पानीपत जिले के नौल्था गांव के रहने वाले कबड्डी खिलाड़ी अंकित जागलान का जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में चयन हो गया है। इस उपलब्धि से पूरे गांव में खुशी का माहौल है। अंकित जागलान ने अपनी कड़ी मेहनत और शानदार खेल के दम पर गांव और जिले का नाम राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। उनके नाम पहले भी कई रिकॉर्ड दर्ज हैं, जिसमें प्रो कबड्डी में पटना पाइरेट्स का प्रतिनिधित्व करना शामिल है। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। 8 साल की उम्र में खेलों में कदम रखा अंकित के पिता सुल्तान सिंह जागलान ने बताया कि अंकित ने 8 साल की उम्र में खेलों में कदम रखा था। परिवार ने उनकी खेल के प्रति रुचि को देखते हुए हमेशा उनका हौसला बढ़ाया। सुल्तान सिंह ने यह भी बताया कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवार ने अंकित को कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दी। पटना पाइरेट्स के कप्तान बने अंकित पहली बार प्रो कबड्डी में गांव के 7 अन्य खिलाड़ियों के साथ चुने गए थे। इसके बाद, उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें अगले साल प्रो कबड्डी की पटना पाइरेट्स टीम का कप्तान बनाया गया, जिस पद पर वह लगातार 2 साल तक रहे। इस साल हैदराबाद में एशियाई टीम के चयन के लिए 25 खिलाड़ियों का एक समूह गया था, जिसमें से 12 खिलाड़ियों का चयन हुआ और अंकित भी उनमें शामिल हैं। गांव में जश्न का माहौल अंकित की सफलता की खबर सुनकर पूरे गांव में जश्न का माहौल है। उनके पिता ने कहा कि अंकित ने केवल परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे गांव और जिले का नाम रोशन किया है। सभी को उम्मीद है कि अंकित एशियाई खेलों में भी बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे।
Top-5 Players With Most Runs In Women's T20 Asia Cup History: महिला एशिया कप 2026 का आगाज होने में अब कुछ ही दिनों का समय बचा है। ये टूर्नामेंट शुक्रवार, 28 अगस्त से दुबई में खेला जाएगा जिसमें कुल 8 टीमें हिस्सा लेंगी। तो आइए इस टूर्नामेंट के शुरूहोने से पहले आज हम आपको अपने खास आर्टिकल के जरिए बताते हैं उन पांच खिलाड़ियों के नाम जिन्होंने महिला टी20 एशिया कप में सर्वाधिक रन बनाने का कारनामा किया है। 5. बिस्माह मारूफ (Bismah Maroof): इस लिस्ट में पांचवें नंबर पर पाकिस्तान की पूर्व कप्तान बिस्माह मारूफ हैं। उन्होंने साल 2012 से लेकर 2022 तक कुल 23 महिला टी20 एशिया कप मुकाबले खेले और 423 रन बनाए। इस टूर्नामेंट में उनका औसत 24.88 रहा और उन्होंने 2 अर्धशतक जड़े। 4. मिताली राज (Mithali Raj): भारत की महान बल्लेबाज़ और पूर्व कप्तान मिताली राज इस लिस्ट में ना हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता। मिताली ने महज़ 12 महिला टी20 एशिया कप मुकाबले खेले और 61.42 की औसत से 430 रन बनाए। इस टूर्नामेंट में उनके बैट से 3 अर्धशतक देखने को मिले। 3. स्मृति मंधाना (Smriti Mandana): टीम इंडिया की दिग्गज सलामी बल्लेबाज़ स्मृति मंधाना जो कि क्लास से शॉट खेलकर रन बनाती हैं, वो इस लिस्ट में तीसरी पॉजिशन पर हैं। उन्होंने अब तक कुल 24 महिला टी20 एशिया कप मुकाबले खेले और कुल 479 रन ठोके। इस दौरान उनकी औसत 28.17 और स्ट्राइक रेट 114.86 रहा। 2. चमारी अट्टापट्टू (Chamari Athapaththu): श्रीलंका की लीजेंड ऑलराउंडर और कप्तान चमारी अट्टाट्टू महिला एशिया कप टूर्नामेंट में दूसरीसबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज़ हैं। उन्होंने अब तक 21 मुकाबलों में 31.38 की औसत और 118.20 की स्ट्राइक रेट से 565 रन बनाकर ये पायदान हासिल किया है। गौरतलब है कि वो विमेंस एशिया कप की एकलौती ऐसी खिलाड़ी हैं, जिन्होंने टूर्नामेंट में सेंचुरी ठोकने का रिकॉर्ड बनाया है। Also Read: LIVE Cricket Score 1. हरमनप्रीत कौर (Harmanpreet Kaur): महिला एशिया कप के इतिहास में सर्वाधिक रन बनाने का महारिकॉर्ड किसी और के नहीं, बल्कि भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर के नाम ही दर्ज है। उन्होंने एशिया के सबसे बडे़ टूर्नामेंट में अब तक 25 मैचों की 22 पारियों में 38.06 की औसत और 106.92 की स्ट्राइक रेट से 571 रन ठोके हैं। बताते चलें कि वो इस टूर्नामेंट में 3 तूफानी अर्धशतक भी लगा चुकी हैं।
IND vs SL 2nd Test: भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा और आखिरी मुकाबला रविवार (23 अगस्त) से कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा। गॉल टेस्ट में 165 रन से जीत दर्ज करने के बाद टीम इंडिया की नजर अब सीरीज में क्लीन स्वीप पर है। वहीं स्टार ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) के लिए भी यह मुकाबला बेहद खास रहने वाला है। जडेजा कोलंबो टेस्ट में मैदान पर उतरते ही इतिहास रच देंगे। 37 साल के जडेजा वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) में 50 टेस्ट मैच खेलने वाले पहले भारतीय और पहले एशियाई क्रिकेटर बन जाएंगे। वह इस समय WTC में 49 मैच खेल चुके हैं और यह मुकाम हासिल करने के लिए सिर्फ एक मुकाबला दूर हैं। WTC में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले एशियाई खिलाड़ियों की लिस्ट में जडेजा के बाद विराट कोहली और मोहम्मद सिराज का नाम आता है, जिन्होंने 46-46 मैच खेले हैं। पाकिस्तान के मोहम्मद रिजवान 43 मैचों के साथ चौथे और जसप्रीत बुमराह 42 मैचों के साथ पांचवें स्थान पर हैं। WTC में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले एशियाई खिलाड़ी रविंद्र जडेजा – 49 मैच विराट कोहली – 46 मैच मोहम्मद सिराज – 46 मैच मोहम्मद रिजवान – 43 मैच जसप्रीत बुमराह – 42 मैच जडेजा ने WTC में अब तक खेले 49 मैचों में बल्ले से 2,632 रन बनाए हैं, जबकि गेंदबाजी में उनके नाम 160 विकेट हैं। इतना ही नहीं, जडेजा के पास कोलंबो टेस्ट में एक और खास उपलब्धि हासिल करने का मौका है। वह भारत के लिए घर से बाहर खेले गए टेस्ट मैचों में 100 विकेट पूरे करने से सिर्फ चार विकेट दूर हैं। जडेजा ने भारत के लिए विदेशों में अब तक 37 टेस्ट मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने 96 विकेट हासिल किए हैं। अगर वह इस टेस्ट में चार विकेट ले लेते हैं तो विदेशी जमीन पर 100 टेस्ट विकेट पूरे करने वाले गेंदबाजों की खास लिस्ट में शामिल हो जाएंगे। Also Read: LIVE Cricket Score इसके अलावा जडेजा के पास विदेशों में टेस्ट क्रिकेट में 2,000 रन पूरे करने का भी मौका रहेगा। उन्होंने अब तक भारत के लिए घर से बाहर खेले गए 37 टेस्ट की 62 पारियों में 1,885 रन बनाए हैं। उन्हें 2,000 रन का आंकड़ा छूने के लिए अब 115 रन की जरूरत है।
भारत ने कहा कि वह बातचीत और कूटनीति के ज़रिए पश्चिम एशिया के मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है। यह बात तब कही गई जब ईरान के ख़िलाफ़ सख़्त आर्थिक उपाय करने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बारे में पूछा गया, क्योंकि इस क्षेत्र में टकराव जारी है। देश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया में हो रही घटनाओं पर बारीकी से नज़र रख रहा है। मीडिया ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने कहा हम बातचीत और कूटनीति के ज़रिए शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में हैं। ट्रंप ने बुधवार को ईरान के ख़िलाफ़ ऐसी कार्रवाई की धमकी दी थी जिसे उन्होंने किसी भी देश के ख़िलाफ़ अब तक का सबसे ज़बरदस्त आर्थिक ऑपरेशन बताया और इसे अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध और अलग-थलग करना कहा। ट्रंप ने चेतावनी दी कि जो देश अपने वित्तीय संस्थानों, व्यवसायों, हवाई अड्डों या सरकारी संस्थाओं को ईरान को किसी भी तरह की जीवन-रेखा (लाइफलाइन) देने की अनुमति देंगे, उन्हें बहुत गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे। इसे भी पढ़ें: Suvendu Adhikari ने Siliguri में 4-सूत्रीय एजेंडा पेश किया, राष्ट्रीय सुरक्षा पर जोर इस अभियान को आर्थिक डी-डे कहते हुए, ट्रंप ने अमेरिकी सहयोगियों से ईरान को आर्थिक रूप से और अलग-थलग करने में वाशिंगटन का साथ देने का आग्रह किया। ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने विशेष रूप से ईरानी तेल की तस्करी, स्वैप लाइनों, नकद हस्तांतरण, एक्सचेंज हाउस, जहाज पंजीकरण और फ्रंट कंपनियों को बंद करने का आह्वान किया और कहा कि ऐसी गतिविधियों को अभी रोकना होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ये उपाय तेहरान को आर्थिक रूप से और अलग-थलग करने के उद्देश्य से हैं और उन्होंने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसे भी पढ़ें: MEA Briefing : West Asia, China, Bangladesh, Palestine मुद्दों पर India ने कही बड़ी बात, Pakistan से Sugar खरीदने की संभावनाओं पर भी दिया जवाब चीन ने भी अमेरिकी घोषणा पर प्रतिक्रिया दी है, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि प्रतिबंध और दबाव की रणनीति समाधान नहीं हैं और सभी पक्षों से राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। लिन जियान ने कहा, प्रतिबंध और दबाव की रणनीति समाधान नहीं हैं। चीन सभी पक्षों से जिम्मेदारी से काम करने और राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण पर कायम रहने का आह्वान करता है। भारत की ये नवीनतम टिप्पणियां पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान पर अमेरिका द्वारा और अधिक दबाव डालने के संभावित आर्थिक और सुरक्षा परिणामों पर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंता के बीच आई हैं।
भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने विभिन्न मुद्दों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दिए। पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग से जुड़े ढांचों को हटाए जाने, समुद्री लुटेरों द्वारा अगवा किए गए जहाजों में सवार भारतीय नाविकों की सुरक्षा, पश्चिम एशिया की स्थिति, बांग्लादेश, भारत-चीन सीमा, नेपाल, अरिहा शाह, गंगा जल संधि, सार्क और जम्मू-कश्मीर से लेकर फिलिस्तीन तथा USCIRF की रिपोर्ट तक कई अहम मुद्दों पर भारत का आधिकारिक पक्ष सामने आया। सबसे पहले पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग से जुड़े घटनाक्रम पर विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि वहां कुछ ढांचों को भारत के अनुरोध के बावजूद हटा दिया गया। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस कार्रवाई के बाद भारत ने भी इसे “अनुपातिक कार्रवाई” के तौर पर देखा और नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर की लेन में मौजूद कुछ अस्थायी ढांचों को हटा दिया। हालांकि, पाकिस्तान द्वारा अमेरिकी राजनयिक को तलब किए जाने के सवाल पर जायसवाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें “पाकिस्तान की निराशा पर टिप्पणी करने का कोई कारण नहीं दिखता।” इसे भी पढ़ें: Tarique Rahman के भारत दौरे पर बात जारी, लेकिन Bangladesh ने रख दी ये शर्त समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर विदेश मंत्रालय ने दो विदेशी ध्वज वाले जहाजों के समुद्री लुटेरों द्वारा अगवा किए जाने की पुष्टि की। इन दोनों जहाजों पर कुल 22 भारतीय नाविक सवार हैं, जिनमें एक जहाज पर 16 और दूसरे पर छह भारतीय शामिल हैं। जायसवाल ने कहा कि अब तक मिली जानकारी के अनुसार सभी 22 भारतीय सुरक्षित हैं और भारत संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। उन्होंने दोहराया कि भारतीय नाविकों और समुद्री समुदाय की सुरक्षा और कल्याण भारत की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा किसी भी संकट की स्थिति में भारत संबंधित अधिकारियों के समक्ष यह मुद्दा सक्रियता से उठाता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और घटनाक्रम पर भारत ने फिलहाल सतर्क रुख अपनाया है। प्रवक्ता ने कहा कि भारत क्षेत्र की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। हालांकि, फिलिस्तीन के प्रति भारत की स्थिति को विदेश मंत्रालय ने विस्तार से स्पष्ट किया। विदेश मंत्रालय की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने 18 से 20 अगस्त तक फिलिस्तीन की तीन दिवसीय यात्रा की, जहां उन्होंने फिलिस्तीन के प्रधानमंत्री समेत विदेश मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, श्रम मंत्री और शिक्षा मंत्री के साथ उच्चस्तरीय बैठकें कीं। फिलिस्तीनी नेतृत्व के साथ बातचीत के दौरान भारत ने बातचीत के जरिए समाधान और दो-राष्ट्र समाधान के प्रति अपनी लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता दोहराई। भारत ने गाजा की मानवीय स्थिति पर भी चिंता जताई और सतत मानवीय सहायता, संवाद और कूटनीति की जरूरत पर जोर दिया। भारत ने फिलिस्तीन के विकास में एक मजबूत साझेदार बने रहने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर भी जायसवाल का रुख स्पष्ट रहा—भारत दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है। भारत-चीन संबंधों और सीमा मुद्दे पर प्रवक्ता ने कहा कि सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए गठित कार्य तंत्र, यानी WMCC की बैठक हो चुकी है और उसके दौरान हुई चर्चा की जानकारी पहले ही साझा की जा चुकी है। बैठक के बाद के घटनाक्रम और आगे की प्रगति के बारे में भारत समय आने पर जानकारी देगा। भारत-चीन सीमा व्यापार को लेकर भी अहम संकेत मिले। विदेश मंत्रालय ने बताया कि तीन ट्रेडिंग पोस्ट खोलने का निर्णय लिया गया है। नाथुला व्यापारिक मार्ग खुल चुका है, जबकि सीमा व्यापार के दो अन्य बिंदुओं को सक्रिय करने पर भी निर्णय लिया गया है। हालांकि इन दोनों बिंदुओं की वर्तमान स्थिति के बारे में विदेश मंत्रालय बाद में विस्तृत जानकारी देगा। नेपाल के साथ भारत के रक्षा संबंधों पर भी प्रवक्ता ने सकारात्मक तस्वीर पेश की। भारतीय सेना प्रमुख की हालिया नेपाल यात्रा को “बहुत अच्छी यात्रा” बताते हुए जायसवाल ने कहा कि उन्हें वहां मानद जनरल की उपाधि दी गई, जो दोनों देशों और दोनों सेनाओं के बीच गहरी मित्रता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख की यात्रा ने विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में भारत-नेपाल संबंधों को और मजबूत किया है। अग्निपथ योजना से जुड़े सवाल पर उन्होंने रक्षा मंत्रालय को इस विषय पर अधिक उपयुक्त बताया। बांग्लादेश से जुड़े सवालों पर विदेश मंत्रालय ने फिलहाल संयमित रुख अपनाया। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री की भारत यात्रा की संभावनाओं पर जायसवाल ने कहा कि उनके पास इस विषय पर फिलहाल साझा करने के लिए कुछ नहीं है और कोई अपडेट होने पर जानकारी दी जाएगी। वहीं गंगा जल संधि के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह समझौता 1996 में 30 वर्षों के लिए किया गया था। भारत और बांग्लादेश के बीच जल और नदियों से जुड़े सभी मुद्दों पर द्विपक्षीय संयुक्त नदी आयोग के एजेंडे के तहत चर्चा होती है, जबकि गंगा जल संधि की संयुक्त समिति की तकनीकी स्तर पर बैठकें भी जारी रहती हैं। अरिहा शाह के मामले पर प्रवक्ता ने कहा कि उनके पास फिलहाल कोई नया अपडेट नहीं है, लेकिन भारत उसकी सांस्कृतिक जरूरतों का ध्यान रख रहा है। भारतीय दूतावास अरिहा और जर्मन अधिकारियों के संपर्क में बना हुआ है। सार्क के भविष्य पर पूछे गए सवाल पर जायसवाल ने एक बार फिर भारत की पुरानी स्थिति दोहराई और कहा कि सभी जानते हैं कि सार्क की प्रगति क्यों रुकी हुई है तथा इसके लिए एक विशेष देश जिम्मेदार है। नए महासचिव की उम्मीदवारी से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि इस विषय में वह बाद में स्थिति स्पष्ट करेंगे। अमेरिकी राजदूत के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दौरे के मद्देनजर भारत ने अपना रुख एक बार फिर स्पष्ट और दृढ़ शब्दों में दोहराया। जायसवाल ने कहा कि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख, जो भारत के केंद्रशासित प्रदेश हैं, भारत का अभिन्न अंग थे, हैं और हमेशा रहेंगे। इस बीच, अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी USCIRF की उस रिपोर्ट पर भी विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई थी। जायसवाल ने प्रभासाक्षी के प्रश्न का उत्तर देते हुए इस अमेरिकी संस्था को पक्षपाती बताते हुए कहा कि यह लंबे समय से भारत के खिलाफ अपमानजनक और भड़काऊ टिप्पणियां करती रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी संस्थाएं अपने एजेंडे के तहत काम करती हैं और उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हैं। साथ ही पाकिस्तान से चीनी खरीदे जाने के मुद्दे पर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान को लेकर हम अपने पुराने रुख पर कायम हैं। कुल मिलाकर, विदेश मंत्रालय की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत ने एक साथ कई संवेदनशील मोर्चों पर अपना रुख स्पष्ट किया। पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक जवाबी कार्रवाई हो, समुद्री लुटेरों के कब्जे वाले जहाजों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा, चीन के साथ सीमा वार्ता और व्यापार, नेपाल के साथ रक्षा सहयोग, बांग्लादेश के साथ जल संबंधी मुद्दे या फिर फिलिस्तीन और गाजा की मानवीय स्थिति—नई दिल्ली ने हर विषय पर अपने राष्ट्रीय हितों, नागरिकों की सुरक्षा और स्थापित कूटनीतिक नीति को केंद्र में रखकर अपनी स्थिति सामने रखी। बहरहाल, आइये देखते हैं विस्तृत प्रेस वार्ता में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने और क्या बड़ी बातें कहीं।
Asian Market Today: शुक्रवार, 21 अगस्त को एशियाई शेयरों में गिरावट आई। वॉल स्ट्रीट के बेंचमार्क इंडेक्स गुरुवार को बॉन्ड यील्ड के निचले स्तर से वापस ऊपर आने के कारण काफी नीचे बंद हुए थे। MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.2% गिर गया। कोस्पी (Kospi) ने इस ट्रेंड के उलट 0.87% की बढ़त दर्ज की, जबकि जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 0.90% और टोपिक्स (Topix) 0.31% नीचे आ गया। हैंग सेंग (Hang Seng) फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।S&P 500 इंडेक्स में रात भर में 0.9% की गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण वॉलमार्ट (Walmart) था। कमजोर बिक्री के आंकड़ों के बाद इसमें 2022 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। नैस्डैक 100 (Nasdaq 100) में 0.7% की गिरावट आई, जो लगातार पांचवें दिन की गिरावट थी।US ट्रेजरी में शुरुआती तेजी के बाद एशियाई बॉन्ड गिरे और अमेरिकी डॉलर कमजोर बना रहा। निवेशकों के मन में यह सवाल था कि क्या लंबे समय के कर्ज की अमेरिकी बायबैक (buyback) प्रक्रिया से उधार लेने की लागत में केवल कुछ समय के लिए ही राहत मिलेगी।ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में बॉन्ड की शुरुआत गिरावट के साथ हुई, क्योंकि गुरुवार को US 30-वर्षीय यील्ड में बढ़ोतरी हुई थी, भले ही US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भविष्य में बड़े बायबैक और एक नए फिस्कल प्लान का संकेत दिया था।30-वर्षीय यील्ड छह बेसिस पॉइंट बढ़कर 5.25% हो गई, जिससे ट्रेजरी के बायबैक बढ़ाने के अचानक फैसले से आई गिरावट का असर काफी हद तक खत्म हो गया।जापानी येन स्थिर रहा क्योंकि देश का मुख्य महंगाई सूचकांक लगातार दूसरे महीने बढ़ा, जिससे बैंक ऑफ जापान द्वारा जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बनी रही। बाजार अब सितंबर में संभावित कदम पर नजर रखे हुए हैं। येन 158.96 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि पिछले सत्र में यह 159 के स्तर को पार कर गया था।ऑफशोर युआन 6.7238 प्रति डॉलर पर लगभग स्थिर रहा।टेक्नोलॉजी शेयरों में सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) पर ध्यान केंद्रित रहा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी शुक्रवार को 110 ट्रिलियन वॉन ($79 बिलियन) तक का शेयरधारक रिटर्न पैकेज पेश करने वाली थी। इस बीच, ईरान के खिलाफ़ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक युद्ध की धमकी के कारण पांच दिनों तक कीमतों में आई तेज़ी के बाद तेल की कीमतें कुछ कम हुईं। ट्रंप ने कहा था कि तेहरान ने एक डील को ठुकरा दिया है।ब्रेंट क्रूड 0.7% गिरकर $93.10 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि गुरुवार को कारोबार के दौरान यह $94 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.7% गिरकर $86.19 प्रति बैरल पर आ गया।(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर की जम्मू-कश्मीर यात्रा ने चीनी-पाकिस्तानी चालों को किया दुरुस्त!
जरा गौर कीजिए, जब चीन अरुणाचल प्रदेश में भारत को आंखें दिखा रहा हो, जब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का जम्मू-कश्मीर/लद्दाख पहुंचना और जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताना भारतीय कूटनीति की कितनी बड़ी सफलता है, क्योंकि यह परोक्ष रूप से चीन को संदेश है कि भारत का साथ मिलते ही अमेरिका अन्य एशियाई 'बदमाशों' को रौंद डालेगा। उधर, पाकिस्तान को संदेश है कि इस्लामिक नाटो उसकी सुरक्षा की गारंटी नहीं बनेगा, यदि अमेरिका खुलकर भारत के साथ खड़ा रहेगा। जी हां, अमेरिकी राजदूत की 19–20 अगस्त 2026 की जम्मू-कश्मीर और लद्दाख यात्रा को केवल एक राजनयिक दौरा मानना पर्याप्त नहीं होगा। इसे भी पढ़ें: Sergio Gor के बयान से तिलमिलाये Pakistan ने Trump Administration पर उतारी भड़ास, US Diplomat Natalie Baker को तलब कर थमाया Strong Demarche खासकर श्रीनगर में उनका यह कहना कि जम्मू-कश्मीर “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” है और अमेरिकी यात्रा-परामर्श की समीक्षा के संकेत देना, वाशिंगटन के पुराने कश्मीर-संबंधी सार्वजनिक रुख की तुलना में महत्वपूर्ण राजनीतिक-सामरिक संकेत देता है। इससे कई सवाल उपजते हैं, जिनके निहितार्थ को समझना भी जरूरी है:- पहला सवाल है कि क्या वास्तव में अमेरिकी स्टैंड बदल गया है? तो जवाब होगा कि अपेक्षित सावधानी जरूरी है। अभी इसे अमेरिका की औपचारिक कश्मीर-नीति में पूर्ण परिवर्तन कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन राजनयिक भाषा और व्यवहार में बदलाव का संकेत स्पष्ट है। पहले अमेरिकी नीति का सार्वजनिक ढांचा मुख्यतः यह रहा कि कश्मीर भारत-पाकिस्तान के बीच विवादित विषय है और दोनों देशों को बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। 2019 के बाद भी अमेरिकी अधिकारियों ने इस मूल स्थिति को बनाए रखा था। इसके विपरीत, गोर ने भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर में जाकर उसे “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” कहा। पाकिस्तान ने इसे अमेरिकी पारंपरिक रुख से विचलन मानते हुए अमेरिकी प्रभारी राजदूत को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। इसलिए फिलहाल इसे “नीति परिवर्तन” से अधिक “नीति-संकेत में परिवर्तन” कहना उचित होगा। दूसरा सवाल है कि इस यात्रा का सबसे बड़ा संदेश क्या है? क्या कश्मीर को जमीन पर देखकर आकलन हुआ है? तो जवाब होगा कि गोर का दौरा छह साल से अधिक अंतराल के बाद किसी अमेरिकी राजदूत की कश्मीर यात्रा है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की और सुरक्षा व्यवस्था तथा बदलते माहौल का प्रत्यक्ष आकलन किया। यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि अमेरिका की कश्मीर संबंधी धारणा अब केवल इस्लामाबाद, नई दिल्ली या अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों पर निर्भर नहीं रह सकती। राजदूत का स्वयं श्रीनगर जाना और फिर सुरक्षा स्थिति पर सकारात्मक टिप्पणी करना वाशिंगटन के नीति-निर्माताओं को एक अलग जमीनी इनपुट देता है। तीसरा सवाल यह है कि Travel Advisory में बदलाव—छोटा दिखने वाला बड़ा संकेत है? तो जवाब होगा कि गोर ने जम्मू-कश्मीर के लिए अमेरिकी यात्रा-परामर्श की समीक्षा के संकेत दिए हैं। अगर आगे अमेरिका अपने मौजूदा “Do Not Travel” स्तर को नीचे करता है, तो इसका असर केवल अमेरिकी पर्यटकों पर नहीं पड़ेगा। यह संदेश जाएगा कि सुरक्षा परिस्थितियों में सुधार हुआ है। सामान्य आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। पर्यटन के लिए क्षेत्र अधिक खुल रहा है। अंतरराष्ट्रीय जोखिम-धारणा बदल रही है। यानी कश्मीर के लिए यह सुरक्षा से पर्यटन और पर्यटन से निवेश की दिशा में सकारात्मक कूटनीतिक संकेत बन सकता है। चौथा सवाल यह है कि क्या यह परिदृश्य पाकिस्तान के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका है? तो कहना न होगा कि इस बयान की सबसे तीखी प्रतिक्रिया पाकिस्तान से आई है। इस्लामाबाद ने इसे अपनी दशकों पुरानी कश्मीर कूटनीति के प्रतिकूल माना और अमेरिकी राजनयिक को तलब किया। पाकिस्तान के लिए समस्या सिर्फ गोर का बयान नहीं है, बल्कि समस्या यह है कि यदि अमेरिका जैसा प्रभावशाली देश धीरे-धीरे कश्मीर को “भारत-पाकिस्तान के विवाद” की भाषा से हटाकर “भारत के महत्वपूर्ण हिस्से” की भाषा में संबोधित करने लगे, तो पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक रणनीति कमजोर हो सकती है। पांचवां सवाल यह है कि क्या चीन का कोण भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता? तो जवाब होगा कि गोर का कार्यक्रम केवल श्रीनगर तक सीमित नहीं रहा; वह लद्दाख भी गए। यह समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि लद्दाख भारत-चीन सीमा-सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। इसलिए यात्रा का एक व्यापक संदेश यह भी हो सकता है कि अमेरिका भारत के पश्चिमी और उत्तरी दोनों रणनीतिक मोर्चों को अपने Indo-Pacific और South/Central Asia दृष्टिकोण से देख रहा है। छठा सवाल यह है कि क्या भारत-अमेरिका संबंधों में कश्मीर की भूमिका बदल सकती है? तो कहना न होगा कि यह घटनाक्रम भारत-अमेरिका संबंधों के उस व्यापक पुनर्संतुलन का हिस्सा हो सकता है जिसमेंआतंकवाद के विरुद्ध सहयोग, चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला, हिंद-प्रशांत रणनीति, रक्षा एवं तकनीकी साझेदारी, ऊर्जा एवं व्यापार, और दक्षिण एशिया में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं। गोर स्वयं भारत में अमेरिकी राजदूत होने के साथ South and Central Asian Affairs के Special Envoy भी हैं। इसलिए उनकी टिप्पणी का महत्व सामान्य राजदूत की टिप्पणी से अधिक माना जा सकता है। सातवां सवाल यह है कि क्या भारत को अति-उत्साहित होने से भी बचना होगा? तो जवाब होगा कि यहां एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सावधानी बरतनी जरूरी है क्योंकि एक राजदूत का बयान अमेरिकी सरकार की पूरी औपचारिक विदेश नीति का विकल्प नहीं होता। जब तक अमेरिकी विदेश विभाग या व्हाइट हाउस अपनी आधिकारिक नीति में स्पष्ट बदलाव घोषित नहीं करता, तब तक यह कहना कि “अमेरिका ने कश्मीर पर पाकिस्तान को छोड़कर भारत का पक्ष ले लिया है” अतिशयोक्ति होगी। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि अमेरिकी सार्वजनिक कूटनीतिक भाषा में एक उल्लेखनीय बदलाव दिखाई दे रहा है। आठवां सवाल यह है कि सबसे बड़ा रणनीतिक निहितार्थ क्या है? तो जवाब होगा कि मेरे आकलन में इस यात्रा का वास्तविक महत्व चार शब्दों में है: “Narrative → Ground Reality → Policy.” यदि अमेरिका को जमीनी स्तर पर कश्मीर में सुरक्षा, राजनीतिक प्रक्रिया, पर्यटन और आर्थिक सामान्यीकरण दिखाई देता है और उसके आधार पर उसकी यात्रा चेतावनी कम होती है, तो धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव भी बदल सकता है। यही भारत के लिए सबसे बड़ा कूटनीतिक लाभ होगा। निष्कर्षतः, सर्जियो गोर की कश्मीर यात्रा को भारत की कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे अभी अमेरिकी कश्मीर नीति का अंतिम परिवर्तन घोषित करना जल्दबाजी होगी। असली परीक्षा अगले चरण में होगी—क्या Washington अपनी आधिकारिक भाषा बदलेगा, क्या travel advisory घटेगी और क्या भविष्य में अमेरिकी अधिकारी कश्मीर को भारत के आंतरिक प्रशासनिक-सुरक्षा संदर्भ में अधिक स्पष्टता से देखेंगे? अगर इन तीनों प्रश्नों का उत्तर “हाँ” होता है, तो गोर की यह यात्रा दक्षिण एशिया की कूटनीति में एक महत्वपूर्ण turning point सिद्ध हो सकती है। # क्या ईरान में पिटी अमेरिकी भद्द और पाकिस्तान के दोगले रवैये से अचंभित अमेरिका ने ऐसा किया हाँ—इसे एक संभावित कारण के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन निर्णायक कारण कहना अभी जल्दबाजी होगी। उपलब्ध घटनाक्रम को जोड़ें तो अमेरिकी सोच में पाकिस्तान को लेकर विश्वसनीयता का प्रश्न जरूर उभरता है। सवाल है कि क्या ईरान प्रकरण ने अमेरिका को पाकिस्तान को नए नजरिये से देखने पर मजबूर किया? जवाब होगा कि ईरान-अमेरिका संकट में पाकिस्तान ने एक तरफ अमेरिका के साथ संवाद और मध्यस्थता की भूमिका निभाई, जबकि दूसरी तरफ ईरान के प्रति अपनी निकटता और क्षेत्रीय हितों को भी साधता रहा। विशेषज्ञों ने भी पाकिस्तान की निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं—विशेषकर ईरान, अफगानिस्तान और सऊदी अरब से उसके एक साथ जुड़े हितों को देखते हुए। यानी Washington के लिए संदेश यह हो सकता है कि पाकिस्तान को एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार की बजाय आवश्यकता पड़ने पर उपयोगी लेकिन स्वार्थ-आधारित साझेदार के रूप में देखना अधिक व्यावहारिक है। लेकिन कश्मीर पर गोर का बयान सिर्फ पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए? मेरे आकलन में नहीं। क्योंकि सर्जियो गोर ने श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर को “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” कहा और क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए अमेरिकी Travel Advisory की समीक्षा की बात कही। इसके बाद पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को बुलाकर औपचारिक विरोध दर्ज कराया और कहा कि यह अमेरिकी पारंपरिक कश्मीर-रुख के विपरीत है। इसलिए इसके पीछे कई परतें हो सकती हैं: 1. ईरान: पाकिस्तान की मध्यस्थता और दोहरे हितों से अमेरिकी रणनीतिक संदेह बढ़ा हो। 2. आतंकवाद: अमेरिका के लिए पाकिस्तान की उपयोगिता और विश्वसनीयता का मूल्यांकन फिर से हो रहा हो। 3. भारत: चीन के मुकाबले भारत का रणनीतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है। 4. कश्मीर: जमीनी सुरक्षा परिस्थितियों को देखकर अमेरिकी धारणा में बदलाव की शुरुआत हुई हो। 5. पाकिस्तान: Washington अब Islamabad को South Asia का अनिवार्य रणनीतिक केंद्र मानने की बजाय भारत को अधिक महत्व दे रहा हो। सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि यह बदलाव ईरान संकट के बाद पाकिस्तान की भूमिका बढ़ने के ठीक उसी दौर में दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाकर अपनी कूटनीतिक उपयोगिता बढ़ाने की कोशिश की थी। लेकिन यदि उसी समय अमेरिका का शीर्ष राजनयिक भारत में जाकर कहता है कि J&K भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, तो यह पाकिस्तान के लिए निश्चित रूप से बड़ा कूटनीतिक झटका है। इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि अमेरिका का संदेश है: “Pakistan may be useful, but India is strategically indispensable.” हालांकि अभी इसे अमेरिकी नीति का औपचारिक परिवर्तन नहीं कहा जा सकता। अगली निर्णायक परीक्षा यह होगी कि Washington अपनी आधिकारिक Kashmir language और Travel Advisory में वास्तव में क्या बदलाव करता है। और एक बड़ा प्रश्न इससे निकलता है—क्या ईरान संकट, पाकिस्तान की कथित दोहरी कूटनीति और चीन की बढ़ती चुनौती ने अमेरिका को अंततः यह समझा दिया है कि दक्षिण एशिया में पाकिस्तान से अधिक भरोसेमंद और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार भारत है? यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण यक्ष प्रश्न है। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
Asian Market Today: एशिया बाजार में रौनक, बॉन्ड यील्ड में नरमी से निक्केई 1% और कोस्पी 5% चढ़ा
Asian Market Today: 20 अगस्त को एशियाई शेयर बाजार में तेज़ी देखी गई। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लंबे समय वाले कर्ज़ को वापस खरीदने की योजना की घोषणा के बाद बॉन्ड मार्केट का दबाव कम हुआ, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा। MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स 0.8% ऊपर चढ़ा, जिसमें दक्षिण कोरियाई बाज़ार सबसे आगे रहे। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान कोस्पी (Kospi) में 3.86% की उछाल आई, जबकि जापान के निक्केई 225 में 0.95% और टोपिक्स (Topix) में 0.80% की बढ़त हुई। वहीं, हैंग सेंग फ्यूचर्स में 0.9% की बढ़ोतरी के संकेत मिले।वॉल स्ट्रीटबुधवार रात वॉल स्ट्रीट पर मज़बूत सेशन के बाद S&P 500 फ्यूचर्स में ज़्यादा बदलाव नहीं हुआ। इस तेज़ी को ट्रेजरी यील्ड में गिरावट से समर्थन मिला था। S&P 500 फ्यूचर्स में लगभग 0.1% की मामूली बढ़त हुई, जबकि नैस्डैक-100 फ्यूचर्स में 0.3% की बढ़ोतरी हुई। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स भी 19 अंक या 0.04% ऊपर चढ़ा।इससे पहले दिन में, S&P 500 ने लगातार तीन सेशन की गिरावट का सिलसिला खत्म किया, क्योंकि लंबे समय वाले अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड कई सालों के उच्चतम स्तर से नीचे आ गए। बॉन्ड मार्केट में हालिया बिकवाली के बाद दबाव कम करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बाद यील्ड में यह गिरावट आई।कच्चे तेल की कीमतेंगुरुवार को शुरुआती एशियाई कारोबार में तेल की कीमतें ज़्यादातर स्थिर रहीं। निवेशक अमेरिका-ईरान युद्ध की संभावित दिशा और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से शिपिंग की सुरक्षा को लेकर चिंताओं पर विचार कर रहे थे।अक्टूबर डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 25 सेंट या 0.3% बढ़कर $91.87 प्रति बैरल हो गया। वहीं, सितंबर के लिए अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 2 सेंट गिरकर $85.81 प्रति बैरल पर आ गया। ज़्यादा सक्रिय रूप से ट्रेड होने वाला अक्टूबर WTI कॉन्ट्रैक्ट 14 सेंट या 0.2% बढ़कर $84.53 प्रति बैरल हो गया। बुधवार को ब्रेंट और WTI, दोनों में लगातार चौथे सेशन में बढ़त देखी गई और ये 24 जुलाई के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर बंद हुए। सितंबर WTI कॉन्ट्रैक्ट गुरुवार को बाद में एक्सपायर होने वाला है।US-ईरान युद्धट्रंप ने कहा कि इन कदमों का मतलब अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध और अलग-थलग करना होगा। उन्होंने इसे ECONOMIC D-DAY बताया और सभी US सहयोगियों से वॉशिंगटन का समर्थन करने को कहा।उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश वित्तीय संस्थानों, कंपनियों, एयरपोर्ट या सरकारी निकायों को ईरान की मदद करने की इजाज़त देंगे, उन्हें गंभीर आर्थिक नतीजों का सामना करना पड़ेगा, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि ये सज़ाएं क्या होंगी। ट्रंप ने ईरान का समर्थन करने वाली गतिविधियों, जैसे तस्करी, कैश ट्रांसफर, एक्सचेंज हाउस के ऑपरेशन और शिप रजिस्ट्री के इस्तेमाल को खत्म करने की भी मांग की।आज सोने का भावगुरुवार को सोने की कीमतें दो महीने से ज़्यादा के उच्चतम स्तर के करीब बनी रहीं। US ट्रेज़री की ओर से लिक्विडिटी सपोर्ट की अचानक घोषणा के बाद बॉन्ड यील्ड और डॉलर में गिरावट आई।0031 GMT पर स्पॉट गोल्ड की कीमत $4,512.19 प्रति औंस पर लगभग स्थिर रही, जबकि सेशन की शुरुआत में यह $4,525.79 तक पहुंच गई थी, जो 2 जून के बाद इसका उच्चतम स्तर था। बुधवार को इस कीमती धातु की कीमत में 4% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई थी। आम तौर पर जियोपॉलिटिकल और आर्थिक अनिश्चितता के समय सोने को फायदा होता है क्योंकि निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश करते हैं, जबकि ऊंची ब्याज दरों से इसकी मांग पर असर पड़ सकता है क्योंकि सोने से कोई ब्याज आय नहीं होती है।Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Agra News: एशिया कप और एशियाई खेलों से पहले द हंड्रेड बना परफेक्ट प्रैक्टिस मंच
इंग्लैंड की धरती पर गेंद और बल्ले से दम दिखा रहीं आगरा की दीप्ति शर्मा के लिए द हंड्रेड आने वाली अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से पहले परफेक्ट प्रैक्टिस मंच बन गया है।
गन्तव्य देशों के हालात खराब होने से दक्षिण एशियाई प्रवासन में कमी
आशीष विश्वास अमेरिका और यूरोपीय देशों में अपनाई गई सरकारी नीति में नए ज़ोर की वजह से, लगभग बिना हुनर वाले आम दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए स्थितियां असल में मुश्किल हो गई हैं। इसका मकसद सालों से वहां गैर-कानूनी ढंग से रह रहे एशियाई लोगों को बाहर निकालना है। ज़्यादातर मौजूदा सरकारों पर दक्षिणपंथियों का ज़ोरदार दबाव है। हाल के दिनों में अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व में दक्षिण एशियाई लोगों के लिए प्रवासन और वहां जाकर नौकरी पाना मुश्किल होता जा रहा है, जो बड़े झगड़ों और लगातार सामाजिक उथल-पुथल और अशांति का सीधा नतीजा है। इस इलाके के बड़े देशों की तरह, भारत और बांग्लादेश पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। लंबे समय में दोनों देशों के सामने दोहरी चुनौती है: घरेलू श्रम बाजार में नौकरी के लिए बेचैनी और बढ़ जाएगी, क्योंकि वे बड़ी आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। साथ ही प्रवासी कामगारों द्वारा घर भेजे जाने वाली बड़ी राशि (रेमिटेंस) से होने वाली अच्छी-खासी आय भी समय के साथ कम हो जाएगी। खबरें हैं कि कम से कम 1500 और भारतीयों को अल्पावधि में अमेरिका से वापस भेजा जा रहा है और केनडा में भी हालात बेहतर नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि नौकरी के मौके कम हो रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों में अपनाई गई सरकारी नीति में नए ज़ोर की वजह से, लगभग बिना हुनर वाले आम दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए स्थितियां असल में मुश्किल हो गई हैं। इसका मकसद सालों से वहां गैर-कानूनी ढंग से रह रहे एशियाई लोगों को बाहर निकालना है। ज़्यादातर मौजूदा सरकारों पर दक्षिणपंथियों का ज़ोरदार दबाव है, क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टियों पर गैर-कानूनी प्रवासन को बढ़ावा देने का आरोप लगता है। आरोप है कि पहले से ही स्थानीय संस्कृति के कमज़ोर होने और गंभीर सुरक्षा चिंताओं जैसी स्थानीय समस्याएं हैं। ज़्यादातर हाथ से काम करने वाले अस्थायी कामों में लगे, हज़ारों प्रवासी ऐसे कमज़ोर लक्ष्य बन गए हैं जिन्हें तुरंत और बिना किसी औपचारिकता के वापस भेजा जा सकता है। यह विकसित देशों में अपनी मौजूदा समस्याओं के समाधान के लिए शासन और नीतिगत कदमों का नतीजा है। यूनाइटेड किंगडम से लेकर अमेरिका तक, उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों और प्रवासियों के लिए वीज़ा मिलना नए कड़े कानूनों से प्रभावित हुआ है, पढ़ाई की फीस बहुत ज़्यादा बढ़ा दी गई है और कानूनी तौर पर स्थायी रूप से रहने का अधिकार कम कर दिया गया है। प्रवासियों के खिलाफ नकारात्मक रूझान सिर्फ़ पश्चिमी देशों तक ही सीमित नहीं है। दिसंबर 2025 तक, सऊदी अरब से किसी न किसी वजह से करीब 11,000 से ज़्यादा भारतीयों को वापस उनके अपने देशों में भेजा जा चुका था, जो एक रिकॉर्ड है। अमेरिका ने उसी समय तक करीब 3800 भारतीयों को वापस भेजा था। साफ़ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कही गई अच्छी दोस्ती का अमेरिका-भारत के आपसी रिश्तों के सभी मामलों में कोई खास फ़र्क नहीं पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि म्यांमार ने करीब 1600 'गैर-कानूनीÓ रूप से वहां रह रहे भारतीयों को वापस भेजा, जबकि मलेशिया और यूएई ने 2025 में करीब 1600 लोगों को वापस भेजा। भारत सरकार और अन्य स्रोतों का दावा है कि कई भारतीय अपनी मज़ीर् से भी अपने गोद लिए हुए देशों को छोड़ रहे हैं। इसकी वजहें हैं बेकाबू महंगाई, जिससे रहने का खर्च बढ़ रहा है, मुश्किल समय में काम का बोझ बढ़ रहा है, अधिकारियों की तरफ़ से बढ़ती परेशानी और घर पैसे भेजने में भारी कमी का आना। इसका मतलब यह नहीं है कि वे भारत के बाहर मौके नहीं देख रहे हैं। दुबई एक पसंदीदा नई जगह है। केनडा से 2025 में लगभग 2830 भारतीय लौटे, जबकि पिछले साल यह संख्या 2000 थी। कुछ मामलों में केनाडाई अधिकारियों के तरीकों पर शक जताते हुए, भारत सरकार ने प्रवासियों को वापस भेजने के दौरान अपनाए गए तरीकों पर भी कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें वापस भेजे गए लोगों को वापस आने के दौरान कोई सुविधाएं नहीं दी जाती हैं। यहां तक कि हमेशा मूलभूत मानवीय सुविधाएं भी नहीं दी जाती हैं, हालांकि लौटने वाला हर कोई घोषित अपराधी नहीं होता है। पड़ोसी बांग्लादेश की बात करें तो, इज़रायली हमलों के जारी रहने के कारण लेबनान में कम से कम 5000 लोगों की नौकरी चली गई। कम से कम 200 लोग स्वयं वापस चले गए क्योंकि प्रवासियों को जानलेवा काम के हालात में धकेला जा रहा था। यह स्थानीय श्रम कानूनों और नौकरी की शर्तों का खुला उल्लंघन था। साथ ही 'आपातकाल' के नाम पर अक्सर वेतन में कटौती भी की जाती थी। मध्य पूर्व में प्रवासी संगठनों के एच आर ग्रुपों और प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि लेबनान और आस-पास के इलाकों में 11 बांग्लादेशी कामगार मारे गए, जबकि कई घायल हुए, जिन पर स्थानीय अधिकारियों ने बहुत कम ध्यान दिया। अप्रशिक्षित कामगारों को सहयोगी, रेस्क्यू स्टाफ और दूसरे कामों के तौर पर समुद्री झड़पों में भी हिस्सा लेने के लिए मजबूर किया गया था। ऐसा लगता है कि ऐसे मामलों में कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं थी। सिर्फ़ एक मामले में फिलिपिनो कामगार के एक ग्रुप ने ऐसे आदेश मानने से मना कर दिया था। एचआर ग्रुपों का आरोप है कि कई बमबारी और मिसाइलों और ड्रोन हमलों के खतरनाक आदान-प्रदान के दौरान मरने वाले ज़्यादातर पीड़ित आर्थिक रूप से कमज़ोर प्रवासी कामगारों के असुरक्षित ग्रुप से थे। अलग-अलग अन्तरराष्ट्रीय प्राधिकारी, देश के प्रमुखों, संयुक्त और दूसरी संस्थाओं से बार-बार गुहार लगाने पर कोई जवाब नहीं मिला। कामगारों के लिए एक और चिंता यह थी कि क्या प्रवासियों को रखने वाले देश उनके ज़िंदा रहते हुए उनकी बुरी हालत के प्रति लगभग पूरी तरह से बेपरवाह होने के मद्देनजर उनके बकाए का इंतज़ाम भी करेंगे। ऐसे डर से इन्कार नहीं किया जा सकता। न सिफ़र् आपूर्तिकर्ता देश को कानूनी तौर पर मिलने वाले पैसे के सवाल पर नुकसान होगा, बल्कि घर पर पीड़ितों के परिवारों को भी बहुत ज़्यादा तकलीफ़ होगी। कई परिवार विदेश में नौकरी करके पैसे कमाने के लिए किसी सदस्य को भेजने और सक्षम बनाने हेतु भारी-भरकम कर्ज भी लेते हैं।
एशिया की प्रमुख शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग प्रतियोगिताओं में शामिल एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी-2026 का आयोजन भारत और देहरादून में दूसरी बार किया जा रहा है।
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
मनोरंजन जगत से सामने आई बेहद दुखद खबर! Asia की सबसे बड़ी फिल्म सिटीके संस्थापकRamoji Rao का हुआ निधन
Cannes Film Festival 2024 : सिनेमैटोग्राफी के लिए पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई बनें संतोष सिवन
Cannes Film Festival 2024: बॉलीवुड के जानेमाने फिल्म सिनेमैटोग्राफर और निर्देशक कान फिल्म फेस्टिवल में सिनेमैटोग्राफी के लिए पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई बन गए हैं। संतोष सिवन को 77वें कान फिल्म फेस्टिवल 2024 में 'सिनेमैटोग्राफी' में प्रतिष्ठित ...

