रेल कोच फैक्ट्री (RCF) कपूरथला के वर्कर्स क्लब चुनाव में 'RCF एम्प्लाइज यूनियन' (RCFEU) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए सभी 8 सीटों पर कब्जा कर लिया है। क्लब प्रबंधन के लिए 9 जुलाई को मतदान हुआ था, जिसकी मतगणना 10 जुलाई को संपन्न हुई। कर्मचारियों ने विपक्ष के आरोपों को दरकिनार करते हुए यूनियन के पक्ष में स्पष्ट और एकतरफा जनादेश दिया। इस चुनाव में सेक्रेटरी पद पर भरतराज और कैशियर पद पर अवतार सिंह ने भारी मतों से जीत हासिल की। वहीं, क्लब के अन्य 6 सदस्य पदों के लिए हरप्रीत सिंह, अश्वनी कुमार, पंकज कुमार सिंह, भान सिंह, हरिओम मीना और संदीप कुमार ने भी रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की है। सहयोगी संगठनों का समर्थन और जश्न इस बड़ी जीत में RCF की आईआरटीएसए (IRTSA) के प्रधान इंजी. दर्शन लाल और जोनल सचिव इंजी. जगतार सिंह की टीम के साथ-साथ इंजीनियरिंग एसोसिएशन के प्रधान इंजी. जगदीश सिंह और जोनल सचिव इंजी. बक्शीश सिंह की टीम का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। नतीजे घोषित होते ही RCF कारखाने और कॉलोनियों में कर्मचारियों ने ढोल-नगाड़ों और मिठाई बांटकर जीत का जश्न मनाया। यूनियन की प्रतिक्रिया: 'सच्चाई और 25 वर्षों की सेवा की जीत' RCFEU के महासचिव सर्बजीत सिंह और प्रधान अमरीक सिंह ने सभी कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए इसे विरोधियों के झूठे प्रोपेगैंडा के खिलाफ 'सच्चाई की जीत' बताया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने यूनियन द्वारा पिछले 25 वर्षों में किए गए निस्वार्थ सेवा भाव और समर्पण को सराहा है। युवा टीम और महिला विंग का विशेष आभार महासचिव सर्वजीत सिंह ने चुनाव प्रचार में दिन-रात मेहनत करने वाली यूनियन की 'युवा टीम' और भारी समर्थन देने वाली 'महिला विंग' का विशेष धन्यवाद किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह जीत यूनियन की जिम्मेदारी को और बढ़ाती है तथा नवनिर्वाचित टीम कर्मचारियों के कल्याण और क्लब को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए निरंतर कार्य करेगी।
मंत्रालय में बाबू और विधायकों के निजी सचिव (पीए) के रूप में कार्य कर रहे शिक्षकों का अटैचमेंट समाप्त कर उन्हें मूल स्कूलों में भेजने के आदेश के बावजूद कई शिक्षकों ने अब तक अपनी मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। बताया जा रहा है कि राजनीतिक रसूख के दम पर कुछ शिक्षक अपने रिलीविंग आदेश निरस्त कराकर दोबारा पूर्व स्थान पर ही पदस्थ होने की कोशिश में लगे हैं। इस बीच उनकी ई-अटेंडेंस भी मूल विद्यालय से दर्ज नहीं हो रही है। मामले को लेकर शासकीय शिक्षक संगठन, मध्यप्रदेश ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत विस्तृत जानकारी मांगने का निर्णय लिया है। संगठन का कहना है कि इससे शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी। आरटीआई के जरिए मांगी जाएगी पूरी जानकारी संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने बताया कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत उन शिक्षकों की जानकारी मांगी जाएगी जो अटैचमेंट समाप्त होने के बाद भी अपनी मूल संस्था में उपस्थित नहीं हुए हैं या जिनकी ई-अटेंडेंस मूल विद्यालय की लोकेशन से दर्ज नहीं हो रही है। आरटीआई के माध्यम से संगठन ऐसे शिक्षकों की सूची, उनकी मूल पदस्थापना, अटैचमेंट समाप्त करने के आदेश, मूल विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने की स्थिति और विभाग द्वारा की गई कार्रवाई से संबंधित जानकारी प्राप्त करेगा। 'नियम सभी पर समान रूप से लागू हों' उपेन्द्र कौशल ने कहा कि यदि शिक्षा विभाग सभी कर्मचारियों पर समान नियम लागू होने का दावा करता है, तो उनका पालन भी बिना किसी भेदभाव के होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि विभागीय व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समानता सुनिश्चित करना है। आवश्यक होने पर प्राप्त जानकारी के आधार पर सक्षम अधिकारियों से आगे की कार्रवाई की मांग भी की जाएगी। 213 शिक्षक पढ़ाने के बजाय दूसरे विभागों में कर रहे थे काम लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि शिक्षकों को उनकी मूल पदस्थापना वाले विद्यालयों में भेजा जाए और यदि वे किसी अन्य विभाग में अटैच हैं तो उनका अटैचमेंट तत्काल समाप्त किया जाए। निर्देशों के बाद प्रदेशभर में 213 शिक्षक ऐसे मिले जो शिक्षण कार्य छोड़कर अन्य विभागों में सेवाएं दे रहे थे। इनमें से भोपाल के 52 शिक्षक शामिल थे। कुछ मंत्रालय में बाबू के रूप में कार्यरत थे, जबकि कुछ विधायकों के पीए के रूप में सेवाएं दे रहे थे। इन सभी शिक्षकों को एकतरफा रिलीव करने की कार्रवाई की जा चुकी है। भोपाल में केवल एक दर्जन शिक्षकों ने किया जॉइन विभागीय सूत्रों के अनुसार, भोपाल के 52 शिक्षकों में से अब तक केवल करीब एक दर्जन शिक्षक ही अपनी मूल पदस्थापना वाले विद्यालयों में लौटे हैं। शेष शिक्षकों ने अभी तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। बताया जा रहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी भी इनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं, जबकि कई शिक्षक दोबारा पूर्व पदस्थापना बनाए रखने के लिए विभागीय अधिकारियों पर दबाव बनाने में जुटे हैं।
ट्रंप बोले- ईरान के साथ युद्धविराम खत्म, लेकिन बातचीत जारी; तेहरान ने वार्ता की अटकलों से किया इनकार
ट्रंप के बयान से यह संकेत मिलता है कि पिछले महीने जिस युद्धविराम व्यवस्था के तहत दोनों देशों के बीच तनाव कम हुआ था, वह अब प्रभावी नहीं रही। इसके बावजूद कूटनीतिक प्रयास जारी हैं और दोनों पक्ष प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संवाद के विकल्प खुले रखना चाहते हैं।
वैश्विक डिफेंस और जियोपॉलिटिक्स के मंच से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। रूस का सबसे घातक और अचूक माना जाने वाला S-400 ट्रायम्फ मिसाइल डिफेंस सिस्टम (S-400 Missile System) इस समय दो अलग-अलग देशों के लिए बिल्कुल अलग कहानी लिख रहा है। एक तरफ जहां यह अत्याधुनिक सिस्टम भारत की सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक अभेद्य और मजबूत ढाल बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ तुर्की (Turkey) के लिए यह एक बड़ा सिरदर्द और अंतरराष्ट्रीय बवाल का कारण बन चुका है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन अब इस सिस्टम को किसी तीसरे देश को बेचने या इससे पीछा छुड़ाने के रास्ते तलाश रहे हैं, लेकिन इस पूरे सौदे की चाबी अब भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हाथों में है।तुर्की के लिए क्यों गले की फांस बन गया रूस का यह महाविनाशक सिस्टम?तुर्की ने जब अमेरिका के कड़े विरोध और प्रतिबंधों की धमकियों को दरकिनार कर रूस से S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदा था, तो इसे एर्दोगन का एक बड़ा और स्वतंत्र रणनीतिक कदम माना गया था। लेकिन इस एक फैसले की तुर्की को बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ी। अमेरिका ने न केवल तुर्की पर सख्त 'काट्सा' (CAATSA) प्रतिबंध लगाए, बल्कि उसे अपने सबसे आधुनिक F-35 स्टील्थ फाइटर जेट प्रोग्राम से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके चलते तुर्की की वायुसेना को आधुनिक लड़ाकू विमानों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। अब अपनी खोई हुई सैन्य ताकत और अमेरिका के साथ रिश्तों को सुधारने के लिए तुर्की इस रूसी सिस्टम को किसी तरह ठिकाने लगाना चाहता है, जिससे वह F-35 प्रोग्राम में दोबारा एंट्री पा सके।भारत का S-400 और तुर्की का सौदा: दोनों में क्या है बुनियादी अंतर?जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट्स और रक्षा मामलों के विश्लेषकों का मानना है कि भारत और तुर्की के मामलों में जमीन-आसमान का अंतर है। भारत ने अपनी संप्रभुता और सीमाओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए रूस के साथ यह डील की थी और अमेरिकी दबाव के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया था। भारतीय वायुसेना (IAF) ने S-400 के स्क्वाड्रनों को चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर इस तरह तैनात किया है कि दुश्मन का कोई भी विमान या मिसाइल भारत की हवाई सीमा में घुसने की हिम्मत नहीं कर सकता। भारत के लिए यह रक्षा का सबसे बड़ा हथियार है, जबकि तुर्की के लिए यह केवल एक राजनीतिक और आर्थिक बोझ बनकर रह गया है।डिफेंस एक्सपर्ट्स का बड़ा दावा: तुर्की चाहकर भी S-400 को इतनी आसानी से किसी तीसरे देश को नहीं बेच सकता। रूस के साथ हुए मूल समझौते में एंड-यूज़र सर्टिफिकेट (End-User Certificate) की सख्त शर्तें शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि मॉस्को यानी व्लादिमीर पुतिन की लिखित अनुमति के बिना तुर्की इस सिस्टम के एक नट-बोल्ट को भी किसी को ट्रांसफर नहीं कर सकता। पुतिन इस समय पूरी तरह से ड्राइविंग सीट पर हैं और वह अमेरिका को फायदा पहुंचाने वाला कोई भी कदम आसानी से नहीं उठाने देंगे।वैश्विक रक्षा बाजार और भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी पर इसका असरइस पूरे घटनाक्रम का असर केवल तुर्की तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के रक्षा बाजार और भारत-रूस के मजबूत रणनीतिक रिश्तों की गवाही देता है। दुनिया के रक्षा जानकार अब भारत की उस कूटनीतिक जीत की तारीफ कर रहे हैं, जिसके तहत भारत ने रूस से हथियार भी खरीदे और अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को भी प्रभावित नहीं होने दिया। तुर्की की इस छटपटाहट और पुतिन के कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक मिलिट्री डील्स में केवल पैसा ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी कूटनीति और मजबूत वैश्विक साख की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री (Bhojpuri Cinema) के दो बड़े दिग्गज—सुपरस्टार खेसारी लाल यादव और मशहूर एक्ट्रेस अंजना सिंह इन दिनों एक बेहद गंभीर और तीखे विवाद को लेकर सुर्खियों में हैं. एक टॉक शो (पॉडकास्ट) में अंजना सिंह द्वारा खेसारी के पुराने बयान पर टिप्पणी करने के बाद शुरू हुआ यह मामला अब व्यक्तिगत हमलों, सोशल मीडिया ट्रोलिंग और लाइव आकर धमकी देने तक पहुंच चुका है. हालात इतने बिगड़ गए हैं कि दोनों स्टार्स के समर्थक भी आमने-सामने आ गए हैं. आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि आखिर इस पूरे हाई-प्रोफाइल विवाद की जड़ क्या है.कहां से शुरू हुआ विवाद? खेसारी लाल यादव का कास्टिंग काउच पर बयानइस पूरे फसाद की शुरुआत कुछ महीने पहले खेसारी लाल यादव द्वारा कास्टिंग काउच (Casting Couch) को लेकर दिए गए एक बेबाक इंटरव्यू से हुई थी. खेसारी ने कहा था:भोजपुरी इंडस्ट्री की लगभग हर एक्ट्रेस यही कहती है कि यहाँ कास्टिंग काउच चलता है, लेकिन मैं अपने टैलेंट के दम पर आगे बढ़ी हूँ और मैंने कोई समझौता नहीं किया. अगर सभी 10 मुख्य एक्ट्रेसेस यही कहती हैं कि उनके साथ कुछ गलत नहीं हुआ, तो फिर यह सब हो किसके साथ रहा है? जब इंडस्ट्री में इतनी ही गंदगी है, तो आप सब यहाँ काम ही क्यों कर रही हैं?खेसारी ने यह भी आरोप लगाया था कि एक्ट्रेसेस इस तरह की बातें सिर्फ भोजपुरी फिल्म डायरेक्टर्स, प्रोड्यूसर्स और को-एक्टर्स की छवि को खराब करने और उन्हें नीचा दिखाने के लिए कहती हैं.पॉडकास्ट में अंजना सिंह की टिप्पणी और 'शब्दों की कमी' वाला तंजबीते 3 जुलाई को एक्ट्रेस अंजना सिंह का एक पॉडकास्ट (Podcast) सामने आया, जिसमें उनसे खेसारी के इसी पुराने बयान पर राय मांगी गई. इस पर अंजना ने हंसते हुए कहा, खेसारी जी तो कुछ भी बोलते हैं. असल में वो बोलना तो सही सेंस में चाहते हैं, लेकिन जो आउटपुट (शब्द) बाहर आता है, वो सुनने में थोड़ा गड़बड़ लगता है.अंजना सिंह का कहना है कि इस बयान के लाइव होने के बाद से ही खेसारी लाल यादव के कतिपय कट्टर समर्थकों ने उन्हें सोशल मीडिया पर बुरी तरह ट्रोल करना शुरू कर दिया. ट्रोलर्स ने न सिर्फ अंजना को गालियां दीं, बल्कि उनकी नाबालिग बेटी को लेकर भी बेहद आपत्तिजनक और भद्दी टिप्पणियां कीं, जिसके बाद अंजना का गुस्सा फूट पड़ा.अंजना सिंह का लाइव वीडियो: खेसारी के टीम मेंबर को दिखाई चप्पलट्रोलिंग से परेशान अंजना सिंह ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर लाइव आकर ट्रोलर्स को मुंहतोड़ जवाब दिया. उन्होंने साफ किया कि उन्होंने खेसारी का कोई अपमान नहीं किया था, बल्कि सिर्फ यह कहा था कि शब्दों की कमी की वजह से उनकी बातों का गलत मतलब निकल जाता है.इसी दौरान अपने एक अन्य लाइव सेशन में अंजना सिंह ने खेसारी लाल यादव की कोर टीम के सदस्य अखिलेश कश्यप पर उन्हें सीधे तौर पर धमकी देने का आरोप लगाया. अंजना ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए लाइव कैमरे के सामने अपनी चप्पल दिखाई और अखिलेश कश्यप को 'चमचा' संबोधित करते हुए कहा, यह चप्पल देख रहे हो न, इसी से मारूंगी और मुंह लाल कर दूंगी.निजी जिंदगी पर अटैक: 'पत्नी ने रंगे हाथों पकड़ा था'यह विवाद तब और ज्यादा व्यक्तिगत हो गया जब अंजना सिंह ने खेसारी लाल यादव की पर्सनल लाइफ को लेकर एक सनसनीखेज दावा कर दिया. अंजना ने आरोप लगाया कि एक बार खेसारी की पत्नी ने उन्हें किसी दूसरी भोजपुरी हीरोइन के साथ रंगे हाथों (Red Handed) पकड़ लिया था और उस समय खेसारी की जमकर पिटाई भी हुई थी. इसके साथ ही अंजना ने खेसारी और उन्हें गाली देने वाले उनके समर्थकों को 'अनपढ़' बताते हुए कहा कि इन लोगों को सही शिक्षा और तमीज की सख्त जरूरत है.खेसारी लाल यादव ने लाइव आकर समर्थकों को कहा 'थैंक्यू'इस पूरे घटनाक्रम और निजी आरोपों के बाद सुपरस्टार खेसारी लाल यादव भी इंस्टाग्राम पर लाइव आए. हालांकि, उन्होंने पूरे वीडियो में कहीं भी सीधे तौर पर अंजना सिंह का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने इस मुश्किल वक्त में उनके साथ खड़े रहने और उनका पक्ष लेने के लिए अपने करोड़ों फैंस और समर्थकों का आभार व्यक्त किया. फिलहाल, सोशल मीडिया पर दोनों ही कलाकारों के फैंस अपनी-अपनी तरफ से पोस्ट और वीडियो डालकर जंग लड़ रहे हैं और यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है.
भिलाई के वैशाली नगर थाना क्षेत्र में 19 साल की फार्मेसी स्टूडेंट खुशी साहू की एकतरफा प्यार में हत्या कर दी गई। आरोपी पिंटू साहू पिछले करीब एक महीने से खुशी को अलग-अलग नंबरों से कॉल कर परेशान कर रहा था। खुशी ने उसका नंबर ब्लॉक कर दिया था। इसी बात से नाराज होकर आरोपी रायपुर से भिलाई पहुंचा और किराए के कमरे में घुसकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी पिंटू साहू को रायपुर से गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि आरोपी मूलत: बलौदाबाजार का रहने वाला है। शनिवार को पुलिस उसे सीन रिक्रिएट करने के लिए रामनगर स्थित घटनास्थल पर लेकर पहुंची। हत्या के दौरान आरोपी के हाथ में भी गंभीर चोट लगी है। पुलिस उससे पूछताछ कर पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस आज इस मामले का खुलासा करेगी। सुबह दो बार कॉल किया, नंबर ब्लॉक मिलापुलिस के मुताबिक शुक्रवार सुबह पिंटू ने खुशी को दो बार कॉल किया था। खुशी ने उसका नंबर पहले ही ब्लॉक कर रखा था, इसलिए बात नहीं हो सकी। इसके बाद आरोपी ने खुशी की सहेली को फोन किया। सहेली ने पिंटू को बताया कि खुशी के पास मोबाइल नहीं है। इसके बाद आरोपी बाइक से सीधे खुशी के रामनगर स्थित किराए के कमरे पर पहुंच गया। उस समय खुशी की सहेली बाथरूम में नहाने गई थी। कमरे में खुशी अकेली थी। पहले गला दबाया, फिर चाकू से किए 10 वारपुलिस जांच में सामने आया है कि कमरे में पहुंचने के बाद आरोपी ने खुशी से विवाद किया। इसके बाद उसने खुशी का गला दबा दिया। गला दबाने से खुशी बेसुध हो गई। इसके बाद आरोपी ने चाकू से उसके पीठ, हाथ और पेट पर करीब 10 वार किए। गंभीर चोट और ज्यादा खून बहने से खुशी की मौत हो गई। वारदात के दौरान आरोपी पिंटू के हाथ में भी गंभीर चोट आई। हत्या के बाद वह कमरे से निकलकर फरार हो गया और रायपुर की ओर चला गया। भाई को बताया था एक युवक कर रहा है परेशान खुशी की सहेली जब बाथरूम से बाहर आई तो उसने खुशी को कमरे में खून से लथपथ पड़ा देखा। उसने तुरंत मकान मालिक और पास के कैफे संचालक को इसकी जानकारी दी। इसके बाद डायल 112 को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और खुशी को अस्पताल लेकर गई। यहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस जांच में पता चला है कि खुशी ने करीब एक सप्ताह पहले अपने भाई को पिंटू के बारे में बताया था। उसने कहा था कि एक युवक लगातार अलग-अलग नंबरों से फोन कर उसे परेशान कर रहा है। आरोपी ने दो दिन पहले खुशी के भाई को भी धमकी दी थी। इसके अलावा उसने उस कैफे संचालक को भी धमकाया था, जहां खुशी पार्ट टाइम नौकरी करती थी। पिंटू चाहता था कि खुशी नौकरी छोड़ दे और उससे शादी करे। ऑनलाइन मंगवाया था हत्या में इस्तेमाल चाकूखुशी निजी कॉलेज से फार्मेसी की पढ़ाई कर रही थी। इसके साथ ही वह बेमेतरा में बीए की परीक्षा भी दे रही थी। गुरुवार को ही उसका भाई उसे भिलाई छोड़कर गया था। अगले दिन शुक्रवार को उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने वारदात में इस्तेमाल चाकू ऑनलाइन मंगवाया था। हत्या के बाद वह रायपुर भाग गया था। पुलिस ने उसकी तलाश कर रायपुर से गिरफ्तार कर लिया। शनिवार को उसे घटनास्थल पर लाकर सीन रिक्रिएट कराया गया। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगा रही है कि उसने हत्या की प्लानिंग कब और कैसे की थी।
एमपी कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी और लेखक नियाज खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने लिखा कि भारत में मॉब लिंचिंग की घटनाओं से बचने के लिए मुस्लिमों को अपना पहनावा बदलकर तुर्की के मुसलमानों जैसा पहनावा अपनाना चाहिए, ताकि उनकी पहचान आसानी से न हो सके। नियाज खान ने अपने पोस्ट में लिखा कि भारत में मॉब लिंचिंग के ज्यादातर मामलों में पीड़ित कुर्ता, पायजामा, दाढ़ी और टोपी पहने हुए थे। उनका कहना है कि इस पहनावे से उनकी पहचान आसानी से हो जाती है। इसलिए मुस्लिमों को अपना ड्रेस और हुलिया बदल लेना चाहिए। लोकतंत्र पर भी उठाए सवाल एक अन्य पोस्ट में नियाज खान ने लोकतंत्र पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि कई आजाद देशों ने लोकतंत्र तो अपनाया, लेकिन उसके मूल सिद्धांत नहीं अपनाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र के नाम पर नेता और अफसर जमकर पैसा लूटते हैं, जबकि जनता मुफ्त की सुविधाओं में व्यस्त रहती है। भौतिकवाद और राजनीति पर भी पोस्ट 9 जुलाई को किए गए अन्य पोस्ट में नियाज खान ने लिखा कि भौतिकवाद ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है और लोगों को इस पर विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम और ईमानदार लोगों को राजनीति में आना चाहिए, क्योंकि आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों के चुने जाने से लोकतंत्र कमजोर होता है।
मिडिल ईस्ट (Middle East) में शांति और युद्धविराम की कोशिशों को एक बार फिर बहुत बड़ा झटका लगा है। गुरुवार को अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे भीषण और रणनीतिक हवाई हमले (Airstrikes) किए हैं। इन हमलों से ईरान का सरकारी मीडिया और कई शहर थर्रा उठे हैं।सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि अमेरिका ने इस बार ईरान के एकमात्र बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट कॉम्प्लेक्स (Bushehr Nuclear Power Plant) के बेहद नजदीकी इलाके को निशाना बनाया है, जिससे परमाणु हादसे का खतरा भी पैदा हो गया था। इस भीषण सैन्य गोलाबारी ने कुछ ही समय पहले हुए उस नाजुक अंतरिम समझौते को पूरी तरह वेंटिलेटर पर ला दिया है, जिसका मकसद क्षेत्र में शांति स्थापित करना था।खामेनेई को दफनाने के तुरंत बाद बुशहर पर गिराए बमईरान के लिए गुरुवार का दिन बेहद भावुक और तनावपूर्ण था। कई दिनों के राष्ट्रीय शोक के बाद, ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (जिनकी मौत 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआती गोलाबारी में हो गई थी) को उनके गृहनगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया गया था। ठीक इसी अंतिम संस्कार के दौरान अमेरिका ने ईरान की रीढ़ तोड़ने के लिए ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए।बुशहर के स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी एहसान जहानियन के हवाले से सरकारी समाचार एजेंसी 'इरना' ($IRNA$) ने पुष्टि की है कि अमेरिकी विमानों ने दोपहर के समय सीधे न्यूक्लियर प्लांट के पास बमबारी की। हालांकि, अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने इसे ईरान की उस सैन्य क्षमता को नष्ट करने की कार्रवाई बताया है, जो होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बनी हुई थी।अमेरिका के 90 ठिकानों पर हमले, ईरान का पलटवार: 14 की मौतअमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने इन हमलों के ब्लैक-एंड-व्हाइट फुटेज जारी किए हैं, जिनमें ईरानी एयरपोर्ट के रनवे, मिसाइल लॉन्चर और उत्तर-पूर्वी गोलिस्तान प्रांत में स्थित रेलवे के बड़े पुलों को नष्ट होते हुए देखा जा सकता है।नुकसान का आंकड़ा: ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले दो दिनों में हुए इन अमेरिकी हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश सुरक्षा बलों के सदस्य थे, जबकि 78 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं।ईरान का जवाबी हमला: ईरान ने भी इस कार्रवाई का तुरंत बदला लेते हुए खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और उसके सहयोगी देशों को निशाना बनाया। जॉर्डन, कुवैत और कतर की तरफ ईरान की ओर से कई बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें दागी गईं।सहयोगियों का हाल: बहरीन में, जहां अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े का मुख्यालय है, हमलों के डर से तीन बार सायरन गूंजे। कुवैती सेना ने दावा किया कि उसने 3 बैलिस्टिक मिसाइलों और 10 ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया, हालांकि इसके मलबे से एक नागरिक घायल हो गया। जॉर्डन सरकार ने भी ईरान के हमलों को रोकने का दावा किया है।'ईरान को दादागिरी की कीमत चुकानी होगी' - डोनाल्ड ट्रंप की दोटूकतुर्की में नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से बाहर निकलने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान में हुए धमाकों के वीडियो पोस्ट करते हुए इस्लामिक गणराज्य को बेहद सख्त चेतावनी दी।ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में तीन अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों पर ईरान द्वारा किए गए बम हमलों का यह सीधा बदला है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा:अगर ईरान ने दोबारा ऐसी हिमाकत की, तो हालात और भी बदतर हो जाएंगे। यह नाजुक अंतरिम युद्धविराम अब पूरी तरह खत्म माना जा सकता है। मुझे लगता है कि शांति वार्ता करने वाले अधिकारी केवल अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे, जैसे कि बिजली ग्रिड, वाटर डिसेलिनेशन प्लांट को उड़ाने और खार्ग द्वीप (जहां से ईरान का 90% तेल एक्सपोर्ट होता है) पर कब्जा करने की अपनी पुरानी धमकियों को फिर से दोहराया।'हमला करोगे तो भुगतोगे' - ईरान का कड़ा रुखअमेरिका के इस आक्रामक रुख पर ईरान के शीर्ष अधिकारियों ने भी झुकने से साफ इनकार कर दिया है। युद्धविराम वार्ता में मुख्य भूमिका निभाने वाले ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका ने अभी तक यह नहीं सीखा है कि वादे तोड़ने की क्या कीमत होती है। अगर आप हम पर हमला करेंगे, तो हम भी चुप नहीं बैठेंगे और पलटवार करेंगे।वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट: होर्मुज स्ट्रेट बंद होने का डरइस ताजा सैन्य टकराव ने वैश्विक आर्थिक जगत की रातों की नींद उड़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का वह सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता है, जहां से वैश्विक व्यापार का लगभग पांचवां (20%) हिस्सा तेल और प्राकृतिक गैस गुजरता है।मई के महीने में जहां इस रास्ते से केवल 233 जहाज गुजरे थे, वहीं जून में अंतरिम समझौते के बाद यह संख्या बढ़कर 576 हुई थी (हालांकि यह जून 2025 के 3,100 जहाजों के मुकाबले बेहद कम है)। अगर यह रास्ता पूरी तरह युद्ध की चपेट में आकर बंद हो जाता है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे हर देश में भयंकर मंदी और महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है। फिलहाल, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची सऊदी अरब, तुर्की, ओमान और पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से फोन पर बात कर तनाव कम करने की कोशिशों में जुटे हैं।
वैश्विक कूटनीति और रक्षा समीकरणों को पूरी तरह से उलटते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक बेहद चौंकाने वाला और ऐतिहासिक ऐलान किया है। अंकारा में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) साल 2020 में तुर्की के खिलाफ लगाए गए सभी सख्त आर्थिक और सैन्य प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटाने जा रहा है। गौरतलब है कि यह वही तुर्की है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद की पनाहगाह माने जाने वाले पाकिस्तान (Pakistan) का सबसे करीबी रणनीतिक जोड़ीदार माना जाता है। भारत के खिलाफ हालिया 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान इसी तुर्की के घातक ड्रोनों की मदद से पाकिस्तान ने भारतीय सीमाओं पर नापाक हिमाकत की थी, जिसे भारतीय सेना ने बहादुरी से नाकाम कर दिया था। अब अमेरिका के इस फैसले से दक्षिण एशिया से लेकर पश्चिम एशिया तक खलबली मच गई है।नाटो समिट में एर्दोगन के साथ मंच साझा कर ट्रंप ने दिया बयान, F-35 फाइटर जेट डील पर सस्पेंस बरकरारतुर्की के ऐतिहासिक बेस्टेपे प्रेसिडेंशियल कंपाउंड (Bestepe Presidential Compound) में नाटो शिखर सम्मेलन (NATO Summit) के दौरान तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdogan) के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होकर डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को यह बड़ा संदेश दिया। ट्रंप ने कहा, हम तुर्की पर लगे प्रतिबंधों को आधिकारिक रूप से खत्म करने जा रहे हैं। हालांकि, जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने ट्रंप से सवाल दागा कि क्या इस बैन के हटने के बाद तुर्की को अमेरिका के सबसे खतरनाक पांचवीं पीढ़ी के F-35 स्टील्थ फाइटर जेट बेचे जाएंगे, तो ट्रंप ने कोई सीधा वादा नहीं किया। उन्होंने चालाकी से जवाब देते हुए कहा कि यह फैसला हम आने वाले दिनों में सामूहिक रूप से करेंगे, लेकिन उन्होंने F-35 को दुनिया का अब तक का सबसे अचूक और शक्तिशाली लड़ाकू विमान जरूर स्वीकार किया।रूस से S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने पर लगा था CAATSA बैन, जानिए इतिहासआपको बता दें कि साल 2020 में तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन ने काट्सा (CAATSA) कानून के तहत तुर्की पर यह कड़े प्रतिबंध थोपे थे। तुर्की ने वाशिंगटन की सख्त चेतावनियों को दरकिनार करते हुए रूस से अत्याधुनिक S-400 ट्रम्प मिसाइल डिफेंस सिस्टम (S-400 Missile System) की खरीद की थी। इस सौदे से नाराज होकर अमेरिका ने तुर्की को अपने महत्वाकांक्षी F-35 जॉइंट स्ट्राइक फाइटर प्रोग्राम से बाहर निकाल दिया था और उसके सैन्य अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिए थे। अमेरिकी कांग्रेस द्वारा 2017 में पारित यह अधिनियम स्पष्ट रूप से किसी भी देश को रूस के साथ बड़े रक्षा या खुफिया लेनदेन करने से रोकता है।अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में ट्रंप के फैसले का तीखा विरोध संभव, सीनेटरों ने दी खुली चेतावनीभले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तुर्की को इस सैन्य दलदल से बाहर निकालने के लिए आतुर दिख रहे हों, लेकिन वाशिंगटन की संसद में उनकी इस राह में बड़े रोड़े अटक सकते हैं। अमेरिकी कानून के मुताबिक, प्रतिबंध हटाने के किसी भी कार्यकारी फैसले को कांग्रेस की समीक्षा (Congressional Review) से गुजरना होगा, जहां रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही दलों के सांसद इस पर गंभीर आपत्ति जता सकते हैं। ट्रंप के बेहद करीबी माने जाने वाले सेनेटर लिंडसे ग्राहम (Lindsey Graham) ने पहले ही साफ कर दिया है कि संसद में इस कदम का तगड़ा विरोध होगा। ग्राहम ने 'टर्की टुडे' अखबार से बातचीत में स्पष्ट कहा, कांग्रेस में इस फैसले को लेकर भारी नाराजगी हो सकती है, क्योंकि वर्तमान में इजरायल के साथ तुर्की के तनावपूर्ण संबंध अमेरिकी सांसदों के लिए कतई स्वीकार्य नहीं हैं।पांच F-35 लड़ाकू विमानों की उम्मीद में एर्दोगन; जेडी वेंस और पेंटागन कर रहे हैं कानूनी समीक्षाइस बीच, तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने ट्रंप के इस दोस्ताना रुख पर भारी भरोसा जताते हुए उम्मीद जताई है कि वाशिंगटन जल्द ही उनके फाइटर जेट के ऑर्डर को हरी झंडी देगा। एर्दोगन ने मीडिया के सामने दावा किया कि पूर्व में तुर्की को पांच अत्याधुनिक F-35 एयरक्राफ्ट देने का वादा खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने किया था और वे हमेशा अपनी बात पर कायम रहते हैं। दूसरी ओर, हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) के नेतृत्व में पेंटागन के शीर्ष अधिकारी इस बात की बारीकी से कानूनी समीक्षा कर रहे हैं कि क्या तुर्की ने F-35 तकनीक हासिल करने के लिए अमेरिका द्वारा निर्धारित सख्त सुरक्षा और कानूनी मानदंडों को पूरा कर लिया है या नहीं।
अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। तुर्की के अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से वाशिंगटन वापस लौटते समय राष्ट्रपति ट्रंप ने बीच रास्ते में ही अपना विमान बदल दिया। ट्रंप कतर द्वारा हाल ही में तोहफे में दिए गए अत्याधुनिक बोइंग 747-8 वीआईपी जेट को छोड़कर अचानक अपने पुराने और भरोसेमंद 'एयरफोर्स वन' विमान में सवार हो गए। ब्रिटेन के आरएएफ मिल्डेनहॉल (RAF Mildenhall) मिलिट्री बेस पर हुए इस अचानक सुरक्षा बदलाव ने वैश्विक स्तर पर कई तरह की चर्चाओं और कयासों को जन्म दे दिया है।सीक्रेट सर्विस की खुफिया सलाह और वाइट हाउस की बड़ी सफाई'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच मिसाइल हमलों के बाद पैदा हुए गंभीर हालातों को देखते हुए यूएस सीक्रेट सर्विस (US Secret Service) ने राष्ट्रपति ट्रंप को तुरंत विमान बदलने की गोपनीय सलाह दी थी। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह कदम किसी विशिष्ट खुफिया इनपुट के बजाय अत्यधिक सावधानी और एहतियात के तौर पर उठाया गया था। दरअसल, कतर की ओर से मिले नए बोइंग विमान में अभी तक वे सभी मिलिट्री-ग्रेड एडवांस डिफेंस फीचर्स, मिसाइल इवेडिंग सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-मेजर पूरी तरह इंस्टॉल नहीं हो पाए हैं, जो दशकों से राष्ट्रपति की सुरक्षा कर रहे 'एयरफोर्स वन' के मूल बेड़े में मौजूद रहते हैं।हालांकि, वाइट हाउस ने उन खबरों और दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें नए विमान को असुरक्षित बताया जा रहा था। वाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि कतर से मिला नया जेट भी उच्च-स्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल से पूरी तरह लैस है। उन्होंने सुरक्षा रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि प्रशासन राष्ट्रपति की अभेद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'दुश्मन का ध्यान भटकाने और उन्हें गुमराह करने' (Decoy and Diversion) समेत अपने हर उपलब्ध खुफिया टूल का इस्तेमाल करता है।ट्रंप बोले- 'मैं ईरान की हिट लिस्ट में नंबर वन हूं, पुरानी यादों के लिए बदला प्लेन'बीच रास्ते में विमान बदलने और सुरक्षा चिंताओं की बात को खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया के सामने अपने ही अंदाज में खारिज किया। ब्रिटेन से वाशिंगटन के लिए उड़ान भरने के बाद विमान में मौजूद पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने बेबाकी से कहा, मुझ पर हमेशा से ही जान का खतरा मंडराता रहता है। मैं उनकी (ईरान की) हिट लिस्ट में नंबर वन पर हूं।ट्रंप ने आगे खुलासा किया कि ब्रिटेन के सैन्य अड्डे पर रुकने का मुख्य उद्देश्य वहां तैनात अमेरिकी फौजियों को कतर से मिला यह बिल्कुल नया और शानदार विमान दिखाना था। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैनिक इसे देखकर बेहद उत्साहित थे और उन्होंने वहां तस्वीरें भी खिंचवाईं। वहीं, पुराने 'एयरफोर्स वन' में दोबारा शिफ्ट होने के पीछे की वजह बताते हुए ट्रंप ने मजाकिया लहजे में कहा कि उन्होंने केवल अपनी पुरानी यादों को ताजा करने के लिए इस विमान से सफर करने का फैसला किया।खिड़कियों के पर्दे रखने पड़े बंद; स्लीजबैग्स की वजह से सख्त पाबंदीइस बेहद संवेदनशील यात्रा के दौरान पुरानी एयरफोर्स वन में सफर कर रहे व्हाइट हाउस के प्रेस पूल और पत्रकारों को फ्लाइट क्रू द्वारा खिड़कियों के ब्लाइंड्स (पर्दे) पूरी तरह से बंद रखने का बेहद सख्त निर्देश दिया गया था। पत्रकारों को बाहर देखने या किसी भी तरह की लोकेशन की रिकॉर्डिंग करने की मनाही थी। ट्रंप ने बाद में स्पष्ट किया कि यह पाबंदी केवल सुरक्षा कारणों से सह-यात्रियों पर लागू थी, उनके अपने निजी केबिन पर नहीं। उन्होंने अमेरिका के दुश्मनों और ईरान की ओर सीधा इशारा करते हुए तीखे शब्दों में कहा कि शायद बाहर सक्रिय कुछ स्लीजबैग्स (संदिग्ध तत्वों) की वजह से सीक्रेट सर्विस को इतनी सख्त पाबंदी लगानी पड़ी है।अमेरिका और ईरान के बीच अचानक क्यों भड़की युद्ध की चिंगारी?राष्ट्रपति के विमान बदलने का यह पूरा हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत शुरू हो चुकी है। अमेरिका ने तेहरान पर अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों पर हमला करने का गंभीर आरोप लगाते हुए ईरानी ठिकानों पर लगातार भारी हवाई हमले और बमबारी की है।इस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान ने भी बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे हैं। खाड़ी देशों में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि बहरीन, कुवैत और कतर में अमेरिकी मिलिट्री बेस के ऊपर लगातार मिसाइल हमले के चेतावनी सायरन गूंज रहे हैं। इसी बीच कुवैत की सेना ने आधिकारिक दावा किया है कि उसने अपनी सीमा की तरफ आ रही कई ईरानी मिसाइलों और ड्रोन्स को पैट्रियट डिफेंस सिस्टम के जरिए बीच हवा में ही मार गिराया है।
युद्धपोत किसी भी देश की समुद्री सीमा की रक्षा करने वाले अभेद्य किले होते हैं, जिनका काम दुश्मनों की पनडुब्बियों को खोजना, मिसाइलें दागना और तटीय सुरक्षा अभेद्य बनाना होता है। लेकिन सोचिए, अगर दुनिया की सबसे ताकतवर सेना के सबसे आधुनिक युद्धपोत ही रहस्यमयी तरीके से आग और तकनीकी खराबियों का शिकार होने लगें, तो क्या होगा? चीन की मशहूर मिलिट्री मैगजीन ‘नेवल एंड मर्चेंट शिप्स’ ने अमेरिकी नौसेना (US Navy) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है, जिसने पेंटागन की रातों की नींद उड़ा दी है।अमेरिकी जंगी जहाजों पर हादसों की बाढ़चीनी मिलिट्री रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में अमेरिका के सबसे एडवांस और घातक जंगी जहाजों पर आग लगने, अचानक बिजली गुल होने (ब्लैकआउट) और प्रोपल्शन (आगे बढ़ाने वाले सिस्टम) फेल होने की कई बड़ी घटनाएं दर्ज की गई हैं। इस लिस्ट में दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर USS गेराल्ड आर. फोर्ड, सबसे आधुनिक स्टील्थ डिस्ट्रॉयर USS ज़ुमवाल्ट, निमित्ज़-क्लास कैरियर USS ड्वाइट डी. आइजनहावर और अर्ले बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर USS हिगिंस शामिल हैं।नाविक पड़ रहे बीमार, लॉन्ड्री से लेकर शिपयार्ड तक लगी आगहादसों की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मार्च में USS फोर्ड के लॉन्ड्री रूम में भीषण आग लग गई। अप्रैल में USS आइजनहावर पर मेंटेनेंस के दौरान और USS ज़ुमवाल्ट पर शिपयार्ड में अपग्रेडेशन के वक्त आग भड़क उठी। इतना ही नहीं, ओहायो-क्लास की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन USS नेब्रास्का के जनरेटर में खराबी आ गई, जिससे जहरीले डीजल के धुएं के संपर्क में आने से 64 अमेरिकी नाविक एक साथ बीमार पड़ गए।आखिर अमेरिकी युद्धपोतों में क्यों लग रही है आग? जानें 5 मुख्य वजहेंचीनी रक्षा विशेषज्ञों ने अमेरिकी नौसेना की इस दुर्दशा के पीछे कई गंभीर और ढांचागत (Structural) कारणों का विश्लेषण किया है:लगातार ऑपरेशन का भारी दबाव: अमेरिकी युद्धपोत दुनिया के लगभग हर रणनीतिक समुद्री क्षेत्र (जैसे ताइवान स्ट्रेट, रेड सी और हिंद महासागर) में चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं। लंबे समय तक लगातार समुद्र में रहने से इनके भारी-भरकम इंजन और इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर क्षमता से अधिक लोड पड़ रहा है।रखरखाव और मेंटेनेंस में भारी देरी: अमेरिकी नौसेना इस समय शिपयार्ड की सीमित क्षमता और मेंटेनेंस बैकलॉग से बुरी तरह जूझ रही है। कई युद्धपोत समय पर मरम्मत के लिए शिपयार्ड नहीं पहुंच पाते, जिससे छोटी खराबियां बाद में बड़ी आग का रूप ले लेती हैं।हद से ज्यादा हाई-टेक और डिजिटल सिस्टम: आधुनिक अमेरिकी जहाज अत्यधिक डिजिटल और ऑटोमेटेड हैं। इनमें हाई-वोल्टेज इलेक्ट्रिकल ग्रिड, रडार और सुपरकंप्यूटर नेटवर्क लगे हैं। जटिल इलेक्ट्रॉनिक्स के कारण एक छोटा सा शॉर्ट सर्किट या इलेक्ट्रिकल फॉल्ट पूरे जहाज को पंगु बना देता है।शिपयार्ड में कुशल कारीगरों और पार्ट्स की कमी: एडवांस्ड युद्धपोतों की मरम्मत के लिए बेहद अनुभवी और विशेषज्ञ इंजीनियरों की जरूरत होती है। रिपोर्ट का दावा है कि अमेरिकी शिपयार्डों में अनुभवहीन और कम कुशल कारीगरों की एक छोटी सी मानवीय गलती पूरे अरबों डॉलर के जहाज को स्वाहा कर रही है।शॉर्ट सर्किट और ऑयल लीकेज: मेंटेनेंस के दौरान इंजन रूम में ईंधन या ट्रांसमिशन तेल का रिसाव होना और ओवरलोडेड इलेक्ट्रिकल सिस्टम का आपस में टकराना आग लगने के तात्कालिक कारण बन रहे हैं।सुपर-टेक्नोलॉजी ही बन गई सबसे बड़ा खतरा!चीनी मैगजीन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि टेक्नोलॉजी जहाजों के परफॉर्मेंस को तो बढ़ा सकती है, लेकिन बिजली की एक छोटी सी खराबी पूरे युद्धपोत को युद्ध के बीच में लाचार कर सकती है, जैसा कि हाल ही में USS हिगिंस पर हुए टोटल ब्लैकआउट के दौरान देखा गया। अमेरिकी नौसेना के लिए आज सबसे बड़ी चुनौती नए और घातक जहाज बनाना नहीं है, बल्कि जो पहले से मौजूद हैं, उनका सही तरीके से मेंटेनेंस करना है। अगर इंडस्ट्रियल सिस्टम ने समय रहते इस बोझ को नहीं संभाला, तो अमेरिका को अपनी ऑपरेशनल उपलब्धता में भारी कमी और अरबों डॉलर का सैन्य नुकसान झेलना पड़ेगा।
एर्दोगन पर ट्रंप मेहरबान, F-35 में तुर्की की वापसी के दिए संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि उनका प्रशासन तुर्की को फिर से एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट कार्यक्रम में शामिल करने पर विचार कर रहा है
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महाभारत के महासंग्राम की चर्चा होते ही सबसे पहले मन में आता है वह दृश्य, जिसमें अर्जुन दुविधा में है और भगवान श्रीकृष्ण उसे गीता का उपदेश दे रहे हैं। युद्ध से पहले ही श्रीकृष्ण ने यह प्रण ले लिया था कि वे कुरुक्षेत्र में शस्त्र नहीं उठाएंगे। उनकी भूमिका केवल अर्जुन के सारथी के रूप में रहने की थी। लेकिन, एक बार ऐसी विषम परिस्थिति बनी कि जगत के पालनहार को अपना वचन तोड़ना पड़ा और वे रथ का पहिया लेकर भीष्म पितामह की ओर दौड़ पड़े। आखिर वह क्या मजबूरी थी, जिसने प्रभु को शस्त्र उठाने पर विवश कर दिया?क्यों दी थी भगवान श्रीकृष्ण ने शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा?भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र युद्ध में तटस्थ रहने की घोषणा की थी। उन्होंने दुर्योधन और अर्जुन दोनों को विकल्प दिया था—एक तरफ उनकी विशाल 'नारायणी सेना' और दूसरी तरफ वे स्वयं, जो निहत्थे रहेंगे। अर्जुन ने श्रीकृष्ण को चुना और दुर्योधन ने सेना को। श्रीकृष्ण की प्रतिज्ञा के पीछे उद्देश्य यह था कि वे न चाहते हुए भी किसी एक पक्ष का सीधा संहार न करें, बल्कि न्याय की स्थापना में केवल मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। वे अपनी लीलाओं से यह दिखाना चाहते थे कि अधर्म का नाश करने के लिए युद्ध से ज्यादा महत्वपूर्ण सही मार्गदर्शन और विवेक है।जब भीष्म के सामने विचलित हो गए थे श्रीकृष्णभीष्म पितामह ने प्रतिज्ञा की थी कि वे श्रीकृष्ण को शस्त्र उठाने पर मजबूर कर देंगे। युद्ध के दौरान, जब भीष्म पितामह ने अर्जुन पर बाणों की वर्षा शुरू की, तो अर्जुन उन्हें रोकने में असमर्थ हो गए। स्थिति ऐसी बन गई कि अर्जुन का रथ क्षतिग्रस्त हो गया और वे हार की कगार पर पहुँच गए। अर्जुन को संकट में देख भगवान श्रीकृष्ण का वात्सल्य और मित्र प्रेम जाग उठा। अपने प्रिय भक्त को मृत्यु के मुख में देख श्रीकृष्ण ने अपनी प्रतिज्ञा त्याग दी और जमीन से रथ का एक टूटा हुआ पहिया उठाकर पितामह की ओर बढ़े।'विपक्ष' की जीत या 'भक्ति' की पराकाष्ठा?जैसे ही श्रीकृष्ण चक्र (पहिया) लेकर पितामह की ओर बढ़े, भीष्म ने अपने शस्त्र डाल दिए और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, प्रभु, मेरी प्रतिज्ञा पूरी हुई। आज आपके हाथों अपना अंत देखकर मेरा जीवन धन्य हो गया। श्रीकृष्ण का वह क्रोध वास्तव में उनके भक्त के प्रति प्रेम था। यह घटना सिखाती है कि भगवान के लिए अपने भक्त की रक्षा उनकी स्वयं की प्रतिज्ञा से कहीं अधिक बड़ी होती है। महाभारत का यह प्रसंग आज भी हमें याद दिलाता है कि भक्त और भगवान के बीच कोई भी नियम, वचन या प्रतिज्ञा बड़ी नहीं होती।
पटियाला में मंगलवार को हिंदू संगठनों ने 'सनातन सम्मान यात्रा' निकाली। इस यात्रा में हरिद्वार से आए संतों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया। यात्रा के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि हिंदू समाज के साथ भेदभाव किया जा रहा है और प्रशासन उनकी शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि यात्रा का मुख्य उद्देश्य सनातन समाज में एकजुटता का संदेश देना और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना है। वक्ताओं ने गोपाल कॉलोनी में एक वाल्मीकि परिवार पर हुए कथित हमले का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस घटना में परिवार के घर में बने मंदिर और भगवान श्री खाटू श्याम की तस्वीर के साथ भी तोड़फोड़ की गई थी। आरोप है कि पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे भाजपा नेता करुण कौड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 295 के तहत मामला दर्ज किया गया, जबकि दूसरे पक्ष के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। रोहिंग्या घुसपैठियों के मुद्दे पर करुण कौड़ा ने दिया बयान सनातनी महंत अरुणा गिरी और केशव नंद ने स्पष्ट किया कि करुण कौड़ा ने किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि कथित रोहिंग्या घुसपैठियों के मुद्दे पर बयान दिया था। उन्होंने प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए करुण कौड़ा के खिलाफ दर्ज मामला रद्द करने की मांग की। निष्पक्ष जांच न हुई तो करेंगे आंदोलन इसके साथ ही, उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दूसरे पक्ष के खिलाफ भी उचित कार्रवाई करने की अपील की। संतों और वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो देश के विभिन्न हिस्सों से सनातन समाज के लोग पटियाला पहुंचकर बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
धनबाद के कतरास थाना क्षेत्र के छाताबाद में मंगलवार को अचानक भू-धंसान हुआ। इससे कई घर क्षतिग्रस्त हो गए और मकानों की दीवारों तथा फर्श में बड़ी दरारें आ गईं। घटना के बाद दहशत में आए लोग जान बचाने के लिए अपने घरों से बाहर निकल आए। कई परिवार अपना कीमती सामान, जेवर और जरूरी दस्तावेज तक घरों के अंदर ही छोड़ने को मजबूर हो गए। इस घटना से नाराज ग्रामीणों ने कतरास-धनबाद मुख्य मार्ग जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। उनकी मुख्य मांगों में प्रभावित परिवारों का तत्काल पुनर्वास, उचित मुआवजा और क्षेत्र में अवैध कोयला खनन पर प्रभावी रोक शामिल है। सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की मांग की प्रभावित ग्रामीणों ने बताया कि वे कई वर्षों से यहां रह रहे हैं। उन्होंने कहा, हम गरीब परिवार के लोग हैं, अपना घर छोड़कर कहां जाएं? अचानक घरों में दरारें पड़ने लगीं, तो जान बचाने के लिए बाहर निकलना पड़ा। हमारा सारा सामान अभी भी घर के अंदर ही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से उचित मुआवजा और सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारी प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हालात सामान्य करने के प्रयास में लगे हैं।
गाजा संघर्ष : नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल
सयुक्त राष्ट्र की हालिया स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की रिपोर्ट ने इजरायल और कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में जारी हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों की गंभीर तस्वीर पेश की है।
मौसम में आए अचानक बदलाव और मानसून की पहली बारिश के दस्तक देते ही जहां लोगों को चिलचिलाती गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ एक बड़े खतरे ने भी दस्तक दे दी है। रिमझिम फुहारों के साथ ही राजधानी और उसके आस-पास के इलाकों में मच्छरों से होने वाली जानलेवा बीमारी 'डेंगू' (Dengue) का खौफनाक खतरा तेजी से बढ़ने लगा है। जलजमाव और उमस भरे इस मौसम को मच्छरों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। इसी गंभीर चुनौती को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। राजधानी के सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) और नगर निगम की टीमों ने इस महामारी से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर अपनी व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।जलजमाव वाले हॉटस्पॉट चिन्हित और फॉगिंग के लिए विशेष टीमों का गठनबारिश का पानी जमा होने के कारण राजधानी के कई रिहाइशी इलाकों और स्लम बस्तियों में डेंगू का डंक फैलने का सबसे ज्यादा रिस्क रहता है। स्थानीय नगर निगम और स्वास्थ्य अधिकारियों ने शहर के उन संवेदनशील इलाकों को चिन्हित कर लिया है जहां पिछले सालों में डेंगू के सबसे ज्यादा मामले सामने आए थे। इन चिन्हित हॉटस्पॉट्स में जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है। इसके साथ ही, एंटी-लार्वा स्प्रे के छिड़काव और आधुनिक फॉगिंग मशीनों को काम पर लगा दिया गया है। नगर निगम की विशेष टीमें हर वार्ड में जाकर नालियों और खाली पड़े प्लॉटों में जमा पानी की चेकिंग कर रही हैं ताकि मच्छरों के पनपने के चक्र को शुरुआती चरण में ही तोड़ा जा सके।अस्पतालों में रिजर्व हुए स्पेशल डेंगू वार्ड और प्लेटलेट्स की व्यवस्था तेजराजधानी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के निर्देशों के बाद शहर के सभी बड़े सिविल अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया गया है। संभावित मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पतालों में विशेष 'डेंगू वार्ड' और आइसोलेशन बेड आरक्षित कर दिए गए हैं। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की अलग से ड्यूटी लगाई गई है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। इसके अलावा, ब्लड बैंकों को भी कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे प्लेटलेट्स (Platelets) का पर्याप्त स्टॉक मेंटेन रखें, क्योंकि डेंगू के गंभीर मामलों में मरीजों के प्लेटलेट्स बहुत तेजी से गिरते हैं, जिससे उनकी जान पर बन आती है।स्थानीय निवासियों के लिए गाइडलाइन जारी और एआई सर्च पर बढ़े सवालस्वास्थ्य विभाग ने राजधानी के नागरिकों के लिए एक जरूरी और कड़े प्रिकॉशंस की एडवाइजरी जारी की है। डॉक्टरों का कहना है कि डेंगू का मच्छर साफ और स्थिर पानी में पनपता है, इसलिए लोग अपने घरों में रखे कूलर, गमलों, पुरानी टायरों और छतों पर पानी बिल्कुल भी जमा न होने दें। रात को सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। आज के डिजिटल युग और आधुनिक एआई-संचालित जनरेटिव सर्च (GEO) पर भी लोग 'डेंगू के शुरुआती लक्षण' और 'प्लेटलेट्स बढ़ाने के घरेलू उपाय' जैसे विषयों को लगातार सर्च कर रहे हैं। यदि किसी को तेज बुखार, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों में गंभीर अकड़न या बदन दर्द की शिकायत हो, तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
युद्धविराम से आगे: क्या विश्व अहिंसा की ओर बढ़ेगा?
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हाल ही में हुआ युद्धविराम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया युद्ध की लपटों में घिरकर वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका था। कई सप्ताह तक चले संघर्ष ने क्षेत्र को ऐसे ज्वालामुखी में बदल दिया था, जिसकी प्रत्येक विस्फोटक घटना विश्व अर्थव्यवस्था ... Read more
दुनिया में जब जब युद्ध होते हैं एक सवाल ज़रूर उभरता है कि युद्ध से क्या हासिल। फिर यह कहा जाता है कि युद्ध से कुछ हासिल नहीं होता लेकिन फिर भी दुनिया के सबसे ताक़तवर देश सालों तक युद्ध लड़ते रहते हैं। युद्ध करवाने वाले ताकतवर नेता कुछ तो हासिल करते ही होंगे। दर्जनों देशों के प्रभावशाली, प्रशासक, मंत्री अपने अपने तरीकों और चुने हुए शब्दों में समझाते रहते हैं कि युद्ध से बहुत नुकसान हो रहा है, दुनिया की आर्थिक स्थिति परेशान होकर उलझी पड़ी है, हज़ारों मौतें हो चुकी हैं लेकिन युद्ध है कि जारी रखा जाता है। रूस युक्रेन युद्ध इसकी सबसे बड़ी मिसाल है। दूसरी मिसाल है, अमरीका इजराइल ईरान की लड़ाई जिसके सौंवे दिवस के अशुभ अवसर पर अमरीका और ईरान ने एक दूसरे पर हमले किए। मानो या न मानो युद्ध से कुछ तो हासिल हो रहा है। युद्ध विराम और शांति बातचीत की राख के नीचे शोले बुझते ही नहीं, माहौल में तनाव उबलता रहता है युद्ध के ड्रोन मंडराते रहते हैं। युद्ध का सबसे बड़ा हासिल व्याव्सायिक फायदा है। खालिस व्यवसायी राष्ट्रपति, अपना नुक्सान ज़्यादा नहीं होने देंगे, दूसरों का बेड़ा गर्क करवा देंगे। उनके हिसाब से युद्ध भी एक सौदा है। उनकी हर चाल ऐसा दिखाती है। कुछ भी सोच सकते हैं। बड़ा सोचना, ज्यादा मांगना उनकी व्यावसायिक शैली में शामिल है। ज़्यादा मांगेंगे तो ज्यादा मिलेगा, कम मांगोगे तो कम ही मिलने वाला है। उन्हें खुद को खबर बनाना आता है। चर्चा में बनाए रखना आता है। वे व्याव्सायिक राजनीतिज्ञों की तरह परिस्थितियों के सभी दरवाज़े खुले रखते हैं। खूब शोर करते हैं और दूसरों को डराते रहते हैं। कहकर मुकर जाते हैं। जैसा बंदा वैसी डील करने को तत्पर रहते हैं। अब तो वैसे भी हर चीज़ में व्यापार और बाज़ार मिला दिया गया है। बड़ा दांव ज्यादा खतरा लेकिन फायदा भी उसी अनुपात में। आम लोग ही तो मरते हैं, घायल हो जाते हैं, विस्थापित होते हैं। ईमारतें और हथियार तबाह होते रहते हैं फिर नए बनाने के लिए मरम्मत के लिए, उद्योग क्षेत्र को काम मिलता है। कुछ भी हो जाए व्यवसाय फैलता रहता है। महंगाई का कर्तव्य तो हमेशा बढ़ते जाना है। इसे भी पढ़ें: विश्वगुरु न होते हुए (व्यंग्य) अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं हारकर उदास बैठी हैं। युद्ध जारी रखने वाले अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधकों को यह संतुष्टि रहती है कि युद्ध निरंतर है। उन्हें अनिश्चितताओं से घिरी दुनिया से क्या लेना। धार्मिक कट्टरता शत्रुता बढ़े तो बढ़े। राजनीति को तो यह सब फैलाकर ही रखना होता है। कितने ही अनुभवी, यशस्वी नेताओं की सामरिक शक्ति, रुआब और प्रभाव की पोल खुलती जाती है लेकिन युद्ध से उनकी नाक ऊंची रहती है। स्वार्थ पूरा होता है और नकली इज्ज़त बनी रहती है। जो शांति स्थापित करने के लिए युद्ध जारी रखते हैं इतिहास उन्हें भूलता नहीं। क्या फर्क पड़ता है अगर युद्ध के कारण याद रखता है। अगर युद्ध से फायदा न हो तो कई तरह का नुक्सान करने वाले इस खतरनाक काम को कौन महीनों तक करता रहेगा। हर व्यवसाय में छिपे हुए फायदे होते हैं जिनका किसी को भी पता नहीं चलता सिर्फ उन्हें पता होता है जो उनके मालिक होते हैं। युद्ध एक व्यवसाय ही तो है जिसका हासिल, ख़ास लोगों को होने वाला किसी न किसी तरह का अशुभ लाभ है। - संतोष उत्सुक
अमर स्वाभिमान का प्रतीक हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष
Battle of Haldighati: 18 जून भारतीय इतिहास की वह अमर तिथि है, जो केवल एक युद्ध का स्मरण नहीं कराती बल्कि त्याग, स्वाभिमान, साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण की गाथा सुनाती है। यह वह दिन है जब मेवाड़ की धरती पर एक ऐसा संघर्ष हुआ, जिसने इतिहास के ...
'वाराणसी' में दिखेगा महायुद्ध, भगवान राम और कुंभकर्ण के बीच होगा 30 मिनट का ऐतिहासिक टकराव!
दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली जब भी कोई नया प्रोजेक्ट लाते हैं, तो वह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक उत्सव बन जाता है। 'बाहुबली' और 'आरआरआर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद, राजामौली अब सुपरस्टार महेश बाबू के साथ अपनी अगली महात्वाकांक्षी ...
इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) हर हफ्ते दुनिया भर यूजर्स के सर्च और प्रोफाइल विजिट के आधार पर 'मोस्ट पॉपुलर इंडियन सेलिब्रिटीज' की लिस्ट जारी करता है। आमतौर पर इस लिस्ट के शीर्ष पर वही सुपरस्टार्स नजर आते हैं जिनकी बड़ी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज ...
खाड़ी युद्ध से निपटने की मोदी की तजबीज
मोदीजी ने एक बार फिर राष्ट्र की जनता को उसके कर्तव्यों के प्रति सचेत किया है।
ललित सुरजन की कलम से युद्ध नहीं, शांति चाहिए
जब एक तरफ सिर्फ एक सैनिक की गिरफ्तारी से उपजे भय और रिहाई की घोषणा से मिली राहत है, तब दूसरी तरफ आक्रामक मुद्रा अपनाकर हम क्या हासिल करना चाहते हैं?
युद्धविराम और हाशिए पर धकेल दिया गया भारत
यह युद्ध स्पष्ट रूप से नेतन्याहू की देन है और ट्रम्प इसके परिणामों के बारे में सोचे-समझे बिना ही इसमें फंस गए।
युद्ध के माहौल में विश्व शांति का शंखनाद है विश्व णमोकार दिवस
विश्व णमोकार दिवस- 9 अप्रैल, 2026 विश्व इतिहास के इस संक्रमणकाल में, जब मानवता युद्ध, हिंसा, आतंक, तनाव और असहिष्णुता के बोझ तले कराह रही है, ऐसे समय में 9 अप्रैल 2026 को मनाया जाने वाला विश्व णमोकार मंत्र दिवस एक अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा-विस्फोट के रूप में सामने आ रहा है। यह दिवस केवल एक ... Read more
तीसरे विश्वयुद्ध की आहट और गांधी
इतिहास विजय-पराजय-विनाश का मृत दस्तावेज नहीं है, न वह किसी की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कहानी का विवरण है।
धीरे-धीरे हकीकत में बदल रहे हैं भारत के ईरान युद्ध के डर
ईरान युद्ध को लेकर भारत की सबसे गहरी आर्थिक चिंताएं अब काल्पनिक नहीं रह गई हैं
पश्चिम एशिया में युद्ध के दुष्प्रभाव से निपटने के लिए बेहतर नीतियों की ज़रूरत
वित्त वर्ष 2026-27 की ठीक शुरुआत में, जो 1 अप्रैल, 2026 से शुरू हो रहा है, भारत को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है
युद्ध के माहौल में महावीर के दर्शन की उपादेयता
सदियों पहले महावीर जनमे। वे जन्म से महावीर नहीं थे। उन्होंने जीवन भर अनगिनत संघर्षों को झेला, कष्टों को सहा, दुख में से सुख खोजा और गहन तप एवं साधना के बल पर सत्य तक पहुंचे, इसलिये वे हमारे लिए आदर्शों की ऊंची मीनार बन गये। उन्होंने समझ दी कि महानता कभी भौतिक पदार्थों, सुख-सुविधाओं, ... Read more
युद्धग्रस्त विश्व में महावीर की अहिंसा: शांति की एकमात्र राह
संदर्भ – तीर्थंकर महावीर स्वामी जन्म कल्याणक 2625वां (31 मार्च 2026) आज का विश्व एक विचित्र विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर विज्ञान, तकनीक और वैश्वीकरण ने मानव जीवन को अभूतपूर्व सुविधाएं दी हैं, वहीं दूसरी ओर युद्ध, हिंसा और असहिष्णुता ने मानवता के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विश्व के ... Read more
मिडिल ईस्ट युद्ध ने ट्रम्प की मुश्किलों को बढ़ाया
युद्ध के मामले में अमेरिका-इजरायल की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं।
पश्चिम एशिया युद्ध में परमाणु खतरे के प्रति लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अंतिम घोषित तिथि बढ़ा दी है।
अब युद्धविराम को लालायित ट्रंप
अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह लड़ाई अमेरिका को पहले ही महंगी पड़ रही है
पश्चिम एशिया में युद्ध फैलने से एक और वैश्विक आर्थिक संकट का खतरा
पश्चिम एशिया का संकट अब एक वैश्विक आर्थिक चुनौती में बदल गया है
फैक्ट चेक: इजरायल के डिमोना पर हमले के दावे से इराक का वीडियो हुआ वायरल
बूम ने पाया कि वायरल हो रहा वीडियो इराक के Nasiriyah स्थित एक रेस्टोरेंट में लगी आग का है.
ईरान युद्ध में नाटो से अलग-थलग पड़े ट्रंप की परीक्षा की घड़ी
बुधवार को, अमेरिका-इजरायल गठबंधन के ईरान के खिलाफ युद्ध के 18वें दिन, ट्रंप को एक साथ दो बुरी खबरें मिलीं
लीजा रे ने दुबई से शेयर की दर्दभरी कविता, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच जताई चिंता
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। हर तरफ धमाकों और सायरन का शोर सुनाई दे रहा है। एक्ट्रेस लीजा रे भी इन हालातों के बीच दुंबई में अपने घर ...
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता, बेटी के साथ सुरक्षित लौटीं भारत, सुनाई आपबीती
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता भी अपनी 14 साल की बेटी सायरा के साथ यूएई में ...
एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज़ की '120 बहादुर' को लेकर चर्चा अब अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। फिल्म ट्रेलर ने पूरी तरह से रोमांच और प्रेरणा का सही मिश्रण पेश किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बलिदान दिवस पर मेजर शैतान सिंह ...
War 2 रिव्यू: लचर स्क्रिप्ट और निर्देशन के कारण रितिक और एनटीआर हारे युद्ध, पढ़ें पूरी समीक्षा
रितिक रोशन और एनटीआर स्टारर War 2 ‘स्पाई यूनिवर्स’ की बड़ी पेशकश मानी जा रही थी, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और औसत निर्देशन ने इसे निराशाजनक बना दिया। शानदार एक्शन सीक्वेंस और एनटीआर के दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद फिल्म का सेकंड हाफ बिखर गया। कहानी में ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला अपनी खूबसूरती से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। उर्वशी ने बेहद ही कम समय में एक अलग मुकाम हासिल किया है। वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों के साथ 'मिलने और अभिवादन' के क्षणों में संलग्न रहती है। ऐसा ही एक क्षण था जब ...
सलमान खान की सिकंदर के आखिरी गाने में दिखेगा जबरदस्त जलवा, तुर्की से बुलाए गए 500 डांसर्स!
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की 'सिकंदर' इस साल की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके एक्शन-पैक्ड टीजर ने इसकी भव्य एंट्री के लिए एकदम परफेक्ट माहौल तैयार कर दिया है। भव्य पैमाने पर बनाई गई इस फिल्म में ...
केसरी वीर के लिए सूरज पंचोली ने की कड़ी ट्रेनिंग, ऐसे सीखा युद्ध कौशल
बॉलीवुड एक्टर सूरज पंचोली अपनी पहली बायोपिक में वीर हामीरजी गोहिल के ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने जा रहे हैं। सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय और सूरज पंचोली अभिनीत फिल्म 'केसरी वीर : लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ' का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ...
Adil Hussain: दुनियाभर में इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 की धूम मची हुई है। पेरिस ओलंपिक में दुनियाभर के खिलाड़ियों ने भाग लिया है। भारत के कई खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। हाल ही में तुर्की के शूटर यूसुफ डिकेक ने सिल्वर मेडल जीता।
बॉर्डर की 27वीं सालगिरह पर, अभिनेता सनी देओल ने एक घोषणा वीडियो के ज़रिए फ़्रैंचाइज़ी के दूसरे संस्करण की पुष्टि की है। अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सनी ने बॉर्डर 2 में अपनी वापसी की आधिकारिक घोषणा करते हुए एक वीडियो शेयर किया और इसे 'भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म' बताया। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ''एक फौजी अपने 27 साल पुराने वादे को पूरा करने के बाद, आ रहा है फिर से। भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म, बॉर्डर 2।'' इस फिल्म का निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता करेंगे। आगामी युद्ध फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह करेंगे। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | पति से तकरार के बीच केन्या लौट गई हैं Dalljiet Kaur? शादी को बचाने की कर रही कोशिश सनी द्वारा घोषणा वीडियो शेयर किए जाने के तुरंत बाद, सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए कमेंट सेक्शन में बाढ़ ला दी। एक यूज़र ने लिखा, ''वाह, यह बहुत बढ़िया घोषणा है सर जी, जय हिंद।'' दूसरे ने लिखा, ''बहुत उत्साहित हूँ।'' तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, ''बॉर्डर 2 के लिए बहुत उत्साहित हूं।'' इसे भी पढ़ें: NDA पर इमोशनल बयान, काले सूट में ली मंत्री पद की शपथ और शर्मिला अंदाज, Tripti Dimri की तरह रातों रात भारत के Sensation बन गये Chirag Paswan सनी देओल की अन्य परियोजनाएं उन्हें आखिरी बार अमीषा पटेल के साथ गदर 2 में देखा गया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही और इसे ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर घोषित किया गया। गदर 2 की सफलता के बाद, सनी ने लाहौर 1947 सहित कई फिल्में साइन कीं, जिसे आमिर खान के प्रोडक्शन बैनर के तहत बनाया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जिन्होंने आमिर को कल्ट क्लासिक अंदाज़ अपना अपना (1994) में निर्देशित किया था। View this post on Instagram A post shared by Sunny Deol (@iamsunnydeol)
Kalki 2898 AD: शुरू हो गया नया युद्ध, पूरे ट्रेलर की अहम कड़ी हैं अमिताभ, प्रभास करेंगे इम्प्रेस
Kalki 2898 AD के ट्रेलर को देखें तो, फिल्म कल्कि 2898 एडी के मेकर्स ने विश्वास दिलाया है कि ये फिल्म लोगों को बांधने में कामयाब होगी. टफ सीक्वेंस, क्लियर एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर आपका ध्यान खींचते हैं. वीएफएक्स पर भी अच्छा काम किया गया है.
आशुतोष राणा ने डीपफेक वीडियो को बताया 'माया युद्ध', बोले- ये सालों से चल रहा
आशुतोष ने कहा कि ऐसी बातों में खुद को डिफेंड करने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि जो लोग आपको जानते हैं वो सवाल करेंगे ही नहीं. और जो नहीं जानते, उन्हें किसी रिस्पॉन्स से फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वो दिमाग में आपकी एक छवि बना चुके होते हैं.
रानीति बालाकोट एंड बियॉन्ड: जिमी शेरगिल की नई सीरीज भारत की आधुनिक युद्ध की ऐतिहासिक कहानी को प्रदर्शित करेगी। जिमी शेरगिल दो मिनट के ट्रेलर की शुरुआत पुलवामा हमले की झलक से होती है। एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाने वाले आशीष कहते हैं, ये एक नया रण है या इसे जीतने के लिए एक नई रणनीति की जरूरत है। इसे भी पढ़ें: नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन प्रहार', कमांडर शंकर राव समेत अब तक 79 हुए ढेर, हिट लिस्ट में और भी कई नाम शामिल आगामी वेब शो आधुनिक युद्ध को डिकोड करता है जो केवल भौतिक सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता है बल्कि सोशल मीडिया, डिजिटल रणनीति और गुप्त राजनीतिक चालों के क्षेत्र से परे है जो भू-राजनीति को नया आकार देने की शक्ति रखता है। वेब श्रृंखला उन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है जिन्होंने 2019 में देश को हिलाकर रख दिया था। शो में कुछ हवाई दृश्य, शानदार प्रदर्शन और एक शक्तिशाली कथा है जो युद्ध के मैदान के अंदर और बाहर हर पहलू को चतुराई से पकड़ती है। इसे भी पढ़ें: Biden को सोचना पड़ेगा फिर एक बार, Iran पर प्रहार तो रूस करेगा पलटवार, रक्षा मंत्रायल ने चिट्ठी लिखकर जता दी मंशा आगामी वेब श्रृंखला के बारे में बात करते हुए, जिमी ने कहा: यह मेरे द्वारा अतीत में की गई किसी भी भूमिका से भिन्न है। कम से कम यह कहना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन भारत की पहली वॉर-रूम केंद्रित वेब-श्रृंखला का हिस्सा बनना बेहद संतोषजनक भी है। वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित जिसने देश को हिलाकर रख दिया। एनएसए प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए, आशीष ने कहा, एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन रक्षा बलों के कुछ सदस्यों के साथ बैठकों ने मुझे अपने चरित्र की बारीकियों को समझने में मदद की। तैयारी कार्य और कार्यशालाएं मुझे वापस ले गईं मेरे एनएसडी के दिनों में। संतोष सिंह द्वारा निर्देशित, श्रृंखला का निर्माण स्फीयरओरिजिन्स मल्टीविजन प्राइवेट लिमिटेड के सुंजॉय वाधवा और कॉमल सुंजय डब्ल्यू द्वारा किया गया है। इसमें प्रसन्ना भी हैं। शो का प्रीमियर 25 अप्रैल को JioCinema पर होगा।
दर्शक काफी समय से रैपर बादशाह और हनी सिंह के बीच जुबानी जंग देख रहे हैं। दोनों का रिश्ता सालों से विवादों से भरा रहा है। हालांकि करियर के शुरुआती दिनों में बादशाह और हनी सिंह के बीच अच्छी दोस्ती हुआ करती थी। हालाँकि, ऐसा लगता है कि सफलता और पैसे ने धीरे-धीरे इस दोस्ती को पूरी तरह से खत्म कर दिया। अब दोनों अक्सर एक दूसरे पर तंज कसते नजर आते हैं। हाल ही में हनी सिंह एक होली पार्टी में शामिल हुए, जहां उन्होंने बादशाह के 'पापा कमबैक' वाले कमेंट का करारा जवाब दिया। रैपर का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसे भी पढ़ें: Punjab Kings के खिलाफ जीत के बाद इंटरनेट पर Virat Kohli का Anushka Sharma के साथ वीडियो कॉल, FLY KISS देते नजर आये खिलाड़ी हनी सिंह ने बादशाह पर किया पलटवार बादशाह कुछ दिनों पहले हनी सिंह पर अपनी टिप्पणी को लेकर चर्चा में थे, जिसमें उन्होंने हनी सिंह की वापसी पर कटाक्ष किया था। अब सिंगर और रैपर हनी सिंह ने एक कमेंट के जरिए बादशाह को करारा जवाब दिया है और कहा है कि उन्हें बादशाह को जवाब देने के लिए मुंह खोलने की जरूरत नहीं है। उनके फैन ही काफी हैं जो हर चीज पर बात कर सकते हैं। उन्होंने अपने गाली वाले अंदाज में अपने फैंस से बात करते हुए बादशाह का जवाब दिया। हनी सिंह को सोमवार को मुंबई में एक होली पार्टी में परफॉर्म करते देखा गया और यहीं उन्होंने बादशाह पर कटाक्ष किया। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा, हर कोई कहता है, रिप्लाई करो, रिप्लाई करो... मैं क्या रिप्लाई करूं... आप लोग तो उनके सारे कमेंट्स का बहुत अच्छे से रिप्लाई कर चुके हैं। मुझे मुंह खोलने की जरूरत है। ऐसा नहीं होता है। जैसे ही भीड़ ने उनके लिए तालियां बजाईं, गायक ने कहा, मुझे बोलने की जरूरत नहीं है। आप लोग खुद पागल हैं। हनी सिंह पागल हैं और उनके प्रशंसक भी पागल हैं। इसे भी पढ़ें: Taapsee Pannu के पति Mathias Boe आखिर कौन है? जब सफल भी नहीं थी एक्ट्रेस तब से उन्हें प्यार करते थे बैडमिंटन खिलाड़ी रैपर बादशाह ने क्या कहा? आपको बता दें कि हाल ही में बादशाह ने हनी सिंह पर कमेंट करते हुए कहा था, ''मुझे एक पेन और कागज दो। मैं तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लाया हूं। मैं कुछ गाने लिखूंगा और तुम्हें दूंगा। पापा की वापसी तुम्हारे साथ होगी।'' Kalesh Controversy B/w Honey Singh and Badshah (Honey Singh Replied to Badshah) pic.twitter.com/o74t423bgS — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 25, 2024 Kalesh Between Badshah & Honey Singh Fans on Stage during Live Concert pic.twitter.com/M4VqSqLSc3 — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 19, 2024
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'सावरकर' रिव्यू: खोखली, एकतरफा फिल्म में एकमात्र अच्छी चीज है रणदीप हुड्डा का काम
आज के दौर में 'गुमनाम' हो चुके एक स्वतंत्रता नायक की कहानी कहने निकली ये फिल्म, एक अनजान कहानी बताने से ज्यादा अपने हीरो विनायक दामोदर सावरकर को बाकियों के मुकाबले अधिक 'वीर' बताने पर फोकस करने लगती है.

