आज ही के दिन यानी की 07 नवंबर को भारत के महान वैज्ञानिक सीवी रमन का जन्म हुआ था। वह विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाले पहले एशियाई वैज्ञानिक थे। जिस समय उन्होंने प्रकाश परावर्तन के क्षेत्र में खोज की थी, वह दौर आजादी से पहले का कठिनाइयों से भरा दौर था। उस समय प्रयोग करने के लिए आधुनिक यंत्रों और प्रयोगशालाओं का नितांत अभाव था। लेकिन तमाम अभावों और मुश्किलों के बारे में विज्ञान के प्रति सीवी रमन का रुझान उनको विश्व के शीर्ष सम्मान तक ले गया। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर सीवी रमन के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में... जन्म और परिवार तमिलनाडु के तिरूचिरापल्ली में 07 नवंबर 1888 को सीवी रमन का जन्म हुआ था। उनका पूरा नाम चंद्रशेखर वेंकटरमन था। उन्होंने 16 साल की उम्र में मद्रास यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेंसी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी। जहां से सीवी रमन ने परीक्षा में टॉप किया था। इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास में फिजिक्स में गोल्ड मेडल जीता। फिर बीएससी पूरी करने के बाद सीवी रमन ने मद्रास यूनिवर्सिटी से एमएससी पूरा की। इसे भी पढ़ें: Shakuntala Devi Birth Anniversary: मानव कंप्यूटर के नाम से फेमस थीं शकुंतला देवी, पलक झपकते ही हल कर देती थीं मुश्किल गणनाएं प्रोफेसर की नौकरी साल 1917 में कोलकाता यूनिवर्सिटी ने सीवी रमन को फीजिक्स पढ़ाने के लिए अपने कॉलेज में बुलाया। इस दौरान प्रोफेसर के पद पर उनको कम सैलरी मिल रही थी। लेकिन फिजिक्स में अपने इंट्रेस्ट और इस क्षेत्र में कुछ नया करने की चाहत की वजह से उन्होंने प्रोफेसर की नौकरी कर ली। यूनिवर्सिटी में पढ़ाने के दौरान सीवी रमन ने अपना रिसर्च का काम जारी रखा। उनके फिजिक्स के लेक्चर से स्टूडेंट्स काफी प्रभावित होते थे। रमन इफेक्ट की खोज साल 1930 में सीवी रमन को फिजिक्स के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सीवी रमन इस क्षेत्र में नोबेल पाने वाले पहले एशियाई थे। सीवी रमन ने फिजिक्स के लाइट के क्षेत्र में काम किया था। जिसको रमन इफेक्ट के नाम से जाना जाता है। फिर साल 1934 में वह बेंगलुरु के IISC में अस्टिटेंट डायरेक्टर बने। वहीं देश की आजादी के बाद उनको देश का पहला नेशनल प्रोफेसर चुना गया। वहीं साल 1943 में बेंगलुरु में उन्होंने रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना की। साल 1954 में सीवी रमन को भारत रत्न से सम्मानित किया गया। मृत्यु वहीं 21 नवंबर 1970 को सीवी रमन का निधन हो गया।
खेल डेस्क। गेंदबाजों के बाद आर्यवीर सहवाग (70 रन) और कप्तान लक्ष्य रायचंदानी (53 रन) की बेहतरीन अर्धशतकीय पारियां के दम पर भारत ने ओमान में अंडर-19 एशिया कप में आज नेपाल को दस विकेट से शिकस्त दी। मुकाबले में नेपाल ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत को 129 रनों का लक्ष्य भारतीय टीम को दिया, जिसे टीम इंडिया ने बिना कोई विकेट खोए 19.1 ओवर में ही आसानी से हासिल कर लिया। भारत के पूर्व तूफानी बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग के बेटे आर्यवीर ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए केवल 34 गेंदों में ही अपना अर्धशतक पूरा किया। आर्यवीर ने 52 गेंदों पर 7 चौकों और 4 छक्कों की मदद से शानदार 70 रनों की पारी खेली। कप्तान लक्ष्य ने भी संभलकर खेलते हुए 59 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने 63 गेंदों पर 7 चौकों की मदद से 53 रन बनाए। इससे पहले भारत की ओर से ईशान सूद और अर्जुन राजपूत ने 3-3 विकेट अपने नाम किए। PC:aajtak अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
नरेंद्र मोदी से मिले एशियाई पैरा गेम्स के एथलीट
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियाई पैरा गेम्स-2026 में भाग लेने वाले भारतीय दल से मुलाकात की। खुशी व्यक्
अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट की आंधी ने शुक्रवार 6 नवंबर को एशियाई बाजारों को भी अपनी चपेट में ले लिया। भारत को छोड़ बाकी सभी एशियाई बाजारों में कोहराम मच गया। दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क इंडेक्स KOSPI शुरुआती कारोबार में करीब 9 फीसदी तक टूट गया। गिरावट इतनी तेज थी कि कोरिया एक्सचेंज को 20 मिनट के लिए कारोबार रोकना पड़ा। वहीं, जापान का Nikkei 225 इंडेक्स 5 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली से एशियाई बाजारों में हाहाकार मचा हुआ है।दक्षिण कोरिया, जापान सहित सभी बाजारों के सूचकांक फिसलेKOSPI शुरुआती कारोबार में 8.8 फीसदी तक गिरकर 5,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। यह करीब नौ महीने का निचला स्तर है। इसके बाद इंडेक्स में कुछ रिकवरी आई। भारतीय समय के मुताबिक, 12:15 बजे यह 6.19 फीसदी गिरकर 5,050 पर चल रहा था। जापान का Nikkei 225 इंडेक्स 5.27 फीसदी गिरकर 57,858.61 पर आ गया। हांगकांग का Hang Seng इंडेक्स 0.77 फीसदी गिरकर 24,607.21 पर आ गया, जबकि MSCI Asia Pacific Index करीब 3 फीसदी नीचे था।दक्षिण कोरिया में Samsung और SK Hynix के शेयरों में भारी बिकवालीएशियाई बाजारों में गिरावट की सबसे ज्यादा मार सेमीकंडक्टर कंपनियों पर पड़ी। दक्षिण कोरिया की चिप बनाने वाली कंपनियों Samsung Electronics और SK Hynix के शेयरों में भारी बिकवाली हुई। शुरुआती कारोबार में Samsung Electronics के शेयर करीब 10 फीसदी और SK Hynix के शेयर 13 फीसदी तक टूट गए। बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा था कि दोनों शेयरों पर कारोबार की शुरुआत में अस्थायी ट्रेडिंग प्रतिबंध लगाना पड़ा।जापान की Kioxia का शेयर 14 फीसदी तक फिसलाजापान की सेमीकंडक्टर कंपनी Kioxia के शेयर 14 फीसदी तक गिर गए। वहीं, ताइवान की दिग्गज चिप निर्माता कंपनी Taiwan Semiconductor Manufacturing Company (TSMC) के शेयरों में 8.5 फीसदी की गिरावट आई। AI कंपनियों में बड़े निवेश के लिए पहचानी जाने वाली जापान की SoftBank Group के शेयर भी 11 फीसदी लुढ़क गए। बाजार में बिकवाली का असर सिर्फ टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। दक्षिण कोरिया की ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। Hyundai Motor के शेयर 6.9 फीसदी और Kia के शेयर 4 फीसदी टूट गए। बैटरी निर्माता LG Energy Solution के शेयरों में भी 4 फीसदी की गिरावट आई।अमेरिकी चुनाव नतीजों से बढ़ी AI सेक्टर को लेकर चिंताएशियाई बाजारों में इस गिरावट के पीछे अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत के बाद निवेशकों को आशंका है कि अमेरिका में AI कंपनियों पर नियामकीय निगरानी बढ़ सकती है। इसके अलावा डेटा सेंटर के निर्माण और विस्तार पर भी सख्ती की आशंका है। निवेशकों को डर है कि अगर AI कंपनियों पर नियम सख्त होते हैं और डेटा सेंटर में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ती है, तो सेमीकंडक्टर चिप और AI इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर दुनिया भर में हो रहे भारी-भरकम निवेश से भविष्य में पर्याप्त कमाई होगी या नहीं, इसे लेकर भी बाजार में चिंता बनी हुई है।यह भी पढ़ें: अमेरिकी शेयर बाजारों में हाहाकार, नैस्डेक क्रैश, Nvidia 10 फीसदी फिसला, जानिए क्या है पूरा मामलादक्षिण कोरिया के बाजारों में चिप बनाने वाले शेयरों से आई थी तेजीदक्षिण कोरिया का बाजार इस बदलाव से ज्यादा प्रभावित हुआ है, क्योंकि पिछले कुछ समय में KOSPI की तेजी में सेमीकंडक्टर कंपनियों की बड़ी भूमिका रही है। मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों और AI से जुड़ी मांग के कारण Samsung Electronics और SK Hynix जैसे शेयरों में जोरदार तेजी आई थी। जून में अपने शिखर तक पहुंचने से पहले KOSPI ने साल भर में करीब तीन गुना की बढ़त दर्ज की थी। अब AI निवेश को लेकर बढ़ती आशंकाओं के कारण बाजार में तेज मुनाफावसूली देखने को मिल रही है।
Asian Champions Trophy 2026: जापान को 4-1 से हराकर भारत ने छठी बार जीता खिताब, आखिरी क्वार्टर में दागे 3 गोल
US Stock Market Crash: अमेरिकी बाजार में 18 महीने की सबसे बड़ी गिरावट, एक दिन में डूबे 236 लाख करोड़ रुपये; एशियाई बाजार भी धड़ाम
Asian Champions Trophy: भारत ने Japan को 4-1 से हराकर छठी बार जीता खिताब
मोहाली, पांच नवंबर मौजूदा चैंपियन भारत ने बृहस्पतिवार को यहां पुरुष एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी टूर्नामेंट के फाइनल में जापान को 4-1 से हराकर खिताबों की हैट्रिक पूरी की और कुल छठी बार यह ट्रॉफी अपने नाम की। एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम इससे पहले 2011, 2016, 2018, 2023 और 2024 में भी यह टूर्नामेंट जीत चुकी है। जापान ने तीसरे ही मिनट में काजुमासा मात्सुमोतो के मैदानी गोल की मदद से भारतीय टीम को चौंका दिया। इसके बाद भारत ने लय हासिल की। शिलानंद लाकड़ा (42वें मिनट) ने पेनल्टी कॉर्नर से, दिलप्रीत सिंह (48वें मिनट) ने मैदानी गोल और जुगराज ने 53वें मिनट में ‘सेट-पीस’ के जरिए गोल किए। विवेक सागर प्रसाद ने 54वें मिनट में गोल करके घरेलू टीम के लिए स्कोर 4-1 कर दिया। भारत ने इससे पहले जालंधर के ओलंपियन सुरजीत सिंह स्टेडियम में टूर्नामेंट के राउंड-रॉबिन चरण में भी जापान को 4-1 से हराया था। लेकिन बृहस्पतिवार को जापान ने पहले दो क्वार्टर में भारत को कड़ी टक्कर दी। हालांकि दूसरे हाफ में घरेलू टीम ने जोरदार वापसी की। भारत ने अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन तीसरे ही मिनट में जापान ने मात्सुमोतो के गोल से बढ़त बना ली। मात्सुमोतो ने ‘टोमाहॉक’ शॉट से गोल करके ओलंपियन बलबीर सिंह स्टेडियम में मौजूद दर्शकों को हैरान कर दिया। इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने तेजी दिखाई और कुछ मौके भी बनाए, लेकिन वे उन्हें गोल में बदलने में नाकाम रहे। 20वें मिनट में जापान को लगातार दो पेनल्टी कॉर्नर मिले। लेकिन भारतीय डिफेंस ने शानदार खेल दिखाते हुए जापान के कप्तान राइकी फुजीशिमा को गोल करने से रोक दिया। अपना 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहे उप कप्तान हार्दिक सिंह भारत के मिडफील्ड में स्टार साबित हुए। उन्होंने बेहतरीन तालमेल बिठाते हुए कई मौके बनाए। दूसरी ओर जरमनप्रीत सिंह ने अपने शानदार खेल और कड़ी मेहनत से डिफेंस में चट्टान की तरह मजबूती बनाए रखी। 0-1 से पिछड़ने के बाद भारतीय टीम ने दूसरे हाफ में अधिक आक्रामक खेल दिखाया और 33वें मिनट में अपना पहला पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया। लेकिन कप्तान हरमनप्रीत सिंह के फ्लिक को जापानी गोलकीपर किशो कुरोदा ने रोक दिया। जापान की टीम ने अपना अच्छा प्रदर्शन जारी रखा और 39वें मिनट में अपना दूसरा पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया, लेकिन शोता यामादा की कोशिश से कोई गोल नहीं हो सका। भारत ने जापानी डिफेंस पर दबाव बनाए रखा और 42वें मिनट में लगातार दो पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए। आदित्य अर्जुन लालागे के पास पर लकड़ा ने रिबाउंड से गोल करके स्कोर बराबर कर दिया। भारत ने आखिरी क्वार्टर में भी दबदबा बनाए रखा और 48वें मिनट में हार्दिक के बेहतरीन पास पर दिलप्रीत ने रिवर्स हिट लगाकर घरेलू टीम को बढ़त दिला दी। बढ़त लेने के बाद भारतीय टीम का खेल पूरी तरह बदल गया। 53वें मिनट में जुगराज ने भारत के तीसरे पेनल्टी कॉर्नर को सटीक तरीके से गोल में बदलकर बढ़त को और बढ़ा दिया। इसके बाद भारत को रोकना मुश्किल हो गया। लकड़ा के शुरुआती शॉट को जापानी गोलकीपर ने रोक दिया था, लेकिन उसके बाद विवेक ने सर्कल के ऊपर से एक जोरदार हिट लगाकर गोल कर दिया। मैच खत्म होने के ठीक 12 सेकेंड पहले जापान को अपना चौथा पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन कप्तान फुजीशिमा का शॉट बाहर चला गया। इस तरह भारत टूर्नामेंट में अजेय बना रहा।
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने एशियाई पैरा गेम्स के खिलाड़ियों को किया सम्मानित
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने गुरुवार को नई दिल्ली में सेना से जुड़े खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया। एशियाई पैरा खेलों में भारतीय सेना के जवानों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया है। पांचवें एशियाई पैरा खेल 2026 में हिस्सा लेने वाले सेना के नौ खिलाड़ियों में से छह ने पदक अपने नाम किए। इनमें एक स्वर्ण, दो रजत और तीन कांस्य पदक शामिल हैं। इन खेलों में सेना के खिलाड़ियों ने एथलेटिक्स, तैराकी और चक्का फेंक जैसी स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
भारत ने एशियाई विश्वविद्यालय रैंकिंग में नया मुकाम हासिल किया
भारत ने हाल ही में एशियाई विश्वविद्यालय रैंकिंग में अपनी स्थिति को मजबूत किया है, जिसमें 325 विश्वविद्यालय शामिल हैं। इस वर्ष 34 नए संस्थान सूची में आए हैं। भारतीय विश्वविद्यालयों ने अनुसंधान पत्रों के प्रकाशन और पीएचडी धारक फैकल्टी सदस्यों की संख्या में उत्कृष्टता दिखाई है। आईआईएससी बेंगलुरु ने अनुसंधान में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है, जबकि आईआईटी दिल्ली कुल रैंकिंग में सबसे ऊपर है। यह प्रदर्शन भारतीय उच्च शिक्षा की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
Gorakhpur News: पिछले वर्ष के मुकाबले रैंकिंग में बेहतर हुआ गोरखपुर विश्वविद्यालय का प्रदर्शन
MMMUT: A jump of four places in South Asia rankings
एमएमएमयूटी : दक्षिण एशिया रैंकिंग में चार पायदान की उछाल
MMMUT: A jump of four places in South Asia rankings
Women's Asian Champions Trophy: भोपाल में 19 नवंबर को मलेशिया से भिड़ेगी भारतीय टीम
नयी दिल्ली, चार नवंबर भारतीय महिला हॉकी टीम एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी (एसीटी) में लगातार तीसरा और कुल मिलाकर चौथा खिताब जीतने की कवायद में 19 नवंबर से भोपाल में शुरू होने वाले छह देशों के टूर्नामेंट में मलेशिया के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी। यह टूर्नामेंट भोपाल के नाथू बरखेड़ा स्थित अंतरराष्ट्रीय खेल परिसर में बने नए हॉकी स्टेडियम में खेला जाएगा। इसमें भारत, जापान, चीन, मलेशिया, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया की टीमें भाग लेंगी। पिछले महीने जापान में एशियाई खेलों में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने के बाद भारतीय महिला हॉकी टीम का यह पहला टूर्नामेंट होगा। भारतीय टीम ने 2016, 2023 और 2024 में एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीता था। टूर्नामेंट राउंड-रॉबिन प्रारूप में खेला जाएगा, जिसमें प्रत्येक टीम अन्य पांच टीमों से एक बार भिड़ेंगी। लीग चरण के अंत में शीर्ष पर रहने वाली चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी। एशिया की शीर्ष रैंकिंग वाली टीम चीन 19 नवंबर को थाईलैंड के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी। भारत इसी दिन मलेशिया का सामना करेगा। भारतीय टीम इसके बाद 21 नवंबर को दक्षिण कोरिया, 22 नवंबर को थाईलैंड, 24 नवंबर को चीन और 25 नवंबर को जापान का सामना करेगी। पांचवें और छठे स्थान के लिए होने वाला क्वालिफिकेशन मैच तथा दोनों सेमीफाइनल मैच 27 नवंबर को होंगे। फाइनल और तीसरे स्थान का मैच 28 नवंबर को खेले जाएंगे। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि भोपाल एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी करेगा। मुझे उम्मीद है कि भारतीय टीम एशियाई खेलों की अपनी सफलता काे आगे बढ़ाते हुए अपने खिताब का बचाव करने में सफल रहेगी।’’
एशियाई रैंकिंग में फिसला डीयू: 95वें स्थान से खिसककर 106वें पायदान पर पहुंचा, कैंपस में मायूसी
क्यूएस एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में दिल्ली विश्वविद्यालय शीर्ष 100 से बाहर होकर 106वें स्थान पर आ गया है। अकादमिक प्रतिष्ठा, रोजगार देने वाली कंपनियों के बीच पहचान और अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव में गिरावट इसकी मुख्य वजहें हैं।
Asian Para Games: एथलेटिक्स में भारत का गोल्डन धमाका, सिमरन का डबल गोल्ड
एशियन पैरा गेम्स में भारत ने ट्रैक एंड फील्ड में पांच गोल्ड समेत 18 मेडल जीते. सिमरन ने 100 मीटर और 200 मीटर में गोल्ड डबल पूरा किया, जबकि प्रवीण कुमार और सचिन खिलारी ने गेम्स रिकॉर्ड बनाए. भारत अब तक 14 गोल्ड समेत 62 मेडल जीतकर पांचवें स्थान पर है.
अगर आपका भी अकेले घूमने का मन है, लेकिन पहली सोलो इंटरनेशनल ट्रिप के लिए किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहां पर ज्यादा पैसे न खर्च करने पड़े। तो आप एशिया के कुछ खूबसूरत देश आपकी लिस्ट में शामिल कर सकती हैं। सोलो ट्रिप का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको किसी दूसरे के हिसाब से अपना प्लान नहीं बनाना पड़ता है। सोलो ट्रिप में जब मन करे, जहां मन करे वहां जाएं, रुकें और अपनी पसंद का खाना खाएं। वहीं अगर आपको बजट को ध्यान में रखना है, तो आप वियतनाम और थाईलैंड जैसे ऑप्शन देख सकती हैं। इन जगहों पर आप खूबसूरत बीच, स्वादिष्ट लोकल फूड्स, शानदार मार्केट और एक अलग ही कल्चर देखने को मिलेगा। वहीं अगर आप भी इस बार अकेले विदेश घूमने का प्लान कर रही हैं, तो आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 3 ऐसे खूबसूरत देशों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर आप सोलो ट्रिप के लिए जा सकती हैं। इसे भी पढ़ें: Travel Tips: Vrindavan के Chhatikara में स्थित Char Dham Mandir में करें चार धामों के दर्शन मलेशिया सोलो ट्रिप के लिए मलेशिया भी एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। खासकर अगर आप शहर, फूड, शॉपिंग और घूमने के साथ-साथ थोड़ा नेचर भी देखना चाहती हैं, तो आपको Kuala Lumpur जैसे शहर से लेकर कई दूसरी खूबसूरत जगहों को एक्सप्लोर करने का मौका मिलेगा। वहीं अच्छी बात यह है कि मलेशिया में बस और ट्रेन जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करके अपना अपने खर्च को थोड़ा मैनेज कर सकती हैं। आप मलेशिया में Kuala Lumpur में घूमने के साथ-साथ शॉपिंग भी कर सकती हैं। यहां के लोकल फूड को एंजॉय कर सकती हैं। थाईलैंड वहीं फॉरेन ट्रिप के लिए आप थाईलैंड भी जा सकती हैं। अगर आपको शॉपिंग, स्ट्रीट फूड और घूमने-फिरने के साथ बीच का मजा चाहिए, तो आपको थाईलैंड जा सकती हैं। यहां पर आप सोलो ट्रिप कर सकती हैं। थाईलैंड का बैंकॉक शहर सबसे फेमस है। आप यहां पर लोकल मार्केट्स में घूमने के साथ-साथ स्ट्रीट फूड ट्राई कर सकती हैं। अगर आपका बजट कम है, तो आप महंगे होटल्स की जगह हॉस्टल्स या अफॉर्डेबल स्टे देख सकती हैं। आप बैंकॉक के अलावा फुकेट या पटाया भी घूमने के लिए जा सकती हैं। आप थाईलैंड में बीचेस और आइलैंड का मजा ले सकती हैं और लोकल मार्केट्स को एक्सप्लोर कर सकती हैं। इसके अलावा स्ट्रीट फूड ट्राई करना न भूलें। वियतनाम आप कम बजट में वियतनाम भी जा सकती हैं। यहां पर आपको बीच के साथ, लोकल मार्केट्स, पहाड़ और अलग-अलग कल्चरल एक्सपीरियंस कर सकेंगी। वियतनाम में आपको एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए ट्रेन, बस और फ्लाइट आदि के ऑप्शंस मिल जाएंगे। आप हनोई, दा नांग और होई आन जैसी जगहों को एक्सप्लोर कर सकती हैं। इसके अलावा आप यहां पर खूबसूरत बीच पर समय बिता सकती हैं। पहाड़ों और नेचर की खूबसूरती को निहारने के साथ लोकल फूड का स्वाद ले सकती हैं और यहां आपको लोकल लाइफ देखने का मौका मिलेगा। इन बातों का रखें ध्यान अगर आप भी पहली बार अकेले विदेश घूमने का प्लान कर रही हैं, तो इस दौरान आपको कुछ बातों का ध्यान रख सकती हैं। 2-3 महीने पहले से प्लानिंग कर लें। होटल और फ्लाइट की कीमत पहले से देखें। पहले से ही पूरे ट्रिप का बजट प्लान कर लें। हॉस्टल या होटल की लोकेशन आदि पहले से पता रखें। लोकल ट्रांसपोर्ट के ऑप्शन को पहले से समझ लें। अपने साथ जरूरी डॉक्यूमेंट्स रख लें। ट्रिप से पहले उस देश के लेटेस्ट एंट्री रूल्स को जरूर चेक करें।
बेटियों का जलवा: एशियाई खेलों में भारत की स्वर्णिम कहानी, 10 में से 8 स्वर्ण महिला खिलाड़ियों के नाम
बेटियों का जलवा: एशियाई खेलों में भारत की स्वर्णिम कहानी, 10 में से 8 स्वर्ण महिला खिलाड़ियों के नाम asian-games-indian-women-athletes-eight-gold-medals-neeru-dhanda-trap-shooting-archery-kabaddi
Asian Games 2026: एशियन गेम्स में भारत ने जीते हैं अब तक कुल 60 मेडल
Asian Games 2026 Day 12 Live Updates: एशियन गेम्स का आज 12वां दिन है. कई खेलों में आज भारत को मेडल की उम्मीदें रहेंगी. वहीं कुछ खेल ऐसे हैं, जहां से मेडल पक्का हो सकता है, ऐसे में इस पेज को रिफ्रेश करते रहें.
Rahul Gandhi Malasia PM Video: BRICS के बीच राहुल-प्रियंका से मिले मलेशिया के PM, क्या बात हुई?
Rahul Gandhi Malasia PM Video: BRICS के बीच राहुल-प्रियंका से मिले मलेशिया के PM, क्या बात हुई? Rahul Gandhi Anwar Ibrahim Meeting को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को मलेशिया के प्रधानमं
गन्तव्य देशों के हालात खराब होने से दक्षिण एशियाई प्रवासन में कमी
आशीष विश्वास अमेरिका और यूरोपीय देशों में अपनाई गई सरकारी नीति में नए ज़ोर की वजह से, लगभग बिना हुनर वाले आम दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए स्थितियां असल में मुश्किल हो गई हैं। इसका मकसद सालों से वहां गैर-कानूनी ढंग से रह रहे एशियाई लोगों को बाहर निकालना है। ज़्यादातर मौजूदा सरकारों पर दक्षिणपंथियों का ज़ोरदार दबाव है। हाल के दिनों में अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व में दक्षिण एशियाई लोगों के लिए प्रवासन और वहां जाकर नौकरी पाना मुश्किल होता जा रहा है, जो बड़े झगड़ों और लगातार सामाजिक उथल-पुथल और अशांति का सीधा नतीजा है। इस इलाके के बड़े देशों की तरह, भारत और बांग्लादेश पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। लंबे समय में दोनों देशों के सामने दोहरी चुनौती है: घरेलू श्रम बाजार में नौकरी के लिए बेचैनी और बढ़ जाएगी, क्योंकि वे बड़ी आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। साथ ही प्रवासी कामगारों द्वारा घर भेजे जाने वाली बड़ी राशि (रेमिटेंस) से होने वाली अच्छी-खासी आय भी समय के साथ कम हो जाएगी। खबरें हैं कि कम से कम 1500 और भारतीयों को अल्पावधि में अमेरिका से वापस भेजा जा रहा है और केनडा में भी हालात बेहतर नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि नौकरी के मौके कम हो रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों में अपनाई गई सरकारी नीति में नए ज़ोर की वजह से, लगभग बिना हुनर वाले आम दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए स्थितियां असल में मुश्किल हो गई हैं। इसका मकसद सालों से वहां गैर-कानूनी ढंग से रह रहे एशियाई लोगों को बाहर निकालना है। ज़्यादातर मौजूदा सरकारों पर दक्षिणपंथियों का ज़ोरदार दबाव है, क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टियों पर गैर-कानूनी प्रवासन को बढ़ावा देने का आरोप लगता है। आरोप है कि पहले से ही स्थानीय संस्कृति के कमज़ोर होने और गंभीर सुरक्षा चिंताओं जैसी स्थानीय समस्याएं हैं। ज़्यादातर हाथ से काम करने वाले अस्थायी कामों में लगे, हज़ारों प्रवासी ऐसे कमज़ोर लक्ष्य बन गए हैं जिन्हें तुरंत और बिना किसी औपचारिकता के वापस भेजा जा सकता है। यह विकसित देशों में अपनी मौजूदा समस्याओं के समाधान के लिए शासन और नीतिगत कदमों का नतीजा है। यूनाइटेड किंगडम से लेकर अमेरिका तक, उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों और प्रवासियों के लिए वीज़ा मिलना नए कड़े कानूनों से प्रभावित हुआ है, पढ़ाई की फीस बहुत ज़्यादा बढ़ा दी गई है और कानूनी तौर पर स्थायी रूप से रहने का अधिकार कम कर दिया गया है। प्रवासियों के खिलाफ नकारात्मक रूझान सिर्फ़ पश्चिमी देशों तक ही सीमित नहीं है। दिसंबर 2025 तक, सऊदी अरब से किसी न किसी वजह से करीब 11,000 से ज़्यादा भारतीयों को वापस उनके अपने देशों में भेजा जा चुका था, जो एक रिकॉर्ड है। अमेरिका ने उसी समय तक करीब 3800 भारतीयों को वापस भेजा था। साफ़ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कही गई अच्छी दोस्ती का अमेरिका-भारत के आपसी रिश्तों के सभी मामलों में कोई खास फ़र्क नहीं पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि म्यांमार ने करीब 1600 'गैर-कानूनीÓ रूप से वहां रह रहे भारतीयों को वापस भेजा, जबकि मलेशिया और यूएई ने 2025 में करीब 1600 लोगों को वापस भेजा। भारत सरकार और अन्य स्रोतों का दावा है कि कई भारतीय अपनी मज़ीर् से भी अपने गोद लिए हुए देशों को छोड़ रहे हैं। इसकी वजहें हैं बेकाबू महंगाई, जिससे रहने का खर्च बढ़ रहा है, मुश्किल समय में काम का बोझ बढ़ रहा है, अधिकारियों की तरफ़ से बढ़ती परेशानी और घर पैसे भेजने में भारी कमी का आना। इसका मतलब यह नहीं है कि वे भारत के बाहर मौके नहीं देख रहे हैं। दुबई एक पसंदीदा नई जगह है। केनडा से 2025 में लगभग 2830 भारतीय लौटे, जबकि पिछले साल यह संख्या 2000 थी। कुछ मामलों में केनाडाई अधिकारियों के तरीकों पर शक जताते हुए, भारत सरकार ने प्रवासियों को वापस भेजने के दौरान अपनाए गए तरीकों पर भी कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें वापस भेजे गए लोगों को वापस आने के दौरान कोई सुविधाएं नहीं दी जाती हैं। यहां तक कि हमेशा मूलभूत मानवीय सुविधाएं भी नहीं दी जाती हैं, हालांकि लौटने वाला हर कोई घोषित अपराधी नहीं होता है। पड़ोसी बांग्लादेश की बात करें तो, इज़रायली हमलों के जारी रहने के कारण लेबनान में कम से कम 5000 लोगों की नौकरी चली गई। कम से कम 200 लोग स्वयं वापस चले गए क्योंकि प्रवासियों को जानलेवा काम के हालात में धकेला जा रहा था। यह स्थानीय श्रम कानूनों और नौकरी की शर्तों का खुला उल्लंघन था। साथ ही 'आपातकाल' के नाम पर अक्सर वेतन में कटौती भी की जाती थी। मध्य पूर्व में प्रवासी संगठनों के एच आर ग्रुपों और प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि लेबनान और आस-पास के इलाकों में 11 बांग्लादेशी कामगार मारे गए, जबकि कई घायल हुए, जिन पर स्थानीय अधिकारियों ने बहुत कम ध्यान दिया। अप्रशिक्षित कामगारों को सहयोगी, रेस्क्यू स्टाफ और दूसरे कामों के तौर पर समुद्री झड़पों में भी हिस्सा लेने के लिए मजबूर किया गया था। ऐसा लगता है कि ऐसे मामलों में कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं थी। सिर्फ़ एक मामले में फिलिपिनो कामगार के एक ग्रुप ने ऐसे आदेश मानने से मना कर दिया था। एचआर ग्रुपों का आरोप है कि कई बमबारी और मिसाइलों और ड्रोन हमलों के खतरनाक आदान-प्रदान के दौरान मरने वाले ज़्यादातर पीड़ित आर्थिक रूप से कमज़ोर प्रवासी कामगारों के असुरक्षित ग्रुप से थे। अलग-अलग अन्तरराष्ट्रीय प्राधिकारी, देश के प्रमुखों, संयुक्त और दूसरी संस्थाओं से बार-बार गुहार लगाने पर कोई जवाब नहीं मिला। कामगारों के लिए एक और चिंता यह थी कि क्या प्रवासियों को रखने वाले देश उनके ज़िंदा रहते हुए उनकी बुरी हालत के प्रति लगभग पूरी तरह से बेपरवाह होने के मद्देनजर उनके बकाए का इंतज़ाम भी करेंगे। ऐसे डर से इन्कार नहीं किया जा सकता। न सिफ़र् आपूर्तिकर्ता देश को कानूनी तौर पर मिलने वाले पैसे के सवाल पर नुकसान होगा, बल्कि घर पर पीड़ितों के परिवारों को भी बहुत ज़्यादा तकलीफ़ होगी। कई परिवार विदेश में नौकरी करके पैसे कमाने के लिए किसी सदस्य को भेजने और सक्षम बनाने हेतु भारी-भरकम कर्ज भी लेते हैं।
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