मिडिल ईस्ट में रचा इतिहास: लेबनान ने खत्म की मौत की सजा, संसद से पास हुआ ऐतिहासिक बिल
लेबनान मौत की सजा को औपचारिक रूप से खत्म करने वाला मिडिल ईस्ट का पहला देश बन गया है। संसद ने इस ऐतिहासिक विधेयक को मंजूरी देते हुए देश में फांसी की प्रथा को कानूनी रूप से खत्म कर दिया है।
1962 युद्ध से CP तक, ‘फ्लैग अंकल’ परिवार आज भी सिलता है तिरंगा
15 अगस्त से पहले दिल्ली के सदर बाजार में तिरंगे की मांग बढ़ गई है. यहां एक परिवार तीन पीढ़ियों से तिरंगे बनाने का काम कर रहा है. चीन के भारत पर हमले के बाद शुरू हुआ यह काम अब परिवार की पहचान बन चुका है. ‘फ्लैग अंकल’ अब्दुल गफ्फार के निधन के बाद उनके भाई अब्दुल मलिक इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं.
'54 साल शासन, लाखों मौतें और गृहयुद्ध...सीरिया में असद युग का खौफनाक अंत! जानिए 14 साल पुरानी उस चिंगारी की कहानी
सऊदी-PAK संग रक्षा समझौते पर तुर्की ने तोड़ी चुप्पी
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच तीन ताकतवर देशों का साथ आना अहम है. एक के पास परमाणु ताकत, दूसरे के पास आधुनिक सैन्य तकनीक और तीसरे के पास अपार आर्थिक संसाधन हैं. ईरान-अमेरिका-इजरायल टकराव के बाद बदले क्षेत्रीय हालात में यह साझेदारी नई रणनीतिक तस्वीर बना सकती है.
पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को देखते हुए भारत और सऊदी अरब का संपर्क में रहना महत्वपूर्ण : राजदूत
पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को देखते हुए भारत और सऊदी अरब का संपर्क में रहना महत्वपूर्ण : राजदूत
मुस्लिमों में तलाक की प्रथाएं- तलाक-ए-हसन और तलाक-ए-अहसन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी.
पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हाल ही में हुए 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' (मक्का संयुक्त रक्षा समझौता) को अपनी पहली बड़ी परीक्षा में नाकामी का सामना करना पड़ा है। यमन के ईरान-समर्थित हूथी विद्रोहियों ने जाज़ान में अरामको रिफाइनरी पर हमला किया, लेकिन इस नए बने गठबंधन ने हमले का कोई साफ़ सैन्य जवाब नहीं दिया और न ही कोई चेतावनी जारी की। जाज़ान में अरामको रिफाइनरी में आग रविवार सुबह लगी। हूथी सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि सादा और हज्जा प्रांतों में सऊदी ड्रोन ऑपरेशन्स के जवाब में उनके समूह ने ड्रोन से इस सुविधा को निशाना बनाया था। बाद में सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने आग लगने की पुष्टि की और बताया कि आग बुझा दी गई है। इसे भी पढ़ें: Yemen Army का बड़ा Military Action, Houthi ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमला, क्या Middle East में बढ़ेगा महायुद्ध का खतरा? यह घटना सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की मक्का में हुई मुलाक़ात और शुक्रवार को हुए समझौते पर हस्ताक्षर करने के ठीक 48 घंटे बाद हुई। इस समझौते के तहत, तीनों देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। फिर भी, जाज़ान पर हूथी हमले के बाद न तो तुर्की और न ही पाकिस्तान ने कोई प्रतिक्रिया दी, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं कि असल संकट के समय यह सामूहिक रक्षा व्यवस्था कैसे काम करेगी। द जेरूसलम पोस्ट के एक विश्लेषण के अनुसार, कुछ इज़राइली कमेंट्री में इस समझौते को इस्लामिक NATO या एक बड़े सुन्नी गठबंधन की नींव के तौर पर दिखाया गया है; कुछ जगहों पर तो सऊदी अरब के लिए पाकिस्तानी परमाणु सुरक्षा कवच (न्यूक्लियर अम्ब्रेला) की बात भी कही गई है। इसे भी पढ़ें: Houthi rebels ने यमन के मोखा बंदरगाह पर किया हमला, 7 की मौत; Aramco संयंत्र में आग हालांकि, समझौते की उपलब्ध जानकारी से पता चलता है कि यह व्यवस्था उतनी 'ऑटोमैटिक' (अपने-आप लागू होने वाली) नहीं है। इस समझौते का मकसद तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और सामूहिक प्रतिरोध (डिटेरेंस) को मज़बूत करना है। समिट के बयान के अनुसार, तीनों में से किसी भी देश पर सशस्त्र हमला होने पर उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसे भी पढ़ें: Yemen War Alert: UN Envoy Hans Grundberg ने दी चेतावनी, Houthi हमलों से बढ़ सकता है भीषण संघर्ष समिट के बयान में कहा गया, इस समझौते का मकसद किसी भी तरह की आक्रामकता के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मज़बूत करना है। इसमें यह प्रावधान है कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमला होने पर उसे उन सभी पर हमला माना जाएगा। साथ ही, इसमें तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं को बेहतर बनाने की बात भी कही गई है। हालांकि इस समझौते में ऑपरेशन या सैन्य प्रतिबद्धताओं का विस्तार से ज़िक्र नहीं है, लेकिन यह बेहतर रक्षा सहयोग के लिए एक ढांचा तैयार करता है और क्षेत्र व उसके बाहर शांति, स्थिरता और सुरक्षा को अपने व्यापक लक्ष्यों के तौर पर पहचानता है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने अनादोलु एजेंसी से बात करते हुए समझौते के बारे में कुछ सबसे स्पष्ट जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सामूहिक रक्षा वाला प्रावधान तकनीकी रूप से NATO के आर्टिकल 5 जैसा ही है और इस व्यवस्था में एक मंत्री-स्तरीय समिति और सऊदी अरब में स्थित एक स्थायी सचिवालय शामिल होगा।
पौराणिक कथाओं और भारतीय इतिहास के महाकाव्य रामायण में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के पिता राजा दशरथ के जीवन से जुड़े कई ऐसे रहस्य हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। क्या आप जानते हैं कि राजा दशरथ का वास्तविक नाम 'नेमी' था और उन्हें 'दशरथ' नाम मिलने के पीछे एक बेहद रोमांचक और साहसिक कहानी जुड़ी हुई है? त्रेतायुग के दौरान जब देवताओं और असुरों के बीच भीषण संग्राम छिड़ा था, तब अयोध्या के तत्कालीन राजा नेमी ने अपनी अद्भुत वीरता का परिचय दिया था। इस भयंकर युद्ध के मैदान में एक ऐसा नाजुक मोड़ भी आया था जब महारानी कैकेयी के अदम्य साहस और युद्ध कौशल ने राजा दशरथ के प्राण बचाए थे, जिसने आगे चलकर अयोध्या के इतिहास और राजनीतिक समीकरणों की तकदीर को पूरी तरह से बदल कर रख दिया था।क्यों पड़ा था महाराज नेमी का नाम 'दशरथ'?पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान राम के पिता का मूल नाम महाराज नेमी था। उनकी सेना की ख्याति और उनकी युद्धक क्षमता इतनी प्रचंड थी कि वे एक साथ दसों दिशाओं यानी रथ, गज, घोड़े और पैदल सेना के व्यूह को नियंत्रित करने में सक्षम थे। उनकी इसी महान महारथ और युद्ध कौशल के कारण उन्हें 'दशरथ' अर्थात 'दस रथों को एक साथ कुशलता से संचालित करने वाला योद्धा' की उपाधि से सम्मानित किया गया था, जो बाद में उनके वास्तविक नाम के रूप में इतिहास में अमर हो गया। वे अपनी प्रजा के प्रति जितने दयालु और न्यायप्रिय थे, रणक्षेत्र में वे उतने ही आक्रामक और अजय योद्धा माने जाते थे।युद्ध के मैदान में कैकेयी ने कैसे बचाई थी जान?इस कथा का सबसे दिलचस्प और निर्णायक मोड़ वह युद्ध था जब राजा दशरथ देवताओं की ओर से असुरों के खिलाफ एक भयंकर संग्राम में हिस्सा ले रहे थे। युद्ध के दौरान एक भीषण हमले में उनके रथ का पहिया टूट गया और वे बुरी तरह जख्मी होकर मृत्यु के मुख में पहुंच गए थे। उस संकट की घड़ी में उनकी पत्नी कैकेयी, जो एक कुशल योद्धा और सारथि की भूमिका में वहां मौजूद थीं, ने बिना एक पल गंवाए अपनी तलवार और रथ की कमान संभाली। कैकेयी ने अपनी जान की परवाह किए बिना अत्यंत शौर्य का परिचय देते हुए राजा दशरथ को सुरक्षित रणभूमि से बाहर निकाला था। उनकी इस बहादुरी से प्रसन्न होकर राजा दशरथ ने उन्हें दो वरदान मांगने का वचन दिया था, जो आगे चलकर रामायण की पूरी कथा और अयोध्या के भाग्य का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।
अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पिछले दिनों तुर्की (Trkiye) में एक गंभीर और पुख्ता जानलेवा खतरे (Assassination Threat) का सामना करना पड़ा था। इस खतरनाक खतरे से बचाने के लिए अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने एक बेहद गोपनीय और फिल्मी प्लान तैयार किया, जिसके तहत ट्रंप को एयर फोर्स वन (Air Force One) से चुपचाप एक एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक (Food/Catering Truck) के जरिए निकालकर दूसरी सीक्रेट मिलिट्री फ्लाइट में शिफ्ट करना पड़ा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान दुनिया और यहां तक कि उनके साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों को भी यही लगता रहा कि राष्ट्रपति मुख्य विमान में ही मौजूद हैं।क्या था पूरा मामला और क्यों पड़ी फूड ट्रक में छुपने की जरूरत?यह पूरी घटना तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल नाटो (NATO) समिट के दौरान की है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को ईरान की तरफ से डोनाल्ड ट्रंप पर हमले का एक बेहद खतरनाक और गंभीर इनपुट मिला था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए व्हाइट हाउस और सुरक्षा अधिकारियों ने तुर्की से उनकी सुरक्षित वापसी के लिए एक चालाक कूटनीतिक चाल (Ruse) चली। योजना के अनुसार, मीडिया और आम लोगों की नजरों के सामने डोनाल्ड ट्रंप को आधिकारिक एयर फोर्स वन विमान में चढ़ते हुए दिखाया गया ताकि हमलावरों या किसी भी बाहरी शख्स को उनकी असली लोकेशन का पता न चल सके।कैसे दिया गया इस सीक्रेट ऑपरेशन को अंजाम?जैसे ही कैमरे के सामने ट्रंप मुख्य विमान के अंदर गए, उसके तुरंत बाद उन्हें विमान के दूसरे हिस्से से एक हाइड्रोलिक एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक (खाने-पीने का सामान लोड करने वाली गाड़ी) के जरिए चुपचाप नीचे उतारा गया। इस फूड ट्रक के भीतर ट्रंप और उनके चुनिंदा करीबी सहयोगी छिपे हुए थे। इसके बाद उस ट्रक ने मुख्य विमान से दूर खड़े एक छोटे और सुरक्षित मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (C-32A) तक का सफर तय किया। उधर, पुराना एयर फोर्स वन विमान एक 'डिकॉय' (Decoy/धोखा देने वाला विमान) की तरह इस्तेमाल किया गया, जिसमें सिर्फ पत्रकार और कुछ व्हाइट हाउस के कर्मचारी सवार थे। इस तरह ट्रंप ने सीक्रेट मिलिट्री फ्लाइट से ब्रिटेन का सफर तय किया और उनकी सुरक्षा में किसी प्रकार की चूक नहीं होने दी गई।
न्यूयॉर्क, 11 अगस्त . President डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की से ब्रिटेन की यात्रा गुपचुप ढंग से एक सैन्य विमान में सवार होकर की थी. अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा कारणों के चलते ऐसा किया गया था. दरअसल, सार्वजनिक रूप से डोनाल्ड ट्रंप एयर फोर्स वन में सवार हुए थे, लेकिन ब्रिटेन तक की यात्रा ... Read more
खुद को दुनिया का सबसे ताकतवर देश बताने वाला अमेरिका और वहां के राष्ट्रपति जो खुद को सबसे ताकतवर लीडर बताते हैं। डोनाल्ड ट्रंप, वह ईरान के डर से चोरी-छुपे चुपचाप अपना प्लेन बदलकर तुर्की से वापस अमेरिका लौटते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के डर से अपने सबसे ताकतवर विमान एयरफोर्स वन की जगह एक छोटे से सैन्य विमान में चुपचाप बिना किसी को कानों कान खबर लगे तुर्की से वापस ब्रिटेन लौटे थे। दरअसल ट्रंप को लेकर एक ऐसा बड़ा खुलासा सामने आया है जिसने उनके तुर्की दौरे को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि जुलाई में जो नाटो समेत तुर्की में आयोजित की गई थी ट्रंप जब वहां से ब्रिटेन के लिए रवाना हुए थे तो उनका पूरा ट्रैवल प्लान अचानक से बदल दिया गया था और यह सब कुछ ईरान के डर से था। इसे भी पढ़ें: Iran ने US के सामने रखीं सख्त शर्तें, बर्ताव बदलने तक बंद रहेगा Hormuz Strait रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप को एयरपोर्ट पर एक कैटरिंग ट्रक की आड़ में एक छोटे से सन विमान तक पहुंचाया गया। इसके बाद उन्हें अमेरिकी एयरफोर्स के C32A से तुर्की से बाहर निकाला गया। यानी कि कैमरों को दिखाई देने के लिए वो विमान एयरफोर्स वन में चढ़ते हैं और इसके बाद छुप-छुपाकर एक छोटे से सैन्य विमान में बैठकर तुर्की से बाहर निकलते हैं। पुराने एयरफोर्स वन विमान को भी उनके साथ ब्रिटेन भेजा गया ताकि बाहर से देखने वाले लोगों को यही लगे कि अमेरिकी राष्ट्रपति एयरफोर्स वन में सवार होकर ब्रिटेन पहुंचा है। दोनों विमान कुछ मिनटों के अंतर पर ब्रिटेन पहुंचे। और अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर अमेरिका जो खुद को इतना शक्तिशाली बताता है वो ईरान के डर से अपने सबसे भरोसेमंद विमान को क्यों छोड़ देगा? इसके पीछे कई सारी वजह बताई गई है। जिसमें से एक बड़ी वजह यह है कि ट्रंप जब नाटो समिति के लिए तुर्की गए थे तो तुर्की की सीमा ईरान से लगती है। ऐसे में अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने ट्रंप की यात्रा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने का फैसला किया और उन्हें चुपचाप निकालने के लिए यह कारवाई की। इसे भी पढ़ें: Donald Trump प्रशासन में अमेरिका ने 1.75 लाख से अधिक US Visa रद्द किए आपको बता दें कि ट्रंप अपने नए बोइंग 7478 विमान में पहुंचे थे। यही विमान है जो क़तर की तरफ से अमेरिका को दान दिया गया है। जिसे अब ट्रंप एयरफोर्स वन की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इस नए विमान की यह पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा थी। लेकिन वापसी के वक्त अचानक इससे वापसी नहीं की गई। उस समय ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा था कि वह पुराने समय की याद दिलाने के लिए पुराने एयरफोर्स वन से उड़ान भरेंगे। लेकिन रिपोर्ट्स का दावा है कि असल में राष्ट्रपति को कुछ देर बाद ऐसे ही गुपचुप तरीके से C32 ए विमान तक पहुंचाया गया और वहां से वह रवाना हो गए। ट्रंप के यूं प्लेन बदलने की जानकारी किसी को नहीं थी।
दिल्ली पुलिस की साइबर थाना साउथ-वेस्ट टीम ने 15.71 करोड़ रुपये की निवेश ठगी करने वाले एक बड़े साइबर रैकेट का पर्दाफाश किया है. जांच में दुबई और कतर से जुड़े कनेक्शन भी सामने आए हैं.
Road Accidents Claim More Lives Than War or Disease: Nitin Gadkari Urges Action on India’s Road Safety Crisisयुद्ध या बीमारी से भी अधिक जान ले रहे हैं सड़क हादसे: नितिन गडकरी ने भारत के सड़क सुरक्षा संकट पर दी बड़ी चेतावनी
Donald Trump की हो सकती थी हत्या? तुर्की से कैटरिंग कार्ट में छिपकर भागे थे, आखिर ऐसा क्या हुआ था
डोनाल्ड ट्रंप की अंकारा यात्रा को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने उनकी सुरक्षा पर सवाल खड़ा किया है। ट्रंप को ईरान की जान से मारने वाली धमकी की वजह से कैटरिंग ट्रक में बैठाकर मिलिट्री एयरपोर्ट पहुंचाया गया था। जानें पूरी खबर...
ईरान के नाकेबंदी के लिए तैनात कितने युद्धपोत? देखें US TOP-10
अमेरिका ने ईरान पर नाकाबंदी लागू कराने के लिए मिडिल-ईस्ट में 20 से ज्यादा युद्धपोत तैनात किए है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक अबतक 55 वाणिज्यिक जहाजों का रास्ता बदला गया जिसमें दो को निष्क्रिय किया गया और दो अन्य जहाजों पर चढ़कर जांच की गई. सेंट्रल कमांड ने ये भी साफ किया कि ये कार्रवाई के सख्त प्रवर्तन का हिस्सा है.
ट्रंप ने ईरान से मांगा मुआवजा - मिडिल ईस्ट की तबाही के लिए ठहराया जिम्मेदार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से मुआवजे की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में हुए नुकसान और मौत के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए
बड़ा खुलासा! ईरान हमले का डर, तुर्की से सीक्रेट ऑपरेशन में निकाले गए थे ट्रंप
रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीक्रेट ऑपरेशन से पत्रकार, कुछ व्हाइट हाउस कर्मचारी, अमेरिकी जनता और कई वरिष्ठ अधिकारी घंटों तक ट्रंप की असली लोकेशन से अनजान रहे, जबकि व्हाइट हाउस सार्वजनिक तौर पर यही कहता रहा कि राष्ट्रपति पुराने बोइंग 747 यानी एयर फोर्स वन से ही रवाना हुए.
केंद्र का यह बयान सटीक है कि कोई बड़ा देश अपने यहां अनियंत्रित एवं अनियमित विदेशी अनुदान की इजाजत नहीं देता।
ट्रंप बहुत जल्दी युद्ध करना चाहते हैं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ बिना परमाणु समझौते के भी जंग खत्म करने पर विचार कर रहे हैं।
'होर्मुज पर अब सिर्फ US नेवी का कंट्रोल', ट्रंप बोले-ईरान से लेंगे युद्ध का मुआवजा
डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कंट्रोल को लेकर एक बड़ा ऐलान करने के साथ ही ईरान की ओर युद्ध के मुआवजे की मांग को ठुकराते हुए कहा कि ईरान युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा अमेरिका को दे।
Russia: क्या विरोधियों से डरने लगे पुतिन, यूक्रेन युद्ध का विरोध करने वाली पार्टी क्यों नहीं लड़ पाएगी चुनाव?
Unnao News: सऊदी अरब में मौत के 11 दिन बाद घर लाया जाएगा युवक का शव
सऊदी अरब में मौत के 11 दिन बाद घर लाया जाएगा युवक का शव
कतरास के छाताबाद भू-धंसान मामले में एक्शन, BCCL सीएमडी मनोज अग्रवाल समेत अधिकारियों पर केस दर्ज
छाताबाद भू-धंसान मामले में मो. अनवर अली ने बीसीसीएल के सीएमडी, जीएम व अन्य अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है।
ग़ाज़ा: ‘युद्धविराम’ के बावजूद 300 दिनों में 300 बच्चों की मौत
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF)ने कहा है कि ग़ाज़ा में युद्धविराम लागू होने के बावजूद बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है.पिछले अक्टूबर में युद्धविराम लागू होने के बाद से300दिनों के दौरान कम से कम300बच्चे मारे गए हैं.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से मांगा मुआवजा, बोले- मिडिल ईस्ट में तबाही और मौतों के लिए तेहरान जिम्मेदार
Yemen War Alert: UN Envoy Hans Grundberg ने दी चेतावनी, Houthi हमलों से बढ़ सकता है भीषण संघर्ष
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना ने कहा कि मोखा पर हुए हमले में सात लोग मारे गए, जिनमें चार सैनिक और तीन आम नागरिक शामिल थे, और कम से कम 30 अन्य घायल हो गए। अल जज़ीरा के अनुसार, रविवार को मोखा पर हुए हमलों के एक पिछले दौर में कम से कम 11 लोग मारे गए थे। ग्रंडबर्ग ने कहा कि ये ताज़ा हमले 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद से सैन्य गतिविधियों में सबसे बड़ी तेज़ी के बीच हुए हैं, जिससे यमन में पूर्ण पैमाने पर संघर्ष के फिर से शुरू होने का ख़तरा काफ़ी बढ़ गया है। इसे भी पढ़ें: Yemen Conflict Alert: हूती ठिकानों पर सेना के भीषण प्रहार, UN ने दी बड़े युद्ध की चेतावनी उन्होंने कहा कि अंसार अल्लाह के हालिया हमलों ने मोखा, मारिब और उसके बाहर भी आम नागरिकों को गंभीर ख़तरे में डाल दिया है। इस तनाव को रोकना होगा, और आम नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करनी होगी। उन्होंने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और तनाव कम करने तथा युद्धविराम के तहत हासिल की गई उपलब्धियों को और कम होने से रोकने के लिए ठोस उपायों पर उनके कार्यालय के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया। ग्रंडबर्ग ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि संघर्ष को केवल एक समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से ही स्थायी रूप से समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल एक समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से ही स्थायी रूप से समाप्त हो सकता है, और तनाव का बढ़ना यमन को विपरीत दिशा में ले जा रहा है। इसे भी पढ़ें: Houthi rebels ने यमन के मोखा बंदरगाह पर किया हमला, 7 की मौत; Aramco संयंत्र में आग सोमवार को जारी एक बयान में, यमनी सरकार की सेना के आधिकारिक प्रवक्ता कर्नल माजिद अब्दुल्ला अल-नुज़ैली ने कहा कि हमले में अल-मोखा और उसके आसपास कई जगहों को निशाना बनाया गया, जिनमें नागरिक बुनियादी ढांचा, कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाएं, कार्यालय, बिजली उत्पादन केंद्र और सैन्य ठिकाने शामिल थे। उन्होंने बताया कि हमले में सशस्त्र बलों के चार सदस्य और तीन आम नागरिक मारे गए, जबकि 30 लोग घायल हुए, जिनमें से ज़्यादातर आम नागरिक थे।
ग्रेटर नोएडा, 10 अगस्त . ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट एंड सेंटर में Monday को यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के चतुर्थ संस्करण की तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई. उत्तर प्रदेश Government के प्रमुख सचिव, एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग, शशि भूषण लाल सुशील ने आयोजन स्थल पहुंचकर तैयारियों का जायजा ... Read more
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के रक्षा समझौते को ईरान ने माना अमेरिका विरोधी
ईरान के मुताबिक हाल ही में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुआ रक्षा समझौता 'अमेरिका विरोधी' है। सोमवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा ये 'सोच में बदलाव का संकेत' है।
शिमला जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव में देरी का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है, जहां सदस्यों ने चुनाव कराने की मांग की है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि सऊदी अरब के रियाद में मूसा सनाइया इलाके की एक सोफा फैक्ट्री में लगी आग में कम से कम 16 बांग्लादेशी नागरिकों की मौत हो गई। मंत्रालय ने इन मौतों पर गहरा दुख जताया और पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। एक बयान में मंत्रालय ने रविवार को हुई इस घटना पर दिल से संवेदना व्यक्त की और मृतकों के परिवारों को इस मुश्किल और दुखद समय में पूरा समर्थन और साथ देने का भरोसा दिलाया। बयान में कहा गया माननीय विदेश मंत्री और माननीय विदेश राज्य मंत्री ने कल सऊदी अरब के रियाद में एक सोफा फैक्ट्री में लगी भीषण आग में 16 बांग्लादेशी नागरिकों की दुखद मौत पर गहरा दुख और दिल से संवेदना व्यक्त की है। इसे भी पढ़ें: ढाका की राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों की नई परीक्षा इसमें आगे कहा गया उन्होंने मृतकों के शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी सहानुभूति व्यक्त की और उन्हें भरोसा दिलाया कि वे इस अपूरणीय क्षति और दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े रहेंगे। मंत्रालय ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के तुरंत बाद रियाद में बांग्लादेश दूतावास के अधिकारी घटनास्थल पर पहुँचे और पीड़ितों की पहचान करने तथा शवों से जुड़ी ज़रूरी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए सऊदी अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Diplomatic Tension के बीच ढाका में सक्रिय भारत, Dinesh Trivedi ने PM Tarique Rahman से की अहम मुलाकात रियाद में बांग्लादेश दूतावास ने यह भी कहा कि वह घटना के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाने और प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करने के लिए काम कर रहा है। रियाद में बांग्लादेश दूतावास ने फेसबुक पर एक बयान में कहा हमें बहुत दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि रियाद के मूसा सनाइया इलाके में लगी भीषण आग में प्रवासी बांग्लादेशियों की जान चली गई है। घटना की खबर मिलते ही रियाद में बांग्लादेश दूतावास का एक प्रतिनिधिमंडल तुरंत घटनास्थल पर पहुँचा और विस्तृत जानकारी जुटाना शुरू कर दिया। दूतावास सरकार के उच्च स्तर के निर्देशों के अनुसार सभी ज़रूरी कदम उठा रहा है - जिसमें मृतकों की पहचान की पुष्टि करना, कानूनी औपचारिकताएं पूरी करना और प्रभावित लोगों को व्यापक सहायता प्रदान करना शामिल है।
7 अगस्त 2026 को मक्का में हस्ताक्षरित त्रिस्तरीय रक्षा समझौते का वैश्विक विश्लेषण। जानिए यदि भारत-पाक युद्ध होता है तो सऊदी अरब और तुर्की की क्या भूमिका होगी और भारत के पास क्या विकल्प हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि अमेरिका ने मध्य पूर्व में 20 से अधिक युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि यह कदम वाशिंगटन द्वारा ईरान के खिलाफ अपनी नाकेबंदी को और सख्त बनाने के बीच उठाया गया है
युद्ध जितना लंबा चलेगा उतना ही अमेरिका को होगा नुकसान, हार चुके हैं राष्ट्रपति: डेमोक्रेटिक सीनेटर
युद्ध जितना लंबा चलेगा उतना ही अमेरिका को होगा नुकसान, हार चुके हैं राष्ट्रपति: डेमोक्रेटिक सीनेटर
Gold का भाव अब युद्ध से नहीं बल्कि अमेरिकी Fed के फैसलों और ब्याज दरों से होगा तय
सोने की कीमतों और भू-राजनीतिक संघर्षों के बीच पारंपरिक संबंध बदल रहा है तथा मुद्रास्फीति, ब्याज दरें और मौद्रिक नीति सर्राफा कीमतों को प्रभावित करने वाले अधिक महत्वपूर्ण कारक बनकर उभरे हैं। एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (एमओएफएसएल)) की एच1 2026 प्रेशियस मेटल्स रिपोर्ट के अनुसार, चालू वर्ष की पहली छमाही में यह स्पष्ट हुआ कि केवल भू-राजनीतिक जोखिम सोने में तेजी बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। निवेशक अब संघर्षों का आकलन इस आधार पर अधिक कर रहे हैं कि उनका मुद्रास्फीति और ब्याज दरों पर क्या असर पड़ता है। एमओएफएसएल में जिंस शोध प्रमुख नवनीत दमानी ने कहा, 2026 की पहली छमाही ने दिखाया कि युद्ध और सोने के बीच संबंध अब पहले की तुलना में अधिक परिस्थितियों पर निर्भर हो गया है। उन्होंने कहा कि बाजार अब केवल भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर ध्यान नहीं दे रहा, बल्कि यह देख रहा है कि उनका मुद्रास्फीति, वास्तविक ब्याज दरों और मौद्रिक नीति की अपेक्षाओं पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसे भी पढ़ें: Jaipur Police ने पुरानी इमारत का सोना चांदी हड़पने के आरोप में 5 लोगों को किया गिरफ्तार दमानी ने कहा कि ऊंचे बॉन्ड प्रतिफल (यील्ड) सोने के लिए सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरी। इससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की पारंपरिक मांग पर भी असर पड़ा, जबकि भू-राजनीतिक तनाव ऊंचे स्तर पर बने रहे। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष की शुरुआत में नीतिगत अनिश्चितता, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में निवेश, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों से सोने की कीमतों को मजबूती मिली। इसे भी पढ़ें: IGI Airport पर जब्त हुआ 869 ग्राम सोना, खिलौने वाले स्कूटर के टायरों में छिपाकर लाया था यात्री रिपोर्ट में कहा गया कि बाद में शुल्क बढ़ने से उत्पादन लागत और मुद्रास्फीति की अपेक्षाएं बढ़ीं। इससे लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की आशंका मजबूत हुई और अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिभूतियों की वास्तविक प्रतिफल तथा डॉलर में तेजी आई। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष भी इस बदलते रुख का उदाहरण है। संघर्ष बढ़ने पर शुरुआती दौर में सोने की मांग बढ़ी, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से मुद्रास्फीति की चिंता बढ़ी और मौद्रिक नीति में ढील की उम्मीद कमजोर हुई। इससे सोने की तेजी सीमित रही और बाद में कीमतों में सुधार आया। रिपोर्ट में कहा गया, शुल्क अब केवल आर्थिक वृद्धि के लिए जोखिम नहीं रह गए हैं, बल्कि वे मुद्रास्फीति बढ़ाने वाली ताकत बन गए हैं। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Budget पेश, TVK सरकार महिलाओं को देगी सोना, नवजात को अंगूठी और पशु रिपोर्ट के अनुसार, आगे भी मुद्रास्फीति का रुख, फेडरल रिजर्व के संकेत, वैश्विक नकदी की उपलब्धता, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, ईटीएफ में निवेश और सट्टा निवेश सोने और चांदी की कीमतों के प्रमुख चालक बने रहेंगे।
महाजन फायरिंग रेंज में सुरक्षा में सेंध, युद्धाभ्यास के बीच सेना के वाहनों से 1500 लीटर डीजल चोरी|
बीकानेर की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में युद्धाभ्यास के दौरान चोरों ने सेना के वाहनों से 1500 लीटर डीजल चुरा लिया।
Houthi Attck On Saudi Arabia: पहले सऊदी फिर America का MQ-9 हुआ क्रैश, हूती बेकाबू | Bab Al Mandeb
हूती-सऊदी तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। हूतियों ने सऊदी अरब के सैन्य और तेल ठिकानों पर हमलों का दावा किया है।
बालाघाट के एक परिवार का दावा है कि 1962 युद्ध में बंदी बने चीनी सैनिक ने भारत में बसकर भारतीय महिला से शादी की थी। अब उनकी तीसरी पीढ़ी को पिता की नागरिकता और जाति संबंधी नियमों के कारण जाति प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा।
न्यूक्लियर डील के बिना युद्ध खत्म करने की तैयारी में ट्रंप? होर्मुज खोलनेकी रखी शर्त, जानें अमेरिका का नया प्लान
Iran-US War News Update: ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब जंग से बाहर निकलने का रास्ता तलाशते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी अखबार 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ईरान के साथ परमाणु समझौते की मांग पर पीछे हटने के लिए तैयार हो सकते हैं, अगर तेहरान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोल देता है। साथ ही यहां से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही सामान्य हो जाती है।अखबार ने बताया कि अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव में तीन महीने से भी कम समय बचा है। ऐसे में ट्रंप अमेरिकी जनता को यह बताने का तरीका ढूंढ रहे हैं कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध जीत लिया है। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप ने बिना किसी परमाणु समझौते के बातचीत से पीछे हटने का विचार रखा है। ट्रंप प्रशासन संघर्ष को खत्म करने और उसे राजनीतिक रूप से एक उपलब्धि के रूप में पेश करने का रास्ता तलाश रहा है।ईरान ने रखीं कई बड़ी शर्तेंईरान ने शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका के सामने कई बड़ी मांगें रख दीं। इनमें अरबों डॉलर का अमेरिकी भुगतान, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना शामिल है। ईरान की इन शर्तों ने ट्रंप के लिए स्थिति को और मुश्किल बना दिया है। अमेरिका चाहता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री ट्रैफिक जल्द से जल्द सामान्य हो, क्योंकि यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी रूट्स में से एक है।मिसाइल और ड्रोन हमलों से बाधित हुआ समुद्री ट्रैफिकरिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ओर से समय-समय पर किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों पर भी पड़ा है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रूट है। यहां किसी भी लंबे समय तक चलने वाली बाधा से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई और तेल की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।ट्रंप के लिए घरेलू मोर्चे पर बढ़ी चुनौतीअमेरिका में मध्यावधि चुनाव करीब आने के साथ ट्रंप प्रशासन के सामने राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है। ईरान के साथ युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें अभी भी काफी अधिक हैं। ऐसे में ट्रंप के लिए युद्ध को अमेरिकी जनता के सामने सफल सैन्य अभियान के रूप में पेश करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सबसे बड़े सैन्य हमले की चेतावनी तक दी थी।लेकिन अमेरिका के सहयोगी देशों ने उन्हें ऐसा कदम उठाने से रोकने की कोशिश की। शुक्रवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा आर्टिकल भी शेयर किया, जिसका शीर्षक था- Donald Trump Won the Iran War यानी डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध जीता।...। इससे संकेत मिला कि ट्रंप परमाणु समझौता हुए बिना भी संघर्ष को अमेरिकी जीत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।जेडी वेंस बोले- अभी खेल खत्म नहीं हुआइस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 'फॉक्स न्यूज' को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका अभी ईरान के साथ संघर्ष के बीच में है। यानी वाशिंगटन फिलहाल यह मानकर नहीं चल रहा कि संघर्ष पूरी तरह समाप्त हो चुका है। वेंस ने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि तेहरान वॉशिंगटन के साथ अपने संबंधों में लंबे समय के लिए बदलाव करे।ईरान लंबे संघर्ष के लिए तैयार?अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हाल के दिनों में बातचीत के दौरान लगातार बदलते रुख और कई बार लिए गए यू-टर्न से यह संकेत मिला है कि ईरान खुद को लंबे और कठिन संघर्ष के लिए तैयार कर रहा है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ ईरान युद्ध को खत्म करने का रास्ता निकालना और दूसरी तरफ अमेरिकी जनता के सामने इसे अपनी जीत के रूप में पेश करना। होर्मुज को फिर से खोलने और ईरान की मांगों पर सहमति बनाने में क्या समझौता होता है, इस पर अब भारत समेत पूरी दुनिया की नजर है।ये भी पढ़ें- ट्रेन टिकट बुकिंग में होने वाला है ऐतिहासिक बदलाव! अब चंद सेकंड में यात्रियों को मिलेगा टिकट, रेलवे का नया PRS सिस्टम मचाएगा तहलका
ईरान की सत्ता में बड़ा फेरबदल: पूर्व IRGC प्रमुख को मिली अहम जिम्मेदारी; युद्ध के बीच क्यों बदली रणनीति?
त्रिकोणीय मुकाबले में एकतरफा रहा फैसला
शक्ति नगर स्थित भगवान वाल्मीकि आश्रम में ट्रस्ट के चेयरमैन पद के लिए बहुप्रतीक्षित चुनाव रविवार को पूरी पारदर्शिता और उत्साहजनक माहौल में संपन्न हुए। पांच वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हुए इस चुनाव में विपन सभ्रवाल ने प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए लगातार दूसरी बार चेयरमैन पद की कमान संभाली। त्रिकोणीय मुकाबले में विपन सभ्रवाल ने अपने विरोधियों को पछाड़ते हुए एकतरफा जीत दर्ज की, जिसके बाद आश्रम परिसर के बाहर समर्थकों ने भांगड़ा डालकर और आतिशबाजी कर खुशी का इजहार किया। चेयरमैन पद के लिए इस बार कुल तीन प्रत्याशी मैदान में किस्मत आजमा रहे थे, जिनमें विपन सभ्रवाल, विक्की गिल और राज कुमार शामिल थे। चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत से ही वोटरों में भारी उत्साह देखा गया। शक्ति नगर, इस्लाम गंज, अली मोहल्ला, ब्रैंडरथ रोड, राईया वाली गली, गिल स्ट्रीट सहित शहर के विभिन्न इलाकों से वाल्मीकि समुदाय और आश्रम से जुड़े श्रद्धालुओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इलेक्शन इंचार्ज डॉ. सुरिंदर कल्याण ने चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने के बाद मतों के आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि इस चुनाव में कुल 955 पात्र मतदाताओं ने अपने वोट डाले। मतगणना के दौरान 9 वोट अमान्य (कैंसिल) पाए गए, जिसके बाद कुल वैध मतों की संख्या 946 रही। वोटों की गिनती शुरू होते ही विपन सभ्रवाल ने अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त बनानी शुरू कर दी, जो अंत तक बरकरार रही। वोटों का ब्यौरा इस प्रकार रहा विपन सभ्रवाल 746 वोट (विजयी), राज कुमार 193 वोट और विक्की गिल 7 वोट प्राप्त किए। चुनाव को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए इलेक्शन इंचार्ज डॉ. सुरिंदर कल्याण की देखरेख में पुख्ता इंतजाम किए गए थे। अलग-अलग बूथों पर अधिकारियों और वालंटियर्स की ड्यूटी लगाई गई थी। मतदान प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने में वाइस चेयरमैन विजय सभ्रवाल, एडवोकेट करन खुल्लर, मोहन लाल लाहौरा, चरणजीत सिंह मट्टू, सुरिंदर, अर्जन गिल, राजेश नाहर, तमन्ना, कंचन थापर और निशा सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने अहम भूमिका निभाई। सभी बूथों पर शांतिपूर्वक मतदान संपन्न हुआ।
भारत और अमेरिका की नौसेनाएं आज से कोच्चि में आतंकवाद और बारूदी सुरंगों से निपटने के लिए एक विशेष संयुक्त अभ्यास शुरू कर रही हैं।
ग़ाज़ा में जानलेवा इसराइली हमले, लेबनानी हवाई क्षेत्र का उल्लंघन
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और शान्तिरक्षकों के अनुसार,युद्धविराम के बावजूद सप्ताहान्त में ग़ाज़ा पर इसराइली हमलों में दो दर्जन से अधिक फ़लस्तीनी मारे गए. इस दौरान लेबनान के हवाई क्षेत्र का100से अधिक बार उल्लंघन किया गया.
‘खेल का मैदान हो, समुद्र तट या घर’: रूस-यूक्रेन युद्ध में बच्चों की मौतें रोकने की पुकार
यूक्रेन पर रूस का आक्रमण जारी है और हाल के सप्ताहों में दोनों देशों ने हवाई व ड्रोन हमले तेज़ किए हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने इन हमलों में बच्चों के मारे जाने और घायल होने पर चिन्ता जताते हुए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है.
ईरान-इराक युद्ध के कमांडर मोहसिन रेजाई को नई जिम्मेदारी, सुप्रीम लीडर ने एसएनएससी में अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया
Strait of Hormuz पर झुका अमेरिका! युद्ध से हटेंगे Trump!
ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब युद्ध खत्म करने का रास्ता तलाशते नजर आ रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने को बड़ी सफलता के तौर पर पेश कर सकते हैं. हालांकि, तेहरान ने इसके बदले अमेरिकी नाकाबंदी हटाने, सैनिकों की वापसी, प्रतिबंध खत्म करने, जब्त संपत्ति लौटाने और युद्ध का मुआवजा देने जैसी बड़ी मांगें रखी हैं, जिससे समझौते की राह मुश्किल बनी हुई है.
ट्रंप को चाहिए ईरान युद्ध से एग्जिट, अब न्यूक्लियर डील भी लगाया दांव पर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता तलाशते दिख रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोल देता है तो ट्रंप परमाणु समझौते के बिना भी इसे जीत के तौर पर पेश कर सकते हैं.
सऊदी अरब में फंसे इंद्रमणि की घर वापसी को लेकर सीएम पुष्कर सिंह धामी से मिले विधायक सुरेश चौहान
उत्तरकाशी, 9 अगस्त . सऊदी अरब में आठ वर्षों से फंसे इंद्रमणि की घर वापसी का मामला अब शासन स्तर पर पहुंच गया है. इस मुद्दे को लेकर गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान ने Chief Minister पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर इंद्रमणि नौटियाल की वापसी के लिए प्रभावी पहल करने का आग्रह किया. इस दौरान ... Read more
द वॉशिंगटन पोस्ट को मिले एक मेमो के अनुसार, अमेरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने देश की डिफेंस कंपनियों को हथियारों के प्रोडक्शन और डिलीवरी में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण अमेरिका के पास जरूरी गोला-बारूद और मिसाइलों का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है, जिसे फिर से भरने का दबाव बढ़ रहा है। डिप्टी डिफेंस सेक्रेटरी स्टीव फीनबर्ग ने डिफेंस कंपनियों को पत्र लिखकर 21 दिनों के भीतर प्रोडक्शन बढ़ाने और तेजी से डिलीवरी का प्लान जमा करने को कहा है। सालों लंबे डेवलपमेंट शेड्यूल अब मंजूर नहीं फीनबर्ग ने अपने पत्र में साफ लिखा कि सालों तक चलने वाले डेवलपमेंट टाइमलाइन अब स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपनी प्रोडक्शन क्षमता तुरंत बढ़ानी होगी। हालांकि, पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने इस मेमो की पुष्टि की, लेकिन अधिकारियों ने इन खबरों का खंडन किया कि सेना के पास हथियार पूरी तरह खत्म हो गए हैं। डिफेंस इनोवेशन यूनिट के प्रिंसिपल डिप्टी डायरेक्टर जैरेड कॉनली ने कहा कि अमेरिका के पास मौजूदा युद्ध लड़ने के लिए पर्याप्त गोला-बारूद मौजूद है। इसे भी पढ़ें: इजरायली मीडिया के दावों के बाद Mojtaba Khamenei का वीडियो आया सामने मिसाइल इंटरसेप्टर और गोला-बारूद पर बढ़ा दबाव अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचने के लिए पैट्रियट और थाड जैसे महंगे और एडवांस एयर-डिफेंस सिस्टम का बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया है। महीनों से चल रहे इस मिलिट्री ऑपरेशन की वजह से अमरीकी सेना के पास एडवांस्ड मिसाइलों का स्टॉक युद्ध से पहले के स्तर से काफी कम हो गया है। जानकारों का मानना है कि अमेरिका के पास अभी के लिए भले ही हथियार हों, लेकिन इस्तेमाल हो चुकी मिसाइलों की जगह नई मिसाइलें बनाने में कई साल लग सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Iran ने US के सामने रखीं सख्त शर्तें, बर्ताव बदलने तक बंद रहेगा Hormuz Strait अमेरिका की चिंता थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज ने चेतावनी दी है कि मिसाइल स्टॉक कम होने से अमेरिका और उसके मध्य-पूर्वी सहयोगियों के लिए आने वाले ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकना मुश्किल हो सकता है। स्टॉक बचाने के लिए सेना को कम इंटरसेप्टर मिसाइलें दागनी पड़ सकती हैं, जिससे दुश्मनों के हमले सफल होने का रिस्क बढ़ जाएगा। इसके अलावा, अमरीकी रक्षा योजनाकार इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि अगर ईरान युद्ध के बाद कोई दूसरा बड़ा वैश्विक संकट खड़ा होता है, तो अमेरिका के पास उससे निपटने के लिए पर्याप्त बैकअप स्टॉक रहेगा या नहीं।
Mecca Joint Defense Agreement से पलटा Turkiye, Saudi Arabia के साथ रक्षा समझौता Iran के खिलाफ नहीं
Mecca Joint Defense Agreement से पलटा Turkiye, Saudi Arabia के साथ रक्षा समझौता Iran के खिलाफ नहीं सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए Defense Agreement को लेकर अब नया ट्विस्ट सामने आया है।
हथियारों और गोला-बारूद का प्रोडक्शन तेजी से बढ़ा रहा अमेरिका, महायुद्ध की तैयारी या कुछ और?
उप रक्षा मंत्री स्टीव फीनबर्ग ने कहा कि वर्षों तक चलने वाली विकास और उत्पादन प्रक्रिया अब स्वीकार्य नहीं है। अमेरिका को कार्यक्रमों की समयसीमा में भारी तेजी लाने के साथ उत्पादन क्षमता का तत्काल विस्तार करना होगा।
तेल अवीव, 9 अगस्त . ग्रीस में Sunday को गाजा संघर्ष के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन का ऐलान किया गया है. प्रस्तावित फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों के बीच इजरायल के विदेश मंत्रालय ने देश में मौजूद अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है. मंत्रालय ने विशेष यात्रा चेतावनी जारी करते हुए इजरायली ... Read more
भारतीय वायु सेना का बैंड स्वतंत्रता दिवस और 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर विशेष प्रस्तुति देगा।
जापान: नागासाकी ने परमाणु युद्ध के बढ़ते खतरे को लेकर चेताया
हिरोशिमा के बाद जापानी शहर नागासाकी ने रविवार को परमाणु बम हमले की 81वीं बरसी पर दुनिया को परमाणु युद्ध के बढ़ते खतरे से आगाह किया। शहर ने परमाणु हथियार रखने वाले देशों और परमाणु प्रतिरोध पर अपनी सुरक्षा निर्भर रखने वाले देशों से मौजूदा सुरक्षा माहौल पर गंभीरता से विचार करने तथा परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को रोकने के प्रयास तेज करने का आह्वान किया।
एक सदी बाद मिटा गुमनामी का दाग: प्रथम विश्वयुद्ध में शहीद हुए थे 9,909 पंजाबी सैनिक; इतिहास में दर्ज हुआ नाम- Stigma of obscurity erased after century 9909 Punjabi soldiers martyred in World War one
युद्ध के बीच मोजतबा खामेनेई का पहला वीडियो, ट्रंप-नेतन्याहू के उड़ा देगा होश?
ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने मोजतबा खामेनेई का एक वीडियो जारी किया है, जिसमें वह स्वस्थ नजर आ रहे हैं।
ईरान युद्ध और अमेरिका की लाचारियां
आज सूरत यह है कि ट्रंप ने अमेरिका को ऐसे युद्ध में उलझा रखा है, जिससे अमेरिका की कमजोरियां रोज-ब-रोज दुनिया के सामने उजागर हो रही हैं।
Turkey ने स्पष्ट किया: Saudi Arabia और Pakistan के साथ रक्षा समझौता किसी देश के खिलाफ नहीं
अंकारा, नौ अगस्त (एपी) तुर्किये के विदेश मंत्री ने सऊदी अरब, पाकिस्तान एवं तुर्किये के बीच हुए रक्षा समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि यह समझौता ईरान या किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं है। सऊदी अरब के युवराज (क्राउन प्रिंस) मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को मक्का के अल-सफा पैलेस में हुई एक बैठक के दौरान मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते में कहा गया है कि इनमें से किसी एक देश पर हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ के तहत तेल संपदा से समृद्ध सऊदी अरब, परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान और तुर्किये एक साथ आए हैं। तुर्किये के पास उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की दूसरी सबसे बड़ी सेना है और उसका रक्षा उद्योग भी तेजी से बढ़ रहा है। ईरान में युद्ध के कारण क्षेत्र में बढ़ी अनिश्चितता और खतरों के बीच यह समझौता तीनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने और संभावित हमलों को रोकने की उनकी क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक कदम है। विदेश मंत्री हाकान फिदान ने तुर्किये की सरकारी समाचार एजेंसी ‘अनादोलू’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि तीनों देश किसी भी अन्य देश को तब तक अपना विरोधी नहीं मानते, जब तक वह उनके खिलाफ कोई शत्रुतापूर्ण कार्रवाई नहीं करता। फिदान ने कहा, ‘‘हमारे पास ऐसा कुछ भी लिखित नहीं है और न ही हमने किसी ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें किसी साझा खतरे को परिभाषित किया गया हो। जो देश हम पर हमला नहीं करता, वह हमारा निशाना नहीं है।’’तुर्किये के विदेश मंत्री ने कहा कि समझौते में आपसी रक्षा से संबंधित प्रावधान ‘‘तकनीकी रूप से’’ नाटो की संधि के अनुच्छेद पांच के समान है। इस अनुच्छेद के तहत नाटो के 32 सदस्य देशों में से किसी एक पर हमले को सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाता है। यह पूछे जाने पर कि यह व्यवस्था कैसे काम करेगी, फिदान ने कहा कि किसी सदस्य देश को मदद के लिए औपचारिक रूप से अनुरोध करना होगा तथा इसके बाद अन्य दो देश खतरे की प्रकृति के आधार पर खुफिया जानकारी साझा करने एवं रसद सहायता देने से लेकर सैन्य इकाइयों की तैनाती तक कर सकते हैं। फिदान ने कहा, ‘‘ये बहु स्तरीय मामले हैं और इनका स्वरूप खतरे की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग होगा। हमने अब तक अपने काम में इसी दृष्टिकोण को अपनाया है।’’तुर्किये के विदेश मंत्री ने कहा कि कुछ अन्य देशों ने भी इस समझौते में शामिल होने में रुचि दिखाई है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मिस्र ‘‘अगले चरण’’ में इसमें शामिल होगा। उन्होंने मिस्र को एक ‘‘स्वाभाविक साझेदार’’ बताया। फिदान ने कहा कि समझौते के तहत तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री तथा सेना प्रमुख समिति की बैठकों में नियमित रूप से हिस्सा लेंगे। तीनों देश एक सचिवालय भी स्थापित करेंगे, जिसका मुख्यालय सऊदी अरब में होगा।
'नशे के विरुद्ध युद्ध' में दैनिक जागरण बना सारथी, युवाओं को जागरूक बनाने की पहल
नशा मुक्ति के लिए दैनिक जागरण ने 'नशे के विरुद्ध युद्ध' अभियान शुरू किया है, जो युवाओं को नशे से बचाने पर केंद्रित है। यह अभियान 'स्वतंत्रता के सारथी' श्रृंखला के तहत डॉक्टरों, अधिकारियों और पुनर्वास केंद्रों के प्रयासों को उजागर करेगा।
युद्ध का दंश: गाजा मददगारों ने इस्राइल पर लगाए प्रताड़ना के आरोप, अंधेरे कंटेनर और बिजली के झटकों का किया दावा---Gaza Aid Activists Allege Torture After Israeli Forces Detained Global Sumud Flotilla Members
Agra News: चमड़े की कतरन से चोक हुए नाले, चार महीने से उठान बंद
चमड़े की कतरन से चोक हुए नाले, चार महीने से उठान बंद
500 साल में सिर्फ एक बार हारा कुम्भलगढ़ किला, वो भी युद्ध से नहीं; महाराणा प्रताप का जन्मस्थान है यह दुर्ग
क्या भारत के खिलाफ पाकिस्तान का साथ देंगे तुर्किए और सऊदी अरब? 'मुस्लिम NATO' की चर्चा के बीच समझें पूरा समीकरण
भारतीय रेलवे में कार्यरत मुस्लिम कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और गौरवशाली अवसर सामने आया है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (Ministry of Minority Affairs) और रेलवे बोर्ड ने सऊदी अरब के जेद्दा, मक्का और मदीना में आगामी हज यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की सहायता और प्रशासनिक प्रबंधन के लिए प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर कर्मचारियों के आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस भर्ती अभियान के तहत रेलवे कर्मियों को हज सुपरिंटेंडेंट (Haj Superintendent), असिस्टेंट हज ऑफिसर (AHO) और हज इंस्पेक्टर (HI) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया जाएगा।इच्छुक और योग्य रेलवे कर्मचारी 10 अगस्त 2026 तक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपना ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं। यह अवसर न केवल रेलवे कर्मियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशासनिक अनुभव प्रदान करता है, बल्कि उन्हें सऊदी अरब में भारतीय हज यात्रियों की सेवा करने का पुण्य अवसर भी देता है।किन-किन पदों पर हो रही है भर्ती और क्या है पात्रता?अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रतिनियुक्ति के तहत विभिन्न पदों के लिए रेलवे के पदानुक्रम (Pay Matrix) के आधार पर योग्यता निर्धारित की गई है:हज सुपरिंटेंडेंट (Haj Superintendent): इस पद के लिए रेलवे में पे-मैट्रिक्स लेवल-8, 9 या 10 पर कार्यरत गजटेड (Gazetted) अधिकारी आवेदन करने के पात्र हैं।असिस्टेंट हज ऑफिसर (AHO): पे-मैट्रिक्स लेवल-7 या 8 में कार्य कर रहे वरिष्ठ रेलवे कर्मचारी और पर्यवेक्षक इस पद के लिए पात्र माने गए हैं।हज इंस्पेक्टर (HI): पे-मैट्रिक्स लेवल-6 में कार्यरत नॉन-गजटेड रेलवे कर्मचारी हज इंस्पेक्टर के पद के लिए अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।आवेदन करने वाले कर्मचारियों की आयु सीमा और शारीरिक फिटनेस को लेकर भी कड़े नियम तय किए गए हैं। आवेदक की आयु 1 जुलाई 2026 तक 25 से 58 वर्ष के बीच होनी चाहिए। चूंकि सऊदी अरब में हज के दौरान अत्यधिक पैदल चलना और कठिन परिस्थितियों में काम करना होता है, इसलिए आवेदक का शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ (Medically Fit) होना अनिवार्य है।मिलने वाले भत्ते, सुविधाएं और डेपुटेशन की अवधिसऊदी अरब में प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने वाले रेलवे कर्मियों को केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार आकर्षक वेतन और भत्ते प्रदान किए जाते हैं। प्रतिनियुक्ति की अवधि आमतौर पर 2 से 3 महीने की होती है, जो हज सीजन की गतिविधियों पर निर्भर करती है।विदेशी भत्ता (Foreign Allowance): भारत में मिलने वाले मूल वेतन के अलावा कर्मियों को विदेश में रहने के दौरान निर्धारित फॉरेन अलाउंस और डेली अलाउंस (DA) दिया जाता है।मुफ्त आवास और परिवहन: जेद्दा, मक्का और मदीना में रहने के लिए नि:शुल्क आवास (Accommodation) तथा ड्यूटी स्थल तक आने-जाने के लिए स्थानीय परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।इमर्जेंसी मेडिकल कवर: प्रतिनियुक्ति अवधि के दौरान सऊदी अरब में पूर्ण चिकित्सा बीमा और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।आने-जाने का हवाई किराया: भारत से सऊदी अरब जाने और वापस आने का संपूर्ण हवाई यात्रा खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाता है।10 अगस्त 2026 तक ऐसे करें ऑनलाइन आवेदनरेलवे कर्मियों को आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए निर्धारित समय-सीमा का विशेष ध्यान रखना होगा। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे:सबसे पहले अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के हज प्रतिनियुक्ति पोर्टल haj.nic.in/deputation पर जाएं।अपनी व्यक्तिगत जानकारी, रेलवे सर्विस डिटेल्स, पे-लेवल और पासपोर्ट संबंधी विवरण दर्ज करके ऑनलाइन फॉर्म भरें।अपने हालिया पासपोर्ट साइज फोटो, रेलवे पहचान पत्र, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और वैलिड पासपोर्ट की कॉपी अपलोड करें।ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद उसकी हार्ड कॉपी (Printout) निकाल लें।इस प्रिंटआउट को अपने संबंधित रेलवे डिवीजन के कार्मिक विभाग (Personnel Department / Cadre Controlling Authority) से अग्रेषित (Forward) करवाकर 'उचित माध्यम' (Proper Channel) से जमा करें।ध्यान रहे कि 10 अगस्त 2026 के बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जिन आवेदनों को रेलवे प्रशासन की अनापत्ति (NOC) प्राप्त नहीं होगी, उन्हें सीधे निरस्त कर दिया जाएगा।चयन प्रक्रिया और रेलवे बोर्ड के सख्त निर्देशऑनलाइन आवेदन जमा होने के बाद अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और रेलवे बोर्ड द्वारा आवेदनों की स्क्रूटनी की जाएगी। आवेदकों के सतर्कता क्लीयरेंस (Vigilance Clearance), सर्विस रिकॉर्ड और पिछले प्रदर्शन के आधार पर शॉर्टलिस्ट तैयार की जाएगी। यदि आवश्यक हुआ तो आवेदकों का पर्सनल इंटरव्यू या भाषा ज्ञान (अरबी/अंग्रेजी) का परीक्षण भी किया जा सकता है।रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि जिन कर्मचारियों पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई (D&AR Case) या सतर्कता जांच लंबित है, वे इस प्रतिनियुक्ति के लिए पात्र नहीं होंगे। साथ ही, पूर्व में हज प्रतिनियुक्ति पर जा चुके कर्मियों के बजाय नए और योग्य उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।सऊदी अरब में भारतीय हज यात्रियों के सुगम आवागमन, मेडिकल सहायता, आवास प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाने में रेलवे कर्मियों की भूमिका सदैव सराहनीय रही है। योग्य रेलवे कर्मचारी समय रहते अपना आवेदन पूरा कर लें।
Yemen Conflict Alert: हूती ठिकानों पर सेना के भीषण प्रहार, UN ने दी बड़े युद्ध की चेतावनी
यमन की सेना ने हूती विद्रोहियों पर हमले तेज़ कर दिए हैं, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि देश में बड़े पैमाने पर संघर्ष फिर से शुरू होने का खतरा बढ़ रहा है। तुर्की में कुर्द शांति प्रयासों से जुड़ा एक विधेयक संसद में अपने पहले चरण से मंज़ूर हो गया है। इस विधेयक में कुर्द उग्रवादियों के हथियार छोड़ने और कुछ पूर्व लड़ाकों के पुनर्वास की शर्तें तय की गई हैं। यमन में सेना ने कहा कि उसके हमले, देश के मध्य और पूर्वी हिस्सों में हाल ही में हुए हूती हमलों के जवाब में थे। यमन की सेना के प्रवक्ता कर्नल माजेद अल-नाज़िली ने कहा कि इन हमलों में कई मोर्चों पर विद्रोहियों के ठिकानों और क्षमताओं को निशाना बनाया गया, हालांकि उन्होंने और कोई जानकारी नहीं दी। उन्होंने कहा कि इन हमलों का मकसद सेना की सुरक्षा करना था। इसे भी पढ़ें: Indian Cargo Ship Attack | Red Sea में भारतीय कार्गो जहाज़ पर हमला, डूबने के बाद 13 भारतीयों को सुरक्षित बचाया गया, विदेश मंत्रालय ने जताई सख्त आपत्ति यह लड़ाई 2022 में हुए उस समझौते के बाद तनाव में बड़ी बढ़ोतरी है, जिसने काफी हद तक लड़ाई को रोक दिया था। यमन के गृह युद्ध में एक तरफ ईरान समर्थित हूथी हैं और दूसरी तरफ सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन है, जो देश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का सहयोगी है। शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र के दूत हैंस ग्रंडबर्ग ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि अप्रैल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता वाले समझौते के बाद से अब यमन में बड़े पैमाने पर फिर से संघर्ष शुरू होने का खतरा सबसे ज़्यादा है। तुर्की में शनिवार को एक संसदीय समिति ने कानून के मसौदे को मंज़ूरी दे दी। इस बिल में हज़ारों पूर्व लड़ाकों के लिए सशर्त माफ़ी जैसा एक तरीका शामिल है और उम्मीद है कि अगले हफ़्ते की शुरुआत में आम सभा में इस पर बहस होगी और इसे मंज़ूरी मिल जाएगी। पिछले साल, कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) ने कहा था कि वह तुर्की सरकार के साथ दशकों से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के मकसद से शुरू की गई शांति पहल के तहत हथियार छोड़ देगी और अपना संगठन भंग कर देगी। इसे भी पढ़ें: बर्दाश्त नहीं...लाल सागर में डूबा भारतीय झंडे वाला जहाज, भयंकर भड़का भारत, अब होगा एक्शन! यह कानून ग्रुप के हथियार छोड़ने और कुछ PKK सदस्यों के पुनर्वास की प्रक्रिया तय करता है। इसके तहत, ग्रुप का सदस्य होने के दोषी लोगों की कुछ जेल की सज़ाएं रोक दी जाएंगी और दूसरों पर मुकदमा चलाने में देरी की जाएगी। ये उपाय तब लागू होंगे जब तुर्की की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद यह पुष्टि कर देगी कि ग्रुप ने खुद को खत्म कर लिया है और सारे हथियार सौंप दिए हैं। 1980 के दशक में शुरू हुए इस संघर्ष में हज़ारों लोग मारे गए हैं और यह पड़ोसी देशों इराक और सीरिया तक फैल गया है। तुर्की और उसके पश्चिमी सहयोगी PKK को आतंकवादी संगठन मानते हैं। कुल मिलाकर, ये घटनाक्रम बताते हैं कि संयुक्त राष्ट्र की संयम बरतने की अपील के बावजूद यमन में तनाव बढ़ रहा है, जबकि तुर्की में संसद में एक ड्राफ्ट कानून को मंज़ूरी मिलने के साथ ही कुर्द शांति प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
कागज के टुकड़े जान नहीं बचाते...पाकिस्तान-तुर्की डील के बाद सऊदी पर दमकर दहाड़ा भारत का दोस्त
7 अगस्त की रात को दुनिया के नक्शे पर एक ऐसी लकीर खींची गई है जिसने ना सिर्फ मिडिल ईस्ट बल्कि भारत के रणनीतिकारों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। मक्का में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मिलकर मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट साइन किया। इसे दुनिया के कई देश इस्लामिक नेटो की शुरुआत कह रहे हैं। लेकिन जैसे ही पाकिस्तान की न्यूक्लियर पावर और तुर्की की ड्रोन टेक्नोलॉजी के एक साथ आने की खबर आई, ईरान ने ऐसी दहाड़ लगाई कि पूरी दुनिया सहम गई। ईरान ने दो टूक शब्दों में कहा कि सऊदी अरब सावधान रहे क्योंकि कागज के टुकड़े कभी भी जान नहीं बचाते। इस एग्रीमेंट की सबसे चौंकाने वाली बात इसकी कलेक्टिव डिफेंस क्लॉज़ है। ठीक वैसे ही जैसे नाटो का आर्टिकल पांच कहता है कि अगर किसी एक सदस्य देश पर हमला हुआ तो बाकी सब मिलकर युद्ध लड़ेंगे। अब यही नियम पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की पर लागू होगा। अब आप सोचिए अगर कल को यमन की हूं विद्रोही या ईरान की सेना सऊदी अरब पर हमला करती है तो पाकिस्तान की फौज और तुर्की की वायु सेना को सऊदी के बचाव में सीधे युद्ध के मैदान में उतरना पड़ेगा। यह वेस्ट एशिया के इतिहास में पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा जियोपॉलिटिकल शिफ्ट है। इसे भी पढ़ें: शहबाज-मुनीर के सऊदी पहुंचते ही टूट पड़ा ईरान, बिछा दी लाशें सऊदी अरब ने आखिर तुर्की को क्यों चुना? इसका जवाब है तुर्की के घातक बैरख्तर ड्रोंस। आज की तारीख में तुर्की दुनिया का सबसे तेजी से उभरता हुआ डिफेंस हब है। तुर्की के पास नेटो की ट्रेनिंग है और सीरिया लीबिया जैसे देशों में लड़ने का कड़वा अनुभव है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान है। पाकिस्तान की माली हालत चाहे जो भी हो लेकिन उसके पास एक विशाल सेना और परमाणु हथियार है। सऊदी अरब को हमेशा से डर रहा है कि ईरान एक परमाणु शक्ति ना बन जाए। ऐसे में पाकिस्तान का परमाणु छाता सऊदी अरब को एक मानसिक सुरक्षा देता है। सऊदी अरब अपना पैसा लगाएगा। तुर्की अपनी टेक्नोलॉजी देगा और पाकिस्तान अपना सैन, मैन पावर और परमाणु ताकत। लेकिन इस पूरी कहानी में विलेन की एंट्री होती है ईरान के रूप में। ईरान के सांसद इब्राहिम रजई ने मक्का पैक को पेपर एग्रीमेंट कहकर इसकी धज्जियां उड़ा दी और खुद इस बात की पुष्टि की अपने एक्स अकाउंट पर की। ईरान का कहना है कि सऊदी अरब पहले अमेरिका के संरक्षण में था तब भी ईरान ने उसे नुकसान पहुंचाया। इसे भी पढ़ें: Iran ने Saudi Arabia, पाकिस्तान और Turkey के रक्षा समझौते को बताया बेअसर तुर्की और पाकिस्तान उसका क्या भला करेंगे? ईरान का तर्क बड़ा सीधा है। क्या पाकिस्तान वाकई ईरान के खिलाफ परमाणु बम इस्तेमाल करने की हिम्मत करेगा? क्या तुर्की अपने आर्थिक हितों को दांव पर लगाकर ईरान से सीधी दुश्मनी लेगा? ईरान इसे सिर्फ एक दिखावा बता रहा है ताकि सऊदी अरब अपनी जनता को दिखा सके कि वो सुरक्षित है। भारत का इन सब से क्या लेना देना? भारत के लिए स्थिति थोड़ी जटिल है। सऊदी अरब के साथ भारत के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से सबसे अच्छे दौर में है। लेकिन पाकिस्तान और तुर्की का गठजोड़ हमेशा भारत के खिलाफ जहर उगलता रहा है। चाहे कश्मीर का मुद्दा हो या इंटरनेशनल फोरम। तुर्की ने हमेशा पाकिस्तान का साथ दिया है। अगर पाकिस्तान इस डिफेंस पैक के बहाने तुर्की के एडवांस टेक्नोलॉजी हासिल करता है और सऊदी के फंड से अपनी सैन्य मशीनरी को आधुनिक बनाता है तो ये भारत की सुरक्षा के लिए एक चुनौती बन सकता है। हालांकि भारत को भरोसा है कि सऊदी अरब कभी भी भारत के हितों के खिलाफ इस पैक का इस्तेमाल नहीं होने देगा क्योंकि भारत सऊदी के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक बाजार है।
पिछले कुछ हफ्तों में जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कई प्रमुख सलाहकारों के सामने अपनी चिंताएं रखी हैं। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि ईरान के साथ टकराव को और बढ़ाने वाले सैन्य विकल्प उल्टा असर डाल सकते हैं।
यमन की सेना ने शनिवार को घोषणा की कि उन्होंने कई मोर्चों पर हूथी ठिकानों को निशाना बनाते हुए एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई मारिब और हद्रामौत प्रांतों में मिलिशिया द्वारा हाल ही में किए गए हमलों का सीधा जवाब है। सरकारी ब्रॉडकास्टर यमन टीवी पर दिए गए एक बयान में सेना के प्रवक्ता कर्नल माजिद अल-नुज़ैली ने कहा कि यह अभियान यमन की सेना के उस वैध अधिकार के तहत शुरू किया गया था, जिसके तहत वे अपनी और अपने बहादुर जवानों की सुरक्षा कर सकते हैं, और आतंकवादी हूथी मिलिशिया द्वारा किए जाने वाले धोखेपूर्ण और बार-बार के आतंकवादी हमलों से निहत्थे नागरिकों की रक्षा कर सकते हैं। इसे भी पढ़ें: बर्दाश्त नहीं...लाल सागर में डूबा भारतीय झंडे वाला जहाज, भयंकर भड़का भारत, अब होगा एक्शन! अल-नुज़ैली ने बताया कि हाल ही में हूथी हमलों में सैनिकों और आम नागरिकों की जान गई है, जिसके जवाब में कई मोर्चों पर एक साथ जवाबी कार्रवाई शुरू की गई है। अल-नुज़ैली ने कहा हमारी सेना ने हूथी मिलिशिया और उनके आतंकवादी गुटों की ताकतों और क्षमताओं के खिलाफ कई मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई की है, जहाँ हमारी सेना का उनसे आमना-सामना होता है। उन्होंने आगे कहा कि इस कार्रवाई से हमारी सेना की कमांड और कंट्रोल की एकता का पता चलता है। सैन्य तनाव और बढ़ाने के खिलाफ़ कड़ी चेतावनी देते हुए, प्रवक्ता ने ज़ोर देकर कहा कि किसी एक सेक्टर पर हमले को देश भर में सरकार के साथ जुड़ी सभी यूनिट्स पर हमला माना जाएगा। इसे भी पढ़ें: शहबाज-मुनीर के सऊदी पहुंचते ही टूट पड़ा ईरान, बिछा दी लाशें उन्होंने कहा हम इस बात पर ज़ोर देते हैं कि किसी भी मोर्चे या एक्सिस (axis) के ख़िलाफ़ आक्रामकता को हमारी सशस्त्र सेनाओं के सभी मोर्चों और एक्सिस के ख़िलाफ़ आक्रामकता माना जाएगा, जिसमें उनके सभी फ़ॉर्मेशन और बहादुर जवान शामिल हैं। जनता को संबोधित करते हुए, अल-नुज़ैली ने यमनी कबीलों और नागरिकों से अपील की कि वे सरकारी संस्थानों को बहाल करने के लिए सरकारी बलों का समर्थन करें। उन्होंने हूथी मिलिशिया पर आरोप लगाया कि वे देश के संसाधनों और संपत्ति को लूट रहे हैं, अवैध टैक्स लगा रहे हैं, अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर रहे हैं और बाहरी एजेंडे के लिए देश को क्षेत्रीय संघर्षों में धकेल रहे हैं।
Islamic NATO में Saudi Arabia, Pakistan,Turkiye आए साथ तो क्या बोला Iran ?
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच बन रहे 'इस्लामिक नाटो' शैली के रक्षा समझौते पर ईरान ने सख्त रुख अपनाया है। तेहरान ने रियाद को चेतावनी देते हुए कहा है कि कागजी समझौते और बाहरी ताकतों पर निर्भरता सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती।
तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने किया त्रिपक्षीय सैन्य समझौता
Three Party Mecca Summit: मध्यपूर्व में चल रहे तनावों के बीच, तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक ऐसे सैन्य समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके अनुसार उनमें से किसी भी देश पर हमले को तीनों सहयोगी देशों पर हमला माना जाएगा।
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान का डिफेंस पैक्ट भारत के लिए कितनी चिंता की बात है. आइए जानते हैं...
इजराइल के साथ सीमा और कैदियों के मुद्दों पर हुई बातचीत में प्रगति हुई: लेबनान
बेरूत, 8 अगस्त . लेबनान और इजराइल के बीच हाल ही में सीमा से जुड़े मुद्दों और कैदियों की वापसी को लेकर बातचीत की गई थी जिसको लेकर लेबनान के President जोसेफ आउन ने कहा है कि रोम में लेबनान और इजराइल के बीच हालिया बातचीत के दौरान सीमा से जुड़े मुद्दों और कैदियों की ... Read more
तुर्किए, सऊदी अरब और पाकिस्तान आए साथ, नई डिफेंस डील से बदलेगी क्षेत्र की ताकतों की तस्वीर?
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच तुर्किए, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने एक महत्वपूर्ण संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। 7 अगस्त 2026 को मक्का में हुए इस समझौते में तीनों देशों ने सामूहिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई है। समझौते की सबसे अहम बात यह है कि तीनों […] The post तुर्किए, सऊदी अरब और पाकिस्तान आए साथ, नई डिफेंस डील से बदलेगी क्षेत्र की ताकतों की तस्वीर? first appeared on Sanjeevni Today .
<
यह समझौता दुनिया के तीन अहम सुन्नी मुस्लिम देशों ने इस्लाम के पवित्र शहर मक्का में पवित्र दिन शुक्रवार को किया और इसे मुस्लिम नेटो के रूप में भी देखा जा रहा है.
मिडिल ईस्ट के ऊपर तेजी से उड़ता दिखाई दिया रहस्यमयी गोला, पेंटागन ने जारी किया UFO वीडियो
पेंटागन ने UFO से जुड़ी ऐसी फाइलें जारी की हैं जिन्हें पिछले करीब डेढ़ साल से छिपाकर रखा गया था. इनमें मिडिल ईस्ट के आसमान में तेज रफ्तार से गुजरी रहस्यमयी चीज सबका ध्यान खींच रही है.
Muslim NATO Agreement:
Moradabad News: नए खरीदार, नए बाजार...पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच निर्यातकों का 10 देशों पर फोकस
पश्चिम एशिया के युद्ध का असर पीतलनगरी के निर्यात पर साफ दिखाई देने लगा है।
सऊदी अरब से पैतृक गांव पहुंचा शव, बिलख पड़े परिजन, VIDEO
सऊदी अरब से पैतृक गांव पहुंचा शव, बिलख पड़े परिजन, VIDEO
Iran America war होगी तेज, UAE, Saudi Arabia और Qatar तक फैलेगी जंग की आग! | Middle East
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब पूरे खाड़ी क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। अब तक ईरान की प्रतिक्रिया मुख्य रूप से क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक सीमित मानी जा रही थी, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया है कि यदि टकराव और गहराया तो इसका दायरा कहीं अधिक व्यापक हो सकता है।
Islamic NATO में Saudi Arabia, Pakistan,Turkiye आएंगे साथ, क्या India के लिए मुश्किल। Israel
Islamic NATO में Saudi Arabia, Pakistan,Turkiye आएंगे साथ, क्या India के लिए मुश्किल। Israel
धनबाद के कतरास में 20 फीट धंसी जमीन, 10 घर जमींदोज; घर में फंसे 8 लोग सीढ़ी के सहारे निकाले गए
धनबाद के कतरास में भारी ब्लास्टिंग के कारण 20 फीट जमीन धंस गई, जिससे 10 घर जमींदोज हो गए और 8 लोग फंस गए।
Jammu News: जम्मू में भाजपा विधायक युद्धवीर सेठी ने वार्ड नंबर 16,न्यू प्लॉट के निवासियों के साथ बिजली कनेक्शन काटे जाने और भारी बिलों के खिलाफ सड़क पर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के कारण जानीपुर मार्ग अवरुद्ध हो गया।
Islamic NATO बनाने को लेकर डील फाइनल, Saudi Arabia, Pakistan,Turkiye जल्द करेंगे ऐलान। Israel
पश्चिम एशिया में जारी जंग और बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच संभावित त्रिपक्षीय रक्षा समझौते ने भू-राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। CNN-News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों देशों के बीच डिफेंस डील को अंतिम रूप देने की कोशिश चल रही है
Amethi News: सऊदी अरब में हार्ट अटैक से युवक की मौत
young man in amethi
मध्य प्रदेश के सीहोर के सेठ जुम्मा लाल रुठिया ने प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान 1917 में ब्रिटिश हुकूमत द्वारा कर्ज मांगे जाने पर 35 हजार रुपये दिए थे। अब रुठिया के उत्तराधिकारियों ने ब्रिटेन सरकार से कर्ज का भुगतान करने के लिए पत्राचार किया है।
पंजाब सरकार द्वारा चलाए जा रहे राज्यव्यापी 'युद्ध नशों के विरुद्ध' (War Against Drugs) अभियान को सरकारी कॉलेज गुरदासपुर में व्यापक जनसमर्थन और अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली है। अभियान के अंतर्गत कॉलेज के सैकड़ों विद्यार्थियों और समस्त शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक स्टाफ ने एकजुट होकर नशा विरोधी शपथ ली। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने ऑनलाइन प्लेज (E-Pledge) लेकर नशा मुक्ति अभियान के आधिकारिक प्रमाण-पत्र भी प्राप्त किए। समारोह के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) अश्वनी कुमार भल्ला ने कहा कि नशा केवल किसी एक व्यक्ति या परिवार की समस्या नहीं है, बल्कि यह समूचे समाज और देश के समग्र विकास के रास्ते में एक गंभीर बाधा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब के युवाओं के भीतर अपार प्रतिभा, क्षमता और ऊर्जा छिपी है, जिसे नशे की गर्त में जाने से बचाना और सही दिशा देना हम सभी का परम और सामूहिक दायित्व है। प्राचार्य भल्ला ने छात्रों का आह्वान किया कि वे अपने जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें और शिक्षा, उच्च अनुसंधान, खेलकूद, नवाचार, उद्यमिता व समाज सेवा जैसे रचनात्मक क्षेत्रों में अपनी ऊर्जा लगाएं। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं हर प्रकार के व्यसन से दूर रहने तथा दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की अपील की। विद्यार्थियों ने ली कभी नशा न करने और पीड़ितों की मदद करने की प्रतिज्ञा अभियान के दौरान विद्यार्थियों ने पूरे आत्मबल के साथ संकल्प लिया कि वे जीवन में कभी भी किसी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करेंगे। इसके अलावा, उन्होंने अपने परिवार, दोस्तों और समाज को भी इस सामाजिक बुराई से दूर रहने के लिए प्रेरित करने का वचन दिया। छात्रों ने प्रतिज्ञा की कि वे नशे की लत से पीड़ित व्यक्तियों को सही इलाज, नशामुक्ति केंद्रों और उचित परामर्श तक पहुंचाने में पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे, ताकि पंजाब और भारत को नशा मुक्त, स्वस्थ एवं समृद्ध बनाया जा सके। पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान कॉलेज परिसर में आयोजित होंगी नशा विरोधी गतिविधियां प्राचार्य प्रो. (डॉ.) अश्वनी कुमार भल्ला ने घोषणा की कि सरकारी कॉलेज गुरदासपुर को पूर्णतः नशा मुक्त परिसर (Drug-Free Campus) बनाए रखने के लिए यह अभियान पूरे शैक्षणिक सत्र में निरंतर जारी रहेगा। इसके तहत सेमिनार और जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि युवाओं में नशा विरोधी चेतना को और अधिक मजबूत किया जा सके। इस मौके पर उपस्थित समस्त प्राध्यापकों ने भी विद्यार्थियों को अच्छी संगति चुनने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और अपने उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए सदैव प्रयासरत रहने की प्रेरणा दी। ये कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जागरूकता रैलियां और संगोष्ठियां (Seminars) विषय-विशेषज्ञों के व्याख्यान और काउंसलिंग सेशन पोस्टर मेकिंग, स्लोगन राइटिंग, निबंध व भाषण प्रतियोगिताएं नुक्कड़ नाटक और खेल गतिविधियां एन.एस.एस. (NSS), रेड रिबन क्लब और अन्य कमेटियों के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम
टेलर ने कपड़े की कतरन वापस लौटा दी तो फेंकने की बजाय 4 तरीके से करें इस्तेमाल
आपके पास ढेर सारी कपड़े की कतरन बची रहती है या फिर टेलर ने सूट या ब्लाउज की बची हुई कतरन को वापस कर दिया है। इसे फेंकने की बजाय आप बहुत ही काम के तरीकों से दोबारा से इस्तेमाल में ला सकते हैं।
500 साल में बस एक बार हारा कुंभलगढ़ किला, वजह युद्ध नहीं; पढ़िए मेवाड़ की आन-बान और शौर्य की अनोखी कहानी
पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (DA) का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा गया है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से कर्मचारियों के पक्ष में फैसला आने के बाद सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना को देखते हुए कर्मचारियों ने पहले ही कैविएट याचिका दाखिल कर दी है। 3 अगस्त को हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को 15 दिनों के भीतर कर्मचारियों और पेंशनरों का बकाया डीए जारी करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि इस महीने के अंत तक भुगतान नहीं किया गया, तो सरकार को 6% ब्याज के साथ राशि देनी होगी। इधर, सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील किए जाने की आशंका के बीच कर्मचारी पक्ष ने 5 अगस्त को कैविएट याचिका दाखिल कर दी। इसका मतलब है कि यदि सरकार हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देती है, तो सुप्रीम कोर्ट कर्मचारी पक्ष को सुने बिना कोई आदेश पारित नहीं करेगा। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अभिषेक गुप्ता सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखेंगे। कर्मचारियों के इस कदम से क्या फायदा… हाईकोर्ट ने रद्द की थी 42 किश्तों वाली नीतिहाल ही में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की उस नीति को खारिज कर दिया था, जिसके तहत DA का बकाया 42 किश्तों में देने का प्रावधान किया गया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को केंद्र सरकार की तर्ज पर DA और DR का भुगतान करे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कर्मचारियों द्वारा उठाया गया यह कदम बेहद सतर्कता भरा है। इससे यह सुनिश्चित हो गया है कि अगर सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती भी है, तो कर्मचारियों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा। कर्मचारियों के बकाया DA का पूरा मामला जानिए… जानिए हाईकोर्ट के फैसले पर वित्तमंत्री ने क्या कहा था ************* ये खबर भी पढ़ें: हाईकोर्ट का AAP सरकार को झटका: 15 दिन में बकाया DA देने के आदेश, देरी पर 6% ब्याज भी; 8 लाख मुलाजिमों-पेंशनर्स को फायदा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को बड़ा झटका देते हुए राज्य के करीब 8 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को 15 दिन के भीतर लंबित महंगाई भत्ता (DA) जारी करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि इस महीने के अंत तक भुगतान नहीं किया गया तो सरकार को 6% ब्याज भी देना होगा। (पढ़ें पूरी खबर)
सबसे अहम युद्ध पर किसी का ध्यान नहीं: तेजी से फैल रहे नफरत और भेदभाव, जीत तभी होगी, जब हम धरती को हारने न दें--The Most Important War We Ignore: Why Climate Change and Environmental Crisis Need Urgent Global Attention
युद्ध नहीं, शांति ही मानवता का भविष्य
विश्व भर में 6 अगस्त को हिरोशिमा दिवस मनाया जाता है। यही वह दिन है, जब वर्ष 1945 में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा शहर पर पहला परमाणु बम गिराया था। इस दिन हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है…
Iran America War: ईरान ने Iraq और Kuwait बार्डर के करीब क्यों भेजे T 72 Tanks|Trump
मिडिल ईस्ट एक ऐसे ज्वालामुखी पर बैठा है जो कभी भी फट सकता है..जी हां जंग के बादल कभी भी छा सकते हैं...अमेरिका चाहे लाख मना करे...लेकिन जब तक इजरायल खित्ते में आक्रामक है तब तक जंग पूरी तरह नहीं रुक सकती..यही वजह है कि ईरान ने ्अपने टैंक इराक से लगी सरहद के करीब जमा करना शुरु कर दिए हैं…
शिवसेना (UBT) और राष्ट्रीय हिंदू कल्याण संगठन ने जम्मू को राज्य का दर्जा और अनुच्छेद 371 के तहत विशेष संवैधानिक संरक्षण देने की मांग की।
कतर से रुकी सप्लाई, फिर भी 15% कैसे बढ़ा भारत का LNG आयात? देखें कूटनीति
कूटनीति' में आज बात भारत की उस रणनीतिक चाल की, जिसने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाज़ारों को हैरान कर दिया है. जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जंग छिड़ी, तो दुनिया को लगा कि भारत में बड़ा गैस संकट आने वाला है. वजह साफ थी-भारत अपनी 60 फीसदी एलएनजी (LNG) गैस इसी समुद्री रास्ते से मंगाता था. लगा कि कतर से सप्लाई रुकते ही भारत की फैक्ट्रियां और रसोई गैस थम जाएगी. लेकिन भारत ने ऐसा कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक खेला कि इस पूरे संकट के बावजूद देश में एलएनजी का आयात घटने के बजाय 15 फीसदी और बढ़ गया.
हरियाणा में मानसून मेहरबान: अधिकतर जिलों में मध्यम से तेज बारिश, 12 अगस्त तक जारी रहेगा दौर
प्रदेश के अधिकतर जिलों में मंगलवार को मध्यम से तेज बारिश हुई।
इंदौर-उज्जैन हेलीकॉप्टर सेवा का किराया 30% बढ़ा: अब एकतरफा सफर के लिए चुकाने होंगे 6,500 रुपए
ईंधन की कीमतें बढ़ने के कारण इंदौर से उज्जैन के बीच चलने वाली हेलीकॉप्टर सेवा का एकतरफा किराया 30% बढ़कर 6,500 हो गया है।
ईरान-ओमान वार्ता पर कतर ने दिया अपडेट, क्या आज हो पाएगी डील?
कतर ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की भाषा तैयार हो चुकी है और उसका मसौदा अभी पक्षों के बीच साझा किया जा रहा है, जबकि कतर और ओमान वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत आसान बनाने के लिए करीबी तालमेल से काम कर रहे हैं.
कंगना के ‘जेबकतरों जैसी ड्रेस’ वाले बयान को यूजर्स ने सोनाक्षी से जोड़ा
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों को लेकर दिए गए बयान से सियासत गरमा गई है। उन्होंने कहा कि मदरसे आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, जिस पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
'जेबकतरों की तरह...', कंगना ने सोनाक्षी पर किया कमेंट!
कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर बिना नाम लिए इंडस्ट्री की एक हीरोइन पर तीखा हमला किया है. यूजर्स का मानना है कंगना ने ये अटैक सोनाक्षी सिन्हा पर किया है.
Iran US War Update: महायुद्ध से डरा Saudi Arab? MBS ने Donald Trump को फोन कर दी बड़ी चेतावनी!
Iran-US War: महायुद्ध से डरा Saudi Arab? MBS ने Donald Trump को फोन कर दी बड़ी चेतावनी!
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
गाजा में कत्लेआम पर भड़के कतर-तुर्की-मिस्र, इजरायल नहीं रोक रहा बमबारी
कतर, मिस्र और तुर्की ने गाजा में इजरायली कार्रवाई, खासकर नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और स्वास्थ्य ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की है. इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है. गाजा सिटी के दक्षिण-पश्चिम में ताजा हमले में कम से कम दो लोग मारे गए हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
'दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा हमला?', ट्रंप ने ईरान पर अब किया ये ऐलान
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित बड़ा हमला फिलहाल रोक दिया है. दूसरी तरफ तेहरान ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए सैन्य सतर्कता बनाए रखने, सऊदी अरब और पाकिस्तान से तेज संपर्क बढ़ाने और यह साफ करने का संदेश दिया है कि क्षेत्रीय सुरक्षा, जवाबी तैयारी और राजनीतिक समाधान अब साथ साथ चलेंगे.
युद्ध, डर और उम्मीद... आखिर क्यों गढ़े गए सुपरहीरो?
सुपरहीरो कभी भी सिर्फ असाधारण शक्तियों वाले किरदार नहीं रहे. वे हर दौर के समाज की इच्छाओं, आशंकाओं और सपनों का प्रतिबिंब रहे हैं. वे हमें याद दिलाते हैं कि असली ताकत केवल असाधारण शक्तियों में नहीं बल्कि सही समय पर सही फैसला लेने, कमजोरों के साथ खड़े होने और दूसरों के लिए जोखिम उठाने के साहस में होती है.
इराक के सुलेमानिया पर ईरानी ड्रोन ने बरपाया कहर, सामने आया Video
इराक के सुलेमानिया में ईरान-विरोधी समूहों के एक ठिकाने को ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया है. माना जा रहा है कि ये हमला ईरान ने किया है जिसमें अलगाववादी समूहों के मुख्यालय पर दो प्रोजेक्टाइल सीधे जाकर लगे. ईरान ने ड्रोन से ये हमला किया. देखें वीडियो.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
Iran US War: Iran ने जारी कर दी अपनी Hitlist, सऊदी, UAE और कतर पर क्यों मंडराया खतरा?
पश्चिम एशिया (Middle East) का युद्ध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से तीसरे विश्व युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है। ईरान (Iran) ने अमेरिका (US) और उसके सहयोगी देशों को खुली चेतावनी दी है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' पहल से खत्म होगा गाजा युद्ध? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'बोर्ड ऑफ पीस' पहल को लेकर साइप्रस में बैठक हुई है. यह बोर्ड गाजा युद्ध खत्म करने और पुनिर्माण योजना की निगरानी के लिए बनाया गया है. ट्रंप के कई देशों के नेताओं को इसमें शामिल होने का मौका दिया है. हालांकि कुछ देशों ने समर्थन किया है. वहीं कुछ ने इसकी भूमिका और और संयुक्त राष्ट्र पर असर को लेकर चिंता जताई है.
'टैरिफ धमकी से टला भारत-पाक परमाणु युद्ध', 'ऑपरेशन सिंदूर' पर ट्रंप का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध टालने में अपनी भूमिका का दावा किया है. उन्होंने कहा कि उनके कूटनीतिक दबाव और टैरिफ की धमकी से होने जा रहा युद्ध रुक गया. ट्रंप ने दावा किया कि इसी तरह उन्होंने 5 युद्ध रोक दिए.
Houthis vs Saudi Arabia: Iran के प्रॉक्सी से तीन तरफा घिरा सऊदी, क्या अब युद्ध की उपाय? Red Sea। US
अमेरिका और इज़राइल की ओर से 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू होने के बाद पश्चिम एशिया लगातार तनाव के दौर से गुजर रहा है। अब तक सऊदी अरब इस संघर्ष से दूरी बनाए रखने की कोशिश करता रहा,
Houthis Attack on Saudi Arabia और Iraq में Iran के रजिस्टेंस की ताकत पर Bobby Naqvi को सुनिए | PMF
Saudi Arabia और Iraq में Iran के रजिस्टेंस की ताकत पर Bobby Naqvi को सुनिए | PMF सऊदी के यमन पर अटैक और हूतियों के पलटवार के बीच..इराक से भी सऊदी से बदले की उठ रही आवाजें..मिडिल ईस्ट में जंग के इस नए मोर्चे पर..गल्फ न्यूज के पूर्व एडिटर बॉबी नकवी को सुनिए
The Odyssey Review: युद्ध से लौटते योद्धा की नहीं, खुद तक लौटते इंसान की कहानी
क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' सिर्फ होमर के महाकाव्य का रूपांतरण नहीं, बल्कि युद्ध, अपराधबोध और आत्म-स्वीकृति की गहरी कहानी है। मैट डेमन का शानदार अभिनय, अद्भुत सिनेमैटोग्राफी और भावनात्मक निर्देशन इसे सिर्फ एक पौराणिक एडवेंचर नहीं रहने देते। शुरुआती ...
गाजा संघर्ष : नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल
सयुक्त राष्ट्र की हालिया स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की रिपोर्ट ने इजरायल और कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में जारी हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों की गंभीर तस्वीर पेश की है।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
युद्धविराम से आगे: क्या विश्व अहिंसा की ओर बढ़ेगा?
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हाल ही में हुआ युद्धविराम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया युद्ध की लपटों में घिरकर वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका था। कई सप्ताह तक चले संघर्ष ने क्षेत्र को ऐसे ज्वालामुखी में बदल दिया था, जिसकी प्रत्येक विस्फोटक घटना विश्व अर्थव्यवस्था ... Read more
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
'वाराणसी' में दिखेगा महायुद्ध, भगवान राम और कुंभकर्ण के बीच होगा 30 मिनट का ऐतिहासिक टकराव!
दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली जब भी कोई नया प्रोजेक्ट लाते हैं, तो वह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक उत्सव बन जाता है। 'बाहुबली' और 'आरआरआर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद, राजामौली अब सुपरस्टार महेश बाबू के साथ अपनी अगली महात्वाकांक्षी ...
इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) हर हफ्ते दुनिया भर यूजर्स के सर्च और प्रोफाइल विजिट के आधार पर 'मोस्ट पॉपुलर इंडियन सेलिब्रिटीज' की लिस्ट जारी करता है। आमतौर पर इस लिस्ट के शीर्ष पर वही सुपरस्टार्स नजर आते हैं जिनकी बड़ी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज ...
खाड़ी युद्ध से निपटने की मोदी की तजबीज
मोदीजी ने एक बार फिर राष्ट्र की जनता को उसके कर्तव्यों के प्रति सचेत किया है।
लीजा रे ने दुबई से शेयर की दर्दभरी कविता, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच जताई चिंता
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। हर तरफ धमाकों और सायरन का शोर सुनाई दे रहा है। एक्ट्रेस लीजा रे भी इन हालातों के बीच दुंबई में अपने घर ...
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता, बेटी के साथ सुरक्षित लौटीं भारत, सुनाई आपबीती
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता भी अपनी 14 साल की बेटी सायरा के साथ यूएई में ...
एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज़ की '120 बहादुर' को लेकर चर्चा अब अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। फिल्म ट्रेलर ने पूरी तरह से रोमांच और प्रेरणा का सही मिश्रण पेश किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बलिदान दिवस पर मेजर शैतान सिंह ...
War 2 रिव्यू: लचर स्क्रिप्ट और निर्देशन के कारण रितिक और एनटीआर हारे युद्ध, पढ़ें पूरी समीक्षा
रितिक रोशन और एनटीआर स्टारर War 2 ‘स्पाई यूनिवर्स’ की बड़ी पेशकश मानी जा रही थी, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और औसत निर्देशन ने इसे निराशाजनक बना दिया। शानदार एक्शन सीक्वेंस और एनटीआर के दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद फिल्म का सेकंड हाफ बिखर गया। कहानी में ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला अपनी खूबसूरती से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। उर्वशी ने बेहद ही कम समय में एक अलग मुकाम हासिल किया है। वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों के साथ 'मिलने और अभिवादन' के क्षणों में संलग्न रहती है। ऐसा ही एक क्षण था जब ...
सलमान खान की सिकंदर के आखिरी गाने में दिखेगा जबरदस्त जलवा, तुर्की से बुलाए गए 500 डांसर्स!
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की 'सिकंदर' इस साल की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके एक्शन-पैक्ड टीजर ने इसकी भव्य एंट्री के लिए एकदम परफेक्ट माहौल तैयार कर दिया है। भव्य पैमाने पर बनाई गई इस फिल्म में ...
केसरी वीर के लिए सूरज पंचोली ने की कड़ी ट्रेनिंग, ऐसे सीखा युद्ध कौशल
बॉलीवुड एक्टर सूरज पंचोली अपनी पहली बायोपिक में वीर हामीरजी गोहिल के ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने जा रहे हैं। सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय और सूरज पंचोली अभिनीत फिल्म 'केसरी वीर : लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ' का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ...
फरहान अख्तर लेकर आ रहे भारत-चीन युद्ध पर आधारित फिल्म 120 बहादुर, निभाएंगे मेजर शैतान सिंह का रोल
Movie 120 Bahadur : रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट, ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज के साथ मिलकर '120 बहादुर' को पेश करने के लिए उत्साहित हैं। यह फिल्म मेजर शैतान सिंह (पीवीसी) और चार्ली कंपनी, 13 कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिकों की कहानी कहती ...
Adil Hussain: दुनियाभर में इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 की धूम मची हुई है। पेरिस ओलंपिक में दुनियाभर के खिलाड़ियों ने भाग लिया है। भारत के कई खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। हाल ही में तुर्की के शूटर यूसुफ डिकेक ने सिल्वर मेडल जीता।
बॉर्डर की 27वीं सालगिरह पर, अभिनेता सनी देओल ने एक घोषणा वीडियो के ज़रिए फ़्रैंचाइज़ी के दूसरे संस्करण की पुष्टि की है। अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सनी ने बॉर्डर 2 में अपनी वापसी की आधिकारिक घोषणा करते हुए एक वीडियो शेयर किया और इसे 'भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म' बताया। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ''एक फौजी अपने 27 साल पुराने वादे को पूरा करने के बाद, आ रहा है फिर से। भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म, बॉर्डर 2।'' इस फिल्म का निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता करेंगे। आगामी युद्ध फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह करेंगे। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | पति से तकरार के बीच केन्या लौट गई हैं Dalljiet Kaur? शादी को बचाने की कर रही कोशिश सनी द्वारा घोषणा वीडियो शेयर किए जाने के तुरंत बाद, सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए कमेंट सेक्शन में बाढ़ ला दी। एक यूज़र ने लिखा, ''वाह, यह बहुत बढ़िया घोषणा है सर जी, जय हिंद।'' दूसरे ने लिखा, ''बहुत उत्साहित हूँ।'' तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, ''बॉर्डर 2 के लिए बहुत उत्साहित हूं।'' इसे भी पढ़ें: NDA पर इमोशनल बयान, काले सूट में ली मंत्री पद की शपथ और शर्मिला अंदाज, Tripti Dimri की तरह रातों रात भारत के Sensation बन गये Chirag Paswan सनी देओल की अन्य परियोजनाएं उन्हें आखिरी बार अमीषा पटेल के साथ गदर 2 में देखा गया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही और इसे ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर घोषित किया गया। गदर 2 की सफलता के बाद, सनी ने लाहौर 1947 सहित कई फिल्में साइन कीं, जिसे आमिर खान के प्रोडक्शन बैनर के तहत बनाया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जिन्होंने आमिर को कल्ट क्लासिक अंदाज़ अपना अपना (1994) में निर्देशित किया था। View this post on Instagram A post shared by Sunny Deol (@iamsunnydeol)
Kalki 2898 AD: शुरू हो गया नया युद्ध, पूरे ट्रेलर की अहम कड़ी हैं अमिताभ, प्रभास करेंगे इम्प्रेस
Kalki 2898 AD के ट्रेलर को देखें तो, फिल्म कल्कि 2898 एडी के मेकर्स ने विश्वास दिलाया है कि ये फिल्म लोगों को बांधने में कामयाब होगी. टफ सीक्वेंस, क्लियर एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर आपका ध्यान खींचते हैं. वीएफएक्स पर भी अच्छा काम किया गया है.
आशुतोष राणा ने डीपफेक वीडियो को बताया 'माया युद्ध', बोले- ये सालों से चल रहा
आशुतोष ने कहा कि ऐसी बातों में खुद को डिफेंड करने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि जो लोग आपको जानते हैं वो सवाल करेंगे ही नहीं. और जो नहीं जानते, उन्हें किसी रिस्पॉन्स से फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वो दिमाग में आपकी एक छवि बना चुके होते हैं.
रानीति बालाकोट एंड बियॉन्ड: जिमी शेरगिल की नई सीरीज भारत की आधुनिक युद्ध की ऐतिहासिक कहानी को प्रदर्शित करेगी। जिमी शेरगिल दो मिनट के ट्रेलर की शुरुआत पुलवामा हमले की झलक से होती है। एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाने वाले आशीष कहते हैं, ये एक नया रण है या इसे जीतने के लिए एक नई रणनीति की जरूरत है। इसे भी पढ़ें: नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन प्रहार', कमांडर शंकर राव समेत अब तक 79 हुए ढेर, हिट लिस्ट में और भी कई नाम शामिल आगामी वेब शो आधुनिक युद्ध को डिकोड करता है जो केवल भौतिक सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता है बल्कि सोशल मीडिया, डिजिटल रणनीति और गुप्त राजनीतिक चालों के क्षेत्र से परे है जो भू-राजनीति को नया आकार देने की शक्ति रखता है। वेब श्रृंखला उन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है जिन्होंने 2019 में देश को हिलाकर रख दिया था। शो में कुछ हवाई दृश्य, शानदार प्रदर्शन और एक शक्तिशाली कथा है जो युद्ध के मैदान के अंदर और बाहर हर पहलू को चतुराई से पकड़ती है। इसे भी पढ़ें: Biden को सोचना पड़ेगा फिर एक बार, Iran पर प्रहार तो रूस करेगा पलटवार, रक्षा मंत्रायल ने चिट्ठी लिखकर जता दी मंशा आगामी वेब श्रृंखला के बारे में बात करते हुए, जिमी ने कहा: यह मेरे द्वारा अतीत में की गई किसी भी भूमिका से भिन्न है। कम से कम यह कहना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन भारत की पहली वॉर-रूम केंद्रित वेब-श्रृंखला का हिस्सा बनना बेहद संतोषजनक भी है। वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित जिसने देश को हिलाकर रख दिया। एनएसए प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए, आशीष ने कहा, एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन रक्षा बलों के कुछ सदस्यों के साथ बैठकों ने मुझे अपने चरित्र की बारीकियों को समझने में मदद की। तैयारी कार्य और कार्यशालाएं मुझे वापस ले गईं मेरे एनएसडी के दिनों में। संतोष सिंह द्वारा निर्देशित, श्रृंखला का निर्माण स्फीयरओरिजिन्स मल्टीविजन प्राइवेट लिमिटेड के सुंजॉय वाधवा और कॉमल सुंजय डब्ल्यू द्वारा किया गया है। इसमें प्रसन्ना भी हैं। शो का प्रीमियर 25 अप्रैल को JioCinema पर होगा।
दर्शक काफी समय से रैपर बादशाह और हनी सिंह के बीच जुबानी जंग देख रहे हैं। दोनों का रिश्ता सालों से विवादों से भरा रहा है। हालांकि करियर के शुरुआती दिनों में बादशाह और हनी सिंह के बीच अच्छी दोस्ती हुआ करती थी। हालाँकि, ऐसा लगता है कि सफलता और पैसे ने धीरे-धीरे इस दोस्ती को पूरी तरह से खत्म कर दिया। अब दोनों अक्सर एक दूसरे पर तंज कसते नजर आते हैं। हाल ही में हनी सिंह एक होली पार्टी में शामिल हुए, जहां उन्होंने बादशाह के 'पापा कमबैक' वाले कमेंट का करारा जवाब दिया। रैपर का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसे भी पढ़ें: Punjab Kings के खिलाफ जीत के बाद इंटरनेट पर Virat Kohli का Anushka Sharma के साथ वीडियो कॉल, FLY KISS देते नजर आये खिलाड़ी हनी सिंह ने बादशाह पर किया पलटवार बादशाह कुछ दिनों पहले हनी सिंह पर अपनी टिप्पणी को लेकर चर्चा में थे, जिसमें उन्होंने हनी सिंह की वापसी पर कटाक्ष किया था। अब सिंगर और रैपर हनी सिंह ने एक कमेंट के जरिए बादशाह को करारा जवाब दिया है और कहा है कि उन्हें बादशाह को जवाब देने के लिए मुंह खोलने की जरूरत नहीं है। उनके फैन ही काफी हैं जो हर चीज पर बात कर सकते हैं। उन्होंने अपने गाली वाले अंदाज में अपने फैंस से बात करते हुए बादशाह का जवाब दिया। हनी सिंह को सोमवार को मुंबई में एक होली पार्टी में परफॉर्म करते देखा गया और यहीं उन्होंने बादशाह पर कटाक्ष किया। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा, हर कोई कहता है, रिप्लाई करो, रिप्लाई करो... मैं क्या रिप्लाई करूं... आप लोग तो उनके सारे कमेंट्स का बहुत अच्छे से रिप्लाई कर चुके हैं। मुझे मुंह खोलने की जरूरत है। ऐसा नहीं होता है। जैसे ही भीड़ ने उनके लिए तालियां बजाईं, गायक ने कहा, मुझे बोलने की जरूरत नहीं है। आप लोग खुद पागल हैं। हनी सिंह पागल हैं और उनके प्रशंसक भी पागल हैं। इसे भी पढ़ें: Taapsee Pannu के पति Mathias Boe आखिर कौन है? जब सफल भी नहीं थी एक्ट्रेस तब से उन्हें प्यार करते थे बैडमिंटन खिलाड़ी रैपर बादशाह ने क्या कहा? आपको बता दें कि हाल ही में बादशाह ने हनी सिंह पर कमेंट करते हुए कहा था, ''मुझे एक पेन और कागज दो। मैं तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लाया हूं। मैं कुछ गाने लिखूंगा और तुम्हें दूंगा। पापा की वापसी तुम्हारे साथ होगी।'' Kalesh Controversy B/w Honey Singh and Badshah (Honey Singh Replied to Badshah) pic.twitter.com/o74t423bgS — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 25, 2024 Kalesh Between Badshah & Honey Singh Fans on Stage during Live Concert pic.twitter.com/M4VqSqLSc3 — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 19, 2024
आखिर क्यों Indira Gandhi ने Aandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध, आज भी देखने से कतराते हैं लोग
आखिर क्यों Indira Gandhi नेAandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध,आज भी देखने से कतराते हैं लोग
'सावरकर' रिव्यू: खोखली, एकतरफा फिल्म में एकमात्र अच्छी चीज है रणदीप हुड्डा का काम
आज के दौर में 'गुमनाम' हो चुके एक स्वतंत्रता नायक की कहानी कहने निकली ये फिल्म, एक अनजान कहानी बताने से ज्यादा अपने हीरो विनायक दामोदर सावरकर को बाकियों के मुकाबले अधिक 'वीर' बताने पर फोकस करने लगती है.
अस्तित्व और बदले के लिएब्रह्मांड में शुरू होने वाला है महायुद्ध, एक्शन और रोमांच से भरपूर हैRebel Moon 2 का धांसू ट्रेलर

