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आज का एक्सप्लेनर:खून का थक्का पैर से फेफड़े में पहुंचा, जिससे प्रतीक यादव की मौत; ये कैसी बीमारी, क्या शरीर पर चोटों से कनेक्शन

पैर की एक नस में बना खून का थक्का, खामोशी से बहते हुए फेफड़े तक पहुंचा और 13 मई की सुबह अचानक सपा मुखिया अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव की मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में निकला- 'पल्मोनरी थ्रॉम्बो एम्बोलिज्म’। उनके शरीर में 6 जगह चोट के निशान भी मिले हैं। पल्मोनरी एम्बोलिज्म कैसी बीमारी है और इसका प्रतीक के शरीर पर मिले चोट के निशान से क्या कोई कनेक्शन है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: प्रतीक यादव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या निकला?जवाब: मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना के बेटे प्रतीक की 13 मई की सुबह अचानक तबीयत बिगड़ी। लखनऊ के सिविल अस्पताल में चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. डीसी पांडेय के मुताबिक- जब प्रतीक को लाया गया, तब उनकी पल्स पूरी तरह डाउन थी। दिल भी रुक चुका था। लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, यानी KGMU में प्रतीक का पोस्टमॉर्टम हुआ। 13 मई की शाम जारी शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बताया गया कि प्रतीक के फेफड़ों में बड़ी मात्रा में खून के थक्के जम गए थे। जिससे दिल और फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया। सवाल-2: आखिर क्या है पल्मोनरी थ्रॉम्बो एम्बोलिज्म?जवाब: प्रतीक की मौत के पीछे जो बीमारी बताई गई, उसमें 3 टर्म हैं- पल्मोनरी, यानी फेफड़े से जुड़ी दिक्कत, थ्रॉम्बो, यानी खून का थक्का और एम्बोलिज्म, यानी शरीर की धमनियों में कोई रुकावट। 'पल्मोनरी थ्रॉम्बो-एम्बोलिज्म' को डॉक्टरी जुबान में PE कहा जाता है। इसमें शरीर के किसी दूसरे हिस्से से खून का थक्का फेफड़े के अंदर या फेफड़े तक जाने वाली नसों तक पहुंच जाता है और खून के फ्लो को ब्लॉक कर देता है। इससे फेफड़े काम नहीं कर पाते और ऑक्सीजन शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं पहुंच पाती। इससे कार्डियक अरेस्ट आता है और मौत हो जाती है। आम तौर पर ये थक्का पैर या पेल्विस के इलाके की नसों में बनना शुरू होता है। फिर ये टूटकर खून के फ्लो के साथ-साथ फेफड़ों तक पहुंच जाता है। ग्राफिक में पूरा प्रॉसेस देख लीजिए- अमेरिका के मेडिकल सेंटर क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, PE के चलते अमेरिका में हर साल कम से कम एक लाख लोगों की मौत होती है। हालांकि भारत में इस बीमारी से मौतों का कोई पुख्ता रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। सवाल-3: ये बीमारी कैसे हो जाती है?जवाबः PE के ज्यादातर मामलों की शुरुआत DVT, यानी 'डीप वेन थ्रॉम्बोसिस' से होती है। इसमें आमतौर पर पैर की नस में खून का थक्का बनने लगता है। DVT 4 बड़ी वजहों से हो सकती है... 1. लंबे समय तक निष्क्रिय रहना 2. कोई सर्जरी या चोट लगना 3. खून में थक्का बनने के डिसऑर्डर 4. कैंसर या कुछ और बीमारियां हॉर्मोन थेरेपी और कुछ गर्भनिरोधक गोलियों से भी PE का खतरा हो सकता है। इसके अलावा मोटापे, किडनी की बीमारी, नसों की बीमारी 'वैरिकोज वेंस', परिवार में किसी को DVT या PE होने, स्टेरॉयड्स जैसी कुछ दवाएं लेने, धूम्रपान और किसी तरह के इन्फेक्शन से भी DVT और PE हो सकता है। सवाल-4: इस बीमारी में अचानक मौत होना कितना कॉमन है?जवाब: आमतौर पर PE के लक्षण अचानक ही नजर आते हैं। कुछ मामलों में पैरों में दर्द, सूजन और गर्मी महसूस हो सकती है। क्लीवलैंड के मुताबिक, PE की चपेट में आए करीब एक-तिहाई लोगों की कुछ ही घंटे के अंदर मौत हो जाती है। अक्सर इलाज मिलने से पहले ही। सवाल-5: क्या प्रतीक की अचानक मौत के पीछे PE ही इकलौती वजह है?जवाब: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रतीक करीब 5 साल से हाई ब्लड प्रेशर और DVT से पीड़ित थे और उनका इलाज चल रहा था। प्रतीक की पत्नी अपर्णा की करीबी मित्र रीना सिंह ने बताया कि 4 महीने पहले उन्हें पता चला था कि प्रतीक को फेफड़े में इन्फेक्शन हुआ है, जिसका ऑपरेशन हुआ था। 30 अप्रैल को भी प्रतीक सांस लेने में तकलीफ और सीने में दर्द की शिकायत के चलते एडमिट हुए थे। 3 दिन में उन्हें थोड़ा आराम मिला। रिपोर्ट्स हैं कि वो अपनी मर्जी से बिना छुट्टी लिए घर चले गए। मेदांता हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. रुचिता शर्मा ने बताया, प्रतीक हमारे पुराने मरीज थे। मैं काफी समय से उनके हाई ब्लड प्रेशर, हाइपरटेंशन और DVT जैसी दिक्कतों के लिए देख रही थी। कुछ ही दिन पहले, उन्हें पल्मोनरी एम्बोलिज्म होने के बाद सांस फूलने के चलते यहां एडमिट किया गया था। दरअसल, PE के इलाज के लिए कुछ दिनों तक खून को पतला करने वाली ‘ब्लड थिनर’, यानी एंटीकोगुलेंट दवाएं दी जाती हैं। गंभीर मामला हो तो ऑपरेशन या सर्जरी करके भी थक्के को निकाला जाता है। कुछ मामलों में पेट की एक बड़ी नस में एक जाल डाल दिया जाता है, ताकि थक्का फेफड़े तक न पहुंचे। डॉ. रुचिता शर्मा के मुताबिक, प्रतीक खून पतला करने वाली और बीपी की दवाइयां रेगुलर ले रहे थे। इस बार क्या हुआ, ये कहना मुश्किल है। उत्तर प्रदेश में लाइफलाइन हॉस्पिटल के संचालक और सीनियर न्यूरोसर्जन डॉ. सतीश कुमार कहते हैं, PE के मरीजों को अस्पताल में रखकर इलाज करना जरूरी है, ताकि कंडीशन लगातार मॉनिटर की जा सके। अगर PE का इलाज पूरा न हो पाए, तो कुछ खून के थक्के बचे रह सकते हैं। DVT के चलते भी दोबारा थक्के बन सकते हैं और PE हो सकता है। डॉ. सतीश के मुताबिक, हो सकता है कि प्रतीक की थेरेपी पूरी न हुई और उन्होंने बिना पूरी डोज लिए अस्पताल से डिस्चार्ज ले लिया। ऐसे में सबसे प्रबल संभावना है कि उन्हें अचानक PE हुआ, जिससे उनके फेफड़े और फिर दिल ने काम करना बंद कर दिया। सवाल-6: क्या प्रतीक के शरीर पर चोट के निशान से इसका कोई कनेक्शन है?जवाब: पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतीक की छाती, दाएं हाथ, कोहनी, बाएं हाथ सहित कुल 6 जगहों पर चोट के निशान पाए गए… इन सभी को ‘कन्ट्यूजन’, यानी अंदरूनी चोट का निशान बताया गया है। साथ ही सभी चोटों के नीचे एकीमॉसिस, यानी खून जमने के निशान पाए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी चोटें मौत लगने से पहले की हैं। पहली, दूसरी और तीसरी चोट 5 से 7 दिन, जबकि चौथी, पांचवीं और छठी चोट करीब 1 दिन पुरानी है। डॉ. सतीश कुमार के मुताबिक, ‘पैर पर तो PE या DVT के चलते चोट का निशान हो सकता है, लेकिन जिस तरह के निशान प्रतीक के शरीर पर हैं, उनका इस बीमारी से संबंध होना मुश्किल है। इस तरह के निशान किसी और मेडिकल कंडीशन, एलर्जी या दवाइयों के चलते भी हो सकते हैं।’ सवाल-7: प्रतीक की मौत पर किन सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिले?जवाब: प्रतीक के शरीर पर चोट के निशान उनकी मौत के पहले के हैं। ये निशान कैसे पड़े, अभी इसको लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। प्रतीक की मौत पर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपने पहले बयान में संकेत दिया था कि प्रतीक फाइनेंशियल स्थितियों के चलते तनाव में थे। 19 जनवरी को प्रतीक ने अचानक इंस्टाग्राम पोस्ट पर अपर्णा से तलाक की घोषणा करते हुए कहा था- अपर्णा ने मेरी जिंदगी नरक बना दी।’ हालांकि, 9 दिन बाद दोनों में सुलह हो गई थी। प्रतीक ने अपर्णा के साथ तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था- ‘All is Good’, यानी सब अच्छा है। ऐसे में सोशल मीडिया पर लोग कई सवाल उठा रहे हैं…. पूरे हार्ट और फेफड़ों के थ्रोम्बोएम्बोलिक मटेरियल, यानी थक्के वाले हिस्सों को आगे की जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा विसरा, यानी अंदरूनी अंगों के सैंपल भी सुरक्षित किए गए हैं, ताकि किसी जहर या केमिकल की पुष्टि की जा सके। सपा नेता रविदास मेहरोत्रा ने मांग की है कि हाई कोर्ट के किसी पूर्व जज से प्रतीक की मौत की जांच करवाई जाए। ---- ये खबर भी पढ़ें… प्रतीक यादव की मौत से ससुराल वाले शॉक्ड:उत्तरकाशी में अपर्णा के भाई बोले- परिवार के साथ गलत हुआ; पूरे मामले की जांच होनी चाहिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव के भाई और भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव के निधन की खबर बुधवार को उत्तरकाशी के डुंडा ब्लॉक स्थित गढ़बरसाली (कुरा) गांव तक पहुंची तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। पूरी खबर पढ़ें..

दैनिक भास्कर 14 May 2026 6:19 pm

2026 चीन-अमेरिका रिश्तों का ऐतिहासिक साल बताएंगे : राष्ट्रपति शी

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि 2026 एक ऐतिहासिक, लैंडमार्क साल होगा, जो चीन-अमेरिका संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करेगा।

देशबन्धु 14 May 2026 10:51 am

चीन के ग्रेट हॉल में ट्रंप का भव्य स्वागत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे पर पहुंचे हुए हैं। चीन के ग्रेट हॉल में गुरुवार को राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति ट्रंप का स्वागत किया

देशबन्धु 14 May 2026 9:07 am

अमेरिका पर बढ़ता कर्ज बना चिंता का कारण, ईरान युद्ध के बाद पेट्रोडॉलर व्यवस्था पर भी मंडराने लगे सवाल

अमेरिकी अर्थव्यवस्था की एक बड़ी विशेषता उसकी खुली निवेश प्रणाली है। दुनिया का कोई भी देश या निवेशक अमेरिका में आसानी से निवेश कर सकता है और जरूरत पड़ने पर पैसा निकाल भी सकता है। यही व्यवस्था अब अमेरिका के लिए जोखिम का कारण बनती दिख रही है।

देशबन्धु 14 May 2026 8:57 am

बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप, एक नागरिक की मौत, दो लोग जबरन गायब

बुधवार को एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने कहा कि पाकिस्तान की सुरक्षा बलों की ओर से बलूचिस्तान में कम से कम एक आम नागरिक को बिना कानूनी प्रक्रिया के मार दिया गया और दो अन्य लोगों को जबरन गायब कर दिया गया।

देशबन्धु 14 May 2026 8:54 am

ब्लैकबोर्ड-’अब तुम हिंदू नहीं, बाप की लाश नाले में बहाओ’:पोस्टमार्टम हाउस में 22 दिन तक सड़ती रही लाश, कसूर इतना कि धर्म बदल लिया

‘7 जनवरी 2025। सुबह के 10 बजे थे। पापा की किडनी फेल होने की वजह से मौत हो गई थी। देखते ही मां रो-रो कर बेहाल हो गई। शव बरामदे में रखते ही चीख-पुकार मच गई। सभी रिश्तेदार घर पहुंचने लगे। सभी कहने लगे- अंतिम संस्कार की तैयारी करो। जब तक लाश दरवाजे पर रहेगी, सब रोते रहेंगे। हम लोग अर्थी सजा रहे थे, तभी गांव के लोगों के साथ सरपंच आए। उनके साथ थानेदार और तहसीलदार भी थे। कुछ देर तक शव देखते खड़े रहे, फिर कड़क आवाज में बोले- ‘देखो, तुम अपने बाप की लाश गांव के कब्रिस्तान में नहीं दफना सकते। वहां केवल दलित हिंदू ही शव दफना सकते हैं। तुम लोगों ने धर्म बदला है। इसलिए गांव के बाहर लाश दफनाओ'। तुम लोगों ने महार जाति के खिलाफ जाकर ईसाई धर्म अपनाया है। इसलिए लाश को गांव के बाहर दफनाओ'। खाट पर बैठे रमेश बघेल अपने पापा की मौत का दिन याद करते हुए ये वाकया बताते हैं। स्याह कहानियों की सीरीज ब्लैकबोर्ड में आज ऐसे परिवारों की कहानी, जिन्होंने ईसाई धर्म अपनाया तो गांव के लोगों ने विरोध किया। परिवार में किसी की मृत्यु हुई तो उसके शव को ईसाई धर्म के मुताबिक दफनाने से रोक दिया। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से करीब 60 किलोमीटर दूर छिंदावाड़ा गांव। रास्ते में कई जगह ईंट से बनी कब्र नजर आ रही हैं। गांव पहुंचते ही मेरी मुलाकात 42 साल के रमेश बघेल से हुई। रमेश बताते हैं, ‘उस दिन हम सभी पापा की लाश के पास बैठकर रो रहे थे। अचानक सरपंच और गांव के लोग कहने लगे- लाश को गांव की सीमा से बाहर दफनाओ या फिर किसी नाली या गटर में फेंक दो। तुम लोगों ने महार जाति के खिलाफ जाकर ईसाई धर्म अपनाया है, इसलिए लाश यहां नहीं दफना सकते। सोचने लगा कि लोग तो कुत्ते-बिल्ली को भी मौत के बाद अपनी जमीन में दफनाते हैं। मुझसे पापा की लाश नाली में फेंकने को कहा गया, जबकि पापा तो 13 एकड़ जमीन के मालिक थे। मरने के बाद उन्हें दो गज जमीन भी न दे सका।' रमेश कहते हैं- 'उनकी बातें सुनते ही मैं लोगों से मिन्नतें करने लगा। कहने लगा कि सिर्फ मूर्ति पूजा में यकीन नहीं करता हूं, इसलिए ईसा-मसीह को मानता हूं। मैंने घर पर बनी चर्च में भी ईसा मसीह की मूर्ति नहीं लगाई है। पक्का ईसाई नहीं हूं। मेरे पापा को कब्रिस्तान में जगह मिलनी चाहिए। जो आदमी इस गांव में पैदा हुआ। पला-बढ़ा, उसे मरने के बाद गांव की मिट्टी नसीब होनी चाहिए। इतनी गुहार लगाने पर सरपंच ने गाली देते हुए कहा- क्या तुम लोगों ने हमसे पूछकर धर्म बदला था? किसी भी कीमत पर तुम्हें ये लाश गांव में नहीं दफनाने देंगे। तुम ही नहीं, तुम्हारे पापा भी ईसाई धर्म मानते थे। ईसाइयों के कब्रिस्तान जहां हों, वहां लाश लेकर जाओ। यह सुनते ही मैं फूट-फूटकर रोने लगा। फिर से हाथ जोड़ते हुए कहा- अगर गांव के कब्रिस्तान में नहीं दफना सकता, तो अपनी जमीन में दफनाऊंगा। पापा ने बड़ी मेहनत-मजदूरी करके 13 एकड़ जमीन खरीदी थी। अपने भाइयों से कहा कि पापा की अर्थी तैयार करो। सरपंच और बाकी लोग फिर से भड़क गए। बोले- पंचायत ने फैसला लिया है कि तुम अपनी जमीन में भी लाश नहीं दफना सकते। पंचायत का फैसला तुम्हें मानना पड़ेगा। हमने एक साल पहले ही तय कर लिया था कि अब से ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों को गांव के कब्रिस्तान में शव नहीं दफनाने देंगे। केवल दलित हिंदू ही यहां शव दफना सकते हैं। अगर तुमने गांव वालों के खिलाफ जाकर शव दफनाया, तो बीवी-बच्चों के बारे में सोच लेना। ये बताते हुए रमेश की आंखें भर आईं। खुद को संभालते हुए वो बोले- उस वक्त ऐसा लगा कि सच में अनाथ हूं।' 'उनसे कहा- देखता हूं, कैसे आप लोग पापा की लाश को नहीं दफनाने देंगे। मामले को कोर्ट में लेकर जाऊंगा। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, पापा की लाश दफनाऊंगा नहीं। सुनते ही पुलिस बोली- अभी फिलहाल, लाश को जगदलपुर पोस्टमार्टम हाउस लेकर जाना होगा। उधर, पुलिस पापा की लाश पोस्टमार्टम हाउस लेकर गई और मैं रोते हुए तुरंत बिलासपुर हाईकोर्ट के लिए निकल पड़ा।' रमेश बघेल को उनके पिता की लाश न दफनाने देने का यह पहला मामला नहीं था। गांव में ऐसे कई ईसाई परिवारों को शव दफनाने से रोका गया था। रमेश ने बिलासपुर पहुंचकर एक वकील की मदद से हाईकोर्ट में अपील दायर की। कोर्ट ने करीब एक हफ्ते बाद फैसला सुनाया- 'ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों के अंतिम संस्कार के लिए पहले से कब्रिस्तान बने हैं। वहीं ले जाना होगा। गांव में दफनाने का आदेश देने से माहौल खराब हो जाएगा।' कोर्ट के फैसले से मुझे बहुत निराशा हुई। उसके बाद दिल्ली के लिए फ्लाइट ली और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।' रमेश आगे बताते हैं कि, 'सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। कहा- बहुत दुख की बात है कि एक बेटे को अपने पिता का शव दफनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट आना पड़ा। 4 महीने में राज्य सरकार अपनी रिपोर्ट दे। सरकार ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों के लिए अलग से कब्रिस्तान की व्यवस्था करे। लेकिन उस रिपोर्ट का क्या हुआ, आज तक पता नहीं चला।' 'पिता की कोई तस्वीर है आपके पास?' मैंने पूछा ‘है न! बड़ी तस्वीर है, लेकिन एक बक्से में है। उनकी तस्वीर देखता हूं तो ये सारी बातें याद आने लगती हैं। मां भी उस तस्वीर को देखकर रोने लगती हैं। फिलहाल रुकिए, दिखाता हूं।’ रमेश घर से पास्टर यानी ईसाई धर्म के प्रचारक पिता सुरेश बघेल की एक बड़ी-सी तस्वीर निकालकर लाते हैं। उनकी नजर बार-बार उस तस्वीर पर रुक जा रही है। मानो वह खुद को रोने से रोक रहे हों। वह कहते हैं- 'पापा का शव 22 दिन तक जगदलपुर पोस्टमार्टम हाउस में पड़ा रहा। जब सुप्रीम कोर्ट से भी न्याय नहीं मिला तो उन्हें जगदलपुर में ही बने ईसाई कब्रिस्तान में दफनाया। गांव नहीं ला पाया, जिसका जिंदगीभर मलाल रहेगा। उन 22 दिनों तक घर का चूल्हा नहीं जला। शव को अंतिम संस्कार किए बिना चूल्हा कैसे जला सकते थे? पड़ोसी हमें खाना खिला रहे थे। आखिर केस लड़ने में ही हमारे लाख-दो लाख खर्च हो गए, लेकिन पिता की लाश को न्याय दिलाने का खर्च गिनाते हुए अच्छा नहीं लग रहा। वो सब याद करके रो देता हूं। अब एक साल बीत चुके हैं। दिसंबर 2024 की बात है। पिता को हाई लेवल डायबिटीज था। तबीयत लगातार खराब होती जा रही थी। करीब हफ्तेभर उन्हें जगदलपुर के अस्पताल में भर्ती रखा। 24 तारीख को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर घर आए थे। एकदम ठीक लग रहे थे। उसके 14 दिन बाद यानी 7 जनवरी 2025 की बात है। सुबह के 8 बजे थे। पत्नी ने नाश्ते में दलिया बनाया था। कहने लगीं- बाबूजी, अभी तक सो कर नहीं उठे हैं, रोज तो जल्दी उठ जाते थे। मैंने मां से पिताजी को जगाने के लिए कहा। मां ने आवाज दी, हिला-डुलाया। जब नहीं जगे तो रोने लगीं। पापा की मौत हो चुकी थी।' इस बातचीत के दौरान सामने एक अलग तरह का सफेद रंग का मकान दिख रहा है। बार-बार मेरी नजर उस पर जा रही है। रमेश कहते हैं- ‘यही मेरा चर्च है। पिताजी ने 1994 में बनवाया था। वह भी ईसा मसीह को मानते थे। दरअसल, मेरे घर में अक्सर लोगों पर देवी-देवता सवार हो जाते थे। झाड़-फूंक चलती रहती थी।’ रमेश कहते हैं कि- 'ओझा ने बताया था कि हमारी पड़ोसन ने करिश्मा कर दिया है। तुम्हारे परिवार पर भूत भेज दिया है। उससे कई बार पड़ोसियों से झगड़े हुए और मार-पिटाई भी। परेशान होकर पिताजी चर्च में जाने लगे। धीरे-धीरे उनका ईसाई धर्म के प्रति झुकाव बढ़ता गया और हिंदू धर्म से विश्वास उठने लगा। उसके बाद मेरा पूरा परिवार चर्च में प्रार्थना करने जाने लगा। ईसाई धर्म मानने के बाद हमारे घर में भूत-प्रेत की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो गई। उसके बाद पिताजी ने यह चर्च बनवाया। हमने चर्च में आज भी ईसा मसीह की मूर्ति नहीं रखी है। इसमें सिर्फ प्रार्थना करते हैं। आखिर इसमें बुराई क्या है?' बातचीत के बीच रमेश बघेल की मां आ जाती हैं। रमेश इशारा करते हैं- 'अब बातचीत बंद कीजिए। मां यह सब सुनेंगी, तो रोने लगेंगी। वह बताते हैं कि अब तो ईसाई धर्म मानने वाले लोगों की एक टीम तैयार कर ली है। जिसके घर में कोई दिक्कत आती है, जाकर हम उसकी मदद करते हैं। किसी के घर में मृत्यु होने पर इलाके में उसके दफनाने की व्यवस्था करते हैं। काश, पिता को अपनी जमीन में दफना पाता और उनकी कब्र पर जाकर उन्हें याद कर पाता!' रमेश बघेल के घर से दो किलोमीटर दूर चंद्रवती का घर है। कच्चे मकान के आंगन में वह कई घंटे से बैठी हैं। साथ में बेटी ओजमनी भी हैं। चंद्रवती को गोंडी भाषा ही आती है। उनकी बेटी ओजमनी बताती हैं- 'मैं तो अपने पापा के शव को गांव लेकर आई ही नहीं। कैसे आती? उनकी मृत्यु से पहले ही गांव के लोग घर के बाहर जुट गए थे। कह रहे थे- गांव में शव को लेकर आए, तो पूरे घर को तोड़ देंगे। 21 जनवरी 2026 की बात है। विशाखापट्टनम में पढ़ाई करती थी। घर से खबर आई कि पिता की तबीयत खराब है। उनके ब्रेन में खून जम गया है। मम्मी और मेरे भाई पापा को लेकर रायपुर भागे। दो दिन वहां भर्ती रहे। 23 तारीख की सुबह उनकी सर्जरी हुई। उसके कुछ घंटे बाद ही मौत हो गई। उस वक्त हम नहीं चाहते थे कि किसी तरह का झगड़ा-विवाद हो। इसलिए पापा के शव को जगदलपुर के ईसाई कब्रिस्तान में ले जाकर दफनाया।' मैंने ओजमनी से पूछा- ‘धर्म कब बदला?’जवाब मिला- 'बहुत साल पहले। अब तो 25 साल की हूं। ईसाई धर्म में ही पैदा हुई। मम्मी बताती हैं कि मेरे छोटे चाचा पास्टर यानी ईसाई धर्म के प्रचारक थे। उस वक्त मम्मी को जितने भी बच्चे होते, सभी की मौत हो जाती थी। चाचा के कहने पर मम्मी चर्च जाकर प्रार्थना करने लगीं। हम पैदा हुए और सभी बच गए। हम लोग तीन बहन और एक भाई हैं। तब से हम ईसाई धर्म को मानने लगे। लेकिन बस्तर और मेरे गांव में हाल-फिलहाल में जो कुछ हुआ है, वह तो कुछ भी नहीं है। यहां कई इलाके तो ऐसे हैं, जहां ईसाई धर्म मानने की वजह से कई दफनाए हुए शवों को कब्र से बाहर निकाल दिया गया।' उनकी बात सुनकर मेरी भौहें तन जाती हैं। मन-ही-मन सवाल उठ रहा है- शायद यह लड़ाई कफन और दफन की है। इसके बाद मैं बस्तर के उस इलाके के लिए निकल पड़ता हूं, जहां एक शख्स के पिता का शव 90 गांव के लोग कब्र से निकालकर ले गए। पूरी कहानी अगले गुरुवार, 21 मई को ‘ब्लैकबोर्ड’ की नई सीरीज में… ---------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-सुहागरात पर ड्रग्स लेने गया, रातभर नहीं लौटा:हर हफ्ते लड़कियां बदलता, सड़क पर अंडरवियर में मिला; नशे के लिए 25 लाख की नौकरी छोड़ी 'जुलाई 2022 की वो रात… जिस रात के लिए ज्यादातर लोग सपने बुनते हैं। उस दिन मेरी सुहागरात थी। कमरा सज चुका था। रिश्तेदार थककर सो गए थे। दुल्हन मेरे कमरे में इंतजार कर रही थी। मैं उसके कमरे में गया और उससे बात किए बिना बगल में लेट गया। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 1- ब्लैकबोर्ड-पत्नी के घरवालों ने नंगा करके पीटा, नस काटकर सुसाइड:पत्नी ने कॉलर पकड़कर मांगे 20 लाख तो फांसी लगाई; तंग पतियों की स्याह कहानियां ‘20 जनवरी 2025 की बात है। शाम के 4 बजे थे। मैं अपने दोनों पोतों को स्कूल से लेकर घर लौट रही थी। रास्ते में मेरा छोटा बेटा नितिन बाइक से आ रहा था। उसने कहा- मम्मी, बाइक पर बैठ जाओ। फिर हम उसके साथ घर आए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 14 May 2026 5:13 am

भारत ‘दोस्त देश’, होर्मुज से जहाजों को न‍िकलने की अनुमत‍ि क‍िसी और को नहीं: गरीबाबादी

ईरान के उप विदेश मंत्री (कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों) काजेम गरीबाबादी ने भारत को 'दोस्त देश' बताते हुए कहा कि तेहरान और नई दिल्ली, मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के बीच, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से और ज्‍यादा भारत से जुड़े जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने पर लगातार काम कर रहे हैं।

देशबन्धु 14 May 2026 3:50 am

ट्रंप के साथ एयर फोर्स वन में सवार होकर चीन दौरे पर पहुंचे एलन मस्क, शी जिनपिंग के साथ बीजिंग शिखर सम्मेलन में लेंगे हिस्सा

अरबपति उद्योगपति एलन मस्क ने पुष्टि की कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कई बड़े अमेरिकी कारोबारी नेताओं के साथ एयर फोर्स वन में बीजिंग जा रहे हैं

देशबन्धु 13 May 2026 11:27 pm

आज का एक्सप्लेनर:क्या देश पर कोई बड़ा संकट आने वाला है, 3 संकेत; सरकार क्या कर रही, आप कैसे तैयार रहें

बैंकर उदय कोटक ने मंगलवार को चेतावनी दी- ‘बड़ा झटका आने ही वाला है… मुश्किल वक्त के लिए तैयार रहें।’ इससे दो दिन पहले पीएम मोदी ने भी कहा था- 1 साल तक सोना न खरीदें और पेट्रोल-डीजल कम खर्च करें। तो क्या कोई बड़ा संकट आने वाला है? हां, तो सरकार क्या कर रही और आप कैसे तैयार रहें; आज के एक्सप्लेनर में इसी की बात… सवाल-1: संकट के संकेत क्या हैं? जवाब: 3 बड़ी बातें हैं- 1. प्रधानमंत्री की 7 अपीलें 10 मई को तेलंगाना के सिकंदराबाद की रैली में कहा- कोरोना सदी का सबसे बड़ा संकट था, तो अमेरिका-ईरान जंग से बने हालात इस दशक के बड़े संकटों में से एक है। इससे निपटने के लिए देशवासियों से 7 अपील की। कुछ देर बाद ही बीजेपी ने सोशल प्लेटफॉर्म पर ये पोस्टर भी जारी कर दिया- पश्चिम एशिया की जंग 27 फरवरी को शुरू हुई थी। सरकार कहती रही सब ठीक है। लेकिन ढाई महीने बाद प्रधानमंत्री सबसे अपील कर रहे हैं। 2. वित्त मंत्रालय ने कहा- ‘महंगे तेल का बोझ टाल नहीं सकते’ 3. सोने-चांदी पर अचानक इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाना सवाल-2: आखिर वो संकट होगा क्या? जवाब: मौजूदा हालात में 3 ऐसी बातें हैं जो लोगों के लिए संकट पैदा करेंगी… 1. पेट्रोल-डीजल 17 रुपए तक महंगा हो सकता है इन तीनों कंपनियों की नेट वर्थ अभी 3.48 लाख करोड़ रुपए है। अगर यही घाटा जारी रहा, तो सिर्फ दो और तिमाही यानी 6 महीने में इनकी नेटवर्थ शून्य हो सकती है। सीधे शब्दों में कंपनियां कागज पर दिवालिया हो जाएंगी। इसलिए पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ने की चर्चा है। अब सवाल आता है कितना? मोटा-मोटी कैलकुलेशन है कि कंपनियों को अपना घाटा पूरा करने के लिए पेट्रोल पर 16 रुपए और डीजल 17 रुपए बढ़ाने की जरूरत है। हिसाब नीचे ग्राफिक में देख लीजिए- बीते दो महीने में कच्चे तेल के दाम बढ़ने के चलते 120 से ज्यादा देशों में दाम बढ़ाए जा चुके हैं। पाकिस्तान में 44%, अमेरिका में 42% और चीन में 31%। 2. महंगाई दर 1% बढ़ने से आपका मंथली बजट 15% बढ़ सकता है अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में 15% की बढ़ोतरी होने पर थोक महंगाई दर में 1% की सीधी बढ़ोत्तरी होती है। ये मौजूदा 3.7% से बढ़कर 4.7% हो सकती है। सुनने में ये एक आंकड़ा है, लेकिन असल जिंदगी में इसके असर काफी गहरे हैं। मान लीजिए कि पेट्रोल-डीजल के दाम ₹15 प्रति लीटर बढ़ जाते हैं, तो एक मिडिल क्लास फैमिली का बजट कुछ ऐसे बिगड़ेगा- इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में काम कर रहे लोगों की नौकरी का संकट होगा। ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन ऑर्गेनाइजेशन 'ऑल इंडियन मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के मेंबर शैलेंद्र गुप्ता के मुताबिक, पहले से पेट्रोल-डीजल के संकट की वजह से 10% गाड़ियां नहीं चल रही हैं। अगर तेल की कीमत बढ़ी तो 30% गाड़ियां नहीं चल पाएंगी।’ 3. जून-जुलाई में 39 मिलियन टन खाद की जरूरत, स्टॉक में सिर्फ आधा सवाल-3: सरकार के पास इस संकट से निपटने की क्या तैयारी है? जवाब: सरकार का दावा है कि उसने तेल, गैस और खाद का जरूरी स्टॉक कर रखा है… 60 दिन के लिए कच्चे तेल का स्टॉक मौजूद: भारत के पास विशाखापट्टनम, मंगलुरु और पादुर के स्टोरेज प्लांट में 5.53 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कच्चा तेल रखने की कैपिसिटी है। इनमें अभी 64% यानी लगभग 3.37 MMT कच्चा तेल भरा है। हरदीप पुरी के मुताबिक, भारत के पास 60 दिन के कच्चा तेल का स्टॉक मौजूद है। LPG का प्रोडक्शन डेढ़ गुना तक बढ़ा: भारत ने अपनी जामनगर, पानीपत, मथुरा और गुवाहाटी समेत कुल 23 गैस-तेल रिफाइनरियों में LPG का प्रोडक्शन बढ़ाया है। पुरी के मुताबिक, ‘पहले हमारा घरेलू LPG उत्पादन रोजाना 35 से 36 हजार मीट्रिक टन था, जिसे हमने बढ़ाकर 50 से 54 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचा दिया है।’ खाद का स्टॉक आम दिनों से ज्यादा: फर्टिलाइजर विभाग की एडिशनल सेक्रेटरी अपर्णा शर्मा के मुताबिक, 'यूरिया प्लांट पूरी कैपिसिटी से चल रहे हैं और फॉस्फेट व पोटाश वाली खाद का प्रोडक्शन भी बढ़ाया गया है। अभी सरकार के पास 51% स्टॉक है, जबकि आमतौर पर इस समय सिर्फ 33% स्टॉक रहता है। खाद सब्सिडी के लिए बजट में 1.70 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा दिए गए हैं, ताकि खाद के दाम बढ़ने पर भी किसानों पर बोझ न बढ़े।’ इसके अलावा दुनिया में जंग के हालात के दौरान भी भारत की अर्थव्यवस्था की असली ताकत उसकी घरेलू मांग में है। देश की GDP का करीब 70% हिस्सा घरेलू खपत से आता है, इससे इकॉनमी पर बाहरी दबावों का असर कम पड़ता है। एक्सपर्ट्स ने युद्ध के चलते भारत की GDP ग्रोथ 7.7% से घटकर 6.7% तक आने की संभावना जताई है, फिर भी ये ज्यादातर देशों के मुकाबले तेज ग्रोथ होगी। टैक्स और ऑडिट फर्म ‘डेलॉइट’ के मुताबिक, भारत ने अपनी सबसे बड़ी ताकत घरेलू मांग पर ध्यान दिया है, जिससे महंगाई कंट्रोल में रही और खपत को बढ़ावा मिला है। सवाल-4: इस संकट के असर से बचने के लिए आप क्या कर सकते हैं? जवाब: पेट्रोल-डीजल, LPG, कुकिंग ऑयल और फर्टिलाइजर जैसी जरूरी चीजों के दाम बढ़ाना या घटाना सरकार के हाथ में है। आप पर उसका असर कम हो, इसकी तैयारी जरूर कर सकते हैं। फाइनेंशियल प्लानर स्वाती कुमारी बताती हैं- इमरजेंसी फंड बढ़ाइए: ज्यादा बचत इमरजेंसी के खर्चों और महंगाई के समय सुरक्षा देती है। अगर इस समय आपके इमरजेंसी फंड में 5 लाख रुपए हैं, तो आप इसे 7-8 लाख के बीच कर लीजिए। उदाहरण के तौर पर, जिस परिवार का मासिक खर्च 50 हजार है, तो उसे कम से कम 3 लाख रुपए का इमरजेंसी फंड बनाना चाहिए। बड़े खर्च रोक दीजिए: खर्च बढ़ेगा और कमाई नहीं बढ़ेगी, तो सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा। ऐसे में अगर आप अपनी कार अपडेट करना चाहते हैं या फिर विदेश यात्रा का प्लान हैं, तो इसे कम से कम एक साल के लिए टाल दीजिए। हेल्थ इश्योरेंस कवर बढ़ा लीजिए: संकट के समय में अगर कोई हेल्थ इमरजेंसी आती है, तो सेविंग कम होने और मेडिकल खर्च बढ़ने की कंडीशन में आप अपनी FD या फिर दूसरे इन्वेस्टमेंट्स से पैसा निकालना चाहेंगे, जो सही डिसिजन नहीं होगा। ऐसे में अगर गुंजाइश हो, तो अपना हेल्थ इंश्योरेंस कवर बढ़ा लें। इन सेक्टर्स में बढ़ाएं निवेश: कोविड के समय में फार्मा और IT जैसे सेक्टर्स के शेयर बढ़े थे। मौजूदा संकट में भी कुछ सेक्टर्स मुनाफा दे सकते हैं। अगर आपके पास एक्स्ट्रा पैसा है, तो आप रिन्यूएबल एनर्जी, EV और रेलवे जैसे सेक्टर्स में इन्वेस्ट कर सकते हैं। -------------- रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास ----------------------------------------ये खबर भी पढ़ें… पीएम मोदी क्यों चाहते हैं कि आप सोना न खरीदें, ऐसी 7 अपील के पीछे की कहानी; क्या आपको चिंता करनी चाहिए पीएम मोदी ने रविवार को तेलंगाना की एक रैली में देश से 7 अपीलें कीं। इनमें एक अपील सोना न खरीदने की भी थी। पीएम मोदी ने कहा- देशहित में हमें यह तय करना होगा कि सालभर तक घर में कोई कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे। हालांकि सरकार ने खुद पिछले कुछ सालों से RBI के जरिए सोने की खरीद बढ़ा दी है। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 13 May 2026 7:32 pm

बंकर में छिपने की अटकलों के बीच सामने आया पुतिन का वीडियो, पुरानी टीचर से मुलाकात की तस्वीरें वायरल

अब इन दावों के बीच क्रेमलिन ने एक नया वीडियो जारी किया है, जिसमें पुतिन मॉस्को की सड़कों पर खुद कार चलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में पुतिन अपनी पुरानी स्कूल टीचर से मुलाकात करते नजर आते हैं।

देशबन्धु 13 May 2026 3:58 pm

ट्रंप-चिनफिंग नहीं चाहते, ईरान संकट के कारण पटरी से उतरे द्विपक्षीय संबंध

इस यात्रा को केवल एक सामान्य द्विपक्षीय बैठक नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे ईरान संकट, ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिका-चीन संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समझा जा रहा है। अमेरिका लंबे समय से चीन पर दबाव बना रहा है कि वह ईरान पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे, ताकि युद्ध खत्म हो सके और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सके

देशबन्धु 13 May 2026 3:40 pm

यूक्रेन में युद्ध का अंत बहुत करीब : ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच समझौते की संभावना अब काफी करीब दिखाई दे रही है

देशबन्धु 13 May 2026 10:39 am

डेमोक्रेटिक नेताओं ने दी ईरान में बढ़े पैमाने पर युद्ध बढ़ने की चेतावनी

अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सीनेटरों ने चेतावनी दी है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिका को मध्य पूर्व में एक और लंबे युद्ध की तरफ धकेल सकता है

देशबन्धु 13 May 2026 9:01 am

रूस ने सरमत इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया

रूस के स्ट्रेटेजिक मिसाइल फोर्सेज के कमांडर के मुताबिक, रूस ने 'सरमत' इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है।

देशबन्धु 13 May 2026 8:40 am

सीजफायर समाप्‍त होते ही रूसी सेना का सैन्य अभियान फिर जारी, यूक्रेन पर युद्धव‍िराम तोड़ने का लगाया आरोप

रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि 'विशेष सैन्य अभियान' के तहत रूसी सेना की कार्रवाई यूक्रेन के साथ सीजफायर खत्म होने के बाद भी जारी है।

देशबन्धु 13 May 2026 5:30 am

क्या अजित पवार के प्लेन क्रैश से पहले हुआ तंत्र-मंत्र:गांववाले बोले- बकरे की बलि, पूजा हुई; लेकिन ये दादा का खेत नहीं

23 अप्रैल 2026, NCP विधायक अमोल मिटकरी ने खेत में कटे पड़े बकरे और पूजा-पाठ की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट कीं। दावा किया कि अजित पवार की मौत सामान्य हादसा नहीं था। अजित पवार के बारामती आने से पहले उनके खेत और फार्महाउस पर तंत्र-मंत्र और काला जादू कराया गया था। ये दावा महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की प्लेन क्रैश में मौत के 85 दिन बाद किया गया। उनके भतीजे रोहित पवार भी ऐसे आरोप लगा चुके हैं। दैनिक भास्कर की टीम इन दावों की पड़ताल करने और फोटोज की असलियत जानने के लिए बारामती में अजित पवार के गांव काटेवाड़ी पहुंची। यहां दो चश्मदीद मिले, जिन्होंने पूजा होते देखी थी। चश्मदीद 1: पूजा हुई, लेकिन अजित दादा के खेत में नहीं काटेवाड़ी के उपसरपंच और NCP से जुड़े मिलिंद तुकाराम काटे जादू-टोने की बात को गलत बताते हैं। वे दावा करते हैं, ‘विधायक अमोल मिटकरी ने जो फोटो शेयर की हैं, वो अजित दादा के घर या खेत की नहीं है। मैंने वो पूजा देखी है, वो अजित दादा के खेत में नहीं हुई थी।‘ पूजा पास के दूसरे खेत में हादसे के 15 दिन बाद की गई थी। ये खेत दादा के घर से दूर है। आज विज्ञान का जमाना है, लोग इन बातों में यकीन नहीं रखते। उस पूजा का अजित दादा के परिवार या इस घटना से कोई लेना-देना नहीं। गांव में रहने वाले मिलिंद कहते हैं, ‘अजित दादा के लिए लोगों में बहुत प्यार है। मीडिया के जरिए अलग-अलग सवाल उठाए जाते हैं, तो गांव के लोगों के दिलोदिमाग में भी थोड़ी शंकाएं पैदा होती हैं।‘ ‘हमें तो ये एक्सीडेंट ही लग रहा है। कुछ लोग साजिश की आशंका जता रहे हैं। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार गृह मंत्री अमित शाह और PM मोदी से मिली हैं। हमें भरोसा है कि अगर कुछ संदिग्ध होगा, तो सामने आएगा।‘ चश्मदीद 2: पूजा का दादा से लेना-देना नहीं हम काटेवाड़ी में उस जगह पहुंचे, जहां पूजा का दावा किया गया था। यहां किसान संजय मधुकर मिले। वे हमें खेत में ले गए। वहां पेड़ पर अब भी बकरे के अवशेष लटके हैं। यहीं बगल में संजय का खेत है। वे दावा करते हैं, ‘मैंने पूजा होते देखी थी। ये नहीं पता कि पूजा गांव में से किसने की थी।‘ ‘कई लोग पूजा की फोटो दिखाकर साजिश बता रहे हैं, लेकिन वहां किसी की फोटो नहीं रखी गई थी। मैंने देखा था कि वहां एक बोकड़ (बकरा) लटकाया गया था और उसका मुंडका (सिर) शरीर से अलग था। नीचे नींबू और नारियल रखकर पूजा की गई थी, लेकिन इसका अजित दादा के प्लेन क्रैश से कोई संबंध नहीं है। इसे बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।‘ विधायक बोले- प्लेन क्रैश हादसा नहीं, सोची-समझी साजिश गांव वालों के दावे जानने के बाद हमने NCP विधायक अमोल मिटकरी से भी बात की। वे अजित पवार के प्लेन क्रैश से पहले अघोरी पूजा के दावों पर कायम हैं। अमोल कहते हैं कि बारामती में उपचुनाव के समय मैं काटेवाड़ी गया था। वहां अजित दादा के फार्म हाउस की कुछ फोटो मिलीं, जिसमें जादू-टोने जैसी चीजें दिख रही थीं। ये सब काटेवाड़ी फार्म हाउस के पिछले हिस्से की थीं। अमोल कहते हैं, ‘अगर कोई प्लेन क्रैश को हादसा कहता है, तो इसे साबित करके दिखाए। प्लेन ट्रेंड पायलट उड़ा रहे थे, ऐसे में हादसे की गुंजाइश कम है। ये देखना जरूरी है कि 26, 27 और 28 जनवरी को अजित पवार कहां थे।‘ अजित के भतीजे रोहित बोले- काली पूजा से पीछे क्या मकसद, जांच हो अजित पवार के भतीजे और NCP (SP) के विधायक रोहित पवार भी कहते हैं कि अजित दादा के काटेवाड़ी वाले घर, बारामती और मुंबई के घर के बाहर काली पूजा की गई थी। इसके वीडियो भी हैं। काली पूजा से जुड़ा अशोक खरात अभी चर्चा में हैं। दादा की पार्टी के कई लोग उसके संपर्क में थे। हम जादू-टोने में भरोसा नहीं करते, लेकिन जो लोग ब्लैक मैजिक करते हैं, उनका मकसद क्या था, इसकी जांच होनी चाहिए। वे सियासी कारणों की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, ‘मौत के चार महीने पहले से अजित दादा BJP के खिलाफ आक्रामक प्रचार कर रहे थे। अगर शरद पवार साहब का दिमाग और दादा का काम करने का स्टाइल फिर साथ आ जाता, तो सत्ता में बैठे लोगों की मुसीबत हो जाती। क्या इस रंजिश के चलते कुछ किया गया, ये संदेह दूर होना चाहिए।‘ रोहित आगे कहते हैं कि VSR एविएशन कंपनी के मालिक वीके सिंह और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू के बीच अच्छे संबंध हैं, इसीलिए कंपनी की जांच ठीक से नहीं की जा रही है। वीके सिंह साजिश में शामिल लोगों के नाम बता सकते हैं। पुलिस के पास जादू-टोने की शिकायत नहीं बारामती तालुका पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर चंद्रशेखर यादव ने प्लेन क्रैश के बाद अजित पवार को सुलगते मलबे से बाहर निकाला था। फार्म हाउस में पूजा-पाठ या जादू-टोने के दावों पर चंद्रशेखर कहते हैं, ‘पुलिस के पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। हम खुद साइट पर गए थे। किसी ने अपने निजी खेत में कुछ किया हो, तो अजित पवार की मौत से उसका कोई लेना-देना नहीं है।‘ रोहित पवार के केस दर्ज न करने के आरोपों पर वे कहते हैं, ‘एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज होने के तुरंत बाद पूरा केस CID को हैंडओवर कर दिया गया। पुलिस ने सारी जानकारियां उन्हें सौंप दी हैं।‘ BJP नेता बोले- जादू-टोने जैसा कुछ नहीं, ये महज हादसा बारामती में BJP के जिला उपाध्यक्ष नितिन भामे कहते हैं, ‘शुरुआती जांच और पुलिस की अब तक की छानबीन में ये हादसा ही लग रहा है। बारामती तालुका पुलिस स्टेशन में पहले ही एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज की जा चुकी है।‘ ‘कुछ लोग इंजन के आवाज करने या प्लेन डगमगाने की बात कर रहे थे। जांच एजेंसियां इन सभी पहलुओं पर जांच कर रही हैं। ये पता लगाया जा रहा है कि हादसा के पीछे मैकेनिकल खराबी थी या फिर मानवीय लापरवाही। सच जांच पूरी होने पर सामने आ जाएगा।‘ वे कहते हैं कि अमोल जिन तस्वीरों को आधार बनाकर जादू टोने का दावा कर रहे हैं, उसका प्लेन क्रैश की घटना से कोई लेना-देना नहीं है। हमे जो भी स्थानीय इनपुट मिल रहे हैं, हम उन्हें जांच एजेंसियों के साथ शेयर कर रहे हैं। …………… ये खबर भी पढ़ें… 58 अश्लील वीडियो वाला खरात बोला-सब दैवीय शक्तियों ने कराया 58 अश्लील वीडियो, 150 पीड़ित महिलाएं, 1500 करोड़ की संपत्ति, 100 फर्जी खाते, स्वयंभू बाबा अशोक खरात पर आरोपों की लिस्ट, अंधविश्वास, मंत्रियों-विधायकों से कनेक्शन से होते हुए सबसे अहम गवाह जितेंद्र शेलके की मौत तक आ पहुंची। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 13 May 2026 5:10 am

प्लेन में ऑपरेशन थिएटर, कार में खून:आज चीन के लिए निकलेंगे ट्रम्प; जानिए अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा का पूरा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आज 3 दिन के दौरे पर चीन पहुंच रहे हैं। लेकिन उनके सिक्योरिटी एजेंट्स करीब 3 महीने पहले से ही पहुंच गए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा में बेहद बारीक बातों पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है। 3 एग्जांपल्स से समझिए… अमेरिकी राष्ट्रपति के व्हाइट हाउस से निकलकर, विदेश यात्रा करने और वापस व्हाइट हाउस आने तक ऐसे ही पूरे सुरक्षा इंतजाम जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… **** References and Further Readings... https://www.faa.gov/air_traffic/publications/atpubs/foa_html/chap5_section_1.html https://www.whitehouse.gov/about-the-white-house/the-grounds/air-force-one/ https://www.princegeorgecountyva.gov/news_detail_T6_R2139.php https://www.oregonlive.com/politics/2015/05/13_ways_secret_service_agents.html https://www.af.mil/About-Us/Fact-Sheets/Display/Article/104588/vc-25-air-force-one/ https://www.bbc.com/news/world-us-canada-57424507 https://www.ojp.gov/pdffiles1/nij/179981.pdf https://www.npr.org/2013/11/07/243769588/how-kennedys-assassination-changed-the-secret-service https://www.secretservice.gov/about/faq/general https://edition.cnn.com/2016/04/18/us/secret-service-fast-facts/index.html ------- ये खबर भी पढ़िए… पुतिन का मल-मूत्र भी उठा ले जाते हैं बॉडीगार्ड:किले जैसी सुरक्षित कार, खाने की जांच के लिए लैब; पुतिन का पूरा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब भी विदेश जाते हैं तो उनके खाने की जांच रूस से लाई लैब में होती है। उनकी खास ऑरस सीनेट कार पहले ही एयरलिफ्ट होकर पहुंच जाती है। और सबसे अनोखी बात- पुतिन का मल-मूत्र तक सील्ड बैग करके मॉस्को भेजा जाता है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 13 May 2026 5:09 am

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामफोसा पर महाभियोग की प्रक्रिया तेज, रिपोर्ट को अदालत में देंगे चुनौती

दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने एक स्वतंत्र पैनल की रिपोर्ट को न्यायिक समीक्षा के लिए ले जाने के अपने इरादे की घोषणा की है

देशबन्धु 13 May 2026 3:15 am

आने वाले हफ्तों में बढ़ सकते हैं हंता वायरस के मामले, फिलहाल वैश्विक खतरा नहीं: डब्‍ल्‍यूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने मंगलवार हंता वायरस के और मामले सामने आने की बात कही।

देशबन्धु 12 May 2026 11:52 pm

चीन-अमेरिका संवाद से वैश्विक स्थिरता को मिलेगा लाभ : संयुक्त राष्ट्र

चीन और अमेरिका के नेताओं के बीच होने वाली आगामी बैठक को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासचिव के उप प्रवक्ता फरहान हक ने 11 मई को कहा कि संयुक्त राष्ट्र, चीन और अमेरिका के बीच जारी संवाद और संपर्क की सराहना करता है।

देशबन्धु 12 May 2026 11:32 pm

चीन-अमेरिका संबंधों के बारे में धारणाओं पर सीजीटीएन का ग्लोबल सर्वे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। सीजीटीएन ने चीन के रेनमिन विश्वविद्यालय के सहयोग से इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल कम्युनिकेशन स्टडीज इन द न्यू एरा के माध्यम से चीन-अमेरिका संबंधों पर एक वैश्विक सर्वेक्षण किया।

देशबन्धु 12 May 2026 11:18 pm

हान चेंग ने 'विश्व डिजिटल शिक्षा सम्मेलन- 2026' के उद्घाटन समारोह में भाग लिया

चीन के चच्यांग प्रांत की राजधानी हांगचो में आयोजित 2026 विश्व डिजिटल शिक्षा सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में चीनी उपराष्ट्रपति हान चेंग ने भाग लिया और संबोधन दिया।

देशबन्धु 12 May 2026 11:16 pm

आज का एक्सप्लेनर:शराब दुकानें बंद, 200 यूनिट बिजली फ्री, गोल्ड चेन भी देंगे; फिल्मी हीरो जैसे फैसले ले रहे CM विजय, कितना महंगा पड़ेगा

CM बनते ही थलापति विजय किसी फिल्मी नायक की तरह फैसले ले रहे हैं। 48 घंटे में ही 700 से ज्यादा शराब की दुकानें बंद कराने का आदेश दिया। शपथ के मंच से ही 200 यूनिट फ्री बिजली का ऐलान कर दिया था। सोने की चेन, अंगूठी और कैश देने का भी वादा किया है। आखिर इन योजनाओं पर कितना पैसा खर्च करने वाले हैं सीएम विजय और तमिलनाडु सरकार के पास पर्याप्त पैसा मौजूद है या नहीं; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: थलापति विजय ने सीएम बनते ही कौन से बड़े फैसले लिए हैं? जवाब: 10 मई को तमिलनाडु के सीएम पद की शपथ लेने के बाद 48 घंटे में विजय ने 4 बड़े फैसले लिए… 1. 200 यूनिट फ्री बिजली 2. हर जिले में एंटी-ड्रग टास्क फोर्स 3. महिलाओं के लिए स्पेशल टास्क फोर्स 4. 717 शराब की दुकानें बंद होंगी सवाल-2: विजय ने और कौन से बड़े वादे किए हैं, जिन्हें जल्द पूरा कर सकते हैं? जवाब: विजय की पार्टी TVK ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में 4 कैटेगरी में फ्री योजनाओं सहित कई बड़े वादे किए हैं... 1. कैश, सोने की चेन, फ्री यात्रा जैसी महिलाओं से जुड़ी योजनाएं 2. रिजर्वेशन, बेरोजगारी भत्ता जैसी पढ़ाई से जुड़ी योजनाएं 3. कर्ज माफी, कैश जैसी किसानों से जुड़ी योजनाएं 4. 25 लाख के हेल्थ इंश्योरेंस जैसे स्वास्थ्य और अन्य सेक्टर के वादे सवाल-3: थलापति विजय की इन योजनाओं पर कितना पैसा खर्च होगा? जवाब: मोटा-मोटी एनालिसिस है कि इन वादों को पूरा करने के लिए विजय सरकार को सालाना करीब 1 लाख करोड़ रुपए तक खर्च करने पड़ सकते हैं… Slide सवाल-4: क्या तमिलनाडु सरकार के पास इन योजनाएं के लिए पर्याप्त पैसा है? जवाब: तमिलनाडु दूसरे राज्यों के मुकाबले अपनी कमाई के लिए खुद के सोर्सेज पर ज्यादा निर्भर है। राज्य की करीब 75% कमाई खुद के टैक्स यानी राज्य की GST, पेट्रोल और शराब की बिक्री पर लगने वाले टैक्स और स्टैम्प ड्यूटी वगैरह से आती है। बाकी का करीब 25% हिस्सा केंद्र सरकार से टैक्स डिवॉल्यूशन और अनुदानों के जरिए आता है। महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु की स्टेट जीडीपी देश में सबसे ज्यादा है। 2025-26 में तमिलनाडु की अनुमानित GSDP करीब 35 लाख करोड़ रुपए है। हालांकि मौजूदा समय में तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। राज्य पर कुल 10.5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। अगले वित्तीय वर्ष में इसके 10.71 लाख करोड़ रुपए पहुंचने का अनुमान है। इस समय राज्य के खाते में कुल 3.31 लाख करोड़ का राजस्व यानी सालाना कमाई जमा है। इन्हीं पैसों से सरकार कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन देती है, योजनाएं चलाती हैं, अपना ब्याज चुकाती है और सड़क जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाती है। इस पर कुल कमाई का 60% से ज्यादा पैसा खर्च हो जाता है। इसके बाद नई योजनाओं के लिए बहुत कम पैसा बचता है। विजय सरकार की नई योजनाओं पर सालाना करीब एक लाख करोड़ रुपए यानी तमिलनाडु के रेवेन्यू का लगभग एक-तिहाई हिस्सा खर्च हो जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विजय सरकार अगर शराब की बिक्री पर भी सख्ती करती है, तो सालाना कमाई करीब 30 हजार करोड़ रुपए घट जाएगी। इसके अलावा अगर नई योजनाएं लागू होती हैं, तो राजस्व घाटा GSDP के 1.2% से बढ़कर 3.8% हो जाएगा। साथ ही राजकोषीय घाटा यानी सरकार के पास मौजूद फंड में भी घाटा 3% से बढ़कर 5.6% हो सकता है। मार्च में चुनाव प्रचार के दौरान विजय ने DMK को निशाना बनाते हुए कहा था, 'लोग पूछते हैं कि 'स्टालिन सर' जो नहीं कर पाए, वह मैं कैसे करूंगा? राज्य का कुल बजट 4.39 लाख करोड़ रुपए का है, लेकिन उसका 30% हिस्सा 'स्टालिन सर टैक्स' यानी 20% मुख्यमंत्री को और 10% उनके मंत्रियों के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। अगर हम इस लूट को रोक दें, तो हमारे पास इन योजनाओं के लिए पर्याप्त पैसा होगा। आप भरोसा रखें, जीत हमारी ही होगी।' सवाल-5: तो क्या ये योजनाएं पूरी तरह लागू हो पाएंगी? जवाब: तमिलनाडु के सीनियर जर्नलिस्ट भगवान सिंह कहते हैं, ‘सरकार पर मौजूदा कर्ज को देखते हुए चुनावी वादों को पूरा करने के लिए फंडिंग जुटाना विजय के लिए बड़ी चुनौती होगी।’ विजय भी जानते हैं कि ये सभी वादे पूरे करना आसान काम नहीं है। उन्होंने अपनी घोषणाओं को लेकर जनता से समय मांगते हुए कहा, ‘कृपया धैर्य रखें, मुझे थोड़ा समय दें, मैं कोई फरिश्ता नहीं, बल्कि आपकी ही तरह आम इंसान हूं। मैं झूठे वादों से कभी आपको धोखा नहीं दूंगा और वही वादे करूंगा जो संभव हो।’ सीएम पद की शपथ लेने के बाद विजय ने पहले ही भाषण में कहा कि DMK सरकार ने उन पर 10 लाख करोड़ का कर्ज छोड़ा है। उन्होंने कहा, ‘मैं एक व्हाइट पेपर जारी करूंगा, जिसमें 2021 से 2026 तक तमिलनाडु सरकार की वित्तीय स्थिति के बारे में बताया जाएगा।’ 2021 में DMK की सरकार आने पर स्टालिन ने अपनी पूर्ववर्ती AIADMK सरकार के दौरान का व्हाइट पेपर जारी किया था। इसमें कहा गया कि 2022 तक सरकार पर 5.7 लाख करोड़ रुपए के कर्ज के लिए पिछली AIADMK जिम्मेदार है। जब विजय के व्हाइट पेपर जारी किया, तो स्टालिन ने X पर लिखा, ‘मौजूदा कर्ज तय सीमा के अंदर ही है। हमारी सरकार ने फरवरी में जारी बजट में तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति साफ कर दी थी, लेकिन आपने उसके बाद भी जनता से इतने सारे वादे किए।’ सवाल-6: थलापति विजय इतनी फ्री योजनाएं क्यों शुरू कर रहे? जवाब: तमिलनाडु की राजनीति में ऐसी योजनाओं की परंपरा रही है। 1991 में तमिलनाडु की CM बनीं जयललिता ने अपने कार्यकाल में ‘अम्मा उनावगम’ या अम्मा कैंटीन योजना चलाई थी, जिसके तहत गरीब-मजदूरों को 1 रुपए में इडली और 5 रुपए में सांभर-राइस दिया जाता था। इसके अलावा गरीब परिवार की बेटियों की शादी में 8 ग्राम सोना देने की योजना भी उन्हीं के समय शुरू हुई, जिसे 'थलिक्कू थंगम स्कीम' कहा गया। इसी तरह पूर्व CM एमके स्टालिन ने महिलाओं, युवाओं के लिए कई स्कीम के अलावा 100 यूनिट फ्री बिजली जैसी योजनाएं चलाईं। अब विजय DMK और AIADMK की योजनाओं से भी आगे निकल गए हैं। मसलन- -------- रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास ------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें…तमिलनाडु में नास्तिक के बाद ईसाई सीएम:थलापति विजय की कहानी, जिसने पहले ही चुनाव में स्टालिन की DMK, जयललिता की AIADMK को किनारे लगा दिया थलापति विजय। द्रविण राजनीति का नया सितारा। बचपन में एक्टर बने। जवानी में सुपरस्टार और पिछले दो साल में ही एक पूरी पार्टी खड़ी कर दी। विजय ने राज्य के नास्तिक मुख्यमंत्री स्टालिन की 50 साल पुरानी पार्टी DMK बनाम AIADMK की सियासत को किनारे लगा दिया। उनका तमिलनाडु का पहला ईसाई मुख्यमंत्री बनना तकरीबन तय है। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 12 May 2026 6:13 pm

अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, ट्रंप और नेतन्याहू के संभावित सैन्य कार्रवाई और ग्राउंड ऑपरेशन की चर्चा तेज

सूत्रों के मुताबिक, ईरान की ओर से भेजा गया जवाब अमेरिकी प्रशासन की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं था। इसी कारण ट्रंप प्रशासन ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद वॉशिंगटन और तेल अवीव के बीच उच्चस्तरीय बातचीत हुई।

देशबन्धु 12 May 2026 12:06 pm

अमेरिकी सीनेटरों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चीनी कारों को बताया खतरनाक, जासूसी के डर से लगा सकता है बैन

अमेरिका के सीनेटरों के एक समूह ने राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम, गलत ट्रेड प्रैक्टिस और घरेलू ऑटो इंडस्ट्री के लिए खतरों का हवाला देते हुए अमेरिकी सड़कों से चीनी कनेक्टेड गाड़ियों, सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर पर बैन लगाने के लिए कानून पेश किया है।

देशबन्धु 12 May 2026 9:42 am

होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित और खुला बनाए रखने पर जोर, रुबियो ने की यूके और ऑस्ट्रेलिया से बातचीत

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग बातचीत की। इन चर्चाओं में मुख्य रूप से ईरान और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित और खुला बनाए रखने पर जोर दिया गया। अमेरिकी विदेश विभाग ने इसकी जानकारी दी है।

देशबन्धु 12 May 2026 9:10 am

पाकिस्तान की पोल खुली! अमेरिका से किया मध्यस्थता का ड्रामा, चोरी-चोरी ईरान को ऐसे पहुंचाई मदद

अमेरिकी न्यूज चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम की घोषणा किए जाने के बाद ईरान ने अपने कुछ सैन्य विमानों को पाकिस्तान भेजा था।

देशबन्धु 12 May 2026 8:08 am

ट्रंप कराएंगे सालाना मेडिकल चेकअप, सेना के जवानों और कर्मचारियों से भी करेंगे मुलाकात

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 26 मई को वॉल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर जाएंगे

देशबन्धु 12 May 2026 7:50 am

ससुराल पहुंचते ही मुर्गी की बलि देती है दुल्हन:शिकार किए गए जानवर के सिर को मंदिर, टाइगर को भाई मानते हैं गालो लोग

सुबह के 7 बजे हैं। अरुणाचल प्रदेश की एक पहाड़ी बस्ती में हूं। यहं एक घर पर लोगों की भीड़ जमा है। उन्हीं के बीच एक लड़का परेशान खड़ा है। थोड़ी देर में घर से एक बुजुर्ग बाहर आते हैं। काले कपड़े में, बाघ की खाल का जैकेट पहने। कंधे पर धनुष, पीठ पर तीरों से भरा तरकश लिए और सिर पर टोपी लगाए। सभी उन्हें पुरोहित कह रहे हैं। नाम है- मोगी ओरी। वह लकड़ी से बने एक पाट पर बैठते हैं। उनके बगल ही एक और बुजुर्ग बैठते हैं, ये उनके साथी हैं। एक महिला आती है और पुरोहित के कान में कुछ बुदबुदाती है। तभी वहां मौजूद एक शख्स पुरोहित के हाथ में फड़फड़ाती मुर्गी थमाता है। पुरोहित मोगी ओरी फरसा उठाते हैं और झटके से मुर्गी की गर्दन काट देते हैं। चारों तरफ खून फैल जाता है। दैनिक भास्कर की सीरीज ‘हम लोग’ में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं अरुणाचल प्रदेश के गालो समुदाय की कहानी, जो संख्या में करीब 80 हजार बचे हैं। मुर्गी की यह बलि अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर से 140 किमी दूर यीगीकन्न बस्ती में स्थित पुरोहित के आंगन में दी जा रही है… मैंने वहां मौजूद एक शख्स से पूछा कि ये बलि क्यों दी जा रही है? वो एक महिला की ओर इशारा करते हुए बताने लगे कि उन्होंने उस परेशान खड़े लड़के पर धान चोरी का आरोप लगाया है, जिसकी सुनवाई चल रही है। पुरोहित ने लड़के से उसका नाम और जन्म की तारीख पूछी और उसके बाद दोनों हाथ से मुर्गी को फाड़ दिया। उसका कलेजा निकाला और खून से सने हाथों में कलेजा छिपाए घर के अंदर चल पड़ा। मुझे भी पीछे आने का इशारा किया। अंदर जाते ही पुरोहित ने आंखें बंद कर ली और कुछ बुदबुदाने लगा। फिर खून से सने मुर्गी के कलेजे पर बार-बार फूंकने लगा। कुछ देर बाद फिर बाहर आया। अपने गले में पहना हुआ टाइगर का एक दांत लड़के की तरफ बढ़ाया और बोला- ‘इस पर हाथ रखकर कहो कि तुमने चोरी नहीं की है।’ लड़का फौरन बोला- ‘मैंने चोरी नहीं की है, धान नहीं चुराया है।’ इस पर पुरोहित ने पास बैठे बुजुर्ग को उबला हुआ अंडा खाने को दिया। अंडा खाने के बाद बुजुर्ग ने पुरोहित के कान में कुछ कहा। कुछ पल खामोशी रहती है। उसके बाद पुरोहित कहता है- ‘लड़का बेकसूर है, इसे घर जाने दो।’ इसके बाद लड़का और वहां मौजूद सभी लोग घर चले जाते हैं। करीब 10 मिनट बाद मैं पुरोहित मोगी ओरी के पास गई और पूछा- अंडा खाने से कैसे पता चला कि लड़का चोर नहीं है? पुरोहित बोला- अंडा खाने के बाद अगर मन का भाव अच्छा है तो आरोपी सच बोल रहा है। अगर भाव गलत है, तो आरोपी झूठ बोल रहा है। फिर मैंने पूछा- यदि आरोप साबित होता तो क्या सजा मिलती? पुरोहित बोला- जिस पर चोरी, हत्या या बलात्कार का आरोप साबित होता है उसे हमारे सबसे खास उत्सव मोपिन में शामिल नहीं किया जाता। साथ ही आरोपी और उसके परिवार को चावल और अदरक की खेती करने से रोक दिया जाता है। फिर मैंने पुरोहित की वेश-भूषा के बारे में पूछा। वह बातते हैं- इस तरह बाघ की खाल पहने बिना मैं बलि नहीं दे सकता। इस बातचीत के दौरान ओरी के तरकश और तीर को छूने के लिए मैं हाथ बढ़ाती हूं, तो वह तेज आवाज में बोल पड़ते हैं- नहीं, इसे मत छुओ, मर जाओगी। इन्हें छूने से तुम्हारा हाथ सड़ सकता है। तीर हल्का सा भी लग गया तो जान चली जाएगी। मैंने पूछा ऐसा क्यों? वह बताते हैं, इन तीरों पर एक जहरीले पौधे पाएजन की पत्तियों को पीसकर लगाया गया है। इससे यह तीर इतना खतरनाक हो गया है कि इसके एक ही वार से इंसान हो या जानवर ढेर हो जाता है। फिर वह मुझे अपने गले में पहने टाइगर के दांत को दिखाते हुए बताते हैं- यह पांच पीढ़ी पुराना है। जैसे- हिंदुओं के लिए गीता, मुसलमानों के लिए कुरान और ईसाइयों के लिए बाइबल होती है, वैसे ही हमारे लिए यह टाइगर का दांत पवित्र होता है। इसकी पवित्रता के लिए हम रोज पूजा करते हैं। इसे सिर्फ पुरोहित पहनते हैं। हम टाइगर को अपना भाई मानते हैं। इसी से हमें शक्ति मिलती है। यदि कोई इसे छूकर झूठी कसम खा ले, तो उसके साथ बहुत बुरा होता है। जानवरों के कंकाल से सजा मंदिर अब तक दोपहर के 11 बज चुके हैं। मैं और मेरी साथी रीबा दूसरी बस्ती- लोगोमजोन की तरफ निकल पड़ते हैं। करीब 20 मिनट बाद दूर से ही बांस और लकड़ियों से बने घर नजर आने लगते हैं। यहां घर जमीन से एक-दो फीट ऊपर बने हुए हैं। बस्ती में पहुंचने पर यहां एक लड़का लिबोन ईंगो हमें अपने घर लेकर जाता है। आंगन में एक ओर दीवार पर जानवरों के कंकाल टंगे हैं। मैंने पूछा- यह क्या है? लिबोन बताते हैं- ये जंगली सूअर और हिरण के सिर के कंकाल हैं। इन्हें हमारे पूर्वज शिकार करके लाए थे। ये घर के जिस कोने में टंगे हैं, वही हमारे गालो समुदाय का मंदिर है। यहां हर घर में ऐसा ही मंदिर होता है। इस मंदिर में महिलाओ के आने पर रोक है। यहां सिर्फ पुरुषों को आकर पूजा करने की इजाजत है। आप भी मंदिर से थोड़ा दूर ही रहें। ये सुनते ही मैं दो कदम पीछे हट गई। लिबाेन बताते हैं- जब हम शिकार करके लाते हैं तो उसकी विधि-विधान से पूजा करते हैं। माना जाता है कि पूजा न करने पर जानवर का भूत आ सकता है। अगर हम जंगली सूअर मारते हैं, तो उसकी बड़ी पूजा करते हैं। पूजा के बाद उसका मांस पूरी बस्ती में बांटते हैं। सिर का मांस महिलाओं को नहीं दिया जाता। मैंने पूछा- कैसे पता चलता है कि भूत आ गया? वह बताते हैं- अगर किसी घर में कोई बीमार पड़ जाए या शराब खराब हो जाए, तो समझा जाता है कि जंगली सूअर का भूत आ गया है। फिर भूत को शांत करने के लिए 20 सूअर और 40 मुर्गियों की बलि दी जाती है। रसोई में टांगते हैं मिथुन का सींग इसके बाद वह हमें अपनी रसोई में ले जाते हैं। रसोई इतनी बड़ी है कि 20-25 लोग आराम से बैठ सकते हैं। बीचों-बीच चूल्हा जल रहा है। पुरुषों और महिलाओं के बैठने की जगह अलग-अलग तय है। जहां पुरुष बैठते हैं, वहां महिलाएं नहीं बैठ सकतीं। रसोई में बैठे परिवार के लोग गालो भाषा में बात कर रहे हैं। एक महिला सभी को शराब और सूखा मांस परोसती हैं। शराब को यहां ‘पोको’ कहते हैं, जो चावल और धान की भूसी से बनी होती है। इस दौरान मेरी नजर रसोई की एक दीवार पर पड़ी, जहां जानवरों के सींग टंगे हैं। मैंने पूछा- ये किसके सींग हैं? बुजुर्ग महिला पाकंगम पाकम ईंगो बताती हैं- ‘ये मिथुन के सींग हैं। मिथुन हमारी परंपरा में शामिल है, खासकर शादी के वक्त। दरअसल, मिथुन अरुणाचल प्रदेश का राजकीय पशु है, जो पहाड़ी बैल जैसा होता है।’ वह एक पुरानी कथा सुनाती हैं। उनके मुताबिक, गालो समुदाय के लोग कभी गुफाओं में रहा करते थे और बहुत जरूरत पड़ने पर ही बाहर निकलते थे। एक दिन एक विशाल पत्थर गुफा के मुहाने पर आ गिरा और रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। गालो लोगों ने एक-एक कर कई जानवरों को उस पत्थर को हटाने के लिए भेजा, लेकिन कोई कामयाब नहीं हुआ। आखिर में मिथुन को भेजा गया। उसने अपनी ताकत से जोरदार धक्का मारा और पत्थर को हटा दिया। कहा जाता है कि उसी दिन से गालो लोग गुफा से बाहर निकलकर खुले संसार में आकर रहने लगे। तभी से मिथुन हमारे लिए सिर्फ एक जानवर नहीं, बल्कि पूजनीय साथी माना जाता है। मैंने पूछा- मिथुन यहां की परंपराओं में कैसे शामिल है? वे बताती हैं- सबसे पहले लड़के वाले, लड़की के परिवार को संदेश भेजते हैं कि हमारा बेटा, आपकी बेटी से शादी करना चाहता है। रिश्ता तय होते ही लड़के वाले दहेज के रूप में लड़की के परिवार के लिए मछली, तलवार, 10 मिथुन और 10 गाय भेजते हैं। इस प्रथा को ‘अरी’ कहते हैं। इसके बाद, दोनों परिवार शादी का दिन तय करते हैं। फिर हमारे यहां लड़का और लड़की धनुष के एक-एक सिरे को पकड़ कर घर के सात फेरे लेते हैं। यह घर लड़के का होता है। फेरे के बाद शादी हो जाती है। उसके बाद नई दुल्हन ससुराल आने पर सबसे पहले घर की चौखट पर मुर्गी की बलि देती है और लड़की का भाई मिथुन की बलि देता है। कोई 10, कोई 20 तो कोई 50 की बलि देता है, जो जितनी ज्यादा बलि देता है, वह उतना संपन्न माना जाता है। वह बताती हैं, हमारे यहां बच्चों का नाम रखने की भी खास परंपरा है। पिता के नाम के आखिरी अक्षर से बेटे का नाम शुरू होता है। जैसे- पिता का नाम- ’आबो’ है तो बेटे का नाम ‘बो’ से शुरू होगा। इससे हमें हमारे पूर्वजों के नाम याद रहते हैं। इस बातचीत के दौरान ही लिबोन की पत्नी घर से बाहर आती हैं। वह मुझे अपना लोअर ‘गाले’ पहनाती हैं। यह यहां का पारंपरिक लिबास है। मोपिन देवी की पूजा करते हैं अब तक दोपहर के 2 बज गए थे। हम फिर से पुरोहित मोगी ओरी के घर वापस पहुंचते हैं। वो मोपिन उत्सव के बारे में बताते हुए कहते हैं- गालो समुदाय में हमारे एक पूर्वज थे- औबोतनि। वह घुमक्कड़ी थे। इधर-उधर घूमते रहते थे। माना जाता है कि हमारी मोपिन देवी ने उन्हें खेती करना सिखाया, ताकि वह एक स्थान पर ही रहें, इधर-उधर भटकें नहीं। मोपिन देवी, मां लक्ष्मी का रूप मानी जाती हैं। उनके आशीर्वाद से ही गालो लोगों ने खेती करना सीखा। उसके बाद हम एक जगह बस गए। तब से हर साल अप्रैल के पहले हफ्ते में मोपिन उत्सव मनाया जाता है। इस उत्सव पर सभी एक-दूसरे के चेहरे पर चावल का आटा लगाते हैं। मिथुन की बलि दी जाती है। जिस मिथुन को बलि के लिए चुना जाता है, उसे बलि से एक रात पहले मोपिन देवी के मंदिर के बाहर बांध जाता है। सुबह उसकी बलि दी जाती है और मांस को बांटा जाता है। मान्यता है, यह मांस खाने से दुख दूर होता है। इसलिए इसे खाना जरूरी होता है। पुरोहित बताते हैं- गालो सूर्य यानी ‘दौनी’ और चंद्रमा यानी ‘पौलो’ की पूजा करते हैं। सुबह-शाम बकायदा ध्यान भी लगाते हैं। मौत पर गीत गाते हैं, देते हैं बलि इसके बाद, पुरोहित मुझे गालो समुदाय में होने वाले अंतिम संस्कार के बारे में बताते हैं। वे कहते हैं- हमारे यहां मौत के बाद दफनाने की परंपरा है, क्योंकि इंसान धरती से पैदा हुआ है, इसलिए उसे धरती की ही गोद में लौटना चाहिए। यदि गालो समुदाय में किसी की मौत होती है, तो पूरी रात शव के पास बैठकर महिलाएं गीत गाती हैं। उस दौरान पुरुष और पुरोहित अपनी भाषा में लगातार मंत्र पढ़ते हैं। फिर मुर्गी, गाय, भेड़ और बकरी की बलि दी जाती है। मृतक की समाधि पर उसका मनपसंद भोजन रखा जाता है। शव को दफनाने के बाद पांच दिन तक बस्ती में भोज चलता है। गालो मानते हैं कि यदि किसी को मरने के बाद जलाया जाए, तो वह यमलोक चला जाता है और फिर लौटकर नहीं आता। इस सीरीज में अगले हफ्ते पढ़िए लेह के बौद्ध तपस्वियों की कहानी…. ------------------------------- 1- नाचती लड़की का हाथ पकड़ा और भगा ले गया लड़का:मैतेई लोगों में शादी की अनोखी परंपरा, पैदा होते ही बच्चे को खिला देते हैं नमक शाम के 5 बजे हैं। एक सुनसान जगह पर कुछ लोग जमीन को चौकोर खोद रहे हैं। आसपास भीड़ है। आधे घंटे बाद खुदाई करने वालों को गड्ढे में कुछ नजर आया। कुछ पल बाद दो-तीन लोग उस गड्‌ढे में उतरे और एक लाश बाहर निकालकर रख दी। लाश के कई हिस्से कंकाल में तब्दील हो चुके हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- शरीर के ऊपरी हिस्से पर कपड़े नहीं पहनतीं बोंडा महिलाएं:शादी ठुकराने पर लड़कीवालों का घर तोड़ देते हैं, मृत्युभोज में खाते हैं गाय का मांस सुबह करीब 10 बजे का वक्त। मिट्टी से लिपा-पुता एक कच्चा घर। बाहर सिर मुंडाए दो महिलाएं बैठी हैं। उम्र करीब 38-40 साल। ऊपरी बदन लगभग नंगा। बाकी शरीर पर नाम मात्र के कपड़े। छाती छिपाने के लिए मोतियों और कौड़ियों से बनी मालाएं। पूरी कहानी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 12 May 2026 5:01 am

लेबनान में भारतीय शांति सैनिकों की बड़ी भूमिका की हुई सराहना

भारतीय दूतावास (लेबनान) ने सोमवार को दक्षिण लेबनान में तैनात भारतीय शांति सैनिकों की सराहना की है

देशबन्धु 12 May 2026 3:13 am

अप्रैल में चीन के नए ऊर्जा वाहनों के उत्पादन, बिक्री और निर्यात में तेज बढ़ोतरी

चीन ऑटोमोबाइल निर्माता संघ (सीएएएम) ने बताया कि अप्रैल महीने में चीन के नए ऊर्जा वाहनों के उत्पादन, बिक्री और निर्यात में लगातार वृद्धि दर्ज की गई।

देशबन्धु 11 May 2026 11:39 pm

नेपाल में PM बनते ही सामने आया बालेन शाह का असली चेहरा, 45 दिन में भारत के खिलाफ लिए ये 4 फैसले

नेपाल सरकार ने भारत-नेपाल सीमा से आने-जाने वाले लोगों के लिए नई व्यवस्था लागू करने की घोषणा की है। अब भारत से नेपाल जाने वाले भारतीय नागरिकों को हर समय पहचान पत्र साथ रखना होगा। इसके अलावा सुरक्षा जांच की प्रक्रिया भी अनिवार्य कर दी गई है।

देशबन्धु 11 May 2026 6:47 pm

आज का एक्सप्लेनर:पीएम मोदी क्यों चाहते हैं कि आप सोना न खरीदें, ऐसी 7 अपील के पीछे की कहानी; क्या आपको चिंता करनी चाहिए

पीएम मोदी ने रविवार को तेलंगाना की एक रैली में देश से 7 अपीलें कीं। इनमें एक अपील सोना न खरीदने की भी थी। पीएम मोदी ने कहा- देशहित में हमें यह तय करना होगा कि सालभर तक घर में कोई कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे। हालांकि सरकार ने खुद पिछले कुछ सालों से RBI के जरिए सोने की खरीद बढ़ा दी है। पीएम मोदी की अपील के पीछे असली वजह क्या है और क्या आपको वाकई चिंता करनी चाहिए; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… 1. एक साल तक सोना न खरीदने से क्या होगा? पीएम मोदी ने कहा: ‘एक समय था, जब संकट आने पर देशहित में लोग सोना दान दे देते थे। आज दान की जरूरत नहीं है, लेकिन देशहित में हमें यह तय करना होगा कि सालभर तक घर में कोई कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें यह स्वीकार करके विदेशी मुद्रा बचानी होगी।’ ऐसा क्यों कहा: पीएम मोदी ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए ये अपील की। भारत अपने इस्तेमाल का करीब 99% सोना विदेशों से खरीदता है। 2025-26 में सोने का ये इम्पोर्ट बिल करीब 6.4 लाख करोड़ रुपए का था। विदेशों से खरीदे जाने वाले सामान के कुल खर्चे में 9% हिस्सेदारी के साथ सोना दूसरे नंबर पर है। 2. पेट्रोल-डीजल के कम इस्तेमाल और ‘वर्क फ्रॉम होम’ से क्या होगा? पीएम मोदी ने कहा: ‘भारत के पास दूसरे देशों की तरह बड़े-बड़े तेल के कुएं नहीं हैं। हमें पेट्रोल डीजल का उपयोग कम करना होगा। शहरों में जहां मेट्रो है, वहां हम तय करें कि हम ज्यादा से ज्यादा मेट्रो का ही उपयोग करेंगे। अगर कार में ही जाना जरूरी है, तो फिर कार पूल करने का प्रयास करें। और भी लोगों को साथ बिठा लें। अगर हमें कहीं सामान भेजना हो तो कोशिश करनी है कि वह ज्यादा से ज्यादा रेलवे गूड्स सर्विज से भेजें। वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन कान्फ्रेंसेस, वर्चुअल मीटिंग, इनको हमें फिर से प्राथमिकता देनी है।’ ऐसा क्यों कहा: अमेरिका-ईरान जंग शुरू होने के बाद दुनियाभर में तेल की कीमतें 50% तक बढ़ी हैं। ईरान पर अमेरिकी हमले के एक दिन पहले यानी 27 फरवरी को इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 72.87 डॉलर प्रति बैरल थी, जो 11 मई को 103.78 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। 3. फर्टिलाइजर के बजाय प्राकृतिक खेती पर शिफ्ट होने की अपील क्यों? पीएम मोदी ने कहा: ’ये बहुत जरूरी है कि हम केमिकल फर्टिलाइजर की खपत 25-50% तक घटाएं, उसे आधी कर दें। हम इसके साथ-साथ नेचुरल फार्मिंग की तरफ बढ़े। मैं कोविड काल से कहता आया हूं कि हम स्थानीय चीजें खरीदें। वोकल फॉर लोकल के मंत्र को लेकर चलें। हम मेड इन इंडिया चीजें खरीद कर भी विदेशी मुद्रा बचा सकते हैं।’ ऐसा क्यों कहा: भारत फर्टिलाइजर, यानी खाद के मामले में दुनिया के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है। भारत अपनी जरूरत का 25-30% यूरिया, 90% DAP और 100% पोटाश विदेशों से खरीदता है। भारत के इम्पोर्ट बिल में इसका हिस्सा करीब 3% है। फर्टिलाइजर का कम इस्तेमाल करने की अपील के पीछे 3 बड़ी वजहें हैं… यानी फर्टिलाइजर की कम खपत से इम्पोर्ट बिल और सब्सिडी का खर्च कम होगा। हालांकि इससे पैदावार घटने का संकट भी खड़ा हो सकता है। 4. घूमने यानी शादी के लिए विदेश नहीं जाने से क्या होगा? पीएम मोदी ने कहा: ‘आजकल मिडिल क्लास में विदेशों में शादियों का, विदेश घूमने का और वैकेशन पर जाने का कल्चर बढ़ता जा रहा है। हमें तय करना होगा कि जब यह संकट का काल है और हमारी देशभक्ति हमें ललकार रही है, तो कम से कम एक साल के लिए हमें विदेश जाने की बातों को टालना चाहिए।’ ऐसा क्यों कहा: मार्च 2025 में आई टूरिज्म डिपार्टमेंट की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में 3.27 करोड़ भारतीयों ने विदेश यात्रा की। इसमें से 43.5% छुट्टी मनाने या घूमने वगैरह के लिए विदेश गए, जो 2024 से 6% ज्यादा है। 5. खाने का तेल कम खाने की बात क्यों कही? पीएम मोदी ने कहा: ‘खाने के तेल आयात के लिए भी बहुत बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। हर परिवार अगर खाने के तेल का उपयोग 10% कम करे, तो भी वह देशभक्ति का बहुत बड़ा काम है।’ ऐसा क्यों कहा: भारत अपने खाने के तेल की जरूरतों का लगभग 60-65% हिस्सा विदेशों से मंगाता है। 59% पाम ऑयल, 23% सोयाबीन ऑयल, 15% सनफ्लावर ऑयल इम्पोर्ट करता है। सवाल: क्या पीएम मोदी की अपीलों के पीछे कोई गहरी चिंता छिपी हुई है? जवाब: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा, ‘12 साल में देश को इस मुकाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है- क्या खरीदें, क्या न खरीदें, कहां जाएं, कहां न जाएं।’ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने पोस्ट किया, ‘सारी पाबंदियां चुनाव के बाद ही क्यों याद आई हैं? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हजारों चार्टर हवाई यात्राएं कीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे?’ दरअसल, पीएम मोदी की 7 अपीलों की पीछे की वजह भारत का घटता फॉरेन रिजर्व है। 1 मई को भारत का कुल फॉरेन रिजर्व 690.69 बिलियन डॉलर, यानी करीब 65.6 लाख करोड़ रुपए पर आ गया। एक हफ्ते में ये करीब 26 हजार करोड़ रुपए कम हुआ है। फरवरी 2026 में यह अपने ऑल टाइम हाई लेवल पर था। तब यह कुल 728.49 बिलियन डॉलर था। यानी पिछले ढाई महीनों में इसमें करीब 37.8 बिलियन डॉलर की गिरावट आई है। वहीं भारत के स्ट्रैटजिक ऑयल रिजर्व को देखें तो मार्च के आखिर में सरकार ने बताया था कि कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन की क्षमता में से करीब 3.37 मिलियन मीट्रिक टन तेल स्टॉक में हैं। यानी कुल क्षमता का 64% तेल भरा हुआ है, जबकि 36% खाली है। पीएम मोदी ने जिन 4 चीजों- सोना, कच्चा तेल, फर्टिलाइजर और खाने के तेल को लेकर अपील की है, उनका इम्पोर्ट बिल 240 बिलियन डॉलर, यानी करीब 22 लाख करोड़ रुपए है। ये कुल इम्पोर्ट बिल का करीब 31% है। ब्रिटिश न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के 46 अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि भारत में महंगाई दर मार्च 2026 में 3.4% थी, जो अप्रैल में बढ़कर 3.8% हो गई। अलग-अलग अर्थशास्त्रियों ने इसके 2.8% से 4.2% तक होने का अनुमान लगाया है। पूर्व भारतीय डिप्लोमैट निरुपमा राव के मुताबिक, ‘ईरान जंग से भारतीयों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ा है। पीएम की अपील का मतलब है कि हमें यह संकट समझने की जरूरत है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि भारत की अर्थव्यवस्था संकट में है। जो बोझ पड़ रहा है उसे सरकार, व्यवसायों और आम लोगों के बीच बांटना जरूरी है।’ इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के गुजरात प्रेसिडेंट नैनेश पच्चीगर के मुताबिक पीएम मोदी की अपील भारत के फॉरेन एक्सचेंज बचाने में मदद कर सकती है। सवाल: आम लोगों को सोना न खरीदने को कहा, लेकिन सरकार खुद ज्यादा क्यों खरीद रही? जवाब: एक तरफ पीएम मोदी ने देशवासियों से 1 साल तक सोना न खरीदने की अपील की है। दूसरी तरफ भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI का गोल्ड रिजर्व अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच 104.2 टन तक बढ़ा है। अभी भारत के पास करीब 880 टन गोल्ड रिजर्व है। पिछले 10 सालों में यह 57.81% तक बढ़ा है। 2023 से 2025 के बीच 280 टन सोना RBI ने जुटाया। दरअसल, सोना खरीदने का यह ट्रेंड भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों के सेंट्रल बैंकों अपना रहे हैं। चीन, ब्राजील, तुर्किये, पोलैंड जैसे कई देश गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने रूस का 300 बिलियन डॉलर फॉरेन रिजर्व पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से दुनियाभर के देशों में डॉलर के प्रति भरोसा कम होने लगा और वो अपना फॉरेन रिजर्व दूसरी करेंसी और खासकर सोने में डाइवर्सिफाय करने लगे। सोने को एक सुरक्षित निवेश समझा जाता है, जो जरूरत के समय काम आता है। पहले भारत अपना सोना दूसरे देशों के बैंकों में भी रखता था। अब इसे भी घर में ही रख रहा है। 2023 में RBI का 38% सोना ही देश में था। अब 77% देश में है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ज्यादा सोना देश में रखने से वैश्विक अस्थिरता के समय देश में सुरक्षा सुनिश्चित रहती है। दूसरे देशों पर निर्भरता भी कम होती है। ---------------------- ये खबर भी पढ़ें… चुनाव बाद कितना महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल; ईरान जंग में पाक से अमेरिका तक 44% कीमतें बढ़ीं, भारत ने कैसे रोके रखा ईरान जंग शुरू होने के बाद से पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 320 पाकिस्तानी रुपए से बढ़कर 460 रुपए पहुंच गई। यानी महज 50 दिनों में करीब 44% की बढ़ोत्तरी। इसी तरह अमेरिका में 42% और चीन में 31% तक तेल की कीमतें बढ़ीं। हालांकि भारत में इस दौरान तेल के दाम ज्यों के त्यों रहे। इससे तेल कंपनियों को हर दिन करोड़ों का नुकसान हो रहा है। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 11 May 2026 6:03 pm

रूस-यूक्रेन में युद्धविराम पर तकरार

रूस और यूक्रेन ने रविवार को एक-दूसरे पर तीन दिन के युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया

देशबन्धु 11 May 2026 7:37 am

सरकारी खजाने से सोमनाथ मंदिर बनवाने के खिलाफ थे गांधी:नेहरू उद्घाटन में क्यों नहीं गए; आज 75 साल पूरे होने पर मोदी जाएंगे

11 मई 1951, गुजरात का प्रभास पाटन क्षेत्र। 1300 सालों में 7वीं बार सोमनाथ मंदिर नए सिरे से बनकर तैयार था। उद्घाटन के लिए मंदिर ट्रस्ट के मुखिया और तब केंद्रीय मंत्री रहे केएम मुंशी ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को न्योता दिया था। लेकिन नेहरू ने आने से साफ मना कर दिया। उन्होंने मुंशी से कहा था, 'सोमनाथ मंदिर को फिर से बनाना मुझे पसंद नहीं। ये हिंदू पुनरुत्थानवाद है।’ उनके मना करने के बावजूद राजेंद्र प्रसाद मंदिर पहुंचे और उद्घाटन में शामिल हुए। आज इसके 75 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमनाथ जाने वाले हैं। वे ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ में शामिल होंगे और विशेष ध्वज फहराएंगे। यह पीएम मोदी की 5 महीने में दूसरी सोमनाथ यात्रा है। मंडे मेगा स्टोरी में सोमनाथ मंदिर के टूटने, बनने और उससे जुड़ी कंट्रोवर्सीज की पूरी कहानी... ***** ग्राफिक्स: दृगचंद भुर्जी ------ यह खबर भी पढ़िए… महिलाओं के मस्जिद जाने, लड़कियों का खतना:ऐसे 66 मामलों पर असर डालेगा सबरीमाला का फैसला, शिव-विष्णु के मिलन से जन्मे अयप्पा की कहानी भारत की सभी मस्जिदों में महिलाएं बिना रुकावट नमाज पढ़ने जा सकेंगी या नहीं? दाऊदी बोहरा समाज की लड़कियों का खतना क्या गैर-कानूनी हो जाएगा? क्या दूसरे धर्म में शादी करने के बाद भी पारसी महिलाएं अग्नि मंदिर में जा पाएंगी? इन सभी सवालों के जवाब तय होंगे सबरीमाला पर फैसले से। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 11 May 2026 5:15 am