Asian Para Games 2026: भारत ने रचा इतिहास! 30 गोल्ड समेत 114 मेडल जीतकर बनाया नया रिकॉर्ड
Asian Para Games 2026: भारत ने रचा इतिहास! 30 गोल्ड समेत 114 मेडल जीतकर बनाया नया रिकॉर्ड
एशियाई पैरा गेम्स में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, 30 गोल्ड सहित जीते 114 मेडल
एशियाई पैरा गेम्स में भारतीय दल ने अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कुल 114 पदक जीते, जिनमें 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदक शामिल हैं।
एशियाई पैरा गेम्स में भारत ने 30 स्वर्ण सहित 114 पदक जीतकर हांगझोउ का पिछला रिकॉर्ड तोड़ा
आइची-नागोया। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पदकों का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया है। भारत ने प्रतियोगिता में अब तक कुल 114 पदक अपने नाम किए हैं। इनमें 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदक शामिल हैं। इस उपलब्धि के साथ भारत ने […] The post एशियाई पैरा गेम्स में भारत ने 30 स्वर्ण सहित 114 पदक जीतकर हांगझोउ का पिछला रिकॉर्ड तोड़ा appeared first on Sabguru News .
Asian Para Games में भारत ने रचा इतिहास, 30 स्वर्ण समेत रिकॉर्ड 114 पदक जीते
भारतीय पैरा खिलाड़ियों ने उम्मीदों से बढ़कर प्रदर्शन करते हुए एशियाई पैरा खेलों में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। भारत ने शुक्रवार को यहां आखिरी दिन रिकॉर्ड प्रदर्शन के दम पर 30 स्वर्ण सहित कुल 114 पदक जीतकर अपना अभियान समाप्त किया। भारत ने इस बार इन खेलों में 168 खिलाड़ियों का दल भेजा था जो 2023 में हांगझोउ में हुए पिछले चरण में हिस्सा लेने वाले दल की संख्या से लगभग आधा था। भारतीय खिलाड़ियों ने हांगझोउ में 27 स्वर्ण सहित 108 पदक जीते थे जो उस समय देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। यहां जारी खेलों में शुक्रवार को पहली बार स्वर्ण पदक जीतने में पैरा एथलेटिक्स का दबदबा नहीं रहा बल्कि बैडमिंटन खिलाड़ियों, तीरंदाजों और निशानेबाज मोना अग्रवाल ने भी भारत के पदकों की संख्या बढ़ाने में अहम योगदान दिया। इस तरह भारत ने 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदकों के साथ अपना अभियान पूरा किया। भारत फिलहाल पदक तालिका में चौथे स्थान पर है, लेकिन शनिवार को कुछ स्पर्धाओं के फाइनल होने के कारण उसकी स्थिति बदल सकती है। भारत का उन स्पर्धाओं में कोई खिलाड़ी हिस्सा नहीं ले रहा है। अभियान के आखिरी दिन भारत ने नौ स्वर्ण पदक जीते जो इस चरण में उसका एक दिन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। ये स्वर्ण पदक तीरंदाजी, निशानेबाजी, बैडमिंटन और एथलेटिक्स में मिले। एथलेटिक्स ने हमेशा की तरह भारत के लिए पदक संख्या में इजाफा किया। इस स्पर्धा में भारत ने कुल 65 पदक जीते जो 2023 के मुकाबले 12 अधिक हैं। शुक्रवार को हालांकि बैडमिंटन खिलाड़ियों ने भी सुर्खियां बटोरीं और तीन स्वर्ण पदक जीते। इनमें पेरिस पैरालंपिक चैंपियन नितेश कुमार और नवीन शिवकुमार के व्यक्तिगत वर्गों के स्वर्ण पदक शामिल हैं। अनुभवी नितेश ने पुरुष एकल एसएल3 वर्ग में स्वर्ण और मिश्रित युगल एसएल3-एसयू5 स्पर्धा में रजत पदक जीता जबकि इन खेलों में पदार्पण कर रहे नवीन ने पुरुष एकल एसएल4 वर्ग का स्वर्ण अपने नाम किया। 31 वर्षीय नितेश ने पुरुष एकल फाइनल में हमवतन और तोक्यो पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता प्रमोद भगत को 21-18, 21-16 से हराकर शानदार जीत दर्ज की। इसके बाद उन्होंने तुलसीमति मुरुगेसन के साथ मिश्रित युगल में रजत पदक जीता। नवीन ने एसएल4 वर्ग के फाइनल में इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान को 21-9, 21-17 से हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया। तुलसीमति ने भी यादगार प्रदर्शन करते हुए एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीते। उन्होंने महिला युगल का खिताब अपने नाम किया। पेरिस पैरालंपिक की रजत पदक विजेता 24 वर्षीय तुलसीमति ने मानसी जोशी के साथ मिलकर महिला युगल एसएल3-एसयू5 का खिताब जीता। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में चीन की यांग किउशिया और शियाओ जुशियान को 21-16, 21-13 से हराया। इससे पहले तुलसीमति को महिला एकल एसयू5 के फाइनल में यांग किउशिया से 18-21, 11-21 से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। एथलेटिक्स में संदीप और हानी ने क्रमशः पुरुषों की 400 मीटर टी64 और भाला फेंक एफ37/38 स्पर्धाओं में विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीते। मौजूदा पैरालंपिक और विश्व चैंपियन सुमित अंतिल ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की भाला फेंक एफ42-44/61-64 संयुक्त स्पर्धा में भारत का दबदबा कायम किया। उन्होंने 72.46 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ स्वर्ण पदक जीता। एफ42 वर्ग में हिस्सा लेने वाले महेंद्र गुर्जर ने 59.03 मीटर के प्रदर्शन के साथ रजत पदक जीता, जबकि एफ44 वर्ग के संदीप संजय सरगर ने 64.48 मीटर भाला फेंककर कांस्य पदक हासिल किया। महेंद्र को कम दूरी के बावजूद रजत पदक मिला। संयुक्त स्पर्धाओं में खिलाड़ियों की रैंकिंग तय करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले आरएजेडए अंक में महेंद्र को बढ़त मिली, जिसके आधार पर उन्हें संदीप से ऊपर स्थान दिया गया। भाला फेंक और चक्का फेंक जैसी मैदान में होने वाली स्पर्धाओं में खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ाने और मुकाबले को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए एफ42, एफ44, एफ62 और एफ64 जैसे वर्गों को अक्सर एक संयुक्त स्पर्धा में शामिल किया जाता है। एफ42 और एफ44 वर्ग में निचले अंगों से संबंधित अक्षमता वाले वे खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, जो भाला फेंकने या दौड़ने के लिए कृत्रिम पैर का इस्तेमाल नहीं करते। एफ62 और एफ64 वर्ग में निचले अंगों से संबंधित अक्षमता वाले वे खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं, जो कृत्रिम पैर या पैरों की मदद से खड़े होकर खेलते हैं। व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाले प्रणव सूरमा ने पुरुषों की क्लब थ्रो स्पर्धा में 32.87 मीटर का खेलों का रिकॉर्ड बनाकर भारत को दिन का आखिरी स्वर्ण पदक दिलाया। इससे पहले संदीप ने पुरुषों की 400 मीटर टी64 स्पर्धा के फाइनल में 52.28 सेकेंड का समय लेकर विश्व रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक जीता। हमवतन अजय कुमार ने 53.61 सेकेंड के खेलों के रिकॉर्ड के साथ कांस्य पदक हासिल किया। भाला फेंक एफ37/38 के फाइनल में हानी ने 60.49 मीटर का विश्व रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले निमिषा चक्कुंगलपरम्बिल और प्रमोद बिजारनिया ने क्रमशः महिलाओं की लंबी कूद टी47 और पुरुषों की 1500 मीटर टी46 स्पर्धाओं में रजत पदक जीते। पुरुषों की 1500 मीटर दौड़ में प्रमोद ने चार मिनट 9.65 सेकंड का समय निकाला। पैरा निशानेबाज मोना अग्रवाल ने महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस एसएच1 स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड तोड़ते हुए स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 357.5 अंक हासिल कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह इन खेलों में उनका दूसरा स्वर्ण पदक था। मोना ने इस साल की शुरुआत में भारत के लिए 2028 पैरालंपिक का पहला कोटा हासिल किया था। पैरालंपिक निशानेबाजी में एसएच1 वर्ग उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके निचले या ऊपरी अंगों में दिव्यांगता होती है और जो अपने हाथों से बंदूक का भार संभाल सकते हैं। इससे पहले मोना ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 स्पर्धा में 250.0 अंक के खेलों के रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता था। अवनि लेखरा ने 249.6 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया। पैरालंपिक चैंपियन तीरंदाज हरविंदर सिंह और उनके साथ पहली बार इन खेलों में हिस्सा ले रहे विजय सुंडी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की रिकर्व युगल स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता। हालांकि, भारतीय महिला युगल टीम को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। हरविंदर और विजय ने फाइनल में चीन के युन डुओ और झाओ लिशुए को 5-1 से हराया। वहीं, महिला युगल फाइनल में भावना चौधरी और पूजा जटिया की जोड़ी महिला पैरा रिकर्व युगल फाइनल में चीन की गाओ जिहान और वांग शूकियान से 0 . 6 से हार गई और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। भारतीय तैराकी दल ने उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए इन खेलों में कुल 11 पदक जीते जिनमें तीन रजत पदक शामिल हैं। आखिरी दिन हिमांशु नंदल ने पुरुषों की 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इन खेलों में कांस्य पदकों की हैट्रिक पूरी की। ‘ऑप्टिक नर्व’ (दृष्टि तंत्रिका) में खराबी के कारण जन्म से दृष्टिहीन 22 वर्षीय हिमांशु ने पुरुषों की 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा को एक मिनट 5.90 सेकंड में पूरी कर कांस्य पदक की हैट्रिक भी पूरी की। हिमांशु इससे पहले पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल और 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एस11 स्पर्धाओं में भी कांस्य पदक जीत चुके हैं। इन खेलों में तीन पदक जीतने के साथ ही वह हमवतन रवि बुडिगिना की बराबरी पर पहुंच गए जिन्होंने दो रजत और एक कांस्य सहित कुल तीन पदक जीते हैं। हिमांशु ने मंगलवार को पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में पांच मिनट 10.91 सेकंड का समय निकालकर अपने पदकों का खाता खोला था। चार तैराकों के बीच हुए मुकाबले में वह तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद उन्होंने 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एस11 में कांस्य जीता और शुक्रवार को तीसरा पदक हासिल कर अपनी हैट्रिक पूरी की। एस11 वर्ग में दृष्टिबाधित खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इसमें वे खिलाड़ी शामिल हैं जिनकी दृष्टि क्षमता बेहद कम है या जिन्हें प्रकाश का बिल्कुल भी आभास नहीं होता।
Asian Para Games में भारत का दबदबा, Javelin Throw में जीते Gold Silver और Bronze
शुक्रवार (23 अक्टूबर) को एक और जैवलिन इवेंट में भारत ने सभी मेडल अपने नाम किए। F42-44/61-64 कंबाइंड कैटेगरी में सुमित अंतिल ने गोल्ड, महेंद्र गुर्जर ने सिल्वर और संदीप संजय सरगर ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। सुमित (T64) ने 72.46 मीटर की थ्रो के साथ पहला स्थान हासिल किया और 1,112 अंक बनाए। वहीं, गुर्जर (T42) और संजय सरगर (T44) ने अपनी-अपनी कैटेगरी में क्रमशः 59.03 मीटर और 64.48 मीटर की दूरी के साथ नए 'गेम्स रिकॉर्ड' बनाए, और क्रमशः 1,066 व 1,006 अंक हासिल किए। इसे भी पढ़ें: Para Asian Games 2026 | बैडमिंटन में भारत का दबदबा, नितेश कुमार और नवीन शिवकुमार ने जीते स्वर्ण पदक 28 वर्षीय अंतिल, जो दो बार के पैरालंपिक चैंपियन और विश्व रिकॉर्ड धारक हैं, मई में बनाए गए अपने 74.82 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को तो नहीं दोहरा सके, लेकिन F64 प्रतियोगिता में उनका दबदबा कायम रहा। अंतिल ने 2023 एशियाई पैरा खेलों में 73.29 मीटर की थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता था, जो उस समय एक विश्व रिकॉर्ड था। महेंद्र गुर्जर ने 59.03 मीटर के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि संदीप संजय सरगर ने 64.48 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता। संयुक्त-वर्ग (कंबाइंड-क्लास) स्पर्धाओं में रैंकिंग तय करने वाले 'RAZA पॉइंट्स' के आधार पर, गुर्जर, सरगर से आगे रहे। प्रतियोगिता में F42, F44, F62 और F64 श्रेणियों के एथलीटों को एक साथ शामिल किया गया था ताकि प्रतिभागियों की संख्या अधिक हो सके। F42 और F44 श्रेणी के एथलीट बिना कृत्रिम अंगों (प्रोस्थेसिस) के हिस्सा लेते हैं, जबकि F62 और F64 श्रेणी के एथलीट कृत्रिम अंगों का उपयोग करते हुए खड़े होकर थ्रो करते हैं। एक दुर्घटना में अपना बायां पैर गंवाने से पहले, अंतिल एक होनहार पहलवान थे। बाद में, एक साथी एथलीट के जरिए उन्हें पैरा-स्पोर्ट्स के बारे में पता चला और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। उन्होंने 2023 से 2025 तक लगातार तीन बार 'वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप' का खिताब जीता है। इसे भी पढ़ें: Ahmedabad में 23 अक्टूबर से पहली Commonwealth Kabaddi Championship, 13 देश होंगे शामिल F42 जैवलिन (भाला फेंक) कैटेगरी में नेशनल चैंपियन और एशियाई रिकॉर्ड धारक, गुर्जर भारत के प्रमुख पैरा-एथलीटों में से एक बनकर उभरे हैं। मई 2025 में, स्विट्जरलैंड के नॉटविल में आयोजित 'वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री' के दौरान, गुर्जर ने F42 जैवलिन थ्रो में 61.17 मीटर की दूरी तय करके एक विश्व रिकॉर्ड बनाया। इसी इवेंट में उन्होंने T42 लॉन्ग जंप में भी स्वर्ण पदक जीता। महाराष्ट्र के सांगली जिले के संदीप संजय सरगर ने बचपन में पैर की गंभीर चोट को मात देकर पैरा-एथलेटिक्स में अपना करियर बनाया। केमिस्ट्री में BSc पूरी करने के बाद, 2016 में उन्होंने जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) की शुरुआत की। अपने गृहनगर में ट्रेनिंग के सीमित मौकों को देखते हुए, बेहतर सुविधाओं के लिए सरगर पुणे चले गए। वहां उन्होंने अपने खेल के सपनों को पूरा करने के साथ-साथ डिलीवरी एग्जीक्यूटिव के तौर पर भी काम किया।
भारत के स्टार पैरा भाला फेंक एथलीट सुमित अंतिल ने शुक्रवार को यहां एशियाई पैरा खेलों में पुरुषों की एफ 42-44/61-64 संयुक्त स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर अपने खिताब का बचाव किया तो वहीं इस स्पर्धा में भारत ने तीनों पदक अपने नाम किये। दो बार के पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता और विश्व रिकॉर्ड धारक 28 वर्षीय सुमित ने अपने दूसरे प्रयास में 72.46 मीटर दूर भाला फेंककर स्वर्ण पदक हासिल किया। सुमित ने 2023 के एशियाई पैरा खेलों में 73.29 मीटर के तत्कालीन विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद उन्होंने इस साल मई में 74.82 मीटर का नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। शुक्रवार को वह अपना रिकॉर्ड नहीं तोड़ सके, लेकिन एफ64 वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए अन्य खिलाड़ियों से आगे रहे। एफ42 वर्ग में हिस्सा लेने वाले महेंद्र गुर्जर ने 59.03 मीटर के प्रदर्शन के साथ रजत पदक जीता, जबकि एफ44 वर्ग के संदीप संजय सरगर ने 64.48 मीटर भाला फेंककर कांस्य पदक हासिल किया। महेंद्र को कम दूरी के बावजूद रजत पदक मिला। संयुक्त स्पर्धाओं में खिलाड़ियों की रैंकिंग तय करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले आरएजेडए अंक में महेंद्र को बढ़त मिली, जिसके आधार पर उन्हें संदीप से ऊपर स्थान दिया गया। भाला फेंक और चक्का फेंक जैसी मैदान में होने वाली स्पर्धाओं में खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ाने और मुकाबले को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए एफ42, एफ44, एफ62 और एफ64 जैसे वर्गों को अक्सर एक संयुक्त स्पर्धा में शामिल किया जाता है। एफ42 और एफ44 वर्ग में निचले अंगों से संबंधित अक्षमता वाले वे खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, जो भाला फेंकने या दौड़ने के लिए कृत्रिम पैर का इस्तेमाल नहीं करते। एफ62 और एफ64 वर्ग में निचले अंगों से संबंधित अक्षमता वाले वे खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं, जो कृत्रिम पैर या पैरों की मदद से खड़े होकर खेलते हैं।
Asian Para Games: सुमित अंतिल का गोल्डन थ्रो, भारत ने किया मेडल स्वीप
सुमित अंतिल ने एशियन पैरा गेम्स में पुरुषों की भाला फेंक संयुक्त स्पर्धा में 72.46 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीतकर अपने खिताब का बचाव किया. महेंद्र गुर्जर ने सिल्वर और संदीप संजय सरगर ने ब्रॉन्ज मेडल जीता. इस तरह भारत ने स्पर्धा के तीनों पदक अपने नाम किए.
Asian Para Games में Himanshu Nandal ने जीता तीसरा कांस्य, पदकों की लगाई हैट्रिक
भारतीय पैरा तैराक हिमांशु नंदल ने शुक्रवार को यहां एशियाई पैरा खेलों में पुरुषों की 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर पदकों की हैट्रिक पूरी की। यह इन खेलों में उनका तीसरा कांस्य पदक है। ऑप्टिक नर्व (दृष्टि तंत्रिका) में खराबी के कारण जन्म से दृष्टिहीन 22 वर्षीय हिमांशु ने यह स्पर्धा एक मिनट 5.90 सेकंड में पूरी की। जापान के उचु तोमिता ने 58.22 सेकंड के समय के साथ खेलों का नया रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता, जबकि चीन के चुआनझेन सुन ने 58.70 सेकंड में रजत पदक हासिल किया। हिमांशु इससे पहले पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल और 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एस11 स्पर्धाओं में भी कांस्य पदक जीत चुके हैं। इन खेलों में तीन पदक जीतने के साथ ही वह हमवतन रवि बुडिगिना की बराबरी पर पहुंच गए, जिन्होंने दो रजत और एक कांस्य सहित कुल तीन पदक जीते हैं। हिमांशु ने मंगलवार को पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में पांच मिनट 10.91 सेकंड का समय निकालकर अपने पदकों का खाता खोला था। चार तैराकों के बीच हुए मुकाबले में वह तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद उन्होंने 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एस11 में कांस्य जीता और शुक्रवार को तीसरा पदक हासिल कर अपनी हैट्रिक पूरी की। एस11 वर्ग में दृष्टिबाधित खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इसमें वे खिलाड़ी शामिल हैं जिनकी दृष्टि क्षमता बेहद कम है या जिन्हें प्रकाश का बिल्कुल भी आभास नहीं होता। हिमांशु की एशियाई पैरा खेलों तक की यात्रा बचपन से ही खेलों से जुड़ी रही है। हरियाणा के रोहतक में खेलों के माहौल वाले परिवार में पले-बढ़े हिमांशु के पिता राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी खेल चुके हैं। चार वर्ष की उम्र में वह दिल्ली आ गए और राष्ट्रीय दृष्टिबाधित संघ से जुड़े और ब्रेल लिपि सीखी। शुरुआत में उन्होंने जूडो में अपनी पहचान बनाई और राष्ट्रीय स्तर पर पदक भी जीते। उन्होंने वर्ष 2021 में तैराकी को अपना नया लक्ष्य बनाया। तैराकी में उनका सफर तेजी से आगे बढ़ा। वर्ष 2024 में हिमांशु पेरिस पैरालंपिक के लिए न्यूनतम योग्यता मानक हासिल करने वाले भारत के पहले दृष्टिहीन तैराक बने। दिल्ली विश्वविद्यालय के आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक हिमांशु ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार प्रगति की है। वर्ष 2025 में सिंगापुर में आयोजित विश्व पैरा तैराकी चैंपियनशिप में उन्होंने दो स्पर्धाओं के फाइनल में जगह बनाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
Asian Para Games में Kokila Kaushik ने जीता Silver Medal, बोलीं- अगली बार लाऊंगी गोल्ड
भारतीय पैरा जूडोका कोकिला कौशिक जापान के आइची-नागोया में आयोजित 2026 एशियाई पैरा खेलों से रजत पदक जीतकर भारत लौटीं। गुरुवार शाम इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बात करते हुए, कोकिला ने और अधिक मजबूत होकर वापसी करने और भविष्य की प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीतने का संकल्प लिया। कोकिला ने महिलाओं की J2 52 किग्रा श्रेणी में रजत पदक हासिल किया। वह उस भारतीय पैरा जूडो दल का हिस्सा थीं, जो इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता से दो पदक लेकर लौटा है; इसमें पुरुषों की J1 70 किग्रा श्रेणी में कपिल परमार ने कांस्य पदक जीता। इसे भी पढ़ें: Para Asian Games 2026 | बैडमिंटन में भारत का दबदबा, नितेश कुमार और नवीन शिवकुमार ने जीते स्वर्ण पदक अपने प्रदर्शन से संतुष्टि जताते हुए, कोकिला ने ANI से कहा कि मैंने अभी सिल्वर मेडल जीता है। हमें गोल्ड की उम्मीद थी, लेकिन इस बार सिल्वर मिला है, इसलिए अभी हम खुश हैं। मतलब, हमने भारत के लिए मेडल जीता है, और अगली बार गोल्ड आएगा। उन्होंने आगे कहा कि भारत को गौरवान्वित करके मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। 2023 में हांगझोऊ में हुए एशियन पैरा गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकीं कोकिला ने कहा कि अब वह आने वाली बड़ी प्रतियोगिताओं पर ध्यान देंगी। उन्होंने बताया, अगले साल वर्ल्ड गेम्स हैं, और उसके बाद 2028 के पैरालंपिक गेम्स हैं। मैं उनके लिए अच्छे से प्रैक्टिस करूंगी। कोकिला को स्वर्ण पदक के मुकाबले में किर्गिस्तान की ऐबिके उलानबेक काइज़ी से हार का सामना करना पड़ा, जिन्होंने महज 21 सेकंड में 'इप्पोन' के जरिए जीत हासिल की। इंडियन ब्लाइंड एंड पैरा जूडो एसोसिएशन के सीईओ मुनव्वर अंज़ार ने टीम के दो पदक जीतने पर गर्व जताया, लेकिन साथ ही यह भी माना कि इस खेल में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि हमें बहुत गर्व है। सबसे बड़ी बात यह है कि जब हम पैरा एशियन गेम्स और पैरालंपिक में भारत के लिए पदक जीतते हैं और तिरंगा ऊपर लहराता है, तो एक अलग ही तरह का गर्व महसूस होता है। हमने दो पदक जीते हैं और हम इसे लेकर बेहद खुश हैं, क्योंकि हमने बहुत अच्छी तैयारी की थी। लेकिन जैसे-जैसे प्रतियोगिता आगे बढ़ रही है, यह और भी कठिन होती जा रही है। इसलिए, अभी हमारा पूरा ध्यान आने वाले एक बहुत बड़े टूर्नामेंट, 'वर्ल्ड गेम्स' पर है और हम उसी की तैयारी कर रहे हैं। हमें वहां भी पदक जीतने हैं, और उसके बाद आने वाले टूर्नामेंटों में भी। LA पैरालंपिक के लिए हमारा लक्ष्य कम से कम दो पदक जीतना है, ठीक वैसे ही जैसे हमने यहां जीते हैं। इसे भी पढ़ें: Ahmedabad में 23 अक्टूबर से पहली Commonwealth Kabaddi Championship, 13 देश होंगे शामिल कोकिला के प्रदर्शन के बारे में अंजार ने कहा कि कोकिला के साथ बात यह है कि वह अपनी वेट कैटेगरी में सबसे कम उम्र की हैं। वह अभी 22 साल की हुई हैं, जबकि उनकी कैटेगरी में कजाकिस्तान या किर्गिस्तान जैसे देशों के बाकी एथलीट लगभग 28 से 30 साल के हैं। वे बहुत मजबूत खिलाड़ी हैं। कोकिला को उस स्तर तक पहुंचने और उन्हें हराने में अभी एक-दो साल और लगेंगे। पुरुषों के J1 70kg इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले कपिल परमार ने फाइनल में जगह न बना पाने के बाद अपने दृढ़ संकल्प के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस बार मैंने 70 kg कैटेगरी में हिस्सा लिया था। सेमीफाइनल में मैं एक इंडोनेशियाई एथलीट से हार गया था, लेकिन फिर हमने ब्रॉन्ज मेडल के लिए और भी कड़ी मेहनत की। हमारे कोच ने कहा था कि हम खाली हाथ वापस नहीं जा सकते। हमने बहुत मेहनत की थी, इसलिए हमें ब्रॉन्ज मेडल चाहिए था। आखिरकार, मैंने कुछ ही मिनटों में इंडोनेशियाई खिलाड़ी को हराकर ब्रॉन्ज मेडल हासिल कर लिया।
भारत के संदीप और हानी ने एशियाई पैरा खेलों में शुक्रवार को क्रमश: पुरूषों की 400 मीटर टी64 फाइनल और पुरूषों की भालाफेंक एफ37 /38 स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीते।
Mona Agarwal ने 357.5 स्कोर के साथ रचा नया World Record, एशियाई पैरा खेलों में जीता दूसरा गोल्ड
भारतीय पैरा निशानेबाज मोना अग्रवाल ने एशियाई पैरा खेलों में शुक्रवार को महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस एसएच1 स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड तोड़कर स्वर्ण पदक जीता। मोना ने 357 . 5 स्कोर करके इन खेलों में दूसरा स्वर्ण अपने नाम किया। इससे पहले विश्व रिकॉर्ड 356 का था जो स्वीडन की अन्ना बेंसन के नाम था। उन्होंने इस साल जुलाई में यह रिकॉर्ड बनाया था। चीन की झांग कुइपिंग ने 353 . 7 अंक लेकर रजत और दक्षिण कोरिया की किम मियुंग ने 344 . 4 अंक के साथ कांस्य पदक जीता। भारत की अवनि लेखरा 333 . 2 अंक के साथ चौथे स्थान पर रही। पैरा निशानेबाजी में एसएच1 श्रेणी उन एथलीटों के लिए है जिनके निचले या ऊपरी अंगों में कोई शारीरिक अक्षमता है लेकिन जो बिना किसी गन स्टैंड या सहारे के अपने हाथों से ही बंदूक का वजन संभाल सकते हैं। मोना ने इससे पहले महिलाओं की दस मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 स्पर्धा में खेलों के रिकॉर्ड के साथ 250 अंक लेकर स्वर्ण जीता था जबकि लेखरा को रजत पदक मिला था।
Harvinder Singh और विजय सुंडी ने Asian Para Games में जीता स्वर्ण पदक, चीन को दी मात
पैरालम्पिक चैम्पियन हरविंदर सिंह और विजय सुंडी ने एशियाई पैरा खेलों में शुक्रवार को पैरा रिकर्व पुरूष युगल फाइनल में चीन को 5 . 1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता जबकि महिला युगल टीम को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। दोनों टीमों के बीच पहला सेट 35 . 35 से बराबरी पर था। भारत ने दूसरा सेट 37 . 36 से और तीसरा 38 . 36 से जीता। चीन के युन डुओ और झाओ लिक्सू की जोड़ी प्रदर्शन में निरंतरता नहीं रख सकी। इससे पहले भारत की भावना चौधरी और पूजा जटिया की जोड़ी महिला पैरा रिकर्व युगल फाइनल में चीन की गाओ जिहान और वांग शूकियान से 0 . 6 से हार गई और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। भारतीय जोड़ी ने 31, 30 , 29 स्कोर किया जबकि चीन ने 38 , 35 और 39 स्कोर किया। हरविंदर और भावना मिश्रित युगल सेमीफाइनल में चीन के झाओ लिक्सू और वांग शूकियान से 0 . 6 से हार गए और अब कांस्य पदक के लिये ईरान के खिलाफ खेलेंगे। हरविंदर ने 2018 एशियाई पैरा खेलों में व्यक्तिगत स्वर्ण जीता था और हांगझोउ में दो कांस्य जीते थे। उन्होंने पेरिस पैरालम्पिक में व्यक्तिगत स्वर्ण जीता था जबकि तोक्यो पैरालम्पिक में कांस्य पदक हासिल किया था।
Para Asian Games 2026 | बैडमिंटन में भारत का दबदबा, नितेश कुमार और नवीन शिवकुमार ने जीते स्वर्ण पदक
पैरा एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पैरा-एथलीटों का दबदबा और स्वर्णिम प्रदर्शन लगातार जारी है। बैडमिंटन के पुरुष एकल वर्ग में भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी धाक जमाते हुए दो स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाले। नितेश कुमार ने SL3 श्रेणी में और नवीन शिवकुमार ने SL4 श्रेणी के पुरुष एकल बैडमिंटन फाइनल में शानदार जीत दर्ज करते हुए देश का तिरंगा फहराया। फाइनल मुकाबले में नितेश कुमार का सामना अपने ही देश के प्रमोद भगत से हुआ। दो पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेताओं के बीच हुए इस मैच में नितेश कुमार ने 21-18, 21-16 से जीत हासिल की। मैच के बाद, नितेश कुमार ने अपने स्वर्ण पदक जीतने के अनुभव के बारे में बात की और बताया कि वे इस जीत से कितने खुश हैं। NDTV के अनुसार, नितेश कुमार ने कहा, एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर बहुत खुशी हो रही है। पिछली बार मैं जीत के काफी करीब था, तीसरे सेट में मैं 19-16 से आगे चल रहा था, लेकिन फिर हार गया। इसलिए इस बार जीतना, और वह भी प्रमोद के खिलाफ सीधे दो सेटों में जीतना, वाकई बहुत खास है। मुझे लगता है कि ऐसी चीजें बहुत कम ही देखने को मिलती हैं। वहीं, प्रमोद भगत को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। वे काफी निराश थे और उन्होंने बताया कि वे एक और स्वर्ण पदक जीतने के इरादे से उतरे थे, लेकिन उन्हें दूसरे स्थान से ही काम चलाना पड़ा। भगत ने कहा, मुझे उतना अच्छा नहीं लग रहा है, क्योंकि मैंने एशियन गेम्स में लगातार दो स्वर्ण पदक जीते थे और यहाँ मैं तीसरा स्वर्ण जीतने की कोशिश कर रहा था। मेरे पास सब कुछ था, लेकिन आज मेरे कुछ स्ट्रोक गलत हो गए और मेरा जजमेंट भी थोड़ा गड़बड़ा गया, जिस वजह से मुझे अब केवल रजत पदक से ही संतोष करना पड़ रहा है। नवीन शिवकुमार ने फ्रेडी सेतियावान को हराकर स्वर्ण पदक जीता इसके अलावा, नवीन शिवकुमार ने भी पुरुष एकल बैडमिंटन के SL4 फाइनल में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता। इंडोनेशिया के फ्रेडी सेटियावान के खिलाफ मुकाबले में शिवकुमार ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को महज 36 मिनट में 21-9, 21-17 से हराकर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता। शिवकुमार की यह जीत पैरा एशियन गेम्स 2026 में भारत का 24वां स्वर्ण पदक रही। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस टूर्नामेंट में भारतीय दल अपने खाते में और कितने स्वर्ण पदक जोड़ पाता है। For the latest scores, match updates, and in-depth coverage, explore Live Cricket Updates in Hindi on Prabhasakshi
Asian Para Games: संदीप और हानी ने नए World Record के साथ जीता स्वर्ण, भारत के कुल 100 पदक पूरे
भारत के संदीप और हानी ने एशियाई पैरा खेलों में शुक्रवार को क्रमश: पुरूषों की 400 मीटर टी64 फाइनल और पुरूषों की भालाफेंक एफ37 /38 स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीते। संदीप ने 52 . 28 सेकंड के विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि अजय कुमार को कांस्य पदक मिला। सउदी अरब के नूर अलसाना को 53 . 13 सेकंड के साथ रजत पदक मिला जबकि अजय ने खेलों का रिकॉर्ड बनाकर 53 . 61 सेकंड के साथ कांस्य पदक जीता। संदीप और अलसाना टी44 श्रेणी में खेलते हैं जबकि कुमार टी64 श्रेणी के खिलाड़ी हैं। दोनों श्रेणियों की स्पर्धा अक्सर संयुक्त होती है। भालाफेंक एफ37 /38 स्पर्धा में हानी ने 60 . 49 मीटर (रजा अंक 1116) का विश्व रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। ईरान के होरमोज एस को 50 . 68 मीटर (रजा अंक 1009) के साथ रजत और चीन के यू चेंगजी को 53 . 66 मीटर (रजा अंक 943) के साथ कांस्य पदक मिला। इसके साथ ही भारत के इन खेलों में सौ पदक हो गए हैं। पैरा भालाफेंक में एफ37 और एफ38 श्रेणी के खिलाड़ी एक साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं और उनकी रैंकिंग रजा अंक के आधार पर तय की जाती है। यही कारण है कि होरमोज का थ्रो कम दूरी का होने के बावजूद उन्हें रजत पदक मिला जबकि यू को बेहतर थ्रो के बावजूद रजा अंक कम होने से कांस्य से संतोष करना पड़ा। पुरुषों की 400 मीटर दौड़ में संदीप और अलसाना को टी44 श्रेणी में रखा गया है जबकि अजय टी64 श्रेणी में आते हैं। दोनों ही पैरों (निचले अंगों) से जुड़ी श्रेणी हैं और इनमें अक्सर एक साथ स्पर्धा कराई जाती है। इससे पहले प्रमोद बिजारनिया और निमिषा चाक्कुंगालपाराम्बिल ने क्रमश: पुरूषों की 1500 मीटर टी46 और महिलाओं की ऊंची कूद टी47 स्पर्धा में रजत पदक जीता। निमिषा ने 5 . 37 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ रजत पदक हासिल किया जबकि श्रीलंका की धनंजना विक्रमसिंघे ने खेलों के रिकॉर्ड 5 . 52 मीटर के साथ स्वर्ण पदक जीता। चीन की चेन जिन ने 5 . 17 मीटर के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। पुरूषों के 1500 मीटर टी46 फाइनल में प्रमोद ने चार मिनट 09.65 सेकंड का समय निकालकर रजत पदक जीता। श्रीलंका के पुवाकपितिकांदे पी वाहुमपुरागे रिकॉर्ड चार मिनट 03.25 सेकंड का समय निकालकर शीर्ष पर रहे। फिलीपींस के किंग जेम्स रेयेस को कांस्य पदक मिला जिन्होंने चार मिनट 13 . 18 सेकंड का समय निकाला। पैरा-एथलेटिक्स में टी46 श्रेणी खड़े होकर प्रतिस्पर्धा करने वाले उन एथलीटों के लिए है जिनके ऊपरी अंगों में कोई कमी या अक्षमता है। जैसे कि कोहनी के ऊपर या नीचे से एक हाथ का न होना, या कंधे या कोहनी से जुड़ी कोई अन्य गंभीर कार्यात्मक अक्षमता होना। टी47 श्रेणी उन एथलीटों के लिए है जिनके शरीर के ऊपरी हिस्से के एक तरफ (यानी एक हाथ में) कोई कमी या विकार हो मसलन कोहनी या कलाई के नीचे से हाथ का न होना, हाथ का जन्म से न होना, या किसी एक हाथ की मांसपेशियों की ताकत कम होना या हाथ की गति सीमित होना। भारत के प्रवीण शर्मा पुरूषों के चक्काफेंक एफ11 फाइनल में 30 . 64 मीटर के प्रयास के साथ चौथे स्थान पर रहे। ईरान ने तीनों पदक जीते। अमीषा रावत महिलाओं की शॉटपुट एफ46 स्पर्धा में 11 . 16 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ चौथे स्थान पर रही।
Asian Para Games में भारत चमका, Pramod Bijarnia और निमिषा ने जीते रजत पदक
भारत के प्रमोद बिजारनिया और निमिषा चाक्कुंगालपाराम्बिल ने एशियाई पैरा खेलों में शुक्रवार को क्रमश: पुरूषों की 1500 मीटर टी46 और महिलाओं की ऊंची कूद टी47 स्पर्धा में रजत पदक जीता। निमिषा ने 5 . 37 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ रजत पदक हासिल किया जबकि श्रीलंका की धनंजना विक्रमसिंघे ने खेलों के रिकॉर्ड 5 . 52 मीटर के साथ स्वर्ण पदक जीता। चीन की चेन जिन ने 5 . 17 मीटर के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। पुरूषों के 1500 मीटर टी46 फाइनल में प्रमोद ने चार मिनट 09.65 सेकंड का समय निकालकर रजत पदक जीता। श्रीलंका के पुवाकपितिकांदे पी वाहुमपुरागे रिकॉर्ड चार मिनट 03.25 सेकंड का समय निकालकर शीर्ष पर रहे। फिलीपींस के किंग जेम्स रेयेस को कांस्य पदक मिला जिन्होंने चार मिनट 13 . 18 सेकंड का समय निकाला। पैरा-एथलेटिक्स में टी46 श्रेणी खड़े होकर प्रतिस्पर्धा करने वाले उन एथलीटों के लिए है जिनके ऊपरी अंगों में कोई कमी या अक्षमता है। जैसे कि कोहनी के ऊपर या नीचे से एक हाथ का न होना, या कंधे या कोहनी से जुड़ी कोई अन्य गंभीर कार्यात्मक अक्षमता होना। टी47 श्रेणी उन एथलीटों के लिए है जिनके शरीर के ऊपरी हिस्से के एक तरफ (यानी एक हाथ में) कोई कमी या विकार हो मसलन कोहनी या कलाई के नीचे से हाथ का न होना, हाथ का जन्म से न होना, या किसी एक हाथ की मांसपेशियों की ताकत कम होना या हाथ की गति सीमित होना। भारत के प्रवीण शर्मा पुरूषों के चक्काफेंक एफ11 फाइनल में 30 . 64 मीटर के प्रयास के साथ चौथे स्थान पर रहे। ईरान ने तीनों पदक जीते।
Para Asian Games 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी, इन्होंने जीते हैं पदक
Para Asian Games 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। शुक्रवार 23 अक्टूबर की सुबह-सुबह भारत के खाते में दो गोल्ड मेडल समेत कई पदक आए।
Asian Para Games में Nitesh Kumar और नवीन ने जीते बैडमिंटन स्वर्ण पदक
भारत के नितेश कुमार और नवीन शिवकुमार ने एशियाई पैरा खेलों में शुक्रवार को बैडमिंटन पुरूष एकल एसएल3 और एसएल4 स्वर्ण पदक जीता। पैरालम्पिक स्वर्ण पदक विजेताओं के बीच हुए मुकाबले में नितेश ने 38 वर्ष के प्रमोद भगत को 21 . 18, 21 . 16 से हराया। वहीं 2018 और 2022 में स्वर्ण जीतने वाले प्रमोद को रजत पदक मिला। पेरिस पैरालम्पिक स्वर्ण पदक विजेता नितेश ने कहा ,‘‘ एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतकर बहुत अच्छा लग रहा है। पिछली बार मैं काफी करीब पहुंचकर हार गया था। इस बार प्रमोद को दो गेम में हराना काफी खास है और ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है।’’नवीन ने इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान को 36 मिनट तक चले मुकाबले में 21 . 9, 21 . 17 से हराया। तोक्यो पैरालम्पिक के स्वर्ण पदक विजेता भगत ने कहा ,‘‘ मुझे अच्छा नहीं लग रहा क्योंकि मैं लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीतना चाहता था। लेकिन आज मेरे कुछ स्ट्रोक्स गलत हो गए और निर्णय भी सही नहीं रहे।’’नित्या श्री सुमति सिवन ने महिला एकल एसएच6 फाइनल में चीन की लि फेंगमेइ से 12 . 21, 13 . 21 से हारने के बाद रजत पदक जीता। इससे पहले तुलसीमति मुरूगेसन को महिला एसयू5 वर्ग में रजत से संतोष करना पड़ा जो फाइनल में चीन की यांग कियूशिया से 18 . 21, 11 . 21 से हार गई। पेरिस पैरालम्पिक की रजत पदक विजेता तुलसीमति दो स्वर्ण पदकों की दौड़ में है। वह मिश्रित युगल में नितेश के साथ फाइनल खेलेंगी जबकि मानसी जोशी के साथ महिला युगल फाइनल में भी हैं। पैरा बैडमिंटन में एसएल3 उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके निचले अंगों (पैरों) में काफी विकलांगता है और वे आधे कोर्ट पर खेलते हैं, जबकि एसएल4 उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके निचले अंगों में विकलांगता तो है, लेकिन उनका चलने और दौड़ने का संतुलन बेहतर है। एसयू5 उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके ऊपरी अंगों (हाथों) में विकलांगता है, जबकि एसएच6 कम कद वाले खिलाड़ियों के लिए है।
Asian Market Today: AI खर्च को लेकर बढ़ी चिंता,एशियाई बाजार धड़ाम, कोस्पी 3% टूटा
Asian Market Today: एशियाई बाजारों पर भारी दबाव बना हुआ है। टेक्नोलॉजी शेयरों में बड़ी गिरावट आई है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों में शानदार प्रदर्शन के बाद निवेशक अब बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों से अपना पैसा निकाल रहे हैं। वे इस पूंजी को ट्रेजरी सिक्योरिटीज और येन जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली मुद्राओं (डिफेंसिव करेंसी) में लगा रहे हैं।एशियाई बाजारों पर दबावब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) इंडेक्स जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर के लिए एक अहम संकेतक माना जाता है, वह लगभग 3.50% गिर गया है। इसके साथ ही, यह अप्रैल के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर बंद होने की कगार पर है।जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) और TOPIX इंडेक्स भी 1.50% से ज्यादा गिर गए हैं।वहीं, दलाल स्ट्रीट (भारतीय बाजार) का रुख कुछ अलग दिख रहा है। GIFT निफ्टी (निफ्टी फ्यूचर्स) के संकेत बता रहे हैं कि बाजार में 130 अंकों की बढ़त (गैप-अप) के साथ शुरुआत हो सकती है।इस गिरावट के कारण MSCI इंक. का क्षेत्रीय इक्विटी इंडेक्स लगातार दूसरे दिन कमजोर रहा, जिससे इसका वैल्यूएशन जुलाई के स्तर के बराबर आ गया है।कैसा रहा यूएस मार्केट का हालयह नकारात्मक माहौल अमेरिका के इक्विटी-इंडेक्स फ्यूचर्स बाजारों में भी दिखा। जून के आखिर के बाद सबसे खराब ट्रेडिंग सेशन के बाद, नैस्डैक 100 (Nasdaq 100) फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स में 0.1% की गिरावट आई।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर में आई कमजोरी के चलते निवेशकों ने फिक्स्ड-इनकम सिक्योरिटीज (जैसे सरकारी बॉन्ड) का रुख किया। ट्रेजरी सिक्योरिटीज ने पिछले सेशन में हुई अपनी बड़ी बढ़त को बरकरार रखा, जो दो साल से अधिक समय में उनकी सबसे बड़ी तेजी थी।गुरुवार को 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में 17 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई और यह 4.96% पर ट्रेड कर रही थी। जापान और ऑस्ट्रेलिया के सरकारी डेट इंस्ट्रूमेंट्स (सरकारी बॉन्ड) का प्रदर्शन भी अमेरिकी ट्रेजरी जैसा ही रहा।येन में बढतयेन (Yen) (जिसे बाजार में अस्थिरता के समय एक सुरक्षित मुद्रा माना जाता है) ने अन्य सभी प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। एशियाई ट्रेडिंग सेशन की शुरुआत में येन 0.4% मजबूत होकर 156.20 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, डॉलर अपने अधिकांश प्रमुख प्रतिस्पर्धी मुद्राओं (Group-of-10) के मुकाबले थोड़ा कमजोर हुआ।क्रूड में उबालपिछले सत्र में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 4% की बढ़ोतरी के बावजूद, ट्रेडर्स को इससे बहुत कम राहत मिली। यह अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क अभी 113 डॉलर प्रति बैरल से थोड़ा नीचे ट्रेड कर रहा है। गुरुवार को क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आई थी, क्योंकि सऊदी अरब में हुई हिंसक घटनाओं के कारण सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। सोने में गुरुवार के सत्र वाली गिरावट बनी रही, जब इसमें 2.8% की कमी आई थी।(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Asian Para Games में Suhas LY और सुवर्णा राज ने जीते पदक, सीएम योगी ने दी बधाई
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एशियाई पैरा खेल 2026 में कांस्य पदक जीतने वाले पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी और आईएएस अफसर सुहास एलवाई तथा ‘ डिस्कस थ्रो’ में स्वर्ण पदक हासिल करने वाली सुवर्णा राज को बृहस्पतिवार को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उत्तर प्रदेश के खेल विभाग के सचिव और आईएएस अधिकारी सुहास एलवाई ने पुरुष एकल एसएल4 पैरा-बैडमिंटन प्रतिस्पर्धा में कांस्य पदक जीता। सुवर्णा राज ने महिलाओं की ‘डिस्कस थ्रो एफ54’ प्रतिस्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया। राज्य सरकार द्वारा जारी बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री ने सुहास को बधाई देते हुए कहा कि एशियाई पैरा खेल-2026 में पुरुष एकल ‘एसएल4 पैरा-बैडमिंटन’ प्रतिस्पर्धा में कांस्य पदक जीतना उनकी मेहनत और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सुहास की उपलब्धि दृढ़ संकल्प और अथक परिश्रम से सपनों को साकार करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने खिलाड़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं। आदित्यनाथ ने सुवर्णा राज को बधाई देते हुए कहा कि महिलाओं की ‘डिस्कस थ्रो एफ54’ प्रतिस्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने देश का मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुवर्णा की यह स्वर्णिम उपलब्धि अथक परिश्रम और अटूट संकल्प का परिणाम है। उनकी सफलता असंख्य बेटियों के सपनों को नई उड़ान देने वाली है।
Asian Para Games में Sheetal Devi का कमाल, दो घंटे में जीते दो स्वर्ण पदक
भुजाहीन तीरंदाज शीतल देवी ने दो घंटे से भी कम समय में दो स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया जबकि एथलेटिक्स दल ने यहां एशियाई पैरा खेलों में भारत के पदकों की संख्या 88 तक पहुंचाने में सबसे अहम योगदान दिया। मौजूदा विश्व चैंपियन और दुनिया की नंबर एक तीरंदाज 19 वर्षीय शीतल ने सबसे पहले तोमन कुमार के साथ मिलकर मिश्रित टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक बरकरार रखा। भारतीय जोड़ी ने इंडोनेशिया की तेओडोरा ऑडी आयुडिया फेरेली और केन स्वागुमिलंग को 151-148 से हराया। इसके बाद शीतल ने चार अंक से पिछड़ने के बावजूद सिंगापुर की अलीम नूर शाहिदा को 142-139 से हराकर व्यक्तिगत स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता। यह मुकाबला हांगझोउ में 2023 में हुए पिछले सत्र के व्यक्तिगत फाइनल का दोहराव था। भारत के लिए दिन की शुरुआत शानदार रही। सुवर्णा राज ने महिलाओं की एफ54 चक्का फेंक स्पर्धा में 15.66 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ स्वर्ण पदक जीता। व्हीलचेयर पर निर्भर 44 वर्षीय खिलाड़ी ने लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए चार बार चक्का 15 मीटर से अधिक दूर फेंका और अपने करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। दिन बढ़ने के साथ भारत की पदक तालिका में और इजाफा हुआ। भारत के कुल पदकों की संख्या 88 हो गई है जिसमें 21 स्वर्ण, 26 रजत और 41 कांस्य पदक शामिल हैं। पैरा तैराकी, पैरा बैडमिंटन और पैरा टेबल टेनिस में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीते। भारत के पदकों में पैरा एथलेटिक्स का योगदान सबसे अधिक रहा है। इस प्रतियोगिता में भारत ने 18 स्वर्ण, 16 रजत और 18 कांस्य सहित कुल 52 पदक जीते हैं। दिन के प्रमुख प्रदर्शनों में शैलेश कुमार की अगुवाई में पुरुषों की ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों का क्लीन स्वीप और महिलाओं तथा पुरुषों की 400 मीटर टी47 दौड़ में क्रमश: अंजनाबेन बुंबाडिया और दिलीप महादू गावित के स्वर्ण पदक शामिल रहे। बुंबाडिया ने महिलाओं की 400 मीटर टी47 दौड़ में 59.97 सेकेंड का समय लेकर स्वर्ण पदक जीता, जबकि भारत की जयंति बेहेडा एक मिनट 0.65 सेकेंड के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। पुरुषों की ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में शैलेश कुमार ने 1.89 मीटर की छलांग लगाकर खेलों का रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने बुधवार को लंबी कूद में कांस्य पदक जीता था। पूर्व पैरालंपिक कांस्य पदक विजेता वरुण भाटी ने सत्र का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 1.84 मीटर की छलांग के साथ रजत पदक जीता जबकि राहुल 1.81 मीटर की छलांग लगाकर तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद गावित ने पुरुषों की 400 मीटर टी47 दौड़ में 48.27 सेकेंड का समय लेकर स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने बुधवार को 100 मीटर स्पर्धा में भी पहला स्थान हासिल किया था। दिन का समापन लंबी कूद के खिलाड़ी सोलाइराज धर्मराज के स्वर्ण पदक के साथ हुआ। उन्होंने टी44/टी62/टी64 की संयुक्त स्पर्धा में 7.15 मीटर की छलांग लगाकर एशियाई रिकॉर्ड बनाया और अपना खिताब बरकरार रखा। महिलाओं की 400 मीटर टी12 स्पर्धा में दृष्टिबाधित तेजलबेन दामोर ने 57.60 सेकेंड का समय लेकर रजत पदक जीता। यह इन खेलों में उनका दूसरा पदक है। इससे पहले उन्होंने 200 मीटर टी12 स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया था। तीरंदाजी में स्वाति चौधरी ने भी इतिहास रचा। वह डब्ल्यू1 वर्ग में एशियाई पैरा खेलों में भारत का पहला पदक जीतने वाली खिलाड़ी बनीं। हालांकि, महिलाओं की व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में उन्हें चीन की सेन मेंगकान के खिलाफ 4-6 से हार के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा। किशोर पैरा तैराक रवि बुडिगिना ने पुरुषों की 50 मीटर फ्रीस्टाइल एस13 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर पदकों की हैट्रिक पूरी की। उनके अलावा तीन अन्य भारतीय तैराकों ने भी पदक जीते। कपिल कुमार ने रजत पदक हासिल किया जबकि स्वातिक पाटिल और तेजस नंदकुमार ने अपनी-अपनी स्पर्धाओं में कांस्य पदक जीते। इसके साथ ही तैराकी में भारत के पदकों की संख्या 10 हो गई। भारतीय दल को हालांकि अब भी स्वर्ण पदक का इंतजार है। रवि इससे पहले इस सप्ताह पुरुषों की एस13 100 मीटर बैकस्ट्रोक और फ्रीस्टाइल स्पर्धाओं में रजत पदक जीत चुके हैं। आंध्र प्रदेश के 18 वर्षीय दृष्टिबाधित तैराक ने 50 मीटर फ्रीस्टाइल में 25.89 सेकेंड का समय लेकर तीसरा स्थान हासिल किया। छब्बीस वर्षीय कपिल ने पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस10 स्पर्धा में चार मिनट 38.44 सेकेंड का समय लेकर रजत पदक जीता। जापान के अकितो मिनाई ने चार मिनट 27.44 सेकेंड के खेलों के रिकॉर्ड समय के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया। चौबीस वर्षीय स्वातिक ने पुरुषों की 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एसबी9 स्पर्धा में एक मिनट 13.77 सेकेंड का समय लेकर भारत को एक और पदक दिलाया। एसबी9 वर्ग न्यूनतम शारीरिक अक्षमता वाले तैराकों के लिए है, जबकि एस13 वर्ग में दृष्टिबाधित खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, जिनकी दृष्टि संबंधी अक्षमता के बावजूद पात्र दृष्टिबाधित वर्गों में सबसे कम दृष्टि हानि होती है। दिन में पूल में उतरने वाले अंतिम भारतीय तेजस ने पुरुषों की 100 मीटर बैकस्ट्रोक एस7 स्पर्धा में एक मिनट 18.58 सेकेंड का समय लेकर कांस्य पदक जीता। इस वर्ग में ऐसे खिलाड़ी शामिल होते हैं जिन्हें शारीरिक अक्षमता होती है और जिनका बांहों तथा धड़ पर नियंत्रण होता है लेकिन पैरों की कार्यक्षमता सीमित होती है या अंगों में कुछ विशेष कमियां होती हैं। भारत ने पुरुष एकल एसएल3 बैडमिंटन स्पर्धा में कम से कम रजत पदक पक्का कर लिया जब प्रमोद भगत ने रोमांचक तीन गेम के सेमीफाइनल में कोरिया के ली सियुंघू को हराकर फाइनल में जगह बनाई। अब खिताबी मुकाबले में उनका सामना हमवतन नितेश कुमार से होगा। छह बार के विश्व चैंपियन और तोक्यो पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता 38 वर्षीय भगत ने दो घंटे नौ मिनट तक चले कड़े मुकाबले में ली को 16-21, 21-18, 21-17 से हराया। इससे पहले पेरिस पैरालंपिक चैंपियन नितेश कुमार ने पुरुष एकल एसएल3 और मिश्रित युगल एसएल3-एसयू5 दोनों स्पर्धाओं के फाइनल में पहुंचकर दो स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद कायम रखी। वहीं नवीन शिवकुमार ने पुरुष एकल एसएल4 के फाइनल में जगह बनाई। नितेश ने 52 मिनट तक चले मुकाबले में इंडोनेशिया के एम इमरान को 21-19, 21-16 से हराकर पुरुष एकल एसएल3 के फाइनल में प्रवेश किया। इससे पहले उन्होंने थुलासिमथी मुरुगेसन के साथ मिलकर 42 मिनट के रोमांचक सेमीफाइनल में चीन की ली मिंगपिन और शियाओ जूशियान की जोड़ी को 21-19, 14-21, 21-17 से हराया। भारतीय खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में पांच कांस्य पदक भी जीते। भारत की भाविना पटेल और शुभम वाधवा ने मिश्रित युगल एक्सडी7 टेबल टेनिस स्पर्धा में कांस्य पदक के साथ अपना अभियान समाप्त किया। सेमीफाइनल में उन्हें दक्षिण कोरिया के जांग योंगजिन और ली मिग्यू के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। भारतीय जोड़ी को अंतिम चार के मुकाबले में 6-11, 11-8, 5-11, 8-11 से हार मिली। हालांकि, क्वार्टर फाइनल में जापान की किमी बेस्शो और मासानोरी ऊनो की जोड़ी को सीधे गेम में हराकर उन्होंने पदक पक्का कर लिया था। भाविना और शुभम ने जापानी जोड़ी को 11-9, 11-3, 11-6 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी।
Asian Para Games: शीतल ने 2 घंटे में जीते 2 गोल्ड, भारत के 88 मेडल
शीतल देवी ने दो घंटे से भी कम समय में दो गोल्ड मेडल जीतकर भारत को एशियन पैरा गेम्स में बड़ी सफलता दिलाई. भारत के कुल पदकों की संख्या 88 हो गई है, जिसमें 21 गोल्ड, 26 सिल्वर और 41 ब्रॉन्ज शामिल हैं. पैरा एथलेटिक्स में भारत ने 52 पदक जीते हैं, जबकि बैडमिंटन, तीरंदाजी, स्विमिंग और टेबल टेनिस में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया.
Asian Para Games में Ravi Budigina ने लगाई पदकों की हैट्रिक, चार भारतीय तैराकों ने जीते मेडल
भारत के किशोर पैरा तैराक रवि बुडिगिना ने बृहस्पतिवार को यहां एशियाई पैरा खेलों में पुरुषों की 50 मीटर फ्रीस्टाइल एस13 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर पदकों की हैट्रिक पूरी की जबकि तीन अन्य भारतीय तैराकों ने भी पदक जीते। कपिल कुमार ने रजत जबकि स्वातिक पाटिल और तेजस नंदकुमार ने अपनी-अपनी स्पर्धाओं में कांस्य पदक जीते। इसके साथ ही तैराकी में भारत के कुल पदकों की संख्या 10 हो गई लेकिन देश के तैराकों के नाम पर अब भी मौजूदा खेलों का स्वर्ण पदक नहीं है। रवि इससे पहले इस सप्ताह पुरुषों की एस13 वर्ग की 100 मीटर बैकस्ट्रोक और फ्रीस्टाइल स्पर्धाओं में भी रजत पदक जीत चुके हैं। आंध्र प्रदेश के दृष्टिबाधित 18 वर्षीय रवि ने 50 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में 25.89 सेकेंड का समय लेकर तीसरा स्थान हासिल किया। छब्बीस वर्ष के कपिल ने पुरूषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस10 स्पर्धा में चार मिनट 38 . 44 सेकेंड का समय लिया। जापान के अकितो मिनाइ ने एशियाई पैरा खेलों के रिकॉर्ड समय (चार मिनट 27 . 44 सेकेंड) के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया। ईरान के शाहीन इजादयार को कांस्य पदक मिला। इसके बाद 24 वर्षीय स्वातिक ने पुरुषों की 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एसबी9 स्पर्धा में एक मिनट 13.77 सेकेंड का समय लेकर कांस्य पदक जीता। यह इन खेलों में भारत का आठवां पदक है। स्वातिक ईरान के दो तैराकों सिना जेघमिनेजाद (एक मिनट 09.47 सेकेंड) और शाहीन इजादयार (एक मिनट 13.23 सेकेंड) के बाद तीसरे स्थान पर रहे। दोनों ईरानी तैराकों ने क्रमश: स्वर्ण और रजत पदक जीते। पूल में उतरने वाले आखिरी भारतीय तैराक तेजस ने पुरुषों की 100 मीटर बैकस्ट्रोक एस7 स्पर्धा में एक मिनट 18.58 सेकेंड का समय लेकर कांस्य पदक जीता। इस वर्ग में ऐसे खिलाड़ी शामिल होते हैं जिन्हें शारीरिक अक्षमता होती है और जिनका बांहों तथा धड़ पर पूरा नियंत्रण होता है लेकिन पैरों की कार्यक्षमता सीमित होती है या अंगों में कुछ विशेष कमियां होती हैं। तेजस चीन के जिंगसोंग रुआन और सिंगापुर के सूंग वेई तोह के बाद तीसरे स्थान पर रहे। रुआन ने एक मिनट 12.16 सेकेड के खेलों के रिकॉर्ड समय के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि तोह ने एक मिनट 16.09 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक अपने नाम किया। कर्नाटक के तैराक तेजस के पैरों में जन्मजात समस्या है। एस10 श्रेणी में वे तैराक होते हैं जिनमें आमतौर पर शारीरिक कमियां बहुत कम होती हैं मसलन पैरों में कमजोरी, पैर न होना, घुटने के नीचे से पैर नहीं होना, या कूल्हों से जुड़ी समस्यायें। एसबी9 वर्ग में ऐसे खिलाड़ी शामिल होते हैं जिनमें शारीरिक अक्षमता सबसे कम होती है। शारीरिक अक्षमता के वर्गीकरण में इस वर्ग के खिलाड़ियों की क्षमता सबसे अधिक मानी जाती है। पैरालंपिक तैराकी में एस, एसबी और एसएम उपसर्ग तैराकी की अलग-अलग शैलियों को दर्शाते हैं। एस का इस्तेमाल फ्रीस्टाइल, बैकस्ट्रोक और बटरफ्लाई स्पर्धाओं के लिए, एसबी का ब्रेस्टस्ट्रोक स्पर्धाओं के लिए और एसएम का व्यक्तिगत मेडले स्पर्धाओं के लिए किया जाता है।
Asian Para Games: शैलेष कुमार की अगुवाई में ऊंची कूद में भारत ने जीते तीनों पदक
एशियाई पैरा खेलों में एथलेटिक्स में शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए शैलेष कुमार की अगुवाई में भारत ने पुरूषों की ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में तीनों पदक जीते जबकि अंजनाबेन बुंबाडिया और दिलीप गावित ने 400 मीटर टी47 महिला और पुरूष वर्ग में और सुवर्णा राज ने महिलाओं की चक्का फेंक एफ54 स्पर्धा में पीले तमगे अपने नाम किये। बुंबाडिया ने महिलाओं की 400 मीटर टी47 स्पर्धा में बृहस्पतिवार को स्वर्ण पदक जीता जबकि जयंती बेहेडा को रजत पदक मिला। बुंबाडिया ने 59 . 97 सेकंड का समय निकाला और चार खिलाड़ियों में एक मिनट से कम का समय निकालने वाली अकेली प्रतियोगी रही। बेहेडा ने एक मिनट 00.65 सेकंड का समय लिया। थाईलैंड की सासिरावान इंताचोत ने एक मिनट 02.58 सेकंड के साथ कांस्य पदक जीता। पुरूषों की ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में शैलेष ने खेलों के नये रिकॉर्ड के साथ 1 . 89 मीटर की कूद लगाकर स्वर्ण पदक जीता। पूर्व पैरालम्पिक कांस्य पदक विजेता वरूण भाटी ने सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 1 . 84 मीटर के साथ रजत जबकि राहुल ने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके 1 . 81 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता। टी63 श्रेणी उन एथलीटों के लिए है जिनका घुटना या घुटने के ऊपर का हिस्सा कटा हुआ है या जिनके पैर में कोई कमी है। ये एथलीट दौड़ने और कूदने के लिए घुटने के जोड़ वाले कृत्रिम पैर (प्रोस्थेसिस) का उपयोग करके प्रतिस्पर्धा करते हैं। भारत ने हांगझोउ में हुए पिछले खेलों में भी इस स्पर्धा के तीनों पदक जीते थे। पुरूषों के 400 मीटर टी47 फाइनल में गावित ने 48 . 27 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता जबकि भाविककुमार भारवाड ने 49 . 31 सेकंड के समय के साथ रजत पदक हासिल किया। जापान के काकेरू इशिदा को कांस्य पदक मिला। गावित ने इससे पहले बुधवार को पुरूषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था।उन्होंने हांगझोउ खेलों में 49 . 48 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता था। टी47 श्रेणी में वे एथलीट आते हैं जिनकी कोहनी के नीचे से बाजू या कलाई कटी हुई है या ऊपरी अंग में कोई ऐसी ही कमी या खराबी है जिससे एक बाजू प्रभावित होती है। सुबह के सत्र में सुवर्णा राज ने भारत को पहला स्वर्ण दिलाया जब वह महिलाओं की चक्का फेंक एफ54 स्पर्धा में 15.66 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ अव्वल रहीं। सुवर्णा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने छह प्रयासों में से चार में 15 मीटर से अधिक का थ्रो किया। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल किया। ईरान की शाहला हदीदी 15.45 मीटर के साथ दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि वियतनाम की थी न्गोक थुई गुयेन ने 14.65 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता। एफ54 श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके धड़ और निचले अंग सक्षम नहीं होते हैं और वह व्हीलचेयर पर बैठकर थ्रो करते हैं। एथलीट अपने शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत और बांहों की गति का उपयोग करके शक्ति पैदा करते हैं। महिला 400मीटर टी12 स्पर्धा में दृष्टिबाधित तेजलबेन दामोर ने 57 . 60 सेकंड के समय के साथ रजत पदक जीता जो इन खेलों में उनका दूसरा पदक है। उन्होंने 200 मीटर टी12 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था।
Asian Para Games: तैराक Kapil Kumar और तीरंदाज Swati Chaudhary ने जीता Silver
भारतीय तैराक कपिल कुमार ने गुरुवार को यहाँ एशियाई पैरा खेलों में पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल S10 स्पर्धा में रजत पदक जीता। 26 वर्षीय कपिल ने 4:38.44 का समय लिया और जापान के अकिटो मिनाई के बाद दूसरे स्थान पर रहे। मिनाई ने 4:27.44 का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता और इस दौरान खेलों का नया रिकॉर्ड भी बनाया। ईरान के शाहीन इज़द्यार ने 4:38.65 का समय निकालकर कांस्य पदक जीता। इस स्पर्धा में कुल पाँच तैराक शामिल थे। इसे भी पढ़ें: Asian Para Games 2026 | भारत की सुवर्णा राज ने महिलाओं की चक्का फेंक (Discus Throw) एफ54 स्पर्धा में रचा इतिहास, जीता स्वर्णिम पदक S10 क्लास के तैराकों में आमतौर पर शारीरिक अक्षमता बहुत कम होती है, जैसे कि पैरों में कमजोरी, पैरों का न होना, घुटने के नीचे से पैर न होना, या कूल्हों से जुड़ी समस्याएँ। पैरालंपिक तैराकी में, S, SB और SM जैसे उपसर्ग (prefixes) तैराकी की शैली (स्ट्रोक) की श्रेणी को दर्शाते हैं। वहीं, स्वाति चौधरी ने एशियाई पैरा खेलों में तीरंदाजी की महिला डब्ल्यू1 श्रेणी में भारत का पहला पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने बृहस्पतिवार को यहां महिला व्यक्तिगत फाइनल में चीन की सेन मेंगकन से हारने के बाद रजत पदक हासिल किया। मेरठ की गुरुकुल तीरंदाजी अकादमी में एथेंस ओलंपिक खेलों में भाग ले चुके सत्यदेव प्रसाद के मार्गदर्शन में अभ्यास करने वाली शीर्ष वरीयता प्राप्त भारतीय खिलाड़ी ने उतार-चढ़ाव भरे फाइनल में 4-2 की बढ़त गंवा दी और 4-6 से हार गई। चीन की तीरंदाज ने शानदार वापसी की और स्वाति को 25-17, 21-22, 22-21, 20-30, 21-28 से हार का सामना करना पड़ा। पिछले महीने अहमदाबाद में विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज में कांस्य पदक जीतने वाली स्वाति ने शानदार शुरुआत करते हुए पहला सेट 25-17 से जीत लिया। इसे भी पढ़ें: देश और दुनिया की दोपहर की बड़ी खबरें, पढ़ें प्रमुख राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम चीन की खिलाड़ी ने दूसरा सेट जीता लेकिन स्वाति ने तीसरा सेट जीत कर वापसी की। चीन की खिलाड़ी ने चौथे सेट में तीन परफेक्ट 10 के साथ 30 का स्कोर बनाकर सेट 30-20 से जीत लिया और मैच को 4-4 से बराबर कर दिया। सेन ने निर्णायक सेट में अपना धैर्य बनाए रखा तथा स्वाति के 21 अंकों के मुकाबले 28 अंक बनाकर एशियाई पैरा खेलों में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। मेरठ की 37 वर्षीय स्वाति को भले ही स्वर्ण पदक नहीं मिला लेकिन वह इस वर्ग में पदक जीतने वाली पहली भारतीय तीरंदाज बन गई। डब्ल्यू1 श्रेणी में गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले खिलाड़ी भाग लेते हैं।
Asian Para Games में Sheetal Devi ने जीते दो स्वर्ण, स्वाति चौधरी ने रचा इतिहास
भारत की भुजाहीन तीरंदाज शीतल देवी ने एशियाई पैरा खेलों में महिलाओं की कंपाउंड व्यक्तिगत स्पर्धा और मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता जबकि स्वाति चौधरी ने डब्ल्यू1 स्पर्धा में रजत पदक जीता और इस श्रेणी में पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गई। शीतल ने तनावपूर्ण क्षणों में धैर्य बनाए रखते हुए महिला व्यक्तिगत फाइनल में सिंगापुर की अलीम नूर शाहिदा को हराया। तोमन कुमार के साथ मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने के कुछ ही घंटों बाद ही 19 वर्षीय विश्व चैंपियन शीतल ने अलीम को 142-139 से हराकर मौजूदा खेलों का अपना दूसरा स्वर्ण पदक और कुल मिलाकर तीसरा पदक जीता। इससे पहले उन्होंने महिला कंपाउंड टीम में पायल नाग के साथ रजत पदक जीता था। हांगझोउ खेलों में भी उन्होंने दो स्वर्ण और एक रजत अपने नाम किये थे। स्वाति महिलाओं के डब्ल्यू1 फाइनल में चीन की सेन मेंगकान के खिलाफ 4 . 2 की बढत बनाने के बाद 4 . 6 से हार गई। इस वर्ग में हालांकि भारत का यह पहला पदक है। दिन की आखिरी स्पर्धा में तोमन कुमार पुरूषों के व्यक्तिगत कांस्य प्लेआफ में चीन के झांग यिचेंग से 139 . 148 से हार गए। भारत के तीरंदाजी में चार पदक हो गए हैं जबकि रिकर्व एलिमिनेशन दौर शुक्रवार को खेला जायेगा। भारत ने 2023 में हांगझोउ में दो स्वर्ण, तीन रजत और दो कांस्य पदक जीते थे। भारत की महिला और पुरूष टीमें फाइनल में पहुंच चुकी है जबकि मिश्रित टीम सेमीफाइनल से अभियान का आगाज करेगी। शीतल ने व्यक्तिगत मुकाबले में जबर्दस्त धैर्य का प्रदर्शन किया। अलीम ने अच्छी शुरुआत की और पहले दो सेट के बाद चार अंकों की बढ़त बना ली। लेकिन जम्मू कश्मीर की रहने वाली भारतीय खिलाड़ी ने शानदार वापसी करके अगले दो सेट में लगातार 10-10 अंक हासिल किए। उन्होंने इस बीच तीन एक्स (निशाने के केंद्र के सबसे करीब लगने वाले तीर) भी लगाए। इस तरह से उन्होंने अंतिम सेट से पहले दो अंकों की बढ़त बना ली। शीतल ने अंतिम सेट में नौ-नौ अंक के साथ कुल 27 अंक हासिल किए जबकि अलीम केवल 26 अंक ही बना सकी। मिश्रित टीम में शीतल और तोमन ने फाइनल में इंडोनेशिया की तेओडोरा ऑडी आयुडिया फेरेली और केन स्वागुमिलंग को 151-148 से हराया। क्वालीफाइंग राउंड में विश्व रिकार्ड बनाने वाली शीर्ष वरीयता प्राप्त भारतीय जोड़ी ने फाइनल में शुरू से लेकर आखिर तक अपनी बढ़त बनाए रखी। भारतीय टीम ने पहले सेट में 38-37 से बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद उन्होंने दूसरे सेट में भी अच्छा प्रदर्शन किया और 77-73 के अंतर से अपनी बढ़त चार अंक की कर दी। इस दौरान उन्होंने केवल एक अंक गंवाया। इंडोनेशियाई टीम ने तीसरे सेट में एक अंक से जीत हासिल की, लेकिन भारतीय टीम ने तीन अंकों की बढ़त बनाए रखी। अंतिम सेट में दोनों टीमों ने 38 अंक बनाए, जो भारत को तीन अंकों की जीत के साथ स्वर्ण पदक दिलाने के लिए पर्याप्त थे। शीतल और तोमन ने सेमीफाइनल में चीनी ताइपे की जोड़ी ली युन-ह्सिएन और यांग जून-काई को संघर्षपूर्ण मुकाबले में 142-141से हराया था। शीतल और तोमन ने क्वालीफाइंग राउंड में 1402 अंक बनाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया था। छत्तीसगढ़ के बलोद जिले के नवागांव के रहने वाले 31 वर्षीय तोमन सीआरपीएफ में कार्यरत हैं। उन्होंने फरवरी 2022 में झारखंड के लोहरदगा जिले में माओवादियों के खिलाफ संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान एक आईईडी विस्फोट में अपना बायां पैर गंवा दिया था। इस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनका पैर काटना पड़ा था। इससे पहले स्वाति ने डब्ल्यू1 श्रेणी में महिला व्यक्तिगत फाइनल में चीन की सेन मेंगकन से हारने के बाद रजत पदक हासिल किया। मेरठ की गुरुकुल तीरंदाजी अकादमी में एथेंस ओलंपिक खेलों में भाग ले चुके सत्यदेव प्रसाद के मार्गदर्शन में अभ्यास करने वाली शीर्ष वरीयता प्राप्त भारतीय खिलाड़ी ने उतार-चढ़ाव भरे फाइनल में 4-2 की बढ़त गंवा दी और 4-6 से हार गई। चीन की तीरंदाज ने शानदार वापसी की और स्वाति को 25-17, 21-22, 22-21, 20-30, 21-28 से हार का सामना करना पड़ा। पिछले महीने अहमदाबाद में विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज में कांस्य पदक जीतने वाली स्वाति ने शानदार शुरुआत करते हुए पहला सेट 25-17 से जीत लिया। चीन की खिलाड़ी ने दूसरा सेट जीता लेकिन स्वाति ने तीसरा सेट जीत कर वापसी की। चीन की खिलाड़ी ने चौथे सेट में तीन परफेक्ट 10 के साथ 30 का स्कोर बनाकर सेट 30-20 से जीत लिया और मैच को 4-4 से बराबर कर दिया। सेन ने निर्णायक सेट में अपना धैर्य बनाए रखा तथा स्वाति के 21 अंकों के मुकाबले 28 अंक बनाकर एशियाई पैरा खेलों में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। मेरठ की 37 वर्षीय स्वाति को भले ही स्वर्ण पदक नहीं मिला लेकिन वह इस वर्ग में पदक जीतने वाली पहली भारतीय तीरंदाज बन गई। डब्ल्यू1 श्रेणी में गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले खिलाड़ी भाग लेते हैं। इस वर्ग में टेट्राप्लेजिया जैसी स्थितियों से ग्रस्त एथलीट शामिल हैं, जिनमें मांसपेशियों की शक्ति और अंगों के कार्य में समान रूप से कमी होती है।
Asian Para Games: शीतल देवी और तोमन कुमार ने जीता स्वर्ण, स्वाति को मिला रजत
भारत की शीतल देवी और तोमन कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बृहस्पतिवार को यहां एशियाई पैरा खेलों की तीरंदाजी प्रतियोगिता की कंपाउंड मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता, जबकि स्वाति चौधरी ने महिला डब्ल्यू1 श्रेणी में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा। शीतल और तोमन ने मौजूदा खेलों में तीरंदाजी में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया। इससे पहले शीतल ने महिला कंपाउंड युगल स्पर्धा में पायल नाग के साथ मिलकर रजत पदक जीता था। शीतल का यह एशियाई पैरा खेलों में मिश्रित टीम वर्ग में लगातार दूसरा स्वर्ण पदक है। इससे पहले उन्होंने 2023 के हांगझोउ खेलों में राकेश कुमार के साथ मिलकर खिताब जीता था। शीतल और तोमन ने फाइनल में इंडोनेशिया की तेओडोरा ऑडी आयुडिया फेरेली और केन स्वागुमिलंग को 151-148 से हराया। क्वालीफाइंग राउंड में विश्व रिकार्ड बनाने वाली शीर्ष वरीयता प्राप्त भारतीय जोड़ी ने फाइनल में शुरू से लेकर आखिर तक अपनी बढ़त बनाए रखी। भारतीय टीम ने पहले सेट में 38-37 से बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद उन्होंने दूसरे सेट में भी अच्छा प्रदर्शन किया और 77-73 के अंतर से अपनी बढ़त चार अंक की कर दी। इस दौरान उन्होंने केवल एक अंक गंवाया। इंडोनेशियाई टीम ने तीसरे सेट में एक अंक से जीत हासिल की, लेकिन भारतीय टीम ने तीन अंकों की बढ़त बनाए रखी। अंतिम सेट में दोनों टीमों ने 38 अंक बनाए, जो भारत को तीन अंकों की जीत के साथ स्वर्ण पदक दिलाने के लिए पर्याप्त थे। शीतल और तोमन ने सेमीफाइनल में चीनी ताइपे की जोड़ी ली युन-ह्सिएन और यांग जून-काई को संघर्षपूर्ण मुकाबले में 142-141से हराया था। शीतल और तोमन ने क्वालीफाइंग राउंड में 1402 अंक बनाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया था। शीतल जन्म से ही भुजाहीन है। वह धनुष को सही स्थिति में रखने के लिए अपने पैरों का इस्तेमाल करती हैं और डोरी को खींचने और छोड़ने के लिए अपने कंधे और जबड़े का उपयोग करती हैं। छत्तीसगढ़ के बलोद जिले के नवागांव के रहने वाले 31 वर्षीय तोमन सीआरपीएफ में कार्यरत हैं। उन्होंने फरवरी 2022 में झारखंड के लोहरदगा जिले में माओवादियों के खिलाफ संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान एक आईईडी विस्फोट में अपना बायां पैर गंवा दिया था। इस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनका पैर काटना पड़ा था। इससे पहले स्वाति ने डब्ल्यू1 श्रेणी में महिला व्यक्तिगत फाइनल में चीन की सेन मेंगकन से हारने के बाद रजत पदक हासिल किया। मेरठ की गुरुकुल तीरंदाजी अकादमी में एथेंस ओलंपिक खेलों में भाग ले चुके सत्यदेव प्रसाद के मार्गदर्शन में अभ्यास करने वाली शीर्ष वरीयता प्राप्त भारतीय खिलाड़ी ने उतार-चढ़ाव भरे फाइनल में 4-2 की बढ़त गंवा दी और 4-6 से हार गई। चीन की तीरंदाज ने शानदार वापसी की और स्वाति को 25-17, 21-22, 22-21, 20-30, 21-28 से हार का सामना करना पड़ा। पिछले महीने अहमदाबाद में विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज में कांस्य पदक जीतने वाली स्वाति ने शानदार शुरुआत करते हुए पहला सेट 25-17 से जीत लिया। चीन की खिलाड़ी ने दूसरा सेट जीता लेकिन स्वाति ने तीसरा सेट जीत कर वापसी की। चीन की खिलाड़ी ने चौथे सेट में तीन परफेक्ट 10 के साथ 30 का स्कोर बनाकर सेट 30-20 से जीत लिया और मैच को 4-4 से बराबर कर दिया। सेन ने निर्णायक सेट में अपना धैर्य बनाए रखा तथा स्वाति के 21 अंकों के मुकाबले 28 अंक बनाकर एशियाई पैरा खेलों में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। मेरठ की 37 वर्षीय स्वाति को भले ही स्वर्ण पदक नहीं मिला लेकिन वह इस वर्ग में पदक जीतने वाली पहली भारतीय तीरंदाज बन गई। डब्ल्यू1 श्रेणी में गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले खिलाड़ी भाग लेते हैं। इस वर्ग में टेट्राप्लेजिया जैसी स्थितियों से ग्रस्त एथलीट शामिल हैं, जिनमें मांसपेशियों की शक्ति और अंगों के कार्य में समान रूप से कमी होती है।
LIVE: एशियाई पैरा खेलों में भारत का शानदार प्रदर्शन, सुवर्णा राज ने जीता गोल्ड
Latest News Today Live Updates in Hindi : एशियाई पैरा खेलों में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी। गुरुवार को भारत की सुवर्णा राज ने महिलाओं की F54 डिस्कस थ्रो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। पल पल की जानकारी...
एशियाई पैरा खेलों में भारतीय एथलीटों का शानदार और प्रेरणादायक प्रदर्शन लगातार जारी है। भारत की दिग्गज पैरा एथलीट सुवर्णा राज ने खेल प्रेमियों को गौरवान्वित करते हुए बृहस्पतिवार को एशियाई पैरा खेलों की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में महिलाओं की चक्का फेंक (Discus Throw) एफ54 (F54) श्रेणी में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। सुवर्णा ने प्रतियोगिता में अपने असाधारण कौशल, अटूट मानसिक मजबूती और बेहतरीन तकनीक का परिचय देते हुए 15.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया और पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल किया। सुवर्णा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने छह प्रयासों में से चार में 15 मीटर से अधिक का थ्रो किया। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल किया। ईरान की शाहला हदीदी 15.45 मीटर के साथ दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि वियतनाम की थी न्गोक थुई गुयेन ने 14.65 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता। एफ54 श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके धड़ और निचले अंग सक्षम नहीं होते हैं और वह व्हीलचेयर पर बैठकर थ्रो करते हैं। एथलीट अपने शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत और बांहों की गति का उपयोग करके शक्ति पैदा करते हैं। समझें क्या है एफ54 (F54) श्रेणी? पैरा एथलेटिक्स में खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमताओं के आधार पर विभिन्न श्रेणियां निर्धारित की जाती हैं ताकि मुकाबला निष्पक्ष हो सके। एफ54 (F54) श्रेणी का विवरण:- शारीरिक स्थिति: यह श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए निर्धारित होती है जिनके धड़ (Torso) और निचले अंगों (Lower Limbs) की कार्यक्षमता सीमित या पूरी तरह प्रभावित होती है। तकनीक: खिलाड़ी व्हीलचेयर पर एक विशेष थ्रोइंग फ्रेम में बैठकर थ्रो करते हैं। शारीरिक शक्ति: चूंकि पैर और धड़ का सहारा नहीं मिलता, इसलिए एथलीट केवल अपने शरीर के ऊपरी हिस्से (Upper Body) की ताकत, कंधों के लचीलेपन और बांहों की तेज गति (Arm Speed) का उपयोग करके गेंद या चक्के में शक्ति पैदा करते हैं। दृढ़ संकल्प और प्रेरणा की अनूठी मिसाल सुवर्णा राज की यह सफलता केवल एक खेल पदक नहीं है, बल्कि यह उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। व्हीलचेयर पर बैठकर केवल शरीर के ऊपरी हिस्से के बल पर 15 मीटर से अधिक दूर भारी चक्का फेंकना अत्यधिक अभ्यास, अनुशासन और मानसिक दृढ़ता की मांग करता है। सुवर्णा की इस स्वर्णिम उपलब्धि से भारत में पैरा-खेलों और पैरा-एथलीटों के प्रति सम्मान और उत्साह में और अधिक बढ़ोतरी होगी। उनकी इस ऐतिहासिक जीत पर देशभर से खेल प्रेमियों, एथलीटों और अधिकारियों द्वारा बधाइयों का तांता लगा हुआ है।
Asian Para Games: थुलासिमथी और नितेश पैरा बैडमिंटन के फाइनल में पहुंचे
थुलासिमथी मुरुगेसन और नितेश कुमार की भारतीय जोड़ी ने बृहस्पतिवार को यहां चीन के ली मिंगपान और शियाओ ज़ुक्सियन को हराकर एशियाई पैरा खेलों की बैडमिंटन प्रतियोगिता के मिश्रित युगल एसएल3-एसयू5 फाइनल में प्रवेश किया, जबकि देश की दो अन्य जोड़ियों को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। थुलासिमथी और नितेश ने इचिनोमिया सिटी म्युनिसिपल जिम्नेजियम में खेले गए रोमांचक सेमीफाइनल में चीनी जोड़ी को 21-19, 14-21, 21-17 से पराजित किया। यह मैच 42 मिनट तक चला। थुलासिमथी ने मैच के बाद कहा, ‘‘हम बहुत खुश हैं। अब हमें अपना पूरा ध्यान फाइनल पर केंद्रित करना होगा।’’नितेश ने कहा, ‘‘हम इनमें से अधिकतर खिलाड़ियों के खिलाफ पहले कई बार खेल चुके हैं और उनके मजबूत पक्ष को जानते हैं। इसलिए हमें यह पता था कि हमें प्रत्येक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ कैसे खेलना है। बीच में हमारा ध्यान थोड़ा भटक गया और हमने कुछ गलतियां कर दीं, लेकिन अच्छी बात यह थी कि तीसरे सेट की शुरुआत में हमने अपनी लय वापस पा ली।’’फाइनल दो भारतीय जोड़ियों के बीच हो सकता था लेकिन मनीषा रामदास और प्रमोद भगत इंडोनेशिया की लीनी रात्रि ओक्टिला और हिकमत रामदानी से 21-16, 13-21, 17-21 से हार गए और उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। भारत के कृष्णा नागर और नित्या श्री सुमति सिवान ने भी मिश्रित युगल एसएच6 सेमीफाइनल में इंडोनेशिया की रीना मर्लिना और सुभान से 14-21, 18-21 से हारने के बाद कांस्य पदक के साथ अपने अभियान का समापन किया। थुलासिमथी महिला युगल एसएल3-एसयू5 स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक की दावेदार हैं। शुक्रवार को स्वर्ण पदक के लिए होने वाले मुकाबले में उनका और मानसी जोशी का सामना चीन की यांग किउक्सिया और शियाओ ज़ुक्सियन से होगा। नितेश पुरुष एकल एसएल3 सेमीफाइनल में इंडोनेशिया के मुह अल इमरान का सामना करेंगे। पैरा बैडमिंटन में एसएल3 श्रेणी में वह खिलाड़ी भाग लेते हैं जिनके जो निचले अंगों से दिव्यांग होते हैं और आधे कोर्ट पर प्रतिस्पर्धा करते हैं। एसयू श्रेणी के खिलाड़ी ऊपरी अंगों से दिव्यांग होते हैं। इन दोनों श्रेणियां के खिलाड़ियों को एक साथ उतारा जाता है।
एशियाई पैरा खेलों में Swati Choudhary ने रचा इतिहास, तीरंदाजी में जीता रजत पदक
स्वाति चौधरी ने एशियाई पैरा खेलों में तीरंदाजी की महिला डब्ल्यू1 श्रेणी में भारत का पहला पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने बृहस्पतिवार को यहां महिला व्यक्तिगत फाइनल में चीन की सेन मेंगकन से हारने के बाद रजत पदक हासिल किया। मेरठ की गुरुकुल तीरंदाजी अकादमी में एथेंस ओलंपिक खेलों में भाग ले चुके सत्यदेव प्रसाद के मार्गदर्शन में अभ्यास करने वाली शीर्ष वरीयता प्राप्त भारतीय खिलाड़ी ने उतार-चढ़ाव भरे फाइनल में 4-2 की बढ़त गंवा दी और 4-6 से हार गई। चीन की तीरंदाज ने शानदार वापसी की और स्वाति को 25-17, 21-22, 22-21, 20-30, 21-28 से हार का सामना करना पड़ा। पिछले महीने अहमदाबाद में विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज में कांस्य पदक जीतने वाली स्वाति ने शानदार शुरुआत करते हुए पहला सेट 25-17 से जीत लिया। चीन की खिलाड़ी ने दूसरा सेट जीता लेकिन स्वाति ने तीसरा सेट जीत कर वापसी की। चीन की खिलाड़ी ने चौथे सेट में तीन परफेक्ट 10 के साथ 30 का स्कोर बनाकर सेट 30-20 से जीत लिया और मैच को 4-4 से बराबर कर दिया। सेन ने निर्णायक सेट में अपना धैर्य बनाए रखा तथा स्वाति के 21 अंकों के मुकाबले 28 अंक बनाकर एशियाई पैरा खेलों में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। मेरठ की 37 वर्षीय स्वाति को भले ही स्वर्ण पदक नहीं मिला लेकिन वह इस वर्ग में पदक जीतने वाली पहली भारतीय तीरंदाज बन गई। डब्ल्यू1 श्रेणी में गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले खिलाड़ी भाग लेते हैं। इस वर्ग में टेट्राप्लेजिया जैसी स्थितियों से ग्रस्त एथलीट शामिल हैं, जिनमें मांसपेशियों की शक्ति और अंगों के कार्य में समान रूप से कमी होती है।
पंजाब को मिली एशियाई हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी, 'आप' ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि और गर्व का क्षण
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इन दो एशियाई देशों में खेला जाएगा महिलाओं का अंडर 19 विश्वकप
वर्ष 2027 का महिला अंडर-19 टी 20 विश्व कप बंगलादेश और नेपाल के चार मैदानों पर 21 जनवरी से 6 फ़रवरी के बीच खेला जाएगा। चटगांव, सिलेट, कीर्तिपुर और मूलपानी में ये मुक़ाबले खेले जाएंगे। चटगांव में 4 फ़रवरी को दोनों सेमीफ़ाइनल और 6 फ़रवरी को फ़ाइनल खेला ...
पंजाब में पहली बार Asian Hockey Champions Trophy, मोहाली में फ्री एंट्री - zeebharat.com
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एशियाई पैरा खेलों में पैरा एथलेटिक्स में सोने की बौछार, भारत पांचवें स्थान पर पहुंचा
भारत बुधवार को कुल 5 गोल्ड मेडल जीतकर पांचवें स्थान पर पहुंचा। एशियाई पैरा खेलों में भारत के लिए अब तक मिले 14 में से 13 स्वर्ण पैरा एथलेटिक्स दल ने जीते हैं।
Asian Para Games: एथलेटिक्स में भारत का गोल्डन धमाका, सिमरन का डबल गोल्ड
एशियन पैरा गेम्स में भारत ने ट्रैक एंड फील्ड में पांच गोल्ड समेत 18 मेडल जीते. सिमरन ने 100 मीटर और 200 मीटर में गोल्ड डबल पूरा किया, जबकि प्रवीण कुमार और सचिन खिलारी ने गेम्स रिकॉर्ड बनाए. भारत अब तक 14 गोल्ड समेत 62 मेडल जीतकर पांचवें स्थान पर है.
एशियाई पैरा खेल: Krishna Nagar और Sivarajan ने जीता युगल में रजत पदक
भारत के कृष्णा नागर और सिवाराजन सोलाइमलाइ ने एशियाई पैरा खेलों की पुरूष युगल एसएच6 बैडमिंटन स्पर्धा में रजत पदक जीता जबकि एसएल4 वर्ग में भारत के तीन पदक पक्के हो गए। कृष्णा और सिवाराजन तीन मैचों में एक जीत और दो हार के बाद दूसरे स्थान पर रहे। सिर्फ चार टीमें होने के कारण ग्रुप में स्थिति के आधार पर पदक तय किये गए। चीन के लिन नेइली और किंगताओ जेंग ने तीनों मैच जीतकर स्वर्ण पदक जीता। इंडोनेशिया के अजी दिमास त्रि और सुभांतुक ने दो मैच गंवाने के बाद कांस्य पदक हासिल किया। एसएच6 श्रेणी पैरा बैडमिंटन में कम कद के खिलाड़ियों के लिये है। इससे पहले मौजूदा चैंपियन सुहास एलवाई और दो अन्य खिलाड़ियों के सेमीफाइनल में पहुंचने से भारत ने पुरुषों के एकल एसएल4 बैडमिंटन प्रतियोगिता में तीन पदक पक्के कर दिए। वर्तमान में विश्व के नंबर एक खिलाड़ी और आईएएस अधिकारी सुहास ने कोरिया के चो नादान को 21-12 21-16 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई जहां उनका सामना इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान से होगा। सेतियावान ने क्वार्टरफाइनल के एक अन्य मैच में भारत के सुकांत कदम को 21-17, 18-21, 21-15 से हराया। दूसरा सेमीफाइनल दो अन्य भारतीय खिलाड़ियों नवीन शिवकुमार और अभिजीत सखूजा के बीच खेला जाएगा। नवीन ने क्वार्टरफाइनल में कोरिया के शिन क्युंग ह्वान को 21-14 21-4 से जबकि अभिजीत ने हमवतन सूर्यकांत यादव को 21-16 21-12 से हराया। एसएल4 श्रेणी में ऐसे खिलाड़ी भाग लेते हैं जिनके निचले अंग दिव्यांग होते हैं लेकिन दौड़ने में उनका संतुलन एसएल3 श्रेणी के खिलाड़ियों से बेहतर होता है।
Asian Para Games में Ravi Budigina ने जीता रजत, हिमांशु और रोहित को कांस्य
भारतीय तैराक रवि बुदिगिना ने एशियाई पैरा खेलों में बुधवार को पुरूषों के 100 मीटर बैकस्ट्रोक एस13 वर्ग में रजत पदक जीता जबकि हिमांशु नंदल और रोहित कुमार ने कांस्य पदक हासिल किये। रवि ने एक मिनट 10 . 10 सेकंड का समय निकालकर चार तैराकों में दूसरा स्थान हासिल किया। उजबेकिस्तान के इगोर बोलोतोव ने 58 . 43 सेकंड के एशियाई रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि चीनी ताइपै के फेंग युआन येह ने एक मिनट 12 . 05 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक हासिल किया। एस 13 श्रेणी उन एथलीटों के लिए है जिनकी दृष्टि संबंधी अक्षमता पात्र प्रतिभागियों में सबसे कम गंभीर है। रवि ने सोमवार को पुरूषों की 100 मीटर एस13 फ्रीस्टाइल स्पर्धा में भी रजत पदक जीता था। आंध्र प्रदेश के रहने वाले 18 वर्ष के रवि दुबई में 2025 एशियाई युवा पैरा खेलों में तीन स्वर्ण और तीन रजत जीत चुके हैं। इससे पहले नंदल ने पुरुष 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एस11 स्पर्धा में तीसरे स्थान पर रहते हुए एशियाई पैरा खेलों में अपना दूसरा कांस्य पदक जीता। हरियाणा के रोहतक के इस 22 वर्षीय खिलाड़ी ने एक मिनट 20.72 सेकेंड का समय निकाला। ऑप्टिक नर्व में खराबी के कारण वह जन्म से ही पूरी तरह दृष्टिबाधित हैं। चीन के यांग बोझुन ने एक मिनट 12.69 सेकेंड के खेलों के रिकॉर्ड समय के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि जापान के केइची किमुरा ने एक मिनट 12.72 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक हासिल किया। हिमांशु ने मंगलवार को पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में चार तैराकों के बीच पांच मिनट 10.91 सेकेंड का समय निकालकर तीसरा स्थान हासिल किया और अपना पहला पदक जीता। खेल पृष्ठभूमि वाले परिवार से आने वाले हिमांशु को उनके पिता से प्रेरणा मिली जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी खेली थी। वह चार साल की उम्र में दिल्ली आ गए थे और यहां ‘नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड’ से जुड़े जहां उन्होंने ब्रेल लिपि सीखी। दिल्ली विश्वविद्यालय के आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक हिमांशु ने शुरुआत में जूडो खेलना शुरू किया था। उन्होंने इस खेल में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते लेकिन 2021 में तैराकी को अपना लिया। वर्ष 2024 में वह पेरिस पैरालंपिक के लिए न्यूनतम क्वालीफाइंग मानक हासिल करने वाले भारत के पहले पूर्ण दृष्टिबाधित तैराक बने। पैरा तैराकी में एस11 वर्ग उन खिलाड़ियों के लिए है जिन्हें गंभीर दृष्टिबाधिता होती है। इसमें बेहद कम दृष्टि वाले या प्रकाश का बिल्कुल भी आभास नहीं कर पाने वाले खिलाड़ी शामिल हैं। पुरूषों के 100 मीटर ब्रीस्टस्ट्रोक एसबी4 वर्ग में रोहित ने एक मिनट 57 . 25 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक हासिल किया। मलेशिया के मुहम्मद जुल्काफली बिन ने स्वर्ण और कजाखस्तान के अली तुरगानबेकोव ने रजत पदक जीता। एसबी4 श्रेणी उन ब्रीस्टस्ट्रोक तैराकों के लिए है जिन्हें शारीरिक अक्षमताएं हैं। इसमें कम कद के साथ अन्य अक्षमताओं का होना, या पूरे शरीर में समन्वय संबंधी दिक्कतें शामिल है।
Asian Para Games 2026: भारतीय पैरा एथलीट प्रीति पाल ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में महिलाओं की 100 मीटर टी35 स्पर्धा में रजत पदक जीता, यह उनका प्रतियोगिता में दूसरा रजत है। उन्होंने 13.98 सेकंड का समय निकालकर अपनी पिछली उपलब्धि में सुधार किया।
Preeti Pal ने Asian Para Games में रचा इतिहास, भारत की झोली में डाला दूसरा Silver
भारतीय पैरालंपिक पदक विजेता प्रीति पाल ने बुधवार को चल रहे एशियाई पैरा खेलों में महिलाओं की 100 मीटर T35 श्रेणी में रजत पदक जीता। ईएसपीएन के अनुसार, प्रीति ने 13.98 सेकंड का समय लिया। वह चीनी स्वर्ण पदक विजेता और विश्व रिकॉर्ड धारक झोउ ज़िया से केवल 0.41 सेकंड पीछे रहीं। झोउ ज़िया ने इस दौरान एशियाई पैरा खेलों का एक नया रिकॉर्ड भी बनाया। इससे पहले, बुधवार को उन्होंने महिलाओं की 200 मीटर T35 फाइनल स्पर्धा में रजत पदक जीता। इसे भी पढ़ें: Noida Sports City में 70 प्रतिशत जमीन पर खेल सुविधाएं, संशोधित मास्टर लेआउट को मंजूरी पैरालंपिक कमिटी ऑफ इंडिया (PCI) के अनुसार, प्रीति ने 29.53 सेकंड का शानदार समय निकाला। वह चीन की स्वर्ण पदक विजेता झोउ एक्स (28.03 सेकंड) के बाद रहीं, जबकि इराक की फा सुवेद 30.82 सेकंड के समय के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। इसके साथ ही, इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता में भारत के पदकों की कुल संख्या 48 हो गई है, जिसमें 12 स्वर्ण, 18 रजत और 18 कांस्य पदक शामिल हैं। कस्तूरी राजामणि ने एशियन पैरा गेम्स में भारत के लिए पदकों की झड़ी जारी रखी। बुधवार को उन्होंने पैरा-पावरलिफ्टिंग के महिलाओं के 67 किलोग्राम तक के इवेंट में सिल्वर मेडल जीता। कस्तूरी ने तीन में से दो लिफ्ट सफलतापूर्वक पूरी कीं: उन्होंने 103 किलोग्राम का वजन सफलतापूर्वक उठाया, फिर 106 किलोग्राम उठाने की कोशिश में असफल रहीं, और उसके बाद 108 किलोग्राम का वजन सफलतापूर्वक उठा लिया। उनकी सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी, दक्षिण कोरिया की किम ह्योंगहुई ने 107 किलोग्राम का वजन सफलतापूर्वक उठाया। ईएसपीएन (ESPN) के अनुसार, उज्बेकिस्तान की रुखशोना उक्तामोवा ने 127 किलोग्राम का सर्वश्रेष्ठ प्रयास करते हुए गोल्ड मेडल जीता। इसे भी पढ़ें: Asian Para Games: भारत ने नागोया में एथलेटिक्स के पहले दिन जीते 6 पदक इसके साथ ही, भारत के पदकों की कुल संख्या 47 हो गई है, जिसमें 12 गोल्ड, 17 सिल्वर और 18 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। इससे पहले, बुधवार को भारतीय पैरा-एथलीट मंजीत ने पुरुषों की F13 जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता। मंजीत ने पुरुषों की F12/13 जैवलिन थ्रो प्रतियोगिता में अपने दूसरे प्रयास में करियर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया और F13 कैटेगरी में पदक हासिल किया।
Asian Para Games में भारत का जलवा, Ayush, Praveen और Sachin ने जीते Gold
भारतीय एथलीटों ने एशियाई पैरा खेलों की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में तीसरे दिन भी अपना दबदबा बरकरार रखते हुए बुधवार को यहां तीन स्वर्ण पदक सहित 10 पदक जीते। आयुष वर्मा ने पुरुषों के शॉट पुट एफ53 स्पर्धा में भारत को दिन का पहला पैरा-एथलेटिक्स स्वर्ण पदक दिलाया। इसके बाद प्रवीण कुमार (पुरुषों की ऊंची कूद टी44/64) और सचिन खिलारी (पुरुषों के शॉट पुट एफ46) ने स्वर्ण पदक जीते। भारत की तरफ से सुबह के सत्र में बंटी (पुरुषों की ऊंची कूद टी44/64), भाग्यश्री जाधव (महिलाओं के शॉट पुट एफ34), मोहम्मद यासर (पुरुषों के शॉट पुट एफ46) और मनजीत (पुरुषों के भाला फेंक एफ12/13) ने रजत पदक हासिल किए। अनुभव चौधरी (पुरुषों की 100 मीटर टी35), परवीन (पुरुषों का शॉट पुट एफ46) और राकेशभाई भट्ट (पुरुषों की 100 मीटर टी37) ने कांस्य पदक जीते। प्रतियोगिता के दूसरे दिन मंगलवार को भारत ने एथलेटिक्स में पांच स्वर्ण पदक सहित 14 पदक जीते थे। आयुष का मौजूदा खेलों में यह दूसरा पदक है। उन्होंने मंगलवार को पुरुषों की भाला फेंक एफ53/एफ54 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। आयुष ने अपने पांचवें प्रयास में 8.16 मीटर का थ्रो करके पहला स्थान हासिल किया। ईरान के अलीरेज़ा हेमामी 8.09 मीटर के साथ दूसरे, जबकि कंजाकिस्तान के मखाम्बेट सेरिक्कालियेव 6.81 मीटर के साथ तीसरे स्थान पर रहे। एफ53 उन एथलीटों के लिए है जिनकी धड़ और पैरों की गति अत्यधिक जबकि हाथों की पकड़ कम प्रभावित होती है। वे बैठकर प्रतिस्पर्धा करते हैं और अपनी छाती, ऊपरी पीठ और कंधों का उपयोग करके ताकत लगाते हैं। प्रवीण कुमार ने पुरुषों की ऊंची कूद टी44/64 स्पर्धा में खेलों के नए रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि बंटी ने इसी स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया। प्रवीण ने 2.05 मीटर की कूद लगाकर स्वर्ण पदक, जबकि बंटी ने 1.92 मीटर की कूद के साथ रजत पदक हासिल किया। उज्बेकिस्तान के तेमुरबेक गियाज़ोव 1.86 मीटर के साथ तीसरे स्थान पर रहे। प्रवीण ने बाद में कहा, ‘‘दो सप्ताह पहले तक मेरी तबीयत ठीक नहीं थी और मैं सोच रहा था कि मैं अपने स्वर्ण पदक का बचाव कैसे करूंगा। उसके बाद मैं एक हफ्ते तक आराम करता रहा, लेकिन मेरा शरीर मजबूत नहीं था। लेकिन अगर आपको देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है तो फिर बीमारी रोड़ा नहीं बन सकती।’’टी64 और टी44 वर्ग के एथलीट अक्सर संयुक्त स्पर्धा में एक साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं क्योंकि विश्व पैरा एथलेटिक्स पर्याप्त प्रतियोगियों और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए निचले अंगों के वर्गों को एक समूह में रखता है। टी64 उन एथलीटों के लिए है जो कृत्रिम निचले अंगों का उपयोग करते हैं, जबकि टी44 उन एथलीटों के लिए है जो निचले अंगों से दिव्यांग होते हैं लेकिन वह कृत्रिम अंगों का उपयोग नहीं करते हैं। उत्तर प्रदेश के गोविंदगढ़ गांव के रहने वाले प्रवीण ने नयी दिल्ली में 2025 विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी जीता था। जन्म से ही शारीरिक रूप से विकलांग (एक पैर दूसरे से छोटा) होने के बावजूद वह बचपन से ही एथलेटिक्स से जुड़ गए थे। सचिन सरजेराव खिलारी ने पुरुषों के शॉट पुट एफ46 स्पर्धा में खेलों के नए रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि भारतीय खिलाड़ियों ने इस स्पर्धा में क्लीन स्वीप किया। पेरिस पैरालंपिक में रजत पदक जीतने वाले सचिन ने इस तरह से पिछले एशियाई पैरा खेलों में जीते गए अपने स्वर्ण पदक का अच्छी तरह से बचाव किया। उन्होंने अपने छठे और अंतिम थ्रो में 15.87 मीटर फेंककर पहला स्थान हासिल किया और 15.67 मीटर के खेलों के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया। भारत के ही मोहम्मद यासर ने तीसरे प्रयास में 15.06 मीटर का थ्रो करके रजत पदक जीता, जबकि परवीन 14.94 मीटर के साथ तीसरे स्थान पर रहे। खिलारी ने कहा, ‘‘पिछले पैरा एशियाई खेलों, पैरालंपिक और विश्व पैरा चैंपियनशिप में अधिकतर समय मैं पोडियम पर अकेला था। आज दो और भारतीय खिलाड़ी मेरे साथ पोडियम पर खड़े थे। यह अविश्वसनीय है।’’एफ46 श्रेणी उन एथलीटों के लिए है जिनका कोहनी के ऊपर या नीचे एक हाथ कटा होता है, या वे ऊपरी अंग से दिव्यांग होते हैं। वे खड़े होकर प्रतिस्पर्धा करते हैं और अपने कूल्हों और पैरों का उपयोग करके गोला फेंकने के लिए शक्ति लगाते हैं। महाराष्ट्र के सांगली जिले के करागानी गांव में किसान परिवार में जन्मे खिलारी को साइकिल दुर्घटना में बाएं हाथ में गंभीर चोट लगी। ऑपरेशन कराने के बावजूद उनका हाथ पूरी तरह से ठीक नहीं हो सका। उन्होंने कम उम्र में ही अपनी मां को खो दिया था।
Asian Para Games में Praveen Kumar ने जीता Gold Medal, Bunty को मिला Silver
बुधवार को एशियन पैरा गेम्स 2026 में, भारतीय पैरा-एथलीट प्रवीण कुमार और बंटी ने पुरुषों की हाई जंप T64 स्पर्धा में पहला और दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि राकेशभाई भट्ट ने पुरुषों की 100 मीटर T37 फाइनल में कांस्य पदक जीता। दो बार के पैरालंपिक पदक विजेता प्रवीण ने 2.05 मीटर की छलांग लगाकर एशियन पैरा गेम्स का नया रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक जीता। वहीं, बंटी ने 1.92 मीटर की अपनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ छलांग के साथ रजत पदक हासिल किया। इस तरह भारत के लिए यह एक यादगार उपलब्धि रही, जिसमें देश के दो एथलीट पोडियम पर एक साथ नजर आए। इसे भी पढ़ें: Noida Sports City में 70 प्रतिशत जमीन पर खेल सुविधाएं, संशोधित मास्टर लेआउट को मंजूरी प्रवीण ने शुरुआत में 1.95 मीटर की ऊंचाई पार करके स्वर्ण पदक पक्का किया और गेम्स रिकॉर्ड की बराबरी की। इसके बाद, उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में 2.00 मीटर की ऊंचाई पार की, और फिर अपने तीसरे प्रयास में 2.05 मीटर की ऊंचाई पार करके एक नया गेम्स रिकॉर्ड कायम किया। बंटी ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 1.92 मीटर की ऊंचाई पार कर रजत पदक जीता और इस स्पर्धा में भारत का दबदबा सुनिश्चित किया। ट्रैक पर भारत को एक और मेडल मिला। राकेशभाई भट्ट ने पुरुषों की 100 मीटर T37 फाइनल में 11.50 सेकंड का अपना सर्वश्रेष्ठ समय निकालते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। सऊदी अरब के अली अलनाखली ने 11.31 सेकंड में गोल्ड मेडल जीता, जबकि इंडोनेशिया के सैप्टोयोगो पूर्णोमो ने 11.35 सेकंड में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। पैरा-तैराकी में, हिमांशु नंदन ने हीट में 1:21.52 का समय निकालकर पुरुषों की 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक SB11 फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। वह चौथे सबसे तेज़ तैराक के रूप में आगे बढ़े; इससे पहले उन्होंने पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल S11 इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था। पुरुषों की लॉन्ग जंप T13 फाइनल में भारत के सुजीत एमएस 5.74 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ छठे स्थान पर रहे। इसे भी पढ़ें: अहमदाबाद Commonwealth Games 2030 के लिए केंद्र देगा 2000 करोड़ रुपये की मदद पैरा-बैडमिंटन में, नवीन शिवकुमार ने दक्षिण कोरिया के क्युंग ह्वान शिन को 26 मिनट में 21-14, 21-4 से हराकर पुरुषों की सिंगल्स SL4 के सेमीफाइनल में जगह बनाई। उनके आगे बढ़ने से इस इवेंट में भारत का एक और मेडल पक्का हो गया है, क्योंकि पैरालंपिक मेडलिस्ट सुहास यथिराज भी पहले ही सेमीफाइनल में पहुंच चुके हैं। हालांकि, पुरुषों की सिंगल्स SU5 कैटेगरी में रुथिक रघुपति का सफर क्वार्टर फाइनल में खत्म हो गया, जहां वे चीन के मिंगपान ली से 37 मिनट में 19-21, 14-21 से हार गए।
Asian Para Games में Ayush Verma ने Shot Put में जीता Gold, भारत के कुल 38 पदक हुए
भारतीय पैरा-एथलीट आयुष वर्मा ने 21 अक्टूबर को एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुषों के शॉट पुट F53 इवेंट में स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या 10 और कुल पदकों की संख्या 38 हो गई है। वर्मा ने 'सीटेड थ्रोइंग' इवेंट में अपने पांचवें प्रयास में 8.16 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करके पहला स्थान हासिल किया। इससे पहले, 20 अक्टूबर को उन्होंने पुरुषों के जैवलिन (भाला फेंक) F53/54 इवेंट में कांस्य पदक जीता था। इसे भी पढ़ें: Noida Sports City में 70 प्रतिशत जमीन पर खेल सुविधाएं, संशोधित मास्टर लेआउट को मंजूरी जापान के नागोया में आयोजित महाद्वीपीय पैरा-स्पोर्ट इवेंट में, वर्मा के स्वर्ण पदक के साथ भारत पदक तालिका में छठे स्थान पर बना हुआ है। पैरा-बैडमिंटन में, पैरालंपिक पदक विजेता सुहास यथिराज ने दक्षिण कोरिया के एन. चो को सीधे गेमों में 21-12, 21-16 से हराकर पुरुष एकल SL4 के सेमीफाइनल में प्रवेश किया और कम से कम एक कांस्य पदक पक्का कर लिया। वहीं, सुकांत कदम को इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान के खिलाफ कड़े मुकाबले में 17-21, 21-18, 15-21 से हार का सामना करना पड़ा और वे क्वार्टर फाइनल से बाहर हो गए। पुरुष एकल WH1 क्वार्टर फाइनल में प्रेम कुमार आले भी बाहर हो गए; उन्हें दक्षिण कोरिया के हेसोंग पार्क ने 13-21, 12-21 से हराया। इसे भी पढ़ें: अहमदाबाद Commonwealth Games 2030 के लिए केंद्र देगा 2000 करोड़ रुपये की मदद महिला एकल WH1 इवेंट में, पल्लवी कलुवेहल्ली का सफर लगातार तीसरी हार के साथ ग्रुप स्टेज में ही समाप्त हो गया। उन्हें जापान की सेना टोमोयोसे ने 4-21, 4-21 से हराया, जिसके बाद वे आगे नहीं बढ़ सकीं। पैरा-आर्चरी में भारत पदक जीतने से मामूली अंतर से चूक गया, क्योंकि पुरुष कंपाउंड डबल्स इवेंट में टोमन कुमार और श्याम सुंदर स्वामी चौथे स्थान पर रहे। इस जोड़ी को कांस्य पदक के मुकाबले में चीन के हाथों 153-154 से हार मिली। कुमार के आखिरी शॉट में 8 अंक मिले, जबकि शूट-ऑफ के लिए 9 अंकों की और जीत के लिए 10 अंकों की जरूरत थी। नागोया में वर्मा के स्वर्ण पदक ने भारत के अभियान को मजबूती दी, जबकि सुहास के सेमीफाइनल में पहुंचने से एक और पैरा-बैडमिंटन पदक जीतने की उम्मीदें बनी रहीं।
मेरठ के आयुष वर्मा ने पैरा एशियन गेम्स में जीता शॉटपुट गोल्ड, अनुभव चौधरी को 100 मीटर में कांस्य
Asian Para Games 2026 Day 3: भारत का शानदार प्रदर्शन, एक इवेंट में गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज जीतने का दावा
मेरठ के अनुभव चौधरी ने एशियन पैरा गेम्स की पुरुषों की 100 मीटर टी-35 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता, 12.72 सेकंड में दौड़ पूरी कर तीसरा स्थान हासिल किया। कंकरखेड़ा निवासी अनुभव ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद यह उपलब्धि हासिल की, अपनी मां को खोने के बाद नाना ने उनका पालन-पोषण किया।
सचिन खिलारी ने एशियाई पैरा गेम्स 2026 की पुरुषों की एफ46 शॉटपुट स्पर्धा में आखिरी प्रयास में 15.87 मीटर का थ्रो करके गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता।
एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को सम्मानित करेगी हिमाचल सरकार, 7 खिलाड़ियों को मिलेंगे 9 करोड़ रुपये
हिमाचल प्रदेश सरकार 30 अक्टूबर को शिमला में एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को सम्मानित करेगी।
आयुष वर्मा ने एशियाई पैरा गेम्स 2026 में पुरुषों की एफ53 शॉटपुट स्पर्धा में 8.16 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने ईरान के अलीरेजा हेमामी को सात सेंटीमीटर से पछाड़ा।
Asian Para Games: प्रवीण कुमार ने हाई जंप में रिकॉर्ड के साथ जीता गोल्ड
भारत के प्रवीण कुमार ने बुधवार को यहां एशियाई पैरा खेलों की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में पुरुषों की ऊंची कूद टी44/64 स्पर्धा में खेलों के नए रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि बंटी ने इसी स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया। प्रवीण ने 2.05 मीटर की कूद लगाकर स्वर्ण पदक, जबकि बंटी ने 1.92 मीटर की कूद के साथ रजत पदक हासिल किया। उज्बेकिस्तान के तेमुरबेक गियाज़ोव 1.86 मीटर के साथ तीसरे स्थान पर रहे। टी64 और टी44 वर्ग के एथलीट अक्सर संयुक्त स्पर्धा में एक साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं क्योंकि विश्व पैरा एथलेटिक्स पर्याप्त प्रतियोगियों और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए निचले अंगों के वर्गों को एक समूह में रखता है। टी64 उन एथलीटों के लिए है जो कृत्रिम निचले अंगों का उपयोग करते हैं, जबकि टी44 उन एथलीटों के लिए है जो निचले अंगों से दिव्यांग होते हैं लेकिन वह कृत्रिम अंगों का उपयोग नहीं करते हैं।
Asian Para Games: शीतल देवी और पायल नाग ने जीता कंपाउंड तीरंदाजी में रजत पदक
शीतल देवी और पायल नाग की भारतीय महिला युगल जोड़ी ने बुधवार को यहां एशियाई पैरा खेलों में फाइनल में हारने के कारण रजत पदक हासिल किया। जन्म से ही बिना हाथों वाली शीतल तथा हाथ और पांव से दिव्यांग पायल स्वर्ण पदक के मुकाबले में चीन की जू ज़ुएक़िंग और झाओ जिंग से 141-150 से हार गईं। भारतीय खिलाड़ी शुरू से ही चीन की खिलाड़ियों के सामने संघर्ष करती हुई दिखी। शीतल ने बेहतर खेल दिखाया और उन्होंने चार 10 अंक हासिल किए लेकिन पायल उनकी तरह प्रदर्शन नहीं कर पाई। उन्होंने अपने अंतिम तीर पर सात अंक बनाए। इससे पहले वह केवल नौ और आठ अंक ही हासिल कर पाईं थी। शीतल ने इस स्पर्धा में लगातार दूसरा रजत पदक जीता है। पिछले एशियाई पैरा खेलों में उन्होंने सरिता देवी के साथ जोड़ी बनाकर दूसरा स्थान हासिल किया था। व्यक्तिगत स्पर्धा में भी वह स्वर्ण पदक की दावेदार हैं। जम्मू और कश्मीर के किश्तवार जिले में बसे लॉइधर गांव की रहने वाली शीतल फोकोमेलिया नामक एक दुर्लभ जन्मजात स्थिति के कारण भुजाहीन पैदा हुई थी। आठ साल की उम्र में पायल 11,000 वोल्ट की हाई-टेंशन बिजली की लाइन के संपर्क में आ गई जिससे उनके हाथ और पांवों को काटना पड़ा था। इस बीच तोमन कुमार और श्याम सुंदर स्वामी की पुरुष युगल जोड़ी कांस्य पदक से चूक गई। उन्हें चीन के ऐ शिनलियांग और झांग यिचेंग से 153-154 से हार का सामना करना पड़ा।
Asian Para Games: Discus Throw में Devendra Kumar ने पक्का किया Gold Medal
जापान के नागोया में चल रहे एशियाई पैरा खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। पुरुषों की चक्का फेंक स्पर्धा में देवेंद्र कुमार, राकेश और प्रदीप कुमार ने क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर भारत को तीनों पदक दिलाए हैं। इस प्रदर्शन के साथ भारतीय खिलाड़ियों ने पैरा एथलेटिक्स में अपनी ताकत दिखाई और देश के पदक खाते में अहम योगदान दिया है। नागोया सिटी मिजुहो पार्क एथलेटिक्स स्टेडियम में आयोजित पुरुषों की चक्का फेंक स्पर्धा में अलग-अलग दिव्यांगता वर्गों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। देवेंद्र कुमार ने एफ44 वर्ग में 49.71 मीटर की दूरी तक चक्का फेंककर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्हें इसके लिए 781 रजा अंक मिले। इसी वर्ग में मुकाबला कर रहे राकेश ने 49.45 मीटर का प्रदर्शन किया और 771 रजा अंकों के साथ रजत पदक जीता। वहीं, प्रदीप कुमार ने एफ64 वर्ग में 51.15 मीटर की दूरी दर्ज की। उन्हें 669 रजा अंक मिले और उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया। बता दें कि पैरा खेलों में खिलाड़ियों की अलग-अलग शारीरिक स्थितियों और दिव्यांगता के आधार पर वर्ग तय किए जाते हैं। ऐसे में प्रदर्शन का आकलन केवल फेंक की दूरी से नहीं, बल्कि संबंधित वर्ग और निर्धारित अंक प्रणाली के आधार पर भी किया जाता है। भारतीय खिलाड़ियों का तीनों पदक जीतना इस स्पर्धा में देश के मजबूत प्रदर्शन को दिखाता है। भारतीय दल ने अन्य खेलों में भी कई पदक जीते हैं। पैरा एथलेटिक्स में दीप्ति जीवनजी ने महिलाओं की 400 मीटर टी20 दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया। पुरुषों की चक्का फेंक एफ51, एफ52 और एफ53 स्पर्धा में प्रणव सूरमा ने स्वर्ण, जबकि राम रतन सिंह ने रजत पदक जीता। सिमरन ने महिलाओं की 200 मीटर टी12 दौड़ में स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि तेजलबेन डामोर को कांस्य मिला। प्रीति पाल ने महिलाओं की 200 मीटर टी35 दौड़ में रजत पदक जीता। भाला फेंक में प्रदीप कुमार ने रजत और आयुष वर्मा ने कांस्य पदक हासिल किया। वहीं, पुरुषों की गोला फेंक एफ11 स्पर्धा में प्रवीण शर्मा ने कांस्य पदक जीता। पैरा पावरलिफ्टिंग में अशोक ने 65 किलोग्राम तक के भार वर्ग में रजत पदक हासिल किया। निशानेबाजी में मनीष नरवाल ने पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा में रजत और सृष्टि अरोड़ा ने महिलाओं की इसी स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। पैरा टेबल टेनिस में सोनलबेन पटेल, भाविना पटेल, प्राची पांडे, सहाना रवि और जेहान मदान ने कांस्य पदक हासिल किए। तैराकी में हिमांशु नंदल ने पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में और निरंजन मुकुंदन ने 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले एसएम7 स्पर्धा में कांस्य पदक जीते। इसके अलावा, पैरा बैडमिंटन में नितेश कुमार, प्रमोद भगत और संजना कुमारी ने अपने-अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले जीतकर आगे का रास्ता तय किया। तीरंदाजी में शीतल देवी ने महिलाओं की व्यक्तिगत कंपाउंड स्पर्धा के फाइनल में जगह बनाई। भारतीय खिलाड़ी कई अन्य मुकाबलों में भी अंतिम चरण तक पहुंचे हैं। गौरतलब है कि इन उपलब्धियों से एशियाई स्तर पर भारतीय पैरा खिलाड़ियों का प्रदर्शन मजबूत हुआ है और वे अलग-अलग खेलों में देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
FIFA चुनाव से पहले एशियाई देशों का समर्थन जुटाने Japan दौरे पर जाएंगे Gianni Infantino
फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो एक बार फिर अपने पद पर बने रहने की तैयारी में जुटे हैं। इसी सिलसिले में उनका चुनावी अभियान इस सप्ताह जापान पहुंचेगा, जहां बुधवार को टोक्यो में एशियाई फुटबॉल परिसंघ के अधिकारियों के साथ उनकी बैठक होनी है। मार्च में होने वाले अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले एशियाई देशों का समर्थन उनके लिए काफी अहम माना जा रहा है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था फीफा में इन्फेंटिनो के फैसलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पिछले सप्ताह स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में उन्होंने फीफा की 37 सदस्यीय परिषद के सामने अपनी गलतियों के लिए माफी मांगी थी। यह विवाद विश्व कप से जुड़े 4.2 अरब डॉलर के एक प्रस्ताव को लेकर था, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया। इस योजना के तहत विश्व कप से जुड़े कारोबार को बेचने और उसके संचालन के लिए अलग कंपनी बनाने की तैयारी थी। फीफा परिषद संस्था का प्रमुख फैसला लेने वाला निकाय है, जिसमें दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों के फुटबॉल अधिकारी शामिल हैं। जापान में होने वाली बैठक टोक्यो के एक पांच सितारा होटल में रखी गई है। इसमें मीडिया की पहुंच काफी सीमित रहने की संभावना है। बताया जा रहा है कि एशियाई फुटबॉल परिसंघ के अध्यक्ष शेख सलमान बिन इब्राहिम अल खलीफा ने शुरुआत में इन्फेंटिनो की योजना का विरोध किया था। हालांकि, द एथलेटिक की रिपोर्ट के अनुसार, अब उनके और इन्फेंटिनो के बीच दूरी कुछ कम हो सकती है। विवाद के बाद इन्फेंटिनो ने फीफा के फैसले लेने की प्रक्रिया की खुली और समीक्षा कराने की पेशकश भी की है। लेकिन इस प्रस्ताव से आलोचकों की चिंताएं कितनी दूर होंगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। एसोसिएटेड प्रेस की ओर से जुटाए गए समर्थन के आंकड़ों के मुताबिक, इन्फेंटिनो मार्च में होने वाले चुनाव में जीत के लिए जरूरी समर्थन के करीब पहुंच चुके हैं। फीफा के कुल 211 सदस्य देशों में से 87 ने सार्वजनिक बयानों या अपने क्षेत्रीय फुटबॉल संगठनों के समर्थन के जरिए उनके पक्ष में संकेत दिए हैं। हालांकि, उन्हें जीत के लिए साधारण बहुमत हासिल करना होगा। एशिया के कुछ देशों के वोट इस मुकाबले में निर्णायक हो सकते हैं। एशियाई फुटबॉल परिसंघ ने विश्व कप से जुड़े प्रस्ताव पर पहले आलोचना जताई थी, लेकिन उसके सदस्य देशों की राय एक जैसी नहीं है। 2022 विश्व कप की मेजबानी करने वाले कतर ने इन्फेंटिनो का समर्थन किया है, जबकि जॉर्डन ने उनके विरोध का रुख अपनाया है। फीफा परिषद की अगली बैठक 16 दिसंबर को कतर की राजधानी दोहा में होनी है। गौरतलब है कि 1974 के बाद से फीफा का कोई भी मौजूदा अध्यक्ष चुनाव हारकर पद से नहीं हटा है। इन्फेंटिनो के खिलाफ चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों को 18 नवंबर तक अपना नाम देना होगा। नियमों के मुताबिक, उम्मीदवार को पिछले 5 वर्षों में कम से कम 2 वर्ष फुटबॉल से सक्रिय रूप से जुड़ा होना चाहिए और कम से कम 5 सदस्य देशों का समर्थन भी हासिल करना होगा। पैसिफिक यूनिवर्सिटी के राजनीतिक विशेषज्ञ और पूर्व पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ी जूल्स बॉयकॉफ ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा कि फीफा दुनिया भर के फुटबॉल संगठनों को बड़ी रकम बांटता है, जिससे उसके नेतृत्व को समर्थन मिल सकता है। उनके मुताबिक, इन पैसों का मकसद फुटबॉल का विकास होना चाहिए, लेकिन खर्च की निगरानी सीमित है। ऐसे में फीफा के कामकाज में बड़े बदलाव की जरूरत है और अध्यक्ष चुनाव के साथ संस्था की पारदर्शिता का सवाल भी अहम बना हुआ है।
Asian Para Games में भारत का दबदबा, Nishad Kumar ने रिकॉर्ड के साथ जीता दूसरा गोल्ड
भारतीय पैरा ट्रैक एंड फील्ड एथलीटों ने मंगलवार को यहां एशियाई पैरा खेलों में पांच स्वर्ण सहित 14 पदक अपने नाम किए, जिसमें निषाद कुमार एक ही संस्करण में दो स्वर्ण पदक जीतने वाले देश के तीसरे खिलाड़ी बन गए। मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारत ने पांच स्वर्ण, चार रजत और पांच कांस्य पदक अपने नाम किए, जिससे पैरा एथलेटिक्स में उसके पदकों की संख्या 20 हो गई। वह चीन के 23 पदक (13 स्वर्ण, पांच रजत, पांच कांस्य) के बाद दूसरे स्थान पर है। निषाद ने सोमवार को लंबी कूद टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने ऊंची कूद में 2.04 मीटर से अधिक की दूरी तय करके खेलों का नया रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण पदक जीता। अंकुर धामा (पुरुषों की 5000 मीटर टी11 और 1500 मीटर टी11) और भुजाहीन तीरंदाज शीतल देवी (महिलाओं की व्यक्तिगत कंपाउंड ओपन और मिश्रित टीम कंपाउंड ओपन) ने चीन के हांगझोउ में पिछले एशियाई पैरा खेलो में दो-दो स्वर्ण पदक जीते थे। टी47 श्रेणी ऊपरी अंगों की अक्षमता वाले एथलीटों के लिए है। निषाद का दाहिना हाथ उस समय कट गया था जब वह महज छह साल के थे। दीप्ति जीवनजी ने एशियाई पैरा खेलों के रिकॉर्ड के साथ महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में 56 . 36 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता। तेलंगाना की 23 वर्ष की दीप्ति दो बार पैरा विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीत चुकी है और 2024 में स्वर्ण जीता था। उन्होंने पैरालम्पिक में भी इसी स्पर्धा में कांस्य पदक जीता है। जापान की नीना कान्नो ने 58 . 92 सेकंड का समय निकालकर रजत और अकाने कातो ने एक मिनट 00.26 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक जीता। टी20 श्रेणी में बौद्धिक अक्षमता वाले खिलाड़ी भाग लेते हैं जिन्हें सूचना समझने, एकाग्रता बनाने और तकनीकी रणनीति पर अमल करने में दिक्कत होती है। भारतीय खिलाड़ियों ने पुरुषों की चक्का फेंक एफ44/64 स्पर्धा में तीनों पदक अपने नाम किए, जिसमें देवेंद्र कुमार ने स्वर्ण पदक जीता। इस स्पर्धा में केवल चार खिलाड़ियों ने भाग लिया था। देवेंद्र ने 49.71 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि राकेश और प्रदीप कुमार ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक हासिल किए। एफ44 और एफ64 में वह खिलाड़ी आते हैं जिनके निचले हिस्से के अंगों में विकार हो। अनुभवी फर्राटा धाविका सिमरन ने नये रिकॉर्ड के साथ महिलाओं की 200 मीटर टी12 स्पर्धा में पहला स्वर्ण पदक जीता जबकि हमवतन तेजलबेन दामोर ने कांस्य पदक हासिल किया। सिमरन ने 24 . 80 सेकंड का समय निकाला और ईरान की हजर सफरजादेह को पछाड़ा जिन्होंने 25 . 02 सेकंड का समय लिया। पहली बार इन खेलों में उतरी तेजलबेन ने 25 . 23 सेकंड का समय निकालकर तीसरा स्थान हासिल किया। सिमरन ने स्वर्ण जीतने के बाद कहा ,‘‘ एशियाई रिकॉर्ड (24.46 सेकंड) भी मेरे नाम है और मेरा लक्ष्य वहां तक पहुंचना था लेकिन शरीर ने साथ नहीं दिया। मुझे जकड़न लग रही थी क्योंकि रिकवरी अच्छी नहीं थी। अपनी हीट रेस के बाद मैं काफी थक गई थी।’’अब वह 100 मीटर में उतरेंगी जिसमें पिछले खेलों में रजत पदक जीता था। तेजलबेन 400 मीटर में भाग लेंगी। प्रणव सूरमा ने एशियाई पैरा रिकॉर्ड के साथ पुरूषों की चक्का फेंक एफ51/52/53 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता जबकि राम रतन सिंह को रजत पदक मिला। 32 वर्ष के सूरमा ने चीन में पिछले एशियाई पैरा खेलों में क्लब थ्रो एफ51 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने चौथे प्रयास में 11 . 66 मीटर थ्रो फेंककर नये एशियाई रिकॉर्ड के साथ पहला स्थान हासिल किया। 31 वर्ष के सिंह ने दूसरे प्रयास में 10 . 35 मीटर का थ्रो फेंककर रजत पदक जीता। ईरान के अलीरजा हेमामी को कांस्य पदक मिला। प्रदीप कुमार ने पुरूषों की भालाफेंक स्पर्धा में एफ53/54 श्रेणी में लगातार दूसरा रजत पदक जीता जबकि आयुष वर्मा ने कांस्य पदक हासिल किया। प्रदीप ने एफ54 में 27 . 45 मीटर का सर्वश्रेष्ठ निजी प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। आयुष ने एफ53 वर्ग में कांस्य पदक जीता। वह थाईलैंड के सहर दाम याएना से आगे रहे जिन्होंने एफ54 वर्ग में 23 . 13 मीटर का थ्रो फेंका लेकिन शारीरिक अक्षमता का स्तर अधिक होने से आयुष को अधिक रजा अंक मिले। रजा अंक एक ऐसी पद्धति है जिसके जरिये जब किसी प्रतियोगिता में अलग-अलग वर्गीकरणों को एक ही स्पर्धा में शामिल किया जाता है तो विकलांगता के स्तर को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शन को अंकों में बदला जाता है। ईरान के इरफान बंदोरी को 30 . 24 मीटर के रिकॉर्ड के साथ फिर स्वर्ण पदक मिला। प्रवीण कुमार ने पुरूषों के शॉटपुट एफ11 वर्ग में सर्वश्रेष्ठ निजी प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक जीता। 19 वर्ष के प्रवीण ने 13 . 86 मीटर का थ्रो फेंककर छह खिलाड़ियों में दूसरा स्थान हासिल किया। ईरान के आमिर हुसैन अलीपोर ने एशियाई रिकॉर्ड के साथ 14 . 99 मीटर का थ्रो फेंककर स्वर्ण पदक जीता जबकि उनके हमवतन माहदी ओलाद को रजत पदक मिला। एफ11 वर्ग में लगभग पूर्ण दृष्टिबाधित खिलाड़ी भाग लेते हैं।
Asian Para Games में भारत की शानदार बढ़त, Nishad Kumar और दीप्ति के दम पर जीते 35 पदक
निषाद कुमार और दीप्ति जीवनजी जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की अगुवाई में भारत ने एशियाई पैरा खेलों की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में मंगलवार को यहां पांच स्वर्ण पदक जीते जिससे देश के कुल पदकों की संख्या 35 पर पहुंच गई। भारत ने दिन के पांचों स्वर्ण पदक एथलेटिक्स में जीते जिसमें निषाद कुमार का मौजूदा खेलों में दूसरा स्वर्ण पदक भी शामिल है। निषाद ने सोमवार को लंबी कूद टी47 में स्वर्ण पदक जीतने के बाद मंगलवार को ऊंची कूद में भी शीर्ष स्थान हासिल किया। इस तरह से वह एक ही पैरा एशियाई खेलों की दो स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतने वाले केवल तीसरे भारतीय बन गए। उन्होंने 2.04 मीटर की छलांग लगाकर खेलों का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। दूसरे दिन के अंत में भारत 35 पदकों के साथ तालिका में छठे स्थान पर था, जिनमें नौ स्वर्ण, 11 रजत और 15 कांस्य पदक शामिल थे। इस कुल पदकों में एथलेटिक्स का योगदान फिलहाल 20 है। दीप्ति ने 56.36 सेकंड के खेलों के नए रिकॉर्ड के साथ महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में लगातार दूसरा स्वर्ण पदक जीतकर महाद्वीपीय स्तर पर अपनी श्रेष्ठता फिर से साबित की। तेलंगाना की 23 वर्षीय यह खिलाड़ी पूर्व विश्व चैंपियन हैं और उन्होंने 2024 पैरालंपिक खेलों में कांस्य पदक जीता था। दृष्टिबाधित सिमरन (महिलाओं की 200 मीटर टी12), व्हीलचेयर पर निर्भर प्रणव सूरमा (एफ51/52/53 चक्का फेंक) और देवेंद्र कुमार (एफ44/64 चक्का फेंक) ने भी स्वर्ण पदक जीते। पैरालिंपिक कांस्य पदक विजेता सिमरन ने 24.80 सेकंड के समय के साथ खेलों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। खेलों में पहली बार भाग ले रही तेजलबेन दामोर ने मध्यम दृष्टिबाधित एथलीटों की इस स्पर्धा में 25.23 सेकंड के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय के साथ कांस्य पदक जीता। भारत ने इसके अलावा निशानेबाजी, टेबल टेनिस, तैराकी और पावरलिफ्टिंग में भी पदक जीते। मनीष नरवाल ने रजत पदक जीतकर भारत के लिए 2028 लॉस एंजिलिस पैरालंपिक का कोटा सुरक्षित किया, जबकि सृष्टि अरोड़ा ने कांस्य पदक जीता। इस तरह से भारतीय निशानेबाजों ने पुरुषों और महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धाओं में दो पदक हासिल किए। पावरलिफ्टिंग में अशोक कुमार मलिक ने पुरुषों के 65 किलोग्राम वर्ग की प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। सोनीपत जिले के गोहाना के रहने वाले 37 वर्षीय मलिक ने 192 किलोग्राम का सर्वश्रेष्ठ भार उठाया। भारतीय तैराक हिमांशु नंदाल और निरंजन मुकुंदन ने देश के खाते में दो कांस्य पदक जोड़े। ऑप्टिक नर्व की खराबी के कारण जन्म से ही दृष्टिहीन 22 वर्षीय हिमांशु ने पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में चार तैराकों के बीच 5:10.91 का समय निकालकर तीसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद निरंजन ने पुरुषों की 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले एसएम7 स्पर्धा को 2:57.01 के समय में पूरा करके कांस्य पदक हासिल किया। टेबल टेनिस में रवि बेबी सहाना और प्राची पांडे ने स्टैंडिंग कैटेगरी में पोडियम पर पहुंचने वाले भारत के पहले खिलाड़ी बनकर इतिहास रच दिया। भारत ने इस प्रतियोगिता में चार कांस्य पदक हासिल किए। पैरालिंपिक पदक विजेता भाविना पटेल, सोनलबेन पटेल, प्राची और सहाना सभी अपने-अपने महिला एकल सेमीफाइनल में से हार गईं। तीरंदाजी में मौजूदा चैंपियन शीतल देवी और खेलों में पहली बार भाग ले रही स्वाति चौधरी ने अपनी व्यक्तिगत स्पर्धाओं के फाइनल में जगह बनाई। इस तरह से भारत के पैरा तीरंदाजों ने पांच पदक पक्के कर लिए। भारत की रिकर्व और कंपाउंड महिला युगल जोड़ियों ने भी सेमीफाइनल में जीत हासिल करके अपने-अपने स्वर्ण पदक मुकाबले में जगह बना ली है। भारत की रिकर्व और कंपाउंड मिश्रित टीम ने क्रमशः थाईलैंड और जापान पर जीत हासिल करके सेमीफाइनल में जगह बनाई। बैडमिंटन में विश्व चैंपियन प्रमोद भगत और पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता कुमार नितेश ने पुरुष एकल एसएल3 सेमीफाइनल में पहुंचकर पदक पक्के किए।
एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय पैरा एथलीट प्रीति पाल ने महिलाओं की 200 मीटर टी-35 स्पर्धा में रजत पदक जीता। उन्होंने पिछले प्रदर्शन में 2.66 सेकंड का सुधार कर यह उपलब्धि हासिल की।
Asian Para Games में Himanshu Nandal और निरंजन मुकुंदन ने जीते कांस्य पदक
भारतीय तैराक हिमांशु नंदल और निरंजन मुकुंदन ने एशियाई पैरा खेलों में अपने अपने वर्ग में मंगलवार को कांस्य पदक जीते। रोहतक के 22 वर्ष के नंदल ने पांच मिनट 10 . 91 सेकंड का समय निकालकर पुरूषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में तीसरा स्थान हासिल किया। निरंजन ने पुरूषों की 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले एसएम7 स्पर्धा में दो मिनट 57 . 01 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक जीता। इस बीच चैतन्य कुलकर्णी ने पुरुषों की 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस6 फाइनल में 1:12.35 के समय के साथ पांचवां स्थान हासिल किया। पैरा-तैराकी में एस6 श्रेणी में वह खिलाड़ी शामिल होते हैं जिन्हें मध्यम शारीरिक अक्षमता, कम कद, अंग विच्छेदन या समन्वय संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। एसएम7 मेडली उन तैराकों के लिए है जिनकी बांहों, धड़ और पैरों की मूवमेंट कम से मध्यम स्तर तक प्रभावित होती है या शरीर के एक तरफ मध्यम स्तर की दिक्कत होती है। इसमें कम कद वाले लोग या ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनके अंग नहीं हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज से स्नातक हिमांशु ने जूडो में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद 2021 में तैराकी शुरू की। वह 2024 में पेरिस पैरालम्पिक में न्यूनतम क्वालीफिकेशन स्तर हासिल करने वाले भारत के पहले नेत्रहीन तैराक बने थे। वह पुरूषों के 100 मीटर बैकस्ट्रोक एस11 वर्ग में चौथे स्थान पर रहे थे। एस11 श्रेणी लगभग पूरी तरह से दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिये है। रवि कार्तिक बुदिगिना पुरूषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस13 स्पर्धा में पांचवें स्थान पर रहे। जहांगीर मिला आठवें और आखिरी स्थान पर रहे। एस 13 श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए है जिन्हें दृष्टि संबंधी दोष है, लेकिन पैरालंपिक खेलों में शामिल होने के योग्य एथलीटों में से इनकी दृष्टि हानि सबसे कम होती है। अब्दुल कादिर इंदौरी पुरूषों की 50 मीटर बटरफ्लाइ एस5 स्पर्ध में सातवें स्थान पर रहे।
Asian Para Games: Pramod Bhagat और नितेश कुमार पुरुष एकल सेमीफाइनल में पहुंचे
भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा तथा विश्व चैंपियन प्रमोद भगत और पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता कुमार नितेश ने मंगलवार को एशियाई पैरा खेलों में पुरुष एकल एसएल3 सेमीफाइनल में पहुंचकर पदक पक्के कर दिए। भगत ने क्वार्टरफाइनल में जापान के डाइसुके फुजिहारा को 21-12 21-10 से हराया। सेमीफाइनल में उनका मुकाबला बृहस्पतिवार को कोरिया के ली सेउंघू से होगा। नितेश ने अपने हमवतन विक्रम कुमार को 21-8 21-8 से हराकर अंतिम चार में जगह बनाई, जहां उनका मुकाबला इंडोनेशिया के अल मुह इमरान से होगा। अगर यह दोनों खिलाड़ी सेमीफाइनल में जीत हासिल करते हैं तो फिर फाइनल में आमने-सामने होंगे। इससे पहले प्रमोद भगत और मनीषा रामदास तथा कृष्णा नागर और नित्याश्री सुमति सिवन की मिश्रित युगल टीमों ने सेमीफाइनल में पहुंचकर पदक पक्के कर लिये। नागर और नित्या ने चीनी ताइपै के वू यू येन और जिन जिया सियांग को 21 . 15, 21 . 10 से हराकर ग्रुप ए में दूसरा स्थान हासिल किया और एसएच6 श्रेणी के सेमीफाइनल में जगह बनाई। यह श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए है जिनका कद कम है, और ऐसा ‘एकोंड्रोप्लेसिया’ या अन्य आनुवंशिक बदलावों जैसी स्थितियों के कारण होता है। भगत और रामदास ने थाईलैंड के सिरिपोंग टीमारोम और चानिदा श्रीनावाकुल को 21 . 15, 21 . 14 से हराकर एसएल3 . एसयू5 वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बनाई। पैरा बैडमिंटन में एसएल3 उन खिलाड़ियों के लिये हैं जिनके शरीर के निचले अंगों में विकार है और जो आधे कोर्ट पर ही खेलते हैं जबकि एसयू5 ऊपर के अंगों में अक्षमता वाले खिलाड़ियों के लिये है। मिश्रित युगल में दोनों श्रेणी के खिलाड़ियों की जोड़ी होती है। इस बीच महिला एकल एसएल3 में संजना कुमारी ने चीन की लियू युमेई को 21-19 21-12 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। पुरुष एकल में थाईलैंड के मीचाई नत्थापोंग ने पूर्व पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता नागर को 21-15, 19-21, 21-17 से हराया। पुरुष एकल एसएल4 में अभिजीत सखूजा ने चीन के चेन पेंगफेई को 21-8 21-12 से हराकर क्वार्टरफाइनल में प्रवेश किया। सखूजा का मुकाबला अब हमवतन सूर्यकांत यादव से होगा, जिन्हें पहले दौर में बाई मिली थी। मौजूदा चैंपियन सुहास एलवाई ने थाईलैंड के टीमारोम सिरिपोंग को 21-5 21-7 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। दो बार के पैरालंपिक रजत पदक विजेता भारतीय खिलाड़ी का सामना अब कोरिया की चो नादान से होगा। हार्दिक मक्कड़ ने पुरुष एकल एसयू5 के राउंड ऑफ 16 में इंडोनेशिया के नुग्रोहो सूर्यो को 21-18, 21-12 से हराया।
Asian Para Games में Simran ने 200m T12 में जीता Gold, Tejalben को Bronze
अनुभवी फर्राटा धाविका सिमरन ने एशियाई पैरा खेलों में नये रिकॉर्ड के साथ महिलाओं की 200 मीटर टी12 स्पर्धा में पहला स्वर्ण पदक जीता जबकि हमवतन तेजलबेन दामोर ने कांस्य पदक हासिल किया। सिमरन ने 24 . 80 सेकंड का समय निकाला और ईरान की हजर सफरजादेह को पछाड़ा जिन्होंने 25 . 02 सेकंड का समय लिया। पहली बार इन खेलों में उतरी तेजलबेन ने 25 . 23 सेकंड का समय निकालकर तीसरा स्थान हासिल किया। टी12 श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिये हैं जो काफी हद तक दृष्टिबाधित होते हैं। पेरिस पैरालम्पिक 2024 में कांस्य जीतने वाली सिमरन ने नये गाइड शिवम के साथ खेला है क्योंकि डोपिंग उल्लंघन के आरोप में उनके पूर्व गाइड उमर सैफी प्रतिबंधित हैं। सिमरन ने हांगझोउ पैरा एशियाई खेल 2023 में रजत पदक जीता था। उन्होंने स्वर्ण जीतने के बाद कहा ,‘‘ एशियाई रिकॉर्ड (24.46 सेकंड) भी मेरे नाम है और मेरा लक्ष्य वहां तक पहुंचना था लेकिन शरीर ने साथ नहीं दिया। मुझे जकड़न लग रही थी क्योंकि रिकवरी अच्छी नहीं थी। अपनी हीट रेस के बाद मैं काफी थक गई थी।’’उन्होंने कहा ,‘‘ दिक्कत यह है कि मैं शाकाहारी हूं और यहां ज्यादातर समुद्री भोजन मिल रहा है। शाकाहारी खाने के नाम पर सिर्फ दाल चावल मिलते हैं। यह दिक्कत है जिससे पार पाने की कोशिश कर रही हूं वरना तो हम भारतीय इच्छाशक्तिपर भी दौड़ सकते हैं।’’अब वह 100 मीटर में उतरेंगी जिसमें पिछले खेलों में रजत पदक जीता था। तेजलबेन 400 मीटर में भाग लेंगी।
Asian Para Games: पावरलिफ्टर अशोक ने 65 किग्रा वर्ग में 192 किलो उठाकर जीता रजत पदक
भारत के अशोक ने एशियाई पैरा खेलों में पुरूषों की 65 किलो पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में रजत पदक जीता। पिछली बार कांस्य जीतने वाले 37 वर्ष के अशोक ने 192 किलो वजन उठाया। चीन के पैरालम्पिक चैम्पियन जोउ यि ने 216 किलो वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। इंडोनेशिया के मारगोनो को कांस्य पदक मिला। अशोक ने 187 किलो के साथ शुरूआत की जबकि दूसरे प्रयास में 192 किलो वजन उठाया। वह अंतिम प्रयास में 201 किलो नहीं उठा सके। सोनीपत जिले के गोहाना के रहने वाले अशोक को बचपन में पोलियो हो गया था। पैरा पावरलिफ्टिंग एक बेंच प्रेस प्रतियोगिता है जिसमें शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत की परीक्षा ली जाती है। इसमें केवल एक ही स्पर्धा होती है लेकिन खिलाड़ी अलग-अलग वजन श्रेणियों में हिस्सा लेते हैं। पावरलिफ्टिंग में भाग लेने वाले खिलाड़ियों के कूल्हों या पैरों में कोई शारीरिक अक्षमता होती है। राष्ट्रमंडल खेलों के कांस्य पदक विजेता झंडू कुमार आठ प्रतियोगियों में पांचवें स्थान पर रहे। उन्होंने 190 किलो वजन उठाया। वह अगले दो प्रयास में 195 किलो वजन नहीं उठा सके। मलेशिया के अनक गस्टिन ने 225 किलो वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। महिलाआं के 61 किलो तक के वर्ग में सुमन देवी छठे और सीमा रानी सातवें स्थान पर रहीं। सुमन का सर्वश्रेष्ठ प्रयास 101 किलो रहा जबकि सीमा के दो प्रयास नाकाम रहे और एकमात्र वैध प्रयास में उन्होंने 96 किलो वजन उठाया।
Asian Para Games: Himanshu Nandal ने तैराकी में जीता Bronze, Sheetal Devi फाइनल में पहुंची
मंगलवार को चल रहे एशियाई खेलों में, पैरा-तैराक हिमांशु नांदल ने पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल S11 श्रेणी में भारत के लिए कांस्य पदक जीता। ईएसपीएन के अनुसार, हिमांशु ने इस संस्करण में पैरा-तैराकी में भारत के लिए दूसरा पदक जीता। चार तैराकों के फाइनल में उन्होंने 5:10.91 के समय के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। वे रजत पदक विजेता उचु तोमिता (जापान) से 32 सेकंड पीछे रहे, और स्वर्ण पदक विजेता चुआनझेन सन (चीन) से 45 सेकंड पीछे रहे; चुआनझेन सन ने इस दौरान एक एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया। इसे भी पढ़ें: Rajnath Singh ने SCO बैठक में उठाया आतंकवाद का मुद्दा, देश-विदेश की प्रमुख खबरें रवि कार्तिक बुडिगिना, जिन्होंने इससे पहले पुरुषों की 100 मीटर फ्रीस्टाइल S13 स्पर्धा में रजत पदक जीता था, पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल S13 स्पर्धा में 5:41.70 के समय के साथ छठे स्थान पर रहे। इसके साथ ही, एशियाई पैरा खेलों में भारत के पदकों की कुल संख्या 24 हो गई है, जिसमें पांच स्वर्ण, आठ रजत और 11 कांस्य पदक शामिल हैं। इसके अलावा, पैरा कंपाउंड तीरंदाजी युगल स्पर्धा में शीतल देवी और पायल नाग की जोड़ी ने भारत के लिए एक और स्वर्ण पदक मुकाबले में अपनी जगह पक्की कर ली है। उन्होंने थाईलैंड की फानिभा स्राथोंगमाएव और वासाना खुथाविसाप को 151–135 से हराया, और अब वे फाइनल में चीन का सामना करेंगी। इसे भी पढ़ें: Asian Para Games 2026 के लिए 168 सदस्यीय भारतीय दल तैयार, SAI केंद्रों में विशेष कैंप इससे पहले, भारतीय शूटर सृष्टि अरोड़ा ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल SH1 कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता। ESPN के अनुसार, सृष्टि ने 214.7 के स्कोर के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। उन्होंने अपनी पहली दो सीरीज में 96.3 का स्कोर बनाया था। इसके बाद वह तीसरे स्थान पर आ गईं और अंत तक अपनी जगह बनाए रखीं। वह ईरान की सारेह जवानमर्दी (237.0) और फ़ैज़ेह अहमदी (237.3) के पीछे रहीं, जिन्होंने क्रमशः सिल्वर और गोल्ड मेडल जीते। इससे पहले, पैरालंपिक में हिस्सा ले चुके पैरा-शूटर मनीष नरवाल ने चल रहे इस महाद्वीपीय टूर्नामेंट में पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल SH1 कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता।
Asian Para Games: मनीष नरवाल को Silver Medal, सृष्टि अरोड़ा ने जीता कांस्य
मनीष नरवाल ने एशियाई पैरा खेलों में मंगलवार को पुरूषों की दस मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा में रजत पदक जीतकर लॉस एंजिलिस पैरालम्पिक 2028 का कोटा भी हासिल कर लिया जबकि सृष्टि अरोड़ा ने महिला वर्ग में कांस्य पदक जीता। इस तरह से भारत निशानेबाजी में अब चार पदक जीत चुका है जिसमें एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक शामिल हैं। बल्लभगढ के अर्जुन पुरस्कार प्राप्त निशानेबाज ने आठ खिलाड़ियों के फाइनल में 233 . 7 अंक लेकर दूसरा स्थान हासिल किया। वह लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 का कोटा हासिल करने वाले तीसरे भारतीय पैरा निशानेबाज बने। इससे पहलने मोना अग्रवाल और अवनि लेखरा ने सोमवार को महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल एसएच1 स्पर्धा में स्वर्ण और रजत पदक जीतकर कोटा हासिल किया था। दक्षिण कोरिया के जो जियोंगडू ने एशियाई पैरा खेलों का रिकॉर्ड तोड़कर 241.3 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि चीन के यांग चाओ को कांस्य पदक मिला। भारत के रूद्रांक्ष खंडेलवाल 127 . 3 के स्कोर के साथ सातवें स्थान पर रहे। नरवाल ने पेरिस पैरालम्पिक 2024 में इसी स्पर्धा में रजत पदक जीता था जबकि हांगझोउ में 2023 एशियाई पैरा खेलों में कांस्य पदक हासिल किया था। नरवाल ने 570 के स्कोर के साथ पांचवें स्थान पर रहकर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया था, जबकि खंडेलवाल 571 के स्कोर के साथ क्वालीफाइंग में दूसरे स्थान पर रहे थे। नारवाल ने फाइनल में शानदार शुरुआत की, लेकिन जो जियोंगडू ने पहले पांच शॉट के बाद 4.3 अंक की बढ़त बना ली। उन्होंने आखिर तक अपनी बढ़त बरकरार रखते हुए स्वर्ण पदक जीता। नरवाल शुरुआत में वे पेशेवर फुटबॉलर बनना चाहते थे, लेकिन शारीरिक अक्षमता के कारण उन्होंने निशानेबाजी को अपनाया। सृष्टि ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा में तीसरा स्थान हासिल करके भारत के खाते में एक और कांस्य पदक जोड़ा। आठ निशानेबाजों के फाइनल में सृष्टि ने 214.7 अंक बनाए तथा वह ईरान की फ़ैज़ेह अहमदी (237.3) और सारेह जवानमर्दी (237.0) के के बाद तीसरे स्थान पर रही। दूसरी भारतीय खिलाड़ी सुमेधा पाठक (111.4) फाइनल में बाहर होने वाली पहली खिलाड़ी थीं। एसएच1 श्रेणी उन निशानेबाजों के लिए है जो निचले या ऊपरी अंगों से दिव्यांग होते हैं लेकिन वह बिना किसी मदद के बंदूक पकड़ सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के निषाद कुमार ने जापान में एशियाई पैरा खेलों में लंबी कूद में स्वर्ण पदक जीता। आठ साल की उम्र में हाथ गंवाने के बावजूद, उन्होंने संघर्ष कर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई और देश को गौरवान्वित किया।
Asian Para Games 2026: मेरठ के पैरा एथलीट आयुष वर्मा ने एशियन पैरा गेम्स में भाला फेंक स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। छह साल की कड़ी मेहनत और व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के दम पर उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की।
Asian Para Games में Srishti Arora ने 10m Air Pistol में Bronze Medal जीता
20 अक्टूबर को जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में, भारतीय निशानेबाज सृष्टि अरोड़ा ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल SH1 कैटेगरी में कांस्य पदक जीता। अरोड़ा ने कुल 214.7 के स्कोर के साथ तीसरा स्थान हासिल किया; उन्होंने अपनी पहली दो सीरीज में 96.3 का स्कोर किया था। ESPN के अनुसार, पूरे इवेंट के दौरान वह तीसरे स्थान पर बनी रहीं। उनसे आगे ईरान की फ़ैज़ेह अहमदी रहीं, जिन्होंने 237.3 के स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि सारेह जवानमर्दी ने 237.0 के स्कोर के साथ रजत पदक हासिल किया। इसे भी पढ़ें: Asian Para Games: भारत ने नागोया में एथलेटिक्स के पहले दिन जीते 6 पदक इस पदक के साथ, एशियाई पैरा खेलों में भारत के कुल पदकों की संख्या 23 हो गई है, जिसमें पांच स्वर्ण, आठ रजत और दस कांस्य पदक शामिल हैं। इससे पहले, भारतीय पैरा-शूटर मनीष नरवाल ने पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल SH1 कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता। नरवाल ने 233.7 का स्कोर किया। वह दक्षिण कोरिया के जो जियोंगडू (जिन्होंने 241.3 के स्कोर के साथ गोल्ड जीता) के पीछे रहे, जबकि चीन के यांग चाओ उनसे पीछे रहे। पांचवें स्थान पर क्वालीफाई करने के बावजूद, फाइनल की दूसरी सीरीज में 49.8 के शानदार स्कोर की बदौलत नरवाल पोडियम तक पहुंचने में सफल रहे। वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर जो जियोंगडू का इस इवेंट में दबदबा रहा। इसी इवेंट में एक और भारतीय फाइनलिस्ट रुद्रांश खंडेलवाल सातवें स्थान पर रहे। क्वालीफिकेशन राउंड में वह दूसरे स्थान पर थे, लेकिन फाइनल में जल्दी बाहर हो गए। खंडेलवाल ने लॉस एंजिल्स पैरालंपिक 2028 के लिए क्वालीफाई कर लिया है। पैरा-टेबल टेनिस में, जहान मदान ने पुरुषों की सिंगल्स क्लास 1 इवेंट में सिल्वर मेडल जीता। पांच खिलाड़ियों के मुकाबले में वह चौथे स्थान पर रहे, लेकिन साथी भारतीय खिलाड़ी संदीप डांगी से बेहतर प्रदर्शन करके मेडल हासिल करने में कामयाब रहे। इसे भी पढ़ें: PM Modi ने Ladakh के युवाओं को दी सौगात, Leh में बनेगा बड़ा Center of Excellence पैरा-पावरलिफ्टिंग में, अशोक ने पुरुषों की 65 किलोग्राम कैटेगरी में 192 किलोग्राम का सर्वश्रेष्ठ लिफ्ट लगाकर सिल्वर मेडल जीता। वह चीन के ज़ू यी के पीछे रहे, जिन्होंने 216 किलोग्राम वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता। भारत ने प्रतियोगिता के पहले दिन कुल 11 मेडल जीते - चार गोल्ड, पांच सिल्वर और दो ब्रॉन्ज।
पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी प्राची ने टोक्यो में आयोजित पैरा एशियन चैंपियनशिप 2026 में भारत के लिए कांस्य पदक जीता है।
Asian Para Games में Baby Sahana Ravi और Prachi Pandey ने जीते Bronze Medal
20 अक्टूबर को 2026 एशियाई पैरा खेलों में, भारतीय पैरा-टेबल टेनिस खिलाड़ी बेबी सहाना रवि और प्राची पांडे ने क्रमशः महिला एकल क्लास 9 और क्लास 6 स्पर्धाओं में कांस्य पदक जीते। महिला एकल क्लास 9 प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में, बेबी सहाना को चीन की माओ जिंगडियन ने 0-3 (8-11, 2-11, 4-11) से हराया, जिसके चलते उन्हें कांस्य पदक मिला। एशियाई पैरा खेलों में पैरा टेबल टेनिस की 'स्टैंडिंग' श्रेणी में यह भारत का पहला पदक था। इसे भी पढ़ें: देश और दुनिया की दोपहर की बड़ी खबरें, पढ़ें प्रमुख राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम प्राची पांडे ने महिला सिंगल्स क्लास 6 इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता। सेमीफाइनल मैच में उन्हें इराक की नजला अल-दयेनी से 9-11, 2-11, 8-11 से हार का सामना करना पड़ा। बेबी सहाना रवि और प्राची पांडे के ब्रॉन्ज मेडल के साथ, भारत ने एक ही दिन पैरा टेबल टेनिस में चार पदक हासिल किए। इससे पहले, महिला सिंगल्स क्लास 4-5 के सेमीफाइनल में चीन की झांग बियान से 0-3 से हारने के बाद भाविना पटेल ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। 2020 पैरालंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वालीं पटेल को सेमीफाइनल मैच में 7-11, 5-11, 7-11 से हार मिली। इसे भी पढ़ें: CRPF Recruitment: CRPF ने Head Constable और GD Constable के 521 पदों पर मांगे आवेदन, ऐसे करें अप्लाई सोनलबेन पटेल ने भी महिला सिंगल्स क्लास 3 कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता। वह अपना सेमीफाइनल मुकाबला दक्षिण कोरिया की यूं जियू से 7-11, 5-11, 6-11 से हार गईं। 2026 एशियन पैरा गेम्स के दूसरे दिन भारत ने कुल आठ मेडल जीते। पैरा टेबल टेनिस में मिले चार पदकों के अलावा, पुरुषों के जैवलिन थ्रो F53/F54 इवेंट में प्रदीप कुमार ने सिल्वर और आयुष वर्मा ने ब्रॉन्ज मेडल जीता, जबकि पुरुषों के शॉट पुट F11 इवेंट में प्रवीण शर्मा ने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। सबसे शानदार प्रदर्शन भारतीय पैरा-एथलीट दीप्ति जीवनजी का रहा, जिन्होंने महिलाओं की 400 मीटर T20 स्पर्धा में 56.36 सेकंड के गेम्स-रिकॉर्ड समय के साथ गोल्ड मेडल जीता।
प्राची पांडेय ने जापान में चल रहे पैरा एशियाई खेल 2026 में महिला एकल क्लास-6 के सेमीफाइनल में जगह बनाई। उन्होंने थाईलैंड की खिलाड़ी को 3-1 से हराकर यह उपलब्धि हासिल की और अब 20 अक्टूबर को इराक की खिलाड़ी से भिड़ेंगी।
शीतल देवी ने वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी की, एशियाई रिकॉर्ड तोड़ा
एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत की स्टार तीरंदाज शीतल देवी ने महिलाओं की कंपाउंड क्वालिफिकेशन स्पर्धा में 720 में से 704 अंक हासिल कर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की और नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया.
Jind News: हुड्डा खाप ने एशियाई गेम्स में पदक जीतने पर किया सम्मानित
Hudda Khap felicitated
अगर आपका भी अकेले घूमने का मन है, लेकिन पहली सोलो इंटरनेशनल ट्रिप के लिए किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहां पर ज्यादा पैसे न खर्च करने पड़े। तो आप एशिया के कुछ खूबसूरत देश आपकी लिस्ट में शामिल कर सकती हैं। सोलो ट्रिप का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको किसी दूसरे के हिसाब से अपना प्लान नहीं बनाना पड़ता है। सोलो ट्रिप में जब मन करे, जहां मन करे वहां जाएं, रुकें और अपनी पसंद का खाना खाएं। वहीं अगर आपको बजट को ध्यान में रखना है, तो आप वियतनाम और थाईलैंड जैसे ऑप्शन देख सकती हैं। इन जगहों पर आप खूबसूरत बीच, स्वादिष्ट लोकल फूड्स, शानदार मार्केट और एक अलग ही कल्चर देखने को मिलेगा। वहीं अगर आप भी इस बार अकेले विदेश घूमने का प्लान कर रही हैं, तो आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 3 ऐसे खूबसूरत देशों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर आप सोलो ट्रिप के लिए जा सकती हैं। इसे भी पढ़ें: Travel Tips: Vrindavan के Chhatikara में स्थित Char Dham Mandir में करें चार धामों के दर्शन मलेशिया सोलो ट्रिप के लिए मलेशिया भी एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। खासकर अगर आप शहर, फूड, शॉपिंग और घूमने के साथ-साथ थोड़ा नेचर भी देखना चाहती हैं, तो आपको Kuala Lumpur जैसे शहर से लेकर कई दूसरी खूबसूरत जगहों को एक्सप्लोर करने का मौका मिलेगा। वहीं अच्छी बात यह है कि मलेशिया में बस और ट्रेन जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करके अपना अपने खर्च को थोड़ा मैनेज कर सकती हैं। आप मलेशिया में Kuala Lumpur में घूमने के साथ-साथ शॉपिंग भी कर सकती हैं। यहां के लोकल फूड को एंजॉय कर सकती हैं। थाईलैंड वहीं फॉरेन ट्रिप के लिए आप थाईलैंड भी जा सकती हैं। अगर आपको शॉपिंग, स्ट्रीट फूड और घूमने-फिरने के साथ बीच का मजा चाहिए, तो आपको थाईलैंड जा सकती हैं। यहां पर आप सोलो ट्रिप कर सकती हैं। थाईलैंड का बैंकॉक शहर सबसे फेमस है। आप यहां पर लोकल मार्केट्स में घूमने के साथ-साथ स्ट्रीट फूड ट्राई कर सकती हैं। अगर आपका बजट कम है, तो आप महंगे होटल्स की जगह हॉस्टल्स या अफॉर्डेबल स्टे देख सकती हैं। आप बैंकॉक के अलावा फुकेट या पटाया भी घूमने के लिए जा सकती हैं। आप थाईलैंड में बीचेस और आइलैंड का मजा ले सकती हैं और लोकल मार्केट्स को एक्सप्लोर कर सकती हैं। इसके अलावा स्ट्रीट फूड ट्राई करना न भूलें। वियतनाम आप कम बजट में वियतनाम भी जा सकती हैं। यहां पर आपको बीच के साथ, लोकल मार्केट्स, पहाड़ और अलग-अलग कल्चरल एक्सपीरियंस कर सकेंगी। वियतनाम में आपको एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए ट्रेन, बस और फ्लाइट आदि के ऑप्शंस मिल जाएंगे। आप हनोई, दा नांग और होई आन जैसी जगहों को एक्सप्लोर कर सकती हैं। इसके अलावा आप यहां पर खूबसूरत बीच पर समय बिता सकती हैं। पहाड़ों और नेचर की खूबसूरती को निहारने के साथ लोकल फूड का स्वाद ले सकती हैं और यहां आपको लोकल लाइफ देखने का मौका मिलेगा। इन बातों का रखें ध्यान अगर आप भी पहली बार अकेले विदेश घूमने का प्लान कर रही हैं, तो इस दौरान आपको कुछ बातों का ध्यान रख सकती हैं। 2-3 महीने पहले से प्लानिंग कर लें। होटल और फ्लाइट की कीमत पहले से देखें। पहले से ही पूरे ट्रिप का बजट प्लान कर लें। हॉस्टल या होटल की लोकेशन आदि पहले से पता रखें। लोकल ट्रांसपोर्ट के ऑप्शन को पहले से समझ लें। अपने साथ जरूरी डॉक्यूमेंट्स रख लें। ट्रिप से पहले उस देश के लेटेस्ट एंट्री रूल्स को जरूर चेक करें।
Asian Games 2026: एशियन गेम्स में भारत ने जीते हैं अब तक कुल 60 मेडल
Asian Games 2026 Day 12 Live Updates: एशियन गेम्स का आज 12वां दिन है. कई खेलों में आज भारत को मेडल की उम्मीदें रहेंगी. वहीं कुछ खेल ऐसे हैं, जहां से मेडल पक्का हो सकता है, ऐसे में इस पेज को रिफ्रेश करते रहें.
Rahul Gandhi Malasia PM Video: BRICS के बीच राहुल-प्रियंका से मिले मलेशिया के PM, क्या बात हुई?
Rahul Gandhi Malasia PM Video: BRICS के बीच राहुल-प्रियंका से मिले मलेशिया के PM, क्या बात हुई? Rahul Gandhi Anwar Ibrahim Meeting को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को मलेशिया के प्रधानमं
गन्तव्य देशों के हालात खराब होने से दक्षिण एशियाई प्रवासन में कमी
आशीष विश्वास अमेरिका और यूरोपीय देशों में अपनाई गई सरकारी नीति में नए ज़ोर की वजह से, लगभग बिना हुनर वाले आम दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए स्थितियां असल में मुश्किल हो गई हैं। इसका मकसद सालों से वहां गैर-कानूनी ढंग से रह रहे एशियाई लोगों को बाहर निकालना है। ज़्यादातर मौजूदा सरकारों पर दक्षिणपंथियों का ज़ोरदार दबाव है। हाल के दिनों में अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व में दक्षिण एशियाई लोगों के लिए प्रवासन और वहां जाकर नौकरी पाना मुश्किल होता जा रहा है, जो बड़े झगड़ों और लगातार सामाजिक उथल-पुथल और अशांति का सीधा नतीजा है। इस इलाके के बड़े देशों की तरह, भारत और बांग्लादेश पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। लंबे समय में दोनों देशों के सामने दोहरी चुनौती है: घरेलू श्रम बाजार में नौकरी के लिए बेचैनी और बढ़ जाएगी, क्योंकि वे बड़ी आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। साथ ही प्रवासी कामगारों द्वारा घर भेजे जाने वाली बड़ी राशि (रेमिटेंस) से होने वाली अच्छी-खासी आय भी समय के साथ कम हो जाएगी। खबरें हैं कि कम से कम 1500 और भारतीयों को अल्पावधि में अमेरिका से वापस भेजा जा रहा है और केनडा में भी हालात बेहतर नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि नौकरी के मौके कम हो रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों में अपनाई गई सरकारी नीति में नए ज़ोर की वजह से, लगभग बिना हुनर वाले आम दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए स्थितियां असल में मुश्किल हो गई हैं। इसका मकसद सालों से वहां गैर-कानूनी ढंग से रह रहे एशियाई लोगों को बाहर निकालना है। ज़्यादातर मौजूदा सरकारों पर दक्षिणपंथियों का ज़ोरदार दबाव है, क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टियों पर गैर-कानूनी प्रवासन को बढ़ावा देने का आरोप लगता है। आरोप है कि पहले से ही स्थानीय संस्कृति के कमज़ोर होने और गंभीर सुरक्षा चिंताओं जैसी स्थानीय समस्याएं हैं। ज़्यादातर हाथ से काम करने वाले अस्थायी कामों में लगे, हज़ारों प्रवासी ऐसे कमज़ोर लक्ष्य बन गए हैं जिन्हें तुरंत और बिना किसी औपचारिकता के वापस भेजा जा सकता है। यह विकसित देशों में अपनी मौजूदा समस्याओं के समाधान के लिए शासन और नीतिगत कदमों का नतीजा है। यूनाइटेड किंगडम से लेकर अमेरिका तक, उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों और प्रवासियों के लिए वीज़ा मिलना नए कड़े कानूनों से प्रभावित हुआ है, पढ़ाई की फीस बहुत ज़्यादा बढ़ा दी गई है और कानूनी तौर पर स्थायी रूप से रहने का अधिकार कम कर दिया गया है। प्रवासियों के खिलाफ नकारात्मक रूझान सिर्फ़ पश्चिमी देशों तक ही सीमित नहीं है। दिसंबर 2025 तक, सऊदी अरब से किसी न किसी वजह से करीब 11,000 से ज़्यादा भारतीयों को वापस उनके अपने देशों में भेजा जा चुका था, जो एक रिकॉर्ड है। अमेरिका ने उसी समय तक करीब 3800 भारतीयों को वापस भेजा था। साफ़ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कही गई अच्छी दोस्ती का अमेरिका-भारत के आपसी रिश्तों के सभी मामलों में कोई खास फ़र्क नहीं पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि म्यांमार ने करीब 1600 'गैर-कानूनीÓ रूप से वहां रह रहे भारतीयों को वापस भेजा, जबकि मलेशिया और यूएई ने 2025 में करीब 1600 लोगों को वापस भेजा। भारत सरकार और अन्य स्रोतों का दावा है कि कई भारतीय अपनी मज़ीर् से भी अपने गोद लिए हुए देशों को छोड़ रहे हैं। इसकी वजहें हैं बेकाबू महंगाई, जिससे रहने का खर्च बढ़ रहा है, मुश्किल समय में काम का बोझ बढ़ रहा है, अधिकारियों की तरफ़ से बढ़ती परेशानी और घर पैसे भेजने में भारी कमी का आना। इसका मतलब यह नहीं है कि वे भारत के बाहर मौके नहीं देख रहे हैं। दुबई एक पसंदीदा नई जगह है। केनडा से 2025 में लगभग 2830 भारतीय लौटे, जबकि पिछले साल यह संख्या 2000 थी। कुछ मामलों में केनाडाई अधिकारियों के तरीकों पर शक जताते हुए, भारत सरकार ने प्रवासियों को वापस भेजने के दौरान अपनाए गए तरीकों पर भी कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें वापस भेजे गए लोगों को वापस आने के दौरान कोई सुविधाएं नहीं दी जाती हैं। यहां तक कि हमेशा मूलभूत मानवीय सुविधाएं भी नहीं दी जाती हैं, हालांकि लौटने वाला हर कोई घोषित अपराधी नहीं होता है। पड़ोसी बांग्लादेश की बात करें तो, इज़रायली हमलों के जारी रहने के कारण लेबनान में कम से कम 5000 लोगों की नौकरी चली गई। कम से कम 200 लोग स्वयं वापस चले गए क्योंकि प्रवासियों को जानलेवा काम के हालात में धकेला जा रहा था। यह स्थानीय श्रम कानूनों और नौकरी की शर्तों का खुला उल्लंघन था। साथ ही 'आपातकाल' के नाम पर अक्सर वेतन में कटौती भी की जाती थी। मध्य पूर्व में प्रवासी संगठनों के एच आर ग्रुपों और प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि लेबनान और आस-पास के इलाकों में 11 बांग्लादेशी कामगार मारे गए, जबकि कई घायल हुए, जिन पर स्थानीय अधिकारियों ने बहुत कम ध्यान दिया। अप्रशिक्षित कामगारों को सहयोगी, रेस्क्यू स्टाफ और दूसरे कामों के तौर पर समुद्री झड़पों में भी हिस्सा लेने के लिए मजबूर किया गया था। ऐसा लगता है कि ऐसे मामलों में कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं थी। सिर्फ़ एक मामले में फिलिपिनो कामगार के एक ग्रुप ने ऐसे आदेश मानने से मना कर दिया था। एचआर ग्रुपों का आरोप है कि कई बमबारी और मिसाइलों और ड्रोन हमलों के खतरनाक आदान-प्रदान के दौरान मरने वाले ज़्यादातर पीड़ित आर्थिक रूप से कमज़ोर प्रवासी कामगारों के असुरक्षित ग्रुप से थे। अलग-अलग अन्तरराष्ट्रीय प्राधिकारी, देश के प्रमुखों, संयुक्त और दूसरी संस्थाओं से बार-बार गुहार लगाने पर कोई जवाब नहीं मिला। कामगारों के लिए एक और चिंता यह थी कि क्या प्रवासियों को रखने वाले देश उनके ज़िंदा रहते हुए उनकी बुरी हालत के प्रति लगभग पूरी तरह से बेपरवाह होने के मद्देनजर उनके बकाए का इंतज़ाम भी करेंगे। ऐसे डर से इन्कार नहीं किया जा सकता। न सिफ़र् आपूर्तिकर्ता देश को कानूनी तौर पर मिलने वाले पैसे के सवाल पर नुकसान होगा, बल्कि घर पर पीड़ितों के परिवारों को भी बहुत ज़्यादा तकलीफ़ होगी। कई परिवार विदेश में नौकरी करके पैसे कमाने के लिए किसी सदस्य को भेजने और सक्षम बनाने हेतु भारी-भरकम कर्ज भी लेते हैं।
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