हिंडौन सिटी के वर्धमान नगर में 27 जनवरी को भव्य हिंदू सम्मेलन और हिंदू जागरण यात्रा का आयोजन होगा। प्रखर महाराज के मुख्य आतिथ्य में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में सर्वसमाज की भागीदारी रहेगी। इस दौरान 91% से अधिक अंक लाने वाली प्रतिभाओं और नव-नियुक्त सरकारी अधिकारियों का सम्मान किया जाएगा। जानिए इस बड़े आयोजन की पूरी रूपरेखा और तैयारियों का हाल इस विशेष रिपोर्ट में।
झाड़ोल स्थित जे.आर. शर्मा कन्या शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में बसंत पंचमी और सुभाष चंद्र बोस जयंती का भव्य आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ. जयश्री रावल की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। डॉ. सतीश जोशी ने नेताजी के योगदान पर व्याख्यान दिया। झाड़ोल की इस शैक्षणिक संस्था में शिक्षा और राष्ट्रवाद के संगम की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।
कानोड़ के आदर्श विद्या मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार और भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ बसंतोत्सव का आयोजन किया गया। सेवानिवृत्त शिक्षक फतह लाल शर्मा और संस्था प्रधान धीरज जोशी ने मां सरस्वती के प्राकट्य और बसंत पंचमी के आध्यात्मिक व पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों ने पीले परिधानों में 'ऐं' मंत्र के जाप और साहित्यिक कार्यक्रमों से समां बांध दिया।
मुंबई के वर्ली में पुलिस सब-इंस्पेक्टर के 5 साल के बेटे को अगवा करने की कोशिश नाकाम, दोस्त की सतर्कता से बच्चा सुरक्षित, आरोपी गिरफ्तार।
मध्य रेल के 70वें विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार 2025 में सोलापुर मंडल ने मारी बाजी। डीआरएम डॉ. सुजीत मिश्रा के नेतृत्व में सोलापुर को मिलीं दो प्रतिष्ठित शील्ड और 9 रेलकर्मियों को मिला व्यक्तिगत सम्मान। महाप्रबंधक विवेक कुमार गुप्ता ने '52 सप्ताह में 52 सुधार' के संकल्प के साथ सम्मानित किया। पूरी रिपोर्ट में जानें पुरस्कार विजेताओं के नाम और रेलवे के भविष्य का रोडमैप।
लसाडिया कस्बे में शुद्ध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सहायक अभियंता रामावतार मीणा ने सदर बाजार और गणपति चौक का औचक निरीक्षण किया। गुणवत्ता जांच के साथ ही उन्होंने ब्लीचिंग पाउडर के नियमित उपयोग और बेहतर जल प्रबंधन के सख्त निर्देश दिए। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
आखिर क्यों साल में दो बार मनाया जाता है पर्यटन दिवस? जानिए भारत और विश्व के इतिहास में क्या है अंतर
पर्यटन दिवस साल में दो बार क्यों मनाया जाता है? 25 जनवरी को मनाए जाने वाले 'राष्ट्रीय पर्यटन दिवस' और 27 सितंबर के 'विश्व पर्यटन दिवस' के बीच का बड़ा अंतर, उनका ऐतिहासिक महत्व और उद्देश्य जानें। भारतीय विरासत और वैश्विक पर्यटन के इस अनूठे संयोग, 1948 की पर्यटन समिति और UNWTO के 1970 के कानूनों की विस्तृत जानकारी के लिए यह विशेष रिपोर्ट पढ़ें।
बोहेड़ा में काबरा परिवार द्वारा आयोजित 'नानी बाई का मायरा' कथा के प्रथम दिन संत दिग्विजय राम जी महाराज ने भक्त नरसी मेहता के जीवन के माध्यम से ईष्ट पर अटूट विश्वास का संदेश दिया। भव्य शोभा यात्रा के साथ शुरू हुई इस कथा में उमड़े सैंकड़ों भक्तों के बीच संत ने बताया कि भगवान भक्तों की परीक्षा प्रतिकूल समय में ही लेते हैं।
ब्यावर जिले की रायपुर पुलिस ने 5 साल से फरार 138 किलो डोडा पोस्त तस्करी के मुख्य आरोपी विष्णु विश्नोई को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। साल 2020 में नाकाबंदी तोड़कर फरार हुए इस तस्कर को कड़ी मशक्कत के बाद जोधपुर से पकड़ा गया। पुलिस अब तस्करी के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। पढ़ें रायपुर पुलिस की इस साहसिक कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट।
प्रतापगढ़: हाउसिंग बोर्ड में सन्नाटे को चीरती चीख, फंदे पर झूलता मिला कॉलेज छात्र का शव
प्रतापगढ़ के हाउसिंग बोर्ड इलाके में कॉलेज छात्र पंकज मीणा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत। किराए के कमरे में फंदे से लटका मिला 22 वर्षीय छात्र का शव। कोतवाली पुलिस मामले की जांच में जुटी, पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा शव। जानिए क्या है पूरी घटना और परिजनों का बयान।
प्रतापगढ़ में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा ऐतिहासिक किला परिसर से नगर परिषद तक भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। हजारों युवाओं ने हाथों में तिरंगा लेकर राष्ट्रभक्ति के नारों के साथ शहर को गुंजायमान कर दिया। प्रशासन की कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुई इस यात्रा ने युवाओं में सामाजिक चेतना और एकता का संदेश प्रसारित किया है।
प्रतापगढ़ में बसंत पंचमी पर दमामी समाज ने निकाली माँ सरस्वती की भव्य शोभायात्रा। बाण माता मंदिर से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी इस पहली ऐतिहासिक यात्रा में उमड़ा जनसैलाब। मेधावी छात्र-छात्राओं का हुआ सम्मान और मनीष दमानी ने साझा किया शिक्षा जागरूकता का संदेश। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
डीग में गूंजा गायत्री मंत्र: बसंत पंचमी पर महायज्ञ के साथ मना युग ऋषि का आध्यात्मिक जन्मोत्सव
डीग में बसंत पंचमी के अवसर पर गायत्री मंदिर में सुश्री नीतू गुप्ता के नेतृत्व में भव्य गायत्री यज्ञ का आयोजन किया गया। युग दृष्टा पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के आध्यात्मिक जन्म दिवस और मां सरस्वती जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम में भारी संख्या में गायत्री परिजनों ने आहुति देकर युग निर्माण के संकल्प को दोहराया। पढ़िए इस आध्यात्मिक समागम की पूरी रिपोर्ट।
डीग के बालिका उच्च प्राथमिक आदर्श विद्या मंदिर में बसंत पंचमी के पावन पर्व पर 'विद्यारम्भ संस्कार' का भव्य आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. धर्मेंद्र शास्त्री की उपस्थिति में नन्हे बच्चों ने यज्ञ में आहुति देकर और शैक्षिक किट प्राप्त कर अपनी ज्ञान यात्रा का शुभारंभ किया। जानिए कैसे संस्कारों के साथ शुरू हुई इन मेधावियों की नई पारी।
सलूम्बर: गणित के जादू से निखरा बचपन, शोभजी का गुड़ा विद्यालय में सजा 'निपुण और गणित मेला'
सलूम्बर जिले के लसाड़िया स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय शोभजी का गुड़ा में प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन द्वारा आयोजित 'निपुण एवं गणित मेले' की पूरी रिपोर्ट। बासुदेव कानोरिया सेवा संस्थान के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने खेल-खेल में सीखे गणित के गुर। प्रशासक शंकर लाल मीणा और टीम लीडर कमल नागर की मौजूदगी में सजे 15 रोचक स्टॉल्स और पुरस्कार वितरण ने बच्चों में भरा नया उत्साह।
'वन्दे मातरम्' केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का महामंत्र है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस राष्ट्रगीत का पूर्ण पाठ भारत की प्राकृतिक सुषमा और अदम्य शक्ति का सजीव चित्रण करता है। इस विशेष लेख में पढ़ें वन्दे मातरम् का अर्थ, इसका इतिहास और संविधान में इसे मिले 'राष्ट्रीय गीत' के दर्जे की पूरी कहानी। जानें कैसे इसने करोड़ों भारतीयों को एक सूत्र में पिरोया।
ट्रंप से ज्यादा मोदी और जिनपिंग ताकतवर क्यों? अमेरिकी एक्सपर्ट का चौंकाने वाला दावा
Trump vs Modi Jinping: अमेरिकी डोनाल्ड ट्रंप खुद को दुनिया का सबसे ताकतवर नेता मानते हों, लेकिन एक अमेरिकी एक्सपर्ट ने इस दावे को पलट दिया है। मशहूर राजनीतिक विश्लेषक इयन ब्रेमर का कहना है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, कई मायनों में ट्रंप से ज्यादा ताकतवर स्थिति में हैं। ब्रेमर के अनुसार, असली ताकत सुर्खियों में नहीं, बल्कि लंबे कार्यकाल और नीतिगत स्थिरता में छिपी होती है। क्या कहा ब्रेमर ने? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वैश्विक सक्रियता, टैरिफ वॉर और नोबेल शांति पुरस्कार जैसे दावों के बीच एक बड़ा राजनीतिक विश्लेषण सामने आया है। राजनीतिक मामलों के जानकार इयन ब्रेमर ने कहा है कि शी जिनपिंग और नरेंद्र मोदी मौजूदा दौर में ट्रंप से ज्यादा मजबूत और बेहतर स्थिति में हैं। ब्रेमर ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि अमेरिका सबसे शक्तिशाली देश है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसका राष्ट्रपति सबसे ताकतवर नेता हो। ब्रेमर के मुताबिक चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग की सबसे बड़ी ताकत यह है कि उन्हें मिडटर्म चुनावों का सामना नहीं करना पड़ता। स्वतंत्र न्यायपालिका या राजनीतिक अस्थिरता का उन पर दबाव नहीं है। वहीं, ट्रंप का कार्यकाल सीमित है और वे अगले कुछ वर्षों में सत्ता से बाहर भी हो सकते हैं, जबकि जिनपिंग लंबे समय तक सत्ता में बने रह सकते हैं। ब्रेमर का कहना है कि ट्रंप मीडिया की सुर्खियों और आक्रामक बयानों पर फोकस करते हैं, जबकि शी जिनपिंग पर्दे के पीछे कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में रहते हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी लिया। मोदी के बारे में क्या कहा ब्रेमर ने? अमेरिकी एक्सपर्ट ब्रेमर के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी भी ट्रंप के मुकाबले बेहतर स्थिति में हैं। उन्होंने बताया कि मोदी का लंबा और निरंतर कार्यकाल उन्हें ऐसे फैसले लेने का मौका देता है, जिनके परिणाम वर्षों बाद दिखते हैं। उन्होंने कहा कि यूरोप और अमेरिका के कई नेताओं को जहां हर चुनाव की चिंता रहती है, वहीं मोदी को नीतियों में स्थिरता और निरंतरता का फायदा मिलता है। ब्रेमर के मुताबिक इसी स्थिर नेतृत्व के कारण मोदी अंतरराष्ट्रीय दबावों का बेहतर तरीके से सामना कर पाते हैं और वैश्विक मंच पर भारत की बात मजबूती से रखते हैं। हाल के वर्षों में इसके कई उदाहरण भी सामने आए हैं। ट्रंप की शांति पहल को समर्थन नहीं दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप ने हमास-इजराइल युद्धविराम को बनाए रखने के लिए अपने प्रस्तावित 'बोर्ड ऑफ पीस' का ऐलान किया है। हालांकि, ब्रिटेन ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है, जबकि फ्रांस, इटली के बाद नॉर्वे और स्वीडन भी पीछे हटते दिख रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ने सिर्फ इस मामले में विचार करने की बात कही है। भारत की तरफ से भी कोई स्पष्ट रुख सामने नहीं आया है। यह स्थिति भी ट्रंप की वैश्विक स्वीकार्यता पर सवाल खड़े करती है। चीन ने भी फिलहाल इससे दूरी बनाई हुई है। हालांकि इजराइल के अलावा कई मुस्लिम देशों ने ट्रंप के बोर्ड से जुड़ने के लिए सहमति व्यक्त कर दी है। हालांकि नहीं जुड़ने वाले देशों को डर है कि इससे संयुक्त राष्ट्र की स्थिति कमजोर होगी और वे ऐसा नहीं होने देना चाहते। Edited by: Vrijendra Singh Jhala
पाकिस्तान में एक टीचर के बच्ची की पिटाई के गलत दावे से इराक का वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो पाकिस्तान का नहीं बल्कि इराक की राजधानी बगदाद का है. यह घटना अक्टूबर 2025 की है, जब एक पिता ने अपनी बच्ची के साथ मारपीट की थी.
कानपुर में पुलिस ने बड़े हवाला और सट्टेबाज़ी रैकेट का भंडाफोड़ किया। ₹2.26 करोड़ नकद, 61.8 किलो चांदी जब्त, 5 आरोपी हिरासत में।
नासिक के सुला वाइनयार्ड्स में 'सुलफेस्ट 2026' की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। 15वें साल के इस ऐतिहासिक जश्न में किंग, न्यूक्लिया और स्वरात्मा जैसे दिग्गज कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। वाइन टेस्टिंग, ग्रेप स्टॉम्पिंग और लक्जरी लाइफस्टाइल का अनुभव लेने के लिए तैयार हो जाइए। जानिए टिकट, लाइनअप और आयोजन से जुड़ी हर बड़ी जानकारी।
श्रवण नक्षत्र में बुधादित्य योग, किन 5 राशियों के लिए है फायदेमंद
Shravana Nakshatra 2026: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब बुद्धि के देवता बुध और मान-सम्मान के कारक सूर्य एक ही राशि में युति करते हैं, तो 'बुधादित्य योग' का निर्माण होता है। वर्तमान में श्रवण नक्षत्र (जो चंद्रमा का नक्षत्र है) में इस योग का बनना अत्यंत शुभ माना जा रहा है। श्रवण नक्षत्र ज्ञान, सुनने की शक्ति और अनुशासन का प्रतीक है। यहाँ बुध और सूर्य की जुगलबंदी इन 3 राशियों के लिए भाग्य के द्वार खोल सकती है। 1. मेष राशि: तरक्की और वैभव का नया दौर 2. वृषभ राशि: किस्मत का साथ और धन की वर्षा 3. सिंह राशि: मान-सम्मान और नेतृत्व का उदय 4. धनु राशि: नए संकल्पों और विदेश यात्रा का योग 5. मकर राशि: कर्ज से मुक्ति और आर्थिक स्थिरता 1. मेष राशि: तरक्की और वैभव का नया दौर मेष राशि वालों के लिए यह समय किसी सुनहरे सपने के सच होने जैसा है। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो आपकी आर्थिक और व्यावसायिक स्थिति में जबरदस्त उछाल आएगा। अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो दफ्तर में आपकी मेहनत रंग लाएगी और प्रमोशन के साथ नई जिम्मेदारियों का तोहफा मिल सकता है। बैंक बैलेंस बढ़ने वाला है, क्योंकि निवेश से मोटा मुनाफा होने के संकेत हैं। व्यापार विस्तार के लिए आपको बड़े प्रभावशाली लोगों का साथ मिलेगा, जिससे आपका काम नई ऊंचाइयों को छुएगा। 2. वृषभ राशि: किस्मत का साथ और धन की वर्षा वृषभ राशि के जातकों के लिए यह योग शिक्षा, करियर और व्यापार में सफलता की नई कहानी लिखेगा। विद्यार्थियों के लिए यह समय वरदान की तरह है; प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता कदम चूमेगी, जिससे सरकारी नौकरी का सपना पूरा हो सकता है। यदि आप साझेदारी (Partnership) में व्यापार कर रहे हैं, विशेषकर कपड़ा, आभूषण या फर्नीचर के काम में, तो मुनाफा आपके दरवाजे पर दस्तक देने वाला है। संपत्ति से जुड़े पुराने विवाद सुलझेंगे और पैतृक संपत्ति से भी अचानक धन लाभ होने के प्रबल योग हैं। 3. सिंह राशि: मान-सम्मान और नेतृत्व का उदय सिंह राशि के स्वामी स्वयं सूर्य देव हैं, इसलिए यह योग आपके लिए अत्यंत प्रभावशाली रहेगा। समाज में आपका कद बढ़ेगा और आपकी लोकप्रियता चारों ओर फैलेगी। धन आगमन के नए रास्ते खुलेंगे और आपकी पुरानी योजनाएं अब धरातल पर सफल होती दिखेंगी। कार्यक्षेत्र में आपकी लीडरशिप क्वालिटी की जमकर तारीफ होगी और बॉस आपके फैसलों पर भरोसा जताएंगे। इसके साथ ही, आपका स्वास्थ्य भी उत्तम रहेगा, जिससे आप ऊर्जा और उत्साह से भरे रहेंगे। 4. धनु राशि: नए संकल्पों और विदेश यात्रा का योग धनु राशि के जातकों के लिए बुधादित्य योग खुशियों की नई शुरुआत लेकर आया है। जो लोग अपना स्टार्टअप या नया बिजनेस शुरू करने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह 'गोल्डन पीरियड' है। विदेश से जुड़े कार्यों में आपको अप्रत्याशित लाभ हो सकता है और यात्रा के योग भी बन रहे हैं। अचानक आने वाले धन से आपके वे काम दोबारा शुरू हो जाएंगे जो पैसों की कमी की वजह से रुके हुए थे। घर-परिवार में सामंजस्य रहेगा और जल्द ही किसी मांगलिक उत्सव की शहनाइयां गूंज सकती हैं। 5. मकर राशि: कर्ज से मुक्ति और आर्थिक स्थिरता मकर राशि वालों के लिए यह योग करियर और फाइनेंस के मोर्चे पर बड़ी राहत लेकर आ रहा है। आपकी आय के स्रोतों में इजाफा होगा, जिससे न केवल आर्थिक स्थिरता आएगी बल्कि आप अपना पुराना कर्ज चुकाने में भी सफल रहेंगे। नौकरी में बदलाव या पदोन्नति की इच्छा रखने वालों की मुराद पूरी हो सकती है। व्यापार में प्रॉफिट मार्जिन बढ़ेगा और किसी कानूनी उलझन से आपको हमेशा के लिए छुटकारा मिल सकता है। कुल मिलाकर, मानसिक शांति और प्रसन्नता का माहौल बना रहेगा।
इलाहाबाद की खोज: ईश्वर का शाश्वत शहर
जैसे ही प्रयाग में माघ मेला शुरू होता है, एक प्रयाग निवासी अपनी यादों और परंपरा के माध्यम से इसकी आध्यात्मिक महिमा, इतिहास, कविता और व्यक्तिगत नुकसान पर विचार करता है....
भीलवाड़ा के शक्ति सिंह राणावत 17 हजार किलोमीटर की पदयात्रा पर हैं। 12 ज्योतिर्लिंग और चार धाम की इस यात्रा का उद्देश्य गौ माता को 'राष्ट्र माता' का दर्जा दिलाना है। नासिक में रतन सिंह, किशन सिंह और नानूराम तेली की उपस्थिति में उनका भव्य स्वागत हुआ। जानिए इस महाभियान और 27 अप्रैल को होने वाले राष्ट्रव्यापी गौ सम्मान आंदोलन के बारे में पूरी जानकारी।
भीलवाड़ा में श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ पर भक्ति का महासंग्राम दिखा। सुंदरकांड समितियों और अयोध्या एंटरप्राइजेज के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में सैकड़ों रामभक्तों ने भाग लिया। 500 वर्षों के संघर्ष और 2024 की ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा की यादों को सुंदरकांड पाठ और भजनों के माध्यम से जीवंत किया गया। भीलवाड़ा की गली-गली राममय हो गई।
भीलवाड़ा में प्रतिबंधित चायनीज मांझे का कहर! संजय कॉलोनी निवासी संगीता न्याती की गर्दन मांझे की चपेट में आने से बुरी तरह कट गई। दूधाधारी मंदिर के पास हुए इस हादसे में डॉ. योगेश दरगड और डॉ. विभा जैन ने 10 टांके लगाकर महिला की जान बचाई। जानिए कैसे एक लापरवाही जानलेवा साबित होते-होते बची और क्यों प्रशासन के दावों पर उठ रहे हैं सवाल।
अमेरिका ने 22 जनवरी 2026 को आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से सदस्यता समाप्त कर ली है। 'ब्यूरोक्रेटिक नाकामी' और कोरोना महामारी के दौरान खराब प्रबंधन का आरोप लगाते हुए ट्रम्प प्रशासन ने फंड रोकने और विशेषज्ञों को वापस बुलाने का फैसला किया है। जानिए इस ऐतिहासिक विदाई का वैश्विक स्वास्थ्य और कूटनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
मुंबई महानगरपालिका में सीधी भर्ती! BMC दे रही है 56,000 रुपये तक सैलरी, जानिए कैसे करें अप्लाई...
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने देवनार पशुवधगृह में 'कामगार' (Group D) के 38 पदों पर सीधी भर्ती की घोषणा की है। 18,000-56,900 रुपये के वेतनमान वाली इस नौकरी के लिए SC, EWS और अन्य आरक्षित वर्गों के लिए विशेष मौके हैं। जानिए आवेदन की प्रक्रिया, पात्रता, आरक्षण के नियम और जॉब प्रोफाइल के बारे में विस्तृत जानकारी। ऑनलाइन आवेदन BMC के आधिकारिक पोर्टल पर शुरू हो चुके हैं।
सांगानेर में श्री राम प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ पर रामायण मंडल द्वारा भव्य अखंड रामचरितमानस पाठ का आयोजन किया गया। 65 वर्षों की परंपरा को निभाते हुए भक्तों ने भजनों पर झूमकर उत्सव मनाया। सनातन संस्कृति के संरक्षण और भावी पीढ़ी में संस्कारों के सिंचन हेतु आयोजित इस भक्तिमय कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।
भीलवाड़ा के प्रसिद्ध 472 साल पुराने श्री दूधाधारी गोपाल मंदिर का 473वां पाटोत्सव आज धूमधाम से मनाया जा रहा है। मीरां काल के इस मंदिर में कभी भक्त की विनती पर भगवान ने साक्षात दूध पिया था। जानिए मंदिर के अद्भुत इतिहास, मुगल काल के गुप्त तहखाने और वृंदावन के प्रेम मंदिर जैसी इसकी भव्य वास्तुकला के बारे में पूरी जानकारी।
भीलवाड़ा के गुलाबपुरा में सेना के कर्नल की कार का शीशा तोड़कर लाखों की चोरी करने वाली हरियाणा की अंतरराज्यीय गैंग का पर्दाफाश। महंगी बाइक पर दिल्ली से आकर नेशनल हाईवे पर 30 से अधिक वारदातों को अंजाम देने वाले उपेंद्र सांसी और वीरेंद्र को पुलिस ने 1500 किमी पीछा कर गिरफ्तार किया। मोबाइल का उपयोग न करने वाली इस शातिर गैंग के कबूलनामे ने उड़ाए पुलिस के होश।
भुसावर के लक्ष्मी नगर में रिमझिम बारिश के बीच भव्य कलश यात्रा के साथ सात दिवसीय श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ हुआ। वृन्दावन के पंडित योगेन्द्र कृष्ण शास्त्री महाराज ने कथा के पहले दिन श्रद्धालुओं को मृत्यु के भय से मुक्ति और भागवत के आध्यात्मिक महत्व के बारे में बताया। जानिए इस भव्य धार्मिक आयोजन और कलश यात्रा की पूरी रिपोर्ट।
बयाना में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती पर 'पराक्रम दिवस' के अवसर पर एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। सुभाष चौक से शुरू हुई इस यात्रा में हजारों की संख्या में छात्रों, युवाओं और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। देशभक्ति के नारों और बैंड-बाजों के साथ निकले इस जुलूस ने पूरे शहर को राष्ट्रभक्ति के रंग में सरोबार कर दिया। जानिए कैसे बयाना की जनता ने नेताजी के बलिदान को याद कर मनाया यह ऐतिहासिक उत्सव।
डिजिटल पर्दे पर 'सेंसर' का साया: ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर लगाम और रचनात्मकता की नई जंग
भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर सेंसरशिप और कंटेंट कंट्रोल को लेकर सरकार ने कड़े रुख के संकेत दिए हैं। आईटी नियम 2021 के तहत वेब सीरीज और डिजिटल कंटेंट के लिए नई गाइडलाइंस और तीन-स्तरीय शिकायत तंत्र की पूरी जानकारी। जानिए कैसे रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक मर्यादा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।
बयाना में गूँजेगा हिंदुत्व का शंखनाद: RSS शताब्दी वर्ष पर विराट हिंदू सम्मेलन की अभूतपूर्व तैयारियाँ
बयाना में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 'विराट हिंदू सम्मेलन' की भव्य तैयारियां जारी हैं। 31 जनवरी को ग्राम हरनगर में आयोजित होने वाले इस विशाल समागम के जरिए संघ का लक्ष्य प्रत्येक गांव और परिवार तक राष्ट्रवाद का संदेश पहुंचाना है। कमल सिंह धाकड़ और अन्य कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में चल रहे इस जनसंपर्क अभियान और सामाजिक संगठन के महाकुंभ की पूरी विस्तृत रिपोर्ट यहां पढ़ें।
भरतपुर: पीसीसी चीफ डोटासरा से मिले जाट महासभा के दिग्गज, आगामी पंचायत चुनावों को लेकर गरमाई सियासत
भरतपुर और डीग के राजनीतिक दिग्गजों ने जयपुर में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात की। हिंदुस्तान जाट महासभा के अध्यक्ष गोविंद सिंह सिनसिनवार और प्रदेश महासचिव पवन ठाकुर के नेतृत्व में हुई इस बैठक में आगामी पंचायत चुनावों और क्षेत्र के विकास पर गहन चर्चा हुई। जानिए इस मुलाकात के सियासी मायने।
व्यंगचित्रकार ते 'किंगमेकर': हिंदुहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे यांचा अविस्मरणीय झंझावाती प्रवास
व्यंगचित्रकार ते किंगमेकर असा थक्क करणारा प्रवास करणारे शिवसेनाप्रमुख बाळासाहेब ठाकरे यांचा जीवनपट. मराठी अस्मिता आणि हिंदुत्वाचा प्रखर आवाज उठवत त्यांनी कोणत्याही पदाविना महाराष्ट्राच्या राजकारणावर हुकूमत गाजवली. त्यांच्या संघर्षाची, राजकीय क्रांतीची आणि शेवटच्या प्रवासाची सविस्तर माहिती देणारा विशेष लेख. (२९५ characters)
डीग में मनरेगा के अस्तित्व पर संकट: जिलाध्यक्ष राजीव सिंह चौधरी ने फूंका जन आंदोलन का बिगुल
डीग में कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजीव सिंह चौधरी के नेतृत्व में 'मनरेगा बचाओ जन आंदोलन' का आगाज़ हुआ। रारह, ताखा और गुनसारा की नुक्कड़ सभाओं में केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा बजट कटौती और ठेकेदारी प्रथा लागू करने की योजनाओं का कड़ा विरोध किया गया। जानें कैसे 60 दिन का ब्लैक आउट पीरियड और घटती सब्सिडी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगी।
झालरापाटन: सालरिया में भ्रष्टाचार का 'श्मशान', कागजों में विकास और धरातल पर लूट का खेल
झालरापाटन की सालरिया ग्राम पंचायत में श्मशान विकास के नाम पर लाखों के गबन का मामला सामने आया है। श्री देव नारायण कंस्ट्रक्शन को हुए भुगतान और फर्जी मजदूरी के दावों ने सरकारी तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानिए कैसे कागजों में हुआ विकास और हकीकत में हुआ भ्रष्टाचार।
बॉलीवुड में सुपरस्टार्स और बड़े बजट की फिल्मों के बीच बॉक्स ऑफिस क्लैश ने नया मोड़ ले लिया है। 'स्टार पावर' बनाम 'दमदार कंटेंट' की इस जंग में दर्शकों का फैसला अब सोशल मीडिया पर भारी पड़ रहा है। जानिए कैसे साल 2025-26 की बड़ी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अपनी साख बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं और क्यों अब केवल बड़े नाम सफलता की गारंटी नहीं रहे।
भाजपा के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन के निर्वाचन पर प्रदेश उपाध्यक्ष छगन माहुर ने दी बधाई। माहुर ने इसे भाजपा के आंतरिक लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि केवल भाजपा में ही एक साधारण कार्यकर्ता शीर्ष पद तक पहुँच सकता है। प्रधानमंत्री द्वारा अध्यक्ष को 'बॉस' मानना पार्टी की महान परंपरा का प्रतीक है। पूरी खबर पढ़ें।
राजसमंद के चौकड़ी गांव में बिजली के तार को लेकर हुए विवाद में हिस्ट्रीशीटर महेंद्र भील की लाठियों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस खूनी संघर्ष में एक अन्य युवक पवनसिंह गंभीर रूप से घायल है। पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता समेत भारी पुलिस बल मौके पर तैनात है। पुलिस संदिग्धों से पूछताछ कर हमलावरों की तलाश में जुटी है।
बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा के पावन अवसर पर यहाँ पढ़ें माँ सरस्वती की संपूर्ण संस्कृत वंदना और महाआरती। 'या कुन्देन्दुतुषारहारधवला' श्लोक के साथ पूजा का शुभारंभ करें और 'ओम जय सरस्वती माता' आरती के साथ समापन। अज्ञान के नाश और ज्ञान के प्रकाश के लिए विधि-विधान से करें आराधना। विद्यार्थियों, लेखकों और साधकों के लिए पूजा के अंत में पुष्पांजलि मंत्र सहित विशेष प्रस्तुति।
जयपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बड़ा कदम उठाते हुए 24 लंबित प्रकरणों का निस्तारण किया है। वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, उद्योग विभाग और PWD के अधिकारियों सहित कई लोक सेवकों पर अभियोजन स्वीकृति और पेंशन रोकने जैसी सख्त कार्रवाई की गई है। राजस्थान सरकार का यह कदम प्रदेश में पारदर्शी और जवाबदेह सुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में एक निर्णायक प्रहार है।
संघीय ढांचे की अग्निपरीक्षा: केंद्र-राज्य टकराव के बढ़ते मोर्चे और अधिकारों की नई सियासी जंग
भारत में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच फंड के आवंटन, जीएसटी मुआवजे और राज्यपाल की शक्तियों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। वित्तीय स्वायत्तता और केंद्रीय एजेंसियों के हस्तक्षेप ने संघीय ढांचे के सामने नई संवैधानिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। जानिए कैसे राज्यों और दिल्ली के बीच बढ़ता यह टकराव देश के विकास और लोकतंत्र की दिशा को प्रभावित कर रहा है।
जयपुर में आयोजित 'रिफॉर्म-परफॉर्म-ट्रांसफॉर्म और इन्फॉर्म' कार्यशाला में मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास और केंद्रीय सचिव संजय जाजू ने सरकारी योजनाओं के प्रभावी संप्रेषण हेतु नई रणनीति साझा की। जानें कैसे सोशल मीडिया, एआई और सरल भाषा के माध्यम से राजस्थान सरकार अब आमजन तक अपनी नीतियों को भावनात्मक अपील के साथ पहुंचाएगी।
जयपुर में आयोजित भव्य जिला स्तरीय कार्यक्रम में सांसद मंजू शर्मा और विधायक गोपाल शर्मा ने किसानों, महिलाओं और श्रमिकों के लिए 1590 करोड़ रुपये की सौगात का ऐलान किया। एचसीएम रीपा में आयोजित इस समारोह में लाभार्थियों को अनुदान चेक वितरित किए गए और 23 जनवरी से शुरू होने वाले ग्राम उत्थान शिविरों का शंखनाद हुआ। जानिए कैसे सरकार हर वर्ग को बना रही है आत्मनिर्भर।
ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती की प्रतिमा केवल श्रद्धा का केंद्र नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक रहस्यों का प्रतीक है। इस विशेष लेख में पढ़ें कि कैसे उनके श्वेत वस्त्र, हाथ में वीणा, पुस्तक, हंस और मयूर मानव जीवन में पवित्रता, विवेक, एकाग्रता और अहंकार पर नियंत्रण का संदेश देते हैं। जानिए बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा के अवसर पर देवी की मूर्ति विज्ञान (Iconography) का विस्तृत और शोधपूर्ण विश्लेषण, जो अज्ञान के अंधेरे से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है।
लोकतंत्र का नया अध्याय या संवैधानिक चुनौती? 'एक देश-एक चुनाव' के प्रस्ताव ने देश में छेड़ा महासंग्राम
भारत में 'एक देश-एक चुनाव' को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कोविंद समिति की सिफारिशों और संविधान संशोधन की जटिलताओं के बीच, केंद्र सरकार इस ऐतिहासिक सुधार को लागू करने की तैयारी में है। जानिए कैसे एक साथ चुनाव देश के संघीय ढांचे, सरकारी खजाने और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रभावित करेंगे। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।
जयपुर में राजस्थान पुलिस द्वारा सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर भव्य राज्य स्तरीय ऑनलाइन जनसंवाद का आयोजन किया गया। महानिदेशक राजीव शर्मा समेत शीर्ष अधिकारियों ने 2.45 लाख कम्युनिटी पुलिसिंग वॉलंटियर्स के साथ महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और राष्ट्रीय एकता पर विचार साझा किए। जानिए कैसे राजस्थान पुलिस और जनता मिलकर प्रदेश को बना रहे हैं सुरक्षित और सशक्त।
दीपिका पादुकोण के सपोर्ट में आगे आए निखिल द्विवेदी, 8 घंटे की वर्क कॉल पर कही यह बात
बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण हर मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखती हैं। बीते दिनों दीपिका ने 8 घंटे वर्क शिफ्ट की मांग की थी। दीपिका की इस डिमांड के बाद उन्हें कुछ बिग बजट फिल्मों से हाथ धोना पड़ा। दीपिका की इस डिमांड ने इंडस्ट्री में एक नई बहस भी छेड़ दी। कई सेलेब्स दीपिका की इस डिमांड के साथ है तो कई इसका विरोध भी कर रहे हैं। वहीं अब प्रोड्यूसर निखिल द्विवेदी ने दीपिका पादुकोण का खुलकर सपोर्ट किया है। उन्होंने दीपिका के मां बनने के बाद उनके बैलेंस्ड वर्क शेड्यूल के फैसले का साथ दिया है। हाल ही में दीपिका पादुकोण के बारे में बात करते हुए निखिल द्विवेदी ने कहा, मुझे यकीन है कि उन्होंने पहले 10, 12 या 14 घंटे तक काम किया होगा। अब वह नई मां बनी हैं, और मुझे लगता है कि हमें इसे थोड़ी नर्मी और समझदारी के साथ देखना चाहिए। नवजात शिशु के लिए पैरेंट्स की मौजूदगी की अहमियत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, एक नन्हे बच्चे के लिए यह बहुत जरूरी है कि मां या पिता में से कोई न कोई पास हो, और खासकर मां का होना बेहद अहम है। द्विवेदी के कॉमेंट्स एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर बढ़ रहे बदलते नजरिए को सामने लाती हैं, खासकर उन महिलाओं के लिए जो बच्चे के जन्म के बाद काम पर लौट रही हैं। दीपिका की लंबे समय से प्रोफेशनलिज़्म और मेहनत की पहचान को मान्यता देते हुए, उन्होंने साफ कर दिया कि उनके संतुलित वर्किंग ऑवर्स की मांग किसी तरह की अनिच्छा या कमिटमेंट्स की कमी की वजह से नहीं है। प्रोड्यूसर ने वर्किंग ऑवर्स के मुद्दे पर दीपिका का उदाहरण देते हुए समझाया कि शेड्यूल को फॉर्मल करना क्यों जरूरी है। उन्होंने कहा, अगर वह आठ या नौ घंटे काम कर रही हैं, तो कभी-कभी इसे लिखित में रखा जाता है ताकि प्रोड्यूसर 12 घंटे का शिफ्ट मांगने न लगे जब वह नहीं कर सकती। मुझे यकीन है कि अगर किसी खास दिन दीपिका को नौ या उससे ज्यादा घंटे काम करना होता, तो वह जरूर करती। उनकी बात यह दिखाती है कि फिल्म सेट पर साफ तौर पर समझ और एक-दूसरे का सम्मान कितना जरूरी है, खासकर जब कलाकार अपनी ज़िंदगी में बड़े बदलाव से गुजर रहे हों। दयालुता और समझदारी की बात करते हुए, द्विवेदी ने कहा कि नई मां की जरूरतों का ध्यान रखना प्रोफेशनलिज़्म को कमजोर नहीं करता बल्कि यह एक बेहतर और इंसानियत भरी काम करने की संस्कृति को दिखाता है। जब मानसिक स्वास्थ्य, पेरेंटिंग और सही वर्किंग कंडीशंस पर बातचीत बढ़ रही है, ऐसे में निखिल द्विवेदी जैसी आवाज़ें बॉलीवुड में सहानुभूति और समझ पर आधारित नियमों को आम बनाने में मदद कर रही हैं। इस अहम चर्चा में दीपिका पादुकोण का उदाहरण इस ज़रूरी बातचीत के केंद्र में है।
गंगापुर सिटी में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने 'वीबी जी राम जी' विधेयक के जरिए ग्रामीण भारत के पुनरुत्थान का रोडमैप पेश किया। उन्होंने कांग्रेस पर योजनाओं के नामकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि नया कानून 2047 के विकसित भारत और राम राज्य की स्थापना का आधार बनेगा। जानिए कैसे यह कानून 125 दिन के रोजगार और साप्ताहिक भुगतान से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलेगा।
Jaya Ekadashi 2026:: जया (अजा) एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा?
Magha Shukla Ekadashi 2026: जया (अजा) एकादशी हिन्दू कैलेंडर के अनुसार एक महत्वपूर्ण उपव्रत और व्रत का दिन है, जो विशेष रूप से भक्तों द्वारा भगवान विष्णु की पूजा और पापों के नाश के लिए मनाया जाता है। यह एकादशी हिन्दू माह के माघ मास की शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है, और इसे विशेष रूप से पापों के नाश और पुण्य की प्राप्ति का दिन माना जाता है। ALSO READ: कौन था मायावी कालनेमि? योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद क्यों छिड़ी है सनातन पर नई बहस? कब रखा जाएगा जया (अजा) एकादशी व्रत जया एकादशी 2026 के शुभ मुहूर्त जया एकादशी पारण का समय जया (अजा) एकादशी का महत्व जया (अजा) एकादशी-FAQs जया एकादशी का व्रत विशेष रूप से स्वास्थ्य, समृद्धि, और मानसिक शांति की प्राप्ति के लिए किया जाता है। इस दिन उपवास रखने से व्यक्ति को न केवल मोक्ष की प्राप्ति होती है, बल्कि जीवन में आ रहे विघ्न और दुखों से भी मुक्ति मिलती है। कब रखा जाएगा जया (अजा) एकादशी व्रत 29 या 30 जनवरी, किस दिन मनाई जाएगी जया (अजा) एकादशी। तो आपको बता दें कि वर्ष 2026 में माघ, शुक्ल एकादशी के दिन पड़ने वाला जया (अजा) एकादशी व्रत 29 जनवरी 2026, बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। जया एकादशी 2026 के शुभ मुहूर्त जया एकादशी बृहस्पतिवार, जनवरी 29, 2026 को माघ शुक्ल एकादशी तिथि का प्रारम्भ- 28 जनवरी 2026 को 04:35 पी एम बजे एकादशी तिथि का समापन- 29 जनवरी 2026 को 01:55 पी एम बजे होगा। जया एकादशी पारण का समय व्रत-पारण (व्रत तोड़ने का) समय- 30 जनवरी को 07:10 ए एम से 09:20 ए एम। पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय- 11:09 ए एम। जया (अजा) एकादशी का महत्व जया (अजा) एकादशी का महत्व हिन्दू धर्म में बहुत अधिक है। इसे विशेष रूप से भगवान विष्णु के भक्तों द्वारा पूजा जाता है, क्योंकि इस दिन उपवास रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। जया एकादशी का व्रत करने से शारीरिक और मानसिक शांति मिलती है, और भक्तों को संसारिक कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है। यह एकादशी पापों को नष्ट करने वाली मानी जाती है, और इसे 'पाप नाशिनी' के रूप में भी जाना जाता है। जया एकादशी का व्रत न केवल भक्तों को मानसिक शांति और सुख प्रदान करता है, बल्कि इससे एकत्रित पुण्य के कारण जीवन में सौभाग्य और समृद्धि भी आती है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। जया (अजा) एकादशी- FAQs Q1: जया (अजा) एकादशी कब मनाई जाती है? उत्तर: जया (अजा) एकादशी माघ शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है। यह तिथि हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल बदलती रहती है, लेकिन यह आमतौर पर जनवरी-फरवरी के बीच आती है। Q2: जया एकादशी का व्रत रखने का क्या महत्व है? उत्तर: जया एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश होता है, और व्यक्ति को मानसिक शांति, सुख, समृद्धि, और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का दिन है। Q3: क्या जया एकादशी पर उपवास रखना जरूरी है? उत्तर: जया एकादशी पर उपवासी रहना या फलाहार करना आवश्यक है। व्रति पूरे दिन केवल फल, दूध या पानी का सेवन करते हैं। Q4: जया एकादशी का व्रत कौन कर सकता है? उत्तर: जया एकादशी का व्रत कोई भी व्यक्ति कर सकता है, लेकिन यह विशेष रूप से भगवान विष्णु के भक्तों और उन लोगों के लिए शुभ माना जाता है जो पापों से मुक्ति चाहते हैं या जिनकी मनोकामनाएं पूरी नहीं हो रही होती हैं। Q5: जया एकादशी पर कौन से मंत्र का जाप करें? उत्तर: जया एकादशी पर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवा' और 'ॐ विष्णवे नमः' का जाप विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इन मंत्रों के जाप से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: धार की भोजशाला: जहाँ पत्थरों पर खुदी है 'संस्कृत' और दीवारों में कैद है परमारों का वैभव
भूपालसागर में पुलिस और जन-सहयोग का नया अध्याय: सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर जुटी खाकी और जनता
भूपालसागर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर पुलिस विभाग और सहयोगी घटकों की महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक संपन्न हुई। सीआई घेवरचन्द की उपस्थिति में नशा मुक्ति, आपसी सामंजस्य और ट्रैफिक नियमों पर जोर दिया गया। जानें कैसे सीएलजी सदस्य और पुलिस मित्र मिलकर अपराध मुक्त समाज का निर्माण करेंगे। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
बॉलीवुड संगीतकार-सिंगर पलाश मुच्छल बीते काफी समय से अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में हैं। पलाश की शादी बीते साल 23 नवंबर को भारतीय महिला क्रिकेटर स्मृति मंधाना से होने वाली थीं। दोनों की शादी के फंक्शन भी धूमधाम से चल रहे थे। लेकिन एनमौके पर यह शादी पोस्टपोन हो गई। बाद में स्मृति मंधाना ने पलाश मुच्छल संग अपनी शादी कैंसिल करने का ऐलान कर दिया था। अब पलाश मुच्छल पर धोखाधड़ी का आरोप लगा है। सांगली के एक फिल्म फाइनेंसर ने पलाश पर 40 लाख रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पलाश के खिलाफ शिकायत करने वाले फिल्म फाइनेंसर विद्यान माने क्रिकेटर स्मृति मंधाना के बचपन के दोस्त बताए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, गुरुवार को विद्यान माने ने सांगली के पुलिस अधीक्षक को पलाश के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए एक आवेदन सौंपा। शिकायत के अनुसार, पलाश की मुलाकात विद्यान से 5 दिसंबर, 2023 को सांगली में हुई थी। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि जब उन्होंने पलाश से फिल्ममेकिग में निवेश करने के लिए कहा, तो पलाश ने उनसे कहा कि वे उनकी आगामी फिल्म 'नजारिया' में निवेश कर सकते हैं। फिल्म के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने के बाद, पलाश ने उन्हें बताया कि विद्यान 25 लाख रुपए के निवेश पर 12 लाख रुपये का मुनाफा कमा सकते हैं। साथ ही उन्हें फिल्म में एक रोल भी ऑफर किया। इसके बाद दोनों दो बार मिले, और विद्यान ने कथित तौर पर मार्च 2025 तक पलाश को कुल 40 लाख रुपए दिए। हालांकि, फिल्म पूरी नहीं हुई, इसलिए विद्यान ने अपने पैसे वापस मांगे, लेकिन कथित तौर पर उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने सांगली पुलिस से संपर्क किया। विद्यान के अनुसार पलाश मुच्छल जब सांगली दौरे पर थे, तब स्मृति मंधाना के पिता श्रीनिवास मंधाना ने ही उनकी मुलाकात पलाश से करवाई थी।
फतहनगर मंडी में उछले फसलों के दाम: गेहूं और सरसों की कीमतों ने किसानों के चेहरे पर बिखेरी चमक
फतहनगर कृषि उपज मण्डी में 22 जनवरी 2026 को फसलों के भावों में भारी उछाल देखा गया। गेहूं 2669 रुपये और सरसों 6699 रुपये के उच्चतम स्तर पर पहुंचे, जिससे काकंरवा क्षेत्र के किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। मक्का और ज्वार की कीमतों सहित मंडी की पूरी रिपोर्ट और व्यापारिक विश्लेषण यहाँ विस्तार से पढ़ें।
चित्तौड़गढ़ के बस्सी में पालका फोरलेन हादसे के बाद 3 दिनों से जारी धरना समाप्त हुआ। रणजीत गाड़ियां लौहार की मौत के बाद प्रशासन और परिजनों के बीच 1 लाख रुपये मुआवजे, पट्टे और नौकरी पर सहमति बनी। 4 थानों की पुलिस की मौजूदगी में हुआ पोस्टमार्टम। पूरी खबर पढ़ें।
निम्बाहेड़ा में न्युवोको का बड़ा धमाका: 'आर्टिस्ट एलीट कलेक्शन' के साथ अब कंक्रीट बनेगा कला का नमूना
न्युवोको विस्टास ने निम्बाहेड़ा में अपनी प्रीमियम डेकोरेटिव काँक्रीट रेंज 'आर्टिस्ट एलीट कलेक्शन' लॉन्च कर निर्माण जगत में हलचल मचा दी है। चिराग शाह द्वारा घोषित यह नई रेंज आधुनिक लैंडस्केपिंग और आउटडोर डिजाइन को तकनीकी सटीकता और कलात्मक सुंदरता का अनूठा संगम प्रदान करती है। जानिए कैसे यह प्रीमियम फिनिश भविष्य के निर्माण प्रोजेक्ट्स की सूरत बदल देगी।
भूपालसागर में कांग्रेस का 'मनरेगा बचाओ संग्राम' तेज! जिला अध्यक्ष प्रमोद सिसोदिया और डॉ. ललित बोरीवाल ने भाजपा सरकार पर बोला हमला। गांवों में जनसंवाद कर मनरेगा कानूनों में बदलाव को बताया गरीब विरोधी षड्यंत्र। जानें कैसे चित्तौड़गढ़ में कांग्रेस ने फूंका आंदोलन का बिगुल और क्या हैं प्रमुख मांगें। पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें।
सियासी बिसात पर 2026 की जंग: गठबंधन की गांठें और सत्ता के नए नैरेटिव ने बढ़ाई देश की राजनीतिक तपिश
लोकसभा चुनाव 2026 और विधानसभा चुनावों को लेकर भारत की राजनीति में हलचल तेज। गठबंधन की नई रणनीतियों, सीट शेयरिंग के पेचीदा फार्मूले और परिसीमन के मुद्दे ने बदला चुनावी नैरेटिव। जानिए पश्चिम बंगाल से तमिलनाडु तक कैसे बिछ रही है सियासी बिसात और क्या होंगे इसके दूरगामी परिणाम। एक विशेष राजनीतिक विश्लेषण।
मुद्रा बाजार में डॉलर और पाउंड की मजबूती, मुंबई में सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ उछाल।
मुंबई सराफा बाजार समाचार: 22 जनवरी 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल। 24 कैरेट सोना ₹1.51 लाख और चांदी ₹2.99 लाख के पार पहुंची। डॉलर और पाउंड की मजबूती के बीच कीमती धातुओं ने बनाए नए रिकॉर्ड। जानिए रात 10 बजे के ताजा रेट्स और बाजार का पूरा विश्लेषण इस विस्तृत रिपोर्ट में।
भारत में सरकारी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर उठते गंभीर सवाल! NET, SSC और राज्य स्तरीय परीक्षाओं में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं ने भर्ती प्रणाली की चुनौतियों को उजागर किया है। जानिए क्या हैं नए भर्ती सुधार, सख्त कानूनी प्रावधान और कैसे तकनीक के जरिए युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने की कोशिश की जा रही है। एक विस्तृत विशेष रिपोर्ट।
भारत में वैश्विक शिक्षा का उदय: विदेशी विश्वविद्यालयों की दस्तक से बदल जाएगी कैंपस की तस्वीर
भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के प्रवेश से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी क्रांति आ गई है। यूजीसी की नई गाइडलाइंस और आईआईटी-आईआईएम के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच, अब भारतीय छात्र देश में ही रहकर अंतरराष्ट्रीय डिग्री हासिल कर सकेंगे। जानिए कैसे विदेशी कैंपस का आगमन भारत को ग्लोबल एजुकेशन हब बनाने और 'ब्रेन ड्रेन' को रोकने में गेम-चेंजर साबित होगा।
प्रकृति का बदला मिजाज ; नमक के खेतों में गूंजी प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट
थूथुकुडी में भारी बारिश ने किया चमत्कार! नमक के खेत बने प्रवासी पक्षियों का बसेरा। यूरोप और एशिया से हजारों मील उड़कर आए 'रोजी स्टार्लिंग्स' और अन्य जलचर पक्षियों ने थूथुकुडी के सॉल्ट पैन्स को बनाया अपना घर। भारी जलजमाव और भोजन की प्रचुरता ने इलाके को 'बर्ड पैराडाइज' में बदल दिया है। विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।
मुंबई का कायाकल्प: झुग्गी-मुक्त और प्रदूषण-रहित भविष्य की ओर बढ़ते कदम
मुंबई अब एक ऐतिहासिक बदलाव की ओर अग्रसर है। 'स्लम-फ्री' और 'प्रदूषण-मुक्त' अभियान के जरिए शहर की झुग्गियों को आधुनिक आवासों में बदलने और बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने की व्यापक योजना तैयार की गई है। धारावी पुनर्विकास से लेकर इलेक्ट्रिक परिवहन तक, जानिए कैसे वैश्विक मानकों पर खुद को ढाल रही है सपनों की नगरी मुंबई। एक उज्ज्वल और स्वच्छ भविष्य की पूरी रिपोर्ट।
डेवलपमेंट प्लान 2034: मुंबई की नई उड़ान, भविष्य की ओर निर्णायक कदम
डेवलपमेंट प्लान 2034 के ज़रिये मुंबई को आधुनिक, टिकाऊ और समावेशी महानगर बनाने की तैयारी। आवास, परिवहन, पर्यावरण और आर्थिक विकास पर केंद्रित यह योजना शहर के भविष्य की दिशा तय करती है और मुंबई की नई उड़ान का खाका पेश करती है।
साइबर सिटी में दहशत का तांडव: गुरुग्राम में दिनदहाड़े सनसनीखेज अपहरण से सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
गुरुग्राम में दिनदहाड़े अपहरण की सनसनीखेज वारदात! व्यस्त सड़क पर हथियारों के बल पर बदमाशों ने एक व्यक्ति को उसकी गाड़ी से खींचकर किया अगवा। साइबर सिटी में फैली दहशत, पुलिस ने की नाकाबंदी और सीसीटीवी फुटेज के जरिए तलाश जारी। जानिए कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली इस घटना की पूरी रिपोर्ट।
क्रिकेट जगत में बड़ा धमाका! बांग्लादेश ने भारत में प्रस्तावित टी-20 वर्ल्ड कप खेलने से किया इनकार। सुरक्षा चिंताओं और कूटनीतिक तनाव के बीच आईसीसी और बीसीसीआई के सामने खड़ी हुई बड़ी चुनौती। क्या तटस्थ स्थल पर होंगे मैच या बढ़ेगा विवाद? जानिए इस बड़े खेल संकट की पूरी इनसाइड स्टोरी और संभावित प्रभाव।
धार की भोजशाला: सदियों पुराना इतिहास और आस्था के बीच उलझा 'सरस्वती सदन' का विवाद
धार की ऐतिहासिक भोजशाला: राजा भोज द्वारा निर्मित ज्ञान के मंदिर से लेकर वर्तमान विवाद तक की पूरी कहानी। जानिए क्यों यहाँ हिंदू मंगलवार को पूजा और मुस्लिम शुक्रवार को नमाज़ पढ़ते हैं। ASI सर्वे और कानूनी लड़ाई के बीच उलझे सरस्वती मंदिर और कमाल मौला मस्जिद के इतिहास और वर्तमान स्थिति पर एक विशेष रिपोर्ट।
फादर ग्राहम स्टेन्स और उनके बच्चों को जिंदा जलाने की घटना पर डॉ. सुरेश खैरनार का विचारोत्तेजक लेख, जो हिंदुत्ववादी हिंसा और अघोषित हिंदू राष्ट्र की पड़ताल करता है।
अंशिका की गिरफ्तारी ने सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती करने के खतरों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि आभासी दुनिया में दिख रही हर चमक असलियत नहीं होती। 'ब्लैकमेलिंग क्वीन' का अंजाम यह संदेश देता है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन नागरिकों की सतर्कता ही उन्हें ऐसे हनीट्रैप से बचा सकती है।
मनाली में कुदरत का सफेद शृंगार: बर्फबारी से गुलजार हुई 'देवभूमि', सैलानियों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
हिमाचल प्रदेश की पर्यटन नगरी मनाली में हुई भारी बर्फबारी से वादियाँ पूरी तरह सफेद हो गई हैं। सैलानियों ने सोलंग वैली और मॉल रोड पर बर्फ का जमकर आनंद लिया। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और पर्यटकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इस ताज़ा हिमपात से पर्यटन कारोबारियों और बागवानों के चेहरे खिल उठे हैं।
मुंबई की सियासत में बड़ा बदलाव! बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) को मिलने जा रही है नई महिला मेयर। आरक्षण और रोटेशन नीति के तहत आधी आबादी के हाथ में होगी देश की सबसे अमीर महानगरपालिका की कमान। जानिए कौन हैं रेस में आगे और नई मेयर के सामने क्या होंगी बड़ी चुनौतियां। मुंबई के विकास और महिला सशक्तिकरण पर विशेष रिपोर्ट।
संगम की रेती पर आस्था का महाकुंभ: बसंत पंचमी पर लाखों भक्तों ने लगाई 'अमृत' की डुबकी
प्रयागराज माघ मेला 2026: बसंत पंचमी के पावन पर्व पर त्रिवेणी संगम में उमड़ा श्रद्धा का जनसैलाब। लाखों श्रद्धालुओं ने पीले वस्त्र धारण कर लगाई आस्था की डुबकी। प्रशासन की कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुआ यह दिव्य स्नान पर्व। विस्तृत रिपोर्ट में देखें मेले की भव्यता, सुरक्षा इंतजाम और धार्मिक महत्व की पूरी जानकारी।
डोडा में दर्दनाक हादसा: गहरी खाई में गिरी सेना की गाड़ी, वतन के रखवालों की शहादत से देश स्तब्ध
जम्मू-कश्मीर के डोडा में भारतीय सेना का वाहन खाई में गिरने से बड़ा हादसा। कई जवानों के हताहत होने की खबर से देश में शोक की लहर। पीएम मोदी ने व्यक्त किया गहरा दुख। बचाव कार्य और सेना की जांच जारी। जानिए इस दर्दनाक हादसे की पूरी रिपोर्ट और शहीद जवानों के प्रति देश की संवेदनाएं।
दक्षिण भारत के रेल नेटवर्क में आज एक नई क्रांति! 23 जनवरी को मिलने जा रही हैं 3 नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें। आधुनिक पुश-पुल तकनीक, 'कवच' सुरक्षा और आम आदमी के बजट में प्रीमियम सुविधाओं के साथ बदल जाएगा सफर का अनुभव। जानिए इन नई ट्रेनों के रूट्स और विशेषताओं के बारे में विस्तृत जानकारी।
ज़हरीली हवा की गिरफ्त में देश की राजधानी: क्या दिल्ली का दम घोंट रहा है 200 के पार पहुंचा AQI?
दिल्ली में प्रदूषण का तांडव! 23 जनवरी 2026 को AQI 213 के पार पहुंचते ही हवा 'गंभीर' श्रेणी में। PM 2.5 और PM 10 के बढ़ते स्तर से बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा। जानिए मौसम विभाग की चेतावनी और ज़हरीली हवा से बचने के लिए विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण सलाह। दिल्ली की वायु गुणवत्ता की पूरी रिपोर्ट।
सफेद अंधेरे में कैद कानपुर: क्या शीतलहर के 'टार्चर' से मिलेगी राहत या अभी और कांपेगा उत्तर भारत?
कानपुर और उत्तर भारत में शीतलहर और कोहरे का भीषण कहर! जीरो विजिबिलिटी के कारण रेल और सड़क यातायात प्रभावित। IMD ने जारी किया रेड अलर्ट, जानिए आपके शहर में तापमान की स्थिति और प्रशासन की तैयारियां। क्या अगले 48 घंटों में मिलेगी राहत? पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
पहाड़ों पर कुदरत का सफेद 'तांडव': क्या फिर थम जाएगी हिमालय की रफ्तार?
हिमालय में पश्चिमी विक्षोभ का कहर! जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड के लिए भारी बर्फबारी और बारिश का रेड अलर्ट जारी। IMD की चेतावनी के बाद कई रास्ते बंद होने की आशंका। पहाड़ों पर कुदरत के इस सफेद तांडव और मैदानी इलाकों पर इसके असर की पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें।
आसमान से बरसेगी आफत या मिलेगी राहत? 9 राज्यों में कुदरत के 'डबल अटैक' की पदचाप
IMD अलर्ट: भारत के 9 राज्यों में अगले 24 घंटों में बारिश, तूफान और शीतलहर का भीषण संकट! दिल्ली, यूपी और बिहार समेत उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी। जानिए आपके शहर में कैसा रहेगा मौसम का हाल और क्या हैं सुरक्षा के इंतजाम। कुदरत के इस 'डबल अटैक' की पूरी रिपोर्ट।
आसमान में हलचल, जमीं पर चेतावनी: क्या 23 जनवरी को फिर लौटेगी कड़ाके की ठंड?
23 जनवरी को भारत के मौसम में बड़ा बदलाव! IMD ने पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश और गरज-चमक की चेतावनी जारी की है। पहाड़ों पर भारी बर्फबारी और मैदानी इलाकों में कड़ाके की ठंड की वापसी के संकेत हैं। जानिए आपके शहर में मौसम का हाल और प्रशासन की तैयारियां।
ग्रीनलैंड की सबसे मशहूर इंफ्लूएंसर हैं क्युपानुक ओलसेन। वो अपने 5 लाख फॉलोअर्स को बर्फ पर सूखती मछलियां, पारंपरिक सूप और 24 घंटे लंबी बर्फीली रातों की कहानियां सुनाती रही हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से उनकी टाइमलाइन बदल गई है। अब उसमें एक नया विषय घुस आया है- डोनाल्ड ट्रम्प। थोड़ा पीछे चलते हैं। तारीख- 4 मार्च 2025। वॉशिंगटन डीसी की एक शाम। अमेरिकी कांग्रेस का संयुक्त सत्र चल रहा था। ट्रम्प मंच पर खड़े बोल रहे थे। उन्होंने अचानक कहा कि अमेरिका को हर हाल में ग्रीनलैंड लेना पड़ेगा। बात इतनी बेहिचक थी कि संसद में बैठे सांसद हंस पड़े, लेकिन ट्रम्प मजाक नहीं कर रहे थे। 14 जनवरी 2026, उन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री से साफ कह दिया- ग्रीनलैंड नेशनल सिक्योरिटी का मसला है। उस पर पूरी तरह अमेरिकी अधिकार चाहिए। फिर उन्होंने चेतावनी की तरह वेनेजुएला का नाम लिया, जिसके राष्ट्रपति मादुरो को उन्होंने उठवा लिया था। मतलब साफ था कि जरूरत पड़ी तो ताकत का इस्तेमाल करने में हिचक नहीं होगी। ट्रम्प के इन बयानों ने यूरोप के डिफेंस हेडक्वार्टर्स में भी हलचल मचा दी। डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में अतिरिक्त सैनिक तैनात किए। जर्मनी, स्वीडन, फ्रांस, नॉर्वे, नीदरलैंड और फिनलैंड ने भी अमेरिका के खिलाफ एकजुटता दिखाई। कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने धमकी भरे लहजे में कह दिया- 'दोस्तों, अब तख्तियां उतार देने का समय आ गया है।' नाटो के 76 साल के इतिहास में यह दृश्य कभी नहीं देखा गया था। एक ऐसा सैन्य गठबंधन, जो इस वादे पर खड़ा था कि ‘एक पर हमला, सब पर हमला’। अब उसके सदस्य एक-दूसरे पर हमलावर हैं। नाटो का जन्म द्वितीय विश्व युद्ध के मलबे से उपजी एक कड़वी मजबूरी थी। 3.65 करोड़ लोगों की मौत के बाद यूरोप एक कब्रिस्तान बन चुका था। सोवियत रूस के राष्ट्रपति जोसेफ स्टालिन को इस तबाही में एक अवसर नजर आया। उनका मानना था कि पूंजीवादी व्यवस्था यूरोप को इस हाल तक लाई है और अब सिर्फ कम्युनिस्ट विचारधारा ही इस डूबते महाद्वीप को बचा सकती है। 1948-49 के बीच सोवियत संघ ने दो बड़े कदम उठाए। पहला- फरवरी 1948 में चेकोस्लोवाकिया की लोकतांत्रिक सरकार को गिराकर सोवियत समर्थक कम्युनिस्टों के हाथों में सत्ता सौंप दी गई। दूसरा कदम और भी ज्यादा डरावना था। 24 जून 1948 की शाम, सोवियत संघ ने पश्चिमी बर्लिन की नाकेबंदी शुरू कर दी। रेल लाइनों पर ताले लग गए, सड़कें बंद हो गईं, जलमार्ग सूख गए। पश्चिमी बर्लिन भूख और अंधेरे में डूब गया था। इसी बीच वॉशिंगटन में बैठे अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने एक ऐसा फैसला लिया, जो इतिहास बन गया- बर्लिन एयरलिफ्ट। अमेरिकी विमान महीनों तक आसमान के रास्ते बर्लिन में खाना, दवाइयां और ईंधन पहुंचाते रहे। यह केवल राहत अभियान नहीं था, यह सोवियत दबाव के खिलाफ खुली चुनौती थी। यूरोप समझ चुका था कि सोवियत संघ एक-एक करके देशों को झुकाने की कोशिश कर रहा है। और यह भी साफ था कि बिना सामूहिक सुरक्षा के वह टिक नहीं पाएगा। इसी मजबूरी में 4 अप्रैल 1949 को वॉशिंगटन में 12 देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए और नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन यानी NATO का जन्म हुआ। तस्वीर ये रही... इस दौरान मौजूद ब्रिटिश जनरल और नाटो के पहले महासचिव लॉर्ड इस्मे ने इसके मकसद को एक ही वाक्य में समेट दिया- ‘रूसियों को बाहर रखना, अमेरिकियों को अंदर रखना और जर्मनों को दबाकर रखना।’ इसे ‘इस्मे डॉक्ट्रिन’ के नाम से जाना जाता है। इस पूरे समझौते की आत्मा थी नाटो का आर्टिकल 5। इसके तहत एक सदस्य पर हमला, सभी पर हमला माना जाएगा। नाटो के जन्म के महज पांच महीने बाद, 29 अगस्त 1949 की सुबह, कजाखस्तान के सेमिपालातिंस्क मैदान में जमीन कांप उठी। एक जबरदस्त धमाका हुआ- सोवियत संघ ने अपना पहला परमाणु परीक्षण कर दिया था। इसी के साथ परमाणु हथियारों पर अमेरिका का एकाधिकार खत्म हो गया। नाटो की आत्मा माने जाने वाले अनुच्छेद-5 को लेकर अमेरिका कभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं था। जब यह अनुच्छेद लिखा जा रहा था, तब अमेरिकी सीनेट के भीतर एक गहरी बेचैनी थी। सीनेटरों को डर था कि कहीं यह समझौता अमेरिका को ऐसे युद्ध में न धकेल दे, जहां से लौटने का कोई रास्ता न बचे। इसलिए अनुच्छेद-5 की भाषा जानबूझकर धुंधली रखी गई। उसमें साफ लिखा गया कि हर देश ‘वही कार्रवाई करेगा, जिसे वह आवश्यक समझे।’ इस धुंधलेपन की असली तस्वीर 1949 के एक छोटे, लेकिन बेहद अहम किस्से में दिखती है। समझौते पर बातचीत के दौरान अमेरिकी विदेश उप-सचिव रॉबर्ट लवेट से सीधा सवाल पूछा गया- अगर लंदन पर हमला होता है, तो क्या उसे वॉशिंगटन पर हमला माना जाएगा? लवेट ने बिना हिचक जवाब दिया- ’नहीं, सर।’ यह जवाब नाटो की उस कमजोरी को उजागर करता है, जिसे बाद में ‘पवित्र गठबंधन’ जैसे शब्दों से ढक दिया गया। आज डोनाल्ड ट्रम्प इसी अंतर्विरोध और कमजोरी का राजनीतिक फायदा उठाते नजर आते हैं। 1950 के दशक की शुरुआत में नाटो ने खुद को एक संगठित मिलिट्री मशीन में बदलना शुरू किया। 19 दिसंबर 1950 को अमेरिका के राष्ट्रपति ड्वाइट डी. आइजनहावर को नाटो का पहला सुप्रीम कमांडर नियुक्त किया गया, लेकिन आइजनहावर इस भूमिका से उत्साहित नहीं थे। 1951 की सर्दियों में आइजनहावर ने अपने सलाहकारों को चेतावनी दी- ‘हम अपनी सेनाओं के साथ दूर-दराज की सीमाओं की रखवाली करने वाला आधुनिक रोम नहीं बन सकते।’ विडंबना यह है कि अगले 76 वर्षों में अमेरिका धीरे-धीरे पूरी दुनिया की पुलिसिंग में उलझता चला गया। शीत युद्ध की असली रीढ़ परमाणु हथियार थे। 1950 और 1960 के दशक में यूरोप हर रात इसी डर में जीता था कि कहीं कोई बटन न दब जाए। ‘म्युचुअल एश्योर्ड डिस्ट्रक्शन’ यानी MAD का सिद्धांत यही कहता था- अगर तुम मारोगे, तो हम भी मरेंगे, और तुम्हें भी साथ ले जाएंगे। नाटो परमाणु बम के साए से बचने के लिए और ज्यादा परमाणु बम जमा करता चला गया। MAD नीति के तहत नाटो ने हजारों परमाणु हथियार रखने का लक्ष्य तय किया था। रणनीति साफ थी- इतनी क्षमता होना कि सोवियत संघ की लगभग 30% आबादी और 70% औद्योगिक ढांचे को नष्ट किया जा सके। यह सुरक्षा की भाषा नहीं थी, यह विनाश के संतुलन की भाषा थी। 7 मार्च 1966 को फ्रांस के राष्ट्रपति चार्ल्स डी गॉल ने नाटो से बाहर निकलने की घोषणा कर दी थी। डी गॉल का सवाल सीधा था- अगर सोवियत मिसाइलें पेरिस की ओर बढ़ें, तो क्या अमेरिका न्यूयॉर्क को दांव पर लगाकर फ्रांस को बचाएगा? उन्हें इस पर जरा भी भरोसा नहीं था। डी गॉल ने अमेरिकी सैनिकों को फ्रांस छोड़ने का आदेश दे दिया। कहा जाता है कि उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन बी. जॉनसन ने व्यंग्य में पूछा था- ‘क्या हमें फ्रांस में दफन अपने सैनिकों की कब्रें भी साथ ले जानी होंगी?’ यह तंज नाटो के भीतर मौजूद गहरी भावनात्मक और रणनीतिक दरारों को उजागर करता है। कई दशकों की दूरी के बाद, साल 2009 में फ्रांस दोबारा नाटो की इंटिग्रेटेड मिलिट्री स्ट्रक्चर का हिस्सा बना, लेकिन डी गॉल का सवाल आज भी हवा में तैर रहा है- सुरक्षा के वादे पर कितना भरोसा किया जा सकता है? 26 दिसंबर 1991 की एक बर्फीली शाम, मॉस्को के क्रेमलिन में इतिहास ने चुपचाप करवट बदली। जिस किले से दशकों तक दुनिया की किस्मत तय होती रही थी, वहां से सोवियत संघ का लाल झंडा हमेशा के लिए उतार लिया गया। 40 साल से चला आ रहा शीत युद्ध, जिसमें देशों को मोहरे बनाकर खेला गया, आखिरकार खत्म हो गया। ऐसा लगा मानो नाटो का काम पूरा हो चुका हो। लेकिन नाटो इतिहास का हिस्सा बनने के बजाय और फैलने लगा। यही वह दौर था, जिसे बाद में ‘मिशन क्रीप’ कहा गया, यानी रेंगते हुए रूस के आंगन तक पहुंचने का अभियान। ये एक कसम के टूटने जैसा था। दरअसल, 9 फरवरी 1990 की दोपहर, अमेरिकी विदेश मंत्री जेम्स बेकर सोवियत राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव से मिलने पहुंचे। बातचीत का मुद्दा था- जर्मनी से सोवियत सेनाओं की वापसी। बदले में एक वादा किया- अगर रूस जर्मनी खाली कर देता है, तो नाटो रूस की सीमा की ओर एक इंच भी आगे नहीं बढ़ेगा। यह वादा कभी कागज पर नहीं उतरा, लेकिन रूस की सामूहिक याद्दाश्त में यह एक टूटी हुई कसम बनकर रह गया। जब 1999 से 2004 के बीच नाटो पूर्वी यूरोप तक फैलता चला गया, तो मॉस्को में इसे एक ऐतिहासिक विश्वासघात के रूप में देखा गया। प्रसिद्ध अमेरिकी रणनीतिकार जॉर्ज केनन ने 1997 में ही चेतावनी दी थी कि नाटो का यह विस्तार अमेरिका की सबसे घातक रणनीतिक भूल साबित होगा। उनकी चेतावनी उस समय अनसुनी कर दी गई। 7 मई 2000 को जब व्लादिमीर पुतिन सत्ता में आए, तब तक पोलैंड, हंगरी और चेक गणराज्य नाटो में शामिल हो चुके थे। इसके बावजूद पुतिन शुरुआती वर्षों में पश्चिम से टकराव से बचते रहे। उन्होंने यहां तक कहा कि रूस नाटो की सदस्यता की संभावना से इनकार नहीं करता, लेकिन नाटो रूस को बराबरी का भागीदार मानने को तैयार नहीं था- उसे सिर्फ एक थर्ड रेट पावर समझा गया। साल 2004 में नाटो ने एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया समेत सात पूर्व सोवियत गणराज्यों को अपने साथ जोड़ लिया। यह केवल विस्तार नहीं था- यह रूस की दहलीज तक सीधी दस्तक थी। पुतिन ने इसे रणनीतिक घेराबंदी के रूप में देखा। 10 फरवरी 2007 की शाम, म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में पुतिन का संयम टूट गया था। मंच से उन्होंने नाटो देशों से तीखे शब्दों में पूछा- ‘उन वादों का क्या हुआ कि नाटो एक इंच भी आगे नहीं बढ़ेगा? आखिर रूस के करीब आप अपने आप को किसके खिलाफ फैला रहे हैं?’ यहीं से सहयोग की बची-खुची उम्मीद भी खुली दुश्मनी में बदलने लगी थी। 2008 के बुखारेस्ट शिखर सम्मेलन शुरू होने से पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने ऐलान कर दिया कि जॉर्जिया और यूक्रेन भी ‘नाटो के सदस्य बनेंगे।’ पुतिन के लिए यह बयान ऐसा था, मानो उनके आंगन में अमेरिकी मिसाइलें लगाने की घोषणा कर दी गई हो। राजनीति विज्ञान में इसे ‘सुरक्षा दुविधा’ कहा जाता है- जहां नाटो का हर ‘रक्षात्मक’ कदम रूस को सीधा ‘आक्रामक’ दिखाई देता है। यही सोच 2008 के जॉर्जिया युद्ध और आगे चलकर यूक्रेन संकट की बुनियाद बनी। पुतिन अपनी नाराजगी पहले ही उजागर कर चुके थे। साल 2011 में, लीबिया के शासक मुअम्मर गद्दाफी को सत्ता से हटाने के लिए नाटो ने हवाई हमले किए। रूस ने इसे केवल एक अमानवीय हस्तक्षेप नहीं माना, बल्कि अपने रणनीतिक हितों, खासतौर पर तेल और गैस व्यापार पर सीधा हमला समझा। अविश्वास और गहराता चला गया। फिर 2014 आया। यूक्रेन में पश्चिम समर्थक सरकार के सत्ता में आते ही पुतिन ने क्रीमिया का विलय रूस में कर लिया। यहीं से नाटो और रूस के बीच ‘छद्म युद्ध’ की शुरुआत मानी जाती है। अमेरिका और नाटो के देश यूक्रेन को हथियार देने लगे और रूस युद्ध के मौके तलाशने लगा। साल 2017। राष्ट्रपति बनते ही डोनाल्ड ट्रम्प ने नाटो सहयोगियों को साफ शब्दों में सुना दिया- अपने हिस्से का पैसा खर्च करो, नहीं तो सुरक्षा भूल जाओ। उनके लिए नाटो कोई विचारधारा नहीं था, बल्कि एक कारोबारी सौदा था। इसी सोच ने नाटो की सबसे बड़ी कमजोरी उजागर कर दी- भरोसा। यूरोप ने पहली बार गंभीरता से सोचना शुरू किया कि मुश्किल समय में अमेरिका पर भरोसा किया जा सकता है क्या? नवंबर 2019 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक ऐसी बात कही, जिसने पूरी अटलांटिक दुनिया को झकझोर दिया- ‘नाटो ब्रेन-डेड है।’ असल में अमेरिका ने नाटो सहयोगियों से सलाह किए बिना ही सीरिया से अपनी सेना वापस बुला ली थी। दरअसल, वो यह बता रहे थे कि अगर गठबंधन में संवाद और भरोसा मर जाए, तो शरीर जीवित तो दिख सकता है, पर वो कुछ कर नहीं सकता। 29 अगस्त 1949 के सोवियत परमाणु परीक्षण से लेकर ग्रीनलैंड पर ट्रम्प के बयानों तक, नाटो एक ही सवाल से जूझता रहा है- सुरक्षा भरोसे से आती है या ताकत से? ट्रम्प के दौर में इस सवाल ने और भी डरावना रूप ले लिया। उन्होंने नाटो की सबसे कीमती पूंजी भरोसे को धीरे-धीरे छीलना शुरू कर दिया। इस भरोसे पर पहला सार्वजनिक प्रहार 25 मई 2017 को ब्रसेल्स में दिखा। नाटो मुख्यालय के उद्घाटन समारोह में ट्रम्प मंच पर खड़े थे। चारों ओर यूरोप के नेता, सामने कैमरे। यह वही मौका था जब हर अमेरिकी राष्ट्रपति परंपरागत रूप से अनुच्छेद 5 को दोहराता है- ‘एक पर हमला, सब पर हमला।’ लेकिन ट्रम्प ने वह वाक्य बोला ही नहीं। समारोह खत्म होते ही यूरोपीय राजनयिक एक-दूसरे से फुसफुसाने लगे- ‘क्या यह भूल थी, या संकेत?’ उसी शाम जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने कह दिया- अब हमें अपनी किस्मत खुद अपने हाथ में लेनी होगी। यह बयान नाटो के भीतर एक मानसिक भूकम्प था। इसके बाद जुलाई 2018 की ब्रसेल्स समिट आई। नाटो के इतिहास की सबसे असहज बैठकों में से एक। बंद कमरे में ट्रम्प ने सीधे जर्मनी पर हमला बोला। उनका आरोप था कि जर्मनी रूस से गैस खरीदता है और हम उसे रूस से बचाने की उम्मीद करते हैं। आप रूस के कैदी हैं। कमरे में सन्नाटा पसर गया। नाटो का आर्थिक इंजन कहलाने वाला जर्मनी अचानक समस्या बना दिया गया। यहीं से यूरोप को पहली बार साफ दिखने लगा कि अमेरिका की नाराजगी अब रूस से ज्यादा अपने ही सहयोगियों पर है। ट्रम्प ने नाटो को कभी ‘खराब बिजनेस डील’ कहा, कभी ऐसा क्लब बताया, जहां अमेरिका बेवकूफ बनता आया है। अक्टूबर 2018 में यूरोप की ठंड अचानक और गहरी हो गई। ट्रम्प ने कहा कि अगर कोई छोटा नाटो देश रूस से उलझता है, तो ‘सोचना पड़ेगा’ कि अमेरिका उसकी मदद करे या नहीं। लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया जैसे देशों के लिए यह बयान किसी अलार्म से कम नहीं था। नीदरलैंड्स के शहर द हेग में मई 2025 की एक सुबह। दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के नेता यहां जमा थे। माहौल में नाटो के 75 साल पूरे होने का जश्न नहीं, बल्कि गहरी बेचैनी थी। सम्मेलन कक्ष के भीतर एक मेज पर एक पतली-सी फाइल रखी थी, जिस पर लिखा था- अमेरिका की नई नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटजी 2025। यह नाटो के लिए ‘डेथ वारंट’ जैसा लग रहा था। ट्रम्प की इस रणनीति में नाटो को अब स्थायी सुरक्षा की गारंटी नहीं, बल्कि कंडीशनल सर्विस कहा गया है। फरमान सीधा, ठंडा और कठोर था- अपनी जीडीपी का 5 प्रतिशत रक्षा पर खर्च करो, वरना पुतिन के टैंकों के सामने अकेले खड़े रहने के लिए तैयार रहो। कमरे में सन्नाटा था। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि यह चेतावनी है, सौदा है, या नाटो के अंत की घंटी। क्या एक दिन ऐसा आएगा जब ग्रीनलैंड में तैनात अमेरिकी बंदूकें पश्चिमी यूरोप की ओर मुड़ जाएंगी? क्या आदेश आएगा- फायर? और अगर ऐसा हुआ, तो क्या दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकत नाटो को उसी क्षण खत्म मान लिया जाएगा? अखिरकार नाटो की सैन्य ताकत में अमेरिका अकेले 42% का हिस्सेदार है। नाटो के करीब 35 लाख सैनिकों में अकेले अमेरिका के 13 लाख हैं। कुल 22400 विमानों में अमेरिका के 14000 हैं। अमेरिका निकला तो नाटो सच में ‘पेपर नाटो’ हो जाएगा। आज नाटो के अंत की अटकलें सिर्फ अखबारों की सुर्खियों या टीवी डिबेट तक सीमित नहीं हैं। यह सवाल अब रणनीतिक दस्तावेजों, सैन्य मुख्यालयों और राष्ट्राध्यक्षों के भाषणों में घूम रहा है- क्या नाटो सच में खत्म हो सकता है? और अगर हुआ, तो क्या दुनिया नए-नए गठबंधनों में बंट जाएगी? नाटो पर दशकों तक काम करने वाले इतिहासकार मार्क ट्रेचटेनबर्ग अपनी किताब ए कंस्ट्रक्टेड पीस में लिखते हैं कि गठबंधन अक्सर किसी धमाके के साथ नहीं टूटते। वे धीरे-धीरे, भरोसे के घटने से खोखले होते हैं। अगर नाटो कमजोर पड़ेगा, तो वह किसी एक तारीख को बंद नहीं होगा। उसके झंडे फहराते रहेंगे, शिखर सम्मेलन होते रहेंगे, घोषणाएं जारी रहेंगी, लेकिन अनुच्छेद 5 का भरोसा सिर्फ एक औपचारिक वाक्य बन जाएगा। यही वह स्थिति है जिसे कई विश्लेषक पेपर नाटो कहते हैं। कुछ रणनीतिकार मानते हैं कि आज अमेरिका की असली चुनौती चीन है, रूस नहीं। इसलिए रूस से तनाव कम करके चीन को संतुलित करना चाहिए। इसे ‘रिवर्स निक्सन स्ट्रैटजी’ कहा जाता है। जैसे- 1970 के दशक में राष्ट्रपति निक्सन ने चीन को सोवियत संघ से अलग किया था। आज डोनाल्ड ट्रम्प जब पुतिन को ‘दोस्त’ कहते हैं, तो इसी रणनीति की झलक दिखती है, लेकिन समस्या यह है कि रूस खुद को अपमानित महसूस करता है। राजनीतिक वैज्ञानिक जॉन मियर्सहाइमर साफ कहते हैं- ‘महाशक्तियां अपमान को भूलती नहीं हैं, वे उसका जवाब देती हैं।’ यूक्रेन युद्ध के बाद रूस के लिए बराबरी का भरोसा और भी दूर चला गया है। भविष्य की दुनिया शायद साफ-सुथरे खेमों में बंटी नहीं होगी। यह एक अस्थिर बहुध्रुवीय व्यवस्था होगी, जहां चीन आर्थिक और तकनीकी शक्ति बनेगा, अमेरिका सैन्य और वित्तीय ताकत रखेगा, रूस ऊर्जा और सैन्य बल से प्रासंगिक रहेगा और यूरोप लगातार तय करता रहेगा कि वह शक्ति बनना चाहता है या सिर्फ बाजार। नाटो का भविष्य इसी अस्थिरता में छिपा है। अगर नाटो बचा, तो पहले जैसा नहीं रहेगा। वह ज्यादा यूरोपीय और कम अमेरिकी होगा। अगर वह टूटा, तो दुनिया ज्यादा सुरक्षित नहीं, बल्कि ज्यादा अनिश्चित हो जाएगी। जैसा कि विंस्टन चर्चिल ने चेताया था- ‘मित्र देशों के आपसी असुरक्षा से लड़ने से भी बदतर केवल एक ही चीज है और वह है मित्र को साथ लिए बिना दुश्मन से लड़ना।’ —------ References…
पश्चिम बंगाल में ममता सरकार के लिए चुनावी रणनीति बना रहे I-PAC ने नए नियम लागू कर दिए हैं। दैनिक भास्कर को I-PAC के कर्मचारियों से मिली जानकारी के मुताबिक स्टाफ के लिए ‘रेड गाइडलाइंस’ लागू की गई हैं। ये बदलाव 8 जनवरी को कंपनी के दफ्तर में हुई ED की रेड के बाद किया गया। छापेमारी के अगले दिन CM ममता बनर्जी और I-PAC के बीच एक इमरजेंसी मीटिंग हुई और पूरे स्टाफ के लिए सीक्रेट एडवाइजरी जारी की गई। रूटीन के कामकाज में भी सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। हालांकि I-PAC का कहना है कि चुनावी तैयारियों पर छापेमारी का असर नहीं पड़ा है। ED की छापेमारी के दौरान CM ममता बनर्जी I-PAC के दफ्तर पहुंचीं, जहां से फाइलें लेकर निकलते वक्त उनकी ED अफसरों से बहस भी हुई। ममता ने गृह मंत्री अमित शाह पर TMC के डॉक्यूमेंट्स उठवाने का आरोप लगाया था। रेड के दिन I-PAC के दफ्तर में और क्या हुआ? उसके बाद I-PAC और TMC की स्ट्रैटजी में क्या बदला? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर ने I-PAC में काम करने वाले लोगों से बातचीत की। ‘सबके फोन जमा कराए, एक हॉल में बैठा दिया‘I-PAC ऑफिस में रेड के वक्त स्टाफ भी मौजूद था। एक स्टाफ ने छापे के दिन का हाल बताते हुए कहा, ‘ED की टीम ने दफ्तर में दाखिल होते ही पूरे स्टाफ को एक जगह इकट्ठा कर दिया। हमसे कहा गया कि ये कानूनी तलाशी है, सभी को सहयोग करना होगा। ऐसा लग रहा था, जैसे कोई फिल्म चल रही हो। हम सबके मोबाइल जमा करा लिए गए ताकि कोई बाहर खबर न दे सके। दफ्तर के सभी दरवाजे अंदर से बंद कर दिए। ED की टीम ने हमें एक बड़े हॉल में बैठाया था। जबकि वो छानबीन के लिए अलग-अलग केबिन में चले गए।‘ टीम क्या जांच कर रही थी? एक स्टाफ ने बताया, वो लैपटॉप, हार्ड डिस्क और ई-मेल खंगालने में लगे थे। अफसरों का फोकस उन अलमारियों और कंप्यूटर्स पर था, जिसमें TMC के फंड्स, वेंडर्स की पेमेंट और कैंडिडेट सिलेक्शन से जुड़ी फाइलें रखी थीं। करीब 5 से 6 घंटों तक दफ्तर का कोना-कोना तलाशा गया। ममता जो हरे रंग की फाइल लेकर निकलीं, उसमें क्या?रेड शुरू होने के करीब 5 घंटे बाद CM ममता बनर्जी I-PAC के चेयरमैन प्रतीक जैन के घर पहुंचीं। यहां से वे हरे रंग की फाइल लेकर निकलीं। ममता ने आरोप लगाया कि ED ने I-PAC चेयरमैन के घर पर छापेमारी करके TMC का इंटरनल डेटा जब्त करने की कोशिश की। फाइल लेकर उन्होंने कहा कि इसमें TMC से जुड़ी हार्ड डिस्क, स्ट्रैटजी और पॉलिसीज की जानकारी है। ममता ने गृह मंत्री अमित शाह पर सवाल उठाया और रेड को डराने-धमकाने की कार्रवाई बताया। अफसरों और ममता के बीच क्या बातचीत हुईप्रतीक जैन के घर से ममता सीधे I-PAC के ऑफिस पहुंची थीं। उनके साथ DGP, पुलिस फोर्स और Z-सिक्योरिटी के जवान भी थे। उस वक्त ऑफिस में मौजूद एक सोर्स ने बताया- ‘CM के पहुंचने के बाद दफ्तर का माहौल ज्यादा बिगड़ गया। वो सीधे उस कमरे में जा पहुंचीं, जहां ED के अफसर डॉक्यूमेंट्स खंगाल रहे थे। CM काफी गुस्से में थीं। उन्होंने अफसरों से रेड की वजह पूछी, इस दौरान बहस भी हुई। हालांकि इन सबका छापेमारी पर खास असर नहीं हुआ।’ ’CM ममता के साथ आए अफसर रेड के बीच से कई फाइलें लेकर बाहर चले गए। ED की टीम ने उन्हें रोकने की कोशिश भी की। इधर दफ्तर के बाहर कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ बढ़ने लगी। ये सब देखकर स्टाफ में मौजूद कई लोगों की घबराहट बढ़ गई थी।’ इन फाइलों में क्या था? इसे लेकर सोर्स ने बताया, ’इनमें I-PAC के ग्राउंड पर किए जा रहे सर्वे से लेकर कई तरह का डेटा रहता है। चुनाव में कम समय बचा है इसलिए हर विधानसभा सीट के लिए हम एक अलग स्ट्रैटजी बना रहे हैं। इन फाइलों में इन्हीं से जुड़ा डेटा और रिसर्च रहता है।’ हालांकि ED का आरोप है कि ममता ने सरकारी काम में बाधा डाली और डॉक्यूमेंट्स चुराने की कोशिश की। वहीं, CM ममता ने इसे गलत बताया। रेड के बाद कोलकाता पुलिस ने ED अफसरों के खिलाफ FIR दर्ज की, जिसके बाद ED ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने पुलिस जांच पर रोक लगा दी। इसे केंद्रीय एजेंसियों पर राज्य के दखल का केस बताते हुए ममता सरकार से जवाब मांगा है। रेड के बाद कैसा था दफ्तर का माहौलकरीब 6 घंटे बाद रेड खत्म हुई। ED की टीम वहां से भारी-भरकम बैग लेकर निकली। तब तक I-PAC के अंदर का नजारा बदल चुका था। सोर्स ने बताया, ’टीम अपने साथ कई लैपटॉप और हार्ड डिस्क का क्लोन डेटा लेकर गई है। इसके तुरंत बाद I-PAC मैनेजमेंट और TMC के नेताओं के बीच एक इमरजेंसी मीटिंग हुई। इसमें तय हुआ कि अब इस रेड को ही BJP के खिलाफ हथियार बनाया जाएगा।’ I-PAC ने स्टाफ को सख्त हिदायत दी कि वे किसी अजनबी से बात न करें। इस बीच न कोई डॉक्यूमेंट नष्ट किया जाएगा और न ही दफ्तर से बाहर ले जाया जाएगा, ताकि आगे किसी भी कानूनी अड़चन से बचा जा सके। I-PAC के स्टाफ के लिए नई 'रेड गाइडलाइंस'छापेमारी के अगले ही दिन I-PAC मैनेजमेंट ने स्टाफ के लिए एक सीक्रेट एडवाइजरी जारी की। इसमें तीन बातों का ध्यान रखने के लिए कहा गया। 1. डिजिटल क्लिनिंग के तहत वर्क लैपटॉप और फोन पर कोई प्राइवेट या सेंसिटिव पॉलिटिकल डेटा न रखें।2. कोई भी कर्मचारी सोशल मीडिया पर रेड या पार्टी के काम को लेकर कमेंट नहीं करेगा।3. जांच एजेंसी अगर दोबारा आती है तो कानूनी टीम की मौजूदगी के बिना कोई बयान दर्ज नहीं कराएगा। रेड के बाद I-PAC की रणनीति क्या? रेड के बाद I-PAC ने अपनी स्ट्रैटजी और आक्रामक कर दी है। संस्था में हमारे सोर्स ने बताया कि किस इलाके में रेड का मुद्दा फायदेमंद होगा और कहां नुकसान हो सकता है, इन पहलुओं को देखते हुए आगे की स्ट्रैटजी बनाई जा रही है। रेड के बाद I-PAC तृणमूल के लिए 3 लेवल प्लान पर काम कर रहा है… 1. TMC नेतृत्व को सुझाव दिया है कि रेड को बंगाल के गौरव पर दिल्ली का हमला बताया जाए। गांव-गांव में ये मैसेज भेजा जा रहा है कि BJP केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके आपकी लोकप्रिय योजनाएं बंद कराना चाहती है। 2. माइक्रो मैनेजमेंट के तहत I-PAC की टीमें उन बूथों की पहचान कर रही हैं, जहां वोट शेयर 5% से ज्यादा गिरा है। सरकारी योजनाओं का फीडबैक लिया जा रहा है। इसमें स्वास्थ्य साथी, कन्याश्री जैसी योजनाओं का फायदा किसे नहीं मिला, इसकी लिस्ट सीधे CM ऑफिस भेजी जा रही है। 3. I-PAC कैंडिडेट्स की लिस्ट फाइनल नहीं करता, लेकिन वो हर मौजूदा विधायकों की विनेबिलिटी रिपोर्ट यानी जीतने की क्षमता की रिपोर्ट बना रहा है। इसमें कार्यकर्ताओं से लेकर बूथ लेवल तक फीडबैक लिया जा रहा है। ED की छापेमारी ममता की चुनावी मशीनरी पर अटैकI-PAC पर छापेमारी का चुनाव पर असर समझने के लिए हमने पश्चिम बंगाल की राजनीति को करीब से देखने वाले सीनियर जर्नलिस्ट प्रभाकर मणि तिवारी से बात की। वे कहते हैं, ‘तृणमूल कांग्रेस इस रेड को BJP के खिलाफ एक बड़े हथियार की तरह इस्तेमाल करेगी। ममता इसे बंगाल के अपमान, बंगालियों की अस्मिता और प्रवासी मजदूरों के मुद्दों से जोड़ेंगीं।‘ 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही TMC की चुनावी मशीनरी I-PAC संभाल रही है। ऑफिशियल तौर पर I-PAC प्रशासन नहीं चलाता, लेकिन चुनाव से जुड़ा हर छोटा-बड़ा काम देखता है। प्रभाकर इसीलिए रेड को ममता की पॉलिटिकल मशीनरी को कमजोर करने की कोशिश मानते हैं। वे आगे कहते हैं, ‘अगर आप उस जड़ पर वार करेंगे, जो आपकी पूरी रणनीति संभाल रहा है तो उसका कुछ असर होने की उम्मीद रहती ही है। BJP को भी शायद यही उम्मीद है कि इससे कुछ फर्क पड़ेगा। हालांकि असल में कितना और क्या असर होगा, ये कहना अभी जल्दबाजी होगी।‘ छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी जो 'ग्रीन फाइल' लेकर बाहर निकली थीं, प्रभाकर मणि उसे मैसेजिंग मानते हैं। 5 साल पुराने केस में छापा, मनी ट्रेल तलाश रही थी EDछापेमारी के तार 5 साल पुराने अनूप मांझी उर्फ लाला केस से जुड़े हैं। मांझी पर बंगाल में कोयला तस्करी का मास्टरमाइंड होने का आरोप है। ED की फाइलों में ये भी दर्ज है कि मांझी के खिलाफ 2000 से 2015 के बीच अवैध कोयला खनन और चोरी से जुड़े 16 केस दर्ज हुए थे। इनमें से कई मामलों में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। ED का दावा है कि कोयला तस्करी से हुई करोड़ों की अवैध कमाई हवाला के जरिए I-PAC तक पहुंचाई गई। 2022 के गोवा विधानसभा चुनाव के दौरान TMC का प्रचार इन्हीं पैसों से किया गया। ED में हमारे सोर्स का दावा है कि मांझी के करीबियों ने I-PAC को फंडिंग दी, जिसके एजेंसी के पास पुख्ता सबूत हैं। रेड का मकसद फाइलों और डिजिटल रिकॉर्ड्स के जरिए उसी मनी ट्रेल को पकड़ना था। पुराने केस ओपन करने की टाइमिंग अहमप्रतीक जैन के TMC में जिम्मेदारी संभालने और ED की कार्रवाई की टाइमिंग को प्रभाकर मणि अहम बताते हैं। वे कहते हैं, ‘प्रतीक जैन पार्टी की IT सेल और सोशल मीडिया संभालते थे। जिस केस का हवाला दिया जा रहा है, वो करीब 5 साल पुराना है। उसमें आखिरी पूछताछ भी 2 साल पहले हुई थी। 2 साल तक कुछ नहीं हुआ और अब अचानक चुनाव के पहले छापेमारी एक संदेश तो देता ही है। वे कहते हैं कि ये रिकॉर्ड रहा है कि चुनाव के पहले गैर-BJP शासित राज्यों में ऐसी रेड बढ़ जाती हैं, जिसे जनता भी पॉलिटिकल टाइमिंग के तौर पर देखती है। पश्चिम बंगाल में I-PAC कैसे काम कर रहा है?इस वक्त I-PAC का पूरा फोकस पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव पर है। I-PAC सीधे राजनीति में शामिल हुए बिना एक मल्टीलेवल स्ट्रैटजी मैनेजमेंट टीम के तौर पर काम कर रहा है। उसका मेन मकसद डेटा आधारित रणनीति तैयार कर पार्टी नेतृत्व को मदद देना है। 1. बूथ लेवल पर माइक्रो मैनेजमेंटI-PAC हर विधानसभा क्षेत्र और हर बूथ स्तर पर आंकड़ों का एनालिसिस कर रहा है। इसमें देखा जा रहा है कि किस बूथ पर TMC का वोट परसेंट घटा है, कहां जनता में असंतोष है और नाराजगी बढ़ रही है। 2. सर्वे और फीडबैक लेनाग्राउंड टीम के जरिए लगातार रिपोर्ट बनाई जा रही है। इसमें आम लोगों की समस्याएं, सरकारी योजनाओं पर लोगों की राय और लोकल नेताओं की स्वीकार्यता देखी जाती है। 3. सरकारी योजनाओं पर फीडबैक I-PAC ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षी योजनाओं के असर पर भी सर्वे कर रही है। इसमें लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री, स्वास्थ्य साथी जैसी योजनाओं पर फीडबैक लिया जा रहा है कि ये योजनाएं सही तरीके से लोगों तक पहुंच रही हैं या नहीं। ये भी देख रहे कि इन्हें लेकर कहां असंतोष है। 4. नेताओं की छवि और बयानबाजी की रणनीतिकौन नेता कहां क्या बोलेगा, किस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाना है या संयम बरतना है, इन सभी मामलों में I-PAC बैक एंड से इनपुट दे रहा है। I-PAC ही पश्चिम बंगाल में TMC की IT सेल का भी काम संभालती है। 5. कैंडिडेट सिलेक्शन में अहम रोलI-PAC कैंडिडेट की फाइनल लिस्ट तय नहीं करता, लेकिन पार्टी नेतृत्व को फीडबैक रिपोर्ट देता है। इस रिपोर्ट में बताया जाता है कि किस कैंडिडेट की जीत की संभावना ज्यादा है, कहां कड़ा विरोध है और कहां नए चेहरों की जरूरत है। इसके बाद उम्मीदवारों पर अंतिम फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करता है। ...................... ये खबर भी पढ़ें... क्या पाकिस्तान से आए लोगों ने ईरान में भड़काई हिंसा ‘हमारा गुस्सा महंगाई की वजह से है, लेकिन ईरान में जो हो रहा है, वो आम लोगों का गुस्सा नहीं है। ये तो साजिश है। कुछ लोग प्रदर्शनकारियों में घुसते हैं और आग लगाने लगते हैं, फायरिंग करते हैं। रश्त शहर में तो पूरा बाजार जला दिया। हॉस्पिटल पर हमले हुए, एक नर्स को जिंदा जला दिया। गिरफ्तार लोगों के पास हैंड ग्रेनेड मिले हैं। इन सबके पीछे अमेरिका और इजराइल हैं।’ ईरान का हाल बता रहे अहमद अब्बास राजधानी तेहरान में रहते हैं। पढ़िए पूरी खबर...
‘14 प्लस बेस्ट है…। उसी में सीधा पॉक्सो लगता है। टच भी नहीं हुआ तब भी केस पक्का। 18 में सहमति का सवाल आ जाता है। 14 में आदमी पूरी तरह फंसता है।’ ये बात सेक्सटॉर्शन और हनीट्रेप का कॉन्ट्रेक्ट लेने वाली गैंग के एजेंट ने भास्कर के खुफिया कैमरे पर कही। ये गैंग बाकायदा कॉन्ट्रैक्ट साइन करके सेक्सटॉर्शन को अंजाम दे रही हैं। पर्दाफाश करने के लिए हमारी टीम ने नईदिल्ली में दो एजेंट्स से मुलाकात की। हम सोर्स के जरिए इन एजेंट्स तक पहुंचे। पढ़िए और देखिए ये इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट। कॉन्ट्रैक्ट लेने वाली गैंग की एजेंट से रिपोर्टर की मुलाकात रिपोर्टर: आपका नाम क्या है एजेंट: पूजा रिपोर्टर: काम क्या है एजेंट: भाई ने समझा दिया है रिपोर्टर: क्या समझाया है एजेंट: लड़कियां अरेंज करनी हैं। पुराने कनेक्शन हैं रिपोर्टर: क्लाइंट मुंबई के बड़े बिजनेसमैन हैं। पैसा अच्छा है एजेंट: ठीक है रिपोर्टर: आपको क्या-क्या जानकारी है, बताइए एजेंट: दो सुंदर लड़कियां चाहिए। होटल में मीटिंग होगी रिपोर्टर: हनी ट्रैप समझती हैं एजेंट: हां रिपोर्टर: प्रोसेस कैसे होगा एजेंट: पीने के बाद टच होता है, बातें होती हैं। वही सब चाहिए रिपोर्टर: लड़की की उम्र कितनी होगी एजेंट: 14 प्लस बेस्ट है रिपोर्टर: 14 एजेंट: उसी में सीधा पॉक्सो लगता है। टच भी नहीं हुआ तब भी केस पक्का रिपोर्टर: 18 प्लस क्यों नहीं एजेंट: 18 में सहमति का सवाल आ जाता है। 14 में आदमी पूरी तरह फंसता है रिपोर्टर: रिकॉर्डिंग कैसे करोगी एजेंट: अपने फोन से। बस हाय-हेलो, बातचीत दिखानी है रिपोर्टर: उसके बाद एजेंट: होटल ले जाएंगे। रूम बुक कराएंगे। अंदर जाते ही काम बन जाता है रिपोर्टर: पुलिस को कब बुलाओगी एजेंट: जब हमारे लिए मजबूत हो जाएगा। फिर बोलेंगे बच्ची के साथ बदतमीजी की रिपोर्टर: पेमेंट कैसे लेते हो एजेंट: एडवांस, फिर काम होने पर। तीन हिस्सों में रिपोर्टर: आदमी अंदर चला जाता है एजेंट: हां। मेरी गवाही तक बाहर नहीं आता। तीन साल से लोग अंदर हैं रिपोर्टर: समझौता हो सकता है एजेंट: अगर पैसे दे दे तो पहले कमरे में ही मैनेज कर लेते हैं रिपोर्टर: होटल में बच्ची की एंट्री कैसे एजेंट: आधार नहीं लगता। हम मौसी-मामी बनकर जाते हैं। सब पैसे का खेल है रिपोर्टर: एक क्लाइंट पॉलिटिशियन है, हरियाणा से एजेंट: हो जाएगा। उम्रदार पॉलिटिशियन जल्दी फंसते हैं रिपोर्टर: उन्हें कैसे ट्रैप करोगी एजेंट: मीटिंग करवा दो। नंबर एक्सचेंज होगा। लड़की सामने आई तो काम हो जाएगा एजेंट दावा करती है कि उसने हनीट्रैप और सेक्सटॉर्शन के लिए चार मामलों में अलग अलग लोगों पर पॉक्सो लगवा रखा है जिसकी सुनवाई कोर्ट में चल रही है। गवाही उनके हाथ में होती है। बातचीत में वे यह भी कहती हैं कि अगर सामने वाला अंदर चला गया, तो बाहर निकलना उनकी मर्जी पर निर्भर करेगा। एजेंट और रिपोर्टर के बीच फिर आगे बातचीत होती है…। एजेंट: लड़की तय कर लो। सोच-समझकर मैसेज करना रिपोर्टर: आपको कॉन्ट्रैक्ट दे दिया है। कैसे करना है, वो आप तय करें। मेरा काम सिर्फ मिलवाना है एजेंट: टारगेट शराब पीता है रिपोर्टर: हां एजेंट: हम पिलाने वाली बैठाएंगे। नशा होगा तभी काम बनेगा रिपोर्टर: पहली मीटिंग मैं कराऊंगा एजेंट: बस हाय-हेलो कराना। उसके बाद हम बाहर मिलेंगे। आदमी खुद कहता है होटल चलो रिपोर्टर: अगर वो टच करने लगे एजेंट: कोई दिक्कत नहीं। हमें फंसाना है महिला एजेंट ने हमसे कहा कि वो टारगेट (मुंबई के बिजनेसमैन) से एक बार मिलवाकर दोस्ती करवा दे। हमने उसे बताया कि मुंबई से उसका दोस्त दो दिन में आ रहा है आते ही मिलवाने का वादा कर हम उस दिन वहां से निकल जाते है। ठीक तीन दिन बाद अंडर कवर रिपोर्टर मुंबई का बिजनेसमैन बन एजेंट से मुलाकात करता है। रिपोर्टर बताता है कि, इन्हीं को फंसाना है। एजेंट बिजनेसमैन को दोस्ती करने के लिए मनाली ले जाने का कहती है। रिपोर्टर: फाइनल प्लान बताओ एजेंट: आठ तारीख रिपोर्टर: दिल्ली या हरियाणा एजेंट: मनाली ले चलेंगे एजेंट: घूमने के बहाने दोस्ती होगी। शराब, चैटिंग, हंसी–मजाक एजेंट: लौटते वक्त दिल्ली में होटल रुकेंगे रिपोर्टर: FIR कहां एजेंट: दिल्ली में। पुलिस सबूत मांगती है, वीडियो बना लेंगे रिपोर्टर: काम पक्का हो जाएगा एजेंट: पक्का इसके बाद हमारी टीम एक और गैंग की तलाश में जुटती है। मकसद यह जानना था कि सेक्सटॉर्शन का यह खेल किसी एक गिरोह तक सीमित है या इसके पीछे कई नेटवर्क एक्टिव है। इसी तलाश में हमारी बातचीत राजू नाम के एक बंगाली एजेंट से होती है। राजू से मुलाकात दिल्ली के महिपालपुर में तय होती है। वह होटल में मिलने से इनकार करता है और कहता है कि अगर गाड़ी है तो बातचीत गाड़ी में ही होगी। वजह, होटल के CCTV कैमरों से बचना। शुरुआत में राजू को टीम पर भरोसा नहीं होता। तय समय पर राजू आता है। उसके साथ उसकी गैंग की एक महिला सदस्य भी मौजूद रहती है। बातचीत की शुरुआत में हम पहले की तरह मुंबई के बिजनेसमैन को टारगेट बताते हैं। राजू और रिपोर्टर के बीच हुई बातचीत रिपोर्टर: टारगेट को हनी ट्रैप या सेक्सटॉर्शन—किसमें फंसाओगे राजू: सेक्सटॉर्शन। सेक्स कराओ और टॉर्चर करो रिपोर्टर: इंडियन या रशियन राजू: दोनों ऑप्शन हैं रिपोर्टर: पहले ऐसा काम किया है राजू: लूटपाट नहीं की, लेकिन काम हो जाएगा रिपोर्टर: रिकॉर्डिंग कौन करेगा राजू: लड़की करेगी एजेंट-2: हमें सब आता है रिपोर्टर: चार्ज कितना लोगे राजू: पार्टी से जो कटेगा, 50-50 रिपोर्टर: ब्लैकमेल कब राजू: अगले दिन फोन करेंगे। वीडियो भेजेंगे एजेंट-2: लोग डर जाते हैं। इज्जत का डर सबसे बड़ा होता है राजू: मोटी पार्टी हो तो एक करोड़ भी दे देता है रिपोर्टर: पुलिस बुलाने की व्यवस्था राजू: पूरी सेटिंग है। मंथली देते हैं। पांच मिनट में पहुंच जाती है रिपोर्टर: होटल कहां राजू: महिपालपुर। 300 होटल में सेटिंग है गैंग के काम करने के 3 तरीके पहला : खुद टारगेट से संपर्क करते हैं। दोस्ती, प्रेम या भरोसे का नाटक कर पहले नजदीकियां बढ़ाई जाती हैं और प्लानिंग के साथ शारीरिक संबंध बनाया जाता है, जिसे स्पाई कैमरा में रिकॉर्ड करते हैं। फिर ब्लैकमेल कर डिमांड पूरी करवाते हैं। अगर टारगेट डिमांड पूरा करने से मना करता है तो नाबालिक लड़कियों को सामने रख कर पुलिस बुला कर पॉक्सो में मामला दर्ज करा दिया जाता है। दूसरा : इस मामले में कोई अपना ही टारगेट से पैसे या गुप्त जानकारी हासिल करने लिए गैंग कि महिलाओं को दोस्त बता कर मिलवाता है। महिला टारगेट से दोस्ती बढ़ाती है। फिर शारीरिक संबंध बनाया जाता है, जिसे स्पाई कैमरा में रिकॉर्ड करते हैं। धमकी देकर डिमांड पूरी करवाते हैं। तीसरा : वीडियो कॉल के जरिए आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड करते हैं। फिर इसी फुटेज के जरिए ब्लैकमेलिंग की जाती है। इस तरह के सेक्सटॉर्शन के शिकार उत्तर प्रदेश पुलिस के एक बड़े अधिकारी भी हो चुके हैं। हनीट्रेन–सेक्सटॉर्शन के 3 मामले पहला : 12 जुलाई 2023 को दिल्ली निवासी धीरज के खिलाफ बलात्कार की एफआईआर दर्ज की गई। आरोप लगाया गया कि दिसंबर 2022 में एक मॉल की बेसमेंट पार्किंग में खड़ी कार में उन्होंने लड़की का रेप किया। एफआईआर के आधार पर धीरज को गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि मुलाकात उस महिला से कभी हुई ही नहीं, जिसने उस पर बलात्कार का आरोप लगाया। गिरफ्तारी के दौरान धीरज का करीबी दोस्त मुकेश सामने आया और परिवार से 50 लाख रुपए की मांग करते हुए दावा किया कि वह लड़की को पैसे देकर धीरज को जेल से छुड़वा देगा। घबराए परिवार ने 33 लाख रुपए दे दिएञ इसके बावजूद धीरज को लगभग 3.5 महीने जेल में बिताने पड़े, जिसके बाद उसे जमानत मिली। जांच में सामने आया कि यह पूरा मामला पैसों की उगाही के लिए रचा गया था। जिस महिला ने बलात्कार का आरोप लगाया था, वह मुकेश के ही स्पा सेंटर में काम करती थी। यह भी उजागर हुआ कि साजिश का मास्टरमाइंड खुद मुकेश था, जिसने इस झूठे मामले के जरिए धीरज के परिवार से पैसे ऐंठे। मुकेश और पिंकी के खिलाफ एक्सटॉर्शन की एफआईआर दर्ज की गई और दोनों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। दूसरा : गुरुग्राम में 8 जून 2023 को पुलिस ने बिनीता कुमारी और महेश फोगाट को झूठे बलात्कार के मामले में फंसाने की धमकी देकर पैसे ऐंठते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। बिहार की रहने वाली बिनीता कुमारी और रोहतक निवासी महेश फोगाट, गुरुग्राम में एक संगठित सेक्सटॉर्शन रैकेट के जरिए पुरुषों को निशाना बनाकर उनसे जबरन वसूली कर रहे थे। 28 मई 2023 को बिनीता ने एक डेटिंग ऐप के जरिए एक व्यक्ति को फंसाया। वह उसे मिलने के बहाने बुलाकर जबरन बीयर पीने का दबाव बनाने लगी। जब उस व्यक्ति को संदेह हुआ, तो वह वहं से निकल गया। इसके बाद बिनीता ने उस व्यक्ति से 5 लाख रुपए की मांग की और झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी। डर के कारण पीड़ित व्यक्ति ने महेश फोगाट को 50 हजार रुपए दे दिए। लेकिन जब दोबारा पैसों की मांग की गई, तो एक एनजीओ के जरिए गुरुग्राम पुलिस को सूचना दी। दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 120B, 384 और 389 आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज की गई और गिरफ्तार किया गया। तीसरा : गुरुग्राम में एक सीनियर सिटीजन को दो महिलाओं ने झूठे रेप केस में फंसाया। एफआईआर के अनुसार, दोनों महिलाओं ने मिस्ड कॉल के जरिए संपर्क किया और धीरे-धीरे दोस्ती बढ़ाई। एक दिन वे उनके घर पहुंचीं, एक महिला ने उन्हें शारीरिक संबंध बनाने के लिए उकसाया। कुछ समय बाद वह यह कहते हुए वहां से चली गई कि ‘काम हो गया, सबूत मिल गया।’ इसके कुछ ही समय बाद पीड़ित को इन महिलाओं के फोन आने लगे। 10 लाख रुपए की मांग की गई। पैसे न देने पर झूठे बलात्कार के मामले में फंसाने की धमकी दी गई। पैसे नहीं देने पर घटना के 14 दिन बाद महिला ने बलात्कार का मामला दर्ज करा दिया गया। पीड़ित परिवार ने पुलिस को पूरी कहानी बताई। एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सुनाई, जिसमें वरिष्ठ नागरिक को झूठे केस से बचाने के बदले महिला और उसके गिरोह के सरगना को 6.5 लाख रुपए देने की मांग करते सुने गए। पॉक्सो और सेक्शन 376 का गलत इस्तेमाल हो रहा दिल्ली हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट शैलेंद्र बब्बर कहते हैं कि, ‘पोस्ट निर्भया के बाद पॉक्सो और सेक्शन 376 जैसे कानूनों का सबसे अधिक मिसयूज देखा गया है। मेट्रोमोनियल विवादों में भी पॉक्सो का मिसयूज़ होता है। कुछ मामलों में, व्यक्ति सेक्सटॉर्शन या हनीट्रैप के जरिए पैसे वसूलने या बदला लेने के लिए अपराधी गतिविधियां करते हैं। कुछ मामले ऐसे हैं जहां निजी लेन-देन कोर्ट में नहीं सुलझ रहे थे। तब एक पक्ष ने दूसरे पक्ष के बच्चों को फंसाया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस इकट्ठा करना जरूरी है। झूठा सबूत बनाना गंभीर अपराध है, जिसमें 6 महीने से 10 साल तक की सजा हो सकती है। पॉक्सो एक्ट में विशेष प्रावधान है। अगर माइनर झूठी शिकायत कराता है, तो उसकी सजा छह महीने तक होती है। टारगेट डर जाता है और पैसे देने लगता है रिटायर्ड एसीपी वेद भूषण कहते हैं, ‘ अभी आपने देखा कि कर्नाटक के डीजी अपने ऑफिस में बैठे थे और एक लड़की के साथ वीडियो बन गया। जब ऐसे मामले सामने आते हैं, तो टारगेट डर जाता है और पैसे देने लगता है।’ ‘हनीट्रैप पुराने समय से हैं, जहां लड़कियां बड़े अधिकारी और राजनीतिक नेताओं को फंसाती थीं। वीडियो बनाकर पैसे की मांग की जाती थी। दिल्ली में एक सुप्रीम कोर्ट की वकील ने सांसद से सात करोड़ रुपए की डिमांड की थी। जांच के बाद उसे अरेस्ट कर लिया गया।’ ‘लोग मामले रिपोर्ट नहीं करते क्योंकि डर या परिवार की इज्जत को लेकर दबाव होता है। अब धीरे-धीरे लोग सामने आ रहे हैं, पुलिस जांच करती है और आरोपी अरेस्ट किए जाते हैं। इससे बचने का सबसे आसान तरीका है सतर्क रहना और किसी अनजान व्यक्ति के दबाव में न आना।’ वहीं, एकम न्याय फाउंडेशन की संस्थापक दीपिका नारायण भारद्वाज कहती हैं कि, ‘हमारे पास बलात्कार, हनीट्रैप और सेक्सटॉर्शन के कई मामले आते हैं, जिनमें से कुछ हम पहले ही सार्वजनिक कर चुके हैं। हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं।’ ‘अक्सर महिला अपनी मर्जी से संबंध बनाती है, लेकिन बाद में उसी पर बलात्कार का केस दर्ज कर देती है। कई बार यह पैसे वसूलने के लिए किया जाता है। कुछ मामलों में वकील और पुलिस भी इसमें शामिल पाए गए।’ कॉन्क्लूजन : हनीट्रैप और सेक्सटॉर्शन संगठित अपराध हैं। कानून मौजूद है, लेकिन डर की वजह से रिपोर्टिंग कम है। पॉक्सो और रेप कानून का डर उगाही का हथियार बन रहा है। .......................................... आप ये इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं ‘4500 टका दिए, एजेंट ने भारत पहुंचा दिया’:बांग्लादेश से आए घुसपैठिए, पुलिस में सिपाही; SIR के बाद भी वोटर लिस्ट में नाम दलाल के जरिए भारत आए। आधार कार्ड से लेकर वोटर आईडी तक बनवा ली। एक तो पश्चिम बंगाल पुलिस में सिपाही बन गया। ये कहानी उन बांग्लादेशियों की है, जो अवैध तरीके से भारत में घुसे हैं। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR में पश्चिम बंगाल से करीब 58 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए आइडेंटिफाई किए गए हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें...।
दिया कुमारी ने झोटवाड़ा में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का किया लोकार्पण
जयपुर। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने गुरुवार को राजधानी जयपुर में विद्याधर नगर विधानसभा क्षेत्र के झोटवाड़ा में 75 लाख रुपए की लागत से निर्मित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का लोकार्पण किया। दिया कुमारी ने लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के नागरिकों को सुलभ, सस्ती […] The post दिया कुमारी ने झोटवाड़ा में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का किया लोकार्पण appeared first on Sabguru News .
MBBS में दाखिले के लिए खुद का पैर काटकर रची दिव्यांग बनने की साजिश
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में लाइन बाजार थाना क्षेत्र में खलीलपुर गांव में मेडिकल की पढ़ाई में दाखिले की सनक एक युवक को इस हद तक ले गई कि उसने खुद को दिव्यांग बनाने के लिए अपना ही पैर काट लिया। मामला सामने आने पर न केवल पुलिस, बल्कि पूरा जिला स्तब्ध रह […] The post MBBS में दाखिले के लिए खुद का पैर काटकर रची दिव्यांग बनने की साजिश appeared first on Sabguru News .
भाटापारा की रियल इस्पात फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 6 मजदूरों की मौत
बलौदाबाजार–भाटापारा। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के भाटापारा ग्रामीण थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बकुलाही स्थित रियल इस्पात स्पंज आयरन फैक्ट्री में गुरुवार सुबह एक भीषण औद्योगिक हादसा हो गया। फैक्ट्री के स्पंज आयरन प्लांट में कोयले के फर्नेस में अचानक जोरदार विस्फोट हुआ, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इस दर्दनाक हादसे में छह मजदूरों […] The post भाटापारा की रियल इस्पात फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 6 मजदूरों की मौत appeared first on Sabguru News .
वर्ल्ड कप बायकॉट से बांग्लादेश को करोड़ों का घाटा:क्या ICC बैन भी कर सकता है, भारत को कितना नुकसान
BCCI को कभी बड़े भाई जैसा मानने वाले बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने अब भारत में ही खेलने से मना कर दिया है। वहीं पाकिस्तान भी कह रहा है कि हम बांग्लादेश का साथ देंगे। भारत-श्रीलंका की मेजबानी में होने वाला T20 वर्ल्ड कप शुरू होने में महज 2 हफ्ते बाकी हैं। ऐसे में बांग्लादेश के बायकॉट से उसे क्या घाटा होगा, क्या पाकिस्तान भी मैच नहीं खेलेगा और भारत पर क्या असर पड़ेगा; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बांग्लादेश ने वर्ल्ड कप बायकॉट क्यों किया? जवाब: बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड यानी BCB ने सुरक्षा का हवाला देते हुए भारत में न खेलने का फैसला किया है। BCB चाहता था कि उसके T20 वर्ल्ड कप मैच श्रीलंका में हों, लेकिन ICC ने इससे इनकार कर दिया। बांग्लादेश के स्पोर्ट्स एडवाइजर आसिफ नजरुल ने कहा, ‘हम वर्ल्ड कप खेलना चाहते हैं, लेकिन भारत में हमारे खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की सुरक्षा को लेकर चिंता है।’ सुरक्षा से जुड़ी इस वजह के अलावा बांग्लादेशी टीम के भारत न आने की 2 छिपी वजहें भी हैं… 1. मुस्तफिजुर रहमान को IPL से बाहर करना IPL की टीम KKR ने बांग्लादेशी पेसर मुस्तफिजुर रहमान को 9.2 करोड़ रुपए में खरीदा, लेकिन भारत में इसका विरोध होने लगा। BCCI ने KKR से उन्हें रिलीज करने को कहा। 3 जनवरी को KKR ने ऐसा कर दिया। BCB ने इसे अपमान माना और IPL का टेलिकास्ट बैन कर दिया। यहीं से ये विवाद शुरू हुआ। 2. भारत-बांग्लादेश में बिगड़ते हालात और रिश्ते पिछले कुछ महीनों में भारत और बांग्लादेश के डिप्लोमेटिक रिलेशंस बेहद खराब हुए हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और हत्या होने के बाद भारत में बांग्लादेशी खिलाड़ियों और कलाकारों के विरोध की बात होने लगी। बिगड़ते माहौल का हवाला देते हुए बांग्लादेश सरकार ने टीम भेजने से मना कर दिया। हालांकि BCB के प्रेसिडेंट अमीनुल इस्लाम बुलबुल ने कहा कि हम ICC से एक बार फिर बात करेंगे और कहेंगे कि वे हमारी चिंताओं पर ध्यान दें। बांग्लादेश इस मसले पर अपनी लड़ाई जारी रखेगा। बांग्लादेश के बायकॉट के फैसले के बाद अब उसकी जगह स्कॉटलैंड की टीम T20 वर्ल्ड कप में खेल सकती है। सवाल-2: वर्ल्ड कप न खेलने से बांग्लादेश को क्या-क्या नुकसान होगा? जवाब: वर्ल्ड कप न खेलने से बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड से लेकर बांग्लादेश में बिजनेस को अच्छा-खासा नुकसान हो सकता है… पार्टिसिपेशन फीस नहीं मिलेगी, बोर्ड का घाटा मैच जीतने पर भी फीस मिलती है, इसका नुकसान स्पॉन्सर और कॉमर्शियल लॉस रैंकिंग पर असर दैनिक भास्कर डिजिटल के स्पोर्ट्स एडिटर बिक्रम प्रताप सिंह के मुताबिक बांग्लादेश ने पाकिस्तान से प्रभावित होकर फैसला तो ले लिया कि वह वर्ल्ड कप बायकॉट कर देगा, लेकिन ICC में पाकिस्तान का फिर भी दबदबा है। भारत-पाकिस्तान मैच से पूरे वर्ल्ड कप का 25% तक रेवेन्यू आता है, लेकिन बांग्लादेश के साथ ऐसा नहीं है। उसने वर्ल्ड कप बायकॉट कर अपना ही नुकसान किया है। हालांकि BCB की फाइनेंस कमेटी के प्रमुख और अंतरिम सरकार के स्पोर्ट्स एडवाइजर नजमुल हुसैन ने हाल ही में कहा था कि बांग्लादेश के वर्ल्ड कप न खेलने से बोर्ड को कोई नुकसान नहीं होगा। जो नुकसान होगा वो खिलाड़ियों को होगा। सवाल-3: वर्ल्ड कप न खेलने से बांग्लादेश के खिलाड़ियों को क्या नुकसान होगा जवाब: वर्ल्ड कप न खेलने से बांग्लादेशी खिलाड़ियों के करियर और फाइनेंस को नुकसान होगा… हर खिलाड़ी को साढ़े सात लाख का नुकसान रैंकिंग पर असर स्पॉन्सर्स का पीछे हटना सवाल-4: क्या ICC बांग्लादेश टीम के खिलाफ कोई एक्शन ले सकती है? जवाब: ICC के पास कार्रवाई का अधिकार है। ICC के नियमों के मुताबिक वर्ल्ड कप का बायकॉट, मेंबर्स पार्टिसिपेशन एग्रीमेंट के खिलाफ है। ऐसे मामलों में ICC आर्थिक दंड से लेकर सदस्यता निलंबन तक का फैसला ले सकती है। पहले भी ICC सख्त कदम उठा चुकी है। 2019 में जिम्बाब्वे क्रिकेट को राजनीतिक दखल के कारण निलंबित किया गया था, जिससे वह 2020 में कोई ICC टूर्नामेंट नहीं खेल सका। अगर ICC को लगता है कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने राजनेताओं के दबाव में फैसला लिया है, तो ICC के सदस्य के तौर पर उसके निलंबन पर सोचा जा सकता है। अगर बांग्लादेश टीम टूर्नामेंट से हटती है तो ICC उसे ग्रुप स्टेज में भागीदारी पर मिलने वाले लगभग 3 लाख डॉलर भी नहीं देगी। इसके अलावा बोर्ड को ICC से मिलने वाला 30–40 मिलियन डॉलर का सालाना हिस्सा भी रोका जा सकता है। इसके अलावा ICC भविष्य में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड से बड़े टूर्नामेंट्स की मेजबानी का अधिकार भी छीन सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्पॉन्सरशिप पर असर पड़ेगा। सवाल-5: क्या पाकिस्तान भी वर्ल्ड कप का बायकॉट कर सकता है? जवाब: पाकिस्तान के वर्ल्ड कप बायकॉट करने की संभावना कम है क्योंकि उसके मैच पहले से ही भारत में नहीं होना तय है। पाकिस्तान के सभी मैच श्रीलंका में शेड्यूल हैं। मीडिया रिपोर्ट भी हैं कि पाकिस्तान भले ही बांग्लादेश का साथ देगा, लेकिन वर्ल्ड कप का बायकॉट नहीं करेगा। टेलिकॉम एशिया स्पोर्ट्स ने PCB सूत्रों के हवाले से लिखा है कि पाकिस्तान वर्ल्ड कप न खेलने जैसा कदम नहीं उठाएगा। 20 जनवरी को भी ऐसी खबरें PCB चेयरमैन मोहसिन नकवी के हवाले से सामने आई हैं। हालांकि 22 जनवरी को पाकिस्तानी न्यूज आउटलेट Geo News में पब्लिश एक रिपोर्ट के मुताबिक, PCB सूत्रों का कहना है कि अगर बांग्लादेश भारत जाने से मना करता है तो पाकिस्तान भी टूर्नामेंट का बायकॉट करेगा। पाकिस्तान के पूर्व कैप्टन राशिद लतीफ ने PCB को बायकॉट करने की सलाह भी दी है। सवाल-6: बांग्लादेश के बायकॉट करने से क्या भारत को भी कोई नुकसान हो सकता है? जवाब: बांग्लादेश के वर्ल्ड कप बायकॉट करने से भारत से ज्यादा बांग्लादेश को ही नुकसान होगा। इससे भविष्य में अब भारत भी बांग्लादेश के साथ द्विपक्षीय सीरीज खेलने से इनकार कर सकता है। जब भारत-बांग्लादेश के मैच होते हैं तो बांग्लादेश के ब्रॉडकास्टर और स्पॉन्सर सबसे ज्यादा कमाई करते हैं। IPL से भी यह कमाई करते हैं। भारत से संबंध खराब कर BCB अपना ही नुकसान कर रहा है। हालांकि मैच टिकट और टूरिज्म से होने वाली कमाई का नुकसान भारत को झेलना पड़ेगा… ***** बांग्लादेश क्रिकेट विवाद से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए... बांग्लादेश टी-20 वर्ल्ड कप से बाहर होने की कगार पर: बोर्ड बोला- भारत में नहीं खेलेंगे; ICC ने कल कहा था- इंडिया में ही खेलना होगा बांग्लादेश ने गुरुवार को भारत में टी-20 वर्ल्ड कप खेलने से इनकार कर दिया, जिसके बाद टीम का टूर्नामेंट से बाहर होना तय माना जा रहा है। एक दिन पहले ही ICC ने स्पष्ट किया था कि बांग्लादेश के सभी ग्रुप मैच भारत में ही कराए जाएंगे। पूरी खबर पढ़िए...
प्रशासन की मेहनत पर संगठन ने फेरा पानी, CM के भाषण के दौरान आधा खाली हुआ पांडाल
सबगुरु न्यूज-सिरोही। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के किसान सम्मान निधि की पांचवी किश्त वितरण और ग्लोबल राजस्थान मीट के तहत ग्राम उत्थान शिविरों के शुभारम्भ के राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लिए सिरोही आए। सिरोही के अरविंद पवेलियन में आयोजित किए जाने वाले इस कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए सिरोही, पाली और जालौर के […] The post प्रशासन की मेहनत पर संगठन ने फेरा पानी, CM के भाषण के दौरान आधा खाली हुआ पांडाल appeared first on Sabguru News .
भीलवाड़ा के ऊंकारपुरा में चोरों ने दो मंदिरों को निशाना बनाकर चांदी के मुकुट, छत्र और सामान चोरी कर लिया। पुजारी दिनेश शर्मा की सूचना पर कोटड़ी थाना प्रभारी महावीर प्रसाद मीणा ने जांच शुरू की है। आस्था के केंद्र पर हुई इस चोरी से क्षेत्र में भारी आक्रोश है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
भीलवाड़ा के कुम्हारिया गांव में 13 दिनों से लापता रतन लाल गुर्जर का शव उनके ही खेत में पेड़ से लटका मिला। सड़ी-गली अवस्था में मिली लाश से इलाके में दहशत फैल गई है। मंगरोप थाना पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है और आत्महत्या के कारणों की गहनता से जांच कर रही है। जानिए इस दुखद घटना का पूरा विवरण।

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