कुछ घंटों बाद बनेगा नवपंचम योग, 3 राशियां बनेंगी मालामाल!
Navpancham Rajyog 2026: आज रात बुध ग्रह अपनी स्वराशि मिथुन से निकलकर कर्क राशि में गोचर करने जा रहे हैं. कर्क राशि में प्रवेश करते ही मीन राशि में मौजूद शनि देव के साथ बुध का अत्यंत शुभ नवपंचम योग बनेगा.
सावन की पहली एकादशी पर बन रहा बेहद दुर्लभ महासंयोग, जानें सही तिथि, महत्व, क्या करें और क्या न करें
पवित्र सावन का महीना चल रहा है और चारों तरफ भगवान शिव की आराधना की धूम मची हुई है। इसी बीच सनातन धर्म में अत्यधिक धार्मिक महत्व रखने वाली सावन मास की पहली एकादशी तिथि आ गई है। सावन के महीने में एकादशी का व्रत पड़ना सोने पर सुहागा जैसा माना जाता है, क्योंकि इस दिन देवों के देव महादेव के साथ-साथ जगत के पालनहार भगवान विष्णु की भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस बार सावन की पहली एकादशी पर एक बेहद दुर्लभ और शुभ संयोग का निर्माण हो रहा है, जिससे इस व्रत का पुण्य कई गुना अधिक बढ़ गया है। आइए जानते हैं इस पावन व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और इस दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।सावन एकादशी का पौराणिक और धार्मिक महत्वहिंदू पंचांग के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को बहुत ही पवित्र माना गया है। ऐसा विश्वास है कि सावन की एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु और भोलेनाथ दोनों का एक साथ आशीर्वाद प्राप्त होता है। चतुर्मास के दौरान पड़ने के कारण इस एकादशी का आध्यात्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। जो जातक सच्चे मन से इस दिन व्रत रखते हैं, उनके जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।एकादशी के दिन क्या करें (What to do)सावन की इस पहली एकादशी पर व्रत रखने वाले जातकों को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान शिव का विधिवत पूजन करें। पूजा के दौरान विष्णु सहस्रनाम या शिव चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दिन सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या जरूरतमंदों को दान अवश्य देना चाहिए। शाम के समय तुलसी के पौधे के सामने घी का दीपक जलाकर उसकी परिक्रमा करना बेहद शुभ माना जाता है।एकादशी के दिन क्या न करें (What not to do)पावन एकादशी के दिन कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना जरूरी होता है। इस दिन भूलकर भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी पर चावल खाने से शरीर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इसके अलावा इस दिन किसी पर भी क्रोध न करें, अपशब्द न बोलें और पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करें। तामसिक भोजन, लहसुन, प्याज और मांस-मदिरा से पूरी तरह दूरी बनाए रखें। घर में शांति का माहौल रखें और किसी का भी अपमान करने से बचें।
हस्तरेखा शास्त्र (Palmistry) एक ऐसा प्राचीन विज्ञान है जिसके जरिए व्यक्ति के स्वभाव, भविष्य, करियर और उसके व्यक्तित्व के अनछुए पहलुओं के बारे में बहुत कुछ पता लगाया जा सकता है। हथेली पर बनने वाली रेखाएं इंसान के जीवन का पूरा नक्शा बयां करती हैं। इन्हीं रेखाओं में से एक बेहद खास और दुर्लभ रेखा होती है 'मस्तिष्क रेखा' (Head Line), जो हमारे बौद्धिक स्तर, मानसिक क्षमता और निर्णय लेने की ताकत को दर्शाती है। आम तौर पर लोगों के हाथ में एक ही मस्तिष्क रेखा होती है, लेकिन कुछ भाग्यशाली लोगों की हथेली में 'डबल मस्तिष्क रेखा' (Double Head Line) पाई जाती है, जिसके बारे में हस्तशास्त्र में कई दिलचस्प खुलासे किए गए हैं।क्या होती है डबल मस्तिष्क रेखा और इसका महत्वहस्तरेखा विज्ञान के जानकारों के अनुसार, जब किसी जातक की हथेली में मुख्य मस्तिष्क रेखा के अलावा एक और सामानांतर रेखा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, तो उसे डबल हेड लाइन कहा जाता है। हथेली पर यह दुर्लभ योग हर किसी के हाथ में नहीं होता है। जिन लोगों के हाथों में यह विशेष रेखा होती है, उन्हें बेहद बुद्धिमान, कुशाग्र और असाधारण प्रतिभा का धनी माना जाता है। ऐसे लोग किसी भी जटिल परिस्थिति को चुटकियों में सुलझाने की क्षमता रखते हैं और अपनी तेज सोच के दम पर समाज में एक अलग मुकाम हासिल करते हैं।हर क्षेत्र में मिलती है अपार तरक्की और सफलताजिन लोगों की हथेलियों में दो मस्तिष्क रेखाएं होती हैं, वे जीवन के हर क्षेत्र में अपनी मेहनत और बुद्धि के बल पर झंडे गाड़ देते हैं। ये लोग पढ़ाई-लिखाई से लेकर कॉर्पोरेट जगत, कला, विज्ञान या नेतृत्व के क्षेत्र में बड़ी ऊंचाइयों को छूते हैं। इनकी निर्णय लेने की क्षमता बहुत मजबूत होती है, जिसके चलते ये कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सही फैसला लेने में माहिर होते हैं। यही वजह है कि इन्हें कार्यक्षेत्र में उच्च पद और मान-सम्मान प्राप्त होता है।इस एक बड़ी चीज में खा जाते हैं मातइतनी सारी खूबियों और उच्च बौद्धिक क्षमता के बावजूद, डबल मस्तिष्क रेखा वाले लोगों की जिंदगी में एक ऐसा कमजोर पहलू भी होता है जहां ये मात खा जाते हैं। हस्तरेखा विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक विचार करने (Overthinking) और कई बार अपने ही विचारों में भ्रमित होने के कारण ये लोग निजी रिश्तों या भावनात्मक मामलों में कई बार पिछड़ जाते हैं। इनकी यह अति-विश्लेषण (Over-analytical) करने की आदत कभी-कभी इन्हें मानसिक तनाव और अपनों के साथ गलतफहमी का शिकार बना देती है, जिससे इन्हें जीवन में भावनात्मक मोर्चे पर संघर्ष करना पड़ता है।
पवित्र सावन का महीना चल रहा है और चारों तरफ भगवान शिव के जयकारों के साथ शिवालय गूंज रहे हैं। इसी बीच ज्योतिष जगत से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है कि सावन के इस पावन महीने में इस साल का अंतिम सूर्यग्रहण लगने जा रहा है। सावन जैसे अति पवित्र और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण मास में सूर्यग्रहण के योग बनने के बाद से देश भर के शिव भक्तों के मन में तरह-तरह की शंकाएं और सवाल उठने लगे हैं। खासकर लोगों के मन में यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या इस ग्रहण के दौरान भगवान शिव की पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक पर कोई रोक लगेगी या नहीं।कब और कितने बजे लगेगा साल का यह आखिरी सूर्यग्रहणखगोल विज्ञान और पंचांग गणना के अनुसार, साल का यह दूसरा और अंतिम सूर्यग्रहण सावन माह के एक विशेष संयोग के दौरान लगने जा रहा है। इस दौरान सूतक काल के नियमों का पालन करना भी अनिवार्य माना जाता है। हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह ग्रहण भारत में दृश्यमान (Visible) है या नहीं। यदि सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता है, तो इसका सूतक काल और धार्मिक प्रभाव यहां मान्य नहीं होगा, जिससे भक्तों को पूजा-पाठ में किसी भी प्रकार की बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।उज्जैन के आचार्यों की शिव भक्तों को खास सलाहधार्मिक नगरी उज्जैन के प्रख्यात आचार्यों और ज्योतिषविदों का कहना है कि यदि सूर्यग्रहण भारत में नजर नहीं आता है, तो सावन मास में भगवान शिव की आराधना, महामृत्युंजय जाप और रुद्राभिषेक पर किसी भी तरह की रोक नहीं लगेगी। सावन का हर एक दिन शिव जी को समर्पित होता है, ऐसे में भक्त बिना किसी संकोच के विधि-विधान से अपने आराध्य की पूजा जारी रख सकते हैं। हालांकि, यदि सूतक काल प्रभावी होता है, तो मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और ग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्धि के पश्चात ही अनुष्ठान किए जाते हैं।धार्मिक और ज्योतिषीय महत्वसावन में सूर्यग्रहण का पड़ना ज्योतिषीय दृष्टिकोण से एक बड़ी खगोलीय घटना मानी जा रही है। जानकारों का मानना है कि ग्रहण काल के दौरान मंत्र जाप करना और दान-पुण्य करना अत्यंत फलदायी होता है। उज्जैन के विद्वानों ने स्पष्ट किया है कि भोलेनाथ के भक्तों को भ्रमित होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है, वे अपनी नियमित पूजा और सावन के सोमवार का व्रत पूरी श्रद्धा के साथ जारी रख सकते हैं, क्योंकि भगवान की भक्ति पर किसी भी प्रकार के प्राकृतिक या खगोलीय बदलाव का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है यदि नियमों का सही पालन किया जाए।
गुरु-बुध ने बनाया पांडित्य योग, 4 राशियों के शुरू हुए अच्छे दिन!
Panditya Yoga 2026: आज 5 अगस्त 2026 को दुर्लभ पांडित्य योग बन चुका है. गुरु और बुध की युति से कर्क समेत किन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत और किसे मिलेगा बंपर धन लाभ? जानिए यहां.
Sawan में घर-घर झूला डालने की Tradition क्यों है खास? जानिए इसके पीछे छिपे आध्यात्मिक Secrets और लाभ
सावन के महीने में चारों ओर हरियाली ही हरियाली देखने को मिलती है। इस दौरान पेड़ों पर नए पत्ते आ जाते हैं, मौसम सुहावना हो जाता है। वहीं घर से लेकर मंदिरों तक में शिवभक्ति का माहौल होता है। वहीं सावन के महीने में एक चीज और भी खास होती है, वह है झूला। आपने देखा होगा कि अक्सर सावन के महीने में लोग अपने घरों में झूला डालते हैं। वहीं लड़कियां और महिलाएं सज-धजकर झूला झूलती हैं और सावन के गीत गाती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर सावन में झूला की परंपरा कैसे शुरू हुई। इसे भी पढ़ें: Stress और Anxiety दूर करता है ‘Har Har Mahadev’ का जाप, Science ने भी मानी इस शिव मंत्र की Healing Power सावन और झूले का कनेक्शन सावन के महीने को खुशियों, हरियाली और उत्सव का महीना माना जाता है। सावन का मौसम ठंडा और सुहावना भी होता है। इसलिए पुराने समय से लोग इस महीने पेड़ों पर झूले डालकर दोस्तों और परिवार के साथ झूला झूलते हैं और समय बिताते हैं। खासकर महिलाएं और लड़कियां इस महीने झूला झूलते हुए लोकगीत गाती हैं। धीरे-धीरे यह परंपरा सावन के खास रीति-रिवाजों में शामिल हो गई। मां पार्वती से जुड़ी है झूले की परंपरा धार्मिक मान्यता है कि भगवान शंकर ने सावन के महीने में मां पार्वती के लिए झूला लगाया था। महादेव ने प्रेम से मां पार्वती को झूला झुलाया था। इस कारण से झूला पति-पत्नी के बीच सम्मान, प्यार और अच्छे रिश्ते का भी प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि जो भी दंपत्ति सावन में साथ झूला झूलते हैं। उनके रिश्ते में हमेशा अपनापन और प्रेम बना रहता है। सावन में मायके आई थीं मां पार्वती इसके अलावा एक और कहावत सुनने को मिलती है कि सावन में मां पार्वती अपने मायके आई थीं। वहां पर मां पार्वती की सखियों ने झूला लगाया और उनको झूला झुलाया। इस दौरान सखियों ने लोक गीत गाए और खुशियां मनाईं। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। कृष्ण और राधा से भी जुड़ी है मान्यता भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी से भी सावन में झूला झूलने की परंपरा का संबंध जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सावन के मौसम में भगवान श्रीकृष्ण ने राधा रानी को झूला झुलाया था। फिर कई जगहों पर मंदिरों में राधा-कृष्ण के लिए सुंदर झूले सजाए जाते हैं। सावन के महीने में कई मंदिरों में झूलन उत्सव भी पड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। मंदिरों में सजाए जाते हैं झूले बता दें कि सावन में कई मंदिरों में देवी-देवताओं और भगवान के लिए भी झूले सजाए जाते हैं। इन झूलों को फूलों और रंग-बिरंगी झालरों से इन झूलों को सुंदर बनाया जाता है। यह परंपरा कई राज्यों यह आज भी पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। सावन में झूला झूलने का महत्व धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सावन में झूला झूलना बेहद शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इससे परिवार में प्यार और एकता बनी रहती है। पति-पत्नी के रिश्ते में मधुरता आती है और मां पार्वती का आशीर्वाद भी मिलता है। वहीं झूला झूलने से आपका मन भी प्रसन्न रहता है। सावन के सुंदर मौसम का आनंद लेने का मौका भी मिलता है। सावन में कैसे डालें झूला झूला डालने के लिए मजबूत पेड़ की डाल, छत का हुक या लोहे की ग्रिल चुनें। नायलॉन, जूट या सूती की मोटी रस्सी लें। झूले पर बैठने के लिए मजबूत लकड़ी की बोर्ड लें। बोर्ड के दोनों तरफ रस्सी बांधने के लिए दो-दो छेद बनाएं। तख्ते और हुक पर सेफ्टी नॉट लगाएं। इसको आम के पत्तों, गेंदे के फूलों या सुंदर कपड़ों से झूले को सजाएं। झूले पर बैठने से पहले थोड़ा वेट डालकर इसकी मजबूती को जरूर चेक कर लें।
कौन था मारीच? रामायण मूवी में एक झलक में ही छाया ये एक्टर
Ramayana: क्या आप जानते हैं कि श्री राम की आवाज निकालकर लक्ष्मण और सीता को भ्रमित करने वाला मायावी मारीच असल में कौन था? रामायण के अनुसार, ताड़का का पुत्र और रावण का मामा मारीच साधारण राक्षस नहीं, बल्कि मायावी शक्तियों का स्वामी था.
घर में सिर्फ इन दिशाओं में लगाएं तुलसी का पौधा, खूब बढ़ेगा पैसा!
Tulsi Plant Vastu: घर में तुलसी का पौधा किस दिशा में लगाना चाहिए? जानिए वास्तु के अनुसार सही नियम, दिशा और इससे मिलने वाले लाभ, जिससे घर में हमेशा सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे.
बुध-शुक्र बनाएंगे दुर्लभ संयोग! 13 अगस्त से 4 राशियों पर बरसेगा पैसा
Labh Drishti Rajyog 2026: क्या आप जानते हैं कि 13 अगस्त से बुध और शुक्र की खास केमिस्ट्री 4 राशियों के भाग्य में बड़ा उछाल लाने वाली है? आइए जानते हैं उन राशियों के बारे में.
आज से 4 राशियों पर मेहरबान बुध, 22 अगस्त तक होगी धनवर्षा!
budh gochar 2026 : 5 अगस्त से इन 4 भाग्यशाली राशियों के अच्छे दिन शुरू हो चुके हैं. 22 अगस्त तक बुध की विशेष कृपा से करियर, कारोबार और आर्थिक पक्ष में बड़ा फायदा मिलने के योग हैं.
अपने कुंडली में शापों का सावन में कैसे करें नाश? देखें भाग्य चक्र
आजतक के कार्यक्रम भाग्य चक्र में शैलेंद्र पांडेय ने बताया कि अगर हमारी कुंडली में बहुत सारे दोष हो सकते है जिसे शाप कहते है. इन शापों को कैसे हम सावन के महीने में शापों का नाश कर सकते है इसपर चर्चा की. साथ ही उन्होनें 12 राशियों के दैनिक राशिफल के बारे में भी चर्चा की.
आज से त्रिग्रही योग करेगा चमत्कार! 3 राशियों की चमकेगी किस्मत
Trigrahi Yog 2026: द्रिक पंचांग के अनुसार, 5 से 17 अगस्त तक का समय ज्योतिषीय दृष्टि से खास माना जा रहा है. सूर्य, गुरु और बुध का त्रिग्रही योग तीन राशियों के लिए प्रगति, समृद्धि और धन लाभ के नए अवसर ला सकता है. हालांकि, ग्रहों की अनुकूलता के साथ-साथ मेहनत और सही दिशा में प्रयास भी सफलता की कुंजी हैं. यदि इस समय का सदुपयोग किया जाए, तो यह अवधि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली साबित हो सकती है.
नई दिल्ली: आज बुधवार, 5 अगस्त 2026 को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। धार्मिक दृष्टि से सावन माह की कृष्ण पक्षीय अष्टमी तिथि का बहुत बड़ा महत्व माना जाता है, क्योंकि इस दिन सावन का पवित्र 'कालाष्टमी' (Kalashtami) व्रत रखा जाता है। यह दिन भगवान शिव के ही रुद्र अवतार 'भगवान कालभैरव' की साधना, पूजा-अर्चना और व्रत के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। पंचांग के अनुसार, आज के दिन की शुरुआत भद्रा के साए में हो रही है, जिससे मांगलिक और शुभ कार्यों की शुरुआत के समय का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य के अनुसार आज 5 अगस्त 2026 का संपूर्ण पंचांग, राहुकाल, भद्रा काल और शुभ-अशुभ मुहूर्त।आज का पंचांग: 5 अगस्त 2026 (बुधवार)विक्रम संवत: 2083 (कील)शक संवत: 1948 (क्रोधन)मास: श्रावण (सावन)पक्ष: कृष्ण पक्षतिथि: अष्टमी तिथि (रात 09:41 बजे तक, तत्पश्चात नवमी तिथि प्रारंभ)वार: बुधवारनक्षत्र: भरणी नक्षत्र (दोपहर 01:25 बजे तक, तत्पश्चात कृतिका नक्षत्र)योग: वृद्धि योग (संध्या 06:12 बजे तक, तत्पश्चात ध्रुव योग)करण: बालव (प्रातः 09:12 बजे तक), कौलव (रात 09:41 बजे तक), तत्पश्चात तैतिलसूर्योदय और चंद्रोदय का समयसूर्योदय: प्रातः 05:45 बजेसूर्यास्त: सायं 07:10 बजेचंद्रोदय: रात 11:28 बजे (5 अगस्त)चंद्रास्त: दोपहर 12:15 बजे (6 अगस्त)सूर्य राशि: कर्क राशिचंद्र राशि: मेष राशि (सायं 07:42 बजे तक), तत्पश्चात वृषभ राशिआज का भद्रा काल और राहुकाल का समय (अशुभ मुहूर्त)पंचांग के अनुसार, आज दिन की शुरुआत भद्रा काल के प्रभाव में हो रही है। भद्रा के दौरान किसी भी प्रकार का नया, मांगलिक या शुभ कार्य शुरू करना वर्जित माना जाता है।भद्रा काल का समय: प्रातः 05:45 बजे से प्रातः 09:12 बजे तक (स्वर्ग लोक की भद्रा - निष्फल/शुभ कार्यों में त्याज्य)राहुकाल: दोपहर 12:27 बजे से दोपहर 02:08 बजे तक (इस समय कोई भी नया काम न शुरू करें)यमगंड: प्रातः 07:25 बजे से प्रातः 09:06 बजे तकदुर्मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:54 बजे तकवर्ज्यम: सायं 05:18 बजे से सायं 06:58 बजे तकआज के शुभ मुहूर्त (Abhijit & Shubh Muhurat)अभिजित मुहूर्त: आज श्रावण कृष्ण अष्टमी के दिन अभिजित मुहूर्त का अभाव रहेगा। (बुधवार को अभिजित मुहूर्त नहीं होता है)अमृत काल: सुबह 08:35 बजे से प्रातः 10:15 बजे तकविजय मुहूर्त: दोपहर 02:41 बजे से दोपहर 03:35 बजे तकगोधूलि मुहूर्त: सायं 07:10 बजे से सायं 07:32 बजे तकनिशिता काल (कालभैरव पूजा का विशेष मुहूर्त): मध्यरात्रि 12:06 बजे से रात 12:48 बजे तक (6 अगस्त तड़के)सावन कालाष्टमी 2026: कालभैरव पूजा का महत्व और नियमकालाष्टमी के दिन भगवान कालभैरव की पूजा करने से जीवन के सभी भय, संकट, बाधाएं, राहु-केतु के दोष और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। कालभैरव को भगवान शिव का उग्र रूप माना गया है, जो अपने भक्तों की हर प्रकार के अनिष्ट और शत्रुओं से रक्षा करते हैं।विशेष पूजा विधि: सुबह स्नान के बाद भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करें। संध्याकाल या निशिता काल में भगवान कालभैरव के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं।भोग और उपाय: आज के दिन कालभैरव महाराज को इमरती, उड़द के पकोड़े, या जलेबी का भोग लगाएं।श्वान (कुत्ते) की सेवा: भगवान कालभैरव की सवारी काला कुत्ता है। इसलिए कालाष्टमी के दिन किसी काले कुत्ते को तेल चुपड़ी हुई रोटी या बिस्किट खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे शनि और राहु के दोष शांत होते हैं।
हिंदू धर्म में श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन का त्योहार केवल भाई-बहन के अटूट स्नेह का पर्व ही नहीं है, बल्कि यह पवित्रता, वचनबद्धता और रक्षा के संकल्प का प्रतीक भी है। इस पावन अवसर पर जब बहनें अपने भाई की कलाई पर रेशमी धागा (राखी) बांधती हैं या पुरोहित अपने यजमानों की कलाई पर रक्षासूत्र (कलावा) सुशोभित करते हैं, तो एक विशेष संस्कृत मंत्र का उच्चारण अनिवार्य रूप से किया जाता है। यह मंत्र अत्यंत प्राचीन है और इसका सीधा संबंध दानवीर राजा बलि, माता लक्ष्मी और भगवान श्री हरि विष्णु से जुड़ा हुआ है।अक्सर लोग राखी बांधते समय इस मंत्र को सुनते जरूर हैं, लेकिन इसके पीछे छिपी रोचक पौराणिक कथा और इसके गूढ़ अर्थ से अनजान रहते हैं। आखिर क्यों रक्षाबंधन के पर्व पर दैत्यों के राजा बलि का स्मरण किया जाता है और इस मंत्र के उच्चारण मात्र से रक्षासूत्र की शक्ति सौ गुना कैसे बढ़ जाती है? आइए जानते हैं इस पावन परंपरा के पीछे का पूरा पौराणिक इतिहास और धार्मिक महत्व।राजा बलि का प्रसिद्ध रक्षा मंत्र और उसका सरल हिंदी अर्थरक्षाबंधन और रक्षासूत्र बांधते समय जिस श्लोक का पाठ किया जाता है, वह इस प्रकार है:येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥इस पवित्र मंत्र का सरल और भावपूर्ण अर्थ यह है कि जिस रक्षासूत्र (पवित्र धागे) से अत्यंत पराक्रमी और दानवीर दैत्यराज राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षासूत्र से मैं तुम्हें बांधती/बांधता हूँ। हे रक्षासूत्र! तुम सदैव अपने कर्तव्य पर स्थिर रहना, कभी अपने वचन और धर्म से विचलित मत होना।यह मंत्र भाई को यह स्मरण कराता है कि जिस प्रकार राजा बलि ने अपने दिए गए वचन की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था, उसी प्रकार भाई भी अपनी बहन की रक्षा और अपने कर्तव्यों के प्रति सदैव निष्ठावान रहेगा।वामन अवतार और दानवीर राजा बलि की कठिन परीक्षाइस मंत्र की पृष्ठभूमि श्रीमद्भागवत महापुराण की उस कथा से जुड़ती है जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया था। कथा के अनुसार, प्रह्लाद के पौत्र दैत्यराज बलि अत्यंत शक्तिशाली, धार्मिक और दानवीर राजा थे। उन्होंने अपने तपोबल और पराक्रम से तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल) पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया था। राजा बलि 100 अश्वमेध यज्ञ कर रहे थे, जिससे वे देवराज इंद्र का सिंहासन छीनने के समीप पहुंच गए थे।देवताओं की रक्षा और सृष्टि का संतुलन बनाए रखने के लिए भगवान विष्णु ने वामन (बौने ब्राह्मण) का रूप धारण किया और राजा बलि के यज्ञ स्थल पर पहुंचे। राजा बलि अपनी दानशीलता के लिए जाने जाते थे। उन्होंने वामन देव से अपनी इच्छा अनुसार दान मांगने को कहा। भगवान वामन ने केवल तीन पग (कदम) भूमि मांगी। राजा बलि के गुरु शुक्राचार्य समझ गए कि यह स्वयं भगवान विष्णु की लीला है और उन्होंने बलि को दान देने से रोका, लेकिन राजा बलि ने अपने वचन से पीछे हटने से साफ इंकार कर दिया।भगवान वामन ने अपना विशाल रूप (त्रिविक्रम रूप) धारण किया और एक पग में पूरी पृथ्वी तथा दूसरे पग में समस्त आकाश व देवलोक को माप लिया। जब तीसरे पग के लिए कोई स्थान नहीं बचा, तो दानवीर राजा बलि ने मुस्कुराते हुए अपना मस्तक भगवान वामन के चरणों में रख दिया। बलि की इस अनुपम भक्ति और सत्यनिष्ठा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक (सुतल लोक) का राजा बना दिया।जब भगवान विष्णु बने राजा बलि के द्वारपालराजा बलि के समर्पण और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उनसे कोई वरदान मांगने को कहा। राजा बलि ने अत्यंत विनम्रता से कहा, हे प्रभु! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो मुझे यह वरदान दीजिए कि जब भी मैं सुबह अपनी आंखें खोलूं, तो मुझे आपके दर्शन हों। आप सदैव मेरे पाताल लोक के महल के मुख्य द्वार पर द्वारपाल बनकर निवास करें।भगवान विष्णु अपने भक्त के इस प्रेमपूर्ण वचन से बंध गए और वैकुंठ धाम छोड़कर पाताल लोक में राजा बलि के महल के पहरेदार बन गए। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी भगवान विष्णु वैकुंठ नहीं लौटे, तो माता लक्ष्मी अत्यंत चिंतित हो गईं। उन्होंने देवरषि नारद से भगवान विष्णु की स्थिति के बारे में पूछा। नारद जी ने माता लक्ष्मी को पूरी बात बताई और एक उपाय सुझाया।देवी लक्ष्मी ने राजा बलि को बांधी थी संसार की पहली राखीनारद जी के परामर्श अनुसार, माता लक्ष्मी श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि के दिन एक साधारण और असहाय महिला का वेश धारण करके पाताल लोक पहुंचीं। वे राजा बलि के द्वार पर बैठकर रोने लगीं। जब राजा बलि ने उनसे रोने का कारण पूछा, तो माता लक्ष्मी ने कहा कि उनका कोई भाई नहीं है जो उनकी रक्षा कर सके, इसलिए वे अत्यंत दुखी और अकेली हैं।राजा बलि का हृदय पिघल गया। उन्होंने स्नेहपूर्वक कहा कि आज से वे उन्हें अपनी बहन मानते हैं। इसके बाद माता लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर एक पवित्र धागा (रक्षासूत्र) बांधा और उनकी लंबी उम्र व सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। राजा बलि ने अपनी नई बहन से कहा, बहन! तुमने मुझे भाई मानकर मेरी कलाई पर यह रक्षासूत्र बांधा है, बताओ तुम्हें उपहार में क्या चाहिए? तुम जो मांगोगी, मैं वही दूंगा।तभी माता लक्ष्मी अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुईं और उन्होंने राजा बलि से कहा, भैया! यदि आप मुझे कुछ देना चाहते हैं, तो उपहार स्वरूप मेरे स्वामी भगवान विष्णु को इस द्वारपाल के बंधन से मुक्त कर दीजिए ताकि वे मेरे साथ वापस वैकुंठ धाम चल सकें।राजा बलि का महान त्याग और रक्षाबंधन का आरंभराजा बलि अपनी बहन की मांग सुनकर अचंभित रह गए, लेकिन उन्होंने बिना किसी संकोच के अपने दिए गए वचन का पालन किया। राजा बलि ने भगवान विष्णु को अपने द्वारपाल के कर्तव्य से सहर्ष मुक्त कर दिया और माता लक्ष्मी के साथ वैकुंठ भेजने के लिए तैयार हो गए। राजा बलि के इस महान त्याग और भक्ति से प्रभावित होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वे प्रतिवर्ष चार महीने (देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक) पाताल लोक में उनके साथ निवास करेंगे।जिस दिन माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षासूत्र बांधकर भगवान विष्णु को मुक्त कराया था, वह श्रावण मास की पूर्णिमा का ही पावन दिन था। तभी से यह परंपरा प्रारंभ हुई कि जब भी बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं, तो वे राजा बलि के उस महान त्याग, वचनबद्धता और रक्षा के संकल्प को याद करते हुए 'येन बद्धो बली राजा...' मंत्र का पाठ करती हैं।रक्षाबंधन पर इस मंत्र के जाप का आध्यात्मिक व मानसिक महत्वधार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से रक्षाबंधन पर इस मंत्र का पाठ करने के कई गूढ़ लाभ हैं:वचन और कर्तव्य का बोध: यह मंत्र भाई को यह अहसास कराता है कि रक्षा का धागा केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि राजा बलि की तरह हर परिस्थिति में अपनी बहन की रक्षा और सम्मान करने का धर्म है।सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह: संस्कृत के इस वैदिक श्लोक के ध्वनि तरंगों से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और रक्षासूत्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।संकटों से सुरक्षा: यह मंत्र धागे को केवल सूत का टुकड़ा न रखकर उसे एक सुरक्षा कवच (अभेद्य ढाल) में बदल देता है, जो भाई को आने वाली सभी विपत्तियों और अकाल मृत्यु के योग से बचाती है।रक्षाबंधन पर सही विधि से कैसे बांधें राखी?शास्त्रों के अनुसार रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल का विशेष ध्यान रखना चाहिए और भद्रा रहित शुभ मुहूर्त में ही राखी बांधनी चाहिए।सबसे पहले पूजा की थाली तैयार करें, जिसमें रोली, अक्षत (चावल), दीपक, मिठाई और राखी रखें।भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं।भाई के माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाएं तथा सिर पर कोई रुमाल या कपड़ा रखें।इसके बाद भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधते हुए 'येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥' मंत्र का कम से कम तीन बार स्पष्ट उच्चारण करें।राखी बांधने के पश्चात भाई की आरती उतारें और उनका मुंह मीठा कराएं। भाई को भी अपनी बहन के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए और सामर्थ्य अनुसार उपहार भेंट करना चाहिए।राजा बलि और माता लक्ष्मी का यह प्रसंग हमें यह सिखाता है कि रक्षा का वास्तविक अर्थ केवल भौतिक सुरक्षा नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति सम्मान, त्याग और धर्म के रास्ते पर चलने का दृढ़ संकल्प है।
क्या आपके रसोईघर में गिनकर बनती हैं रोटियां? जान लें ये वास्तु नियम
Roti Vastu Tips: अक्सर लोग आटा बर्बादी से बचाने के लिए रोटियां गिनकर बनाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह एक छोटी-सी आदत घर की बरकत खत्म कर सकती है? वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भोजन का हिसाब लगाना मां अन्नपूर्णा का अपमान माना जाता है, जिससे घर में दरिद्रता आती है.
'चांदीपुरा' वायरस के तेज रफ्तार से मचा हड़कंप, देखें गुजरात आजतक
गुजरात में चांदीपुरा वायरस से एक बार फिर हड़़कंप मच गया है. इस वायरस से अबतक 22 बच्चों की मौत हो गई. गुजरात में 184 संदिग्ध केस सामने आए हैं, जिनमें 35 मरीज चांदीपुरा वायरस से संक्रमित पाए गए हैं.. वहीं, चांदीपुरा वायरस को लेकर गुजरात स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट है.
नई दिल्ली: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहों और नक्षत्रों की बदलती चाल हर दिन हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। 5 अगस्त 2026, बुधवार का दिन कई राशियों के लिए नए अवसर और आर्थिक लाभ लेकर आ रहा है, तो वहीं कुछ राशियों को कार्यक्षेत्र और लेन-देन के मामलों में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। आज के दिन जल्दबाज़ी में लिया गया कोई भी फैसला भविष्य में आपकी योजनाओं को प्रभावित कर सकता है। आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मेष से लेकर मीन राशि तक के सभी 12 जातकों के लिए आज का दिन कैसा रहने वाला है।मेष राशि (Aries)मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन मिलाजुला रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा, लेकिन काम का दबाव बना रह सकता है। व्यावसायिक मामलों में जल्दबाज़ी से बचें। पैसों के लेन-देन में सावधानी बरतें। पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए वाणी पर नियंत्रण रखें।भाग्यशाली रंग: लालशुभ अंक: 9वृषभ राशि (Taurus)वृषभ राशि के जातकों के लिए आज का दिन लाभ दिलाने वाला रहेगा। लंबे समय से अटके हुए कार्य पूरे होंगे। व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं। निवेश करने के लिए दिन अनुकूल है, लेकिन विशेषज्ञों की सलाह ज़रूर लें। परिवार के साथ सुखद समय व्यतीत होगा।भाग्यशाली रंग: सफेदशुभ अंक: 6मिथुन राशि (Gemini)मिथुन राशि के जातकों को आज अपने स्वास्थ्य और खान-पान का विशेष ध्यान रखना होगा। दफ़्तर में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाकर चलें। किसी भी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे अच्छी तरह पढ़ लें। फिजूलखर्ची से बचें।भाग्यशाली रंग: हराशुभ अंक: 5कर्क राशि (Cancer)कर्क राशि के जातकों के लिए 5 अगस्त का दिन रचनात्मक ऊर्जा से भरपूर रहेगा। जो लोग कला, लेखन या मीडिया से जुड़े हैं, उन्हें नए अवसर मिल सकते हैं। प्रेम संबंधों में मधुरता रहेगी। अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं।भाग्यशाली रंग: क्रीमशुभ अंक: 2सिंह राशि (Leo)सिंह राशि के जातकों के लिए आज का दिन थोड़ी सतर्कता बरतने का है। नौकरी या व्यवसाय में कोई भी फैसला सोच-समझकर लें। क्रोध और अति-उत्साह में किसी से वादा करने से बचें। भूमि-भवन से जुड़े मामलों में सकारात्मक प्रगति देखने को मिल सकती है।भाग्यशाली रंग: नारंगीशुभ अंक: 1कन्या राशि (Virgo)कन्या राशि के जातकों के लिए आज का दिन यात्रा और नए संपर्कों के लिहाज से बेहतरीन है। आपकी मेहनत का फल मिलेगा और व्यापार में मनमुताबिक सफलता प्राप्त होगी। छोटे भाई-बहनों से सहयोग मिलेगा। जीवनसाथी का साथ मानसिक शांति देगा।भाग्यशाली रंग: धानी (हल्का हरा)शुभ अंक: 3तुला राशि (Libra)तुला राशि के जातकों के लिए आज आर्थिक मोर्चे पर दिन अच्छा रहेगा। रुका हुआ धन वापस मिल सकता है। हालांकि, परिवार में किसी मुद्दे को लेकर संवादहीनता से बचें। अपने खर्चों पर लगाम लगाना आवश्यक होगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।भाग्यशाली रंग: गुलाबीशुभ अंक: 7वृश्चिक राशि (Scorpio)वृश्चिक राशि के जातकों के मन में आज नए विचार आ सकते हैं। आपकी कार्यशैली से लोग प्रभावित होंगे। व्यापार में साझेदारी से लाभ मिलेगा। हालांकि, अति-विश्वास से बचें और अपने गोपनीय फैसलों को किसी के साथ साझा न करें।भाग्यशाली रंग: गहरा लालशुभ अंक: 8धनु राशि (Sagittarius)धनु राशि के जातकों को आज के दिन थोड़ा संभलकर चलने की सलाह दी जाती है। बेवजह की भागदौड़ और मानसिक तनाव हो सकता है। आर्थिक लेन-देन में सतर्कता बरतें। धार्मिक या आध्यात्मिक गतिविधियों में मन लगाने से शांति मिलेगी।भाग्यशाली रंग: पीलाशुभ अंक: 4मकर राशि (Capricorn)मकर राशि के जातकों के लिए आज का दिन उपलब्धियों से भरा हो सकता है। आपकी आय के स्रोतों में वृद्धि होगी। पुराने मित्रों या सहकर्मियों से सहयोग मिलेगा। करियर में कोई बड़ा प्रस्ताव मिल सकता है। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा।भाग्यशाली रंग: नीलाशुभ अंक: 8कुंभ राशि (Aquarius)कुंभ राशि के जातकों के लिए 5 अगस्त का दिन कर्मप्रधान रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। बॉस या वरिष्ठों का प्रोत्साहन मिलेगा। पैतृक संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझ सकते हैं। घर में मांगलिक कार्य की योजना बन सकती है।भाग्यशाली रंग: आसमानीशुभ अंक: 11मीन राशि (Pisces)मीन राशि के जातकों के लिए आज भाग्य का सितारा बुलंद रहेगा। अटके हुए काम आसानी से बन जाएंगे। विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता के योग हैं। लंबी दूरी की यात्रा का प्लान बन सकता है। धर्म-कर्म में रुचि बढ़ेगी।भाग्यशाली रंग: सुनहराशुभ अंक: 3आज का विशेष ज्योतिषीय उपायबुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करना अत्यंत शुभ माना जाता है। आज गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें और ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे कार्यक्षेत्र में आ रही बाधाएं दूर होंगी और आर्थिक फैसलों में सफलता प्राप्त होगी।
नई दिल्ली: खगोल विज्ञान प्रेमी और ज्योतिष में रुचि रखने वाले लोगों के लिए वर्ष 2026 एक से बढ़कर एक अद्भुत खगोलीय घटनाओं का साक्षी बन रहा है। साल का पहला सूर्य ग्रहण फरवरी माह में रिंग ऑफ फायर के रूप में देखा गया था और अब संपूर्ण विश्व 12 अगस्त 2026 को लगने वाले वर्ष के दूसरे और अंतिम सूर्य ग्रहण की ओर देख रहा है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह एक अत्यंत दुर्लभ पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) होगा, जिसमें चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच इस प्रकार आ जाएगा कि सूर्य का प्रकाश पूरी तरह से ढक जाएगा और दिन में ही अंधेरा छा जाएगा। वैदिक पंचांग और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह ग्रहण सावन माह की अमावस्या तिथि को घटित होने जा रहा है।इस महा-खगोलीय घटना को लेकर आम जनता के मन में कई प्रकार के प्रश्न उठ रहे हैं—जैसे कि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा या नहीं? इसका सूतक काल कब से शुरू होगा? मंदिर के कपाट बंद रहेंगे या खुले? और इसका विभिन्न 12 राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा? आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक सूर्य ग्रहण से जुड़ी हर एक छोटी-बड़ी और महत्वपूर्ण जानकारी।सूर्य ग्रहण 2026 की सटीक तारीख और भारतीय समयानुसार टाइमिंगअंतरराष्ट्रीय खगोलीय गणना और भारतीय पंचांग के अनुसार साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण बुधवार, 12 अगस्त 2026 को लगेगा। भारतीय मानक समय (IST) के मुताबिक यह ग्रहण रात के समय शुरू होगा।सूर्य ग्रहण का प्रारंभ: 12 अगस्त 2026 की रात 9:04 मिनट पर।सूर्य ग्रहण का परमग्रास (पीक टाइम): 12 अगस्त 2026 की रात 11:17 मिनट के आसपास।सूर्य ग्रहण का समापन: 13 अगस्त 2026 की तड़के 1:30 बजे से लेकर 4:25 बजे तक (स्थान के आधार पर)।पूर्णता की अवधि (Totality Duration): मध्य मार्ग में सूर्य लगभग 2 मिनट 18 सेकंड के लिए पूरी तरह चंद्रमा की ओट में छिपा रहेगा।चूँकि यह ग्रहण भारतीय समयानुसार रात के समय घटित हो रहा है, इसलिए उस समय भारतीय क्षेत्र में सूर्य अस्त हो चुका होगा।क्या भारत में दिखाई देगा 12 अगस्त का यह सूर्य ग्रहण?भारतीय खगोलविदों और ज्योतिषियों ने स्पष्ट कर दिया है कि 12 अगस्त 2026 को लगने वाला यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। जब यह घटना घटेगी, उस समय भारतीय उपमहाद्वीप में रात का समय होगा और सूर्य क्षितिज से नीचे जा चुका होगा। इसलिए भारत के किसी भी शहर (जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, पटना या जयपुर) में इसे प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जा सकेगा।हालांकि, दुनिया के अन्य हिस्सों में इसका अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, पुर्तगाल के उत्तरी हिस्से और रूस के ध्रुवीय क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। स्पेन के प्रसिद्ध शहरों जैसे बिलबाओ, ज़रागोज़ा और वालेंसिया में शाम के सूर्य अस्त होने से ठीक पहले यह नजारा बेहद मनोरम होगा। यूरोप के अधिकांश देशों, उत्तरी अमेरिका, कनाडा और उत्तर-पश्चिम अफ्रीका में इसे आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse) के रूप में देखा जा सकेगा।सूतक काल का समय और धार्मिक मान्यताओं का सचहिन्दू सनातन परंपरा में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल का विशेष महत्व माना जाता है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से ठीक 12 घंटे पहले लागू हो जाता है। सूतक काल के दौरान पूजा-पाठ, मांगलिक कार्य, भोजन पकाना और खाना, तथा मंदिरों में स्पर्श पूरी तरह से वर्जित रहता है।लेकिन धर्मशास्त्रों का अकाट्य नियम है कि यस्मिन देशे न दृश्यते, तस्मिन देशे न सूतकम् अर्थात जिस भू-भाग पर कोई ग्रहण नग्न आंखों से दिखाई नहीं देता है, वहां उसका सूतक काल और धार्मिक प्रतिबंध लागू नहीं होते हैं।चूंकि 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में अदृश्य रहेगा, इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि:भारत में मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे और दैनिक पूजा-अर्चना सामान्य रूप से जारी रहेगी।भोजन बनाने, खाने, जल पीने या यात्रा करने पर कोई पाबंदी नहीं होगी।गर्भवती महिलाओं, वृद्धों और बच्चों के लिए भी अलग से कठिन नियम पालने की कोई आवश्यकता नहीं है।दैनिक दिनचर्या, कार्यालयीन कार्य और शुभ कार्य बिना किसी भय के किए जा सकते हैं।सावन अमावस्या, 6 ग्रहों की युति और पर्सिड्स उल्कापिंडों का महा-संगम12 अगस्त 2026 को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण केवल एक साधारण ग्रहण नहीं है, बल्कि यह तीन अति-दुर्लभ खगोलीय घटनाओं का एक अनोखा संगम होने जा रहा है।पहला, यह ग्रहण सावन माह की अमावस्या तिथि पर पड़ रहा है, जिसे तंत्र साधना, पितृ तर्पण और मंत्र सिद्धि के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।दूसरा, इसी दिन तड़के सुबह आसमान में 6 प्रमुख ग्रह (बुध, गुरु, मंगल, यूरेनस, शनि और नेप्च्यून) एक सीधी कतार में दिखाई देंगे, जिसे 'प्लैनेट परेड' (Planet Parade) कहा जाता है।तीसरा, 12 और 13 अगस्त की रात को ही दुनिया की सबसे प्रसिद्ध उल्कापिंडों की बारिश 'पर्सिड्स मिटिओर शॉवर' (Perseid Meteor Shower) अपने उच्चतम शिखर (Peak) पर होगी। एक ही दिन सूर्य ग्रहण, 6 ग्रहों की परेड और टूटते तारों की आतिशबाजी का यह अद्भुत योग खगोल विज्ञान के इतिहास में दर्ज होने वाला है।ज्योतिषीय दृष्टिकोण: 12 राशियों पर कैसा रहेगा सूर्य ग्रहण का प्रभाव?हालांकि भारत में भौतिक रूप से ग्रहण दिखाई नहीं देगा, फिर भी ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य का यह परिवर्तन और राहु-केतु का प्रभाव सौरमंडल की ऊर्जा को प्रभावित करता है। इस समय सूर्य कर्क राशि को छोड़कर सिंह राशि में प्रवेश की तैयारी में होगा। आइए जानें सभी 12 राशियों पर इसका संभावित प्रभाव:मेष (Aries): कार्यक्षेत्र में धैर्य बनाए रखें। जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचें, आध्यात्मिक कार्यों से मन शांत रहेगा।वृषभ (Taurus): वित्तीय मामलों में सावधानी बरतें। गैर-जरूरी खर्चों पर नियंत्रण रखें।मिथुन (Gemini): नए अवसर प्राप्त होंगे, संवाद कौशल मजबूत होगा।कर्क (Cancer): मानसिक तनाव से बचें, परिजनों के स्वास्थ्य का ध्यान रखें।सिंह (Leo): नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होगी, अहंकार से दूर रहकर निर्णय लें।कन्या (Virgo): कार्यों की समीक्षा करें, सोच-समझकर निवेश करना फायदेमंद रहेगा।तुला (Libra): साझेदारी के कामों में संतुलन बनाएं, मान-सम्मान में वृद्धि होगी।वृश्चिक (Scorpio): आत्म-चिंतन का समय है, आर्थिक अनुशासन लाभ देगा।धनु (Sagittarius): शिक्षा और यात्रा से जुड़े योग बनेंगे, सकारात्मक सोच बनाए रखें।मकर (Capricorn): कार्यस्थल पर जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, सेहत पर ध्यान दें।कुंभ (Aquarius): रचनात्मक विचारों से सफलता मिलेगी, संबंधों में मधुरता रखें।मीन (Pisces): धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी, वाद-विवाद से दूर रहें।ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें: विशेष उपायभले ही भारत में सूतक काल मान्य न हो, लेकिन जो लोग आध्यात्मिक कल्याण और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति चाहते हैं, वे इस दिन कुछ आसान शास्त्रीय उपाय अपना सकते हैं:मंत्र जाप: ग्रहण की अवधि के दौरान गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र या 'ॐ सूर्याय नमः' का मानसिक जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।दान-पुण्य: अमावस्या और ग्रहण के संयोग पर जरूरतमंदों को हरी मूंग, अनाज, वस्त्र या तिल का दान करना शुभ माना गया है।तुलसी पत्ता: भोजन और जल की सात्विकता बनाए रखने के लिए उसमें तुलसी का पत्ता या कुशा घास डालने की प्राचीन परंपरा है।वैज्ञानिक सावधानी: जो लोग विदेश में (स्पेन, आइसलैंड आदि) इस ग्रहण को देखने वाले हैं, वे कभी भी नग्न आंखों से सूर्य को न देखें। ग्रहण देखने के लिए केवल ISO 12312-2 प्रमाणित सोलर फिल्टर चश्मों का ही प्रयोग करें।भारत में रहने वाले खगोल प्रेमी इस दुर्लभ सूर्य ग्रहण का सीधा लाइव प्रसारण नासा (NASA) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के आधिकारिक यूट्यूब चैनलों और वेब पोर्टलों पर ऑनलाइन देख सकेंगे। 12 अगस्त 2026 की यह रात विज्ञान और अध्यात्म दोनों के प्रेमियों के लिए बेहद यादगार साबित होने वाली है।
शनिदेव की तिरछी नजर! कुंभ, मीन और मेष पर कब तक चलेगी साढ़ेसाती?
Shani Ki Sade Sati 2026: क्या आप जानते हैं कि 2026 में किस राशि पर चल रहा है शनि की साढ़ेसाती का सबसे कठिन चरण? जानें इन तीनों राशियों को साढ़ेसाती से कब पूरी तरह मुक्ति मिलेगी और शनिदेव के प्रकोप से बचने के सबसे असरदार शनिवार उपाय.
पुष्य नक्षत्र में गुरु का गोचर, चमकेगी इन राशियों की किस्मत!
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गुरु ग्रह ने पुष्य नक्षत्र के चौथे चरण में प्रवेश किया है. माना जा रहा है कि इस नक्षत्र परिवर्तन का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन मेष, मिथुन, तुला और कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से शुभ रह सकता है. करियर, कारोबार, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक बदलाव के संकेत बताए गए हैं.
आज बुध का होगा कर्क राशि में गोचर, जानें सभी राशियों पर प्रभाव
Budh Gochar 2026: बुद्धि, वाणी, व्यापार, शिक्षा और संचार के कारक ग्रह बुध जब कर्क राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव सभी 12 राशियों के जीवन पर देखने को मिलता है. यह गोचर कुछ राशियों के लिए करियर, धन और रिश्तों में लाभ लेकर आ सकता है, जबकि कुछ जातकों को निर्णय लेने में सावधानी बरतनी होगी. जानें बुध के कर्क राशि में गोचर से मेष से लेकर मीन राशि तक किसे मिलेगा सफलता का साथ, किसकी आर्थिक स्थिति होगी मजबूत और किन राशियों को रहना होगा सतर्क.
वृषभ राशि वालों के रुके हुए काम होंगे पूरे, जानें सभी राशियों का हाल
Aaj ka Rashifal 5 अगस्त 2026, Horoscope Today: विदेश से शुभ समाचार प्राप्त होगा और यात्रा करने से बड़ा लाभ मिलेगा. व्यापार से जुड़े लोगों को अच्छा लाभ होने के योग बन रहे हैं.
5 अगस्त 2026 का क्या है अभिजित मुहूर्त और राहुकाल, जानें आज का पंचांग
Aaj 5 August 2026 का पंचांग (Aaj ka Panchang): 05 अगस्त 2026, दिन- बुधवार, श्रावण मास, कृष्ण पक्ष, सप्तमी तिथि रात 20.42 बजे तक फिर अष्टमी तिथि , अश्विनी नक्षत्र 21.18 बजे तक फिर भरणी नक्षत्र, चंद्रमा- मेष में, सूर्य- कर्क में, विजय मुहूर्त- दोपहर 14.41 बजे से दोपहर 15.50 बजे तक, राहुकाल- दोपहर 12.27 बजे से दोपहर 14.08 बजे तक, दिशा शूल- उत्तर.
मीन राशिवालों को भाग्य का सपोर्ट मिलेगा, परिवार में सुख बढ़ेगा, जानें दैनिक राशिफल
Pisces Daily Horoscope, 5 August 2026 Aaj Ka Meen Rashifal in Hindi: भाग्य का सपोर्ट मिलेगा, परिवार में सुख बढ़ेगा, आपके काम की लोग तारीफ करेंगे, समाज में सम्मान बढ़ेगा, धन लाभ होगा,रिश्तेदारों से दूरी बनेगी.
कुंभ राशिवालोें की मन की चिंता दूर होगी, मेहनत का अच्छा फल मिलेगा, जानें जरूरी टिप
Aquarius Daily Horoscope, 5 August 2026 Aaj Ka Kumbh Rashifal in Hindi: आपकी नेतृत्व क्षमता और बढ़ेगी, सीनियर अधिकारियों से सपोर्ट मिलेगा, मन की चिंता दूर होगी, मेहनत का अच्छा फल मिलेगा,धन लाभ के नए रास्ते खुलेंगे.
मकर राशिवालों का आज समय अनुकूल रहेगा, धन की स्थिति बेहतर होगी, जानें शुभ रंग
Capricorn Daily Horoscope, 5 August 2026 Aaj Ka Makar Rashifal in Hindi: आज समय अनुकूल रहेगा, धन की स्थिति बेहतर होगी, नई नौकरी का ऑफर मिलेगा, परिवार में सुख बढ़ेगा, प्रेम के मामले में सफलता मिलेगी.
धनु राशिवाले अनजान लोगों से सावधान रहें, सेहत में लापरवाही ना करें, जानें दैनिक राशिफल
Sagittarius Daily Horoscope, 5 August 2026 Aaj Ka Dhanu Rashifal in Hindi: अनजान लोगों से सावधान रहें, सेहत के मामले में लापरवाही ना करें, करियर से जुड़े फैसले सोच समझ कर करें, विदेश से संबंधित काम बनेंगे, संतान की तरक्की होगी, कार्यक्षेत्र में आपकी जिम्मेदारियां बढ़ेगी.
वृश्चिक राशिवालों को भाग्य का सपोर्ट मिलेगा, परिवार में सुख बढ़ेगा, जानें जरूरी टिप
Scorpio Daily Horoscope, 5 August 2026 Aaj Ka Vrishchik Rashifal in Hindi: भाग्य का सपोर्ट मिलेगा, परिवार में सुख बढ़ेगा, धन की प्राप्ति होगी, शत्रुओं पर विजय मिलेगी, काम में तेजी आएगी.
तुला राशिवालों को प्रॉपर्टी से लाभ का योग है, सम्मन और बढ़ेगा, जानें शुभ रंग
Libra Daily Horoscope, 5 August 2026 Aaj Ka Tula Rashifal in Hindi: प्रॉपर्टी से लाभ का योग है, आपका सम्मन और बढ़ेगा, परिवार से सहयोग मिलेगा, रुके हुए काम पूरे होंगे, वाणी का प्रयोग सोच समझ कर करें, लंबी दूरी की यात्रा से बचें.
कन्या राशिवालों को उधार लेनदेन से बचना होगा, शुभ रंग हल्का हरा, जानें दैनिक राशिफल
Virgo Daily Horoscope, 5 August 2026 Aaj Ka Kanya Rashifal in Hindi: मित्रों की मदद से काम बनेंगे, वाणी का प्रयोग सोच समझ कर करें, कुछ नया करने का विचार बनेगे, रिश्तेदारों से मतभेद दूर होंगे, आपका खर्च बढ़ेगा, उधार लेनदेन से बचना होगा, व्यापार में लाभ का योग है.
कर्क राशिवालों की टेंशन दूर होगी, कॉन्फिडेंस अच्छा रहेगा, जानें दैनिक राशिफल
Cancer Daily Horoscope, 5 August 2026 Aaj Ka Kark Rashifal in Hindi: आपकी टेंशन दूर होगी, योजना बना कर काम करने का दिन है, क्रिएटिव कार्य में में सफलता मिलेगी, अचानक धन की प्राप्ति होगी, कॉन्फिडेंस अच्छा रहेगा, जीवनसाथी के साथ मधुरता और बढ़ेगी, व्यापार में लाभ का योग है.
मिथुन राशिवाले धन के लेनदेन से सावधान रहें, जानें दैनिक राशिफल
Gemini Daily Horoscope, 5 August 2026 Aaj Ka Mithun Rashifal in Hindi: धन के लेनदेन में सावधान रहें, किसी से आज मतभेद हो सकता है, सेहत के मामले में लापरवाही ना करें, वाणी पर नियंत्रण रखें, प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी, व्यापार में उधार लेनदेन से बचें.
वृष राशिवालों के लिए मानसिक तनाव कम होगा, यात्रा से लाभ होगा, जानें दैनिक भाग्यफल
Taurus Daily Horoscope, 5 August 2026 Aaj Ka Vrishabh Rashifal in Hindi: मानसिक तनाव कम होगा, रुके हुए काम बनेंगे, करियर आगे बढ़ाने का समय है, मित्रों से मदद मिलेगी, विदेश से शुभ समाचार मिलेगा, यात्रा से लाभ होगा, व्यापार से लाभ का योग है.
मेष राशिवालों को अच्छी खबर मिलेगी, सेहत का रखना होगा ख्याल, जानें दैनिक राशिफल
Aries Daily Horoscope, 5 August 2026 Aaj Ka Mesh Rashifal in Hindi: शिक्षा से जुड़े काम बनेंगे, कहीं दूर से कोई अच्छी खबर मिलेगी, रिश्तेदारों से मतभेद हो सकता है, अचानक कोई फैसला करने से बचें, तेज गति से गाड़ी ना चलाएं, सेहत का ख्याल रखना होगा, व्यापार में आज पैसा निवेश ना करें.
धनलाभ बढ़त पर रहेगा, सेहत का रखें खास ख्याल
Aaj ka Meen (Pisces) Tarot Card Horoscope, 5 August 2026: कर्तव्यपालन में आगे होंगे. लेनदेेन में सहज रहेंगे. व्यक्तिगत मामलों में साहस बढ़ेगा. कार्य समय पर पूरा करेंगे. अतिभावुकता में नहीं आएंगे.
शारीरिक उलझनें कम होंगी, अफवाहों से दूर रहें
Aaj ka Kumbh (Aquarius) Tarot Card Horoscope, 5 August 2026: लोगों से संपर्क में सहजता बनाए रखेंगे. वाणिज्यिक मामलों में अनुकूल स्थिति बनी रहेगी. आत्मविश्वास से कार्यों में सफलता पाएंगे.
मकर राशि वाले पाएंगे मनचाही सफलता, हर कार्य में महसूस करेंगे ऊर्जावान
Aaj ka Makar (Capricorn) Tarot Card Horoscope, 5 August 2026: लेनदेन में स्पष्टता बढ़ाएं. रिश्तों में धैर्य दिखाएं. करीबी से सहज संबंध बनाए रखेंगे. सजगता सतर्कता से आगे बढ़ेंगे. निर्देशा का पालन करें.
आत्मविश्वास से आगे बढ़ेंगे, सबके लिए आदरभाव बढ़ाए रखेंगे
Aaj ka Dhanu (Sagittarius) Tarot Card Horoscope, 5 August 2026: आपसी प्रेम और विश्वास बना रहेगा. व्यक्तिगत संबंधों को बेहतर बनाएंगे. रहन सहन के संतुलन पर बल बनाए रखेंगे.
आसपास का वातावरण में अनुकूलन रहेगा, सजगता और संतुलन से आगे बढ़ेंगे
Aaj ka Tula (Libra) Tarot Card Horoscope, 5 August 2026: सहयोगात्मक मामलों को बल मिलेगा. उचित सलाह का सम्मान करें. कारोबार में अपेक्षित परिणाम बनेंगे. कारोबार में बेहतर मौके बनेंगे.
कारोबार में सहज रहें, रुटीन कार्य पूरे करें
Aaj ka Kanya (Virgo) Tarot Card Horoscope, 5 August 2026: परिचित सहयोगी बने रहेंगे. लक्ष्य पाने के लिए प्रभावपूर्ण तरीके अपनाएं. महत्वपूर्ण विषयों में निरंतर गतिविधि बनाए रखें.
सिंह राशि वाले स्वभाव में लाएं मधुरता, कार्यक्षेत्र में प्रतिद्वंद्वियों से रहें सावधान
Aaj ka Singh (Leo) Tarot Card Horoscope, 5 August 2026: बेहतर स्थिति बनाए रखेंगे. अपेक्षित परिणाम पाएंगे. व्यावसायिक गतिविधियों में अवसरों को भुनाएंगे. कला कौशल पर ध्यान देंगे.
चाटुकारों से दूरी बनाएं, योजनाओं को उचित ढंग से आगे बढ़ाएंगे
Aaj ka Kark (Cancer) Tarot Card Horoscope, 5 August 2026: नियमों की समझ बढ़ाएंगे. लाभकारी परिस्थितियां बल पाएंगी. विविध विषयांे में सुधार बनाए रहेंगे. जिम्मेदारों से भेंट होगी.
आर्थिक क्षेत्र में इच्छित प्रदर्शन बनाए रखेंगे, विनम्रता से बात रखेंगे
Aaj ka Mithun (Gemini) Tarot Card Horoscope, 5 August 2026: सहयोगियों से तालमेल बढ़ेगा. कार्ययोजनाओं पर अमल बढ़ाएंगे. पद प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. वाणिज्यिक स्थिति बेहतर रहेगी. सभी प्रभावित होंगे.
वृषभ राशि वाले पाएंगे पद-प्रतिष्ठा, योग्यता के अनुरूप प्रदर्शन बनाए रखेंगे
Aaj ka Vrishabh (Taurus) Tarot Card Horoscope, 5 August 2026: स्थिति का उचित आंकलन करें. नियमित दिनचर्या बनाए रखें. खानपान की आदतों को संवारें. बहस विवाद की स्थिति से बचें.
मेष राशि वाले पैसों का खर्चा सोच-समझकर करें, संयम और सावधानी की है आवश्यकता
Aaj ka Mesh (Aries) Tarot Card Horoscope, 5 August 2026: निजी विषयों में उम्मीद के अनुरूप गति लें. लाभ एवं प्रभाव में वृद्धि होगी. वाणी व्यवहार आकर्षक बना रहेगा. सभी को प्रसन्न और प्रभावित रहेंगे.
सूर्य ग्रहण की ओर बढ़ रहे बुध, 5 अगस्त से इन 4 राशियों में मचेगा हाहाकार
बुध ग्रह मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश कर जाएंगे. बुध 22 अगस्त तक कर्क राशि में ही रहेंगे. ध्यान देने वाली बात यह है कि इस राशि में 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण भी लगने वाला है. बुध जब कर्क राशि में गोचर करेंगे तो इसका सभी 12 राशियों पर प्रभाव पड़ेगा.
सिर्फ 8 फुट में बना शिव का 125 फीट ऊंचा मंदिर, तीसरी आंख में हीरा
करनाल में श्री सनातन धर्म प्राचीन शिव मंदिर का निर्माण 1975-76 में हुआ था. इसकी सबसे खास बात यह है कि 125 फीट ऊंचा यह मंदिर सिर्फ 8 फुट जगह के दायरे में बना हुआ है. भगवान शिव का यह मंदिर अपनी अलग अहमियत रखता है. यहां भगवान भोलेनाथ की अष्टधातु की मूर्ति में तीसरी आंख में हीरा जड़ा हुआ है.
मन भटकेगा, धन हानि होगी! सूर्य ग्रहण से पहले ज्योतिषविद ने किया आगाह
12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगेगा. यह भारत में दिखाई नहीं देगा और इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. ज्योतिषाचार्य डॉ. अरुणेश कुमार शर्मा के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण सिंह राशि के जातकों की मुश्किलें बढ़ाने वाला है.
सूर्य ग्रहण से पहले मंगल-शनि का आतंक! 5 राशियों का हो सकता है अमंगल
Surya Grahan 2026: 2 अगस्त की रात मंगल ने मिथुन राशि में गोचर किया था. इस गोचर के साथ ही मंगल-शनि एक दूसरे से केंद्र में आ गए हैं और इनका एक दूसरे से केंद्र में आना अच्छा संकेत नहीं है, क्योंकि अगले सप्ताह 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण भी लगने वाला है.
शनि के घर आए गुरु! 19 अगस्त तक पैसों में खेलेंगे इन 4 राशियों के लोग
Guru Nakshatra Parivartan 2026: गुरु ने शनि के स्वामित्व वाले पुष्य नक्षत्र के चौथे चरण में प्रवेश कर लिया है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस बदलाव का शुभ असर मेष, मिथुन, तुला और कुंभ राशि के जातकों पर सबसे अधिक देखने को मिल सकता है.
बुध का कर्क राशि में गोचर: इन 6 राशियों की चमकेगी किस्मत, मिलेगा बड़ा धन लाभ और सफलता
बुद्धि, तर्क, संवाद और व्यापार के कारक ग्रह बुध 5 अगस्त 2026 को कर्क राशि में प्रवेश कर चुके हैं। 5 तारीख और बुधवार का यह दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग कुछ विशेष राशियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं साबित होने वाला है। अगर आपकी राशि भी इन 6 भाग्यशाली ...
सावन के सोमवार में ज़रूर चढ़ाएं 'शिवा मुट्ठी': जानिए वो 1 चीज़ जो दूर करेगी पैसों की तंगी
Shiva Mutthi 2026: सनातन धर्म में श्रावण (सावन) मास का प्रत्येक दिन और प्रत्येक सोमवार अत्यंत पवित्र माना जाता है। सावन के सोमवार को भगवान शिव का विशेष पूजन होता है, जिसमें जल, बेलपत्र और धतूरे के अलावा 'शिवा मुट्ठी' चढ़ाने की एक विशेष और प्राचीन ...
दिन में 3 बार रंग बदलता है ये शिवलिंग, 300 साल से जल रही अखंड ज्योत
Shri Tripoliya Mahadev Mandir: राजस्थान के अलवर में है एक ऐसा मंदिर जहां दिन में तीन बार शिवलिंग का रंग बदलता है. यहां 300 वर्षों से अखंड ज्योत भी जल रही है. सावन में बाबा त्रिपोलिया महादेव के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब उमड़ रहा है.
सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही चारों ओर शिव भक्तों की गूंज सुनाई देने लगती है। मंदिरों में जल चढ़ाते शिवभक्त हों या फिर कांवड़ यात्रा पर निकले कांवड़िए। हर किसी की जुबान पर सिर्फ एक ही नाम 'हर हर महादेव' होता है। इस जयघोष के बिना यह पर्व अधूरा माना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह जयघोष लोग क्यों करते हैं और इसकी शुरूआत कहां से हुई है। पहली बार 'हर-हर महादेव' का उत्घोष पौराणिक कथाओं के मुताबिक जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था, तो उसमें से बेहद विषैला हलाहल विष निकला था। इस विष की तपन से पूरी सृष्टि जलने लगी थी। संसार की रक्षा के लिए भगवान शंकर ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया था। भगवान शिव के इस त्याग से प्रसन्न होकर सभी ऋषियों-मुनियों और देवताओं ने आभार व्यक्त करने के लिए पहली बार 'हर हर महादेव' का जयघोष किया था। इसे भी पढ़ें: Sawan Somwar Vrat Rules: 16 सोमवार व्रत की शुरुआत में न करें ये गलती, मनोकामना पूर्ति के लिए महादेव के सामने बोलें यह मंत्र इस जयघोष का अर्थ 'हर हर महादेव' सिर्फ एक जयकारा नहीं बल्कि भगवान शिव से जुड़ी अटूट श्रद्धा और विश्वाक का प्रतीक है। जब-जब देवताओं पर कोई संकट आया था, या फिर कोई महान असुर सृष्टि पर अत्याचार करने लगा, तो लोगों ने मदद के लिए भगवान शिव का आह्वान किया। भोलेनाथ ने हमेशा आगे आकर अपने सभी भक्तों के सभी कष्टों और पापों का हरण किया था। यही वजह है कि संकट या परेशानी के समय शिव को याद करते हुए भक्त 'हर हर महादेव' का जयघोष करने लगे। जयघोष करने से मिलती है ताकत सावन के महीने में जब कांवड़िए पवित्र नदियों से जल भरकर पैदल शिवधाम की तरफ बढ़ते हैं, तो 'हर हर महादेव' का जयघोष करते हैं। सैकड़ों किमी की थकान भरे सफर में यह मंत्र भक्तों के अंदर एक नई ऊर्जा, भक्ति और जोश का संचार करता है। माना जाता है कि इस जयघोष के उच्चारण मात्र से मन की घबराहट और शरीर की शारीरिक थकान मिट जाती है। इस कारण से सावन का पवित्र महीना इस पावन जयकारे के बिना अधूरा माना जाता है। शिव मंत्र या 'हर हर महादेव' का नियमित जाप करने से शरीर में तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन कम होता है। इससे चिंता, डिप्रेशन और घबराहट दूर होता है और मन शांत होता है। वहीं दिमाग की याददाश्त और ध्यान लगाने की क्षमता बेहतर होती है। सरल शब्दों, यह जाप दिमाग को तनावमुक्त और तेज बनाने वाली एक नेचुरल थेरेपी है।
धनु राशि के लिए कल का दिन रहेगा शानदार, जानें सभी राशियों का हाल
Kal Ka Rashifal 5 August 2026: वाणी और व्यवहार में मिठास बनी रहेगी. प्रेम संबंधों में उत्साह रहेगा और महत्वपूर्ण कार्य गति पाएंगे. भ्रमण व मनोरंजन के अवसर बनेंगे, जिससे लाभ का प्रतिशत बढ़ेगा.
5 अगस्त तक बना रहेगा बुध का भद्र राजयोग! 3 राशियों की लगेगी लॉटरी
Bhadra Rajyog 2026: 5 अगस्त तक बुध देव का स्वराशि में रहने से भद्र राजयोग का निर्माण हो रहा है, जिससे 3 राशियों के करियर को नई ऊंचाइयों प्राप्त होंगी. आइए जानते हैं उन लकी राशियों के बारे में.
कौन थे गिद्धराज जटायु? फिल्म रामायण में अनुपम खेर ने दी है आवाज
Ramayan: रामायण का वो महान पक्षीराज, जिसने अपनी जान की बाजी लगाकर रावण को भी जख्मी कर दिया था और जिसकी मृत्यु पर स्वयं भगवान श्रीराम भी रो पड़े थे. आइए जानते हैं वीर जटायु की कथा के बारे में.
जहां 18 साल की उम्र में ज्यादातर युवा यूनिवर्सिटी का चुनाव करने या कॉलेज के पहले सेमेस्टर में एडजस्ट होने में व्यस्त रहते हैं, वहीं अमेरिका के फ्लोरिडा के रहने वाले नाथन थॉमस (Nathan Thomas) मियामी डेड कॉलेज के क्लासरूम में खड़े होकर अपने से बड़ी उम्र या अपनी ही उम्र के छात्रों को इंजीनियरिंग पढ़ा रहे हैं। फ्लोरिडा के इस किशोर ने 18 साल और 346 दिन की उम्र में दुनिया का सबसे कम उम्र का पुरुष प्रोफेसर बनकर गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। उन्होंने 306 साल से कायम रिकॉर्ड को तोड़ा है। वे मियामी डेड कॉलेज में इंजीनियरिंग इंस्ट्रक्टर के तौर पर शामिल हुए और ऐसे छात्रों को पढ़ा रहे हैं, जिनकी उम्र कई मामलों में लगभग उनके जितनी ही है। उनकी यह उपलब्धि स्कॉटिश गणितज्ञ कॉलिन मैकलॉरिन के रिकॉर्ड से भी आगे निकल गई, जो 1717 में 19 साल की उम्र में प्रोफेसर बने थे। एक सफ़र जो सिर्फ़ 10 साल की उम्र में शुरू हुआ नाथन का एकेडमिक सफ़र ज़्यादातर लोगों की तुलना में बहुत पहले शुरू हो गया था। 10 साल की उम्र में, उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा जारी रखते हुए 'डुअल-एनरोलमेंट प्रोग्राम' के ज़रिए मियामी डेड कॉलेज में दाखिला लिया। 14 साल की उम्र तक, वे फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी चले गए, जहाँ उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ऑनर्स के साथ अपनी बैचलर और मास्टर डिग्री पूरी की। सालों बाद, वे उसी कॉलेज में लौटे जहाँ वे कभी एक बच्चे के तौर पर पढ़ते थे। इस बार, वे एक फैकल्टी मेंबर के तौर पर वापस आए। अगस्त 2023 में, उन्होंने 'COP 2270: C for Engineers' पढ़ाना शुरू किया। यह कोर्स इंजीनियरिंग के छात्रों को C प्रोग्रामिंग और कंप्यूटेशनल प्रॉब्लम-सॉल्विंग से परिचित कराता है। जब उम्र सिर्फ़ एक नंबर बन जाती है अपनी ही उम्र के आस-पास के छात्रों को पढ़ाने से नाथन को कभी कोई परेशानी नहीं हुई। उनका मानना है कि सीखना उम्र से नहीं, बल्कि जिज्ञासा और कमिटमेंट से तय होता है। उनके अनुसार, हर कोई एक ही मकसद से क्लासरूम में आता है - सीखने, बेहतर बनने और आगे बढ़ने के लिए। नाथन के लिए, पढ़ाने का सबसे संतोषजनक हिस्सा छात्रों को उन कॉन्सेप्ट्स को समझते हुए देखना है जो कभी मुश्किल लगते थे। इंजीनियरों के परिवार में पले-बढ़े होने के कारण भी उनकी रुचियों को आकार देने में बड़ी भूमिका रही। उन्होंने अक्सर अपनी माँ को गणित को मज़ेदार बनाने और कम उम्र से ही विज्ञान में मज़बूत आधार बनाने में मदद करने का श्रेय दिया है। आज इंजीनियर, कल वकील नाथन की महत्वाकांक्षाएँ इंजीनियरिंग से कहीं आगे तक जाती हैं। पढ़ाने के साथ-साथ, वह यूनिवर्सिटी ऑफ़ मियामी स्कूल ऑफ़ लॉ से ज्यूरिस डॉक्टर की डिग्री भी ले रहे हैं और 2028 में उनके ग्रेजुएट होने की उम्मीद है। उनका लक्ष्य इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ (बौद्धिक संपदा कानून) में स्पेशलाइज़ेशन करना है। इसके लिए वे अपने इंजीनियरिंग बैकग्राउंड और कानूनी जानकारी का इस्तेमाल करके साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हुए इनोवेशन को सुरक्षित रखने में मदद करना चाहते हैं। उनका मानना है कि इंजीनियरिंग के ज़रिए विकसित हुई लॉजिकल सोच और प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स कानून की पढ़ाई में भी उतनी ही काम आई हैं। वर्ल्ड रिकॉर्ड से भी बढ़कर नाथन थॉमस की कहानी सिर्फ़ दुनिया के सबसे कम उम्र के पुरुष प्रोफ़ेसर बनने से कहीं ज़्यादा है। 10 साल की उम्र में कॉलेज में दाखिला लेने से लेकर दो इंजीनियरिंग डिग्रियां पूरी करने, 306 साल पुराना गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने और अब पढ़ाने के साथ-साथ लॉ स्कूल की पढ़ाई करने तक, उनका सफ़र बरसों की जिज्ञासा, अनुशासन और सीखने के प्रति सच्चे लगाव को दिखाता है। यह खबर www.guinnessworldrecords.com पर प्रसारित की गयी है- इसके पढ़ने के लिए क्लिक करें Read LatestNational News in Hindi only on Prabhasakshi
बुध का कर्क राशि में प्रवेश: 12 राशियों पर क्या होगा असर? जानें किसकी चमकेगी किस्मत
बुध ग्रह 5 अगस्त 2026 (बुधवार) को शाम 07:42 बजे मिथुन राशि की यात्रा समाप्त करके कर्क राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। बुध का यह राशि परिवर्तन सभी 12 राशियों के जीवन में बड़े उथल-पुथल और बदलाव लेकर आएगा। आइए जानते हैं आपकी राशि पर इस गोचर का कैसा ...
खाली होगी जेब! 5 अगस्त से बुध की चाल से 4 राशियां हो जाएं सावधान
Budh Gochar Negative 2026: 5 अगस्त 2026 को बुद्धि और व्यापार के कारक बुध देव जल तत्व की राशि कर्क में गोचर करने जा रहे हैं. बुध का यह राशि परिवर्तन कई राशियों के जीवन में पारिवारिक अनबन, मानसिक तनाव, अचानक बड़े खर्च और व्यापार में मंदी जैसी परेशानियां ला सकता है.
सावन के पवित्र महीने की शुरुआत होते ही उत्तर भारत की सड़कें केसरिया रंग में रंग जाती हैं। चारों तरफ केवल 'बोल बम' के जयकारे गूंजते हैं और लाखों शिव भक्त नंगे पांव मीलों का सफर तय करते नजर आते हैं। कंधे पर कांवड़ उठाए और उसमें पवित्र गंगा जल भरे इन शिव भक्तों की निष्ठा और भक्ति भाव देखने लायक होती है। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि इस ऐतिहासिक और धार्मिक कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई थी? भक्तगण क्यों सावन के महीने में मीलों पैदल चलकर भगवान शिव को गंगा जल अर्पित करते हैं? आइए जानते हैं कांवड़ यात्रा के पीछे की पौराणिक कथा, इसका आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़े कड़े नियमों के बारे में।क्या है कांवड़ यात्रा और कैसे होती है इसकी शुरुआतकांवड़ यात्रा हिंदू धर्म की सबसे बड़ी और लोकप्रिय वार्षिक तीर्थयात्राओं में से एक है, जो मुख्य रूप से सावन मास के दौरान निकाली जाती है। इस यात्रा में शिव भक्त हरिद्वार, गंगोत्री, गोमुख और सुल्तानगंज जैसे पवित्र स्थलों से मां गंगा का पावन जल अपनी कांवड़ में भरते हैं। इसके बाद वे इस जल को बांस और फूलों से सजी हुई कांवड़ में रखकर पैदल अपने गृह नगर लौटते हैं और सावन के पावन सोमवार या चतुर्दशी तिथि पर स्थानीय शिव मंदिरों में भगवान शिव के शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं।कांवड़ यात्रा के पीछे छिपी है समुद्र मंथन की पौराणिक कथापौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कांवड़ यात्रा और भगवान शिव को गंगा जल अर्पित करने की परंपरा का गहरा संबंध 'समुद्र मंथन' से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथा के मुताबिक जब देवताओं और असुरों द्वारा समुद्र मंथन किया जा रहा था, तब उसमें से हलाहल नामक अत्यंत घातक विष निकला था, जिसके प्रभाव से पूरी सृष्टि नष्ट होने लगी थी। इस भयंकर संकट से ब्रह्मांड को बचाने के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने गले में रोक लिया था, जिसके कारण उनका गला नीला पड़ गया और उन्हें 'नीलकंठ' कहा जाने लगा। उस विष की तीव्र गर्मी और उसके नकारात्मक प्रभावों को शांत करने के लिए सभी देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों ने भगवान शिव पर पवित्र गंगा जल अर्पित किया था। तभी से सावन के महीने में शिव को गंगा जल चढ़ाने की यह परंपरा चली आ रही है। इसके अलावा कुछ कथाओं में भगवान परशुराम द्वारा कांवड़ यात्रा करने का भी उल्लेख मिलता है।कांवड़ यात्रा का आध्यात्मिक महत्व और अनुशासनकांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह अटूट आस्था, अनुशासन और आत्म-नियंत्रण का प्रतीक है। यह यात्रा व्यक्ति को भगवान शिव के प्रति पूर्ण समर्पण, प्रकृति और मां गंगा के प्रति कृतज्ञता और कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखना सिखाती है। लाखों श्रद्धालुओं का मानना है कि यह तीर्थयात्रा मन और आत्मा को पवित्र करती है तथा महादेव के साथ एक गहरा आध्यात्मिक संबंध स्थापित करती है।कांवड़ यात्रा के दौरान किन कड़े नियमों का पालन करते हैं भक्त?कांवड़ यात्रा बेहद कठिन मानी जाती है और इसके दौरान भक्तों को अत्यधिक अनुशासन और पवित्रता के सख्त नियमों का पालन करना पड़ता है:यात्रा शुरू करने से पहले भक्त स्नान कर स्वयं को पवित्र करते हैं।इस पूरी यात्रा के दौरान केवल साफ-सुथरे केसरिया रंग के वस्त्र ही पहने जाते हैं।मन, वचन और कर्म से पूरी तरह शुद्धता और सात्विकता बनाए रखी जाती है।यात्रा के दौरान पूरी तरह से शाकाहारी और सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है।किसी भी प्रकार के नशे, मांस, मदिरा, लहसुन या प्याज का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है।यात्रा के दौरान ब्रह्मचर्य के नियमों का कठोरता से पालन करना अनिवार्य है।कांवड़ को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखा जाता है, बल्कि इसे हमेशा किसी ऊंचे स्थान या विशेष स्टैंड पर ही रखा जाता है।चलते समय लगातार 'बोल बम' और 'हर हर महादेव' के जयकारे लगाए जाते हैं।
क्या सच में रावण ने काटे थे अपने 9 सिर? जानें इस ज्योतिर्लिंग की कथा
Sawan 2026: आखिर क्यों लंकापति रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए इतना कठोर तप किया? पौराणिक कथाओं के अनुसार रावण ने महादेव की आराधना में अपने एक-एक सिर का बलिदान देना शुरू किया. जब वह दसवां सिर अर्पित करने वाला था, तब भगवान शिव प्रकट हुए और उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया.
धर्म, संस्कृति एवं जीवनशैली डेस्क: हिंदू धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक 16 संस्कारों का विधान है। मृत्यु के पश्चात किए जाने वाले अंतिम संस्कार और गरुड़ पुराण (Garuda Purana) के नियमों का सनातन परंपरा में विशेष महत्व है। किसी प्रियजन के देहांत के बाद अक्सर परिवार के लोग समझ नहीं पाते कि मृतक के पीछे छूटे सामान, जैसे—वस्त्र (कपड़े), आभूषण (गहने), घड़ी या अन्य दैनिक वस्तुओं का क्या किया जाए। कई बार लोग मोहवश या वस्तु के महंगे होने के कारण मृत व्यक्ति के कपड़े और गहनों का स्वयं उपयोग करने लगते हैं।हालांकि, हिंदू धर्मशास्त्रों, गरुड़ पुराण, ज्योतिष विज्ञान और आधुनिक मनोविज्ञान (Psychology) तीनों ही दृष्टिकोण से किसी भी मृत व्यक्ति के वस्त्रों और आभूषणों को पहनने से सख्त मना किया गया है। माना जाता है कि ऐसा करने से जीवित व्यक्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और उसके जीवन में परेशानियां आने लगती हैं।आइए जानते हैं कि किसी मृत व्यक्ति के कपड़े और आभूषण क्यों नहीं पहनने चाहिए और इसके पीछे के मुख्य आध्यात्मिक, ऊर्जात्मक व वैज्ञानिक कारण क्या हैं।1. गरुड़ पुराण के अनुसार आत्मा का 'मोह' और सूक्ष्म ऊर्जा (Spiritual Reason)गरुड़ पुराण में मृत्यु और उसके पश्चात आत्मा के सफर का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसके अनुसार:भौतिक वस्तुओं से आत्मा का लगाव: व्यक्ति भले ही अपने शरीर को त्याग देता है, लेकिन उसकी आत्मा का अपनी सबसे प्रिय वस्तुओं (विशेष रूप से वस्त्रों, गहनों और दैनिक उपयोग की चीजों) के प्रति मोह और आकर्षण तुरंत खत्म नहीं होता।ऊर्जा का प्रवाह: यदि कोई व्यक्ति मृतक के वस्त्रों या गहनों को धारण करता है, तो मृतक की सूक्ष्म ऊर्जा (Subtle Energy) उस व्यक्ति की ओर आकर्षित होने लगती है। इसके परिणामस्वरूप, वस्त्र पहनने वाले व्यक्ति को मानसिक अशांति, डरावने सपने, अकारण भय और शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है।मोक्ष में बाधा: जब जीवित परिजन मृतक की वस्तुओं का उपभोग करने लगते हैं, तो आत्मा का अपनी पुरानी दुनिया से मोहभंग होने में समय लगता है, जिससे उसकी परलोक यात्रा में बाधा उत्पन्न होती है।2. आभूषणों (धातुओं) में ऊर्जा संचय का विज्ञान (Metaphysical & Energy Science)वस्त्रों की तुलना में आभूषणों (सोना, चांदी, हीरे आदि) को लेकर नियम और भी ज्यादा सख्त हैं। इसके पीछे गहरा ऊर्जा विज्ञान काम करता है:धातुओं की अवशोषण क्षमता (Memory of Metals): सोना और चांदी जैसी बहुमूल्य धातुओं में इंसानी ऊर्जा, आभामंडल (Aura) और विचारों की तरंगों को अवशोषित (Absorb) करके लंबे समय तक बनाए रखने की अद्भुत क्षमता होती है।मृतक के जीवनकाल की ऊर्जा: मृत व्यक्ति ने अपने पूरे जीवनकाल के दौरान उन गहनों को पहना होता है। व्यक्ति के सुख-दुःख, बीमारियों, भावनात्मक तनाव और मृत्यु के समय की ऊर्जा उन गहनों में समाहित हो जाती है।गहनों का क्या करें? गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत व्यक्ति के गहनों को कभी भी सीधे तौर पर बिना शोधन के नहीं पहनना चाहिए। यदि आप उन गहनों का उपयोग करना ही चाहते हैं, तो उन्हें पिघलाकर (Melt) कोई नया आभूषण बनवाएं या उनका पुनर्गठन करवाएं। गहनों को पिघलाने से उनमें मौजूद पुरानी ऊर्जा का संचय पूरी तरह नष्ट हो जाता है।3. मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक कारण (Psychological Reason)किसी प्रियजन को खोने का दुख बहुत गहरा होता है। मनोविज्ञान के अनुसार:दुख से उबरने में रुकावट: यदि आप हर दिन मृत व्यक्ति के कपड़े पहनेंगे या उनके आभूषणों को अपनी आंखों के सामने रखेंगे, तो आपके मन में उनके जाने का गम हमेशा तरोताजा रहेगा।मानसिक तनाव और डिप्रेशन: मृतक की वस्तुएं लगातार आपको उनकी याद दिलाती रहेंगी, जिससे आप शोक की अवस्था (Grieving Process) से कभी बाहर नहीं निकल पाएंगे। यह स्थिति व्यक्ति को अवसाद (Depression) और मानसिक तनाव की ओर धकेल सकती है।आगे बढ़ने की आवश्यकता: जीवन का नियम निरंतर आगे बढ़ना है। मृतक की स्मृतियों को दिल में रखना अलग बात है, लेकिन उनकी भौतिक वस्तुओं को पहनकर खुद को उनके अतीत से बांधे रखना आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।4. वैज्ञानिक और चिकित्सीय कारण (Scientific & Biological Reason)चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) भी मृत व्यक्ति के इस्तेमाल किए गए वस्त्रों को बिना विसंक्रमित (Sterilize) किए पहनने की सलाह नहीं देता:संक्रमण और बैक्टीरिया का खतरा: मृत्यु से पहले व्यक्ति अक्सर किसी न किसी बीमारी, संक्रमण या शारीरिक कष्ट से जूझ रहा होता है। उनके कपड़ों में कई सूक्ष्म बैक्टीरिया, वायरस और पसीने के कण लंबे समय तक मौजूद रह सकते हैं।त्वचा संबंधी समस्याएं: यदि कोई व्यक्ति बिना धोए या बिना सही तरीके से साफ किए मृतक के कपड़े पहनता है, तो उसे त्वचा में संक्रमण (Skin Infections), एलर्जी या अन्य बीमारियां होने का खतरा रहता है।मृत व्यक्ति के कपड़े और सामान का क्या करना चाहिए?गरुड़ पुराण और सनातन परंपरा में मृत व्यक्ति की वस्तुओं का सही निस्तारण (Disposal) करने के स्पष्ट नियम बताए गए हैं:वस्त्रों का दान (Donation): गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद 13वें दिन (तेरही) या श्राद्ध पक्ष के दौरान मृतक के वस्त्रों, जूतों और बिस्तरों का किसी जरूरतमंद, गरीब या ब्राह्मण को दान कर देना चाहिए। दान करने से आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर पुण्य प्रभाव बढ़ता है।बहुत पुराने या फटे कपड़ों का निस्तारण: यदि कपड़े बहुत पुराने, फटे या बीमारी के दौरान इस्तेमाल किए गए हैं, तो उन्हें जलप्रवाहित कर देना चाहिए या भूमि विसर्जन (दफना) देना चाहिए।गहनों का शोधन: मृतक के सोने-चांदी के गहनों को घर में रखा जा सकता है, लेकिन पहनने से पहले उन्हें पिघलाकर नया रूप दें, या फिर उन्हें बेचकर मिलने वाले धन का उपयोग किसी धार्मिक/सामाजिक कार्य या नए आभूषण खरीदने में करें।घड़ी या इलेक्ट्रॉनिक सामान: यदि मृतक की कोई ऐसी वस्तु है जिसे आप यादगार के तौर पर रखना चाहते हैं (जैसे घड़ी, कलम आदि), तो उसे केवल संभालकर संदूक में रखें, उसका दैनिक इस्तेमाल न करें।निष्कर्ष:किसी मृत व्यक्ति के वस्त्र और आभूषण न पहनने के पीछे केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शांति, ऊर्जा शुद्धता, मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वच्छता के गहरे नियम छिपे हैं। मृतक की वस्तुओं का दान करने से न केवल उनकी आत्मा को सद्गति मिलती है, बल्कि जीवित परिजनों का जीवन भी सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि से भरा रहता है।
रुद्राक्ष को धारण करने का सही नियम क्या है? देखें भाग्य चक्र
आजतक के कार्यक्रम भाग्य चक्र में शैलेंद्र पांडेय ने बताया कि सावन के पावन महीन में रुद्राक्ष धारण करने की विशेष परंपरा है. उन्होनें रुद्राक्ष के महत्व के बारे में चर्चा की साथ ही उसको धारण करने के सही नियमों पर बात की. कार्यक्रम में आगे उन्होनें 12 राशियों के दैनिक राशिफल के बारे में चर्चा की.
विशेष पंचांग एवं धर्म-अध्यात्म रिपोर्टर: हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिषशास्त्र में पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार और मांगलिक कार्यों के आयोजन से पहले दैनिक पंचांग के माध्यम से तिथि, नक्षत्र, करण, योग, राहुकाल और शुभ मुहूर्तों का विचार करना अत्यंत आवश्यक होता है। आज मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को पवित्र सावन (श्रावण) मास के शुक्ल पक्ष की तिथि है। सावन का मंगलवार होने के कारण आज मां मंगला गौरी (माता पार्वती) का अति पावन मंगला गौरी व्रत रखा जा रहा है। इसके साथ ही पिछले पांच दिनों से चले आ रहे नक्षत्रों के विशेष प्रभाव यानी 'पंचक' भी आज समाप्त हो रहे हैं। आज सावन के मंगलवार पर सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का अति दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने वाले साधकों को अक्षय पुण्य और मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी।4 अगस्त 2026 का पंचांग: सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, तिथि और पंचक समाप्ति का समयआज 4 अगस्त 2026 के वैदिक पंचांग के अनुसार, विक्रम संवत 2083 (नल) और शक संवत 1948 (क्रोधन) चल रहा है। आज सूर्योदय प्रातः 05:44 बजे होगा और सूर्यास्त सायं 07:10 बजे होगा। चंद्रोदय प्रातः 10:15 बजे और चंद्रास्त रात्रि 10:42 बजे होगा। सावन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि दोपहर 12:45 बजे तक रहेगी, जिसके उपरांत सप्तमी तिथि का प्रारंभ हो जाएगा। आज स्वाति नक्षत्र रात्रि 09:12 बजे तक रहेगा, जिसके बाद विशाखा नक्षत्र आरंभ होगा। आज सिद्धि योग और साध्य योग का निर्माण हो रहा है। इसके अतिरिक्त, कौलव करण दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा, जिसके बाद तैतिल करण की शुरुआत होगी। पंचक जो पिछले दिनों से चले आ रहे थे, वे आज प्रातःकाल ही विधिपूर्वक समाप्त हो रहे हैं, जिसके बाद से सभी प्रकार के शुभ एवं मांगलिक कार्य पुनः बिना किसी बाधा के प्रारंभ किए जा सकते हैं।ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, आज का सबसे शुभ मुहूर्त यानी 'अभिजीत मुहूर्त' दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक रहेगा। इस दौरान किसी भी नए कार्य की शुरुआत या पूजा-पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। आज का विजय मुहूर्त दोपहर 02:40 बजे से सायं 03:33 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त सायं 06:58 बजे से सायं 07:21 बजे तक रहेगा। वहीं, अगर अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 03:48 बजे से सायं 05:29 बजे तक रहेगा। राहुकाल की अवधि में कोई भी नया या शुभ काम करने से बचना चाहिए। इसके साथ ही यमगंड काल सुबह 09:05 बजे से 10:46 बजे तक रहेगा। आज के दिन उत्तर-पूर्व दिशा में यात्रा का ध्यान रखें और पूर्व दिशा में 'दिशाशूल' रहता है, इसलिए पूर्व दिशा की ओर अनावश्यक यात्रा करने से बचें; यदि यात्रा अनिवार्य हो तो गुड़ या खांड खाकर और हनुमान जी का ध्यान करके ही घर से निकलें। मंगला गौरी व्रत रखने वाली सुहागिन महिलाओं को आज मां पार्वती को 16 श्रृंगार अर्पित कर ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः मंत्र का जाप करना चाहिए।
Mangla Gauri Vrat 2026: मंगला गौरी व्रत आज, अखंड सौभाग्य के लिए भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां
धर्म एवं अध्यात्म डेस्क: पवित्र श्रावण (सावन) मास का प्रत्येक मंगलवार जगत जननी माता पार्वती के स्वरूप 'मां मंगला गौरी' को समर्पित होता है। आज, 4 अगस्त 2026 को सावन का मंगलवार होने के कारण देश भर में सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य, संतान प्राप्ति और सुख-समृद्धि के लिए मंगला गौरी का व्रत रख रही हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं मनचाहा और सुयोग्य वर प्राप्त करने के साथ-साथ कुंडली में मौजूद मंगल दोष (Mangal Dosh) के निवारण के लिए मां मंगला गौरी की विशेष पूजा-अर्चना कर रही हैं।शास्त्रों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के मंगलवार को पूरी निष्ठा और विधि-विधान से मां मंगला गौरी की पूजा करने से दांपत्य जीवन के सभी कष्ट, तनाव और अनबन समाप्त हो जाते हैं। हालांकि, धार्मिक ग्रंथों में यह भी स्पष्ट बताया गया है कि व्रत और पूजा का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। जाने-अनजाने में की गई छोटी सी भूल या चूक व्रत के पुण्य को क्षीण कर सकती है या पूजा को अधूरी छोड़ सकती है। यदि आप भी आज मंगला गौरी का व्रत रख रही हैं, तो आपको इन 5 मुख्य गलतियों से बचना चाहिए।मंगला गौरी व्रत में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां: पूजा-विधि और नियमों का रखें खास ख्याल1. काले, नीले या भूरे रंग के वस्त्र न पहनेंधार्मिक मान्यताओं में लाल, गुलाबी, हरा और पीला रंग शुभता, सौम्यता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। मंगला गौरी व्रत के दिन सुहागिन महिलाओं व कन्याओं को भूलकर भी काले, नीले, स्लेटी या गहरे भूरे रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पूजा के समय लाल या हरे रंग की साड़ी अथवा वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है, क्योंकि ये रंग मां पार्वती को अति प्रिय हैं।2. क्रोध, वाद-विवाद और दूसरों का अपमान करने से बचेंव्रत का अर्थ केवल भोजन का त्याग करना नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धता बनाए रखना होता है। मंगला गौरी व्रत के दिन महिलाओं को अपने मन में किसी के प्रति ईर्ष्या, द्वेष या क्रोध नहीं लाना चाहिए। आज के दिन अपने पति, सास-ससुर, बुजुर्गों या किसी भी व्यक्ति का अपमान करने से बचें। घर में क्लेश या वाद-विवाद करने से पूजा का फल निष्फल हो जाता है और नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।3. पूजा सामग्री में अशुद्ध या वर्जित चीजों का प्रयोगमां मंगला गौरी की पूजा में सामग्री की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। पूजा में कभी भी टूटे हुए चावल (खंडित अक्षत), बासी फूल या कटे-फटे बेलपत्र अर्पित न करें। इसके अलावा, मां गौरी और भगवान शिव की पूजा में केतकी के फूल, तुलसी पत्र या हल्दी (विशेष रूप से केवल शिवलिंग पर सीधे अर्पित करना) के नियमों का ध्यान रखें। मां गौरी को लाल चुनरी, 16 श्रृंगार की वस्तुएं और शुद्ध घी का दीपक ही अर्पित करें।4. तामसिक विचारों, लहसुन-प्याज और नियम तोड़ने से परहेजमंगला गौरी व्रत के दिन पूरे घर का माहौल सात्विक होना चाहिए। व्रत रखने वाली महिला और परिवार के सदस्यों को भोजन में लहसुन, प्याज या किसी भी प्रकार के तामसिक पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए। यदि आप एकभुक्त (दिन में एक बार अन्न ग्रहण करने वाला) व्रत रख रही हैं, तो पूजा संपन्न होने और कथा सुनने के बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण करें। सूर्यास्त से पहले फलाहार या पारण के नियमों का सही पालन करें।5. सुहाग सामग्री का अनादर या पुरानी चीजों का दानमंगला गौरी व्रत में मां पार्वती को 16 श्रृंगार (सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, मेहंदी, आलता आदि) चढ़ाने का विधान है। पूजा के पश्चात यह सुहाग सामग्री किसी योग्य ब्राह्मणी या सुहागिन महिला को आदरपूर्वक दान की जाती है। कभी भी अपनी इस्तेमाल की हुई पुरानी या टूटी-फूटी श्रृंगार सामग्री का दान न करें। सुहाग की वस्तुएं हमेशा नई और स्वच्छ होनी चाहिए। मां पार्वती को अर्पित सिंदूर को अपने माथे पर लगाना न भूलें, यह अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देता है।मंगला गौरी व्रत की सही पूजा विधिप्रातःकाल स्नान: सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ (लाल या हरे) वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प लें।चौकी स्थापना: घर के मंदिर में या पूजा स्थल पर एक लाल कपड़ा बिछाकर मां मंगला गौरी (माता पार्वती) और भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।16 चीजों का अर्पण: मां गौरी को 16 की संख्या में चीजें चढ़ाने का विशेष महत्व है—जैसे 16 चूड़ियां, 16 लौंग, 16 इलायची, 16 सुपारी, 16 बेलपत्र और 16 प्रकार के फूल/फल।कथा व आरती: मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें अथवा सुनें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर कपूर से मां गौरी की आरती उतारें और परिवार के साथ प्रसाद वितरित करें।
पेपर लीक पर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष की ये मांग, देखें पंजाब आजतक
पंजाब विधानसभा के मॉनसून सत्र में पंजाब पेपर लीक के मुद्दे पर पंजाब विधानसभा के मॉनसूत्र के पहले दिन जमकर हंगामा हुआ. विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर जवाबदेही तय करने के लिए पंजाब के शिक्षा मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से इस्तीफा मांग रहा है जबकि सरकार पेपर लीक के आरोपों को झूठा बता रही है. इस बीच सत्र के पहले सदन में केंद्र सरकार के खिलाफ एक निंदा प्रस्ताव भी पेश किया गया.
क्या सच में आएगी महाप्रलय? नंदी की ये मूर्ति है कलयुग के अंत का संकेत
Hindu Dharam: क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा मंदिर भी है जहां नंदी जी की मूर्ति लगातार बड़ी हो रही है और मंदिर के खंभों में दरारें आ रही हैं? पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस मूर्ति का आकार बढ़ना महाप्रलय का बड़ा संकेत माना जा रहा है. लेकिन क्यों?
मांजलपुर सीट पर बीजेपी का दबदबा बरकरार, देखें गुजरात आजतक
गुजरात के मांजलपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी ने बड़ी और निर्णायक जीत दर्ज की है. बीजेपी उम्मीदवार सतेंद्रभाई पटेल ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को 30 हजार 630 वोटों के बड़े अंतर से हराकर सीट बरकरार रखी. यह उपचुनाव बीजेपी के वरिष्ठ नेता और आठ बार के विधायक रहे योगेश पटेल के निधन के बाद हुआ था. कम मतदान के बावजूद बीजेपी ने अपने मजबूत जनाधार को कायम रखते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि मांजलपुर में उसका संगठन और सियासी पकड़ अब भी मजबूत है.
20 अगस्त को शनिदेव करेंगे गोचर! 3 राशियों की बढ़ेंगी मुश्किलें!
Shani Nakshtra Parivartan 2026: कर्मफलदाता शनि देव 20 अगस्त 2026 को रेवती नक्षत्र के प्रथम चरण में प्रवेश करने जा रहे हैं, जहां वे 9 अक्टूबर तक विराजमान रहेंगे. बुध के स्वामित्व वाले रेवती नक्षत्र में शनि का यह गोतर कई राशियों के लिए खतरनाक रहने वाला है.
04 अगस्त 2026 का क्या है अभिजित मुहूर्त और राहुकाल, जानें आज का पंचांग
Aaj 4 August 2026 का पंचांग (Aaj ka Panchang): 04 अगस्त 2026, दिन- मंगलवार, श्रावण मास, कृष्ण पक्ष, षष्ठी तिथि रात 22.03 बजे तक फिर सप्तमी तिथि , रेवती नक्षत्र रात 21.54 बजे तक फिर अश्विनी नक्षत्र, चंद्रमा- मीन में रात 21.54 बजे तक फिर मेष में, सूर्य- कर्क में, अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12 बजे से दोपहर 12.54 बजे तक, राहुकाल- दोपहर 15.49 बजे से शाम 17.29 बजे तक, दिशा शूल- उत्तर.
मीन राशि वालों का आज कैसा रहेगा दिन, जानें क्या करें उपाय
Pisces Daily Horoscope, 4 August 2026 Aaj Ka Meen Rashifal in Hindi: आज जल्दबाजी में फैसला करने से बचें, नए लोगों से मुलाकात होगी, विदेश से लाभ का समाचार मिलेगा, जीवनसाथी से विवाद हो सकता है, आज रहें सावधान, मन में तनाव ना पालें, व्यापार से नया निवेश आज ना करें.
कुंभ राशि वाले आज नीले रंग के पहनें कपड़े, भाग्य का मिलेगा साथ
Aquarius Daily Horoscope, 4 August 2026 Aaj Ka Kumbh Rashifal in Hindi: रुके हुए काम बनेंगे, भाग्य का साथ मिलेगा, अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में कामयाब होंगे, परिवार में सुख-शांति बढ़ेगी, गाड़ी बहुत तेज गति से ना चलाएं, व्यापार में लाभ का योग है.
मकर राशि वालों की आज कार्यक्षमता बढ़ेगी, जानें दैनिक राशिफल
Capricorn Daily Horoscope, 4 August 2026 Aaj Ka Makar Rashifal in Hindi: आपकी कार्यक्षमता बढ़ेगी, मन की उलझन सुलझेगी, शिक्षा से जुड़े लोगों को फायदा होगा, बड़े फैसले करने में देरी ना करें, अपने समय का सही तरीके से प्रयोग करें, व्यापार में धन की स्थिति बेहतर होगी.
धनु राशि वाले आज किसी गरीब को फल दान करें, कारोबार में होगा लाभ
Sagittarius Daily Horoscope, 4 August 2026 Aaj Ka Dhanu Rashifal in Hindi: पूरे उत्साह से काम करेंगे, करियर को आगे बढ़ाने का समय है, आपका सम्मान और बढ़ेगा, वाणी का प्रयोग सोच-समझ कर करें, किसी बहस में उलझने से बचें, कारोबार में लाभ के रास्ते बनेंगे.
वृश्चिक राशिवालों को परिवार में सहयोग मिलेगा, कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा, जानें दैनिक राशिफल
Scorpio Daily Horoscope, 4 August 2026 Aaj Ka Vrishchik Rashifal in Hindi: सुख सुविधाओं में धन खर्च होगा, परिवार से सहयोग मिलेगा, आपके कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा, हर किसी पर भरोसा करने से बचें, लंबी दूरी की यात्रा से बचें, व्यापार से जुड़े खर्चे बढ़ेंगे.
तुला राशिवालों को अपने काम पर ध्यान होगा, सेहत ठीक रहेगी, जानें दैनिक राशिफल
Libra Daily Horoscope, 4 August 2026 Aaj Ka Tula Rashifal in Hindi: अपने काम पर ध्यान देना होगा, प्रॉपर्टी से संबंधित फैसला सोच समझ कर करें, सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी, काम के दौरान गुस्सा ना दिखाएं, सेहत आपकी ठीक रहेगी, व्यापार से जुड़े काम बनेंगे.
कन्या राशिवाले लंबी यात्रा की दूरी से बचें, शुभ रंग हहरा रहेगा, जानें दैनिक भाग्यफल
Virgo Daily Horoscope, 4 August 2026 Aaj Ka Kanya Rashifal in Hindi: किसी बात को लेकर चिंता रहेगी, वाणी का प्रयोग सोच समझ कर करें, परिवार में चल रहे मतभेद दूर होंगे, व्यापार में तरक्की के मौके मिलेंगे, लंबी दूरी की यात्रा से बचें, व्यापार में नया निवेश सोच समझ कर करें.
कर्क राशिवालों के लिए मानसिक तनाव होगा, कैसा रहेगा करियर, जानें दैनिक भाग्यफल
Cancer Daily Horoscope, 4 August 2026 Aaj Ka Kark Rashifal in Hindi: मानसिक तनाव कम होगा, करियर के मामले में सोच समझ कर फैसला करें, कुछ नया काम करने की योजना बनेगी, आपको उन्नति के नए रास्ते मिलेंगे, रिश्तेदारों से मतभेद हो सकता है, व्यापार में और समय लगाना होगा.
मिथुन राशिवालों का नए लोगों से संपर्क बनेगा, रुका हुआ पैसा प्राप्त होगा, जानें दैनिक राशिफल
Gemini Daily Horoscope, 4 August 2026 Aaj Ka Mithun Rashifal in Hindi: हर काम सावधानी से करने का दिन है, अपने खर्चों के कंट्रोल करना होगा, नए लोगों से संपर्क बनेगा, जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा, रुका हुआ पैसा प्राप्त होगा, किसी से झगड़ा करने से बचें, व्यापार में योजना बना कर काम करें.
वृष राशिवालों के लिए मन की टेंशन दूर होगी, आत्म विश्वास बढ़ेगा, जानें दैनिक राशिफल
Taurus Daily Horoscope, 4 August 2026 Aaj Ka Vrishabh Rashifal in Hindi: कार्यक्षेत्र में स्थिति बेहतर होगी, मन की टेंशन दूर होगी, आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा, उधार लेनदेन ना करें, लगातार बढ़ रहे खर्चे को कंट्रोल करना होगा, व्यापार में नया निवेश अभी ना करें.
मेष राशिवालों कोे करियर में धयान देने का समय, जानें दैनिक राशिफल
Aries Daily Horoscope, 4 August 2026 Aaj Ka Mesh Rashifal in Hindi: आपका सम्मान और बढ़ेगा, धन की स्थिति बेहतर करने के प्रयास सफल होंगे, करियर में ध्यान देने का समय है, आपके फैसले सही साबित होंगे, पुराने संबंधों में नई जान आएगी, सकारात्मक सोच के साथ काम करें लाभ होगा, व्यापार में लाभ का योग है.
व्यक्तित्व सुधार पाएगा, रचनात्मक नजरिया बनाए रखेंगे
Aaj ka Meen (Pisces) Tarot Card Horoscope, 4 August 2026: बेहतर करने पर जोर होगा. लोगों का समर्थन पाएंगे. सहयोग बना रहेगा. रचनात्मक गतिविधियों में रुचि रखेंगे. विविध प्रयास प्रभावपूर्ण रहेंगे. करीबियों से भेंट होगी. उत्सव आयोजन में शामिल होंगे. व्यक्तित्व सुधार पाएगा. रचनात्मक नजरिया बनाए रखेंगे.
आर्थिक सफलता बढ़ेगी, लाभ का प्रतिशत ऊंचा रहेगा
Aaj ka Kumbh (Aquarius) Tarot Card Horoscope, 4 August 2026: करीबियों की अपेक्षाओं के दबाव में नहीं आएंगे. जिम्मेदारों से तालमेल बढ़ाएंगे. घर की साज संवार बढ़ाए रखेंगे. परंपरागत कार्यों को बढ़ावा देंगे. व्यवहार असरदार बना रहेगा. वचन निभाएंगे.
वित्तीय पक्ष बेहतर रहेगा, जिम्मेदारी बढ़ सकती है
Aaj ka Makar (Capricorn) Tarot Card Horoscope, 4 August 2026: पद प्रतिष्ठा पर जोर होगा. कारोबारी नजरिया स्पष्ट रहेगा. संबंधों को निभाने में आगे रहेंगे. यात्राओं की संभावना बनी रहेगी. विभिन्न मोर्चों पर सफलता पाएंगे. वित्तीय पक्ष बेहतर रहेगा. जिम्मेदारी बढ़ सकती है.
कार्यों में पहल बनाए रखें, मदद का भाव बढ़ाएं
Aaj ka Dhanu (Sagittarius) Tarot Card Horoscope, 4 August 2026: अधिकारियों से सामंजस्य बिठाएं. व्यवस्था के प्रति सहजता बढ़ाएं. करीबी मददगार रहेंगे. अनुभवियों से सलाह बनाए रखें. संतुलित संयमित गति से आगे बढ़ें. कार्यों में पहल बनाए रखें. मदद का भाव बढ़ाएं. अहंकार में नहीं आएं.
नियमों का सम्मान बनाए रखेंगे, सहयोग की भावना बढ़ेगी
Aaj ka Vrishchik (Scorpio) Tarot Card Horoscope, 4 August 2026: कलात्मकता को बढ़ावा देंगे. निजी प्रदर्शन प्रभावी बना रहेगा. प्रतियोगिता में बेहतर रहेंगे. सुखद संयोग बनाए रहेंगे. विविध मामलों में प्रभावशाली बने रहेंगे. विरोधी को मौका नहीं देंगे.
स्वास्थ्य पर ध्यान दें, खान-पान संतुलित रखें
Aaj ka Tula (Libra) Tarot Card Horoscope, 4 August 2026: लेनदेन में धैर्य दिखाएं. दोस्तों की मदद से हित साधेंगे. निजी विषयों में सहजता के साथ आगे बढ़ेंगे. प्रलोभन में आने से बचें. लंबित कार्यों में सूझबूझ रखें. व्यवस्था पर ध्यान दें. आवश्यक बदलाव बनाए रखें.
कारोबार में प्रतिभा का लाभ लेंगे, तेजगति बनाए रखेंगे
Aaj ka Kanya (Virgo) Tarot Card Horoscope, 4 August 2026: परिचतों से बेहतर व्यवहार बना रहेगा. एक दूसरे के लिए मददगार होंगे. दिनचर्या व्यवस्थित बनाए रखेंगे. अपनी बात स्पष्टता से रखेंगे. कारोबार में प्रतिभा का लाभ लेंगे. योजनाओं को बढ़ावा देंगे. तेजगति बनाए रखेंगे.
जल्दबाजी में निर्णय न लें, सजगता से आगे बढ़ते रहें
Aaj ka Singh (Leo) Tarot Card Horoscope, 4 August 2026: विविधि प्रयासों में धैर्य दिखाएं. उचित प्रस्ताव प्राप्त होंगे. सभ्यता संस्कार से सभी प्रसन्न रहेंगे. परिस्थिति का उचित आंकलन बनाए रखें. जल्दबाजी में निर्णय न लें. सजगता से आगे बढ़ते रहें. बहकावे से बचें.

