सैन्य एथलीटों ने एशियाई खेलों में बनाए रिकॉर्ड
नई दिल्ली। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने जापान में हालही में संपन्न एशियाई खेलों में 27 पदक (6 स्वर्ण, 11 रजत और 10 कांस्य) ज
एशियाई खेलों में सैन्य खिलाड़ियों का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, राजनाथ सिंह ने की मुलाकात
New Delhi, 12 अक्टूबर . रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय सशस्त्र बलों के खिलाड़ियों की सराहना की है. Monday को उन्होंने कहा कि भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के खिलाड़ियों ने सीमित संख्या में भाग लेने के बावजूद अपने अनुशासन, टीम भावना और मेहनत से बड़ी उपलब्धि ... Read more
Asian Games से चूके Abhishek Verma, अब 2028 Los Angeles Olympics पर साधा निशाना
भारत के दिग्गज कंपाउंड तीरंदाज अभिषेक वर्मा भले ही एशियाई खेलों में भाग नहीं ले पाए लेकिन उनका हौसला बरकरार है और उन्होंने 2028 में लॉस एंजिलिस और स्वदेश में 2030 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों को अपना लक्ष्य बनाया है। भारत हाल ही में संपन्न हुए आइची-नागोया एशियाई खेलों में कंपाउंड तीरंदाजी में ओलंपिक कोटा हासिल करने वाला पहला देश बना। साहिल जाधव और चिकिता तनिपार्थी ने मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर ओलंपिक कोटा हासिल किया। एशियाई खेलों में लगातार चौथी बार भाग लेने से चूकने वाले 37 वर्षीय अभिषेक ने स्वीकार किया कि खेल से दूर रहना निराशाजनक था लेकिन उन्हें संतुष्टि है कि जिन युवा खिलाड़ियों को उन्होंने प्रशिक्षण दिया, वह अच्छा प्रदर्शन करने में सफल रहे। अभिषेक ने पीटीआई से कहा, ‘‘एशियाई खेलों में भाग नहीं ले पाने का निश्चित रूप से मुझे दुख हुआ लेकिन मैंने जिन खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया है वे वहां मौजूद थे और उन्होंने वैसा ही प्रदर्शन किया जैसा मैं चाहता था।’’ ओलंपिक कोटा खिलाड़ियों के लिए नहीं बल्कि देश के लिए होते हैं। ओलंपिक के नजदीक होने के समय ट्रायल्स से खेलों में भाग लेने वाले खिलाड़ियों का चयन किया जाता है। अभिषेक ने कहा कि भारत के कोटा हासिल करने के बाद अब खिलाड़ी पूरी तरह से लॉस एंजिलिस खेलों की तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अब हमारे ऊपर से क्वालिफाई करने का दबाव हट गया है। हम बिना किसी रुकावट के पूरी तरह से ओलंपिक पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। हमारे पास तैयारी के लिए लगभग डेढ़ साल का समय है और हमें इसका भरपूर फायदा उठाना होगा।’’ वर्मा अपने ओलंपिक सपनों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने तीन एशियाई खेलों में भाग लेते हुए दो स्वर्ण सहित पांच पदक जीतने के साथ-साथ विश्व कप में कई खिताब जीते हैं लेकिन अभी उनका मन नहीं भरा है। उन्होंने कहा, ‘‘यह मानवीय स्वभाव है कि आप जितना अधिक हासिल करते हैं, उतनी ही अधिक आपकी चाहत बढ़ती है। मेरा लक्ष्य 2028 के ओलंपिक हैं। इसके अलावा मैं 2023 में भारत में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों पर भी नजर रख रहा हूं।
Asian Champions Trophy: 5 खिताब जीतने वाली Indian Hockey Team अब Punjab में उतरेगी
एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी (एसीटी) में 2011 में इसकी शुरुआत के बाद से पांच बार खिताब जीतने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम इस महीने पंजाब में होने वाले टूर्नामेंट में सबसे सफल टीम के रूप में प्रवेश करेगी। भारत की उपलब्धियों में पहले टूर्नामेंट में रोमांचक शूटआउट जीत से लेकर 2024 में चीन में अपने खिताब का बचाव करना शामिल है। अब एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी 27 अक्टूबर से पांच नवंबर तक जालंधर और मोहाली में खेली जाएगी। भारत का एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में पांच खिताब जीतने संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है। पहली बार एशियाई चैंपियनशिप ट्रॉफी का आयोजन चीन के ओर्डोस में किया गया था, जिसमें छह टीमों ने चीन, भारत, मलेशिया, पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया और जापान ने भाग लिया था। भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए फाइनल में कोई भी टीम निर्धारित समय तक गोल नहीं कर पाई थी। इसके बाद पेनल्टी शूटआउट का सहारा लिया गया जिसमें भारत ने 4-2 से जीत हासिल की। इस तरह से भारत इस टूर्नामेंट का पहला चैंपियन बना। दूसरी बार चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन 2013 में किया गया था। इसके बाद 2016 में मलेशिया के कुआंटन में तीसरा टूर्नामेंट खेला गया था। भारत इसमें चैंपियन बना था। वर्ष 2016 की प्रतियोगिता में भाग लेने वाली छह टीमों में भारत, पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया, जापान, मलेशिया और चीन शामिल थे। भारत फाइनल में पहुंचा और उसका सामना पाकिस्तान से हुआ। भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ने 3-2 से जीत हासिल की और अपना दूसरा खिताब जीता। रुपिंदर पाल सिंह, अफ्फान यूसुफ और निकिन थिम्मैया ने भारत की तरफ से गोल किए। भारत ने अपना तीसरा खिताब 2018 में ओमान के मस्कट में आयोजित पांचवीं एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में जीता था। इस प्रतियोगिता में भारत, जापान, मलेशिया, ओमान, पाकिस्तान और दक्षिण कोरिया ने भाग लिया था। भारत और पाकिस्तान फाइनल में पहुंचे थे, लेकिन लगातार बारिश के कारण मैच पूरा नहीं हो सका और दोनों टीमों को संयुक्त विजेता घोषित किया गया। भारत ने 2023 में चेन्नई में खेली गई सातवीं एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में फिर से खिताब जीता था। फाइनल में उसका मुकाबला मलेशिया से था। भारत एक समय पिछड़ रहा था, लेकिन उसने शानदार वापसी करते हुए 4-3 से जीत हासिल की। पहले हाफ में मलेशिया 3-1 से आगे था, लेकिन आखिरी 16 मिनट में हरमनप्रीत सिंह, गुरजंत सिंह और आकाशदीप सिंह के गोल ने मैच का रुख ही पलट दिया। इस जीत के साथ भारत ने अपना चौथा खिताब जीता और टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे सफल टीम बन गई। भारत ने चीन के हुलुनबुइर में खेली गई आठवीं चैंपियंस ट्रॉफी में भी अपनी लय बरकरार रखी। भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई जहां उसका सामना चीन से हुआ। भारत ने इस कड़े मुकाबले में जुगराज सिंह के निर्णायक गोल से 1-0 से जीत हासिल की।
अगर आपका भी अकेले घूमने का मन है, लेकिन पहली सोलो इंटरनेशनल ट्रिप के लिए किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहां पर ज्यादा पैसे न खर्च करने पड़े। तो आप एशिया के कुछ खूबसूरत देश आपकी लिस्ट में शामिल कर सकती हैं। सोलो ट्रिप का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको किसी दूसरे के हिसाब से अपना प्लान नहीं बनाना पड़ता है। सोलो ट्रिप में जब मन करे, जहां मन करे वहां जाएं, रुकें और अपनी पसंद का खाना खाएं। वहीं अगर आपको बजट को ध्यान में रखना है, तो आप वियतनाम और थाईलैंड जैसे ऑप्शन देख सकती हैं। इन जगहों पर आप खूबसूरत बीच, स्वादिष्ट लोकल फूड्स, शानदार मार्केट और एक अलग ही कल्चर देखने को मिलेगा। वहीं अगर आप भी इस बार अकेले विदेश घूमने का प्लान कर रही हैं, तो आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 3 ऐसे खूबसूरत देशों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर आप सोलो ट्रिप के लिए जा सकती हैं। इसे भी पढ़ें: Travel Tips: Vrindavan के Chhatikara में स्थित Char Dham Mandir में करें चार धामों के दर्शन मलेशिया सोलो ट्रिप के लिए मलेशिया भी एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। खासकर अगर आप शहर, फूड, शॉपिंग और घूमने के साथ-साथ थोड़ा नेचर भी देखना चाहती हैं, तो आपको Kuala Lumpur जैसे शहर से लेकर कई दूसरी खूबसूरत जगहों को एक्सप्लोर करने का मौका मिलेगा। वहीं अच्छी बात यह है कि मलेशिया में बस और ट्रेन जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करके अपना अपने खर्च को थोड़ा मैनेज कर सकती हैं। आप मलेशिया में Kuala Lumpur में घूमने के साथ-साथ शॉपिंग भी कर सकती हैं। यहां के लोकल फूड को एंजॉय कर सकती हैं। थाईलैंड वहीं फॉरेन ट्रिप के लिए आप थाईलैंड भी जा सकती हैं। अगर आपको शॉपिंग, स्ट्रीट फूड और घूमने-फिरने के साथ बीच का मजा चाहिए, तो आपको थाईलैंड जा सकती हैं। यहां पर आप सोलो ट्रिप कर सकती हैं। थाईलैंड का बैंकॉक शहर सबसे फेमस है। आप यहां पर लोकल मार्केट्स में घूमने के साथ-साथ स्ट्रीट फूड ट्राई कर सकती हैं। अगर आपका बजट कम है, तो आप महंगे होटल्स की जगह हॉस्टल्स या अफॉर्डेबल स्टे देख सकती हैं। आप बैंकॉक के अलावा फुकेट या पटाया भी घूमने के लिए जा सकती हैं। आप थाईलैंड में बीचेस और आइलैंड का मजा ले सकती हैं और लोकल मार्केट्स को एक्सप्लोर कर सकती हैं। इसके अलावा स्ट्रीट फूड ट्राई करना न भूलें। वियतनाम आप कम बजट में वियतनाम भी जा सकती हैं। यहां पर आपको बीच के साथ, लोकल मार्केट्स, पहाड़ और अलग-अलग कल्चरल एक्सपीरियंस कर सकेंगी। वियतनाम में आपको एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए ट्रेन, बस और फ्लाइट आदि के ऑप्शंस मिल जाएंगे। आप हनोई, दा नांग और होई आन जैसी जगहों को एक्सप्लोर कर सकती हैं। इसके अलावा आप यहां पर खूबसूरत बीच पर समय बिता सकती हैं। पहाड़ों और नेचर की खूबसूरती को निहारने के साथ लोकल फूड का स्वाद ले सकती हैं और यहां आपको लोकल लाइफ देखने का मौका मिलेगा। इन बातों का रखें ध्यान अगर आप भी पहली बार अकेले विदेश घूमने का प्लान कर रही हैं, तो इस दौरान आपको कुछ बातों का ध्यान रख सकती हैं। 2-3 महीने पहले से प्लानिंग कर लें। होटल और फ्लाइट की कीमत पहले से देखें। पहले से ही पूरे ट्रिप का बजट प्लान कर लें। हॉस्टल या होटल की लोकेशन आदि पहले से पता रखें। लोकल ट्रांसपोर्ट के ऑप्शन को पहले से समझ लें। अपने साथ जरूरी डॉक्यूमेंट्स रख लें। ट्रिप से पहले उस देश के लेटेस्ट एंट्री रूल्स को जरूर चेक करें।
New Delhi, 12 अक्टूबर . भारतीय फुटबॉल के जब दिग्गज खिलाड़ियों का नाम लिया जाता है, तो इस लिस्ट में जरनैल सिंह का भी जिक्र जरूर किया जाता है. 1950-60 में भारतीय फुटबॉल टीम के स्वर्णिम युग में जरनैल सिंह का प्रदर्शन कमाल का रहा. पंजाब में जन्मे जरनैल सिंह अपने आक्रामक खेल के लिए ... Read more
पंजाब में प्रस्तावित पुरुष एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला मुकाबला अब नहीं होगा।
आइची-नागोया एशियाई पैरा गेम्स के लिए चीनी खेल प्रतिनिधिमंडल की स्थापना
बीजिंग, 10 अक्टूबर . चीन विकलांग संघ द्वारा आयोजित आइची-नागोया एशियाई पैरा गेम्स के लिए चीनी खेल प्रतिनिधिमंडल की स्थापना Saturday को पेइचिंग में हुई. विदेश में आयोजित एशियाई पैरा गेम्स में भाग लेने वाला यह अब तक का सबसे बड़ा चीनी खेल प्रतिनिधिमंडल है. चीनी खेल प्रतिनिधिमंडल में 500 लोग शामिल हैं, जिनमें 13 ... Read more
AFC U17 Women Asian Cup: मलेशिया से ड्रॉ भी भारत को दिला देगा टूर्नामेंट का टिकट
लगातार दूसरी बार एएफसी अंडर-17 महिला एशियाई कप में जगह बनाने की दहलीज पर खड़ी भारतीय टीम के सामने रविवार को मेजबान मलेशिया की कड़ी चुनौती होगी। ग्रुप ई के इस निर्णायक मुकाबले में भारत को क्वालीफिकेशन पक्का करने के लिए सिर्फ हार से बचना है, जबकि मलेशिया को अगले दौर में पहुंचने के लिए हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी। दोनों टीमों ने अपने शुरुआती दो मैच जीते हैं और उनके खाते में छह-छह अंक हैं। भारत की स्थिति हालांकि 16 गोल दागने के कारण मजबूत है। मलेशिया के खाते में पांच गोल हैं। मुख्य कोच जोकिम अलेक्जेंडरसन की टीम को ग्रुप में शीर्ष स्थान के साथ क्वालीफाई करने के लिए केवल हार से बचना है। क्वालीफायर के आठ ग्रुपों की विजेता टीमें ही एएफसी अंडर-17 महिला एशियाई कप चीन 2027 में जगह बनाएंगी। उनके साथ मौजूदा चैंपियन उत्तर कोरिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया और मेजबान चीन भी टूर्नामेंट में खेलेंगे। इन चार टीमों ने 2026 सत्र में शीर्ष चार में रहने के कारण सीधे प्रवेश हासिल किया है। भारत ने पिछले सत्र में क्वार्टर फाइनल तक पहुंचकर इतिहास रचा था। रविवार को जीत या ड्रॉ हासिल करने पर भारतीय टीम एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर सकती है। ऐसा होने पर भारत किसी भी आयु वर्ग में, सीनियर स्तर सहित, लगातार दो महिला एशियाई कप में जगह बनाने वाली पहली भारतीय टीम बन जाएगा। कोच अलेक्जेंडरसन ने खिलाड़ियों को केवल ड्रॉ के लक्ष्य के साथ मैदान पर उतरने की जगह जीत की मानसिकता के साथ मुकाबला करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा, “हमें मैच में जीत के इरादे से उतरना होगा। युवा खिलाड़ियों से यह कहना मुश्किल है कि ड्रॉ भी पर्याप्त होगा। हम मुकाबला जीतने की कोशिश करेंगे, लेकिन साथ ही हमें आक्रमण करते समय अधिक समझदारी दिखानी होगी और सही संतुलन बनाना होगा।”भारत ने अलग-अलग अंदाज में दोनों जीत दर्ज करते हुए खुद को मजबूत स्थिति में पहुंचाया है। टीम ने अभियान की शुरुआत इराक को 14-0 से रौंदकर की थी। भारतीय टीम ने इसके बाद सीरिया के खिलाफ कड़ी चुनौती का सामना करते हुए 2-0 से जीत हासिल की। भारत की ओर से 15 वर्षीय अनुष्का कुमारी ने अब तक सात गोल दागे हैं। उन्होंने इराक के खिलाफ पांच और सीरिया के खिलाफ दो गोल किए हैं। अनुष्का ने कहा, “सात गोल करके बहुत अच्छा लग रहा है, लेकिन यह सिर्फ मेरे बारे में नहीं है। मेरी साथी खिलाड़ी मौके बना रही हैं और मुझे पास दे रही हैं। मैं उन मौकों को गोल में बदलने की कोशिश कर रही हूं। यह पूरी टीम का प्रयास है। हम सभी ने बहुत मेहनत की है। मैं टीम और कोच की ओर से मिले समर्थन के लिए आभारी हूं।”कोच ने खिलाड़ियों को लगातार याद दिलाया है कि शुरुआती दो मैचों में मिली जीत का कोई खास महत्व नहीं रह जाएगा, अगर टीम निर्णायक मुकाबले में अपना स्तर बरकरार नहीं रख पाती। स्वीडन के अलेक्जेंडरसन ने कहा, “भले ही बाहर के लोगों को लगता हो कि हम प्रबल दावेदार हैं, लेकिन हमें हमेशा विनम्र रहना होगा, चाहे सामने कोई भी टीम हो। हर खेल में विनम्र रहना और प्रतिद्वंद्वी का सम्मान करना जरूरी है। आत्मविश्वास भी महत्वपूर्ण है। आपको अपने खेल और अपनी तैयारियों पर भरोसा होना चाहिए, लेकिन मैच में कड़ी मेहनत करना भी उतना ही जरूरी है।
एशियाई हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी को लेकर CM भगवंत मान सख्त, विश्वस्तरीय तैयारियों के दिए निर्देश
मुख्यमंत्री ने बताया कि टूर्नामेंट का उद्घाटन समारोह 27 अक्टूबर को जालंधर में होगा, जबकि मैच 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक खेले जाएंगे. उन्होंने सभी संबंधित विभागों को तैयारियां समय से पहले पूरी करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि चैंपियनशिप का आयोजन बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन के नियमों और पेशेवर दृष्टिकोण के अनुरूप किया जाए.
क्या आपको रेचल चू की सिंगापुर की वह यादगार यात्रा याद है, जब अपने बॉयफ्रेंड के साथ छुट्टियां बिताने के दौरान उन्हें दुनिया के सबसे रईस परिवारों में से एक की चकाचौंध भरी दुनिया से रूबरू होने का अनचाहा मौका मिला था? अगर आप इस शानदार रोमांटिक-कॉमेडी के दीवाने हैं, तो आपके लिए एक बेहद रोमांचक खबर है। 'Crazy Rich Asians' एक बार फिर वापसी करने जा रहा है, लेकिन इस बार यह बड़े पर्दे की बजाय एक भव्य HBO सीरीज़ के रूप में दर्शकों के सामने आएगा। 2018 की यह रोमांटिक कॉमेडी फ़िल्म फिर से चर्चा में है क्योंकि HBO ने आठ एपिसोड की सीरीज़ का ऐलान किया है, जिसमें कॉन्स्टेंस वू, हेनरी गोल्डिंग और मिशेल योह अपने किरदारों में वापसी कर रहे हैं। नए शो के आने में अभी कुछ समय है, लेकिन जो दर्शक ओरिजिनल फ़िल्म को दोबारा देखना चाहते हैं, वे इसे भारत में JioHotstar, Netflix और Amazon Prime Video पर देख सकते हैं। भारत में 'Crazy Rich Asians' कहाँ देखें? ओरिजिनल 'Crazy Rich Asians' फ़िल्म JioHotstar, Netflix और Amazon Prime Video पर स्ट्रीम करने के लिए उपलब्ध है। 2018 में रिलीज़ हुई इस फ़िल्म को जॉन एम. चू ने डायरेक्ट किया था और यह केविन क्वान के इसी नाम के बेस्टसेलिंग नॉवेल पर आधारित है। 'Crazy Rich Asians' में क्या होता है? कॉन्स्टेंस वू ने रेचल चू का किरदार निभाया है, जो न्यूयॉर्क में इकोनॉमिक्स की प्रोफ़ेसर हैं और अपने बॉयफ़्रेंड निक यंग (हेनरी गोल्डिंग) के साथ सिंगापुर जाती हैं। रेचल को लगता है कि वह निक के परिवार से मिलने जा रही हैं। उन्हें यह नहीं पता होता कि निक देश के सबसे अमीर परिवारों में से एक से ताल्लुक रखते हैं। इस सरप्राइज़ से उनकी यात्रा का रुख बदल जाता है। निक का परिवार आलीशान घरों और शानदार पार्टियों वाली दुनिया में रहता है, और उनसे ऐसी उम्मीदें रखी जाती हैं जिनका रेचल ने पहले कभी सामना नहीं किया था। निक की माँ, एलेनोर यंग (मिशेल योह), को यह यकीन नहीं होता कि रेचल उनके बेटे के लिए सही जीवनसाथी हैं। जब रेचल परिवार की नाराज़गी को संभालने की कोशिश करती हैं, तो कपल को यह तय करना होता है कि क्या उनका रिश्ता आस-पास के दबाव को झेल पाएगा। फ़िल्म रोमांस और कॉमेडी के साथ-साथ क्लास (सामाजिक स्तर), परिवार की उम्मीदों और ऐसी दुनिया में ढलने की मुश्किल हकीकतों को भी दिखाती है जहाँ पैसे और रुतबे की बहुत अहमियत होती है। फ़िल्म की कास्ट में जेम्मा चैन, ऑक्वाफ़िना, केन जियोंग और रॉनी चिएंग भी शामिल हैं। यह फ़िल्म मुख्य रूप से एशियाई कलाकारों और एशियाई किरदारों पर आधारित एक बड़ी हॉलीवुड रोमांटिक कॉमेडी के तौर पर अपनी सफलता के कारण चर्चा का विषय बनी। HBO सीरीज़ के बारे में क्या जानकारी है? आने वाली सीरीज़ फ़िल्म की घटनाओं के बाद की कहानी दिखाएगी। HBO ने आठ एपिसोड का ऑर्डर दिया है, जिससे कहानी को किरदारों और उनके रिश्तों को और गहराई से दिखाने का मौका मिलेगा। वू और गोल्डिंग, रेचल और निक के तौर पर वापसी कर रहे हैं, जबकि चिएंग, एडी चेंग के अपने किरदार को फिर से निभाएंगे। येओह भी एलेनोर यंग के तौर पर एक बार-बार दिखने वाले किरदार में नज़र आएंगी। एडल लिम, जिन्होंने ओरिजिनल फ़िल्म की कहानी लिखने में मदद की थी, शो-रनर और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के तौर पर काम करेंगी। जॉन एम. चू और केविन क्वान भी नीना जैकबसन और ब्रैड सिम्पसन के साथ एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के तौर पर वापसी कर रहे हैं। इस सीरीज़ को HBO और वार्नर ब्रदर्स टेलीविज़न मिलकर प्रोड्यूस कर रहे हैं। प्रोडक्शन 2027 में शुरू होने वाला है। HBO ने अभी तक प्रीमियर की तारीख का ऐलान नहीं किया है, इसलिए दर्शकों को यह जानने के लिए थोड़ा और इंतज़ार करना होगा कि यंग परिवार स्क्रीन पर कब वापसी करेगा। Entertainment News Hindi Today only at Prabhasakshi
झज्जर के गांव बामडौला की खिलाड़ी वर्षा गुलिया ने मलेशिया में आयोजित एशियाई डीफ चैंपियनशिप में दो सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है। 3 से 8 अक्टूबर तक हुई प्रतियोगिता में वर्षा ने डिस्कस थ्रो और शॉट पुट में रजत पदक हासिल किए। वह इससे पहले टोक्यो ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और एशियन गेम्स में दो कांस्य पदक भी जीत चुकी हैं। उनकी उपलब्धि पर गांव और बादली क्षेत्र में खुशी का माहौल है। वर्षा के पिता महाबीर सिंह और परिवार ने उनकी सफलता पर गर्व जताया। उनके कोच डॉ. सतपाल ने भी उन्हें बधाई दी। दो स्पर्धाओं में जीते रजत पदक एशियाई डीफ चैंपियनशिप का आयोजन तीन से आठ अक्टूबर तक हुआ। इसमें वर्षा गुलिया ने डिस्कस थ्रो और शॉट पुट में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए दोनों स्पर्धाओं में सिल्वर मेडल अपने नाम किए। विदेशी धरती पर मिली इस सफलता से बामडौला गांव और झज्जर जिले का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन हुआ है। पहले भी देश के लिए जीत चुकी हैं पदक वर्षा गुलिया इससे पहले टोक्यो ओलिंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इसके अलावा वह एशियन गेम्स में दो कांस्य पदक भी जीत चुकी हैं। लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर वर्षा ने साबित किया है कि मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प से बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है। परिवार की मेहनत लाई रंग वर्षा की सफलता के पीछे उनके परिवार का वर्षों का संघर्ष और सहयोग रहा है। उनके पिता महाबीर सिंह और परिवार के अन्य सदस्यों ने बेटी को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत की। पिता ने बताया कि वर्षा ने बचपन से ही संघर्ष किया है। परिवार ने भी उसके सपनों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आज बेटी की उपलब्धियों पर पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है। गांव पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत दो सिल्वर मेडल जीतकर भारत लौटने पर वर्षा गुलिया का भव्य स्वागत किया गया। उनकी उपलब्धि पर ग्रामीणों और खेल प्रेमियों ने खुशी जताई। क्षेत्र के लोगों ने इसे झज्जर जिले और हरियाणा के लिए गौरव का क्षण बताया। कोच ने दी बधाई वर्षा गुलिया के कोच पद्मश्री एवं द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित डॉ. सतपाल ने भी उनकी सफलता पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि वर्षा पहले टोक्यो ओलिंपिक में भी हिस्सा ले चुकी हैं। अब एशियाई डीफ चैंपियनशिप में दो सिल्वर मेडल जीतना उनके लिए बेहद खुशी की बात है। वर्षा गुलिया की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और गांव, बल्कि पूरे झज्जर जिले के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने एक बार फिर साबित किया है कि हरियाणा की बेटियां खेल के मैदान में देश का तिरंगा बुलंद करने का दम रखती हैं।
Asian Champions Trophy 2026 से हटा Pakistan, 1 नवंबर को Malaysia से भिड़ेगा India
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का असर अब हॉकी के मैदान पर भी देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान ने भारत में होने वाली पुरुष एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी 2026 से हटने का फैसला किया है। इस टूर्नामेंट में अब उसकी जगह बांग्लादेश की टीम हिस्सा लेगी। प्रतियोगिता 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक पंजाब के जालंधर और मोहाली में आयोजित होनी है। पाकिस्तान के हटने के बाद भारतीय टीम के मुकाबलों के कार्यक्रम में भी बदलाव किया गया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, भारत को पहले 1 नवंबर को पाकिस्तान के खिलाफ खेलना था। अब इसी तारीख पर भारतीय टीम मलेशिया से भिड़ेगी। इस टूर्नामेंट में कुल 6 टीमें हिस्सा लेने वाली हैं। पाकिस्तान के बाहर होने के बाद बांग्लादेश को प्रतियोगिता में शामिल किया गया है। हालांकि, इस बदलाव से टूर्नामेंट का आयोजन तय कार्यक्रम के अनुसार ही आगे बढ़ने की उम्मीद है। पाकिस्तान हॉकी महासंघ के अध्यक्ष मोहिउद्दीन अहमद वानी ने पहले ही संकेत दिया था कि भारत में खेलने का फैसला सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा था कि महासंघ सरकार के निर्देशों का पालन करेगा। इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी घोषणा की थी कि पाकिस्तान सहित 6 टीमें इस प्रतियोगिता में भाग लेंगी। उन्होंने केंद्र सरकार की उस नीति का हवाला दिया था, जिसके तहत पाकिस्तान को भारत की धरती पर बहु-देशीय खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाती है। हालांकि, पाकिस्तान हॉकी महासंघ ने 16 सितंबर को एशियाई हॉकी महासंघ को पत्र लिखकर प्रतियोगिता के लिए किसी तटस्थ स्थान की मांग की थी। महासंघ का कहना था कि इससे टीम की बिना रुकावट और पूरी भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, वानी ने उस समय कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा संवेदनशील हालात और सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए यह मांग की गई है, ताकि खिलाड़ियों और अधिकारियों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिल सके। टूर्नामेंट की शुरुआत 27 अक्टूबर को जालंधर के सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम में होगी। वहीं, फाइनल मुकाबला 5 नवंबर को मोहाली के बलबीर सिंह सीनियर अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में खेला जाएगा। एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी महाद्वीप की प्रमुख हॉकी प्रतियोगिताओं में शामिल है, जिसमें एशिया की मजबूत टीमें खिताब के लिए मुकाबला करती हैं। ऐसे में पाकिस्तान की गैरमौजूदगी से भारत-पाकिस्तान मुकाबले का इंतजार कर रहे हॉकी प्रशंसकों को निराशा हो सकती है। गौरतलब है कि इसी सप्ताह पाकिस्तान ने भारत से जुड़े एक अन्य खेल आयोजन से भी दूरी बनाई है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स प्रतियोगिता के लिए अपनी टीम को अनापत्ति प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पाकिस्तान की टीम ने टूर्नामेंट से हटने का फैसला किया। पाकिस्तान ने प्रतियोगिता के आयोजकों पर दोहरे मापदंड और पक्षपात के आरोप भी लगाए थे और भविष्य में भी इसमें भाग नहीं लेने की बात कही थी। पिछले संस्करण में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ 2 मुकाबलों में खेलने से इनकार किया था, जिनमें एक सेमीफाइनल भी शामिल था। उस सेमीफाइनल में पाकिस्तान को बिना खेले जीत मिली थी। वहीं, ग्रुप चरण के मुकाबले में भारत के हटने के बावजूद उसे अंक दिए जाने पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने नाराजगी जताई थी। बता दें कि खेलों में भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत हमेशा दर्शकों के बीच खास उत्साह पैदा करती है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव का असर कई बार खेल आयोजनों पर भी पड़ता रहा है। अब एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान की जगह बांग्लादेश की भागीदारी और भारत के बदले हुए कार्यक्रम पर सभी की नजरें टिकी हैं।
एशियाई खेलों में सफलता के बाद भी विदेशी Archery Coach Dave Cousins को तीन माह से वेतन नहीं मिला
(तपन मोहंता)रांची, नौ अक्टूबर भारतीय कंपाउंड तीरंदाजों ने एशियाई खेलों के जरिये ओलंपिक कोटा हासिल करने वाला पहला देश बनकर इतिहास रच दिया लेकिन उन्हें इस उपलब्धि तक पहुंचाने वाले विदेशी कोच को कार्यभार संभालने के तीन महीने बाद भी वेतन नहीं मिला है। अमेरिका के डेव कजिंस को मई में भारत का मुख्य कंपाउंड तीरंदाजी कोच बनाया गया था। समझा जाता है कि बकाया भुगतान नहीं मिलने पर उन्होंने भारत छोड़कर जाने की धमकी दी है। भारतीय तीरंदाजी संघ के कोषाध्यक्ष डॉक्टर जोरिस पाउलोस उम्माचेरिल और भारतीय खेल प्राधिकरण के एक अधिकारी ने कहा कि भुगतान में विलंब तकनीकी कारणों से हुआ है जो अब सुलझ गया है और अगले कुछ दिन में उन्हें भुगतान हो जायेगा। कजिंस के मार्गदर्शन में भारतीय कंपाउंड तीरंदाजों ने एशियाई खेलों में तीन स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीता। भारत ने तीरंदाजी में पांच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य हासिल किया। सूत्रों ने कहा ,‘‘ उन्होंने कुछ अधिकारियों से बात की और कहा कि अगर भुगतान नहीं होता है तो वह स्वदेश लौट जायेंगे। पिछले तीन महीने में उनके साथ जिस तरह बर्ताव हुआ है, उससे वह खुश नहीं है। अभी तक उन्हें वेतन नहीं मिला है।’’इस बीच महासंघ दक्षिण कोरिया के पार्क चाए सून से भी लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 से पहले भारत के रिकर्व तीरंदाजों का प्रभार देने को लेकर बात कर रहा है। उनके दिसंबर में टीम से जुड़ने की उम्मीद है। उधर जोरिस ने कहा ,‘‘ भारतीय खेल प्राधिकरण के साथ कुछ मसला था जिससे भुगतान में विलंब हुआ लेकिन अब सब सुलझ गया है और दो दिन में भुगतान हो जायेगा।’’दिल्ली में साइ के एक अधिकारी ने कहा ,‘‘ हम उनसे बात कर चुके हैं और बता दिया है कि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बैंक के साथ कुछ तकनीकी कारणों से विलंब हुआ था लेकिन अब दो दिन में भुगतान हो जायेगा।
Mansukh Mandaviya से मिले पैरा निशानेबाज, Asian Para Games चयन में PCI पर लगाया पक्षपात का आरोप
नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर आगामी आइची-नागोया पैरा एशियाई खेलों के लिए चयन प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे पैरा निशानेबाजों ने शुक्रवार को यहां खेल मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात की और खेल प्रशासन में कथित खामियों को लेकर अपनी चिंताएं उनके सामने रखीं। तीन निशानेबाजों के एक प्रतिनिधिमंडल ने खेल मंत्री से मुलाकात की और अपना आरोप दोहराया कि भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) ने 18 अक्टूबर से शुरू होने वाले खेलों के लिए चार ऐसे निशानेबाजों को शामिल करने के उद्देश्य से चयन के नियमों में ढील दी जो निर्धारित मानदंडों पर खरे नहीं उतरते थे। एशिया में तीसरी रैंकिंग पर काबिज पैरा पिस्टल निशानेबाज संदीप कुमार ने पहले चयन प्रक्रिया में पक्षपात का आरोप लगाया था। उनका दावा था कि महाद्वीपीय रैंकिंग में 14वें स्थान पर मौजूद रुद्रांश खंडेलवाल को उनसे और मौजूदा एशियाई नंबर एक आकाश पर तरजीह देते हुए चुन लिया गया। खेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई को बताया, ‘‘मंत्री ने उनकी बातें सुनीं और उनकी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। इस स्थिति को बेहतर तरीके से कैसे सुलझाया जाए, इस पर चर्चा अभी जारी है। ’’पैरा निशानेबाजों ने पैरा एशियाई खेलों के लिए चयन प्रक्रिया में कथित वित्तीय भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और हेरफेर की तत्काल स्वतंत्र जांच की मांग की थी। भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के महानिदेशक को बुधवार को सौंपे गए एक ज्ञापन में पैरा निशानेबाजों ने पीसीआई के अधिकारियों और उसकी निशानेबाजी तकनीकी समिति (एसटीसी) पर गैर-कानूनी तरीके से पैसे वसूलने, खुलेआम भ्रष्टाचार और खेल मंत्रालय के दिशानिर्देशों के उल्लघंन करने का आरोप लगाया। बैठक में मौजूद एक निशानेबाज ने कहा, ‘‘पीसीआई को लगता है कि चूंकि यह मामला मीडिया में उजागर हो चुका है इसलिए अब खिलाड़ियों के नाम भेजना उनके लिए अपमानजनक होगा। उनका कहना है कि ‘हमने कोटे छोड़ दिए हैं और अब कुछ नहीं हो सकता’। ’’उन्होंने कहा, ‘‘हमने खेल मंत्री को बताया कि पीसीआई खिलाड़ियों को नहीं भेजकर देश की पदक संभावनाओं को नुकसान पहुंचा रही है। इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा? ’’खेल मंत्री के साथ यह बैठक उस घटना के एक दिन बाद हुई जिसमें पैरा निशानेबाजों ने पैरा एशियाई खेलों में हिस्सा लेने वाले भारतीय दल के विदाई समारोह के दौरान विरोध प्रदर्शन किया था।
एशियाई खेलों में चूके Dhiraj Bommadevara, अब 2028 Olympics के लिए सुधार पर नजर
(तपन मोहंता)रांची, नौ अक्टूबर विश्व में चौथे नंबर के खिलाड़ी धीरज बोम्मादेवरा लगातार दूसरे एशियाई खेलों से बिना किसी व्यक्तिगत पदक के लौटे हैं, लेकिन इस शीर्ष भारतीय रिकर्व तीरंदाज को इसका कोई अफसोस नहीं है और इसके बजाय वह अपने रिकॉर्ड क्वालीफाइंग स्कोर से प्रेरणा लेकर 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए सुधार करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। धीरज एशियाई खेलों से ठीक एक सप्ताह पहले मैक्सिको में तीरंदाजी विश्व कप फाइनल में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बने थे। लेकिन एशियाई खेलों में व्यक्तिगत पदक एक बार फिर उनके हाथ नहीं लगा, हालांकि उन्होंने मिश्रित और पुरुष टीम स्पर्धाओं दोनों में रजत पदक हासिल किए। धीरज ने हैदराबाद से पीटीआई से कहा, ‘‘मुझे अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन पर कभी पछतावा नहीं हुआ। क्वालीफाइंग राउंड में मैंने एशियाई खेलों का रिकॉर्ड बनाया। हमने टीम और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में रजत पदक भी जीते।’’धीरज आर्चरी प्रीमियर लीग में माइटी मराठाज का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनसे पहले, डोला बनर्जी एकमात्र भारतीय तीरंदाज थीं जिन्होंने 2007 में महिलाओं की रिकर्व श्रेणी में विश्व कप फाइनल में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता था। एशियाई खेलों में क्वालीफाइंग राउंड में रिकॉर्ड 698 अंक बनाने वाले धीरज ने कहा, ‘‘व्यक्तिगत मुकाबले में जीत और हार का अंतर मामूली होता है। यह खेल का हिस्सा है। इसने मुझे यह अहसास दिलाया है कि मुझे और अधिक मेहनत करने की जरूरत है। इस लिहाज से यह मेरे लिए और भारत के लिए अच्छा है, क्योंकि (व्यक्तिगत) कांस्य पदक भारत को मिला।’’उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मुझे किसी तरह का मलाल नहीं है। हमारा प्रदर्शन अच्छा रहा और इससे हमें ओलंपिक चक्र को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी आत्मविश्वास भी मिला। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि हमारे पास पदक भी हैं और आत्मविश्वास भी। हमने उन कमियों की पहचान कर ली है जिन्हें हमें दूर करना है।’’धीरज ने कहा, ‘‘परिस्थितियां कैसी भी हों हमें उन कमियों पर काम करते रहना होगा। हमने उन चीजों की पहचान कर ली है जिन पर हमें काम करना है और ओलंपिक से पहले यह काफी महत्व रखता है।
Asian Games गोल्ड मेडलिस्ट ऋतु नेगी का नाम 1 करोड़ के Cash Award से हटा, गहराया विवाद
अर्जुन पुरस्कार विजेता भारतीय महिला कबड्डी टीम की पूर्व कप्तान और जापान में हाल ही में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम की सदस्य ऋतु नेगी का नाम हिमाचल प्रदेश सरकार की पुरस्कार पाने वाले खिलाड़ियों की सूची से हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। ऋतु हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र की रहने वाली हैं और उनकी शादी हरियाणा के पानीपत में हुई है। हिमाचल सरकार ने एक करोड़ रुपये के नकद पुरस्कार के लिए पात्र खिलाड़ियों की सूची से अंतिम समय में उनका नाम हटा दिया, जिससे ऋतु और उनका परिवार निराश है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एशियाई खेलों में कबड्डी में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला टीम की सदस्य रही हिमाचल प्रदेश की तीन खिलाड़ियों पुष्पा राणा, ज्योति ठाकुर और भावना ठाकुर तथा भारतीय महिला क्रिकेटर रेणुका ठाकुर के लिए एक करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि की घोषणा की थी। ऋतु ने सरकार के इस कदम को बेहद अपमानजनक बताया। उन्होंने मीडिया से कहा, ‘‘एक सप्ताह पहले तक मैं हिमाचल की बेटी थी और मुख्यमंत्री ने फेसबुक पर बधाई संदेश साझा किया था, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और सांसद अनुराग ठाकुर ने मुझे बधाई देने के लिए फोन किया था। मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि दो दिन में अचानक क्या बदल गया।’’ ऋतु ने कहा कि एक ऐसी खिलाड़ी के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों किया जा रहा है जिसने लगातार तीन एशियाई खेलों में देश का प्रतिनिधित्व किया है और दो स्वर्ण पदक और एक रजत पदक जीता है। उन्होंने बताया कि वह भारतीय रेलवे में कार्यरत हैं, लेकिन उन्होंने घरेलू प्रतियोगिताओं में हरियाणा का नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने पूछा, ‘‘मेरे करियर के इस पड़ाव पर हिमाचल प्रदेश सरकार मेरे साथ इस तरह का व्यवहार क्यों कर रही है।’’ ऋतु के पिता भवन सिंह नेगी ने सवाल उठाया कि क्या किसी लड़की की शादी दूसरे राज्य में हो जाने से वह अपने गृह राज्य की बेटी नहीं रह जाती। उन्होंने बताया कि ऋतु को 2023 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद हिमाचल सरकार से नकद पुरस्कार मिला था, जबकि उनकी शादी हरियाणा में हुई थी। पुरस्कारों की सूची से ऋतु का नाम हटाए जाने के मामले को भाजपा ने हिमाचल प्रदेश के गौरव और राज्य की बेटी के सम्मान से जोड़ दिया है। शिलाई के पूर्व भाजपा विधायक और भाजपा के राज्य प्रवक्ता बलदेव सिंह तोमर ने कहा कि हिमाचल सरकार ने न केवल हिमाचल की एक बेटी की गरिमा को ठेस पहुंचाई है, बल्कि पुरस्कार सूची से ऋतु का नाम हटाकर राज्य के गौरव को भी धूमिल किया है। उन्होंने हिमाचल सरकार को इस फैसले पर फिर से विचार करने के लिए कहा और ‘हिमाचल की बेटी’ को उचित सम्मान देने की अपील की। राज्य सरकार के सूत्रों ने बताया कि सरकार इस मामले पर हरियाणा सरकार के रुख पर बारीकी से नजर रख रही है। हरियाणा सरकार ने अभी तक ऋतु के लिए किसी भी प्रकार के नकद पुरस्कार की घोषणा नहीं की है, इसलिए हिमाचल सरकार बाद में निर्णय ले सकती है। हिमाचल प्रदेश के खेल मंत्री यादविंदर गोमा ने कहा कि नकद पुरस्कार पाने वाले हिमाचल प्रदेश के खिलाड़ियों की सूची में बदलाव का कारण उन्हें पता नहीं है और वह इस मामले में मुख्यमंत्री से बात करेंगे।
Asian Games 2026: Indian Army के एथलीटों ने जीते रिकॉर्ड 20 मेडल, 6 Gold किए नाम
भारतीय सेना की स्पोर्ट्स टीम ने एशियन गेम्स 2026 में अब तक का अपना सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया और रिकॉर्ड 20 मेडल (6 गोल्ड, 8 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज़) जीते। एक रिलीज़ के अनुसार, 15 अलग-अलग खेलों में सेना के 62 एथलीटों के प्रदर्शन ने भारत के कुल मिलाकर चौथे स्थान पर रहने में अहम भूमिका निभाई और देश के खेल इतिहास में कई नए अध्याय जोड़े। ये छह गोल्ड मेडल, 2022 एशियन गेम्स में आर्मी के गोल्ड मेडल की संख्या से 100 प्रतिशत ज़्यादा हैं। इसे भी पढ़ें: Asian Games में Indian Army के एथलीटों का जलवा, जीते 6 स्वर्ण सहित कुल 20 पदक भारत के कुल पदकों में आर्मी के खिलाड़ियों का योगदान 23.52 प्रतिशत रहा; उन्होंने देश के कुल 85 पदकों में से 20 पदक जीते, जबकि उनके छह गोल्ड मेडल भारत के कुल 21 गोल्ड मेडल का 29 प्रतिशत थे। यह उपलब्धि उस स्पोर्ट्स इकोसिस्टम को भी दिखाती है जिसे भारतीय सेना ने पिछले कुछ सालों में तैयार किया है। इस प्रक्रिया की शुरुआत स्पोर्ट्स टैलेंट की पहचान करने और होनहार एथलीटों को एक व्यवस्थित माहौल में आगे बढ़ने का मौका देने से होती है। इसके बाद, अलग-अलग खेलों के लिए खास ट्रेनिंग सेंटर्स में एथलीटों को तैयार किया जाता है। उन्हें अत्याधुनिक सुविधाएं, खास कोचिंग, टेक्निकल और साइंटिफिक सपोर्ट, ज़रूरी उपकरण, कॉम्पिटिशन का अनुभव और लगातार मोटिवेशन मिलता है। इसका मकसद सिर्फ़ टैलेंट खोजना नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों को ऐसा माहौल और सपोर्ट देना है जिससे वे अपनी काबिलियत को बेहतरीन परफ़ॉर्मेंस में बदल सकें। यह इकोसिस्टम खिलाड़ियों को मकसद के साथ ट्रेनिंग करने, सबसे ऊंचे लेवल पर मुक़ाबला करने और संस्थान के सपोर्ट से कामयाबी की राह पर आगे बढ़ने का मौका देता है। खेलों में शानदार प्रदर्शन की आर्मी की एक लंबी और गौरवशाली परंपरा रही है। भारतीय हॉकी के इतिहास के सबसे बड़े नामों में से एक, मेजर ध्यानचंद, इस विरासत की एक अहम पहचान बने हुए हैं। हाल के समय में, लेफ्टिनेंट कर्नल नीरज चोपड़ा जैसे खिलाड़ियों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया है, वे इंटरनेशनल एथलेटिक्स में सबसे ऊंचे मुकाम तक पहुंचे हैं और भारतीय खेलों को दुनिया भर में पहचान दिलाई है। इसे भी पढ़ें: Devendra Jhajharia ने Asian Para Games चयन को बताया पारदर्शी, कहा- सुलझाएंगे समस्याएं एशियन गेम्स 2026 में भारतीय सेना की सफलता, सेना प्रमुख के 'विजय' (VIJAY) विज़न को साकार करती है, जिसमें 'योद्धा' को बदलाव के केंद्र में रखा गया है। खेल के मैदान में उतरने वाला योद्धा उसी अनुशासन, सहनशक्ति, दृढ़ संकल्प और जीतने के जज़्बे का प्रतीक है जो एक सैनिक की पहचान होते हैं। ये उपलब्धियाँ प्रतिभा को निखारने और व्यक्तिगत क्षमता को राष्ट्रीय स्तर की उत्कृष्टता में बदलने के प्रति सेना की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। पदकों से कहीं बढ़कर, खेल में हिस्सा लेने वाला हर योद्धा देश की उम्मीदों को साथ लेकर चलता है; यह साबित करते हुए कि भले ही मैदान बदल जाए, लेकिन योद्धा का जज़्बा हमेशा एक जैसा ही रहता है।
Asian Games में Indian Army के एथलीटों का जलवा, जीते 6 स्वर्ण सहित कुल 20 पदक
नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर भारतीय सेना के खिलाड़ियों ने हाल ही में संपन्न हुए आइची-नागोया एशियाई खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 20 पदक जीते। भारत के 501 सदस्यीय दल में सेना के 62 खिलाड़ी शामिल थे जिन्होंने 15 स्पर्धाओं में भाग लिया तथा छह स्वर्ण, आठ रजत और छह कांस्य पदक जीते। भारत ने कुल 85 पदक जीते जिनमें 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक शामिल हैं। यहां जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘भारत के कुल पदकों में से 23.52 प्रतिशत पदक सेना के खिलाड़ियों ने जीते। उन्होंने देश के 85 पदकों में से 20 पदक जीते। उनके छह स्वर्ण पदक भारत के 21 स्वर्ण पदकों का 29 प्रतिशत है।’’सेना के जिन खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया उनमें नायब सूबेदार नीरू ढांडा प्रमुख हैं, जिन्होंने ट्रैप निशानेबाजी में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। लंबी दूरी के धावक नायब सूबेदार गुलवीर सिंह ने भी दो रजत और एक कांस्य पदक अपने नाम किया। गुलवीर ने किसी एक एशियाई खेल में तीन व्यक्तिगत पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष ट्रैक एवं फील्ड एथलीट बनकर नया इतिहास रचा। निशानेबाजी में सेना के चार निशानेबाजों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने तीन स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। भारतीय सेना के खिलाड़ियों ने मुक्केबाजी में एक स्वर्ण और दो कांस्य पदक सहित तीन पदक जीते। सेना के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और एशियाई खेलों के रिकॉर्ड भी बनाए। हवलदार सावन बरवाल ने पुरुषों की मैराथन में दो घंटे, 11 मिनट, 37 सेकेंड के समय के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। सूबेदार धीरज बोम्मादेवरा ने पुरुषों की रिकर्व तीरंदाजी में 698 के स्कोर के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। हवलदार कमलजीत ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में 484.6 के स्कोर के साथ जबकि नीरू ने महिलाओं की ट्रैप निशानेबाजी में 118 अंक के साथ एशियाई खेलों के नए रिकॉर्ड बनाए। रोइंग में नायब सूबेदार सलमान खान ने पुरुषों की डबल स्कल्स स्पर्धा में भारत के लिए एशियाई खेलों का पहला पदक जीता। महिला खिलाड़ियों ने सेना के कुल पदकों में 15 प्रतिशत और स्वर्ण पदकों में 33 प्रतिशत का योगदान दिया। विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘एशियाई खेल 2026 में सेना का प्रतिनिधित्व भी काफी बढ़ गया है। भारतीय दल में सेना के खिलाड़ियों की संख्या 12.6 प्रतिशत थी, जबकि 2023 के एशियाई खेलों में यह नौ प्रतिशत थी।’’इसके अनुसार, ‘‘सेना के 62 खिलाड़ियों में नौ महिला खिलाड़ी थी जिन्होंने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता।
Panipat News: एशियाई खेलों में सात ने बढ़ाया मान
एशियाई खेलों में सात ने बढ़ाया मान
एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली चंबा की सीमा से भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष नीता अंबानी मुलाकात करेंगी, जिससे उनके ओलंपिक सपने को साकार होने की उम्मीद है।
बेटियों का जलवा: एशियाई खेलों में भारत की स्वर्णिम कहानी, 10 में से 8 स्वर्ण महिला खिलाड़ियों के नाम
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पश्चिम एशियाई देशों के छात्रों के लिए सीबीएसई विशेष परीक्षा 2026 की एलओसी भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। छात्र 22 से LOC भर सकते हैं और एक या अधिक विषय चुन सकते हैं।
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Rahul Gandhi Malasia PM Video: BRICS के बीच राहुल-प्रियंका से मिले मलेशिया के PM, क्या बात हुई? Rahul Gandhi Anwar Ibrahim Meeting को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को मलेशिया के प्रधानमं
गन्तव्य देशों के हालात खराब होने से दक्षिण एशियाई प्रवासन में कमी
आशीष विश्वास अमेरिका और यूरोपीय देशों में अपनाई गई सरकारी नीति में नए ज़ोर की वजह से, लगभग बिना हुनर वाले आम दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए स्थितियां असल में मुश्किल हो गई हैं। इसका मकसद सालों से वहां गैर-कानूनी ढंग से रह रहे एशियाई लोगों को बाहर निकालना है। ज़्यादातर मौजूदा सरकारों पर दक्षिणपंथियों का ज़ोरदार दबाव है। हाल के दिनों में अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व में दक्षिण एशियाई लोगों के लिए प्रवासन और वहां जाकर नौकरी पाना मुश्किल होता जा रहा है, जो बड़े झगड़ों और लगातार सामाजिक उथल-पुथल और अशांति का सीधा नतीजा है। इस इलाके के बड़े देशों की तरह, भारत और बांग्लादेश पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। लंबे समय में दोनों देशों के सामने दोहरी चुनौती है: घरेलू श्रम बाजार में नौकरी के लिए बेचैनी और बढ़ जाएगी, क्योंकि वे बड़ी आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। साथ ही प्रवासी कामगारों द्वारा घर भेजे जाने वाली बड़ी राशि (रेमिटेंस) से होने वाली अच्छी-खासी आय भी समय के साथ कम हो जाएगी। खबरें हैं कि कम से कम 1500 और भारतीयों को अल्पावधि में अमेरिका से वापस भेजा जा रहा है और केनडा में भी हालात बेहतर नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि नौकरी के मौके कम हो रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों में अपनाई गई सरकारी नीति में नए ज़ोर की वजह से, लगभग बिना हुनर वाले आम दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए स्थितियां असल में मुश्किल हो गई हैं। इसका मकसद सालों से वहां गैर-कानूनी ढंग से रह रहे एशियाई लोगों को बाहर निकालना है। ज़्यादातर मौजूदा सरकारों पर दक्षिणपंथियों का ज़ोरदार दबाव है, क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टियों पर गैर-कानूनी प्रवासन को बढ़ावा देने का आरोप लगता है। आरोप है कि पहले से ही स्थानीय संस्कृति के कमज़ोर होने और गंभीर सुरक्षा चिंताओं जैसी स्थानीय समस्याएं हैं। ज़्यादातर हाथ से काम करने वाले अस्थायी कामों में लगे, हज़ारों प्रवासी ऐसे कमज़ोर लक्ष्य बन गए हैं जिन्हें तुरंत और बिना किसी औपचारिकता के वापस भेजा जा सकता है। यह विकसित देशों में अपनी मौजूदा समस्याओं के समाधान के लिए शासन और नीतिगत कदमों का नतीजा है। यूनाइटेड किंगडम से लेकर अमेरिका तक, उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों और प्रवासियों के लिए वीज़ा मिलना नए कड़े कानूनों से प्रभावित हुआ है, पढ़ाई की फीस बहुत ज़्यादा बढ़ा दी गई है और कानूनी तौर पर स्थायी रूप से रहने का अधिकार कम कर दिया गया है। प्रवासियों के खिलाफ नकारात्मक रूझान सिर्फ़ पश्चिमी देशों तक ही सीमित नहीं है। दिसंबर 2025 तक, सऊदी अरब से किसी न किसी वजह से करीब 11,000 से ज़्यादा भारतीयों को वापस उनके अपने देशों में भेजा जा चुका था, जो एक रिकॉर्ड है। अमेरिका ने उसी समय तक करीब 3800 भारतीयों को वापस भेजा था। साफ़ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कही गई अच्छी दोस्ती का अमेरिका-भारत के आपसी रिश्तों के सभी मामलों में कोई खास फ़र्क नहीं पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि म्यांमार ने करीब 1600 'गैर-कानूनीÓ रूप से वहां रह रहे भारतीयों को वापस भेजा, जबकि मलेशिया और यूएई ने 2025 में करीब 1600 लोगों को वापस भेजा। भारत सरकार और अन्य स्रोतों का दावा है कि कई भारतीय अपनी मज़ीर् से भी अपने गोद लिए हुए देशों को छोड़ रहे हैं। इसकी वजहें हैं बेकाबू महंगाई, जिससे रहने का खर्च बढ़ रहा है, मुश्किल समय में काम का बोझ बढ़ रहा है, अधिकारियों की तरफ़ से बढ़ती परेशानी और घर पैसे भेजने में भारी कमी का आना। इसका मतलब यह नहीं है कि वे भारत के बाहर मौके नहीं देख रहे हैं। दुबई एक पसंदीदा नई जगह है। केनडा से 2025 में लगभग 2830 भारतीय लौटे, जबकि पिछले साल यह संख्या 2000 थी। कुछ मामलों में केनाडाई अधिकारियों के तरीकों पर शक जताते हुए, भारत सरकार ने प्रवासियों को वापस भेजने के दौरान अपनाए गए तरीकों पर भी कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें वापस भेजे गए लोगों को वापस आने के दौरान कोई सुविधाएं नहीं दी जाती हैं। यहां तक कि हमेशा मूलभूत मानवीय सुविधाएं भी नहीं दी जाती हैं, हालांकि लौटने वाला हर कोई घोषित अपराधी नहीं होता है। पड़ोसी बांग्लादेश की बात करें तो, इज़रायली हमलों के जारी रहने के कारण लेबनान में कम से कम 5000 लोगों की नौकरी चली गई। कम से कम 200 लोग स्वयं वापस चले गए क्योंकि प्रवासियों को जानलेवा काम के हालात में धकेला जा रहा था। यह स्थानीय श्रम कानूनों और नौकरी की शर्तों का खुला उल्लंघन था। साथ ही 'आपातकाल' के नाम पर अक्सर वेतन में कटौती भी की जाती थी। मध्य पूर्व में प्रवासी संगठनों के एच आर ग्रुपों और प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि लेबनान और आस-पास के इलाकों में 11 बांग्लादेशी कामगार मारे गए, जबकि कई घायल हुए, जिन पर स्थानीय अधिकारियों ने बहुत कम ध्यान दिया। अप्रशिक्षित कामगारों को सहयोगी, रेस्क्यू स्टाफ और दूसरे कामों के तौर पर समुद्री झड़पों में भी हिस्सा लेने के लिए मजबूर किया गया था। ऐसा लगता है कि ऐसे मामलों में कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं थी। सिर्फ़ एक मामले में फिलिपिनो कामगार के एक ग्रुप ने ऐसे आदेश मानने से मना कर दिया था। एचआर ग्रुपों का आरोप है कि कई बमबारी और मिसाइलों और ड्रोन हमलों के खतरनाक आदान-प्रदान के दौरान मरने वाले ज़्यादातर पीड़ित आर्थिक रूप से कमज़ोर प्रवासी कामगारों के असुरक्षित ग्रुप से थे। अलग-अलग अन्तरराष्ट्रीय प्राधिकारी, देश के प्रमुखों, संयुक्त और दूसरी संस्थाओं से बार-बार गुहार लगाने पर कोई जवाब नहीं मिला। कामगारों के लिए एक और चिंता यह थी कि क्या प्रवासियों को रखने वाले देश उनके ज़िंदा रहते हुए उनकी बुरी हालत के प्रति लगभग पूरी तरह से बेपरवाह होने के मद्देनजर उनके बकाए का इंतज़ाम भी करेंगे। ऐसे डर से इन्कार नहीं किया जा सकता। न सिफ़र् आपूर्तिकर्ता देश को कानूनी तौर पर मिलने वाले पैसे के सवाल पर नुकसान होगा, बल्कि घर पर पीड़ितों के परिवारों को भी बहुत ज़्यादा तकलीफ़ होगी। कई परिवार विदेश में नौकरी करके पैसे कमाने के लिए किसी सदस्य को भेजने और सक्षम बनाने हेतु भारी-भरकम कर्ज भी लेते हैं।
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