अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। तुर्की के अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से वाशिंगटन वापस लौटते समय राष्ट्रपति ट्रंप ने बीच रास्ते में ही अपना विमान बदल दिया। ट्रंप कतर द्वारा हाल ही में तोहफे में दिए गए अत्याधुनिक बोइंग 747-8 वीआईपी जेट को छोड़कर अचानक अपने पुराने और भरोसेमंद 'एयरफोर्स वन' विमान में सवार हो गए। ब्रिटेन के आरएएफ मिल्डेनहॉल (RAF Mildenhall) मिलिट्री बेस पर हुए इस अचानक सुरक्षा बदलाव ने वैश्विक स्तर पर कई तरह की चर्चाओं और कयासों को जन्म दे दिया है।सीक्रेट सर्विस की खुफिया सलाह और वाइट हाउस की बड़ी सफाई'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच मिसाइल हमलों के बाद पैदा हुए गंभीर हालातों को देखते हुए यूएस सीक्रेट सर्विस (US Secret Service) ने राष्ट्रपति ट्रंप को तुरंत विमान बदलने की गोपनीय सलाह दी थी। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह कदम किसी विशिष्ट खुफिया इनपुट के बजाय अत्यधिक सावधानी और एहतियात के तौर पर उठाया गया था। दरअसल, कतर की ओर से मिले नए बोइंग विमान में अभी तक वे सभी मिलिट्री-ग्रेड एडवांस डिफेंस फीचर्स, मिसाइल इवेडिंग सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-मेजर पूरी तरह इंस्टॉल नहीं हो पाए हैं, जो दशकों से राष्ट्रपति की सुरक्षा कर रहे 'एयरफोर्स वन' के मूल बेड़े में मौजूद रहते हैं।हालांकि, वाइट हाउस ने उन खबरों और दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें नए विमान को असुरक्षित बताया जा रहा था। वाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि कतर से मिला नया जेट भी उच्च-स्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल से पूरी तरह लैस है। उन्होंने सुरक्षा रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि प्रशासन राष्ट्रपति की अभेद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'दुश्मन का ध्यान भटकाने और उन्हें गुमराह करने' (Decoy and Diversion) समेत अपने हर उपलब्ध खुफिया टूल का इस्तेमाल करता है।ट्रंप बोले- 'मैं ईरान की हिट लिस्ट में नंबर वन हूं, पुरानी यादों के लिए बदला प्लेन'बीच रास्ते में विमान बदलने और सुरक्षा चिंताओं की बात को खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया के सामने अपने ही अंदाज में खारिज किया। ब्रिटेन से वाशिंगटन के लिए उड़ान भरने के बाद विमान में मौजूद पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने बेबाकी से कहा, मुझ पर हमेशा से ही जान का खतरा मंडराता रहता है। मैं उनकी (ईरान की) हिट लिस्ट में नंबर वन पर हूं।ट्रंप ने आगे खुलासा किया कि ब्रिटेन के सैन्य अड्डे पर रुकने का मुख्य उद्देश्य वहां तैनात अमेरिकी फौजियों को कतर से मिला यह बिल्कुल नया और शानदार विमान दिखाना था। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैनिक इसे देखकर बेहद उत्साहित थे और उन्होंने वहां तस्वीरें भी खिंचवाईं। वहीं, पुराने 'एयरफोर्स वन' में दोबारा शिफ्ट होने के पीछे की वजह बताते हुए ट्रंप ने मजाकिया लहजे में कहा कि उन्होंने केवल अपनी पुरानी यादों को ताजा करने के लिए इस विमान से सफर करने का फैसला किया।खिड़कियों के पर्दे रखने पड़े बंद; स्लीजबैग्स की वजह से सख्त पाबंदीइस बेहद संवेदनशील यात्रा के दौरान पुरानी एयरफोर्स वन में सफर कर रहे व्हाइट हाउस के प्रेस पूल और पत्रकारों को फ्लाइट क्रू द्वारा खिड़कियों के ब्लाइंड्स (पर्दे) पूरी तरह से बंद रखने का बेहद सख्त निर्देश दिया गया था। पत्रकारों को बाहर देखने या किसी भी तरह की लोकेशन की रिकॉर्डिंग करने की मनाही थी। ट्रंप ने बाद में स्पष्ट किया कि यह पाबंदी केवल सुरक्षा कारणों से सह-यात्रियों पर लागू थी, उनके अपने निजी केबिन पर नहीं। उन्होंने अमेरिका के दुश्मनों और ईरान की ओर सीधा इशारा करते हुए तीखे शब्दों में कहा कि शायद बाहर सक्रिय कुछ स्लीजबैग्स (संदिग्ध तत्वों) की वजह से सीक्रेट सर्विस को इतनी सख्त पाबंदी लगानी पड़ी है।अमेरिका और ईरान के बीच अचानक क्यों भड़की युद्ध की चिंगारी?राष्ट्रपति के विमान बदलने का यह पूरा हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत शुरू हो चुकी है। अमेरिका ने तेहरान पर अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों पर हमला करने का गंभीर आरोप लगाते हुए ईरानी ठिकानों पर लगातार भारी हवाई हमले और बमबारी की है।इस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान ने भी बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे हैं। खाड़ी देशों में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि बहरीन, कुवैत और कतर में अमेरिकी मिलिट्री बेस के ऊपर लगातार मिसाइल हमले के चेतावनी सायरन गूंज रहे हैं। इसी बीच कुवैत की सेना ने आधिकारिक दावा किया है कि उसने अपनी सीमा की तरफ आ रही कई ईरानी मिसाइलों और ड्रोन्स को पैट्रियट डिफेंस सिस्टम के जरिए बीच हवा में ही मार गिराया है।
युद्धपोत किसी भी देश की समुद्री सीमा की रक्षा करने वाले अभेद्य किले होते हैं, जिनका काम दुश्मनों की पनडुब्बियों को खोजना, मिसाइलें दागना और तटीय सुरक्षा अभेद्य बनाना होता है। लेकिन सोचिए, अगर दुनिया की सबसे ताकतवर सेना के सबसे आधुनिक युद्धपोत ही रहस्यमयी तरीके से आग और तकनीकी खराबियों का शिकार होने लगें, तो क्या होगा? चीन की मशहूर मिलिट्री मैगजीन ‘नेवल एंड मर्चेंट शिप्स’ ने अमेरिकी नौसेना (US Navy) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है, जिसने पेंटागन की रातों की नींद उड़ा दी है।अमेरिकी जंगी जहाजों पर हादसों की बाढ़चीनी मिलिट्री रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में अमेरिका के सबसे एडवांस और घातक जंगी जहाजों पर आग लगने, अचानक बिजली गुल होने (ब्लैकआउट) और प्रोपल्शन (आगे बढ़ाने वाले सिस्टम) फेल होने की कई बड़ी घटनाएं दर्ज की गई हैं। इस लिस्ट में दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर USS गेराल्ड आर. फोर्ड, सबसे आधुनिक स्टील्थ डिस्ट्रॉयर USS ज़ुमवाल्ट, निमित्ज़-क्लास कैरियर USS ड्वाइट डी. आइजनहावर और अर्ले बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर USS हिगिंस शामिल हैं।नाविक पड़ रहे बीमार, लॉन्ड्री से लेकर शिपयार्ड तक लगी आगहादसों की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मार्च में USS फोर्ड के लॉन्ड्री रूम में भीषण आग लग गई। अप्रैल में USS आइजनहावर पर मेंटेनेंस के दौरान और USS ज़ुमवाल्ट पर शिपयार्ड में अपग्रेडेशन के वक्त आग भड़क उठी। इतना ही नहीं, ओहायो-क्लास की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन USS नेब्रास्का के जनरेटर में खराबी आ गई, जिससे जहरीले डीजल के धुएं के संपर्क में आने से 64 अमेरिकी नाविक एक साथ बीमार पड़ गए।आखिर अमेरिकी युद्धपोतों में क्यों लग रही है आग? जानें 5 मुख्य वजहेंचीनी रक्षा विशेषज्ञों ने अमेरिकी नौसेना की इस दुर्दशा के पीछे कई गंभीर और ढांचागत (Structural) कारणों का विश्लेषण किया है:लगातार ऑपरेशन का भारी दबाव: अमेरिकी युद्धपोत दुनिया के लगभग हर रणनीतिक समुद्री क्षेत्र (जैसे ताइवान स्ट्रेट, रेड सी और हिंद महासागर) में चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं। लंबे समय तक लगातार समुद्र में रहने से इनके भारी-भरकम इंजन और इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर क्षमता से अधिक लोड पड़ रहा है।रखरखाव और मेंटेनेंस में भारी देरी: अमेरिकी नौसेना इस समय शिपयार्ड की सीमित क्षमता और मेंटेनेंस बैकलॉग से बुरी तरह जूझ रही है। कई युद्धपोत समय पर मरम्मत के लिए शिपयार्ड नहीं पहुंच पाते, जिससे छोटी खराबियां बाद में बड़ी आग का रूप ले लेती हैं।हद से ज्यादा हाई-टेक और डिजिटल सिस्टम: आधुनिक अमेरिकी जहाज अत्यधिक डिजिटल और ऑटोमेटेड हैं। इनमें हाई-वोल्टेज इलेक्ट्रिकल ग्रिड, रडार और सुपरकंप्यूटर नेटवर्क लगे हैं। जटिल इलेक्ट्रॉनिक्स के कारण एक छोटा सा शॉर्ट सर्किट या इलेक्ट्रिकल फॉल्ट पूरे जहाज को पंगु बना देता है।शिपयार्ड में कुशल कारीगरों और पार्ट्स की कमी: एडवांस्ड युद्धपोतों की मरम्मत के लिए बेहद अनुभवी और विशेषज्ञ इंजीनियरों की जरूरत होती है। रिपोर्ट का दावा है कि अमेरिकी शिपयार्डों में अनुभवहीन और कम कुशल कारीगरों की एक छोटी सी मानवीय गलती पूरे अरबों डॉलर के जहाज को स्वाहा कर रही है।शॉर्ट सर्किट और ऑयल लीकेज: मेंटेनेंस के दौरान इंजन रूम में ईंधन या ट्रांसमिशन तेल का रिसाव होना और ओवरलोडेड इलेक्ट्रिकल सिस्टम का आपस में टकराना आग लगने के तात्कालिक कारण बन रहे हैं।सुपर-टेक्नोलॉजी ही बन गई सबसे बड़ा खतरा!चीनी मैगजीन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि टेक्नोलॉजी जहाजों के परफॉर्मेंस को तो बढ़ा सकती है, लेकिन बिजली की एक छोटी सी खराबी पूरे युद्धपोत को युद्ध के बीच में लाचार कर सकती है, जैसा कि हाल ही में USS हिगिंस पर हुए टोटल ब्लैकआउट के दौरान देखा गया। अमेरिकी नौसेना के लिए आज सबसे बड़ी चुनौती नए और घातक जहाज बनाना नहीं है, बल्कि जो पहले से मौजूद हैं, उनका सही तरीके से मेंटेनेंस करना है। अगर इंडस्ट्रियल सिस्टम ने समय रहते इस बोझ को नहीं संभाला, तो अमेरिका को अपनी ऑपरेशनल उपलब्धता में भारी कमी और अरबों डॉलर का सैन्य नुकसान झेलना पड़ेगा।
एर्दोगन पर ट्रंप मेहरबान, F-35 में तुर्की की वापसी के दिए संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि उनका प्रशासन तुर्की को फिर से एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट कार्यक्रम में शामिल करने पर विचार कर रहा है
ऊपर Video पर क्लिक करें और देखें... आज यूपी की राजनीति और सरकारी विभागों की कौन सी बात खरी है…
पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा एलान किया है। अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) समिट के दौरान ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम समझौता (सीजफायर) अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व को कड़े शब्दों में फटकार लगाते हुए संकेत दिए कि अमेरिकी सेना आज रात ही ईरान पर दोबारा विनाशकारी हवाई हमले कर सकती है।अमेरिका और ईरान के बीच भीषण सैन्य टकरावदरअसल, यह विवाद तब और गहरा गया जब ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने बहरीन और कुवैत में मौजूद करीब 85 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। इसके जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के 80 से ज्यादा रणनीतिक और सैन्य ठिकानों पर बमबारी की। अमेरिकी हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार साइट्स और आईआरजीसी की कई सैन्य नावें तबाह हो गईं।सरकार बदलना मकसद नहीं, परमाणु हथियार पर रोक जारीट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और नाटो महासचिव मार्क रुटे की मौजूदगी में कहा कि वे ईरानियों के इस बर्ताव से बेहद खफा हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन तेहरान में सत्ता परिवर्तन (गवर्नमेंट चेंज) नहीं चाहता, लेकिन वह ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने नहीं देगा। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान के नेता धोखेबाज हैं और बातचीत करना सिर्फ समय की बर्बादी है।पावर प्लांट और बुनियादी ढांचों को तबाह करने की चेतावनीअमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अभी तक अमेरिका ने ईरान पर अपने सबसे घातक स्तर (हाईएस्ट लेवल) से हमला नहीं किया है। उन्होंने कहा, अगर ईरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो हम उनके बिजली घर (पावर प्लांट) और पानी साफ करने वाले प्लांट जैसे बुनियादी ढांचों को पूरी तरह नष्ट कर देंगे। मैं ऐसा करना नहीं चाहता, लेकिन जरूरत पड़ी तो अमेरिकी सेना पीछे नहीं हटेगी।भाषण के दौरान बड़ी चूक: ईरान को बोल गए 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ जापान'इस बेहद गंभीर नाटो समिट के दौरान डोनाल्ड ट्रंप एक मजाकिया विवाद में भी घिर गए। अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर (USS अब्राहम लिंकन) पर हुए मिसाइल हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने ईरान की जगह 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ जापान' बोल दिया। ट्रंप ने कहा, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ जापान ने हम पर 111 मिसाइलें दागीं, जिन्हें हमारे पैट्रियट सिस्टम ने मार गिराया। ट्रंप की इस बड़ी जुबान फिसलने (Gaffe) का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और लोग उनकी बढ़ती उम्र और याददाश्त पर सवाल उठा रहे हैं।
ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौता समाप्त घोषित किया, परमाणु वार्ता पर जताई निराशा
अंकारा। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ तीन सप्ताह पहले हुए युद्धविराम समझौते को समाप्त घोषित करते हुए कहा है कि यह समझौता अब प्रभावी नहीं रहा। इसके व्यावहारिक परिणामों को लेकर उन्होंने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। ट्रंप ने अंकारा में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि युद्धविराम समझौता अब […] The post ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौता समाप्त घोषित किया, परमाणु वार्ता पर जताई निराशा appeared first on Sabguru News .
महाभारत के महासंग्राम की चर्चा होते ही सबसे पहले मन में आता है वह दृश्य, जिसमें अर्जुन दुविधा में है और भगवान श्रीकृष्ण उसे गीता का उपदेश दे रहे हैं। युद्ध से पहले ही श्रीकृष्ण ने यह प्रण ले लिया था कि वे कुरुक्षेत्र में शस्त्र नहीं उठाएंगे। उनकी भूमिका केवल अर्जुन के सारथी के रूप में रहने की थी। लेकिन, एक बार ऐसी विषम परिस्थिति बनी कि जगत के पालनहार को अपना वचन तोड़ना पड़ा और वे रथ का पहिया लेकर भीष्म पितामह की ओर दौड़ पड़े। आखिर वह क्या मजबूरी थी, जिसने प्रभु को शस्त्र उठाने पर विवश कर दिया?क्यों दी थी भगवान श्रीकृष्ण ने शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा?भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र युद्ध में तटस्थ रहने की घोषणा की थी। उन्होंने दुर्योधन और अर्जुन दोनों को विकल्प दिया था—एक तरफ उनकी विशाल 'नारायणी सेना' और दूसरी तरफ वे स्वयं, जो निहत्थे रहेंगे। अर्जुन ने श्रीकृष्ण को चुना और दुर्योधन ने सेना को। श्रीकृष्ण की प्रतिज्ञा के पीछे उद्देश्य यह था कि वे न चाहते हुए भी किसी एक पक्ष का सीधा संहार न करें, बल्कि न्याय की स्थापना में केवल मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। वे अपनी लीलाओं से यह दिखाना चाहते थे कि अधर्म का नाश करने के लिए युद्ध से ज्यादा महत्वपूर्ण सही मार्गदर्शन और विवेक है।जब भीष्म के सामने विचलित हो गए थे श्रीकृष्णभीष्म पितामह ने प्रतिज्ञा की थी कि वे श्रीकृष्ण को शस्त्र उठाने पर मजबूर कर देंगे। युद्ध के दौरान, जब भीष्म पितामह ने अर्जुन पर बाणों की वर्षा शुरू की, तो अर्जुन उन्हें रोकने में असमर्थ हो गए। स्थिति ऐसी बन गई कि अर्जुन का रथ क्षतिग्रस्त हो गया और वे हार की कगार पर पहुँच गए। अर्जुन को संकट में देख भगवान श्रीकृष्ण का वात्सल्य और मित्र प्रेम जाग उठा। अपने प्रिय भक्त को मृत्यु के मुख में देख श्रीकृष्ण ने अपनी प्रतिज्ञा त्याग दी और जमीन से रथ का एक टूटा हुआ पहिया उठाकर पितामह की ओर बढ़े।'विपक्ष' की जीत या 'भक्ति' की पराकाष्ठा?जैसे ही श्रीकृष्ण चक्र (पहिया) लेकर पितामह की ओर बढ़े, भीष्म ने अपने शस्त्र डाल दिए और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, प्रभु, मेरी प्रतिज्ञा पूरी हुई। आज आपके हाथों अपना अंत देखकर मेरा जीवन धन्य हो गया। श्रीकृष्ण का वह क्रोध वास्तव में उनके भक्त के प्रति प्रेम था। यह घटना सिखाती है कि भगवान के लिए अपने भक्त की रक्षा उनकी स्वयं की प्रतिज्ञा से कहीं अधिक बड़ी होती है। महाभारत का यह प्रसंग आज भी हमें याद दिलाता है कि भक्त और भगवान के बीच कोई भी नियम, वचन या प्रतिज्ञा बड़ी नहीं होती।
होर्मुज स्ट्रेट में तीन टैंकरों पर हमले, सऊदी और कतर के जहाजों को नुकसान
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ने मंगलवार को बताया कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर तीन अलग-अलग हमले हुए हैं। इन तीनों घटनाओं में किसी के घायल होने की खबर नहीं है
अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंचों पर अपने अप्रत्याशित और चौंकाने वाले बयानों के लिए मशहूर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर अचानक बदलते हुए दिखाई दिए हैं। तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के इतर तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान के साथ एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने ट्रंप से इटली के साथ जारी कड़वाहट पर सवाल पूछा, तो ट्रंप ने बेहद सधे हुए अंदाज में मेलोनी की तारीफों के पुल बांध दिए। ट्रंप ने मेलोनी को एक 'शानदार महिला' (Wonderful Woman) बताते हुए सार्वजनिक रूप से कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर उन्हें बेहद पसंद करते हैं और दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंध हमेशा मजबूत रहे हैं।हालांकि, इस तारीफ के पीछे ट्रंप ने उस कूटनीतिक दर्द को भी बयां किया जिसने हाल ही में दोनों देशों के बीच एक बड़ी दीवार खड़ी कर दी थी। ट्रंप ने मीडिया के सामने स्वीकार किया कि दोनों के बीच हालिया समस्या इसलिए पैदा हुई क्योंकि मेलोनी ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में वाशिंगटन की मदद करने से साफ इनकार कर दिया था। गौरतलब है कि इससे ठीक पहले ट्रंप ने दावा किया था कि मेलोनी उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए गिड़गिड़ा रही थीं, जिसके बाद इटली ने इस पर बेहद आक्रामक और सख्त प्रतिक्रिया दी थी।'मैं खुश नहीं था पर वह बेहतरीन इंसान हैं': ईरान मुद्दे पर ट्रंप ने मेलोनी की गलती सुधारीप्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इटली सरकार पर कोई अनुचित या बड़ा दबाव नहीं डाला था, लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समय पर मेलोनी ने ईरान के मामले में अमेरिका का खुलकर साथ देने से मना कर दिया। ट्रंप ने बेबाकी से कहा कि आप खुद सोच सकते हैं कि इटली के इस कदम से मैं बिल्कुल भी खुश नहीं हुआ था, और इसी असहयोग के चलते दोनों महाशक्तियों के बीच कूटनीतिक संबंध थोड़े प्रभावित हुए।इसके बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी तल्खी को थोड़ा कम करते हुए कहा कि भले ही मुझे लगता है कि उन्होंने ईरान नीति पर एक बड़ी रणनीतिक गलती की है, लेकिन इसके बाद भी मैं उनकी शानदार शख्सियत का सम्मान करता हूं और उन्हें एक मजबूत नेता मानता हूं।ट्रुथ सोशल पोस्ट से भड़की थी आग: जी-7 शिखर सम्मेलन की वो 'तस्वीर' और हवाई पट्टियों का विवादइस अभूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट लिखी थी। ट्रंप ने दावा किया था कि फ्रांस में आयोजित जी-7 (G7) शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने कई बार सुरक्षा घेरा तोड़कर उनके साथ एक आधिकारिक फ्रेम में तस्वीर खिंचवाने का विशेष अनुरोध किया था।बात सिर्फ फोटो तक सीमित नहीं रही; ट्रंप ने सुरक्षात्मक लहजे में इटली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब अमेरिकी वायुसेना ईरान के ठिकानों पर हमला करने की योजना बना रही थी, तब इटली ने अपने सैन्य हवाई अड्डों और रनवे (Runways) का इस्तेमाल करने की अनुमति अमेरिकी लड़ाकू विमानों को नहीं दी। ट्रंप के अनुसार, इस अप्रत्याशित इनकार के कारण अमेरिकी सेना को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि अमेरिका इटली सहित सभी नाटो सहयोगियों की हवाई सुरक्षा पर अरबों डॉलर खर्च करता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इटली ने पीठ दिखा दी। ट्रंप ने यह दावा भी कर दिया था कि अब ईरान पर अमेरिका की सैन्य बढ़त देखने के बाद सुश्री मेलोनी दोबारा वाशिंगटन के करीब आने की कोशिश कर रही हैं।भीख नहीं मांगता इटली: मेलोनी का वीडियो संदेश और विदेश मंत्री का अमेरिकी दौरा रद्दडोनाल्ड ट्रंप के इन तीखे आरोपों और 'गिड़गिड़ाने' वाले दावों पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने बेहद कड़ा और स्वाभिमानी रुख अख्तियार किया था। मेलोनी ने तुरंत एक आधिकारिक वीडियो संदेश जारी कर ट्रंप के दावों को पूरी तरह से काल्पनिक, मनगढ़ंत और सत्य से परे बताया था। मेलोनी ने बेहद कड़े लहजे में वैश्विक मंच से कहा था कि न तो वह व्यक्तिगत रूप से और न ही इटली की संप्रभु सरकार अपनी राष्ट्रीय नीतियों के लिए किसी के सामने भीख मांगती है।इस विवाद का असर तुरंत द्विपक्षीय संबंधों पर भी देखने को मिला, जब इटली के विदेश मंत्री एंतोनियो तजानी ने अमेरिका की अपनी बेहद महत्वपूर्ण और प्रस्तावित आधिकारिक यात्रा को ऐन वक्त पर रद्द कर दिया। तजानी ने रोम में मीडिया से बात करते हुए साफ कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति की यह टिप्पणियां प्रधानमंत्री मेलोनी के व्यक्तिगत सम्मान और पूरे इटली राष्ट्र की संप्रभुता के लिए बेहद अपमानजनक हैं, इसलिए ऐसी परिस्थितियों में वाशिंगटन का दौरा करना उचित नहीं है। हालांकि, अब अंकारा में ट्रंप के बदले हुए नर्म सुरों के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों नाटो सहयोगियों के बीच जमी बर्फ जल्द ही पिघल सकती है।
तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित हाई-प्रोफाइल नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद आक्रामक और अनूठे तेवर देखने को मिले हैं। शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन राष्ट्रपति ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ अपने उतार-चढ़ाव भरे निजी और कूटनीतिक संबंधों पर खुलकर बात की। ट्रंप ने एक तरफ मेलोनी के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए उन्हें वास्तव में एक 'बेहद अच्छी महिला' बताया, तो वहीं दूसरी तरफ ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान में अमेरिका का साथ न देने के लिए वैश्विक मीडिया के सामने उनकी तीखी आलोचना भी की। कूटनीतिक गलियारों में मेलोनी को पहले ट्रंप का सबसे मजबूत यूरोपीय सहयोगी माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ महीनों में दोनों के बीच कड़वाहट काफी बढ़ गई है।अंकारा में पत्रकारों से आमने-सामने की बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने बेबाकी से कहा कि ईरान के खिलाफ चल रही रणनीतिक लड़ाई में जब अमेरिका को इटली की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब मेलोनी सरकार ने हमारी सैन्य मदद करने से साफ इनकार कर दिया था; इसी वजह से वर्तमान में हमारे आपसी संबंध थोड़े खराब हो गए हैं। ट्रंप ने आगे कहा कि व्यक्तिगत तौर पर वह मेलोनी को पसंद करते हैं, लेकिन बतौर प्रधानमंत्री ईरान युद्ध पर पीछे हटकर उन्होंने एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक भूल की है।इस बयान से ठीक एक दिन पहले सोमवार को ट्रंप ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर मेलोनी के साथ एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए मजाकिया और तीखे लहजे में लिखा था— इस समय एक निरोधक आदेश (Restraining Order) की सख्त जरूरत है।डेनमार्क को सीधी चुनौती: ग्रीनलैंड पर सिर्फ और सिर्फ अमेरिका का नियंत्रण होना चाहिएनाटो नेताओं की मौजूदगी के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक पुराना और बेहद संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दा दोबारा उठाकर यूरोपीय देशों को चौंका दिया है। तुर्किये के राष्ट्रपति के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक के दौरान ट्रंप ने वैश्विक मीडिया से कहा कि सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण द्वीप 'ग्रीनलैंड' (Greenland) पर डेनमार्क का नहीं, बल्कि हर हाल में केवल अमेरिका का संप्रभु नियंत्रण होना चाहिए।अमेरिकी राष्ट्रपति ने तर्क दिया कि ग्रीनलैंड के भौगोलिक स्वामित्व और नियंत्रण के पुराने विवाद ने अतीत में नाटो के साथ अमेरिका के संबंधों को काफी नुकसान पहुंचाया है। ट्रंप के इस बयान ने आर्कटिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक नियंत्रण की बहस को एक बार फिर गरमा दिया है, और डेनमार्क समेत कई यूरोपीय देशों ने इस पर आंतरिक रूप से आपत्ति जताना शुरू कर दिया है।मिनेसोटा के स्कूल का हिजाब वीडियो शेयर कर भड़के ट्रंप: गवर्नर टिम वॉल्ज ने दिया करारा जवाबअंतरराष्ट्रीय कूटनीति के साथ-साथ ट्रंप ने अमेरिका की आंतरिक राजनीति और धार्मिक पहनावे को लेकर भी अंकारा से एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अमेरिका के मिनेसोटा (Minnesota) प्रांत के एक किंडरगार्टन (प्राइमरी स्कूल) में आयोजित ग्रेजुएशन सेरेमनी का एक संक्षिप्त वीडियो साझा किया। इस वीडियो के साथ ट्रंप ने एक संक्षिप्त लेकिन विवादास्पद टिप्पणी लिखते हुए ध्यान दिलाया कि इस अमेरिकी स्कूल की 'हर छोटी बच्ची हिजाब में' नजर आ रही है।ट्रंप के इस सोशल मीडिया पोस्ट पर अमेरिका के भीतर ही तीखी प्रतिक्रियाएं आना शुरू हो गई हैं। मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज ने राष्ट्रपति की इस टिप्पणी की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए तुरंत पलटवार किया। गवर्नर वॉल्ज ने कहा कि देश के राष्ट्रपति का एक छोटे किंडरगार्टन के मासूम बच्चों के उस पहनावे को लेकर निशाना बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, जो वे स्वेच्छा से या अपनी पारिवारिक संस्कृति के अनुसार स्कूल में पहनते हैं। वॉल्ज ने आरोप लगाया कि ट्रंप अंतरराष्ट्रीय मंच पर होने के बावजूद घरेलू स्तर पर केवल ध्रुवीकरण और विवाद खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं।
होर्मुज में जहाजों पर फिर हमला: कतर से गुजरात आ रहे रहे LNG टैंकर पर ड्रोन अटैक
पश्चिम एशिया (Middle East) में शांति और कूटनीतिक सुलह की कोशिशों को मंगलवार तड़के उस समय बहुत बड़ा झटका लगा, जब दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) में तीन कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाकर भीषण ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए। इस हमले की सबसे डरावनी बात यह है कि निशाना बने जहाजों में से एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) से लदा कतर का विशाल टैंकर 'अल रेकयात' है, जो सीधे भारत के गुजरात तट की ओर आ रहा था। इस हाई-रिस्क एलएनजी टैंकर पर चार भारतीय चालक दल (Crew Members) के सदस्य भी सवार थे, जिनकी जान इस हमले के दौरान बाल-बाल बची है।अंतरराष्ट्रीय शिपिंग इंटेलिजेंस और ब्रिटिश नौसेना के सूत्रों के अनुसार, कतर का यह गैस टैंकर हमले के बाद बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। गैस रिसाव और मलबे के कारण जहाज के भीतर भारी विस्फोट होने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इसी क्षेत्र में सऊदी अरब का एक कच्चे तेल से लदा सुपर टैंकर 'वेडयान' भी इस जलप्रलय की चपेट में आकर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ है।ओमान के तट पर कतर के 'अल रेकयात' ने मांगी मदद: इंजन रूम में लगी भीषण आगरॉयटर्स (Reuters) की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, यह समुद्री हमला ओमान के रणनीतिक तटीय इलाके लिमाह के समीप मंगलवार तड़के अंजाम दिया गया। गैस से लदे 'अल रेकयात' टैंकर पर जब आसमान से एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल या आत्मघाती ड्रोन आकर गिरा, तो जोरदार धमाके के साथ जहाज के मुख्य इंजन रूम में भीषण आग लग गई।खतरे की भयावहता को देखते हुए कैप्टन ने तुरंत अंतरराष्ट्रीय समुद्र में आपातकालीन डिस्ट्रेस सिग्नल भेजकर मदद की गुहार लगाई। राहत की बात यह रही कि आपातकालीन दस्तों ने समय रहते आग पर काबू पा लिया, जिससे जहाज पर मौजूद चारों भारतीय नागरिकों सहित पूरा चालक दल पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि, जहाज की तकनीकी प्रणाली को भारी नुकसान पहुंचने की पुष्टि हुई है।कतर और अमेरिका का ईरान पर सीधा शक: रिवोल्यूशनरी गार्ड की मिसाइल एक्टिविटी पर उठे सवालइस अप्रत्याशित और हिंसक हमले के तुरंत बाद कतर सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसके लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर अभी तक किसी भी विद्रोही संगठन या देश ने आधिकारिक रूप से इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन जांच के तार सीधे तेहरान से जुड़ रहे हैं।अमेरिकी रक्षा विभाग के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने दावा किया है कि कल देर रात ईरान की कुख्यात 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' (IRGC) कोर ने होर्मुज जलमार्ग के बेहद करीब कई गुप्त बैलिस्टिक मिसाइलें और लंबी दूरी के ड्रोन दागे थे। भू-राजनीतिक विश्लेषक इस बात से हैरान हैं कि यह इतिहास में पहली बार हुआ है जब ईरान ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच परमाणु व कूटनीतिक वार्ताओं में मुख्य मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाने वाले देश कतर के ही वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाया है।यूकेएमटीओ की पुष्टि: तीन जहाजों पर एक साथ हुआ प्रोजेक्टाइल हमलाब्रिटिश सेना के नियंत्रण वाले 'यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स' (UKMTO) सेंटर ने इस समुद्री आतंकी घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मंगलवार तड़के होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे कुल तीन वाणिज्यिक जहाजों पर एक सोची-समझी रणनीति के तहत हमला किया गया था।पहले जहाज को ओमान के लिमाह के पास एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल से उड़ाने की कोशिश की गई, जबकि बाकी के दो जहाजों पर अत्याधुनिक लड़ाकू ड्रोनों के जरिए क्लस्टर बम गिराए गए। यूकेएमटीओ ने स्पष्ट किया है कि इन हमलों में वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन (Global Energy Supply Chain) को अस्थिर करने का बड़ा प्रयास किया गया है, लेकिन किसी भी नाविक के हताहत होने या बंदी बनाए जाने की खबर नहीं है।खामेनेई की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब: कोम की सड़कों पर लगे 'किल ट्रंप' के नारेयह भीषण समुद्री हमला ठीक उसी समय हुआ है जब पूरे ईरान में देश के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा निकाली जा रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की रिपोर्ट के अनुसार, शिया धार्मिक शिक्षा के सबसे बड़े केंद्र कोम (Qom) शहर में मंगलवार को लाखों की तादाद में काले कपड़ों में लिपटे शोक संतप्त लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।खामेनेई के राष्ट्रीय ध्वज में लिपटे ताबूत को एक विशेष सैन्य वाहन पर रखकर निकाला गया। इस दौरान पूरे शहर में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ बेहद आक्रामक और हिंसक नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बड़े-बड़े बैनर और पोस्टर दिखाई दिए, जिन पर अंग्रेजी और फारसी भाषा में सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति को लक्षित करते हुए 'किल ट्रंप' (Kill Trump) के नारे लिखे हुए थे।आपको बता दें कि पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत इसी साल 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एक बेहद गोपनीय और विनाशकारी हवाई हमले में हो गई थी। सुरक्षा कारणों और देश के आंतरिक हालातों के चलते उनकी मृत्यु के ठीक चार महीने बाद अब जाकर उनके अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की जा रही हैं। शुक्रवार से शुरू हुआ यह शोक कार्यक्रम आगामी 9 जुलाई को मशहद शहर में स्थित पवित्र इमाम रजा दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक (दफन) करने के साथ संपन्न होगा, जिसने पूरे मध्य पूर्व में युद्ध की चिंगारी को एक बार फिर भड़का दिया है।
पटियाला में मंगलवार को हिंदू संगठनों ने 'सनातन सम्मान यात्रा' निकाली। इस यात्रा में हरिद्वार से आए संतों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया। यात्रा के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि हिंदू समाज के साथ भेदभाव किया जा रहा है और प्रशासन उनकी शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि यात्रा का मुख्य उद्देश्य सनातन समाज में एकजुटता का संदेश देना और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना है। वक्ताओं ने गोपाल कॉलोनी में एक वाल्मीकि परिवार पर हुए कथित हमले का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस घटना में परिवार के घर में बने मंदिर और भगवान श्री खाटू श्याम की तस्वीर के साथ भी तोड़फोड़ की गई थी। आरोप है कि पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे भाजपा नेता करुण कौड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 295 के तहत मामला दर्ज किया गया, जबकि दूसरे पक्ष के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। रोहिंग्या घुसपैठियों के मुद्दे पर करुण कौड़ा ने दिया बयान सनातनी महंत अरुणा गिरी और केशव नंद ने स्पष्ट किया कि करुण कौड़ा ने किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि कथित रोहिंग्या घुसपैठियों के मुद्दे पर बयान दिया था। उन्होंने प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए करुण कौड़ा के खिलाफ दर्ज मामला रद्द करने की मांग की। निष्पक्ष जांच न हुई तो करेंगे आंदोलन इसके साथ ही, उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दूसरे पक्ष के खिलाफ भी उचित कार्रवाई करने की अपील की। संतों और वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो देश के विभिन्न हिस्सों से सनातन समाज के लोग पटियाला पहुंचकर बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
राजस्थान कांग्रेस का डिजिटल चक्रव्यूह: क्या करेगी 15 लाख की फौज, युद्ध या मौज
राजस्थान की राजनीति में एक नया और बेहद दिलचस्प मोड़ आ गया है। कांग्रेस ने राज्य में आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए एक अभूतपूर्व डिजिटल सेना तैयार की है। इसे पार्टी के अंदर और बाहर 15 लाख की फौज कहा जा रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर सक्रिय होने वाली यह विशाल वाहिनी विपक्षी दलों के खिलाफ चुनावी 'युद्ध' लड़ेगी या सिर्फ संगठन के भीतर ही 'मौज' करेगी?सोशल मीडिया पर 'चक्रव्यूह' तैयारकांग्रेस आलाकमान ने बूथ स्तर तक मजबूत पकड़ बनाने के लिए एक ऐसा डिजिटल चक्रव्यूह रचा है, जिसे भेदना विरोधियों के लिए आसान नहीं होगा। सूत्रों के अनुसार, इस रणनीति के तहत लाखों कार्यकर्ताओं को सीधे व्हाट्सएप ग्रुप, रील्स, और लोकल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए जोड़ा गया है।बड़ी रणनीति: यह पहली बार है जब राजस्थान में किसी क्षेत्रीय राजनीतिक दल ने इतने बड़े पैमाने पर माइक्रो-लेवल (लोकल) डिजिटल मैनेजमेंट को अंजाम दिया है।लोकल ऑप्टिमाइजेशन और जमीनी असरजयपुर से लेकर जोधपुर और बीकानेर के सुदूर गांवों तक, इस डिजिटल फौज का मुख्य काम सरकार की नीतियों और पार्टी के नैरेटिव को हर घर तक पहुंचाना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक ऑनलाइन कैंपेन नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर लेवल पर वोटर्स को प्रभावित करने की एक सोची-समझी योजना है। अब देखना यह है कि यह 15 लाख की डिजिटल सेना जमीन पर कितना बड़ा चमत्कार दिखा पाती है।
राजनीतिक डेस्क: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पेपर लीक मामले को लेकर देश में सियासी पारा पहले से ही गरमाया हुआ है, लेकिन इसी बीच आंदोलन की अगुवाई कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को लेकर एक ऐसा विवादित बयान दे दिया है, जिसने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी बहस छिड़ गई है।60-70 के लोग रिटायर होकर आश्रम में बैठें - अभिजीत दीपकेदिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 18 दिनों से प्रदर्शन कर रहे अभिजीत दीपके अपने गृह जिले छत्रपति संभाजीनगर में छात्रों के एक प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान जब पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि क्या वे इस आंदोलन को लेकर अन्ना हजारे से मुलाकात करेंगे, तो उन्होंने दो टूक मना कर दिया।दीपके ने तल्ख लहजे में कहा, बिल्कुल नहीं! मुझे लगता है कि युवाओं को अब चीजें अपने हाथ में लेनी चाहिए। जो लोग 60-70 के हो गए हैं, उन्हें रिटायर हो जाना चाहिए—चाहें राजनीति हो या एक्टिविज्म। वे आश्रम में जाकर बैठें। यह हमारे भविष्य का सवाल है, छात्रों का भविष्य है, हमें फैसला करने दो। आखिर कब तक बूढ़े लोग हमारे फैसले करते रहेंगे?बयान पर भड़के लोग, सोनम वांगचुक को लेकर दीपके को घेराअभिजीत दीपके के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनकी जमकर आलोचना हो रही है। यूजर्स उनके इस 'एज शेमिंग' वाले बयान पर उन्हें पाखंडी बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि एक तरफ दीपके बुजुर्गों और अन्ना हजारे को किनारे करने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ अपने आंदोलन के लिए 59-60 साल के सोनम वांगचुक को आगे कर भूख हड़ताल करवा रहे हैं। लोगों ने सवाल उठाया, अगर बूढ़ों से प्रेरणा नहीं लेनी तो खुद अनशन पर क्यों नहीं बैठते, वांगचुक को आगे क्यों धकेल रखा है?जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का अनशन, तेजी से गिर रहा वजनआपको बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी का दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन मंगलवार (7 जुलाई 2026) को 18वें दिन में पहुंच चुका है। आंदोलन के समर्थन में दिग्गज पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक पिछले 10 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लगातार अनशन के कारण उनकी सेहत बिगड़ रही है और अब तक उनका वजन 6.9 किलोग्राम कम हो चुका है, जिससे समर्थकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
धनबाद के कतरास थाना क्षेत्र के छाताबाद में मंगलवार को अचानक भू-धंसान हुआ। इससे कई घर क्षतिग्रस्त हो गए और मकानों की दीवारों तथा फर्श में बड़ी दरारें आ गईं। घटना के बाद दहशत में आए लोग जान बचाने के लिए अपने घरों से बाहर निकल आए। कई परिवार अपना कीमती सामान, जेवर और जरूरी दस्तावेज तक घरों के अंदर ही छोड़ने को मजबूर हो गए। इस घटना से नाराज ग्रामीणों ने कतरास-धनबाद मुख्य मार्ग जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। उनकी मुख्य मांगों में प्रभावित परिवारों का तत्काल पुनर्वास, उचित मुआवजा और क्षेत्र में अवैध कोयला खनन पर प्रभावी रोक शामिल है। सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की मांग की प्रभावित ग्रामीणों ने बताया कि वे कई वर्षों से यहां रह रहे हैं। उन्होंने कहा, हम गरीब परिवार के लोग हैं, अपना घर छोड़कर कहां जाएं? अचानक घरों में दरारें पड़ने लगीं, तो जान बचाने के लिए बाहर निकलना पड़ा। हमारा सारा सामान अभी भी घर के अंदर ही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से उचित मुआवजा और सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारी प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हालात सामान्य करने के प्रयास में लगे हैं।
NATO बैठक से पहले ट्रंप का बड़ा दावा! बोले- पुतिन और जेलेंस्की दोनों चाहते हैं युद्ध का अंत
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की, दोनों ही यूक्रेन युद्ध खत्म करना चाहते हैं
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने कतर (Qatar) द्वारा अमेरिका को उपहार में दिए गए अत्याधुनिक बोइंग 747-8 (Boeing 747-8) विमान से अपनी आधिकारिक यात्राएं शुरू कर दी हैं। जरूरी बदलावों और कड़ी टेस्टिंग के बाद इस विशाल विमान को अमेरिकी राष्ट्रपति के 'एयर फोर्स वन' बेड़े में शामिल कर लिया गया है। लेकिन, ट्रंप की योजना सिर्फ इस विमान में सफर करने तक सीमित नहीं है; वह इसे अपने एक खास ड्रीम प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाना चाहते हैं।मियामी की प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी में विमान प्रदर्शित करने का प्लानप्रसिद्ध अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप की दिली ख्वाहिश है कि कतर से मिले इस बोइंग विमान को रिटायरमेंट के बाद मियामी (Miami) में बनने वाली उनकी अपकमिंग 'प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी' में प्रदर्शित किया जाए। ट्रंप चाहते हैं कि यह विमान उनकी विरासत के एक शानदार प्रतीक के तौर पर मियामी में रखा जाए, जिसे लोग करीब से देख सकें।राह में खड़ी हैं राजनीतिक और सैन्य चुनौतियांहालांकि, ट्रंप का यह सपना जितना भव्य है, इसे हकीकत में बदलना उतना ही जटिल है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट बताती है कि एक विशालकाय बोइंग विमान को मियामी के किसी सिविलियन या लाइब्रेरी एरिया में शिफ्ट करना और उसे स्थायी तौर पर प्रदर्शित करना आसान नहीं है। इस योजना के रास्ते में कई गंभीर राजनीतिक (Political), सैन्य (Military) और लॉजिस्टिकल (Logistical) चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। फिलहाल, यह विमान अमेरिका के अस्थायी 'एयर फोर्स वन' के रूप में अपनी सेवाएं दे रहा है और सुरक्षा कारणों से सेना इसे इतनी आसानी से किसी सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए नहीं सौंप सकती।नए बोइंग प्रोजेक्ट में क्यों हो रही है देरी?यह पूरा मामला इसलिए भी पेचीदा हो गया है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए तैयार हो रहे नए विमानों के प्रोजेक्ट में भारी देरी चल रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान ही, साल 2017 में पुराने एयर फोर्स वन बेड़े को बदलने की कवायद शुरू कर दी थी। उन्होंने इसके लिए बोइंग को अगली पीढ़ी के दो नए प्रेसिडेंशियल विमानों का ऑर्डर दिया था।कार्यकाल के अंत तक ही मिल पाएंगे नए विमानशुरुआती योजना के विपरीत, बोइंग के इस अति-सुरक्षित प्रोजेक्ट में काफी विलंब हो चुका है। अब इन दोनों नए विमानों के मध्य 2028 तक ही अमेरिकी वायुसेना को सौंपे जाने की उम्मीद है। तकनीकी और लॉजिस्टिक दिक्कतों के चलते ट्रंप को मजबूरी में कतर से मिले इसी बोइंग 747-8 का इस्तेमाल एक अस्थायी एयर फोर्स वन के रूप में करना पड़ रहा है। विडंबना यह है कि जब 2028 में नए विमान बनकर पूरी तरह तैयार होंगे, तब तक राष्ट्रपति ट्रंप का मौजूदा कार्यकाल अपने अंतिम चरण में होगा।
समंदर का नया 'अदृश्य शिकारी': 11 जुलाई को नौसेना में शामिल होगा स्वदेशी युद्धपोत 'महेंद्रगिरि'
भारतीय नौसेना की ताकत में एक ऐतिहासिक इजाफा होने जा रहा है। आगामी 11 जुलाई को स्वदेशी तकनीक से निर्मित अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट 'महेंद्रगिरि' आधिकारिक तौर पर नौसेना के बेड़े में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रोजेक्ट 17A (शिवालिक-क्लास) के तहत बना यह छठा युद्धपोत भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को अभेद्य बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।आत्मनिर्भर भारत की बुलंद तस्वीर और स्वदेशी ताकतपूर्वी घाट की प्रतिष्ठित पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया यह युद्धपोत भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान का एक बड़ा उदाहरण है। नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन और मुंबई के मझगांव डाक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा निर्मित इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसने देश के MSME और रक्षा उद्योगों को एक नई मजबूती दी है।आधुनिक हथियारों और स्टेल्थ तकनीक से लैस समरवीर'महेंद्रगिरि' को समंदर का एक अदृश्य शिकारी माना जा रहा है क्योंकि इसके उन्नत स्टेल्थ फीचर्स इसे दुश्मन के रडार की पकड़ में आने से बचाते हैं। यह बहुआयामी फ्रिगेट सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों और एकीकृत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है। कंबाइंड डीजल या गैस (CODOG) प्रणोदन प्रणाली के कारण यह उच्च गति से हवाई, सतही और पनडुब्बी रोधी अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है।हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बनेगा भारत का 'अभेद्य कवच'यह युद्धपोत न केवल युद्ध की स्थिति में नौसेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाएगा, बल्कि आपदा राहत, खोज और बचाव अभियानों में भी अहम भूमिका निभाएगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन और अन्य रणनीतिक चुनौतियों के बीच 'महेंद्रगिरि' भारतीय नौसेना के लिए एक अचूक 'फोर्स मल्टीप्लायर' साबित होगा, जो देश के समुद्री हितों की रक्षा करेगा।
पहलगाम हमला : NIA की चार्जशीट में हाफिज सईद का नाम, भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश का आरोप
राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA ने सोमवार को पहलगाम आतंकी हमले के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद को अपनी पूरक चार्जशीट में आरोपी बनाया है। एनआईए ने उस पर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और सीमा पार से आतंकी साजिश रचने जैसे ...
गाजा संघर्ष : नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल
सयुक्त राष्ट्र की हालिया स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की रिपोर्ट ने इजरायल और कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में जारी हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों की गंभीर तस्वीर पेश की है।
सालों से दफ्तरों में जमे सात शिक्षक एकतरफा कार्यमुक्त
भास्कर न्यूज | जांजगीर जिले के शिक्षा विभाग में अपनी मूल पदस्थापना को छोड़कर अन्य कार्यालयों या संस्थाओं में अटैच होकर कार्य कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ बड़ी कार्यवाही की गई है। जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश जारी करते हुए ऐसे 7 अधिकारियों-कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से उनकी मूल संस्था के लिए एकतरफा कार्यमुक्त कर दिया है। आदेश में पुष्पा कोरी दिवाकर (सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी) को बीईओ कार्यालय बलौदा भेजा गया। संजय कुमार राठौर (शिक्षक एलबी) को शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय अमोरा, विकासखंड नवागढ़ भेजा गया। चंद्र प्रकाश तंबोली (शिक्षक एलबी) को शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय औराईकला, विकासखंड बलौदा भेजा गया। हेमंत कुमार यादव (व्यायाम शिक्षक एलबी) को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोसमंदा, विकासखंड बलौदा भेजा गया। रेवती रमन दुबे (सहायक ग्रेड-02) को शासकीय हाईस्कूल नवगवां, विकासखंड बलौदा भेजा गया। विशाल वैभव (सहायक ग्रेड-02) को बीईओ कार्यालय बलौदा में पदस्थ किया गया। राकेश सिंह गोंड (सहायक ग्रेड-03) को शासकीय हाईस्कूल कोसमंदा, विकासखंड बलौदा भेजा गया। डीईओ ने दी वेतन रोकने की चेतावनी: जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश में कड़ी चेतावनी दी गई है कि यदि कर्मचारी अपनी मूल संस्था में अनुपस्थित पाए जाते हैं, तो उनके वेतन का भुगतान नहीं होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी स्वयं कर्मचारी की होगी।
भारत 2025 से 2029 के बीच स्पेस बेस्ड सर्विलांस (SBS-III) प्रोग्राम के तहत 52 नए निगरानी सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इसी दौरान ऑपरेशन सिंदूर, NavIC नेटवर्क, जॉइंट मिलिट्री स्पेस डॉक्ट्रिन दिखा रही हैं कि भारत की सैन्य रणनीति में स्पेस की भूमिका लगातार बढ़ रही है। जॉइंट मिलिट्री स्पेस डॉक्ट्रिन का मतलब ऐसी गाइडलाइन है, जो बताती है कि युद्ध या शांति के समय तीनों सेनाएं मिलकर अंतरिक्ष आधारित संसाधनों का प्रभावी और सुरक्षित उपयोग कैसे करें। इसका असर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राजस्थान में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर भी दिखाई दिया था। युद्ध के समय पाकिस्तान की ओर से राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में 413 ड्रोन हमलों की कोशिश की गई थी। हालांकि स्पेस बेस्ड सर्विलांस के तहत लॉन्च सैटेलाइट की कड़ी मॉनिटरिंग से सभी हमलों को नाकाम किया गया। साथ ही दुश्मन के रडार सिस्टम को भी ध्वस्त कर दिया गया था। इसी वजह से भारत युद्ध के मोर्च पर आगे रहा था। सैन्य अधिकारियों, स्पेस एक्सपर्ट और पूर्व सैन्य कमांडरों का मानना है कि जमीन, समुद्र और हवा के साथ अब स्पेस भी देश की सुरक्षा का बड़ा हिस्सा बन चुका है। आज के समय में युद्ध सिर्फ सीमा पर तैनात सैनिकों और हथियारों से नहीं जीते जाते। स्पेस आधारित सिस्टम तेजी से अहम भूमिका निभा रहे हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… स्पेस भी युद्ध का नया मैदान एक्सपट्र्स मानते हैं कि भविष्य के युद्ध साइबर और स्पेस तक पहुंच चुके हैं। इसी दिशा में भारत ने जॉइंट मिलिट्री स्पेस डॉक्ट्रिन जारी की है। डिफेंस स्पेस एजेंसी को और मजबूत बनाया है। 52 नए निगरानी सैटेलाइट वाले SBS-III प्रोग्राम पर काम शुरू कर दिया है। भारतीय नौसेना के रिटायर्ड कैप्टन और फाइटर पायलट अभिजीत भूते कहते हैं- स्पेस तेजी से चौथे युद्धक्षेत्र के रूप में उभर रहा है। आने वाले समय के सैन्य ऑपरेशनों में इसकी भूमिका लगातार बढ़ेगी। ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि आधुनिक युद्ध में स्पेस और सैटेलाइट सिस्टम कितनी बड़ी भूमिका निभाते हैं। यह ऑपरेशन मुख्य रूप से नेटवर्क-सेंट्रिक रणनीति पर आधारित था। सैटेलाइट से मिलने वाली जानकारी, नेविगेशन और टारगेटिंग सपोर्ट ने अहम भूमिका निभाई। सीमा पार बड़ी संख्या में सैनिक भेजने के बजाय भारतीय सशस्त्र बलों ने दूर से सटीक हमले करने की अपनी क्षमता दिखाई। पूर्व महानिदेशक, डिफेंस स्पेस एजेंसी तथा IN-SPACe के विशेषज्ञ सलाहकार एयर वाइस मार्शल धनंजय खोत (रिटायर्ड) बताते हैं कि आधुनिक सेनाएं दुश्मन देशों के निगरानी सैटेलाइट पर भी नजर रखती हैं। इसके आधार पर वे अपने अहम हथियारों और सैन्य संसाधनों की जगह बदल सकती हैं या दुश्मन को भ्रमित करने के लिए डिकॉय भी तैनात कर सकती हैं। इन सभी स्रोतों से मिलने वाली जानकारी को भारतीय वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) जैसे नेटवर्क से जोड़ा जाता है। इससे सैटेलाइट, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम और जमीन पर लगे रडार से मिलने वाली जानकारी एक ही जगह पहुंचती है। इसके बाद तेजी से फैसले लेकर ऑपरेशन को अंजाम देना आसान हो जाता है। ये सभी सिस्टम भारतीय सेनाओं को दुश्मन पर नजर रखने, आपस में संपर्क बनाए रखने, रास्ता बताने, टारगेट पहचानने और ऑपरेशन की योजना बनाने में मदद करते हैं। भूते के अनुसार सिर्फ सैटेलाइट की संख्या मायने नहीं रखती, बल्कि असली बात यह है कि सभी सैटेलाइट मिलकर सेना को कितनी ताकत और कितनी बेहतर क्षमता देते हैं। ऑपरेशन सिंदूर में ड्रोन और सैटेलाइट की भूमिक IN-SPACe के एक्सपर्ट ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि अब युद्ध सिर्फ सैनिकों और हथियारों से नहीं, बल्कि रियल टाइम जानकारी, ड्रोन और सैटेलाइट के दम पर भी लड़े जाते हैं। राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर इस दौरान अहम ऑपरेशनल जोन बने। भारतीय सेना ने SkyStriker कामिकेज़ ड्रोन और लंबी दूरी के टोही ड्रोन की मदद से पाकिस्तान के भीतर मौजूद 9 आतंकी ठिकानों और 11 एयरबेस पर सटीक हमले किए। राजस्थान में स्पेस की क्या भूमिका रही? ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राजस्थान का बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर क्षेत्र सबसे अहम सैन्य मोर्चों में शामिल रहा। इन सीमावर्ती इलाकों में दुश्मन की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने, ड्रोन हमलों का समय रहते पता लगाने और सेना तक रियल टाइम जानकारी पहुंचाने में स्पेस आधारित सिस्टम की बड़ी भूमिका रही। ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान ने राजस्थान सीमा की ओर बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे। बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर सेक्टर में सबसे ज्यादा गतिविधियां देखी गईं। अकेले राजस्थान सेक्टर में 413 ड्रोन हमलों की कोशिश की गई। इन खतरों से निपटने के लिए ऑपरेशन के दौरान ISRO के 400 से अधिक वैज्ञानिक और कम से कम 10 रणनीतिक सैटेलाइट 24 घंटे लगातार काम करते रहे। इन सैटेलाइट्स ने भारतीय सेना को रियल टाइम खुफिया जानकारी, सुरक्षित संचार और सटीक लोकेशन उपलब्ध कराई। इन्हीं स्पेस आधारित सिस्टम की मदद से सेना दुश्मन के ड्रोन की गतिविधियों पर लगातार नजर रख सकी और समय रहते जवाबी कार्रवाई कर अधिकांश ड्रोन हमलों को विफल कर दिया। अब जानें कैसे स्पेस बना युद्धक्षेत्र …… 1. सैटेलाइट से तैयार हुई पूरी रणनीति पूर्व महानिदेशक, डिफेंस स्पेस एजेंसी तथा IN-SPACe के एक्सपर्ट एडवाइजर एयर वाइस मार्शल धनंजय खोत (रिटायर्ड) के अनुसार, किसी भी आधुनिक सैन्य ऑपरेशन में कई तरह के स्पेस सिस्टम एक साथ काम करते हैं। उन्होंने बताया कि सैन्य इंटेलिजेंस तैयार करने के लिए सैटेलाइट से मिली जानकारी को एयरक्राफ्ट, ड्रोन, यूएवी और अन्य उपलब्ध जानकारियों के साथ जोड़कर पूरी रणनीति और ऑपरेशनल प्लान तैयार किया जाता है। इसलिए आधुनिक सैन्य इंटेलिजेंस केवल अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों (IMINT) पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि कई खुफिया स्रोतों से मिली जानकारी को एक साथ जोड़कर मल्टी-इंटेलिजेंस (Multi-INT) और ऑल-सोर्स (All-Source) सिस्टम के रूप में काम करती है। 2. कार्टोसैट और RISAT ने रखी लगातार नजर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्पेस आधारित सिस्टम ने भारतीय सेना को रियल टाइम जानकारी उपलब्ध कराई। ISRO के कार्टोसैट और RISAT जैसे सैटेलाइट लगातार दुश्मन के ड्रोन और अन्य गतिविधियों पर नजर रखते रहे। इन सैटेलाइट्स से मिली रियल टाइम ट्रैकिंग और मैपिंग के आधार पर भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। इसका सबसे बड़ा असर भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में देखने को मिला। ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान ने इन सीमावर्ती इलाकों की ओर बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे, लेकिन भारत ने स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और काउंटर-यूएएस (C-UAS) तकनीक की मदद से उनके नेविगेशन और संचार सिस्टम को जाम कर दिया। इसके कारण अधिकांश ड्रोन भारतीय सीमा में प्रवेश करने से पहले ही पाकिस्तान की सीमा के भीतर गिर गए। 3. सीमा में घुसने से पहले ही रोके गए हमले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर में घुसपैठ की सभी कोशिशों को भारतीय क्षेत्र में नुकसान पहुंचाने से पहले ही विफल कर दिया गया। 4. अब और मजबूत हुई सीमा सुरक्षा मेजर शैलेन्द्र सिंह चौहान के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया कि भारत के स्वदेशी स्पेस संसाधन प्रभावी और भरोसेमंद हैं। उन्होंने कहा कि देश के पास अपनी स्वतंत्र और लगातार निगरानी की क्षमता होना बेहद जरूरी है। ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभव के बाद भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने अपनी ड्रोन रोधी क्षमता को और मजबूत किया है। अब सीमा पर विशेष बाज बटालियन और समर्पित ड्रोन स्क्वाड्रन तैनात किए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी भी ड्रोन खतरे का अधिक प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके। पहले जानकारी मिलना ही सबसे बड़ी ताकत पूर्व नौसेना अधिकारी और डिफेंस एयरोस्पेस प्रोजेक्ट्स से जुड़े कमांडर (रिटायर्ड) अरुण रविंद्रनाथन का कहना है कि आज के युद्ध में सबसे बड़ी ताकत हथियार नहीं, बल्कि सही समय पर मिलने वाली जानकारी होती है। टारगेट चुनने, सैन्य ऑपरेशन को कंट्रोल करने, रास्ता बताने, सुरक्षित संपर्क बनाए रखने और युद्ध के दौरान तेजी से फैसले लेने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। दुश्मन पर नजर रखने के लिए इमेजिंग और ऑप्टिकल सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जाता है। ये बहुत साफ तस्वीरें और वीडियो भेजते हैं, जिनकी मदद से दुश्मन के ठिकानों, सैनिकों की आवाजाही और हथियारों की तैनाती पर लगातार नजर रखी जा सकती है। वहीं सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) सैटेलाइट दुश्मन के रेडियो, रडार और संचार नेटवर्क से निकलने वाले सिग्नल पकड़ते हैं। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि दुश्मन क्या तैयारी कर रहा है और उसकी आगे की योजना क्या हो सकती है। सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) तकनीक वाले सैटेलाइट बादलों, घने कोहरे या रात के अंधेरे में भी काम कर सकते हैं। इनकी मदद से जमीन पर मौजूद वाहनों, बंकरों और दूसरी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। एक साथ कई मोर्चों पर लड़े जाएंगे भविष्य के युद्ध मेजर जनरल एस. वी. पी. सिंह (रिटायर्ड) के अनुसार, आज के युद्ध पहले की तरह अलग-अलग चरणों में नहीं लड़े जाते। अब जमीन, समुद्र, हवा, साइबर और स्पेस में एक साथ कार्रवाई होती है। अंतरिक्ष और रक्षा सैटेलाइट के एकीकरण से भारत मल्टी-फ्रंट वॉर यानी एक साथ कई मोर्चों पर होने वाले युद्ध में बेहतर तालमेल के साथ कार्रवाई करने में सक्षम हुआ है। उन्होंने बताया कि सैटेलाइट की मदद से सेना की अलग-अलग इकाइयों के बीच रियल टाइम में जानकारी साझा की जा सकती है। इससे लक्ष्य चूकने की संभावना कम हो जाती है और 'फ्रेंडली फायर' यानी गलती से अपनी ही सेना पर हमला होने का खतरा भी घटता है। मेजर जनरल सिंह के अनुसार, कार्टोसैट और रिसैट जैसे रडार सैटेलाइट अंतरिक्ष से 24/7 यानी दिन-रात और हर मौसम में दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। ये सैटेलाइट एलएसी (LAC) और एलओसी (LoC) जैसे संवेदनशील इलाकों में सैनिकों के जमावड़े और अन्य गतिविधियों को लगातार ट्रैक करते रहते हैं। इसके अलावा, कुछ अंतरिक्ष आधारित सिस्टम दुश्मन की मिसाइल लॉन्चिंग का समय रहते पता लगा लेते हैं, जिससे त्वरित बचाव और जवाबी कार्रवाई संभव हो पाती है। सिर्फ तस्वीर नहीं, उसका सही मतलब समझना ज्यादा जरूरी धनंजय खोत का कहना है कि भारतीय रक्षा सैटेलाइट, जैसे कार्टोसैट और रिसैट, हाई रेजोल्यूशन मैप और थर्मल तस्वीरें उपलब्ध कराते हैं। इन जानकारियों की मदद से ड्रोन ऑपरेटर उड़ान का रास्ता तय करते हैं, इलाके की स्थिति को समझते हैं और जमीन पर मौजूद संभावित लक्ष्यों की सटीक पहचान कर पाते हैं। हालांकि, केवल सैटेलाइट से तस्वीरें मिल जाना ही काफी नहीं होता। खोत के अनुसार, सबसे मुश्किल और सबसे जरूरी काम उन तस्वीरों और जानकारियों का सही विश्लेषण करना होता है। उन्होंने बताया कि पैनक्रोमैटिक, मल्टीस्पेक्ट्रल, हाइपरस्पेक्ट्रल, इन्फ्रारेड और थर्मल इमेजरी की मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि किसी इलाके में नई इमारत बन रही है या नहीं, बंकर तैयार किए जा रहे हैं या नहीं, सैनिकों और हथियारों की तैनाती में कोई बदलाव हुआ है या नहीं और कहीं किसी ढांचे को छिपाने की कोशिश तो नहीं की गई है। हाल ही में राजस्थान के पोकरण, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर क्षेत्रों में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन से जुड़े कई सैन्य अभ्यास भी किए गए हैं। वहीं, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल किए गए ड्रोन भी सैटेलाइट और स्पेस आधारित सेवाओं से जुड़े थे। संयुक्त सैन्य स्पेस सिद्धांत में क्या है? 2025 में संयुक्त कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के बाद जारी संयुक्त सैन्य स्पेस सिद्धांत ने पहली बार औपचारिक रूप से स्पेस को युद्ध के एक अलग क्षेत्र के रूप में स्वीकार किया। इसमें स्पेस को जमीन, समुद्र, हवा और साइबर के साथ एक पूर्ण सैन्य क्षेत्र माना गया है। इस सिद्धांत में विशेष रूप से मल्टी डोमेन वारफेयर, स्पेस आधारित ISR ऑपरेशन, स्पेस संसाधनों की सुरक्षा, एकीकृत कमांड सिस्टम और स्पेस क्षमताओं की लगातार उपलब्धता पर जोर दिया गया है। यह ढांचा 2019 में स्थापित डिफेंस स्पेस एजेंसी (DSA) की भूमिका को भी आगे बढ़ाता है। भारत सरकार ने स्पेस बेस्ड सर्विलांस (SBS) फेज-III परियोजना के तहत 2025 से 2029 के बीच 52 अतिरिक्त निगरानी सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना बनाई है। मेजर शैलेन्द्र सिंह चौहान के अनुसार प्रस्तावित SBS-III कॉन्स्टेलेशन का उद्देश्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर लगभग लगातार निगरानी बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में किसी क्षेत्र की दो तस्वीरों के बीच जो समय का अंतर होता है, उसे कम करना भविष्य की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। पाकिस्तान, चीन और बढ़ती स्पेस प्रतिस्पर्धा भारत की स्पेस रणनीति ऐसे समय में आगे बढ़ रही है जब पाकिस्तान और चीन के बीच स्पेस सहयोग लगातार बढ़ रहा है। धनंजय खोत ने कहा कि पाकिस्तान ने पिछले कई वर्षों में लगभग छह सैटेलाइट लॉन्च किए हैं। पाकिस्तान पहले अपनी निगरानी जरूरतों के लिए चीन और अन्य मित्र देशों से मिलने वाली जानकारी पर निर्भर था। अब वह अपनी स्वतंत्र स्पेस क्षमता विकसित करना चाहता है। पाकिस्तान का उद्देश्य भारतीय इलाकों पर नजर रखना और खुफिया जानकारी जुटाना है। हाल ही में जयपुर में ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर आयोजित जॉइंट कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए. मिनवाला ने कहा कि भारत वर्ष 2001 से सैन्य सैटेलाइट लॉन्च कर रहा है और सैन्य स्पेस संरचना के मामले में काफी आगे है। सैटेलाइट की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरीमेजर शैलेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि भविष्य की चुनौती केवल नए सैटेलाइट हासिल करना नहीं है। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि युद्ध के दौरान वे सुरक्षित रहें और लगातार काम करते रहें। इसी कारण दुनिया भर की सेनाएं स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस (SSA), स्पेस डोमेन अवेयरनेस (SDA), सैटेलाइट सुरक्षा और आवश्यकता पड़ने पर तेजी से नए स्पेस संसाधन उपलब्ध कराने जैसी क्षमताओं पर ध्यान दे रही हैं। निजी कंपनियां और स्टार्टअप भी बने सहयोगी धनंजय खोत ने बताया कि भारत का निजी स्पेस सेक्टर भी अब रक्षा से जुड़ी क्षमताओं में योगदान दे रहा है। कई निजी कंपनियां और स्टार्टअप्स डेटा विश्लेषण के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई संस्थानों ने सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर सुरक्षा एजेंसियों को उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराने में मदद की है। स्पेस उद्योग विशेषज्ञ सुब्बु वेंकटाचलम का मानना है कि मजबूत डिफेंस स्पेस क्षमता केवल सेना या सरकारी संस्थानों के भरोसे विकसित नहीं की जा सकती। भविष्य में सरकार, निजी उद्योग, स्टार्टअप्स और रिसर्च संस्थानों को मिलकर काम करना होगा। उनके अनुसार भारत के सामने केवल सैटेलाइट लॉन्च करने की चुनौती नहीं है। उतना ही जरूरी है कि उन्हें डिजाइन किया जाए, निर्मित किया जाए, लॉन्च किया जाए और अपने दम पर संचालित भी किया जाए। उन्होंने कहा कि मजबूत स्पेस क्षमता तभी विकसित होगी जब पूरे स्पेस सेक्टर में लगातार निवेश, तकनीकी विकास और औद्योगिक भागीदारी बढ़ेगी।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
युद्धविराम से आगे: क्या विश्व अहिंसा की ओर बढ़ेगा?
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हाल ही में हुआ युद्धविराम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया युद्ध की लपटों में घिरकर वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका था। कई सप्ताह तक चले संघर्ष ने क्षेत्र को ऐसे ज्वालामुखी में बदल दिया था, जिसकी प्रत्येक विस्फोटक घटना विश्व अर्थव्यवस्था ... Read more
दुनिया में जब जब युद्ध होते हैं एक सवाल ज़रूर उभरता है कि युद्ध से क्या हासिल। फिर यह कहा जाता है कि युद्ध से कुछ हासिल नहीं होता लेकिन फिर भी दुनिया के सबसे ताक़तवर देश सालों तक युद्ध लड़ते रहते हैं। युद्ध करवाने वाले ताकतवर नेता कुछ तो हासिल करते ही होंगे। दर्जनों देशों के प्रभावशाली, प्रशासक, मंत्री अपने अपने तरीकों और चुने हुए शब्दों में समझाते रहते हैं कि युद्ध से बहुत नुकसान हो रहा है, दुनिया की आर्थिक स्थिति परेशान होकर उलझी पड़ी है, हज़ारों मौतें हो चुकी हैं लेकिन युद्ध है कि जारी रखा जाता है। रूस युक्रेन युद्ध इसकी सबसे बड़ी मिसाल है। दूसरी मिसाल है, अमरीका इजराइल ईरान की लड़ाई जिसके सौंवे दिवस के अशुभ अवसर पर अमरीका और ईरान ने एक दूसरे पर हमले किए। मानो या न मानो युद्ध से कुछ तो हासिल हो रहा है। युद्ध विराम और शांति बातचीत की राख के नीचे शोले बुझते ही नहीं, माहौल में तनाव उबलता रहता है युद्ध के ड्रोन मंडराते रहते हैं। युद्ध का सबसे बड़ा हासिल व्याव्सायिक फायदा है। खालिस व्यवसायी राष्ट्रपति, अपना नुक्सान ज़्यादा नहीं होने देंगे, दूसरों का बेड़ा गर्क करवा देंगे। उनके हिसाब से युद्ध भी एक सौदा है। उनकी हर चाल ऐसा दिखाती है। कुछ भी सोच सकते हैं। बड़ा सोचना, ज्यादा मांगना उनकी व्यावसायिक शैली में शामिल है। ज़्यादा मांगेंगे तो ज्यादा मिलेगा, कम मांगोगे तो कम ही मिलने वाला है। उन्हें खुद को खबर बनाना आता है। चर्चा में बनाए रखना आता है। वे व्याव्सायिक राजनीतिज्ञों की तरह परिस्थितियों के सभी दरवाज़े खुले रखते हैं। खूब शोर करते हैं और दूसरों को डराते रहते हैं। कहकर मुकर जाते हैं। जैसा बंदा वैसी डील करने को तत्पर रहते हैं। अब तो वैसे भी हर चीज़ में व्यापार और बाज़ार मिला दिया गया है। बड़ा दांव ज्यादा खतरा लेकिन फायदा भी उसी अनुपात में। आम लोग ही तो मरते हैं, घायल हो जाते हैं, विस्थापित होते हैं। ईमारतें और हथियार तबाह होते रहते हैं फिर नए बनाने के लिए मरम्मत के लिए, उद्योग क्षेत्र को काम मिलता है। कुछ भी हो जाए व्यवसाय फैलता रहता है। महंगाई का कर्तव्य तो हमेशा बढ़ते जाना है। इसे भी पढ़ें: विश्वगुरु न होते हुए (व्यंग्य) अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं हारकर उदास बैठी हैं। युद्ध जारी रखने वाले अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधकों को यह संतुष्टि रहती है कि युद्ध निरंतर है। उन्हें अनिश्चितताओं से घिरी दुनिया से क्या लेना। धार्मिक कट्टरता शत्रुता बढ़े तो बढ़े। राजनीति को तो यह सब फैलाकर ही रखना होता है। कितने ही अनुभवी, यशस्वी नेताओं की सामरिक शक्ति, रुआब और प्रभाव की पोल खुलती जाती है लेकिन युद्ध से उनकी नाक ऊंची रहती है। स्वार्थ पूरा होता है और नकली इज्ज़त बनी रहती है। जो शांति स्थापित करने के लिए युद्ध जारी रखते हैं इतिहास उन्हें भूलता नहीं। क्या फर्क पड़ता है अगर युद्ध के कारण याद रखता है। अगर युद्ध से फायदा न हो तो कई तरह का नुक्सान करने वाले इस खतरनाक काम को कौन महीनों तक करता रहेगा। हर व्यवसाय में छिपे हुए फायदे होते हैं जिनका किसी को भी पता नहीं चलता सिर्फ उन्हें पता होता है जो उनके मालिक होते हैं। युद्ध एक व्यवसाय ही तो है जिसका हासिल, ख़ास लोगों को होने वाला किसी न किसी तरह का अशुभ लाभ है। - संतोष उत्सुक
अमर स्वाभिमान का प्रतीक हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष
Battle of Haldighati: 18 जून भारतीय इतिहास की वह अमर तिथि है, जो केवल एक युद्ध का स्मरण नहीं कराती बल्कि त्याग, स्वाभिमान, साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण की गाथा सुनाती है। यह वह दिन है जब मेवाड़ की धरती पर एक ऐसा संघर्ष हुआ, जिसने इतिहास के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
'वाराणसी' में दिखेगा महायुद्ध, भगवान राम और कुंभकर्ण के बीच होगा 30 मिनट का ऐतिहासिक टकराव!
दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली जब भी कोई नया प्रोजेक्ट लाते हैं, तो वह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक उत्सव बन जाता है। 'बाहुबली' और 'आरआरआर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद, राजामौली अब सुपरस्टार महेश बाबू के साथ अपनी अगली महात्वाकांक्षी ...
इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) हर हफ्ते दुनिया भर यूजर्स के सर्च और प्रोफाइल विजिट के आधार पर 'मोस्ट पॉपुलर इंडियन सेलिब्रिटीज' की लिस्ट जारी करता है। आमतौर पर इस लिस्ट के शीर्ष पर वही सुपरस्टार्स नजर आते हैं जिनकी बड़ी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज ...
खाड़ी युद्ध से निपटने की मोदी की तजबीज
मोदीजी ने एक बार फिर राष्ट्र की जनता को उसके कर्तव्यों के प्रति सचेत किया है।
युद्धविराम और हाशिए पर धकेल दिया गया भारत
यह युद्ध स्पष्ट रूप से नेतन्याहू की देन है और ट्रम्प इसके परिणामों के बारे में सोचे-समझे बिना ही इसमें फंस गए।
युद्ध के माहौल में विश्व शांति का शंखनाद है विश्व णमोकार दिवस
विश्व णमोकार दिवस- 9 अप्रैल, 2026 विश्व इतिहास के इस संक्रमणकाल में, जब मानवता युद्ध, हिंसा, आतंक, तनाव और असहिष्णुता के बोझ तले कराह रही है, ऐसे समय में 9 अप्रैल 2026 को मनाया जाने वाला विश्व णमोकार मंत्र दिवस एक अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा-विस्फोट के रूप में सामने आ रहा है। यह दिवस केवल एक ... Read more
तीसरे विश्वयुद्ध की आहट और गांधी
इतिहास विजय-पराजय-विनाश का मृत दस्तावेज नहीं है, न वह किसी की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कहानी का विवरण है।
धीरे-धीरे हकीकत में बदल रहे हैं भारत के ईरान युद्ध के डर
ईरान युद्ध को लेकर भारत की सबसे गहरी आर्थिक चिंताएं अब काल्पनिक नहीं रह गई हैं
युद्ध को लेकर मोदी का देश को डराने वाला संदेश
देश में जहां भी और जब भी चुनाव होते हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दूसरे सारे काम छोड़कर अपनी भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार में जुट जाते हैं
पश्चिम एशिया में युद्ध के दुष्प्रभाव से निपटने के लिए बेहतर नीतियों की ज़रूरत
वित्त वर्ष 2026-27 की ठीक शुरुआत में, जो 1 अप्रैल, 2026 से शुरू हो रहा है, भारत को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है
युद्ध के माहौल में महावीर के दर्शन की उपादेयता
सदियों पहले महावीर जनमे। वे जन्म से महावीर नहीं थे। उन्होंने जीवन भर अनगिनत संघर्षों को झेला, कष्टों को सहा, दुख में से सुख खोजा और गहन तप एवं साधना के बल पर सत्य तक पहुंचे, इसलिये वे हमारे लिए आदर्शों की ऊंची मीनार बन गये। उन्होंने समझ दी कि महानता कभी भौतिक पदार्थों, सुख-सुविधाओं, ... Read more
युद्धग्रस्त विश्व में महावीर की अहिंसा: शांति की एकमात्र राह
संदर्भ – तीर्थंकर महावीर स्वामी जन्म कल्याणक 2625वां (31 मार्च 2026) आज का विश्व एक विचित्र विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर विज्ञान, तकनीक और वैश्वीकरण ने मानव जीवन को अभूतपूर्व सुविधाएं दी हैं, वहीं दूसरी ओर युद्ध, हिंसा और असहिष्णुता ने मानवता के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विश्व के ... Read more
पश्चिम एशिया युद्ध में परमाणु खतरे के प्रति लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अंतिम घोषित तिथि बढ़ा दी है।
अब युद्धविराम को लालायित ट्रंप
अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह लड़ाई अमेरिका को पहले ही महंगी पड़ रही है
पश्चिम एशिया में युद्ध फैलने से एक और वैश्विक आर्थिक संकट का खतरा
पश्चिम एशिया का संकट अब एक वैश्विक आर्थिक चुनौती में बदल गया है
फैक्ट चेक: इजरायल के डिमोना पर हमले के दावे से इराक का वीडियो हुआ वायरल
बूम ने पाया कि वायरल हो रहा वीडियो इराक के Nasiriyah स्थित एक रेस्टोरेंट में लगी आग का है.
ईरान युद्ध के सबक मौजूदा संघर्ष से कहीं आगे बाजार का आकार तय करेंगे
ऊर्जा बाजार एक ऐसे दौर में जा रहा है, जहां मूल्य निर्धारण मॉडल के आधार पर बनी पारंपरिक धारणाएं संघर्ष के बदलते स्वरूप से पूरी तरह बदल रही हैं
ईरान युद्ध में नाटो से अलग-थलग पड़े ट्रंप की परीक्षा की घड़ी
बुधवार को, अमेरिका-इजरायल गठबंधन के ईरान के खिलाफ युद्ध के 18वें दिन, ट्रंप को एक साथ दो बुरी खबरें मिलीं
लीजा रे ने दुबई से शेयर की दर्दभरी कविता, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच जताई चिंता
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। हर तरफ धमाकों और सायरन का शोर सुनाई दे रहा है। एक्ट्रेस लीजा रे भी इन हालातों के बीच दुंबई में अपने घर ...
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता, बेटी के साथ सुरक्षित लौटीं भारत, सुनाई आपबीती
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता भी अपनी 14 साल की बेटी सायरा के साथ यूएई में ...
ईरान युद्ध से भारतीय अर्थव्यवस्था को जोरदार झटका संभव
पश्चिम एशिया में चल रहे व्यापक युद्ध, जिसमें अमेरिका-इज़राइल जोड़ी और ईरान शामिल हैं
एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज़ की '120 बहादुर' को लेकर चर्चा अब अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। फिल्म ट्रेलर ने पूरी तरह से रोमांच और प्रेरणा का सही मिश्रण पेश किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बलिदान दिवस पर मेजर शैतान सिंह ...
War 2 रिव्यू: लचर स्क्रिप्ट और निर्देशन के कारण रितिक और एनटीआर हारे युद्ध, पढ़ें पूरी समीक्षा
रितिक रोशन और एनटीआर स्टारर War 2 ‘स्पाई यूनिवर्स’ की बड़ी पेशकश मानी जा रही थी, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और औसत निर्देशन ने इसे निराशाजनक बना दिया। शानदार एक्शन सीक्वेंस और एनटीआर के दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद फिल्म का सेकंड हाफ बिखर गया। कहानी में ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला अपनी खूबसूरती से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। उर्वशी ने बेहद ही कम समय में एक अलग मुकाम हासिल किया है। वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों के साथ 'मिलने और अभिवादन' के क्षणों में संलग्न रहती है। ऐसा ही एक क्षण था जब ...
सलमान खान की सिकंदर के आखिरी गाने में दिखेगा जबरदस्त जलवा, तुर्की से बुलाए गए 500 डांसर्स!
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की 'सिकंदर' इस साल की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके एक्शन-पैक्ड टीजर ने इसकी भव्य एंट्री के लिए एकदम परफेक्ट माहौल तैयार कर दिया है। भव्य पैमाने पर बनाई गई इस फिल्म में ...
केसरी वीर के लिए सूरज पंचोली ने की कड़ी ट्रेनिंग, ऐसे सीखा युद्ध कौशल
बॉलीवुड एक्टर सूरज पंचोली अपनी पहली बायोपिक में वीर हामीरजी गोहिल के ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने जा रहे हैं। सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय और सूरज पंचोली अभिनीत फिल्म 'केसरी वीर : लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ' का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ...
फरहान अख्तर लेकर आ रहे भारत-चीन युद्ध पर आधारित फिल्म 120 बहादुर, निभाएंगे मेजर शैतान सिंह का रोल
Movie 120 Bahadur : रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट, ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज के साथ मिलकर '120 बहादुर' को पेश करने के लिए उत्साहित हैं। यह फिल्म मेजर शैतान सिंह (पीवीसी) और चार्ली कंपनी, 13 कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिकों की कहानी कहती ...
Adil Hussain: दुनियाभर में इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 की धूम मची हुई है। पेरिस ओलंपिक में दुनियाभर के खिलाड़ियों ने भाग लिया है। भारत के कई खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। हाल ही में तुर्की के शूटर यूसुफ डिकेक ने सिल्वर मेडल जीता।
Kalki 2898 AD: शुरू हो गया नया युद्ध, पूरे ट्रेलर की अहम कड़ी हैं अमिताभ, प्रभास करेंगे इम्प्रेस
Kalki 2898 AD के ट्रेलर को देखें तो, फिल्म कल्कि 2898 एडी के मेकर्स ने विश्वास दिलाया है कि ये फिल्म लोगों को बांधने में कामयाब होगी. टफ सीक्वेंस, क्लियर एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर आपका ध्यान खींचते हैं. वीएफएक्स पर भी अच्छा काम किया गया है.
आशुतोष राणा ने डीपफेक वीडियो को बताया 'माया युद्ध', बोले- ये सालों से चल रहा
आशुतोष ने कहा कि ऐसी बातों में खुद को डिफेंड करने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि जो लोग आपको जानते हैं वो सवाल करेंगे ही नहीं. और जो नहीं जानते, उन्हें किसी रिस्पॉन्स से फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वो दिमाग में आपकी एक छवि बना चुके होते हैं.
रानीति बालाकोट एंड बियॉन्ड: जिमी शेरगिल की नई सीरीज भारत की आधुनिक युद्ध की ऐतिहासिक कहानी को प्रदर्शित करेगी। जिमी शेरगिल दो मिनट के ट्रेलर की शुरुआत पुलवामा हमले की झलक से होती है। एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाने वाले आशीष कहते हैं, ये एक नया रण है या इसे जीतने के लिए एक नई रणनीति की जरूरत है। इसे भी पढ़ें: नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन प्रहार', कमांडर शंकर राव समेत अब तक 79 हुए ढेर, हिट लिस्ट में और भी कई नाम शामिल आगामी वेब शो आधुनिक युद्ध को डिकोड करता है जो केवल भौतिक सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता है बल्कि सोशल मीडिया, डिजिटल रणनीति और गुप्त राजनीतिक चालों के क्षेत्र से परे है जो भू-राजनीति को नया आकार देने की शक्ति रखता है। वेब श्रृंखला उन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है जिन्होंने 2019 में देश को हिलाकर रख दिया था। शो में कुछ हवाई दृश्य, शानदार प्रदर्शन और एक शक्तिशाली कथा है जो युद्ध के मैदान के अंदर और बाहर हर पहलू को चतुराई से पकड़ती है। इसे भी पढ़ें: Biden को सोचना पड़ेगा फिर एक बार, Iran पर प्रहार तो रूस करेगा पलटवार, रक्षा मंत्रायल ने चिट्ठी लिखकर जता दी मंशा आगामी वेब श्रृंखला के बारे में बात करते हुए, जिमी ने कहा: यह मेरे द्वारा अतीत में की गई किसी भी भूमिका से भिन्न है। कम से कम यह कहना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन भारत की पहली वॉर-रूम केंद्रित वेब-श्रृंखला का हिस्सा बनना बेहद संतोषजनक भी है। वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित जिसने देश को हिलाकर रख दिया। एनएसए प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए, आशीष ने कहा, एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन रक्षा बलों के कुछ सदस्यों के साथ बैठकों ने मुझे अपने चरित्र की बारीकियों को समझने में मदद की। तैयारी कार्य और कार्यशालाएं मुझे वापस ले गईं मेरे एनएसडी के दिनों में। संतोष सिंह द्वारा निर्देशित, श्रृंखला का निर्माण स्फीयरओरिजिन्स मल्टीविजन प्राइवेट लिमिटेड के सुंजॉय वाधवा और कॉमल सुंजय डब्ल्यू द्वारा किया गया है। इसमें प्रसन्ना भी हैं। शो का प्रीमियर 25 अप्रैल को JioCinema पर होगा।
दर्शक काफी समय से रैपर बादशाह और हनी सिंह के बीच जुबानी जंग देख रहे हैं। दोनों का रिश्ता सालों से विवादों से भरा रहा है। हालांकि करियर के शुरुआती दिनों में बादशाह और हनी सिंह के बीच अच्छी दोस्ती हुआ करती थी। हालाँकि, ऐसा लगता है कि सफलता और पैसे ने धीरे-धीरे इस दोस्ती को पूरी तरह से खत्म कर दिया। अब दोनों अक्सर एक दूसरे पर तंज कसते नजर आते हैं। हाल ही में हनी सिंह एक होली पार्टी में शामिल हुए, जहां उन्होंने बादशाह के 'पापा कमबैक' वाले कमेंट का करारा जवाब दिया। रैपर का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसे भी पढ़ें: Punjab Kings के खिलाफ जीत के बाद इंटरनेट पर Virat Kohli का Anushka Sharma के साथ वीडियो कॉल, FLY KISS देते नजर आये खिलाड़ी हनी सिंह ने बादशाह पर किया पलटवार बादशाह कुछ दिनों पहले हनी सिंह पर अपनी टिप्पणी को लेकर चर्चा में थे, जिसमें उन्होंने हनी सिंह की वापसी पर कटाक्ष किया था। अब सिंगर और रैपर हनी सिंह ने एक कमेंट के जरिए बादशाह को करारा जवाब दिया है और कहा है कि उन्हें बादशाह को जवाब देने के लिए मुंह खोलने की जरूरत नहीं है। उनके फैन ही काफी हैं जो हर चीज पर बात कर सकते हैं। उन्होंने अपने गाली वाले अंदाज में अपने फैंस से बात करते हुए बादशाह का जवाब दिया। हनी सिंह को सोमवार को मुंबई में एक होली पार्टी में परफॉर्म करते देखा गया और यहीं उन्होंने बादशाह पर कटाक्ष किया। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा, हर कोई कहता है, रिप्लाई करो, रिप्लाई करो... मैं क्या रिप्लाई करूं... आप लोग तो उनके सारे कमेंट्स का बहुत अच्छे से रिप्लाई कर चुके हैं। मुझे मुंह खोलने की जरूरत है। ऐसा नहीं होता है। जैसे ही भीड़ ने उनके लिए तालियां बजाईं, गायक ने कहा, मुझे बोलने की जरूरत नहीं है। आप लोग खुद पागल हैं। हनी सिंह पागल हैं और उनके प्रशंसक भी पागल हैं। इसे भी पढ़ें: Taapsee Pannu के पति Mathias Boe आखिर कौन है? जब सफल भी नहीं थी एक्ट्रेस तब से उन्हें प्यार करते थे बैडमिंटन खिलाड़ी रैपर बादशाह ने क्या कहा? आपको बता दें कि हाल ही में बादशाह ने हनी सिंह पर कमेंट करते हुए कहा था, ''मुझे एक पेन और कागज दो। मैं तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लाया हूं। मैं कुछ गाने लिखूंगा और तुम्हें दूंगा। पापा की वापसी तुम्हारे साथ होगी।'' Kalesh Controversy B/w Honey Singh and Badshah (Honey Singh Replied to Badshah) pic.twitter.com/o74t423bgS — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 25, 2024 Kalesh Between Badshah & Honey Singh Fans on Stage during Live Concert pic.twitter.com/M4VqSqLSc3 — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 19, 2024
आखिर क्यों Indira Gandhi ने Aandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध, आज भी देखने से कतराते हैं लोग
आखिर क्यों Indira Gandhi नेAandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध,आज भी देखने से कतराते हैं लोग
'सावरकर' रिव्यू: खोखली, एकतरफा फिल्म में एकमात्र अच्छी चीज है रणदीप हुड्डा का काम
आज के दौर में 'गुमनाम' हो चुके एक स्वतंत्रता नायक की कहानी कहने निकली ये फिल्म, एक अनजान कहानी बताने से ज्यादा अपने हीरो विनायक दामोदर सावरकर को बाकियों के मुकाबले अधिक 'वीर' बताने पर फोकस करने लगती है.
अस्तित्व और बदले के लिएब्रह्मांड में शुरू होने वाला है महायुद्ध, एक्शन और रोमांच से भरपूर हैRebel Moon 2 का धांसू ट्रेलर

