Asian Market Today: शुक्रवार, 21 अगस्त को एशियाई शेयरों में गिरावट आई। वॉल स्ट्रीट के बेंचमार्क इंडेक्स गुरुवार को बॉन्ड यील्ड के निचले स्तर से वापस ऊपर आने के कारण काफी नीचे बंद हुए थे। MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.2% गिर गया। कोस्पी (Kospi) ने इस ट्रेंड के उलट 0.87% की बढ़त दर्ज की, जबकि जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 0.90% और टोपिक्स (Topix) 0.31% नीचे आ गया। हैंग सेंग (Hang Seng) फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।S&P 500 इंडेक्स में रात भर में 0.9% की गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण वॉलमार्ट (Walmart) था। कमजोर बिक्री के आंकड़ों के बाद इसमें 2022 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। नैस्डैक 100 (Nasdaq 100) में 0.7% की गिरावट आई, जो लगातार पांचवें दिन की गिरावट थी।US ट्रेजरी में शुरुआती तेजी के बाद एशियाई बॉन्ड गिरे और अमेरिकी डॉलर कमजोर बना रहा। निवेशकों के मन में यह सवाल था कि क्या लंबे समय के कर्ज की अमेरिकी बायबैक (buyback) प्रक्रिया से उधार लेने की लागत में केवल कुछ समय के लिए ही राहत मिलेगी।ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में बॉन्ड की शुरुआत गिरावट के साथ हुई, क्योंकि गुरुवार को US 30-वर्षीय यील्ड में बढ़ोतरी हुई थी, भले ही US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भविष्य में बड़े बायबैक और एक नए फिस्कल प्लान का संकेत दिया था।30-वर्षीय यील्ड छह बेसिस पॉइंट बढ़कर 5.25% हो गई, जिससे ट्रेजरी के बायबैक बढ़ाने के अचानक फैसले से आई गिरावट का असर काफी हद तक खत्म हो गया।जापानी येन स्थिर रहा क्योंकि देश का मुख्य महंगाई सूचकांक लगातार दूसरे महीने बढ़ा, जिससे बैंक ऑफ जापान द्वारा जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बनी रही। बाजार अब सितंबर में संभावित कदम पर नजर रखे हुए हैं। येन 158.96 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि पिछले सत्र में यह 159 के स्तर को पार कर गया था।ऑफशोर युआन 6.7238 प्रति डॉलर पर लगभग स्थिर रहा।टेक्नोलॉजी शेयरों में सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) पर ध्यान केंद्रित रहा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी शुक्रवार को 110 ट्रिलियन वॉन ($79 बिलियन) तक का शेयरधारक रिटर्न पैकेज पेश करने वाली थी। इस बीच, ईरान के खिलाफ़ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक युद्ध की धमकी के कारण पांच दिनों तक कीमतों में आई तेज़ी के बाद तेल की कीमतें कुछ कम हुईं। ट्रंप ने कहा था कि तेहरान ने एक डील को ठुकरा दिया है।ब्रेंट क्रूड 0.7% गिरकर $93.10 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि गुरुवार को कारोबार के दौरान यह $94 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.7% गिरकर $86.19 प्रति बैरल पर आ गया।(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Mayank Chakraborty ने Asian Chess में जीत से किया आगाज, विग्नेश का ड्रॉ
शीर्ष वरीय मयंक चक्रवर्ती ने बृहस्पतिवार को यहां एशियाई जूनियर क्लासिकल चैंपियनशिप में शानदार जीत के साथ अपने अभियान की शुरुआत की जबकि दो प्रमुख दावेदारों विग्नेश अद्वैत वेमुला और अखिलबे इमांगली को कम रैंकिंग वाले प्रतिद्वंद्वियों ने ड्रॉ पर रोक दिया। विग्नेश को नीमाय भानुशाली ने ड्रॉ पर रोका जबकि कजाखस्तान के इमांगली को रिशान जैन के साथ अंक बांटने पड़े। लड़कियों के वर्ग के शुरुआती दौर में कुछ उलटफेर देखने को मिले। स्वरा लक्ष्मी एस नायर को उनसे काफी कम रेटिंग वली वकचेरी मोहिता ने ड्रॉ पर रोक दिया जबकि आद्या गौड़ा ने अधिक रेटिंग वाली डब्ल्यूएफएम मृत्तिका मलिक को हराया। एक अन्य उलटफेर में उज्बेकिस्तान की लिलिया बेलाया ने भारत की अपने से अधिक रेटिंग वाली अर्चिता अग्रवाल को शिकस्त दी। ओपन चैंपियनशिप में नौ महासंघों के 85 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। इसे भी पढ़ें: ASEAN Chess: भारत की अंडर-11 बालिका टीम ने सिंगापुर में जीता कांस्य पदक प्रतियोगिता में छह अंतरराष्ट्रीय मास्टर और 11 फिडे मास्टर शामिल हैं जिससे यह एशिया की सबसे मजबूत जूनियर प्रतियोगिताओं में से एक बन गई है। भारत के शीर्ष वरीय अंतरराष्ट्रीय मास्टर मयंक चक्रवर्ती 2500 रेटिंग अंक के साथ शीर्ष खिलाड़ी हैं। चैंपियनशिप का उद्घाटन ग्रैंडमास्टर विदित गुजराती ने किया जिन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना गया है।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर की जम्मू-कश्मीर यात्रा ने चीनी-पाकिस्तानी चालों को किया दुरुस्त!
जरा गौर कीजिए, जब चीन अरुणाचल प्रदेश में भारत को आंखें दिखा रहा हो, जब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का जम्मू-कश्मीर/लद्दाख पहुंचना और जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताना भारतीय कूटनीति की कितनी बड़ी सफलता है, क्योंकि यह परोक्ष रूप से चीन को संदेश है कि भारत का साथ मिलते ही अमेरिका अन्य एशियाई 'बदमाशों' को रौंद डालेगा। उधर, पाकिस्तान को संदेश है कि इस्लामिक नाटो उसकी सुरक्षा की गारंटी नहीं बनेगा, यदि अमेरिका खुलकर भारत के साथ खड़ा रहेगा। जी हां, अमेरिकी राजदूत की 19–20 अगस्त 2026 की जम्मू-कश्मीर और लद्दाख यात्रा को केवल एक राजनयिक दौरा मानना पर्याप्त नहीं होगा। इसे भी पढ़ें: Sergio Gor के बयान से तिलमिलाये Pakistan ने Trump Administration पर उतारी भड़ास, US Diplomat Natalie Baker को तलब कर थमाया Strong Demarche खासकर श्रीनगर में उनका यह कहना कि जम्मू-कश्मीर “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” है और अमेरिकी यात्रा-परामर्श की समीक्षा के संकेत देना, वाशिंगटन के पुराने कश्मीर-संबंधी सार्वजनिक रुख की तुलना में महत्वपूर्ण राजनीतिक-सामरिक संकेत देता है। इससे कई सवाल उपजते हैं, जिनके निहितार्थ को समझना भी जरूरी है:- पहला सवाल है कि क्या वास्तव में अमेरिकी स्टैंड बदल गया है? तो जवाब होगा कि अपेक्षित सावधानी जरूरी है। अभी इसे अमेरिका की औपचारिक कश्मीर-नीति में पूर्ण परिवर्तन कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन राजनयिक भाषा और व्यवहार में बदलाव का संकेत स्पष्ट है। पहले अमेरिकी नीति का सार्वजनिक ढांचा मुख्यतः यह रहा कि कश्मीर भारत-पाकिस्तान के बीच विवादित विषय है और दोनों देशों को बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। 2019 के बाद भी अमेरिकी अधिकारियों ने इस मूल स्थिति को बनाए रखा था। इसके विपरीत, गोर ने भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर में जाकर उसे “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” कहा। पाकिस्तान ने इसे अमेरिकी पारंपरिक रुख से विचलन मानते हुए अमेरिकी प्रभारी राजदूत को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। इसलिए फिलहाल इसे “नीति परिवर्तन” से अधिक “नीति-संकेत में परिवर्तन” कहना उचित होगा। दूसरा सवाल है कि इस यात्रा का सबसे बड़ा संदेश क्या है? क्या कश्मीर को जमीन पर देखकर आकलन हुआ है? तो जवाब होगा कि गोर का दौरा छह साल से अधिक अंतराल के बाद किसी अमेरिकी राजदूत की कश्मीर यात्रा है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की और सुरक्षा व्यवस्था तथा बदलते माहौल का प्रत्यक्ष आकलन किया। यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि अमेरिका की कश्मीर संबंधी धारणा अब केवल इस्लामाबाद, नई दिल्ली या अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों पर निर्भर नहीं रह सकती। राजदूत का स्वयं श्रीनगर जाना और फिर सुरक्षा स्थिति पर सकारात्मक टिप्पणी करना वाशिंगटन के नीति-निर्माताओं को एक अलग जमीनी इनपुट देता है। तीसरा सवाल यह है कि Travel Advisory में बदलाव—छोटा दिखने वाला बड़ा संकेत है? तो जवाब होगा कि गोर ने जम्मू-कश्मीर के लिए अमेरिकी यात्रा-परामर्श की समीक्षा के संकेत दिए हैं। अगर आगे अमेरिका अपने मौजूदा “Do Not Travel” स्तर को नीचे करता है, तो इसका असर केवल अमेरिकी पर्यटकों पर नहीं पड़ेगा। यह संदेश जाएगा कि सुरक्षा परिस्थितियों में सुधार हुआ है। सामान्य आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। पर्यटन के लिए क्षेत्र अधिक खुल रहा है। अंतरराष्ट्रीय जोखिम-धारणा बदल रही है। यानी कश्मीर के लिए यह सुरक्षा से पर्यटन और पर्यटन से निवेश की दिशा में सकारात्मक कूटनीतिक संकेत बन सकता है। चौथा सवाल यह है कि क्या यह परिदृश्य पाकिस्तान के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका है? तो कहना न होगा कि इस बयान की सबसे तीखी प्रतिक्रिया पाकिस्तान से आई है। इस्लामाबाद ने इसे अपनी दशकों पुरानी कश्मीर कूटनीति के प्रतिकूल माना और अमेरिकी राजनयिक को तलब किया। पाकिस्तान के लिए समस्या सिर्फ गोर का बयान नहीं है, बल्कि समस्या यह है कि यदि अमेरिका जैसा प्रभावशाली देश धीरे-धीरे कश्मीर को “भारत-पाकिस्तान के विवाद” की भाषा से हटाकर “भारत के महत्वपूर्ण हिस्से” की भाषा में संबोधित करने लगे, तो पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक रणनीति कमजोर हो सकती है। पांचवां सवाल यह है कि क्या चीन का कोण भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता? तो जवाब होगा कि गोर का कार्यक्रम केवल श्रीनगर तक सीमित नहीं रहा; वह लद्दाख भी गए। यह समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि लद्दाख भारत-चीन सीमा-सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। इसलिए यात्रा का एक व्यापक संदेश यह भी हो सकता है कि अमेरिका भारत के पश्चिमी और उत्तरी दोनों रणनीतिक मोर्चों को अपने Indo-Pacific और South/Central Asia दृष्टिकोण से देख रहा है। छठा सवाल यह है कि क्या भारत-अमेरिका संबंधों में कश्मीर की भूमिका बदल सकती है? तो कहना न होगा कि यह घटनाक्रम भारत-अमेरिका संबंधों के उस व्यापक पुनर्संतुलन का हिस्सा हो सकता है जिसमेंआतंकवाद के विरुद्ध सहयोग, चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला, हिंद-प्रशांत रणनीति, रक्षा एवं तकनीकी साझेदारी, ऊर्जा एवं व्यापार, और दक्षिण एशिया में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं। गोर स्वयं भारत में अमेरिकी राजदूत होने के साथ South and Central Asian Affairs के Special Envoy भी हैं। इसलिए उनकी टिप्पणी का महत्व सामान्य राजदूत की टिप्पणी से अधिक माना जा सकता है। सातवां सवाल यह है कि क्या भारत को अति-उत्साहित होने से भी बचना होगा? तो जवाब होगा कि यहां एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सावधानी बरतनी जरूरी है क्योंकि एक राजदूत का बयान अमेरिकी सरकार की पूरी औपचारिक विदेश नीति का विकल्प नहीं होता। जब तक अमेरिकी विदेश विभाग या व्हाइट हाउस अपनी आधिकारिक नीति में स्पष्ट बदलाव घोषित नहीं करता, तब तक यह कहना कि “अमेरिका ने कश्मीर पर पाकिस्तान को छोड़कर भारत का पक्ष ले लिया है” अतिशयोक्ति होगी। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि अमेरिकी सार्वजनिक कूटनीतिक भाषा में एक उल्लेखनीय बदलाव दिखाई दे रहा है। आठवां सवाल यह है कि सबसे बड़ा रणनीतिक निहितार्थ क्या है? तो जवाब होगा कि मेरे आकलन में इस यात्रा का वास्तविक महत्व चार शब्दों में है: “Narrative → Ground Reality → Policy.” यदि अमेरिका को जमीनी स्तर पर कश्मीर में सुरक्षा, राजनीतिक प्रक्रिया, पर्यटन और आर्थिक सामान्यीकरण दिखाई देता है और उसके आधार पर उसकी यात्रा चेतावनी कम होती है, तो धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव भी बदल सकता है। यही भारत के लिए सबसे बड़ा कूटनीतिक लाभ होगा। निष्कर्षतः, सर्जियो गोर की कश्मीर यात्रा को भारत की कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे अभी अमेरिकी कश्मीर नीति का अंतिम परिवर्तन घोषित करना जल्दबाजी होगी। असली परीक्षा अगले चरण में होगी—क्या Washington अपनी आधिकारिक भाषा बदलेगा, क्या travel advisory घटेगी और क्या भविष्य में अमेरिकी अधिकारी कश्मीर को भारत के आंतरिक प्रशासनिक-सुरक्षा संदर्भ में अधिक स्पष्टता से देखेंगे? अगर इन तीनों प्रश्नों का उत्तर “हाँ” होता है, तो गोर की यह यात्रा दक्षिण एशिया की कूटनीति में एक महत्वपूर्ण turning point सिद्ध हो सकती है। # क्या ईरान में पिटी अमेरिकी भद्द और पाकिस्तान के दोगले रवैये से अचंभित अमेरिका ने ऐसा किया हाँ—इसे एक संभावित कारण के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन निर्णायक कारण कहना अभी जल्दबाजी होगी। उपलब्ध घटनाक्रम को जोड़ें तो अमेरिकी सोच में पाकिस्तान को लेकर विश्वसनीयता का प्रश्न जरूर उभरता है। सवाल है कि क्या ईरान प्रकरण ने अमेरिका को पाकिस्तान को नए नजरिये से देखने पर मजबूर किया? जवाब होगा कि ईरान-अमेरिका संकट में पाकिस्तान ने एक तरफ अमेरिका के साथ संवाद और मध्यस्थता की भूमिका निभाई, जबकि दूसरी तरफ ईरान के प्रति अपनी निकटता और क्षेत्रीय हितों को भी साधता रहा। विशेषज्ञों ने भी पाकिस्तान की निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं—विशेषकर ईरान, अफगानिस्तान और सऊदी अरब से उसके एक साथ जुड़े हितों को देखते हुए। यानी Washington के लिए संदेश यह हो सकता है कि पाकिस्तान को एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार की बजाय आवश्यकता पड़ने पर उपयोगी लेकिन स्वार्थ-आधारित साझेदार के रूप में देखना अधिक व्यावहारिक है। लेकिन कश्मीर पर गोर का बयान सिर्फ पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए? मेरे आकलन में नहीं। क्योंकि सर्जियो गोर ने श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर को “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” कहा और क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए अमेरिकी Travel Advisory की समीक्षा की बात कही। इसके बाद पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को बुलाकर औपचारिक विरोध दर्ज कराया और कहा कि यह अमेरिकी पारंपरिक कश्मीर-रुख के विपरीत है। इसलिए इसके पीछे कई परतें हो सकती हैं: 1. ईरान: पाकिस्तान की मध्यस्थता और दोहरे हितों से अमेरिकी रणनीतिक संदेह बढ़ा हो। 2. आतंकवाद: अमेरिका के लिए पाकिस्तान की उपयोगिता और विश्वसनीयता का मूल्यांकन फिर से हो रहा हो। 3. भारत: चीन के मुकाबले भारत का रणनीतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है। 4. कश्मीर: जमीनी सुरक्षा परिस्थितियों को देखकर अमेरिकी धारणा में बदलाव की शुरुआत हुई हो। 5. पाकिस्तान: Washington अब Islamabad को South Asia का अनिवार्य रणनीतिक केंद्र मानने की बजाय भारत को अधिक महत्व दे रहा हो। सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि यह बदलाव ईरान संकट के बाद पाकिस्तान की भूमिका बढ़ने के ठीक उसी दौर में दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाकर अपनी कूटनीतिक उपयोगिता बढ़ाने की कोशिश की थी। लेकिन यदि उसी समय अमेरिका का शीर्ष राजनयिक भारत में जाकर कहता है कि J&K भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, तो यह पाकिस्तान के लिए निश्चित रूप से बड़ा कूटनीतिक झटका है। इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि अमेरिका का संदेश है: “Pakistan may be useful, but India is strategically indispensable.” हालांकि अभी इसे अमेरिकी नीति का औपचारिक परिवर्तन नहीं कहा जा सकता। अगली निर्णायक परीक्षा यह होगी कि Washington अपनी आधिकारिक Kashmir language और Travel Advisory में वास्तव में क्या बदलाव करता है। और एक बड़ा प्रश्न इससे निकलता है—क्या ईरान संकट, पाकिस्तान की कथित दोहरी कूटनीति और चीन की बढ़ती चुनौती ने अमेरिका को अंततः यह समझा दिया है कि दक्षिण एशिया में पाकिस्तान से अधिक भरोसेमंद और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार भारत है? यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण यक्ष प्रश्न है। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
Asian Market Today: एशिया बाजार में रौनक, बॉन्ड यील्ड में नरमी से निक्केई 1% और कोस्पी 5% चढ़ा
Asian Market Today: 20 अगस्त को एशियाई शेयर बाजार में तेज़ी देखी गई। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लंबे समय वाले कर्ज़ को वापस खरीदने की योजना की घोषणा के बाद बॉन्ड मार्केट का दबाव कम हुआ, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा। MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स 0.8% ऊपर चढ़ा, जिसमें दक्षिण कोरियाई बाज़ार सबसे आगे रहे। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान कोस्पी (Kospi) में 3.86% की उछाल आई, जबकि जापान के निक्केई 225 में 0.95% और टोपिक्स (Topix) में 0.80% की बढ़त हुई। वहीं, हैंग सेंग फ्यूचर्स में 0.9% की बढ़ोतरी के संकेत मिले।वॉल स्ट्रीटबुधवार रात वॉल स्ट्रीट पर मज़बूत सेशन के बाद S&P 500 फ्यूचर्स में ज़्यादा बदलाव नहीं हुआ। इस तेज़ी को ट्रेजरी यील्ड में गिरावट से समर्थन मिला था। S&P 500 फ्यूचर्स में लगभग 0.1% की मामूली बढ़त हुई, जबकि नैस्डैक-100 फ्यूचर्स में 0.3% की बढ़ोतरी हुई। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स भी 19 अंक या 0.04% ऊपर चढ़ा।इससे पहले दिन में, S&P 500 ने लगातार तीन सेशन की गिरावट का सिलसिला खत्म किया, क्योंकि लंबे समय वाले अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड कई सालों के उच्चतम स्तर से नीचे आ गए। बॉन्ड मार्केट में हालिया बिकवाली के बाद दबाव कम करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बाद यील्ड में यह गिरावट आई।कच्चे तेल की कीमतेंगुरुवार को शुरुआती एशियाई कारोबार में तेल की कीमतें ज़्यादातर स्थिर रहीं। निवेशक अमेरिका-ईरान युद्ध की संभावित दिशा और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से शिपिंग की सुरक्षा को लेकर चिंताओं पर विचार कर रहे थे।अक्टूबर डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 25 सेंट या 0.3% बढ़कर $91.87 प्रति बैरल हो गया। वहीं, सितंबर के लिए अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 2 सेंट गिरकर $85.81 प्रति बैरल पर आ गया। ज़्यादा सक्रिय रूप से ट्रेड होने वाला अक्टूबर WTI कॉन्ट्रैक्ट 14 सेंट या 0.2% बढ़कर $84.53 प्रति बैरल हो गया। बुधवार को ब्रेंट और WTI, दोनों में लगातार चौथे सेशन में बढ़त देखी गई और ये 24 जुलाई के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर बंद हुए। सितंबर WTI कॉन्ट्रैक्ट गुरुवार को बाद में एक्सपायर होने वाला है।US-ईरान युद्धट्रंप ने कहा कि इन कदमों का मतलब अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध और अलग-थलग करना होगा। उन्होंने इसे ECONOMIC D-DAY बताया और सभी US सहयोगियों से वॉशिंगटन का समर्थन करने को कहा।उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश वित्तीय संस्थानों, कंपनियों, एयरपोर्ट या सरकारी निकायों को ईरान की मदद करने की इजाज़त देंगे, उन्हें गंभीर आर्थिक नतीजों का सामना करना पड़ेगा, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि ये सज़ाएं क्या होंगी। ट्रंप ने ईरान का समर्थन करने वाली गतिविधियों, जैसे तस्करी, कैश ट्रांसफर, एक्सचेंज हाउस के ऑपरेशन और शिप रजिस्ट्री के इस्तेमाल को खत्म करने की भी मांग की।आज सोने का भावगुरुवार को सोने की कीमतें दो महीने से ज़्यादा के उच्चतम स्तर के करीब बनी रहीं। US ट्रेज़री की ओर से लिक्विडिटी सपोर्ट की अचानक घोषणा के बाद बॉन्ड यील्ड और डॉलर में गिरावट आई।0031 GMT पर स्पॉट गोल्ड की कीमत $4,512.19 प्रति औंस पर लगभग स्थिर रही, जबकि सेशन की शुरुआत में यह $4,525.79 तक पहुंच गई थी, जो 2 जून के बाद इसका उच्चतम स्तर था। बुधवार को इस कीमती धातु की कीमत में 4% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई थी। आम तौर पर जियोपॉलिटिकल और आर्थिक अनिश्चितता के समय सोने को फायदा होता है क्योंकि निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश करते हैं, जबकि ऊंची ब्याज दरों से इसकी मांग पर असर पड़ सकता है क्योंकि सोने से कोई ब्याज आय नहीं होती है।Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
एशियाई यूथ हैंडबॉल में राजस्थान के मानवेन्द्र सिंह करेंगे देश का प्रतिनिधित्व, टीम जॉर्डन रवाना
पावना स्पोर्ट्स फाउंडेशन की गोल्डन ईगल हैंडबॉल अकैडमी के लिए अनुबंधित विदेशी कोच पुर्तगाल के फर्नांडो नुएनस भारतीय टीम के कोच के रूप में गए है। अन्य प्रशिक्षकों में पी. कीर्ति वेंकटेश (गोल्डन ईगल-अलीगढ़), मोहम्मद तौहीद (उत्तर प्रदेश), नवीन मलिक (इंडियन रेलवे) है।
Asian Market Today: चिप शेयरों में भारी बिकवाली से एशियाई शेयर धड़ाम, कोस्पी 5% से ज़्यादा टूटा
Asian Market Today: 19 अगस्त को एशियाई शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट आई। इसकी मुख्य वजह सेमीकंडक्टर शेयरों में आई जबरदस्त गिरावट रही, जो बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और तेल की कीमतों में तेज़ी के कारण और बढ़ गई। इन दोनों ही बातों ने निवेशकों का भरोसा कम कर दिया। यह गिरावट अमेरिकी टेक शेयरों में हुई भारी बिकवाली के बाद आई है, जिसमें टेक-प्रधान नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स 1.33% गिर गया।जिसमें दक्षिण कोरिया के बाज़ारों में सबसे ज़्यादा गिरावट देखी गई। कोस्पी (Kospi) में शुरुआती कारोबार में ही 5.89% की भारी गिरावट आई, जबकि स्मॉल-कैप कोस्डैक (Kosdaq) 3.62% गिर गया, जिससे कुछ समय के लिए ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। सैमसंग और SK हाइनिक्स जैसे प्रमुख कोस्पी शेयरों में क्रमशः 7% और 5% से ज़्यादा की गिरावट आई।जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 1.04% नीचे आया, जबकि व्यापक टोपिक्स (Topix) में 1.01% की गिरावट हुई। ऑस्ट्रेलिया का बेंचमार्क S&P/ASX 200 भी 0.50% गिरकर खुला।एशियाई टेक्नोलॉजी शेयरबुधवार को एशियाई टेक्नोलॉजी शेयरों में गिरावट आई, जो US की संबंधित कंपनियों में आई गिरावट के अनुरूप थी, क्योंकि ग्लोबल बॉन्ड में बिकवाली का असर बाज़ार के सेंटीमेंट पर पड़ा।जापान में, सॉफ्टबैंक ग्रुप 5.44% गिरा, जबकि चिप उपकरण बनाने वाली कंपनी टोक्यो इलेक्ट्रॉन 3.85% नीचे आई। एडवांटेस्ट में 3.93% की गिरावट आई और मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनी किओक्सिया (Kioxia) 9.13% गिर गई।दक्षिण कोरियाई टेक्नोलॉजी शेयरों पर भी दबाव रहा, जिसमें SK हाइनिक्स 8.66% और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स 7.08% गिरे। सियोल सेमीकंडक्टर में 4.33% की गिरावट आई। हाल के सेशन में टेक्नोलॉजी शेयरों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिसमें दक्षिण कोरिया का सेमीकंडक्टर-केंद्रित बाजार भारी गिरावट और रिकॉर्ड ऊंचाई के बीच तेजी से ऊपर-नीचे हो रहा है।वॉल स्ट्रीटमंगलवार रात US स्टॉक फ्यूचर्स में ज़्यादा बदलाव नहीं हुआ, क्योंकि प्रमुख इंडेक्स में लगातार तीसरे सत्र में गिरावट दर्ज की गई थी। ग्लोबल बॉन्ड की बिकवाली और तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों के सेंटीमेंट को कमज़ोर बनाए रखा।डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स में 2 अंकों की मामूली बढ़त हुई, जबकि S&P 500 फ्यूचर्स स्थिर रहे। वहीं, नैस्डैक 100 फ्यूचर्स 0.2% नीचे आए।वॉल स्ट्रीट का पिछला सत्र गिरावट के साथ बंद हुआ था, जिसमें डाऊ 116 अंक या 0.2% गिरा था। S&P 500 में 0.7% की गिरावट आई, जबकि नैस्डैक कम्पोजिट सबसे ज़्यादा 1.3% गिरा।कच्चे तेल की कीमतेंबुधवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई, जिससे सप्लाई को लेकर चिंताओं के बीच लगातार चौथे सेशन में भी बढ़त जारी रही। निवेशक सतर्क रहे क्योंकि तेहरान और वाशिंगटन से मिले विरोधाभासी संकेतों ने इस बात को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी कि क्या होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) शिपिंग के लिए खुला रहेगा।ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 26 सेंट या 0.29% बढ़कर $91.28 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 37 सेंट बढ़कर $85.31 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।मंगलवार को दोनों बेंचमार्क 24 जुलाई के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर बंद हुए थे, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की कम होती उम्मीदों ने तेल की कीमतों को सहारा देना जारी रखा।US-ईरान युद्धअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है और उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है, जो तेहरान के इस दावे के विपरीत है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग अभी भी बंद है।दोनों पक्षों के बीच अस्थायी युद्धविराम सोमवार को खत्म हो गया। रॉयटर्स के अनुसार, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राजनयिक गतिरोध के बीच, ईरान पूरी तरह से आक्रामक सैन्य रुख अपना रहा है। हालांकि, मंगलवार को किसी भी पक्ष की ओर से नए हमले की खबर नहीं मिली।होर्मुज जलडमरूमध्य तक पहुंच को लेकर चिंताओं के बीच, इराक के मंत्रिमंडल ने कई निर्यात मार्गों का उपयोग करके विशेष अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कंपनियों के माध्यम से अपने कच्चे तेल के निर्यात के लिए एक नई व्यवस्था को मंजूरी दी। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जारी सरकारी बयान के अनुसार, इस व्यवस्था के तहत अनुबंध 1 सितंबर से शुरू होकर तीन महीने के लिए मान्य होंगे।आज सोने की कीमतबुधवार को एशियाई बाजार में शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतों में बढ़ोतरी हुई क्योंकि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड अपने हालिया उच्चतम स्तर से नीचे आ गई। निवेशकों की नजर फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स (कार्यवृत्त) के आने वाले प्रकाशन पर भी टिकी रही।पिछले सेशन में लगभग 2% की गिरावट के बाद थोड़ी रिकवरी करते हुए स्पॉट गोल्ड 0.2% बढ़कर $4,342.33 प्रति औंस हो गया। इस बीच, दिसंबर डिलीवरी के लिए US गोल्ड फ्यूचर्स 0.6% गिरकर $4,396.30 पर आ गया।(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
इंटरनेट डेस्क। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स 2026 के लिए अपनी टीम का ऐलान कर दिया है। एसीबी ने सोशल मीडिया के जरिए 15 सदस्यीय अफगानी टीम की घोषणा की। टूर्नामेंट का आयोजन 24 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026 तक होगा। इस टीम की कमान दरवेश रसूली को सौंपी गई है, वहीं इशाक रहीमी को विकेटकीपर के तौर पर टीम में शामिल किया गया है। टीम में नजीबुल्लाह जादरान, करीम जनत और नांगेयालिया खारोटी जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं। अफगानिस्तान की टीम में ज्यादातर युवा खिलाड़ियों को मौका दिया गया है, जिन्होंने हाल ही में हुई शपागीजा क्रिकेट लीग 2026 के 11वें संस्करण में शानदार प्रदर्शन किया था। अफगानिस्तान की 15 सदस्यीय टीम दरविश रसूली (कप्तान), इशाक रहीमी (विकेटकीपर), हसन ईसाखिल, मोहम्मद अकरम, इमरान मीर, खालिद तनिवाल, फैसल शिनोजादा, नजीब जादरान, फरमानुल्लाह सफी, करीम जनत, इस्मत आलम, नांगेयालिया खरोटी, अरब गुल, फरीदून दाऊदजई और अब्दुल्लाह अहमदजई pc- jansatta
Anahat on Asian Games: क्या एशियाड में पदक जीत पाएंगी अनाहत सिंह? तैयारियों को लेकर दिया बयान
अनाहत पहले भी एशियन गेम्स में हिस्सा ले चुकी हैं और उस टूर्नामेंट की यादों ने उन्हें इस कॉन्टिनेंटल इवेंट में वापसी के लिए और उत्साहित किया है।
गन्तव्य देशों के हालात खराब होने से दक्षिण एशियाई प्रवासन में कमी
आशीष विश्वास अमेरिका और यूरोपीय देशों में अपनाई गई सरकारी नीति में नए ज़ोर की वजह से, लगभग बिना हुनर वाले आम दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए स्थितियां असल में मुश्किल हो गई हैं। इसका मकसद सालों से वहां गैर-कानूनी ढंग से रह रहे एशियाई लोगों को बाहर निकालना है। ज़्यादातर मौजूदा सरकारों पर दक्षिणपंथियों का ज़ोरदार दबाव है। हाल के दिनों में अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व में दक्षिण एशियाई लोगों के लिए प्रवासन और वहां जाकर नौकरी पाना मुश्किल होता जा रहा है, जो बड़े झगड़ों और लगातार सामाजिक उथल-पुथल और अशांति का सीधा नतीजा है। इस इलाके के बड़े देशों की तरह, भारत और बांग्लादेश पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। लंबे समय में दोनों देशों के सामने दोहरी चुनौती है: घरेलू श्रम बाजार में नौकरी के लिए बेचैनी और बढ़ जाएगी, क्योंकि वे बड़ी आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। साथ ही प्रवासी कामगारों द्वारा घर भेजे जाने वाली बड़ी राशि (रेमिटेंस) से होने वाली अच्छी-खासी आय भी समय के साथ कम हो जाएगी। खबरें हैं कि कम से कम 1500 और भारतीयों को अल्पावधि में अमेरिका से वापस भेजा जा रहा है और केनडा में भी हालात बेहतर नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि नौकरी के मौके कम हो रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों में अपनाई गई सरकारी नीति में नए ज़ोर की वजह से, लगभग बिना हुनर वाले आम दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए स्थितियां असल में मुश्किल हो गई हैं। इसका मकसद सालों से वहां गैर-कानूनी ढंग से रह रहे एशियाई लोगों को बाहर निकालना है। ज़्यादातर मौजूदा सरकारों पर दक्षिणपंथियों का ज़ोरदार दबाव है, क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टियों पर गैर-कानूनी प्रवासन को बढ़ावा देने का आरोप लगता है। आरोप है कि पहले से ही स्थानीय संस्कृति के कमज़ोर होने और गंभीर सुरक्षा चिंताओं जैसी स्थानीय समस्याएं हैं। ज़्यादातर हाथ से काम करने वाले अस्थायी कामों में लगे, हज़ारों प्रवासी ऐसे कमज़ोर लक्ष्य बन गए हैं जिन्हें तुरंत और बिना किसी औपचारिकता के वापस भेजा जा सकता है। यह विकसित देशों में अपनी मौजूदा समस्याओं के समाधान के लिए शासन और नीतिगत कदमों का नतीजा है। यूनाइटेड किंगडम से लेकर अमेरिका तक, उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों और प्रवासियों के लिए वीज़ा मिलना नए कड़े कानूनों से प्रभावित हुआ है, पढ़ाई की फीस बहुत ज़्यादा बढ़ा दी गई है और कानूनी तौर पर स्थायी रूप से रहने का अधिकार कम कर दिया गया है। प्रवासियों के खिलाफ नकारात्मक रूझान सिर्फ़ पश्चिमी देशों तक ही सीमित नहीं है। दिसंबर 2025 तक, सऊदी अरब से किसी न किसी वजह से करीब 11,000 से ज़्यादा भारतीयों को वापस उनके अपने देशों में भेजा जा चुका था, जो एक रिकॉर्ड है। अमेरिका ने उसी समय तक करीब 3800 भारतीयों को वापस भेजा था। साफ़ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कही गई अच्छी दोस्ती का अमेरिका-भारत के आपसी रिश्तों के सभी मामलों में कोई खास फ़र्क नहीं पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि म्यांमार ने करीब 1600 'गैर-कानूनीÓ रूप से वहां रह रहे भारतीयों को वापस भेजा, जबकि मलेशिया और यूएई ने 2025 में करीब 1600 लोगों को वापस भेजा। भारत सरकार और अन्य स्रोतों का दावा है कि कई भारतीय अपनी मज़ीर् से भी अपने गोद लिए हुए देशों को छोड़ रहे हैं। इसकी वजहें हैं बेकाबू महंगाई, जिससे रहने का खर्च बढ़ रहा है, मुश्किल समय में काम का बोझ बढ़ रहा है, अधिकारियों की तरफ़ से बढ़ती परेशानी और घर पैसे भेजने में भारी कमी का आना। इसका मतलब यह नहीं है कि वे भारत के बाहर मौके नहीं देख रहे हैं। दुबई एक पसंदीदा नई जगह है। केनडा से 2025 में लगभग 2830 भारतीय लौटे, जबकि पिछले साल यह संख्या 2000 थी। कुछ मामलों में केनाडाई अधिकारियों के तरीकों पर शक जताते हुए, भारत सरकार ने प्रवासियों को वापस भेजने के दौरान अपनाए गए तरीकों पर भी कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें वापस भेजे गए लोगों को वापस आने के दौरान कोई सुविधाएं नहीं दी जाती हैं। यहां तक कि हमेशा मूलभूत मानवीय सुविधाएं भी नहीं दी जाती हैं, हालांकि लौटने वाला हर कोई घोषित अपराधी नहीं होता है। पड़ोसी बांग्लादेश की बात करें तो, इज़रायली हमलों के जारी रहने के कारण लेबनान में कम से कम 5000 लोगों की नौकरी चली गई। कम से कम 200 लोग स्वयं वापस चले गए क्योंकि प्रवासियों को जानलेवा काम के हालात में धकेला जा रहा था। यह स्थानीय श्रम कानूनों और नौकरी की शर्तों का खुला उल्लंघन था। साथ ही 'आपातकाल' के नाम पर अक्सर वेतन में कटौती भी की जाती थी। मध्य पूर्व में प्रवासी संगठनों के एच आर ग्रुपों और प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि लेबनान और आस-पास के इलाकों में 11 बांग्लादेशी कामगार मारे गए, जबकि कई घायल हुए, जिन पर स्थानीय अधिकारियों ने बहुत कम ध्यान दिया। अप्रशिक्षित कामगारों को सहयोगी, रेस्क्यू स्टाफ और दूसरे कामों के तौर पर समुद्री झड़पों में भी हिस्सा लेने के लिए मजबूर किया गया था। ऐसा लगता है कि ऐसे मामलों में कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं थी। सिर्फ़ एक मामले में फिलिपिनो कामगार के एक ग्रुप ने ऐसे आदेश मानने से मना कर दिया था। एचआर ग्रुपों का आरोप है कि कई बमबारी और मिसाइलों और ड्रोन हमलों के खतरनाक आदान-प्रदान के दौरान मरने वाले ज़्यादातर पीड़ित आर्थिक रूप से कमज़ोर प्रवासी कामगारों के असुरक्षित ग्रुप से थे। अलग-अलग अन्तरराष्ट्रीय प्राधिकारी, देश के प्रमुखों, संयुक्त और दूसरी संस्थाओं से बार-बार गुहार लगाने पर कोई जवाब नहीं मिला। कामगारों के लिए एक और चिंता यह थी कि क्या प्रवासियों को रखने वाले देश उनके ज़िंदा रहते हुए उनकी बुरी हालत के प्रति लगभग पूरी तरह से बेपरवाह होने के मद्देनजर उनके बकाए का इंतज़ाम भी करेंगे। ऐसे डर से इन्कार नहीं किया जा सकता। न सिफ़र् आपूर्तिकर्ता देश को कानूनी तौर पर मिलने वाले पैसे के सवाल पर नुकसान होगा, बल्कि घर पर पीड़ितों के परिवारों को भी बहुत ज़्यादा तकलीफ़ होगी। कई परिवार विदेश में नौकरी करके पैसे कमाने के लिए किसी सदस्य को भेजने और सक्षम बनाने हेतु भारी-भरकम कर्ज भी लेते हैं।
Asia Cup और Asian Games 2026 के लिए बांग्लादेश महिला टीम का ऐलान, Nigar Sultana संभालेंगी कमान
Bangladesh Women Team : बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने आगामी ACC महिला एशिया कप 2026 और एशियन गेम्स 2026 के लिए अपनी महिला क्रिकेट टीम का ऐलान कर दिया है। सोमवार (17 अगस्त) को घोषित की गई इस 15 सदस्यीय टीम में निगार सुल्ताना ज्योतीको कप्तान और अनुभवी स्पिनर नाहिदा अख्तर को उपकप्तान बनाया गया है। बांग्लादेश ने दोनों बड़े टूर्नामेंटों के लिए अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं का संतुलित मिश्रण तैयार किया है। टीम में कई ऐसे खिलाड़ी शामिल हैं, जिन्होंने हाल ही में महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में अच्छा प्रदर्शन किया था। सोभना मोस्तरी और जुएरिया फिरदौसने इंग्लैंड में खेले गए महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया था और दोनों ने एशिया कप व एशियन गेम्स के लिए अपनी जगह बरकरार रखी है। वहीं शोर्ना अख्तर भी टीम की अहम खिलाड़ियों में शामिल हैं। अनुभवी ऑलराउंडर रितु मोनी टीम को बल्ले और गेंद दोनों से मजबूती देंगी। गेंदबाजी विभाग में मारूफा अख्तर तेज गेंदबाजी आक्रमण की अगुआई करेंगी। उनके साथ रितु मोनी और फरिहा इस्लाम त्रिस्ना भी तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी संभालेंगी। बांग्लादेश महिला टीमएशिया कप 2026 में अपने अभियान की शुरुआत 31 अगस्त को इंडोनेशिया के खिलाफ करेगी। टीम को ग्रुप बी में रखा गया है, जहां उसके साथ इंडोनेशिया, श्रीलंका और यूएई की टीमें मौजूद हैं।महिला एशिया कप 2026 के सभी मुकाबले दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले जाएंगे। वहीं एशियन गेम्स 2026 का आयोजन जापान के आइची-नागोया में 17 से 22 सितंबर तक किया जाएगा। बांग्लादेश की महिला टीम इस टूर्नामेंट में भी इसी 15 सदस्यीय दल के साथ उतरती नजर आएगी। Also Read: LIVE Cricket Score एशिया कप और एशियन गेम्स 2026 के लिए बांग्लादेश महिला टीम: निगार सुल्ताना ज्योती(कप्तान), नाहिदा अख्तर (उपकप्तान), दिलारा अख्तर, जुएरिया फर्डूस, शर्मिन अख्तर सुप्ता, सरमिन सुल्ताना, सोभना मोस्तरी, शोरना अख्तर, रितु मोनी, फाहिमा खातून, राबेया खान, मारूफा अख्तर, सुल्ताना खातून, शांजिदा अख्तर माघला और फरिहा इस्लाम त्रिस्ना।
Asian Games में मुख्य खिलाड़ियों को आराम देकर युवा टीम भेजेगा अफगानिस्तान
अफगानिस्तान ने दरविश रसूली की अगुवाई में जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेल 2026 के लिए 15 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। इस टीम में युवा खिलाड़ियों के साथ नजीबुल्लाह ज़दरान और करीम जनत जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी शामिल हैं। अफगानिस्तान ...
Afghanistan ने Asian Games 2026 के लिए घोषित की 15 सदस्यीय स्क्वाड, Darwish Rasooli बने नए कप्तान
जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स 2026 के पुरुष क्रिकेट इवेंट के लिए अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने टीम का ऐलान कर दिया है। 15 सदस्यीय टीम की कमान मध्यक्रम के बल्लेबाज दरवेश रसूली के हाथों में सौंपी गई है। एशियन गेम्स 2026 में पुरुष क्रिकेट टीम के मुकाबले 24 सितंबर से 1 अक्टूबर तक कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में खेले जाएंगे। इससे पहले, महिला क्रिकेट टीम के मुकाबले 17 से 22 सितंबर तक खेले जाने हैं। इस वेन्यू पर पहले पुरुष टी20 विश्व कप 2026 के ईस्ट एशिया-पैसिफिक सब-रीजनल क्वालिफायर हो चुके हैं। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) की नेशनल सिलेक्शन कमिटी ने सोमवार को 15 सदस्यों वाली टीम को मंजूरी दी और अनुभवी इंटरनेशनल खिलाड़ियों और नए टैलेंट के मिश्रण को चुना है। अनुभवी नजीबुल्लाह जादरान और ऑलराउंडर करीम जनत के साथ-साथ हाल ही में खत्म हुई श्पागीजा क्रिकेट लीग (एससीएल) 2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाले कई खिलाड़ियों को भी टीम में शामिल किया गया है। अच्छी फॉर्म में चल रहे टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज मोहम्मद अकरम को एससीएल में शानदार प्रदर्शन के कारण नेशनल टीम में जगह मिली है। उन्होंने 8 पारियों में 339 रन बनाए, जिसमें एक शतक और दो अर्धशतक शामिल थे। उनके साथ ऑलराउंडर इस्मत आलम को भी टीम में जगह दी गई है, जिन्होंने 294 रन बनाने के साथ-साथ 9 विकेट चटकाए। वह 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' भी रहे। एशियन गेम्स 2026 में पुरुष क्रिकेट टीम के मुकाबले 24 सितंबर से 1 अक्टूबर तक कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में खेले जाएंगे। इससे पहले, महिला क्रिकेट टीम के मुकाबले 17 से 22 सितंबर तक खेले जाने हैं। इस वेन्यू पर पहले पुरुष टी20 विश्व कप 2026 के ईस्ट एशिया-पैसिफिक सब-रीजनल क्वालिफायर हो चुके हैं। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) की नेशनल सिलेक्शन कमिटी ने सोमवार को 15 सदस्यों वाली टीम को मंजूरी दी और अनुभवी इंटरनेशनल खिलाड़ियों और नए टैलेंट के मिश्रण को चुना है। Also Read: LIVE Cricket Score एशियन गेम्स 2026 के लिए अफगानिस्तान टीम: दरविश रसूली (कप्तान), मोहम्मद इशाक (विकेटकीपर), मोहम्मद अकरम, हसन ईसाखिल, खालिद तानिवाल, इमरान मीर, फैसल खान शिनोजादा, नजीबुल्लाह जादरान, फरमानुल्लाह सफी, इस्मत आलम, करीम जनत, नांग्याल खरोती, अरब गुल मोमंद, फरीदून दाऊदजई और अब्दुल्ला अहमदजई। Article Source: IANS
AUS vs BAN: बांग्लादेश के मेहदी हसन मिराज ने रचा इतिहास, यह कारनामा करने वाले बने पहले एशियाई खिलाड़ी
इंटरेनट डेस्क। बांग्लादेश ने डार्विन में खेले गए पहले टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया को हराकर इतिहास रचा। ऑस्ट्रेलिया में बांग्लादेश ने पहली बार टेस्ट मैच जीता, इस ऐतिहासिक जीत में बांग्लादेश के स्पिन ऑलराउंडर मेहदी हसन मिराज ने महत्वपूर्ण योगदान दिया, और साथ ही इतिहास के पन्नों में अपना नाम भी दर्ज करा लिया। डार्विन में खेले गए पहले टेस्ट मैच में मेहदी हसन मिराज ने पहली पारी में सात नंबर पर बैटिंग करते हुए 154 गेंदों में 65 रन बनाए। वहीं दूसरी पारी में गेंदबाजी में धमाल मचाते हुए 66 रन देकर 5 विकेट चटकाए, इस दमदार प्रदर्शन से मेहदी हसन मिराज ने एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। बांग्लादेश के मेहदी हसन मिराज अब ऑस्ट्रेलिया में एक टेस्ट मैच में फिफ्टी लगाने और पांच विकेट लेने वाले पहले एशियाई स्पिनर बन गए हैं। टेस्ट क्रिकेट के 149 सालों के इतिहास में अब तक किसी भी एशियाई स्पिन ऑलराउंडर ने ऐसा नहीं किया था। अब तक 13 स्पिन ऑलराउंडर ऑस्ट्रेलिया में एक टेस्ट मैच में अर्धशतक लगाने और पांच विकेट लेने का कारनामा कर चुके हैं, हालांकि, इसमें कोई भी एशियाई खिलाड़ी नहीं शामिल है। PC- cricinfo.com
पाकिस्तान-श्रीलंका फेल, भारत एकमात्र एशियाई टीम; अब बांग्लादेश करना चाहता है ये ऐतिहासिक कारनामा
बांग्लादेश की नजरें ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज हराने पर है। अभी तक सिर्फ भारत ही एकमात्र ऐसी एशियन टीम है, जिसने यह कारनामा करके दिखाया है। पाकिस्तान-श्रीलंका हर बार फेल हुआ है।
एशियाई खेलों में इस बार भारत का दल छोटा रहेगा। आईओए ने 36 खेलों में 504 खिलाड़ियों की मंजूरी मांगी है। इनमें 275 पुरुष और 229 महिला खिलाड़ी हैं।
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
मनोरंजन जगत से सामने आई बेहद दुखद खबर! Asia की सबसे बड़ी फिल्म सिटीके संस्थापकRamoji Rao का हुआ निधन
Cannes Film Festival 2024 : सिनेमैटोग्राफी के लिए पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई बनें संतोष सिवन
Cannes Film Festival 2024: बॉलीवुड के जानेमाने फिल्म सिनेमैटोग्राफर और निर्देशक कान फिल्म फेस्टिवल में सिनेमैटोग्राफी के लिए पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई बन गए हैं। संतोष सिवन को 77वें कान फिल्म फेस्टिवल 2024 में 'सिनेमैटोग्राफी' में प्रतिष्ठित ...

