ईरान से सीजफायर की गुहार, ट्रंप बोले– होर्मुज स्ट्रेट खुलने तक नहीं समझौता!
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान से संघर्ष विराम को लेकर बड़ा दावा किया है। 'नए शासन के राष्ट्रपति' की गुजारिश और 'सीजफायर' की शर्त को लेकर एक बार फिर अपने ट्रुथ सोशल पर बयान दिया है
अमेरिकी पत्रकार को अगवा कर क्या ईरान ने लिया बदला? इराक के जिस संगठन पर शक वो है IRGC का समर्थक
मंगलवार को अज्ञात हमलावरों ने पत्रकार शेली किटल्सन का अपहरण कर लिया। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और अपहरणकर्ताओं की तलाश के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।
ईरान में क्रूर शासन के खिलाफ हमारे संघर्ष की दहाड़ पूरी दुनिया सुन रही : नेतन्याहू
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि मेरे भाइयों और बहनों, इजरायल के नागरिकों, इस स्वतंत्रता के पर्व की पूर्व संध्या पर इजरायल पहले से कहीं अधिक मजबूत है
ईरान संघर्ष पर राष्ट्र को संबोधित करेंगे राष्ट्रपति ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं
होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर अपनी नीति बदल सकता है अमेरिका, ट्रंप ने दिए संकेत
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर अमेरिका अपनी नीति बदल सकता है
ईरान के साथ चल रहे संघर्ष से अमेरिकी सेना कुछ हफ्तों में बाहर आ सकती है : ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष से अमेरिकी सेना कुछ हफ्तों में बाहर आ सकती है
अमेरिकी हमलों से कमांड ढांचे में संकट, मुश्किल में ईरानी सेना: पीट हेगसेथ
अमेरिका ने कहा कि ईरान के खिलाफ उसका चल रहा सैन्य अभियान देश की सशस्त्र सेनाओं को कमजोर कर रहा है। ईरानी सेना का मनोबल गिर रहा है, सैनिक भाग रहे हैं और अहम कर्मियों की कमी हो रही है
क्रीमिया में बड़ा विमान हादसा: एएन-26 क्रैश, 29 की मौत
बुधवार सुबह रूस के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि क्रीमिया में रूसी सेना का एक एएन-26 परिवहन विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में 6 चालक दल के सदस्य और 23 यात्रियों की मौत हो गई
‘शादी के बाद मुझे बेटा नहीं हो रहा था। ससुराल में ताने मिलते थे। तंग आकर मैं कैप्टन बाबा के पास गई। अप्रैल, 2022 से दिसंबर 2024 तक नासिक में उसके ऑफिस जाती रही। बाबा ने गारंटी दी कि तंत्र-पूजा से सब ठीक हो जाएगा। उन्होंने मुझे तांबे के लोटे से पानी पिलाया और कुछ खाने को दिया। थोड़ी देर बाद मेरा सिर घूमने लगा और शरीर सुन्न पड़ गया। इसी का फायदा उठाकर बाबा ने मेरा रेप किया और बोला- मैं शिव का अवतार हूं, मेरे साथ संबंध बनाकर तुम पवित्र हो गई हो।’ यह आपबीती 36 साल की उस पीड़िता की है, जिसकी शिकायत पर नासिक पुलिस ने अशोक कुमार खरात उर्फ ‘कैप्टन बाबा’ को गिरफ्तार किया है। दैनिक भास्कर ने जांच के लिए बनी SIT की एक अफसर से बात की। उन्होंने बताया कि इस मामले में नरबलि दिए जाने का शक है। अभी जांच चल रही है। खरात 1 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में है। SIT को पता चला है खरात ने 150 से ज्यादा महिलाओं का शोषण किया है। पढ़िए जांच टीम को अब तक क्या-क्या मिला है। 150 महिलाएं, 10 FIR, ऑफिस-प्रॉपर्टी सील, लेनदेन की जांच कर रही पुलिस18 मार्च को नासिक पुलिस ने अशोक खरात को अरेस्ट कर लिया। SIT के मुताबिक, उसने 150 से ज्यादा महिलाओं का शोषण किया है। एक पीड़िता ने बताया कि खरात पूजा के वक्त धार्मिक पत्थर बताकर चिंचोका बेचता था। मराठी में इमली को चिंच और उसके बीज को चिंचोका कहते हैं। खरात इनके बदले 10 हजार से 1 लाख रुपए तक लेता था। पुलिस ने खरात का ऑफिस और प्रॉपर्टी को सील कर दिया है। बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं। उनके पैसों के लेन-देन की जांच की जा रही रही है। पहली विक्टिमजादूई पानी दिया, संबंध बनाए, प्रेग्नेंट होने पर अबॉर्शन करायाइस विक्टिम ने नासिक के सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई है। उसके मुताबिक, वह फरवरी 2020 से 18 मार्च 2026 तक अशोक खरात के संपर्क में थी। खरात ने उसे अपने ऑफिस बुलाया था। तांबे की बोतल में जादूई पानी पीने को दिया। फिर धार्मिक रस्म की आड़ में 6 साल तक शारीरिक संबंध बनाए। वह प्रेग्नेंट हुई, तो खरात ने हर्बल दवा बताकर गोलियां खिलाईं। इससे उसका अबॉर्शन हो गया। पीड़िता ने बताया है कि अशोक खरात कहता था कि अगर वह धार्मिक रस्म नहीं करेगी, तो ठीक होने के बजाय वह और उसका परिवार मुश्किल में पड़ जाएंगे। दूसरी विक्टिमप्रेग्नेंसी के दौरान बुलाया, शरीर पर यूरिन फेंका, पूजा के नाम पर रेप कियाशिकायत के मुताबिक, बाबा ने नवंबर 2023 से दिसंबर 2025 तक प्रेग्नेंसी के दौरान धार्मिक अनुष्ठान के बहाने नासिक ऑफिस में बुलाया। इस दौरान खरात ने पेट-सीने पर हाथ फेरा। अपना यूरिन छिड़का। पूजा के नाम पर प्राइवेट पार्ट को छुआ और फिर रेप किया। विक्टिम ने विरोध किया तो बाबा ने जान से मारने की धमकी दी। तीसरी विक्टिमबाबा बोला- मेरे पास दिव्य शक्ति, छूने से ठीक हो जाओगीसरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज तीसरी FIR में विक्टिम ने बताया, ‘12 अक्टूबर, 2024 की सुबह करीब 11 बजे मैं पति के साथ अशोक खरात से मिलने उसके ऑफिस गई थी। बाबा ने पति को बाहर भेज दिया। समस्या बताने पर हाथ में काला पत्थर घुमाकर कान में मंत्र पढ़े। सिर और पीठ पर हाथ फेरा। इसी दौरान बाबा ने सीने पर छुआ। मैं घबराने लगी तो बाबा बोला कि डरो मत, तुम मेरे यहां हो। मेरे पास दिव्य शक्ति है। मेरे छूने से तुम ठीक हो जाओगी। मैंने तुम्हें पवित्र कर दिया है।’ चौथी विक्टिम‘मैं शिव का अवतार, तुम्हें पवित्र कर दूंगा, मना किया तो नाग डस लेंगे’पीड़िता बताती हैं, ‘जुलाई से दिसंबर 2024 के बीच अशोक खरात ने कई बार रेप किया। फोन पर धमकी देता था। कहता था कि मैं शिव का अवतार हूं। मेरे पास दिव्य शक्ति हैं। मैं तुम्हें पवित्र कर दूंगा। अगर तुमने मना किया तो तुम्हारे बच्चों का भविष्य खराब हो जाएगा। उन्हें नाग डस लेंगे। उनकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।’ मर्चेंट नेवी से रिटायरमेंट, गांव में बनाया ‘कैप्टन बाबा’ का मंदिरअशोक खरात नासिक के कहांडलवाडी गांव का रहने वाला है। उसने BSc तक पढ़ाई की। फिर मर्चेंट नेवी में 22 साल तक कैप्टन के पद पर काम किया। नौकरी के बाद 2010 में घर लौट आया। आसपास के इलाके में उसकी छवि रिटायर्ड अधिकारी जैसी थी। केस की जांच के लिए बनी SIT में शामिल एक अफसर बताते हैं, ‘लौटने के बाद अशोक ने मीरगांव तालुका के पास 20 एकड़ जमीन खरीदी। यहां उसने देवस्थान बनवाया, जिसे ईशान्येश्वर महादेव मंदिर नाम दिया। 2016-17 तक ये मंदिर नासिक का तीर्थ बन गया। हर सोमवार और शिवरात्रि पर भीड़ जुटने लगी। खरात का मंदिर होने की वजह से लोग उसे कैप्टन बाबा का मंदिर बोलने लगे।’ ‘मंदिर की वजह से अशोक खरात की पॉपुलरिटी भी बढ़ने लगी। चंदा आने लगा, तो खरात ने और जमीनें खरीदीं। नासिक के कनाडा कॉर्नर इलाके में 'ओक्स प्रॉपर्टीज' नाम से दफ्तर खोला। यहीं वो लोगों का भविष्य बताता था। समस्या दूर करने के लिए पूजा-अनुष्ठान करवाने लगा।’ पुलिस के मुताबिक, खरात के गलत कामों का खुलासा 17 मार्च, 2026 को हुआ, जब 35 साल की एक महिला ने उसके खिलाफ केस दर्ज करवाया। उसने आरोप लगाया कि खरात ने दैवीय शक्तियों का दावा करके भरोसा जीता। समस्या दूर करने के लिए ऑफिस बुलाया। फिर नशीला पानी पिलाकर रेप किया। सरकार से मिले सवा करोड़ रुपए, चंदे से बनाया 18 करोड़ का फार्महाउस18 मार्च को अशोक खरात की गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में बताया था कि अशोक खरात के पास 40 करोड़ 87 लाख रुपए की संपत्ति है। 2017-18 में ईशान्येश्वर देवस्थान के डेवलपमेंट के लिए 25 लाख रुपए का सरकारी फंड दिया गया था। इससे पहले राज्य सरकार ने 1.05 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। आसपास के लोग दावा करते हैं कि खरात ने मंदिर में आने वाले दान और फंडिंग से मीरगांव में 16 एकड़ में आलीशान फार्महाउस बनवाया। इस पर 18 करोड़ रुपए खर्च हुए। यहां छुट्टियों में आता था। पुलिस के मुताबिक, खरात के नासिक वाले दफ्तर में भी लोगों की लंबी लाइन लगती थी। उसके भक्तों में सरकारी अधिकारी, नेता, डॉक्टर और बड़े बिजनेसमैन शामिल थे। CM-मंत्रियों के आने से रुतबा बढ़ा, एकनाथ शिंदे ने गोशाला के लिए दान दियामहाराष्ट्र के सीनियर जर्नलिस्ट वरुण सिंह कहते हैं, ‘ईशान्येश्वर देवस्थान में हाईप्रोफाइल लोग दर्शन के लिए जाते थे। नवंबर 2022 में CM रहते हुए एकनाथ शिंदे भी आए थे। उनके साथ पत्नी लता शिंदे, राजस्व मंत्री रहे राधाकृष्ण विखे पाटिल और प्राथमिक शिक्षा मंत्री रहे दीपक केसकर भी थे। शिंदे ने मंदिर की गोशाला के लिए दान भी दिया था। मुख्यमंत्री के आने से अशोक खरात का रुतबा और बढ़ गया।’ ‘महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रहीं रूपाली चाकंकर खरात ट्रस्ट की नामित सदस्य हैं। बाबा की गिरफ्तारी के कुछ घंटों के भीतर ही उनकी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इसमें रुपाली खरात के पैर पर सिर रखकर प्रणाम कर रही हैं। एक फोटो में वे खरात के लिए छाता पकड़े हुए थीं।’ सोर्स ये भी बताते हैं कि शिवसेना लीडर दीपक केसरकर ने अशोक खरात के भाई दिलीप को फर्जी दस्तावेजों के जरिए स्कूलों और कॉलेजों के लिए सरकारी मंजूरी लेने में मदद की थी। सरकारी वकील बोले- केमिकल देकर दिमाग कंट्रोल करता था खरातखरात के वीडियो वायरल होने के बाद विक्टिम और उनके परिवार वाले सामने नहीं आ रहे हैं। उसके खिलाफ FIR दर्ज कराने वाली महिला के एक रिश्तेदार ने हमें पीड़ित पक्ष के वकील एमवाई काले का नंबर दिया। काले नासिक कोर्ट में सरकारी वकील हैं। वे दावा करते हैं कि खरात दैवीय शक्ति का झूठा दावा और केमिकल देकर महिलाओं के दिमाग पर कंट्रोल करता था। वो महिलाओं को हिप्नोटाइज और टॉर्चर करता था। जांच में सामने आया है कि उसने मोबाइल और कंप्यूटर की हार्ड डिस्क से डेटा डिलीट कर दिया है। अब जांच का मुख्य हिस्सा उसकी पर्सनल चैट, कॉल रिकॉर्ड और डिलीट वीडियो रिकवर करना होगा। खरात ने एक CA की मदद से करीब 100 करोड़ रुपए दुबई भेजे थे। ये CA गिरफ्तारी के डर से खरात के खिलाफ गवाही दे सकता है। जांच अधिकारी बोले- पूजा की आड़ में नरबलि देने का भी शकमामले की जांच रही SIT के सीनियर ऑफिसर किरण कुमार सूर्यवंशी के मुताबिक, ‘खरात के पास मिले कारतूसों में से कुछ खोखे गायब हैं। जांच की जा रही है। हमें ये भी शक है कि आरोपी ने कुछ रस्मों में नरबलि दी हो। खरात खुद को सिद्ध पुरुष बताकर धोखा दे रहा था। नकली सांप और बाघ का इस्तेमाल करके डर पैदा करता था। कस्तूरी का इस्तेमाल कर रहा था। उस पर शक है कि उसने वाइल्डलाइफ एक्ट का भी उल्लंघन किया है।’ हमने खरात पर लगे आरोपों पर उनके वकील सचिन भाटे से भी बात की। उन्होंने मामला कोर्ट में होने का हवाला देकर कुछ कहने से इनकार कर दिया। …………………………. ये रिपोर्ट भी पढ़ें क्या मुख्तार अंसारी की मौत के पीछे 5 करोड़:2 साल बाद भी बैरक नंबर-16 सील मुख्तार को गुजरे 2 साल हो गए। परिवार अब भी केस लड़ रहा है। 172 दिन चली जांच में मुख्तार की मौत की वजह हार्ट अटैक को बताया गया। कानूनी प्रक्रिया की वजह से जेल में मुख्तार के कपड़ों से लेकर बैरक तक, सब सील है। उनके बड़े भाई और गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी भी मौत को सरकार और जेल प्रशासन की मिलीभगत मानते हैं। पढ़ें पूरी खबर...
‘जो जमीन आपने पसंद की है, उसकी कीमत 15 करोड़ 60 लाख है। नेता को 50 हजार प्रति कट्टा और माफिया को 30 हजार प्रति कट्टा देना होगा।’ ‘यानी साढ़े छह बीघा जमीन पर नेता को 1 करोड़ और माफिया को 40 लाख देना होंगे। इसके बाद कोई तकलीफ नहीं होगी। सिंडिकेट सब संभाल लेगा’ यह खुलासा भास्कर के हिडन कैमरे पर सिंडिकेट माफियाओं ने किया है। अधिकतर पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस यानी TMC से जुड़े हैं। हालांकि, शुभेंदु अधिकारी, अर्जुन सिंह, बैशाली डालमिया, रुद्रनील घोष जैसे जिन TMC नेताओं पर पहले BJP सिंडिकेट चलाने का आरोप लगाती थी, वो अब BJP में ही शामिल हो चुके हैं। 4 नेता और 4 माफिया भास्कर के कैमरे पर बात करते हुए रिकॉर्ड हुए। भास्कर रिपोर्टर ने कंसल्टेंसी कंपनी का मेंबर बनकर सिंडिकेट से जुड़े लोगों से मुलाकात की। 'जमीन पसंद करो, बाकी हम संभाल लेंगे' पहली मुलाकात : राजू पाल ये कौन हैं : मोगरा ग्राम-2, हुगली की प्रधान के पति हैं। TMC के सक्रिय कार्यकर्ता हैं रिपोर्टर: कोलकाता में स्कूल खोलने के लिए जमीन चाहते हैं राजू पाल: कितनी चाहिए रिपोर्टर: 5 बीघा राजू पाल: ठीक है, आप नंबर दे जाइए। 4-5 जगह दिखा देंगे। जो पसंद आए, उसी के मालिक से बात करवा देंगे रिपोर्टर: पेपर सही रहेगा राजू पाल: बिल्कुल सही रहेगा रिपोर्टर: सुना है यहां सिंडिकेट सिस्टम भी मैनेज करना होता है राजू पाल: वो हमारे ऊपर छोड़ दीजिए। सिंडिकेट के लोग हमारे साथ हैं रिपोर्टर : उन्हें क्या देना पड़ता है राजू पाल : सब बता देंगे, पहले जमीन पसंद कीजिए। यहां सिंडिकेट के मालिक को ‘चाचा’ कहते हैं रिपोर्टर : उन्हीं के जरिए काम होगा राजू पाल : बिल्कुल, जहां जमीन पसंद आएगी, वहीं से सब होगा अन्य व्यक्ति: जो बिल्डर को चाहिए, वो सब मिलेगा राजू पाल : चाचा का ईंट भट्ठा है, ईंट, सीमेंट, पत्थर, सब मिलेगा ‘यहां पूरा कंट्रोल हमारा है, कोई दिक्कत नहीं’ दूसरी मुलाकात : देवराज पाल ये कौन हैं : बांसबेड़िया में TMC के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष रहे, अभी एक्टिव मेंबर राजू के साथी सूरज ने जमीन दिखाई। फिर राजू मिला और मोगरा में सिंडिकेट चलाने वाले देवराज पाल के ऑफिस ले गया। राजू ने बातचीत में कहा कि वे सभी एक ही सिंडिकेट का हिस्सा हैं और देवराज पाल इस इलाके में सिंडिकेट चलाता है। राजू पाल : सिंगूर में आपको दिक्कत हो रही है, यहां नहीं होगी। हम सब सिंडिकेट के आदमी हैं। देवराज सिंडिकेट के मालिक हैं, और ‘चाचा’ हेड हैं रिपोर्टर : ठीक है देवराज पाल : कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा। यहां पूरा कंट्रोल है जमीन पसंद आने की बात कहकर हमने सिंडिकेट चार्ज और निर्माण प्रक्रिया समझी… रिपोर्टर : काम शुरू होगा तो सिंडिकेट सिस्टम कैसे चलेगा राजू पाल : पॉलिटिकल और सिंडिकेट चार्ज हम संभाल लेंगे रिपोर्टर : कितना देना होगा राजू पाल : 25 लाख रुपए रिपोर्टर : इसमें सब शामिल रहेगा राजू पाल : हां, सब कुछ रिपोर्टर: क्या निर्माण सामग्री सिंडिकेट से ही लेनी होगी राजू पाल: हां, जो चाहिए, बालू, गिट्टी सब हम देंगे सूरज सिंह: ठेकेदार भी हमारा ही है, बाहर से कराओगे तो खर्च बढ़ेगा राजू पाल: देवराज भैया ठेकेदार हैं रिपोर्टर: अगर हम अपना ठेकेदार रखें राजू पाल: तब पूछना पड़ेगा। लेकिन माल सिंडिकेट से ही लेना होगा रिपोर्टर: अगर सिंडिकेट से माल नहीं लिया तो सूरज सिंह: आपका कोई काम नहीं होगा राजू पाल: एक गाड़ी बालू भी नहीं मिलेगी रिपोर्टर: पेमेंट कैसे होगा राजू पाल: 25 लाख कैश में देना होगा। हमारे ऊपर भी एक बॉस है, जो पूरे जिले को देखता है रिपोर्टर : कौन राजू पाल: ‘केडी’ नाम चलता है राजू पाल: वो तय करता है किसे टिकट मिलेगा, कौन आगे जाएगा 'नेता और माफिया दोनों को मैं कंट्रोल करता हूं' तीसरी मुलाकात : सुब्रत दास ये कौन हैं : नदिया दक्षिण यूथ तृणमूल कांग्रेस एक्सटेंडेड कमिटी के जिला सचिव होटल प्रोजेक्ट के लिए जमीन खरीदने की बात कहकर हम सुब्रत से मिले… रिपोर्टर: हमें करीब 5 बीघा जमीन चाहिए, फ्रंट अच्छा हो और मेन रोड पर हो सुब्रत दास: कल्याणी मोड़ के पास एक जमीन है, करीब साढ़े छह बीघा, 80 फीट फ्रंट रिपोर्टर: हम होटल-रिजॉर्ट बनाना चाहते हैं, बजट का कोई इश्यू नहीं अन्य व्यक्ति: आप यहां होटल बनाएंगे तो AIIMS के डॉक्टर भी रुकेंगे, फायदा होगा रिपोर्टर: यहां सिंडिकेट कैसे चलता है सुब्रत दास: यहां भी बाहुबली और नेता मिलकर सिंडिकेट चलाते हैं अन्य व्यक्ति: सुब्रत भैया जिले के यूथ सेक्रेटरी हैं, सब मैनेज हो जाएगा सुब्रत दास: आपको कोई दिक्कत नहीं होगी, पॉलिटिकल और लोकल दोनों हम संभाल लेंगे अन्य व्यक्ति: यहां जो माफिया राज है, सब भइया के अंडर है सुब्रत दास: नेता और माफिया दोनों को मैं कंट्रोल करता हूं जमीन दिखाने के बाद जब हमने कुल खर्च पूछा तो सिंडिकेट और नेताओं को देने वाली रकम का खुलासा हुआ रिपोर्टर : जमीन की कीमत सुब्रत दास: करीब 15 करोड़ 60 लाख रिपोर्टर: सिंडिकेट का कितना सुब्रत दास: नेता को 50 हजार प्रति कट्टा, माफिया को 30 हजार प्रति कट्टा (करीब साढ़े छह बीघा जमीन पर यह रकम लगभग 1 करोड़ रुपए बैठती है, जो कैश में देनी होगी) रिपोर्टर: माफिया का काम क्या होता है सुब्रत दास: कोई डिस्टर्बेंस होगा तो माफिया संभालेगा, जरूरत पड़ी तो मारपीट भी रिपोर्टर: नेताओं को क्यों देना पड़ेगा सुब्रत दास: यह TMC का जमाना है, जो पावर में रहेगा उसे देना पड़ेगा। MLA, MP सब शामिल हैं रिपोर्टर: अगर नहीं दें तो सुब्रत दास: काम रुकवा देंगे, लेबर भगा देंगे, डिस्टर्बेंस करेंगे रिपोर्टर: क्या हम अपना माल खुद ला सकते हैं सुब्रत दास: नहीं, लोकल से ही लेना पड़ेगा। हम बताएंगे किससे लेना है रिपोर्टर : पेमेंट कैसे होगा सुब्रत दास: सब कैश में होगा। 50% रजिस्ट्रेशन के समय। बाकी काम शुरू होने पर '10 लाख लूंगा, सारे झमेले संभालूंगा' चौथी मुलाकात : एमडी जाकिर ये कौन हैं : टीएमसी कार्यकर्ता और सिंडिकेट ऑपरेटर जाकिर से उसके घर पर मुलाकात हुई। हमने होटल के लिए जमीन की बात छेड़ी। बातचीत में जाकिर सिंडिकेट से दूरी बनाता दिखा, लेकिन उसके साथी ने साफ कर दिया कि नेता और सिंडिकेट एक ही हैं। एमडी जाकिर: इस एरिया में कोई प्रॉब्लम नहीं होगी रिपोर्टर: नेता या सिंडिकेट साथी: नेता और सिंडिकेट सब एक ही है एमडी जाकिर: वो नेता भी है और सिंडिकेट भी साथी: यहां का नेता भी जाकिर दा और सिंडिकेट भी वही है रिपोर्टर: मतलब जाकिर दा खुद सिंडिकेट हैं एमडी जाकिर: आपको प्रॉब्लम नहीं होगा बाद में जाकिर ने जमीन से जुड़े किसी भी झमेले को संभालने के लिए 10 लाख रुपए मांगे। एमडी जाकिर: टोटल साढ़े पांच बीघा लैंड है, 10 लाख लगेगा रिपोर्टर: किसको देना है एमडी जाकिर: मैं ही सब संभालूंगा अब तक तीन ऐसे लोगों से मुलाकात हो चुकी थी, जो नेता भी हैं और सिंडिकेट का हिस्सा भी। इससे साफ हुआ कि यह सिस्टम बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं। 'थाना-विधायक सब को पैसा जाएगा' पांचवी मुलाकात : बिभाकर प्रसाद उर्फ मोनू ये कौन है : सिंडिकेट ऑपरेटर, स्थानीय विधायक से रिश्तेदारी का दावा किया बिभाकर: होटल लाइन के लिए जमीन हो जाएगी रिपोर्टर: रेट क्या है? बिभाकर: 3 बीघा रेडी प्रॉपर्टी 10 करोड़ बिभाकर: खर्चा 50 लाख पड़ेगा रिपोर्टर: किस बात का बिभाकर: थाना, लोकल, एमएलए सब रिपोर्टर: सिंडिकेट कौन देखता है बिभाकर: हम ही रिपोर्टर: पैसा कैसे देना होगा बिभाकर: कैश में रिपोर्टर: अगर अपना कॉन्ट्रैक्टर लाएं बिभाकर: पूरे कंस्ट्रक्शन बजट का 10% देना पड़ेगा रिपोर्टर: नहीं दिया तो बिभाकर: डिस्टर्ब होगा… यहां 200 रुपए में मर्डर हो जाता है बिभाकर ने यह भी दावा किया कि स्थानीय विधायक उसका रिश्तेदार है (भास्कर इसकी पुष्टि नहीं करता) इसके बाद हम बामनगाछी पहुंचे, जहां हुसैन अली, मासूम अली और मफिजूल इस्लाम से मुलाकात हुई। ये तीनों सिंडिकेट ऑपरेटर हैं। मासूम अली: लैंड सिंडिकेट का है हुसैन अली: हम सिंडिकेट के मेम्बर हैं रिपोर्टर: सिंडिकेट को क्या देना होगा हुसैन अली: प्रोजेक्ट का 2% रिपोर्टर: इसके अलावा हुसैन अली: बालू, पत्थर, गिट्टी हमसे ही लेना होगा रिपोर्टर: पैसा कैसे जाएगा हुसैन अली: कैश में रिपोर्टर: पैसा किसे जाता है मफिजूल इस्लाम: छोटे से बड़े तक… एमएलए तक जाता है रिपोर्टर: सिस्टम कैसे बना मफिजूल इस्लाम: नेता लोग बनाया… सीधे नहीं ले सकते, सिंडिकेट से जाता है मफिजूल के मुताबिक, कोई भी बड़ा प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले सिंडिकेट से परमिशन जरूरी है। एक बार परमिशन मिल जाए तो पुलिस, प्रशासन या नेता कोई दखल नहीं देता। जांच में यह भी सामने आया कि ये लोग भले आधिकारिक तौर पर पार्टी में पद पर न हों, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े हैं। सिंडिकेट से जुड़े सप्लायर्स से माल खरीदने का दबाव कोलकाता के दमदम इलाके में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करने वाले एक प्रॉपर्टी डीलर कहते हैं, ‘सिंडिकेट सिस्टम केवल कोलकाता तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल में अलग-अलग लेवल पर है।’ ‘इस सिस्टम की वजह से बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्टरों पर यह दबाव बनाया जाता है कि वे निर्माण सामग्री केवल सिंडिकेट से जुड़े सप्लायरों से ही खरीदें। अगर कोई कॉन्ट्रैक्टर ऐसा करने से इनकार करता है, तो उससे एकमुश्त बड़ी रकम देने के लिए कहा जाता है।’ ‘इसलिए कॉन्ट्रैक्टर की लागत काफी बढ़ जाती है। फिर बिल्डर को प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ानी पड़ती है, इसका असर खरीदारों पर पड़ता है।’ डीलर ने यह भी बताया कि ‘सिंडिकेट के इस पूरे तंत्र में किसी एक राजनीतिक दल का वर्चस्व नहीं होता बल्कि जिस इलाके में जिसका प्रभाव है, वहां उसका सिंडिकेट काम करता है।’ सिंडिकेट वाले नेता ही अब BJP में शामिल हो रहे सीनियर जर्नलिस्ट गौतम लाहिरी कहते हैं कि, ‘जो भी सरकारी स्कीम्स हैं, जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना इसका फायदा कोई तभी ले सकता है, जब वे लोकल सिंडिकेट के साथ मिलकर काम करे। वरना आपको स्कीम का फायदा ही नहीं मिल सकेगा। सिंडिकेट के लोग ही इलेक्शन के वक्त वोटर्स को बुलाने, बूथ पर हंगामा करने, कहीं–कहीं बोगस वोट डलवाने जैसे काम करते हैं।’ ‘कई ऐसे नेता हैं, जिन पर सिंडिकेट राज के आरोप लगे और अब वो बीजेपी में शामिल हो गए। टीएमसी ने कई नेताओं पर एक्शन भी लिया है। जैसे, पार्थ चटर्जी को इस बार टिकट नहीं दिया। कोलकाता में छोटे व्यापारियों को भी लोकल लीडर्स को हफ्ता देना पड़ता है। सिंडिकेट में सीधे पैसा नहीं लिया जाता बल्कि सामान और सर्विस लेने के लिए मजबूर किया जाता है।’ एक लाख से ज्यादा कंपनियां बंगाल में रजिस्टर्ड हुईं टीएमसी प्रवक्ता प्रदीप्त मुखर्जी कहते हैं कि, ‘2020 से पहले जिन नेताओं पर बीजेपी सिंडिकेट चलाने का आरोप लगाती थी, उनमें से कई आज खुद बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। शुभेंदु अधिकारी इनमें बड़ा नाम हैं।’ ‘कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय के मुताबिक, ममता बनर्जी के कार्यकाल में एक लाख से ज्यादा कंपनियां बंगाल में रजिस्टर्ड हुईं। अगर कोई केवल आरोप लगाना चाहता है तो वह अलग बात है, लेकिन जो लोग डेटा के आधार पर बात करना चाहते हैं, उन्हें सामने आना चाहिए।’ वहीं बीजेपी के मीडिया पैनलिस्ट सजल घोष कहते हैं, ‘आप घर में एक टॉयलेट बनाओ या एक प्रेयर रूम, अपनी मर्जी से ईंट, बालू, गिट्टी नहीं खरीद सकते। ममता दीदी कहती हैं, जो सिंडिकेट करेगा वो टीएमसी में नहीं रहेगा, लेकिन वही लोग विधायक, मेयर, चेयरमैन बन रहे हैं।’ कॉन्क्लूजन : भास्कर की पड़ताल में पता चलता है कि, पश्चिम बंगाल में जमीन खरीदनी हो, निर्माण करना हो या बिजनेस शुरू करना हो, सिंडिकेट का साथ जरूरी है। निर्माण सामग्री से लेकर सुरक्षा और काम रुकवाने-चलवाने तक पूरा सिस्टम इसी नेटवर्क के हाथ में है। सरकार सिंडिकेट सिस्टम खत्म करने की बात जरूर कहती है, लेकिन ग्राउंड रियल्टी इससे अलग है। ………………………………. आप ये इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं आपको ट्रेन का तत्काल टिकट क्यों नहीं मिलता:ये 5वीं फेल गैंग की करामात, सरगना बेल पर; IIT वाले अफसरों के पास भी इसका इलाज नहीं अवैध सॉफ्टवेयर्स से ट्रेनों के तत्काल टिकट बुक हो रहे हैं। एक आम यात्री जितनी देर में IRCTC ऐप पर डिटेल भर पाता है, उससे भी कम वक्त में ये सॉफ्टवेयर टिकट बुक कर देते हैं। 25 से 30 सेकंड्स में एक टिकट बुक हो जाती है। फिर इन टिकट्स को 300 से 500 रुपए तक का कमीशन लेकर बेचा जाता है। फेस्टिवल टाइम में कमीशन चार गुना तक हो जाता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें…।
होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का सख्त रुख, ईरान को खुली चेतावनी
अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने मंगलवार को कहा कि वॉशिंगटन पहले ही ऐसे कदम उठा चुका है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट को चालू रखा जा सके, भले ही ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी हो
बलूचिस्तान में 30 से अधिक हमलों में मारे गए पाकिस्तानी सेना के कई सैनिक : बीएलए
बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने दावा किया कि उसने बलूचिस्तान के कई क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ 30 से अधिक समन्वित हमले किए, जिनमें कई सैनिकों की मौत हुई और कई अन्य घायल हो गए
ईरान के खिलाफ जमीनी हमला कर सकते हैं, मिशन तो हमारी शर्तों पर ही होगा खत्म: हेगसेथ
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया कि वो 'बूट्स ऑन द ग्राउंड' के लिए तैयार हैं और संघर्ष उनकी शर्तों पर ही खत्म होगा। ये भी कहा कि अगर संवाद से बात नहीं बनेगी तो 'बम के जरिए बातचीत' को अंजाम दिया जाएगा
सफा ने अपने बयान में ‘न्यूक्लियर विंटर’ (परमाणु हमले के बाद वैश्विक जलवायु पर पड़ने वाला गंभीर प्रभाव) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा इस खतरे को दुनिया के सामने लाने की कोशिश है, ताकि समय रहते इसे टाला जा सके।
महायुद्ध के बीच इजरायल बोला भारत है बेहतरीन मध्यस्थ, ईरान ने भी अमेरिका से बातचीत को मारी ठोकर
उषा वेंस ने अपने जीवन के बारे में खुलकर की बात, जेडी वेंस की महत्वाकांक्षाओं का किया समर्थन
उषा वेंस ने एनबीसी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में उपराष्ट्रपति आवास के अंदर के जीवन की एक दुर्लभ व्यक्तिगत झलक साझा की। उन्होंने परिवार, राजनीति और अपनी बदलती सार्वजनिक भूमिका पर बात की
ट्रंप का दावा: जल्द पता चल जाएगा कि ईरान के संसद अध्यक्ष अमेरिका के साथ काम करना चाहते हैं या नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा है कि करीब एक हफ्ते में यह साफ हो जाएगा कि ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ अमेरिका के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं या नहीं
लेबनान में यूएन शांतिसैनिकों पर हमला: फ्रांस के विदेश मंत्री ने की इजरायल की कड़े शब्दों में निंदा
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने इजरायल की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि लेबनान के नकौरा क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना (यूएनआईएफआईएल) के साथ “गंभीर घटनाएं” हुई हैं
सुबह करीब 10 बजे का वक्त। मिट्टी से लिपा-पुता एक कच्चा घर। बाहर सिर मुंडाए दो महिलाएं बैठी हैं। उम्र करीब 38-40 साल। ऊपरी बदन लगभग नंगा। बाकी शरीर पर नाम मात्र के कपड़े। छाती छिपाने के लिए मोतियों और कौड़ियों से बनी मालाएं। गले में एल्युमीनियम के ढेर सारे छल्ले भी। हाथों में अंगूठी और कानों में दो अलग-अलग तरह की बालियां। ये हैं बोंडा सुमदाय की महिलाएं। मैं मनीषा भल्ला दैनिक भास्कर की खास सीरीज ‘हम लोग’ में लाई हूं इसी बोंडा समुदाय की कहानी। मैं पहुंची हूं दिल्ली से 1700 किलोमीटर दूर ओडिशा के बोंडा हिल्स… अब सिर्फ 9,200 बोंडा लोग बचे हैं। इनसे मिलने पर पाबंदी है। सरकार को डर है कि घुलने-मिलने से बोंडा संस्कृति खत्म न हो जाए। बेहद जरूरी होने पर ही इनसे मिलने की परमिशन मिलती है। सो मैं बोंडा डेवलपमेंट एजेंसी के ऑफिस पहुंच गई। ये दफ्तर गांव की शुरुआत में ही है। बोंडा प्रोजेक्ट हिल्स के प्रोजेक्ट मैनेजर शशिकांत समांतारे से मिली। उन्होंने लक्ष्मी नाम के एक शख्स को मेरे साथ कर दिया। कह तो वो ये रहे थे कि लक्ष्मी मेरी मदद करेंगे, लेकिन वो मुझ पर नजर रख रहे थे। लक्ष्मी गांव की तरफ चलते हुए बताते हैं कि- ‘10 साल पहले तक बोंडा महिलाएं बिना कपड़ों के रहती थीं। सिर्फ प्राइवेट पार्ट एक छोटे से कपड़े से ढक लेती थीं, जिसे रिंगा कहते हैं। ऊपरी हिस्से पर केवल मोतियों की माला पहनती थीं।’ हम गांव में घुसे ही थे कि चिकनी मिट्टी से खिलौने बनाते बच्चे नजर आने लगे। हमें देखते ही हंसने लगे। शायद उन्हें मेरा पहनावा अजीब लग रहा था। मैं कार्गो पैंट और टीशर्ट जो पहने थी। सुबह का वक्त था, कई महिलाएं घर के बाहर झाड़ू लगा रही थीं। मेरे साथी लक्ष्मी ने एक कोने की तरफ इशारा किया और बोले- ‘कल रात यहीं गांव की लड़कियां डांस कर रही थीं। लड़के देख रहे थे। इस दौरान कुछ लड़कों ने लड़कियों को पसंद कर लिया। हमारे यहां शादियों की शुरुआत ऐसे ही होती है। डांस करती लड़कियों को लड़के पसंद करते हैं। अपनी पसंद परिवार को बताते हैं। फिर उनका परिवार शराब की बोतल, चूड़ी और अंगूठी लेकर लड़की के घर पहुंचता है। शादी का प्रस्ताव रखता है, लेकिन लड़की वाले इनकार कर देते हैं। लड़के वाले दोबारा आते हैं। लड़की वाले फिर मना कर देते हैं। ये सिलसिला डेढ़ साल तक चलता है। आखिरकार एक दिन लड़के वाले लड़की के घर आते हैं और उसका पूरा घर तहस-नहस कर देते हैं। तब जाकर लड़की वाले शादी के लिए हामी भरते हैं। सुनने में ये थोड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन ये सब रिवाज है, कोई दुश्मनी नहीं। आखिर लड़के वाले, लड़की के परिवार को मुर्गी, सुअर और बकरी देकर रिश्ता पक्का कर देते हैं।’ ‘इसके बाद शादी कैसे होती है?’ मैंने पूछा ‘हमारे यहां बारात दूल्हे के घर की महिलाएं लेकर जाती हैं, मर्द नहीं। गीत गाती, नाचती ये महिलाएं पैदल लड़की के घर पहुंचती हैं। लड़की को शादी का जोड़ा पहनाती हैं। ये जोड़ा भी लड़के वालों की तरफ से ही आता है। फिर ये महिलाएं लड़की को अपने साथ घर ले आती हैं। जब लड़की ससुराल की चौखट पर पहुंचती है, तो पुरोहित उसी चौखट पर मुर्गी की बलि देता है। मुर्गी के खून से पुरोहित लड़की और लड़के का तिलक करता है। यहीं पर लड़की की एक छोटी सी परीक्षा होती है। उसे चावल पकाकर पूरे परिवार को खिलाना होता है। इसके बाद से दुल्हन शादीशुदा मानी जाती है और उसे बहू का दर्जा मिल जाता है।’ एक घर के बाहर एक महिला और पुरुष बैठे बात कर रहे हैं। हाव-भाव से लग रहा है कि पति-पत्नी हैं। पत्नी की उम्र ज्यादा और पति की कम लगा रही है। मैंने लक्ष्मी को उनसे मिलवाने का इशारा किया। महिला का नाम है सोगी। मैंने सोगी से पूछा, ‘ये आपके पति हैं?’ जवाब मिला ‘हां’ लेकिन इनकी उम्र तो आपसे काफी कम लग रही है? सोगी मुस्कुराईं और बोलीं- ‘मेरा पति मुझसे आठ साल छोटा है। हमारे यहां 10 साल के लड़के की शादी कर दी जाती है, लेकिन लड़की की उम्र कम से कम 18 साल होती है। हर रिश्ते में जरूरी है कि लड़की, लड़के से बड़ी हो। इसकी वजह तो किसी को नहीं मालूम, लेकिन यही नियम है। आज तक किसी ने इसे नहीं तोड़ा है।’ बोंडा लोग हिंदी या उड़िया नहीं जानते। इनकी भाषा रेमो है। इन्हें हिंदी में केवल एक वाक्य बोलना आता है कि पैसा दे, पैसा दे। इन्हें पता लग गया है कि बाहरी इनके गांव आकर तस्वीरें खींचते हैं। फिर उससे पैसा कमाते हैं। इसलिए फोटो खींचने या वीडियो बनाने पर आपको हर बोंडा को पैसे देने होते हैं। गांव में मिट्टी और घास-फूस से बने कुल 1900 घर हैं। सरकारी योजना के तहत इनमें से 1200 घरों को ढहाकर नए पक्के घर बनाए जा रहे हैं। इसके लिए सरकार ने दो-दो लाख रुपए दिए हैं। जगह-जगह मलबा और बल्लियां रखी हुई हैं। एक घर के बाहर महिला झाड़ू लगा रही है। मैं उनसे मिलने पहुंची तो उन्होंने घर के अंदर आने के लिए कहा। महिला का नाम है चुनकी धंधमाझी। वो मुझे अपनी रसोई में ले गईं। पूरी तरह से मिट्टी से लिपी हुई एकदम साफ-सुथरी रसोई। यहां मिट्टी के कई चूल्हे बने हैं। दो पर दाल, सब्जी और एक पर चावल पक रहा है। पास में सिर्फ तेल, नमक और मिर्च रखे हैं। दीवार पर कुछ पॉलिथीन टंगी हैं। बोंडा समुदाय के घरों में ऐसी एक बड़ी रसोई के अलावा सिर्फ एक कमरा होता है। इनके घरों में बिस्तर नहीं होते, कपड़े और बर्तन भी गिने चुने। चुनकी से मैंने बोंडा महिलाओं की पहनावे के बारे में पूछा। वो बताने लगीं कि ‘मोतियों और कौड़ियों की जो माला वे पहनती हैं उसे लुबैदक कहते हैं। एल्युमीनियम के छल्लेनुमा गहने को उसुन्गु कहते हैं। चुनकी बताती हैं कि ‘महिलाओं के इस तरह से सजने संवरने के पीछे कहते हैं कि एक बार माता सीता नहा रही थीं। बोंडा समुदाय के लोग उन्हें देखकर हंसने लगे। नाराज सीता ने उन्हें हमेशा वस्त्रहीन रहने का श्राप दे दिया। ये सुनते हो बोंडा लोग माफी मांगने लगे। तब माता सीता ने अपनी धोती फाड़कर एक छोटा सा टुकड़ा महिलाओं को दिया। ये कपड़ा महिलाओं के निचले हिस्से को ढकने के लिए था। जिसे ये लोग रिंगा कहते हैं।’ बात करते हुए चुनकी चूल्हे पर खाना बना रही हैं। चूल्हे के ठीक ऊपर लकड़ी का एक छोटा झूला टंगा है। इस पर यह लोग मांस भूनते हैं। फिलहाल इस पर बींस भुन रही है। रसोई से अंदर की तरफ एक बड़ा कमरा है। जिसमें पलंग पर धान, छोटे-छोटे टमाटर, प्याज, चावल रखे हैं। पास ही एल्युमीनियम के पतीले में भात यानी पका चावल रखा है। एक मटके में भी कुछ रखा है। पूछने पर चुनकी बोलीं- ‘इसमें मंडिया है।’ चखा तो एकदम खट्टे दही जैसा लगा। दरअसल, मंडिया इनका स्थानीय अनाज है जिसे पानी में नमक और हल्दी डालकर पकाया जाता है। इसे ये लोग चावल के साथ खाते हैं। चुनकी बताती हैं कि भात, गाय का मांस, सुअर का मांस और बींस की सब्जी हमारा पारंपरिक खाना है। यहां से मेरे साथी लक्ष्मी मुझे अपने घर ले गए। पहुंचते ही मेरे सामने शराब रख दी। बोले- ये हमारी अपनी बनाई शराब है। मेहमानों को यही पिलाते हैं। ये शराब एक खास तरह के बर्तन में दी। ये बर्तन डाल पर ही सूखी हुई लौकी से बना है। इसे चखा तो स्वाद चावल की मांड़ जैसा थोड़ा कड़वा और खट्टा लगा। ये सलभ नाम के पेड़ के पत्तों के रस से बनती है। एक ही कुल में शादी पाप मानी जाती है। अगर कोई अपने ही कुल में शादी कर ले तो उसे समाज से बेदखल कर देता है। जुर्माने के तौर पर एक गाय या बैल और कुछ पैसे भी देने पड़ते हैं। शादी के बाद अगर लड़की किसी लड़के को छोड़ दे, तो उसके परिवार पर जुर्माना लगाया जाता है। लड़का अगर लड़की को छोड़ दे तो उसे भी यही सजा दी जाती है। परिवार की मर्जी के बिना अपनी जाति से बाहर शादी करने पर लड़का-लड़की को समाज से बाहर कर दिया जाता है। कुछ समय बाद मामला दोबारा देख कर जुर्माना लगाया जाता है। उन्हें गांव में दावत देनी पड़ती है। तब जाकर समाज में शामिल किया जाता है। हालांकि, उनके हाथ से खाना-पानी नहीं लिया जाता, सिर्फ सूखा अनाज ही स्वीकार होता है। अब ये परंपराएं धीरे-धीरे बदल रही हैं।' बोंडा समुदाय की अपनी अदालत है। एक पेड़ के नीचे पत्थरों से बना प्लेटफॉर्म है, जहां यह स्थानीय झगड़े सुलझाते हैं। लक्ष्मी के घर में ही बोंडा समुदाय के रघुनाथ सीसा मिले। वो बताते हैं कि 'हमारे यहां मृत्यु के बाद जलाने का रिवाज है। मौत के बाद एक या दो महीने के बाद पूरे गांव को भोज दिया जाता है, जिसमें चावल और गौ-मांस खिलाया जाता है। इसे एकोस्याह कहते हैं। बोंडा समुदाय के त्योहार यहां की रौनक हैं। फसल कटने के बाद पूस का त्योहार जनवरी में आता है। उस दिन नए कपड़े खरीदे जाते हैं। बींस की सब्जी, पहाड़ और पेड़ों की पूजा की जाती है। पूजा में किसी प्रकार की कोई मूर्ति नहीं होती है। बल्कि अपने पुरखों को याद किया जाता है। उस दिन पारंपरिक डांस मेमे भी किया जाता है। इस त्योहार को अन्नूआल झातिमारा कहते हैं। इस त्योहार को पुरानी दुश्मनी खत्म करने के लिए मनाया जाता है। सबसे पहले गांव का पुरोहित देवता को मुर्गी समेत कुछ पक्षियों की बलि देता है। अनाज और शराब चढ़ाई जाती है। उसके बाद लोग एक-दूसरे से अपनी दुश्मनी खत्म करते हैं। सभी एक-दूसरे को सलभ पेड़ की शाखा से मारते हैं। इतना मारते हैं कि पिटने वाले का खून निकल आए और उनका सारा गुस्सा उतर जाए। गुस्सा निकलने के बाद एक-दूसरे को गले लगाते हैं। फिर महिलाएं उनके घावों पर हल्दी लगाती है। ये लोग हर साल एक पाठखंडा यात्रा निकलते हैं। यह बोंडा समुदाय का सबसे बड़ा त्योहार है। जिसमें तलवार की पूजा की जाती है। ये तलवार सौ साल पुरानी होती है। इसे पुराने बरगद के पेड़ में छिपाकर टांगा जाता है। ताकि किसी को दिखे ना। हर साल पुजारी ही उसे नीचे उतारता है। फिर इससे बकरे की बलि दी जाती है और तलवार की पूजा की जाती है। यह तलवार इन लोगों के पूर्वजों की है। तलवार की पूजा में हमेशा ओडिशा के जेपोर राज घराने के लोग शामिल होते हैं। माना जाता है कि ये लोग जेपोर के राजा के सिपाही थे। बीते साल जेपोर के राजा इनकी यात्रा में शामिल होने के लिए आए थे। इस दिन बोंडा समुदाय के 12 गांव के लोग इकट्ठा होते हैं। मेमे डांस भी किया जाता है। इसी तरह से अक्टूबर-नवंबर में डंगर पूजा होती है, जिसमें मुर्गी की बलि दी जाती है। दो अंडे फोड़े जाते हैं। अगर घर में किसी के साथ कुछ बुरा हो जाए तो डुमा पूजा करते हैं। इसमें घर के अंदर मिट्टी की एक आकृति बनाई जाती है। जो उनके किसी पूर्वज की होती है। इस आकृति में आत्मा बुलाते हैं और उसकी पूजा करते हैं। आत्मा को बींस, सुअर और गाय के मांस का भोग लगाते हैं। बोंडा समुदाय के ये लोग ओडिशा के मलकानगिरी जिले से 85 किलोमीटर दूर बोंडा हिल्स पर रहते हैं। पहाड़ों पर बसे इस गांव में ये लोग कांगो, काजू, स्ट्रॉबेरी, आम, बांस, फूल झाड़ू, कटहल और आंवला की खेती करते हैं। इस सीरीज में अगले हफ्ते पढ़िए ऐसे ही अनोखे वांचू लोगों की कहानी…. ---------------------------------------------------- 1- 100 किलो का पत्थर उठाया, लड़की बोली- तुमसे करूंगी शादी:औरतें 5 पति भी रख सकती हैं, 1800 अनोखे ‘टोडा’ लोगों की कहानी सुबह की हल्की धुंध अभी पहाड़ियों से हटी नहीं है। घास पर जमी ओस चमक रही है। मैदान के किनारे जंगल में एक पुराने पेड़ के नीचे लोग जमा हुए हैं। इसी पेड़ के नीचे एक बड़ा इम्तिहान होने वाला है। पूरी कहानी यहां पढ़ें
शुरुआत बिंदू की कहानी से। तिरुवनंतपुरम के पल्लीचल गांव में रहने वाली बिंदू की शादी 16 साल की उम्र में हो गई थी। ससुराल में खाने के भी लाले थे। बिंदू पढ़ी-लिखी थीं। बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगीं। पहली कमाई 10 रुपए थी। धीरे-धीरे कमाई बढ़ी, तो बिंदू संस्कृत से ग्रेजुएशन करने लगीं। वहीं उनके आचार्य ने आयुर्वेद बिजनेस का आइडिया दिया। बिंदू ने सास से एक हजार रुपए उधार लिए। केरलम सरकार की कुडुंबश्री योजना से मदद ली और काम शुरू कर दिया। ये 2006 की बात है। अब बिंदू अपनी कंपनी चलाती हैं। 3 से 4 लाख रुपए महीने का बिजनेस है। 40 से ज्यादा देशों के लोग उनसे बिजनेस मॉडल समझने आ चुके हैं। सब उन्हें दीदी बुलाते हैं। बिंदू मानती हैं कि उनकी लाइफ कुडुंबश्री ने बदली है। केरलम सरकार की इस योजना से 46 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं, यानी राज्य के हर दूसरे घर में एक कुडुंबश्री मेंबर है। ये महिलाएं बिजनेस तो चलाती ही हैं, साथ में चुनाव लड़ती भी हैं और हार-जीत तय भी करती हैं। कुडुंबश्री में लेफ्ट का दबदबा, विजयन को दूसरी बार सत्ता दिलाई2021 में चुनाव जीतने वाले गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी LDF को 48% महिलाओं ने वोट दिए थे। ये मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की सत्ता में वापसी की बड़ी वजह मानी गई। नवंबर 2023 से नवंबर 2025 में देश के 15 राज्यों में चुनाव हुए हैं। इनमें से 10 में महिलाओं को पैसे देने वाली कैश स्कीम लागू की गईं या वादा किया गया। 10 में से 9 राज्यों में योजना कारगर रही। मध्यप्रदेश, बिहार, हरियाणा, झारखंड, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, ओडिशा में महिलाओं के लिए हर महीने पैसे वाली स्कीम लाने वाली पार्टियों को एकतरफा जीत मिली। केरलम की 140 सीटों के लिए 9 अप्रैल को वोटिंग होनी है। यहां कुडुंबश्री गेमचेंजर हो सकती है। अब तक इस बिजनेस मॉडल पर लेफ्ट का कब्जा था, लेकिन अब कांग्रेस और BJP भी सेंधमारी कर रही हैं। बिंदू की कहानी से समझिए कुडुंबश्री कितनी अहमबिंदू की आयुराज इंडस्ट्री के नाम से आयुर्वेद कंपनी है। वे 15 तरह के प्रोडक्ट बेचती हैं। 5 प्रोडक्ट ब्राह्मी के हैं, जिसमें हेयर ऑयल, फेसवॉश, शहद, जैम, मिक्स पैक शामिल हैं। बिंदु केरलम में आयुर्वेद आइकाॅन बन चुकी हैं। कुडुंबश्री से जुड़ी महिलाओं को ट्रेनिंग देने जाती हैं। 2012, 2014, 2016 में राज्य और केंद्र सरकार से बेस्ट आंत्रप्रेन्योर अवॉर्ड मिला है। आयुर्वेद पर किताब लिख रही हैं। बिंदू बताती हैं, ‘पहली बार ब्राह्मी ऑयल बनाकर फ्री में पड़ोसियों को दिया था। उन्हें बहुत पसंद नहीं आया। तभी पता चला कि तिरुवनंतपुरम में कुडुंबश्री फेयर लगा है। वहां स्टॉल लगाया। 24 बॉटल ऑयल तैयार किया था। 2 घंटे में सब बिक गया। इसी से हिम्मत बढ़ी। मैं कुडुंबश्री मिशन से जुड़ गई। वहां से लोन लेकर घर में मशीन लगवाई। काम चल निकला।’ 1998 में कुडुंबश्री की शुरुआत, विजयन सरकार की सबसे बड़ी ताकतकेरलम में बिंदु की तरह लाखों कहानियां हैं। इससे जुड़ी महिलाओं के बिजनेस हैं, वे कैंटीन, जूस का प्लांट चलाती हैं। 17 मई, 1998 को शुरू हुआ। तब LDF के ईके नयनार मुख्यमंत्री थे। योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने मल्लापुरम से की थी। योजना का मकसद गरीबी खत्म करना और महिलाओं को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाना था। अब ये मिशन दुनिया में महिलाओं का सबसे बड़ा ग्रुप बन चुका है। अब कुडुंबश्री के ऑफिस चलिए, देखिए वहां क्या होता हैकुडुंबश्री का ऑफिस राजधानी तिरुवनंतपुरम में है। सीढ़ियां चढ़ते ही सीएम पिनराई विजयन की फोटो और LDF का पोस्टर दिखता है। चुनावी माहौल में कुडुंबश्री की बातें हो रही हैं। दिसंबर, 2025 में हुए स्थानीय निकाय चुनाव में ग्राम, ब्लॉक, जिला पंचायत, म्युनिसिपालिटी, कॉर्पोरेशन लेवल पर 17,082 कुडुंबश्री वॉलंटियर्स ने चुनाव लड़ा। इनमें 7,210 जीत गईं। ऑफिस में महिलाओं की क्लास चल रही है। पूरे केरलम से करीब 40 महिलाएं आई हुई थीं, जिन्होंने एक-दो साल पहले ही बिजनेस शुरू किया है। अधिकारी बोले- ग्राउंड पर राजनीति है, बात करूंगा तो झापड़ खाऊंगाहमने महिलाओं को ट्रेनिंग दे रहे अधिकारी से बात की। वे अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहते। अधिकारी कहते हैं, ‘हम ट्रेनिंग, डोनेशन और ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को मिशन से जोड़ने की बात करते हैं। अगर मैं यहां पॉलिटिकल बात करूंगा, तो झापड़ खाने को मिलेगा।’ ‘हकीकत यही है कि ये महिलाएं किसी न किसी पार्टी से जुड़ी हैं। 10 साल से LDF की सरकार है, जाहिर सी बात है कि उससे प्रभावित महिलाएं ज्यादा मिलेंगी। विजयन सरकार ने पिछले साल में अच्छा खासा बजट भी दिया है।’ 10 लाख लोन लेकर कैंटीन खोला, हर महीने 7 लाख रुपए कमाई50 साल की सुनिता तिरुवनंतपुरम में कैंटीन चलाती हैं। वे बताती हैं, ‘बेटे और पति बाहर काम करते हैं। घर पर मन नहीं लगता था, इसलिए मैंने 2024 में कैंटीन शुरू किया। कुडुंबश्री से जुड़ी, 10 लाख रुपए लोन लिया। आज कैंटीन में 21 महिलाएं काम कर रही हैं। उन्हें 700 से 1300 रुपए रोज मेहनताना देती हूं। महीने में 6 से 7 लाख रुपए की कमाई हो जाती है।’ चुनाव पर सुनिता कहती हैं, इस बार थोड़ा मुश्किल है। BJP अच्छी फाइट में है। तिरुवनंतपुरम में तीन सीटों पर मजबूत है। हालांकि, कुडुंबश्री की महिलाएं LDF को ही वोट देंगी। कुडुंबश्री के जरिए राजनीति में आईं महिलाएंसिंधू शशि LDF से जुड़ी हैं। वे मलयालम में बताती हैं, ‘20 साल से कुडुंबश्री से जुड़ी हूं। मेरी टीम सिलाई–बुनाई करती हैं। नगर निगम चुनाव में कुडुंबश्री से जुड़ी 10 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था, इनमें से 5 जीत गईं। ज्यादातर LDF से जुड़ी हैं। महिलाओं की इतनी तरक्की मौजूदा सरकार की वजह से हुई है, तो हम उसे कैसे छोड़ सकते हैं।’ एक्सपर्ट बोले- कुडुंबश्री का वोट LDF को मिलेगातिरुवनंतपुरम के सीनियर जर्नलिस्ट अजय कुमार बताते हैं कि कुडुंबश्री की शुरुआत के बाद ज्यादातर LDF की सरकार रही है। उसने समय-समय पर फंड भी बढ़ाया है। ऐसे में कुडुंबश्री का बड़ा तबका LDF और विजयन सरकार को ही वोट करेगा। ये उनके लिए फायदे का मिशन है। LDF कुडुंबश्री को अपनी राजनीति में इस्तेमाल भी करता है। जन्मभूमि अखबार के एडिटर प्रदीप बताते हैं सरकार चला रही पार्टी CPI(M) ने कुडुंबश्री का कैरेक्टर बदल दिया है। कार्यकर्ताओं को इसकी यूनिट में नौकरी दी है। कुडुंबश्री को CPI(M) के नेता वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने इसमें अपनी राजनीति को मिक्स कर दिया है। उनका यूनियन भी ग्राउंड पर कुडुंबश्री के साथ मिलकर काम कर रहा है। कुडुंबश्री पर BJP-कांग्रेस के वादे BJP: राजनीति का दखल खत्म करेंगे, मार्केट मुहैया कराएंगेBJP ने महिलाओं के दम पर मध्यप्रदेश, हरियाणा और बिहार में एकतरफा जीत हासिल की। केरलम में महिलाओं को अपने पाले में करने की चुनौती है। पार्टी ने 11 मार्च को जारी संकल्प पत्र में कुडुंबश्री को भी शामिल किया है। वादा किया है कि इसकी यूनिट का दायरा बढ़ाकर इसे लघु उद्योग में बदलेेंगे। फंड मैनेजमेंट को पारदर्शी बनाएंगे, ताकि राजनीतिक दखल कम हो। कुडुंबश्री के बनाए प्रोडक्ट को इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा गरीबी रेखा से नीचे रह रही महिलाओं को हर महीने पैसे देना, साल में 6 मुफ्त सिलेंडर, स्कॉलरशिप और सस्ते कर्ज जैसे वादे भी हैं। कांग्रेस: 5 लाख रुपए का ब्याज मुक्त कर्जराहुल गांधी ने 25 मार्च को कोच्चि में UDF का गारंटी कार्ड जारी किया। इसमें कुडुंबश्री के जरिए बच्चों के लिए नर्सरी और क्रेच चलाने की योजना है। इसके अलावा महिलाओं को 5 लाख रुपए तक का ब्याज मुक्त कर्ज देने का वादा किया है। …………………………असम से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ेंगांव के हर घर में तांत्रिक, चुनाव में काला जादू करवाने आ रहे नेता असम का मायोंग गांव काले जादू की राजधानी कहा जाता है। यहां के घर में तांत्रिक है। असम में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होनी हैं। इसलिए नेता और मंत्री भी जीत के लिए जादू-टोना करवाने मायोंग आने लगे हैं। गांव के तांत्रिक कैमरे पर नेताओं के नाम नहीं बताते। कैमरा बंद होने पर एक शख्स दावा करते हैं कि विधायक पीजूष हजारिका अक्सर यहां आते हैं। पढ़ें पूरी खबर...
ईरान के खजाने पर ट्रंप की नजर खार्ग द्वीप पर कब्जे की खुली धमकी, क्या अमेरिका छेड़ेगा जमीनी जंग?
ईरान का तेल छीन लेंगे,ट्रंप की खार्ग द्वीप पर कब्जे की खुली धमकी, क्या शुरू होगी जमीनी जंग?
संकट गहराने के साथ ही क्यूबा अगला निशाना होगा : ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि क्यूबा “अगला होगा” जो पतन का सामना करेगा
ईरान का भारी जल संयंत्र बुरी तरह क्षतिग्रस्त, संचालन बंदः आईएईए
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने कहा है कि मध्य ईरान के खोंडाब में स्थित ईरान का भारी जल उत्पादन संयंत्र बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है और अब चल नहीं रहा है
ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी, जमीनी हमले की स्थिति में दी जवाबी कार्रवाई की धमकी
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका जमीनी हमला करता है, तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा
तनाव बढ़ने के बीच ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते के संकेत दिए
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ समझौता जल्द हो सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका के हालिया हमलों से ईरान की सेना और नेतृत्व कमजोर हुआ है
गाजा में हमास के दस हथियारबंद लड़ाकों को निशाना बनाया : इजरायल
इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने जानकारी देते हुए बताया कि शनिवार रात सैन्य कार्रवाई में उसने गाजा पट्टी में लगभग दस हथियारबंद लड़ाकों को मार गिराया
अगर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के 5% वोटर खिसके, तो बीजेपी नंबर-1 पार्टी बन सकती है। लेकिन अगर असम के 34% मुस्लिम एकजुट हो गए, तो हिमंत बिस्व सरमा की सरकार का लौटना मुश्किल हो जाएगा। अगले 30 दिनों में भारत के 4 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। इलेक्शन एक्सप्लेनर में जानेंगे आखिर इन पांचों प्रदेशों में बीजेपी का दांव पर क्या लगा है… ***** ये भी खबर पढ़िए… CEC ज्ञानेश कुमार ने चुनावी तारीखें बताईं, विपक्ष उन्हें पद से हटाने की तैयारी कर रहा; क्या ममता बनर्जी का राजनीतिक दांव चुनाव ऐलान से पहले पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की अगुआई में विपक्ष नेु मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में महाभियोग का नोटिस दिया। सड़कों पर प्रदर्शन कर रही TMC का आरोप है कि ज्ञानेश SIR के जरिए वोट काटकर बीजेपी को फायदा पहुंचाना चाहते हैं। पूरी खबर पढ़िए…
अमेरिका ने ईरान जंग में डुअल ट्रैक स्ट्रैटजी अपनाई है। यानी एक तरफ जंग रोकने के लिए डिप्लोमैटिक चैनल से बातचीत की कोशिशें हो रही हैं। दूसरी तरफ ‘फाइनल ब्लो’ यानी अंतिम प्रहार की तैयारी है, जिसमें जमीनी सैनिक भी शामिल होंगे। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रम्प ने अभी तक जमीनी हमले की मंजूरी नहीं दी है। 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के 3500 अमेरिकी सैनिक मिडिल ईस्ट पहुंच चुके हैं। उनके साथ ट्रांसपोर्ट और लड़ाकू विमान भी भेजे गए हैं। हजारों अतिरिक्त सैनिक, टैंक, जंगी बेड़े, फाइटर जेट्स भेजने की योजना है। ईरान के अंग्रेजी अखबार तेहरान टाइम्स ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सैनिकों ने ईरान की जमीन पर कदम रखा, तो ताबूत में वापस लौटेंगे। अखबार ने अपने फ्रंट पेज पर लिखा- नर्क में आपका स्वागत है। आखिर अमेरिका के ‘अंतिम प्रहार’ का प्लान क्या है, ईरान कैसे मुकाबला करेगा और इसका असर क्या होगा; मंडे मेगा स्टोरी में पूरी कहानी… ईरान की जियोग्राफी और जंग के खर्च को देखते हुए, अमेरिका फुल स्केल वॉर के बजाए 3 संभावित जमीनी टारगेट पर हमले कर सकता है... ***** ग्राफिक्स: अंकुर बंसल और अजीत सिंह -------- ये खबर भी पढ़िए…क्या पूरे मिडिल ईस्ट पर नेतन्याहू की नजर:'ग्रेटर इजराइल' क्या है, जिसके लिए ईरान जंग के बीच लेबनान पर कब्जा कर रहा इजराइल पूरी दुनिया की नजर ईरान जंग पर टिकी है। उधर इजराइल तेजी से लेबनान पर जमीनी कब्जा करने में जुटा है। 20% जमीन खाली करा ली है और अपने सैन्य ठिकाने जमा रहा है। इजराइल का कहना है कि वो हिजबुल्ला के सैन्य ढांचे और हथियारों को खत्म करना चाहता है। कई विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू ‘ग्रेटर इजराइल’ को हकीकत बनाने में जुटे हैं। पूरी खबर पढ़िए…
अफगानिस्तान में भारी बारिश का कहर, बाढ़ और भूस्खलन से 17 की मौत, 26 घायल
अफगानिस्तान में पिछले 24 घंटों के दौरान बारिश से जुड़ी दुर्घटनाओं में कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई
होली सेपल्चर मामला: नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा 'प्रार्थना की अनुमति देने का बनाया जा रहा प्लान'
यरूशलम स्थित होली चर्च सेपल्चर में पैट्रिआर्क कार्डिनल और होली लैंड के कस्टोस फादर को पाम संडे मास की इजाजत न दिए जाने पर इजरायल को चौतरफा आलोचना झेलनी पड़ी
ईरान ने इजरायल के इंडस्ट्रियल जोन को बनाया निशाना, बीर शेवा में दागे मिसाइल
ईरान और इजरायल के बीच तनाव एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में इजरायल की ओर से ईरान की औद्योगिक सुविधा को निशाना बनाए जाने के बाद, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल के बीर शेवा स्थित नियोट होवाव इंडस्ट्रियल जोन पर मिसाइल हमला किया है
ईरान संघर्ष पर कूटनीतिक पहल: इस्लामाबाद में सऊदी, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक
इस बैठक की मेजबानी पाकिस्तान कर रहा है, जिसे क्षेत्रीय संतुलन और अपने तटस्थ रुख के चलते बातचीत के लिए उपयुक्त मंच माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बैठक का उद्देश्य ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए साझा रणनीति तैयार करना है।
हूती विद्रोही पहले भी गाजा संघर्ष के दौरान लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्गों को बाधित कर चुके हैं। ऐसे में उनकी सक्रियता से वैश्विक शिपिंग रूट्स पर बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
देशभर में हुए इन प्रदर्शनों का केंद्र न्यूयॉर्क, लॉस एंजिलिस, वॉशिंगटन डीसी और मिनेसोटा के ट्विन सिटीज रहे। हालांकि इस बार की खास बात यह रही कि बड़ी संख्या में रैलियां छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी आयोजित की गईं।
चीन के शांक्सी में भीषण आग, तीन की मौत, 23 घायल
उत्तरी चीन के शांक्सी प्रांत में ताइयुआन में किनशियान नॉर्थ स्ट्रीट के पास एक इमारत में आग लगने से कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई
क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंध: विदेश मंत्री रोड्रिग्ज ने ईंधन नाकेबंदी और आर्थिक दबाव पर साधा निशाना
क्यूबा और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। क्यूबा ने अमेरिका पर ईंधन आपूर्ति को लेकर झूठ बोलने का गंभीर आरोप लगाया है
मिस्र ने मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से बातचीत की
मिस्र के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देलट्टी ने मध्य पूर्व में तनाव कम करने के प्रयासों पर चर्चा करने के लिए सऊदी, जॉर्डन और जर्मन समकक्षों के साथ-साथ यूरोपीय आयोग के अधिकारियों के साथ अलग-अलग फोन पर बातचीत की
अमेरिका में गूंजा नारा: ‘नो किंग्स’- ट्रंप नीतियों के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आव्रजन और विदेश नीति के खिलाफ अमेरिका के लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। इसी क्रम में पूरे अमेरिका में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं
ईरान का बड़ा दावा: अमेरिकी एफ-16 और ड्रोन मार गिराए
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश के दक्षिणी हवाई क्षेत्र में एक अमेरिकी एफ-16 फाइटिंग फाल्कन और एक एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को निशाना बनाया है
ईरान संग तनाव चरम पर, अमेरिका ने भेजे 3,500 मरीन
ईरान के साथ जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है
मैं अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर की रहने वाली मरीना नीडो हूं- नीडो तानिया की मां, जिसे दिल्ली में भीड़ ने पीट-पीटकर मार दिया। अगर ऐसी नफरत बढ़ती रही, तो किसी दिन हालात खतरनाक हो सकते हैं। हम बस इतना चाहते हैं कि- आप हमें समझिए। हम अलग दिखते हैं, लेकिन अलग नहीं हैं। हम भी इसी देश के हैं। मेरे बेटे को सिर्फ इसलिए मार दिया गया, क्योंकि उसका चेहरा आपसे अलग था। वह चिल्ला रहा था- ‘मैं भारतीय हूं…’ लेकिन भीड़ ने उसकी एक भी नहीं सुनी। सोचा था- मेरा बेटा पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बनेगा, लेकिन उसकी लाश हवाई जहाज से वापस आई। नीडो बाकी बच्चों जैसा नहीं था। अक्सर मुझसे 5-10 हजार मांगता। मैं पूछती- कहां जाते हैं इतने पैसे? वह हंसकर टाल देता। बाद में पता चला- वह जरूरतमंदों की मदद करता था। दोस्तों की फीस भरता था। मुझे बिना बताए घर के ड्राइवरों को पैसे दे देता था। उसके भीतर इंसानियत भरी थी। वह मेरे पास बैठकर कहता- मम्मी, बड़ा होकर एक ऐसी जगह बनाऊंगा, जहां मंदिर, गुरुद्वारा, चर्च और मस्जिद- सभी होंगे… और हर कोई वहां आकर एक साथ प्रार्थना कर सकेगा। मैं उसे देखती रह जाती… और सोचती- यह बच्चा आखिर बड़ा होकर क्या बनेगा? नीडो पांच बच्चों में तीसरे नंबर पर था। ईटानगर के छोटे से स्कूल से पढ़कर जब उसे हरियाणा के डीपीएस पानीपत भेज रही थी, तो दिल में डर था… लेकिन एक भरोसा भी था कि- मेरा बेटा कुछ बड़ा करेगा। पानीपत में साइंस की पढ़ाई की। 12वीं के बाद बोला- मम्मी, मैं सोशोलॉजी पढ़ूंगा और विदेश जाऊंगा। मैंने पूछा- क्या बनना चाहते हो? वह बस मुस्कुरा देता। अब समझ आता है- वह कुछ बनना नहीं, कुछ बदलना चाहता था। 12वीं के बाद उसने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया। फीस थी 68 हजार रुपए सालाना। लेकिन जब उसकी मार्कशीट देखी गई- तो यूनिवर्सिटी ने कहा- इतना इंटेलिजेंट बच्चा हमारे यहां पढ़ेगा, यही हमारे लिए काफी है। उसने फीस घटाकर 13 हजार कर दी। उस दिन मुझे लगा- मेरा बेटा सच में कुछ अलग है। लेकिन एक डर लगा रहता था। मैंने नस्लवाद झेला था, इसलिए उसे हमेशा समझाती- सावधान रहना, सब जगह लोग एक जैसे नहीं होते, लेकिन उसने कभी शिकायत नहीं की- न डीपीएस में, न यूनिवर्सिटी में। छुट्टियों में घर आता तो खाली हाथ नहीं आता। सबके लिए कुछ न कुछ लाता। हमारे घर के ड्राइवर मुस्लिम हैं- ईद पर उनके लिए टोपी लाता। उनके लिए क्रिसमस और न्यू ईयर पर पार्टी करता। वह सबको हंसाता था, घर का माहौल हल्का कर देता था। नीडो मुझे कभी उदास नहीं देख पाता था। जैसे ही चेहरे पर जरा-सी उदासी दिखती, वह तुरंत कोई न कोई मजाक कर देता। एक दिन हंसते-हंसते बोला- मम्मी, मैं दो शादियां करूंगा। मैं चौंकी- क्या? वह हंसकर बोला- ताकि आपको हमेशा खुश रख सकूं… फिर घर में किसी नौकर की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह उसकी बचकानी बातें थीं, लेकिन इरादा सच्चा था- मुझे खुश देखना। कभी-कभी वह किचन में चला जाता, कुछ बनाकर खुद ही चखता और कहता- मम्मी, एक दिन मैं सब संभाल लूंगा। सच कहूं, मुझे उस पर भरोसा था। फिर एक दिन आया, जब सब कुछ बदल गया। उस दिन वह दिल्ली में अपनी बहन के घर था। बैग पैक था, कार नीचे खड़ी थी। वह झुककर जूते के फीते बांध रहा था… तभी फोन बजा। दूसरी तरफ से एक लड़की की घबराई हुई आवाज थी- भैया, मेरे भाई की तबीयत बहुत खराब है। हम लाजपत नगर में, चौथी मंजिल पर हैं… प्लीज आ जाओ। मैं अकेली हूं। नीडो ने एक सेकंड भी नहीं सोचा। ड्राइवर से कहा- रुको, कॉलेज बाद में जाएंगे। उसने तुरंत एंबुलेंस बुलाई और लाजपत नगर के लिए निकल पड़ा। तंग गलियों में वह भटकता रहा- घर मिल नहीं रहा था। फोन कान से लगा था- उधर से जल्दबाजी भरी आवाज आती- जल्दी आओ, हालत और खराब हो रही है… पास में एक मिठाई की दुकान है, वहीं से पता पूछ लो। वह सीधे उसी दुकान पर पहुंचा- अंकल, एक पता पूछना है। दुकानदार ने बिना देखे ही कह दिया- नहीं पता। वह फिर गलियों में भटकने लगा। फोन दोबारा बजा- इस बार आवाज और घबराई हुई थी- भैया, जल्दी आ जाओ। थककर वह उसी मिठाई की दुकान पर वापस लौटकर गया। बोला- अंकल, प्लीज, मेरे दोस्त की जान जा सकती है। दुकानदार भड़क गया- क्या समझता है खुद को? सलमान खान, अक्षय कुमार? बार-बार क्यों आ रहा है? इतना कहकर उसने धक्का दे दिया। बस यहीं से सब बदल गया। नीडो ने पलटकर कुछ नहीं कहा, बस गुस्से में दुकान के काउंटर पर हाथ मार दिया- शीशे में हल्की दरार पड़ गई। अगले ही पल आसपास के दुकानदार जमा हो गए। किसी ने कॉलर पकड़ा, किसी ने मुक्का मारा। वह कुछ कह भी नहीं कह पाया। फिर पुलिस को बुला लिया गया। उधर, लाजपत नगर जाते वक्त उसने मुझे फोन पर बताया था और 10 हजार रुपए मांगे थे। मैंने पैसे भेज दिए थे। वही पैसे उसने पुलिस को दे दिए। पुलिस ने उसमें से 6 हजार दुकानदार को दिए और 4 हजार अपने पास रख लिए। पुलिस उसे अपने साथ ले गई। थाने में बिठाए रखा- चोट लगी थी, फिर भी अस्पताल नहीं ले गई। थोड़ी देर बाद पुलिस फिर उसी दुकान पर लेकर गई- कहा, समझौता करना है। लेकिन वहां फिर भीड़ जुट गई। किसी ने कहा- यही है, शीशा तोड़ने वाला लड़का! और भीड़ ने दोबारा हमला कर दिया। उसे फिर से बेरहमी से पीटा गया। मैं लगातार फोन कर रही थी, लेकिन वह उठा नहीं पा रहा था। जब भीड़ ने छोड़ा, तो उसने कॉल उठाया। आवाज बहुत धीमी थी- सब ठीक है मम्मी… बस हल्की चोट है… दवा ले ली… बाय बाय…, फोन कट गया। शायद उसे खुद भी नहीं पता था- यही उसकी जिंदगी की आखिरी बात होगी। अगले दिन फोन आया। स्क्रीन पर बड़ी बेटी का नाम था। आवाज टूटी हुई थी- मम्मी… नीडो एम्स में है… अब वो… नहीं रहा। बस इतना सुनते ही मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया। बेहोश हो गई। होश आया, तो खुद को अस्पताल में पाया। उधर, बेटे का शव हेलिकॉप्टर से गुवाहाटी लाया गया। हम हेलीकॉप्टर से पहुंचे। ताबूत में उसे देखा, तो लगा- यह वही बच्चा नहीं है, जो हंसते हुए घर से गया था। मेरा शरीर कांप रहा था। हम किसी तरह उसे ईटानगर लेकर आए और अंतिम संस्कार किया। करीब 15 दिन बाद हम 300 लोग इकट्ठा होकर दिल्ली पहुंचे। सड़कें, दफ्तर, कोर्ट- हर जगह एक ही आवाज गूंज रही थी- नीडो के लिए न्याय चाहिए। मैंने जंतर-मंतर पर भाषण दिया। ‘मरीना नीडो स्पीच’ नाम से वह वीडियो यूट्यूब पर है। उस पर दुनिया भर के छात्रों का समर्थन मिला- जापान, अफ्रीका, कश्मीर… हर जगह से हमारे पक्ष में आवाज उठी। लोग लिख रहे थे- आंटी, हम भी यह झेल चुके हैं… पीछे मत हटना, हम आपके साथ हैं। ये पढ़कर मुझे नीडो की वह बात याद आई- मम्मी, मैं बड़ा होकर कुछ ऐसा करूंगा कि दुनिया याद रखेगी। उसने सच में कुछ बड़ा कर दिया था। पूरी दुनिया उसे जान गई थी। बस फर्क इतना था कि वह खुद इसे देखने के लिए जिंदा नहीं था। कुछ दिन बाद लंदन से बीबीसी की टीम आई। कैमरा मेरे सामने था, लेकिन मुझे सिर्फ अपने बेटे का चेहरा दिख रहा था। इस तरह नीडो के जाने के बाद मुझे रोने का वक्त नहीं मिला। मैं उसकी न्याय की लड़ाई में जुट गई। आंसू आते, पर हर बार उन्हें पोंछकर एक नई फाइल उठा लेती। दिल्ली की सड़कें, दफ्तरों के बाहर, कोर्ट के गलियारे- बस कागजों के साथ भटकती रही। सरकार ने वकील दिया, भरोसा भी दिलाया कि दोषियों को सजा मिलेगी। लेकिन हकीकत अलग थी- कार्यवाही धीमी, फाइलें खिसकती रहीं, तारीखें बढ़ती रहीं। हुआ कुछ नहीं। मैंने कई वकील बदले। इस तरह एक वकील जाता, दूसरा आता। करोड़ों रुपए खर्च कर दिए। आखिरकार मैंने निजी वकील किया। तब केस कुछ आगे खिसका। इस दौरान मामला सीबीआई तक पहुंचा। उम्मीद जगी, लेकिन वहां भी सवाल मेरे बेटे पर ही उठे- कहा गया कि उसके कागज नहीं है, उसका एससी का सर्टिफिकेट नहीं है। तभी सोच लिया- अगर बेटे को इंसाफ नहीं मिल रहा, तो कम से कम उसकी कहानी देश तक पहुंचे। मैंने सरकार को एक मांगपत्र दिया। उसमें मांग थी- दिल्ली के किसी व्यस्त रोड के किनारे नीडो की ऊंची मूर्ति बनाई जाए, जिस पर लिखा हो- उसे सिर्फ अलग दिखने की वजह से मार दिया गया। सिनेमा हॉल में फिल्मों से पहले चेतावनी दिखाई जाए- नॉर्थ-ईस्ट के लोग भी इसी देश के हैं। रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट जैसे सार्वजनिक स्थानों पर भी यह संदेश लिखा हो। स्कूल और विश्वविद्यालयों में हमारे कल्चर के बारे में पढ़ाया जाए। कल्चर एक्सचेंज प्रोग्राम चलें। लेकिन आज तक इस पर कोई काम नहीं हुआ। खैर उधर, कोर्ट में पहली सुनवाई का दिन आया। कोर्टरूम खचाखच भरा था। विरोधी वकील खड़ा हुआ और बोला कि नीडो ड्रग्स लेता था। बहुत गुस्सैल था। यह सुनते ही मेरा खून खौल गया। खुद को रोक नहीं पाई। कटघरे से निकलकर वकील के पास पहुंची और गिरेबान पकड़ लिया। बोली- मेरे बेटे के बारे में ऐसा मत कहो। कोर्ट में हड़कंप मच गया। वकील मुस्कुराया और बोला- देखिए इन्हें… ऐसा ही इनका बेटा भी गुस्सैल था। तभी जज ने वकील को रोका और कहा- वो मां हैं, उनका गुस्सा स्वाभाविक है। फिर मेरी तरफ देखकर अगली सुनवाई में आने से मुझे रोक दिया। इसके बाद मामला खिंचता रहा- लंबा, थकाने वाला रहा। फिर एक दिन फैसला आया। कोर्टरूम में सन्नाटा था। जज ने दोषियों को 10 साल की सजा सुनाई। लोग कह रहे थे- न्याय मिला है। लेकिन मैं वहीं खड़ी सोच रही थी- क्या 10 साल एक जिंदगी के बराबर हो सकते हैं? 12 साल बाद मिला यह फैसला… मेरे लिए अब भी अधूरा है। मैं आज भी अपने बेटे के लिए लड़ रही हूं। मेरी मेज पर एक फाइल हमेशा रहती है- जिस पर लिखा है, बेजवाड़ा कमेटी। 2014 में सरकार ने इस मामले की जांच के लिए यह कमेटी बनाई थी। कमेटी ने अपनी पड़ताल के बाद सिफारिश की थी- नस्लवाद के खिलाफ सख्त कानून बने। नॉर्थ-ईस्ट के लिए पुलिस में अलग सेल हो। नॉर्थ-ईस्ट वालों के लिए हेल्पलाइन शुरू की जाए और लोगों को बताया जाए कि नॉर्थ-ईस्ट भी भारत का हिस्सा है। लेकिन ये सिफारिशें कागजों तक रह गईं। आज 12 साल हो गए, लेकिन नीडो कहीं गया नहीं है। वह किसी न किसी रात, मेरे सपनों में लौट आता है। मैं देखती हूं- वह खड़ा है, बिल्कुल वैसे ही, मासूम सा। सपने में कहता है- मम्मी, टिकट दिलवा दो, मुझे जाना है। मैं नींद में ही उसे रोकना चाहती हूं, कुछ पूछना चाहती हूं, लेकिन वह चला जाता है। जैसे वह पूछ रहा हो- मम्मी आप मेरे लिए कुछ कर क्यों नहीं रही हैं? नींद टूटती है और रात फिर से लंबी हो जाती है। आज भी उसके सारे सर्टिफिकेट मेरे पास हैं- आईडी कार्ड, एटीएम कार्ड, मार्कशीट्स सभी। कभी-कभी मैं उन्हें निकालकर देखती हूं और लगता है, जैसे वह अभी दरवाजे से अंदर आ जाएगा। अभी देहरादून से खबर आई- त्रिपुरा के एंजेल चकमा की हत्या कर दी गई। खबर पढ़ते ही नीडो की याद ताजा हो गई। लगा, जैसे वही सीन फिर सामने है- नीडो भीड़ के बीच चिल्ला रहा है- 'मैं भारतीय हूं…’ और भीड़… बस उसकी शक्ल देख रही है, कुछ सुन नहीं रही। एंजेल की मां के बारे में सोचती हूं- वह भी शायद कहीं बैठी रो रही होगी, बिल्कुल मेरी तरह। कई बार मन हुआ कि त्रिपुरा जाकर उससे मिलूं, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाती। अब तो एंजेल भी सपनों में आने लगा है, जबकि मैंने उसे कभी देखा तक नहीं। नॉर्थ-ईस्ट के लोगों से बस इतना कहूंगी- मैं यहां तक लड़कर आ गई हूं, अब कोई और आगे बढ़े… वर्ना हमारे साथ यह सब यूं ही होता रहेगा। एंजेल की खबर के बाद मैंने सोशल मीडिया देखना छोड़ दिया है। हर तस्वीर में मुझे अपना नीडो दिखने लगता है। आज नीडो होता, तो 31 साल का होता। शायद उसकी शादी हो चुकी होती, घर में बच्चे खेल रहे होते। वह मेरे पास बैठकर कहता- मम्मी, चिंता मत करो, मैं हूं। लेकिन आंखों के सामने आज भी वही तस्वीर घूमती है- एयरपोर्ट, एक सफेद ताबूत… और उसमें मेरा बेटा। मैंने उसे अपने हाथों से रिसीव किया था, फिर अग्नि दी थी। ईटानगर में हमारे घरों और दफ्तरों में उत्तर भारत के लोग काम करते हैं। हम उन्हें मेहमान मानते हैं, सम्मान देते हैं। लेकिन दिल में एक सवाल अटका जाता है- हमारे साथ ऐसा क्यों नहीं किया जाता? अगर हम भी आपके लोगों के साथ नीडो जैसा सलूक करें तो फिर क्या होगा? हम चाहें तो एक फोन कॉल पर नॉर्थ-ईस्ट के लोगों को इकट्ठा कर सकते हैं- नागालैंड, गुवाहाटी, सिक्कम… हर जगह से। फिर आपके साथ वही सुलूक होगा, जो हमारे साथ होता है। उन्होंने मेरे बेटे को मारकर हेलिकॉप्टर से भेजा, हम भी चाहें तो ट्रेनों की बोगियों को लाशों से भरकर भेज सकते हैं। तब मेनलैंड इंडिया वालों को समझ नहीं आएगा कि अचानक क्या हो गया। इसलिए नस्लवाद के खिलाफ सख्त कानून बने। इसे नहीं रोका गया, तो मेरी तरह जख्म खाया कोई और भी एक दिन खड़ा हो जाएगा। मैं ये बातें बोलना नहीं चाहती। लेकिन नीडो को याद में गुस्सा आ जाता है। हमारे बच्चे दिल्ली में फ्री में नहीं पढ़ने जाते। वे किराया देते हैं, फीस भरते हैं। हमारे यहां यूपीएससी की कोचिंग नहीं, इसलिए हम उन्हें बाहर भेजते हैं- पढ़ने के लिए, जीने के लिए… मरने के लिए नहीं। हमारी आंखें और चेहरा अलग हैं- इसे हमने नहीं, भगवान ने बनाया है। भगवान से पूछिए, उसने हमें अलग क्यों बनाया है। अगर आप चाहते हैं सब एक जैसे दिखें, तो सरकार से कहिए- सभी कपड़ा फैक्ट्रियां सिर्फ साड़ियां बनाएं, पूरे देश में सिर्फ गेहूं उगाया जाए। फिर सब एक जैसा पहनें, एक जैसा खाएं। तब शायद हम भी आपके जैसे दिखने लगें। लेकिन क्या सच में ऐसा संभव है, तब भी हमारा चेहरा नहीं बदलेगा? (मरीना नीडो ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) -------------------------------------------------- 1- संडे जज्बात-पुलिस ने मेरे प्राइवेट पार्ट पर ईंट बांधी:सिर कुर्सी में बांधकर उल्टा टांगा, मैं वकील बनकर केस खुद लड़ा- 12 साल बाद जीता 18 साल की उम्र में पुलिस ने मुझे हत्या के मामले में आरोपी बना दिया। मैंने अपने केस की खुद पैरवी की और 12 साल बाद बाइज्जत बरी हुआ। अपना केस लड़ने के लिए लॉ किया और अब मैं एडवोकेट अमित चौधरी हूं। मेरठ बार एसोसिएशन का सदस्य भी हूं। मेरी जिंदगी पर जल्द ही एक फिल्म बन रही है, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-तीरंदाज बेटी मरी तो MBBS बेटे को खिलाड़ी बनाया:जब डॉक्टर बेटा भी नहीं रहा तो 55 की उम्र में बेटी पैदाकर बनाया तीरंदाज मेरी कहानी एक साधारण स्पोर्ट्स कोच की नहीं, उस पिता की है, जिसने अपने दोनों अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बच्चों को खो दिया… लेकिन खेल और सपने को मरने नहीं दिया। 2004 में नेशनल चैंपियन तीरंदाज बेटी वोल्गा एक सड़क हादसे में चली गई। अकादमी बंद हो गई। परिवार बिखरने लगा। उसके बाद बेटे लेनिन ने MBBS छोड़ धनुष उठा लिया- अपने लिए नहीं, मेरे और अपनी बहन के अधूरे सपने के लिए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

