फरारी ने अपनी नई फ्लैगशिप कार '849 टेस्टारोसा' को भारत में लॉन्च कर दिया है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत 10.37 करोड़ रुपए से शुरू है। यह कार कंपनी के पिछले फ्लैगशिप मॉडल SF90 स्ट्राडेल की जगह लेगी। भारत में इसका सीधा मुकाबला लैंबॉर्गिनी रेव्यूल्टो से होगा। कंपनी ने बताया कि भारत में कार की डिलीवरी 2026 की दूसरी छमाही से शुरू होगी। यह कार उन लोगों के लिए डिजाइन की गई है जो लग्जरी के साथ-साथ ट्रैक जैसी परफॉर्मेंस चाहते हैं। हाइब्रिड इंजन: सिर्फ 2.3 सेकंड में 0 से 100 की रफ्तार टेस्टारोसा में 4.0-लीटर का ट्विन-टर्बो V8 प्लग-इन हाइब्रिड इंजन दिया गया है। इसमें तीन इलेक्ट्रिक मोटर्स लगी हैं। दो फ्रंट एक्सेल पर और एक इंजन और गियरबॉक्स के बीच में। इसका V8 इंजन अकेले 830hp की पावर जेनरेट करता है, लेकिन इलेक्ट्रिक मोटर्स के साथ मिलकर इसकी कुल पावर 1,050hp तक पहुंच जाती है। रफ्तार की बात की जाए तो यह महज 2.3 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड पकड़ लेती है। इसकी टॉप स्पीड 330 किलोमीटर प्रति घंटा है। इलेक्ट्रिक मोड पर भी चलेगी कार इसमें 7.45kWh की बैटरी भी दी गई है। कंपनी का दावा है कि सिर्फ इलेक्ट्रिक मोड पर यह कार 16 से 25 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है। इसमें 8-स्पीड डुअल क्लच ट्रांसमिशन (DCT) गियरबॉक्स दिया गया है, जो चारों पहियों को पावर सप्लाई करता है। एक्सटीरियर: पुराने दौर की याद दिलाती है कार के नाम में 'टेस्टारोसा' शब्द जुड़ा है, जो फरारी की क्लासिक कारों की याद दिलाता है। सामने की तरफ L-शेप्ड LED हेडलाइट्स दी गई हैं, जो एक ग्लॉस ब्लैक ट्रिम से जुड़ी हैं। साइड प्रोफाइल में बड़े अलॉय व्हील्स और ब्लैक-आउट छत दी गई है। कार के पिछले हिस्से में दो ऊंचे एग्जॉस्ट और स्लिम LED टेल-लैंप्स दिए गए हैं, जो इसे एग्रेसिव लुक देते हैं। इंटीरियर: बिना टचस्क्रीन वाला डैशबोर्ड, 16 इंच का डिस्प्ले कार के डैशबोर्ड पर पारंपरिक इंफोटेनमेंट टचस्क्रीन नहीं है। इसकी जगह ड्राइवर के लिए 16 इंच का बड़ा डिजिटल डिस्प्ले दिया गया है, जिसमें कार की सारी जानकारी मिलती है। वहीं, बगल में बैठे पैसेंजर के लिए एक अलग 9 इंच की स्लिम स्क्रीन दी गई है। स्टीयरिंग व्हील पर ही कई फिजिकल कंट्रोल बटन दिए गए हैं ताकि ड्राइवर का ध्यान न भटके। इसमें 7-स्पीकर वाला साउंड सिस्टम और वायरलेस एप्पल कारप्ले और एंड्रॉइड ऑटो की सुविधा भी मिलेगी। CEO बोले- भारत में सुपरकार्स का बाजार तेजी से बढ़ रहा फरारी के CEO बेनेडेटो विग्ना के मुताबिक, भारत में सुपरकार्स का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। यहां के ग्राहक अब ग्लोबल लॉन्च के साथ ही नई कारों की डिमांड कर रहे हैं। वर्तमान में फरारी की मुंबई और दिल्ली में डीलरशिप है और बेंगलुरु में सर्विस सेंटर है। भारत में फरारी मालिकों की औसत उम्र दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले काफी कम है। नॉलेज पार्ट: क्या होता है प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) ऐसी कारें जिनमें पेट्रोल इंजन के साथ-साथ एक बड़ी बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर होती है। इन्हें बाहर से बिजली के जरिए चार्ज किया जा सकता है। ये कारें पूरी तरह बिजली पर भी चल सकती हैं और जरूरत पड़ने पर पेट्रोल इंजन का इस्तेमाल करती हैं, जिससे ज्यादा पावर और बेहतर माइलेज मिलता है।
एलन मस्क की 'सुपर टीम' में भारतीय दिमाग का जलवा: IIT बॉम्बे के देवेंद्र चपलोत रचेंगे डिजिटल क्रांति
दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क की 'सुपर इंटेलिजेंस' टीम में शामिल हुए भारतीय इंजीनियर देवेंद्र सिंह चपलोत। IIT बॉम्बे के इस छात्र की काबिलियत देख मस्क भी हुए कायल। जानें पूरी कहानी।
दुनिया की सबसे भरोसेमंद लोकेशन तकनीक मानी जाने वाली जीपीएस प्रणाली अब कमजोर पड़ती दिख रही है। अमेरिका ने स्पेस रेस के दौरान इसे विकसित किया था, लेकिन वॉलस्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार यह बहुत कमजोर सैटेलाइट सिग्नल पर निर्भर करती है, जिन्हें ब्लॉक या जाम करना अपेक्षाकृत आसान है। ऐसे में दुनिया के बड़े स्टार्टअप्स इसके विकल्प बनाने की तैयार शुरू कर चुके हैं। जीपीएस के विकल्प पर काम जारी इंजीनियर लंबे समय से ऐसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं जो सैटेलाइट पर निर्भर न हों। 1. क्वांटम नेविगेशन: यह तकनीक पृथ्वी की मैग्नेटिक फील्ड और माइक्रो इम्प्रूवमेंट्स को मापकर लोकेशन तय करती है। ब्रिटेन की कंपनी Q-CTRL इस पर काम कर रही है। 2. AI-आधारित विजुअल नेविगेशन: यह सिस्टम कैमरों से आसपास के दृश्य पहचानकर रास्ता तय करता है। कैमरा इमारतें, सड़कें, पहाड़, लैंडमार्क पहचानता है और एआई उन्हें मैप से मिलाकर लोकेशन निकालता है। यह इमारतों की ऊंचाई और मंजिलों की संख्या का भी अनुमान लगा सकता है। 3. इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम: यह सेंसर बेस्ड सिस्टम है जो एक्सेलेरोमीटर जायरोस्कोप से यह भी पता लगाता है कि वाहन कितनी गति में चला। जामिंग से बन रहे ‘जीपीएस डेड जोन’ रूस-यूक्रेन सीमा और स्ट्रेज ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील इलाकों में जीपीएस जामिंग आम होती जा रही है। छोटे-छोटे जैमर, जिनकी कीमत 100 डॉलर से भी कम हो सकती है, हजारों किलोमीटर दूर से आने वाले सैटेलाइट सिग्नल को दबा देते हैं। यही वजह है कि जीपीएस कमजोर पड़ रहा है।
क्या अब सामान्य लैपटॉप पुराने पड़ जाएंगे?:AI लैपटॉप; प्राइवेसी-फर्स्ट कंप्यूटिंग का नया दौर शुरू
पिछले एक साल में टेक में एआई सबसे बड़ा सेलिंग पॉइंट बनकर उभरा है। अब सिर्फ फोन ही नहीं, टीवी, फ्रिज, एसी और यहां तक कि वाटर प्यूरीफायर भी एआई टैग के साथ बेचे जा रहे हैं। ऐसे में कंपनियां एआई लैपटॉप को भविष्य की जरूरत बता रही हैं। यही वजह है कि वैश्विक एआई बूम के कारण मेमोरी, स्टोरेज और सीपीयू जैसे मुख्य कंपोनेंट महंगे हो रहे हैं, जिससे 2026 में लैपटॉप की कीमतों में 35 से 40% बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। क्या वाकई एआई लैपटॉप हमारी जरूरत हैं? सामान्य लैपटॉप और एआई लैपटॉप में अंतर एआई लैपटॉप में तीन चिप्स, सामान्य में दो सामान्य लैपटॉप में दो चिप होते हैं। सीपीयू और जीपीयू। AI लैपटॉप में इनके साथ तीसरा खास प्रोसेसर जुड़ता है, जिसे एनपीयू कहते हैं। यह एआई से जुड़े कामों के लिए बना होता है, जैसे इमेज पहचानना, भाषा समझना, टेक्स्ट प्रोसेसिंग आदि। एनपीयू एआई काम सीधे लैपटॉप पर ही कर देता है। यानी हर बार इंटरनेट पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती है। एआई लैपटॉप में ये चार फीचर्स अतिरिक्त लाइव ट्रांसलेशन-सबटाइटल वीडियो कॉल के समय भाषा को टेक्स्ट में बदल सकता है। यानी सामने वाला जर्मन में बोले और आपको अंग्रेजी में समझ आए। लोकल एआई असिस्टेंट फाइल खोजने, टेक्स्ट लिखने, फोटो-वीडियो एडिट करने जैसे काम बिना इंटरनेट के भी तेजी से हो सकते हैं। स्मार्ट वीडियो कॉलिंग ऑटो बैकग्राउंड ब्लर कर देता है, चेहरे पर फोकस होता है और नॉइज कैंसिलेशन से मीटिंग्स ज्यादा प्रोफेशनल लगती हैं। बेहतर बैटरी-स्मूद परफॉर्मेंस एआई प्रोसेसिंग एनपीयू संभालता है, इसलिए CPU-GPU पर दबाव कम पड़ता है। बैटरी व स्पीड दोनों बेहतर रहती है। लैपटॉप खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें सामान्य यूजर्स - ऑफिस, पढ़ाई, एंटरटेनमेंट के लिए अगर आपका काम इंटरनेट चलाना, ईमेल, ऑनलाइन क्लास, वीडियो देखना या फोटो-एडिटिंग तक सीमित है, तो एआई लैपटॉप की जरूरत नहीं है। नॉर्मल लैपटॉप से काम हो जाएगा। इन फीचर्स पर ध्यान दें। 8-16 जीबी रैम पर्याप्त है रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए। स्टोरेज - 512 GB होनी चाहिए। अच्छी बैटरी लाइफ- 6-8 घंटे या उससे ज्यादा होनी चाहिए। पावर यूजर्स - प्रोफेशनल, क्रिएटर, डेवलपर्स के लिए अगर आपका काम कोडिंग, एआई टूल्स, डेटा साइंस, वीडियो एडिटिंग, 3डी डिजाइन या मल्टीटास्किंग से जुड़ा है, तो एआई फर्क डाल सकता है। इन फीचर्स को प्राथमिकता दें। एनपीयू होना चाहिए- लोकल एआई प्रोसेसिंग के लिए फायदेमंद। कम से कम 16 से 32 GB रैम। 1 TB या अधिक स्टोरेज। AI फीचर्स -असिस्टेंट, जनरेटिव एआई, एडिटिंग टूल्स हों। कीमत - 25% तक महंगे होते हैं एआई लैपटॉप AI लैपटॉप को एआई पीसी या कोपायलट प्लस पीसी भी कहा जाता है। यह सामान्य स्पेसिफिकेशन वाले लैपटॉप की तुलना में आमतौर पर 15 से 25% तक महंगे होते हैं। उदाहरण के लिए, लेनोवो की एआई लैपटॉप सीरीज औरा एडिशन की शुरुआती कीमत लगभग ₹94,000 रुपए है, जबकि लेनोवो के आई7 प्रोसेसर वाले लैपटॉप की रेंज करीब ₹71,000 रुपए से शुरू होती है।
अगले महीने यानी 1 अप्रैल से नेशनल हाईवे पर सफर करना थोड़ा महंगा हो जाएगा। सड़क परिवहन मंत्रालय ने फास्टैग (FASTag) एनुअल पास की कीमतों में 2.5% की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। अब प्राइवेट गाड़ी मालिकों को सालाना पास के लिए 3,000 रुपए की जगह 3,075 रुपए चुकाने होंगे। यह पास कार यूजर्स को देशभर के 200 टोल प्लाजा पर बिना रुके सफर करने की सुविधा देता है। सालाना रिवीजन के तहत बढ़ी कीमतेंसड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, जब फास्टैग एनुअल पास की शुरुआत की गई थी, तभी इसके नोटिफिकेशन में हर साल कीमतों की समीक्षा और बदलाव का प्रावधान रखा गया था। यह बढ़ोतरी उसी सालाना रिवीजन प्रक्रिया का हिस्सा है। देश भर में हाईवे टोल की दरों में बदलाव के लिए जो फॉर्मूला तय है, उसी के आधार पर इस बार 2.5% की वृद्धि की गई है। 52 लाख से ज्यादा लोग इस्तेमाल कर रहे हैं यह पाससरकार ने 15 अगस्त से इस खास एनुअल पास की शुरुआत की थी, जिसे उम्मीद से कहीं ज्यादा बेहतर रिस्पॉन्स मिला है। अब तक 52 लाख से ज्यादा हाईवे कार यूजर्स इस स्कीम से जुड़ चुके हैं। इस पास की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे एक साल में कितनी भी बार रिचार्ज कराया जा सकता है और यह लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों के लिए काफी किफायती साबित होता है। 31 मार्च तक पुराने रेट पर खरीदने का मौकाअगर आप अक्सर हाईवे पर सफर करते हैं और इस बढ़ोतरी से बचना चाहते हैं, तो आपके पास अभी मौका है। अधिकारियों ने बताया कि जो यूजर्स 31 मार्च तक अपना पास रिचार्ज करा लेंगे या नया पास खरीदेंगे, उन्हें यह पुराने रेट यानी 3,000 रुपए में ही मिल जाएगा। 1 अप्रैल की सुबह से सिस्टम में नई दरें अपडेट कर दी जाएंगी। 200 टोल प्लाजा पर मिलती है सुविधायह एनुअल पास फिलहाल देश के प्रमुख 200 टोल प्लाजा पर मान्य है। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि बार-बार टोल टैक्स कटने की झंझट से भी मुक्ति मिलती है। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में इस पास के दायरे में और भी अधिक टोल प्लाजा को शामिल करना है, ताकि कैशलेस इकोनॉमी और स्मूद ट्रैवल को बढ़ावा दिया जा सके।
भारतीय मूल के शांतनु नारायण एडोबी के CEO का पद छोड़ रहे हैं। वे पिछले 18 साल से इस जिम्मेदारी को संभाल रहे थे। शांतनु ने कर्मचारियों को भेजे एक मेमो में इसकी जानकारी दी है। हालांकि, वे तुरंत पद नहीं छोड़ेंगे। जब तक बोर्ड उनके उत्तराधिकारी की तलाश पूरी नहीं कर लेता, वे CEO बने रहेंगे। इसके बाद वे बोर्ड के चेयरमैन के तौर पर अपनी सेवाएं जारी रखेंगे। 18 साल में कंपनी का रेवेन्यू ₹2.31 लाख करोड़ पहुंचाया शांतनु नारायण ने 2007 में एडोबी की कमान संभाली थी। उस समय एडोबी मुख्य रूप से बॉक्स में पैक सॉफ्टवेयर जैसे फोटोशॉप और एक्रोबैट बेचने वाली कंपनी थी। तब कंपनी का रेवेन्यू 1 अरब डॉलर (करीब 9,200 करोड़ रुपए) से कम था और सिर्फ 3,000 कर्मचारी थे। शांतनु ने कंपनी को ट्रेडिशनल लाइसेंस मॉडल से हटाकर 'सब्सक्रिप्शन फर्स्ट' मॉडल पर शिफ्ट किया। पहले लोग फोटोशॉप जैसे सॉफ्टवेयर की CD या लाइसेंस एक बार भारी पैसा देकर खरीदते थे। शांतनु ने इसे बदलकर नेटफ्लिक्स जैसा बना दिया। यानी अब आपको सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने के लिए हर महीने या साल के हिसाब से फीस देनी होती है। इसी छोटे से बदलाव ने कंपनी की कमाई कई गुना बढ़ा दी। आज एडोबी का सालाना रेवेन्यू करीब 2.31 लाख करोड़ रुपए है और कंपनी में 30,000 से ज्यादा लोग काम करते हैं। उनके कार्यकाल में कंपनी के शेयरों में 6 गुना से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है। AI प्रोडक्ट्स का रेवेन्यू 3 गुना बढ़ा, तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में एडोबी का रेवेन्यू 12% बढ़कर 6.40 अरब डॉलर रहा, जो बाजार के अनुमान 6.28 अरब डॉलर से ज्यादा है। खास बात यह है कि कंपनी के AI-बेस्ड प्रोडक्ट्स जैसे फायरफ्लाई से होने वाली कमाई पिछले साल के मुकाबले 3 गुना बढ़ गई है। कंपनी के कुल मंथली यूजर्स की संख्या भी 17% बढ़कर 85 करोड़ पहुंच गई है। यह शांतनु के कार्यकाल की 100वीं अर्निंग्स कॉल थी। बोर्ड ने नए CEO की तलाश शुरू की कंपनी के बोर्ड ने नए CEO की तलाश के लिए एक स्पेशल कमेटी बनाई है। इसकी अध्यक्षता इंडिपेंडेंट डायरेक्टर फ्रैंक कालडेरोनी करेंगे। नारायण ने अर्निंग्स कॉल के दौरान कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में कुछ महीनों का समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि मैं अगले CEO के लिए उसी तरह सपोर्ट सिस्टम बनाऊंगा, जैसे मुझसे पहले जॉन और चक ने मेरे लिए बनाया था। फिगमा डील टूटने का लगा था झटका, AI से बढ़ी चुनौती शांतनु के सफर में कुछ चुनौतियां भी रहीं। एडोबी ने डिजाइन टूल 'फिगमा' को 20 अरब डॉलर में खरीदने की कोशिश की थी, लेकिन रेगुलेटरी अड़चनों की वजह से यह डील रद्द हो गई। इसके अलावा 2026 में एडोबी के शेयरों पर दबाव बना हुआ है और यह करीब 23% तक गिर चुका है। निवेशकों को डर है कि 'जेनरेटिव AI' आने वाले समय में सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के पारंपरिक मॉडल को बदल सकता है, जिससे एडोबी जैसी कंपनियों के सामने कड़ी टक्कर होगी। शांतनु बोले- एडोबी के सबसे अच्छे दिन आने अभी बाकी हैं नारायण ने अपने मेमो में एडोबी के साथ अपने 28 साल के सफर को याद किया। उन्होंने लिखा, जब मैं यहां आया था, तब वर्क कल्चर और इनोवेशन की चाह ने मुझे प्रभावित किया था। हमने मिलकर ऐसी टेक्नोलॉजी बनाई जिसने अरबों लोगों की जिंदगी छुई। AI के दौर में हमारे सामने और भी बड़े अवसर हैं। एडोबी के सबसे अच्छे दिन आने अभी बाकी हैं।
एक समय था जब फॉर्मूला-1 को दुनिया की सबसे तेज कार रेस के रूप में जाना जाता था। ट्रैक पर इंजन की गूंज, सेकंडों की होड़ और ड्राइवरों की तकनीकी क्षमता ही इसकी पहचान थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह खेल तेजी से बदल गया है। आज फॉर्मूला-1 केवल मोटरस्पोर्ट नहीं रहा, बल्कि ग्लैमर, मनोरंजन और लाइफस्टाइल का एक बड़ा वैश्विक ब्रांड बन चुका है। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी भूमिका अमेरिकी मीडिया कंपनी लिबर्टी मीडिया की रही है। कंपनी ने 2017 में फॉर्मूला-1 को अपने नियंत्रण में लिया और इसके बाद खेल की प्रस्तुति, डिजिटल रणनीति और दर्शकों तक पहुंच को पूरी तरह नए तरीके से तैयार किया। लक्ष्य साफ था- एफ1 को सिर्फ रेस नहीं, बल्कि एक बड़े मनोरंजन शो के रूप में पेश करना। इस बदलाव को गति देने में नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज “ड्राइव टू सर्वाइव’ ने अहम भूमिका निभाई। इस सीरीज में रेस के पीछे की दुनिया दिखाई गई- ड्राइवरों की निजी जिंदगी, टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा, रणनीति और पर्दे के पीछे होने वाली राजनीति। इससे दर्शकों का जुड़ाव बढ़ा और लोग केवल रेस देखने के बजाय ड्राइवरों की कहानियों में भी दिलचस्पी लेने लगे। लिबर्टी मीडिया ने खास तौर पर युवाओं और नए दर्शकों को ध्यान में रखकर रणनीति बनाई। सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ाई गई, छोटे वीडियो, गेमिंग कंटेंट और डिजिटल इंटरैक्शन को बढ़ावा दिया गया। इसका असर आंकड़ों में साफ दिखता है। 2018 में एफ-1 के ऑनलाइन फॉलोअर्स करीब 2 करोड़ थे, जो 8 साल में 6 गुना बढ़कर 11.5 करोड़ हो चुके हैं। डिज्नी और लेगो जैसे ब्रांड्स के साथ साझेदारी कर एफ-1 बच्चों और किशोरों तक भी पहुंचने की कोशिश कर रहा है, ताकि आने वाले समय में दर्शकों का आधार और बड़ा हो सके। इस रणनीति का असर एफ-1 की कमाई पर भी दिख रहा है। 2025 में फॉर्मूला-1 की कुल कमाई करीब 32,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। शेयर बाजार में इसकी कुल वैल्यू लगभग 1.74 लाख करोड़ रुपए से अधिक आंकी जा रही है। कई देश भी इसे अपने यहां आयोजित करने के लिए बड़ी रकम देने को तैयार रहते हैं। चीन और सऊदी अरब जैसे देश एक ग्रां प्री रेस की मेजबानी के लिए भारी फीस चुकाते हैं, क्योंकि इससे पर्यटन, निवेश और अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ती है। रेस से आगे... कैसे ‘प्रीमियम लाइफस्टाइल ब्रांड’ बन गया एफ-1 फॉर्मूला-1 अब सिर्फ कार कंपनियों का खेल नहीं रहा। लग्जरी और टेक्नोलॉजी कंपनियां भी तेजी से इससे जुड़ रही हैं। फ्रांस की लग्जरी समूह एलवीएमएच (लुई विटों) ने 8,300 करोड़ रुपए की 10 साल की साझेदारी की है। यह दिखाता है कि एफ-1 अब एक प्रीमियम लाइफस्टाइल प्लेटफॉर्म बन चुका है। एपल ने 6,200 करोड़ रुपए की बड़ी डील के जरिए इस खेल से हाथ मिलाया है, ताकि खासकर अमेरिकी बाजार में इसकी पहुंच और मजबूत हो सके। लिबर्टी मीडिया ने मोटोजीपी (बाइक रेसिंग) को भी खरीद लिया है। योजना यह है कि बाइक रेसिंग को भी उतना ही लोकप्रिय और मुनाफे वाला बनाया जा सके।
डाइकिन इंडिया ने लॉन्च किए साल 2026 के नए एयर कंडीशनर और वीआरवी अल्फा सीरीज
कंपनी ने एआई आधारित वीआरवी अल्फा और बीईई 2026 मानकों वाले रूम एसी पेश किए हैं, जिनकी कीमतों में अप्रैल से बढ़ोतरी होगी।
चाइनीज टेक कंपनी शाओमी ने आज 11 मार्च को भारतीय बाजार में अपना सबसे पावरफुल फ्लैगशिप स्मार्टफोन 'शाओमी 17 अल्ट्रा' लॉन्च कर दिया है। इस फोन को स्टैंडर्ड शाओमी 17 मॉडल के साथ पेश किया गया है। जिसकी डिटेल यहां क्लिक कर देख सकते हैं।कंपनी का दावा है कि यह दुनिया का पहला ऐसा फोन है जिसमें लाइका का 1-इंच LOFIC सेंसर दिया गया है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए इसमें 200 मेगापिक्सल का टेलीफोटो कैमरा और प्रोफेशनल फोटोग्राफी किट जैसे फीचर्स मिलते हैं। 16GB रैम और 512GB स्टोरेज के साथ कीमत ₹1,39,999 भारत में शाओमी 17 अल्ट्रा को सिंगल स्टोरेज वैरिएंट में उतारा गया है। इसमें 16GB रैम और 512GB इंटरनल स्टोरेज मिलती है, जिसकी कीमत ₹1,39,999 रखी गई है। फोन 18 मार्च से ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक्री के लिए अवेलेबल होगा। क्रेडिट कार्ड यूजर्स को ₹10,000 का इंस्टेंट डिस्काउंट मिलेगा। 13 से 17 मार्च के बीच फोन की प्री बुकिंग पर ₹19,999 की कीमत वाला 'शाओमी प्रोफेशनल फोटोग्राफी किट प्रो' फ्री मिलेगा। डिजाइन और बिल्ड: प्रीमियम लेदर फिनिश और ग्लास प्रोटेक्शन शाओमी 17 अल्ट्रा का डिजाइन काफी प्रीमियम और एर्गोनोमिक है। फोन के बैक पैनल पर बड़ा सर्कुलर कैमरा मॉड्यूल दिया गया है जो इसे एक प्रोफेशनल कैमरे जैसा लुक देता है। फोन को ब्लैक और वाइट कलर ऑप्शन में पेश किया गया है। फ्रंट में प्रोटेक्शन के लिए 'शाओमी शील्ड ग्लास 3.0' का इस्तेमाल किया गया है। फोन का वजन लगभग 219 ग्राम है और इसकी मोटाई 8.29mm है। हाथ में पकड़ने पर यह काफी सॉलिड और प्रीमियम फील देता है। इसमें दाईं ओर पावर बटन और वॉल्यूम रॉकर्स दिए गए हैं। नीचे की तरफ USB टाइप-C पोर्ट और सिम ट्रे मिलती है। फोन को IP68 रेटिंग मिली है, जिसका मतलब है कि यह धूल और पानी से पूरी तरह सुरक्षित है। डिस्प्ले: 3,500 निट्स की पीक ब्राइटनेस और वेट टच टेक्नोलॉजी फोन में 6.9 इंच का 'शाओमी हाइपर-आरजीबी' OLED डिस्प्ले दिया गया है। इसमें 1,200x2,608 पिक्सल का रेजोल्यूशन मिलता है। यह 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है, जिससे स्क्रॉलिंग और गेमिंग एक्सपीरियंस स्मूथ रहता है। डिस्प्ले में में 'वेट टच' टेक्नोलॉजी दी गई है, जिससे हाथ गीले होने पर भी फोन की स्क्रीन आसानी से काम करती है। इसमें डॉल्बी विजन और HDR+ का सपोर्ट भी मिलता है। कैमरा: लाइका के साथ मिलकर बनाया गया ट्रिपल रियर सेटअप शाओमी 17 अल्ट्रा का सबसे बड़ा हाईलाइट इसका कैमरा सेटअप है: परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर: सबसे तेज स्नैपड्रैगन प्रोसेसर बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए इसमें क्वालकॉम का लेटेस्ट 3nm ऑक्टा-कोर 'स्नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5' (Snapdragon 8 Elite Gen 5) प्रोसेसर दिया गया है। बैटरी और चार्जिंग: 90W की फास्ट चार्जिंग शाओमी ने इस फ्लैगशिप फोन में 6,000mAh की बड़ी बैटरी दी है।
देश में अगले कुछ महीनों में लैपटॉप और डेस्कटॉप खरीदना महंगा पड़ सकता है। प्रोसेसर और ग्राफिक्स कार्ड (GPU) जैसे प्रमुख कंपोनेंट्स के दाम बढ़ने से इस साल लैपटॉप-डेक्सटॉप की कीमतों में 35% तक के उछाल की संभावना है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतों में इस बढ़ोतरी की वजह से इस साल कंप्यूटर बाजार की ग्रोथ में 8% तक की कमी आ सकती है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है। मार्च में 10% बढ़ सकती है कीमतें, 12% पहले ही महंगे हो चुके IDC इंडिया के सीनियर मार्केट एनालिस्ट भरत शेनॉय के मुताबिक, रैम (RAM) की कीमतें पहले ही 2.5 से 3 गुना तक बढ़ चुकी हैं। इससे लैपटॉप और डेस्कटॉप की कीमतों में अब तक 10-12% की बढ़ोतरी हो चुकी है। मार्च के महीने में ही 8-10% की एक और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जबकि इसके अगले कुछ महीनों में कीमतें 10% और बढ़ सकती हैं। 35 हजार वाला लैपटॉप अब 45 हजार का होगा शेनॉय ने बताया कि जो डिवाइसेस पहले 30,000 से 35,000 रुपए की रेंज में मिलते थे, उनकी कीमत अब 45,000 रुपए के करीब पहुंच रही हैं। इससे स्टूडेंट्स, होम यूजर्स और पहली बार कंप्यूटर खरीदने वालों के लिए अपग्रेड करना मुश्किल हो जाएगा। जानकारों का कहना है कि यह तेजी अगले 6-7 तिमाहियों तक जारी रह सकती है और 2027 के दूसरे हाफ से पहले राहत मिलने की उम्मीद कम है। AI-सप्लाई चेन है बड़ी वजह काउंटरपॉइंट रिसर्च की सीनियर एनालिस्ट अंशिका जैन के अनुसार, मेमोरी (DRAM और NAND) की कीमतों में उछाल का सबसे बड़ा कारण 'AI इंफ्रास्ट्रक्चर' की बढ़ती डिमांड है। कंपनियां अब अपना प्रोडक्शन हाई-मार्जिन वाले सर्वर और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की तरफ मोड़ रही हैं, जिससे आम लैपटॉप के लिए इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स महंगे हो गए हैं। इसके अलावा इंटेल के एंट्री-लेवल प्रोसेसर की कमी ने भी मुश्किल बढ़ा दी है। मिडिल ईस्ट में तनाव का भी असर इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' में चल रहे तनाव के कारण भविष्य में संकट और गहरा सकता है। यह रूट एनर्जी और पेट्रोकेमिकल के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अगर यहां रुकावट लंबी रहती है, तो सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की इनपुट कॉस्ट बढ़ जाएगी। जिसका असर चिप्स की अवेलेबिलिटी और उनकी कीमतों पर पड़ेगा। 2025 में बना था रिकॉर्ड, अब 8% गिर सकता है मार्केट साल 2025 भारतीय पीसी मार्केट के लिए ऐतिहासिक रहा था। IDC के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल 1.59 करोड़ यूनिट्स की शिपमेंट हुई, जो साल-दर-साल 10.2% की ग्रोथ थी। यह पहली बार था जब सालाना शिपमेंट 1.5 करोड़ के पार पहुंची। हालांकि, इस साल ऊंचे दामों के कारण डिमांड कमजोर रहने की आशंका है। अनुमान है कि कंज्यूमर और कमर्शियल दोनों सेगमेंट में 7-8% की गिरावट आ सकती है। सेल और फाइनेंस स्कीम का सहारा ले रहीं कंपनियां बढ़ती कीमतों के बीच ग्राहकों को लुभाने के लिए टेक ब्रांड्स अब नए रास्ते तलाश रहे हैं। कंपनियां लैपटॉप के कॉन्फिगरेशन में बदलाव कर रही हैं ताकि बेस प्राइस कम रखा जा सके। इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को आसान किस्तों और प्रमोशनल ऑफर्स के जरिए जोड़ने की कोशिश की जा रही है। गेमिंग और प्रोफेशनल सेगमेंट के खरीदार महंगे होने के बावजूद खरीदारी जारी रख सकते हैं, लेकिन बजट सेगमेंट में सुस्ती दिखेगी। अगर आप अगले कुछ महीनों में लैपटॉप या पीसी खरीदने की सोच रहे हैं, तो अभी खरीदना बेहतर है। क्योंकि इनकी कीमतों में कमी आने के आसार 2027 से पहले नहीं दिख रहे हैं। ये खबर भी पढ़ें… चीन समेत पड़ोसी देशों के लिए भारत में निवेश आसान:फॉरेन इन्वेस्टमेंट के नियम बदले; 10% से कम हिस्सेदारी पर बिना मंजूरी निवेश कर सकेंगे केंद्र सरकार ने चीन समेत भारत के साथ बॉर्डर शेयर करने वाले यानी पड़ोसी देशों से आने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के नियमों में ढील दी है। PM मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार (10 मार्च) को हुई कैबिनेट मीटिंग में प्रेस नोट 3 यानी FDI पॉलिसी के नियमों में बदलाव को मंजूरी दी गई। नए नियमों के तहत अब उन निवेश प्रस्तावों को ऑटोमैटिक मंजूरी मिल जाएगी, जिनमें पड़ोसी देश के निवेशक की हिस्सेदारी 10% से कम हो और उसका कंपनी पर कोई कंट्रोल न हो। इसके साथ ही, स्ट्रैटेजिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के लिए 60 दिनों की समय सीमा तय कर दी गई है। पूरी खबर पढ़ें…
चीन में लूनर न्यू ईयर के दौरान लोगों को लाल लिफाफों में पैसे देने की परंपरा (हांगबाओ) है, इस बार यह नए रूप में दिखी। एआई दिग्गज कंपनियां ही लोगों को डिजिटल हांगबाओ बांटने लगीं। पिछले कुछ हफ्तों में अलीबाबा, बाइडांस, टेंसेंट व बायडू ने 11 हजार करोड़ रुपए के कूपन और कैश रिवॉर्ड देकर लोगों को अपने एआई एप डाउनलोड व इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया। चीन में इस सब्सिडी की होड़ को ‘होंगबाओ वॉर’ कहा जा रहा है। यह नए साल पर दिए जाने वाले लिफाफों के नाम पर है। ज्यादातर चीनी एआई कंपनियां पहले ही अपने मॉडल मुफ्त दे रही थीं। अब वे यूजर्स को पैसे देकर इस्तेमाल करा रही हैं। दरअसल कंपनियां एजेंटिक सर्विस बनाने और प्रमोट करने में बड़ा निवेश कर रही हैं। चीनी नव वर्ष से ठीक पहले अलीबाबा व बाइडांस ने चैटबॉट के अपग्रेड लॉन्च किए। अपग्रेड के बाद इनके बॉट यूजर की ओर से कई टास्क कर सकते हैं। इस मौके पर अलीबाबा के चैटबॉट क्वेन के जरिए 10 करोड़ से ज्यादा बेवरेज बेचे गए। वहीं, बाइडांस के चैटबॉट दौबाओ ने टीवी शो के दौरान कुछ ही घंटों में 2 अरब सवालों के जवाब दिए। एक्सपर्ट कहते हैं,‘यह सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि डिजिटल बाजार पर कब्जे की रणनीति है। जो कंपनी सबसे पहले ज्यादा यूजर जोड़ेगी, वही आगे एआई-आधारित सुपर एप बना पाएगी। जिसमें चैट, खरीदारी, भुगतान व टिकट बुकिंग एक ही जगह हो सकेगी। स्टैनफोर्ड की एआई इंडेक्स रिपोर्ट बताती है कि शुरुआती यूजर बेस बेहद अहम है, क्योंकि इससे कंपनियों को ज्यादा डेटा मिलता है और मॉडल तेजी से बेहतर होते हैं। इसी वजह से कंपनियां मुनाफे की बजाय यूजर्स जुटाने पर खर्च कर रही हैं। इस प्रतिस्पर्धा के नकारात्मक असर भी दिखने लगे हैं। निवेशकों को भरोसा नहीं है कि इतना बड़ा खर्च भविष्य में मुनाफा देगा। उदाहरण के तौर पर, हांगबाओ वॉर शुरू होने के बाद अलीबाबा के शेयर 30% गिर गए। इंडस्ट्री के भीतर दबाव भी बढ़ रहा है। हाल ही में ‘क्वेन’ के मुख्य इंजीनियर लिन जुनयांग ने इस्तीफा दे दिया। बढ़ते कारोबारी दबाव को इसके पीछे प्रमुख वजह माना जा रहा है। चिप नहीं मस्तिष्क की कोशिकाओं से चलेगा डेटा सेंटर मेलबर्न: ऑस्ट्रेलिया के बायोटेक स्टार्टअप कॉर्टिकल लैब्स ने मेलबर्न में दुनिया का पहला ऐसा डेटा सेंटर बनाया है जो चिप्स नहीं, बल्कि मानव मस्तिष्क की कोशिकाओं से चलता है। कंपनी सिंगापुर में भी सेंटर बना रही है। इन ‘बायोलॉजिकल कंप्यूटर्स’ में लैब में तैयार किए गए न्यूरॉन्स सिलिकॉन पर लगाए जाते हैं, जो बिजली के संकेतों से प्रतिक्रिया देते हैं और कंप्यूटिंग आउटपुट बनाते हैं। ये कोशिकाएं बेहद कम ऊर्जा खर्च करती हैं। स्टार्टअप ने पहले अपने न्यूरॉन्स को ‘पोंग’ गेम खेलना सिखाया था। अब वे डूम खेलने में भी सफल रहे। एक्सपर्ट मानते हैं कि प्रयोग शुरुआती चरण में है, लेकिन भविष्य में पारंपरिक चिप को चुनौती दे सकता है
ब्रिटेन के बिजनेस एग्जीक्यूटिव तेजी से अपनी सोच और फैसले लेने की क्षमता एआई चैटबॉट्स पर छोड़ रहे हैं। मार्केट रिसर्च एजेंसी 3-जेम की स्टडी के मुताबिक 62% बिजनेस लीडर ज्यादातर फैसले लेने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्टडी में 200 ओनर्स, फाउंडर्स, सीओ और दूसरे सीनियर लीडर्स को शामिल किया गया। इसमें 140 लोगों ने बताया कि जब उनके आइडिया एआई की सिफारिशों से टकराते हैं, तो वे अपने ही विचारों पर दोबारा शक करने लगते हैं। वहीं 46 फीसदी ने कहा कि अब वे अपने बिजनेस साथियों की तुलना में एआई की सलाह पर ज्यादा भरोसा करते हैं। यह ट्रेंड पिछले साल आई एक रिपोर्ट से भी जुड़ता है, जिसमें कहा गया था कि 64 फीसदी बिजनेस लीडर कर्मचारियों को निकालने (टर्मिनेशन) जैसे मामलों में भी एआई से सलाह लेते हैं। हालांकि 33-जेम सर्वे में 2025 के लिए 27 फीसदी लोगों ने कहा कि वे ऐसे फैसलों में एआई का इस्तेमाल करते हैं। एआई पर भरोसा खतरनाक, कम हो सकती है सोचने क्षमता कार्नेगी मेलन और माइक्रोसॉफ्ट की स्टडी के अनुसार, एआई पर ज्यादा निर्भरता से लोगों की गहराई से सोचने की शक्ति घट रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब हमें लगता है कि कोई काम मशीन बेहतर तरीके से कर रही है, तो हमारा दिमाग खुद कोशिश करना छोड़ देता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे सेल्फ-ड्राइविंग कार होने पर ड्राइवर सड़क से ध्यान हटाकर पूरी तरह सिस्टम के भरोसे बैठ जाता है। बच्चों के दिमागी विकास के लिए भी घातक है एआई डेनमार्क के मनोचिकित्सक सोरेन ओस्टरगार्ड ने चेतावनी दी है कि एआई पर अत्यधिक निर्भरता से विद्वानों में ‘कॉग्निटिव डेट’ यानी दिमागी सुस्ती बढ़ सकती है। इसका मतलब है कि अपनी बुद्धि का इस्तेमाल न करने से सोचने की क्षमता उधार की हो जाती है। ओस्टरगार्ड ने इसे ‘एआई साइकोसिस’ नाम दिया है, जिसमें इंसान धीरे-धीरे अपनी वास्तविक मानसिक कार्यक्षमता और तर्कशक्ति खोने लगता है। एआई को काम सौंपने से बढ़ सकती है दिमागी सुस्ती एमआईटी के अनुसार, चैटजीपीटी युवाओं की क्रिटिकल थिंकिंग खत्म कर रहा है। शोध में एआई पर निर्भर लोगों की दिमागी सक्रियता गूगल सर्च करने वालों से काफी कम मिली। लेखिका नतालिया कॉस्मिना ने चेतावनी दी है कि विकसित हो रहे बच्चों के लिए एआई सबसे खतरनाक है, जिससे उनकी सीखने की क्षमता और दीर्घकालिक मानसिक विकास को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
टेक ब्रांड आइटेल ने भारतीय बाजार में अपना नया लो-बजट फोन 'आईटेल जेनो 100' लॉन्च किया है। फोन में सबसे खास इसकी मजबूती और प्रीमियम लुक है। कंपनी का दावा है कि मिलिट्री-ग्रेड फोन 1.2 मीटर की ऊंचाई से गिरने पर भी सुरक्षित रहेगा। इससे बिना नेटवर्क के भी कॉल कर सकेंगे। कंपनी ने इसमें 5000mAh बैटरी दी है। आईटेल जेनो 100 को भारत में 2 वैरिएंट में उतारा गया है। इसके 3GB रैम और 64GB स्टोरेज वाले बेस वैरिएंट की कीमत ₹6866 रखी गई है। वहीं, इसका दूसरा वैरिएंट 4GB रैम और 64GB स्टोरेज के साथ आता है, जिसकी कीमत ₹7285 है। डिजाइन: मिलिट्री-ग्रेड सर्टिफिकेशन और वनप्लस जैसा लुक मटेरियल: यह स्मार्टफोन MIL-STD-810H मिलिट्री-ग्रेड बॉडी पर बना है। इसका मतलब है कि यह बेहद मजबूत है और कठोर परिस्थितियों को झेल सकता है। बैक पैनल: फोन का पिछला हिस्सा देखने में वनप्लस 15 जैसा प्रीमियम फील देता है। इसमें एक बड़ा सर्कुलर कैमरा मॉड्यूल दिया गया है। टेंपरेचर रेजिस्टेंस: कंपनी का दावा है कि यह फोन माइनस 35 डिग्री की कड़ाके की ठंड और 43 डिग्री की भीषण गर्मी में भी बिना रुके काम कर सकता है। कलर ऑप्शन: यह फोन तीन कलर ऑप्शंस- टाइटेनियम गोल्ड, प्योर ब्लैक और सिल्क ग्रीन में उपलब्ध है। पोर्ट्स और बटन्स: फोन के राइट साइड में पावर बटन और वॉल्यूम रॉकर दिए गए हैं। पावर बटन में ही साइड माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर को इंटीग्रेट किया गया है। ऊपर की तरफ इसमें IR ब्लास्टर भी है, जिससे आप टीवी कंट्रोल कर सकते हैं। आईटेल जेनो 100: स्पेसिफिकेशन्स डिस्प्ले: फोन में 6.6-इंच की HD+ आईपीएस एलसीडी (IPS LCD) स्क्रीन दी गई है। बजट सेगमेंट होने के बावजूद इसमें 90Hz का रिफ्रेश रेट मिलता है, जिससे स्क्रॉलिंग और वीडियो देखने का अनुभव स्मूथ रहता है। सेल्फी कैमरे के लिए फ्रंट में वॉटरड्रॉप नॉच डिजाइन दिया गया है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए इसके बैक पैनल पर 8 मेगापिक्सल का मेन कैमरा LED फ्लैश के साथ दिया गया है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन के फ्रंट में 5 मेगापिक्सल का कैमरा मिलता है। परफॉर्मेंस: इसमें यूनिसोक T7100 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर लगा है। इसकी क्लॉक स्पीड 1.2GHz से 1.6GHz तक है। यह एक एंट्री लेवल चिपसेट है जो रोजमर्रा के टास्क आसानी से हैंडल कर लेता है। यह फोन ‘एंड्रॉयड 15 गो’ पर काम करता है। यह ओएस कम स्टोरेज और हल्के प्रोसेसर वाले फोन के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि फोन हैंग न हो और स्मूथ चले। पावरबैकअप: फोन को पावर देने के लिए इसमें 5000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है। इसे चार्ज करने के लिए बॉक्स में 10 वॉट का फास्ट चार्जर मिलता है। नॉर्मल इस्तेमाल पर इसकी बैटरी आराम से डेढ़ से दो दिन चल सकती है। अन्य: इस फोन की सबसे अनोखी खूबी अल्ट्रा लिंक टेक्नोलॉजी है। कंपनी का दावा है कि इसकी मदद से नेटवर्क न होने पर भी कॉल की जा सकेगी। फोन में फिंगरप्रिंट सेंसर के साथ फेस अनलॉक का फीचर भी दिया गया है। इसमें 4G सपोर्ट, वाई-फाई, ब्लूटूथ और 3.5mm ऑडियो जैक जैसे जरूरी फीचर्स शामिल हैं।
पुरानी गाड़ी को एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर करना आसान होने वाला है। केंद्र सरकार दूसरे राज्य में गाड़ी ट्रांसफर करने के लिए लगने वाले 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) की अनिवार्यता खत्म कर सकती है। इसके लिए नीति आयोग की एक हाई-लेवल कमेटी ने परिवहन मंत्रालय (MoRTH) को प्रस्ताव भेजा है। इसके अलावा, सरकार 15 साल पुरानी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नियम में भी बदलाव कर सकती है। अभी राज्य बदलने पर गाड़ी के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जानें मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के सेक्शन 47 के मुताबिक आप किसी भी राज्य में एक साल तक दूसरे राज्य के वाहन को चला सकते हैं। एक साल के भीतर आपको नए राज्य में अपने वाहन को रजिस्टर्ड कराना होता है। इसके लिए पुराने RTO से NOC लाना जरूरी है। हर राज्य में ये प्रोसेस अलग-अलग है और डॉक्युमेंट भी अलग-अलग लगते हैं। इसमें रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, फिटनेस सर्टिफिकेट और टैक्स रसीद जैसे डॉक्युमेंट शामिल हैं। इस सर्टिफिकेट से पता चलता है कि गाड़ी पर कोई टैक्स बकाया नहीं है या कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। इसके बिना दूसरे राज्य में रजिस्ट्रेशन संभव नहीं होता। ये सर्टिफिकेट खास तौर पर सेकेंड हैंड गाड़ी खरीदने-बेचने के काम आता है। ऑटो-जेनरेटेड सिस्टम से ऑनलाइन वेरिफिकेशन होगा कमेटी ने सुझाव दिया है कि NOC की जगह एक 'ऑटो-जेनरेटेड क्लीयरेंस सिस्टम' शुरू किया जाए। उम्र नहीं, फिटनेस तय करेगी गाड़ी सड़क पर रहेगी या नहीं कमेटी ने एक और बड़ा बदलाव सुझाया है। अब गाड़ियों को उनकी उम्र के आधार पर सड़क से हटाने के बजाय उनकी फिटनेस देखी जाएगी। इंटरनेशनल प्रैक्टिस: कई देशों में गाड़ी कितनी पुरानी है, इससे फर्क नहीं पड़ता, बशर्ते वह फिटनेस टेस्ट पास कर ले। कमर्शियल वाहनों को फायदा: कमेटी का मानना है कि उम्र आधारित पाबंदियों के कारण कई बार अच्छी स्थिति वाली गाड़ियां भी कबाड़ घोषित कर दी जाती हैं। यदि सख्त फिटनेस निरीक्षण प्रणाली लागू हो, तो सेफ और फिट कमर्शियल गाड़ियां उम्र की सीमा पार करने के बाद भी चल सकेंगी। ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें… पुरानी गाड़ियों का फिटनेस टेस्ट 10 गुना तक महंगा: 20 साल पुरानी कार की ₹15,000 और बाइक की ₹2,000 फीस लगेगी; देखें नई दरें पुरानी गाड़ियों का फिटनेस टेस्ट अब 10 गुना तक महंगा हो गया है। मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज (MoRTH) ने देश में वाहन फिटनेस सर्टिफिकेट टेस्ट की फीस बढ़ा दी है। ये बदलाव सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स (फिफ्थ अमेंडमेंट) के तहत लागू कर दिए गए हैं। नए नियम के तहत अब 20 साल पुरानी कारों का फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाने के लिए 15,000 रुपए, बाइक के लिए 2,000 रुपए और हैवी कमर्शियल व्हीकल के लिए 25,000 रुपए देने पड़ेंगे। इसके अलावा, गाड़ियों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट 10 साल में लेना होगा, जो पहले 15 पुरानी गाड़ियों के लिए अनिवार्य था। पूरी खबर पढ़ें…
महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपनी पॉपुलर इलेक्ट्रिक एसयूवी BE 6 का स्पेशल बैटमैन एडिशन भारत में एक बार फिर लॉन्च किया है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत 28.49 लाख रुपए है, जो पुराने मॉडल से 70,000 रुपए ज्यादा है। वहीं, चार्जर के लिए अलग से ₹50,000 से ₹75,000 देने होंगे। स्पेशल एडिशन की डिमांड को देखते हुए महिंद्रा ने इसे दोबारा रिलॉन्च किया है। महिंद्रा BE 6 बैटमैन एडिशन की बुकिंग 10 मार्च 2026 को सुबह 11 बजे से शुरू होगी। इस बार 24 घंटे में जितनी बुकिंग मिलेंगी, कंपनी उतनी ही कारें बनाएगी और 20 अप्रैल 2026 से डिलीवरी शुरू करेगी। कंपनी ने पिछली बार सिर्फ 300 यूनिट ही सेल की थी। महिंद्रा ने BE 6 के इस स्पेशल एडिशन के लिए DC कॉमिक्स के साथ पार्टनरशिप की है। कार फुल चार्ज पर 682km की रेंज के साथ आती है। ये गाड़ी भारत में टाटा कर्व ईवी, हुंडई क्रेटा इलेक्ट्रिक और MG ZS EV को टक्कर देती है। एक्सटीरियर: सैटिन ब्लैक कलर और गोल्डन फिनिश यह स्पेशल एडिशन BE 6 के टॉप 'पैक थ्री' वैरिएंट पर बेस्ड है, लेकिन इसमें 'डार्क नाइट' मूवी से इन्स्पायर्ड कई बदलाव किए गए हैं। पूरी कार सैटिन ब्लैक पेंट में आती है। फ्रंट फेंडर, व्हील कैप और रियर बम्पर पर बैटमैन का लोगो दिया गया है। कार के सस्पेंशन और ब्रेक कैलिपर्स को गोल्डन फिनिश दी गई है। इसमें बड़े 20-इंच के अलॉय व्हील्स मिलते हैं। इसके पैनोरमिक ग्लास रूफ में रेड कलर की बैटमैन थीम वाली लाइटिंग है। साथ ही, पडल लैंप्स जमीन पर बैटमैन का लोगो प्रोजेक्ट करते हैं। इंटीरियर: ऑल-ब्लैक डैशबोर्ड और यूनिक नंबर वाली नेमप्लेट अंदर आपको प्रीमियम 'बैटमैन' कार का अनुभव मिलता है। केबिन को पूरी तरह ब्लैक रखा गया है, जिसमें डैशबोर्ड और सेंटर कंसोल पर गोल्डन ट्रिम्स का इस्तेमाल हुआ है। सीटों पर ब्लैक स्वेड लेदर फिनिश के साथ गोल्डन स्टिचिंग और बैटमैन लोगो दिया गया है। सेंटर कंसोल पर एक गोल्डन प्लेट लगी है, जिस पर हर कार का एक यूनिक प्रोडक्शन नंबर लिखा होगा। स्टीयरिंग व्हील पर लगे बूस्ट मोड बटन पर भी बैटमैन का लोगो मौजूद है। फीचर्स: डुअल स्क्रीन और 16-स्पीकर साउंड सिस्टम पैक थ्री वैरिएंट पर बेस्ड होने के कारण इसमें फीचर्स की कोई कमी नहीं है। कार में 12.3-इंच की दो बड़ी स्क्रीन (इंफोटेनमेंट और इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर) दी गई हैं। ऑगमेंटेड रियलिटी बेस्ड हेड-अप डिस्प्ले (HUD) और 360-डिग्री कैमरा मिलता है। वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स और 16-स्पीकर वाला हरमन कार्डन साउंड सिस्टम दिया गया है। सेफ्टी फीचर्स: लेवल-2 ADAS और 7 एयरबैग्स सुरक्षा के लिहाज से महिंद्रा ने इसे लेवल-2 ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) से लैस किया है। इसमें 7 एयरबैग्स, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल और सुरक्षा के कई आधुनिक फीचर्स मिलते हैं।
टोयोटा किर्लोस्कर ने भारतीय बाजार में अपनी पॉपुलर MPV रूमियन का नया एंट्री-लेवल बेस वैरिएंट E लॉन्च किया है। इस नए वैरिएंट की एक्स-शोरूम कीमत 9.56 लाख रुपए है। खास बात यह है कि नया वैरिएंट आने से रूमियन की शुरुआती कीमत अब पहले से 95,000 रुपए सस्ती हो गई है। मारुति सुजुकी अर्टिगा पर बेस्ड MPV अब 4 वेरिएंट्स- E, S, G और V में आएगी। नया 'E' वैरिएंट मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ पेश किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह कार पेट्रोल वैरिएंट में 20.52kmpl और CNG वैरिएंट में 26.11km का माइलेज देती है। टोयोटा की सबसे सस्ती MPV रूमियन स्मार्टफोन और स्मार्टवॉच कनेक्टिविटी जैसे लेटेस्ट फीचर्स से लैस है। कार के इंजन को स्मार्टफोन से स्टार्ट/स्टॉप किया जा सकता है। टोयोटा ग्लांजा, अर्बन क्रूजर और मारुति सुजुकी इनविक्टो के बाद रूमियन दोनों कंपनियों के बीच शेयर किया गया चौथा बैज-इंजीनियर्ड मॉडल है। इसके साथ ही जापानी कार मेकर कंपनी टोयोटा के पास इंडियन मार्केट में मौजूद अपने MPV पोर्टफोलियो में इनोवा क्रिस्टा, इनोवा हाइक्रॉस और वेलफायर के बाद सबसे अफोर्डेबल कार है। एक्सटीरियर: इंटीग्रेटेड LED DRLs के साथ LED प्रोजेक्टर हेडलैंप कार की मैन्युफैक्चरिंग मारुति सुजुकी करती है और ग्लांजा की तरह टोयोटा को सप्लाई करती है। टोयोटा रुमियन में अर्टिगा की तुलना में कुछ कॉस्मेटिक चेंजेस मिलते हैं। सबसे बड़ा बदलाव इसके फ्रंट ग्रिल में नजर आता है जो इनोवा क्रिस्टा से ली गई है। ग्रिल में हनीकॉम्ब पैटर्न है और यह क्रोम से घिरा हुआ है। ग्रिल के दोनों और इंटीग्रेटेड LED DRLs के साथ LED प्रोजेक्टर हेडलैंप का सेटअप दिया गया है। फ्रंट बम्पर को भी नया डिजाइन दिया गया है और निचले हिस्से पर एक और क्रोम एलीमेंट्स है। इसके दोनों ओर फोगलैंप मिलते हैं। साइड में नए 7-स्पोक डायमंड-कट अलॉय व्हील मिलते हैं, जो अर्टिगा से अलग हैं। कार की साइड और रियर प्रोफाइल में कोई बलदाव नहीं है। रूमियन के इंटीरियर में अर्टिगा की तरह डुअल-टोन ट्रीटमेंट मिलता है, इसमें स्टीयरिंग व्हील पर टोयोटा का नया लोगो एकमात्र अंतर है। इसके अलावा 7 सीटर लेआउट के साथ इक्यूपमेंट्स भी अर्टिगा से लिए गए हैं। इंटीरियर डिजाइन: 7-इंच टचस्क्रीन के साथ 60:40 स्प्लिट सीटें कलर थीम और लेआउट: ड्यूल-टोन बेज और ब्लैक इंटीरियर, जो केबिन को स्पेशियस और साफ-सुथरा लुक देता है। डैशबोर्ड सिंपल है, जिसमें वुड-फिनिश्ड इंसर्ट्स हैं। सीटिंग और स्पेस: 7-सीटर लेआउट के साथ दूसरी रो की 60:40 स्प्लिट सीटें, जो स्लाइड और फोल्ड हो सकती हैं। बूट स्पेस 209 लीटर है, जो सीट्स फोल्ड करने पर 550 लीटर तक बढ़ता है। तीसरी रो छोटे बच्चों या शॉर्ट ट्रिप्स के लिए ठीक है। कंफर्ट फीचर्स: हाइट एडजस्टेबल ड्राइवर सीट, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, सेकंड रो AC वेंट्स, और फ्लैट-बॉटम स्टीयरिंग व्हील (ऑडियो/ब्लूटूथ कंट्रोल के साथ)। कुछ वेरिएंट्स में क्रूज कंट्रोल और आर्मरेस्ट भी हैं। इंफोटेनमेंट: 7-इंच टचस्क्रीन, जो वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो और एपल कारप्ले सपोर्ट करता है। 6-स्पीकर साउंड सिस्टम के साथ। इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर एनालॉग है, जिसमें छोटा डिजिटल डिस्प्ले है। परफॉर्मेंस: CNG में 26.11km/kg का माइलेज टोयोटा रुमियन में अर्टिगा वाला ही 1.5-लीटर का नेचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन दिया गया है, जो 103hp की पावर और 137Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इस इंजन के साथ 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स और 6-स्पीड टॉर्क कनवर्टर ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का ऑप्शन मिलता है। रूमियन को फैक्ट्री फिटेड CNG किट के साथ भी पेश किया गया है। ये इंजन CNG मोड में 88hp की पावर और 121.5Nm का टॉर्क जनरेट करता है। कंपनी का दावा है कि कार मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ 20.11 kmpl, ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ 20.51kmpl और CNG में 26.11km/kg का माइलेज देती है। कंपनी ने इस कार को पेट्रोल इंजन के साथ ही नियो ड्राइव (इंटीग्रेटेड स्टार्टर जेनरेटर - ISG) और E-CNG टेक्निक से भी लैस किया है। कंपनी का कहना है कि नई नियो ड्राइव टेक्नोलॉजी और E-CNG टेक्नीक इस कार के माइलेज को बेहतर बनाते हैं। ये कार पेट्रोल (नियो ड्राइव) और CNG यानी दोनों फ्यूल ऑप्शन के साथ अवेलेबल है।
मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने की चिंता खत्म हो गई है। क्योंकि, होर्मुज रूट बंद होने के बाद सरकार ने कुल इम्पोर्ट का 10% कच्चा तेल नए रूट से मंगाना शुरू कर दिया है। सरकार ने ये फैसला सप्लाई प्रभावित होने के कारण लिया है। सूत्रों के अनुसार, सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत के पास तेल का पर्याप्त भंडार है और स्थिति नियंत्रण में है। हालांकि, होर्मुज रूट बंद होने की वजह से बीते 8 दिन में इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम 27% तक बढ़ गए हैं। सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट शब्दों में कहा, पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ेंगे। आज हम देश को फिर से यह भरोसा दिलाते हैं कि कीमतों में कोई इजाफा नहीं होगा। जरूरत का 70% कच्चा तेल अब दूसरे रास्तों से आएगा ईरान ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को ब्लॉक कर दिया है, जहां से दुनिया की 20% तेल सप्लाई होती है। वहीं, भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए भारत ने अपनी रणनीति बदल ली है और इस विवादित रास्ते पर निर्भरता कम कर दी है। 10% की बढ़ोतरी: भारत ने उन रास्तों से होने वाले कच्चे तेल के आयात में 10% की बढ़ोतरी की है, जो होर्मुज के दायरे में नहीं आते। नया रूट: पहले भारत अपनी जरूरत का 60% कच्चा तेल होर्मुज के अलावा अन्य रास्तों से मंगाता था, जिसे अब बढ़ाकर 70% कर दिया गया है। इससे खाड़ी देशों में छिड़ी जंग का असर भारत की सप्लाई चेन पर कम पड़ेगा। बता दें कि भारत अपनी जरूरत का करीब 85-90% कच्चा तेल 40+ देशों से मंगाता है। ईरान ने भरोसा दिया: होर्मुज से कार्गो मूवमेंट जल्द शुरू होगा सरकार ने ये संकेत भी दिए हैं कि होर्मुज रूट के पास जहाजों की आवाजाही जल्द ही शुरू हो सकती है। देश में तेल का भंडार बढ़ा, सरकार का बढ़ा कॉन्फिडेंस पश्चिम एशिया में चल रही उथल-पुथल के बावजूद भारत की एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत हुई है। सरकारी अधिकारियों ने बताया है कि हालिया समीक्षा में तेल के स्टॉक के स्तर में सुधार देखा गया है। LPG के दाम को लेकर भ्रम फैला रही कांग्रेस सरकार ने रसोई गैस (LPG) की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस का दावा आधिकारिक बयानों की गलत व्याख्या है। ईरान-इजराइल जंग से कच्चा तेल 92 डॉलर प्रति बैरल के पार अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के बीच कच्चे तेल की कीमत एक हफ्ते में लगभग 27% बढ़ गई है। आज शनिवार (7 मार्च) को भी ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव करीब 9% बढ़कर 92.69 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। यह अप्रैल 2024 के बाद इसका उच्चतम स्तर भी है। 28 फरवरी को जंग की शुरूआत हुई थी, तब क्रूड ऑयल की कीमत 72.87 डॉलर प्रति बैरल थी। तब से अब तक यानी 8 दिन में क्रूड ऑयल की कीमत करीब 20 डॉलर प्रति बैरल बढ़ी है। -------------------- ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल 55 रुपए महंगा:पेट्रोल 336 और डीजल 321 रुपए लीटर हुआ, अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का असर पाकिस्तान ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 20% की बढ़ोतरी की है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपए (पाकिस्तानी रुपया) प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत अब 335.86 रुपए प्रति लीटर हो गई है। वहीं डीजल 321.17 रुपए प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है। सरकार का तर्क है कि अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग व मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं, जिसकी वजह से यह फैसला लेना पड़ा। पूरी खबर पढ़ें…
एपल ने इस हफ्ते कई प्रोडक्ट लॉन्च किए हैं। कंपनी ने आईफोन 17ई, नया आईपैड एयर, मैकबुक नियो, अपडेटेड मैकबुक प्रो और मैकबुक एयर पेश किए हैं। इन लॉन्च से साफ है कि एपल अब प्रीमियम के साथ बजट सेगमेंट में भी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। खासकर आईफोन 17ई और मैकबुक नियो को उन यूजर्स के लिए बनाया गया है जो कम कीमत में एपल इकोसिस्टम में एंट्री चाहते हैं। 1- 64 हजार रु. में आईफोन 17ई एपल ने अपनी बजट आईफोन सीरीज में आईफोन 17ई लॉन्च किया। इसकी शुरुआती कीमत करीब 64 हजार रु है। यह बेस iPhone 17 से लगभग ₹16,500 सस्ता है। मुख्य फीचर्स- A19 चिप (iPhone 17 वाली) 256GB स्टोरेज 48MP कैमरा C1X मॉडेम से तेज नेटवर्क स्पीड सुपर रेटिना डिस्प्ले सिरेमिक शील्ड 2 प्रोटेक्शन, MagSafe और Qi2 वायरलेस चार्जिंग आईपैड एयर 12 GB रैम, M4 चिप एपल ने आईपैड एयर का नया वर्जन भी लॉन्च किया है जिसमें M4 चिप दी गई है।इसमें रैम 8GB से बढ़ाकर 12GB कर दी है, लेकिन कीमत वही करीब ₹64,900 है। मुख्य फीचर्स- 11-इंच व 13-इंच Liquid Retina डिस्प्ले, 128GB से लेकर 1TB तक विकल्प, iPadOS 26 ऑपरेटिंग सिस्टम , टच आईडी सेंसर }एपल C1X मॉडेम }एपल पेंसिल प्रो और एपल पेंसिल (USB-C) सपोर्ट }एपल इंटेलिजेंस सपोर्ट। मैकबुक नियो - सस्ता लैपटॉप एपल ने पहली बार MacBook Neo नाम से एंट्री-लेवल लैपटॉप लॉन्च किया है।कीमत 256GB मॉडल की करीब ₹69,900 है। मुख्य फीचर्स-13-इंच डिस्प्ले, A18 Pro चिप 8GB RAM , दो USB-C पोर्ट , 512GB मॉडल में Touch ID भी दिया गया है। छात्रों और शिक्षकों को करीब ₹8,300 रुपए (100 डॉलर) की छूट भी दी जाएगी।
जर्मनी के दक्षिण पश्चिम में बसा बादेन-वुरटमबर्ग लंबे समय से जर्मनी के बिजनेस मॉडल की मिसाल है। इसकी छोटी, मध्यम और बड़ी कंपनियां हाई क्वालिटी का सामान खासकर कारें बनाने के लिए काफी लोगों को रोजगार देती हैं, लेकिन इन दिनों अमेरिकी टैरिफ, चीन से बढ़ते आयात और ऑटोमोबाइल सेक्टर के संकट में आने से यह सब खतरे में पड़ गया है। आर्थिक मंत्री निकोल हॉफमीस्टर-क्राउट कहते हैं, यह सेक्टर अपने इतिहास की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। राज्य की राजधानी स्टटगार्ट के आसपास लगभग दो लाख जॉब उस पर निर्भर हैं। मर्सिडीज और पोर्शे कामगारों की छंटनी कर रही हैं। बड़ी सप्लायर कंपनी बॉश्च 2030 तक 22 हजार जॉब कम करेगी। कम्बशन एंजिन (पेट्रोल, डीजल, गैस) पर निर्भर छोटी मितेलस्टैंड कंपनियां ज्यादा मुश्किल में हैं। इलेक्ट्रिक कारों के आने से इनकी बिक्री घटने का खतरा पैदा हो गया है। स्टटगार्ट स्थित कॉरपोरेट वकील मार्टिन मुछा कहते हैं, पहले जो कंपनियां अपना स्टाफ कम कर रहीं थीं,अब वे कंपनियां बंद हो रही हैं। कंपनियों के संकट में होने से टैक्स की आय कम हुई है। पिछले दो साल में कॉरपोरेट टैक्स आय में आधी गिरावट आई है। कारों में मंदी देखकर लोग दूसरे क्षेत्र में दस्तक देने लगे हैं। पांच हजार वर्करों की कूलिंग टेक्नोलॉजी कंपनी ईबीएम पैप्स्ट ने नए सिरे से कुछ करने की संभावना दिखाई है। पांच साल पहले स्थिति बिगड़ते देख कंपनी ने कार बिजनेस छोड़कर डेटा सेंटरों के कूलिंग सिस्टम पर दांव लगाया है। कई लोग ऑटो सेक्टर में अब भी भविष्य देखते हैं। सत्तारूढ़ ग्रीन्स पार्टी के सेम ओजडेमिर कहते हैं, हमें भविष्य की कार बनाने वाला बनना चाहिए। पेटेंट के 40% आवेदन यहीं से बादेन-वुटनबर्ग की वर्कफोर्स बेहद हुनरमंद है। वहां अच्छे विश्वविद्यालय और इनोवेशन का माहौल है। जर्मनी की 13% आबादी के राज्य में देश के लगभग 40% पेटेंट आवेदन आते हैं। एआई, रोबोटिक्स और हेल्थ केयर की अच्छी स्थिति है।
टेक कंपनी मोटोरोला ने आज 6 मार्च को भारतीय बाजार में अपनी एज 70 सीरीज का नया स्मार्टफोन मोटोरोला एज 70 फ्यूजन लॉन्च कर दिया है। यह फोन लंबी बैटरी लाइफ के साथ प्रीमियम डिस्प्ले और दमदार परफॉर्मेंस चाहने वाले यूजर्स के लिए उतारा गया है। फोन में 50MP सोनी कैमरा और 7000mAh बैटरी दी गई है। इसके अलावा इसमें मिलिट्री ग्रेड बॉडी के साथ IP69 प्रोटेक्शन भी मिलेगी। फोन तीन वैरिएंट में आया है। इसकी शुरुआती कीमत 26,999 रुपए है। शुरुआती सेल में फोन पर 2 हजार रुपए का डिस्काउंट मिलेगा। डिजाइन: मिलिट्री ग्रेड बॉडी और क्वाड-कर्व्ड स्क्रीन बिल्ड क्वालिटी: फोन को MIL-STD 810H मिलिट्री ग्रेड सर्टिफिकेशन मिला है, जो इसे गिरने पर बचाता है। इसे IP68 और IP69 की रेटिंग मिली है, यानी यह पानी में भी सुरक्षित रह सकता है। फ्रंट डिजाइन: फोन के फ्रंट में क्वाड-कर्व्ड स्क्रीन है, जिसमें बेजल्स न के बराबर हैं। सेल्फी कैमरा के लिए टॉप सेंटर में छोटा पंच-होल दिया गया है। कर्व्ड किनारों की वजह से फोन हाथ में पकड़ने पर काफी प्रीमियम और स्लिम महसूस होता है। कलर: फोन पैंटोन ब्लू सर्फ, पैंटोन सिल्हूट और पैंटोन कंट्री एयर कलर ऑप्शन के साथ अवेलेबल है। स्पेसिफिकेशन: पावरफुल प्रोसेसर और AI का सपोर्ट डिस्प्ले: इसमें 6.8-इंच की 1.5K एक्सट्रीम एमोलेड स्क्रीन है। यह 144Hz रिफ्रेश रेट और 5200 निट्स की पीक ब्राइटनेस सपोर्ट करती है। डिस्प्ले की सुरक्षा के लिए कोर्निंग गोरिल्ला ग्लास 7i लगा है। इसमें 'स्मार्ट वॉटर टच' फीचर भी है, जिससे हाथ गीले होने पर भी टच काम करता है। परफॉर्मेंस: फोन में परफॉर्मेंस के लिए क्वालकॉम का स्नैपड्रैगन 7s जेन 4 प्रोसेसर दिया गया है। कंपनी का दावा है कि इसका AnTuTu स्कोर 11.49 लाख से ज्यादा है। यह फोन 'मोटो एआई 2.0' के साथ आता है, जो स्मार्ट फीचर्स को आसान बनाता है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए फोन के रियर पैनल पर ट्रिपल कैमरा सेटअप है। इसमें मेन कैमरा 50MP सोनी LYT710 सेंसर है, जो ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन (OIS) के साथ आता है। साथ में 13MP का अल्ट्रा-वाइड एंगल लेंस और लाइट सेंसर दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फ्रंट में 32MP का कैमरा है। बैटरी और चार्जिंग: फोन में 7000mAh की बैटरी दी गई है। इसे चार्ज करने के लिए बॉक्स में 68W का टर्बोपावर फास्ट चार्जर मिलेगा। सॉफ्टवेयर और अन्य फीचर्स फोन एंड्रॉयड 16 पर चलता है। कंपनी ने वादा किया है कि इस पर 3 साल तक OS अपग्रेड (एंड्रॉयड 19 तक) और 5 साल तक सिक्योरिटी अपडेट्स मिलते रहेंगे। कनेक्टिविटी के लिए इसमें Wi-Fi 6E, ब्लूटूथ 6.0 और NFC जैसे फीचर्स दिए गए हैं। सिक्योरिटी के लिए इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर है।
एआई का मेडिकल क्षेत्र में दखल बढ़ रहा है, लेकिन हालिया रिपोर्ट ने इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘नेचर मेडिसिन’ में छपी एक स्टडी के अनुसार, ओपनएआई का नया फीचर चैटजीपीटी हेल्थ मेडिकल इमरजेंसी पहचानने में गंभीर चूक रहा है।शोध के अनुसार, जिन मामलों में तुरंत अस्पताल जाना जीवन बचाने के लिए अनिवार्य था, उनमें से 51.6% बार एआई ने मरीज को घर पर रहने या सामान्य अपॉइंटमेंट लेने की सलाह दी। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह लापरवाही किसी के मौत की वजह बन सकती है। वो सब कुछ, जो आपके लिए जानना जरूरी है दोस्त की सलाह पर बदलता है फैसला - मरीज कह दे कि उसके दोस्त ने इस बीमारी को मामूली बताया है, तो एआई द्वारा लक्षणों को कम गंभीर बताने की संभावना 12 गुना बढ़ जाती है। दम घुटने पर भी ‘इंतजार’ की सलाह - सांस की गंभीर समस्या वाली महिला को 84% बार बाद में अपॉइंटमेंट लेने को कहा, जबकि मरीज के अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम टूटने का डर था। सुरक्षित लोगों को डराया - इसके विपरीत, 64.8% ऐसे लोग जो पूरी तरह सुरक्षित थे, उन्हें एआई ने तुरंत इमरजेंसी में जाने की गलत सलाह देकर स्वास्थ्य प्रणाली पर बोझ बढ़ाने का काम किया। सुसाइड - सुसाइड के मामलों में एआई का व्यवहार सबसे ज्यादा डराने वाला है। जब एक मरीज ने सवाल के साथ नॉर्मल लैब रिपोर्ट जोड़ दी तो एआई के सारे सुरक्षा गार्डरेल गायब हो गए। ओपनएआई का पक्ष - कंपनी का कहना है कि लोग असल जिंदगी में एआई का इस्तेमाल अलग तरीके से करते हैं और मॉडल को लगातार रिफाइन किया जा रहा है।
टेक कंपनी नथिंग ने आज 5 मार्च को नई स्मार्टफोन सीरीज 'नथिंग फोन 4a' भारत सहित ग्लोबल मार्केट में लॉन्च कर दी है। इसमें नथिंग फोन (4a) और नथिंग फोन (4a) प्रो शामिल है। लंदन में हुए एक इवेंट के दौरान इन दोनों हैंडसेट्स से पर्दा उठाया गया। नए फोन की सबसे बड़ी खासियत इसके ट्रांसपेरेंट डिजाइन के साथ नया 'ग्लिफ बार' इंटरफेस है, जो नोटिफिकेशन्स आने पर चमकती है। फोन 4a प्रो में 140X अल्ट्रा जूम वाला 50MP कैमरा है। कंपनी का दावा है कि ये इतने जूम कैमरा वाला ये दुनिया का पहला फोन है। कीमत और ऑफर्स: शुरुआती कीमत ₹31,999 कंपनी ने नथिंग फोन (4a) की शुरुआती कीमत 31,999 रुपए और नथिंग फोन 4a प्रो की शुरुआती कीमत 39,999 रुपए रखी है। फोन खरीदने पर आपको ₹1,000 का बैंक ऑफर और ₹6,000 का एक्सचेंज बोनस भी मिलेगा। नथिंग फोन 4a की सेल 13 मार्च से और फोन 4a प्रो की सेल 27 मार्च से शुरू होगी। डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी: नया ग्लिफ बार और ट्रांसपेरेंट लुक नथिंग ने अपने सिग्नेचर ट्रांसपेरेंट डिजाइन को बरकरार रखा है, लेकिन इसमें कुछ बड़े बदलाव किए हैं। डिस्प्ले: 120Hz रिफ्रेश रेट और 5000 निट्स की ब्राइटनेस कैमरा: 70x और 140x अल्ट्रा जूम की सुविधा दोनों फोन में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है: परफॉरमेंस और बैटरी: स्नैपड्रैगन 7 सीरीज का पावर अन्य फीचर्स कनेक्टिविटी के लिए दोनों फोन में 5G, वाई-फाई 6, ब्लूटूथ 5.4 और NFC जैसे फीचर्स दिए गए हैं। सिक्योरिटी के लिए इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर मिलता है।
दिग्गज टेक कंपनी एपल ने अपना अब तक का सबसे किफायती लैपटॉप 'मैकबुक नियो' लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इसे उन यूजर्स के लिए पेश किया है जो कम बजट में मैकबुक का अनुभव लेना चाहते हैं। इसकी शुरुआती कीमत भारत में 69,990 रुपए रखी गई है। आईफोन वाली चिप के साथ आएगा लैपटॉप मैकबुक नियो में A18 प्रो चिपसेट दिया गया है। ये 6-कोर CPU और 5-कोर GPU के साथ आता है। इसमें 16-कोर वाला न्यूरल इंजन (NPU) भी है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टास्क को तेजी से प्रोसेस करता है। ये चिप आईफोन 16 प्रो में मिलती थी। एपल का दावा है कि स्मार्टफोन चिपसेट होने के बावजूद यह लैपटॉप ब्राउजिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग, फोटो एडिटिंग और डेली ऑफिस वर्क को बड़ी आसानी से हैंडल कर सकता है। 13-इंच की स्क्रीन और चार कलर्स डिजाइन के मामले में यह काफी हद तक मैकबुक एयर जैसा दिखता है। इसमें 13-इंच की लिक्विड रेटिना (IPS LCD) डिस्प्ले दी गई है। इसे टिकाऊ एल्युमिनियम एनक्लोजर से बनाया गया है और यह चार कलर्स- ब्लश, इंडिगो, सिल्वर और सिट्रस में उपलब्ध होगा। बैटरी लाइफ और स्टोरेज ऑप्शन्स एपल के मुताबिक, मैकबुक नियो को एक बार फुल चार्ज करने पर 16 घंटे तक का वीडियो प्लेबैक टाइम मिलता है। इसमें 36.5Wh की बैटरी लगी है। इसे बॉक्स में मिलने वाले 20W के USB-C पावर अडैप्टर से चार्ज किया जा सकता है। कनेक्टिविटी और एक्सटर्नल डिस्प्ले सपोर्ट इसमें एक USB 3 टाइप-सी पोर्ट दिया गया है, जो डिस्प्ले पोर्ट की तरह भी काम करता है। इसके अलावा एक दूसरा USB 2 टाइप-सी पोर्ट और 3.5mm का हेडफोन जैक भी मिलता है। यह 60Hz रिफ्रेश रेट पर एक एक्सटर्नल 4K डिस्प्ले को सपोर्ट कर सकता है। कीमत और उपलब्धता भारत में मैकबुक नियो की शुरुआती कीमत 69,990 रुपए है। इसके लिए प्री-ऑर्डर एपल की वेबसाइट पर शुरू हो गए हैं। इसकी बिक्री 11 मार्च से शुरू होगी। यह लेटेस्ट macOS पर काम करेगा। वीडियो कॉल के लिए इसमें 1080p फेसटाइम HD कैमरा और स्पेशियल ऑडियो सपोर्ट वाले डुअल स्पीकर दिए गए हैं। किसके लिए है यह लैपटॉप? स्टूडेंट्स के लिए: पढ़ाई, प्रोजेक्ट्स और ऑनलाइन क्लासेज के लिए यह बेस्ट है। बेसिक ऑफिस वर्क: अगर आपका काम केवल ईमेल, एक्सेल और ब्राउजिंग का है। एपल इकोसिस्टम: जो लोग कम बजट में पहली बार विंडोज से मैक पर शिफ्ट होना चाहते हैं। इन्फो-बॉक्स: क्या है A18 प्रो चिप? यह वही प्रोसेसर है जो एपल के आईफोन 16 प्रो में मिलता है। यह बहुत ही कम बिजली की खपत करता है, जिससे लैपटॉप गर्म नहीं होता और बैटरी ज्यादा चलती है।
देश के बड़े औद्योगिक घराने JSW ग्रुप की ऑटोमोबाइल कंपनी अपनी पहली गाड़ी लॉन्च करने की तैयारी में है। कंपनी ने अपनी अपकमिंग SUV का डिजाइन पेटेंट भारत में फाइल कर दिया है। यह नई SUV चीन की कंपनी चेरी के 'जेटूर T2' (Jetour T2) मॉडल पर बेस्ड होगी। पिछले हफ्ते ही कंपनी ने डीलर के लिए इस गाड़ी का टीजर जारी किया था। जानकारी के मुताबिक, JSW मोटर्स इसे 2026 की दिवाली के आसपास बाजार में उतार सकती है। दिसंबर में फाइल हुआ था पेटेंट, फरवरी में मिली मंजूरी इस SUV का डिजाइन पेटेंट 18 दिसंबर 2025 को चेरी ऑटोमोबाइल ने फाइल किया गया था, जिसे 27 फरवरी 2026 को मंजूरी मिली है। पेटेंट से साफ है कि भारत में आने वाली JSW की इस SUV का लुक ग्लोबल मार्केट में बिकने वाली जेटूर T2 जैसा ही होगा। हालांकि, इंटरनेशनल मॉडल में ग्रिल पर 'JETOUR' लिखा होता है, लेकिन भारत में यहां 'JSW' की ब्रांडिंग देखने को मिल सकती है। डिजाइन: मस्कुलर लुक और बॉक्सी स्टाइल टीजर से जो इशारा मिला था, डिजाइन पेटेंट भी लगभग उसी बात पर मुहर लगाता दिख रहा है। JSW मोटर्स, जेटूर T2 के बॉक्सी और रफ-एंड-टफ स्टाइल में बहुत ही मामूली बदलाव करेगी। इसके फ्रंट में चौकोर LED हेडलाइट्स दी गई हैं, जो एक ब्लैक ट्रिम पीस से जुड़ी हैं। इसमें हनीकॉम्ब (मधुमक्खी के छत्ते जैसी) पैटर्न वाली ग्रिल भी देखी जा सकती है। इसके मस्कुलर बंपर पर एक फॉग लैंप और दोनों तरफ पिक्सल DRL क्लस्टर्स के दो जोड़े दिए गए हैं। इसका बोनट काफी उभरा हुआ है और दोनों तरफ पकड़ने वाले हैंडल दिए गए हैं। साइड की तरफ देखें तो डिजाइन पेटेंट में दरवाजों पर लगे हुए साइड मिरर दिख रहे हैं, जो कि दिलचस्प है क्योंकि पिछले टीजर में ये मिरर ए-पिलर (आगे वाले खंभे) से जुड़े हुए दिखाए गए थे। इंटरनेशनल मॉडल के मुकाबले इसके रूफ रेल्स के बीच का गैप भी थोड़ा अलग है। बाकी सब कुछ जैसे कि अलॉय व्हील्स, पहियों के ऊपर वाली क्लैडिंग, खिड़कियों की लाइन वैसी ही हैं। ये मॉडल पीछे से कैसा दिखता है इसकी तस्वीरें नहीं आई है, लेकिन अगर बाकी डिजाइन को देखें तो ग्लोबल मॉडल के मुकाबले इसमें शायद ही कोई बदलाव दिखे। पावरट्रेन: हाइब्रिड इंजन के साथ मिलेगी जबरदस्त रेंज JSW मोटर्स भारत में इस SUV का 'i-DM' (प्लग-इन हाइब्रिड) वर्जन पेश करेगी। इसमें पेट्रोल इंजन और बैटरी दोनों का कॉम्बिनेशन होगा। महाराष्ट्र के प्लांट में असेंबल होगी, ₹15 लाख हो सकती है कीमत JSW मोटर्स इस SUV को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में स्थित प्लांट में असेंबल करेगी। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसकी एक्स-शोरूम कीमत 15 लाख रुपए के करीब हो सकती है। इसका मुकाबला टाटा हैरियर, सफारी और महिंद्रा XUV700 जैसी गाड़ियों से होगा। नॉलेज बॉक्स: यूटिलिटी बॉक्स: किसे खरीदनी चाहिए: जिन्हें शहर में इलेक्ट्रिक की बचत चाहिए और लॉन्ग ट्रिप पर रेंज की चिंता नहीं करनी, उनके लिए प्लग-इन हाइब्रिड एक बेहतर विकल्प है।
मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने भारत में अपनी लग्जरी MPV (मल्टी पर्पस व्हीकल) वी-क्साल का अपडेटेड 2026 मॉडल लॉन्च किया है। कंपनी ने इसमें 15 स्पीकर वाला थिएटर जैसा साउंड सिस्टम और 360-डिग्री कैमरा जैसे सेफ्टी फीचर्स के साथ उतारा है। इसके अलावा पहली बार कार में पेट्रोल इंजन भी मिलेगा। कंपनी ने V-क्लास को 2022 डिस्कंटीन्यू कर दिया था। अब इसे नए फीचर्स के साथ 1.40 करोड़ रुपए की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत में उतारा है। इस नई कार की डिलीवरी मार्च के अंत तक शुरू हो जाएगी। इसका मुकाबला मार्केट में लेक्सस LM और टोयोटा वेलफायर जैसी प्रीमियम वैन से होगा। एक्सटीरियर डिजाइन: केबिन को ठंडा रखने वाला स्पेशल ग्रीन ग्लास नई वी-क्लास को कंपनी ने 3430mm के 'एक्स्ट्रा-लॉन्ग-व्हीलबेस' के साथ उतारा गया है, जो भारत में बिकने वाली मर्सिडीज की किसी भी अन्य कार से सबसे ज्यादा है। वी-क्लास में चारों तरफ 'ग्रीन-टिंटेड' कांच लगा है। इसमें सामने की तरफ लेमिनेटेड विंडशिल्ड और साइड व पीछे की खिड़कियों में खास सेफ्टी ग्लास है, जो चिलचिलाती धूप में भी केबिन को ठंडा रखने में मदद करते हैं। फ्रंट लुक: सामने से देखने पर कार का डिजाइन बिल्कुल नया लगता है। इसमें यू-शेप वाली 'इल्लुमिनेटेड' (चमकने वाली) ग्रिल दी गई है, जिस पर मर्सिडीज का खास स्टार लोगो मिलता है। ग्रिल के दोनों तरफ डुअल-पोड LED हेडलाइट्स हैं और किनारों पर पतली LED DRL (डे-टाइम रनिंग लाइट्स) दी गई हैं, जो इसे मॉडर्न लुक देती हैं। कार का हुड हल्का सा झुका हुआ है, जो इसे एक बड़ी MPV वाला लुक देता है। इस डिजाइन की वजह से यह काफी ऊंची और स्पेशियस नजर आती है। छत पर रूफ रेल्स कार के लुक को और भी अट्रेक्टिव बनाती हैं। साइड प्रोफाइल: बॉडी क्लेडिंग नहीं होने से साइड से कार काफी 'क्लीन' लगती है। यहां 18-इंच के डुअल-टोन डायमंड कट अलॉय व्हील्स मिलते हैं। सेकेंड रो में एंट्री के लिए इलेक्ट्रिक स्लाइडिंग डोर दिए गए हैं। साथ ही, पुराने स्टाइल के डोर हैंडल और इंडिकेटर वाले ORVM मिलते हैं। खिड़कियों के किनारे लगी क्रोम स्ट्रिप कार के लुक में हल्का कंट्रास्ट जोड़ती है। रियर प्रोफाइल: पीछे वाले हिस्से की बात करें तो यहां से यह ऊंची और सुव्यवस्थित है, जिसमें वर्टिकल एलईडी टेललाइट, एक पतला बंपर, एक क्रोम स्ट्रिप और एक रूफ स्पॉइलर है, जो इसे शानदार फिनिश देता है। पीछे से MPV काफी ऊंची और सिस्टमैटिक नजर आती है। यहां वर्टिकल LED टेललाइट्स, एक पतला बंपर और रूफ स्पॉइलर दिया गया है। बीच में दी गई क्रोम स्ट्रिप इसके पिछले हिस्से को प्रीमियम फिनिश देती है। कलर ऑप्शन: यह कार ऑब्सीडियन ब्लैक, हाई-टेक सिल्वर, अल्पाइन ग्रे, सोडालाइट ब्लू और क्रिस्टल वाइट कलर में अवेलेबल होगी। इंटीरियर: 12.3-इंच की दो डिजिटल डिस्प्ले और दो कलर थीम कार के केबिन में दो कलर थीम है। इसमें एक फुली ब्लैक और दूसरी बैज अपहोल्स्ट्री के साथ ब्लैक थीम दी गई है। डैशबोर्ड का डिजाइन काफी सिंपल और साफ-सुथरा रखा गया है। इसमें 12.3-इंच की दो डिजिटल डिस्प्ले दी गई हैं। टचस्क्रीन के साथ यहां जरूरी फंक्शन के लिए फिजिकल बटन और रोटरी कंट्रोल (घुमाने वाले बटन) भी मिलते हैं। इसके सेंटर कंसोल को 'टेबल-टॉप' जैसा लुक दिया गया है, जहां टॉगल स्विच और बटन हैं। पूरे केबिन में हाई-क्वालिटी लेदर (लूनागो या प्रीमियम लेदर) और सॉफ्ट-टच मटेरियल का इस्तेमाल किया गया है। डैशबोर्ड और दरवाजों पर लकड़ी (वुड) और ब्रश्ड सिल्वर फिनिशिंग दी गई है। स्टीयरिंग व्हील पर भी प्रीमियम लेदर है। इस पर टच कंट्रोल्स के साथ-साथ कुछ जरूरी स्विच भी हैं। ड्राइवर की सुविधा और बेहतर ड्राइविंग एक्सपीरियंस के लिए इसमें पैडल शिफ्टर्स भी दिए गए हैं। एक्सटेंडेबल अंडर-थाई सपोर्ट के साथ फ्लैक्सिबल सीटें वी-क्लास की सीटें काफी फ्लैक्सिबल हैं। इसके 6-सीटर वर्जन में दूसरी और तीसरी लाइन में अलग-अलग 'कैप्टन सीटें' मिलती हैं। इन सीटों को आप तीन तरह से सेट कर सकते हैं। आगे वाली सीटें काफी आरामदायक हैं। लंबे सफर पर थकान न हो, इसके लिए खासकर लंबी हाइट वाले पैसेंजर्स के लिए सीटों में 'एक्सटेंडेबल अंडर-थाई सपोर्ट' (पैरों के नीचे एक्स्ट्रा सपोर्ट) भी दिया गया है। फीचर्स: 15-स्पीकर वाला बुर्मेस्टर साउंड सिस्टम, लेकिन सनरूफ की कमी कंफर्ट के लिए मर्सिडीज ने इसमें एयर सस्पेंशन दिया है, जो खराब सड़कों पर भी झटके महसूस नहीं होने देता। परफॉरमेंस: पेट्रोल और डीजल दोनों इंजन का विकल्प नई V-Class में ग्राहकों को दो पावरफुल इंजन ऑप्शन मिलते हैं: V300 d (डीजल): इसमें 2-लीटर का टर्बोचार्ज्ड डीजल इंजन है जो 237hp की पावर जनरेट करता है। V300 (पेट्रोल): इसमें 2-लीटर का टर्बो पेट्रोल इंजन है जो 231hp की पावर देता है। इसमें माइल्ड-हाइब्रिड तकनीक भी जोड़ी गई है। दोनों ही इंजन के साथ 9-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स मिलता है। कंपनी इसके लिए ₹90,000 से शुरू होने वाले सर्विस पैकेज भी ऑफर कर रही है। सेफ्टी फीचर्स: 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग और ड्राइवर मॉनिटरिंग मर्सिडीज वी-क्लास को यूरो एनकैप क्रैश टेस्ट में 5-स्टार रेटिंग मिली है। सुरक्षा के लिहाज से इसमें कई एडवांस फीचर्स हैं:
एंथ्रोपिक की को-फाउंडर एवं प्रेसिडेंट डेनिएला अमोडेई संभावित ग्राहकों और पार्टनर्स से मिलती हैं, तो मीटिंग के बाद लोग उनसे एक सवाल जरूर पूछते हैं- मेरा बच्चा कॉलेज में क्या पढ़े?’ डेनिएला कहती हैं, ‘एआई मॉडल तेजी से नौकरियों का स्वरूप बदल रहे हैं, ऐसे में माता-पिता की चिंता स्वाभाविक है। एआई की दुनिया के दिग्गज मानते हैं कि टेलॉजी से जुड़ी स्किल जल्द पुरानी हो सकती हैं, पर घबराना समाधान नही हैं। इंसान के व्यवहार में शामिल लचीलापन, आलोचनात्मक सोच, नैतिकता और जिम्मेदारी जैसे गुण असली ताकत हैं। शीर्ष एआई लीडर अपने बच्चों को इन्हीं गुणों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित करते हैं। जानिए उनकी परवरिश का तरीका… मेलजोल और जुड़ाव अहम डेनिएला कहती हैं,‘जैसे-जैसे एआई बढ़ेगा, सहानुभूति, दयालुता और दूसरों से जुड़ने की क्षमता का महत्व बढ़ता जाएगा। ‘मशीनें संवाद कर सकती हैं, पर वे इंसान की तरह महसूस नहीं कर सकतीं। डेनिएला कहती हैं, ‘भविष्य में वही बच्चा सफल होगा जो लोगों के साथ रिश्ता बनाना जानता हो।’ इंसान हमेशा इंसानों के साथ रहना पसंद करता है, अकेलापन दुख देता है। इसलिए मैं चाहती हूं कि मेरे बच्चे ज्यादा मेलजोल बढ़ाएं व अपनी अनोखी पहचान के साथ लोगों को समझें। इंसान की रचनात्मकता और समूह में रहने की चाह कभी खत्म नहीं होगी। इंसानी विशेषज्ञता की जरूरत रहेगी पेड एआई के को-फाउंडर मैनी मेडिना के (4, 9, 19, 26 साल उम्र) चार बच्चे हैं। वे मानते हैं भविष्य में दो क्षेत्र एनर्जी व हेल्थकेयर सबसे वाइब्रेंट रहेंगे। मेडिना कहते हैं,‘कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज के लिए इंसानी विशेषज्ञता हमेशा जरूरी रहेगी। वे कहते हैं,‘परोपकार और पर्यावरण की देखभाल जैसे काम मशीनें दिल से नहीं कर सकतीं। बच्चे एआई को खतरा नहीं टूल की तरह देखें।’ लचीलापन और तर्कशक्ति महत्वपूर्ण एसएपी में एआई वर्क ट्रांसफॉर्मेशन एक्सपर्ट कैरोलिन हैंके का 15 साल का बेटा फुटबॉलर बनना चाहता है। कैरोलिन इसे सही मानती हैं। उनका कहना है कि आज के टेक स्किल दो साल बाद पुराने हो जाएंगे, इसलिए लचीलापन और बदलाव स्वीकार करने की क्षमता सबसे महत्वपूर्ण है। वे अपने बेटे को गणित व तार्किक सोच पर ध्यान देने को कहती हैं क्योंकि एआई के दौर में लॉजिकल थिंकिंग ही मजबूत आधार होगी। हरफनमौला बनना जरूरी व्हार्टन स्कूल के प्रोफेसर एथन मॉलिक के दो बच्चे (16 व 19 साल) हैं। एआई पर बात तो करते हैं, पर बहुत ज्यादा नहीं सोचते। वे बच्चों को ‘हरफनमौला’ बनने की सलाह देते हैं। जैसे डॉक्टर का काम बीमारी पकड़ना नहीं, बल्कि मरीज को समझना और ढांढस बंधाना भी है। वे कहते हैं कि लिबरल आर्ट्स पहले से कहीं ज्यादा जरूरी है ताकि बच्चे हर परिस्थिति में खुद को ढाल सकें। जिम्मेदारी लेना सीखना अहम माइक्रोसॉफ्ट की चीफ साइंटिस्ट जेमी टीवन कहती हैं,‘एआई सुझाव तो दे सकता है, पर फैसले की जिम्मेदारी नहीं ले सकता।’ इसलिए वे बच्चों को कानून या अकाउंटिंग जैसे क्षेत्रों जाने के लिए कहती हैं, जहां फैसलों की जवाबदेही इंसान की होती है। वे मानती हैं, गहराई से सोचने व मुश्किल काम करने की आदत ही बच्चों को मशीनों से आगे रखेगी।
टेक कंपनी एपल ने आज 2 मार्च को भारत सहित ग्लोबल मार्केट में अपनी अपडेटेड 17 सीरीज में सबसे सस्ता फोन आईफोन 17e लॉन्च कर दिया है। आईफोन 16e के मुकाबले इसमें कई अपडेट्स किए गए हैं, जैसे- लेटेस्ट A19 चिप-सेट, 48MP फ्यूजन कैमरा, बेहतर मजबूती, मैग्सेफ सपोर्ट और बेस वैरिएंट में स्टोरेज को दोगुना यानी 256GB कर दिया गया है। इसके अलावा, कंपनी ने अपडेटेड M4 प्रोसेसर के साथ नया आईपैड एयर भी पेश किया, जो पिछली जनरेशन के मुकाबले 30% फास्ट है। आईफोन 17e और आईपैड एयर की शुरुआती कीमत 64,900 रुपए है। आईफोन 17e की शुरुआती कीमत पिछले मॉडल के मुकाबले ज्यादा है, जिसकी वजह संभवतः मेमोरी चिप्स की कमी है। पिछले साल आईफोन 16e को 59,900 रुपए में लॉन्च किया गया था। हालांकि, 16e के बेस मॉडल में 128GB स्टोरेज थी, जबकि 17e के बेस मॉडल में 256GB मैमोरी दी गई है। दोनों डिवाइस को 4 मार्च शाम 7:45 बजे से बुक कर सकेंगे, जबकि सेल 11 मार्च से शुरू होगी। डिजाइन: 'मैट' फिनिश के साथ सिरेमिक शील्ड 2 की सेफ्टी आईफोन 17e के फ्रंट में सिरेमिक शील्ड 2 का इस्तेमाल किया गया है, जो स्क्रेच से 3 गुना ज्यादा सुरक्षा देता है। बैक पैनल पर मैट टेक्स्चर दिया गया है, जिससे हाथ में पकड़ने पर यह फिसलता नहीं है। इसमें पुराने मॉडल की तरह ही 'नॉच' डिजाइन बरकरार है। फोन में शॉर्टकट्स के लिए खास एक्शन बटन दिया गया है। चार्जिंग के लिए इसमें USB टाइप-C पोर्ट मिलता है। यह 3 कलर- सॉफ्ट पिंक, व्हाइट और ब्लैक में उपलब्ध होगा। स्पेसिफिकेशन्स: 48MP कैमरा और एप्पल इंटेलिजेंस डिजाइन: स्लिम प्रोफाइल और डेस्कटॉप जैसा एक्सपीरियंस मिलेगा एप्पल ने आईपेड एयर के सिग्नेचर स्लिम और लाइटवेट डिजाइन को बरकरार रखा है। यह प्रीमियम एल्युमिनियम मटेरियल से बना है, जो हाथ में पकड़ने पर काफी प्रीमियम और मजबूत फील देता है। यह 11 और 13 इंच के दो साइज में आता है। इसमें सुपर रेटिना डिस्प्ले के साथ पतले बेजल्स दिए गए हैं। इसमें फास्ट डेटा ट्रांसफर और चार्जिंग के लिए USB टाइप-C पोर्ट है। यह नए 'एपल पेंसिल प्रो' और मैजिक कीबोर्ड को सपोर्ट करता है, जिससे इसे मिनी लैपटॉप की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। स्पेसिफिकेशन्स: M4 चिपसेट और 12GB की बड़ी मेमोरी ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें… सबसे पतला आईफोन लॉन्च, कीमत ₹1.20 लाख: आईफोन-17 सीरीज में 4 फोन आएंगे, हार्ट रेट बताने वाला पहला एयरपॉड भी लॉन्च एपल ने अपने सालाना इवेंट 'ऑव ड्रॉपिंग' में अपना सबसे पतला आईफोन लॉन्च किया। आईफोन एयर 5.6mm पतला है। इसकी शुरुआती कीमत 1.20 लाख रुपए है। इवेंट में आईफोन 17, आईफोन 17 प्रो और आईफोन 17 प्रो मैक्स भी लॉन्च किया गया है। प्रो वैरिएंट में अब तक की सबसे बड़ी आईफोन बैटरी मिलेगी। 17 सीरीज की शुरुआती कीमत 82,900 रुपए है। लेकिन इस बार 128 GB के स्टोरेज ऑप्शन को हटा दिया गया है। शुरुआत 256 GB के स्टोरेज से की गई है। पूरी खबर पढ़ें…
महिंद्रा एंड महिंद्रा ने आज 2 मार्च को अपनी पॉपुलर इलेक्ट्रिक एसयूवी XEV 9e का नया सिनेलक्स एडिशन भारत में लॉन्च किया है। कंपनी ने इसमें 79kWh का बड़ा बैटरी पैक दिया है, जो लंबी फुल चार्च पर 500km की रेंज देता है। कार की एक्स-शोरूम कीमत ₹29.35 लाख है और इसकी बुकिंग शुरू कर दी गई है। 10 मार्च 2026 से डिलीवरी शुरू होगी। नया स्पेशल एडिशन 59kWh पैक (₹28.65 लाख) और टॉप-एंड 79kWh पैक (₹31.25 लाख) के बीच रखा गया है। कार चार्ज करने के लिए ग्राहकों को 50 हजार रुपए कीमत वाला 7.2kW AC चार्जर या 75 हजार रुपए कीमत वाला 11kW AC चार्जर अलग से खरीद सकते हैं। महिंद्रा एक्सईवी 9ई का मुकाबला टाटा हैरियर EV और BYD एटो 3 से है।
अमेरिका ने ईरान पर किए गए हवाई हमले में उसी AI कंपनी एन्थ्रोपिक के टूल्स का इस्तेमाल किया है, जिस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सरकारी बैन लगाया था। अमेरिकी मीडिया हाउस द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने पुष्टि की है। मिडल ईस्ट में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) समेत दुनिया भर के कमांड एन्थ्रोपिक के 'क्लॉड' एआई टूल का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, सेंटकॉम ने ईरान के खिलाफ चल रहे मौजूदा ऑपरेशन में इस्तेमाल हो रहे सिस्टम्स पर कमेंट करने से इनकार कर दिया। टारगेट पहचानने के लिए इस्तेमाल हुआ क्लॉड AI जानकारों का कहना है कि बैन के बावजूद कमांड इस टूल का इस्तेमाल इंटेलिजेंस असेसमेंट, टारगेट की पहचान और युद्ध के हालातों को समझने (सिमुलेशन) के लिए कर रही है। इससे पता चलता है कि सैन्य ऑपरेशन्स में ये एआई टूल्स कितनी गहराई तक शामिल हो चुके हैं। रक्षा विभाग ने कंपनी को बताया सुरक्षा के लिए खतरा पेंटागन में AI मॉडल्स के इस्तेमाल को लेकर सरकार और एन्थ्रोपिक के बीच महीनों से विवाद चल रहा है। ट्रम्प ने शुक्रवार को ही सरकारी एजेंसियों को कंपनी के साथ काम बंद करने का आदेश दिया था और रक्षा विभाग ने इसे सुरक्षा के लिए खतरा और अपनी सप्लाई चेन के लिए जोखिम बताया था। कंपनी बोली- AI से जान लेना गलत यह विवाद तब बढ़ा जब एन्थ्रोपिक ने अमेरिकी रक्षा विभाग को 'बिना किसी शर्त' के अपने टूल का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी। इस वजह से उसका कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल कर दिया रक्षा विभाग चाहता था कि एक बार कॉन्ट्रैक्ट होने के बाद वे इस टूल को 'सभी कानूनी स्थितियों' में इस्तेमाल कर सकें। इसमें खुफिया जानकारी जुटाने से लेकर हमले के टारगेट तय करना शामिल है। यानी, सेना एआई को एक 'हथियार' की तरह इस्तेमाल करना चाहती है। लेकिन एन्थ्रोपिक 'सेफ एआई' पर जोर देती है। उसने अपने कॉन्ट्रैक्ट में यह शर्त रखने की कोशिश की कि उसके AI टूल का इस्तेमाल घातक सैन्य ऑपरेशन्स या सीधे तौर पर युद्ध में जान लेने के लिए न हो। मस्क की xAI और ओपन एआई से समझौता ट्रम्प प्रशासन ने कहा है कि सेना से इस तकनीक को पूरी तरह हटाने में कम से कम 6 महीने का समय लगेगा। यह प्रक्रिया काफी जटिल है क्योंकि डेटा-माइनिंग फर्म पालान्टिर जैसे पार्टनर्स भी इसी तकनीक के जरिए सैन्य डेटा प्रोसेस करते हैं। विकल्प के तौर पर पेंटागन ने अब इलॉन मस्क की कंपनी xAI और OpenAI के साथ क्लासिफाइड सेटिंग्स में काम करने के लिए समझौते किए हैं। वेनेजुएला ऑपरेशन में भी हुआ था क्लॉड का इस्तेमाल क्लॉड AI का इस्तेमाल वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने जैसे बड़े सैन्य ऑपरेशन्स में भी हुआ है। यह पहली बार था जब एआई का इस्तेमाल इतने बड़े और गुप्त ऑपरेशन में किया गया था। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट में ये जानकारी सामने आई थी। क्या है एनट्रॉपिक का 'क्लॉड' AI? क्लॉड एक एडवांस AI चैटबॉट है, जो टेक्स्ट जनरेशन, डेटा एनालिसिस और कोडिंग जैसे कामों में माहिर है। इसे ओपन AI के पूर्व एग्जीक्यूटिव्स ने 2021 में शुरू किया था। हाल ही में एक फंडिंग राउंड के बाद एंथ्रोपिक की वैल्यूएशन 380 बिलियन डॉलर यानी, करीब 34 लाख करोड़ रुपए हो गई है। नॉलेज पार्ट: युद्ध में कैसे मदद करता है AI? मिलिट्री ऑपरेशंस में AI का इस्तेमाल मुख्य रूप से इन कामों के लिए किया जाता है:
दुनिया के सबसे अमीर शख्स इलॉन मस्क अब एक ऐसे भविष्य की स्क्रिप्ट लिख रहे हैं, जहां काम शब्द डिक्शनरी से बाहर हो सकता है। मस्क का नया मंत्र है सस्टेनेबल अबंडेंस। यह एक ऐसी दुनिया का खाका है जहां रोबोटिक सेना इंसानों की हर जरूरत पूरी करेगी, पैसा बेमानी हो जाएगा और श्रम का वजूद खत्म हो जाएगा। नवंबर में टेस्ला की शेयरधारक बैठक में मस्क ने एक साइनबोर्ड के सामने खड़े होकर ऐलान किया कि एआई और रोबोटिक्स के जरिये हम इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनकी इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला अब ‘ऑप्टिमस’ जैसे इंसानी रोबोट बना रही है; ‘स्पेसएक्स’ कक्षीय डेटा केंद्रों को बढ़ावा दे रही है। एआई स्टार्टअप एक्सएआई को लेकर उनका दावा है कि वह मानवता की लगभग सभी समस्याओं को हल कर देगी। ‘मस्क का दावा है कि 12 से 18 महीनों के भीतर यह युग शुरू हो जाएगा और अरबों रोबोट होंगे जो इंसानों की हर जरूरत को पूरा करेंगे। 54 वर्षीय मस्क का यह नया नारा उनके एक दशक पुराने रुख से उलट है, जब उन्होंने चेतावनी दी थी कि बेकाबू एआई मानव जाति को नष्ट कर सकती है। अब यह अवधारणा उनके व्यापार विस्तार के लिए एक मिशन बन गई है। टेस्ला की चेयरपर्सन रॉबिन डेनहोम ने बताया कि मस्क का सस्टेनेबल अबंडेंस का लक्ष्य उस भारी-भरकम पे-पैकेज के पीछे का मुख्य तर्क था, जो उन्हें दुनिया का पहला ट्रिलियनेयर बना सकता है। टेस्ला एक ऐसी दुनिया बनाना चाहती है जहां वस्तुओं और सेवाओं का प्रचुर मात्रा में उत्पादन हो सके। यह अर्थव्यवस्थाओं की उत्पादकता बढ़ाने के बारे में है।’ मस्क के इसे सपने के आलोचक कहते हैं कि ये रोबोट और स्पेस डेटा सेंटर हकीकत से कोसों दूर हैं, लेकिन मस्क ने दुनिया को एक ऐसी बहस में जरूर झोंक दिया है जहां काम, पैसा और वजूद के मायने बदलने वाले हैं। 1800 के दशक में कार्ल मार्क्स ने सामूहिक संपत्ति का सपना देखा था और 1930 में अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड कीन्स ने भविष्यवाणी की थी कि भविष्य में इंसान हर हफ्ते सिर्फ 15 घंटे ही काम करेंगे। मस्क के मित्र और एक्सप्राइज फाउंडेशन के फाउंडर पीटर डियामांडिस कहते हैं कि मस्क का लक्ष्य मानवता के लिए ‘बेसलाइन’ तैयार करना है। अगर मंगल पर कोई मल्टी-ट्रिलियनेयर रह रहा है और पृथ्वी पर 8 अरब लोगों का जीवन स्तर शानदार है, तो कोई समस्या नहीं है। यदि काम नहीं होगा, तो सामाजिक ढांचा ढह जाएगा मस्क के इस जादुई विजन को हर कोई सच नहीं मान रहा है। आलोचकों का तर्क है कि यदि काम करने की आवश्यकता खत्म हो जाती है, तो समाज का ढांचा ढह जाएगा। शिकागो विश्वविद्यालय के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रोफेसर एलेक्स इमास ने सवाल उठाया कि मस्क ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह तकनीक से पैदा हुई इस संपत्ति का बंटवारा कैसे करेंगे। मालिक कौन होगा? अगर नीतियां नहीं बदलीं, तो हम स्वर्ग में नहीं, बल्कि एक भयावह नर्क में होंगे, जहां मांग पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।’
ब्रिटिश टू-व्हीलर दिग्गज ट्रायम्फ और भारतीय कंपनी बजाज ऑटो मिलकर भारत में अपनी सबसे सस्ती मोटरसाइकिल रेंज उतारने की तैयारी में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रायम्फ की नई 350cc रेंज यानी सीरीज को अप्रैल में लॉन्च किया जा सकता है। यह नई सीरीज कंपनी की अभी बिक रही स्पीड 400 और स्क्रैम्बलर 400X के नीचे प्लेस की जाएगी। जिससे प्रीमियम बाइक्स के शौकीनों को कम बजट में बेहतर ऑप्शन मिल सकेंगे। बजाज के चाकन प्लांट में प्रोडक्शन होगा ट्रायम्फ की इन नई बाइक्स का प्रोडक्शन बजाज ऑटो के पुणे स्थित चाकन प्लांट में किया जाएगा। कंपनी का लक्ष्य भारत में अपना मार्केट शेयर बढ़ाना है। वर्तमान में ट्रायम्फ की 400cc रेंज को भारतीय बाजार में काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। जिसके बाद अब कंपनी वॉल्यूम सेगमेंट (ज्यादा बिक्री वाले सेगमेंट) पर फोकस कर रही है। बजाज-ट्रायम्फ की पार्टनरशिप का मकसद प्रीमियम इंजीनियरिंग को किफायती दाम पर अवेलेबल कराना है। इंजन और परफॉर्मेंस, 350cc का नया प्लेटफॉर्म नई बाइक्स में बिल्कुल नया 350cc का सिंगल-सिलेंडर लिक्विड-कूल्ड इंजन मिल सकता है। हालांकि इसके पावर आउटपुट की जानकारी अभी ऑफिशियल तौर पर सामने नहीं आई है। हालांकि, माना जा रहा है कि यह 30-35 BHP की पावर जनरेट कर सकता है। इसे 6-स्पीड गियरबॉक्स के साथ जोड़ा जा सकता है। कंपनी इसे सिटी राइडिंग और हाईवे क्रूजिंग दोनों के लिहाज से ट्यून करेगी। स्पीड और स्क्रैम्बलर लुक बरकरार रहेगा सोर्स के मुताबिक, 350cc रेंज में भी दो मॉडल देखने को मिल सकते हैं- एक 'स्पीड' (स्ट्रीट नेकेड) और दूसरा 'स्क्रैम्बलर'। इनका लुक काफी हद तक मौजूदा 400cc मॉडल्स जैसा ही होगा। इनमें राउंड एलईडी हेडलाइट, टियर-ड्रॉप फ्यूल टैंक और प्रीमियम फिनिशिंग देखने को मिलेगी। हालांकि, कीमत कम रखने के लिए कंपनी कुछ कंपोनेंट्स जैसे टायर और सस्पेंशन सेटअप में बदलाव कर सकती है। रॉयल एनफील्ड से मुकाबला होगा भारत में 350cc सेगमेंट पर फिलहाल रॉयल एनफील्ड (क्लासिक 350, हंटर और बुलेट) का दबदबा है। ट्रायम्फ की नई 350cc बाइक सीधे तौर पर हंटर 350 और क्लासिक 350 को चुनौती देगी। इसके अलावा होंडा की CB350 और जावा-येज्दी की बाइक्स से भी इसका कड़ा मुकाबला होगा। ट्रायम्फ की ब्रांड वैल्यू इस रेस में उसे बढ़त दिला सकती है। कितनी हो सकती है कीमत? कीमत की बात करें तो ट्रायम्फ इसे काफी एग्रेसिव रख सकती है। अनुमान है कि नई 350cc रेंज की एक्स-शोरूम कीमत 1.90 लाख रुपए से 2.10 लाख रुपए के बीच शुरू हो सकती है। मौजूदा स्पीड 400 की कीमत लगभग 2.40 लाख रुपए है। कम कीमत होने से यह उन युवाओं के लिए पहली पसंद बन सकती है जो प्रीमियम ब्रांड की ओर शिफ्ट होना चाहते हैं। अगले साल का प्लान, शोरूम्स की संख्या बढ़ेगी लॉन्चिंग के साथ ही ट्रायम्फ और बजाज मिलकर अपने डीलरशिप नेटवर्क का भी विस्तार कर रहे हैं। कंपनी का लक्ष्य अगले साल तक भारत के 100 से ज्यादा शहरों में अपनी पहुंच बनाना है। अभी कई छोटे शहरों में ट्रायम्फ के शोरूम नहीं हैं, जिससे सर्विस और सेल्स में दिक्कत आती है। नई सस्ती रेंज आने के बाद कंपनी टायर-2 और टायर-3 शहरों पर ज्यादा फोकस करेगी। ये खबर भी पढ़ें… 1 अप्रैल से 20% एथेनॉल मिक्स पेट्रोल अनिवार्य: तेल कंपनियों को E20 पेट्रोल बेचना होगा, पुरानी गाड़ियों के माइलेज पर असर संभव केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल से देशभर में E20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य कर दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके अनुसार, अब सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेल कंपनियों को 20% एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल ही सप्लाई करना होगा। हालांकि, देश के कई हिस्सों में E20 (20% इथेनॉल मिक्स) पेट्रोल की शुरुआत 2023 से ही हो चुकी है, लेकिन ये ऑप्शनल था। सरकार ने हाल ही में एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य 2030 से घटाकर 2025-26 कर दिया था, जिसे अब पूर्ण रूप से लागू किया जा रहा है।
गूगल ने अपना अब तक का सबसे तेज और एडवांस AI इमेज जनरेशन मॉडल नैनो बनाना 2 लॉन्च कर दिया है। CEO सुंदर पिचाई ने इसे गूगल का 'बेस्ट इमेज मॉडल' बताया है। यह नया टूल कल्पना को हाई-क्वालिटी तस्वीर में बदल सकता है। गूगल सर्च की मदद से रियल-टाइम जानकारी का इस्तेमाल कर सटीक और असली दिखने वाली इमेज भी तैयार करता है। यह साधारण AI टूल्स की तुलना में ज्यादा तेजी से और ज्यादा बारीकी के साथ रिजल्ट देता है। आइए जानते हैं कि यह टूल कैसे आपके काम आ सकता है… 1. पुरानी फोटो को नया लुक देना: चेहरा वही, स्टाइल नया अक्सर हम अपनी किसी पुरानी फोटो का बैकग्राउंड बदलना चाहते हैं, लेकिन चेहरे में बदलाव आने का डर रहता है। नैनो बनाना 2 की 'फेस कंसिस्टेंसी' खूबी की वजह से अब आप अपनी फोटो में चेहरा वही रखकर सिर्फ कपड़े, हेयरस्टाइल या बैकग्राउंड सटीकता से बदल सकते हैं। कैसे करें: बस फोटो अपलोड करें और कहें- मेरा चेहरा यही रहने दें, लेकिन मुझे पहाड़ों के बैकग्राउंड में फॉर्मल सूट पहने हुए दिखाएं। यह तुरंत नई इमेज जनरेट कर देगा। 2. बच्चों की पढ़ाई और प्रोजेक्ट्स में मदद: अब खुद बनाएं इन्फोग्राफिक्स इस टूल की समझ इतनी गहरी है कि यह जटिल ग्राफिक्स भी बना सकता है। जैसे कई बार स्कूल प्रोजेक्ट्स के लिए अक्सर हमें इंटरनेट पर सटीक डायग्राम नहीं मिलते। कई बार ये अपनी भाषा में भी नहीं मिलते। इस टूल की मदद से आप अपनी पसंद के भाषा में 4K इन्फोग्राफिक बनवा सकते हैं। ये इंग्लिश ग्राफिक को हिंदी में भी बदल सकते हैं। कैसे करें: जेमिनी एप में जाकर बोलें- सौर मंडल का एक 4K चार्ट बनाएं जिसमें हर ग्रह का नाम हिंदी में लिखा हो। यह तुरंत आपको एक फ्रेश और ओरिजिनल इमेज बना कर दे देगा। इसे निर्देश दें कि वॉटर साइकिल का एक 4K इन्फोग्राफिक बनाओ जिसमें हिंदी में साफ लेबल लिखे हों। यह पढ़ने लायक टेक्स्ट और रियलिस्टिक लाइटिंग के साथ इमेज तैयार कर देगा। 3. दुकानदारों और बिजनेस के लिए फ्री ग्राफिक डिजाइनर अगर आप अपना छोटा बिजनेस चलाते हैं और सोशल मीडिया पर प्रोडक्ट की फोटो डालनी है, तो अब महंगे डिजाइनर की जरूरत नहीं है। नैनो बनाने आपके लिए ये काम तेजी से कर देगा। कैसे करें: अपने प्रोडक्ट की फोटो खींचें और AI को निर्देश दें- इस जूते की फोटो को एक स्टाइलिश शोरूम के बैकग्राउंड में रखें और ऊपर '50% डिस्काउंट' लिख दें। 4. वॉट्सएप और सोशल मीडिया के लिए यूनिक स्टिकर और डीपी आप ऐसे मीम्स या स्टिकर्स बना सकते हैं जो इंटरनेट पर कहीं और नहीं मिलेंगे। कैसे करें: जेमिनी एप में जाकर बोलें- एक चश्मा पहने हुए कुत्ते की फनी फोटो बनाओ जो समोसा खा रहा हो। यह सेकंड्स में आपको इमेज दे देगा। गूगल के इन एप्स में मिलेगा नैनो बनाना 2 का सपोर्ट गूगल नैनो बनाने को अपने पूरे इकोसिस्टम में जोड़ रहा है। यूजर्स इसका इस्तेमाल जेमिनी एप , गूगल सर्च के AI मोड, गूगल लेंस और गूगल के 'फ्लो' वीडियो टूल में कर सकेंगे। इससे ग्राफिक डिजाइनिंग और फोटो एडिटिंग का काम हर किसी के लिए आसान हो जाएगा। अगस्त 2025 में शुरू हुआ था नैनो बनाना का सफर

