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गूगल जून में रोलआउट करेगा एंड्रॉइड-17, ‘गूगलबुक’ भी लॉन्च होगा:बड़े बदलाव; स्कैम कॉल खुद ब्लॉक होंगी, स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल मिलेगा

गूगल ने इस हफ्ते आयोजित ‘एंड्रॉइड शो 2026’ में कई बड़े बदलावों का ऐलान किया। कंपनी अब एंड्रॉइड को एआई आधारित पर्सनल असिस्टेंट प्लेटफॉर्म में बदलना चाहती है। नए अपडेट्स में जेमिनी एआई, गूगल क्रोम में ऑटोमेशन और एआई कीबोर्ड जैसे नए फीचर्स आएंगे। इसके साथ ही क्रोमबुक लैपटॉप के बाद अब कंपनी नया गूगलबुक भी पेश करेगी। कंपनी के मुताबिक जून 2026 तक एंड्रॉइड-17 रोलआउट होगा, लेकिन अन्य एआई फीचर्स पूरे साल अलग-अलग समय पर आएंगे। गूगल इन मोर्चों पर कर रहा काम फ्रॉड - फर्जी कॉल खुद पहचानकर काट देगा स्कैमर्स अक्सर बैंक कर्मचारी बनकर कॉल करते हैं और लोगों से ओटीपी या अकाउंट डिटेल मांगकर ठगते हैं। अब एंड्रॉइड का नया ‘वेरिफाइड फाइनेंशियल कॉल’ फीचर्स आ रहा है। अगर फोन में बैंक का आधिकारिक एप है और कोई फेक कॉल आए, तो सिस्टम खुद जांच करेगा कि बैंक सच में कॉल कर रहा है या नहीं। अगर बैंक से कॉल नहीं की गई, तो एआई की मदद से आपका फोन कॉल कट कर देगा। स्क्रॉलिंग - रील्स की लत कम करेगा नया फीचर रील्स की लत लगी है, तो ‘पॉज पॉइंट’ फीचर भी आ रहा है। इसमें ध्यान भटकाने वाले एप्स चुने जा सकेंगे। ये एप्स तुरंत नहीं खुलेंगे, इसमें 10 सेकंड का ‘पॉज’ रहेगा। इन 10 सेकंड में यूजर उस एप के इस्तेमाल की समय सीमा तय कर सकेगा, जैसे- सिर्फ 5 मिनट चलाने का विकल्प चुन सकेंगे। गूगलबुक- एंड्रॉइड वाला नया लैपटॉप लाएगा गूगल अब क्रोमबुक के बाद गूगलबुक नाम की नई श्रेणी पर काम कर रहा है। यह एंड्रॉइड आधारित लैपटॉप होगा, विंडोज जैसा इंटरफेस जरूर देगा, पर एंड्रॉइड एप्स विंडो मोड में चलेंगे। इसमें जेमिनी एआई, मल्टीकलर एलईडी स्ट्रिप, हल्का डिजाइन… और लंबी बैटरी लाइफ जैसे फीचर्स होंगे। एआई - जेमिनी बनेगा पर्सनल असिस्टेंट जेमिनी फोन पर आपके कई काम खुद कर सकेगा। अगर आप खाना ऑर्डर करना चाहते हैं, तो यह आपकी पसंद, लोकेशन और बजट के हिसाब से रेस्टोरेंट ढूंढ सकेगा, खाना चुन सकेगा और ऑर्डर प्रक्रिया पूरी करने में मदद करेगा। हालांकि सुरक्षा के लिए भुगतान का अंतिम चरण यूजर को ही पूरा करना होगा। टाइपिंग - अब बोलकर लिखना आसान होगा गूगल अपने की-बोर्ड ‘गूगल बोर्ड’ में रैमब्लर नाम का नया एआई वॉइस टाइपिंग फीचर ला रहा है। यह फीचर बिखरी हुई बातों को व्यवस्थित टेक्स्ट में बदलेगा। आपकी बात समझेगा और उसके हिसाब से टाइप करेगा। यह लगभग हर एंड्रॉइड एप में काम करेगा जहां टाइपिंग की सुविधा है।

दैनिक भास्कर 16 May 2026 4:23 pm

स्मार्टफोन की लाइफ लंबी करने के पांच टिप्स:100% चार्जिंग और फुल स्टोरेज से घटती है फोन की लाइफ, अपडेट्स भी जरूरी

हर साल टेक कंपनियां नए स्मार्टफोन लॉन्च करती हैं। यूजर्स को अपग्रेड करने के लिए आकर्षित किया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि अगर आपका मौजूदा फोन ठीक चल रहा है, तो क्या हर दो-तीन साल में नया फोन लेना जरूरी है? ज्यादातर लोग हर 2-3 साल में फोन बदल देते हैं, जबकि सही देखभाल की जाए तो स्मार्टफोन कहीं ज्यादा समय तक चल सकता है। आज ऐसे 5 तरीके जानें, जिससे फोन की लाइफ बढ़ सकती है। चार्जिंग से स्टोरेज तक... ये टिप्स अपनाएं 1. बार-बार फोन को ‘ओवरहीटिंग’ से बचाएं एपल, गूगल और सैमसंग जैसी कंपनियां सलाह देती हैं कि फोन को बहुत ज्यादा गर्म या बहुत ज्यादा ठंडे तापमान में इस्तेमाल न करें। 35 डिग्री से ज्यादा गर्मी बैटरी को नुकसान पहुंचाती है। धूप में फोन छोड़ना, कार की धूप में ज्यादा गर्म होने देना, लगातार ओवरहीटिंग बैटरी लाइफ कम कर सकता है। 2. हर बार 100% चार्ज करना जरूरी नहीं फोन को रोज 100% तक चार्ज करना बैटरी की उम्र घटा सकता है। अगर फोन की बैटरी 20% से 80% के बीच रखी जाए, तो उसकी लाइफ बढ़ सकती है। आईफोन व सैमसंग जैसे फोन ऑप्टिमाइज्ड चार्जिंग फीचर देते हैं, जो बैटरी को जरूरत से ज्यादा चार्ज होने से बचाते हैं। 3. बैटरी बचाने के लिए ये 6 सेटिंग्स बदलें अगर बैटरी जल्दी खत्म होती है, तो कुछ छोटे बदलाव मदद कर सकते हैं।- डार्क मोड इस्तेमाल करें - ऑटो ब्राइटनेस चालू रखें -स्क्रीन टाइमआउट 60 सेकेंड से कम - लो पावर मोड ऑन करें -जरूरत न हो तो जीपीएस आधारित एप्स कम ही इस्तेमाल करें 4. फोन में 20% तक स्टोरेज खाली रखें फोन की स्टोरेज लगभग भर जाने पर उसका परफॉर्मेंस भी धीमा होने लगता है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि आपके फोन में कम से कम 10% और आदर्श रूप में 20% स्टोरेज खाली होना चाहिए। अगर फोन की कुल स्टोरेज 128 जीबी है तो 24 जीबी तक फोन में खाली स्पेस होना परफॉर्मेंस तेज करता है। 5. सॉफ्टवेयर अपडेट्स को नजरअंदाज न करें अपडेट्स सिक्योरिटी के लिए बेहद जरूरी होते हैं। फोन को नए सिक्योरिटी अपडेट्स न मिले तो… - हैकिंग रिस्क बढ़ सकता है - एप्स ठीक से काम नहीं करते - प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है -एपल लगभग हर 4-6 हफ्ते में सिक्योरिटी अपडेट्स देता है, इन्हें जरूर अपडेट रखना चाहिए।

दैनिक भास्कर 16 May 2026 4:13 pm

टर्बो 5 नाम से आएगी रेडमी की गेमिंग स्मार्टफोन सीरीज:मीडियाटेक डाइमेंसिटी 8500-अल्ट्रा चिपसेट और 100W फास्ट चार्जिंग जैसे फीचर्स मिलेंगे

शाओमी का सब-ब्रांड रेडमी अपनी परफॉर्मेंस-ओरिएंटेड 'टर्बो' सीरीज भारत में पहली बार लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसका टीजर जारी किया है। फोन मीडियाटेक डाइमेंसिटी 8500-अल्ट्रा चिपसेट के साथ आएगा। ये फोन चीन में लॉन्च हो चुका है, जहां इसकी शुरुआती कीमत युआन1,999 (करीब ₹28,200) है। भारत में इसकी कीमत 45 हजार रुपए के आसपास रह सकती है और इसे 5 जून को पेश किया जा सकता है। यह वनप्लस नॉर्ड 6 और वीवो V70 FE जैसे स्मार्टफोन्स को टक्कर देगा। मीडियाटेक डाइमेंसिटी 8500-अल्ट्रा चिपसेट से होगा लैस परफॉर्मेंस के लिए फोन में मीडियाटेक डाइमेंसिटी 8500-अल्ट्रा चिपसेट दिया गया है। यह फोन खास तौर पर उन यूजर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जो गेमिंग और हैवी टास्क करते हैं। फोन में बेहतरीन थर्मल स्टेबिलिटी और गेमिंग परफॉर्मेंस मिलने की उम्मीद है। मजबूती के लिए मिली है IP69K रेटिंग फोन में मेटल फ्रेम के साथ ग्लास बैक दिया गया है। ड्यूरेबिलिटी के मामले में भी यह फोन काफी एडवांस है। इसे धूल और पानी से बचाव के लिए IP66, IP68 और IP69K जैसी हाई रेटिंग्स मिली हैं। स्टोरेज की बात करें तो इसमें 16GB तक LPDDR5X रैम और 512GB तक की UFS 4.1 इंटरनल स्टोरेज दी गई है। 7560mAh बैटरी और 100W फास्ट चार्जिंग रेडमी टर्बो 5 की सबसे बड़ी खूबी इसकी 7560mAh की सिलिकॉन-कार्बन बैटरी है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बैटरी क्षमता 9000mAh तक भी हो सकती है। फोन को चार्ज करने के लिए 100W की वायर्ड फास्ट चार्जिंग और 27W की रिवर्स चार्जिंग का सपोर्ट मिलेगा। 1.5K एमोलेड डिस्प्ले और 50MP कैमरा रेडमी टर्बो 5 में 6.59-इंच का 1.5K एमोलेड डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। फोटोग्राफी के लिए इसके बैक पैनल पर ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन (OIS) के साथ 50MP का सोनी IMX882 प्राइमरी कैमरा मिलता है।

दैनिक भास्कर 15 May 2026 10:48 pm

सब्सक्रिप्शन का ‘चक्रव्यूह’, नुकसान में ग्राहक:75% अमेरिकी कंपनियां सब्सक्रिप्शन मॉडल अपना चुकीं; एक क्लिक से शुरू सफर, हर महीने तनाव

ब्रुकलिन की 35 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर एलेनोर लुई की कहानी आज हर दूसरे शख्स की कहानी है। एलेनोर हर महीने ऐसे वीडियो गेम के लिए भुगतान कर रही हैं, जिसमें उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं है। वह कहती हैं, ‘मैंने 5 साल से यह गेम नहीं खेला है। पर समझ नहीं आ रहा कि इससे पीछा कैसे छुड़ाऊं...।’ यह तो सिर्फ बानगी है। अगर आप क्रेडिट कार्ड का स्टेटमेंट या यूपीआई की ऑटो-डेबिट हिस्ट्री खंगालेंगे, तो हैरान रह जाएंगे। वहां लंबी फेहरिस्त मिलेगी- स्ट्रीमिंग एप, क्लाउड स्टोरेज, ई-कॉमर्स साइट्स की प्राइम मेंबरशिप, जिम व फिटनेस एप्स और यहां तक कि आरओ मशीन भी... सबकुछ सब्सक्रिप्शन मॉडल पर आ गया है। और तो और अब ‘सब्सक्रिप्शन’ के अंदर भी एक और सब्सक्रिप्शन छिपा होता है। किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म का बेस पैक लीजिए, फिर उसमें बिना एड के कंटेंट या लाइव स्पोर्ट्स देखने के लिए ‘प्रीमियम’ का खर्च अलग। और यह याद रखने के लिए कि कौन सा रीचार्ज कब खत्म हो रहा है- सारे सब्सक्रिप्शन ट्रैक करने वाले एक और एप की मेंबरशिप लेनी पड़ती है। ब्रिटिश प्लेटफॉर्म ‘बैंगो’ की स्टडी के मुताबिक ब्रिटेन व अमेरिका में एक औसत व्यक्ति हर माह करीब 5,700 से 16 हजार रु. खर्च कर रहा है। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की रिपोर्ट के अनुसार सीधे ग्राहकों को सामान बेचने वाली 75% कंपनियां सब्सक्रिप्शन मॉडल अपना चुकी हैं। जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के प्रो. गिल एपल कहते हैं, कंपनियां चालाकी से चीजें अलग-अलग बेचती हैं। जैसे दही खरीदें पर चम्मच सब्सक्रिप्शन पर लें। सामान्य रूप से यह संभव नहीं है, पर एप्स की दुनिया में यह आम है। इसका सबसे पेचीदा पहलू ‘कैंसिलेशन’ है। कंपनियों के एप्स में ‘सब्सक्राइब’ करना आसान होता है, पर उसे बंद करना बेहद कठिन। इसकी प्रक्रिया लंबी और उलझी होती है या कस्टमर केयर पर लंबा इंतजार करना पड़ता है। प्रो. एपल कहते हैं,‘अगली बार जब किसी एप पर ‘स्टार्ट सब्सक्रिप्शन’ पर क्लिक करें, तो ध्यान रखें- शुरुआत आसान दिखेगी, पर हर महीने कटने वाला छोटा हिस्सा कंपनियों को ताकतवर और आपको लाचार बना देगा।’ स्टेटमेंट का ऑडिट करें, सालाना के बजाय मंथली प्लान बेहतर अमेरिकी फाइनेंस एक्सपर्ट व ‘आई विल टीच यू टू बी रिच’ के लेखक रमित सेठी के अनुसार, सब्सक्रिप्शन के चक्रव्यूह से निकलने का सबसे प्रभावी तरीका सचेत होकर खर्च करना है। अपने बैंक स्टेटमेंट का ‘निर्दयी ऑडिट’ करें, जिस सेवा का इस्तेमाल 30 दिनों में नहीं किया है, उसे बिना सोचे तुरंत कैंसल कर देना चाहिए। किसी भी ‘फ्री ट्रायल’ के लिए साइन-अप करते ही उसे तुरंत कैंसल कर दें, ताकि ट्रायल अवधि का फायदा भी उठा सकें और भविष्य में भूलवश कटने वाले पैसों से भी बच जाएं। सालाना डिस्काउंट के बजाय मासिक प्लान बेहतर है क्योंकि हर महीने जेब से कटने वाला पैसा आपको सचेत रखता है।

दैनिक भास्कर 15 May 2026 5:15 pm

देश में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों की लॉन्चिंग अटकी:ऑटो कंपनियां बोलीं- पहले फ्यूल मिले, तेल कंपनियों ने कहा- पहले गाड़ियां आएं

सरकार देश में पेट्रोल पर निर्भरता कम करने के लिए फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां तेजी से सड़क पर उतारना चाहती है, लेकिन यह प्लान अब ' पहले मुर्गी आई या अंडे' वाली उलझन में फंस गया है। ऑटोमोबाइल कंपनियां बड़े पैमाने पर तब तक हाई-एथेनॉल ब्लेंड वाली गाड़ियां बनाने को तैयार नहीं हैं, जब तक बाजार में पर्याप्त मात्रा में फ्लैक्स फ्यूल उपलब्ध न हो। वहीं, तेल कंपनियां तब तक E85 और E100 जैसे फ्यूल के स्टोरेज और सप्लाई में निवेश करने से कतरा रही हैं, जब तक सड़कों पर इन्हें चलाने वाली गाड़ियां न आ जाएं। अब सरकार दोनों पक्षों से बात कर रही है। क्या है फ्लेक्स-फ्यूल और भारत की जरूरत? फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां सामान्य गाड़ियों से अलग होती हैं, क्योंकि ये पेट्रोल के साथ किसी भी मात्रा में एथेनॉल-मिक्स पेट्रोल पर चल सकती हैं। अभी भारत में 20% एथेनॉल वाले (E20) पेट्रोल अनिवार्य है। सरकार अब E85 (85% एथेनॉल + 15% पेट्रोल) और E100 यानी 100% एथेनॉल जैसे फ्लैक्स फ्यूल की ओर बढ़ना चाहती है, ताकि कच्चे तेल के आयात को कम किया जा सके। एथेनॉल को गन्ने के रस, मक्का और सड़े हुए अनाज जैसे कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। ये फ्यूल पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करता है। 28 फरवरी को मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ा है। तेल कंपनियों की चिंता: एथेनॉल स्टॉक खराब होने का डर तेल कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि हाई-एथेनॉल ब्लेंड वाले फ्यूल को लंबे समय तक स्टोर करना जोखिम भरा है। अगर स्टॉक का उपयोग तुरंत नहीं हुआ, तो एथेनॉल नमी सोख लेता है, जिससे इंजन खराब या कोरोड (जंग लगना) हो सकता है। कंपनियों का मानना है कि जब तक मांग सुनिश्चित नहीं होती, तब तक स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना घाटे का सौदा है। ऑटो सेक्टर की मांग: फ्यूल सप्लाई पर मिले स्पष्टता दूसरी तरफ, ऑटो कंपनियों का तर्क है कि फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां सामान्य पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले महंगी होंगी। ऐसे में ग्राहक इन्हें तभी खरीदेंगे जब उन्हें देशभर में फ्यूल की उपलब्धता का भरोसा मिले। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक फ्यूल सप्लाई पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक इन गाड़ियों की डिमांड पैदा करना मुश्किल है। क्रूड इम्पोर्ट घटाना है सरकार की प्राथमिकता अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 90% तेल आयात करता है। हालांकि वित्त वर्ष 2026 में तेल आयात बिल पिछले साल के $137 बिलियन से घटकर $123 बिलियन रहा है, लेकिन सरकार इसे और कम करना चाहती है। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ऊर्जा संकट को देखते हुए वैकल्पिक ईंधन अपनाने पर जोर दिया है। एथेनॉल उत्पादकों के पास सरप्लस स्टॉक, सरकार से लगाई गुहार देश के एथेनॉल उत्पादक फिलहाल ओवरकैपेसिटी की समस्या से जूझ रहे हैं। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (Aida) के मुताबिक, उन्होंने करीब 20 अरब लीटर एथेनॉल बनाया है, जबकि सरकार के 20% ब्लेंडिंग टारगेट से केवल 11 अरब लीटर के ऑर्डर मिले हैं। एथेनॉल मेकर्स ने सरकार को पत्र लिखकर फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए इंसेंटिव और ऊंचे ब्लेंडिंग टारगेट की मांग की है। ब्राजील मॉडल से सीख और पायलट प्रोजेक्ट का सुझाव एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत को ब्राजील से सीखना चाहिए, जहां 2003 में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां आईं और आज वहां 90% से ज्यादा नई गाड़ियां इसी तकनीक पर चलती हैं। टेरी (TERI) की एसोसिएट डायरेक्टर संयुक्ता सुबुद्धि ने सुझाव दिया है कि एक छोटे लेवल पर 'पायलट प्रोजेक्ट' शुरू करना चाहिए। इससे तेल और ऑटो कंपनियों को जरूरी डेटा मिलेगा और बड़े स्तर पर रोलआउट करना आसान होगा। विदेशी मुद्रा की बचत: मंत्री ने गिनाए फायदे पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, साल 2025 में E20 ब्लेंडिंग की वजह से भारत ने लगभग $19.3 बिलियन (करीब 1.6 लाख करोड़ रुपए) की विदेशी मुद्रा बचाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों और ईंधन, दोनों पर खरीदारी की छूट देती है, तो इस डेडलॉक को तोड़ा जा सकता है। टोयोटा, मारुति इथेनॉल वाले वाहन पेश कर चुके टोयोटा और मारुति सुजुकी जैसी कंपनियां पहले ही हाई इथेनॉल ब्लेंड से चलने वाले वाहन पेश कर चुकी हैं। टीवीएस मोटर के चेयरमैन सुदर्शन वेणु ने भी संकेत दिए हैं कि कंपनी अपाचे सहित अपने कई सेगमेंट में इथेनॉल से चलने वाले वाहन लाने की योजना बना रही है। इन 4 मोर्चों पर चुनौतियों से निपटना होगा SP ग्लोबल के डायरेक्टर पुनीत गुप्ता का कहना है कि E85 को अपनाने के लिए बड़े इकोसिस्टम की जरूरत होगी। इसमें 4 मुख्य चुनौतियां हैं: माइलेज और कीमत बन सकती है रुकावट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तकनीक से ज्यादा बड़ी चुनौती फ्यूल की कीमत और माइलेज है। इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी कम होने के कारण फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का माइलेज 20 से 30% तक गिर सकता है। इस कमी की भरपाई के लिए फ्यूल की कीमत कम रखनी होगी ।

दैनिक भास्कर 14 May 2026 10:17 pm

मोटोरोला रेजर फोल्ड प्रीमियम स्मार्टफोन भारत में लॉन्च:50MP के तीन रियर कैमरे और 8.1 इंच 2K डिस्प्ले, शुरुआती कीमत ₹1.50 लाख

टेक कंपनी मोटोरोला ने भारत में अपना सबसे प्रीमियम फोल्डेबल स्मार्टफोन मोटोरोला रेजर फोल्ड लॉन्च किया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका 8.1-इंच का फोल्डेबल डिस्प्ले और लेटेस्ट स्नैपड्रैगन 8 जेन 5 प्रोसेसर है। फोन 50 मेगापिक्सल के तीन रियर कैमरे के साथ आया है। मोटोरोला ने इस रेजर फोल्ड को दो स्टोरेज वैरिएंट और एक स्पेशल एडिशन के साथ उतारा है। इसकी कीमत ₹1.50 लाख से शुरू होती है। मोटोरोला रेजर फोल्ड: वैरिएंट वाइस प्राइस लॉन्च ऑफर में 10,000 रुपए का इंस्टेंट बैंक डिस्काउंट या एक्सचेंज बोनस मिलेगा। साथ ही 18 महीने तक की नो-कॉस्ट EMI का भी ऑप्शन है। 20 जून तक फोन खरीदने वालों को 1 साल के लिए 'फ्री वन-टाइम स्क्रीन रिप्लेसमेंट' की सुविधा मिलेगी। फोन के प्री-ऑर्डर शुरू हो चुके हैं। डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी: फोल्ड होने पर भी काफी स्लिम मोटोरोला रेजर फोल्ड का डिजाइन काफी प्रीमियम और स्लीक है। ओपन होने पर इसकी मोटाई सिर्फ 4.55mm रह जाती है, जिससे यह पकड़ने में काफी हल्का महसूस होता है। स्पेसिफिकेशंस: डिस्प्ले से लेकर परफॉर्मेंस तक सब 'एक्सट्रीम' 1. डिस्प्ले: दो स्क्रीन और 120Hz रिफ्रेश रेट 2. कैमरा: ट्रिपल 50MP सेटअप 3. परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर 4. पावरबैकअप: 6000mAh की बड़ी बैटरी

दैनिक भास्कर 14 May 2026 4:47 pm

चीन में नया संघर्ष; रोबोट-ड्रोन से ड्राइवर खतरे में:रोबोटैक्सी और फूड-डिलीवरी ड्रोन तेजी से सड़कों पर कब्जा कर रहे, ट्रेंड का विरोध बढ़ा

चीन एआई और ऑटोमेशन के दुष्प्रभाव से जूझ रहा है। बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने का खतरा मंडरा रहा है। किंगदाओ जैसे शहर ऑटोमेशन और इंसानी संघर्ष की लैब बन गए हैं। महज एक साल पहले इस शहर में ऑटोनॉमस व्हीकल गिने-चुने थे। आज यह दुनिया के सबसे उन्नत शहरों में है। नियोलिक्स कंपनी ने यहां 1,200 मानवरहित डिलीवरी वैन उतारी है। दिसंबर तक इसे बढ़ाकर 4,000 करने का लक्ष्य है। यह शहर उस बदलाव का प्रतीक है, जहां रोबोटैक्सी और फूड-डिलीवरी ड्रोन तेजी से सड़कों पर कब्जा कर रहे हैं। गोल्डमैन सैक्स के आंकड़ों के अनुसार 2025 के अंत तक चीन की सड़कों पर 33,000 शॉर्ट-रेंज डिलीवरी वाहन थे। 2026 के अंत तक मानवरहित कैब 14,000 होने की उम्मीद है। 5 साल में, चीनी शहरों में 7 लाख रोबोटैक्सी होंगी। यह कुल राइड-हेलिंग सेवाओं का 12% होगी। दिग्गज एप मीटुआन का अनुमान है कि वह चीन की 10% क्विक फूड डिलीवरी ड्रोन के जरिए कर सकता है। पिछले वर्ष 6 हजार करोड़ डिलीवरी हुई थीं। इससे ड्राइवरों की रोजी-रोटी छिनने लगी है। ऐसे में चीनी नेतृत्व ने रणनीति बदली है। सरकार ने मार्च में जारी पंचवर्षीय आर्थिक योजना में स्पष्ट कहा कि बड़े पैमाने पर बेरोजगारी के जोखिम को रोकना होगा। अप्रैल में जारी एक मसौदा दस्तावेज में डेवलपर्स को सख्त हिदायत दी गई कि वे रोजगार खत्म करने के इरादे से एआई का इस्तेमाल न करें। रिसर्च फर्म टॉम ननलिस्ट के मुताबिक, चीनी एआई रेगुलेशन में रोजगार बचाने के लिए किया गया अनुरोध दुर्लभ है। इससे पहले नीतिगत स्तर पर मानव श्रम के संरक्षण का ऐसा उदाहरण नहीं मिलता। असली खतरा उन 2.2 करोड़ ड्राइवरों को है जो सवारियां ढोते हैं या ग्राहकों को पार्सल पहुंचाते हैं। तनाव कम करने के लिए मीटुआन जैसी कंपनियां ड्राइवरों को नई भूमिकाओं के लिए प्रशिक्षित कर रही हैं। शंघाई में ड्राइवरों को ड्रोन डिलीवरी संचालित करने, खाना लोड करने और कमांड सेंटर से निगरानी करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। वुहान में ऑटोमेशन कारों से जाम बढ़ रहा, ड्राइवर संगठित हो रहे चीन में ऑटोमेशन की राह आसान भी नहीं है। वुहान जैसे शहरों में, जहां बायडू लगभग 1,000 रोबोटैक्सी चला रहा है, तकनीकी खामियां ट्रैफिक जाम कर रही हैं। मार्च में दर्जनों टैक्सियां अचानक सड़क पर ‘फ्रीज’ हो गईं, जिससे यातायात ठप हो गया। इसके बाद सरकार ने रोबोटैक्सी के नए लाइसेंस पर रोक लगा दी है। इसके अलावा, ड्राइवर अब संगठित होकर विरोध कर रहे हैं। 2024 में वुहान में हुए प्रदर्शनों के बाद, अधिकारियों ने बायडू को अपने रोबोटैक्सी के आंकड़े सार्वजनिक करने से मना कर दिया।

दैनिक भास्कर 13 May 2026 4:27 pm

टाटा अल्ट्रोज iCNG AMT लॉन्च, कीमत ₹8.70 लाख से शुरू:ये CNG के साथ ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन वाली भारत में पहली प्रीमियम हैचबैक, 360° कैमरा जैसे फीचर्स

टाटा मोटर्स ने आज (12 मई) अपनी प्रीमियम हैचबैक अल्ट्रोज के CNG मॉडल को AMT (ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन) गियरबॉक्स के साथ भारत में लॉन्च किया है। इसी के साथ टाटा अल्ट्रोज iCNG भारत में CNG के साथ ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन वाली पहली प्रीमियम हैचबैक बन गई है। टाटा ने इसे 5 वैरिएंट्स- प्योर, प्योर S, क्रिएटिव, क्रिएटिव S और अकम्प्लिश्ड S में पेश किया है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 8.70 लाख रुपए है, जो टॉप मॉडल में ₹10.77 लाख तक जाती है। वैरिएंट के आधार पर AMT मॉडल्स मैनुअल से ₹55,000 से ₹60,000 तक महंगे हैं। मारुति बलेनो और टोयोटा ग्लाजा से मुकाबला अल्ट्रोज का सीधा मुकाबला मारुति बलेनो, टोयोटा ग्लाजा और हुंडई i20 से है। बलेनो और ग्लैंजा में भी CNG का ऑप्शन मिलता है, लेकिन इनमें सिर्फ मैनुअल गियरबॉक्स ही आता है। ऐसे में अल्ट्रोज उन ग्राहकों को अपनी ओर खींचेगी जो लग्जरी के साथ ऑटोमैटिक CNG कार ढूंढ रहे हैं। अल्ट्रोज कई सेगमेंट फर्स्ट फीचर के साथ आती है। एक्सटीरियर: ट्विन पॉड प्रोजेक्टर LED हेडलैंप्स और फ्लश डोर हैंडल्स अल्ट्रोज के डिजाइन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कंपनी ने इसके उसी आइकोनिक 'एरो-डायनेमिक' लुक को जारी रखा है इंटीरियर: बैज कलर थीम के साथ 10.25-इंच के दो डिस्प्ले टाटा अल्ट्रोज 2025 में डुअल-टोन डैशबोर्ड और बैज कलर की नई प्रीमियम अपहोल्स्ट्री दी गई है। कैबिन में अब नेक्सन की तरह 'टू-स्पोक इल्लुमिनेटेड स्टीयरिंग व्हील' और टच-बेस्ड AC कंट्रोल पैनल मिलता है। ऑटोमैटिक वैरिएंट में अपडेटेड गियर लिवर और डैशबोर्ड पर ग्लॉस ब्लैक फिनिश के साथ एम्बिएंट लाइटिंग दी गई है। कार में सेगमेंट फर्स्ट 10.25-इंच का फुली डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले दिया गया है, जिसमें मैप्स और कस्टमाइजेशन के विकल्प मिलते हैं। सेंटर में भी 10.25-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मौजूद है। इसके अलावा वॉइस कमांड सनरूफ, ऑटो AC, क्रूज कंट्रोल, एयर प्यूरीफायर, 8-स्पीकर साउंड सिस्टम और कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी जैसे फीचर्स भी शामिल हैं। परफॉर्मेंस: पेट्रोल इंजन के साथ CNG का भी ऑप्शन मिलेगा अपडेटेड मॉडल में मैकेनिकली कोई बदलाव नहीं किया गया है। टाटा अल्ट्रोज इस सेगमेंट की पहले की तरह एकमात्र हैचबैक है, जो 3 इंजन ऑप्शन- पेट्रोल, टर्बो पेट्रोल और डीजल ऑफर करती है। इसके अलावा, पेट्रोल इंजन के साथ CNG का ऑप्शन भी मिलता है। 1.2-लीटर का नेचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन मिलता है, जो 88hp की पावर और 113Nm का टॉर्क जनरेट करता है। गियरबॉक्स के लिए 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन और 6-स्पीड DCA (ऑटोमैटिक) का ऑप्शन मिलता है। यह इंजन रोजमर्रा की ड्राइविंग के लिए अच्छा है, लेकिन टर्बो की तुलना में कम पावरफुल है। इसके साथ कार 19.05-19.33 kmpl का माइलेज (ARAI सर्टिफाइड) देती है। DCA गियरबॉक्स, आमतौर पर प्रीमियम कारों में देखा जाता है, इस सेगमेंट में AMT या CVT की तुलना में ज्यादा रिफाइंड एक्सपीरियंस ऑफर करता है। 1.2-लीटर का नेचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन CNG में 73.5hp की पावर और 103Nm का टॉर्क जनरेट करता है। गियरबॉक्स के लिए इसमें 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ अब ऑटोमेटिक गियरबॉक्स भी मिलेगा। इसके साथ कार 26.2 km/kg का माइलेज (ARAI सर्टिफाइड) देती है। CNG वैरिएंट किफायती रनिंग कॉस्ट के लिए है, लेकिन पावर थोड़ी कम हो जाती है। अल्ट्रोज में 1.2-लीटर का टर्बो-पेट्रोल इंजन का ऑप्शन भी मिलता है, जिसमें 110hp की पावर और 170Nm का टॉर्क जनरेट करता है। गियरबॉक्स के लिए इसमें सिर्फ 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन मिलती है। इसके साथ कार 18.5kmpl का माइलेज (ARAI सर्टिफाइड) देती है। यह स्पोर्टी ड्राइविंग के लिए बेहतर है, खासकर हाईवे पर अच्छी पावर देता है। अल्ट्रोज में चौथा और आखिरी पावरट्रेन ऑप्शन 1.5-लीटर के डीजल इंजन का मिलता है, जो 90hp की पावर और 200Nm का टॉर्क जनरेट करता है। गियरबॉक्स के लिए इसमें सिर्फ 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन मिलती है। इसके साथ कार 23.64 - 25.11kmpl का माइलेज (ARAI सर्टिफाइड) देती है। डीजल इंजन कम rpm पर हाई टॉर्क देता है, जो लंबी दूरी की ड्राइविंग और माइलेज के लिए अच्छा ऑप्शन है। सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग्स के साथ 360-डिग्री कैमरा टाटा अल्ट्रोज भारत की सबसे सुरक्षित हैचबैक है, जिसे ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में 5-स्टार रेटिंग मिली है। यह इस सेगमेंट में एकमात्र हैचबैक है जो इस रेटिंग को हासिल करने में सफल रही है। इसकी मजबूत बिल्ड क्वालिटी और सेफ्टी फीचर्स इसे अलग बनाते हैं। सेफ्टी फीचर्स में शामिल हैं: CNG वेरिएंट में टैंक की सुरक्षा के लिए एडिशनल फीचर्स भी मिलते हैं, जो इस सेगमेंट में रेयर है। ड्यूल क्लच ऑटोमेटिक (DCA) गियरबॉक्स में भी सेफ्टी फीचर्स शामिल हैं, जैसे कि ड्राइव मोड में गलती से डोर खोलने पर गाड़ी का आगे न बढ़ना, जो नए ड्राइवर्स के लिए खास तौर पर उपयोगी है।

दैनिक भास्कर 12 May 2026 7:43 pm

होंडा की NX500 ई-क्लच ₹7.44 लाख में लॉन्च:गियर बदलते समय क्लच दबाने की जरूरत नहीं होगी; कावासाकी वर्सिस 650 से मुकाबला

होंडा ने अपनी ई-क्लच टेक्नोलॉजी के साथ नई NX500 को भारत में लॉन्च कर दिया है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत ₹7.44 लाख है। इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब राइडर को गियर बदलते समय क्लच लीवर का इस्तेमाल नहीं करना होगा। क्लच का मैनुअल कंट्रोल भी अपने ले सकते हैं होंडा की ई-क्लच तकनीक में इलेक्ट्रॉनिक एक्चुएटर्स का इस्तेमाल किया गया है। यह गियर शिफ्ट करते समय या बाइक को रोकते और शुरू करते समय क्लच को अपने आप ऑपरेट करता है। खास बात यह है कि राइडर जब चाहे क्लच का मैनुअल कंट्रोल अपने हाथ में ले सकता है। बाइक में क्लच लीवर और गियर पैडल दोनों दिए गए हैं। ई-क्लच मैकेनिज्म काफी कॉम्पैक्ट है, जिससे बाइक का वजन केवल 3 किलो बढ़ा है और अब इसका कुल वजन 199 किलो हो गया है। पुराने मॉडल के मुकाबले ₹1.11 लाख महंगी कीमत के मामले में नई NX500 पहले के मुकाबले काफी महंगी हो गई है। ई-क्लच वेरिएंट की कीमत पुराने मॉडल (कन्वेंशनल क्लच) से ₹1.11 लाख ज्यादा है। मार्केट में इसका सीधा मुकाबला BMW F 450 GS ट्रॉफी (कीमत ₹5.30 लाख) और कावासाकी वर्सिस 650 (कीमत ₹8.63 लाख) से होगा। होंडा की यह बाइक अपनी मजबूती और कम मेंटेनेंस खर्च के लिए जानी जाती है। इंजन और परफॉर्मेंस में कोई बदलाव नहीं ई-क्लच के अलावा बाइक के बाकी मैकेनिकल फीचर्स पहले जैसे ही हैं। इसमें वही पुराना 471cc का ट्विन-सिलेंडर, लिक्विड-कूल्ड इंजन दिया गया है। इंजन 8,500 rpm पर 47hp की पावर जनरेट करता है। बाइक में 6-स्पीड गियरबॉक्स दिया गया है। सस्पेंशन के लिए फ्रंट में USD फोर्क और रियर में मोनोशॉक दिए गए हैं। ब्रेकिंग के लिए फ्रंट में 296mm के दो डिस्क ब्रेक और रियर में 240mm का सिंगल डिस्क ब्रेक मिलता है। सुरक्षा के लिए इसमें डुअल चैनल ABS दिया गया है। बुकिंग शुरू, दो रंगों में उपलब्ध NX500 ई-क्लच को दो रंगों - व्हाइट और ब्लैक में पेश किया गया है। सभी ऑथोराइज्ड होंडा बिगविंग डीलरशिप पर इसकी बुकिंग शुरू हो गई है। बाइक में 5-इंच की TFT स्क्रीन और स्विचेबल ट्रैक्शन कंट्रोल जैसे फीचर्स मिलते हैं। हालांकि, इसमें राइडिंग मोड नहीं दिए गए हैं। नॉलेज पार्ट ई-क्लच: यह एक ऐसी तकनीक है जो क्लच के काम को ऑटोमेट कर देती है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो ट्रैफिक में बार-बार क्लच दबाने से परेशान होते हैं।

दैनिक भास्कर 12 May 2026 11:58 am

2026 स्कोडा कोडिएक लॉन्च, शुरुआती कीमत ₹36.99 लाख:₹3 लाख तक सस्ती हुई SUV, 14.86kmpl का माइलेज के साथ सेफ्टी के लिए लेवल-2 ADAS

स्कोडा ऑटो इंडिया ने प्रीमियम फुल साइज SUV स्कोडा कोडिएक का 2026 मॉडल भारत में लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने अपडेटेड मॉडल में सबसे बड़ा बदलाव सेफ्टी को लेकर किया है, जिसमें अब लेवल-2 ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) फीचर शामिल किया गया है। कंपनी का दावा है कि कार 14.86kmpl का माइलेज देती है। अपडेटेड मॉडल की एक्स-शोरूम शुरुआती कीमत 36.99 लाख रुपए रखी गई है। खास बात यह है कि इसके बेस वैरिएंट 'लाउंज' की कीमत 3 लाख रुपए घटाई गई है। हालांकि, अन्य वैरिएंट्स नए फीचर्स जुड़ने से महंगे हुए हैं। कार में मैकेनिकली कोई बदलाव नहीं है। यह पहले की तरह टर्बो पेट्रोल इंजन के साथ 3 वैरिएंट्स और 5 कलर ऑप्शंस में मिलेगी। भारत में इसका मुकाबला फॉक्सवैगन टिगुआन आर-लाइन, टोयोटा फॉर्च्यूनर, MG ग्लोस्टर, जीप मेरिडियन, हुंडई टूसॉन और निसान एक्स-ट्रेल से रहेगा। एक्सटीरियर और इंटीरियर: इल्यूमिनेटेड ग्रिल और लग्जरी कैबिन लुक की बात करें तो 2026 मॉडल का डिजाइन पहले जैसा ही रखा गया है। हालांकि, अब 'स्पोर्टलाइन' वैरिएंट में भी इल्यूमिनेटेड फ्रंट ग्रिल मिलेगी, जो पहले सिर्फ टॉप मॉडल LK में आती थी। कार 5 और 7-सीटर कॉन्फिगरेशन के साथ 5 कलर ऑप्शंस में अवेलेबल है। इंटीरियर: 12.9-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम केबिन में नया लेयर्ड डैशबार्ड और 12.9-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है, जो वायरलेस एंड्रॉइड ऑटो और एपल कारप्ले सपोर्ट करता है। इसमें फिजिकल कंट्रोल्स भी हैं, जिनसे क्लाइमेट कंट्रोल और इंफोटेनमेंट कई काम के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। ड्राइवर के लिए 10.25-इंच का डिजिटल क्लस्टर मौजूद है। गियर सिलेक्टर स्टीयरिंग कॉलम में है और सेंटर कंसोल के नीचे कई स्टोरेज स्पेस दिए गए हैं। इसमें दो केबिन कलर थीम: स्पोर्टलाइन के साथ ब्लैक और सिलेक्शन LK के साथ ब्लैक/टेन दी गई है। कंफर्ट के लिए कार में वेंटिलेटेड और मसाज फंक्शन वाली 12-वे पावर्ड फ्रंट सीटें, थ्री-जोन क्लाइमेट कंट्रोल, दो वायरलेस फोन चार्जर, मल्टी-कलर एम्बिएंट लाइटिंग, पैनोरमिक सनरूफ और 13-स्पीकर वाला कैंटन साउंड सिस्टम मिलता है। परफॉरमेंस: 2-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन और 14.86kmpl माइलेज इंजन की बात करें तो इसमें कोई बदलाव नहीं है। कार में पहले वाला ही 2-लीटर टर्बो पेट्रोल TSI इंजन मिलता है। सेफ्टी: अब लेवल-2 ADAS के साथ 9 एयरबैग्स स्कोडा ने 2026 कोडिएक में सेफ्टी को अगले लेवल पर पहुंचा दिया है। अब इसके स्पोर्टलाइन और LK वैरिएंट में लेवल-2 ADAS फीचर्स मिलेंगे।

दैनिक भास्कर 11 May 2026 11:03 pm

टेक्नोलॉजी व एआई रखेंगे स्वस्थ और खुश:बुजुर्गों को नई तकनीक सीखने में जागरूकता और स्क्रीन टाइम का ध्यान रखना जरूरी है

बढ़ती उम्र में नई टेक्नोलॉजी सीखना बुजुर्गों की मेंटल हेल्थ के लिए फायदेमंद है। बशर्ते इसमें स्क्रीन टाइम का ध्यान रखने के साथ इसका उपयोग पूरी जागरूकता से किया जाए। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास का एक शोध कहता है कि डिजिटल स्किल सीखने से सीनियर सिटीजन की याददाश्त 30 फीसदी तक बढ़ सकती है। मस्तिष्क की सीखने की क्षमता बढ़ाती है नई टेक्नोलॉजी टेक्सास यूनिवर्सिटी की रिसर्च कहती है कि जब आप नई तकनीक सीखते हैं तो याददाश्त मजबूत होती है। रिसर्च में पाया गया कि जो बुजुर्ग नई एप्स खुद सीखते, वीडियो ट्यूटोरियल देखकर प्रैक्टिस करते, या ग्रुप क्लासेज जॉइन करते हैं, उनकी मेंटल हेल्थ पर सकारात्मक असर दिखा। मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ती है। एआई ट्यूटर्स का इस्तेमाल करें, आत्मविश्वास बढ़ेगा जब आप एआई ट्यूटर्स से नई भाषा, संगीत अथवा स्किल सीखते हैं तो दिमाग व्यस्त और सक्रिय रहता है। नया सीखने और समस्या सुलझाने की इस प्रक्रिया में मस्तिष्क में 'डोपामाइन' रिलीज होता है, जिससे आपके जीवन में खुशी का स्तर और आत्मविश्वास बढ़ता है। टेक्नोलॉजी पर्सनल ब्रेन कोच की तरह काम करती है एआई आधारित एप्स बुजुर्गों की मानसिक क्षमता का आकलन करते हैं। और फिर उनकी याददाश्त के स्तर के हिसाब से पहेलियां और चुनौतियां डिजाइन करके उनके समक्ष पेश करते हैं। इससे निरंतर सीखने की प्रक्रिया (न्यूरोप्लास्टिसिटी) को बढ़ावा मिलता है। इससे अल्जाइमर जैसे रोगों का खतरा कम होता है। गैजेट्स, हेल्थ डिवाइस बीमारी का समय पर संकेत देते हैं टेक्नोलॉजी उपयोगी साबित हो रही है, क्योंकि कई स्मार्टवॉच और हेल्थ डिवाइस का डेटा सीधे एआई आधारित एल्गोरिदम तक पहुंचता है। यह दिल की धड़कन, सांसों की गति या नींद के पैटर्न में आए मामूली बदलावों को भी पहचान लेता है, जो बीमारी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ऐसे मजबूत करता है मेमोरी अकेलेपन में कमी आती है शोध में पाया कि ऑनलाइन ग्रुप, वीडियो कॉल, मेल या व्हाट्सएप पर रिश्तेदार‑दोस्तों से जुड़े रहने वाले बुजुर्गों में अकेलापन और तनाव कम होता, क्योंकि टेक्नोलॉजी की मदद से उन में रिश्तों का डिजिटल ब्रिज बन जाता है। चीजें सीखने को प्रेरित होते हैं जब बुजुर्ग नई तकनीक जैसे-ऑनलाइन बैंकिंग, यूट्यूब पर वीडियो आदि खुद बनाते हैं तो उनके मस्तिष्क के न्यूरल नेटवर्क एक्टिवेट रहते हैं, जिससे डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा घटता है। सोचने-समझने की क्षमता बढ़ती है यूरोप-अमेरिका में 60-80 वर्ष तक के लोगों पर हुई रिसर्च में पाया गया कि जो बुजुर्ग स्मार्टफोन, इंटरनेट आदि खुद चलाते हैं उनमें समस्याएं हल करने और सोचने-समझने की क्षमता दूसरों से बेहतर होती है। (एक्सपर्ट पैनल: ∙ डॉ. मंजरी त्रिपाठी, एचओडी, न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट, एम्स नई दिल्ली ∙ डॉ. अर्चना वर्मा, सीनियर न्यूरो फिजिशियन ∙ डॉ. राहुल माथुर, साइकेट्रिस्ट, एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर)

दैनिक भास्कर 11 May 2026 1:20 pm

स्कूलों में पढ़ाया जा रहा गणित असल जिंदगी में फेल:गणना के बजाय डेटा-रीजनिंग पर फोकस बढ़ाएं, सेहत से लेकर निवेश तक में होंगे सफल

गणित का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के जेहन में स्कूल के दिनों की वे डरावनी यादें ताजा हो जाती हैं- अलजेब्रा, ज्योमेट्री, ट्रिगोनोमेट्री और कैलकुलस का एक अंतहीन चक्रवात... लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस गणित के लिए हमने हजारों घंटे बर्बाद किए, वह हमारे वास्तविक जीवन में कितना काम आता है? आधुनिक शोध और विशेषज्ञों का मानना है कि हम न सिर्फ गलत गणित पढ़ रहे हैं, बल्कि उसे आंकने का हमारा तरीका भी पूरी तरह गलत है। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि अमेरिका समेत दुनिया के कई हिस्सों में गणित का वर्तमान पाठ्यक्रम 1893 की ‘कमेटी ऑफ टेन’ द्वारा निर्धारित किया गया था। उस दौर में रटकर गणना करना (रोट मैथ) आर्किटेक्ट, खगोलविदों और सिविल इंजीनियरों के लिए जरूरी था। पर आज, जब हमारे हाथ में सुपरकंप्यूटर जैसे स्मार्टफोन हैं, तब भी हम बच्चों को हाथ से जटिल समीकरण हल करना सिखा रहे हैं। ‘आफ्टरमैथ: द लाइफ-चेंजिंग मैथ दैट स्कूल्स वॉन्ट टीच यू’ के लेखक टेड डिनर्टस्मिथ कहते हैं, आज की दुनिया डेटा, एल्गोरिदम, सांख्यिकी व एआई से चलती है। पर हमारी शिक्षा नीति अब भी 19वीं सदी के रटने वाले गणित व मल्टीपल चॉइस टेस्ट स्कोर के पीछे भाग रही है।’ एक्सपर्ट मानते हैं अगर कंप्यूटर कोई काम बेहतर व तेज कर सकता है, तो बच्चों को उसी काम में उलझाए रखना गुणवत्ता का पैमाना नहीं हो सकता। गणित की अज्ञानता से जोखिम ओईसीडी के एजुकेशन डायरेक्टर एंड्रियास श्लीचर के मुताबिक गणित की व्यावहारिक समझ न होना सिर्फ अकादमिक कमी नहीं, बल्कि जिंदगी व स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा जोखिम है। डेटा की समझ न होने से लोग मेडिकल टेस्ट की रिपोर्ट व डॉक्टरों द्वारा डेटा की गलत व्याख्या से जीवन-मरण से जुड़े गलत फैसले ले लेते हैं। वहीं, ‘मैथ एंग्जायटी’ के शिकार 93% लोग वित्तीय जाल में फंस रहे हैं; वे महंगाई व ब्याज के गणित को न समझ पाने से निवेश व भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। यही अज्ञानता जनता को नीति-निर्धारकों के आंकड़ों के मायाजाल में भी उलझाती है। कई देशों में बेरोजगारी के आधिकारिक आंकड़े हकीकत छुपाते हैं, जबकि असली दर ज्यादा है। पर गणित से दूरी, यह गफलत समझा नहीं पाती। जनगणना जैसी प्रक्रियाओं में भी डेटा की गलतियों से संसाधनों का गलत आवंटन होता है। जब तक हम आंकड़ों में छिपा सच नहीं समझेंगे, तब तक गुमराह होते रहेंगे।एक्सपर्ट कहते हैं,‘गणित का सही ज्ञान न सिर्फ व्यक्तिगत सफलता के लिए जरूरी है, बल्कि यह लोकतंत्र को भी मजबूत करता है। जब नागरिक डेटा व आंकड़ों को समझना शुरू करेंगे, तभी सही सवाल पूछ सकेंगे। वक्त आ गया है कि हम रटने वाले गणित से बाहर निकलें और उस गणित को अपनाएं जो हमारा कल संवार सके। 80% वक्त गणना पर खर्च हो रहा, इसे एआई-कंप्यूटर को करने दें अमेरिकी शिक्षाविद् कॉनराड वोल्फ्राम का तर्क है कि हमें ‘डेटा एनालिटिक्स’ व ‘फाइनेंशियल लिटरेसी’ को महत्व देना चाहिए। वर्तमान शिक्षा 80% समय ‘गणना’ पर खर्च करती है, जबकि यह काम कंप्यूटर व एआई कहीं बेहतर कर सकते हैं। छात्रों को गणना के बोझ से मुक्त कर समस्या सुलझाने पर ध्यान देना चाहिए। छात्र सांख्यिकीय तर्क व वित्तीय फैसले सीखें जो जीवन को प्रभावित करते हैं। यदि छात्र स्कूल से निकलने के बाद टैक्स, निवेश या ब्याज दर नहीं समझ सकते, तो उनकी गणित की शिक्षा अधूरी है। इन व्यावहारिक आंकड़ों में दक्षता ही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।

दैनिक भास्कर 9 May 2026 5:08 pm

चैटजीपीटी लॉन्च कर सकता है एआई फोन:एपल रोबोट से चैटजीपीटी पिन तक; अब AI गैजेट्स की रेस

चैटजीपीटी को आम लोगों के लिए खुले हुए अब तीन साल से ज्यादा हो चुके हैं और इस दौरान बहुत कुछ बदल गया है। चैटजीपीटी और जेमिनी जैसे एआई एलएलएम अब सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि ऐसे एजेंट बनते जा रहे हैं जो जटिल काम आसान कर सकते हैं, उन्हें तेज कर सकते हैं या कुछ काम खुद ही संभाल सकते हैं। तो अब ओपनएआई के लिए अगला कदम क्या है? सैम आल्टमैन की अगुवाई वाली यह कंपनी एआई मॉडल्स और एजेंट्स के बाद ‘एआई एजेंट फोन’ बनाने की तैयारी में है। AI हार्डवेयर का नया दौर ओपनएआई का बड़ा प्रोडक्ट ऐसा स्मार्टफोन हो सकता है, जो एक एआई फोन होगा और फोन इस्तेमाल करने का तरीका ही बदल सकता है। इस रेस में ओपनएआई अकेला नहीं है। दूसरी कंपनियां भी एआई को ध्यान में रखकर नए डिवाइस बना रही हैं। मेटास्टैट रिसर्च के मुताबिक, एआई गैजेट्स का बाजार 2032 तक हर साल करीब 24% की रफ्तार से बढ़ सकता है। इस दिशा में तेजी अब दिखने लगी है, जहां ओपनएआई और एपल जैसी कंपनियां दिलचस्पी ले रही हैं। आइए जानते हैं ऐसे कुछ आने वाले गैजेट्स, जिनका फोकस एआई पर है। जल्द लॉन्च होंगे ये एआई डिवाइस चैटजीपीटी फोन - 6 पॉइंट से समझिए कैसा होगा - इसका इंटरफेस एंड्रॉइड और आईओएस से अलग हो सकता है। - इस फोन में एप-आधारित सिस्टम की जगह टास्क-आधारित इंटरफेस हो सकता है, जहां ज्यादातर काम चैटजीपीटी या उसके एप्स संभालेंगे। - उदाहरण के लिए आप सुबह उठकर आप फोन से सभी अपडेट्स ले सकते हैं। फोन खुद ईमेल का जवाब दे सकेगा, कॉल कर सकेगा और ग्रोसरी ऑर्डर भी खुद कर पाएगा यानी स्क्रॉल करने की जगह आप फोन को काम सौंप सकेंगे। - इसमें मीडियाटेक डायमेंसिटी 9600 प्रोसेसर, दो NPU (एआई प्रोसेसिंग यूनिट) हो सकते हैं। - कैमरा भी आसपास को स्कैन कर जवाब देने के लिए इस्तेमाल होगा। - एनालिस्ट मिंग ची कुओ के अनुसार फोन 2027 तक लॉन्च हो सकता है और पहले साल करीब 3 करोड़ यूनिट्स बेचने का अनुमान है। ओपनएआई स्मार्ट पिन ओपनएआई का यह एक स्क्रीनलेस वियरेबल होगा, जिसमें माइक्रोफोन, कैमरा और स्पीकर हो सकता है। यह आसपास की चीजों को रिकॉर्ड करके चैटजीपीटी को देगा और इससे बातचीत कर सकेंगे। 2026 तक लॉन्च की चर्चा थी। अब टाइमलाइन बदल सकती है। एपल का एआई पिन - एपल भी एक एआई पिन पर काम कर रहा है। यह एयरटैग जितना छोटा हो सकता है और इसमें दो कैमरे, तीन माइक्रोफोन और स्पीकर हो सकते हैं। - यह डिवाइस मीटिंग नोट्स लेने और रियल-टाइम ट्रांसलेशन जैसे काम कर सकता है। - 2027 के अंत तक आ सकता है। गूगल का स्मार्ट ग्लास - इसका इंटरफेस ऐसा होगा कि स्क्रीन आंखों के सामने दिखेगी, लेकिन नजर को ब्लॉक नहीं करेगी… यानी ट्रांसपेरेंट एलिमेंट्स के जरिए जानकारी दिखेगी। ये जेमिनी पर आधारित होंगे, जो सवालों के जवाब देंगे, रास्ता बताएंगे और नोटिफिकेशन लेंस पर दिखाएंगे एपल का टेबलटॉप रोबोट एपल एक ऐसे रोबोट पर काम कर रहा है, जिसमें टैबलेट जैसी स्क्रीन हो सकती है। स्क्रीन से आप वीडियो देख सकते हैं या मेन्यू कंट्रोल कर सकते हैं। इसका मुख्य इंटरफेस वॉइस होगा। एआई पावर्ड सिरी होगी, जो ज्यादा एडवांस जवाब दे सकेगी।

दैनिक भास्कर 9 May 2026 3:23 pm

रील स्क्रॉलिंग भी जंक फूड की तरह; मेमोरी -फोकस कमजोर:माता-पिता का स्क्रीन टाइम ज्यादा, तो बच्चों में फोन की लत लगने के चांस ज्यादा

लोगों में रील्स देखने की आदत बढ़ रही है। खासकर बच्चों और युवाओं में यह आदत देखी जाती है, लेकिन बड़े भी इससे उतने ही प्रभावित हैं। वे खुद स्क्रीन टाइम को कम नहीं कर पाते और बच्चों के लिए उदाहरण बनते हैं। लेकिन रील स्क्रॉल के कई दुष्प्रभाव हैं। इससे आपकी याद्दाश्त और ध्यान भी कमजोर होता है। ऐसे में जानें फोन एडिक्शन की साइंस और बचाव के तरीके। स्क्रीन टाइम से ज्यादा देखे जा रहे कंटेंट के बारे में सोचें स्क्रीन टाइम निर्धारित नहीं करता कि आपको फोन की लत है। इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया एप्स, जिनमें हम रैंडम रील्स स्क्रॉल करते हैं, वे ‘जंक फूड’ की तरह हैं। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क की स्टडी के मुताबिक इस तरह के कंटेंट की आदत याददाश्त और फोकस को प्रभावित कर सकती है। इसलिए इस तरह के एप्स से दूरी बनाना ज्यादा जरूरी है। आदत कम करने के लिए फैमिली मीडिया प्लान बनाएं प्रो.जेसन नागाटा के अनुसार, जिन माता-पिता का स्क्रीन टाइम ज्यादा होता है, उनके बच्चों में भी फोन की लत ज्यादा देखने को मिलती है। इसे कम करने के लिए अपना फैमिली मीडिया प्लान बनाएं। यानी घर में कुछ नियम तय करें, जैसे खाने और सोने के समय फोन न इस्तेमाल करना। फोन को बेडरूम और डाइनिंग टेबल से दूर रखना। जानें कब फोन चलाना हमारी आदत बन जाती है फोन का ज्यादा इस्तेमाल करना और लत लगना, दो अलग बातें है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को के एसोसिएट प्रो. जेसन नागाटा इसकी तुलना नशे की लत से करते हैं। अगर कोई व्यक्ति ज्यादा समय सोशल मीडिया पर बिताने लगे, दोस्तों से दूरी बनाने लगे या पढ़ाई- काम पर असर दिखने लगे, तो यह संकेत है कि अब इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

दैनिक भास्कर 9 May 2026 1:39 pm

आइटेल A100C स्मार्टफोन लॉन्च, कीमत ₹7,999:मिलिट्री ग्रेड सर्टिफिकेशन के साथ 90Hz डिस्प्ले और 5000mAh बैटरी जैसे फीचर्स

टेक कंपनी आइटेल ने अपना नया स्टाइलिश स्मार्टफोन A100C न्यू लॉन्च किया है। कंपनी ने फोन को खासतौर पर उन लोगों के लिए पेश किया है, जो कम बजट में मजबूती और बेहतर फीचर्स चाहते हैं। स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूती है। इसे मिलिट्री ग्रेड सर्टिफिकेशन (MIL-STD-810H) मिला हुआ है, जो इसे गिरने या झटकों से खराब होने से बचाता है। CMR ड्यूरेबिलिटी इंडेक्स रिपोर्ट 2026 के अनुसार, आइटेल 10 हजार रुपए से कम के सेगमेंट में देश का सबसे भरोसेमंद और टिकाऊ ब्रांड बनकर उभरा है। आइटेल A100C न्यू स्मार्टफोन की भारत में कीमत 7,999 रुपए रखी गई है। कंपनी ने इसे सिल्क ग्रीन, टाइटेनियम गोल्ड और प्योर ब्लैक जैसे तीन कलर ऑप्शन के साथ उतारा है। मेमोरी और परफॉर्मेंस: 64GB स्टोरेज के साथ ऑक्टा-कोर प्रोसेसर स्मार्टफोन 2GB रैम के साथ आता है, जिसे वर्चुअल रैम की मदद से 4GB और बढ़ाकर कुल 6GB तक किया जा सकता है। इसमें 64GB की इंटरनल स्टोरेज दी गई है। फोन की स्पीड को बेहतर बनाने के लिए इसमें यूनिसोक T7100 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर दिया गया है। यह एंड्रॉइड 15 गो एडिशन पर चलता है, जो कम रैम वाले फोन में भी स्मूथ गेमिंग और वीडियो कॉलिंग का अनुभव देता है। डिस्प्ले और ऑडियो: 90Hz रिफ्रेश रेट के साथ DTS साउंड बेहतर विजुअल एक्सपीरियंस के लिए फोन में 6.6-इंच का HD+ डिस्प्ले दिया गया है, जो 90Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। स्क्रीन चलाने में काफी स्मूथ है। ऑडियो के लिए इसमें DTS पावर्ड साउंड टेक्नोलॉजी दी गई है, जो मूवी देखने या गाने सुनने के दौरान शानदार आवाज देती है। बैटरी और सिक्योरिटी: दिनभर चलेगी 5000mAh की बैटरी लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए आइटेल ने इसमें 5000mAh की बड़ी बैटरी दी है, जिसे चार्ज करने के लिए 10W का चार्जर साथ मिलता है। सिक्योरिटी के लिए फोन में फेस अनलॉक के साथ साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है, जो इसे इस्तेमाल करने में आसान और सुरक्षित बनाता है। डायनामिक बार और कैमरा फीचर्स फोन में एक खास 'डायनामिक बार' फीचर दिया गया है। इसकी मदद से यूजर बिना किसी रुकावट के बैटरी स्टेटस, कॉल और नोटिफिकेशन चेक कर सकते हैं। फोटोग्राफी के लिए इसमें एडवांस्ड इमेज प्रोसेसिंग वाला 8MP का रियर कैमरा है, जो बेहतरीन और जीवंत तस्वीरें क्लिक करने में सक्षम है।

दैनिक भास्कर 8 May 2026 4:27 pm

साउथ कोरिया के मंदिर में रोबोट बना बौद्ध भिक्षु VIDEO:माला और ट्रेडिशनल चोला पहनकर शिष्य बनने की दीक्षा ली, इंसानों की तरह हाथ जोड़े

साउथ कोरिया ने अपना पहला ह्यूमनॉइड रोबोट पेश किया है। इसका नाम गाबी रखा गया है और ये दुनिया का पहला ह्यूमनॉइड रोबोट भिक्षु है। राजधानी सियोल के जोग्ये मंदिर में एक दीक्षा समारोह में इस रोबोट को औपचारिक रूप से बौद्ध धर्म के शिष्य के रूप में शामिल किया गया। AI और धर्म के इस मेल का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में रोबोट ट्रेडिशनल चोला पहनकर मंच के सामने आता है, जहां उसे माला पहनाकर दीक्षा के लिए शिष्य बनाने की शुरुआत की गई। रोबोट को बुद्ध पूर्णिमा के उत्सव में भी पेश किया जाएगा। मंत्रों का उच्चारण कर सकता है ‘गाबी’ चीन के Unitree G1 ह्यूमनॉइड प्लेटफॉर्म पर बेस्ड 'गाबी' की बॉडी इंसानों जैसी है। यह आसानी से चल सकता है और इशारों में बात कर सकता है। यह मंत्रों का उच्चारण करने और अनुष्ठानों में झुककर प्रणाम करने में भी सक्षम है। गाबी को दक्षिण कोरिया के सबसे बड़े बौद्ध संप्रदाय 'जोग्ये ऑर्डर' ने डेवलप किया है। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल युग में बौद्ध धर्म को आधुनिक बनाना और युवा पीढ़ी को धर्म से जोड़ना है। 130 सेंटीमीटर लंबे रोबोट ने भिक्षुओं द्वारा पहना जाने वाला पारंपरिक ग्रे और भूरे रंग का चोला पहना था। जब एक वरिष्ठ भिक्षु ने गाबी से पूछा कि क्या वह खुद को बौद्ध धर्म के लिए समर्पित करेगा, तो रोबोट ने जवाब दिया, 'हां, मैं खुद को समर्पित करूंगा।' इसके बाद रोबोट ने हाथ जोड़कर सभी के सामने सिर झुकाया और वरिष्ठ भिक्षुओं ने उसके गले में 108 मोतियों की माला पहनाई। इंसानों की तरह हुई रस्में, बस सिर नहीं मुंडवाया आमतौर पर जब कोई व्यक्ति भिक्षु बनता है, तो उसके सिर पर अगरबत्ती से प्रतीकात्मक निशान बनाया जाता है, लेकिन रोबोट के मामले में इसकी जगह एक प्रतीकात्मक स्टिकर का इस्तेमाल किया गया। जोग्ये ऑर्डर के अनुसार, 'गाबी' नाम गौतम बुद्ध के बचपन के नाम 'सिद्धार्थ' और कोरियाई भाषा के शब्द 'दया' को जोड़कर बनाया गया है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसका उच्चारण आसान रहे और यह बुद्ध की करुणा का संदेश फैला सके। इंसानों और मशीनों के बीच तालमेल की कोशिश जोग्ये ऑर्डर के सांस्कृतिक मामलों के प्रमुख वेन. सियोंग वोन ने बताया कि यह देखने के लिए की गई है कि क्या भविष्य में इंसान और रोबोट एक साथ मिल-जुलकर रह सकते हैं। यह अभी सिर्फ एक शुरुआत है ताकि समाज को AI तकनीक के साथ जीने के लिए तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि हालांकि अभी यह असामान्य लग सकता है, लेकिन इस तरह के प्रयास समाज को भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ ढलने में मदद करेंगे। गाबी इस महीने के अंत में होने वाले लालटेन महोत्सव में भी अन्य रोबोटों के साथ हिस्सा लेगा। हर इंडस्ट्री में बढ़ रहा है रोबोट्स का दखल गाबी का यह डेब्यू ऐसे समय में हुआ है जब पूरी दुनिया में ह्यूमनॉइड रोबोट्स का इस्तेमाल आम लोगों से जुड़े कामों में बढ़ रहा है। हाल ही में जापान एयरलाइंस ने सामान संभालने के लिए AI रोबोट्स की टेस्टिंग शुरू की है। वहीं, फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा ने भी रोबोटिक्स स्टार्टअप 'एश्योर्ड रोबोट इंटेलिजेंस' का अधिग्रहण किया है, ताकि वह इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर सके।

दैनिक भास्कर 7 May 2026 2:51 pm

फर्स्ट क्लास यात्रा को अल्ट्रा लग्जरी बनाने की तैयारी:प्राइवेट जेट जैसा अहसास होगा; जीरो-ग्रैविटी सीट, निजी शावर-स्पा जैसे फीचर्स

एविएशन वर्ल्ड में ‘फर्स्ट क्लास’ अब आलीशान ‘प्राइवेट सुइट’ का रूप ले चुका है। भविष्य के डिजाइनों में फर्श से छत तक के दरवाजे, अलग सोने के लिए फुल-साइज बेड और यहां तक कि निजी बाथरूम जोड़े जा रहे हैं। इंजीनियरिंग की चुनौतियों के बावजूद, एयरलाइंस वजन और ईंधन दक्षता से समझौता कर यात्रियों को ‘अल्ट्रा-लग्जरी’ अनुभव देने की होड़ में हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक एयरलाइंस अब कमर्शियल उड़ानों में प्राइवेट जेट जैसा अहसास देना चाहती हैं ताकि हाई-नेट-वर्थ यात्री उनकी ओर आकर्षित हों। एयरलाइंस कमर्शियल उड़ानों में प्राइवेट जेट जैसा अहसास देना चाहती हैं ताकि हाई-नेट-वर्थ यात्री आएं प्राइवेसी और सुइट का नया पैमानाएमिरेट्स ने बोइंग 777 सुइट्स में फर्श से छत तक के दरवाजे और वर्चुअल विंडोज पेश की हैं, जो हाई-डेफिनिशन कैमरा तकनीक का उपयोग करती हैं। सीटों में नासा से प्रेरित ‘जीरो-ग्रैविटी’ तकनीक है, जो शरीर के दबाव को कम कर वजनहीनता का अहसास कराती है। इन-सुइट बाथरूम का ऑफरएमिरेट्स के प्रेसिडेंट सर टिम क्लार्क ने भविष्य के बोइंग 777एक्स विमानों के लिए हर सुइट में एक पूरी तरह से निजी बाथरूम जोड़ने की योजना का संकेत दिया है, जो वर्तमान के साझा शावर स्पा से एक कदम आगे होगा। टचलेस और स्मार्ट कंट्रोल कतर एयरवेज और एमिरेट्स जैसी कंपनियां अब यात्रियों को अपने स्मार्टफोन या टैबलेट से सुइट की लाइटिंग और तापमान नियंत्रित करने की सुविधा दे रही हैं। पर्सनल स्पेस - एक सुइट, कई कमरेएयरलाइंस एक ही सुइट में अलग-अलग गतिविधियों के लिए जगह दे रही है। एतिहाद एयरवेज- ‘द रेजिडेंस’ में अलग लिविंग रूम, डबल बेड वाला बेडरूम, एक निजी शॉवर की सुविधा। सिंगापुर एयर. -ए380 सुइट्स में अलग रिक्लाइनर और फोल्डेबल बेड, ताकि यात्री को घर जैसा अनुभव मिले। लुफ्थांसा - सुइट प्लस फीचर्स में 2 यात्री एक साथ बैठ सकते हैं। सीट को एक बड़े बेड में बदल सकते हैं। जापान एयर.- नए ए350-1000 में इन-सीट स्टीरियो तकनीक, जिससे बिना हेडफोन के संगीत सुना जा सकता है।

दैनिक भास्कर 6 May 2026 12:48 pm

रेंज रोवर SV ₹75 लाख सस्ती हुई:₹3.50 करोड़ में मिलेगी, भारत-UK ट्रेड डील का असर; स्पोर्ट्स मॉडल भी 40 लाख सस्ता

जगुआर लैंड रोवर (JLR) इंडिया ने ब्रिटेन से इंपोर्ट होने वाली अपनी सबसे प्रीमियम SUV रेंज रोवर SV की कीमत 75 लाख रुपए कम कर दी है, जिसके बाद अब इसकी एक्स-शोरूम कीमत 3.5 करोड़ रुपए हो गई है। पहले इसकी कीमत 4.25 करोड़ रुपए थी। यह कटौती भारत और ब्रिटेन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लागू होने से पहले की गई है। कंपनी ने रेंज रोवर स्पोर्ट SV एडिशन टू की कीमत में भी 40 लाख रुपए की कटौती की है, जो अब 2.35 करोड़ रुपए में मिलेगी। नई कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। इंपोर्ट ड्यूटी 110% से घटकर 30% रह जाएगी भारत और ब्रिटेन के बीच 24 जुलाई 2025 को व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते के तहत ब्रिटेन से पूरी तरह बनकर आने वाली (CBU) बड़ी कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी को 110% से घटाकर पहले साल में 30% कर दिया जाएगा। 5वें साल तक यह ड्यूटी घटकर सिर्फ 10% रह जाएगी। यह नियम 3,000cc से ऊपर के पेट्रोल और 2,500cc से ऊपर के डीजल इंजन वाले मॉडल पर लागू होगा। कीमतों में बदलाव की 3 बड़ी बातें: लगातार दूसरी कटौती: GST 2.0 सुधारों के बाद सितंबर 2025 में भी कीमतों में 30.4 लाख रुपए तक की कमी की गई थी। यह एक साल के भीतर दूसरा बड़ा बदलाव है। पेंट स्कीम में अपडेट: रेंज रोवर SV में अब अल्ट्रा मैटेलिक पेंट (ग्लॉस और सैटिन फिनिश) स्टैंडर्ड तौर पर मिलेगा। नया वेरिएंट जल्द: सूत्रों के मुताबिक, कंपनी जल्द ही रेंज रोवर स्पोर्ट का एक नया स्टैंडर्ड SV वेरिएंट भी लाएगी, जिसकी कीमत करीब 2.05 करोड़ रुपए होगी। डिफेंडर और डिस्कवरी के दाम नहीं बदलेंगे कंपनी ने स्पष्ट किया है कि भारत में असेंबल (Locally Assembled) होने वाले मॉडल्स जैसे रेंज रोवर स्टैंडर्ड, स्पोर्ट, इवोक और वेलार की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा। इसके अलावा 'डिफेंडर' और 'डिस्कवरी' की कीमतें भी वैसी ही रहेंगी, क्योंकि इनका निर्माण स्लोवाकिया में होता है और ये भारत-UK ट्रेड डील के दायरे में नहीं आते। हालांकि, कंपनी डिफेंडर की लोकल असेंबली पर विचार कर रही है। पावरफुल इंजन: 635hp की ताकत जेनरेट करती है कार रेंज रोवर के इन दोनों SV वेरिएंट्स में 4.4-लीटर का ट्विन-टर्बो V8 पेट्रोल इंजन दिया गया है। रेंज रोवर SV में यह इंजन 540hp की पावर देता है, जबकि रेंज रोवर स्पोर्ट SV में यह 635hp की पावर और 800Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इन ब्रांड्स को भी मिलेगा फायदा ब्रिटेन के साथ हुई इस डील का फायदा केवल JLR को ही नहीं, बल्कि बेंटले, रोल्स-रॉयस, एस्टन मार्टिन और मैकलारेन जैसे अन्य ब्रिटिश लग्जरी ब्रांड्स को भी मिलेगा। हालांकि, इसके लिए एक सालाना कोटा (पहले साल 20,000 गाड़ियां) तय किया गया है, जिसे सभी ब्रिटिश ब्रांड्स के बीच शेयर किया जाएगा।

दैनिक भास्कर 5 May 2026 4:59 pm

एशिया-अफ्रीका में ईवी की मांग तेज:चीन में हर दस में से एक कार ईवी, भारत में टू और थ्री व्हीलर सेगमेंट में 25% का उछाल

ईरान युद्ध के बाद पेट्रोल, डीजल और गैस के ‎‎दामों में बढ़ोतरी के कारण कई देशों में इलेक्ट्रिक ‎वाहनों (ईवी) की मांग तेजी से बढ़ी है। एशिया‎ के अधिकतर देशों, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका‎ में पिछले साल की तुलना में इस साल मार्च में‎ ईवी की बिक्री में 79 प्रतिशत उछाल आया है।‎ इन देशों में 2025 में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री‎ 48 प्रतिशत बढ़ी थींं। लैटिन अमेरिकी देश कोस्टा रिका इलेक्ट्रिक ‎वाहनों के कारोबार की तेज रफ्तार का एक प्रमुख‎ उदाहरण है। कोस्टा रिका में वर्ष के पहले तीन‎ महीनों में सभी नई कारों की बिक्री में इलेक्ट्रिक‎ वाहनों का हिस्सा 18 प्रतिशत था। यह अमेरिका से‎ तीन गुना अधिक है, जहां टेस्ला ने 14 साल पहले‎ अपने मॉडल-एस से आधुनिक इलेक्ट्रिक कार‎ क्रांति की शुरुआत की थी। इथियोपिया, उरुग्वे‎ सहित कई अन्य देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं और‎ विदेशी मुद्रा भंडार के लिए भारी पड़ रहे आयातित ‎विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने के लिए‎ इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रहे हैं।‎ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार एशिया में‎ इलेक्ट्रिक वाहनों की सबसे ज्यादा बिक्री चीन में ‎हो रही है। 2024 में एक करोड़ दस लाख ईवी‎ बेचे गए। यह कुल वाहनों का लगभग आधा है।‎ चीन में अप्रैल 2026 में सड़क पर दस में एक ‎वाहन इलेक्ट्रिक था। एशिया के आर्थिक रूप से‎ उभरते देशों में 2024 में इलेक्ट्रिक वाहनों की‎ बिक्री में 60 फीसदी उछाल दर्ज किया गया है।‎ वियतनाम में 40 प्रतिशत और थाईलैंड में 20‎प्रतिशत से अधिक इजाफा हुआ है। इंडोनेशिया में‎ भी वृद्धि हो रही है। ईवी पर सरकारी रियायतों और‎ चीन के सस्ते वाहनों ने कारोबार बढ़ाया है। भारत ‎में दो पहिया और तीन पहिया ईवी की बिक्री में 15‎ से 25 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है।‎ कोस्टा रिका की सांसद काटिया कैम्ब्रोनेरो ने‎ संसद में चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण की गति तेज‎ करने के लिए विधेयक पेश किया है। कोस्टा रिका‎ के राष्ट्रपति रॉड्रिगो शावेज द्वारा विधेयक को ‎मंजूरी देने की संभावना है। हालांकि राष्ट्रपति‎ रॉड्रिगो और कैम्ब्रोनेरो कट्‌टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी‎ हैं।कोस्टा रिका तेल का उत्पादन नहीं करता है‎ और उसकी अधिकतर बिजली पनबिजली‎(हाइड्रोपावर) से पैदा होती है।‎ चीन की सस्ती इलेक्ट्रिक कारों ने बाजार में अपनी धाक जमाई कोस्टा रिका ने 2018 में टैक्स और शुल्क में छूट देकर इलेक्ट्रिक वाहनों को‎ बढ़ावा दिया है। वहां इको टूरिज्म प्रमुख इंडस्ट्री है। तेल के मूल्य बढ़ने से यह‎ नीति सही लगती है। 2023 में सस्ते चीनी मॉडलों के आने के बाद ईवी कारों ‎की बिक्री बढ़ी है। लेकिन अन्य गरीब देशों की स्थिति कमजोर है। ज्यादातर बड़े‎ ट्रक डीजल और कारें पेट्रोल पर चलती हैं। कोस्टा रिका की ईवी एसोसिएशन‎ असोमोव के मुताबिक तीन चीनी इलेक्ट्रिक मॉडलों का मूल्य 18-19 लाख‎ रुपए से कम है। यहां प्रति व्यक्ति आय अमेरिका की एक चौथाई है। एक सर्वे में‎ 70 प्रतिशत सदस्यों ने बताया कि उन्होंने पर्यावरण या स्वास्थ्य की दृष्टि से‎ नहीं बल्कि पैसा बचाने के लिए ईवी को अपनाया है।‎ कई देशों में प्रचार अभियान‎ ईवी एसोसिएशन की एग्जिक्यूटिव‎ डायरेक्टर शिल्वा रोजास इलेक्ट्रिक वाहनों की‎ खूबियों का प्रचार करती हैं। वे‎ मैक्सिको,कोलंबिया, ब्राजील और केन्या जैसे‎ देशों में ईवी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए‎ वर्कशॉप करती हैं। कोस्टारिका में पहले ‎टोयोटा सबसे लोकप्रिय ब्रांड था। अब चीनी‎ इलेक्ट्रिक कारों का यहां के ईवी बाजार पर‎ कब्जा है।‎ ट्रांसपोर्ट में भी ज्यादा जोर‎ ग्रॉसरी चेन ऑटो मर्केडो के फेलिपो अलोंजो ‎बताते हैं, हमने इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से‎ डिलीवरी खर्च 5-10% घटाया है। प्राइवेट बस‎ कंपनी बियूसा ने 60 बसों के अपने समूचे बेड़े‎ को बैट्री चलित बसों से बदल दिया है। डीजल‎ बसों के मुकाबले इलेक्ट्रिक मॉडल 50 हजार‎ डॉलर ज्यादा महंगे हैं। लेकिन कंपनी फ्यूल‎ और मेंटेनेंस पर खर्च घटा कर इसकी भरपाई ‎जल्द कर लेगी।‎ ईवी ब्रांड्स में प्रतिस्पर्धा‎ कोस्टा रिका का कोई राजनेता ईवी मालिकों को‎ दूर नहीं करना चाहता है। बीवाईडी, गीली,‎एमजी और दर्जनों अन्य चीनी ब्रांड ने तेजी से‎ हां के बाजार पर कब्जा जमा लिया है। पहले ‎इस बाजार पर जापानी, अमेरिकन और यूरोपियन ‎ब्रांड का दबदबा था। इसमें टोयोटा प्रमुख थी।‎अब यहां टेस्ला सहित पश्चिमी देशों की‎ कंपनियों के इलेक्ट्रिक वाहनों के मॉडल बहुत‎ कम दिखाई पड़ते हैं।‎

दैनिक भास्कर 5 May 2026 4:39 pm

इस हफ्ते वीवो-वनप्लस सहित 4 मोबाइल लॉन्च होंगे:200 मेगापिक्सल कैमरा के साथ AI फीचर्स और 6.3 इंच स्क्रीन मिलेगी

भारत में मई के पहले हफ्ते में 4 नए स्मार्टफोन लॉन्च होंगे। 4 से 9 मई के बीच वनप्लस और वीवो अपने नए डिवाइस लॉन्च करेंगी। इन फोन्स में AI फीचर्स के साथ 200 मेगापिक्सल का कैमरा और 6.3-इंच स्क्रीन जैसे फीचर्स मिलेंगे। इनकी कीमत 25,000 रुपए से लेकर 1.50 लाख रुपए तक होगी। इस हफ्ते इंडिया में भारत में लॉन्च होने स्मार्टफोंस की डिटेल्स जानिए। वीवो X300 FE वीवो एक्स300 एफई से मई महीने की शुरुआत होगा। यह मोबाइल 6 मई को इंडिया में लॉन्च होगा जो क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 8 जेन 5 प्रोसेसर के साथ आएगा। वीवो X300 अल्ट्रा वीवो 6 मई को ही इंडिया में X300 अल्ट्रा लॉन्च करेगी, जो इस सीरीज का सबसे ताकतवर कैमरा फोन बनकर आएगा। वनप्लस नोर्ड CE6 वनप्लस नोर्ड CE6 भारत में 7 अप्रैल को लॉन्च होगा। यह मिलिट्री ग्रेड सर्टिफाइड फोन है, जो काफी मजबूत है। पानी और धूल से बचाव के लिए इसमें IP69K तक की टॉप रेटिंग दी गई है। वनप्लस नोर्ड CE6 लाइट वनप्लस का नोर्ड CE6 लाइट इंडिया में 7 अप्रैल को लॉन्च होगा। इसमें 50MP का मुख्य कैमरा और 8MP का सेल्फी कैमरा है। साथ ही, यह मिलिट्री ग्रेड सर्टिफाइड फोन है, जो इसे काफी मजबूत बनाता है।

दैनिक भास्कर 4 May 2026 11:38 pm

निसान ग्रेवाइट के लिए रेट्रोफिट CNG किट लॉन्च:7-सीटर MPV में 25-25 लीटर के दो सिलेंडर मिलेंगे, कीमत ₹82,999

निसान इंडिया ने आज 4 मई को अपनी कॉम्पैक्ट MPV 'ग्रेवाइट' के लिए रेट्रोफिट CNG किट लॉन्च की है। इसकी शुरुआती कीमत 82,999 रुपए है। ग्राहक किसी भी ऑफिशियल निसान डीलरशिप पर जाकर अपनी कार में इसे लगवा सकते हैं। कंपनी का दावा है कि यह किट ICAT (इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी) से अप्रूव्ड है। इसे मोटोजेन द्वारा डेवलप किया गया है। कंपनी इस किट के पार्ट्स पर 3 साल या 1 लाख किलोमीटर की थर्ड-पार्टी वारंटी भी दे रही है। निसान ग्रेविट की एक्स-शोरूम कीमत 5.65 लाख से 8.93 लाख रुपए के बीच है। 25-25 लीटर के दो सिलेंडर, बूट स्पेस नहीं मिलेगा ग्रेवाइट CNG किट की सबसे बड़ी खासियत इसका 'ट्विन टैंक' सेटअप है। इसमें 25-25 लीटर के दो CNG टैंक दिए गए हैं, जिन्हें एक के ऊपर एक (वर्टिकली) रखा गया है। हालांकि, दोनों टैंक की वजह से कार का बूट स्पेस (सामान रखने की जगह) पूरी तरह खत्म हो गई है, लेकिन इसकी 7-सीटर क्षमता बरकरार रहेगी। यह देश की इकलौती ऐसी कार है, जो 7 सीटों के साथ ट्विन CNG टैंक ऑफर कर रही है। रेनो ट्राइबर CNG से कितनी अलग? ध्यान देने वाली बात यह है कि निसान ग्रेविट की यह CNG किट रेनो की आने वाली ट्राइबर CNG से अलग है। ट्राइबर के नए मॉडल में कंपनी ने प्लेटफॉर्म में बदलाव कर सिलेंडर को गाड़ी के निचले हिस्से (अंडरबॉडी) में फिट किया है। वहीं ग्रेविट में पुराने आर्किटेक्चर का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें सिलेंडर डिग्गी यानी बूट स्पेस में रखे जाते हैं। परफॉर्मेंस: 1.0 लीटर इंजन, मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ CNG ऑप्शन निसान ग्रेविट में 1.0-लीटर का 3-सिलेंडर पेट्रोल इंजन मिलता है, जो 72hp की पावर और 96Nm का टॉर्क जनरेट करता है। फिलहाल यह CNG किट केवल 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन वाले वैरिएंट्स के लिए ही अवेलेबल है। इसमें पेट्रोल भरने वाली जगह के नीचे ही CNG नोजल (फ्यूल-फिलिंग पॉइंट) दिया गया है। फिलहाल यह सुविधा 16 राज्यों के 60 शहरों में शुरू की गई है। एक्सटीरियर: ट्राइबर जैसा लुक, लेकिन मॉडर्न टच ग्रेवाइट का बाहरी डिजाइन काफी हद तक ट्राइबर से मिलता-जुलता है, लेकिन निसान ने इसमें कई 'कॉस्मेटिक' बदलाव किए हैं। कार के फ्रंट में नई हनीकॉम्ब पैटर्न वाली ग्रिल और हेडलाइट्स में नए सिग्नेचर वाली DRLs दी गई हैं। इसके बंपर को दोबारा डिजाइन किया गया है। इसमें C-शेप के सिल्वर फिनिश वाले हिस्से मिलते हैं। कार को अलग पहचान देने के लिए इसके बोनट और पीछे के दरवाजे (टेलगेट) पर बड़े अक्षरों में 'GRAVITE' लिखा है। ग्राहक इसे पांच रंगों-फॉरेस्ट ग्रीन, ओनिक्स ब्लैक, ब्लेड सिल्वर, स्नो व्हाइट और मेटालिक ग्रे में खरीद सकते हैं। इंटीरियर और सीटिंग: 7 लोगों के बैठने की जगह कार के अंदर 5+2 सीटिंग कॉन्फिगरेशन मिलता है। डैशबोर्ड का लेआउट सरल है। इसमें 8-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम और ड्राइवर के लिए 7-इंच का डिजिटल डिस्प्ले दिया गया है। इंटीरियर की कलर स्कीम और ट्रिम्स ट्राइबर से अलग हैं, जिससे यह अंदर से फ्रेश महसूस होती है। इसमें वायरलेस चार्जिंग पैड और कूल्ड ग्लव बॉक्स जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। फीचर्स: सेफ्टी के लिए 6 एयरबैग्स और क्रूज कंट्रोल निसान ने इसमें फीचर्स की लंबी लिस्ट दी है। टॉप मॉडल्स में वायरलेस एपल कारप्ले और एंड्रॉइड ऑटो, पुश-बटन स्टार्ट/स्टॉप, ऑटोमैटिक LED हेडलैंप्स, रेन-सेंसिंग वाइपर्स और टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे फीचर्स हैं। सेफ्टी के लिए इसमें 6 एयरबैग्स और रियर पार्किंग सेंसर दिए गए हैं।

दैनिक भास्कर 4 May 2026 10:48 pm

बुजुर्गों पर साइबर खतरा, ये 5 उपाय करेंगे सुरक्षा:स्कैमर्स के भावनात्मक दबाव में न आएं, कॉल आए तो परिजन या एक्सपर्ट को बताएं

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कुछ दिन पहले ही एक रिटायर्ड महिला प्रोफेसर को ठगों ने 7 दिनों तक घर में डिजिटल अरेस्ट रखा। टेरर फंडिंग का डर दिखाया और 1.4 करोड़ रुपए ठग लिए। यह अकेला मामला नहीं है; देश में डिजिटल ठगी के शिकार होने वालों में 60% से अधिक बुजुर्ग और रिटायर्ड कर्मचारी हैं। इधर, ठग भी अब ओटीपी या बिजली बिल जैसे झांसे तक सीमित नहीं हैं, वे टेरर फंडिंग, पार्सल में ड्रग, मनी लॉन्ड्रिंग, ट्राई, सीबीआई अफसर के नाम से कॉल जैसे तरीकों से डराते हैं। ऐसे में बुजुर्ग कैसे बचें? इसमें हाल ही में आए एआई चैटबॉट ‘अभय’ जैसी तकनीक मदद कर सकती है। आइए नई तकनीक व ठगी के नए तरीकों से सुरक्षा के बारे में जानते हैं। ‘अभय’ बनाएगा आपको निर्भय - इस तरह से करें उपयोग नोटिस की असली पहचान करेगा अभय एआई-पावर्ड नोटिस वेरिफिकेशन चैटबॉट है। संदिग्ध नोटिस, मैसेज-कॉल जो सीबीआई के नाम से आते हैं उन्हें ये डेटाबेस से तुरंत मैच कर चेक कर देगा। क्यूआर कोड के जरिए सुरक्षा देगा सीबीआई के अब हर नोटिस पर क्यूआर कोड होगा। यदि स्कैमर्स क्यूआर कोड वाला नोटिस भेजें तो चैटबॉट से स्कैन करते ही हकीकत पता चल जाएगी। सही फैसला लेने में मदद करेगा स्कैमर्स डिजिटल अरेस्ट के दौरान कई तरीकों से बुजुर्गों को डराते हैं। ऐसी स्थिति में अभय यूजर्स को शांत रहने व सही फैसला लेने में भी मदद करेगा। मोबाइल में ये एहतियात आपको डिजिटल अरेस्ट जैसे फ्रॉड से बचाएंगी 1. डीएनडी सर्विस एक्टिवेट कर लें अपने स्मार्ट फोन में ट्राई की डीएनडी सेवा एक्टिव रखें। इसकी सेटिंग्स के लिए मैसेज बॉक्स में जाएं। बड़े अक्षरों में ‘FULLY BLOCK’ लिखकर 1909 पर भेज दें। इसके बाद कमर्शियल-स्पैम कॉल आने बंद हो जाएंगे। एंड्रॉयड व आईफोन दोनों में डू नॉट डिस्टर्ब का बटन होता है। 2. स्पैम कॉल-मैसेज से बचाव करें फोन में स्पैम कॉल-मैसेज फिल्टर को ऑन रखें। एंड्रॉयड में यह विकल्प मैसेज सेटिंग्स में स्पैम प्रोटेक्शन में मिलेगा। आईफोन में फिल्टर अननोन सेंडर्स ऑन करें। जिस पर स्पैम लिखा हो वह कॉल भी रिसीव नहीं करें। 3. वाट्सएप में ऑटो डाउनलोड बंद रखें वाट्सएप की सेटिंग्स में जाकर मीडिया ऑटो डाउनलोड को बंद रखें। ताकि कोई भी संदिग्ध फोटो या वीडियो अपने आप डाउनलोड न हो सके। साइलेंट अननोन कॉल को भी ऑन रखें। 4. बैंक और अपने यूपीआई को सुरक्षित करें अपने मोबाइल फोन में बैंकिंग एप्स और गूगल पे या फोनपे जैसे पेमेंट ऐप्स पर फिंगरप्रिंट या फेस लॉक अवश्य लगाएं, जिससे अतिरिक्त सुरक्षा बनी रहे। इसकी सेटिंग्स भी अपने पोता-पोती से करा लें। 5. मुसीबत में तुरंत हेल्पलाइन पर कॉल करें यदि आपको अहसास हो कि किसी साइबर ठगी का शिकार होने वाले हैं तो तुरंत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। हेल्पलाइन 1930/112 पर तत्काल कॉल कर बताएं। अधिकृत वेबसाइट का उपयोग करें मोबाइल-कंप्यूटर पर https://abhay.cbi.gov.in/ टाइप करें। अभय चैटबॉट पर अपना नाम, मोबाइल नंबर डालें। इस पर संदिग्ध नोटिस अपलोड कर दें।

दैनिक भास्कर 4 May 2026 3:11 pm

वीवो X300 FE और X300-अल्ट्रा 6 मई को लॉन्च होंगे:अल्ट्रा मॉडल में 200MP कैमरा और स्नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5 प्रोसेसर मिलेगा

टेक कंपनी वीवो 6 मई को भारत में अपनी प्रीमियम स्मार्टफोन सीरीज 'X300' के दो नए स्मार्टफोन लॉन्च करने की घोषणा की है। कंपनी वीवो X300 अल्ट्रा और वीवो X300 FE पेश करेगी। इसमें सबसे खास अल्ट्रा मॉडल होगा जिसे सबसे पावरफुल कैमरा स्मार्टफोन में से एक माना जा रहा है। इसमें कंपनी ZEISS तकनीक के साथ एडवांस टेलीफोटो लेंस के साथ मार्केट में उतारा जाएगा। कीमत: 60 हजार से शुरू हो सकती है रेंज कंपनी 6 मई को दोपहर 12 बजे एक इवेंट में इन स्मार्टफोन्स को लॉन्च करेगी। डिजाइन और बिल्ड: प्रीमियम लुक के साथ मिलेगी डस्ट-वॉटर सेफ्टी कैमरा: 200 मेगापिक्सल का मेन सेंसर और अल्ट्रा जूम फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए X300 अल्ट्रा में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। वहीं, X300 FE में 50 मेगापिक्सल का सोनी OIS प्राइमरी सेंसर, 50 मेगापिक्सल का टेलीफोटो लेंस और 8 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड लेंस दिया गया है। इसमें वीवो की सिग्नेचर 'ऑरा लाइट' भी मौजूद है। स्पेसिफिकेशन्स: स्नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5 और दमदार डिस्प्ले पावरबैकअप: 6600mAh की बड़ी बैटरी और फास्ट चार्जिंग बैटरी के मामले में इंडिया मॉडल्स में कुछ बदलाव किए गए हैं।

दैनिक भास्कर 3 May 2026 12:05 am

वनप्लस 15 फ्लैगशिप स्मार्टफोन ₹6 हजार तक महंगा हुआ:स्नैपड्रैगन 8 जेन-5 प्रोसेसर और 120W चार्जिंग के साथ 7300mAh बैटरी

टेक कंपनी वनप्लस ने अपने फ्लैगशिप स्मार्टफोन वनप्लस 15 कीमतें बढ़ा दी हैं। इस फोन का 12GB रैम + 256GB स्टोरेज वाला वैरियंट अब 5 हजार और 16GB रैम + 512GB स्टोरेज वाला मॉडल 6 हजार रुपए महंगा मिलेगा। कंपनी ने फोन की कीमत में ये बढ़ोतरी लॉन्च के करीब 6 महीने के अंदर ही की है। नई कीमतें कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट, अमेजॉन और ऑफलाइन मोड पर लागू हो गईं हैं। वनप्लस 15 भारत में पहला फोन है, जिसमें फोटो की क्वालिटी को बेहतर बनाने वाला डीटेलमैक्स इमेज इंजन है। फोन स्नैपड्रैगन 8 जेन-5 प्रोसेसर के साथ आता है। इसके अलावा, फोन में कई इंडस्ट्री फर्स्ट फीचर्स दिए गए हैं, जिनमें 120W चार्जिंग के साथ 7300mAh बैटरी और 16GB रैम शामिल है। प्रोसेसर और डीटेलमैक्स इमेज इंजन वाला पहला भारत में फोन डीटेलमैक्स इमेज इंजन: ये वनप्लस का अपना पहला इन-हाउस डिजाइन कंप्यूटेशनल इमेजिंग सॉफ्टवेयर है, जो एडवांस्ड अल्गोरिदम और पावरफुल प्रोसेसर का इस्तेमाल करके स्मार्टफोन कैमरा में ज्यादा डेटा कैप्चर और प्रोसेस करता है। ये फोटोज को ओवर-ब्यूटीफिकेशन या डिस्टॉर्शन के बिना, पूरी तरह रियल और क्लियर तरीके से पेश करता है, ताकि जूम करने पर भी डिटेल्स शार्प रहें। ये लो-लाइट में क्लीयर नाइट इंजन, फास्ट मूविंग सब्जेक्ट्स के लिए क्लीयर बर्स्ट जैसे फीचर्स के साथ HDR ऑप्टिमाइजेशन और AI-पावर्ड डिटेल बूस्ट देता है, जो फोटोज को नैचुरल और डेप्थ वाली बनाता है। क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5 प्रोसेसर: ये 3 नैनोमीटर आर्किटेक्चर पर बना ऑक्टा-कोर मोबाइल CPU है, जो 4.6GHz तक की क्लॉक स्पीड पर रन कर सकता है। वनप्लस 15 के बाद इसी चिपसेट के साथ भारत में रियलमी GT 8 प्रो और आईक्यू 15 फोन भी लॉन्च होंगे। डिजाइन: तीन कलर ऑप्शन के साथ माइक्रो आर्क ऑक्सीडेशन ट्रीटमेंट वनप्लस 15 एलुमिनियम फ्रेम पर बना है, जिसमें इंडस्ट्री का पहला माइक्रो आर्क ऑक्सीडेशन ट्रीटमेंट का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह रॉ एलुमिनियम से 3.4 गुना ज्यादा टफ और टाइटेनियम से 1.5 गुना ज्यादा मजबूत है। मोबाइल को IP66 + IP68 + IP69 + IP69K रेटिंग मिली है, जो धूल और पानी के साथ ही चाय या तेल जैसे लिक्विड गिरने पर भी फोन को सु​रक्षित रखती है। फोन इन्फिनिटी ब्लैक अल्ट्रा वॉयलेट और सैंड स्ट्रॉम कलर ऑप्शन के साथ आया है। वनप्लस 15 का डिजाइन बिल्कुल सिंपल, स्लिम, कम्फर्टेबल और प्रीमियम फील वाला है। दाईं तरफ पावर और वॉल्यूम बटन, ऊपर IR ब्लास्टर और स्पीकर, बाईं तरफ कस्टमाइजेबल प्लस की (Key), नीचे सिम ट्रे, माइक, USB-C चार्जिंग पोर्ट और स्पीकर है। बैक पैनल पर वनप्लस लोगो सेंटर में है, जो पहले थोड़ा ऊपर था। कैमरा बंप बहुत छोटा है, इसमें तीन कैमरे और फ्लैश है। स्क्रीन के चारों तरफ 1.15mm की पतली और बराबर बेजल्स है। मिडिल फ्रेम पर माइक्रो आर्क ऑक्सीडेशन का नया टच है, जो इसे और मजबूत और स्टाइलिश बनाता है। वनप्लस 15 : स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: वनप्लस 15 में 2772 x 1272 पिक्सल रेजोल्यूशन वाली 6.78-इंच की QHD+ डिस्प्ले दी गई है। यानी, तस्वीरें और वीडियो बहुत साफ और तेज दिखते हैं। यह स्क्रीन LTPO ओलेड टेक्नोलॉजी वाली 1.5K डिस्प्ले है, जो नॉर्मल इस्तेमाल में 120Hz रिफ्रेश रेट पर काम करती है। इससे स्क्रॉलिंग और एनिमेशन स्मूथ लगते हैं, लेकिन गेम खेलते समय यह 165Hz तक की स्पीड दे सकती है, जिससे गेमिंग और भी फास्ट हो जाती है। स्क्रीन की क्वालिटी और बेहतर बनाने के लिए इसमें 450PPI (पिक्सल डेंसिटी) है, जो छोटे-छोटे डिटेल्स को क्रिस्प बनाता है। डिस्प्ले की पीक ब्राइटनेस 1800 निट्स है, यानी धूप में भी स्क्रीन साफ दिखेगी। फिंगरप्रिंट अनलॉक के लिए स्क्रीन के अंदर ही अल्ट्रासाउंड फिंगरप्रिंट सेंसर है, जो तेज और सेफ तरीके से काम करता है। कुल मिलाकर, यह डिस्प्ले गेमिंग, मूवीज और रोजमर्रा के काम के लिए परफेक्ट है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए वनप्लस 15 के बैक पैनल पर ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। इसमें एक 50 मेगापिक्सल का सोनी IMX906 मेन सेंसर है, जो रोजमर्रा की क्लियर और डिटेल्ड फोटोज के लिए ठीक है। दूसरा 50 मेगापिक्सल टेलीफोटो S5KJN5 लेंस है, जो दूर की चीजों को जूम करके बिना क्वालिटी खराब हुए शार्प फोटो लेता है। तीसरा 50 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड OV50D सेंसर है, जो ज्यादा वाइड एरिया को कवर करता है। ग्रुप फोटोज, लैंडस्केप या आर्किटेक्चर शॉट्स के लिए परफेक्ट है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 32 मेगापिक्सल वाला सोनी IMX709 फ्रंट कैमरा सपोर्ट करता है, जो शार्प सेल्फीज और स्मूथ वीडियोज देता है। परफॉर्मेंस: वनप्लस 15 में क्वालकॉम का सुपर फास्ट स्नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5 प्रोसेसर लगा है, जो 3 नैनोमीटर की एडवांस टेक्नोलॉजी से बना है। यह चिप 4.6GHz तक की हाई स्पीड से चल सकती है, यानी फोन में एप्स फटाफट खुलेंगे, मल्टीटास्किंग बिना रुके चलेगी और सब कुछ स्मूथ लगेगा। ग्राफिक्स के लिए इसमें एड्रेनो 840 GPU है, जिससे गेमिंग, वीडियो एडिटिंग या हाई-क्वालिटी ग्राफिक्स वाले काम आसानी से होते हैं। हैवी गेमिंग या हाई परफॉर्मेंस वाले टास्क करने पर फोन को गर्म होने से बचाने के लिए 360 Cryo-Velocity कूलिंग सिस्टम दिया गया है। यह सिस्टम पूरे फोन को 360 डिग्री से कवर करके ठंडा रखता है, ताकि परफॉर्मेंस ड्रॉप न हो। मेमोरी और स्टोरेज की बात करें तो, यह LPDDR5X अल्ट्रा+ रैम सपोर्ट करता है, जो मल्टीटास्किंग को और तेज बनाती है। फोन में UFS 4.1 स्टोरेज टेक्नोलॉजी दी गई है, जो फाइल्स, एप्स और गेम्स को ब्लिंक की स्पीड में लोड करती है। कुल मिलाकर, यह फोन परफॉर्मेंस के मामले में बेस्ट-इन-क्लास है- गेमर्स और पावर यूजर्स के लिए परफेक्ट है। बैटरी और चार्जर: वनप्लस 15 में पावर बैकअप के लिए 7300mAh की बैटरी दी गई है। टेस्टिंग में यह 17 घंटे, 06 मिनट का PC मार्क बैटरी बेंचमार्क स्कोर अचीव कर चुकी है। कंपनी का दावा है कि बैटरी की हेल्थ 4 साल तक 80% से अधिक रहेगी। इसे चार्ज करने के लिए स्मार्टफोन में 120W सुपरवूक वायर्ड और 50W एयरवूक वायरलेस चार्जिंग तकनीक दी गई है। अन्य: वनप्लस 15 में ब्लूटूथ 6.0 और NFC के साथ वाईफाई 7 और डेडिकेटेड वाई-फाई चिप लगाई गई है। फोन में कंपनी ने 16 5G बैंड्स दिए हैं, ​जो जियो, एयरटेल और VI नेटवर्क पर फास्ट काम करेंगे। USB 3.2 जेन 1, नॉइस कैंसलेशन वाले 3 माइक और इन्फ्रारेड रिमोट कंट्रोल जैसे फीचर्स भी हैं।

दैनिक भास्कर 2 May 2026 8:48 pm

सूरत में देश का पहला बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम शुरू:120kmph की स्पीड पर भी रियल टाइम में कटेगा टोल टैक्स

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को भारत का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम लॉन्च किया। यह सिस्टम गुजरात में सूरत-भरूच सेक्शन के NH-48 पर चोर्यासी टोल प्लाजा पर शुरू किया गया है, जिससे वाहन बिना रुके टोल दे सकेंगे। बैरियर-फ्री टोलिंग मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टेक्नोलॉजी पर आधारित है। यह 120 की स्पीड से भी गुजरने वाली गाड़ियों को बिना रुके टोल पॉइंट से गुजरने की सुविधा देती है। पारंपरिक टोल प्लाजा पर जहां फिजिकल बैरियर होते हैं वहीं यह सिस्टम सेंसर और कैमरों से लैस ओवरहेड फ्रेम का इस्तेमाल करता है, ताकि गाड़ियों की अपने-आप पहचान हो सके और टोल शुल्क रियल टाइम में काट लिया जाए। 120 की स्पीड से भी गुजरने वाली गाड़ियों की नंबर प्लेट पढ़ लेगें Ai कैमरे यह सिस्टम FASTag को ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ता है। हाई-परफॉर्मेंस वाले एआई कैमरे 120 किमी की स्पीड से भी गुजरने वाली गाड़ियों की नंबर प्लेट पढ़ लेते हैं, जबकि RFID रीडर FASTag स्टिकर को स्कैन करते हैं। इसके बाद टोल की रकम सीधे लिंक्ड अकाउंट से काट ली जाती है। अगर किसी गाड़ी में FASTag काम नहीं कर रहा है या गाड़ी पर फास्टैग नहीं लगा है तो कैमरा नंबर प्लेट के जरिए गाड़ी की पहचान कर मालिक को ई-नोटिस भेज देता है। यात्रा समय में कमी और हाईवे पर जाम घटेगाइस प्रणाली से यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी बल्कि हाईवे पर लगने वाले जाम में भी कमी आएगी। साथ ही दावा किया जा रहा है कि ईंधन की बचत भी होगी। वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी और टोल संचालन में कम से कम लोगों की जरूरत होगी। नए सिस्टम से ईंधन की होगी बचतमंत्रालय के अनुसार, इस सिस्टम से यात्रा का समय कम होगा, हाईवे पर जाम घटेगा, ईंधन की बचत होगी, वाहन प्रदूषण कम होगा और टोल संचालन में मानव हस्तक्षेप भी कम होगा। बयान में कहा गया कि एमएलएफएफ की शुरुआत भारत के टोल सिस्टम के डिजिटलीकरण और राष्ट्रीय राजमार्गों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। आम लोगों के जीवन को आसान बनाएगा सिस्टम: गडकरी गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह अत्याधुनिक प्रणाली वाहनों को बिना रुके निर्बाध टोल भुगतान की सुविधा देती है। इसमें ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) और फास्टैग जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया गया है। उन्होंनेकहा कि यह बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम आम लोगों के जीवन को आसान बनाएगा और व्यापार करने में भी सुविधा देगा, क्योंकि इससे माल और लॉजिस्टिक्स की आवाजाही तेज और अधिक प्रभावी होगी। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… पेट्रोल-डीजल ₹28 महंगा होने की खबरें गलत:सरकार बोली- दाम बढ़ाने का प्रस्ताव नहीं पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹25-28 प्रति लीटर बढ़ोतरी की खबरों को सरकार ने गलत बताया है। आज यानी 23 अप्रैल को पेट्रोलियम मिनिस्ट्री ने कहा कि दाम बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। ये खबरें भ्रामक हैं और डर फैलाने के लिए फैलाई जा रही हैं। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 2 May 2026 2:22 pm

भारत में लॉन्च हुआ विस्पर फ्लो एआई:AI डिक्टेशन का दौर, ये 4 एप्स आपके बड़े काम के

एआई वॉइस डिक्टेशन टूल हमारे लिखने का तरीका तेजी से बदल रहे हैं। अब कीबोर्ड की जरूरत घट रही है, आप बस बोलते हैं और एआई उसे साफ, व्यवस्थित, पढ़ने लायक टेक्स्ट में बदल देता है। ये एआई डिक्टेशन टूल्स सिर्फ शब्द नहीं, भाव भी पहचानते हैं। क्लेवरटिप के मुताबिक 40% स्मार्टफोन यूजर्स अब मैसेज या कंटेंट बनाने के लिए वॉइस इनपुट का इस्तेमाल कर रहे हैं। यानी यह सिर्फ एक फीचर नहीं, यूजर बिहेवियर का बड़ा बदलाव है। वॉइस टाइपिंग vs एआई टूलएआई बातचीत को नोट्स में बदलता है पहले वॉइस टाइपिंग का मतलब था… जो बोलेंगे, वही टेक्स्ट में आ जाएगा। अब एआई डिक्टेशन टूल्स उस टेक्स्ट को एडिट करते हैं, यानी वह एक तरह से आपके को-राइटर बन जाते हैं। यह एप्स अधूरे वाक्यों को पूरा करते हैं, गलत या बिखरी भाषा को सुधारते हैं व भाषा की टोन सही करते हैं और सामान्य बातचीत को नोट्स, मेल या आर्टिकल में भी बदल सकते हैं। डिक्टेशन की रेस में ये एप्स1. Wispr Flow Wispr Flow फोन में कीबोर्ड की जगह काम करता है। लगभग हर एप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह 179 शब्द प्रति मिनट तक टाइप कर सकता है। हिंदी समेत 100 से ज्यादा भाषाएं समझता है। फ्री वर्जन में हर हफ्ते फोन में 1 हजार शब्द मिलते हैं। 2. Google AI Edge Eloquent (iOS) यह ऑफलाइन भी काम करता है, यानी आवाज डिवाइस पर ही प्रोसेस होती है, क्लाउड पर नहीं जाती। यह नोट्स को पॉइंट्स में बदल सकता है, हालांकि अभी यह दूसरे एप्स के अंदर सीधे काम नहीं करता। पूरी तरह फ्री है। 3. Otter AI मीटिंग्स, इंटरव्यू और लेक्चर के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले टूल्स में से एक है। यह मीटिंग के सभी स्पीकर्स को पहचानता है, ऑटोमैटिक समरी बनाता है और जरूरी पॉइंट्स हाइलाइट करता है। सब्सक्रिप्शन 800 रुपए महीना से शुरू है। 4. Monologue यह स्क्रीन पर चल रही चीजों को भी समझता है। अगर आप कोड लिख रहे हैं, तो उसका संदर्भ पकड़ सकता है और उसी हिसाब से भाषा बदल सकता है। यह ऑफलाइन भी काम करता है। इसका मासिक सब्सक्रिप्शन 950 रुपए से शुरू है। एप इस्तेमाल के लिए ये परमिशन देनी होंगी -ज्यादातर डिक्टेशन एप्स को इन परमिशन्स की जरूरत होती है। - माइक्रोफोन एक्सेस - Display over other apps - Accessibility सेटिंग्स - Otter AI को स्क्रीन रिकॉर्ड करने की परमिशन भी चाहिए होती है, ताकि मीटिंग को कैप्चर कर सके। एआई डिक्टेशन टूल्स की ये चुनौतियां भी -प्राइवेसी - आपकी आवाज और डेटा कहां जा रहा है। कई टूल्स इसे साफ-साफ नहीं बताते हैं। -एक्युरेसी - लोकल भाषाओं और मिक्स लैंग्वेज जैसे माहौल में अभी भी सुधार की जरूरत है। -इंटरनेट - कई टूल्स को चलाने के लिए तेज इंटरनेट चाहिए होता है।

दैनिक भास्कर 2 May 2026 1:51 pm

एपल, गूगल व जेबीएल बना रहे नए दौर के ईयरबड्स:40 भाषाओं में ट्रांसलेशन, हार्ट रेट भी ट्रेक कर रहे हैं

नए दौर के हेडफोन्स तेजी से पर्सनल असिस्टेंट में बदल रहे हैं। ये आपके आसपास के माहौल को समझते हैं, बातचीत को प्रोसेस करते हैं, सेहत से जुड़े संकेत पकड़ते हैं और रियल टाइम में फैसले लेते हैं। पहले हेडफोन का काम था साउंड आउटपुट देना। अब इनमें एआई, सेंसर और मशीन लर्निंग जुड़ चुके हैं। एडाप्टिव नॉइज कैंसलेशन, वॉइस कमांड और लाइव ट्रांसक्रिप्शन, हार्ट रेट, बॉडी टेम्परेचर ट्रैकिंग और लोकेशन व एक्टिविटी मॉनिटरिंग जैसे फीचर्स आ गए हैं। इस तरह काम करते हैं एआई हेडफोन एआई हेडफोन्स में लगे माइक्रोफोन, सेंसर और एआई सिस्टम आपके आसपास की जानकारी समझते रहते हैं। जैसे आप क्या सुन रहे हैं, किससे बात कर रहे हैं, आसपास कितना शोर है या आप कहां मौजूद हैं। यह डेटा तुरंत प्रोसेस होता है। छोटे और तेज फैसले, जैसे आवाज कम-ज्यादा करना या बैकग्राउंड नॉइज हटाना, एआई खुद लेता है। एपल-गूगल बना रहे डिवाइस एपल एयरपॉड्स प्रो - यह ट्रांसपेरेंसी और नॉइज को खुद बैलेंस करता है। जैसे ही बोलना शुरू करते हैं, म्यूजिक धीमा हो जाता है। कीमत - 25900 रु. पिक्सल बड्स प्रो 2 - इसमें 40 अलग-अलग भाषाओं में लाइव ट्रांसलेशन है। वॉइस कमांड से काम होता है। शोर के हिसाब से ऑडियो बदलता है। कीमत- 22,900 रु. जेबीएल लाइव बीम 3 - ऑडियो के साथ फिटनेस और एक्टिव यूजर्स पर फोकस करता है। इसमें 6 माइक हैं। जरूरत पड़ने पर बाहर की आवाज सुन सकते हैं। कीमत- 11,999 रु. सैमसंग गैलेक्सी बड्स-3 प्रो सायरन-ट्रैफिक जैसी जरूरी आवाजों को आने देता है, अनावश्यक शोर को ब्लॉक करता है। कीमत- 19,999 रु. बीट्स पावरबीट्स प्रो 2 - इनमें PPG सेंसर लगे हैं, जो हार्ट रेट मापते हैं। वर्कआउट के दौरान इनकी हार्ट रेट ट्रैकिंग काफी सटीक मानी जा रही है, यहां तक कि कुछ मामलों में स्मार्टवॉच के बराबर। कीमत- 29900 रु. एआई हेडफोन की चार खूबियां इंटेलिजेंट नॉइज मैनेजमेंट भीड़ में भी सामने वाले व्यक्ति की आवाज साफ सुनाई देती है। रियल टाइम ट्रांसलेशन अब दो भाषाओं के लोगों के बीच लाइव ट्रांसलेशन कर सकते हैं। हिंदी में बोलें, सामने वाला अपनी भाषा में सुने। एडाप्टिव ऑडियो पर्सनलाइजेशन AI आपके कान के आकार के हिसाब से साउंड प्रोफाइल बदलता है। हेल्थ और प्रोडक्टिविटी ट्रैकिंग हार्ट रेट मॉनिटरिंग, बॉडी सिग्नल्स का एनालिसिस और मीटिंग ट्रांसक्रिप्शन करते हैं, इन्हें नोट्स में बदलते हैं।

दैनिक भास्कर 2 May 2026 1:03 pm

अमेजन ने लॉन्च किया एआई ऑडियो फीचर:अमेजन पर सवाल पूछकर होगी खरीदारी; रिव्यू-प्रोडक्ट डिटेल के अनुसार देगा जवाब

अमेजन ने नया फीचर लॉन्च किया है, जिसमें यूजर प्रोडक्ट के बारे में सवाल पूछकर बातचीत भी कर सकते हैं। कंपनी ने अपने फीचर Hear the Highlights में नया Join the Chat विकल्प जोड़ा है। इसकी मदद से यूजर किसी प्रोडक्ट की ऑडियो समरी सुनते समय टेक्स्ट या आवाज में सवाल पूछ सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यूजर पूछ सकता है कि क्या यह कॉफी मशीन बच्चों के लिए ठीक है? एआई प्रोडक्ट डिटेल, कस्टमर रिव्यू और उपलब्ध जानकारी से जवाब देता है। ऑडियो होस्ट की तरह जवाब देगा - AI स्क्रिप्ट रियल टाइम में बदलती है - टेक्स्ट-टू-स्पीच जवाब तैयार करता है - होस्ट उसी टोन में जवाब देता है कैसे काम करता है यह फीचर - यह सिर्फ सामान्य चैटबॉट नहीं है। - डिटेल, रिव्यू, वेब पर मौजूद जानकारी... इन सबको मिलाकर जवाब देता है। - अगर किसी फीचर के बारे में पहले बताया जा चुका है, तो AI नया और अलग जवाब देने की कोशिश करता है। कहां मिलेगा फीचर? - अमेरिका में उपलब्ध है। अन्य देशों में भी आएगा। - iOS और Android दोनों पर इस्तेमाल कर सकेंगे। - यूजर को सिर्फ प्रोडक्ट पेज पर जाकर Hear the Highlights बटन दबाना होगा। अमेजन में एआई पावर्ड शॉपिंग असिस्टेंट भी अमेजन में पहले से Rufus नाम का असिस्टेंट भी है। इसका एआई-पावर्ड शॉपिंग असिस्टेंट खरीदारी को ज्यादा बातचीत जैसा बनाता है। यह प्रोडक्ट कैटलॉग, रिव्यू और वेब डेटा के आधार पर यूजर्स को सलाह देता है। यूजर्स इसे भी इस्तेमाल कर सकते है।

दैनिक भास्कर 2 May 2026 12:44 pm

जेन अल्फा में लोकप्रिय हो रहे बिना स्क्रीन वाले फोन:स्मार्टफोन पर सख्ती के बीच बच्चों को डिजिटल ओवरलोड से बचाने का नया तरीका

दुनियाभर में बच्चों के बीच बढ़ते स्मार्टफोन के उपयोग और डिजिटल एक्सपोजर को देखते हुए कई देशों के स्कूलों में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लगाने की बातें हो रही हैं। वहीं मां-बाप के सामने भी एक बड़ी दुविधा होती है, भारी-भरकम फीचर्स वाले स्मार्टफोन दिए जाएं या नहीं? अगर नहीं, तो फिर उनसे संपर्क में बने रहने का सुरक्षित और आसान विकल्प क्या हो? इन्हीं चिंताओं के बीच पुराने जमाने का लैंडलाइन फोन एक नए अवतार में वापसी कर रहा है। अमेरिका और कनाडा में ‘टिन कैन’ नाम का एक स्क्रीन-फ्री वायर्ड फोन जेन अल्फा (16 वर्ष तक के) बच्चों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। करीब 100 डॉलर (करीब 9500 रुपए) कीमत वाला यह फोन दिखने में 90 के दशक के लैंडलाइन जैसा है। इसमें बड़े फिजिकल बटन, घुमावदार तार और बेस स्टैंड हैं। फोन बॉक्स पुराने जमाने का, पर तकनीक नई टिन केन की तकनीक पूरी तरह आधुनिक है। यह वाई-फाई से कनेक्ट होता है और इंटरनेट कॉलिंग की सुविधा देता है। सबसे खास बात यह है कि इसमें कोई एप, गेम या मैसेजिंग फीचर नहीं है। यानी बच्चे सिर्फ कॉल कर सकते हैं, वो भी सीमित दायरे में। माता-पिता एक मोबाइल एप के जरिए इस फोन को सेट करते हैं और तय करते हैं कि बच्चा किन लोगों से बात कर सकता है। इससे कोई अनजान कॉल या स्पैम का खतरा नहीं रहता। सिर्फ भरोसेमंद संपर्क ही उपलब्ध होते हैं। बच्चों को डिजिटल ओवरलोड से बचाने किया यह फोन डिजाइन इस डिवाइस को सिएटल के तीन व्यक्तियों ने मिलकर डिजाइन किया, जिनका मकसद था अपने बच्चों को डिजिटल ओवरलोड से बचाना। उनका कहना है कि बाजार में उपलब्ध स्मार्टफोन या तो जरूरत से ज्यादा जटिल हैं या बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं। ऐसे में यह नया नो-स्क्रीन वायर्ड फोन एक संतुलित समाधान बनकर उभर रहा है, जहां बच्चे संपर्क में भी रहें और डिजिटल दुनिया के जोखिमों से भी बचे रहें। सोशल मीडिया पर इसे अच्छी प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं।

दैनिक भास्कर 1 May 2026 1:39 pm

रेडमी पैड 2 प्रो रिव्यू, 12.1 इंच डिस्प्ले:12000mAh की बड़ी बैटरी और रिवर्स चार्जिंग के साथ वेल्यू फॉर मनी पैकेज

रेडमी ने अपना नया टैब रेडमी पैड 2 प्रो भारत में उतारा है। मिडरेंज सेगमेंट का यह टैब 12,000mAh की बैटरी के साथ आया है। इसकी शुरुआती कीमत 24,999 रुपए है। इस टैब को हमारी टीम दो महीने से इस्तेमाल कर रही है। हमने इसकी खूबियों और खामियों को जाना है। तो चलिए जानते हैं, इसमें क्या खास है। डिजाइन: मैटल बॉडी और हेडफोन जैक के साथ 4 स्पीकर्स बॉक्स में टैबलेट के साथ कुछ डॉक्यूमेंट्स, 33W का फास्ट चार्जिंग एडॉप्टर और टाइप-A टू टाइप-C केबल मिलती है। डिस्प्ले: 12.1 इंच स्क्रीन और गीले हाथों से भी चलने वाला टच रेडमी पैड 2 प्रो का सबसे खास फीचर इसकी 12.1 इंच की बड़ी 2.5K स्क्रीन है। इसमें 120Hz का रिफ्रेश रेट दिया गया है, जिससे स्क्रॉलिंग और नेविगेशन बेहद स्मूथ रहता है। डॉल्बी विजन सपोर्ट होने की वजह से इस पर वीडियो देखने और गेम खेलने का अनुभव शानदार मिलता है। कलर्स और डिटेल्स एकदम क्लियर नजर आती हैं और आप इस पर 4K वीडियो का मजा ले सकते हैं। बैटरी: 5 दिन तक का बैकअप और रिवर्स चार्जिंग रेडमी पैड 2 प्रो में 12,000mAh की बैटरी दी गई है। स्टैंडबाय मोड पर रखते हुए और रोजाना करीब 3 घंटे ऑनलाइन वीडियो देखने के बावजूद, 5 दिन में बैटरी 78% से घटकर 26% पर ही आई। वहीं, आधे घंटे तक यूट्यूब पर वीडियो चलाने पर बैटरी सिर्फ 3% ही खर्च हुई। बैटरी चार्ज करने के लिए बॉक्स में 33W का फास्ट चार्जर मिलता है। टैबलेट की एक बड़ी खूबी इसकी 27W 'रिवर्स चार्जिंग' तकनीक है। यानी आप इसे पावरबैंक की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं और अपने फोन, ईयरबड्स या स्मार्टवॉच को इस टैबलेट से चार्ज कर सकते हैं। परफॉर्मेंस: डेली यूज के लिए बेहतर और स्मूथ रेडमी पैड 2 प्रो लेटेस्ट हाइपर OS 2 पर चलता है। इसमें क्वालकॉम का पावरफुल स्नैपड्रैगन 7s जेन 4 प्रोसेसर दिया गया है, जो 2.7GHz तक की हाई स्पीड देता है। ग्राफिक्स के लिए इसमें एड्रेनो 810 GPU लगा है। प्रोसेसर की ताकत समझने के लिए हमने कुछ बेंचमार्क टेस्ट किए हैं, जिनका स्कोर नीचे टेबल में दिया गया है। कैमरा: मीटिंग्स के लिए अच्छा ऑप्शन रेडमी पैड 2 प्रो के फ्रंट और बैक दोनों तरफ 8 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है। रियर कैमरे से फोटो और वीडियो क्वालिटी औसत है। इसमें पोर्ट्रेट, प्रो और डॉक्यूमेंट जैसे मोड्स मिलते हैं। हालांकि इसमें 6.0x तक का डिजिटल जूम है, लेकिन जूम करने पर फोटो थोड़ी धुंधली हो जाती है। अच्छी बात यह है कि जूम करने के बावजूद फ्रेम में लिखे हुए 'टेक्स्ट' साफ नजर आते हैं। फ्रंट कैमरा अच्छा काम करता है। यह स्किन टोन को साफ और स्मूथ कर देता है। इसमें HDR सपोर्ट भी है, जो लाइट को अच्छे से एडजस्ट करता है। इसका फ्रेम काफी वाइड है, जिससे ऑनलाइन मीटिंग्स या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए यह अच्छा ऑप्शन है। काम के फीचर्स: लाउड साउंड और शानदार कनेक्टिविटी रेडमी पैड 2 प्रो में डॉल्बी एटमॉस वाले 4 स्पीकर्स हैं, जो काफी तेज और साफ आवाज देते हैं। इनकी वॉल्यूम को 300% तक बढ़ाया जा सकता है। इसमें डुअल 5G सिम का सपोर्ट भी है, यानी आप टैबलेट में सिम कार्ड डालकर सीधे इंटरनेट चला सकते हैं। हाइब्रिड स्लॉट होने की वजह से आप सिम के साथ मेमोरी कार्ड भी लगा सकते हैं। इसके अलावा इसमें सर्किल टू सर्च और जेमिनी AI जैसे एडवांस फीचर्स भी मिलते हैं। एक्सेसरीज: पेन और कीबोर्ड का भी विकल्प बेहतर कनेक्टिविटी के लिए इसमें वाई-फाई 6 और ब्लूटूथ 5.4 दिया गया है। कंपनी इस टैबलेट के साथ स्मार्ट पेन और कीबोर्ड का सपोर्ट भी देती है, लेकिन इन्हें अलग से खरीदना होगा। दोनों की कीमत ₹3,999-₹3,999 है। पेन प्रेशर सेंसिटिव है, यानी दबाकर लिखने पर लाइन मोटी हो जाती है। आप इसे टाइप-C से चार्ज कर सकते हैं। कीबोर्ड का एक्सपीरियंस बहुत टेक्टाइल है। इसमें टचपैड तो नहीं है, लेकिन शॉर्टकट्स बहुत सारे हैं। एक बार चार्ज करने पर कीबोर्ड हफ्तों चलता है। ये एक्सेसरीज आपके टैबलेट को एक मिनी लैपटॉप बना देती है। वैसे इन एक्सेसरीज के बिना भी टैबलेट का इस्तेमाल करने में कोई परेशानी नहीं आती है, यह पूरी तरह यूजर की जरूरत पर निर्भर करता है। फाइनल वर्डिक्ट कीमतों की बात करें तो, इसका Wi-Fi वैरिएंट आपको मिलेगा 24,999 रुपये में मिलेगा। वहीं, 5G मॉडल के 128GB स्टोरेज वाले वैरिएंट की कीमत 27,999 रुपए और 256GB वाले टॉप मॉडल की कीमत 29,999 रुपए है। अगर आपको एक ऐसा टैबलेट चाहिए जिसकी बैटरी लंबी चले, जिसका डिस्प्ले बड़ा और अच्छा हो और परफॉर्मेंस भी दमदार हो, तो रेडमी पैड 2 प्रो एक पैसा वसूल डील हो सकती है। रिवर्स चार्जिंग टेक्नोलॉजी टैबलेट के यूज को एडवांस बनाती है। अमूमन टैबलेट के कैमरा से संतुष्टि नहीं होती है लेकिन रेडमी पैड 2 प्रो का कैमरा निराशा नहीं करेगा। यह टैब हाइपर OS 2 पर काम करता है, जो 5 जनरेशन की एंड्रॉयड OS अपडेट और 7 साल की सिक्योरिटी अपडेट के साथ लाया गया है। कुल मिलाकर 25 से 30 हजार की रेंज में रेडमी पैड 2 प्रो खरीदना घाटे का सौदा साबित नहीं होगा।

दैनिक भास्कर 1 May 2026 6:00 am