तारीख- 25 फरवरी 2026, जगह- पूर्णिया एयरपोर्ट। एयरस्ट्रिप पर बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी समेत कई नेता और अधिकारी खड़े थे। शाम करीब 5 बजे BSF का एक खास विमान उतरा। सफेद कुर्ता-पायजामा और गमछे में गृहमंत्री अमित शाह बाहर निकले। Mi-17 V5 हेलिकॉप्टर से शाह सीधे किशनगंज पहुंचे। अगले तीन दिन शाह ने इलाके के सभी जिला कलेक्टरों, एसपी, केंद्रीय बलों और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों से बात की। 27 फरवरी की शाम वे दिल्ली लौटे। शाह के इस दौरे के बाद एक कॉन्सपिरेसी थ्योरी चली कि केंद्र सरकार एक केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तैयारी में है, जिसमें बिहार के सीमांचल इलाके के 4 जिले और पश्चिम बंगाल के चिकन नेक या सिलिगुड़ी कॉरिडोर के 8 जिले शामिल हो सकते हैं। कहा गया कि पश्चिम बंगाल चुनाव से ठीक पहले ये ममता बनर्जी को हराने की स्ट्रैटजी है। चर्चा इतनी जोर से उठी कि प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो यानी PIB को इसे अफवाह बताकर खारिज करना पड़ा। इस कॉन्सपिरेसी थ्योरी की हकीकत और ममता के असली चिकन नेक की पूरी कहानी; जानेंगे आज के इलेक्शन एक्सप्लेनर में… चिकन नेक को UT बनाने की मांग पहले भी उठी उत्तर बंगाल के 8 जिले उस भूगोल पर बसे हैं, जिसे दुनिया सिलिगुड़ी कॉरिडोर या चिकन नेक के नाम से जानती है। महज 40 किमी लंबा और 22 से 30 किमी चौड़ा यह रास्ता पूर्वोत्तर के सातों राज्यों को भारत के बाकी हिस्से से जोड़ता है। एक तरफ नेपाल, दूसरी तरफ बांग्लादेश, और सिर्फ 200 किमी दूर चीन। उत्तर बंगाल को अलग करने की मांग पहली बार जून 2021 में उठी थी, जब अलीपुरद्वार से बीजेपी सांसद जॉन बारला ने कहा कि इन जिलों को मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाए। ममता ने तुरंत विरोध किया। लेकिन खुद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने बारला से ये कहते हुए किनारा कर लिया कि बंगाल बांटना हमारा एजेंडा नहीं। तीन साल बाद जुलाई 2024 में गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में इसी मांग को और बड़े दायरे में उठाया। झारखंड के संथाल परगना के 6 जिले, बिहार के सीमांचल के 4 जिले और बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद समेत उत्तरी बंगाल के कुछ हिस्से- सबको मिलाकर UT बनाने की बात कही। तर्क था कि इन इलाकों में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है। लेकिन न संसद में चर्चा हुई, न बीजेपी ने इसे आधिकारिक स्टैंड बनाया। अब 2026 में बंगाल चुनाव से ठीक पहले शाह की सीमांचल विजिट के बाद यही चर्चा तीसरी बार उठी। उत्तर बंगाल हथियाने से बीजेपी को खास चुनावी फायदा नहीं राजनीतिक तौर पर यह इलाका फिलहाल बीजेपी की तरफ झुका है। 2021 में इन 8 जिलों की 54 सीटों में से बीजेपी ने 30 और टीएमसी ने 24 जीतीं। 2016 में यहां लेफ्ट ने 25 सीटें जीती थीं, लेकिन 2021 तक उसकी जगह बीजेपी ने ले ली। इसकी वजह डेमोग्राफी है। इन 8 में से 6 जिलों में हिंदू आबादी 73-81% के बीच है। सिर्फ उत्तर दिनाजपुर और मालदा में मुस्लिम आबादी 50% के करीब है और वहां टीएमसी मजबूत है। यानी उत्तर बंगाल में बीजेपी की ताकत और टीएमसी की कमजोरी, दोनों का एक ही कारण है- डेमोग्राफी। लेकिन यह आधी तस्वीर है। असली तस्वीर दक्षिण बंगाल में है। ममता का असली ‘चिकन नेक’ हैं मुस्लिम बहुल ये 6 जिले पश्चिम बंगाल के 23 जिलों में 6 मुस्लिम बहुल जिले हैं- मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना और बीरभूम। विधानसभा की 294 में से 118 सीटें यानी 40% सीटें इन्हीं जिलों में हैं। 2021 में टीएमसी ने कुल 215 सीटें जीती थीं- उनमें से 103 यानी 48% सीटें सिर्फ इन्हीं 6 जिलों से आईं। इन जिलों में टीएमसी का जीत प्रतिशत 87% रहा। बीजेपी को महज 14 सीटें मिलीं। यह सिर्फ संख्या नहीं है। यह ममता की पूरी चुनावी गणित की नींव है। अगर यह नींव हिली, तो ममता की सरकार हिलेगी। और इसीलिए इस वोटबैंक को समझना जरूरी है। 15 साल में कैसे बना टीएमसी का यह गढ़? लेफ्ट के 34 साल के राज में मुस्लिम वोटर 'लाल झंडे' के साथ थे। दो घटनाओं ने यह बदला… 2011 में सत्ता में आने के बाद ममता ने इस रिश्ते को नीतियों में बदला। इमामों-मोअज्जिनों के लिए मासिक भत्ता, ऐक्यश्री स्कॉलरशिप से लाखों अल्पसंख्यक छात्रों को मदद, और मुस्लिम जातियों को OBC में शामिल करके आरक्षण का फायदा। ऊपर से सांस्कृतिक नजदीकी, मसलन- हिजाब पहनकर इफ्तार पार्टी में जाना, इस्लामी दुआएं पढ़ना। बीजेपी इसे तुष्टिकरण कहती है, लेकिन मुस्लिम वोटर इसे अपनी पहचान का सम्मान मानते हैं। जब NRC-CAA के बाद असुरक्षा बढ़ी, तो ममता ने खुद को मुस्लिमों की इकलौती ढाल बताया। यह नैरेटिव इतना मजबूत हुआ कि 2021 में बीजेपी की पूरी ताकत झोंकने के बाद भी मुस्लिम वोट में कोई दरार नहीं आई। पश्चिम बंगाल के सीनियर जर्नलिस्ट प्रभाकर मणि तिवारी मानते हैं कि इस बार SIR में काफी नाम कटे हैं। इससे थोड़ा उलटफेर हो सकता है। लेकिन यहां बीजेपी की एकतरफा जीत नहीं होगी। अगर यहां भ्रष्टाचार के मुद्दे का असर पड़ता तो ममता कई साल पहले हार गईं होती। लेकिन ये मुद्दा असरदार नहीं है। नॉर्थ और साउथ परगना में काफी हद तक ममता ही मजबूत रहने वाली हैं। इसलिए बीजेपी को ममता के गढ़ में चुनौती देना अभी आसान नहीं है। हालांकि उत्तर बंगाल में बीजेपी जरूर मजबूत रहेगी। -------------- बंगाल चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… ममता के सिर पर रॉड मारी, लगा बचेंगी नहीं: बंगाल में जो आता है, क्यों छा जाता है; क्या अब बीजेपी की बारी है जैसे बंगाली रसगुल्ले की चाशनी कपड़ों पर गिर जाए, तो जल्दी छूटती नहीं है। वैसे ही बंगाल में एक बार जो सरकार में आता है, सालों तक टिकता है। आजादी के बाद से पश्चिम बंगाल में सिर्फ तीन पार्टियों ने सत्ता संभाली है। कांग्रेस ने 20 साल, CPI(M) ने 34 साल और TMC ने 15 साल। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक पैटर्न है। पूरी खबर पढ़िए…
कश्मीर में पोनी यानी घोड़ा चलाने वाले बशीर अहमद और परवेज अहमद ने पहलगाम में हमला करने वालों को न सिर्फ अपने घर में रुकवाया, बल्कि लोकेशन की डिटेल भी दी। अपने ढोक यानी झोपड़ी में आतंकियों को चाय पिलाई, खाना खिलाया। पॉलिथीन में सब्जी-रोटी पैक करके दी। वे आतंकी हैं, ये पता चलने के बावजूद पुलिस या सुरक्षाबलों को जानकारी नहीं दी। NIA ने अपनी चार्जशीट में ये खुलासे किए हैं। जांच के दौरान NIA ने कुल 1,113 गवाहों के बयान दर्ज किए। 31 शॉल हॉकर, 543 ढोक यानी झोपड़ी में रहने वाले लोग, 117 पोनी चलाने वाले, 69 पशु मालिक, 42 फोटोग्राफर, 54 ढाबा-भेलपुरी और चाय बेचने वाले, 36 टिकट काउंटर-जिपलाइन वाले, 25 टैक्सी ड्राइवर, 19 दुकान मालिक, 23 दूसरे जिलों के संदिग्ध और अन्य 54 लोग शामिल थे। चार्जशीट के मुताबिक, हमले की साजिश पाकिस्तान में बैठे साजिद सैफुल्लाह जट्ट उर्फ अली भाई ने रची, जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा है। NIA ने उस पर 10 लाख रुपए का इनाम घोषित किया है। उसने ही हमले के लिए लोकेशन बताई और कोर्डिनेट्स भेजे थे। तीन पाकिस्तानी आतंकी भारत में घुसे और हमला किया। पहलगाम हमले की पहली बरसी पर पढ़िए इनसाइड स्टोरी… गवाह का खुलासा: बशीर को हथियारों से लैस लोगों के साथ जाते देखाचार्जशीट में एक गवाह को X-1 नाम दिया गया है। उसने खुलासा किया, ‘मैं हिल पार्क के रास्ते घर लौट रहा था। मैंने बशीर अहमद जोठार को हथियारों से लैस तीन लोगों को इशारा करते देखा। फिर सभी को बशीर के भांजे परवेज अहमद की झोपड़ी में जाते देखा। मैं परवेज को भी जानता हूं।' 'अगले दिन यानी 22 अप्रैल को मैं रूटीन काम के लिए बैसरन घाटी गया। अजान के वक्त के आसपास मैंने परवेज अहमद और बशीर अहमद जोठार को वहां टहलते देखा।’ हमले के वक्त X–1 मौके पर था। तीनों आतंकियों ने उसे भी रोका और कलमा पढ़ने को कहा। कलमा पढ़ने पर जाने दिया। दूर से उसने आतंकियों को गोली चलाते हुए देखा। X–1 ने तीनों आतंकियों की पहचान की है। परवेज बोला- मामा अंदर आया और हमें चुप रहने को कहापरवेज अहमद ने पूछताछ में बताया, ‘21 अप्रैल, 2025 को शाम 5 बजे मैं और पत्नी घर में चाय बनाने की तैयारी कर रहे थे। तभी मेरा मामा बशीर अहमद जोठार अंदर आया और हमें चुप रहने को कहा। वो बाहर गया और कुछ मिनट बाद वापस आया। उसके पीछे तीन लोग थे, जिनके हाथ में हथियार थे।’ ‘वे अंदर आकर बैठ गए। पानी देने के लिए कहते हुए बोले कि वे बहुत दूर से आए हैं। थके और प्यासे हैं। पानी पीने के बाद उन्होंने कहा कि अल्लाह के रास्ते में लड़ने वाले और कश्मीरी मुसलमानों की आजादी के लिए जिहाद करने वालों को पानी पिलाने पर मुझे सवाब मिलेगा।’ ‘वे उर्दू बोल रहे थे, जिसमें पंजाबी टच था। वे कश्मीरी नहीं लग रहे थे। मुझे अहसास हुआ कि वे मुजाहिद थे। उन्होंने मुझसे बैग और पाउच छिपाने के लिए कहा। मैंने उन्हें ढोक में पड़े कंबलों, बिस्तरों के नीचे छिपा दिया। पत्नी ताहिरा से सभी के लिए चाय बनाने को कहा। तीनों मुजाहिद ढोक की दीवार से टिककर बैठे थे। ‘ इस खुलासे के बाद बशीर अहमद जोठार से पूछताछ की गई। बशीर और परवेज को 22 जून, 2025 को गिरफ्तार किया गया। बशीर का खुलासा: पेड़ों के पीछे से तीन हथियारबंद लोग आए बशीर अहमद जोठार ने खुलासा किया कि 19 और 20 अप्रैल को पानी की वजह से मैं बैसरन घाटी नहीं गया था। 21 अप्रैल को शाम 4 बजे के करीब अपने घोड़े को देखने जंगल गया। तभी पेड़ों के पीछे से तीन हथियारबंद व्यक्ति सामने आए। उन्होंने मुझे कहा कि हमें सुरक्षित जगह ले चलो और अल्लाह के नाम पर खाने का इंतजाम करो। यह सुनते ही मुझे अहसास हो गया था कि ये मुजाहिद हैं। मैं उन्हें परवेज के ढोक के पास ले गया और कहा कि यहां रुककर मेरे सिग्नल का इंतजार करना। मैं परवेज के ढोक में अंदर घुसा और परवेज–ताहिरा को चुप रहने को कहा। आसपास नजर मारने के बाद मैंने उन्हें हाथों से इशारा किया। फिर वे मेरे पीछे-पीछे परवेज के ढोक में अंदर आए। वे एक-दूसरे को भाईजान बोल रहे थे। ताहिरा ने सभी के लिए चाय बनाई। छोटे कद के एक मुजाहिद ने खाना बनाने के लिए कहा। मैंने ताहिरा को चावल और कच्चे टमाटर बनाने को कहा। खाने खाते हुए उन्होंने मुझसे अमरनाथ यात्रा के बारे में बात की। सिक्योरिटी कैंप्स और एरिया में जवानों के मूवमेंट के बारे में पूछा। वे हमसे उर्दू और पंजाबी में बात कर रहे थे। आपस में पंजाबी में बात कर रहे थे। उनकी बातचीत में मैंने साजिद का नाम सुना। खाने के बाद उन्होंने ताहिरा को रोटी पैक करने को कहा। हल्दी, मिर्ची और नमक भी लेकर गए थे बशीर ने आगे बताया, ‘परवेज ने पुराने कपड़े के टुकड़े में 10 रोटी पैक कर दीं और एक पॉलिथीन में सब्जी रख दी। मुजाहिदों ने एक पॉलिथीन में हल्दी, मिर्ची और नमक भी ले लिया। उन्होंने परवेज के ढोक से एक पतीला और करछी भी ले ली। मैंने ढोक को पानी से बचाने के लिए जो बड़ी पॉलिथीन रखी थी, एक मुजाहिद ने वो भी ले ली।’ उनके पास सिगरेट, टॉफी और खजूर भी थे। वे करीब 5 घंटे ढोक में रहे और रात 10 बजे एक-एक करके निकल गए। बाहर निकलते वक्त छोटे कद के मुजाहिद ने परवेज को 3 हजार रुपए दिए। मुजाहिदों के जाने के 5 मिनट के बाद मैं भी चला गया। ‘22 अप्रैल को सुबह 10 बजे के आसपास मैं परवेज से हिल पार्क पोनी स्टेंड के पास मिला। हम अपने घोड़ों से दो टूरिस्ट को लेकर बैसरन घाटी पहुंचे। उन्हें मेन गेट पर छोड़ने के बाद परवेज और मैंने घोड़ों को मेन गेट के पास ही बांध दिया। हम पार्क में टहल रहे थे, तभी हमने उन्हीं तीन लोगों को पार्क की फेंसिंग के पास बैठे देखा।’ ‘हम तुरंत मेन गेट की तरफ आए और जिन टूरिस्ट को लेकर गए थे, उनके आने का इंतजार करने लगे। 1 बजे के करीब पोनी स्टेंड से निकल गए। मैं पहलगाम मार्केट में था, तब मुझे एक पोनीवाले ने बताया कि बैसरन में आतंकी हमला हुआ है, जिसमें कई टूरिस्ट मारे गए हैं। हमले के बाद मैंने हिल पार्क वाला ढोक छोड़ दिया और खैय्यार में अपने घर में शिफ्ट हो गया। पकड़े जाने के डर से किसी से इस बारे में बात नहीं की।’ मुठभेड़ में ढेर हुए तीनों आतंकवादी 28 जुलाई, 2025 को श्रीनगर के डाचीगाम की महादेव हिल्स में सिक्योरिटी फोर्स और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई। इसमें तीन आतंकवादी मारे गए। उनके पास मिले हथियारों की फॉरेंसिक जांच से पुष्टि हुई कि वही हथियार बैसरन में हुए हमले में इस्तेमाल किए गए थे। इस मुठभेड़ के दौरान एक GoPro कैमरा मिला। मोबाइल डेटा के एनालिसिस से टेरेरिस्ट नेटवर्क से कनेक्शन साबित हुआ। जांच में पता चला कि 21 दिसंबर 2023 को सेना वाहन पर हमला, 4 मई 2024 को वायुसेना के वाहन पर हमला, 9 जून 2024 को शिव खोरी यात्री हमला, 20 अक्टूबर को APCO कंपनी पर हमला और 22 अप्रैल 2025 को बैसरन में हुए हमले में बरामद किए गए हथियार एक जैसे थे। जांच में साबित हुआ कि तीनों टेरेरिस्ट को पाकिस्तान में बैठे लश्कर–ए–तैयबा के कमांडर साजिद जट्ट से इंस्ट्रक्शन मिल रहे थे। हमला सोची–समझी साजिश था, जिसे पाकिस्तान से ऑपरेट किया गया और लोकल लेवल पर मदद ली गई। साजिद जट्ट सीधे एक आतंकी सुलेमान के संपर्क में था। सुलेमान के फोन में alpine quest app डाउनलोड था। इस पर बिना इंटरनेट के किसी लोकेशन के कोऑर्डिनेट मिल जाते हैं। एप में पहले से बैसरन घाटी की लोकेशन सेट थी। मौके से बरामद कंबल, सामान पर बशीर और परवेज का डीएनए मिला। मोबाइल फोन की जांच में पता चला कि आतंकियों के फोन पाकिस्तान में खरीदे गए थे और उनमें उनकी तस्वीरें भी थीं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR से यह भी साबित हुआ कि बशीर और परवेज घटना के समय उसी इलाके में मौजूद थे। दोनों स्थानीय आरोपियों के पहले से बड़ी मात्रा में राशन खरीदने के सबूत भी मिले। आशंका है कि वे पहले से ही आतंकियों को सपोर्ट देने की तैयारी में थे। हमले में लश्कर-ए-तैयबा और द रेसिस्टेंस फ्रंट शामिल थे। कश्मीर में डर का माहौल बनाना, टूरिज्म एक्टिविटी को रोकना और देश विरोधी एक्टिविटी को बढ़ाना इसका मकसद था। केस अभी ट्रायल स्टेज मेंNIA पुलिस स्टेशन जम्मू में FIR नंबर RC-02/2025/NIA/JMU के तहत 27 अप्रैल 2025 को केस रजिस्टर हुआ। यह केस NIA एक्ट 2008 के तहत जम्मू की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया है और चार्जशीट नंबर 03/2025 दाखिल हो चुकी है। केस ट्रायल स्टेज में है। इसके बाद आरोप तय किए जाएंगे और ट्रायल होगा, जिसमें गवाहों के बयान और सबूत पेश किए जाएंगे। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट फैसला सुनाएगा। …………………………….पहलगाम अटैक पर ये स्टोरी भी पढ़िए, ये हमले के 30 दिन पूरे होने पर की गई थी…13 मिनट, 26 कत्ल; वीडियो में देखिए आतंकी कहां से आए, कहां गए कश्मीर की हरी-भरी बायसरन घाटी, उसकी खूबसूरती को निहारते टूरिस्ट, गोलियां, चीखें, बचने-बचाने की कोशिशें और 26 कत्ल, 22 अप्रैल को हुए पहलगाम अटैक की कहानी बस इतनी ही है, लेकिन असर इतना बड़ा कि भारत-पाकिस्तान जंग के मुहाने पर खड़े हो गए। पहलगाम में तीन आतंकी आए और हमेशा का दर्द देकर चले गए। पढ़िए पूरी खबर…
पहलगाम की बैसरन घाटी। हरी वादियों और घास के मैदानों से आबाद। कश्मीर आने वाले टूरिस्ट यहां जरूर आते थे। ठीक एक साल पहले 22 अप्रैल को भी आए थे। तभी जंगल की तरफ से तीन आतंकी आए और 13 मिनट में 26 लोगों का कत्ल कर दिया। बैसरन घाटी वीरान हो गई। पूरा साल बीत गया, लेकिन वीरानी अब भी है। यहां अब पहले जैसे टूरिस्ट नहीं आते। लोगों को घाटी घुमाने वाले गाइड बर्बाद हो गए। उनके घोड़े और गाड़ियां तक बिक गईं। पहलगाम में अटैक करने वाले तीनों आतंकी मारे गए, भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान से बदला ले लिया, लेकिन बैसरन घाटी में कुछ नहीं बदला। मुंबई की मुनीजा परिवार के साथ कश्मीर घूमने आईं, तो पहलगाम भी पहुंचीं। बैसरन घाटी जाना चाहती थीं, लेकिन नहीं जा पाईं क्योंकि हमले के बाद घाटी दोबारा खुली ही नहीं। पहलगाम अटैक के बाद क्या बदला 1. 48 में से 6 टूरिस्ट स्पॉट अब भी बंद, सिक्योरिटी क्लियरेंस के बाद खुलेंगे हमले के बाद कश्मीर में 48 टूरिस्ट स्पॉट बंद किए गए थे। इनमें 42 दोबारा खुल गए। 6 अब भी बंद हैं। बैसरन घाटी के अलावा चंदनवाणी, गुरेज, अथवटो, बंगस और रामकुंड का सिक्योरिटी रिव्यू हो रहा है। क्लीयरेंस के बाद इन्हें खोला जा सकता है। आतंकी हमले से पहले अप्रैल, जून और जुलाई में हर दिन 10 हजार से ज्यादा टूरिस्ट पहलगाम आते थे। अब 2000 से 2500 ही आते हैं। अब बैसरन घाटी कब खुलेगी, हमने ये सवाल जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों से पूछा। वे ऑफिशियली बात करने को नहीं हुए, लेकिन ये बताया कि अभी यहां की सिक्योरिटी देखी जा रही है। क्लीयरेंस मिलने के बाद ही फैसला लिया जाएगा। 2. घोड़े वाले, दुकानदारों की पहचान के लिए QR कोड वाले कार्ड सेंसेटिव टूरिस्ट स्पॉट की लिस्टिंग की गई है। यहां टूरिस्ट के साथ सीधे कॉन्टैक्ट में आने वाले लोकल लोगों का वेरिफिकेशन होगा। उन्हें QR कोड वाला कार्ड जारी किया जा रहा है। इसे स्कैन करते ही, उनकी डिटेल, फोन नंबर, आधार नंबर और एड्रेस की जानकारी मिल जाएगी। इसकी शुरुआत इसी हफ्ते से पहलगाम में हुई है। मुंबई से आईं टूरिस्ट मुनीजा मोहम्मद मेरीशा बताती हैं, ‘पहलगाम अटैक की वजह से थोड़ा डरी हुई थी। यहां घूमने के बाद डर नहीं है। सेफ्टी पर काम हो रहा है। हर घोड़े वाले के पास एक QR कोड है। इसे स्कैन करने पर पता चल जाता है कि हम सही इंसान के साथ घूमने आए हैं।’ मुनीजा इसका अनुभव बताती हैं, ‘मैं एक घोड़े वाले से बैसरन घाटी जाने की बात कर रही थी। उसने अपनी पहचान के लिए QR कोड दिखाया। इसे स्कैन करते ही उसकी पूरी डिटेल आ गई। नाम- मोहिद्दीन मागरे। एड्रेस- पहलगाम। फोन नंबर 9469******। आधार नंबर 4491********। प्रोफेशन-पोनी मैन। पुलिस वेरिफाइड- यस।’ टूरिस्ट गाइड जब्बार अहमद मागरे कहते हैं कि QR कोड शुरू करके सरकार ने अच्छा काम किया है। इससे घोड़े वाले, कैमरे वालों और दुकान वालों की सही पहचान हो रही है। अब तक 165 से ज्यादा घोड़े वालों को कार्ड इश्यू हुए हैं। हम सबसे पहले टूरिस्ट को कार्ड ही दिखाते हैं। गाड़ी वाले और दुकानदार, सभी के अलग-अलग QR कोड हैं। 3. आतंकियों के मददगारों के खिलाफ चार्जशीट पहलगाम अटैक में शामिल तीन पाकिस्तानी आतंकियों की मदद करने वाले ओवरग्राउंड वर्कर्स के खिलाफ जम्मू NIA कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई है। ट्रायल शुरू हो गया है। 1300 पेज की चार्जशीट में हमले की साजिश पाकिस्तान में रचे जाने के सबूत दिए गए हैं। पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और द रेजिस्टेंस फ्रंट समेत 7 आरोपी बनाए गए हैं। चार्जशीट में पाकिस्तानी हैंडलर सजाद जट्ट का नाम भी है। 4. आतंकियों से भिड़ने वाले आदिल की पत्नी को नौकरी, परिवार को घर मिला कश्मीरी युवक सैयद आदिल हुसैन 22 अप्रैल,2025 को टूरिस्ट के साथ बैसरन घाटी गए थे। आतंकियों ने हमला किया, तो वे टूरिस्ट को बचाने के लिए एक आतंकी से भिड़ गए। उसकी राइफल पकड़ ली। आदिल को आतंकी ने तीन गोलियां मार दीं। परिवार की जिम्मेदारी 29 साल के आदिल पर ही थी। जम्मू-कश्मीर सरकार ने उनकी पत्नी गुलनाज अख्तर को सरकारी नौकरी दी है। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने उनके गांव हापतनार में घर बनवाकर दिया है। आदिल के भाई नौशाद कहते हैं, ‘उसकी मौत से हमें तकलीफ तो होती है लेकिन उससे ज्यादा फख्र होता है। उसने आतंकियों के सामने घुटने नहीं टेके।’ टूर ऑपरेटर बोले- EMI नहीं भर पा रहे, बैंक वाले गाड़ी उठा ले जाएंगे जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से करीब 90 किमी दूर पहलगाम और पहलगाम से 6 किमी दूर बैसरन घाटी है। घास के बड़े मैदान, देवदार के घने जंगल, बर्फ से ढंकी पहाड़ियों की वजह से ये जगह स्विट्जरलैंड का एहसास दिलाती है। इसलिए इसका नाम मिनी स्विट्जरलैंड ही पड़ गया। यहां सिर्फ घोड़े या ट्रैक करके ही जा सकते हैं। जिस जगह से टूरिस्ट सफर शुरू करते थे, वहां काफी घोड़े और गाइड मिल जाते थे। एक साल बाद भी मिले, लेकिन पहले से बहुत कम। घाटी का रास्ता बताने वाला बोर्ड भी हटा दिया गया। पहलगाम से 2-3 किमी दूर कनहमर्ग है। अब गाइड लोगों को वहीं घुमाने ले जाते हैं। बैसरन घाटी की ओर कोई नहीं जा सकता। टूर ऑपरेटर मोहम्मद शफी बताते हैं कि बैसरन घाटी पहलगाम का सबसे पसंदीदा स्पॉट है। आतंकी हमले के बाद 8-9 महीने तक पहलगाम पूरी तरह बंद रहा। डेढ़-दो महीने से टूरिस्ट आना शुरू हुए हैं। बैसरन घाटी के साथ चंदनवाड़ी भी बंद है। इसलिए सिर्फ 20% टूरिस्ट आ रहे हैं। साइट बंद होने से वे भी जल्दी लौट जाते हैं।’ ‘कहा गया है कि जल्द ही घाटी खोली जाएगी, लेकिन अभी फाइनल नहीं हुआ है। पुलिस और एजेंसियां पूरी सिक्योरिटी जांच कर लें। कम से कम चंदनवाड़ी को तो खोलना चाहिए। चंदनवाड़ी में बर्फ होती है। टूरिस्ट वही देखने आते हैं। हमारी गाड़ियों की किस्त बाकी है। अगर ये टूरिस्ट स्पॉट नहीं खोले गए, तो किस्त नहीं भर पाएंगे। बैंक वाले गाड़ी उठा ले जाएंगे। चंदनवाड़ी पर पुलिस चौकी है, आर्मी तैनात है। उसे खोला जा सकता है। बैसरन घाटी भले बंद रखें।’ पहलगाम में पोनी मैन एसोसिएशन के प्रेजिडेंट बिलाल अहमद कहते हैं, ‘एक साल बाद भी हमारा काम बंद है। कई लोगों ने अपने घोड़े और गाड़ियां बेच दीं। कुछ टूरिस्ट साइट खुलने से काम शुरू हुआ है। रोज 200-500 रुपए की कमाई हो रही है। हम मांग कर रहे हैं कि कुछ और साइट खोली जाएं।’ ‘अभी टूरिस्ट आ रहे हैं। हम उन्हें यहां-वहां घुमा देते हैं। इससे टूरिस्ट खुश नहीं होते। वे तो बैसरन घाटी और चंदनवाड़ी घूमने आते हैं। इनमें से कोई भी खुल जाए, तो अच्छा रहेगा। यहां अब बहुत सिक्योरिटी है। हम लोग भी समझ गए हैं कि किस तरह के लोग बुरे हैं और उनसे दूर रहना है।’ 22 अप्रैल, 2025 का दिन, जब बैसरन घाटी में अटैक हुआ दोपहर करीब 2 बजे की बात है। टूरिस्ट के ग्रुप घाटी में वीडियो-फोटो शूट कर रहे थे। उसी वक्त तीन आतंकी जंगल की ओर से आए और गोलियां बरसाने लगे। पहली गोली करीब 2.20 बजे चली। शुरुआत में किसी को समझ नहीं आया कि क्या हुआ है। जब लाशें गिरने लगीं, तब लगा कि हमला हुआ है। लोग बचने के लिए भागे, लेकिन उस मैदान में छिपने की जगह ही नहीं थी। हमले में कुल 26 लोग मारे गए। पहलगाम अटैक के 15 दिन बाद भारत ने 7 मई को रात डेढ़ बजे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकियों के 9 ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की। भारत ने कोटली, बहावलपुर, मुरीदके, बाग और मुजफ्फराबाद में एयर स्ट्राइक की। इसमें आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हेडक्वॉर्टर और जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर का ठिकाना शामिल है। मुजफ्फराबाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की राजधानी है और यहीं से आतंकी नेटवर्क ऑपरेट होता है। ऑपरेशन सिंदूर में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। इनमें कंधार प्लेन हाईजैक, पठानकोट और संसद हमले में शामिल अब्दुल रऊफ अजहर भी शामिल है। रऊफ जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर का भाई था। …………………………….पहलगाम अटैक पर ये स्टोरी भी पढ़िए, ये हमले के 30 दिन पूरे होने पर की गई थी…13 मिनट, 26 कत्ल; वीडियो में देखिए आतंकी कहां से आए, कहां गए कश्मीर की हरी-भरी बायसरन घाटी, उसकी खूबसूरती को निहारते टूरिस्ट, गोलियां, चीखें, बचने-बचाने की कोशिशें और 26 कत्ल, 22 अप्रैल को हुए पहलगाम अटैक की कहानी बस इतनी ही है, लेकिन असर इतना बड़ा कि भारत-पाकिस्तान जंग के मुहाने पर खड़े हो गए। पहलगाम में तीन आतंकी आए और हमेशा का दर्द देकर चले गए। पढ़िए पूरी खबर…
ईरान और होर्मुज स्ट्रेट पर ईयू का कड़ा रुख, प्रतिबंध बढ़ाने के संकेत दिए
यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कैलास ने विदेश मामलों की परिषद की बैठक में ईरान और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाया
जापान में टैंक अभ्यास के दौरान हादसा, तीन जवानों की मौत, एक गंभीर रूप से घायल
जापान के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में एक ट्रेनिंग रेंज में जबरदस्त हादसा हुआ। टैंक का गोला समय से पहले फटने से तीन रक्षा कर्मियों की मौत हो गई और एक घायल हो गया
अमेरिकी राजनेता और पूर्व गवर्नर निक्की हेली ने इस घटना को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि जब्त किया गया जहाज चीन से ईरान की ओर जा रहा था और उस पर मिसाइल निर्माण से जुड़े रसायन मौजूद थे।
ट्रंप के सख्त रुख से लड़खड़ाई अमेरिका-ईरान वार्ता
अमेरिका-ईरान शांति वार्ता असमंजस की स्थिति में लग रही है क्योंकि तेहरान ने पाकिस्तान में होने वाली बातचीत में शामिल होने को लेकर हिचकिचाहट दिखाई है
बलूच कार्यकर्ता का आरोप, मुख्यमंत्री बुगती ‘पाकिस्तानी सैनिकों के दलाल’
बलोच अमेरिकी कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “पाकिस्तानी सैनिकों का दलाल” करार दिया है
ईरान से डील न हुई तो ‘बम बरसेंगे’, ट्रंप का अल्टीमेटम
ईरान और अमेरिका के बीच जारी गतिरोध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम बुधवार शाम को खत्म हो जाएगा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ईरान न्यूक्लियर डील' में भारी रकम देने का किया दावा
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान न्यूक्लियर डील (जेसीपीओए) को लेकर फिर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद खराब समझौता बताया
शाम 8 बजे का वक्त। गांव का एक घर रंग-बिरंगे बल्ब और हैलोजन की लाइट से रोशन है। ढोल बज रहे हैं। आंगन में महिलाएं एक लाइन से जमीन पर बैठी हैं। सभी के सामने पत्तों से बने दोने रखे हैं। यहां कोई मर्द नहीं है। सिर पर मटका रखे एक महिला आती है। इस मटके में शराब है। जिसे ‘लंदा’ और ‘इड्डिकुल’ कहा जाता है। लंदा, बासी चावल और इड्डिकुल महुआ से बनती है। महिला सिर से मटका उतारकर नीचे रखती है और दोने में सभी महिलाओं को शराब परोसती है। दूसरी महिला सभी के दोने में भुनी सोयाबीन परोसती है। गीत गाती हुई यहां बूढ़ी-जवान, सभी उम्र की महिलाएं शराब पी रही हैं। यहां महिलाएं मेहमान हैं और मेजबान भी। दैनिक भास्कर की सीरीज ‘हम लोग’ में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं कोया समुदाय की कहानी। ओडिशा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इनकी कुल आबादी 9 लाख है। इनमें से डेढ़ लाख ओडिशा के मलकानगिरी में बसे हैं… ऊपर मैंने जिस दावत का जिक्र किया है वह एक शादी की है। चटक पीली साड़ी, होठों पर हल्की गुलाबी लिपस्टिक, गले में चांदी के सिक्कों की माला पहने एक दुल्हन के कदम धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं। दूसरी ओर, सफेद पोशाक में दूल्हा उसका इंतजार कर रहा है। तभी पुरोहित आगे बढ़कर दोनों को पास-पास खड़ा कर देता है। दूल्हे की कलाई में घास की एक गांठ बांधता है। मंत्र पढ़ता है, फिर दुल्हन का हाथ दूल्हे के हाथ में थमा देता है। तभी वहां मौजूद महिलाएं दुल्हन के स्वागत में कोया गीत गाने लगती हैं। यह शादी ओडिशा के नक्सल प्रभावित जिले मलकानगिरी से करीब 35 किलोमीटर दूर बसे गांव राखेलगुड़ा में हो रही है। यहां के एक आदिवासी नेता अडमा राखा के बेटे निरंजन और नई बहू बासंती की शादी का जश्न मनाया जा रहा है। शादी होते ही महिलाएं फिर शराब पीने लगती हैं। कुछ देर बाद ये एक-दूसरे की कमर में हाथ डालकर नाचना शुरू कर देती हैं। करीब 15 मिनट बाद वे थककर बैठ जाती हैं। इसके बाद, पुरोहित दूल्हा-दुल्हन को बेडरूम में छोड़ आते हैं और बाहर से दरवाजे की कुंडी लगा देते हैं। बाहर बैठी महिलाएं फिर से गीत गाने लगती हैं। बुआ की बेटी से शादी न करने पर मिलती है सजा इसी बीच, अडमा राखा आते हैं, जिनके बेटे की शादी है। मैंने उनसे कहा- ‘दुल्हन बहुत सुंदर है।’ वो कहने लगे कि मेरी बहू बासंती तो घर की लड़की है। लगभग पूरा बचपन हमारे सामने बीता है। मैंने हैरान होकर पूछा- ‘घर की लड़की का मतलब?’ वो बोले- ‘मेरे बेटे निरंजन की शादी, मेरी बहन की बेटी यानी उसकी सगी बुआ की बेटी से हुई है। यही हमारा रिवाज है।’ सगी बुआ की बेटी न हो तो? ‘तो पिता की दूर की बहन की बेटी से भी शादी हो जाती है।’ मैंने पूछा- ‘कोई खास वजह।’ अडमा बताते हैं- ‘घर की बेटी है। उसे हमारे परिवार के तौर-तरीकों की समझ है। वह हमें कभी नुकसान नहीं पहुंचाएगी, इसलिए यही परंपरा चली आ रही है।’ ‘अगर कोई ऐसा न करे तो फिर क्या करते हैं?’ ‘समाज से बाहर कर दिया जाता है। जिंदा रहते हुए पिंडदान भी कर देते हैं। कोया लोगों में बाहरी समुदाय में विवाह किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं है।’ अब अडमा ने मुझे इरमा पवासी नाम की महिला से मिलवाते हैं। वो बताती हैं कि ‘हम लोगों में जब भी शादी या किसी रस्म में बड़ी दावत होती है तो खाने की जिम्मेदारी पूरे गांव की होती है। गांव के लोग शादी वाले घर में महुआ की शराब, मुर्गी, बकरी और मछली पहुंचाते हैं। जैसे आज आप जिस शादी में आई हैं, उसके लिए भी महिलाएं कई दिनों से जंगलों से महुआ बीनकर शराब बनाने में लगी थीं।’ इरमा मुझे और मेरे साथी मुन्ना को खाना खाने के लिए कहती हैं। पत्तलों में मछली का सिर, मटन, चिकन, चावल, रायता और पनीर परोसा जाता है। कुछ देर बाद गांव के सभी लोग खाना खाकर अपने घरों को लौटने लगते हैं, लेकिन महिलाओं की महफिल बदस्तूर जारी रहती है। कच्चा घर, लेकिन सफाई ऐसी कि हर कोना चमकता है अगली सुबह मैं फिर अपने साथी मुन्ना के साथ गांव की तरफ निकल पड़ी। यहां हर घर मिट्टी से बना है, लेकिन इन्हें करीने से सजाया गया है। आगे बांस से बने बाड़े और छोटे-छोटे गेट। घरों की छतें ताड़ के पत्तों से ढकी हैं। हवा में महुआ की खुशबू घुली हुई है। लगभग हर घर के सामने महुआ सूख रहा है। मुन्ना बताते हैं कि- ‘हमारे यहां महुआ की शराब के बिना कोई रस्म पूरी नहीं होती।’ मुन्ना सबसे पहले मुझे अपने घर ले गए। बाहर तेज गर्मी है, लेकिन घर में ठंडक महसूस हो रही है। साफ-सफाई भी ऐसी कि जमीन पर गिरी चीज बिना झिझक उठाकर खाई जा सके। आंगन के एक कोने में, खुले में खाना बन रहा है। यही इनकी रसोई है। रसोई में बर्तन भी उतने हैं, जितना खाना बनाने के लिए जरूरी हैं। अंदर केवल एक ही कमरा है। सामने रखी कुर्सी पर मुझे बैठने के लिए कहा गया। खाट पर अनाज रखा है। खाना पकने की खुशबू आ रही है। मुन्ना बताते हैं कि ‘हमारे घरों में एक ही कमरा होता है। यहीं खाते हैं, यहीं सोते हैं। आज खाने में चावल, दाल और मछली के अंडों की भुर्जी बन रही है।’ कुछ देर यहां रुकने के बाद हम अडमा राखा के घर की तरफ चल पड़े। यहां अडमा राखा हमारा इंतजार कर रहे थे। मैंने उनसे हर घर के बाहर सूख रहे महुए का जिक्र किया। तो बोले- ‘चाहे रिश्ता लेकर जाना हो, शादी का मौका हो या किसी की मौत, हर रस्म में हमारे यहां शराब जरूरी है। इसी वजह से महुआ बड़ी मात्रा में इस्तेमाल होता है। जब लड़के वाले रिश्ता लेकर लड़की के घर जाते हैं तो शराब यानी लंदा और इड्डिकुल जरूर ले जाते हैं। इसके बिना बातचीत आगे नहीं बढ़ती। मान लीजिए, रिश्ता पक्का करने के लिए लड़के वालों को लड़की के घर पांच बार जाना पड़े, तो हर बार शराब की मात्रा बढ़ा दी जाती है। पहली बार में एक बोतल, दूसरी बार दो, तीसरी बार तीन। शादी पक्की होने पर लड़के वाले अपनी हैसियत के हिसाब से लड़की के परिवार को नकद, चावल और शराब भेंट करते हैं।’ कोई दूसरी शराब पीने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना अडमा बताते हैं- ‘हम लोगों में जीवन के हर पड़ाव पर शराब का महत्व है। बच्चे का जन्म होने पर सबसे पहले शराब चखाई जाती है। मौत के समय भी मुंह में शराब डाली जाती है। हालांकि, हमारे कुछ नियम बेहद सख्त हैं। समुदाय से बाहर शादी करने और पारंपरिक शराब छोड़कर दूसरी शराब पीने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भरना पड़ता है। महिलाओं के शराब पीने को लेकर सवाल किया तो वो हंसने लगे। बोले- ‘ये हमारी परंपरा है। हमारे समाज में महिलाएं और पुरुष बराबर हैं, सबकी खुशी समान है।’ दिन के हिसाब से रखा जाता है बच्चों का नाम अडमा के घर में मौजूद गौरी कवासी बताती हैं- ‘यहां बच्चों के नामकरण का तरीका भी अनोखा है। यहां नाम, दिन के आधार पर रखे जाते हैं- जैसे शुक्रवार को जन्मे बच्चे को ‘शुक्री’ और गुरुवार को जन्मे को ‘गुरु’ कहा जाता है।’ विवाद पर थाने नहीं जाते, खुद करते हैं फैसला मुन्ना बताते हैं- कोया, अपने घरेलू और सार्वजनिक विवाद कभी थाने लेकर नहीं जाते। समुदाय के मामलों में किसी बाहरी व्यक्ति को दखल देने का अधिकार नहीं है। वे तारीखों की व्यवस्था को नहीं मानते। फैसला लेने के लिए हमारे ही समुदाय के एक बुजुर्ग व्यक्ति को चुना जाता है, जिस पर कभी कोई आरोप न लगा हो। इन्हें हम पेद्दा कहते हैं। पेद्दा ही जुर्माने का फैसला करते हैं। इस सीरीज में अगले हफ्ते पढ़िए ऐसे ही अनोखे गालो लोगों की कहानी…. -------------------------------------------- 1- नाचती लड़की का हाथ पकड़ा और भगा ले गया लड़का:मैतेई लोगों में शादी की अनोखी परंपरा, पैदा होते ही बच्चे को खिला देते हैं नमक शाम के 5 बजे हैं। एक सुनसान जगह पर कुछ लोग जमीन को चौकोर खोद रहे हैं। आसपास भीड़ है। आधे घंटे बाद खुदाई करने वालों को गड्ढे में कुछ नजर आया। कुछ पल बाद दो-तीन लोग उस गड्ढे में उतरे और एक लाश बाहर निकालकर रख दी। लाश के कई हिस्से कंकाल में तब्दील हो चुके हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- शरीर के ऊपरी हिस्से पर कपड़े नहीं पहनतीं बोंडा महिलाएं:शादी ठुकराने पर लड़कीवालों का घर तोड़ देते हैं, मृत्युभोज में खाते हैं गाय का मांस सुबह करीब 10 बजे का वक्त। मिट्टी से लिपा-पुता एक कच्चा घर। बाहर सिर मुंडाए दो महिलाएं बैठी हैं। उम्र करीब 38-40 साल। ऊपरी बदन लगभग नंगा। बाकी शरीर पर नाम मात्र के कपड़े। छाती छिपाने के लिए मोतियों और कौड़ियों से बनी मालाएं। पूरी कहानी यहां पढ़ें
भारत में गर्मी का मतलब अब सिर्फ दोपहर की झुलसाने वाली धूप नहीं रह गया है। अब सूरज ढलने के बाद भी राहत नहीं मिलती। रात 11 बजे भी दीवारें गर्म रहती हैं, पंखे गर्म हवा फेंकते हैं और कूलर-एसी भी कई बार बेअसर लगते हैं। वैज्ञानिक इसे ‘वॉर्म नाइट्स’ कहते हैं। इन गर्म रातों का असर सीधे दिल, किडनी और नींद पर पड़ रहा है। देश के 734 जिलों में से 57% जिले अब हाई या बहुत हाई हीट रिस्क जोन में आ चुके हैं, जहां करीब 76% आबादी रहती है। तो आखिर ये वॉर्म नाइट्स क्या हैं, क्यों बढ़ रही हैं और इससे बचने का रास्ता क्या है; भास्कर एक्सप्लेनर में 6 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: ‘वॉर्म नाइट’ क्या है और यह पहले से अलग क्यों है? जवाब: भारतीय मौसम विभाग, यानी IMD के मुताबिक जब रात का न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो जाए, तो उसे 'वॉर्म नाइट' कहते हैं। अगर यह फासला इससे भी ज्यादा हो, तो मामला 'बेहद गंभीर' श्रेणी में आ जाता है। पहले हीट वेव का मतलब था- दिन में 40C पार करने वाली लू। उससे बचने के तरीके थे- छांव, पानी, घर के अंदर रहो। लेकिन वॉर्म नाइट में घर भी दुश्मन बन जाता है। दिन भर कंक्रीट की दीवारें और सीमेंट की छत धूप को अपने अंदर सोखती रहती हैं। जब सूरज ढलता है, तो वही गर्मी धीरे-धीरे बाहर निकलने लगती है। ठीक उस वक्त जब आप सोने की कोशिश कर रहे होते हैं। नतीजा? रात 11 बजे भी दीवार को हाथ लगाओ, तो वह गर्म मिलती है और पंखे आग उगलते हैं। पिछले कुछ सालों में वार्म नाइट्स तेजी से बढ़ी हैं… सवाल-2: बढ़ती वार्म नाइट्स के पीछे असली वजह क्या है?जवाबः रात की बढ़ती गर्मी के लिए 3 बड़ी वजहें जिम्मेदार हैं… 60% जिम्मेदारी कंक्रीट की इमारतें और सड़कें हवा में बढ़ती नमी और उमस ग्लोबल वार्मिंग और पेड़ों की कमी सवाल-3: रातें गर्म होने से सेहत पर क्या असर पड़ता है? जवाब: CEEW यानी काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायर्नमेंट एंड वाटर के मुताबिक, रात की गर्मी एक 'साइलेंट किलर' की तरह काम करती है… शरीर की कूलिंग प्रणाली ठप हो जाती है: मानव शरीर का तापमान 37C होता है। रात में बाहर ठंडक होती है, तो शरीर को ठीक होने का वक्त मिलता है। लेकिन अगर रात का तापमान 25C से नीचे न गिरे, तो शरीर खुद को रिकवर नहीं कर पाता। इसे 'हीट स्ट्रेस' कहते हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2100 तक अत्यधिक गर्म रातों से मौत का खतरा लगभग छह गुना बढ़ जाएगा। दिल पर सीधा हमला: जब शरीर रात में ठंडा नहीं होता, तो दिल को शरीर का तापमान कम करने के लिए लगातार अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और नींद के दौरान 'साइलेंट हार्ट अटैक' या हार्ट फेलियर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। नींद की बर्बादी: जब रात का तापमान 27C से ऊपर जाता है, तो नींद के सबसे जरूरी हिस्से- REM स्लीप और डीप स्लीप बर्बाद होने लगते हैं। दिन की भीषण गर्मी के बाद गर्म रातें नींद की फिजियोलॉजी को सीधे बाधित करती हैं, जिससे स्वास्थ्य के गंभीर खतरे पैदा होते हैं। याददाश्त कमजोर होना, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन… ये सब गर्म रातों की लंबी कीमत हैं। सवाल-4: वार्म नाइट्स से आर्थिक असर क्या होगा? जवाब: गर्म रातें सेहत के साथ-साथ हमारे और देश के आर्थिक विकास में दिक्कतें खड़ी कर सकती हैं… सवाल-5: क्या वार्म नाइट्स से कूलर-एसी हमें बचा लेंगे? जवाब: नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि भारत में सिर्फ 24% घरों में एसी या कूलर है। शहरों में यह 40% है, गांवों में महज 15%। पश्चिम बंगाल और बिहार में तो सिर्फ 5% घरों में एसी है। ये वही राज्य हैं जहां गर्मी सबसे ज्यादा सितम ढाती है। लेकिन एसी भी कोई जादू की छड़ी नहीं है। एसी कमरे को ठंडा करता है, लेकिन बाहर की हवा को और गर्म। यानी एसी चलाने से हम खुद तो बच जाते हैं, पर पूरे शहर की गर्मी बढ़ती जाती है। सवाल-6: वार्म नाइट्स से निपटने के लिए क्या करना चाहिए? जवाब: CEEW ने अपनी रिपोर्ट में भारत सरकार से सिफारिश की है कि कुछ जरूरी सुझाव अपने हीट एक्शन प्लान में शामिल करें… 1. ज्यादातर प्लान सिर्फ दिन की लू पर फोकस करते हैं। जबकि अब गर्म रातों, भारी उमस को भी प्लान में शामिल करना होगा। राज्यों को मौसम विभाग के पूर्वानुमान और आंकड़ों का इस्तेमाल कर बिजली की मांग और बीमारियों से लड़ने की तैयारी करनी चाहिए। 2. साल 2024 से लू को स्टेट डिजास्टर मिटिगेशन फंड यानी SDMF के तहत फंडिंग के लिए शामिल किया गया है। राज्य इस पैसे का इस्तेमाल कर कूलिंग शेल्टर और अलर्ट सिस्टम बना सकते हैं। इसके अलावा शहरों में पेड़-पौधे या हरियाली बढ़ाने पर जोर दे सकते हैं। 3. जिन राज्यों के आधे से ज्यादा जिले हीट की वजह से हाई-रिस्क पर हैं, उन इलाकों को 'राज्य-विशिष्ट आपदा' घोषित करनी चाहिए। ऐसा करने से SDRF का अतिरिक्त 10% फंड अनलॉक हो जाता है, जिसका इस्तेमाल गर्मी से होने वाली मौतों, खेती के नुकसान और इमरजेंसी ट्रेनिंग के लिए किया जा सकता है। 4. जैसे ही तापमान एक तय सीमा को पार करे, मजदूरों के खातों में तुरंत पैसा पहुंच जाए ताकि उन्हें भीषण गर्मी में काम न करना पड़े। नागालैंड और अहमदाबाद (SEWA) में यह प्रयोग सफल हो चुका हैं। 5. अगर भारत अगले 10 साल में AC की एनर्जी एफिशिएंसी को दोगुना कर दे, तो उपभोक्ताओं के 2.2 लाख करोड़ रुपए बच सकते हैं। इससे न केवल लोगों के बिजली बिल कम होंगे, बल्कि पावर ग्रिड पर दबाव भी कम होगा और गंभीर पावर कट की स्थिति से बचा जा सकेगा। वार्म नाइट्स के दौरान आपको ORS, नींबू पानी और छाछ जैसे पेय पदार्थ पीते रहना चाहिए, जिससे शरीर की कूलिंग प्रणाली को मदद मिले। रात को सोने से पहले छत और दीवार पर पानी छिड़कें, इससे कंक्रीट की संग्रहीत गर्मी जल्दी निकलती है। सूती और हल्के कपड़े पहनें। बुजुर्गों और बच्चों पर ख्यास ध्यान दें। यह स्टोरी दैनिक भास्कर में फेलोशिप कर रहे आकाश कुमार ने लिखी है। ----------------------------------- मार्च में गर्मी ने 15 साल का रिकॉर्ड तोड़ा:14 शहरों में 40 डिग्री के पार क्यों पहुंचा पारा; अप्रैल-मई में कैसी गर्मी पड़ेगी 2026 की फरवरी पिछले 125 सालों में सबसे गर्म और सूखी रही। अब मार्च में भी मौसम के वही तेवर बरकरार हैं। मार्च की गर्मी ने दिल्ली में 50 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात के 14 शहरों में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। पूरी खबर पढ़ें…
तमिलनाडु की 234 सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होनी है। सरकार बनाने के लिए 118 सीटें चाहिए। मुकाबला DMK और AIADMK के बीच है। एक तरफ CM एमके स्टालिन का द्रविड़ियन मॉडल और उनकी पॉपुलर योजनाएं हैं, दूसरी तरफ जयललिता की विरासत संभाल रही AIADMK और हिंदुत्व के सहारे पैर जमाने की कोशिश कर रही BJP का गठबंधन है। 20 दिन की चुनावी कवरेज के दौरान दैनिक भास्कर की टीम नॉर्थ तमिलनाडु में चेन्नई और वेल्लोर, वेस्ट में तिरुपुर, साउथ में मदुरै, रामनाथपुरम और सेंट्रल रीजन में त्रिची पहुंची। आम लोगों, सीनियर जर्नलिस्ट और पॉलिटिकल एक्सपर्ट के जरिए ये 3 बातें समझ आईं… 1. तमिलनाडु में स्टालिन सरकार की वापसी हो सकती है। DMK गठबंधन को 120 से 140 सीटें मिल सकती हैं। इनमें DMK को 100 से 110, कांग्रेस को 10 से 15 और गठबंधन की बाकी पार्टियों को भी 10 से 15 सीटें मिल सकती हैं। 2. दूसरी बड़ी पार्टी AIADMK के गठबंधन को 90 से 100 सीटों मिलने के आसार हैं। AIADMK को 70 से 80 सीटें मिल सकती हैं। 27 सीटों पर लड़ रही BJP का खाता खुलना मुश्किल है, लेकिन पार्टी ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया, तो 5 तक सीटें मिल सकती हैं। कोयंबटूर साउथ, तिरुनेलवेली, नागरकोइल, मोडाकुरिची और कारैकुडी सीट पर जीत के ज्यादा चांस हैं। गठबंधन की बाकी पार्टियों को 5 से 10 सीटें मिल सकती हैं। 3. तमिल फिल्मों से सुपरस्टार थलापति विजय की नई पार्टी TVK की एंट्री फीकी दिख रही है। पार्टी को 5 से 15 सीटें मिल सकती हैं। हालांकि पार्टी का वोट शेयर 12% रह सकता है। स्टालिन की वापसी की वजहें मजबूत गठबंधन, महिलाओं में पॉपुलर योजनाएं और स्टालिन की इमेज AIADMK-BJP क्यों पीछे AIADMK में झगड़ा, हिंदुत्व कार्ड का फेल होना, स्टालिन को घेर नहीं पाए थलापति विजय का किंगमेकर बनना क्यों मुश्किल एक्सपर्ट्स की रायस्टालिन ने चुनाव को तमिलनाडु Vs दिल्ली बनाया ………………………….तमिलनाडु से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़िए… लोग बोले- हिंदी हम पर बोझ, तमिल हमारी मां भारत के 28 राज्यों में तमिलनाडु इकलौता है, जिसने अपने यहां तीन भाषा फॉर्मूला लागू नहीं किया। इसका असर चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही दिखने लगता है। बिल्डिंग पर तीन भाषाओं तमिल, हिंदी और अंग्रेजी में बोर्ड लगा है। करीब आधा किमी दूर चेन्नई कॉर्पोरेशन की बिल्डिंग है। इस पर लगे बोर्ड से हिंदी गायब है। यहां के लोग तमिल भाषा को लेकर इमोशनल हैं। चेन्नई में मिलीं 40 साल की विजयलक्ष्मी कहती हैं, ‘तमिल मां की तरह है। हम इसमें स्वाभिमान देखते हैं।’ पढ़िए पूरी खबर...
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की दिशा में बड़ा कदम, भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह पहुंचेगा वॉशिंगटन
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह वॉशिंगटन पहुंचने वाला है। राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।
भारत की सभी मस्जिदों में महिलाएं बिना रुकावट नमाज पढ़ने जा सकेंगी या नहीं? दाऊदी बोहरा समाज की लड़कियों का खतना क्या गैर-कानूनी हो जाएगा? क्या दूसरे धर्म में शादी करने के बाद भी पारसी महिलाएं अग्नि मंदिर में जा पाएंगी? इन सभी सवालों के जवाब तय होंगे सबरीमाला पर फैसले से। सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की संवैधानिक पीठ सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश मामले पर सुनवाई कर रही है। इसके साथ धार्मिक आस्था से जुड़े 66 मामले और जुड़े हैं। इसी महीने फैसला आने की उम्मीद है। भगवान अयप्पा के जन्म से लेकर सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की कानूनी लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के व्यापक असर की पूरी कहानी; जानेंगे मंडे मेगा स्टोरी में… ***** ग्राफिक्स: दृगचंद भुर्जी और अजीत सिंह ------ यह खबर भी पढ़िए… गजनवी ने सोमनाथ शिवलिंग के टुकड़े मस्जिद में लगवाए:6 टन सोना लूटा; नेहरू मंदिर बनवाने के इतने खिलाफ क्यों थे 6 जनवरी 1026 यानी आज से करीब 1 हजार साल पहले। कश्मीर, मथुरा और ग्वालियर में लूटपाट कर चुका महमूद गजनवी भारत पर अपने आखिरी हमले के लिए सोमनाथ पहुंचा। सोमनाथ के ब्राह्मणों ने कहा, 'शक्तिशाली सोमेश्वर ने भारत के देवताओं के अपमान का बदला लेने इन मुसलमानों को अपने पास बुलाया है।' पूरी खबर पढ़िए
मदुरै से करीब 15 किमी दूर तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी है। इसकी तलहटी में भगवान मुरुगन का मंदिर है और शिखर पर सूफी संत सिकंदर बदुशा की दरगाह। दरगाह के पास दीपम (कांसे से बना बड़ा दीपक) जलाने के विवाद से ये इलाका दक्षिण भारत का ‘अयोध्या’ बन चुका है। बीते 6 महीने में हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता कई बार यहां जमा हो चुके हैं, इसलिए पुलिस ने इलाके की किलेबंदी कर रखी है। भीड़ जुटाने की मनाही है। मामला हाईकोर्ट में है। तमिलनाडु में भगवान मुरुगन वैसे ही पूजे जाते हैं, जैसे उत्तर भारत में भगवान राम, महाराष्ट्र में गणपति और बंगाल में मां काली। मान्यता है कि तिरुपरनकुंद्रम उनके छह पवित्र निवासों में पहला है, जहां उन्होंने देवयानी से विवाह किया था। इसीलिए ये मंदिर दक्षिण भारत में शादी से जुड़ी मुरादें पूरी करने के लिए मशहूर है। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोटिंग हैं। उससे पहले ही तिरुपरनकुंद्रम धार्मिक अधिकारों की लड़ाई का अखाड़ा बन चुका है। तमिलनाडु में हिंदू-मुस्लिम की राजनीति पहले कभी नहीं हुई। फिर भी BJP ने इसे मुद्दा बनाने की कोशिश की है। 1 दिसबंर को मद्रास हाईकोर्ट ने पहाड़ी के शिखर पर दीपम जलाने की अनुमति दी थी। DMK ने इसे चुनौती दी। पहाड़ी पर चढ़ने की कोशिश कर रहे तमिलनाडु BJP अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन और सीनियर लीडर एच. राजा समेत 113 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। 1 मार्च को PM मोदी भी मंदिर में दर्शन के लिए आए थे। छोटा सा कस्बा हिंदुत्व की प्रयोगशाला, 91% हिंदू आबादी2011 की जनगणना में तिरुपरनकुंद्रम की आबादी 48,810 थी। ये बढ़कर करीब 70 हजार हो गई है। 91.8% आबादी हिंदू है और 3.6% मुस्लिम। मंदिर के आसपास की गलियों में हिंदू-मुस्लिम मिलकर रहते हैं। ऐसा भी नहीं है कि कस्बे में धर्म के आधार पर इलाके बंटे हों, लेकिन मंदिर के पास जाते ही ये बंटवारा दिखने लगता है। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर दरगाह का रास्ता बंद कर दिया है। आने-जाने वालों से पूछताछ होती है। एक पुलिसवाले ने हमें भी सीढ़ियों से पहले रोक लिया। बोला- आगे जाने के लिए ऊपर से परमिशन लेनी होगी। परमिशन के लिए थाना इंचार्ज को फोन किया, तो उन्होंने कहा, ‘आदेश है कि मीडिया और गैर मुस्लिमों को दरगाह तक नहीं जाने देना है।’ ‘विवाद शुरू हुए डेढ़ साल हो गए, मुस्लिमों से रिश्ते नहीं बदले’दरगाह जाने के रास्ते में जयराजमणि मिले। ऑटो ड्राइवर हैं। कहते हैं, ‘18 महीने से विवाद शुरू हुआ है। माहौल थोड़ा अलग हो गया है। हमेशा मंदिर में ही दीप जलाया गया है। वही परंपरा आज भी है। एक-दो साल से अचानक मांग होने लगी कि दीपम दरगाह के पास जलाया जाना चाहिए। इससे तो माहौल खराब ही होगा न।’ ‘मुस्लिमों से हमारे रिश्तों में कोई बदलाव नहीं आया है। BJP और RSS वोट के लिए इसे हवा दे रहे हैं, लेकिन हमारे लिए ये मुद्दा नहीं है। हमारे लिए असली सवाल यह है कि चुनाव कौन जीतेगा, DMK या AIADMK। इस सीट से DMK ने कृथिका थंगपंडियान और AIADMK ने मौजूदा विधायक वीवी राजन चेल्लपा को टिकट दिया है।' ‘दीपम पहाड़ी पर ही जले, दरगाह नाजायज’मंदिर के सामने 45 साल से मालाएं बेच रहीं प्रसन्नकुमारी ने यहां का माहौल बदलते देखा है। वे कहती हैं ‘मैं तिरुपरनकुंद्रम में हो रहे अन्याय पर चुप नहीं रह सकती। DMK सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने का दावा करती है। कार्तिगई (तमिल हिंदुओं का त्योहार, जब घरों और मंदिरों में दीये जलाए जाते हैं) के समय सैकड़ों श्रद्धालुओं को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोक दिया। वे पहाड़ी पर बने दीपस्तंभ पर दीप जलाने जा रहे थे।’ मंदिर के सामने मिले सुंदरमूर्ति करीब 40 साल से यहां आ रहे हैं। दीपम के मसले पर तेज आवाज में कहते हैं, ‘ये मुद्दा बिल्कुल सही है। दीपम पहाड़ी के शिखर पर ही जलाया जाना चाहिए। ये हमारे लिए भावनात्मक मुद्दा है। दरगाह नाजायज है।’ पी. मुरुगन की पीढ़ियां मंदिर में रहते आई हैं। उनका नाम भगवान मुरुगन के नाम पर रखा गया। पेशे से टेलर मुरुगन की राय सुंदरमूर्ति से अलग है। वे कहते हैं, ‘यह सिर्फ उन लोगों का मुद्दा है, जो समाज में फूट डालना चाहते हैं। हिंदू हो या मुस्लिम हम हर त्योहार साथ मनाते हैं। मंदिर का उत्सव हो या दरगाह का, हम वहां जाते हैं और वे यहां आते हैं।’ फिर अचानक इतना बड़ा मुद्दा क्यों बन गया? मुरुगन जवाब देते हैं, ‘यह चुनाव से जुड़ा मामला है। कुछ लोग धर्म का इस्तेमाल कर वोट लेना चाहते हैं। बाहर से लोगों को लाकर विरोध करवाया जा रहा है, ताकि ऐसा लगे कि हिंदू और मुस्लिम आपस में लड़ रहे हैं।’ मुस्लिम बोले- हमारे दिलों में कोई बैर नहीं, लोग विवाद से थक चुकेमुरुगन के पड़ोस में रहने वाले सैयद इब्राहिम मस्जिद से नमाज पढ़कर निकले थे। हमें अपनी कपड़े की दुकान पर ले गए। वे कहते हैं, ‘सदियों से यह पहाड़ी शांति और सौहार्द का प्रतीक रही है। एक तरफ भगवान मुरुगन का मंदिर है और ऊपर पवित्र दरगाह। हमारे दिलों में इस विवाद का कोई असर नहीं पड़ा है। यहां के लोग सच्चाई जानते हैं। सरकारी रिकॉर्ड में भी यह मामला साफ है।’ जैनुलाबुद्दीन 40 साल पहले तिरुपरनकुंद्रम में आकर बसे थे। वे कहते हैं कि मैंने इस विवाद के बारे में कभी नहीं सुना। यहां हिंदू दरगाह जाते हैं और मुस्लिम मंदिर के रथ उत्सव में शामिल होते हैं। परिवार की तरह साथ रहते हैं।’ क्या इस विवाद का असर वोटिंग पैटर्न पर पड़ेगा? जैनुलाबुद्दीन जवाब देते हैं, ‘कुछ लोग प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग इससे थक चुके हैं। हम चाहते हैं कि चुनाव पानी, सड़क और रोजगार जैसे मुद्दों पर हो, न कि इस बात पर कि दीप कहां जलाया जाए।’ दीपम जलाने की मांग के पीछे हिंदू मुन्नानी संगठनहिंदू मुन्नानी नाम का संगठन दीपम को दरगाह के पास जलाने की मांग उठाता रहा है। वही इस मामले को कोर्ट में ले गया। संगठन के अलगारसामी सेल्वाराज 15 साल से इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं। कई बार दरगाह के पास दीपम जलाने की कोशिश करते हुए हिरासत में लिए गए हैं। उन पर 12 FIR दर्ज हैं। सेल्वाराज RSS और BJP के समर्थक हैं। वे दावा करते हैं कि PM मोदी 1 मार्च को मंदिर आए थे, तब मैंने उनके स्वागत में 1 लाख रुपए खर्च कर पूरे मदुरै में पोस्टर लगवाए थे। सेल्वाराज कहते हैं- ये पहाड़ी भगवान मुरुगन की है। इस पर हिंदुओं का ही हक है। ऊपर बना स्ट्रक्चर गैरकानूनी है और हटकर रहेगा। DMK से जुड़े नेताओं ने तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी को सिकंदर हिल कहकर विवाद पैदा किया। हमने सेल्वाराज से पूछा कि ये पहाड़ी भगवान मुरुगन की है, इसके समर्थन में आपके पास क्या सबूत हैं? सेल्वाराज कहते हैं, ‘तमिल साहित्य साबित करता है, लंदन से लेकर मद्रास हाईकोर्ट तक अदालतों ने माना है कि यह पहाड़ी भगवान मुरुगन की है। तमिल राजाओं के समय से लेकर आज तक के प्रशासनिक रिकॉर्ड भी यही पुष्टि करते हैं।’ एक्सपर्ट बोले- तमिलनाडु में हिंदू-मुस्लिम की राजनीति कभी नहीं चलीसीनियर जर्नलिस्ट डी. सुरेश कुमार मंदिर-दरगाह विवाद पर कहते हैं, ‘तमिलनाडु में हिंदू-मुस्लिमों के बीच विवाद की स्थिति नहीं रही। द्रविड़ राजनीति के बड़े किरदारों पेरियार, अन्नादुरै, करुणानिधि, जयललिता जैसे नेताओं ने कभी विवाद की राजनीति को हवा नहीं दी। DMK कहता है- वुन्द्रै कुडम, उर्वदे देवम। मलतब कि हम सब एक हैं और हमारे देवता एक ही हैं। तमिलनाडु के मुसलमान भी तमिल बोलने वाले ही हैं। उर्दू बोलने वाले बहुत कम हैं।’ वहीं, स्थानीय पत्रकार राहुल कहते हैं कि तिरुपरनकुंद्रम मंदिर विवाद का चुनाव में खास असर नहीं होगा। यहां लोग धार्मिक हैं। हर गली-नुक्कड़ पर मंदिर है, लेकिन लोग राजनीति में धार्मिक मुद्दे शामिल करने को पसंद नहीं करते। ………………………….तमिलनाडु से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़िए…लोग बोले- हिंदी हम पर बोझ, तमिल हमारी मां भारत के 28 राज्यों में तमिलनाडु इकलौता है, जिसने अपने यहां तीन भाषा फॉर्मूला लागू नहीं किया। इसका असर चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही दिखने लगता है। बिल्डिंग पर तीन भाषाओं तमिल, हिंदी और अंग्रेजी में बोर्ड लगा है। करीब आधा किमी दूर चेन्नई कॉर्पोरेशन की बिल्डिंग है। इस पर लगे बोर्ड से हिंदी गायब है। यहां के लोग तमिल भाषा को लेकर इमोशनल हैं। चेन्नई में मिलीं 40 साल की विजयलक्ष्मी कहती हैं, ‘तमिल मां की तरह है। हम इसमें स्वाभिमान देखते हैं।’ पढ़िए पूरी खबर...
इटली में बड़ी वारदात: दो सिख युवकों की गोली मारकर हत्या, भारतीय समुदाय में मचा हड़कंप
इटली के कोवो में दो भारतीयों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना तब हुई जब वे एक ऐसे गोदाम से बाहर निकल रहे थे, जिसका इस्तेमाल पूजा स्थल के तौर पर किया जाता था। स्थानीय मीडिया ने रविवार को यह जानकारी दी।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति भारत के लिए रवाना, सोमवार को पीएम मोदी के साथ करेंगे शिखर वार्ता
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग रविवार को भारत के लिए रवाना हुए। दो देशों के दौरे में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति भारत के बाद शिखर वार्ता के लिए वियतनाम भी जाएंगे। इस यात्रा में मिडिल ईस्ट में युद्ध से पैदा हुई ग्लोबल एनर्जी मार्केट की अनिश्चितताओं के बीच सप्लाई चेन को स्थिर करने पर ध्यान दिया जा सकता है।
उत्तर कोरिया ने समुद्र की ओर दागीं कई बैलिस्टिक मिसाइलें, जापान और दक्षिण कोरिया अलर्ट
पश्चिम एशिया में संकट के बीच उत्तर कोरिया ने रविवार को समुद्र की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी। ये मिसाइलें रविवार सुबह उत्तर कोरिया के पूर्वी सिनपो इलाके से दागी गईं
भारत ने होर्मुज घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की, विदेश सचिव के साथ ईरान के राजदूत की बैठक
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों पर हुई गोलीबारी की घटना के संबंध में ईरान के भारत में राजदूत मोहम्मद फथली को विदेश सचिव विक्रम मिसरी के साथ बैठक के लिए बुलाया गया था।
ईरान का सख्त ऐलान: युद्ध खत्म होने तक होर्मुज स्ट्रेट पर रहेगा नियंत्रण
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एसएनएससी) ने कहा है कि जब तक युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित नहीं हो जाती
क्यूबा में ईंधन संकट गहराया: अमेरिकी प्रतिबंध से बिगड़ी मानवीय स्थिति
जनवरी के आखिर में वॉशिंगटन द्वारा तेल की सप्लाई रोकने के बाद क्यूबा की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त ईंधन नहीं मिल रहा है ईंधन के अभाव में इन तीन महीनों में वहां मानवीय स्थिति एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है
हिजबुल्लाह का अल्टीमेटम: इजरायली उल्लंघन पर करारा जवाब तय
हिजबुल्लाह के नेता नईम कासिम ने कहा कि इजरायल के साथ संघर्ष-विराम का मतलब पूरी तरह से हमले बंद होना चाहिए
पहले मम्मी-पापा से बात करना कई बार टाल देता था, लेकिन अब वे बात करने के लिए इस दुनिया में ही नहीं रहे। मेरी सभी से गुजारिश है, अगर आप भी अपने मम्मी-पापा से बात करना टालते हैं, तो ऐसा न करें। मैं मोहित गुलाटी लुधियाना का रहने वाला हूं। जालंधर से आईटी की पढ़ाई पूरी करने के बाद पुणे की एक कंपनी में इंजीनियर हूं। जिंदगी पूरी रफ्तार से चल रही थी- वही रोज का काम, जिम्मेदारियां। लेकिन इस भाग-दौड़ के बीच मम्मी-पापा से बात होती रहती थी। कई बार काम के दबाव में उनका फोन नहीं उठा पाता था, तब अंदाजा नहीं था कि ये 'टालना' एक दिन उम्रभर का पछतावा बन जाएगा। वृंदावन में उस नाव हादसे ने मेरा सब कुछ छीन लिया। मेरे मम्मी-पापा भी उसी नाव पर सवार थे और उस हादसे ने उनकी जान ले ली। 10 अप्रैल को मैं ऑफिस में था… मेरे एक पड़ोसी ने फोन कर बताया कि- आपके मम्मी-पापा नहीं रहे। नाव हादसे में उनकी भी जान चली गई है। एक पल तो लगा यह सब झूठ है। इसी बीच, मेरी बहन दामिनी ने मुझे फोन किया। उसने रोते-रोते बताया- मम्मी-पापा नहीं रहे। मैंने तुरंत फोन काटा और अपने जीजा जी को फोन लगााया। कहा- ठीक से पता कर लीजिए, कोई गलतफहमी तो नहीं है। वो बोले- मरने वालों की लिस्ट में मम्मी-पापा का भी नाम है। इतना सुनते ही, मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। दरअसल, उस हादसे में एक आंटी बच गई थीं, उन्होंने अपने बच्चों को फोन करके बताया। उसके बाद हादसे में मारे गए परिवारों को पता चला। मैं बदहवास ऑफिस से सीधे पुणे एयरपोर्ट पहुंचा। आंखों के सामने बार–बार मम्मी-पापा का चेहरा आ रहा था। लगा शरीर में जान ही नहीं है, अचानक एयरपोर्ट के अंदर गिर गया। एयरपोर्ट स्टाफ ने मुझे संभाला और पानी पिलाया। वहां से किसी तरह दिल्ली पहुंचा। वृंदावन जाना चाह रहा था, लेकिन पता लगा कि सभी शव दिल्ली लाए जा रहे हैं। वृंदावन के स्थानीय विधायक ने शवों को भेजने में बड़ी मदद की थी। जब मम्मी-पापा का शव दिल्ली आया तो बहुत रोया। उन्हें लेकर लुधियाना चल पड़ा। रास्तेभर मां की बातें, उनकी आवाज, उनकी हंसी याद आ रही थीं। सच कहूं तो, आज जब आपसे मम्मी-पापा की यादें साझा करने को तैयार हो रहा था, तो शब्द गले में अटक जा रहे थे। मुझमें हिम्मत नहीं थी कि आपसे बात करूं। मैंने अपनी बहन दामिनी से साफ कह दिया कि अकेले इंटरव्यू नहीं दे पाऊंगा। ‘बहन दामिनी ने जब कहा कि पत्रकार काफी दूर से आई हैं, तो मैंने खुद को संभाला। हमें लगा कि हमारी आपबीती के जरिए उन बच्चों तक एक संदेश पहुंचना चाहिए जो करियर की दौड़ में इतने मशरूफ हो गए हैं कि अपने मां-बाप कॉल तक नहीं उठा पाते। मेरी सबसे एक ही विनती है- कुछ भी करें, अपने मम्मी-पापा से रोज बात जरूर करें।’ मेरी मां मुझे हर दिन कई सारे वॉयस नोट्स यानी संदेश रिकॉर्ड करके भेजती थीं। अब मैं बार-बार उन्हें सुन रहा हूं। अब उनकी आवाज सुनने का बस यही जरिया बचा है। दरअसल, अपनी कंपनी में शाम से देर रात तक क्लाइंट्स की कॉल्स में उलझा रहता था। मां इस बात को अच्छे से समझती थीं, इसलिए उन्होंने एक रास्ता निकाला था। वे मुझे कॉल करके परेशान नहीं करना चाहती थीं, वॉयस नोट्स भेज दिया करती थीं। व्यस्त बेटे से जुड़े रहने का उन्होंने यह अपना एक तरीका बना लिया था। उन वॉयस नोट्स में मां की ममता गूंजती थी। वे बड़े प्यार से कहतीं- 'बेटा, जब भी काम से फुर्सत मिले तो एक बार फोन कर लेना।' वे अक्सर पूछतीं कि कहां हूं? क्या कर रहे हूं? खाना समय पर खाया या नहीं? और आखिर में हमेशा की तरह ढेर सारी दुआएं देना नहीं भूलतीं। अभी कुछ ही दिन पहले की बात है, मैं किसी काम की उलझन में फंसा हुआ था। उस वक्त मम्मी का फोन आया। मैं उठा नहीं पाया। उसके कुछ देर बाद उनका एक वॉयस नोट आया, जिसमें उन्होंने बड़े प्यार से कहा था- ‘जब मैं नहीं रहूंगी न, तो तरस जाएगा मेरी आवाज सुनने को।’ मां का वो वॉयस मैसेज सुनकर मेरा गला भर आया और मैं रो पड़ा। जब मैंने उन्हें वापस फोन किया, तो वो हंस पड़ीं। दिनभर में उनका तीन बार फोन आता था… पर अब मां का फोन कभी नहीं आएगा। एक झटके में मेरा सब कुछ उजड़ गया। मेरी छोटी बहन दामिनी बेंगलुरु में सीए है, हम दोनों के बीच सिर्फ दो साल का फर्क है। घर में मैं बड़ा हूं। हमारे पास मम्मी-पापा बारी बारी से आकर रहते थे। मम्मी जब भी हमारे पास आतीं तो हम खुश होते थे कि अब तरह-तरह के पराठे खाने को मिलेंगे। वह हमारे पास कभी अचार खत्म नहीं होने देती थीं। यहां तक कि आचार कूरिअर से भिजवा देतीं। मेरी बच्चे कहते नानी हाउस से अचार आया है। दरअसल, बहन के बच्चे नानी हाउस कहते थे, तो मेरे बच्चे भी वही सीख गए थे और वे भी नानी हाउस कहते। मेरे बच्चे मम्मी को दादी न कहकर नानी कहते थे। इस समय साथ में हमारे बच्चे भी आए हुए हैं। यहां उन्हें मम्मी के बिना बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा है। वे बार-बार कह रहे हैं कि नानी हाउस से वापस चलो। यहां नानी नहीं है। यह बस यही बार-बार सोच रहा हूं कि अगर भगवान के दर पर जाकर भी ऐसा हो सकता है, तो उनके यहां कौन जाएगा? भगवान भला इस तरह राधे-राधे जपने वाले अपने श्रद्धालु को कैसे मार सकते हैं? मम्मी-पापा पहली बार बांके बिहारी के दर्शन करने गए थे। बहन ने तो तय कर लिया था कि वह कभी भी वृंदावन नहीं जाएगी। इस दौरान हमारे घर लोग आते तो बहन वही बात दोहराती, तब वे कहते कि- परेशान मत हो। तुम्हारे मम्मी-पापा ने कितनी अच्छी जगह मौत पाई है। वे राधे-राधे करते हुए इस दुनिया से गए हैं, लेकिन हम उनकी बातों से सहमत नहीं हो पाते। आखिर भगवान जब अपने भक्त की रक्षा नहीं कर सकते फिर काहे का भगवान? लेकिन अब धीरे-धीरे मन शांत हो रहा है। मैंने दामिनी से बात की और तय किया है कम से कम एक बार उस घाट पर चलेंगे, जहां मम्मी-पापा आखिरी बार एक साथ थे। वहां चलकर एकांत में बैठेंगे और उन्हें महसूस करेंगे। आपको पता है कि पापा वृंदावन नहीं जा रहे थे। मम्मी उन्हें जबरदस्ती लेकर गई थीं। वह पापा से कह रही थीं कि साथ इसलिए चल रही हूं, ताकि वहां आपको रोटी-पानी दे सकूं। दरअसल, मम्मी पापा को बहुत प्यार करती थीं। उन्हें हमेशा लगता था कि पापा उनके बिना अकेले कैसे रहेंगे? कैसे खाना खाएंगे? इसलिए जहां भी पापा जाते, मम्मी साथ जाती थीं। उस दिन जब वे जा रहे थे तो मम्मी ने हमें बताया था कि मोहल्ले वालों के साथ बस से पापा को लेकर वृंदावन जा रही हूं। वृंदावन पहुंचकर मम्मी ने पापा का एक वीडियो भेजा था कि- देखो नाव में बैठकर तुम्हारे पापा कैसे राधे-राधे कर रहे हैं। पापा को पानी से बहुत डर लगता था। इसलिए वे कभी नदी वगैरह में नहीं जाते, न ही नाव में बैठते थे। इसलिए मम्मी वीडियो दिखाकर बताना चाह रही थीं कि- देखो तुम्हारे पापा नाव में बैठकर कैसे मस्ती में गा रहे हैं। उसके बाद नाव पलट गई थी। अब जिंदगी में बस दो चीजें रह गई हैं। एक अफसोस और दूसरे पापा जैसा बनने की तमन्ना। अफसोस इस बात का है कि उस दिन काश मम्मी-पाप लाइफ जैकेट पहने होते। काश, जो चार लोग दूसरी नाव में शिफ्ट किए गए थे, उसमें मेरे मम्मी-पापा भी होते। काश नाव पुल से टकराने से पहले घूम गई होती, जिससे हादसा टल जाता। काश मम्मी-पापा मेरे पास पुणे आ जाते, क्योंकि उन्हें पुणे आना था। हमने योजना बनाई थी कि पुणे से एक साथ उज्जैन और इंदौर घूमने चलेंगे। अब वो सारी बातें दिमाग में चल रही हैं। दूसरी चीज यह कि- पापा की तरह बनना चाहता हूं। पापा पूरे दिन लोगों की मदद करते थे। उनके काम करवाने में लगे रहते थे। यह जिस पार्क में बैठकर हम बात कर रहे हैं, इसे भी पापा ने बनवाया था। इसकी देखरेख भी वही करते थे। लोगों के लिए साल में एक बार जगराता करवाते थे। मोहल्ले में हजारों औरतें हैं, जिनकी पेंशन पापा ने लगवाई थी। दरअसल, हमारी सोसाइटी का नाम अर्बन स्टेट 2 है, जिसका मुखिया पापा को चुना गया था। मुझे याद है कि पिछले साल जब मम्मी-पापा के पास आया था तो अपना टिफिन भूल गया था। मैंने उन्हें फोन किया तो लगातार उनका फोन बिजी जा रहा था। जब बात हुई तो पता चला कि वह किसी का आधार कार्ड बनवाने साथ गए हुए थे। इस तरह पापा लोगों की मदद करने में लगे रहते। मम्मी-पापा कभी पैसे के पीछे नहीं भागते थे। हम शुरू से कोई बहुत अमीर नहीं थे। मुझे इंजीनियरिंग कराने और दामिनी को सीए बनाने के लिए मम्मी ने अपने गहने तक बेच दिए थे। मम्मी-पापा ने जैसे भी हो हम भाई-बहन को अच्छे स्कूल में पढ़ाया। पापा का बिजनेस बहुत अच्छा नहीं चल रहा था, तो हमारी फीस भरने के लिए मम्मी ने घर में बूटीक काम शुरू कर दिया था। घर पर ही कपड़े सिलतीं और बेचती थीं। मेरे सामने की बात है। एक बार मम्मी ने एक सूट सिला था। उसे बनाने में 275 रुपए लगे थे, लेकिन उन्होंने 300 में बेचा, क्योंकि उन्हें हमारी फीस भरनी थी। इस तरह मम्मी ने हमारे लिए बहुत मेहनत की थी। आखिर में मुझे सरकार से बहुत शिकायत है। कहना चाहता हूं कि वृंदावन जैसी धार्मिक जगहों पर हम सभी के माता-पिता जाते हैं। उनमें ज्यादातर बूढ़े होते हैं। कई बार वे मुसीबत में घबरा जाते हैं। सरकार ऐसी धार्मिक जगहों पर सख्त नियम बनाए। कम से कम वहां तो जरूर, जिन धार्मिक जगहों पर ज्यादा लोग जाते हैं। अगर आज हमारे मम्मी-पापा लाइफ जैकेट पहने होते तो बच जाते या नाव में सवार बच्चों का ख्याल रखा गया होता तो कम से कम वे जिंदा होते। (मोहित गुलाटी ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) ---------------------------------- 1- संडे जज्बात-मैंने 20 अपनों को गोली मारी:अपनों पर गोली चलाना आसान नहीं था, लेकिन बम-धमाके में साथियों की मौत ने मुझे झकझोर दिया था मैं शरतचंद्र बुरुदा हूं, ओडिशा के मलकानगिरी जिले के सरपल्ली गांव का रहने वाला। एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी हूं। 1990 के दशक के आखिर में जब मैंने पुलिस की नौकरी जॉइन की, तब ओडिशा के दंडकारण्य इलाके में नक्सलवाद अपने चरम पर था। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-उन्होंने हेलिकॉप्टर से लाश भेजी, हम ट्रेनें भर देंगे:दिल्ली वालों ने पीट-पीटकर मार डाला मेरा बेटा, क्योंकि हमारी शक्ल अलग है मैं अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर की रहने वाली मरीना नीडो हूं- नीडो तानिया की मां, जिसे दिल्ली में भीड़ ने पीट-पीटकर मार दिया। अगर ऐसी नफरत बढ़ती रही, तो किसी दिन हालात खतरनाक हो सकते हैं। हम बस इतना चाहते हैं कि- आप हमें समझिए। हम अलग दिखते हैं, लेकिन अलग नहीं हैं। हम भी इसी देश के हैं। मेरे बेटे को सिर्फ इसलिए मार दिया गया, क्योंकि उसका चेहरा आपसे अलग था। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति का भारत दौरा, द्विपक्षीय संबंधों में नए दौर का आगाज
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की रविवार से शुरू हो रही तीन दिवसीय भारत यात्रा को भारत और दक्षिण कोरिया के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने वाला अहम पड़ाव माना जा रहा है
अमेरिका-चीन के बीच कोल्ड वॉर 2.0 क्यूबा के आसमान में दिखा $240 मिलियन का अमेरिकी जासूसी ड्रोन
ट्रंप का ट्रुथ धमाका ईरान के साथ शांति समझौते की ओर बढ़े कदम, होर्मुज से नाटो तक दी बड़ी चेतावनी
अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत, फाइनल हुआ इस्लामाबाद में वार्ता का दिन!
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 20 अप्रैल को इस्लामाबाद में संभावित वार्ता आयोजित की जा सकती है। यदि यह बैठक होती है, तो यह दोनों देशों के बीच चल रहे गतिरोध को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
Trump-Iran Deal : होर्मुज खुलते ही बदले ट्रंप के तेवर,क्या खत्म होने वाला है ईरान के साथ युद्ध?
ईरान के आसमान में आधी रात को 'गायब' हुए चीनी विमान, तेहरान में लैंडिंग से दुनिया में खलबली
ट्रंप की चेतावनी- ‘डील फाइनल होने तक ईरान पर दबाव जारी’
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान एक जरूरी ग्लोबल शिपिंग रूट को फिर से खोलने पर राजी हो गया है। इसके साथ ही चेतावनी दी कि जब तक कोई बड़ा समझौता तय नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी सैन्य दबाव जारी रहेगा।
एरिज़ोना रैली में ट्रंप का दावा- ‘अर्थव्यवस्था तेज़, महंगाई पर जीत’
मेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एरिजोना में 'टर्निंग पॉइंट अमेरिका' के एक कार्यक्रम में अपनी आर्थिक उपलब्धियों की तारीफ की
ईरान का सख्त बयान—‘संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को देना कभी विकल्प नहीं था’
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को किसी दूसरे देश को हस्तांतरित नहीं करेगा और इसे अमेरिका भेजने पर कभी विचार भी नहीं किया गया था।
ट्रंप के अनुरोध पर लेबनान में अस्थायी युद्धविराम, नेतन्याहू ने दी मंजूरी
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के अनुरोध पर लेबनान में अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी है
चेन्नई की मिंट रोड पर छोटा-सा बिजनेस करने वाली सेल्वी की बेटी की शादी तय हुई, तो घर में एक अजीब किस्म की उठापटक शुरू हो गई। पैसे कम थे, लेकिन गोल्ड ज्वेलरी खरीदनी जरूरी थी। आखिर सेल्वी ने रास्ता निकाला। घर में रखी पुरानी ज्वेलरी में थोड़ा नया सोना मिलाया और बेटी के लिए नए गहने तैयार कराए। सेल्वी कहती हैं, ‘अगर हम ऐसा नहीं करते तो सामाजिक प्रतिष्ठा खराब होती है। कोई लोअर मिडिल क्लास या गरीब भी हो तो कम से कम 10-20 तोला सोना शादी में चढ़ाना ही होता है।’ सेल्वी की कहानी कोई अपवाद नहीं, यह तामिलनाडु का स्वभाव है। भारत का सबसे ज्यादा करीब 28% घरेलू सोना अकेले तमिलनाडु के लोगों की तिजोरियों और अलमारियों में रखा है। वजन में करीब 6,720 टन। ये अमेरिका के कुल सरकारी गोल्ड भंडार (8000 टन) के आस-पास है। जर्मनी, इटली और रूस जैसे देशों में राष्ट्रीय भंडार से कहीं ज्यादा। 23 अप्रैल को तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव की वोटिंग है। जहां अन्य राज्यों के चुनाव में कैश और शराब की छापेमारी का चलन है, तामिलनाडु में सोने की छापेमारी की जाती है। थलापति विजय जैसे नेता जीतने पर दुल्हनों को 8 ग्राम सोना और नवजात बच्चों को सोने की अंगूठी देने का वादा कर रहे हैं। AIADMK भी थलिक्कू थनगम यानी शादी के लिए सोना जैसी स्कीम ला चुकी है। इस स्टोरी में जानेंगे तमिलनाडु के लोगों में सोने की दीवानगी के पीछे की पूरी कहानी… प्राचीन तमिल साहित्य में संपन्नता पर असाधारण जोर मिलता है। तमिल ग्रंथ तिरुक्कुरल की एक पंक्ति कहती है- गरीबी पर पूरी दुनिया मजाक उड़ाती है। इस समाज में संपन्नता का पैमाना था- सोना। यहां की एक प्रसिद्ध कहानी का नाम ही शीलप्पद्दीगारम यानी ‘सोने की पायल’ है। यह कहानी कन्नगी नाम की स्त्री के सोने की पायल पर आधारित है। बुरे वक्त में पति की मदद के लिए वह अपना सोना आगे कर देती है। कहानी का सार एक पंक्ति में था- बुरे समय में सोना ही काम आता है। इसी से निकली स्त्री-धन की परंपरा। वह सोना जो विवाह के समय स्त्री को मिलता था और जो सिर्फ उसका था। कोई बैंक उसे नहीं छीन सकता था, कोई कानून उस पर दावा नहीं कर सकता था। मुसीबत में यही सोना परिवार की ढाल बनता था। जब तमिलनाडु में जमा होने लगा पूरी दुनिया का सोना करीब 2,000 साल पहले। रोमन साम्राज्य के सम्राट कैलिगुला अपनी तीसरी शादी की पार्टी दे रहे थे। शाम ढल चुकी थी और महल मशालों की रोशनी में आलोकित था। तभी सभी मेहमानों की नजरें एक गलियारे की तरफ मुड़ गईं, जहां से नई रानी लोलिया पॉलिना आ रही थीं। उनके कान, नाक, गले, उंगलियों, जूतों के साथ-साथ बालों में भी सैकड़ों पन्ने और मोती जड़े हुए थे। उस पार्टी में ‘प्लिनी द एल्डर’ नाम के एक इतिहासकार मौजूद थे। वो अपनी किताब नेचुरालिस हिस्टोरिया में लिखते हैं कि रोम हर साल भारत से आने वाले मोतियों, मसालों और कपड़ों के बदले भारी मात्रा में सोना लुटा रहा था। उनकी शिकायत थी- ‘हम भारत के मोतियों के बदले हर साल 5.5 करोड़ सेस्टर्टियस गंवा रहे हैं।’ यह सोना आता था तीन बंदरगाहों पर- चोल साम्राज्य का मायलापुर (जहां से कपड़े जाते थे), पांड्य वंश का अरिकामेडू (मोतियों का केंद्र) और चेर वंश का मुजिरिस (काली मिर्च का बड़ा बाजार)। इन तीनों बंदरगाहों पर हर साल 120 जहाज सोना लेकर आते थे। विलियम डार्लिंपल अपनी किताब द गोल्डन रोड में लिखते हैं कि चेर और पांड्य वंश ने रोम में अपने राजदूत तक तैनात कर दिए थे, ताकि रोम के व्यापार-घाटे की समस्या सुलझाई जा सके। हालत यह हो गई कि 70 ईस्वी में रोमन सम्राट वेस्पासियन को तमिल आयात के बदले सोना देने पर रोक लगानी पड़ी। तामिलनाडु के व्यापारियों ने दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य को आर्थिक रूप से झुकने पर मजबूर किया था। जब पश्चिमी रोमन साम्राज्य टूट गया और 640 ईस्वी में अरबों ने मिस्र पर कब्जा कर रोम की ओर जाने वाले रास्ते बंद कर दिए, तो तमिल व्यापारियों ने अपना रुख पूरब की ओर मोड़ लिया। पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम के शासनकाल में मामल्लापुरम बंदरगाह सुवर्णभूमि, यानी आज के म्यांमार, सुमात्रा, इंडोनेशिया और मलेशिया की ओर जाने वाले जहाजों का सबसे बड़ा अड्डा बन गया। 11वीं सदी में चोल वंश के राजा राजेंद्र चोल प्रथम ने 1025 AD में श्रीविजय साम्राज्य पर विशाल नौसैनिक हमला किया। सिर्फ युद्ध के लिए नहीं, बल्कि चीन तक जाने वाले व्यापारिक मार्गों पर एकाधिकार के लिए। सुमात्रा और मलेशिया के शासकों को हराकर वहां का खजाना तामिलनाडु के मंदिरों में भर दिया गया। यहीं से शुरू हुई एक ऐसी व्यवस्था, जो आधुनिक बैंकिंग की पूर्वज थी। गोल्ड बैंक की तरह काम करते थे तमिलनाडु के मंदिर पल्लव और चोल राजाओं ने समझ लिया था कि सोने को सबसे सुरक्षित रखना है तो मंदिर से बेहतर कोई जगह नहीं। मंदिर इतनी पवित्र संस्था था कि वहां से सोना चुराने की हिम्मत कोई नहीं जुटा सकता था। पांड्य राजाओं ने कोरकई जैसे बंदरगाहों से मिलने वाले रोमन सोने को मदुरई के मंदिरों में जमा किया। राजराजा चोल प्रथम ने तंजावुर के बृहदेश्वर मंदिर को सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि पूरे राज्य की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनाया। मंदिर की दीवारों पर दर्ज है कि राजा ने युद्ध में लूटा हुआ लगभग 230 किलो सोना और 125 किलो कीमती रत्न मंदिर के खजाने में जमा किए थे। यह सोना वहां बस पड़ा नहीं रहता था। मंदिर एक बैंक की तरह काम करते थे। जहां सोना जमा भी होता था और लोगों को व्यापार के लिए ब्याज पर कर्ज भी दिया जाता था। 19वीं और 20वीं सदी में इस मंदिर-बैंकिंग की विरासत को एक नया रूप दिया चेट्टिनाड के नट्टुकोट्टई चेट्टियार समुदाय ने। ये लोग म्यांमार, सिंगापुर और मलेशिया में जब व्यापार फैलाने लगे, तो उन्होंने एक क्रांतिकारी मॉडल विकसित किया। सोने के गहनों को गिरवी रखकर कर्ज देना। सोने की शुद्धता परखना और उसके आधार पर फैसले करना। मंदिरों को ही वह जगह बनाना जहां ब्याज दरें तय होती थीं और व्यापारिक झगड़े सुलझाए जाते थे। लोग इन चेट्टियारों पर सरकारी बैंकों से ज्यादा भरोसा करते थे। इसीलिए जब आजादी के बाद भारत की अर्थव्यवस्था का ढांचा बदला, तो इसी परंपरा पर मुथूट और मणप्पुरम जैसी गोल्ड लोन कंपनियां खड़ी हुईं। गरीब परिवार भी शादियों में 20-25 लाख का सोना खरीदते हैं चेन्नई में तीन पीढ़ियों से ज्वेलरी का बिजनेस करने वाले विकास मेहता कहते हैं कि तामिलनाडु में गोल्ड की डिमांड पूरे साल रहती है। साउथ इंडिया की किसी भी शादी में लोग कम से कम 3-4 हेवी गोल्ड ज्वेलरी पहनते ही हैं। अपर मिडिल क्लास एक शादी के लिए कम से कम 1 करोड़ तक का गोल्ड खरीदते हैं। लोअर मिडिल क्लास भी 20-25 लाख का गोल्ड तो खरीदते ही हैं। यहां शादी में दहेज का सोना सिर्फ दिया नहीं जाता। वह खुले तौर पर सबके सामने रखा जाता है। जो मेहमान आते हैं, वे सोना देखकर ही परिवार की हैसियत और समाज में रुतबा तय करते हैं। सोने की खरीदारी सिर्फ शादी तक सीमित नहीं है। विकास मेहता बताते हैं कि जन्म, एंगेजमेंट, गोदभराई, पोंगल, अक्षय तृतीया, नवरात्र, दिवाली- हर मौके पर सोना खरीदने का चलन है। यहां तक कि लड़की के जब पहली बार पीरियड्स शुरू होते हैं, उस मौके पर भी एक बड़ा आयोजन होता है और उसमें भी सोना चढ़ाने का रिवाज है। तमिल परिवारों में गोल्ड खरीदना एक निवेश जैसा है 20 साल से चेन्नई में ज्वेलरी का बिजनेस करने वाले रोशन कहते हैं कि तमिल परिवारों में बचपन से ही गोल्ड खरीदने को एक शौक के तौर पर नहीं, बल्कि एक जरूरत के तौर पर देखा जाता है। ‘लोग गोल्ड को अपने इन्वेस्टमेंट और सेविंग के नजरिए से देखते हैं, ताकि क्राइसिस में उसे बेचकर कैश ले सकें।’ यह बात आंकड़ों में भी दिखती है। तामिलनाडु के परिवारों के कुल कर्ज का लगभग 40% हिस्सा सिर्फ गोल्ड लोन का होता है। जहां सरकारी बैंक तमाम तरह के डॉक्यूमेंट्स मांगते हैं, वहीं मुथूट और मणप्पुरम जैसी कंपनियां 10-15 मिनट में सोने के बदले नकद दे देती हैं। दिसंबर 2024 तक, बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के पास गोल्ड लोन का कुल बकाया 1,72,000 करोड़ रुपये को पार कर चुका था। पिछले साल की तुलना में 71% की वृद्धि। 2020 में जब महामारी ने अर्थव्यवस्था को रोक दिया, तब भी यही सोना मध्यम वर्ग की ढाल बना। RBI ने गोल्ड लोन का LTV (लोन टू वैल्यू) रेश्यो 75 से बढ़ाकर 90 प्रतिशत कर दिया। लाखों परिवारों ने अपना सोना गिरवी रखकर उस मुश्किल दौर को पार किया। सोने की इसी दीवानगी को भुनाना चाहते हैं नेता तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सोने से जुड़ा सबसे प्रमुख वादा TVK के प्रमुख अभिनेता-राजनेता विजय ने किया है। उन्होंने सोने से जुड़े 2 प्रमुख वादे किए- अन्नन सीर थिट्टम: शादी करने वाली युवतियों खासकर गरीब परिवारों की दुल्हनों को 8 ग्राम सोना और सिल्क साड़ी देने का वादा। इसे ‘भाई का उपहार’ के रूप में पेश किया गया है। थाई मामन थंगा मोथिरम थिट्टम: तमिलनाडु में जन्म लेने वाले हर नवजात बच्चे को सरकारी आशीर्वाद के रूप में एक सोने की अंगूठी और बेबी वेलकम किट देने का वादा। ये वादे TVK के चुनावी घोषणा-पत्र में भी शामिल हैं। AIADMK ने भी पहले की ‘तालीक्कु थंगम’ योजना को जारी रखने और शादी में सोना देने का जिक्र किया है। चेन्नई की सेल्वी एक लाइन में बताती हैं- ‘मुसीबत में सोना बेचकर पैसा मिल जाता है।’ यही वह विश्वास है जो दो हजार साल से इस मिट्टी में गहरा धंसा है और चुनावी वादों में भी जाहिर हो रहा है। ------------- तमिलनाडु चुनाव से जुड़ी खबर भी पढ़िए… ‘हिंदी हम पर बोझ, तमिल हमारी मां’: स्टेशन के नाम पर काली स्याही, तमिल बोले- जो हिंदी थोपेगा, तमिलनाडु उसे रिजेक्ट करेगा 23 अप्रैल को तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग है। प्रचार के बीच एक रिपोर्टर ने CM स्टालिन से पूछा- केंद्र सरकार CBSE स्कूलों में 3 लैंग्वेज पॉलिसी लागू करेगी, हिंदी भाषा पढ़ना भी अनिवार्य होगा… स्टालिन ने फौरन जवाब दिया- ‘जब तक DMK है, तमिलनाडु में ऐसा नहीं होने देंगे।’ पूरी खबर पढ़िए…
पश्चिम बंगाल में ममता सरकार ने 7 मार्च से 'बांग्लार युवा साथी योजना' लागू की। 1500 रुपए की पहली किस्त भी जारी कर दी। दुर्गापुर की रहने वाली मोमिता ने फॉर्म भरा था, लेकिन खाते में पैसे नहीं आए। गुस्से से भरी मोमिता कहती हैं, ‘पैसों से ज्यादा हमें नौकरी की जरूरत है।‘ 21 साल की मोमिता के परिवार की माली हालत ठीक नहीं है, इसीलिए ग्रेजुएशन पूरा किए बिना पढ़ाई छोड़ दी और छोटा-मोटा काम करने लगीं। वे बहन के साथ काम से लौट रही थीं, तभी मुलाकात हुई। पढ़ाई दोबारा शुरू करने सवाल पर कहती हैं- ‘इतने कम पैसों में पढ़ाई कैसे कर पाएंगे।’ युवा साथी योजना चुनाव से ठीक पहले शुरू हुई है। चुनावी साल में ममता सरकार ने पंडितों और मौलवियों के भत्ते भी बढ़ाए हैं। लक्ष्मी भंडार के तहत महिलाओं को मिलने वाली रकम 500 रुपए बढ़ाई गई है। BJP ने भी कई वादे किए हैं। इन घोषणाओं का जमीन पर कितना असर है, इस रिपोर्ट में पढ़िए… योजनाओं से दिक्कत नहीं, नौकरियां भी होंममता बनर्जी ने इस साल बजट में ‘युवा साथी योजना’ का ऐलान किया था। पहली किस्त चुनाव से ठीक पहले आई। इसे लेकर दुर्गापुर की 20 साल की मोह कहती हैं, ‘सरकारी योजनाएं हमारी सुविधा के लिए हैं, फिर फायदा लेने में क्या हर्ज। सरकार कुछ भी अपने घर से नहीं देती है। ये जरूरतमंदों के लिए जनता का ही पैसा है।‘ ‘हमें ऐसी योजनाओं से दिक्कत नहीं, लेकिन नौकरियां भी हों।‘ वहीं, BJP के तीन हजार रुपए देने वादे पर उनकी बहन मोमिता कहती हैं, ‘अगर इसका फायदा मिला, तो हम बहनों की पढ़ाई फिर शुरू हो सकती है।‘ पैसे सिर्फ 5 साल मिलेंगे, नौकरी हमेशा रहेगीआसनसोल की रहने वाली संध्या की राय इससे अलग है। 12वीं पास करने के बाद ही संध्या की शादी कर दी गई इसलिए पढ़ नहीं पाईं। कंप्यूटर का बेसिक कोर्स करने के बाद बेकिंग का काम सीखा है। लक्ष्मी भंडार का फायदा लेने के लिए उनकी उम्र नहीं, इसलिए युवा साथी का फॉर्म भरा। खाते में पहली किस्त के 1500 रुपए भी आ गए हैं। संध्या कहती हैं, रोजगार की जरूरत ज्यादा है। ये पैसे सिर्फ पांच साल ही मिलेंगे, नौकरी हमेशा रहेगी। हमने पूछा इससे केक बेकिंग का काम भी तो शुरू कर सकती हैं? जवाब मिला, ‘इतने कम पैसों में कैसे होगा। साल भर पैसे जमा करने पड़ेंगे, तभी इस लायक पूंजी होगी।’ ट्यूशन फीस और कॉलेज आने-जाने का खर्च निकलेगा योजनाओं को लेकर पेरेंट्स की राय अलग है। आसनसोल के रहने वाले गौतम बाध्यकर का कहना है कि ऐसी स्कीम्स ने कई पेरेंट्स की परेशानियां कम कर दी हैं। ये बच्चों की पढ़ाई के काम आएंगी। वे कहते हैं, ‘बच्चे इससे कॉम्पिटीशन के फॉर्म भर सकेंगे। नौकरी का इंटरव्यू देने जाने के लिए घरवालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। माता-पिता का बोझ कम होगा।‘ आसनसोल में राशन दुकान चलाने वाले रवींद्र प्रसाद का भी यही मानना है। वे कहते हैं, ‘महंगाई में पेरेंट्स को थोड़ी राहत मिली है। बच्चों की ट्यूशन फीस आराम से निकल रही है। उनके मोबाइल रिचार्ज जैसे छोटे-मोटे काम हो जा रहे हैं।‘ विधवा पेंशन से घर चल रहा, नमक का फर्ज अदा करेंगेआसनसोल में हम 65 साल की कल्याणी देवी सिंह से मिले। योजनाओं का पूछते ही वे कहती हैं, ‘सिर्फ विधवा पेंशन मिलती है, बाकी का पता नहीं।‘ स्वास्थ्य साथी कार्ड के बारे में वे नहीं जानतीं। हां, राशन कार्ड के लिए फॉर्म भरा है, लेकिन नहीं बना।‘ वोट किसे देंगी, पूछने पर कल्याणी कहती हैं, ‘हमारी एक ही पसंद है, जिसका नमक खाया है। उसे अदा करना है।‘ इसके बाद हम कुल्टी विधानसभा में प्रतिमा केवड़ा से मिले। पति गुजर गए इसलिए घरों में काम करके परिवार चला रही हैं। सरकारी योजनाओं का नाम पर सिर्फ लक्ष्मी भंडार का फायदा मिलता है। जॉब कार्ड है, लेकिन कभी उस पर काम नहीं मिला। स्वास्थ्य साथी कार्ड की कभी जरूरत नहीं पड़ी। प्रतिमा को सबसे ज्यादा जरूरत राशन की है। राशन कार्ड है, लेकिन राशन नहीं मिल रहा। सब दीदी ने दिया, जो हमारे साथ-हम उसके साथइसके बाद हम मुर्शिदाबाद पहुंचे। यहां हमें ईरानी मूल की भारतीय रुखसार खातून से मिलीं। उनके परिवार के कई लोगों के नाम SIR में कट गए, इसलिए गुस्से में हैं। सरकारी योजनाओं के बारे में पूछने पर कहती हैं, ‘मुझे और बेटी को लक्ष्मी भंडार का पैसा मिलता है। छोटी बेटी को स्कूल से कन्या श्री की राशि मिली है। सरकारी घर भी है।‘ BJP के 3 हजार और कांग्रेस के 2 हजार देने के वादे पर कहती हैं, ‘ये सब राजनीति है। इन पर भरोसा नहीं है, जिन्होंने हमारा साथ दिया, हम उनके साथ हैं।‘ क्या सरकारी मकान पीएम आवास योजना के तहत मिला? इस पर कहती हैं, ‘BJP, बिहार वालों को दे रही है, यहां तो सब दीदी ने दिया है।‘ 1500 या 3 हजार में क्या होगा, काम करके ही घर चलेगा इसके बाद हम शमशेरगंज विधानसभा गए। यहां तकरीबन हर घर में बीड़ी बनाने का काम होता है। यहां मिलीं सुमित्रा दास भी बीड़ी बांधती हैं। 100 बीड़ी बंधाने पर 100 रुपए मिलते हैं। उन्हें लक्ष्मी भंडार योजना का फायदा मिल रहा है, लेकिन वे इससे खुश नहीं हैं। BJP के 3 हजार देने के वादे पर कहती हैं, ‘इतने पैसों से कुछ नहीं होता। पांच साल से लक्ष्मी भंडार के पैसे मिल रहे हैं, लेकिन पहले भी काम करके घर चल रहा था और अब भी। कोई 1500 दे या 3 हजार इससे फर्क नहीं पड़ने वाला है।‘ पुरुलिया जिले की रघुनाथपुर विधानसभा क्षेत्र के दलित गांव में रहने वाली झरना बाउरी का घर विधवा पेंशन और लक्ष्मी भंडार से चल रहा है। हालांकि वे भी सरकार से खफा हैं क्योंकि स्वास्थ्य साथी कार्ड का फायदा नहीं मिल सका। एक्सपर्ट: महिला-युवा वोटर साध ममता एंटी इनकम्बेंसी मैनेज कर रहीं ममता की योजनाओं का असर समझने के लिए हमने पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रोफेसर मैदुल इस्लाम से बात की। उनका कहना है, ‘ममता बनर्जी ने पिछले 15 साल में इंसान के पैदा होने से लेकर मरने तक कई स्कीमें शुरू कीं, जिनका उन्हेंं फायदा भी मिला। 2021 में लक्ष्मी भंडार योजना की घोषणा हुई। तब महिला वोटर्स TMC के साथ गईं और सीटें भी बढ़ीं।‘ ‘यही 2024 के लोकसभा चुनाव में हुआ। ममता सरकार ने लक्ष्मी भंडार की रकम बढ़ाई और TMC की सीट 22 से बढ़कर 29 हो गई। जबकि BJP की 18 से घटकर 12 हो गईं। अब BJP राज्य में सरकार बनने पर TMC से ज्यादा भत्ता देने की बात कर रही है, लेकिन लोगों तक अपनी बात नहीं पहुंचा पा रही है। वहीं लोगों को ये लगता है कि अगर BJP सत्ता में आई, तो सारी स्कीमें बंद हो जाएगी।‘ ‘साफ है कि इसे वोट के लिए शुरू किया गया है। लेफ्ट की सरकार में बेरोजगारी भत्ता के नाम से ऐसी योजना थी। उसमें युवाओं को हर महीने कुछ राशि मिलती थी, शर्त इतनी थी कि एक्सचेंज ऑफिस जाकर रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता था।‘ एंटी इनकम्बेंसी को इसकी वजह बताते हुए वे आगे कहते हैं, ‘इसे मैनेज करने के लिए ममता, महिला और युवा वोटरों को स्कीम के जरिए टारगेट कर रही हैं। जहां तक युवाओं को काम और भत्ते देने की बात है, ये दोनों जरूरी हैं। क्योंकि केंद्र और राज्य दोनों सरकारें उतनी नौकरियां नहीं दे पा रहीं, जितनी होनी चाहिए। लिहाजा, सरकार को भत्ता देना पड़ रहा है। ये लगभग हर राज्य में हो रहा है।‘ वहीं, पॉलिटिकल एक्सपर्ट उन्नयन बंदोपाध्याय कहते हैं, ‘चुनाव से पहले सभी पार्टियां आजकल ऐसे लोकलुभावन वादे करती हैं। ममता ने भी युवाओं को टारगेट कर अबकी युवा साथी योजना का ऐलान किया है। इसका मकसद 21 से 40 साल तक के वोटर्स को अपनी ओर खींचना है। राज्य में इस वर्ग के युवा वोटर्स लगभग 40-50% हैं।’ ’ममता ने पिछले कार्यकाल में भी कई ऐसी योजनाएं शुरू कीं, लेकिन लोगों की पहली पसंद रोजगार होगा क्योंकि उसमें ज्यादा सिक्योरिटी है।’ …………………..पश्चिम बंगाल चुनाव पर ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें… हिंदू बाप-बेटे को काट डाला, बंगाल में चुनावी मुद्दा नहीं 11 अप्रैल 2025 को वक्फ संशोधन कानून के विरोध में मुर्शिदाबाद के जाफराबाद में रैली निकाली गई। बेकाबू भीड़ ने पारुल के पति हरगोविंद दास और बेटे चंदन को घर के सामने ही काट डाला। जाफराबाद में लोग इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बता रहे हैं और TMC को हटाने की बात कर रहे हैं, जबकि यहां से 142 किमी दूर मालदा में इसकी चर्चा भी नहीं है। पढ़ें पूरी खबर...
शनचो-21 मिशन : चीनी अंतरिक्ष यात्रियों की सफल स्पेसवॉक, नया रिकॉर्ड कायम
शनचो-21 मिशन के तीन अंतरिक्ष यात्री चांग लू, वू फेई और चांग होंगचांग ने शुक्रवार सुबह 01:36 बजे (पेइचिंग समयानुसार) करीब साढ़े पांच घंटे की स्पेसवॉक सफलतापूर्वक पूरी की
5.0 प्रतिशत की शुरुआत : चीनी अर्थव्यवस्था की स्थिरता, नवाचार और लचीलापन
वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच, चीन की पहली तिमाही में 5.0 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि उल्लेखनीय है

