ईरान युद्ध, जी7 को लेकर डोनाल्ड ट्रंप-जॉर्जिया मेलोनी के बीच तनातनी बढ़ी
नई दिल्ली। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच ईरान युद्ध और जी-7 शिखर सम्मेलन से जुड़े मुद्दों को लेकर सार्वजनिक विवाद गहरा गया है। दोनों नेताओं को कभी करीबी राजनीतिक सहयोगी माना जाता था। विवाद की शुरुआत तब हुई जब ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर […] The post ईरान युद्ध, जी7 को लेकर डोनाल्ड ट्रंप-जॉर्जिया मेलोनी के बीच तनातनी बढ़ी appeared first on Sabguru News .
पाकिस्तानी नौसेना में एक नाम लौट आया है ‘PNS हैंगोर’। ये है चीन में बनी नई पाकिस्तानी पनडुब्बी। ये 11 जून को कराची पहुंची। पाकिस्तान इसे बंगाल की खाड़ी में तैनात करेगा। इसी हैंगोर नाम की पनडुब्बी ने 1971 की जंग में भारतीय युद्धपोत ‘INS खुखरी’ को डुबो दिया था। जंग के दौरान किसी भारतीय पोत के डूबने की यह इकलौती घटना है। आखिर क्या है 1971 का वो पूरा किस्सा, नई हैंगोर पनडुब्बी कितनी ताकतवर है और भारत इससे कैसे निपटेगा; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: हैंगोर पनडुब्बी ने 55 साल पहले भारतीय युद्धपोत को कैसे डुबोया था? जवाब: 1971 की जंग के दौरान 6 दिसंबर को भारतीय नौसेना का पता चला कि एक पाकिस्तानी पनडुब्बी PNS (Pakistan Naval Ship) हैंगोर दीव के पास मौजूद है। जवाब में भारत ने एंटी सबमरीन युद्धपोत 'INS (Indian Naval Ship) खुखरी' और INS कृपाण' को उस इलाके में भेज दिया। PNS का मतलब पाकिस्तान नेवल शिप और INS का मतलब इंडियन नेवल शिप होता है। 'PNS हैंगोर' में 25 किमी दूर तक के युद्धपोत की टोह लेने की क्षमता थी। जबकि खुखरी सिर्फ 2.5 किमी दूर तक ही दुश्मन के पोत या पनडुब्बी को डिटेक्ट कर सकता था। हैंगोर को खुखरी और कृपाण का पहले से पता चल गया। उसने दोनों के नजदीक आने का इंतजार किया। हैंगोर के कैप्टन लेफ्टिनेंट कमांडर तसनीम अहमद ने बाद में एक इंटरव्यू में बताया, 'हमने कृपाण पर जो टॉरपीडो दागा, वो बिना फटे उसके नीचे से गुजर गया। भारतीय युद्धपोतों को हमारी पोजीशन का पता चल चुका था। इसलिए मैंने तेजी से INS खुखरी पर पीछे से दो फायर और किए।’ टॉरपीडो खुखरी के नीचे फटा था। जिससे 3 मिनट के अंदर जहाज डूबने लगा था। इस हमले में खुखरी के कैप्टन महेंद्रनाथ मुल्ला सहित कुल 18 नेवी ऑफिसर्स, 176 क्रू और बाकी स्टाफ सहित कुल 194 लोग शहीद हुए। 'द सिंकिंग ऑफ INS खुखरी: सर्वाइवर्स स्टोरीज' किताब लिखने वाले मेजर जनरल इयान कारडोजो के मुताबिक, 'अगर किसी इलाके में पनडुब्बी का खतरा हो, तो युद्धपोत टेढ़े-मेढ़े तरीके से चलते हैं। खुखरी भी यही कर रहा था, इसलिए उसकी स्पीड कम थी। उसी समय खुखरी पर एक नए किस्म के सोनार का भी परीक्षण चल रहा था, इससे रफ्तार और धीमी हो गई थी। यही वजह थी कि हैंगोर ने उसे आसानी से निशाना बना लिया।' हालांकि इस हमले से 1971 की जंग का नतीजा नहीं बदला। बंगाल की खाड़ी से पाकिस्तानी नेवी को भी वापस लौटना पड़ा था। अब 55 साल बाद अब हैंगोर के नाम पर एक नई पनडुब्बी फिर सुर्खियों में है। सवाल-2: पाकिस्तान की नई हैंगोर पनडुब्बी कितनी घातक है? जवाबः पाकिस्तान की नई हैंगोर क्लास सबमरीन को चीन की सरकारी कंपनी 'चाइना शिपबिल्डिंग एंड ऑफशोर इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन लिमिटेड', यानी CSOC ने बनाया है। ये डीजल और इलेक्ट्रिक बैटरी से चलने वाली अटैक सबमरीन है। 2015 में पाकिस्तान ने चीन से करीब 5 अरब डॉलर में 8 हैंगोर पनडुब्बियों का सौदा किया था। अभी पाकिस्तानी नेवी को पहली हैंगोर पनडुब्बी मिली है। तीन और पनडुब्बियों का समुद्र में ट्रायल चल रहा है। बाकी 4 पनडुब्बियां पाकिस्तान में ही बनाई जाएंगी। सवाल-3: हैंगोर पनडुब्बी बंगाल की खाड़ी में क्यों भेजना चाहता है पाकिस्तान? जवाब: इसकी 2 मुख्य वजहें हैं... 1. बंगाल की खाड़ी में पाकिस्तान की मौजूदगी दोबारा बढ़ाना 1971 की जंग हारने के बाद पाकिस्तानी नेवी बंगाल की खाड़ी से गायब हो गई। इस इलाके में भारतीय नौसेना का वर्चस्व है… हैंगोर को चीन से कराची लाने वाली नेवी फ्लीट के कमांडर उमर फारूक ने कहा, 'ये पनडुब्बी गेमचेंजर है। इसके जरिए पाकिस्तान को बंगाल की खाड़ी में अपनी मौजूदगी बनाए रखने में मदद मिलेगी।' बंगाल की खाड़ी से भारत के अलावा बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया और श्रीलंका जुड़े हैं। खाड़ी में अपने तट से 22 किमी तक के समुद्र को उस देश का 'टेरिटोरियल सी' कहा जाता है। फिर 200 किमी का 'विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र' यानी EEZ होता है। बाकी समुद्र को 'इंटरनेशनल वाटर जोन' कहते हैं, जहां किसी भी देश के सैन्य जहाज या पनडुब्बी आ सकती हैं। इस मैप में देखिए… 2. बांग्लादेश से शुरू हुए रिश्ते मजबूत करना 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश के अंतरिम राष्ट्रपति बने मोहम्मद यूनुस का पाकिस्तान की ओर था। उन्होंने 2 बार पाकिस्तानी पीएम शाहबाज शरीफ से मुलाकात की थी। पाक विदेश मंत्री इशाक डार भी ढाका दौरे पर गए। इसके बाद दोनों देशों में 1971 से बंद समुद्री व्यापार दोबारा खुला। 12 साल बाद जनवरी 2026 में इस्लामाबाद-ढाका के बीच सीधी फ्लाइट शुरू हुई। वीजा रूल्स में भी ढील दी गई। दिसंबर 2025 में पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच कारोबार पिछले साल के मुकाबले 20% बढ़ा। दोनों देशों के बीच 100 करोड़ डॉलर के आर्थिक समझौते हुए। इसलिए इस इलाके में पाकिस्तान अपनी नौसैनिक ताकत बढ़ाना चाहता है। सवाल-4: पाकिस्तानी नेवी को कैसे तेजी से मजबूत बना रहा है चीन? जवाब: पाकिस्तान 80% हथियार चीन से खरीदता है। पाकिस्तानी नौसेना को एडवांस बनाने में भी चीन 3 तरह से मदद कर रहा है… सवाल-5: ये भारत के लिए कितनी चिंता की बात है, कैसे जवाब देगा? जवाब: बंगाल की खाड़ी में पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियां बढ़ती हैं, तो भारत के लिए 3 बड़े खतरे हैं… 1. निशाने पर भारत के अहम ठिकानेः PNS हैंगोर के 6 हैवीवेट टॉरपीडो ट्यूब में पाकिस्तान की 450 किमी रेंज वाली 'बाबर-3' क्रूज मिसाइल लग सकती है। अगर बाबर-3 के साथ पनडुब्बी बंगाल की खाड़ी में उतरी, तो भारत के अहम ठिकाने जैसे- नेवी की ईस्टर्न कमांड, अंडमान निकोबार कमांड और आंध्र प्रदेश में पनडुब्बी अड्डा ‘INS वर्षा’ और ISRO का सतीश धवन स्पेस सेंटर, वगैरह इसकी जद में आ सकते हैं। 2. खुफिया जानकारी चुराने का खतराः पाकिस्तान समुद्री गश्त बढ़ाकर भारतीय जहाजों, बंदरगाहों और नौसैनिक अड्डों की खुफिया जानकारी जुटा सकता है। इसका जंग की स्थिति में इस्तेमाल करेगा। मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस में रिसर्च एनालिस्ट नमिता बर्थवाल के मुताबिक, चिंता की बात ये है कि पर्दे के पीछे चीन है, जिसे ये खुफिया इन्फॉर्मेशन मिलती रहेंगी। 3. महीनों तक एक्टिव सकती है पनडुब्बी: नवंबर 2025 में पाक युद्धपोत 'PNS सैफ' ने 1971 के बाद पहली बार बांग्लादेश के चटगांव पोर्ट का दौरा किया। अगर हैंगोर को बांग्लादेश के पोर्ट्स पर 'लॉजिस्टिक्स सपोर्ट' जैसे- ईंधन, राशन वगैरह मिलने लगा, तो वह इस इलाके में और देर तक रह सकेगी। हालांकि ऐसी चुनौतियों के लिए भारतीय नौसेना पूरी तरह तैयार है… -------------------- ये खबर भी पढ़िए… भारत ने अचानक 12 परमाणु बम क्यों तैनात किए; 3 साल से जखीरा बढ़ा रहा, चीन-पाक से एकसाथ निपटने को तैयार भारत ने पिछले 3 साल में 26 परमाणु हथियार बढ़ाए। अब परमाणु जखीरा 190 तक पहुंच गया है। भारत ने पहली बार 12 न्यूक्लियर बम मिसाइल्स पर लोड करके तैनात कर दिए हैं। ये खुलासा स्वीडिश थिंकटैंक SIPRI की लेटेस्ट रिपोर्ट में हुआ है। पूरी खबर पढ़िए…
फीफा विश्व कप 2026 (FIFA World Cup 2026) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को बे एरिया स्टेडियम में खेले गए ग्रुप डी के एक बेहद रोमांचक और करो या मरो के मुकाबले में पैराग्वे ने बड़ा उलटफेर करते हुए तुर्की को 1-0 से शिकस्त दे दी है। इस करारी हार के साथ ही टूर्नामेंट की 'डार्क हॉर्स' (अप्रत्याशित दावेदार) मानी जा रही तुर्की की टीम आधिकारिक तौर पर विश्व कप की दौड़ से बाहर हो गई है। तुर्की के इस शर्मनाक प्रदर्शन और इतनी जल्दी बाहर होने से दुनिया भर के फुटबॉल फैंस को गहरा सदमा लगा है।दूसरे ही मिनट में हुआ मैच का एकमात्र गोल, शुरुआती झटके से नहीं उबर पाया तुर्कीमैच की शुरुआत से ही पैराग्वे की टीम ने आक्रामक रुख अपनाया। खेल के दूसरे ही मिनट में पैराग्वे के स्टार खिलाड़ी मटियास गलार्ज़ा (Matias Galarza) ने तुर्की के डिफेंस को भेदते हुए एक शानदार मैदानी गोल दाग दिया। इस शुरुआती बढ़त ने पैराग्वे को मैच में मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना पहला मैच 2-0 से हारने के बाद तुर्की को इस मैच में वापसी की पूरी उम्मीद थी, लेकिन मैच के आखिरी मिनट तक कड़े संघर्ष के बाद भी टीम बराबरी का गोल नहीं दाग सकी और पैराग्वे ने रक्षात्मक खेल दिखाते हुए मुकाबला 1-0 से अपने नाम कर लिया।ग्रुप डी का ताजा समीकरण: शून्य अंकों के साथ सबसे नीचे फिसला तुर्कीइस जीत के साथ ही पैराग्वे ने टूर्नामेंट में अपनी पहली जीत दर्ज कर 3 अंक हासिल कर लिए हैं और खुद को नॉकआउट की रेस में बनाए रखा है। अगर ग्रुप डी की अंक तालिका (Points Table) पर नजर डालें तो मेजबान अमेरिका 6 अंकों के साथ शीर्ष पर काबिज है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 3 अंकों के साथ दूसरे और पैराग्वे 3 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है। लगातार दो मैच हारने के बाद तुर्की शून्य अंकों के साथ सबसे निचले पायदान पर है, जिसके चलते उसका अगले दौर में पहुंचने का रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है।रियल मैड्रिड के वंडरकिड अर्दा गुलेर रहे फ्लॉप, कोच की तारीफ भी नहीं आई कामइस पूरे टूर्नामेंट में फैंस और फुटबॉल पंडितों की निगाहें तुर्की के युवा सनसनी और स्पेनिश क्लब रियल मैड्रिड के स्टार खिलाड़ी अर्दा गुलेर (Arda Guler) पर टिकी थीं। उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ युवा खिलाड़ियों में से एक माना जाता है। मैच से पहले तुर्की के मुख्य कोच विन्सेन्ज़ो मोंटेला ने गुलेर की तारीफ करते हुए कहा था, उसमें कमाल की प्रतिभा और खेल की गहरी समझ है। वह जानता है कि खेल को कब धीमा करना है और कब तेज। उसका चेहरा मासूम है, लेकिन वह मैदान पर बहुत चालाक है। मगर पैराग्वे के खिलाफ इस महत्वपूर्ण मैच में गुलेर का जादू नहीं चल पाया और वे टीम को ऐतिहासिक हार से बचा नहीं सके।अब अपराजित अमेरिका से होगी तुर्की की प्रतिष्ठा की जंगविश्व कप से बाहर होने के बाद अब तुर्की के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। टीम को ग्रुप स्टेज का अपना आखिरी औपचारिक मैच 26 जून को इंग्लेवुड के लॉस एंजिल्स स्टेडियम में मजबूत मेजबान टीम अमेरिका के खिलाफ खेलना है। अमेरिका इस समय शानदार फॉर्म में है और उसने अपने शुरुआती दोनों मैचों में पैराग्वे और ऑस्ट्रेलिया को पटखनी दी है। तुर्की के मौजूदा खराब फॉर्म को देखते हुए अपराजित अमेरिका के खिलाफ अपनी साख बचाना उसके लिए एक बेहद कठिन चुनौती होने वाला है।
जींद जिले में उचाना उपमंडल कार्यालय और नागरिक अस्पताल परिसर में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। इससे मरीजों, उनके परिजनों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोग अपने हाथों में खाने-पीने का सामान लेकर निकलने से भी कतराने लगे हैं, क्योंकि कई बार बंदर उनके हाथों से सामान छीन लेते हैं। नागरिक अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि बंदर अस्पताल परिसर में दिनभर घूमते रहते हैं। बंदरों को भगाने के लिए नागरिक अस्पताल के पास पुरानी बिल्डिंग, जहां आयुर्वेदिक अस्पताल चलता है, वहां एक लंगूर का पोस्टर लगाया गया है। यह माना जाता है कि लंगूर की तस्वीर देखकर बंदर उस क्षेत्र से दूर रहते हैं। लोगों ने की समस्या के समाधान की मांग हालांकि, उपमंडल कार्यालय में काम करवाने आने वाले लोगों को भी बंदरों के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि केवल पोस्टर लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। बंदरों का आतंक लगातार बना हुआ है और उनकी संख्या में भी कमी नहीं आ रही है। मंजीत, सुनील, राजबीर और मनोज सहित कई स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाए और इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। उनका कहना है कि जब तक बंदरों को हटाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक आमजन और मरीजों को इसी प्रकार परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। एसडीएम बोले- नगर पालिका प्रशासन से करेंगे बात लोगों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर उपमंडल कार्यालय और नागरिक अस्पताल परिसर को बंदरों के आतंक से मुक्त कराने की अपील की है, ताकि आमजन बिना किसी भय के अपने कार्य कर सकें और मरीजों को भी राहत मिल सके। इस संबंध में एसडीएम रमित यादव ने बताया कि बंदरों के आतंक से छुटकारा दिलाने के लिए नगर पालिका प्रशासन से बातचीत की जाएगी।
सीजफायर के कुछ घंटों बाद ही इजरायल ने लेबनान पर किया हमला , 5 की मौत
दक्षिण लेबनान में इजरायली हमले जारी है। हालिया हमले में 5 लोगों की मौत हो गई है। लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी (एनएनए) ने शनिवार को बताया कि, हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच युद्धविराम लागू होने के 24 घंटों के भीतर ही दक्षिणी लेबनानी शहर सज्द के निकट स्थित जबल अल-रफी क्षेत्र पर एयर स्ट्राइक की गई।
छतरपुर शहर के बस स्टैंड क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान मची अफरा-तफरी में एक जेबकतरा पकड़ा गया। भीड़ का फायदा उठाकर एक व्यक्ति की जेब काटने की कोशिश कर रहे इस युवक को स्थानीय लोगों ने रंगेहाथ दबोच लिया। इसके बाद लोगों ने उसे सिटी कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया, जो अब उससे पूछताछ कर रही है। शुक्रवार शाम बस स्टैंड पर प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान कुछ लोगों के विरोध के चलते सड़क पर जाम लग गया और बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए। क्षेत्र में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इसी भीड़भाड़ का फायदा उठाकर कुछ जेबकतरे सक्रिय हो गए और लोगों की जेबों पर हाथ साफ करने की कोशिश करने लगे। रंगेहाथ पकड़ा गया तो बनाने लगा बहानेइसी दौरान एक युवक को संदिग्ध गतिविधि करते हुए लोगों ने पकड़ लिया। आरोप है कि वह एक व्यक्ति की जेब काटने का प्रयास कर रहा था, तभी लोगों की नजर उस पर पड़ गई और उसे मौके पर ही दबोच लिया गया। पकड़े गए युवक ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह जेब नहीं काट रहा था। उसका तर्क था कि भीड़ में धक्का-मुक्की हो रही थी, जिसके कारण उसका हाथ गलती से दूसरे व्यक्ति की जेब पर चला गया था। कोतवाली पुलिस कर रही मामले की विस्तृत जांचहालांकि, मौके पर मौजूद लोगों ने उसकी किसी भी सफाई पर विश्वास नहीं किया और तुरंत पुलिस को घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और युवक को हिरासत में लेकर थाने ले गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। पूछताछ और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
Top News 20 June : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच सीजफायर कराने का दावा किया। भारत के लिए ईरान से गैस आयात का रास्ता खुला। उद्धव ठाकरे ने शिवसेना यूबीटी अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश की। ट्रेन में अब महंगी पड़ेगी बगैर ...
इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष में राहत, युद्धविराम पर बनी सहमति
इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच युद्धविराम पर सहमति बन गई है। यह जानकारी शुक्रवार को इजरायली अधिकारियों के हवाले से दी गई।
हल्दीघाटी युद्ध स्वतंत्रता का स्वर्णिम अध्याय
उदयपुर | मीरा नगर में हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतु:शती पर संगोष्ठी हुई। भामाशाह फाउंडेशन समिति के अध्यक्ष प्रमोद सामर ने कहा कि 450 वर्ष पूर्व महाराणा प्रताप के नेतृत्व में लड़ा गया हल्दीघाटी युद्ध स्वतंत्रता संग्राम का स्वर्णिम अध्याय है। युद्ध में दानवीर भामाशाह का अतुल्य योगदान और समर्पण हमेशा स्मरणीय रहेगा। मुख्य अतिथि भंवर सिंह पंवार ने कहा कि इस वर्ष प्रताप और भामाशाह जयंती विशेष संदेश देती है। संगोष्ठी में शंभू गमेती, दूधाराम पटेल, कन्हैया लाल देशबंंधु, विजय दलाल, कन्हैया लाल डांगी, नरेंद्र जैन और ध्रुव बाबेल ने विचार रखे। वक्ताओं ने प्रताप का संघर्ष, भामाशाह का समर्पण और चेतक की भूमिका पर चर्चा की। आगामी 28 जून, रविवार को सुबह 9 बजे हाथीपोल स्थित भामाशाह सर्किल पर समारोह होगा।
4 सैनिकों की मौत के बाद इजराइल के रक्षा मंत्री बेन-ग्विर ने पूरे लेबनान को जलाने की बात कही
तेल अवीव। दक्षिणी लेबनान में लड़ाई में इजराइली सेना के चार सैनिकों के मारे जाने के बाद इजराइल रक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने लेबनान को ‘जलाने’ का आह्वान किया है। बेन-ग्विर ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि अमरीकियों के प्रति पूरे सम्मान के साथ, इजराइल को पूरी दुनिया के सामने यह साफ कर देना […] The post 4 सैनिकों की मौत के बाद इजराइल के रक्षा मंत्री बेन-ग्विर ने पूरे लेबनान को जलाने की बात कही appeared first on Sabguru News .
'हैट्रिक... आत्मघाती गोल और रेड कार्ड।' ये सब कनाडा और कतर मैच में देखने को मिला, जिसमें कनाडा ने फुटबॉल वर्ल्ड कप में अपनी पहली जीत हासिल की। टीम ने होम फैंस के सामने कतर को 6-0 के बड़े अंतर से हराया। वैंकूवर के BC पैलेस में शुक्रवार सुबह मिली इस जीत के हीरो जोनाथन डेविड रहे। 26 साल के युवा स्टार ने मैच के इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में नाथन सालिबा के पास को हल्के टच से कंट्रोल किया, फिर जोरदार किक लगाकर बॉल को गोल पोस्ट में धकेल दिया। इसी के साथ उन्होंने वर्ल्ड कप में अपनी पहली हैट्रिक पूरी की। वे सुपीरियर प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए। जोनाथन डेविड की हैट्रिक में खास साइल लारिन के गोल से कनाडा को बढ़त कनाडा को 16वें मिनट में साइल लारिन के गोल से बढ़त मिली। फिर जोनाथन डेविड ने 29वें मिनट में गोल दागा। उन्होंने पहले हाफ के इंजरी टाइम के तीसरे मिनट में गोलकर स्कोर 3-0 कर दिया। कतर के 2 प्लेयर्स को रेड कार्ड कतर को आखिरी 49 मिनट 9 प्लेयर्स से खेलना पड़ा मादीबो को रेड कार्ड मिलने के बाद कतर की मुश्किलें बढ़ गईं। टीम को आखिरी 49 मिनट 9 प्लेयर्स के साथ खेलना पड़ा। इसी कारण वह कनाडा के हमलों का सामना नहीं कर सकी। सालिबा का फ्री-किक पर गोल, मनाई का आत्मघाती गोल नाथन सालिबा ने 64वें मिनट में फ्री-किक से गोल किया। 75वें मिनट में मोहम्मद मनाई के आत्मघाती गोल से कनाडा की बढ़त 5-0 हो गई। इंजरी टाइम में डेविड ने तीसरा गोल कर हैट्रिक पूरी की और टीम की 6-0 की ऐतिहासिक जीत तय की। साइल लारिन बोले- कनाडा ने दुनिया को अपना दम दिखाया कनाडा के स्ट्राइकर साइल लारिन ने कहा- 'हमने दुनिया को दिखा दिया कि कनाडा क्या है। हमारे कई खिलाड़ी लगभग गुमनामी से आए हैं, लेकिन हमने अपना जज्बा और लड़ने की क्षमता दिखाई। हमने साबित किया कि हम विश्व मंच पर प्रदर्शन कर सकते हैं।' 'यह तो सिर्फ शुरुआत है। इस्माइल कोए की चोट दुखद है और भावुक करने वाली भी, लेकिन हम मैदान पर लौटे और अपना काम पूरा किया। कोने हमारे दिमाग में रहेंगे और हम उनके लिए भी खेलेंगे।' मैच 26: स्विट्जरलैंड Vs बोस्निया, स्कोरलाइन 4-1 मंजाम्बी के डबल गोल से जीता स्विट्जरलैंड स्विट्जरलैंड ने बोस्निया-हर्जेगोविना को 4-1 से हराकर ग्रुप-बी में स्थिति मजबूत कर ली। इंगलवुड में दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष हुआ। दूसरे हाफ में जोहान मंजाम्बी के डबल गोल ने स्विस टीम को बढ़त दिलाई। बोस्निया को आखिरी में 10 प्लेयर्स के साथ खेलना पड़ा, क्योंकि तारिक मुहरेमोविच को खतरनाक टैकल के लिए रेड कार्ड मिला। LA स्टेडियम में 19 जून के मुकाबले में मंजाम्बी 71वें मिनट में सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर आए और 74वें मिनट में शानदार वॉली से स्विट्जरलैंड को बढ़त दिलाई। 84वें मिनट में रुबिन वर्गास के गोल से बढ़त दोगुनी हो गई। 90वें मिनट में मंजाम्बी ने दूसरा गोल किया, जबकि इंजरी टाइम में कप्तान ग्रेनिट झाका ने पेनल्टी को गोल में बदलकर स्कोर 4-0 कर दिया। बोस्निया के लिए एरमिन माहमिक ने अंतिम क्षणों में एक गोल कर हार का अंतर कम किया, लेकिन टीम को 4-1 से हार झेलनी पड़ी। इस जीत के साथ स्विट्जरलैंड ने कतर के खिलाफ पहले मैच की निराशा पीछे छोड़कर नॉकआउट चरण की ओर मजबूत कदम बढ़ाया है।
कैडेटों ने सीखे युद्ध कौशल व मैप रीडिंग के गुर
भास्कर न्यूज | यमुनानगर 14 हरियाणा बटालियन एनसीसी द्वारा सरस्वती विद्या मंदिर जगाधरी में आयोजित अम्बाला ग्रुप थल सैनिक कैंप-सह-संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर के सातवें दिन कैडेटों को अनुशासन, सैन्य कौशल और सामाजिक जागरूकता का पाठ पढ़ाया गया। कमांडिंग ऑफिसर कर्नल पंकज पारीक के नेतृत्व और लेफ्टिनेंट कर्नल कुमुद मैनी के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। दिन की शुरुआत नशा मुक्त हरियाणा विषय पर एक प्रेरणादायक व्याख्यान के साथ हुई। मुख्य वक्ता डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने कैडेटों को संबोधित करते हुए नशे के घातक परिणामों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि नशा न केवल व्यक्ति, बल्कि परिवार और समाज के लिए भी एक अभिशाप है। उन्होंने युवाओं से नशा मुक्त हरियाणा अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने और अपने आसपास के क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। प्रशिक्षण शिविर में हवलदार अरविंद ने फील्ड क्राफ्ट एवं बैटल क्राफ्ट के गुर सिखाए। कैडेटों को युद्ध क्षेत्र की बारीकियां, जैसे कि छलावरण (कैमूफ्लाज एंड कंसीलमेंट), सही तरीके से छिपने की तकनीक, फील्ड मूवमेंट और सैन्य अभियानों के दौरान व्यक्तिगत सुरक्षा के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई। इस सत्र से कैडेटों में सतर्कता और टीम भावना का विकास हुआ।
अलकतरा महंगा, बालू गायब:स्टॉक में बालू, रॉयल्टी चालान ने रोका शहर की 60 सड़क-नाली का निर्माण
राजधानी के विकास में अलकतरा की बढ़ती कीमत और बालू की किल्लत ने ग्रहण लगा दिया है। मानसून शुरू होने से पहले शहर के गली-मुहल्लों की सड़कों और नालियों का निर्माण किया जाना था, लेकिन कई स्थानों पर काम शुरू ही नहीं हुआ। क्योंकि एनजीटी की रोक के बाद रॉयल्टी चालान मिलना बंद हो गया, जिससे बालू नहीं मिल रहा है और काम अधूरे छोड़ दिए गए हैं। खान विभाग ने मानसून से पहले राज्य में 3 करोड़ सीएफटी बालू का स्टॉक रखने का दावा किया था, लेकिन सच्चाई यह है कि बालू नहीं मिलने की वजह से शहर के 53 वार्डों में 60 सड़कों और नालियों का काम ठप पड़ गया है। दूसरी ओर अलकतरा की बढ़ती कीमत ने कांट्रेक्टरों के होश उड़ा दिए हैं। क्योंकि मिडिल ईस्ट के तनाव की वजह से अलकतरा की कीमत में करीब 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है। पहले 156 किलो के एक ड्रम अलकतरा की कीमत 10,500 रुपए थी, लेकिन अब 17 से 18 हजार रुपए में मिल रहा है। इसके बावजूद कांट्रेक्टर महंगा अलकतरा खरीद कर काम करने को विवश हैं। क्योंकि नगर निगम के इंजीनियर मानसून में काम बंद होने का हवाला देकर कांट्रेक्टरों पर दबाव बना रहे हैं। कांट्रेक्टर इस मामले की जानकारी नगर आयुक्त को देंगे। मुहल्लेवासियों को जर्जर सड़क-बदहाल नालियों से नहीं मिलेगी निजात हिंदपीढ़ी नाला रोड में सड़क के बीच में 2850 फीट लंबी नाली और दो गलियों में 2200-2200 फीट लंबी छोटी नाली का निर्माण चल रहा था। यहां 600 फीट लंबा पीसीसी रोड का भी निर्माण होना है। करीब 5 करोड़ रुपए की यह योजना है। पिछले वर्ष मानसून में बारिश की वजह से काम नहीं हुआ था। इसके बाद से अब तक मात्र 50 प्रतिशत नाली बनी है। अब बालू का रॉयल्टी चालान नहीं होने की वजह से ठेकेदार ने काम बंद कर दिया है। ऐसे में इस बार भी बारिश में नाला रोड के लोगों को भारी जलजमाव का सामना करना पड़ेगा। पीसीसी सड़क का टेंडर हुआ, काम शुरू नहीं वार्ड नंबर 34 में राजू महतो के घर तक पीसीसी सड़क का निर्माण होना है। करीब 11.82 लाख रुपए से सड़क बननी है। इसका टेंडर पिछले माह हो गया, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ। जबकि 90 दिनों के अंदर काम किया जाना है। बालू की किल्लत से काम शुरू नहीं हुआ है। नामकुम के जोरार में इस वर्ष भी नहीं बनी नाली वार्ड नंबर 47 के नामकुम जोरार स्थित सांई नगर में नाली बनाने के लिए 23 मई को ही टेंडर किया गया है। करीब 21.73 लाख रुपए की लागत से आरसीसी ड्रेन और स्लैब बनना है। लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ। इस क्षेत्र के लोग पिछले दो साल से जलजमाव से परेशान हैं। रॉयल्टी चालान अनिवार्य होने से फंसे ठेकेदार : सरकार ने निर्माण कार्यों से जुड़े कांट्रेक्टरों के लिए बालू, मिट्टी और गिट्टी के लिए रॉयल्टी चालान अनिवार्य कर दिया है। पहले चालान नहीं देने पर रॉयल्टी मद का पैसा पेनाल्टी के साथ काटकर ठेकेदारों को भुगतान किया जाता था। लेकिन अब चालान अनिवार्य होने से ठेकेदार फंस गए हैं। क्योंकि एनजीटी की रोक लगने के बाद बालू का चालान लेना मुश्किल हो गया है। गिट्टी का भी क्रशर संचालक चालान देने में दिक्कत करते हैं। बालू नहीं मिल रहा, चालान कहां से देंगे एनजीटी की रोक की वजह से बालू मिलना मुश्किल हो गया है। रॉयल्टी चालान भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में निगम में ठेकेदारों का पेमेंट भी फंस रहा है। निर्माण सामग्री और चालान उपलब्ध होगा, तभी काम हो पाएगा। अन्यथा मानसून तक काम बंद करना ही होगा। - रणधीर सिंह, सचिव, नगर निगम संवेदक संघ बारिश से पहले काम में तेजी का निर्देश दिया है बारिश से पहले जो योजना अधूरी है, उसे हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया गया है। ठेकेदारों को अगर परेशानी आ रही है तो अधिकारियों को समन्वय स्थापित करके उनकी समस्याओं का समाधान भी करना चाहिए, ताकि विकास योजनाओं में तेजी आ सके। जल्द ही इसकी समीक्षा करूंगी। - रोशनी खलखो, मेयर
उत्तराखंड पुलिस की कार्रवाई को एकतरफा, दोषी पुलिस अधिकारियों पर हो कार्रवाई
भास्कर न्यूज | अमृतसर श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने उत्तराखंड में सिख युवाओं को हो रही परेशानी का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से श्री हेमकुंट साहिब की तीर्थ यात्रा पर जाने वाले सिख संगत की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। जत्थेदार ने गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के प्रतिनिधियों को फटकार लगाते हुए कहा कि सिखों से हथियार छोड़कर तीर्थ यात्रा पर आने के लिए कहना दुर्भाग्यपूर्ण है। जल्द ही गुरुद्वारा ट्रस्ट के प्रतिनिधियों से इसका जवाब मांगा जाएगा। उन्होंने कहा कि श्री हेमकुंट साहिब गुरुद्वारा ट्रस्ट के प्रतिनिधियों की यह पहली जिम्मेदारी है कि उत्तराखंड सरकार से बात करें और यह सुनिश्चित करें कि यात्रा शुरू होने से पहले रास्ते में किसी भी सिख तीर्थयात्री को स्थानीय लोग धक्केशाही न करें। हाल ही में कर्णप्रयाग में हुई घटना के बारे में जत्थेदार गड़गज्ज ने उत्तराखंड पुलिस की कार्रवाई को एकतरफा बताया। जिस तरह एक आम रास्ते के झगड़े के मामले में सिख युवकों पर सख्त धाराओं के तहत केस करके उन्हें सरेआम घुमाया गया, हिरासत में टॉर्चर, मारपीट और पगड़ी उतारने की सजा दी गई, उसी तरह इस मामले की भी हाई लेवल जांच होनी चाहिए और सिखों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। जानकारी के अनुसार, स्थानीय लोगों ने पहले सिख युवकों पर हाथ उठाया था, जिसके बाद सिखों ने अपनी सुरक्षा के लिए कृपाण का इस्तेमाल किया। जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी पहले ऐसी घटनाएं हुई हैं, लेकिन पंजाब सरकार ने सिखों के हक के लिए कोई कदम नहीं उठाया। उन्हें पता है कि पंजाब सरकार इन मामलों में सिखों का साथ नहीं देगी, इसलिए सिख अब ऐसे मामलों से खुद निपटेंगे।
खतरे में युद्धविराम! ट्रंप की चेतावनी के बावजूद लेबनान में इजराइली हमले जारी
Israel Lebanon Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बावजूद इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लेबनान पर हमले जारी रखे हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इजराइली सेना ने बुधवार को दक्षिणी लेबनान में नए हमले किए, जबकि अमेरिकी ...
ईरान युद्ध के लक्ष्यों में डॉनल्ड ट्रंप को क्या हासिल हुआ
ईरान में प्रदर्शन कर रहे लोगों का उत्साह बढ़ाते डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले के कुछ लक्ष्य तय किए थे. शुरुआती समझौता हो जाने के बाद सवाल पूछे जा रहे हैं कि उन लक्ष्यों में से कितना कुछ हासिल हुआ
ईरान युद्ध के लक्ष्यों में डोनाल्ड ट्रंप को क्या हासिल हुआ
ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमला शुरू करने के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके कुछ उद्देश्य तय किए थे। इनमें ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को ध्वस्त करना और यह सुनिश्चित करना शामिल था कि यह देश कभी परमाणु हथियार ना बना सके। ...
Top News 18 June : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान के डील साइन करते ही अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी से जारी युद्ध खत्म हो गया। कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट। फ्रांस में ट्रंप ने पीएम मोदी से वादा किया कि भारत पर ...
अमेरिका-ईरान में ऐतिहासिक शांति समझौता, युद्ध खत्म होते ही कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट
US Iran Peace Deal : अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते (MoU) पर दस्तखत हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन ...
अजमेर की दरगाह थाना पुलिस ने भीड़भाड़ वाले इलाकों में मोबाइल चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाली एक शातिर गैंग का पर्दाफाश करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से करीब 18 लाख रुपए कीमत के 42 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। आरोपियों के खिलाफ विभिन्न थानों में पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। जिला पुलिस अधीक्षक उमा यादव के निर्देश पर चोरी, नकबजनी और लूट की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। दरगाह थाना प्रभारी दिनेश कुमार जीवनानी के नेतृत्व में गठित टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया। थाना प्रभारी दिनेश जीवनानी ने बताया कि 16 जून को दरगाह क्षेत्र में मोबाइल चोरी की वारदातों की जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की मदद से सात आरोपियों को चिन्हित किया गया। पुलिस ने दबिश देकर सभी को गिरफ्तार कर लिया और उनके कब्जे से विभिन्न कंपनियों के 42 चोरी के मोबाइल फोन बरामद किए। ये आरोपी हुए गिरफ्तार भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में करते वारदात पुलिस के अनुसार, आरोपी भीड़भाड़ वाले स्थानों, धार्मिक आयोजनों और बाजारों में लोगों की जेब और बैग से मोबाइल चोरी कर फरार हो जाते थे। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनसे गैंग के अन्य सदस्यों तथा चोरी के मोबाइलों की खरीद-फरोख्त से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस को और मोबाइल बरामद होने की भी संभावना है। कई मामलों में पहले भी जा चुके हैं जेल पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ दरगाह, क्लॉक टावर सहित अन्य थानों में चोरी, एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट और आबकारी अधिनियम के तहत कई मामले दर्ज हैं। कुछ आरोपियों को पूर्व में सजा भी हो चुकी है।
जी7 के देशों का ध्यान अब यूक्रेन युद्ध रोकने पर
फ्रांस में जी7 की बैठक से दुनिया के ताकतवर देशों के नेताओं ने यूक्रेन युद्ध की ओर ध्यान बढ़ाने के संकेत दिए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस को समझौता कर लेना चाहिए
फीफा वर्ल्ड कप में बुधवार को I ग्रुप के दो मैच खेले गए। पहले मैच में फ्रांस ने अपने ओपनिंग मैच में सेनेगल को 3-1 से हराया। न्यू जर्सी में खेले गए मुकाबले में स्टार फॉरवर्ड किलियन एम्बापे ने दो गोल दागे और फ्रांस के इतिहास के सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए। उन्होंने पूर्व स्ट्राइकर ओलिवियर गिरूड का रिकॉर्ड तोड़ा। फ्रांस के लिए ब्रेडली बारकोला ने भी एक गोल किया, जबकि सेनेगल का एकमात्र गोल इब्राहिम म्बाए ने दागा। वहीं, इस ग्रुप के खेले गए दूसरे मुकाबले में नॉर्वे ने इराक को 4-1 से हराया। पहले हाफ में कोई गोल नहीं, दूसरे में 4 गोलमैच का पहला हाफ गोलरहित रहा, लेकिन दूसरे हाफ में एम्बापे ने फ्रांस को बढ़त दिलाई। इसके बाद बारकोला ने स्कोर 2-0 किया। सेनेगल के 18 साल के इब्राहिम म्बाए ने गोल कर अंतर कम किया और वर्ल्ड कप में गोल करने वाले सबसे युवा अफ्रीकी खिलाड़ी बने। हालांकि, इंजरी टाइम में एम्बापे ने गोल कर फ्रांस की जीत पक्की कर दी। एम्बापे के वर्ल्ड कप में 14 गोलएम्बापे के अब वर्ल्ड कप में 14 गोल हो गए हैं। उन्होंने जर्मनी के महान स्ट्राइकर गर्ड मुलर की बराबरी कर ली है और ऑल-टाइम रिकॉर्डधारी मिरोस्लाव क्लोस (16 गोल) से सिर्फ दो गोल पीछे हैं। पहले हाफ में सेनेगल ने फ्रांस को कड़ी टक्कर दी, लेकिन दूसरे हाफ में एम्बापे की चमक के आगे उसकी चुनौती फीकी पड़ गई। पेनल्टी को लेकर विवाद, VAR के बाद भी नहीं मिला मौकामैच के दौरान एक बड़ा विवाद देखने को मिला। दूसरे हाफ में फ्रांस ने पेनल्टी की अपील की, जिसके बाद मामला VAR तक पहुंचा। हालांकि, वीडियो रीप्ले देखने के बाद भी रेफरी ने अपना फैसला नहीं बदला और फ्रांस को पेनल्टी नहीं दी। इस विवादित फैसले के कुछ ही मिनट बाद किलियन एम्बापे ने गोल कर फ्रांस को बढ़त दिला दी। पहले हाफ में सेनेगल के पास बढ़त का मौका, सार से हुई चूकपहले हाफ में गोल करने का सबसे अच्छा मौका सेनेगल के इस्माइला सार को मिला था। हाफ-टाइम से ठीक पहले उन्हें नजदीक से गोल करने का मौका मिला, लेकिन उनका शॉट क्रॉसबार के ऊपर चला गया। इस तरह सेनेगल बढ़त हासिल करने से चूक गया। हालांकि, दूसरे हाफ में इब्राहिम म्बाए ने टीम के लिए एक गोल जरूर किया। 2002 की हार का हिसाब बराबर, फ्रांस ने सेनेगल को हराया साल 2002 के वर्ल्ड कप के उद्घाटन मैच में सेनेगल ने डिफेंडिंग चैंपियन फ्रांस को 1-0 से हराकर बड़ा उलटफेर किया था। उस हार के बाद फ्रांस टीम ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई थी और एक भी मैच नहीं जीत सकी थी। हालांकि, इस बार फ्रांस ने सेनेगल को 3-1 से हराकर उस हार का हिसाब बराबर कर लिया। फ्रांस ने इसके बाद 2018 और 2022 वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बनाई थी, जिसमें 2018 में टीम चैंपियन भी बनी थी। ---------------------------- नॉर्वे की 28 साल बाद टूर्नामेंट में की जीत के साथ वापसी स्ट्राइकर एर्लिंग हालैंड के शानदार दो गोल की बदौलत नॉर्वे ने अपने फीफा वर्ल्ड कप ओपनिंग मैच में इराक को 4-1 से हरा दिया है। बुधवार के इस मुकाबले में नॉर्वे ने टूर्नामेंट में जीत के साथ अपनी वापसी दर्ज की। नॉर्वे की टीम पूरे 28 साल बाद इस टूर्नामेंट में खेल रही है। मैच में हालैंड के डबल गोल के अलावा लियो ओस्टिगार्ड ने एक गोल किया, जबकि इराक के आयमेन हुसैन के आत्मघाती (ओन) गोल से नॉर्वे की बड़ी जीत पक्की हो गई। पहले हाफ में इराक ने दी टक्कर, हालैंड के दो गोल ने बनाई बढ़तमैच के पहले हाफ में दोनों टीमों के बीच अच्छी टक्कर देखने को मिली। स्टार फॉरवर्ड एर्लिंग हालैंड ने गोल करके नॉर्वे को शुरुआती बढ़त दिलाई, लेकिन इराक के आयमेन हुसैन ने जल्द ही गोल दागकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। हालांकि, हालैंड ने हाफ-टाइम से ठीक पहले अपना दूसरा गोल दागकर नॉर्वे को मैच में दोबारा आगे कर दिया। इसके बाद दूसरे हाफ में लियो ओस्टिगार्ड ने टीम के लिए तीसरा गोल किया। मैच के आखिरी पलों में इराक के आयमेन हुसैन से एक मिस्टेक हुई और उनकी तरफ से हुए ओन गोल ने नॉर्वे को 4-1 की एकतरफा जीत दिला दी। 1998 के बाद पहली बार वर्ल्ड कप खेल रहा है नॉर्वेनॉर्वे के फुटबॉल इतिहास के लिहाज से यह मैच बेहद खास था। टीम ने आखिरी बार साल 1998 में वर्ल्ड कप के फाइनल्स में हिस्सा लिया था। पूरे 28 साल के लंबे इंतजार के बाद नॉर्वे ने ग्लोबल फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर वापसी की है। इस कमबैक को यादगार बनाने में स्ट्राइकर एर्लिंग हालैंड के गोल और मिडफील्ड में कप्तान मार्टिन ओडेगार्ड के बेहतरीन खेल का सबसे बड़ा योगदान रहा। नॉर्वे का डिफेंस पड़ा भारीइराक की टीम इस मुकाबले में अपने अनुभवी खिलाड़ियों और यूरोप में खेल रहे युवा टैलेंट्स के बेहतरीन तालमेल के साथ उतरी थी। इराकी टीम में अली अल-हमादी, आयमेन हुसैन, जिदान इकबाल, आमिर अल-अम्मारी और अली जासिम जैसे मजबूत नाम शामिल थे। दूसरी ओर, नॉर्वे के पास एंटोनियो नुसा और ऑस्कर बॉब जैसे डायनामिक विंगर्स के साथ जूलियन रयर्सन जैसे भरोसेमंद डिफेंडर थे, जिन्होंने इराक के अटैक को ज्यादा मौके नहीं दिए और मैच में नॉर्वे का पलड़ा भारी रखा।
हल्दीघाटी का युद्ध देशभक्ति का एक जीता-जागता प्रतीक है : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि मेवाड़ की पवित्र धरती ने पूरी दुनिया को साहस, वीरता और स्वाभिमान का संदेश दिया है।
दुनिया में जब जब युद्ध होते हैं एक सवाल ज़रूर उभरता है कि युद्ध से क्या हासिल। फिर यह कहा जाता है कि युद्ध से कुछ हासिल नहीं होता लेकिन फिर भी दुनिया के सबसे ताक़तवर देश सालों तक युद्ध लड़ते रहते हैं। युद्ध करवाने वाले ताकतवर नेता कुछ तो हासिल करते ही होंगे। दर्जनों देशों के प्रभावशाली, प्रशासक, मंत्री अपने अपने तरीकों और चुने हुए शब्दों में समझाते रहते हैं कि युद्ध से बहुत नुकसान हो रहा है, दुनिया की आर्थिक स्थिति परेशान होकर उलझी पड़ी है, हज़ारों मौतें हो चुकी हैं लेकिन युद्ध है कि जारी रखा जाता है। रूस युक्रेन युद्ध इसकी सबसे बड़ी मिसाल है। दूसरी मिसाल है, अमरीका इजराइल ईरान की लड़ाई जिसके सौंवे दिवस के अशुभ अवसर पर अमरीका और ईरान ने एक दूसरे पर हमले किए। मानो या न मानो युद्ध से कुछ तो हासिल हो रहा है। युद्ध विराम और शांति बातचीत की राख के नीचे शोले बुझते ही नहीं, माहौल में तनाव उबलता रहता है युद्ध के ड्रोन मंडराते रहते हैं। युद्ध का सबसे बड़ा हासिल व्याव्सायिक फायदा है। खालिस व्यवसायी राष्ट्रपति, अपना नुक्सान ज़्यादा नहीं होने देंगे, दूसरों का बेड़ा गर्क करवा देंगे। उनके हिसाब से युद्ध भी एक सौदा है। उनकी हर चाल ऐसा दिखाती है। कुछ भी सोच सकते हैं। बड़ा सोचना, ज्यादा मांगना उनकी व्यावसायिक शैली में शामिल है। ज़्यादा मांगेंगे तो ज्यादा मिलेगा, कम मांगोगे तो कम ही मिलने वाला है। उन्हें खुद को खबर बनाना आता है। चर्चा में बनाए रखना आता है। वे व्याव्सायिक राजनीतिज्ञों की तरह परिस्थितियों के सभी दरवाज़े खुले रखते हैं। खूब शोर करते हैं और दूसरों को डराते रहते हैं। कहकर मुकर जाते हैं। जैसा बंदा वैसी डील करने को तत्पर रहते हैं। अब तो वैसे भी हर चीज़ में व्यापार और बाज़ार मिला दिया गया है। बड़ा दांव ज्यादा खतरा लेकिन फायदा भी उसी अनुपात में। आम लोग ही तो मरते हैं, घायल हो जाते हैं, विस्थापित होते हैं। ईमारतें और हथियार तबाह होते रहते हैं फिर नए बनाने के लिए मरम्मत के लिए, उद्योग क्षेत्र को काम मिलता है। कुछ भी हो जाए व्यवसाय फैलता रहता है। महंगाई का कर्तव्य तो हमेशा बढ़ते जाना है। इसे भी पढ़ें: विश्वगुरु न होते हुए (व्यंग्य) अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं हारकर उदास बैठी हैं। युद्ध जारी रखने वाले अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधकों को यह संतुष्टि रहती है कि युद्ध निरंतर है। उन्हें अनिश्चितताओं से घिरी दुनिया से क्या लेना। धार्मिक कट्टरता शत्रुता बढ़े तो बढ़े। राजनीति को तो यह सब फैलाकर ही रखना होता है। कितने ही अनुभवी, यशस्वी नेताओं की सामरिक शक्ति, रुआब और प्रभाव की पोल खुलती जाती है लेकिन युद्ध से उनकी नाक ऊंची रहती है। स्वार्थ पूरा होता है और नकली इज्ज़त बनी रहती है। जो शांति स्थापित करने के लिए युद्ध जारी रखते हैं इतिहास उन्हें भूलता नहीं। क्या फर्क पड़ता है अगर युद्ध के कारण याद रखता है। अगर युद्ध से फायदा न हो तो कई तरह का नुक्सान करने वाले इस खतरनाक काम को कौन महीनों तक करता रहेगा। हर व्यवसाय में छिपे हुए फायदे होते हैं जिनका किसी को भी पता नहीं चलता सिर्फ उन्हें पता होता है जो उनके मालिक होते हैं। युद्ध एक व्यवसाय ही तो है जिसका हासिल, ख़ास लोगों को होने वाला किसी न किसी तरह का अशुभ लाभ है। - संतोष उत्सुक
अमर स्वाभिमान का प्रतीक हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष
Battle of Haldighati: 18 जून भारतीय इतिहास की वह अमर तिथि है, जो केवल एक युद्ध का स्मरण नहीं कराती बल्कि त्याग, स्वाभिमान, साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण की गाथा सुनाती है। यह वह दिन है जब मेवाड़ की धरती पर एक ऐसा संघर्ष हुआ, जिसने इतिहास के ...
भास्कर एक्सपर्ट टीम भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक, 18 जून 1576 को लड़े गए हल्दीघाटी युद्ध के परिणामों को लेकर नए शोध, पुरातात्विक साक्ष्यों और स्वयं मुगल स्रोतों के विश्लेषण के बाद नया अकादमिक पुनर्मूल्यांकन सामने आया है। इसके अनुसार, हल्दीघाटी के इस महायुद्ध में मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप एक स्पष्ट सामरिक विजेता के रूप में उभरे थे। इन्हीं स्थापित तथ्यों के आधार पर 17 जून, बुधवार को गांधी ग्राउंड में कार्यक्रम होगा, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत मौजूद रहेंगे। उस दौर की कृतियां भी मुगलों की रणनीतिक विफलता का प्रमाण यदि मुगलकालीन कृतियों का विश्लेषण करें तो युद्ध में मुगल सेना की रणनीतिक विफलता स्वतः स्पष्ट हो जाती है। युद्ध के तुरंत बाद जारी किए गए थे जमीनों के पट्टे राजनीतिक इतिहास और संप्रभुता का यह सार्वभौमिक सिद्धांत है कि भूमि और राजस्व पर अधिकार केवल उसी राजा का हो सकता है जिसका उस क्षेत्र पर प्रशासनिक नियंत्रण हो। समकालीन शिलालेखों में दर्ज है प्रताप की विजय {जगन्नाथ राय प्रशस्ति (विक्रम संवत 1708) : जगदीश मंदिर में स्थापित इस प्रशस्ति के श्लोक संख्या 41 में दर्ज है कि प्रतापसिंह के रणभूमि में उतरते ही मानसिंह से युक्त शत्रु सेना पीछे हट गई थी। {सुरपणखेड़ा (सूरखंड) शिलालेख (विक्रम संवत 1642) : इसमें स्पष्ट उल्लेख है कि महाराणा प्रतापसिंह ने मानसिंह के साथ भीषण युद्ध किया, जिसमें महाराणा प्रताप विजयी हुए। {राजप्रशस्ति व अमरकाव्यम : राजसमंद झील के तट पर उत्कीर्ण संसार के सबसे बड़े शिलालेखीय इतिहास ‘राजप्रशस्ति महाकाव्यम’ और समकालीन संस्कृत पांडुलिपि अमरकाव्य वंशावली के अनुसार राजपूतों के प्रहार से मुगल सेना के पैर उखड़ गए थे। {वैद्यनाथ मंदिर प्रशस्ति : सीसारमा की इस प्रशस्ति (श्लोक 34-35) में भी महाराणा प्रताप के प्रभाव का उल्लेख है। {बदायूंनी का विवरण : युद्ध में मुगल सेना की तरफ से शामिल प्रत्यक्षदर्शी बदायूंनी ने अपनी पुस्तक मुंतखब-उत-तवारीख में लिखा है कि राजपूतों के पहले हमले ने मुगल सेना को पीछे धकेल दिया था। बाद में गोगुन्दा पहुंचकर मुगलों ने सुरक्षा के लिए चारों तरफ गहरी खाई और दीवारें बनवाईं। { रसद आपूर्ति ठप होना : महाराणा प्रताप ने भील योद्धाओं की सहायता से मेवाड़ के सभी पहाड़ी रास्तों को अवरुद्ध कर दिया था। इस नाकेबंदी के कारण गोगुन्दा में फंसी शाही सेना के लिए खाद्य सामग्री की आपूर्ति ठप हो गई। { अकबर ने बंद की थी सेनापतियों की ड्योढ़ी : महाराणा प्रताप को बंदी बनाने या मेवाड़ पर पूर्ण अधिकार करने में मानसिंह और आसफ खान पूरी तरह विफल रहे। अकबरनामा में दर्ज है कि इस विफलता से नाराज होकर बादशाह अकबर ने दोनों सेनापतियों की ड्योढ़ी बंद कर दी थी यानी शाही दरबार में आने पर प्रतिबंध लगा दिया था। ताम्रपत्र और पट्टे : हल्दीघाटी युद्ध के ठीक बाद (सन 1576 के उत्तरार्ध में) महाराणा प्रताप ने युद्ध क्षेत्र के ठीक बगल में स्थित बलीचा गाँव के किसानों को भूमि अनुदान जारी किए थे। लोहासिंह ताम्रपत्र : युद्ध के बाद (1576-1577 ई.) महाराणा प्रताप द्वारा आसपास के गांवों में ‘लोहासिंह ताम्रपत्र’ और भूमि सुधार संबंधी प्रशासनिक आदेश जारी किए गए। इन पर एकलिंगनाथ दीवान के रूप में उनके प्राधिकृत हस्ताक्षर अंकित थे, जो उनके प्रभावी प्रशासनिक ढांचे को सिद्ध करते हैं। प्रो. बी.पी. शर्मा, पूर्व कुलपति व अध्यक्ष, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति डॉ. सुदर्शन सिंह राठौड़, आचार्य-इतिहास विभाग, राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय डॉ. मनीष श्रीमाली, सहायक आचार्य-इतिहास विभाग, सुविवि, उदयपुर
लालू प्रसाद के शासनकाल के दौरान हुए 1997 के अलकतरा घोटाले से जुड़े एक मामले में सोमवार को पटना स्थित सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुनाया। इस मामले में फैसला सीबीआई-2 के न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम ने सुनाया है। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में तीन जूनियर इंजीनियर (जेई) को बरी कर दिया, जबकि एक ट्रांसपोर्टर को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष की सजा और 15 लाख रुपये जुर्माना लगाया। किन लोगों पर चल रहा था ट्रायल इस मामले में चार आरोपी ट्रायल फेस कर रहे थे। इनमें तीन जूनियर इंजीनियर और एक ट्रांसपोर्टर शामिल थे। जिसमें जयनारायण प्रसाद (जूनियर इंजीनियर), हामिद राज अंसारी (जूनियर इंजीनियर), एक अन्य जूनियर इंजीनियर, ट्रांसपोर्टर दूधेश्वर नाथ सिंह, ट्रायल के दौरान दो अन्य अभियुक्तों की मौत हो चुकी थी। क्या था मामला जयनारायण प्रसाद की ओर से 1997 से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद जी वर्मा के अनुसार, आरोप था कि 7 अगस्त 1994 के ऑर्डर संख्या 5501 के तहत 1000 मीट्रिक टन बिटुमन (अलकतरा) की आपूर्ति जहानाबाद डिवीजन में की जानी थी। इसके लिए हल्दिया से बरौनी होते हुए अलकतरा भेजा जाना था। मामले में 1053.92 मीट्रिक टन अलकतरा का उठाव किया गया था। आरोप था कि अलकतरा हल्दिया से उठाया तो गया, लेकिन उसे जहानाबाद नहीं भेजा गया और बीच में ही गड़बड़ी कर दी गई। कब दर्ज हुई थी एफआईआर मामले में एफआईआर 6 मार्च 1997 को दर्ज की गई थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने 20 फरवरी 1997 को मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। बाद में छह लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। कोर्ट ने क्या कहा सीबीआई-2 पटना सिविल कोर्ट ने माना कि तीनों जूनियर इंजीनियरों के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। इसके चलते तीनों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। वहीं ट्रांसपोर्टर दूधेश्वर नाथ सिंह को दोषी पाया गया। कोर्ट ने उन्हें तीन वर्ष की सजा सुनाई और 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती और हल्दीघाटी युद्ध विजय के 450वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में जयपुर में ‘हल्दीघाटी विजय स्मृति शिल्प प्रदर्शनी’ की शुरुआत हुई। इसका उद्घाटन राज्यपाल हरिभाऊ किशन राव बागड़े ने किया। प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए राज्यपाल बागड़े ने कहा- महान इतिहास सदैव समाज को ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करता है। हल्दीघाटी का युद्ध केवल एक संघर्ष नहीं, बल्कि स्वाभिमान, स्वतंत्रता और राष्ट्र गौरव का प्रतीक है। अंग्रेजों ने भारतीय इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को भुलाने का प्रयास किया, लेकिन हमारे वीरों की गाथाएं आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित कर रही हैं। मानसरोवर स्थित भारती शिल्पकला स्टूडियो में प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में महाराणा प्रताप और मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास से जुड़े योद्धाओं, वीरांगनाओं एवं ऐतिहासिक विभूतियों की प्रतिमाओं का दुर्लभ संग्रह प्रदर्शित किया गया है। राज्यपाल ने महाराणा प्रताप की हाथी पर सवार प्रतिमा, चेतक पर सवार प्रताप की भव्य मूर्तियों और हल्दीघाटी युद्ध से जुड़ी शिल्पाकृतियों का अवलोकन किया। मेवाड़ की भूमि सदैव वीरों की भूमि रही है, जिसने कभी भी मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की। उन्होंने बप्पा रावल के पराक्रम का उल्लेख करते हुए कहा- विदेशी आक्रांताओं को भारत से खदेड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। राज्यपाल ने कहा- अकबरनामा दरबारी इतिहास था, जबकि भारतीय इतिहास में अनेक वीरों और वीरांगनाओं के योगदान को पर्याप्त स्थान नहीं मिला। ऐसे आयोजनों के माध्यम से उन गौरवशाली अध्यायों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। इवेंट की फोटोज यहां देखें… मेवाड़ के स्वर्णिम इतिहास की झलक प्रदर्शनी में 12 इंच से लेकर 15 फीट तक की प्रतिमाएं प्रदर्शित की गई हैं। इनमें चेतक पर सवार महाराणा प्रताप, हाथी पर आरूढ़ महाराणा प्रताप, राणा पूंजा, भामाशाह, हाकिम खान सूरी, पन्ना धाय, भक्त शिरोमणि मीराबाई, महारानी पद्मिनी और राणा सांगा जैसी ऐतिहासिक विभूतियों की आकर्षक मूर्तियां शामिल हैं। इन प्रतिमाओं के माध्यम से न केवल हल्दीघाटी युद्ध की स्मृतियों को जीवंत किया गया है, बल्कि मेवाड़ की उस गौरवशाली परंपरा को भी सामने लाया गया है जिसने भारतीय इतिहास को नई दिशा दी। 25 वर्षों से महाराणा प्रताप को गढ़ रहे हैं महावीर भारती प्रदर्शनी के आयोजक एवं प्रख्यात मूर्तिकार महावीर भारती ने बताया कि वे पिछले 25 वर्षों से महाराणा प्रताप की प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे हैं। अब तक वे विश्वभर में 600 से अधिक प्रतिमाओं का निर्माण कर चुके हैं। देश के 15 से अधिक राज्यों के साथ-साथ दुबई और मॉरीशस तक स्थापित महाराणा प्रताप की अनेक प्रतिमाएं उनके स्टूडियो में तैयार की गई हैं। यह प्रदर्शनी केवल मूर्तियों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि मेवाड़ के शौर्य, त्याग और बलिदान की अमर गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है। नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा, राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी, विधायक गोपाल शर्मा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संघ चालक डॉ. रमेश अग्रवाल, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ सहित राजनीतिक, सामाजिक और कला जगत की अनेक हस्तियां उपस्थित रहीं।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से राजकीय इंटर कालेज में प्रवक्ता भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा रविवार को लखनऊ सहित कई जनपदों में आयोजित हुई। रूस और यूक्रेन युद्ध के अलावा आयुष्मान आरोग्य व प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के पूछे गए सवाल पूछे गए। सामान्य अध्ययन में तार्किक क्षमता और समसामयिक मुद्दों से जुड़े सवाल पूछे गये। शिक्षा और कृषि क्षेत्र की सरकारी योजनाओं, प्रमुख नियुक्तियां और खेल जगत से जुड़े प्रश्न थे। अधिकांश प्रश्न सीधे रटे-रटाए तथ्यों के बजाय विषय की गहरी समझ पर आधारित थे। परीक्षा में 23951 में 11378 उपस्थित रहे। जबकि करीब 52 फीसदी ने यानी 12573 परीक्षार्थियों ने परीक्षा नहीं दी। कड़ी जांच के बाद मिली एंट्री राजकीय जुबिली इंटर कालेज समेत दूसरे परीक्षा केंद्रों पर सघन तलाशी के बाद परीक्षार्थियों को प्रवेश दिया दिया। हिंदी, संस्कृत, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, भौतिक विज्ञान, उर्दू, गणित, समाजशास्त्र, जीव विज्ञान, अंग्रेजी, नागरिक शास्त्र और रसायन विज्ञान विषयों के शिक्षकों का चयन होगा। सामान्य अध्ययन में तार्किक क्षमता और समसामयिक मुद्दों से जुड़े सवाल पूछे गये। शिक्षा और कृषि क्षेत्र की सरकारी योजनाओं, प्रमुख नियुक्तियां और खेल जगत से जुड़े प्रश्न थे। अधिकांश प्रश्न सीधे रटे-रटाए तथ्यों के बजाय विषय की गहरी समझ पर आधारित थे। अखिलेश ने बताया कि अर्थशास्त्र विषय के सवाली टीजीटी-पीजीटी स्तर के पूछे गए। इसमें सतत विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विभिन्न सरकारी योजनाएं प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना व आयुष्मान आरोग्य योजना के सवाल पूछे गए। अनुराग ने बताया कि जीएस का स्तर सामान्य रहा। जबकि अर्थशास्त्र का खंड अपेक्षाकृत कठिन था। परीक्षा में स्टेटिक्स और करंट एफेयर दोनों प्रकार के प्रश्न शामिल थे। इसके अलावा इजराइल-ईरान और रूस व यूक्रेन युद्ध के सवाल पूछे गए।
पंजाब में भगवंत मान सरकार की ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ मुहिम के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान की स्थायी सफलता केवल नशा तस्करों और सप्लायरों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि इसकी सफलता का आधार रोकथाम, समय पर पहचान, प्रभावी उपचार और परिवारों और समाज द्वारा दिया जाने वाला सहयोग भी है। 1 मार्च 2025 को शुरू की गई ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ मुहिम राज्य की सबसे महत्वपूर्ण नशा-विरोधी पहलों में से एक बन चुकी है। इस अभियान के अंतर्गत जहां एक ओर नशा तस्करों और अवैध नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर नशामुक्ति, पुनर्वास और जन-जागरूकता को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। 90 हजार से अधिक व्यक्तियों का इलाज हुआ पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि रोकथाम और पुनर्वास प्रयासों के तहत 1 मार्च 2025 से मई 2026 तक पंजाब के विभिन्न नशामुक्ति केंद्रों और ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओ ओ ए टी ) केंद्रों में नशे से प्रभावित 90 हजार से अधिक व्यक्तियों को भर्ती कर उनका उपचार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि पंजाब सरकार नशों के खिलाफ केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित लोगों को उपचार और पुनर्वास के माध्यम से सामान्य जीवन में वापस लाने के लिए भी गंभीरतापूर्वक कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में नशों के विरुद्ध कार्रवाई लगातार जारी है, लेकिन ऐसे संवेदनशील व्यक्तियों की पहचान करने में, जिनमें नशे की आदत विकसित होने का खतरा हो, शिक्षकों, अभिभावकों और समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नशे की लत के शुरुआती संकेत अक्सर अनदेखे रह जाते हैं और ये भावनात्मक, व्यवहारिक तथा शारीरिक परिवर्तनों के रूप में दिखाई देते हैं। 'व्यवहारिक और शारीरिक परिवर्तनों को नजरअंदाज न करें' नशे की लत के प्रारंभिक संकेतों में अचानक स्वभाव में परिवर्तन, चिड़चिड़ापन, पढ़ाई या कार्य में ध्यान न लगना, परिवार से दूरी बनाना, अपनी गतिविधियों के बारे में अत्यधिक गोपनीयता रखना, बार-बार पैसों की मांग करना, नए मित्रों का साथ बनना, नींद में गड़बड़ी तथा खेल-कूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में रुचि कम होना शामिल हो सकता है। इसी प्रकार शारीरिक लक्षणों में व्यक्तिगत स्वच्छता की अनदेखी, लगातार थकान महसूस होना, आंखों का लाल होना, अत्यधिक नींद आना, खान-पान की आदतों में बदलाव और बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन में वृद्धि या कमी शामिल हो सकती है। अभियान से जुड़े विशेषज्ञों ने परिवारों को सलाह दी है कि वे ऐसे व्यवहारिक और शारीरिक परिवर्तनों को नजरअंदाज न करें। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों के साथ शांत, संवेदनशील और सहयोगपूर्ण तरीके से संवाद करें तथा उन्हें डांटने या दोष देने के बजाय उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास करें। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों, मनोवैज्ञानिकों या चिकित्सकों की सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए। ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के तहत की गई कार्रवाई और पुनर्वास प्रयासों के परिणामस्वरूप अनेक व्यक्तियों ने सफलतापूर्वक उपचार प्राप्त किया है और अब वे स्वस्थ एवं सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। 'साहस कर लें तो नशे से मुक्ति संभव' अमृतसर के मनप्रीत सिंह (परिवर्तित नाम), जो नशे की लत से उबर चुके हैं, ने कहा, “एक समय ऐसा था जब मैंने स्वयं से उम्मीद छोड़ दी थी। पंजाब सरकार के नशामुक्ति केंद्र ने मुझे जीवन की नई दिशा दी। यहां के स्टाफ ने मेरा सम्मान बनाए रखते हुए पूरी देखभाल के साथ उपचार किया। आज मैं नशों से मुक्त हूं और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहा हूं। मेरा संदेश केवल इतना है कि यदि आप पहला कदम उठाने का साहस कर लें तो नशे से मुक्ति संभव है।” इसी प्रकार तरनतारन जिले के भिखीविंड निवासी खुशबाज़ सिंह (परिवर्तित नाम), जो वर्तमान में सरकारी मेडिकल कॉलेज, अमृतसर के नशामुक्ति केंद्र में भर्ती हैं, ने बताया, “उपचार और काउंसलिंग ने मुझे नशे की लत से बाहर निकलने और सामान्य जीवन में लौटने में सहायता की है। आज मेरा ध्यान अपने परिवार, काम और स्वस्थ भविष्य पर है। यहां का स्टाफ अत्यंत सहयोगी और प्रेरणादायक है।” अभिभावकों के लिए दिशा-निर्देश… 'शुरुआती चेतावनी संकेतों की पहचान करनी होगी' भगवंत मान सरकार का मानना है कि नशे की समस्या से निपटने के 3 प्रमुख स्तंभ हैं। नशामुक्ति, पुनर्वास और काउंसलिंग। ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के माध्यम से सरकार नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर रोक लगाने, नशों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और प्रभावित व्यक्तियों की सफल रिकवरी सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का स्पष्ट मत है कि नशों के खिलाफ लड़ाई केवल कठोर कार्रवाई तक सीमित नहीं रह सकती। परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और समाज को मिलकर शुरुआती चेतावनी संकेतों की पहचान करनी होगी और प्रभावित व्यक्तियों को उपचार, पुनर्वास और पुनर्स्थापन की दिशा में सहयोग देना होगा। अभियान इस बात पर विशेष बल देता है कि नशा तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई के साथ-साथ रोकथाम, उपचार और पुनर्वास के प्रयास भी निरंतर जारी रहने चाहिए, तभी पंजाब को नशों की इस गंभीर समस्या से स्थायी रूप से मुक्त किया जा सकेगा।
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
'वाराणसी' में दिखेगा महायुद्ध, भगवान राम और कुंभकर्ण के बीच होगा 30 मिनट का ऐतिहासिक टकराव!
दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली जब भी कोई नया प्रोजेक्ट लाते हैं, तो वह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक उत्सव बन जाता है। 'बाहुबली' और 'आरआरआर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद, राजामौली अब सुपरस्टार महेश बाबू के साथ अपनी अगली महात्वाकांक्षी ...
इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) हर हफ्ते दुनिया भर यूजर्स के सर्च और प्रोफाइल विजिट के आधार पर 'मोस्ट पॉपुलर इंडियन सेलिब्रिटीज' की लिस्ट जारी करता है। आमतौर पर इस लिस्ट के शीर्ष पर वही सुपरस्टार्स नजर आते हैं जिनकी बड़ी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज ...
खाड़ी युद्ध से निपटने की मोदी की तजबीज
मोदीजी ने एक बार फिर राष्ट्र की जनता को उसके कर्तव्यों के प्रति सचेत किया है।
ललित सुरजन की कलम से युद्ध नहीं, शांति चाहिए
जब एक तरफ सिर्फ एक सैनिक की गिरफ्तारी से उपजे भय और रिहाई की घोषणा से मिली राहत है, तब दूसरी तरफ आक्रामक मुद्रा अपनाकर हम क्या हासिल करना चाहते हैं?
युद्धविराम और हाशिए पर धकेल दिया गया भारत
यह युद्ध स्पष्ट रूप से नेतन्याहू की देन है और ट्रम्प इसके परिणामों के बारे में सोचे-समझे बिना ही इसमें फंस गए।
युद्ध के माहौल में विश्व शांति का शंखनाद है विश्व णमोकार दिवस
विश्व णमोकार दिवस- 9 अप्रैल, 2026 विश्व इतिहास के इस संक्रमणकाल में, जब मानवता युद्ध, हिंसा, आतंक, तनाव और असहिष्णुता के बोझ तले कराह रही है, ऐसे समय में 9 अप्रैल 2026 को मनाया जाने वाला विश्व णमोकार मंत्र दिवस एक अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा-विस्फोट के रूप में सामने आ रहा है। यह दिवस केवल एक ... Read more
तीसरे विश्वयुद्ध की आहट और गांधी
इतिहास विजय-पराजय-विनाश का मृत दस्तावेज नहीं है, न वह किसी की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कहानी का विवरण है।
युद्ध को लेकर मोदी का देश को डराने वाला संदेश
देश में जहां भी और जब भी चुनाव होते हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दूसरे सारे काम छोड़कर अपनी भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार में जुट जाते हैं
पश्चिम एशिया में युद्ध के दुष्प्रभाव से निपटने के लिए बेहतर नीतियों की ज़रूरत
वित्त वर्ष 2026-27 की ठीक शुरुआत में, जो 1 अप्रैल, 2026 से शुरू हो रहा है, भारत को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है
युद्ध के माहौल में महावीर के दर्शन की उपादेयता
सदियों पहले महावीर जनमे। वे जन्म से महावीर नहीं थे। उन्होंने जीवन भर अनगिनत संघर्षों को झेला, कष्टों को सहा, दुख में से सुख खोजा और गहन तप एवं साधना के बल पर सत्य तक पहुंचे, इसलिये वे हमारे लिए आदर्शों की ऊंची मीनार बन गये। उन्होंने समझ दी कि महानता कभी भौतिक पदार्थों, सुख-सुविधाओं, ... Read more
युद्धग्रस्त विश्व में महावीर की अहिंसा: शांति की एकमात्र राह
संदर्भ – तीर्थंकर महावीर स्वामी जन्म कल्याणक 2625वां (31 मार्च 2026) आज का विश्व एक विचित्र विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर विज्ञान, तकनीक और वैश्वीकरण ने मानव जीवन को अभूतपूर्व सुविधाएं दी हैं, वहीं दूसरी ओर युद्ध, हिंसा और असहिष्णुता ने मानवता के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विश्व के ... Read more
मिडिल ईस्ट युद्ध ने ट्रम्प की मुश्किलों को बढ़ाया
युद्ध के मामले में अमेरिका-इजरायल की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं।
पश्चिम एशिया युद्ध में परमाणु खतरे के प्रति लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अंतिम घोषित तिथि बढ़ा दी है।
अब युद्धविराम को लालायित ट्रंप
अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह लड़ाई अमेरिका को पहले ही महंगी पड़ रही है
पश्चिम एशिया में युद्ध फैलने से एक और वैश्विक आर्थिक संकट का खतरा
पश्चिम एशिया का संकट अब एक वैश्विक आर्थिक चुनौती में बदल गया है
ईरान युद्ध के सबक मौजूदा संघर्ष से कहीं आगे बाजार का आकार तय करेंगे
ऊर्जा बाजार एक ऐसे दौर में जा रहा है, जहां मूल्य निर्धारण मॉडल के आधार पर बनी पारंपरिक धारणाएं संघर्ष के बदलते स्वरूप से पूरी तरह बदल रही हैं
ईरान युद्ध में नाटो से अलग-थलग पड़े ट्रंप की परीक्षा की घड़ी
बुधवार को, अमेरिका-इजरायल गठबंधन के ईरान के खिलाफ युद्ध के 18वें दिन, ट्रंप को एक साथ दो बुरी खबरें मिलीं
लीजा रे ने दुबई से शेयर की दर्दभरी कविता, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच जताई चिंता
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। हर तरफ धमाकों और सायरन का शोर सुनाई दे रहा है। एक्ट्रेस लीजा रे भी इन हालातों के बीच दुंबई में अपने घर ...
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता, बेटी के साथ सुरक्षित लौटीं भारत, सुनाई आपबीती
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता भी अपनी 14 साल की बेटी सायरा के साथ यूएई में ...
ईरान के अखबार तेहरान टाइम्स ने अपने पहले पन्ने पर एक मार्मिक और भीतर तक झकझोरने वाली तस्वीर छापी है
ईरान युद्ध से भारतीय अर्थव्यवस्था को जोरदार झटका संभव
पश्चिम एशिया में चल रहे व्यापक युद्ध, जिसमें अमेरिका-इज़राइल जोड़ी और ईरान शामिल हैं
ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश ने आपातकालीन कदम उठाए
बांग्लादेश ने आने वाले दिनों में ईंधन की भारी कमी से बचने के लिए पेट्रोल राशनिंग का सहारा लिया है
ललित सुरजन की कलम से - युद्ध नहीं, शांति चाहिए
'एक कटु सत्य है कि भारत ने युद्ध की विभीषिका का बहुत सीमित अनुभव किया है। बातें हम भले ही बड़ी-बड़ी कर लें
एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज़ की '120 बहादुर' को लेकर चर्चा अब अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। फिल्म ट्रेलर ने पूरी तरह से रोमांच और प्रेरणा का सही मिश्रण पेश किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बलिदान दिवस पर मेजर शैतान सिंह ...
War 2 रिव्यू: लचर स्क्रिप्ट और निर्देशन के कारण रितिक और एनटीआर हारे युद्ध, पढ़ें पूरी समीक्षा
रितिक रोशन और एनटीआर स्टारर War 2 ‘स्पाई यूनिवर्स’ की बड़ी पेशकश मानी जा रही थी, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और औसत निर्देशन ने इसे निराशाजनक बना दिया। शानदार एक्शन सीक्वेंस और एनटीआर के दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद फिल्म का सेकंड हाफ बिखर गया। कहानी में ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला अपनी खूबसूरती से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। उर्वशी ने बेहद ही कम समय में एक अलग मुकाम हासिल किया है। वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों के साथ 'मिलने और अभिवादन' के क्षणों में संलग्न रहती है। ऐसा ही एक क्षण था जब ...
सलमान खान की सिकंदर के आखिरी गाने में दिखेगा जबरदस्त जलवा, तुर्की से बुलाए गए 500 डांसर्स!
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की 'सिकंदर' इस साल की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके एक्शन-पैक्ड टीजर ने इसकी भव्य एंट्री के लिए एकदम परफेक्ट माहौल तैयार कर दिया है। भव्य पैमाने पर बनाई गई इस फिल्म में ...
केसरी वीर के लिए सूरज पंचोली ने की कड़ी ट्रेनिंग, ऐसे सीखा युद्ध कौशल
बॉलीवुड एक्टर सूरज पंचोली अपनी पहली बायोपिक में वीर हामीरजी गोहिल के ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने जा रहे हैं। सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय और सूरज पंचोली अभिनीत फिल्म 'केसरी वीर : लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ' का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ...
फरहान अख्तर लेकर आ रहे भारत-चीन युद्ध पर आधारित फिल्म 120 बहादुर, निभाएंगे मेजर शैतान सिंह का रोल
Movie 120 Bahadur : रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट, ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज के साथ मिलकर '120 बहादुर' को पेश करने के लिए उत्साहित हैं। यह फिल्म मेजर शैतान सिंह (पीवीसी) और चार्ली कंपनी, 13 कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिकों की कहानी कहती ...
Adil Hussain: दुनियाभर में इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 की धूम मची हुई है। पेरिस ओलंपिक में दुनियाभर के खिलाड़ियों ने भाग लिया है। भारत के कई खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। हाल ही में तुर्की के शूटर यूसुफ डिकेक ने सिल्वर मेडल जीता।
बॉर्डर की 27वीं सालगिरह पर, अभिनेता सनी देओल ने एक घोषणा वीडियो के ज़रिए फ़्रैंचाइज़ी के दूसरे संस्करण की पुष्टि की है। अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सनी ने बॉर्डर 2 में अपनी वापसी की आधिकारिक घोषणा करते हुए एक वीडियो शेयर किया और इसे 'भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म' बताया। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ''एक फौजी अपने 27 साल पुराने वादे को पूरा करने के बाद, आ रहा है फिर से। भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म, बॉर्डर 2।'' इस फिल्म का निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता करेंगे। आगामी युद्ध फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह करेंगे। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | पति से तकरार के बीच केन्या लौट गई हैं Dalljiet Kaur? शादी को बचाने की कर रही कोशिश सनी द्वारा घोषणा वीडियो शेयर किए जाने के तुरंत बाद, सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए कमेंट सेक्शन में बाढ़ ला दी। एक यूज़र ने लिखा, ''वाह, यह बहुत बढ़िया घोषणा है सर जी, जय हिंद।'' दूसरे ने लिखा, ''बहुत उत्साहित हूँ।'' तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, ''बॉर्डर 2 के लिए बहुत उत्साहित हूं।'' इसे भी पढ़ें: NDA पर इमोशनल बयान, काले सूट में ली मंत्री पद की शपथ और शर्मिला अंदाज, Tripti Dimri की तरह रातों रात भारत के Sensation बन गये Chirag Paswan सनी देओल की अन्य परियोजनाएं उन्हें आखिरी बार अमीषा पटेल के साथ गदर 2 में देखा गया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही और इसे ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर घोषित किया गया। गदर 2 की सफलता के बाद, सनी ने लाहौर 1947 सहित कई फिल्में साइन कीं, जिसे आमिर खान के प्रोडक्शन बैनर के तहत बनाया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जिन्होंने आमिर को कल्ट क्लासिक अंदाज़ अपना अपना (1994) में निर्देशित किया था। View this post on Instagram A post shared by Sunny Deol (@iamsunnydeol)
आशुतोष राणा ने डीपफेक वीडियो को बताया 'माया युद्ध', बोले- ये सालों से चल रहा
आशुतोष ने कहा कि ऐसी बातों में खुद को डिफेंड करने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि जो लोग आपको जानते हैं वो सवाल करेंगे ही नहीं. और जो नहीं जानते, उन्हें किसी रिस्पॉन्स से फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वो दिमाग में आपकी एक छवि बना चुके होते हैं.
रानीति बालाकोट एंड बियॉन्ड: जिमी शेरगिल की नई सीरीज भारत की आधुनिक युद्ध की ऐतिहासिक कहानी को प्रदर्शित करेगी। जिमी शेरगिल दो मिनट के ट्रेलर की शुरुआत पुलवामा हमले की झलक से होती है। एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाने वाले आशीष कहते हैं, ये एक नया रण है या इसे जीतने के लिए एक नई रणनीति की जरूरत है। इसे भी पढ़ें: नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन प्रहार', कमांडर शंकर राव समेत अब तक 79 हुए ढेर, हिट लिस्ट में और भी कई नाम शामिल आगामी वेब शो आधुनिक युद्ध को डिकोड करता है जो केवल भौतिक सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता है बल्कि सोशल मीडिया, डिजिटल रणनीति और गुप्त राजनीतिक चालों के क्षेत्र से परे है जो भू-राजनीति को नया आकार देने की शक्ति रखता है। वेब श्रृंखला उन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है जिन्होंने 2019 में देश को हिलाकर रख दिया था। शो में कुछ हवाई दृश्य, शानदार प्रदर्शन और एक शक्तिशाली कथा है जो युद्ध के मैदान के अंदर और बाहर हर पहलू को चतुराई से पकड़ती है। इसे भी पढ़ें: Biden को सोचना पड़ेगा फिर एक बार, Iran पर प्रहार तो रूस करेगा पलटवार, रक्षा मंत्रायल ने चिट्ठी लिखकर जता दी मंशा आगामी वेब श्रृंखला के बारे में बात करते हुए, जिमी ने कहा: यह मेरे द्वारा अतीत में की गई किसी भी भूमिका से भिन्न है। कम से कम यह कहना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन भारत की पहली वॉर-रूम केंद्रित वेब-श्रृंखला का हिस्सा बनना बेहद संतोषजनक भी है। वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित जिसने देश को हिलाकर रख दिया। एनएसए प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए, आशीष ने कहा, एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन रक्षा बलों के कुछ सदस्यों के साथ बैठकों ने मुझे अपने चरित्र की बारीकियों को समझने में मदद की। तैयारी कार्य और कार्यशालाएं मुझे वापस ले गईं मेरे एनएसडी के दिनों में। संतोष सिंह द्वारा निर्देशित, श्रृंखला का निर्माण स्फीयरओरिजिन्स मल्टीविजन प्राइवेट लिमिटेड के सुंजॉय वाधवा और कॉमल सुंजय डब्ल्यू द्वारा किया गया है। इसमें प्रसन्ना भी हैं। शो का प्रीमियर 25 अप्रैल को JioCinema पर होगा।
दर्शक काफी समय से रैपर बादशाह और हनी सिंह के बीच जुबानी जंग देख रहे हैं। दोनों का रिश्ता सालों से विवादों से भरा रहा है। हालांकि करियर के शुरुआती दिनों में बादशाह और हनी सिंह के बीच अच्छी दोस्ती हुआ करती थी। हालाँकि, ऐसा लगता है कि सफलता और पैसे ने धीरे-धीरे इस दोस्ती को पूरी तरह से खत्म कर दिया। अब दोनों अक्सर एक दूसरे पर तंज कसते नजर आते हैं। हाल ही में हनी सिंह एक होली पार्टी में शामिल हुए, जहां उन्होंने बादशाह के 'पापा कमबैक' वाले कमेंट का करारा जवाब दिया। रैपर का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसे भी पढ़ें: Punjab Kings के खिलाफ जीत के बाद इंटरनेट पर Virat Kohli का Anushka Sharma के साथ वीडियो कॉल, FLY KISS देते नजर आये खिलाड़ी हनी सिंह ने बादशाह पर किया पलटवार बादशाह कुछ दिनों पहले हनी सिंह पर अपनी टिप्पणी को लेकर चर्चा में थे, जिसमें उन्होंने हनी सिंह की वापसी पर कटाक्ष किया था। अब सिंगर और रैपर हनी सिंह ने एक कमेंट के जरिए बादशाह को करारा जवाब दिया है और कहा है कि उन्हें बादशाह को जवाब देने के लिए मुंह खोलने की जरूरत नहीं है। उनके फैन ही काफी हैं जो हर चीज पर बात कर सकते हैं। उन्होंने अपने गाली वाले अंदाज में अपने फैंस से बात करते हुए बादशाह का जवाब दिया। हनी सिंह को सोमवार को मुंबई में एक होली पार्टी में परफॉर्म करते देखा गया और यहीं उन्होंने बादशाह पर कटाक्ष किया। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा, हर कोई कहता है, रिप्लाई करो, रिप्लाई करो... मैं क्या रिप्लाई करूं... आप लोग तो उनके सारे कमेंट्स का बहुत अच्छे से रिप्लाई कर चुके हैं। मुझे मुंह खोलने की जरूरत है। ऐसा नहीं होता है। जैसे ही भीड़ ने उनके लिए तालियां बजाईं, गायक ने कहा, मुझे बोलने की जरूरत नहीं है। आप लोग खुद पागल हैं। हनी सिंह पागल हैं और उनके प्रशंसक भी पागल हैं। इसे भी पढ़ें: Taapsee Pannu के पति Mathias Boe आखिर कौन है? जब सफल भी नहीं थी एक्ट्रेस तब से उन्हें प्यार करते थे बैडमिंटन खिलाड़ी रैपर बादशाह ने क्या कहा? आपको बता दें कि हाल ही में बादशाह ने हनी सिंह पर कमेंट करते हुए कहा था, ''मुझे एक पेन और कागज दो। मैं तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लाया हूं। मैं कुछ गाने लिखूंगा और तुम्हें दूंगा। पापा की वापसी तुम्हारे साथ होगी।'' Kalesh Controversy B/w Honey Singh and Badshah (Honey Singh Replied to Badshah) pic.twitter.com/o74t423bgS — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 25, 2024 Kalesh Between Badshah & Honey Singh Fans on Stage during Live Concert pic.twitter.com/M4VqSqLSc3 — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 19, 2024
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'सावरकर' रिव्यू: खोखली, एकतरफा फिल्म में एकमात्र अच्छी चीज है रणदीप हुड्डा का काम
आज के दौर में 'गुमनाम' हो चुके एक स्वतंत्रता नायक की कहानी कहने निकली ये फिल्म, एक अनजान कहानी बताने से ज्यादा अपने हीरो विनायक दामोदर सावरकर को बाकियों के मुकाबले अधिक 'वीर' बताने पर फोकस करने लगती है.
अस्तित्व और बदले के लिएब्रह्मांड में शुरू होने वाला है महायुद्ध, एक्शन और रोमांच से भरपूर हैRebel Moon 2 का धांसू ट्रेलर

