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जयपुर बनेगा एशियाई वास्तुकला का केंद्र, दुनियाभर के आर्किटेक्ट आएंगे:प्रिट्जकर पुरस्कार विजेता रिकेन यामामोटो समेत विश्व के दिग्गज वास्तुकार होंगे शामिल, 11 सितम्बर से होगी शुरुआत

जयपुर इस वर्ष एशिया के सबसे प्रतिष्ठित वास्तुकला आयोजनों में से एक 23वें आर्केसिया फोरम 2026 की मेजबानी करेगा। 11 और 12 सितंबर 2026 को होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में एशिया के 24 देशों से एक हजार से ज्यादा विदेशी प्रतिनिधि और भारत के दो हजार से अधिक वास्तुकार, शहरी नियोजक, शिक्षाविद, शोधकर्ता, विद्यार्थी एवं निर्माण उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ एक मंच पर जुटेंगे। दो दिवसीय यह आयोजन जयपुर को अंतरराष्ट्रीय वास्तुकला मानचित्र पर नई पहचान देने के साथ-साथ राजस्थान की समृद्ध स्थापत्य कला, पारंपरिक निर्माण तकनीकों और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा। द इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स (आईआईए) राजस्थान चैप्टर की ओर से आयोजित इस सम्मेलन का संयोजन आर्किटेक्ट तुषार सोगानी कर रहे हैं। सोमवार को होटल क्लार्क्स आमेर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि इस बार फोरम की थीम ‘ब्रिंगिंग बैक… वर्नाक्यूलर विजडम’ रखी गई है। इसका उद्देश्य पारंपरिक भारतीय वास्तुकला, स्थानीय निर्माण सामग्री, जलवायु-अनुकूल डिजाइन, शिल्पकला और सतत विकास की अवधारणाओं को आधुनिक वास्तुकला के साथ जोड़ना है। कार्यक्रम में आईआईए राजस्थान चैप्टर के उपाध्यक्ष आर्किटेक्ट गौरव अग्रवाल, संयुक्त सचिव आर्किटेक्ट प्रकाश मोहानी और आर्किटेक्ट आशुतोष भार्गव भी मौजूद रहे। 24 देशों के विशेषज्ञ होंगे शामिल सम्मेलन में बांग्लादेश, भूटान, ब्रुनेई, कंबोडिया, चीन, हांगकांग, भारत, इंडोनेशिया, जापान, उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, लाओस, मकाऊ, मलेशिया, मालदीव, मंगोलिया, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान, फिलीपींस, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड और वियतनाम सहित 24 सदस्य देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। सम्मेलन विचारों के आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग और एशियाई वास्तुकला विरासत के संरक्षण का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण जापान के विश्वप्रसिद्ध वास्तुकार रिकेन यामामोटो होंगे, जिन्हें वर्ष 2024 का प्रिट्जकर आर्किटेक्चर प्राइज मिला है। प्रिट्जकर पुरस्कार को वास्तुकला का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। यामामोटो अपने ऐसे डिजाइनों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं जो लोगों के बीच सामाजिक संवाद, सामुदायिक जीवन और सार्वजनिक सहभागिता को बढ़ावा देते हैं। उनके प्रमुख कार्यों में योकोसुका म्यूजियम ऑफ आर्ट, फुताकोतामागावा हाउसिंग प्रोजेक्ट, हिरोशिमा निसी फायर स्टेशन, सैतामा प्रीफेक्चरल यूनिवर्सिटी जैसे आधुनिक सार्वजनिक भवन शामिल हैं। उनकी डिजाइन फिलॉसफी यह मानती है कि इमारतें केवल निर्माण नहीं बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम होती हैं। सतत विकास के विशेषज्ञ प्रो. फिलिप एफ. युआन भी देंगे व्याख्यान सम्मेलन में चीन के प्रसिद्ध वास्तुकार एवं शिक्षाविद प्रो. फिलिप एफ. युआन भी भाग लेंगे। वे शंघाई स्थित टोंगजी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं और डिजिटल फैब्रिकेशन, रोबोटिक कंस्ट्रक्शन, पर्यावरण-अनुकूल निर्माण तकनीकों तथा भविष्य की वास्तुकला पर उनके शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जाता है। उन्होंने आधुनिक तकनीक को पारंपरिक निर्माण प्रणालियों से जोड़ने की दिशा में कई उल्लेखनीय परियोजनाएं विकसित की हैं और वे सतत एवं स्मार्ट वास्तुकला के क्षेत्र में अग्रणी विशेषज्ञों में गिने जाते हैं। पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक पर होगा मंथन दो दिवसीय सम्मेलन में मुख्य व्याख्यान, पैनल डिस्कशन, तकनीकी सत्र और विशेषज्ञ संवाद आयोजित होंगे। इनमें जलवायु परिवर्तन के दौर में भवन निर्माण, धरोहर संरक्षण, पारंपरिक निर्माण प्रणाली, सतत शहरी विकास, डिजाइन शिक्षा, नवाचार और भविष्य के एशियाई शहरों जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। फोरम के दौरान आर्केसिया अवॉर्ड्स फॉर आर्किटेक्चर, थीसिस ऑफ द ईयर, स्टूडेंट डिजाइन प्रतियोगिता और कॉल फॉर पेपर्स जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा। एशिया के विभिन्न देशों से आने वाली प्रविष्टियों का मूल्यांकन अंतरराष्ट्रीय ज्यूरी करेगी। सम्मेलन के साथ विशाल बिल्डिंग मटेरियल एक्सपो भी लगाया जाएगा, जिसमें देश-विदेश की अग्रणी कंपनियां अपने नवीनतम उत्पाद, निर्माण तकनीक और नवाचार प्रदर्शित करेंगी। इससे वास्तुकारों, बिल्डर्स, डिजाइनरों और उद्योग जगत को नए व्यावसायिक अवसर मिलेंगे। लघु उद्योग भारती इस आयोजन का इंडस्ट्रियल पार्टनर है। जयपुर की विरासत से रूबरू होंगे विदेशी प्रतिनिधि सम्मेलन में आने वाले विदेशी प्रतिनिधियों के लिए विशेष हेरिटेज एवं आर्किटेक्चरल टूर भी आयोजित किए जाएंगे। इसके तहत वे आमेर किला, सिटी पैलेस, जंतर-मंतर, हवामहल सहित जयपुर की ऐतिहासिक इमारतों, पारंपरिक शिल्प और नगर नियोजन की विशेषताओं को करीब से देखेंगे। इस आयोजन से जयपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वास्तुकला और डिजाइन की राजधानी के रूप में नई पहचान मिलेगी। हजारों विदेशी और भारतीय प्रतिनिधियों के आगमन से पर्यटन, होटल, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प, खानपान और व्यापार को भी बड़ा लाभ मिलेगा। साथ ही राजस्थान की पारंपरिक स्थापत्य कला, स्थानीय निर्माण तकनीकों और शिल्पकला को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

दैनिक भास्कर 15 Jul 2026 5:57 pm

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