Iran America Tension: ईरान और अमेरिका के बीच लगातार तनाव बढ़ रहा है. इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि मेरा मैसेज है कि आप वही गलती दोबारा न करें जो आपने जून में की थी. इसके अलावा क्या कुछ कहा जानते हैं.
ईरान प्रदर्शन के बीच ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- ‘रुक रही हैं हत्याएं, अब नहीं दी जाएगी किसी को फांसी’
Trump Iran Statement: ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि ईरान में हत्याएं अब रुक रही हैं. फिलहाल किसी भी तरह की फांसी देने की कोई योजना नहीं है. यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं.
एक बार मैं दिल्ली में अपने दोस्तों के साथ एक कॉमन फ्रेंड के घर पार्टी में गया था। कुछ देर में एक लड़का मेरे पास आया और पूछा- ‘तुम नेपाली हो?’ मैंने बोला- ‘नहीं, मैं नॉर्थ ईस्ट से हूं।’ ये सुनते ही कहने लगा- ‘अच्छा… तुम लोग तो कुत्ता, बिल्ली, बंदर सब खाते हो न?’ उसकी बात सुनते ही वहां मौजूद सभी लोग हंसने लगे… मैं कोई जवाब नहीं दे पाया। कुछ देर बाद फिर एक लड़के ने पूछा- ‘तुम्हारे यहां तो ओपन सेक्स होता है न? लड़कियां होटल में काम करती हैं। कोई जान पहचान वाली लड़की हो तो मिलवाओ। वो तो मसाज भी अच्छा करती हैं। पूरी रात का कितना पैसा लेती हैं?’ वहां मौजूद सभी लोग दिलचस्पी से ये बातें सुन रहे थे। ये कोई पहली बार नहीं था, इसके पहले भी मेरी कई महिला दोस्तों के साथ ऐसा हो चुका है। दिल्ली के राह चलते लोग लड़कियों की कमर में हाथ डालकर पूछते हैं- ’कितने में चलोगी चिंकी?’ ब्लैकबोर्ड में इस बार स्याह कहानी नॉर्थ ईस्ट के लोगों की जो पढ़ाई और नौकरी के लिए अपने घर से दूर, दूसरे शहरों में रह रहे हैं और शक्ल-सूरत की वजह से नस्लभेद का शिकार होते हैं। त्रिपुरा के जॉर्ज चकमा 2014 में दिल्ली आए थे। फिलहाल, इंटरनेशनल स्टडीज में पीएचडी के चौथे साल के छात्र हैं। जॉर्ज बताते हैं कि ‘मेरे गांव में अब भी आंदोलन चल रहा है। उत्तराखंड में त्रिपुरा के एंजेल की हत्या के बाद से मेरे पेरेंट्स परेशान रहते हैं। हर रोज मेरी सुरक्षा को लेकर फोन करते हैं और कहते हैं कि सिर्फ जरूरी काम के लिए घर से बाहर निकलो। आखिर हम लोगों ने ऐसा क्या गुनाह किया है कि घर से बाहर न निकलें। यहां पढ़ने आए हैं और पढ़ना कोई गुनाह तो नहीं है?’ क्या एंजेल की तरह आपके साथ भी कभी नस्लीय हिंसा हुई? ‘हम नॉर्थ ईस्ट वालों के साथ ये सब बहुत सलीके से होता है। ऑटो वाले शक्ल देखकर ज्यादा पैसे मांगते हैं। किराए का कमरा लेने जाओ तो सबसे पहले पूछते हैं- क्या-क्या खाते हो? हमारे घर में कुत्ता-बिल्ली तो नहीं बनाओगे? पार्टी करते हो? ड्रग्स लेते हो? आखिर में पांच हजार का कमरा दस हजार में देते हैं। दुकानदार भी हमें महंगा सामान देते हैं।’ जॉर्ज खीझते हुए कहते हैं- ‘बार-बार ये साबित करना पड़ता है कि हम भारतीय हैं। एक बार मैं ताजमहल देखने गया। वहां आधार कार्ड दिखाने पर भी स्टाफ को यकीन नहीं हुआ कि मैं भारतीय हूं। वे बार-बार पूछते रहे- नेपाल से हो? वो मेरी बात पर यकीन ही नहीं कर रहे थे। विदेशियों की टिकट अलग होती है, इसलिए वो चाहते थे कि मैं ज्यादा पैसे दूं।' अपनी यूनिवर्सिटी के बारे में बताते हुए जॉर्ज कहते हैं कि हमारी यूनिवर्सिटी में भी लोग नॉर्थ-ईस्ट के बारे में नहीं जानते। एक बार किसी ने पूछा कहां से हो? मैंने कहा त्रिपुरा से हूं तो कहने लगे वही त्रिपुरा जो साउथ में है। जब मैंने बताया नॉर्थ ईस्ट तो कहने लगे तुम्हारे यहां बर्फ पड़ती है क्या? क्या खाते हो तुम लोग? वीडियो में देखा है कि तुम लोग कुत्ता, बंदर, यहां तक कि इंसान भी खा लेते हो।’ आप सोचिए ये सवाल पीएचडी स्टूडेंट पूछते हैं। कुछ देर चुप रहकर जॉर्ज कहते हैं कि सबसे ज्यादा तकलीफदेह बातें तो वो होती हैं जो हमारे यहां की लड़कियों के बारे में कही जाती हैं। लड़कों को लगता है कि नॉर्थ-ईस्ट की लड़कियां कुछ भी करने को राजी हो जाती हैं। उनके चरित्र पर सवाल उठाते हैं। रेट पूछते हैं, छूते हैं, बिना पूछे कमरे में घुस जाते हैं। यह आम है।’ वे कहते हैं, ‘हमारी अंग्रेजी और फैशन सेंस अच्छा होता है, इसलिए हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में काम मिलता है। बस इसलिए लोग मान लेते हैं कि हम होटल में ही काम करते हैं और वे हमें ‘एग्जॉटिक’ समझते हैं।’ जॉर्ज से मिलने के बाद मैं दिल्ली में रह रहे मणिपुर के काकचिंग जिले के गांव सौरा के निवासी कबीर अहमद से मिलने पहुंची। कबीर के सामने मैंने जैसे ही नस्लीय हिंसा का जिक्र किया, वो दुखी होकर आपबीती सुनाने लगे। कबीर कहते हैं, ‘दिल्ली के महारानी बाग की बात है। एक शाम मैं अपने चचेरे भाई के साथ घर जा रहा था। अचानक एक कुत्ते का पिल्ला हमारे पीछे-पीछे चलने लगा। हमने घर पहुंचकर जल्दी से दरवाजा बंद कर लिया। वो हमारे दरवाजे पर ही बैठकर रोने लगा और दरवाजे पर पंजे मारता रहा। उसकी आवाज सुनकर कुछ ही देर में पूरा मोहल्ला हमारे दरवाजे पर खड़ा हो गया। उन्हें शक हुआ कि हम कुत्ता खाते हैं। हम बार-बार कहते रहे कि कुत्ता नहीं खाते हैं, लेकिन वो लोग चिल्लाते रहे कि तुम नॉर्थ ईस्ट के हो, झूठ बोल रहे हो।’ जब मैंने बताया, ‘मैं मुस्लिम हूं। मुसलमान कुत्ता नहीं खाते। तब जाकर भीड़ शांत हुई, लेकिन जाते हुए वो लोग मुझे धमकी देकर गए कि हमारे मोहल्ले में ये सब मत करना, वरना बचोगे नहीं।’ कबीर कहते हैं, ‘कुछ महीनों बाद मैंने वह घर छोड़ दिया।’ कबीर अहमद 2013 में मणिपुर से दिल्ली आए। दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के बाद वह अब एमए कर रहे हैं। उनका परिवार बॉर्डर इलाके में रहता है और पिता मणिपुर राइफल्स में हैं। कबीर कहते हैं, ‘दिल्ली आते वक्त पापा ने कहा था- अगर कभी बहस हो जाए, तो पहले सुरक्षित निकलने का रास्ता देखना।’ वह कहते हैं, ‘मेरी मुश्किल दोहरी है। मैं मुस्लिम भी हूं और नॉर्थ ईस्ट से भी। कई बार अपना नाम बताने से डर लगता है।’ कबीर के मुताबिक, उन्हें अंदाजा नहीं था कि राजधानी में उन्हें ‘चिंकी’, ‘मोमो’, ‘नेपाली’, ‘नूडल्स’ और ‘चींचींचूंचूं’ जैसे शब्दों से पुकारा जाएगा। उनके अनुसार, दिल्ली में रह रहे करीब 30 हजार नॉर्थ-ईस्ट के लोग रोज नस्लवादी भेदभाव झेलते हैं। दिल्ली में किस तरह की दिक्कतें आती हैं? ‘दिक्कत कहां नहीं है। कमरा जल्दी नहीं मिलता और अगर मिल भी जाए, तो हमारी शक्ल देखकर पांच हजार का कमरा दस हजार में दिया जाता है।’ वह महारानी बाग का एक अनुभव बताते हैं, ‘किराए का कमरा पूछने गया था। कुर्ता-पायजामा पहना था। एक घर की घंटी बजाते ही सामने वाले ने चिल्लाकर कहा- इस गली में क्यों आए हो? दोबारा आए तो काटकर फेंक दूंगा।’ कबीर कहते हैं, ‘जब तक घर के अंदर या अपने नॉर्थ ईस्ट के लोगों के बीच हूं, सब ठीक रहता है। बाहर निकलते ही बेइज्जती शुरू हो जाती है।’ वह बताते हैं कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हिंदी समझ नहीं आती थी। ‘टीचर हिंदी में पढ़ाती थीं, इसलिए घर आकर कजिन से दोबारा पढ़ता था।’ डीयू के दिनों को याद करते हुए कबीर अफसोस भरे लहजे में कहते हैं, ‘ग्रेजुएशन के दौरान एक दिन मेरे ही क्लासमेट ने कहा- ‘ऐ मोमो, चिंकी। तुम लोग तो कुत्ता-बंदर सब खा लेते हो न?’ उस दिन बहुत धक्का लगा। उम्मीद नहीं थी कि दोस्त भी ऐसा बोलेगा।’ कबीर बताते हैं कि नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं को लेकर भी भद्दी टिप्पणियां आम हैं। ‘पूछते हैं- तुम्हारे यहां फ्री सेक्स होता है न? कहते हैं हमारी लड़कियां सेक्स वर्कर होती हैं। उन्हें नहीं पता कि मणिपुर महिला-प्रधान समाज है, जहां लड़कियां दिन-रात सुरक्षित घूम सकती हैं।’ वह लाजपत नगर की एक घटना याद करते हैं। ‘मैं एक दोस्त और एक महिला मित्र के साथ मार्केट में था। एक आदमी ने मेरी दोस्त को छेड़ते हुए कहा-‘ऐ चाइनीज, चिंकचांकमाऊंमाऊं।’ दोस्त ने रोका तो उसने थप्पड़ मार दिया। मैंने विरोध किया तो भीड़ जमा हो गई और हमें चोर-चोर कहकर दौड़ाने लगी। उस दिन किसी तरह जान बचाई।’ कबीर लाजपत नगर की एक और घटना बताते हैं। ‘एक दिन मैं दोस्त के साथ मार्केट जा रहा था। एक कम उम्र का लड़का कपड़े बेच रहा था। हमें देखकर चिल्लाने लगा- ‘ऐ मोमो, कपड़ा खरीदेगा क्या? ऐ मोमो, मोमो?’ मुझे गुस्सा आ गया। मैंने पूछा- किसे मोमो बोल रहा है? बात बढ़ी तो भीड़ जमा हो गई। हालात बिगड़ते देख मैं वहां से निकल गया।’ कबीर कहते हैं, ‘कुछ दिन पहले विजयनगर में नॉर्थ ईस्ट के एक दुकानदार को सिर्फ इस शक में पीट दिया गया कि उसकी दुकान में बीफ है। न जांच हुई, न कोई बात सुनी गई- बस भीड़ टूट पड़ी।’ ‘यहां हमारी पहचान ही कई बार हमारी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है।’ कबीर कहते हैं, ‘यह तो कुछ भी नहीं है। यहां हालात ऐसे हैं कि किसी कुत्ते को कुछ कह दो, तो जान पर बन आती है।’ ‘एक दिन मेरा भाई पार्क में टहल रहा था। एक आदमी अपने कुत्ते को घुमा रहा था। कुत्ता उसे काटने दौड़ा, तो भाई ने डर के मारे पांव से भगाया। उस पर कुत्ते का मालिक भड़क गया। उसने लोगों को इकट्ठा किया और भाई की पिटाई कर दी। उसी दिन उसे मोतीबाग का घर छोड़ना पड़ा।’ कबीर बताते हैं, ‘मैं एक जगह नौकरी करता हूं। हाल ही में ऑफिस ने पूरे दिन के लिए टैक्सी दी थी। ड्राइवर को बुलाया तो उसने कहा कि उसे सिर्फ एक जगह रुकने का आदेश है। मैंने कहा- ऑफिस ने पूरे दिन का भुगतान किया है, आप ऑफिस से बात कर लीजिए।’ कबीर के मुताबिक, ड्राइवर ने फोन पर ही उन पर चिल्लाते हुए कहा- ‘यह चिंकी, चाउमिन, नेपाली क्या बोल रहा है?’ फोन रखने के बाद उसने कहा, ‘मैं हरियाणा से हूं।’ उस दिन उससे काफी बहस हुई। कबीर बताते हैं, ‘मोहल्ले में तो कुछ लोगों की हिम्मत इतनी होती है कि वे हमारी आंखों की पलकें खींचकर कहते हैं- 'ऐ छोटी आंख, चिंकी इधर आ।' तब लगता है कि हमारी पहचान ही उनके लिए मजाक बन गई है।’ वह हाल की एक घटना का जिक्र करते हैं- ‘देहरादून में नस्लीय टिप्पणी के बाद त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। उसके पिता बीएसएफ में हैं। सोचिए, एक जवान के बेटे के साथ क्या हुआ?’ इस घटना के बाद उनके माता-पिता डर गए। कबीर बताते हैं, ‘पापा का फोन आया- कहां हो? घर लौट आओ। दिल्ली में रहने की जरूरत नहीं है। डर लगता है कि कहीं तुम्हें भी कुछ न हो जाए।’ सोचिए, हमारे माता-पिता किस डर में जीते हैं। इन बातों का आप पर क्या असर हुआ? कबीर कहते हैं, ‘लोग मुझे 'मोमो' कहकर चिढ़ाते थे। मुझे मोमोज पसंद थे, लेकिन अब खाना छोड़ दिया है। लगता है कोई ठेले के पास देख लेगा, तो फिर मजाक उड़ाएगा।’ हाथ जोड़कर वह कहते हैं, ‘हम कभी किसी से यह नहीं पूछते कि वह क्या खाता है। बस यही चाहते हैं कि हमारे खाने का भी सम्मान किया जाए।’ आंखों में आंसू भरे हुए कबीर पूछते हैं, ‘कहां है 'इंडिया एक'? मेरे पापा और भाई इस देश के लिए काम करते हैं, लेकिन यहां हमें अपनाया नहीं जाता।’ फिलहाल कबीर सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस की कोचिंग ले रहे हैं। क्या आप इस देश में स्वीकार किए गए हैं? वह कहते हैं, ‘मुझे शर्म आती है कि मुझे एक भारतीय के सामने खुद को भारतीय साबित करना पड़ रहा है। कई बार समझ नहीं आता- घर लौट जाऊं, खेत में काम करूं या कहां जाऊं। जितना भी कर लूं, यह देश हमें अपना नहीं मानता।’ क्या लगता है कि भारत आपका नहीं है? कबीर कुछ पल चुप रहते हैं, फिर कहते हैं, ‘अगर जवाब दूंगा, तो देशद्रोही कहलाऊंगा।’ थोड़ी देर बाद जोड़ते हैं, ‘घर के अंदर सब ठीक लगता है, लेकिन बाहर निकलते ही परेशानी शुरू हो जाती है। इसी डर से नॉर्थ ईस्ट के लोगों ने अपने संगठन बनाए हैं और हम एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं।’ नॉर्थ ईस्ट से आई लड़कियों की मुश्किलें और भी ज्यादा हैं। 25 साल की सोजोम अरुणाचल प्रदेश के नेफ्रा जिले की हैं। 2023 में हायर स्टडीज के लिए जेएनयू आईं और फिलहाल दिल्ली के विजयनगर में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं। सोजोम कहती हैं, ‘मम्मी-पापा दोनों नौकरी करते हैं। मम्मी ने जेएनयू की पढ़ाई के बारे में सुना था, इसलिए मुझे यहां भेजा। दिल्ली आने के बाद मैं ज्यादातर जेएनयू परिसर तक ही सीमित रही। वहां लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, फिर भी कई बार लगता है कि मैं यहां की नहीं हूं।’ वह बताती हैं,‘एक दिन लाइब्रेरी में बैठी थी। मेरा एक क्लासमेट एक लड़की को लेकर गंदी बातें करने लगा। मैंने टोका और कहा कि मुझे ऐसी बातें सुननी पसंद नहीं। इस पर वह बोला- ‘मोमो, यहां से निकल।’ पहले लगा मजाक है, लेकिन उसने दोबारा वही कहा। मैं घबरा गई। जेएनयू ही वह जगह थी, जहां खुद को सुरक्षित समझती थी, और वहीं यह हुआ। उस रात कमरे में जाकर नींद नहीं आई। किताब खोली, फोन देखा, लेकिन दिमाग में बस ‘मोमो, मोमो’ गूंजता रहा। अगले दिन शिकायत करने की सोची। वाटर कूलर से पानी लेने गई तो वह भी वहीं मिला। मैंने कहा कि तुम्हारी चेयरपर्सन से शिकायत करने जा रही हूं। वह मेरे पीछे दौड़ा, मैं भाग रही थी। तभी एक साथी ने बीच-बचाव किया, तब मामला रुका। बाद में मैंने अपने कम्युनिटी के व्हाट्सएप ग्रुप में बताया। जवाब मिला-गलत हुआ है, लेकिन छोड़ दो। ‘नॉर्थ ईस्ट को मोमो’ कहे जाने की शिकायत कोई नहीं सुनता।’ सोजोम कहती हैं, ‘जब जेएनयू जैसी जगह पर यह हाल है, तो बाहर की स्थिति समझी जा सकती है। सड़क पर चलते वक्त हमेशा डर लगा रहता है कि कोई मुझे 'मोमो' या 'चिंकी' न कह दे। कुछ लोग कहते हैं कि 'मोमो' प्यार से बोला जाता है, लेकिन हमारे लिए यह नस्लभेदी शब्द है। अगर आप संवेदनशील हैं, तो कृपया इसे हमारे लिए इस्तेमाल न करें।’ क्या नॉर्थ ईस्ट वालों के लिए डबल मीनिंग बातें होती हैं? सोजोम कहती हैं,‘कुछ दिन पहले मेट्रो में दो लड़कों ने मेरी ओर देखकर कहा- 'येलो लाइन पर तो बहुत सारी चाइनीज और जापानी लड़कियां मिलती हैं।' मुझे पता था कि वे मुझे निशाना बना रहे हैं, लेकिन शिकायत का कोई सबूत नहीं था। यहां लड़कों को लगता है कि हमारा पहनावा अलग है, हम शॉर्ट स्कर्ट पहनते हैं, इसलिए हम सेक्स वर्कर हैं। वे कभी नॉर्थ ईस्ट जाकर देखें। वहां के लोग फैशनेबल भी हैं और पढ़े-लिखे भी। हो सकता है हमारा पहनावा अलग हो, लेकिन क्या कहीं लिखा है कि पढ़ाई के साथ फैशन नहीं हो सकता? हमें लगा था दिल्ली मेट्रो सिटी है, सब ठीक होगा, लेकिन हम गलत थे।’ क्लास में भी लोग अक्सर उल्टे-सीधे सवाल पूछते हैं, जैसे- 'तुम्हारे यहां फ्री सेक्स होता है?' वह कहती हैं, ‘लोग मेरे खाने को अजीब कहते हैं। अगर मैं दिल्ली आकर छोले-भटूरे, इडली-डोसा खा सकती हूं, तो मेरा खाना अजीब क्यों है? आपको नहीं खाना मत खाइए, लेकिन अजीब क्यों कहना?’ सोजोम बताती हैं,‘नस्लीय हमला सिर्फ सड़क पर नहीं, सोशल मीडिया पर भी होता है। कुछ महीने पहले राजनीतिक बहस के बाद एक लड़की ने मुझे डीएम में ‘मोमो’, ‘चिंकी’, ‘चाइनीज’ कहकर धमकी दी- 'रुको, सबक सिखाती हूं।' उसने मेरी 12–13 तस्वीरें अपलोड कर अपमानजनक टिप्पणियां कीं। मैं बहुत डर गई। मां से कहा कि पुलिस में शिकायत करना चाहती हूं, लेकिन मां ने मना किया- डर था कि वह लड़की कुछ लड़कों के साथ मुझे नुकसान पहुंचा सकती है। मैं बस अपनी मां को परेशान नहीं करना चाहती। पढ़ाई के लिए आई हूं। कम से कम लोग नॉर्थ ईस्ट के उन लोगों को जानें, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में अपना खून बहाया। क्या इन घटनाओं का आप पर मानसिक असर पड़ता है? सोजोम कहती हैं,‘जब कुछ गलत होता है, तो बार-बार वही बातें दिमाग में चलती हैं और परेशान करती हैं। खुद से कहती हूं- चलो, जाने दो। फोन देखती हूं, किताब खोलती हूं, फिर भी कई दिन किसी चीज में मन नहीं लगता। एंजेल चकमा की देहरादून में हत्या के बाद दोस्तों ने समझाया- बाहर ज्यादा मत बोलना, गलत चीजें नजरअंदाज करना। पेरेंट्स भी यही कहते हैं। लेकिन कई बार लगता है कि चीखूं- मैं भी भारतीय हूं। बेजवाड़ा कमेटी ने नस्लभेदी शब्दों का जिक्र किया, पर कौन मानता है? आज भी हमें ‘चींचींचूंचूं’ कहा जाता है। कार्रवाई कौन करेगा? पुलिस ने एंजेल चकमा मामले में कहा कि यह नस्लवाद नहीं था। हम शांतिप्रिय हैं, किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते, फिर भी बार-बार साबित करना पड़ता है कि हम इस देश के हैं।’ 1- ब्लैकबोर्ड-पापा को फांसी दिलाकर आत्महत्या कर लूंगी:कहते थे ब्राह्मण होकर नीच से शादी कैसे की, गोली मारकर बोले- अब मैं बहुत खुश हूं ‘हम दोनों की लव मैरिज को तीन महीने बीत चुके थे। लग रहा था कि अब घर वाले शांत हो गए हैं और हमारी जिंदगी से उन्हें कोई लेना-देना नहीं रह गया है, लेकिन 5 अगस्त 2025 की शाम, करीब 5 बजे, सब कुछ बदल गया।' पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-तलाक हुआ तो अनजान डोनर से स्पर्म लेकर मां बनी:विदेश ले जाकर पति ने घर से निकाला, बिना पति के महिलाओं की कहानियां मेरी चीख सुनकर पड़ोसी जमा हो गए। बिस्तर से उठी तो देखा- मेरी सास ही तौलिए से मेरा मुंह दबा रही थीं। वह जोर-जोर से कह रही थीं- तूने मेरे बेटे को खा लिया। तू मांगलिक है। कुलच्छन है। अब अपने बच्चे को लेकर यहां से भाग जा, नहीं तो तुझे जिंदा नहीं छोड़ूंगी। पूरी खबर यहां पढ़ें
‘हमारा गुस्सा महंगाई की वजह से है, लेकिन ईरान में जो हो रहा है, वो आम लोगों का गुस्सा नहीं है। ये तो साजिश है। कुछ लोग प्रदर्शनकारियों में घुसते हैं और आग लगाने लगते हैं, फायरिंग करते हैं। रश्त शहर में तो पूरा बाजार जला दिया। हॉस्पिटल पर हमले हुए, एक नर्स को जिंदा जला दिया। गिरफ्तार लोगों के पास हैंड ग्रेनेड मिले हैं। इन सबके पीछे अमेरिका और इजराइल हैं।’ ईरान का हाल बता रहे अहमद अब्बास राजधानी तेहरान में रहते हैं। वे दावा करते हैं कि बढ़ती महंगाई से लोगों में बेचैनी थी। पेट्रोल की कीमत 15 से बढ़कर 25 रुपए हो गई। 10 रुपए की रोटी 15 रुपए में मिलने लगी। इसके विरोध में लोग पहली बार 28 दिसंबर 2025 को तेहरान की सड़कों पर उतरे। अहमद का दावा है कि अमेरिका और इजराइल के दखल से प्रोटेस्ट हिंसक हो गया। देश में बीते 17 दिन में 2500 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। भारत के सीनियर जियो पॉलिटिक्स एक्सपर्ट कमर आगा इसके पीछे पाकिस्तान कनेक्शन देखते हैं। अहमद हिंसा के पीछे जिन ‘कुछ लोगों’ को जिम्मेदार बता रहे हैं, आगा के मुताबिक, उनकी ट्रेनिंग पाकिस्तान में हुई है। वे कहते हैं कि ईरान में हिंसा का पैटर्न बिल्कुल बांग्लादेश जैसा है। ईरान में अभी इंटरनेट बंद है। इसलिए कम ही जानकारी बाहर आ रही है। दैनिक भास्कर ने ईरान के लोगों से बात की। उनसे दो सवाल पूछे-1. ईरान के शहरों में अभी क्या चल रहा है, कैसा माहौल है?2. क्या इन प्रदर्शनों से ईरान में सत्ता बदलने वाली है? ईरान के प्रोफेसर बोले- बहुत बुरे हालात थे, लेकिन अब सब ठीकईरान के कुम शहर में रहने वाले जमीर अब्बास जाफरी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। वैसे मुंबई के रहने वाले हैं, लेकिन बीते 15 साल से कुम में रह रहे हैं। ये शहर तेहरान से 150 किमी दूर है। जाफरी बताते हैं, 'ईरान में हालात बिगड़े जरूर थे, लेकिन अब काबू में हैं। प्रदर्शन करने वालों ने 25 मस्जिदों में आग लगा दी। शॉपिंग सेंटर्स और बैंकों पर हमले किए हैं। उनका मकसद सिर्फ हिंसा फैलाना है।’ खबरें आई थीं कि सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की। इस पर प्रोफेसर जाफरी कहते हैं, ‘ईरान सरकार पर बहुत दबाव है। प्रदर्शनकारियों के पास हथियार हैं। सरकार उनके खिलाफ सख्ती करती है, तो दूसरे देश इसे मानवाधिकारों का हनन बताएंगे। अगर नरमी बरती जाती है, तो कहा जाएगा कि सरकार का कंट्रोल नहीं रहा।’ प्रोफेसर जाफरी प्रोटेस्ट के बारे में चल रही खबरों को प्रोपेगैंडा मानते हैं। वे आरोप लगाते हैं कि विदेशी मीडिया भ्रम फैला रहा है कि सरकार गिरने वाली है। हकीकत इसके उलट है। भारत सरकार की एडवाइजरी- जैसे भी हो, ईरान से तुरंत निकलेंईरान के हालात देखते हुए भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। उनसे तुरंत ईरान छोड़ने की अपील की गई है। एडवाइजरी के मुताबिक, हालात और बिगड़ सकते हैं। इसलिए इंतजार करना ठीक नहीं होगा। ईरान से जल्द बाहर निकलने की कोशिश करें। इस पर प्रो. जाफरी बताते हैं कि सभी उलेमा और स्टूडेंट सुरक्षित हैं। इंटरनेट न होने से कोई भी जानकारी शेयर नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन चिंता की बात नहीं है। ‘छोटे दुकानदारों का प्रदर्शन अमेरिका-इजराइल ने हाईजैक किया’तेहरान में रह रहे भारतीय मूल के अहमद अब्बास बताते हैं कि अब हालात नॉर्मल हो रहे हैं। 13 जनवरी की शाम से इंटरनेट सर्विस भी शुरू हो गई है। प्रदर्शन के बारे में अहमद बताते हैं, ‘डॉलर की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ईरानी रियाल की गिरती कीमत ने कारोबारियों और आम लोगों में बेचैनी पैदा की थी। शुरुआत में छोटे शहरों में प्रदर्शन हुए, जल्द ही ये बड़े हो गए।’ अब्बास मानते हैं कि प्रदर्शन हिंसक होने के पीछे साजिश है। वे कहते हैं- कुछ लोग प्रदर्शनकारियों के बीच घुसकर आगजनी और फायरिंग करने लगे। पश्चिमी ईरान में तो भीड़ को मिसाइल साइट्स की ओर भेजने की कोशिश की गई। यह गुस्सा नहीं, बल्कि सिस्टम को अस्थिर करने की कोशिश थी। ‘महिलाओं का हिजाब उतारकर विरोध करना वेस्टर्न मीडिया का नैरेटिव’प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के हिजाब उतारकर विरोध जताने के वीडियो सामने आए थे। इस पर अहमद अब्बास कहते हैं, ‘जेंडर और हिजाब जैसे मुद्दों पर पश्चिमी मीडिया ने यह नैरेटिव गढ़ा कि नौजवान ईरान के सिस्टम के खिलाफ हैं। हकीकत में यह प्रोपेगैंडा था। यह कोई क्रांति नहीं, बल्कि ईरान की पॉलिसी बदलने के लिए विदेशी ताकतों का दखल था। ईरान के लोग सरकार के साथ हैं।’ अब्बास दावा करते हैं कि अमेरिका का मकसद ईरान में सरकार बदलना है। इसमें वह नाकाम हो गया। उसकी खुफिया एजेंसियों ने प्रदर्शनों को हाईजैक कर लिया था। गिरफ्तार किए गए लोगों के पास हैंड ग्रेनेड जैसे घातक हथियार मिले। इनके तार इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद और अमेरिका की CIA से जुड़े हैं। कुर्दिस्तान और सिस्तान-बलूचिस्तान जैसे सरहदी इलाकों में एक्टिव अलगाववादी गुटों का भी इस्तेमाल किया गया, जो 1979 की क्रांति से ही ईरान को बांटना चाहते हैं।’ भारत लौटे हाकिम रजा बोले- ईरान में विद्रोह जैसा कुछ नहीं, सभी भारतीय सेफ इंडो-ईरानी चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रेसिडेंट सैयद हाकिम रजा ईरान में 40 दिन बिताकर जनवरी में लौटे हैं। वे बेंगलुरु में रहते हैं। भारत सरकार की एडवाइजरी के बावजूद रजा मानते हैं कि ईरान में सभी भारतीय सुरक्षित हैं। वे कहते हैं कि हमें ईरान में डर जैसा कुछ महसूस नहीं हुआ। हम शॉपिंग और जियारतें कर रहे थे। हम ईरान के तीन बड़े शहरों तेहरान, कुम और मशहद गए हैं। वहां बहुत ज्यादा प्रदर्शन नहीं दिखे। ऐसा कुछ भी नहीं था, जिसे तख्तापलट या बड़ा विद्रोह कहा जाए। 50-60 लोग जमा होकर नारेबाजी करते हैं और उनकी वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दी जाती है। इजराइली, अमेरिकी और कुछ हद तक भारतीय मीडिया में जो दिखाया जा रहा है, वैसा जमीन पर कुछ नहीं है।’ प्रदर्शन में आम लोगों के शामिल होने पर रजा कहते हैं, ‘इसकी बड़ी वजह महंगाई है। एक साल पहले डॉलर का रेट 50-60 तोमान था। एक तोमान में 10 रियाल होते हैं। डॉलर का रेट बढ़कर 1400 तोमान तक पहुंच गया। इससे जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ी हैं। पेट्रोल के रेट 3 तोमान से बढ़कर 5 तोमान (लगभग 25 रुपए) हो गए हैं। रोटी की कीमत 2 तोमान से 3 तोमान यानी 15 रुपए हो गई। भारतीयों के लिए यह बहुत सस्ता है, लेकिन ईरान में कम कमाने वाले लोगों के लिए यह बड़ा बोझ है।’ (प्रदर्शन के दौरान रियाल की कीमत यूरो के मुकाबले जीरो हो गई है। अभी भारत के एक रुपए की कीमत 12 हजार रियाल से ज्यादा है) एक्सपर्ट बोले- ईरान में हिंसा के पीछे पाकिस्तानसीनियर जियो पॉलिटिक्स एक्सपर्ट कमर आगा ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की कई वजहें मानते हैं। वे कहते हैं कि हिजाब विवाद, महंगाई, रोजगार की कमी से लोग नाखुश थे, लेकिन प्रदर्शनों में बाहरी ताकतों का भी हाथ है। आगा आगे कहते हैं, ‘ईरान में गरीबी भारत, पाकिस्तान या अफगानिस्तान जैसी नहीं है। वहां बेरोजगारी और ईरानी रियाल की घटती कीमत बड़ी समस्या बन गई है। ईरान की शहरी आबादी अच्छी जिंदगी जीने की आदी है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने धीरे-धीरे हालात बिगाड़ दिए।’ ‘इसके अलावा ईरानी मिडिल क्लास और युवाओं को सरकार की सख्ती पसंद नहीं है। धर्म में हिजाब या नमाज के लिए जबरदस्ती का कोई प्रावधान नहीं है। यह पूरी तरह से निजी मसला है। लोग क्या पहनें या क्या खाएं, इसमें सरकार का दखल क्यों हो। ईरान के ऑफिसों में 70% तक महिलाएं काम करती हैं, लेकिन वे अच्छा माहौल और बदलाव चाहती हैं।’ ‘हिंसा में शामिल लोग पाकिस्तान से ट्रेनिंग लेकर आए’कमर आगा ईरान की हिंसा में पाकिस्तान का भी हाथ मानते हैं। वे कहते हैं, ‘ईरान की इंटरनल सिक्योरिटी में बड़ी सेंध लगी है। विरोध प्रदर्शनों में जिस तरह आगजनी हुई और 100 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी मारे गए, वह बांग्लादेश की याद दिलाता है। ईरान में हिंसा का पैटर्न बांग्लादेश जैसा है। ईरान से पाकिस्तान का बॉर्डर भी मिलता है। इसीलिए सरहद से आतंकी और स्लीपर सेल ट्रेनिंग लेकर ईरान में घुसते हैं। इन्हीं लोगों ने प्रदर्शन को हिंसक बनाया है।’ ‘प्रदर्शनकारियों के बीच इराक में सद्दाम हुसैन के समय से एक्टिव रहे मुजाहिदीन-ए-खल्क जैसे संगठन और पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा से ट्रेंड होकर आए आतंकी एक्टिव हैं। उनके पास आधुनिक हथियार हैं। यह सिर्फ जनता का गुस्सा नहीं है, इसमें बाहरी ताकतों का भी हाथ है।’ ‘ईरान के लोग सुधार चाहते हैं, लेकिन वे पश्चिमी देशों के पिछलग्गू नहीं बनना चाहते। 12 जनवरी को सरकार के समर्थन में सड़कों पर निकले लोगों ने साबित कर दिया कि वे सरकार से असहमत हों, लेकिन अमेरिका-इजराइल के खिलाफ एकजुट हैं।’ ‘ईरान में सत्ता बदलना आसान नहीं है क्योंकि वहां की राष्ट्रवादी भावनाएं बहुत गहरी हैं। फिलहाल वहां कोई वैकल्पिक लीडरशिप मौजूद नहीं है। यह आंदोलन क्रांति नहीं है, बल्कि एक वर्ग का विद्रोह है। इसे बाहरी ताकतों ने हाईजैक करने की कोशिश की है।’ ईरान पर हमला हुआ, तो भारत के लिए भी खतराआगा चेतावनी देते हैं कि ईरान में अस्थिरता पूरी दुनिया खासकर भारत के लिए भी घातक साबित हो सकती है। अगर ईरान पर हमला होता है या हालात बेकाबू होते हैं, तो ईरान पूरे रीजन को युद्ध में झोंक देगा। ईरान ऑयल सप्लाई का रूट बंद कर सकता है, जिससे पूरी दुनिया में मंदी आ जाएगी। भारत के लिए यह स्थिति डरावनी है क्योंकि खाड़ी देशों में 90 लाख भारतीय रहते हैं। वे देश में 4.06 लाख करोड़ रुपए भेजते हैं। हमारा उनके साथ 200 बिलियन डॉलर या करीब 18 लाख करोड़ रुपए का कारोबार है। ईरान के अस्थिर होने का मतलब है कि भारत के आर्थिक हितों पर सीधी चोट पहुंचेगी। ………………………………..स्टोरी में सहयोग: रऊफ डार, जम्मू-कश्मीर
दिल्ली में रहने वाले 36 साल के मोहम्मद इमरान का घर तुर्कमान गेट के पास है। यहीं उनकी कचौरी की दुकान भी है। 8 जनवरी की सुबह वो रोज की तरह दुकान गए, लेकिन शाम को घर नहीं लौटे। परिवार ने परेशान होकर जब ढूंढना शुरू किया तो करीब 2 घंटे बाद आसपास वालों ने बताया कि पुलिस उठा ले गई। थाने पहुंचने पर पता चला कि दंगे का केस लगा है। परिवार का कहना है कि पीठ में तकलीफ के चलते वो ठीक से चल भी नहीं पाते हैं। वे न मुड़ सकते है, न झुक सकते हैं। ऐसे में दंगा और पत्थरबाजी कैसे करेंगे। 7 जनवरी को तुर्कमान गेट पर फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने के दौरान हिंसा हुई थी। इमरान पर इसी दौरान पत्थरबाजी, पुलिस पर हमला करने, हत्या की कोशिश और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे हैं। इमरान के साथ ही पुलिस ने अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार किया है। सभी मुस्लिम हैं। इनमें से ज्यादातर तुर्कमान गेट और चांदनी महल के रहने वाले हैं। वहीं पुलिस का दावा है कि आरोपियों को सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो के आधार पर गिरफ्तार किया जा रहा है। कई लोग अब भी हिरासत में हैं, जिनसे पूछताछ की जा रही है। हमने इस केस में आरोपी बनाए गए लोगों के परिवारों से कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की, लेकिन ज्यादातर परिवार डरे हुए हैं इसलिए कैमरे पर बात करने से मना कर दिया। सिर्फ दो परिवार ही राजी हुए। आरोपियों के परिवारों से बात…वे न मुड़ सकते-न झुक सकते, मीडिया मास्टरमाइंड बता रहीगिरफ्तार आरोपियों के परिवार वाले पुलिस थाने और कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं। इन्हीं में से एक मोहम्मद इमरान की पत्नी सुमैरा हैं। वे बताती हैं, ‘जब हिंसा हुई तब वे घर पर ही थे। रात करीब 1 बजे घर से दूध लेने निकले थे। उस दिन हमारे पास दूध नहीं था। छोटे-छोटे बच्चे हैं, वे रो रहे थे। इमरान दूध और बच्चों का कुछ सामान लेने के लिए नीचे गए और कुछ देर बाद लौट आए।‘ ‘अगले दिन वो रोज की तरह दुकान भी गए, लेकिन शाम को पता चला कि उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। परिवार को कोई जानकारी नहीं दी गई। कुछ समय तक हमें पता ही नहीं चला कि उन्हें कहां लेकर गए।‘ सुमैरा घर के पास की एक दुकान की सीसीटीवी फुटेज दिखाते हुए कहती हैं, ‘इमरान सामान लेकर आ रहे हैं। अगर उन्होंने कुछ किया होता तो इतने आराम से चलकर नहीं आते।‘ उन्हें पीठ में काफी दिक्कत है। वे आसानी से झुक नहीं सकते, मुड़ नहीं सकते तो फिर ये सब कैसे करेंगे। उन्हें पिछले 4-5 सालों से दिक्कत है। दवाई भी चल रही है। कुछ लड़ाई-झगड़ा होगा तो वो भाग तक नहीं सकते। सुमैरा पति की गिरफ्तारी के बाद से परेशान हैं। इमरान पर लगाए जा रहे आरोपों को बेबुनियाद बताती हुए कहती हैं, ‘इन्हें मीडिया में घटना का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। जबकि वीडियो में दिख रहा है कि वे सामान्य तरीके से गए और वापस आ गए। थाने में सिर्फ यही बताया गया कि वे किसी वीडियो में दिख रहे हैं।‘ ‘फिर भी पहले दो दिन उन्हें थाने में ही रखा गया। सिर्फ इतना कहा जा रहा था कि उन्हें छोड़ दिया जाएगा, लेकिन 9 जनवरी को उन्हें कोर्ट में पेश कर दिया गया।‘ 12 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में आरोपी9 जनवरी को इमरान समेत आठ आरोपियों को रिमांड में लेने के लिए दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में पेश किया गया था। पुलिस ने कोर्ट में बताया कि आरोपियों को सीसीटीवी फुटेज में देखा गया है और स्टाफ ने उनकी पहचान की है। वहीं आरोपियों के वकील ने कहा कि उनके खिलाफ 'हत्या की कोशिश' की धारा (BNS की धारा-109) गलत तरीके से लगाई है, क्योंकि पुलिस को आई चोटें मामूली थीं। इस पर कोर्ट ने कहा कि ये सब ट्रायल के दौरान तय होगा। इन सभी आरोपियों को 12 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस घटना के बाद पुलिस ने 7 जनवरी को एक FIR दर्ज की थी। इसमें बताया गया था कि अतिक्रमण हटाने के दौरान सुरक्षा में तैनात पुलिस बल पर करीब 30-35 लोगों की भीड़ ने हमला कर दिया। भड़काऊ नारेबाजी की, पुलिस बैरिकेड्स तोड़े और पथराव किया। इसमें कई पुलिसकर्मी घायल भी हो गए। पुलिस ने भाई को अरेस्ट किया, परिवार को बताया भी नहींदिल्ली पुलिस ने 7 जनवरी को (घटना वाले दिन) ही पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। इनमें मोहम्मद आरिब भी थे। आरिब उसी इलाके में LED लाइट्स का काम करते हैं। उनका नाम FIR में भी दर्ज किया गया है। हालांकि आरिब की बहनें अपने भाई के खिलाफ लगाए गए आरोपों को झूठा बताती हैं। आरिब की बहन अनुषा कहती हैं कि उनके बड़े भाई का अपना कैफे है। जब आरिब रात में कैफे से आ रहा था तो बड़े भाई ने इधर आने से मना कर दिया था क्योंकि दंगे के चलते सेफ नहीं था। इसलिए आरिब अपने दोस्त के यहां चला गया। हिंसा रुकने के बाद वो 3 बजे घर लौट रहा था। घर के पास से पुलिस उसे जबरदस्ती पकड़ ले गई। जबकि उसने कुछ नहीं किया है।’ कुछ साल पहले ही आरिब के अब्बू-अम्मी का निधन हुआ था। उनकी एक और बहन सवाल उठाते हुए कहती हैं, ’अगर आप किसी को गिरफ्तार कर रहे हैं, तो क्या उसके परिवार को जानकारी नहीं देनी चाहिए। हम सब पूरी रात परेशान रहे, लेकिन किसी पुलिस वाले ने कुछ नहीं बताया कि उसे पकड़ा गया है।’ ’आरिब इस इलाके में था ही नहीं, न ही पुलिस के पास कोई सबूत है। फिर ऐसे ही कैसे गिरफ्तार कर सकते हैं। अगर आप गिरफ्तार करते हैं तो आपकी जिम्मेदारी बनती है कि घर वालों को इसकी जानकारी दी जाए। हम अगले दिन भी हर जगह ढूंढते रहे, लेकिन किसी थाने में पुलिस ने नहीं बताया कि उसे पकड़ा गया है। जबकि वो चांदनी महल थाने में था और हम वहां भी गए थे। आखिरकार हमें उसके बारे में कल रात पता चला।’ एक और आरोपी के पिता नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, ‘पुलिस ने बिना किसी सबूत के मेरे बेटे को गिरफ्तार किया है। मीडिया ने भी बिना वेरिफाई किए सबको पत्थरबाज बता दिया। मेरा बेटा उस दिन वहां नहीं था। अगले दिन वो गली में गया था। उसे सांस की दिक्कत है, इसलिए उसने मास्क लगा रखा था। पुलिस ने उससे पूछा कि मास्क क्यों लगा रखा है, ये सब बोलते हुए उसे थाने लेकर चले गए।‘ वकील बोले- पत्थरबाजी की, तो पुलिस कोर्ट में वीडियो दिखाएइस मामले में कुछ आरोपियों की तरफ से केस लड़ रहे वकील दानिश अली कहते हैं, ‘जो कुछ भी मीडिया ने दिखाया है या जो बातें की जा रही हैं, उसमें अभी तक कोई भी बातें कोर्ट के सामने नहीं लाई गई हैं। अगर पत्थरबाजी करने का कोई वीडियो है तो पुलिस ने अभी तक कोर्ट में क्यों नहीं दिया।‘ ‘पुलिस ने वहां पर आंसू गैस के गोले छोड़े थे। इस वजह से जिन लोगों के घर सड़क किनारे थे, वे अपने घरों से निकलने लगे। जब वे सड़क पर आए तो कैमरे में आ गए और पुलिस ने उन्हीं को डिटेन कर लिया।‘ ‘पुलिस ने कई बार कहा कि लोगों ने उन्हें पत्थर मारे। कई बार उनके बारे में ही कहा गया कि इन्होंने वीडियो सर्कुलेट किया। अगर वो वीडियो सर्कुलेट कर रहे थे तो वो उसी वक्त पत्थर कैसे मार रहे थे? अगर कोई पत्थर मार रहा है या जो भी हुआ, उसका कोई वीडियो पुलिस के पास मौजूद ही नहीं है।‘ सीसीटीवी और ग्राउंड पर मौजूद स्टाफ से आरोपियों की पहचानदिल्ली पुलिस इस मामले में उन सोशल मीडिया हैंडल्स की भी पहचान कर रही है, जिन्होंने अपनी पोस्ट में दावा किया है कि 'फैज-ए-इलाही मस्जिद' को गिराया जा रहा है। इसके साथ लोगों के वॉट्सएप ग्रुप को भी खंगाला जा रहा है। जबकि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई मस्जिद के आसपास होनी थी। सेंट्रल दिल्ली के DCP निधिन वालसन दावा करते हैं कि गिरफ्तार किए गए सारे लोग पत्थरबाजी में शामिल थे। वहां के सीसीटीवी कैमरों और ग्राउंड पर मौजूद स्टाफ के बयानों के आधार पर उन सबकी पहचान की गई और उन्हें गिरफ्तार किया गया है। अब तक कोई मास्टरमाइंड सामने नहीं आया है। निधिन बताते हैं, ‘अभी पूरे मामले की जांच चल रही है। हम सभी संभावनाएं देख रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए जिन्होंने लोगों को भड़काने की कोशिश की है, हमारी टीम ने ऐसे 10 लोगों की पहचान की है। जैसे ही उनके खिलाफ सबूत मिलेंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया के मामले में अभी किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। सपा सांसद (मोहिबुल्लाह नदवी) की भूमिका की भी जांच की जा रही है।‘ DCP के मुताबिक, पुलिस ने लोगों को समझाने की कोशिश की थी। जितने भी समझदार लोग थे, वो वहां से चले गए थे। इसके बावजूद कुछ लोगों ने निर्देश नहीं माने। ऐसा लग रहा है कि वे इलाके की शांति को भंग करना चाहते थे। परिवार के आरोपों (बिना सबूत के गिरफ्तारी) पर DCP कहते हैं, ‘ऐसा कुछ नहीं है, सबको वीडियो और फोटो में पहचान करने के बाद ही गिरफ्तार किया जा रहा है। हमें एमसीडी की तरफ से अनुरोध आया था, तभी हमने फोर्स तैनात की थी। उसके बाद ही पूरा डिमोलिशन हुआ।‘ अब जानिए 7 जनवरी फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास क्या हुआ था7 जनवरी की रात दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास अवैध अतिक्रमण हटाया गया। 32 जेसीबी और बुलडोजर ने मस्जिद के पास 36,400 वर्ग फीट में बने एक बंद पड़े बारात घर और प्राइवेट क्लिनिक को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान भीड़ ने MCD के स्टाफ और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। इस दौरान 5 पुलिस वाले घायल हो गए। पुलिस ने हालात संभाले और MCD के अमले ने कब्जा तोड़ा। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने ये कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर की, जिसमें मस्जिद से सटी डिस्पेंसरी और बारात घर को अवैध घोषित कर दिया गया। वहीं फैज-ए-इलाही मस्जिद की मैनेजिंग कमेटी का दावा है कि जिस जमीन पर कार्रवाई की गई है, वो 100 साल से ज्यादा पुरानी नोटिफाइड वक्फ संपत्ति है। हालांकि मस्जिद के पास उस जमीन के कागज नहीं हैं।..................... ये खबर भी पढ़ें... दिल्ली में जहां पत्थरबाजी, मस्जिद के पास उसके कागज नहीं तारीख 7 जनवरी, वक्त रात के 1 बजे। पुरानी दिल्ली सो रही थी, तभी 32 जेसीबी और बुलडोजर तुर्कमान गेट की गलियों में दाखिल हुए। हाईकोर्ट के आदेश पर फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास 36,400 वर्ग फीट में बने एक बंद पड़े बारात घर और प्राइवेट क्लिनिक के अलावा पार्किंग ढहाने की तैयारी थी। जेसीबी चलनी शुरू हुईं, तभी भीड़ जुट गई। पढ़िए पूरी खबर...
DNA on Iran Protest News in Hindi: अमेरिका ने ईरान से जेल में बंद 8 कैदियों को छोड़ने की मांग की है. चेतावनी दी है कि खामेनेई इन कैदियों को तुरंत रिहा कर दे वरना ईरान को बर्बाद कर दिया जाएगा. सवाल है कि आखिर ये कैदी कौन हैं, जिनकी ट्रंप प्रशासन जान बचाना चाहता है.
DNA: ईरान पर ट्रंप और मुनीर की हुई थी सीक्रेट डील? खलीफा के खिलाफ पाकिस्तान की बड़ी साजिश का खुलासा
डॉनल्ड ट्रंप और आसिम मुनीर की सीक्रेट डील पर बड़ा खुलासा. मुनीर ने हाफिज सईद के आतंकियों को 2 नए टारगेट दिये हैं. इनमें से एक खलीफा के खिलाफ पाकिस्तान की बड़ी साजिश है. माना जा रहा है कि पाकिस्तान इस समय दोस्त अमेरिका के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है.
US-Iran Conflict: ईरान में सरकार के खिलाफ बढ़ते विरोध प्रदर्शन के बीच जल्द ही अमेरिकी हमले की संभावना जताई जा रहा है. सवाल ये है कि अमेरिका किस तरह से तेहरान पर हमला कर सकता है.
ट्रंप का बड़ा फैसला 75 देशों पर वीज़ा बैन
अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने 75 देशों के नागरिकों के लिए इमिग्रेंट वीज़ा (स्थायी निवास से जुड़े वीज़ा) की प्रक्रिया पर अनिश्चितकालीन रोक लगाने का आदेश दिया है। यह फैसला इस आशंका के आधार पर लिया गया है कि कुछ आवेदक अमेरिका में “पब्लिक चार्ज” बन सकते हैं और सरकारी कल्याण योजनाओं व सार्वजनिक लाभों पर निर्भर हो सकते हैं।
Explainer: ईरान कभी क्यों नहीं गिरता? एक ऐसी हुकूमत की कहानी जो गिरने के लिए बनी ही नहीं
Why Iranian Khamenei regime never ends: ईरान इन दिनों जबरदस्त बगावत से जूझ रहा है. महंगाई, भ्रष्टाचार और मजहबी कट्टरता से परेशान हो चुकी पब्लिक अब खामेनेई का शासन उखाड़ फेंकने पर आमादा है. लेकिन सवाल है कि क्या वहां की जनता ऐसा कर पाएगी या फिर खामेनेई एक बार फिर विजेता बनकर उभरेंगे.
अब ग्रीनलैंड को कोई नहीं बचा सकता, ट्रंप ने दिया फाइनल अल्टीमेटम; NATO को लेकर किया बड़ा ऐलान
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि ग्रीनलैंड पर कब्जे से कम उनको कुछ भी स्वीकार नहीं है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि गोल्डन डोम एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कंट्रोल बहुत जरूरी है.
उत्तरी अफ्रीका भर में अमाजिग लोग 2976 का स्वागत कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने तैयारियां की हैं. वे दुनिया के अधिकांश हिस्सों से करीब 1 हजार साल आगे चल रहे हैं क्योंकि वह ऐसे कैलेंडर का पालन करते हैं, जो 950 ईसा पूर्व से शुरू होता है. ये लोग तमाम प्रकार के पकवान बनाते हुए नए साल के स्वागत में लगे हैं.
ट्रंप की धमकी के बावजूद क्यों ईरान पर हमला नहीं कर सकता अमेरिका? इस वजह ने बनाया लाचार
Trump Attack On Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले की चेतावनी दी है, हालांकि अमेरिका के लिए ऐसा करना मुश्किल साबित हो सकता है. इसके कई कारण हैं.
MEA Advisory on Iran Protest: ईरान में जारी प्रोटेस्ट के बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने बड़ी एडवाइजरी जारी की है. इस एडवाइजरी में लोगों से अपनी गैर-जरूरी ईरान यात्रा को टालने के लिए कहा गया है. साथ ही प्रोटेस्ट वाले इलाकों से भी दूर रहने की अपील की गई है.
राष्ट्रपति ट्रंप लगातार यह कहते आ रहे हैं कि ग्रीनलैंड अमेरिका के रणनीतिक हितों के लिए बेहद अहम है। हाल के बयानों में उन्होंने यहां तक कहा कि वह इस आर्कटिक द्वीप को हासिल करने के लिए सैन्य बल सहित सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
Bangladesh Political Violence: बांग्लादेश में फरवरी चुनाव से पहले राजनीतिक हिंसा बढ़ गई है, 15 दिनों में तीन नेताओं की हत्या हुई है. BNP ने कानून-व्यवस्था पर चिंता जताई और अंतरिम सरकार की आलोचना की है.
स्पेन में 150 साल बाद बनने जा रही हैं नई रानी, जानिए कौन हैं 20 साल की राजकुमारी लियोनोर
स्पेन के मौजूदा राजा किंग फेलिप छठे और रानी लेटीजिया की बड़ी बेटी, 20 वर्षीय राजकुमारी लियोनोर भविष्य में देश की पहली महिला शासक बनेंगी। इससे पहले 19वीं सदी में इसाबेला द्वितीय स्पेन की रानी बनी थीं।
Iran Protester Death: अमेरिका ने धमकी दी है कि प्रदर्शनकारी को फांसी हुई तो वह ईरान पर बड़ी कार्रवाई करेगा. देश में दो हफ्ते से चल रहे प्रोटेस्ट के बीच पहले प्रदर्शनकारी को खुलेआम फांसी दी जा रही है. तारीख 14 जनवरी तय है. परिवार को केवल 10 मिनट के लिए इरफान सुलतानी से मिलवाया जाएगा.
trump warning iran: इरान में विरोध प्रदर्शन में अब तक 2,500 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, और सरकार ने इंटरनेट ब्लैकआउट और फांसी जैसी कठोर कार्रवाई की है. अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है, जिससे शासन पर दबाव बढ़ गया है.
थाईलैंड में भयानक रेल हादसा, क्रेन गिरने से पटरी से उतरी ट्रेन, 22 की मौत, कई घायल
Thailand Accident: थाईलैंड में एक भयानक हादसा हुआ है, यहां पर पटरी से ट्रेन उतरने की वजह से 22 लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं.
थाईलैंड में भीषण रेल हादसा : क्रेन गिरने से ट्रेन पटरी से उतरी, 22 की मौत, 30 घायल
थाईलैंड में बुधवार सुबह एक भीषण रेल दुर्घटना हुई। राजधानी बैंकॉक से उत्तर-पूर्वी प्रांत की ओर जा रही ट्रेन पर निर्माणाधीन साइट की क्रेन अचानक गिर गई
चुनाव पर हिंसा का साया, बांग्लादेश ने बंद किए ऑन-अराइवल वीजा के दरवाजे, किन देशों पर पड़ेगा असर?
Bangladesh News: बांग्लादेश में इन दिनों सियासी हलचल मची हुई है, इसी बीच बांग्लादेश ने चुनाव से पहले ऑन अराइवल वीजा सस्पेंड कर दिया है. ये सस्पेंड करने के बाद बांग्लादेश ने उन देशों की सरकारों को बता दिया है.
डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर भड़का ईरान, अमेरिका के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखा
Iran US Tension: हिंसा की हर कोने में फैलती चिंगारी के कारण ईरान मुश्किल के दौर से गुजर रहा है. इसी बीच, ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष अबुकर दाहिर उस्मान को एक पत्र लिखा है. जिसमें अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए गए.
World Longest Bridge: अगर आपसे पूछा जाए कि आपने अब तक सबसे लंबा पुल कौन सा देखा है, तो भारत में ज्यादातर लोग मुंबई के अटल सेतु का नाम लेंगे. जिसकी लंबाई करीब 23 किलोमीटर है. दुनिया का सबसे लंबे पुल के आगे ये बहुत छोटा लगता है. दुनिया का सबसे लंबा पुल चीन में बना है और इसकी लंबाई करीब 164 किलोमीटर है.
ट्रंप का दावा- वेनेज़ुएला से तेल आयात ने घटाए अमेरिका में ईंधन के दाम
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा नीति पर बात करते हुए वेनेज़ुएला का ज़िक्र किया
नहीं थम रहा अत्याचार, बांग्लादेश में एक और हिंदू का कत्ल, कट्टरपंथियों ने पीट-पीटकर मार डाला
Bangladesh News: बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार अत्याचार हो रहा है, अब एक हिंदू युवक की हत्या पीट-पीटकर कर दी गई. लगातार हो रही मौतों की वजह से लोग सदमें में हैं.
Donald trump angry on greenland: ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने अमेरिका को लेकर बयान दिया था, जिसमें उन्होंने डेनमार्क के साथ रहने की बात की थी. इस बयान को खारिज करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ये ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री के लिए एक बड़ी समस्या बन सकता है.
ईरान में मौतों को लेकर अमेरिका सख्त, ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- ‘हम सही आंकड़ा निकालेंगे’
Trump warning Iran: ईरान में पिछले कई दिनों से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं. इन प्रदर्शनों के दौरान लोगों की मौत और कथित फांसी की खबरें सामने आई हैं. इसी बीच अमेरिका की ओर से कड़ा बयान सामने आया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान को अब ठीक तरह से पेश आना होगा और वहां के लोगों के साथ इंसानियत दिखानी होगी.
कश्मीर के बडगाम की रहने वाली बिलकिस 6 जनवरी की शाम को कॉलेज हॉस्टल में थीं। बिलकिस जम्मू में कटरा के श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस से MBBS की पढ़ाई कर रही थीं। उन्हें पता चला कि नेशनल मेडिकल कमीशन ने कॉलेज की मान्यता ही रद्द कर दी है। बिलकिस मुस्लिम हैं और कॉलेज की 50 सीटों में 42 पर मुस्लिम स्टूडेंट के एडमिशन की वजह से हिंदूवादी संगठन इसका विरोध कर रहे थे। बिलकिस फिलहाल घर पर हैं। उन्हें नहीं पता कि आगे की पढ़ाई कैसे होगी। किसी और कॉलेज में एडमिशन मिल भी गया, तो कैसे कोर्स कवर करेंगी। हिंदूवादी संगठनों की दलील थी कि कॉलेज माता वैष्णो देवी तीर्थ क्षेत्र में है और भक्तों के दान से बना है इसलिए इसमें सिर्फ हिंदू स्टूडेंट्स को एडमिशन मिलना चाहिए। हालांकि बिलकिस कहती हैं कि बाहर भले कुछ भी हो रहा हो, लेकिन अंदर हम सभी अच्छे से पढ़ाई कर रहे थे। धर्म की वजह से किसी को परेशानी नहीं हुई। श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी के तहत आने वाले इस मेडिकल कॉलेज में 2025 में MBBS की पढ़ाई शुरू हुई थी। मान्यता रद्द होने के बाद सभी स्टूडेंट घर लौट गए हैं। इस विवाद पर दैनिक भास्कर ने कुछ स्टूडेंट्स से बात की। क्या सच में ये कॉलेज दान के पैसों से चलता है, इसकी भी पड़ताल की। पता चला कि जम्मू-कश्मीर सरकार से यूनिवर्सिटी को हर साल मदद मिल रही है। 2017 से 2025 तक सरकार ने करीब 121 करोड़ रुपए की मदद की है। पहले स्टूडेंट्स की बातनाम: बिलकिसपता: बडगाम, कश्मीरMBBS, फर्स्ट ईयर बिलकिस ने हमें एडमिशन से अब तक की पूरी कहानी सुनाई। वे बताती हैं, ‘25 अक्टूबर, 2025 को NEET की थर्ड राउंड काउंसलिंग हुई थी। इसी में मुझे एडमिशन मिला। NEET में मेरे 490 नंबर आए थे। जम्मू-कश्मीर डिवीजन में 758वीं रैंक थी। 29 अक्टूबर को एडमिशन की प्रोसेस पूरी हुई और 3 नवंबर से क्लास शुरू हो गई।’ बिलकिस के घर से ये कॉलेज करीब 250 किमी दूर है। उन्होंने चॉइस फिलिंग में दूसरे कॉलेज भी रखे थे, इनमें श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस मिल गया। बिलकिस को कॉलेज के बारे में पता चला कि यहां फैकल्टी और बाकी सुविधाएं अच्छी हैं। इसलिए उन्होंने एडमिशन ले लिया। बिलकिस बताती हैं, ‘मैंने दो महीने 10 दिन पढ़ाई की। सुबह 9 बजे क्लास शुरू होती थी। सब ठीक चल रहा था। हमारा सेशन लेट शुरू हुआ था। हम दूसरे कॉलेजों से दो महीने पीछे थे। मेडिकल कॉलेज में हमारा पहला ही बैच था। गाइड करने के लिए सीनियर स्टूडेंट नहीं थे, इसलिए फैकल्टी कहती थी कि कोई दिक्कत हो तो हमें बताना।’ मुस्लिम स्टूडेंट्स के एडमिशन से हुए विवाद पर बिलकिस कहती हैं, ‘कॉलेज में हमें धर्म की वजह से कोई दिक्कत नहीं हुई। न कभी महसूस हुआ कि हम अलग धर्म से हैं। बाहर प्रोटेस्ट चल रहे थे, तब भी अंदर तक कोई नेगेटिविटी नहीं आई।’ ‘मैंने कॉलेज में 4.95 लाख रुपए ट्यूशन फीस दी है। हॉस्टल के पैसे अलग से थे। जो भी हुआ, उससे नुकसान तो हमारा ही हुआ है। हम अब घर बैठे हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि जल्द ही हमारा एडमिशन कराएंगे। तब भी टाइम तो बर्बाद हो रहा है।’ कोर्स की मान्यता रद्द होने पर बिलकिस कहती हैं, ‘दो महीने से दिमाग में यही चल रहा है कि हमारा क्या होगा। आगे क्या करेंगे। विरोध करने वालों को लगता है कि उन्होंने एक कॉलेज बंद करा दिया, लेकिन उन्हें सोचना चाहिए कि कॉलेज बनाने में कितनी मेहनत, कितना टाइम लगता है।’ ये हम 50 स्टूडेंट का नुकसान नहीं है, पूरी पीढ़ी का नुकसान है। जैसे ही पता चला कि कॉलेज की मान्यता रद्द हो गई है, सारे स्टूडेंट अपने-अपने घर चले गए। अब सभी लिस्ट का इंतजार कर रहे हैं, ताकि पता चले कि आगे क्या होगा। हमने बिलकिस से पूछा कि क्या आपको पता है कॉलेज को चलाने में श्राइन बोर्ड का क्या रोल है? वे जवाब देती हैं, ‘इस बारे में कोई आइडिया नहीं है। हम तो पढ़ाई कर रहे थे, जैसे बाकी कॉलेज में होती है। अब हमारी कोई डिमांड नहीं है, बस गुजारिश है कि जितना जल्दी हो सके, हमें दूसरे कॉलेज में शिफ्ट करना चाहिए। हमने बहुत प्रेशर झेल लिया है। अगस्त में हमारे एग्जाम हैं। हमें यही नहीं पता कि हमें कब शिफ्ट करेंगे।’ नेशनल मेडिकल कमीशन ने मान्यता रद्द करने की वजह बताई है कि कॉलेज में इन्फ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और जरूरी मानकों में गंभीर कमियां थीं इसलिए अनुमति रद्द कर दी गई। बिलकिस इस पर कहती हैं, ‘कॉलेज में कोई कमी नहीं थी। मेरे दोस्त दूसरे कॉलेजों में हैं, उनके साथ बात करने पर पता चलता था कि उनसे ज्यादा सुविधाएं हमें मिल रही हैं। अगर कमियां होतीं तो पहले ही परमिशन नहीं मिलती।’ मैनत श्रीवास्तव कॉलेज की मान्यता रद्द होने पर कहते हैं, ‘विवाद और कोर्स की परमिशन खत्म होना बहुत परेशान करने वाला है। हमें यहां बहुत अच्छी सुविधाएं मिल रही थीं। हमें कॉलेजों में शिफ्ट किया जा सकता है, वहां शायद ही ऐसी सुविधाएं मिलेंगी।’ ‘हम ट्रांसफर प्रोसेस के बारे में सोचकर परेशान हैं। अब भी नहीं पता कि हमें किस मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट किया जाएगा। ट्रांसफर किस आधार पर होगा। कुछ भी साफ नहीं है। इससे स्ट्रेस और इनसिक्योरिटी बढ़ रही है। अभी तो हमने पढ़ाई के रूटीन में सेटल होना शुरू किया था। आशिया कहती हैं, ‘हमारे इंस्टीट्यूट में ऐसी सुविधाएं थीं, जो कई जाने-माने मेडिकल कॉलेजों में भी नहीं हैं। हमने दूसरे मेडिकल कॉलेजों की हालत देखी है। यहां सच में बहुत अच्छी और स्टूडेंट फ्रेंडली फैसिलिटीज थीं। सिर्फ एनाटॉमी के लिए हमारे पास चार डेड बॉडी थीं। दूसरे मेडिकल कॉलेजों में स्टूडेंट्स के लिए एक भी डेड बॉडी नहीं है।’ ‘लाइब्रेरी में पढ़ाई के लिए शांत माहौल था। किताबों, बैठने की जगह या पढ़ाई के रिसोर्स की कमी नहीं थी। क्लासरूम कभी भीड़भाड़ वाले नहीं थे। प्रोफेसर हर स्टूडेंट पर ध्यान देते थे। लेक्चर के दौरान बेहतर बातचीत होती थी। हम जैसे स्टूडेंट्स के लिए, जिन्होंने अभी-अभी मेडिकल की पढ़ाई शुरू की है, ऐसे माहौल का खत्म होना बड़ा झटका है।’ विवाद की जड़: क्या सिर्फ दान के पैसों से चलता है कॉलेजश्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को सितंबर 2025 में 50 सीटों पर एडमिशन की परमिशन मिली थी। MBBS के पहले बैच में 42 कश्मीरी मुस्लिम, 7 हिंदू और एक सिख स्टूडेंट ने एडमिशन लिया। विवाद तब शुरू हुआ, जब वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने मुस्लिम स्टूडेंट्स के एडमिशन का विरोध किया। 22 नवंबर को बनाई गई इस समिति में 50 से ज्यादा संगठन शामिल थे, जिनमें RSS और BJP से जुड़े संगठन भी थे। बजरंग दल ने तो कॉलेज के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था। संविधान के आर्टिकल-30 के मुताबिक, अल्पसंख्यकों को अपने समुदाय के लिए 50% तक आरक्षण के साथ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन बनाने का अधिकार है। हालांकि श्राइन बोर्ड के मालिकाना हक वाली 34 एकड़ जमीन पर बनी श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। 8 साल में यूनिवर्सिटी को 121 करोड़ रुपए की सरकारी मददवैष्णो देवी संघर्ष समिति ने दावा किया कि यूनिवर्सिटी श्राइन बोर्ड के फंड से बनी है, जो भक्तों के दान से इकट्ठा होता है। इसलिए यहां सिर्फ हिंदू स्टूडेंट्स को ही पढ़ने की परमिशन मिलनी चाहिए। इसके बाद कॉलेज से मुस्लिम स्टूडेंट्स को हटाने की मांग उठने लगी। जम्मू में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। सोर्स बताते हैं कि श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में सालाना फीस स्ट्रक्चर में 4.95 लाख रुपए ट्यूशन फीस, 50 हजार रुपए रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट, लगभग 51 हजार रुपए वन टाइम कॉलेज चार्ज और 20 हजार रुपए सालाना हॉस्टल फीस शामिल है। यूनिवर्सिटी और मेस चार्ज मिलाकर हर स्टूडेंट का सालाना खर्च करीब 5.5 लाख रुपए हो जाता है। हिंदू संगठन दावा कर रहे थे कि श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी देश की इकलौती मुस्लिम-मेजॉरिटी वाली सरकार से बिना फंड लिए चल रही है। हालांकि डॉक्यूमेंट से पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटा गया, तब भी यूनिवर्सिटी को सरकार से मदद मिलती रही। सोर्स बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर सरकार से यूनिवर्सिटी को 2017-18 में 10 लाख रुपए की मदद मिली। 2018-19 में ये मदद बढ़कर 50 लाख रुपए और 2019-20 में 5 करोड़ रुपए हो गई। 2019 के बाद JK के बजट को 2025 तक संसद ने मंजूरी दी थी, जब उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में पहली चुनी हुई सरकार ने शपथ ली थी। बजट डॉक्यूमेंट से पता चलता है कि 2020-21 में यूनिवर्सिटी को 19.70 करोड़ रुपए दिए गए थे। इसके बाद से ये ग्रांट लगातार बढ़ी है। 2021-22 में 21 करोड़ रुपए, 2022-23 में 23 करोड़ रुपए, 2023-24 में 24 करोड़ और 2024-25 में 28 करोड़ रुपए दिए गए। इस साल के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार ने यूनिवर्सिटी के लिए 28 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। मुस्लिम स्टूडेंट्स को एडमिशन देने के खिलाफ हुए प्रोटेस्ट में शामिल रहे राष्ट्रीय बजरंग दल के नेता राकेश बजरंगी बताते हैं, ‘ये यूनिवर्सिटी 2004 में बनी थी। इसके बाद 13 साल श्राइन बोर्ड ने इसे चलाने के लिए सरकार से कोई पैसा नहीं लिया। यूनिवर्सिटी श्राइन बोर्ड के पैसों से चलती थी। 2017 से सरकार ने पैसा देना शुरू किया। कुल 121 करोड़ रुपए दिए हैं। श्राइन बोर्ड ने यूनिवर्सिटी पर 600 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।’ ‘सरकार इस सेशन के लिए 28 करोड़ रुपए देने वाली है, लेकिन अब तक मिले नहीं हैं। इतने पैसे में तो यूनिवर्सिटी नहीं चलने वाली। ये एक हिस्सा हो सकता है। बाकी पैसा तो श्राइन बोर्ड ही खर्च करता है। मेडिकल कॉलेज अभी शुरू हुआ था और इस साल यूनिवर्सिटी ने सरकार से मदद ही नहीं ली। यानी मेडिकल कॉलेज में सरकार ने कोई पैसा नहीं दिया।‘ मान्यता रद्द होने की वजह मानक पूरे न होनानेशनल मेडिकल कमीशन को मेडिकल कॉलेज में नाकाफी इन्फ्रास्ट्रक्चर, काबिल टीचिंग फैकल्टी और रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी, मरीजों की संख्या कम होने और बेड ऑक्यूपेंसी खराब होने की शिकायतें मिलीं। मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड की टीम 2 जनवरी, 2026 को कॉलेज पहुंची। असेसमेंट रिपोर्ट में बड़ी कमियां सामने आईं। इस दौरान टीचिंग फैकल्टी में 39% और ट्यूटर, डेमोंस्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट की 65% की कमी मिली। आउटपेशेंट डिपार्टमेंट में न्यूनतम जरूरी संख्या के मुकाबले 50% से भी कम मरीज थे। बेड ऑक्यूपेंसी कम से कम 80% होनी चाहिए, लेकिन ये सिर्फ 45% पाई गई। ICU में भी एवरेज बेड ऑक्यूपेंसी लगभग 50% थी। रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ डिपार्टमेंट में स्टूडेंट के लिए प्रैक्टिकल और रिसर्च लैब नहीं हैं। लाइब्रेरी भी नियमों के मुताबिक नहीं है। यहां जरूरी संख्या के मुकाबले सिर्फ 50% किताबें मिलीं। यहां 15 जर्नल होने थे, जो दो ही मिले। ART सेंटर, MDR-TB मैनेजमेंट फैसिलिटी, ऑपरेशन थिएटर और अलग-अलग मेल-फीमेल वार्ड जैसी जरूरी सुविधाएं भी या तो नहीं हैं या नाकाफी हैं। इसके बाद नेशनल मेडिकल कमीशन ने पाया कि संस्थान अंडरग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन नियमों के तहत न्यूनतम जरूरतें पूरी करने में नाकाम रहा। इसलिए मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड ने कमीशन के चेयरमैन की मंजूरी से मान्यता तुरंत वापस लेने का आदेश दिया। कांग्रेस के स्टूडेंट विंग NSUI के नेशनल प्रेसिडेंट रहे एडवोकेट फिरोज खान कहते हैं, ‘मेडिकल कॉलेज बंद होने से जम्मू-कश्मीर के स्टूडेंट्स का बड़ा नुकसान हुआ है। हेल्थ मिनिस्ट्री और नेशनल मेडिकल कमीशन ने कॉलेज को मान्यता दी थी। इसे कैसे और क्यों रद्द किया गया। अगर इसे माइनॉरिटी इंस्टीट्यूशन घोषित करना था, तो श्राइन बोर्ड को हिंदू-मुस्लिम बंटवारा करने के बजाय इसके लिए अप्लाई करना चाहिए था।’ ..........................................ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ेंदिल्ली के 300 घर यूपी सरकार ने क्यों सील किए, लोग बोले- दिल्ली की CM कहां 32 साल की शबाना का मकान 15 दिसंबर से सील है। शबाना दिल्ली के ओखला में रहती हैं। उनका घर आली गांव की मस्जिद कॉलोनी के 300 मकानों में से एक है, जिसे यूपी के सिंचाई विभाग ने सील कर दिया है। शबाना की तरह कॉलोनी के बाकी परिवार भी सड़क पर रह रहे हैं। इन लोगों को दिल्ली सरकार से शिकायत है क्योंकि इनके पास आधार और वोटर आईडी दिल्ली की ही हैं। पढ़िए पूरी खबर...
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ा तनाव तो होगा विनाशकारी परिणाम: कतर
कतर ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ने से इस क्षेत्र को गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं
DNA: क्या आप जानते हैं कि खलीफा को अपने समर्थकों की फौज को सड़कों पर उतारने की जरूरत क्यों पड़ी. मोहरिब की घोषणा क्यों करनी पड़ी, क्योंकि खलीफा की सबसे खतरनाक फौज इस वक्त खौफ में है. कल तक खलीफा के जो कमांडर ईरान की क्रांति के बीच कत्ल की इबारत लिख रहे थे. अब उनके खिलाफ ऑपरेशन रेड क्रॉस शुरू कर दिया गया है. ईरान में अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने अब एक नया मोड़ ले लिया है.
शी चिनफिंग ने अधिक ऊंचे मापदंडों और ठोस कदमों से पार्टी के सख्त शासन पर बल दिया
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय कमेटी के महासचिव, राष्ट्रपति और केंद्रीय फौजी आयोग के अध्यक्ष शी चिनफिंग ने मंगलवार को पेइचिंग में 20वें सीपीसी केंद्रीय अनुशासन निरीक्षण आयोग के पांचवें पूर्णाधिवेशन पर महत्वपूर्ण भाषण दिया
अफ्रीकी देशों का चीनी विकास एक्सप्रेस पर सवार होने का स्वागत करता है चीन: वांग यी
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने अपनी अफ्रीका यात्रा समाप्त करने के वक्त चीनी मीडिया को एक साक्षात्कार दिया
ट्रंप का ईरान में प्रदर्शनकारियों को सरकारी इमारतों पर कब्जे का आह्वान, 12 हजार मौतों का दावा
ट्रंप ने ईरान के प्रदर्शनकारियों से न केवल आंदोलन जारी रखने की अपील की, बल्कि सरकारी संस्थानों पर कब्जा करने तक की सलाह दी है। उन्होंने यह भी कहा है कि प्रदर्शनकारियों पर हो रही हत्याओं और अत्याचारों के जिम्मेदार लोगों के नाम दर्ज किए जा रहे हैं।
Volodymyr Zelenskyy India visit: यूक्रेन ने उम्मीद जताई है कि राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की जल्द ही भारत का दौरा करेने वाले हैं. इसको लेकर कीव व्यापार और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए जॉइंट कमीशन की बैठक की योजना बना रहा है.
Iran Unrest: ईरान में कई शहरों में दो हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शन, 2,000 मौतों का दावा
इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत ईरान की खराब आर्थिक स्थिति के कारण हुई। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, मुद्रा की गिरती कीमत और रोजमर्रा की जरूरतों की कमी से आम जनता में गुस्सा लंबे समय से पनप रहा था।
दुनिया के सबसे बड़े उद्योगपति एलन मस्क की कंपनी xAI का चैटबॉट ग्रोक फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है. इस चैटबॉट को मलेशिया और इंडोनेशिया में बैन कर दिया गया है. दावा किया जा रहा है कि xAI का चैटबॉट महिलाओं और बच्चों को अनड्रेस कर रहा है. इसके बाद एक नही बहस छिड़ गई है.
20 बरस की राजकुमारी 150 साल के बाद बनने जा रही स्पेन की रानी, आखिर कौन हैं लियोनोर?
Spain queen: स्पेन में ऐसा कानून है जिसका पालन सिंहासन के उत्तराधिकारी को करना पड़ता है. कानून के अनुसार भावी उत्तराधिकारी को सेना, नौसेना और वायुसेना का सैन्य प्रशिक्षण हासिल करना जरूरी होता है.
लंदन में नाबालिग सिख लड़की का यौन शोषण, 200 सिखों ने घेरा डालकर पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग से छुड़ाया
आरोप है कि एक कथित पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग ने उसे प्रेम जाल में फंसाकर अगवा किया और एक फ्लैट में बंधक बनाकर कई लोगों से दुष्कर्म कराया। यह घटना सामने आने के बाद इलाके में तनाव फैल गया और सिख समुदाय के लोगों ने आरोपियों के फ्लैट के बाहर कई घंटे तक प्रदर्शन किया।
Bangladesh parliamentary election:बांग्लादेश में फरवरी 2026 के संसदीय चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक हिंसा तेज हो गई है. पिछले साल राजनीतिक झड़पों में 100 से ज्यादा मौतें हुईं, कई उम्मीदवारों की हत्या हो चुकी है. अवैध हथियारों का बोलबाला है, पुलिस 'ऑपरेशन डेविल हंट फेज-2' चला रही है लेकिन डर कम नहीं हो रहा. उम्मीदवार और वोटर दोनों सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं. जानें पूरी रिपोर्ट.
कोर्ट के निर्देश की अनदेखी पड़ी भारी! निर्वासित भारतीय को वापस बुलाने पर अमेरिकी अदालत का बड़ा फैसला
Indian deportation case USA: अमेरिका की एक संघीय अदालत ने अपने तरह का एक अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे एक भारतीय नागरिक को फिर से अमेरिका वापस लाने की व्यवस्था करें, जिसे अदालत के साफ आदेश के बावजूद भारत भेज दिया गया था. जज ने फैसला सुनाया कि डिपोर्टेशन गैर-कानूनी था और न्यायिक अधिकार का उल्लंघन था.
24 साल की उम्र में डिमेंशिया, ब्रिटेन के सबसे युवा मरीज ने खोले बीमारी के रहस्य
इंग्लैंड के नॉरफ़ोक निवासी आंद्रे यारहम को ब्रिटेन का सबसे युवा डिमेंशिया पीड़ित माना जाता है। हाल ही में केवल 24 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उन्हें महज़ 22 वर्ष की आयु में डिमेंशिया का औपचारिक निदान मिला था।
बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की हत्या: 23 दिन में 7 हिंदुओं का मर्डर
समीर कुमार दास की हत्या बांग्लादेश में बीते 23 दिनों के दौरान हिंदू समुदाय से जुड़ी सातवीं मौत की घटना है। इससे पहले 5 जनवरी को नरसिंदी जिले में 40 वर्षीय हिंदू दुकानदार शरत चक्रवर्ती मणि की धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई थी।
Money Heist जैसा प्लान! 180 करोड़ का गोल्ड चोरी, कनाडा पुलिस ने भारतीय को किया अरेस्ट
gold heist project 24k: कनाडा की पील पुलिस ने देश की सबसे बड़ी सोने की चोरी, प्रोजेक्ट 24K, में शामिल आरोपी अर्सलान चौधरी को गिरफ्तार किया है. अन्य आरोपी भी कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं, जबकि एक मुख्य आरोपी भारत में है.
वेंस और रुबियो ने सर्जियो गोर को दी बधाई, भारत में संभाला अमेरिकी दूत का पद
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सार्वजनिक रूप से सर्जियो गोर को बधाई दी है
US Bill To Annex Greenland News:अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की धमकियों के बीच, रिपब्लिकन सांसद ने अमेरिकी कांग्रेस ((Senate, House of Representatives) में ग्रीनलैंड विलय और राज्य का दर्जा अधिनियम पेश किया. यह विधेयक राष्ट्रपति को ग्रीनलैंड को अमेरिकी संघ में शामिल करने और डेनमार्क के साथ बातचीत करने का अधिकार देगा ताकि द्वीप को भविष्य में अमेरिकी राज्य बनाया जा सके.
ट्रंप प्रशासन का कड़ा कदम: रिकॉर्ड 1 लाख वीजा रद्द
ट्रंप प्रशासन ने एक साल से भी कम समय में एक लाख से ज्यादा विदेशी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए हैं
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा के बीच एक और हिंदू युवक की हत्या
बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की हत्या हुई है। यह घटना फेनी जिले के डागनभुइयां उपजिले में हुई, जहां भीड़ ने हिंदू समीर दास को मार डाला
छोटे मतभेदों के बावजूद भारत-अमेरिका रिश्ते मजबूत: अमेरिकी सांसद
अमेरिकी कांग्रेसमैन्स ने माना है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर कुछ समय से मतभेद बने हुए हैं
US lawmakers call China main adversary:अमेरिकी कांग्रेस के सांसदों अमी बेरा और रिच मैकॉर्मिक ने CSIS फोरम में चीन को अमेरिका का मुख्य रणनीतिक दुश्मन करार दिया है. उन्होंने भारत को लोकतंत्र का मजबूत काउंटरवेट बताया है. इसके साथ ही पीएम मोदी की लीडरशिप की जमकर तारीफ करते हुए गांधी के बाद आधुनिक युग में सबसे बड़ा नेता बताया है.
ईरान में विरोध प्रदर्शन के बीच खामेनेई के समर्थन में निकली रैली, विदेश मंत्री हुए शामिल
ईरान में अभी भारी तनाव का माहौल है। एक तरफ देश की आम जनता खामेनेई के खिलाफ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रही है
8 साल बाद कनाडाई प्रधानमंत्री की चीन यात्रा
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 14 से 17 जनवरी तक चीन की औपचारिक यात्रा करेंगे
ईरान से व्यापार पड़ सकता है भारी! ट्रंप ने लगाया 25% टैरिफ, ग्लोबल ट्रेड में मच गया भूचाल?
Trump Iran tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर बड़ा कदम उठाया है. ट्रंप ने ऐलान किया है, जो भी देश ईरान से व्यापार करेंगे उसे अमेरिका के साथ होने वाले हर तरह के कारोबार पर 25 प्रतिशत टैक्स देना पड़ेगा. इस फैसले तो तुरंत लागू भी कर दिया गया है. इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है, साथ ही उन देशों पर भी जिनका ईरान के साथ व्यापार होता है.
ट्रंप का बड़ा ऐलान: ईरान से व्यापार करने वालों पर 25% टैरिफ
ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका ने एक बार फिर कड़ा कदम उठाया है
32 साल की शबाना का मकान 15 दिसंबर से सील है। शबाना दिल्ली के ओखला में रहती हैं। उनका घर आली गांव की मस्जिद कॉलोनी के 300 मकानों में से एक है, जिसे यूपी के सिंचाई विभाग ने सील कर दिया है। शबाना का आरोप है कि घर सील करने से पहले नोटिस भी नहीं दिया। वे कहती हैं, ‘एक महीना होने वाला है। हम घर से बाहर पड़े हैं। मोदी जी कहते हैं कि बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ। हम तो रोड पर हैं। बेटियों को कहां से पढ़ाएंगे। हमारे सिर से छत छीन ली, इससे अच्छा तो फांसी दे दें।‘ शबाना की तरह कॉलोनी के बाकी परिवार भी सड़क पर रह रहे हैं। मस्जिद कॉलोनी से 500 मीटर दूर पीर कॉलोनी के लोग भी डरे हुए हैं। यहां भी यूपी सिंचाई विभाग के दावे वाली 8.48 एकड़ जमीन है। यहां अभी मकान सील नहीं किए गए हैं। लोगों को डर है कि किसी भी दिन कार्रवाई हो सकती है। वहीं यूपी के सिंचाई विभाग का दावा है कि जमीन उनकी है और दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर घर सील किए गए हैं। इस मामले में दिल्ली के साकेत कोर्ट में केस चल रहा है। 13 जनवरी को सुनवाई होनी है। मस्जिद कॉलोनी का हाल'अफसर पुलिस और मजदूर लेकर आए, सामान बाहर फिंकवा दिया'आली गांव में पुस्ता रोड से सटी 8.48 एकड़ जमीन पर सिंचाई विभाग का दावा है। रोड पर बड़ा मार्केट है। दुकानों के अलावा मकान भी बने हैं। बंद पड़ी रेलवे लाइन पार करके मस्जिद कॉलोनी आती है। हम रात 8 बजे कॉलोनी में पहुंचे। यहां मिलीं शबाना बच्चों और मोहल्ले की बाकी महिलाओं के साथ अलाव ताप रही थीं। वे बताती हैं, ‘मकान सील हुआ, तब बच्चे स्कूल से लौट रहे थे। पुलिस को देखकर डर गए और रोने लगे। अफसर अपने साथ लेबर लेकर आए थे। हमारा आधा सामान बाहर फिंकवा दिया। आधा सामान अंदर ही रह गया। वे मकान सील करके चले गए। हमें नोटिस ही नहीं मिला, तो वे हमारा घर कैसे सील कर सकते हैं।’ शबाना आगे कहती हैं, 'पानी और टॉयलेट नहीं है। महिलाओं को बहुत दिक्कतें हो रही हैं। मैं खुद 8 दिन से नहीं नहा पाई। हम लोग दिल्ली में रह रहे हैं, तो यहां की सरकार कोई दखल क्यों नहीं दे रही।' 8 डिग्री वाली ठंड, बचने के लिए सिर्फ तिरपाल23 साल की ज्योति 8 महीने की प्रेग्नेंट हैं। वे कहती हैं, ‘प्रेग्नेंसी में बार-बार टॉयलेट की जरूरत पड़ती है, लेकिन घर सील है, तो दिक्कत हो रही है।‘ यहीं 60 साल की समीना अलाव के पास बैठी मिलीं। उनके परिवार में 18 सदस्य हैं। समीना बताती हैं, ‘13 दिसंबर को सीलिंग से पहले बहू को बेटा हुआ। कुछ दिन हमने बहू और पोते को यहीं रखा, लेकिन ठंड बढ़ी तो खुले में सोने से बीमारी होने का डर था। इसीलिए दोनों को रिश्तेदारों के पास झज्जर भेज दिया। बाकी परिवार के साथ हम अब भी सड़क किनारे रह रहे हैं।‘ समीना की गोद में उनका 5 साल का नाती लगातार रो रहा था। उसे देखकर समीना कहती हैं, ‘बेटी नहीं रही, उसका बेटा हमारे साथ रहता है। ये भी मेरे साथ बाहर सोता है, लेकिन इतनी ठंड में नींद कहां आती है। बार-बार जाग जाता है।‘ मदरसा सील, इमाम बोले- टोकने पर पुलिस ने बदसलूकी की मस्जिद के बगल में बने मदरसे को भी सील कर दिया है। मस्जिद के इमाम मोहम्मद आबदीन कहते हैं, ‘15 तारीख को 500 से ज्यादा अधिकारी बिना नोटिस दिए पुलिसवालों के साथ आए। मस्जिद तो सील नहीं की, लेकिन मदरसा सील कर गए। पुलिस वालों ने मस्जिद में पानी की सप्लाई वाला सबमर्सिबल पंप भी तोड़ दिया। मैंने समझाया कि इससे वजू करने वाले नमाजियों को दिक्कत होगी। टोकने पर पुलिसवाले बदसलूकी करने लगे। 'आधार और वोटर कार्ड है, फिर कैसे बेदखल किया'कॉलोनी में रहने वाले 17 साल के आकिब खान 10वीं में पढ़ते हैं। पिता मेट्रो में सफाई कर्मचारी हैं। छह भाई-बहनों के परिवार में मझले आकिब दाहिने पैर से पैरालाइज्ड हैं। अगले महीने उनके एग्जाम होने वाले हैं, लेकिन कॉलोनी के हालात की वजह से उनकी पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। आकिब कहते हैं- पानी-बिजली काट दी। मीटर उखाड़ ले गए। नहाने तक का इंतजाम नहीं है। मैं स्कूल नहीं जा पा रहा हूं। रात में बिजली नहीं होती, इसीलिए पढ़ाई नहीं हो रही। ऐसा ही रहा तो बोर्ड के एग्जाम नहीं दे पाऊंगा। 24 साल के दानिश मलिक दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर रहे हैं। वे दावा करते हैं कि वे तीन पीढ़ी से यहां बसे हैं। सीलिंग वाले दिन के बारे में दानिश कहते हैं, ‘कॉलेज से लौटा तो कार्रवाई शुरू हो गई थी। सब अचानक ही हुआ। पहले मार्केट सील करने की बात थी। इसीलिए अधिकारी पहले मार्केट में गए, लेकिन फिर मेन चौक पर आ गए।‘ ‘अफसरों ने बदतमीजी की और सारे दरवाजे बंद करने लगे। शुरू में ऐसा लगा, जैसे अचानक किसी ने हमला कर दिया हो। अगर हमें नोटिस दिया होता, तो हम सामान निकालते या कोई इंतजाम करते। उन्होंने आनन-फानन में ही सब कुछ कर दिया।’ दानिश दावा करते हैं कि यहां लोगों के पास आधार से लेकर वोटर कार्ड भी हैं। इसीलिए बेदखल किया जाना गलत है। ‘मस्जिद कॉलोनी में सिर्फ मुस्लिम नहीं, हिंदू परिवार भी‘32 साल के मनोज 15 लोगों के परिवार के साथ रहते हैं। वे कहते हैं कि जगह का नाम मस्जिद कॉलोनी है, लेकिन यहां सभी धर्म के लोग रहते हैं। मनोज शिकायत करते हैं कि कार्रवाई का असर हम पर ही नहीं, बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। खुले में सोने से 60 साल की मां की तबीयत बिगड़ने लगी है। वे कहते हैं, 'शुरू में हमने किराए के मकान में जाने का सोचा, लेकिन आली गांव और आसपास के इलाकों में किराए के कमरे भर गए हैं। किराया 2 हजार से बढ़कर 5 हजार हो गया है। मजबूरी में लोगों ने ले भी लिया है। अब कमरे ही नहीं बचे। हम दूर जाना नहीं चाहते, इसलिए तिरपाल डालकर यही रह रहे हैं।’ मस्जिद कॉलोनी से सिर्फ 500 मीटर दूर पुस्ता रोड पर ही पीर मोहल्ला है। इस जमीन पर भी यूपी सिंचाई विभाग का दावा है। यहां रहने वाले लोगों को भी मस्जिद कॉलोनी की तरह कार्रवाई का डर सता रहा है। पीर मोहल्ले में भी लोग डरे, बेघर हो जाएंगे 1500 से ज्यादा परिवार63 साल के इसरार अहमद पीर मोहल्ले में रहते हैं। वे यूपी सिंचाई विभाग के दावे को सिरे से खारिज करते हैं। इसरार का दावा है कि ये बस्ती 200 साल पुरानी है। यहां उनका 7 लोगों का परिवार रहता है। इसरार बताते हैं, ‘हमें यहां रहते हुए 80 साल हो गए। बिजली, पानी का कनेक्शन है, राशन कार्ड है। दिल्ली सरकार कहती है कि जहां झुग्गी है, वहां मकान बनाएंगे। यहां तो पहले से ही मकान हैं, झुग्गी का सवाल ही नहीं है। फिर क्यों कार्रवाई की जा रही है।‘ ‘2004 में यूपी सिंचाई विभाग ने जितनी जमीन लेनी थी, वो ले ली। विभाग कहता है कि लगभग 9 एकड़ बाकी है, लेकिन कागजों में साफ लिखा है कि इसे भूल जाओ, क्योंकि यहां घनी आबादी है। कोर्ट में भी ये दर्ज है। 2004 के बाद का नया दावा हमारे लिए मुसीबत बन गया है।‘ यहां किराए पर रहे रहे 34 साल के संजय दिल्ली सरकार से जांच की मांग करते हैं। वे कहते हैं कि यूपी और दिल्ली के बीच जमीन का विवाद सुलझना चाहिए। वरना यहां रह रहे 1,500 से 1,600 घरों में रह रहे परिवार ठंड में सड़क पर आ जाएंगे। वकील बोले- सरकार को मानवीय आधार पर सोचना चाहिए मस्जिद कॉलोनी और पीर मोहल्ले में रहने वाले लगभग 250 लोगों का केस सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के वकील अनुज कुमार गर्ग लड़ रहे हैं। वे बताते हैं कि यूपी सिंचाई विभाग के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट और साकेत कोर्ट में केस चल रहा है। साकेत कोर्ट में 13 जनवरी को सुनवाई होनी है। अनुज दावा करते हैं कि विवाद वाली जमीन उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की नहीं है। यहां लगभग 50 से 60 साल से लोग रह रहे हैं। सबसे पुराना केस लगभग 150 साल पुराना है। 6-7 पीढ़ी से लोग यहीं रह रहे हैं। 1963 के लिमिटेशन एक्ट में साफ है कि अगर सरकारी जमीन पर भी कोई 30 साल से बसा है और सरकार की जानकारी में है, फिर भी एक्शन नहीं हुआ तो ये एडवर्स पजेशन में बदल जाता है। फिर ये लोग तो इतने साल से यहां रह रहे हैं। वे कहते हैं, ‘ये जमीन यूपी सरकार की नहीं है और इसमें अभी तक पूरा डिमार्केशन भी नहीं हुआ है। ये चीजें साफ नहीं हो जातीं, तब तक हमारा कब्जा गलत नहीं कहा जा सकता। अभी तक सिर्फ सीलिंग हुई है। कोई कब्जा कार्रवाई नहीं हुई और न ही आगे कोई प्रक्रिया चली है।‘ केस की स्थिति पर अनुज बताते हैं, ‘हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि सभी पक्ष बैठकर बात करें और मामले को सुलझाएं। अभी तक केस में दिल्ली सरकार का नाम नहीं था। इसीलिए एक नया केस फाइल किया है, जिसमें दिल्ली सरकार, लेफ्टिनेंट गवर्नर, DDA और केंद्र सरकार को पक्षकार बनाया गया है। सभी पक्षकारों को नोटिस जारी हो चुका है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया है।‘ केस में लोगों की मांगों को लेकर अनुज गर्ग डिक्लेरेशन और वैकल्पिक जगह पर बसाए जाने की बात करते हैं। वे कहते हैं, ‘लोग वहीं रहना चाहते हैं। जमीन उनकी है, वे कहां जाएंगे। ये कोई बड़े लैंडलॉर्ड नहीं हैं, छोटी आमदनी वाले लोग हैं, जिन्होंने जैसे-तैसे पैसे जमा करके जमीन खरीदी है।‘ हमने यूपी के सिंचाई विभाग में सेक्रेटरी कृष्ण कुमार से बात की। उन्होंने इस पर कोई कमेंट करने से मना कर दिया। इसके बाद हमारी बात ओखला में तैनात इंजीनियर लेवल के अधिकारी से हुई। केस कोर्ट में पेंडिंग है, इसलिए उन्होंने हमसे नाम न छापने की शर्त पर बात की। अधिकारी का दावा है, ‘2002 में ही यूपी के सिंचाई विभाग ने ओखला में आने वाली जमीनों का केस जीत लिया था। इसमें जामिया नगर और पुस्ता रोड में काफी जमीनें थी। खाली पड़ी जमीनों पर 2004 तक कब्जा ले लिया गया। आबादी वाली जमीनों पर विभाग ने कब्जा नहीं लिया। पहला फोकस खाली पड़ी जमीनों को वापस लेना था। फिर विभाग ने आबादी वाली जगहों पर नोटिस देने शुरू किए तो लोग कोर्ट पहुंच गए। हम पहले ही कोर्ट में जीत चुके थे।‘ मस्जिद कॉलोनी के केस में अधिकारी दावा करते हैं कि जब भी कोर्ट ने घरों को तोड़ने पर स्टे लगाया, हमने फैसला माना है। 13 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने मस्जिद कॉलोनी में कब्जा लेने का आदेश दिया। 15 दिसंबर की कार्रवाई कोर्ट के आदेश के बाद ही की गई। आगे भी कोर्ट की बात मानी जाएगी। दिल्ली में यूपी के सिंचाई विभाग की जमीन कैसे? यूपी का सिंचाई विभाग दिल्ली में आए दिन जमीनों का दावा करता रहा है। जून 2025 में जामिया नगर में भी विभाग ने लोगों के मकानों पर नोटिस लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले एडवोकेट कुणाल यादव इसे नदियों के बंटवारे और पुराने समय के मैनेजमेंट का नतीजा बताते हैं। वे कहते हैं, ‘आजादी से पहले और कुछ समय बाद तक दिल्ली और आसपास के इलाकों में यमुना नदी के पानी और नहरों के मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संयुक्त प्रांत यानी आज के उत्तर प्रदेश की थी। अंग्रेजों के समय दिल्ली में कई नहरें बनाई गईं। उस समय सिंचाई से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स का कंट्रोल यूपी के इंजीनियरों के पास था।‘ ‘यमुना की सफाई और नहरों के रखरखाव के लिए नदी के किनारों पर खाली जमीन की जरूरत होती है। कानूनी रूप से ये जिम्मेदारी यूपी की है, इसलिए ये जमीन भी उन्हीं की है। दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश बना, तब भी जमीनों का ट्रांसफर पूरी तरह से नहीं हुआ।‘ ‘दिल्ली और यूपी के बीच कई पुराने समझौते हैं। इनके तहत बाढ़ नियंत्रण या सिंचाई के काम में आने वाली यमुना के किनारे की जमीनें यूपी सिंचाई विभाग के अधिकार क्षेत्र में ही छोड़ी गईं। इसलिए अब भी इन जमीनों का टाइटल यूपी सरकार के पास है।‘.................... ये खबर भी पढ़ें... स्कैन कर बांग्लादेशी बताने वाली मशीन का सच क्या 23 दिसंबर की बात है। गाजियाबाद में कौशाम्बी थाने के SHO अजय शर्मा बिहारी मार्केट की झुग्गियों में पहुंचे। उनके साथ लोकल पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान भी थे। अजय शर्मा टीम के साथ वहां रहने वालों की नागरिकता चेक करने लगे। SHO ने झुग्गी में रहने वाले 52 साल के मोहम्मद कैसर आलम से कागज दिखाने को कहा। पूछा कि कहां के रहने वाले हो, बांग्लादेशी तो नहीं हो। पढ़िए पूरी खबर...
DNA: ट्रंप की जिद... वेनेजुएला से क्यूबा तक कैसे चल रही 'आत्ममुग्धता' की राजनीति?
DNA: महात्मा गांधी ने कहा है कि हिंसा की राजनीति अंततः सबको जला देती है. लेकिन गांधीजी की कही ये बात ट्रंप को कहां समझ में आ रही है! ट्रंप को सिर्फ उतना ही समझ में आता है, जो उन्हें 'अभूतपूर्व' की श्रेणी में ला सकता है. ट्रंप अक्खड़ हैं, ट्रंप जिद्दी हैं, वो आत्ममुग्ध हैं, अति आत्मकेन्द्रित हैं. अप्रत्याशित निर्णय लेते हैं यही उन्हें अहंकारी जैसे अलंकार से अलंकृत भी करता है.
मुसलमानों की मौत पर इतना सन्नाटा? ईरान के लोगों के साथ सहानुभूति क्यों नहीं दिख रही
Iran news:ईरान में हो रही इन मुसलमानों की मौत पर इस्लामिक दुनिया कोई मातम नहीं मना रही. ना दुनिया के 50 से ज्यादा इस्लामिक देशों के नेताओं की छाती फट रही है. सोचिए गाजा में कोई घटना घटती तो देश-दुनिया के गाजा प्रेमी आंसू बहाने लगते हैं. लेकिन ईरान के मुसलमान मारे जा रहे हैं तब कोई कुछ नहीं बोल रहा, सब चुप हैं.
DNA: ईरान की मस्जिदें कैसे बन गईं प्रोपेगेंडा का हब, आखिर कौन लगा रहा इनमें आग?
अपने कथित इस्लामिक शासन के नाम पर खामनेई और उनकी मौलाना मंडली ने खुद को सर्वोपरि घोषित कर दिया. हर मस्जिद, हर मदरसा उनका कंट्रोल रूम बन गया. मित्रो कथित इस्लामिक शासन में ईरान की मस्जिदें धार्मिक स्थल नहीं सरकारी ताकत का केंद्र बन गई थी.
Mosque Burning In Iran Protest: ईरान में प्रदर्शन का रूप इतना भीषण हो गया है कि वहां की 99 प्रतिशत मुस्लिम आबादी मस्जिदों को आग के हवाले कर रही है. यहां अबतक 30 से ज्यादा मस्जिद फूंक चुके हैं.
यूट्यूब पर नॉर्थ कोरिया से अपलोड हुआ बिना ऑडियो वाला 140 साल लंबा वीडियो, इंटरनेट पर मची हलचल
Youtube Longest Video With Cryptic Confusion: वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर एक अजीबोगरीब वीडियो अपलोग की गई है, जिसकी अवधि पूरे 140 साल की है.
अमेरिकी दूतावास भारतीय छात्रों को कानूनों का पालन करने की चेतावनी दे रहा है ताकि उनके वीजा रद्द न हों और भविष्य सुरक्षित रहे. क्योंकि वीजा कोई अधिकार नहीं बल्कि एक सुविधा है. जिसे नियमों के उल्लंघन पर छीना जा सकता है.
Bangladesh Hindu murder: मृतक की पहचान समीर कुमार दास के रूप में हुई है. 29 साल के समीर पेशे से ऑटो-रिक्शा ड्राइवर थे. ढाका से आई सनसनीखेज रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑटो ड्राइवर समीर दास की खून से लथपथ बॉडी एक अस्पताल के पास मिली.
न दोस्ती न विचारधारा फिर भी जमात का चीन से रिश्ता! बांग्लादेश में ड्रैगन का ये कैसा 'सीक्रेट गेम'?
इस मुलाकात ने दक्षिण एशिया के रणनीतिक और सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. शीर्ष सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह संपर्क केवल किसी विचारधारा के प्रति समर्थन तक सीमित नहीं है बल्कि बांग्लादेश में होने वाले आगामी चुनावों से पहले चीन की एक सोची-समझी और बहुस्तरीय कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है.
Filipino Women Worshipped Cartoon Character: फिलीपींस में एक महिला 4 साल से भगवान बुद्ध समझकर एक मूर्ति की पूजा कर रही थी, हालांकि वह मूर्ति एक कार्टून कैरेक्टर निकला.
14 लाख के बराबर एक! अमेरिका का डॉलर 40 साल बाद कैसे लाया ईरान में भूचाल? अब खामेनेई की खैर नहीं
ईरान की करेंसी रियाल के गिरने से वहां की सरकार के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है. खामेनेई की सुप्रीम लीडरशिप में रियाल की हालत दम तोड़ने के कगार पर पहुंच गई है.
Irani Girl Smoking Cigarette While Burning Khamenei Photo: ईरान में खामेनेई की सत्ता के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के बीच सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीर जलाती एक युवती का वीडियो वायरल हो रहा है. युवती अब प्रदर्शन की पोस्टर गर्ल बन चुकी है.
Modern warfare technology: क्या अमेरिका और चीन के पास 'सोनिक' (Sonic weapons) हथियार हैं? ये चर्चा इसलिए क्योंकिएक ऑनलाइन पोस्ट के हवाले से दावा किया जा रहा है कि इनका इस्तेमाल चीन ने पांच साल पहले गलवान घाटी (Galwan clash) में भारत से झड़प के दौरान किया था.
निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी से जोड़कर AI जनरेटेड तस्वीर वायरल
बूम ने पाया कि अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी दिखाती ये तस्वीर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार की गई है.
बलजोत ने अपनी फेसबुक पोस्ट पर हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए लिखा, 'सत श्री अकाल वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह,आज इंडियाना में विरेंदर सेंभी की जो हत्या हुई है उसकी जिम्मेदारी मैं बलजोत और जस्सा लेते हैं.
गार्ड के अनुसार, कार्रवाई के दौरान अमेरिकी सेना ने बिना किसी नुकसान के सैकड़ों लड़ाकों को निष्क्रिय कर दिया। उसने कहा कि उसने इस तरह की सैन्य तकनीक न तो पहले कभी देखी थी और न ही इसके बारे में सुना था।
Gaza Stabilization Force: बांग्लादेश की पैलेस्टाइन सोलिडैरिटी कमेटी ने सरकार को गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स में शामिल न होने की चेतावनी दी है. समिति ने कहा कि गाजा गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा है और किसी अंतरराष्ट्रीय सैन्य बल में भागीदारी फिलिस्तीन समर्थक बांग्लादेश की ऐतिहासिक व नैतिक नीति के खिलाफ होगी.
‘एक झटके में छीन सकता हूं अमेरिकियों की नागरिकता...' ट्रंप के विवादित बयान से मचा बवाल
Trump:अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर उन्हें किसी अमेरिकी नागरिक की देशभक्ति पर शक होगा या वे देश के लिए खतरा हैं, तो वह उसकी नागरिकता तुरंत रद्द कर सकते हैं. उन्होंने नेचुरलाइज्ड नागरिकों को भी इससे अलग नहीं बताया और कहा कि ऐसा करना उनका अधिकार है.
ट्रंप का ऐलान – “किसी भी हालत में ग्रीनलैंड होगा अमेरिका का”
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ग्रीनलैंड को अपने अधिकार में लेगा। उनका कहना है कि अगर अमेरिका ऐसा नहीं करता है तो रूस या चीन इस रणनीतिक इलाके पर कब्जा कर सकते हैं
Donald Trump Acting President of Venezuela: अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट डाली, जिसमें खुद को 'वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति' बताया. ये ऐलान निकोलस मदुरो की गिरफ्तारी के बाद आया, जब अमेरिका वेनेजुएला पर कब्जा कर तेल की बिक्री का कंट्रोल ले रहा है. ट्रंप ने कहा कि वो देश को चलाएंगे जब तक संक्रमण पूरा नहीं होता. ये पोस्ट दुनिया भर में हंगामा मचा रहा है.
145 किमी दूर जिस क्यूबा को ट्रंप ने धमकाया, वहां की तस्वीरों से ही तब सहम गया था अमेरिका
वेनेजुएला के बाद ट्रंप जिस द्वीपीय देश क्यूबा को धमका रहे हैं, वे दोनों पिछले कई दशकों से दोस्त हैं. वजह समाजवादी विचारधारा होने के साथ-साथ तेल भी है. 1960 के दशक से ये दोनों देश एक दूसरे पर निर्भर हैं. अब डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि क्यूबा का पतन होने वाला है.
ईरान पर ट्रंप की सख्त चेतावनी – “बहुत कड़े कदम” उठाने की तैयारी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान में चल रही घटनाओं को देखते हुए अमेरिका कड़े कदम उठाने पर विचार कर रहा है
कौन हैं खामनेई की सत्ता को चुनौती देने वाले रजा पहलवी? इस्लामी क्रांति की वजह से छोड़ना पड़ा था ईरान
Trump Act For Iran:ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे और निर्वासित युवराज रजा पहलवी एक बार फिर सुर्खियों में हैं. 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद देश छोड़ने को मजबूर हुए रजा पहलवी अब ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच एक प्रमुख प्रतीक और समर्थक के रूप में उभर रहे हैं. अमेरिका में निर्वासन में रह रहे 65 वर्षीय पहलवी ने हाल के दिनों में ईरानी जनता से सड़कों पर डटे रहने और आंदोलन को जारी रखने की अपील की है.
ट्रंप की 'बहुत मजबूत एक्शन' वाली धमकी सुनते ही ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई ने बातचीत का ऑफर दे दिया है. ये तब हुआ है जब विरोध प्रदर्शनों में 500 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं. उधर निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने ट्रंप से अपील की है कि ईरान को आजाद करवाओ, फिर महान बनाओ'. जिसके बाद अब नेगोशिएशन की उम्मीद जगी है. लेकिन हालात अभी भी आग की तरह भड़क रहे हैं. जानें पूरी खबर.
Trump inclined to keep ExxonMobil:वेनेजुएला इन दिनों पूरी दुनिया की सुर्खियों में है. अमेरिका ने पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सैन्य कार्रवाई के जरिए हटाकरअब इस देश के विशाल तेल भंडारों को अमेरिकी कंपनियों के हवाले करने की तैयारी में जुटे हैं.लेकिन मामला इतना आसान नहीं है.
6 जनवरी 1026 यानी आज से करीब 1 हजार साल पहले। कश्मीर, मथुरा और ग्वालियर में लूटपाट कर चुका महमूद गजनवी भारत पर अपने आखिरी हमले के लिए सोमनाथ पहुंचा। उसके साथ 30 हजार घुड़सवार और हजारों पैदल सैनिक थे। सोमनाथ के ब्राह्मणों ने कहा, 'शक्तिशाली सोमेश्वर ने भारत के देवताओं के अपमान का बदला लेने इन मुसलमानों को अपने पास बुलाया है।' 15 दिन तक मारकाट और लूटपाट के बाद गजनवी वापस लौटा तो उसके पास 6 टन से ज्यादा सोना था और पीछे सोमनाथ में 50 हजार से ज्यादा लाशें और खंडहर बन चुका मंदिर। गजनवी के बाद भी सोमनाथ मंदिर कई बार तोड़ा गया और फिर बना। आखिरी बार 75 साल पहले इसे सरदार पटेल के प्रयासों से बनाया गया। इन्हीं दो ऐतिहासिक पड़ावों को जोड़ते हुए ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाया गया, जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी भी पहुंचे। उन्होंने अपने भाषण में कहा सोमनाथ मंदिर पर ध्वजा आज भी फहरा रही, 1000 साल पहले हमलावरों को लगा था कि वे जीत गए। मंडे मेगा स्टोरी में सोमनाथ मंदिर और उससे जुड़ी कंट्रोवर्सीज की पूरी कहानी... गजनवी की लूट के 1000 साल और मौजूदा सोमनाथ मंदिर के बनने के 75 साल पूरे होने पर 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' मनाया गया। 8 से 11 जनवरी तक चले इस कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी ने भी भाग लिया। 10 जनवरी की शाम वे सोमनाथ पहुंचे। उन्होंने सोमेश्वर महादेव की महाआरती की। 72 घंटे चलने वाले ओंकार जाप में शामिल हुए। फिर ड्रोन शो भी देखा, जिसमें 3 हजार ड्रोन से सोमनाथ गाथा दिखाई गई। अगले दिन यानी 11 जनवरी को निकाली गई शौर्य यात्रा में पीएम मोदी शामिल हुए। इसमें 108 घोड़े और हजारों श्रद्धालु भी चल रहे थे। फिर पीएम मोदी ने सोमेश्वर महादेव का पूजन-अभिषेक किया। पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा, '1000 साल पहले 1026 में गजनवी ने मंदिर को तोड़ा था। उसे लगा उसने सोमनाथ का वजूद मिटा दिया। लेकिन इसके बाद ही मंदिर का पुननिर्माण शुरू हो गया।' उन्होंने नेहरू का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा, 'जब सरदार पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण की शपथ ली तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भी मंदिर आने से रोकने की कोशिश की गई।' पीएम मोदी ने कहा कि कोई भी देश कट्टरपंथी सोच का समर्थन नहीं करेगा, लेकिन देश के कुछ लोगों ने कट्टरपंथी सोच के आगे घुटने टेक दिए। कार्यक्रम खत्म होने के बाद पीएम मोदी राजकोट रवाना हो गए। ***** ग्राफिक्स: दृगचंद भुर्जी, अजीत सिंह ------ सोमनाथ मंदिर से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए... सोमनाथ मंदिर पर गजनवी के हमले के 1000 साल: मुस्लिम शासकों ने कई बार तोड़ा, सरदार पटेल ने बनवाया; ध्वस्त होने से बनने तक की कहानियां 2026 गुजरात के सोमनाथ मंदिर के लिए 2 वजहों से अहम है। साल 1026 में महमूद गजनवी ने मंदिर पर हमला कर ध्वस्त कर दिया था, जिसके 1000 साल पूरे हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, 11 मई 1951 को स्वतंत्र भारत में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष हो गए हैं। पीएम मोदी ने 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' नाम दिया है। पूरी खबर पढ़ें...
6 फरवरी 2025, सरसंघचालक मोहन भागवत 10 दिन के पश्चिम बंगाल दौरे पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने संघ के पदाधिकारियों के साथ बातचीत की और संगठन के भविष्य के रोडमैप पर बातचीत की। करीब 10 महीने बाद 18 दिसंबर को भागवत 4 दिन के लिए फिर बंगाल पहुंचे। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार का जिक्र करते हुए हिंदुओं से एकजुट होने को कहा। पश्चिम बंगाल में मार्च-अप्रैल तक विधानसभा चुनाव होने हैं। इस लिहाज से मोहन भागवत के ये दोनों दौरे काफी अहम हैं। चुनाव को लेकर RSS की क्या तैयारी है। ये हमें पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में संघ के स्वयंसेवक समझाते हैं। वे बताते हैं, ‘पिछले साल फरवरी में बंगाल दौरे के वक्त संघ प्रमुख ने स्वयंसेवकों को अगले एक साल का टारगेट दिया था। इसमें VHP के कार्यकर्ता भी शामिल थे। मार्च 2026 तक स्वयंसेवकों को हिंदुओं के हर घर में दस्तक देनी है।' 'हमें हर हिंदू के घर पहुंचना है। उसमें दलितों के घर तो सबसे पहले हैं। उनके साथ खाना-पीना है। एक दिन या रात साथ गुजारनी है। बीमारी में उन्हें अस्पताल पहुंचाना है। शादी ब्याह में मदद करनी है। अभी हमें यही आदेश मिला है। अप्रैल 2025 से लेकर अब तक मैं अपनी टीम के साथ 5000 से ज्यादा घरों में जा चुका हूं। कहीं कुछ घंटे रुके तो कहीं एक दिन या रात का प्रवास किया।' पश्चिम बंगाल में चुनाव को लेकर संघ की और क्या तैयारियां हैं, संघ के स्वयंसेवक किन एजेंडे पर काम कर रहे हैं। हमने RSS में अपने सोर्सेज से बात कर समझने की कोशिश की। बंगाल में चुनाव से पहले हिंदुओं को क्या मंत्र दे रहा संघकोलकाता में एक संघ कार्यकर्ता ने हमें पूरा एजेंडा समझाया। वे कहते हैं, प्रखर या कहें प्रचंड हिंदुत्व, दलितों को जोड़ना, बांग्लादेश में हिंदुओं की हालत, घुसपैठ और ममता राज में महिलाओं पर क्रूरता। इन 5 मुद्दों पर हम घर-घर चर्चा कर रहे हैं। अब तक बंगाल के एक बड़े हिस्से में हम पहुंच भी चुके हैं।' आप बंगाल के हिंदुओं को क्या मंत्र दे रहे हैं? ये पूछने पर वो हंसकर बताते हैं, 'वही जो दुनिया के हर कोने में हिंदुओं के लिए है। हिन्दुव: सोदरा: सर्वे, न हिन्दू पतितो भवेत्।मम दीक्षा धर्म रक्षा, मम मंत्र समानताः।मतलब सभी हिंदू एक-दूसरे के भाई हैं, कोई भी हिंदू पतित (नीच) नहीं है। मेरा संकल्प धर्म की रक्षा करना और मेरा मंत्र समानता है। इस मंत्र को उनके मन तक पहुंचाना है। हम हिंदू भाईचारे के इस मूलमंत्र को हर हिंदू तक खासतौर पर हर दलित तक पहुंचा रहे हैं।' वे इस बात को और साफ करते हुए कहते हैं, 'देखिए संघ चुनाव में किसी पार्टी के लिए सीधा प्रचार नहीं करता, लेकिन सबको पता है कि संघ और VHP किसके संगठन हैं। हमें चुनाव के पहले हर हिंदू और खासतौर पर दलितों को संदेश देना ही है कि हिंदू एकजुट नहीं रहे तो उनका हाल बांग्लादेश के हिंदुओं जैसा होगा।' कुछ देर के मौन के बाद वे गंभीरता से कहते हैं, 'आपको पता है कि बांग्लादेश की सीमा संदेशखाली से सिर्फ 15 किलोमीटर दूर है। बंगाल में संघ की सबसे एक्टिव विंग VHP है। इसलिए इस काम में उसके कार्यकर्ता सीधे तौर पर इन्वॉल्व हैं। हर टीम में स्वयंसेवक और VHP कार्यकर्ता साथ काम कर रहे हैं।’ पश्चिम बंगाल में RSS का एजेंडा, 5 पॉइंट्स में समझिए… 1. प्रचंड हिंदुत्व की बातेंदिसंबर में पश्चिम बंगाल पहुंचे संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- दुनियाभर के हिंदुओं को एकजुट होकर बांग्लादेशी हिंदुओं की मदद करनी होगी। भारत ही हिंदुओं का एकमात्र देश बचा है। भारत सरकार को भी बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर दखल देना चाहिए। मुझे लगता है कि सरकार शायद कुछ कर भी रही है।' संघ प्रमुख की इस चिंता को RSS की बंगाल यूनिट के जनरल सेक्रेटरी जिश्नू बसु समझाते हुए कहते हैं, 'बंगाल भी बांग्लादेश जैसा ही बनता जा रहा है। यहां के बुद्धिजीवी गाजा के हालात पर चिंता जताते हैं, लेकिन बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर कोई बात नहीं करता। ये कैसे बुद्धिजीवी हैं, जिन्हें हजारों किलोमीटर दूर गाजा की हिंसा दिखती है, लेकिन कुछ किलोमीटर दूर स्थित बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहा अत्याचार नहीं दिखता।' वहीं बंगाल में RSS के जमीनी कार्यकर्ता कहते हैं, 'हम बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार की कहानी घर-घर तक पहुंचा रहे हैं। RSS बंगाल यूनिट के पदाधिकारी तो इसे अपने भाषणों और बयानों में दोहरा ही रहे हैं। सरसंघचालक कह चुके हैं कि बंगाल में जल्द ही कुछ और बड़े पदाधिकारियों का दौरा भी हो सकता है। ऐसे वे भी अपने प्रवास के दौरान इन बातों को यहां दोहराएंगे।' वे आगे कहते हैं, RSS पॉलिटिकल बातें नहीं करती है। हम ये नहीं बता सकते कि किस पार्टी को वोट दें, लेकिन हिंदू राष्ट्रहित में कैसी सरकार चुननी चाहिए, ये तो बता ही सकते हैं। राष्ट्रहित में ये बताना हमारा धर्म है कि हिंदुओं को एकजुट और चौकन्ना रहना होगा। बंटेंगे तो कटेंगे। दलित, आदिवासी और सवर्ण से पहले हम हिंदू हैं, यही हमारी पहचान है। 2. हिंदुओं को एकजुट करने की कोशिशइसका मतलब RSS के एक साल के एजेंडे में बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार की कहानी पहुंचाना भी शामिल था। इस पर RSS के पदाधिकारी कहते हैं, 'देखिए हमारा प्रमुख एजेंडा हिंदू एकजुटता है। उसका सबसे ताजा उदाहरण बंगाल में हिंदुओं पर हो रहा अत्याचार है। आम हिंदू भी इसे देख और सुन रहा है, तो अगर कहानी वहां से शुरू होगी तो ज्यादा समझ आएगी। ‘हम कहते हैं कि अगर बंगाल को बांग्लादेश बनाने से बचाना है तो हिंदुओं को अवेयर होना पड़ेगा। हमारे बीच ऊंच-नीच का भाव भुलाकर एकजुट होना होगा। बंगाल और बांग्लादेश ज्यादा दूर नहीं हैं। हमें अपनी पहचान बचानी होगी। हिंदू नस्ल बचानी होगी क्योंकि हम ही कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं।' 3. दलितों के घर उनके साथ खाने पर चर्चाबंगाल में 30% से ज्यादा दलित हैं। यानी ये निर्णायक स्थिति में है। सोर्स बताते हैं, ‘फरवरी 2025 में RSS प्रमुख ने स्वयंसेवकों को दलित कम्युनिटी के बीच प्रमुखता से जाने को कहा था। उनके घर प्रवास करने और साथ भोजन करने की सलाह दी थी। बशीरहाट के एक कार्यकर्ता इसे लेकर कहते हैं, 'भागवत जी का संदेश साफ था कि हिंदू समुदाय की एकजुटता को ऊंच-नीच में बांटने की कोशिश हो रही है। दलितों और आदिवासियों के मन में ये भाव भरा जा रहा है। इसलिए हमें दलितों और आदिवासियों के भीतर कमजोर हो रहे हिंदुत्व के भाव को फिर से मजबूत करना होगा।' 'इसलिए घर-घर जाने के अभियान में स्वयंसेवकों की लिस्ट में सबसे ऊपर दलितों के घर हैं। उनके घरों में कम से कम एक दिन या रात गुजारना हर स्वयंसेवक की लिस्ट में है। उनके दुख-सुख में हमें बराबरी से खड़ा होना है। ये पहल ऊंची जाति के सवर्ण स्वयंसेवक कर रहे हैं। वो दलितों के घर उनके कामकाज में जा रहे हैं। ये कोशिश है कि दलित उन स्वयंसेवकों के घर बराबरी से आएं।' 4. ममता राज में महिलाओं से क्रूरता पर बातचुनाव से ठीक एक साल पहले RSS की बैठक के एजेंडे में चौथे नंबर पर महिलाओं के साथ ममता राज में हो रही हिंसा का मुद्दा है। बंगाल में RSS के एक आधिकारिक सोर्स ने बताया, '2022 में नदिया जिले में हुए गैंगरेप में TMC कार्यकर्ता का नाम आया और CM ममता उसके बचाव में उतर गईं।' 'फिर आरजीकर रेप-मर्डर केस में भी ममता बनर्जी पीड़िता के पक्ष में नहीं दिखीं और एक्शन लेने में देरी हुई। इसके बाद सबसे ताजा मामला मालदा और मुर्शिदाबाद में दंगाइयों के आतंक का है, जिसकी सबसे ज्यादा शिकार महिलाएं हुईं। आरोप है कि ये दंगे वक्फ कानून के खिलाफ एक खास कम्युनिटी के लोगों ने किए थे।' वे आगे कहते हैं कि बंगाल में हिंदू महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। महिलाओं के खिलाफ हिंसा की एक लंबी लिस्ट है। हम घर-घर चर्चा में इस मुद्दे को भी उठा रहे हैं। 5. घुसपैठ पर संघ की चिंताRSS बंगाल में घुसपैठ के मुद्दे पर लगातार सख्त है। एक साल के एजेंडे की लिस्ट में घुसपैठ का मुद्दा भी शामिल किया गया था। बंगाल की जनता को डेटा से समझाया जा रहा है कि कैसे घुसपैठ से राज्य की डेमोग्राफी चेंज करने की साजिश चल रही है। इस कवायद का सिर्फ एक ही मकसद है, हिंदुओं को अल्पसंख्यक बनाना। ममता के वोटों का गणित बिगाड़ने की भी तैयारीइमोशनल मुद्दों के बाद वोटों के गणित की बारी आती है। ममता के पूर्व विधायक हुमायूं कबीर के बाबरी मस्जिद के ऐलान को भी स्वयंसेवक CM ममता की चाल बता रहे हैं। मुर्शिदाबाद के एक संघ कार्यकर्ता कहते हैं, 'ममता बनर्जी लगातार हिंदुओं के सेंटिमेंट्स के साथ खेल रही हैं। हुमायूं कबीर के तौर पर उन्होंने मुस्लिम तुष्टिकरण और पोलराइजेशन का पासा फेंका। उनकी पार्टी में रहते हुए पिछले एक साल से वो लगातार बाबरी मस्जिद बनाने की बात कर रहा था। उस पर एक्शन तब लिया, जब हंगामा मचा।' हालांकि अब तो मुस्लिम वोट बंट ही जाएगा न। इस पर जवाब मिला, 'क्या खाक बंटेगा। हुमायूं को पहले भी पार्टी से निकाला गया था। फिर शामिल कर लिया गया था। चुनाव में अगर मुस्लिम वोटों के बंटने का डर होगा तो फिर उसे शामिल कर लेंगे।' फिर वो धीरे से कहते हैं कि हालांकि अगर ये शामिल नहीं हुआ तो ममता का बड़ा नुकसान होगा। बंगाल में BJP की स्थिति पर संघ का सर्वे जारीबंगाल के सह प्रचार प्रमुख बिप्लव रॉय मस्जिद के मसले को सीधा काटते हैं। वे कहते हैं, 'भारत में बाबरी मस्जिद अब दोबारा बन ही नहीं सकती। बाबर ने तो भारत पर हमला किया था। उसके नाम से मस्जिद कैसे बन सकती है। जो कह रहे हैं, उन्हें कहने दो। मैं कह रहा हूं कि इस नाम से मस्जिद नहीं बनेगी।' बंगाल में BJP की क्या स्थिति है और संघ किन मुद्दों पर लोगों से सवाल पूछ रही या उन्हें टटोल रही है? बिप्लव रॉय जवाब में कहते हैं, 'हम बेरोजगारी, राज्य की आर्थिक स्थिति, अस्पतालों की हालत, एजुकेशन, डेवलपमेंट पर लोगों से बात कर रहे हैं कि किन मुद्दों पर उन्हें असंतोष है।' 'RSS फरवरी के पहले हफ्ते में अपनी रिपोर्ट सौंपकर बताएगी कि लोगों के बीच किन मुद्दों की चर्चा है। जनता किन मुद्दों को लेकर खफा है और सरकार से क्या आस लगाए हुए है। लोग सत्ताधारी दल के पक्ष में हैं या लहर उसके विरोध में है।' =========================== ये खबर भी पढ़ें... बांग्लादेश में हिंदुओं का कत्ल, पश्चिम बंगाल तक असर 18 दिसंबर 2025, रात करीब 9 बजे का वक्त था। बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में भीड़ ने गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले दीपू दास को पकड़ लिया। ईशनिंदा का इल्जाम लगाकर भीड़ ने उसे पीट-पीटकर मार डाला। इसके बाद दीपू के शव को फैक्ट्री से कुछ दूर ले गए और आग लगा दी। उस दिन से अब तक बांग्लादेश के अलग-अलग जिलों में 6 हिंदुओं की हत्या हुई है। बांग्लादेश में दीपू की हत्या का असर पश्चिम बंगाल में दिख रहा है। पढ़िए पूरी खबर...
ईरान में महंगाई के खिलाफ उग्र आंदोलन: 100 से अधिक शहरों में हिंसा, 538 मौतें; अमेरिका-यूरोप की नजर
प्रदर्शनकारियों ने कई शहरों में सरकारी इमारतों, बैंकों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। जवाब में सुरक्षाबलों ने भी कड़ी कार्रवाई की, जिसके चलते हालात लगातार बेकाबू होते चले गए।
उबलते किलाउएआ ज्वालामुखी ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की चिंता, 50 फीट तक उठ रहे लावे के फुव्वारे
Kilauea volcano: वैज्ञानिकों ने बताया कि ज्वालामुखी के अंदर होने वाले कंपन, जिन्हें वोल्कैनिक ट्रेमर कहा जाता है वो पहले से ज्यादा तेज हो गए हैं. इसके साथ ही लावा में गैस के बुलबुले फूटने की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं, जिससे लावा के छोटे-छोटे टुकड़े हवा में उछल रहे हैं.
'यह न्यूज़ीलैंड है, भारत नहीं... ऑकलैंड के पास सिखों जुलूस को रोका गया, SGPC ने बताया अस्वीकार्य
सिखों का ये जुलूस रविवार, 11 जनवरी को सुबह 11 बजे गुरुद्वारा सिख संगत मंदिर से शुरू हुआ और कैमरन रोड होते हुए टौरंगा बॉयज़ कॉलेज की ओर बढ़ रहा था. पुलिस ने पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी क्योंकि एक इस जुलूस को लेकर एक स्थानीय ईसाई समूह के द्वारा संभावित हस्तक्षेप की आशंका थी.
ईरान में अवाम का कत्लेआम! विरोध-प्रदर्शन में अब तक 538 ने गंवाई जान, एक्टिविस्ट्स का दावा
Iran protest live update:ईरान में देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 538 लोग मारे गए हैं. मृतकों का आंकड़ा कहीं ज्यादा हो सकता है. दूसरी ओर तेहरान की सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के लिए सैन्य हमला किया तो अमेरिका की सेना और इजरायल पर डायरेक्ट हमला होगा.
Europe Tourism News: यूरोप घूमने का सपना काफी लोगों का रहता है. माना जाता है कि यूरोपीय देश बहुत साफ-सुथरे और टूरिस्ट फ्रेंडली हैं. लेकिन क्या ये फैक्ट वाकई सच हैं. एक ट्रैवल ब्लॉगर के वीडियो ने यूरोपीय देशों के टूरिज्म का 'ग्लैमर' तोड़ दिया है.
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Israel Iran Tension: इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, 'ईरान की मौजूदा सरकार गिरने पर दोनों देश फिर से साझेदार बन सकते हैं'. आपको बताते चलें कि ईरान और इजरायल एक जमाने में जिगरी दोस्त हुआ करते थे'. ईरान में कट्टरपंथियों की सरकार आने के बाद दोनों के रिश्ते तल्ख होते चले गए.
ट्रंप का क्यूबा को अल्टीमेटम – बहुत देर होने से पहले डील करो
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कैरेबियाई देश क्यूबा को धमकी दी है। अल्टीमेटम के साथ कि अगर अमेरिका संग डील नहीं की तो उसे उसका अंजाम भुगतना होगा
Let's deal! इससे पहले देर हो जाए... वेनेजुएला को बर्बाद करने के बाद क्यूबा को ट्रंप की खुली धमकी
Trump warns Cuba: कहां 'ईगल' इतना बड़ा अमेरिका और इत्तू सा क्यूबा, टेक्निकली दोनों में दूर-दूर तक कोई तुलना नहीं है, फिर भी सुपरपावर इस छोटे से देश जिसे 'चीनी का कटोरा' भी कहते हैं, उस क्यूबा से बेंइतहा नफरत करता है. दोनों की दूरी बस इतनी कि फौज छोड़िए, कोई आम अमेरिकी अपनी नाव पर बैठे और चंद घंटों में पहुंच जाए.
बुर्ज खलीफा नहीं रहेगी दुनिया की सबसे ऊंची बिल्डिंग, ये देश बनाने जा रहा 1000 मीटर ऊंचा टावर
Jeddah Tower: जेद्दा टावर का निर्माण 2009 में शुरू हुआ था, लेकिन 2018 में कुछ कारणों से इसे रोकना पड़ा था. अब फिर से 2024–25 में इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम दोबारा शुरू हुआ है, जिसके 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है.

