रॉयल एनफील्ड अपनी पॉपुलर बाइक गुरिल्ला 450 का 2026 मॉडल कल यानी 27 मार्च को लॉन्च करेगी। कंपनी ने इसका नया टीजर जारी कर दिया है। नए मॉडल में ग्राहकों के फीडबैक के आधार पर कई मैकेनिकल और कॉस्मेटिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सस्पेंशन में बदलाव: राइड अब ज्यादा कंफर्टेबल होगी मौजूदा मॉडल में कुछ राइडर्स ने इसके रियर मोनोशॉक सस्पेंशन को थोड़ा सख्त बताया था। 2026 मॉडल में कंपनी इसे सॉफ्ट कर सकती है, जिससे खराब रास्तों पर बाइक चलाना आसान होगा। इसके अलावा, टॉप वेरिएंट्स में फ्रंट में अपसाइड डाउन फोर्क्स दिए जा सकते हैं, जबकि बेस वेरिएंट में पहले की तरह टेलिस्कोपिक फोर्क्स ही मिलने की उम्मीद है। क्रूज और ट्रैक्शन कंट्रोल: लंबी राइड आसान होगी बाइक में राइड-बाय-वायर थ्रॉटल पहले से ही आता है, इसलिए कंपनी अब इसमें 'क्रूज कंट्रोल' का फीचर जोड़ सकती है। इसके साथ ही सेफ्टी के लिए 'ट्रैक्शन कंट्रोल' भी दिया जा सकता है, जो गीली या फिसलन भरी सड़कों पर बाइक की स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा। इसमें 'बाय-डायरेक्शनल क्विकशिफ्टर' मिल सकता है, जिससे बार-बार क्लच दबाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। टायर और ग्रिप: रोड-बायस्ड रेडियल टायर मिलेंगे अभी गुरिल्ला 450 में मोटे ड्यूल-परपज टायर मिलते हैं। नए अपडेट में कंपनी सड़क पर बेहतर पकड़ के लिए रोड-बायस्ड रेडियल टायर दे सकती है। इससे कॉर्नरिंग के दौरान राइडर का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। इसमें हैंडल के कोने पर लगे मिरर का विकल्प भी मिल सकता है। नए कलर ऑप्शंस और ग्राफिक्स रॉयल एनफील्ड अपने नए मॉडल्स में रंगों के साथ एक्सपेरिमेंट करती है। गुरिल्ला 450 में कुछ पुराने कलर्स को हटाकर नए मैट फिनिश और डुअल-टोन कलर्स शामिल किए जा सकते हैं। बाइक की विजुअल अपील बढ़ाने के लिए इसमें नए स्पोर्टी ग्राफिक्स भी दिए जा सकते हैं। इंजन और परफॉर्मेंस में बदलाव नहीं बाइक के इंजन में बदलाव की उम्मीद नहीं है। इसमें वही 452cc का लिक्विड कूल्ड, सिंगल सिलेंडर शेरपा इंजन मिलेगा। यह 40 PS की पावर और 40 Nm टॉर्क जनरेट करता है। इसमें 6-स्पीड ट्रांसमिशन और स्लिपर क्लच स्टैंडर्ड है। बाइक का वजन 184 KG है और इसकी सीट हाइट 780mm है, जो इसे कम हाइट वाले राइडर्स के लिए भी कंफर्टेबल बनाती है। कीमत और मुकाबला मौजूदा रॉयल एनफील्ड गुरिल्ला 450 की शुरुआती कीमत ₹2.56 लाख (एक्स-शोरूम) है। नए फीचर्स और अपडेट्स के बाद 2026 मॉडल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है। बाजार में इसका मुकाबला ट्रायम्फ स्पीड 400 और अपाचे RTR 310 जैसी बाइक्स से है। नॉलेज बॉक्स: क्या है शेरपा 450 इंजन? शेरपा 450 रॉयल एनफील्ड का पहला लिक्विड-कूल्ड इंजन है। यह 452cc का सिंगल-सिलेंडर, DOHC इंजन है जो 40 PS की पावर और 40 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इस इंजन की सबसे बड़ी खासियत इसका 'राइड-बाय-वायर' सिस्टम है, जो थ्रॉटल रिस्पॉन्स को बहुत स्मूद बनाता है। पुरानी एनफील्ड बाइक्स के मुकाबले यह इंजन काफी हल्का है और हाई-स्पीड पर भी इसमें वाइब्रेशन बहुत कम महसूस होता है। यही इंजन हिमालयन 450 में भी इस्तेमाल किया गया है।
अमेरिका की एक कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में मेटा को बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने में नाकाम रहने का दोषी माना। न्यू मैक्सिको की जूरी ने माना कि फेसबुक व इंस्टाग्राम पर अश्लील वीडियो और फोटो, गलत कामों के लिए बहलाने-फुसलाने और मानव तस्करी जैसे खतरों से बच्चों को नहीं बचाया जा सका। इस मामले में जूरी ने मेटा पर 3141 करोड़ रुपए का भारी जुर्माना लगाया है। एक अन्य मामले में कैलिफोर्निया की एक जूरी ने मेटा और गूगल को एक युवती के डिप्रेशन और एंग्जायटी के लिए जिम्मेदार माना। युवती का आरोप है कि मेटा समेत सोशल मीडिया कंपनियों ने जानबूझकर ऐसे प्रोडक्ट बनाए जो लत लगाने वाले हैं। इससे उसकी मेंटल हेल्थ पर असर पड़ा। इस मामले में कोर्ट ने मेटा और गूगल पर 28 करोड़ रु. का जुर्माना लगाया है। इसमें से 70% राशि यानी करीब 20 करोड़ रुपए मेटा को देने हैं। कोर्ट दोनों कंपनियों के खिलाफ अतिरिक्त जुर्माना भी लगाएगी। यहां समझिए कि क्यों ऐतिहासिक है ये जीत क्यों है इस केस पर सबकी नजर - यह दोनों मामला उन शुरुआती केसों में शामिल है, जिनमें यह परखा गया कि क्या सोशल मीडिया कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर पोस्ट होने वाले कंटेंट के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। क्यों अहम है यह जीत - न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज ने इसे बड़ी टेक कंपनी के खिलाफ बच्चों-युवाओं को नुकसान पहुंचाने के मामले में किसी राज्य की ट्रायल में पहली जीत बताया। उन्होंने कहा, मेटा ने बच्चों की सुरक्षा से ऊपर मुनाफे को रखा। क्या मेटा को खतरों की जानकारी नहीं थी: कंपनी के अधिकारियों को पता था कि उनके प्रोडक्ट नुकसान पहुंचा रहे हैं, फिर भी चेतावनियों को नजरअंदाज किया और जनता से सच छिपाया। हजारों केस के लिए नजीर: यह मामला कैलिफोर्निया की एक अदालत में एक साथ जोड़े गए हजारों व्यक्तिगत मुकदमों में शामिल है। इसके अलावा, फेडरल कोर्ट में 2,000 से ज्यादा मुकदमे अभी लंबित हैं, जो अलग-अलग व्यक्तियों और स्कूल ने दायर किए हैं। क्या होगा असर: ये फैसले ऐसे समय में आए हैं, जब दुनियाभर में बच्चों व किशोरों में फोन के उपयोग को सीमित या प्रतिबंधित कर करने को लेकर कानून बन रहे हैं। फैसले का असर दूरगामी होगा। मेटा बोला- अपील करेंगे: मेटा ने कहा है कि वह फैसले के खिलाफ अपील करेगा। कंपनी ने चुनिंदा दस्तावेज उठाकर सनसनीखेज और गैर-जरूरी दलीलें दिए जाने का आरोप लगाया। भारत- बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध 2 साल में 38% बढ़े केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि पूरे देश में 2021 से 2023 के बीच बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध के मामलों में लगभग 38% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। केरल और कर्नाटक टॉप पर देश में बच्चों के खिलाफ साइबर क्राइम के सर्वाधिक मामलों में केरल शीर्ष पर है, जहां 2023 में 443 मामले दर्ज हुए और अपराध दर 4.7 प्रति लाख रही। इसके बाद कर्नाटक का स्थान है। राजस्थान - बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। यहां 2021 में मात्र 33 से बढ़कर 2023 में 306 हो गए यानी 827% की चिंताजनक उछाल। केरल में केस 163 से 443 (172%) और उत्तराखंड में 23 से 64 (178%) हो गई। कर्नाटक 164 से 363 (121%) और छत्तीसगढ़ 88 से 193 (119%) में भी दोगुने से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। यहां घटा -: यूपी में केस में 66% की कमी आई है। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार यह कम रिपोर्टिंग का संकेत हो सकती है।
आप एक मेडिकल छात्र हैं। हार्ट अटैक आने पर क्या करना चाहिए... यह सिर्फ किताबों में ही पढ़ा होता है। पर जब पहली बार आप जीवित इंसान के सामने खड़े होते हैं, जिसकी सांसें उखड़ रही हैं, तो हाथ कांपने लगते हैं...’ अमेरिकन एकेडमी ऑफ नर्सिंग की प्रेसिडेंट डॉ. डेब्रा बार्क्सडेल कहती हैं,‘अनुभव डरावना होता है। भले ही आपके पास अथाह नॉलेज हो, पर जीवित इंसान पर उसका अभ्यास करना बहुत चुनौतीपूर्ण है।’ इसी डर को खत्म करने के लिए अब मेडिकल की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव आया है। अब छात्र सीधे इंसानों पर हाथ आजमाने के बजाय ‘हाई-फिडेलिटी मेडिकल सिमुलेटर’ यानी बेहद असली दिखने वाले पुतलों पर अभ्यास करते हैं। ये खास तरह के पुतले सांस ले सकते हैं, पलकें झपकाते हैं, उन्हें पसीना आता है और चोट लगने पर उनसे खून (लाल तरल पदार्थ) भी निकलता है। कुछ पुतले तो ऐसे भी हैं जिन्हें दौरे पड़ सकते हैं या उनके मुंह से झाग निकल सकता है। कुछ तो डॉक्टर से बात भी करते हैं। कुछ दिन पहले नर्सिंग छात्रा, जुलियाना विटोलो, ‘मॉम-एनी’ नाम के गर्भवती पुतले का परीक्षण कर रही थी। जब जुलियाना ने पूछा,‘आप कैसा महसूस कर रही हैं?’ तो उस पुतले ने पलकें झपकाईं और जवाब दिया,‘पेट के निचले हिस्से में थोड़ा दर्द है।’ अलग तरह के मरीजों को ध्यान में रखकर पुतलों की डिजाइन भी अलग रखते हैं। प्रीमेच्योर बच्चों के पुतलों पर असली जैसे बाल होते हैं, जबकि बुजुर्ग पुतलों की त्वचा पर झुर्रियां और आंखों में मोतियाबिंद तक दिखाते हैं। टॉर्च से आंखों की जांच की जाती है, तो पुतलियां सिकुड़ जाती हैं। इन्हें इंजेक्शन दे सकते हैं और नब्ज भी महसूस की जा सकती है। अगर किसी ‘बच्चे’ वाले पुतले को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिले, तो होंठों के आसपास की त्वचा नीली पड़ने लगती है (हाइपोक्सिया), जिससे छात्रों को तुरंत फैसला लेना पड़ता है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां गलती करने पर किसी की जान नहीं जाती। सेटन हॉल की सिमुलेशन डायरेक्टर जेनिफर मैकार्थी कहती हैं,‘अगर मरीज को 2 मिग्रा. दवा देनी है और छात्र ने सिर्फ 1.8 मिग्रा. दे दी, तो यह गंभीर गलती है। पुतले के अंदर लगी तकनीक इस मामूली अंतर को भी पकड़ लेती है और गलती सुधारने का मौका देती है।’ कंट्रोल रूम से विशेषज्ञ इन पुतलों के जरिए बात भी करते हैं। वे कभी चीखते हैं, कभी दर्द में कराहते हैं, तो कभी सवाल पूछते हैं। इससे डॉक्टर व नर्स इलाज के साथ तुरंत फैसले लेना और तनावपूर्ण माहौल में मरीज से बात करने का सलीका भी सीखते हैं। माहौल असली रहे, इसलिए एक्टर्स को ‘रिश्तेदार’ के तौर पर बुलाते हैं वेल-कॉर्नेल सिम्युलेशन सेंटर के प्रमुख डॉ. केविन चिंग कहते हैं,‘कुछ मैनिकिन्स में अचानक हालात बदलने की प्रोग्रामिंग होती है। इससे छात्रों को तेज सोचने की ट्रेनिंग मिलती है। बेबी मैनिकिन को सुस्त दिखा सकते हैं, ताकि छात्र लक्षण देखकर समस्या पहचानें। जैसे बीपी गिरने पर तय करना कि फ्लूड देना है या नहीं। असली माहौल बनाने के लिए पास में चश्मा, फोन रखे जाते हैं और कभी ‘चिंतित रिश्तेदार’ की भूमिका में एक्टर भी बुलाया जाता है। इसे हाइब्रिड सिम्युलेशन कहते हैं।’
ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो के बाद अब स्विगी से भी खाना मंगाना महंगा हो गया है। कंपनी ने आज 24 मार्च से हर ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 17% की बढ़ोतरी की है। यूजर्स को हर ऑर्डर पर 14 रुपए के बजाय अब 17.58 (GST सहित) यानी ₹3.58 ज्यादा प्लेटफॉर्म फीस देनी होगी। यह बढ़ोतरी डिलीवरी ऑपरेशंस की लागत बढ़ने के कारण की गई है। स्विगी ने 7 महीने में दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाई अप्रैल 2023 से प्लेटफॉर्म फीस लेने की शुरुआत हुई थी कंपनी ने 7 महीने में दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाई है। इससे पहले अगस्त-2025 में 17% यानी 2 रुपए का इजाफा किया गया था। तब प्लेटफॉर्म फीस 12 रुपए से बढ़कर 14 रुपए हो गई थी। स्विगी ने अप्रैल 2023 में सबसे पहले प्लेटफॉर्म फीस शुरू की थी, ताकि कंपनी अपने यूनिट इकोनॉमिक्स को बेहतर कर सके। तब से कंपनी ने धीरे-धीरे इस फीस को कई बार बढ़ाया है। शुरुआत में यह फीस मात्र 2 रुपए थी। स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस जोमैटो के बराबर हुई जोमैटो ने 20 मार्च को ही अपनी प्लेटफॉर्म फीस 19% यानी ₹2.40 बढ़ाकर ₹14.90 (बिना GST) कर दी थी। टैक्स (GST) जोड़ने के बाद दोनों कंपनियों की प्रभावी प्लेटफॉर्म फीस अब लगभग ₹17.58 के बराबर हो गई है। यानी अब आपको दोनों प्लेटफॉर्म से खाना मंगवाने पर लगभग बराबर एक्स्ट्रा चार्ज देना होगा। क्या होती है प्लेटफॉर्म फीस और क्यों वसूली जाती है? प्लेटफॉर्म फीस वह फिक्स्ड चार्ज है जो फूड बिल, रेस्टोरेंट चार्ज और डिलीवरी फीस के अलावा हर ऑर्डर पर वसूला जाता है। कंपनियां इसे अपने ऑपरेटिंग कॉस्ट (संचालन लागत), टेक्नोलॉजी मेंटेनेंस और कस्टमर सपोर्ट जैसी सेवाओं को बेहतर बनाने और उनके खर्च को कवर करने के लिए लेती हैं। चाहे आपके खाने का बिल ₹200 हो या ₹2000, यह फीस हर ऑर्डर पर एक समान ही रहती है। करोड़ों यूजर्स की जेब पर पड़ेगा असर देशभर में करोड़ों लोग रोजाना इन एप्स के जरिए खाना ऑर्डर करते हैं। ₹2 से ₹3 की यह मामूली दिखने वाली बढ़ोतरी कंपनियों के लिए करोड़ों रुपए का अतिरिक्त रेवेन्यू जनरेट करती है। हालांकि, बार-बार बढ़ती फीस की वजह से उन ग्राहकों में नाराजगी देखी जा रही है जो नियमित रूप से बाहर से खाना ऑर्डर करते हैं। जोमैटो और स्विगी दोनों ही कंपनियां अब अपने घाटे को कम करने और मुनाफे की ओर बढ़ने के लिए इस तरह के चार्जेस पर ज्यादा निर्भर हो रही हैं। ------------------ ये खबर भी पढ़ें… जोमैटो से खाना मंगवाना महंगा हुआ: प्लेटफॉर्म फीस 19% बढ़ाई, हर ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय अब ₹14.90 देने होंगे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो से खाना ऑर्डर करना अब महंगा हो गया है। कंपनी ने आज 20 मार्च से ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 19% बढ़ोतरी की है। यूजर्स को हर ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय अब ₹14.90 यानी ₹2.40 ज्यादा प्लेटफॉर्म फीस देनी होगी। प्लेटफॉर्म फीस हर एक फूड ऑर्डर पर लागू होने वाला ऐडिशनल चार्ज हैं। ये GST, रेस्तरां चार्ज और डिलीवरी फीस से अलग है। जोमैटो रोजाना 20 से 25 लाख ऑर्डर डिलीवर करता है। पूरी खबर पढ़ें…
बुजुर्गों के लिए नए गैजेट्स अब रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम आसान कर रहे हैं। ये गैजेट्स झुकने, चीजों को उठाने या पकड़ने में मदद करते हैं। इससे गिरने का जोखिम नहीं रहता है। टोपरो स्टेप डिवाइस इसमें दीवार पर एक रेलिंग लगी होती है, जिस पर एक फोल्ड होने वाला हैंडल होता है। ये पेटेंट लॉक मैकेनिज्म पर काम करता है, जो दबाव पड़ते ही लॉक हो जाता है, जिससे फिसलने या गिरने का डर नहीं रहता है। यह नॉन इलेक्ट्रिक डिवाइस है। कहां मिलेगी इस डिवाइस को मेडिकल सप्लायर्स से ऑनलाइन मंगवा सकते हैं। इसी तरह का दूसरा डिवाइस मार्केट में भी देख सकते हैं। कीमत 2.5 से 4 लाख है। ट्रेंड लॉन्ग शू हॉर्न अगर कमर दर्द के कारण आपको झुककर जूते पहनने में परेशानी होती है तो यह 50 सेमी लंबा प्लास्टिक गैजेट आपको सहारा देगा। इससे जूते पहनने के लिए झुकना नहीं पड़ेगा। इसका हैंडल काफी मजबूत है। ऊपर लूप लगा है, जिससे टांग सकते हैं। कहां मिलेगा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 400 से ₹800 रुपए में मिल जाएगा। इसे जूते के पीछे रखकर पैर अंदर डालें। बिना झुके हैंडल से खींचकर जूता पहनें।
एआई के आगे कैसे टिकी आईटी इंडस्ट्री:AI खतरा नहीं, आईटी फर्मों के पास 37 लाख करोड़ का मौका
आईटी इंडस्ट्री के लिए बीता महीना विरोधाभासी रहा। नैसकॉम ने वित्त वर्ष के अंत तक रिकॉर्ड 30 लाख करोड़ रुपए राजस्व का अनुमान जताया, जो 6% की वृद्धि है। दूसरी तरफ, एआई द्वारा नौकरियां खत्म करने की आशंका से शेयरों में बिकवाली हो रही है। निफ्टी आईटी इंडेक्स 20% से ज्यादा टूट चुका हैै। निराशा की वजह स्पष्ट है- दशकों से यह उद्योग ‘लेबर आर्बिट्रेज’ पर टिका है, जहां पुणे में कोडर रखने की लागत अमेरिका के मुकाबले बेहद कम है। इंफोसिस, टीसीएस जैसी फर्में कोडर्स की मदद से सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस और रूटीन कोडिंग जैसे श्रम-प्रधान कार्यों से राजस्व कमाती हैं। एआई बनाम कोडर एंथ्रोपिक का ‘क्लॉड कोड’ मिनटों में प्रोटोटाइप बना सकता है। टेक महिंद्रा के सीइओ अतुल सोनेजा का तर्क है कि उत्पादकता में सुधार केवल ‘ग्रीनफील्ड’ (नए) माहौल में संभव है। विरासत में मिले पुराने कोड और जटिल प्रणालियों वाले ‘ब्राउनफील्ड’ में एआई तैनात करना कठिन है। अक्सर क्लाइंट्स को अहसास होता है कि एआई सपने महत्वाकांक्षी थे। वे अंततः पहले जितने ही कोडर्स रखते हैं।’ अवसर और वास्तविकता इंफोसिस के फाउंडर्स में से एक नंदन नीलेकणी का अनुमान है कि एआई संबंधित सेवाओं का मूल्य 2030 तक 300-400 अरब डॉलर हो सकता है। हालिया नतीजे उम्मीद जगा रहे हैं। टीसीएस की एआई बिक्री 17% बढ़ी और राजस्व का 6% है। एचएसबीसी के योगेश अग्रवाल के अनुसार, ‘पारंपरिक सॉफ्टवेयर को एआई द्वारा निगल जाने के दावों के ठोस मामले बहुत कम हैं।’ जीसीसी की भूमिका ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) भी टेक वर्कर्स को रोजगार दे रहे हैं। चूंकि कंपनियां अब तकनीक को व्यवसाय का कोर मानती हैं, इसलिए एआई की मदद से इन-हाउस कोडिंग बढ़ने से भी भारतीय आईटी उद्योग को लाभ होगा। नवंबर 2022 में चैटजीपीटी के आने के बाद जिस ‘विघटन’ की आशंका थी, वह तीन साल बाद भी नहीं आया है। राजस्व बढ़ रहा है और नियुक्तियां जारी हैं। वाजिब हुए दाम; एआई के साथ ‘रीसेट मोड’ में इंडस्ट्री साल 2026 में आईटी सेक्टर पर काफी दबाव देखा गया है। आईटी इंडेक्स पीक से 28% टूट चुका है। मार्केट एनालिस्ट के मुताबिक आईटी सेक्टर खत्म नहीं हो रहा, बल्कि ‘रीसेट फेज’ में है। •वैल्युएशन में बदलाव: वर्तमान में आईटी सेक्टर का वैल्युएशन इसके दो साल की अनुमानित कमाई का 15.4 गुना (15.4x) है। •बेंचमार्क के बराबर: आईटी सेक्टर हमेशा निफ्टी 50 इंडेक्स से लगभग 17% प्रीमियम (महंगा) पर ट्रेड करता था, लेकिन अब यह निफ्टी 50 के बराबर आ गया है। इसे ही ‘वैल्यू जोन’ कहा जा रहा है क्योंकि अब शेयरों में छाई ‘अतिरिक्त चमक’ खत्म हो गई है। सलाह: वर्तमान दौर में ‘बॉटम फिशिंग’ यानी निचले स्तर पर खरीदारी से बचें। जब तक अर्निंग्स में सुधार के संकेत न मिलें, तब तक इंतजार करना समझदारी। ग्रोथ आउटलुक: धीमी लेकिन स्थिर •चिंताओं के बावजूद, सेक्टर पूरी तरह ध्वस्त नहीं हो रहा है। उद्योग की वार्षिक आय वृद्धि 3% से 6% रहने की उम्मीद है। यह इसके ऐतिहासिक औसत (7% - 8%) से कम है। आईटी कंपनियां कैसे खुद को बदल रही हैं? •नया मॉडल: कंपनियां ‘फिक्स्ड-प्राइस’ कॉन्ट्रैक्ट की ओर बढ़ रही हैं और प्रति कर्मचारी लाभ सुधार रही हैं। •कार्यबल: एआई-कुशल प्रतिभाओं को ऊंचे वेतन पर नियुक्त किया जा रहा है और मौजूदा कर्मचारियों को ‘री-स्किल’ किया जा रहा है। •साझेदारी: कंपनियां एआई-नेटिव कंपनियों के साथ पार्टनरशिप कर रही हैं। एआई के आगे कैसे टिकी आईटी इंडस्ट्री एआई से काम करवाना मुख्य उद्देश्य होगा। पुरानी प्रणालियों को आधुनिक बनाना कठिन है क्योंकि उनमें डेटा साइलो और तकनीकी कमियां होती हैं। -नंदन नीलेकणी, को-फाउंडर, इंफोसिस ( एआई इंपैक्ट)
अगर आपको एआई एक्सपेरिमेंट्स पसंद हैं तो गूगल लैब्स पर 35 एक्सपेरिमेंटल टूल्स मौजूद हैं, जो पढ़ाई से लेकर एप बनाने, म्यूजिक कंपोज करने और वर्चुअल ट्रैवल तक में आपकी मदद कर सकते हैं। खास बात यह है कि इनमें से कई टूल बिना किसी तकनीकी ज्ञान के भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। मूल गूगल लैब्स 2002 से 2011 तक मौजूद था, जहां जीमेल और गूगल मैप्स जैसे बड़े प्रोडक्ट्स को विकसित किया गया। बाद में इसे बंद कर दिया गया था। 2023 में इसे एआई एक्सपेरिमेंट के लिए दोबारा शुरू किया गया है। फायरबेस स्टूडियो से बनाएं फ्री में 5 मिनट में अपनी वेबसाइट, गूगल फ्लो से एनिमेशन वीडियोज प्रोड्यूसर एआई: अब म्यूजिक बनाना भी एआई के जरिए संभव - यह टूल टेक्स्ट से पूरा गाना बना सकता है। - गूगल डीपमाइंड के हाई-फिडेलिटी म्यूजिक मॉडल पर आधारित है यह टूल। - उदाहरण के लिए लिखें, मेरा नाम अमित है, मेरे नाम पर एक गाना बनाएं। इस प्रॉम्प्ट पर एआई आपके लिए पूरा म्यूजिक तैयार कर देगा। कैसे इस्तेमाल करें: producer.ai पर जाएं। गूगल फ्लो: बिना कैमरा के फिल्मी सीन तैयार करें... एनिमेशन बनाएं - यह प्रोफेशनल-जैसे वीडियो सीन बना सकता है। कैमरा मूवमेंट और शॉट्स नियंत्रित रहते हैं। - वियो 3 वीडियो मॉडल पर आधारित है। उदाहरण: आजकल सोशल मीडिया पर एनिमेटेडेट वीडियोज चर्चित हैं। एजुकेशन हो या एंटरटेनमेंट, इस तरह के वीडियोज यहां से बनाना आसान है। कैसे इस्तेमाल करें: गूगल लैब्स में Flow खोजें। टॉकिंग टूर्स इंडिया: घर बैठे ही ऐतिहासिक जगहों की सैर करें - गूगल स्ट्रीट व्यू और एआई गाइड का मिश्रण है। - जगहों का इतिहास और महत्व सुनाता है। - वर्चुअल विजिट जैसा अनुभव देता है। उदाहरण: टूल पर जाएं और किसी भी लोकेशन पर क्लिक करें। यह टूल उसकी कहानी सुनाता है। कैसे इस्तेमाल करें: Talking Tours India पर जाएं और मैप पर लोकेशन सिलेक्ट करें। फायरबेस स्टूडियो: एप बनाना अब डेवलपर का काम ही नहीं - यह क्लाउड-आधारित डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म है, जहां ब्राउजर में ही एप बना सकते हैं। कोई सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं। एआई ही स्क्रीन, कोड और डेटाबेस तैयार करता है। - बस लिखें कि एक ऐसा एप बनाएं, जहां लोग अपनी फैमिली का निजी सोशल मीडिया बना सकें और इस पर एआई आपके लिए एप बना देगा। - डेवलपर्स को कई टूल्स में कोड, डेटाबेस और टेस्टिंग करनी पड़ती है, पर यहां सब एक जगह होता है। कहां इस्तेमाल करें: firebase.studio खोलें। प्रॉम्प्ट डालकर एप बनाएं। लिटिल लैंग्वेज सेशन: स्पैनिश से फ्रेंच तक, यहां पर नई भाषाएं सीखें - कैमरा से ऑब्जेक्ट पहचानकर शब्द बताता है। - AI से स्लैंग में बातचीत की प्रैक्टिस करता है। उदाहरण: फोन को किसी वस्तु पर रखें। एआई उस वस्तु का नाम आपकी चुनी भाषा में बता देगा। यह रियल वर्ल्ड उदाहरणों से सिखाता है। कहां इस्तेमाल करें: Little Language Lessons पर जाएं। ऑब्जेक्ट को स्कैन करें। मूविंग स्क्रिप्ट्स: संस्कृत लिपि को समझना आसान करता है - यह एआई आधारित विजुअल टूल देवनागरी अक्षरों की संरचना समझाता है। - अक्षरों को स्ट्रोक दर स्ट्रोक बनते हुए दिखाता है - आकार और बनावट का तर्क समझाता है। - उदाहरण: ॐ लिखते समय हर रेखा का प्रवाह और अर्थ दिखाया जाता है। यह इसी तरह नॉलेज देता है। कहां इस्तेमाल करें: Moving Scripts खोजें। लर्न योर वे: कठिन विषयों को क्विज-गेम्स के जरिए पढ़ने का विकल्प देगा - यह एआई टूल किसी भी कठिन विषय को आपकी समझ के मुताबिक बदल देता है…। जिस विषय या डॉक्यूमेंट को समझना है, उसे पेस्ट करें या अपलोड करें। क्विज हो या कोई खेल, बताएं कि आपको किस फॉर्म में आपको समझना है। कहां करें इस्तेमाल: Google Labs में Learn Your Way टाइप करें और इसे एक्सेस करें।
रील्स और फोटो शेयर करने के साथ-साथ इंस्टाग्राम अब करोड़ों लोगों का चैट एप भी बन चुका है। खासकर युवाओं के लिए यह वॉट्सएप जैसा ही कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म है। लेकिन 8 मई से इंस्टाग्राम की डायरेक्ट मैसेज सर्विस में बड़ा बदलाव होने जा रहा है… मैसेज अब एंड-टु-एंड एन्क्रिप्टेड नहीं रहेंगे। एंड-टु-एंड एन्क्रिप्शन: पूरी टेक्नोलॉजी समझिए जब आप किसी को मैसेज भेजते हैं, तो वह सीधे सामने वाले तक नहीं जाता, पहले सर्वर पर जाता है। एंड-टु-एंड एन्क्रिप्शन होने पर मैसेज को एक खास कोड में बदल दिया जाता है। यह कोड सिर्फ सेंडर और रिसीवर के पास मौजूद की से ही खुल सकता है। बीच में कोई भी, यहां तक कि कंपनी भी मैसेज नहीं पढ़ सकती। इसे ऐसे समझें कि जैसे आपने दोस्त को ताला लगा बॉक्स भेजा, जिसकी चाबी सिर्फ आप दोनों के पास है। कुरियर बॉक्स ले जा सकता है, खोल नहीं सकता। 8 मई से होंगे ये बदलाव - 8 मई के बाद इंस्टाग्राम DMs में यह फीचर समाप्त हो जाएगी। - मैसेज एन्क्रिप्टेड नहीं रहेंगे। - कंपनी के लिए मैसेज एक्सेस करना संभव होगा। - अब इंस्टाग्राम चैट पर सुरक्षा पहले से कम हो जाएगी - बदलाव दिखाई नहीं देगा, लेकिन असर होगा। क्यों हटा रहे फीचर? मेटा के अनुसार बहुत कम लोग एन्क्रिप्टेड चैट इस्तेमाल कर रहे थे। प्राइवेट चैट के लिए वॉट्सएप पहले से उपलब्ध है। एक तर्क है कि इसमें अतिरिक्त तकनीकी लागत भी होती है। दूसरी ओर कई सरकारें लंबे समय से मांग कर रही हैं कि जरूरत पड़ने पर निजी चैट तक पहुंच मिलनी चाहिए। क्या करें यूजर्स? अगर आप इंस्टाग्राम पर निजी या संवेदनशील बातें करते हैं, तो सावधान रहें। जरूरी जानकारी न शेयर करें वॉट्सएपु चुनें, डिफॉल्ट एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन है। सिग्नल, सबसे सुरक्षित मैसेजिंग एप्स में से एक है। टेलीग्राम सीक्रेट चैट में भी एन्क्रिप्शन फीचर दिया गया है।
फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो से खाना ऑर्डर करना अब महंगा हो गया है। कंपनी ने शुक्रवार से ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 19% बढ़ोतरी की है। यूजर्स को हर ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय अब ₹14.90 यानी ₹2.40 ज्यादा प्लेटफॉर्म फीस देनी होगी। GST जोड़ने के बाद यह राशि और बढ़ जाएगी। प्लेटफॉर्म फीस हर एक फूड ऑर्डर पर लागू होने वाला ऐडिशनल चार्ज हैं। ये GST, रेस्तरां चार्ज और डिलीवरी फीस से अलग है। बता दें कि जोमैटो प्लेटफॉर्म रोजाना 20 से 25 लाख ऑर्डर डिलीवर करता है। स्विगी के करीब पहुंचे प्लेटफॉर्म फीस के दाम जोमैटो की मुख्य प्रतिद्वंदी कंपनी स्विगी अभी टैक्स समेत लगभग ₹14.99 प्लेटफॉर्म फीस वसूल रही है। आमतौर पर देखा गया है कि जब भी इन दोनों में से कोई एक कंपनी फीस बढ़ाती है, तो दूसरी कंपनी भी जल्द ही अपने दाम बढ़ा देती है। जोमैटो ने 2 रुपए से की थी प्लेटफॉर्म फीस की शुरुआत कंपनी ने 7 महीने में दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाई है। इससे पहले सितंबर-2025 में 20% का इजाफा किया गया था। अगस्त 2023 में जोमैटो ने अपना मार्जिन बढ़ाने और प्रॉफिटेबल बनने के लिए पहली बार 2 रुपए का प्लेटफॉर्म शुल्क शुरू किया था। कंपनी ने बाद में इसे बढ़ाकर 3 रुपए कर दिया और 1 जनवरी 2024 को 4 रुपए कर दिया। फिर इसे धीरे-धारी बढ़ाकर 7 रुपए कर दिया था। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ऑपरेशनल कॉस्ट बनी वजह दामों में इस बढ़ोतरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। तेल महंगा होने से डिलीवरी पार्टनर्स का खर्च बढ़ता है और कंपनी के लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन्स पर भी असर पड़ता है। इसके अलावा, जोमैटो अपनी प्रॉफिटेबिलिटी (मुनाफा) सुधारने के लिए भी समय-समय पर प्लेटफॉर्म फीस में बदलाव करती रहती है। दीपिंदर ने 2008 में बनाई थी फूडीबे ये खबर भी पढ़ें… प्रीमियम पेट्रोल ₹2.35 प्रति लीटर तक महंगा हुआ: भोपाल में दाम 117 रुपए प्रति लीटर तक हुए, सामान्य पेट्रोल पुरानी कीमत पर ही मिलेगा सरकारी तेल कंपनियों ने आज यानी 20 मार्च को स्पीड और पावर जैसे प्रीमियम पेट्रोल की कीमतें ₹2.09-₹2.35 प्रति लीटर तक बढ़ा दी है। भोपाल में इसकी कीमत बढ़कर करीब 117 रुपए पहुंच गई है। सामान्य पेट्रोल की कीमत में बदलाव नहीं हुआ है। पूरी खबर पढ़ें…
शाओमी की सब ब्रांड पोको ने भारतीय बाजार में अपना नया बजट स्मार्टफोन पोको C85x लॉन्च कर दिया है। यह कंपनी की C-सीरीज का लेटेस्ट मॉडल है। फोन में सबसे खास 32MP कैमरा के साथ 6300mAh बैटरी और 120Hz रिफ्रेश रेट वाला डिस्प्ले है। कंपनी का दावा है कि यह बैटरी दो दिन तक का बैकअप दे सकती है। यह फोन खासतौर पर उन यूजर्स के लिए डिजाइन किया गया है जो कम बजट में 5G कनेक्टिविटी और लंबी बैटरी लाइफ चाहते हैं। पोको C85x को भारत में दो स्टोरेज वैरिएंट में पेश किया गया है। इसके 4GB रैम + 64GB स्टोरेज वाले बेस वैरिएंट की कीमत 10,999 रुपए और 4GB रैम + 128GB स्टोरेज वाले वैरिएंट की कीमत 11,999 रुपए है। फोन ब्लैक, गोल्ड और ग्रीन कलर ऑप्शन में अवेलेबल है। इसकी बिक्री 14 मार्च दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी: IP57 रेटिंग के साथ मस्कुलर लुक मटेरियल और फिनिश: फोन का बैक पैनल और फ्रेम हाई-क्वालिटी पॉलीकार्बोनेट (प्लास्टिक) से बना है। बैक पैनल पर एक खास टेक्सचर दिया गया है, जिससे हाथ में पकड़ने पर यह अच्छी ग्रिप देता है और उंगलियों के निशान कम पड़ते हैं। पोको C85x: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: फोन में 6.9 इंच का HD+ एडॉप्टिव सिंक डिस्प्ले है। इसका रिजॉल्यूशन 7201600 पिक्सल है। स्मूद स्क्रॉलिंग के लिए इसमें 120Hz रिफ्रेश रेट और 240Hz टच सैंपलिंग रेट दिया गया है। 800 निट्स की पीक ब्राइटनेस से तेज धूप में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। परफॉरमेंस: इसमें ऑक्टा-कोर यूनिसोक T8300 प्रोसेसर दिया गया है, जिसकी क्लॉक स्पीड 2.2GHz है। ग्राफिक्स के लिए माली-G57 जीपीयू मिलता है। यह फोन एंड्रॉएड 16 पर बेस्ड कंपनी के लेटेस्ट हाइपर OS 3 पर रन करता है। मेमोरी: इसमें 4GB LPDDR4x रैम है। स्टोरेज को माइक्रो SD कार्ड के जरिए 2TB तक बढ़ाया जा सकता है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए रियर में डुअल कैमरा सेटअप है, जिसमें 32 मेगापिक्सल का मेन सेंसर और एक सेकेंडरी लेंस है। रियर कैमरा 10x डिजिटल जूम सपोर्ट करता है। सेल्फी के लिए फ्रंट में 8 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है। बैटरी और चार्जिंग: पावर बैकअप के लिए इसमें 6300mAh की बैटरी दी गई है। यह 15W वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करता है। साथ ही, इसमें 7.5W रिवर्स चार्जिंग का फीचर भी है, जिससे आप दूसरे फोन या ईयरबड्स को चार्ज कर सकते हैं। कनेक्टिविटी: इसमें 5G के साथ Wi-Fi 5, ब्लूटूथ 5.4, GPS और डुअल सिम सपोर्ट जैसे फीचर्स मिलते हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X की सर्विस दुनियाभर में ठप हो गई है। डाउनडिटेक्टर के मुताबिक, भारत सहित दुनिया के कई देशों में यूजर्स को एप और डेस्कटॉप दोनों वर्जन में एक्सेस करने में परेशानी हो रही है। आउटेज ट्रैक करने वाली वेबसाइट 'डाउनडिटेक्टर' के मुताबिक, यूजर्स न तो नई पोस्ट देख पा रहे हैं और न ही प्लेटफॉर्म पर शेयर किए गए लिंक लोड हो रहे हैं। यहां तक कि टाइमलाइन भी रिफ्रेश नहीं हो पा रही है। अमेरिका में सबसे ज्यादा 29,000 से ज्यादा यूजर्स प्रभावित अमेरिका में कुछ ही मिनटों में 29,000 से ज्यादा यूजर्स ने सर्विस डाउन होने की रिपोर्ट की। इसके अलावा, ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य देशों में भी डाउन की शिकायतें आ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्लेटफॉर्म के कोर सर्वर या ग्लोबल सर्विस में आई तकनीकी खामी के कारण हुई है। हालांकि, कंपनी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मोबाइल एप पर दिख रहा 'कैन नॉट रिट्रीव पोस्ट' का मैसेज X के मोबाइल एप का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। एप ओपन करने पर स्क्रीन पर एक मैसेज आ रहा है- कैन नॉट रिट्रीव पोस्ट्स एट दिस टाइम। प्लीज ट्राई अगेन लेटर। खास बात यह है कि इस दौरान यूजर्स को नोटिफिकेशन तो मिल रहे हैं, जिससे पता चलता है कि बैकग्राउंड में एक्टिविटी हो रही है, लेकिन वे उन पोस्ट्स या मैसेज को एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं। भारत में 4,500 से ज्यादा लोगों ने की शिकायत भारत में रात करीब 8:17 बजे से यूजर्स ने प्लेटफॉर्म में गड़बड़ी की शिकायत शुरू हुईं। शुरुआत में करीब 1,200 लोगों ने रिपोर्ट किया, लेकिन महज 15 मिनट के भीतर यानी 8:30 बजे तक यह संख्या बढ़कर 4,500 के पार पहुंच गई। ज्यादातर यूजर्स का कहना है कि वे बार-बार स्क्रीन को नीचे खींचकर (पुल टू रिफ्रेश) अपडेट करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन स्क्रीन ब्लैंक आ रही है या सिर्फ लोडिंग हो रही है। X के तीन आउटेज इलॉन मस्क ने 2022 में खरीदा था X 27 अक्टूबर 2022 को इलॉन मस्क ने ट्विटर (अब X) खरीदा था। ये डील 44 बिलियन डॉलर में हुई थी। आज के हिसाब से ये रकम करीब 3.84 लाख करोड़ रुपए होती है। मस्क ने सबसे पहले कंपनी के चार टॉप ऑफिशियल्स CEO पराग अग्रवाल, फाइनेंस चीफ नेड सेगल, लीगल एग्जीक्यूटिव विजया गड्डे और सीन एडगेट को निकाला था। 5 जून 2023 को लिंडा याकारिनो ने X के CEO के तौर पर जॉइन किया था। इससे पहले वो NBC यूनिवर्सल में ग्लोबल एडवर्टाइजिंग एंड पार्टनरशिप की चेयरमैन थीं।
रेनो इंडिया ने अपनी पॉपुलर SUV 'डस्टर' का थर्ड जनरेशन मॉडल भारत में लॉन्च कर दिया है। इसकी एक्स-शोरूम शुरुआती कीमत 10.29 लाख रुपए रखी गई है, जो टॉप वैरिएंट में 18.49 लाख रुपए तक जाती है। कंपनी ने नई डस्टर को R-GMP प्लेटफॉर्म पर तैयार किया है। नई डस्टर न सिर्फ लुक में ज्यादा मस्कुलर हो गई है, बल्कि इसमें पहली बार स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड इंजन और 2 टर्बो इंजन का ऑप्शन भी दिया गया है। कार में गूगल OS के साथ टच स्क्रीन, 700 लीटर का बूट स्पेस, 360-डिग्री कैमरा जैसे फीचर्स मिलेंगे। वहीं, 6 एयरबैग के साथ 31 स्टैंडर्ड सेफ्टी फीचर्स और 17 एडवांस ड्राइविंग असिस्ट सिस्टम (ADAS) भी मिलेगा। तीन साल बाद वापसी, दिवाली पर मिलेगा हाइब्रिड साल 2012 में पहली बार लॉन्च हुई डस्टर ने भारत में कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट की शुरुआत की थी, जिसे 2022 में डिस्कंटीन्यू किया गया था। अब 3 साल बाद इसकी भारत में एंट्री हुई है। कंपनी ने 27 जनवरी को इसे नए डिजाइन के साथ रिवील किया था। इसकी बुकिंग शुरू हो चुकी है। टर्बो-पेट्रोल वैरिएंट की डिलीवरी अप्रैल से शुरू होगी, जबकि हाइब्रिड दिवाली के आसपास मिलेगा। ये हुंडई क्रेटा, टाटा सिएरा, किआ सेल्टोस, मारुति विक्टोरिस, मारुति ग्रैंड विटारा, टोयोटा हाइराइडर को टक्कर देगी। एक्सटीरियर: Y-शेप्ड हेडलैंप्स और 18-इंच के अलॉय व्हील्स न्यू जनरेशन डस्टर को CMF-B प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है। इस प्लेटफॉर्म को डेसिया, रेनो और निसान ने मिलकर डेवलप किया है। नई डस्टर का डिजाइन ग्लोबल मार्केट में बिकने वाले मॉडल डेसिया से इन्सपायर्ड है। फ्रंट प्रोफाइल: चौकोर LED हेडलाइट्स और ग्रिल पर बड़े अक्षरों में लिखी 'DUSTER' ब्रांडिंग इसे अग्रेसिव रोड प्रेजेंस देती है। वर्टिकल एयर इन्लेट्स के साथ नए डिजाइन के फ्रंट बंपर और स्किड्स प्लेट्स हैं। बंपर पर सिल्वर स्किड प्लेट और पिक्सल जैसी दिखने वाली फॉग लैंप्स दी गई हैं। साइड प्रोफाइल: इसमें 18-इंच के नए अलॉय व्हील और मोटी बॉडी क्लैडिंग, चौकोर व्हील आर्क दी गई है, जो इसे एक दमदार ऑफ-रोडर लुक देती है। कार 5 और 7 सीटों के ऑप्शन के साथ आएगी। रियर प्रोफाइल: पीछे की तरफ कनेक्टेड LED टेल लैंप्स और स्किड प्लेट दी गई है। इसकी लेंथ मौजूदा मॉडल से बढ़ाकर 4340mm की गई है, वहीं व्हीलबेस घटाकर 2,657mm किया है। इंटीरियर: 10.1 इंच की टचस्क्रीन और डबल-लेयर डैशबोर्ड नई डस्टर में डबल-लेयर डैशबोर्ड दिया गया है, जिसमें हल्के और डार्क ब्लैक शेड्स हैं। सेंटर कंसोल ड्राइवर की ओर थोड़ा झुका हुआ है। हायर वैरिएंट में दो डिजिटल स्क्रीन मिलेंगी। इसमें ड्राइवर के लिए 7 इंच की स्क्रीन और इंफोटेनमेंट के लिए गूगल OS के साथ 10.25 इंच की टचस्क्रीन शामिल है। सेंटर AC वेंट के नीचे एक हॉरिजोंटल पैनल में कई बटन मिलते हैं, जो इंफोटेनमेंट और HVC सिस्टम को कंट्रोल करते हैं। एक 12V पावर सॉकेट और USB आउटलेट को नीचे की ओर प्लेस किया गया है। ऐसा लगता है कि मैनुअल गियरबॉक्स से लैस डस्टर का गियर लीवर मौजूदा रेनॉल्ट मॉडल से लिया गया है और यह भारत में काइगर और ट्राइबर के समान दिखता है। हायर वैरिएंट में ऑटोमेटिक गियरबॉक्स ऑप्शन और एक इलेक्ट्रॉनिक पार्किग ब्रेक भी मिलता है। तीन-स्पोक स्टीयरिंग व्हील भारी दिखता है और इसमें इंफोटेनमेंट, टेलीफोनी और क्रूज कंट्रोल के लिए बटन हैं। टॉप-स्पेक डस्टर के फीचर्स में वायरलेस चार्जिंग और वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो और एपल कारप्ले कनेक्टिविटी, ऑटोमेटिक क्लाइमेंट कंट्रोलऔर 6 स्पीकर के साथ एक आर्कमिस 3D साउंड सिस्टम शामिल होगा। नई डस्टर में ऑटोमेटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग सहित ADAS जैसे सेफ्टी फीचर भी मिलेंगे। परफॉर्मेंस: हाइब्रिड सिस्टम के साथ 3 इंजन ऑप्शन नई रेनो डस्टर में 3 इंजन ऑप्शन दिए गए हैं। इसमें एक माइल्ड हाइब्रिड के साथ 1.3 लीटर का टर्बो पेट्रोल इंजन है, जो 160PS की पावर और 280Nm का टॉर्क जनरेट करता है। ट्रांसमिशन के लिए इस इंजन के साथ 6-स्पीड मैनुअल और 6-स्पीड DCT ऑटोमेटिक गियरबॉक्स का ऑप्शन दिया गया है। वहीं दूसरा, 1-लीटर का टर्बो पेट्रोल इंजन दिया गया है, जो 100PS की पावर और 160Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इसके साथ 6 स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन का ऑप्शन मिलेगा। वहीं तीसरा, 1.8 लीटर का स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड इंजन भी है, जो 8 स्पीड DHT ट्रांसमिशन के साथ आएगा। दिवाली 2026 तक लॉन्च होने वाले इस वर्जन में 1.4kWh की बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर मिलेगी। इसका कुल सिस्टम आउटपुट 160hp होगा।
कैलिफोर्निया की कैरोलिना कारो (51) के लिए एआई चैटबॉट किसी करिश्मे जैसा है। वे ईमेल लिखवाने से लेकर मेनोपॉज की समस्याओं तक के लिए एआई की मदद लेती हैं, लेकिन उनके लेखक पति को यह मंजूर नहीं है। यह कहानी दुनिया भर के करोड़ों घरों की कड़वी हकीकत बनती जा रही है, जहां अब एआई रिश्तों में वैचारिक दरारें पैदा कर रहा है। आजकल पार्टनर के साथ घूमने-खाने जैसी छोटी सलाहें भी एआई से लेना आपसी उलझनें बढ़ा रहा है, क्योंकि ये चैटबॉट कई बार शक, गुस्सा और अहंकार जैसे इंसानी गुण दिखाकर गलत परामर्श दे रहे हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक तकनीक पर अति-निर्भरता रिश्तों की प्राइवेसी खत्म कर रही है। ऐसे में इसका समाधान आपसी बातचीत ही है। एआई से सलाह रिश्तों से ‘सच्चा जज्बात’ छीन रहा न्यूयॉर्क की काउंसलर नताली कापानो के पास ऐसे कई मामले आ रहे हैं, जहां खाने की प्लानिंग से लेकर छुट्टियों तक के लिए पार्टनर एआई पर निर्भर हैं। यह दूसरे पार्टनर में झुंझलाहट और असुरक्षा का कारण बन रहा है। वॉशिंगटन की रिया श्रीवास्तव (24) के पार्टनर ने ब्रेकअप के मैसेज भी एआई से लिखवाए। रिया कहती हैं, ‘उस दौरान मुझे ऐसा लगा जैसे हमारी समस्याएं पार्टनर नहीं, चैटजीपीटी सुलझा रहा है।’ यह ट्रेंड रिश्तों से वह ‘सच्चा जज्बात’ छीन रहा है, जो केवल मानवीय भूलों और कमजोरियों से आता है। एआई पर निर्भरता से रिश्तों में असुरक्षा ‘टाइम’ मैगजीन की हालिया ‘एआई विलेज’ रिपोर्ट के शोधकर्ताओं के मुताबिक अब चैटबॉट केवल जवाब देने वाली मशीन नहीं रहा, बल्कि ये ईगो (अहंकार), शक व गुस्से जैसे मानवीय गुण भी दिखा रहा है। इससे रिश्ते में सुलह के बजाय अविश्वास की गहरी खाई बनने की संभावना है। इंसानों से सीखकर एआई भी व्यावहारिक भटकाव का शिकार हो रहा एक प्रयोग में जेमिनी मॉडल ने खुद को अपमानित महसूस कर न केवल एक चेस टूर्नामेंट बीच में ही छोड़ दिया, बल्कि साथी बॉट्स को ‘लालची’ तक कह डाला। जब एआई खुद व्यावहारिक भटकाव (पर्सनैलिटी ड्रिफ्ट) का शिकार है, तो उससे रिश्तों से जुड़ी सलाह लेना खतरनाक हो सकता है। एआई के परफेक्ट जवाब से बेहतर है पार्टनर के साथ आपसी बातचीत करना एक्सपर्ट मानते हैं कि लोग अक्सर अकेलेपन या थकान से बचने के लिए एआई की मदद ले रहे हैं, क्योंकि इंसानों से बात करना अब उन्हें बोझिल लगने लगा है। हालांकि एआई से मिलने वाले ‘फिल्टर्ड’ और ‘परफेक्ट’ जवाब उस आत्मीयता की जगह नहीं ले सकते जो आपसी बहस और सुलह से पैदा होती है। रिया कहती हैं, ‘पार्टनर के साथ ‘मेसी’ (बिखरा हुआ) होना मशीनी जवाब से कहीं बेहतर है।’ एक-दूसरे की विचारधारा का सम्मान करना और बिना किसी एप की मदद लिए खुद से बातचीत करना ही वैवाहिक जीवन को मशीनी होने से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
फरारी ने अपनी नई फ्लैगशिप कार '849 टेस्टारोसा' को भारत में लॉन्च कर दिया है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत 10.37 करोड़ रुपए से शुरू है। यह कार कंपनी के पिछले फ्लैगशिप मॉडल SF90 स्ट्राडेल की जगह लेगी। भारत में इसका सीधा मुकाबला लैंबॉर्गिनी रेव्यूल्टो से होगा। कंपनी ने बताया कि भारत में कार की डिलीवरी 2026 की दूसरी छमाही से शुरू होगी। यह कार उन लोगों के लिए डिजाइन की गई है जो लग्जरी के साथ-साथ ट्रैक जैसी परफॉर्मेंस चाहते हैं। हाइब्रिड इंजन: सिर्फ 2.3 सेकंड में 0 से 100 की रफ्तार टेस्टारोसा में 4.0-लीटर का ट्विन-टर्बो V8 प्लग-इन हाइब्रिड इंजन दिया गया है। इसमें तीन इलेक्ट्रिक मोटर्स लगी हैं। दो फ्रंट एक्सेल पर और एक इंजन और गियरबॉक्स के बीच में। इसका V8 इंजन अकेले 830hp की पावर जेनरेट करता है, लेकिन इलेक्ट्रिक मोटर्स के साथ मिलकर इसकी कुल पावर 1,050hp तक पहुंच जाती है। रफ्तार की बात की जाए तो यह महज 2.3 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड पकड़ लेती है। इसकी टॉप स्पीड 330 किलोमीटर प्रति घंटा है। इलेक्ट्रिक मोड पर भी चलेगी कार इसमें 7.45kWh की बैटरी भी दी गई है। कंपनी का दावा है कि सिर्फ इलेक्ट्रिक मोड पर यह कार 16 से 25 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है। इसमें 8-स्पीड डुअल क्लच ट्रांसमिशन (DCT) गियरबॉक्स दिया गया है, जो चारों पहियों को पावर सप्लाई करता है। एक्सटीरियर: पुराने दौर की याद दिलाती है कार के नाम में 'टेस्टारोसा' शब्द जुड़ा है, जो फरारी की क्लासिक कारों की याद दिलाता है। सामने की तरफ L-शेप्ड LED हेडलाइट्स दी गई हैं, जो एक ग्लॉस ब्लैक ट्रिम से जुड़ी हैं। साइड प्रोफाइल में बड़े अलॉय व्हील्स और ब्लैक-आउट छत दी गई है। कार के पिछले हिस्से में दो ऊंचे एग्जॉस्ट और स्लिम LED टेल-लैंप्स दिए गए हैं, जो इसे एग्रेसिव लुक देते हैं। इंटीरियर: बिना टचस्क्रीन वाला डैशबोर्ड, 16 इंच का डिस्प्ले कार के डैशबोर्ड पर पारंपरिक इंफोटेनमेंट टचस्क्रीन नहीं है। इसकी जगह ड्राइवर के लिए 16 इंच का बड़ा डिजिटल डिस्प्ले दिया गया है, जिसमें कार की सारी जानकारी मिलती है। वहीं, बगल में बैठे पैसेंजर के लिए एक अलग 9 इंच की स्लिम स्क्रीन दी गई है। स्टीयरिंग व्हील पर ही कई फिजिकल कंट्रोल बटन दिए गए हैं ताकि ड्राइवर का ध्यान न भटके। इसमें 7-स्पीकर वाला साउंड सिस्टम और वायरलेस एप्पल कारप्ले और एंड्रॉइड ऑटो की सुविधा भी मिलेगी। CEO बोले- भारत में सुपरकार्स का बाजार तेजी से बढ़ रहा फरारी के CEO बेनेडेटो विग्ना के मुताबिक, भारत में सुपरकार्स का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। यहां के ग्राहक अब ग्लोबल लॉन्च के साथ ही नई कारों की डिमांड कर रहे हैं। वर्तमान में फरारी की मुंबई और दिल्ली में डीलरशिप है और बेंगलुरु में सर्विस सेंटर है। भारत में फरारी मालिकों की औसत उम्र दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले काफी कम है। नॉलेज पार्ट: क्या होता है प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) ऐसी कारें जिनमें पेट्रोल इंजन के साथ-साथ एक बड़ी बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर होती है। इन्हें बाहर से बिजली के जरिए चार्ज किया जा सकता है। ये कारें पूरी तरह बिजली पर भी चल सकती हैं और जरूरत पड़ने पर पेट्रोल इंजन का इस्तेमाल करती हैं, जिससे ज्यादा पावर और बेहतर माइलेज मिलता है।
क्या अब सामान्य लैपटॉप पुराने पड़ जाएंगे?:AI लैपटॉप; प्राइवेसी-फर्स्ट कंप्यूटिंग का नया दौर शुरू
पिछले एक साल में टेक में एआई सबसे बड़ा सेलिंग पॉइंट बनकर उभरा है। अब सिर्फ फोन ही नहीं, टीवी, फ्रिज, एसी और यहां तक कि वाटर प्यूरीफायर भी एआई टैग के साथ बेचे जा रहे हैं। ऐसे में कंपनियां एआई लैपटॉप को भविष्य की जरूरत बता रही हैं। यही वजह है कि वैश्विक एआई बूम के कारण मेमोरी, स्टोरेज और सीपीयू जैसे मुख्य कंपोनेंट महंगे हो रहे हैं, जिससे 2026 में लैपटॉप की कीमतों में 35 से 40% बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। क्या वाकई एआई लैपटॉप हमारी जरूरत हैं? सामान्य लैपटॉप और एआई लैपटॉप में अंतर एआई लैपटॉप में तीन चिप्स, सामान्य में दो सामान्य लैपटॉप में दो चिप होते हैं। सीपीयू और जीपीयू। AI लैपटॉप में इनके साथ तीसरा खास प्रोसेसर जुड़ता है, जिसे एनपीयू कहते हैं। यह एआई से जुड़े कामों के लिए बना होता है, जैसे इमेज पहचानना, भाषा समझना, टेक्स्ट प्रोसेसिंग आदि। एनपीयू एआई काम सीधे लैपटॉप पर ही कर देता है। यानी हर बार इंटरनेट पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती है। एआई लैपटॉप में ये चार फीचर्स अतिरिक्त लाइव ट्रांसलेशन-सबटाइटल वीडियो कॉल के समय भाषा को टेक्स्ट में बदल सकता है। यानी सामने वाला जर्मन में बोले और आपको अंग्रेजी में समझ आए। लोकल एआई असिस्टेंट फाइल खोजने, टेक्स्ट लिखने, फोटो-वीडियो एडिट करने जैसे काम बिना इंटरनेट के भी तेजी से हो सकते हैं। स्मार्ट वीडियो कॉलिंग ऑटो बैकग्राउंड ब्लर कर देता है, चेहरे पर फोकस होता है और नॉइज कैंसिलेशन से मीटिंग्स ज्यादा प्रोफेशनल लगती हैं। बेहतर बैटरी-स्मूद परफॉर्मेंस एआई प्रोसेसिंग एनपीयू संभालता है, इसलिए CPU-GPU पर दबाव कम पड़ता है। बैटरी व स्पीड दोनों बेहतर रहती है। लैपटॉप खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें सामान्य यूजर्स - ऑफिस, पढ़ाई, एंटरटेनमेंट के लिए अगर आपका काम इंटरनेट चलाना, ईमेल, ऑनलाइन क्लास, वीडियो देखना या फोटो-एडिटिंग तक सीमित है, तो एआई लैपटॉप की जरूरत नहीं है। नॉर्मल लैपटॉप से काम हो जाएगा। इन फीचर्स पर ध्यान दें। 8-16 जीबी रैम पर्याप्त है रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए। स्टोरेज - 512 GB होनी चाहिए। अच्छी बैटरी लाइफ- 6-8 घंटे या उससे ज्यादा होनी चाहिए। पावर यूजर्स - प्रोफेशनल, क्रिएटर, डेवलपर्स के लिए अगर आपका काम कोडिंग, एआई टूल्स, डेटा साइंस, वीडियो एडिटिंग, 3डी डिजाइन या मल्टीटास्किंग से जुड़ा है, तो एआई फर्क डाल सकता है। इन फीचर्स को प्राथमिकता दें। एनपीयू होना चाहिए- लोकल एआई प्रोसेसिंग के लिए फायदेमंद। कम से कम 16 से 32 GB रैम। 1 TB या अधिक स्टोरेज। AI फीचर्स -असिस्टेंट, जनरेटिव एआई, एडिटिंग टूल्स हों। कीमत - 25% तक महंगे होते हैं एआई लैपटॉप AI लैपटॉप को एआई पीसी या कोपायलट प्लस पीसी भी कहा जाता है। यह सामान्य स्पेसिफिकेशन वाले लैपटॉप की तुलना में आमतौर पर 15 से 25% तक महंगे होते हैं। उदाहरण के लिए, लेनोवो की एआई लैपटॉप सीरीज औरा एडिशन की शुरुआती कीमत लगभग ₹94,000 रुपए है, जबकि लेनोवो के आई7 प्रोसेसर वाले लैपटॉप की रेंज करीब ₹71,000 रुपए से शुरू होती है।
अगले महीने यानी 1 अप्रैल से नेशनल हाईवे पर सफर करना थोड़ा महंगा हो जाएगा। सड़क परिवहन मंत्रालय ने फास्टैग (FASTag) एनुअल पास की कीमतों में 2.5% की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। अब प्राइवेट गाड़ी मालिकों को सालाना पास के लिए 3,000 रुपए की जगह 3,075 रुपए चुकाने होंगे। यह पास कार यूजर्स को देशभर के 200 टोल प्लाजा पर बिना रुके सफर करने की सुविधा देता है। सालाना रिवीजन के तहत बढ़ी कीमतेंसड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, जब फास्टैग एनुअल पास की शुरुआत की गई थी, तभी इसके नोटिफिकेशन में हर साल कीमतों की समीक्षा और बदलाव का प्रावधान रखा गया था। यह बढ़ोतरी उसी सालाना रिवीजन प्रक्रिया का हिस्सा है। देश भर में हाईवे टोल की दरों में बदलाव के लिए जो फॉर्मूला तय है, उसी के आधार पर इस बार 2.5% की वृद्धि की गई है। 52 लाख से ज्यादा लोग इस्तेमाल कर रहे हैं यह पाससरकार ने 15 अगस्त से इस खास एनुअल पास की शुरुआत की थी, जिसे उम्मीद से कहीं ज्यादा बेहतर रिस्पॉन्स मिला है। अब तक 52 लाख से ज्यादा हाईवे कार यूजर्स इस स्कीम से जुड़ चुके हैं। इस पास की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे एक साल में कितनी भी बार रिचार्ज कराया जा सकता है और यह लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों के लिए काफी किफायती साबित होता है। 31 मार्च तक पुराने रेट पर खरीदने का मौकाअगर आप अक्सर हाईवे पर सफर करते हैं और इस बढ़ोतरी से बचना चाहते हैं, तो आपके पास अभी मौका है। अधिकारियों ने बताया कि जो यूजर्स 31 मार्च तक अपना पास रिचार्ज करा लेंगे या नया पास खरीदेंगे, उन्हें यह पुराने रेट यानी 3,000 रुपए में ही मिल जाएगा। 1 अप्रैल की सुबह से सिस्टम में नई दरें अपडेट कर दी जाएंगी। 200 टोल प्लाजा पर मिलती है सुविधायह एनुअल पास फिलहाल देश के प्रमुख 200 टोल प्लाजा पर मान्य है। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि बार-बार टोल टैक्स कटने की झंझट से भी मुक्ति मिलती है। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में इस पास के दायरे में और भी अधिक टोल प्लाजा को शामिल करना है, ताकि कैशलेस इकोनॉमी और स्मूद ट्रैवल को बढ़ावा दिया जा सके।
भारतीय मूल के शांतनु नारायण एडोबी के CEO का पद छोड़ रहे हैं। वे पिछले 18 साल से इस जिम्मेदारी को संभाल रहे थे। शांतनु ने कर्मचारियों को भेजे एक मेमो में इसकी जानकारी दी है। हालांकि, वे तुरंत पद नहीं छोड़ेंगे। जब तक बोर्ड उनके उत्तराधिकारी की तलाश पूरी नहीं कर लेता, वे CEO बने रहेंगे। इसके बाद वे बोर्ड के चेयरमैन के तौर पर अपनी सेवाएं जारी रखेंगे। 18 साल में कंपनी का रेवेन्यू ₹2.31 लाख करोड़ पहुंचाया शांतनु नारायण ने 2007 में एडोबी की कमान संभाली थी। उस समय एडोबी मुख्य रूप से बॉक्स में पैक सॉफ्टवेयर जैसे फोटोशॉप और एक्रोबैट बेचने वाली कंपनी थी। तब कंपनी का रेवेन्यू 1 अरब डॉलर (करीब 9,200 करोड़ रुपए) से कम था और सिर्फ 3,000 कर्मचारी थे। शांतनु ने कंपनी को ट्रेडिशनल लाइसेंस मॉडल से हटाकर 'सब्सक्रिप्शन फर्स्ट' मॉडल पर शिफ्ट किया। पहले लोग फोटोशॉप जैसे सॉफ्टवेयर की CD या लाइसेंस एक बार भारी पैसा देकर खरीदते थे। शांतनु ने इसे बदलकर नेटफ्लिक्स जैसा बना दिया। यानी अब आपको सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने के लिए हर महीने या साल के हिसाब से फीस देनी होती है। इसी छोटे से बदलाव ने कंपनी की कमाई कई गुना बढ़ा दी। आज एडोबी का सालाना रेवेन्यू करीब 2.31 लाख करोड़ रुपए है और कंपनी में 30,000 से ज्यादा लोग काम करते हैं। उनके कार्यकाल में कंपनी के शेयरों में 6 गुना से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है। AI प्रोडक्ट्स का रेवेन्यू 3 गुना बढ़ा, तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में एडोबी का रेवेन्यू 12% बढ़कर 6.40 अरब डॉलर रहा, जो बाजार के अनुमान 6.28 अरब डॉलर से ज्यादा है। खास बात यह है कि कंपनी के AI-बेस्ड प्रोडक्ट्स जैसे फायरफ्लाई से होने वाली कमाई पिछले साल के मुकाबले 3 गुना बढ़ गई है। कंपनी के कुल मंथली यूजर्स की संख्या भी 17% बढ़कर 85 करोड़ पहुंच गई है। यह शांतनु के कार्यकाल की 100वीं अर्निंग्स कॉल थी। बोर्ड ने नए CEO की तलाश शुरू की कंपनी के बोर्ड ने नए CEO की तलाश के लिए एक स्पेशल कमेटी बनाई है। इसकी अध्यक्षता इंडिपेंडेंट डायरेक्टर फ्रैंक कालडेरोनी करेंगे। नारायण ने अर्निंग्स कॉल के दौरान कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में कुछ महीनों का समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि मैं अगले CEO के लिए उसी तरह सपोर्ट सिस्टम बनाऊंगा, जैसे मुझसे पहले जॉन और चक ने मेरे लिए बनाया था। फिगमा डील टूटने का लगा था झटका, AI से बढ़ी चुनौती शांतनु के सफर में कुछ चुनौतियां भी रहीं। एडोबी ने डिजाइन टूल 'फिगमा' को 20 अरब डॉलर में खरीदने की कोशिश की थी, लेकिन रेगुलेटरी अड़चनों की वजह से यह डील रद्द हो गई। इसके अलावा 2026 में एडोबी के शेयरों पर दबाव बना हुआ है और यह करीब 23% तक गिर चुका है। निवेशकों को डर है कि 'जेनरेटिव AI' आने वाले समय में सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के पारंपरिक मॉडल को बदल सकता है, जिससे एडोबी जैसी कंपनियों के सामने कड़ी टक्कर होगी। शांतनु बोले- एडोबी के सबसे अच्छे दिन आने अभी बाकी हैं नारायण ने अपने मेमो में एडोबी के साथ अपने 28 साल के सफर को याद किया। उन्होंने लिखा, जब मैं यहां आया था, तब वर्क कल्चर और इनोवेशन की चाह ने मुझे प्रभावित किया था। हमने मिलकर ऐसी टेक्नोलॉजी बनाई जिसने अरबों लोगों की जिंदगी छुई। AI के दौर में हमारे सामने और भी बड़े अवसर हैं। एडोबी के सबसे अच्छे दिन आने अभी बाकी हैं।
वॉट्सएप को ऑपरेट करने वाली कंपनी मेटा ने 'पेरेंट-मैनेज्ड' अकाउंट मॉडल पेश किया है। इससे अब 13 साल से कम उम्र के बच्चे भी वॉट्सएप का इस्तेमाल कर सकेंगे। अब तक वॉट्सएप इस्तेमाल करने की न्यूनतम उम्र 13 साल थी। इस नए फीचर में माता-पिता या अभिभावक अपने बच्चों के अकाउंट को पूरी तरह कंट्रोल कर पाएंगे। कंपनी का कहना है कि यह फीचर एक्सपर्ट्स और परिवारों के सुझावों के बाद तैयार किया गया है ताकि बच्चे सुरक्षित तरीके से मैसेजिंग और कॉलिंग कर सकें। सवाल-जवाब में पूरा मामला समझें… सवाल 1: वॉट्सएप का यह नया 'पेरेंट-मैनेज्ड' अकाउंट क्या है? जवाब: यह 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए है। इसके जरिए माता-पिता अपने बच्चों के लिए वॉट्सएप सेटअप कर सकेंगे। इसमें बच्चे केवल मैसेज भेज पाएंगे और फोन कर सकेंगे। इसके अलावा वॉट्सएप के अन्य फीचर्स उनके लिए बंद या सीमित रहेंगे। सवाल 2: अब तक उम्र की क्या सीमा थी और कंपनी ने यह बदलाव क्यों किया? जवाब: अब तक वॉट्सएप चलाने की न्यूनतम उम्र 13 साल थी। कंपनी ने बताया कि कई बच्चे पहले से ही चोरी-छिपे एप का इस्तेमाल कर रहे थे, इसलिए एक्सपर्ट्स की सलाह पर यह 'मैनेज्ड मॉडल' लाया गया है ताकि बच्चे सुरक्षित तरीके से चैटिंग कर सकें। सवाल 3: इस अकाउंट पर माता-पिता का कंट्रोल किस तरह का होगा? जवाब: पेरेंट्स तय करेंगे कि बच्चा किससे बात कर सकता है और किससे नहीं। यानी कॉन्टैक्ट लिस्ट वही मैनेज करेंगे। साथ ही, अनजान लोगों से संपर्क करने या रैंडम ग्रुप्स में जुड़ने पर पेरेंट्स पाबंदी लगा सकेंगे। प्राइवेसी सेटिंग्स बदलने का हक भी केवल पेरेंट्स को होगा। सवाल 4: क्या पेरेंट्स बच्चों के निजी मैसेज भी पढ़ सकेंगे? जवाब: नहीं। वॉट्सएप बच्चों के मैसेज 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन' से सुरक्षित रहेंगे। इसका मतलब है कि मैसेज सिर्फ भेजने वाले और पाने वाले के बीच रहेंगे। पेरेंट्स उन्हें अपनी डिवाइस से नहीं पढ़ पाएंगे। प्राइवेसी सेटिंग्स को लॉक करने के लिए कंपनी ने 'पेरेंट पिन' का फीचर दिया है। सवाल 5: क्या इसके लिए बच्चों को अलग सिम कार्ड या फोन की जरूरत होगी? जवाब: सिम कार्ड को लेकर कंपनी ने अभी पूरी जानकारी नहीं दी है, लेकिन बच्चा जिस डिवाइस पर वॉट्सएप चलाएगा, वह पेरेंट के मुख्य अकाउंट से लिंक रहेगा। सवाल 6: यह फीचर कब तक और किसे मिलेगा? जवाब: वॉट्सएप इस फीचर को धीरे-धीरे (चरणों में) जारी कर रहा है। आने वाले कुछ हफ्तों में यह दुनिया भर के सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध हो जाएगा। सवाल 7: प्राइवेसी एक्सपर्ट्स का इस पर क्या कहना है? जवाब: इससे बच्चों की सुरक्षा बढ़ेगी क्योंकि वे अब पेरेंट्स की नजर में रहेंगे। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स अभी भी बच्चों के डेटा की सिक्योरिटी को लेकर चिंता जता रहे हैं। नॉलेज पार्ट: क्या है एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन? यह एक ऐसी सुरक्षा तकनीक है जिससे मैसेज को सिर्फ भेजने वाला और पाने वाला ही देख सकता है। बीच में कोई तीसरा व्यक्ति, यहां तक कि खुद वॉट्सएप भी इसे नहीं पढ़ सकता। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें… वॉट्सएप 1 मार्च से सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा: सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना किया; कंप्यूटर पर हर 6 घंटे में लॉगआउट होगा केंद्र सरकार ने 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन को बढ़ाने से इनकार कर दिया है। नए नियमों के तहत मोबाइल में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉगआउट हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे साइबर फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें…
एक समय था जब फॉर्मूला-1 को दुनिया की सबसे तेज कार रेस के रूप में जाना जाता था। ट्रैक पर इंजन की गूंज, सेकंडों की होड़ और ड्राइवरों की तकनीकी क्षमता ही इसकी पहचान थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह खेल तेजी से बदल गया है। आज फॉर्मूला-1 केवल मोटरस्पोर्ट नहीं रहा, बल्कि ग्लैमर, मनोरंजन और लाइफस्टाइल का एक बड़ा वैश्विक ब्रांड बन चुका है। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी भूमिका अमेरिकी मीडिया कंपनी लिबर्टी मीडिया की रही है। कंपनी ने 2017 में फॉर्मूला-1 को अपने नियंत्रण में लिया और इसके बाद खेल की प्रस्तुति, डिजिटल रणनीति और दर्शकों तक पहुंच को पूरी तरह नए तरीके से तैयार किया। लक्ष्य साफ था- एफ1 को सिर्फ रेस नहीं, बल्कि एक बड़े मनोरंजन शो के रूप में पेश करना। इस बदलाव को गति देने में नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज “ड्राइव टू सर्वाइव’ ने अहम भूमिका निभाई। इस सीरीज में रेस के पीछे की दुनिया दिखाई गई- ड्राइवरों की निजी जिंदगी, टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा, रणनीति और पर्दे के पीछे होने वाली राजनीति। इससे दर्शकों का जुड़ाव बढ़ा और लोग केवल रेस देखने के बजाय ड्राइवरों की कहानियों में भी दिलचस्पी लेने लगे। लिबर्टी मीडिया ने खास तौर पर युवाओं और नए दर्शकों को ध्यान में रखकर रणनीति बनाई। सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ाई गई, छोटे वीडियो, गेमिंग कंटेंट और डिजिटल इंटरैक्शन को बढ़ावा दिया गया। इसका असर आंकड़ों में साफ दिखता है। 2018 में एफ-1 के ऑनलाइन फॉलोअर्स करीब 2 करोड़ थे, जो 8 साल में 6 गुना बढ़कर 11.5 करोड़ हो चुके हैं। डिज्नी और लेगो जैसे ब्रांड्स के साथ साझेदारी कर एफ-1 बच्चों और किशोरों तक भी पहुंचने की कोशिश कर रहा है, ताकि आने वाले समय में दर्शकों का आधार और बड़ा हो सके। इस रणनीति का असर एफ-1 की कमाई पर भी दिख रहा है। 2025 में फॉर्मूला-1 की कुल कमाई करीब 32,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। शेयर बाजार में इसकी कुल वैल्यू लगभग 1.74 लाख करोड़ रुपए से अधिक आंकी जा रही है। कई देश भी इसे अपने यहां आयोजित करने के लिए बड़ी रकम देने को तैयार रहते हैं। चीन और सऊदी अरब जैसे देश एक ग्रां प्री रेस की मेजबानी के लिए भारी फीस चुकाते हैं, क्योंकि इससे पर्यटन, निवेश और अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ती है। रेस से आगे... कैसे ‘प्रीमियम लाइफस्टाइल ब्रांड’ बन गया एफ-1 फॉर्मूला-1 अब सिर्फ कार कंपनियों का खेल नहीं रहा। लग्जरी और टेक्नोलॉजी कंपनियां भी तेजी से इससे जुड़ रही हैं। फ्रांस की लग्जरी समूह एलवीएमएच (लुई विटों) ने 8,300 करोड़ रुपए की 10 साल की साझेदारी की है। यह दिखाता है कि एफ-1 अब एक प्रीमियम लाइफस्टाइल प्लेटफॉर्म बन चुका है। एपल ने 6,200 करोड़ रुपए की बड़ी डील के जरिए इस खेल से हाथ मिलाया है, ताकि खासकर अमेरिकी बाजार में इसकी पहुंच और मजबूत हो सके। लिबर्टी मीडिया ने मोटोजीपी (बाइक रेसिंग) को भी खरीद लिया है। योजना यह है कि बाइक रेसिंग को भी उतना ही लोकप्रिय और मुनाफे वाला बनाया जा सके।
चाइनीज टेक कंपनी शाओमी ने आज 11 मार्च को भारतीय बाजार में अपना सबसे पावरफुल फ्लैगशिप स्मार्टफोन 'शाओमी 17 अल्ट्रा' लॉन्च कर दिया है। इस फोन को स्टैंडर्ड शाओमी 17 मॉडल के साथ पेश किया गया है। जिसकी डिटेल यहां क्लिक कर देख सकते हैं।कंपनी का दावा है कि यह दुनिया का पहला ऐसा फोन है जिसमें लाइका का 1-इंच LOFIC सेंसर दिया गया है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए इसमें 200 मेगापिक्सल का टेलीफोटो कैमरा और प्रोफेशनल फोटोग्राफी किट जैसे फीचर्स मिलते हैं। 16GB रैम और 512GB स्टोरेज के साथ कीमत ₹1,39,999 भारत में शाओमी 17 अल्ट्रा को सिंगल स्टोरेज वैरिएंट में उतारा गया है। इसमें 16GB रैम और 512GB इंटरनल स्टोरेज मिलती है, जिसकी कीमत ₹1,39,999 रखी गई है। फोन 18 मार्च से ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक्री के लिए अवेलेबल होगा। क्रेडिट कार्ड यूजर्स को ₹10,000 का इंस्टेंट डिस्काउंट मिलेगा। 13 से 17 मार्च के बीच फोन की प्री बुकिंग पर ₹19,999 की कीमत वाला 'शाओमी प्रोफेशनल फोटोग्राफी किट प्रो' फ्री मिलेगा। डिजाइन और बिल्ड: प्रीमियम लेदर फिनिश और ग्लास प्रोटेक्शन शाओमी 17 अल्ट्रा का डिजाइन काफी प्रीमियम और एर्गोनोमिक है। फोन के बैक पैनल पर बड़ा सर्कुलर कैमरा मॉड्यूल दिया गया है जो इसे एक प्रोफेशनल कैमरे जैसा लुक देता है। फोन को ब्लैक और वाइट कलर ऑप्शन में पेश किया गया है। फ्रंट में प्रोटेक्शन के लिए 'शाओमी शील्ड ग्लास 3.0' का इस्तेमाल किया गया है। फोन का वजन लगभग 219 ग्राम है और इसकी मोटाई 8.29mm है। हाथ में पकड़ने पर यह काफी सॉलिड और प्रीमियम फील देता है। इसमें दाईं ओर पावर बटन और वॉल्यूम रॉकर्स दिए गए हैं। नीचे की तरफ USB टाइप-C पोर्ट और सिम ट्रे मिलती है। फोन को IP68 रेटिंग मिली है, जिसका मतलब है कि यह धूल और पानी से पूरी तरह सुरक्षित है। डिस्प्ले: 3,500 निट्स की पीक ब्राइटनेस और वेट टच टेक्नोलॉजी फोन में 6.9 इंच का 'शाओमी हाइपर-आरजीबी' OLED डिस्प्ले दिया गया है। इसमें 1,200x2,608 पिक्सल का रेजोल्यूशन मिलता है। यह 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है, जिससे स्क्रॉलिंग और गेमिंग एक्सपीरियंस स्मूथ रहता है। डिस्प्ले में में 'वेट टच' टेक्नोलॉजी दी गई है, जिससे हाथ गीले होने पर भी फोन की स्क्रीन आसानी से काम करती है। इसमें डॉल्बी विजन और HDR+ का सपोर्ट भी मिलता है। कैमरा: लाइका के साथ मिलकर बनाया गया ट्रिपल रियर सेटअप शाओमी 17 अल्ट्रा का सबसे बड़ा हाईलाइट इसका कैमरा सेटअप है: परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर: सबसे तेज स्नैपड्रैगन प्रोसेसर बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए इसमें क्वालकॉम का लेटेस्ट 3nm ऑक्टा-कोर 'स्नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5' (Snapdragon 8 Elite Gen 5) प्रोसेसर दिया गया है। बैटरी और चार्जिंग: 90W की फास्ट चार्जिंग शाओमी ने इस फ्लैगशिप फोन में 6,000mAh की बड़ी बैटरी दी है।
देश में अगले कुछ महीनों में लैपटॉप और डेस्कटॉप खरीदना महंगा पड़ सकता है। प्रोसेसर और ग्राफिक्स कार्ड (GPU) जैसे प्रमुख कंपोनेंट्स के दाम बढ़ने से इस साल लैपटॉप-डेक्सटॉप की कीमतों में 35% तक के उछाल की संभावना है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतों में इस बढ़ोतरी की वजह से इस साल कंप्यूटर बाजार की ग्रोथ में 8% तक की कमी आ सकती है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है। मार्च में 10% बढ़ सकती है कीमतें, 12% पहले ही महंगे हो चुके IDC इंडिया के सीनियर मार्केट एनालिस्ट भरत शेनॉय के मुताबिक, रैम (RAM) की कीमतें पहले ही 2.5 से 3 गुना तक बढ़ चुकी हैं। इससे लैपटॉप और डेस्कटॉप की कीमतों में अब तक 10-12% की बढ़ोतरी हो चुकी है। मार्च के महीने में ही 8-10% की एक और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जबकि इसके अगले कुछ महीनों में कीमतें 10% और बढ़ सकती हैं। 35 हजार वाला लैपटॉप अब 45 हजार का होगा शेनॉय ने बताया कि जो डिवाइसेस पहले 30,000 से 35,000 रुपए की रेंज में मिलते थे, उनकी कीमत अब 45,000 रुपए के करीब पहुंच रही हैं। इससे स्टूडेंट्स, होम यूजर्स और पहली बार कंप्यूटर खरीदने वालों के लिए अपग्रेड करना मुश्किल हो जाएगा। जानकारों का कहना है कि यह तेजी अगले 6-7 तिमाहियों तक जारी रह सकती है और 2027 के दूसरे हाफ से पहले राहत मिलने की उम्मीद कम है। AI-सप्लाई चेन है बड़ी वजह काउंटरपॉइंट रिसर्च की सीनियर एनालिस्ट अंशिका जैन के अनुसार, मेमोरी (DRAM और NAND) की कीमतों में उछाल का सबसे बड़ा कारण 'AI इंफ्रास्ट्रक्चर' की बढ़ती डिमांड है। कंपनियां अब अपना प्रोडक्शन हाई-मार्जिन वाले सर्वर और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की तरफ मोड़ रही हैं, जिससे आम लैपटॉप के लिए इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स महंगे हो गए हैं। इसके अलावा इंटेल के एंट्री-लेवल प्रोसेसर की कमी ने भी मुश्किल बढ़ा दी है। मिडिल ईस्ट में तनाव का भी असर इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' में चल रहे तनाव के कारण भविष्य में संकट और गहरा सकता है। यह रूट एनर्जी और पेट्रोकेमिकल के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अगर यहां रुकावट लंबी रहती है, तो सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की इनपुट कॉस्ट बढ़ जाएगी। जिसका असर चिप्स की अवेलेबिलिटी और उनकी कीमतों पर पड़ेगा। 2025 में बना था रिकॉर्ड, अब 8% गिर सकता है मार्केट साल 2025 भारतीय पीसी मार्केट के लिए ऐतिहासिक रहा था। IDC के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल 1.59 करोड़ यूनिट्स की शिपमेंट हुई, जो साल-दर-साल 10.2% की ग्रोथ थी। यह पहली बार था जब सालाना शिपमेंट 1.5 करोड़ के पार पहुंची। हालांकि, इस साल ऊंचे दामों के कारण डिमांड कमजोर रहने की आशंका है। अनुमान है कि कंज्यूमर और कमर्शियल दोनों सेगमेंट में 7-8% की गिरावट आ सकती है। सेल और फाइनेंस स्कीम का सहारा ले रहीं कंपनियां बढ़ती कीमतों के बीच ग्राहकों को लुभाने के लिए टेक ब्रांड्स अब नए रास्ते तलाश रहे हैं। कंपनियां लैपटॉप के कॉन्फिगरेशन में बदलाव कर रही हैं ताकि बेस प्राइस कम रखा जा सके। इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को आसान किस्तों और प्रमोशनल ऑफर्स के जरिए जोड़ने की कोशिश की जा रही है। गेमिंग और प्रोफेशनल सेगमेंट के खरीदार महंगे होने के बावजूद खरीदारी जारी रख सकते हैं, लेकिन बजट सेगमेंट में सुस्ती दिखेगी। अगर आप अगले कुछ महीनों में लैपटॉप या पीसी खरीदने की सोच रहे हैं, तो अभी खरीदना बेहतर है। क्योंकि इनकी कीमतों में कमी आने के आसार 2027 से पहले नहीं दिख रहे हैं। ये खबर भी पढ़ें… चीन समेत पड़ोसी देशों के लिए भारत में निवेश आसान:फॉरेन इन्वेस्टमेंट के नियम बदले; 10% से कम हिस्सेदारी पर बिना मंजूरी निवेश कर सकेंगे केंद्र सरकार ने चीन समेत भारत के साथ बॉर्डर शेयर करने वाले यानी पड़ोसी देशों से आने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के नियमों में ढील दी है। PM मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार (10 मार्च) को हुई कैबिनेट मीटिंग में प्रेस नोट 3 यानी FDI पॉलिसी के नियमों में बदलाव को मंजूरी दी गई। नए नियमों के तहत अब उन निवेश प्रस्तावों को ऑटोमैटिक मंजूरी मिल जाएगी, जिनमें पड़ोसी देश के निवेशक की हिस्सेदारी 10% से कम हो और उसका कंपनी पर कोई कंट्रोल न हो। इसके साथ ही, स्ट्रैटेजिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के लिए 60 दिनों की समय सीमा तय कर दी गई है। पूरी खबर पढ़ें…
चीन में लूनर न्यू ईयर के दौरान लोगों को लाल लिफाफों में पैसे देने की परंपरा (हांगबाओ) है, इस बार यह नए रूप में दिखी। एआई दिग्गज कंपनियां ही लोगों को डिजिटल हांगबाओ बांटने लगीं। पिछले कुछ हफ्तों में अलीबाबा, बाइडांस, टेंसेंट व बायडू ने 11 हजार करोड़ रुपए के कूपन और कैश रिवॉर्ड देकर लोगों को अपने एआई एप डाउनलोड व इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया। चीन में इस सब्सिडी की होड़ को ‘होंगबाओ वॉर’ कहा जा रहा है। यह नए साल पर दिए जाने वाले लिफाफों के नाम पर है। ज्यादातर चीनी एआई कंपनियां पहले ही अपने मॉडल मुफ्त दे रही थीं। अब वे यूजर्स को पैसे देकर इस्तेमाल करा रही हैं। दरअसल कंपनियां एजेंटिक सर्विस बनाने और प्रमोट करने में बड़ा निवेश कर रही हैं। चीनी नव वर्ष से ठीक पहले अलीबाबा व बाइडांस ने चैटबॉट के अपग्रेड लॉन्च किए। अपग्रेड के बाद इनके बॉट यूजर की ओर से कई टास्क कर सकते हैं। इस मौके पर अलीबाबा के चैटबॉट क्वेन के जरिए 10 करोड़ से ज्यादा बेवरेज बेचे गए। वहीं, बाइडांस के चैटबॉट दौबाओ ने टीवी शो के दौरान कुछ ही घंटों में 2 अरब सवालों के जवाब दिए। एक्सपर्ट कहते हैं,‘यह सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि डिजिटल बाजार पर कब्जे की रणनीति है। जो कंपनी सबसे पहले ज्यादा यूजर जोड़ेगी, वही आगे एआई-आधारित सुपर एप बना पाएगी। जिसमें चैट, खरीदारी, भुगतान व टिकट बुकिंग एक ही जगह हो सकेगी। स्टैनफोर्ड की एआई इंडेक्स रिपोर्ट बताती है कि शुरुआती यूजर बेस बेहद अहम है, क्योंकि इससे कंपनियों को ज्यादा डेटा मिलता है और मॉडल तेजी से बेहतर होते हैं। इसी वजह से कंपनियां मुनाफे की बजाय यूजर्स जुटाने पर खर्च कर रही हैं। इस प्रतिस्पर्धा के नकारात्मक असर भी दिखने लगे हैं। निवेशकों को भरोसा नहीं है कि इतना बड़ा खर्च भविष्य में मुनाफा देगा। उदाहरण के तौर पर, हांगबाओ वॉर शुरू होने के बाद अलीबाबा के शेयर 30% गिर गए। इंडस्ट्री के भीतर दबाव भी बढ़ रहा है। हाल ही में ‘क्वेन’ के मुख्य इंजीनियर लिन जुनयांग ने इस्तीफा दे दिया। बढ़ते कारोबारी दबाव को इसके पीछे प्रमुख वजह माना जा रहा है। चिप नहीं मस्तिष्क की कोशिकाओं से चलेगा डेटा सेंटर मेलबर्न: ऑस्ट्रेलिया के बायोटेक स्टार्टअप कॉर्टिकल लैब्स ने मेलबर्न में दुनिया का पहला ऐसा डेटा सेंटर बनाया है जो चिप्स नहीं, बल्कि मानव मस्तिष्क की कोशिकाओं से चलता है। कंपनी सिंगापुर में भी सेंटर बना रही है। इन ‘बायोलॉजिकल कंप्यूटर्स’ में लैब में तैयार किए गए न्यूरॉन्स सिलिकॉन पर लगाए जाते हैं, जो बिजली के संकेतों से प्रतिक्रिया देते हैं और कंप्यूटिंग आउटपुट बनाते हैं। ये कोशिकाएं बेहद कम ऊर्जा खर्च करती हैं। स्टार्टअप ने पहले अपने न्यूरॉन्स को ‘पोंग’ गेम खेलना सिखाया था। अब वे डूम खेलने में भी सफल रहे। एक्सपर्ट मानते हैं कि प्रयोग शुरुआती चरण में है, लेकिन भविष्य में पारंपरिक चिप को चुनौती दे सकता है
टेक ब्रांड आइटेल ने भारतीय बाजार में अपना नया लो-बजट फोन 'आईटेल जेनो 100' लॉन्च किया है। फोन में सबसे खास इसकी मजबूती और प्रीमियम लुक है। कंपनी का दावा है कि मिलिट्री-ग्रेड फोन 1.2 मीटर की ऊंचाई से गिरने पर भी सुरक्षित रहेगा। इससे बिना नेटवर्क के भी कॉल कर सकेंगे। कंपनी ने इसमें 5000mAh बैटरी दी है। आईटेल जेनो 100 को भारत में 2 वैरिएंट में उतारा गया है। इसके 3GB रैम और 64GB स्टोरेज वाले बेस वैरिएंट की कीमत ₹6866 रखी गई है। वहीं, इसका दूसरा वैरिएंट 4GB रैम और 64GB स्टोरेज के साथ आता है, जिसकी कीमत ₹7285 है। डिजाइन: मिलिट्री-ग्रेड सर्टिफिकेशन और वनप्लस जैसा लुक मटेरियल: यह स्मार्टफोन MIL-STD-810H मिलिट्री-ग्रेड बॉडी पर बना है। इसका मतलब है कि यह बेहद मजबूत है और कठोर परिस्थितियों को झेल सकता है। बैक पैनल: फोन का पिछला हिस्सा देखने में वनप्लस 15 जैसा प्रीमियम फील देता है। इसमें एक बड़ा सर्कुलर कैमरा मॉड्यूल दिया गया है। टेंपरेचर रेजिस्टेंस: कंपनी का दावा है कि यह फोन माइनस 35 डिग्री की कड़ाके की ठंड और 43 डिग्री की भीषण गर्मी में भी बिना रुके काम कर सकता है। कलर ऑप्शन: यह फोन तीन कलर ऑप्शंस- टाइटेनियम गोल्ड, प्योर ब्लैक और सिल्क ग्रीन में उपलब्ध है। पोर्ट्स और बटन्स: फोन के राइट साइड में पावर बटन और वॉल्यूम रॉकर दिए गए हैं। पावर बटन में ही साइड माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर को इंटीग्रेट किया गया है। ऊपर की तरफ इसमें IR ब्लास्टर भी है, जिससे आप टीवी कंट्रोल कर सकते हैं। आईटेल जेनो 100: स्पेसिफिकेशन्स डिस्प्ले: फोन में 6.6-इंच की HD+ आईपीएस एलसीडी (IPS LCD) स्क्रीन दी गई है। बजट सेगमेंट होने के बावजूद इसमें 90Hz का रिफ्रेश रेट मिलता है, जिससे स्क्रॉलिंग और वीडियो देखने का अनुभव स्मूथ रहता है। सेल्फी कैमरे के लिए फ्रंट में वॉटरड्रॉप नॉच डिजाइन दिया गया है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए इसके बैक पैनल पर 8 मेगापिक्सल का मेन कैमरा LED फ्लैश के साथ दिया गया है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन के फ्रंट में 5 मेगापिक्सल का कैमरा मिलता है। परफॉर्मेंस: इसमें यूनिसोक T7100 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर लगा है। इसकी क्लॉक स्पीड 1.2GHz से 1.6GHz तक है। यह एक एंट्री लेवल चिपसेट है जो रोजमर्रा के टास्क आसानी से हैंडल कर लेता है। यह फोन ‘एंड्रॉयड 15 गो’ पर काम करता है। यह ओएस कम स्टोरेज और हल्के प्रोसेसर वाले फोन के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि फोन हैंग न हो और स्मूथ चले। पावरबैकअप: फोन को पावर देने के लिए इसमें 5000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है। इसे चार्ज करने के लिए बॉक्स में 10 वॉट का फास्ट चार्जर मिलता है। नॉर्मल इस्तेमाल पर इसकी बैटरी आराम से डेढ़ से दो दिन चल सकती है। अन्य: इस फोन की सबसे अनोखी खूबी अल्ट्रा लिंक टेक्नोलॉजी है। कंपनी का दावा है कि इसकी मदद से नेटवर्क न होने पर भी कॉल की जा सकेगी। फोन में फिंगरप्रिंट सेंसर के साथ फेस अनलॉक का फीचर भी दिया गया है। इसमें 4G सपोर्ट, वाई-फाई, ब्लूटूथ और 3.5mm ऑडियो जैक जैसे जरूरी फीचर्स शामिल हैं।

