खेल डेस्क। गेंदबाजों के बाद आर्यवीर सहवाग (70 रन) और कप्तान लक्ष्य रायचंदानी (53 रन) की बेहतरीन अर्धशतकीय पारियां के दम पर भारत ने ओमान में अंडर-19 एशिया कप में आज नेपाल को दस विकेट से शिकस्त दी। मुकाबले में नेपाल ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत को 129 रनों का लक्ष्य भारतीय टीम को दिया, जिसे टीम इंडिया ने बिना कोई विकेट खोए 19.1 ओवर में ही आसानी से हासिल कर लिया। भारत के पूर्व तूफानी बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग के बेटे आर्यवीर ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए केवल 34 गेंदों में ही अपना अर्धशतक पूरा किया। आर्यवीर ने 52 गेंदों पर 7 चौकों और 4 छक्कों की मदद से शानदार 70 रनों की पारी खेली। कप्तान लक्ष्य ने भी संभलकर खेलते हुए 59 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने 63 गेंदों पर 7 चौकों की मदद से 53 रन बनाए। इससे पहले भारत की ओर से ईशान सूद और अर्जुन राजपूत ने 3-3 विकेट अपने नाम किए। PC:aajtak अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
नरेंद्र मोदी से मिले एशियाई पैरा गेम्स के एथलीट
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियाई पैरा गेम्स-2026 में भाग लेने वाले भारतीय दल से मुलाकात की। खुशी व्यक्
अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट की आंधी ने शुक्रवार 6 नवंबर को एशियाई बाजारों को भी अपनी चपेट में ले लिया। भारत को छोड़ बाकी सभी एशियाई बाजारों में कोहराम मच गया। दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क इंडेक्स KOSPI शुरुआती कारोबार में करीब 9 फीसदी तक टूट गया। गिरावट इतनी तेज थी कि कोरिया एक्सचेंज को 20 मिनट के लिए कारोबार रोकना पड़ा। वहीं, जापान का Nikkei 225 इंडेक्स 5 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली से एशियाई बाजारों में हाहाकार मचा हुआ है।दक्षिण कोरिया, जापान सहित सभी बाजारों के सूचकांक फिसलेKOSPI शुरुआती कारोबार में 8.8 फीसदी तक गिरकर 5,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। यह करीब नौ महीने का निचला स्तर है। इसके बाद इंडेक्स में कुछ रिकवरी आई। भारतीय समय के मुताबिक, 12:15 बजे यह 6.19 फीसदी गिरकर 5,050 पर चल रहा था। जापान का Nikkei 225 इंडेक्स 5.27 फीसदी गिरकर 57,858.61 पर आ गया। हांगकांग का Hang Seng इंडेक्स 0.77 फीसदी गिरकर 24,607.21 पर आ गया, जबकि MSCI Asia Pacific Index करीब 3 फीसदी नीचे था।दक्षिण कोरिया में Samsung और SK Hynix के शेयरों में भारी बिकवालीएशियाई बाजारों में गिरावट की सबसे ज्यादा मार सेमीकंडक्टर कंपनियों पर पड़ी। दक्षिण कोरिया की चिप बनाने वाली कंपनियों Samsung Electronics और SK Hynix के शेयरों में भारी बिकवाली हुई। शुरुआती कारोबार में Samsung Electronics के शेयर करीब 10 फीसदी और SK Hynix के शेयर 13 फीसदी तक टूट गए। बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा था कि दोनों शेयरों पर कारोबार की शुरुआत में अस्थायी ट्रेडिंग प्रतिबंध लगाना पड़ा।जापान की Kioxia का शेयर 14 फीसदी तक फिसलाजापान की सेमीकंडक्टर कंपनी Kioxia के शेयर 14 फीसदी तक गिर गए। वहीं, ताइवान की दिग्गज चिप निर्माता कंपनी Taiwan Semiconductor Manufacturing Company (TSMC) के शेयरों में 8.5 फीसदी की गिरावट आई। AI कंपनियों में बड़े निवेश के लिए पहचानी जाने वाली जापान की SoftBank Group के शेयर भी 11 फीसदी लुढ़क गए। बाजार में बिकवाली का असर सिर्फ टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। दक्षिण कोरिया की ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। Hyundai Motor के शेयर 6.9 फीसदी और Kia के शेयर 4 फीसदी टूट गए। बैटरी निर्माता LG Energy Solution के शेयरों में भी 4 फीसदी की गिरावट आई।अमेरिकी चुनाव नतीजों से बढ़ी AI सेक्टर को लेकर चिंताएशियाई बाजारों में इस गिरावट के पीछे अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत के बाद निवेशकों को आशंका है कि अमेरिका में AI कंपनियों पर नियामकीय निगरानी बढ़ सकती है। इसके अलावा डेटा सेंटर के निर्माण और विस्तार पर भी सख्ती की आशंका है। निवेशकों को डर है कि अगर AI कंपनियों पर नियम सख्त होते हैं और डेटा सेंटर में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ती है, तो सेमीकंडक्टर चिप और AI इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर दुनिया भर में हो रहे भारी-भरकम निवेश से भविष्य में पर्याप्त कमाई होगी या नहीं, इसे लेकर भी बाजार में चिंता बनी हुई है।यह भी पढ़ें: अमेरिकी शेयर बाजारों में हाहाकार, नैस्डेक क्रैश, Nvidia 10 फीसदी फिसला, जानिए क्या है पूरा मामलादक्षिण कोरिया के बाजारों में चिप बनाने वाले शेयरों से आई थी तेजीदक्षिण कोरिया का बाजार इस बदलाव से ज्यादा प्रभावित हुआ है, क्योंकि पिछले कुछ समय में KOSPI की तेजी में सेमीकंडक्टर कंपनियों की बड़ी भूमिका रही है। मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों और AI से जुड़ी मांग के कारण Samsung Electronics और SK Hynix जैसे शेयरों में जोरदार तेजी आई थी। जून में अपने शिखर तक पहुंचने से पहले KOSPI ने साल भर में करीब तीन गुना की बढ़त दर्ज की थी। अब AI निवेश को लेकर बढ़ती आशंकाओं के कारण बाजार में तेज मुनाफावसूली देखने को मिल रही है।
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US Stock Market Crash: अमेरिकी बाजार में 18 महीने की सबसे बड़ी गिरावट, एक दिन में डूबे 236 लाख करोड़ रुपये; एशियाई बाजार भी धड़ाम
Asian Market Today: AI क्रैश के डर से एशिया में भी भारी गिरावट आई। कोरिया के बाजार कोस्पी में 9% की भारी गिरावट आई। ट्रेडिंग 20 मिनट के लिए रोकनी पड़ी। जापान का बाजार निक्केई भी 7% टूटा है। ताइवान का मार्केट भी 9% नीचे है।वॉल स्ट्रीट पर चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में आई भारी गिरावट के बाद, निवेशकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों को धड़ाधड़ बेचना शुरू कर दिया। ट्रेडरों को इस बात का डर था कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में कांग्रेस (संसद) पर कब्जा जमाने वाली डेमोक्रेटिक पार्टी, AI उद्योग के लिए कड़े नियम लागू करने की दिशा में कदम उठा सकती है।जून के अंत से निक्केई (Nikkei) में भारी गिरावट आई है और अब यह अपने उच्चतम स्तर से 20% नीचे आने की कगार पर है - यह वह स्तर है जिसे 'टेक्निकल बियर मार्केट' माना जाता है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, टेक-हैवी निक्केई और व्यापक टॉपिक्स (Topix) के प्रदर्शन के बीच का अंतर दशकों में सबसे ज्यादा हो गया है, जो यह बताता है कि बिकवाली मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी शेयरों में केंद्रित रही है।दक्षिण कोरिया के टेक-हैवी कोस्पी (Kospi) में शुरुआती कारोबार के दौरान 8.55% की गिरावट आई, जिससे 'सर्किट ब्रेकर' लग गया। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स (SK Hynix) दोनों के शेयरों में 9% से ज्यादा की गिरावट देखी गई। निक्केई 225 में 5.86% की गिरावट आई, जबकि MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स 2.9% नीचे आ गया।फ्यूचर्स के संकेत ताइवान, हांगकांग और मुख्य भूमि चीन में नुकसान की ओर इशारा कर रहे हैं, जबकि हैंग सेंग फ्यूचर्स में 1.6% की गिरावट आई है।AI से जुड़े शेयरों में हुई भारी बिकवाली का सबसे ज्यादा असर सैमसंग, एसके हाइनिक्स और ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) पर पड़ा। ब्लूमबर्ग के अनुसार, हांगकांग का बाजार इस रुझान से कुछ अलग रहा, क्योंकि निवेशकों ने AI सप्लाई-चेन शेयरों से पैसा निकालकर चीनी इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स में निवेश किया, जो अभी कम कीमत (डिस्काउंट) पर मिल रहे हैं।भारत में, GIFT निफ्टी - जो यह संकेत देता है कि देश का शेयर बाजार दिन के कारोबार में कैसे खुल सकता है - ने बाजार की कमजोर शुरुआत (गैप-डाउन ओपनिंग) के संकेत दिए हैं।जापानी येन में कोई खास बदलाव नहीं दिखा और यह 157.65 प्रति डॉलर पर रहा, जबकि ऑफशोर युआन भी 6.6643 प्रति डॉलर के आसपास स्थिर रहा।बाजार की दिशा वॉल स्ट्रीट ने तय की, जहां गुरुवार को S&P 500 में 4.4% की भारी गिरावट आई। यह अप्रैल 2025 में टैरिफ से जुड़ी गिरावट के बाद से इसका सबसे खराब दिन रहा। नैस्डैक 100 (Nasdaq 100) 6.4% गिर गया, जिससे बाजार मूल्य में 2.3 ट्रिलियन डॉलर की कमी आई; मार्च 2020 के बाद से यह एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। चिप बनाने वाली बड़ी कंपनियों का सूचकांक 12% गिर गया, जिसमें एनवीडिया (Nvidia), क्वालकॉम (Qualcomm) और आर्म होल्डिंग्स (Arm Holdings) सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाली कंपनियों में शामिल रहीं।फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स में इस हफ्ते लगभग 16% की गिरावट आई है, जो पिछले साल अप्रैल के बाद से इसका सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन है। शुक्रवार को नैस्डैक 100 फ्यूचर्स में 0.3% की मामूली बढ़त दिखी, जो इस बात का संकेत है कि बाजार शायद स्थिर होने लगे हैं।निवेशकों को यह भी उम्मीद थी कि अगर कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पार्टी का दबदबा कायम होता है, तो ईरान युद्ध के खत्म होने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। हालांकि, डेटा सेंटर उद्योग पर सख्त निगरानी की आशंकाओं ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया, जिससे इस हफ्ते वैश्विक बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।खासकर टेक्सास में, नई चुनी गई डेमोक्रेटिक गवर्नर जीना हिनोजोसा ने डेटा सेंटर के विकास पर तुरंत रोक (मोरटोरियम) लगाने की मांग की है। टेक्सास के डेटा सेंटर डेवलपर्स के लिए यह सबसे खराब स्थिति है।उनकी जीत, और अन्य राज्यों में डेमोक्रेटिक गवर्नरों की जीत के कारण, अमेरिका भर में प्रस्तावित आधे AI डेटा सेंटरों को कड़ी स्थानीय जांच और विरोध का सामना करना पड़ सकता है।आर्थिक मोर्चे पर, श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में साप्ताहिक बेरोजगारी दावों ( jobless claims) की संख्या सभी अनुमानों से कम रही। अब निवेशक ब्याज दरों की दिशा के बारे में और संकेत पाने के लिए शुक्रवार को आने वाली अमेरिकी पेरोल रिपोर्ट का इंतजार करेंगे।ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, क्लीवलैंड फेडरल रिजर्व बैंक की अध्यक्ष बेथ हैमैक ने कहा कि महंगाई को केंद्रीय बैंक के लक्ष्य तक वापस लाने के लिए ब्याज दरों को सख्त बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर फेड ज्यादा बार नीतिगत कदम उठाता है, तो उसके पीछे रह जाने (यानी समय पर कदम न उठा पाने) का जोखिम कम हो सकता है।इस बीच, कमोडिटी बाजार में, काफी उतार-चढ़ाव के बाद तेल की कीमतों में अप्रैल के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट देखने को मिली। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि निवेशक पश्चिमी एशिया में महीनों से चल रहे युद्ध के खत्म होने की संभावनाओं का आकलन कर रहे थे।Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा कमजोर शुरुआत के संकेत, नतीजों के बाद एयरटेल पर नजर (डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने एशियाई पैरा गेम्स के खिलाड़ियों को किया सम्मानित
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने गुरुवार को नई दिल्ली में सेना से जुड़े खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया। एशियाई पैरा खेलों में भारतीय सेना के जवानों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया है। पांचवें एशियाई पैरा खेल 2026 में हिस्सा लेने वाले सेना के नौ खिलाड़ियों में से छह ने पदक अपने नाम किए। इनमें एक स्वर्ण, दो रजत और तीन कांस्य पदक शामिल हैं। इन खेलों में सेना के खिलाड़ियों ने एथलेटिक्स, तैराकी और चक्का फेंक जैसी स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
भारत ने एशियाई विश्वविद्यालय रैंकिंग में नया मुकाम हासिल किया
भारत ने हाल ही में एशियाई विश्वविद्यालय रैंकिंग में अपनी स्थिति को मजबूत किया है, जिसमें 325 विश्वविद्यालय शामिल हैं। इस वर्ष 34 नए संस्थान सूची में आए हैं। भारतीय विश्वविद्यालयों ने अनुसंधान पत्रों के प्रकाशन और पीएचडी धारक फैकल्टी सदस्यों की संख्या में उत्कृष्टता दिखाई है। आईआईएससी बेंगलुरु ने अनुसंधान में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है, जबकि आईआईटी दिल्ली कुल रैंकिंग में सबसे ऊपर है। यह प्रदर्शन भारतीय उच्च शिक्षा की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
Asian Market Today: गुरुवार, 5 नवंबर को एशियाई बाजारों की शुरुआत मिली-जुली रही। अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में डेमोक्रेट्स की शानदार जीत के बाद वॉल स्ट्रीट में भारी तेजी देखी गई। इस जीत से ईरान के साथ तनाव जल्द खत्म होने की उम्मीद जगी, जिससे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई। हालांकि, डेटा सेंटर के विकास को लेकर निवेशकों की चिंताएं बाजार की तेजी पर कुछ हद तक लगाम लगाती दिखीं।जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख सूचकांकों में बढ़त रही, जिससे MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स 0.3% ऊपर चढ़ गया। जापान में निक्केई 225 में 0.40% और TOPIX में 2.15% की तेजी आई। हैंग सेंग फ्यूचर्स भी 2.1% ऊपर रहा।इसके उलट, दक्षिण कोरिया के कोस्पी (Kospi) सूचकांक में 2.35% की गिरावट आई। निवेशक डेटा सेंटर के विकास की संभावनाओं और अमेरिकी चिप कंपनियों के शेयरों में हुए नुकसान को लेकर चिंतित थे।भारत में, GIFT निफ्टी ने एक शानदार शुरुआत के संकेत दिए, जिसमें फ्यूचर्स के आंकड़ों के अनुसार 350 अंकों के गैप-अप (तेजी के साथ) खुलने की संभावना दिखी। 1 अक्टूबर से बुधवार तक निफ्टी 50 में 6% की तेजी आई, जबकि इसी अवधि में MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स में 7.5% की गिरावट दर्ज की गई।करेंसी मार्केट में ज्यादा हलचल नहीं दिखी। जापानी येन 158.28 प्रति डॉलर पर स्थिर रहा, और ऑफशोर युआन 6.6719 पर बना रहा।क्षेत्र के अन्य देशों की बात करें तो, बैंक ऑफ कोरिया के गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में दक्षिण कोरिया का करंट अकाउंट सरप्लस रिकॉर्ड 61.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो अगस्त में 46.1 अरब डॉलर था। सेमीकंडक्टर के निर्यात में भारी उछाल के कारण ऐसा हुआ, और यह पहली बार है जब मासिक सरप्लस 60 अरब डॉलर के पार पहुंचा है।दूसरी ओर, चीन का बाजार कमजोर बना हुआ है। वहां के शेयर बाजार 'बियर मार्केट' (मंदी के दौर) में चले गए हैं, जिससे 3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की वैल्यू खत्म हो गई है। जून के अंत में अपने उच्चतम स्तर पर रहने वाला CSI 300 सूचकांक भी अब बियर मार्केट में आ गया है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, पिछले एक दशक में अक्टूबर का महीना बाजार के लिए सबसे खराब रहा, और 'स्टार 50' (Star 50) सूचकांक में 48% तक की भारी गिरावट आई है।एशियाई बाजारों में यह तेजी न्यूयॉर्क के मजबूत सत्र के बाद देखने को मिली है। S&P 500 में 1.6% की उछाल आई, जो पिछले तीन महीनों में इसकी सबसे बड़ी बढ़त है। वहीं, टेक-हैवी नैस्डैक 100 में 0.9% की तेजी देखी गई। ऐसा लगता है कि निवेशक वाशिंगटन में संभावित नीतिगत गतिरोध (policy gridlock) को नजरअंदाज करने को तैयार हैं, क्योंकि डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है।US ट्रेजरी बॉन्ड में भी तेजी आई, क्योंकि ट्रेडर्स ने अगले साल US फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं पर अपना दांव कम कर दिया। दूसरी ओर, डॉलर में पिछले दो महीनों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस अटकल ने भी शेयरों को सहारा दिया कि 'ब्लू वेव' (डेमोक्रेट्स की जीत) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की घाटा (deficit) बढ़ाने की क्षमता को सीमित कर देगी।डेटा सेंटरों का विरोध करने वाले डेमोक्रेट्स ने टेक्सास जैसे पारंपरिक रूप से 'रेड' (रिपब्लिकन) राज्यों में भी बड़ी जीत हासिल की। निवेशकों को लगता है कि नए निर्माण पर रोक लगने से बड़ी कंपनियों का सीमित कंप्यूटिंग पावर पर कब्जा और मजबूत होगा, साथ ही उनके कैश फ्लो पर दबाव भी कम होगा।अमेज़न के शेयरों में 7.4% की उछाल आई और यह तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। वहीं, मेटा प्लेटफॉर्म्स, अल्फाबेट और माइक्रोसॉफ्ट के शेयरों में 2% से 6.3% तक की तेजी आई। एप्पल, जिसने बड़ी टेक कंपनियों की तरह AI पर भारी खर्च करने से परहेज किया है, लेकिन जिसे AI के कारण मेमोरी चिप की कीमतों में आई तेजी का असर झेलना पड़ा है, उसके शेयरों में लगभग 7% की उछाल आई और यह रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया।अगर यह तेजी बनी रहती है, तो इन पांच कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू में 750 अरब डॉलर से ज्यादा का इजाफा होगा।यह तेजी उन दिनों की बिकवाली को पलट देती है, जो AI से जुड़े खर्चों की चिंताओं के कारण हुई थी। तिमाही नतीजों से पता चला था कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर की होड़ ने कभी कैश से भरपूर और कम कर्ज वाली कंपनियों को भारी खर्च करने वाली और कर्ज पर निर्भर कंपनियों में बदल दिया है। माइक्रोसॉफ्ट इसका अपवाद रहा, जिसने 18.6 अरब डॉलर का कैश फ्लो दर्ज किया।फिर भी, ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, कई निवेशकों को AI निवेश थीम के लिए फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं दिखता, जिसने इस सेक्टर में तेजी को बढ़ावा दिया है—भले ही डेमोक्रेट्स कुछ राज्यों में डेटा-सेंटर परियोजनाओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।गुरुवार को एशियाई बाजार की शुरुआती ट्रेडिंग में तेल की कीमतें स्थिर रहीं। इससे पहले, मई के बाद से एक ही दिन में इसमें सबसे बड़ी गिरावट देखी गई थी। बुधवार को ब्रेंट क्रूड 8% से ज्यादा गिरकर 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया था, और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) गिरकर 88 डॉलर के स्तर की ओर आ गया।ट्रेडर्स अब उम्मीद कर रहे हैं कि रिपब्लिकन पार्टी पर ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को खत्म करने और कोई समझौता करने का दबाव बढ़ेगा। सीनेट में अल्पसंख्यक नेता चक शूमर ने युद्ध को जल्द खत्म करने का वादा किया, और उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने एक लंबी पोस्ट में लिखा कि युद्ध और अमेरिका-इजरायल संबंधों को लेकर मतदाताओं के गुस्से के कारण चुनावों में उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।
प्रधानमंत्री मोदी आज एशियाई पैरा गेम्स 2026 में हिस्सा लेने वाले भारतीय दल से करेंगे बातचीत
New Delhi, 5 नवंबर . Prime Minister Narendra Modi Thursday को एशियाई पैरा गेम्स 2026 में भाग लेने वाले भारतीय दल के साथ बातचीत करेंगे. यह कार्यक्रम इंदिरा…
आज के दिन: एशियाई पैरा खेल के एथलीटों से मिलेंगे पीएम मोदी; 10 लाख से अधिक दीपों से जगमगाएगी काशी
5 November 2026 Major event 2026
Gorakhpur News: पिछले वर्ष के मुकाबले रैंकिंग में बेहतर हुआ गोरखपुर विश्वविद्यालय का प्रदर्शन
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एमएमएमयूटी : दक्षिण एशिया रैंकिंग में चार पायदान की उछाल
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नोएडा के ओखला पक्षी अभयारण्य में दुर्लभ सफेद सारस (White Stork) दिखाई देने से दिल्ली-एनसीआर के पक्षी प्रेमियों में उत्साह है। 1 नवंबर को पहली बार नजर आए इस प्रवासी पक्षी को लगातार तीन दिनों तक देखा गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मध्य एशिया की दुर्लभ एशियाटिका उप-प्रजाति हो सकती है। The post ओखला पक्षी अभयारण्य में सफेद सारस (वाइट स्टॉर्क) की दुर्लभ मध्य एशियाई उप-प्रजाति नजर आई, एनसीआर के पक्षी प्रेमियों में उत्साह appeared first on Rashtriya Ujala .
Kospi-Nikkei में आई 4% तक की गिरावट, अमेरिका में डेमोक्रेट की जीत से एशियाई बाजारों में कोहराम
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़त ने आज 4 नवंबर को एशियाई शेयर बाजारों में कोहराम मचा दिया। निवेशकों को आशंका है कि अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट्स का दबदबा बढ़ने से AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कंपनियों पर नियामकीय सख्ती बढ़ सकती है। इसका असर एशिया की उन टेक्नोलॉजी कंपनियों पर पड़ सकता है, जिनका बिजनेस अमेरिकी एआई निवेश और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री से जुड़ा है।इस डर में एशियाई बाजारों में सबसे तेज जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) फिसला, जो करीब 4.5% कमजोर हुआ तो टॉपिक्स (Topix) इंडेक्स करीब 2% नीचे आया। इसके अलावा दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी शुरुआती बढ़त गंवाते हुए करीब 4% तक तो ताइवान का शेयर बाजार लगभग 3% गिर गया। MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स में भी 2.3% तक की गिरावट आई। हालांकि चीन के सीएसआई 300 और हॉन्ग कॉन्ग के हैंग सेंग इंडेक्स में हल्की गिरावट आई।Chip Stock में सबसे अधिक बिकवालीजापान में एआई और चिप इंडस्ट्री से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव दिखाष कियोक्सिया होल्डिंग्स (Kioxia Holdings) के शेयर 11% से अधिक और एडवांटेस्ट (Advantest) के शेयर करीब 8% टूट गए। टोक्यो इलेक्ट्रॉन (Tokyo Electron) में भी लगभग 6% की गिरावट आई।दक्षिण कोरिया में सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) के शेयर करीब 2% और एसके हीनिक्स (SK Hynix) के शेयर 3% से अधिक नीचे आ गए। ये दोनों कंपनियां वैश्विक मेमोरी चिप और AI इंफ्रास्ट्रक्चर सप्लाई चेन के लिए काफी अहम हैं।हॉन्ग कॉन्ग में हैंग सेंग टेक इंडेक्स 1% से कमजोर हुआ। अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग और शाओमी कॉर्प 2-2% से अधिक टूट गया।क्या है इस कोहराम की वजहनिवेशकों की चिंता ये है कि डेमोक्रेट्स को अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में बढ़त मिलने पर एआई कंपनियों की निगरानी बढ़ सकती है। पहले से ही दिक्कतों से जूझ एशियाई बाजारों में अब यह चिंता भी बढ़ रही है कि एआई से जुड़ी कंपनियों में जो अरबों डॉलर लगाए जा रहे हैं, क्या उनसे पर्याप्त रिटर्न मिल पाएगा।पेपरस्टोन ग्रुप लिमिटेड के स्ट्रैटेजिस्ट डिलिन वू का कहना है कि अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण मजबूत होने की संभावना पर एशियाई बाजारों में अनिश्चितता बढ़ रही है। चुनाव के नतीजों का असर AI रेगुलेशन, चिप निर्यात पर प्रतिबंध और डेटा सेंटर की ऊर्जा नीतियों पर पड़ सकता है।iM सिक्योरिटीज की एनालिस्ट यांग ह्यून-क्यूंग ने डाउ जोन्स से कहा कि एशिया की एआई इंफ्रा कंपनियां काफी हद तक अमेरिका से आने वाले एआई निवेश पर निर्भर हैं। उनका कहना है कि अगर कांग्रेस के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण हो जाता है, तो एआई के कड़ी निगरानी की मांग बढ़ सकती है, जिससे डेटा सेंटर के विस्तार की टाइमलाइन को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बन सकती है।लोम्बार्ड ओडियर के सीनियर मैक्रो स्ट्रैटेजिस्ट होमिन ली का कहना है कि अगर डेमोक्रेट्स बड़ी जीत हासिल करते हैं, तो ट्रम्प के कार्यकाल के बचे हुए समय में राजनीतिक गतिरोध बढ़ सकता है, जिससे निवेशकों को अपनी रणनीतियों में तेजी से बदलाव करना पड़ सकता है।यूजीन इन्वेस्टमेंट एंड सिक्योरिटीज के एनालिस्ट Huh Jae-Hwan का कहना है कि ओहियो और टेक्सास के चुनाव नतीजे काफी अहम हैं, क्योंकि एआई डेटा सेंटर निवेश के केंद्र के रूप में इन राज्यों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि अगर टेक्सास में नए नियम लागू होते हैं, तो सबसे पहले एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर पड़ेगा, जिसकी आंच शेयर मार्केट में महसूस हुई।US Midterm Elections : डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत, औंधे मुंह गिरे एलन मस्क के टेस्ला और स्पेसएक्स के शेयरडिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Women's Asian Champions Trophy: भोपाल में 19 नवंबर को मलेशिया से भिड़ेगी भारतीय टीम
नयी दिल्ली, चार नवंबर भारतीय महिला हॉकी टीम एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी (एसीटी) में लगातार तीसरा और कुल मिलाकर चौथा खिताब जीतने की कवायद में 19 नवंबर से भोपाल में शुरू होने वाले छह देशों के टूर्नामेंट में मलेशिया के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी। यह टूर्नामेंट भोपाल के नाथू बरखेड़ा स्थित अंतरराष्ट्रीय खेल परिसर में बने नए हॉकी स्टेडियम में खेला जाएगा। इसमें भारत, जापान, चीन, मलेशिया, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया की टीमें भाग लेंगी। पिछले महीने जापान में एशियाई खेलों में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने के बाद भारतीय महिला हॉकी टीम का यह पहला टूर्नामेंट होगा। भारतीय टीम ने 2016, 2023 और 2024 में एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीता था। टूर्नामेंट राउंड-रॉबिन प्रारूप में खेला जाएगा, जिसमें प्रत्येक टीम अन्य पांच टीमों से एक बार भिड़ेंगी। लीग चरण के अंत में शीर्ष पर रहने वाली चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी। एशिया की शीर्ष रैंकिंग वाली टीम चीन 19 नवंबर को थाईलैंड के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी। भारत इसी दिन मलेशिया का सामना करेगा। भारतीय टीम इसके बाद 21 नवंबर को दक्षिण कोरिया, 22 नवंबर को थाईलैंड, 24 नवंबर को चीन और 25 नवंबर को जापान का सामना करेगी। पांचवें और छठे स्थान के लिए होने वाला क्वालिफिकेशन मैच तथा दोनों सेमीफाइनल मैच 27 नवंबर को होंगे। फाइनल और तीसरे स्थान का मैच 28 नवंबर को खेले जाएंगे। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि भोपाल एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी करेगा। मुझे उम्मीद है कि भारतीय टीम एशियाई खेलों की अपनी सफलता काे आगे बढ़ाते हुए अपने खिताब का बचाव करने में सफल रहेगी।’’
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के शुरुआती रुझानों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत से एशियाई बाजारों में गिरावट आई है, खासकर टेक्नोलॉजी शेयरों में। एमके रिसर्च ने तीन परिदृश्यों में भारतीय इक्विटी बाजार पर इसके संभावित प्रभावों का विश्लेषण किया है।
एशियाई रैंकिंग में फिसला डीयू: 95वें स्थान से खिसककर 106वें पायदान पर पहुंचा, कैंपस में मायूसी
क्यूएस एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में दिल्ली विश्वविद्यालय शीर्ष 100 से बाहर होकर 106वें स्थान पर आ गया है। अकादमिक प्रतिष्ठा, रोजगार देने वाली कंपनियों के बीच पहचान और अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव में गिरावट इसकी मुख्य वजहें हैं।
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच Asian Cup 2027 टला, अब 23 दिसंबर से Saudi Arabia में होगा
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के बीच एशियाई फुटबॉल परिसंघ ने टूर्नामेंट को टालने का फैसला किया है। पहले यह प्रतियोगिता 7 जनवरी से 5 फरवरी 2027 तक सऊदी अरब में आयोजित होनी थी, लेकिन अब इसका आयोजन 23 दिसंबर 2027 से 21 जनवरी 2028 तक किया जाएगा। इस फैसले के पीछे क्षेत्र में बिगड़ते हालात, यात्रा में आ रही परेशानियां और आयोजन से जुड़ी कई व्यावहारिक चुनौतियां बताई गई हैं। एशियाई फुटबॉल परिसंघ ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि प्रतियोगिता के आयोजन से जुड़ी समिति ने मौजूदा असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए तारीखों में बदलाव को मंजूरी दी है। परिसंघ के मुताबिक, क्षेत्र में हाल के घटनाक्रम के कारण सुरक्षा के साथ-साथ यात्रा और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर चुनौतियां पैदा हुई हैं। ऐसे में सभी भाग लेने वाली टीमों, खिलाड़ियों, अधिकारियों, दर्शकों और आयोजन से जुड़े दूसरे लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। टूर्नामेंट की नई तारीखों को अंतिम मंजूरी के लिए अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ यानी फीफा के सामने रखा जाएगा। गौरतलब है कि पिछले महीने एशियाई फुटबॉल परिसंघ के अध्यक्ष शेख सलमान ने कहा था कि टूर्नामेंट की तैयारियां तय कार्यक्रम के अनुसार जारी हैं। उस समय पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बावजूद आयोजन को लेकर कोई बदलाव नहीं किया गया था। हालांकि, सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन और यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष बढ़ने के बाद हालात लगातार गंभीर होते चले गए। मौजूद जानकारी के अनुसार, हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब के कई ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 11 दिनों के दौरान कम से कम 20 हमले होने की खबर सामने आई थी। इन हमलों में 17 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई थी। ऐसे हालात में बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन की सुरक्षा और यात्रा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। इस बीच, 2015 की एशियाई कप विजेता ऑस्ट्रेलिया ने पिछले सप्ताह साफ किया था कि वह क्षेत्र में होने वाले अपने मैत्री मुकाबलों में हिस्सा लेने के लिए तैयार है। ऑस्ट्रेलिया को 11 नवंबर को दोहा में कतर और इसके 6 दिन बाद अम्मान में जॉर्डन के खिलाफ खेलना है। हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई टीम ने यह भी कहा था कि वह पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। क्षेत्र में तनाव का असर क्लब फुटबॉल पर भी देखने को मिला है। सोमवार को सऊदी अरब के बड़े क्लब अल नासर ने उज्बेकिस्तान के पाक्ताकोर को 6-2 से हराया, लेकिन इस मुकाबले में क्रिस्टियानो रोनाल्डो नहीं खेले। क्लब की ओर से बताया गया कि उन्हें आराम दिया गया था। इससे एक सप्ताह पहले अल नासर का अल वस्ल के खिलाफ एशियाई चैंपियंस लीग का मुकाबला भी टालना पड़ा था, क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात की टीम ने सुरक्षा कारणों से रियाद जाने से इनकार कर दिया था। बता दें कि सऊदी अरब पहली बार एशियाई कप की मेजबानी कर रहा है। रियाद में होने वाले 51 मुकाबलों में से 30 मैच खेले जाने हैं। प्रतियोगिता के 8 मैदानों में से 5 रियाद में हैं और फाइनल किंग फहद स्पोर्ट्स सिटी स्टेडियम में होना तय है। सऊदी अरब को 2034 के फीफा विश्व कप की मेजबानी भी करनी है। ऐसे में एशियाई कप का सफल आयोजन उसके लिए अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में अपनी तैयारियों और आयोजन क्षमता दिखाने का बड़ा अवसर माना जा रहा है। अब नई तारीखों के साथ टूर्नामेंट की तैयारियों को दोबारा व्यवस्थित करना होगा।
AFC Asian Cup 2027: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच बड़ा फैसला, एक साल के लिए टला एशियन कप, जानें नई तारीखें
Asian Champions Trophy: दक्षिण कोरिया से सेमीफाइनल भिड़ंत, Abhishek की फिटनेस बनी भारत की चिंता
(सौमोज्योति एस चौधरी)मोहाली, तीन नवंबर अभी तक बेहतरीन प्रदर्शन करके अजेय रही पांच बार की चैंपियन भारतीय टीम शानदार फॉर्म में चल रहे स्ट्राइकर अभिषेक की चोट के बावजूद दक्षिण कोरिया के खिलाफ बुधवार को यहां होने वाले एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी (एसीटी) हॉकी टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जीत के प्रबल दावेदार के रूप में शुरुआत करेगी। एशियाई खेलों के चैंपियन भारत ने सोमवार को जालंधर में खेले गए छह टीमों के टूर्नामेंट के अपने आखिरी राउंड-रॉबिन मैच में दक्षिण कोरिया को 8-0 से करारी शिकस्त दी थी और वह इसे दोहराने के लिए प्रतिबद्ध होगा। भारत ने राउंड-रॉबिन चरण में बांग्लादेश को 13-0, चीन को 5-2, जापान को 4-1 और दक्षिण कोरिया को 8-0 से हराया था। लेकिन जापान के खिलाफ मैच से ठीक पहले अभिषेक के टखने में चोट लग गई जिससे भारतीय टीम प्रबंधन चिंतित होगा क्योंकि उन्होंने न केवल गोल किए हैं बल्कि अच्छे मौके भी बनाए हैं। भारत के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने भी स्वीकार किया कि अभिषेक ने अभी तक शानदार भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें अभी पक्का पता नहीं है कि अभिषेक खेल पाएंगे या नहीं। वह चोटिल हैं और वह वापसी करेंगे या नहीं इसके लिए हमें इंतजार करना होगा लेकिन समय बहुत कम है।’’अभिषेक की अनुपस्थिति में अनुभवी स्ट्राइकर मनदीप सिंह, सुखजीत सिंह और शिलानंद लाकड़ा को अग्रिम पंक्ति में अधिक जिम्मेदारी निभानी होगी। मनदीप सिंह ने बांग्लादेश के खिलाफ पहले मैच में हैट्रिक लगाकर शानदार शुरुआत की थी लेकिन इसके बाद वह अपनी इस लय को बरकरार नहीं रख पाए।यदि अभिषेक नहीं खेल पाते हैं, तो आदित्य अर्जुन लालागे और अंगद बीर सिंह जैसे खिलाड़ियों को भी जिम्मेदारी संभालनी होगी। भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह को हालांकि उम्मीद है कि अभिषेक इस मैच में खेलने के लिए उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘वह अच्छी स्थिति में है। हमने उसे दो मैचों के लिए आराम दिया था। मुझे उम्मीद है कि वह सेमीफाइनल में खेलने के लिए पूरी तरह से फिट होगा।’’उपकप्तान हार्दिक सिंह ने विवेक सागर प्रसाद और नीलकांत शर्मा के साथ मिलकर मध्य पंक्ति में अच्छी भूमिका निभाई है। नीलकांत का यह भारत की तरफ से अंतिम टूर्नामेंट है। हरमनप्रीत भी शानदार फॉर्म में हैं। उन्होंने टूर्नामेंट में अभी तक नौ गोल किए हैं। इनमें से उन्होंने आठ गोल पेनल्टी कॉर्नर से और एक पेनल्टी स्ट्रोक से किया है। हरमनप्रीत ने जुगराज सिंह और अमित रोहिदास के साथ मिलकर भारतीय रक्षापंक्ति में भी अच्छी भूमिका निभाई है। युवा फॉरवर्ड विष्णुकांत सिंह को भी टूर्नामेंट में जितने मौके मिले हैं उनमें वह खरे उतरे हैं। वह जरूरत पड़ने पर टीम के लिए मध्य पंक्ति में खेलने के लिए तैयार हैं। विष्णुकांत ने कहा, ‘‘मैं लंबे समय से मौके का इंतजार कर रहा था। मैंने इसके लिए कड़ी मेहनत की और जापान के खिलाफ गोल करने से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। मैं मध्य पंक्ति में खेलने के लिए भी तैयार हूं।’’भारतीय गोलकीपर सूरज करकेरा और कृष्ण बहादुर पाठक को टूर्नामेंट में अभी तक खास चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा है और यह देखना दिलचस्प होगा कि अगर विरोधी टीम आक्रामक रवैया अपनाती है तो वह उससे कैसे निपटते हैं। पहला सेमीफाइनल जापान और एशियाई खेलों के रजत पदक विजेता मलेशिया के बीच खेला जाएगा। भारतीय टीम:गोलकीपर: सूरज करकेरा, कृष्ण बहादुर पाठक। डिफेंडर: संजय, हरमनप्रीत सिंह (कप्तान), अमित रोहिदास, जुगराज सिंह, जरमनप्रीत सिंह, अमनदीप लाकड़ा। मिडफील्डर: राजिंदर सिंह, आदित्य अर्जुन लालागे, नीलकांत शर्मा, हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद, अंगद बीर सिंह। फॉरवर्ड: शिलानंद लाकड़ा, अभिषेक, सुखजीत सिंह, दिलप्रीत सिंह, मंदीप सिंह, विष्णुकांत सिंह। मैच का समय:पहला सेमीफ़ाइनल: जापान बनाम मलेशिया, शाम 4:30 बजेदूसरा सेमीफाइनल: भारत बनाम दक्षिण कोरिया, शाम 7:00 बजे।
Mohali News: मोहाली में सजेगा एशियाई हॉकी का महाकुंभ, पदक के लिए भिड़ेंगी दिग्गज टीमें
मोहाली में सजेगा एशियाई हॉकी का महाकुंभ, पदक के लिए भिड़ेंगी दिग्गज टीमें
शीतल देवी ने वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी की, एशियाई रिकॉर्ड तोड़ा
एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत की स्टार तीरंदाज शीतल देवी ने महिलाओं की कंपाउंड क्वालिफिकेशन स्पर्धा में 720 में से 704 अंक हासिल कर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की और नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया.
अगर आपका भी अकेले घूमने का मन है, लेकिन पहली सोलो इंटरनेशनल ट्रिप के लिए किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहां पर ज्यादा पैसे न खर्च करने पड़े। तो आप एशिया के कुछ खूबसूरत देश आपकी लिस्ट में शामिल कर सकती हैं। सोलो ट्रिप का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको किसी दूसरे के हिसाब से अपना प्लान नहीं बनाना पड़ता है। सोलो ट्रिप में जब मन करे, जहां मन करे वहां जाएं, रुकें और अपनी पसंद का खाना खाएं। वहीं अगर आपको बजट को ध्यान में रखना है, तो आप वियतनाम और थाईलैंड जैसे ऑप्शन देख सकती हैं। इन जगहों पर आप खूबसूरत बीच, स्वादिष्ट लोकल फूड्स, शानदार मार्केट और एक अलग ही कल्चर देखने को मिलेगा। वहीं अगर आप भी इस बार अकेले विदेश घूमने का प्लान कर रही हैं, तो आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 3 ऐसे खूबसूरत देशों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर आप सोलो ट्रिप के लिए जा सकती हैं। इसे भी पढ़ें: Travel Tips: Vrindavan के Chhatikara में स्थित Char Dham Mandir में करें चार धामों के दर्शन मलेशिया सोलो ट्रिप के लिए मलेशिया भी एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। खासकर अगर आप शहर, फूड, शॉपिंग और घूमने के साथ-साथ थोड़ा नेचर भी देखना चाहती हैं, तो आपको Kuala Lumpur जैसे शहर से लेकर कई दूसरी खूबसूरत जगहों को एक्सप्लोर करने का मौका मिलेगा। वहीं अच्छी बात यह है कि मलेशिया में बस और ट्रेन जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करके अपना अपने खर्च को थोड़ा मैनेज कर सकती हैं। आप मलेशिया में Kuala Lumpur में घूमने के साथ-साथ शॉपिंग भी कर सकती हैं। यहां के लोकल फूड को एंजॉय कर सकती हैं। थाईलैंड वहीं फॉरेन ट्रिप के लिए आप थाईलैंड भी जा सकती हैं। अगर आपको शॉपिंग, स्ट्रीट फूड और घूमने-फिरने के साथ बीच का मजा चाहिए, तो आपको थाईलैंड जा सकती हैं। यहां पर आप सोलो ट्रिप कर सकती हैं। थाईलैंड का बैंकॉक शहर सबसे फेमस है। आप यहां पर लोकल मार्केट्स में घूमने के साथ-साथ स्ट्रीट फूड ट्राई कर सकती हैं। अगर आपका बजट कम है, तो आप महंगे होटल्स की जगह हॉस्टल्स या अफॉर्डेबल स्टे देख सकती हैं। आप बैंकॉक के अलावा फुकेट या पटाया भी घूमने के लिए जा सकती हैं। आप थाईलैंड में बीचेस और आइलैंड का मजा ले सकती हैं और लोकल मार्केट्स को एक्सप्लोर कर सकती हैं। इसके अलावा स्ट्रीट फूड ट्राई करना न भूलें। वियतनाम आप कम बजट में वियतनाम भी जा सकती हैं। यहां पर आपको बीच के साथ, लोकल मार्केट्स, पहाड़ और अलग-अलग कल्चरल एक्सपीरियंस कर सकेंगी। वियतनाम में आपको एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए ट्रेन, बस और फ्लाइट आदि के ऑप्शंस मिल जाएंगे। आप हनोई, दा नांग और होई आन जैसी जगहों को एक्सप्लोर कर सकती हैं। इसके अलावा आप यहां पर खूबसूरत बीच पर समय बिता सकती हैं। पहाड़ों और नेचर की खूबसूरती को निहारने के साथ लोकल फूड का स्वाद ले सकती हैं और यहां आपको लोकल लाइफ देखने का मौका मिलेगा। इन बातों का रखें ध्यान अगर आप भी पहली बार अकेले विदेश घूमने का प्लान कर रही हैं, तो इस दौरान आपको कुछ बातों का ध्यान रख सकती हैं। 2-3 महीने पहले से प्लानिंग कर लें। होटल और फ्लाइट की कीमत पहले से देखें। पहले से ही पूरे ट्रिप का बजट प्लान कर लें। हॉस्टल या होटल की लोकेशन आदि पहले से पता रखें। लोकल ट्रांसपोर्ट के ऑप्शन को पहले से समझ लें। अपने साथ जरूरी डॉक्यूमेंट्स रख लें। ट्रिप से पहले उस देश के लेटेस्ट एंट्री रूल्स को जरूर चेक करें।
बेटियों का जलवा: एशियाई खेलों में भारत की स्वर्णिम कहानी, 10 में से 8 स्वर्ण महिला खिलाड़ियों के नाम
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Asian Games 2026: एशियन गेम्स में भारत ने जीते हैं अब तक कुल 60 मेडल
Asian Games 2026 Day 12 Live Updates: एशियन गेम्स का आज 12वां दिन है. कई खेलों में आज भारत को मेडल की उम्मीदें रहेंगी. वहीं कुछ खेल ऐसे हैं, जहां से मेडल पक्का हो सकता है, ऐसे में इस पेज को रिफ्रेश करते रहें.
Rahul Gandhi Malasia PM Video: BRICS के बीच राहुल-प्रियंका से मिले मलेशिया के PM, क्या बात हुई?
Rahul Gandhi Malasia PM Video: BRICS के बीच राहुल-प्रियंका से मिले मलेशिया के PM, क्या बात हुई? Rahul Gandhi Anwar Ibrahim Meeting को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को मलेशिया के प्रधानमं
गन्तव्य देशों के हालात खराब होने से दक्षिण एशियाई प्रवासन में कमी
आशीष विश्वास अमेरिका और यूरोपीय देशों में अपनाई गई सरकारी नीति में नए ज़ोर की वजह से, लगभग बिना हुनर वाले आम दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए स्थितियां असल में मुश्किल हो गई हैं। इसका मकसद सालों से वहां गैर-कानूनी ढंग से रह रहे एशियाई लोगों को बाहर निकालना है। ज़्यादातर मौजूदा सरकारों पर दक्षिणपंथियों का ज़ोरदार दबाव है। हाल के दिनों में अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व में दक्षिण एशियाई लोगों के लिए प्रवासन और वहां जाकर नौकरी पाना मुश्किल होता जा रहा है, जो बड़े झगड़ों और लगातार सामाजिक उथल-पुथल और अशांति का सीधा नतीजा है। इस इलाके के बड़े देशों की तरह, भारत और बांग्लादेश पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। लंबे समय में दोनों देशों के सामने दोहरी चुनौती है: घरेलू श्रम बाजार में नौकरी के लिए बेचैनी और बढ़ जाएगी, क्योंकि वे बड़ी आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। साथ ही प्रवासी कामगारों द्वारा घर भेजे जाने वाली बड़ी राशि (रेमिटेंस) से होने वाली अच्छी-खासी आय भी समय के साथ कम हो जाएगी। खबरें हैं कि कम से कम 1500 और भारतीयों को अल्पावधि में अमेरिका से वापस भेजा जा रहा है और केनडा में भी हालात बेहतर नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि नौकरी के मौके कम हो रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों में अपनाई गई सरकारी नीति में नए ज़ोर की वजह से, लगभग बिना हुनर वाले आम दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए स्थितियां असल में मुश्किल हो गई हैं। इसका मकसद सालों से वहां गैर-कानूनी ढंग से रह रहे एशियाई लोगों को बाहर निकालना है। ज़्यादातर मौजूदा सरकारों पर दक्षिणपंथियों का ज़ोरदार दबाव है, क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टियों पर गैर-कानूनी प्रवासन को बढ़ावा देने का आरोप लगता है। आरोप है कि पहले से ही स्थानीय संस्कृति के कमज़ोर होने और गंभीर सुरक्षा चिंताओं जैसी स्थानीय समस्याएं हैं। ज़्यादातर हाथ से काम करने वाले अस्थायी कामों में लगे, हज़ारों प्रवासी ऐसे कमज़ोर लक्ष्य बन गए हैं जिन्हें तुरंत और बिना किसी औपचारिकता के वापस भेजा जा सकता है। यह विकसित देशों में अपनी मौजूदा समस्याओं के समाधान के लिए शासन और नीतिगत कदमों का नतीजा है। यूनाइटेड किंगडम से लेकर अमेरिका तक, उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों और प्रवासियों के लिए वीज़ा मिलना नए कड़े कानूनों से प्रभावित हुआ है, पढ़ाई की फीस बहुत ज़्यादा बढ़ा दी गई है और कानूनी तौर पर स्थायी रूप से रहने का अधिकार कम कर दिया गया है। प्रवासियों के खिलाफ नकारात्मक रूझान सिर्फ़ पश्चिमी देशों तक ही सीमित नहीं है। दिसंबर 2025 तक, सऊदी अरब से किसी न किसी वजह से करीब 11,000 से ज़्यादा भारतीयों को वापस उनके अपने देशों में भेजा जा चुका था, जो एक रिकॉर्ड है। अमेरिका ने उसी समय तक करीब 3800 भारतीयों को वापस भेजा था। साफ़ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कही गई अच्छी दोस्ती का अमेरिका-भारत के आपसी रिश्तों के सभी मामलों में कोई खास फ़र्क नहीं पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि म्यांमार ने करीब 1600 'गैर-कानूनीÓ रूप से वहां रह रहे भारतीयों को वापस भेजा, जबकि मलेशिया और यूएई ने 2025 में करीब 1600 लोगों को वापस भेजा। भारत सरकार और अन्य स्रोतों का दावा है कि कई भारतीय अपनी मज़ीर् से भी अपने गोद लिए हुए देशों को छोड़ रहे हैं। इसकी वजहें हैं बेकाबू महंगाई, जिससे रहने का खर्च बढ़ रहा है, मुश्किल समय में काम का बोझ बढ़ रहा है, अधिकारियों की तरफ़ से बढ़ती परेशानी और घर पैसे भेजने में भारी कमी का आना। इसका मतलब यह नहीं है कि वे भारत के बाहर मौके नहीं देख रहे हैं। दुबई एक पसंदीदा नई जगह है। केनडा से 2025 में लगभग 2830 भारतीय लौटे, जबकि पिछले साल यह संख्या 2000 थी। कुछ मामलों में केनाडाई अधिकारियों के तरीकों पर शक जताते हुए, भारत सरकार ने प्रवासियों को वापस भेजने के दौरान अपनाए गए तरीकों पर भी कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें वापस भेजे गए लोगों को वापस आने के दौरान कोई सुविधाएं नहीं दी जाती हैं। यहां तक कि हमेशा मूलभूत मानवीय सुविधाएं भी नहीं दी जाती हैं, हालांकि लौटने वाला हर कोई घोषित अपराधी नहीं होता है। पड़ोसी बांग्लादेश की बात करें तो, इज़रायली हमलों के जारी रहने के कारण लेबनान में कम से कम 5000 लोगों की नौकरी चली गई। कम से कम 200 लोग स्वयं वापस चले गए क्योंकि प्रवासियों को जानलेवा काम के हालात में धकेला जा रहा था। यह स्थानीय श्रम कानूनों और नौकरी की शर्तों का खुला उल्लंघन था। साथ ही 'आपातकाल' के नाम पर अक्सर वेतन में कटौती भी की जाती थी। मध्य पूर्व में प्रवासी संगठनों के एच आर ग्रुपों और प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि लेबनान और आस-पास के इलाकों में 11 बांग्लादेशी कामगार मारे गए, जबकि कई घायल हुए, जिन पर स्थानीय अधिकारियों ने बहुत कम ध्यान दिया। अप्रशिक्षित कामगारों को सहयोगी, रेस्क्यू स्टाफ और दूसरे कामों के तौर पर समुद्री झड़पों में भी हिस्सा लेने के लिए मजबूर किया गया था। ऐसा लगता है कि ऐसे मामलों में कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं थी। सिर्फ़ एक मामले में फिलिपिनो कामगार के एक ग्रुप ने ऐसे आदेश मानने से मना कर दिया था। एचआर ग्रुपों का आरोप है कि कई बमबारी और मिसाइलों और ड्रोन हमलों के खतरनाक आदान-प्रदान के दौरान मरने वाले ज़्यादातर पीड़ित आर्थिक रूप से कमज़ोर प्रवासी कामगारों के असुरक्षित ग्रुप से थे। अलग-अलग अन्तरराष्ट्रीय प्राधिकारी, देश के प्रमुखों, संयुक्त और दूसरी संस्थाओं से बार-बार गुहार लगाने पर कोई जवाब नहीं मिला। कामगारों के लिए एक और चिंता यह थी कि क्या प्रवासियों को रखने वाले देश उनके ज़िंदा रहते हुए उनकी बुरी हालत के प्रति लगभग पूरी तरह से बेपरवाह होने के मद्देनजर उनके बकाए का इंतज़ाम भी करेंगे। ऐसे डर से इन्कार नहीं किया जा सकता। न सिफ़र् आपूर्तिकर्ता देश को कानूनी तौर पर मिलने वाले पैसे के सवाल पर नुकसान होगा, बल्कि घर पर पीड़ितों के परिवारों को भी बहुत ज़्यादा तकलीफ़ होगी। कई परिवार विदेश में नौकरी करके पैसे कमाने के लिए किसी सदस्य को भेजने और सक्षम बनाने हेतु भारी-भरकम कर्ज भी लेते हैं।
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