जलवायु परिवर्तन से निपटने को राजस्थान अब अपनाएगा सिक्किम और असम मॉडल
ग्लोबल वार्मिंग और घटते भूजल के बीच राजस्थान की कृषि अर्थव्यवस्था को टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा नीतिगत कदम उठाया जा रहा है। राज्य को गो-आधारित जैविक अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूसर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. अतुल गुप्ता 28 से 30 जुलाई तक असम और सिक्किम के अध्ययन दौरे पर रहेंगे। चारों शंकराचार्यों और धर्माचार्यों के आध्यात्मिक समर्थन के बाद अब इस अभियान को संवैधानिक और नीतिगत समर्थन दिलाने की पहल की जा रही है। 28 जुलाई को असम तथा 30 जुलाई को सिक्किम के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों के साथ प्रस्तावित बैठकों के बाद संयुक्त समन्वय समिति गठित की जाएगी। राज्य की गोशालाओं को वर्मीकंपोस्ट और जैव-उर्वरक उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करने, महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को ग्रेडिंग, पैकिंग और ब्रांडिंग से जोड़ने तथा प्रत्येक जिले में जैविक क्लस्टर विकसित करने की योजना है। सिक्किम ने 2003 में जैविक नीति लागू की और 2016 में देश का पहला 100 प्रतिशत जैविक राज्य बना। वहां रसायन-मुक्त खेती को पर्यटन, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और डायरेक्ट एक्सपोर्ट से जोड़ने के बाद किसानों की आय में 40 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। इसी मॉडल के आधार पर राजस्थान में भी जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है।

