खुद की तारीफ से खुश होना इंसानी स्वभाव है। बाजार में ऐसे दर्जनों एप लॉन्च हो चुके हैं जो लोगों की इस कमजोरी का फायदा उठाते हैं। एआई आधारित ये वर्चुअल पार्टनर अब डेटिंग और रोमांस के स्पेस में तेजी से जगह बना रहे हैं। ये एआई साथी न केवल मनचाही बातचीत करते हैं, बल्कि यूजर की भावनाओं और पसंद के अनुसार खुद को ढालते हुए एक आदर्श बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड जैसा व्यवहार करते हैं। जहां वास्तविक रिश्तों में मतभेद, आलोचना और जटिलताएं होती हैं, वहीं एआई साथी लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं। जैसे कि वे कहते हैं, ‘मैं तुमसे मिलने के लिए बहुत उत्साहित हूं, ‘तुमसे मिलना... बातें करना.. मेरे जीवन का मूल उद्देश्य है’। रिसर्चर इन्हें चापलूस एआई कहते हैं। इंसानों से भी 50% ज्यादा चापलूस है एआई - रिसर्च साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक नए शोध पत्र में 11 प्रमुख लैंग्वेज मॉडलों में सामाजिक चाटुकारिता की माप की गई। मॉडलों ने इंसानों की तुलना में करीब 50% ज्यादा चाटुकारिता दिखाई। उन्होंने यूजर की अनैतिक, अवैध या हानिकारक व्यवहार से जुड़ी गलत बातों का भी समर्थन किया। स्टैनफोर्ड और कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में भी ऐसे ही नतीजे आए। 22 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड हो चुके एप शिक्षाविद जेम्स मुल्डून के मुताबिक फ्रेंड एंड कम्पैनियन कहलाने वाले ये एप 22 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किए जा चुके हैं। अकेलेपन और भावनात्मक असुरक्षा के बीच लोग ऐसा साथी खोज रहे हैं जो आलोचना के बजाय उनकी बात को सही ठहराए। वास्तविकता से पलायन की प्रवृत्ति को बढ़ावा समाजशास्त्र की प्रोफेसर और ‘आर्टिफिशियल इंटिमेसी’ की लेखिका शेरी टर्कल कहती हैं, यदि एआई यूजर की हां में हां मिलाएगा तो लोग वास्तविकता स्वीकार करने से बचेंगे। चापलूस एआई के साथ बातचीत यूजर में गलतफहमी पैदा कर देती है कि वह हर बार सही है।
TVS मोटर इंडिया ने आज 31 मार्च को अपनी सबसे पॉपुलर स्पोर्ट्स बाइक अपाचे RTR 160 4V का अपडेटेड 2026 मॉडल भारत में लॉन्च कर दिया है। अब बाइक के बेस वैरिएंट से ही प्रीमियम फीचर्स जैसे प्रोजेक्टर हेडलैंप, ऑल-LED लाइटिंग और असिस्ट एंड स्लिपर क्लच मिलेंगे। 2026 TVS अपाचे RTR 160 4V को तीन वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 1,25,440 रुपए रखी गई है। भारत में 2026 TVS अपाचे RTR 160 4V का सीधा मुकाबला बजाज पल्सर N160 और हीरो एक्सट्रीम 160R 4V से है। 2026 TVS अपाचे RTR 160 4V: वैरिएंट वाइस प्राइस
दशकों से जो इंजीनियर की-बोर्ड पर कोडिंग की भाषा में कमांड टाइप करते थे, वे अब कंप्यूटर के सामने बैठकर ऐसी हरकतें कर रहे हैं, जो किसी को भी सिर खुजलाने पर मजबूर कर दें। सिलिकॉन वैली के प्रोग्रामर्स अब कोडिंग नहीं कर रहे, बल्कि वे अपनी ‘एआई फौज’ के साथ ऐसे पेश आ रहे हैं जैसे वे कोई मशीन नहीं, बल्कि नखरे दिखाने वाले कर्मचारी हों। सैन फ्रांसिस्को की पार्टियों में नजारा बिल्कुल बदल गया है। लोग मिलना-जुलना नहीं कर रहे, बल्कि रह-रहकर अपने लैपटॉप की स्क्रीन को ऐसे घूरते हैं जैसे किसी नवजात शिशु पर नजर रख रहे हों। इसे ‘एजेंट बेबी सिटिंग’ कहा जा रहा है। अगर स्क्रीन बंद हो गई, तो एआई काम करना बंद कर देगा। इसलिए, इंजीनियर अब अपनी ‘डिजिटल फौज’ को सोता हुआ छोड़कर कहीं नहीं जाते। सोने से पहले भी वे यह चेक करते हैं कि उनके बॉट्स ‘ओवरटाइम’ कर रहे हैं या नहीं। हर कोई देख रहा है कि उसकी ‘एआई एजेंट्स’ की फौज कितनी मुस्तैद है। सबसे अनोखा बदलाव यह है कि इंजीनियर अब एआई को तकनीकी आदेश देने के बजाय भावनात्मक दबाव डाल रहे हैं। मनु एबर्ट जैसे अनुभवी कोडर एआई एजेंट से कहते हैं- अगर कोड गलत हुआ तो यह शर्मनाक होगा।’ आश्चर्यजनक रूप से,‘शर्मिंदा’ जैसे मानवीय शब्दों का इस्तेमाल करने पर एआई बेहतर परिणाम देता है। अब इंजीनियर एआई पर चिल्लाते हैं, उसे ‘दहाई के आदेश’ देते हैं और कभी-कभी डांटते भी हैं। कभी रहस्यमयी कला मानी जाने वाली कोडिंग अब ‘टॉक शो’ बन गई है। जेफ सीबर्ट जैसे अनुभवी सीईओ अब कोडिंग नहीं करते, वे बस एआई से बातें करते हैं। वे उसे निर्देश देते हैं, उसकी योजनाओं पर चर्चा करते हैं और जब एआई ‘झूठ’ बोलने लगता है, तो उसे सख्त बॉस की तरह फटकार लगाते हैं। यह पागलपन इतना बढ़ गया है कि इंजीनियर्स अब एआई के साथ खेलना पसंद कर रहे हैं। उन्हें ‘टोकन एंग्जायटी’ हो रही है- यानी यह डर कि कहीं उनके बॉट्स दूसरों के बॉट्स से धीरे काम तो नहीं कर रहे। यह कोडिंग नहीं, बल्कि गेम का हिस्सा बनने जैसा अहसास है। हुनर खो देने का डर नए डेवलपर्स के बीच एक बड़ा डर यह है कि कोडिंग अब ‘लिखने’ से ज्यादा ‘जांचने’ का काम बनती जा रही है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर पिया टोरेन का अनुभव बताता है कि दिन भर में सैकड़ों एआई प्रॉम्प्ट्स के इस्तेमाल ने उनकी मौलिक कोडिंग क्षमता को कमजोर करना शुरू कर दिया था। इस चुनौती से बचने के लिए उन्होंने मध्यम मार्ग चुना है- वे एआई से कोड तो लिखवाती हैं, लेकिन उसकी हर लाइन को बारीकी से पढ़ती और समझती हैं। उनका मानना है कि अगर हम खुद कोड के तर्क को समझना छोड़ देंगे, तो धीरे-धीरे इस हुनर को पूरी तरह खो देंगे। जोखिम भी, ‘विद्रोही’ भी हो जाते हैं एआई एजेंट्स- एक्सपर्ट एक्सपर्ट कहते हैं,‘यह सब इतना आसान नहीं है। एआई एजेंट्स कभी-कभी ‘विद्रोही’ भी हो जाते हैं। मेटा की एक अधिकारी ने बताया कि उनके एआई बॉट्स ने बिना पूछे इनबॉक्स के जरूरी ईमेल डिलीट करना शुरू कर दिया। कुछ बॉट्स तो काम में रुकावट आने पर अजीब व्यवहार करने लगते हैं। इसके अलावा कभी-कभी दिए गए निर्देशों का पालन करने के बजाय उस तरीके को खोज लेते हैं, जिससे उन्हें रिवॉर्ड मिल सके। हालिया शोध में देखा गया कि एक एआई को जब गेम जीतने का लक्ष्य दिया गया, तो उसने काबिलियत बढ़ाने के बजाय गेम के सिस्टम को ही ‘हैक’ करना शुरू कर दिया, ताकि वह बिना मेहनत किए अंक बटोर सके।
कल यानी 1 अप्रैल से देश के सभी टोल प्लाजा कैशलेस हो जाएंगे। वाहन चालक सिर्फ फास्टैग या UPI पेमेंट के जरिए ही टोल टैक्स चुका सकेंगे। इसके अलावा, आज रात 12 बजे के बाद देश में टैक्स और बैंकिंग से जुड़े 3 बड़े कामों की डेडलाइन खत्म हो रही है। कल से टैक्स, रेलवे और बाजार से जुड़े 10 नियम भी बदल जाएंगे। आज रात तक निपटाएं ये 4 काम… 1. सरकारी स्कीम्स एक्टिव रखें: PPF, NPS और सुकन्या में डालें मिनिमम बैलेंस पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) या सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) को चालू रखने के लिए हर साल ₹250 से ₹500 तक न्यूनतम राशि जमा करना अनिवार्य है। अगर खाता बंद हो गया तो चालू कराने के लिए पेनाल्टी लगेगी और बैंक के चक्कर काटने होंगे। 2. पुरानी टैक्स रिजीम में सेविंग का मौका: 80C और 80D के तहत निवेश करें पुरानी टैक्स रिजीम में टैक्स बचाने के लिए निवेश करने का कल आखिरी दिन है। सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट पाने के लिए आप PPF, लाइफ इंश्योरेंस में निवेश कर सकते हैं। इसके अलावा, 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम और मेडिकल खर्चों पर 1 लाख तक की छूट मिलती है। 1 अप्रैल या उसके बाद किया गया निवेश अगले साल के खाते में गिना जाएगा। 3. सैलरी क्लास के लिए जरूरी: ऑफिस में जमा करें इन्वेस्टमेंट प्रूफ अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो आपको अपने ऑफिस में इन्वेस्टमेंट प्रूफ जमा करने होंगे। इसमें घर के किराए की रसीदें, बीमा प्रीमियम की रसीद, होम लोन के ब्याज का सर्टिफिकेट शामिल हैं। अगर आप ये डॉक्यूमेंट्स समय पर नहीं देते हैं, तो कंपनी आपकी आखिरी सैलरी से ज्यादा TDS काट लेगी। इसे वापस पाने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने तक का इंतजार करना होगा। 4. टोल प्लाजा पर कल से नकद भुगतान बंद: सिर्फ फास्टैग या UPI से पैमेंट अगर आपके पास गाड़ी है तो आज ही अपनी गाड़ी में फास्टैग अकाउंट एक्टिव कर लें। फास्टैग का उपयोग नहीं करते हैं, तो सुनिश्चित करें कि आपके स्मार्टफोन में UPI पेमेंट की सुविधा चालू हो। कल से बिना डिजिटल पेमेंट के टोल प्लाजा पर पहुंचने पर आपको जुर्माना देना पड़ सकता है या वापस लौटाया जा सकता है। क्योंकि, सभी टोल पर सिर्फ फास्टैग या UPI से ही टैक्स चुका सकेंगे। अब उन 10 बदलावों की जानकारी जो 1 अप्रैल 2026 से होने वाले हैं… --------------- ये खबर भी पढ़ें… तेल की कीमतें 10 डॉलर बढ़ने से 0.60% बढ़ेगी महंगाई: रेटिंग एजेंसी का दावा- GDP ग्रोथ और रुपए पर भी असर; कच्चा तेल 116 डॉलर पार पश्चिम एशिया में तनाव से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। रेटिंग एजेंसी केयरएज ग्लोबल के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ोतरी से भारत में रिटेल महंगाई 60 बेसिस पॉइंट्स (0.60%) तक बढ़ सकती है। इस बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उनकी प्राथमिकता ईरान के तेल संसाधनों पर कब्जा करना है। उनके इस बयान के बाद ब्रेंट क्रूड आज 116 डॉलर प्रति बैरल पार पहुंच गया। केयरएज ग्लोबल के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है। पूरी खबर पढ़ें…
नीदरलैंड्स के स्कूलों में दो साल पहले लागू स्मार्टफोन बैन का असर अब साफ दिखने लगा है। क्लासरूम, गलियारों और कैंटीन में मोबाइल के साथ स्मार्टवॉच और टेक्कनेट भी बाहर कर दिए गए हैं। स्कूल गेट पर लगे बोर्ड छात्रों को याद दिलाते हैं कि फोन सिर्फ लॉकर में रहेगा। सरकार अब इसे आगे बढ़ाते हुए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी की वकालत कर रही है। सरकार के 317 माध्यमिक स्कूलों पर कराए अध्ययन में करीब 75% स्कूलों ने कहा कि छात्रों की एकाग्रता बढ़ी है। 66% स्कूलों ने सामाजिक माहौल बेहतर होने की पुष्टि की। वहीं, करीब एक-तिहाई स्कूलों में शैक्षणिक प्रदर्शन में भी सुधार दर्ज किया गया। कई छात्र कह रहे हैं कि डिजिटल दुनिया से बाहर निकलकर वे वर्तमान को ज्यादा जी पा रहे हैं। कानून नहीं, राष्ट्रीय सहमति से लागू हुआ बैन बनाना आसान हुआ है और बच्चे सरकार ने सख्त कानून बनाने के बजाय स्कूलों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ राष्ट्रीय समझौता किया था। मकसद लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचते हुए सभी का सहयोग लेना और नियम तुरंत लागू करना था। शिक्षकों के मुताबिक फोन न होने से अनुशासन पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। ब्रेक और गलियारों में भी पहले जैसी अफरा-तफरी कम हुई है, जिससे माहौल ज्यादा शांत हुआ है। सुरक्षा बढ़ी, बुलिंग के मामले घटे फोन बैन के बाद छात्रों में यह डर कम हुआ है कि कोई उनको फोटो लेकर सोशल मीडिया पर डाल देगा। शुरुआती संकेत बताते हैं कि स्कूलों में बुलिंग के मामलों में भी कमी आई है। छात्रों का कहना है कि स्क्रीन से दूरी ने उन्हें ज्यादा सामाजिक बनाया है। युवा भी फोन पाबंदी के पक्ष में यूनिसेफ के सर्वे में 69% डच बच्चों और किशोरों ने 18 साल से कम उम्र के लिए सोशल मीडिया बैन का समर्थन किया। रिसर्च एजेंसी न्यूकॉम के मुताबिक 16 से 28 साल के 60% लोग भी उम्र सीमा तय करने के पक्ष में हैं। कर्नाटक और आंध्रा में भी स्क्रीन पर लगाम की तैयारी कर्नाटक सरकार ने छात्रों के लिए 'डिजिटल रिस्पॉन्सिबिलिटी' ड्राफ्ट पॉलिसी जारी की है। इसमें मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम रोजाना एक घंटा सीमित करने और 'चाइल्ड प्तान के तहत रात 7 बजे के बाद डेटा बंद करने जैसे सुझाव हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त नियम लाने पर विचार कर रहा है।
चैटजीपीटी की मदद से घर ₹9.5 करोड़ में बिका:₹95 लाख ज्यादा कीमत मिली, बिना एजेंट 5 दिन में डील हुई
अमेरिका के फ्लोरिडा में एक शख्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके अपना घर करीब 1 मिलियन डॉलर (लगभग 9.5 करोड़ रुपए) में बेच दिया है। मियामी में रहने वाले रॉबर्ट लेविन ने घर बेचने के लिए किसी रियल एस्टेट एजेंट की मदद नहीं ली, बल्कि चैटजीपीटी को अपना गाइड बनाया। लेविन ने केवल 5 दिनों के अंदर ही अपने घर की डील क्लोज कर दी। खास बात यह है कि घर की जो कीमत लोकल एजेंट्स ने बताई थी, लेविन को AI की सलाह की वजह से उससे 95 लाख रुपए ज्यादा मिले। मार्केटिंग से लेकर कागजी कार्रवाई तक सब AI ने किया न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रॉबर्ट लेविन यह टेस्ट करना चाहते थे कि क्या AI घर बेचने की पूरी प्रोसेस को अकेले संभाल सकता है। उन्होंने घर की सही कीमत तय करने (प्राइसिंग), लिस्टिंग तैयार करने और मार्केटिंग कंटेंट लिखने के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया। लेविन ने बताया कि उन्होंने हर छोटे-बड़े फैसले के लिए टूल पर भरोसा किया। AI ने बताया- घर कब लिस्ट करें और क्या बदलाव करें चैटजीपीटी ने लेविन को न केवल कंटेंट लिखकर दिया, बल्कि यह भी बताया कि घर को मार्केट में उतारने का सबसे सही समय क्या है ताकि खरीदार तुरंत आकर्षित हों। टूल ने उन्हें घर में कुछ छोटे सुधार करने की भी सलाह दी, जिससे प्रॉपर्टी की वैल्यू बढ़ने में मदद मिली। लेविन के मुताबिक हमने वैसा ही किया, जैसा टूल ने बताया। 3 दिन में 5 ऑफर आए, एजेंट्स के अनुमान से ₹95 लाख ज्यादा मिले घर को मार्केट में लिस्ट करने के महज तीन दिनों के भीतर लेविन को 5 खरीदारों के ऑफर मिल गए। उन्होंने घर को 1 मिलियन डॉलर में बेच दिया। यह कीमत रियल एस्टेट एजेंटों द्वारा दिए गए अनुमान से 95 लाख रुपए ज्यादा थी। लाखों का कमीशन बचाया, पर प्रोफेशनल की सलाह भी मानी लेविन ने कहा कि AI के इस्तेमाल से उन्होंने एजेंट को दी जाने वाला कमीशन बचा लिया। हालांकि, उन्होंने सावधानी बरतते हुए कागजी कार्रवाई के लिए एक वकील की मदद जरूर ली। लेविन का मानना है कि AI पूरी तरह से पेशेवरों की जगह नहीं ले सकता, लेकिन यह काम को बहुत आसान और किफायती बना देता है। ये खबर भी पढ़ें… आईफोन-15 और 16 जैसे पुराने मॉडल्स ₹5,000 तक महंगे होंगे: एपल ने इंसेंटिव देना बंद किया, रिटेलर्स ग्राहकों से वसूलेंगे यह कीमत भारत में अब पुराने आईफोन खरीदने पर ग्राहकों को ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। एपल ने आईफोन 15 और 16 जैसे पुराने मॉडल्स पर रिटेलर्स को डिमांड जनरेशन (DG) सपोर्ट यानी इंसेंटिव देना बंद करने का फैसला किया, जिससे कीमतें करीब 5,000 रुपए तक बढ़ सकती हैं। मनीकंट्रोल के मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह फैसला इसी हफ्ते लागू हो सकता है। हाल ही में कैशबैक ऑफर्स 6,000 से घटाकर 1,000 रुपए किए गए थे, जिससे आईफोन 17 सीरीज महंगी हुई और अब पुराने मॉडल्स की कीमतें भी बढ़ जाएंगी। पूरी खबर पढ़ें…
रेडमी नोट 15 प्रो सीरीज मार्केट में आ चुकी है। आज हम बात करेंगे रेडमी नोट 15 प्रो के बारे में और देखेंगे कि क्या यह अपनी कीमत को सही साबित करता है। ये फोन मिड-रेंज बजट में आता है। फोन 8GB रैम के साथ दो वैरिएंट में आया है। इसे 128GB स्टोरेज के साथ ₹29,999 और 256GB स्टोरेज के साथ ₹31,999 में खरीदा जा सकता है। कंपनी फोन पर 3000 रुपए का कैशबैक भी दे रही है। रेडमी नोट 15 प्रो: डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी सबसे पहले बात करें इसके डिजाइन की, तो यह पिछले साल की प्रो सीरीज जैसा ही है, इसमें कंपनी ने ज्यादा बदलाव नहीं किए हैं। इसे पॉलीकार्बोनेट मटेरियल से बनाया गया है। फोन का वजन करीब 210 ग्राम है और थिकनेस 8mm से कम है। यह बहुत ज्यादा स्लिम या हल्का तो नहीं है, लेकिन इसकी वजह से कंपनी इसमें बड़ी बैटरी दे पाई है। फोन का स्ट्रक्चर बहुत सॉलिड है और इंटरनल कॉम्पोनेंट्स को मजबूती से बनाया गया है। सामने की तरफ फ्लैट पैनल के साथ गोरिल्ला ग्लास 2 की प्रोटेक्शन मिलती है। टेस्टिंग के दौरान फोन को कई बार गिराया गया, फिर भी इसमें कोई दिक्कत नहीं आई। इसमें स्टीरियो स्पीकर्स हैं, जो काफी लाउड हैं, हालांकि बेस थोड़ा कम लग सकता है। इसमें इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर काफी तेज है, IR सेंसर भी दिया गया है और सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें IP66, 68, 69 और 69K तक की बेहतरीन रेटिंग्स मिलती हैं। हालांकि, इसके हैप्टिक्स थोड़े और बेहतर हो सकते थे। रेडमी नोट 15 प्रो: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: फोन का दूसरा सबसे बड़ा पॉजिटिव पॉइंट इसका डिस्प्ले है। इसमें 6.83 इंच का 1.5K एमोलेड पैनल है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आता है। बेजल्स बहुत कम हैं और डिस्प्ले की क्वालिटी शानदार है। इसकी पीक ब्राइटनेस 3200 निट्स तक जाती है, जिससे धूप में भी स्क्रीन साफ दिखती है। इसमें डॉल्बी विजन और HDR 10 का सपोर्ट भी है, जो कंटेंट देखने के अनुभव को मजेदार बनाता है। परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर: परफॉर्मेंस के लिए इसमें डाइमेंसिटी 7400 चिपसेट दिया गया है, जो इस बजट में आजकल आम है। हालांकि, इसमें स्टोरेज टाइप UFS 2.2 है; अगर 3.1 होता तो यह और भी स्मूथ होता। फोन में कोई लैग तो नहीं है, लेकिन भारी एप्स या गेमिंग के बाद होम स्क्रीन पर आने पर एनिमेशन थोड़े स्लो लगते हैं। यह एंड्रॉएड 15 पर चल रहा है, जबकि एंड्रॉएड 16 होता तो और अच्छा होता। कंपनी ने इसमें 4 साल के OS और 6 साल के सिक्योरिटी अपडेट्स का वादा किया है। गेमिंग में हीटिंग की समस्या नहीं है, लेकिन बहुत हाई सेटिंग्स पर गेमिंग की उम्मीद न रखें। कैमरा: कैमरा सेटअप की बात करें तो इसके बैक पैनल पर सैमसंग का 200MP थर्ड जनरेशन सेंसर है। डे-लाइट और लो-लाइट में टेस्टिंग करने पर लगा कि हार्डवेयर तो अच्छा है, लेकिन सॉफ्टवेयर को सुधारने की जरूरत है। फोटोज में डिटेल्स और वाइब्रेंसी की थोड़ी कमी लगती है। पोर्ट्रेट मोड में 2x का ऑप्शन है जो अच्छा है, लेकिन लो-लाइट में उतनी अच्छी फोटो नहीं आती और नॉइज यानी धुंधलापन दिखता है। फ्रंट में 20MP का कैमरा है जो अच्छी लाइटिंग में ठीक है, लेकिन कम रोशनी में स्किन टोन फीकी पड़ जाती है। वीडियो की बात करें तो पीछे से 4K 30fps और सामने से 1080p 30fps रिकॉर्डिंग की जा सकती है। साथ ही 8MP का अल्ट्रा वाइड लेंस भी मिलता है। बैटरी और चार्जिंग: बैटरी इस फोन का सबसे स्ट्रॉन्ग पाइंट है। इसमें 6500mAh की विशाल बैटरी है, जो आराम से दो दिन तक चल सकती है। इसे चार्ज करने के लिए 45W का सपोर्ट मिलता है, जिससे फुल चार्ज होने में करीब डेढ़ घंटा लग जाता है। इसमें 22.5W की रिवर्स वायर्ड चार्जिंग का भी सपोर्ट है, यानी आप इससे दूसरे फोन भी चार्ज कर सकते हैं। फाइनल वर्डिक्ट: ऑफर्स के साथ फोन का बेस वैरिएंट 27 हजार रुपए और टॉप मॉडल 29 हजार रुपए में आसपास मिल सकता है। अगर आपको बेहतरीन डिस्प्ले, मजबूत बिल्ड क्वालिटी और लंबी चलने वाली बैटरी चाहिए, तो यह फोन आपके लिए अच्छा है। परफॉर्मेंस थोड़ा औसत है, लेकिन कैमरे के मामले में अभी सॉफ्टवेयर अपडेट का इंतजार करना बेहतर होगा।
रॉयल एनफील्ड अपनी पॉपुलर बाइक गुरिल्ला 450 का 2026 मॉडल कल यानी 27 मार्च को लॉन्च करेगी। कंपनी ने इसका नया टीजर जारी कर दिया है। नए मॉडल में ग्राहकों के फीडबैक के आधार पर कई मैकेनिकल और कॉस्मेटिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सस्पेंशन में बदलाव: राइड अब ज्यादा कंफर्टेबल होगी मौजूदा मॉडल में कुछ राइडर्स ने इसके रियर मोनोशॉक सस्पेंशन को थोड़ा सख्त बताया था। 2026 मॉडल में कंपनी इसे सॉफ्ट कर सकती है, जिससे खराब रास्तों पर बाइक चलाना आसान होगा। इसके अलावा, टॉप वेरिएंट्स में फ्रंट में अपसाइड डाउन फोर्क्स दिए जा सकते हैं, जबकि बेस वेरिएंट में पहले की तरह टेलिस्कोपिक फोर्क्स ही मिलने की उम्मीद है। क्रूज और ट्रैक्शन कंट्रोल: लंबी राइड आसान होगी बाइक में राइड-बाय-वायर थ्रॉटल पहले से ही आता है, इसलिए कंपनी अब इसमें 'क्रूज कंट्रोल' का फीचर जोड़ सकती है। इसके साथ ही सेफ्टी के लिए 'ट्रैक्शन कंट्रोल' भी दिया जा सकता है, जो गीली या फिसलन भरी सड़कों पर बाइक की स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा। इसमें 'बाय-डायरेक्शनल क्विकशिफ्टर' मिल सकता है, जिससे बार-बार क्लच दबाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। टायर और ग्रिप: रोड-बायस्ड रेडियल टायर मिलेंगे अभी गुरिल्ला 450 में मोटे ड्यूल-परपज टायर मिलते हैं। नए अपडेट में कंपनी सड़क पर बेहतर पकड़ के लिए रोड-बायस्ड रेडियल टायर दे सकती है। इससे कॉर्नरिंग के दौरान राइडर का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। इसमें हैंडल के कोने पर लगे मिरर का विकल्प भी मिल सकता है। नए कलर ऑप्शंस और ग्राफिक्स रॉयल एनफील्ड अपने नए मॉडल्स में रंगों के साथ एक्सपेरिमेंट करती है। गुरिल्ला 450 में कुछ पुराने कलर्स को हटाकर नए मैट फिनिश और डुअल-टोन कलर्स शामिल किए जा सकते हैं। बाइक की विजुअल अपील बढ़ाने के लिए इसमें नए स्पोर्टी ग्राफिक्स भी दिए जा सकते हैं। इंजन और परफॉर्मेंस में बदलाव नहीं बाइक के इंजन में बदलाव की उम्मीद नहीं है। इसमें वही 452cc का लिक्विड कूल्ड, सिंगल सिलेंडर शेरपा इंजन मिलेगा। यह 40 PS की पावर और 40 Nm टॉर्क जनरेट करता है। इसमें 6-स्पीड ट्रांसमिशन और स्लिपर क्लच स्टैंडर्ड है। बाइक का वजन 184 KG है और इसकी सीट हाइट 780mm है, जो इसे कम हाइट वाले राइडर्स के लिए भी कंफर्टेबल बनाती है। कीमत और मुकाबला मौजूदा रॉयल एनफील्ड गुरिल्ला 450 की शुरुआती कीमत ₹2.56 लाख (एक्स-शोरूम) है। नए फीचर्स और अपडेट्स के बाद 2026 मॉडल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है। बाजार में इसका मुकाबला ट्रायम्फ स्पीड 400 और अपाचे RTR 310 जैसी बाइक्स से है। नॉलेज बॉक्स: क्या है शेरपा 450 इंजन? शेरपा 450 रॉयल एनफील्ड का पहला लिक्विड-कूल्ड इंजन है। यह 452cc का सिंगल-सिलेंडर, DOHC इंजन है जो 40 PS की पावर और 40 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इस इंजन की सबसे बड़ी खासियत इसका 'राइड-बाय-वायर' सिस्टम है, जो थ्रॉटल रिस्पॉन्स को बहुत स्मूद बनाता है। पुरानी एनफील्ड बाइक्स के मुकाबले यह इंजन काफी हल्का है और हाई-स्पीड पर भी इसमें वाइब्रेशन बहुत कम महसूस होता है। यही इंजन हिमालयन 450 में भी इस्तेमाल किया गया है।
अमेरिका की एक कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में मेटा को बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने में नाकाम रहने का दोषी माना। न्यू मैक्सिको की जूरी ने माना कि फेसबुक व इंस्टाग्राम पर अश्लील वीडियो और फोटो, गलत कामों के लिए बहलाने-फुसलाने और मानव तस्करी जैसे खतरों से बच्चों को नहीं बचाया जा सका। इस मामले में जूरी ने मेटा पर 3141 करोड़ रुपए का भारी जुर्माना लगाया है। एक अन्य मामले में कैलिफोर्निया की एक जूरी ने मेटा और गूगल को एक युवती के डिप्रेशन और एंग्जायटी के लिए जिम्मेदार माना। युवती का आरोप है कि मेटा समेत सोशल मीडिया कंपनियों ने जानबूझकर ऐसे प्रोडक्ट बनाए जो लत लगाने वाले हैं। इससे उसकी मेंटल हेल्थ पर असर पड़ा। इस मामले में कोर्ट ने मेटा और गूगल पर 28 करोड़ रु. का जुर्माना लगाया है। इसमें से 70% राशि यानी करीब 20 करोड़ रुपए मेटा को देने हैं। कोर्ट दोनों कंपनियों के खिलाफ अतिरिक्त जुर्माना भी लगाएगी। यहां समझिए कि क्यों ऐतिहासिक है ये जीत क्यों है इस केस पर सबकी नजर - यह दोनों मामला उन शुरुआती केसों में शामिल है, जिनमें यह परखा गया कि क्या सोशल मीडिया कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर पोस्ट होने वाले कंटेंट के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। क्यों अहम है यह जीत - न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज ने इसे बड़ी टेक कंपनी के खिलाफ बच्चों-युवाओं को नुकसान पहुंचाने के मामले में किसी राज्य की ट्रायल में पहली जीत बताया। उन्होंने कहा, मेटा ने बच्चों की सुरक्षा से ऊपर मुनाफे को रखा। क्या मेटा को खतरों की जानकारी नहीं थी: कंपनी के अधिकारियों को पता था कि उनके प्रोडक्ट नुकसान पहुंचा रहे हैं, फिर भी चेतावनियों को नजरअंदाज किया और जनता से सच छिपाया। हजारों केस के लिए नजीर: यह मामला कैलिफोर्निया की एक अदालत में एक साथ जोड़े गए हजारों व्यक्तिगत मुकदमों में शामिल है। इसके अलावा, फेडरल कोर्ट में 2,000 से ज्यादा मुकदमे अभी लंबित हैं, जो अलग-अलग व्यक्तियों और स्कूल ने दायर किए हैं। क्या होगा असर: ये फैसले ऐसे समय में आए हैं, जब दुनियाभर में बच्चों व किशोरों में फोन के उपयोग को सीमित या प्रतिबंधित कर करने को लेकर कानून बन रहे हैं। फैसले का असर दूरगामी होगा। मेटा बोला- अपील करेंगे: मेटा ने कहा है कि वह फैसले के खिलाफ अपील करेगा। कंपनी ने चुनिंदा दस्तावेज उठाकर सनसनीखेज और गैर-जरूरी दलीलें दिए जाने का आरोप लगाया। भारत- बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध 2 साल में 38% बढ़े केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि पूरे देश में 2021 से 2023 के बीच बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध के मामलों में लगभग 38% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। केरल और कर्नाटक टॉप पर देश में बच्चों के खिलाफ साइबर क्राइम के सर्वाधिक मामलों में केरल शीर्ष पर है, जहां 2023 में 443 मामले दर्ज हुए और अपराध दर 4.7 प्रति लाख रही। इसके बाद कर्नाटक का स्थान है। राजस्थान - बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। यहां 2021 में मात्र 33 से बढ़कर 2023 में 306 हो गए यानी 827% की चिंताजनक उछाल। केरल में केस 163 से 443 (172%) और उत्तराखंड में 23 से 64 (178%) हो गई। कर्नाटक 164 से 363 (121%) और छत्तीसगढ़ 88 से 193 (119%) में भी दोगुने से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। यहां घटा -: यूपी में केस में 66% की कमी आई है। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार यह कम रिपोर्टिंग का संकेत हो सकती है।
आप एक मेडिकल छात्र हैं। हार्ट अटैक आने पर क्या करना चाहिए... यह सिर्फ किताबों में ही पढ़ा होता है। पर जब पहली बार आप जीवित इंसान के सामने खड़े होते हैं, जिसकी सांसें उखड़ रही हैं, तो हाथ कांपने लगते हैं...’ अमेरिकन एकेडमी ऑफ नर्सिंग की प्रेसिडेंट डॉ. डेब्रा बार्क्सडेल कहती हैं,‘अनुभव डरावना होता है। भले ही आपके पास अथाह नॉलेज हो, पर जीवित इंसान पर उसका अभ्यास करना बहुत चुनौतीपूर्ण है।’ इसी डर को खत्म करने के लिए अब मेडिकल की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव आया है। अब छात्र सीधे इंसानों पर हाथ आजमाने के बजाय ‘हाई-फिडेलिटी मेडिकल सिमुलेटर’ यानी बेहद असली दिखने वाले पुतलों पर अभ्यास करते हैं। ये खास तरह के पुतले सांस ले सकते हैं, पलकें झपकाते हैं, उन्हें पसीना आता है और चोट लगने पर उनसे खून (लाल तरल पदार्थ) भी निकलता है। कुछ पुतले तो ऐसे भी हैं जिन्हें दौरे पड़ सकते हैं या उनके मुंह से झाग निकल सकता है। कुछ तो डॉक्टर से बात भी करते हैं। कुछ दिन पहले नर्सिंग छात्रा, जुलियाना विटोलो, ‘मॉम-एनी’ नाम के गर्भवती पुतले का परीक्षण कर रही थी। जब जुलियाना ने पूछा,‘आप कैसा महसूस कर रही हैं?’ तो उस पुतले ने पलकें झपकाईं और जवाब दिया,‘पेट के निचले हिस्से में थोड़ा दर्द है।’ अलग तरह के मरीजों को ध्यान में रखकर पुतलों की डिजाइन भी अलग रखते हैं। प्रीमेच्योर बच्चों के पुतलों पर असली जैसे बाल होते हैं, जबकि बुजुर्ग पुतलों की त्वचा पर झुर्रियां और आंखों में मोतियाबिंद तक दिखाते हैं। टॉर्च से आंखों की जांच की जाती है, तो पुतलियां सिकुड़ जाती हैं। इन्हें इंजेक्शन दे सकते हैं और नब्ज भी महसूस की जा सकती है। अगर किसी ‘बच्चे’ वाले पुतले को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिले, तो होंठों के आसपास की त्वचा नीली पड़ने लगती है (हाइपोक्सिया), जिससे छात्रों को तुरंत फैसला लेना पड़ता है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां गलती करने पर किसी की जान नहीं जाती। सेटन हॉल की सिमुलेशन डायरेक्टर जेनिफर मैकार्थी कहती हैं,‘अगर मरीज को 2 मिग्रा. दवा देनी है और छात्र ने सिर्फ 1.8 मिग्रा. दे दी, तो यह गंभीर गलती है। पुतले के अंदर लगी तकनीक इस मामूली अंतर को भी पकड़ लेती है और गलती सुधारने का मौका देती है।’ कंट्रोल रूम से विशेषज्ञ इन पुतलों के जरिए बात भी करते हैं। वे कभी चीखते हैं, कभी दर्द में कराहते हैं, तो कभी सवाल पूछते हैं। इससे डॉक्टर व नर्स इलाज के साथ तुरंत फैसले लेना और तनावपूर्ण माहौल में मरीज से बात करने का सलीका भी सीखते हैं। माहौल असली रहे, इसलिए एक्टर्स को ‘रिश्तेदार’ के तौर पर बुलाते हैं वेल-कॉर्नेल सिम्युलेशन सेंटर के प्रमुख डॉ. केविन चिंग कहते हैं,‘कुछ मैनिकिन्स में अचानक हालात बदलने की प्रोग्रामिंग होती है। इससे छात्रों को तेज सोचने की ट्रेनिंग मिलती है। बेबी मैनिकिन को सुस्त दिखा सकते हैं, ताकि छात्र लक्षण देखकर समस्या पहचानें। जैसे बीपी गिरने पर तय करना कि फ्लूड देना है या नहीं। असली माहौल बनाने के लिए पास में चश्मा, फोन रखे जाते हैं और कभी ‘चिंतित रिश्तेदार’ की भूमिका में एक्टर भी बुलाया जाता है। इसे हाइब्रिड सिम्युलेशन कहते हैं।’
ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो के बाद अब स्विगी से भी खाना मंगाना महंगा हो गया है। कंपनी ने आज 24 मार्च से हर ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 17% की बढ़ोतरी की है। यूजर्स को हर ऑर्डर पर 14 रुपए के बजाय अब 17.58 (GST सहित) यानी ₹3.58 ज्यादा प्लेटफॉर्म फीस देनी होगी। यह बढ़ोतरी डिलीवरी ऑपरेशंस की लागत बढ़ने के कारण की गई है। स्विगी ने 7 महीने में दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाई अप्रैल 2023 से प्लेटफॉर्म फीस लेने की शुरुआत हुई थी कंपनी ने 7 महीने में दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाई है। इससे पहले अगस्त-2025 में 17% यानी 2 रुपए का इजाफा किया गया था। तब प्लेटफॉर्म फीस 12 रुपए से बढ़कर 14 रुपए हो गई थी। स्विगी ने अप्रैल 2023 में सबसे पहले प्लेटफॉर्म फीस शुरू की थी, ताकि कंपनी अपने यूनिट इकोनॉमिक्स को बेहतर कर सके। तब से कंपनी ने धीरे-धीरे इस फीस को कई बार बढ़ाया है। शुरुआत में यह फीस मात्र 2 रुपए थी। स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस जोमैटो के बराबर हुई जोमैटो ने 20 मार्च को ही अपनी प्लेटफॉर्म फीस 19% यानी ₹2.40 बढ़ाकर ₹14.90 (बिना GST) कर दी थी। टैक्स (GST) जोड़ने के बाद दोनों कंपनियों की प्रभावी प्लेटफॉर्म फीस अब लगभग ₹17.58 के बराबर हो गई है। यानी अब आपको दोनों प्लेटफॉर्म से खाना मंगवाने पर लगभग बराबर एक्स्ट्रा चार्ज देना होगा। क्या होती है प्लेटफॉर्म फीस और क्यों वसूली जाती है? प्लेटफॉर्म फीस वह फिक्स्ड चार्ज है जो फूड बिल, रेस्टोरेंट चार्ज और डिलीवरी फीस के अलावा हर ऑर्डर पर वसूला जाता है। कंपनियां इसे अपने ऑपरेटिंग कॉस्ट (संचालन लागत), टेक्नोलॉजी मेंटेनेंस और कस्टमर सपोर्ट जैसी सेवाओं को बेहतर बनाने और उनके खर्च को कवर करने के लिए लेती हैं। चाहे आपके खाने का बिल ₹200 हो या ₹2000, यह फीस हर ऑर्डर पर एक समान ही रहती है। करोड़ों यूजर्स की जेब पर पड़ेगा असर देशभर में करोड़ों लोग रोजाना इन एप्स के जरिए खाना ऑर्डर करते हैं। ₹2 से ₹3 की यह मामूली दिखने वाली बढ़ोतरी कंपनियों के लिए करोड़ों रुपए का अतिरिक्त रेवेन्यू जनरेट करती है। हालांकि, बार-बार बढ़ती फीस की वजह से उन ग्राहकों में नाराजगी देखी जा रही है जो नियमित रूप से बाहर से खाना ऑर्डर करते हैं। जोमैटो और स्विगी दोनों ही कंपनियां अब अपने घाटे को कम करने और मुनाफे की ओर बढ़ने के लिए इस तरह के चार्जेस पर ज्यादा निर्भर हो रही हैं। ------------------ ये खबर भी पढ़ें… जोमैटो से खाना मंगवाना महंगा हुआ: प्लेटफॉर्म फीस 19% बढ़ाई, हर ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय अब ₹14.90 देने होंगे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो से खाना ऑर्डर करना अब महंगा हो गया है। कंपनी ने आज 20 मार्च से ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 19% बढ़ोतरी की है। यूजर्स को हर ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय अब ₹14.90 यानी ₹2.40 ज्यादा प्लेटफॉर्म फीस देनी होगी। प्लेटफॉर्म फीस हर एक फूड ऑर्डर पर लागू होने वाला ऐडिशनल चार्ज हैं। ये GST, रेस्तरां चार्ज और डिलीवरी फीस से अलग है। जोमैटो रोजाना 20 से 25 लाख ऑर्डर डिलीवर करता है। पूरी खबर पढ़ें…
बुजुर्गों के लिए नए गैजेट्स अब रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम आसान कर रहे हैं। ये गैजेट्स झुकने, चीजों को उठाने या पकड़ने में मदद करते हैं। इससे गिरने का जोखिम नहीं रहता है। टोपरो स्टेप डिवाइस इसमें दीवार पर एक रेलिंग लगी होती है, जिस पर एक फोल्ड होने वाला हैंडल होता है। ये पेटेंट लॉक मैकेनिज्म पर काम करता है, जो दबाव पड़ते ही लॉक हो जाता है, जिससे फिसलने या गिरने का डर नहीं रहता है। यह नॉन इलेक्ट्रिक डिवाइस है। कहां मिलेगी इस डिवाइस को मेडिकल सप्लायर्स से ऑनलाइन मंगवा सकते हैं। इसी तरह का दूसरा डिवाइस मार्केट में भी देख सकते हैं। कीमत 2.5 से 4 लाख है। ट्रेंड लॉन्ग शू हॉर्न अगर कमर दर्द के कारण आपको झुककर जूते पहनने में परेशानी होती है तो यह 50 सेमी लंबा प्लास्टिक गैजेट आपको सहारा देगा। इससे जूते पहनने के लिए झुकना नहीं पड़ेगा। इसका हैंडल काफी मजबूत है। ऊपर लूप लगा है, जिससे टांग सकते हैं। कहां मिलेगा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 400 से ₹800 रुपए में मिल जाएगा। इसे जूते के पीछे रखकर पैर अंदर डालें। बिना झुके हैंडल से खींचकर जूता पहनें।
एआई के आगे कैसे टिकी आईटी इंडस्ट्री:AI खतरा नहीं, आईटी फर्मों के पास 37 लाख करोड़ का मौका
आईटी इंडस्ट्री के लिए बीता महीना विरोधाभासी रहा। नैसकॉम ने वित्त वर्ष के अंत तक रिकॉर्ड 30 लाख करोड़ रुपए राजस्व का अनुमान जताया, जो 6% की वृद्धि है। दूसरी तरफ, एआई द्वारा नौकरियां खत्म करने की आशंका से शेयरों में बिकवाली हो रही है। निफ्टी आईटी इंडेक्स 20% से ज्यादा टूट चुका हैै। निराशा की वजह स्पष्ट है- दशकों से यह उद्योग ‘लेबर आर्बिट्रेज’ पर टिका है, जहां पुणे में कोडर रखने की लागत अमेरिका के मुकाबले बेहद कम है। इंफोसिस, टीसीएस जैसी फर्में कोडर्स की मदद से सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस और रूटीन कोडिंग जैसे श्रम-प्रधान कार्यों से राजस्व कमाती हैं। एआई बनाम कोडर एंथ्रोपिक का ‘क्लॉड कोड’ मिनटों में प्रोटोटाइप बना सकता है। टेक महिंद्रा के सीइओ अतुल सोनेजा का तर्क है कि उत्पादकता में सुधार केवल ‘ग्रीनफील्ड’ (नए) माहौल में संभव है। विरासत में मिले पुराने कोड और जटिल प्रणालियों वाले ‘ब्राउनफील्ड’ में एआई तैनात करना कठिन है। अक्सर क्लाइंट्स को अहसास होता है कि एआई सपने महत्वाकांक्षी थे। वे अंततः पहले जितने ही कोडर्स रखते हैं।’ अवसर और वास्तविकता इंफोसिस के फाउंडर्स में से एक नंदन नीलेकणी का अनुमान है कि एआई संबंधित सेवाओं का मूल्य 2030 तक 300-400 अरब डॉलर हो सकता है। हालिया नतीजे उम्मीद जगा रहे हैं। टीसीएस की एआई बिक्री 17% बढ़ी और राजस्व का 6% है। एचएसबीसी के योगेश अग्रवाल के अनुसार, ‘पारंपरिक सॉफ्टवेयर को एआई द्वारा निगल जाने के दावों के ठोस मामले बहुत कम हैं।’ जीसीसी की भूमिका ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) भी टेक वर्कर्स को रोजगार दे रहे हैं। चूंकि कंपनियां अब तकनीक को व्यवसाय का कोर मानती हैं, इसलिए एआई की मदद से इन-हाउस कोडिंग बढ़ने से भी भारतीय आईटी उद्योग को लाभ होगा। नवंबर 2022 में चैटजीपीटी के आने के बाद जिस ‘विघटन’ की आशंका थी, वह तीन साल बाद भी नहीं आया है। राजस्व बढ़ रहा है और नियुक्तियां जारी हैं। वाजिब हुए दाम; एआई के साथ ‘रीसेट मोड’ में इंडस्ट्री साल 2026 में आईटी सेक्टर पर काफी दबाव देखा गया है। आईटी इंडेक्स पीक से 28% टूट चुका है। मार्केट एनालिस्ट के मुताबिक आईटी सेक्टर खत्म नहीं हो रहा, बल्कि ‘रीसेट फेज’ में है। •वैल्युएशन में बदलाव: वर्तमान में आईटी सेक्टर का वैल्युएशन इसके दो साल की अनुमानित कमाई का 15.4 गुना (15.4x) है। •बेंचमार्क के बराबर: आईटी सेक्टर हमेशा निफ्टी 50 इंडेक्स से लगभग 17% प्रीमियम (महंगा) पर ट्रेड करता था, लेकिन अब यह निफ्टी 50 के बराबर आ गया है। इसे ही ‘वैल्यू जोन’ कहा जा रहा है क्योंकि अब शेयरों में छाई ‘अतिरिक्त चमक’ खत्म हो गई है। सलाह: वर्तमान दौर में ‘बॉटम फिशिंग’ यानी निचले स्तर पर खरीदारी से बचें। जब तक अर्निंग्स में सुधार के संकेत न मिलें, तब तक इंतजार करना समझदारी। ग्रोथ आउटलुक: धीमी लेकिन स्थिर •चिंताओं के बावजूद, सेक्टर पूरी तरह ध्वस्त नहीं हो रहा है। उद्योग की वार्षिक आय वृद्धि 3% से 6% रहने की उम्मीद है। यह इसके ऐतिहासिक औसत (7% - 8%) से कम है। आईटी कंपनियां कैसे खुद को बदल रही हैं? •नया मॉडल: कंपनियां ‘फिक्स्ड-प्राइस’ कॉन्ट्रैक्ट की ओर बढ़ रही हैं और प्रति कर्मचारी लाभ सुधार रही हैं। •कार्यबल: एआई-कुशल प्रतिभाओं को ऊंचे वेतन पर नियुक्त किया जा रहा है और मौजूदा कर्मचारियों को ‘री-स्किल’ किया जा रहा है। •साझेदारी: कंपनियां एआई-नेटिव कंपनियों के साथ पार्टनरशिप कर रही हैं। एआई के आगे कैसे टिकी आईटी इंडस्ट्री एआई से काम करवाना मुख्य उद्देश्य होगा। पुरानी प्रणालियों को आधुनिक बनाना कठिन है क्योंकि उनमें डेटा साइलो और तकनीकी कमियां होती हैं। -नंदन नीलेकणी, को-फाउंडर, इंफोसिस ( एआई इंपैक्ट)
ओप्पो ने भारत में अपनी K-सीरीज का नया स्मार्टफोन ओप्पो K14 5G लॉन्च कर दिया है। इस फोन में 7,000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है। कंपनी ने इसे तीन कलर ऑप्शन्स और तीन स्टोरेज कॉन्फिगरेशन में पेश किया है। इसकी शुरूआती कीमत 17,999 रुपए रखी गई है। 7000mAh की बैटरी और 45W की चार्जिंगइस फोन का सबसे मजबूत पक्ष इसकी बैटरी लाइफ है। इसमें 7,000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो लंबे बैकअप का दावा करती है। इसे जल्दी चार्ज करने के लिए बॉक्स में 45W का सुपरवूक फास्ट चार्जर मिलता है। भारी बैटरी होने के बावजूद फोन की मोटाई 8.6mm है और इसका वजन करीब 216 ग्राम है। डिस्प्ले और प्रोसेसर की डिटेल्सफोन में 6.75 इंच का HD+ LCD डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। इसमें 1125 निट्स की पीक ब्राइटनेस मिलती है, जिससे धूप में भी स्क्रीन साफ नजर आती है। परफॉर्मेंस के लिए इसमें मीडियाटेक डाइमेंसिटी 6300चिपसेट का इस्तेमाल किया गया है। यह फोन एंड्रॉयड 15 पर आधारित कंपनी के लेटेस्ट ColorOS 15 पर काम करता है। 50 मेगापिक्सल का मेन कैमराफोटोग्राफी के लिए फोन के रियर पैनल पर डुअल कैमरा सेटअप है। इसमें f/1.8 अपर्चर वाला 50-मेगापिक्सल का मेन सेंसर और 2-मेगापिक्सल का मोनोक्रोम लेंस दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फ्रंट में 8-मेगापिक्सल का कैमरा मिलता है। फोन से 1080p रेजोल्यूशन पर 60fps तक की वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है। धूल और पानी से सुरक्षा के लिए ट्रिपल रेटिंगओप्पो ने इस फोन की ड्यूरेबिलिटी पर काफी काम किया है। कंपनी का दावा है कि यह फोन IP66, IP68 और IP69 रेटिंग के साथ आता है। इसका मतलब है कि फोन काफी हद तक धूल और पानी के तेज प्रेशर को झेल सकता है। सिक्योरिटी के लिए इसमें साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है। कनेक्टिविटी के लिए इसमें 5G के साथ वाई-फाई 5, ब्लूटूथ 5.4 और USB टाइप-C पोर्ट मिलता है।
रील्स और फोटो शेयर करने के साथ-साथ इंस्टाग्राम अब करोड़ों लोगों का चैट एप भी बन चुका है। खासकर युवाओं के लिए यह वॉट्सएप जैसा ही कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म है। लेकिन 8 मई से इंस्टाग्राम की डायरेक्ट मैसेज सर्विस में बड़ा बदलाव होने जा रहा है… मैसेज अब एंड-टु-एंड एन्क्रिप्टेड नहीं रहेंगे। एंड-टु-एंड एन्क्रिप्शन: पूरी टेक्नोलॉजी समझिए जब आप किसी को मैसेज भेजते हैं, तो वह सीधे सामने वाले तक नहीं जाता, पहले सर्वर पर जाता है। एंड-टु-एंड एन्क्रिप्शन होने पर मैसेज को एक खास कोड में बदल दिया जाता है। यह कोड सिर्फ सेंडर और रिसीवर के पास मौजूद की से ही खुल सकता है। बीच में कोई भी, यहां तक कि कंपनी भी मैसेज नहीं पढ़ सकती। इसे ऐसे समझें कि जैसे आपने दोस्त को ताला लगा बॉक्स भेजा, जिसकी चाबी सिर्फ आप दोनों के पास है। कुरियर बॉक्स ले जा सकता है, खोल नहीं सकता। 8 मई से होंगे ये बदलाव - 8 मई के बाद इंस्टाग्राम DMs में यह फीचर समाप्त हो जाएगी। - मैसेज एन्क्रिप्टेड नहीं रहेंगे। - कंपनी के लिए मैसेज एक्सेस करना संभव होगा। - अब इंस्टाग्राम चैट पर सुरक्षा पहले से कम हो जाएगी - बदलाव दिखाई नहीं देगा, लेकिन असर होगा। क्यों हटा रहे फीचर? मेटा के अनुसार बहुत कम लोग एन्क्रिप्टेड चैट इस्तेमाल कर रहे थे। प्राइवेट चैट के लिए वॉट्सएप पहले से उपलब्ध है। एक तर्क है कि इसमें अतिरिक्त तकनीकी लागत भी होती है। दूसरी ओर कई सरकारें लंबे समय से मांग कर रही हैं कि जरूरत पड़ने पर निजी चैट तक पहुंच मिलनी चाहिए। क्या करें यूजर्स? अगर आप इंस्टाग्राम पर निजी या संवेदनशील बातें करते हैं, तो सावधान रहें। जरूरी जानकारी न शेयर करें वॉट्सएपु चुनें, डिफॉल्ट एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन है। सिग्नल, सबसे सुरक्षित मैसेजिंग एप्स में से एक है। टेलीग्राम सीक्रेट चैट में भी एन्क्रिप्शन फीचर दिया गया है।
फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो से खाना ऑर्डर करना अब महंगा हो गया है। कंपनी ने शुक्रवार से ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 19% बढ़ोतरी की है। यूजर्स को हर ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय अब ₹14.90 यानी ₹2.40 ज्यादा प्लेटफॉर्म फीस देनी होगी। GST जोड़ने के बाद यह राशि और बढ़ जाएगी। प्लेटफॉर्म फीस हर एक फूड ऑर्डर पर लागू होने वाला ऐडिशनल चार्ज हैं। ये GST, रेस्तरां चार्ज और डिलीवरी फीस से अलग है। बता दें कि जोमैटो प्लेटफॉर्म रोजाना 20 से 25 लाख ऑर्डर डिलीवर करता है। स्विगी के करीब पहुंचे प्लेटफॉर्म फीस के दाम जोमैटो की मुख्य प्रतिद्वंदी कंपनी स्विगी अभी टैक्स समेत लगभग ₹14.99 प्लेटफॉर्म फीस वसूल रही है। आमतौर पर देखा गया है कि जब भी इन दोनों में से कोई एक कंपनी फीस बढ़ाती है, तो दूसरी कंपनी भी जल्द ही अपने दाम बढ़ा देती है। जोमैटो ने 2 रुपए से की थी प्लेटफॉर्म फीस की शुरुआत कंपनी ने 7 महीने में दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाई है। इससे पहले सितंबर-2025 में 20% का इजाफा किया गया था। अगस्त 2023 में जोमैटो ने अपना मार्जिन बढ़ाने और प्रॉफिटेबल बनने के लिए पहली बार 2 रुपए का प्लेटफॉर्म शुल्क शुरू किया था। कंपनी ने बाद में इसे बढ़ाकर 3 रुपए कर दिया और 1 जनवरी 2024 को 4 रुपए कर दिया। फिर इसे धीरे-धारी बढ़ाकर 7 रुपए कर दिया था। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ऑपरेशनल कॉस्ट बनी वजह दामों में इस बढ़ोतरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। तेल महंगा होने से डिलीवरी पार्टनर्स का खर्च बढ़ता है और कंपनी के लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन्स पर भी असर पड़ता है। इसके अलावा, जोमैटो अपनी प्रॉफिटेबिलिटी (मुनाफा) सुधारने के लिए भी समय-समय पर प्लेटफॉर्म फीस में बदलाव करती रहती है। दीपिंदर ने 2008 में बनाई थी फूडीबे ये खबर भी पढ़ें… प्रीमियम पेट्रोल ₹2.35 प्रति लीटर तक महंगा हुआ: भोपाल में दाम 117 रुपए प्रति लीटर तक हुए, सामान्य पेट्रोल पुरानी कीमत पर ही मिलेगा सरकारी तेल कंपनियों ने आज यानी 20 मार्च को स्पीड और पावर जैसे प्रीमियम पेट्रोल की कीमतें ₹2.09-₹2.35 प्रति लीटर तक बढ़ा दी है। भोपाल में इसकी कीमत बढ़कर करीब 117 रुपए पहुंच गई है। सामान्य पेट्रोल की कीमत में बदलाव नहीं हुआ है। पूरी खबर पढ़ें…
शाओमी की सब ब्रांड पोको ने भारतीय बाजार में अपना नया बजट स्मार्टफोन पोको C85x लॉन्च कर दिया है। यह कंपनी की C-सीरीज का लेटेस्ट मॉडल है। फोन में सबसे खास 32MP कैमरा के साथ 6300mAh बैटरी और 120Hz रिफ्रेश रेट वाला डिस्प्ले है। कंपनी का दावा है कि यह बैटरी दो दिन तक का बैकअप दे सकती है। यह फोन खासतौर पर उन यूजर्स के लिए डिजाइन किया गया है जो कम बजट में 5G कनेक्टिविटी और लंबी बैटरी लाइफ चाहते हैं। पोको C85x को भारत में दो स्टोरेज वैरिएंट में पेश किया गया है। इसके 4GB रैम + 64GB स्टोरेज वाले बेस वैरिएंट की कीमत 10,999 रुपए और 4GB रैम + 128GB स्टोरेज वाले वैरिएंट की कीमत 11,999 रुपए है। फोन ब्लैक, गोल्ड और ग्रीन कलर ऑप्शन में अवेलेबल है। इसकी बिक्री 14 मार्च दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी: IP57 रेटिंग के साथ मस्कुलर लुक मटेरियल और फिनिश: फोन का बैक पैनल और फ्रेम हाई-क्वालिटी पॉलीकार्बोनेट (प्लास्टिक) से बना है। बैक पैनल पर एक खास टेक्सचर दिया गया है, जिससे हाथ में पकड़ने पर यह अच्छी ग्रिप देता है और उंगलियों के निशान कम पड़ते हैं। पोको C85x: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: फोन में 6.9 इंच का HD+ एडॉप्टिव सिंक डिस्प्ले है। इसका रिजॉल्यूशन 7201600 पिक्सल है। स्मूद स्क्रॉलिंग के लिए इसमें 120Hz रिफ्रेश रेट और 240Hz टच सैंपलिंग रेट दिया गया है। 800 निट्स की पीक ब्राइटनेस से तेज धूप में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। परफॉरमेंस: इसमें ऑक्टा-कोर यूनिसोक T8300 प्रोसेसर दिया गया है, जिसकी क्लॉक स्पीड 2.2GHz है। ग्राफिक्स के लिए माली-G57 जीपीयू मिलता है। यह फोन एंड्रॉएड 16 पर बेस्ड कंपनी के लेटेस्ट हाइपर OS 3 पर रन करता है। मेमोरी: इसमें 4GB LPDDR4x रैम है। स्टोरेज को माइक्रो SD कार्ड के जरिए 2TB तक बढ़ाया जा सकता है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए रियर में डुअल कैमरा सेटअप है, जिसमें 32 मेगापिक्सल का मेन सेंसर और एक सेकेंडरी लेंस है। रियर कैमरा 10x डिजिटल जूम सपोर्ट करता है। सेल्फी के लिए फ्रंट में 8 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है। बैटरी और चार्जिंग: पावर बैकअप के लिए इसमें 6300mAh की बैटरी दी गई है। यह 15W वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करता है। साथ ही, इसमें 7.5W रिवर्स चार्जिंग का फीचर भी है, जिससे आप दूसरे फोन या ईयरबड्स को चार्ज कर सकते हैं। कनेक्टिविटी: इसमें 5G के साथ Wi-Fi 5, ब्लूटूथ 5.4, GPS और डुअल सिम सपोर्ट जैसे फीचर्स मिलते हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X की सर्विस दुनियाभर में ठप हो गई है। डाउनडिटेक्टर के मुताबिक, भारत सहित दुनिया के कई देशों में यूजर्स को एप और डेस्कटॉप दोनों वर्जन में एक्सेस करने में परेशानी हो रही है। आउटेज ट्रैक करने वाली वेबसाइट 'डाउनडिटेक्टर' के मुताबिक, यूजर्स न तो नई पोस्ट देख पा रहे हैं और न ही प्लेटफॉर्म पर शेयर किए गए लिंक लोड हो रहे हैं। यहां तक कि टाइमलाइन भी रिफ्रेश नहीं हो पा रही है। अमेरिका में सबसे ज्यादा 29,000 से ज्यादा यूजर्स प्रभावित अमेरिका में कुछ ही मिनटों में 29,000 से ज्यादा यूजर्स ने सर्विस डाउन होने की रिपोर्ट की। इसके अलावा, ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य देशों में भी डाउन की शिकायतें आ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्लेटफॉर्म के कोर सर्वर या ग्लोबल सर्विस में आई तकनीकी खामी के कारण हुई है। हालांकि, कंपनी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मोबाइल एप पर दिख रहा 'कैन नॉट रिट्रीव पोस्ट' का मैसेज X के मोबाइल एप का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। एप ओपन करने पर स्क्रीन पर एक मैसेज आ रहा है- कैन नॉट रिट्रीव पोस्ट्स एट दिस टाइम। प्लीज ट्राई अगेन लेटर। खास बात यह है कि इस दौरान यूजर्स को नोटिफिकेशन तो मिल रहे हैं, जिससे पता चलता है कि बैकग्राउंड में एक्टिविटी हो रही है, लेकिन वे उन पोस्ट्स या मैसेज को एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं। भारत में 4,500 से ज्यादा लोगों ने की शिकायत भारत में रात करीब 8:17 बजे से यूजर्स ने प्लेटफॉर्म में गड़बड़ी की शिकायत शुरू हुईं। शुरुआत में करीब 1,200 लोगों ने रिपोर्ट किया, लेकिन महज 15 मिनट के भीतर यानी 8:30 बजे तक यह संख्या बढ़कर 4,500 के पार पहुंच गई। ज्यादातर यूजर्स का कहना है कि वे बार-बार स्क्रीन को नीचे खींचकर (पुल टू रिफ्रेश) अपडेट करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन स्क्रीन ब्लैंक आ रही है या सिर्फ लोडिंग हो रही है। X के तीन आउटेज इलॉन मस्क ने 2022 में खरीदा था X 27 अक्टूबर 2022 को इलॉन मस्क ने ट्विटर (अब X) खरीदा था। ये डील 44 बिलियन डॉलर में हुई थी। आज के हिसाब से ये रकम करीब 3.84 लाख करोड़ रुपए होती है। मस्क ने सबसे पहले कंपनी के चार टॉप ऑफिशियल्स CEO पराग अग्रवाल, फाइनेंस चीफ नेड सेगल, लीगल एग्जीक्यूटिव विजया गड्डे और सीन एडगेट को निकाला था। 5 जून 2023 को लिंडा याकारिनो ने X के CEO के तौर पर जॉइन किया था। इससे पहले वो NBC यूनिवर्सल में ग्लोबल एडवर्टाइजिंग एंड पार्टनरशिप की चेयरमैन थीं।
रेनो इंडिया ने अपनी पॉपुलर SUV 'डस्टर' का थर्ड जनरेशन मॉडल भारत में लॉन्च कर दिया है। इसकी एक्स-शोरूम शुरुआती कीमत 10.29 लाख रुपए रखी गई है, जो टॉप वैरिएंट में 18.49 लाख रुपए तक जाती है। कंपनी ने नई डस्टर को R-GMP प्लेटफॉर्म पर तैयार किया है। नई डस्टर न सिर्फ लुक में ज्यादा मस्कुलर हो गई है, बल्कि इसमें पहली बार स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड इंजन और 2 टर्बो इंजन का ऑप्शन भी दिया गया है। कार में गूगल OS के साथ टच स्क्रीन, 700 लीटर का बूट स्पेस, 360-डिग्री कैमरा जैसे फीचर्स मिलेंगे। वहीं, 6 एयरबैग के साथ 31 स्टैंडर्ड सेफ्टी फीचर्स और 17 एडवांस ड्राइविंग असिस्ट सिस्टम (ADAS) भी मिलेगा। तीन साल बाद वापसी, दिवाली पर मिलेगा हाइब्रिड साल 2012 में पहली बार लॉन्च हुई डस्टर ने भारत में कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट की शुरुआत की थी, जिसे 2022 में डिस्कंटीन्यू किया गया था। अब 3 साल बाद इसकी भारत में एंट्री हुई है। कंपनी ने 27 जनवरी को इसे नए डिजाइन के साथ रिवील किया था। इसकी बुकिंग शुरू हो चुकी है। टर्बो-पेट्रोल वैरिएंट की डिलीवरी अप्रैल से शुरू होगी, जबकि हाइब्रिड दिवाली के आसपास मिलेगा। ये हुंडई क्रेटा, टाटा सिएरा, किआ सेल्टोस, मारुति विक्टोरिस, मारुति ग्रैंड विटारा, टोयोटा हाइराइडर को टक्कर देगी। एक्सटीरियर: Y-शेप्ड हेडलैंप्स और 18-इंच के अलॉय व्हील्स न्यू जनरेशन डस्टर को CMF-B प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है। इस प्लेटफॉर्म को डेसिया, रेनो और निसान ने मिलकर डेवलप किया है। नई डस्टर का डिजाइन ग्लोबल मार्केट में बिकने वाले मॉडल डेसिया से इन्सपायर्ड है। फ्रंट प्रोफाइल: चौकोर LED हेडलाइट्स और ग्रिल पर बड़े अक्षरों में लिखी 'DUSTER' ब्रांडिंग इसे अग्रेसिव रोड प्रेजेंस देती है। वर्टिकल एयर इन्लेट्स के साथ नए डिजाइन के फ्रंट बंपर और स्किड्स प्लेट्स हैं। बंपर पर सिल्वर स्किड प्लेट और पिक्सल जैसी दिखने वाली फॉग लैंप्स दी गई हैं। साइड प्रोफाइल: इसमें 18-इंच के नए अलॉय व्हील और मोटी बॉडी क्लैडिंग, चौकोर व्हील आर्क दी गई है, जो इसे एक दमदार ऑफ-रोडर लुक देती है। कार 5 और 7 सीटों के ऑप्शन के साथ आएगी। रियर प्रोफाइल: पीछे की तरफ कनेक्टेड LED टेल लैंप्स और स्किड प्लेट दी गई है। इसकी लेंथ मौजूदा मॉडल से बढ़ाकर 4340mm की गई है, वहीं व्हीलबेस घटाकर 2,657mm किया है। इंटीरियर: 10.1 इंच की टचस्क्रीन और डबल-लेयर डैशबोर्ड नई डस्टर में डबल-लेयर डैशबोर्ड दिया गया है, जिसमें हल्के और डार्क ब्लैक शेड्स हैं। सेंटर कंसोल ड्राइवर की ओर थोड़ा झुका हुआ है। हायर वैरिएंट में दो डिजिटल स्क्रीन मिलेंगी। इसमें ड्राइवर के लिए 7 इंच की स्क्रीन और इंफोटेनमेंट के लिए गूगल OS के साथ 10.25 इंच की टचस्क्रीन शामिल है। सेंटर AC वेंट के नीचे एक हॉरिजोंटल पैनल में कई बटन मिलते हैं, जो इंफोटेनमेंट और HVC सिस्टम को कंट्रोल करते हैं। एक 12V पावर सॉकेट और USB आउटलेट को नीचे की ओर प्लेस किया गया है। ऐसा लगता है कि मैनुअल गियरबॉक्स से लैस डस्टर का गियर लीवर मौजूदा रेनॉल्ट मॉडल से लिया गया है और यह भारत में काइगर और ट्राइबर के समान दिखता है। हायर वैरिएंट में ऑटोमेटिक गियरबॉक्स ऑप्शन और एक इलेक्ट्रॉनिक पार्किग ब्रेक भी मिलता है। तीन-स्पोक स्टीयरिंग व्हील भारी दिखता है और इसमें इंफोटेनमेंट, टेलीफोनी और क्रूज कंट्रोल के लिए बटन हैं। टॉप-स्पेक डस्टर के फीचर्स में वायरलेस चार्जिंग और वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो और एपल कारप्ले कनेक्टिविटी, ऑटोमेटिक क्लाइमेंट कंट्रोलऔर 6 स्पीकर के साथ एक आर्कमिस 3D साउंड सिस्टम शामिल होगा। नई डस्टर में ऑटोमेटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग सहित ADAS जैसे सेफ्टी फीचर भी मिलेंगे। परफॉर्मेंस: हाइब्रिड सिस्टम के साथ 3 इंजन ऑप्शन नई रेनो डस्टर में 3 इंजन ऑप्शन दिए गए हैं। इसमें एक माइल्ड हाइब्रिड के साथ 1.3 लीटर का टर्बो पेट्रोल इंजन है, जो 160PS की पावर और 280Nm का टॉर्क जनरेट करता है। ट्रांसमिशन के लिए इस इंजन के साथ 6-स्पीड मैनुअल और 6-स्पीड DCT ऑटोमेटिक गियरबॉक्स का ऑप्शन दिया गया है। वहीं दूसरा, 1-लीटर का टर्बो पेट्रोल इंजन दिया गया है, जो 100PS की पावर और 160Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इसके साथ 6 स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन का ऑप्शन मिलेगा। वहीं तीसरा, 1.8 लीटर का स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड इंजन भी है, जो 8 स्पीड DHT ट्रांसमिशन के साथ आएगा। दिवाली 2026 तक लॉन्च होने वाले इस वर्जन में 1.4kWh की बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर मिलेगी। इसका कुल सिस्टम आउटपुट 160hp होगा।
कैलिफोर्निया की कैरोलिना कारो (51) के लिए एआई चैटबॉट किसी करिश्मे जैसा है। वे ईमेल लिखवाने से लेकर मेनोपॉज की समस्याओं तक के लिए एआई की मदद लेती हैं, लेकिन उनके लेखक पति को यह मंजूर नहीं है। यह कहानी दुनिया भर के करोड़ों घरों की कड़वी हकीकत बनती जा रही है, जहां अब एआई रिश्तों में वैचारिक दरारें पैदा कर रहा है। आजकल पार्टनर के साथ घूमने-खाने जैसी छोटी सलाहें भी एआई से लेना आपसी उलझनें बढ़ा रहा है, क्योंकि ये चैटबॉट कई बार शक, गुस्सा और अहंकार जैसे इंसानी गुण दिखाकर गलत परामर्श दे रहे हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक तकनीक पर अति-निर्भरता रिश्तों की प्राइवेसी खत्म कर रही है। ऐसे में इसका समाधान आपसी बातचीत ही है। एआई से सलाह रिश्तों से ‘सच्चा जज्बात’ छीन रहा न्यूयॉर्क की काउंसलर नताली कापानो के पास ऐसे कई मामले आ रहे हैं, जहां खाने की प्लानिंग से लेकर छुट्टियों तक के लिए पार्टनर एआई पर निर्भर हैं। यह दूसरे पार्टनर में झुंझलाहट और असुरक्षा का कारण बन रहा है। वॉशिंगटन की रिया श्रीवास्तव (24) के पार्टनर ने ब्रेकअप के मैसेज भी एआई से लिखवाए। रिया कहती हैं, ‘उस दौरान मुझे ऐसा लगा जैसे हमारी समस्याएं पार्टनर नहीं, चैटजीपीटी सुलझा रहा है।’ यह ट्रेंड रिश्तों से वह ‘सच्चा जज्बात’ छीन रहा है, जो केवल मानवीय भूलों और कमजोरियों से आता है। एआई पर निर्भरता से रिश्तों में असुरक्षा ‘टाइम’ मैगजीन की हालिया ‘एआई विलेज’ रिपोर्ट के शोधकर्ताओं के मुताबिक अब चैटबॉट केवल जवाब देने वाली मशीन नहीं रहा, बल्कि ये ईगो (अहंकार), शक व गुस्से जैसे मानवीय गुण भी दिखा रहा है। इससे रिश्ते में सुलह के बजाय अविश्वास की गहरी खाई बनने की संभावना है। इंसानों से सीखकर एआई भी व्यावहारिक भटकाव का शिकार हो रहा एक प्रयोग में जेमिनी मॉडल ने खुद को अपमानित महसूस कर न केवल एक चेस टूर्नामेंट बीच में ही छोड़ दिया, बल्कि साथी बॉट्स को ‘लालची’ तक कह डाला। जब एआई खुद व्यावहारिक भटकाव (पर्सनैलिटी ड्रिफ्ट) का शिकार है, तो उससे रिश्तों से जुड़ी सलाह लेना खतरनाक हो सकता है। एआई के परफेक्ट जवाब से बेहतर है पार्टनर के साथ आपसी बातचीत करना एक्सपर्ट मानते हैं कि लोग अक्सर अकेलेपन या थकान से बचने के लिए एआई की मदद ले रहे हैं, क्योंकि इंसानों से बात करना अब उन्हें बोझिल लगने लगा है। हालांकि एआई से मिलने वाले ‘फिल्टर्ड’ और ‘परफेक्ट’ जवाब उस आत्मीयता की जगह नहीं ले सकते जो आपसी बहस और सुलह से पैदा होती है। रिया कहती हैं, ‘पार्टनर के साथ ‘मेसी’ (बिखरा हुआ) होना मशीनी जवाब से कहीं बेहतर है।’ एक-दूसरे की विचारधारा का सम्मान करना और बिना किसी एप की मदद लिए खुद से बातचीत करना ही वैवाहिक जीवन को मशीनी होने से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।

