डिजिटल समाचार स्रोत

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अमेरिका के कोलोराडो में विमान हादसा : तीन लोगों की मौत

अमेरिका के कोलोराडो राज्य के स्टीमबोट स्प्रिंग्स में एक विमान दुर्घटना में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई। संघीय विमानन प्रशासन की शुरुआती रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है

देशबन्धु 14 Feb 2026 8:56 am

बांग्लादेश चुनाव: बीएनपी की ऐतिहासिक जीत, जनता को कहा धन्यवाद

बांग्लादेश चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को बहुमत मिला है। अब बीएनपी की तरफ से कहा गया है कि पार्टी लंबे समय से बांग्लादेश में लोगों के वोट का अधिकार बहाल करने के लिए संघर्ष कर रही है

देशबन्धु 14 Feb 2026 8:40 am

मस्जिद पर हमले ने खोली पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था की पोल

पाकिस्तान में जिस तरह से चरमपंथी हमले और हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं, वह शहबाज शरीफ सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है. इससे पार पाने में पाकिस्तान की सरकार संघर्ष करती नजर आ रही है

देशबन्धु 14 Feb 2026 6:50 am

यादगार के रूप में बिक रहे बर्लिन वॉल के नकली टुकड़े?

बर्लिन की दीवार गिरने के लगभग 40 साल बाद भी जर्मनी की राजधानी बर्लिन में लोग इसके टुकड़े यादगार के रूप में खरीद सकते हैं. लेकिन क्या यह टुकड़े सच में असली हैं?

देशबन्धु 14 Feb 2026 6:20 am

जब बागी हिमंता मिलने पहुंचे, राहुल कुत्ते से खेलते रहे:आज नॉर्थ-ईस्ट के 6 राज्यों में बीजेपी सरकार; कांग्रेस कैसे उखड़ गई

2014 से पहले नॉर्थ ईस्ट के 8 राज्यों में से किसी भी राज्य में BJP की सरकार नहीं थी। कुल मिलाकर 9 विधायक और महज 4 सांसद थे। त्रिपुरा, सिक्किम और मिजोरम में तो BJP के पास एक भी सीट नहीं थी। आज नॉर्थ ईस्ट के 6 राज्यों में BJP सत्ता में है। चार राज्यों में उसका मुख्यमंत्री है। कुल 197 विधायक और 13 सांसद हैं। यानी, 2014 के मुकाबले 22 गुना ज्यादा विधायक और तीन गुना ज्यादा सांसद हैं। आज पीएम मोदी असम दौरे पर जा रहे हैं, तो एकबार फिर सवाल उठा- आखिर बीजेपी ने नॉर्थ-ईस्ट में इतना बड़ा उलटफेर कैसे किया? जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… हिमंता को सीएम बनाने वाले थे आजाद, राहुल ने रोका साल 2014, जून-जुलाई का महीना… कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद श्रीनगर में छुट्टियां बिता रहे थे। दोपहर 12 बजे, दिल्ली से अहमद पटेल ने आजाद को फोन किया- ‘मैडम आपसे बात करना चाहती हैं।’ अब टेलिफोन पर सोनिया गांधी थीं। उन्होंने आजाद से पूछा- आप कहां हो, मैं कब से ढूंढ रही हूं? आजाद ने जवाब दिया- श्रीनगर में हूं। सोनिया- आप अभी दिल्ली आ जाइए। अगर प्लेन नहीं मिल रहा हो, तो बोलिए मैं यहां से भेज देती हूं। आजाद- नहीं उसकी कोई जरूरत नहीं है। यहां से हर घंटे दिल्ली के लिए प्लेन है। सोनिया- शाम 5 बजे हम बैठक करेंगे, लेकिन उसके पहले आपको दो काम करते हुए आना है। आजाद- क्या? सोनिया- असम में बहुत बड़ा संकट आ गया है। हिमंता बिस्व सरमा ने 40-50 विधायकों के साथ बगावत कर दी है। मैंने सुना है कि वो आपके करीब हैं। आप फोन करके बोलिए कि अभी वो अपना प्लान होल्ड पर रखें। राज्यपाल भी आपके करीबी हैं, उन्हें भी बोलिए कि अभी कुछ फैसला नहीं लें। शाम करीब 5 बजे आजाद, दिल्ली पहुंचे और सोनिया गांधी से मिले। सोनिया आजाद से बोलीं- आप असम जाइए और वहां लीडर चुनिए। आजाद- मैडम मैं वहां जाने से पहले यहीं पर एक्सरसाइज करना चाहता हूं। वहां जाकर अपने मन से किसी को मुख्यमंत्री बना दूंगा, तो आप कहोगे कि इसको नहीं बनाना था। सोनिया - प्लान लीक हो गया तो? आजाद- कोई प्लान लीक नहीं होगा। मैं इंदिराजी के जमाने से यही काम करता आ रहा हूं। इसके बाद आजाद ने हिमंता बिस्व सरमा को फोन किया और कहा कि वे अलग-अलग जहाजों से अपने विधायकों को लेकर दिल्ली पहुंचें। सरमा के साथ 40-50 विधायक दिल्ली पहुंचे। उन्हें दिल्ली में अलग-अलग होटलों में रखा गया। किसी को कहीं बयान देने से सख्त मना किया गया। आजाद ने असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से कहा कि आपके समर्थन में जो विधायक हैं, उन्हें दिल्ली भेजिए। गोगोई ने 7 विधायकों को दिल्ली भेजा। 10 विधायक और दिल्ली आए, जिनका कहना था कि वे आलाकमान का फैसला मानेंगे। आजाद ने सभी आंकड़े नोट किए और जाकर सोनिया को बताया कि हिमंता बिस्व सरमा के पास बहुमत है। सोनिया आजाद से बोलीं- ठीक है…आप असम जाइए और वहां जो नेता चुना जाए, उसे सीएम बनाइए। आजाद को जिस रोज असम जाना था, उससे एक दिन पहले, रात के करीब 8 बजे राहुल गांधी ने उन्हें फोन किया। राहुल गांधी ने आजाद से कहा - मुझे पता चला है कि आप असम के मुख्यमंत्री को बदलने वाले हैं? आजाद- हां। राहुल- आप प्लान कैंसिल करिए। कोई असम नहीं जाएगा। इसके बाद आजाद, राहुल गांधी से मिलने उनके घर पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि राहुल के साथ तरुण गोगोई और उनके बेटे गौरव गोगोई बैठे हैं। राहुल, आजाद से कहते हैं- मैंने सुना है आप लोग इन्हें तंग कर रहे हैं। आजाद- मैं क्यों तंग करूंगा। मुझे जो काम दिया गया, वो कर रहा हूं। हिमंता के पास बहुमत है। आप सोचकर बताइएगा क्या करना है। राहुल- सोचना क्या है… अभी जो मुख्यमंत्री है, वही रहेगा। आजाद- फिर हिमंता पार्टी छोड़ देगा। राहुल- जाने दो उसे RSS में। गुलाम नबी आजाद ने इस पूरे किस्से का जिक्र अपनी किताब ‘आजाद: एन ऑटोबायोग्राफी’ में किया है। हिमंता बिस्व सरमा, नॉर्थ-ईस्ट में कांग्रेस का बड़ा चेहरा थे। वे पूर्व सीएम तरुण गोगोई के करीबी माने जाते थे। 2001 से 2011 तक हिमंता लगातार 3 बार कांग्रेस से विधायक रहे। गोगोई ने कैबिनेट में उन्हें अहम मंत्रालय दिए थे। हिमंता और तरुण गोगोई के रिश्तों में दरार की शुरुआत हुई 2013 में, जब तरुण ने बेटे गौरव की पॉलिटिकल लॉन्चिंग की। 2014 में गौरव को कलियाबोर से लोकसभा का टिकट मिला और वे जीत भी गए। यहां से सरकार के कामकाज में भी गौरव की भूमिका रहने लगी। कहा जाता है कि 2014 से पहले ही हिमंता बिस्व सरमा, बीजेपी नेता राम माधव के संपर्क में थे। RSS से बीजेपी में आने वाले राम माधव तब असम के प्रभारी थे। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वे राम माधव, हिमंता को बीजेपी में लाने का ब्लू प्रिंट तैयार कर रहे थे। हिमंता बोले- बात करने के बजाय कुत्ते से खेलते रहे राहुल गांधी बीजेपी में शामिल होने के बाद एक टीवी इंटरव्यू में हिमंता बिस्व सरमा ने बताया- '2014 की बात है। असम में क्राइसिस को लेकर मैं दिल्ली में राहुल गांधी से मिला। मेरे साथ असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और कांग्रेस नेता सीपी जोशी भी थे। थोड़ी देर बाद सीपी जोशी और गोगोई के बीच बहस हो गई, लेकिन राहुल ने उन पर ध्यान नहीं दिया। वे अपने कुत्ते के साथ खेलते रहे। इसी बीच कुत्ते ने टेबल पर प्लेट में रखे बिस्किट को जूठा कर दिया। मुझे लगा कि राहुल किसी को आवाज देकर बुलाएंगे और प्लेट चेंज करवाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लोग उसी प्लेट से बिस्किट खाते रहे और उन्हें देखकर राहुल हंसते रहे। ये हम सब का अपमान था। उसी दिन मैं बीजेपी के राम माधव से मिला और फिर जो हुआ सबको पता है।' साल 2015 और तारीख 21 जुलाई। असम के बीजेपी नेता सर्बानंद सोनोवाल और केंद्रीय राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने एक बुकलेट जारी कर बताया कि लुईस बर्जर घोटाले में हिमंता बिस्व सरमा मुख्य संदिग्ध हैं। दरअसल, ED ने दावा किया था कि 2010 में वाटर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए असम और गोवा में भारतीय अधिकारियों को फर्जी कंपनियों ने रिश्वत दी है। कहा जाता है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के अगले दिन यानी 22 जुलाई को हिमंता की बीजेपी जॉइन करने वाले थे, लेकिन घोटाले में नाम आने के बाद जॉइनिंग टाल दी गई। असम के बीजेपी अध्यक्ष रहे सिद्धार्थ भट्टाचार्य ने एक मीडिया इंटरव्यू में बताया- ‘सर्बानंद सोनोवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मैं, हिमंता के साथ दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिला और उन्हें बताया कि आरोप झूठे हैं। शाह ने कहा कि ये तो गलत हुआ। अब गलती सुधारिए।’ ठीक एक महीने बाद 23 अगस्त 2015 को हिमंता ने दिल्ली में शाह से मुलाकात की और उसी दिन बीजेपी जॉइन की। यहीं से उस पटकथा की शुरुआत हुई, जिसने बीजेपी को नॉर्थ-ईस्ट में कामयाबी दिलवाई… असम: हिमंता के बीजेपी में आने के 10 महीने बाद ही सरकार बनाई 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने नॉर्थ-ईस्ट में तीन बड़े मुद्दों को उठाया था- बांग्लादेशी मुस्लिम को घुसपैठिया बताकर बाहर भेजना, नेहरू-गांधी परिवार पर नॉर्थ-ईस्ट से भेदभाव का आरोप और करप्शन। इस चुनाव में बीजेपी को असम की 14 में से 7 सीटें और 36.6% वोट मिले। 2009 के लोकसभा चुनाव से 2 ज्यादा सीटें और करीब 20% ज्यादा वोट। एक सीट अरुणाचल प्रदेश में भी जीती। लेकिन बाकी के 6 राज्यों में बीजेपी का खाता तक नहीं खुला। पहली बार बीजेपी को नॉर्थ-ईस्ट में 25 में से 8 लोकसभा सीटें मिलीं। वहीं आम चुनावों के साथ अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में विधानसभा चुनाव भी हुए। अरुणाचल में बीजेपी को 11 सीटें और 33% वोट मिले। जबकि सिक्किम में उसे कोई सीट नहीं मिली। करीब डेढ़ साल बाद 2016 में असम विधानसभा चुनाव हुए। 29 जनवरी 2016 को बीजेपी ने पुराने चेहरे को तवज्जो देते हुए सर्बानंद सोनोवाल को सीएम फेस बनाया। इसके अलावा बीजेपी ने बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट यानी BPF और असम गणपरिषद के साथ अलायंस किया। BPF असम की बोडो जनजाति के अलग राज्य बोडोलैंड की मांग से निकली थी। 19 मई को नतीजे आए तो 126 सीटों में से 60 पर बीजेपी और 26 सीटों पर उसके सहयोगियों को जीत मिलीं। जबकि कांग्रेस 26 सीटों पर सिमट गई। पहली बार नॉर्थ-ईस्ट के किसी राज्य में बीजेपी की सरकार बनी। सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। 2021 में भी असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी को लगातार दूसरी बार बहुमत मिला। हालांकि, इस बार पार्टी ने चेहरा बदल दिया और हिमंता बिस्व सरमा मुख्यमंत्री बने। NDA की जगह NEDA, ताकि बीजेपी बाहरी पार्टी नहीं लगे नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी- उसकी बाहरी पार्टी की पहचान। RSS लंबे समय से वहां काम कर रहा था, उसके बाद भी बीजेपी के पास मजबूत कैडर नहीं था। इसकी काट निकालने के लिए 26 मई 2016 को नॉर्थ-ईस्ट की स्थानीय पार्टियों को मिलाकर एक नया गठबंधन ‘नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस’ यानी, NEDA बना। हिमंता बिस्व सरमा को NEDA का संयोजक बनाया गया। बीजेपी के साथ नागा पीपुल्स फ्रंट, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट, पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल, असम गण परिषद, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट जैसी स्थानीय पार्टियां इसमें शामिल हुईं। सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और असम के मुख्यमंत्री इसके फाउंडिंग मेंबर बने। अरुणाचल प्रदेश: 33 विधायक तोड़कर बनाई सरकार 2014 के असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 11 सीटें मिलीं। दो साल बाद सितंबर 2016 में कांग्रेस के 43 विधायक ‘पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल’ में शामिल हो गए। फिर दिसंबर 2016 में इस पार्टी के 33 विधायक बीजेपी में चले गए। इस तरह अरुणाचल में बीजेपी की सरकार बन गई। पेमा खांडू मुख्यमंत्री बने, जो पहले कांग्रेस से पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल में और फिर बीजेपी में आए थे। 2019 के विधानसभा में बीजेपी ने 60 सीटों में से 41 सीटें जीतकर दोबारा सरकार बनाई। पेमा खांडू एक बार फिर से राज्य के मुख्यमंत्री बने। 2024 में बीजेपी ने 46 सीटें जीतीं और पेमा खांडू सीएम बने। मणिपुर: कांग्रेस बड़ी पार्टी बनी, लेकिन सरकार बीजेपी ने बनाई 2017 में मणिपुर में चुनाव हुए। 60 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस को 28 और बीजेपी को 21 सीटें मिलीं। 2011 के बाद पहली बार बीजेपी का मणिपुर में खाता खुला। पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 34% वोट शेयर बढ़ा। बीजेपी ने नेशनल पीपुल्स पार्टी, नागा पीपुल्स फ्रंट और लोक जनशक्ति पार्टी के साथ मिलकर मणिपुर में सरकार बनाई। एन वीरेन सिंह मुख्यमंत्री बने, जो 2016 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। 2021 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 32 सीटें जीतकर दोबारा सरकार बनाई। वीरेन सिंह को फिर से मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा होने लगी। वीरेन सिंह पर स्थिति न संभाल पाने के आरोप लगे। ऐसे में 9 फरवरी 2025 को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और राष्ट्रपति शासन लग गया। एक साल बाद 4 फरवरी 2026 को बीजेपी के युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर के मुख्यमंत्री बने। त्रिपुरा: 25 साल पुराना लेफ्ट का किला ध्वस्त किया 2018 में त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव हुए। 3 मार्च को जब नतीजे आए, तो 60 में से 35 सीटें जीतकर बीजेपी ने न सिर्फ त्रिपुरा में पहली बार खाता खोला, बल्कि अपने दम पर सरकार बनाई। लेफ्ट का 25 साल पुराना किला ध्वस्त हो गया। बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष बिप्लव देब मुख्यमंत्री बने, लेकिन 4 साल बाद मई 2022 में उन्हें हटाकर माणिक साहा को सीएम बनाया गया। साहा 2016 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे। 2023 विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने 32 सीटें जीतकर यहां वापसी की। हालांकि, पिछले चुनाव के मुकाबले उसकी 3 सीटें कम हो गईं। वोट शेयर भी करीब 4% कम हुआ। सिक्किम: अकेले चुनाव लड़ा, लेकिन खाता नहीं खुला 2019 के विधानसभा चुनाव में सिक्किम विधानसभा चुनाव में बीजेपी को कुल 5700 वोट मिले। एक भी सीट नहीं जीती, लेकिन बाद में बीजेपी के पास 12 विधायक हो गए और सरकार में भी रही। दरअसल, चुनाव के बाद 3 विधायकों को इस्तीफा देना पड़ा, क्योंकि वे दो-दो सीटों से लड़े थे। इन पर उपचुनाव हुए, तो 2 सीटें बीजेपी ने जीत लीं। वहीं सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के 15 में से 10 विधायक बीजेपी में चले गए। यानी सिक्किम में बीजेपी के 12 विधायक हो गए और वह गठबंधन की सरकार में शामिल हो गई। हालांकि, 2024 के चुनाव से पहले बीजेपी ने गठबंधन तोड़ लिया और जब नतीजे आए तो खाता भी नहीं खुला। नगालैंड: पांच साल में 11 विधायक बढ़े, गठबंधन की सरकार का हिस्सा 2018 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व सीएम केएल चिशी बीजेपी में शामिल हो गए। उनके साथ 12 नेता भी बीजेपी में गए। बीजेपी ने नागा पीपुल्स फ्रंट के साथ गठबंधन तोड़ा और नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के साथ चुनाव में उतर गई। तब बीजेपी को 12 सीटें मिलीं, यानी पिछले चुनाव से 11 ज्यादा। 2023 विधानसभा में भी बीजेपी को 12 सीटें मिलीं और इस बार भी वो गठबंधन की सरकार में शामिल हुई। मिजोरम: 2018 में पहली बार खाता खुला 2018 में विधानसभा चुनाव में बीजेपी 39 सीटों पर लड़ी और एक सीट ही जीत सकी। यहां पहली बार बीजेपी का खाता खुला। पिछले चुनाव के मुकाबले उसका वोट शेयर भी करीब 8% बढ़ गया। 2023 चुनाव में बीजेपी को दो सीटें मिलीं। फिलहाल वो यहां विपक्ष में है। मेघालय: लगातार दो बार से गठबंधन की सरकार में मेघालय में बीजेपी को 2018 और 2013 दोनों ही विधानसभा चुनावों 2-2 सीटें मिलीं। दोनों ही बार वो गठबंधन की सरकार में शामिल हुई। बीजेपी के नॉर्थ-ईस्ट मेंकामयाब होने की 7 बड़ी वजह 1. मुस्लिम घुसपैठिए बनाम मूल निवासी 2014 में जब बीजेपी नरेंद्र मोदी के चेहरे पर लोकसभा चुनाव में उतरी, तब नॉर्थ-ईस्ट में उसने बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। लगभग हर रैली में मोदी ने इसका जिक्र किया। 24 फरवरी 2014 को असम के रामनगर की रैली में मोदी ने कहा- ‘कांग्रेस सरकार ने डिटेंशन सेंटर के नाम पर मानवाधिकारों का हनन किया। घुसपैठिए आपके अधिकार छीन रहे हैं। असम के नौजवान बेरोजगार हैं और बाहरी रोजी रोटी कमा रहे हैं। ये अन्याय है कि नहीं। दिल्ली में सरकार बना दीजिए, न्याय मिलने की शुरुआत हो जाएगी। सारे डिटेंशन सेंटर खत्म कर दूंगा।’ असम के साथ ही पूरे नॉर्थ-ईस्ट में मूल निवासी बनाम बाहरी का मुद्दा लंबे अरसे से रहा है। 1980 के दशक में इसको लेकर असम में खूब हिंसा हुई और 2 हजार से ज्यादा बांग्लादेशी प्रवासी मारे गए थे। 15 अगस्त 1985 को प्रधानमंत्री राजीव गांधी और छात्र संगठन आसू के बीच समझौता हुआ, जिसे असम अकॉर्ड कहा जाता है। इसके बाद नागरिकता कानून में बदलाव किया गया। जो लोग मार्च 1971 के बाद असम आए, उन्हें अवैध प्रवासी माना गया। 1980 के दशक से ही बीजेपी बांग्लादेशी प्रवासियों को बाहर भेजने की मांग करती रही है। हालांकि, बाद में बीजेपी ने अपना स्टैंड बदला और बांग्लादेशी हिंदुओं को नागरिकता देने और बांग्लादेशी मुस्लिमों को घुसपैठिया बताकर बाहर भेजने की मांग करने लगी। 2. हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण नॉर्थ-ईस्ट के 8 राज्यों में से 4 राज्य- त्रिपुरा, असम, सिक्किम और मणिपुर हिंदू बहुल हैं। जबकि नगालैंड, मेघालय और मिजोरम में 80% से ज्यादा आबादी ईसाई है। असम में 34% मुस्लिम हैं, जो नॉर्थ-ईस्ट के अन्य राज्यों के मुकाबले बहुत ज्यादा है। पूरे नॉर्थ-ईस्ट में 37% हिंदू, 42.3% ईसाई और 7.7% मुस्लिम आबादी है। बीजेपी के बड़े नेता नॉर्थ-ईस्ट में हिंदू-मुस्लिम मुद्दा उछालते रहे हैं। 2021 में हिमंता बिस्व सरमा ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था- 'मुझे मियां वोट्स नहीं चाहिए। मैं उनके पास वोट मांगने नहीं जाऊंगा और वे भी मेरे पास नहीं आएंगे।' बांग्लादेशी मुस्लिम प्रवासियों को घुसपैठिया बताकर बाहर भेजने की बात हो या हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसा करके बीजेपी नॉर्थ-ईस्ट में पोलराइजेशन को मुद्दा बनाने में कामयाब रही है। 24 फरवरी 2014 को असम के रामनगर की चुनावी रैली में नरेंद्र मोदी ने कहा- ‘दुनिया के किसी देश में हिंदुओं को खदेड़ दिया जाएगा, तो उसके लिए एक ही जगह बची है, वो यहीं चला आएगा। हम नहीं चाहते कि बांग्लादेशी हिंदुओं का बोझ अकेले, असम उठाए। पूरे हिंदुस्तान को इसका बोझ उठाना चाहिए।’ 3. दूसरे दलों के बड़े नेता-विधायक बीजेपी में आए नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी की कामयाबी के पीछे दूसरी पार्टियों के बड़े नेताओं का अहम रोल है। असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा, मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, त्रिपुरा के सीएम माणिक साहा और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू सभी पहले कांग्रेसी या स्थानीय पार्टियों के बड़े नेता थे। इसके अलावा दूसरी पार्टियों से बड़ी संख्या में विधायक और नेता बीजेपी में शामिल हुए। 2015 में हिमंता अपने साथ 10 से ज्यादा विधायक लेकर बीजेपी में आए थे। 2016 में पेमा खांडू 33 विधायक लेकर बीजेपी में शामिल हुए। सिक्किम में तो बीजेपी ने स्थानीय पार्टी के 15 में से 10 विधायकों को पार्टी में शामिल करा लिया। इतना ही नहीं, नॉर्थ-ईस्ट के हर राज्य में बीजेपी का किसी न किसी पार्टी के साथ गठबंधन जरूर है। 4. केंद्र में बीजेपी की सरकार का होना आम तौर पर नॉर्थ-ईस्ट के लोग उसी पार्टी को प्राथमिकता देते हैं, जिनकी केंद्र में सरकार होती है। नॉर्थ-ईस्ट में लंबे समय से राजनीति को कवर कर रहे बिश्वेंदु भट्टाचार्य बताते हैं, 'नॉर्थ-ईस्ट में ज्यादातर दल छोटे-छोटे हैं। बड़े खर्चे के लिए सरकार के फंड और ग्रांट पर निर्भर रहना इनकी मजबूरी है। केंद्र सरकार में काबिज होने के बाद इन दलों को बीजेपी ने लुभाया, राज्य में उनकी सरकार बनी, तो उन्हें पद मिलेगा, मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी। यहां के स्थानीय नेता ट्राइबल बेल्ट में जाकर बोलते थे, यदि कमल पर वोट दिया, तो हम मंत्री बनेंगे, आपका बेटा ये बनेगा। बीजेपी को इसका बहुत फायदा भी मिला।' 5. आजादी से पहले से नॉर्थ-ईस्ट में एक्टिव है RSS 6. कल्चरल स्ट्रैटजी नॉर्थ इंडिया में बीजेपी और संघ बीफ का खूब विरोध करते हैं, लेकिन नॉर्थ-ईस्ट में वे ऐसा नहीं करते। 2023 विधानसभा चुनाव से पहले नगालैंड के बीजेपी नेता और डिप्टी सीएम यानथुंगो पैटन ने कहा, नगालैंड में बीफ मुख्य भोजन है। बीजेपी, कांग्रेस या कोई भी नेशनल पार्टी हमारे खानपान में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। बीफ खाना नगालैंड के साथ ही पूरे नॉर्थ-ईस्ट में कोई इश्यू नहीं है। 7. पीएम मोदी 10 साल में 70 बार नॉर्थ-ईस्ट गए 2014 से 2024 के बीच 10 साल में पीएम मोदी ने करीब 70 बार नॉर्थ-ईस्ट जा चुके हैं। मार्च 2024 में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि वे बतौर प्रधानमंत्री 70 बार नॉर्थ-ईस्ट जा चुके हैं। उनके मंत्री 10 सालों में 680 बार नॉर्थ-ईस्ट जा चुके हैं। अभी तक सभी प्रधानमंत्री मिलकर जितनी बार नॉर्थ-ईस्ट गए होंगे, उससे कई गुना ज्यादा बार मैं अकेले गया हूं। -----------असम चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… असम में फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश, 2.43 लाख नाम हटे: राज्य में अब 2.49 करोड़ वोटर; बंगाल में फाइनल लिस्ट की तारीख 14 दिन बढ़ी चुनाव आयोग (EC) ने मंगलवार को असम में हुए स्पेशल रिवीजन (SR) 2026 के तहत फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी। EC के मुताबिक, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की तुलना में 2.43 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। अब राज्य में कुल 2,49,58,139 वोटर्स रजिस्टर्ड हैं। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 14 Feb 2026 5:23 am

निखिल गुप्ता ने अमेरिकी अदालत में कबूला जुर्म, हो सकती है 40 साल की सजा

खालिस्तानी अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश में आरोपी भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने अमेरिकी अदालत में अपना जुर्म कबूल कर लिया है

देशबन्धु 14 Feb 2026 5:20 am

जमात सपोर्टर बोले- हमें जानबूझकर हराया, रात में रिजल्ट बदला:अवामी लीग के वोटर BNP की जीत से खुश, हिंदू बोले- तारिक रहमान हमारे गार्जियन

शेख हसीना के तख्तापलट के करीब डेढ़ साल बाद हुए चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP बहुमत के साथ जीत गई। रिकॉर्ड जीत के बावजूद न जश्न मना, न जीत के जुलूस निकले। ढाका की सड़कें सूनी ही रहीं। BNP के चेयरमैन तारिक रहमान ने पार्टी वर्कर्स से कहा कि जुमे की नमाज के बाद पूरे देश में खास दुआ करें और अल्लाह को शुक्रिया कहें। इसके बाद लोग घरों से निकले, मस्जिदों में नमाज अदा की और लौट गए। ढाका समेत पूरे बांग्लादेश में शांति रही। बांग्लादेश में चुनाव के रिजल्ट से तीन बातें साफ हो गईं। तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे। कट्टरपंथी मानी जाने वाली पार्टी जमात की धर्म की राजनीति नहीं चली और शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन करने वाले स्टूडेंट्स को अपनी जगह बनाने में बहुत मेहनत करनी होगी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, BNP की जीत के पीछे हिंदू वोटर, शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के सपोर्टर और महिलाएं हैं। दैनिक भास्कर ने चुनाव नतीजों पर अलग-अलग तबके के लोगों से बात की। उनसे समझा कि BNP के जीतने की क्या वजहें रहीं, लोगों ने उसे क्यों वोट दिया और आखिरकार वे नई सरकार से क्या चाहते हैं। पढ़िए रिपोर्ट… जमात सपोर्टर: शेख हसीना के वक्त धांधली होती थी, इस बार भी हुईढाका में जमात के ऑफिस में मौजूद समर्थक मायूस दिखे। उन्हें लग रहा है कि चुनाव में धांधली हुई है। ऑफिस में मिले रेजा अल करीम खुद को जमात-ए-इस्लामी का कट्टर समर्थक बताते हैं। वे ऑफिस के बाहर बैठकर जमात चीफ शफीकुर रहमान से मिलने का इंतजार कर रहे थे। करीम कहते हैं, ‘लोगों में चुनाव के लिए सुबह से उत्साह था। वोटिंग के आखिर तक हमें उम्मीद थी कि चुनाव सही तरह से होंगे। शेख हसीना के वक्त भी हमने इलेक्शन देखा है कि कैसे रात में वोट डालकर धांधली होती थी। लोगों को वोट तक डालने नहीं देते थे। इस बार कम से कम हम वोट डाल पाए। इस बार भी बैलेट बॉक्स छीनने और फर्जी वोट डालने की कोशिश की गई। हमें शक है कि रिजल्ट में धांधली हुई है।’ ‘हम जीत रहे थे, रात 11 बजे के बाद रिजल्ट बदला’ऑफिस में बैठे मुफज्जल हुसैन पेशे से कारोबारी हैं। वे कहते हैं, ‘वोटिंग की शाम तक आ रहे रुझान के हिसाब से जमात-ए-इस्लामी आगे चल रही थी। रात 11 बजे के बाद अचानक नतीजे बदल गए। अब जो भी सत्ता में आ रहा है, उसे करप्शन और बिजनेस सिंडिकेट खत्म करने, नौकरियां पैदा करने, विदेश में काम करने वालों को सुविधाएं देने पर काम करना चाहिए।' हमारे यहां बहुत सारे लोग पढ़े-लिखे हैं, लेकिन उनके पास काम या नौकरी नहीं है। सरकार को इकोनॉमी के लिए बड़े कदम उठाने चाहिए। आम लोग: रहमान का जीतना बांग्लादेश के लिए बहुत जरूरीजमात समर्थकों के बाद हमने कुछ आम लोगों से बात की। वे चुनाव नतीजों से खुश नजर आए। मोहम्मद सुहैल ढाका में रिक्शा चलाते हैं। वे कहते हैं, ‘BNP को पूरे देश में सपोर्ट मिल रहा था। चुनाव के रिजल्ट में यही दिखा है। BNP का जीतना बांग्लादेश के लिए बहुत जरूरी था। मैं भी यही चाहता था।’ ‘बांग्लादेश में BNP को खत्म करने की कोशिश की गई। फिर भी लोगों ने उसे वोट दिया और सत्ता में लाकर खड़ा कर दिया। देश में कानून-व्यवस्था सुधारने की जरूरत है। अगर कोई सड़क पर चले तो सुरक्षित महसूस करे। सरकार कानून-व्यवस्था ठीक करती है, तो लोग उसके साथ रहेंगे।’ अवामी लीग के समर्थक: जमात पसंद नहीं, BNP का जीतना अच्छाई-रिक्शा चलाने वाले मोहम्मद सबुज भुइया अवामी लीग के समर्थक रहे हैं। अवामी लीग और BNP धुर विरोधी पार्टियां रही हैं। फिर भी मोहम्मद सबुज BNP की जीत से खुश हैं। वे कहते हैं, ‘तारिक रहमान चुनकर आए हैं। वे अच्छे से देश चलाएं, ज्यादा उत्साह ना दिखाएं। वे प्रधानमंत्री बनेंगे, ये सुनकर अच्छा लग रहा है।’ मोहम्मद सबुज आगे कहते हैं, ‘मुझे जमात के लोग बिल्कुल पसंद नहीं हैं। कुछ वक्त से ऐसा माहौल बना दिया गया कि मैं खुद को अवामी लीग का समर्थक बताने में भी डरने लगा था। उम्मीद है अब ये डर कम होगा। मैंने इस बार वोट नहीं दिया। अगर अवामी लीग का कैंडिडेट चुनाव लड़ता, तो मैं वोट देता। अब देश ने तारिक रहमान को प्रधानमंत्री चुन लिया है। हमारे लिए भी ये अच्छा है।’ हिंदू वोटर: जमात की हार ने बताया, धर्म की राजनीति नहीं चलेगीढाका यूनिवर्सिटी में हमें दीपांकर चंद्र शील मिले। वे स्टूडेंट लीडर होने के साथ बांग्लादेश हिंदू बौद्ध छात्र एकता परिषद के सेक्रेटरी भी हैं। वे बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के लिए काम करते हैं। दीपांकर कहते हैं, ‘बांग्लादेश सेक्युलर देश है। शेख हसीना सरकार गिरने के बाद अल्पसंख्यकों पर हमले होते रहे। पूरा समुदाय डरकर रहता था। बीते डेढ़ साल में हमने बहुत जुल्म सहा है। चुनाव के नतीजों ने बता दिया कि जमात जैसी पार्टी हमें धर्म के आधार पर नहीं बांट सकती।’ 'तारिक रहमान बांग्लादेश के लिए सबसे अच्छे लीडर हैं। वे हमारे गार्जियन की तरह हैं। तारिक रहमान से हमारी मांग है कि पिछले दिनों अल्पसंख्यकों पर जो जुल्म हुआ है, उसकी जांच कराएं। बांग्लादेश के सभी लोग बिना डरे रह सकें, ऐसा माहौल बनाना बहुत जरूरी है।’ स्टूडेंट: ‘तारिक रहमान जेंटलमैन, स्टूडेंट लीडर अपने स्वार्थ में हारेढाका यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले फाहिम मसूम शेख हसीना के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन में शामिल थे। शेख हसीना सरकार गिरने तक वे सड़कों पर लड़ते रहे। आंदोलन से निकली छात्रों की पार्टी NCP चुनाव में बुरी तरह हार गई। उसके 30 में से सिर्फ 6 कैंडिडेट जीते हैं। फाहिम कहते हैं, ‘हमने छात्र आंदोलन से नेताओं को उभरते देखा। इनमें से कई ने यूनुस सरकार बनने के बाद वैसा बर्ताव नहीं किया, जैसी वे बातें करते थे। कई स्टूडेंट ने अपने स्वार्थ में पार्टी बनाई। यहां तक भी ठीक था। NCP ने जमात का समर्थन किया, उसके बाद पार्टी ने अपना आधार खो दिया। कुछ स्टूडेंट लीडर भले जीत गए, लेकिन बांग्लादेश के लोगों की नजरों में उन्होंने साख खो दी है।’ जमात की हार पर फाहिम कहते हैं, ‘जमात अब भी 1971 की पॉलिटिक्स से ऊपर नहीं उठ पाई है। जमात के लोग कैसे बांग्लादेश पर शासन करने की बात कर सकते हैं। उन्होंने बांग्लादेश बनने का विरोध किया था। अब इसी बांग्लादेश में चुनाव जीतना चाहते हैं। ये दोगलापन है। पूरे देश को जमात का दोगलापन पता है। इसलिए लोगों ने उन्हें खारिज कर दिया।’ ‘तारिक रहमान का देश के नेता के तौर पर चुनकर आना खास मौका है। प्रचार के दौरान उन्होंने जैसी मैच्योरिटी दिखाई, उससे पूरा देश उनका मुरीद हो गया। रहमान में लोगों को एकजुट करने का जज्बा है। वे जेंटलमैन हैं। तारिक रहमान ने पूरे चुनाव के दौरान मैसेज दिया कि वे बेहतर बांग्लादेश चाहते हैं। उन्होंने किसी भी पार्टी के खिलाफ बात नहीं की। वे सिर्फ लोगों को एकजुट करने और डेवलपमेंट की बात करते रहे।' महिलाएं: जमात को लोगों ने पहचान लिया, उसे सही जगह दिखाईढाका यूनिवर्सिटी में पढ़ने वालीं मालिहा खान BNP की जीत और जमात की हार से खुश हैं। वे कहती हैं, ‘पिछले 17 साल से हम सही और निष्पक्ष चुनाव का इंतजार कर रहे थे। आखिरकार इस बार वैसा चुनाव देखने को मिला। हम चाहते थे कि जो सच में लोगों की बात करता हो, वही जनता के वोट से जीते। जुलाई के आंदोलन के बाद हमारी यह उम्मीद पूरी हुई।’ ‘पिछले 17 साल में BNP ने बहुत मुश्किलें झेली हैं। तारिक रहमान खुद भी इस दौर से गुजरे हैं। इतनी मुश्किलों के बाद वे देश का नेतृत्व करने आ रहे हैं। यह हमारे लिए उम्मीद की बात है। उन्होंने अपने मेनिफेस्टो में अच्छी और साफ राजनीति करने का वादा किया है। हम चाहते हैं कि वे अपने वादे पूरे करें।’ ‘जहां तक जमात की हार का सवाल है, लोगों ने उन्हें पहचान लिया है। वोट के जरिए अपना जवाब दे दिया है। ढाका यूनिवर्सिटी के चुनाव के बाद लगा था कि वे राष्ट्रीय चुनाव को भी प्रभावित कर सकते हैं। ऐसा नहीं हुआ।’ मालिहा खान आगे कहती हैं, ‘उम्मीद थी कि जो लोग आंदोलन में आगे थे, वे जनता के लिए मजबूती से खड़े रहेंगे। वे करप्शन और जुल्म के खिलाफ बोलेंगे। बाद में उनमें से कई लोगों पर अलग-अलग आरोप लगे। कुछ विवादों में भी फंस गए। NCP नाम की नई पार्टी बनी, लेकिन लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी।’ ‘इससे सवाल उठता है कि क्या वे सच में जुलाई आंदोलन की सही आवाज थे। शायद लोगों ने उनके जरिए उस आंदोलन को स्वीकार नहीं किया। चुनाव के नतीजों से लगता है कि लोगों ने किसी और पर भरोसा जताया है। हम उम्मीद करते हैं कि इस बार जो लोग संसद में जाएंगे, वे सच में जनता के लिए काम करेंगे। बांग्लादेश इलेक्शन पर ये रिपोर्ट भी पढ़ेंअवामी लीग-हिंदुओं के वोट BNP को मिले, हसीना की सरकार गिराने वाले भी हारे 12 फरवरी को हुए चुनाव में उनकी पार्टी BNP यानी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के गठबंधन ने 299 में से 212 सीटें जीती हैं। कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी बुरी तरह हारी है। शेख हसीना की सरकार गिराने वाले स्टूडेंट्स की पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी यानी NCP को भी बांग्लादेशियों ने नकार दिया। पूर्व PM शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के वोट खासकर हिंदू वोटर BNP में शिफ्ट हो गए। BNP को अवामी लीग के गढ़ रहे गोपालगंज के अलावा खुलना, सिलहट, चटगांव, ठाकुरगंज में जीत मिली है। पढ़ें पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 14 Feb 2026 5:16 am

दालमंडी पर बुलडोजर, क्या BJP के 50 हजार वोट घटेंगे:वाराणसी के लोग बोले- रोड के लिए घर-दुकान तोड़ी, चुनाव में जवाब देंगे

आदिल खान और उनका परिवार वाराणसी की दालमंडी में रहता है। 9 फरवरी की सुबह तक घर में सब हंसी-खुशी थे। शाम होने तक प्रशासन ने घर को जर्जर बताकर खंडहर बना दिया। आदिल गुस्से में बताते हैं, ‘1960 में जो दुकान हमारे पुरखों ने पाई-पाई जोड़कर खरीदी, उस पर बुलडोजर चल चुका है। घर पर पत्नी-बच्चे ये सोचकर खौफजदा हैं कि अब हम कहां जाएंगे। इतना दर्द देखकर आंसू भी सूख चुके हैं।' 'दालमंडी में 180 से ज्यादा घर और हजारों दुकानें गिराई जाएंगी। इस कार्रवाई से सीधे-सीधे 2 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित होंगे, जिसमें 80% यहीं के वोटर हैं। दालमंडी पर अभी हो रहे सितम का असर 2027 के विधानसभा चुनाव में दिखेगा। लोगों की नाराजगी बता रही है कि BJP ये सीट 100 नहीं बल्कि 1 हजार पर्सेंट हारेगी।' आदिल की मोबाइल शॉप और मकान पर जिला प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की है, क्योंकि वो सरकार के महत्वाकांक्षी 'दालमंडी मॉडल रोड प्रोजेक्ट' की सीमा में आ रहे थे। प्रोजेक्ट के लिए दालमंडी में अब तक 31 मकान तोड़े जा चुके हैं। इसमें से 16 पूरी तरह से जमींदोज कर दिए गए हैं। सरकार ने दालमंडी में 17.5 मीटर चौड़ी मॉडल रोड बनाने का फैसला लिया है, जिससे यात्रियों को काशी विश्वनाथ मंदिर तक जाने में आसानी होगी। ये रास्ता बनाने के लिए प्रशासन को दालमंडी के 181 घर, 500 से ज्यादा छोटी-बड़ी दुकानें और 6 मस्जिदें तोड़नी होंगी, जिसका विरोध हो रहा है। दालमंडी इलाका वाराणसी की दक्षिणी विधानसभा में आता है। 2022 चुनाव में ये सीट BJP ने जीती थी। तब डॉ. नीलकंठ तिवारी यहां से विधायक बने। उनकी जीत का मार्जिन बाकी 7 सीटों की तुलना में सबसे कम था। अब दालमंडी में हो रहे ध्वस्तीकरण पर लोकल लोगों और पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये कार्रवाई 2027 विधानसभा चुनाव में BJP के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकती है। सबसे पहले बात उन दुकानदारों की, जिनकी रोजीरोटी छिन गई… 70% दुकानें मुसलमानों की बाकी हिंदुओं की, नुकसान सभी कोवाराणसी के चौक थाने से सटा दालमंडी मिलीजुली आबादी वाला इलाका है। यहां लगभग 10,000 से ज्यादा दुकानें और घर हैं। इसका एक हिस्सा बेनिया बाग और दूसरा चौक की तरफ खुलता है। जहां से काशी विश्वनाथ मंदिर की दूरी महज 150 मीटर है। पिछले साल 6 दिसंबर को CM योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी आकर दालमंडी क्षेत्र के विकास प्रोजेक्ट की समीक्षा की थी। इसके बाद उन्होंने कहा था कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में आने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कत न हो, इसके लिए मंदिर से नजदीक दालमंडी मार्केट की सड़क को चौड़ा करके यहां मॉडल रोड बनाई जाएगी। रोड के दायरे में आने वाले दालमंडी के 181 मकान गिराए जाने हैं। 11 फरवरी तक 35 मकानों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है। इनमें आदिल खान के भी 2 मकान और एक दुकान है, जिनपर कार्रवाई हुई है। आदिल के परिवार में उनकी पत्नी और 3 बेटे हैं। वो 12 साल से दालमंडी में 'वारसी कम्युनिकेशन' नाम से मोबाइल फोन की दुकान चला रहे हैं। जिला प्रशासन के बुलडोजर एक्शन से निराश आदिल कहते हैं, ‘लोगों को गलतफहमी है कि अगर मकान और दुकानें खत्म कर दिए जाएंगे, तो लोग ये इलाका छोड़कर खुद चले जाएंगे। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। मेरे जैसे यहां बहुत से लोग हैं, जिनका एक घर कार्रवाई में चला गया है, लेकिन बस्ती के अंदर दूसरा मकान अब भी बचा है।‘ ‘हम लोग कहीं नहीं जाने वाले, यहीं दालमंडी में रहेंगे। क्योंकि हमें ये पता है कि अभी अंधेरी रात है, लेकिन कुछ दिन बाद फिर सवेरा होगा।‘ ‘लोकल विधायक की चुप्पी और प्रशासन की मनमानी से लोग परेशान हो चुके हैं। बात सिर्फ दालमंडी की ही नहीं। यहां डेवलपमेंट के नाम पर मणिकर्णिका घाट पर की जा रही तोड़फोड़ से भी हर वर्ग के लोगों में गुस्सा है। इसलिए एक बात जान लीजिए, जनता जब अपना गुस्सा उतारती है तो उसका असर सीधे 5 साल बाद चुनावों में ही दिखता है और इस बार ये निश्चित दिखेगा।’ ’दालमंडी में 70% दुकानें मुसलमानों और 30% हिंदू दुकानदारों की हैं। यहां अग्रवाल, यादव, गुप्ता, पाल जैसे तमाम वर्ग के लोग व्यापार करते हैं। ये सभी BJP के कोर वोटर रहे हैं।’ कायनात के पास दुकान के कागज, लेकिन फिर भी तोड़ने का आदेशदालमंडी में आदिल की दुकान से कुछ दूरी पर कायनात बानो की M.S सेवई मर्चेंट नाम की ड्रायफ्रूट की दुकान है। ये उनके वालिद सिराज अहमद ने 1957 में किराए पर ली थी। तब से लेकर उनका परिवार हर महीने दुकान के किराए का 440 रुपए भर रहा है। उनके पास इसकी रसीद भी है। पिता की मौत के बाद कायनात और उनकी 4 बहनें ये दुकान संभाल रही थीं। अब उनकी दुकान जर्जर घोषित कर दी गई है। पेशे से एडवोकेट कायनात कहती हैं, ‘9 फरवरी को पुलिस की मौजूदगी में नगर निगम की टीम हमारी दुकान पर पहुंची। हमें बताया गया कि ये इमारत जर्जर है इसलिए दुकान जमीदोंज की जाएगी।‘ ‘आदेश के बाद हमारे मकान मालिक ने ऊपर का छज्जा, बरामदा और बाहरी दीवारें खुद गिरा दीं। बावजूद इसके प्रशासन हम पर दुकान खाली करने का दबाव बना रहा है। मैं CM योगी से यही कहना चाहती हूं कि हम लोग आपके विकास की राह में बाधा नहीं हैं। हम आपको सहयोग करते हैं, लेकिन आप भी हमारे बारे में सोचिए, हम कहां जाएंगे। कहां रोड पर भीख मांगेंगे। हमारे घर में चूल्हा कैसे जलेगा।‘ दालमंडी से वाराणसी को हर महीने मिलता है करोड़ों का रेवेन्यूदालमंडी, वाराणसी की सबसे पुरानी लोकल मार्केट के तौर पर जानी जाती रही है। यहां शादी-विवाह और मेकअप का सामान, ज्वेलरी साज-सज्जा, फैंसी कपड़े, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक, स्मार्टफोन से लेकर घड़ी और चश्मा बनाने के कारखानों के साथ हजारों दुकानें हैं। ये काशी में रहने वाले मुस्लिम व्यापारी, कारीगर और मजदूरों के रोजगार का सबसे बड़ा जरिया है। दालमंडी में पूर्वांचल के चंदौली, जौनपुर, भदोही, मिर्जापुर, सोनभद्र, गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, बलिया के साथ-साथ बिहार की सीमा से नकदीक बक्सर, भभुआ, मोहनिया, आरा, छपरा, सासाराम जैसे जिलों के थोक और फुटकर व्यापारी खरीददारी करने आते हैं। काशी के इतिहासकार प्रवेश भारद्वाज कहते हैं, ‘दालमंडी बनारस की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है। मंडी शहर का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र रही है। आजादी की लड़ाई के दौर में जद्दनबाई से लेकर रसूलन बाई के कोठों पर सजने वाली संगीत की महफिलों के बीच ब्रिटिश सरकार के खिलाफ रणनीति तैयार होती थी।’ ’यहां आज भी लाल बलुआ पत्थर और चूने की जुड़ाई से बनी बेहद पुरानी इमारतें हैं, जिनमें बनारसी तहजीब की झलक मिलती है। दालमंडी के विकास के लिए जमीनें लेने से पहले सरकार को वहां रहने वालों को दूसरी जगह शिफ्ट करना चाहिए था। इससे उनका आर्थिक और मानसिक नुकसान पूरी तरह से भले कम न होता, लेकिन थोड़ी राहत जरूर मिलती।’ वाराणसी शहर की दक्षिण सीट पर 9 बार जीती BJPदालमंडी इलाका वाराणसी की शहर दक्षिण सीट में आता है। यहां 1977 में पहला विधानसभा चुनाव हुआ, जिसमें जनता पार्टी के नेता रामबलि तिवारी को जीत मिली। 1980 में कांग्रेस पार्टी के कैलाश टंडन ने रामबलि तिवारी को 19 हजार वोटों से हरा दिया। 1985 में भी इस सीट पर कांग्रेस पार्टी का कब्जा रहा। इस चुनाव में कांग्रेस नेता रजनी कांत ने BJP के श्यामादेव राम चौधरी को हराया। 1989 से लेकर 2022 तक वाराणसी शहर दक्षिण सीट पर 9 बार विधानसभा चुनाव हुए। सभी चुनाव BJP ने जीते। 2022 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर BJP नेता और पूर्व विधायक नीलकंठ तिवारी को जीत मिली। उन्हें कुल 99,622 वोट मिले। उन्होंने सपा के कामेश्वर क‍िशन दीक्षित (88,900 वोट) को महज 10,722 वोटों के अंतर से हराया। BJP को वाराणसी की सभी 8 सीटों में सबसे कम मार्जिन वाली जीत इसी सीट पर मिली। 2024 लोकसभा चुनाव नतीजों में भी दिखा असर 2024 लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट पर सातवें चरण में एक जून को वोटिंग हुई थी। जब 4 जून को काउंटिंग शुरू हुई तो सुबह 9.15 बजे तक के आंकड़ों में पीएम मोदी कांग्रेस कैंडिडेट अजय राय से 6 हजार वोटों से पीछे चल रहे थे। इसकी बड़ी वजह वो 5 सीटें थीं, जहां मोदी को 2019 के मुकाबले 2024 में कम वोट मिलें। वाराणसी दक्षिण सीट, जिसमें दालमंडी भी आता है, वहां मोदी को 7,000 वोटों का घाटा हुआ। कुल 30 राउंड की काउंटिंग में मोदी को 6,12,970 लाख वोट मिले, जबकि अजय राय को 4,60,457 वोट मिले। मोदी 1,52,513 वोट से चुनाव जीते। जीत का मार्जिन 2014 और 2019 से कम रहा। एक्सपर्ट बोले- दालमंडी की तोड़फोड़ 2027 में BJP के लिए चुनौती बनारस हिंदू यनिवर्सिटी में कॉमर्स डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. अवधेश सिंह कहते हैं, ’दालमंडी में मॉडल रोड बनाने के लिए प्रशासन 187 बिल्डिंग तोड़ रहा है। हर बिल्डिंग में करीब 6 से 8 दुकानें हैं। इतनी दुकानें टूटने का मतलब है कि आप सीधे-सीधे 1200 परिवारों को प्रभावित कर रहे हैं। यही लोग आने वाले चुनाव में वोट डालेंगे। जाहिर सी बात है, जिसका नुकसान होगा वो आपको वोट क्यों देगा।’ ’चाहे विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा चुनाव दालमंडी का वोटर हमेशा बड़ी भूमिका निभाता रहा है। यहां हिंदू-मुस्लिम आबादी के वोटर तकरीबन बराबर हैं। शहर दक्षिण विधानसभा चुनाव में भले ही BJP की जीत हुई हो, लेकिन उसका प्रदर्शन 2017 की तुलना में खराब था। यही वजह है कि डॉ. नीलकंठ भले ही चुनाव जीत गए लेकिन उनका खराब प्रदर्शन देखते हुए इस बार योगी सरकार में उन्हें मंत्री पद नहीं मिला।’ ‘डेवलपमेंट होगा तो परेशानियां भी बढे़ंगी’ बनारस के सीनियर जर्नलिस्ट विश्वनाथ पांडे, अवधेश सिंह की बात से सहमत नहीं दिखते। वे कहते हैं, ’2024 लोकसभा चुनाव में वाराणसी की कई सीटों पर BJP के वोट कम पड़े, जबकि कांग्रेस-सपा को पिछले चुनाव से ज्यादा वोट मिले। इस बार भी सरकारी कामों की धीमी रफ्तार को देखकर बनारस के लोग बहुत संतुष्ट नहीं हैं। जितना डेवलपमेंट होना चहिए था, उतना नहीं हुआ। ये देखकर एक भ्रम की स्थिति जरूर है। फिर भी BJP के सामने कोई बड़ी चुनौती नहीं दिखती।’ ’काशी में BJP को चुनौती देने के लिए अब भी कोई राजनीतिक विकल्प नहीं है। यहां आज भी इतनी मजबूत राजनीतिक समझ वाले लोग नहीं है, जो BJP को चुनौती दे सकें। सबसे बड़ी बात ये प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र हैं। ऐसे में BJP की पकड़ यहां स्वभाविक तौर पर बढ़ जाती है। लिहाजा, दालमंडी पर कार्रवाई का बहुत बड़ा इम्पैक्ट होगा, इसकी संभावना कम दिखती है।’ पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं…BJP: दालमंडी की हालत धारावी जैसी, इसे पूर्वांचल का सिंगापुर बनाने की कोशिशBJP नेता और वाराणसी के आदि विशेश्वर वार्ड-69 के पार्षद इंद्रेश सिंह कहते हैं, ’दालमंडी को पूर्वांचल का सिंगापुर कहा जाता है। हालांकि यहां की स्थिति ऐसी है कि ये सिंगापुर कम मुंबई का धारावी ज्यादा लगता है। अंधेरा और भीड़ इतनी की चलना भी दूभर। जब सिंगापुर कहा जाता है तो उसकी सूरत भी वैसे होनी चाहिए। इसे साफ-सुथरा करने की जरूरत है, जिसके लिए चौड़ीकरण जरूरी है।' ’ये भ्रम फैलाया जा रहा है कि दालमंडी और वहां के लोगों को उजाड़ा जा रहा है। ये विकास की सतत प्रक्रिया है। पांडेयपुर से लेकर आशापुर तक चौड़ीकरण हुआ, और भी कई मार्ग चौड़े किए जा रहे हैं। इस दौरान दिक्कतें आती हैं।’ कांग्रेस: तोड़फोड़ BJP का प्लांड एजेंडा, काशी की सारी सीट हारेंगेकांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय कहते हैं, ’काशी में जब भी किसी घर में शादी या कोई कार्यक्रम होता है, लोग दालमंडी ही खरीदारी करने जाते हैं। ये इलाका पुराने समय से बनारस का ग्रोथ इंजन रहा है। यहां हर आदमी किसी न किसी तरह दालमंडी से जुड़ा है। BJP इसे तोड़कर बनारस की विरासत खत्म कर रही है। इसका असर वाराणसी की आठों विधानसभाओं सीटों पर दिखेगा।’ सपा: BJP दालमंडी वालों को दाल की तरह दर रही समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव कहते हैं, ’सरकार दालमंडी में मुआवजे के तौर पर दूसरी दुकान दे सकती है, लेकिन बाजार कैसे देगी। दालमंडी एक दिन में नहीं बनी है। यहां एक दुकान जमाने में जमाना लग जाता है। कई ऐसे व्यापारी हैं, जो पुश्तों से व्यापार कर रहे हैं। BJP दालमंडी वालों को दाल की तरह दरे नहीं, यहां के कारोबारियों को संरक्षण दें।’ ’BJP कभी भी दालमंडी से नहीं जीत पाई। मेरे पास वहां के बूथ के रिजल्ट हैं। भाजपा वाले जानते हैं कि वहां के लोगों ने उन्हें वोट नहीं दिया, इसलिए विकास के नाम पर ऐसे हथकंडे अपना रहे हैं।’ ………………….. ये खबर भी पढ़ें… गैंग्स ऑफ म्यावड्डी; 1 लाख सैलरी-बंगले का ऑफर, मिली गुलामी थाईलैंड के घने जंगली इलाके माईसोट के रास्ते इंटरनेशनल बॉर्डर क्रॉस करने पर म्यांमार का शहर आता है, म्यावड्डी। ये कोई आम शहर नहीं है, कई देशों की पुलिस, इंटरपोल और अमेरिका की खुफिया एजेंसी FBI ने इसे खतरनाक शहरों की लिस्ट में डाला हुआ है। इस शहर की किसी बिल्डिंग में पहुंच गए, तो बिना पैसा दिए रिहाई नामुमकिन है। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 14 Feb 2026 5:16 am

23 साल छोटी इटैलियन PA से दिल लगा बैठा NATO का ब्रिटिश अफसर, स्टोरी में फिर आया ये ट्विस्ट

British man Italian women love story: क्या कोई अधेड़ आदमी, खुद से आधी उम्र की पर्सनल सेकेट्री जिसने बतौर इंटर्न करियर शुरु किया हो उसके चक्कर में देश की सुरक्षा जैसी अहम जिम्मेदारी निभाने के बजाए उसके साथ बावरा बनकर घूमने लगे. ये सच्ची कहानी ब्रिटेन के 55 साल के NATO एंबैसडर की है, जो इटली की कोर्टिनी के चक्कर में बदनाम हो गए.

ज़ी न्यूज़ 14 Feb 2026 2:34 am

AI समिट के लिए दिल्ली में लगने वाला है राष्ट्राध्यक्षों का जमावड़ा, तकनीक में दुनिया को बड़े संदेश दे रहा भारत

India-AI Impact Summit 2026 News: AI समिट के लिए दिल्ली में राष्ट्राध्यक्षों का जमावड़ा लगने वाला है. इस सम्मेलन के जरिए भारत तकनीक के क्षेत्र में दुनिया को बड़े संदेश देने जा रहा है. जिसे विश्व में महसूस भी किया जा रहा है.

ज़ी न्यूज़ 14 Feb 2026 12:24 am

DNA: अवैध प्रवासियों की अब खैर नहीं, मेलोनी ने अपनाया 'योगी मॉडल'; नेवी को मिली ये बड़ी ताकत

Illegal Immigrants:इटली में अवैध प्रवासियों की आबादी 9 प्रतिशत है लेकिन अपराध में इनकी हिस्सेदारी तकरीबन 35 प्रतिशत है. पिछले 2 सालों में जितने अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं उनमें से 35 प्रतिशत अवैध प्रवासी निकले हैं.

ज़ी न्यूज़ 14 Feb 2026 12:18 am

बांग्लादेश के चुनावी नतीजों के बाद मोहम्मद यूनुस सत्ता के केंद्र में रहेंगे या होंगे लापता? बड़ा सवाल

Muhammad Yunus news: बांग्लादेश की जनता ने फैसला सुना दिया है. आम चुनावों में बीएनपी प्रचंड बहुमत से सत्ता में लौटी. तारिक रहमान (Tarique Rahman) के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ होते ही 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के सियासी भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

ज़ी न्यूज़ 13 Feb 2026 11:59 pm

300 अप्रवासियों को अमेरिका से हटाने के लिए ट्रंप प्रशासन ने फूंक दिए 362 करोड़ रुपये, पॉलिसी पर उठे सवाल

'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' जैसा नारा देकर सत्ता में आए ट्रंप, विदेशी अप्रवासियों और डंकी रूट से अमेरिका पहुंचे, लोगों पर बेहद सख्ती से पेश आ रहे हैं. सड़कों पर आईसीई गार्ड्स उतारकर दहशत फैला चुके ट्रंप ने 300 लोगों को घर भेजने के लिए 362 करोड़ फूंक दिए. यह खुलासा होते ही विपक्षी दल डेमोक्रेट्स के नेता राशन-पानी लेकर उनके ऊपर चढ़ गए.

ज़ी न्यूज़ 13 Feb 2026 10:57 pm

DNA: हारने के बावजूद भारत के लिए रास्ते का कांटा क्यों है जमात ए इस्लामी? बांग्लादेशी चुनाव ने बजाई खतरे की घंटी

Bangladesh Elections 2026 Results: बांग्लादेश में हुए संसदीय चुनाव में BNP की जीत के साथ ही कट्टरवादी विचारधारा वाली जमात ए इस्लामी की हार हुई है, हालांकि इस हार से भी भारत को बड़ा खतरा है.

ज़ी न्यूज़ 13 Feb 2026 10:53 pm

शेख हसीना की उल्टी गिनती शुरू? चुनाव जीतते ही BNP का बड़ा ऐलान, भारत सरकार के सामने रख दी ये बड़ी डिमांड

BNP Demands Extradition Of Sheikh Hasina: बांग्लादेश चुनाव में अपनी बड़ी जीत के बाद BNP ने ढाका में शेख हसीना के प्रत्यर्पण की बात कही है. इसको लेकर एक नेता का बयान सामने आया है.

ज़ी न्यूज़ 13 Feb 2026 6:51 pm

Bangladesh election results: बीएनपी के साथ भारत के कैसे रहे हैं रिश्ते, भविष्य कैसा होना चाहिए? पाकिस्तान प्रायोजित जमात की बुलंद हार के मायने भी जानिए

Bangladesh Election results: बांग्लादेश के नतीजों से पाकिस्तान समर्थित मोहम्मद यूनुस की अलोकतांत्रिक अंतरिम सरकार का सुपर्दे-खाक होना तय हो गया है. जनता ने भारत विरोधी 'जमात' का सपना चूर-चूर करते हुए कट्टरपंथी मंसूबों का जनाजा निकाल दिया. बीएनपी ने संसद की 300 में से 210 सीटें जीत विरोधियों का सूपड़ा साफ कर दिया. इस जीत ने नई दिल्ली-ढाका के बीच नई संभावनाओं को जन्म दिया है.

ज़ी न्यूज़ 13 Feb 2026 6:33 pm

कूड़े में फेंक दिया 12 लाख का सोना, छोटी-सी भूल ने उड़ा दिए होश; फिर 3 दिन बाद आया फोन...

Dubai Gold Recovery Story: कभी-कभी छोटी सी भूल या लापरवाही बड़ा नुकसान करवा देती है. दुबई में रहने वाली कामिनी कन्नन के साथ जो हुआ वो इंसानियत, ईमानदारी, भरोसे और नसीब की अजीब और रोचक कहानी बन गई है.

ज़ी न्यूज़ 13 Feb 2026 5:44 pm

कट्टरपंथियों आंखें खोलकर देख लो...ढाका से जीते हिंदू नेता गायेश्वर रॉय, बांग्लादेश में 17 साल बाद होगा BNP का राज

Gayeshwar Chandra Roy BNP Result:बांग्लादेश में लंबे वक्त के बाद हुए संसदीय चुनाव में BNP के एक हिंदू लीडर की बड़ी जीत देखने को मिली है. इस नेता ने जमात ए इस्लामी के उम्मीदवार को हराया है.

ज़ी न्यूज़ 13 Feb 2026 4:10 pm

जब खौफ में नहीं आए खामनेई, ट्रंप ने ईरान पर ‘बड़ा दांव’ खेलने की कर ली तैयारी? पश्चिम एशिया में अमेरिका ने उतारा दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर

US Iran tensions: अमेरिका ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया में दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात कर दिया है. परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं.

ज़ी न्यूज़ 13 Feb 2026 1:46 pm

क्या जमात-ए-इस्लामी को अमेरिका के साथ 'सीक्रेट मीटिंग' ले डूबी? जानें बांग्लादेश चुनाव में हार की वजह समझिए

चुनाव अभियान के दौरान एक अंतरराष्ट्रीय आयाम भी जुड़ गया। अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी राजनयिक जमात-ए-इस्लामी के साथ संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

देशबन्धु 13 Feb 2026 1:44 pm

रूस में व्हाट्सएप पर लगा पूर्ण प्रतिबंध, सरकार ने ‘राष्ट्रीय मैसेंजर’ मैक्स अपनाने की अपील की

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पुष्टि करते हुए कहा कि यह फैसला कंपनी द्वारा रूसी कानूनों का पालन न करने के कारण लिया गया है। साथ ही उन्होंने नागरिकों से सरकार समर्थित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म ‘मैक्स’ का उपयोग करने की अपील की।

देशबन्धु 13 Feb 2026 1:12 pm

बांग्लादेश में तारिक रहमान का पीएम बनना तय:क्या ये पाक-चीन के लिए झटका और भारत के लिए अच्छा; 6 जरूरी सवालों के जवाब

बांग्लादेश में तारिक रहमान की सरकार बनने वाली है। उनकी पार्टी BNP ने 299 में से 165 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है। भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बीएनपी की जीत पर बधाई दी है। तारिक रहमान की बड़ी चुनौतियों में से एक अपने पड़ोसी भारत के साथ संबंधों को बहाल करना होगा। दशकों से भारत का दोस्त रहा बांग्लादेश, शेख हसीना के तख्ता पलट के बाद से चीन और पाकिस्तान के साथ खड़ा नजर आ रहा है। बांग्लादेश में नई सरकार से जुड़े 6 जरूरी सवालों के जवाब जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बांग्लादेश चुनाव में किसे कितनी सीटें मिलीं? जवाब: 12 फरवरी को शाम 4:30 बजे तक 299 सीटों पर वोटिंग हुई। करीब 55% वोट पड़े। इसके बाद काउंटिंग शुरू हुई और 13 जनवरी की सुबह तक नतीजे आए… BNP के तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। उनकी पार्टी को 165 सीटें मिलीं हैं। 20 नवंबर 1965 को जन्में तारिक रहमान पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे हैं। 17 साल के निर्वासन के बाद वे 25 दिसंबर 2025 को लंदन से लौटे। वापसी के सिर्फ 5 दिन बाद उनकी मां खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। इसके बाद BNP की कमान पूरी तरह तारिक के हाथों में आ गई। उन्हीं के चेहरे पर BNP चुनाव में उतरी। तारिक ने खुद दो सीटों- ढाका-17 और बोगरा-6 से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत दर्ज की। दरअसल, तारिक ने खुद को युवाओं और मध्यम वर्ग के मतदाताओं से कनेक्ट किया। उन्होंने खुद को शांत, सुनने वाला और पॉलिसी पर फोकस करने वाले नेता की तरह पेश किया। इसके अलावा तारिक को उनकी मां के निधन के बाद मिली सिम्पैथी और उनकी पॉलिटिकल रीलॉन्चिंग से भी फायदा हुआ। सवाल-2: क्या तारिक रहमान भारत के साथ रिश्ते सुधारेंगे? जवाब: शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में गिरावट आई। अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने भारत के परंपरागत विरोधी पाकिस्तान और चीन से दोस्ती बढ़ाई। ऐसे में भारत को उम्मीद थी कि बांग्लादेश की नई सरकार से रिश्ते ठीक किए जाएंगे। माना जाता है कि BNP भारत का पसंदीदा ऑप्शन है और वे संपर्क में भी है। जब खालिदा जिया का निधन हुआ तो पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट की। खालिदा के निधन पर विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ढाका पहुंचे और तारिक से मिले। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग गए और शोक व्यक्त किया। BNP ने अपने मेनिफेस्टो में विदेश नीति ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ और ‘फ्रेंड यस, मास्टर नो’ नारों के इर्द-गिर्द तैयार की है। एक चुनावी रैली में तारिक रहमान ने कहा, ‘न दिल्ली, न पिंडी, बांग्लादेश सर्वोपरि’। यानी उन्होंने भारत और पाकिस्तान के प्रभाव से मुक्त रहने की बात कही। पूर्व हाई कमिश्नर रीवा गांगुली दास मानती हैं कि हम पड़ोसी हैं और पड़ोसी बदले नहीं जा सकते। हमें एक-दूसरे के साथ काम करना ही पड़ता है। भारत सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि कोई भी सत्ता में आए हम उनके साथ काम करने के लिए तैयार हैं। BNP ने चुनावी वादा किया है कि… बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर रहे हर्षवर्धन श्रृंगला का कहना है कि तारिक रहमान समझ चुके हैं कि एक सफल पीएम बनने के लिए उन्हें भारत के समर्थन की जरूरत है, या कम से कम भारत की दुश्मनी वह मोल नहीं लेना चाहेंगे। अब देखना यह होगा कि उनकी कथनी और करनी मेल खाती हैं या नहीं। अमेरिकी थिंकटैंक Atlantic Council में साउथ एशिया सेंटर की सीनियर फेलो माइकल कुगेलमैन मानते हैं कि भारत को उम्मीद है कि नई सरकार बातचीत करने को तैयार होगी। वह उन किरदारों से प्रभावित न हो, जो भारत के हितों के लिए खतरा हैं। BNP और भारत दोनों ही एक-दूसरे के साथ काम करने को तैयार हैं। 13 फरवरी की सुबह पीएम मोदी ने तारिक रहमान को जीत की बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया X पर लिखा, यह जीत दिखाती है कि बांग्लादेश की जनता को आपके नेतृत्व पर भरोसा है। भारत हमेशा एक लोकतांत्रिक और आगे बढ़ते हुए बांग्लादेश के साथ खड़ा रहेगा। मैं दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने और मिलकर विकास के लिए काम करने को तैयार हूं। सवाल-3: भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सुधरना दोनों के लिए क्यों जरूरी है? जवाब: बांग्लादेश की 94% सीमा भारत से लगती है। बांग्लादेश लगभग चारों तरफे भारत से घिरा हुआ है, इसलिए इसे 'इंडिया लॉक्ड' देश कहा जाता है। ऐसे में बांग्लादेश सुरक्षा और व्यापार के मामले में भारत पर निर्भर है। वहीं पूर्वोत्तर के राज्यों से बाकी भारत को जोड़ने में बांग्लादेश की अहम भूमिका है। शेख हसीना के सत्ता में रहते हुए भारत को कभी पूर्वोत्तर को लेकर बांग्लादेश की ओर से किसी परेशानियों की चिंता नहीं करनी पड़ी, लेकिन उनके तख्तापलट के बाद एक सिक्योरिटी थ्रेट खड़ा हो गया। मार्च 2025 में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने चीन दौरे में कहा, 'भारत के पूर्वोत्तर राज्य जमीन से घिरे हुए हैं। समुद्र तक पहुंचने के लिए बांग्लादेश ही उनका एकलौता रास्ता है।' इसके अलावा कई बांग्लादेशी नेताओं ने 'सेवन सिस्टर्स' को अलग करने की धमकी तक दी और उसे बांग्लादेश का हिस्सा बताया। पूर्वोत्तर के 7 राज्यों को बाकी देश से सिलिगुड़ी कॉरिडोर जोड़ता है, जो सिर्फ 40 किमी लंबा और 22 से 30 किमी चौड़ा है। इसे ही चिकन नेक कहते हैं। इसके एक तरफ नेपाल और दूसरी तरफ बांग्लादेश है। यहां से चीन महज 200 किमी दूर है। मनोहर पर्रिकर इंस्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस की सीनियर फेलो स्मृति पटनायक के मुताबिक, पूर्वोत्तर की सुरक्षा को लेकर भारत जरा भी ढील नहीं देगा। ये मुद्दा बेहद अहम है और इसको लेकर भारत कोई समझौता नहीं करेगा। ये मैसेज बांग्लादेश की पूरी लीडरशिप तक पहुंचा दिया गया है। रिटायर्ड ब्रिगेडियर रंजीत बरठाकुर मानते हैं कि बांग्लादेश में चिकन नेक से छेड़छाड़ करने की कुव्वत नहीं है। वह कट्टरपंथियों की मदद करके और घुसपैठ से भारत को परेशान कर सकता है, लेकिन चिकन नेक को निशाना बनाने की हिम्मत नहीं करेगा। असल दिक्कत चीन है और हमें तैयार रहना होगा। हालांकि बांग्लादेश में भारत के एम्बेस्डर रहे अनिल त्रिगुणायत मानते हैं कि तारिक रहमान के सत्ता में आने से भारत की सबसे बड़ी चुनौती बांग्लादेश में घुसपैठ कर रहे पाकिस्तान और अन्य भारत-विरोधी आतंकवादी समूहों पर नजर रखना होगा। सवाल-4: क्या तारिक सरकार पाकिस्तान से और नजदीकियां बढ़ाएगी? जवाब: 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद से पाकिस्तान से उसके रिश्ते लंबे वक्त तक तनाव भरे रहे। BNP की पिछली सरकारों यानी खालिदा जिया के समय पाकिस्तान से रिश्ते सुधरे, लेकिन शेख हसीना ने फिर दूरी बना ली। हसीना के तख्तापलट के बाद मोहम्मद यूनुस ने पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ से 3 बार मुलाकात की। दोनों देशों के नेता और सैन्य अधिकारी भी मिले। पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने भी मुलाकात की। दोनों देशों के बीच दशकों बाद सीधी समुद्री सेवा शुरू हुई। रक्षा साझेदारी बढ़ाने पर बात हुई। जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज और हथियार बनाने पर सोचा गया। पूर्व हाई कमिश्नर हर्षवर्धन श्रृंगला के मुताबिक, 2001-2006 के BNP शासन के दौरान बांग्लादेश ने भारत विरोधी रुख अपनाया और पाकिस्तान के बेहद करीब हो गया। तब तारिक रहमान सरकार में अहम व्यक्ति थे और उनका प्रभाव कहीं ज्यादा था। दरअसल, उस वक्त भारत में बीजेपी के अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी। वहीं बांग्लादेश में BNP की खालिदा जिया सरकार चला रहीं थीं। दोनों देशों के बीच व्यापार, सीमा, नदी जल बंटवारा, अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा, इमिग्रेशन और सशस्त्र विद्रोह जैसे मुद्दों पर विरोध था। तब भारत ने BNP पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों की मदद करने का आरोप भी लगाया था, जिनका ढाका ने का खंडन किया था। ढाका यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डेलवर हुसैन मानते हैं कि सत्ता में कोई भी आए, बांग्लादेश-पाकिस्तान के रिश्ते और बेहतर होंगे और अचानक बदलाव की कोई संभावना नहीं है। BNP सरकार का पाकिस्तान से मजबूत रिश्ते होने का अतीत रहा है। हालांकि पाकिस्तान के लिए नई सरकार मुद्दा नहीं है। वह देखेगा कि नई सरकार की भारत को लेकर क्या पॉलिसी होगी और पाकिस्तान को किस हद तक सपोर्ट करेंगे? इंटरनेशनल रिलेशंस एक्सपर्ट स्मृति पटनायक मानती हैं कि बांग्लादेश पाकिस्तान से चाहे जितने मजबूत रिश्ते बना लें, उन्हें बिना सिक्योरिटी चेक के बांग्लादेश बुला ले। यह भारत की चिंता का मुद्दा नहीं है। दरअसल, पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ मिलकर SAARC को फिर से एक्टिव करना चाहता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई सरकार से कश्मीर जैसे मुद्दे पर साथ या तटस्थ रहने की उम्मीद करता है। सवाल-5: चीन से कैसे रिश्ते रखेंगे तारिक रहमान? जवाब: बांग्लादेश पर जैसे-जैसे भारत का प्रभाव कम हुआ, उस गैप को चीन ने भरा। आमतौर पर बांग्लादेशी नेता शपथ के बाद पहली विदेश यात्रा भारत की करते हैं, लेकिन यूनुस ने चीन को चुना। 26 से 29 मार्च 2025 तक उन्होंने चीन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने चीन के साथ 9 समझौते साइन किए। इनमें तीस्ता रिवर प्रोजेक्ट, 98% प्रोडक्ट्स पर जीरो टैरिफ, डिफेंस लॉजिस्टिक्स, डिजिटल कनेक्टिविटी और लालमोनिरहाट एयरपोर्ट को रिन्यू करने जैसे समझौते हैं। भारतीय थिंकटैंक सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस के कॉन्स्टेंटिनो जेवियर का कहना है कि चीन भारत-बांग्लादेश रिश्तों में संकट का फायदा उठाते हुए खुले तौर पर और पर्दे के पीछे दोनों तरह से अपना प्रभाव लगातार बढ़ा रहा है। अमेरिकी थिंकटैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के फेलो जोशुआ कुर्लांट्जिक मानते हैं कि बंगाल की खाड़ी के मामले में चीन की स्ट्रैटजी का बांग्लादेश केंद्र बन चुका है। चीन को भरोसा है कि बांग्लादेश इसमें उसकी मदद करेगा। चीन में बांग्लादेश के एम्बेस्डर रहे मुंशी फैज अहमद के मुताबिक, बांग्लादेश के लिए चीन का जगह किसी अन्य देश से नहीं बदली जा सकती। क्योंकि पिछले कुछ साल में चीन एक बड़े निवेशक के साथ-साथ ट्रेड पार्टनर के तौर पर उभरा है। बांग्लादेश के नेशनल रेवेन्यू बोर्ड के मुताबिक, 2024-25 में बांग्लादेश का चीन के साथ ट्रेड 21.3 अरब डॉलर से ज्यादा का था। वहीं भारत के साथ करीब 11.5 अरब डॉलर का कारोबार हुआ। अहमद मानते हैं कि भले ही लोग सोचते थे कि भारत हमारे बहुत करीब हैं, लेकिन ट्रेड और कॉमर्स के मामले में चीन से हमारे रिश्ते लगातार बढ़ रहे हैं। हमारे डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में चीन का पैसा लगा है। लंबे समय तक बांग्लादेश चीन से नजदीकियां जारी रखेगा, क्योंकि चीन जो दे सकता है, वह कोई नहीं कर सकता। सवाल-6: बांग्लादेश में जनमत संग्रह का नतीजा क्या रहा और इससे क्या फर्क पड़ेगा? जवाब: जनमत संग्रह के पक्ष में 66.7% लोगों ने वोट दिया। वहीं इसके खिलाफ में 32.27% वोट पड़े। यानी अब बांग्लादेश में जुलाई चार्टर लागू हुआ। नई संसद पहले 180 दिनों तक एक 'संवैधानिक सुधार परिषद' की तरह काम करेगी और चार्टर की सिफारिशों को कानून में बदलेगी। दरअसल, बांग्लादेश में राजनीतिक और संवैधानिक सुधार लाने के लिए नेशनल कंसेंशन कमीशन बनाया गया। अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस इसके चेयरमैन बने। इस कमीशन के 5 अलग-अलग आयोगों ने 33 पॉलिटिकल पार्टियों और अलायंस से 72 मीटिंग कर 166 सिफारिशों पर चर्चा की। इसके बाद ‘नेशनल चार्टर ऑफ जुलाई 2025‘ तैयार हुआ, जिसमें 84 सिफारिशें शामिल थीं। इसमें कुछ बदलाव होने जा रहे हैं… ------------------ बांग्लादेश चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… बांग्लादेश में 20 साल बाद BNP की जीत: तारिक रहमान का PM बनना तय; देश को 35 साल बाद मिलेगा पुरुष प्रधानमंत्री बांग्लादेश में गुरुवार को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। BNP ने 299 सीटों में से 209 हासिल कर बहुमत के लिए जरूरी 150 के आंकड़े को पार कर लिया। अब तक 286 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 13 Feb 2026 1:00 pm

BNP नेता से लेकर पोलिंग अफसर और मतदाता तक… 12 फरवरी को बांग्लादेश में कितनी गईं जानें? लाइन में लगे वोटर की मौत की क्या है असली सच्चाई?

9 die during Bangladesh voting: 12 फरवरी को बांग्लादेश में संसदीय चुनाव के मतदान के दौरान कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई. इनमें BNP नेता, प्रिसाइडिंग ऑफिसर, पोलिंग अधिकारी और आम मतदाता शामिल हैं. कुछ की मौत हार्ट अटैक से बताई जा रही है, तो कहीं धक्का-मुक्की और भगदड़ के आरोप लगे हैं. लाइन में खड़े-खड़े मौत की खबर ने लोगों को झकझोर दिया.

ज़ी न्यूज़ 13 Feb 2026 11:53 am

बांग्लादेश चुनाव से पहले ही यूनुस ने कर ली थी सेटिंग! तारिक रहमान के पीएम बनते ही होगा ऐलान?

बांग्लादेश में चुनाव तो हो गए, अब मोहम्मद यूनुस का क्या होगा? पहले वह चार साल तक कुर्सी पर जमे रहने का ख्वाब देख रहे थे लेकिन प्रेशर बढ़ा तो सेटिंग कर ली. नए संविधान के नाम पर नई पावर या कहें 'शक्तिमान' जैसी पावर लेकर देश की बड़ी कुर्सी पर काबिज होने का उनका प्लान है.

ज़ी न्यूज़ 13 Feb 2026 10:47 am

बीएनपी से निकाली गईं, फिर भी जीत गईं! कौन हैं बैरिस्टर रूमीन फरहाना, जिन्होंने ब्राह्मणबारिया-2 में निर्दलीय लड़कर रच दिया इतिहास; लंदन-रिटर्न मुस्लिम महिला की कहानी फिल्मी है

बांग्लादेश की मशहूर बैरिस्टर और पूर्व सांसद रूमीन फरहाना ने ब्राह्मणबारिया-2 सीट से इंडिपेंडेंट उम्मीदवार बनकर धमाकेदार जीत हासिल की है. लंदन से पढ़ीं ये मुस्लिम नेत्री BNP से निकाले जाने के बाद भी 1 लाख से ज्यादा वोट पाकर इतिहास रच दिया है. उनके पिता ओली अहद की विरासत को आगे बढ़ाते हुए वो अब संसद में नई ऊर्जा लाएंगी.

ज़ी न्यूज़ 13 Feb 2026 10:19 am

हिंदू-अवामी लीग के वोट BNP को मिले, जमात को हराया:हसीना की सरकार गिराने वाले हारे, हिंदू आबादी वाले जिलों में BNP की एकतरफा जीत

करीब ढाई महीने पहले ही लंदन से बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना तय है। सुबह 9:30 बजे तक आए नतीजों के मुताबिक उनकी पार्टी BNP यानी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने 299 में से 209 सीटें जीती हैं। सरकार बनाने के लिए 150 सीटों की जरूरत थी। पहली बार सत्ता के करीब दिख रही कट्‌टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी बुरी तरह हारी। उसके गठबंधन को सिर्फ 70 सीटें मिलीं हैं। शेख हसीना की सरकार गिराने वाले स्टूडेंट्स की पार्टी को भी बांग्लादेशियों ने नकार दिया। BNP की एकतरफा जीत और जमात की हार की तीन वजह समझ आईं। 1. पूर्व PM शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के वोट खासकर हिंदू वोटर BNP में शिफ्ट हो गए। BNP को अवामी लीग के गढ़ रहे गोपालगंज के अलावा खुलना, सिलहट, चटगांव, ठाकुरगंज में जीत मिली है।2. जमात का अतीत आड़े आ गया, लोगों को याद रहा कि उसने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का विरोध किया था। जमात इस दाग को नहीं धो पाई।3. स्टूडेंट्स की नेशनल सिटीजन पार्टी को आपसी फूट और जमात से गठबंधन करना भारी पड़ा। उन्हें लोगों ने पूरी तरह खारिज कर दिया। BNP की जीत के सबसे बड़े फैक्टर तारिक रहमानतारिक रहमान पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। BNP की जीत का पूरा क्रेडिट तारिक रहमान के हिस्से में है। करीब 17 साल के निर्वासन के बाद वे 25 दिसंबर 2025 को लंदन से बांग्लादेश लौटे थे। 2008 में तारिक रहमान को देश छोड़कर भागना पड़ा था। शेख हसीना सरकार ने उन पर 80 से ज्यादा केस दर्ज किए थे। उन्हें अलग-अलग मामलों में उम्रकैद के अलावा 17 साल की सजा मिल चुकी थी। वे लंदन से ही पार्टी का काम संभालते रहे। चुनावों से ठीक पहले उनकी वापसी BNP के लिए बड़े पॉलिटिकल बूस्टर की तरह रही। तारिक रहमान 2018 से पार्टी के एक्टिंग चेयरमैन थे। 9 जनवरी 2026 को उन्हें चेयरमैन बनाया गया। पार्टी की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया के निधन के बाद यह पद खाली हो गया था। खालिदा जिया का निधन 30 दिसंबर, 2025 को हुआ था। देश लौटने पर तारिक रहमान का स्वागत हीरो की तरह हुआ। ढाका पहुंचने पर उन्होंने मिट्टी को छूकर सलाम किया। इसकी फोटो काफी वायरल हुई थीं। लौटने के बाद रहमान ने पूरे देश का दौरा किया। वे लोगों से सीधे बात करते। उन्हें मंच पर बुलाते। उन्होंने देश की इकोनॉमी सुधारने का रोडमैप पेश किया। तारिक रहमान की वापसी के अलावा खालिया जिया के निधन से उपजी सहानुभूति, अवामी लीग का चुनाव न लड़ना, लोगों को स्टूडेंट्स लीडर से मिली निराशा और जमात के लिए गुस्सा, सब BNP के पक्ष में गया। ढाका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और पॉलिटिकल एनालिस्ट सैफुल आलम चौधरी कहते हैं, ‘BNP ने इस चुनाव में बहुत कुछ अलग या खास नहीं किया। BNP की जीत में एक बड़ा फैक्टर ये भी रहा कि अवामी लीग के करीब 10% वोटर्स ने मतदान किया है। दिलचस्प बात ये है कि उन्होंने BNP को वोट किया है।’ जमात को अतीत और खराब इमेज ने डुबोयाजमात-ए-इस्लामी इस बार 10 पार्टियों के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ी। इनमें स्टूडेंट्स की पार्टी NCP भी शामिल है। इसके बावजूद जमात बुरी तरह हारी। एक्सपर्ट मानते हैं कि जमात का अतीत और कट्‌टरपंथी इमेज लोगों को कभी पसंद नहीं आई। लोगों को याद है कि जमात ने बांग्लादेश की आजादी का विरोध किया था। सैफुल आलम चौधरी जमात की हार की मौजूदा वजहें बताते हैं। वे कहते हैं, ‘चुनाव से दो दिन पहले ऐसे वीडियो वायरल हो रहे थे, जिनमें जमात के लोग पैसे बांटते दिख रहे थे। इससे लोगों में मैसेज गया कि जमात गलत तरीके से चुनाव लड़ रही है। बैलेट पेपर में भी हेरफेर की कोशिश की खबरें आईं। इससे जमात को नुकसान पहुंचा।’ ‘हर वर्ग को खुश करना, जमात की सबसे बड़ी गलती’चौधरी आगे कहते हैं, ‘जमात इस्लामिक राज का सपोर्ट करती है। इस बार चुनाव से पहले उसने कहा कि सरकार बनी तब भी वे शरिया कानून नहीं लाएंगे। इससे जमात का कोर वोटर दूर हो गया। जमात ने खुद को आजाद ख्याल पार्टी साबित करने की कोशिश की। हर वर्ग को खुश करने की कोशिश की, लेकिन लोग समझ गए कि ये चुनावी बातें हैं। जमात ने चुनाव के पहले खुद को काफी हद तक बदलने की कोशिश की, लेकिन वो लोगों में भरोसा पैदा नहीं कर पाई।’ BNP के नेता फजीउल रहमान को एकतरफा जीत मिली है। उन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ी थी। साफ दिखता कि लोगों ने आजादी की लड़ाई के पक्ष में वोट दिया और आजादी का विरोध करने वालों को खारिज किया है। वहीं सीनियर जर्नलिस्ट मॉन्जरूल आलम पन्ना कहते हैं, ‘लोगों का रुझान साफ है। वे जमात को रिजेक्ट करना चाहते थे, इसलिए दूसरा ऑप्शन BNP ही है। हिंदू वोटर्स ने बड़ी संख्या ने BNP को वोट दिया है। यह पहले से अंदाजा था कि हिंदू वोटर्स जमात को वोट नहीं देंगे।’ ‘अवामी लीग चुनाव लड़ती, तो जमात को फायदा होगा’सैफुल आलम चौधरी कहते हैं कि अवामी लीग का चुनाव न लड़ना जमात के लिए मुसीबत बन गया। जमात ने अंतरिम सरकार पर दबाव बनाया कि अवामी लीग को चुनाव न लड़ने दिया जाए। ऐसे में वह अनजाने में पिछले 18 महीनों से BNP के लिए जमीन तैयार कर रही थी। अगर अवामी लीग चुनाव लड़ती तो जमात को फायदा होता। अवामी लीग और BNP में वोट बंट जाते। दूसरी तरफ जमात अपने गठबंधन के साथ वोट एकजुट कर सकती थी। स्टूडेंट्स लीडर नाहिद इस्लाम जीते, लेकिन पार्टी हारी शेख हसीना की सरकार गिराने वाले स्टूडेंट्स की पार्टी NCP कुछ कमाल नहीं कर पाई। हालांकि, पार्टी के सबसे बड़े चेहरे नाहिद इस्लाम ढाका-11 सीट से जीत गए हैं। NCP ने 30 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन 4 सीटें ही जीत पाई। पार्टी ही हार की 5 वजहें… 1. आंदोलन का असर खत्म और आपसी फूटअगस्त, 2024 में हुए छात्र आंदोलन का असर बीते डेढ़ साल में काफी कम रह गया है। शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन करने वाले कई छात्र नेताओं ने पार्टी छोड़ दी। NCP ने जमात के साथ गठबंधन किया तो पार्टी के अंदर ही मतभेद हो गए। 2. कैडर का न होनाNCP कुछ महीने पहले बनी पार्टी है। उनके पास सरकार विरोधी आंदोलन में शामिल रहे छात्र तो थे, लेकिन वोट डलवाने वाली चुनावी मशीनरी नहीं थी। दूसरी तरफ BNP और जमात के पास पुराना कैडर है, जो हर बूथ पर मौजूद रहा। NCP सिर्फ जेन जी वोटर्स के भरोसे थी। 3. वोट का बंटवारा अवामी लीग के खिलाफ लोगों के पास दो ही विकल्प थे, BNP या NCP। लोगों ने नई पार्टी की बजाय अनुभव को चुना। उन्हें लगा कि देश चलाने के लिए पुरानी पार्टी स्टूडेंट्स से बेहतर विकल्प है। 4. अर्बन पार्टी की छविNCP की पहचान सोशल मीडिया और ढाका यूनिवर्सिटी तक है। देश के बाकी हिस्सों में वोटर तारिक रहमान की विरासत या जमात के इस्लामी कार्ड से ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं। छात्रों का 'रिफॉर्म एजेंडा' वहां तक नहीं पहुंच पाया। 5. अनुभव की कमी का डरलोगों को डर था कि बिना अनुभव वाले स्टूडेंट देश की कमजोर हो रही इकोनॉमी और सुरक्षा व्यवस्था नहीं संभाल पाएंगे। इसलिए उन्होंने BNP को चुना। नेशनल गवर्नमेंट बनने की संभावना खत्मBNP को बहुमत मिलने के बाद सवाल है कि BNP अपने राजनीतिक एजेंडे पर चलेगी या अंतरिम सरकार संभाल रहे डॉ. मोहम्मद यूनुस के दबाव में काम करेगी। हालांकि, जिस मजबूती से BNP चुनाव जीती है, यूनुस के लिए दबाव बनाना आसान नहीं होगा। चुनाव से पहले जमात ने प्रस्ताव दिया था कि सभी की सहमति वाली नेशनल गवर्नमेंट बनाई जाए। तारिक रहमान ने ये प्रस्ताव खारिज कर दिया। जमात ने खुद को विपक्षी दल के तौर पर स्थापित किया है। ऐसे में BNP के लिए उसके साथ सरकार बनाना जोखिम भरा हो सकता है। BNP के लिए ज्यादा बेहतर यही है कि जमात विपक्ष में रहे।

दैनिक भास्कर 13 Feb 2026 10:06 am

बांग्लादेश में बीएनपी की ऐतिहासिक जीत: 13वें संसदीय चुनाव में दो-तिहाई बहुमत, तारिक रहमान बनेंगे PM

चुनाव परिणामों के शुरुआती रुझानों ने स्पष्ट कर दिया है कि अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद यह चुनाव देश की राजनीति में बड़ा बदलाव लेकर आया है। पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने बीएनपी को बांग्लादेश चुनावों में जीत की बधाई दी है।

देशबन्धु 13 Feb 2026 9:29 am

बांग्लादेश चुनाव: ऐतिहासिक जीत मिली, लेकिन जश्न नहीं! 200 पार करने के बाद भी खामोश क्यों हुई BNP? देश में खुशी न मनाने के पीछे क्या वजह?

बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में BNP ने जोरदार वापसी की है. अनौपचारिक नतीजों के मुताबिक पार्टी 200 से ज्यादा सीटों पर जीत या बढ़त बनाती दिख रही है. यह आंकड़ा अपने आप में ऐतिहासिक माना जा रहा है. लेकिन इस बड़ी सफलता के बावजूद पार्टी ने किसी तरह का विजय जुलूस या सार्वजनिक जश्न न मनाने का फैसला किया है. यही बात सबको हैरान कर रही है.

ज़ी न्यूज़ 13 Feb 2026 9:19 am

चीन का बड़ा फैसला: ईयू डेयरी उत्पादों पर सब्सिडी-विरोधी शुल्क

चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने 12 फरवरी को एक घोषणा जारी कर यूरोपीय संघ से आयातित डेयरी उत्पादों पर सब्सिडी-विरोधी शुल्क जांच के अंतिम निर्णय की घोषणा की

देशबन्धु 13 Feb 2026 9:03 am

ईरान को ट्रंप की चेतावनी: ‘डील नहीं हुई तो हालात दर्दनाक’

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह जल्द से जल्द परमाणु समझौता करे, वरना उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है

देशबन्धु 13 Feb 2026 8:54 am

‘क्रांति’ से ‘करारी हार’ तक! शेख हसीना की सत्ता उखाड़ फेंकने वाले स्टूडेंट लीडर्स की NCP का चुनाव में निकला कचूमर, BNP की आंधी ने कुचल दिया?

शेख हसीना को 2024 में उखाड़ फेंकने वाले छात्र लीडर्स की नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने पहली बार चुनाव लड़ा और 30 सीटों पर उतरकर महज 5-6 सीटें जीतीं है. NCP के नाहिद इस्लाम ने ढाका-11 जीती, लेकिन कुल मिलाकर BNP की पुरानी ताकत ने युवा पार्टी को पीछे छोड़ दिया है.

ज़ी न्यूज़ 13 Feb 2026 8:12 am

बांग्लादेश में जीती बीएनपी! दुनिया को खबर नहीं, बिना सीरियल नंबर वाले बैलेट पेपर से हो गया बड़ा खेला

बांग्लादेश में तारिक रहमान की पार्टी बीएनपी की सरकार बननी तय है. चुनावों में जमात का गठबंधन काफी पीछे रह गया है. इसके साथ जो रेफरेंडम हुआ है उसमें एक बड़ा खेला हुआ है. भारत की पूर्व राजदूत वीणा सीकरी ने दावा किया है कि बिना सीरियल नंबर के ही रेफरेंडम कराया गया है.

ज़ी न्यूज़ 13 Feb 2026 7:50 am

कैरेबियन सागर में टकराए अमेरिकी नौसेना के जहाज, दो नाविक घायल, समंदर में कैसे हुआ हादसा?

बीते दिन कैरेबियन सागर में अमेरिका ने वेनेजुएला के कई तेल टैंकर को कब्जे में लिया था. इसके साथ ही यहां पर मिलिट्री फोर्स को बढ़ा दिया था. अब कैरिबियन सागर में दो नेवी जहाजों की कड़ी टक्कर हो गई,यह हादसा ईंधन भरने (रिफ्यूलिंग) के दौरान हुआ, इस घटना की वजह से दो नाविक घायल हो गए हैं.

ज़ी न्यूज़ 13 Feb 2026 7:47 am

बांग्लादेश में BNP का ‘वनवास’ खत्म! 17 साल बाद वतन लौटे खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने रचा इतिहास, पीएम की कुर्सी कर ली पक्की

Bangladesh election result 2026:बांग्लादेश के 2026 चुनाव में BNP ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत हासिल कर लिया है. तारिक रहमान, खालिदा जिया के बेटे अब प्रधानमंत्री बनने की राह पर हैं. जमात-ए-इस्लामी को सिर्फ कुछ सीटें मिलीं हैं. ये चुनाव 2024 की क्रांति के बाद पहला बड़ा चुनाव था, जहां युवाओं का जोश दिखा.

ज़ी न्यूज़ 13 Feb 2026 7:13 am

यूपी चुनाव से पहले मायावती को क्यों मिला बड़ा बंगला:अखिलेश को बताया सबसे बड़ा दुश्मन, योगी से मुलाकात के बाद क्या बदला

अप्रैल, 2024 की बात है। लोकसभा चुनाव होने वाले थे। मायावती के भतीजे आकाश आनंद यूपी के सीतापुर में रैली करने पहुंचे थे। उन्होंने BJP को नफरत फैलाने वाली और आतंकवादियों की पार्टी कहा। इससे बुआ मायावती इतनी नाराज हुईं कि फौरन आनंद को नेशनल कोआर्डिनेटर पद से हटा दिया। मायावती ने आकाश को पद से हटाने की बात सिर्फ दफ्तर के अंदर जारी लेटर तक नहीं रखी, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर लिखा, 'आकाश आनंद से पद ले लिया गया है। अभी उन्हें पूरी तरह परिपक्व होने में वक्त लगेगा।' आकाश समाजवादी पार्टी के खिलाफ भी खूब बोल रहे थे, लेकिन मायावती उस पर चुप रहीं। मैसेज साफ था कि मायावती BJP पर हमला करने से बच रही थीं। हां, राजनीतिक बयान देने की छूट थी। मायावती खुद रैलियों में BJP के खिलाफ राजनीतिक बयान दे रही थीं। इसके बाद उनकी BJP से करीबी के संकेत आने लगे। 9 अक्टूबर, 2025 को एक रैली में उन्होंने BJP को शुक्रिया कहा और CM योगी का आभार जताया। जनवरी, 2026 को मायावती को दिल्ली में एक और बंगला मिला है। ये टाइप-8 बंगला है, जबकि नेशनल पार्टी का अध्यक्ष होने के नाते उन्हें टाइप-6 या 7 बंगला ही मिल सकता है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या BJP और मायावती के बीच कोई खिचड़ी पक रही है, दोनों में औपचारिक गठबंधन भले न हो, लेकिन क्या अंदरखाने सांठगांठ हो चुकी है, क्या मायावती को मिला बंगला इसी का नतीजा है? लोकसभा चुनाव से अब तक BSP-BJP का समीकरण समझिए… नेताओं को आदेश- BJP पर तीखे बयान न देंलोकसभा चुनाव के दौरान आकाश आनंद BJP पर हमलावर थे। एक रैली में उन्होंने कहा, ‘BJP ने केंद्र की ज्यादातर जांच एजेंसियों का राजनीतिकरण कर दिया है।‘ दूसरी रैली में कहा, ‘सवर्ण जातियों के गरीबों की हालत BJP के राज में बहुत खराब है। अगर निष्पक्ष चुनाव हुए तो BJP सत्ता से बाहर होगी।‘ 28 अप्रैल 2024 को सीतापुर की चुनावी रैली में आकाश ने BJP को नफरत फैलाने वालों की पार्टी कहा तो उन्हें पार्टी से बाहर होना पड़ा। हालांकि माफी मांगने के बाद उन्हें दोबारा पार्टी में जगह मिल गई। यहां मायावती का रुख साफ दिखा कि BJP पर तीखे हमलों से बचा जाए। इस पर BJP के प्रदेश स्तर के एक नेता बताते हैं, 'लोकसभा चुनाव के दौरान BJP को टारगेट करके तीखे बयान देने पर रोक थी। हमसे कहा गया कि सिर्फ राजनीतिक बयान दें। BJP की राष्ट्रभक्ति पर सवाल न उठाएं और न ही उसे सांप्रदायिक कहें। मीडिया में जो बयान चलते रहे हैं, वो दे सकते हैं। हम समझ गए थे कि हमें समाजवादी पार्टी को टारगेट करना है। BJP को लेकर बहन जी का रुख नरम है।' ‘हालांकि बहन जी कब, कौन सा फैसला करेंगी, कोई नहीं जानता। ये जरूर है कि अब अखिलेश के साथ तो समझौता नहीं करेंगी। हालांकि वे BJP के साथ बहुत अच्छे न सही लेकिन नॉर्मल रिलेशन रखना चाहती हैं।‘ क्या BSP और BJP में कोई सांठगांठ हुई है? सोर्स कहते हैं, ‘नहीं, कोई ऐसा सीधा मैसेज तो नहीं है लेकिन BJP पर हमला करने का कोई आदेश नहीं है।‘ BSP की बड़ी रैली से पहले योगी से मिलीं मायावतीBSP ने 9 अक्टूबर 2025 को लखनऊ में कई साल बाद बड़ी रैली की। तब कांशीराम की पुण्यतिथि थी। सोर्स बताते हैं, 'मायावती और उनके करीबी सतीश चंद्र मिश्र इस रैली से करीब 15 दिन पहले यूपी के CM योगी आदित्यनाथ से मिले थे। उनके बीच क्या बात हुई, ये नहीं पता। हालांकि, इस मुलाकात के बाद रैली का प्रोग्राम और बड़ा किया गया। इसके बाद किसी ऑफिशियल गठबंधन पर बात नहीं हुई।' ‘रैली में मायावती समाजवादी पार्टी पर खूब बरसीं। उन्होंने कहा कि सपा सरकार में रहते PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) को याद नहीं रखती। कांशीराम की जयंती भूल जाती है, लेकिन सत्ता से बाहर होने पर उसे कांशीराम याद आते हैं।‘ रैली में कार्यकर्ताओं को कहा गया कि मायावती अपने वोटर्स (दलितों) को संदेश देंगी कि उनका मुकाबला सीधा समाजवादी पार्टी से है। कांग्रेस पर भी उनकी टेढ़ी नजर है। वहीं BJP के लिए उनका रुख आभार के तौर पर सामने आया। सोर्स बताते हैं, ‘रैली के बाद बहनजी का मैसेज जमीन तक पहुंच चुका है। विधानसभा चुनाव से पहले हम लोग घर-घर जाने की योजना बना रहे हैं। कुछ इलाकों में तो घर-घर जाओ अभियान शुरू भी हो गया है।‘ चुनावी रणनीति बनाने में क्या RSS बना BSP का मददगार हमने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के यूपी में सक्रिय पदाधिकारी से पूछा कि BSP अचानक BJP पर इतनी नरम क्यों हो गई? जवाब मिला, ‘BSP की जैसी स्थिति है, उसके जीतने के चांस बहुत कम हैं। अगर वह सही रणनीति से लड़ेगी, तो कुछ सीटें ला भी सकती है।‘ ‘दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी इस बार पूरी तैयार है। ऐसे में BSP जितना एक्टिव होगी, उसका नुकसान समाजवादी पार्टी को होगा। अगर मायावती BJP पर नरम रहीं, तो उनके वोटर भी BJP पर नरम रहेंगे।' क्या RSS इस बार रणनीति बनाने में BSP की मदद कर रहा है? इस पर पदाधिकारी का जवाब सीधा नहीं था। वे कहते हैं, 'RSS के दरवाजे सबके लिए खुले हैं। जो मदद मांगेगा, उसे देंगे।' इस बार BSP चुपचाप काम कर रही है। पार्टी ने कार्यकर्ता वोटर्स से घर-घर जा रहे हैं। प्लान है कि यूपी के हर मंडल में मायावती खुद जाएंगी और रात वहीं रुकेंगी। वे मार्च से ये अभियान शुरू कर देंगी। इस दौरान चौपालें लगाई जाएंगी।' पार्टी की चुनावी रणनीति पर BSP के एक नेता कहते हैं, ‘RSS के लोग रणनीति बनाने में तो शामिल नहीं दिखे, लेकिन जो रणनीति बनी है, वह RSS के मॉडल पर बनी है। इस बार डोर टू डोर अभियान पर जोर दिया जा रहा है।’ मायावती को लुटियन दिल्ली में कैसे मिला बड़ा बंगला मायावती को 7 दिसंबर 2021 को दिल्ली में लोधी रोड पर टाइप-6 का बंगला नंबर- 29 मिला था। कुछ महीनों बाद उन्होंने इसे केंद्रीय कार्यालय में बदल दिया। करीब दो साल बाद फरवरी 2024 में मायावती को इसी रोड पर एक और बंगला मिला। ये टाइप-7 का बंगला नंबर-35 था। ये भी मायावती और BJP के बीच अच्छे संबंधों का संकेत माना गया। मई-जून 2024 में वे बंगले में शिफ्ट हुईं, लेकिन एक साल बाद 20 मई, 2025 को इसे खाली कर दिया। वजह बताई गई कि सामने मौजूद स्कूल से मायावती को दिक्कत हो रही है। हालांकि ये स्कूल तब भी था, जब मायावती ने बंगला लिया था। सोर्स का कहना है कि मायावती ने बंगला खाली नहीं किया, बल्कि उनसे खाली करवाया गया था। हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री ने उनके पास दो बंगले होने का हवाला देकर इसे खाली कराया था। मायावती इसे खाली नहीं करना चाहती थीं, क्योंकि उन्होंने इसे अपनी पसंद के हिसाब से रेनोवेट कराया था। साथ ही बताई गई वजह भी उन्हें वाजिब नहीं लगी थी। ‘डिपार्टमेंट से आदेश आया, मायावती के लिए बड़ा बंगला देखो’बंगला उन्हें अलॉट किया गया था, तब भी मिनिस्ट्री को पता था कि उनके पास एक बंगला पहले से है। फिर इतने महीनों के बाद विभाग को आखिर दो बंगलों पर एतराज क्यों हुआ। हमने ये सवाल हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री के ऑफिशियल सोर्स से पूछा। वे बताते हैं, ‘अक्टूबर 2025 के आखिरी हफ्ते में विभाग के पास मायावती के लिए टाइप-8 बंगले की तलाश का ऑर्डर आया। तब विभाग के पास कोई बंगला खाली नहीं था। विभाग को एक महीने पहले सितंबर में ही एक और पूर्व पदाधिकारी के लिए टाइप-8 बंगला खोजने का ऑर्डर मिल चुका था। उन्हें एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर बंगला नंबर-34 अलॉट भी कर दिया गया था। सोर्स के मुताबिक, बंगले में मरम्मत का काफी काम होना था। इसके लिए ऑर्डर भी जारी कर दिया था। तभी ऊपर से कहा गया कि अभी मरम्मत नहीं करनी है। फिर इस साल 20-21 जनवरी को ऑर्डर निकला कि ये बंगला मायावती के नाम अलॉट होगा।' हमने हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री के एक अफसर से पूछा कि नियम के मुताबिक मायावती को किस टाइप का बंगला मिलना चाहिए? जवाब मिला, ‘नेशनल पार्टी की अध्यक्ष या संयोजक और केंद्र में मंत्री को विभाग टाइप 6 या 7 बंगला देता है।’ फिर टाइप-8 बंगला कैसे अलॉट हुआ? उन्होंने कहा- ये स्पेशल रिकमंडेशन में दिया जा सकता है। हो सकता है कि कोई टाइप-7 बंगला खाली ही न हो। इसलिए टाइप-8 अलॉट कर दिया गया।‘ मायावती वाले बंगले पर थी केजरीवाल की नजर, मोदी के मंत्री को मिलासोर्स ने बताया कि मायावती से लोधी रोड वाला बंगला नंबर-35 लेकर केंद्रीय मंत्री और बाद में यूपी के अध्यक्ष बने पंकज चौधरी को दिया गया। इस बंगले पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की भी नजर थी। मायावती ने बंगला खाली किया तो अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय पार्टी का संयोजक होने के हक से यही बंगला अलॉट करने की गुजारिश की थी। बंगला उन्हें नहीं मिला। अक्टूबर 2025 में उन्हें लोधी रोड पर बंगला नंबर- 95 अलॉट किया गया। मायावती के नए बंगले का रेनोवेशन शुरूहाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री के GRPA विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक बंगले का रेनोवेशन शुरू हो गया है। मई खत्म होने से पहले बंगले की मरम्मत पूरी करने के आदेश हैं। BSP के सोर्स के मुताबिक, मायावती तय करेंगी कि उन्हें यहां कब तक शिफ्ट होना है। पहले तो इस बंगले का रेनोवेशन होगा। फिर एक बार मायावती खुद भी बंगला देखने और अपने हिसाब से रेनोवेशन का निर्देश देने के लिए आ सकती हैं। …………………ये खबर भी पढ़ें… क्या RSS की तरह रणनीति बना रहीं मायावती 'मायावती ने लखनऊ में रैली की तो भीड़ उमड़ पड़ी। ये वो भीड़ थी, जो अपने साथ रोटियां बांधकर लाई थी। सोचिए कितनी कमिटेड जनता होगी, जो सिर्फ मायावती के नाम पर इकट्ठी हुई। वरना रैलियों में लोग तब जाते हैं, जब कम से कम खाने-पीने का अच्छा इंतजाम हो। कई बार तो लोग बारात जैसा स्वागत मांगते हैं।' सीनियर जर्नलिस्ट अमिताभ अग्निहोत्री इसे सिर्फ बसपा की रैली नहीं बल्कि मायावती की सक्रिय राजनीति में वापसी मान रहे हैं। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 13 Feb 2026 5:06 am

शर्मनाक! अर्जेंटीना में परिजनों को खुद खोदनी पड़ी अपनों की कब्र, मानवता को शर्मसार करने वाले मामले पर मचा हड़कंप!

Argentina: अर्जेंटीना के गोडॉय क्रूज कब्रिस्तान में प्रशासन की लापरवाही ने मृतक के परिवार को खुद कब्र खोदने पर मजबूर कर दिया. इस घटना ने न केवल मानवता को शर्मसार किया है, बल्कि पीड़ित परिवार के दुख को और बढ़ा दिया है.

ज़ी न्यूज़ 13 Feb 2026 1:19 am

महाशिवरात्रि से पहले पशुपतिनाथ धाम सजा, 20 लाख श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारी; भारत समेत कई देशों से पहुंचे भक्त

Shivratri at Pashupatinath Temple: इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जा रहा है. इस त्योहार को मनाने के लिए इस बार 20 लाख श्रद्धालुओं के नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है.

ज़ी न्यूज़ 13 Feb 2026 12:27 am

DNA: ट्रंप-नेतन्याहू की मीटिंग में 3 बातें तय, ट्रंप ने 'मिडनाइट हैमर' की याद क्यों दिलाई?

Iran-US War:ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इजरायली प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात काफी अच्छी थी. ईरान से बातचीत जारी रहनी चाहिए ताकि ये देखा जा सके कि डील होगी या नहीं. लेकिन इसके बाद ट्रंप ने जो कहा, वो किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है. ट्रंप ने लिखा कि पिछली बार ईरान ने तय किया था कि उनके लिए डील न करना बेहतर होगा, और इसका जवाब उन्हें मिडनाइट हैमर से मिला था.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 11:42 pm

रूस फिर से अपना सकता है डॉलर! ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक और चीन को तगड़ा झटका, जानें क्या है पूरा मामला

Russia US Economic Partnership: ग्लोबल इकोनॉमी में बड़े उलटफेर की संभावना जताई जा रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार रूस फिर से डॉलर अपना सकता है. हालांकि ये खबर चीन के 'डी-डॉलरलाइजेशन' अभियान के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 11:12 pm

बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी को बड़ा झटका, अपने ही बूथ पर हारे पार्टी के चीफ शफीकुर रहमान

Bangladesh Election Result 2026: बांग्लादेश में लंबे वक्त के बाद चुनाव देखने को मिले हैं. यहां पर काउंटिंग के बीच जमात ए इस्लामी के चीफ शफीकुर रहमान ढाका अपने ही मतदान केंद्र पर हार गए हैं.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 10:32 pm

अमेरिका में AI गर्लफ्रेंड तो चीन में AI बॉयफ्रेंड; दोनों मुल्कों में एआई पार्टनर का अलग-अलग क्रेज क्यों?

Why AI girlfriends craze in US: AI पार्टनर को लेकर दुनिया भर में क्रेज बढ़ता जा रहा है. लेकिन हैरत की बात ये है कि अमेरिका में जहां AI गर्लफ्रेंड बनाने के लिए दीवानगी है. वहीं चीन में AI बॉयफ्रेंड का चलन तेजी से बढ़ रहा है. सवाल है कि दोनों मुल्कों में एआई पार्टनर का अलग-अलग क्रेज क्यों है?

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 9:34 pm

बांग्लादेश चुनाव की वोटिंग के बाद फूटा शेख हसीना का गुस्सा, युनूस को जमकर सुनाया, बोलीं-ये सोचा-समझा तमाशा था

Sheikh Hasina on Bangladesh Elections: बांग्लादेश में बुधवार को हुए चुनाव पर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान मतदाताओं की कमी दर्शाती है कि अंतरिम सरकार की चुनावी प्रक्रिया को जनता ने सिरे से नकार दिया है.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 8:23 pm

क्या रिटायर होने जा रहे नॉर्थ कोरिया के किम जोंग? पत्नी या रिश्तेदार नहीं, इनको मिलेगी सत्ता!

North Kore Kim Jong Un Heir: साउथ कोरिया की इंटेलिजेंस एजेंसी के मुताबिक उत्तर कोरिया के तानाशह किम जोंग उन ने अपने अगले उत्तराधिकारी के तौर पर अपनी बेटी किम जू ऐ को चुन लिया है.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 5:08 pm

बांग्लादेश चुनाव में हिंसा की छाया: खुलना में बीएनपी नेता की मौत, कई जिलों में बम धमाके

खुलना के एक वोटिंग सेंटर के बाहर कथित तौर पर BNP और जमात-ए-इस्लामी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हुई। इसी दौरान BNP नेता मोहिबुज्जमान कोच्चि की मौत हो गई।

देशबन्धु 12 Feb 2026 4:05 pm

विदेशों से बैठकर वोटिंग, बूथ के अलावा पोस्टल बैलेट से मतदान, बांग्लादेश में कैसे होती है काउंटिंग? कब बनेगी नई सरकार

बांग्लादेश में आज आम चुनाव हो रहे हैं. साल 2024 में हुए जेन-जी प्रदर्शन के बाद यह पहला चुनाव है. इस बार के चुनाव में देश ही नहीं दुनिया के तमाम हिस्सों में बैठे बांग्लादेश के लोग हिस्सा ले रहे हैं. देश में लोग अपने बूथ पर वोटिंग कर रहे है, तो विदेशों में बैठे लोगों ने पोस्टल वोटिंग बैलेट के माध्यम से चुनाव में हिस्सा लिया है.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 3:59 pm

Jellyfish UFO: सोवियत युग के दस्तावेजों में खुलासा! रूसी शहर के ऊपर देखा गया था 'जेलीफिश' जैसी UFO

Jellyfish UFO: सोवियत-युग के दस्तावेजों के सार्वजनिक होने से अनोखी रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट में 1980 के दशक में रूस के एक शहर के ऊपर 'जेलीफिश' जैसे दिखने वाले (UFO) का जिक्र है.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 3:52 pm

जाह्नवी कंडुला के परिवार को मिलेंगे 262 करोड़, US पुलिस की तेज रफ्तार गाड़ी की टक्कर से गई थी भारतीय छात्रा की जान

अमेरिका के सिएटल शहर में भारतीय छात्रा जाह्नवी कंडुला की मौत के मामले में उनके परिवार को करीब 262 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाएगा. यह समझौता शहर प्रशासन और परिवार के बीच हुआ है. जाह्नवी की मौत जनवरी 2023 में एक तेज रफ्तार पुलिस गाड़ी की टक्कर से हुई थी.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 1:49 pm

शेख हसीना के बगैर बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में दो वोट क्यों डलवाए जा रहे? गुलाबी बैलेट की कहानी

Bangladesh National Election 2026: बांग्लादेश में संसदीय चुनाव कराए जा रहे हैं.नई सरकार के लिए देश के 12 करोड़ से ज्यादा लोग वोट डालेंगे. युवाओं के विरोध प्रदर्शन के बाद यह पहला चुनाव है. तब शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा था.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 1:33 pm

ट्रंप का गुरूर चूर-चूर! दुनिया को टैरिफ के नाम पर डराने-धमकाने पर उनके ही सांसदों ने कर दी बगावत! विपक्ष के साथ मिलकर किया 'खेला'

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में डोनाल्ड ट्रंप की कनाडा पर लगाई गई टैरिफ नीति को लेकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर हुआ है. कई रिपब्लिकन सांसदों ने पार्टी लाइन तोड़ते हुए डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर टैरिफ खत्म करने वाला बिल पास कर दिया है. 219 बनाम 211 वोटों से पारित यह प्रस्ताव मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप के लिए सियासी चेतावनी माना जा रहा है. समझें पूरी कहानी.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 1:14 pm

नकली पुलिस, गांधी की फोटो और CBI ऑफिस... इस देश में मिला डिजिटल अरेस्ट का सबसे बड़ा अड्डा, भारतीयों को धोखा देने के लिए बनाया था ये प्लान

Digital Arrests: कंबोडिया में बड़े स्तर पर डिजिटल अरेस्ट के अड्डे का खुलासा हुआ है. यहां पर एक खाली पड़े कंपाउंड के अंदर नकली मुंबई पुलिस और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के लोगो वाले नकली साइनबोर्ड मिले हैं.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 12:21 pm

मिस्र की ‘वैली ऑफ किंग्स’ में मिला तमिल कनेक्शन! 2000 साल पुराने नामों ने खोला प्राचीन भारत-इजिप्ट ट्रेड का राज

Tamil Brahmi Inscription: मिस्र के मशहूर वैली ऑफ किंग्स में करीब 2,000 साल पुराने ऐसे लिखे हुए नाम मिले हैं, जो भारत से जुड़े हैं. इन नामों में ज्यादातर तमिल भाषा में हैं. इससे पता चलता है कि उस दौर में भारतीय व्यापारी मिस्र तक जाते थे. वहां काफी समय भी बिताते थे.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 12:10 pm

18 साल की लड़की ने पहले घर में मां-भाई को 'भूना' फिर स्कूल में ताबड़तोड़ फायरिंग करके 6 और को मारा, दिल दहला देने वाली कहानी का सच!

कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में टंबलर रिज शहर में 10 फरवरी 2026 को 18 साल की जेसी वैन रूटसेलार (ट्रांसजेंडर) ने पहले घर में अपनी 39 साल की मां जेनिफर स्ट्रांग और 11 साल के सौतेले भाई को गोली मार दी. फिर टंबलर रिज सेकेंडरी स्कूल जाकर एक महिला टीचर और पांच स्टूडेंट्स (12-13 साल के) को मार डाला. कुल 8 मौतें हुई हैं. जिसके बाद जेसी ने खुद को गोली मार ली.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 12:03 pm

अल्हम्दुलिल्लाह, अल्लाह ने हमें आज...जमात के 'अमीर' ने 15 साल बाद वोट डालते ही कर दिया बड़ा ऐलान- अगर चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हुए तो फैसला मानेंगे

बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के अमीर शफीकुर रहमान ने मतदान के बाद कहा कि अगर चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण हुआ तो उनकी पार्टी जनता का फैसला स्वीकार करेगी. 2014, 2018 और 2024 में जेल में रहने के कारण वोट न डाल पाने का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे “नए अध्याय की शुरुआत” बताया और सरकार बनाने का भरोसा जताया है.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 11:12 am

पश्चिम एशिया में बढ़ा अमेरिकी सैन्य जमावड़ा, कतर के बेस पर पैट्रियट मिसाइलों की तैनाती, ईरान भी हाई अलर्ट पर

हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से संकेत मिले हैं कि कतर स्थित अल-उदीद एयर बेस पर पैट्रियट मिसाइल सिस्टम को मोबाइल लॉन्चरों पर तैनात किया गया है।

देशबन्धु 12 Feb 2026 10:52 am

वोटिंग के दौरान BNP ने खोल दिए भारत के रिश्तों पर अपने पत्ते, खालिदा जिया का बेटा जीता तो क्या होंगे इंडिया से नए समीकरण?

Great opportunities to work with India: BNPकड़ी सुरक्षा के बीच बांग्लादेश में मतदान हो रहा है. अवामी लीग की गैरमौजूदगी और जमात-ए-इस्लामी की चुनौती ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है.BNP सत्ता की दौड़ में सबसे आगे मानी जा रही है. ऐसे में बहुत सारे सवाल लोगों के मन में है. क्या ढाका और दिल्ली के रिश्तों में नया मोड़ आने वाला है? बीएनपी ने अब वोटिंग के दौरान भारत के रिश्तों पर अपने पत्ते खोल दिए हैं.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 9:35 am

विपक्षी सांसदों ने घेरकर जस्टिस मिनिस्टर को पीट दिया, तुर्किये की संसद में घमाघम फाइट

संसद का सत्र चलता है तो तीखी नोकझोंक, हल्ला-गुल्ला तो होता है लेकिन तुर्किये में गजब हो गया. यहां की संसद में सांसद ने नवनियुक्त जस्टिस मिनिस्टर को घमाघम कई पंच मारे.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 9:19 am

बांग्लादेश में एयरपोर्ट पर 74 लाख टका के साथ पकड़े गए जमात लीडर, जैसे पूछताछ हुई आ गया हार्ट अटैक, चुनावी माहौल में कैश कांड की चर्चा

बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव से ठीक एक दिन पहले ठाकुरगांव जिले के जमात-ए-इस्लामी अमीर बेलाल उद्दीन प्रधान को सैदपुर एयरपोर्ट पर 74 लाख टका कैश के साथ डिटेन किया गया. पूछताछ के दौरान सीने में दर्द हुआ, हार्ट अटैक आ गया. उन्हें रंगपुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के CCU में भर्ती कराया गया है.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 8:40 am

सीरिया के राष्ट्रपति समेत 3 मंत्रियों को मारने की 5 साजिशें नाकाम- UN रिपोर्ट का बड़ा खुलासा, टॉप लीडरशिप पर टारगेटेड अटैक क्यों?

UN Report: संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले साल सीरिया के राष्ट्रपति, गृहमंत्री और विदेश मंत्री को मारने की 5 कोशिशों को नाकाम कियाा गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये साजिशें इस्लामिक स्टेट (आईएस) से जुड़े एक समूह ने रची थीं. इससे साफ है कि आईएस अब भी सीरिया में एक्टिव है और नई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 8:16 am

रस्सी से बंधे हाथ-पैर, शरीर पर जख्म के निशान; बांग्लादेश में मतदान के बीच मिली एक और हिंदू की लाश

Bangladesh Murder: बांग्लादेश में आज आम चुनावों के लिए वोटिंग की जा रही है. इसी बीच एक और हिंदू युवक की लाश बरामद हुई है. युवक के हाथ-पैर बंधे थे और शरीर पर गहरे जख्मों के निशान थे.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 7:53 am

शेख हसीना के बगैर आज बांग्लादेश में दो वोट क्यों डलवाए जा रहे? गुलाबी बैलेट की कहानी

Bangladesh National Election 2026: बांग्लादेश में संसदीय चुनाव कराए जा रहे हैं.नई सरकार के लिए देश के 12 करोड़ से ज्यादा लोग वोट डालेंगे. युवाओं के विरोध प्रदर्शन के बाद यह पहला चुनाव है. तब शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा था.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 7:36 am

बांग्लादेश में आम चुनाव आज, 12.77 करोड़ मतदाता करेंगे नई सरकार का चयन

बांग्लादेश में गुरुवार सुबह 7:30 बजे से 13वें आम चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया। कुल 300 संसदीय सीटों में से 299 पर वोट डाले जा रहे हैं

देशबन्धु 12 Feb 2026 7:10 am

25 साल बाद BNP सरकार के आसार, लेकिन बहुमत नहीं:कट्टरपंथी जमात भी बहुत पीछे नहीं; हिंदू वोटों के बिना सरकार नहीं

बांग्लादेश में चुनाव के पहले राजधानी ढाका करीब-करीब खाली है। सड़कों पर ट्रैफिक न के बराबर है। देशभर से बड़ी तादाद में लोग काम के लिए ढाका आते हैं। वे 12 फरवरी यानी आज होने वाली वोटिंग के लिए लौट रहे हैं। अंतरिम सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को 3 दिन की छुट्टी दे दी है। प्राइवेट वर्कर्स को 4 दिन की छुट्टी दी गई है। ट्रेनें खचाखच भरी हैं। लोग छतों पर बैठकर सफर कर रहे हैं। बांग्लादेश में दो दिन पहले चुनावी प्रचार खत्म हो चुका है। इस बार पूर्व PM खालिदा जिया की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP सरकार बनाने की रेस में सबसे आगे है। पार्टी ने पिछली बार 2001 में सरकार बनाई थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, BNP को कुल 300 में से 130-140 सीटें मिल सकती हैं। दूसरे नंबर पर जमात-ए-इस्लामी का गठबंधन है, जिसे 90 से 100 सीटें मिलने के आसार हैं। लगातार 4 बार से चुनाव जीत रही शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग इस बार मैदान में नहीं है। दैनिक भास्कर ने चुनाव के मुद्दों और पार्टियों की स्थिति पर आम लोगों के अलावा एक्सपर्ट्स से बात की। 9 घंटे वोटिंग, 13 फरवरी की सुबह तक रिजल्टचुनाव के लिए वोटिंग 12 फरवरी को सुबह 7:30 बजे शुरू होगी और शाम 4:30 बजे तक चलेगी। इसके बाद काउंटिंग शुरू हो जाएगी। बांग्लादेश में बैलेट पेपर से ही चुनाव होता है। इसलिए वोटों की गिनती में ज्यादा वक्त लगता है। बांग्लादेश इलेक्शन कमीशन के मुताबिक, 300 सीटों पर वोटिंग के लिए 64 जिलों में 42,761 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। बांग्लादेश में करीब 12.7 करोड़ वोटर हैं। पहली बार डाक से वोट देने की सुविधा दी गई है। इसका फायदा करीब 1.5 करोड़ वोटर्स को होगा, जो काम के लिए घर से दूर चले गए हैं। 350 सीटों वाली संसद में 300 सांसदों के लिए चुनाव होता है। बाकी 50 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हैं। रिजर्व सीटें चुनाव के नतीजों के हिसाब से मिलती हैं, जैसे अगर BNP को 120 सीटें मिलती हैं, तो उसे महिलाओं के लिए रिजर्व 20 सीटें मिलेंगी। अवामी लीग के न होने से BNP को फायदाबांग्लादेश में करीब 10% हिंदू आबादी हैं। हिंदू वोटर अवामी लीग के वोटर रहे हैं। अवामी लीग ने 2024 के चुनाव में 272 सीटें जीती थीं। उसे 30 से 40% वोट मिलते रहे हैं। इस बार ये वोट बैंक किसके हिस्से में जाएगा, यही सवाल है। अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध का फायदा BNP को होता दिख रहा है। हिंदू वोटर जमात से दूरी बनाते दिख रहे हैं क्योंकि जमात का नाम अल्पसंख्यकों पर हमले में आता रहा है। ऐसे में उनका झुकाव BNP की ओर दिख रहा है। ढाका के ढाकेश्वरी मंदिर में मिले डॉ. सुनीरमल रॉय कहते हैं, ‘हमें पता है कि जमात-ए-इस्लामी इस्लामिक पार्टी है। BNP लोकतांत्रिक पार्टी है।’ पेशे से बिजनेसमैन मोहम्मद शौकत अजीज BNP के ऑफिस के बाहर खड़े मिले। वे कहते हैं, ‘बांग्लादेश के लोगों ने आजादी के लिए मुक्ति संग्राम लड़ा था। वह संग्राम इसी मतदान के अधिकार और लोकतंत्र के लिए तो था। उम्मीद है कि चुनाव में यही भावना दिखेगी। लोग वोट के जरिए गलत का विरोध करेंगे। जो पार्टियां झूठ बयान देकर गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, लोग उन्हें जवाब देंगे।’ ऑटो रिक्शा चलाने वाले अनवर हुसैन कहते हैं, ‘चुनाव में अच्छा माहौल है। मुझे भरोसा है कि BNP बड़े अंतर से जीतेगी।’ एक्सपर्ट बोले- सबसे बड़ी फिक्र चुनाव निष्पक्ष होंगे या नहींढाका यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और पॉलिटिकल एक्सपर्ट सैफुल इस्लाम चौधरी कहते हैं, ‘चुनाव के नतीजे क्या होंगे, मुझे इससे ज्यादा फिक्र इस बात की है कि चुनाव निष्पक्ष होंगे या नहीं। लोग खुलकर वोट डाल पाएंगे या नहीं। एक रात पहले ही ढाका के बाहर कई घटनाएं हुई हैं।' 'कुछ न कुछ गड़बड़ करने की कोशिशें चल रही हैं। कैंडिडेट धमकी दे रहे हैं कि अगर वे नहीं जीते तो विरोधियों के घरों में तोड़फोड़ करेंगे। इसीलिए सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है। अगर लोगों को सुरक्षा का भरोसा नहीं होगा, तो वे डर की वजह से पोलिंग बूथ तक नहीं जाएंगे।’ चौधरी आगे कहते हैं, ‘अगर चुनाव में कोई गड़बड़ी नहीं हुई, तो कहना मुश्किल है कि कौन कितनी सीटें जीतेगा। मैं इस देश के लोगों के वोटिंग बिहेवियर को जानता हूं। यहां लोग कैंडिडेट की बजाय पार्टी को वोट देते हैं। अवामी लीग इस बार नहीं है। मुझे लगता है कि बहुत से लोग BNP को वोट देंगे। चुनाव में धांधली नहीं हुई, तो हो सकता है कि BNP सत्ता में आ जाए।’ हिंदू और अवामी लीग के वोट किसे वोट देंगे? चौधरी जवाब देते हैं, ‘अगर अवामी लीग के 10% वोटर भी मतदान करें और उनमें से 8 से 9% BNP को वोट दे दें, तो भी BNP आसानी से जीत सकती है। अगर वे जमात को वोट देंगें, तो जमात जीत सकती है। हालांकि, सैफुल इस्लाम चौधरी मानते हैं कि किसी भी पार्टी को बहुमत लायक 151 सीटें मिलती नहीं दिख रही हैं। वे कहते हैं, ‘इस स्थिति में शायद जमात और BNP के बीच पर्दे के पीछे समझौता हो सकता है। ये थोड़ा अजीब होगा, लेकिन दोनों मिलकर सरकार बना सकते हैं।’ ‘जनमत संग्रह महज दिखावा, संवैधानिक बदलाव होना तय’बांग्लादेश में चुनाव के साथ संविधान में सुधार के लिए जनमत संग्रह भी होना है। डॉ. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने खुलकर इसके पक्ष में वोट करने के लिए कहा है। चुनाव की कवरेज करते हुए हमने देखा कि सरकारी कर्मचारी भी जनमत संग्रह के पक्ष में वोट करने की अपील करते हुए दिखे। चौधरी कहते हैं, सरकार खुद पक्ष लेती है, तो विपक्ष के जीतने की संभावना नहीं रहती। इसलिए लग रहा है कि संविधान में बदलाव के पक्ष में ज्यादा वोट आएंगे। ‘जनमत संग्रह दिखावा लगता है। सरकार पहले ही संविधान में बदलाव के पक्ष में है। बांग्लादेश जैसे देश में सरकार की इच्छा के खिलाफ रिजल्ट आना बहुत मुश्किल है। मान लीजिए एक हजार वोटर हैं, तो सरकार 900 वोट ‘हां’ के वोट दिखा सकती है। यह एक तरह का खेल है, पैसों की बर्बादी है। सरकार चाहे तो अध्यादेश के जरिए भी फैसला कर सकती है। जनमत-संग्रह की जरूरत नहीं है।’ ‘धांधली हुई, तभी जमात सत्ता में आएगी’सीनियर जर्नलिस्ट मोन्जुरुल आलम पन्ना का मानना है कि पहले के मुकाबले जमात के वोटर और समर्थक बढ़े हैं। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि उन्हें अपने दम पर सरकार बनाने लायक समर्थन मिल गया है। अगर चुनाव निष्पक्ष हुए, तो BNP काफी आगे रहेगी। वे इतनी सीटें जीत सकते हैं कि सरकार बना सकें। अगर कोई हेरफेर हुआ, तो हालात अलग हो सकते हैं। ऐसे में जमात भी आगे आ सकती है। इस बार बांग्लादेश चुनाव में कौन से मुद्दे हावी रहे? मोन्जुरुल बताते हैं, ‘पार्टियों ने एक करोड़ नौकरियां, फैमिली कार्ड, 5 करोड़ पेड़ लगाने जैसे वादे किए हैं। चाहे BNP हो या जमात, उनके वादे सुनने में अच्छे लगते हैं। अनुभव बताता है कि सत्ता में आने के बाद पार्टियां मुश्किल से 10 से 20% वादे ही पूरे करती हैं। वादा करने में कोई खर्च नहीं होता। इसलिए इन घोषणाओं को ज्यादा महत्व नहीं देता। मेरे लिए ज्यादा अहम उनका पिछला रिकॉर्ड है।’ ‘5 अगस्त, 2024 को शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद 18 महीनों में BNP पर वसूली, बदले और दमन के आरोप लगे हैं। इससे उनकी छवि को नुकसान हुआ है। जमात ने सीधा टकराव कम किया है, हालांकि उन पर भी टोकन के जरिए चंदा वसूली और जमीन कब्जाने के आरोप हैं। फिर भी ऐसे मामले कम हैं।’ अवामी लीग के कोर वोटर्स क्या करेंगे? मोन्जुरुल का मानना है कि अवामी लीग के कुछ वोटर वोट डालने न जाएं, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि कोई भी नहीं जाएगा। अगर किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला तो क्या होगा?मोन्जुरुल कहते हैं, ‘त्रिशंकु संसद की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। मान लीजिए BNP को 125–130 सीटें मिलती हैं और जमात को 120–125। तब गठबंधन की राजनीति के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। अगर BNP दूसरी पार्टियों से समझौता नहीं कर पाती, तो उसे जमात पर निर्भर होना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में मिली-जुली सरकार भी बन सकती है। फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता।’ सीटें, जिन पर नजर रहेगी बांग्लादेश से ये स्टोरी भी पढ़ें1. हिफाजत-ए-इस्लाम के लीडर बोले- जमात इस्लामिक शासन नहीं लाई तो उससे भी लड़ेंगे बांग्लादेश का सबसे बड़ा इस्लामिक संगठन है हिफाजत-ए-इस्लाम। ये संगठन बांग्लादेश में इस्लामिक राज चाहता है। पूरे बांग्लादेश में हिफाजत का नेटवर्क है। इसलिए चुनाव के दौर में हिफाजत की अहमियत बढ़ जाती है। संगठन के लीडर अजीज-उल-हक कहते हैं अगर जमात देश में इस्लामिक शासन नहीं लाता है तो हम उसके भी खिलाफ हो जाएंगे। पढ़िए पूरा इंटरव्यू... 2. जमात के पहले हिंदू कैंडिडेट बोले- शरिया नहीं लाएंगे, पैसे बांटते कैमरे में कैद बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से ही माहौल हिंदुओं के खिलाफ है। शरिया कानून की वकालत करने वाली जमात की छवि हमेशा कट्टरपंथी पार्टी की रही है। हालांकि, इस बार जमात ने पहली बार चुनाव में हिंदू कैंडिडेट उतारा है। खुलना जिले की दाकोप सीट से लड़ रहे कृष्णा नंदी दावा करते हैं कि जमात बांग्लादेश में शरिया नहीं लाएगी। नंदी रैली में वोटरों को खुलेआम कैश बांटते कैमरे में भी कैद हो गए। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 12 Feb 2026 5:00 am

बांग्लादेश: महिला सशक्तिकरण पर जमात के वादों के पीछे छिपा रूढ़िवादी रुख

बांग्लादेश की कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के हालिया बयान और चुनावी घोषणापत्र में महिलाओं के प्रति समावेशी और सुरक्षात्मक छवि पेश की गई है, लेकिन उसकी लंबे समय से चली आ रही रूढ़िवादी सोच में कोई वास्तविक बदलाव नहीं दिखता। एक रिपोर्ट में बुधवार को यह दावा किया गया।

देशबन्धु 12 Feb 2026 12:33 am

DNA: दूसरा पाकिस्तान या अफगानिस्तान? बांग्लादेश की वोटिंग पर कैसे टिक गई है भारत की सुरक्षा

Bangladesh Election Latest News: क्या बांग्लादेश दूसरा पाकिस्तान या अफगानिस्तान बनने जा रहा है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि बांग्लादेश चुनाव में यूएस और पाकिस्तान हद से ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं और उसे अपने हिसाब से हांकना चाहते हैं.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 12:17 am

BNP हो या जमात, दोनों के टारगेट पर हिंदू, क्या बांग्लादेश में चुनाव हिंदुओं की बलि लेकर होंगे?

Bangladesh Hindu Crisis: बांग्लादेश में नई सरकार बनाने के लिए गुरुवार को वोट डाले जाएंगे. इन चुनाव में BNP और जमात, दो मुख्य पार्टियां हैं. लेकिन विडंबना ये है कि दोनों ही पार्टियां हिंदुओं की घोर दुश्मन हैं.

ज़ी न्यूज़ 12 Feb 2026 12:04 am

DNA: अमेरिका में नेतन्याहू, फ्रंटफुट पर खलीफा, ट्रंप-नेतन्याहू की मीटिंग में क्या तय हुआ? सीक्रेट मीटिंग की इनसाइड स्टोरी

US-Iran War:इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू जब इजरायल से अमेरिका के लिए निकले थे तो उन्होंने साफ साफ कहा था कि इस दौरे में सबसे प्रमुख ईरान का मुद्दा होगा. और वॉशिंगटन में उतरने के बाद नेतन्याहू ने सबसे पहले डॉनल्ड ट्रंप के उन दूतों से मुलाकात की, जो ओमान में ईरान से समझौते की बातचीत में अमेरिकी वार्ताकार थे.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 11:49 pm

टेक-ऑफ से पहले पायलट गिरफ्तार, परिवार को लालच देकर मासूमों को खरीदने का करता था काम; 8 साल से चला रहा था रैकेट

Brazil Pilot Got Arrested: ब्राजील से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आ रही है. यहां एक 60 साल के पायलट को विमान के अंदर से गिरफ्तार कर लिया गया. पायलट पर आरोप है कि वह गरीब परिवारों की लालच देकर उनके बच्चों को खरीदता था और उनका यौन शोषण करता था.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 9:13 pm

'भारत से रिश्ते जरूरी', कौन हैं जमात नेता शफीकुर रहमान, जिन्होंने कही यूनुस को चुभने वाली बात; कट्टरपंथ से रहा नाता

बांग्लादेश में होने वाले चुनाव में बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी की सीधी टक्कर होने जा रही है. चुनाव के ठीक पहले जमात-ए-इस्लामी पार्टी के प्रमुख शफ़ीकुर रहमान ने एक बड़ा बयान दिया और कहा कि हमारे देश का कोई नागरिक अल्पसंख्यक नहीं है.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 8:42 pm

प्लेटफॉर्म पर टाइम पर पहुंची बर्फ से जमी ट्रेन, इस देश की पंक्चुअलिटी देख दुनिया हैरान!

Viral Frozen Train Reel: जापान की ट्रेन का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है जिसमें दिखता है कि ट्रेन पूरी तरह बर्फ से जमी हुई है, खिड़कियां बर्फ से ढकी हुई हैं, लेकिन ऐसे में भी ट्रेन समय पर पहुंच रही है. चलिए देखते हैं ये खूबसूरत और अनोखा वीडियो.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 6:09 pm

‘उनके नेता का लहजा नहीं आया पसंद...’ फोन कॉल पर भड़के ट्रंप; स्विट्जरलैंड पर लगा दिया 39% टैरिफ

US-Switzerland Trade Row:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने स्विट्जरलैंड पर टैरिफ 30% से बढ़ाकर 39% इसलिए किया क्योंकि उन्हें एक स्विस नेता का उनसे बात करने का तरीका उन्हें पसंद नहीं आया. ट्रंप के अनुसार, स्विट्जरलैंड के साथ 42 अरब डॉलर के व्यापार घाटे और बातचीत के लहजे ने उनके फैसले को प्रभावित किया है.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 2:19 pm

ईरान में पहली बार राष्ट्रपति ने मानी अपनी गलती, बोले- 'हम जनता का दर्द समझते हैं,' क्या अब बंद होगी कार्रवाई?

Iran president apology protests: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने देशभर में हुए प्रदर्शनों और हिंसक कार्रवाई को लेकर माफी मांगते हुए कहा कि सरकार जनता से टकराव नहीं चाहती है. इसी बीच अमेरिका द्वारा एक और विमानवाहक पोत भेजने के संकेत और परमाणु बातचीत को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 2:14 pm

चीन की मोनोपॉली पर जापान का बड़ा वार! समंदर की 6000 मीटर गहराई से निकालेगा ‘सोने से भी कीमती’ कीचड़

Japan Deep Sea Rare Earth Mining: जापान ने चीन पर रेयर अर्थ मिनरल्स की निर्भरता खत्म करने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रहा है. देश अब गहरे समुद्र से सोने से भी कीमती माने जाने वाले दुर्लभ खनिज निकालने की तैयारी में है. इस योजना के तहत समुद्र की गहराई में मौजूद कीचड़ से रेयर अर्थ एलिमेंट निकाले जाएंगे. जिससे जापान की ऑटोमोबाइल और दूसरी इंडस्ट्री को सीधा फायदा मिल पाएगा.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 1:42 pm

बांग्लादेश में वोटिंग से कुछ घंटा पहले किसने कर दी 33,50,69,04,000 से ज्यादा की फंडिंग? क्या है पीछे की प्लानिंग, पूरे देश में पड़ने वाला है असर

बांग्लादेश में चुनाव से ठीक पहले करीब 3,350 करोड़ रुपए (370 मिलियन डॉलर) की बड़ी फंडिंग को मंजूरी मिली है. इस फंडिंग की टाइमिंग को लेकर चर्चाएं तेज हैं, क्योंकि इसका असर पूरे देश पर पड़ सकता है.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 1:08 pm

शहबाज का नाम लेकर ट्रंप ने कहा, 'मैंने 10 मिलियन लोगों की जान बचाई है', भारत-पाक संघर्ष पर फिर बोले US राष्ट्रपति

Donald Trump Claims: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव को उन्होंने रोका था. उनका कहना है कि अगर समय रहते दखल न दिया जाता तो हालात परमाणु युद्ध तक पहुंच सकते थे. ट्रंप का कहना है कि उन्होंने टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल कर दोनों देशों पर दबाव बनाया. वहीं भारत ने इन दावों को साफ तौर पर खारिज किया है.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 12:37 pm

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में बदलाव: व्हाइट हाउस ने अमेरिकी दालों को सूची से हटाया, जानें क्या है इसके मायने

व्हाइट हाउस की ओर से जारी पहले तथ्य पत्र में कहा गया था कि भारत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कुछ खाद्य व कृषि वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेगा या समाप्त करेगा। सूची में सूखे अनाज, लाल ज्वार, पेड़ के मेवे, फल और नट्स, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, शराब और वाइन जैसे उत्पाद शामिल बताए गए थे।

देशबन्धु 11 Feb 2026 12:24 pm

खत्म होगी H1B वीजा योजना? भारतीय टेक और आईटी सेक्टर में मची खलबली, जानिए बिल की पूरी सच्चाई

America h1b visa scrap bill: अमेरिका में H1B वीजा योजना खत्म करने के लिए रिपब्लिकन सांसद ग्रेग स्ट्यूबी ने नया बिल पेश किया है, जिसमें 2027 से हर साल H1B वीजा की संख्या शून्य करने का प्रस्ताव है. अगर यह कानून बना, तो इसका सबसे बड़ा असर भारतीय आईटी और टेक प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा, क्योंकि H1B वीजा पाने वालों में 70 प्रतिशत से ज्यादा भारतीय हैं.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 12:19 pm

क्या है एरिया 51? एलियंस और UFO की कहानियों से जुड़ा दुनिया का सबसे रहस्यमयी ठिकाना

Area 51 Real Truth: एरिया 51 का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में एलियंस और UFO की तस्वीर आ जाती है. फिल्मों और टीवी शो ने भी इसे रहस्य से भरी जगह के रूप में दिखाया है. हालांकि असल में यह जगह क्या है इसे लेकर अब काफी बातें साफ हो चुकी हैं. आज हम आपको उसी के बारे में बताएंगे.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 11:34 am

इंसान या फिर दानव! 55 साल से कर रहा था रेप, भारत समेत कई देशों के 89 नाबालिगों को बनाया निशाना; फ्रांस से आया खौफनाक मामला

Jacques Leveugle: फ्रांस के 79 वर्षीय पूर्व शिक्षक जैक्स लेव्यूगल पर 1967 से 2022 के बीच भारत समेत नौ देशों में 89 नाबालिगों के यौन शोषण का आरोप है. मामला यूएसबी ड्राइव से उजागर हुआ. आरोपी 2024 से हिरासत में है.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 11:10 am

चीन के शीर्ष सैन्य जनरलों से डगमगा रहा शी जिनपिंग का भरोसा

चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी में हाल ही में उजागर हुए भ्रष्टाचार घोटाले ने सेना को झकझोर दिया है. शी जिनपिंग के दो उप-प्रमुखों के खिलाफ जांच ने सशस्त्र सेनाओं में वफादारी, सत्ता और नियंत्रण की खींचतान को उजागर कर दिया है

देशबन्धु 11 Feb 2026 11:07 am

'वो आदमी खतरनाक था' -ट्रंप ने एपस्टीन को क्यों मार-ए-लागो से धक्के मारकर निकाला? व्हाइट हाउस का बड़ा खुलासा

White house on epstein: ट्रंप ने जैफरी एपस्टीन को अपने क्लब से इसलिए निकाला क्योंकि वह संदिग्ध था और ट्रंप ने उसके साथ अपने संबंध सालों पहले ही खत्म कर दिए थे. एपस्टीन फाइलों की सार्वजनिकता से प्रशासन की पारदर्शिता सामने आई है और जुड़े लोगों को जवाब देना जरूरी हो गया है.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 10:47 am

Zero Tariff लगा दे ट्रंप, तो भी... बांग्लादेश-US डील पर निश्चिंत रहे भारत, पूर्व उच्चायुक्त वीना सिकरी का बड़ा बयान

US-Bangladesh Trade Deal:बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीना सिकरी ने कहा कि बांग्लादेश-US व्यापार डील से भारत को चिंता नहीं करनी चाहिए. उनका कहना है कि जिन क्षेत्रों में शून्य टैरिफ मिलेगा, वहां भारत प्रतिस्पर्धी आपूर्ति कर सकता है.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 10:11 am

कनाडा के स्कूल में गोलीबारी: हमलावर समेत 10 लोगों की मौत

ब्रिटिश कोलंबिया में सामूहिक गोलीबारी से दहशत हाई स्कूल के अंदर छह शव मिले, पुलिस जांच में जुटी स्थानीय MLA ने जताया दुख, समुदाय सदमे में वसूली नहीं, कारणों की जांच जारी; पुलिस सतर्क ब्रिटिश कोलंबिया। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में हुई एक सामूहिक गोलीबारी में हमलावर समेत कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई है और कई लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने यह जानकारी दी है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, यह घटना मंगलवार (स्थानीय समय) को ब्रिटिश कोलंबिया के टंबलर रिज स्थित एक स्कूल में हुई। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) के मुताबिक, हाई स्कूल के अंदर छह लोग मृत पाए गए। एक अन्य व्यक्ति की अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। पुलिस के अनुसार संदिग्ध हमलावर भी मृत पाया गया। पुलिस का कहना है कि उसकी मौत खुद को पहुंचाई गई चोट के कारण हुई। यह जानकारी कनाडा के प्रमुख मीडिया संस्थान सीबीसी ने दी है। इसके अलावा, एक घर से भी दो लोगों के शव मिले हैं। पुलिस का मानना है कि इस घर का संबंध इसी गोलीबारी की घटना से है। घटना में घायल सभी लोगों को प्राथमिक उपचार देने के बाद अस्पताल भेज दिया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। एमएलए लैरी न्यूफेल्ड ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है। एक्स पर एक पोस्ट में, उन्होंने कहा, टंबलर रिज सेकेंडरी स्कूल में हुई दुखद और बहुत परेशान करने वाली घटना के बाद मैं टंबलर रिज की स्थिति पर करीब से नजर रख रहा हूं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने कन्फर्म किया है कि कई लोग मारे गए हैं। उन्होंने आगे बताया कि एक्टिव शूटर अलर्ट हटा लिया गया है, लेकिन जांच जारी है। न्यूफेल्ड ने आगे कहा, मैं फर्स्ट रेस्पॉन्डर्स, स्कूल स्टाफ और लोकल अधिकारियों को इस बहुत मुश्किल हालात में उनके तेज़ और प्रोफेशनल रिस्पॉन्स के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। मेरी दुआएं स्टूडेंट्स, परिवारों, टीचर्स और पूरी टम्बलर रिज कम्युनिटी के साथ हैं। यह एक छोटा और आपस में जुड़ा हुआ शहर है, जहां इस तरह की घटना का असर हर कोई महसूस करता है। उन्होंने आगे कहा, जिन लोगों पर असर पड़ा है, उनके सम्मान में, यह ज़रूरी है कि हम पुलिस को अपनी जांच पूरी करने और डिटेल्स कन्फर्म करने के लिए ज़रूरी समय दें। जैसे ही वेरिफाइड जानकारी मिलेगी, मैं उसे शेयर करता रहूंगा। एमएलए ने यह भी कहा कि अगर घटना के बाद किसी को मानसिक या भावनात्मक कठिनाई महसूस हो रही है तो वे उनसे संपर्क कर सकते हैं। इस बीच पुलिस ने कहा है कि गोलीबारी के कारणों की जांच अभी चल रही है। संदिग्ध के बारे में फिलहाल कोई अतिरिक्त जानकारी जारी नहीं की गई है। आगे की डिटेल्स का इंतजार है।

देशबन्धु 11 Feb 2026 10:00 am

'मेरा बेटा मारा गया, इसलिए राष्ट्रपति चुनावी मैदान में उतरा…', गोली से मारे गए नेता के पिता की एंट्री, भावनाओं ने बदला कोलंबिया का सियासी खेल

Miguel Uribe father enters Colombia presidential race: कोलंबिया के राष्ट्रपति चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मोड़ आया है. गोली से मारे गए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मिगुएल उरीबे तुर्बे के पिता मिगुएल उरीबे लोंडोनो ने खुद चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि वह अपने बेटे की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने मैदान में उतरे हैं.जिसके बादभावनाओं ने कोलंबिया का सियासी खेल बदल दिया है.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 9:51 am

ट्रेड वार के बीच ट्रंप की नई चेतावनी, नहीं खुलने देंगे अमेरिका-कनाडा ब्रिज

करीब ढाई किलोमीटर लंबे गार्डी होवे इंटरनेशनल ब्रिज का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। यह पुल डेट्राइट (मिशिगन) को विंडसर (ओंटारियो) से जोड़ेगा और दोनों देशों के बीच व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इस परियोजना की लागत लगभग 4.7 अरब डॉलर बताई जा रही है।

देशबन्धु 11 Feb 2026 9:37 am

रूसी ऑयल पर क्या है भारत वादा? US के दावे पर उठे सवाल; व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट ने ही ट्रंप को झुठलाया

India-US Trade Deal: व्हाइट हाउस ने अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर पहली आधिकारिक फैक्ट शीट जारी की. जानकारी के अनुसार, इसमें वाणिज्यिक और डिजिटल उत्पादों पर पारस्परिक टैरिफ कटौती, भारत का डिजिटल सेवा कर हटाने का निर्णय और प्रौद्योगिकी सहयोग शामिल है. हालांकि, शीट में रूस से तेल की खरीद बंद करने पर कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 9:13 am

बदल गए US के सुर! PoK और अक्साई चीन को भारत का हिस्सा बताने वाला मैप भी डिलीट किया

US removes India map showing pok aksai chin: अमेरिका ने अपने ट्रेड डील पोस्ट से भारत का नक्शा हटा दिया जिसमें पीओके और अक्साई चिन भारत में दिखाए गए थे. ये कदम भारत की आपत्ति के बाद विवाद को शांत करने के लिए उठाया गया था.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 8:54 am

बांग्लादेश में सत्ता में आए बिना ही जमात का खूनी खेल शुरू! घर में घुसकर BNP नेता की निकाल ली आंख, खबर सुनते ही मां की मौत

बांग्लादेश के बोगुरा जिले में BNP और जमात समर्थकों के बीच हिंसक झड़प में छह लोग घायल हो गए. BNP का आरोप है कि जमात-शिबिर कार्यकर्ताओं ने एक स्थानीय नेता की आंख निकाल ली है. जमात का ये रूप उस समय है, जब बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव है. बेटे की हालत जैसे ही मां ने सुनी उनका निधन हो गया.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 8:49 am

कनाडा के स्कूल में अंधाधुंध फायरिंग, शूटर समेत 10 की मौत, पूरे शहर में लगा लॉकडाउन

Canada School Shooting: कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया के पीस रीजन में मंगलवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई. यहां टम्बलर रिज सेकेंडरी स्कूल में अचानक गोलीबारी शुरू हो गई. इस हमले में 10 लोगों की जान चली गई. रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस ने इस घटना की पुष्टि की है.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 8:18 am

बांग्लादेश बनेगा इस्लामी राज या लोकतंत्र की सांस बचेगी? 12 फरवरी को शेख हसीना के देश की अग्निपरीक्षा; छात्र क्रांति से चुनाव के सफर तक पूरी कहानी!

Bangladesh holds its first election without Hasina:12 फरवरी को सुबह जब बांग्लादेश के लोग वोट डालने निकलेंगे, तो वो सिर्फ एक सरकार चुनने नहीं जा रहे होंगे, बल्कि ये तय कर रहे होंगे कि देश का भविष्य कैसा होगा. यानीशेख हसीना के देश का कल भविष्य तय होने वाला है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बांग्लादेश मेंपुरानी सियासत की वापसी होगी या फिर इस्लामी रंग में नया दौर आएगा? तो इस मौके पर जानते हैं 2024 छात्र क्रांति से लेकर 2026 चुनाव तक के सफर की पूरी कहानी.

ज़ी न्यूज़ 11 Feb 2026 8:04 am