ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौता समाप्त घोषित किया, परमाणु वार्ता पर जताई निराशा
अंकारा। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ तीन सप्ताह पहले हुए युद्धविराम समझौते को समाप्त घोषित करते हुए कहा है कि यह समझौता अब प्रभावी नहीं रहा। इसके व्यावहारिक परिणामों को लेकर उन्होंने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। ट्रंप ने अंकारा में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि युद्धविराम समझौता अब […] The post ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौता समाप्त घोषित किया, परमाणु वार्ता पर जताई निराशा appeared first on Sabguru News .
फिर भड़केगी महायुद्ध की आग? ट्रंप का बड़ा एलान- ईरान के साथ समझौता खत्म, रातभर बरसे बम
Donald Trumps statement: पश्चिम एशिया में एक बार फिर बड़े युद्ध की आहट तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्किये (अंकारा) में चल रहे नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान बेहद तीखा बयान देते हुए ईरान के साथ हुए हालिया संघर्ष-विराम ...
महाभारत के महासंग्राम की चर्चा होते ही सबसे पहले मन में आता है वह दृश्य, जिसमें अर्जुन दुविधा में है और भगवान श्रीकृष्ण उसे गीता का उपदेश दे रहे हैं। युद्ध से पहले ही श्रीकृष्ण ने यह प्रण ले लिया था कि वे कुरुक्षेत्र में शस्त्र नहीं उठाएंगे। उनकी भूमिका केवल अर्जुन के सारथी के रूप में रहने की थी। लेकिन, एक बार ऐसी विषम परिस्थिति बनी कि जगत के पालनहार को अपना वचन तोड़ना पड़ा और वे रथ का पहिया लेकर भीष्म पितामह की ओर दौड़ पड़े। आखिर वह क्या मजबूरी थी, जिसने प्रभु को शस्त्र उठाने पर विवश कर दिया?क्यों दी थी भगवान श्रीकृष्ण ने शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा?भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र युद्ध में तटस्थ रहने की घोषणा की थी। उन्होंने दुर्योधन और अर्जुन दोनों को विकल्प दिया था—एक तरफ उनकी विशाल 'नारायणी सेना' और दूसरी तरफ वे स्वयं, जो निहत्थे रहेंगे। अर्जुन ने श्रीकृष्ण को चुना और दुर्योधन ने सेना को। श्रीकृष्ण की प्रतिज्ञा के पीछे उद्देश्य यह था कि वे न चाहते हुए भी किसी एक पक्ष का सीधा संहार न करें, बल्कि न्याय की स्थापना में केवल मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। वे अपनी लीलाओं से यह दिखाना चाहते थे कि अधर्म का नाश करने के लिए युद्ध से ज्यादा महत्वपूर्ण सही मार्गदर्शन और विवेक है।जब भीष्म के सामने विचलित हो गए थे श्रीकृष्णभीष्म पितामह ने प्रतिज्ञा की थी कि वे श्रीकृष्ण को शस्त्र उठाने पर मजबूर कर देंगे। युद्ध के दौरान, जब भीष्म पितामह ने अर्जुन पर बाणों की वर्षा शुरू की, तो अर्जुन उन्हें रोकने में असमर्थ हो गए। स्थिति ऐसी बन गई कि अर्जुन का रथ क्षतिग्रस्त हो गया और वे हार की कगार पर पहुँच गए। अर्जुन को संकट में देख भगवान श्रीकृष्ण का वात्सल्य और मित्र प्रेम जाग उठा। अपने प्रिय भक्त को मृत्यु के मुख में देख श्रीकृष्ण ने अपनी प्रतिज्ञा त्याग दी और जमीन से रथ का एक टूटा हुआ पहिया उठाकर पितामह की ओर बढ़े।'विपक्ष' की जीत या 'भक्ति' की पराकाष्ठा?जैसे ही श्रीकृष्ण चक्र (पहिया) लेकर पितामह की ओर बढ़े, भीष्म ने अपने शस्त्र डाल दिए और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, प्रभु, मेरी प्रतिज्ञा पूरी हुई। आज आपके हाथों अपना अंत देखकर मेरा जीवन धन्य हो गया। श्रीकृष्ण का वह क्रोध वास्तव में उनके भक्त के प्रति प्रेम था। यह घटना सिखाती है कि भगवान के लिए अपने भक्त की रक्षा उनकी स्वयं की प्रतिज्ञा से कहीं अधिक बड़ी होती है। महाभारत का यह प्रसंग आज भी हमें याद दिलाता है कि भक्त और भगवान के बीच कोई भी नियम, वचन या प्रतिज्ञा बड़ी नहीं होती।
होर्मुज स्ट्रेट में तीन टैंकरों पर हमले, सऊदी और कतर के जहाजों को नुकसान
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ने मंगलवार को बताया कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर तीन अलग-अलग हमले हुए हैं। इन तीनों घटनाओं में किसी के घायल होने की खबर नहीं है
अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंचों पर अपने अप्रत्याशित और चौंकाने वाले बयानों के लिए मशहूर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर अचानक बदलते हुए दिखाई दिए हैं। तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के इतर तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान के साथ एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने ट्रंप से इटली के साथ जारी कड़वाहट पर सवाल पूछा, तो ट्रंप ने बेहद सधे हुए अंदाज में मेलोनी की तारीफों के पुल बांध दिए। ट्रंप ने मेलोनी को एक 'शानदार महिला' (Wonderful Woman) बताते हुए सार्वजनिक रूप से कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर उन्हें बेहद पसंद करते हैं और दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंध हमेशा मजबूत रहे हैं।हालांकि, इस तारीफ के पीछे ट्रंप ने उस कूटनीतिक दर्द को भी बयां किया जिसने हाल ही में दोनों देशों के बीच एक बड़ी दीवार खड़ी कर दी थी। ट्रंप ने मीडिया के सामने स्वीकार किया कि दोनों के बीच हालिया समस्या इसलिए पैदा हुई क्योंकि मेलोनी ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में वाशिंगटन की मदद करने से साफ इनकार कर दिया था। गौरतलब है कि इससे ठीक पहले ट्रंप ने दावा किया था कि मेलोनी उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए गिड़गिड़ा रही थीं, जिसके बाद इटली ने इस पर बेहद आक्रामक और सख्त प्रतिक्रिया दी थी।'मैं खुश नहीं था पर वह बेहतरीन इंसान हैं': ईरान मुद्दे पर ट्रंप ने मेलोनी की गलती सुधारीप्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इटली सरकार पर कोई अनुचित या बड़ा दबाव नहीं डाला था, लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समय पर मेलोनी ने ईरान के मामले में अमेरिका का खुलकर साथ देने से मना कर दिया। ट्रंप ने बेबाकी से कहा कि आप खुद सोच सकते हैं कि इटली के इस कदम से मैं बिल्कुल भी खुश नहीं हुआ था, और इसी असहयोग के चलते दोनों महाशक्तियों के बीच कूटनीतिक संबंध थोड़े प्रभावित हुए।इसके बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी तल्खी को थोड़ा कम करते हुए कहा कि भले ही मुझे लगता है कि उन्होंने ईरान नीति पर एक बड़ी रणनीतिक गलती की है, लेकिन इसके बाद भी मैं उनकी शानदार शख्सियत का सम्मान करता हूं और उन्हें एक मजबूत नेता मानता हूं।ट्रुथ सोशल पोस्ट से भड़की थी आग: जी-7 शिखर सम्मेलन की वो 'तस्वीर' और हवाई पट्टियों का विवादइस अभूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट लिखी थी। ट्रंप ने दावा किया था कि फ्रांस में आयोजित जी-7 (G7) शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने कई बार सुरक्षा घेरा तोड़कर उनके साथ एक आधिकारिक फ्रेम में तस्वीर खिंचवाने का विशेष अनुरोध किया था।बात सिर्फ फोटो तक सीमित नहीं रही; ट्रंप ने सुरक्षात्मक लहजे में इटली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब अमेरिकी वायुसेना ईरान के ठिकानों पर हमला करने की योजना बना रही थी, तब इटली ने अपने सैन्य हवाई अड्डों और रनवे (Runways) का इस्तेमाल करने की अनुमति अमेरिकी लड़ाकू विमानों को नहीं दी। ट्रंप के अनुसार, इस अप्रत्याशित इनकार के कारण अमेरिकी सेना को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि अमेरिका इटली सहित सभी नाटो सहयोगियों की हवाई सुरक्षा पर अरबों डॉलर खर्च करता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इटली ने पीठ दिखा दी। ट्रंप ने यह दावा भी कर दिया था कि अब ईरान पर अमेरिका की सैन्य बढ़त देखने के बाद सुश्री मेलोनी दोबारा वाशिंगटन के करीब आने की कोशिश कर रही हैं।भीख नहीं मांगता इटली: मेलोनी का वीडियो संदेश और विदेश मंत्री का अमेरिकी दौरा रद्दडोनाल्ड ट्रंप के इन तीखे आरोपों और 'गिड़गिड़ाने' वाले दावों पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने बेहद कड़ा और स्वाभिमानी रुख अख्तियार किया था। मेलोनी ने तुरंत एक आधिकारिक वीडियो संदेश जारी कर ट्रंप के दावों को पूरी तरह से काल्पनिक, मनगढ़ंत और सत्य से परे बताया था। मेलोनी ने बेहद कड़े लहजे में वैश्विक मंच से कहा था कि न तो वह व्यक्तिगत रूप से और न ही इटली की संप्रभु सरकार अपनी राष्ट्रीय नीतियों के लिए किसी के सामने भीख मांगती है।इस विवाद का असर तुरंत द्विपक्षीय संबंधों पर भी देखने को मिला, जब इटली के विदेश मंत्री एंतोनियो तजानी ने अमेरिका की अपनी बेहद महत्वपूर्ण और प्रस्तावित आधिकारिक यात्रा को ऐन वक्त पर रद्द कर दिया। तजानी ने रोम में मीडिया से बात करते हुए साफ कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति की यह टिप्पणियां प्रधानमंत्री मेलोनी के व्यक्तिगत सम्मान और पूरे इटली राष्ट्र की संप्रभुता के लिए बेहद अपमानजनक हैं, इसलिए ऐसी परिस्थितियों में वाशिंगटन का दौरा करना उचित नहीं है। हालांकि, अब अंकारा में ट्रंप के बदले हुए नर्म सुरों के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों नाटो सहयोगियों के बीच जमी बर्फ जल्द ही पिघल सकती है।
तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित हाई-प्रोफाइल नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद आक्रामक और अनूठे तेवर देखने को मिले हैं। शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन राष्ट्रपति ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ अपने उतार-चढ़ाव भरे निजी और कूटनीतिक संबंधों पर खुलकर बात की। ट्रंप ने एक तरफ मेलोनी के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए उन्हें वास्तव में एक 'बेहद अच्छी महिला' बताया, तो वहीं दूसरी तरफ ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान में अमेरिका का साथ न देने के लिए वैश्विक मीडिया के सामने उनकी तीखी आलोचना भी की। कूटनीतिक गलियारों में मेलोनी को पहले ट्रंप का सबसे मजबूत यूरोपीय सहयोगी माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ महीनों में दोनों के बीच कड़वाहट काफी बढ़ गई है।अंकारा में पत्रकारों से आमने-सामने की बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने बेबाकी से कहा कि ईरान के खिलाफ चल रही रणनीतिक लड़ाई में जब अमेरिका को इटली की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब मेलोनी सरकार ने हमारी सैन्य मदद करने से साफ इनकार कर दिया था; इसी वजह से वर्तमान में हमारे आपसी संबंध थोड़े खराब हो गए हैं। ट्रंप ने आगे कहा कि व्यक्तिगत तौर पर वह मेलोनी को पसंद करते हैं, लेकिन बतौर प्रधानमंत्री ईरान युद्ध पर पीछे हटकर उन्होंने एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक भूल की है।इस बयान से ठीक एक दिन पहले सोमवार को ट्रंप ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर मेलोनी के साथ एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए मजाकिया और तीखे लहजे में लिखा था— इस समय एक निरोधक आदेश (Restraining Order) की सख्त जरूरत है।डेनमार्क को सीधी चुनौती: ग्रीनलैंड पर सिर्फ और सिर्फ अमेरिका का नियंत्रण होना चाहिएनाटो नेताओं की मौजूदगी के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक पुराना और बेहद संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दा दोबारा उठाकर यूरोपीय देशों को चौंका दिया है। तुर्किये के राष्ट्रपति के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक के दौरान ट्रंप ने वैश्विक मीडिया से कहा कि सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण द्वीप 'ग्रीनलैंड' (Greenland) पर डेनमार्क का नहीं, बल्कि हर हाल में केवल अमेरिका का संप्रभु नियंत्रण होना चाहिए।अमेरिकी राष्ट्रपति ने तर्क दिया कि ग्रीनलैंड के भौगोलिक स्वामित्व और नियंत्रण के पुराने विवाद ने अतीत में नाटो के साथ अमेरिका के संबंधों को काफी नुकसान पहुंचाया है। ट्रंप के इस बयान ने आर्कटिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक नियंत्रण की बहस को एक बार फिर गरमा दिया है, और डेनमार्क समेत कई यूरोपीय देशों ने इस पर आंतरिक रूप से आपत्ति जताना शुरू कर दिया है।मिनेसोटा के स्कूल का हिजाब वीडियो शेयर कर भड़के ट्रंप: गवर्नर टिम वॉल्ज ने दिया करारा जवाबअंतरराष्ट्रीय कूटनीति के साथ-साथ ट्रंप ने अमेरिका की आंतरिक राजनीति और धार्मिक पहनावे को लेकर भी अंकारा से एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अमेरिका के मिनेसोटा (Minnesota) प्रांत के एक किंडरगार्टन (प्राइमरी स्कूल) में आयोजित ग्रेजुएशन सेरेमनी का एक संक्षिप्त वीडियो साझा किया। इस वीडियो के साथ ट्रंप ने एक संक्षिप्त लेकिन विवादास्पद टिप्पणी लिखते हुए ध्यान दिलाया कि इस अमेरिकी स्कूल की 'हर छोटी बच्ची हिजाब में' नजर आ रही है।ट्रंप के इस सोशल मीडिया पोस्ट पर अमेरिका के भीतर ही तीखी प्रतिक्रियाएं आना शुरू हो गई हैं। मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज ने राष्ट्रपति की इस टिप्पणी की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए तुरंत पलटवार किया। गवर्नर वॉल्ज ने कहा कि देश के राष्ट्रपति का एक छोटे किंडरगार्टन के मासूम बच्चों के उस पहनावे को लेकर निशाना बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, जो वे स्वेच्छा से या अपनी पारिवारिक संस्कृति के अनुसार स्कूल में पहनते हैं। वॉल्ज ने आरोप लगाया कि ट्रंप अंतरराष्ट्रीय मंच पर होने के बावजूद घरेलू स्तर पर केवल ध्रुवीकरण और विवाद खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं।
पटियाला में मंगलवार को हिंदू संगठनों ने 'सनातन सम्मान यात्रा' निकाली। इस यात्रा में हरिद्वार से आए संतों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया। यात्रा के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि हिंदू समाज के साथ भेदभाव किया जा रहा है और प्रशासन उनकी शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि यात्रा का मुख्य उद्देश्य सनातन समाज में एकजुटता का संदेश देना और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना है। वक्ताओं ने गोपाल कॉलोनी में एक वाल्मीकि परिवार पर हुए कथित हमले का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस घटना में परिवार के घर में बने मंदिर और भगवान श्री खाटू श्याम की तस्वीर के साथ भी तोड़फोड़ की गई थी। आरोप है कि पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे भाजपा नेता करुण कौड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 295 के तहत मामला दर्ज किया गया, जबकि दूसरे पक्ष के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। रोहिंग्या घुसपैठियों के मुद्दे पर करुण कौड़ा ने दिया बयान सनातनी महंत अरुणा गिरी और केशव नंद ने स्पष्ट किया कि करुण कौड़ा ने किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि कथित रोहिंग्या घुसपैठियों के मुद्दे पर बयान दिया था। उन्होंने प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए करुण कौड़ा के खिलाफ दर्ज मामला रद्द करने की मांग की। निष्पक्ष जांच न हुई तो करेंगे आंदोलन इसके साथ ही, उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दूसरे पक्ष के खिलाफ भी उचित कार्रवाई करने की अपील की। संतों और वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो देश के विभिन्न हिस्सों से सनातन समाज के लोग पटियाला पहुंचकर बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
राजस्थान कांग्रेस का डिजिटल चक्रव्यूह: क्या करेगी 15 लाख की फौज, युद्ध या मौज
राजस्थान की राजनीति में एक नया और बेहद दिलचस्प मोड़ आ गया है। कांग्रेस ने राज्य में आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए एक अभूतपूर्व डिजिटल सेना तैयार की है। इसे पार्टी के अंदर और बाहर 15 लाख की फौज कहा जा रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर सक्रिय होने वाली यह विशाल वाहिनी विपक्षी दलों के खिलाफ चुनावी 'युद्ध' लड़ेगी या सिर्फ संगठन के भीतर ही 'मौज' करेगी?सोशल मीडिया पर 'चक्रव्यूह' तैयारकांग्रेस आलाकमान ने बूथ स्तर तक मजबूत पकड़ बनाने के लिए एक ऐसा डिजिटल चक्रव्यूह रचा है, जिसे भेदना विरोधियों के लिए आसान नहीं होगा। सूत्रों के अनुसार, इस रणनीति के तहत लाखों कार्यकर्ताओं को सीधे व्हाट्सएप ग्रुप, रील्स, और लोकल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए जोड़ा गया है।बड़ी रणनीति: यह पहली बार है जब राजस्थान में किसी क्षेत्रीय राजनीतिक दल ने इतने बड़े पैमाने पर माइक्रो-लेवल (लोकल) डिजिटल मैनेजमेंट को अंजाम दिया है।लोकल ऑप्टिमाइजेशन और जमीनी असरजयपुर से लेकर जोधपुर और बीकानेर के सुदूर गांवों तक, इस डिजिटल फौज का मुख्य काम सरकार की नीतियों और पार्टी के नैरेटिव को हर घर तक पहुंचाना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक ऑनलाइन कैंपेन नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर लेवल पर वोटर्स को प्रभावित करने की एक सोची-समझी योजना है। अब देखना यह है कि यह 15 लाख की डिजिटल सेना जमीन पर कितना बड़ा चमत्कार दिखा पाती है।
राजनीतिक डेस्क: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पेपर लीक मामले को लेकर देश में सियासी पारा पहले से ही गरमाया हुआ है, लेकिन इसी बीच आंदोलन की अगुवाई कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को लेकर एक ऐसा विवादित बयान दे दिया है, जिसने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी बहस छिड़ गई है।60-70 के लोग रिटायर होकर आश्रम में बैठें - अभिजीत दीपकेदिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 18 दिनों से प्रदर्शन कर रहे अभिजीत दीपके अपने गृह जिले छत्रपति संभाजीनगर में छात्रों के एक प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान जब पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि क्या वे इस आंदोलन को लेकर अन्ना हजारे से मुलाकात करेंगे, तो उन्होंने दो टूक मना कर दिया।दीपके ने तल्ख लहजे में कहा, बिल्कुल नहीं! मुझे लगता है कि युवाओं को अब चीजें अपने हाथ में लेनी चाहिए। जो लोग 60-70 के हो गए हैं, उन्हें रिटायर हो जाना चाहिए—चाहें राजनीति हो या एक्टिविज्म। वे आश्रम में जाकर बैठें। यह हमारे भविष्य का सवाल है, छात्रों का भविष्य है, हमें फैसला करने दो। आखिर कब तक बूढ़े लोग हमारे फैसले करते रहेंगे?बयान पर भड़के लोग, सोनम वांगचुक को लेकर दीपके को घेराअभिजीत दीपके के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनकी जमकर आलोचना हो रही है। यूजर्स उनके इस 'एज शेमिंग' वाले बयान पर उन्हें पाखंडी बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि एक तरफ दीपके बुजुर्गों और अन्ना हजारे को किनारे करने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ अपने आंदोलन के लिए 59-60 साल के सोनम वांगचुक को आगे कर भूख हड़ताल करवा रहे हैं। लोगों ने सवाल उठाया, अगर बूढ़ों से प्रेरणा नहीं लेनी तो खुद अनशन पर क्यों नहीं बैठते, वांगचुक को आगे क्यों धकेल रखा है?जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का अनशन, तेजी से गिर रहा वजनआपको बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी का दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन मंगलवार (7 जुलाई 2026) को 18वें दिन में पहुंच चुका है। आंदोलन के समर्थन में दिग्गज पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक पिछले 10 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लगातार अनशन के कारण उनकी सेहत बिगड़ रही है और अब तक उनका वजन 6.9 किलोग्राम कम हो चुका है, जिससे समर्थकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
पंजाब कांग्रेस में 'महायुद्ध': अपनों की बगावत से टूटी पीठ, क्या 2027 में BJP मारेगी बाजी
पंजाब की सियासत में इस समय सबसे बड़ा भूचाल कांग्रेस के अंदर मचा हुआ है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) द्वारा किए गए हालिया संगठनात्मक फेरबदल ने पंजाब कांग्रेस की सुलगती आग में घी डालने का काम किया है। हाईकमान ने अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखा और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को सिर्फ कैंपेन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया। इस फैसले के बाद से ही पंजाब में शह और मात का खेल शुरू हो चुका है और चन्नी गुट ने सीधे दिल्ली दरबार तक मोर्चा खोल दिया है।चन्नी बनाम राजा वडिंग: मोरिंडा में 'शक्ति प्रदर्शन' और दिल्ली की दौड़कांग्रेस आलाकमान ने सोचा था कि सभी गुटों को पदों की मलाई बांटकर वो शांति स्थापित कर लेंगे, लेकिन दांव उल्टा पड़ गया। चरणजीत सिंह चन्नी के मोरिंडा स्थित आवास पर उनके समर्थकों की एक बड़ी बैठक हुई, जिसे सीधे तौर पर राजा वडिंग और प्रताप सिंह बाजवा के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। चन्नी समर्थक अब खुलकर उन्हें पंजाब का अगला मुख्य चेहरा घोषित करने की मांग कर रहे हैं। मामला यहीं नहीं रुका; चन्नी गुट के कई नेता इस असंतोष को लेकर दिल्ली कूच कर चुके हैं, जिससे साफ है कि पार्टी के भीतर दरारें अब खाई में बदल चुकी हैं। इसके साथ ही मनीष तिवारी को किसी कमेटी में जगह न मिलना और सुखजिंदर सिंह रंधावा की गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने इस सियासी सस्पेंस को और गहरा कर दिया है।बीजेपी के लिए 'लॉटरी': क्या पंजाब में खिलेगा कमल?कांग्रेस की इस भयंकर गुटबाजी को देखकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) बेहद गदगद नजर आ रही है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जालंधर और पठानकोट के दौरों पर सीधे तंज कसते हुए कहा कि आंतरिक कलह तो कांग्रेस के डीएनए (DNA) में है। बीजेपी ने साफ कर दिया है कि वह 2027 के विधानसभा चुनावों में किसी भी क्षेत्रीय दल (जैसे शिरोमणि अकाली दल) से गठबंधन नहीं करेगी, बल्कि सीधे जनता के बीच जाएगी। पंजाब में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) दोनों से नाराज चल रहे शहरी और दलित वोटर्स को अपने पाले में करने के लिए बीजेपी के पास इससे बेहतर मौका नहीं हो सकता। कांग्रेस का यह बिखराव सीधे तौर पर बीजेपी को राज्य में एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरने का स्पेस दे रहा है।आम आदमी पार्टी (AAP) की नजरें: नगर निगम चुनाव की जीत से बढ़े हौसलेदूसरी तरफ, सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी इस पूरे ड्रामे पर पैनी नजर रखे हुए है। हाल ही में हुए पंजाब नगर निगम (Civic Body) चुनावों में 'आप' ने बंपर जीत हासिल की है, जिससे भगवंत मान सरकार के हौसले बुलंद हैं। हालांकि, कांग्रेस इस समय 'आप' सरकार पर भी बीजेपी के साथ गुपचुप 'डील' करने के आरोप लगा रही है। खासकर केंद्र की 'विकसित भारत गारंटी' (VB-G RAM G) योजना को पंजाब में लागू करने के फैसले के बाद राजा वडिंग ने सीएम मान पर तीखे हमले किए हैं। लेकिन सच तो यह है कि जब तक मुख्य विपक्षी दल यानी कांग्रेस खुद आपस में लड़ती रहेगी, तब तक सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) का फायदा उठाना उसके लिए नामुमकिन होगा।अब देखना यह होगा कि दिल्ली में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे इस कलह को कैसे शांत करते हैं, या फिर इतिहास खुद को दोहराएगा और 2022 की तरह 2027 में भी कांग्रेस अपनी ही गलतियों से पंजाब की सत्ता से कोसों दूर रह जाएगी।
धनबाद के कतरास थाना क्षेत्र के छाताबाद में मंगलवार को अचानक भू-धंसान हुआ। इससे कई घर क्षतिग्रस्त हो गए और मकानों की दीवारों तथा फर्श में बड़ी दरारें आ गईं। घटना के बाद दहशत में आए लोग जान बचाने के लिए अपने घरों से बाहर निकल आए। कई परिवार अपना कीमती सामान, जेवर और जरूरी दस्तावेज तक घरों के अंदर ही छोड़ने को मजबूर हो गए। इस घटना से नाराज ग्रामीणों ने कतरास-धनबाद मुख्य मार्ग जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। उनकी मुख्य मांगों में प्रभावित परिवारों का तत्काल पुनर्वास, उचित मुआवजा और क्षेत्र में अवैध कोयला खनन पर प्रभावी रोक शामिल है। सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की मांग की प्रभावित ग्रामीणों ने बताया कि वे कई वर्षों से यहां रह रहे हैं। उन्होंने कहा, हम गरीब परिवार के लोग हैं, अपना घर छोड़कर कहां जाएं? अचानक घरों में दरारें पड़ने लगीं, तो जान बचाने के लिए बाहर निकलना पड़ा। हमारा सारा सामान अभी भी घर के अंदर ही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से उचित मुआवजा और सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारी प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हालात सामान्य करने के प्रयास में लगे हैं।
NATO बैठक से पहले ट्रंप का बड़ा दावा! बोले- पुतिन और जेलेंस्की दोनों चाहते हैं युद्ध का अंत
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की, दोनों ही यूक्रेन युद्ध खत्म करना चाहते हैं
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने कतर (Qatar) द्वारा अमेरिका को उपहार में दिए गए अत्याधुनिक बोइंग 747-8 (Boeing 747-8) विमान से अपनी आधिकारिक यात्राएं शुरू कर दी हैं। जरूरी बदलावों और कड़ी टेस्टिंग के बाद इस विशाल विमान को अमेरिकी राष्ट्रपति के 'एयर फोर्स वन' बेड़े में शामिल कर लिया गया है। लेकिन, ट्रंप की योजना सिर्फ इस विमान में सफर करने तक सीमित नहीं है; वह इसे अपने एक खास ड्रीम प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाना चाहते हैं।मियामी की प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी में विमान प्रदर्शित करने का प्लानप्रसिद्ध अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप की दिली ख्वाहिश है कि कतर से मिले इस बोइंग विमान को रिटायरमेंट के बाद मियामी (Miami) में बनने वाली उनकी अपकमिंग 'प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी' में प्रदर्शित किया जाए। ट्रंप चाहते हैं कि यह विमान उनकी विरासत के एक शानदार प्रतीक के तौर पर मियामी में रखा जाए, जिसे लोग करीब से देख सकें।राह में खड़ी हैं राजनीतिक और सैन्य चुनौतियांहालांकि, ट्रंप का यह सपना जितना भव्य है, इसे हकीकत में बदलना उतना ही जटिल है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट बताती है कि एक विशालकाय बोइंग विमान को मियामी के किसी सिविलियन या लाइब्रेरी एरिया में शिफ्ट करना और उसे स्थायी तौर पर प्रदर्शित करना आसान नहीं है। इस योजना के रास्ते में कई गंभीर राजनीतिक (Political), सैन्य (Military) और लॉजिस्टिकल (Logistical) चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। फिलहाल, यह विमान अमेरिका के अस्थायी 'एयर फोर्स वन' के रूप में अपनी सेवाएं दे रहा है और सुरक्षा कारणों से सेना इसे इतनी आसानी से किसी सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए नहीं सौंप सकती।नए बोइंग प्रोजेक्ट में क्यों हो रही है देरी?यह पूरा मामला इसलिए भी पेचीदा हो गया है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए तैयार हो रहे नए विमानों के प्रोजेक्ट में भारी देरी चल रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान ही, साल 2017 में पुराने एयर फोर्स वन बेड़े को बदलने की कवायद शुरू कर दी थी। उन्होंने इसके लिए बोइंग को अगली पीढ़ी के दो नए प्रेसिडेंशियल विमानों का ऑर्डर दिया था।कार्यकाल के अंत तक ही मिल पाएंगे नए विमानशुरुआती योजना के विपरीत, बोइंग के इस अति-सुरक्षित प्रोजेक्ट में काफी विलंब हो चुका है। अब इन दोनों नए विमानों के मध्य 2028 तक ही अमेरिकी वायुसेना को सौंपे जाने की उम्मीद है। तकनीकी और लॉजिस्टिक दिक्कतों के चलते ट्रंप को मजबूरी में कतर से मिले इसी बोइंग 747-8 का इस्तेमाल एक अस्थायी एयर फोर्स वन के रूप में करना पड़ रहा है। विडंबना यह है कि जब 2028 में नए विमान बनकर पूरी तरह तैयार होंगे, तब तक राष्ट्रपति ट्रंप का मौजूदा कार्यकाल अपने अंतिम चरण में होगा।
समंदर का नया 'अदृश्य शिकारी': 11 जुलाई को नौसेना में शामिल होगा स्वदेशी युद्धपोत 'महेंद्रगिरि'
भारतीय नौसेना की ताकत में एक ऐतिहासिक इजाफा होने जा रहा है। आगामी 11 जुलाई को स्वदेशी तकनीक से निर्मित अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट 'महेंद्रगिरि' आधिकारिक तौर पर नौसेना के बेड़े में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रोजेक्ट 17A (शिवालिक-क्लास) के तहत बना यह छठा युद्धपोत भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को अभेद्य बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।आत्मनिर्भर भारत की बुलंद तस्वीर और स्वदेशी ताकतपूर्वी घाट की प्रतिष्ठित पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया यह युद्धपोत भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान का एक बड़ा उदाहरण है। नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन और मुंबई के मझगांव डाक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा निर्मित इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसने देश के MSME और रक्षा उद्योगों को एक नई मजबूती दी है।आधुनिक हथियारों और स्टेल्थ तकनीक से लैस समरवीर'महेंद्रगिरि' को समंदर का एक अदृश्य शिकारी माना जा रहा है क्योंकि इसके उन्नत स्टेल्थ फीचर्स इसे दुश्मन के रडार की पकड़ में आने से बचाते हैं। यह बहुआयामी फ्रिगेट सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों और एकीकृत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है। कंबाइंड डीजल या गैस (CODOG) प्रणोदन प्रणाली के कारण यह उच्च गति से हवाई, सतही और पनडुब्बी रोधी अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है।हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बनेगा भारत का 'अभेद्य कवच'यह युद्धपोत न केवल युद्ध की स्थिति में नौसेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाएगा, बल्कि आपदा राहत, खोज और बचाव अभियानों में भी अहम भूमिका निभाएगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन और अन्य रणनीतिक चुनौतियों के बीच 'महेंद्रगिरि' भारतीय नौसेना के लिए एक अचूक 'फोर्स मल्टीप्लायर' साबित होगा, जो देश के समुद्री हितों की रक्षा करेगा।
गाजा संघर्ष : नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल
सयुक्त राष्ट्र की हालिया स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की रिपोर्ट ने इजरायल और कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में जारी हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों की गंभीर तस्वीर पेश की है।
गाज़ा युद्ध के 1000 दिन: दिल्ली में फ़िलिस्तीन के समर्थन में कविताएँ, प्रतिरोध और न्याय की आवाज़
गाज़ा में इज़राइली हमलों के 1000वें दिन दिल्ली में IPSN की सभा हुई। वक्ताओं ने फ़िलिस्तीन, न्याय, शांति और मानवाधिकारों के समर्थन में अपनी बात रखी।
सालों से दफ्तरों में जमे सात शिक्षक एकतरफा कार्यमुक्त
भास्कर न्यूज | जांजगीर जिले के शिक्षा विभाग में अपनी मूल पदस्थापना को छोड़कर अन्य कार्यालयों या संस्थाओं में अटैच होकर कार्य कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ बड़ी कार्यवाही की गई है। जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश जारी करते हुए ऐसे 7 अधिकारियों-कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से उनकी मूल संस्था के लिए एकतरफा कार्यमुक्त कर दिया है। आदेश में पुष्पा कोरी दिवाकर (सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी) को बीईओ कार्यालय बलौदा भेजा गया। संजय कुमार राठौर (शिक्षक एलबी) को शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय अमोरा, विकासखंड नवागढ़ भेजा गया। चंद्र प्रकाश तंबोली (शिक्षक एलबी) को शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय औराईकला, विकासखंड बलौदा भेजा गया। हेमंत कुमार यादव (व्यायाम शिक्षक एलबी) को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोसमंदा, विकासखंड बलौदा भेजा गया। रेवती रमन दुबे (सहायक ग्रेड-02) को शासकीय हाईस्कूल नवगवां, विकासखंड बलौदा भेजा गया। विशाल वैभव (सहायक ग्रेड-02) को बीईओ कार्यालय बलौदा में पदस्थ किया गया। राकेश सिंह गोंड (सहायक ग्रेड-03) को शासकीय हाईस्कूल कोसमंदा, विकासखंड बलौदा भेजा गया। डीईओ ने दी वेतन रोकने की चेतावनी: जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश में कड़ी चेतावनी दी गई है कि यदि कर्मचारी अपनी मूल संस्था में अनुपस्थित पाए जाते हैं, तो उनके वेतन का भुगतान नहीं होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी स्वयं कर्मचारी की होगी।
भारत 2025 से 2029 के बीच स्पेस बेस्ड सर्विलांस (SBS-III) प्रोग्राम के तहत 52 नए निगरानी सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इसी दौरान ऑपरेशन सिंदूर, NavIC नेटवर्क, जॉइंट मिलिट्री स्पेस डॉक्ट्रिन दिखा रही हैं कि भारत की सैन्य रणनीति में स्पेस की भूमिका लगातार बढ़ रही है। जॉइंट मिलिट्री स्पेस डॉक्ट्रिन का मतलब ऐसी गाइडलाइन है, जो बताती है कि युद्ध या शांति के समय तीनों सेनाएं मिलकर अंतरिक्ष आधारित संसाधनों का प्रभावी और सुरक्षित उपयोग कैसे करें। इसका असर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राजस्थान में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर भी दिखाई दिया था। युद्ध के समय पाकिस्तान की ओर से राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में 413 ड्रोन हमलों की कोशिश की गई थी। हालांकि स्पेस बेस्ड सर्विलांस के तहत लॉन्च सैटेलाइट की कड़ी मॉनिटरिंग से सभी हमलों को नाकाम किया गया। साथ ही दुश्मन के रडार सिस्टम को भी ध्वस्त कर दिया गया था। इसी वजह से भारत युद्ध के मोर्च पर आगे रहा था। सैन्य अधिकारियों, स्पेस एक्सपर्ट और पूर्व सैन्य कमांडरों का मानना है कि जमीन, समुद्र और हवा के साथ अब स्पेस भी देश की सुरक्षा का बड़ा हिस्सा बन चुका है। आज के समय में युद्ध सिर्फ सीमा पर तैनात सैनिकों और हथियारों से नहीं जीते जाते। स्पेस आधारित सिस्टम तेजी से अहम भूमिका निभा रहे हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… स्पेस भी युद्ध का नया मैदान एक्सपट्र्स मानते हैं कि भविष्य के युद्ध साइबर और स्पेस तक पहुंच चुके हैं। इसी दिशा में भारत ने जॉइंट मिलिट्री स्पेस डॉक्ट्रिन जारी की है। डिफेंस स्पेस एजेंसी को और मजबूत बनाया है। 52 नए निगरानी सैटेलाइट वाले SBS-III प्रोग्राम पर काम शुरू कर दिया है। भारतीय नौसेना के रिटायर्ड कैप्टन और फाइटर पायलट अभिजीत भूते कहते हैं- स्पेस तेजी से चौथे युद्धक्षेत्र के रूप में उभर रहा है। आने वाले समय के सैन्य ऑपरेशनों में इसकी भूमिका लगातार बढ़ेगी। ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि आधुनिक युद्ध में स्पेस और सैटेलाइट सिस्टम कितनी बड़ी भूमिका निभाते हैं। यह ऑपरेशन मुख्य रूप से नेटवर्क-सेंट्रिक रणनीति पर आधारित था। सैटेलाइट से मिलने वाली जानकारी, नेविगेशन और टारगेटिंग सपोर्ट ने अहम भूमिका निभाई। सीमा पार बड़ी संख्या में सैनिक भेजने के बजाय भारतीय सशस्त्र बलों ने दूर से सटीक हमले करने की अपनी क्षमता दिखाई। पूर्व महानिदेशक, डिफेंस स्पेस एजेंसी तथा IN-SPACe के विशेषज्ञ सलाहकार एयर वाइस मार्शल धनंजय खोत (रिटायर्ड) बताते हैं कि आधुनिक सेनाएं दुश्मन देशों के निगरानी सैटेलाइट पर भी नजर रखती हैं। इसके आधार पर वे अपने अहम हथियारों और सैन्य संसाधनों की जगह बदल सकती हैं या दुश्मन को भ्रमित करने के लिए डिकॉय भी तैनात कर सकती हैं। इन सभी स्रोतों से मिलने वाली जानकारी को भारतीय वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) जैसे नेटवर्क से जोड़ा जाता है। इससे सैटेलाइट, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम और जमीन पर लगे रडार से मिलने वाली जानकारी एक ही जगह पहुंचती है। इसके बाद तेजी से फैसले लेकर ऑपरेशन को अंजाम देना आसान हो जाता है। ये सभी सिस्टम भारतीय सेनाओं को दुश्मन पर नजर रखने, आपस में संपर्क बनाए रखने, रास्ता बताने, टारगेट पहचानने और ऑपरेशन की योजना बनाने में मदद करते हैं। भूते के अनुसार सिर्फ सैटेलाइट की संख्या मायने नहीं रखती, बल्कि असली बात यह है कि सभी सैटेलाइट मिलकर सेना को कितनी ताकत और कितनी बेहतर क्षमता देते हैं। ऑपरेशन सिंदूर में ड्रोन और सैटेलाइट की भूमिक IN-SPACe के एक्सपर्ट ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि अब युद्ध सिर्फ सैनिकों और हथियारों से नहीं, बल्कि रियल टाइम जानकारी, ड्रोन और सैटेलाइट के दम पर भी लड़े जाते हैं। राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर इस दौरान अहम ऑपरेशनल जोन बने। भारतीय सेना ने SkyStriker कामिकेज़ ड्रोन और लंबी दूरी के टोही ड्रोन की मदद से पाकिस्तान के भीतर मौजूद 9 आतंकी ठिकानों और 11 एयरबेस पर सटीक हमले किए। राजस्थान में स्पेस की क्या भूमिका रही? ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राजस्थान का बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर क्षेत्र सबसे अहम सैन्य मोर्चों में शामिल रहा। इन सीमावर्ती इलाकों में दुश्मन की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने, ड्रोन हमलों का समय रहते पता लगाने और सेना तक रियल टाइम जानकारी पहुंचाने में स्पेस आधारित सिस्टम की बड़ी भूमिका रही। ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान ने राजस्थान सीमा की ओर बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे। बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर सेक्टर में सबसे ज्यादा गतिविधियां देखी गईं। अकेले राजस्थान सेक्टर में 413 ड्रोन हमलों की कोशिश की गई। इन खतरों से निपटने के लिए ऑपरेशन के दौरान ISRO के 400 से अधिक वैज्ञानिक और कम से कम 10 रणनीतिक सैटेलाइट 24 घंटे लगातार काम करते रहे। इन सैटेलाइट्स ने भारतीय सेना को रियल टाइम खुफिया जानकारी, सुरक्षित संचार और सटीक लोकेशन उपलब्ध कराई। इन्हीं स्पेस आधारित सिस्टम की मदद से सेना दुश्मन के ड्रोन की गतिविधियों पर लगातार नजर रख सकी और समय रहते जवाबी कार्रवाई कर अधिकांश ड्रोन हमलों को विफल कर दिया। अब जानें कैसे स्पेस बना युद्धक्षेत्र …… 1. सैटेलाइट से तैयार हुई पूरी रणनीति पूर्व महानिदेशक, डिफेंस स्पेस एजेंसी तथा IN-SPACe के एक्सपर्ट एडवाइजर एयर वाइस मार्शल धनंजय खोत (रिटायर्ड) के अनुसार, किसी भी आधुनिक सैन्य ऑपरेशन में कई तरह के स्पेस सिस्टम एक साथ काम करते हैं। उन्होंने बताया कि सैन्य इंटेलिजेंस तैयार करने के लिए सैटेलाइट से मिली जानकारी को एयरक्राफ्ट, ड्रोन, यूएवी और अन्य उपलब्ध जानकारियों के साथ जोड़कर पूरी रणनीति और ऑपरेशनल प्लान तैयार किया जाता है। इसलिए आधुनिक सैन्य इंटेलिजेंस केवल अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों (IMINT) पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि कई खुफिया स्रोतों से मिली जानकारी को एक साथ जोड़कर मल्टी-इंटेलिजेंस (Multi-INT) और ऑल-सोर्स (All-Source) सिस्टम के रूप में काम करती है। 2. कार्टोसैट और RISAT ने रखी लगातार नजर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्पेस आधारित सिस्टम ने भारतीय सेना को रियल टाइम जानकारी उपलब्ध कराई। ISRO के कार्टोसैट और RISAT जैसे सैटेलाइट लगातार दुश्मन के ड्रोन और अन्य गतिविधियों पर नजर रखते रहे। इन सैटेलाइट्स से मिली रियल टाइम ट्रैकिंग और मैपिंग के आधार पर भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। इसका सबसे बड़ा असर भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में देखने को मिला। ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान ने इन सीमावर्ती इलाकों की ओर बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे, लेकिन भारत ने स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और काउंटर-यूएएस (C-UAS) तकनीक की मदद से उनके नेविगेशन और संचार सिस्टम को जाम कर दिया। इसके कारण अधिकांश ड्रोन भारतीय सीमा में प्रवेश करने से पहले ही पाकिस्तान की सीमा के भीतर गिर गए। 3. सीमा में घुसने से पहले ही रोके गए हमले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर में घुसपैठ की सभी कोशिशों को भारतीय क्षेत्र में नुकसान पहुंचाने से पहले ही विफल कर दिया गया। 4. अब और मजबूत हुई सीमा सुरक्षा मेजर शैलेन्द्र सिंह चौहान के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया कि भारत के स्वदेशी स्पेस संसाधन प्रभावी और भरोसेमंद हैं। उन्होंने कहा कि देश के पास अपनी स्वतंत्र और लगातार निगरानी की क्षमता होना बेहद जरूरी है। ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभव के बाद भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने अपनी ड्रोन रोधी क्षमता को और मजबूत किया है। अब सीमा पर विशेष बाज बटालियन और समर्पित ड्रोन स्क्वाड्रन तैनात किए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी भी ड्रोन खतरे का अधिक प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके। पहले जानकारी मिलना ही सबसे बड़ी ताकत पूर्व नौसेना अधिकारी और डिफेंस एयरोस्पेस प्रोजेक्ट्स से जुड़े कमांडर (रिटायर्ड) अरुण रविंद्रनाथन का कहना है कि आज के युद्ध में सबसे बड़ी ताकत हथियार नहीं, बल्कि सही समय पर मिलने वाली जानकारी होती है। टारगेट चुनने, सैन्य ऑपरेशन को कंट्रोल करने, रास्ता बताने, सुरक्षित संपर्क बनाए रखने और युद्ध के दौरान तेजी से फैसले लेने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। दुश्मन पर नजर रखने के लिए इमेजिंग और ऑप्टिकल सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जाता है। ये बहुत साफ तस्वीरें और वीडियो भेजते हैं, जिनकी मदद से दुश्मन के ठिकानों, सैनिकों की आवाजाही और हथियारों की तैनाती पर लगातार नजर रखी जा सकती है। वहीं सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) सैटेलाइट दुश्मन के रेडियो, रडार और संचार नेटवर्क से निकलने वाले सिग्नल पकड़ते हैं। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि दुश्मन क्या तैयारी कर रहा है और उसकी आगे की योजना क्या हो सकती है। सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) तकनीक वाले सैटेलाइट बादलों, घने कोहरे या रात के अंधेरे में भी काम कर सकते हैं। इनकी मदद से जमीन पर मौजूद वाहनों, बंकरों और दूसरी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। एक साथ कई मोर्चों पर लड़े जाएंगे भविष्य के युद्ध मेजर जनरल एस. वी. पी. सिंह (रिटायर्ड) के अनुसार, आज के युद्ध पहले की तरह अलग-अलग चरणों में नहीं लड़े जाते। अब जमीन, समुद्र, हवा, साइबर और स्पेस में एक साथ कार्रवाई होती है। अंतरिक्ष और रक्षा सैटेलाइट के एकीकरण से भारत मल्टी-फ्रंट वॉर यानी एक साथ कई मोर्चों पर होने वाले युद्ध में बेहतर तालमेल के साथ कार्रवाई करने में सक्षम हुआ है। उन्होंने बताया कि सैटेलाइट की मदद से सेना की अलग-अलग इकाइयों के बीच रियल टाइम में जानकारी साझा की जा सकती है। इससे लक्ष्य चूकने की संभावना कम हो जाती है और 'फ्रेंडली फायर' यानी गलती से अपनी ही सेना पर हमला होने का खतरा भी घटता है। मेजर जनरल सिंह के अनुसार, कार्टोसैट और रिसैट जैसे रडार सैटेलाइट अंतरिक्ष से 24/7 यानी दिन-रात और हर मौसम में दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। ये सैटेलाइट एलएसी (LAC) और एलओसी (LoC) जैसे संवेदनशील इलाकों में सैनिकों के जमावड़े और अन्य गतिविधियों को लगातार ट्रैक करते रहते हैं। इसके अलावा, कुछ अंतरिक्ष आधारित सिस्टम दुश्मन की मिसाइल लॉन्चिंग का समय रहते पता लगा लेते हैं, जिससे त्वरित बचाव और जवाबी कार्रवाई संभव हो पाती है। सिर्फ तस्वीर नहीं, उसका सही मतलब समझना ज्यादा जरूरी धनंजय खोत का कहना है कि भारतीय रक्षा सैटेलाइट, जैसे कार्टोसैट और रिसैट, हाई रेजोल्यूशन मैप और थर्मल तस्वीरें उपलब्ध कराते हैं। इन जानकारियों की मदद से ड्रोन ऑपरेटर उड़ान का रास्ता तय करते हैं, इलाके की स्थिति को समझते हैं और जमीन पर मौजूद संभावित लक्ष्यों की सटीक पहचान कर पाते हैं। हालांकि, केवल सैटेलाइट से तस्वीरें मिल जाना ही काफी नहीं होता। खोत के अनुसार, सबसे मुश्किल और सबसे जरूरी काम उन तस्वीरों और जानकारियों का सही विश्लेषण करना होता है। उन्होंने बताया कि पैनक्रोमैटिक, मल्टीस्पेक्ट्रल, हाइपरस्पेक्ट्रल, इन्फ्रारेड और थर्मल इमेजरी की मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि किसी इलाके में नई इमारत बन रही है या नहीं, बंकर तैयार किए जा रहे हैं या नहीं, सैनिकों और हथियारों की तैनाती में कोई बदलाव हुआ है या नहीं और कहीं किसी ढांचे को छिपाने की कोशिश तो नहीं की गई है। हाल ही में राजस्थान के पोकरण, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर क्षेत्रों में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन से जुड़े कई सैन्य अभ्यास भी किए गए हैं। वहीं, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल किए गए ड्रोन भी सैटेलाइट और स्पेस आधारित सेवाओं से जुड़े थे। संयुक्त सैन्य स्पेस सिद्धांत में क्या है? 2025 में संयुक्त कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के बाद जारी संयुक्त सैन्य स्पेस सिद्धांत ने पहली बार औपचारिक रूप से स्पेस को युद्ध के एक अलग क्षेत्र के रूप में स्वीकार किया। इसमें स्पेस को जमीन, समुद्र, हवा और साइबर के साथ एक पूर्ण सैन्य क्षेत्र माना गया है। इस सिद्धांत में विशेष रूप से मल्टी डोमेन वारफेयर, स्पेस आधारित ISR ऑपरेशन, स्पेस संसाधनों की सुरक्षा, एकीकृत कमांड सिस्टम और स्पेस क्षमताओं की लगातार उपलब्धता पर जोर दिया गया है। यह ढांचा 2019 में स्थापित डिफेंस स्पेस एजेंसी (DSA) की भूमिका को भी आगे बढ़ाता है। भारत सरकार ने स्पेस बेस्ड सर्विलांस (SBS) फेज-III परियोजना के तहत 2025 से 2029 के बीच 52 अतिरिक्त निगरानी सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना बनाई है। मेजर शैलेन्द्र सिंह चौहान के अनुसार प्रस्तावित SBS-III कॉन्स्टेलेशन का उद्देश्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर लगभग लगातार निगरानी बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में किसी क्षेत्र की दो तस्वीरों के बीच जो समय का अंतर होता है, उसे कम करना भविष्य की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। पाकिस्तान, चीन और बढ़ती स्पेस प्रतिस्पर्धा भारत की स्पेस रणनीति ऐसे समय में आगे बढ़ रही है जब पाकिस्तान और चीन के बीच स्पेस सहयोग लगातार बढ़ रहा है। धनंजय खोत ने कहा कि पाकिस्तान ने पिछले कई वर्षों में लगभग छह सैटेलाइट लॉन्च किए हैं। पाकिस्तान पहले अपनी निगरानी जरूरतों के लिए चीन और अन्य मित्र देशों से मिलने वाली जानकारी पर निर्भर था। अब वह अपनी स्वतंत्र स्पेस क्षमता विकसित करना चाहता है। पाकिस्तान का उद्देश्य भारतीय इलाकों पर नजर रखना और खुफिया जानकारी जुटाना है। हाल ही में जयपुर में ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर आयोजित जॉइंट कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए. मिनवाला ने कहा कि भारत वर्ष 2001 से सैन्य सैटेलाइट लॉन्च कर रहा है और सैन्य स्पेस संरचना के मामले में काफी आगे है। सैटेलाइट की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरीमेजर शैलेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि भविष्य की चुनौती केवल नए सैटेलाइट हासिल करना नहीं है। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि युद्ध के दौरान वे सुरक्षित रहें और लगातार काम करते रहें। इसी कारण दुनिया भर की सेनाएं स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस (SSA), स्पेस डोमेन अवेयरनेस (SDA), सैटेलाइट सुरक्षा और आवश्यकता पड़ने पर तेजी से नए स्पेस संसाधन उपलब्ध कराने जैसी क्षमताओं पर ध्यान दे रही हैं। निजी कंपनियां और स्टार्टअप भी बने सहयोगी धनंजय खोत ने बताया कि भारत का निजी स्पेस सेक्टर भी अब रक्षा से जुड़ी क्षमताओं में योगदान दे रहा है। कई निजी कंपनियां और स्टार्टअप्स डेटा विश्लेषण के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई संस्थानों ने सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर सुरक्षा एजेंसियों को उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराने में मदद की है। स्पेस उद्योग विशेषज्ञ सुब्बु वेंकटाचलम का मानना है कि मजबूत डिफेंस स्पेस क्षमता केवल सेना या सरकारी संस्थानों के भरोसे विकसित नहीं की जा सकती। भविष्य में सरकार, निजी उद्योग, स्टार्टअप्स और रिसर्च संस्थानों को मिलकर काम करना होगा। उनके अनुसार भारत के सामने केवल सैटेलाइट लॉन्च करने की चुनौती नहीं है। उतना ही जरूरी है कि उन्हें डिजाइन किया जाए, निर्मित किया जाए, लॉन्च किया जाए और अपने दम पर संचालित भी किया जाए। उन्होंने कहा कि मजबूत स्पेस क्षमता तभी विकसित होगी जब पूरे स्पेस सेक्टर में लगातार निवेश, तकनीकी विकास और औद्योगिक भागीदारी बढ़ेगी।
मौसम में आए अचानक बदलाव और मानसून की पहली बारिश के दस्तक देते ही जहां लोगों को चिलचिलाती गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ एक बड़े खतरे ने भी दस्तक दे दी है। रिमझिम फुहारों के साथ ही राजधानी और उसके आस-पास के इलाकों में मच्छरों से होने वाली जानलेवा बीमारी 'डेंगू' (Dengue) का खौफनाक खतरा तेजी से बढ़ने लगा है। जलजमाव और उमस भरे इस मौसम को मच्छरों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। इसी गंभीर चुनौती को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। राजधानी के सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) और नगर निगम की टीमों ने इस महामारी से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर अपनी व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।जलजमाव वाले हॉटस्पॉट चिन्हित और फॉगिंग के लिए विशेष टीमों का गठनबारिश का पानी जमा होने के कारण राजधानी के कई रिहाइशी इलाकों और स्लम बस्तियों में डेंगू का डंक फैलने का सबसे ज्यादा रिस्क रहता है। स्थानीय नगर निगम और स्वास्थ्य अधिकारियों ने शहर के उन संवेदनशील इलाकों को चिन्हित कर लिया है जहां पिछले सालों में डेंगू के सबसे ज्यादा मामले सामने आए थे। इन चिन्हित हॉटस्पॉट्स में जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है। इसके साथ ही, एंटी-लार्वा स्प्रे के छिड़काव और आधुनिक फॉगिंग मशीनों को काम पर लगा दिया गया है। नगर निगम की विशेष टीमें हर वार्ड में जाकर नालियों और खाली पड़े प्लॉटों में जमा पानी की चेकिंग कर रही हैं ताकि मच्छरों के पनपने के चक्र को शुरुआती चरण में ही तोड़ा जा सके।अस्पतालों में रिजर्व हुए स्पेशल डेंगू वार्ड और प्लेटलेट्स की व्यवस्था तेजराजधानी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के निर्देशों के बाद शहर के सभी बड़े सिविल अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया गया है। संभावित मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पतालों में विशेष 'डेंगू वार्ड' और आइसोलेशन बेड आरक्षित कर दिए गए हैं। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की अलग से ड्यूटी लगाई गई है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। इसके अलावा, ब्लड बैंकों को भी कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे प्लेटलेट्स (Platelets) का पर्याप्त स्टॉक मेंटेन रखें, क्योंकि डेंगू के गंभीर मामलों में मरीजों के प्लेटलेट्स बहुत तेजी से गिरते हैं, जिससे उनकी जान पर बन आती है।स्थानीय निवासियों के लिए गाइडलाइन जारी और एआई सर्च पर बढ़े सवालस्वास्थ्य विभाग ने राजधानी के नागरिकों के लिए एक जरूरी और कड़े प्रिकॉशंस की एडवाइजरी जारी की है। डॉक्टरों का कहना है कि डेंगू का मच्छर साफ और स्थिर पानी में पनपता है, इसलिए लोग अपने घरों में रखे कूलर, गमलों, पुरानी टायरों और छतों पर पानी बिल्कुल भी जमा न होने दें। रात को सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। आज के डिजिटल युग और आधुनिक एआई-संचालित जनरेटिव सर्च (GEO) पर भी लोग 'डेंगू के शुरुआती लक्षण' और 'प्लेटलेट्स बढ़ाने के घरेलू उपाय' जैसे विषयों को लगातार सर्च कर रहे हैं। यदि किसी को तेज बुखार, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों में गंभीर अकड़न या बदन दर्द की शिकायत हो, तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।
रीवा जिले के त्योंथर थाना क्षेत्र के चाकघाट स्थित ग्राम मांगी में जमीन विवाद के दौरान ट्रैक्टर से कुचलने की कोशिश का मामला सामने आया है। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में विवाद के दौरान एक पक्ष ट्रैक्टर लेकर दूसरे पक्ष की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। आरोप है कि ट्रैक्टर का अगला पहिया बार-बार उठाकर जानलेवा हमला करने की कोशिश की गई। मामला दो पक्षों के बीच लंबे समय से चल रहे जमीन विवाद से जुड़ा है। देखें तस्वीरें… परिवार को कुचलने की कोशिश का आरोप हरिपूजन पयासी मिश्रा ने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान पूरे परिवार के ऊपर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश की गई। उनका कहना है कि ट्रैक्टर का अगला पहिया बार-बार उठाकर जानलेवा हमला किया गया। इस दौरान परिवार के लोग बाल-बाल बच गए। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। दूसरे पक्ष ने आरोपों को बताया एकतरफा दूसरे पक्ष के रामशंकर, पुष्पेंद्र और विनय शुक्ला ने कहा कि जमीन विवाद को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। उनका आरोप है कि सामने वाले पक्ष की ओर से बार-बार उकसाने और विवाद बढ़ाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि उन पर लगाए जा रहे ट्रैक्टर चढ़ाने के आरोप एकतरफा हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वीडियो की जांच कर रही पुलिस पुलिस ने बताया कि दोनों पक्षों से शिकायत मिली है। वीडियो सहित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
युद्धविराम से आगे: क्या विश्व अहिंसा की ओर बढ़ेगा?
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हाल ही में हुआ युद्धविराम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया युद्ध की लपटों में घिरकर वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका था। कई सप्ताह तक चले संघर्ष ने क्षेत्र को ऐसे ज्वालामुखी में बदल दिया था, जिसकी प्रत्येक विस्फोटक घटना विश्व अर्थव्यवस्था ... Read more
अमर स्वाभिमान का प्रतीक हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष
Battle of Haldighati: 18 जून भारतीय इतिहास की वह अमर तिथि है, जो केवल एक युद्ध का स्मरण नहीं कराती बल्कि त्याग, स्वाभिमान, साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण की गाथा सुनाती है। यह वह दिन है जब मेवाड़ की धरती पर एक ऐसा संघर्ष हुआ, जिसने इतिहास के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
'वाराणसी' में दिखेगा महायुद्ध, भगवान राम और कुंभकर्ण के बीच होगा 30 मिनट का ऐतिहासिक टकराव!
दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली जब भी कोई नया प्रोजेक्ट लाते हैं, तो वह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक उत्सव बन जाता है। 'बाहुबली' और 'आरआरआर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद, राजामौली अब सुपरस्टार महेश बाबू के साथ अपनी अगली महात्वाकांक्षी ...
इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) हर हफ्ते दुनिया भर यूजर्स के सर्च और प्रोफाइल विजिट के आधार पर 'मोस्ट पॉपुलर इंडियन सेलिब्रिटीज' की लिस्ट जारी करता है। आमतौर पर इस लिस्ट के शीर्ष पर वही सुपरस्टार्स नजर आते हैं जिनकी बड़ी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज ...
खाड़ी युद्ध से निपटने की मोदी की तजबीज
मोदीजी ने एक बार फिर राष्ट्र की जनता को उसके कर्तव्यों के प्रति सचेत किया है।
ललित सुरजन की कलम से युद्ध नहीं, शांति चाहिए
जब एक तरफ सिर्फ एक सैनिक की गिरफ्तारी से उपजे भय और रिहाई की घोषणा से मिली राहत है, तब दूसरी तरफ आक्रामक मुद्रा अपनाकर हम क्या हासिल करना चाहते हैं?
युद्धविराम और हाशिए पर धकेल दिया गया भारत
यह युद्ध स्पष्ट रूप से नेतन्याहू की देन है और ट्रम्प इसके परिणामों के बारे में सोचे-समझे बिना ही इसमें फंस गए।
युद्ध के माहौल में विश्व शांति का शंखनाद है विश्व णमोकार दिवस
विश्व णमोकार दिवस- 9 अप्रैल, 2026 विश्व इतिहास के इस संक्रमणकाल में, जब मानवता युद्ध, हिंसा, आतंक, तनाव और असहिष्णुता के बोझ तले कराह रही है, ऐसे समय में 9 अप्रैल 2026 को मनाया जाने वाला विश्व णमोकार मंत्र दिवस एक अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा-विस्फोट के रूप में सामने आ रहा है। यह दिवस केवल एक ... Read more
धीरे-धीरे हकीकत में बदल रहे हैं भारत के ईरान युद्ध के डर
ईरान युद्ध को लेकर भारत की सबसे गहरी आर्थिक चिंताएं अब काल्पनिक नहीं रह गई हैं
युद्ध को लेकर मोदी का देश को डराने वाला संदेश
देश में जहां भी और जब भी चुनाव होते हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दूसरे सारे काम छोड़कर अपनी भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार में जुट जाते हैं
पश्चिम एशिया में युद्ध के दुष्प्रभाव से निपटने के लिए बेहतर नीतियों की ज़रूरत
वित्त वर्ष 2026-27 की ठीक शुरुआत में, जो 1 अप्रैल, 2026 से शुरू हो रहा है, भारत को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है
युद्ध के माहौल में महावीर के दर्शन की उपादेयता
सदियों पहले महावीर जनमे। वे जन्म से महावीर नहीं थे। उन्होंने जीवन भर अनगिनत संघर्षों को झेला, कष्टों को सहा, दुख में से सुख खोजा और गहन तप एवं साधना के बल पर सत्य तक पहुंचे, इसलिये वे हमारे लिए आदर्शों की ऊंची मीनार बन गये। उन्होंने समझ दी कि महानता कभी भौतिक पदार्थों, सुख-सुविधाओं, ... Read more
युद्धग्रस्त विश्व में महावीर की अहिंसा: शांति की एकमात्र राह
संदर्भ – तीर्थंकर महावीर स्वामी जन्म कल्याणक 2625वां (31 मार्च 2026) आज का विश्व एक विचित्र विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर विज्ञान, तकनीक और वैश्वीकरण ने मानव जीवन को अभूतपूर्व सुविधाएं दी हैं, वहीं दूसरी ओर युद्ध, हिंसा और असहिष्णुता ने मानवता के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विश्व के ... Read more
मिडिल ईस्ट युद्ध ने ट्रम्प की मुश्किलों को बढ़ाया
युद्ध के मामले में अमेरिका-इजरायल की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं।
पश्चिम एशिया युद्ध में परमाणु खतरे के प्रति लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अंतिम घोषित तिथि बढ़ा दी है।
अब युद्धविराम को लालायित ट्रंप
अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह लड़ाई अमेरिका को पहले ही महंगी पड़ रही है
फैक्ट चेक: इजरायल के डिमोना पर हमले के दावे से इराक का वीडियो हुआ वायरल
बूम ने पाया कि वायरल हो रहा वीडियो इराक के Nasiriyah स्थित एक रेस्टोरेंट में लगी आग का है.
ईरान युद्ध के सबक मौजूदा संघर्ष से कहीं आगे बाजार का आकार तय करेंगे
ऊर्जा बाजार एक ऐसे दौर में जा रहा है, जहां मूल्य निर्धारण मॉडल के आधार पर बनी पारंपरिक धारणाएं संघर्ष के बदलते स्वरूप से पूरी तरह बदल रही हैं
ईरान युद्ध में नाटो से अलग-थलग पड़े ट्रंप की परीक्षा की घड़ी
बुधवार को, अमेरिका-इजरायल गठबंधन के ईरान के खिलाफ युद्ध के 18वें दिन, ट्रंप को एक साथ दो बुरी खबरें मिलीं
लीजा रे ने दुबई से शेयर की दर्दभरी कविता, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच जताई चिंता
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। हर तरफ धमाकों और सायरन का शोर सुनाई दे रहा है। एक्ट्रेस लीजा रे भी इन हालातों के बीच दुंबई में अपने घर ...
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता, बेटी के साथ सुरक्षित लौटीं भारत, सुनाई आपबीती
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता भी अपनी 14 साल की बेटी सायरा के साथ यूएई में ...
ईरान के अखबार तेहरान टाइम्स ने अपने पहले पन्ने पर एक मार्मिक और भीतर तक झकझोरने वाली तस्वीर छापी है
ईरान युद्ध से भारतीय अर्थव्यवस्था को जोरदार झटका संभव
पश्चिम एशिया में चल रहे व्यापक युद्ध, जिसमें अमेरिका-इज़राइल जोड़ी और ईरान शामिल हैं
एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज़ की '120 बहादुर' को लेकर चर्चा अब अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। फिल्म ट्रेलर ने पूरी तरह से रोमांच और प्रेरणा का सही मिश्रण पेश किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बलिदान दिवस पर मेजर शैतान सिंह ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला अपनी खूबसूरती से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। उर्वशी ने बेहद ही कम समय में एक अलग मुकाम हासिल किया है। वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों के साथ 'मिलने और अभिवादन' के क्षणों में संलग्न रहती है। ऐसा ही एक क्षण था जब ...
सलमान खान की सिकंदर के आखिरी गाने में दिखेगा जबरदस्त जलवा, तुर्की से बुलाए गए 500 डांसर्स!
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की 'सिकंदर' इस साल की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके एक्शन-पैक्ड टीजर ने इसकी भव्य एंट्री के लिए एकदम परफेक्ट माहौल तैयार कर दिया है। भव्य पैमाने पर बनाई गई इस फिल्म में ...
केसरी वीर के लिए सूरज पंचोली ने की कड़ी ट्रेनिंग, ऐसे सीखा युद्ध कौशल
बॉलीवुड एक्टर सूरज पंचोली अपनी पहली बायोपिक में वीर हामीरजी गोहिल के ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने जा रहे हैं। सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय और सूरज पंचोली अभिनीत फिल्म 'केसरी वीर : लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ' का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ...
फरहान अख्तर लेकर आ रहे भारत-चीन युद्ध पर आधारित फिल्म 120 बहादुर, निभाएंगे मेजर शैतान सिंह का रोल
Movie 120 Bahadur : रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट, ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज के साथ मिलकर '120 बहादुर' को पेश करने के लिए उत्साहित हैं। यह फिल्म मेजर शैतान सिंह (पीवीसी) और चार्ली कंपनी, 13 कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिकों की कहानी कहती ...
Adil Hussain: दुनियाभर में इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 की धूम मची हुई है। पेरिस ओलंपिक में दुनियाभर के खिलाड़ियों ने भाग लिया है। भारत के कई खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। हाल ही में तुर्की के शूटर यूसुफ डिकेक ने सिल्वर मेडल जीता।
बॉर्डर की 27वीं सालगिरह पर, अभिनेता सनी देओल ने एक घोषणा वीडियो के ज़रिए फ़्रैंचाइज़ी के दूसरे संस्करण की पुष्टि की है। अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सनी ने बॉर्डर 2 में अपनी वापसी की आधिकारिक घोषणा करते हुए एक वीडियो शेयर किया और इसे 'भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म' बताया। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ''एक फौजी अपने 27 साल पुराने वादे को पूरा करने के बाद, आ रहा है फिर से। भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म, बॉर्डर 2।'' इस फिल्म का निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता करेंगे। आगामी युद्ध फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह करेंगे। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | पति से तकरार के बीच केन्या लौट गई हैं Dalljiet Kaur? शादी को बचाने की कर रही कोशिश सनी द्वारा घोषणा वीडियो शेयर किए जाने के तुरंत बाद, सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए कमेंट सेक्शन में बाढ़ ला दी। एक यूज़र ने लिखा, ''वाह, यह बहुत बढ़िया घोषणा है सर जी, जय हिंद।'' दूसरे ने लिखा, ''बहुत उत्साहित हूँ।'' तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, ''बॉर्डर 2 के लिए बहुत उत्साहित हूं।'' इसे भी पढ़ें: NDA पर इमोशनल बयान, काले सूट में ली मंत्री पद की शपथ और शर्मिला अंदाज, Tripti Dimri की तरह रातों रात भारत के Sensation बन गये Chirag Paswan सनी देओल की अन्य परियोजनाएं उन्हें आखिरी बार अमीषा पटेल के साथ गदर 2 में देखा गया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही और इसे ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर घोषित किया गया। गदर 2 की सफलता के बाद, सनी ने लाहौर 1947 सहित कई फिल्में साइन कीं, जिसे आमिर खान के प्रोडक्शन बैनर के तहत बनाया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जिन्होंने आमिर को कल्ट क्लासिक अंदाज़ अपना अपना (1994) में निर्देशित किया था। View this post on Instagram A post shared by Sunny Deol (@iamsunnydeol)
Kalki 2898 AD: शुरू हो गया नया युद्ध, पूरे ट्रेलर की अहम कड़ी हैं अमिताभ, प्रभास करेंगे इम्प्रेस
Kalki 2898 AD के ट्रेलर को देखें तो, फिल्म कल्कि 2898 एडी के मेकर्स ने विश्वास दिलाया है कि ये फिल्म लोगों को बांधने में कामयाब होगी. टफ सीक्वेंस, क्लियर एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर आपका ध्यान खींचते हैं. वीएफएक्स पर भी अच्छा काम किया गया है.
आशुतोष राणा ने डीपफेक वीडियो को बताया 'माया युद्ध', बोले- ये सालों से चल रहा
आशुतोष ने कहा कि ऐसी बातों में खुद को डिफेंड करने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि जो लोग आपको जानते हैं वो सवाल करेंगे ही नहीं. और जो नहीं जानते, उन्हें किसी रिस्पॉन्स से फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वो दिमाग में आपकी एक छवि बना चुके होते हैं.
दर्शक काफी समय से रैपर बादशाह और हनी सिंह के बीच जुबानी जंग देख रहे हैं। दोनों का रिश्ता सालों से विवादों से भरा रहा है। हालांकि करियर के शुरुआती दिनों में बादशाह और हनी सिंह के बीच अच्छी दोस्ती हुआ करती थी। हालाँकि, ऐसा लगता है कि सफलता और पैसे ने धीरे-धीरे इस दोस्ती को पूरी तरह से खत्म कर दिया। अब दोनों अक्सर एक दूसरे पर तंज कसते नजर आते हैं। हाल ही में हनी सिंह एक होली पार्टी में शामिल हुए, जहां उन्होंने बादशाह के 'पापा कमबैक' वाले कमेंट का करारा जवाब दिया। रैपर का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसे भी पढ़ें: Punjab Kings के खिलाफ जीत के बाद इंटरनेट पर Virat Kohli का Anushka Sharma के साथ वीडियो कॉल, FLY KISS देते नजर आये खिलाड़ी हनी सिंह ने बादशाह पर किया पलटवार बादशाह कुछ दिनों पहले हनी सिंह पर अपनी टिप्पणी को लेकर चर्चा में थे, जिसमें उन्होंने हनी सिंह की वापसी पर कटाक्ष किया था। अब सिंगर और रैपर हनी सिंह ने एक कमेंट के जरिए बादशाह को करारा जवाब दिया है और कहा है कि उन्हें बादशाह को जवाब देने के लिए मुंह खोलने की जरूरत नहीं है। उनके फैन ही काफी हैं जो हर चीज पर बात कर सकते हैं। उन्होंने अपने गाली वाले अंदाज में अपने फैंस से बात करते हुए बादशाह का जवाब दिया। हनी सिंह को सोमवार को मुंबई में एक होली पार्टी में परफॉर्म करते देखा गया और यहीं उन्होंने बादशाह पर कटाक्ष किया। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा, हर कोई कहता है, रिप्लाई करो, रिप्लाई करो... मैं क्या रिप्लाई करूं... आप लोग तो उनके सारे कमेंट्स का बहुत अच्छे से रिप्लाई कर चुके हैं। मुझे मुंह खोलने की जरूरत है। ऐसा नहीं होता है। जैसे ही भीड़ ने उनके लिए तालियां बजाईं, गायक ने कहा, मुझे बोलने की जरूरत नहीं है। आप लोग खुद पागल हैं। हनी सिंह पागल हैं और उनके प्रशंसक भी पागल हैं। इसे भी पढ़ें: Taapsee Pannu के पति Mathias Boe आखिर कौन है? जब सफल भी नहीं थी एक्ट्रेस तब से उन्हें प्यार करते थे बैडमिंटन खिलाड़ी रैपर बादशाह ने क्या कहा? आपको बता दें कि हाल ही में बादशाह ने हनी सिंह पर कमेंट करते हुए कहा था, ''मुझे एक पेन और कागज दो। मैं तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लाया हूं। मैं कुछ गाने लिखूंगा और तुम्हें दूंगा। पापा की वापसी तुम्हारे साथ होगी।'' Kalesh Controversy B/w Honey Singh and Badshah (Honey Singh Replied to Badshah) pic.twitter.com/o74t423bgS — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 25, 2024 Kalesh Between Badshah & Honey Singh Fans on Stage during Live Concert pic.twitter.com/M4VqSqLSc3 — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 19, 2024
आखिर क्यों Indira Gandhi ने Aandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध, आज भी देखने से कतराते हैं लोग
आखिर क्यों Indira Gandhi नेAandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध,आज भी देखने से कतराते हैं लोग
'सावरकर' रिव्यू: खोखली, एकतरफा फिल्म में एकमात्र अच्छी चीज है रणदीप हुड्डा का काम
आज के दौर में 'गुमनाम' हो चुके एक स्वतंत्रता नायक की कहानी कहने निकली ये फिल्म, एक अनजान कहानी बताने से ज्यादा अपने हीरो विनायक दामोदर सावरकर को बाकियों के मुकाबले अधिक 'वीर' बताने पर फोकस करने लगती है.
अस्तित्व और बदले के लिएब्रह्मांड में शुरू होने वाला है महायुद्ध, एक्शन और रोमांच से भरपूर हैRebel Moon 2 का धांसू ट्रेलर

