मिडिल ईस्ट के बाद अब यूरोप में महायुद्ध की आहट, NATO के इस कदम पर भड़का नया देश
पूरी दुनिया इस वक्त ईरान और इजरायल के बीच छिड़े भीषण संघर्ष को थामने की कोशिशों में जुटी है, लेकिन इसी बीच वैश्विक मंच पर एक और नया और बेहद खतरनाक मोर्चा खुलता नजर आ रहा है। उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानी नाटो (NATO) ने अपनी पूर्वी सीमाओं पर एक ऐसा आक्रामक सैन्य कदम उठाया है, जिसने सोए हुए एक और बड़े सैन्य दिग्गज को बुरी तरह भड़का दिया है। इस देश ने नाटो की इस ताजा हरकत को महज एक सैन्य अभ्यास मानने से साफ इनकार करते हुए इसे 'युद्ध की खुली तैयारी' करार दे दिया है, जिससे वैश्विक कूटनीति में हड़कंप मच गया है।नाटो ने ऐसा क्या किया जिससे अचानक भड़क उठी चिंगारीदरअसल, नाटो ने रूस और उसके सहयोगियों की सीमाओं के बेहद करीब अपने अत्याधुनिक हथियारों, लड़ाकू विमानों और हजारों सैनिकों के साथ एक बहुत बड़ा और सीक्रेट युद्धाभ्यास शुरू किया है। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में दुश्मन के किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देना है। लेकिन नाटो की इस भारी घेरेबंदी को इस नए देश ने अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक सीधे और बड़े खतरे के रूप में देखा है। इस देश के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर नाटो को चेतावनी दी है कि वे अपनी हदों में रहें, वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें।ईरान जंग के बीच इस नए बवाल से क्यों बढ़ी दुनिया की धड़कनेंएक तरफ जहां लाल सागर और पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बारूद बरस रहा है, वहीं दूसरी तरफ यूरोप के मुहाने पर इस नए विवाद के खड़े होने से दुनिया के रक्षा विशेषज्ञ बेहद चिंतित हैं। जानकारों का मानना है कि यदि यह तनाव थोड़ा भी और आगे बढ़ा, तो यह केवल दो देशों की जंग नहीं रह जाएगी। नाटो के आर्टिकल 5 (सामूहिक रक्षा) के चलते इसमें अमेरिका समेत दुनिया के 30 से ज्यादा शक्तिशाली देश सीधे तौर पर शामिल हो जाएंगे, जो पूरी तरह से तीसरे विश्व युद्ध (Third World War) की शुरुआत जैसा होगा।क्या वैश्विक शांति के लिए अब बहुत देर हो चुकी हैक्रेमलिन के करीबियों और इस नए मोर्चे के रणनीतिकारों का कहना है कि नाटो लगातार यूक्रेन संकट के बाद से ही अपनी सीमाओं का विस्तार करने और रूस के सहयोगियों को उकसाने की कोशिश कर रहा है। इस ताजा बवाल ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की उन सभी कोशिशों पर पानी फेर दिया है जो दुनिया में शांति बहाल करने के लिए की जा रही थीं। अब देखना यह होगा कि क्या नाटो इस कड़े विरोध के बाद अपने कदम पीछे खींचता है या फिर यह नया सैन्य संकट पूरी दुनिया को तबाही के एक नए और गहरे दलदल में धकेल देता है।
ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' पहल से खत्म होगा गाजा युद्ध? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'बोर्ड ऑफ पीस' पहल को लेकर साइप्रस में बैठक हुई है. यह बोर्ड गाजा युद्ध खत्म करने और पुनिर्माण योजना की निगरानी के लिए बनाया गया है. ट्रंप के कई देशों के नेताओं को इसमें शामिल होने का मौका दिया है. हालांकि कुछ देशों ने समर्थन किया है. वहीं कुछ ने इसकी भूमिका और और संयुक्त राष्ट्र पर असर को लेकर चिंता जताई है.
भारतीय सेना के 14वें पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वीएन शर्मा का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे 1965 युद्ध के योद्धा और पालमपुर, कांगड़ा से संबंध रखते थे।
Gwalior Photographer Suicide Case: युवक ने सुसाइड नोट में ये भी लिखा... आप सपना को इस नंबर पर खबर दे देना कि मैं इस दुनिया में नहीं रहा। सब कुछ छोड़कर चला गया हूं, लेकिन मेरे चक्कर में आप सब सपना से कुछ मत बोलना, मैं उससे बहुत प्यार करता हूं। उसे यह बात बता देना। सपना मेरी जान, आई लव यू।
भारत-पाकिस्तान युद्ध नहीं भूल पा रहे डोनाल्ड ट्रंप, इस बार बोले- दोनों चीखने-चिल्लाने लगे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान का युद्ध रुकवाया था। ट्रंप ने कहा कि जब उन्होंने 250 फीसदी टैरिफ की धमकी दी तो दोनों नाराज हो गए और खूब चीखे-चिल्लाए।
एयरफोर्स स्टेशन अमृतसर कैंट की बाइक रैली, युद्ध स्मारकों पर शहीदों को दी श्रद्धांजलि
भास्कर न्यूज | अमृतसर एयरफोर्स स्टेशन अमृतसर कैंट की ओर से 27वें कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित 1600 किलोमीटर का साहसिक और प्रेरणादायक मोटरसाइकिल अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। स्टेशन कमांडर के नेतृत्व में निकाले गए इस अभियान में वायु सेना के 17 एयर वॉरियर्स (कर्मियों) ने हिस्सा लिया। यह अभियान 24 जुलाई को अमृतसर से रवाना हुआ था और विभिन्न राज्यों से होकर गुजरते हुए 30 जुलाई को संपन्न हुआ। 7 दिनों की इस यात्रा के दौरान टीम ने चंडीगढ़, नई दिल्ली, जयपुर, हिसार और बठिंडा सहित प्रमुख शहरों को कवर किया। मार्ग में पड़ने वाले विभिन्न युद्ध स्मारकों पर रुककर टीम ने देश की संप्रभुता के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर शहीदों को नमन किया और पूर्व सैनिकों से मुलाकात कर उनके अमूल्य योगदान का सम्मान किया। एयरफोर्स स्टेशन अमृतसर कैंट के स्टेशन कमांडर ने बताया कि यह बाइक रैली कारगिल युद्ध के नायकों के अदम्य साहस को एक नमन है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में देशभक्ति, साहस, बलिदान और राष्ट्रीय गौरव की भावना जगाना है।
Houthis vs Saudi Arabia: Iran के प्रॉक्सी से तीन तरफा घिरा सऊदी, क्या अब युद्ध की उपाय? Red Sea। US
अमेरिका और इज़राइल की ओर से 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू होने के बाद पश्चिम एशिया लगातार तनाव के दौर से गुजर रहा है। अब तक सऊदी अरब इस संघर्ष से दूरी बनाए रखने की कोशिश करता रहा,
Houthis Attack on Saudi Arabia और Iraq में Iran के रजिस्टेंस की ताकत पर Bobby Naqvi को सुनिए | PMF
Saudi Arabia और Iraq में Iran के रजिस्टेंस की ताकत पर Bobby Naqvi को सुनिए | PMF सऊदी के यमन पर अटैक और हूतियों के पलटवार के बीच..इराक से भी सऊदी से बदले की उठ रही आवाजें..मिडिल ईस्ट में जंग के इस नए मोर्चे पर..गल्फ न्यूज के पूर्व एडिटर बॉबी नकवी को सुनिए
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को रूस-यूक्रेन युद्ध प्रभावित भारतीयों के लिए विदेश मंत्रालय में नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया है।
Saudi Arabia ने समुद्री सुरक्षा के लिए बनाया 14 देशों का गठबंधन, लेकिन ओमान और UAE क्यों रहे अलग? जानें वजह
इजरायल ने तोड़ दी हिज्बुल्लाह की कमर! साउथ लेबनान में तबाह कर दिया उसका अंडरग्राउंड टनल नेटवर्क
इजरायल डिफेंस फोर्सेज ने साउथ लेबनान में कई अहम अंडरग्राउंड सुरंगों को नष्ट कर दिया है। यहीं, हिज्बुल्लाह का सेंट्रल कमांड सेंटर था, जिससे हमलों के निर्देश दिए जाते थे।
प्रीति पवार शुक्रवार को महिलाओं के 54 किग्रा सेमीफ़ाइनल में जाम्बिया की कैथरीन म्वापे को 5-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाने वाली पहली भारतीय बॉक्सर बनीं। इस जीत से प्रीति का कम से कम सिल्वर मेडल पक्का हो गया।
चमोली में भारी बारिश से बद्रीनाथ हाईवे बंद, सड़क खोलने का काम युद्ध स्तर पर जारी
लगातार हो रही बारिश के कारण बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग एक बार फिर बंद हो गया है। चमोली जिले में पागल नाला के पास पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने से सड़क पूरी तरह बाधित है।
ईरान युद्ध पर ट्रंप का नियंत्रण: नेतन्याहू ने किया बड़ा खुलासा
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान युद्ध से जुड़े सभी निर्णय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही ले रहे हैं
US-Iran War Big Update: मिडिल ईस्ट युद्ध में हुई सऊदी अरब की सरप्राइज एंट्री
मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा सैन्य संघर्ष अब अपने सबसे भयावह मोड़ पर पहुंच चुका है। कूटनीतिक वार्ताओं का दौर पूरी तरह समाप्त होने के बाद मोर्चे पर सबसे बड़ा उलटफेर तब देखा गया, जब सऊदी अरब ने अपनी पुरानी निष्पक्षता छोड़कर अमेरिका का खुलकर साथ देने का फैसला किया। इराक में अमेरिका और सऊदी अरब की वायुसेना ने संयुक्त रूप से हमला बोलकर ईरान समर्थित गुटों के लॉजिस्टिक्स डिपो और हथियारों के ठिकानों को तबाह कर दिया है। इस भीषण एयरस्ट्राइक में 20 लड़ाकों और 6 ईरानी सैन्य सलाहकारों की मौत हो चुकी है, जिससे इस क्षेत्रीय संघर्ष का संतुलन पूरी तरह बदल गया है।जॉर्डन एयरबेस पर मिसाइल दागने के बाद भड़का अमेरिकातनाव की यह नई चिंगारी तब सुलगी जब ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयरबेस 'मुवफ्फक साल्टी' को निशाना बनाते हुए कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते सभी मिसाइलों को हवा में ही ध्वस्त कर दिया। इसके तुरंत बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पलटवार करते हुए ईरान के अंदर कई सैन्य ठिकानों पर फिर से घातक बमबारी शुरू कर दी। वाशिंगटन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि कूटनीति के लिए दिया गया पांच दिनों का विराम अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।मिस्र के तटीय क्षेत्र तक फैला जंग का दायराइराक में हुई भीषण एयरस्ट्राइक के अलावा, संघर्ष की लपटें अब मिस्र तक भी पहुंच गई हैं। मिस्र के 'दमिएटा' बंदरगाह के पास खड़े अमेरिका के स्वामित्व वाले दो लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) टैंकरों पर संदिग्ध ड्रोन से हमला किया गया है। अब तक इस युद्ध से अछूते रहे मिस्र के समुद्री क्षेत्र में यह हमला इस बात का बड़ा सबूत है कि यह संघर्ष अब क्षेत्रीय सीमाओं को लांघकर पूरे मध्य-पूर्व को निगलने के लिए तैयार खड़ा है।सऊदी अरब की एंट्री से कैसे पलटा पूरा गेम?अब तक इस जंग से दूरी बनाए रखने वाले सऊदी अरब ने अपने तेल प्रतिष्ठानों पर लगातार हो रहे ड्रोन हमलों के जवाब में अमेरिका से हाथ मिला लिया है। सऊदी की इस सैन्य सहभागिता से इराक, सीरिया और यमन में सक्रिय ईरान समर्थक संगठनों जैसे 'पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस' (PMF) और 'हूती' विद्रोहियों पर दोहरी मार पड़ रही है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान युद्ध विराम की मिन्नतें कर रहा है, लेकिन अमेरिका उन्हें करारा जवाब देगा। ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि अब हमारी बारी है और हम उन पर बहुत जोरदार प्रहार करने जा रहे हैं।वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर मंडराया गहरा संकटयुद्ध के विकराल रूप धारण करने से विश्व अर्थव्यवस्था पर संकट गहरा गया है। थिंक टैंक CSIS की रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार मिसाइल इंटरसेप्ट करने से अमेरिका के 'पैट्रियट' और 'थाड' इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक खतरनाक स्तर तक कम हो गया है। वहीं दूसरी ओर, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' और लाल सागर में जहाजों की आवाजाही ठप होने से कच्चे तेल और एलपीजी की वैश्विक सप्लाई रुकने की कगार पर है। अगर स्थिति नहीं संभली तो आने वाले दिनों में दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और ऊर्जा के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, जो एक अंतरराष्ट्रीय मंदी का कारण बन सकती है।
मिडिल ईस्ट में ड्रैगन का बड़ा धमाका: ईरान को ₹610 करोड़ के घातक मिसाइल डिफेंस सिस्टम दे रहा चीन
पश्चिम एशिया (Middle East) के सुलगते हालातों के बीच एक ऐसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आ रही है, जो वैश्विक महाशक्तियों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा सकती है। लंबे समय से पर्दे के पीछे से चालें चलने वाले चीन ने अब इस क्षेत्र में खुला खेल शुरू कर दिया है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, चीन जल्द ही ईरान को ₹610 करोड़ (लगभग 73 मिलियन डॉलर) की कीमत वाले अत्याधुनिक मैनपैड्स (MANPADS - मैन-पोर्टेबल एयर-डिफेंस सिस्टम) की एक बड़ी खेप सौंपने जा रहा है। ड्रैगन के इस कदम से न सिर्फ पश्चिम एशिया का सैन्य संतुलन बदलने की आशंका है, बल्कि अमेरिकी रक्षा खेमे में भी खलबली मच गई है।क्या होते हैं मैनपैड्स और क्यों इतने खतरनाक हैं ये हथियारमैनपैड्स (MANPADS) असल में कंधे पर रखकर दागी जाने वाली बेहद हल्की और घातक मिसाइलें होती हैं, जिनका इस्तेमाल कम ऊंचाई पर उड़ने वाले दुश्मन के लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और ड्रोन को पलक झपकते ही मार गिराने के लिए किया जाता है। इन्हें एक या दो सैनिकों द्वारा आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है और बेहद कम समय में फायर किया जा सकता है। ईरान को इन चीनी मिसाइलों के मिलने से उसकी हवाई सुरक्षा अभेद्य हो जाएगी, जिससे खाड़ी क्षेत्र में किसी भी संभावित हवाई हमले या रीइंजीनियरिंग ऑपरेशंस को नाकाम करने की उसकी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।चीन और ईरान के बीच गहराता रणनीतिक गठजोड़यह बड़ी सैन्य डील चीन और ईरान के बीच बढ़ते उस मजबूत आर्थिक और रणनीतिक गठबंधन का हिस्सा है, जो पिछले कुछ वर्षों में तेजी से उभरा है। अमेरिकी और पश्चिमी प्रतिबंधों (Western Sanctions) से घिरे ईरान को चीन का यह खुला समर्थन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि चीन इस सौदे के जरिए न सिर्फ ईरान से सस्ते कच्चे तेल की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करना चाहता है, बल्कि वह पश्चिम एशिया में अमेरिकी वर्चस्व को सीधी चुनौती देने की तैयारी कर चुका है।अमेरिका और इजरायल के लिए पैदा हुआ नया सिरदर्दचीन के इस कदम से सबसे बड़ा झटका अमेरिका और उसके सबसे करीबी सहयोगी इजरायल को लगा है। इजरायल और ईरान के बीच जारी सीधे टकराव के माहौल में ईरान को इतने आधुनिक हथियारों की सप्लाई मिलना इजरायली वायुसेना की रणनीतिक बढ़त के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। इसके साथ ही, पेंटागन को डर है कि ये चीनी हथियार ईरान समर्थित अन्य गुटों (जैसे हूती विद्रोही या हिजबुल्लाह) के हाथों में भी पहुंच सकते हैं, जिससे लाल सागर (Red Sea) और फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना और वाणिज्यिक जहाजों पर खतरा और अधिक गहरा हो जाएगा।वैश्विक व्यापार और एआई सर्च के नजरिए से बड़े मायनेआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च) और वैश्विक सुरक्षा के समीकरणों को देखें तो चीन का यह खुला हस्तक्षेप आने वाले समय में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को अस्थिर कर सकता है। यदि इस डील के जवाब में पश्चिमी देश चीन या ईरान पर नए कड़े प्रतिबंध लगाते हैं, तो वैश्विक सप्लाई चेन एक बार फिर बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बीजिंग और तेहरान के इस नए सैन्य गठजोड़ पर वॉशिंगटन और यूरोपीय देश क्या जवाबी कदम उठाते हैं।
इराक में अमेरिका-सऊदी के एयरस्ट्राइक, ईरान की मिसाइल जवाबी कार्रवाई; पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव
अमेरिकी सेना ने ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों को बनाया निशाना, ईरान ने आरोपों से किया इनकार; जॉर्डन स्थित अमेरिकी बेस और सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ी
मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में शांति की कोशिशों के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) और सऊदी अरब की सेना ने एक संयुक्त अभियान चलाकर पूर्वी इराक में स्थित ईरान समर्थित मिलिशिया के कई ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए हैं। यह सैन्य कार्रवाई पिछले 72 घंटों के दौरान अमेरिकी ठिकानों और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हुए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में की गई है।दूसरी ओर, इस एयरस्ट्राइक के ठीक बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजर रहे 3 अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों को जब्त कर आगे बढ़ने से रोक दिया है, जिससे वैश्विक कच्चे तेल के व्यापार पर सीधा संकट मंडराने लगा है।जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य बेस पर हमला नाकाममिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान को लेकर हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के तुरंत बाद जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी गईं।एयर डिफेंस की सफलता: CENTCOM के मुताबिक, जॉर्डन में तैनात अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते सभी मिसाइलों को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया।कोई नुकसान नहीं: हमले की इस कोशिश में अमेरिकी सैनिकों या बुनियादी ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।व्हाइट हाउस अलर्ट: इस हमले की तात्कालिक जानकारी राष्ट्रपति ट्रम्प और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों को दे दी गई है।स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान की बड़ी कार्रवाईवैश्विक ईंधन आपूर्ति के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में ईरान की ओर से की गई कार्रवाई ने वैश्विक शिपिंग कंपनियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ईरान के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, IRGC ने दावा किया है कि तीन तेल टैंकरों ने पहले दी गई चेतावनियों का उल्लंघन किया था, जिसके बाद उन्हें बलपूर्वक रोक दिया गया।घटनाक्रम (Event)स्थान (Location)मुख्य विवरण (Details)संयुक्त एयरस्ट्राइकपूर्वी इराकअमेरिका व सऊदी अरब द्वारा हथियारों और सैन्य लॉजिस्टिक्स डिपो पर हमलामिसाइल हमलाजॉर्डन (US बेस)ईरान समर्थित समूहों द्वारा दागी गई मिसाइलें हवा में ध्वस्ततेल टैंकर जब्तीस्ट्रेट ऑफ होर्मुजIRGC ने चेतावनी उल्लंघन का हवाला देकर 3 टैंकरों को रोकाशिपिंग कंपनियों ने बदले रूट, नौसैनिक बेड़े मुस्तैदखाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य टकराव को देखते हुए कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने अलर्ट जारी कर दिया है।मार्ग में बदलाव: कंपनियों ने जोखिम वाले समुद्री रास्तों के बजाय लंबे और सुरक्षित विकल्पों की समीक्षा शुरू कर दी है।सुरक्षा में इजाफा: कमर्शियल जहाजों पर अतिरिक्त निजी सुरक्षा गार्ड्स की तैनाती की जा रही है और बीमा (Insurance) कवर की समीक्षा की जा रही है।अमेरिकी नौसैनिक मौजूदगी: फिलहाल क्षेत्र में अमेरिका के 20 से ज्यादा युद्धपोत और नौसैनिक जहाज गश्त कर रहे हैं, जो ईरान के आसपास समुद्री नाकेबंदी अभियानों में शामिल हैं।CENTCOM ने कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि फरवरी से अप्रैल 2026 के दौरान इराक में अमेरिकी ठिकानों पर 600 से ज्यादा हमलों के प्रयासों में ईरान समर्थित समूहों का हाथ रहा है। यदि ये समूह अपनी भड़काऊ गतिविधियां बंद नहीं करते हैं, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश आगे भी कठोर सैन्य कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
कारगिल युद्ध के शहीदों को दी श्रद्धांजलि
भाटापारा| जय स्तंभ चौक स्थित भारत माता परिसर में अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद छत्तीसगढ़, भाटापारा द्वारा आयोजित 28वें कारगिल विजय दिवस समारोह में शामिल होकर कारगिल युद्ध के अमर वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उक्त अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले वीर सपूतों के शौर्य, साहस और बलिदान को नमन करते हुए शहीद परिवारों का सम्मान किया गया। देशभक्ति से ओत-प्रोत यह आयोजन प्रत्येक नागरिक में राष्ट्रप्रेम और वीरों के प्रति कृतज्ञता की भावना को और अधिक सशक्त करने वाला रहा। उक्त अवसर पर मुकेश शर्मा, डॉ.वाय पी सोनी, गिरधर शर्मा, सतीश अग्रवाल, मोनू मानिक, सुनील तिवारी, इंदरानी साहू, राजेश साहू, अभिषेक मोदी, सरिता धु्व सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में दीनानगर स्थित एस.एस.एम कॉलेज के ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय 'शौर्य सम्मान समारोह' का भावुक और गरिमामय आयोजन किया गया। शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद और कॉलेज प्रबंधन के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आर.के. तुली ने की। देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले जांबाजों की याद में आयोजित इस विशेष समारोह में पंजाब भर से पहुंचे 105 शहीद परिवारों को विशेष रूप से सम्मानित कर उनकी शहादत को नमन किया गया। समारोह में मामून कैंट पठानकोट से डिप्टी जी.ओ.सी. ब्रिगेडियर सुखबीर सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान 25 मैक यूनिट से मेजर कुलदीप सिंह, शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंद्र सिंह विक्की, कारगिल युद्ध के वीर चक्र विजेता कैप्टन रघुनाथ सिंह, कॉलेज प्रबंधकीय कमेटी के सचिव भारतेंदु ओहरी, रिटायर्ड कर्नल जी.एस. सैनी, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा पंजाब के चेयरमैन ठाकुर दविंदर सिंह दर्शी, राजपूत महासभा लोकसभा हलका गुरदासपुर के प्रधान कुंवर संतोख सिंह और परिषद के प्रेस सचिव बिट्टा काटल सहित कई गणमान्य नागरिक और सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे। । परमवीर चक्र व अशोक चक्र विजेताओं के परिजनों ने बढ़ाई समारोह की शोभा इस ऐतिहासिक सम्मान समारोह में परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया के भतीजे सूबेदार कर्ण सिंह, अशोक चक्र विजेता बलिदानी लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह के पिता कैप्टन जोगिंदर सिंह और कारगिल युद्ध के वीर चक्र विजेता शहीद सूबेदार निर्मल सिंह की पत्नी मंजीत कौर विशेष रूप से मौजूद रहीं। इनके अलावा वीर चक्र विजेता मेजर भगत सिंह के भतीजे प्रो. हरबंस सिंह, सेना मेडल विजेता शहीद लांसनायक डिप्टी सिंह के भतीजे वरिंदर सिंह, वीर चक्र विजेता शहीद नायक मुख्तयार सिंह के बेटे सूबेदार सुरजीत सिंह, गलवान घाटी के बलिदानी नायब सूबेदार सतनाम सिंह (सेना मेडल) के भाई सूबेदार सुखचैन सिंह, शहीद सिपाही मक्खन सिंह के पिता हंस राज और पुलवामा हमले में शहीद हुए कांस्टेबल मनिंदर सिंह के पिता सतपाल अत्री सहित अनेक वीरों के परिजनों ने शिरकत की। कारगिल युद्ध भारतीय सेना के अतुलनीय शौर्य का प्रतीक: ब्रिगेडियर सुखबीर सिंह मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर सुखबीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि कारगिल का युद्ध भारतीय सेना के अद्भुत साहस, अनुशासन और अद्वितीय पराक्रम की जीती-जागती मिसाल है। उन्होंने कहा कि अत्यंत दुर्गम पहाड़ियों और विपरीत परिस्थितियों के बीच भारतीय वीरों ने जिस तरह से दुश्मन को धूल चटाई, उसकी मिसाल पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिलती। ब्रिगेडियर सिंह ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा में सर्वस्व न्योछावर करने वाले रणबांकुरों के शौर्य और शहादत के सामने पूरा राष्ट्र नतमस्तक है और इन वीरों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) प्रकोष्ठ की ओर से रविवार को कारगिल विजय दिवस पर कृषि महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विश्वविद्यालय के अलग-अलग महाविद्यालयों के करीब 80 एनएसएस स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय शर्मा ने की, जबकि मुख्य अतिथि कारगिल युद्ध के वीर योद्धा और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित पूर्व सैनिक सुबेदार मेजर गोवर्धन शर्मा रहे। कार्यक्रम में सुबेदार मेजर गोवर्धन शर्मा ने कारगिल युद्ध के अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि भारतीय सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में साहस, धैर्य और राष्ट्रभक्ति का परिचय देकर दुश्मनों का मुकाबला किया। उन्होंने शहीद जवानों के बलिदान का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। इस दौरान छात्रों ने उनसे संवाद कर युद्ध से जुड़े अनुभव भी सुने। युवाओं को दिलाया राष्ट्र सेवा का संकल्प कार्यक्रम की शुरुआत एनएसएस के लक्ष्य गीत से हुई। अतिथियों का स्वागत करने के बाद डॉ. संजय शर्मा ने छात्र-छात्राओं और स्वयंसेवकों को देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा का संकल्प दिलाया। कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने अपने संदेश में युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने और जिम्मेदार नागरिक बनने का आह्वान किया। जय हिन्द के उद्घोष के साथ कार्यक्रम का समापन कार्यक्रम के दौरान कारगिल युद्ध और देश की रक्षा में शहीद हुए वीर जवानों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। अंत में एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुबुही निषाद ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार जताया। कार्यक्रम का समापन भारत माता की जय, वंदे मातरम् और जय हिन्द के उद्घोष के साथ हुआ।
जोधपुर के पहाड़ी इलाकों पर सेना ने कारगिल के 'टाइगर हिल युद्ध' जैसा दृश्य दिखाते हुए सांकेतिक प्रदर्शन किया। इस दौरान हथियार लिए जवानों ने पहले पहाड़ी इलाके में चढ़ाई की। इसके बाद दुश्मन को हराकर चौकी पर कब्जा किया। कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ पर रविवार को जोधपुर में ऑपरेशन विजय कारगिल-2026 सम्मान समारोह के दौरान यह दृश्य दिखा। क्रीड़ा भारती जोधपुर प्रांत के तत्वावधान में रावटी, घोड़ा घाटी, मेहरानगढ़ फोर्ट रोड पर आयोजित समारोह में आम लोग, पूर्व सैनिक आदि शामिल हुए। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा- कारगिल विजय भारतीय सेना के शौर्य, साहस और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा- देश की सीमाओं की रक्षा के लिए प्राणों का बलिदान देने वाले वीर जवानों का ऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शहीदों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्रसेवा, अनुशासन और देशभक्ति की भावना को जीवन का हिस्सा बनाएं। राज्यपाल ने कहा- कारगिल के वीरों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। देंखे समारोह से जुड़े PHOTOS… वीर सैनिकों और वीरांगनाओं को किया सम्मानित राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागडे और आयोजन समिति के अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कारगिल युद्ध में वीरता का परिचय देने वाले राजस्थान के 16 वीर सैनिकों और वीरांगनाओं को सम्मानित किया। शेखावत ने कहा- हम सभी यहां उस स्वर्णिम इतिहास को आंखों के सामने पुनः जीवंत करने और उससे प्रेरणा लेने के लिए एकत्र हुए हैं, जिसे हमारे वीरों ने अपने रक्त से लिखा था। कारगिल युद्ध ने पूरी दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत शांति का उपासक तो है, लेकिन यदि कोई हमारी संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देगा तो देश अपने सैनिकों की ताकत के बल पर हर चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देना जानता है। इतिहास अतीत का पन्ना नहीं, बल्कि भविष्य के निर्माण की आधारभूमि गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा- किसी भी देश के लिए इतिहास केवल अतीत का पन्ना नहीं, बल्कि भविष्य के निर्माण की आधारभूमि होता है। जब हम इतिहास की घटनाओं को केवल पुस्तकों में पढ़ने के बजाय अपनी आंखों के सामने जीवंत देखते हैं तो वह आने वाली पीढ़ियों के मानस पर गहरा प्रभाव छोड़ती है। जो समाज अपने राष्ट्रनायकों का सम्मान करना बंद कर देता है, वह अपनी जड़ों और प्रेरणास्रोतों से दूर हो जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साल 2047 तक 'विकसित भारत' के संकल्प से जोड़ते हुए शेखावत ने कहा- राष्ट्र निर्माण केवल सीमा पर तैनात सैनिक ही नहीं करते। प्रयोगशाला में काम करने वाला वैज्ञानिक, स्टार्टअप शुरू करने वाला युवा, संस्कार देने वाला शिक्षक, खिलाड़ी तैयार करने वाला कोच और निष्ठा से अध्ययन करने वाला छात्र, अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन करने वाला हर व्यक्ति राष्ट्र निर्माण में योगदान देता है। युद्ध का किया जीवंत प्रदर्शन समारोह में कारगिल युद्ध का जीवंत मंचन किया गया। युद्ध के रोमांचक और भावनात्मक दृश्यों के सजीव प्रदर्शन ने लोगों को कारगिल के रणबांकुरों की वीरगाथा से रूबरू कराया। देशभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग दिया। सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने कारगिल की प्रमुख चोटियों पॉइंट 5140, पॉइंट 4875, पॉइंट 5353 और टाइगर हिल पर हुए भीषण संघर्ष और भारतीय सेना की विजय गाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में ये रहे मौजूद केंद्रीय मंत्री शेखावत ने क्रीड़ा भारती व आयोजन समिति का आयोजन की सफलता के लिए आभार जताया। साथ ही राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागडे का अभिनंदन किया। कार्यक्रम में मुख्य सचेतक व जालोर विधायक जोगेश्वर गर्ग, क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय मंत्री राज चौधरी, प्रांत अध्यक्ष पृथ्वीराज सिंह जोधा, महानगर अध्यक्ष वरुण धनाडिया, पूर्व सैनिक सेवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरपत सिंह सहित सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक आदि मौजूद रहे।
दुश्मन करीब 18 हजार फीट की ऊंचाई पर पहाड़ों पर मजबूत स्थिति में बैठा था। भारतीय जवानों को नीचे से ऊपर की तरफ हमला करना था। जवानों के कंधों पर करीब 50-50 किलो का भारी सामान था। गोलियों का जखीरा भी सीमित था। 22 ग्रेनेडियर्स की मुस्लिम कंपनी ने ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर’ और रेजिमेंट के नारे ‘सर्वदा शक्तिशाली’ के साथ अचानक हमला किया। इससे पाकिस्तानी सेना पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना। भारतीय सेना ने इसका फायदा उठाया। चार्ली कंपनी कमांडर मेजर अजीत सिंह (अब ब्रिगेडियर) के नेतृत्व में जवानों ने बैनेट फाइट और आर्टिलरी फायर के जरिए दुश्मन का मुकाबला किया। इसके बाद खालूबार रिज-5287 मीटर पर भारतीय सेना ने तिरंगा फहराया। यह कहना है 22 ग्रेनेडियर्स के वेटरन रिटायर्ड ऑनरेरी कैप्टन टीपू सुलतान खान का। कारगिल विजय दिवस के 27 साल पूरे होने पर झुंझुनूं के टीपू सुलतान और रिटायर्ड नायब सूबेदार जंगशेर खां ने अनुभव साझा किए। कारगिल युद्ध में झुंझुनूं के 19 जवान शहीद हुए थे। हजारों फीट की ऊंचाई पर जवानों ने बेहद मुश्किल हालात में लड़ाई लड़ी। कई जगह तापमान बहुत कम था, जिससे वहां रहना और लड़ना जवानों के लिए बेहद मुश्किल था। ससुराल मैसेज भेजा- सबसे बड़ी शादी युद्ध में सफल होकर लौटना रिटायर्ड नायब सूबेदार जंगशेर खां ने बताया- जब मुझे कारगिल जाने का आदेश मिला, उसी समय मेरे साले की शादी तय थी। ससुराल से लगातार संदेश आ रहे थे कि मैं शादी की रस्मों में शामिल होने के लिए घर आ जाऊं। लेकिन मेरे लिए उस समय देश की रक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी। मैंने ससुराल में संदेश भेजकर कहा था कि मेरे लिए सबसे बड़ी शादी यही है कि युद्ध में सफल होकर लौटूं। उन्होंने बताया- शायद वह खत आज भी मेरे ससुराल में मौजूद होगा। मैंने जवाब दिया था कि हमारे लिए सबसे बड़ी शादी यह है कि हम लड़ाई में सफल होकर आ जाएं, उसके बाद ही मैं आ सकता हूं। उससे पहले मैं नहीं आ सकता। घर पर पहुंच गई शहादत की अफवाह जंगशेर खां ने बताया कि जब मैं खालूबार की बर्फीली पहाड़ियों पर दुश्मन से लड़ रहा था, उस समय घर पर मेरी शहादत की झूठी खबर तक पहुंच गई थी। इससे परिवार की चिंता बढ़ गई थी। मैंने और मेरे साथियों ने जान की परवाह किए बिना दुश्मन से मुकाबला जारी रखा। जवानों ने मुश्किल परिस्थितियों में भी मोर्चा नहीं छोड़ा और दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर किया। जब अपने ही जवानों के पास बोफोर्स से फायर करना पड़ा धनूरी गांव के वेटरन रिटायर्ड ऑनरेरी कैप्टन टीपू सुलतान खान ने बताया कि मेरी यूनिट हैदराबाद से राजस्थान और फिर स्पेशल ट्रेन से महज तीन दिन में जम्मू और कारगिल के मोर्चे पर पहुंची थी। बुधखरबू से जवान पैदल यलडोर पहुंचे। इसके बाद द्रास, कारगिल और बटालिक सेक्टर की दुर्गम पहाड़ियों पर चढ़ाई शुरू की गई। युद्ध के दौरान एक ऐसा समय भी आया, जब जवानों का गोला-बारूद कम होने लगा। दूसरी ओर दुश्मन लगातार काउंटर-अटैक कर रहा था। हालात इतने मुश्किल हो गए थे कि कंपनी कमांडर को SOS फायर का निर्देश देना पड़ा। इसका मतलब था कि बोफोर्स तोपों से अपने ही जवानों की स्थिति के आसपास फायर करना, ताकि दुश्मन को रोका जा सके। टीपू सुलतान खान ने उस पल को याद करते हुए बताया कि 25 से 30 सेकंड का वह समय ऐसा था, जब सांसें थम जाती थीं। उस समय मां-बाप, यार-दोस्त और बचपन की गलियां आंखों के सामने घूमने लगती थीं। उन्होंने बताया कि बोफोर्स की मार से करीब ढाई किलोमीटर के दायरे में दुश्मन को भारी नुकसान हुआ। इसके बाद जवानों ने आमने-सामने की लड़ाई और बैनेट फाइट के जरिए दुश्मनों को पीछे खदेड़ दिया। सैनिक के पास होता है सिर्फ 25-30 सेकंड का समय कैप्टन टीपू सुलतान खान ने SOS फायर के बारे में कहा कि जब कोई सैनिक दुश्मन के बहुत करीब पहुंच जाता है और उसके पास लड़ने के लिए गोला-बारूद नहीं बचता तो वह दुश्मन के हाथों में नहीं पड़ना चाहता। ऐसी स्थिति में वह वायरलेस के जरिए कम से कम 45 किलोमीटर दूर मौजूद अपनी फोर्स से SOS फायर मांगता है। उन्होंने बताया कि SOS फायर की अलग-अलग तरह की प्रक्रिया होती है। दिन में धुआं छोड़कर और रात में रोशनी के जरिए सैनिक अपनी लोकेशन बताते हैं। इसके बाद उसी जगह पर तोपों से फायर किया जाता है। यह गोला इतना भयानक होता है कि आसपास करीब ढाई किलोमीटर के इलाके में कुछ भी बचना मुश्किल होता है। जिस सैनिक ने SOS फायर मांगा होता है, वह कोशिश करता है कि किसी चट्टान या ऐसी जगह छुप जाए, जहां गोले का सीधा असर न पहुंचे। SOS फायर मांगने के बाद सैनिक के पास सिर्फ 25 से 30 सेकंड का समय होता है। इसके बाद गोला गिरता है और आसपास का इलाका तबाह हो जाता है। कैप्टन टीपू सुलतान खान के अनुसार, उस समय सैनिक के मन में यही भाव रहता है कि ‘SOS मेरे जिस्म के बजाय मेरी आत्मा की रक्षा करना।’ देशभर से जवानों के लिए भेजी राखी-चिट्ठियां कारगिल युद्ध के दौरान देशभर के लोगों ने जवानों का हौसला बढ़ाया। बहनों ने जवानों के लिए राखियां भेजीं। लोगों ने चिट्ठियां और खाने का सामान भी भेजा। कैप्टन टीपू सुलतान खान ने बताया कि जब चोटी पर तिरंगा लहराता हुआ दिखाई दिया तो ऐसा लगा कि अब तक किया गया हर संघर्ष सफल हो गया। चाचा ने पत्र में लिखा- ‘घबराना मत बेटे, मुझे भी बुला लेना’ कैप्टन टीपू सुलतान खान ने बताया कि जब मैं सीमा पर जा रहा था, तब मेरे चाचा इकबाल ने मुझे एक पत्र भेजा था। पत्र में लिखा था- “अजीज टीपू सुलतान, प्यार भरा सलाम। तुम सीमा पर युद्ध में जा रहे हो, बड़ी खुशी हुई। घबराना मत बेटे, मुझे भी बुला लेना। ऐसा अवसर खुशनसीबों को ही मिलता है। वतन की हिफाजत में कोई कमी मत रखना।” उन्होंने बताया- चाचा ने पत्र में आगे लिखा था कि वे भी युद्ध में जाना चाहते हैं। उन्होंने मुझसे कहा था कि अपने कर्नल को बता देना कि तुम्हारा चाचा भी युद्ध में आना चाहता है और दोनों चाचा-भतीजा मिलकर दुश्मन से लड़ेंगे। पत्र के आखिर में उन्होंने उम्मीद जताई थी कि टीपू सुलतान की हर गोली अपने निशाने पर लगेगी। सैनिक बोले- युद्ध में जाति और भाषा नहीं, सिर्फ भारत था कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने वाले इन सैनिकों का कहना है कि आज भी उन दिनों की याद आती है तो आंखें नम हो जाती हैं। उन्हें गर्व है कि देश की ऐतिहासिक जीत में उनका भी योगदान रहा। युद्ध ने उन्हें सिखाया कि मोर्चे पर न कोई जाति थी और न कोई भाषा। वहां सिर्फ भारत था और देश की रक्षा का संकल्प था।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शनिवार को कारगिल विजय दिवस पर चंडीगढ़ स्थित वॉर मेमोरियल पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में सेना, प्रशासन और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने शहीदों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने सेना के नाम एक संदेश भी लिखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। मई से 26 जुलाई, 1999 तक चले कारगिल युद्ध में 527 से अधिक वीर जवान शहीद हुए थे, जिनमें 65 पंजाब के जवान शामिल थे। यह कार्यक्रम सैनिक वेलफेयर बोर्ड और विभिन्न संस्थाओं की ओर से आयोजित किया गया। शहीद एक परिवार के नहीं पूरे देश के होते हैं सीएम ने कहा , “जो कौम अपने शहीदों को याद रखती है, वह हमेशा आगे बढ़ती है। शहीद किसी एक परिवार के नहीं, बल्कि पूरे देश के होते हैं। मैं हर साल यहां आकर उन्हें श्रद्धांजलि देता हूं।” मुख्यमंत्री ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा, जब कारगिल युद्ध हुआ था, तब मैं पटियाला में रहता था। बतौर कलाकार उस समय मैं शो किया था और उससे हुई कमाई सेना को भेजी थी। मैं शहीदों को हमेशा प्रणाम करता हूं। उनकी वजह से ही आज हम सुरक्षित हैं। चाहे माइनस तापमान हो या भीषण गर्मी, हमारे जवान सीमाओं पर डटे रहते हैं। उनकी बदौलत ही हम अपने घरों में चैन की नींद सो पाते हैं। वहीं, उन्होंने किसी तरह का राजनीतिक सवाल नहीं लिया।
अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल 98 डॉलर पार:कतर से LNG सप्लाई भी अटकने की आशंका; महंगाई बढ़ सकती है
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड आज 23 जुलाई को 4% बढ़कर 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। यह पिछले 6 हफ्तों में सबसे ज्यादा है। वहीं अमेरिकी क्रूड भी 89 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत में महंगाई बढ़ सकती है। कच्चे तेल के महंगे होने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के फ्यूल मार्जिन पर दबाव बढ रहा है। अगर लंबे समय तक क्रूड महंगा बना रहता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती है। लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमला, हूतियों ने नाकेबंदी का ऐलान किया तेल की कीमतों में अचानक आए इस उछाल की बड़ी वजह पश्चिम एशिया का बिगड़ता माहौल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के साथ अब यह विवाद फारसी खाड़ी के अन्य हिस्सों में भी फैल गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हमला कर दिया है। यह हमला हुती ग्रुप की ओर से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी की घोषणा करने के ठीक एक दिन बाद हुआ है, जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। तेल कंपनियों के शेयर 2.5% तक टूटे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर पड़ा है… भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। क्रूड महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ता है, जिससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। अक्टूबर तक LNG सप्लाई अटकने के आसार ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कतर एनर्जी मिड-अक्टूबर तक लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी LNG के शिपमेंट पर 'फोर्स मैज्योर' को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कतर ने जून में ही एशिया और यूरोप के कुछ ग्राहकों को सूचित किया था कि अगस्त और सितंबर के कार्गो रद्द रहेंगे। अगर यह पाबंदी अक्टूबर तक खिंचती है, तो सर्दियां शुरू होने से पहले गैस का ग्लोबल संकट और गहरा सकता है, क्योंकि यूरोप और एशियाई देश सीमित LNG सप्लाई के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा करेंगे। सेंसेक्स 364 और निफ्टी 127 अंक गिरी कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार पर बिकवाली का भारी दबाव बन गया है। 23 जुलाई को सेंसेक्स 364 अंक की गिरावट के साथ 76,391 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 127 अंक की गिरावट रही, ये 23,870 पर बंद हुआ। रियल्टी, एनर्जी और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा बिकवाली रही। मई में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े थे मई में IOC, BPCL और HPCL ने महंगे अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों का हवाला देते हुए किस्तों में पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में ₹7.50-₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। देश के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों में से 90% से अधिक पर इन तीनों सरकारी कंपनियों का नियंत्रण है। आगे क्या? पश्चिम एशिया में अगर यह गतिरोध लंबा खींचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर सकती हैं। इससे आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार, खासकर बैंकिंग, ऑटो और पेंट कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… सोना ₹274 बढ़कर ₹1.46 लाख पर पहुंचा: 4 दिन में ₹4,398 महंगा हो चुका, चांदी आज ₹360 चढ़कर ₹2.26 लाख पर पहुंची सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 23 जुलाई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 360 रुपए बढ़कर 2.26 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 274 रुपए चढ़कर 1.46 लाख रुपए पर पहुंच गया है। 4 दिन में सोना 4,398 रुपए और 10,346 रुपए चांदी महंगी हो चुकी है। पूरी खबर पढ़ें…
The Odyssey Review: युद्ध से लौटते योद्धा की नहीं, खुद तक लौटते इंसान की कहानी
क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' सिर्फ होमर के महाकाव्य का रूपांतरण नहीं, बल्कि युद्ध, अपराधबोध और आत्म-स्वीकृति की गहरी कहानी है। मैट डेमन का शानदार अभिनय, अद्भुत सिनेमैटोग्राफी और भावनात्मक निर्देशन इसे सिर्फ एक पौराणिक एडवेंचर नहीं रहने देते। शुरुआती ...
महाभारत के महासंग्राम की चर्चा होते ही सबसे पहले मन में आता है वह दृश्य, जिसमें अर्जुन दुविधा में है और भगवान श्रीकृष्ण उसे गीता का उपदेश दे रहे हैं। युद्ध से पहले ही श्रीकृष्ण ने यह प्रण ले लिया था कि वे कुरुक्षेत्र में शस्त्र नहीं उठाएंगे। उनकी भूमिका केवल अर्जुन के सारथी के रूप में रहने की थी। लेकिन, एक बार ऐसी विषम परिस्थिति बनी कि जगत के पालनहार को अपना वचन तोड़ना पड़ा और वे रथ का पहिया लेकर भीष्म पितामह की ओर दौड़ पड़े। आखिर वह क्या मजबूरी थी, जिसने प्रभु को शस्त्र उठाने पर विवश कर दिया?क्यों दी थी भगवान श्रीकृष्ण ने शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा?भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र युद्ध में तटस्थ रहने की घोषणा की थी। उन्होंने दुर्योधन और अर्जुन दोनों को विकल्प दिया था—एक तरफ उनकी विशाल 'नारायणी सेना' और दूसरी तरफ वे स्वयं, जो निहत्थे रहेंगे। अर्जुन ने श्रीकृष्ण को चुना और दुर्योधन ने सेना को। श्रीकृष्ण की प्रतिज्ञा के पीछे उद्देश्य यह था कि वे न चाहते हुए भी किसी एक पक्ष का सीधा संहार न करें, बल्कि न्याय की स्थापना में केवल मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। वे अपनी लीलाओं से यह दिखाना चाहते थे कि अधर्म का नाश करने के लिए युद्ध से ज्यादा महत्वपूर्ण सही मार्गदर्शन और विवेक है।जब भीष्म के सामने विचलित हो गए थे श्रीकृष्णभीष्म पितामह ने प्रतिज्ञा की थी कि वे श्रीकृष्ण को शस्त्र उठाने पर मजबूर कर देंगे। युद्ध के दौरान, जब भीष्म पितामह ने अर्जुन पर बाणों की वर्षा शुरू की, तो अर्जुन उन्हें रोकने में असमर्थ हो गए। स्थिति ऐसी बन गई कि अर्जुन का रथ क्षतिग्रस्त हो गया और वे हार की कगार पर पहुँच गए। अर्जुन को संकट में देख भगवान श्रीकृष्ण का वात्सल्य और मित्र प्रेम जाग उठा। अपने प्रिय भक्त को मृत्यु के मुख में देख श्रीकृष्ण ने अपनी प्रतिज्ञा त्याग दी और जमीन से रथ का एक टूटा हुआ पहिया उठाकर पितामह की ओर बढ़े।'विपक्ष' की जीत या 'भक्ति' की पराकाष्ठा?जैसे ही श्रीकृष्ण चक्र (पहिया) लेकर पितामह की ओर बढ़े, भीष्म ने अपने शस्त्र डाल दिए और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, प्रभु, मेरी प्रतिज्ञा पूरी हुई। आज आपके हाथों अपना अंत देखकर मेरा जीवन धन्य हो गया। श्रीकृष्ण का वह क्रोध वास्तव में उनके भक्त के प्रति प्रेम था। यह घटना सिखाती है कि भगवान के लिए अपने भक्त की रक्षा उनकी स्वयं की प्रतिज्ञा से कहीं अधिक बड़ी होती है। महाभारत का यह प्रसंग आज भी हमें याद दिलाता है कि भक्त और भगवान के बीच कोई भी नियम, वचन या प्रतिज्ञा बड़ी नहीं होती।
गाजा संघर्ष : नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल
सयुक्त राष्ट्र की हालिया स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की रिपोर्ट ने इजरायल और कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में जारी हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों की गंभीर तस्वीर पेश की है।
मौसम में आए अचानक बदलाव और मानसून की पहली बारिश के दस्तक देते ही जहां लोगों को चिलचिलाती गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ एक बड़े खतरे ने भी दस्तक दे दी है। रिमझिम फुहारों के साथ ही राजधानी और उसके आस-पास के इलाकों में मच्छरों से होने वाली जानलेवा बीमारी 'डेंगू' (Dengue) का खौफनाक खतरा तेजी से बढ़ने लगा है। जलजमाव और उमस भरे इस मौसम को मच्छरों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। इसी गंभीर चुनौती को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। राजधानी के सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) और नगर निगम की टीमों ने इस महामारी से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर अपनी व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।जलजमाव वाले हॉटस्पॉट चिन्हित और फॉगिंग के लिए विशेष टीमों का गठनबारिश का पानी जमा होने के कारण राजधानी के कई रिहाइशी इलाकों और स्लम बस्तियों में डेंगू का डंक फैलने का सबसे ज्यादा रिस्क रहता है। स्थानीय नगर निगम और स्वास्थ्य अधिकारियों ने शहर के उन संवेदनशील इलाकों को चिन्हित कर लिया है जहां पिछले सालों में डेंगू के सबसे ज्यादा मामले सामने आए थे। इन चिन्हित हॉटस्पॉट्स में जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है। इसके साथ ही, एंटी-लार्वा स्प्रे के छिड़काव और आधुनिक फॉगिंग मशीनों को काम पर लगा दिया गया है। नगर निगम की विशेष टीमें हर वार्ड में जाकर नालियों और खाली पड़े प्लॉटों में जमा पानी की चेकिंग कर रही हैं ताकि मच्छरों के पनपने के चक्र को शुरुआती चरण में ही तोड़ा जा सके।अस्पतालों में रिजर्व हुए स्पेशल डेंगू वार्ड और प्लेटलेट्स की व्यवस्था तेजराजधानी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के निर्देशों के बाद शहर के सभी बड़े सिविल अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया गया है। संभावित मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पतालों में विशेष 'डेंगू वार्ड' और आइसोलेशन बेड आरक्षित कर दिए गए हैं। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की अलग से ड्यूटी लगाई गई है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। इसके अलावा, ब्लड बैंकों को भी कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे प्लेटलेट्स (Platelets) का पर्याप्त स्टॉक मेंटेन रखें, क्योंकि डेंगू के गंभीर मामलों में मरीजों के प्लेटलेट्स बहुत तेजी से गिरते हैं, जिससे उनकी जान पर बन आती है।स्थानीय निवासियों के लिए गाइडलाइन जारी और एआई सर्च पर बढ़े सवालस्वास्थ्य विभाग ने राजधानी के नागरिकों के लिए एक जरूरी और कड़े प्रिकॉशंस की एडवाइजरी जारी की है। डॉक्टरों का कहना है कि डेंगू का मच्छर साफ और स्थिर पानी में पनपता है, इसलिए लोग अपने घरों में रखे कूलर, गमलों, पुरानी टायरों और छतों पर पानी बिल्कुल भी जमा न होने दें। रात को सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। आज के डिजिटल युग और आधुनिक एआई-संचालित जनरेटिव सर्च (GEO) पर भी लोग 'डेंगू के शुरुआती लक्षण' और 'प्लेटलेट्स बढ़ाने के घरेलू उपाय' जैसे विषयों को लगातार सर्च कर रहे हैं। यदि किसी को तेज बुखार, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों में गंभीर अकड़न या बदन दर्द की शिकायत हो, तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
'वाराणसी' में दिखेगा महायुद्ध, भगवान राम और कुंभकर्ण के बीच होगा 30 मिनट का ऐतिहासिक टकराव!
दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली जब भी कोई नया प्रोजेक्ट लाते हैं, तो वह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक उत्सव बन जाता है। 'बाहुबली' और 'आरआरआर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद, राजामौली अब सुपरस्टार महेश बाबू के साथ अपनी अगली महात्वाकांक्षी ...
इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) हर हफ्ते दुनिया भर यूजर्स के सर्च और प्रोफाइल विजिट के आधार पर 'मोस्ट पॉपुलर इंडियन सेलिब्रिटीज' की लिस्ट जारी करता है। आमतौर पर इस लिस्ट के शीर्ष पर वही सुपरस्टार्स नजर आते हैं जिनकी बड़ी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज ...
खाड़ी युद्ध से निपटने की मोदी की तजबीज
मोदीजी ने एक बार फिर राष्ट्र की जनता को उसके कर्तव्यों के प्रति सचेत किया है।
ललित सुरजन की कलम से युद्ध नहीं, शांति चाहिए
जब एक तरफ सिर्फ एक सैनिक की गिरफ्तारी से उपजे भय और रिहाई की घोषणा से मिली राहत है, तब दूसरी तरफ आक्रामक मुद्रा अपनाकर हम क्या हासिल करना चाहते हैं?
युद्धविराम और हाशिए पर धकेल दिया गया भारत
यह युद्ध स्पष्ट रूप से नेतन्याहू की देन है और ट्रम्प इसके परिणामों के बारे में सोचे-समझे बिना ही इसमें फंस गए।
युद्ध के माहौल में विश्व शांति का शंखनाद है विश्व णमोकार दिवस
विश्व णमोकार दिवस- 9 अप्रैल, 2026 विश्व इतिहास के इस संक्रमणकाल में, जब मानवता युद्ध, हिंसा, आतंक, तनाव और असहिष्णुता के बोझ तले कराह रही है, ऐसे समय में 9 अप्रैल 2026 को मनाया जाने वाला विश्व णमोकार मंत्र दिवस एक अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा-विस्फोट के रूप में सामने आ रहा है। यह दिवस केवल एक ... Read more
तीसरे विश्वयुद्ध की आहट और गांधी
इतिहास विजय-पराजय-विनाश का मृत दस्तावेज नहीं है, न वह किसी की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कहानी का विवरण है।
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता, बेटी के साथ सुरक्षित लौटीं भारत, सुनाई आपबीती
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता भी अपनी 14 साल की बेटी सायरा के साथ यूएई में ...
एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज़ की '120 बहादुर' को लेकर चर्चा अब अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। फिल्म ट्रेलर ने पूरी तरह से रोमांच और प्रेरणा का सही मिश्रण पेश किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बलिदान दिवस पर मेजर शैतान सिंह ...
War 2 रिव्यू: लचर स्क्रिप्ट और निर्देशन के कारण रितिक और एनटीआर हारे युद्ध, पढ़ें पूरी समीक्षा
रितिक रोशन और एनटीआर स्टारर War 2 ‘स्पाई यूनिवर्स’ की बड़ी पेशकश मानी जा रही थी, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और औसत निर्देशन ने इसे निराशाजनक बना दिया। शानदार एक्शन सीक्वेंस और एनटीआर के दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद फिल्म का सेकंड हाफ बिखर गया। कहानी में ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला अपनी खूबसूरती से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। उर्वशी ने बेहद ही कम समय में एक अलग मुकाम हासिल किया है। वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों के साथ 'मिलने और अभिवादन' के क्षणों में संलग्न रहती है। ऐसा ही एक क्षण था जब ...
सलमान खान की सिकंदर के आखिरी गाने में दिखेगा जबरदस्त जलवा, तुर्की से बुलाए गए 500 डांसर्स!
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की 'सिकंदर' इस साल की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके एक्शन-पैक्ड टीजर ने इसकी भव्य एंट्री के लिए एकदम परफेक्ट माहौल तैयार कर दिया है। भव्य पैमाने पर बनाई गई इस फिल्म में ...
केसरी वीर के लिए सूरज पंचोली ने की कड़ी ट्रेनिंग, ऐसे सीखा युद्ध कौशल
बॉलीवुड एक्टर सूरज पंचोली अपनी पहली बायोपिक में वीर हामीरजी गोहिल के ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने जा रहे हैं। सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय और सूरज पंचोली अभिनीत फिल्म 'केसरी वीर : लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ' का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ...
फरहान अख्तर लेकर आ रहे भारत-चीन युद्ध पर आधारित फिल्म 120 बहादुर, निभाएंगे मेजर शैतान सिंह का रोल
Movie 120 Bahadur : रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट, ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज के साथ मिलकर '120 बहादुर' को पेश करने के लिए उत्साहित हैं। यह फिल्म मेजर शैतान सिंह (पीवीसी) और चार्ली कंपनी, 13 कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिकों की कहानी कहती ...
Adil Hussain: दुनियाभर में इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 की धूम मची हुई है। पेरिस ओलंपिक में दुनियाभर के खिलाड़ियों ने भाग लिया है। भारत के कई खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। हाल ही में तुर्की के शूटर यूसुफ डिकेक ने सिल्वर मेडल जीता।
Kalki 2898 AD: शुरू हो गया नया युद्ध, पूरे ट्रेलर की अहम कड़ी हैं अमिताभ, प्रभास करेंगे इम्प्रेस
Kalki 2898 AD के ट्रेलर को देखें तो, फिल्म कल्कि 2898 एडी के मेकर्स ने विश्वास दिलाया है कि ये फिल्म लोगों को बांधने में कामयाब होगी. टफ सीक्वेंस, क्लियर एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर आपका ध्यान खींचते हैं. वीएफएक्स पर भी अच्छा काम किया गया है.
आशुतोष राणा ने डीपफेक वीडियो को बताया 'माया युद्ध', बोले- ये सालों से चल रहा
आशुतोष ने कहा कि ऐसी बातों में खुद को डिफेंड करने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि जो लोग आपको जानते हैं वो सवाल करेंगे ही नहीं. और जो नहीं जानते, उन्हें किसी रिस्पॉन्स से फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वो दिमाग में आपकी एक छवि बना चुके होते हैं.
रानीति बालाकोट एंड बियॉन्ड: जिमी शेरगिल की नई सीरीज भारत की आधुनिक युद्ध की ऐतिहासिक कहानी को प्रदर्शित करेगी। जिमी शेरगिल दो मिनट के ट्रेलर की शुरुआत पुलवामा हमले की झलक से होती है। एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाने वाले आशीष कहते हैं, ये एक नया रण है या इसे जीतने के लिए एक नई रणनीति की जरूरत है। इसे भी पढ़ें: नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन प्रहार', कमांडर शंकर राव समेत अब तक 79 हुए ढेर, हिट लिस्ट में और भी कई नाम शामिल आगामी वेब शो आधुनिक युद्ध को डिकोड करता है जो केवल भौतिक सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता है बल्कि सोशल मीडिया, डिजिटल रणनीति और गुप्त राजनीतिक चालों के क्षेत्र से परे है जो भू-राजनीति को नया आकार देने की शक्ति रखता है। वेब श्रृंखला उन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है जिन्होंने 2019 में देश को हिलाकर रख दिया था। शो में कुछ हवाई दृश्य, शानदार प्रदर्शन और एक शक्तिशाली कथा है जो युद्ध के मैदान के अंदर और बाहर हर पहलू को चतुराई से पकड़ती है। इसे भी पढ़ें: Biden को सोचना पड़ेगा फिर एक बार, Iran पर प्रहार तो रूस करेगा पलटवार, रक्षा मंत्रायल ने चिट्ठी लिखकर जता दी मंशा आगामी वेब श्रृंखला के बारे में बात करते हुए, जिमी ने कहा: यह मेरे द्वारा अतीत में की गई किसी भी भूमिका से भिन्न है। कम से कम यह कहना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन भारत की पहली वॉर-रूम केंद्रित वेब-श्रृंखला का हिस्सा बनना बेहद संतोषजनक भी है। वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित जिसने देश को हिलाकर रख दिया। एनएसए प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए, आशीष ने कहा, एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन रक्षा बलों के कुछ सदस्यों के साथ बैठकों ने मुझे अपने चरित्र की बारीकियों को समझने में मदद की। तैयारी कार्य और कार्यशालाएं मुझे वापस ले गईं मेरे एनएसडी के दिनों में। संतोष सिंह द्वारा निर्देशित, श्रृंखला का निर्माण स्फीयरओरिजिन्स मल्टीविजन प्राइवेट लिमिटेड के सुंजॉय वाधवा और कॉमल सुंजय डब्ल्यू द्वारा किया गया है। इसमें प्रसन्ना भी हैं। शो का प्रीमियर 25 अप्रैल को JioCinema पर होगा।
दर्शक काफी समय से रैपर बादशाह और हनी सिंह के बीच जुबानी जंग देख रहे हैं। दोनों का रिश्ता सालों से विवादों से भरा रहा है। हालांकि करियर के शुरुआती दिनों में बादशाह और हनी सिंह के बीच अच्छी दोस्ती हुआ करती थी। हालाँकि, ऐसा लगता है कि सफलता और पैसे ने धीरे-धीरे इस दोस्ती को पूरी तरह से खत्म कर दिया। अब दोनों अक्सर एक दूसरे पर तंज कसते नजर आते हैं। हाल ही में हनी सिंह एक होली पार्टी में शामिल हुए, जहां उन्होंने बादशाह के 'पापा कमबैक' वाले कमेंट का करारा जवाब दिया। रैपर का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसे भी पढ़ें: Punjab Kings के खिलाफ जीत के बाद इंटरनेट पर Virat Kohli का Anushka Sharma के साथ वीडियो कॉल, FLY KISS देते नजर आये खिलाड़ी हनी सिंह ने बादशाह पर किया पलटवार बादशाह कुछ दिनों पहले हनी सिंह पर अपनी टिप्पणी को लेकर चर्चा में थे, जिसमें उन्होंने हनी सिंह की वापसी पर कटाक्ष किया था। अब सिंगर और रैपर हनी सिंह ने एक कमेंट के जरिए बादशाह को करारा जवाब दिया है और कहा है कि उन्हें बादशाह को जवाब देने के लिए मुंह खोलने की जरूरत नहीं है। उनके फैन ही काफी हैं जो हर चीज पर बात कर सकते हैं। उन्होंने अपने गाली वाले अंदाज में अपने फैंस से बात करते हुए बादशाह का जवाब दिया। हनी सिंह को सोमवार को मुंबई में एक होली पार्टी में परफॉर्म करते देखा गया और यहीं उन्होंने बादशाह पर कटाक्ष किया। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा, हर कोई कहता है, रिप्लाई करो, रिप्लाई करो... मैं क्या रिप्लाई करूं... आप लोग तो उनके सारे कमेंट्स का बहुत अच्छे से रिप्लाई कर चुके हैं। मुझे मुंह खोलने की जरूरत है। ऐसा नहीं होता है। जैसे ही भीड़ ने उनके लिए तालियां बजाईं, गायक ने कहा, मुझे बोलने की जरूरत नहीं है। आप लोग खुद पागल हैं। हनी सिंह पागल हैं और उनके प्रशंसक भी पागल हैं। इसे भी पढ़ें: Taapsee Pannu के पति Mathias Boe आखिर कौन है? जब सफल भी नहीं थी एक्ट्रेस तब से उन्हें प्यार करते थे बैडमिंटन खिलाड़ी रैपर बादशाह ने क्या कहा? आपको बता दें कि हाल ही में बादशाह ने हनी सिंह पर कमेंट करते हुए कहा था, ''मुझे एक पेन और कागज दो। मैं तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लाया हूं। मैं कुछ गाने लिखूंगा और तुम्हें दूंगा। पापा की वापसी तुम्हारे साथ होगी।'' Kalesh Controversy B/w Honey Singh and Badshah (Honey Singh Replied to Badshah) pic.twitter.com/o74t423bgS — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 25, 2024 Kalesh Between Badshah & Honey Singh Fans on Stage during Live Concert pic.twitter.com/M4VqSqLSc3 — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 19, 2024
आखिर क्यों Indira Gandhi ने Aandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध, आज भी देखने से कतराते हैं लोग
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'सावरकर' रिव्यू: खोखली, एकतरफा फिल्म में एकमात्र अच्छी चीज है रणदीप हुड्डा का काम
आज के दौर में 'गुमनाम' हो चुके एक स्वतंत्रता नायक की कहानी कहने निकली ये फिल्म, एक अनजान कहानी बताने से ज्यादा अपने हीरो विनायक दामोदर सावरकर को बाकियों के मुकाबले अधिक 'वीर' बताने पर फोकस करने लगती है.
अस्तित्व और बदले के लिएब्रह्मांड में शुरू होने वाला है महायुद्ध, एक्शन और रोमांच से भरपूर हैRebel Moon 2 का धांसू ट्रेलर

