मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब पूर्ण युद्ध (Full-Scale War) का रूप ले चुकी है। हाल ही में दोनों देशों के बीच हुआ अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire Agreement) पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। अमेरिकी सैनिकों की मौत और होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) में तेल के टैंकरों पर हुए हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आक्रामक रुख अपनाते हुए अमेरिकी सेना को 'आर-पार' की कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। ट्रम्प ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि हर अमेरिकी सैनिक के खून का बदला ईरान से कई गुना भारी कीमत वसूल कर लिया जाएगा।अमेरिकी CENTCOM का बड़ा हमला: ईरान के सैन्य ठिकाने और कमान सेंटर तबाहअमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के नेतृत्व में अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचों पर लगातार भीषण एयरस्ट्राइक (Airstrikes) की है।मिलिट्री ऑपरेशन्स सेंटर पर बमबारी: अमेरिकी बमवर्षक विमानों और मिसाइलों ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के मुख्य सैन्य कमान केंद्रों, संचार प्रणालियों (Communication Networks) और खुफिया अड्डों को सीधा निशाना बनाया है।ड्रोन व मिसाइल लॉन्च पैड्स नष्ट: तटीय इलाकों में स्थित ईरान की एंटी-शिप मिसाइल साइट्स, एयर डिफेंस रडार और ड्रोन स्टोरेज डिपो पर ताबड़तोड़ हमले कर उन्हें नष्ट कर दिया गया है।नौसैनिक बेड़ों पर प्रहार: होर्मुज के आसपास गश्त लगा रही ईरानी नौसेना की कई गश्ती नौकाओं और नौसैनिक ढांचों को तबाह कर दिया गया है।होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) में ठप हुआ वैश्विक तेल व्यापारदुनिया भर के 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' इस समय युद्ध का केंद्र बन गया है। ईरान द्वारा तेल टैंकरों पर ड्रोन व मिसाइल हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी यातायात पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। अमेरिकी सेना जहां जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए लगातार बमबारी कर रही है, वहीं ईरान ने साफ कर दिया है कि वह होर्मुज पर अपना नियंत्रण ढीला नहीं करेगा। इसके चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है।कूटनीति की राह बंद, मध्य पूर्व में महायुद्ध का खतराईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने बयान जारी कर माना है कि देश इस समय अमेरिका के साथ 'पूर्ण पैमाने के युद्ध' का सामना कर रहा है। यद्यपि मध्यस्थ देश (जैसे कतर और पाकिस्तान) कूटनीतिक बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच भरोसे की भारी कमी और रोजाना हो रही भारी बमबारी ने शांति की उम्मीदों को धुंधला कर दिया है। खाड़ी के अन्य देशों (कुवैत, बहरीन और जॉर्डन) में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने मंगलवार को अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी स्थित व्हाइट हाउस पहुंचकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पहली बार आमने-सामने मुलाकात की है। यह कूटनीतिक मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता, लेबनान-इजरायल संबंधों और हिजबुल्ला को निशस्त्र करने के लिए लेबनानी सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को लेकर गहन चर्चा की गई। वर्ष 2009 के बाद से व्हाइट हाउस में आमंत्रित होने वाले जोसेफ औन पहले लेबनानी राष्ट्रपति हैं, जिससे इस यात्रा का महत्व और भी बढ़ जाता है।दक्षिणी लेबनान में शांति स्थापित करने और रूपरेखा समझौते पर चर्चाराष्ट्रपति जोसेफ औन पिछले शनिवार से ही आधिकारिक अमेरिकी दौरे पर हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलने से पहले उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की थी। कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, औन का यह दौरा दक्षिणी लेबनान में स्थायी शांति स्थापित करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। गौरतलब है कि बीते 26 जून को लेबनान और इजरायल ने एक रूपरेखा समझौते (Framework Agreement) पर सहमति जताई थी, जिसमें इजरायली सेना की वापसी, हिजबुल्ला का पूर्ण निरस्त्रीकरण और भविष्य के शांति समझौतों की रूपरेखा तैयार करना शामिल है।ट्रंप का बड़ा एलान, कहा- लेबनान की भरपूर मदद करेंगेव्हाइट हाउस में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान लेबनानी राष्ट्रपति ने हिजबुल्ला को बेअसर करने और इजरायल के साथ शांति का मार्ग प्रशस्त करने के लिए वाशिंगटन से कूटनीतिक और राजनीतिक समर्थन की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने लेबनानी सशस्त्र बलों (LAF) को मजबूत करने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि सेना के बिना देश की व्यवस्था संभालना मुमकिन नहीं है।लेबनानी राष्ट्रपति की इन मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आश्वासन दिया कि अमेरिका लेबनान की भरपूर मदद करेगा। ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि लेबनान एक ऐसा देश रहा है जिसे लंबे समय से कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने माना कि कई मायनों में यह एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है, लेकिन लेबनानी लोग अपने देश से प्रेम करते हैं और अमेरिका इस मुश्किल वक्त में उनकी हरसंभव सहायता करेगा।जोसेफ औन का अमेरिका दौरा आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) और वैश्विक कूटनीति के दृष्टिकोण से इस मुलाकात के मुख्य बिंदु:ऐतिहासिक मुलाकात: साल 2009 के बाद व्हाइट हाउस आने वाले लेबनान के पहले राष्ट्रपति हैं जोसेफ औन।मुख्य मुद्दा: दक्षिणी लेबनान में संघर्ष विराम, अमेरिकी मध्यस्थता से हुआ रूपरेखा समझौता और हिजबुल्ला का निरस्त्रीकरण।सैन्य सहायता: लेबनानी सेना (LAF) को मजबूत करने के लिए अमेरिका से निरंतर समर्थन की मांग और अमेरिकी प्रशासन का सकारात्मक आश्वासन।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के पास मिसाइल हमले में जान गंवाने वाले यमुनानगर जिले के गांव पंजेटो निवासी मर्चेंट नेवी के नाविक गुरप्रीत सिंह बाठ के शव की पहचान अब डीएनए जांच से होगी। परिजनों के अनुसार मिसाइल विस्फोट इतना भीषण था कि कई शव बुरी तरह जल गए हैं, जिसके कारण उनकी शिनाख्त नहीं हो पा रही है। ऐसे में शिपिंग कंपनी ने मृतकों के परिजनों से डीएनए सैंपल मांगे हैं, ताकि रिपोर्ट के आधार पर शव की पहचान कर उसे भारत भेजा जा सके। रिपोर्ट मैच करने पर भेजा जाएगा पार्थिव शरीर गुरप्रीत के मामा अमरीक सिंह ने बताया कि कंपनी की ओर से संपर्क कर परिवार से डीएनए सैंपल उपलब्ध कराने को कहा गया था। इसके बाद गुरप्रीत के पिता किर्तन सिंह ने अपना डीएनए सैंपल दे दिया है। अब रिपोर्ट आने के बाद उसे ईमेल के माध्यम से संबंधित अधिकारियों और कंपनी को भेजा जाएगा। डीएनए मैच होने के बाद ही गुरप्रीत के शव की औपचारिक पहचान पूरी होगी और फिर पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। चार भारतीय नागरिकों की हुई मौत परिजनों ने बताया कि 19 जुलाई को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना होते ही गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले मर्चेंट वेसल एमवी गोल्डन लियो पर क्रूज मिसाइल से हमला हुआ था। इस हमले में गुरप्रीत सिंह बाठ सहित चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य भारतीय नाविक गंभीर रूप से घायल हुआ था। हमले में कुल 10 लोगों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है, जिनमें सीरिया के नागरिक भी शामिल हैं। परिवार का कहना है कि मिसाइल विस्फोट की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शव इस कदर झुलस गए हैं कि उनकी सामान्य तरीके से पहचान संभव नहीं है। इसी वजह से डीएनए जांच का सहारा लिया जा रहा है। प्रशासन ने नहीं किया परिजनों से संपर्क मामा अमरीक सिंह ने बताया कि परिवार लगातार कंपनी और संबंधित एजेंसियों के संपर्क में है, लेकिन अभी तक शव भारत कब तक पहुंचेगा, इसकी कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई गई है। पहले अनुमान लगाया गया था कि पार्थिव शरीर को भारत लाने में करीब 10 दिन लग सकते हैं, लेकिन अब यह प्रक्रिया डीएनए रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। परिजनों ने यह भी कहा कि भारत सरकार को इस हमले के बाद रूस के दूतावास को तलब कर अपना विरोध दर्ज कराना चाहिए। वहीं अब तक जिला प्रशासन या राज्य सरकार की ओर से परिवार से किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं किया गया है। पार्थिव शरीर जल्द भारत लाए जाने की मांग उनका कहना है कि अभी तक किसी अधिकारी ने घर पहुंचकर न तो परिवार का हाल जाना है और न ही कोई सहायता या आश्वासन दिया है। परिवार ने सरकार से मांग की है कि गुरप्रीत के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने की व्यवस्था की जाए और पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। गुरप्रीत अपने परिवार का इकलौता बेटा था। करीब डेढ़ साल पहले उसकी शादी हुई थी और उसका छह माह का एक बेटा है। वर्ष 2016 में सड़क हादसे में पिता किर्तन सिंह की एक टांग कट जाने के बाद परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी काफी हद तक गुरप्रीत पर ही आ गई थी। उसकी मौत के बाद पूरा परिवार गहरे सदमे में है और गांव पंजेटो में शोक का माहौल बना हुआ है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब तक के सबसे खतरनाक और चरम स्तर पर पहुंच गया है। जॉर्डन में बने अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए घातक हमले में एक और अमेरिकी सैनिक की मौत की पुष्टि के बाद वॉशिंगटन ने ईरान के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोमवार, 20 जुलाई की सुबह ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों और लड़ाकू विमानों से ताबड़तोड़ बमबारी की। इस भीषण अमेरिकी हमले में कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 517 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।अमेरिकी एयरस्ट्राइक से दहला ईरान: परमाणु अड्डे और आईआरजीसी के सैन्य ठिकाने तबाहअमेरिकी सेना द्वारा जारी की गई फुटेज के अनुसार, यह हमला समुद्र और हवा दोनों ओर से बेहद सटीक रणनीति के तहत किया गया। सेंट्रल कमांड ने बयान जारी कर बताया कि हमले का मुख्य लक्ष्य ईरान के तटीय निगरानी केंद्रों, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल व ड्रोन भंडारण परिसरों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के ठिकानों को पूरी तरह ध्वस्त करना था। ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने उसके एक निर्माणाधीन परमाणु प्रतिष्ठान को भी निशाना बनाया है, जिसके बाद तेहरान ने अमेरिका को इसके बेहद गंभीर अंजाम भुगतने की सीधी धमकी दी है।रणनीतिक जलमार्ग होर्मुज फिर से ठप: वैश्विक ऊर्जा संकट का बड़ा खतरा मंडरायादोनों देशों के बीच पिछले महीने हुई अंतरिम शांति डील अब पूरी तरह से निष्प्रभावी हो चुकी है और दोनों ही पक्षों ने समझौतों को मानने से इनकार कर दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) में दो वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और आगजनी के बाद इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आवाजाही पूरी तरह से रोक दी गई है। ईरान ने दावा किया कि अमेरिका ने जहाजों को बारूदी सुरंग वाले रास्ते पर धकेला। दुनिया के प्रमुख तेल आपूर्ति मार्ग के बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर एक बार फिर भारी ऊर्जा संकट का खतरा गहरा गया है।खाड़ी देशों में रेड अलर्ट: कुवैत, बहरीन और इजरायल में एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिवअमेरिका और ईरान की इस सीधी जंग की चपेट में खाड़ी देश भी आ गए हैं। ईरान की ओर से खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सहयोगी देशों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे जा रहे हैं। कुवैत के एक महत्वपूर्ण पावर जनरेशन और वॉटर डिजैलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया गया है, जिसके बाद कुवैत, बहरीन और जॉर्डन ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह एक्टिवेट कर दिया है। उधर इजरायल ने भी चेतावनी जारी की है कि जॉर्डन की दिशा से दागी गई ईरानी मिसाइलें उसके क्षेत्र को भी प्रभावित कर सकती हैं।युद्ध में अब तक 17 अमेरिकी सैनिकों की मौत, जंग और भीषण होने के आसारअमेरिकी रक्षा मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जॉर्डन में हुए हालिया हमले के बाद अब तक इस संघर्ष में कुल 17 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है, जबकि 430 से ज्यादा जवान घायल हुए हैं। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह बड़ी सैन्य कार्रवाई जॉर्डन में मारे गए अपने जवानों का बदला लेने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की आक्रामक पकड़ को कमजोर करने के लिए की गई है। खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बदलते इस घटनाक्रम से विश्व स्तर पर कूटनीतिक तनाव उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
पंजाब पुलिस की 3-आयामी रणनीति (सख्त कानूनी कार्रवाई, जनभागीदारी और निवारक जागरूकता) अपने प्रमुख नशा विरोधी अभियान ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ की पहचान बनकर उभरी है। अभियान की शुरुआत के बाद बीते 500 दिनों में पुलिस ने नशीले पदार्थों के कारोबार पर बड़े प्रहार किए हैं, साथ ही समुदायों को भी नशे के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया है। ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के 500 दिन पूरे होने पर पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) गौरव यादव ने कहा कि इस अवधि में राज्य के इतिहास में ड्रग तस्करों के खिलाफ सबसे व्यापक और प्रभावी अभियानों में से एक चलाया गया। यह सफलता सख्त कानूनी- कार्रवाई , खुफिया सूचनाओं पर आधारित अभियानों और जनसहभागिता आधारित पुलिसिंग के माध्यम से हासिल की गई है। उन्होंने कहा कि लगातार चलाए गए इस सघन अभियान के परिणामस्वरूप रिकॉर्ड संख्या में नशा तस्करों की गिरफ्तारियां हुई हैं, भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए गए हैं तथा संगठित नशा तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त किया गया है। 68 हाजर 850 से अधिक ड्रग तस्कर गिरफ्तार उन्होंने कहा, “1 मार्च 2025 को अभियान शुरू होने के बाद से पंजाब पुलिस ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत 52 हजार 432 एफआईआर दर्ज की हैं और 68 हाजर 850 से अधिक ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनमें 629 बड़े तस्कर शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक के पास 2 किलोग्राम से अधिक हेरोइन बरामद हुई, जिसकी कुल अनुमानित कीमत लगभग 12 करोड़ रुपए है।” कानूनी कार्रवाई अभियान के साथ-साथ मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने भी एनडीपीएस अधिनियम की धारा 64ए के तहत 10 हजाक 917 व्यक्तियों को अदालती कार्रवाई से छूट प्रदान कर उन्हें अपने जीवन को नई दिशा देने का अवसर दिया है। इसके तहत उन्हें सजा के बजाय नशामुक्ति उपचार और रिहैबिलिटेशन का लाभ लेने में सक्षम बनाया गया है। ड्रग तस्करों की 319 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियां जब्त पंजाब पुलिस ने साथ ही ड्रग माफिया के आर्थिक ढांचे को तोड़ने के लिए नशीले पदार्थों के कारोबार से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई भी की है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के प्रमुख एडीजीपी नीलाभ किशोर ने कहा, “अभियान के दौरान ड्रग तस्करों की 319 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियां जब्त की गईं। नशीले पदार्थों के कारोबार से अर्जित धन से सरकारी भूमि पर बनाए गए अवैध निर्माण भी ध्वस्त किए गए। यह कार्रवाई पंजाब पुलिस की ड्रग तस्करों और नशीले पदार्थों से अर्जित अवैध संपत्ति के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का स्पष्ट संदेश है।” इस अभियान की एक और प्रमुख उपलब्धि ‘सेफ पंजाब एंटी-ड्रग हेल्पलाइन’ (97791-00200) के माध्यम से बढ़ी जनभागीदारी रही है। इस हेल्पलाइन पर 46 हजार 342 गुमनाम सूचनाएं प्राप्त हुई हैं, जिनके आधार पर 22 हजार 960 ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया। लोगों की ओर से मिली इस अभूतपूर्व प्रतिक्रिया से पंजाब पुलिस के प्रति बढ़ते जनविश्वास का पता चलता है। साथ ही, यह जनसहभागिता आधारित पुलिसिंग की सफलता का भी प्रमाण है, जिसने नागरिकों को बिना किसी भय के नशे से जुड़ी गतिविधियों की सूचना देने के लिए प्रोत्साहित किया है। 'गांव स्तर पर खुफिया सूचनाएं जुटा रही ग्राम रक्षा समिति' पंजाब पुलिस यह भी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दे रही है कि जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई हो। डीजीपी गौरव यादव ने कहा, “एनडीपीएस मामलों में 89 प्रतिशत की दोषसिद्धि दर, जो देश में सबसे अधिक है। उच्च गुणवत्ता वाली जांच, बेहतर सबूत जुटाना और अभियोजन एजेंसियों के साथ मजबूत तालमेल का परिणाम है।” लगातार सख्त कार्रवाई के साथ-साथ पंजाब पुलिस 24 हाजर से अधिक ग्राम रक्षा समितियों के साथ भी मजबूत तालमेल स्थापित कर कार्य कर रही है। इन समितियों में 1.25 लाख से अधिक सदस्य शामिल हैं, जो संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने के साथ-साथ गांव स्तर पर खुफिया सूचनाएं जुटाने में भी सहयोग कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, नशे के खिलाफ समाज को जागरूक और सशक्त बनाने के उद्देश्य से पूरे राज्य में शैक्षणिक संस्थानों, सिविल सोसाइटी संगठनों और सामुदायिक नेताओं के सहयोग से जागरूकता अभियान, खेल प्रतियोगिताओं, युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम और जनसभाओं का आयोजन किया जा रहा है। 'ड्रग सिंडिकेट्स के खिलाफ कार्रवाई करेगा पुलिस बल' हालांकि अभियान के 500 दिन पूरे होना एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन पंजाब पुलिस इसे राज्य को नशे के अभिशाप से मुक्त करने के अपने निरंतर अभियान का एक और महत्त्वपूर्ण पड़ाव मानती है। डीजीपी यादव ने कहा कि पुलिस बल संगठित ड्रग सिंडिकेट्स के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और अधिक तेज करेगा, तस्करी नेटवर्क को खत्म करने के लिए जांच को मजबूत बनाएगा और नागरिकों को नशामुक्त पंजाब के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनने के लिए प्रेरित करते हुए जनसहभागिता आधारित पुलिसिंग को और सशक्त करेगा।
महायुद्ध की दहलीज पर अमेरिका और ईरान, मिडिल ईस्ट में घातक हमलों से दहला इलाका
पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहा अमेरिका और ईरान का तनाव अब पूरी तरह से एक विनाशकारी युद्ध के रूप में तब्दील हो चुका है। दोनों ही महाशक्तियों ने एक-दूसरे के खिलाफ अपने सबसे घातक और आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और ईरानी समर्थित गुटों के रणनीतिक केंद्रों पर लगातार रॉकेट, मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन से हमले किए जा रहे हैं। युद्ध का यह नया चरण इतना आक्रामक है कि इसने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर तीसरे विश्व युद्ध (World War 3) की आहट तेज हो गई है।निर्दोष और बेकसूर देश बन रहे निशाना: वैश्विक सप्लाई चेन तबाहइस युद्ध की सबसे भयावह बात यह है कि इसका शिकार अब वे देश और क्षेत्र भी बन रहे हैं, जिनका इस भू-राजनीतिक दुश्मनी से कोई वास्ता नहीं है। ईरान और अमेरिका की इस जंग के कारण लाल सागर (Red Sea) और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग पूरी तरह असुरक्षित हो गए हैं। वाणिज्यिक जहाजों और कार्गो शिप्स पर हो रहे लगातार घातक हमलों की वजह से कई एशियाई और यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। आवश्यक वस्तुओं, दवाओं और खाद्यान्न की सप्लाई रुकने से उन देशों में भी महंगाई और भुखमरी का खतरा मंडराने लगा है जो इस युद्ध में पूरी तरह तटस्थ थे।घातक हवाई हमलों से टूटी कमर: सैन्य और आर्थिक मोर्चे पर भारी नुकसानपेंटागन और ईरानी सैन्य कमांडरों की ओर से जारी बयानों के मुताबिक, दोनों पक्षों को इस टकराव में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। जहां एक तरफ अमेरिका ने ईरान के तेल डिपो, अंडरग्राउंड मिसाइल सेंटर्स और कमांड पोस्टों को निशाना बनाकर उसकी आर्थिक और सैन्य कमर तोड़ने का दावा किया है, वहीं दूसरी तरफ ईरानी ड्रोन हमलों ने अमेरिकी गठबंधन सेना के कई महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक हब को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस भीषण गोलाबारी और बमबारी के कारण स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुका है और बड़े पैमाने पर मानवीय संकट खड़ा हो गया है।भारत सहित पूरी दुनिया पर क्या होगा इसका सीधा असर?इस युद्ध के खतरनाक दौर में पहुंचने का सीधा असर भारत सहित दुनिया के तमाम बड़े देशों पर दिखने लगा है। खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने और महंगाई अनियंत्रित होने का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और उनकी आजीविका पर भी इस संकट के काले बादल मंडरा रहे हैं, जिसने नई दिल्ली की चिंताएं बेहद बढ़ा दी हैं।
Share Market 20 July : अमेरिका ईरान युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी की वजह से हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ हुई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में खुले।
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी संघर्ष ने अब एक बेहद खतरनाक और चिंताजनक मोड़ ले लिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव की आग में अब क्षेत्र के अन्य शांतिप्रिय देश भी झुलसने लगे हैं। सोमवार को ईरान ने कुवैत के एक प्रमुख 'बिजली और जल अलवणीकरण संयंत्र' (Water Desalination & Power Plant) को निशाना बनाकर एक भीषण आत्मघाती हमला किया। इस सुनियोजित हमले के कारण कुवैत के इस बेहद महत्वपूर्ण एनर्जी हब में भयंकर आग लग गई और कई बिजली उत्पादन इकाइयां पूरी तरह तबाह हो गईं। दुखद बात यह है कि इस हमले में प्लांट में काम करने वाले एक भारतीय नागरिक की भी मौत हो गई है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले इस हमले ने पूरे रेगिस्तानी देश में पीने के पानी और बिजली का एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।कुवैत का 90% पानी सप्लाई ठप होने की कगार परकुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, ईरान की ओर से किए गए इस ड्रोन और मिसाइल हमले ने उनके सबसे संवेदनशील बुनियादी ढांचे को चोट पहुंचाई है। रेगिस्तानी देश होने के कारण कुवैत अपनी पीने के पानी की लगभग 90 प्रतिशत जरूरतों के लिए समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाने वाले इसी 'डिसैलिनेशन प्रोसेस' पर निर्भर रहता है। हमले के बाद प्लांट में लगी भीषण आग पर काबू तो पा लिया गया है, लेकिन बिजली और पानी की कई मुख्य यूनिट्स के क्षतिग्रस्त होने से देश में हाहाकार मच गया है। कुवैती अधिकारी फिलहाल नुकसान का आकलन करने और प्लांट को आंशिक रूप से फिर से चालू करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति की चेतावनी के बाद तेहरान पर भीषण एयरस्ट्राइकईरान की इस आक्रामक हरकत के बाद अमेरिकी सेना भी पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। सोमवार सुबह अमेरिकी वायुसेना ने ईरान की राजधानी तेहरान और उसके रणनीतिक ठिकानों पर अपनी सैन्य कार्रवाई का दायरा काफी ज्यादा बढ़ा दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के कई अहम पुलों, सैन्य साइटों और एक प्रमुख बंदरगाह पर बने 'पोर्ट कंट्रोल टावर' को हवाई हमलों में पूरी तरह मलबे में तब्दील कर दिया है।यह भीषण कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा तेहरान को दी गई उस कड़ी चेतावनी का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने साफ कहा था कि यदि ईरान वैश्विक तेल मार्ग 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) और क्षेत्रीय स्थिरता को बिगाड़ने की कोशिश करेगा, तो उसके पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा।हॉर्मुज संकट से दुनिया भर में बढ़े कच्चे तेल के दामईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस आमने-सामने के युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आंशिक रूप से बंद होने के खतरे ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। दुनिया का एक बड़ा तेल निर्यात इसी समुद्री रास्ते से होता है, जिस पर ईरान ने नए सेवा शुल्क और सख्त नियम लगाकर खलबली मचा दी है। इस सुरक्षा संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है, जिससे भारत सहित कई विकासशील देशों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों ने तुरंत संयम नहीं बरता, तो यह संघर्ष एक पूर्ण वैश्विक युद्ध में बदल सकता है।
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में युद्ध के गहराते बादलों और तेजी से बिगड़ते सुरक्षा हालातों के बीच भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने ईरान में रह रहे और वहां की यात्रा करने वाले सभी भारतीय नागरिकों के लिए एक बेहद अर्जेंट और महत्वपूर्ण सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने ईरान में मौजूद सभी भारतीयों को सख्त हिदायत दी है कि वे बिना किसी देरी के उपलब्ध कमर्शियल उड़ानों (फ्लाइट्स) का विकल्प चुनकर तुरंत देश छोड़ दें और भारत लौट आएं। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो यह कदम साफ तौर पर संकेत देता है कि क्षेत्र में जमीनी हालात बेहद गंभीर हो चुके हैं और किसी भी समय स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।विदेश मंत्रालय की दो टूक: ईरान की यात्रा करने से पूरी तरह बचेंभारत सरकार की तरफ से जारी की गई इस नई एडवाइजरी में न केवल वहां रह रहे लोगों को वापस आने को कहा गया है, बल्कि नए यात्रियों के लिए भी कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि भारतीय नागरिक अगले आदेश तक ईरान की किसी भी प्रकार की गैर-जरूरी या व्यावसायिक यात्रा करने से पूरी तरह परहेज करें। जो लोग पहले से ही वहां मौजूद हैं, उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर सर्वोच्च प्राथमिकता बरतने की सलाह दी गई है।दूतावास के संपर्क में रहें नागरिक, जारी हुए हेल्पलाइन नंबरतेजी से बदलते घटनाक्रम को देखते हुए तेहरान में स्थित भारतीय दूतावास (Indian Embassy in Tehran) पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। एडवाइजरी में कहा गया है कि:पंजीकरण अनिवार्य: ईरान के अलग-अलग शहरों में रह रहे सभी भारतीय नागरिक, चाहे वे छात्र हों, नौकरीपेशा हों या कारोबारी, तुरंत तेहरान स्थित भारतीय दूतावास में अपना रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) करवाएं।लगातार संपर्क: किसी भी आपातकालीन स्थिति (इमरजेंसी) से निपटने के लिए नागरिक दूतावास के अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखें ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत सुरक्षित निकाला जा सके।क्यों अचानक बढ़ गया है मिडिल ईस्ट में इतना बड़ा तनाव?दरअसल, पिछले कुछ समय से ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच सैन्य तनातनी चरम पर पहुंच गई है। खुफिया रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के अनुसार, इस क्षेत्र में किसी भी समय एक बड़े हवाई हमले या सैन्य संघर्ष की शुरुआत हो सकती है। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने पहले ही ईरान की हवाई सीमा का उपयोग बंद कर दिया है और अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं। यही वजह है कि भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कोई भी जोखिम नहीं उठाना चाहती और समय रहते सभी को सुरक्षित वतन वापस लौटने की अपील कर रही है।
कतर में इराकी पीएम से मिले अमीर, अमेरिका-ईरान समझौते को आगे बढ़ाने पर जोर
कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने इराक के प्रधानमंत्री अली फलीह अल-जैदी से मुलाकात की। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लागू करने की अपील की
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाल के दिनों में सरकार और कट्टरपंथी गुटों के बीच मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे हैं, जिससे ईरान की आंतरिक राजनीति में नई उथल-पुथल देखने को मिल रही है।
बाराबंकी। रामनगर तहसील स्थित प्रसिद्ध लोधेश्वर महादेव धाम में 20 जुलाई को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित आगमन को लेकर प्रशासन युद्धस्तर पर तैयारियों में जुटा है। लगातार हो रही बारिश के बावजूद हेलीपैड, पंडाल, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक कार्यों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह स्वयं मौके पर पहुंचकर तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए नंदी बाग में लोक निर्माण विभाग की ओर से हेलीपैड तैयार किया जा रहा है। विभागीय अधिकारी राजीव कुमार राय इसकी निगरानी कर रहे हैं। शनिवार शाम से हो रही लगातार बारिश के कारण निर्माण स्थल पर जलभराव हो गया, जिससे कुछ समय के लिए कार्य प्रभावित हुआ। मुख्यमंत्री के संबोधन के लिए बनाए जा रहे विशाल पंडाल का निर्माण अंतिम चरण में है। बारिश से कार्य की गति प्रभावित हुई, लेकिन मशीनों से जल निकासी कर निर्माण कार्य फिर से तेज कर दिया गया है। मंदिर परिसर में विशेष सफाई अभियान भी चलाया जा रहा है। वर्षा का पानी जमा होने वाले स्थानों से पंपिंग मशीनों द्वारा पानी निकालकर परिसर को व्यवस्थित किया जा रहा है। मंदिर परिसर के भीतर और बाहर रंगाई-पुताई का कार्य तेजी से जारी है। निर्माणाधीन लोधेश्वर महादेव कॉरिडोर को व्यवस्थित रखने के लिए नीले रंग की टीन शेड लगाई जा रही है। बिजली विभाग सीसीटीवी कैमरे लगाने और नई विद्युत वायरिंग का कार्य कर रहा है। पुलिस, स्वास्थ्य, नगर पंचायत, लोक निर्माण और विद्युत विभाग सहित सभी संबंधित विभाग लगातार मौके पर मौजूद रहकर तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरी कराई जा रही हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मुख्यमंत्री के आगमन से पहले सभी तैयारियां पूरी तरह दुरुस्त कर ली जाएं, ताकि कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।
THAAD और आयरन डोम भी फेल? मिडिल ईस्ट में बेअसर हुए दुनिया के सबसे महंगे एयर डिफेंस सिस्टम
मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) के रणक्षेत्र से इस वक्त की सबसे बड़ी सुरक्षा चिंता सामने आ रही है। दुनिया के सबसे आधुनिक और अचूक माने जाने वाले एयर डिफेंस सिस्टम अब ईरान समर्थित गुटों के हमलों को रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं। अमेरिका का सबसे भरोसेमंद और हाल ही में तैनात किया गया THAAD (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) और इजरायल का अभेद्य कवच कहा जाने वाला 'आरण डोम' भी अब इन हमलों के आगे बेबस नजर आ रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर तैनात जवानों की सुरक्षा पर भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है।आखिर क्यों फेल साबित हो रहे हैं दुनिया के सबसे महंगे डिफेंस सिस्टम?सैन्य विशेषज्ञों और आधुनिक एआई सर्च इंजनों (Generative Search Engines) के विश्लेषण के अनुसार, ईरान और उसके सहयोगी संगठनों (जैसे हिजबुल्लाह और हूतियों) ने अपनी युद्ध रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। वे अब पारंपरिक मिसाइलों के बजाय 'स्वार्म ड्रोन' (एक साथ दर्जनों ड्रोन से हमला) और लो-फ्लाईंग क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये ड्रोन बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते हैं, जिसके कारण बेहद ऊंचाई पर मार करने वाला अमेरिकी THAAD सिस्टम इन्हें समय रहते डिटेक्ट नहीं कर पाता। वहीं, लगातार होने वाले रॉकेट हमलों से आयरन डोम का रडार सिस्टम ओवरलोड हो जाता है, जिससे कुछ मिसाइलें अपने टारगेट को हिट करने में कामयाब हो जाती हैं।अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बढ़ा खतरा, जवानों की सुरक्षा दांव परसीरिया, इराक और जॉर्डन के सीमावर्ती इलाकों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों (US Military Bases) पर हाल के दिनों में ड्रोन और रॉकेट हमलों की फ्रीक्वेंसी तेजी से बढ़ी है। पेंटागन के सूत्रों के मुताबिक, तमाम अत्याधुनिक तकनीक होने के बावजूद इन रिमोट लोकेशंस पर तैनात अमेरिकी सैनिकों को पूरी सुरक्षा दे पाना मुश्किल हो रहा है। ईरान समर्थित लड़ाके घात लगाकर सटीक हमले कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी कैंपों के भीतर तक नुकसान पहुंच रहा है। यह स्थिति वाशिंगटन के लिए रणनीतिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर एक बड़ा झटका मानी जा रही है।इजरायल और अमेरिका की बढ़ती टेंशन, नया सुरक्षा कवच तलाशने की मजबूरीइस नए खतरे ने इजरायल के तेल अवीव से लेकर अमेरिका के वाशिंगटन तक रक्षा रणनीतिकारों (Defense Strategists) की रातों की नींद उड़ा दी है। सालों की रिसर्च और अरबों डॉलर खर्च करके तैयार किया गया आयरन डोम और पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम जब फेल होने लगा है, तो अब लेजर-बेस्ड डिफेंस सिस्टम (जैसे इजरायल का आयरन बीम) को जल्द से जल्द एक्टिवेट करने की मांग उठ रही है। अगर जल्द ही इस तकनीकी खामी को दूर नहीं किया गया, तो पूरे मिडिल ईस्ट रीजन में अमेरिकी सैन्य दबदबा पूरी तरह खतरे में पड़ सकता है।
तेहरान/लखनऊ। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण सैन्य संघर्ष के बीच अब ईरान के भीतर एक बहुत बड़ा आंतरिक राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। वैश्विक मीडिया संस्थान सीएनएन (CNN) की एक ताजा और बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के भीतर सत्ता पर कब्जे को लेकर गृहयुद्ध और तख्तापलट (Coup) जैसी स्थितियां बनती दिखाई दे रही हैं। ईरान के शक्तिशाली कट्टरपंथी गुटों ने अपनी ही सरकार पर बेहद संगीन आरोप लगाते हुए कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत और समझौता करने वाले उदारवादी नेता इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ एक 'सॉफ्ट तख्तापलट' (Soft Coup) की साजिश रच रहे हैं। कट्टरपंथियों का दावा है कि नए सुप्रीम लीडर को पूरी तरह दरकिनार कर देश की कमान कुछ चुनिंदा नेताओं ने अपने हाथों में ले ली है।खामेनेई के अंतिम संस्कार में बवाल: विदेश मंत्री पर पथराव, लगे गद्दार के नारेईरान के भीतर सुलग रहा यह आंतरिक असंतोष उस समय सार्वजनिक रूप से हिंसक रूप में सामने आ गया, जब पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा निकाली जा रही थी। गौरतलब है कि खामेनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए शुरुआती हवाई हमलों में हो गई थी। अंतिम संस्कार के दौरान जब ईरान के वर्तमान राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तब कट्टरपंथी समर्थकों ने 'समझौता करने वालों की मौत हो' के उग्र नारे लगाए। हद तो तब हो गई जब भीड़ ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पत्थरों से हमला कर दिया और उन्हें 'देश बेचने वाला गद्दार' करार दिया। यही नहीं, ईरानी शासन से जुड़े एक प्रमुख धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति पजशकियान को सीधे तौर पर धमकी देते हुए कहा, राष्ट्रपति महोदय, अगर सुप्रीम लीडर की शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो हमारी तलवार होगी और आपका गला होगा। हम आपकी जिंदगी को जहन्नुम बना देंगे।कट्टरपंथी गुटों के गंभीर आरोप: मुज्तबा खामेनेई के नाम पर खेल?ईरान के इन कट्टरपंथी गुटों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि सरकार को अमेरिका से बदला लेना चाहिए था, लेकिन उसने देश के स्वाभिमान को ताक पर रखकर वाशिंगटन से गुप्त समझौता कर लिया। उनका आरोप है कि यह समझौता नए संभावित सुप्रीम लीडर और दिवंगत खामेनेई के बेटे मुज्तबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) की इच्छा के बिल्कुल खिलाफ जाकर किया गया है। रहस्यमयी बात यह है कि मुज्तबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से जनता के सामने नहीं आए हैं, न ही उन्होंने देश को संबोधित किया है। इसके बावजूद, राष्ट्रपति और उनकी टीम उनके नाम का इस्तेमाल कर बड़े फैसले ले रही है। कट्टरपंथियों ने सरकार पर संसद को जबरन निलंबित करने, सुप्रीम लीडर के पुराने निर्देशों की धज्जियां उड़ाने और रात में होने वाली सरकार विरोधी रैलियों को बलपूर्वक रोकने का भी आरोप मढ़ा है। ईरान के सांसद महमूद नबावियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साफ लिखा है, ईरान की जनता सावधान रहे, क्या देश में तख्तापलट होने वाला है? हम खामेनेई के खून का बदला लेने और तख्तापलट के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार हैं।क्यों पैदा हुआ यह नेतृत्व का संकट? क्या कहते हैं एक्सपर्ट्सईरान मामलों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और प्रसिद्ध पुस्तक ‘What Iranians Want’ के लेखक अराश अजीजी ने सीएनएन से बातचीत में इस पूरे विवाद की इनसाइड स्टोरी समझाई है। उनके मुताबिक, मुज्तबा खामेनेई के पूरी तरह से पर्दे के पीछे रहने के कारण ईरान में एक पावर वैक्यूम (नेतृत्व शून्यता) पैदा हो गया है। इसके चलते संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बघेर गालिबाफ, राष्ट्रपति पेजेशकियन और विदेश मंत्री अराघची ही इस समय ईरानी सरकार के मुख्य चेहरे बन चुके हैं। चूंकि कट्टरपंथी तत्वों की पहुंच मुज्तबा तक सीधे नहीं हो पा रही है, इसलिए वे इन तीन शीर्ष नेताओं को विलेन मान रहे हैं और उन पर अवैध तरीके से सत्ता हथियाने की साजिश का आरोप लगा रहे हैं। इस भयंकर अंदरूनी राजनीतिक खींचतान के बीच सीमा पर अमेरिका और ईरान की सेनाओं के बीच मिसाइल और ड्रोन हमले भी बदस्तूर जारी हैं, जिससे ईरान दोहरे संकट में फंस गया है।
आर्थिक बदहाली और वैश्विक मंच पर अलग-थलग पड़ने के संकट से जूझ रहा पाकिस्तान अपनी डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए नए-नए पैंतरे आजमा रहा है। सऊदी अरब और तुर्की जैसे पुराने सहयोगियों से उम्मीद के मुताबिक वित्तीय मदद और कूटनीतिक समर्थन न मिलने के बाद अब इस्लामाबाद ने अपना रुख एक और अमीर खाड़ी देश कुवैत (Kuwait) की तरफ किया है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के नेतृत्व में देश का शीर्ष नेतृत्व इन दिनों कुवैत के साथ रणनीतिक और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इस नई नजदीकी के पीछे सिर्फ कर्ज की गुहार नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे मुस्लिम देशों का एक तथाकथित 'इस्लामिक नाटो' खड़ा करने का पुराना पाकिस्तानी एजेंडा भी छिपा हो सकता है।आखिर कुवैत के सामने क्यों हाथ फैला रहा है इस्लामाबाद?पाकिस्तान इस समय विदेशी मुद्रा भंडार की भारी किल्लत और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कड़ी शर्तों के जाल में फंसा हुआ है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अब पाकिस्तान को मुफ्त में बेलआउट पैकेज देने के बजाय सीधे तौर पर देश की सरकारी संपत्तियों में निवेश करने की शर्त रख दी है। ऐसे में पाकिस्तान को कुवैत एक सुरक्षित और बड़े निवेशक के रूप में दिखाई दे रहा है। पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल कुवैत को तेल रिफाइनरी, कृषि, माइनिंग और आईटी सेक्टर में भारी निवेश के प्रस्ताव दे रहा है। इसके साथ ही पाकिस्तान अपने लाखों कुशल और अकुशल श्रमिकों को कुवैत भेजने के लिए वीजा नियमों में ढील देने की गुहार लगा रहा है ताकि देश में रेमिटेंस (विदेशी मुद्रा) का प्रवाह बढ़ाया जा सके।मुस्लिम ब्लॉक के जरिए भारत को घेरने की नाकाम कोशिशभू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान का कुवैत और तुर्की जैसे देशों के करीब जाना उसकी पुरानी और घिसी-पिटी कूटनीति का हिस्सा है। पाकिस्तान हमेशा से सऊदी अरब की अगुवाई वाले इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) और तुर्की-मलेशिया के साथ मिलकर एक मजबूत मिलिट्री और पॉलिटिकल ब्लॉक यानी 'इस्लामिक नाटो' बनाने का सपना देखता रहा है, ताकि कश्मीर जैसे मुद्दों पर भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा सके। लेकिन पाकिस्तान का यह ख्वाब हमेशा से खोखला साबित हुआ है क्योंकि कुवैत, यूएई और सऊदी अरब जैसे प्रभावशाली खाड़ी देशों के भारत के साथ बेहद मजबूत और गहरे व्यापारिक संबंध हैं, जिन्हें वे पाकिस्तान के कारण दांव पर लगाने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।शहबाज-मुनीर की इस महत्वाकांक्षी चाल में छिपे हैं बड़े खतरेइस समय जब मध्य-पूर्व (Middle East) में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है, पाकिस्तान की यह कूटनीतिक पैंतरेबाजी उस पर खुद भारी पड़ सकती है। कुवैत और अन्य खाड़ी देश इस समय क्षेत्रीय स्थिरता पर ध्यान दे रहे हैं न कि किसी नए सैन्य या वैचारिक गुटबाजी पर। जानकारों का कहना है कि अगर पाकिस्तान ने खाड़ी देशों को अपने रक्षा एजेंडे या इस्लामिक ब्लॉक की राजनीति में घसीटने की कोशिश की, तो उसे लेने के देने पड़ सकते हैं। लखनऊ और दिल्ली के विदेश नीति विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि पाकिस्तान अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं को छोड़कर कूटनीतिक चालबाजियों में उलझा रहा, तो वह कुवैत से मिलने वाले संभावित आर्थिक सहयोग और निवेश से भी हाथ धो बैठेगा।
आजमगढ़ के पवई थाना क्षेत्र में एकतरफा प्रेम में महिला पर धारदार हथियार से हमला करने वाले आरोपी को पुलिस ने शनिवार तड़के मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपी के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोपी पर आरोप है कि उसने घर में घुसकर महिला के गाल पर धारदार हथियार से हमला किया था और फरार हो गया था। पुलिस के मुताबिक, चेकिंग के दौरान घेराबंदी किए जाने पर उसने पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे दबोच लिया गया। पढ़ें पूरी खबर…. मथुरा में RTI कार्यकर्ता पर जानलेवा हमला, 3 किमी तक पीछा कर बाइक में मारी टक्कर, लाठी-डंडों से पीटा मथुरा के फरह में RTI कार्यकर्ता पर शुक्रवार रात जानलेवा हमला कर दिया गया। स्विफ्ट कार सवार हमलावरों ने करीब तीन किलोमीटर तक पीछा कर उनकी बाइक में टक्कर मारी और सड़क पर गिराने के बाद लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा। मृत समझकर छोड़ने के बाद आरोपी फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल पत्रकार ने किसी तरह परिजनों और साथियों को फोन कर घटना की जानकारी दी। उनका आरोप है कि अवैध खनन के वायरल वीडियो को लेकर रंजिश में हमला किया गया, जबकि पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। पढ़ें पूरी खबर…
आजमगढ़ जिले की पवई थाने की पुलिस ने एक दिन पूर्व एक तरफा प्यार में महिला पर धारदार हथियार से हमला किए जाने के मामले में आरोपी को शनिवार सुबह 4 बजे मुठभेड़ में गिरफ्तार किया है। मुठभेड़ में आरोपी के पैर में गोली लगी। जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायल बदमाश की पहचान सुजीत मौर्य के रूप में हुई है। सुजीत मौर्य महिला से एक तरफा पसंद करता था। और लंबे समय से महिला का पीछा कर रहा था। गुरुवार की रात भी महिला मोबाइल पर बात कर रही थी और इसी दौरान घर में घुसते समय आरोपी भी पीछे से घुस गया था और घर के अंदर छुप गया था। जब महिला ने आरोपी को देखा तो शोर मचाना शुरू कर दिया। इसके बाद आरोपी ने धारदार हथियार से महिला के गण पर हमला कर दिया था और मौके से फरार हो गया था घायल महिला को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया था। जहां महिला का इलाज चल रहा है। इसके बाद से पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी हुई थी। चेकिंग के दौरान हुई मुठभेड़ इस बारे में फूलपुर के क्षेत्राधिकारी किरणपाल सिंह ने बताया किशनिवार सुबह की पुलिस चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि घटना में फरार आरोपी सुजीत मौर्य अंडरपास के पास छिपा हुआ है। इस सूचना पर पुलिस ने आरोपी की घेराबंदी की अपने को घिरा देखते हुए आरोपी ने पुलिस पर फायर कर दिया। पुलिस द्वारा की गई कंट्रोल फायरिंग में आरोपी के दाहिने पैर में एक गोली लगी। आरोपी के कब्जे से तमंचा कारतूस भी बरामद किया गया है।
The Odyssey Review: युद्ध से लौटते योद्धा की नहीं, खुद तक लौटते इंसान की कहानी
क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' सिर्फ होमर के महाकाव्य का रूपांतरण नहीं, बल्कि युद्ध, अपराधबोध और आत्म-स्वीकृति की गहरी कहानी है। मैट डेमन का शानदार अभिनय, अद्भुत सिनेमैटोग्राफी और भावनात्मक निर्देशन इसे सिर्फ एक पौराणिक एडवेंचर नहीं रहने देते। शुरुआती ...
पीएम मोदी ने कतर के अमीर से की बात, भारत-कतर रिश्तों में पूर्व अमीर के योगदान को किया याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से फोन पर बातचीत की। पीएम मोदी ने पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर दुख जताया और भारत-कतर संबंधों में उनके योगदान को याद किया।
लखनऊ में 13 साल पुराने आतंकी साजिश मामले में लखनऊ की विशेष एनआईए कोर्ट ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (हूजी) के संदिग्ध सदस्य कुरबान अली को दोषी ठहराते हुए 5 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर 7 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी और जेल में पहले से बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। विशेष न्यायाधीश (एनआईए) उमाशंकर जिंदल की अदालत ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए कुरबान अली को आपराधिक साजिश, भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश, युद्ध के लिए हथियार जुटाने, जालसाजी और आर्म्स एक्ट के मामलों में दोषी करार दिया। इन अपराधों में उसे 5 साल की कठोर कैद और 7 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े अपराधों में 3 साल की कठोर कैद और 500 रुपए जुर्माने की सजा भी सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं समवर्ती (Concurrent) रूप से चलेंगी। यानी आरोपी को अलग-अलग सजाएं क्रमवार नहीं काटनी होंगी। साथ ही न्यायिक हिरासत में पहले से बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का आदेश भी दिया गया। लखनऊ जिला जेल भेजने का आदेश दोषसिद्धि के बाद कोर्ट ने सजायाफ्ता वारंट जारी करने के निर्देश दिए और जेल प्रशासन को आदेश दिया कि कुरबान अली को शेष सजा काटने के लिए लखनऊ जिला जेल में रखा जाए। इन धाराओं में ठहराया गया दोषी अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल रहा। इसके बाद कुरबान अली को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120B, 121A, 122, 420, 467, 468 और 471 के तहत दोषी ठहराया गया। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 3, 5, 25, 30 और 35 के तहत भी उसे दोषी पाया गया। यह मामला वर्ष 2013 में दर्ज हूजी से जुड़ी कथित आतंकी साजिश से संबंधित है।
महाभारत के महासंग्राम की चर्चा होते ही सबसे पहले मन में आता है वह दृश्य, जिसमें अर्जुन दुविधा में है और भगवान श्रीकृष्ण उसे गीता का उपदेश दे रहे हैं। युद्ध से पहले ही श्रीकृष्ण ने यह प्रण ले लिया था कि वे कुरुक्षेत्र में शस्त्र नहीं उठाएंगे। उनकी भूमिका केवल अर्जुन के सारथी के रूप में रहने की थी। लेकिन, एक बार ऐसी विषम परिस्थिति बनी कि जगत के पालनहार को अपना वचन तोड़ना पड़ा और वे रथ का पहिया लेकर भीष्म पितामह की ओर दौड़ पड़े। आखिर वह क्या मजबूरी थी, जिसने प्रभु को शस्त्र उठाने पर विवश कर दिया?क्यों दी थी भगवान श्रीकृष्ण ने शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा?भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र युद्ध में तटस्थ रहने की घोषणा की थी। उन्होंने दुर्योधन और अर्जुन दोनों को विकल्प दिया था—एक तरफ उनकी विशाल 'नारायणी सेना' और दूसरी तरफ वे स्वयं, जो निहत्थे रहेंगे। अर्जुन ने श्रीकृष्ण को चुना और दुर्योधन ने सेना को। श्रीकृष्ण की प्रतिज्ञा के पीछे उद्देश्य यह था कि वे न चाहते हुए भी किसी एक पक्ष का सीधा संहार न करें, बल्कि न्याय की स्थापना में केवल मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। वे अपनी लीलाओं से यह दिखाना चाहते थे कि अधर्म का नाश करने के लिए युद्ध से ज्यादा महत्वपूर्ण सही मार्गदर्शन और विवेक है।जब भीष्म के सामने विचलित हो गए थे श्रीकृष्णभीष्म पितामह ने प्रतिज्ञा की थी कि वे श्रीकृष्ण को शस्त्र उठाने पर मजबूर कर देंगे। युद्ध के दौरान, जब भीष्म पितामह ने अर्जुन पर बाणों की वर्षा शुरू की, तो अर्जुन उन्हें रोकने में असमर्थ हो गए। स्थिति ऐसी बन गई कि अर्जुन का रथ क्षतिग्रस्त हो गया और वे हार की कगार पर पहुँच गए। अर्जुन को संकट में देख भगवान श्रीकृष्ण का वात्सल्य और मित्र प्रेम जाग उठा। अपने प्रिय भक्त को मृत्यु के मुख में देख श्रीकृष्ण ने अपनी प्रतिज्ञा त्याग दी और जमीन से रथ का एक टूटा हुआ पहिया उठाकर पितामह की ओर बढ़े।'विपक्ष' की जीत या 'भक्ति' की पराकाष्ठा?जैसे ही श्रीकृष्ण चक्र (पहिया) लेकर पितामह की ओर बढ़े, भीष्म ने अपने शस्त्र डाल दिए और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, प्रभु, मेरी प्रतिज्ञा पूरी हुई। आज आपके हाथों अपना अंत देखकर मेरा जीवन धन्य हो गया। श्रीकृष्ण का वह क्रोध वास्तव में उनके भक्त के प्रति प्रेम था। यह घटना सिखाती है कि भगवान के लिए अपने भक्त की रक्षा उनकी स्वयं की प्रतिज्ञा से कहीं अधिक बड़ी होती है। महाभारत का यह प्रसंग आज भी हमें याद दिलाता है कि भक्त और भगवान के बीच कोई भी नियम, वचन या प्रतिज्ञा बड़ी नहीं होती।
गाजा संघर्ष : नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल
सयुक्त राष्ट्र की हालिया स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की रिपोर्ट ने इजरायल और कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में जारी हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों की गंभीर तस्वीर पेश की है।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
युद्धविराम से आगे: क्या विश्व अहिंसा की ओर बढ़ेगा?
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हाल ही में हुआ युद्धविराम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया युद्ध की लपटों में घिरकर वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका था। कई सप्ताह तक चले संघर्ष ने क्षेत्र को ऐसे ज्वालामुखी में बदल दिया था, जिसकी प्रत्येक विस्फोटक घटना विश्व अर्थव्यवस्था ... Read more
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
'वाराणसी' में दिखेगा महायुद्ध, भगवान राम और कुंभकर्ण के बीच होगा 30 मिनट का ऐतिहासिक टकराव!
दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली जब भी कोई नया प्रोजेक्ट लाते हैं, तो वह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक उत्सव बन जाता है। 'बाहुबली' और 'आरआरआर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद, राजामौली अब सुपरस्टार महेश बाबू के साथ अपनी अगली महात्वाकांक्षी ...
इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) हर हफ्ते दुनिया भर यूजर्स के सर्च और प्रोफाइल विजिट के आधार पर 'मोस्ट पॉपुलर इंडियन सेलिब्रिटीज' की लिस्ट जारी करता है। आमतौर पर इस लिस्ट के शीर्ष पर वही सुपरस्टार्स नजर आते हैं जिनकी बड़ी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज ...
खाड़ी युद्ध से निपटने की मोदी की तजबीज
मोदीजी ने एक बार फिर राष्ट्र की जनता को उसके कर्तव्यों के प्रति सचेत किया है।
ललित सुरजन की कलम से युद्ध नहीं, शांति चाहिए
जब एक तरफ सिर्फ एक सैनिक की गिरफ्तारी से उपजे भय और रिहाई की घोषणा से मिली राहत है, तब दूसरी तरफ आक्रामक मुद्रा अपनाकर हम क्या हासिल करना चाहते हैं?
युद्धविराम और हाशिए पर धकेल दिया गया भारत
यह युद्ध स्पष्ट रूप से नेतन्याहू की देन है और ट्रम्प इसके परिणामों के बारे में सोचे-समझे बिना ही इसमें फंस गए।
तीसरे विश्वयुद्ध की आहट और गांधी
इतिहास विजय-पराजय-विनाश का मृत दस्तावेज नहीं है, न वह किसी की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कहानी का विवरण है।
धीरे-धीरे हकीकत में बदल रहे हैं भारत के ईरान युद्ध के डर
ईरान युद्ध को लेकर भारत की सबसे गहरी आर्थिक चिंताएं अब काल्पनिक नहीं रह गई हैं
युद्ध को लेकर मोदी का देश को डराने वाला संदेश
देश में जहां भी और जब भी चुनाव होते हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दूसरे सारे काम छोड़कर अपनी भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार में जुट जाते हैं
पश्चिम एशिया में युद्ध के दुष्प्रभाव से निपटने के लिए बेहतर नीतियों की ज़रूरत
वित्त वर्ष 2026-27 की ठीक शुरुआत में, जो 1 अप्रैल, 2026 से शुरू हो रहा है, भारत को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है
युद्ध के माहौल में महावीर के दर्शन की उपादेयता
सदियों पहले महावीर जनमे। वे जन्म से महावीर नहीं थे। उन्होंने जीवन भर अनगिनत संघर्षों को झेला, कष्टों को सहा, दुख में से सुख खोजा और गहन तप एवं साधना के बल पर सत्य तक पहुंचे, इसलिये वे हमारे लिए आदर्शों की ऊंची मीनार बन गये। उन्होंने समझ दी कि महानता कभी भौतिक पदार्थों, सुख-सुविधाओं, ... Read more
युद्धग्रस्त विश्व में महावीर की अहिंसा: शांति की एकमात्र राह
संदर्भ – तीर्थंकर महावीर स्वामी जन्म कल्याणक 2625वां (31 मार्च 2026) आज का विश्व एक विचित्र विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर विज्ञान, तकनीक और वैश्वीकरण ने मानव जीवन को अभूतपूर्व सुविधाएं दी हैं, वहीं दूसरी ओर युद्ध, हिंसा और असहिष्णुता ने मानवता के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विश्व के ... Read more
मिडिल ईस्ट युद्ध ने ट्रम्प की मुश्किलों को बढ़ाया
युद्ध के मामले में अमेरिका-इजरायल की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं।
पश्चिम एशिया युद्ध में परमाणु खतरे के प्रति लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अंतिम घोषित तिथि बढ़ा दी है।
पश्चिम एशिया में युद्ध फैलने से एक और वैश्विक आर्थिक संकट का खतरा
पश्चिम एशिया का संकट अब एक वैश्विक आर्थिक चुनौती में बदल गया है
लीजा रे ने दुबई से शेयर की दर्दभरी कविता, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच जताई चिंता
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। हर तरफ धमाकों और सायरन का शोर सुनाई दे रहा है। एक्ट्रेस लीजा रे भी इन हालातों के बीच दुंबई में अपने घर ...
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता, बेटी के साथ सुरक्षित लौटीं भारत, सुनाई आपबीती
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता भी अपनी 14 साल की बेटी सायरा के साथ यूएई में ...
एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज़ की '120 बहादुर' को लेकर चर्चा अब अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। फिल्म ट्रेलर ने पूरी तरह से रोमांच और प्रेरणा का सही मिश्रण पेश किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बलिदान दिवस पर मेजर शैतान सिंह ...
War 2 रिव्यू: लचर स्क्रिप्ट और निर्देशन के कारण रितिक और एनटीआर हारे युद्ध, पढ़ें पूरी समीक्षा
रितिक रोशन और एनटीआर स्टारर War 2 ‘स्पाई यूनिवर्स’ की बड़ी पेशकश मानी जा रही थी, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और औसत निर्देशन ने इसे निराशाजनक बना दिया। शानदार एक्शन सीक्वेंस और एनटीआर के दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद फिल्म का सेकंड हाफ बिखर गया। कहानी में ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला अपनी खूबसूरती से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। उर्वशी ने बेहद ही कम समय में एक अलग मुकाम हासिल किया है। वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों के साथ 'मिलने और अभिवादन' के क्षणों में संलग्न रहती है। ऐसा ही एक क्षण था जब ...
सलमान खान की सिकंदर के आखिरी गाने में दिखेगा जबरदस्त जलवा, तुर्की से बुलाए गए 500 डांसर्स!
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की 'सिकंदर' इस साल की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके एक्शन-पैक्ड टीजर ने इसकी भव्य एंट्री के लिए एकदम परफेक्ट माहौल तैयार कर दिया है। भव्य पैमाने पर बनाई गई इस फिल्म में ...
केसरी वीर के लिए सूरज पंचोली ने की कड़ी ट्रेनिंग, ऐसे सीखा युद्ध कौशल
बॉलीवुड एक्टर सूरज पंचोली अपनी पहली बायोपिक में वीर हामीरजी गोहिल के ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने जा रहे हैं। सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय और सूरज पंचोली अभिनीत फिल्म 'केसरी वीर : लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ' का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ...
Adil Hussain: दुनियाभर में इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 की धूम मची हुई है। पेरिस ओलंपिक में दुनियाभर के खिलाड़ियों ने भाग लिया है। भारत के कई खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। हाल ही में तुर्की के शूटर यूसुफ डिकेक ने सिल्वर मेडल जीता।
बॉर्डर की 27वीं सालगिरह पर, अभिनेता सनी देओल ने एक घोषणा वीडियो के ज़रिए फ़्रैंचाइज़ी के दूसरे संस्करण की पुष्टि की है। अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सनी ने बॉर्डर 2 में अपनी वापसी की आधिकारिक घोषणा करते हुए एक वीडियो शेयर किया और इसे 'भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म' बताया। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ''एक फौजी अपने 27 साल पुराने वादे को पूरा करने के बाद, आ रहा है फिर से। भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म, बॉर्डर 2।'' इस फिल्म का निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता करेंगे। आगामी युद्ध फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह करेंगे। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | पति से तकरार के बीच केन्या लौट गई हैं Dalljiet Kaur? शादी को बचाने की कर रही कोशिश सनी द्वारा घोषणा वीडियो शेयर किए जाने के तुरंत बाद, सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए कमेंट सेक्शन में बाढ़ ला दी। एक यूज़र ने लिखा, ''वाह, यह बहुत बढ़िया घोषणा है सर जी, जय हिंद।'' दूसरे ने लिखा, ''बहुत उत्साहित हूँ।'' तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, ''बॉर्डर 2 के लिए बहुत उत्साहित हूं।'' इसे भी पढ़ें: NDA पर इमोशनल बयान, काले सूट में ली मंत्री पद की शपथ और शर्मिला अंदाज, Tripti Dimri की तरह रातों रात भारत के Sensation बन गये Chirag Paswan सनी देओल की अन्य परियोजनाएं उन्हें आखिरी बार अमीषा पटेल के साथ गदर 2 में देखा गया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही और इसे ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर घोषित किया गया। गदर 2 की सफलता के बाद, सनी ने लाहौर 1947 सहित कई फिल्में साइन कीं, जिसे आमिर खान के प्रोडक्शन बैनर के तहत बनाया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जिन्होंने आमिर को कल्ट क्लासिक अंदाज़ अपना अपना (1994) में निर्देशित किया था। View this post on Instagram A post shared by Sunny Deol (@iamsunnydeol)
Kalki 2898 AD: शुरू हो गया नया युद्ध, पूरे ट्रेलर की अहम कड़ी हैं अमिताभ, प्रभास करेंगे इम्प्रेस
Kalki 2898 AD के ट्रेलर को देखें तो, फिल्म कल्कि 2898 एडी के मेकर्स ने विश्वास दिलाया है कि ये फिल्म लोगों को बांधने में कामयाब होगी. टफ सीक्वेंस, क्लियर एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर आपका ध्यान खींचते हैं. वीएफएक्स पर भी अच्छा काम किया गया है.
आशुतोष राणा ने डीपफेक वीडियो को बताया 'माया युद्ध', बोले- ये सालों से चल रहा
आशुतोष ने कहा कि ऐसी बातों में खुद को डिफेंड करने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि जो लोग आपको जानते हैं वो सवाल करेंगे ही नहीं. और जो नहीं जानते, उन्हें किसी रिस्पॉन्स से फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वो दिमाग में आपकी एक छवि बना चुके होते हैं.
रानीति बालाकोट एंड बियॉन्ड: जिमी शेरगिल की नई सीरीज भारत की आधुनिक युद्ध की ऐतिहासिक कहानी को प्रदर्शित करेगी। जिमी शेरगिल दो मिनट के ट्रेलर की शुरुआत पुलवामा हमले की झलक से होती है। एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाने वाले आशीष कहते हैं, ये एक नया रण है या इसे जीतने के लिए एक नई रणनीति की जरूरत है। इसे भी पढ़ें: नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन प्रहार', कमांडर शंकर राव समेत अब तक 79 हुए ढेर, हिट लिस्ट में और भी कई नाम शामिल आगामी वेब शो आधुनिक युद्ध को डिकोड करता है जो केवल भौतिक सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता है बल्कि सोशल मीडिया, डिजिटल रणनीति और गुप्त राजनीतिक चालों के क्षेत्र से परे है जो भू-राजनीति को नया आकार देने की शक्ति रखता है। वेब श्रृंखला उन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है जिन्होंने 2019 में देश को हिलाकर रख दिया था। शो में कुछ हवाई दृश्य, शानदार प्रदर्शन और एक शक्तिशाली कथा है जो युद्ध के मैदान के अंदर और बाहर हर पहलू को चतुराई से पकड़ती है। इसे भी पढ़ें: Biden को सोचना पड़ेगा फिर एक बार, Iran पर प्रहार तो रूस करेगा पलटवार, रक्षा मंत्रायल ने चिट्ठी लिखकर जता दी मंशा आगामी वेब श्रृंखला के बारे में बात करते हुए, जिमी ने कहा: यह मेरे द्वारा अतीत में की गई किसी भी भूमिका से भिन्न है। कम से कम यह कहना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन भारत की पहली वॉर-रूम केंद्रित वेब-श्रृंखला का हिस्सा बनना बेहद संतोषजनक भी है। वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित जिसने देश को हिलाकर रख दिया। एनएसए प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए, आशीष ने कहा, एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन रक्षा बलों के कुछ सदस्यों के साथ बैठकों ने मुझे अपने चरित्र की बारीकियों को समझने में मदद की। तैयारी कार्य और कार्यशालाएं मुझे वापस ले गईं मेरे एनएसडी के दिनों में। संतोष सिंह द्वारा निर्देशित, श्रृंखला का निर्माण स्फीयरओरिजिन्स मल्टीविजन प्राइवेट लिमिटेड के सुंजॉय वाधवा और कॉमल सुंजय डब्ल्यू द्वारा किया गया है। इसमें प्रसन्ना भी हैं। शो का प्रीमियर 25 अप्रैल को JioCinema पर होगा।
दर्शक काफी समय से रैपर बादशाह और हनी सिंह के बीच जुबानी जंग देख रहे हैं। दोनों का रिश्ता सालों से विवादों से भरा रहा है। हालांकि करियर के शुरुआती दिनों में बादशाह और हनी सिंह के बीच अच्छी दोस्ती हुआ करती थी। हालाँकि, ऐसा लगता है कि सफलता और पैसे ने धीरे-धीरे इस दोस्ती को पूरी तरह से खत्म कर दिया। अब दोनों अक्सर एक दूसरे पर तंज कसते नजर आते हैं। हाल ही में हनी सिंह एक होली पार्टी में शामिल हुए, जहां उन्होंने बादशाह के 'पापा कमबैक' वाले कमेंट का करारा जवाब दिया। रैपर का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसे भी पढ़ें: Punjab Kings के खिलाफ जीत के बाद इंटरनेट पर Virat Kohli का Anushka Sharma के साथ वीडियो कॉल, FLY KISS देते नजर आये खिलाड़ी हनी सिंह ने बादशाह पर किया पलटवार बादशाह कुछ दिनों पहले हनी सिंह पर अपनी टिप्पणी को लेकर चर्चा में थे, जिसमें उन्होंने हनी सिंह की वापसी पर कटाक्ष किया था। अब सिंगर और रैपर हनी सिंह ने एक कमेंट के जरिए बादशाह को करारा जवाब दिया है और कहा है कि उन्हें बादशाह को जवाब देने के लिए मुंह खोलने की जरूरत नहीं है। उनके फैन ही काफी हैं जो हर चीज पर बात कर सकते हैं। उन्होंने अपने गाली वाले अंदाज में अपने फैंस से बात करते हुए बादशाह का जवाब दिया। हनी सिंह को सोमवार को मुंबई में एक होली पार्टी में परफॉर्म करते देखा गया और यहीं उन्होंने बादशाह पर कटाक्ष किया। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा, हर कोई कहता है, रिप्लाई करो, रिप्लाई करो... मैं क्या रिप्लाई करूं... आप लोग तो उनके सारे कमेंट्स का बहुत अच्छे से रिप्लाई कर चुके हैं। मुझे मुंह खोलने की जरूरत है। ऐसा नहीं होता है। जैसे ही भीड़ ने उनके लिए तालियां बजाईं, गायक ने कहा, मुझे बोलने की जरूरत नहीं है। आप लोग खुद पागल हैं। हनी सिंह पागल हैं और उनके प्रशंसक भी पागल हैं। इसे भी पढ़ें: Taapsee Pannu के पति Mathias Boe आखिर कौन है? जब सफल भी नहीं थी एक्ट्रेस तब से उन्हें प्यार करते थे बैडमिंटन खिलाड़ी रैपर बादशाह ने क्या कहा? आपको बता दें कि हाल ही में बादशाह ने हनी सिंह पर कमेंट करते हुए कहा था, ''मुझे एक पेन और कागज दो। मैं तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लाया हूं। मैं कुछ गाने लिखूंगा और तुम्हें दूंगा। पापा की वापसी तुम्हारे साथ होगी।'' Kalesh Controversy B/w Honey Singh and Badshah (Honey Singh Replied to Badshah) pic.twitter.com/o74t423bgS — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 25, 2024 Kalesh Between Badshah & Honey Singh Fans on Stage during Live Concert pic.twitter.com/M4VqSqLSc3 — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 19, 2024
आखिर क्यों Indira Gandhi ने Aandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध, आज भी देखने से कतराते हैं लोग
आखिर क्यों Indira Gandhi नेAandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध,आज भी देखने से कतराते हैं लोग
'सावरकर' रिव्यू: खोखली, एकतरफा फिल्म में एकमात्र अच्छी चीज है रणदीप हुड्डा का काम
आज के दौर में 'गुमनाम' हो चुके एक स्वतंत्रता नायक की कहानी कहने निकली ये फिल्म, एक अनजान कहानी बताने से ज्यादा अपने हीरो विनायक दामोदर सावरकर को बाकियों के मुकाबले अधिक 'वीर' बताने पर फोकस करने लगती है.

