एशियाई पैरा खेलों में चमकने के बाद Sheetal Devi बोलीं, खेल पर ध्यान रखने को सोशल मीडिया से बनाई दूरी
भारत की स्टार पैरा तीरंदाज शीतल देवी सोशल मीडिया की चर्चाओं से दूर रहकर अपना पूरा ध्यान खेल पर केंद्रित करना चाहती हैं क्योंकि लगातार पदक जीतने से उनसे उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं। शीतल जापान में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में शानदार प्रदर्शन के बाद रविवार को अपने साथी भारतीय तीरंदाजों के साथ स्वदेश लौटीं, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया। उन्होंने कंपाउंड व्यक्तिगत, मिश्रित टीम और महिला टीम स्पर्धाओं में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। शीतल ने पीटीआई से कहा, ‘‘मैं अपने खेल पर ध्यान देती हूं। सोशल मीडिया ज्यादा नहीं देखती। लेकिन जब मैं पदक जीतती हूं और लोग मुझसे मिलने आते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होती है। यहां तक कि बहुत छोटे बच्चे भी मुझे देखते हैं, इसलिए यह बहुत अच्छा लगता है। ’’जम्मू की 19 वर्षीय शीतल ने अपने तीन पदकों में व्यक्तिगत स्पर्धा के स्वर्ण को सबसे खास बताया। उन्होंने कहा, ‘‘व्यक्तिगत स्पर्धा मेरे लिए सबसे खास थी। बाकी पदक भी विशेष हैं, लेकिन चैंपियन बनकर लौटने के लिए मेरा ध्यान व्यक्तिगत स्पर्धा पर अधिक था जिसमें मैंने जीत हासिल की। ’’पेरिस पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता हरविंदर सिंह ने कहा कि भारत की रिकर्व टीम ने बढ़ी हुई उम्मीदों के दबाव को अच्छी तरह संभाला और महाद्वीपीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। हरविंदर ने कहा, ‘‘अधिक उम्मीदों के कारण दबाव निश्चित रूप से बढ़ता है, लेकिन मुझे खुशी है कि हमने उस दबाव को अच्छी तरह संभाला। हमारा अभ्यास शानदार था, महासंघ का समर्थन बेहतरीन रहा और वहां हमें एक सप्ताह तक प्रशिक्षण लेने का मौका मिला। इन सभी चीजों से तीरंदाजी में हमें फायदा हुआ। ’’एशियाई पैरा खेलों में भारत का तीरंदाजी अभियान अब तक का सर्वश्रेष्ठ रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने तीन स्वर्ण और इतने ही रजत पदक जीते। हरविंदर ने कहा, ‘‘जब पूरी टीम पदक जीतती है, तो बहुत अच्छा लगता है। 2018 में केवल मैंने व्यक्तिगत पदक जीता था, लेकिन इस बार मुझे खुशी है कि कई और पदक आए हैं। जो कुछ खिलाड़ी पदक नहीं जीत सके, हमें उम्मीद है कि अगली बार हमारी पूरी टीम पदक लेकर लौटेगी। ’’वहीं पैरा निशानेबाज मोना अग्रवाल ने एशियाई पैरा खेलों में अपने अभियान को सपने के सच होने जैसा बताया। उन्होंने दो स्वर्ण पदक जीतने के साथ पांच रिकॉर्ड बनाए, जिनमें एक विश्व रिकॉर्ड भी शामिल है। नागोया में आयोजित समापन समारोह के लिए भारत की ध्वजवाहक चुनी गईं मोना भारत के 114 पदकों के अभियान की सबसे सफल खिलाड़ियों में से एक बनकर उभरीं। स्वदेश लौटने पर उन्होंने कहा, ‘‘मैं कहना चाहूंगी कि बहुत कम समय में मैं जापान से ढेर सारी खुशियां लेकर लौटी हूं। मुझे पदक जीतने की उम्मीद थी, लेकिन जब एक साथ पांच रिकॉर्ड बने और मुझे ध्वजवाहक बनने का अवसर मिला, तो यह मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। ’’उन्होंने कहा, ‘‘पदक जीतना, रिकॉर्ड बनाना और ध्वजवाहक बनना, ये सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं। इन्हें अलग नहीं किया जा सकता। यह किसी सपने जैसा लगता है। जब मैं जापान के लिए रवाना हुई थी, तब मैंने सोचा था कि दो पदक लेकर लौटूंगी। लेकिन मैंने यह नहीं सोचा था कि दो स्वर्ण पदक, पांच रिकॉर्ड और ध्वजवाहक बनने की उपलब्धि के साथ वापस आऊंगी। ’’भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी नितेश कुमार ने पुरुष एकल एसएल3 वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने फाइनल में हमवतन और अनुभवी खिलाड़ी प्रमोद भगत को हराया। पेरिस पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता नितेश ने कहा, ‘‘प्रमोद को दो गेम में हराना निश्चित रूप से बहुत खास है। उनके खिलाफ फाइनल जीतना बहुत बड़ी बात है। फाइनल मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। ’’नितेश ने कहा कि उनका अंतिम लक्ष्य 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले पैरालंपिक खेलों में अपने खिताब का बचाव करना है। उन्होंने कहा, ‘‘हम उसी लक्ष्य (पैरालंपिक स्वर्ण) को हासिल करने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन दो साल का सफर लंबा होता है। सबसे पहले हमें क्वालीफिकेशन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। लॉस एंजिलिस में अपने खिताब का बचाव करना ही हमारा लक्ष्य रहेगा।
सऊदी अरब में मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद अमेरिका ने अपने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके पात्र परिवार के सदस्यों को देश छोड़ने का आदेश दिया है।
Asian Market Today: सोमवार को एशिया बाजारों की सतर्क शुरुआत रही। निवेशक एक तरफ AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़ी नई बिकवाली पर विचार कर रहे थे। तो दूसरी तरफ कंपनियों के नतीजों और सेंट्रल बैंक की बैठकों पर भी उनकी नजर थी। सप्ताह की शुरुआत में MSCI का एशिया पैसिफिक इंडेक्स 0.2% गिर गया, जबकि हैंग सेंग फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं दिखा। दक्षिण कोरिया में कोस्पी (Kospi) 0.21% नीचे आया, जबकि जापान में निक्केई 225 (Nikkei 225) में 0.23% और व्यापक टॉपिक्स (Topix) इंडेक्स में 0.65% की बढ़त दर्ज की गई।भारत में GIFT निफ्टी (जो यह संकेत देता है कि दिन की शुरुआत कैसी होगी )ने बाजार के लाल निशान (गिरावट) के साथ सुस्त शुरुआत का अनुमान जताया।करेंसी मार्केट में, जापानी येन 156.94 प्रति डॉलर पर स्थिर रहा, जबकि ऑफशोर युआन 6.6686 पर बना रहा।यूएस मार्केट का हालअमेरिकी इक्विटी फ्यूचर्स ने अपनी शुरुआती बढ़त गंवा दी और लगभग सपाट (बिना किसी बड़े बदलाव के) रहे। SK हाइनिक्स (SK Hynix) के शेयरों में तेजी आई; एक रिपोर्ट के अनुसार, यह चिप निर्माता कंपनी अपने 'किओक्सिया' (Kioxia) स्टेक का एक अहम हिस्सा बेचकर मिलने वाली रकम का लगभग 80% हिस्सा 'स्पेशल डिविडेंड' के रूप में अपने शेयरधारकों को देने की योजना बना रही है।यह सुस्त शुरुआत वॉल स्ट्रीट पर बीते शुक्रवार को आए उतार-चढ़ाव के बाद हुई है, जहां AI से जुड़े शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। साथ ही, अमेरिकी चिप इंडेक्स में भी लगातार गिरावट जारी रही, जो नवंबर के बाद से सबसे लंबी गिरावट है।इस गिरावट के कारण इस महीने क्षेत्रीय बेंचमार्क इंडेक्स 6% से ज्यादा नीचे आ गया है। इससे निवेशकों के बीच फिर से वही सवाल उठने लगा है जो पूरे साल पूछा जाता रहा है, क्या AI के क्षेत्र में कंपनियों द्वारा किया जा रहा भारी निवेश, उनके मुनाफे से सही साबित होता है? चिप शेयरों में हालिया बिकवाली के कारण निवेशकों ने अपना पैसा बॉन्ड में लगाना शुरू कर दिया है, जिससे AI पर किए जा रहे खर्च से रिटर्न देने का दबाव और बढ़ गया है।इस हफ्ते कंपनियों के नतीजे निवेशकों के भरोसे की और परीक्षा लेंगे। माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट और अमेज़न अपने नतीजे जारी करने वाले हैं। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, एशिया में अब नतीजों का सबसे व्यस्त दौर शुरू हो रहा है। MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स में शामिल लगभग 1,200 कंपनियों में से करीब 550 कंपनियां इस दौरान अपने नतीजे घोषित करेंगी।इनमें SK हाइनिक्स और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कंपनियां भी शामिल हैं, जो AI के इस दौर में प्रमुख खिलाड़ी हैं। अगर AI की रफ़्तार और धीमी होती है, तो निवेशकों को ग्रोथ के लिए कंज्यूमर डिमांड और अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों की ओर देखना होगा।US फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ जापान और यूरो ज़ोन के सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने की उम्मीद है। फेड की बैठक बुधवार से शुरू होकर तीन दिनों तक चलेगी। फेड ने 2023 के बाद पहली बार सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाई थीं और इस साल एक और बढ़ोतरी का संकेत दिया था।क्रूड में नरमीइस बीच, तेल की कीमतों में कुछ राहत देखने को मिली। एशियाई बाज़ार की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड अपने छह महीने के उच्च स्तर से लगभग 1% गिरकर 115.35 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 1.1% गिरकर 102.10 डॉलर पर आ गया।इसके बावजूद, पश्चिम एशिया की स्थिति ने ट्रेडर्स की चिंताएं बढ़ा रखी हैं। US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अब यह तय करने का समय आ गया है कि तेहरान के साथ कोई समझौता किया जाए या फिर हमले फिर से शुरू किए जाएं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस क्षेत्र में ईरान और हूतियों की ओर से अमेरिकियों के लिए ख़तरा बढ़ता जा रहा है।वाशिंगटन मध्य पूर्व के कुछ हिस्सों में अपने राजनयिक और सैन्य कर्मचारियों की संख्या कम कर रहा है। वहीं, हूतियों ने कई बार रियाद एयरपोर्ट को निशाना बनाया है, जिसे रविवार को कमर्शियल उड़ानों के लिए फिर से खोल दिया गया था।(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
जापान में 5वें एशियाई पैरा गेम्स का समापन
बीजिंग, 5वें एशियाई पैरा गेम्स का समापन 24 अक्टूबर को जापान के नागोया स्थित मिज़ुहो पार्क एथलेटिक्स स्टेडियम में हुआ।
जापान के नागोया में 5वें एशियाई पैरा गेम्स का समापन
जापान के नागोया में 5वें एशियाई पैरा गेम्स का समापन
West Asia में तनाव से कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक जाने के आसार
पश्चिम एशिया में बढ़ते वैश्विक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर अगले सप्ताह भी जारी रहने की आशंका है। इससे आपूर्ति बाधित होने की चिंताएं बनी हुई हैं। वहीं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का मौद्रिक नीति संबंधी फैसला बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। विश्लेषकों ने यह राय जताई है। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 117 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बीच निवेशकों की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम, ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले की आशंकाओं और अमेरिका के साप्ताहिक भंडार आंकड़ों पर रहेगी। विश्लेषकों ने कहा कि अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन अपने साप्ताहिक भंडार के अनुमान जारी करेंगे। इसके अलावा, कुशिंग में कच्चे तेल का भंडार और 27-28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक भी बाजार के लिए अहम रहेगी। रेलिगेयर ब्रोकिंग में वरिष्ठ उपाध्यक्ष-शोध अजित मिश्रा ने कहा, ‘‘निकट अवधि में कीमतों का रुख तेजी का है, लेकिन यह काफी हद तक खबरों से प्रभावित होगा। कारोबारियों को कीमतों में तेज उछाल के पीछे भागने से बचना चाहिए और आगे की दिशा की पुष्टि के लिए वैश्विक घटनाक्रम, फेडरल रिजर्व के संकेतों तथा साप्ताहिक भंडार आंकड़ों पर नजर रखनी चाहिए।’’उन्होंने कहा कि ऊर्जा बुनियादी ढांचे या होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले समुद्री परिवहन में किसी भी तरह की बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। वहीं, तनाव कम करने की दिशा में ठोस प्रगति होने पर कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड में जिंस शोध प्रमुख नवनीत दमानी ने कहा, ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य और सऊदी अरब के आसपास हमलों में तेजी आने से बाजार का ध्यान ऊर्जा बुनियादी ढांचे और निर्यात की सुरक्षा को लेकर चिंताओं पर फिर केंद्रित हो गया है।’’उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल द्वारा तीन नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे, जिसमें नतांज के पास स्थित परमाणु प्रतिष्ठान भी शामिल हैं, को निशाना बनाने की योजना तैयार किए जाने संबंधी खबरों ने भी चिंता बढ़ाई है।
वियतनाम को पहली बार मिली 2027 दक्षिण-पूर्व एशियाई अंडर-23 फुटबॉल चैंपियनशिप की मेजबानी
दक्षिण-पूर्व एशियाई फुटबॉल महासंघ (AFF) ने वियतनाम को पहली बार मेजबानी सौंपी है, जिससे टीम को SEA गेम्स 34 की तैयारी में मदद मिलेगी।
जापान में आयोजित पैरा एशियाई खेलों में हरियाणा के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 31 पदक जीते, जिसमें 9 स्वर्ण शामिल हैं। रोहतक के हनी ने भाला फेंकने और हिसार के संदीप कुमार ने एथलेटिक्स में विश्व रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रचा।
एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने वाली हॉकी खिलाड़ी लालरेम्सियामी और ललथांतलुआंगी का RCF में भव्य सम्मान
एशियाई खेल 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम को स्वर्ण पदक दिलाने वाली लालरेम्सियामी और ललथांतलुआंगी का कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री में भव्य स्वागत हुआ। महाप्रबंधक अजय नंदन ने सम्मानित किया, रोड शो में उमड़े खेल प्रेमी।
Asian Para Games 2026: भारत ने रचा इतिहास! 30 गोल्ड समेत 114 मेडल जीतकर बनाया नया रिकॉर्ड
Asian Para Games 2026: भारत ने रचा इतिहास! 30 गोल्ड समेत 114 मेडल जीतकर बनाया नया रिकॉर्ड
एशियाई पैरा गेम्स में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, 30 गोल्ड सहित जीते 114 मेडल
एशियाई पैरा गेम्स में भारतीय दल ने अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कुल 114 पदक जीते, जिनमें 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदक शामिल हैं।
एशियाई पैरा गेम्स में भारत ने 30 स्वर्ण सहित 114 पदक जीतकर हांगझोउ का पिछला रिकॉर्ड तोड़ा
आइची-नागोया। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पदकों का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया है। भारत ने प्रतियोगिता में अब तक कुल 114 पदक अपने नाम किए हैं। इनमें 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदक शामिल हैं। इस उपलब्धि के साथ भारत ने […] The post एशियाई पैरा गेम्स में भारत ने 30 स्वर्ण सहित 114 पदक जीतकर हांगझोउ का पिछला रिकॉर्ड तोड़ा appeared first on Sabguru News .
Asian Para Games में भारत ने रचा इतिहास, 30 स्वर्ण समेत रिकॉर्ड 114 पदक जीते
भारतीय पैरा खिलाड़ियों ने उम्मीदों से बढ़कर प्रदर्शन करते हुए एशियाई पैरा खेलों में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। भारत ने शुक्रवार को यहां आखिरी दिन रिकॉर्ड प्रदर्शन के दम पर 30 स्वर्ण सहित कुल 114 पदक जीतकर अपना अभियान समाप्त किया। भारत ने इस बार इन खेलों में 168 खिलाड़ियों का दल भेजा था जो 2023 में हांगझोउ में हुए पिछले चरण में हिस्सा लेने वाले दल की संख्या से लगभग आधा था। भारतीय खिलाड़ियों ने हांगझोउ में 27 स्वर्ण सहित 108 पदक जीते थे जो उस समय देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। यहां जारी खेलों में शुक्रवार को पहली बार स्वर्ण पदक जीतने में पैरा एथलेटिक्स का दबदबा नहीं रहा बल्कि बैडमिंटन खिलाड़ियों, तीरंदाजों और निशानेबाज मोना अग्रवाल ने भी भारत के पदकों की संख्या बढ़ाने में अहम योगदान दिया। इस तरह भारत ने 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदकों के साथ अपना अभियान पूरा किया। भारत फिलहाल पदक तालिका में चौथे स्थान पर है, लेकिन शनिवार को कुछ स्पर्धाओं के फाइनल होने के कारण उसकी स्थिति बदल सकती है। भारत का उन स्पर्धाओं में कोई खिलाड़ी हिस्सा नहीं ले रहा है। अभियान के आखिरी दिन भारत ने नौ स्वर्ण पदक जीते जो इस चरण में उसका एक दिन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। ये स्वर्ण पदक तीरंदाजी, निशानेबाजी, बैडमिंटन और एथलेटिक्स में मिले। एथलेटिक्स ने हमेशा की तरह भारत के लिए पदक संख्या में इजाफा किया। इस स्पर्धा में भारत ने कुल 65 पदक जीते जो 2023 के मुकाबले 12 अधिक हैं। शुक्रवार को हालांकि बैडमिंटन खिलाड़ियों ने भी सुर्खियां बटोरीं और तीन स्वर्ण पदक जीते। इनमें पेरिस पैरालंपिक चैंपियन नितेश कुमार और नवीन शिवकुमार के व्यक्तिगत वर्गों के स्वर्ण पदक शामिल हैं। अनुभवी नितेश ने पुरुष एकल एसएल3 वर्ग में स्वर्ण और मिश्रित युगल एसएल3-एसयू5 स्पर्धा में रजत पदक जीता जबकि इन खेलों में पदार्पण कर रहे नवीन ने पुरुष एकल एसएल4 वर्ग का स्वर्ण अपने नाम किया। 31 वर्षीय नितेश ने पुरुष एकल फाइनल में हमवतन और तोक्यो पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता प्रमोद भगत को 21-18, 21-16 से हराकर शानदार जीत दर्ज की। इसके बाद उन्होंने तुलसीमति मुरुगेसन के साथ मिश्रित युगल में रजत पदक जीता। नवीन ने एसएल4 वर्ग के फाइनल में इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान को 21-9, 21-17 से हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया। तुलसीमति ने भी यादगार प्रदर्शन करते हुए एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीते। उन्होंने महिला युगल का खिताब अपने नाम किया। पेरिस पैरालंपिक की रजत पदक विजेता 24 वर्षीय तुलसीमति ने मानसी जोशी के साथ मिलकर महिला युगल एसएल3-एसयू5 का खिताब जीता। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में चीन की यांग किउशिया और शियाओ जुशियान को 21-16, 21-13 से हराया। इससे पहले तुलसीमति को महिला एकल एसयू5 के फाइनल में यांग किउशिया से 18-21, 11-21 से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। एथलेटिक्स में संदीप और हानी ने क्रमशः पुरुषों की 400 मीटर टी64 और भाला फेंक एफ37/38 स्पर्धाओं में विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीते। मौजूदा पैरालंपिक और विश्व चैंपियन सुमित अंतिल ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की भाला फेंक एफ42-44/61-64 संयुक्त स्पर्धा में भारत का दबदबा कायम किया। उन्होंने 72.46 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ स्वर्ण पदक जीता। एफ42 वर्ग में हिस्सा लेने वाले महेंद्र गुर्जर ने 59.03 मीटर के प्रदर्शन के साथ रजत पदक जीता, जबकि एफ44 वर्ग के संदीप संजय सरगर ने 64.48 मीटर भाला फेंककर कांस्य पदक हासिल किया। महेंद्र को कम दूरी के बावजूद रजत पदक मिला। संयुक्त स्पर्धाओं में खिलाड़ियों की रैंकिंग तय करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले आरएजेडए अंक में महेंद्र को बढ़त मिली, जिसके आधार पर उन्हें संदीप से ऊपर स्थान दिया गया। भाला फेंक और चक्का फेंक जैसी मैदान में होने वाली स्पर्धाओं में खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ाने और मुकाबले को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए एफ42, एफ44, एफ62 और एफ64 जैसे वर्गों को अक्सर एक संयुक्त स्पर्धा में शामिल किया जाता है। एफ42 और एफ44 वर्ग में निचले अंगों से संबंधित अक्षमता वाले वे खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, जो भाला फेंकने या दौड़ने के लिए कृत्रिम पैर का इस्तेमाल नहीं करते। एफ62 और एफ64 वर्ग में निचले अंगों से संबंधित अक्षमता वाले वे खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं, जो कृत्रिम पैर या पैरों की मदद से खड़े होकर खेलते हैं। व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाले प्रणव सूरमा ने पुरुषों की क्लब थ्रो स्पर्धा में 32.87 मीटर का खेलों का रिकॉर्ड बनाकर भारत को दिन का आखिरी स्वर्ण पदक दिलाया। इससे पहले संदीप ने पुरुषों की 400 मीटर टी64 स्पर्धा के फाइनल में 52.28 सेकेंड का समय लेकर विश्व रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक जीता। हमवतन अजय कुमार ने 53.61 सेकेंड के खेलों के रिकॉर्ड के साथ कांस्य पदक हासिल किया। भाला फेंक एफ37/38 के फाइनल में हानी ने 60.49 मीटर का विश्व रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले निमिषा चक्कुंगलपरम्बिल और प्रमोद बिजारनिया ने क्रमशः महिलाओं की लंबी कूद टी47 और पुरुषों की 1500 मीटर टी46 स्पर्धाओं में रजत पदक जीते। पुरुषों की 1500 मीटर दौड़ में प्रमोद ने चार मिनट 9.65 सेकंड का समय निकाला। पैरा निशानेबाज मोना अग्रवाल ने महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस एसएच1 स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड तोड़ते हुए स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 357.5 अंक हासिल कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह इन खेलों में उनका दूसरा स्वर्ण पदक था। मोना ने इस साल की शुरुआत में भारत के लिए 2028 पैरालंपिक का पहला कोटा हासिल किया था। पैरालंपिक निशानेबाजी में एसएच1 वर्ग उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके निचले या ऊपरी अंगों में दिव्यांगता होती है और जो अपने हाथों से बंदूक का भार संभाल सकते हैं। इससे पहले मोना ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 स्पर्धा में 250.0 अंक के खेलों के रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता था। अवनि लेखरा ने 249.6 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया। पैरालंपिक चैंपियन तीरंदाज हरविंदर सिंह और उनके साथ पहली बार इन खेलों में हिस्सा ले रहे विजय सुंडी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की रिकर्व युगल स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता। हालांकि, भारतीय महिला युगल टीम को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। हरविंदर और विजय ने फाइनल में चीन के युन डुओ और झाओ लिशुए को 5-1 से हराया। वहीं, महिला युगल फाइनल में भावना चौधरी और पूजा जटिया की जोड़ी महिला पैरा रिकर्व युगल फाइनल में चीन की गाओ जिहान और वांग शूकियान से 0 . 6 से हार गई और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। भारतीय तैराकी दल ने उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए इन खेलों में कुल 11 पदक जीते जिनमें तीन रजत पदक शामिल हैं। आखिरी दिन हिमांशु नंदल ने पुरुषों की 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इन खेलों में कांस्य पदकों की हैट्रिक पूरी की। ‘ऑप्टिक नर्व’ (दृष्टि तंत्रिका) में खराबी के कारण जन्म से दृष्टिहीन 22 वर्षीय हिमांशु ने पुरुषों की 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा को एक मिनट 5.90 सेकंड में पूरी कर कांस्य पदक की हैट्रिक भी पूरी की। हिमांशु इससे पहले पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल और 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एस11 स्पर्धाओं में भी कांस्य पदक जीत चुके हैं। इन खेलों में तीन पदक जीतने के साथ ही वह हमवतन रवि बुडिगिना की बराबरी पर पहुंच गए जिन्होंने दो रजत और एक कांस्य सहित कुल तीन पदक जीते हैं। हिमांशु ने मंगलवार को पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में पांच मिनट 10.91 सेकंड का समय निकालकर अपने पदकों का खाता खोला था। चार तैराकों के बीच हुए मुकाबले में वह तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद उन्होंने 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एस11 में कांस्य जीता और शुक्रवार को तीसरा पदक हासिल कर अपनी हैट्रिक पूरी की। एस11 वर्ग में दृष्टिबाधित खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इसमें वे खिलाड़ी शामिल हैं जिनकी दृष्टि क्षमता बेहद कम है या जिन्हें प्रकाश का बिल्कुल भी आभास नहीं होता।
Asian Para Games में भारत का दबदबा, Javelin Throw में जीते Gold Silver और Bronze
शुक्रवार (23 अक्टूबर) को एक और जैवलिन इवेंट में भारत ने सभी मेडल अपने नाम किए। F42-44/61-64 कंबाइंड कैटेगरी में सुमित अंतिल ने गोल्ड, महेंद्र गुर्जर ने सिल्वर और संदीप संजय सरगर ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। सुमित (T64) ने 72.46 मीटर की थ्रो के साथ पहला स्थान हासिल किया और 1,112 अंक बनाए। वहीं, गुर्जर (T42) और संजय सरगर (T44) ने अपनी-अपनी कैटेगरी में क्रमशः 59.03 मीटर और 64.48 मीटर की दूरी के साथ नए 'गेम्स रिकॉर्ड' बनाए, और क्रमशः 1,066 व 1,006 अंक हासिल किए। इसे भी पढ़ें: Para Asian Games 2026 | बैडमिंटन में भारत का दबदबा, नितेश कुमार और नवीन शिवकुमार ने जीते स्वर्ण पदक 28 वर्षीय अंतिल, जो दो बार के पैरालंपिक चैंपियन और विश्व रिकॉर्ड धारक हैं, मई में बनाए गए अपने 74.82 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को तो नहीं दोहरा सके, लेकिन F64 प्रतियोगिता में उनका दबदबा कायम रहा। अंतिल ने 2023 एशियाई पैरा खेलों में 73.29 मीटर की थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता था, जो उस समय एक विश्व रिकॉर्ड था। महेंद्र गुर्जर ने 59.03 मीटर के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि संदीप संजय सरगर ने 64.48 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता। संयुक्त-वर्ग (कंबाइंड-क्लास) स्पर्धाओं में रैंकिंग तय करने वाले 'RAZA पॉइंट्स' के आधार पर, गुर्जर, सरगर से आगे रहे। प्रतियोगिता में F42, F44, F62 और F64 श्रेणियों के एथलीटों को एक साथ शामिल किया गया था ताकि प्रतिभागियों की संख्या अधिक हो सके। F42 और F44 श्रेणी के एथलीट बिना कृत्रिम अंगों (प्रोस्थेसिस) के हिस्सा लेते हैं, जबकि F62 और F64 श्रेणी के एथलीट कृत्रिम अंगों का उपयोग करते हुए खड़े होकर थ्रो करते हैं। एक दुर्घटना में अपना बायां पैर गंवाने से पहले, अंतिल एक होनहार पहलवान थे। बाद में, एक साथी एथलीट के जरिए उन्हें पैरा-स्पोर्ट्स के बारे में पता चला और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। उन्होंने 2023 से 2025 तक लगातार तीन बार 'वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप' का खिताब जीता है। इसे भी पढ़ें: Ahmedabad में 23 अक्टूबर से पहली Commonwealth Kabaddi Championship, 13 देश होंगे शामिल F42 जैवलिन (भाला फेंक) कैटेगरी में नेशनल चैंपियन और एशियाई रिकॉर्ड धारक, गुर्जर भारत के प्रमुख पैरा-एथलीटों में से एक बनकर उभरे हैं। मई 2025 में, स्विट्जरलैंड के नॉटविल में आयोजित 'वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री' के दौरान, गुर्जर ने F42 जैवलिन थ्रो में 61.17 मीटर की दूरी तय करके एक विश्व रिकॉर्ड बनाया। इसी इवेंट में उन्होंने T42 लॉन्ग जंप में भी स्वर्ण पदक जीता। महाराष्ट्र के सांगली जिले के संदीप संजय सरगर ने बचपन में पैर की गंभीर चोट को मात देकर पैरा-एथलेटिक्स में अपना करियर बनाया। केमिस्ट्री में BSc पूरी करने के बाद, 2016 में उन्होंने जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) की शुरुआत की। अपने गृहनगर में ट्रेनिंग के सीमित मौकों को देखते हुए, बेहतर सुविधाओं के लिए सरगर पुणे चले गए। वहां उन्होंने अपने खेल के सपनों को पूरा करने के साथ-साथ डिलीवरी एग्जीक्यूटिव के तौर पर भी काम किया।
Asian Para Games के समापन समारोह में Mona Agarwal और Nishad Kumar संभालेंगे तिरंगा
पैरा निशानेबाज मोना अग्रवाल और पैरा एथलीट निषाद कुमार शनिवार को होने वाले एशियाई पैरा खेलों के समापन समारोह में भारत के ध्वजवाहक होंगे। दोनों ने इन खेलों में दो-दो स्वर्ण पदक जीते हैं। अड़तीस वर्षीय मोना ने इन खेलों में रिकॉर्ड बनाया है। नौ महीने की उम्र में पोलियो के कारण उनके दोनों पैर प्रभावित हुए और उन्हें व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा। उन्होंने सबसे पहले महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 स्पर्धा में खेलों का रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन एसएच1 स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड तोड़कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। सत्ताईस वर्षीय निषाद कुमार जब छह साल के थे, तब हिमाचल प्रदेश में अपने खेत पर घास काटने वाली मशीन की चपेट में आने से उनका दायां हाथ कट गया था। उन्होंने इन खेलों में पुरुषों की ऊंची कूद और लंबी कूद की टी47 स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते।
Asian Para Games: सुमित अंतिल का गोल्डन थ्रो, भारत ने किया मेडल स्वीप
सुमित अंतिल ने एशियन पैरा गेम्स में पुरुषों की भाला फेंक संयुक्त स्पर्धा में 72.46 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीतकर अपने खिताब का बचाव किया. महेंद्र गुर्जर ने सिल्वर और संदीप संजय सरगर ने ब्रॉन्ज मेडल जीता. इस तरह भारत ने स्पर्धा के तीनों पदक अपने नाम किए.
Asian Para Games में Himanshu Nandal ने जीता तीसरा कांस्य, पदकों की लगाई हैट्रिक
भारतीय पैरा तैराक हिमांशु नंदल ने शुक्रवार को यहां एशियाई पैरा खेलों में पुरुषों की 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर पदकों की हैट्रिक पूरी की। यह इन खेलों में उनका तीसरा कांस्य पदक है। ऑप्टिक नर्व (दृष्टि तंत्रिका) में खराबी के कारण जन्म से दृष्टिहीन 22 वर्षीय हिमांशु ने यह स्पर्धा एक मिनट 5.90 सेकंड में पूरी की। जापान के उचु तोमिता ने 58.22 सेकंड के समय के साथ खेलों का नया रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता, जबकि चीन के चुआनझेन सुन ने 58.70 सेकंड में रजत पदक हासिल किया। हिमांशु इससे पहले पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल और 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एस11 स्पर्धाओं में भी कांस्य पदक जीत चुके हैं। इन खेलों में तीन पदक जीतने के साथ ही वह हमवतन रवि बुडिगिना की बराबरी पर पहुंच गए, जिन्होंने दो रजत और एक कांस्य सहित कुल तीन पदक जीते हैं। हिमांशु ने मंगलवार को पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में पांच मिनट 10.91 सेकंड का समय निकालकर अपने पदकों का खाता खोला था। चार तैराकों के बीच हुए मुकाबले में वह तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद उन्होंने 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एस11 में कांस्य जीता और शुक्रवार को तीसरा पदक हासिल कर अपनी हैट्रिक पूरी की। एस11 वर्ग में दृष्टिबाधित खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इसमें वे खिलाड़ी शामिल हैं जिनकी दृष्टि क्षमता बेहद कम है या जिन्हें प्रकाश का बिल्कुल भी आभास नहीं होता। हिमांशु की एशियाई पैरा खेलों तक की यात्रा बचपन से ही खेलों से जुड़ी रही है। हरियाणा के रोहतक में खेलों के माहौल वाले परिवार में पले-बढ़े हिमांशु के पिता राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी खेल चुके हैं। चार वर्ष की उम्र में वह दिल्ली आ गए और राष्ट्रीय दृष्टिबाधित संघ से जुड़े और ब्रेल लिपि सीखी। शुरुआत में उन्होंने जूडो में अपनी पहचान बनाई और राष्ट्रीय स्तर पर पदक भी जीते। उन्होंने वर्ष 2021 में तैराकी को अपना नया लक्ष्य बनाया। तैराकी में उनका सफर तेजी से आगे बढ़ा। वर्ष 2024 में हिमांशु पेरिस पैरालंपिक के लिए न्यूनतम योग्यता मानक हासिल करने वाले भारत के पहले दृष्टिहीन तैराक बने। दिल्ली विश्वविद्यालय के आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक हिमांशु ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार प्रगति की है। वर्ष 2025 में सिंगापुर में आयोजित विश्व पैरा तैराकी चैंपियनशिप में उन्होंने दो स्पर्धाओं के फाइनल में जगह बनाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
Asian Para Games में Kokila Kaushik ने जीता Silver Medal, बोलीं- अगली बार लाऊंगी गोल्ड
भारतीय पैरा जूडोका कोकिला कौशिक जापान के आइची-नागोया में आयोजित 2026 एशियाई पैरा खेलों से रजत पदक जीतकर भारत लौटीं। गुरुवार शाम इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बात करते हुए, कोकिला ने और अधिक मजबूत होकर वापसी करने और भविष्य की प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीतने का संकल्प लिया। कोकिला ने महिलाओं की J2 52 किग्रा श्रेणी में रजत पदक हासिल किया। वह उस भारतीय पैरा जूडो दल का हिस्सा थीं, जो इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता से दो पदक लेकर लौटा है; इसमें पुरुषों की J1 70 किग्रा श्रेणी में कपिल परमार ने कांस्य पदक जीता। इसे भी पढ़ें: Para Asian Games 2026 | बैडमिंटन में भारत का दबदबा, नितेश कुमार और नवीन शिवकुमार ने जीते स्वर्ण पदक अपने प्रदर्शन से संतुष्टि जताते हुए, कोकिला ने ANI से कहा कि मैंने अभी सिल्वर मेडल जीता है। हमें गोल्ड की उम्मीद थी, लेकिन इस बार सिल्वर मिला है, इसलिए अभी हम खुश हैं। मतलब, हमने भारत के लिए मेडल जीता है, और अगली बार गोल्ड आएगा। उन्होंने आगे कहा कि भारत को गौरवान्वित करके मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। 2023 में हांगझोऊ में हुए एशियन पैरा गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकीं कोकिला ने कहा कि अब वह आने वाली बड़ी प्रतियोगिताओं पर ध्यान देंगी। उन्होंने बताया, अगले साल वर्ल्ड गेम्स हैं, और उसके बाद 2028 के पैरालंपिक गेम्स हैं। मैं उनके लिए अच्छे से प्रैक्टिस करूंगी। कोकिला को स्वर्ण पदक के मुकाबले में किर्गिस्तान की ऐबिके उलानबेक काइज़ी से हार का सामना करना पड़ा, जिन्होंने महज 21 सेकंड में 'इप्पोन' के जरिए जीत हासिल की। इंडियन ब्लाइंड एंड पैरा जूडो एसोसिएशन के सीईओ मुनव्वर अंज़ार ने टीम के दो पदक जीतने पर गर्व जताया, लेकिन साथ ही यह भी माना कि इस खेल में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि हमें बहुत गर्व है। सबसे बड़ी बात यह है कि जब हम पैरा एशियन गेम्स और पैरालंपिक में भारत के लिए पदक जीतते हैं और तिरंगा ऊपर लहराता है, तो एक अलग ही तरह का गर्व महसूस होता है। हमने दो पदक जीते हैं और हम इसे लेकर बेहद खुश हैं, क्योंकि हमने बहुत अच्छी तैयारी की थी। लेकिन जैसे-जैसे प्रतियोगिता आगे बढ़ रही है, यह और भी कठिन होती जा रही है। इसलिए, अभी हमारा पूरा ध्यान आने वाले एक बहुत बड़े टूर्नामेंट, 'वर्ल्ड गेम्स' पर है और हम उसी की तैयारी कर रहे हैं। हमें वहां भी पदक जीतने हैं, और उसके बाद आने वाले टूर्नामेंटों में भी। LA पैरालंपिक के लिए हमारा लक्ष्य कम से कम दो पदक जीतना है, ठीक वैसे ही जैसे हमने यहां जीते हैं। इसे भी पढ़ें: Ahmedabad में 23 अक्टूबर से पहली Commonwealth Kabaddi Championship, 13 देश होंगे शामिल कोकिला के प्रदर्शन के बारे में अंजार ने कहा कि कोकिला के साथ बात यह है कि वह अपनी वेट कैटेगरी में सबसे कम उम्र की हैं। वह अभी 22 साल की हुई हैं, जबकि उनकी कैटेगरी में कजाकिस्तान या किर्गिस्तान जैसे देशों के बाकी एथलीट लगभग 28 से 30 साल के हैं। वे बहुत मजबूत खिलाड़ी हैं। कोकिला को उस स्तर तक पहुंचने और उन्हें हराने में अभी एक-दो साल और लगेंगे। पुरुषों के J1 70kg इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले कपिल परमार ने फाइनल में जगह न बना पाने के बाद अपने दृढ़ संकल्प के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस बार मैंने 70 kg कैटेगरी में हिस्सा लिया था। सेमीफाइनल में मैं एक इंडोनेशियाई एथलीट से हार गया था, लेकिन फिर हमने ब्रॉन्ज मेडल के लिए और भी कड़ी मेहनत की। हमारे कोच ने कहा था कि हम खाली हाथ वापस नहीं जा सकते। हमने बहुत मेहनत की थी, इसलिए हमें ब्रॉन्ज मेडल चाहिए था। आखिरकार, मैंने कुछ ही मिनटों में इंडोनेशियाई खिलाड़ी को हराकर ब्रॉन्ज मेडल हासिल कर लिया।
भारत के संदीप और हानी ने एशियाई पैरा खेलों में शुक्रवार को क्रमश: पुरूषों की 400 मीटर टी64 फाइनल और पुरूषों की भालाफेंक एफ37 /38 स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीते।
Mona Agarwal ने 357.5 स्कोर के साथ रचा नया World Record, एशियाई पैरा खेलों में जीता दूसरा गोल्ड
भारतीय पैरा निशानेबाज मोना अग्रवाल ने एशियाई पैरा खेलों में शुक्रवार को महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस एसएच1 स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड तोड़कर स्वर्ण पदक जीता। मोना ने 357 . 5 स्कोर करके इन खेलों में दूसरा स्वर्ण अपने नाम किया। इससे पहले विश्व रिकॉर्ड 356 का था जो स्वीडन की अन्ना बेंसन के नाम था। उन्होंने इस साल जुलाई में यह रिकॉर्ड बनाया था। चीन की झांग कुइपिंग ने 353 . 7 अंक लेकर रजत और दक्षिण कोरिया की किम मियुंग ने 344 . 4 अंक के साथ कांस्य पदक जीता। भारत की अवनि लेखरा 333 . 2 अंक के साथ चौथे स्थान पर रही। पैरा निशानेबाजी में एसएच1 श्रेणी उन एथलीटों के लिए है जिनके निचले या ऊपरी अंगों में कोई शारीरिक अक्षमता है लेकिन जो बिना किसी गन स्टैंड या सहारे के अपने हाथों से ही बंदूक का वजन संभाल सकते हैं। मोना ने इससे पहले महिलाओं की दस मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 स्पर्धा में खेलों के रिकॉर्ड के साथ 250 अंक लेकर स्वर्ण जीता था जबकि लेखरा को रजत पदक मिला था।
Harvinder Singh और विजय सुंडी ने Asian Para Games में जीता स्वर्ण पदक, चीन को दी मात
पैरालम्पिक चैम्पियन हरविंदर सिंह और विजय सुंडी ने एशियाई पैरा खेलों में शुक्रवार को पैरा रिकर्व पुरूष युगल फाइनल में चीन को 5 . 1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता जबकि महिला युगल टीम को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। दोनों टीमों के बीच पहला सेट 35 . 35 से बराबरी पर था। भारत ने दूसरा सेट 37 . 36 से और तीसरा 38 . 36 से जीता। चीन के युन डुओ और झाओ लिक्सू की जोड़ी प्रदर्शन में निरंतरता नहीं रख सकी। इससे पहले भारत की भावना चौधरी और पूजा जटिया की जोड़ी महिला पैरा रिकर्व युगल फाइनल में चीन की गाओ जिहान और वांग शूकियान से 0 . 6 से हार गई और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। भारतीय जोड़ी ने 31, 30 , 29 स्कोर किया जबकि चीन ने 38 , 35 और 39 स्कोर किया। हरविंदर और भावना मिश्रित युगल सेमीफाइनल में चीन के झाओ लिक्सू और वांग शूकियान से 0 . 6 से हार गए और अब कांस्य पदक के लिये ईरान के खिलाफ खेलेंगे। हरविंदर ने 2018 एशियाई पैरा खेलों में व्यक्तिगत स्वर्ण जीता था और हांगझोउ में दो कांस्य जीते थे। उन्होंने पेरिस पैरालम्पिक में व्यक्तिगत स्वर्ण जीता था जबकि तोक्यो पैरालम्पिक में कांस्य पदक हासिल किया था।
Asian Para Games: एथलेटिक्स में भारत का गोल्डन धमाका, सिमरन का डबल गोल्ड
एशियन पैरा गेम्स में भारत ने ट्रैक एंड फील्ड में पांच गोल्ड समेत 18 मेडल जीते. सिमरन ने 100 मीटर और 200 मीटर में गोल्ड डबल पूरा किया, जबकि प्रवीण कुमार और सचिन खिलारी ने गेम्स रिकॉर्ड बनाए. भारत अब तक 14 गोल्ड समेत 62 मेडल जीतकर पांचवें स्थान पर है.
मेरठ के आयुष वर्मा ने पैरा एशियन गेम्स में जीता शॉटपुट गोल्ड, अनुभव चौधरी को 100 मीटर में कांस्य
मेरठ के अनुभव चौधरी ने एशियन पैरा गेम्स की पुरुषों की 100 मीटर टी-35 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता, 12.72 सेकंड में दौड़ पूरी कर तीसरा स्थान हासिल किया। कंकरखेड़ा निवासी अनुभव ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद यह उपलब्धि हासिल की, अपनी मां को खोने के बाद नाना ने उनका पालन-पोषण किया।
एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को सम्मानित करेगी हिमाचल सरकार, 7 खिलाड़ियों को मिलेंगे 9 करोड़ रुपये
हिमाचल प्रदेश सरकार 30 अक्टूबर को शिमला में एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को सम्मानित करेगी।
एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय पैरा एथलीट प्रीति पाल ने महिलाओं की 200 मीटर टी-35 स्पर्धा में रजत पदक जीता। उन्होंने पिछले प्रदर्शन में 2.66 सेकंड का सुधार कर यह उपलब्धि हासिल की।
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के निषाद कुमार ने जापान में एशियाई पैरा खेलों में लंबी कूद में स्वर्ण पदक जीता। आठ साल की उम्र में हाथ गंवाने के बावजूद, उन्होंने संघर्ष कर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई और देश को गौरवान्वित किया।
Asian Para Games 2026: मेरठ के पैरा एथलीट आयुष वर्मा ने एशियन पैरा गेम्स में भाला फेंक स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। छह साल की कड़ी मेहनत और व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के दम पर उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की।
पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी प्राची ने टोक्यो में आयोजित पैरा एशियन चैंपियनशिप 2026 में भारत के लिए कांस्य पदक जीता है।
शीतल देवी ने वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी की, एशियाई रिकॉर्ड तोड़ा
एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत की स्टार तीरंदाज शीतल देवी ने महिलाओं की कंपाउंड क्वालिफिकेशन स्पर्धा में 720 में से 704 अंक हासिल कर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की और नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया.
बेटियों का जलवा: एशियाई खेलों में भारत की स्वर्णिम कहानी, 10 में से 8 स्वर्ण महिला खिलाड़ियों के नाम
बेटियों का जलवा: एशियाई खेलों में भारत की स्वर्णिम कहानी, 10 में से 8 स्वर्ण महिला खिलाड़ियों के नाम asian-games-indian-women-athletes-eight-gold-medals-neeru-dhanda-trap-shooting-archery-kabaddi
Asian Games 2026: एशियन गेम्स में भारत ने जीते हैं अब तक कुल 60 मेडल
Asian Games 2026 Day 12 Live Updates: एशियन गेम्स का आज 12वां दिन है. कई खेलों में आज भारत को मेडल की उम्मीदें रहेंगी. वहीं कुछ खेल ऐसे हैं, जहां से मेडल पक्का हो सकता है, ऐसे में इस पेज को रिफ्रेश करते रहें.
Rahul Gandhi Malasia PM Video: BRICS के बीच राहुल-प्रियंका से मिले मलेशिया के PM, क्या बात हुई?
Rahul Gandhi Malasia PM Video: BRICS के बीच राहुल-प्रियंका से मिले मलेशिया के PM, क्या बात हुई? Rahul Gandhi Anwar Ibrahim Meeting को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को मलेशिया के प्रधानमं
गन्तव्य देशों के हालात खराब होने से दक्षिण एशियाई प्रवासन में कमी
आशीष विश्वास अमेरिका और यूरोपीय देशों में अपनाई गई सरकारी नीति में नए ज़ोर की वजह से, लगभग बिना हुनर वाले आम दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए स्थितियां असल में मुश्किल हो गई हैं। इसका मकसद सालों से वहां गैर-कानूनी ढंग से रह रहे एशियाई लोगों को बाहर निकालना है। ज़्यादातर मौजूदा सरकारों पर दक्षिणपंथियों का ज़ोरदार दबाव है। हाल के दिनों में अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व में दक्षिण एशियाई लोगों के लिए प्रवासन और वहां जाकर नौकरी पाना मुश्किल होता जा रहा है, जो बड़े झगड़ों और लगातार सामाजिक उथल-पुथल और अशांति का सीधा नतीजा है। इस इलाके के बड़े देशों की तरह, भारत और बांग्लादेश पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। लंबे समय में दोनों देशों के सामने दोहरी चुनौती है: घरेलू श्रम बाजार में नौकरी के लिए बेचैनी और बढ़ जाएगी, क्योंकि वे बड़ी आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। साथ ही प्रवासी कामगारों द्वारा घर भेजे जाने वाली बड़ी राशि (रेमिटेंस) से होने वाली अच्छी-खासी आय भी समय के साथ कम हो जाएगी। खबरें हैं कि कम से कम 1500 और भारतीयों को अल्पावधि में अमेरिका से वापस भेजा जा रहा है और केनडा में भी हालात बेहतर नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि नौकरी के मौके कम हो रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों में अपनाई गई सरकारी नीति में नए ज़ोर की वजह से, लगभग बिना हुनर वाले आम दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए स्थितियां असल में मुश्किल हो गई हैं। इसका मकसद सालों से वहां गैर-कानूनी ढंग से रह रहे एशियाई लोगों को बाहर निकालना है। ज़्यादातर मौजूदा सरकारों पर दक्षिणपंथियों का ज़ोरदार दबाव है, क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टियों पर गैर-कानूनी प्रवासन को बढ़ावा देने का आरोप लगता है। आरोप है कि पहले से ही स्थानीय संस्कृति के कमज़ोर होने और गंभीर सुरक्षा चिंताओं जैसी स्थानीय समस्याएं हैं। ज़्यादातर हाथ से काम करने वाले अस्थायी कामों में लगे, हज़ारों प्रवासी ऐसे कमज़ोर लक्ष्य बन गए हैं जिन्हें तुरंत और बिना किसी औपचारिकता के वापस भेजा जा सकता है। यह विकसित देशों में अपनी मौजूदा समस्याओं के समाधान के लिए शासन और नीतिगत कदमों का नतीजा है। यूनाइटेड किंगडम से लेकर अमेरिका तक, उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों और प्रवासियों के लिए वीज़ा मिलना नए कड़े कानूनों से प्रभावित हुआ है, पढ़ाई की फीस बहुत ज़्यादा बढ़ा दी गई है और कानूनी तौर पर स्थायी रूप से रहने का अधिकार कम कर दिया गया है। प्रवासियों के खिलाफ नकारात्मक रूझान सिर्फ़ पश्चिमी देशों तक ही सीमित नहीं है। दिसंबर 2025 तक, सऊदी अरब से किसी न किसी वजह से करीब 11,000 से ज़्यादा भारतीयों को वापस उनके अपने देशों में भेजा जा चुका था, जो एक रिकॉर्ड है। अमेरिका ने उसी समय तक करीब 3800 भारतीयों को वापस भेजा था। साफ़ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कही गई अच्छी दोस्ती का अमेरिका-भारत के आपसी रिश्तों के सभी मामलों में कोई खास फ़र्क नहीं पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि म्यांमार ने करीब 1600 'गैर-कानूनीÓ रूप से वहां रह रहे भारतीयों को वापस भेजा, जबकि मलेशिया और यूएई ने 2025 में करीब 1600 लोगों को वापस भेजा। भारत सरकार और अन्य स्रोतों का दावा है कि कई भारतीय अपनी मज़ीर् से भी अपने गोद लिए हुए देशों को छोड़ रहे हैं। इसकी वजहें हैं बेकाबू महंगाई, जिससे रहने का खर्च बढ़ रहा है, मुश्किल समय में काम का बोझ बढ़ रहा है, अधिकारियों की तरफ़ से बढ़ती परेशानी और घर पैसे भेजने में भारी कमी का आना। इसका मतलब यह नहीं है कि वे भारत के बाहर मौके नहीं देख रहे हैं। दुबई एक पसंदीदा नई जगह है। केनडा से 2025 में लगभग 2830 भारतीय लौटे, जबकि पिछले साल यह संख्या 2000 थी। कुछ मामलों में केनाडाई अधिकारियों के तरीकों पर शक जताते हुए, भारत सरकार ने प्रवासियों को वापस भेजने के दौरान अपनाए गए तरीकों पर भी कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें वापस भेजे गए लोगों को वापस आने के दौरान कोई सुविधाएं नहीं दी जाती हैं। यहां तक कि हमेशा मूलभूत मानवीय सुविधाएं भी नहीं दी जाती हैं, हालांकि लौटने वाला हर कोई घोषित अपराधी नहीं होता है। पड़ोसी बांग्लादेश की बात करें तो, इज़रायली हमलों के जारी रहने के कारण लेबनान में कम से कम 5000 लोगों की नौकरी चली गई। कम से कम 200 लोग स्वयं वापस चले गए क्योंकि प्रवासियों को जानलेवा काम के हालात में धकेला जा रहा था। यह स्थानीय श्रम कानूनों और नौकरी की शर्तों का खुला उल्लंघन था। साथ ही 'आपातकाल' के नाम पर अक्सर वेतन में कटौती भी की जाती थी। मध्य पूर्व में प्रवासी संगठनों के एच आर ग्रुपों और प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि लेबनान और आस-पास के इलाकों में 11 बांग्लादेशी कामगार मारे गए, जबकि कई घायल हुए, जिन पर स्थानीय अधिकारियों ने बहुत कम ध्यान दिया। अप्रशिक्षित कामगारों को सहयोगी, रेस्क्यू स्टाफ और दूसरे कामों के तौर पर समुद्री झड़पों में भी हिस्सा लेने के लिए मजबूर किया गया था। ऐसा लगता है कि ऐसे मामलों में कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं थी। सिर्फ़ एक मामले में फिलिपिनो कामगार के एक ग्रुप ने ऐसे आदेश मानने से मना कर दिया था। एचआर ग्रुपों का आरोप है कि कई बमबारी और मिसाइलों और ड्रोन हमलों के खतरनाक आदान-प्रदान के दौरान मरने वाले ज़्यादातर पीड़ित आर्थिक रूप से कमज़ोर प्रवासी कामगारों के असुरक्षित ग्रुप से थे। अलग-अलग अन्तरराष्ट्रीय प्राधिकारी, देश के प्रमुखों, संयुक्त और दूसरी संस्थाओं से बार-बार गुहार लगाने पर कोई जवाब नहीं मिला। कामगारों के लिए एक और चिंता यह थी कि क्या प्रवासियों को रखने वाले देश उनके ज़िंदा रहते हुए उनकी बुरी हालत के प्रति लगभग पूरी तरह से बेपरवाह होने के मद्देनजर उनके बकाए का इंतज़ाम भी करेंगे। ऐसे डर से इन्कार नहीं किया जा सकता। न सिफ़र् आपूर्तिकर्ता देश को कानूनी तौर पर मिलने वाले पैसे के सवाल पर नुकसान होगा, बल्कि घर पर पीड़ितों के परिवारों को भी बहुत ज़्यादा तकलीफ़ होगी। कई परिवार विदेश में नौकरी करके पैसे कमाने के लिए किसी सदस्य को भेजने और सक्षम बनाने हेतु भारी-भरकम कर्ज भी लेते हैं।
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मनोरंजन जगत से सामने आई बेहद दुखद खबर! Asia की सबसे बड़ी फिल्म सिटीके संस्थापकRamoji Rao का हुआ निधन
Cannes Film Festival 2024 : सिनेमैटोग्राफी के लिए पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई बनें संतोष सिवन
Cannes Film Festival 2024: बॉलीवुड के जानेमाने फिल्म सिनेमैटोग्राफर और निर्देशक कान फिल्म फेस्टिवल में सिनेमैटोग्राफी के लिए पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई बन गए हैं। संतोष सिवन को 77वें कान फिल्म फेस्टिवल 2024 में 'सिनेमैटोग्राफी' में प्रतिष्ठित ...

