Naman Dhir ने 64 गेंदों पर ठोके 173 रन, Amritsar Soormas ने Mohali Kings को हराया
Naman Dhir ने Sher-E-Punjab T20 League में 64 गेंदों पर 173 रन ठोककर Amritsar Soormas को Mohali Kings पर 67 रन की जीत दिलाई। Soormas ने 279/7 का सीजन का सबसे बड़ा स्कोर बनाया।
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Sher-E-Punjab T20 Cup का 17वां मुकाबला बीते सोमवार, 07 सितंबर को मोहाली के पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन आईएस बिंद्रा स्टेडियम में खेला गया था। इस मुकाबले में Amritsar Soormas के कप्तान Abhishek Sharma ने मैदान पर अपनी बैटिंग से हाहाकर मचाया और Shubman Gill की कप्तानी वाली Fazilka Falcons के खिलाफ महज़ 15 गेंदों पर 49 रन ठोके। गौरतलब है इसी बीच अभिषेक ने विपक्षी तेज गेंदबाज़ Jasan Jindal को आढ़े हाथ लिया और उनके एक ओवर से 25 रन बटोरे। ये घटना अमृतसर सूरमास की पारी के तीसरे ओवर में घटी। फाजिल्का फाल्कन्स के कप्तान शुभमन गिल ने ये ओवर डालने के लिए अपने तेज गेंदबाज़ जसनजिंदल को बुलाया था जो कि अपने कोटे का दूसरा ओवर करने आए थे। यहां पर ही अभिषेक शर्मा का आक्रमक अंदाज देखने को मिला। अमृतसर के कप्तान अभिषेक ने जसनको पहली गेंद से टारगेट किया और सबसे पहले डीप एक्स्ट्रा कवर की तरफ छक्का मारा। इसके बाद तो मानो शेर के मुंह पर खून लग गया हो। उन्होंने अगली गेंद पर लॉन्ग-ऑन और फिर डीप एक्स्ट्रा कवर की तरफ चौका लगा दिया। जसन जिंदल अपनी पहली तीन गेंदों पर 14 रन लुटा चुके थे और फिर अपनी लाइन लेंथ ही खो बैठे। उन्होंने एक गेंद वाइड डाली। हालांकि इसके बावजूद अभिषेक ने उन पर कोई रहम नहीं दिखाई और आखिरी तीन गेंदों पर भी एक चौका और एक छक्का लगा दिया। तो इस तरह अभिषेक ने जसन के ओवर में चौके-छक्के से 24 रन ठोके और अमृतसर की टीम को कुल 25 रन मिले। आप इस घटना का वीडियो नीचे देख सकते हो। Sharma ji ka beta on Catch all the Sher-E-Punjab T20 action LIVE on FanCode [Sher-E-Punjab T20, Abhishek Sharma, Six, Cricket, Explore] #SherEPunjabT20 pic.twitter.com/vsmAxJ1D0p — FanCode (@FanCode) September 7, 2026 मैच का हाल: मोहाली के मैदान पर अमृतसर की टीम ने टॉस जीतकर फाजिल्का फाल्कन्स को पहले बल्लेबाज़ी करने का न्योता दिया था जिन्होंने अपनी पारी के 20 ओवर में 6 विकेट खोकर 191 रन बनाए। उनके लिए कप्तान शुभमन गिल ने 35 गेंदों पर 67 रनों की पारी खेली। Also Read: LIVE Cricket Score इसके जवाब में अमृतसर सूरमास के लिए राहुल कुमार ने 35 गेंदों पर 53 रन ठोके और अभिषेक शर्मा ने 15 गेंदं पर 49 रनों की पारी खेली। इन्हीं पारियों के दम पर टीम ने 19.3 ओवर में 192 रनों का लक्ष्य हासिल किया और आखिर में 4 विकेट से जीत दर्ज की।
आज ही के दिन यानी की 05 सितंबर को मदर टेरेसा का निधन हो गया था। उन्होंने अपना पूरी जीवन दीन-दुखियों की सेवा में लगा दिया था। वह बीमार, अनाथ, गरीब, असहाय लोगों की मदद और सेवा किया करती थीं। वह 19 साल की उम्र में भारत आ गई थीं। वह पहले शिक्षिका बनीं और फिर बाद में गरीबों और असहायों की सेवा और मदद करने लगीं। वहीं सेवा कार्यों के लिए उनको नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर मदर टेरेसा के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में... जन्म और परिवार यूगोस्लाविया में 26 अगस्त 1910 को मदर टेरेसा का जन्म हुआ था। इनका असली नाम नाम एग्नेस गोंझा बोयाजिजू था। वहीं 18 साल की उम्र में वह दीक्षा लेकर सिस्टर टेरेसा बनी थीं। इसे भी पढ़ें: Guru Ramdas Death Anniversary: 30 रागों में रचे 638 शब्द, सिखों के चौथे गुरु ने कैसे रखा Amritsar का आधार जब भारत आईं मदर टेरेसा साल 1929 में मदर टेरेसा भारत आईं और अध्यापन का कार्य करने लगी। वहीं कोलकाला में पढ़ाने के दौरान उन्होंने लोगों की गरीबी को देखा और कच्ची बस्तियों में जाकर सेवा कार्य करने लगीं। वहीं सेवा कार्य के लिए मदर टेरेसा ने 07 अक्तूबर 1950 को मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की। इसके जरिए वह लंबे समय तक बीमार, गरीब और अनाथ लोगों की सेवा में जुटी रहीं। वहीं साल 1948 में मदर टेरेसा ने स्वेच्छा से भारत की नागरिकता ग्रहण की। उन्होंने अपनी मिशनरीज के जरिए उस दौरान समाज से बहिष्कृत समझे जाने वाले तपेदिक और कुष्ठ रोगियों की सेवा की। नोबेल शांति पुरस्कार मदर टेरेसा के सेवा कार्यों को देखते हुए साल 1979 में उनको नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लेकिन उन्होंने प्राइज मनी लेने से इंकार कर दिया और इसको भारत के गरीब लोगों में दान करने के लिए कहा। साल 1980 में भारत सरकार द्वारा मदर टेरेसा को सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया। इसके अलावा रोमन कैथोलिक चर्च ने भी उनको कलकत्ता की संत टेरेसा के नाम से नवाजा। मृत्यु वहीं 05 सितंबर 1997 को दिल का दौरा पड़ने से मदर टेरेसा निधन हो गया था।
सिख धर्म के चौथे गुरु, गुरु रामदास का का 01 सितंबर को निधन हो गया था। वह सिख धर्म के चौथे गुरु थे। उन्होंने चार उपमाओं की रचना करके सिख धर्म को अधिक मजबूत करने का कार्य किया था। गुरु रामदास जी सात वर्षों तक सिखों के गुरु रहे थे। वह 01 सितंबर 1574 को सिखों के चौथे गुरु बने थे। इसके अलावा गुरु रामदास ने अमृतसर शहर बसाया था। इस शहर को पहले रामदासपुर के नाम से जाना जाता था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी पर गुरु रामदास के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में जन्म और परिवार चूना मंडी में 24 सितंबर 1534 को गुरु रामदास का जन्म हुआ था। यह जगह वर्तमान समय में पाकिस्तान के लाहौर में है। इनके पिता का नाम हरिदास मल सोढी और मां का नाम अनूप देवी था। इनका असली नाम जेठा जी था। जब उनको गुरु पद मिला, तो उनको रामदास नाम मिला। इनके माता-पिता की मृत्यु बचपन में ही हो गई थी। जिसके बाद इनका पालन-पोषण नानी ने किया था। इसे भी पढ़ें: Bal Gangadhar Tilak Death Anniversary: पत्रकारिता के जरिए ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिलाने वाले Bal Gangadhar Tilak तीसरे सिख गुरु से मिले जब जेठाजी अपनी नानी के पास रहते थे, तो वह पहली बार सिखों के तीसरे नानक, गुरु अमर दास से मिले थे। इस मुलाकात के दौरान वह इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने नानक अमरदास के पास रहकर उनकी सेवा का विचार बना लिया। वहीं गुरु अमरदास ने अपनी छोटी बेटी का विवाह रामदास से कराया था। इसी दौरान जब गुरु अमरदास को यह एहसास हुआ कि उनको अब सिखों के अगले गुरु का चयन करना चाहिए, तो उन्होंने गुरु रामदास की परीक्षा ली। इस परीक्षा में गुरु रामदास सफल हुए। गुरु गद्दी पर बैठे रामदास जिसके बाद गुरु अमरदास ने बाबा बूढ़ा जी से रामदास का तिलक कराया और गुरुगद्दी सौंपी। इसके बाद गुरु अमरदास ने जेठा जी को संगत से परिचित कराते हुए बताया कि यह सिखों के चौथे गुरु, गुरु रामदास हैं। अमृतसर शहर बसाया गुरु गद्दी पर बैठने के बाद रामदास ने सिख संगत की भलाई के लिए अनेकों कार्य किए थे। उन्होंने चक रामदास पुर नामक नगर बसाया। जिसको आज के समय में हम सभी अमृतसर शहर के नाम से जानते हैं। इसके अलावा उन्होंने नगर के बीचोबीच एक बड़े जल सरोवर का निर्माण कराया था। गुरु रामदास ने 'आनंद कारज' यानी की सिखों के विवाह में पढ़े जाने वाले फेरों की रचना की। गुरु रामदास ने बताया कि अब से आनंद कारज की मर्यादा के तहत ही सिख विवाह किए जाएंगे। गुरु रामदास ने अपने पूरे जीवनकाल में 30 राहों में 638 शब्द लिखे। जिनमें 246 पौउड़ी, 136 श्लोक, 31 अष्टपदी और 8 वारां है। इन सभी को गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल किया गया। मृत्यु वहीं 01 सितंबर 1581 को पंजाब के गोइंदवाल साहिब में सिखों के चौथे गुरु, गुरु रामदास का निधन हो गया।

