। इस निर्धारित रेशियो के तहत मुख्य शिक्षकों के खाली पदों को सीधी भर्ती, विभागीय पदोन्नति (प्रमोशन) और विशेष प्रतिस्पर्धी (सेमी-डायरेक्ट) परीक्षा के माध्यम से पारदर्शी तरीके से भरा जाएगा। प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों को मिलेगी नई गति विभाग के इस महत्वपूर्ण निर्णय से स्कूलों के प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों में काफी तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। शिक्षा जगत में इस कदम का स्वागत किया जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से मुख्य शिक्षकों की कमी के कारण राज्य के कई प्राथमिक स्कूलों में दैनिक संचालन और प्रशासन से जुड़ी बड़ी चुनौतियाँ खड़ी हो रही थीं। प्राथमिक स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद सभी प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दस्तावेजी कार्यवाही समय पर पूरी करके पूरी भर्ती प्रक्रिया को गति देने के लिए कहा गया है। शिक्षा विभाग के इस सराहनीय कदम के कारण आने वाले समय में राज्य के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता के स्तर में सुधार होगा और साथ ही स्कूलों की प्रबंधन व्यवस्था अधिक सुदृढ़ और मजबूत बनेगी। Edited by: Vrijendra Singh Jhala
इंग्लैंड टीम में गे और बेकर डेब्यू को तैयार, इस गेंदबाज की भी 2 साल बाद वापसी
इंग्लैंड ने लॉर्ड्स में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ पहले रोथेसे टेस्ट के लिए 12-खिलाड़ियों वाली टीम का ऐलान किया है।एमिलियो गे अपना टेस्ट डेब्यू करने के लिए तैयार हैं, और उनके साथ टीम में सोनी बेकर के रूप में एक और नया खिलाड़ी शामिल हो सकता है, जबकि ओली रॉबिन्सन दो साल से ज़्यादा समय में अपना पहला टेस्ट खेलने के लिए तैयार हैं। छोटी टीम का मतलब है कि पिछले महीने घोषित 15 खिलाड़ियों में से 3 खिलाड़ी को हटा दिया गया है: समरसेट के जेम्स रेव, जो अपना डेब्यू भी कर रहे होते, साथ ही लेगस्पिनर रेहान अहमद और फास्ट बॉलर मैट फिशर। आखिरी विकल्प गुरुवार सुबह कन्फर्म होने की संभावना है, हेड कोच ब्रेंडन मैकुलम ने इशारा किया है कि आने वाले हफ्ते में खराब मौसम को देखते हुए, दो अलग-अलग तेज गेंदबाज, शायद गस एटकिंसन और बेकर के बीच होगी। “हम बस यह तय करेंगे कि क्या हमें एक्स्ट्रा एयर स्पीड चाहिए, अगर अचानक मौसम 35 डिग्री हो जाए और फ्लैट हो जाए। या हम लॉर्ड्स में जो ट्राई और टेस्ट किया गया है, उसी पर टिके रहेंगे और ऐसे बॉलर्स के साथ रहेंगे जो कुछ ओवरहेड कंडीशंस में कुछ मूवमेंट निकाल सकें। मैकुलम ने आगे कहा, “हम अपने ग्रुप के साथ बहुत कम्फर्टेबल हैं। हम जो चुनने जा रहे हैं, उस पर हमें भरोसा है। इससे हमें कुछ भी गारंटी नहीं मिलती, लेकिन इससे हमें लगता है कि लॉर्ड्स में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ़ हमें सबसे अच्छा मौका मिलेगा। हम इस विरोधी टीम के खिलाफ़ इन हालात में जो ज़रूरी होगा, हम उसी पर टिके रहना चाहते हैं।” शोएब बशीर, जो 18 महीने तक इंग्लैंड के पहले पसंद के स्पिनर थे, जब तक कि उन्हें इस सर्दी की एशेज़ के लिए नज़रअंदाज़ नहीं कर दिया गया, उनके XI में वापस आने की उम्मीद है।मैकुलम ने कहा, “बैश, उनमें शायद लॉर्ड्स में पहले कुछ दिनों में ज़्यादा होल्डिंग रोल निभाने की काबिलियत है।फिर जैसे-जैसे खेल गहरा होता है, और अगर स्पिन ज़्यादा होने लगती है, तो वह ज़्यादा अटैकिंग रोल में जा सकते हैं।” इंग्लैंड टेस्ट XII: बेन स्टोक्स (कप्तान), गस एटकिंसन, सोनी बेकर, शोएब बशीर, जैकब बेथेल, हैरी ब्रूक, बेन डकेट, एमिलियो गे, ओली रॉबिन्सन, जो रूट, जेमी स्मिथ (विकेट कीपर), जोश टंग
जून 2026 में शुक्र प्रदोष व्रत कब है? कैसे करें पूजन, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और कथा
June 2026 Shukra Pradosh Vrat: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम माना गया है। हर महीने के दोनों पक्षों (कृष्ण और शुक्ल) की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब त्रयोदशी तिथि शुक्रवार के दिन पड़ती है, तो उसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। शुक्रवार के दिन पड़ने वाले इस प्रदोष व्रत से सुख-समृद्धि मिलती है। ALSO READ: कर्क राशि में गुरु और शुक्र की युति से बना ये खास राजयोग, 4 राशियों के लिए धनवर्षा इस साल जून 2026 में ज्येष्ठ मास (अधिकमास) के कृष्ण पक्ष में शुक्र प्रदोष व्रत 12 जून 2026 को पड़ रहा है। आइए जानते हैं इसकी सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और व्रत कथा: जून 2026 शुक्र प्रदोष व्रत: तिथि व शुभ मुहूर्त इस बार त्रयोदशी तिथि की शुरुआत और प्रदोष काल (शाम का समय) का संयोग शुक्रवार को बन रहा है, इसलिए व्रत 12 जून को ही रखा जाएगा। साथ ही इस दिन सुबह के समय सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग भी बन रहा है, जो पूजा के फल को कई गुना बढ़ा देता है। शुक्र प्रदोष व्रत की तारीख: 12 जून 2026, शुक्रवार त्रयोदशी तिथि आरंभ- 12 जून 2026 को शाम 07:36 बजे से त्रयोदशी तिथि समाप्त- 13 जून 2026 को शाम 04:07 बजे तक दिन का प्रदोष समय - 07:19 पी एम से 09:20 पी एम शिव प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 07:36 बजे से रात 09:20 बजे तक कुल अवधि: 1 घंटा 44 मिनट शुक्र प्रदोष व्रत की सरल पूजन विधि प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा हमेशा शाम को सूर्यास्त के समय (प्रदोष काल) की जाती है। सुबह का संकल्प और स्नान प्रातःकाल/ सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र, यदि संभव हो तो सफेद या पीले पहनें। हाथ में जल लेकर भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लें। सुबह सामान्य पूजा करें। शाम की तैयारी (प्रदोष काल) सूर्यास्त से थोड़ा पहले यानी शाम को सूर्यास्त से करीब 1 घंटा पहले दोबारा स्नान करें या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ हो जाएं। पूजा स्थल पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठें। शिवलिंग का अभिषेक मुख्य पूजा के रूप में पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके बाद शुद्ध जल चढ़ाएं। भगवान शिव को चंदन का तिलक लगाएं। सामग्री अर्पित करना और मंत्र जप महादेव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और अक्षत (साबुत चावल) चढ़ाएं। माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। इसके बाद 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जप करें। कथा और आरती शुक्र प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। धूप-दीप से शिव जी की आरती करें और भोग लगाएं। अगले दिन सुबह सूर्योदय के बाद पारण करें या व्रत खोलें। शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अलग-अलग दिनों को पड़ने वाले प्रदोष व्रत का फल भी अलग होता है। शुक्र प्रदोष व्रत रखने से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं: सौभाग्य और समृद्धि: यह व्रत जीवन से दरिद्रता को मिटाकर सुख, समृद्धि और वैभव लाता है। दांपत्य जीवन में मधुरता: यदि पति-पत्नी के बीच अनबन रहती है, तो यह व्रत रखने से आपसी प्रेम बढ़ता है और वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। संतान सुख: संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए भी यह व्रत बेहद फलदायी माना गया है। ग्रह दोष शांत: इस व्रत से कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होता है और मानसिक शांति मिलती है। शुक्र प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में तीन मित्र रहते थे- राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र। राजकुमार और ब्राह्मण कुमार विवाहित थे। धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, लेकिन गौना शेष था। एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा- 'नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है।' धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरंत ही उसने अपनी पत्नी को लाने का निश्चय कर लिया। तब धनिक पुत्र के माता-पिता ने समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं। ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं माना जाता लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी और ससुराल पहुंच गया। ससुराल में भी उसे मनाने की कोशिश की गई लेकिन वो जिद पर अड़ा रहा और कन्या के माता-पिता को उनकी विदाई करनी पड़ी। विदाई के बाद पति-पत्नी शहर से निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई। दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे। कुछ दूर जाने पर उनका पाला डाकुओं से पड़ा। जो उनका धन लूटकर ले गए। दोनों घर पहूंचे। वहां धनिक पुत्र को सांप ने डंस लिया। उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि वो तीन दिन में मर जाएगा। जब ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी और कहा कि इसे पत्नी सहित वापस ससुराल भेज दें। धनिक ने ब्राह्मण कुमार की बात मानी और ससुराल पहुंच गया, जहां उसकी हालत ठीक होती गई और शुक्र प्रदोष के माहात्म्य से सभी घोर कष्ट दूर हो गए। इस दिन व्रत रखकर कथा सुनें अथवा सुनाएं। कथा समाप्ति के बाद हवन सामग्री मिलाकर 11 या 21 या 108 बार 'ॐ ह्रीं क्लीं नम: शिवाय स्वाहा' मंत्र से आहुति दें। उसके बाद शिवजी की आरती तथा प्रसाद वितरित करें, उसके बाद भोजन करें। कहा जाता है कि शुक्रवार को प्रदोष व्रत सौभाग्य और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि भर देता है। यही कारण है कि शुक्र प्रदोष व्रत बहुत खास माना जाता है। ALSO READ: कुंभ राशि पर चल रहा है शनि की उतरती हुई साढ़ेसाती, पढ़ें क्या होगा इसका प्रभाव
भारत भाग्य विधाता: जॉन अब्राहम की दरियादिली से कंगना रनौट को मिला टाइटल
बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौट इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में मुंबई में एक ग्रैंड इवेंट में इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया गया। ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान कंगना ने एक्टर जॉन अब्राहम का शुक्रिया भी अदा किया। जॉन अब्राहम ने अपनी दरियादिली दिखाते हुए एक रजिस्टर्ड फिल्म का टाइटल कंगना को बिना कोई पैसा लिए सौंप दिया है। यह टाइटल और कोई नहीं बल्कि कंगना की आने वाली बहुप्रतीक्षित फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' है। कंगना ने बताया कि शुरुआत में इस फिल्म का नाम काफी सीधा और वास्तविक था। ALSO READ: आमिर खान 5 जुलाई को तीसरी बार करेंगे शादी, गौरी स्प्रैट बनेंगी दुल्हन! कंगना ने बताया, मेकर्स ने इसका वर्किंग टाइटल 'नर्सेस ऑफ कामा' रखा था, जो सीधे तौर पर फिल्म की कहानी की पृष्ठभूमि को दर्शाता था। लेकिन जैसे-जैसे फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम आगे बढ़ा और इसकी शूटिंग पूरी हुई, मेकर्स को महसूस हुआ कि यह फिल्म सिर्फ एक अस्पताल या चंद नर्सों की कहानी नहीं है। यह कहानी देश की उस सामूहिक चेतना और राष्ट्रवाद की भावना को दर्शाती है, जहां आम लोग भी वक्त आने पर असाधारण वीरता दिखाते हैं। टीम को लगा कि फिल्म का नाम ऐसा होना चाहिए जो इसके गहरे और भावनात्मक संदेश को बखूबी बयां कर सके। ऐसे में उनके दिमाग में 'भारत भाग्य विधाता' नाम आया। शीर्षक तय होने के बाद जब मेकर्स ने इसकी खोजबीन की, तो पता चला कि 'भारत भाग्य विधाता' टाइटल पहले से ही जॉन अब्राहम के पास रजिस्टर्ड है। बॉलीवुड के नियमों के मुताबिक, किसी भी रजिस्टर्ड टाइटल को हासिल करना एक लंबी और कभी-कभी महंगी प्रक्रिया होती है। कई बार लोग इसके बदले मोटी रकम की मांग करते हैं। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें कंगना रनौत ने इस वाकये को याद करते हुए कहा, जब हमें पता चला कि यह टाइटल जॉन सर के पास है, तो मैंने उन्हें फोन किया और अपनी फिल्म की कहानी बताई। मुझे लोगों ने कहा था कि फिल्म इंडस्ट्री में कोई भी आसानी से अपना टाइटल नहीं छोड़ता है। लेकिन जॉन सर ने हमारी बात सुनी और महज एक दिन के भीतर बिना एक भी रुपया चार्ज किए यह टाइटल हमारे नाम ट्रांसफर कर दिया। आज के समय में ऐसा बड़प्पन दिखाना वाकई बहुत बड़ी बात है। मनोज तपाड़िया द्वारा लिखित और निर्देशित 'भारत भाग्य विधाता' साल 2008 में हुए 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमलों के एक ऐसे अध्याय को पर्दे पर लाती है, जो इतिहास के पन्नों में कहीं ओझल हो गया था। यह कहानी मुंबई के कामा एंड अल्ब्लेस हॉस्पिटल की है। हमले की उस खौफनाक रात दो खूंखार आतंकवादी इस सरकारी अस्पताल की दीवार फांदकर अंदर घुस गए थे। पूरे अस्पताल में अंधेरा छा गया था और मौत सामने खड़ी थी। ऐसे नाजुक वक्त में अस्पताल की नर्सों, वार्ड बॉय, सफाईकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए मोर्चा संभाला। उन्होंने सूझबूझ से वार्डों के दरवाजे बंद किए, रोते हुए बच्चों को चुप कराया और गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित जगहों पर छिपाया। इन गुमनाम हीरोज ने उस खौफनाक रात लगभग 400 मासूम जिंदगियों को आतंकियों की गोलियों का शिकार होने से बचा लिया था। फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' में कंगना रनौट के साथ-साथ गिरिजा ओक गोडबोले, स्मिता तांबे और ईशा डे जैसे मंझे हुए कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। फिल्म का निर्माण 'पेन स्टूडियोज', 'मणिकर्णिका फिल्म्स' और 'परमहंस क्रिएशन्स' के बैनर तले किया गया है। यह फिल्म 12 जून 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
बात अक्टूबर 1999 की है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 224 में 132 सीटें जीतीं। एसएम कृष्णा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले थे। कृष्णा के करीबी थे 37 साल के डीके शिवकुमार। इतने करीबी कि नए मंत्रिमंडल की लिस्ट भी दोनों ने साथ मिलकर तैयार की। लेकिन एक रात पहले कांग्रेस हाईकमान से मिली फाइनल लिस्ट में डीके का ही नाम नहीं था। डीके निराश और बेचैन हो गए। उन्होंने रात में ही अपने ज्योतिषी राजगुरु बेल्लूर शंकरनारायण द्वारकानाथ से सलाह मांगी। ज्योतिषी ने कहा- 'जब तक तुम खुद दरवाजा नहीं खोलोगे और मंत्री पद की मांग नहीं करोगे, यह नहीं मिलेगा।' डीके को बात लग गई। लेकिन संभावित मंत्रियों की लिस्ट राज्यपाल को भेजी जा चुकी थी। डीके आधी रात ही एसएम कृष्णा के घर जा पहुंचे। पता चला कि कृष्णा सो रहे हैं, लेकिन डीके ने उन्हें जगाकर कहा- 'आप मेरे बिना मुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं ले सकते।' अगले दिन, यानी 11 अक्टूबर 1999 को जब एसएम कृष्णा ने शपथ ली, तब डीके भी मंत्रिमंडल का हिस्सा थे। बाद में डीके ने खुद ये किस्सा सुनाते हुए कहा- 'ज्योतिषी द्वारकानाथ ने मुझसे कहा था कि सत्ता छीननी पड़ती है और मैंने उनकी सलाह मानी।' 27 साल बाद आज 'डोड्डालाहल्ली केम्पेगौड़ा शिवकुमार' उर्फ डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया को हटाकर कर्नाटक के 18वें मुख्यमंत्री की शपथ ली है। आज के एक्सप्लेनर में डीके शिवकुमार की पूरी कहानी… साउथ बेंगलुरु जिले में अर्कावती नदी के किनारे बसा है कनकपुरा शहर। यहीं के वोक्कालिगा किसान परिवार में 15 मई 1962 को डीके पैदा हुए। कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं था, लेकिन राजनीति में शुरुआत से ही दिलचस्पी थी। 18 साल की उम्र में डीके कांग्रेस की स्टू़डेंट विंग NSUI से जुड़ गए। जल्द ही NSUI के बेंगलुरु जिला अध्यक्ष बन गए। बेंगलुरु के राम नारायण चेल्लाराम कॉलेज में पढ़ने पहुंचे, तो इंडियन यूथ कांग्रेस जॉइन कर ली। साल 1979 डीके की जिंदगी में टर्निंग पॉइंट बना। कर्नाटक के पहले मुख्यमंत्री देवराज उर्स की इंदिरा गांधी से अनबन हो गई थी। देवराज ने पार्टी तोड़ी। NSUI और यूथ कांग्रेस में भी फूट पड़ी। कांग्रेस लीडरशिप ने कैडर बचाने का जिम्मा डीके को सौंपा। उन्हें यूथ कांग्रेस का स्टेट जनरल सेक्रेटरी बना दिया गया। डीके ने इतनी जिम्मेदारी से काम किया कि कांग्रेस में उनकी पैठ बनती गई। फिर साल आया 1985। कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। कांग्रेस राज्य में अपनी खोई जमीन वापस चाहती थी। वहीं, जेपी आंदोलन और इमरजेंसी से निकली जनता पार्टी दूसरी बार सत्ता में आना चाहती थी। जनता पार्टी में नंबर-2 की हैसियत रखने वाले एचडी देवगौड़ा ने दो सीटों से पर्चा भरा- हासन जिले की होलेनरसीपुर और बेंगलुरु की साथनूर। देवगौड़ा राज्य के रसूखदार वोक्कालिगा समुदाय से आते थे। उन्हें 'मण्णिन मगा' यानी धरती पुत्र कहा जाता था। कांग्रेस ने देवगौड़ा के खिलाफ साथनूर सीट से वोक्कालिगा समुदाय के ही 23 साल के डीके शिवकुमार को टिकट दिया। डीके ने चुनाव लड़ने के लिए बेंगलुरु के पास की पुश्तैनी जमीन बेच दी। कड़ा मुकाबला हुआ। 4 बार के विधायक और दो बार नेता प्रतिपक्ष रहे देवगौड़ा सिर्फ 15 हजार वोटों से जीत पाए। डीके हारकर भी टॉप लीडरशिप के करीबी बन गए। देवगौड़ा से हार के बावजूद डीके 4 साल तक साथनूर सीट पर डटे रहे। जिसका फायदा 1989 में मिला। डीके ने जनता पार्टी के यूके स्वामी को 13 हजार वोटों से हराया। इस साल कांग्रेस ने 224 में से 178 सीटें जीतकर सरकार बनाई। फिर अक्टूबर 1990 में कांग्रेस के एस बंगारप्पा सीएम बने और 29 साल के डीके मंत्री। वे तब सबसे कम उम्र के मंत्री थे। डीके को झटका तब लगा, जब 1994 के चुनाव में उन्हें कांग्रेस से टिकट ही नहीं मिला। वजह थी- पार्टी में गुटबाजी और जातीय समीकरण। हालांकि डीके निर्दलीय चुनाव जीते। कांग्रेस के बी रमेश तीसरे नंबर पर रहे। कांग्रेस आलाकमान समझ गया कि डीके को साथ रखने में ही पार्टी का फायदा है। 1995 के आखिर में डीके की कांग्रेस में वापसी हो गई। 1999 में उन्हें फिर मंत्री बनाया गया। डीके ने साथनूर से लगातार 4 विधानसभा चुनाव जीते। 2008 के परिसीमन में साथनूर सीट कनकपुरा में शामिल हो गई। इसके बाद डीके ने कनकपुरा से चुनाव लड़ा और लगातार 4 बार जीते। सभी 8 चुनावों में डीके को हमेशा 45% से ज्यादा वोट मिले हैं। 1985 के चुनाव से ही डीके और देवगौड़ा परिवार की राजनीतिक अदावत रही है। 1999 के चुनाव में साथनूर सीट पर डीके के सामने देवगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी खड़े हुए। डीके ने 14 हजार वोटों से हराया। हालांकि 2002 में कनकपुरा लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में वो देवगौड़ा से हार गए। 2004 के लोकसभा चुनाव हुए। कनकपुरा से देवगौड़ा ने पर्चा भरा। डीके ने सियासी गणित लगाया और 37 साल की पत्रकार तेजस्विनी गौड़ा को टिकट दिलवा दिया। तेजस्विनी का नाम नॉमिनेशन की आखिरी तारीख को ही तय हुआ था। तेजस्विनी ने देवगौड़ा को 1.16 लाख वोटों से हरा दिया। ये चौंकाने वाली बात इसलिए थी, क्योंकि तेजस्विनी का यह पहला चुनाव था। जबकि देवगौड़ा 6 दशकों से राजनीति कर रहे थे और प्रधानमंत्री रह चुके थे। इस जीत से डीके की साख इतनी मजबूत हुई कि समर्थक उन्हें 'कनकपुरदा बंदे' यानी कनकपुरा की चट्टान बुलाने लगे। राजनीति में शिवकुमार का कद और बिजनेस तेजी से बढ़ा। किताब 'डीके शिवकुमार: कांग्रेस क्राइसिस मैनेजर, कर्नाटक किंगमेकर' लिखने वाले सीनियर जर्नलिस्ट रशीद किदवई बताते हैं, 'जब भी कांग्रेस आलाकमान को फंड या क्राइसिस मैनेजमेंट की जरूरत पड़ी, उन्हें डीके की याद आई। डीके कई बार कांग्रेस के संकटमोचक साबित हुए।’ किस्सा-1: महाराष्ट्र सरकार बचाने के लिए 40 विधायक बेंगलुरू ले गए जून 2002 की बात है। महाराष्ट्र में कांग्रेस की अगुवाई वाले डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार थी। कांग्रेस के विलासराव देशमुख 30 महीने से मुख्यमंत्री थे। अचानक 9 विधायकों ने कह दिया कि वे देशमुख सरकार को समर्थन नहीं देंगे। बीजेपी की अगुआई वाला विपक्ष देशमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आ गया। कांग्रेस को और विधायक टूटने का डर था। कांग्रेस आलाकमान ने संकट में डीके को जिम्मेदारी सौंपी। डीके ने रातोंरात महाराष्ट्र कांग्रेस के 40 विधायकों बेंगलुरू शिफ्ट किया। एक हफ्ते तक उन्हें कड़ी सुरक्षा में अपने ईगलटन रिसोर्ट में रखा। टूट नहीं हो सकी और फ्लोर टेस्ट में देशमुख की कुर्सी बच गई। किस्सा-2: गुजरात के राज्यसभा चुनाव के लिए 44 विधायक एयरलिफ्ट किए 2017 में डीके ने गुजरात में भी ऐसा ही किया। राज्यसभा चुनाव हो रहे थे। सोनिया गांधी के करीबी और राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल गुजरात से राज्यसभा चुनाव लड़ रहे थे। कांग्रेस को डर था कि उनके विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। इससे अहमद पटेल हार जाते। आलाकमान ने फिर डीके को याद किया। रातोंरात डीके ने गुजरात कांग्रेस के 44 विधायकों को अहमदाबाद से एयरलिफ्ट किया। उन्हें बेंगलुरू के ईगलटन रिसॉर्ट में ठहराया। कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए डीके खुद रिसॉर्ट में ठहरे। 2 अगस्त की सुबह इनकम टैक्स अधिकारियों ने डीके शिवकुमार और उनके भाई डीके सुरेश के दिल्ली और बेंगलुरू में मौजूद करीब 60 ठिकानों पर छापे मारे। एक टीम ईगलटन रिसॉर्ट भी पहुंची। जब अधिकारी डीके के कमरे में घुसे तो वे उस वक्त सोकर उठे ही थे। डीके ने कहा, ‘आप अपनी जांच कीजिए। लेकिन मैं अपने मेहमानों को छोड़कर कहीं नहीं जाउंगा।’ उन्होंने ये सुनिश्चित किया कि कोई भी अधिकारी गुजरात के विधायकों के कमरे में न जाए। 8 अगस्त 2017 को वोटिंग हुई। डीके खुद सभी विधायकों को लेकर कड़ी सुरक्षा में अहमदाबाद पहुंचे। नतीजा आया तो अहमद पटेल चुनाव जीत गए। उन्होंने जीत का क्रेडिट डीके को दिया। कहा जाने लगा कि डीके ने ऐसा करके बीजेपी के ‘चाणक्य’ अमित शाह को सीधी चुनौती दी। रशीद किदवई बताते हैं, ‘2017 में डीके पर बीजेपी जॉइन करने का एक अनकहा दबाव था। फिर भी उन्होंने कांग्रेस की वफादारी चुनी।’ किस्सा-3: कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस-JDS गठजोड़ किया 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में 104 विधायकों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत से 11 कम। राज्यपाल ने बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा को सीएम पद की शपथ दिला दी। कांग्रेस के पास 79 और देवगौड़ा की JDS के पास 37 सीटें थीं। बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए दोनों ने गठबंधन कर लिया और बहुमत जुटाया। लेकिन विधायक टूटने का डर था। डीके फिर संकटमोचक बने। उन्होंने कांग्रेस के 43 विधायकों को बेंगलुरू के एक रिसॉर्ट में जमा किया। सभी के मोबाइल फोन ले लिए और उन पर नजर रखी। असंतुष्ट विधायकों को संभाला और सुनिश्चित किया कि गठबधंन में किसी भी तरह की फूट न पड़े। नतीजतन येदियुरप्पा बहुमत साबित नहीं कर पाए। एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व में कांग्रेस-JDS गठजोड़ की सरकार बनी। डीके शिवकुमार का माइनिंग, रियल एस्टेट, एजुकेशन और ट्रांसपोर्ट का कारोबार है। 2018 के चुनावी हलफनामे में 860 करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित है। तब वे देश के सबसे रईस विधायकों में शुमार थे। डीके पर टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के कई आरोप हैं। ऐसे ही एक मामले में ED ने उनसे लगातार 4 दिन तक पूछताछ की और 3 सितंबर 2019 को गणेश चतुर्थी के दिन गिरफ्तार कर लिया। डीके भावुक हो गए। लोगों ने उस कद्दावर नेता की आंख में आंसू देखे, जो कभी सीधे अमित शाह से भिड़ गया था। शिवकुमार के एक नजदीकी ने कहा था, 'यह कोई राजनीतिक नाटक नहीं था। वोक्कालिगा समुदाय के लोग गणेश चतुर्थी से बहुत गहराई से जुड़े हैं। डीके के साथ जैसा बर्ताव किया गया, इस क्षेत्र के समुदाय पर इसका प्रभाव पड़ना तय है।’ करीब 50 दिन तक डीके को दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया। इस दौरान सोनिया गांधी उनसे मिलने जेल पहुंची। 13 मई 2023 को जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तो डीके ने कहा, ‘मैं भूल नहीं सकता कि श्रीमती सोनिया गांधी मुझसे जेल में मिलने आई थीं। बीजेपी के लोगों ने मुझे जेल में डाल दिया था। तब मैंने पद पर रहने के बदले जेल में रहना चुना। सोनिया, राहुल से वादा किया था कि कर्नाटक जीतकर दिलाऊंगा। आज वादा पूरा हुआ।’ कांग्रेस को लंबे वक्त से कवर करने वाले सीनियर जर्नलिस्ट आदेश रावल ने हाल में सोशल मीडिया X पर एक पोस्ट लिखा- ‘डीके आर्थिक अपराध के आरोप में जेल गए थे। उन्हें आर्थिक अपराध वाले बाकी कैदियों के साथ रखा गया। उनमें से कई लोगों की डीके से दोस्ती हो गई। ज्यादातर गरीब लोग थे और बहुत छोटे आरोपों में जेल में बंद थे। जैसे- पत्नी को गुजारा भत्ता न दे पाना और जमीन के झगड़े। बाद में डीके को जमानत मिल गई। बाहर आकर उन्होंने जेल की दोस्ती निभाई। भारी भरकम वकीलों की एक फौज खड़ी करके जेल के दोस्तों की जमानत करवाई। उनमें से एक उनके दिल्ली वाले घर पर काम करता था, जो आजकल अपने जमीन के मसले को सुलझाने गांव गया हुआ है। दूसरे को बेंगलुरू के अपने मॉल में नौकरी पर रखा। ऐसे ही कई और लोगों को सलाखों के पीछे से निकालकर काम दिलवाया।’ जुलाई 2020 में कांग्रेस आलाकमान ने डीके को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया। उनकी मेहनत और इलेक्शन मैनेजमेंट की बदौलत कांग्रेस 135 सीटें जीतीं। डीके ने सीएम की कुर्सी पर दावा ठोका। उन्हें सिद्धारमैया से चुनौती मिली। बंद कमरे में 5 दिन मैराथन बैठकें हुईं। आखिरकार 19 मई 2023 को तय हुआ कि सिद्धा सीएम और डीके डिप्टी सीएम बनेंगे। सिद्धारमैया का अनुभव और सामाजिक समीकरण भारी पड़ा। वरिष्ठ पत्रकार आदेश रावल बताते हैं, ‘कांग्रेस आलाकमान की उस मीटिंग में तय किया गया कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनेंगे। तब डीके चाहते थे कि इस फैसले का ऐलान किया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।' 20 नवंबर 2025 को जब सिद्धा के कार्यकाल के ढाई साल पूरे हुए, तब भी लामबंदियां और बयानबाजियां शुरू हुईं। डीके और उनके समर्थक ‘सीक्रेट डील’ को पूरा करने का दबाव बना रहे थे, जबकि सिद्धा इससे इनकार कर रहे थे। आलाकमान ने दोनों नेताओं को समझाया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। डीके के सीएम बनने की भविष्यवाणी करने वाले ज्योतिषी द्वारकानाथ ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा, ‘सत्ता की खींचतान में डीके डिप्रेशन में थे। इतना ज्यादा कि वे रोने लगते थे।’ 20 मई 2026 को सिद्धा के 3 साल पूरे हुए। बदलाव की चर्चा फिर से शुरू हुई। कांग्रेस आलाकमान ने सीएम सिद्धा और डिप्टी सीएम डीके दिल्ली तलब किया। दोनों से कहा गया- आप 26 मई की सुबह 11 बजे तक दिल्ली के इंदिरा भवन (कांग्रेस मुख्यालय) पहुंचे। करीब 6 घंटे तक बातचीत चली। राहुल ने सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से भी बातचीत की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोनिया और प्रियंका चाहती थीं कि कर्नाटक में सीएम परिवर्तन हो। अलाकमान ने तय किया कि डीके सीएम बनेंगे और सिद्धारमैया की केंद्र में भूमिका बढ़ेगी। 28 मई को सिद्धारमैया ने इस्तीफा दे दिया। 30 मई को डीके विधायक दल के नेता चुने गए और 3 जून को कर्नाटक के 18वें सीएम के रूप में शपथ ली। 1413.7 करोड़ रुपए की संपत्ति के साथ डीके आज देश के सबसे रईस मुख्यमंत्री हैं। उनके ज्योतिषी की वो लाइन एक बार फिर सही साबित हुई कि सत्ता छीननी पड़ती है। --------------- कर्नाटक से जुड़ी भी खबर पढ़िए… कर्नाटक में सीएम बदलने के पीछे की कहानी; कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक या बीजेपी के भाग्य खुले, दांव पर हैं 62% अहिंदा वोटर्स कर्नाटक में कांग्रेस ने कार्यकाल के बीच सीएम बदल दिया। 77 साल के सिद्धारमैया की जगह 64 साल के डीके शिवकुमार ले रहे हैं। कहा जा रहा है कि ये फैसला एक सीक्रेट डील के तहत हुआ। लेकिन बीजेपी को दो तैयार मुद्दे मिल गए- ओबीसी नेता की अनदेखी और दागदार छवि वाले नेता को कुर्सी। पूरी खबर पढ़िए…
PSG की जीत के बाद पेरिस में भड़की हिंसा से जोड़कर पुराना वीडियो हुआ वायरल
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो साल 2022 का है, तब पेरिस की सड़कों पर कुर्दिश कल्चरल सेंटर के पास हुई गोलीबारी के विरोध में प्रदर्शन हुआ था.
सम्राट विक्रमादित्य का विजय अभियान: क्या समुद्रगुप्त से भी बड़ा था उज्जैन के राजा का साम्राज्य?
इतिहास के पन्नों को जब हम पलटते हैं, तो अक्सर कुछ गौरवशाली गाथाएं कहीं पीछे छूट जाती हैं। अगर इतिहास की किताबों में हरिषेण की 'प्रयाग प्रशस्ति' के आधार पर सम्राट समुद्रगुप्त के विजय अभियानों को पढ़ाया जाता है, तो समय आ गया है कि सोमदेव के 'कथासरित्सागर' और आचार्य क्षेमेंद्र की 'बृहत्कथामंजरी' के उन पन्नों को भी सामने लाया जाए, जो उज्जैन के महान सम्राट विक्रमादित्य के अखंड भारत साम्राज्य की गवाही देते हैं। आइए, इतिहास के इस नए और भव्य अंदाज़ में सम्राट विक्रमादित्य के उस चक्रवर्ती अभियान को समझते हैं, जिसने भारत की सीमाओं को ईरान तक फैला दिया था। इस महा-विजय यात्रा को चार मुख्य क्षेत्रों में श्रेणीबद्ध करके विस्तार से समझते हैं। 1. शकों का समूल नाश और भारत का पश्चिमी अभियान सम्राट विक्रमादित्य की पहली और सबसे बड़ी चुनौती विदेशी आक्रांता 'शक' थे। उन्होंने शकों को देश से खदेड़ने के लिए एक सिलसिलेवार अभियान चलाया:- चरण 1 (मालवा की मुक्ति): विक्रमादित्य ने सबसे पहले अपने गृह क्षेत्र मालवा पर कुंडली मारकर बैठे शकों पर भीषण आक्रमण किया और उन्हें वहां से भागने पर मजबूर कर दिया। चरण 2 (गुजरात पर विजय): मालवा से हारकर शक जब गुजरात की ओर भागे, तो सम्राट ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। उन्होंने गुजरात पर हमला कर वहां भी अपना परचम लहराया। चरण 3 (सिंधु और शकों का अंत): गुजरात से खदेड़े जाने के बाद शक सिंध जा छुपे। विक्रमादित्य ने एक निर्णायक सैन्य अभियान चलाकर उन्हें सिंध और भारत की सीमाओं से हमेशा-हमेशा के लिए बाहर खदेड़ दिया। 2. आर्यावर्त (उत्तर और मध्य भारत) का एकीकरण शकों के सफाए के बाद, सम्राट ने उत्तर और मध्य भारत के जनपदों को एक सूत्र में पिरोने का काम शुरू किया:- चरण 4 (मत्स्य देश): सम्राट ने मध्य भारत के मत्स्य देश (वर्तमान राजस्थान का क्षेत्र) पर आक्रमण कर उसे अपने साम्राज्य में मिलाया। चरण 5 (कुरु जनपद): यहाँ से आगे बढ़ते हुए उन्होंने कुरु जनपद (आज का दिल्ली और हरियाणा क्षेत्र) पर विजय प्राप्त की। चरण 6 और 7 (पांचाल, मथुरा और प्रयाग): इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के पांचाल जनपद और कृष्ण की नगरी मथुरा को जीता। अपनी सेना के साथ आगे बढ़ते हुए उन्होंने प्रयाग (इलाहाबाद) तक अपने शासन का विस्तार किया। चरण 8 (पूर्वदिक्ग): प्रयाग की विजय के बाद सम्राट ने संपूर्ण उत्तर प्रदेश (पूर्वदिक्ग) को अपने अधीन कर लिया। 3. पूर्वी भारत और सुदूर दक्षिण (समुद्र पार तक) की विजय उत्तर भारत को सुदृढ़ करने के बाद विक्रमादित्य की सेनाएं पूर्व और फिर दक्षिण की ओर बढ़ीं, जहाँ उन्होंने समुद्र पार के द्वीपों तक को जीत लिया: चरण 9, 10 और 11 (बिहार, बंगाल और बांग्लादेश): पूर्व की ओर बढ़ते हुए सम्राट ने अंग (बिहार), गौड़ (पश्चिम बंगाल) और फिर बंग (वर्तमान बांग्लादेश) पर अपनी संप्रभुता स्थापित की। चरण 12 (कलिंग): इसके बाद उन्होंने ओडिशा के ऐतिहासिक कलिंग क्षेत्र को जीता। चरण 13 और 14 (अपरांत और विदर्भ): दक्षिण का रुख करते हुए उन्होंने अपरांत (कोंकण क्षेत्र) और विदर्भ (महाराष्ट्र का नागपुर क्षेत्र) पर विजय पताका फहराई। चरण 15 और 16 (आंध्र और कुंतल): विजय रथ आगे बढ़ा और आज के आंध्र प्रदेश-तेलंगाना (आंध्र) तथा कर्नाटक (कुंतल) को साम्राज्य का हिस्सा बनाया गया। चरण 17 (केरल, तमिल और सिंहल द्वीप): मुख्य भूमि के सुदूर दक्षिण यानी केरल और तमिल क्षेत्रों को जीतने के बाद सम्राट की सेना ने समुद्र पार किया और सिंहल द्वीप (आज का श्रीलंका) को भी जीत लिया। चरण 18 (हिंद महासागर के द्वीप): श्रीलंका विजय के बाद, उन्होंने हिंद महासागर में स्थित कई छोटे-बड़े रणनीतिक द्वीपों पर अपना आधिपत्य स्थापित किया। 4. पश्चिमोत्तर सीमांत और अंतरराष्ट्रीय विजय (ईरान तक साम्राज्य) भारत के भीतर और दक्षिण में अपनी धाक जमाने के बाद, सम्राट विक्रमादित्य ने उस दौर की वैश्विक शक्तियों और विदेशी मलेच्छों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया: चरण 19 (कश्मीर और पश्चिमोत्तर): उन्होंने भारत के पश्चिमोत्तर क्षेत्र पर एक बड़ा हमला बोला, जिसमें कश्मीर, कावेरी और काष्ठा के क्षेत्रों को जीतकर वहां पैर पसारे बैठे विदेशियों को बाहर निकाला। चरण 20 (पेशावर के मलेच्छ): कश्मीर से आगे बढ़ते हुए सम्राट ने पेशावर (वर्तमान पाकिस्तान) के क्षेत्र में 'मलेच्छों' को बुरी तरह पराजित कर खदेड़ा। चरण 21 (यवनों की पराजय): पेशावर के भी पार जाकर उन्होंने यवनों (यूनानियों/ग्रीक्स) की सेनाओं को धूल चटाई। चरण 22 (तुषारों/कुषाणों का अंत): विक्रमादित्य ने आगे बढ़कर तुषार साम्राज्य यानी कुषाणों को परास्त किया। इस विजय के साथ ही वे आधुनिक ईरान की सीमाओं तक जा पहुंचे। चरण 23 (पार्थियन विजय - ईरान पर कब्जा): अपने अंतिम और सबसे भव्य चरण में, राजा विक्रमादित्य ने पार्थियन यानी 'पहलवों' को उनके ही घर में युद्ध हराकर संपूर्ण ईरान पर सनातन साम्राज्य का भगवा ध्वज लहरा दिया। निष्कर्ष: सोमदेव और क्षेमेंद्र के ग्रंथ केवल कहानियों के पुलिंदे नहीं हैं, बल्कि वे भारत के उस स्वर्णिम काल के दस्तावेज हैं जब उज्जैन की धरती से उठकर एक महानायक ने भारत को 'अखंड भारत' बनाया था और उसकी सीमाएं एशिया के दिल (ईरान) तक फैला दी थीं। यह इतिहास की वह भव्य गाथा है, जो हर भारतीय को गौरवान्वित करती है। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अलावा, उन्हें वेताल पंचविंशति (विक्रम और बेताल) और सिंहासन बत्तीसी जैसी लोककथाओं में एक ऐसे पराक्रमी चक्रवर्ती सम्राट के रूप में दिखाया गया है, जिन्होंने कभी कोई युद्ध नहीं हारा। - संकलन: अनिरुद्ध जोशी
तमिल फिल्म 'किलर' के सेट पर दर्दनाक हादसा, शूटिंग के दौरान फटा सिलेंडर, एक की मौत
तमिल फिल्म इंडस्ट्री से एक दुखद खबर सामने आई है। एक्टर और निर्देशक एस.जे. सूर्या की आगामी फिल्म 'किलर' के सेट पर एक भीषण हादसा हो गया। चेन्नई के पेरम्बूर स्थित ऐतिहासिक बिन्नी मिल्स परिसर में चल रही शूटिंग के दौरान एक गैस सिलेंडर में जोरदार विस्फोट हो गया। इस दर्दनाक हादसे में स्पेशल इफेक्ट विभाग के एक युवा तकनीशियन की जान चली गई, जबकि तीन अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह घटना बुधवार सुबह करीब 5 बजे की बताई जा रही है। ALSO READ: बंदर मूवी प्रिव्यू: सच्ची घटना से प्रेरित बॉबी देओल और अनुराग कश्यप की क्राइम थ्रिलर फिल्म के सेट पर एक महत्वपूर्ण बम ब्लास्ट सीक्वेंस फिल्माया जा रहा था। इस दृश्य को सजीव और प्रभावी बनाने के लिए स्पेशल इफेक्ट्स टीम गुब्बारों में भरी जाने वाली गैस और सिलेंडरों का उपयोग कर रही थी। इसी प्रक्रिया के दौरान अचानक एक सिलेंडर में तकनीकी खराबी या अत्यधिक दबाव के कारण जोरदार धमाका हो गया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास मौजूद तकनीशियनों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। हादसे की चपेट में आने से स्पेशल इफेक्ट्स टीम के चार सदस्य गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के तुरंत बाद सेट पर अफरा-तफरी मच गई और आनन-फानन में सभी घायलों को अस्पताल ले जाया गया। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने 26 वर्षीय मधन को मृत घोषित कर दिया। वहीं, अन्य तीन घायल तकनीशियनों—शक्तिवेल, सूर्या और दिनकरन का इलाज चल रहा है, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केस दर्ज कर लिया है और फॉरेंसिक टीम की मदद से ब्लास्ट के सही कारणों का पता लगाया जा रहा है। फिल्म 'किलर' की शूटिंग को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है। फिल्म के मुख्य अभिनेता एस.जे. सूर्या और सह-कलाकार प्रीति असरानी की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
द इंडिया स्टोरी: खेती के ज़हर पर बनी फिल्म, काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े पहली बार दिखेंगे साथ
गंभीर मुद्दों पर फिल्में कम बनती हैं, लेकिन जब बनती हैं तो चर्चा दूर तक जाती है। अब ऐसी ही एक फिल्म ‘द इंडिया स्टोरी’ रिलीज़ से पहले सुर्खियों में आ गई है। Kajal Aggarwal और Shreyas Talpade स्टारर यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक ऐसे खामोश खतरे को सामने लाने की कोशिश कर रही है जो लाखों लोगों की जिंदगी से जुड़ा है। खेती में इस्तेमाल होने वाले जहरीले रसायनों पर आधारित है कहानी The India Story का सबटाइटल ‘स्लो पॉइज़न इन प्रोग्रेस’ है, जो इसके विषय की गंभीरता को साफ दिखाता है। फिल्म खेती में इस्तेमाल होने वाले हानिकारक रसायनों और उनके लोगों की सेहत पर पड़ने वाले खतरनाक असर को केंद्र में रखती है। कहानी यह दिखाने की कोशिश करती है कि कैसे औद्योगिक लापरवाही और जागरूकता की कमी धीरे-धीरे समाज को नुकसान पहुंचा रही है। पहली बार साथ दिखेंगे काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े इस फिल्म की एक और खास बात यह है कि पहली बार Kajal Aggarwal और Shreyas Talpade एक साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे। दोनों कलाकारों से दमदार और भावनात्मक अभिनय की उम्मीद की जा रही है। फिल्म का टोन गंभीर है, इसलिए दर्शकों को इसमें इमोशन और सामाजिक संदेश का मजबूत मिश्रण देखने को मिल सकता है। 24 जुलाई को सिनेमाघरों में होगी रिलीज़ फिल्म का निर्देशन Chetan DK ने किया है, जबकि कहानी, लेखन और निर्माण की जिम्मेदारी Sagar B Shinde ने संभाली है। यह फिल्म Zee Studios और MIG Production and Studios के सहयोग से बनाई गई है। ‘द इंडिया स्टोरी’ 24 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में दर्शकों के सामने आएगी। मेकर्स को उम्मीद है कि यह फिल्म सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक चर्चा में भी अपनी खास जगह बनाएगी।
भारत भाग्य विधाता: जब डर के सामने खड़ी हुई इंसानियत, कंगना रनौत की यह मूवी सच्ची कहानी पर आधारित
हर सुपरहीरो के पास केप नहीं होती और इसी सच्चाई को पर्दे पर लाने जा रही हैं कंगना रनौत अपनी नई फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ के जरिए। 12 जून 2026 को रिलीज होने वाली यह फिल्म किसी काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि उस सच्चाई को दिखाती है जहां आम लोगों ने असाधारण हालात में अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जिंदगी बचाई। यही वजह है कि फिल्म का पहला पोस्टर सामने आते ही दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। कहानी: आतंक के बीच इंसानियत की जीत यह फिल्म एक भयावह रात की सच्ची घटनाओं पर आधारित है, जब शहर में आतंक का माहौल था। बाहर गोलियों और हमलों की गूंज थी, लेकिन अस्पताल के अंदर इंसानियत जिंदा थी। खास तौर पर कामा अस्पताल के भीतर करीब 400 लोगों की जान बचाई गई और यही इस कहानी का सबसे मजबूत पहलू है। फिल्म अस्पताल के गलियारों, वार्ड्स और इमरजेंसी के उन पलों को दिखाती है, जहां हर सेकंड भारी था, लेकिन वहां मौजूद लोगों ने हिम्मत नहीं हारी। ‘भारत भाग्य विधाता’ सिर्फ एक थ्रिलर नहीं, बल्कि उन गुमनाम नायकों की कहानी है, नर्स, वार्ड बॉय, सफाई कर्मचारी, लिफ्ट ऑपरेटर, सुरक्षा कर्मी और प्रशासनिक स्टाफ, जिन्होंने बिना हथियार के, सिर्फ अपने कर्तव्य और साहस के दम पर लोगों की जान बचाई। जब पूरा शहर डर के साए में था, तब इन लोगों ने दिखाया कि असली बहादुरी क्या होती है। कंगना रनौत का नजरिया फिल्म को लेकर कंगना रनौत का कहना है कि हम अक्सर दिखावटी वीरता का जश्न मनाते हैं, लेकिन असली साहस शांत होता है जो बिना शोर के अपनी जिम्मेदारी निभाता है। उनके मुताबिक, यह फिल्म देशभक्ति का सबसे सच्चा रूप दिखाती है, जहां आम लोग ही असली हीरो बन जाते हैं। मैं इस कहानी का हिस्सा बनकर गर्व महसूस करती हूं और 12 जून को इसे बड़े पर्दे पर दर्शकों के सामने लाने के लिए उत्साहित हूं।” फिल्म को मनोज तापड़िया ने लिखा और निर्देशित किया है, जबकि डॉ. जयंतीलाल गडा के पेन स्टूडियोज ने इसे प्रस्तुत किया है। मेकर्स का मानना है कि भारत की असली ताकत उसके आम लोग हैं, जो मुश्किल वक्त में बिना किसी पहचान के बड़ा काम कर जाते हैं। मनोज तापड़िया ने कहा, “12 जून को दर्शक एक ऐसा थ्रिलर देखेंगे जो तनाव से भरा, भावनात्मक और गहराई से इंसानी होगा। लेकिन इसकी असली कहानी सिर्फ आतंक के बारे में नहीं है, यह कहानी है उस साहस की जो डर पर जीत हासिल करता है, उस करुणा की जो अफरा-तफरी के बीच भी ज़िंदा रहती है, और उस बलिदान की जो खतरे के सामने दिया जाता है। फिल्म में कंगना रनौत के साथ गिरीजा ओक, स्मिता तांबे, अमृता नामदेव, ईशा डे, प्रिया बेर्डे, आशा शेलार, सुहिता ठट्टे, रसीका आगाशे, आदित्य मिश्रा और जाहिद खान जैसे कलाकार नजर आएंगे। ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी और दर्शकों को एक ऐसी कहानी से रूबरू कराएगी, जो दिल को छूने के साथ-साथ सोचने पर मजबूर कर देगी। निर्देशक: मनोज तापड़िया कलाकार: कंगना रनौत, गिरीजा ओक, स्मिता तांबे, अमृता नामदेव, ईशा डे, प्रिया बेर्डे, आशा शेलार, सुहिता ठट्टे, रसीका आगाशे, आदित्य मिश्रा रिलीज डेट : 12 जून 2026
कर्क राशि में गुरु और शुक्र की युति से बना ये खास राजयोग, 4 राशियों के लिए धनवर्षा
सितारों की चाल बदलने वाली है और इस बार ब्रह्मांड में कुछ बहुत बड़ा होने जा रहा है! ज्योतिष की दुनिया में जब वैभव और धन के देवता शुक्र और ज्ञान के महागुरु बृहस्पति (गुरु) एक साथ हाथ मिलाते हैं, तो जन्म होता है एक बेहद शक्तिशाली और चमत्कारी योग का- 'गजलक्ष्मी राजयोग'। आने वाली 8 जून 2026 से यह धमाकेदार युति कर्क राशि में बनने जा रही है, जो कुछ चुनिंदा राशियों की किस्मत का ताला खोलने के लिए बिल्कुल तैयार है। अगर आपकी राशि नीचे दी गई 4 राशियों में से एक है, तो समझ लीजिए कि आपके जीवन में अचानक धन की बरसात और करियर में एक लंबी छलांग लगने वाली है। आइए जानते हैं कि यह राजयोग किन राशियों की जिंदगी में खुशियों का तड़का लगाने आ रहा है। ALSO READ: साल का सबसे बड़ा महागोचर: 2 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति का कर्क राशि में प्रवेश, जानें सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल मेष राशि: अटके काम होंगे पूरे, चमकेगा करियर मेष राशि वालों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है। अगर आपका पैसा कहीं फंसा हुआ था या पैतृक संपत्ति को लेकर कोई विवाद चल रहा था, तो अब वह सुलझ जाएगा और अचानक धन का आगमन होगा। नौकरी करने वालों के बॉस उनकी तारीफ करते नहीं थकेंगे- प्रमोशन और सैलरी हाइक की पूरी उम्मीद है। वहीं, बिजनेसमैन इस दौरान कोई ऐसी बड़ी डील क्रैक कर सकते हैं जो उनके बिजनेस का रुख बदल देगी। मिथुन राशि: पैसों की तंगी होगी दूर, बढ़ेगा बैंक बैलेंस मिथुन राशि के जातकों के लिए यह राजयोग सीधे उनकी जेब पर असर डालेगा, यानी आर्थिक स्थिति में जबरदस्त उछाल आने वाला है। कमाई के नए रास्ते खुलेंगे और अगर आपने पहले कभी कहीं इन्वेस्ट किया था, तो अब उससे मोटा मुनाफा वसूलने का समय आ गया है। घर में सुख-सुविधाओं की चीजें बढ़ेंगी और परिवार में किसी शुभ या मांगलिक कार्य की शहनाई गूंज सकती है। ALSO READ: शनि, बृहस्पति, राहु और केतु के कारण 5 राशियों के लिए रहेगा राजयोग कर्क राशि: आप ही हैं इस राजयोग के 'असली किंग' चूंकि यह जादुई संयोग कर्क राशि में ही आकार ले रहा है, इसलिए सबसे ज्यादा लाइमलाइट और फायदा आपको ही मिलने वाला है। समाज में आपका दबदबा बढ़ेगा, लोग आपकी बात सुनेंगे और मान-सम्मान में चार चांद लग जाएंगे। बिजनेस करने वालों के हाथ कोई 'जैकपॉट' लग सकता है, जिससे अप्रत्याशित मुनाफा होगा। अगर कोई नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं, तो इससे बेहतर मुहूर्त दूसरा नहीं हो सकता। कन्या राशि: सुख-साधनों की बौछार और मनचाही सफलता कन्या राशि वालों के लिए यह समय ऐश-ओ-आराम और भौतिक सुखों को बढ़ाने वाला रहेगा। शेयर मार्केट, लॉटरी या किसी पुराने निवेश से अचानक आपकी तिजोरी भर सकती है, जिससे आपका बैंक बैलेंस तेजी से बढ़ेगा। स्टूडेंट्स के लिए यह दौर बेहतरीन है; उन्हें कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में सफलता मिलेगी। वहीं, जो युवा लंबे समय से जॉब की तलाश में भटक रहे थे, उन्हें मनचाही नौकरी का ऑफर लेटर मिल सकता है। भाग्य चमकाने का एक सीक्रेट मंत्र: ग्रहों के इस अद्भुत संयोग का सौ फीसदी फायदा उठाने के लिए, इस दौरान मां लक्ष्मी की दिल से आराधना करें। साथ ही, शुक्रवार के दिन सफेद चीजें (जैसे दूध, चीनी या सफेद कपड़े) दान करना न भूलें। ऐसा करने से इस राजयोग का शुभ असर कई गुना बढ़ जाएगा!
राहुल से BJP क्यों डरती है? सुप्रिया श्रीनेत ने गिनाईं 20 बड़ी वजहें
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने राहुल गांधी के समर्थन में भाजपा और आलोचकों पर तीखा हमला बोला। जानिए राहुल गांधी को लेकर कांग्रेस के बड़े दावे
'गवर्नर' को असली 1990 का लुक देने के लिए मेकर्स को करनी पड़ी कड़ी मशक्कत, पढ़ें हर एक डिटेल
मनोज बाजपेयी और अदा शर्मा स्टारर फिल्म 'गवर्नर' इस साल की सबसे मच-अवेटेड फिल्मों में से एक है, जो अपने ट्रेलर लॉन्च के बाद से ही लगातार जबरदस्त सुर्खियां बटोर रही है। भारत के 1990 के आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि पर आधारित यह फिल्म देश के इतिहास के एक बेहद महत्वपूर्ण अध्याय को टटोलती है। इतिहास के इस पन्ने को पर्दे पर इतने बेहतरीन तरीके से उतारने के लिए दर्शकों से ट्रेलर को बेहद शानदार रिस्पॉन्स मिला है। अपनी दमदार कहानी के अलावा, 'गवर्नर' इस समय उस दौर (1990 के दशक) को पूरी तरह प्रामाणिक और असली दिखाने के लिए की गई कड़ी मेहनत को लेकर भी चर्चा में है। प्रोडक्शन से जुड़े एक करीबी सूत्र ने खुलासा किया कि मेकर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती उस दौर को पर्दे पर हूबहू जिंदा करने की थी। चूंकि फिल्म का एक बड़ा हिस्सा असली आउटडोर लोकेशंस पर शूट किया गया था, इसलिए टीम को आज के आधुनिक दौर के माहौल को बदलकर उसे 1990 के दशक के रंग में ढालना पड़ा। सूत्र ने बताया, गवर्नर की मेकिंग के दौरान सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक ऐसा दौर तैयार करना था जो स्क्रीन पर पूरी तरह से असली लगे। चूंकि इसकी शूटिंग बड़े पैमाने पर असली लोकेशंस पर की गई थी, इसलिए आज की आधुनिक दुनिया से जुड़ी हर चीज को फ्रेम से हटाने में बहुत मेहनत लगी। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें चाहे वो आधुनिक कारें हों, साइनबोर्ड हों, बिलबोर्ड, मोबाइल टावर, एलईडी डिस्प्ले हों या फिर भीड़ में खड़े लोगों के हेयरस्टाइल और कपड़े ही क्यों न हों। हर एक फ्रेम ऐसा होना चाहिए था जो दर्शकों को सीधे समय में पीछे ले जाए, और इसे हासिल करने के लिए पूरी टीम की तरफ से बारीक प्लानिंग और बारीकियों पर खास ध्यान देने की जरूरत थी। सच्ची घटनाओं से प्रेरित 'गवर्नर' दर्शकों को भारत के आर्थिक इतिहास के सबसे उथल-पुथल भरे दौर में ले जाती है। 1990 के वित्तीय संकट के बीच सेट यह फिल्म बड़े फैसलों, राजनीतिक दांव-पेचों और संस्थागत टकरावों की एक बेहद रोमांचक कहानी बयां करती है। ट्रेलर में अनिश्चितता और महत्वाकांक्षा से भरी एक गंभीर कहानी की झलक मिलती है, वहीं राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता मनोज बाजपेयी देश को एक नई दिशा देने वाले इस पल के केंद्र में 'गवर्नर' के रूप में एक बेहद दमदार किरदार में नजर आ रहे हैं। दमदार डायलॉग्स से सजी यह शानदार कहानी 'सनशाइन पिक्चर्स' द्वारा पेश की जा रही है। चिन्मय मांडलेकर के निर्देशन में बनी इस फिल्म को विपुल अमृतलाल शाह ने प्रोड्यूस किया है, जबकि आशिन ए. शाह इसके को-प्रोड्यूसर हैं। फिल्म की स्क्रिप्ट सुवेंदु भट्टाचार्य, सौरभ भरत, रवि असरानी और विपुल अमृतलाल शाह ने लिखी है। यह फिल्म 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है।
बॉबी देओल ने मनीषा कोइराला संग इंटीमेट सीन करने से कर दिया था इनकार, सालों बाद बताई वजह
बॉलीवुड के 'लॉर्ड बॉबी' यानी बॉबी देओल इन दिनों अपने करियर के पीक पर है। वेब सीरीज 'आश्रम' की सफलता के बाद से ही बॉबी के पास बैक-टू-बैक फिल्मों की लाइन लगी हुई है। वह जल्द ही अनुराग कश्यप की फिल्म 'बंदर' में नजर आने वाले हैं। हाल ही में बॉबी देओल रजत शर्मा के शो 'आप की अदालत' में पहुंचे। शो में बॉबी देओल ने अपने पुराने दिनों को याद किया। इस दौरान उन्होंने 90 के दशक में अपनी फीमेल को-स्टार्स के साथ अनबन और सेट पर उन्हें परेशान करने की अफवाहों पर से सालों पुराना पर्दा उठा दिया है। ALSO READ: 'धुरंधर' के लिए रणवीर सिंह ने ली मामूली फीस, फिर भी की मोटी कमाई, 'रिस्क मॉडल' ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास ट्विंकल खन्ना से लड़ाई की अफवाह बॉबी देओल ने साल 1995 में फिल्म 'बरसात' से ट्विंकल खन्ना के साथ अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। उस दौर में दोनों के बीच अनबन की कई खबरें आती थीं। इस पर बॉबी ने कहा, हम दोनों उस समय बहुत छोटे और नासमझ थे। दरअसल, मुझे बचपन से ही पेट की समस्या रही है। मैं अक्सर सेट पर अपनी इस समस्या के बारे में बात करता रहता था कि आज मेरा पेट कैसा है या मैं वॉशरुम गया या नहीं। ट्विंकल मेरी इन बातों से बहुत ज्यादा चिढ़ जाती थीं। बॉबी ने आगे बताया कि ट्विंकल खन्ना ने अपने करियर के पहले ही इंटरव्यू में बॉबी की इस आदत का खुलासा मीडिया के सामने कर दिया था, जिसके बाद मीडिया ने इसे दोनों के बीच की बड़ी लड़ाई का रूप दे दिया। मनीषा कोइराला और प्याज का 'मजेदार' बदला साल 1997 की कल्ट थ्रिलर फिल्म 'गुप्त: द हिडन ट्रुथ' में बॉबी देओल, काजोल और मनीषा कोइराला मुख्य भूमिकाओं में थे। इस फिल्म के एक गाने के दौरान बॉबी ने मनीषा कोइराला के साथ एक क्लोज सीन करने से मना कर दिया था। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें इस घटना को याद करते हुए बॉबी ने शो में बताया, ठंड का मौसम था और सेट के पास कोई 'चना जोर गरम' बेच रहा था। मनीषा बड़े चाव से उसमें खूब सारा कच्चा प्याज डलवाकर खा रही थीं। जब शॉट का समय आया, तो उनके मुंह से प्याज की इतनी तेज बदबू आ रही थी कि मैं चाहकर भी रोमांटिक एक्सप्रेशन नहीं दे पा रहा था। बॉबी ने इस बात का बदला लेने के लिए एक मजेदार प्रैंक भी प्लान किया। कॉलेज के एक सीन में मनीषा के भाई का किरदार निभा रहे एक नए एक्टर को बॉबी ने खूब सारी प्याज खिला दी और कहा कि इससे एक्टिंग बेहतर होती है। बॉबी का प्लान मनीषा को परेशान करने का था, लेकिन मनीषा को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा और बॉबी का यह प्रैंक फेल हो गया। 90 के दशक के इन हल्के-फुल्के प्रैंक्स से निकलकर बॉबी देओल अब पूरी तरह से बदल चुके हैं। फिल्म 'एनिमल' में अबरार के मूक और खूंखार विलेन के किरदार के बाद अब वे बॉलीवुड के सबसे भरोसेमंद एक्टर्स में शुमार हैं। वह जल्द ही अनुराग कश्यप के निर्देशन और सुदीप शर्मा की लिखी फिल्म 'बंदर' में नजर आने वाले हैं।
शुक्र तारे का नक्षत्र परिवर्तन, इन 5 राशियों पर होगा सकारात्मक असर
Venus Transit: शुक्र तारा का नक्षत्र परिवर्तन ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। शुक्र ग्रह प्रेम, वैवाहिक सुख, धन, ऐश्वर्य, कला, सौंदर्य, विलासिता और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक ग्रह है। जब शुक्र एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ता है। इस बार शुक्र तारे के नक्षत्र परिवर्तन से विशेष रूप से मेष, वृषभ, सिंह, तुला और मीन राशि के जातकों को सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना बन रही है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह परिवर्तन करियर, व्यापार, प्रेम संबंध, वैवाहिक जीवन, आर्थिक स्थिति तथा सामाजिक प्रतिष्ठा में शुभ अवसर प्रदान कर सकता है। शुक्र ग्रह का यह नक्षत्र परिवर्तन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आकर्षण शक्ति, धन लाभ, प्रेम संबंधों में मधुरता तथा भौतिक सुखों में वृद्धि का संकेत देता है। इसलिए मेष, वृषभ, सिंह, तुला और मीन राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी और शुभ माना जा रहा है। आइए जानते हैं उन 5 भाग्यशाली राशियों के बारे में जिन्हें इस गोचर से जबरदस्त लाभ होने वाला है: 1. मेष राशि (Aries) मेष राशि वाले जातकों के लिए यह नक्षत्र परिवर्तन बेहद शुभ रहने वाला है। आर्थिक लाभ: लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिल सकता है। आय के नए स्रोत खुलेंगे। करियर: नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर सराहना मिलेगी और पदोन्नति के योग बनेंगे। पारिवारिक जीवन: जीवनसाथी के साथ रिश्ते मजबूत होंगे और घर में सुख-शांति का माहौल रहेगा। 2. वृषभ राशि (Taurus) चूंकि शुक्र आपकी ही राशि के स्वामी हैं, इसलिए इस परिवर्तन का सबसे अधिक और सकारात्मक प्रभाव आप पर देखने को मिलेगा। व्यक्तित्व में निखार : आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा और आकर्षण में वृद्धि होगी। लोग आपकी बातों से प्रभावित होंगे। बिजनेस: व्यापारियों के लिए यह समय कोई नई डील साइन करने के लिए उत्तम है। बड़ा मुनाफा होने की उम्मीद है। स्वास्थ्य: सेहत में सुधार होगा और आप खुद को मानसिक रूप से काफी ऊर्जावान महसूस करेंगे। 3. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि के जातकों के लिए शुक्र का यह गोचर भाग्य के द्वार खोलने वाला साबित हो सकता है। भाग्य का साथ: आप जिस भी काम में हाथ डालेंगे, उसमें सफलता मिलने की संभावना अधिक रहेगी। यात्राएं: बिजनेस या नौकरी के सिलसिले में की गई यात्राएं लाभदायक सिद्ध होंगी। सुख-साधन: भौतिक सुख-सुविधाओं- जैसे गाड़ी, मकान या इलेक्ट्रॉनिक्स पर खर्च कर सकते हैं, जिससे घर में खुशियां आएंगी। 4. तुला राशि (Libra) तुला राशि के स्वामी भी शुक्र देव ही हैं, इसलिए यह नक्षत्र परिवर्तन आपके लिए भी वरदान से कम नहीं है। प्रेम और वैवाहिक जीवन: यदि आप सिंगल हैं, तो आपके जीवन में किसी खास व्यक्ति की एंट्री हो सकती है। विवाहित जातकों के बीच प्रेम और बढ़ेगा। करियर में बदलाव: कला, मीडिया, फैशन या डिजाइनिंग से जुड़े लोगों को इस अवधि में कोई बड़ी उपलब्धि मिल सकती है। निवेश: शेयर मार्केट या प्रॉपर्टी में किया गया पुराना निवेश अब अच्छा रिटर्न दे सकता है। 5. मीन राशि (Pisces) मीन राशि के जातकों के लिए शुक्र का यह परिवर्तन आर्थिक और मानसिक सुकून लेकर आ रहा है। धन की आवक: अचानक से धन लाभ होने के योग बन रहे हैं। बैंक बैलेंस में वृद्धि होगी। कर्ज से मुक्ति: यदि आप पिछले कुछ समय से कर्ज से परेशान थे, तो उससे राहत मिलने के रास्ते नजर आएंगे। मानसिक शांति: पिछले कुछ समय से चल रहा तनाव समाप्त होगा और आप मानसिक रूप से शांत महसूस करेंगे। विशेष टिप: शुक्र देव की कृपा को और अधिक बढ़ाने के लिए शुक्रवार के दिन सफेद रंग के कपड़े पहनें, छोटी कन्याओं को खीर खिलाएं या मिश्री का दान करें। इससे शुक्र जनित शुभ फलों में और वृद्धि होगी। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
डॉन 3 विवाद: FWICE के बैन के खिलाफ कोर्ट पहुंचे रणवीर सिंह, भेजा लीगल नोटिस
बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज (FWICE) के बीच जारी टकराव ने अब एक बेहद गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया है। फरहान अख्तर की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'डॉन 3' से रणवीर सिंह के अचानक बाहर होने के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब कोर्ट में सुलझाया जाएगा। रणवीर सिंह ने फिल्म वर्कर्स की शीर्ष संस्था FWICE को एक कड़ा कानूनी नोटिस भेजा है, जिसने पूरी इंडस्ट्री में हलचल पैदा कर दी है। रणवीर सिंह की लीगल टीम ने अंदरूनी तौर पर बड़ा दांव खेला है। अभिनेता द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस में FWICE के अधिकार क्षेत्र पर ही सीधे सवाल उठाए गए हैं। ALSO READ: हैसियत बढ़ती है तो दुश्मन भी बनते हैं, रणवीर सिंह के सपोर्ट में आगे आईं कंगना रनौट रणवीर के वकीलों का तर्क है कि एक अभिनेता और प्रोडक्शन हाउस के बीच का विवाद पूरी तरह से एक 'निजी संविदात्मक मामला' है, और इसमें किसी भी ट्रेड यूनियन या फेडरेशन को टांग अड़ाने या किसी कलाकार की आजीविका पर अघोषित प्रतिबंध लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि इस विवाद में अब बॉलीवुड के अन्य बड़े चेहरे भी कूद पड़े हैं। जहां एक तरफ दिग्गज प्रोड्यूसर टी.पी. अग्रवाल ने बॉम्बे सिविल कोर्ट में एक याचिका दायर कर फेडरेशन के इस अलोकतांत्रिक रवैये को चुनौती दी है, वहीं सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) भी अभिनेता के समर्थन में खड़ी दिखाई दे रही है। फिलहाल, गेंद अब पूरी तरह से अदालत के पाले में है। रणवीर सिंह के इस कानूनी नोटिस के बाद FWICE को कोर्ट में लिखित जवाब दाखिल करना होगा। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या फिल्म फेडरेशन अपने रुख पर अड़ा रहता है या फिर कानून के आगे उसे अपनी इस 'नॉन-कोऑपरेशन' गाइडलाइन को वापस लेना पड़ता है। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें क्या है पूरा विवाद? इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनने जा रही फिल्म 'डॉन 3' से रणवीर सिंह ने शूटिंग शुरू होने से ऐन पहले अपने पैर पीछे खींच लिए। फिल्म के निर्देशक और निर्माता फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी ने इस संबंध में फिल्म फेडरेशन से शिकायत दर्ज कराई। मेकर्स का आरोप है कि फिल्म के प्री-प्रोडक्शन, लोकेशन स्काउटिंग और लॉजिस्टिक्स पर पहले ही लगभग 45 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे। ऐसे में एडवांस स्टेज पर आकर अभिनेता का प्रोजेक्ट को छोड़ना मेकर्स को भारी वित्तीय नुकसान के संकट में डाल गया। फरहान अख्तर की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए FWICE ने अपने सभी संबद्ध यूनियनों और सदस्यों को रणवीर सिंह के साथ काम न करने का एक 'असहयोग निर्देश' जारी कर दिया। संगठन के अध्यक्ष अशोक पंडित ने मीडिया को बताया कि रणवीर सिंह को अपनी बात रखने के लिए कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन उनकी तरफ से कोई संतोषजनक जवाब न मिलने के कारण फेडरेशन को यह सख्त कदम उठाना पड़ा। हालांकि, बाद में विवाद बढ़ता देख संगठन ने स्पष्ट किया कि यह कोई 'आधिकारिक बैन' नहीं बल्कि एक असहयोग आंदोलन है।
हैसियत बढ़ती है तो दुश्मन भी बनते हैं, रणवीर सिंह के सपोर्ट में आगे आईं कंगना रनौट
बॉलीवुड गलियारों में इन दिनों सुपरस्टार रणवीर सिंह और निर्देशक-निर्माता फरहान अख्तर के बीच का 'डॉन 3' विवाद गर्माया हुआ है। 'डॉन 3' से रणवीर सिंह के अचानक पीछे हटने के बाद फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने अभिनेता के खिलाफ एक 'नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव' यानी असहयोग का नोटिस जारी किया है। यह विवाद अब सिर्फ गॉसिप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें कानूनी मोड़ और फिल्म इंडस्ट्री के दोफाड़ होने की स्थिति आ गई है। इस विवाद के बीच कई सेलेब्स रणवीर सिंह के सपोर्ट में आगे आए हैं। अब बॉलीवुड की 'क्वीन' कंगना रनौट ने भी रणवीर सिंह का समर्थन किया है। कंगना रनौट हमेशा अपने बेबाक बयानों के लिए जानी जाती हैं। अपनी आगामी फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' के ट्रेलर लॉन्च के दौरान जब उनसे रणवीर सिंह के इस बैन पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'आप मुझसे पूछ रहे हैं? मुझे तो सबने बैन कर रखा है।' बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें रणवीर का हौसला बढ़ाते हुए कंगना ने आगे कहा, जब आपकी हैसियत बढ़ती है, तो दुश्मन भी बनते हैं। ऐसा हो ही नहीं सकता कि आपका कद बढ़े और आपके दुश्मन न बनें। रणवीर सिंह को तो यह सोचना चाहिए कि उनकी क्या हैसियत है जो उनके इतने दुश्मन हैं। उन्होंने कहा, जीवन में जब आप आगे बढ़ते हैं, तो कई तरह की बाधाएं आती हैं। रास्ता हमेशा आसान नहीं होता। मेरे साथ भी इतना सब कुछ हुआ है और देखिए, आज मैं अच्छा कर रही हूँ। मेरी गाड़ी चल रही है, कोई फर्क नहीं पड़ता। सब कुछ अंत में ठीक हो जाएगा। इस विवाद में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन (IMPPA) के पूर्व अध्यक्ष और दिग्गज निर्माता टी.पी. अग्रवाल ने इस बैन के खिलाफ मुंबई की डिंडोशी सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने FWICE और IMPPA दोनों को कानूनी नोटिस भिजवाया है। अग्रवाल का तर्क है कि किसी भी ट्रेड यूनियन या फेडरेशन के पास किसी भी कलाकार या नागरिक की आजीविका और रचनात्मक स्वतंत्रता को रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। सिविल या कॉन्ट्रैक्टर विवादों का निपटारा अदालतों में होना चाहिए, न कि इस तरह के एकतरफा प्रतिबंधों के जरिए। क्या है विवाद की जड़ यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब रणवीर सिंह ने एक्सेल एंटरटेनमेंट की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'डॉन 3' से अपने हाथ पीछे खींच लिए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी ने इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन और FWICE से शिकायत की कि रणवीर के आखिरी वक्त पर फिल्म छोड़ने की वजह से उनके प्री-प्रोडक्शन के लगभग 45 करोड़ रुपए बर्बाद हो गए। FWICE का दावा है कि उन्होंने रणवीर सिंह को बातचीत के लिए तीन बार नोटिस भेजे, लेकिन अभिनेता की तरफ से ईमेल पर जवाब आया कि यह मामला पूरी तरह कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा है और FWICE इस पर फैसला सुनाने का सही मंच या अधिकार क्षेत्र नहीं है। रणवीर के इस रुख से नाराज होकर फेडरेशन ने अपने 4 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं को रणवीर के साथ काम न करने का निर्देश जारी कर दिया।
किडनी प्रत्यारोपण के लिए भारत में क्यों है लंबा इंतजार?
भारत में क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। अंगदान (Organ Donation) की भारी कमी और डायलिसिस के भारी-भरकम खर्च के कारण देश में अवैध किडनी रैकेट की जड़ें फैल रही हैं। जानिए इसके लक्षण, इलाज का खर्च और जमीनी हकीकत।
अजमेर में पश्चिम बंगाल की युवती से दरगाह में सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज, आरोपियों की तलाश जारी
अजमेर। दरगाह थाना क्षेत्र में पश्चिम बंगाल की एक 39 वर्षीय महिला के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पश्चिम बंगाल से प्राप्त जीरो नंबर एफआईआर के आधार पर दरगाह थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों […] The post अजमेर में पश्चिम बंगाल की युवती से दरगाह में सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज, आरोपियों की तलाश जारी appeared first on Sabguru News .
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (03 जून, 2026)
1. मेष (Aries) Today 03 June 2026 horoscope in Hindi : करियर: कार्यक्षेत्र में आपकी ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी। लव: जीवनसाथी के साथ सामंजस्य बना रहेगा। धन: आकस्मिक धन लाभ हो सकता है। स्वास्थ्य: शारीरिक थकान महसूस हो सकती है। उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें। ALSO READ: Vibhuvan Chaturthi 2026: विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत कब है, जानें महत्व, पूजा विधि और मंत्र 2. वृषभ (Taurus) करियर: व्यापार में कुछ उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। लव: प्रेम संबंधों में मधुरता रहेगी। धन: बजट बनाकर चलना बेहतर होगा। स्वास्थ्य: पेट संबंधी समस्या हो सकती है। उपाय: सफेद वस्त्र का दान करें। 3. मिथुन (Gemini) करियर: ऑफिस के प्रोजेक्ट में कलीग्स का सहयोग मिलेगा। लव: लव पार्टनर से वाद-विवाद हो सकता है। धन: रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। स्वास्थ्य: मानसिक तनाव कम होगा। उपाय: गाय को हरा चारा खिलाएं। 4. कर्क (Cancer) करियर: कारोबार में शुभ समाचार मिल सकता है। लव: अविवाहितों के लिए विवाह का प्रस्ताव आ सकता है। धन: भूमि-भवन से जुड़े मामलों में लाभ की स्थिति है। स्वास्थ्य: बदलते मौसम के कारण सर्दी-जुकाम की संभावना है। उपाय: शिवलिंग पर जल अर्पित करें। 5. सिंह (Leo) करियर: नौकरी में लिये गये निर्णय आपको बड़ी सफलता दिलाएंगे। लव: पार्टनर आपकी भावनाओं का सम्मान करेगा। धन: आय के नए स्रोत बनेंगे, आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। स्वास्थ्य: दिनभर ऊर्जावान महसूस करेंगे। उपाय: उगते सूर्य को अर्घ्य दें। 6. कन्या (Virgo) करियर: कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर बांटें। लव: पुरानी बातों को भूलकर नई शुरुआत करने का समय है। धन: आज सोच-समझकर निवेश करें। स्वास्थ्य: कमर दर्द या जोड़ों के दर्द की समस्या हो सकती है। उपाय: गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएं। ALSO READ: Weekly Horoscope 1–7 June 2026: 01 से 07 जून तक कैसा रहेगा आपका सप्ताह? शॉर्ट में पढ़ें साप्ताहिक राशिफल 7. तुला (Libra) करियर: साझेदारी में किया गया काम फलदायी होगा। लव: रोमांटिक डिनर पर जा सकते हैं। धन: सुख-सुविधाओं पर धन खर्च हो सकता है। स्वास्थ्य: आज ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं। उपाय: छोटी कन्याओं को कुछ मीठा खिलाएं। 8. वृश्चिक (Scorpio) करियर: आपकी मेहनत का श्रेय कोई और ले सकता है। लव: प्रेम जीवन में पारदर्शिता रखें। धन: उधार देने से बचें, पैसा फंस सकता है। स्वास्थ्य: मानसिक शांति के लिए संगीत का सहारा लें। उपाय: सुंदरकांड का पाठ करें। 9. धनु (Sagittarius) करियर: आज नौकरी में उच्च अधिकारियों से प्रशंसा मिलेगी। लव: रिश्तों में नयापन आएगा। धन: पुराने निवेशों से अच्छा रिटर्न मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य: खान-पान में लापरवाही न बरतें। उपाय: माथे पर हल्दी का तिलक लगाएं। 10. मकर (Capricorn) करियर: करियर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लव: घर के बड़ों की सहमति से प्रेम संबंध विवाह में बदल सकते हैं। धन: आज अनावश्यक खर्च पर रोक लगाएं। स्वास्थ्य: नींद की कमी महसूस हो सकती है। उपाय: शनिवार के मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं। 11. कुंभ (Aquarius) करियर: नई योजनाओं पर टीम वर्क में सफलता मिलेगी। लव: पार्टनर के साथ यात्रा का योग है। धन: शेयर बाजार में लाभ होने के संकेत हैं। स्वास्थ्य: शारीरिक थकान हो सकती है। उपाय: गरीब व्यक्ति को भोजन कराएं। 12. मीन (Pisces) करियर: काम में मन नहीं लगेगा, मन भटक सकता है। लव: पार्टनर की सेहत को लेकर चिंता हो सकती है। धन: अचानक खर्च बढ़ सकते हैं। स्वास्थ्य: पुरानी किसी बीमारी से राहत मिल सकती है। उपाय: पक्षियों को दाना डालें। ALSO READ: गुरु का कर्क राशि में गोचर: किन राशियों के लिए रहेगा शुभ और अशुभ
बदलती सर्दियां, सिकुड़ते दाने: भारत के गेहूं पर बढ़ता जलवायु संकट और खाद्य सुरक्षा की चुनौती
Climate Trends की रिपोर्ट में खुलासा—बढ़ती गर्मी, गर्म होती रातें और बदलती बारिश भारत के गेहूं उत्पादन व खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन रही हैं
देवी भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ कथा का भव्य समापन, महाआरती में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
पुष्कर। निकटवर्ती रेवत डूंगरिया खुर्द स्थित जोगणियाधाम में आयोजित देवी भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ कथा का सोमवार को श्रद्धा और भक्ति के माहौल में भव्य समापन हुआ। आठ दिनों तक चली कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया। कथा के समापन अवसर पर कथा वाचक पंडित दिलीप शास्त्री […] The post देवी भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ कथा का भव्य समापन, महाआरती में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ appeared first on Sabguru News .
बंगाल में आजादी के बाद से ही एक ट्रेंड है। जो पार्टी सत्ता से एकबार बेदखल हुई, वो कभी लौट नहीं सकी। सिर्फ कांग्रेस एक अपवाद है। 2026 का बंगाल चुनाव हारने के बाद TMC भी सबसे मुश्किल दौर में है। क्या ममता बनर्जी TMC को संकट से निकालकर वापसी कर पाएंगी या उनके हाथ से पार्टी फिसल जाएगी; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: ममता की TMC पर कितना बड़ा संकट है? जवाबः TMC पर आए संकट को 4 संकेतों से समझिए… 1. TMC के सांसद, नेता और सभासदों तक के इस्तीफे 2. दावा- भाजपा के संपर्क में TMC के 75% सांसद-विधायक 3. 80 में सिर्फ 20 विधायक ही ममता की मीटिंग में पहुंचे 4. TMC के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार हमले सवाल-2: पार्टी को बचाने के लिए ममता बनर्जी क्या कर रहीं? जवाबः ममता बनर्जी दो तरह की स्ट्रैटेजी पर काम कर रही हैं, पहली- मजबूत और जुझारू दिखो, दूसरी- पॉलिटिकली रिलेवेंट बने रहो। चुनाव में हार के बाद पहली बार किसी सीएम ने इस्तीफा देने से मना कर दिया। जानकार बताते हैं कि ममता ने ‘मैं नहीं झुकूंगी’ वाला संदेश देने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के लिए ऐसा किया। चुनाव बाद TMC कार्यकर्ताओं के साथ हो रही हिंसा और 30 मई को अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को भी ममता ने आक्रामक तरीके से उठाया। TMC इन घटनाओं के विरोध में पूरे राज्य में पॉलिटिकल कैंपेन खड़ा करने की कोशिश कर रही है। ममता ने 2 जून को कोलकाता के धर्मतला बस स्टैंड के पास प्रोटेस्ट किया। ममता ने एक मेगाफोन से भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, ‘हमें मंच बनाने या माइक्रोफोन इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी गई। लेकिन मैं लड़ूंगी या मर जाऊंगी।’ ममता ने कहा, ‘बंगाल में पुलिस वाले TMC नेताओं को धमका रहे हैं। इस मुश्किल समय में मैं उन्हें अकेला नहीं छोड़ूंगी।’ ममता कई मुद्दों पर INDIA ब्लॉक से अलग लीक पर चलती दिखती थीं। हालांकि चुनाव हारने के बाद उनका नया रुख दिखा। वह नेशनल लेवल पर विपक्ष की राजनीति में TMC की हिस्सेदारी और प्रभाव को कमजोर नहीं होने देना चाहतीं। चुनाव हारते ही 5 मई को ममता ने कहा, ‘मेरा टारगेट बहुत क्लियर है। मैं INDIA टीम को मजबूत करूंगी... सोनिया जी, राहुल, अरविंद केजरीवाल, हेमंत सोरेन…सभी ने मुझे फोन किया। सभी INDIA गठबंधन के सहयोगी मेरे साथ हैं। आने वाले दिनों में हमारी एकजुटता और मजबूत होगी।’ सवाल-3: ममता की कोशिशों के बावजूद क्या वाकई TMC बिखर सकती है? जवाबः पश्चिम बंगाल को करीब से समझने वाले एक्सपर्ट्स के बीच राय बंटी हुई है। पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक प्रभाकर मणि तिवारी का मानना है कि TMC बिखर जाएगी। वो कहते हैं, ‘ममता 2011 में सत्ता में आईं, तो धीरे-धीरे उन्होंने भी CPM को खत्म कर दिया था। बीजेपी भी बंगाल में विपक्ष को खत्म करना चाहती है। बीजेपी की कोशिश रहेगी कि TMC के आधे से ज्यादा विधायक अलग हो जाएं, जिससे उपचुनाव भी न कराना पड़े। हालांकि अगले 2-3 महीने तक TMC में किसी बड़ी टूट की आशंका नहीं है।’ वहीं, वरिष्ठ पत्रकार शिखा मुखर्जी मानती हैं कि TMC में कोई बड़ा विभाजन होता नहीं दिख रहा। वो कहती हैं, ‘इसका कोई साफ संकेत नहीं है कि बीजेपी TMC नेताओं को बीजेपी में शामिल होने के लिए उकसा रही है।’ बंगाल बीजेपी के बड़े नेताओं के बयानों से भी लगता है कि बीजेपी बागियों को खुला न्योता नहीं देना चाहती… हालांकि जीत के बाद 5 मई को सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता का राजनीतिक निर्वासन शुरू हो गया है। बंगाल में TMC के कई सांसद और कार्यकर्ता उनके साथ जुड़ेंगे। शिखा मुखर्जी कहती हैं कि बीजेपी फिर भी TMC को कमजोर करने के लिए कुछ विधायकों को अपने पाले में जरूर ले सकती है। सवाल-4: क्या बंगाल की सत्ता में टीएमसी वापसी कर पाएगी? जवाबः 1977 तक बंगाल में कांग्रेस 25 साल शासन में रही। हालांकि, बीच में 1967 से 1972 तक यूनाइटेड फ्रंट भी सत्ता में आई। फिर 34 साल लेफ्ट फ्रंट की सरकार चली। 2011 में सीएम बनीं ममता 2026 तक काबिज रहीं। यानी बंगाल में जो आता है, सालों तक छा जाता है। अब बीजेपी सत्ता में है। 4 वजहों से TMC की भी सत्ता में वापसी मुश्किल लगती है… 1. कैडर बेस नई पार्टी में शिफ्ट हो जाता है 2. दिल्ली बनाम बंगाल का नैरेटिव खत्म 3. ममता की जगह सुवेंदु का ‘पर्सनैलिटी कल्ट’ 4. वोटबैंक की सटीक चुनावी इंजीनियरिंग ***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------पश्चिम बंगाल से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…बंगाल में गाय की कुर्बानी पर रोक, हिंदू क्यों नाराज:बोले- दीदी से परेशान होकर सरकार बदली, BJP ने 2500 करोड़ का धंधा बिगाड़ा पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में रहने वाले सुखदेव मंडल खेती-किसानी करते हैं। इसी से परिवार का खर्च चलता है। इस साल बेटी की शादी करनी है, इसलिए सालभर पहले बैंक से लोन लेकर मवेशी खरीदे। उम्मीद थी कि बकरीद पर बिक जाएंगे और शादी-ब्याह का खर्च निकल जाएगा, लेकिन बंगाल सरकार के एक फैसले ने उनकी उम्मीद तोड़ दी। पढ़ें पूरी खबर…
मिथुन संक्रांति 2026: कब है, क्या है इसका धार्मिक महत्व और पुण्य फल?
वर्ष में 12 संक्रांतियां होती है। जिसमें मेष, मकर, कर्क, धनु, मिथुन और मीन संक्रांति संक्रांति का ज्यादा महत्व है। 15 जून 2026 सोमवार को अधिकमास के समाप्ति के दिन मिथुन संक्रांति रहेगी। इस दिन सूर्यदेव मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का यह गोचर दोपहर करीब 12:58 बजे होगा। इस संक्रांति का महत्व ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में अधिक है। मिथुन संक्रांति का महत्व 1. मौसम में बदलाव का प्रतीक यह संक्रांति सीधे तौर पर प्रकृति से जुड़ी है। मिथुन संक्रांति के साथ ही उत्तर भारत और मध्य भारत में भीषण गर्मी का दौर खत्म होने लगता है और आधिकारिक रूप से वर्षा ऋतु (Monsoon) की शुरुआत मानी जाती है। किसानों के लिए यह दिन बेहद खास होता है क्योंकि यहां से खेती-किसानी के काम में तेजी आती है। 2. ओडिशा का प्रसिद्ध 'राजा पर्ब' (Raja Parba) ओडिशा राज्य में मिथुन संक्रांति को 'राजा पर्ब' के रूप में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार तीन से चार दिनों तक चलता है। मान्यता: ऐसी लोक मान्यता है कि जैसे महिलाओं को मासिक धर्म (Periods) होता है, वैसे ही इन तीन दिनों में धरती माता (भूदेवी) रजस्वला होती हैं, यानी वे भविष्य की फसलों के लिए खुद को तैयार करती हैं। परंपरा: इन दिनों में धरती पर हल चलाना, खुदाई करना या कोई भी चोट पहुंचाना पूरी तरह मना होता है। महिलाएं और लड़कियां नए कपड़े पहनती हैं, झूला झूलती हैं और इस त्योहार का आनंद लेती हैं। चौथे दिन धरती माता को स्नान कराकर उनकी विशेष पूजा की जाती है। 3. पूर्वोत्तर भारत में 'अम्बुबाची मेला' (Ambubachi Mela) भारत के पूर्वी और पूर्वोत्तर प्रांतों में मिथुन संक्रांति को माता पृथ्वी के वार्षिक मासिक धर्म चरण के रूप में मनाया जाता है, जिसे राजा पारबा या अंबुबाची मेला के नाम से जानते हैं। असम के गुवाहाटी में स्थित प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर में इस संक्रांति के दौरान 'अम्बुबाची मेला' लगता है। मान्यता है कि इस दौरान देवी कामाख्या रजस्वला होती हैं। इसलिए संक्रांति से लेकर अगले तीन दिनों तक मंदिर के कपाट बंद रहते हैं और चौथे दिन विशेष पूजा के बाद भक्तों के लिए खोले जाते हैं। 4. दान-पुण्य और पितृ तर्पण अन्य संक्रांतियों की तरह मिथुन संक्रांति पर भी पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष महत्व है। इस दिन गरीब लोगों को अन्न, वस्त्र, पानी का घड़ा, छाता और पंखा दान करने से पुण्य मिलता है। साथ ही, इस दिन पूर्वजों (पितरों) के नाम तर्पण करने से घर में सुख-शांति आती है। ज्योतिषीय दृष्टि से महत्व ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा, पिता, मान-सम्मान और करियर का कारक माना गया है। 15 जून को मिथुन राशि में सूर्य के आते ही इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा। विशेष रूप से मेष, मिथुन, सिंह और कन्या राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और आर्थिक दृष्टिकोण से काफी लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
बॉलीवुड की सबसे चर्चित सस्पेंस-थ्रिलर फ्रेंचाइजी में शामिल ‘दृश्यम’ के प्रशंसकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। अजय देवगन की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘दृश्यम 3’ की शूटिंग आधिकारिक तौर पर पूरी हो चुकी है। लंबे समय से इस फिल्म का इंतजार कर रहे दर्शकों के लिए यह अपडेट किसी खुशखबरी से कम नहीं है। अब फिल्म पोस्ट-प्रोडक्शन के चरण में प्रवेश कर चुकी है और इसकी रिलीज की उल्टी गिनती भी शुरू हो गई है। निर्देशक अभिषेक पाठक ने दी बड़ी जानकारी फिल्म के निर्देशक अभिषेक पाठक ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए शूटिंग पूरी होने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि पिछले कई महीनों से पूरी टीम इसी फिल्म की दुनिया में जी रही थी। दिन-रात मेहनत, चुनौतियों का सामना और लगातार कहानी को बेहतर बनाने की कोशिशों के बाद आखिरकार फिल्म का शूट पूरा हो गया है। अभिषेक पाठक ने अपनी पोस्ट में कलाकारों और तकनीकी टीम का विशेष रूप से आभार जताया। उन्होंने कहा कि फिल्म से जुड़े हर व्यक्ति ने पूरे समर्पण और धैर्य के साथ काम किया और यही मेहनत अब बड़े पर्दे पर दिखाई देगी। ALSO READ: काला हिरण फिल्म पर सलमान खान का बड़ा एक्शन, रिलीज से पहले भेजा कानूनी नोटिस; 24 घंटे का अल्टीमेटम हर फ्रेम में टीम की मेहनत निर्देशक ने कहा कि इस फिल्म का हर दृश्य उन लोगों की मेहनत, जुनून और समर्पण की कहानी कहता है जिन्होंने इसे बनाने में योगदान दिया। उनके मुताबिक शूटिंग के दौरान अच्छे और मुश्किल दोनों तरह के दिन आए, लेकिन पूरी टीम ने कभी हार नहीं मानी। उनकी पोस्ट से साफ झलकता है कि ‘दृश्यम 3’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि पूरी टीम के लिए एक भावनात्मक सफर भी रही है। ALSO READ: गोल्ड डिगर नहीं, डायमंड थीं सुष्मिता सेन: 4 साल बाद ललित मोदी का बड़ा खुलासा, रिश्ते पर पहली बार खुलकर बोले फिर लौटेगा सस्पेंस का बादशाह विजय सालगांवकर ‘दृश्यम’ सीरीज ने भारतीय सिनेमा में सस्पेंस और मनोवैज्ञानिक थ्रिलर की एक अलग पहचान बनाई है। अजय देवगन द्वारा निभाया गया विजय सालगांवकर का किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहा है। पहली और दूसरी फिल्म में जिस तरह कहानी ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा, उसी वजह से तीसरे भाग को लेकर उत्सुकता अपने चरम पर है। फिल्म में अजय देवगन के साथ तब्बू और श्रिया सरन भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगी। इन कलाकारों की मौजूदगी ने फिल्म को लेकर दर्शकों की उम्मीदें और बढ़ा दी हैं। ALSO READ: थाई-हाई स्लिट आउटफिट में शिल्पा शेट्टी का कातिलाना अंदाज, बोल्ड अदाओं से इंटरनेट पर मचाया तहलका गांधी जयंती पर होगा बड़ा मुकाबला ‘दृश्यम 3’ का निर्माण पैनोरमा स्टूडियोज और वायकॉम18 द्वारा किया जा रहा है। फिल्म 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी। त्योहारी माहौल और लंबे वीकेंड का फायदा फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर मिल सकता है। ऐसे में इंडस्ट्री की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ‘दृश्यम 3’ अपने पिछले दोनों भागों की सफलता को पीछे छोड़ पाएगी। फिलहाल इतना तय है कि विजय सालगांवकर की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। शूटिंग पूरी होने की खबर ने फैंस के उत्साह को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है और अब सभी को ट्रेलर और फिल्म की पहली झलक का इंतजार है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर लें धरती को हरा-भरा बनाने का सच्चा संकल्प
World Environment Day 2026: हर साल 5 जून को मनाया जाने वाला 'विश्व पर्यावरण दिवस' हमें याद दिलाता है कि यह धरती हमारा इकलौता घर है और इसकी हरियाली को बचाना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है। साल 2026 में, जब कंक्रीट के जंगल लगातार बढ़ते जा रहे हैं और मौसम का मिजाज बदल रहा है, तब सिर्फ एक दिन का उत्सव मनाना काफी नहीं है। यदि पर्यावरण संतुलित रहेगा तो पृथ्वी पर जीवन सुरक्षित रहेगा। इस बार हमें अपनी सोच और आदतों को बदलने का एक सच्चा 'संकल्प' लेना होगा। ALSO READ: विश्व पर्यावरण दिवस 2026: 'कमिटमेंट नहीं, अब एक्शन का समय', यही है धरती बचाने का सबसे बड़ा संदेश आइए जानते हैं कि इस पर्यावरण दिवस पर हम अपनी धरती को फिर से सुंदर और हरा-भरा बनाने के लिए क्या संकल्प ले सकते हैं: 1. 'एक पौधा, एक संकल्प' (हर खास मौके पर वृक्षारोपण) हम अक्सर पर्यावरण दिवस पर पौधे तो लगाते हैं, लेकिन बाद में उनकी देखभाल करना भूल जाते हैं। इस साल यह संकल्प लें: अपने या परिवार के सदस्यों के जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ या किसी भी शुभ अवसर पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं। पौधे को सिर्फ लगाएं नहीं, बल्कि अगले 3 वर्षों तक उसकी एक बच्चे की तरह देखभाल करने की जिम्मेदारी भी लें, ताकि वह एक मजबूत पेड़ बन सके। 2. 'शहरी हरियाली' (बालकनी और छतों को बनाएं हरा-भरा) अगर आप शहरों में रहते हैं और आपके पास जमीन की कमी है, तो भी आप धरती को हरा-भरा बनाने में योगदान दे सकते हैं: अपनी बालकनी, खिड़की या छत पर छोटे-छोटे गमले रखें। हवा को शुद्ध करने वाले (Air-Purifying) पौधे जैसे—तुलसी, मनी प्लांट, स्नेक प्लांट, एलोवेरा और स्पाइडर प्लांट लगाएं। यह आपके घर के अंदर की हवा को साफ रखेंगे। 3. 'जीरो वेस्ट' और प्लास्टिक मुक्त जीवन का संकल्प हरियाली तभी बढ़ेगी जब हम धरती को कचरे और प्लास्टिक के बोझ से मुक्त करेंगे: कच्चा कचरा, सूखी खाद: अपने रसोईघर के गीले कचरे (सब्जियों और फलों के छिलकों) को फेंकने के बजाय उससे घर पर ही जैविक खाद तैयार करें। इसी खाद को अपने पौधों में डालें। प्लास्टिक को ना: बाजार जाते समय कपड़े का थैला साथ ले जाने का संकल्प लें। प्लास्टिक की थैलियों और सिंगल-यूज प्लास्टिक का पूरी तरह बहिष्कार करें। ALSO READ: World Environment Day Essay: विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष निबंध 4. पानी की बचत का संकल्प (जल है तो जीवन है) बिना पानी के किसी भी हरियाली की कल्पना नहीं की जा सकती। गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए यह संकल्प लें: घर में वॉटर प्यूरीफायर (RO) से निकलने वाले बेकार पानी को बाल्टी में इकट्ठा करेंगे और उसका उपयोग पौधों में डालने या पोछा लगाने में करेंगे। बारिश के पानी को बचाने (Rainwater Harvesting) के छोटे-छोटे प्रयास अपने घरों में शुरू करेंगे। 5. अपनी 'कार्बन फुटप्रिंट' को कम करने का संकल्प प्रदूषण को कम करके ही हम पौधों को एक स्वस्थ वातावरण दे सकते हैं: कम दूरी के लिए पैदल चलने या साइकिल का उपयोग करने का संकल्प लें। सार्वजनिक वाहनों (बस या मेट्रो) या कारपूलिंग का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें। संकल्प पत्र: आज ही से शुरुआत करें 'आज इस विश्व पर्यावरण दिवस पर, मैं यह संकल्प लेता/लेती हूं कि मैं प्रकृति के संसाधनों का सम्मान करूंगा/करूंगी। मैं अपनी ज़रूरतों को सीमित रखूंगा/रखूंगी और अपनी धरती मां को फिर से हरा-भरा और स्वस्थ बनाने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा/करूंगी।' याद रखें, बदलाव की शुरुआत हमेशा एक छोटे से कदम से होती है। आपका लगाया हुआ एक पौधा और आपकी एक सुधरी हुई आदत आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर और सांस लेने योग्य भविष्य दे सकती है। इस 5 जून को आइए केवल बातें नहीं, बल्कि काम करके दिखाएं! अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: पृथ्वी और पर्यावरण पर कविता: काश प्रकृति भी बोल पाती
भाग्य बदलने वाली रात: परमा एकादशी व्रत की अमर कथा
parama ekadashi vrat katha: यह बात द्वापर युग की है। महाभारत के युद्ध की कगार पर खड़े अर्जुन के मन में कई दुविधाएं थीं। तब उनके सारथी और मार्गदर्शक, भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें एक ऐसी कहानी सुनाई, जो यह सिखाती है कि जब इंसान के पास सब कुछ खत्म हो जाता है, तब भी धर्म और धैर्य उसका साथ नहीं छोड़ते। अभावों के बीच महकता प्रेम और संतोष सदियों पहले, काम्पिल्य नाम के एक खूबसूरत नगर में सुमेधा नाम के एक ब्राह्मण रहते थे। उनकी पत्नी का नाम था पवित्रा—जो अपने नाम की तरह ही पवित्र, शांत और ऊंचे विचारों वाली महिला थीं। दोनों के जीवन में एक बहुत बड़ी परीक्षा थी—घोर दरिद्रता। खाने को ठीक से अनाज नहीं था, पहनने को फटे-पुराने कपड़े थे, लेकिन उनके घर का दरवाज़ा कभी किसी अतिथि के लिए बंद नहीं होता था। खुद भूखे सो जाते, पर मेहमान को भूखा नहीं लौटने देते। एक दिन गरीबी के इस अंतहीन सिलसिले से टूटकर सुमेधा ने अपनी पत्नी से कहा, पवित्रा, अब यह मुफ़लिसी मुझसे देखी नहीं जाती। मैं धन कमाने के लिए परदेस जा रहा हूँ। पवित्रा ने मुस्कुराते हुए अपने पति का हाथ थामा और बड़े शांत भाव से कहा, स्वामी, धन और संतान तो पूर्वजन्मों के कर्मों और दान से मिलते हैं। अगर हमारे भाग्य में इस समय संघर्ष लिखा है, तो जगह बदलने से भाग्य नहीं बदलेगा। आप यहीं रहिए, हम मिलकर इस संकट का सामना करेंगे। ALSO READ: परमा एकादशी 2026: कब है व्रत? जानें तिथि, महत्व, पूजा विधि और जरूरी नियम जब कुटिया में आए महर्षि कौडिन्य वक्त गुज़रा और एक दोपहर उनकी कुटिया में साक्षात महर्षि कौडिन्य पधारे। ब्राह्मण दंपत्ति के पास देने के लिए कोई धन-दौलत नहीं थी, लेकिन उन्होंने अपने तन-मन की श्रद्धा से महर्षि की ऐसी सेवा की कि ऋषि का हृदय पिघल गया। दोनों की आंखों में छिपे दर्द को महर्षि ने भांप लिया। महर्षि कौडिन्य ने प्यार से कहा, हे सुमेधा! तुम्हारी इस कंगाली का अंत अब निकट है। मैं तुम्हें इस दरिद्रता के चक्रव्यूह से निकलने का सबसे सीधा और दिव्य रास्ता बताता हूँ। अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष में एक चमत्कारी तिथि आती है, जिसे 'परमा एकादशी' कहते हैं। तुम दोनों मिलकर पूरी श्रद्धा से इस दिन व्रत रखो और रात में सोओ मत, बल्कि ईश्वर की भक्ति में लीन रहकर जागरण करो। याद रखो, इसी व्रत के पुण्य से कभी राजा हरिश्चंद्र को उनका खोया राजपाठ मिला था और कुबेर देवताओं के धनाधीश बने थे। श्रद्धा का फल और बदला हुआ भाग्य ऋषि की बात मानकर सुमेधा और पवित्रा ने पूरे नियम और अटूट विश्वास के साथ परमा एकादशी का व्रत किया। रात भर दोनों ने प्रभु के नाम के दीप जलाए और कीर्तन किया। कहते हैं कि सच्ची श्रद्धा कभी खाली हाथ नहीं लौटती। अगले ही दिन सुबह, उनकी कुटिया के बाहर घोड़े की टापों की आवाज़ गूंजी। उन्होंने देखा कि एक दिव्य राजकुमार वहां खड़ा था। राजकुमार ने सुमेधा के त्याग और धार्मिकता से प्रभावित होकर उन्हें उपहार स्वरूप एक भव्य, आलीशान घर और इतनी धन-सम्पदा दी कि उनकी सात पीढ़ियों की गरीबी एक पल में गायब हो गई। सीख: श्री कृष्ण अर्जुन को समझाते हैं कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत हों, जो इंसान अपने धर्म पर टिका रहता है और ईश्वर पर भरोसा रखता है, समय आने पर उसका भाग्य ज़रूर बदलता है। परमा एकादशी का व्रत सिर्फ धन नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और समृद्धि देता है।
परमा एकादशी 2026: कब है व्रत? जानें तिथि, महत्व, पूजा विधि और जरूरी नियम
अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ने वाली एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस बार अधिकमास ज्येष्ठ महीने में लगा है, इसलिए इसके कृष्ण पक्ष की एकादशी को परमा एकादशी कहा जाता है। इस बार परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026 को रखा जाएगा। आइए जानते हैं साल 2026 की परमा एकादशी से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातें। 1. परमा एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पारण समय एकादशी तिथि आरंभ: 11 जून, 2026 को सुबह 12:57 बजे से एकादशी तिथि समाप्त: 11 जून, 2026 को रात 10:36 बजे तक उदयातिथि (व्रत का दिन): बृहस्पतिवार, 11 जून 2026 व्रत तोड़ने का (पारण) समय: 12 जून 2026 को सुबह 05:23 बजे से 08:10 बजे के बीच द्वादशी तिथि समाप्त: 12 जून 2026 को शाम 07:36 बजे ALSO READ: भाग्य बदलने वाली रात: परमा एकादशी व्रत की अमर कथा 2. व्रत का विशेष महत्व और लाभ कल्पतरू के समान फल: नि:स्वार्थ भावना से रखा गया यह व्रत कल्पतरू वृक्ष के समान फलदायी है, जिससे हर मनोकामना पूरी होती है। पापों से मुक्ति व मोक्ष: इस व्रत को करने से अनजाने में हुए पापों का नाश होता है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। सुख और ऐश्वर्य: यह एकादशी जीवन में धन, सुख, समृद्धि और पुत्र-पौत्रादि का सुख देने वाली है। दुर्लभ सिद्धियां: पुरुषोत्तम मास की इस एकादशी को करने से साधक को परम दुर्लभ सिद्धियां प्राप्त होती हैं। ALSO READ: परमा एकादशी का व्रत रखने के 10 फायदे 3. सम्पूर्ण पूजा विधि (स्टेप-बाय-स्टेप) दशमी तिथि (व्रत से एक दिन पहले): दशमी की रात्रि को सात्विक भोजन ग्रहण करें। एकादशी तिथि (व्रत का दिन): संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें। पूजन सामग्री: धूप, दीप, पुष्प, मौसमी फल और नैवेद्य (प्रसाद) एकत्रित करें। अभिषेक व मंत्र: भगवान श्री विष्णु जी को पंचामृत से स्नान कराएं। पूजन के समय इस मंत्र का मनपूर्वक उच्चारण करें: एकादश्यां निराहार: स्थित्वाहमपरेअहनि, भोक्ष्यामि पुण्डरीकाक्ष शरणं मे भवाच्युत दिनचर्या: पूरा दिन उपवास रखें (केवल एक समय फलाहार ले सकते हैं) और ज्यादा से ज्यादा समय श्रीहरि की भक्ति में बिताएं। रात्रि जागरण: रात में सोएं नहीं; भजन-कीर्तन, दीपदान, विष्णु सहस्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ करते हुए जागरण करें। द्वादशी तिथि (अगले दिन): दूध से अभिषेक: सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु का केवल दूध से अभिषेक करें और हाथ जोड़कर इस मंत्र का जाप करें: अज्ञानतिमि रान्धस्य व्रतेनानेन केशव, प्रसीद सुमुखो भूत्वा ज्ञानदृष्टिप्रदो भव तर्पण व अर्घ्य: सूर्यदेव को जल चढ़ाएं और पितृ तर्पण करें। दान-दक्षिणा: ब्राह्मणों को आदरपूर्वक भोजन करवाएं। उन्हें कपड़े, अनाज और सामर्थ्य अनुसार रुपए-पैसे दान दें। पारण: इसके बाद स्वयं भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करें। ALSO READ: Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा? 4. परमा एकादशी व्रत के कड़े नियम (क्या करें, क्या न करें) अन्न का त्याग: एकादशी के दिन भूलकर भी अन्न (चावल, गेहूं आदि) का सेवन न करें। वाणी पर संयम: इस दिन किसी की निंदा या बुराई न करें। किसी का दिल दुखाने वाले कटु (कड़वे) वचन न बोलें। पुण्य कार्य: गाय को चारा-पानी दें, असहाय और गरीब लोगों को भोजन, वस्त्र और अनाज का दान करें। मंदिर में फलों का दान करना भी शुभ होता है। महादान का फल: इस दिन स्वर्ण, विद्या, अन्न, भूमि और गौदान करने से अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है। 5. विशेष परंपरा: पंचरात्रि उपवास परमा एकादशी पर कुछ श्रद्धालु बेहद कठिन 'पंचरात्रि उपवास' रखते हैं: यह उपवास एकादशी तिथि से शुरू होकर अमावस्या तिथि तक (5 दिनों तक) चलता है। इसमें रात के समय जल का पूर्ण त्याग कर दिया जाता है। उपवास के दौरान केवल भगवान का चरणामृत ही ग्रहण किया जाता है। इस पंचरात्र व्रत का पुण्य लाभ असीमित माना गया है।
LIVE: भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन से मिले अन्नामलाई
Latest News Today Live Updates in Hindi : भाजपा से मोहभंग की खबरों के बीच तमिलनाडु भाजपा के दिग्गज नेता अन्नामलाई आज दिल्ली में है। यहां वे पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन समेत कई दिग्गजों से मुलाकात कर रहे हैं। पल पल की जानकारी...
बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए अपना ध्यान कैसे रखें? WHO ने जारी किए नए स्व-सहायता दिशानिर्देश
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए नई गाइड जारी की है। जानिए डिप्रेशन, चिंता और तनाव से निपटने के स्व-सहायता उपाय
सिरोही:वार्ड पंचों ने दिया तीन बच्चों के सबूत, प्रशासन पर बिना जांच प्रशासक बनाने के आरोप
सबगुरु न्यूज- सिरोही। आबूरोड पंचायत समिति की किवरली पंचायत में चुने हुए जनप्रतिनिधियों और लोगों में आक्रोश है। वो इस बात का कि उनकी पंचायत समिति के अनुसूचित जनजाति के प्रशासक को प्रशासन ने कथित मामूली अनियमितता के चलते निलंबित कर दिया है, उनकी जगह उस निवर्तमान जनप्रतिनिधि को प्रशासक नियुक्त कर दिया जिसके खिलाफ […] The post सिरोही:वार्ड पंचों ने दिया तीन बच्चों के सबूत, प्रशासन पर बिना जांच प्रशासक बनाने के आरोप appeared first on Sabguru News .
इतना गर्म कैसे हो गया यूपी का बांदा जिला?
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर बुंदेलखंड के बांदा जिले में इस साल गर्मी में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तक पहुंच गया। पिछले कई दिनों तक यहां का तापमान 47-48 डिग्री ही बना रहा। तापमान के असर के चलते शहरी और ग्रामीण इलाकों में दोपहर में ...
सुबह का वक्त, हल्की धुंध, घने जंगल में अजीब सी आवाजें आ रही हैं। 5 घंटे तक पैदल चलने के बाद चट्टानों पर कुछ लोग नजर आते हैं। नजदीक पहुंचे तो देखा चट्टानों में छोटी-बड़ी काली गुफाएं हैं। हमें देखते ही उनमें से कुछ छिप-छिपकर गुफाओं में जाने लगे। थोड़ी देर बाद डरे-सहमे कुछ लोग हमारे करीब आए। मैंने कैमरा निकाला तो वो अजीब हाव-भाव दिखाने लगे। मेरे साथी बोले- ये आपको नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। इस बीच, उन्हीं में से एक बुजुर्ग आगे आया और कैमरे की ओर इशारा करते हुए अपनी भाषा में बोला- इसे दूर करो, ये हमारी शक्ति खींच लेगा। मैंने तुरंत कैमरा हटा लिया। ये बात मुझे मेरे साथी ने समझाई। अपने साथी के जरिए बुजुर्ग से पूछा– आप लोग गुफाओं में क्यों रहते हैं? बुजुर्ग हमें अपनी गुफा के पास ले गया। एक ओर इशारा करते हुए कहा- यहां हमारे बुजुर्ग सोए हैं। हम उन्हें छोड़कर नहीं जाते। ये हमारी गुफाओं के रक्षक हैं। हम अपने परिवार के लोगों को भी यहीं दफनाते हैं। ये किस्सा है चोलानाइकन जनजाति का, जो 21वीं सदी में भी घने जंगलों के बीच गुफाओं में रहती है। इनसे मिलने पहुंचे थे पर्यावरणविद केए शाहजी। दैनिक भास्कर की सीरीज ‘हम लोग’ में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं इसी चोलानाइकन जनजाति की कहानी। चोलानाइकन जनजाति के करीब 250 लोग ही बचे हैं, जो केरलम के मलप्पुरम जिले के नीलांबूर के जंगलों में बसे हैं। जब मैं इनसे मिलने जंगल पहुंची तो रोक दिया गया। केरलम सरकार ने हाल ही में चोलानाइकन लोगों से जंगल में जाकर मिलने पर सख्त पाबंदी लगा दी है। केए शाहजी वो आखिरी शख्स हैं, जो इनकी गुफाओं तक पहुंचे हैं। शाहजी ने चोलानाइकन की गुफाएं और उनके रहन-सहन को करीब से देखा है। मेरी शाहजी से मुलाकात नीलांबूर जंगलों के मुहाने पर हुई। वहीं उन्होंने ये पूरी कहानी सुनाई। यह जंगल वायनाड के करीब है। मैंने प्रशासन से चोलानाइकन की गुफाओं तक जाने की मंजूरी मांगी, लेकिन अफसर नहीं माने। लगातार प्रयास करने के बाद वन विभाग के अफसरों ने सिर्फ दो चोलानाइकन परिवारों से मिलने की मंजूरी दी। ये दो परिवार जंगल के मुहाने पर रहते हैं। इन्हें सरकार ने कच्चे घर भी बनाकर दिए हैं। बाकी 20-25 परिवार जंगल में ही गुफाओं में रहते हैं। इजाजत मिलते ही मैं अपने साथी राम कुमार और बालकृष्णन के साथ वायनाड से नीलांबूर के जंगलों की ओर निकल पड़ी। रास्ते में बालकृष्णन बताते हैं कि चोलानाइकन बाहरी लोगों से डरते हैं, जल्द बातचीत के लिए तैयार नहीं होते। ये पहाड़ों को देवता मानते हैं। गर्मियों के मौसम में नदियों के किनारे झोपड़ी बनाते हैं। मानसून और ठंड में वापस गुफाओं में लौट जाते हैं। ये जंगल से आमतौर पर बाहर नहीं आते। फिर ये दो परिवार यहां क्यों रहते हैं? कभी-कभी कुछ सामान वगैरह लेने के लिए चोलानाइकन जंगल से बाहर आते हैं। थोड़े दिन इन कच्चे घरों में रहते हैं। प्रशासन इनकी निगरानी करता है, ताकि कोई इन्हें परेशान न करे। बाद में जंगल के बीचोबीच अपनी गुफाओं में लौट जाते हैं। नीलांबूर के आगे करीब 20 किलोमीटर के बाद सड़क खत्म हो जाती है। आगे का सफर यहां से पैदल ही तय करना होगा। हम तीनों पथरीले रास्तों से होते हुए तो जंगल के मुहाने पर पहुंचे। यहां चारों ओर पक्षियों की आवाज आ रही है। अचानक दो कच्चे घर दिखाई देते हैं। तभी बालकृष्णन कहते हैं- चोलानाइकन के दो परिवार वहीं रह रहे हैं। हम उन घरों की ओर बढ़े, तो कुत्ते भौंककर स्वागत करते हैं। घरों के करीब पहुंचते ही एक आदमी दिखता है। बालकृष्णन बताते हैं– ये मुरगन है। इस बीच, मुरगन अपने काम में लगा रहा, हमें देखा तक नहीं। वह जमीन पर बैठे-बैठे कटहल को फोड़कर उसके बीजों को खा रहा है। बालकृष्णन ने उसी की भाषा में पूछा- यह कहां से लाए हो? वह बताता है- जंगल से एक आदमी लेकर आया था। अभी वो और फल लेने जंगल गया है। इस दौरान, जब मैं इस बातचीत का वीडियो बना रही थी, तो मुरगन कुछ कहते-कहते रुक गया। बालकृष्णन के थोड़ा समझाने के बाद मुरगन मान गया। वह बताता है- गर्मी से एक महीने पहले जंगल से कटहल लाते हैं। इसे उबालते हैं। इसके बाद, इसमें शहद और मिर्च डालकर छोटे–छोटे गोले बनाकर खाते हैं। बालकृष्णन बताते हैं- 'इनके पास हर बीमारी का इलाज जंगल में ही है। ये हर तरह की जड़ी–बूटी पहचानते हैं। बालकृष्णन, मुरगन से पूछता है कि तुम्हारे यहां शादी कैसे होती है?' वो बताता है- ‘जब लड़की को लड़का पसंद कर लेता है, तो हमारे मुखिया और गांव के बुजुर्ग एक जगह सभी को बुलाते हैं। वहां वे तुलसी की दो माला बनाकर दोनों को देते हैं। लड़का, लड़की एक दूसरे को माला पहनाते हैं। इसके बाद, दोनों साथ रहने लगते हैं। उन्हें अलग से एक गुफा भी दे दी जाती है। किसी तरह का कोई भोज या लेन-देन नहीं होता।’ इतने में एक महिला आती हैं। दुबली-पतली, घुंघराले बालों वाली। बालकृष्णन ने नाम पूछा, तो बोली- बिंदु। मुझे देखते ही वह गुफा के दूसरी ओर चली जाती है और वहां कुछ सुखाने लगती है। बालकृष्णन पास में जाकर पूछते हैं- यह क्या कर रही हो? वो बताती है- ये काली मिर्च है, इसे सुखा रही हूं। जंगली शहद और काली मिर्च बेचकर थोड़ा बहुत पैसा मिल जाता है। इस दौरान मैं उनके घर में झांकती हूं, तो मुरगन–बिंदु मुझे गौर से देखते हैं। घर की दीवारें गंदी थीं और चारों तरफ धूल ही धूल है। नीचे दाल–चावल बिखरे पड़े हैं। शायद एक–दो दिन पहले उन्हें किसी ने राशन किट दी थी। जंगल से लाई गई सब्जियां हैं और नींबू भी रखे हैं। रसोई में सिर्फ 2–3 एल्युमिनियम के बर्तन दिखाई दिए। न मसाला, न नमक, न तेल। मुरगन, बालकृष्ण को बताता है कि हम जंगलों से कुछ भी तोड़कर सीधे ही खा लेते हैं, पकाते नहीं हैं। आग में मछली भून लेते हैं या चावल उबालकर कांजी बनाते हैं। तभी, मेरे साथी राम कुमार ने मुझे आवाज दी। मैं बाहर निकली, तो उन्होंने मुझे घर के पास से ही एक हल्दी की गांठ निकालकर दी। कहा– 'इसकी खुशबू लेकर देखिए।' मैंने सूंघी तो, वाकई हल्दी की ऐसी खुशबू मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। राम कुमार ने बताया– दुनिया में आपको इससे ज्यादा शुद्ध हल्दी कहीं नहीं मिलेगी। चोलानाइकन इसे खाते हैं। घाव होने पर शरीर पर लगाते हैं। इसके बाद राम कुमार ने एक पेड़ से पत्ता तोड़कर दिया। कहा- ये तेजपत्ता है। उसकी खुशबू भी लाजवाब थी। मैंने पूछा- जंगल में हर समय फल-फूल नहीं होते, ऐसे में ये क्या खाते हैं? बालकृष्णन बताते हैं– चोलानाइकन जंगल से शहद इकट्ठा करते हैं। बांस के लंबे खोखले डंडों में भरकर इसे हल्की आंच पर गर्म करते हैं। इसके बाद इसे मिट्टी में दबा देते हैं। जब जंगल में खाने के लिए कुछ नहीं मिलता, तब ये लोग इस शहद को बाहर निकालकर उसमें पानी मिलाते हैं और पके चावल से खाते हैं। क्या, इनके नाम भी खास होते हैं? बालकृष्णन बताते हैं– ‘हर चोलानाइकन की गुफा का एक नाम होता है, इसलिए गुफा के नाम से ही परिवार पहचाने जाते हैं। ये लोग भले ही संख्या में कम हैं, लेकिन अपने मुखिया की हर बात मानते हैं।’ ‘कौन सा परिवार किस गुफा में रहेगा, कब जंगल में नई जगह जाना है या शहद का बंटवारा कैसे होगा, ये सब मुखिया ही तय करता है।’ चोलानाइकन छोटे–छोटे कबीलों में जंगलों में अलग-अलग जगह रहते हैं। हर कबीले का एक मुखिया होता है। कबीले आपस में बहुत मेल-जोल नहीं रखते। क्या चोलानाइकन कोई उत्सव भी मनाते हैं? दैवओट्टू, इनका एक पारंपरिक उत्सव है। यह आमतौर पर अप्रैल में होता है। इस उत्सव के लिए हर परिवार शहद एकत्रित करता है। फिर शहद का एक हिस्सा पर्वत और पुरखों को अर्पित करते हैं। क्या आपको पता है, चोलानाइकन तारों को देखकर मौसम का हाल बता देते हैं। मैंने पूछा- कैसे? वो बताते हैं- ये लोग तारों की स्थिति और उनकी चमक के आधार पर मानसून के आने का अनुमान लगा लेते हैं। साथ ही, अपनी गुफा बदल लेते हैं। भारी बारिश से बचने के लिए ये लोग पहाड़ों पर बनी गुफाओं में चले जाते हैं। मौत के बाद मिट्टी से दूरी… लाश को पत्तों–बेलों से ढंकते हैं बालकृष्णन बताते हैं कि चोलनाइकन समुदाय में अंतिम संस्कार अनूठे तरीके से होता है। मौैत के बाद वे एक गहरा गड्ढा खोदते हैं। लाश को बेलों और पत्तों में लपेटकर उसमें रखते हैं। ऊपर से मिट्टी नहीं डालते, बल्कि गड्ढे को सूखी लकड़ियों और पत्तों से ढंक देते हैं। वे इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि मिट्टी का एक भी कण शव को न छू पाए। ऐसा क्यों? चोलनाइकन के लिए मिट्टी 'संसार का भार' है। शव को मिट्टी से दूर रखने के पीछे उनकी गहरी आस्था है। उनका मानना है कि ऐसा करने से मृतक की आत्मा बिना किसी सांसारिक बंधन में उलझे, जंगल की हवाओं और पेड़ों की चेतना में विलीन हो जाती है। अब शाम होने वाली है। हम वापस वायनाड की ओर निकल पड़ते हैं। अगले दिन, वायनाड में पर्यावरणविद केए शाहजी के घर पहुंची। शाहजी बताते हैं- बारिश के दिन थे। जब मैं पहली बार चोलानाइकन लोगों की गुफा के पास पहुंचा, तो लगा जैसे किसी दूसरी सदी में आ गया हूं। मैंने चोलानाइकन के बीच रात गुजारी है। रात में हाथियों की चिंघाड़ पूरे जंगल में गूंज रही थी। गुफाओं के पास तक भी कुछ हाथी आ गए थे, लेकिन चोलानाइकन पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा। वो रात मैंने करवटें बदल–बदल कर गुजारी। चोलानाइकन की खासियत बताता हूं। वे पक्षियों की चहचहाहट, हवा का रुख और पेड़ों की पत्तियों के हिलने के तरीके से बता सकते हैं कि बारिश कब होगी या जंगल में खतरा कितना करीब है। ‘वे कौन सी भाषा बोलते हैं?’ चोलानाइकन अपनी भाषा को 'चोलानाइक्कन' कहते हैं। इस भाषा में मलयालम के अलावा तमिल और कन्नड़ के भी कुछ शब्द मिलते हैं। शाहजी से मिलकर मैं वायनाड के स्थानीय पत्रकार दीपक कुमार के घर पहुंची। दीपक भी चोलानाइकन और उनकी गुफाओं को करीब से देख चुके हैं। कुछ बताने से पहले वो मुझे चोलानाइकन की तस्वीरें दिखाते हैं। इसके बाद वे कहते हैं- ये लोग अपने पूर्वजों की तरह गुफाओं में ही रहना पसंद करते हैं। सरकार ने जंगल में इनके लिए घर बनाकर दिए हैं, लेकिन वह अधूरे हैं। वे बताते हैं– चोलानाइकन समुदाय की एक महिला को गर्भवती होने पर वायनाड के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, लेकिन वह रात में ही वहां से चली गई। अफरा–तफरी मच गई। आखिर, वह जंगल में अपने लोगों के बीच मिली। ऐसे और भी किस्से हैं। लेकिन सबसे बड़ा संकट यह है कि यदि इस जनजाति को नहीं संभाला गया तो ये ‘केवमैन’ जंगलों में ही खत्म हो जाएंगे। --------------------------------------- 1- ‘-10C में मौत, लेकिन हम करते हैं नंगे बदन तपस्या’:ध्यान में ही थम जाती हैं हमारी सांसें, मरने के 15 दिन बाद अंतिम संस्कार हिमालय। 3,600 मीटर की ऊंचाई पर यहां पारा -10 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क चुका है। हवा में ऑक्सीजन इतनी कम है कि हर सांस एक जद्दोजहद है। लेकिन इन बर्फीली हवाओं के बीच, सामने जो कुछ दिख रहा है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। यहां नजर आ रही छोटी-छोटी गुफाओं और पत्थरों पर कुछ लोग नंगे बदन आंखें बंद किए बैठे हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- मुर्गी का कलेजा चीरकर कहा, ये चोर नहीं है:ससुराल पहुंचते ही बलि देती है दुल्हन, कटे सिर को मंदिर मानते हैं गालो सुबह के 7 बजे हैं। अरुणाचल प्रदेश की एक पहाड़ी बस्ती में हूं। यहं एक घर पर लोगों की भीड़ जमा है। उन्हीं के बीच एक लड़का परेशान खड़ा है। थोड़ी देर में घर से एक बुजुर्ग बाहर आते हैं। काले कपड़े में, बाघ की खाल का जैकेट पहने। कंधे पर धनुष, पीठ पर तीरों से भरा तरकश लिए और सिर पर टोपी लगाए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (02 जून, 2026)
1. मेष (Aries) Today Rashifal 02 June 2026 : करियर: आज काम में नई चुनौतियां आ सकती हैं। लव: प्यार में भावनाओं को समझना जरूरी है। धन: कारोबारी अनावश्यक खर्चों से बचें। स्वास्थ्य: पेट और पाचन संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं। उपाय: लाल कपड़े धारण करें। ALSO READ: Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा? 2. वृषभ (Taurus) करियर: कार्यस्थल पर सहयोगियों का समर्थन मिलेगा। लव: रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी। धन: आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। स्वास्थ्य: सिरदर्द और तनाव की संभावना। उपाय: रविवार को सूर्य देव की पूजा करें। 3. मिथुन (Gemini) करियर: आज आपकी रचनात्मकता काम आएगी। लव: प्रेम संबंधों में रोमांस बढ़ेगा। धन: अचानक आय के योग हैं। स्वास्थ्य: गले से संबंधित समस्या हो सकती है। उपाय: बुधवार को बुध देव की पूजा करें। 4. कर्क (Cancer) करियर: नौकरीपेशा के काम में स्थिरता रहेगी। लव: प्रेमी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करें। धन: आज अनावश्यक खरीदारी को टालें। स्वास्थ्य: नींद कम आने की समस्या संभव है। उपाय: सोमवार को चंद्रमा की पूजा करें। ALSO READ: Weekly Horoscope 1 to 7 June: साप्ताहिक राशिफल (1 से 7 जून 2026): अपने भाग्य को जानें और तैयार रहें 5. सिंह (Leo) करियर: प्रमोशन और सराहना मिलने के योग हैं। लव: प्यार में रोमांस और उत्साह बना रहेगा। धन: कारोबार से पैसों में वृद्धि की संभावना है। स्वास्थ्य: व्यायाम और संतुलित भोजन करें। उपाय: रविवार को सूर्य को जल अर्पित करें। 6. कन्या (Virgo) करियर: कार्यक्षेत्र में दस्तावेज और रिपोर्ट में गलती न करें। लव: साथी की भावनाओं का ध्यान रखें। धन: व्यय बढ़ सकता है। बचत पर ध्यान दें। स्वास्थ्य: पेट और पाचन से जुड़ी समस्या हो सकती है। उपाय: मंगलवार को हनुमान जी का ध्यान करें। 7. तुला (Libra) करियर: आज नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। लव: प्रेम में मधुरता बनी रहेगी। धन: खर्च अधिक होने की संभावना। स्वास्थ्य: थकान और मानसिक तनाव हो सकता है। उपाय: सफेद रंग के वस्त्र आज पहनें। 8. वृश्चिक (Scorpio) करियर: नौकरीपेशा को मेहनत का फल मिलेगा। लव: प्यार में उत्साह और समझ बढ़ेगी। धन: आर्थिक स्थिति मजबूत। धन प्राप्ति के योग। स्वास्थ्य: ध्यान और योग लाभकारी रहेगा। उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें। 9. धनु (Sagittarius) करियर: नौकरीपेशा की नई योजनाएँ सफल होंगी। लव: साथी के साथ समझदारी बनाए रखें। धन: कारोबारियों को निवेश में लाभ मिलेगा। स्वास्थ्य: जोड़ों और हड्डियों में हल्का दर्द हो सकता है। उपाय: गुरुवार को बृहस्पति देव की पूजा करें। 10. मकर (Capricorn) करियर: आज का दिन मेहनत का प्रतिफल देगा। लव: रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी। धन: आर्थिक लाभ के योग हैं। स्वास्थ्य: हल्का व्यायाम और संतुलित भोजन करें। उपाय: काले रंग का उपयोग कम करें। 11. कुम्भ (Aquarius) करियर: आज आपकी बुद्धिमानी और सोच से फायदा होगा। लव: प्रेम संबंधों में विश्वास और सहयोग बढ़ेगा। धन: कारोबार की आय में वृद्धि के योग हैं। स्वास्थ्य: सेहत संबंधी तनाव कम करें। उपाय: नीले या सफेद वस्त्र पहनें। 12. मीन (Pisces) करियर: कार्यस्थल पर पुराने प्रोजेक्ट पूरे होंगे। लव: अकेले लोगों के लिए नए संबंध के योग हैं। धन: आय के नए स्रोत बन सकते हैं। स्वास्थ्य: शरीर और मानसिक स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। उपाय: सोमवार को चंद्रमा की पूजा करें। ALSO READ: Bada Mangal 2026: बड़ा मंगल: नवाबों के शहर से कैसे शुरू हुई बजरंगबली की ये खास परंपरा, पढ़ें गौरव गाथा
28 मई 2026, 77 साल के सिद्धारमैया ने कर्नाटक के CM पद से इस्तीफा दिया, अब 64 साल के डीके शिवकुमार 3 जून को राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। ये फैसला अचानक नहीं लिया गया। 4 मई को दिल्ली में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल के साथ सिद्धारमैया की बैठक हुई। इसमें उन्हें नेतृत्व परिवर्तन के लिए कहा गया। सिद्धारमैया ने 48 घंटे का वक्त मांगा और वादा पूरा करते हुए इस्तीफा दे दिया। CM पद छोड़ने के लिए आखिर कैसे माने सिद्धारमैया? कर्नाटक के सीनियर जर्नलिस्ट गौतम शंकर कहते हैं, ‘कांग्रेस सत्ता परिवर्तन को भले सहजता से पेश कर रही, लेकिन सिद्धारमैया का करियर देखने के बाद मैं कह सकता हूं कि इतनी आसानी से पद छोड़ देना, उनके स्वभाव के विपरीत है। उन्होंने 1996 में जेएच पटेल और 2004 में धर्म सिंह को कर्नाटक का CM बनाए जाने को खुली चुनौती दी थी। इसी अड़ियल रुख के कारण 2005 में पूर्व PM देवगौड़ा ने उन्हें JDS से निकाल दिया था।’ इस बार क्या बदला? गौतम जवाब में कहते हैं, ‘अहिंदा गुट के कुछ नेताओं से जानकारी मिली है कि सिद्धारमैया ने 4 प्रमुख मांगें रखीं।’ 1. तीन डिप्टी CM का पद। 2. कैबिनेट में वफादारों के लिए अहम विभाग। 3. MLC बेटे यतींद्र को कैबिनेट में जगह और बड़ी जिम्मेदारी। 4. कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष चुनने में उनकी सलाह जरूरी। इसकी ज्यादा संभावना है कि सतीश जारकीहोली को नया अध्यक्ष बनाया जाए।वे एक शक्तिशाली ST नेता हैं और खुद को अगले अहिंदा नेता के रूप में भी स्थापित कर रहे हैं। गौतम आगे कहते हैं, ‘सीट छोड़ने के बाद सिद्धारमैया सबसे पहले बेटे यतींद्र के साथ दिल्ली गए। 29 मई को उन्होंने बेटे की मुलाकात सोनिया गांधी और राहुल गांधी से कराई। इससे लगभग तय है कि अबकी यतींद्र को कैबिनेट में शामिल किया जाए।’ कर्नाटक की पॉलिटिक्स पर करीब से नजर रख रहे पॉलिटिकल एनालिस्ट केए शाजी कहते हैं, ‘पार्टी के भरोसेमंद सूत्रों से पता चला है कि सिद्धारमैया बेटे यतींद्र के लिए डिप्टी CM का पद या फिर पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, उद्योग और जल संसाधन विभाग और मेडिकल एजुकेशन जैसे विभाग चाहते हैं।‘ सिद्धारमैया गुट खुश नहीं, लेकिन फैसला माना सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले विधायक अशोक एम.पट्टन बताते हैं, ‘ये पहले से तय था कि हाईकमान से जो भी निर्देश होगा, दोनों नेता (सिद्धारमैया और शिवकुमार) मानेंगे। अब जब डीके शिवकुमार अगले मुख्यमंत्री होंगे, तो सभी उनके साथ हैं।‘ ‘पिछड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले विधायकों ने आलाकमान तक संदेश पहुंचाया है कि अगर हमारे (अहिंदा) इतने बड़े नेता को पद से हटाया जा रहा है, तो भविष्य में भी इस वर्ग के हितों और प्रतिनिधित्व का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए।‘ केरल चुनाव की वजह से टाली गई CM बदलने की कवायद कर्नाटक में 2023 के विधानसभा चुनाव में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के दावेदार बनकर उभरे। इसे देखते हुए फॉर्मूला निकाला गया कि दोनों ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनेंगे। नवंबर 2025 में सिद्धारमैया के ढाई साल पूरे हो गए, लेकिन वो तब भी CM बने रहने पर अड़े रहे। कर्नाटक कांग्रेस से जुड़े सोर्स के मुताबिक, तय फॉर्मूले के हिसाब से दिसंबर 2025 से शिवकुमार को CM पद संभालना था, लेकिन राहुल गांधी समेत पार्टी के सभी सीनियर लीडर केरल में चुनावों की तैयारियों में व्यस्त थे, इसलिए तब ये बदलाव नहीं हो सका। नए CM के लिए क्या चैलेंज…वोक्कालिगा को एक रखना डीके के सामने चुनौती कांग्रेस सोर्सेज के मुताबिक, नई सरकार में 4 डिप्टी CM और 6 मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। शिवकुमार प्रभावशाली वोक्कालिगा कम्युनिटी से हैं। राज्य में इनकी हिस्सेदारी करीब 15% है। CM बनते शिवकुमार का सबसे बड़ा टारगेट पूरे वोक्कालिगा वोटबैंक को कांग्रेस के पक्ष में करना होगा। ऐसे में BJP की सहयोगी पार्टी JD(S) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के लिए वोक्कालिगा वोटरों का समर्थन हासिल कर पाना मुश्किल हो सकता है। BJP की भी टेंशन बढ़ीBJP के एक सोर्स बताते हैं कि शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद JD(S) के अंदर टूट-फूट की आशंका भी बढ़ जाएगी। सोर्स के मुताबिक, शिवकुमार ये तय करेंगे कि JD(S) के नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक हिस्सा कांग्रेस में आए। JD(S) के लिए अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा राज्य की सबसे बड़ी कम्युनिटी लिंगायत को साधना भी चुनौती है। ये BJP के सपोर्टर रहे हैं। पार्टी लीडर और कर्नाटक के पूर्व CM बीएस येदियुरप्पा की बढ़ती उम्र के चलते पार्टी का इन पर कंट्रोल कम हो रहा है। ऐसे में BJP के नेतृत्व वाली NDA अगले चुनाव में सिर्फ एंटी-इनकंबेंसी के भरोसे नहीं रह सकती। उसे कांग्रेस को चुनौती देने के लिए नई रणनीति और मुद्दे तलाशने होंगे। डीके का कर्नाटक के लिए रोडमैप शिवकुमार की पहचान मनी और पावर के दम पर काम करने वाले लीडर की रही है। अब CM बनकर उन्हें अपनी प्रशासनिक क्षमता साबित करनी है। सीनियर जर्नलिस्ट गौतम शंकर के मुताबिक, CM बनने के बाद शिवकुमार को सबसे पहले ये तय करना होगा कि राज्य कर्ज में न डूबे और टैक्सपेयर्स पर ज्यादा बोझ न बढ़े। उपमुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने कई मेगा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू किए थे, लेकिन सभी फंड की कमी से जूझ रहे हैं। इनमें बेंगलुरु में 40 किलोमीटर की टनल परियोजना शामिल है, जिसे 40,000 करोड़ से ज्यादा की लागत से शहर को जाम मुक्त करने के लिए बनाया जाना है। इस प्रोजेक्ट से लोगों को काफी उम्मीदें हैं, लिहाजा इसपर काम जल्द पूरा करना चाहिए। गौतम कहते हैं, ‘राज्य के सिंचाई मंत्री के रूप में डीके ने कावेरी नदी पर मेकेदातु संतुलन जलाशय और पेयजल परियोजना के लिए केंद्र से मंजूरी लेने में कड़ी मेहनत की है। इसकी लागत करीब 14,000 करोड़ है। वे CM बनते ही ये प्रोजेक्ट शुरू करेंगे। इसके अलावा परिवहन और लॉ एंड ऑर्डर कंट्रोल की दिशा में सरकार बड़े फैसले ले सकती है।’ ………………….. ये खबर भी पढ़ें… 5 दिन मीटिंग, प्रियंका एक्टिव, तब सतीशन बने केरलम CM 10 दिन की माथापच्ची के बाद आखिर कांग्रेस ने केरलम का CM तय कर लिया। राज्य में पार्टी के सबसे बड़े लीडर वीडी सतीशन नए CM होंगे। राहुल के भरोसेमंद केसी वेणुगोपाल और सबसे अनुभवी रमेश चेन्नीथला भी दावेदार थे। पढ़िए पूरी खबर…
पीएम बालेन शाह ने रविवार को दावा किया- नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा किया है। मामले ने तूल पकड़ा, तो नेपाल के विदेश मंत्रालय को सफाई देनी पड़ी। क्या वाकई नेपाल ने भारत की जमीन कब्जा की है और बालेन का दावा उनका ही नुकसान कैसे कर सकता है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बालेन शाह ने क्या दावे किए, जिसपर हंगामा मच गया? जवाबः नेपाल में जेन-जी आंदोलन के बाद मार्च 2026 में चुनाव हुए। पुरानी पार्टियां और नेता बुरी तरह हार गए। बालेन शाह की अगुवाई में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को दो-तिहाई बहुमत मिला। 35 साल के बालेन शाह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने। पीएम बनने के 65 दिन बाद 31 मई को बालेन संसद में पहला भाषण देने पहुंचे थे। इसी दौरान कुछ सांसदों ने उनसे भारत-नेपाल सीमा विवाद पर सवाल पूछा। जवाब में बालेन ने 2 बड़ी बातें कहीं… इन बयानों के बाद नेपाल की संसद में हंगामा मचा। विपक्षी दलों ने उनसे सबूत मांगे। बयान को संसद की कार्रवाई से हटाने की मांग की गई। प्रधानमंत्री को माफी मांगने के लिए कहा जाने लगा। नेपाल के पूर्व उप प्रधानमंत्री कमल थापा ने X पर लिखा ‘उन्हें जनता को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि वह कौन-सी जगह है और उसके क्या सबूत हैं। उन्हें तुरंत उस गलती को सुधारना चाहिए और सम्मानपूर्वक वह जमीन भारत को वापस कर देनी चाहिए।’ विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस के नेता वासना थापा ने कहा, ‘हमें जल्द सूचित किया जाना चाहिए था कि किस भूमि पर अतिक्रमण हुआ है। यह एक गंभीर और आपत्तिजनक मुद्दा है। इस बयान को संसद के रिकॉर्ड से भी हटाना चाहिए।’ हालांकि नेपाल में पत्रकारों और राजनयिकों के एक धड़े ने पीएम बालेन की साफगोई और सीमा विवाद को इतनी मजबूती से उठाने की तारीफ भी की है। सवाल-2: क्या वाकई नेपाल ने भारत की जमीन पर कब्जा कर रखा है? जवाबः नेपाल के विदेश मंत्रालय ने पीएम के बयान पर खुद स्पष्टीकरण जारी किया। लिखा- ‘प्रधानमंत्री भारत के इलाकों पर कब्जे की नहीं, 'क्रॉस-बॉर्डर ऑक्यूपेशन' की बात कर रहे थे।’ क्रॉस-बॉर्डर ऑक्यूपेशन यानी एक देश की जमीन को दूसरे देश के नागरिक खेती-बाड़ी, रहने के लिए और दूसरे कामों में इस्तेमाल करते हैं। दरअसल, भारत और नेपाल के बीच करीब 1,751 किमी लंबी सीमा है। इसमें पहाड़ी इलाके, नदियां और समतल जमीन है। ज्यादातर ओपेन बॉर्डर है, यानी दोनों देशों के बीच में कोई फेंसिंग नहीं है। जिन इलाकों में जमीन समतल है, वहां दोनों तरफ कुछ जमीन ‘नो-मेंस लैंड’ रखी जाती है। बॉर्डर पिलर के दोनों तरफ 10-10 गज की पट्टी होती है, इसलिए इसे दसगजा भी कहते हैं। इस जमीन पर दोनों देशों के नागरिकों को स्थायी निर्माण, मकान, दुकान या खेती करने की अनुमति नहीं होती। बिहार के सीमावर्ती इलाकों से भास्कर रिपोर्टर बताते हैं कि सीमा के कई इलाकों में 500 मीटर तक कोई पिलर नहीं है। यहां लोग अपना कब्जा बढ़ा लेते हैं। दोनों तरफ के किसान अपनी जमीन के साथ नो-मेंस लैंड की जमीन पर भी खेत जोतकर बुआई कर लेते हैं। कई जगहों पर लोगों ने टीन शेड लगाकर भैंसें और बकरियां भी बांधी हुई हैं। भारत की सशस्त्र सीमा बल और नेपाल सशस्त्र पुलिस मिलकर इस क्षेत्र में कब्जे हटाने के अभियान चलाते रहते हैं। इसके अलावा भी पिछले सालों में क्रॉस बॉर्डर अतिक्रमण की कुछ रिपोर्ट मिलती हैं… सवाल-3: बालेन शाह का दावा उनका ही नुकसान कैसे करेगा? जवाबः उनके दावे से 3 मुश्किलें पैदा होंगी… 1. नेपाल की कूटनीतिक स्थिति कमजोर होगी 2. ब्रिटेन शामिल हुआ, तो मामला और उलझ जाएगा 3. बालेन शाह की विश्वसनीयता पर सवाल उठे सवाल-4: भारत के लिए इस बयान के मायने क्या हैं? जवाबः बालेन शाह के ताजा बयान पर फिलहाल भारत ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि पिछले दिनों सीमा विवाद के सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नेपाल के ये क्षेत्रीय दावे न तो सही हैं और न ही किसी ऐतिहासिक तथ्य या सबूत पर आधारित हैं। पीएम बनने के बाद पिछले 65 दिनों में बालेन शाह ने कई ऐसे काम किए, जिससे भारत के डिप्लोमैटिक गलियारों में हलचल है… भारतीय राजदूत को विशेष दर्जा नहीं दिया: परंपरा के मुताबिक, नेपाल में नए पीएम भारतीय राजदूत से अलग से शिष्टाचार मुलाकात करते हैं। बालेन शाह ने भारतीय राजदूत से अलग से मिलने के बजाय सभी देशों के राजदूतों से सामूहिक मुलाकात की। इससे यह संदेश गया कि उनकी सरकार भारत को कोई विशेष तरजीह नहीं देना चाहती। मानसरोवर यात्रा पर आपत्ति जताई: 4 जुलाई से मानसरोवर यात्रा शुरू होनी है। इसके लिए श्रद्धालु भारत से लिपुलेख पास होते हुए चीन के तिब्बत जाते हैं। नेपाली विदेश मंत्रालय ने इस पर आपत्ति जताई है और कहा है कि लिपुलेख उनका इलाका है। उन्होंने भारत और चीन को भी चिट्ठी लिखकर अपना स्टैंड साफ किया है। भारतीय विदेश सचिव से नहीं मिले: मई 2026 में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री नेपाल जाकर बालेन शाह को भारत आने का आधिकारिक न्योता देने वाले थे। लेकिन, बालेन ने उन्हें मुलाकात का समय नहीं दिया और दौरा रद्द हो गया। पीएम बनने के बाद भारत नहीं आए: ये परंपरा रही है कि पद संभलाने के बाद नेपाली प्रधानमंत्री भारत का दौरा करते हैं। लेकिन बालेन ने कार्यभार संभालते ही यह घोषणा कर दी कि वे कार्यकाल के पहले साल किसी भी देश के आधिकारिक दौरे पर नहीं जाएंगे। राजन कुमार के मुताबिक, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने पीएम बालेन शाह के बयान पर सफाई दे दी है। इसलिए भारत अभी इस पर कड़ा रुख नहीं अपनाएगा। भारत-नेपाल का सीमा विवाद उतना जटिल भी नहीं है, क्योंकि दोनों देशों के बीच खुली सीमा है। इस बीच बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रबी लामिछाने 5 दिन के भारत दौरे पर आए हैं। वे बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात करेंगे। इस दौरान हुई बातचीत से नेपाल की नई सरकार का रुख और साफ हो सकता है। सवाल-5: भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद क्या है? जवाबः भारत के पांच राज्यों से नेपाल की सीमा लगती है- उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम। इनमें उत्तराखंड में भारत-नेपाल सीमा की लंबाई 173 किलोमीटर है। उत्तराखंड की सीमा चीन से भी लगती है। इसी सीमा से जुड़े तीन इलाके- लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी विवाद की वजह हैं। नेपाल इन्हें अपना हिस्सा बताता है, जबकि भारत इस दावे को खारिज करता आया है। ये पूरा इलाका लगभग 338 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यानी रायपुर शहर जितना बड़ा। भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद करीब 210 साल पुराना है… उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में मौजूद कालापानी भारत के लिए रणनीतिक तौर पर बेहद जरूरी है। मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्री इसी इलाके के लिपुलेख दर्रे से होकर गुजरते हैं। यहां से चीनी सेना पर नजर रखना आसान है। इसीलिए चीन इसे लेकर नेपाल को उकसाता रहता है। 1962 के युद्ध के बाद लिपुलेख दर्रा बंद भी हुआ। हालांकि 2015 में हुए भारत-चीन समझौते के बाद इसे दोबारा खोला गया। मई 2020 में भारत ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को आसान बनाने के लिए पिथौरागढ़ से लेकर लिपुलेख दर्रे तक 80 किमी की सड़क बनाई, जिस पर नेपाल ने नाराजगी जताई थी। 15 मई 2020 को तत्कालीन थल सेना अध्यक्ष एम.एम नरवणे ने कहा था कि नेपाल ऐसा किसी और के बहकावे में कर रहा है। नरवणे का इशारा चीन की ओर था। इसके बाद जून 2020 में नेपाल की संसद ने एक नया नक्शा मंजूर किया था, जिसमें इन इलाकों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि नेपाल का दावा ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित नहीं है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। ---------- पुरी खबर पढ़िए… 15 दिन में सैलरी, अफसरों के बच्चे सरकारी स्कूल में: पीएम बालेन शाह के 30 दिनों की कहानी; नेपाल को बदलेंगे या तानाशाह बनेंगे 27 मार्च 2026 को 35 साल के बालेन शाह ने नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। पीएम बनते ही पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार करवा दिया गया। सरकारी दफ्तरों से नेताओं की तस्वीरें उतरवा दी गईं। छात्र राजनीति पर रोक लगा दी गई। अब अफसरों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ना होगा, जबकि कर्मचारियों को हर 15 दिन में सैलरी मिलेगी। पूरी खबर पढ़िए…
अलवर में तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े टेंपो से टकराई, तीन घायल
अलवर। राजस्थान में अलवर के बगड़ तिराहे थाना क्षेत्र में सोमवार को तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े टेंपो से टकरा गई इससे टैम्पो में सवार तीन लोग घायल हाे गए। प्राप्त जानकारी के अनुसार सुभाष जोशी अलवर सब्जी मंडी से सब्जी भरकर टेंपो से अपने गांव बाम्बोली जा रहा था। रास्ते में बगड़ तिराहे […] The post अलवर में तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े टेंपो से टकराई, तीन घायल appeared first on Sabguru News .
कांग्रेस की रीति-नीति के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता जाएंगे जनता के बीच : राहुल गांधी
अजमेर। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष एवं लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पार्टी संगठन को सर्वोपरि बताते हुए कार्यकर्ताओं का आह्वान किया है कि दल की रीति-नीति आम जनता के बीच प्रसारित कर कांग्रेस को और मजबूत करने के जिए जी-जान से जुट जाएं। गांधी सोमवार को कांग्रेस की ओर से अजमेर के […] The post कांग्रेस की रीति-नीति के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता जाएंगे जनता के बीच : राहुल गांधी appeared first on Sabguru News .
ऑस्ट्रेलिया की फुटबॉल टीम फीफा विश्वकप में लगातार छठी बार लेंगी हिस्सा
ऑस्ट्रेलिया की फुटबॉल टीम 11 जून से शुरु होने वाले फीफा विश्वकप 2026 में लगातार छठी बार हिस्सा लेगी। ऑस्ट्रेलियाई टीम क्वालिफाइंग ग्रुप में जापान के बाद दूसरे स्थान पर रही थी। पिछली बार, कतर 2022 में,ऑस्ट्रेलिया की फुटबॉल टीम, जिसे सॉकरूज के नाम से भी जाना जाता है ने राउंड ऑफ 16 में पहुंचकर विश्वकप में अपना अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन दोहराया था। वहा, ऑस्ट्रेलिया को बाद में चैंपियन बनी टीम अर्जेंटीना के हाथों 2-1 से करीबी हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार कनाडा, मेक्सिको और अमेरिका में होने वाले टूर्नामेंट में वे और भी बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद करेंगे। टोनी पोपोविक की अगुवाई वाली ऑस्ट्रेलियाई फुटबॉल टीम ग्रुप डी में तुकिर्ये के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी। इसके बाद उनका मुकाबला सह-मेजबान अमेरिका और फिर वे पैराग्वे के साथ होगा। फुटबॉल ऑस्ट्रेलिया ने सोमवार को 2026 फीफा विश्व कप के लिए अपनी टीम का की घोषणा कर दी है इस टीम में 17 ऐसे खिलाड़ी शामिल हैं जो पहली बार विश्व कप खेल सकते हैं और दो ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने अभी तक कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है। चयनकर्ताओं ने टीम में इटली में रहने वाले अटैकिंग प्लेमेकर क्रिस्टियन वोल्पाटो को भी शामिल किया गया है। वोल्पाटो ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इटली के बजाय ऑस्ट्रेलिया की तरफ से खेलने का फैसला किया है और वह वर्ल्ड कप में अपना पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के लिए तैयार हैं। 22 साल के वोल्पाटो का जन्म ऑस्ट्रेलिया में हुआ था, लेकिन उन्होंने यूथ इंटरनेशनल स्तर पर इटली की तरफ से खेला था। टीम में उनके साथ ऐसे स्ट्राइकर टेटे येंगी भी शामिल हैं, जिन्होंने अभी तक कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है और जो जापान में क्लब फुटबॉल खेलते हैं। विश्व कप में टीम की कप्तानी गोलकीपर मैट रयान और विंगर मैथ्यू लेकी करेंगे। ये दोनों सॉकरूस के तीसरे और चौथे ऐसे खिलाड़ी बन जाएंगे जो चार वर्ल्ड कप में खेलेंगे। हेड कोच टोनी पोपोविक ने एक बयान में कहा, “इस फाइनल वर्ल्ड कप टीम को चुनने में कई बातों का ध्यान रखा गया है। कुछ मुश्किल फैसले भी लेने पड़े – बड़े टूर्नामेंट्स में ऐसा ही होता है।”
नागेंद्र नाथ त्रिपाठी बने भाजपा के राष्ट्रीय संगठक
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने सांगठनिक ढांचे को मजबूती प्रदान करने के लिए नागेंद्र नाथ त्रिपाठी को पार्टी का राष्ट्रीय संगठक (वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क) नियुक्त किया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने सोमवार को विज्ञप्ति जारी कर बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने त्रिपाठी को भारतीय जनता पार्टी का […] The post नागेंद्र नाथ त्रिपाठी बने भाजपा के राष्ट्रीय संगठक appeared first on Sabguru News .
आईपीएल फाइनल देखते समय लोहे की रेलिंग गिरने से एक प्रवासी मजदूर की मौत, 48 घायल
चेन्नई। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के नंदंबक्कम में निर्माण स्थल पर आईपीएल फाइनल देखते समय सीढ़ियों की लोहे की रेलिंग गिरने से एक प्रवासी मजदूर की मौत हो गई और 48 अन्य घायल हो गए। यह घटना तब हुई जब सैकड़ों मजदूर अहमदाबाद में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और गुजरात टाइटन्स के बीच आईपीएल का फाइनल […] The post आईपीएल फाइनल देखते समय लोहे की रेलिंग गिरने से एक प्रवासी मजदूर की मौत, 48 घायल appeared first on Sabguru News .
कोटपूतली में अवैध खनन के विरोध में धरना दे रहे ग्रामीणों पर गोलीबारी, 5 घायल
अलवर। राजस्थान में कोटपूतली बहरोड़ जिले के अजीतपुरा-कुजेटा गांव में अवैध खनन के विरोध में चल रहे धरने के दौरान सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब धरनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों पर कथित तौर पर खनन माफियाओं ने गोलीबारी कर दी, जिससे करीब छह लोग घायल हो गए। घटना में पांच ग्रामीणों को गोली […] The post कोटपूतली में अवैध खनन के विरोध में धरना दे रहे ग्रामीणों पर गोलीबारी, 5 घायल appeared first on Sabguru News .
Driving License New Rules: आज से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का नियम बदला, RTO जाए बिना ऐसे मिलेगा DL
अगर आप नया ड्राइविंग लाइसेंस (DL) बनवाने की तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। अब कई मामलों में लोगों को ड्राइविंग टेस्ट के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नए नियमों के तहत सरकार से मान्यता प्राप्त निजी ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर भी ड्राइविंग टेस्ट आयोजित कर सकेंगे। इन संस्थानों में प्रशिक्षण लेने और टेस्ट पास करने वाले आवेदकों को प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा, जिसके आधार पर ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त किया जा सकेगा। ALSO READ: सूर्या हत्याकांड पर CM योगी की चेतावनी, दोस्ती की आड़ में छुरेबाजी स्वीकार नहीं, नालायक औलादों को समझाना जरूरी, सामने खरदूषण तो शस्त्र उठाना होगा क्या है नया नियम? सरकार द्वारा अधिकृत निजी ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर ड्राइविंग टेस्ट ले सकेंगे। टेस्ट पास करने वाले उम्मीदवारों को ट्रेनिंग सर्टिफिकेट दिया जाएगा। इस सर्टिफिकेट को ऑनलाइन अपलोड कर ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया जा सकेगा। कई मामलों में आरटीओ में अलग से ड्राइविंग टेस्ट देने की आवश्यकता नहीं होगी। ALSO READ: Kalita Majhi : कौन हैं कलिता माझी, कभी 4,000 रुपए प्रतिमाह में घरों में करती थीं काम, अब बंगाल में बनीं मंत्री, पढ़िए संघर्ष, मेहनत और राजनीतिक समर्पण की पूरी कहानी लाइसेंस के लिए कैसे करें आवेदन? सारथी परिवहन पोर्टल पर जाएं। ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें। जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। मान्यता प्राप्त ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर से प्रशिक्षण लें। टेस्ट पास करने के बाद प्राप्त सर्टिफिकेट अपलोड करें। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने पर ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया जाएगा। ALSO READ: Flex Fuel Vehicle : पेट्रोल की टेंशन खत्म, 3 जून को Hero की एथेनॉल बाइक और 4 जून को Maruti की E100 कार लॉन्च, जानिए क्या होंगी खूबियां आम लोगों को क्या होगा फायदा? आरटीओ में भीड़ और लंबी प्रतीक्षा से राहत मिलेगी। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया अधिक सरल और तेज होगी। प्रशिक्षित ड्राइवरों की संख्या बढ़ेगी, जिससे सड़क सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों को सुविधा मिलेगी। किन बातों का रखें ध्यान? केवल सरकार द्वारा अधिकृत और मान्यता प्राप्त ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटरों का ही चयन करें। आवेदन करने से पहले संबंधित राज्य के परिवहन विभाग की वेबसाइट या सारथी पोर्टल पर नवीनतम दिशा-निर्देश जरूर जांच लें। Edited by : Sudhir Sharma
वाणिज्यिक एलपीजी सिलिंडर 42 रुपए महंगा
नई दिल्ली। देशभर में वाणिज्यिक रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडरों की कीमतों में सोमवार को एक बार फिर बढ़ोतरी की गई। इससे होटल, रेस्तरां, कैटरिंग सेवाओं और एलपीजी पर निर्भर अन्य व्यवसायों की परिचालन लागत बढ़ने की आशंका है। दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 42 रुपए बढ़ाकर 3,113.50 रुपए कर […] The post वाणिज्यिक एलपीजी सिलिंडर 42 रुपए महंगा appeared first on Sabguru News .
Bada Mangal Remedies on 2nd June 2026: साल 2026 में 2 जून, दिन मंगलवार को ज्येष्ठ माह का पांचवां बड़ा मंगल मनाया जा रहा है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, यह ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) का पांचवां बड़ा मंगल है, जो भगवान विष्णु और हनुमान जी की संयुक्त उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस बार यह अधिक ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर पड़ रहा है। साथ ही हिंदू ज्योतिष में ग्रहों की चाल और उनका प्रभाव हमारे जीवन पर गहरा असर डालता है। मंगल ग्रह को क्रोध, ऊर्जा, साहस और साहसिक निर्णयों का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 में आने वाला यह 5वां बड़ा मंगल विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस समयावधि में आप हनुमानजी की उपासना करके जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं... ALSO READ: Bada Mangal 2026: बड़ा मंगल: नवाबों के शहर से कैसे शुरू हुई बजरंगबली की ये खास परंपरा, पढ़ें गौरव गाथा आइए इस लेख में हम 12 राशियों के लिए विशेष उपाय के बारे में जानेंगे... पांचवां बड़ा मंगल (2 जून 2026): 12 राशियों के उपाय मेष राशि हनुमान जी को लाल सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें। “ॐ हनुमते नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। वृषभ राशि बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं और जरूरतमंदों को मीठा दान करें। मिथुन राशि हनुमान चालीसा का 11 बार पाठ करें। इससे मानसिक तनाव कम होने की मान्यता है। कर्क राशि हनुमान मंदिर में नारियल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएं। सिंह राशि लाल वस्त्र और गुड़ का दान करें। रुके हुए कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है। ALSO READ: Bada Mangal Dates: ज्येष्ठ माह में कब-कब रहेगा बड़ा मंगल, जानें संपूर्ण तिथियां कन्या राशि बंदरों को केले और चने खिलाएं। इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होने की मान्यता है। तुला राशि सुंदरकांड का पाठ करें और गरीबों को भोजन कराएं। वृश्चिक राशि हनुमान जी को लाल फूल अर्पित करें और बजरंग बाण का पाठ करें। धनु राशि मंदिर में लाल ध्वजा चढ़ाएं और जरूरतमंदों को वस्त्र दान करें। मकर राशि पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा पढ़ें। कुंभ राशि काले तिल और सरसों के तेल का दान करें। इससे शनि दोष कम होने की मान्यता है। मीन राशि राम नाम का जाप करें और तुलसी में जल अर्पित करें। घर में सुख-शांति बनी रहती है। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: Bada Mangal 2026: बड़ा मंगल के दिनों में करें ये 10 विशेष कार्य, मिलेगा रामदूत हनुमान जी का आशीर्वाद
IPL 2026 का चैंम्पियन बनने के बाद अनुष्का ने लुटाया विराट कोहली पर प्यार, ट्रॉफी थाम पति को किया किस
इंडियन प्रीमियर लीग 2026 का खिताबी मुकाबला इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने गुजरात टाइटंस को 5 विकेट से हराकर लगातार दूसरी बार आईपीएल ट्रॉफी पर कब्जा किया है। विराट कोहली इस खिताबी जीत के सबसे बड़े हीरो साबित हुए। कोहली ने महज 25 गेंदों में आईपीएल फाइनल इतिहास की अपनी सबसे तेज फिफ्टी ठोक दी। उन्होंने 42 गेंदों का सामना करते हुए 9 चौकों और 3 गगनचुंबी छक्कों की मदद से 75 रनों की नाबाद पारी खेली। इस पूरे मुकाबले के दौरान विराट कोहली की पत्नी और बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा स्टैंड्स में मौजूद थीं। मैच के दौरान वह हर एक गेंद पर काफी नर्वस और दुआएं मांगती नजर आईं, लेकिन जैसे ही विराट ने विजयी छक्का लगाया, अनुष्का खुशी से झूम उठीं। उनके जश्न मनाने के कई वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहे हैं। A post shared by AnushkaSharma1588 (@anushkasharma) अनुष्का शर्मा ने इंस्टाग्राम पर विराट कोहली के साथ एक बेहद खूबसूरत और दिल छू लेने वाली तस्वीर भी साझा की। इस तस्वीर में अनुष्का, विराट के माथे पर 'फोरहेड किस' करती नजर आ रही हैं, जबकि विराट के हाथों में आईपीएल की चमचमाती ट्रॉफी है और अनुष्का ने उनका हाथ थाम रखा है। अनुष्का ने इस पोस्ट के कैप्शन में किसी शब्द का इस्तेमाल न करते हुए सिर्फ एक पीस साइन, रेड हार्ट और हाथ जोड़ने वाले इमोजी पोस्ट किए, जो यह साफ बयां करता है कि उनके लिए यह पल शब्दों से परे है। ALSO READ: व्हाइट सूट और नीले दुपट्टे में पश्मीना रोशन का सादगी भरा अंदाज, जीता फैंस का दिल अनुष्का शर्मा की इस पोस्ट पर लाइक्स और कमेंट्स की बाढ़ आ गई है। महज कुछ ही मिनटों में इस पोस्ट को मिलियन से ज्यादा लाइक्स मिल गए। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, 'हर अच्छे और बुरे वक्त में, वह हमेशा विराट के साथ खड़ी रहीं।' एक अन्य ने लिखा, 'अनुष्का तो असली ट्रॉफी (विराट) को चूम रही हैं।' इसके अलावा अनुष्का ने अपनी इंस्टा स्टोरी पर विराट कोहली की एक और फोटो शेयर की है, जिसमें कोहली एक खास टी-शर्ट पहने नजर आ रहे हैं। इस टी-शर्ट पर लिखा है— One time felt nice, we did it twice (एक बार अच्छा लगा, हमने इसे दोबारा कर दिखाया), जो RCB की लगातार दूसरी खिताबी जीत की ओर इशारा करता है। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की लव स्टोरी एक एड शूट के दौरान शुरू हुई थी, जिसके बाद दिसंबर 2017 में दोनों ने इटली में एक बेहद निजी समारोह में शादी रचाई थी। साल 2021 में इस कपल के घर बेटी वामिका और साल 2024 में बेटे अकाय का जन्म हुआ। अपनी पर्सनल लाइफ को प्राइवेट रखने के लिए मशहूर यह कपल अब ज्यादातर यूके में रहता है और वहीं अपने बच्चों की परवरिश कर रहा है। अनुष्का शर्मा साल 2018 में आई फिल्म 'जीरो' के बाद से बड़े पर्दे से दूर हैं, लेकिन वह हर बड़े मौके पर विराट की सबसे बड़ी ताकत बनकर खड़ी नजर आती हैं।
बल्ला है गेंद पर भारी, सचिन ने IPL में संतुलित खेल के लिए दिए यह सुझाव
इंडियन प्रीमियर लीग में जान फूंकने के लिए दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। सचिन तेंदुलकर ने इंडियन प्रीमियर लीग IPL में बल्ले और गेंद के बीच संतुलन बनाने के लिए विवादास्पद इम्पैक्ट प्लेयर नियम को खत्म करने की वकालत की और साथ ही कुछ अन्य बदलाव करने के लिए भी सुझाव दिए। आईपीएल में इंपैक्ट प्लेयर का नियम 2023 में लागू किया गया था। इसके तहत टीम अंतिम एकादश में शामिल किसी खिलाड़ी को पहले से घोषित किए गए पांच संभावित खिलाड़ियों में से किसी एक से बदल सकती हैं। तेंदुलकर ने एक अग्रणी क्रिकेट वेबसाइट द्वारा आयोजित पुरस्कार समारोह में कहा, ‘‘मेरी निजी राय है कि कुछ ऐसी बातें हैं जिनसे मुझे लगता है कि ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ का नियम खत्म कर देना चाहिए।’’उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि टी20 प्रारूप में आपको केवल 20 ओवर खेलने होते हैं। फिर आप उस लाइन-अप में एक और बल्लेबाज जोड़ देते हैं। जहां गेंदबाजों को पहले से ही चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, वहां मुझे असंतुलन नजर आता है।’’ IPL में पिछले कुछ सत्र में खेल का पलड़ा काफी हद तक बल्लेबाजों की पक्ष में झुक गया है और तेंदुलकर का मानना है कि इस नियम ने बल्ले और गेंद के बीच पहले से ही मौजूद असमानता को और भी बिगाड़ दिया है।इस नियम की आलोचना कई प्रमुख खिलाड़ियों ने भी की है, जिनमें भारतीय कप्तान शुभमन गिल और पूर्व कप्तान रोहित शर्मा भी शामिल हैं। उनका तर्क है कि यह नियम खेल से कौशल को खत्म कर देता है और ऑलराउंडर के महत्व को कम करता है। तेंदुलकर ने मौजूदा बल्लेबाजी पावरप्ले के साथ-साथ गेंदबाजी पावरप्ले को भी शुरू करने की वकालत की।उन्होंने कहा, ‘‘पहले छह ओवर में पावरप्ले लागू रहता है जिसमें केवल दो फील्डर ही 30 गज के दायरे से बाहर रहते हैं। मेरा मानना है कि पहले चार ओवर बल्लेबाजों के पावरप्ले हों और उनमें भी यही फील्डिंग प्रतिबंध लागू हों।’’ तेंदुलकर ने कहा, ‘‘इसके बाद पावरप्ले के शेष दो ओवर फील्डिंग कप्तान अपनी इच्छानुसार ले सकते हैं। इन लगातार दो ओवरों में खेल के किसी भी चरण में रिंग के बाहर एक अतिरिक्त फील्डर तैनात किया जा सकता है।’’ एक गेंदबाज करे 5 ओवर इस महान बल्लेबाज ने प्रत्येक टीम में एक गेंदबाज के गेंदबाजी कोटा को चार ओवर से बढ़ाकर पांच करने का भी प्रस्ताव रखा।उन्होंने कहा, ‘‘एक गेंदबाज को पांच ओवर फेंकने की अनुमति दी जानी चाहिए, क्योंकि आमतौर पर टीम का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज ही पांचवां ओवर फेंकेगा।’’तेंदुलकर ने सवालिया अंदाज में कहा, ‘‘क्या आप नहीं चाहेंगे कि सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज और अधिक गेंदबाजी करे। शीर्ष बल्लेबाज कभी-कभी 20 ओवर तक बल्लेबाजी करते हैं। तो फिर सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज को पांच ओवर गेंदबाजी क्यों नहीं करनी चाहिए।’’
पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल का हुआ विस्तार, 35 मंत्रियों ने ली शपथ
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की शुभेन्दु अधिकारी सरकार ने सत्ता संभालने के एक महीने के भीतर सोमवार को अपना पहला बड़ा कैबिनेट विस्तार किया । इसमें 35 नये मंत्रियों को शामिल किया गया है और इसके साथ ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी समेत कुल मंत्रियों की संख्या 41 हो गई है। इससे पहले मुख्यमंत्री के साथ पांच […] The post पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल का हुआ विस्तार, 35 मंत्रियों ने ली शपथ appeared first on Sabguru News .
IPL 2026 : वैभव सूर्यवंशी ने जीते ऑरेंज कैप, एमवीपी और इमर्जिंग प्लेयर पुरस्कार
अहमदाबाद। राजस्थान रॉयल्स के सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 के एमवीपी और इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट के पुरस्कार से नवाजा गया। इसके साथ ही वह एक ही सीजन में यह दोनों पुरस्कार जीतने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। इसके अलावा 16 मुक़ाबलों में 776 रन बनाने के साथ ही […] The post IPL 2026 : वैभव सूर्यवंशी ने जीते ऑरेंज कैप, एमवीपी और इमर्जिंग प्लेयर पुरस्कार appeared first on Sabguru News .
साल की सबसे मच-अवेटेड फिल्मों में से एक 'गवर्नर' में मनोज बाजपेयी और अदा शर्मा लीड रोल में नजर आने वाले हैं, और इस फिल्म ने अभी से दर्शकों के बीच एक जबरदस्त एक्साइटमेंट पैदा कर दी है। यह फिल्म भारत के इकोनॉमिक इतिहास के एक बेहद जरूरी लेकिन अनसुने चैप्टर को पर्दे पर दिखाने जा रही है। फिल्म में 1990 के दशक के उस बड़े और उथल-पुथल भरे फाइनेंशियल क्राइसिस (आर्थिक संकट) को बहुत ही ग्रिपिंग और एंगेजिंग तरीके से बड़े पर्दे पर लाया गया है। ट्रेलर में मनोज बाजपेयी की कमाल की परफॉर्मेंस ने तो सबका दिल जीत ही लिया है, लेकिन अब यह साफ हो गया है कि उनका यह रोल असल में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के पूर्व गवर्नर एस. वेंकिटरमणन से इंस्पायर्ड है। ALSO READ: थाई-हाई स्लिट आउटफिट में शिल्पा शेट्टी का कातिलाना अंदाज, बोल्ड अदाओं से इंटरनेट पर मचाया तहलका भारतीय सिविल सर्वेंट और जाने-माने इकोनॉमिस्ट एस. वेंकिटरमणन ने दिसंबर 1990 से दिसंबर 1992 के बीच RBI के 18वें गवर्नर के रूप में देश की कमान संभाली थी। उन्होंने उस बेहद नाजुक दौर में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी, जब भारत अभूतपूर्व आर्थिक दबावों और बड़े बदलावों के दौर से गुजर रहा था। एस. वेंकिटरमणन की विरासत भारत के 1991 के आर्थिक संकट से गहराई से जुड़ी हुई है। जब देश एक गंभीर 'बैलेंस ऑफ पेमेंट्स क्राइसिस' (भुगतान संतुलन संकट) से जूझ रहा था और देश का विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व) लगभग खत्म होने की कगार पर था, तब उन्होंने भारत के आर्थिक इतिहास के इस सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से देश को बाहर निकालने में एक ऐतिहासिक रोल निभाया था। दशकों की प्रशासनिक सेवा और मजबूत एकेडमिक बैकग्राउंड वाले इस सीनियर आईएएस अधिकारी ने इस बड़ी जिम्मेदारी को संभालने से पहले राज्य और केंद्र सरकारों में कई अहम पदों पर काम किया था। उस दौर में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व) इस कदर गिर चुका था कि देश के पास सिर्फ कुछ हफ्तों के इम्पोर्ट (आयात) के लिए ही पैसे बचे थे। इस अभूतपूर्व इमरजेंसी का सामना करते हुए, एस. वेंकिटरमणन ने एक बेहद विवादास्पद लेकिन बेहद जरूरी कदम उठाने का फैसला किया, उन्होंने इमरजेंसी विदेशी लोन लेने के लिए भारत के सोने के भंडार को गिरवी रखने की मंजूरी दे दी। उनके नेतृत्व में, लगभग 405 मिलियन डॉलर जुटाने के लिए सोने को विदेशों में भेजा गया और इंटरनेशनल बैंकों के पास गिरवी रखा गया। इस साहसिक फैसले ने भारत को डिफॉल्टर होने से बचा लिया और नीति निर्माताओं को बड़े आर्थिक सुधार (इकोनॉमिक रिफॉर्म्स) लागू करने के लिए जरूरी समय दे दिया। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें आज इस फैसले को मॉडर्न इंडियन इकोनॉमिक हिस्ट्री का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जाता है। इस महान सिविल सर्वेंट का 18 नवंबर, 2023 को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। एस. वेंकिटरमणन से इंस्पायर्ड किरदार निभाने जा रहे मनोज बाजपेयी ने उन्हें एक ऐसा विजनरी बताया, जिसने उस समय इतना बड़ा रिस्क लिया जब देश का भविष्य पूरी तरह अनिश्चित था। एक्टर के मुताबिक, पूर्व RBI गवर्नर को इस रोल के लिए कोई आम पसंद नहीं माना जा रहा था, बल्कि उन्हें एक नेशनल इमरजेंसी के दौरान इस जिम्मेदारी के लिए लाया गया था। मनोज बाजपेयी ने कहा, वेंकिटरमणन की लीक से हटकर सोचने की क्षमता और मुश्किल फैसले लेने की हिम्मत ने ही भारत को दिवालिया होने से बचाया था। इस फिल्म का मकसद एक ऐसे इंसान की कहानी को सामने लाना है, जिसका भारत को आर्थिक रूप से जिंदा रखने में इतना बड़ा योगदान होने के बावजूद, आम जनता उनके बारे में ज्यादा नहीं जानती। सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म 'गवर्नर' 1990 के दशक के उस आर्थिक संकट (इकोनॉमिक कोलैप्स) की गहराई में ले जाती है, जिसने पूरे भारत को हिलाकर रख दिया था। सस्पेंस, पावर और पॉलिटिकल ड्रामे से भरपूर इस फिल्म का ट्रेलर दर्शकों को उस दौर के क्राइसिस और देश के सर्वाइवल की एक बेहद रोमांचक झलक दिखाता है। नेशनल अवार्ड-विनिंग एक्टर मनोज बाजपेयी फिल्म में गवर्नर के लीड रोल में सेंटर स्टेज संभाल रहे हैं, और उनका ऐसा खूंखार और कमांडिंग स्क्रीन प्रेजेंस पहले कभी नहीं देखा गया है। दमदार और इम्पैक्टफुल डायलॉग्स से सजी इस बेमिसाल कहानी को सनशाइन पिक्चर्स लेकर आ रहा है। इस फिल्म को चिन्मय मांडलेकर ने डायरेक्ट किया है और इसके प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह हैं। फिल्म के को-प्रोड्यूसर आशिन ए. शाह हैं, जबकि इसकी स्क्रिप्ट सुवेंदु भट्टाचार्य, सौरभ भारत, रवि असरानी और विपुल अमृतलाल शाह ने मिलकर लिखी है। फिल्म के खूबसूरत गाने महान गीतकार जावेद अख्तर ने लिखे हैं और इसका म्यूजिक अमित त्रिवेदी ने कंपोज किया है।यह फिल्म 12 जून 2026 को दुनिया भर के थिएटर्स में रिलीज के लिए पूरी तरह तैयार है।
स्वरों की मधुर साधिका सुमन कल्याणपुर : छह दशक तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर किया राज
मुंबई। हिंदी फिल्म संगीत के स्वर्णिम दौर की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर ने अपनी मधुर, कोमल और भावपूर्ण आवाज से भारतीय संगीत जगत में विशिष्ट पहचान बनाई है। लगभग छह दशक लंबे अपने संगीत सफर में उन्होंने हजारों गीतों को स्वर देकर श्रोताओं के दिलों में अमिट स्थान बनाया। सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 […] The post स्वरों की मधुर साधिका सुमन कल्याणपुर : छह दशक तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर किया राज appeared first on Sabguru News .
अलवर में अवैध निर्माण रुकवाने गए पटवारी पर हमला
अलवर। राजस्थान में अलवर जिले के गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र में गन्दीका गांव में सरकारी जमीन पर चल रहे अवैध निर्माण को रुकवाने गए पटवारी से मारपीट करने के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने सोमवार को बताया कि बारोली में पटवारी […] The post अलवर में अवैध निर्माण रुकवाने गए पटवारी पर हमला appeared first on Sabguru News .
भीलवाड़ा में जुए के अड्डे पर पुलिस की दबिश, लाखों रुपए बरामद
भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के मांडल थाना क्षेत्र में रविवार देर रात पुलिस और जिला विशेष टीम (डीएसटी) ने एक संयुक्त अभियान के तहत जुए के बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करके 16 से अधिक जुआरियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस सूत्रों ने सोमवार को बताया कि धुवाला-लागरों का खेड़ा मार्ग पर जुआ संचालित होने […] The post भीलवाड़ा में जुए के अड्डे पर पुलिस की दबिश, लाखों रुपए बरामद appeared first on Sabguru News .
पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की उम्र में निधन
मुंबई। भारतीय संगीत जगत की दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार को निधन हो गया। उनकी उम्र 89 वर्ष थी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि सुमन कल्याणपुर के निधन से भारतीय संगीत जगत की एक मधुर, सुरमयी और भावपूर्ण आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई। उन्होंने कहा कि छह दशकों […] The post पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की उम्र में निधन appeared first on Sabguru News .
चीन की परमाणु प्रलय की तैयारी? रेगिस्तान में बिछाया मिसाइलों का खौफनाक जाल, सीधे अमेरिका पर निशाना!
China Nuclear Expansion: चीन के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर वैश्विक चिंता बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters द्वारा विश्लेषित हालिया उपग्रह तस्वीरों में चीन के उत्तर-पश्चिमी रेगिस्तानी इलाकों में तेजी से विकसित हो रहे विशाल सैन्य ढांचे का खुलासा हुआ है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल मिसाइल तैनाती का विस्तार नहीं, बल्कि चीन की परमाणु युद्ध रणनीति में बड़ा बदलाव है। तस्वीरों के अनुसार, चीन अपने परमाणु मिसाइल साइलो के आसपास लॉन्च पैड, भूमिगत बंकर, संचार केंद्र, हवाई रक्षा तंत्र और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध सुविधाओं का विशाल नेटवर्क तैयार कर रहा है। ये वही साइलो हैं जिनमें चीन की लंबी दूरी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM) तैनात की जाती हैं, जो अमेरिका के किसी भी शहर तक मार करने में सक्षम हैं। उल्लेखनीय है कि हाल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के दौरान दोनों के बीच काफी तल्खियां नजर आई थीं। ऐसे में चीन की इस योजना ने अमेरिका के भी कान खड़े कर दिए हैं। 80 से अधिक लॉन्च पैड, हजारों वर्ग किलोमीटर में फैलता नेटवर्क उपग्रह तस्वीरों में 80 से अधिक ऐसे लॉन्च पैड दिखाई दिए हैं जिनका इस्तेमाल मोबाइल मिसाइल लॉन्चर, एयर डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यूनिट और कमांड सेंटर के रूप में किया जा सकता है। निर्माण का दायरा इतना व्यापक है कि यह पूरे रेगिस्तानी क्षेत्र में हजारों वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ है। हवाई स्थित रणनीतिक थिंक टैंक Pacific Forum के सहयोगी फेलो अलेक्जेंडर नील के अनुसार, “चीन केवल नए साइलो नहीं बना रहा, बल्कि वह अपने पूरे रणनीतिक परमाणु ढांचे को बहुस्तरीय सुरक्षा कवच दे रहा है। यह उसकी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता में भारी विस्तार और विविधीकरण का संकेत है।” क्या है ‘सेकंड स्ट्राइक’ रणनीति? परमाणु रणनीति में “Second Strike Capability” बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसका अर्थ है—यदि किसी देश पर पहले परमाणु हमला हो जाए, तब भी उसके पास इतना सैन्य ढांचा बचा रहे कि वह जवाबी परमाणु हमला कर सके। विश्लेषकों का मानना है कि चीन अब अपनी इसी क्षमता को लगभग अजेय बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यदि उसके कुछ साइलो नष्ट भी हो जाएं, तब भी मोबाइल लॉन्चर, वैकल्पिक कमांड सेंटर और भूमिगत नेटवर्क उसकी जवाबी कार्रवाई सुनिश्चित कर सकते हैं। चीन की ‘न्यूनतम लेकिन विश्वसनीय’ परमाणु नीति चीन लंबे समय से “Minimum but Credible Nuclear Deterrence” यानी “न्यूनतम लेकिन विश्वसनीय परमाणु प्रतिरोध” की नीति का दावा करता रहा है। बीजिंग आधिकारिक तौर पर ‘No First Use’ नीति की भी बात करता है, जिसके तहत वह पहले परमाणु हमला न करने का दावा करता है। लेकिन हाल के वर्षों में चीन की परमाणु गतिविधियों की रफ्तार ने पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ा दी है। शिनजियांग और गांसु प्रांत में तेजी से बन रहे साइलो नेटवर्क को विशेषज्ञ PLA (Peoples Liberation Army) के जमीनी परमाणु बलों का भविष्य मान रहे हैं। ताइवान तनाव और अमेरिका-चीन परमाणु प्रतिस्पर्धा यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। पश्चिमी रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में ताइवान को लेकर सैन्य टकराव होता है, तो चीन परमाणु प्रतिरोध की शक्ति का इस्तेमाल बाहरी हस्तक्षेप रोकने के लिए कर सकता है। कुछ पश्चिमी राजनयिकों का मानना है कि बीजिंग अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं रहना चाहता, बल्कि वह अमेरिका के बराबर वैश्विक सामरिक शक्ति बनने की दिशा में बढ़ रहा है। एशिया-प्रशांत में बदलता सामरिक संतुलन विशेषज्ञों के अनुसार, चीन का यह परमाणु विस्तार केवल सैन्य आधुनिकीकरण नहीं है, बल्कि यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र के सामरिक संतुलन को बदलने वाला कदम हो सकता है। इससे अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की सुरक्षा रणनीतियों पर भी असर पड़ सकता है। यदि यह निर्माण इसी गति से जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में दुनिया एक नए परमाणु संतुलन और संभवतः नए शीत युद्ध जैसी स्थिति की ओर बढ़ सकती है। Edited by: Vrijendra Singh Jhala सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल मिसाइल तैनाती का विस्तार नहीं, बल्कि चीन की परमाणु युद्ध रणनीति में बड़ा बदलाव है। तस्वीरों के अनुसार, चीन अपने परमाणु मिसाइल साइलो के आसपास लॉन्च पैड, भूमिगत बंकर, संचार केंद्र, हवाई रक्षा तंत्र और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध सुविधाओं का विशाल नेटवर्क तैयार कर रहा है। ये वही साइलो हैं जिनमें चीन की लंबी दूरी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM) तैनात की जाती हैं, जो अमेरिका के किसी भी शहर तक मार करने में सक्षम हैं। उल्लेखनीय है कि हाल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के दौरान दोनों के बीच काफी तल्खियां नजर आई थीं। ऐसे में चीन की इस योजना ने अमेरिका के भी कान खड़े कर दिए हैं। 80 से अधिक लॉन्च पैड, हजारों वर्ग किलोमीटर में फैलता नेटवर्क उपग्रह तस्वीरों में 80 से अधिक ऐसे लॉन्च पैड दिखाई दिए हैं जिनका इस्तेमाल मोबाइल मिसाइल लॉन्चर, एयर डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यूनिट और कमांड सेंटर के रूप में किया जा सकता है। निर्माण का दायरा इतना व्यापक है कि यह पूरे रेगिस्तानी क्षेत्र में हजारों वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ है। हवाई स्थित रणनीतिक थिंक टैंक Pacific Forum के सहयोगी फेलो अलेक्जेंडर नील के अनुसार, “चीन केवल नए साइलो नहीं बना रहा, बल्कि वह अपने पूरे रणनीतिक परमाणु ढांचे को बहुस्तरीय सुरक्षा कवच दे रहा है। यह उसकी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता में भारी विस्तार और विविधीकरण का संकेत है।” क्या है ‘सेकंड स्ट्राइक’ रणनीति? परमाणु रणनीति में “Second Strike Capability” बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसका अर्थ है—यदि किसी देश पर पहले परमाणु हमला हो जाए, तब भी उसके पास इतना सैन्य ढांचा बचा रहे कि वह जवाबी परमाणु हमला कर सके। विश्लेषकों का मानना है कि चीन अब अपनी इसी क्षमता को लगभग अजेय बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यदि उसके कुछ साइलो नष्ट भी हो जाएं, तब भी मोबाइल लॉन्चर, वैकल्पिक कमांड सेंटर और भूमिगत नेटवर्क उसकी जवाबी कार्रवाई सुनिश्चित कर सकते हैं। चीन की ‘न्यूनतम लेकिन विश्वसनीय’ परमाणु नीति चीन लंबे समय से “Minimum but Credible Nuclear Deterrence” यानी “न्यूनतम लेकिन विश्वसनीय परमाणु प्रतिरोध” की नीति का दावा करता रहा है। बीजिंग आधिकारिक तौर पर ‘No First Use’ नीति की भी बात करता है, जिसके तहत वह पहले परमाणु हमला न करने का दावा करता है। लेकिन हाल के वर्षों में चीन की परमाणु गतिविधियों की रफ्तार ने पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ा दी है। शिनजियांग और गांसु प्रांत में तेजी से बन रहे साइलो नेटवर्क को विशेषज्ञ PLA (Peoples Liberation Army) के जमीनी परमाणु बलों का भविष्य मान रहे हैं। ताइवान तनाव और अमेरिका-चीन परमाणु प्रतिस्पर्धा यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। पश्चिमी रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में ताइवान को लेकर सैन्य टकराव होता है, तो चीन परमाणु प्रतिरोध की शक्ति का इस्तेमाल बाहरी हस्तक्षेप रोकने के लिए कर सकता है। कुछ पश्चिमी राजनयिकों का मानना है कि बीजिंग अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं रहना चाहता, बल्कि वह अमेरिका के बराबर वैश्विक सामरिक शक्ति बनने की दिशा में बढ़ रहा है। एशिया-प्रशांत में बदलता सामरिक संतुलन विशेषज्ञों के अनुसार, चीन का यह परमाणु विस्तार केवल सैन्य आधुनिकीकरण नहीं है, बल्कि यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र के सामरिक संतुलन को बदलने वाला कदम हो सकता है। इससे अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की सुरक्षा रणनीतियों पर भी असर पड़ सकता है। यदि यह निर्माण इसी गति से जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में दुनिया एक नए परमाणु संतुलन और संभवतः नए शीत युद्ध जैसी स्थिति की ओर बढ़ सकती है। Edited by: Vrijendra Singh Jhala
RCB नहीं निकालेगा विजय जूलूस, कप्तान पाटीदार ने पिछले साल के मृतकों को समर्पित की खिताबी जीत
रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने इस साल विजय जूलूस नहीं निकालने का फैसला किया। कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार को शपथ लेने वाले हैं। ऐसे में प्रशासनिक व्यवस्था को बनाए रखने और पिछली साल की दुखद दुर्घटना को याद कर यह फैसला लिया गया है। इस बीच रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के कप्तान रजत पाटीदार ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) में अपनी दूसरी ट्रॉफी को पिछले साल भगदड़ में मारे गए प्रशंसकों को समर्पित की। पिछले साल जब आरसीबी ने अपना पहला आईपीएल खिताब जीता था तो तब बेंगलुरु में जल्दबाजी में आयोजित किए गए विजय समारोह के दौरान भगदड़ मच गई थी। इससे एम चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर 11 प्रशंसकों की मौत हो गई थी। पाटीदार ने रविवार को गुजरात टाइटंस के खिलाफ फाइनल में पांच विकेट की जीत के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘निश्चित तौर पर बहुत बुरा लगता है कि खिताब जीतने के बाद आपने अपने प्रशंसकों को खो दिया। सिर्फ़ प्रशंसक ही नहीं, वे तो परिवार के सदस्य थे।’’ उन्होंने कहा,‘‘मैं यह ट्रॉफी उन्हें समर्पित करना चाहता हूं। बस इतना ही। उस भावना को व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।’’ पहली बार RCB ने IPL की ट्राफी अपने नाम की थी पिछले साल , उस Victory parade मे व्यवस्था चरमरा गई थी इसमें कई लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा था इस बार भी RCB प्रबल दावेदार है, उसके जश्न को लेकर @DCPSouthBCP ने advisory जारी की है। pic.twitter.com/TK9Glv6fNX — chandresh Gupta (@chandresh1912) May 31, 2026 उस दुखद घटनाक्रम के बाद चिन्नास्वामी स्टेडियम में लगभग आठ महीने तक शीर्ष स्तर के क्रिकेट मैचों का आयोजन नहीं किया गया।इन प्रशंसकों के सम्मान में आरसीबी के खिलाड़ियों ने मैच के दिन अभ्यास सत्र के दौरान 11 नंबर की जर्सी पहनी थी। यही नहीं उनके सम्मान में चिन्नास्वामी स्टेडियम में 11 सीट स्थायी तौर पर खाली रखी गई थी।
थाई-हाई स्लिट आउटफिट में शिल्पा शेट्टी का कातिलाना अंदाज, बोल्ड अदाओं से इंटरनेट पर मचाया तहलका
बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी अपने बेहतरीन फैशन सेंस, कमाल की फिटनेस और स्टाइल स्टेटमेंट के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी कुछ बेहद हॉट और ग्लैमरस तस्वीरें शेयर की हैं, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। तस्वीरों में शिल्पा शेट्टी ने एक बेहद अट्रैक्टिव व्हाइट कलर की वेस्टर्न ड्रेस पहने नजर आ रही हैं। यह एक स्लीवलेस, बोट-नेकलाइन वाली ड्रेस है, जिसमें वेस्टलाइन पर शानदार पेपलम स्टाइल रफ़ल डिज़ाइन दिया गया है। इस आउटफिट की सबसे बड़ी यूएसपी इसका बोल्ड 'थाई-हाई स्लिट' है, जो शिल्पा के लंबे और टोंड लेग्स को बेहद खूबसूरती से फ्लॉन्ट कर रहा है। व्हाइट कलर की सादगी और ड्रेस का बोल्ड कट मिलकर उनके इस लुक को क्लासी के साथ-साथ बेहद सेक्सी बना रहे हैं। ALSO READ: व्हाइट सूट और नीले दुपट्टे में पश्मीना रोशन का सादगी भरा अंदाज, जीता फैंस का दिल शिल्पा शेट्टी तस्वीरों में एक से बढ़कर एक सिजलिंग और कॉन्फिडेंट पोज देती दिख रही हैं। कभी वह स्विमिंग पूल के किनारे लगे टेबलनुमा सनबेड पर लेटकर कैमरे की तरफ कातिलाना अंदाज में देख रही हैं, तो कभी काउच पर बैठकर अपनी टोंड बॉडी को फ्लॉन्ट कर रही हैं। अपने इस लुक को कम्प्लीट करने के लिए शिल्पा ने मिनिमल लेकिन बेहद अट्रैक्टिव स्टाइलिंग चुनी है। उन्होंने अपने बालों को हल्का कर्ल करके खुला रखा है, जो हवा में लहराते हुए उनके लुक में एक सेंसुअलिटी जोड़ रहे हैं। एक्सेसरीज की बात करें तो, शिल्पा ने कानों में बड़े और अट्रैक्टिव गोल्डन हूप इयररिंग्स पहने हैं, जो उनके चेहरे को परफेक्ट फ्रेम दे रहे हैं। इसके साथ ही कलाई में चौड़ा गोल्डन ब्रेसलेट और उंगलियों में स्टेटमेंट रिंग्स उनके लुक में एक रीगल और ग्लैमरस टच जोड़ रहे हैं। शिल्पा शेट्टी को देखकर उम्र का अंदाजा लगाना नामुमकिन है। इन तस्वीरों में उनका ग्लोइंग, ड्यूई और सटल मेकअप उनके नेचुरल फीचर्स को और निखार रहा है। न्यूड लिपस्टिक, स्मोकी आइज और परफेक्टली डिफाइंड आईब्रोज़ के साथ उनका फेशियल ग्लैम ऑन-पॉइंट है।
ज्योतिष शास्त्र के दृष्टिकोण से वर्ष 2026 की सबसे सनसनीखेज और महत्वपूर्ण खगोलीय घटना 2 जून 2026 को घटित होने जा रही है। ज्ञान, भाग्य, अध्यात्म, धन और संतान के परम कारक देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) अपने पुराने घर को छोड़कर अपनी सबसे प्रिय और उच्च राशि कर्क (Cancer) में प्रवेश कर रहे हैं। गुरु पूरे 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कर्क राशि में आ रहे हैं। चूंकि कर्क एक जल तत्व की राशि है और चंद्रमा इसके स्वामी हैं, इसलिए इस राशि में आते ही बृहस्पति अपने सबसे बलवान और चेष्टावान स्वरूप (Exalted State) में आ जाते हैं। गुरु का यह उच्च अवस्था में जाना पूरी दुनिया में एक बड़े वैचारिक और आध्यात्मिक बदलाव का संकेत है। शिक्षा जगत, बैंकिंग सेक्टर, न्याय व्यवस्था और धार्मिक संस्थानों से जुड़े लोगों के लिए यह समय अभूतपूर्व प्रगति लेकर आएगा। ALSO READ: बृहस्पति अपनी उच्च की राशि कर्क में करेंगे प्रवेश, 4 राशियों के लिए विपरीत राजयोग विशेष रूप से मेष, मिथुन, कर्क और मीन राशि के जातकों के लिए यह गोचर जीवन की दिशा और दशा बदलने वाला 'टर्निंग पॉइंट' साबित हो सकता है। आइए बिना किसी तालिका (टेबल) के, अत्यंत विस्तार से जानते हैं कि इस महागोचर का सभी 12 राशियों के जीवन पर क्या गहरा प्रभाव पड़ने वाला है: मेष राशि (Aries) देवगुरु बृहस्पति आपकी राशि से चौथे भाव में गोचर करने जा रहे हैं, जिसे सुख, माता, भूमि और वाहन का घर माना जाता है। करियर और सामाजिक जीवन: इस अवधि में आपके कार्यक्षेत्र में जबरदस्त उछाल आएगा। नौकरीपेशा लोगों को मनचाहा ट्रांसफर या प्रमोशन मिल सकता है। समाज में आपका मान-सम्मान और रुतबा बढ़ेगा। पारिवारिक और आर्थिक जीवन: आपके पारिवारिक सुखों में भारी वृद्धि होने वाली है। लंबे समय से अटका हुआ नया घर खरीदने या नई गाड़ी लेने का सपना इस दौरान पूरा होगा। माता जी के स्वास्थ्य में चल रहा पुराना उतार-चढ़ाव पूरी तरह समाप्त होगा और उनके साथ आपके संबंध बेहद मधुर होंगे। मानसिक रूप से आप खुद को बहुत शांत और संतुष्ट महसूस करेंगे। वृषभ राशि (Taurus) बृहस्पति देव आपकी राशि से तीसरे भाव में प्रवेश करेंगे, जिसे पराक्रम, साहस, छोटे भाई-बहन और संचार (Communication) का भाव कहा जाता है। करियर और सामाजिक जीवन: आपकी निर्णय लेने की क्षमता और कार्यकुशलता में गजब का सुधार होगा। लेखन, पत्रकारिता, मार्केटिंग और कंसल्टेंसी के क्षेत्र से जुड़े लोगों को अपनी कला के दम पर बड़ी सफलता हाथ लगेगी। इस दौरान आपकी छोटी लेकिन बेहद लाभदायक व्यावसायिक यात्राएं होंगी। पारिवारिक और आर्थिक जीवन: आपके भीतर आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा रहेगा। छोटे भाई-बहनों के साथ यदि कोई मनमुटाव चल रहा था, तो वह समाप्त होगा और संकट के समय उनका पूरा सहयोग आपको मिलेगा। आपका झुकाव धार्मिक यात्राओं और परोपकार के कार्यों की तरफ बढ़ेगा। ALSO READ: बृहस्पति का इस वर्ष 2026 में 3 राशियों में होगा गोचर, किस राशि को क्या मिलेगा, कौन होगा परेशान मिथुन राशि (Gemini) मिथुन राशि के जातकों के लिए देवगुरु का यह गोचर उनके दूसरे भाव में होने जा रहा है, जिसे धन, पैतृक संपत्ति, परिवार और वाणी का स्थान माना जाता है। करियर और आर्थिक जीवन: आर्थिक मोर्चे पर यह समय आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यदि आपका पैसा कहीं लंबे समय से फंसा हुआ था या डूब चुका था, तो वह इस दौरान वापस मिल जाएगा। आय के नए स्रोत बनेंगे जिससे आपका बैंक बैलेंस तेजी से बढ़ेगा। व्यापारियों को निवेश से भारी मुनाफा होने के संकेत हैं। पारिवारिक और सामाजिक जीवन: आपकी वाणी में एक अद्भुत सौम्यता और आकर्षण पैदा होगा, जिससे लोग आपकी बातों से प्रभावित होकर आपके मुरीद हो जाएंगे। परिवार में चल रहे पुराने विवाद सुलझेंगे और घर में किसी मांगलिक या शुभ कार्य (जैसे विवाह या मुंडन) का आयोजन होने के प्रबल योग बनेंगे। ALSO READ: 10 जनवरी का 'महा बृहस्पति': ब्रह्मांड में होगा बड़ा बदलाव, इन 4 राशियों की खुलेगी किस्मत कर्क राशि (Cancer) कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय उनके जीवन का स्वर्णिम काल कहा जा सकता है, क्योंकि बृहस्पति आपकी ही राशि में यानी आपके पहले (लग्न) भाव में आ रहे हैं, जहाँ वे पूरी तरह उच्च के हो जाते हैं। व्यक्तिगत विकास और स्वास्थ्य: आपके व्यक्तित्व में एक अलग ही तेज और आकर्षण देखने को मिलेगा। आपकी बौद्धिक और तार्किक क्षमता इतनी मजबूत हो जाएगी कि आपके द्वारा लिए गए फैसले भविष्य में मील का पत्थर साबित होंगे। समाज के संभ्रांत और उच्च पदों पर बैठे लोगों से आपके संपर्क स्थापित होंगे। स्वास्थ्य से जुड़ी हर पुरानी समस्या से आपको निजात मिलेगी। पारिवारिक और वैवाहिक जीवन: वैवाहिक जीवन में यदि कड़वाहट या दूरियां आ गई थीं, तो वे प्यार और आपसी समझ में बदल जाएंगी। जीवनसाथी के भाग्य से भी आपको धन और करियर में लाभ मिलेगा। सिंह राशि (Leo) सिंह राशि के जातकों के लिए बृहस्पति देव का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में होने जा रहा है, जिसे व्यय (खर्च), विदेश और मोक्ष का भाव माना जाता है। करियर और आर्थिक जीवन: जो लोग बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) में काम कर रहे हैं या विदेश जाकर पढ़ाई या नौकरी करने का सपना देख रहे हैं, उनके लिए यह गोचर सफलता के द्वार खोलने वाला है। विदेशी व्यापार से आपको उम्मीद से बढ़कर लाभ होगा। हालांकि, इस दौरान आपके खर्चों में बढ़ोतरी होगी, लेकिन राहत की बात यह है कि ये खर्चे किसी बीमारी पर न होकर शुभ कार्यों, घर के रेनोवेशन या तीर्थ यात्राओं पर होंगे। आध्यात्मिक जीवन: आपका झुकाव भौतिक सुखों से हटकर अध्यात्म, ध्यान और योग की तरफ तेजी से बढ़ेगा। मानसिक शांति के लिए आप कुछ समय एकांत में बिताना पसंद करेंगे। कन्या राशि (Virgo) कन्या राशि के जातकों के लिए देवगुरु का यह गोचर आपके ग्यारहवें भाव में होने जा रहा है, जिसे लाभ, आय और इच्छा पूर्ति का भाव माना जाता है। करियर और आर्थिक जीवन: यह गोचर आपकी आमदनी की रफ्तार को दोगुना कर देगा। लंबे समय से रुके हुए प्रोजेक्ट्स दोबारा शुरू होंगे और उनसे आपको बंपर आर्थिक लाभ होगा। यदि आप शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो यह समय आपको बड़ा मुनाफा देकर जा सकता है। सामाजिक जीवन: आपकी कई ऐसी अधूरी इच्छाएं और महत्वाकांक्षाएं इस अवधि में पूरी होंगी जिनकी आपने उम्मीद छोड़ दी थी। आपको अपने बड़े भाई-बहनों और मित्रों का हर मोड़ पर सहयोग मिलेगा। आपका सामाजिक दायरा बढ़ेगा और आप नए प्रभावशाली मित्र बनाएंगे। तुला राशि (Libra) तुला राशि के जातकों के लिए बृहस्पति का गोचर उनके दसवें भाव में होगा, जिसे कर्म, करियर, व्यवसाय और पिता का स्थान कहा जाता है। करियर और व्यवसाय: आपके पेशेवर जीवन में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव आने वाला है। नौकरीपेशा लोगों को न केवल प्रमोशन मिलेगा, बल्कि उनकी सैलरी में भी अच्छी बढ़ोतरी होगी। यदि आप नई नौकरी की तलाश में हैं, तो बड़े ब्रांड्स से आपको ऑफर मिल सकते हैं। कार्यस्थल पर आपके सीनियर्स और बॉस आपके काम के मुरीद रहेंगे। पारिवारिक जीवन: व्यापार करने वाले जातकों के काम का विस्तार होगा। पिता के साथ आपके संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत और सम्मानजनक होंगे। पिता या पैतृक सहयोग से आपको अपने बिजनेस में कोई बड़ी डील हासिल हो सकती है। वृश्चिक राशि (Scorpio) वृश्चिक राशि के जातकों के लिए देवगुरु का गोचर उनके नौवें भाव में होने जा रहा है, जिसे भाग्य, धर्म और उच्च शिक्षा का भाव माना जाता है। भाग्य और करियर: इस गोचर के प्रभाव से आपका सोया हुआ भाग्य पूरी तरह से जाग उठेगा। अब तक जिन कामों में आपको कड़ी मेहनत के बाद भी असफलता मिल रही थी, वे काम अब बहुत कम प्रयास में भी आसानी से बनने लगेंगे। उच्च शिक्षा या सरकारी नौकरी के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को इस अवधि में कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। धार्मिक और पारिवारिक जीवन: आप खुद को धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों से पूरी तरह जुड़ा हुआ पाएंगे। परिवार के साथ किसी लंबी दूरी की सुखद यात्रा या प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों के दर्शन करने के प्रबल योग बन रहे हैं। समाज में आपकी ख्याति एक परोपकारी व्यक्ति के रूप में होगी। धनु राशि (Sagittarius) धनु राशि के जातकों के लिए बृहस्पति का गोचर आठवें भाव में होने जा रहा है, जिसे आयु, संकट, गुप्त विद्या और अचानक होने वाले लाभ-हानि का भाव माना जाता है। करियर और आर्थिक जीवन: यह समय आपके लिए मिले-जुले परिणाम लेकर आ रहा है। आर्थिक मोर्चे पर आपको सावधान रहने की जरूरत है, हालांकि सट्टा बाजार या पैतृक संपत्ति के माध्यम से आपको अचानक से कोई बड़ा धन लाभ भी हो सकता है। जो लोग रिसर्च, गुप्त विज्ञान, ज्योतिष या तंत्र-मंत्र की विद्याओं में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह समय बेहद ज्ञानवर्धक रहेगा। स्वास्थ्य और सावधानी: आपको अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखना होगा। विशेषकर खान-पान पर नियंत्रण रखें, अन्यथा पेट, लीवर या मोटापे से जुड़ी समस्याएं आपको परेशान कर सकती हैं। वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें। मकर राशि (Capricorn) मकर राशि के जातकों के लिए देवगुरु बृहस्पति का गोचर सातवें भाव में होने जा रहा है, जिसे विवाह, जीवनसाथी, साझेदारी (Partnership) और दैनिक रोजगार का भाव माना जाता है। वैवाहिक और प्रेम जीवन: जो जातक लंबे समय से सिंगल हैं या जिनके विवाह में लगातार अड़चनें आ रही थीं, उनके लिए अब शहनाइयां बजने का समय आ चुका है। आपके लिए विवाह के बेहद मजबूत और अच्छे प्रस्ताव आएंगे। शादीशुदा लोगों के जीवन में चल रहे पुराने तनाव और गलतफहमियां दूर होंगी और आपसी प्रेम बढ़ेगा। बिजनेस और सामाजिक जीवन: यदि आप पार्टनरशिप में कोई नया बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, तो यह समय सबसे सटीक है। आपके साझेदार के साथ आपके संबंध बेहतर होंगे और व्यापार में बड़ा मुनाफा दर्ज किया जाएगा। समाज में आपकी प्रतिष्ठा और लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से ऊपर जाएगा। कुंभ राशि (Aquarius) कुंभ राशि के जातकों के लिए बृहस्पति का यह गोचर छठे भाव में होने जा रहा है, जिसे रोग, ऋण (कर्ज), और शत्रुओं (विरोधियों) का घर माना जाता है। करियर और कानूनी मामले: कार्यस्थल पर आपके जो विरोधी या सहकर्मी आपके खिलाफ साजिशें रच रहे थे, वे इस दौरान पूरी तरह परास्त हो जाएंगे। यदि आपका कोई मामला कोर्ट-कचहरी में लंबे समय से लंबित था, तो उसका फैसला इस अवधि में आपके पक्ष में आ सकता है। जो लोग नौकरी बदलने का प्रयास कर रहे हैं, उन्हें सफलता मिलेगी। कर्ज और स्वास्थ्य: यदि आप किसी पुराने कर्ज के बोझ से दबे हुए थे, तो इस गोचर के दौरान आपको उस कर्ज से मुक्ति पाने के रास्ते मिल जाएंगे। हालांकि, स्वास्थ्य के मोर्चे पर आपको लापरवाही बिल्कुल नहीं बरतनी है। नियमित रूप से योग और संतुलित दिनचर्या अपनाएं ताकि मौसमी बीमारियों से बचे रहें। मीन राशि (Pisces) मीन राशि के जातकों के लिए बृहस्पति का गोचर पांचवें भाव में होने जा रहा है, जिसे संतान, बुद्धि, उच्च शिक्षा और प्रेम संबंधों का भाव माना जाता है। शिक्षा और संतान: विद्यार्थियों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है। आपकी एकाग्रता बढ़ेगी और जटिल से जटिल विषय भी आपको आसानी से समझ आने लगेंगे। जो विवाहित दंपत्ति लंबे समय से संतान सुख से वंचित थे या संतान प्राप्ति की योजना बना रहे थे, उनके घर में इस दौरान किलकारियां गूंज सकती हैं। प्रेम और रचनात्मकता: प्रेम संबंधों के लिहाज से यह समय बेहद रोमांटिक और प्रगाढ़ता लाने वाला रहेगा। आप अपने पार्टनर के साथ विवाह के बंधन में बंधने का फैसला भी कर सकते हैं। आपकी रचनात्मकता (Creativity) और कलात्मक क्षमता अपने चरम पर होगी, जिससे आपको अपने कार्यक्षेत्र में विशेष पहचान और पुरस्कार मिल सकता है।
व्हाइट सूट और नीले दुपट्टे में पश्मीना रोशन का सादगी भरा अंदाज, जीता फैंस का दिल
रितिक रोशन की कजिन और 'इश्क विश्क रिबाउंड' से बॉलीवुड में कदम रखने वालीं खूबसूरत एक्ट्रेस पश्मीना रोशन को हाल ही में जुहू में स्पॉट किया गया। इस दौरान उन्होंने अपनी सिंपल लेकिन बेहद एलिगेंट स्टाइल से सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया। पश्मीना का सादगी भरा अंदाज सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। तस्वीरों में पश्मीना रोशन ने बेहद खूबसूरत ऑफ-व्हाइट कुर्त-पायजामा सेट पहने नजर आ रही हैं। इस ट्रेडिशनल स्ट्रेट-कट कुर्ते पर सामने और आस्तीन पर नीले और पीले रंगों से बेहद महीन फ्लोरल एम्ब्रॉयडरी की गई है, जो उनके लुक को समरी और फ्रेश वाइब दे रही है। ALSO READ: ब्लैक स्विमसूट में प्रियंका चोपड़ा का बोल्ड अंदाज, पूल में लगाई आग लुक को कम्प्लीट करने के लिए पश्मीना ने इसके साथ डुअल-टोन का शेडेड दुपट्टा कैरी किया है। यह दुपट्टा उनके पूरे आउटफिट में कलर्स का एक परफेक्ट कंट्रास्ट जोड़ रहा है। पश्मीना ने पैरों में कोल्हापुरी सैंडल्स पहनी हैं, जो उनके इस एथनिक वियर को पूरा देसी टच दे रही हैं। तस्वीरों में उनकी मिलियन-डॉलर स्माइल हर किसी का ध्यान खींच रही है। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें पश्मीना ने पैपराजी को देखते ही अपनी प्यारी सी मुस्कान के साथ पोज दिए। कैमरे की तरफ देखते हुए उनके ब्लश करते गाल और मासूम एक्सप्रेशन्स उनके ग्लैमर को दोगुना कर रहे हैं। बिना किसी हैवी ज्वैलरी के भी पश्मीना का चेहरा बेहद ग्लो कर रहा है। पश्मीना ने अपने इस कैजुअल आउटिंग लुक के लिए 'नो-मेकअप' लुक या बेहद मिनिमल मेकअप चुना है। हल्के गुलाबी गाल और न्यूड लिपस्टिक उनके नेचुरल कॉम्प्लेक्शन को निखार रहे हैं। वहीं हेयर स्टाइल की बात करें, तो उन्होंने अपने वेवी और कर्ली बालों को मिडिल पार्टिंग के साथ खुला रखा है, जो हवा में लहराते हुए उनके लुक में एक सॉफ्ट, रोमांटिक टच जोड़ रहे हैं। फैंस पश्मीना की इन तस्वीरों पर 'ब्यूटी इन व्हाइट', 'सो एलिगेंट' और 'सिम्पलिसिटी एट इट्स बेस्ट' जैसे कमेंट्स की बौछार कर रहे हैं।
1 मैच ज्यादा खेलने के कारण कगीसो रबाड़ा ने भुवनेश्वर कुमार से छीनी पर्पल कैप
कगीसो रबाड़ा ने भुवनेश्वर कुमार से 1 मैच ज्यादा खेलने के कारण पर्पल कैप छीन ली। गौरतलब है कि रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर गुजरात टाइटंस के खिलाफ क्वालिफायर 1 जीतकर सीधे फाइनल में चली गई थी और गुजरात को फिर एलिमिनेटर की विजेता राजस्थान रॉयल्स से मैच खेलने को मिला था। इसे जीतकर गुजरात फिर खिताबी मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर से आमने सामने हुई। कगीसो रबाड़ा ने भुवनेश्वर कुमार से 1 मैच ज्यादा खेलने के साथ साथ सिर्फ एक विकेट ज्यादा लेने के कारण पर्पल कैप जीती। उन्होंने 17 मैचों में 29 विकेट लिए। इस दौरान उन्होंने 64 ओवर किए और 626 रन दिए। वहीं भुवनेश्वर कुमार ने 16 मैचों में 28 विकेट लिए। कुल 63 ओवर में उन्होंने 501 रन दिए। गौरतलब है कि पूरे टूर्नामेंट में भुवनेश्वर कुमार कगीसो रबाड़ा से आगे चल रहे थे लेकिन फाइनल से ठीक पहले कगीसो रबाड़ा उनसे आगे निकल गए। फाइनल में भी महंगे साबित होने के बावजूद वह सिर्फ एक विकेट निकाल पाए और यह ही निर्णायक साबित हुआ अन्यथा समान विकेट लेने के कारण भुवनेश्वर के पास पर्पल कैप रहती क्योंकि उन्होंने रबाड़ा से कम रन दिए हैं।यह तीसरा मौका है जब कगीसो रबाडा़ ने इंडियन प्रीमियर लीग में पर्पल कैप जीती हो।
इंदौर में सड़क पर शराब पीने से रोका तो हुई चाकूबाजी, दोनों तरफ के कई लोग जख्मी
इंदौर में अपराधिक गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। यहां के परदेशीपुरा थाना इलाके में सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने से रोकने को लेकर दो पक्षों के बीच जमकर खूनी संघर्ष हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों ने हथियार निकाल लिए और जमकर चाकूबाजी हो गई। जानकारी के मुताबिक घटना में दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार जनता क्वार्टर निवासी विनोद उर्फ पन्नू सिंह जादौन (48) ने शिकायत दर्ज कराई है कि 31 मई की रात करीब 11 बजे वह सांची पॉइंट के सामने से गुजर रहा था। इसी दौरान उसने मंगू सरदार उर्फ राजदीप, जयेश संकट तथा उनके साथियों राहुल और नितिन को सार्वजनिक स्थान पर शराब पीते देखा। विनोद ने उन्हें समझाइश देते हुए कहा कि यह रिहायशी इलाका है और यहां महिलाओं का आना-जाना रहता है, इसलिए सड़क पर शराब न पिएं। विनोद के मुताबिक उसकी बात सुनकर आरोपियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। जयेश संकट ने उसके साथ मारपीट की, जबकि मंगू सरदार ने चाकू निकालकर उस पर हमला कर दिया। चाकू का वार विनोद के गले के बाईं ओर लगा, जिससे वह घायल हो गया। घटना के बाद विवाद और बढ़ गया। पुलिस के अनुसार विनोद पक्ष के कुछ लोग भी हथियार लेकर मौके पर पहुंच गए। आरोप है कि कालू मराठा, गोल्डी सरदार और विनोद उर्फ पन्नू जादौन ने मंगू सरदार पर चाकुओं से कई वार किए। हमले में मंगू सरदार के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं और उसके शरीर पर आधा दर्जन से अधिक घाव हुए। वहीं जयेश संकट ने भी शिकायत में बताया कि कालू मराठा ने उस पर चाकू से हमला किया, जिससे उसके बाएं पैर के घुटने के ऊपर चोट लगी और खून बहने लगा। सूचना मिलने पर परदेशीपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। कुछ आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। Edited By: Naveen R Rangiyal
बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय और यादगार गीतों में से एक अब नए अंदाज में लौट आया है। जंगली म्यूज़िक, जो टाइम्स म्यूज़िक का एक डिवीजन है, ने बहुप्रतीक्षित कॉमेडी एंटरटेनर 'वेलकम टू द जंगल' का नया गाना 'ऊंचा लंबा कद फॉरएवर' रिलीज कर दिया है। यह गीत नॉस्टैल्जिया, स्टार पावर और मॉडर्न म्यूज़िक का शानदार संगम लेकर आया है, जो नई पीढ़ी के दर्शकों को भी आकर्षित करेगा। अक्षय कुमार और दिशा पाटनी पर फिल्माया गया यह गीत आइकॉनिक चार्टबस्टर की यादों को ताज़ा करते हुए उसे एक नए और आधुनिक अंदाज में पेश करता है। मूल गीत का संगीत आनंद राज आनंद ने तैयार किया था, जबकि इसके नए संस्करण को विक्रम मॉन्ट्रोज़ ने रीक्रिएट किया है। उन्होंने गाने की मूल आत्मा को बरकरार रखते हुए उसमें नई ऊर्जा का संचार किया है। अक्षय कुमार और दिशा पाटनी की शानदार केमिस्ट्री, रंगीन विज़ुअल्स और जोशीली धुन 'ऊंचा लंबा कद फॉरएवर' को फिल्म के साउंडट्रैक का एक खास आकर्षण बनाती है। डांस फ्लोर पर थिरकाने वाली इसकी ऊर्जा और नॉस्टैल्जिया का तड़का इसे हर पीढ़ी के दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाने की क्षमता रखता है। ALSO READ: 'अल्फा' के सेट पर आलिया भट्ट संग अनबन की खबरों पर बॉबी देओल ने तोड़ी चुप्पी, बोले- लोग इतने वेल्ले हैं कि... गाने के इस नए संस्करण को आनंद राज आनंद और रुबाई ने अपनी आवाज दी है। इसमें मेघा बाली द्वारा लिखे गए नए बोलों के साथ समीर के मूल गीत भी शामिल हैं। अपनी दमदार धुन, हाई-एनर्जी विज़ुअल्स और सेलिब्रेशन वाले माहौल के साथ यह गीत नॉस्टैल्जिया और समकालीन पॉप कल्चर के बीच एक बेहतरीन पुल बनकर उभरा है। गाने के रीक्रिएशन को लेकर विक्रम मॉन्ट्रोज़ ने कहा, मूल ‘ऊंचा लंबा कद’ बॉलीवुड संगीत प्रेमियों के दिलों में एक खास जगह रखता है। चुनौती यह थी कि उसके नॉस्टैल्जिया को बनाए रखते हुए उसे एक नई पहचान दी जाए, जो 'वेलकम टू द जंगल' की ऊर्जा के अनुरूप हो। हम चाहते थे कि दर्शक इस गीत से तुरंत जुड़ जाएं और साथ ही इसमें कुछ नया भी महसूस करें। नई पंक्तियां लिखने वाली मेघा बाली ने कहा, ऐसे गीत अपने साथ एक विरासत और दर्शकों की भावनात्मक यादें लेकर आते हैं। हमारी कोशिश यही थी कि लोग मूल गीत में जो पसंद करते थे, उसे बरकरार रखा जाए और साथ ही उसमें आज के दौर का नया स्वाद भी जोड़ा जाए। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें यह गीत ‘वेलकम टू द जंगल’ के संगीत सफर का एक और बड़ा पड़ाव है। अपनी भव्यता, हास्य और बड़े कलाकारों की टोली के लिए चर्चित यह फ्रेंचाइज़ी हमेशा ऐसे गीत देने के लिए जानी जाती है जो लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा बन जाते हैं। टाइम्स म्यूज़िक और जंगली म्यूज़िक के सीईओ मंदार ठाकुर ने कहा, आइकॉनिक गीतों को हर पीढ़ी तक पहुंचना चाहिए। ‘ऊंचा लंबा कद फॉरएवर’ इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि किस तरह किसी क्लासिक गीत को सम्मानपूर्वक नए रूप में पेश किया जा सकता है और उसे आज के दर्शकों के लिए भी प्रासंगिक बनाया जा सकता है। हमें खुशी है कि हम इसे ‘वेलकम’ फ्रेंचाइज़ी के प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों तक पहुंचा रहे हैं। नॉस्टैल्जिया, भव्यता और आधुनिक संगीत का अनूठा मेल लिए ‘ऊंचा लंबा कद फॉरएवर’ अब सभी प्रमुख ऑडियो प्लेटफॉर्म्स पर स्ट्रीम हो रहा है। इसका म्यूज़िक वीडियो जंगली म्यूज़िक और टाइम्स म्यूज़िक के चैनलों पर उपलब्ध है। फिल्म में अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडिस, अरशद वारसी, जैकी श्रॉफ, परेश रावल, रवीना टंडन, लारा दत्ता, फरीदा जलाल, जॉनी लीवर, श्रेयस तलपड़े, तुषार कपूर, राजपाल यादव, कृष्णा अभिषेक, कीकू शारदा, दलेर मेहंदी, आफताब शिवदासानी, मुकेश तिवारी, यशपाल शर्मा, किरण कुमार, ज़ाकिर हुसैन, विंदू दारा सिंह, उर्वशी रौतेला, हेमंत पांडेय, बृजेंद्र काला, फिरोज़ खान (अर्जुन), स्वर्गीय पंकज धीर, पुनीत इस्सर, सुदेश बेरी, जीतू वर्मा, वृहि कोडवारा, आदित्या सिंह और भाग्य भानुशाली जैसे कलाकार शामिल हैं। अहमद खान द्वारा निर्देशित ‘वेलकम टू द जंगल’ को ए.ए. नाडियाडवाला, केप ऑफ गुड फिल्म्स और स्टार स्टूडियो18 ने सीता फिल्म्स और राकेश डांग के सहयोग से प्रस्तुत किया है। यह बेस इंडस्ट्रीज़ ग्रुप का प्रोडक्शन है, जिसे राकेश डांग और वेदांत विकास बाली ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म के निर्माता फिरोज़ ए. नाडियाडवाला हैं और यह 26 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने के लिए तैयार है।
Lunar Eclipse 2026: साल के दूसरे चंद्र ग्रहण की 5 बड़ी और रोचक बातें
Partial Lunar Eclipse: वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को (एक पूर्ण चंद्र ग्रहण के रूप में) लग चुका है। वर्ष 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण 27-28 अगस्त 2026 को लगने जा रहा है। ग्रहण सुबह 06:53 से प्रारंभ होगा और सूतक काल 9 घंटे पहले प्रारंभ होगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में घटित होगा। राहु और शनि के प्रभाव वाली इस राशि में ग्रहण लगने से मानसिक और आर्थिक उथल-पुथल के संकेत मिलते हैं। चलिए इस आगामी चंद्र ग्रहण से जुड़ी 5 खास बातें जानते हैं। 1. यह एक गहरे स्तर का आंशिक ग्रहण है (Deep Partial Eclipse) भले ही यह पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) नहीं है, लेकिन यह आंशिक ग्रहणों में बेहद खास है। इस ग्रहण के दौरान पृथ्वी की मुख्य घनी छाया (Umbra) चंद्रमा के लगभग 96.2% हिस्से को ढक लेगी। इसका मतलब है कि चंद्रमा का केवल एक बहुत छोटा सा कोना ही चमकीला बचेगा, बाकी पूरा हिस्सा अंधकार में डूब जाएगा। 2. 'ब्लड मून' जैसा अद्भुत नजारा आमतौर पर आंशिक चंद्र ग्रहण में चंद्रमा का रंग सफेद-मटमैला या हल्का काला दिखता है। लेकिन इस बार 96% से अधिक हिस्सा ढकने के कारण, अधिकतम ग्रहण के समय चंद्रमा पूरी तरह काला होने के बजाय हल्का तांबे जैसा या गहरा लाल (Coppery Red) दिखाई दे सकता है। यह नजारा लगभग 'ब्लड मून' जैसा ही अद्भुत होगा। ALSO READ: 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण कब लगेगा? 5 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान 3. आकार में थोड़ा छोटा दिखेगा चंद्रमा (Micro Moon इफेक्ट) यह चंद्र ग्रहण तब लग रहा है जब चंद्रमा पृथ्वी से अपनी कक्षा में काफी दूरी (Apogee के करीब) पर होगा। पृथ्वी से दूर होने के कारण आसमान में चंद्रमा का आकार आम पूर्णिमा के मुकाबले थोड़ा छोटा दिखाई देगा, जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'माइक्रो मून' (Micro Moon) भी कहा जाता है। 4. ग्रहण की कुल अवधि (Duration) यह ग्रहण अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए काफी लंबा होने वाला है। अगर इसके सभी चरणों (उपछाया और मुख्य छाया दोनों) को मिला दिया जाए, तो यह पूरा घटनाक्रम लगभग 5 घंटे 38 मिनट तक चलेगा। वहीं, मुख्य आंशिक चरण (जब चांद साफ तौर पर कटा हुआ या लाल दिखेगा) लगभग 3 घंटे 18 मिनट का होगा।स्थानीय समयानुसार अवधि में 5 से 10 मिनट की घटबढ़ रह सकती है। 5. दृश्यता: कहां दिखेगा और क्या भारत में सूतक लगेगा? कहां दिखाई देगा: यह चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका (North and South America) में शुरू से अंत तक पूरा दिखाई देगा। इसके अलावा यूरोप, अफ्रीका और प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में भी इसे देखा जा सकेगा। भारत में स्थिति: यह ग्रहण भारतीय समयानुसार (IST) 28 अगस्त 2026 को सुबह लगभग 6:53 बजे (जब भारत में सूरज उग चुका होगा और चंद्रमा अस्त हो चुका होगा) अपने चरम पर होगा। इसलिए यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। भारत में दृश्यमान न होने के कारण यहाँ इसका कोई धार्मिक प्रभाव या सूतक काल मान्य नहीं होगा। सावधानी के उपाय ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए ज्योतिष शास्त्र में ये उपाय बताए गए हैं: मंत्र जाप: ग्रहण काल के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' या चंद्रमा के बीज मंत्र 'ॐ सों सोमाय नमः' का जाप करें। दान: ग्रहण समाप्त होने के बाद सफेद वस्तुओं जैसे दूध, दही, चावल या सफेद वस्त्र का दान गरीबों को करें। हनुमान चालीसा: नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत प्रभावी रहता है।
बचपन में भूमि पेडनेकर को था इमरान हाशमी पर क्रश, 'अधूरे हम अधूरे तुम' में साथ करने जा रहीं काम
भारतीय सिनेमा में एक दौर ऐसा था जब रोमांटिक-कॉमेडी फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर दबदबा हुआ करता था। 2010 की शुरुआत में मासूम प्रेम कहानियों, दिल को छू लेने वाले संगीत और सहज किरदारों को दर्शकों ने खूब प्यार दिया। इस दौर के सबसे पसंदीदा और चहेते अभिनेताओं में से एक इमरान खान थे। अपनी सादगी, 'बॉय-नेक्स्ट-डोर' इमेज और चॉकलेटी लुक के दम पर उन्होंने लाखों दिलों पर राज किया। अब लगभग 10 साल के लंबे इंतजार के बाद, इमरान खान आखिरकार नेटफ्लिक्स की आगामी फिल्म 'अधूरे हम अधूरे तुम' के साथ मुख्य अभिनेता के तौर पर अपना फुल-फ्लेज्ड कमबैक करने जा रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को लेकर जितने उत्साहित उनके फैंस हैं, उतनी ही उत्साहित उनकी को-स्टार और अभिनेत्री भूमि पेडनेकर भी हैं। ALSO READ: 'अल्फा' के सेट पर आलिया भट्ट संग अनबन की खबरों पर बॉबी देओल ने तोड़ी चुप्पी, बोले- लोग इतने वेल्ले हैं कि... भूमि पेडनेकर ने हाल ही में खुलासा किया कि बचपन में इमरान खान उनका सबसे बड़ा 'क्रश' हुआ करते थे। ग्राज़िया इंडिया के साथ बातचीत में भूमि पेडनेकर ने इमरान खान के साथ काम करने के अपने अनुभव और उनके प्रति अपनी दीवानगी को साझा किया। भूमि ने स्वीकार किया कि फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने से बहुत पहले से ही वह इमरान की बहुत बड़ी प्रशंसक रही हैं। उन्होंने कहा, जब मैं बड़ी हो रही थी, तब मुझे इमरान खान पर सबसे बड़ा क्रश था। वह अपनी सभी रोमांटिक फिल्मों में 'सबसे बड़े ग्रीन फ्लैग' की तरह नजर आते थे। आज के समय में वैसी रॉम-कॉम फिल्में कोई नहीं बनाता। जब मैंने इस फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ी, तो मुझे इससे तुरंत प्यार हो गया। यह एक बेहद परिपक्व, एलीवेटेड और शानदार कहानी है। भूमि का यह बयान उन तमाम फैंस की भावनाओं को दर्शाता है जो इमरान खान की 'जाने तू... या जाने ना', 'आई हेट लव स्टोरीज', 'मेरे ब्रदर की दुल्हन' और 'ब्रेक के बाद' जैसी फिल्में देखकर बड़े हुए हैं। 'अधूरे हम अधूरे तुम' का निर्देशन दानिश असलम कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि दानिश ने ही साल 2010 में इमरान खान और दीपिका पादुकोण को लेकर फिल्म 'ब्रेक के बाद' बनाई थी। इस नई फिल्म का नाम भी 'ब्रेक के बाद' के ही एक बेहद लोकप्रिय और खूबसूरत गाने 'अधूरे हम अधूरे तुम' से प्रेरित है। इमरान खान ने खुद एक इंटरव्यू में साफ किया कि यह फिल्म कोई सीक्वल नहीं है, बल्कि इसे उस दौर की फिल्मों का एक 'आध्यात्मिक उत्तराधिकारी' माना जा सकता है। पारंपरिक प्रेम कहानियों से अलग होगी कहानी जहां पुरानी फिल्मों में सिर्फ लड़के-लड़की के मिलने और प्यार में पड़ने पर ध्यान दिया जाता था, वहीं 'अधूरे हम अधूरे तुम' रिश्तों के एक अलग और मैच्योर पहलू को छूती है। यह फिल्म एक शादीशुदा जोड़े की जिंदगी, उनके बीच आने वाली चुनौतियों, भावनात्मक जटिलताओं और आपसी समझ के साथ उनके व्यक्तिगत विकास की कहानी को पर्दे पर उतारेगी।
the history of Bada Mangal: इस बार 2 जून 2026 को पांचवां बड़ा मंगल मनाया जा रहा है तथा 23 जून को आठवां बड़ा मंगल मनाने के साथ ही ज्येष्ठ महीने के अधिकमास के बड़ा मंगल पर्व का समापन होगा। इस बड़े मंगल का इतिहास, लखनऊ की गलियों में गूंजता जय श्री राम और भंडारे की कहानी बहुत अनूठी है। आइए यहां जानते हैं आखिर नवाबों ने क्यों बनवाया था यह हनुमान मंदिर? ALSO READ: Bada Mangal Dates: ज्येष्ठ माह में कब-कब रहेगा बड़ा मंगल, जानें संपूर्ण तिथियां जब ज्येष्ठ की तपती गर्मी शुरू होती है, तो उत्तर प्रदेश, खासकर लखनऊ की रूह एक अलग ही रंग में रंग जाती है। इसे हम 'बड़ा मंगल' कहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक हिंदू त्योहार के पीछे नवाबी रियासत और आपसी भाईचारे की कितनी गहरी जड़ें हैं? 1. जब बेगम की मन्नत ने दूर की 'महामारी' कहानी शुरू होती है अलीगंज के पुराने हनुमान मंदिर से। नवाब शुजाउद्दौला की बेगम, आलिया ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। कहा जाता है कि जब शहर में महामारी फैली, तो बेगम ने बजरंगबली का सुमिरन कराया। ज्येष्ठ के मंगलवार को ही वह संकट टला और तभी से यह दिन 'बड़ा' हो गया। आज भी इस मंदिर के गुंबद पर बना 'चांद' हिंदू-मुस्लिम एकता की गवाही देता है। 2. नवाब के बेटे की सेहत और गुड़-पानी का प्याऊ एक और दिलचस्प किस्सा नवाब मोहम्मद अली शाह से जुड़ा है। उनका बेटा जब मौत के मुंह से वापस आया, तो बेगम रूबिया ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। ज्येष्ठ की चिलचिलाती धूप में प्यासे राहगीरों के लिए नवाब ने जगह-जगह गुड़ और ठंडे पानी की व्यवस्था की। यही परंपरा आज आधुनिक 'भंडारे' का रूप ले चुकी है। 3. इत्र, केसर और जाटमल की मन्नत व्यापार और भक्ति का भी यहां अनूठा मेल है। जाटमल नाम के एक व्यापारी का सारा इत्र और केसर जब नवाब वाजिद अली शाह ने खरीद लिया, तो उन्होंने अपनी मन्नत पूरी करते हुए ज्येष्ठ के पहले मंगल को हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की। 4. क्यों है यह मंगल इतना खास? ज्योतिष शास्त्र और परंपराओं का मानना है कि ज्येष्ठ के महीने में हनुमान जी का दर्जा स्वयं प्रभु श्री राम से भी ऊंचा हो जाता है। इस दिन कुछ विशेष करने से बजरंगबली तुरंत प्रसन्न होते हैं: दान का महत्व: इस दिन गुड़, गेहूं और मीठी पूड़ी का दान 'महादान' माना जाता है। संकटों का समाधान: मान्यता है कि लखनऊ के इन ऐतिहासिक मंदिरों या किसी भी हनुमान मंदिर में हाजिरी लगाने से बड़े से बड़ा संकट टल जाता है। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: Bada Mangal 2026: क्या आप जानते हैं ज्येष्ठ मंगल को 'बड़ा मंगल' क्यों कहते हैं? जानें सटीक पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का इस्तीफा, अमेरिका के साथ शांति वार्ता को लग सकता है झटका?
अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। इस बीच खबर है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सुप्रीम लीडर को अपना इस्तीफा दे दिया है। यह दावा एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से किया गया है। इस इस्तीफे के बाद अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता और युद्ध रोकने की कोशिशों को भी झटका लग सकता है। हालांकि अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का दफ्तर पेजेशकियान का इस्तीफा मंजूर करेगा या नहीं। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान इंटरनेशनल ने रविवार को बताया कि इस्तीफे में कहा गया है कि राष्ट्रपति और उनकी सरकार को ईरान में बड़े फैसले लेने की प्रक्रिया से बाहर रखा गया था। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ईरान में युद्ध के बाद पैदा हुए खालीपन का फ़ायदा उठाकर, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के भीतर के कट्टरपंथी गुटों ने अहम मामलों पर अपना कब्जा जमा लिया है। इससे ईरान की सरकार चलाना मुश्किल हो रहा था। क्या कहा इस्तीफे में : रिपोर्ट के मुताबिक इस इस्तीफ़ में पेजेशकियान ने लिखा कि हालात ठीक नहीं हैं। वह न तो ठीक से शासन चला पा रहे हैं और न ही अपनी कानूनी जिम्मेदारियां पूरी कर पा रहे हैं। इसलिए उन्होंने तुरंत अपने पद से हटने की गुजारिश की है। कौन हैं पेज़ेश्कियान : बता दें कि पेज़ेश्कियान का जन्म 29 सितंबर, 1954 को उत्तर-पश्चिमी ईरान के महाबाद में हुआ था। वह एक अजेरी पिता और एक कुर्द मां की संतान हैं। वे एक हार्ट सर्जन रहे हैं। 1994 में एक कार दुर्घटना में उनकी पत्नी, फ़तेमेह मजीदी और एक बेटी की मृत्यु हो गई। इसके बाद उन्होंने शादी नहीं की और दो बेटों और एक बेटी का अकेले ही पालन-पोषण किया। वह 2024 में ईरान के राष्ट्रपति बने थे। Edited By: Naveen R Rangiyal
ब्लैक स्विमसूट में प्रियंका चोपड़ा का बोल्ड अंदाज, पूल में लगाई आग
ग्लोबल आइकॉन प्रियंका चोपड़ा सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरों से तहलका मचाती हैं। इस बार उन्होंने अपनी जो तस्वीरें शेयर की हैं, उसे देखकर फैंस के दिलों की धड़कनें तेज हो गई हैं। एसएस राजामौली की आगामी मेगा-बजट फिल्म 'वाराणसी' की शूटिंग के व्यस्त शेड्यूल से वक्त निकालकर देसी गर्ल ने एक परफेक्ट 'सेल्फ-केयर संडे' एन्जॉय किया। प्रियंका के पूल किनारे बिताए इस फुर्सत के पलों की तस्वीरें इस समय इंटरनेट पर ट्रेंड कर रही हैं। ALSO READ: 'तारक मेहता' शो की एक्ट्रेस नेहल वडोलिया का दावा- IPL क्रिकेटर भेजता था पर्सनल मैसेज, फिर किया ब्लॉक प्रियंका चोपड़ा ब्लैक कलर का स्विमसूट पहने नजर आ रही हैं। यह स्विमसूट डीप-नेकलाइन और क्लीन-कट स्ट्रैप्स के साथ उनके टोंड फिगर को बेहद खूबसूरती से फ्लॉन्ट कर रहा है। बिना किसी तामझाम या हैवी एक्सेसरीज के, सिर्फ एक क्लासिक ब्लैक आउटफिट में भी प्रियंका का यह लुक 'मैक्सिमम ग्लैम' और एफर्टलेस समर वाइब्स दे रहा है। तस्वीरों में प्रियंका पानी में एक से बढ़कर एक सिजलिंग अंदाज में पोज देती दिख रही हैं। प्रियंका के गीले बाल उनके चेहरे पर आ रहे हैं, जो उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा रहे हैं। सबसे ज्यादा ध्यान खींचा उनके जबरदस्त मर्मेड हेयर फ्लिप ने, जहां पानी से निकलते हुए जब उन्होंने अपने बालों को पीछे झटका, तो पानी की गिरती बूंदों ने एक जादुई फ्रेम तैयार कर दिया। पानी में तैरते हुए प्रियंका का रिलैक्स्ड अंदाज सोशल मीडिया पर आग लगा रहा है। प्रियंका चोपड़ा ने इन तस्वीरों को कैप्शन दिया, Sunday done right... now Summer, here I come.
जिम्मी मगिलिगन सेंटर में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 का 34वां वार्षिक पर्यावरण संवाद सप्ताह शुरू
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम दिन 1: 30 मई, 2026 शनिवार 'जलवायु कार्रवाई' विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के उपलक्ष्य में आयोजित जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट में पर्यावरण संवाद सप्ताह का शुभारंभ वीरेंद्र गोयल, डॉ. नीरजा पौराणिक और जनक मगिलिगन द्वारा प्रकृति को समर्पित प्रार्थनाओ से किया गया। डॉ. (श्रीमती) जनक पलटा मगिलिगन ने सभी का स्वागत किया और बताया कि 1992 से चले आ रहे उनके द्वारा पर्यावरण संवाद का 34वां साल हैं। उन्होंने बताया की UNEP द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम सामूहिक कार्रवाई घोषित की गई। उन्होंने जानकारी दी कि यह पहल 'संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम' (UNEP) के मार्गदर्शन में चलाई जा रही है, और उन्होंने सभी को पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदार तौर-तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। सप्ताहभर कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं एवं आम नागरिकों को सतत विकास के लिए पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने के प्रति संवेदनशील बनाना तथा स्वयं और अपने आसपास के वातावरण से शुरुआत करते हुए “जलवायु कार्रवाई” के लिए प्रेरित करना है। डॉ. जनक ने सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) को समझने के अपने सफ़र को साझा किया। उन्होंने अपनी जीवन-गाथा सुनाते हुए समझाया कि उन्हें सतत विकास का सही अर्थ कैसे समझ में आया और आज की दुनिया में यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है; साथ ही उन्होंने इस कार्यक्रम के उद्देश्यों के बारे में भी बताया। उन्होंने पहली बार 'सतत विकास' (Sustainable Development) की परिभाषा जब 1992 में रियो डी जनेरियो में आयोजित 'अर्थ समिट' (पृथ्वी शिखर सम्मेलन) में भाग लिया था तब वहां से उन्हें इसकी गहरी अंतर्दृष्टि मिली और उन्होंने 'सतत जीवन शैली' का संकल्प लिया। जनक, 'बर्ली डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट फॉर रूरल की संस्थापक निदेशक थीं। इस अनुभव ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया; वे पर्यावरण के प्रति अत्यंत जागरूक और सचेत व्यक्ति बन गईं और उन्होंने स्वयं भी पर्यावरण-अनुकूल जीवन शैली का अभ्यास शुरू कर दिया। उनके पति, स्वर्गीय जेम्स (जिम्मी) आर. मगिलिगन—जो कि एक भूमि सुधार विशेषज्ञ, जल निकासी विशेषज्ञ और पर्यावरणविद् थे—उसी संस्थान के प्रबंधक थे। उन दोनों ने मिलकर 6 एकड़ के उस परिसर को विकसित किया; इसकी शुरुआत उन्होंने 40 साल पुराने एक सूखे हुए कुएं को पुनर्जीवित करने से की थी। उन्होंने इस परिसर को प्लास्टिक-मुक्त, प्रदूषण-मुक्त, जैविक खेती वाला, सोलर थर्मल किचन और पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर आधारित 'हरित परिसर' विकसित किया, जिसमें वर्षा जल संचयन की भी व्यवस्था थी। उन्होंने प्रशिक्षण के सभी पाठ्यक्रम भी तैयार किए और 26 वर्षों के दौरान, 6-6 महीने के प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से 6000 अशिक्षित और गरीब आदिवासी लड़कियों को 'सामुदायिक स्वयंसेवकों' के रूप में प्रशिक्षित किया। उन लड़कियों ने 500 से अधिक गांवों में सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाए। विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के उपलक्ष्य में जिम्मी और जनक मगिलिगन फाउंडेशन फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट' के ट्रस्टी वीरेंद्र गोयल के उद्घाटन भाषण से हुई, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवन शैली के महत्व पर ज़ोर दिया। इस अवसर पर बोलते हुए, जाने-माने बायोटेक्नोलॉजिस्ट और 'रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट' के निदेशक डॉ. अनुराग तिवारी ने पानी और हवा को बचाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, इंदौर वन प्रभाग के मुख्य वन संरक्षक (IFS) पी.एन. मिश्रा ने सतत विकास, ज्ञानोदय और सकारात्मक सोच की शक्ति एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उज्जैन में कार्यरत रहते हुए शिप्रा नदी के किनारे एक लाख पौधारोपण का कार्य शासन-प्रशासन एवं स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से सफलतापूर्वक किया गया। बाद में देवास में पदस्थापना के दौरान उन्होंने सभी के सहयोग से शंकरगढ़ पहाड़ी के संरक्षण हेतु विशेष कार्य किए। उन्होंने जनक मैम की तुलना सूर्य की एक किरण से की, जो सभी को सतत विकास की राह दिखाती है और उनके मन में पर्यावरण के प्रति प्रेम जगाती है। मालवांचल के मनोचिकित्सक डॉ. राम गुलाम ने संबोधित करते हुए कहा कि आज प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने की आवश्यकता है तथा आज समाज को जिम्मी मगिलिगन एवं जनक मगिलिगन के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। विशेष अतिथि अनुराग तिवारी, रिसर्च एंड डेवलपमेंट डायरेक्टर, एक्रोपोलिस यूनिवर्सिटी, इंदौर ने अपने संबोधन में बताया कि प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर जीवन जीना अत्यंत सुकूनभरा, शांतिदायक एवं सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला है। कार्यक्रम के अंत में फाउंडेशन के ट्रस्टी श्री वीरेंद्र गोयल जी ने सभी अतिथियों एवं सहभागियों के प्रति धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डीएवीवी एमएसडब्ल्यू इंटर्न निलेश चौहान ने किया। इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से गुजराती कॉलेज की सेवानिवृत्त प्रोफेसर जयश्री सिक्का, कलेक्टोरेट कार्यालय से महेंद्र धाकड़ जी, डीएवीवी इकोनॉमिक्स इंटर्न तुहिना झा, अमर नर्गेश, मालवांचल मनोचिकित्सा पीजी स्टूडेंट्स एवं सेंट पॉल इंस्टिट्यूट के स्टूडेंट्स उपस्थित रहे।
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (01 जून, 2026)
1. मेष (Aries) Today Horoscope Rashifal 01 June 2026: करियर: कार्यस्थल पर आपकी नेतृत्व क्षमता की प्रशंसा होगी। लव: पार्टनर के साथ अच्छा समय बीतेगा। धन: निवेश के लिए दिन सामान्य है। स्वास्थ्य: आज थकान महसूस हो सकती है। उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें। ALSO READ: June 2026 Monthly Horoscope: मासिक राशिफल जून 2026: 12 राशियों की भविष्यवाणी, जानें भाग्य, आर्थिक स्थिति और जीवनशैली 2. वृषभ (Taurus) करियर: व्यापार में नए सौदे लाभकारी रहेंगे। लव: प्रेम संबंधों में मजबूती आएगी। धन: रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। स्वास्थ्य: पेट से जुड़ी समस्या हो सकती है। उपाय: आज दूध या चावल जैसी सफेद वस्तुओं का दान करें। 3. मिथुन (Gemini) करियर: नौकरी में बदलाव के अवसर मिल सकते हैं। लव: छोटी सी गलतफहमी विवाद का रूप ले सकती है। धन: अचानक खर्च बढ़ सकते हैं, बजट बनाकर चलें। स्वास्थ्य: मानसिक तनाव से बचने के लिए योग करें। उपाय: गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें। 4. कर्क (Cancer) करियर: कार्यक्षेत्र में अधिकारी वर्ग आपसे प्रसन्न रहेगा। लव: पार्टनर से सरप्राइज मिल सकता है। धन: भूमि या वाहन खरीदने के योग बन रहे हैं। स्वास्थ्य: मौसमी बीमारियों से सावधान रहें। उपाय: शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। 5. सिंह (Leo) करियर: राजनीति के क्षेत्र में पदोन्नति के योग हैं। लव: जीवनसाथी के साथ सामंजस्य बढ़ेगा। धन: शेयर बाजार से लाभ हो सकता है। स्वास्थ्य: ऊर्जा से भरपूर महसूस करेंगे। उपाय: सूर्य देव को जल अर्पित करें। 6. कन्या (Virgo) करियर: मेहनत का फल देर से मिलेगा, निराश न हों। लव: पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है, जो प्रेम में बदल सकती है। धन: धन संचय करने में सफल रहेंगे। स्वास्थ्य: पैरों में दर्द या थकान की शिकायत हो सकती है। उपाय: गाय को हरी घास खिलाएं। 7. तुला (Libra) करियर: पार्टनरशिप के काम में सावधानी बरतें। लव: रिश्तों में मधुरता आएगी। धन: आय के नए स्रोत बनेंगे। स्वास्थ्य: त्वचा संबंधी एलर्जी हो सकती है। उपाय: लक्ष्मी जी की आरती करें। ALSO READ: Weekly Numerology Horoscope 1-7 June 2026: साप्ताहिक अंक राशिफल, जानें किस मूलांक की चमकेगी किस्मत? 8. वृश्चिक (Scorpio) करियर: आज ऑफिस की राजनीति से दूर रहना ही बेहतर है। लव: पार्टनर की सेहत को लेकर चिंता हो सकती है। धन: उधार देने से बचें, पैसा फंस सकता है। स्वास्थ्य: वाहन सावधानी से चलाएं। उपाय: बजरंग बाण का पाठ करें। 9. धनु (Sagittarius) करियर: विदेश से जुड़े कार्यों में प्रगति होगी। लव: लव लाइफ में कुछ नयापन महसूस करेंगे। धन: पुराने निवेश से बड़ा मुनाफा मिल सकता है। स्वास्थ्य: कमर दर्द की समस्या हो सकती है। उपाय: माथे पर हल्दी का तिलक लगाएं। 10. मकर (Capricorn) करियर: आज कर्मक्षेत्र में कड़ी मेहनत का दिन है। लव: परिवार के साथ समय बिताएंगे। धन: पैतृक संपत्ति से लाभ होने की संभावना है। स्वास्थ्य: नींद की कमी महसूस हो सकती है। उपाय: शनि चालीसा का पाठ करें। 11. कुंभ (Aquarius) करियर: तकनीकी कार्य करने वालों के लिए उन्नति भरा दिन है। लव: किसी अजनबी पर भरोसा न करें। धन: आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी। स्वास्थ्य: प्राणायाम करना आपके लिए बेहतर रहेगा। उपाय: गरीब बच्चों को शिक्षा सामग्री दान करें। 12. मीन (Pisces) करियर: नौकरी में तबादले के योग हैं। लव: पार्टनर के साथ लंबी बातचीत भविष्य के रास्ते खोलेगी। धन: आज दान-पुण्य में रुचि बढ़ेगी। स्वास्थ्य: पाचन तंत्र संवेदनशील रह सकता है। उपाय: विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। ALSO READ: अधिकमास की भानु सप्तमी 2026 कब है? जानें तिथि, महत्व, शुभ मुहूर्त और सूर्यदेव को प्रसन्न करने के उपाय
29 मई की शाम। फोन पर नोटिफिकेशन आया- राजस्थान रॉयल्स के वैभव सूर्यवंशी सेंचुरी के करीब हैं। मैंने जियो हॉटस्टार खोला, लाइव मैच चला लिया। तभी ध्यान आया कि इस पूरे सीजन में पहला मैच लाइव देख रही हूं। बाकी दो महीने? बस हाइलाइट्स, स्कोर अपडेट्स और कभी-कभी रील्स। न्यूजरूम में पूछा तो कई और क्रिकेट के दीवानों का यही हाल था। थोड़ी रिसर्च की तो और परतें खुलती गईं। इस साल IPL के फर्स्ट हाफ में टीवी व्यूअरशिप 26% गिरी है। स्पॉन्सर 65 से 45 रह गए हैं। ईडन गार्डन जैसे स्टेडियम भी कुछ मैचों में आधे ही भर पाए। कई विदेशी खिलाड़ियों ने भी आधे सीजन बाद टीम को जॉइन किया। तो क्या IPL का डाउनफॉल शुरू हो गया है? या यह सिर्फ एक स्पीड ब्रेकर है जिसे आसानी से पार किया जा सकता है; इस मंडे मेगा इसी की कहानी… **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी और अंकलेश विश्वकर्मा ------------ ये खबर भी पढ़िए आज का एक्सप्लेनर: हार्दिक, पंत, रहाणे...आखिर IPL 2026 कप्तानों पर भारी क्यों पड़ गया, क्या अगले सीजन 50% कप्तान बदलेंगे; किन नए चेहरों को मौका IPL का ये सीजन कई कप्तानों के लिए अच्छा नहीं गुजरा। पहले हार्दिक पांड्या और ऋतुराज गायकवाड़ की कप्तानी खत्म होने की खबरें आईं, फिर ऋषभ पंत का इस्तीफा आ गया...लिस्ट में और भी कई नाम शामिल हैं। पूरी खबर पढ़िए…
IPL का ये सीजन कई कप्तानों के लिए अच्छा नहीं गुजरा। पहले हार्दिक पांड्या और ऋतुराज गायकवाड़ की कप्तानी खत्म होने की खबरें आईं, फिर ऋषभ पंत का इस्तीफा आ गया...लिस्ट में और भी कई नाम शामिल हैं। आखिर इन कप्तानों के साथ ऐसा क्यों हुआ, परफॉरमेंस आड़े आई या टीमों को नए चेहरों की तलाश, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… ऋषभ पंत: 27 करोड़ में बिके, LSG आखिरी पायदान पर, दिया इस्तीफा IPL 2026 में लखनऊ सुपर जायंट्स, यानी LSG पॉइंट्स टेबल में सबसे निचले पायदान पर रही। 30 मई को LSG ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि फ्रेंचाइजी ने ऋषभ के कप्तानी छोड़ने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। LSG के क्रिकेट डायरेक्टर टॉम मूडी के मुताबिक, ‘पंत ने खुद कप्तानी से हटने की इच्छा जताई थी और फ्रेंचाइजी ने उनके फैसले को सम्मानपूर्वक स्वीकार कर लिया। ऐसा फैसला लेना कभी आसान नहीं होता।' पंत के इस्तीफा देने के पीछे 3 बड़े फैक्टर हो सकते हैं… 1. टीम का खराब प्रदर्शन, पंत प्रेशर मैनेज नहीं कर पाए 2. IPL के सबसे महंगे खिलाड़ी, लेकिन परफॉरमेंस उम्मीद से कम 3. LSG के मालिक संजीव से अनबन की खबर हार्दिक पांड्या: कोचों की बात नहीं मानी, मुंबई इंडियंस 9वें पायदान पर रही 28 मई को इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया कि मुंबई इंडियंस, यानी MI के कप्तान के बतौर हार्दिक पांड्या का टेन्योर खत्म होने वाला है। टीम में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। इसकी शुरुआत कप्तान से होगी। अखबार ने टीम से जुड़े 3 सोर्सेज के हवाले से बताया, ‘टीम का मैनेजमेंट हार्दिक को आगे कप्तान बनाए रखना नहीं चाहता। आने वाले दिनों में इंट्रोस्पेक्शन होगा। कई सवालों के जवाब देने होंगे। उसके बाद तय होगा कि क्या हार्दिक कप्तान बने रहेंगे या सिर्फ प्लेयर की तरह टीम में रहेंगे?’ हार्दिक की कप्तानी जाने के पीछे 3 बड़े फैक्टर हो सकते हैं.. 1. MI की खराब परफॉरमेंस, सीनियर खिलाड़ी भी नाकाम रहे 2. मिड-ऑर्डर में हार्दिक का परफॉरमेंस अच्छा नहीं रहा 3. कोचों से अंदरूनी विवाद ऋतुराज गायकवाड़: 3 सीजन से कप्तान, CSK 8वें पायदान पर रही पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी ने 19 मई को क्रिकबज से कहा, 'IPL 2027 में ऋतुराज ही चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान होंगे, ये कहा नहीं जा सकता। CSK के लिए खेल चुके ऑफ-स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी मौजूदा सीजन में गायकवाड़ की परफॉर्मेंस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'कप्तानी के प्रेशर के चलते वे बल्लेबाजी में भी कुछ खास नहीं कर पा रहे हैं।’ ऋतुराज की कप्तानी जाने के 3 बड़े फैक्टर हो सकते हैं… 1. CSK की कमजोर परफॉर्मेंस, गायकवाड़ प्लेयर्स को मैनेज नहीं कर पाए 2. ओपनर के तौर पर ऋतुरात का प्रदर्शन खराब रहा 3. तीन सीजन से कप्तान, एक बार भी प्लेऑफ तक नहीं ले जा पाए अजिंक्य रहाणे: KKR दूसरी बार प्लेऑफ तक नहीं पहुंची, 7वें पायदान पर फिनिश 15 मई 2026 को आउटलुक इंडिया मैगजीन ने सोर्सेज के हवाले से तीन IPL कप्तानों के नाम दिए, जिनसे कप्तानी छीनी जा सकती है। इस रिपोर्ट में ऋतुराज गायकवाड़, अक्षर पटेल और अजिंक्य रहाणे का नाम था। आउटलुक के मुताबिक, ‘रहाणे को KKR की कप्तानी मिलना 'फोर्स्ड कॉल' यानी मजबूरी में लिया फैसला था, क्योंकि टीम के पास कोई दूसरा ऑप्शन नहीं था।’ KKR ने 2024 में श्रेयस अय्यर की कप्तानी में 10 साल के इंतजार के बाद IPL खिताब जीता। हालांकि, 2025 में अय्यर पंजाब किंग्स में शामिल हो गए थे। 3 फैक्टर जिनके चलते रहाणे की कप्तानी छिन सकती है… 1. KKR का निराशाजनक सीजन, लगातार दूसरी बार प्लेऑफ से बाहर 2. एज फैक्टर और इंटरनेशनल क्रिकेट से दूरी 3. स्लो-बैटिंग और स्ट्राइक रेट पर सवाल इन 4 कप्तानों के अलावा दिल्ली कैपिटल्स (DC) के कप्तान अक्षर पटेल की कप्तानी पर भी सवाल हैं। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, ‘अक्षर बतौर कप्तान पूरी तरह नाकाम रहे। फैसले लेने के लिए वे ज्यादातर कोच हेमांग बदानी और वेणुगोपाल राव पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में अगर अगले साल उनकी कप्तानी बरकरार रहना एक चमत्कार ही होगा।’ सवाल-1: इन टीमों के नए कप्तान कौन हो सकते हैं? जवाब: 5 टीमों के नए कप्तान के लिए सबसे बड़े दावेदार हैं… LSG : मिशेल मार्श ESPN के मुताबिक LSG अगले कप्तान की दौड़ में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज मिचेल मार्श का नाम सबसे आगे है, मार्श पिछले दो सीजन से टीम के टॉप स्कोरर भी रहे हैं। इसके अलावा भारतीय युवा खिलाड़ी आयुष बडोनी के नाम की भी चर्चा है। MI: तिलक वर्मा MI के पास जसप्रीत बुमराह और सूर्यकुमार यादव का विकल्प है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, मैनेजमेंट युवा बैटर तिलक वर्मा पर दांव खेल सकता है। CSK: संजू सैमसन पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी के मुताबिक, 'CSK IPL 2027 के लिए संजू सैमसन को चुनेगी। उनके पास RR की कप्तानी का अनुभव है और वे ऋतुराज से बेहतर फॉर्म में हैं।’ KKR: रिंकू सिंह क्रिकट्रैकर की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘KKR मैनेजमेंट 2027 में टीम की कप्तानी रिंकू सिंह को सौंप सकता है। टीम के CEO वेंकी मैसूर ने IPL 2026 से पहले उन्हें वाइस-कैप्टन बनाकर इसका संकेत दे दिया था।’ DC: ट्रिस्टन स्टब्स DC के पास मौजूदा वाइस-कैप्टन केएल राहुल का विकल्प है। हालांकि, जब वे पहले ही कप्तान बनने से मना कर चुके हैं। IPL 2026 में अक्षर की गैर-मौजूदगी में डेविड मिलर और ट्रिस्टन स्टब्स ने कप्तानी संभाली। स्टब्स युवा हैं, टीम उन्हें कप्तान बना सकती है।***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास----------------------------------------------------------- IPL से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… IPL 2026 ने दिए भारत को 10 फ्यूचर स्टार्स:सूर्यवंशी ने 776 रन बनाए, प्रिंस ने कोहली को बोल्ड किया; रसिख खेलेंगे फाइनल IPL का फाइनल आज अहमदाबाद में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और गुजरात टाइटंस के बीच खेला जाएगा। इस सीजन में कई अनकैप्ड खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से टीमों की जीत में अहम भूमिका निभाई। वैभव सूर्यवंशी, प्रिंस यादव, प्रफुल हिंगे और आयुष म्हात्रे जैसे युवा सितारे चर्चा में रहे। स्टोरी में ऐसे ही 10 अनकैप्ड भारतीय प्लेयर्स, जो आने वाले समय में टीम इंडिया के लिए डेब्यू कर सकते हैं। पढ़ें पूरी खबर…
5 मई 2024, NEET-UG का एग्जाम था। पेपर शुरू होने से पहले ही पता चला कि पेपर लीक हो गया है। मुख्य सेंटर पटना बताया गया, जहां साल्वर गैंग ने एक रात पहले कुछ स्टूडेंट्स को एग्जाम में आने वाले सवाल-जवाब रटवाए। इसके अलावा भी कई गड़बड़ियां सामने आईं। एग्जाम कैंसिल नहीं हुआ लेकिन आगे ऐसा न हो, इसके लिए NTA ने फुल-प्रूफ सिस्टम बनाने का दावा किया। एक कमेटी बनाई गई और उसकी सिफारिशें लागू भी की गईं। 2026 में फिर लीक हुआ और एग्जाम कैंसिल करना पड़ा। हमने 2024 के NEET पेपर लीक से जुड़े केस रिकॉर्ड, CBI चार्जशीट और पटना हाईकोर्ट के आदेश खंगाले। छानबीन और पकड़े गए लोगों के लगातार जमानत पर बाहर आने का ये सिलसिला पहले ही बता रहा था कि जल्द ही फिर पेपर लीक होना तय है। पड़ताल में 3 बड़ी बातें सामने आईं… 1. 46 गिरफ्तारियां हुईं, लगभग सभी जमानत पर बाहर केस में पहले बिहार EOW और बाद में CBI ने जांच की। कुल 46 लोग गिरफ्तार किए गए। इनमें से 45 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई और 44 जमानत पर बाहर आ चुके हैं। मीडिया में मास्टरमाइंड बताए गए संजीव मुखिया के खिलाफ CBI को ज्यादा सबूत नहीं मिले, इसलिए उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं हुई और उसे डिफॉल्ट बेल मिल गई। ज्यादातर आरोपी सशर्त जमानत पर हैं। सिर्फ अमित प्रसाद महाराणा को जमानत नहीं मिली है। मामले का ट्रायल अभी शुरू नहीं हुआ है। 2. नाम बदले, लेकिन कोचिंग नेटवर्क का मॉडल वही रहा 2024 और 2026 के मामलों में आरोपियों के नाम अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों मामलों में कोचिंग और एडमिशन कंसल्टेंसी से जुड़े नेटवर्क की भूमिका सामने आई। 2024 की जांच में ऐसे लोगों का नाम आया, जो पहले भी एंट्रेंस एग्जाम में डमी कैंडिडेट और सॉल्वर नेटवर्क से जुड़े रहे थे। इनमें कुछ आरोपी जमानत मिलने के बाद शिक्षा और काउंसलिंग के कारोबार में फिर एक्टिव मिले। 3. पांच महीने पहले से भरोसा था कि पेपर लीक करा लेंगे पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े प्रमुख आरोपी को 2024 में भरोसा था कि वो झारखंड के एक एग्जाम सेंटर के स्ट्रॉन्ग रूम से पेपर हासिल कर लेंगे। इसे देखते हुए उन्होंने एग्जाम से करीब पांच महीने पहले तैयारी शुरू कर दी। सॉल्वर गैंग तैयार किए, डमी कैंडिडेट्स की तलाश हुई और एग्जाम से पहले फ्लाइट और ट्रेन टिकट तक बुक करा दिए गए। 2023 में भी लीक करा लेने के दावे किए थे। भले 2026 केस में अलग लोग हैं, लेकिन पैटर्न सेम ही फॉलो हो रहा है। 2024 पेपर लीक नेटवर्क के 5 किरदार 2024 NEET पेपर लीक केस में जांच एजेंसियों ने जिस नेटवर्क का खुलासा किया, उसमें 5 प्रमुख किरदार सामने आए। इनमें से चार आरोपियों को 271 से 279 दिनों के अंदर ही जमानत मिल गई। वहीं, कथित मास्टरमाइंड बताए गए संजीव मुखिया के खिलाफ CBI चार्जशीट ही दाखिल नहीं कर सकी। 1. संजीव मुखियाकथित मास्टरमाइंड, लेकिन सबूत नहीं99 दिनों में जमानत मिली संजीव मुखिया को 24 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया गया। शुरुआती जांच में उसका नाम सामने आया, लेकिन CBI को पर्याप्त सबूत नहीं मिले। 90 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल नहीं होने पर 2 अगस्त 2025 को उसे डिफॉल्ट बेल मिल गई। हालांकि दूसरे मामलों में राहत न मिलने के कारण वो अभी जेल में है। 2. अमित कुमार सिंहसॉल्वर और कोचिंग नेटवर्क का कोऑर्डिनेटर279 दिन बाद जमानत मिली झारखंड का रहने वाला अमित कुमार सिंह नेटवर्क के प्रमुख ऑपरेटरों में था। CBI के मुताबिक, उसने राजस्थान, बिहार, झारखंड और ओडिशा से कैंडिडेट और सॉल्वर जुटाए। एग्जाम से महीनों पहले तैयारी शुरू कर दी गई थी। सॉल्वरों के आने-जाने तक की एडवांस बुकिंग कराई थी। जांच में कई कोचिंग एजेंट्स और कंसल्टेंसी नेटवर्क से उसके संबंध सामने आए। 2 जुलाई 2024 को उसे गिरफ्तार किया गया, लेकिन साल भर के अंदर ही 7 मई 2025 को जमानत मिल गई। 3. पंकज कुमार उर्फ आदित्यपेपर चोरी से लेकर सबूत मिटाने तक साजिश में शामिल272 दिन बाद जमानत मिली CBI के मुताबिक, पंकज कुमार ने एग्जाम का पेपर हासिल करने, उसे सॉल्वरों तक पहुंचाने और बाद में सबूत मिटाने में अहम भूमिका निभाई। उसने हजारीबाग के ओएसिस स्कूल से NEET का पेपर चुराकर फोटो खींची थी। फिर इसे राज गेस्ट हाउस भेजकर 9 से ज्यादा सॉल्वर से हल कराया। इसके बाद सॉल्वड पेपर की PDF बनाकर पटना, बोकारो और भुवनेश्वर भेजा, जहां पहले से जुटाए गए NEET कैंडिडेट को पेपर रटवाया गया था। हजारीबाग के राज गेस्ट हाउस और सिंदूर हाउस में इसी की मदद से कैंडिडेट को पेपर रटवाया गया था। जांच एजेंसी का दावा है कि पेपर लीक में जिन-जिन फोन का इस्तेमाल किया गया, पंकज ने वो सभी 16 फोन नष्ट कराए, ताकि सबूत ना मिले। पंकज को 17 जुलाई 2024 को गिरफ्तार किया गया था। वो एक साल भी जेल में नहीं रहा, 15 मई 2025 को सशर्त जमानत पर बाहर आ गया था। 4. राकेश रंजन उर्फ रॉकीपेपर लीक नेटवर्क का ऑपरेटरकरीब 271 दिन बाद जमानत मिली CBI ने राकेश को पेपर लीक नेटवर्क के मुख्य ऑपरेटरों में से एक बताया। ओएसिस स्कूल से पेपर लीक कराने में पंकज के साथ वो भी शामिल था। उसने पंकज से सॉल्व पेपर की PDF अपने साथी शशिकांत पासवान के फोन पर मंगवाई, जिसे हजारीबाग के सिंदूर हाउस में कैंडिडेट्स को रटवाया गया था। राकेश पूरे नेटवर्क की निगरानी कर रहा था। उसी के कहने पर पटना के लर्न प्ले स्कूल में उसके दोस्त बलदेव कुमार उर्फ चिंटू के फोन पर NEET का सॉल्वड पेपर भेजा गया था। वो गिरफ्तारी को लेकर पहले से अलर्ट था, इसीलिए पेपर लीक से जुड़ा कोई डॉक्यूमेंट उसने अपने फोन पर नहीं मंगाया था। 10 जुलाई 2024 को उसे अरेस्ट किया गया और 5 अक्टूबर 2024 को उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई थी। पटना हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राकेश के वकील ने यही दावा किया कि उसके पास से लीक से जुड़े कोई दस्तावेज नहीं मिले। 4 जुलाई 2025 को पटना हाईकोर्ट से राकेश को सशर्त जमानत मिल गई। 5. रंजीत कुमार बेउराकाउंसलिंग सेंटर से उम्मीदवारों तक पहुंचकरीब 276 दिन बाद मिली जमानत भुवनेश्वर में रंजीत कुमार बेउरा के नाम से एक ट्रस्ट और कई कंपनियां हैं। वो एक काउंसलिंग सेंटर, करियर एकेडमी एजुकेशन ट्रस्ट (CAET) का चेयरमैन है, जबकि अमित प्रसाद महाराणा और धीरेन इसी ट्रस्ट के डायरेक्टर हैं। 2024 NEET पेपर लीक मामले में रंजीत के साथ अमित प्रसाद और धीरेन को भी गिरफ्तार किया गया था। अमित ही अकेला आरोपी है, जिसे अब तक जमानत नहीं मिली है। CBI जांच में पता चला कि इनके काउंसलिंग सेंटर में इंजीनियरिंग और मेडिकल स्टूडेंट आते हैं। ये पहले स्टूडेंट और उनके पेरेंट्स से मिलकर डिटेल नोट करते हैं। फिर इनमें से ऐसे स्टूडेंट की लिस्ट बनाते हैं, जो अच्छा पैसा खर्च कर सकते हैं। इसके बाद एकेडमी का स्टाफ उन्हें अलग से अप्रोच कर समझाता कि उनके बच्चे को ज्यादा से ज्यादा नंबर कैसे मिल सकते हैं। कैसे सरकारी कॉलेज में भी एडमिशन मिल सकता है। फिर एग्जाम से पहले सॉल्वड पेपर का दावा कर लाखों रुपए की डील होती है। रंजीत की टीम ने NEET 2024 एग्जाम का फॉर्म भरते वक्त ही अपने 17 कैंडिडेट का सेंटर ओडिशा के बजाय झारखंड के हजारीबाग डलवाया था, जहां से पेपर लीक हुआ था। CBI ने सभी 17 स्टूडेंट की पहचान कर ली थी। इन्हें हजारीबाग के राज गेस्ट हाउस और सिंदूर हाउस में एग्जाम से पहले पेपर रटवाया गया था। CBI जांच में रंजीत के फोन की लोकेशन भी 3 मई से 5 मई 2024 तक हजारीबाग में ही मिली थी। पटना हाईकोर्ट में जमानत के लिए पेश हुए रंजीत के वकील ने दावा किया था कि 3 अगस्त 2023 को उसने अपनी ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन कराया था। वे जरूरतमंद और गरीब बच्चों की काउंसलिंग में मदद करते हैं। CBI को इनके पास से कोई सबूत नहीं मिला, जिससे पेपर लीक का संबंध हो। 6 मई 2025 को पटना हाई कोर्ट ने रंजीत को सशर्त जमानत दे दी थी। जमानत पर बाहर आकर रंजीत फिर से अपना करियर काउंसलिंग सेंटर चला रहा है। दैनिक भास्कर ने एक कैंडिडेट के पेरेंट बनकर फोन पर रंजीत से बात की। उसने कहा कि अभी हम 40 लाख से लेकर 1.5 करोड़ रुपए में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज दिला सकते हैं। हमने सरकारी कॉलेज में दाखिले के लिए पूछा, तो रंजीत ने कहा कि पहले ऑफिस आइए, आमने-सामने बात होगी। सब फोन पर नहीं बता सकते। वकील बोले- CBI जांच खत्म, जमानत लेना आरोपी का हक नीट पेपर लीकल केस में एक के बाद एक आरोपियों को कैसे जमानत मिलती गई, ये जानने के लिए हमने सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट विनीत जिंदल और पटना हाईकोर्ट के वकील आकाश शंकर से बात की। आकाश लीक में गिरफ्तार एक आरोपी के वकील भी हैं। वे बताते हैं, ‘2024 के NEET पेपर लीक में पहले पटना की शास्त्री नगर पुलिस ने FIR की, बाद में EOW ने जांच की। फिर केस CBI को ट्रांसफर हो गया। अभी केस में चार्जफ्रेम हो रहे हैं और ट्रायल शुरू होना बाकी है। CBI जांच खत्म हो गई थी, इसलिए जमानत लेना आरोपी का हक है। सभी सशर्त जमानत पर बाहर हैं। ट्रायल के समय सभी को हर तारीख पर आना होगा। कोई सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा।‘ ‘दूसरी बात, आरोपियों के पास से IPC धारा-409 के तहत लीक हुआ पेपर रिकवर नहीं हुआ, इसलिए सीधे मटीरियल ऑफ एविडेंस नहीं मिला है। इस वजह से भी कई आरोपियों को जल्दी जमानत मिल गई। अगर CBI किसी भी आरोपी के खिलाफ सीधे सबूत पेश कर सकी, तो उसे IPC की धारा-409 के तहत आजीवन कारावास हो सकती है।‘ अब 2026 NEET लीक की बात2024 NEET लीक की जांच और जमानत के सिलसिलों से साफ है कि 2026 में भी सामने आए नामों को ज्यादा दिन जेल में नहीं रखा जा सकता। यहां भी IPC धारा-409 के तहत लीक हुआ पेपर रिकवर होने की संभावना कम है। आरोप है कि केमिस्ट्री लेक्चरर पीवी कुलकर्णी की पहुंच पेपर तक थी और इन्होंने रटकर ये लीक किया, ऐसे में पेपर की रिकवरी होनी मुश्किल है। कोर्ट में ये साबित करना और मुश्किल होगा। अन्य आरोपियों मनीषा वाघमारे, मनोज शिरूरे, तेजस हर्षदकुमार शाह और मनीष संजय हवलदार पर तो सिर्फ लीक नेटवर्क में शामिल होने, पेपर खरीदने और बच्चों को मुहैया कराने के ही आरोप हैं। …………………… ये खबर भी पढ़ें… NEET पेपर लीक का ब्यूटीशियन कनेक्शन NEET पेपर लीक की कड़ियां अब जुड़ने लगी हैं। इस मामले में पहले केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी और फिर बॉटनी लेक्चरर मनीषा मांधरे अरेस्ट हुईं। अब NEET एग्जाम कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अफसर के भी शामिल होने की बात सामने आ रही है। पूरी खबर पढ़िए…

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