अपने संबोधन में नेतन्याहू ने कहा कि यह कार्रवाई इस्राइल की सुरक्षा को मजबूत करने और संभावित खतरों को रोकने के उद्देश्य से की गई। उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा हालात, इस्राइल की सैन्य रणनीति और ईरान के खिलाफ उठाए जा रहे कदमों पर विस्तार से बात की।
इजरायल का ईरान पर बड़ा हमला, तेहरान में धमाके और आसमान में धुएं का गुबार
मध्य एशिया में तनाव के बीच इजरायल ने एक बार फिर ईरान पर हमला कर दिया है। इजरायल के रक्षा मंत्री ने कहा कि पूरे देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि ईरान की राजधानी तेहरान में धुएं का गुबार उठता देखा गया है।
अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा वार्ता बेनतीजा, ईरान परमाणु कार्यक्रम पर गतिरोध कायम, ट्रंप नाखुश
मध्यस्थता कर रहे ओमान ने बातचीत को “सकारात्मक” बताया है, लेकिन दोनों देशों के बीच मौजूदा मतभेद दूर होने के स्पष्ट संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव बरकरार है और संभावित सैन्य टकराव की आशंकाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
दिल्ली में संसद भवन से करीब डेढ़ किमी दूर कदीमी मस्जिद है। करीब 114 साल पुरानी छोटी सी ये मस्जिद कृषि भवन के कैंपस में है। वक्फ की प्रॉपर्टी के तौर पर रजिस्टर्ड है। हाई सिक्योरिटी एरिया होने की वजह से आम लोग इसमें नहीं जा सकते, यहां ज्यादातर सरकारी कर्मचारी नमाज पढ़ते हैं। मस्जिद राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक 3 किमी एरिया के रिडेवलपमेंट वाले सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में आ रही है, इसलिए इसके हटाए जाने की आशंका है। सरकार ने इसके सुरक्षित रहने का भरोसा दिया है। फिर भी वक्फ बोर्ड से जुड़े लोगों को यकीन नहीं है, क्योंकि पहले भी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के लिए तीन मजारें और एक मस्जिद तोड़ी जा चुकी है। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के निर्माण पथ पर आने वाली 6 मस्जिदों की हिफाजत के लिए सबसे पहले हाई कोर्ट जाने वाले एडवोकेट मशरूर खान से हमने पूछा कि क्या मस्जिदें सुरक्षित हैं? उन्होंने जवाब दिया, 'नहीं। इसीलिए तो कदीमी मस्जिद के बारे हमने खबरें पढ़ीं तो एक बार फिर कोर्ट के दिए भरोसे और भारत सरकार से लगाई उम्मीद डगमगाने लगी। हम इस मस्जिद से जुड़े कागजात इकट्ठे कर रहे हैं, ताकि अगर इसे गिराने की कोशिश की जाए, तो दावा ठोक सकें।' 1912 में लुटियन के बनाए नक्शे में कदीमी मस्जिद का जिक्रवक्फ बोर्ड में इन दिनों यही बातें हो रही हैं कि कहीं 6, मौलाना आजाद रोड (पुराना उपराष्ट्रपति भवन) पर बनी मस्जिद की तरह चुपचाप एक और मस्जिद ढहाने की तैयारी तो नहीं हो रही। वक्फ बोर्ड की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट मशरूर बताते हैं कि अब तक हमारे पास कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है। छन-छनकर बोर्ड के पास आ रही खबरों से शक तो हो ही रहा है। मशरूर कहते हैं, 'कृषि भवन 1957 में बना था। कदीमी मस्जिद उससे बहुत पहले से है। 1912 में जब ब्रिटिश आर्किटेक्ट लुटियन एडवर्ड दिल्ली को नए सिरे से डिजाइन कर रहे थे, उस वक्त के नक्शे में भी ये मस्जिद है। इसे उस वक्त बनाया नहीं गया, क्योंकि ये पहले से मौजूद थी। इसलिए इसे बिना छेड़े दिल्ली को डिजाइन किया गया।’ ‘ये मस्जिद सिर्फ इस्लामिक ढांचा नहीं, हैरिटेज प्रॉपर्टी है। ब्रिटिश सरकार ने लुटियंस दिल्ली बनाई, तब भी इसे नहीं गिराया। पहली बार भारत सरकार बनी, तब भी ये इमारत सुरक्षित रही। इससे अगर छेड़छाड़ होगी, तो हम कोर्ट जाएंगे।' एडवोकेट मशरूर 1912 में एडविन लुटियन का बनाया नक्शा दिखाते हैं। इसमें दो सर्किल जरिए कहते हैं, 'बड़े सर्किल में सुनहरी मस्जिद है। इसे भी तोड़ा जाना था, लेकिन हमने इसे बचा लिया। हमें सही वक्त पर उसे गिराए जाने की सूचना मिल गई थी। हम कोर्ट चले गए और कोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला दिया। दूसरे छोटे सर्किल में कदीमी मस्जिद है। ये नक्शा सबूत है कि ये दोनों मस्जिदें 1912 से पहले की हैं।' ‘सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की शुरुआत में पिटीशन डाली’एडवोकेट मशरूर कहते हैं, ‘1911 में ब्रिटिश सरकार ने दिल्ली को राजधानी बनाने का फैसला लिया, तो 1911 में सरकारी इमारतें और संसद भवन बनाने के लिए जमीनें खरीदीं। फिर एडवर्ड लुटियन ने पूरी दिल्ली डिजाइन की। उस वक्त कदीमी मस्जिद के अलावा बाकी 5 मस्जिदें भी मौजूद थीं। अभी जहां कृषि भवन है, उसके पास तब रायसीना गांव हुआ करता था। शायद इस मस्जिद में गांव के लोग आते होंगे।’ ‘सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट शुरू हुआ, तब हमने 2021-22 में हाईकोर्ट में पहले ही पिटीशन डाल दी थी, ताकि रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के नक्शे में आने वाली इन 6 मस्जिदों को सुरक्षित कर सकें। कोर्ट ने सरकार से पूछा तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया कि फिलहाल इन्हें ध्वस्त करने की योजना नहीं है। कोर्ट ने भी हमें भरोसा दिया कि मस्जिदें सुरक्षित रहेंगी। अगर आपको इस प्रोजेक्ट के दौरान कुछ आशंका लगे, तो आप वक्फ कोर्ट जा सकते हैं।’ ‘कोर्ट के भरोसे के बाद भी एक मस्जिद चुपचाप हटा दी गई। अब महसूस होता है कि सरकारी वकील के जवाब में जो फिलहाल शब्द था, शायद वही भ्रमित करने वाला था।’ सरकारी वकील ने आपको भ्रमित किया? एडवोकेट मशरूर कहते हैं, ‘हां। उपराष्ट्रपति भवन की मस्जिद हटा दी गई, इससे तो यही लगता है। न कोई सूचना, न कॉन्टैक्ट किया गया। सरकारी वकील का जवाब टालमटोल वाला था। कोई इतनी बड़ी योजना का डिजाइन बनाता है, तो सब कुछ पहले ही तय हो जाता है। इसका मतलब है कि ये तय था कि उपराष्ट्रपति भवन की मस्जिद को गिराया जाएगा।’ ‘इतनी बड़ी योजनाओं में रोज फेरबदल नहीं होता, मतलब हमें बरगलाया गया। अब इसी तरह से कृषि भवन के परिसर में बनी मस्जिद को लेकर भी स्पष्टता नहीं है। हमें जो अलग-अलग सोर्सेज से सूचना मिल रही है कि कृषि भवन और शास्त्री भवन को गिराया जाना है। टेंडर जारी कर दिया गया है। इस टेंडर के लिए जो नक्शा है, उसमें मस्जिद नहीं है।’ ‘हमने सुनहरी बाग मस्जिद बचा ली, क्योंकि इसमें ट्रांसपेरेंसी बरती गई। नई दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने 2023 में सूचना जारी कि इस मस्जिद की वजह से ट्रैफिक बहुत होता है। इसलिए इसे हटाने की योजना हैं। हमने तुरंत एतराज जताया और कोर्ट गए। हमने उसके हेरिटेज प्रॉपर्टी और वक्फ प्रॉपर्टी होने के सारे सबूत दिखाए। हमारा पक्ष सही था, कोर्ट ने इसे माना। आदेश दिया और मस्जिद बच गई। कम से कम इस मस्जिद को चुपचाप नहीं गिराया गया। प्रोसेस को फॉलो किया गया।' सुनहरी बाग मस्जिद को NDMC ने दिया था नोटिसकरीब 174 साल पुरानी सुनहरी बाग मस्जिद 125 वर्गमीटर जगह में बनी है। मस्जिद एक गोलचक्कर पर है, जहां मौलाना आजाद मार्ग, मोतीलाल नेहरू मार्ग, सुनहरी बाग मार्ग और रफी मार्ग मिलते हैं। मस्जिद के एक तरफ उद्योग भवन मेट्रो स्टेशन का गेट और गवर्नमेंट ऑफिस हैं। सुनहरी बाग मस्जिद ऐतिहासिक स्मारक ग्रेड-3 लिस्ट में है और वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी है। ट्रैफिक पुलिस ने दिल्ली नगर निगम, यानी NDMC को एक रिपोर्ट भेजी है कि विदेशियों, VIP और अधिकारियों का इस गोलचक्कर से आना-जाना होता है। सुनहरी मस्जिद की वजह से उन्हें जाम में फंसना पड़ रहा है। इसके बाद NDMC ने नोटिस जारी कर पूछा था कि क्या सुनहरी मस्जिद को हटाकर ट्रैफिक में सुधार किया जा सकता है। एक मस्जिद ही नहीं, तीन मजारें भी हटाई गईंएडवोकेट मशरूर कहते हैं, 'उद्योग भवन के गोलचक्कर में तीन मजारें थीं। ये कब बनीं, ये तो नहीं पता। ये लुटियन दिल्ली में हैं। आजादी के बाद तो किसी ने नहीं बनाई होंगी। जाहिर है ये लुटियन दिल्ली बनने से पहले की होंगी। लुटियन दिल्ली बनाते वक्त इन्हें भी ब्रिटिश गवर्नमेंट ने सुरक्षित रखा। भारत सरकार ने भी इन्हें नहीं छेड़ा। अब अचानक उन्हें हटा दिया गया।' वे आगे कहते हैं कि CPWD ने अब तक नहीं बताया कि कदीमी मस्जिद के बारे में क्या सोचा जा रहा है। इसीलिए चिंता ज्यादा हो रही है। ऐसे ही चुपचाप उपराष्ट्रपति भवन की मस्जिद गिरा दी गई थी। इसीलिए हमने सोचा है कि सारे सबूत जुटाने के बाद हम खुद विभाग से संपर्क साधेंगे। जरूरत हुई तो कोर्ट जाएंगे। कदीमी मस्जिद के हेरिटेज प्रॉपर्टी होने के सबूत 1. 1912 का नक्शा 2. वक्फ बोर्ड का रिकॉर्ड 3. इतिहास की किताबों में कदीमी मस्जिद का जिक्र 4. गजट नोटिफिकेशन गजट नोटिफिकेशन सरकारी डॉक्यूमेंट होता है, जो वक्फ की प्रॉपर्टी के सर्वे के बाद बनता है। ये डॉक्यूमेंट 1970 का है। इसमें ये मस्जिद मौजूद है। ‘उपराष्ट्रपति भवन की मस्जिद को भी यूं ही नहीं जाने देंगे, कोर्ट जाएंगे’एडवोकेट मशरूर आगे कहते हैं, ‘नियम है कि जो प्रॉपर्टी एक बार वक्फ की घोषित हो जाती है, वो हमेशा वक्फ की ही रहती है। नए कानून के हिसाब से भी देखें, तो सरकार ऐसे ही कोई वक्फ प्रॉपर्टी न कब्जे में ले सकती और न गिरा सकती है। कम से कम पब्लिक इंटरेस्ट से जुड़ा कोई कारण तो देना पड़ेगा।' 'वैसे तो वक्फ की जमीन अल्लाह की होती है। सरकार को कुछ जरूरी कंस्ट्रक्शन करना है और उसे वो जमीन चाहिए, तो स्टेकहोल्डर से बात करनी होगी। उसे एतराज जताने का समय देना होता है। 6 मौलाना आजाद रोड यानी उपराष्ट्रपति के आवास पर बनी मस्जिद के गिराने जाने का कारण हम सरकार से पूछेंगे। वाजिब जवाब नहीं मिला तो कोर्ट जाएंगे।' मस्जिद 2024 में गिराई गई थी, फिर इतनी देर क्यों हो रही है? जवाब मिला, ‘क्योंकि हमें कागज इकट्ठा करने में वक्त लगा। दूसरी बात वक्फ बोर्ड के पास पिछले दो साल से सिर्फ एक सेक्शन ऑफिसर है। यहां कम से कम तीन अधिकारी होते हैं। अभी 13-14 फरवरी को एक अधिकारी और दिया गया है।’ ‘हमने उपराष्ट्रपति भवन वाली मस्जिद के लिए RTI डाली है। पूछा है कि आखिर मस्जिद क्यों गिरानी पड़ी। इसका पब्लिक इंटरेस्ट क्या है।' कोर्ट जाने के लिए आपके पास कुछ तो आधार होना चाहिए। हम उस मस्जिद पर भी सवाल करेंगे। पहले डिपार्टमेंट से पूछ लें, फिर उसी जवाब को आधार बनाकर, अपने ऐतिहासिक दस्तावेजों के साथ कोर्ट जाएंगे। नई बिल्डिंग के नक्शे में मस्जिद का जिक्र नहींCPWD ने कृषि भवन और शास्त्री भवन के रीडेवलपमेंट के लिए टेंडर जारी किया है। इसके तहत मौजूदा बिल्डिंग की जगह कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग्स 4 और 5 बनना है। इस प्रोजेक्ट पर करीब तीन हजार करोड़ रुपए खर्च होने हैं। नए प्लान में कृषि भवन परिसर में बनी कदीमी मस्जिद शामिल नहीं है। हमने इस बारे में 25 फरवरी को हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स में डिप्टी डायरेक्टर सुशील कुमार को सवाल भेजे थे। उन्होंने जवाब दिया कि मिनिस्ट्री में संबंधित अधिकारियों को सवाल भेज दिए गए हैं। हालांकि उधर से जवाब नहीं आया। हमने हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स के डायरेक्टर श्यामलाल पुनिया को फोन किए, लेकिन रिसीव नहीं हुआ। हालांकि, CPWD के सोर्स ने बताया है कि नक्शे में मस्जिद का जिक्र नहीं है। ……………………ये खबर भी पढ़ें64 लाख बांग्लादेशियों का दावा, सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर खाली असम में मार्च-अप्रैल में चुनाव हैं। बांग्लादेशी घुसपैठिए मुद्दा हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा दावा कर चुके हैं कि असम की मुस्लिम आबादी में करीब 36% बांग्लादेशी हैं। हालांकि असम का मटिया डिटेंशन सेंटर खाली पड़ा है। हिमंता सरकार इसे होल्डिंग सेंटर कहती है। ऊंची-ऊंची दीवारों और लोहे के भारी-भरकम गेट वाला डिटेंशन सेंटर गुवाहाटी से करीब 120 किमी दूर गोलपाड़ा जिले में है। इसमें कैद 133 विदेशी ‘घुसपैठियों’ में सिर्फ 11 बांग्लादेशी हैं। पढ़ें पूरी खबर...
दिल्ली शराब नीति केस में CBI की जांच को बड़ा झटका लगा है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप साबित करने लायक ठोस सबूत नहीं हैं। कोर्ट ने किन आधारों पर फैसला दिया? क्या सभी मामलों से राहत मिल गई है? और इसका राजनीति पर क्या असर होगा? समझते हैं 6 सवालों में… सवाल-1: शराब घोटाले के मामले में कोर्ट ने केजरीवाल-सिसोदिया को किस आधार पर बरी किया? जवाब: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित शराब घोटाले के मामले में केजरीवाल और सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया। स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने कहा कि चार्जशीट में ‘भ्रामक दावे’ किए गए हैं और साबित करने लायक सबूत नहीं हैं… कोर्ट ने चार्जशीट पर क्या कहा कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल पर क्या कहा कोर्ट ने मुख्य आरोपी कुलदीप सिंह पर क्या कहा कोर्ट ने मनीष सिसोदिया पर क्या कहा सवाल-2: कथित शराब घोटाला आखिर है क्या, इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ? जवाब: दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर 2021 को शराब बिक्री से जुड़ी नई आबकारी नीति लागू की थी। इससे शराब दुकानें प्राइवेट हाथों में चली गईं। तब की केजरीवाल सरकार का दावा था कि इससे माफिया राज खत्म होगा और सरकार के रेवेन्यू में बढ़ोत्तरी होगी। जुलाई 2022 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव ने आबकारी नीति में आर्थिक गड़बड़ी को लेकर एक रिपोर्ट उपराज्यपाल वीके सक्सेना को सौंपी थी। मुख्य सचिव की रिपोर्ट के आधार पर उपराज्यपाल ने CBI जांच की मांग की। 17 अगस्त 2022 को CBI ने केस दर्ज किया। इसमें मनीष सिसोदिया, 3 रिटायर्ड सरकारी अधिकारी, 9 बिजनेसमैन और 2 कंपनियों को आरोपी बनाया गया। विवाद बढ़ता देख 28 जुलाई 2022 को दिल्ली सरकार ने नई शराब नीति रद्द कर दी। 22 अगस्त 2022 को ED ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर लिया। 28 फरवरी 2023 को दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी हुई। 4 अक्टूबर 2023 को राज्यसभा संजय सिंह को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। नवंबर 2023 से मार्च 2024 तक ED ने केजरीवाल को 9 समन जारी किए, केजरीवाल एक भी बार नहीं पहुंचे। 21 मार्च 2024 को ED ने उन्हें उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। 28 मार्च 2024 को केजरीवाल को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने 15 अप्रैल 2024 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 10 मई 2024 को लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उन्हें 21 दिन की जमानत मिली। 2 जून को उन्हें फिर दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया। 20 जून 2024 को केजरीवाल को ट्रायल कोर्ट से तो जमानत मिल गई, लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। CBI के मामले में 13 सितंबर 2024 को जमानत मिलने के बाद ही वह जेल से बाहर आ सके। सवाल-3: केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर क्या आरोप लगे थे? जवाब: अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर मुख्य रूप से दिल्ली की 2021-22 एक्साइज पॉलिसी में गड़बड़ी के चलते आरोप लगे थे। इस नीति को आम आदमी पार्टी की सरकार ने लागू किया था। उन पर ED और CBI ने दो तरह के आरोप लगाए थे… ED का मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप CBI का भ्रष्टाचार का आरोप सवाल-4: क्या कोर्ट के आदेश के बाद केजरीवाल सभी आरोपों से बरी हो गए? जवाब: कोर्ट ने भ्रष्टाचार और घोटाले के जिस मामले में फैसला दिया है, वो CBI ने अगस्त 2022 में दर्ज किया था। CBI ने 2022 में पहली चार्जशीट दाखिल की और बाद में कई पूरक चार्जशीट भी दाखिल कीं। आज का फैसला केवल CBI वाले मामले में आया है, जिसमें केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपी बरी हो गए हैं। हालांकि इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED अलग से मामला दर्ज करके शराब नीति में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रही थी। ED का कहना था कि इस नई शराब नीति में होलसेल बिजनेस ने 12% का कमीशन बुक किया, जिसमें से 6 प्रतिशत आम आदमी पार्टी को दिया गया। ED ने ये भी आरोप लगाया था कि जानबूझकर शराब नीति में ऐसे लूपहोल्स छोड़े गए हैं, ताकि आम आदमी पार्टी को बैकएंड से पैसा मिलता रहे। केजरीवाल पर भी ED ने PMLA यानी पीएमएलए यानी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। इसी मामले में केजरीवाल के अलावा मंत्री मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को भी जेल में रहना पड़ा। चूंकि, दोनों मामले अलग-अलग दर्ज किए गए हैं, इसलिए इनमें केजरीवाल की गिरफ्तारी भी अलग-अलग हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि ED और CBI दोनों के मामले और ट्रायल अलग-अलग तरीके से चले। दोनों मामले अलग-अलग कानून के तहत अलग-अलग जांच एजेंसियां हैंडल कर रही हैं, इसलिए ये मर्ज नहीं किए जा सकते। CBI के मामले में तो केजरीवाल बरी हो गए हैं, लेकिन ED के मामले में चार्जशीट दायर हो चुकी है और केजरीवाल की गिरफ्तारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला रिजर्व हो गया है। इस मामले में आगे की सुनवाई में फैसला सुनाया जा सकता है। सवाल-5: क्या CBI कोर्ट के इस फैसले को चुनौती दे सकती है? जवाब: मीडिया रिपोर्ट्स ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि CBI इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दे सकती है। विराग गुप्ता कहते हैं कि अगर CBI हाई कोर्ट जाती है, तो हाई कोर्ट इस मामले में नए सिरे से सुनवाई शुरू कर सकता है, या फिर राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को बरकरार रख सकता है। सवाल-6: कोर्ट के फैसले से केजरीवाल और AAP की राजनीति पर क्या असर होगा? जवाब: पॉलिटिकल एक्सपर्ट आदेश रावल के मुताबिक केजरीवाल के दिल्ली विधानसभा चुनाव हारने के पीछे ये केस एक बड़ी वजह था। इससे पहले कोयला घोटाला, 2G स्पेक्ट्रम घोटाला और कामनवेल्थ घोटाले के कारण कांग्रेस चुनाव हारी थी और आज तक उभर नहीं पाई। बाद में किसी को सजा नहीं हुई। इन दोनों घटनाओं से फायदा BJP को हुआ। कोर्ट का फैसला आने के बाद मीडिया से बात करते हुए केजरीवाल भावुक होकर रोने लगे। इस दौरान मनीष सिसोदिया उन्हें सहारा देते हुए दिखे। केजरीवाल ने मीडिया से कहा, ‘बीजेपी हमारे ऊपर शराब घोटाले का आरोप लगा रही थी। आज कोर्ट ने हमें बरी कर दिया। हम हमेशा कहते थे कि सत्य की जीत होती है। सत्य की जीत हुई। पीएम मोदी और अमित शाह ने यह सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र रचा। आम आदमी पार्टी के टॉप 4 लीडर को जेल में डाल दिया। सिटिंग मुख्यमंत्री को जेल में डाल दिया। 24 घंटे खबरें दिखाई जाती थीं कि केजरीवाल भ्रष्ट है। मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई।’ अब कोर्ट के इस फैसले को आम आदमी पार्टी अपनी जीत की तरह दिखाएगी। हालांकि अभी ED के मामले में फैसला आना बाकी है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इस फैसले से AAP को राजनीतिक फायदा होगा। 2026 में 5 राज्यों- असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में चुनाव हैं। हालांकि इन राज्यों में AAP की मौजूदगी लगभग नगण्य है। 2027 में पंजाब विधानसभा चुनाव हैं, जहां अभी AAP की सरकार है। दिल्ली में हार के बाद केजरीवाल फिलहाल पंजाब में ज्यादा समय दे रहे हैं। वह पंजाब में भी इस मुद्दे को उठाएंगे और बीजेपी पर राजनीतिक साजिश करके सहानुभूति हासिल करने की कोशिश करेंगे। कोर्ट के फैसले से INDIA गठबंधन के इस आरोप को भी बल मिलेगा, कि केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं को ED जैसी जांच एजेंसियों के जरिए निशाना बनाती है। यानी शुरुआत में ही ऐसा कोई मजबूत सबूत नहीं दिखा जिससे लगे कि उनके खिलाफ केस बनता है। --------- ये खबर भी पढ़िए… जब बागी हिमंता मिलने पहुंचे, राहुल कुत्ते से खेलते रहे:आज नॉर्थ-ईस्ट के 6 राज्यों में बीजेपी सरकार; कांग्रेस कैसे उखड़ गई 2014 से पहले नॉर्थ ईस्ट के 8 राज्यों में से किसी भी राज्य में BJP की सरकार नहीं थी। कुल मिलाकर 9 विधायक और महज 4 सांसद थे। त्रिपुरा, सिक्किम और मिजोरम में तो BJP के पास एक भी सीट नहीं थी। आज नॉर्थ ईस्ट के 6 राज्यों में BJP सत्ता में है। चार राज्यों में उसका मुख्यमंत्री है। कुल 197 विधायक और 13 सांसद हैं। पूरी खबर पढ़िए…
चीन की संसद से नौ वरिष्ठ सैन्य अधिकारी बाहर, शी जिनपिंग के कदम को मिली मंजूरी
2024 के दौरान भी शी जिनपिंग की अध्यक्षता वाले शक्तिशाली केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) से कई शीर्ष अधिकारियों को बाहर किया गया था। यह आयोग चीन की सशस्त्र सेनाओं का सर्वोच्च निर्णयकारी निकाय है और सीधे राष्ट्रपति शी के नेतृत्व में काम करता है।
ट्रंप प्रशासन विदेशी स्टूडेंट्स के लिए ओपीटी वर्क रूट की फिर से करेगा समीक्षा
अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हजारों विदेशी छात्रों पर असर डालने वाला एक बड़ा कदम उठाया गया है
व्हाइट हाउस में सरप्राइज मीटिंग – मेयर ममदानी और ट्रंप आमने-सामने
न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात की
पाकिस्तानी हमलों का अफगान पलटवार – 15 चौकियां कब्जे में
सीमा पर बढ़ा तनाव, अफगानिस्तान ने किया बड़ा दावा रात के अंधेरे में ऑपरेशन, पाक सैनिकों पर भारी पड़ा अफगान हमला यूएन रिपोर्ट: पाक एयर स्ट्राइक में 13 नागरिकों की मौत डूरंड लाइन पर अफगान रणनीतिक बढ़त, हालात संवेदनशील काबुल। अफगानिस्तान ने गुरुवार रात को दावा किया है कि वह हाल में हुए पाकिस्तानी हवाई हमलों के जवाब में पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर रहा है। अफगान अधिकारियों के अनुसार, सीमा क्षेत्र में की गई कार्रवाई के दौरान अब तक दुश्मन की 15 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया है। इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान के उप प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि कार्रवाई के दौरान कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं, जबकि कुछ को जिंदा भी पकड़ लिया गया है। प्रवक्ता के अनुसार, दुश्मन के खिलाफ अभियान लगातार जारी है और सीमा क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त हासिल की जा रही है। उन्होंने कहा कि दुश्मन की कुल 15 पोस्ट पर कब्जा कर लिया गया है तथा कई सैनिक हताहत हुए हैं। अफगान पक्ष ने यह भी बताया कि डूरंड लाइन पर तैनात अत्याधुनिक लेजर उपकरणों से लैस इकाइयों ने भी ऑपरेशन शुरू कर दिया है। बयान में कहा गया है कि रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए दुश्मन की हर गतिविधि को निशाना बनाया जाएगा। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से इन दावों पर अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए क्षेत्र में हालात संवेदनशील बने हुए हैं। बता दें कि अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) ने पुष्टि की थी कि पाकिस्तानी सैन्य बलों द्वारा अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में किए गए हवाई हमलों में 13 नागरिकों की मौत हुई थी। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। स्थानीय मीडिया ने यूएनएएमए के हवाले से मंगलवार को ये खबर प्रकाशित की थी। अफगानिस्तान की प्रमुख न्यूज एजेंसी खामा प्रेस ने यूएनएएमए की एक रिपोर्ट के हवाले से खुलासा किया था कि हालिया हवाई हमलों में 13 अफगान नागरिक मारे गए हैं, जबकि सात घायल हो गए थे। ये हमले नंगरहार के बेहसूद और खोगियानी जिलों में 21-22 फरवरी की दरमियानी रात किए गए थे। पक्तिका के बरमल में एक स्कूल और मस्जिद को निशाना बनाया गया था, जबकि ओर्गुन जिले में एक घर पर एयर स्ट्राइक की गई थी।
भारत में आतंकी बड़ा हमला करने की फिराक में हैं। कश्मीर से लेकर दिल्ली तक कई धार्मिक स्थल निशाने पर हैं। VIP स्पॉट और सेना भी टारगेट लिस्ट में हैं। फरवरी में महज 20 दिन के अंदर सुरक्षा एजेंसियों को इसके इनपुट मिले हैं। ये सीक्रेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट दैनिक भास्कर को भी मिली है। इसके मुताबिक, 10 फरवरी को होने वाला बड़ा हमला टाला जा चुका है, लेकिन खतरा अब भी बरकरार है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से आतंकी एक्टिविटीज बढ़ी हैं। आतंकियों का नेटवर्क पाकिस्तानी कैंपों और बांग्लादेश रूट से ऑपरेट हो रहा है। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा कश्मीर और दिल्ली के आसपास हमले की तैयारी में है। आतंकियों के पास 15-20 किलो RDX और IED होने के इनपुट हैं। 5 आतंकी पाकिस्तान से भारत में घुस चुके हैं। कुछ स्लीपर सेल बांग्लादेश लिंक से ऑपरेट कर रहे हैं। पूरा मामला आखिर क्या है, खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में क्या इनपुट हैं, पाकिस्तान से घुसपैठ करने वाले आतंकी कौन हैं, ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकियों को लेकर बनाई खुफिया एजेंसियों की लिस्ट में क्या है। पढ़िए ये रिपोर्ट… फरवरी में 3 बड़े इंटेलिजेंस अलर्ट पहला: 8 फरवरी को जम्मू-कश्मीर में खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिला, जो लश्कर-ए-तैयबा की धमकी से जुड़ा था। इसके मुताबिक, लश्कर के आतंकी IED ब्लास्ट की तैयारी में हैं। ये ब्लास्ट कश्मीर के नरबल से पट्टन या कुंजेर से नरबल के रास्ते में हो सकता है। इस धमाके के लिए आतंकी 15 से 20 किलो RDX का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये हमला सेना के काफिले पर भी हो सकता है। दूसरा: 18 फरवरी के इनपुट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद ने ओवरग्राउंड नेटवर्क एक्टिव कर दिया है। इसके लोगों ने हाल में जम्मू से कश्मीर को जोड़ने वाली काजीगुंड टनल की रेकी की है। इसमें 10 आतंकियों के दो अलग-अलग ग्रुप साजिश रच रहे हैं। आतंकी फिरदौस अहमद भट्ट रिमोट IED के जरिए सुरक्षा बलों को टारगेट कर रहा है। सुरक्षा बलों के वाहनों को भी निशाना बनाया जा सकता है। तीसरा: 8 से 20 फरवरी के बीच अलग-अलग इनपुट मिले। इसमें से एक इनपुट लश्कर-ए-तैयबा के बारे में है। इसके मुताबिक, आतंकी भारत के बड़े शहरों को निशाना बना सकते हैं। दिल्ली में चांदनी चौक के आसपास के मंदिर निशाने पर हैं। पुरानी दिल्ली भी टारगेट पर है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद की एक मस्जिद पर 6 फरवरी को हुए हमले के बाद भारत में अटैक की साजिश है। जम्मू-कश्मीर को जोड़ने वाली काजीगुंड टनल, भीड़भाड़ वाली जगहों पर अलर्टखुफिया एजेंसियों को मिले अलर्ट में दो ज्यादा संवेदनशील हैं। पहला, जम्मू से कश्मीर के बीच काजीगुंड टनल की रेकी और दूसरा 15-20 किलो RDX के जरिए किसी हाइवे या सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की साजिश। दैनिक भास्कर ने इस पर सुरक्षा एजेंसियों में अपने सोर्स से बात की। वे बताते हैं कि काजीगुंड टनल की रेकी करना बहुत खतरनाक है। ये सुरक्षा के लिहाज से काफी संवेदनशील है, लेकिन हम अलर्ट हैं। पूरे जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ बड़े ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। जैश और लश्कर से जुड़े आतंकी मारे जा चुके हैं। कई एक्टिव आतंकियों की लिस्ट भी तैयार है। जम्मू में कठुआ के रास्ते 5 पाकिस्तानी आतंकी घुसेइसी महीने 5 पाकिस्तानी आतंकियों के भारतीय सीमा में घुसपैठ की इंटेलिजेंस रिपोर्ट मिली है। सोर्स ने बताया कि ट्रेंड पाकिस्तानी आतंकियों ने जम्मू के कठुआ में हीरानगर के रास्ते घुसपैठ की है। आशंका है कि जैश-ए-मोहम्मद के कैंप में ट्रेनिंग लेने वाले ये आतंकी आर्मी कैंप या सेना के वाहनों पर आत्मघाती हमला भी कर सकते हैं। ठीक वैसे ही जैसे 2015 में दिनानगर पुलिस स्टेशन पर हमला हुआ था। जम्मू-कश्मीर में पांचों संदिग्ध आतंकियों की फोटो जारी कर दी गई है। पोस्टर लगाकर लोगों से जानकारी मांगी गई है। सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। सोर्स ने बताया कि इन आतंकियों की घुसपैठ और काजीगुंड टनल को लेकर मिले अलर्ट में काफी बातें एक जैसी हैं। असल में वो अलर्ट भी जैश से जुड़े ओवरग्राउंड वर्कर की तरफ से रेकी करने को लेकर था। अब जैश के आतंकी घुसपैठ कर आए हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों की इन पर नजर है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकियों की दूसरी लिस्ट तैयार पिछले साल पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया। इसके साथ ही पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के लोकल आतंकियों की एक लिस्ट तैयार की गई थी। 17 आतंकियों की लिस्ट में से ज्यादातर आतंकी एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं। आतंकियों की पहचान कर अब दूसरी लिस्ट तैयार की गई है। इसमें पहलगाम हमले के बाद चर्चा में आए अनंतनाग के आतंकी आदिल अहमद ठोकर का नाम था। इस नई लिस्ट में भी उसका नाम है। अभी उसके पाकिस्तान में होने का शक है। नई लिस्ट में दो अलग-अलग कैटेगिरी में 25 आतंकियों के नाम हैं। इसमें एक्टिव और इनएक्टिव आतंकियों की कैटेगिरी भी है। इनमें 5 आतंकियों को सेना ने एनकाउंटर में मार दिया है। बाकी 20 पर सुरक्षा बलों की नजर है। इनमें 4 इनएक्टिव हो चुके हैं, बाकी 16 की लिस्ट दैनिक भास्कर के पास भी है। इनमें फिरदौस अहमद भट्ट का नाम शामिल है, जिसे लेकर हाल में अलर्ट मिला है। इसके बाद से काजीगुंड टनल भी टारगेट पर है। इसके अलावा नसीर अहमद वानी, आदिल रहमान, जाकिर अहमद, मुबाशिर अहमद डार, जुबैर अहमद, हारुन रशीद, आसिफ अहमद, आबिद कयूम, आबिद रमजान, सज्जाद अहमद वानी, जमील, मोहम्मद उमर मीर, बिलाल अहमद मीर और हाशिर रफीक पारे हैं। बांग्लादेश नेटवर्क से दिल्ली और दूसरे शहरों में हमले की तैयारी में आतंकीफरवरी की शुरुआत में ही खुफिया एजेंसियों को दिल्ली और आसपास के इलाके में आतंकी साजिश का अलर्ट मिला था। 7-8 फरवरी को दिल्ली के जनपथ मेट्रो स्टेशन के आसपास कुछ पोस्टर लगे मिले। ये पोस्टर पाकिस्तान के सपोर्ट में थे। इसमें भारत के खिलाफ भड़काने वाली बातें लिखीं थीं। पोस्टर में कश्मीर की आजादी का जिक्र था। आतंकी बुरहान वानी की तारीफ भी थी। 22 फरवरी को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस पोस्टर वाले नेटवर्क का खुलासा किया। कुल 8 आरोपी गिरफ्तार किए गए। इसमें पुलिस ने कोलकाता और तमिलनाडु मॉड्यूल का खुलासा किया। कोलकाता मॉड्यूल में उमर फारूक और रबीउल इस्लाम को अरेस्ट किया। इनमें उमर, पश्चिम बंगाल और इस्लाम, बांग्लादेश का रहने वाला है। तमिलनाडु मॉड्यूल में मोहम्मद मिजानुर रहमान, शफायत हुसैन, जाहिदुल इस्लाम, मोहम्मद लिटन, मोहम्मद उज्जल और उमर को अरेस्ट किया गया। ये सभी बांग्लादेशी हैं। इनका मुख्य हैंडलर शब्बीर अहमद लोन उर्फ राजा है। ये श्रीनगर का रहने वाला है। पाकिस्तान में लश्कर के कैंप में ट्रेनिंग ले चुका है। शब्बीर को 27 जुलाई 2007 को दिल्ली के चांदनी चौक में एक रेस्तरां के पास से गिरफ्तार किया गया था। उसके रूम से विस्फोटक, हैंड ग्रेनेड और हथियार मिले थे। वो एक पॉलिटिकल किलिंग के लिए दिल्ली आया था। यहां सजा काटने के बाद 2018 में जेल से बाहर आया और बांग्लादेश चला गया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद शांत आतंकी फिर एक्टिवआतंकियों का हैंडलर शब्बीर अभी बांग्लादेश से ऑपरेट कर रहा है। वह कई साल तक एक्टिव नहीं था और गुमनाम स्लीपर सेल की तरह काम करता रहा। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी नेटवर्क ने इसे फिर एक्टिव किया। तब इसने कोलकाता और तमिलनाडु नेटवर्क को एक्टिव किया। इसी शब्बीर अहमद के कहने पर दिल्ली और कोलकाता में पाकिस्तान के समर्थन में पोस्टर लगाए गए थे। शब्बीर को लेकर दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के ACP प्रमोद कुशवाह बताते हैं, ‘जनपथ मेट्रो स्टेशन के पास पाकिस्तान के सपोर्ट में पोस्टर लगाए जाने के बाद जांच शुरू हुई। हमें पता चला कि इसमें उमर फारुक और इस्लाम की भूमिका है। इन्होंने कोलकाता में सेफ हाइडआउट बनाया था। पाकिस्तान में दोनों एडवांस्ड ट्रेनिंग लेने के बाद भारत में टारगेट किलिंग करने आए थे।‘ ‘शब्बीर लश्कर का पुराना आतंकी है और उसी ने पोस्टर लगवाए थे। इनका नेटवर्क कोलकाता और तमिलनाडु में एक्टिव है। शब्बीर आत्मघाती हमले का भी मास्टरमाइंड है। अभी ये लश्कर के लिए भारत में खतरनाक स्लीपर सेल तैयार कर रहा है। अब तक कुल 8 लोगों को अरेस्ट किया है। इन लोगों ने दिल्ली और इससे सटे शहरों की रेकी की थी।‘ दिल्ली पुलिस में हमारे सोर्स ने बताया कि इन आतंकियों ने खासकर धार्मिक स्थलों की रेकी की है। उसके वीडियो भी बांग्लादेश में मौजूद आतंकी शब्बीर अहमद को भेजे हैं। सोर्स का दावा है कि दिल्ली के चांदनी चौक के पास के मंदिर के साथ लोटस टेंपल और इस्कॉन टेंपल की भी रेकी की गई है। इसके अलावा अयोध्या, रामेश्वरम और कांचीपुरम में भी रेकी की है। पहले कश्मीरी पंडितों को मारने की धमकी, फिर नई पोस्ट सामने आईदैनिक भास्कर ने हाल ही में कश्मीरी पंडितों को मिली धमकी को लेकर स्टोरी की थी। हमने बताया था कि 3 फरवरी को लश्कर के प्रॉक्सी संगठन फाल्कन स्क्वॉड ने कश्मीरी पंडितों को धमकी दी है। अब उसी फॉल्कन स्क्वॉड के फिर धमकी वाले पोस्टर सामने आए हैं। इसमें कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा के दावे करने वाले जम्मू-कश्मीर के नामी राजनेताओं को मारने की धमकी दी गई है। आतंकियों ने पोस्टर में राजनेता की फोटो के आगे रेड कलर से क्रॉस किया है। इसे लेकर अब कश्मीरी पंडितों से जुड़े संगठन भी अलर्ट हैं। एक कश्मीरी पंडित ने बताया कि हमारी सिक्योरिटी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां चाक-चौबंद हैं लेकिन जिस तरह से खुलेआम धमकियां मिल रही हैं। उसे देखते हुए जल्द बड़ा ऑपरेशन चलाने की जरूरत है। जम्मू-कश्मीर में जैश का ‘इजरायल ग्रुप‘ एक्टिवजम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में हाल ही में मारे गए आतंकी सैफुल्लाह के वीडियो सामने आए हैं। ये आतंकी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा था। इसने 'इजरायल ग्रुप' नाम से एक ग्रुप बनाया था। इसे लेकर जम्मू जोन के IG भीम सेन तुती ने बताया कि पिछले डेढ़ साल में इजरायल ग्रुप के 7 आतंकियों को मार गिराया गया है। ये सभी 7 आतंकी अप्रैल 2024 में घुसपैठ कर जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे। इसके बाद सेना से इनका 17 अलग-अलग मौकों पर एनकाउंटर हुआ लेकिन पिछले 18 महीनों में सभी सात आतंकियों को मार गिराया गया। ये हार्डकोर आतंकी ग्रुप था। इसका मकसद सेना और आम लोगों को टारगेट करना था। …………………..ये खबर भी पढ़ें… घाटी में कौन बना रहा कश्मीरी पंडितों की ‘डेथ लिस्ट’ कश्मीर में पहलगाम के पास मट्टन में कश्मीरी पंडितों की बस्ती है। आबादी करीब 300 की है। यहां की गलियों में दिन के 4 बजते ही सन्नाटा पसर जाता है। मट्टन में रहने वाले रमेश कौल (बदला हुआ नाम) अब अनजान नंबरों से आने वाले फोन नहीं उठाते। वजह पूछने पर बताते हैं, ‘कश्मीरी पंडितों को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। पढ़िए पूरी खबर…
अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर किया भीषण हमला, 17 पाकिस्तानी चौकियों पर किया कब्जा, 40 सैनिक मारे
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, जवाबी हमले सीमा से लगे पांच प्रांतों में चलाए गए। मंत्रालय का कहना है कि पाकिस्तानी सेना की 17 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया है और 40 सैनिक मारे गए हैं। इनमें से 13 शव अफगानिस्तान ले जाए जाने का भी दावा किया गया है।
याद वाशेम में मैंने पीएम मोदी को पत्नी सारा के रिश्तेदारों के नाम दिखाए: नेतन्याहू
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की एक तस्वीर कौतुहल का विषय बनी थी। आखिर पीएम मोदी के भाई समान सच्चे मित्र उन्हें क्या दिखा रहे थे और भारत के प्रधानमंत्री क्या गौर से देख रहे थे? इसका खुलासा खुद नेतन्याहू ने एक्स पोस्ट के जरिए किया है।
नेपाल चुनाव 2026 : मेयर से प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे रैपर बालेन शाह
नेपाल में आधिकारिक ओपिनियन पोल की परंपरा नहीं है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक और स्थानीय मीडिया बालेन शाह को प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे मान रहे हैं। उन्होंने देश की दो प्रमुख राजनीतिक शक्तियों केपी शर्मा ओली की चीन समर्थक मानी जाने वाली कम्युनिस्ट पार्टी और भारत के निकट मानी जाने वाली नेपाली कांग्रेस को कड़ी चुनौती दी है।
भारतीय अंदाज़ में नेतन्याहू, डिनर पर मोदी को दिया सरप्राइज़
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर इजरायल में हैं। इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू ने पीएम मोदी का स्वागत किया। वहीं, नेतन्याहू ने पीएम मोदी के लिए रात्रि भोज भी होस्ट किया
वसंत महोत्सव के बाद काम पर फोकस: ली छ्यांग की बड़ी बैठक
चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने 24 फरवरी को राज्य परिषद की स्थायी बैठक बुलाकर वसंत त्योहार के बाद सरकारी कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने का इंतजाम किया
‘पापा ने मेरी शादी के लिए दो एकड़ जमीन बेच दी थी। उस समय मैं 20 साल की थी। जून का महीना था जब मेरी शादी हुई और मैं ससुराल आई। सुहागरात के अगले दिन सुबह-सुबह मेरे जेठ और ननदोई मेरे कमरे में आए। उन्होंने पूछा- तुम्हारी पहली रात कैसी रही? कोई परेशानी तो नहीं हुई? सुनते ही मेरी नजर शर्म से झुक गई। मन ही मन सोचने लगी कि कोई इस तरह की निजी बातें कैसे पूछ सकता है! बाद में मुझे पता चला कि मेरे पति को शारीरिक संबंध बनाने से जुड़ी पहले कुछ समस्याएं थीं। मेरे दो बच्चे हैं। मेरे बेटे की उम्र 16 साल है और बेटी की 10 साल। दोनों बच्चे दो अलग-अलग मर्दों से हैं और अब बिना पिता के बड़े हो रहे हैं। इनके लिए अब मैं ही मां-बाप हूं।’, सुनीता आर्या स्याह कहानियों की सीरीज ब्लैकबोर्ड में सुनीता आर्या की कहानी, जिन्हें घूंघट न करने पर जेठ ने निर्वस्त्र करके पीटा। गर्भवती होने के 3 महीने बाद पति ने छोड़ दिया। उसके बाद प्रेमी ने गर्भवती किया और बच्चा स्वीकार नहीं किया। सुनीता आर्या अभी मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के गैरतगंज में रहती हैं। सरकारी जमीन पर बने एक छोटे से घर में उनका गुजारा हो रहा है। मां और दोनों बच्चे भी साथ रहते हैं। जब मैं उनसे बातचीत करने पहुंचा, तो उन्होंने आसपास नजर घुमाई और धीमे से कहा, ‘बच्चों को कमरे में भेज देती हूं। हम बगल के नए घर के बरामदे में बैठकर बात करते हैं। उनके सामने ये सारी बातें करना ठीक नहीं होगा।’ उन्होंने हल्के से इशारा किया, तो बच्चे चुपचाप कमरे के भीतर चले गए। मैं उस बरामदे में उनके साथ आकर बैठा। सुनीता ने गहरी सांस ली, जैसे बीते वर्षों की परतें फिर से खोलने की तैयारी कर रही हों। वह बताती हैं, ‘2007 की बात है। अपने पापा के साथ मध्य प्रदेश के इंदौर में रह रही थी। मां-बाप की इकलौती संतान। एक रिश्तेदार घर आते, तो अक्सर कहते- बेटी जवान हो गई है। अब शादी कर दो। बाद में ढंग का लड़का नहीं मिलेगा। अपनी बिरादरी में तो 13-14 साल की उम्र में ही शादी हो जाती है।’ जवाब में पापा ने कहा, ‘अगर कोई अच्छा लड़का मिले तो बताइए।’ उन्होंने मेरे मामा से भी इस बारे में बात की। कुछ दिनों बाद मामा रायसेन से एक रिश्ता लेकर आए। उन्होंने लड़के और उसके परिवार के बारे में काफी तारीफ की- कहा कि लोग ठीक हैं, खानदान अच्छा है। फिर हमारे परिवार का आपस में मिलने-जुलने का सिलसिला चला। देखते ही देखते बात आगे बढ़ी और रिश्ता पक्का हो गया। शादी हुई और मैं ससुराल आ गई। शुरू-शुरू में सब सामान्य लग रहा था। नए माहौल को समझने और उसमें खुद को ढालने की कोशिश कर रही थी। इसी बीच जब पहली बार गर्भवती हुई, तो मन में एक अजीब-सी खुशी थी। लगा कि शायद अब जिंदगी में कुछ ठहराव आएगा। लेकिन जब मैंने यह बात अपने पति को बताई, तो उनका चेहरा उतर गया। उन्होंने मुझे समझाना शुरू किया- अभी मैं बच्चा पैदा करने के लिए तैयार नहीं हूं, हमारी हालत भी ठीक नहीं है। अगली बार कर लेंगे। इस बार बच्चा गिरवा देते हैं। वह बार-बार यही कहते रहे। मैं दुविधा में थी। एक तरफ मेरे मन में मां बनने की चाह थी, दूसरी तरफ पति की बात और उनका दबाव। आखिरकार, उनके जोर देने पर मैंने गर्भपात करवा लिया। इसी बीच घर के भीतर एक और अजीब स्थिति बन रही थी। जो जेठ मुझे हर वक्त घर में पर्दा करने की नसीहत देते थे, उन्हीं की नजरें मुझ पर ठीक नहीं थीं। वह अक्सर डॉक्यूमेंट बनवाने के बहाने मुझे शहर लेकर जाते। गांव की बस की सीढ़ियां ऊंची होती थीं, तो वह मेरी कमर में हाथ डालकर चढ़ाने का बहाना करते और फिर सीट पर सटकर बैठ जाते। शुरू में मुझे लगता था कि वह मेरा ख्याल रख रहे हैं, लेकिन धीरे-धीरे उनकी हरकतें साफ होने लगीं। एक-दो बार उन्होंने मुझे गलत तरीके से छूने की कोशिश की, यहां तक कि मेरी छाती पर भी हाथ लगा दिया। इन घटनाओं से मैं अंदर ही अंदर परेशान होने लगी थी, लेकिन जो आगे हुआ, उसने मुझे पूरी तरह झकझोर दिया। हमारा शहर में भी एक घर था। एक दिन मैं वहां आराम कर रही थी। दरवाजा भीतर से बंद कर रखा था। गर्मी का मौसम था, इसलिए हल्के कपड़ों में लेटी हुई थी। मेरे जेठ टीचर थे। उस दिन वह घर आए। मुझे सोता हुआ समझकर दरवाजे के ऊपर बनी खिड़की से झांकने लगे। अचानक मेरी नींद खुली, तो देखा- वह दरवाजे पर चढ़े हुए थे। जैसे ही उनकी नजर मुझसे मिली, वह तुरंत नीचे उतर गए, मानो कुछ हुआ ही न हो। उस दिन बहुत डर गई थी, लेकिन सोचती रही कि शायद यह एक बार की बात हो। पर ऐसा नहीं था। इसी तरह एक बार मैं वॉशरूम में नहाने गई थी। मेरे कपड़े कमरे में बेड पर रखे थे। जब वॉशरूम से टॉवल लपेटे बाहर आई, तो देखा- जेठ सामने कमरे में बैठे हैं। मैं घबरा गई। चीखते हुए बोली- आप मेरे कमरे में अचानक कैसे आ गए? वह इधर-उधर देखने लगे और बहाना बनाने लगे कि किसी काम से आए थे। उस समय तो मैंने किसी तरह खुद को संभाला, लेकिन अंदर से टूटती जा रही थी। बाद में हिम्मत करके यह बात अपनी सास और पति को बताई। मुझे उम्मीद थी कि वे मेरा साथ देंगे, लेकिन उल्टा मुझे ही समझाने लगे। कहा- वह ऐसा नहीं कर सकते, तुम गलत समझ रही हो। घर में थोड़ा-बहुत ऊंच-नीच हो जाए तो औरत को बर्दाश्त करना चाहिए। यह सुनकर मुझे पहली बार महसूस हुआ कि इस घर में मेरी बात सुनने वाला कोई नहीं है। मैं उनकी इस तरह की हरकतों से लगातार परेशान थी। हर दिन मुझे यही चिंता सताती रहती थी कि पता नहीं कब, किस बहाने वह फिर से मेरे सामने आ खड़े होंगे। आखिरकार हिम्मत जुटाई और अपनी जेठानी को सारी बातें बताईं। उन्हें बताया कि किस तरह वह मुझे शहर ले जाने के बहाने छूने की कोशिश करते हैं और कमरे में बिना बताए आ जाते हैं। जेठानी ने बात को हल्के में नहीं लिया। उन्होंने जेठ से साफ-साफ पूछा- तुम देवरानी को बार-बार शहर क्यों लेकर जाते हो? उसका पति क्यों नहीं जाता? तुम्हें उससे थोड़ी दूरी बनाकर रहना चाहिए। उस समय मुझे लगा कि शायद अब कुछ बदलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जेठ ने अपनी आदतें नहीं बदलीं। ऊपर से सामान्य व्यवहार करते, लेकिन उनकी नजरें अब भी वैसी ही थीं- टकटकी लगाए, मौका तलाशती हुईं। एक दिन मैं रसोई में खाना बना रही थी। काम करते-करते अनजाने में सिर पर रखा पल्लू थोड़ा नीचे सरक गया। मुझे इसका ध्यान भी नहीं रहा। तभी अचानक जेठ की तेज आवाज सुनाई दी। मेरा खुला सिर देखते ही वह चीखने लगे। गाली देते हुए बोले- ऐसी ही औरत परिवार की इज्जत मिट्टी में मिलाती है। बेशर्म की तरह खुला सिर लेकर पूरे आंगन में घूमती रहती है। उनकी आवाज इतनी ऊंची थी कि घर के बाकी लोग भी पहुंच गए। मैं घबराकर तुरंत पल्लू ठीक करने लगी, लेकिन तब तक वह बात बढ़ा चुके थे। उनकी आवाज इतनी ऊंची थी कि माहौल तनाव से भर गया। समझ ही नहीं पा रही थी कि इतनी सी बात पर इतना गुस्सा क्यों हो रहे हैं। बार-बार पल्लू ठीक करते हुए कह रही थी कि गलती से सरक गया, मेरा कोई गलत इरादा नहीं था। लेकिन जैसे वह सुनने की हालत में ही नहीं थे। यह कहते हुए वह गुस्से में मेरी तरफ बढ़े और अचानक मेरे बाल पकड़कर जोर से खींचने लगे। मैं दर्द से चीख उठी। चीख सुनकर मेरे पति भी आ गए। उन्होंने मुझे बचाने के बजाय अपने भाई का ही साथ दिया। उन्होंने भी मेरा हाथ कसकर पकड़ लिया। दोनों मिलकर मुझे घसीटते हुए कमरे से आंगन की ओर ले जाने लगे। इस खींचतान में मेरी साड़ी ढीली होकर खुलने लगी। खुद को संभालने की कोशिश करती रही, लेकिन उस वक्त कोई मेरी बात सुनने वाला नहीं था। उस वक्त ऐसा लगा कि दुर्योधन द्रौपदी का चीरहरण कर रहा हो। शोर सुनकर आस-पास के घरों के लोग आंगन में जुट गए। लेकिन किसी ने एक शब्द बोलना जरूरी नहीं समझा। साड़ी उतरने से मैं सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में रह गई थी। जेठ और मेरे पति ने मेरे बाल पकड़ लिए और बेल्ट व डंडे से मारना शुरू कर दिया। आंगन में एक बड़ा पत्थर रखा था। उसी पर पटक दिया। तेज चोट लगी और मैं दर्द से कराह उठी। उस वक्त 3 महीने की गर्भवती थी। हाथ-पैर पटकते हुए रहम की भीख मांग रही थी, लेकिन दोनों का कलेजा नहीं पसीजा। उस वक्त लगा कि काश! इस तरह भीड़ के सामने निर्वस्त्र बेइज्जती होने से अच्छा मार दी जाती। मेरा गला घोंट देते। धीरे-धीरे यह बात रिश्तेदारी में भी फैल गई। शायद किसी पड़ोसी ने मेरे मामा के बेटे को सब कुछ बता दिया। जब उसे सच्चाई पता चली, तो वह बिना देर किए आया। उसने मेरी हालत देखी और उसी समय फैसला किया कि अब मुझे वहां नहीं छोड़ सकता। वह मुझे अपने साथ मायके ले आया। उस समय मैं गर्भवती थी और बेहद कमजोर भी। मायके पहुंचकर थोड़ा सुकून मिला। वहां 6 महीने बाद मैंने एक बेटे को जन्म दिया। हॉस्पिटल का पूरा खर्च मेरे मां-बाप ने उठाया। मेरे रिश्तेदार वगैरह देखने आए, लेकिन मेरा पति न तो अस्पताल आया, न कभी बच्चे को देखने। कोई खर्च भी नहीं भेजा। उस दिन मुझे साफ समझ आ गया कि अब यह जिम्मेदारी सिर्फ मेरी है। उसके बाद मैंने बच्चे को अकेले पाला। फिर ये बेटी कैसे हुई? ‘हां, आगे वही बताने वाली हूं। 2011 की बात है। तब तक मैं अपने बेटे के साथ मायके में ही रह रही थी। पापा को एक जमीन बेचनी थी। गैरतगंज में मनीष जैन नाम का एक व्यक्ति था, जो जमीन की खरीद-फरोख्त करता था। जब उसे पता चला कि पापा जमीन बेचना चाहते हैं, तो वह मेरे घर आया। इसी दौरान मेरी उससे पहली मुलाकात हुई। जमीन के सिलसिले में उसका घर आना-जाना बढ़ने लगा। धीरे-धीरे उससे बातचीत होने लगी और वह मुझे अच्छा लगने लगा। मेरा बेटा भी उसे अपनापन देने लगा। उसे ‘पापा’ कहकर बुलाता। ‘पापा’ शब्द सुनकर उसके चेहरे पर एक अलग ही खुशी दिखाई देती थी। हालांकि, वह शादीशुदा था, फिर भी उसका हमारे घर आना-जाना लगातार बना रहा।’ वह इस तरह मेरे मायके आने लगा। कई बार रात-रातभर रुकता था। धीरे-धीरे वह मेरे साथ सोने लगा। एक दिन मैंने उससे साफ पूछा- क्या तुम अपनी पत्नी से झूठ बोलकर मेरे पास आते हो? उसने कहा- नहीं, पत्नी को तुम्हारे बारे में सब पता है। उसे कोई परेशानी नहीं है। उसकी बात पर मुझे भरोसा नहीं हुआ। मैंने उसकी पत्नी को फोन किया और कहा- आपके पति मेरे साथ रहते हैं, क्या आपको एतराज नहीं? उन्होंने जवाब दिया- मुझे मालूम है कि वे आपके पास जाते हैं। आप उनकी दोस्त हैं। यह सब सुनने के बाद मेरे मन का संकोच कुछ कम हुआ। धीरे-धीरे वह भी मुझे अच्छा लगने लगा। इतने संघर्षों के बाद मुझे एक सहारे की जरूरत महसूस होती थी। जब भी वह मुझसे मिलने आता, हम एक-दूसरे के करीब आ जाते और हमारे बीच शारीरिक संबंध बनने लगे। हमारे बीच नजदीकियां बढ़ती गईं और मुलाकातों का सिलसिला चलता रहा। इसी दौरान, 2013 में, मैं उससे गर्भवती हो गई। जब उसे इस बात का पता चला, तो वह घबराया हुआ मेरे पास आया। उसके चेहरे पर बेचैनी थी। उसने कहा- अभी मैं इसके लिए तैयार नहीं हूं। तुम इस बच्चे को गिरा दो। बाद में बच्चा कर लेंगे। अभी अबॉर्शन करवा लो। उसकी बात सुनकर मैं एक बार फिर दुविधा में पड़ गई। मुझे लगा वाकई में कोई परेशान होगी, लेकिन उसके शब्दों ने मुझे अंदर तक हिला दिया। आप उस शादीशुदा आदमी से शादी करना चाहती थीं? ‘नहीं, मैं उससे शादी नहीं करना चाहती थी। लेकिन चाहती थी कि वह इस बच्चे को दुनिया में आने दे। फिर भी, उसकी बातों में आकर आखिरकार गर्भपात करवा लिया। 2 साल बाद फिर से उससे गर्भवती हुई। इस बार जब उसे पता चला, तो उसका रवैया पूरी तरह बदल गया। कहने लगा- यह बच्चा मेरा नहीं है, किसी और का होगा। तुम मेरे पीछे किस-किस से मिलती हो, मुझे क्या पता? मैं तो महीने में एक-दो बार ही तुमसे मिलने आता हूं। तुम्हारे पेट में पल रहा बच्चा मेरा नहीं है। उसकी यह बात सुनकर मुझे गहरा धक्का लगा। जिस रिश्ते को मैं भरोसे के साथ निभा रही थी, उसी पर उसने सवाल खड़े कर दिए। मैं हैरान थी और भीतर से बहुत गुस्से में भी थी। उसकी बातें सुनते ही गहरे तनाव में चली गई। बार-बार यही सोच रही थी कि 4 साल से वह मेरे साथ संबंध बना रहा था। दो बार उससे गर्भवती हुई। पहली बार उसके कहने पर मैंने गर्भपात करवा लिया, और अब वह कह रहा है कि यह बच्चा किसी और का है। उस पल मुझे लगा जैसे मेरे विश्वास की कोई कीमत ही नहीं थी। सोच रही थी कि उसे सिर्फ मेरे शरीर से मतलब था, मेरी भावनाओं से नहीं। यह कहते-कहते सुनीता अपने दोनों हाथों से चेहरा ढक लेती हैं। 15 साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन उन दिनों को याद करते हुए आज भी उनकी आवाज कांपने लगती है। वह कहती हैं, ‘जब भी उन बातों को याद करती हूं तो अंदर तक सिहर जाती हूं।’ वह आगे बताती हैं कि उसके आरोपों और इनकार के बाद मैंने ठान लिया कि अब पीछे नहीं हटूंगी। अपने पेट में पल रहे बच्चे को दुनिया में लाऊंगी। उससे मैंने साफ कहा- इस बच्चे को जन्म दूंगी और अदालत में साबित करूंगी कि यह तुम्हारा है। तब तक पहले पति से मेरा तलाक हो चुका था, इसलिए मुझे किसी और बंधन का डर नहीं था। आखिरकार मैंने एक बेटी को जन्म दिया। बेटी के जन्म के बाद उसका डीएनए टेस्ट करवाया। रिपोर्ट लेकर अदालत पहुंची। जांच हुई और साबित हो गया कि बच्ची उसी की है। 2015 में अदालत का फैसला मेरे पक्ष में आया। साबित हुआ कि बच्ची मनीष जैन की है। लेकिन मनीष ने अदालत का फैसला मानने से इनकार कर दिया। उसने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। 2018 में फिर से अदालत का फैसला मेरे पक्ष में आया। फैसला तो पक्ष मेरे पक्ष में आ गया। इतनी कानूनी लड़ाइयों और संघर्षों के बाद भी मेरी जिंदगी आसान नहीं हुई। आज भी दोनों बच्चों के साथ अकेली रहती हूं। बातचीत के दौरान बार-बार मेरी नजर उनके छोटे कटे बालों पर जा रही थी। मैं कुछ पूछता, उससे पहले ही वह खुद कहने लगीं- ‘2023 में पापा की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई। उनकी इकलौती संतान हूं। मैंने ही उन्हें मुखाग्नि दी। उसके बाद सिर मुंडवा लिया था। गांव वालों ने यहां तक कहा था कि मैं पागल हो गई हूं, लड़की को सिर नहीं मुंडवाना चाहिए। लेकिन नहीं मानी थी।’ यह सच्ची कहानी सुनीता आर्या की अंधेरी जिंदगी की है, लेकिन कहानी हार की नहीं है। जिन हालातों में ज्यादातर लोग टूट जाते हैं, उन हालातों में सुनीता आर्या अकेले खड़ी रहीं। ------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-5 करोड़ मुआवजा शानो-शौकत में उड़ाया:3 करोड़ की जमीन खरीदी, 1 करोड़ का मकान; 80-80 लाख की शादियां- अब रोज कमाने से घर चल रहा एक सच्ची कहानी- ग्रेटर नोएडा के किसान रामेश्वर सिंह की। 12 एकड़ जमीन सरकार ने ली और बदले में उन्हें सवा 5 करोड़ रुपए दिए। पैसा खाते में आते ही जिंदगी बदल गई। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-‘एक्स्ट्रा सर्विस’ न देने पर मारी गई थी अंकिता भंडारी:मां-बाप ने खुद को घर में बंद किया; न कमा रहे, न राशन खरीद पा रहे दिल्ली से आए मीडिया के लोग दिनभर अंकिता भंडारी के माता-पिता से बात करने के लिए उनके घर के बाहर बैठे रहे, लेकिन वे घर पर ताला लगाकर चले गए थे। तब तक नहीं लौटे, जब तक मीडिया के लोग वापस नहीं चले गए। अगले दिन मैं बिना बताए उनके घर पहुंची। वह हड़बड़ा गईं, लेकिन बात करने से पहले एक शर्त रख दी- ‘मनीषा जी, आप पत्रकार बनकर नहीं, मेरी बेटी बनकर सुनेंगी, तभी बात करूंगी,’ मैंने हामी भर दी। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
दिल्ली के पॉश एरिया मालवीय नगर के खिड़की गांव में बनी पांच मंजिला एक इमारत में सन्नाटा पसरा है। इसके चौथे फ्लोर पर रहने वाली अरुणाचल प्रदेश की तीन लड़कियां तीन दिन से बाहर नहीं निकली हैं। ये वही लड़कियां हैं, जिन्हें एसी लगवाने के दौरान हुई बहस के बाद मोमो, पार्लर वाली, धंधा करने वाली कहा गया। आरोप इसी बिल्डिंग में रहने वाले हर्ष और उनकी पत्नी रूबी जैन पर है। SC-ST एक्ट में केस दर्ज होने की वजह से रूबी को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है। इस घटना का वीडियो वायरल हो गया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है, लेकिन तीनों लड़कियां अब भी डरी हुई हैं। पहचान उजागर होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर दिए हैं। डर और प्रेशर की वजह से एक लड़की को परिवारवालों ने पढ़ाई छोड़कर घर वापस आने के लिए कह दिया है। पूरा केस समझने के लिए हमने आरोपी हर्ष और रूबी के अलावा पीड़ित लड़कियों की वकील और चश्मदीद AC मैकेनिक से बात की। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से लड़कियां परेशानहमने पीड़ित लड़कियों से बात करने की कोशिश की। उन्होंने अपनी वकील लीयी मारली नोशी से बात करने के लिए कहा। लीयी बताती हैं कि तीनों लड़कियों की उम्र 20 से 23 साल है। वीडियो वायरल होने के बाद से वे परेशान हैं। उन पर बहुत ज्यादा पब्लिक और सोशल प्रेशर है। सब उनके चेहरे पहचानते हैं। परिवार भी डरे हुए हैं। उनमें से एक को तो परिवार ने वापस बुला लिया है। लड़की को अब पढ़ाई छोड़कर वापस जाना पड़ेगा। लीयी आगे बताती हैं कि लड़कियों को सोशल मीडिया पर लगातार मैसेज आ रहे थे। इसलिए उन्होंने अकाउंट डिलीट कर दिए हैं। AC वाले से बदसलूकी, इसी से शुरू हुआ विवादपीड़ित लड़कियों में एक UPSC एग्जाम की तैयारी कर रही हैं। बाकी दोनों भी स्टूडेंट हैं और खर्च निकालने के लिए फ्रीलांसिंग करती हैं। वे अपने किराए के फ्लैट में AC लगवा रही थीं। घर के अंदर कॉरिडोर में ही AC का कंप्रेसर लगाने की जगह है। इसी से विवाद की शुरुआत हुई। एडवोकेट लीयी बताती हैं, ‘आरोपियों ने AC लगाने वाले से बदसलूकी की। वे कह रहे थे कि ड्रिल करने से गिरी धूल से उनके AC को नुकसान हुआ है। लड़कियों ने कहा कि अगर आपके AC को नुकसान हुआ है, तो हम रिपेयर करवा देंगे।’ ‘राहुल गांधी ने मिलने बुलाया, लेकिन हम नहीं गए’लीयी बताती हैं कि पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश भी हुई है। अलग-अलग पार्टियों के नेताओं ने हमसे बात की है। कांग्रेस लीडर राहुल गांधी और अल्का लांबा का फोन आया था। उन्होंने मुझे और लड़कियों को मिलने बुलाया। मैेंने साफ इनकार कर दिया कि यह राजनीतिक मामला नहीं है। लीयी आरोप लगाती हैं कि आरोपियों ने समझौते का दबाव बनाया था। पहले मकान मालिक के घर माफी मांगकर समझौते की कोशिश हुई, लेकिन उनकी कम्युनिटी पर जैसी बातें बोली गई है, इसके बाद कोई समझौता नहीं होगा। AC वाला चश्मदीद, बोला- मेरी टांगे तोड़ने की धमकी दीपीड़ित लड़कियों ने खिड़की गांव से सलीम (बदला हुआ नाम) को AC फिट कराने के लिए बुलाया था। दोपहर करीब 3:30 बजे AC का कंप्रेसर लगाने के लिए सलीम ने ड्रिलिंग की। इससे कुछ मलबा नीचे के बाकी AC और कॉरिडोर में जाकर गिरा। हम AC मैकेनिक सलीम से मिले। नाम और चेहरा छिपाने की शर्त पर वे बताते हैं, ‘बिल्डिंग पुरानी है, इसलिए थोड़ा कचरा और छोटे पत्थर नीचे गिर गए। नीचे के फ्लैट में रहने वाला शख्स इससे भड़क गया और मुझे गालियां देने लगा। मैंने दो बार माफी मांगी। इस पर उसने कहा कि तेरी टांगें तोड़ दूंगा।’ सलीम आगे कहते हैं, ‘मैं जिन मैडम के यहां एसी लगा रहा था, उन्होंने भी कहा कि एसी लगवाने में थोड़ा बहुत मलबा गिरता है। अगर ज्यादा गिरा है, तो सफाई करवा देंगे। उस शख्स ने उन्हें भी गाली दीं। इसके बाद बहस बढ़ गई।’ सलीम बताते हैं कि शुरुआत में बहस नीचे ही खत्म हो गई। 20 मिनट बाद आरोपी पति-पत्नी पुलिस को बुलाकर ऊपर आ गए। पुलिस के सामने ही नॉर्थ-ईस्ट के बारे में उल्टी-सीधी बातें करने लगे। लड़कियों से बोले कि तुम लोग पार्लर चलाते हो, धंधा करती हो, तुम्हारे यहां ड्रग्स चलता है। गिरफ्तारी से पहले रूबी बोलीं- अपने शब्दों के लिए माफी मांगती हूंआरोपी हर्ष पत्नी रूबी के साथ बिल्डिंग के पहले फ्लोर पर किराए के फ्लैट में रहते हैं। बिल्डिंग में हर फ्लोर पर 4 फ्लैट हैं। इसी बिल्डिंग के चौथे फ्लोर पर पीड़ित लड़कियां भी किराए पर रहती हैं। दोनों के फ्लैट मालिक एक ही हैं। 25 फरवरी को रूबी को अरेस्ट कर लिया गया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि रूबी के खिलाफ SC-ST एक्ट में कार्रवाई की गई है। 24 फरवरी की शाम करीब 6 बजे हम रूबी और हर्ष के घर पहुंचे थे। करीब 7 बजे उनके घर अनिल कुमार नाम के हेड कॉन्स्टेबल आए। उन्होंने रूबी और हर्ष को मालवीय नगर थाने जाकर DCP से मिलने के लिए कहा। थाने में पहले रूबी और फिर हर्ष से अलग-अलग पूछताछ की गई। रूबी गिरफ्तारी को लेकर डरी हुई थीं। हर्ष उन्हें न घबराने की सलाह देते रहे। करीब रात 8 बजे पूछताछ के बाद रूबी और हर्ष वापस घर चले गए। 25 फरवरी की सुबह मालवीय नगर पुलिस ने रूबी को घर से अरेस्ट कर लिया। गिरफ्तारी से पहले रूबी ने हमें बताया कि सोशल मीडिया पर 4 मिनट का वीडियो वायरल हुआ है। ये झगड़े के दूसरे हिस्से का है। इससे पहले चार लड़कियां मेरे फ्लोर पर आई थीं। मैं सीढ़ियों पर खड़े होकर उन्हें जवाब दे रही थी, उसी को रिकॉर्ड कर वायरल किया गया, ताकि हमारे खिलाफ राय बन जाए। वायरल वीडियो में रूबी के हाथ में डंडा दिख रहा है। इस पर वे बोलीं कि हमने पुलिस बुलाई, तब तक लड़कियां हमारे फ्लोर पर आ गई थीं। मैं टीबी की मरीज हूं, मेरे शरीर का एक हिस्सा ठीक से काम नहीं करता। इसलिए मैंने सेल्फ डिफेंस के लिए घर में रखी डॉग स्टिक हाथ में ली थी। ये किसी को मारने के लिए नहीं थी। रूबी आगे कहती हैं कि पुलिस के आने के बाद हमें ऊपर ले जाया गया। वायरल वीडियो उसी समय का है। वहां मुझे और पुलिस को धक्का दिया गया। पुलिस अधिकारी मुझ पर गिरे। उसी दौरान मेरे मुंह से भी भद्दे शब्द निकले। रूबी जैन ने नस्लीय कमेंट के लिए माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि मैं अपने शब्दों के लिए दिल से माफी मांगती हूं। ये सब मैंने तब कहा, जब मेरे लिए धंधे वाली और हिजड़ा जैसे शब्द बोले गए। उस हालत में मुझसे क्या उम्मीद की जाती। फिर भी मैं मानती हूं कि मेरे शब्द गलत थे। हर्ष बोले- नस्लीय कमेंट के लिए हम शर्मिंदाहमने वीडियो में दिख रहे रूबी के पति हर्ष से भी बात की। 35 साल के हर्ष इवेंट मैनेजर हैं। वे बीते एक साल से इस फ्लैट में रह रहे हैं। हर्ष कहते हैं, ‘हमारे AC और कॉरिडोर में बड़े पत्थर गिरने पर मैं बाहर निकला था। AC के ऊपर बड़े पत्थर गिरे थे। दो बार जोर की आवाज आई। ऊपर से एक लड़का झांका। मैंने गुस्से में दिल्ली के स्लैंग में एक-दो बातें कहीं। तभी लड़की आई और बहस शुरू कर दी। दोनों तरफ से गाली-गलौज हुई।’ हर्ष आरोप लगाते हैं कि लड़कियों ने उनकी पत्नी को जातिसूचक शब्द कहे। इसके बाद हमने PCR को कॉल किया। पुलिस दोनों पक्षों की बात सुन रही थी, तभी लड़की ने वीडियो बनाया। वायरल वीडियो सिलेक्टिव है, उसमें सिर्फ उनका हिस्सा दिखाया गया है। मेरी पत्नी के साथ धक्का-मुक्की की गई। हमने उसी दिन लिखित शिकायत तैयार कर वॉट्सएप और ईमेल के जरिए एसएचओ, डीसीपी और जॉइंट सीपी को भेजी थी। गृह मंत्रालय को भी शिकायत भेजी थी। हर्ष नॉर्थ ईस्ट के लोगों पर की गई नस्लीय टिप्पणी के लिए माफी मांगते हैं। कहते हैं कि मैं और मेरी पत्नी इसके लिए शर्मिंदा हैं। सब गुस्से में हुआ, लेकिन यह गलती नहीं बल्कि गुनाह है। मैं कोर्ट में भी अपनी गलती मानूंगा। हर्ष आरोप लगाते हैं कि सोशल मीडिया पर मुझे जान से मारने की धमकी मिल रही है। पत्नी रूबी को रेप की धमकियां मिल रही हैं। हमारे नंबर सार्वजनिक कर दिए गए। हमने इसकी भी शिकायत की है। 4 मिनट के वीडियो में क्या है…वीडियो में पीड़ित लड़कियों के अलावा हर्ष, रूबी, एक पुलिसवाला और कुछ पड़ोसी दिख रहे हैं। शुरुआत में पीड़ित लड़की की आवाज आती है… पीड़ित: तुम क्या बोला, हम दारू पीता है। मेरा रूम चेक करो, अगर एक भी चीज मिला न, उसके बाद देखेंगे। रूबी: ऊंगली पीछे करके बात कर। हर्ष: चल, चल, गंदगी मसाज पार्लर। पीड़ित: मसाज पार्लर तू, बुड्ढा। रूबी: मेरा बेडरूम खाली है, आजमा ले जा। तेरे को पता चलेगा कितना बुड्ढा है। 35 साल का लड़का तेरे यहां बुड्ढा होता होगा, क्योंकि ड्रग्स इतने करते हो तुम लोग, हमारे यहां 35 साल में एक्चुअल जवान होते हैं। पीड़ित: मसाज पार्लर तू चलाती है न। रूबी: चलाती हूं, तेरे को कराना है, नौकरी चाहिए। तेरी औकात नहीं है, जहां से वो आया है। कस्टम ऑफिसर का बेटा है, पॉलिटिशियन है उसका बाप। पुलिसवाला: आप इन्हें अंदर कर दो, जो समझदार हो, वो बाहर रहो रूबी: तेरे यहां आदमी मसाज पार्लर में काम करते होंगे, हमारे यहां नहीं। एक दूसरी लड़की रूबी को समझाती है। रूबी कहती है, वो मेरे को बोली कि तेरा आदमी मसाज पार्लर में मिला होगा। हर्ष के BJP नेताओं के साथ फोटो, बोले- पार्टी से नहीं जुड़ाहर्ष के BJP नेताओं के साथ फोटो वायरल हुए हैं। झगड़े के वीडियो में भी रूबी उन्हें पॉलिटिशियन का बेटा बता रही हैं। इस पर हर्ष कहते हैं, ‘मैं सामान्य परिवार से हूं। मेरा किसी पार्टी से संबंध नहीं है। मैं इवेंट मैनेजर हूं। अलग-अलग नेताओं के साथ मेरी तस्वीरें प्रोफेशनल काम की वजह से हैं। मैंने किसी पार्टी से सीधा पेमेंट नहीं लिया, न किसी पार्टी का सदस्य हूं। मैंने BJP के लिए इवेंट मैनेज किया है। वायरल फोटो भी इसी से जुड़े हैं।' मकान मालिक बोले- नॉर्थ-ईस्ट के लोगों से कभी दिक्कत नहीं हुईइस विवाद पर हमने बिल्डिंग में रहने वाले लोगों से बात करने की कोशिश की, लेकिन वे बात नहीं करना चाहते। इसके बाद हम मालवीय नगर के प्रॉपर्टी कारोबारी विनोद चौहान से मिले। वे कहते हैं कि मेरे मकानों में नॉर्थ-ईस्ट के लोग किराए से रहते हैं। अब तक कोई दिक्कत नहीं आई। इस तरह के नस्लीय कमेंट नहीं होने चाहिए। हमारे बच्चे भी दूसरे राज्यों में पढ़ने और काम करने जाते हैं। अगर उनके साथ वहां भेदभाव हो, तो हमें भी बुरा लगेगा।
22 फरवरी 2026‘रात के करीब 8 बज रहे होंगे। मैं ओरियन मॉल से कुछ काम निपटाकर दोस्त के साथ कैंपस लौट रही थी। जैसे ही मॉल से निकली, मैंने महसूस किया कि बाइक से 3 लोग मेरा पीछा कर रहे हैं। शुरुआत में मैंने इग्नोर किया, लेकिन अचानक बाइक मेरे बगल में आ गई। वो लोग सिर्फ मेरे पीछे ही नहीं चल रहे थे, बल्कि रास्ते भर नस्लीय कमेंट और गंदी बातें बोलते रहे।’ 'उन लड़कों ने डेढ़ किलोमीटर तक मेरा पीछा किया। मैं आर्मी कैंप के पास कॉलेज के गेट नंबर 2 के पास पहुंचीं, तो उनमें से एक लड़का मेरे पास आया। उसने मुझे गलत तरीके से छुआ और अपने कपड़े उतारने लगा। मैं बहुत डर गई थी, मैंने मदद के लिए गुहार लगाई। तभी कैंपस के लोग वहां पहुंच गए। लोगों की भीड़ देखकर लड़के वहां से भाग निकले।' ये गोरखपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की एक रेजिडेंट डॉक्टर की आपबीती है, जो नगालैंड की रहने वाली हैं। घटना के अगले दिन 23 फरवरी को एम्स पुलिस स्टेशन में विक्टिम ने शिकायत दर्ज करवाई। इसके 24 घंटे के अंदर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। दैनिक भास्कर की टीम ने महिला डॉक्टर से कॉन्टैक्ट किया और गोरखपुर पुलिस से पूरा घटनाक्रम सिलसिलेवार जाना। इस घटना के अलावा हमने नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं पर देश भर में हुए नस्लवादी टिप्पणी के मामलों की भी लिस्टिंग की है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… विक्टिम के साथी डॉक्टर बोले- लड़के नीचता की हद तक गिर गएइस घटना के बाद हमने विक्टिम डॉक्टर से संपर्क करने की कोशिश की। हमें बताया गया कि वे घटना के बाद से बहुत परेशान हैं और किसी से बात नहीं करना चाहती। पीड़िता की सुरक्षा और देखभाल से लेकर उसकी कानूनी लड़ाई फिलहाल नेशनल फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया रेजिडेंट डॉक्टर्स (NAFORD) संगठन लड़ रहा हैं। हमें विक्टिम का पक्ष जानने के लिए संगठन के अध्यक्ष डॉ. देवेश दुबे का फोन नंबर दिया गया। डॉ. देवेश कहते हैं, ‘घटना के बाद विक्टिम ने हॉस्टल पहुंचकर सबसे पहले NAFORD के ग्रुप पर मैसेज किया। वो बहुत डरी हुई थी, उसने बताया कि कैसे 3 लड़कों ने उसे रास्ते में परेशान किया।‘ ‘वो लड़के नीचता की उस हद तक गिर गए कि उन्होंने डॉक्टर पर न सिर्फ गंदे कमेंट किए, बल्कि उसके शरीर के पिछले हिस्से पर हाथ मारा। फिर उनमें से एक ने विक्टिम के सामने अपनी टी-शर्ट उतार दी। उन लड़कों की ये हरकत देखकर विक्टिम डरी नहीं, बल्कि बहादुरी से उनका सामना किया।’ NAFORD के मुताबिक, पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि उस रात तीनों लड़कों ने उसका डेढ़ किलोमीटर तक पीछा किया। इस दौरान नस्लवादी कमेंट पास करते हुए उसके साथ अभद्रता की, उसे गलत तरीके से छुआ। यहां तक कि कपड़े उतारकर उसे प्राइवेट पार्ट दिखाने की कोशिश की। ये देख विक्टिम ने मदद के लिए आवाज लगाई, जिसके बाद लड़के वहां से भाग गए। विक्टिम गोरखपुर AIIMS में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में थर्ड ईयर की रेजिडेंट डॉक्टर हैं। दैनिक भास्कर को विक्टिम डॉक्टर का वो मैसेज मिला है, जिसे उसने घटना के बाद NAFORD के ग्रुप में शेयर किया था। आइए जानते हैं कि पीड़िता ने मैसेज में क्या लिखा। ‘क्या मैं तीनों लड़कों को थप्पड़ मार सकती हूं’गोरखपुर एम्स अस्पताल के डॉक्टर अमित राय NAFORD से लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने हमें विक्टिम डॉक्टर की कंडीशन के बारे में बताया, जब वे एम्स पुलिस स्टेशन में बयान दर्ज करवाने गई थीं। डॉ. अमित कहते हैं, ‘घटना के बाद विक्टिम डॉक्टर ने एम्स के सीनियर डॉक्टरों को आपबीती बताई। अगले दिन हम सभी उसे लेकर थाने गए। उसकी शिकायत, CCTV फुटेज और बयानों के आधार पर तीनों आरोपी लड़के गिरफ्तार कर लिए गए।‘ ‘22 फरवरी की रात हुई घटना ने विक्टिम को गहरा सदमा पहुंचाया। वो पुलिस स्टेशन में इतना गुस्सा गई थी कि उसने पुलिस अधिकारी से कहा कि क्या मैं तीनों लड़कों को थप्पड़ मार सकती हूं। उसकी बात सुनकर पुलिस ने भरोसा दिया कि आरोपियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।‘ घटना से आहत डॉक्टर ने कहा- ‘ये बहुत दुखद है कि 2026 में भी महिलाओं को हर दिन ऐसी घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। खासकर नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं को खुलेआम उत्पीड़न और हमले का सामना करना पड़ता है। हम सम्मान और सुरक्षा के हकदार हैं। हम बिना किसी डर के चलने की आजादी के हकदार हैं।‘ कौन हैं तीनों आरोपीगोरखपुर के SP सिटी अभिनव त्यागी के मुताबिक, 23 फरवरी को हमें महिला डॉक्टर की शिकायत मिली। विक्टिम के बयानों के आधार पर एम्स पुलिस स्टेशन में BNS की धारा 74, 296 ए, 352 और 351 C के तहत FIR दर्ज की गई है। SP अभिनव कहते हैं, ‘शिकायत दर्ज होने के बाद हमने आरोपियों को पकड़ने के लिए 4 पुलिस टीमें बनाईं। CCTV फुटेज की मदद से आरोपियों की पहचान की गई और 24 घंटे के अंदर तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान सूरज गुप्ता, आदित्य राजपूत और अमृत विश्वकर्मा के रूप में हुई है, जिनकी उम्र 21 से 24 साल के बीच है। घटना में इस्तेमाल बाइक भी बरामद कर ली गई है।’ गोरखपुर पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में पता चला है कि सूरज और अमृत पड़ोसी हैं। सूरज फलों की दुकान चलाता है, जबकि अमृत देवरिया में ही एक जनरल मर्चेंडाइज स्टोर पर काम करता है। तीसरा आरोपी आदित्य BA सेकेंड ईयर का छात्र है। मेघालय CM बोले- नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं के साथ भेदभाव भुला दिया जाता हैइस घटना पर मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, 'नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं के साथ नस्लीय भेदभाव और सेक्शुअल हैरेसमेंट को सिर्फ सुर्खियां बनाकर भूल नहीं जाना चाहिए। एम्स गोरखपुर में नगालैंड की एक रेजिडेंट डॉक्टर के साथ हुआ नस्लीय और सेक्शुअल उत्पीड़न बेहद शर्मनाक है।' 'किसी सभ्य देश में महिला के सम्मान से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। ये भी आपकी बहनें और बेटियां हैं। मैं अधिकारियों से अपील करता हूं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।' ये छेड़छाड़ नहीं, नस्लीय और यौन उत्पीड़न का मामला: NAFORDइस मामले पर NAFORD सहित कई मेडिकल संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संगठनों ने इस घटना के बाद महिला डॉक्टरों और मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है। संगठन ने इस घटना को गंभीर नस्लीय और यौन उत्पीड़न का मामला बताया है। पोस्ट में कहा गया कि नॉर्थ ईस्ट से होने के कारण डॉक्टर को रूढ़िवादी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा, जिससे उन्हें गहरा सदमा और अपमान महसूस हुआ है। घटना में पुलिस के तुरंत एक्शन लेने और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी पर NAFORD के अध्यक्ष डॉ. देवेश दुबे कहते हैं, ‘विक्टिम डॉक्टर का मैसेज मिलते ही हमारे संगठन ने इसकी सूचना गोरखपुर पुलिस को दी। इसके कुछ घंटों में ही 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। तीसरा आरोपी भी 24 घंटे के अंदर पकड़ा गया। इस मामले पर सख्त एक्शन लेने के लिए हम CM योगी आदित्यनाथ और गोरखपुर पुलिस को धन्यवाद देते हैं।‘ दिल्ली में 'मोमो बेचने वाली' और 'मसाज पार्लर वाली' बोला गयागोरखपुर एम्स की डॉक्टर से जुड़ी घटना के एक दिन पहले दिल्ली के मालवीय नगर में भी नॉर्थ ईस्ट की 3 महिलाओं पर नस्लवादी टिप्पणी किए जाने का मामला सामने आया था। इसमें उन्हें 'मोमो बेचने वाली' और '500 में मसाज पार्लर में धंधा करने वाली' जैसे कमेंट किए गए। इस केस में भी FIR दर्ज हुई है। मामला मालवीय नगर का है, जहां अरुणाचल प्रदेश की 3 महिलाएं चौथी मंजिल पर एक फ्लैट में रह रही थी। इनमें से एक UPSC की तैयारी कर रही थी। उन्होंने अपने फ्लैट में एयर कंडीशनर लगवाने के लिए मैकेनिक बुलाया था। ड्रिलिंग के दौरान धूल और मलबा नीचे की मंजिल पर गिर गया, जिससे नीचे रहने वाले पड़ोसी हर्ष सिंह और उनकी पत्नी रूबी जैन नाराज हो गए। शुरुआत में ये विवाद फ्लैट पर मलबे को लेकर शुरू हुआ, लेकिन बाद में विवाद बढ़ते-बढ़ते नस्लीय और आपत्तिजनक हो गया। घटना के बाद बिल्डिंग के ब्रोकर ने महिलाओं से कहा कि उन्हें 2 महीने में फ्लैट खाली करना होगा। इससे पीड़ित महिलाओं में उनकी सुरक्षा लेकर डर बढ़ गया। मेघालय के CM कोनराड के संगमा ने इस घटना की भी निंदा की थी। उन्होंने X पर इस घटना को लेकर लिखा कि नॉर्थ-ईस्ट के लोगों के साथ भेदभाव बंद होना चाहिए। ……………….ये खबर भी पढ़ें… जैश की महिला जिहादी ब्रिगेड, भारत के लिए नया खतरा जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर ने 8 अक्टूबर 2025 को पहली बार आतंकियों की महिला विंग जमात-उल-मोमिनात का ऐलान किया था। इसके ठीक 31 दिन बाद 10 नवंबर, 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में ब्लास्ट हुआ। 15 लोग मारे गए। NIA ने ब्लास्ट को जैश-ए-मोहम्मद के 'वॉइट कॉलर टेरर मॉड्यूल' का हिस्सा बताया। पढ़िए पूरी खबर…
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रूसी युद्ध के खिलाफ यूक्रेनी हौसला पांचवें साल में भी बरकरार
रूसी हमलों ने यूक्रेनियों के लिए पहले से ही सख्त सर्दियों को और भी मुश्किल बना दिया है. फिर भी, चार साल की जंग के बावजूद ज्यादातर यूक्रेनी लड़ाई जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं
अमेरिकी सांसदों की चेतावनी – चीन की पकड़ से डिफेंस इंडस्ट्री को खतरा
अमेरिका की ओर से 'महत्वपूर्ण खनिजों और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन्स' की ओर बढ़ते कदमों को लेकर सवाल उठ रहे हैं

