दुनिया में जब जब युद्ध होते हैं एक सवाल ज़रूर उभरता है कि युद्ध से क्या हासिल। फिर यह कहा जाता है कि युद्ध से कुछ हासिल नहीं होता लेकिन फिर भी दुनिया के सबसे ताक़तवर देश सालों तक युद्ध लड़ते रहते हैं। युद्ध करवाने वाले ताकतवर नेता कुछ तो हासिल करते ही होंगे। दर्जनों देशों के प्रभावशाली, प्रशासक, मंत्री अपने अपने तरीकों और चुने हुए शब्दों में समझाते रहते हैं कि युद्ध से बहुत नुकसान हो रहा है, दुनिया की आर्थिक स्थिति परेशान होकर उलझी पड़ी है, हज़ारों मौतें हो चुकी हैं लेकिन युद्ध है कि जारी रखा जाता है। रूस युक्रेन युद्ध इसकी सबसे बड़ी मिसाल है। दूसरी मिसाल है, अमरीका इजराइल ईरान की लड़ाई जिसके सौंवे दिवस के अशुभ अवसर पर अमरीका और ईरान ने एक दूसरे पर हमले किए। मानो या न मानो युद्ध से कुछ तो हासिल हो रहा है। युद्ध विराम और शांति बातचीत की राख के नीचे शोले बुझते ही नहीं, माहौल में तनाव उबलता रहता है युद्ध के ड्रोन मंडराते रहते हैं। युद्ध का सबसे बड़ा हासिल व्याव्सायिक फायदा है। खालिस व्यवसायी राष्ट्रपति, अपना नुक्सान ज़्यादा नहीं होने देंगे, दूसरों का बेड़ा गर्क करवा देंगे। उनके हिसाब से युद्ध भी एक सौदा है। उनकी हर चाल ऐसा दिखाती है। कुछ भी सोच सकते हैं। बड़ा सोचना, ज्यादा मांगना उनकी व्यावसायिक शैली में शामिल है। ज़्यादा मांगेंगे तो ज्यादा मिलेगा, कम मांगोगे तो कम ही मिलने वाला है। उन्हें खुद को खबर बनाना आता है। चर्चा में बनाए रखना आता है। वे व्याव्सायिक राजनीतिज्ञों की तरह परिस्थितियों के सभी दरवाज़े खुले रखते हैं। खूब शोर करते हैं और दूसरों को डराते रहते हैं। कहकर मुकर जाते हैं। जैसा बंदा वैसी डील करने को तत्पर रहते हैं। अब तो वैसे भी हर चीज़ में व्यापार और बाज़ार मिला दिया गया है। बड़ा दांव ज्यादा खतरा लेकिन फायदा भी उसी अनुपात में। आम लोग ही तो मरते हैं, घायल हो जाते हैं, विस्थापित होते हैं। ईमारतें और हथियार तबाह होते रहते हैं फिर नए बनाने के लिए मरम्मत के लिए, उद्योग क्षेत्र को काम मिलता है। कुछ भी हो जाए व्यवसाय फैलता रहता है। महंगाई का कर्तव्य तो हमेशा बढ़ते जाना है। इसे भी पढ़ें: विश्वगुरु न होते हुए (व्यंग्य) अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं हारकर उदास बैठी हैं। युद्ध जारी रखने वाले अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधकों को यह संतुष्टि रहती है कि युद्ध निरंतर है। उन्हें अनिश्चितताओं से घिरी दुनिया से क्या लेना। धार्मिक कट्टरता शत्रुता बढ़े तो बढ़े। राजनीति को तो यह सब फैलाकर ही रखना होता है। कितने ही अनुभवी, यशस्वी नेताओं की सामरिक शक्ति, रुआब और प्रभाव की पोल खुलती जाती है लेकिन युद्ध से उनकी नाक ऊंची रहती है। स्वार्थ पूरा होता है और नकली इज्ज़त बनी रहती है। जो शांति स्थापित करने के लिए युद्ध जारी रखते हैं इतिहास उन्हें भूलता नहीं। क्या फर्क पड़ता है अगर युद्ध के कारण याद रखता है। अगर युद्ध से फायदा न हो तो कई तरह का नुक्सान करने वाले इस खतरनाक काम को कौन महीनों तक करता रहेगा। हर व्यवसाय में छिपे हुए फायदे होते हैं जिनका किसी को भी पता नहीं चलता सिर्फ उन्हें पता होता है जो उनके मालिक होते हैं। युद्ध एक व्यवसाय ही तो है जिसका हासिल, ख़ास लोगों को होने वाला किसी न किसी तरह का अशुभ लाभ है। - संतोष उत्सुक
अमर स्वाभिमान का प्रतीक हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष
Battle of Haldighati: 18 जून भारतीय इतिहास की वह अमर तिथि है, जो केवल एक युद्ध का स्मरण नहीं कराती बल्कि त्याग, स्वाभिमान, साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण की गाथा सुनाती है। यह वह दिन है जब मेवाड़ की धरती पर एक ऐसा संघर्ष हुआ, जिसने इतिहास के ...
श्रीलंका में इंडिया ए, श्रीलंका ए, और अफगानिस्तान ए के बीच वनडे फॉर्मेट की त्रिकोणीय सीरीज खेली जा रही है। इस सीरीज के लिए तेज गेंदबाज अशोक शर्मा को इंडिया ए टीम में जगह दी गई है। शर्मा चोटिल गेंदबाज युद्धवीर सिंह की जगह लेंगे। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की तरफ से जारी बयान में कहा गया, पुरुषों की चयन समिति ने श्रीलंका में चल रही त्रिकोणीय सीरीज के लिए इंडिया ए टीम में युद्धवीर सिंह की जगह अशोक शर्मा को शामिल किया है। युद्धवीर ने 13 जून को गेंदबाजी करते समय अपने दाहिने कंधे में तकलीफ बताई थी और 11 जून को फील्डिंग सेशन के दौरान भी उन्हें ऐसी ही परेशानी हुई थी। बयान में कहा गया, बीसीसीआई मेडिकल टीम ने एक विशेषज्ञ से सलाह के बाद युद्धवीर को राइट रोटेटर कफ की चोट से पूरी तरह ठीक होने के लिए बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) में रिहैबिलिटेशन कार्यक्रम की प्रक्रिया से गुजरने की सलाह दी है। अशोक ने आईपीएल 2026 में अपनी तेज गेंदबाजी से काफी असर डाला था। उन्होंने गुजरात टाइटंस (जीटी) के लिए छह मैचों में छह विकेट लिए थे। इससे पहले अशोक ने 2025/26 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में दस मैचों में सर्वाधिक 22 विकेट लिए थे। यह डेवलपमेंट अशोक के आने वाले डोमेस्टिक सीज़न के लिए राजस्थान से गुजरात में कन्फर्म्ड स्विच के बाद हुआ है। वह भारत के लेग-स्पिनर रवि बिश्नोई के बाद डोमेस्टिक क्रिकेट में राजस्थान से गुजरात में ट्रांसफर होने वाले दूसरे खिलाड़ी हैं। अशोक ने आईपीएल 2026 में अपनी तेज गेंदबाजी से काफी असर डाला था। उन्होंने गुजरात टाइटंस (जीटी) के लिए छह मैचों में छह विकेट लिए थे। इससे पहले अशोक ने 2025/26 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में दस मैचों में सर्वाधिक 22 विकेट लिए थे। Also Read: LIVE Cricket Score त्रिकोणीय सीरीज के लिए इंडिया ए की अपडेटेड स्क्वॉड: तिलक वर्मा (कप्तान), ऋतुराज गायकवाड़ (उपकप्तान), प्रियांश आर्य, वैभव सूर्यवंशी, आयुष बडोनी, निशांत सिंधु, सूर्यांश शेडगे, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), कुमार कुशाग्र (विकेटकीपर), विप्रज निगम, यश ठाकुर, अंशुल कंबोज, अरशद खान, अनुकूल रॉय, अशोक शर्मा। Article Source: IANS
भास्कर एक्सपर्ट टीम भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक, 18 जून 1576 को लड़े गए हल्दीघाटी युद्ध के परिणामों को लेकर नए शोध, पुरातात्विक साक्ष्यों और स्वयं मुगल स्रोतों के विश्लेषण के बाद नया अकादमिक पुनर्मूल्यांकन सामने आया है। इसके अनुसार, हल्दीघाटी के इस महायुद्ध में मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप एक स्पष्ट सामरिक विजेता के रूप में उभरे थे। इन्हीं स्थापित तथ्यों के आधार पर 17 जून, बुधवार को गांधी ग्राउंड में कार्यक्रम होगा, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत मौजूद रहेंगे। उस दौर की कृतियां भी मुगलों की रणनीतिक विफलता का प्रमाण यदि मुगलकालीन कृतियों का विश्लेषण करें तो युद्ध में मुगल सेना की रणनीतिक विफलता स्वतः स्पष्ट हो जाती है। युद्ध के तुरंत बाद जारी किए गए थे जमीनों के पट्टे राजनीतिक इतिहास और संप्रभुता का यह सार्वभौमिक सिद्धांत है कि भूमि और राजस्व पर अधिकार केवल उसी राजा का हो सकता है जिसका उस क्षेत्र पर प्रशासनिक नियंत्रण हो। समकालीन शिलालेखों में दर्ज है प्रताप की विजय {जगन्नाथ राय प्रशस्ति (विक्रम संवत 1708) : जगदीश मंदिर में स्थापित इस प्रशस्ति के श्लोक संख्या 41 में दर्ज है कि प्रतापसिंह के रणभूमि में उतरते ही मानसिंह से युक्त शत्रु सेना पीछे हट गई थी। {सुरपणखेड़ा (सूरखंड) शिलालेख (विक्रम संवत 1642) : इसमें स्पष्ट उल्लेख है कि महाराणा प्रतापसिंह ने मानसिंह के साथ भीषण युद्ध किया, जिसमें महाराणा प्रताप विजयी हुए। {राजप्रशस्ति व अमरकाव्यम : राजसमंद झील के तट पर उत्कीर्ण संसार के सबसे बड़े शिलालेखीय इतिहास ‘राजप्रशस्ति महाकाव्यम’ और समकालीन संस्कृत पांडुलिपि अमरकाव्य वंशावली के अनुसार राजपूतों के प्रहार से मुगल सेना के पैर उखड़ गए थे। {वैद्यनाथ मंदिर प्रशस्ति : सीसारमा की इस प्रशस्ति (श्लोक 34-35) में भी महाराणा प्रताप के प्रभाव का उल्लेख है। {बदायूंनी का विवरण : युद्ध में मुगल सेना की तरफ से शामिल प्रत्यक्षदर्शी बदायूंनी ने अपनी पुस्तक मुंतखब-उत-तवारीख में लिखा है कि राजपूतों के पहले हमले ने मुगल सेना को पीछे धकेल दिया था। बाद में गोगुन्दा पहुंचकर मुगलों ने सुरक्षा के लिए चारों तरफ गहरी खाई और दीवारें बनवाईं। { रसद आपूर्ति ठप होना : महाराणा प्रताप ने भील योद्धाओं की सहायता से मेवाड़ के सभी पहाड़ी रास्तों को अवरुद्ध कर दिया था। इस नाकेबंदी के कारण गोगुन्दा में फंसी शाही सेना के लिए खाद्य सामग्री की आपूर्ति ठप हो गई। { अकबर ने बंद की थी सेनापतियों की ड्योढ़ी : महाराणा प्रताप को बंदी बनाने या मेवाड़ पर पूर्ण अधिकार करने में मानसिंह और आसफ खान पूरी तरह विफल रहे। अकबरनामा में दर्ज है कि इस विफलता से नाराज होकर बादशाह अकबर ने दोनों सेनापतियों की ड्योढ़ी बंद कर दी थी यानी शाही दरबार में आने पर प्रतिबंध लगा दिया था। ताम्रपत्र और पट्टे : हल्दीघाटी युद्ध के ठीक बाद (सन 1576 के उत्तरार्ध में) महाराणा प्रताप ने युद्ध क्षेत्र के ठीक बगल में स्थित बलीचा गाँव के किसानों को भूमि अनुदान जारी किए थे। लोहासिंह ताम्रपत्र : युद्ध के बाद (1576-1577 ई.) महाराणा प्रताप द्वारा आसपास के गांवों में ‘लोहासिंह ताम्रपत्र’ और भूमि सुधार संबंधी प्रशासनिक आदेश जारी किए गए। इन पर एकलिंगनाथ दीवान के रूप में उनके प्राधिकृत हस्ताक्षर अंकित थे, जो उनके प्रभावी प्रशासनिक ढांचे को सिद्ध करते हैं। प्रो. बी.पी. शर्मा, पूर्व कुलपति व अध्यक्ष, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति डॉ. सुदर्शन सिंह राठौड़, आचार्य-इतिहास विभाग, राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय डॉ. मनीष श्रीमाली, सहायक आचार्य-इतिहास विभाग, सुविवि, उदयपुर
लगभग चार महीने से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में अमेरिका और ईरान ने बड़ा कदम उठाया है। दोनों देशों ने युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमति बना ली है। यह इस वर्ष संघर्ष शुरू होने के बाद सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जा रही ...
लालू प्रसाद के शासनकाल के दौरान हुए 1997 के अलकतरा घोटाले से जुड़े एक मामले में सोमवार को पटना स्थित सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुनाया। इस मामले में फैसला सीबीआई-2 के न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम ने सुनाया है। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में तीन जूनियर इंजीनियर (जेई) को बरी कर दिया, जबकि एक ट्रांसपोर्टर को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष की सजा और 15 लाख रुपये जुर्माना लगाया। किन लोगों पर चल रहा था ट्रायल इस मामले में चार आरोपी ट्रायल फेस कर रहे थे। इनमें तीन जूनियर इंजीनियर और एक ट्रांसपोर्टर शामिल थे। जिसमें जयनारायण प्रसाद (जूनियर इंजीनियर), हामिद राज अंसारी (जूनियर इंजीनियर), एक अन्य जूनियर इंजीनियर, ट्रांसपोर्टर दूधेश्वर नाथ सिंह, ट्रायल के दौरान दो अन्य अभियुक्तों की मौत हो चुकी थी। क्या था मामला जयनारायण प्रसाद की ओर से 1997 से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद जी वर्मा के अनुसार, आरोप था कि 7 अगस्त 1994 के ऑर्डर संख्या 5501 के तहत 1000 मीट्रिक टन बिटुमन (अलकतरा) की आपूर्ति जहानाबाद डिवीजन में की जानी थी। इसके लिए हल्दिया से बरौनी होते हुए अलकतरा भेजा जाना था। मामले में 1053.92 मीट्रिक टन अलकतरा का उठाव किया गया था। आरोप था कि अलकतरा हल्दिया से उठाया तो गया, लेकिन उसे जहानाबाद नहीं भेजा गया और बीच में ही गड़बड़ी कर दी गई। कब दर्ज हुई थी एफआईआर मामले में एफआईआर 6 मार्च 1997 को दर्ज की गई थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने 20 फरवरी 1997 को मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। बाद में छह लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। कोर्ट ने क्या कहा सीबीआई-2 पटना सिविल कोर्ट ने माना कि तीनों जूनियर इंजीनियरों के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। इसके चलते तीनों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। वहीं ट्रांसपोर्टर दूधेश्वर नाथ सिंह को दोषी पाया गया। कोर्ट ने उन्हें तीन वर्ष की सजा सुनाई और 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 80वें जन्मदिन पर मिडिल ईस्ट में जारी जंग खत्म करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो गया है। अमेरिका-ईरान समझौते की घोषणा के बाद एशिया में शुरुआती कारोबार के दौरान तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। ...
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती और हल्दीघाटी युद्ध विजय के 450वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में जयपुर में ‘हल्दीघाटी विजय स्मृति शिल्प प्रदर्शनी’ की शुरुआत हुई। इसका उद्घाटन राज्यपाल हरिभाऊ किशन राव बागड़े ने किया। प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए राज्यपाल बागड़े ने कहा- महान इतिहास सदैव समाज को ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करता है। हल्दीघाटी का युद्ध केवल एक संघर्ष नहीं, बल्कि स्वाभिमान, स्वतंत्रता और राष्ट्र गौरव का प्रतीक है। अंग्रेजों ने भारतीय इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को भुलाने का प्रयास किया, लेकिन हमारे वीरों की गाथाएं आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित कर रही हैं। मानसरोवर स्थित भारती शिल्पकला स्टूडियो में प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में महाराणा प्रताप और मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास से जुड़े योद्धाओं, वीरांगनाओं एवं ऐतिहासिक विभूतियों की प्रतिमाओं का दुर्लभ संग्रह प्रदर्शित किया गया है। राज्यपाल ने महाराणा प्रताप की हाथी पर सवार प्रतिमा, चेतक पर सवार प्रताप की भव्य मूर्तियों और हल्दीघाटी युद्ध से जुड़ी शिल्पाकृतियों का अवलोकन किया। मेवाड़ की भूमि सदैव वीरों की भूमि रही है, जिसने कभी भी मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की। उन्होंने बप्पा रावल के पराक्रम का उल्लेख करते हुए कहा- विदेशी आक्रांताओं को भारत से खदेड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। राज्यपाल ने कहा- अकबरनामा दरबारी इतिहास था, जबकि भारतीय इतिहास में अनेक वीरों और वीरांगनाओं के योगदान को पर्याप्त स्थान नहीं मिला। ऐसे आयोजनों के माध्यम से उन गौरवशाली अध्यायों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। इवेंट की फोटोज यहां देखें… मेवाड़ के स्वर्णिम इतिहास की झलक प्रदर्शनी में 12 इंच से लेकर 15 फीट तक की प्रतिमाएं प्रदर्शित की गई हैं। इनमें चेतक पर सवार महाराणा प्रताप, हाथी पर आरूढ़ महाराणा प्रताप, राणा पूंजा, भामाशाह, हाकिम खान सूरी, पन्ना धाय, भक्त शिरोमणि मीराबाई, महारानी पद्मिनी और राणा सांगा जैसी ऐतिहासिक विभूतियों की आकर्षक मूर्तियां शामिल हैं। इन प्रतिमाओं के माध्यम से न केवल हल्दीघाटी युद्ध की स्मृतियों को जीवंत किया गया है, बल्कि मेवाड़ की उस गौरवशाली परंपरा को भी सामने लाया गया है जिसने भारतीय इतिहास को नई दिशा दी। 25 वर्षों से महाराणा प्रताप को गढ़ रहे हैं महावीर भारती प्रदर्शनी के आयोजक एवं प्रख्यात मूर्तिकार महावीर भारती ने बताया कि वे पिछले 25 वर्षों से महाराणा प्रताप की प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे हैं। अब तक वे विश्वभर में 600 से अधिक प्रतिमाओं का निर्माण कर चुके हैं। देश के 15 से अधिक राज्यों के साथ-साथ दुबई और मॉरीशस तक स्थापित महाराणा प्रताप की अनेक प्रतिमाएं उनके स्टूडियो में तैयार की गई हैं। यह प्रदर्शनी केवल मूर्तियों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि मेवाड़ के शौर्य, त्याग और बलिदान की अमर गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है। नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा, राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी, विधायक गोपाल शर्मा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संघ चालक डॉ. रमेश अग्रवाल, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ सहित राजनीतिक, सामाजिक और कला जगत की अनेक हस्तियां उपस्थित रहीं।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से राजकीय इंटर कालेज में प्रवक्ता भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा रविवार को लखनऊ सहित कई जनपदों में आयोजित हुई। रूस और यूक्रेन युद्ध के अलावा आयुष्मान आरोग्य व प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के पूछे गए सवाल पूछे गए। सामान्य अध्ययन में तार्किक क्षमता और समसामयिक मुद्दों से जुड़े सवाल पूछे गये। शिक्षा और कृषि क्षेत्र की सरकारी योजनाओं, प्रमुख नियुक्तियां और खेल जगत से जुड़े प्रश्न थे। अधिकांश प्रश्न सीधे रटे-रटाए तथ्यों के बजाय विषय की गहरी समझ पर आधारित थे। परीक्षा में 23951 में 11378 उपस्थित रहे। जबकि करीब 52 फीसदी ने यानी 12573 परीक्षार्थियों ने परीक्षा नहीं दी। कड़ी जांच के बाद मिली एंट्री राजकीय जुबिली इंटर कालेज समेत दूसरे परीक्षा केंद्रों पर सघन तलाशी के बाद परीक्षार्थियों को प्रवेश दिया दिया। हिंदी, संस्कृत, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, भौतिक विज्ञान, उर्दू, गणित, समाजशास्त्र, जीव विज्ञान, अंग्रेजी, नागरिक शास्त्र और रसायन विज्ञान विषयों के शिक्षकों का चयन होगा। सामान्य अध्ययन में तार्किक क्षमता और समसामयिक मुद्दों से जुड़े सवाल पूछे गये। शिक्षा और कृषि क्षेत्र की सरकारी योजनाओं, प्रमुख नियुक्तियां और खेल जगत से जुड़े प्रश्न थे। अधिकांश प्रश्न सीधे रटे-रटाए तथ्यों के बजाय विषय की गहरी समझ पर आधारित थे। अखिलेश ने बताया कि अर्थशास्त्र विषय के सवाली टीजीटी-पीजीटी स्तर के पूछे गए। इसमें सतत विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विभिन्न सरकारी योजनाएं प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना व आयुष्मान आरोग्य योजना के सवाल पूछे गए। अनुराग ने बताया कि जीएस का स्तर सामान्य रहा। जबकि अर्थशास्त्र का खंड अपेक्षाकृत कठिन था। परीक्षा में स्टेटिक्स और करंट एफेयर दोनों प्रकार के प्रश्न शामिल थे। इसके अलावा इजराइल-ईरान और रूस व यूक्रेन युद्ध के सवाल पूछे गए।
पंजाब में भगवंत मान सरकार की ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ मुहिम के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान की स्थायी सफलता केवल नशा तस्करों और सप्लायरों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि इसकी सफलता का आधार रोकथाम, समय पर पहचान, प्रभावी उपचार और परिवारों और समाज द्वारा दिया जाने वाला सहयोग भी है। 1 मार्च 2025 को शुरू की गई ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ मुहिम राज्य की सबसे महत्वपूर्ण नशा-विरोधी पहलों में से एक बन चुकी है। इस अभियान के अंतर्गत जहां एक ओर नशा तस्करों और अवैध नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर नशामुक्ति, पुनर्वास और जन-जागरूकता को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। 90 हजार से अधिक व्यक्तियों का इलाज हुआ पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि रोकथाम और पुनर्वास प्रयासों के तहत 1 मार्च 2025 से मई 2026 तक पंजाब के विभिन्न नशामुक्ति केंद्रों और ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओ ओ ए टी ) केंद्रों में नशे से प्रभावित 90 हजार से अधिक व्यक्तियों को भर्ती कर उनका उपचार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि पंजाब सरकार नशों के खिलाफ केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित लोगों को उपचार और पुनर्वास के माध्यम से सामान्य जीवन में वापस लाने के लिए भी गंभीरतापूर्वक कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में नशों के विरुद्ध कार्रवाई लगातार जारी है, लेकिन ऐसे संवेदनशील व्यक्तियों की पहचान करने में, जिनमें नशे की आदत विकसित होने का खतरा हो, शिक्षकों, अभिभावकों और समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नशे की लत के शुरुआती संकेत अक्सर अनदेखे रह जाते हैं और ये भावनात्मक, व्यवहारिक तथा शारीरिक परिवर्तनों के रूप में दिखाई देते हैं। 'व्यवहारिक और शारीरिक परिवर्तनों को नजरअंदाज न करें' नशे की लत के प्रारंभिक संकेतों में अचानक स्वभाव में परिवर्तन, चिड़चिड़ापन, पढ़ाई या कार्य में ध्यान न लगना, परिवार से दूरी बनाना, अपनी गतिविधियों के बारे में अत्यधिक गोपनीयता रखना, बार-बार पैसों की मांग करना, नए मित्रों का साथ बनना, नींद में गड़बड़ी तथा खेल-कूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में रुचि कम होना शामिल हो सकता है। इसी प्रकार शारीरिक लक्षणों में व्यक्तिगत स्वच्छता की अनदेखी, लगातार थकान महसूस होना, आंखों का लाल होना, अत्यधिक नींद आना, खान-पान की आदतों में बदलाव और बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन में वृद्धि या कमी शामिल हो सकती है। अभियान से जुड़े विशेषज्ञों ने परिवारों को सलाह दी है कि वे ऐसे व्यवहारिक और शारीरिक परिवर्तनों को नजरअंदाज न करें। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों के साथ शांत, संवेदनशील और सहयोगपूर्ण तरीके से संवाद करें तथा उन्हें डांटने या दोष देने के बजाय उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास करें। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों, मनोवैज्ञानिकों या चिकित्सकों की सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए। ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के तहत की गई कार्रवाई और पुनर्वास प्रयासों के परिणामस्वरूप अनेक व्यक्तियों ने सफलतापूर्वक उपचार प्राप्त किया है और अब वे स्वस्थ एवं सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। 'साहस कर लें तो नशे से मुक्ति संभव' अमृतसर के मनप्रीत सिंह (परिवर्तित नाम), जो नशे की लत से उबर चुके हैं, ने कहा, “एक समय ऐसा था जब मैंने स्वयं से उम्मीद छोड़ दी थी। पंजाब सरकार के नशामुक्ति केंद्र ने मुझे जीवन की नई दिशा दी। यहां के स्टाफ ने मेरा सम्मान बनाए रखते हुए पूरी देखभाल के साथ उपचार किया। आज मैं नशों से मुक्त हूं और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहा हूं। मेरा संदेश केवल इतना है कि यदि आप पहला कदम उठाने का साहस कर लें तो नशे से मुक्ति संभव है।” इसी प्रकार तरनतारन जिले के भिखीविंड निवासी खुशबाज़ सिंह (परिवर्तित नाम), जो वर्तमान में सरकारी मेडिकल कॉलेज, अमृतसर के नशामुक्ति केंद्र में भर्ती हैं, ने बताया, “उपचार और काउंसलिंग ने मुझे नशे की लत से बाहर निकलने और सामान्य जीवन में लौटने में सहायता की है। आज मेरा ध्यान अपने परिवार, काम और स्वस्थ भविष्य पर है। यहां का स्टाफ अत्यंत सहयोगी और प्रेरणादायक है।” अभिभावकों के लिए दिशा-निर्देश… 'शुरुआती चेतावनी संकेतों की पहचान करनी होगी' भगवंत मान सरकार का मानना है कि नशे की समस्या से निपटने के 3 प्रमुख स्तंभ हैं। नशामुक्ति, पुनर्वास और काउंसलिंग। ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के माध्यम से सरकार नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर रोक लगाने, नशों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और प्रभावित व्यक्तियों की सफल रिकवरी सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का स्पष्ट मत है कि नशों के खिलाफ लड़ाई केवल कठोर कार्रवाई तक सीमित नहीं रह सकती। परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और समाज को मिलकर शुरुआती चेतावनी संकेतों की पहचान करनी होगी और प्रभावित व्यक्तियों को उपचार, पुनर्वास और पुनर्स्थापन की दिशा में सहयोग देना होगा। अभियान इस बात पर विशेष बल देता है कि नशा तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई के साथ-साथ रोकथाम, उपचार और पुनर्वास के प्रयास भी निरंतर जारी रहने चाहिए, तभी पंजाब को नशों की इस गंभीर समस्या से स्थायी रूप से मुक्त किया जा सकेगा।
पंजाब सरकार की 'युद्ध नशे विरुद्ध' मुहिम के दूसरे चरण की शुरुआत पठानकोट में हो गई है। आम आदमी पार्टी के सुजानपुर हलका इंचार्ज अमित सिंह मंटू ने शिकायत बॉक्स से लैस एक विशेष ई-रिक्शा को झंडी दिखाकर रवाना किया। इस पहल का उद्देश्य नशे के खिलाफ जनभागीदारी बढ़ाना और शिकायतों को सीधे प्रशासन तक पहुंचाना है। गांवों और कस्बों में जाएगा रिक्शाइस अवसर पर अमित सिंह मंटू ने बताया कि यह ई-रिक्शा हलका सुजानपुर के विभिन्न गांवों और कस्बों में जाकर नशे के खिलाफ जागरूकता संबंधी घोषणाएं करेगा। यह लोगों से नशा मुक्त समाज के निर्माण में सहयोग की अपील भी करेगा। ई-रिक्शा पर लगाए गए शिकायत बॉक्सउन्होंने बताया कि ई-रिक्शा पर लगाए गए शिकायत बॉक्स में आम लोग नशा तस्करी, नशे के कारोबार या अन्य संबंधित गतिविधियों के बारे में अपनी शिकायतें और सुझाव डाल सकेंगे। प्राप्त शिकायतों को संबंधित विभागों और अधिकारियों तक पहुंचाकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। शिकायतकर्ता की पहचान रहेगी गोपनीय अमित सिंह मंटू ने लोगों से अपील की कि वे बिना किसी डर या दबाव के नशे से जुड़ी जानकारी शिकायत बॉक्स में डालें। उन्होंने जोर दिया कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी, क्योंकि नशे के खिलाफ यह लड़ाई तभी सफल होगी जब समाज का हर वर्ग इसमें सक्रिय भूमिका निभाएगा। लोग इस मुहिम में करें सहयोगउन्होंने कहा कि पंजाब सरकार नशे के खात्मे के लिए पूरी गंभीरता से कार्य कर रही है और जनता के सहयोग से इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इस मौके पर पार्टी कार्यकर्ता, स्थानीय नेता और क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पहल को नशा मुक्त समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
आखिरी क्षणों में बौआलेम खौखी के गोल से कतर ने फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप-बी मैच में स्विट्जरलैंड को 1-1 के ड्रॉ पर रोक लिया। इंजरी टाइम के चौथे मिनट में हेडर के जरिए आए इस गोल ने कतार को हार से बचा लिया। जबकि, स्विट्जरलैंड से जीत छीन ली। इससे पहले 90 मिनट के खेल में स्विट्जरलैंड का दबदबा रहा, पर टीम जीत नहीं हासिल कर सकी और उसे एक अंक साझा करना पड़ा। एम्बोलो ने पेनल्टी पर गोल दागा स्विट्जरलैंड को 17वें मिनट में बढ़त मिली। कतर के गोलकीपर महमूद अबुनादा ने ब्रेल एम्बोलो को बॉक्स के अंदर फाउल कर दिया, जिसके बाद रेफरी ने पेनल्टी दी। एम्बोलो ने मौका नहीं गंवाया और गेंद को गोलपोस्ट के ऊपरी कोने में पहुंचाकर टीम को 1-0 से आगे कर दिया। स्विट्जरलैंड ने गोल के कई मौके बनाए मैच में स्विट्जरलैंड ने गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखा और कई बार गोल करने के मौके बनाए। हालांकि कतर की रक्षापंक्ति और गोलकीपर ने कई हमलों को नाकाम कर टीम को मैच में बनाए रखा। दूसरे हाफ में भी स्विस टीम बढ़त बढ़ाने में नाकाम रही। इंजरी टाइम में कॉर्नर पर गोल आया जब मुकाबला समाप्ति की ओर बढ़ रहा था और स्विट्जरलैंड जीत के करीब था, तभी इंजरी टाइम में कतर को कॉर्नर मिला। 90+4 मिनट में बौआलेम खौखी ने शानदार हेडर लगाकर गेंद को नेट में पहुंचाया और स्कोर 1-1 कर दिया। इसी के साथ कतर के खिलाड़ियों ने मैदान पर जोरदार जश्न मनाया।
युद्ध खत्म होने के करीब, होर्मुज, पुनर्निर्माण पर बातचीत का फोकस : ईरान
तेहरान/वाशिंगटन। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि अमरीका के साथ शत्रुता समाप्त करने संबंधी समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है। प्रस्तावित समझौते में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने, ईरान की जब्त विदेशी परिसंपत्तियों को मुक्त करने तथा युद्ध के बाद पुनर्निर्माण में सहायता संबंधी […] The post युद्ध खत्म होने के करीब, होर्मुज, पुनर्निर्माण पर बातचीत का फोकस : ईरान appeared first on Sabguru News .
उदयपुर के महाराणा भूपाल स्टेडियम (गांधी ग्राउंड) में 17 जून को हल्दीघाटी युद्ध की 450वीं वर्षगांठ पर यहां ‘राष्ट्र चेतना संकल्प सभा’ होगी। प्रताप गौरव केन्द्र के इस आयोजन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत संबोधित करेंगे। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने बताया- पिछले साढ़े चार सौ सालों से फैलाए जा रहे इस झूठ को अब बदला जाएगा कि युद्ध में अकबर जीता था। सच यह है कि महाराणा प्रताप ने अपनी रणनीति से अकबर की सेना को हराया था। प्रो. शर्मा ने बताया- युद्ध के शुरुआती दौर में ही मेवाड़ी सेना ने मुगलों को सात कोस पीछे खदेड़ दिया था। हार के डर से मुगल सेना गोगुंदा के किले में छिप गई थी। वहां रसद खत्म होने पर मुगलों को मरे हुए घोड़ों का मांस और कच्ची केरियां खाकर दिन काटने पड़े थे। जब वे आगरा लौटे तो अकबर ने नाराज होकर मानसिंह का दरबार में आना 6 महीने के लिए बंद कर दिया था। यह साबित करता है कि जीत प्रताप की हुई थी। घर-घर बांटे जा रहे 2 लाख पत्रक प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया कि इस ऐतिहासिक सच को जनता तक पहुंचाने के लिए 2 लाख पत्रक छपवाए गए हैं। कार्यकर्ता राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश के कई जिलों में इन्हें घर-घर बांट रहे हैं। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 1000 से ज्यादा संतों और देश भर से 5000 प्रबुद्धजनों को न्योता भेजा गया है। कार्यक्रम संयोजक सीए महावीर चपलोत ने बताया कि सभा में 25 से 30 हजार लोगों के आने की उम्मीद है। इसके लिए 2 लाख वर्ग फीट का विशाल वाटरप्रूफ डोम और 20 हजार कुर्सियां लगाई जा रही हैं। जून की भीषण गर्मी को देखते हुए पूरे डोम में पंखे और वाटर मिस्ट (कूलर जैसी ठंडी फुहार) सिस्टम लगाया जा रहा है। हल्दीघाटी की मिट्टी से बनेगी प्रताप की तस्वीर कलाकार मनोहर कलार्थी पहली बार हल्दीघाटी की मूल मिट्टी से महाराणा प्रताप और डॉ. मोहनराव भागवत की अनूठी तस्वीर बना रहे हैं। मंच के सामने मिट्टी से ही कुम्भलगढ़ और चित्तौड़गढ़ के किलों की झांकी सजाई जाएगी। ई-रिक्शा, फ्री खाना और वीआईपी एंट्री बाहर से आने वाले लोगों के लिए विद्या भवन और फतह स्कूल में पार्किंग रहेगी। पार्किंग से ग्राउंड तक लाने-ले जाने के लिए ई-रिक्शा चलेंगे। वापसी में सभी के लिए 25 हजार भोजन पैकेट तैयार किए जा रहे हैं। कार्यक्रम स्थल पर डॉक्टरों की स्पेशल टीम और एम्बुलेंस तैनात रहेगी। सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन यह पूरा आयोजन पर्यावरण के अनुकूल होगा। मैदान में सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं होगा। मेहमानों के लिए पानी की बोतलें और कूड़ेदान भी मिट्टी के बने होंगे। इसके अलावा 15 जून से गांधी ग्राउंड में तीन दिवसीय ‘मेवाड़ शौर्य प्रदर्शनी’ भी शुरू होगी।
मुंशी हसदा ने स्टूडेंट स्पोर्टिंग क्लब को हराया:जिला फुटबॉल लीग में 4-0 से एकतरफा जीत दर्ज की
पूर्णिया जिला फुटबॉल लीग टूर्नामेंट में आज मुंशी हसदा और स्टूडेंट स्पोर्टिंग क्लब के बीच मुकाबला खेला गया। इस मैच में मुंशी हसदा की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्टूडेंट स्पोर्टिंग क्लब को 4-0 से एकतरफा मात दी। मैच की शुरुआत से ही मुंशी हसदा की टीम आक्रामक नजर आई। खेल के दूसरे मिनट में जर्सी नंबर 11 के खिलाड़ी वीरेंद्र ने पहला गोल दागकर टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। इसके बाद 15वें और 27वें मिनट में जर्सी नंबर 12 के राजीव ने लगातार दो गोल कर बढ़त को 3-0 कर दिया। दूसरे हाफ में भी मुंशी हसदा का दबदबा कायम रहा। जर्सी नंबर 10 के खिलाड़ी ने चौथा गोल कर टीम की बढ़त को 4-0 तक पहुंचाया। अंततः मुंशी हसदा ने यह मुकाबला 4-0 से अपने नाम कर लिया। मैच के मुख्य निर्णायक राम सेवक, रमन, रजनीश कुमार और बबलू कुमार थे। अपने उत्कृष्ट खेल के लिए जर्सी नंबर 12 के राजीव कुमार को 'मैन ऑफ द मैच' चुना गया। इस अवसर पर डीएसए अध्यक्ष गौतम वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ एथलेटिक संघ के सचिव एम.एच. रहमान, क्रिकेट संघ के अध्यक्ष गौतम चौधरी, फुटबॉल संघ के उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, रमन सिंह, आलोक लोहिया, पूर्व फुटबॉलर मनीष कुमार, फरद आलम, राजू सिंह और अंबुज सिंह भी मौजूद थे। टूर्नामेंट के अध्यक्ष मनोज सिंह ने बताया कि प्रतियोगिता में आगे भी कई रोमांचक मुकाबले खेले जाएंगे।
दुर्ग जिले के बहुचर्चित एकतरफा प्रेम और जानलेवा हमले के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी ओमप्रकाश निर्मलकर उर्फ सोनू को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने माना कि आरोपी ने शादीशुदा महिला की हत्या करने के इरादे से उस पर पत्थर और धारदार कटर से हमला किया था। पीड़िता ने जनवरी 2025 में नेवई थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता अन्नू गायकवाड़ अपने पति से अलग होकर नेवईभाठा क्षेत्र में रह रही थीं। इसी दौरान क्षेत्र का निवासी ओमप्रकाश निर्मलकर उनसे एकतरफा प्रेम करने लगा। आरोपी लगातार उन्हें परेशान करता था। इस संबंध में अन्नू ने जनवरी 2025 में नेवई थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद आरोपी पीड़िता से रंजिश रखने लगा था। ड्यूटी जाने निकली थी तब किया हमला 17 अप्रैल 2025 की सुबह करीब 6:30 बजे अन्नू गायकवाड़ काम पर जाने के लिए घर से निकली थीं। नेवई खदानपारा नर्सरी के पास आरोपी ने उनका रास्ता रोक लिया और एकतरफा प्रेम में असफल रहने की नाराजगी में हमला कर दिया। आरोपी ने पहले भारी पत्थर से महिला के सिर और चेहरे पर वार किया, फिर धारदार कटर से हमला कर गंभीर चोटें पहुंचाईं। घटना में महिला गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें तत्काल इलाज के लिए जिला अस्पताल दुर्ग में भर्ती कराया गया। सूचना मिलने पर नेवई पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से खून लगी मिट्टी, टूटी चूड़ियां और अन्य साक्ष्य जब्त किए। 12 गवाहों की गवाही बनी अहम सबूत पुलिस ने 18 अप्रैल 2025 को आरोपी को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान आरोपी के मेमोरेंडम के आधार पर घटना में प्रयुक्त करीब पांच किलो का पत्थर और खून से सना कटर बरामद किया गया। फॉरेंसिक जांच में इन पर मानव रक्त मिलने की पुष्टि हुई। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता अन्नू गायकवाड़, प्रत्यक्षदर्शी पायल यादव, पीड़िता की मां सुभिया टंडन सहित कुल 12 गवाहों को अदालत में पेश किया। मेडिकल रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने अभियोजन के पक्ष को मजबूत किया। कोर्ट ने कहा- हमला बेहद गंभीर था सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने महिला के सिर और चेहरे जैसे संवेदनशील अंगों पर हमला किया था। हमले की प्रकृति और परिस्थितियां स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि यदि पीड़िता की मृत्यु हो जाती तो आरोपी हत्या का दोषी होता। अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118(2) के तहत दोषसिद्ध कर तीन वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। फैसले के बाद आरोपी को केंद्रीय कारागार दुर्ग भेज दिया गया।
झाबुआ बस स्टैंड पर शुक्रवार को एक महिला जेबकतरी को रंगे हाथों पकड़ा गया। वह एक निजी यात्री बस में चढ़कर भागने की कोशिश कर रही थी, तभी एक ग्रामीण महिला ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद भीड़ ने उसकी पिटाई कर दी और पुलिस को सूचना दी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्र से आई एक महिला बस स्टैंड पर मौजूद थी। इसी दौरान एक अन्य महिला ने उसके पर्स से नकदी निकाल ली। चोरी का पता चलते ही पीड़िता ने तुरंत आरोपी महिला का पीछा किया। आरोपी महिला एक निजी यात्री बस में सवार होकर भागने का प्रयास कर रही थी, लेकिन पीड़िता ने उसे बस में चढ़ने से पहले ही पकड़ लिया। बस स्टैंड पर देखते ही देखते लोगों की भीड़ जमा हो गई। गुस्साई ग्रामीण महिला ने आरोपी की सार्वजनिक रूप से पिटाई कर दी। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने इस घटना का वीडियो भी अपने मोबाइल में कैद कर लिया। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी जुटाई। पुलिस ने आरोपी महिला को हिरासत में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है। घटना स्थल की अन्य तस्वीरें…
रूस और यूक्रेन के बीच हो रही लड़ाई के बाद कुक, रसोइयां और सिक्योरिटी गार्ड बनने का सपना लेकर गए युवक जिन्हें युद्ध के मैदान में उतार दिया गया था। इनमें आठ लोग लापता हो गए थे। लापता युवाओं में से दो लोगों की डेड बॉडी गुरुवार की देर रात्रि आजमगढ़ पहुंची। आजमगढ़ और मऊ जिले के कई लोग नौकरी की तलाश में जनवरी 2024 में एजेंटों के जाल में फंस कर रूस चले गए। इनमें से आजमगढ़ के कन्हैया यादव और मऊ के श्यामसुंदर और सुनील यादव की रूस- यूक्रेन जंग में मौत हो चुकी थी। आजमगढ़ के राकेश यादव और मऊ के बृजेश यादव घायल होने के बाद घर लौट आए थे। वहीं विनोद यादव, जोगेंद्र यादव, अरविंद यादव, रामचंद्र, अजहरुद्दीन खान, हुमेश्वर प्रसाद, दीपक, धीरेंद्र कुमार लापता हो गए थे। कंधरापुर थाना के खोजापुर माधवपट्टी निवासी योगेंद्र यादव भी उसी में थे। परिवार के लोगों का कहना था कि मऊ के एजेंट विनोद यादव ने सभी को फंसाया था। गार्ड की नौकरी के लिए लेकर गए और बार्डर पर भेज दिया। 15 जनवरी 2024 को विनोद, सुमित और दुष्यंत नामक एजेंट के साथ गए उनको गार्ड और हेल्पर की नौकरी के लिए ले जाया गया। रूस पहुंचने के बाद उन्हें जबरन ट्रेनिंग देकर आर्मी में युद्ध के लिए भर्ती कर दिया गया।शहर के गुलामी का पूरा निवासी अजहरूद्दीन को 27 जनवरी 2024 को एजेंट विनोद अपने साथ लेकर गया था। जब वह लापता हो गया तो उसके भाई ने यहां से लेकर रूस तक दौड़ लगाई। लेकिन उसका पता नहीं चल सका। काफी दिनों बाद बृहस्पतिवार को अजहरुद्दीन और आराजी देवारा करखिया निवासी रामचंद्र का शव उनके घर पहुंचा। दोनों की 2 वर्ष पूर्व मौत हो चुकी थी ताबूत में कंकाल पहुंचा। 2 वर्ष से कर रहे थे भाई की तलाशअजहरुद्दीन के भाई अजीमुद्दीन और जीजा अबू बकर ने बताया कि हम लोग दो साल से अजहरुद्दीन की तलाश में भटक रहा था। यहां एंबेसी से लेकर रूस तक दौड़ा हूं। काफी मशक्कत के बाद सरकार की मदद से आज उसका शव मिल सका। यह बहुत बड़ा स्कैम है एजेंसी संचालक पर कार्रवाई होनी चाहिए। काफी संख्या में लोग फंसे हुए हैं। हमारी सरकार से मांग है कि हमारे अजहरुद्दीन की सेलरी और जो भी बकाया फंसा है उसे दिलाया जाए। प्रशासन की ओर से दोनों शवों को वाराणसी से लाकर उनके परिवार के सुपुर्द करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तहसीलदार सगड़ी विवेकानंद वाराणसी एयरपोर्ट पहुंचे और सारी कार्रवाई पूरी कर शव को लाकर परिजनों के हवाले किए।
पंजाब सरकार द्वारा में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। सरकार ने 4 IAS और 30 PCS अधिकारियों के ट्रांसफर किए है। इसमें उनमें मुख्य रूप से अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (ADC) और सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) स्तर के अधिकारी शामिल हैं. वर्ष 2022 बैच के IAS अधिकारी श्री डेवी गोयल को अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (ग्रामीण विकास) श्री मुक्तसर साहिब लगाया गया है और उन्हें अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (जनरल) का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। साल 2023 बैच की IAS अधिकारी कृतिका गोयल को मानसा का नया अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (ग्रामीण विकास) नियुक्त किया गया है। वर्ष 2023 बैच के ही IAS अधिकारी आदित्य शर्मा को अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (जनरल) तरनतारन और पल्लवी मिश्रा को अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (जनरल) अमृतसर के खाली पदों पर तैनात किया गया है। आदेश की कॉपी
टोंक में पुलिस ने रेप के आरोपी को 6 साल बाद सऊदी अरब से जयपुर आते ही हिरासत में ले लिया है। आरोपी के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) जारी हुआ था। इस कारण आरोपी के विदेश से आने की सूचना मिलते ही यह कार्रवाई की गई। इसके बाद उसे टोंक कोतवाली पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। आरोपी से पूछताछ की जा रही है। 2020 में दर्ज करवाया था मामला पुलिस जानकारी के अनुसार, पीड़िता ने साल 2020 में आरोपी के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद टोंक में मामला ट्रांसफर कर दिया गया। महिला का आरोप था कि वह रेप कर दुबई चला गया और वहां अपना बिजनेस कर रहा है। विदेश से आपत्तिजनक फोटोज भेजता था महिला का आरोप था कि युवक सऊदी अरब से विवाहिता के पति को आपत्तिजनक तस्वीरें भेजकर परेशान करता था। मामले में आरोपी की लंबे समय से तलाश की जा रही थी। पुलिस ने उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया था, जिसके चलते विदेश से भारत पहुंचते ही उसे जयपुर एयरपोर्ट पर रोक लिया गया। फिलहाल पूछताछ कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
राजधानी भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर गुरुवार को एक अलग ही आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला। भगवान बुद्ध के परम शिष्यों सारिपुत्र और महामोद्गलायन के पवित्र अस्थि अवशेष जैसे ही भोपाल पहुंचे, वहां मौजूद लोगों ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। एयरपोर्ट परिसर कुछ देर के लिए श्रद्धा और भक्ति के रंग में डूब गया। मध्यप्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग ने इस मौके पर विशेष स्वागत कार्यक्रम रखा था। बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर दर्शन किए और इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ने जिस मानवता, शांति और करुणा के प्रवाह को शुरू किया था, उसे आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ा रहे हैं। “आज दुनिया को युद्ध नहीं, बुद्ध की आवश्यकता है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का विचार भारत दुनिया तक पहुंचा रहा है। इस अवसर पर महाबोधि सोसायटी, सांची के पूज्य बान गल उप तिस्स नायक थेरो और बान गल विमल तिस्स थेरो सहित कई गणमान्य संत उपस्थित रहे। अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला ने इसे गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के प्रयासों से इन पवित्र अवशेषों को विश्व के बौद्ध देशों तक पहुंचाया जा रहा है। एक लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शनमंगोलिया की राजधानी उलानबातर स्थित गंदन मठ में इन पवित्र अवशेषों को प्रदर्शित किया गया, जहां करीब एक लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर शुरू हुई इस प्रदर्शनी ने मंगोलियाई बौद्ध अनुयायियों को दुर्लभ आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया। भारत-मंगोलिया के सांस्कृतिक संबंध हुए मजबूतयह यात्रा भारत और मंगोलिया के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्तों को और सशक्त करने वाली रही। दोनों देशों के बीच बौद्ध विरासत एक मजबूत सेतु का काम करती है। उल्लेखनीय है कि इन पवित्र अवशेषों को इससे पहले केवल थाईलैंड और मंगोलिया में ही सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए भेजा गया है। एयरपोर्ट पर लगी छायाचित्र प्रदर्शनीस्वागत कार्यक्रम के दौरान एयरपोर्ट परिसर में एक विशेष फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें भारत से मंगोलिया तक की यात्रा, वहां हुए स्वागत, श्रद्धालुओं की आस्था और गंदन मठ में हुए धार्मिक अनुष्ठानों के दुर्लभ दृश्य प्रदर्शित किए गए।
बठिंडा पुलिस ने 'युद्ध नशे के विरुद्ध' अभियान के तहत कार्रवाई करते हुए एक डिप्लोमा होल्डर युवक को 314 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान कोटली अब्लू (थाना कोट भाई) निवासी राजप्रीत सिंह उर्फ मान के रूप में हुई है। डीएसपी संदीप सिंह ने बताया कि अधिकारियों के निर्देशों पर सीआईए स्टाफ-2 की टीम ठंडी सड़क से सुरखपीर रोड की ओर जा रहे संदिग्ध व्यक्ति की जांच कर रही थी। पोखरामाल कैंटीन के पास उसे रोका गया और तलाशी के दौरान उसके पास से 314 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। राजप्रीत सिंह के खिलाफ कैनाल कॉलोनी पुलिस स्टेशन में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। उसे अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने हेरोइन कहां से प्राप्त की थी और इसे कहां सप्लाई करना था। आरके टेक से आरोपी ने किया है डिप्लोमा पुलिस के अनुसार, आरोपी राजप्रीत सिंह के खिलाफ पहले भी झपटमारी का मामला दर्ज हो चुका है। उसने आरके टेक से डिप्लोमा किया है और पिछले कुछ महीनों से गांव में एक बिजली की दुकान पर काम कर रहा था। मामले की आगे की जांच जारी है।
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
'वाराणसी' में दिखेगा महायुद्ध, भगवान राम और कुंभकर्ण के बीच होगा 30 मिनट का ऐतिहासिक टकराव!
दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली जब भी कोई नया प्रोजेक्ट लाते हैं, तो वह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक उत्सव बन जाता है। 'बाहुबली' और 'आरआरआर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद, राजामौली अब सुपरस्टार महेश बाबू के साथ अपनी अगली महात्वाकांक्षी ...
इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) हर हफ्ते दुनिया भर यूजर्स के सर्च और प्रोफाइल विजिट के आधार पर 'मोस्ट पॉपुलर इंडियन सेलिब्रिटीज' की लिस्ट जारी करता है। आमतौर पर इस लिस्ट के शीर्ष पर वही सुपरस्टार्स नजर आते हैं जिनकी बड़ी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज ...
खाड़ी युद्ध से निपटने की मोदी की तजबीज
मोदीजी ने एक बार फिर राष्ट्र की जनता को उसके कर्तव्यों के प्रति सचेत किया है।
ललित सुरजन की कलम से युद्ध नहीं, शांति चाहिए
जब एक तरफ सिर्फ एक सैनिक की गिरफ्तारी से उपजे भय और रिहाई की घोषणा से मिली राहत है, तब दूसरी तरफ आक्रामक मुद्रा अपनाकर हम क्या हासिल करना चाहते हैं?
युद्धविराम और हाशिए पर धकेल दिया गया भारत
यह युद्ध स्पष्ट रूप से नेतन्याहू की देन है और ट्रम्प इसके परिणामों के बारे में सोचे-समझे बिना ही इसमें फंस गए।
युद्ध के माहौल में विश्व शांति का शंखनाद है विश्व णमोकार दिवस
विश्व णमोकार दिवस- 9 अप्रैल, 2026 विश्व इतिहास के इस संक्रमणकाल में, जब मानवता युद्ध, हिंसा, आतंक, तनाव और असहिष्णुता के बोझ तले कराह रही है, ऐसे समय में 9 अप्रैल 2026 को मनाया जाने वाला विश्व णमोकार मंत्र दिवस एक अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा-विस्फोट के रूप में सामने आ रहा है। यह दिवस केवल एक ... Read more
तीसरे विश्वयुद्ध की आहट और गांधी
इतिहास विजय-पराजय-विनाश का मृत दस्तावेज नहीं है, न वह किसी की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कहानी का विवरण है।
युद्ध को लेकर मोदी का देश को डराने वाला संदेश
देश में जहां भी और जब भी चुनाव होते हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दूसरे सारे काम छोड़कर अपनी भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार में जुट जाते हैं
पश्चिम एशिया में युद्ध के दुष्प्रभाव से निपटने के लिए बेहतर नीतियों की ज़रूरत
वित्त वर्ष 2026-27 की ठीक शुरुआत में, जो 1 अप्रैल, 2026 से शुरू हो रहा है, भारत को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है
युद्ध के माहौल में महावीर के दर्शन की उपादेयता
सदियों पहले महावीर जनमे। वे जन्म से महावीर नहीं थे। उन्होंने जीवन भर अनगिनत संघर्षों को झेला, कष्टों को सहा, दुख में से सुख खोजा और गहन तप एवं साधना के बल पर सत्य तक पहुंचे, इसलिये वे हमारे लिए आदर्शों की ऊंची मीनार बन गये। उन्होंने समझ दी कि महानता कभी भौतिक पदार्थों, सुख-सुविधाओं, ... Read more
युद्धग्रस्त विश्व में महावीर की अहिंसा: शांति की एकमात्र राह
संदर्भ – तीर्थंकर महावीर स्वामी जन्म कल्याणक 2625वां (31 मार्च 2026) आज का विश्व एक विचित्र विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर विज्ञान, तकनीक और वैश्वीकरण ने मानव जीवन को अभूतपूर्व सुविधाएं दी हैं, वहीं दूसरी ओर युद्ध, हिंसा और असहिष्णुता ने मानवता के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विश्व के ... Read more
मिडिल ईस्ट युद्ध ने ट्रम्प की मुश्किलों को बढ़ाया
युद्ध के मामले में अमेरिका-इजरायल की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं।
पश्चिम एशिया युद्ध में परमाणु खतरे के प्रति लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अंतिम घोषित तिथि बढ़ा दी है।
अब युद्धविराम को लालायित ट्रंप
अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह लड़ाई अमेरिका को पहले ही महंगी पड़ रही है
पश्चिम एशिया में युद्ध फैलने से एक और वैश्विक आर्थिक संकट का खतरा
पश्चिम एशिया का संकट अब एक वैश्विक आर्थिक चुनौती में बदल गया है
ईरान युद्ध के सबक मौजूदा संघर्ष से कहीं आगे बाजार का आकार तय करेंगे
ऊर्जा बाजार एक ऐसे दौर में जा रहा है, जहां मूल्य निर्धारण मॉडल के आधार पर बनी पारंपरिक धारणाएं संघर्ष के बदलते स्वरूप से पूरी तरह बदल रही हैं
ईरान युद्ध में नाटो से अलग-थलग पड़े ट्रंप की परीक्षा की घड़ी
बुधवार को, अमेरिका-इजरायल गठबंधन के ईरान के खिलाफ युद्ध के 18वें दिन, ट्रंप को एक साथ दो बुरी खबरें मिलीं
लीजा रे ने दुबई से शेयर की दर्दभरी कविता, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच जताई चिंता
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। हर तरफ धमाकों और सायरन का शोर सुनाई दे रहा है। एक्ट्रेस लीजा रे भी इन हालातों के बीच दुंबई में अपने घर ...
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता, बेटी के साथ सुरक्षित लौटीं भारत, सुनाई आपबीती
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता भी अपनी 14 साल की बेटी सायरा के साथ यूएई में ...
ईरान के अखबार तेहरान टाइम्स ने अपने पहले पन्ने पर एक मार्मिक और भीतर तक झकझोरने वाली तस्वीर छापी है
ईरान युद्ध से भारतीय अर्थव्यवस्था को जोरदार झटका संभव
पश्चिम एशिया में चल रहे व्यापक युद्ध, जिसमें अमेरिका-इज़राइल जोड़ी और ईरान शामिल हैं
ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश ने आपातकालीन कदम उठाए
बांग्लादेश ने आने वाले दिनों में ईंधन की भारी कमी से बचने के लिए पेट्रोल राशनिंग का सहारा लिया है
ललित सुरजन की कलम से - युद्ध नहीं, शांति चाहिए
'एक कटु सत्य है कि भारत ने युद्ध की विभीषिका का बहुत सीमित अनुभव किया है। बातें हम भले ही बड़ी-बड़ी कर लें
एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज़ की '120 बहादुर' को लेकर चर्चा अब अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। फिल्म ट्रेलर ने पूरी तरह से रोमांच और प्रेरणा का सही मिश्रण पेश किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बलिदान दिवस पर मेजर शैतान सिंह ...
War 2 रिव्यू: लचर स्क्रिप्ट और निर्देशन के कारण रितिक और एनटीआर हारे युद्ध, पढ़ें पूरी समीक्षा
रितिक रोशन और एनटीआर स्टारर War 2 ‘स्पाई यूनिवर्स’ की बड़ी पेशकश मानी जा रही थी, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और औसत निर्देशन ने इसे निराशाजनक बना दिया। शानदार एक्शन सीक्वेंस और एनटीआर के दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद फिल्म का सेकंड हाफ बिखर गया। कहानी में ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला अपनी खूबसूरती से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। उर्वशी ने बेहद ही कम समय में एक अलग मुकाम हासिल किया है। वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों के साथ 'मिलने और अभिवादन' के क्षणों में संलग्न रहती है। ऐसा ही एक क्षण था जब ...
सलमान खान की सिकंदर के आखिरी गाने में दिखेगा जबरदस्त जलवा, तुर्की से बुलाए गए 500 डांसर्स!
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की 'सिकंदर' इस साल की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके एक्शन-पैक्ड टीजर ने इसकी भव्य एंट्री के लिए एकदम परफेक्ट माहौल तैयार कर दिया है। भव्य पैमाने पर बनाई गई इस फिल्म में ...
केसरी वीर के लिए सूरज पंचोली ने की कड़ी ट्रेनिंग, ऐसे सीखा युद्ध कौशल
बॉलीवुड एक्टर सूरज पंचोली अपनी पहली बायोपिक में वीर हामीरजी गोहिल के ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने जा रहे हैं। सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय और सूरज पंचोली अभिनीत फिल्म 'केसरी वीर : लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ' का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ...
फरहान अख्तर लेकर आ रहे भारत-चीन युद्ध पर आधारित फिल्म 120 बहादुर, निभाएंगे मेजर शैतान सिंह का रोल
Movie 120 Bahadur : रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट, ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज के साथ मिलकर '120 बहादुर' को पेश करने के लिए उत्साहित हैं। यह फिल्म मेजर शैतान सिंह (पीवीसी) और चार्ली कंपनी, 13 कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिकों की कहानी कहती ...
Adil Hussain: दुनियाभर में इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 की धूम मची हुई है। पेरिस ओलंपिक में दुनियाभर के खिलाड़ियों ने भाग लिया है। भारत के कई खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। हाल ही में तुर्की के शूटर यूसुफ डिकेक ने सिल्वर मेडल जीता।
बॉर्डर की 27वीं सालगिरह पर, अभिनेता सनी देओल ने एक घोषणा वीडियो के ज़रिए फ़्रैंचाइज़ी के दूसरे संस्करण की पुष्टि की है। अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सनी ने बॉर्डर 2 में अपनी वापसी की आधिकारिक घोषणा करते हुए एक वीडियो शेयर किया और इसे 'भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म' बताया। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ''एक फौजी अपने 27 साल पुराने वादे को पूरा करने के बाद, आ रहा है फिर से। भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म, बॉर्डर 2।'' इस फिल्म का निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता करेंगे। आगामी युद्ध फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह करेंगे। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | पति से तकरार के बीच केन्या लौट गई हैं Dalljiet Kaur? शादी को बचाने की कर रही कोशिश सनी द्वारा घोषणा वीडियो शेयर किए जाने के तुरंत बाद, सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए कमेंट सेक्शन में बाढ़ ला दी। एक यूज़र ने लिखा, ''वाह, यह बहुत बढ़िया घोषणा है सर जी, जय हिंद।'' दूसरे ने लिखा, ''बहुत उत्साहित हूँ।'' तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, ''बॉर्डर 2 के लिए बहुत उत्साहित हूं।'' इसे भी पढ़ें: NDA पर इमोशनल बयान, काले सूट में ली मंत्री पद की शपथ और शर्मिला अंदाज, Tripti Dimri की तरह रातों रात भारत के Sensation बन गये Chirag Paswan सनी देओल की अन्य परियोजनाएं उन्हें आखिरी बार अमीषा पटेल के साथ गदर 2 में देखा गया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही और इसे ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर घोषित किया गया। गदर 2 की सफलता के बाद, सनी ने लाहौर 1947 सहित कई फिल्में साइन कीं, जिसे आमिर खान के प्रोडक्शन बैनर के तहत बनाया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जिन्होंने आमिर को कल्ट क्लासिक अंदाज़ अपना अपना (1994) में निर्देशित किया था। View this post on Instagram A post shared by Sunny Deol (@iamsunnydeol)
आशुतोष राणा ने डीपफेक वीडियो को बताया 'माया युद्ध', बोले- ये सालों से चल रहा
आशुतोष ने कहा कि ऐसी बातों में खुद को डिफेंड करने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि जो लोग आपको जानते हैं वो सवाल करेंगे ही नहीं. और जो नहीं जानते, उन्हें किसी रिस्पॉन्स से फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वो दिमाग में आपकी एक छवि बना चुके होते हैं.
रानीति बालाकोट एंड बियॉन्ड: जिमी शेरगिल की नई सीरीज भारत की आधुनिक युद्ध की ऐतिहासिक कहानी को प्रदर्शित करेगी। जिमी शेरगिल दो मिनट के ट्रेलर की शुरुआत पुलवामा हमले की झलक से होती है। एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाने वाले आशीष कहते हैं, ये एक नया रण है या इसे जीतने के लिए एक नई रणनीति की जरूरत है। इसे भी पढ़ें: नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन प्रहार', कमांडर शंकर राव समेत अब तक 79 हुए ढेर, हिट लिस्ट में और भी कई नाम शामिल आगामी वेब शो आधुनिक युद्ध को डिकोड करता है जो केवल भौतिक सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता है बल्कि सोशल मीडिया, डिजिटल रणनीति और गुप्त राजनीतिक चालों के क्षेत्र से परे है जो भू-राजनीति को नया आकार देने की शक्ति रखता है। वेब श्रृंखला उन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है जिन्होंने 2019 में देश को हिलाकर रख दिया था। शो में कुछ हवाई दृश्य, शानदार प्रदर्शन और एक शक्तिशाली कथा है जो युद्ध के मैदान के अंदर और बाहर हर पहलू को चतुराई से पकड़ती है। इसे भी पढ़ें: Biden को सोचना पड़ेगा फिर एक बार, Iran पर प्रहार तो रूस करेगा पलटवार, रक्षा मंत्रायल ने चिट्ठी लिखकर जता दी मंशा आगामी वेब श्रृंखला के बारे में बात करते हुए, जिमी ने कहा: यह मेरे द्वारा अतीत में की गई किसी भी भूमिका से भिन्न है। कम से कम यह कहना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन भारत की पहली वॉर-रूम केंद्रित वेब-श्रृंखला का हिस्सा बनना बेहद संतोषजनक भी है। वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित जिसने देश को हिलाकर रख दिया। एनएसए प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए, आशीष ने कहा, एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन रक्षा बलों के कुछ सदस्यों के साथ बैठकों ने मुझे अपने चरित्र की बारीकियों को समझने में मदद की। तैयारी कार्य और कार्यशालाएं मुझे वापस ले गईं मेरे एनएसडी के दिनों में। संतोष सिंह द्वारा निर्देशित, श्रृंखला का निर्माण स्फीयरओरिजिन्स मल्टीविजन प्राइवेट लिमिटेड के सुंजॉय वाधवा और कॉमल सुंजय डब्ल्यू द्वारा किया गया है। इसमें प्रसन्ना भी हैं। शो का प्रीमियर 25 अप्रैल को JioCinema पर होगा।
दर्शक काफी समय से रैपर बादशाह और हनी सिंह के बीच जुबानी जंग देख रहे हैं। दोनों का रिश्ता सालों से विवादों से भरा रहा है। हालांकि करियर के शुरुआती दिनों में बादशाह और हनी सिंह के बीच अच्छी दोस्ती हुआ करती थी। हालाँकि, ऐसा लगता है कि सफलता और पैसे ने धीरे-धीरे इस दोस्ती को पूरी तरह से खत्म कर दिया। अब दोनों अक्सर एक दूसरे पर तंज कसते नजर आते हैं। हाल ही में हनी सिंह एक होली पार्टी में शामिल हुए, जहां उन्होंने बादशाह के 'पापा कमबैक' वाले कमेंट का करारा जवाब दिया। रैपर का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसे भी पढ़ें: Punjab Kings के खिलाफ जीत के बाद इंटरनेट पर Virat Kohli का Anushka Sharma के साथ वीडियो कॉल, FLY KISS देते नजर आये खिलाड़ी हनी सिंह ने बादशाह पर किया पलटवार बादशाह कुछ दिनों पहले हनी सिंह पर अपनी टिप्पणी को लेकर चर्चा में थे, जिसमें उन्होंने हनी सिंह की वापसी पर कटाक्ष किया था। अब सिंगर और रैपर हनी सिंह ने एक कमेंट के जरिए बादशाह को करारा जवाब दिया है और कहा है कि उन्हें बादशाह को जवाब देने के लिए मुंह खोलने की जरूरत नहीं है। उनके फैन ही काफी हैं जो हर चीज पर बात कर सकते हैं। उन्होंने अपने गाली वाले अंदाज में अपने फैंस से बात करते हुए बादशाह का जवाब दिया। हनी सिंह को सोमवार को मुंबई में एक होली पार्टी में परफॉर्म करते देखा गया और यहीं उन्होंने बादशाह पर कटाक्ष किया। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा, हर कोई कहता है, रिप्लाई करो, रिप्लाई करो... मैं क्या रिप्लाई करूं... आप लोग तो उनके सारे कमेंट्स का बहुत अच्छे से रिप्लाई कर चुके हैं। मुझे मुंह खोलने की जरूरत है। ऐसा नहीं होता है। जैसे ही भीड़ ने उनके लिए तालियां बजाईं, गायक ने कहा, मुझे बोलने की जरूरत नहीं है। आप लोग खुद पागल हैं। हनी सिंह पागल हैं और उनके प्रशंसक भी पागल हैं। इसे भी पढ़ें: Taapsee Pannu के पति Mathias Boe आखिर कौन है? जब सफल भी नहीं थी एक्ट्रेस तब से उन्हें प्यार करते थे बैडमिंटन खिलाड़ी रैपर बादशाह ने क्या कहा? आपको बता दें कि हाल ही में बादशाह ने हनी सिंह पर कमेंट करते हुए कहा था, ''मुझे एक पेन और कागज दो। मैं तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लाया हूं। मैं कुछ गाने लिखूंगा और तुम्हें दूंगा। पापा की वापसी तुम्हारे साथ होगी।'' Kalesh Controversy B/w Honey Singh and Badshah (Honey Singh Replied to Badshah) pic.twitter.com/o74t423bgS — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 25, 2024 Kalesh Between Badshah & Honey Singh Fans on Stage during Live Concert pic.twitter.com/M4VqSqLSc3 — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 19, 2024
आखिर क्यों Indira Gandhi ने Aandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध, आज भी देखने से कतराते हैं लोग
आखिर क्यों Indira Gandhi नेAandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध,आज भी देखने से कतराते हैं लोग
'सावरकर' रिव्यू: खोखली, एकतरफा फिल्म में एकमात्र अच्छी चीज है रणदीप हुड्डा का काम
आज के दौर में 'गुमनाम' हो चुके एक स्वतंत्रता नायक की कहानी कहने निकली ये फिल्म, एक अनजान कहानी बताने से ज्यादा अपने हीरो विनायक दामोदर सावरकर को बाकियों के मुकाबले अधिक 'वीर' बताने पर फोकस करने लगती है.
अस्तित्व और बदले के लिएब्रह्मांड में शुरू होने वाला है महायुद्ध, एक्शन और रोमांच से भरपूर हैRebel Moon 2 का धांसू ट्रेलर

