। भारत ने होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग पर हमलों पर चिंता जताई है। वहीं दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के विरुद्ध लाए गए प्रस्ताव पर रूस और चीन द्वारा वीटो करने के मामले में भारत ने किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं किया और तटस्थ रहने का फैसला किया है।
अमेरिका ने कहा कि हाल ही में ईरान के खिलाफ उसकी सैन्य कार्रवाइयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और दूसरी उन्नत तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है
पाकिस्तान में रातभर छापेमारी, तीन बलोच युवकों के जबरन गायब होने का आरोप
पाकिस्तान में रातभर चली छापेमारी के दौरान तीन बलोच युवकों के जबरन गायब किए जाने की खबर सामने आई है, जिससे एक बार फिर ‘एनफोर्स्ड डिसअपियरेंस’ को लेकर चिंता बढ़ गई है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इजरायल-लेबनान सीजफायर का किया स्वागत
इजरायल और लेबनान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आखिरकार राहत की खबर सामने आई है। शुक्रवार को दोनों देशों के बीच 10 दिनों का युद्धविराम लागू हो गया
सीजफायर के दौरान इजरायल दक्षिणी लेबनान में 10 किमी का सुरक्षा जोन बनाए रखेगा : नेतन्याहू
यरूशलम, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हिजबुल्लाह के साथ युद्धविराम लागू होने के बाद भी इजरायल दक्षिणी लेबनान में 10 किलोमीटर का सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखेगा।
ट्रंप ने ईरान डील और सीजफायर पर आगे बढ़ने के संकेत दिए
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान अब समझौता होने के काफी करीब पहुंच गए हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि परमाणु समझौते पर प्रगति हो रही है
‘अगर हिम्मत है, तो गोली चलाओ।’ हिंदी के विरोध में प्रोटेस्ट कर रहे लड़के ने सेंट्रल फोर्स के जवान को ललकारते हुए कहा। जवान ने उसके पैर में गोली मार दी। आसपास मौजूद लोग लड़के को अस्पताल ले गए। मरहम-पट्टी हुई, लेकिन वो लंगड़ाते हुए फिर सड़क पर आ गया। कुछ देर में फिर गोली लगी और उसकी मौत हो गई। तमिलनाडु में इस लड़के को ‘अनडेड प्रोटेस्टर’ यानी जिंदा आंदोलनकारी माना जाता है। 1965 में ऑफिशियल लेंग्वेज एक्ट के विरोध में मदुरै से लेकर चेन्नई तक लोग सड़कों पर उतर आए थे। प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने सेंट्रल फोर्स भेज दी। फायरिंग में 70 लोग मारे गए। विरोध में तीन लोगों ने खुद को आग लगा ली। ये प्रोटेस्ट ‘हिंदी विरोध’ और पोलाची नरसंहार के तौर पर जाना जाता है। इसके बाद तमिलनाडु से कांग्रेस खत्म हो गई और DMK ने अपनी जगह बना ली। 23 अप्रैल को तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग है। प्रचार के बीच एक रिपोर्टर ने CM स्टालिन से पूछा- केंद्र सरकार CBSE स्कूलों में 3 लैंग्वेज पॉलिसी लागू करेगी, हिंदी भाषा पढ़ना भी अनिवार्य होगा… स्टालिन ने फौरन जवाब दिया- ‘जब तक DMK है, तमिलनाडु में ऐसा नहीं होने देंगे।’ तो क्या तमिलनाडु में हिंदी विरोध अब भी है? पढ़िए ये रिपोर्ट… केंद्र की प्रॉपर्टी पर हिंदी, राज्य की बिल्डिंग से गायब भारत के 28 राज्यों में तमिलनाडु इकलौता है, जिसने अपने यहां तीन भाषा फॉर्मूला लागू नहीं किया। इसका असर चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही दिखने लगता है। बिल्डिंग पर तीन भाषाओं तमिल, हिंदी और अंग्रेजी में बोर्ड लगा है। बड़े-बड़े अक्षरों में हिंदी में लिखा है- पुरट्चि तलैवर डॉ. एमजी रामचंद्रन सेंट्रल रेलवे स्टेशन। यहां से करीब आधा किमी दूर चेन्नई कॉर्पोरेशन की बिल्डिंग है। इस पर लगे बोर्ड से हिंदी गायब है, सिर्फ तमिल और अंग्रेजी लिखी है। मैं रिपोर्टिंग के लिए भारत के ज्यादातर नॉन हिंदी राज्यों में गया हूं। थोड़ी बहुत हिंदी सभी को आती है। तमिलनाडु की सड़कों पर घूमते हुए हिंदी बिल्कुल नहीं सुनाई देती। ऑटो ड्राइवर से लेकर दुकानदार तक, किसी से बात करनी हो, तो बस अंग्रेजी विकल्प है। चेन्नई सेंट्रल के ठीक सामने एक और रेलवे स्टेशन है चेन्नई पार्क। स्टेशन केंद्र सरकार की प्रॉपर्टी है, इसलिए यहां तीन भाषाओं में बोर्ड लगे हैं। यहां हिंदी में जो लिखा है, उस पर काला पेंट पोतने के निशान हैं। 11 मार्च को PM मोदी के तमिलनाडु दौरे के पहले हिंदी शब्दों पर ब्लैक पेंट स्प्रे कर दिया गया। नारे लगे ‘तमिल वाज्गा, हिंदी ओझिगा’ मतलब ‘तमिल जिंदाबाद, हिंदी मुर्दाबाद..’ भाषा को लेकर उग्र विरोध और कालिख पोतने की घटनाओं के पीछे राजनीतिक पार्टियां सीधे तौर पर शामिल नहीं होतीं, बल्कि छोटे प्रॉक्सी संगठनों का सहारा लेती हैं। चेन्नई पार्क की घटना के पीछे ‘मई-17’ नाम के संगठन की भूमिका थी। कहने को ये श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दे पर काम करता है, लेकिन इस तरह के संगठन का सिर्फ नाम इस्तेमाल होता है। DMK इन घटनाओं का खुलकर समर्थन तो नहीं करती, लेकिन उसके कार्यकर्ताओं की भूमिका होती है। तमिलनाडु में हिंदी विरोध 100 साल पुराना, लोग बोले- हिंदी बोझ है, ढोएंगे नहीं इस तरह के प्रोटेस्ट में शामिल रहे DMK के एक कार्यकर्ता से हमने बात की। वे पार्टी की लेंग्वेज विंग में एक्टिव हैं। नाम नहीं बताना चाहते थे। सुरेश (बदला हुआ नाम) कहते हैं ‘तमिलनाडु के लोग अपनी भाषा को लेकर जज्बाती हैं। हम तमिल के अलावा कोई दूसरी भाषा पसंद नहीं करते। हिंदी थोपने को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।’ लेकिन सिर्फ तमिल से तो काम नहीं चलेगा, तमिलनाडु के बाहर कैसे बात करेंगे? सुरेश जवाब देते हैं, ‘हम अंग्रेजी से बाकी दुनिया से जुड़ सकते हैं। हिंदी बोझ है। इसे ढोने के लिए मजबूर किया जा रहा है।’ तमिलनाडु में हिंदी के विरोध की राजनीति करीब 90 साल पुरानी है। 1937 में मद्रास प्रेसिडेंसी के CM सी राजगोपालाचारी ने स्कूलों में हिंदी अनिवार्य की थी। इसके खिलाफ तमिलनाडु में आंदोलन खड़ा हो गया। जस्टिस पार्टी के पेरियार ने पहली बार ‘हिंदी थोपना’ जुमले का इस्तेमाल किया। ये सबसे बड़ा नारा बन गया। 1965 में फिर लैंग्वेज एक्ट के विरोध में आंदोलन हुआ। तमिलनाडु में हिंदी हमेशा से वैकल्पिक भाषा ही रही। DMK हो या थलापति सपोर्टर, हिंदी की जबरदस्ती के खिलाफ चेन्नई में मिलीं 40 साल की विजयलक्ष्मी मदुरै के पास तिंदिवरन की रहने वाली हैं। तमिल भाषा को लेकर काफी इमोशनल हैं। कहती हैं, ‘तमिल मां की तरह है। हम इसमें स्वाभिमान देखते हैं।’ 55 साल के केवी राजन चेन्नई से करीब 500 किमी दूर तिरुपुर में कार एसेसरीज का बिजनेस करते हैं। DMK को पसंद नहीं करते। सुपरस्टार थलापति विजय के समर्थक राजन कहते हैं, ‘तमिलनाडु में कोई पार्टी हिंदी लागू करने की वकालत करेगी, तो उसका कोई समर्थन नहीं करेगा।' 76 साल के रिटायर्ड कर्मचारी एम मुनियांडि भी ‘अनिवार्य हिंदी’ के विरोध में हैं। वे कहते हैं, ‘सेंटर के लोग हिंदी के साथ अनिवार्य लगाते हैं, ये उन्हें छोड़ना पड़ेगा। हिंदी बोलना ही भारतीय होने की इकलौती शर्त नहीं है।’ ‘हिंदी सीखने से कॉन्फिडेंस आया, बोलने में मजा आता है’ ऐसा भी नहीं है कि तमिलनाडु में लोग हिंदी नहीं सीख रहे हैं। 1918 में महात्मा गांधी ने दक्षिण भारत में हिंदी को लिंक लैंग्वेज (जुड़ाव की भाषा) बनाने के लिए ‘दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा’ की शुरुआत की। हम चेन्नई में इस संस्था के कैंपस पहुंचे। यहां हिंदी सीख रहीं तनुजा 8 साल से चेन्नई में रह रही हैं। हिंदी प्रचार सभा में बीएड की पढ़ाई कर रही हैं। हिंदी बोलती हैं, लेकिन अटकती जुबान से। मद्रास यूनिवर्सिटी के MA हिंदी में सिर्फ 4 स्टूडेंट हमने हिंदी प्रचार सभा में प्रोफेसर डॉ. मंजूनाथ से पूछा कि तमिलनाडु में तो टू लैंग्वेज पॉलिसी है, तो लोग क्यों हिंदी पढ़ने आते हैं? वे कहते हैं, ‘ये तमिलनाडु सरकार की पॉलिसी है। इस पर मेरा बात करना अच्छा नहीं होगा। मैंने महसूस किया है कि हर कोई हिंदी भाषा पढ़ना चाहता है। इससे बाकी देश के लोगों से जुड़ने में मदद हो सकती है।’ हालांकि, मद्रास यूनिवर्सिटी में हिंदी विभाग की हालत खराब है। मास्टर्स के कोर्स में सिर्फ 4 स्टूडेंट हैं। विभाग प्रमुख प्रोफेसर अन्नपूर्णा कहती हैं कि युवा पीढ़ी इंजीनियरिंग-मेडिकल की पढ़ाई करना चाहती है। कोई भाषा नहीं पढ़ना चाहता। हिंदी तो बहुत दूर की बात है, लोग तमिल तक पढ़ना नहीं चाहते। ‘हिंदी न बोलने वालों को दोयम दर्जे का नागरिक नहीं बना सकते’ हिंदी से जुड़े सवालों पर हमने DMK नेता एसएएस हफीजुल्लाह से बात की। वे बताते हैं, ‘हिंदी थोपने की कोशिश 90 साल से हो रही है। आप हिंदी न बोलने वालों को दोयम दर्जे का नागरिक नहीं बना सकते। थ्री लैंग्वेज पॉलिसी के तहत यही कोशिश हो रही है।’ स्टेशन पर कालिख पोतना और उग्र प्रदर्शन करने से तमिलनाडु की क्या छवि बनेगी, क्या पार्टी इसके समर्थन में है? DMK नेता जवाब देते हैं, हम तीन भाषा फॉर्मूला का विरोध करने वाले हर लोकतांत्रिक विरोध का समर्थन करते हैं। आप तमिलनाडु में आकर हिंदी थोपने की कोशिश करेंगे, तो जवाब मिलेगा। अगर कोई कानून के खिलाफ जाता है, तो सरकार उसके खिलाफ एक्शन लेती है। क्या 80 हजार मंदिरों वाला तमिलनाडु सनातन विरोधी भी है? CM स्टालिन के बेटे उदयनिधि 2023 में सनातन विरोधी बयान की वजह से विवादों में आ गए थे। उन्होंने कहा था, ‘सनातन का विरोध नहीं करना चाहिए, बल्कि इसे खत्म करना चाहिए… जैसे डेंगू, मलेरिया, कोरोना जैसी बीमारियों को खत्म किया जाता है।’ बाद में उन्होंने सफाई दी कि मैं किसी धर्म का दुश्मन नहीं हूं। मैं सनातन प्रथा के खिलाफ हूं। क्या आम तमिल भी सनातन को लेकर ऐसा ही सोचते हैं, जबकि तमिलनाडु में देश के सबसे ज्यादा हिंदू मंदिर हैं। इस सवाल के जवाब में कारोबारी केवी राजन कहते हैं, ‘हम उदयनिधि के बयान के साथ नहीं है। ये सब राजनीति है। तमिलनाडु के लोग किसी धर्म के खिलाफ नहीं हैं। हम हिंदू हैं, लेकिन बच्चों के साथ वेलांकनी चर्च जाते हैं। दूसरे धर्म के लोग हमारे मंदिरों में भी आते हैं।’ उदयनिधि हों या स्टालिन, सब पॉलिटिक्स की वजह से बयानबाजी करते हैं। उनके घर में पूजा होती है। घर के सामने श्रीवेणुगोपाल मंदिर हैं, उनकी मां इसी मंदिर में जाया करती थीं। सेलम के रहने वाले कारोबारी कनकराज कहते हैं, ‘हम हिंदू धर्म को मानने वाले लोग हैं। उदयनिधि ने ऐसा क्यों कहा हमें नहीं पता। लेकिन किसी भी धर्म को डेंगू, मलेरिया नहीं कहा जाना चाहिए। ये इलेक्शन का मुद्दा नहीं है। बात होगी सरकार के काम पर और हम उसी पर वोट करेंगे।’ तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोटिंग… चेन्नई में मारवाड़ियों के इलाके से ग्राउंड रिपोर्ट… राजस्थानी बोले- हम तमिल बोलते हैं, तमिलों को हिंदी सिखा दी तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई की मिंट स्ट्रीट पर एक बाजार है- सौकार पेठ। यहां राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के करीब डेढ़ लाख लोग रहते हैं। हिंदी विरोध की राजनीति करने वाली DMK ने यहां से मारवाड़ी को पार्षद का टिकट दिया, वे जीते भी। यहां रहने वालीं निर्मला राजपुरोहित राजस्थान से हैं। वे कहती हैं, हमने यहां तमिलों को हिंदी और मारवाड़ी सिखा दी। हमारे घर में नाश्ता भी इडली-सांभर ही होता है।’ पढ़िए पूरी खबर…
लेबनान-इजरायल संघर्ष: ट्रंप ने किया दस दिन के युद्धविराम का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लेबनान और इजरायल के बीच दस दिनों के युद्धविराम पर सहमति का दावा किया
महायुद्ध की कगार पर दुनिया ट्रंप की नौसैनिक घेराबंदी से दहला ईरान, क्या पाकिस्तान करा पाएगा समझौता?
लाहौर में लश्कर के सह-संस्थापक अमीर हमजा को में मारी गोली, हालत नाजुक; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावर अचानक मौके पर पहुंचे, उन्होंने सटीक निशाना साधते हुए गोलीबारी की और कुछ ही पलों में वहां से निकल गए। पूरे घटनाक्रम की गति और सटीकता को देखते हुए इसे एक सुनियोजित हमला माना जा रहा है।
पूर्व मंत्री का बड़ा दावा असीम मुनीर ही देश के असली बॉस, ट्रंप और शरीफ के बीच सीक्रेट प्लान
समुद्र में अमेरिकी नौसेना की सख्त गश्त, ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लागू; कई जहाज लौटे
ओमान की खाड़ी के संवेदनशील हालात पर अमेरिकी नौसेना सक्रिय गश्त में लगी हुई है। नाकेबंदी का सख्ती से पालन कराया जा रहा है
पोप का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब दुनिया के कई हिस्सों में धार्मिक तनाव और संघर्ष की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में उनका यह कदम अंतरधार्मिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
अमेरिका ने ईरान वार्ता में प्रगति के दिए संकेत, कहा-समझौते की संभावनाओं को लेकर हैं आश्वस्त
व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत “सार्थक और जारी” है। हालांकि होरमुज़ जलडमरूमध्य को लेकर जारी तनाव अब भी वार्ता की गति और परिणाम को प्रभावित कर रहा है।
ईरान के साथ तनाव के चलते अमेरिका में गैस की कीमतों के पूर्वानुमान पर छाई अनिश्चितता
ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका में ईंधन की कीमतों के भविष्य को ईरान संघर्ष में हो रहे घटनाक्रमों से जोड़ दिया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि पेट्रोल की कीमतों में लगातार गिरावट इस बात पर निर्भर करेगी कि होरमुज़ जलडमरूमध्य दोबारा खोला जाता है या नहीं और चल रही वार्ताओं में कितनी प्रगति होती है।
ईरान की चेतावनी: पहली मिसाइल से डूबेंगे अमेरिकी जहाज
इस्लामाबाद में ईरान के साथ वार्ता असफल होने के बाद अमेरिका ने अरब और ओमान की खाड़ी में ईरानी बंदरगाह से आने और जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर नाकाबंदी लगा दी है
1952 में जब देश में पहली बार लोकसभा चुनाव हुए, तब संसद में 489 सीटें थीं और आबादी थी करीब 36 करोड़। आज आबादी 140 करोड़ पार कर चुकी है, लेकिन पिछले 50 साल से सीटें 543 पर जमी हैं। अब सरकार ने सरकार ने 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाया है और एक साथ तीन बड़े काम करने की तैयारी में है- लोकसभा सीटें बढ़ाकर 850 करना, देश का नया चुनावी नक्शा खींचना (यानी परिसीमन), और 2023 में पास हुए महिला आरक्षण कानून को असल में लागू करना। लेकिन यह इतना सीधा नहीं है। दक्षिण के राज्यों को डर है कि उनकी सीटें घटेंगी। विपक्ष पूछ रहा है कि बंगाल चुनाव से ठीक पहले इतनी हड़बड़ी क्यों और सबसे बड़ा सवाल- महिला आरक्षण असल में लागू कब से होगा? ऐसे ही 8 जरूरी सवालों के जवाब, जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में... सवाल-1: महिला आरक्षण का कानून 2023 में ही पास हो गया था, तो अब तीन नए बिल क्यों लाने पड़े?जवाबः केंद्र सरकार ने 19 सितंबर 2023 को संविधान (128वां संशोधन) विधेयक पेश किया था। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान था। 20 सितंबर को लोकसभा, 21 सितंबर को राज्यसभा और 28 सितंबर 2023 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद यह बिल कानून बन गया। लेकिन लागू नहीं हो सका। क्यों? क्योंकि उस कानून में शर्त थी कि आरक्षण नई जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू होगा। नई जनगणना का डेटा आने में करीब दो साल और लग सकते हैं। यानी परिसीमन 2034 के चुनाव तक टल सकता था। इसी को बदलने के लिए सरकार ने 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाया है और तीन नए बिल ला रही है: इन बिलों के तीन मकसद हैं… सवाल 2: लोकसभा सीटें बढ़ाकर 850 करने की जरूरत क्यों पड़ रही है? जवाबः मौजूदा सीटों का बंटवारा 1971 की जनगणना पर आधारित है। तब एक सांसद औसतन 10 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करता था, जो अब बढ़कर 25 लाख से ऊपर पहुंच गया है। लेकिन राजनीतिक जानकार एक और बात भी कहते हैं। लोकसभा में अभी 74 महिला सांसद हैं, यानी सिर्फ 13.6%। 543 सीटों पर 33% आरक्षण लागू होता, तो 181 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व होतीं और कई पुरुष सांसदों को अपनी सीटें छोड़नी पड़तीं। इससे पार्टियों के भीतर बगावत का खतरा था। अनुमान है कि परिसीमन के बाद 816 सीटें हो जाएंगी, यानी 273 नई सीटें जुड़ेंगी। लगभग इतनी ही सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यानी मौजूदा पुरुष सांसदों पर सीधा असर कम होगा। सवाल 3: परिसीमन के लिए 2011 का पुराना डेटा क्यों, नई जनगणना का इंतजार क्यों नहीं?जवाबः लोकतांत्रिक मानकों के हिसाब से परिसीमन हमेशा ताजा जनगणना के आधार पर होना चाहिए। लेकिन अगर 2027 की जनगणना का इंतजार किया गया, तो महिला आरक्षण 2034 तक लागू नहीं हो पाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश की महिलाओं को पत्र लिखा- ‘महिलाओं का अधिकार अब और टाला नहीं जा सकता और 2029 के चुनाव से इसे लागू होना चाहिए।’ लेकिन मोदी सरकार की इस जल्दबाजी पर सवाल भी उठ रहे हैं- इन सवालों को लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, ‘यह विधेयक 2023 में पास हुआ था। अब बात वादे को पूरा करने की है। संसद ने देश की महिलाओं को 33% आरक्षण देने का वादा किया है। इस वादे को जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए।’ सवाल-4: दक्षिण के राज्यों ने आबादी काबू में रखी, तो क्या अब उनकी सीटें घटेंगी और हिंदी भाषी राज्यों की बढ़ेंगी?जवाबः यह डर नया नहीं है। 1976 और 2001 में भी परिसीमन इसीलिए टाला गया था, क्योंकि उत्तर और दक्षिण की जनसंख्या में बड़ा अंतर था। आज भी यही चिंता है। दक्षिण के राज्यों ने परिवार नियोजन अपनाया, आबादी काबू में रखी, लेकिन जनसंख्या आधारित परिसीमन में उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व घट सकता है। तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने चेतावनी दी है कि अगर परिसीमन से राज्य को नुकसान हुआ तो 1950-60 के दशक जैसा आंदोलन होगा। तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने दक्षिण के सभी मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखकर एकजुट होने और पीएम मोदी से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। इलेक्शन एनालिस्ट से पॉलिटिकल एक्टिविस्ट बने योगेंद्र यादव का कहना है कि अगर 2011 की जनगणना के आधार पर आनुपातिक परिसीमन हुआ तो केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पंजाब को नुकसान होगा, जबकि हिंदी भाषी राज्यों को फायदा। इससे संघीय ढांचे का नाजुक संतुलन बिगड़ सकता है। केंद्र सरकार बार-बार भरोसा दे रही है कि राज्यों की आनुपातिक हिस्सेदारी से छेड़छाड़ नहीं होगी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सीटों का बंटवारा परिसीमन आयोग करेगा और आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर होगा। इससे दक्षिण को नुकसान नहीं, फायदा होगा। अनुपातिक प्रतिनिधित्व, यानी लोकसभा में राज्यों की मौजूदा हिस्सेदारी की हिसाब से परिसीमन में सीटें बांटी जाएंगी। उदाहरण से समझते हैं- तमिलनाडु में अभी लोकसभा की 39 सीटें हैं, यानी अनुपातिक हिस्सेदारी हुई- (39/543) 100 = 7.18%। अगर लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 850 हो जाएंगी, तो इस फॉर्मूले से तमिलनाडु की लोकसभा सीटें बढ़कर 61 हो जाएंगी। सवाल-5: महिलाओं को आरक्षण कब से मिलेगा और परिसीमन कब लागू होगा?जवाबः इसके लिए पहले परिसीमन आयोग बनेगा। इसके अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज होते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त और राज्य चुनाव आयुक्त सदस्य होते हैं। हर राज्य के लिए 5 लोकसभा और 5 विधानसभा सदस्य सहयोगी सदस्य होते हैं। हालांकि इन्हें वोट देने का हक नहीं होता। भारत के पिछले चार परिसीमन आयोगों को अंतिम आदेश जारी करने में 3 से साढ़े 5 साल लगे थे। 2002 में शुरू हुआ परिसीमन 2008 में पूरा हुआ, यानी 6 साल में। सरकार की कोशिश है कि यह सब 2029 के लोकसभा चुनाव तक लागू हो जाए। आरक्षित सीटें हर चुनाव में बारी-बारी बदलती रहेंगी। SC/ST कोटे की भी एक-तिहाई सीटें उसी वर्ग की महिलाओं के लिए रिजर्व होंगी। सवाल-6: क्या विधानसभाओं में भी महिला आरक्षण लागू होगा?जवाबः हां। नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2023) के तहत लोकसभा के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। ज्यादातर राज्यों की विधानसभा सीटें 2001 की जनगणना पर आधारित हैं, असम और जम्मू-कश्मीर को छोड़कर। पूर्वोत्तर के 4 राज्यों- नागालैंड, मणिपुर, अरुणाचल और मिजोरम में तो विधानसभा क्षेत्र 2001 से भी पुराने आधार पर हैं। इसलिए इन सभी जगहों पर भी नए सिरे से परिसीमन होगा। सवाल-7: अगर परिसीमन आयोग का फैसला गलत लगे, तो क्या कोर्ट जा सकते हैं?जवाबः परिसीमन आयोग के आदेश कानून की तरह लागू होते हैं। आर्टिकल 329 और परिसीमन अधिनियम 2002 की धारा 10 के तहत इनके खिलाफ अदालत में नहीं जाया जा सकता। संसद और विधानसभाएं भी इनमें बदलाव नहीं कर सकतीं। हालांकि 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने किशोरचंद्र छगनलाल राठौर बनाम भारत सरकार मामले में एक अहम फैसला दिया। कोर्ट ने कहा कि आर्टिकल 329 न्यायिक समीक्षा को पूरी तरह खत्म नहीं करता। अगर कोई आदेश स्पष्ट रूप से मनमाना हो, समानता और निष्पक्षता जैसे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ हो या गलत इरादे से लिया गया हो, तो हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट उसकी जांच कर सकती हैं। छोटे-मोटे सीमा बदलाव जैसे मुद्दों पर कोर्ट दखल नहीं देगा और यह भी ध्यान रखेगा कि उसकी वजह से चुनाव में देरी न हो। हालांकि मीडिया रिपोर्ट है कि 2026 का परिसीमन आयोग ज्यादा ताकतवर होगा, जिसके फैसलों को कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकेगी। सवाल-8: संसद में तीनों बिल पास होना कितना आसान या मुश्किल है?जवाबः संविधान संशोधन के लिए लोकसभा में 'विशेष बहुमत' चाहिए। यानी कुल 543 में से कम से कम आधे यानी 272 सांसद उपस्थित होने चाहिए। जितने भी सांसद उपस्थित हों, उनके दो-तिहाई का समर्थन। मान लीजिए सभी 543 सांसद मतदान करें, तो बिल पारित कराने के लिए 362 वोट चाहिए। अभी NDA के पास 292 सांसद हैं। विपक्ष के 233। यानी अकेले NDA बिल नहीं पास करा सकता। विपक्ष का सहयोग जरूरी है। BJP, कांग्रेस, JDU, LJP(R) समेत कई दलों ने व्हिप जारी कर दिया है। माना जा रहा है कि जैसे 2023 में महिला आरक्षण बिल बिना विरोध के पास हुआ था, वैसा इस बार होने की उम्मीद कम है। क्योंकि विपक्षी गठबंधन INDIA का कहना है कि हम महिला आरक्षण के समर्थन में तो है, लेकिन परिसीमन के खिलाफ है। इसका हम संसद में विरोध करेंगे। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, सरकार जो प्रस्ताव पेश कर रही है, उसका महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है। जाति जनगणना को नजरअंदाज कर OBC, दलित और आदिवासियों के हक की चोरी हो रही है। दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर जैसे राज्यों के साथ किसी भी तरह का अन्याय हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। ------------ चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… ममता के सिर पर रॉड मारी, लगा बचेंगी नहीं: बंगाल में जो आता है, क्यों छा जाता है; क्या अब बीजेपी की बारी है जैसे बंगाली रसगुल्ले की चाशनी कपड़ों पर गिर जाए, तो जल्दी छूटती नहीं है। वैसे ही बंगाल में एक बार जो सरकार में आता है, सालों तक टिकता है। आजादी के बाद से पश्चिम बंगाल में सिर्फ तीन पार्टियों ने सत्ता संभाली है। कांग्रेस ने 20 साल, CPI(M) ने 34 साल और TMC ने 15 साल। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक पैटर्न है। पूरी खबर पढ़िए…
2002 गुजरात दंगे के दो पोस्टर बॉय की कहानी, जिनमें हिंदुत्व का चेहरा बने मोची अशोक परमार आज दो वक्त की रोटी को मोहताज हैं। सर्दी, गर्मी, बरसात सड़क पर सोते हैं। वह उस वक्त 27 साल के थे। आज 51 साल के हैं। उनसे मिलने मैं अहमदाबाद के शाहपुर इलाके पहुंचा- ‘केटी देसाई स्कूल’। बगल में एक नीम के पेड़ नीचे अशोक परमार की दुकान है- एक बंद अलमारी और नीचे रखा पतला, मटमैला गत्ता। आसपास के लोगों से पता चला कि वे सिविल हॉस्पिटल गए हैं- कुछ दिन पहले उन्हें लकवा मार गया है। मैं दुकान पर उनका इंतजार करता हूं। वह दो घंटे बाद लौटे- दुबले-पतले, फटी टी-शर्ट और पैंट पहने। लंगड़ाते हुए हाथ में दवाइयों से भरी थैली है। मैंने पूछा- आप ही अशोक परमार हैं? लाल आंख, काले-मुरझाए चेहरे से वो तेज आवाज में बोले- हां… वही, जिसे 2002 में हिंदुत्व का चेहरा बनाया गया था। अब भोजन से ज्यादा दवाइयां खाता हूं। थैली से दवाएं दिखाते हुए कहते हैं- ये दवाइयां तो सरकारी अस्पताल से मिल जाती हैं… लेकिन खाना? वह फ्री में नहीं मिलता। अब तो बस मौत का इंतजार है। पहले तो जूते-चप्पल सिलकर किसी तरह 50-100 रुपए कमा लेता था… अब लकवे ने वह भी छीन लिया’, इतना कहकर वे चुपचाप दुकान के बाहर झाड़ू लगाने लगते हैं। ब्लैकबोर्ड में आज अशोक परमार और कुतुबुद्दीन अंसारी की कहानी, जिन्हें 2002 गुजरात दंगे का पोस्टर बॉय बनाया गया। अशोक परमार को हिंदुत्व का चेहरा और कुतुबुद्दीन अंसारी को मुस्लिम दर्द का चेहरा, लेकिन उन तस्वीरों की वजह से आज दोनों की जिंदगी स्याह बन चुकी है। झाड़ू लगाने के बाद अशोक गमछा बिछाते हैं। मैं उनके साथ बातचीत के लिए बैठ जाता हूं। वह कहते हैं- जो बात करनी है, जल्दी कर लीजिए। यहां आप जैसे मीडिया वालों को देखकर लोग जुटने लगते हैं। मुझे खाना खाने भी जाना है। आज का खाना आप खिला देंगे क्या? मुझे तो रोज दो वक्त का खाना दूसरों से मांगना पड़ता है। पिछले साल दिसंबर में लकवा मार गया था, तो दो महीने दुकान बंद रही। पिछले महीने से ही इसे खोला है। मैंने कहा- चलिए, पहले खाना खा लेते हैं, फिर बात करेंगे। कहते हैं- नहीं-नहीं, पहले बात कर लीजिए। अब मुझे भूख कम लगती है। बस जिंदा हूं। इस जिंदगी से तंग आकर कई बार खुद को मारने की कोशिश की। डिप्रेशन की दवाइयों की ओवरडोज ली, लेकिन मरा नहीं। सांस है कि निकलती नहीं। अब सोचता हूं, खुद से नहीं मरूंगा, वर्ना लोग कहेंगे- अशोक कितना कायर था। उनकी हालत देखकर ताज्जुब होता है। दिमाग में गुजरात दंगे की वही तस्वीर उभर आती है- पीछे आग का गुबार और सामने काली शर्ट में माथे पर भगवा पट्टी बांधे और गुस्से में लोहे की रॉड उठाए यही अशोक परमार थे। अब मैं उन्हें पोस्टर बॉय बनाने वाली उस तस्वीर को दिखाते हुए पूछता हूं- इस तस्वीर में आप ही हैं? अशोक गुस्से में बोल पड़ते हैं- इसी फोटो ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी। पता नहीं, उस मुंबई के पत्रकार को मैंने क्यों फोटो खींचने को कहा। दरअसल, यह गोधरा कांड के अगले दिन 28 फरवरी 2002 की बात है। सुबह के 10 बज रहे थे। शहर की सारी दुकानें बंद थीं। पता चला कि शाहपुर चौराहे के पास दंगाई तांडव मचा रहे हैं। मुस्लिम बस्तियों को आग के हवाले किया जा रहा है। चौराहे और सड़कों पर जलते टायर बिखरे हैं। यह पूरा इलाका मुसलमानों का है। थोड़ी देर बाद हल्ला मचा कि दंगाई मेरी दुकान की तरफ आ रहे हैं। उनके हाथ में पेट्रोल और जलते टायर हैं। मैंने तुरंत दुकान बंद की और अपने भाई के घर की तरफ भागा। उधर भी भीड़ थी। रास्ते में मुझे एक भगवा पट्टी गिरी दिखी। भीड़ से बचने के लिए मैंने उसे माथे पर बांध लिया, ताकि दंगाई समझ सकें कि मैं भी हिंदू हूं। जैसे ही शाहपुर चौराहे पर पहुंचा, एक फोटो पत्रकार मिला। वह बेचैन था। मुझे देखकर बोला, ‘मैं काफी देर से एक गुस्सैल चेहरे की तलाश में हूं, जो हिंदुत्व का गुस्सा दिखा सके। आपका चेहरा वैसा ही लग रहा है। पीछे आग की लपटें उठ रही थीं। मैंने सड़क पर पड़ी एक लोहे की रॉड उठाई और दोनों हाथ ऊपर उठाए और कहा- ‘मेरी फोटो खींच लो।’ उसने मेरी फोटो खींची और चला गया। मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उस फोटो की वजह से मैं गुजरात दंगे का चेहरा बन जाऊंगा। अगले दिन मेरी वह फोटो टीवी पर गुजरात दंगाई के रूप में दिखाई जाने लगी। उस समय इलाके के लोगों को छोड़कर किसी को पता नहीं था कि वह शख्स मैं ही हूं। ‘आपके परिवार में कौन-कौन हैं?’ कोई नहीं। तभी तो 24 साल से इस सड़क पर जिंदगी बिता रहा हूं। इसी जगह चबूतरे पर सोता हूं। कोई खाना दे दे, तो भूख मिटा लेता हूं। अभी दो दिन पहले ही मेरी भाभी की मौत हुई है। वही भाभी, जिन्होंने मुझे घर से निकाल दिया था। 1990 की बात है। 7वीं में पढ़ता था। पिताजी मोची का काम करते थे, लेकिन बीमार रहते थे। अचानक उनकी मौत हो गई। मां पहले ही गुजर गई थीं। कुछ समय तक भाई ने पिताजी का काम संभाला। हम दो भाई और दो बहनें हैं। दोनों की शादी हो चुकी थी। भाभी मुझे घर पर देखकर गाली-गलौज करती थीं। खाना नहीं देती थीं। कहतीं- जाओ, रुपए कमाकर लाओ, तब खाना मिलेगा। तुम पढ़ोगे और तुम्हारा भाई काम करेगा? उनकी बातें सुन-सुनकर परेशान हो गया था। एक दिन उनसे खूब लड़ा। भाई घर आए, तो उन्हें पता चला। उस दिन उन्होंने मुझे मारा और घर से निकाल दिया। गाली देते हुए बोले- तुम्हारी वजह से मेरी बीवी मुझे मारती है। अब लौटकर मत आना। उसके बाद मैंने पढ़ाई छोड़ दी और पिताजी की दुकान पर बैठने लगा। 5-10 रुपए की कमाई हो जाती, किसी तरह खाना खा लेता था। तब से इसी सड़क पर हूं। थोड़ा बड़ा हुआ, तो एक दूसरी बिरादरी की लड़की से प्यार हो गया। हम दोनों 5 साल साथ रहे। लड़की के घर वालों को जब पता चला, तो उन्होंने उसकी शादी कहीं और कर दी। मेरे पास कुछ था भी नहीं, शादी करके लाता, तो रखता कहां? इसलिए उसे जाने दिया। उसके बाद यह दंगा हो गया। '2002 गुजरात दंगे के बाद क्या हुआ?’ क्या बताऊं, उसके बाद तो जिंदगी दो जोड़ी कपड़ों में आ गई। टी-शर्ट, पैंट, जो अभी पहने हूं और एक जोड़ी इस अलमारी में है। रात में एक शख्स यहां अपनी ऑटो खड़ी करते हैं, उसी में सोता हूं। 2012 में दुकान के साथ मेरी एक तस्वीर वायरल हुई, तब पुलिस पकड़कर मुझे ले गई। मैंने सब सच-सच बता दिया। 14 दिन साबरमती जेल में रखा, उसके बाद छोड़ दिया। बाहर आया तो कुछ लोगों ने मुझे मारने की कोशिश की। गोली चलाई, लेकिन बच गया। अब सोचता हूं, मर ही गया होता, तो आज मौत का इंतजार न करना पड़ता। 2012 में मुझे खोजते हुए मीडिया के लोग यहां पहुंचे, तब से उनका तांता लगने लगा। मीडिया वाले आकर एक ही बात पूछते हैं। मन करता था कि भाग जाऊं, लेकिन कहां जाता? टीवी पर, नेताओं के भाषणों में, जहां भी गुजरात दंगे का जिक्र होता, मेरी तस्वीर दिखाई जाती। कई बार मैं हिंदू नेताओं के पास गया और कहा- हिंदुत्व के नाम पर मेरी तस्वीर इस्तेमाल करते हो, रहने के लिए एक छत ही दे दीजिए। कोई काम दे दीजिए, ताकि घर बसा सकूं। वे कहते- तुम्हें अपनी जाति का पता है…? और भगा देते। उसके बाद मैंने हिंदुओं के धार्मिक कार्यक्रमों में जाना बंद कर दिया। इस बातचीत के दौरान अब यहां लोग जमा होने लगे हैं। अशोक कई बार कह चुके हैं- अब रहने दीजिए। चलिए, खाना खिला दीजिए, वर्ना 3 बजे के बाद होटल बंद हो जाएंगे। हम दोनों ऑटो से खाना खाने निकल जाते हैं। वह बताते हैं- आप लोगों से बात करते हुए मुझे पुरानी बातें याद आने लगती हैं। सोचकर पागल हो जाता हूं। यहां लोग मुझे दो वक्त खाना खिला देते हैं। जरूरत पड़ने पर 50-100 रुपए भी दे देते हैं। राजस्थानी और मुस्लिम मेरी काफी मदद करते हैं। सोचिए, मुझे 5 करोड़ गुजरातियों का चेहरा बताया गया, लेकिन कोई पूछता नहीं। ऑटो रुकते ही एक होटल में जाते हैं। दोनों यहां खाना खाते हैं। वापस लौटते हुए अशोक कहते हैं, 'कुछ पैसे हों तो दे दीजिए, जेब में सिर्फ 20 रुपए हैं।’ मैं कुछ पैसे उनकी जेब में डालते हुए ‘सोनी की चाली’ इलाके की ओर निकल पड़ता हूं। गुजरात दंगे के दूसरे ‘पोस्टर बॉय’ कुतुबुद्दीन अंसारी के घर। कुतुबुद्दीन उस वक्त 28 साल के थे। यहां पहुंचने पर पता चला कि वह ऊपरी माले पर सिलाई का काम कर रहे हैं। एक पतली सीढ़ी से ऊपर पहुंचता हूं। मुझे देखते ही वह कहते हैं- जब कोई मुझे गुजरात दंगे का पोस्टर बॉय कहता है, तो दुख होता है। मेरा अपना नाम है। चाहता हूं कि लोग उसी नाम से बुलाएं। अब उन बातों पर चर्चा नहीं करना चाहता। मेरे बच्चे बड़े हो गए हैं। जो बेटा दंगे के वक्त मेरी पत्नी की कोख में था, उसकी हाल ही में शादी हुई है। अब बेटा-बहू डांटते हैं कि अब्बू कब तक उन बातों को दोहराते रहोगे। अच्छा नहीं लगता… इसलिए अब उन सब के बारे में बात नहीं करना चाहता। कई बार गुजारिश करता हूं, तब वह बातचीत के लिए राजी होते हैं। ऊपर माले से नीचे आकर एक कमरे में बैठते हैं। बातचीत शुरू करते ही कहते हैं- उस तस्वीर ने मेरी पूरी जिंदगी चौपट कर दी। अब अल्लाह के करम से दो वक्त की रोटी खा रहा हूं और परिवार के साथ शांति से हूं। दरअसल, यहां नरोडा हाईवे के एक तरफ दंगा भड़का। उसके बाद जगह-जगह लाशें बिछ गईं। उनके हाथों में बम-बारूद, पेट्रोल और जलते हुए टायर थे- भयावह मंजर था। दंगाई सड़क पर मुसलमान को देखते ही तलवार से काट रहे थे। उस दिन अच्छा था कि पुलिस की एक गाड़ी पहुंची और हमें किसी तरह एक राहत कैंप में लेकर गई। वहां रहने-खाने की सुविधा नहीं थी। उस समय मेरी पत्नी 5 महीने की गर्भवती थी। गोद में डेढ़ साल की बेटी भी थी। ऐसा लग रहा था कि दंगाई कभी भी यहां आ सकते हैं। खैर, एक-दो दिन में दंगा थोड़ा शांत हुआ। लगा कि शायद सब ठीक हो रहा है। मैं पत्नी-बेटी को लेकर राहत कैंप से घर लौट आया। बस्ती में बमुश्किल दो-चार घरों में ही लोग बचे थे। कुछ मारे गए थे, बाकी भाग चुके थे। लेकिन 1 मार्च 2002 को दोपहर 2 बजे अचानक फिर से दंगाई पेट्रोल बम और तलवार लेकर बस्ती में पहुंचे। वे दुकानों में आग लगाने लगे। मुसलमान मिलता तो उसे मार देते। गर्भवती महिलाओं के पेट में तलवार घोंप रहे थे। मैं यह सब घर की दूसरी मंजिल की दीवार के एक झरोखे से देख रहा था। अब तय हो गया था कि दंगाई हमारे घर में भी घुसेंगे और मार देंगे। आखिरी वक्त में बस अल्लाह का नाम ले रहा था। तभी सामने से पुलिस की गाड़ी दिखी, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी बैठे थे। मैं झरोखे से जोर-जोर से चीख रहा था- साहब, बचा लो! जब लगा कि मेरी आवाज उन तक नहीं पहुंच रही, तो बालकनी में आकर चिल्लाने लगा। उसके बाद कुछ पुलिसकर्मी तुरंत गाड़ी से उतरे और मेरे पास पहुंचे। मैं उनके सामने हाथ जोड़कर रहम की भीख मांगने लगा। उसी गाड़ी में बैठे एक पत्रकार ने मेरी रोती-बिलखती, हाथ जोड़े तस्वीर खींच ली। उसके बाद पुलिस हमें राहत कैंप में ले गई। अगले दिन मेरी तस्वीर पीड़ित मुसलमानों के चेहरे के रूप में अखबारों में छपी। एक-दो दिनों में यही तस्वीर हर जगह फैल गई। उसके बाद पत्रकार इस तस्वीर के जरिए मुझे खोजने लगे। राहत कैंप में कुछ पत्रकारों ने मुझे पहचान लिया। इसके बाद मेरी तस्वीर लगातार छपने लगी- एक तरफ हिंदुत्व के चेहरे के रूप में अशोक परमार की और दूसरी तरफ पीड़ित मुसलमान के रूप में मेरी। ‘आप उस वक्त भी सिलाई करते थे?’ हां, यह हमारा खानदानी काम है। दंगे से पहले मैं अहमदाबाद की एक बड़ी फैक्ट्री में काम करता था। वहां सुनील नाम का एक दोस्त था। वह मुझे घर से लेकर जाता और वापस छोड़ता भी था। 27 फरवरी को जब गोधरा कांड हुआ, तो शाम में फैक्ट्री में घोषणा हुई कि बाहर माहौल ठीक नहीं है। सभी घर चले जाएं। दंगा रुकने तक फैक्ट्री बंद रहेगी। उसके बाद मैं घर आ गया। जब मेरी फोटो आई, तो मीडिया और पार्टियों के नेता मेरे पास आने लगे। उस दौरान कई महीने तक इलाके में कर्फ्यू लगा रहा। यह नया घर 2008 में बनवाया था। इससे कुछ ही दूर मेरे हिंदू दोस्त सुनील का घर था, लेकिन उसने मुझसे बात करना बंद कर दिया। फैक्ट्री में करीब एक साल काम किया था, लेकिन मालिक ने निकाल दिया। उनका कहना था- मीडिया वाले तुम्हारा इंटरव्यू ले रहे हैं, भीड़ लग रही है, इसलिए तुम्हें नहीं रख सकते। नौकरी गई, तो सोचा था कि काश उस दंगे में मर गया होता, तो यह न होता। दिन-रात मीडिया वाले घर के बाहर जमे रहते थे। काम-धंधा चौपट हो गया था, जहां भी गुजरात दंगों में मारे गए मुसलमानों की बात होती, मेरी ही तस्वीर दिखाई जाती। तंग आकर मैंने शहर छोड़ दिया और कोलकाता चला गया। तीन-चार साल वहां रहा, फिर चुपके से अहमदाबाद लौट आया। इसी बीच कुछ समाजसेवी संस्थाओं ने बुलाकर कहा- गुमनाम रहने से कुछ नहीं होगा। जिंदा बचे हो, तो लोग पूछेंगे ही, इसी में जिंदगी बिताओ। इसके बाद मैंने 5,000 रुपए में पांच सिलाई मशीनें खरीदीं और घर पर काम शुरू कर दिया। लेकिन 13 सितंबर 2008 की बात है। दिल्ली में बम धमाका हुआ था। हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन ने ली थी। उसने सरकार को एक मेल भेजा था, जिसमें लिखा था- 'आंख के बदले आंख’, यानी गुजरात दंगों में मारे गए मुसलमानों का बदला लेंगे। मेल के नीचे मेरी फोटो लगा दी थी। अगले दिन सुबह 7 बजे से ही मीडिया के लोग मेरे घर जमा हो गए। पत्नी और बच्चे डर गए। शाम होते-होते मुझे पुलिस उठा ले गई, लेकिन कुछ स्थानीय लोगों की कोशिश से छोड़ दिया गया। 2013 में ‘राजधानी एक्सप्रेस’ फिल्म आई। उसमें मुझे आतंकवादी की तरह दिखाया गया। उसमें एक सीन में एक पुलिस अफसर के दफ्तर में मेरी फोटो लगी है, सामने एक आतंकी खड़ा है। पहले पुलिस मेरी तस्वीर पर बंदूक तानती है, फिर आतंकी को गोली मार देती है। फिल्म के बारे में दोस्तों ने बताया, तब मुझे पता चला। मैंने डायरेक्टर पर केस कर दिया, लेकिन कुछ नहीं हुआ और 2019 में मामला बंद कर दिया गया। मैंने उस पत्रकार से भी सवाल किया, जिसने मेरी फोटो खींची थी। उसके पास माफी के अलावा कोई जवाब नहीं था। नहीं पता था कि एक तस्वीर मेरी जिंदगी इस तरह बर्बाद कर देगी। खैर… मेरी बेटी के बच्चे की तबीयत खराब है, अब मुझे जाना होगा। शाम हो चुकी है।’ कहते-कहते वह सहम जाते हैं। कैमरा बंद करते ही कहते हैं, ‘सच कहूं, तो मुझे मोबाइल से भी डर लगता है। उस पर ऐसी ही खबरें देखकर परेशान हो जाता हूं। मेरी हालत तो फिर भी कुछ ठीक है, लेकिन अशोक का सब खत्म हो गया। वह महीने-पंद्रह दिन में खाना खाने मेरे घर आ जाता है। उसे कुछ पैसे दे देता हूं। अब क्या कर सकता हूं, मेरे भी बाल-बच्चे हैं। अब मैं 52 साल का हूं। ---------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-वो बेटी जैसी थी, उसके पिता बोले-तूने इसका रेप किया:25 साल बाद जेल से बरी, आज भी लगता है कोई मारने आ रहा है 57 साल के आजाद खान अपने भाई की किराने की दुकान पर बेसुध बैठे हुए हैं। तीन महीने पहले ही 25 साल बाद जेल से बाइज्जत बरी होकर आए हैं। अकेले में कुछ बुदबुदा रहे हैं। पूछने पर कहते हैं- पूरी जिंदगी काल-कोठरी में गुजार दी। अब किसी से क्या ही बात करूं, क्या ही बचा है! पूरी कहानी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-हट्टा-कट्टा भर्ती हुआ, फौज ने विकलांग बनाकर भेज दिया:8 महीने कोमा में रहा, होश आया तो पता चला- मुझे आर्मी से निकाल दिया ‘डेढ़ महीने से मुझे ‘महाराजा’ पनिशमेंट दी जा रही थी, जिसमें सिर के बल डेढ़-डेढ़ घंटे रहना होता था। एक दिन मैं बॉक्सिंग की ट्रेनिंग ले रहा था। तभी एक जोरदार पंच मेरे सिर पर लगा और मैं गिर पड़ा। अफसर चिल्लाए- चेतन, उठो और लड़ो। मैंने कहा- अब नहीं लड़ पाऊंगा, सर। लेकिन उन्होंने कहा- नहीं चेतन, तुम्हें भिड़ना होगा। पूरी कहानी यहां पढ़ें
‘मई 2025 की बात है, मैंने सोमवार का व्रत रखा था। तभी तौसीफ अत्तार पास आया और मेरे टेबल पर रखी महादेव की मूर्ति देखकर बोला कि क्या ये सच में भगवान हैं। अगर पार्वती ने गणेश को जन्म दिया, तो इन्हें क्यों नहीं पता था। फिर हंसने लगा। वो अक्सर हिंदू धर्म और देवी-देवताओं का मजाक उड़ाता था। एक दिन उसने कहा कि ब्रह्मा ने अपनी बेटी के साथ गलत काम किया था।‘ ‘तौसीफ ऑफिस में बिजनेस प्रोसेस लीडर है। हम एक टीम में नहीं थे, फिर भी वो मेरे पास आता और निजी जिंदगी के बारे में बातें करता। पूछता कि क्या तुम्हारा बॉयफ्रेंड है। वो ऑफिस की लड़कियों को सिर से पैर तक घूरता और आंख मारता। मैंने सीनियर्स से शिकायत की, लेकिन कुछ नहीं हुआ, इसलिए पुलिस के पास जाना पड़ा।‘ ये आपबीती 25 साल की उस लड़की की है, जिसकी शिकायत के बाद नासिक पुलिस ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के 7 अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। 26 मार्च से 3 अप्रैल के बीच 9 महिलाओं ने FIR दर्ज कराई। उन्होंने कंपनी के मुस्लिम टीम लीडर्स और HR मैनेजर पर सेक्शुअल हैरेसमेंट समेत जबरन धर्म परिवर्तन जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। नई फीमेल वर्कर्स को टारगेट कर ब्रेनवॉश का पैटर्न हमने जांच कर रही नासिक पुलिस की SIT के अफसर से बात की। उन्होंने बताया कि मामले के तार ह्यूमन ट्रैफिकिंग, धर्मांतरण और विदेशी फंडिंग से भी जुड़े हो सकते हैं। इसकी जांच हो रही है। आरोपियों के बैकग्राउंड और ऑफिशियल रिकॉर्ड्स देखे जा रहे हैं। पीड़ित महिलाएं महाराष्ट्र पुलिस की निगरानी में हैं। SIT से जुड़े सोर्स कहते हैं, ‘पहली FIR 26 मार्च को देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। इसके बाद 8 और महिलाओं ने शिकायत दर्ज कराई। इनके बयानों से यौन शोषण, जोर-जबरदस्ती और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का पैटर्न सामने आया है।‘ ‘ज्यादातर गवाही में पाया गया कि पीड़ित महिलाओं को पहले अलग-अलग तरीकों से अप्रोच किया गया। फिर नौकरी के दबाव, प्रमोशन और काम सिखाने के बहाने टारगेट किया गया। पुलिस ने बयानों के आधार पर TCS कंपनी के दानिश शेख, तौसीफ अत्तार, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, आसिफ अंसारी, शफी शेख और अश्विनी चनानी को गिरफ्तार किया है। कंपनी की HR मैनेजर निदा खान अभी फरार हैं।’ 9 में से 3 महिलाओं की FIR मिली…पहली पीड़ितसीनियर पूछते- हनीमून पर कहां गई, क्या-क्या किया पीड़ित महिला ने 2 अप्रैल को नासिक के मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में FIR कराई है। उसके मुताबिक, जून 2025 से 31 मार्च 2026 तक वो TCS ऑफिस में एसोसिएट थी। पति काम के सिलसिले में पुणे में रहते हैं। FIR में उसने बताया, ‘24 जून 2025 को मुझे 3 महीने के ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल किया गया। रजा मेमन का मेरी ट्रेनिंग से कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी वो मेरे पास आकर पर्सनल लाइफ के बारे में पूछते। कहते थे कि पति के साथ क्यों नहीं रहती, हनीमून पर कहां गई थी। वहां क्या किया, कैसे किया। रजा मेमन के साथ शाहरुख कुरैशी भी था।‘ ट्रेनिंग में आसिफ अंसारी भी अक्सर मेरे पास आ जाता। सटकर बैठता और गलत तरह से छूता। कभी जांघ या कंधे पर हाथ रख देता। एक दिन लंच के वक्त हाथ गोद में रख दिया। फिर बोला- अगर कोई फिजिकल नीड हो, तो बताओ, पूरा कर दूंगा। महिला ने बताया, ‘सीनियर तौसीफ अत्तार ने भी गलत बर्ताव किया। वो भी टीम में नहीं था, फिर भी पास आकर खाने के लिए पूछता। अश्लील तरीके में पूछता, 'क्या संतरे लाई हो। छोटे वाले लाई हो या बड़े वाले।' वो चेहरा सटाता और छूता था। जब सवाल किया, तो कहा, 'क्या तुम्हें आगे नहीं बढ़ना।‘ पीड़ित के मुताबिक, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, आसिफ अंसारी, तौसीफ अत्तार और शफी शेख ने उसे फिजिकली और मेंटली टॉर्चर किया। हिंदू देवी-देवताओं को अपशब्द कहे, जिससे उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची। उसने HR सेल में शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। तब उसने मुंबई नाका थाने में शिकायत की। दूसरी पीड़ित‘ईश्वर वही जो अदृश्य है, हिंदू देवी-देवता झूठे’ मुंबई नाका पुलिस स्टेशन पर दर्ज शिकायत के मुताबिक, जनवरी से दिसंबर 2025 तक उसका ऑफिस में यौन उत्पीड़न हुआ। महिला कंपनी में क्रेडिट कार्ड कस्टमर्स की शिकायतें सुनती थी। उसने बताया, ‘तौसीफ अत्तार अपने धर्म को ऊंचा दिखाता और हिंदू धर्म को नीचा। वो कहता कि सच्चा ईश्वर वही है, जो अदृश्य है। हिंदू धर्म में देवता दिखते हैं, इसलिए झूठे हैं।‘ ‘दिसंबर 2025 की बात है। मैं लंच के बाद छाछ पी रही थी, तभी तौसीफ आया और पूछा- ‘क्या पी रही हो?' मैंने कहा- 'छाछ पी रही हूं।' उसने अजीब नजरों से देखा और कहा- मेरे पास भी छाछ है, क्या पीना चाहोगी। ये कहते हुए उसने प्राइवेट पार्ट की ओर इशारा किया।’ तीसरी पीड़ितभगवान कृष्ण और शिव को लेकर गलत बातें कीं तीसरी FIR में पीड़ित ने बताया, ‘मैं दिसंबर 2024 में ऑफिस में थी। तब शफी शेख काम के बहाने पास आकर बैठ गया और जानबूझकर मेरे पैर से अपना पैर रगड़ने की कोशिश की। फिर मेरा कीपैड इस्तेमाल करने के बहाने गलत तरह से छुआ। मैंने कुर्सी दूर कर ली, तो हंसते हुए चला गया।‘ ‘फरवरी 2026 में तौसीफ ने मेरे धर्म को नीचा दिखाने की कोशिश की। उसने कहा कि कृष्ण ने 16 हजार महिलाओं से शादी की, इससे पता चलता है कि कृष्ण कैसे थे। क्या भगवान शंकर को ये नहीं पता था कि गणेश पार्वती के बेटे हैं। अगर नहीं पता था तो देवी पार्वती को बेटा कैसे हुआ। उन्होंने गणेश का सिर क्यों काट दिया।‘ 40 दिन के 'अंडरकवर ऑपरेशन' से खुलासा मामले की जांच कर रहे SIT चीफ और सहायक पुलिस आयुक्त संदीप मिटके कहते हैं कि नासिक पुलिस को जांच के दौरान अहम बातें पता चलीं। जांच टीम के एक सीनियर अफसर नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, ‘फरवरी में कुछ लड़कियों ने हमसे गोपनीय तरीके से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि कंपनी में बहुत खराब माहौल है, लड़कियां खुलकर बोलने से डर रही हैं। आरोपों की सच्चाई जानने के लिए हमने पुलिस कमिश्नर संदीप कार्णिक के निर्देश पर एक प्लान बनाया।‘ 7 महिला पुलिसकर्मियों को अंडरकवर तैनात किया गया। ये हाउसकीपिंग स्टाफ और बाकी छोटे पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों के तौर पर कंपनी के अंदर गईं। ‘ऑफिसर्स ने 40 दिनों तक नजर रखी कि क्या आरोपी मीटिंग में या महिला कर्मचारियों के वर्क स्टेशन पर दुर्व्यवहार कर रहे थे। ये अंडरकवर ड्यूटी के बाद हर दिन सीनियर्स को अपडेट देती थीं।‘ जांच के दौरान एक महिला कर्मचारी ने 26 मार्च को देवलाली पुलिस स्टेशन में पहली FIR दर्ज कराई। उसने कंपनी के सीनियर अधिकारी पर रेप का आरोप लगाया। 2 अप्रैल तक कुल 9 केस दर्ज हुए। इनमें आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी स्टाफ सस्पेंड, TCS चेयरमैन बोले- केस परेशान करने वाला टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि ये केस परेशान करने वाला है। हम पुलिस का सहयोग कर रहे हैं। TCS किसी भी तरह के उत्पीड़न और जबरदस्ती के प्रति लंबे समय से 'जीरो टॉलरेंस' अपनाता रहा है। इस मामले में भी कंपनी सख्त रुख अपना रही है। सरकारी वकील बोलीं- कंपनी की ऑपरेशंस हेड ने आरोपियों की मदद की पीड़ित पक्ष की सरकारी वकील किरण बेंडभर कहती हैं, ‘ये गंभीर मामला है, जिसमें पीड़ित के यौन उत्पीड़न और मानसिक उत्पीड़न के आरोप शामिल हैं। साथ ही आरोपियों ने वर्कप्लेस में कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यवहार किया।‘ ‘जांच में पाया गया है कि कंपनी की ऑपरेशंस हेड ने POSH यानी यौन उत्पीड़न के लिए रोकथाम समिति की सदस्य होने के बावजूद शिकायत पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि आरोपियों की मदद की। इससे उनकी हिम्मत बढ़ी और वे दूसरी महिलाओं को भी परेशान करने लगे।‘ ………………ये खबर भी पढ़ें… कैप्टन बाबा के 58 अश्लील वीडियो, कहता था, ‘मैं शिव का अवतार, संबंध बनाओ, पवित्र हो जाओगी’ ‘शादी के बाद मुझे बेटा नहीं हो रहा था। ससुराल में ताने मिलते थे। तंग आकर मैं कैप्टन बाबा के पास गई। बाबा ने गारंटी दी कि तंत्र-पूजा से सब ठीक हो जाएगा। उन्होंने मुझे तांबे के लोटे से पानी पिलाया और कुछ खाने को दिया। थोड़ी देर बाद मेरा सिर घूमने लगा और शरीर सुन्न पड़ गया। इसी का फायदा उठाकर बाबा ने मेरा रेप किया और बोला- मैं शिव का अवतार हूं, मेरे साथ संबंध बनाकर तुम पवित्र हो गई हो।’ पढ़ें पूरी खबर...
पाकिस्तान: सरकारी अस्पताल में गंभीर लापरवाही बनी बच्चों में एचआईवी फैलने की वजह
एक नई जांच-पड़ताल वाली रिकॉर्डिंग में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के एक सरकारी अस्पताल के बच्चों के वार्ड में 'गंभीर लापरवाही और गलत इलाज' का मामला सामने आया है।
अमेरिका के बिना होर्मुज मिशन की योजना बना रहा है यूरोप : रिपोर्ट
यूरोपीय देश अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से ज्यादा समय तक चले संघर्ष के बाद होर्मुज स्ट्रेट को लेकर एक योजना तैयार कर रहे हैं
मिडिल ईस्ट में बिछेगी नई एनर्जी बिसात, ईरान को बाइपास कर यूरोप तक पाइपलाइन ले जाएगा तुर्किये
कंगाली की कगार पर खड़े पाकिस्तान के लिए मसीहा बना सऊदी अरब झोली में डाले अरबों डॉलर
मेलोनी का सख्त रुख, इटली ने इजरायल से रक्षा समझौता निलंबित किया
इटली सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब उसने हाल के हफ्तों में इजरायल की लेबनान में सैन्य कार्रवाई की खुलकर आलोचना की थी। इन हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों के घायल होने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है।
मध्य पूर्व संकट का सैन्य समाधान नहीं, शांति के लिए वार्ता जरूरी: संयुक्त राष्ट्र महासचिव
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है
अमेरिका में विदेशी छात्रों से जुड़े एक अहम वर्क परमिट कार्यक्रम को लेकर सियासत तेज हो गई है। रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी)' प्रोग्राम को खत्म करने की अपील की
अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के बीच उच्च स्तरीय वार्ता शुरू
अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के बीच एक दुर्लभ और उच्च स्तरीय सीधी बैठक संपन्न हुई। बीते 30 वर्षों में यह पहला अवसर था जब दोनों देशों ने इस स्तर पर प्रत्यक्ष संवाद किया है।
अमेरिका और ईरान के बीच दो दिनों में हो सकती है वार्ता, ट्रंप बोले- पाकिस्तान में बैठक की उम्मीद
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ सीधी बातचीत का दूसरा राउंड “अगले दो दिनों में” हो सकता है। यह एक संभावित डिप्लोमैटिक शुरुआत का संकेत है
साल 1990। अगस्त का महीना। ज्योति बसु की लेफ्ट सरकार ने बस का किराया बढ़ा दिया। विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने गोली चलाई और तीन लोग मारे गए। कांग्रेस ने हड़ताल का ऐलान किया। दक्षिण कोलकाता के हाजरा इलाके से मार्च निकालने की जिम्मेदारी मिली बंगाल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी को। ‘माय अनफॉरगेटेबल मेमोरीज’ में ममता लिखती हैं- ‘हाजरा में CPI(M) कार्यकर्ताओं की एक टुकड़ी पहले से मौजूद थी। जैसे ही हम आगे बढ़े, उन्होंने हमला कर दिया। सबसे पहले लालू आलम ने मेरे सिर पर लोहे की रॉड मारी। मैं खून से भीग गई। फिर कई और वार हुए। होश आया तो अस्पताल में थी। डॉक्टरों को लग रहा था कि मौत तय है, लेकिन मैं बच गई।’ इस घटना के 8 साल बाद 1998 में ममता ने कांग्रेस छोड़ दी और 1998 में तृणमूल कांग्रेस यानी TMC बनाई। 2011 में TMC ने 34 साल से जारी लेफ्ट सरकार को उखाड़ फेंका और तब से बंगाल की सत्ता पर ममता बनर्जी का ही राज है। जैसे बंगाली रसुगुल्ले की चाशनी कपड़ों पर गिर जाए, तो जल्दी छूटती नहीं है। वैसे ही बंगाल में एक बार जो सरकार में आता है, सालों तक टिकता है। आजादी के बाद से पश्चिम बंगाल में सिर्फ तीन पार्टियों ने सत्ता संभाली है। कांग्रेस ने 20 साल, CPI(M) ने 34 साल और TMC ने 15 साल। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक पैटर्न है। आज के इलेक्शन एक्सप्लेनर में इसी पैटर्न से जुड़े 2 सवालों को समझेंगे… पहला- आखिर बंगाल में जो आता है, लंबे वक्त तक छा क्यों जाता है? दूसरा- कांग्रेस, लेफ्ट, TMC के बाद क्या बंगाल में अब BJP की बारी है? पहले सवाल का जवाब इन 5 वजहों में छिपा है… वजह-1: बंगाल में सबसे बड़ा कैडर बेस कोलकाता के सीनियर जर्नलिस्ट प्रभाकर मणि तिवारी बताते हैं कि कोई पार्टी जब लंबे समय तक सत्ता में रहती है। तो उसका खासकर गांवों में संगठन मजबूत हो जाता है। पहले इसका फायदा लेफ्ट को मिला और आज TMC को। वजह-2: दिल्ली बनाम बंगाल का नैरेटिव सीनियर जर्नलिस्ट प्रभाकर मणि तिवारी बताते हैं कि पश्चिम बंगाल के लोगों के दिमाग में ‘बंगाली अस्मिता’ सबसे अहम है। वे अपना हीरो बनाना जानते हैं। चाहे वो रविंद्रनाथ टैगोर हों या सुभाष चंद्र बोस। या फिर कोई हीरो या खिलाड़ी।’ वजह-3: पर्सनैलिटी कल्ट यानी चेहरे को चुनता है बंगाल बंगाल के चुनाव हमेशा एक चेहरे के इर्द-गिर्द घूमते हैं… पश्चिम बंगाल की सीनियर जर्नलिस्ट शिखा मुखर्जी बताती हैं, 'पश्चिम बंगाल में सारे चुनाव चेहरे पर लड़े जाते हैं। आजादी के बाद कांग्रेस के पास आंदोलन से निकले नेता थे, जिसके चलते कांग्रेस ने 20 साल तक सत्ता संभाली। फिर लेफ्ट के ज्योति बसु का कल्ट बना। इसके बाद ममता बनर्जी TMC का चेहरा हैं। पिछले कुछ चुनावों से ममता के सामने लेफ्ट या कांग्रेस के पास कोई चेहरा नहीं है।’ वजह-4: वोटबैंक की सटीक चुनावी इंजीनियरिंग वजह-5: बिखरा हुआ विपक्ष सीनियर जर्नलिस्ट शिखा मुखर्जी बताती हैं, 'बंगाल के ज्यादातर चुनाव बाइपोलर, यानी दो पार्टियों के बीच हुए हैं। जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब लेफ्ट विपक्ष में था। फिर लेफ्ट सत्ता में आई, तो कांग्रेस विपक्ष में चली गई। TMC के आने के बाद भी पहले लेफ्ट, फिर कांग्रेस विपक्ष में बैठी। अब बीजेपी उसे टक्कर दे रही है। क्या कांग्रेस, लेफ्ट, टीएमसी के बाद अब बंगाल में बीजेपी की बारी है? 2016 में बीजेपी के पास बंगाल विधानसभा में सिर्फ 3 सीटें थीं। 2021 में 77 हो गईं। वोट शेयर 10% से 38% तक पहुंचा। यह छलांग कैसे लगी? पांच चीजें काम आईं- लेफ्ट-कांग्रेस का वोट बीजेपी की तरफ शिफ्ट होना, हिंदुत्व कार्ड, मतुआ समुदाय को CAA का वादा, RSS का जमीनी नेटवर्क और सुवेंदु अधिकारी जैसे TMC के बड़े नेताओं का पार्टी में आना। सुवेंदु अधिकारी की कहानी तो बंगाल की राजनीति में अलग ही अध्याय है। नवंबर 2020 में ममता के सबसे करीबी सिपहसालार ने इस्तीफा दिया। दिसंबर में अमित शाह ने मेदिनीपुर के मंच पर उनके गले में बीजेपी का गमछा डाला। TMC ने उन्हें 'मीरजाफर' कहा। ममता ने सीधे उनके गढ़ नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का ऐलान किया। सुवेंदु ने जवाब दिया- अगर 50,000 वोटों से नहीं हराया, तो राजनीति छोड़ दूंगा। 2 मई 2021 को गिनती हुई। 16वें राउंड तक ममता 800 वोट आगे थीं। 17वें राउंड में पासा पलट गया। सुवेंदु 1956 वोटों से जीत गए। पहली बार किसी 'सिटिंग CM' ने अपनी सीट गंवाई। अब 2026 में सुवेंदु ने ममता के गढ़ भवानीपुर से पर्चा भरा है। बीजेपी की गणित सीधा है- 2021 में BJP ने 294 में से 77 सीटों जीतें थी और 75 सीटें सिर्फ 10% से कम मार्जिन से हारी थी। 2026 में इस बार BJP अगर TMC के 5% वोट शेयर भी अपने पाले में कर ले, तो मोटा-मोटी 77+75 यानी 152 सीटें जीत सकती है। यानी बहुमत के 148 सीटों से 4 ज्यादा। लेकिन रास्ता आसान नहीं है। सेफोलॉजिस्ट से नेता बने योगेंद्र यादव का आकलन है कि 2021 के मुकाबले जमीन पर बीजेपी कमजोर हुई है और SIR के बावजूद बीजेपी सरकार बनाने में कामयाब नहीं होगी। बंगाल का इतिहास बताता है कि जब भी कोई पार्टी यहां सत्ता में आई, उसने दशकों तक राज किया। कांग्रेस 20 साल, लेफ्ट 34 साल। सीनियर जर्नलिस्ट सुमन भट्टाचार्य कहते हैं- ‘बंगाल के लोग बेहद वफादार होते हैं। एक बार पसंद कर लिया तो लंबे समय तक जिताते हैं। अगर बीजेपी एक बार ध्रुवीकरण में सफल हो गई, तो अगले 15-20 साल तक वह जीतती रह सकती है।’ लेकिन यह 'अगर' बड़ा है। बंगाल में हर जीतने वाली पार्टी की पांच खूबियां रही हैं- मजबूत कैडर, बंगाली अस्मिता का नैरेटिव, एक करिश्माई चेहरा, सटीक वोटबैंक, और बिखरा हुआ विपक्ष। बीजेपी के पास अभी इनमें से कुछ हैं, कुछ नहीं। सुवेंदु जैसा चेहरा है। RSS का नेटवर्क है। हिंदुत्व का नैरेटिव है। लेकिन गहरा जमीनी कैडर अभी भी TMC के मुकाबले कमजोर है। बंगाली अस्मिता का नैरेटिव अभी भी ममता के पास है। और ममता खुद एक ऐसा 'पर्सनैलिटी कल्ट' हैं, जिसका कोई विकल्प बीजेपी के पास नहीं। ------------ बंगाल चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… सोनिया ने 9 दिन इंतजार कराया, बागी हो गईं ममता: बंगाल में कभी 39% वोट पाने वाली कांग्रेस, 2.9% पर सिमटी; क्या जानबूझकर हार रहे राहुल 1952 में पहली बार पश्चिम बंगाल में चुनाव हुए। 238 में से 150 सीटें कांग्रेस ने जीतीं। लेफ्ट फ्रंट को 41 और जनसंघ वाले राइट ब्लॉक को 13 सीट मिलीं। पं. नेहरू और महात्मा गांधी के पर्सनल डॉक्टर रहे बिधान चंद्र रॉय मुख्यमंत्री बने। लगातार 20 साल और कुल 25 साल कांग्रेस सरकार में रही, लेकिन 1977 के बाद वो अपना सीएम नहीं बना पाई। अब कोई विधायक भी नहीं है। वोट शेयर भी सिमटकर 3% से कम हो गया। पूरी खबर पढ़िए…
पहले ये वीडियो देखिए…’हुमायूं कबीर तू चोर है, दलाल है…’ वीडियो में दिख रहे शख्स हुमायूं कबीर हैं। सरेराह खुद को चोर कहने वाले से उलझ पड़े और उसके पीछे भागे। Video Courtesy- ABP हुमायूं को चोर क्यों कहा, ये वीडियो देखिए… ’मैंने शुभेंदु अधिकारी से बोला कि मुझे पैसा चाहिए, ये पूरा लक्ष्य 1000 करोड़ रुपए में पूरा होगा।’ इस वीडियो में हुमायूं BJP नेताओं के साथ एक हजार करोड़ रुपए की डील के बारे में बता रहे थे। 6 दिसंबर 2025 को मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास करने के बाद हुमायूं को ममता ने पार्टी से निकाल दिया। इन सभी मसलों पर हुमायूं कबीर से सीधी बातचीत। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: आप कांग्रेस, TMC और BJP तीनों पार्टियों में रह चुके हैं, अब किस आधार पर वोट मांग रहे हैं?जवाब: 2016 में जब TMC ने टिकट नहीं दिया, तब मैं निर्दलीय चुनाव लड़ा। महज 17 दिन के चुनाव प्रचार में ही TMC को कमजोर कर दिया था। TMC काफी पीछे थी, इसलिए हुमायूं कबीर से पंगा लेने से पहले किसी भी पार्टी को सोचना चाहिए। मैं कोई फालतू आदमी नहीं हूं। अपने इलाके का जमीन से जुड़ा नेता हूं। भरोसा दिलाता हूं कि यहां लोग हुमायूं कबीर को देखकर वोट देते हैं। आपको ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की रैली से ज्यादा ज्यादा भीड़ मेरी रैली में दिखेगी। सवाल: एक वायरल वीडियो में आप 1000 करोड़ रुपए की लेनदेन की बात कर रहे हैं। क्या मामला है?जवाब: किसी ने मुझे दिल्ली के एक पत्रकार से मिलवाया था। बीते साल दिसंबर में जब वो सिलीगुड़ी आए, तो मिलने का समय मांगा। 19 दिसंबर 2025 की बात है। मैंने उन्हें दोपहर 12 बजे बहरामपुर में मिलने के लिए बुलाया, लेकिन वो नहीं आ सके। फिर शाम 4 बजे उनका फोन आया और बोले कि दूर से आए हैं, अगर मुलाकात हो जाए, तो मैंने बुला लिया। शाम करीब 7 बजे वो घर आए। उनके साथ एक महाराज भी थे। मैं उन्हें नहीं जानता था। दोनों लगभग 51 मिनट बैठे। पत्रकार ने पूछा कि TMC ने आपको सस्पेंड कर दिया है, अब क्या करेंगे, कैसे राजनीति करेंगे। कांग्रेस में जाएंगे या कुछ और करेंगे। मैंने कहा कि 30 साल कांग्रेस, 7 साल TMC और 17 महीने BJP में रहा। अब किसी के अंडर काम नहीं करूंगा। मुलाकात के बाद से ही उनका फोन बंद है। अब बताइए वीडियो में हुए सवाल-जवाब अगर कोई बाहर जाकर बदल दे, तो क्या करें। अब जवाब तो मुझे ही देना है। सवाल: MP के CM मोहन यादव और असम के CM हिमंता से मुलाकात और बातचीत के आरोपों पर क्या कहेंगे?जवाब: मोहन यादव से कभी नहीं मिला, न कभी बात हुई। हिमंता से भी कोई बात नहीं हुई। जब तक जिंदा रहूंगा, कभी BJP और RSS के साथ नहीं मिलूंगा। यही मेरा एजेंडा है। मैं मुसलमानों के साथ गद्दारी नहीं करूंगा। मेरे लिए पहले कौम है, मुसलमान लोग हैं, उसके बाद राजनीति और पार्टी है। सवाल: वायरल वीडियो के बाद औवेसी ने आपसे समर्थन ले लिया, क्या वजह लगती है?जवाब: ओवैसी को बड़ा भाई मानता हूं। वे लंदन से पढ़े-लिखे बैरिस्टर है, सांसद हैं, इसलिए उनकी इज्जत करता हूं। उनकी पार्टी के स्टेट लीडर इमरान सोलंकी गड़बड़ी कर रहे हैं। कुछ और नेता भी TMC से मिले हुए हैं। ये अभिषेक और I-PAC के जरिए काफी पैसा लेते हैं। AIMIM का राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हुसैन और प्रदेश अध्यक्ष इमरान सोलंकी दोनों बंगाली नहीं हैं। ये TMC से पैसे लेकर उसकी भाषा बोलते हैं। ओवैसी को इनकी जांच करानी चाहिए। सवाल: मतलब आप ये कहना चाहते हैं कि ओवैसी की पार्टी के लोग TMC से मिले हुए हैं?जवाब: हां, बिल्कुल। पहले ओवैसी ने 8 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही थी। फिर मुझसे बात करके 12 सीटें देने की गुजारिश की। फिर आदिल ने पैसे ले लिए और वो मुझसे 14 सीटें मांगने लगा। इस तरह ओवैसी की पार्टी बंगाल में कभी खड़ी नहीं हो सकेगी। सवाल: वीडियो वायरल होने के बाद क्या आपकी असदुद्दीन ओवैसी से कोई बात हुई?जवाब: नहीं, कोई बात नहीं हुई। पहले जब सीट बंटवारे को लेकर हमारी बात हो रही थी, तब मैंने डिप्टी CM का पद मांगा था। हालांकि उन्होंने सीधे CM बनाने की बात कही थी। वीडियो वायरल होने के बाद मैंने खुद उनसे बात करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। अगले दिन मीडिया से पता चला कि उनकी पार्टी ने हमसे समर्थन वापस ले लिया है। सवाल: वायरल वीडियो आपका है या नहीं, सच क्या है?जवाब: वो मेरा ही वीडियो है, लेकिन AI के जरिए मेरी बातें बदली गई हैं। मैंने हाईकोर्ट में चैलेंज किया है। मेरा सवाल है कि जब वीडियो 19 दिसंबर को रिकॉर्ड किया गया, तो 5 महीने बाद अप्रैल में क्यों जारी किया गया। जब वो लोग (TMC) मेरा सामना नहीं कर पाए और लगा चुनाव हार जाएंगे, तो ऐसा वीडियो ले आए। सवाल: क्या बाबरी मस्जिद बनेगी, ये कितना बड़ा मुद्दा है? जवाब: बाबरी तो बनेगी, इसे न BJP रोक पाएगी और न TMC। अयोध्या में दोबारा बाबरी मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन दी जानी थी, लेकिन ये अयोध्या से 15 किमी दूर दी गई। वहां मुस्लिम आबादी भी नहीं है। यहां (मुर्शिदाबाद) 72% मुस्लिम हैं, इसलिए यहां मस्जिद बनवा रहा हूं। ये इबादत की जगह है। इसके लिए हमने एक ट्रस्ट बनाया है। अभी चुनाव लड़ने की वजह से मैंने ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया है। सवाल: अगर बंगाल में TMC और BJP किसी को बहुमत नहीं मिला, तो आप किसे समर्थन देंगे?जवाब: इस बार किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलने वाला है। इस स्थिति में दूसरी राजनीतिक पार्टियां मुझसे समर्थन मांगेंगी। सरकार बनाने के लिए जो मुझे सपोर्ट करेगा, उसी के साथ जाएंगे। …………………. ये खबर भी पढ़ें… हिंदू बाप-बेटे को काट डाला, बंगाल में चुनावी मुद्दा नहीं पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद ही नहीं, बीते 5 साल में मालदा, कूचबिहार, नादिया, झाड़ग्राम, बीरभूम और संदेशखाली में कई हिंसक घटनाएं हुईं। इन इलाकों में विधानसभा की कुल 76 विधानसभा सीटें हैं। इनमें से 54 सीटें TMC और 22 BJP के पास हैं। हिंसा का इन सीटों क्या असर है, पढ़िए पूरी खबर…
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच शी जिनपिंग की पहल, शांति के लिए चार सूत्रीय फॉर्मूला पेश
शी जिनपिंग ने जोर देकर कहा कि किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि दुनिया को दोबारा “जंगलराज” की ओर नहीं बढ़ना चाहिए, जहां ताकतवर देश अपनी शक्ति के बल पर फैसले थोपें।
होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी को झटका, ईरान की अनुमति से चीनी टैंकर सुरक्षित गुजरा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, “रिच स्टारी” नाम का चीनी मेथनॉल टैंकर ईरान की अनुमति लेकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजर गया। इस जहाज पर करीब 2.5 लाख बैरल मेथनॉल लदा था, जिसे संयुक्त अरब अमीरात के हमरिया पोर्ट से लोड किया गया था।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में US की नाकेबंदी फेल, ईरानी बंदरगाह से तेल लेकर निकला चीन का विशाल टैंकर
आशा भोसले को श्रद्धांजलि देना पड़ा भारी,पाकिस्तान के जियो न्यूज पर गिरी गाज, PEMRA ने थमाया नोटिस
US-Iran No Deal: जेडी वेंस ने खोला राज, आखिर क्यों बिना किसी समझौते के पाकिस्तान से लौटा अमेरिकी दल?
ऑस्ट्रेलिया: 125 साल के इतिहास में पहली बार महिला अफसर को सेना की कमान
ऑस्ट्रेलिया में पहली बार एक महिला अफसर को सेना की कमान सौंपे जाने का ऐलान किया गया। बताया गया कि देश की डिफेंस फोर्स लीडरशिप में फेरबदल के तहत, इतिहास में पहली बार कोई महिला उसकी आर्मी को लीड करेगी
होर्मुज पर अब ट्रंप-जिनपिंग आमने-सामने, चीन की अमेरिका को दो टूक- हमारे मामलों में न दे दखल
चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने अमेरिका को चेतावनी जारी की। उन्होंने साफ कहा कि ईरान के साथ चीन के द्विपक्षीय व्यापार और ऊर्जा समझौतों में किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं मिलेंगे : ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान “परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा” और यह पुष्टि की कि अमेरिका ने नौसैनिक नाकाबंदी शुरू कर दी है क्योंकि वे तेहरान पर वार्ता में लौटने के लिए दबाव बना रहे हैं
मध्यस्थ नहीं संदेशवाहक की भूमिका में था पाकिस्तान : रिपोर्ट
पाकिस्तान की अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका असल में किसी “मध्यस्थ” जैसी नहीं बल्कि एक “कुरियर” यानी संदेश पहुंचाने वाले की तरह थी
यूएन प्रमुख की अपील: अमेरिका-ईरान संवाद जारी रहे
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी रखने की अपील की है
पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद का जाफराबाद इलाका। शाम के करीब 5 बजे। पारुल दास रोज की तरह घर की चौखट पर बैठी थीं। पास में खंभे पर CCTV कैमरे लगे हैं। दीवार पर शमशेरगंज पुलिस का नंबर लिखा है। घर के आसपास सेना और BSF जवान तैनात हैं। 50 कदम दूर BSF की बख्तरबंद गाड़ी खड़ी है। सुरक्षा के ये इंतजाम एक साल पहले हुई हिंसा की वजह से थे। 11 अप्रैल 2025 को वक्फ संशोधन कानून के विरोध में यहां रैली निकाली गई। बेकाबू भीड़ ने पारुल के पति हरगोविंद दास और बेटे चंदन को घर के सामने ही काट डाला। बंगाल ही नहीं, देशभर में घटना का विरोध हुआ। राज्य में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में विधानसभा चुनाव हैं। जाफराबाद में लोग इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बता रहे हैं और TMC को हटाने की बात कर रहे हैं, जबकि यहां से 142 किमी दूर मालदा में इसकी चर्चा भी नहीं है। मुर्शिदाबाद ही नहीं, बीते 5 साल में मालदा, कूचबिहार, नादिया, झाड़ग्राम, बीरभूम और संदेशखाली में कई हिंसक घटनाएं हुईं। इन इलाकों में विधानसभा की कुल 76 विधानसभा सीटें हैं। इनमें से 54 सीटें TMC और 22 BJP के पास हैं। ‘भीड़ ने पति-बेटे को मार दिया, सरकार से आज तक मदद नहीं मिली’ सबसे पहले हम पारुल दास से मिले। हमें देखते ही वहां कुछ और लोग कैमरा लेकर पहुंच गए। पूछने पर पता चला कि इंटेलिजेंस अफसर हैं और हमारी बातचीत रिकॉर्ड करने आए हैं। परिवार के साथ हुई घटना का जिक्र करते ही पारूल भावुक हो गईं। वे बांग्ला में कहती हैं, ‘आज भी पति और बेटे का इंतजार करती हूं। जानती हूं, वे नहीं आएंगे, लेकिन क्या करूं। भीड़ ने जिस तरह आंखों के सामने दोनों को काट डाला, वो मंजर आज भी सपने में आता है। हमें पुलिस और सरकार से न तब मदद मिली, न अब मिल रही है। जो कुछ भी किया, वो शुभेंदु अधिकारी ने किया। वही समय-समय पर मदद करते रहे हैं।‘ आपके घर पर कई पार्टियों के झंडे लगे हैं, क्या चुनाव में मदद का कोई वादा मिला? पारुल कहती हैं, ‘आसपास TMC वाले आते हैं, लेकिन हमारे यहां शुभेंदु अधिकारी के अलावा कोई नहीं आया।‘ पारुल अब बीड़ी बनाकर परिवार का खर्च चला रही हैं। वे कहती हैं, ‘अफसोस यही है कि पति-बेटे की हत्या के 13 दोषियों को सजा हुई, लेकिन फांसी नहीं मिली।’ ‘पार्टियां चुनाव में सिर्फ वोट मांगती हैं, मुसीबत में नहीं आतीं’जाफराबाद में हम कुछ और महिलाओं से मिले। हिंसा के सवाल पर वे कहती हैं, ‘हम खौफ के माहौल में जी रहे थे, लेकिन 24 घंटे BSF की तैनाती और CCTV कैमरे लगने से डर कम हुआ है।‘ चुनाव को लेकर उनका कहना है कि नेता बस वोट मांगने आते हैं, लेकिन मुसीबत पड़ने पर कोई नहीं पूछता। अबकी शांति बनी रहे इसलिए वोट करेंगे। ‘हिंदू-मुस्लिम कहकर भड़काती है BJP, TMC से सुरक्षा की उम्मीद नहीं’ इसके बाद हम मुर्शिदाबाद के घनश्यामपुर गांव पहुंचे। ये बॉर्डर वाला इलाका है। बांग्लादेश सिर्फ 4 किमी दूर है। यहां मिले सलीम हिंसा के मुद्दे पर कहते हैं, ‘अभी शांति है क्योंकि ममता अच्छी CM हैं। हिंसा के पीछे BJP का हाथ है। वही हिंदू-मुस्लिम करती है, इसलिए माहौल बिगड़ता है। हम सब मिलकर रहते हैं।‘ मुर्शिदाबाद के धुलियान में रहने वाले मनोरंजन घोष का कहना हैं, ‘पिछले साल 11 अप्रैल को वक्फ बिल को लेकर रैली निकलने की जानकारी थी, लेकिन उन्हीं लोगों ने हिंसा कर दी। यहां 33.21% हिंदू हैं, बाकी मुस्लिम हैं। इस बार TMC की सरकार बदल देंगे।‘ यहीं रहने वाले सुमन दास कहते हैं, ‘हिंसा वाले दिन पुलिस ने ही थाने पर ताला लगा दिया था। इस सरकार से सुरक्षा की उम्मीद कैसे करेंगे।‘ मालदा में हिंदू बोले- दंगों में थाने बंद करके छिप जाती है पुलिस मुर्शिदाबाद के बाद हम मालदा पहुंचे। यहां पिछले साल मोथाबाड़ी इलाके में रामनवमी से पहले हिंसा भड़की थी। पुलिस थाने के पास चौराहे पर जहां हिंसा हुई, वहां मस्जिद-मंदिर आसपास हैं। यहां ज्यादातर लोग कैमरे पर बात करने को राजी नहीं हुए, सिर्फ कृष्ण मंडल से बात हुई। वे कहते हैं, ‘रामनवमी के दिन पटाखे जलाए गए थे। हिंदुओं पर आरोप लगा कि उन्होंने मस्जिद के पास पटाखे फोड़े, जबकि ऐसा नहीं हुआ था। सैकड़ों की भीड़ ने दुकानों और घरों में तोड़फोड़ कर दी। सब लूट लिया। हम शिकायत भी नहीं कर सके क्योंकि हिंसा शुरू होते ही पुलिस खुद छिप गई थी। BSF जवानों के आने पर हालात काबू में आए। हम डर में जीते हैं, इसलिए इससे छुटकारा पाने के लिए वोट करेंगे।‘ नादिया, झाड़ग्राम और बीरभूम में तनाव, जवान तैनातअब बात बाकी हिंसा वाले इलाकों की। नादिया में राजनीतिक हत्या मुद्दा है और लोगों के बीच उसकी चर्चा भी है। यहां हाईवे से ही BSF तैनात नजर आती है। दूरदराज वाले इलाकों में भी जवान मौजूद हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यहां हिंसा होती है, लेकिन उसे वोट में कन्वर्ट करना आसान नहीं है। बीरभूम के कई इलाकों में चुनाव से पहले तनाव का माहौल है। हमने जहां भी कैमरा ऑन करने की कोशिश की, लोगों ने यही पूछा कि किस पार्टी ने भेजा है। कोई भी बात करने को तैयार नहीं हुआ। यहां TMC मजबूत दिख रही है। वोटिंग और नतीजे वाले दिन हिंसा की आशंका को लेकर पुलिस मुस्तैद है। इधर, 74.06% हिंदू आबादी वाले कूचबिहार में जगह-जगह कमल के पोस्टर दिखे। यहां की 9 में से 7 सीटों पर BJP का कब्जा है और वो इस बार भी मजबूत दिख रही है। चुनाव पर हिंसा और तनाव का असर नहीं दिख रहा है। वहीं, झाड़ग्राम में चुनावी माहौल में होने वाली हिंसा को रोकने के लिए सुरक्षा बल लगातार फ्लैग मार्च कर रहे हैं। TMC, BJP और लेफ्ट के बीच कड़ा मुकाबला है। संदेशखाली में जमीन कब्जा करने और महिलाओं के उत्पीड़न के मामलों की चर्चा है, क्योंकि BJP इसे लेकर खास अभियान चला रही है। हालांकि, लोगों के बीच इसकी चर्चा नहीं है। एक्सपर्ट बोले- बंगाल में हिंसा आम बात, ये चुनाव में मुद्दा नहीं इस बार चुनाव में हिंसा मुद्दा है या नहीं, इस पर पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रभाकर मणि तिवारी कहते हैं, ‘बंगाल चुनाव में हिंसा परंपरा बन चुकी है। मुर्शिदाबाद, बीरभूम और इसके आसपास के इलाकों में छोटी-बड़ी घटनाएं होती हैं, लेकिन मुद्दा नहीं बन पातीं। हावड़ा और हुगली में भी पहले कई बार हिंसा हुई, लेकिन चुनाव में कभी इसका असर नहीं दिखा।‘ हिंसा वाले इलाकों में कौन पार्टी मजबूत है? इस पर वे कहते हैं, ‘मालदा, गनी खान के समय से ही कांग्रेस का गढ़ रहा है। हालांकि, अब कई इलाकों में TMC ने घुसपैठ कर ली है। पिछले साल 4 सीटें BJP ने भी जीती। इसी तरह मुर्शिदाबाद में भी 22 में से 20 सीटें TMC के पास हैं, लेकिन दो सीटों पर BJP जीती है। बीरभूम और मुर्शिदाबाद में TMC मजबूत है। मालदा में भी एकाध सीट कांग्रेस जीत सकती है, इसके अलावा TMC ही मजबूत दिख रही है।‘ मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज में चंदन हत्याकांड की काफी चर्चा है, चुनाव में इसका कितना असर होगा? प्रभाकर कहते हैं, ‘इसका ज्यादा असर नहीं होने वाला। अभी वहां TMC मजबूत है।‘ पॉलिटिकल एक्सपर्ट सुमन भट्टाचार्य का भी मानना है कि बंगाल में हिंसा होती है, लेकिन ये चुनावी मुद्दा नहीं बनती। खासकर मुर्शिदाबाद, मालदा और इसके आसपास के इलाकों में हिंसा आम बात है।‘ ममता बोली थीं- मुस्लिम हिंसा भी करेंगे, तो सपोर्ट करेंगेBJP प्रवक्ता बिमल शंकर नंदा कहते हैं, ‘ममता बनर्जी ने भी कहा था कि जो गाय दूध देती है, अगर वो लात भी मारेगी तो सहेंगे। उनके कहने का मतलब साफ है कि अगर इस समुदाय (मुस्लिम) के लोग हिंसा भी करते हैं, तो उसे सपोर्ट करेंगे।‘ वहीं, TMC प्रवक्ता रिजू दत्ता कहते हैं, ‘राज्य में लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी हमारी है। अगर कभी हिंसा होती, तो हमारी ही जिम्मेदारी बनेगी। देश के PM और केंद्रीय गृह मंत्री बंगाल में आकर बोलते हैं कि सबका हिसाब होगा, कब्र से निकालेंगे। BJP ही हिंसा और खून खराबा कराती है।‘ …………….ये खबर भी पढ़ें… सोनिया ने 9 दिन इंतजार कराया, बागी हो गईं ममता पश्चिम बंगाल में लगातार 20 साल और कुल 25 साल कांग्रेस सरकार में रही, लेकिन 1977 के बाद वो अपना सीएम नहीं बना पाई। अब उसका कोई विधायक भी नहीं है। कभी 39% से ज्यादा वोट शेयर भी सिमटकर 3% से कम हो गया। आखिर पश्चिम बंगाल में सत्ता से दूर कैसे हुई कांग्रेस; इलेक्शन एक्सप्लेनर में पूरी कहानी…
ईरान पर नाकाबंदी: अमेरिका-इजरायल की नई रणनीतिक तालमेल
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक सरकारी बैठक में कहा कि लड़ाई हर समय जारी है। हम ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी लगाने के राष्ट्रपति ट्रंप के कड़े रुख का समर्थन करते हैं
ईरान को हथियार सप्लाई कर रहा चीन? ड्रैगन ने पश्चिमी देशों के आरोपों को बताया बेबुनियाद, दी चेतावनी
ऑस्ट्रेलिया में पहली बार महिला बनीं आर्मी चीफ, 125 साल के बाद आया ये मौका; किसे मिली कमान?
रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने लेफ्टिनेंट जनरल सुसान कोयले को देश की थल सेना का प्रमुख नियुक्त करने का ऐलान किया। 125 वर्षों के इतिहास में यह पहली बार है जब कोई महिला इस सर्वोच्च पद पर पहुंची है।
ईरान संघर्ष के बाद बदला वैश्विक समीकरण: अमेरिका कमजोर, चीन-रूस को मिला रणनीतिक लाभ
इस संघर्ष का सबसे सीधा असर मध्य पूर्व में अमेरिका की भूमिका पर पड़ा है। दशकों से इस क्षेत्र में सुरक्षा गारंटर माने जाने वाले अमेरिका की विश्वसनीयता पर अब सवाल उठने लगे हैं।
ट्रंप बनाम पोप लियो: ईरान नीति पर बयान से बढ़ा टकराव, दोनों के बीच तीखी जुबानी जंग
विवाद की शुरुआत तब हुई, जब पोप लियो ने अमेरिका की ईरान नीति और युद्ध को लेकर आलोचनात्मक रुख अपनाया। उन्होंने इस संघर्ष को “अन्यायपूर्ण” बताया और अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाए।
अमेरिका के साथ चल रही बातचीत में ईरान के पास 'कोई दांव नहीं' बचा : ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ने कहा है कि ईरान की सैन्य ताकत अब काफी कमजोर हो चुकी है और बातचीत में उसके पास अब कोई मजबूत विकल्प नहीं बचा है
पूर्व अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट की चेतावनी, 'रणनीतिक विफलता' की ओर बढ़ रहा है अमेरिका
वाशिंगटन की हालिया सैन्य सफलता भविष्य में बड़ी रणनीतिक समस्या बन सकती है
अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने के बाद निक्की हेली बोलीं- तेहरान के साथ बातचीत समय की बर्बादी है
भारतीय मूल की रिपब्लिकन नेता निक्की हेली ने कहा कि अमेरिका का ईरान के साथ बातचीत से पीछे हटना सही था
ट्रंप का दावा: ईरान बातचीत में पूरी तरह बेदम
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ने कहा है कि ईरान की सैन्य ताकत अब काफी कमजोर हो चुकी है और बातचीत में उसके पास अब कोई मजबूत विकल्प नहीं बचा है
राजस्थान की राजधानी जयपुर से 80 किमी दूर रामपुरा कस्बा। अक्षय और अशोक नाम के दो भाई घर के आंगन में अक्सर क्रिकेट खेलते। बड़े भाई की गेंद कभी छोटे की छाती पर लगती तो कभी सिर पर। बदला लेने के लिए अशोक तेज गेंद फेंकने की खूब प्रैक्टिस करता। कुछ सालों में ही उसकी बॉलिंग का खौफ पूरे इलाके में फैल गया। घर में पैसों की तंगी थी। पिता खेती करके और अखबार बेचकर महीने के महज 10 हजार रुपए कमाते थे। इसलिए एक बेटे को ही एकेडमी भेज सकते थे। बड़े भाई ने कहा- तू खेल। अशोक ने जयपुर की अरावली क्रिकेट एकेडमी जॉइन कर ली। वहां कोच विवेक यादव खूब सपोर्ट करते। कोविड-19 में कोच की मौत हो गई तो अशोक ने एकेडमी और क्रिकेट दोनों छोड़ दिए। पिता के साथ खेतों में समय बिताने लगा। उसी अशोक शर्मा ने IPL के इस सीजन की सबसे तेज गेंद फेंकी है। स्पीड- 154.2 किमी/घंटे। IPL 2026 ने अभी 25% रास्ता ही तय किया है और अशोक शर्मा जैसे कई राइजिंग स्टार्स सामने आ चुके हैं; मंडे मेगा स्टोरी में ऐसे ही 7 खिलाड़ियों की सुनी-अनसुनी रोचक कहानी... ***** ग्राफिक्स: दृगचंद्र भुर्जी और अजीत सिंह -------- IPL से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… IPL में कैसा खेल रहे टी-20 वर्ल्ड चैंपियंस:सैमसन ने शतक लगाया, चक्रवर्ती-बुमराह को विकेट नहीं मिल रहे; रिंकू, हार्दिक और अर्शदीप फ्लॉप IPL में 19वें सीजन के 18 मैच खत्म हो चुके हैं। भारत को टी-20 वर्ल्ड चैंपियन बनाने वाले 15 प्लेयर्स अलग-अलग टीमों में खेल रहे हैं। प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट संजू सैमसन ने शनिवार को ही शतक लगा दिया। उनके साथी अभिषेक शर्मा ने भी 74 रन की पारी खेली। पूरी खबर पढ़िए…

