होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर भड़का युद्ध! अमेरिका-ईरान के बीच सीधी भिड़ंत से खाड़ी देशों में खलबली
दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) पर एक बार फिर तनाव चरम पर है। अमेरिकी सेना ने ईरान के ठिकानों पर फिर से हवाई हमले किए हैं, जिससे मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष अब खाड़ी देशों की सीमाओं तक पहुंच गया है। इस घटना ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति और भू-राजनीतिक सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहाँ से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है, अब सीधे तौर पर युद्ध क्षेत्र में बदलता नजर आ रहा है।क्यों बढ़ रहा है होर्मुज पर तनाव?ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहा शीतयुद्ध अब खुले संघर्ष में बदल चुका है। ताजा हमलों के पीछे अमेरिकी सेना का तर्क है कि ईरान समर्थित गुटों ने अमेरिकी संपत्ति और नौसैनिक बेड़ों को निशाना बनाने की कोशिश की थी। वहीं, तेहरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला करार देते हुए कड़े जवाब की चेतावनी दी है। यह पूरा क्षेत्र न केवल तेल के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ग्लोबल सप्लाई चेन की 'धमनी' माना जाता है। किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ना तय है।खाड़ी देशों के लिए कितना बड़ा खतरा?यूएई, सऊदी अरब और कतर जैसे खाड़ी देश इस बढ़ते तनाव को लेकर सबसे ज्यादा डरे हुए हैं। यदि युद्ध और अधिक फैलता है, तो इन देशों के समुद्री व्यापारिक मार्ग पूरी तरह से ठप हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर रूस-यूक्रेन युद्ध से भी कहीं ज्यादा घातक होगा। खाड़ी देशों ने अपनी सीमाओं पर सुरक्षा को हाई-अलर्ट पर रखा है और वे लगातार अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के संपर्क में हैं ताकि संघर्ष को फैलने से रोका जा सके।क्या वैश्विक बाजारों में आएगी तेजी?बाजार के जानकारों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच इस सीधी भिड़ंत का असर सीधे तौर पर क्रूड ऑयल के दामों पर दिखेगा। अगले कुछ दिनों में पेट्रोल और डीजल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं। निवेशकों और आम नागरिकों के लिए आने वाला समय अनिश्चितताओं से भरा हो सकता है, क्योंकि युद्ध की यह आंच अब सीधे खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंच चुकी है, जिसका असर हम सभी की जेब पर पड़ेगा।
देश के लिए सीमा पर तीन ऐतिहासिक युद्ध लड़ चुके एक बुजुर्ग सैनिक को अपने जीवन के आखिरी पड़ाव में अपनी ही जमीन बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों और थानों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। मामला राजस्थान के सरहदी जिले जैसलमेर के मोहनगढ़ इलाके का है, जहां 1962 में चीन और 1965 व 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ जंग में शामिल रहे 92 साल के रिटायर्ड कैप्टन चुन्नीलाल की कृषि जमीन को भू-माफियाओं ने फर्जी डाक्यूमेंट्स के जरिए अपने नाम करवा लिया। आरोप है कि असली सैनिक की जगह 75 साल के एक फर्जी बुजुर्ग को खड़ा कर रजिस्ट्री करवाई गई और बाद में जमीन करीब 25 लाख रुपए में बेच दी गई। मामले में पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद कोतवाली थाने में नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना के तहत मिली थी जमीन पीड़ित कैप्टन चुन्नीलाल मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं और पोंग बांध परियोजना के विस्थापित हैं। बांध निर्माण के दौरान उनकी पैतृक जमीन अधिग्रहित की गई थी। इसके बदले सरकार ने उन्हें इंदिरा गांधी नहर परियोजना के तहत जैसलमेर के मोहनगढ़ इलाके में कृषि भूमि का मुरब्बा आवंटित किया था। परिवार का कहना है कि दशकों पहले जिस बंजर मरुस्थल को उन्हें दिया गया था, उसे उन्होंने अपने खून-पसीने की मेहनत से उपजाऊ कृषि भूमि में बदल दिया। 16 जून को हुई रजिस्ट्री, 22 जून को हुआ नामांतरण रिटायर्ड कैप्टन के बेटे मुल्तान सिंह ठाकुर ने बताया कि उन्हें 16 जून को हुई रजिस्ट्री और 22 जून को हुए म्यूटेशन यानी नामांतरण की जानकारी मिली। इसके बाद परिवार न्याय के लिए अधिकारियों के पास पहुंचा। उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रशासन का रवैया निराशाजनक रहा। परिवार को क्षेत्राधिकार का हवाला देकर मोहनगढ़ थाने से पीटीएम थाने और फिर कोतवाली थाने भेजा गया। वहीं राजस्व अधिकारियों ने म्यूटेशन निरस्त करवाने के लिए कोर्ट जाने की सलाह देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। भागदौड़ से बिगड़ी 92 साल के कैप्टन की तबीयत परिजनों के अनुसार लगातार मानसिक और शारीरिक भागदौड़ के कारण दिल के मरीज 92 साल के कैप्टन चुन्नीलाल की तबीयत भी बिगड़ गई। परिवार का कहना है कि देश के लिए तीन युद्ध लड़ने वाले सैनिक को अपनी जमीन बचाने के लिए इस तरह भटकना पड़ रहा है। उधार के पैसों से कर रहे न्याय की लड़ाई रिटायर्ड सार्जेंट लालाराम चौधरी, जो इस मामले में परिवार की मदद कर रहे हैं, ने बताया कि देश के लिए तीन-तीन युद्ध लड़ने वाला सैनिक पिछले आठ दिनों से टैक्सी का किराया भी उधार लेकर न्याय की गुहार लगा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री होते ही दलालों और भू-माफियाओं ने 25 लाख रुपए की रकम आपस में बांट ली। उन्होंने हिमाचल प्रदेश और राजस्थान सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। एसपी के निर्देश के बाद दर्ज हुई एफआईआर शहर कोतवाल सुरजाराम जाखड़ ने बताया कि पीड़ित पक्ष की शिकायत और पुलिस अधीक्षक के निर्देश के बाद कोतवाली थाने में भू-माफियाओं के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली गई है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि 92 साल के रिटायर्ड सैनिक की जगह किसी अन्य व्यक्ति को हमशक्ल बनाकर खड़ा किया गया और फर्जी नाम से जमीन की रजिस्ट्री करवाई गई। पुलिस के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए गहन जांच शुरू कर दी गई है। फर्जी डाक्यूमेंट्स तैयार करने वालों और इस पूरे गिरोह में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मिडिल ईस्ट (Middle East) में ईरान, लेबनान और गाजा के साथ साल भर से भीषण युद्ध में उलझे इजरायल से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है. इजरायल में आगामी आम संसदीय चुनावों (General Elections) की तारीखों का आधिकारिक एलान कर दिया गया है. चुनावी तारीख की घोषणा होते ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के करीब 4 दशक लंबे राजनीतिक करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षा की घड़ी आ गई है. युद्ध के इस तनावपूर्ण माहौल के बीच चुनावी बिगुल बजते ही पूरे इजरायल में सियासी सरगर्मियां सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं.रविवार देर शाम आई इजरायली मीडिया (Israeli Media Reports) की आधिकारिक रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की वर्तमान सरकार का चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर आगामी 27 अक्टूबर 2026 को देश में आम चुनाव कराए जाएंगे.38 साल बाद इतिहास दोहराएगा इजरायल'टाइम्स ऑफ इजरायल' की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, सत्तारूढ़ लिकुड पार्टी के वरिष्ठ नेता ओफिर काट्ज ने स्पष्ट किया कि इजरायली कानून के अनुसार निर्धारित तारीख पर ही अगले चुनाव संपन्न होंगे. इजरायल की मौजूदा संसद यानी 'नेसेट' (Knesset) 17 जुलाई 2026 को अपना चार साल का कार्यकाल पूरा कर रही है. कार्यकाल पूरा होते ही संसद चुनावी ब्रेक पर चली जाएगी और 7 सितंबर तक उम्मीदवारों की अंतिम सूची फाइनल कर ली जाएगी.यह चुनाव बेहद ऐतिहासिक होने जा रहा है क्योंकि बीते 38 सालों के इजरायली इतिहास में यह पहली बार होगा जब राष्ट्रीय चुनाव किसी समय पूर्व विघटन के बजाय अपने निर्धारित समय पर (On Schedule) हो रहे हैं. आखिरी बार साल 1988 में तय समय पर चुनाव हुए थे. इसके साथ ही, नेतन्याहू के नेतृत्व वाली यह दक्षिणपंथी सरकार पिछले 50 वर्षों में पूरे चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाली इजरायल की पहली सरकार बन जाएगी.सबसे लंबे समय तक रहने वाले पीएम की सबसे कठिन परीक्षाबेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले प्रधानमंत्री हैं. वे अब तक रिकॉर्ड 6 बार देश के प्रधानमंत्री बन चुके हैं, जिसमें उनका पहला कार्यकाल 1996 में शुरू हुआ था और छठा कार्यकाल दिसंबर 2022 से अब तक जारी है. हालांकि, इस बार राजनीतिक विश्लेषक इसे उनके जीवन का सबसे कठिन चुनाव मान रहे हैं.इजरायली जनता इस बार वोट डालते समय 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए औचक हमले, इंटेलिजेंस व सुरक्षा विफलता (Security Failure), गाजा-लेबनान युद्ध के तौर-तरीकों, ईरान के साथ सीधे सैन्य टकराव और अमेरिका के साथ बिगड़े कूटनीतिक संबंधों के आधार पर नेतन्याहू सरकार का मूल्यांकन करेगी. हालांकि, नेतन्याहू अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के खात्मे और ईरानी सैन्य तंत्र को कमजोर करने को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक जीत बताकर राष्ट्रवाद के नाम पर चुनाव प्रचार को धार दे रहे हैं.क्या कह रहे हैं इजरायल के चुनावी सर्वे? (Opinion Polls)इजरायल के प्रमुख मीडिया हाउस 'चैनल 12' के ताजा पोल (Pre-Poll Survey) के मुताबिक, इस बार के महा-मुकाबले में भी किसी भी एक राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है. वर्तमान में नेतन्याहू की 'लिकुड पार्टी' (Likud Party) और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट की विपक्षी 'याशर पार्टी' (Yashar Party) दोनों 23-23 सीटों के साथ सबसे बड़े राजनीतिक दलों के रूप में उभर रहे हैं.वहीं 'चैनल 13' के एक अन्य ओपिनियन पोल में आइजनकोट की पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बनते दिखाया गया है. कुल मिलाकर, इजरायल की 120 सदस्यीय संसद (Knesset) में सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का जादुई आंकड़ा किसी भी गठबंधन को आसानी से मिलता नहीं दिख रहा है, जिससे इजरायल में एक बार फिर 'हंग पार्लियामेंट' (त्रिशंकु संसद) बनने के आसार मजबूत हो गए हैं.
Crude Oil Price 13 July 2026: पश्चिम एशिया (Middle East) में सीजफायर खत्म होने और अमेरिका-ईरान के बीच दोबारा छिड़े भयंकर युद्ध का सीधा और बड़ा असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर पड़ा है. हफ्ते के पहले दिन आज सोमवार 13 जुलाई 2026 को कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Prices) में जोरदार रॉकेट जैसी तेजी देखने को मिली है. वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 4% से ज्यादा उछलकर 79 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं.क्रूड ऑयल में आई इस भारी तेजी की मुख्य वजह दुनिया के सबसे रणनीतिक तेल मार्ग— स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण को लेकर दोनों महाशक्तियों के बीच बढ़ा सैन्य तनाव है. साइप्रस के एक कमर्शियल मर्चेंट शिप पर हुए हमले के बाद भड़के अमेरिका ने ईरान के करीब 140 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी की, जिसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी बेस को निशाना बनाया है.क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस की कीमतों का ताजा गणितअंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट में सोमवार सुबह से ही हाहाकार मचा हुआ है और कीमतें तेजी से ऊपर भाग रही हैं:ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): सितंबर में एक्सपायर होने वाले कॉन्ट्रैक्ट के लिए ब्रेंट क्रूड 4% से अधिक की छलांग लगाकर $79 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर ट्रेड कर रहा है. गौरतलब है कि पिछले हफ्ते भी इसमें 5.5% की भारी बढ़त दर्ज की गई थी.WTI या US क्रूड वेरिएंट: अमेरिकी क्रूड वेरिएंट वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी तेज बढ़त के साथ $74 प्रति बैरल के निशान से ऊपर निकल गया है.यूरोपियन नेचुरल गैस फ्यूचर्स: वीकेंड ब्रेक के बाद खुले यूरोपीय बाजार में नेचुरल गैस फ्यूचर्स (Natural Gas) की कीमतों में भी 2.5% की तेजी देखी गई है.बड़ा सस्पेंस: होर्मुज स्ट्रेट खुला है या पूरी तरह बंद?ग्लोबल एनर्जी सप्लाई (वैश्विक तेल आपूर्ति) का करीब 20% हिस्सा कंट्रोल करने वाले मुख्य जलमार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' को लेकर दोनों देशों के दावों में भारी विरोधाभास देखने को मिल रहा है:ईरान का दावा: ईरान की सरकार ने आधिकारिक घोषणा की है कि यह इंटरनेशनल जलमार्ग अगली सूचना तक पूरी तरह बंद रहेगा और यहां से किसी भी जहाज को गुजरने की अनुमति नहीं होगी.अमेरिका का खंडन: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (US Central Command) ने ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है. सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा— होर्मुज स्ट्रेट उन सभी कमर्शियल जहाजों के लिए खुला है जो कानूनी तौर पर इस इंटरनेशनल वॉटरवे से गुज़रना चाहते हैं. अमेरिकी सेना यहां नेविगेशन की आज़ादी सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है.रविवार शाम को फिर हुआ हमला: अमेरिकी सेना ने साफ किया कि स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के लिए ईरान को ज़िम्मेदार ठहराने और उसे सबक सिखाने के लिए रविवार शाम 5 बजे (ईस्टर्न टाइम) हमलों का एक और नया दौर शुरू किया गया है.जमीन पर क्या है हकीकत? ठप हुआ समंदर का ट्रैफिकभले ही अमेरिका दावा कर रहा हो कि मार्ग खुला है, लेकिन युद्ध के खौफ से जहाजों ने इस रूट से दूरी बना ली है. जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर (JMIC) के मुताबिक, रविवार को इस मुख्य चोकपॉइंट से लगभग शून्य ट्रैफिक था. पूरे दिन में सिर्फ़ दो तेल प्रोडक्ट टैंकर इस चोकपॉइंट के पास आते देखे गए. हालांकि, JMIC ने राहत की बात यह बताई कि ओमान द्वारा कोऑर्डिनेट किया जाने वाला दक्षिणी वैकल्पिक रूट (Southern Route) जहाजों के लिए अभी भी खुला हुआ है.फ्रांस G7 समिट का MoU हुआ फेल, ईरान ने दी चेतावनीपिछले महीने फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिका और ईरान दोनों ने एक महत्वपूर्ण सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते में युद्ध को रोकने और स्ट्रेट से कमर्शियल जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने की बात शामिल थी. लेकिन हालिया हमलों ने इस शांति समझौते को ठंडे बस्ते में डाल दिया है.इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने शुक्रवार को ही चेतावनी दी थी कि अगर यह तनाव दोबारा भड़कता है, तो साल के आखिर तक वैश्विक तेल के भंडारों को फिर से बनाने (Restocking) की कोशिशों को भारी झटका लगेगा, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की किल्लत हो सकती है.इधर, ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर और टॉप नेगोशिएटर मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ़ ने वॉशिंगटन को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि— अब एकतरफ़ा डील्स का ज़माना पूरी तरह खत्म हो चुका है. अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत शुरू होने से पहले वॉशिंगटन को होर्मुज़ ट्रांज़िट पर किए गए पुराने वादों को प्राथमिकता देनी होगी और ईरान से तेल एक्सपोर्ट (Oil Export) को पूरी तरह नॉर्मल करना होगा, तभी शांति संभव है.
पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहा तनाव अब एक भीषण और पूर्ण युद्ध का रूप ले चुका है. सीजफायर (युद्धविराम) की मियाद खत्म होते ही अमेरिका ने ईरान के खिलाफ तीसरे दौर की सबसे बड़ी एयरस्ट्राइक (Third Round of Airstrikes) शुरू कर दी है.एक वरिष्ठ अमेरिकी रक्षा अधिकारी के हवाले से सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के भीतर घुसकर उसके प्रमुख मिसाइल लॉन्चिंग पैड्स, संवेदनशील परमाणु प्रतिष्ठानों के करीब मौजूद ठिकानों और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया है. इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमनध्य (Strait of Hormuz) के पास गश्त लगा रही ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कई सैन्य बोट्स और कमांड सेंटरों को भी निशाना बनाया गया है. बता दें कि इससे पहले बुधवार और गुरुवार को भी अमेरिका ने ईरान पर भीषण बमबारी की थी.मुजतबा खामेनेई की पहली हुंकार: पिता के खून का बदला जरूर लूंगाइस भीषण बमबारी के बीच ईरान के नवनियुक्त सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) ने अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद दुनिया के नाम अपना पहला आधिकारिक संदेश जारी किया. उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगियों को खुली चुनौती देते हुए कहा, मैं अपने दिवंगत पिता के बेगुनाह खून की एक-एक बूंद का बदला जरूर लूंगा. यही हमारे पूरे देश की इच्छा और संकल्प है. ईरान इस अमेरिकी आक्रामकता के आगे घुटने नहीं टेकेगा.ईरान का पलटवार: खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दागे ड्रोन-मिसाइलअमेरिकी एयरस्ट्राइक के जवाब में रविवार को ईरान की सेना (IRGC) ने भी खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में चौतरफा मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन हमले (Drone Attacks) करने का दावा किया है, जिससे कुवैत, कतर और बहरीन जैसे देशों में युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं:कुवैत में भारी तबाही का दावा: तेहरान (ईरान की राजधानी) का दावा है कि उसके विस्फोटक ड्रोनों ने कुवैत में तैनात अमेरिकी सेना के पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम (Patriot Air Defense System), भारी गोला-बारूद के गोदामों और अमेरिकी रडार स्टेशनों को सीधे निशाना बनाकर भारी नुकसान पहुंचाया है.बहरीन में बजे एयर रेड सायरन: बहरीन में मौजूद अमेरिकी संचार और रडार सुविधाओं पर भी ईरानी मिसाइलें गिरने का दावा किया गया है. हमले के बाद बहरीन में आपातकालीन एयर रेड सायरन गूंज उठे और नागरिकों से तुरंत बंकरों व सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई.जॉर्डन और कतर पर हमला: आईआरजीसी ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस पर स्थित अमेरिकी सैन्य कैंपों की ओर कई घातक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं. दूसरी ओर, कतर की सेना ने बयान जारी कर बताया कि उसने अपनी सीमा की ओर आ रही एक ईरानी मिसाइल को आसमान में ही (Intercept) मार गिराया.यूएई (UAE) में धमाके: संयुक्त अरब अमीरात ने भी पुष्टि की है कि उसका एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम ईरान की ओर से आने वाले हवाई खतरों को रोकने में मुस्तैद है, और इस दौरान आसमान में कई तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं.समंदर में भारतीय जहाज पर हमला; 10 नाविक बचाए गए, 1 लापताइस युद्ध की आंच अब अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और भारतीय नागरिकों तक भी पहुंच गई है. ओमान के तट (Oman Coast) के पास से गुजर रहे एक कमर्शियल मर्चेंट शिप 'GFS गैलेक्सी' (GFS Galaxy) पर भीषण हमला हुआ.भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि इस प्रभावित जहाज पर कुल 11 भारतीय नागरिक (नाविक) सवार थे. राहत की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत 10 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन 1 भारतीय नाविक अभी भी गहरे समुद्र में लापता है, जिसकी तलाश के लिए रेस्क्यू टीमें जुटी हुई हैं. भारत सरकार ने इस मर्चेंट शिप पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है और खाड़ी क्षेत्र में अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है.
कतर के फादर अमीर के निधन पर भारत ने घोषित किया एक दिन का राष्ट्रीय शोक
कतर के फादर अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी के निधन के बाद भारत सरकार ने 13 जुलाई को एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। उनका निधन रविवार को हुआ था।
फीनिक्स पोल्ट्री कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों पर कथित उत्पीड़न और पुलिस की एकतरफा कार्रवाई के विरोध में अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल ने मोर्चा खोल दिया है। संगठनों ने खमरिया थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिषद का आरोप है कि मजदूर हितों के लिए आवाज उठाने वाले यूनियन पदाधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है और उन पर झूठे आपराधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यूनियन प्रतिनिधियों द्वारा दर्ज कराई गई पुरानी शिकायतों पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि विपक्षी पक्ष की शिकायतों पर तुरंत प्रकरण दर्ज कर लिए गए। संगठनों ने आरोप लगाया कि 27 फरवरी को सोनू कुशवाहा और 24 मार्च को महेंद्र यादव व कृपाल चौधरी द्वारा धमकी व अभद्र व्यवहार की दी गई शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, यूनियन पदाधिकारियों के खिलाफ तुरंत मामले दर्ज कर लिए गए। शिकायतकर्ता अमित कुमार के शपथपत्र का हवाला देते हुए बताया गया कि 16 सितंबर 2025 के इस्तगासा क्रमांक 627/25 में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, अमित कुमार ने 4 जुलाई को शपथपत्र देकर कहा कि विवाद केवल दीपक विश्वकर्मा से था और उन्होंने कल्लू कुशवाहा, गुरुदयाल यादव और सोनू कुशवाहा के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की थी। खमरिया थाना द्वारा 24 जून को जारी प्रमाण-पत्र 507/26 में यह स्पष्ट है कि सोनू कुशवाहा के खिलाफ पहले कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं था, फिर भी उन्हें इस कार्रवाई में शामिल किया गया। इसके अलावा, अपराध क्रमांक 298/2025 आज तक न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया है, और अपराध क्रमांक 183/2026 में भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
कतर की किस्मत बदलने वाले पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा का निधन, तख्तापलट कर ली थी सत्ता की कमान
वैश्विक राजनीति और मिडिल ईस्ट से एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है। कतर को एक छोटे से गुमनाम देश से दुनिया का सबसे अमीर और आधुनिक देश बनाने वाले पूर्व अमीर (शासक) शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से पूरे खाड़ी देशों (Gulf Countries) सहित वैश्विक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। शेख हमद को आधुनिक कतर का निर्माता माना जाता है, जिन्होंने अपने विजन और फैसलों से न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, बल्कि कतर को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक बड़ा केंद्र भी बना दिया।साल 1995 का वो ऐतिहासिक तख्तापलट जिसने बदल दिया कतर का इतिहासशेख हमद बिन खलीफा अल थानी के सत्ता में आने की कहानी बेहद नाटकीय और ऐतिहासिक रही है। साल 1995 में जब उनके पिता देश से बाहर स्विट्जरलैंड की यात्रा पर थे, तब शेख हमद ने एक रक्तहीन तख्तापलट (Bloodless Coup) के जरिए कतर की सत्ता अपने हाथों में ले ली थी। उस समय कतर की आर्थिक स्थिति आज जैसी मजबूत नहीं थी। सत्ता संभालने के बाद उन्होंने देश के प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर एक नई और आक्रामक नीति अपनाई, जिसने आने वाले दशकों में देश की पूरी तस्वीर को बदलकर रख दिया।लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के दम पर कतर को बनाया दुनिया का सबसे अमीर देशशेख हमद की सबसे बड़ी कामयाबी कतर के विशाल प्राकृतिक गैस भंडार (Natural Gas Reserves) को पहचानना और उसका सही इस्तेमाल करना था। उनके नेतृत्व में कतर ने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के उत्पादन और निर्यात में भारी निवेश किया। देखते ही देखते कतर दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यातक देश बन गया। इस गैस क्रांति ने कतर के नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय को दुनिया में सबसे ऊंचा बना दिया और एक छोटे से मरुस्थलीय देश को दुनिया के सबसे अमीर और शक्तिशाली देशों की कतार में ला खड़ा किया।ग्लोबल मीडिया नेटवर्क अल जजीरा की शुरुआत और कूटनीति में दबदबाशेख हमद सिर्फ आर्थिक सुधारों तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने कतर को वैश्विक मंच पर एक बड़ी पहचान दिलाई। साल 1996 में उन्होंने प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय न्यूज चैनल 'अल जजीरा' (Al Jazeera) की स्थापना की, जिसने मिडिल ईस्ट और दुनिया भर की पत्रकारिता का रुख बदल दिया। इसके साथ ही उन्होंने कतर की एयरलाइंस 'कतर एयरवेज' को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ एयरलाइंस में शुमार कराया और खेल जगत में निवेश कर फीफा वर्ल्ड कप जैसे बड़े आयोजनों की नींव भी रखी। साल 2013 में उन्होंने स्वेच्छा से सत्ता अपने बेटे और वर्तमान अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी को सौंप दी थी। उनके निधन के साथ ही मध्य पूर्व के इतिहास का एक बड़ा अध्याय समाप्त हो गया है।
अमेरिका द्वारा ईरान पर ताजा सैन्य हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला कर वहां मौजूद कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और ...
रेल कोच फैक्ट्री (RCF) कपूरथला के वर्कर्स क्लब चुनाव में 'RCF एम्प्लाइज यूनियन' (RCFEU) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए सभी 8 सीटों पर कब्जा कर लिया है। क्लब प्रबंधन के लिए 9 जुलाई को मतदान हुआ था, जिसकी मतगणना 10 जुलाई को संपन्न हुई। कर्मचारियों ने विपक्ष के आरोपों को दरकिनार करते हुए यूनियन के पक्ष में स्पष्ट और एकतरफा जनादेश दिया। इस चुनाव में सेक्रेटरी पद पर भरतराज और कैशियर पद पर अवतार सिंह ने भारी मतों से जीत हासिल की। वहीं, क्लब के अन्य 6 सदस्य पदों के लिए हरप्रीत सिंह, अश्वनी कुमार, पंकज कुमार सिंह, भान सिंह, हरिओम मीना और संदीप कुमार ने भी रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की है। सहयोगी संगठनों का समर्थन और जश्न इस बड़ी जीत में RCF की आईआरटीएसए (IRTSA) के प्रधान इंजी. दर्शन लाल और जोनल सचिव इंजी. जगतार सिंह की टीम के साथ-साथ इंजीनियरिंग एसोसिएशन के प्रधान इंजी. जगदीश सिंह और जोनल सचिव इंजी. बक्शीश सिंह की टीम का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। नतीजे घोषित होते ही RCF कारखाने और कॉलोनियों में कर्मचारियों ने ढोल-नगाड़ों और मिठाई बांटकर जीत का जश्न मनाया। यूनियन की प्रतिक्रिया: 'सच्चाई और 25 वर्षों की सेवा की जीत' RCFEU के महासचिव सर्बजीत सिंह और प्रधान अमरीक सिंह ने सभी कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए इसे विरोधियों के झूठे प्रोपेगैंडा के खिलाफ 'सच्चाई की जीत' बताया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने यूनियन द्वारा पिछले 25 वर्षों में किए गए निस्वार्थ सेवा भाव और समर्पण को सराहा है। युवा टीम और महिला विंग का विशेष आभार महासचिव सर्वजीत सिंह ने चुनाव प्रचार में दिन-रात मेहनत करने वाली यूनियन की 'युवा टीम' और भारी समर्थन देने वाली 'महिला विंग' का विशेष धन्यवाद किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह जीत यूनियन की जिम्मेदारी को और बढ़ाती है तथा नवनिर्वाचित टीम कर्मचारियों के कल्याण और क्लब को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए निरंतर कार्य करेगी।
मंत्रालय में बाबू और विधायकों के निजी सचिव (पीए) के रूप में कार्य कर रहे शिक्षकों का अटैचमेंट समाप्त कर उन्हें मूल स्कूलों में भेजने के आदेश के बावजूद कई शिक्षकों ने अब तक अपनी मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। बताया जा रहा है कि राजनीतिक रसूख के दम पर कुछ शिक्षक अपने रिलीविंग आदेश निरस्त कराकर दोबारा पूर्व स्थान पर ही पदस्थ होने की कोशिश में लगे हैं। इस बीच उनकी ई-अटेंडेंस भी मूल विद्यालय से दर्ज नहीं हो रही है। मामले को लेकर शासकीय शिक्षक संगठन, मध्यप्रदेश ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत विस्तृत जानकारी मांगने का निर्णय लिया है। संगठन का कहना है कि इससे शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी। आरटीआई के जरिए मांगी जाएगी पूरी जानकारी संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने बताया कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत उन शिक्षकों की जानकारी मांगी जाएगी जो अटैचमेंट समाप्त होने के बाद भी अपनी मूल संस्था में उपस्थित नहीं हुए हैं या जिनकी ई-अटेंडेंस मूल विद्यालय की लोकेशन से दर्ज नहीं हो रही है। आरटीआई के माध्यम से संगठन ऐसे शिक्षकों की सूची, उनकी मूल पदस्थापना, अटैचमेंट समाप्त करने के आदेश, मूल विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने की स्थिति और विभाग द्वारा की गई कार्रवाई से संबंधित जानकारी प्राप्त करेगा। 'नियम सभी पर समान रूप से लागू हों' उपेन्द्र कौशल ने कहा कि यदि शिक्षा विभाग सभी कर्मचारियों पर समान नियम लागू होने का दावा करता है, तो उनका पालन भी बिना किसी भेदभाव के होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि विभागीय व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समानता सुनिश्चित करना है। आवश्यक होने पर प्राप्त जानकारी के आधार पर सक्षम अधिकारियों से आगे की कार्रवाई की मांग भी की जाएगी। 213 शिक्षक पढ़ाने के बजाय दूसरे विभागों में कर रहे थे काम लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि शिक्षकों को उनकी मूल पदस्थापना वाले विद्यालयों में भेजा जाए और यदि वे किसी अन्य विभाग में अटैच हैं तो उनका अटैचमेंट तत्काल समाप्त किया जाए। निर्देशों के बाद प्रदेशभर में 213 शिक्षक ऐसे मिले जो शिक्षण कार्य छोड़कर अन्य विभागों में सेवाएं दे रहे थे। इनमें से भोपाल के 52 शिक्षक शामिल थे। कुछ मंत्रालय में बाबू के रूप में कार्यरत थे, जबकि कुछ विधायकों के पीए के रूप में सेवाएं दे रहे थे। इन सभी शिक्षकों को एकतरफा रिलीव करने की कार्रवाई की जा चुकी है। भोपाल में केवल एक दर्जन शिक्षकों ने किया जॉइन विभागीय सूत्रों के अनुसार, भोपाल के 52 शिक्षकों में से अब तक केवल करीब एक दर्जन शिक्षक ही अपनी मूल पदस्थापना वाले विद्यालयों में लौटे हैं। शेष शिक्षकों ने अभी तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। बताया जा रहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी भी इनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं, जबकि कई शिक्षक दोबारा पूर्व पदस्थापना बनाए रखने के लिए विभागीय अधिकारियों पर दबाव बनाने में जुटे हैं।
ट्रंप बोले- ईरान के साथ युद्धविराम खत्म, लेकिन बातचीत जारी; तेहरान ने वार्ता की अटकलों से किया इनकार
ट्रंप के बयान से यह संकेत मिलता है कि पिछले महीने जिस युद्धविराम व्यवस्था के तहत दोनों देशों के बीच तनाव कम हुआ था, वह अब प्रभावी नहीं रही। इसके बावजूद कूटनीतिक प्रयास जारी हैं और दोनों पक्ष प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संवाद के विकल्प खुले रखना चाहते हैं।
वैश्विक डिफेंस और जियोपॉलिटिक्स के मंच से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। रूस का सबसे घातक और अचूक माना जाने वाला S-400 ट्रायम्फ मिसाइल डिफेंस सिस्टम (S-400 Missile System) इस समय दो अलग-अलग देशों के लिए बिल्कुल अलग कहानी लिख रहा है। एक तरफ जहां यह अत्याधुनिक सिस्टम भारत की सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक अभेद्य और मजबूत ढाल बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ तुर्की (Turkey) के लिए यह एक बड़ा सिरदर्द और अंतरराष्ट्रीय बवाल का कारण बन चुका है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन अब इस सिस्टम को किसी तीसरे देश को बेचने या इससे पीछा छुड़ाने के रास्ते तलाश रहे हैं, लेकिन इस पूरे सौदे की चाबी अब भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हाथों में है।तुर्की के लिए क्यों गले की फांस बन गया रूस का यह महाविनाशक सिस्टम?तुर्की ने जब अमेरिका के कड़े विरोध और प्रतिबंधों की धमकियों को दरकिनार कर रूस से S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदा था, तो इसे एर्दोगन का एक बड़ा और स्वतंत्र रणनीतिक कदम माना गया था। लेकिन इस एक फैसले की तुर्की को बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ी। अमेरिका ने न केवल तुर्की पर सख्त 'काट्सा' (CAATSA) प्रतिबंध लगाए, बल्कि उसे अपने सबसे आधुनिक F-35 स्टील्थ फाइटर जेट प्रोग्राम से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके चलते तुर्की की वायुसेना को आधुनिक लड़ाकू विमानों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। अब अपनी खोई हुई सैन्य ताकत और अमेरिका के साथ रिश्तों को सुधारने के लिए तुर्की इस रूसी सिस्टम को किसी तरह ठिकाने लगाना चाहता है, जिससे वह F-35 प्रोग्राम में दोबारा एंट्री पा सके।भारत का S-400 और तुर्की का सौदा: दोनों में क्या है बुनियादी अंतर?जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट्स और रक्षा मामलों के विश्लेषकों का मानना है कि भारत और तुर्की के मामलों में जमीन-आसमान का अंतर है। भारत ने अपनी संप्रभुता और सीमाओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए रूस के साथ यह डील की थी और अमेरिकी दबाव के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया था। भारतीय वायुसेना (IAF) ने S-400 के स्क्वाड्रनों को चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर इस तरह तैनात किया है कि दुश्मन का कोई भी विमान या मिसाइल भारत की हवाई सीमा में घुसने की हिम्मत नहीं कर सकता। भारत के लिए यह रक्षा का सबसे बड़ा हथियार है, जबकि तुर्की के लिए यह केवल एक राजनीतिक और आर्थिक बोझ बनकर रह गया है।डिफेंस एक्सपर्ट्स का बड़ा दावा: तुर्की चाहकर भी S-400 को इतनी आसानी से किसी तीसरे देश को नहीं बेच सकता। रूस के साथ हुए मूल समझौते में एंड-यूज़र सर्टिफिकेट (End-User Certificate) की सख्त शर्तें शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि मॉस्को यानी व्लादिमीर पुतिन की लिखित अनुमति के बिना तुर्की इस सिस्टम के एक नट-बोल्ट को भी किसी को ट्रांसफर नहीं कर सकता। पुतिन इस समय पूरी तरह से ड्राइविंग सीट पर हैं और वह अमेरिका को फायदा पहुंचाने वाला कोई भी कदम आसानी से नहीं उठाने देंगे।वैश्विक रक्षा बाजार और भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी पर इसका असरइस पूरे घटनाक्रम का असर केवल तुर्की तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के रक्षा बाजार और भारत-रूस के मजबूत रणनीतिक रिश्तों की गवाही देता है। दुनिया के रक्षा जानकार अब भारत की उस कूटनीतिक जीत की तारीफ कर रहे हैं, जिसके तहत भारत ने रूस से हथियार भी खरीदे और अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को भी प्रभावित नहीं होने दिया। तुर्की की इस छटपटाहट और पुतिन के कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक मिलिट्री डील्स में केवल पैसा ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी कूटनीति और मजबूत वैश्विक साख की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री (Bhojpuri Cinema) के दो बड़े दिग्गज—सुपरस्टार खेसारी लाल यादव और मशहूर एक्ट्रेस अंजना सिंह इन दिनों एक बेहद गंभीर और तीखे विवाद को लेकर सुर्खियों में हैं. एक टॉक शो (पॉडकास्ट) में अंजना सिंह द्वारा खेसारी के पुराने बयान पर टिप्पणी करने के बाद शुरू हुआ यह मामला अब व्यक्तिगत हमलों, सोशल मीडिया ट्रोलिंग और लाइव आकर धमकी देने तक पहुंच चुका है. हालात इतने बिगड़ गए हैं कि दोनों स्टार्स के समर्थक भी आमने-सामने आ गए हैं. आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि आखिर इस पूरे हाई-प्रोफाइल विवाद की जड़ क्या है.कहां से शुरू हुआ विवाद? खेसारी लाल यादव का कास्टिंग काउच पर बयानइस पूरे फसाद की शुरुआत कुछ महीने पहले खेसारी लाल यादव द्वारा कास्टिंग काउच (Casting Couch) को लेकर दिए गए एक बेबाक इंटरव्यू से हुई थी. खेसारी ने कहा था:भोजपुरी इंडस्ट्री की लगभग हर एक्ट्रेस यही कहती है कि यहाँ कास्टिंग काउच चलता है, लेकिन मैं अपने टैलेंट के दम पर आगे बढ़ी हूँ और मैंने कोई समझौता नहीं किया. अगर सभी 10 मुख्य एक्ट्रेसेस यही कहती हैं कि उनके साथ कुछ गलत नहीं हुआ, तो फिर यह सब हो किसके साथ रहा है? जब इंडस्ट्री में इतनी ही गंदगी है, तो आप सब यहाँ काम ही क्यों कर रही हैं?खेसारी ने यह भी आरोप लगाया था कि एक्ट्रेसेस इस तरह की बातें सिर्फ भोजपुरी फिल्म डायरेक्टर्स, प्रोड्यूसर्स और को-एक्टर्स की छवि को खराब करने और उन्हें नीचा दिखाने के लिए कहती हैं.पॉडकास्ट में अंजना सिंह की टिप्पणी और 'शब्दों की कमी' वाला तंजबीते 3 जुलाई को एक्ट्रेस अंजना सिंह का एक पॉडकास्ट (Podcast) सामने आया, जिसमें उनसे खेसारी के इसी पुराने बयान पर राय मांगी गई. इस पर अंजना ने हंसते हुए कहा, खेसारी जी तो कुछ भी बोलते हैं. असल में वो बोलना तो सही सेंस में चाहते हैं, लेकिन जो आउटपुट (शब्द) बाहर आता है, वो सुनने में थोड़ा गड़बड़ लगता है.अंजना सिंह का कहना है कि इस बयान के लाइव होने के बाद से ही खेसारी लाल यादव के कतिपय कट्टर समर्थकों ने उन्हें सोशल मीडिया पर बुरी तरह ट्रोल करना शुरू कर दिया. ट्रोलर्स ने न सिर्फ अंजना को गालियां दीं, बल्कि उनकी नाबालिग बेटी को लेकर भी बेहद आपत्तिजनक और भद्दी टिप्पणियां कीं, जिसके बाद अंजना का गुस्सा फूट पड़ा.अंजना सिंह का लाइव वीडियो: खेसारी के टीम मेंबर को दिखाई चप्पलट्रोलिंग से परेशान अंजना सिंह ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर लाइव आकर ट्रोलर्स को मुंहतोड़ जवाब दिया. उन्होंने साफ किया कि उन्होंने खेसारी का कोई अपमान नहीं किया था, बल्कि सिर्फ यह कहा था कि शब्दों की कमी की वजह से उनकी बातों का गलत मतलब निकल जाता है.इसी दौरान अपने एक अन्य लाइव सेशन में अंजना सिंह ने खेसारी लाल यादव की कोर टीम के सदस्य अखिलेश कश्यप पर उन्हें सीधे तौर पर धमकी देने का आरोप लगाया. अंजना ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए लाइव कैमरे के सामने अपनी चप्पल दिखाई और अखिलेश कश्यप को 'चमचा' संबोधित करते हुए कहा, यह चप्पल देख रहे हो न, इसी से मारूंगी और मुंह लाल कर दूंगी.निजी जिंदगी पर अटैक: 'पत्नी ने रंगे हाथों पकड़ा था'यह विवाद तब और ज्यादा व्यक्तिगत हो गया जब अंजना सिंह ने खेसारी लाल यादव की पर्सनल लाइफ को लेकर एक सनसनीखेज दावा कर दिया. अंजना ने आरोप लगाया कि एक बार खेसारी की पत्नी ने उन्हें किसी दूसरी भोजपुरी हीरोइन के साथ रंगे हाथों (Red Handed) पकड़ लिया था और उस समय खेसारी की जमकर पिटाई भी हुई थी. इसके साथ ही अंजना ने खेसारी और उन्हें गाली देने वाले उनके समर्थकों को 'अनपढ़' बताते हुए कहा कि इन लोगों को सही शिक्षा और तमीज की सख्त जरूरत है.खेसारी लाल यादव ने लाइव आकर समर्थकों को कहा 'थैंक्यू'इस पूरे घटनाक्रम और निजी आरोपों के बाद सुपरस्टार खेसारी लाल यादव भी इंस्टाग्राम पर लाइव आए. हालांकि, उन्होंने पूरे वीडियो में कहीं भी सीधे तौर पर अंजना सिंह का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने इस मुश्किल वक्त में उनके साथ खड़े रहने और उनका पक्ष लेने के लिए अपने करोड़ों फैंस और समर्थकों का आभार व्यक्त किया. फिलहाल, सोशल मीडिया पर दोनों ही कलाकारों के फैंस अपनी-अपनी तरफ से पोस्ट और वीडियो डालकर जंग लड़ रहे हैं और यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है.
मिडिल ईस्ट (Middle East) में भू-राजनीतिक समीकरण एक बार फिर बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गए हैं। अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच अमेरिका द्वारा ईरान के अहम सैन्य ठिकानों पर किए गए ड्रोन व मिसाइल हमलों और जवाब में ईरान द्वारा कतर, बहरीन व यूएई (UAE) में अमेरिकी ठिकानों को टारगेट किए जाने के बाद युद्ध की स्थिति बनी हुई है।पिछले दो दिनों से ईरान को भीषण हमले की धमकी दे रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के सुर शुक्रवार (10 जुलाई 2026) को अचानक बदलते नजर आए। ट्रंप अब सैन्य हमले की बात छोड़कर फिर से कूटनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाना चाहते हैं, हालांकि उन्होंने इसका श्रेय ईरान के पाले में डाल दिया है।डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान: सीजफायर खत्म, लेकिन बातचीत को तैयारअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान ने दोबारा बातचीत की टेबल पर लौटने की इच्छा जताई है। ईरान की इस पहल के बाद अमेरिका भी राजनयिक वार्ता के लिए तैयार है। हालांकि, ट्रंप ने यह पूरी तरह साफ कर दिया कि दोनों देशों के बीच पूर्व में हुआ अंतरिम सीजफायर (युद्ध विराम) अब आधिकारिक रूप से खत्म हो चुका है, लेकिन भविष्य में बड़े युद्ध को टालने के लिए बातचीत का सिलसिला जारी रहेगा।दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र (UN) में अमेरिका की उप राजदूत टैमी ब्रूस ने भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप क्षेत्र में स्थायी शांति चाहते हैं, लेकिन उन्होंने एक कड़ी शर्त भी रखी। ब्रूस ने कहा कि यदि ईरान समर्थित ताकतों द्वारा नागरिक ठिकानों या अंतरराष्ट्रीय कारोबारी जहाजों (Commercial Ships) पर कोई भी हमला किया गया, तो अमेरिका उसका माकूल और आक्रामक जवाब देगा।इजरायल के पीएम नेतन्याहू की दो टूक: ईरान से जंग अभी खत्म नहीं हुईजहां एक तरफ अमेरिका बातचीत की वकालत कर रहा है, वहीं उसके सबसे करीबी सहयोगी इजरायल का रुख बेहद आक्रामक बना हुआ है। इजरायल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने इजराइली एयर फोर्स के एक कार्यक्रम में दो टूक कहा कि ईरान के साथ जारी यह महाजंग अभी खत्म नहीं हुई है।नेतन्याहू ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान को न्यूक्लियर (परमाणु) हथियार हासिल नहीं करने देगा, चाहे कोई अंतरराष्ट्रीय समझौता हो या नहीं। उन्होंने दावा किया कि यदि इजरायल ने पहले सर्जिकल स्ट्राइक न की होती, तो ईरान अब तक परमाणु बम बना चुका होता और देश हर आगामी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।ईरान का पलटवार: हमला हुआ तो इजरायल का अस्तित्व मिट जाएगाबेंजामिन नेतन्याहू की सीधी सैन्य धमकी के बाद ईरान ने भी बेहद आक्रामक तेवर दिखाए हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना (IRNA) के मुताबिक, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोलगदर ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान के किसी भी परमाणु या रणनीतिक ठिकाने पर हमला हुआ, तो उसका ऐसा घातक जवाब दिया जाएगा जिसके बाद इजरायल को दुनिया की कोई ताकत नहीं बचा पाएगी।अमेरिका-ईरान सैन्य टकराव से जुड़े 5 बड़े अंतरराष्ट्रीय अपडेट्स:अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें: अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाते हुए कई मिसाइलें दागीं। हालांकि, इन मित्र देशों की एयर डिफेंस प्रणालियों ने अधिकांश मिसाइलों और सुसाइड ड्रोनों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है।रणनीतिक रेलवे ब्रिज पर हमला: ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी वायुसेना ने उत्तरी ईरान में चीन और रूस की साझेदारी से बने एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक रेलवे पुल को क्रूज मिसाइल से उड़ा दिया है। ईरान ने इसे सीधा 'युद्ध अपराध' बताया है, जबकि पेंटागन ने इसे ईरान द्वारा अंतरिम शर्तों के उल्लंघन का नतीजा करार दिया।होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही ठप: रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव बढ़ने के कारण दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री तेल मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही शुक्रवार को भी पूरी तरह ठप रही। वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में करीब 1% का उछाल दर्ज किया गया है।ईरान का 1 करोड़ बैरल तेल का इमरजेंसी एक्सपोर्ट: अमेरिका द्वारा दोबारा पूर्ण नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) लागू किए जाने के डर से ईरान ने एक ही रात के भीतर आनन-फानन में कम से कम 1 करोड़ बैरल कच्चा तेल और फ्यूल ऑयल निर्यात के लिए विभिन्न गुप्त जहाजों के जरिए अंतरराष्ट्रीय रूट पर रवाना कर दिया है।लेबनान पर इजराइली ड्रोन स्ट्राइक: लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी (NNA) के मुताबिक, इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने दक्षिणी लेबनान के नबातियेह प्रांत में दो बड़े ड्रोन हमले किए हैं। ये हमले कफर रेमान और नबातियेह अल-फौका कस्बों में हिजबुल्लाह के ठिकानों को देखकर किए गए, हालांकि इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।वैश्विक मध्यस्थता की कोशिशें तेजबीबीसी (BBC) की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल दो दिनों की सीधी सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों पक्षों की ओर से गोलाबारी थमी हुई है। इस वैश्विक संकट को टालने और दोनों देशों को दोबारा 18 जून को हुए अंतरिम समझौते (MoU) के रास्ते पर लाने के लिए मध्यस्थ देश— कतर, मिस्र (Egypt) और पाकिस्तान पर्दे के पीछे से सक्रिय कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलाती से फोन पर वार्ता कर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के सेफ कॉरिडोर को तुरंत बहाल करने पर जोर दिया है।
एमपी कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी और लेखक नियाज खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने लिखा कि भारत में मॉब लिंचिंग की घटनाओं से बचने के लिए मुस्लिमों को अपना पहनावा बदलकर तुर्की के मुसलमानों जैसा पहनावा अपनाना चाहिए, ताकि उनकी पहचान आसानी से न हो सके। नियाज खान ने अपने पोस्ट में लिखा कि भारत में मॉब लिंचिंग के ज्यादातर मामलों में पीड़ित कुर्ता, पायजामा, दाढ़ी और टोपी पहने हुए थे। उनका कहना है कि इस पहनावे से उनकी पहचान आसानी से हो जाती है। इसलिए मुस्लिमों को अपना ड्रेस और हुलिया बदल लेना चाहिए। लोकतंत्र पर भी उठाए सवाल एक अन्य पोस्ट में नियाज खान ने लोकतंत्र पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि कई आजाद देशों ने लोकतंत्र तो अपनाया, लेकिन उसके मूल सिद्धांत नहीं अपनाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र के नाम पर नेता और अफसर जमकर पैसा लूटते हैं, जबकि जनता मुफ्त की सुविधाओं में व्यस्त रहती है। भौतिकवाद और राजनीति पर भी पोस्ट 9 जुलाई को किए गए अन्य पोस्ट में नियाज खान ने लिखा कि भौतिकवाद ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है और लोगों को इस पर विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम और ईमानदार लोगों को राजनीति में आना चाहिए, क्योंकि आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों के चुने जाने से लोकतंत्र कमजोर होता है।
मिडिल ईस्ट (Middle East) में शांति और युद्धविराम की कोशिशों को एक बार फिर बहुत बड़ा झटका लगा है। गुरुवार को अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे भीषण और रणनीतिक हवाई हमले (Airstrikes) किए हैं। इन हमलों से ईरान का सरकारी मीडिया और कई शहर थर्रा उठे हैं।सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि अमेरिका ने इस बार ईरान के एकमात्र बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट कॉम्प्लेक्स (Bushehr Nuclear Power Plant) के बेहद नजदीकी इलाके को निशाना बनाया है, जिससे परमाणु हादसे का खतरा भी पैदा हो गया था। इस भीषण सैन्य गोलाबारी ने कुछ ही समय पहले हुए उस नाजुक अंतरिम समझौते को पूरी तरह वेंटिलेटर पर ला दिया है, जिसका मकसद क्षेत्र में शांति स्थापित करना था।खामेनेई को दफनाने के तुरंत बाद बुशहर पर गिराए बमईरान के लिए गुरुवार का दिन बेहद भावुक और तनावपूर्ण था। कई दिनों के राष्ट्रीय शोक के बाद, ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (जिनकी मौत 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआती गोलाबारी में हो गई थी) को उनके गृहनगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया गया था। ठीक इसी अंतिम संस्कार के दौरान अमेरिका ने ईरान की रीढ़ तोड़ने के लिए ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए।बुशहर के स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी एहसान जहानियन के हवाले से सरकारी समाचार एजेंसी 'इरना' ($IRNA$) ने पुष्टि की है कि अमेरिकी विमानों ने दोपहर के समय सीधे न्यूक्लियर प्लांट के पास बमबारी की। हालांकि, अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने इसे ईरान की उस सैन्य क्षमता को नष्ट करने की कार्रवाई बताया है, जो होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बनी हुई थी।अमेरिका के 90 ठिकानों पर हमले, ईरान का पलटवार: 14 की मौतअमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने इन हमलों के ब्लैक-एंड-व्हाइट फुटेज जारी किए हैं, जिनमें ईरानी एयरपोर्ट के रनवे, मिसाइल लॉन्चर और उत्तर-पूर्वी गोलिस्तान प्रांत में स्थित रेलवे के बड़े पुलों को नष्ट होते हुए देखा जा सकता है।नुकसान का आंकड़ा: ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले दो दिनों में हुए इन अमेरिकी हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश सुरक्षा बलों के सदस्य थे, जबकि 78 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं।ईरान का जवाबी हमला: ईरान ने भी इस कार्रवाई का तुरंत बदला लेते हुए खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और उसके सहयोगी देशों को निशाना बनाया। जॉर्डन, कुवैत और कतर की तरफ ईरान की ओर से कई बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें दागी गईं।सहयोगियों का हाल: बहरीन में, जहां अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े का मुख्यालय है, हमलों के डर से तीन बार सायरन गूंजे। कुवैती सेना ने दावा किया कि उसने 3 बैलिस्टिक मिसाइलों और 10 ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया, हालांकि इसके मलबे से एक नागरिक घायल हो गया। जॉर्डन सरकार ने भी ईरान के हमलों को रोकने का दावा किया है।'ईरान को दादागिरी की कीमत चुकानी होगी' - डोनाल्ड ट्रंप की दोटूकतुर्की में नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से बाहर निकलने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान में हुए धमाकों के वीडियो पोस्ट करते हुए इस्लामिक गणराज्य को बेहद सख्त चेतावनी दी।ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में तीन अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों पर ईरान द्वारा किए गए बम हमलों का यह सीधा बदला है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा:अगर ईरान ने दोबारा ऐसी हिमाकत की, तो हालात और भी बदतर हो जाएंगे। यह नाजुक अंतरिम युद्धविराम अब पूरी तरह खत्म माना जा सकता है। मुझे लगता है कि शांति वार्ता करने वाले अधिकारी केवल अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे, जैसे कि बिजली ग्रिड, वाटर डिसेलिनेशन प्लांट को उड़ाने और खार्ग द्वीप (जहां से ईरान का 90% तेल एक्सपोर्ट होता है) पर कब्जा करने की अपनी पुरानी धमकियों को फिर से दोहराया।'हमला करोगे तो भुगतोगे' - ईरान का कड़ा रुखअमेरिका के इस आक्रामक रुख पर ईरान के शीर्ष अधिकारियों ने भी झुकने से साफ इनकार कर दिया है। युद्धविराम वार्ता में मुख्य भूमिका निभाने वाले ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका ने अभी तक यह नहीं सीखा है कि वादे तोड़ने की क्या कीमत होती है। अगर आप हम पर हमला करेंगे, तो हम भी चुप नहीं बैठेंगे और पलटवार करेंगे।वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट: होर्मुज स्ट्रेट बंद होने का डरइस ताजा सैन्य टकराव ने वैश्विक आर्थिक जगत की रातों की नींद उड़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का वह सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता है, जहां से वैश्विक व्यापार का लगभग पांचवां (20%) हिस्सा तेल और प्राकृतिक गैस गुजरता है।मई के महीने में जहां इस रास्ते से केवल 233 जहाज गुजरे थे, वहीं जून में अंतरिम समझौते के बाद यह संख्या बढ़कर 576 हुई थी (हालांकि यह जून 2025 के 3,100 जहाजों के मुकाबले बेहद कम है)। अगर यह रास्ता पूरी तरह युद्ध की चपेट में आकर बंद हो जाता है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे हर देश में भयंकर मंदी और महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है। फिलहाल, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची सऊदी अरब, तुर्की, ओमान और पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से फोन पर बात कर तनाव कम करने की कोशिशों में जुटे हैं।
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महाभारत के महासंग्राम की चर्चा होते ही सबसे पहले मन में आता है वह दृश्य, जिसमें अर्जुन दुविधा में है और भगवान श्रीकृष्ण उसे गीता का उपदेश दे रहे हैं। युद्ध से पहले ही श्रीकृष्ण ने यह प्रण ले लिया था कि वे कुरुक्षेत्र में शस्त्र नहीं उठाएंगे। उनकी भूमिका केवल अर्जुन के सारथी के रूप में रहने की थी। लेकिन, एक बार ऐसी विषम परिस्थिति बनी कि जगत के पालनहार को अपना वचन तोड़ना पड़ा और वे रथ का पहिया लेकर भीष्म पितामह की ओर दौड़ पड़े। आखिर वह क्या मजबूरी थी, जिसने प्रभु को शस्त्र उठाने पर विवश कर दिया?क्यों दी थी भगवान श्रीकृष्ण ने शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा?भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र युद्ध में तटस्थ रहने की घोषणा की थी। उन्होंने दुर्योधन और अर्जुन दोनों को विकल्प दिया था—एक तरफ उनकी विशाल 'नारायणी सेना' और दूसरी तरफ वे स्वयं, जो निहत्थे रहेंगे। अर्जुन ने श्रीकृष्ण को चुना और दुर्योधन ने सेना को। श्रीकृष्ण की प्रतिज्ञा के पीछे उद्देश्य यह था कि वे न चाहते हुए भी किसी एक पक्ष का सीधा संहार न करें, बल्कि न्याय की स्थापना में केवल मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। वे अपनी लीलाओं से यह दिखाना चाहते थे कि अधर्म का नाश करने के लिए युद्ध से ज्यादा महत्वपूर्ण सही मार्गदर्शन और विवेक है।जब भीष्म के सामने विचलित हो गए थे श्रीकृष्णभीष्म पितामह ने प्रतिज्ञा की थी कि वे श्रीकृष्ण को शस्त्र उठाने पर मजबूर कर देंगे। युद्ध के दौरान, जब भीष्म पितामह ने अर्जुन पर बाणों की वर्षा शुरू की, तो अर्जुन उन्हें रोकने में असमर्थ हो गए। स्थिति ऐसी बन गई कि अर्जुन का रथ क्षतिग्रस्त हो गया और वे हार की कगार पर पहुँच गए। अर्जुन को संकट में देख भगवान श्रीकृष्ण का वात्सल्य और मित्र प्रेम जाग उठा। अपने प्रिय भक्त को मृत्यु के मुख में देख श्रीकृष्ण ने अपनी प्रतिज्ञा त्याग दी और जमीन से रथ का एक टूटा हुआ पहिया उठाकर पितामह की ओर बढ़े।'विपक्ष' की जीत या 'भक्ति' की पराकाष्ठा?जैसे ही श्रीकृष्ण चक्र (पहिया) लेकर पितामह की ओर बढ़े, भीष्म ने अपने शस्त्र डाल दिए और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, प्रभु, मेरी प्रतिज्ञा पूरी हुई। आज आपके हाथों अपना अंत देखकर मेरा जीवन धन्य हो गया। श्रीकृष्ण का वह क्रोध वास्तव में उनके भक्त के प्रति प्रेम था। यह घटना सिखाती है कि भगवान के लिए अपने भक्त की रक्षा उनकी स्वयं की प्रतिज्ञा से कहीं अधिक बड़ी होती है। महाभारत का यह प्रसंग आज भी हमें याद दिलाता है कि भक्त और भगवान के बीच कोई भी नियम, वचन या प्रतिज्ञा बड़ी नहीं होती।
पटियाला में मंगलवार को हिंदू संगठनों ने 'सनातन सम्मान यात्रा' निकाली। इस यात्रा में हरिद्वार से आए संतों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया। यात्रा के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि हिंदू समाज के साथ भेदभाव किया जा रहा है और प्रशासन उनकी शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि यात्रा का मुख्य उद्देश्य सनातन समाज में एकजुटता का संदेश देना और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना है। वक्ताओं ने गोपाल कॉलोनी में एक वाल्मीकि परिवार पर हुए कथित हमले का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस घटना में परिवार के घर में बने मंदिर और भगवान श्री खाटू श्याम की तस्वीर के साथ भी तोड़फोड़ की गई थी। आरोप है कि पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे भाजपा नेता करुण कौड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 295 के तहत मामला दर्ज किया गया, जबकि दूसरे पक्ष के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। रोहिंग्या घुसपैठियों के मुद्दे पर करुण कौड़ा ने दिया बयान सनातनी महंत अरुणा गिरी और केशव नंद ने स्पष्ट किया कि करुण कौड़ा ने किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि कथित रोहिंग्या घुसपैठियों के मुद्दे पर बयान दिया था। उन्होंने प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए करुण कौड़ा के खिलाफ दर्ज मामला रद्द करने की मांग की। निष्पक्ष जांच न हुई तो करेंगे आंदोलन इसके साथ ही, उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दूसरे पक्ष के खिलाफ भी उचित कार्रवाई करने की अपील की। संतों और वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो देश के विभिन्न हिस्सों से सनातन समाज के लोग पटियाला पहुंचकर बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
धनबाद के कतरास थाना क्षेत्र के छाताबाद में मंगलवार को अचानक भू-धंसान हुआ। इससे कई घर क्षतिग्रस्त हो गए और मकानों की दीवारों तथा फर्श में बड़ी दरारें आ गईं। घटना के बाद दहशत में आए लोग जान बचाने के लिए अपने घरों से बाहर निकल आए। कई परिवार अपना कीमती सामान, जेवर और जरूरी दस्तावेज तक घरों के अंदर ही छोड़ने को मजबूर हो गए। इस घटना से नाराज ग्रामीणों ने कतरास-धनबाद मुख्य मार्ग जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। उनकी मुख्य मांगों में प्रभावित परिवारों का तत्काल पुनर्वास, उचित मुआवजा और क्षेत्र में अवैध कोयला खनन पर प्रभावी रोक शामिल है। सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की मांग की प्रभावित ग्रामीणों ने बताया कि वे कई वर्षों से यहां रह रहे हैं। उन्होंने कहा, हम गरीब परिवार के लोग हैं, अपना घर छोड़कर कहां जाएं? अचानक घरों में दरारें पड़ने लगीं, तो जान बचाने के लिए बाहर निकलना पड़ा। हमारा सारा सामान अभी भी घर के अंदर ही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से उचित मुआवजा और सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारी प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हालात सामान्य करने के प्रयास में लगे हैं।
गाजा संघर्ष : नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल
सयुक्त राष्ट्र की हालिया स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की रिपोर्ट ने इजरायल और कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में जारी हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों की गंभीर तस्वीर पेश की है।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
युद्धविराम से आगे: क्या विश्व अहिंसा की ओर बढ़ेगा?
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हाल ही में हुआ युद्धविराम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया युद्ध की लपटों में घिरकर वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका था। कई सप्ताह तक चले संघर्ष ने क्षेत्र को ऐसे ज्वालामुखी में बदल दिया था, जिसकी प्रत्येक विस्फोटक घटना विश्व अर्थव्यवस्था ... Read more
दुनिया में जब जब युद्ध होते हैं एक सवाल ज़रूर उभरता है कि युद्ध से क्या हासिल। फिर यह कहा जाता है कि युद्ध से कुछ हासिल नहीं होता लेकिन फिर भी दुनिया के सबसे ताक़तवर देश सालों तक युद्ध लड़ते रहते हैं। युद्ध करवाने वाले ताकतवर नेता कुछ तो हासिल करते ही होंगे। दर्जनों देशों के प्रभावशाली, प्रशासक, मंत्री अपने अपने तरीकों और चुने हुए शब्दों में समझाते रहते हैं कि युद्ध से बहुत नुकसान हो रहा है, दुनिया की आर्थिक स्थिति परेशान होकर उलझी पड़ी है, हज़ारों मौतें हो चुकी हैं लेकिन युद्ध है कि जारी रखा जाता है। रूस युक्रेन युद्ध इसकी सबसे बड़ी मिसाल है। दूसरी मिसाल है, अमरीका इजराइल ईरान की लड़ाई जिसके सौंवे दिवस के अशुभ अवसर पर अमरीका और ईरान ने एक दूसरे पर हमले किए। मानो या न मानो युद्ध से कुछ तो हासिल हो रहा है। युद्ध विराम और शांति बातचीत की राख के नीचे शोले बुझते ही नहीं, माहौल में तनाव उबलता रहता है युद्ध के ड्रोन मंडराते रहते हैं। युद्ध का सबसे बड़ा हासिल व्याव्सायिक फायदा है। खालिस व्यवसायी राष्ट्रपति, अपना नुक्सान ज़्यादा नहीं होने देंगे, दूसरों का बेड़ा गर्क करवा देंगे। उनके हिसाब से युद्ध भी एक सौदा है। उनकी हर चाल ऐसा दिखाती है। कुछ भी सोच सकते हैं। बड़ा सोचना, ज्यादा मांगना उनकी व्यावसायिक शैली में शामिल है। ज़्यादा मांगेंगे तो ज्यादा मिलेगा, कम मांगोगे तो कम ही मिलने वाला है। उन्हें खुद को खबर बनाना आता है। चर्चा में बनाए रखना आता है। वे व्याव्सायिक राजनीतिज्ञों की तरह परिस्थितियों के सभी दरवाज़े खुले रखते हैं। खूब शोर करते हैं और दूसरों को डराते रहते हैं। कहकर मुकर जाते हैं। जैसा बंदा वैसी डील करने को तत्पर रहते हैं। अब तो वैसे भी हर चीज़ में व्यापार और बाज़ार मिला दिया गया है। बड़ा दांव ज्यादा खतरा लेकिन फायदा भी उसी अनुपात में। आम लोग ही तो मरते हैं, घायल हो जाते हैं, विस्थापित होते हैं। ईमारतें और हथियार तबाह होते रहते हैं फिर नए बनाने के लिए मरम्मत के लिए, उद्योग क्षेत्र को काम मिलता है। कुछ भी हो जाए व्यवसाय फैलता रहता है। महंगाई का कर्तव्य तो हमेशा बढ़ते जाना है। इसे भी पढ़ें: विश्वगुरु न होते हुए (व्यंग्य) अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं हारकर उदास बैठी हैं। युद्ध जारी रखने वाले अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधकों को यह संतुष्टि रहती है कि युद्ध निरंतर है। उन्हें अनिश्चितताओं से घिरी दुनिया से क्या लेना। धार्मिक कट्टरता शत्रुता बढ़े तो बढ़े। राजनीति को तो यह सब फैलाकर ही रखना होता है। कितने ही अनुभवी, यशस्वी नेताओं की सामरिक शक्ति, रुआब और प्रभाव की पोल खुलती जाती है लेकिन युद्ध से उनकी नाक ऊंची रहती है। स्वार्थ पूरा होता है और नकली इज्ज़त बनी रहती है। जो शांति स्थापित करने के लिए युद्ध जारी रखते हैं इतिहास उन्हें भूलता नहीं। क्या फर्क पड़ता है अगर युद्ध के कारण याद रखता है। अगर युद्ध से फायदा न हो तो कई तरह का नुक्सान करने वाले इस खतरनाक काम को कौन महीनों तक करता रहेगा। हर व्यवसाय में छिपे हुए फायदे होते हैं जिनका किसी को भी पता नहीं चलता सिर्फ उन्हें पता होता है जो उनके मालिक होते हैं। युद्ध एक व्यवसाय ही तो है जिसका हासिल, ख़ास लोगों को होने वाला किसी न किसी तरह का अशुभ लाभ है। - संतोष उत्सुक
अमर स्वाभिमान का प्रतीक हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष
Battle of Haldighati: 18 जून भारतीय इतिहास की वह अमर तिथि है, जो केवल एक युद्ध का स्मरण नहीं कराती बल्कि त्याग, स्वाभिमान, साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण की गाथा सुनाती है। यह वह दिन है जब मेवाड़ की धरती पर एक ऐसा संघर्ष हुआ, जिसने इतिहास के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
'वाराणसी' में दिखेगा महायुद्ध, भगवान राम और कुंभकर्ण के बीच होगा 30 मिनट का ऐतिहासिक टकराव!
दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली जब भी कोई नया प्रोजेक्ट लाते हैं, तो वह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक उत्सव बन जाता है। 'बाहुबली' और 'आरआरआर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद, राजामौली अब सुपरस्टार महेश बाबू के साथ अपनी अगली महात्वाकांक्षी ...
इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) हर हफ्ते दुनिया भर यूजर्स के सर्च और प्रोफाइल विजिट के आधार पर 'मोस्ट पॉपुलर इंडियन सेलिब्रिटीज' की लिस्ट जारी करता है। आमतौर पर इस लिस्ट के शीर्ष पर वही सुपरस्टार्स नजर आते हैं जिनकी बड़ी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज ...
खाड़ी युद्ध से निपटने की मोदी की तजबीज
मोदीजी ने एक बार फिर राष्ट्र की जनता को उसके कर्तव्यों के प्रति सचेत किया है।
युद्धविराम और हाशिए पर धकेल दिया गया भारत
यह युद्ध स्पष्ट रूप से नेतन्याहू की देन है और ट्रम्प इसके परिणामों के बारे में सोचे-समझे बिना ही इसमें फंस गए।
युद्ध के माहौल में विश्व शांति का शंखनाद है विश्व णमोकार दिवस
विश्व णमोकार दिवस- 9 अप्रैल, 2026 विश्व इतिहास के इस संक्रमणकाल में, जब मानवता युद्ध, हिंसा, आतंक, तनाव और असहिष्णुता के बोझ तले कराह रही है, ऐसे समय में 9 अप्रैल 2026 को मनाया जाने वाला विश्व णमोकार मंत्र दिवस एक अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा-विस्फोट के रूप में सामने आ रहा है। यह दिवस केवल एक ... Read more
तीसरे विश्वयुद्ध की आहट और गांधी
इतिहास विजय-पराजय-विनाश का मृत दस्तावेज नहीं है, न वह किसी की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कहानी का विवरण है।
धीरे-धीरे हकीकत में बदल रहे हैं भारत के ईरान युद्ध के डर
ईरान युद्ध को लेकर भारत की सबसे गहरी आर्थिक चिंताएं अब काल्पनिक नहीं रह गई हैं
युद्ध को लेकर मोदी का देश को डराने वाला संदेश
देश में जहां भी और जब भी चुनाव होते हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दूसरे सारे काम छोड़कर अपनी भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार में जुट जाते हैं
पश्चिम एशिया में युद्ध के दुष्प्रभाव से निपटने के लिए बेहतर नीतियों की ज़रूरत
वित्त वर्ष 2026-27 की ठीक शुरुआत में, जो 1 अप्रैल, 2026 से शुरू हो रहा है, भारत को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है
युद्ध के माहौल में महावीर के दर्शन की उपादेयता
सदियों पहले महावीर जनमे। वे जन्म से महावीर नहीं थे। उन्होंने जीवन भर अनगिनत संघर्षों को झेला, कष्टों को सहा, दुख में से सुख खोजा और गहन तप एवं साधना के बल पर सत्य तक पहुंचे, इसलिये वे हमारे लिए आदर्शों की ऊंची मीनार बन गये। उन्होंने समझ दी कि महानता कभी भौतिक पदार्थों, सुख-सुविधाओं, ... Read more
युद्धग्रस्त विश्व में महावीर की अहिंसा: शांति की एकमात्र राह
संदर्भ – तीर्थंकर महावीर स्वामी जन्म कल्याणक 2625वां (31 मार्च 2026) आज का विश्व एक विचित्र विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर विज्ञान, तकनीक और वैश्वीकरण ने मानव जीवन को अभूतपूर्व सुविधाएं दी हैं, वहीं दूसरी ओर युद्ध, हिंसा और असहिष्णुता ने मानवता के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विश्व के ... Read more
पश्चिम एशिया युद्ध में परमाणु खतरे के प्रति लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अंतिम घोषित तिथि बढ़ा दी है।
अब युद्धविराम को लालायित ट्रंप
अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह लड़ाई अमेरिका को पहले ही महंगी पड़ रही है
पश्चिम एशिया में युद्ध फैलने से एक और वैश्विक आर्थिक संकट का खतरा
पश्चिम एशिया का संकट अब एक वैश्विक आर्थिक चुनौती में बदल गया है
फैक्ट चेक: इजरायल के डिमोना पर हमले के दावे से इराक का वीडियो हुआ वायरल
बूम ने पाया कि वायरल हो रहा वीडियो इराक के Nasiriyah स्थित एक रेस्टोरेंट में लगी आग का है.
ईरान युद्ध के सबक मौजूदा संघर्ष से कहीं आगे बाजार का आकार तय करेंगे
ऊर्जा बाजार एक ऐसे दौर में जा रहा है, जहां मूल्य निर्धारण मॉडल के आधार पर बनी पारंपरिक धारणाएं संघर्ष के बदलते स्वरूप से पूरी तरह बदल रही हैं
ईरान युद्ध में नाटो से अलग-थलग पड़े ट्रंप की परीक्षा की घड़ी
बुधवार को, अमेरिका-इजरायल गठबंधन के ईरान के खिलाफ युद्ध के 18वें दिन, ट्रंप को एक साथ दो बुरी खबरें मिलीं
लीजा रे ने दुबई से शेयर की दर्दभरी कविता, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच जताई चिंता
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। हर तरफ धमाकों और सायरन का शोर सुनाई दे रहा है। एक्ट्रेस लीजा रे भी इन हालातों के बीच दुंबई में अपने घर ...
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता, बेटी के साथ सुरक्षित लौटीं भारत, सुनाई आपबीती
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता भी अपनी 14 साल की बेटी सायरा के साथ यूएई में ...
War 2 रिव्यू: लचर स्क्रिप्ट और निर्देशन के कारण रितिक और एनटीआर हारे युद्ध, पढ़ें पूरी समीक्षा
रितिक रोशन और एनटीआर स्टारर War 2 ‘स्पाई यूनिवर्स’ की बड़ी पेशकश मानी जा रही थी, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और औसत निर्देशन ने इसे निराशाजनक बना दिया। शानदार एक्शन सीक्वेंस और एनटीआर के दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद फिल्म का सेकंड हाफ बिखर गया। कहानी में ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला अपनी खूबसूरती से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। उर्वशी ने बेहद ही कम समय में एक अलग मुकाम हासिल किया है। वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों के साथ 'मिलने और अभिवादन' के क्षणों में संलग्न रहती है। ऐसा ही एक क्षण था जब ...
सलमान खान की सिकंदर के आखिरी गाने में दिखेगा जबरदस्त जलवा, तुर्की से बुलाए गए 500 डांसर्स!
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की 'सिकंदर' इस साल की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके एक्शन-पैक्ड टीजर ने इसकी भव्य एंट्री के लिए एकदम परफेक्ट माहौल तैयार कर दिया है। भव्य पैमाने पर बनाई गई इस फिल्म में ...
केसरी वीर के लिए सूरज पंचोली ने की कड़ी ट्रेनिंग, ऐसे सीखा युद्ध कौशल
बॉलीवुड एक्टर सूरज पंचोली अपनी पहली बायोपिक में वीर हामीरजी गोहिल के ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने जा रहे हैं। सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय और सूरज पंचोली अभिनीत फिल्म 'केसरी वीर : लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ' का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ...
फरहान अख्तर लेकर आ रहे भारत-चीन युद्ध पर आधारित फिल्म 120 बहादुर, निभाएंगे मेजर शैतान सिंह का रोल
Movie 120 Bahadur : रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट, ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज के साथ मिलकर '120 बहादुर' को पेश करने के लिए उत्साहित हैं। यह फिल्म मेजर शैतान सिंह (पीवीसी) और चार्ली कंपनी, 13 कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिकों की कहानी कहती ...
Adil Hussain: दुनियाभर में इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 की धूम मची हुई है। पेरिस ओलंपिक में दुनियाभर के खिलाड़ियों ने भाग लिया है। भारत के कई खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। हाल ही में तुर्की के शूटर यूसुफ डिकेक ने सिल्वर मेडल जीता।
बॉर्डर की 27वीं सालगिरह पर, अभिनेता सनी देओल ने एक घोषणा वीडियो के ज़रिए फ़्रैंचाइज़ी के दूसरे संस्करण की पुष्टि की है। अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सनी ने बॉर्डर 2 में अपनी वापसी की आधिकारिक घोषणा करते हुए एक वीडियो शेयर किया और इसे 'भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म' बताया। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ''एक फौजी अपने 27 साल पुराने वादे को पूरा करने के बाद, आ रहा है फिर से। भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म, बॉर्डर 2।'' इस फिल्म का निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता करेंगे। आगामी युद्ध फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह करेंगे। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | पति से तकरार के बीच केन्या लौट गई हैं Dalljiet Kaur? शादी को बचाने की कर रही कोशिश सनी द्वारा घोषणा वीडियो शेयर किए जाने के तुरंत बाद, सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए कमेंट सेक्शन में बाढ़ ला दी। एक यूज़र ने लिखा, ''वाह, यह बहुत बढ़िया घोषणा है सर जी, जय हिंद।'' दूसरे ने लिखा, ''बहुत उत्साहित हूँ।'' तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, ''बॉर्डर 2 के लिए बहुत उत्साहित हूं।'' इसे भी पढ़ें: NDA पर इमोशनल बयान, काले सूट में ली मंत्री पद की शपथ और शर्मिला अंदाज, Tripti Dimri की तरह रातों रात भारत के Sensation बन गये Chirag Paswan सनी देओल की अन्य परियोजनाएं उन्हें आखिरी बार अमीषा पटेल के साथ गदर 2 में देखा गया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही और इसे ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर घोषित किया गया। गदर 2 की सफलता के बाद, सनी ने लाहौर 1947 सहित कई फिल्में साइन कीं, जिसे आमिर खान के प्रोडक्शन बैनर के तहत बनाया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जिन्होंने आमिर को कल्ट क्लासिक अंदाज़ अपना अपना (1994) में निर्देशित किया था। View this post on Instagram A post shared by Sunny Deol (@iamsunnydeol)
Kalki 2898 AD: शुरू हो गया नया युद्ध, पूरे ट्रेलर की अहम कड़ी हैं अमिताभ, प्रभास करेंगे इम्प्रेस
Kalki 2898 AD के ट्रेलर को देखें तो, फिल्म कल्कि 2898 एडी के मेकर्स ने विश्वास दिलाया है कि ये फिल्म लोगों को बांधने में कामयाब होगी. टफ सीक्वेंस, क्लियर एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर आपका ध्यान खींचते हैं. वीएफएक्स पर भी अच्छा काम किया गया है.
रानीति बालाकोट एंड बियॉन्ड: जिमी शेरगिल की नई सीरीज भारत की आधुनिक युद्ध की ऐतिहासिक कहानी को प्रदर्शित करेगी। जिमी शेरगिल दो मिनट के ट्रेलर की शुरुआत पुलवामा हमले की झलक से होती है। एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाने वाले आशीष कहते हैं, ये एक नया रण है या इसे जीतने के लिए एक नई रणनीति की जरूरत है। इसे भी पढ़ें: नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन प्रहार', कमांडर शंकर राव समेत अब तक 79 हुए ढेर, हिट लिस्ट में और भी कई नाम शामिल आगामी वेब शो आधुनिक युद्ध को डिकोड करता है जो केवल भौतिक सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता है बल्कि सोशल मीडिया, डिजिटल रणनीति और गुप्त राजनीतिक चालों के क्षेत्र से परे है जो भू-राजनीति को नया आकार देने की शक्ति रखता है। वेब श्रृंखला उन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है जिन्होंने 2019 में देश को हिलाकर रख दिया था। शो में कुछ हवाई दृश्य, शानदार प्रदर्शन और एक शक्तिशाली कथा है जो युद्ध के मैदान के अंदर और बाहर हर पहलू को चतुराई से पकड़ती है। इसे भी पढ़ें: Biden को सोचना पड़ेगा फिर एक बार, Iran पर प्रहार तो रूस करेगा पलटवार, रक्षा मंत्रायल ने चिट्ठी लिखकर जता दी मंशा आगामी वेब श्रृंखला के बारे में बात करते हुए, जिमी ने कहा: यह मेरे द्वारा अतीत में की गई किसी भी भूमिका से भिन्न है। कम से कम यह कहना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन भारत की पहली वॉर-रूम केंद्रित वेब-श्रृंखला का हिस्सा बनना बेहद संतोषजनक भी है। वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित जिसने देश को हिलाकर रख दिया। एनएसए प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए, आशीष ने कहा, एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन रक्षा बलों के कुछ सदस्यों के साथ बैठकों ने मुझे अपने चरित्र की बारीकियों को समझने में मदद की। तैयारी कार्य और कार्यशालाएं मुझे वापस ले गईं मेरे एनएसडी के दिनों में। संतोष सिंह द्वारा निर्देशित, श्रृंखला का निर्माण स्फीयरओरिजिन्स मल्टीविजन प्राइवेट लिमिटेड के सुंजॉय वाधवा और कॉमल सुंजय डब्ल्यू द्वारा किया गया है। इसमें प्रसन्ना भी हैं। शो का प्रीमियर 25 अप्रैल को JioCinema पर होगा।
दर्शक काफी समय से रैपर बादशाह और हनी सिंह के बीच जुबानी जंग देख रहे हैं। दोनों का रिश्ता सालों से विवादों से भरा रहा है। हालांकि करियर के शुरुआती दिनों में बादशाह और हनी सिंह के बीच अच्छी दोस्ती हुआ करती थी। हालाँकि, ऐसा लगता है कि सफलता और पैसे ने धीरे-धीरे इस दोस्ती को पूरी तरह से खत्म कर दिया। अब दोनों अक्सर एक दूसरे पर तंज कसते नजर आते हैं। हाल ही में हनी सिंह एक होली पार्टी में शामिल हुए, जहां उन्होंने बादशाह के 'पापा कमबैक' वाले कमेंट का करारा जवाब दिया। रैपर का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसे भी पढ़ें: Punjab Kings के खिलाफ जीत के बाद इंटरनेट पर Virat Kohli का Anushka Sharma के साथ वीडियो कॉल, FLY KISS देते नजर आये खिलाड़ी हनी सिंह ने बादशाह पर किया पलटवार बादशाह कुछ दिनों पहले हनी सिंह पर अपनी टिप्पणी को लेकर चर्चा में थे, जिसमें उन्होंने हनी सिंह की वापसी पर कटाक्ष किया था। अब सिंगर और रैपर हनी सिंह ने एक कमेंट के जरिए बादशाह को करारा जवाब दिया है और कहा है कि उन्हें बादशाह को जवाब देने के लिए मुंह खोलने की जरूरत नहीं है। उनके फैन ही काफी हैं जो हर चीज पर बात कर सकते हैं। उन्होंने अपने गाली वाले अंदाज में अपने फैंस से बात करते हुए बादशाह का जवाब दिया। हनी सिंह को सोमवार को मुंबई में एक होली पार्टी में परफॉर्म करते देखा गया और यहीं उन्होंने बादशाह पर कटाक्ष किया। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा, हर कोई कहता है, रिप्लाई करो, रिप्लाई करो... मैं क्या रिप्लाई करूं... आप लोग तो उनके सारे कमेंट्स का बहुत अच्छे से रिप्लाई कर चुके हैं। मुझे मुंह खोलने की जरूरत है। ऐसा नहीं होता है। जैसे ही भीड़ ने उनके लिए तालियां बजाईं, गायक ने कहा, मुझे बोलने की जरूरत नहीं है। आप लोग खुद पागल हैं। हनी सिंह पागल हैं और उनके प्रशंसक भी पागल हैं। इसे भी पढ़ें: Taapsee Pannu के पति Mathias Boe आखिर कौन है? जब सफल भी नहीं थी एक्ट्रेस तब से उन्हें प्यार करते थे बैडमिंटन खिलाड़ी रैपर बादशाह ने क्या कहा? आपको बता दें कि हाल ही में बादशाह ने हनी सिंह पर कमेंट करते हुए कहा था, ''मुझे एक पेन और कागज दो। मैं तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लाया हूं। मैं कुछ गाने लिखूंगा और तुम्हें दूंगा। पापा की वापसी तुम्हारे साथ होगी।'' Kalesh Controversy B/w Honey Singh and Badshah (Honey Singh Replied to Badshah) pic.twitter.com/o74t423bgS — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 25, 2024 Kalesh Between Badshah & Honey Singh Fans on Stage during Live Concert pic.twitter.com/M4VqSqLSc3 — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 19, 2024
आखिर क्यों Indira Gandhi ने Aandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध, आज भी देखने से कतराते हैं लोग
आखिर क्यों Indira Gandhi नेAandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध,आज भी देखने से कतराते हैं लोग
'सावरकर' रिव्यू: खोखली, एकतरफा फिल्म में एकमात्र अच्छी चीज है रणदीप हुड्डा का काम
आज के दौर में 'गुमनाम' हो चुके एक स्वतंत्रता नायक की कहानी कहने निकली ये फिल्म, एक अनजान कहानी बताने से ज्यादा अपने हीरो विनायक दामोदर सावरकर को बाकियों के मुकाबले अधिक 'वीर' बताने पर फोकस करने लगती है.
अस्तित्व और बदले के लिएब्रह्मांड में शुरू होने वाला है महायुद्ध, एक्शन और रोमांच से भरपूर हैRebel Moon 2 का धांसू ट्रेलर

