भारतीय युद्धपोत पर लगेंगे कामीकाजे ड्रोन, 18 हजार करोड़ की होगी डील
रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के लिए जहाज से लॉन्च होने वाले लॉइटरिंग म्यूनिशन की RFI जारी की है. 1000 किमी रेंज, नौ घंटे तक लॉइटरिंग क्षमता मांगी गई है. डील 15-18 हजार करोड़ रुपये की हो सकती है.
उत्तरी इराक के एरबिल में 4 ड्रोन गिरे, घरों को पहुंचा नुकसान
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15 अगस्त को कर्क में बुध और गुरु का गृहयुद्ध, मेष राशि के लोग बचकर रहें, अन्य राशि का क्या?
15 अगस्त 2026 को कर्क राशि में बुध और उच्च के गुरु (बृहस्पति) के बीच होने वाला ग्रह युद्ध सभी 12 राशियों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव और मानसिक उथल-पुथल लेकर आएगा। जल तत्व की राशि में यह संयोग मुख्य रूप से सोच-विचार, निर्णय लेने की क्षमता, व्यापार, शिक्षा और रिश्तों को प्रभावित करेगा। क्या होता है गृहयुद्ध? खगोलीय रूप से, 15 अगस्त के आसपास सुबह सूर्योदय से ठीक पहले पूर्व दिशा के आसमान में बुध और गुरु की युति (Conjunction) बेहद नजदीक दिखाई देगी, जिसे बाइनाकुलर (दूरबीन) की मदद से आसानी से देखा जा सकता है। 15 अगस्त 2026 को कर्क राशि में बुध (Mercury) और गुरु (Jupiter) के बीच होने वाली खगोलीय और ज्योतिषीय स्थिति को ज्योतिष में ग्रह युद्ध (Planetary War) कहा जाता है। वैदिक ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार, जब मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि में से कोई दो ग्रह एक ही राशि में बिल्कुल एक-दूसरे के करीब (आमतौर पर 1 डिग्री या उससे कम के अंतर पर या समान अंशों पर) आ जाते हैं, तो उनके बीच 'ग्रह युद्ध' की स्थिति बनती है। ज्योतिषीय गणना में माना जाता है कि ग्रह युद्ध में वही ग्रह विजेता होता है जो अक्षांश या दीप्ति में अधिक बलवान हो। चूंकि कर्क राशि में गुरु उच्च के हैं, इसलिए इस स्थिति में गुरु का पलड़ा भारी रहता है। आइए जानते हैं कि सभी 12 राशियों पर इस ग्रह युद्ध का क्या प्रभाव पड़ेगा: 1. मेष राशि (Aries) प्रभाव: चतुर्थ भाव में यह ग्रह युद्ध पारिवारिक मामलों में कुछ भ्रम या बहस की स्थिति पैदा कर सकता है। सलाह: घर-परिवार या जमीन-जायदाद से जुड़े बड़े फैसले लेते समय अति-उत्साह या बहसबाजी से बचें। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। 2. वृषभ राशि (Taurus) प्रभाव: तृतीय भाव में बुध-गुरु की निकटता आपके पराक्रम और संचार (Communication) में वृद्धि करेगी। सलाह: छोटे भाई-बहनों से बातचीत में अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करें। नौकरी और व्यापारिक यात्राओं में सफलता मिलेगी, लेकिन दस्तावेज ध्यान से जांच लें। 3. मिथुन राशि (Gemini) प्रभाव: द्वितीय (धन) भाव में यह योग अचानक धन लाभ के अवसर देगा, लेकिन वाणी में कठोरता या घमंड भी ला सकता है। सलाह: आर्थिक मामलों में किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। परिवार के साथ वित्तीय मामलों पर चर्चा करते समय शांति बनाए रखें। 4. कर्क राशि (Cancer) प्रभाव: आपकी ही राशि (प्रथम भाव) में यह ग्रह युद्ध हो रहा है। मानसिक रूप से आप विचारों के अतिप्रवाह (Overthinking) और भ्रम का अनुभव कर सकते हैं। सलाह: जल्दबाजी या भावुक होकर कोई बड़ा फैसला न लें। गुरु की कृपा से आपकी बुद्धिमत्ता बढ़ेगी, लेकिन अहंकार से बचना होगा। 5. सिंह राशि (Leo) प्रभाव: द्वादश (12वें) भाव में यह स्थिति अचानक खर्चों में बढ़ोतरी और विदेश से जुड़े कार्यों में तेजी संकेत देती है। सलाह: बजट बनाकर चलें और कानूनी या कागजी मामलों में लापरवाही न बरतें। आध्यात्मिक कार्यों की ओर झुकाव रहेगा। 6. कन्या राशि (Virgo) प्रभाव: एकादश (लाभ) भाव में यह संयोग आय के नए रास्ते खोलेगा। आपके पेशेवर संपर्क मजबूत होंगे। सलाह: दोस्तों या व्यावसायिक साझेदारों के साथ पैसों या तर्कों को लेकर मतभेद हो सकते हैं। काम पर ध्यान केंद्रित रखें। 7. तुला राशि (Libra) प्रभाव: दशम (कर्म) भाव में यह ग्रह युद्ध करियर और कार्यक्षेत्र में बड़े बदलाव और नए अवसर ला सकता है। सलाह: कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत करते समय अत्यधिक आत्मविश्वासी होने से बचें। अपने विचारों को स्पष्टता से रखें। 8. वृश्चिक राशि (Scorpio) प्रभाव: नवम (भाग्य) भाव में उच्च के गुरु और बुध का यह संयोग उच्च शिक्षा, धार्मिक गतिविधियों और दूर की यात्राओं के योग बनाएगा। सलाह: भाग्य का साथ मिलेगा, लेकिन किसी भी मुद्दे पर अपने विचार दूसरों पर थोपने की कोशिश न करें। 9. धनु राशि (Sagittarius) प्रभाव: अष्टम भाव में यह स्थिति अचानक धन लाभ या शोध कार्यों में सफलता दिला सकती है, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। सलाह: शेयर बाजार या जोखिम भरे निवेश से बचें। गुप्त बातों को उजागर न होने दें। 10. मकर राशि (Capricorn) प्रभाव: सप्तम भाव में यह संयोग वैवाहिक जीवन और साझेदारी के व्यवसाय को प्रभावित करेगा। सलाह: जीवनसाथी या बिजनेस पार्टनर के साथ संवादहीनता (Communication Gap) न होने दें। तार्किक बहस रिश्ते बिगाड़ सकती है, इसलिए धैर्य रखें। 11. कुंभ राशि (Aquarius) प्रभाव: छठे भाव में यह योग आपको प्रतियोगिताओं और शत्रु पक्ष पर विजय दिलाएगा, लेकिन स्वास्थ्य का ख्याल रखना होगा। सलाह: खान-पान पर ध्यान दें और अनावश्यक वाद-विवाद से खुद को दूर रखें। कर्ज या लेन-देन के मामलों में सावधानी बरतें। 12. मीन राशि (Pisces) प्रभाव: पंचम भाव में यह ग्रह युद्ध शिक्षा, बुद्धि और संतान पक्ष के लिए सकारात्मक परिणाम देगा। सलाह: विद्यार्थियों को एकाग्रता बनाए रखनी होगी। रचनात्मक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए नए अवसर मिलेंगे, लेकिन निर्णय लेने में भ्रमित न हों। अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए उपाय: विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें: बुध और गुरु दोनों ग्रहों के शुभ फल प्राप्त करने के लिए भगवान विष्णु की आराधना सबसे उत्तम मानी जाती है। पीले और हरे रंग का सही संतुलन: इस दिन केले के वृक्ष की पूजा करें या किसी जरूरतमंद को चने की दाल/हल्दी का दान करें। गाय को हरा चारा/गुड़ खिलाएं: इससे बुध-गुरु जनित मानसिक तनाव और भ्रम दूर होता है।
अब PAK-चीन की खैर नहीं... नेवी के हर युद्धपोत पर होगी ब्रह्मोस की तैनाती
भारतीय नौसेना 2030 तक ज्यादातर युद्धपोतों पर ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल लगा देगी. ऑपरेशन सिंदूर में इसकी सफलता के बाद लगभग 20 जहाज लैस हैं. नए जहाजों में पहले से व्यवस्था है.
जापान की सैन्य नीति पर भड़का उत्तर कोरिया, बोला- 'युद्ध मशीन' को मजबूत करने का बहाना
उत्तर कोरिया ने जापान की नई रक्षा श्वेत पत्र को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्योंगयांग ने आरोप लगाया है कि जापान पड़ोसी देशों से खतरे का हवाला देकर अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने और क्षेत्र में सैन्यीकरण को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
जापान की सैन्य नीति पर भड़का उत्तर कोरिया, बोला- ‘युद्ध मशीन’ को मजबूत करने का बहाना
सोल, 12 अगस्त उत्तर कोरिया ने जापान की नई रक्षा श्वेत पत्र को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. प्योंगयांग ने आरोप लगाया है कि जापान पड़ोसी देशों से खतरे का हवाला देकर अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने और क्षेत्र में सैन्यीकरण को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. उत्तर कोरियाई Governmentी मीडिया में प्रकाशित एक ... Read more
Trump की ईरानी साजिश पर Turkey ने उठाए बड़े सवाल!
डोनाल्ड ट्रंप की तुर्की यात्रा के दौरान कथित ईरानी हमले की चेतावनी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की के अधिकारियों को शक है कि इजरायल की ओर से दी गई खुफिया जानकारी का इस्तेमाल अमेरिका ईरान बातचीत को प्रभावित करने के लिए किया गया हो सकता है. हालांकि, इस दावे के समर्थन में अभी कोई सार्वजनिक ठोस सबूत सामने नहीं आया है और रिपोर्ट को संदेह के रूप में देखा जा रहा है.
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक तात्या टोपे की प्रेरक गाथा पढ़िए... जानिए कैसे तात्या टोपे ने गोरिल्ला युद्ध की रणनीति से अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, कानपुर और ग्वालियर में ऐतिहासिक भूमिका निभाई तथा रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर आजादी की लड़ाई लड़ी.
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण युद्ध के मोर्चे पर एक ऐसा सनसनीखेज भू-राजकीय मोड़ आ गया है, जिसने पूरी दुनिया की सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अपने सख्त और रहस्यमयी तौर-तरीकों के लिए पहचाना जाने वाला दुनिया का सबसे गोपनीय देश अब इस युद्ध के अखाड़े में प्रत्यक्ष रूप से कूद पड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस गुप्त देश की तरफ से रूस को ऐसे अत्याधुनिक और खतरनाक अस्त्र-शस्त्र सप्लाई किए जा रहे हैं, जिनके आगे यूक्रेन की रक्षा प्रणालियां और पश्चिमी देशों के हथियार भी लाचार नजर आ रहे हैं। इस नई एंट्री से यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।यूक्रेन की डिफेंस लाइन को ध्वस्त कर रहे हैं ये सीक्रेट हथियारयुद्ध के मैदान से आ रही खुफिया रिपोर्टों से पता चलता है कि इस रहस्यमय देश द्वारा मोर्चे पर पहुंचाए जा रहे हथियार बेहद उच्च तकनीक वाले और घातक हैं। ये अस्त्र सटीक निशाना लगाने के साथ-साथ रडार को चकमा देने में भी माहिर बताए जा रहे हैं। रूसी सेना जब इन आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल कर रही है, तो यूक्रेनी वायु रक्षा प्रणाली और बख्तरबंद गाड़ियां बुरी तरह तबाह हो रही हैं। जेलेंस्की प्रशासन लगातार पश्चिमी देशों से आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम की मांग कर रहा था, लेकिन इस नई खेप के सामने आने के बाद यूक्रेन के रणनीतिकारों के होश फाख्ता हो गए हैं।वैश्विक कूटनीति में मचा हड़कंप, पश्चिमी देशों की बढ़ी चिंताइस रहस्यमय देश के सीधे तौर पर रूस के पक्ष में युद्ध के मैदान में उतरने से वाशिंगटन से लेकर ब्रुसेल्स तक के तमाम पश्चिमी देशों में हड़कंप मच गया है। अमेरिका और नाटो (NATO) के रणनीतिकार यह अनुमान लगाने में जुटे हैं कि इस गुप्त गठबंधन से आने वाले दिनों में युद्ध का पासा पूरी तरह से पलट सकता है। एक तरफ जहां रूस की सैन्य ताकत और मारक क्षमता में बेतहाशा इजाफा हुआ है, वहीं यूक्रेन और उसके पश्चिमी सहयोगियों के लिए इस नई चुनौती का सामना करना बेहद कठिन साबित हो रहा है। इस हाई-वोल्टेज डेवलपमेंट ने तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं को एक बार फिर से तेज कर दिया है।
Donald Trump Secret Plane Swap: क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर एक बड़ा मिसाइल हमला होने वाला था? क्या ईरान के सीक्रेट एजेंटों कोट्रंप के होटल के कमरे से लेकर उनके हर एक कदम की सटीक जानकारी थी? जी हां, तुर्की में आयोजित नाटो सम्मेलन के दौरान एक ऐसा खौफनाक सनसनीखेज वाकया सामने आया है, जिसने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और सीक्रेट सर्विस के होश उड़ा दिए थे।न्यू यॉर्क टाइम्स की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ओर से 'सरफेस-टू-एयर मिसाइल' हमले के इनपुट मिलने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप को तुर्की से बेहद नाटकीय और सीक्रेट तरीके से सुरक्षित बाहर निकाला गया।ईरानी जासूसों के पास थी कमरे के फ्लोर तक की खबर!अंकारा में नाटो सम्मेलन के दौरान अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को बेहद खौफनाक इनपुट्स मिले। इंटेल रिपोर्ट में दावा किया गया था कि, ईरानी गुर्गों को इस बात की सटीक जानकारी थी कि ट्रंप अंकारा के किस होटल में रुके हैं और किस फ्लोर पर ठहरे हुए हैं।नाटो समिट वेन्यू के पास एक संदिग्ध व्यक्ति को कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मिसाइल के साथ देखा गया था। रिपोर्ट यह भी थी कि ट्रंप जिस भी प्लेन से उड़ान भरेंगे, उसे सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से निशाना बनाया जा सकता है।कैटरिंग ट्रक में छिपकर निकले ट्रंपईरान के इस सीधे और जानलेवा खतरे को देखते हुए सीक्रेट सर्विस और अमेरिकी सेना ने ट्रंपको बचाने के लिए एक हॉलीवुड फिल्म जैसा 'मास्टरप्लान' बनाया। दुनिया और मीडिया को चकमा देने के लिए ट्रंप सबसे पहले कैमरों के सामने अपने आधिकारिक विमान 'एयर फोर्स वन' में सवार हुए। उन्होंने कहा भी कि वे 'पुरानी यादों के लिए' इस प्लेन का इस्तेमाल कर रहे हैं।इसके बाद एयरपोर्ट पर एक कैटरिंग कंटेनर को प्लेन के पास लाया गया। ट्रंप को बेहद चुपके से इस कैटरिंग ट्रक के अंदर ले जाया गया। ट्रंप को इस ट्रक के जरिए गुप्त रूप से एक सैन्य विमान (Air Force C-32A) में ट्रांसफर किया गया और वहां से वे ब्रिटेन के लिए रवाना हो गए। जब दुनिया सोच रही थी कि ट्रंप एयर फोर्स वन में हैं, तब वे एक मिलिट्री प्लेन से तुर्की की सीमा पार कर चुके थे।ट्रंप का सनसनीखेज कबूलनामा- 'मैंने ज्यादा सवाल नहीं पूछे...'तुर्की में हुए इस सीक्रेट प्लेन स्वैप पर ट्रंप का बयान भी सामने आया है। उन्होंने खुद पुष्टि की है कि उन्हें सुरक्षा एजेंसियों के कहने पर अपना विमान बदलना पड़ा था।डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'मैं सीक्रेट सर्विस और सेना के निर्देशों पर चलता हूं। वे चाहते थे कि मैं दूसरी फ्लाइट और दूसरे प्लेन से जाऊं... मैंने वही किया जो उन्होंने कहा। मुझे लगता है कि वहां कोई बड़ा खतरा था। मैंने इसके बारे में ज्यादा सवाल नहीं पूछे, क्योंकि मुझे अक्सर ऐसी धमकियां मिलती रहती हैं। शायद मैं सबसे ज्यादा असरदार राष्ट्रपति हूं, इसलिए ऐसा होता है।'जब दो देशों के बीच मंडराया जंग का खतराविभाजन और वैश्विक कूटनीति के बीच इस घटना ने अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव में घी डालने का काम किया है। अगर तुर्की में अमेरिकी राष्ट्रपति के विमान पर हमला हो जाता या ट्रंप को नुकसान पहुंचता, तो यह सीधे तौर पर तीसरे विश्व युद्ध का कारण बन सकता था। फिलहाल, अमेरिका की इस सतर्कता और सीक्रेट ऑपरेशन ने ट्रंप की जान बचा ली।
बाब अल-मंदेब में हूती समूहों ने सऊदी अरब के जहाज को बनाया निशाना, सैन्य उपकरण ले जाने का आरोप
बाब अल-मंदेब में हूती समूहों ने सऊदी अरब के जहाज को बनाया निशाना, सैन्य उपकरण ले जाने का आरोप
Trump Plane Threat: तुर्की से निकलते वक्त क्यों बदला गया ट्रंप का विमान? राष्ट्रपति ने खुद बताया- जान को था गंभीर खतर
US Secret Operations: कैमरों के सामने पुरानी 'बेबी ब्लू' एयरफोर्स वन में सवार हुए डोनाल्ड ट्रंप, लेकिन गंतव्य तक पहुंचे किसी बेहद गुप्त तीसरे सैन्य विमान से—पढ़िए अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा में हुए अब तक के सबसे असाधारण और सनसनीखेज हेरफेर की अंदरूनी परतें। 1. कैमरों का धोखा और एयरफोर्स वन की 'शैडो' फ्लाइट वैश्विक कूटनीति और खुफिया रणनीति के इतिहास में कुछ ऐसी घटनाएं दर्ज होती हैं जो किसी हॉलीवुड सस्पेंस थ्रिलर फिल्म की पटकथा से भी अधिक हैरतअंगेज होती हैं। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक ऐसा ही विस्फोटक खुलासा हुआ है जिसने वाशिंगटन से लेकर तेहरान तक सनसनी फैला दी है। घटनाक्रम की शुरुआत तुर्की की राजधानी अंकारा से हुई, जहां डोनाल्ड ट्रंप नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे थे। सम्मेलन के समापन के बाद ट्रंप को ब्रिटेन के लिए रवाना होना था। वैश्विक मीडिया के कैमरे अंकारा एयरपोर्ट के रनवे पर तैनात थे। दुनिया की नजरों के सामने डोनाल्ड ट्रंप अपने परिचित और ऐतिहासिक नीले रंग वाले पारंपरिक अमेरिकी राष्ट्रपति विमान— ' बेबी ब्लू एयरफोर्स वन' (Boeing VC-25A) में चढ़ते हुए दिखाई दिए। पत्रकारों, फोटोग्राफरों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को पूरी तरह यही विश्वास था कि अमेरिकी राष्ट्रपति इसी विशालकाय और भव्य विमान से ब्रिटेन के लिए उड़ान भर रहे हैं। प्रेसब्रीफिंग में भी इसी आधिकारिक यात्रा योजना की पुष्टि की गई थी। खुद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रूथ सोशल' (Truth Social) पर लिखा था कि वे तुर्की से यूके जाने के लिए पुराने दिनों की यादों को ताजा करते हुए अपने पारंपरिक 'बेबी ब्लू' एयरफोर्स वन का ही उपयोग कर रहे हैं। लेकिन यह तो महज एक रचा हुआ दृश्य था—असली खेल तो पर्दे के पीछे शुरू होना था। 2. हवाई अड्डे का कैटरिंग ट्रक और 'ऑपरेशन सीक्रेट शिफ्ट' जैसे ही ट्रंप बेबी ब्लू एयरफोर्स वन के भीतर दाखिल हुए और विमान के दरवाजे बंद हुए, मीडिया का ध्यान रनवे की औपचारिकताओं पर केंद्रित हो गया। लेकिन विमान के भीतर प्रवेश करते ही पेंटागन और सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों ने अति-गोपनीय सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिया। अंकारा एयरपोर्ट के एक सुनसान और मीडिया की नजरों से दूर बने हिस्से में एक साधारण एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक (वह ट्रक जिससे विमानों के भीतर खाना और रसद पहुंचाया जाता है) को एयरफोर्स वन की पिछली सर्विस एंट्री से जोड़ा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बेहद खामोशी से, बिना किसी तड़क-भड़क या आधिकारिक काफिले के, उस कैटरिंग ट्रक के कंटेनर में उतारा गया। कैटरिंग ट्रक रणनीति का रहस्य : रनवे पर खड़े किसी भी निगरानी उपग्रह, ईरानी ड्रोन या स्थानीय सर्विलांस नेटवर्क के लिए कैटरिंग ट्रक की आवाजाही पूरी तरह सामान्य एयरपोर्ट गतिविधि मानी जाती है। सुरक्षा एजेंसियों ने इसी अंधबिंदु (Blind Spot) का फायदा उठाकर राष्ट्रपति को मुख्य विमान से बाहर निकाला। उस कैटरिंग ट्रक के जरिए ट्रंप को एयरपोर्ट के दूसरी तरफ मुस्तैद खड़े एक छोटे अमेरिकी सैन्य विमान— C-32A (Boeing 757 का विशेष सैन्य रूपांतरण) में चुपके से शिफ्ट कर दिया गया। जब तक मीडिया और दुनिया सोच रही थी कि ट्रंप विशालकाय एयरफोर्स वन में आराम कर रहे हैं, तब तक ट्रंप C-32A विमान में सवार होकर वायुमंडल की ऊंचाइयों में उड़ चुके थे। 3. ईरान का डर और भौगोलिक संवेदनशीलता : सुरक्षा एजेंसियों के हाथ-पांव क्यों फूले? इस हैरतअंगेज सीक्रेट ऑपरेशन के पीछे सबसे मुख्य और प्राथमिक कारण था— ईरान से बढ़ता सैन्य तनाव और सीधी सीमा निकटता । तुर्की की पूर्वी सीमा सीधे ईरान से सटी हुई है। जिस समय ट्रंप तुर्की में मौजूद थे, उस समय मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच स्थिति अत्यधिक विस्फोटक और नाजुक बनी हुई थी। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (CIA और DIA) को इनपुट्स मिले थे कि ईरानी रिपब्लिकन गार्ड्स (IRGC) या उनके समर्थित प्रॉक्सी समूह राष्ट्रपति के विमान के फ्लाइट पाथ (Flight Path) और रडार सिग्नेचर की निगरानी कर सकते हैं। रडार सिग्नेचर और डिकॉय (Decoy) रणनीति : एयरफोर्स वन (Boeing 747 आधारित VC-25A) का अपना एक विशिष्ट रडार और थर्मल सिग्नेचर होता है जिसे ट्रैक करना आसान होता है। यदि किसी हमलावर को राष्ट्रपति के सटीक लोकेशन और फ्लाइट कोड की जानकारी हो, तो मैनपैड्स (MANPADS) या सतह से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलों से खतरा कई गुना बढ़ जाता है। विमान बदलकर भ्रम पैदा करना : सीक्रेट सर्विस ने तीन अलग-अलग विमानों का इस्तेमाल करके एक त्रिकोणीय सुरक्षा घेरा तैयार किया। यदि कोई दुश्मन एयरफोर्स वन को ट्रैक कर रहा था, तो वे वास्तव में केवल डिकॉय विमान का पीछा कर रहे थे, जबकि राष्ट्रपति एक पूरी तरह अलग, छोटे और गैर-पारंपरिक सैन्य विमान C-32A में सुरक्षित सफर कर रहे थे। 4. तीन प्लेन और दो अलग-अलग लैंडिंग : RAF मिल्डनहाल पर रचा गया ड्रामा इस पूरे ऑपरेशन में कुल तीन विमानों की भूमिका रही: रात करीब 10:20 बजे अमेरिकी वायुसेना का C-32A विमान ब्रिटेन के RAF मिल्डनहाल एयरबेस पर उतरा। डोनाल्ड ट्रंप बिना किसी मीडिया कवरेज के चुपचाप उतरे और सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचा दिए गए। इसके कुछ मिनटों बाद पुराना 'बेबी ब्लू' एयरफोर्स वन रनवे पर उतरा, जिसमें से व्हाइट हाउस का मीडिया दल बाहर निकला। बाहर से देखने पर सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन हकीकत में इतिहास का सबसे बड़ा डिकॉय ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हो चुका था। 5. कतर से मिले नए लग्जरी प्लेन पर क्यों उठे गंभीर सवाल? इस खुलासे के बाद एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है— कतर द्वारा अमेरिका को भेंट में दिए गए नए बोइंग 747-8 विमान की सुरक्षा पर संशय। ट्रंप ने कतर से मिले इस बेहद आधुनिक और लग्जरी विमान से अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्रा की शुरुआत की थी। यह इस विमान की पहली विदेशी उड़ान थी। लेकिन तुर्की से ब्रिटेन जाने के दौरान ट्रंप ने इस नए विमान का उपयोग नहीं किया। इसके दो मुख्य कारण सामने आ रहे हैं: सुरक्षा ऑडिट और टेस्टिग : यद्यपि विमान कतर से मिला था, लेकिन राष्ट्रपति के स्थायी उपयोग के लिए इसके संचार (Communication) और एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम का पेंटागन द्वारा पूर्ण परीक्षण किया जाना बाकी था। अति-संवेदनशील ईरानी तनाव के बीच पेंटागन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता था। विमान का विशाल आकार : नया बोइंग 747-8 आकार में अत्यधिक विशाल है, जिससे तुर्की जैसे संवेदनशील इलाके में इसे गुप्त रखना असंभव था। इसलिए C-32A जैसे छोटे और फुर्तीले विमान को वरीयता दी गई। 6. पेंटागन का मौन और व्हाइट हाउस का आधिकारिक बयान इस गोपनीय उड़ान की खबर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में लीक होने के बाद हड़कंप मच गया। जब व्हाइट हाउस और पेंटागन से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उनके उत्तर बेहद नपे-तुले रहे: व्हाइट हाउस का आधिकारिक रुख: हम राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़ी परिचालन संबंधी (Operational) विशिष्ट जानकारियों पर टिप्पणी नहीं करते। हालांकि, कतर से मिले नए विमान और सभी राष्ट्रपतीय उड़ानों के लिए उच्चतम स्तर के सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू हैं। राष्ट्रपति की सुरक्षा सर्वोपरि है। दूसरी ओर, पेंटागन ने इस पूरे मामले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया । हालांकि, सेवानिवृत्त अमेरिकी सैन्य अधिकारियों और खुफिया विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रिपोर्ट सटीक है, तो यह दर्शाता है कि ईरान की तरफ से खतरे का स्तर बेहद गंभीर था और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां राष्ट्रपति को किसी भी तरह के सर्विलांस या टारगेटेड हमले से बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थीं। 7. आधुनिक इतिहास का सबसे चालाक डिकॉय ऑपरेशन ट्रंप की सीक्रेट फ्लाइट का यह खुलासा न केवल अमेरिकी राष्ट्रपति की बहुस्तरीय सुरक्षा परत (Multi-layered Security Protocol) को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वैश्विक कूटनीति के पीछे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) कितने खौफनाक मोड़ ले सकते हैं। कैमरों के सामने खड़ा चमकता हुआ विशालकाय एयरफोर्स वन एक छलावा मात्र था, मीडिया दल एक अनजाने डिकॉय का हिस्सा था, और कैटरिंग ट्रक के अंधेरे से होकर निकला C-32A विमान अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा की नई ढाल बना। ईरान और अमेरिका के बीच पर्दे के पीछे चल रही इस शह और मात की जंग में, तुर्की के आसमान पर खेला गया यह 3-प्लेन गेम इतिहास के सबसे सनसनीखेज सुरक्षा ऑपरेशनों में दर्ज हो चुका है।
डोनाल्ड ट्रंप ने किया खुलासा, हां, मेरी जान को खतरा था, इसी वजह से तुर्की में मेरा विमान बदला गया
डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने पुष्टि की है कि तुर्की में मेरा विमान बदला गया था, क्योंकि मेरी जान को खतरा था। उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें कई ऐसी धमकियां मिली हैं जिनके बारे में लोगों को पता नहीं है।
प्रदेश के निकायों के मेयर, सभापति, अध्यक्ष ज्यादातर बार पांच साल में चुने जाते रहे हैं। लेकिन पाक युद्ध, इमरजेंसी, बाबरी ढांचा विवाद के बाद पहली बार है, जब 5 की जगह 7 साल बाद नए निगम मेयर, परिषद सभापति और पालिका अध्यक्ष कुर्सी संभाल पाएंगे। 13 अगस्त को पिछली लॉटरी के ठीक 6 साल 10 माह बाद फिर से निकायों की लॉटरी निकाली जाएगी। इसके करीब 2 माह चुनाव और परिणाम में लगेंगे। उसके बाद एक माह तक निकायों में बहुमत वाले दल के पार्षद बोर्ड द्वारा नए मेयर, सभापति का चुनाव किया जाएगा। फिर नए मेयर निकाय प्रमुख कुर्सी संभालेंगे, तब तक अक्टूबर-नवंबर आ जाएगा। ऐसे में 7 साल बाद नए निकाय प्रमुख मिलेंगे। 1977 की इमरजेंसी के बाद 6 साल के अंतराल से चुनाव हुए थे। गौरतलब है कि प्रदेश में 309 निकाय हैं और उनकी आरक्षण की लॉटरी 13 अगस्त को निकाली जाएगी। वार्डों की पिछली लॉटरी 18 सितंबर, 2019 में निकाली गई थी। यह अंतराल करीब 7 साल का है।
Ambala News: एकतरफा कार्रवाई पर गुरमत्ता पारित, कल होगी सिख संगत की बैठक
एकतरफा कार्रवाई पर गुरमत्ता पारित, कल होगी सिख संगत की बैठक
Unnao News: सऊदी अरब में मौत के 12 वें दिन आया युवक का शव, परिजन बेहाल
सऊदी अरब में मौत के 12 वें दिन आया युवक का शव, परिजन बेहाल
Nainital News: नाटक में तीसरे विश्वयुद्ध के बाद का दर्द हुआ जीवंत
सिने अभिनेता निर्मल पांडे की स्मृति में उनके जन्मदिवस पर सांस्कृतिक संस्था युगमंच एवं प्रयोगांक संस्था की ओर से नाट्य महोत्सव हुआ।
रख रहे करीबी नजर, सुरक्षा पर असर का भी आकलन, पाकिस्तान-सऊदी अरब-तुर्किये समझौते पर भारत
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए रक्षा समझौते पर भारत करीबी निगाह रख रहा है। इसके साथ ही वह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन कर रहा है।
भारत ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए नए संयुक्त रक्षा समझौते के प्रभावों का आकलन शुरू कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि भारत इस समझौते के राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता पर पड़ने वाले असर की समीक्षा कर ...
मिडिल ईस्ट में रचा इतिहास: लेबनान ने खत्म की मौत की सजा, संसद से पास हुआ ऐतिहासिक बिल
लेबनान मौत की सजा को औपचारिक रूप से खत्म करने वाला मिडिल ईस्ट का पहला देश बन गया है। संसद ने इस ऐतिहासिक विधेयक को मंजूरी देते हुए देश में फांसी की प्रथा को कानूनी रूप से खत्म कर दिया है।
1962 युद्ध से CP तक, ‘फ्लैग अंकल’ परिवार आज भी सिलता है तिरंगा
15 अगस्त से पहले दिल्ली के सदर बाजार में तिरंगे की मांग बढ़ गई है. यहां एक परिवार तीन पीढ़ियों से तिरंगे बनाने का काम कर रहा है. चीन के भारत पर हमले के बाद शुरू हुआ यह काम अब परिवार की पहचान बन चुका है. ‘फ्लैग अंकल’ अब्दुल गफ्फार के निधन के बाद उनके भाई अब्दुल मलिक इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं.
सऊदी-PAK संग रक्षा समझौते पर तुर्की ने तोड़ी चुप्पी
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच तीन ताकतवर देशों का साथ आना अहम है. एक के पास परमाणु ताकत, दूसरे के पास आधुनिक सैन्य तकनीक और तीसरे के पास अपार आर्थिक संसाधन हैं. ईरान-अमेरिका-इजरायल टकराव के बाद बदले क्षेत्रीय हालात में यह साझेदारी नई रणनीतिक तस्वीर बना सकती है.
पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को देखते हुए भारत और सऊदी अरब का संपर्क में रहना महत्वपूर्ण : राजदूत
पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को देखते हुए भारत और सऊदी अरब का संपर्क में रहना महत्वपूर्ण : राजदूत
मुस्लिमों में तलाक की प्रथाएं- तलाक-ए-हसन और तलाक-ए-अहसन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी.
Trump Secret Flight: Iran के डर से ट्रक में छिपकर भागे थे ट्रम्प, अब हुआ खुलासा। Turkey NATO Summit
अमेरिका के मुताबिक इस बार ईरान ट्रंप के तुर्के दौरे पर उन्हें निशाना बनाने वाला था। इस खतरे से सूचना मिलते ही ट्रंप को बेहद फिल्मी तरीके से बचाया गया था। इस सीक्रेट ऑपरेशन को लेकर हाल ही कुछ हैरतअंगेज खुलासे हुए हैं।
पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हाल ही में हुए 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' (मक्का संयुक्त रक्षा समझौता) को अपनी पहली बड़ी परीक्षा में नाकामी का सामना करना पड़ा है। यमन के ईरान-समर्थित हूथी विद्रोहियों ने जाज़ान में अरामको रिफाइनरी पर हमला किया, लेकिन इस नए बने गठबंधन ने हमले का कोई साफ़ सैन्य जवाब नहीं दिया और न ही कोई चेतावनी जारी की। जाज़ान में अरामको रिफाइनरी में आग रविवार सुबह लगी। हूथी सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि सादा और हज्जा प्रांतों में सऊदी ड्रोन ऑपरेशन्स के जवाब में उनके समूह ने ड्रोन से इस सुविधा को निशाना बनाया था। बाद में सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने आग लगने की पुष्टि की और बताया कि आग बुझा दी गई है। इसे भी पढ़ें: Yemen Army का बड़ा Military Action, Houthi ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमला, क्या Middle East में बढ़ेगा महायुद्ध का खतरा? यह घटना सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की मक्का में हुई मुलाक़ात और शुक्रवार को हुए समझौते पर हस्ताक्षर करने के ठीक 48 घंटे बाद हुई। इस समझौते के तहत, तीनों देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। फिर भी, जाज़ान पर हूथी हमले के बाद न तो तुर्की और न ही पाकिस्तान ने कोई प्रतिक्रिया दी, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं कि असल संकट के समय यह सामूहिक रक्षा व्यवस्था कैसे काम करेगी। द जेरूसलम पोस्ट के एक विश्लेषण के अनुसार, कुछ इज़राइली कमेंट्री में इस समझौते को इस्लामिक NATO या एक बड़े सुन्नी गठबंधन की नींव के तौर पर दिखाया गया है; कुछ जगहों पर तो सऊदी अरब के लिए पाकिस्तानी परमाणु सुरक्षा कवच (न्यूक्लियर अम्ब्रेला) की बात भी कही गई है। इसे भी पढ़ें: Houthi rebels ने यमन के मोखा बंदरगाह पर किया हमला, 7 की मौत; Aramco संयंत्र में आग हालांकि, समझौते की उपलब्ध जानकारी से पता चलता है कि यह व्यवस्था उतनी 'ऑटोमैटिक' (अपने-आप लागू होने वाली) नहीं है। इस समझौते का मकसद तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और सामूहिक प्रतिरोध (डिटेरेंस) को मज़बूत करना है। समिट के बयान के अनुसार, तीनों में से किसी भी देश पर सशस्त्र हमला होने पर उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसे भी पढ़ें: Yemen War Alert: UN Envoy Hans Grundberg ने दी चेतावनी, Houthi हमलों से बढ़ सकता है भीषण संघर्ष समिट के बयान में कहा गया, इस समझौते का मकसद किसी भी तरह की आक्रामकता के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मज़बूत करना है। इसमें यह प्रावधान है कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमला होने पर उसे उन सभी पर हमला माना जाएगा। साथ ही, इसमें तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं को बेहतर बनाने की बात भी कही गई है। हालांकि इस समझौते में ऑपरेशन या सैन्य प्रतिबद्धताओं का विस्तार से ज़िक्र नहीं है, लेकिन यह बेहतर रक्षा सहयोग के लिए एक ढांचा तैयार करता है और क्षेत्र व उसके बाहर शांति, स्थिरता और सुरक्षा को अपने व्यापक लक्ष्यों के तौर पर पहचानता है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने अनादोलु एजेंसी से बात करते हुए समझौते के बारे में कुछ सबसे स्पष्ट जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सामूहिक रक्षा वाला प्रावधान तकनीकी रूप से NATO के आर्टिकल 5 जैसा ही है और इस व्यवस्था में एक मंत्री-स्तरीय समिति और सऊदी अरब में स्थित एक स्थायी सचिवालय शामिल होगा।
पौराणिक कथाओं और भारतीय इतिहास के महाकाव्य रामायण में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के पिता राजा दशरथ के जीवन से जुड़े कई ऐसे रहस्य हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। क्या आप जानते हैं कि राजा दशरथ का वास्तविक नाम 'नेमी' था और उन्हें 'दशरथ' नाम मिलने के पीछे एक बेहद रोमांचक और साहसिक कहानी जुड़ी हुई है? त्रेतायुग के दौरान जब देवताओं और असुरों के बीच भीषण संग्राम छिड़ा था, तब अयोध्या के तत्कालीन राजा नेमी ने अपनी अद्भुत वीरता का परिचय दिया था। इस भयंकर युद्ध के मैदान में एक ऐसा नाजुक मोड़ भी आया था जब महारानी कैकेयी के अदम्य साहस और युद्ध कौशल ने राजा दशरथ के प्राण बचाए थे, जिसने आगे चलकर अयोध्या के इतिहास और राजनीतिक समीकरणों की तकदीर को पूरी तरह से बदल कर रख दिया था।क्यों पड़ा था महाराज नेमी का नाम 'दशरथ'?पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान राम के पिता का मूल नाम महाराज नेमी था। उनकी सेना की ख्याति और उनकी युद्धक क्षमता इतनी प्रचंड थी कि वे एक साथ दसों दिशाओं यानी रथ, गज, घोड़े और पैदल सेना के व्यूह को नियंत्रित करने में सक्षम थे। उनकी इसी महान महारथ और युद्ध कौशल के कारण उन्हें 'दशरथ' अर्थात 'दस रथों को एक साथ कुशलता से संचालित करने वाला योद्धा' की उपाधि से सम्मानित किया गया था, जो बाद में उनके वास्तविक नाम के रूप में इतिहास में अमर हो गया। वे अपनी प्रजा के प्रति जितने दयालु और न्यायप्रिय थे, रणक्षेत्र में वे उतने ही आक्रामक और अजय योद्धा माने जाते थे।युद्ध के मैदान में कैकेयी ने कैसे बचाई थी जान?इस कथा का सबसे दिलचस्प और निर्णायक मोड़ वह युद्ध था जब राजा दशरथ देवताओं की ओर से असुरों के खिलाफ एक भयंकर संग्राम में हिस्सा ले रहे थे। युद्ध के दौरान एक भीषण हमले में उनके रथ का पहिया टूट गया और वे बुरी तरह जख्मी होकर मृत्यु के मुख में पहुंच गए थे। उस संकट की घड़ी में उनकी पत्नी कैकेयी, जो एक कुशल योद्धा और सारथि की भूमिका में वहां मौजूद थीं, ने बिना एक पल गंवाए अपनी तलवार और रथ की कमान संभाली। कैकेयी ने अपनी जान की परवाह किए बिना अत्यंत शौर्य का परिचय देते हुए राजा दशरथ को सुरक्षित रणभूमि से बाहर निकाला था। उनकी इस बहादुरी से प्रसन्न होकर राजा दशरथ ने उन्हें दो वरदान मांगने का वचन दिया था, जो आगे चलकर रामायण की पूरी कथा और अयोध्या के भाग्य का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।
अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पिछले दिनों तुर्की (Trkiye) में एक गंभीर और पुख्ता जानलेवा खतरे (Assassination Threat) का सामना करना पड़ा था। इस खतरनाक खतरे से बचाने के लिए अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने एक बेहद गोपनीय और फिल्मी प्लान तैयार किया, जिसके तहत ट्रंप को एयर फोर्स वन (Air Force One) से चुपचाप एक एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक (Food/Catering Truck) के जरिए निकालकर दूसरी सीक्रेट मिलिट्री फ्लाइट में शिफ्ट करना पड़ा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान दुनिया और यहां तक कि उनके साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों को भी यही लगता रहा कि राष्ट्रपति मुख्य विमान में ही मौजूद हैं।क्या था पूरा मामला और क्यों पड़ी फूड ट्रक में छुपने की जरूरत?यह पूरी घटना तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल नाटो (NATO) समिट के दौरान की है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को ईरान की तरफ से डोनाल्ड ट्रंप पर हमले का एक बेहद खतरनाक और गंभीर इनपुट मिला था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए व्हाइट हाउस और सुरक्षा अधिकारियों ने तुर्की से उनकी सुरक्षित वापसी के लिए एक चालाक कूटनीतिक चाल (Ruse) चली। योजना के अनुसार, मीडिया और आम लोगों की नजरों के सामने डोनाल्ड ट्रंप को आधिकारिक एयर फोर्स वन विमान में चढ़ते हुए दिखाया गया ताकि हमलावरों या किसी भी बाहरी शख्स को उनकी असली लोकेशन का पता न चल सके।कैसे दिया गया इस सीक्रेट ऑपरेशन को अंजाम?जैसे ही कैमरे के सामने ट्रंप मुख्य विमान के अंदर गए, उसके तुरंत बाद उन्हें विमान के दूसरे हिस्से से एक हाइड्रोलिक एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक (खाने-पीने का सामान लोड करने वाली गाड़ी) के जरिए चुपचाप नीचे उतारा गया। इस फूड ट्रक के भीतर ट्रंप और उनके चुनिंदा करीबी सहयोगी छिपे हुए थे। इसके बाद उस ट्रक ने मुख्य विमान से दूर खड़े एक छोटे और सुरक्षित मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (C-32A) तक का सफर तय किया। उधर, पुराना एयर फोर्स वन विमान एक 'डिकॉय' (Decoy/धोखा देने वाला विमान) की तरह इस्तेमाल किया गया, जिसमें सिर्फ पत्रकार और कुछ व्हाइट हाउस के कर्मचारी सवार थे। इस तरह ट्रंप ने सीक्रेट मिलिट्री फ्लाइट से ब्रिटेन का सफर तय किया और उनकी सुरक्षा में किसी प्रकार की चूक नहीं होने दी गई।
न्यूयॉर्क, 11 अगस्त . President डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की से ब्रिटेन की यात्रा गुपचुप ढंग से एक सैन्य विमान में सवार होकर की थी. अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा कारणों के चलते ऐसा किया गया था. दरअसल, सार्वजनिक रूप से डोनाल्ड ट्रंप एयर फोर्स वन में सवार हुए थे, लेकिन ब्रिटेन तक की यात्रा ... Read more
दिल्ली पुलिस की साइबर थाना साउथ-वेस्ट टीम ने 15.71 करोड़ रुपये की निवेश ठगी करने वाले एक बड़े साइबर रैकेट का पर्दाफाश किया है. जांच में दुबई और कतर से जुड़े कनेक्शन भी सामने आए हैं.
Road Accidents Claim More Lives Than War or Disease: Nitin Gadkari Urges Action on India’s Road Safety Crisisयुद्ध या बीमारी से भी अधिक जान ले रहे हैं सड़क हादसे: नितिन गडकरी ने भारत के सड़क सुरक्षा संकट पर दी बड़ी चेतावनी
Donald Trump की हो सकती थी हत्या? तुर्की से कैटरिंग कार्ट में छिपकर भागे थे, आखिर ऐसा क्या हुआ था
डोनाल्ड ट्रंप की अंकारा यात्रा को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने उनकी सुरक्षा पर सवाल खड़ा किया है। ट्रंप को ईरान की जान से मारने वाली धमकी की वजह से कैटरिंग ट्रक में बैठाकर मिलिट्री एयरपोर्ट पहुंचाया गया था। जानें पूरी खबर...
ईरान की धमकी से डर गए थे ट्रंप! तुर्की जानें के लिए बदला था प्लेन...सामने आई ये बड़ी जानकारी
ईरान से मिली धमकी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दौरे में गुपचुप तरीके से बदलाव किया गया था। ट्रंप तुर्की से एक छोटे अमेरिकी सैन्य विमान में सवार होकर ब्रिटेन के लिए रवाना हुए थे। ट्रंप नाटो शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए तुर्की की राजधानी अंकारा पहुंचे थे। तुर्की जाने के लिए उन्होंने कतर की ओर से उपहार में दिए गए और नए सिरे से तैयार किए गए बोइंग 747-8 विमान का इस्तेमाल किया था। इस विमान को संभावित रूप से भविष्य में ‘एयर फोर्स वन’ के तौर पर इस्तेमाल किया जाना है।बदला गया था ट्रंप का प्लेनहालांकि, रिपोर्ट के अनुसार तुर्की से लौटते समय ट्रंप को उसी विमान से रवाना नहीं किया गया। सार्वजनिक कार्यक्रम के मुताबिक उन्हें पुराने ‘एयर फोर्स वन’ विमान से भी नहीं जाना था। इसके बजाय सुरक्षा कारणों से उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायु सेना के सी-32ए विमान में बैठाया गया। यह विमान ट्रंप को तुर्की से ब्रिटेन लेकर गया। यह पूरा बदलाव 8 जुलाई को किया गया था। उस समय अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ था और ईरान की ओर से ट्रंप को धमकी मिलने की खबरें सामने आई थीं।ईरान की धमकी के बाद उठाया गया था कदमईरान की सीमा तुर्की से लगती है। ऐसे में ईरान से बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप की यात्रा में किए गए इस बदलाव को सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्ट में ऑपरेशन से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी और ट्रंप की यात्रा की जानकारी रखने वाले एक अन्य व्यक्ति के हवाले से बताया गया है कि ट्रंप ने सबसे पहले अंकारा एयरपोर्ट पर कैमरों के सामने पुराने ‘एयर फोर्स वन’ विमान में सवार होने की औपचारिकता पूरी की।इसके बाद उन्हें चुपचाप एक कैटरिंग ट्रक में बैठाकर दूसरे हिस्से में ले जाया गया। यह ट्रक उन्हें अमेरिकी वायु सेना के छोटे सी-32ए विमान तक लेकर गया। इसके बाद सी-32ए विमान ट्रंप को लेकर ब्रिटेन के लिए रवाना हो गया। ट्रंप रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन पहुंचे। वहीं, पत्रकारों और दूसरे कर्मचारियों को लेकर चल रहा पुराना ‘एयर फोर्स वन’ विमान कुछ मिनट बाद ब्रिटेन पहुंचा। इस तरह ट्रंप और उनके साथ यात्रा कर रहे मीडिया कर्मचारियों के विमान के पहुंचने के समय में कुछ मिनट का अंतर रहा।अमेरिकी मीडिया ने इससे पहले भी बताया था कि ईरान से मिली धमकी के कारण ट्रंप कतर की ओर से दिए गए नए विमान से तुर्की से रवाना नहीं हुए थे। कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि यह धमकी ईरान से जुड़े प्रॉक्सी समूहों की ओर से मिली थी। इसी खतरे को देखते हुए ट्रंप की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया और उन्हें चुपचाप दूसरे अमेरिकी सैन्य विमान से ब्रिटेन भेजा गया।
ईरान के नाकेबंदी के लिए तैनात कितने युद्धपोत? देखें US TOP-10
अमेरिका ने ईरान पर नाकाबंदी लागू कराने के लिए मिडिल-ईस्ट में 20 से ज्यादा युद्धपोत तैनात किए है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक अबतक 55 वाणिज्यिक जहाजों का रास्ता बदला गया जिसमें दो को निष्क्रिय किया गया और दो अन्य जहाजों पर चढ़कर जांच की गई. सेंट्रल कमांड ने ये भी साफ किया कि ये कार्रवाई के सख्त प्रवर्तन का हिस्सा है.
ट्रंप ने ईरान से मांगा मुआवजा - मिडिल ईस्ट की तबाही के लिए ठहराया जिम्मेदार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से मुआवजे की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में हुए नुकसान और मौत के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए
बड़ा खुलासा! ईरान हमले का डर, तुर्की से सीक्रेट ऑपरेशन में निकाले गए थे ट्रंप
रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीक्रेट ऑपरेशन से पत्रकार, कुछ व्हाइट हाउस कर्मचारी, अमेरिकी जनता और कई वरिष्ठ अधिकारी घंटों तक ट्रंप की असली लोकेशन से अनजान रहे, जबकि व्हाइट हाउस सार्वजनिक तौर पर यही कहता रहा कि राष्ट्रपति पुराने बोइंग 747 यानी एयर फोर्स वन से ही रवाना हुए.
केंद्र का यह बयान सटीक है कि कोई बड़ा देश अपने यहां अनियंत्रित एवं अनियमित विदेशी अनुदान की इजाजत नहीं देता।
'होर्मुज पर अब सिर्फ US नेवी का कंट्रोल', ट्रंप बोले-ईरान से लेंगे युद्ध का मुआवजा
डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कंट्रोल को लेकर एक बड़ा ऐलान करने के साथ ही ईरान की ओर युद्ध के मुआवजे की मांग को ठुकराते हुए कहा कि ईरान युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा अमेरिका को दे।
Russia: क्या विरोधियों से डरने लगे पुतिन, यूक्रेन युद्ध का विरोध करने वाली पार्टी क्यों नहीं लड़ पाएगी चुनाव?
Unnao News: सऊदी अरब में मौत के 11 दिन बाद घर लाया जाएगा युवक का शव
सऊदी अरब में मौत के 11 दिन बाद घर लाया जाएगा युवक का शव
हर दिन 'हाइब्रिड' युद्ध के डर का सामना कर रहा जर्मनी: गृह मंत्री
जर्मन अखबार बिल्ड को दिए गए एक इंटरव्यू में गृह मंत्री आलेक्जांडर डोब्रिंट का कहना है कि विदेशी ताकतों द्वारा किए जाने वाले हमले जर्मनी के लिए एक निरंतर खतरा बन गए हैं
कतरास के छाताबाद भू-धंसान मामले में एक्शन, BCCL सीएमडी मनोज अग्रवाल समेत अधिकारियों पर केस दर्ज
छाताबाद भू-धंसान मामले में मो. अनवर अली ने बीसीसीएल के सीएमडी, जीएम व अन्य अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है।
ग़ाज़ा: ‘युद्धविराम’ के बावजूद 300 दिनों में 300 बच्चों की मौत
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF)ने कहा है कि ग़ाज़ा में युद्धविराम लागू होने के बावजूद बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है.पिछले अक्टूबर में युद्धविराम लागू होने के बाद से300दिनों के दौरान कम से कम300बच्चे मारे गए हैं.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से मांगा मुआवजा, बोले- मिडिल ईस्ट में तबाही और मौतों के लिए तेहरान जिम्मेदार
Yemen War Alert: UN Envoy Hans Grundberg ने दी चेतावनी, Houthi हमलों से बढ़ सकता है भीषण संघर्ष
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना ने कहा कि मोखा पर हुए हमले में सात लोग मारे गए, जिनमें चार सैनिक और तीन आम नागरिक शामिल थे, और कम से कम 30 अन्य घायल हो गए। अल जज़ीरा के अनुसार, रविवार को मोखा पर हुए हमलों के एक पिछले दौर में कम से कम 11 लोग मारे गए थे। ग्रंडबर्ग ने कहा कि ये ताज़ा हमले 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद से सैन्य गतिविधियों में सबसे बड़ी तेज़ी के बीच हुए हैं, जिससे यमन में पूर्ण पैमाने पर संघर्ष के फिर से शुरू होने का ख़तरा काफ़ी बढ़ गया है। इसे भी पढ़ें: Yemen Conflict Alert: हूती ठिकानों पर सेना के भीषण प्रहार, UN ने दी बड़े युद्ध की चेतावनी उन्होंने कहा कि अंसार अल्लाह के हालिया हमलों ने मोखा, मारिब और उसके बाहर भी आम नागरिकों को गंभीर ख़तरे में डाल दिया है। इस तनाव को रोकना होगा, और आम नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करनी होगी। उन्होंने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और तनाव कम करने तथा युद्धविराम के तहत हासिल की गई उपलब्धियों को और कम होने से रोकने के लिए ठोस उपायों पर उनके कार्यालय के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया। ग्रंडबर्ग ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि संघर्ष को केवल एक समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से ही स्थायी रूप से समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल एक समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से ही स्थायी रूप से समाप्त हो सकता है, और तनाव का बढ़ना यमन को विपरीत दिशा में ले जा रहा है। इसे भी पढ़ें: Houthi rebels ने यमन के मोखा बंदरगाह पर किया हमला, 7 की मौत; Aramco संयंत्र में आग सोमवार को जारी एक बयान में, यमनी सरकार की सेना के आधिकारिक प्रवक्ता कर्नल माजिद अब्दुल्ला अल-नुज़ैली ने कहा कि हमले में अल-मोखा और उसके आसपास कई जगहों को निशाना बनाया गया, जिनमें नागरिक बुनियादी ढांचा, कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाएं, कार्यालय, बिजली उत्पादन केंद्र और सैन्य ठिकाने शामिल थे। उन्होंने बताया कि हमले में सशस्त्र बलों के चार सदस्य और तीन आम नागरिक मारे गए, जबकि 30 लोग घायल हुए, जिनमें से ज़्यादातर आम नागरिक थे।
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के रक्षा समझौते को ईरान ने माना अमेरिका विरोधी
ईरान के मुताबिक हाल ही में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुआ रक्षा समझौता 'अमेरिका विरोधी' है। सोमवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा ये 'सोच में बदलाव का संकेत' है।
शिमला जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव में देरी का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है, जहां सदस्यों ने चुनाव कराने की मांग की है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि सऊदी अरब के रियाद में मूसा सनाइया इलाके की एक सोफा फैक्ट्री में लगी आग में कम से कम 16 बांग्लादेशी नागरिकों की मौत हो गई। मंत्रालय ने इन मौतों पर गहरा दुख जताया और पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। एक बयान में मंत्रालय ने रविवार को हुई इस घटना पर दिल से संवेदना व्यक्त की और मृतकों के परिवारों को इस मुश्किल और दुखद समय में पूरा समर्थन और साथ देने का भरोसा दिलाया। बयान में कहा गया माननीय विदेश मंत्री और माननीय विदेश राज्य मंत्री ने कल सऊदी अरब के रियाद में एक सोफा फैक्ट्री में लगी भीषण आग में 16 बांग्लादेशी नागरिकों की दुखद मौत पर गहरा दुख और दिल से संवेदना व्यक्त की है। इसे भी पढ़ें: ढाका की राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों की नई परीक्षा इसमें आगे कहा गया उन्होंने मृतकों के शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी सहानुभूति व्यक्त की और उन्हें भरोसा दिलाया कि वे इस अपूरणीय क्षति और दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े रहेंगे। मंत्रालय ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के तुरंत बाद रियाद में बांग्लादेश दूतावास के अधिकारी घटनास्थल पर पहुँचे और पीड़ितों की पहचान करने तथा शवों से जुड़ी ज़रूरी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए सऊदी अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Diplomatic Tension के बीच ढाका में सक्रिय भारत, Dinesh Trivedi ने PM Tarique Rahman से की अहम मुलाकात रियाद में बांग्लादेश दूतावास ने यह भी कहा कि वह घटना के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाने और प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करने के लिए काम कर रहा है। रियाद में बांग्लादेश दूतावास ने फेसबुक पर एक बयान में कहा हमें बहुत दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि रियाद के मूसा सनाइया इलाके में लगी भीषण आग में प्रवासी बांग्लादेशियों की जान चली गई है। घटना की खबर मिलते ही रियाद में बांग्लादेश दूतावास का एक प्रतिनिधिमंडल तुरंत घटनास्थल पर पहुँचा और विस्तृत जानकारी जुटाना शुरू कर दिया। दूतावास सरकार के उच्च स्तर के निर्देशों के अनुसार सभी ज़रूरी कदम उठा रहा है - जिसमें मृतकों की पहचान की पुष्टि करना, कानूनी औपचारिकताएं पूरी करना और प्रभावित लोगों को व्यापक सहायता प्रदान करना शामिल है।
भारत वर्ष 1947 में सदियों की गुलामी के बाद 15 अगस्त को आजाद हुआ। भारत की स्वतंत्रता की यह तारीख न केवल भारतीय इतिहास बल्कि विश्व राजनीति के पन्नों में भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ब्रिटिश संसद ने शुरुआत में भारत की आजादी के लिए जून 1948 की समयसीमा तय की थी? फिर ऐसा क्या हुआ कि अंग्रेजों को निर्धारित समय से लगभग 10 महीने पहले ही भारत छोड़ना पड़ा? 15 अगस्त की तारीख चुनने के पीछे अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन का एक व्यक्तिगत फैसला और द्वितीय विश्व युद्ध में जापान का आत्मसमर्पण मुख्य कारण बना। आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक घटनाक्रम की पूरी कहानी।जून 1948 से 15 अगस्त 1947: क्यों जल्दबाजी में चुनी गई यह तारीख?ब्रिटिश संसद द्वारा फरवरी 1947 में पारित किए गए निर्णय के अनुसार, ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने घोषणा की थी कि भारत को 30 जून 1948 तक पूर्ण सत्ता हस्तांतरित कर दी जाएगी। इस ऐतिहासिक कार्य को पूरा करने के लिए लॉर्ड लुई माउंटबेटन को भारत का अंतिम वायसराय बनाकर भेजा गया था।जब माउंटबेटन भारत आए, तो देश में सांप्रदायिक तनाव और दंगे चरम पर थे। विभाजन और आजादी की मांग को लेकर राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ती जा रही थी। माउंटबेटन को अहसास हो गया था कि यदि जून 1948 तक का इंतजार किया गया, तो देश में गृहयुद्ध जैसे हालात बन सकते हैं और सत्ता हस्तांतरण का नियंत्रण अंग्रेजों के हाथ से निकल जाएगा। इसलिए उन्होंने भारतीय नेताओं से चर्चा कर आजादी की तारीख को प्रीपोन (आगे खिसका) कर अगस्त 1947 में करने का फैसला लिया।जापान का आत्मसमर्पण और लॉर्ड माउंटबेटन की 'लकी डेट'जब माउंटबेटन ने 1947 में ही सत्ता हस्तांतरित करने का मन बनाया, तो उनके सामने यह सवाल था कि आखिर अगस्त महीने की किस तारीख को आजादी दी जाए। यहीं से इस कहानी में जापान का ऐतिहासिक कनेक्शन जुड़ता है।द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लॉर्ड माउंटबेटन दक्षिण-पूर्व एशिया में मित्र राष्ट्रों (Allied Forces) के सुप्रीम एलीड कमांडर थे। 15 अगस्त 1945 को ही जापानी सेना ने मित्र राष्ट्रों के सामने बिना शर्त आत्मसमर्पण किया था। इस जीत ने द्वितीय विश्व युद्ध का अंत किया था और इसे माउंटबेटन के सैन्य करियर की सबसे बड़ी और गौरवशाली उपलब्धि माना जाता था। इसलिए माउंटबेटन 15 अगस्त की तारीख को अपने लिए बेहद शुभ (लकी) मानते थे। जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनसे आजादी की तारीख को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने अपने करियर के इसी खास दिन यानी '15 अगस्त' को भारत की आजादी के रूप में चुना।ज्योतिषीय अड़चन और 14-15 अगस्त की मध्यरात्रि का हलजब लॉर्ड माउंटबेटन ने 15 अगस्त की तारीख की घोषणा की, तो देश के विद्वानों और ज्योतिषियों में खलबली मच गई। पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 15 अगस्त 1947 का दिन स्वतंत्रता के शुभ मुहूर्त के लिए अनुकूल नहीं माना जा रहा था। ज्योतिषियों ने माउंटबेटन से तारीख बदलने का आग्रह किया, लेकिन माउंटबेटन 15 अगस्त के दिन पर अड़े रहे।इस समस्या का एक ऐतिहासिक समाधान निकाला गया। हिंदू पंचांग के अनुसार नया दिन सूर्योदय से शुरू होता है, जबकि अंग्रेजी (ग्रोगोरियन) कैलेंडर के अनुसार नया दिन रात 12 बजे (मध्यरात्रि) से बदलता है। इसलिए तय किया गया कि संविधान सभा का सत्र 14 अगस्त की रात को बुलाया जाएगा। रात 12 बजे जैसे ही अंग्रेजी कैलेंडर में 15 अगस्त की शुरुआत हुई, जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध भाषण 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' (Tryst with Destiny) दिया और भारत आधिकारिक रूप से एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित हो गया।
7 अगस्त 2026 को मक्का में हस्ताक्षरित त्रिस्तरीय रक्षा समझौते का वैश्विक विश्लेषण। जानिए यदि भारत-पाक युद्ध होता है तो सऊदी अरब और तुर्की की क्या भूमिका होगी और भारत के पास क्या विकल्प हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि अमेरिका ने मध्य पूर्व में 20 से अधिक युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि यह कदम वाशिंगटन द्वारा ईरान के खिलाफ अपनी नाकेबंदी को और सख्त बनाने के बीच उठाया गया है
युद्ध जितना लंबा चलेगा उतना ही अमेरिका को होगा नुकसान, हार चुके हैं राष्ट्रपति: डेमोक्रेटिक सीनेटर
युद्ध जितना लंबा चलेगा उतना ही अमेरिका को होगा नुकसान, हार चुके हैं राष्ट्रपति: डेमोक्रेटिक सीनेटर
Gold का भाव अब युद्ध से नहीं बल्कि अमेरिकी Fed के फैसलों और ब्याज दरों से होगा तय
सोने की कीमतों और भू-राजनीतिक संघर्षों के बीच पारंपरिक संबंध बदल रहा है तथा मुद्रास्फीति, ब्याज दरें और मौद्रिक नीति सर्राफा कीमतों को प्रभावित करने वाले अधिक महत्वपूर्ण कारक बनकर उभरे हैं। एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (एमओएफएसएल)) की एच1 2026 प्रेशियस मेटल्स रिपोर्ट के अनुसार, चालू वर्ष की पहली छमाही में यह स्पष्ट हुआ कि केवल भू-राजनीतिक जोखिम सोने में तेजी बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। निवेशक अब संघर्षों का आकलन इस आधार पर अधिक कर रहे हैं कि उनका मुद्रास्फीति और ब्याज दरों पर क्या असर पड़ता है। एमओएफएसएल में जिंस शोध प्रमुख नवनीत दमानी ने कहा, 2026 की पहली छमाही ने दिखाया कि युद्ध और सोने के बीच संबंध अब पहले की तुलना में अधिक परिस्थितियों पर निर्भर हो गया है। उन्होंने कहा कि बाजार अब केवल भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर ध्यान नहीं दे रहा, बल्कि यह देख रहा है कि उनका मुद्रास्फीति, वास्तविक ब्याज दरों और मौद्रिक नीति की अपेक्षाओं पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसे भी पढ़ें: Jaipur Police ने पुरानी इमारत का सोना चांदी हड़पने के आरोप में 5 लोगों को किया गिरफ्तार दमानी ने कहा कि ऊंचे बॉन्ड प्रतिफल (यील्ड) सोने के लिए सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरी। इससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की पारंपरिक मांग पर भी असर पड़ा, जबकि भू-राजनीतिक तनाव ऊंचे स्तर पर बने रहे। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष की शुरुआत में नीतिगत अनिश्चितता, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में निवेश, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों से सोने की कीमतों को मजबूती मिली। इसे भी पढ़ें: IGI Airport पर जब्त हुआ 869 ग्राम सोना, खिलौने वाले स्कूटर के टायरों में छिपाकर लाया था यात्री रिपोर्ट में कहा गया कि बाद में शुल्क बढ़ने से उत्पादन लागत और मुद्रास्फीति की अपेक्षाएं बढ़ीं। इससे लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की आशंका मजबूत हुई और अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिभूतियों की वास्तविक प्रतिफल तथा डॉलर में तेजी आई। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष भी इस बदलते रुख का उदाहरण है। संघर्ष बढ़ने पर शुरुआती दौर में सोने की मांग बढ़ी, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से मुद्रास्फीति की चिंता बढ़ी और मौद्रिक नीति में ढील की उम्मीद कमजोर हुई। इससे सोने की तेजी सीमित रही और बाद में कीमतों में सुधार आया। रिपोर्ट में कहा गया, शुल्क अब केवल आर्थिक वृद्धि के लिए जोखिम नहीं रह गए हैं, बल्कि वे मुद्रास्फीति बढ़ाने वाली ताकत बन गए हैं। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Budget पेश, TVK सरकार महिलाओं को देगी सोना, नवजात को अंगूठी और पशु रिपोर्ट के अनुसार, आगे भी मुद्रास्फीति का रुख, फेडरल रिजर्व के संकेत, वैश्विक नकदी की उपलब्धता, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, ईटीएफ में निवेश और सट्टा निवेश सोने और चांदी की कीमतों के प्रमुख चालक बने रहेंगे।
Houthi Attck On Saudi Arabia: पहले सऊदी फिर America का MQ-9 हुआ क्रैश, हूती बेकाबू | Bab Al Mandeb
हूती-सऊदी तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। हूतियों ने सऊदी अरब के सैन्य और तेल ठिकानों पर हमलों का दावा किया है।
बालाघाट के एक परिवार का दावा है कि 1962 युद्ध में बंदी बने चीनी सैनिक ने भारत में बसकर भारतीय महिला से शादी की थी। अब उनकी तीसरी पीढ़ी को पिता की नागरिकता और जाति संबंधी नियमों के कारण जाति प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा।
न्यूक्लियर डील के बिना युद्ध खत्म करने की तैयारी में ट्रंप? होर्मुज खोलनेकी रखी शर्त, जानें अमेरिका का नया प्लान
ट्रंप युद्ध खत्म करना चाहते हैं, ईरान ने रखी शर्त, नेतान्याहू भी नहीं माने!
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Iran-US War News Update: ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब जंग से बाहर निकलने का रास्ता तलाशते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी अखबार 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ईरान के साथ परमाणु समझौते की मांग पर पीछे हटने के लिए तैयार हो सकते हैं, अगर तेहरान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोल देता है। साथ ही यहां से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही सामान्य हो जाती है।अखबार ने बताया कि अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव में तीन महीने से भी कम समय बचा है। ऐसे में ट्रंप अमेरिकी जनता को यह बताने का तरीका ढूंढ रहे हैं कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध जीत लिया है। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप ने बिना किसी परमाणु समझौते के बातचीत से पीछे हटने का विचार रखा है। ट्रंप प्रशासन संघर्ष को खत्म करने और उसे राजनीतिक रूप से एक उपलब्धि के रूप में पेश करने का रास्ता तलाश रहा है।ईरान ने रखीं कई बड़ी शर्तेंईरान ने शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका के सामने कई बड़ी मांगें रख दीं। इनमें अरबों डॉलर का अमेरिकी भुगतान, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना शामिल है। ईरान की इन शर्तों ने ट्रंप के लिए स्थिति को और मुश्किल बना दिया है। अमेरिका चाहता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री ट्रैफिक जल्द से जल्द सामान्य हो, क्योंकि यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी रूट्स में से एक है।मिसाइल और ड्रोन हमलों से बाधित हुआ समुद्री ट्रैफिकरिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ओर से समय-समय पर किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों पर भी पड़ा है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रूट है। यहां किसी भी लंबे समय तक चलने वाली बाधा से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई और तेल की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।ट्रंप के लिए घरेलू मोर्चे पर बढ़ी चुनौतीअमेरिका में मध्यावधि चुनाव करीब आने के साथ ट्रंप प्रशासन के सामने राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है। ईरान के साथ युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें अभी भी काफी अधिक हैं। ऐसे में ट्रंप के लिए युद्ध को अमेरिकी जनता के सामने सफल सैन्य अभियान के रूप में पेश करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सबसे बड़े सैन्य हमले की चेतावनी तक दी थी।लेकिन अमेरिका के सहयोगी देशों ने उन्हें ऐसा कदम उठाने से रोकने की कोशिश की। शुक्रवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा आर्टिकल भी शेयर किया, जिसका शीर्षक था- Donald Trump Won the Iran War यानी डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध जीता।...। इससे संकेत मिला कि ट्रंप परमाणु समझौता हुए बिना भी संघर्ष को अमेरिकी जीत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।जेडी वेंस बोले- अभी खेल खत्म नहीं हुआइस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 'फॉक्स न्यूज' को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका अभी ईरान के साथ संघर्ष के बीच में है। यानी वाशिंगटन फिलहाल यह मानकर नहीं चल रहा कि संघर्ष पूरी तरह समाप्त हो चुका है। वेंस ने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि तेहरान वॉशिंगटन के साथ अपने संबंधों में लंबे समय के लिए बदलाव करे।ईरान लंबे संघर्ष के लिए तैयार?अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हाल के दिनों में बातचीत के दौरान लगातार बदलते रुख और कई बार लिए गए यू-टर्न से यह संकेत मिला है कि ईरान खुद को लंबे और कठिन संघर्ष के लिए तैयार कर रहा है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ ईरान युद्ध को खत्म करने का रास्ता निकालना और दूसरी तरफ अमेरिकी जनता के सामने इसे अपनी जीत के रूप में पेश करना। होर्मुज को फिर से खोलने और ईरान की मांगों पर सहमति बनाने में क्या समझौता होता है, इस पर अब भारत समेत पूरी दुनिया की नजर है।ये भी पढ़ें- ट्रेन टिकट बुकिंग में होने वाला है ऐतिहासिक बदलाव! अब चंद सेकंड में यात्रियों को मिलेगा टिकट, रेलवे का नया PRS सिस्टम मचाएगा तहलका
ईरान की सत्ता में बड़ा फेरबदल: पूर्व IRGC प्रमुख को मिली अहम जिम्मेदारी; युद्ध के बीच क्यों बदली रणनीति?
त्रिकोणीय मुकाबले में एकतरफा रहा फैसला
शक्ति नगर स्थित भगवान वाल्मीकि आश्रम में ट्रस्ट के चेयरमैन पद के लिए बहुप्रतीक्षित चुनाव रविवार को पूरी पारदर्शिता और उत्साहजनक माहौल में संपन्न हुए। पांच वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हुए इस चुनाव में विपन सभ्रवाल ने प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए लगातार दूसरी बार चेयरमैन पद की कमान संभाली। त्रिकोणीय मुकाबले में विपन सभ्रवाल ने अपने विरोधियों को पछाड़ते हुए एकतरफा जीत दर्ज की, जिसके बाद आश्रम परिसर के बाहर समर्थकों ने भांगड़ा डालकर और आतिशबाजी कर खुशी का इजहार किया। चेयरमैन पद के लिए इस बार कुल तीन प्रत्याशी मैदान में किस्मत आजमा रहे थे, जिनमें विपन सभ्रवाल, विक्की गिल और राज कुमार शामिल थे। चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत से ही वोटरों में भारी उत्साह देखा गया। शक्ति नगर, इस्लाम गंज, अली मोहल्ला, ब्रैंडरथ रोड, राईया वाली गली, गिल स्ट्रीट सहित शहर के विभिन्न इलाकों से वाल्मीकि समुदाय और आश्रम से जुड़े श्रद्धालुओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इलेक्शन इंचार्ज डॉ. सुरिंदर कल्याण ने चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने के बाद मतों के आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि इस चुनाव में कुल 955 पात्र मतदाताओं ने अपने वोट डाले। मतगणना के दौरान 9 वोट अमान्य (कैंसिल) पाए गए, जिसके बाद कुल वैध मतों की संख्या 946 रही। वोटों की गिनती शुरू होते ही विपन सभ्रवाल ने अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त बनानी शुरू कर दी, जो अंत तक बरकरार रही। वोटों का ब्यौरा इस प्रकार रहा विपन सभ्रवाल 746 वोट (विजयी), राज कुमार 193 वोट और विक्की गिल 7 वोट प्राप्त किए। चुनाव को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए इलेक्शन इंचार्ज डॉ. सुरिंदर कल्याण की देखरेख में पुख्ता इंतजाम किए गए थे। अलग-अलग बूथों पर अधिकारियों और वालंटियर्स की ड्यूटी लगाई गई थी। मतदान प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने में वाइस चेयरमैन विजय सभ्रवाल, एडवोकेट करन खुल्लर, मोहन लाल लाहौरा, चरणजीत सिंह मट्टू, सुरिंदर, अर्जन गिल, राजेश नाहर, तमन्ना, कंचन थापर और निशा सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने अहम भूमिका निभाई। सभी बूथों पर शांतिपूर्वक मतदान संपन्न हुआ।
भारत और अमेरिका की नौसेनाएं आज से कोच्चि में आतंकवाद और बारूदी सुरंगों से निपटने के लिए एक विशेष संयुक्त अभ्यास शुरू कर रही हैं।
‘खेल का मैदान हो, समुद्र तट या घर’: रूस-यूक्रेन युद्ध में बच्चों की मौतें रोकने की पुकार
यूक्रेन पर रूस का आक्रमण जारी है और हाल के सप्ताहों में दोनों देशों ने हवाई व ड्रोन हमले तेज़ किए हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने इन हमलों में बच्चों के मारे जाने और घायल होने पर चिन्ता जताते हुए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है.
ईरान-इराक युद्ध के कमांडर मोहसिन रेजाई को नई जिम्मेदारी, सुप्रीम लीडर ने एसएनएससी में अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया
Strait of Hormuz पर झुका अमेरिका! युद्ध से हटेंगे Trump!
ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब युद्ध खत्म करने का रास्ता तलाशते नजर आ रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने को बड़ी सफलता के तौर पर पेश कर सकते हैं. हालांकि, तेहरान ने इसके बदले अमेरिकी नाकाबंदी हटाने, सैनिकों की वापसी, प्रतिबंध खत्म करने, जब्त संपत्ति लौटाने और युद्ध का मुआवजा देने जैसी बड़ी मांगें रखी हैं, जिससे समझौते की राह मुश्किल बनी हुई है.
बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप के गाजा संघर्ष को समाप्त करने वाले 15-सूत्रीय योजना को खारिज किया
यरूशलम। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाज़ा संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमरीका समर्थित 15-सूत्रीय योजना को खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक हमास पूरी तरह से हथियार डालना स्वीकार नहीं कर लेता, तब तक इज़राइली सेना पीछे नहीं हटेगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की […] The post बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप के गाजा संघर्ष को समाप्त करने वाले 15-सूत्रीय योजना को खारिज किया appeared first on Sabguru News .
ट्रंप को चाहिए ईरान युद्ध से एग्जिट, अब न्यूक्लियर डील भी लगाया दांव पर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता तलाशते दिख रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोल देता है तो ट्रंप परमाणु समझौते के बिना भी इसे जीत के तौर पर पेश कर सकते हैं.
सऊदी अरब में फंसे इंद्रमणि की घर वापसी को लेकर सीएम पुष्कर सिंह धामी से मिले विधायक सुरेश चौहान
उत्तरकाशी, 9 अगस्त . सऊदी अरब में आठ वर्षों से फंसे इंद्रमणि की घर वापसी का मामला अब शासन स्तर पर पहुंच गया है. इस मुद्दे को लेकर गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान ने Chief Minister पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर इंद्रमणि नौटियाल की वापसी के लिए प्रभावी पहल करने का आग्रह किया. इस दौरान ... Read more
द वॉशिंगटन पोस्ट को मिले एक मेमो के अनुसार, अमेरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने देश की डिफेंस कंपनियों को हथियारों के प्रोडक्शन और डिलीवरी में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण अमेरिका के पास जरूरी गोला-बारूद और मिसाइलों का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है, जिसे फिर से भरने का दबाव बढ़ रहा है। डिप्टी डिफेंस सेक्रेटरी स्टीव फीनबर्ग ने डिफेंस कंपनियों को पत्र लिखकर 21 दिनों के भीतर प्रोडक्शन बढ़ाने और तेजी से डिलीवरी का प्लान जमा करने को कहा है। सालों लंबे डेवलपमेंट शेड्यूल अब मंजूर नहीं फीनबर्ग ने अपने पत्र में साफ लिखा कि सालों तक चलने वाले डेवलपमेंट टाइमलाइन अब स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपनी प्रोडक्शन क्षमता तुरंत बढ़ानी होगी। हालांकि, पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने इस मेमो की पुष्टि की, लेकिन अधिकारियों ने इन खबरों का खंडन किया कि सेना के पास हथियार पूरी तरह खत्म हो गए हैं। डिफेंस इनोवेशन यूनिट के प्रिंसिपल डिप्टी डायरेक्टर जैरेड कॉनली ने कहा कि अमेरिका के पास मौजूदा युद्ध लड़ने के लिए पर्याप्त गोला-बारूद मौजूद है। इसे भी पढ़ें: इजरायली मीडिया के दावों के बाद Mojtaba Khamenei का वीडियो आया सामने मिसाइल इंटरसेप्टर और गोला-बारूद पर बढ़ा दबाव अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचने के लिए पैट्रियट और थाड जैसे महंगे और एडवांस एयर-डिफेंस सिस्टम का बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया है। महीनों से चल रहे इस मिलिट्री ऑपरेशन की वजह से अमरीकी सेना के पास एडवांस्ड मिसाइलों का स्टॉक युद्ध से पहले के स्तर से काफी कम हो गया है। जानकारों का मानना है कि अमेरिका के पास अभी के लिए भले ही हथियार हों, लेकिन इस्तेमाल हो चुकी मिसाइलों की जगह नई मिसाइलें बनाने में कई साल लग सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Iran ने US के सामने रखीं सख्त शर्तें, बर्ताव बदलने तक बंद रहेगा Hormuz Strait अमेरिका की चिंता थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज ने चेतावनी दी है कि मिसाइल स्टॉक कम होने से अमेरिका और उसके मध्य-पूर्वी सहयोगियों के लिए आने वाले ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकना मुश्किल हो सकता है। स्टॉक बचाने के लिए सेना को कम इंटरसेप्टर मिसाइलें दागनी पड़ सकती हैं, जिससे दुश्मनों के हमले सफल होने का रिस्क बढ़ जाएगा। इसके अलावा, अमरीकी रक्षा योजनाकार इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि अगर ईरान युद्ध के बाद कोई दूसरा बड़ा वैश्विक संकट खड़ा होता है, तो अमेरिका के पास उससे निपटने के लिए पर्याप्त बैकअप स्टॉक रहेगा या नहीं।
Mecca Joint Defense Agreement से पलटा Turkiye, Saudi Arabia के साथ रक्षा समझौता Iran के खिलाफ नहीं
Mecca Joint Defense Agreement से पलटा Turkiye, Saudi Arabia के साथ रक्षा समझौता Iran के खिलाफ नहीं सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए Defense Agreement को लेकर अब नया ट्विस्ट सामने आया है।
तेल अवीव, 9 अगस्त . ग्रीस में Sunday को गाजा संघर्ष के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन का ऐलान किया गया है. प्रस्तावित फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों के बीच इजरायल के विदेश मंत्रालय ने देश में मौजूद अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है. मंत्रालय ने विशेष यात्रा चेतावनी जारी करते हुए इजरायली ... Read more
भारतीय वायु सेना का बैंड स्वतंत्रता दिवस और 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर विशेष प्रस्तुति देगा।
जापान: नागासाकी ने परमाणु युद्ध के बढ़ते खतरे को लेकर चेताया
हिरोशिमा के बाद जापानी शहर नागासाकी ने रविवार को परमाणु बम हमले की 81वीं बरसी पर दुनिया को परमाणु युद्ध के बढ़ते खतरे से आगाह किया। शहर ने परमाणु हथियार रखने वाले देशों और परमाणु प्रतिरोध पर अपनी सुरक्षा निर्भर रखने वाले देशों से मौजूदा सुरक्षा माहौल पर गंभीरता से विचार करने तथा परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को रोकने के प्रयास तेज करने का आह्वान किया।
भविष्य के युद्ध के लिए सेना की तैयारी, आत्मनिर्भरता व नवाचार पर फोकस
New Delhi, 9 अगस्त . भारतीय सेना की परिचालन और सैन्य तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने आयुध उत्पादन, रसद व्यवस्था, प्रशिक्षण, तकनीकी नवाचार और आपदा राहत तैयारियों की समीक्षा की. उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने खमरिया और जबलपुर में सेना की तैयारियों का जायजा लिया, ... Read more
एक सदी बाद मिटा गुमनामी का दाग: प्रथम विश्वयुद्ध में शहीद हुए थे 9,909 पंजाबी सैनिक; इतिहास में दर्ज हुआ नाम- Stigma of obscurity erased after century 9909 Punjabi soldiers martyred in World War one
युद्ध के बीच मोजतबा खामेनेई का पहला वीडियो, ट्रंप-नेतन्याहू के उड़ा देगा होश?
ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने मोजतबा खामेनेई का एक वीडियो जारी किया है, जिसमें वह स्वस्थ नजर आ रहे हैं।
ईरान युद्ध और अमेरिका की लाचारियां
आज सूरत यह है कि ट्रंप ने अमेरिका को ऐसे युद्ध में उलझा रखा है, जिससे अमेरिका की कमजोरियां रोज-ब-रोज दुनिया के सामने उजागर हो रही हैं।
Turkey ने स्पष्ट किया: Saudi Arabia और Pakistan के साथ रक्षा समझौता किसी देश के खिलाफ नहीं
अंकारा, नौ अगस्त (एपी) तुर्किये के विदेश मंत्री ने सऊदी अरब, पाकिस्तान एवं तुर्किये के बीच हुए रक्षा समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि यह समझौता ईरान या किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं है। सऊदी अरब के युवराज (क्राउन प्रिंस) मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को मक्का के अल-सफा पैलेस में हुई एक बैठक के दौरान मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते में कहा गया है कि इनमें से किसी एक देश पर हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ के तहत तेल संपदा से समृद्ध सऊदी अरब, परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान और तुर्किये एक साथ आए हैं। तुर्किये के पास उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की दूसरी सबसे बड़ी सेना है और उसका रक्षा उद्योग भी तेजी से बढ़ रहा है। ईरान में युद्ध के कारण क्षेत्र में बढ़ी अनिश्चितता और खतरों के बीच यह समझौता तीनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने और संभावित हमलों को रोकने की उनकी क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक कदम है। विदेश मंत्री हाकान फिदान ने तुर्किये की सरकारी समाचार एजेंसी ‘अनादोलू’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि तीनों देश किसी भी अन्य देश को तब तक अपना विरोधी नहीं मानते, जब तक वह उनके खिलाफ कोई शत्रुतापूर्ण कार्रवाई नहीं करता। फिदान ने कहा, ‘‘हमारे पास ऐसा कुछ भी लिखित नहीं है और न ही हमने किसी ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें किसी साझा खतरे को परिभाषित किया गया हो। जो देश हम पर हमला नहीं करता, वह हमारा निशाना नहीं है।’’तुर्किये के विदेश मंत्री ने कहा कि समझौते में आपसी रक्षा से संबंधित प्रावधान ‘‘तकनीकी रूप से’’ नाटो की संधि के अनुच्छेद पांच के समान है। इस अनुच्छेद के तहत नाटो के 32 सदस्य देशों में से किसी एक पर हमले को सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाता है। यह पूछे जाने पर कि यह व्यवस्था कैसे काम करेगी, फिदान ने कहा कि किसी सदस्य देश को मदद के लिए औपचारिक रूप से अनुरोध करना होगा तथा इसके बाद अन्य दो देश खतरे की प्रकृति के आधार पर खुफिया जानकारी साझा करने एवं रसद सहायता देने से लेकर सैन्य इकाइयों की तैनाती तक कर सकते हैं। फिदान ने कहा, ‘‘ये बहु स्तरीय मामले हैं और इनका स्वरूप खतरे की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग होगा। हमने अब तक अपने काम में इसी दृष्टिकोण को अपनाया है।’’तुर्किये के विदेश मंत्री ने कहा कि कुछ अन्य देशों ने भी इस समझौते में शामिल होने में रुचि दिखाई है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मिस्र ‘‘अगले चरण’’ में इसमें शामिल होगा। उन्होंने मिस्र को एक ‘‘स्वाभाविक साझेदार’’ बताया। फिदान ने कहा कि समझौते के तहत तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री तथा सेना प्रमुख समिति की बैठकों में नियमित रूप से हिस्सा लेंगे। तीनों देश एक सचिवालय भी स्थापित करेंगे, जिसका मुख्यालय सऊदी अरब में होगा।
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सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच बन रहे 'इस्लामिक नाटो' शैली के रक्षा समझौते पर ईरान ने सख्त रुख अपनाया है। तेहरान ने रियाद को चेतावनी देते हुए कहा है कि कागजी समझौते और बाहरी ताकतों पर निर्भरता सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती।
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नाटो के भीतर जब अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच भरोसे की दरारें गहरी हो रही हैं, ठीक उसी समय पश्चिम एशिया में एक नया शक्ति-केंद्र खड़ा करने की कोशिश शुरू हो गई है। मक्का में तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने ऐसा रक्षा समझौता किया है, जिसकी सबसे अहम लाइन में साफ कहा गया है कि तीनों में से किसी एक पर हमला हुआ तो उसे तीनों पर हमला माना जाएगा। यही वह बिंदु है, जो इस समझौते को सामान्य सैन्य सहयोग से उठाकर एक संभावित नए क्षेत्रीय सुरक्षा गठबंधन में बदल देता है। हालांकि इसे अभी आधिकारिक तौर पर ‘सुन्नी नाटो’ कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन इसके भीतर उसकी बुनियादी तस्वीर जरूर दिखाई देने लगी है। देखा जाये तो मक्का में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन का एक मंच पर आना अपने आप में बड़ा संदेश है। खास बात यह है कि यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम एशिया पहले ही ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की आग में झुलस रहा है। सऊदी अरब पर ईरान और उसके सहयोगी संगठनों के हमलों का खतरा है। पाकिस्तान अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है और तुर्किये पश्चिम एशिया में अपनी भूमिका लगातार बढ़ा रहा है। यानी तीनों देश एक-दूसरे की जरूरत बन गए हैं। इसे भी पढ़ें: Iran ने Saudi Arabia, पाकिस्तान और Turkey के रक्षा समझौते को बताया बेअसर क्यों हुआ त्रि-पक्षीय समझौता? वर्तमान हालात को देखें तो सऊदी को चाहिए सुरक्षा, पाकिस्तान को पैसा और तुर्किये को ताकत, इसलिए तीनों एक साथ आ गये हैं। हालांकि इस गठजोड़ को समझने के लिए तीनों देशों के हितों को अलग-अलग देखना होगा। सबसे पहले सऊदी अरब की बात करें तो उसके सामने सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा का है। दशकों तक रियाद ने अमेरिकी सुरक्षा छाते पर भरोसा किया। लेकिन अब सऊदी नेतृत्व यह मानकर चल रहा है कि बदलती अमेरिकी नीति में किसी एक बाहरी शक्ति पर पूरी तरह निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। ईरान और उसके सहयोगियों की मिसाइल तथा ड्रोन क्षमता ने इस खतरे को और वास्तविक बना दिया है। ऐसे में सऊदी अरब ने अपना सुरक्षा कवच चौड़ा करना शुरू किया है। पाकिस्तान उसके लिए स्वाभाविक साझेदार है। पाकिस्तानी सेना दशकों से सऊदी सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण देती रही है और हाल के महीनों में पाकिस्तान ने सऊदी अरब में सैनिकों, लड़ाकू विमानों, ड्रोन और वायु रक्षा प्रणालियों की मौजूदगी भी बढ़ाई है। वहीं पाकिस्तान की जरूरत बिल्कुल दूसरी है। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को सऊदी अरब से निवेश और आर्थिक मदद चाहिए, जबकि तुर्किये से रक्षा तकनीक और सैन्य सहयोग चाहिए। बदले में पाकिस्तान अपनी सेना और परमाणु क्षमता को मुस्लिम दुनिया की सुरक्षा में सबसे बड़ा सैन्य योगदान बताकर अपनी भू-राजनीतिक अहमियत बढ़ाना चाहता है। वहीं तुर्किये की बात करें तो एर्दोगन लंबे समय से अपने देश को सिर्फ नाटो का सदस्य नहीं, बल्कि मुस्लिम दुनिया की एक स्वतंत्र शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। तुर्किये के पास अत्याधुनिक ड्रोन, रक्षा उद्योग और बड़ी सैन्य ताकत है। पाकिस्तान के साथ उसका रक्षा सहयोग पहले ही तेजी से बढ़ चुका है। यह गठबंधन किसके खिलाफ है? अब सवाल उठता है कि यह गठबंधन किसके खिलाफ है? इस सवाल का जवाब हालांकि तीनों देशों ने नहीं में दिया है। तुर्किये ने साफ कहा है कि समझौता रक्षात्मक है, यह किसी खास देश या संगठन को निशाना नहीं बनाता और दूसरे क्षेत्रीय देशों के लिए भी खुला है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सिर्फ दस्तावेज की भाषा नहीं देखी जाती, टाइमिंग भी देखी जाती है। और इस समझौते की टाइमिंग बहुत कुछ कहती है क्योंकि इस समय ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव चरम पर है। ईरान समर्थित हूती, इराकी मिलिशिया और अन्य समूहों की गतिविधियों ने खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंता बढ़ाई है। दूसरी तरफ इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को बारूद के ढेर में बदल दिया है। इसलिए यह समझौता भले ही ईरान का नाम न ले, लेकिन ईरान के लिए इसका संदेश साफ है कि सऊदी अरब अब अकेला नहीं है। ईरान की बढ़ेंगी मुश्किलें वहीं इस समझौते के बाद ईरान के लिए नई चुनौती खड़ी हो गयी है। तेहरान अब तक पश्चिम एशिया में अपने प्रभाव का बड़ा हिस्सा सहयोगी और प्रॉक्सी संगठनों के नेटवर्क के जरिए कायम करता रहा है। लेकिन यदि सऊदी अरब को पाकिस्तान की सैन्य क्षमता और तुर्किये की रक्षा तकनीक का समर्थन मिलने लगे तो क्षेत्रीय समीकरण बदल सकते हैं। यही कारण है कि मक्का समझौते को ईरान के खिलाफ सीधा सैन्य गठबंधन नहीं होते हुए भी ईरान के लिए रणनीतिक चुनौती जरूर माना जा सकता है। इजराइल-अमेरिका को भी संदेश दिलचस्प बात यह है कि इस गठबंधन का एक और बड़ा संदेश इजरायल के लिए भी है। पश्चिम एशिया में जिस ‘सुन्नी धुरी’ की चर्चा लंबे समय से होती रही है, वह अब सिर्फ राजनीतिक अवधारणा नहीं रहना चाहती। साथ ही यह अमेरिका के लिए भी खतरे की घंटी है और यह समझौता वाशिंगटन के लिए भी सुखद खबर नहीं है। दरअसल सऊदी अरब और तुर्किये दोनों अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था के पुराने साझेदार हैं। लेकिन यदि यही देश अपनी सुरक्षा के लिए अलग क्षेत्रीय सैन्य ढांचा बनाने लगें तो इसका अर्थ साफ है कि अमेरिकी सुरक्षा छतरी पर भरोसा कम हो रहा है। यही इस समझौते का सबसे बड़ा दीर्घकालिक रणनीतिक अर्थ हो सकता है। सुन्नी नाटो सिर्फ कल्पना है या हकीकत? इसके अलावा, यदि मक्का मॉडल सफल होता है और उसमें दूसरे सुन्नी देश शामिल होते हैं, तो पश्चिम एशिया में अमेरिका के नेतृत्व वाली सुरक्षा व्यवस्था के समानांतर एक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा खड़ा हो सकता है। सवाल उठता है कि इसमें और कौन-से देश शामिल हो सकते हैं? इसके जवाब में कतर, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात और सीरिया जैसे देशों के नाम संभावित सदस्य के रूप में सामने आ रहे हैं। हालांकि यह भी एक तथ्य है कि यूएई की कई क्षेत्रीय मुद्दों पर सऊदी अरब और तुर्किये से अलग नीति रही है। साथ ही मिस्र भी किसी ऐसे सैन्य गठबंधन में फंसना नहीं चाहेगा जो उसे सीधे किसी क्षेत्रीय युद्ध में धकेल दे। वहीं सीरिया अपनी युद्धोत्तर परिस्थितियों से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है। इसलिए ‘सुन्नी नाटो’ का विस्तार संभव जरूर है, लेकिन आसान नहीं है। त्रि-पक्षीय समझौते का भारत पर क्या होगा असर? अब सवाल यह है कि इस रक्षा समझौते का भारत पर क्या असर पड़ेगा और अगर भारत-पाकिस्तान के बीच फिर सैन्य टकराव हुआ तो क्या तुर्किये और सऊदी अरब पाकिस्तान के साथ खड़े होंगे और भारत के खिलाफ युद्ध लड़ेंगे? देखा जाये तो भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता पाकिस्तान की बढ़ती रणनीतिक क्षमता है। तुर्किये पहले से ही पाकिस्तान का करीबी सैन्य साझेदार है और कश्मीर से लेकर रक्षा सहयोग तक उसका रुख भारत के लिए चिंता का विषय रहा है। 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव में भी अंकारा ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया था। ऐसे में भविष्य में पाकिस्तान को तुर्किये से ड्रोन, हथियार, तकनीक, खुफिया सहयोग और सैन्य सहायता का अधिक संगठित समर्थन मिल सकता है। हालांकि सऊदी अरब को तुर्किये के साथ एक ही नजर से देखना सही नहीं होगा क्योंकि रियाद के पाकिस्तान से गहरे रक्षा संबंध जरूर हैं, लेकिन भारत भी उसके लिए ऊर्जा, व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग का अहम साझेदार है। इसलिए भारत-पाकिस्तान संघर्ष की स्थिति में तुर्किये का पाकिस्तान के पक्ष में खुलकर खड़ा होना ज्यादा संभावित है, जबकि सऊदी अरब के लिए सीधे भारत के खिलाफ युद्ध में उतरना आसान नहीं होगा। वह पाकिस्तान को राजनीतिक, आर्थिक या सीमित सैन्य-लॉजिस्टिक मदद दे सकता है, लेकिन मक्का समझौते की मौजूदा सार्वजनिक भाषा से यह नहीं कहा जा सकता कि पाकिस्तान पर हमले की स्थिति में सऊदी और तुर्किये अपने आप भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ देंगे। यही वजह है कि भारत के लिए असली चिंता इस समझौते की ‘सामूहिक युद्ध’ वाली भाषा से ज्यादा पाकिस्तान को मिलने वाली संभावित अतिरिक्त सैन्य और रणनीतिक ताकत है। पाकिस्तान का विरोधाभास हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान का सबसे बड़ा विरोधाभास भी सबके सामने आया है। जिस देश की अपनी सीमाओं पर लगातार तनाव है, जिसे अफगानिस्तान सीमा पर संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है, जिसके बलूचिस्तान प्रांत ने आजादी का ऐलान कर दिया है, जिसके अवैध कब्जे वाले पीओके में विद्रोह और दमन तेज होता जा रहा है, वह देश अब मुस्लिम दुनिया की सामूहिक सुरक्षा का प्रहरी बनने की भूमिका तलाश रहा है। देखा जाये तो पाकिस्तान के आंतरिक संकटों के बीच यह समझौता उसके लिए अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रासंगिकता दिखाने का अवसर भी बन गया है। कई सवालों के जवाब समय देगा वैसे मक्का समझौते की असली परीक्षा तब होगी जब तीनों में से किसी एक पर वास्तविक सैन्य हमला होगा। अगर सऊदी अरब पर हूती या किसी अन्य ईरान समर्थित समूह का बड़ा हमला होता है, तो क्या पाकिस्तान और तुर्किये युद्ध में उतरेंगे? अगर पाकिस्तान पर हमला होता है, तो क्या सऊदी अरब और तुर्किये सैनिक भेजेंगे? और अगर भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध होता है, तो क्या रियाद अपने भारत संबंधों को दांव पर लगाकर इस्लामाबाद के साथ खड़ा होगा? इन सवालों का जवाब अभी किसी के पास नहीं है। लेकिन एक बात साफ है कि मक्का में सिर्फ एक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। पश्चिम एशिया में शक्ति के नए समीकरण की नींव रखी गई है। बहरहाल, नाटो की छतरी के नीचे मतभेद बढ़ रहे हैं और उसी समय मुस्लिम दुनिया के तीन देश अपनी सुरक्षा को एक-दूसरे से जोड़ रहे हैं। अभी इसे ‘सुन्नी नाटो’ कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन यदि इसमें दूसरे देश जुड़ते हैं, संयुक्त सैन्य अभ्यास बढ़ते हैं, खुफिया और हथियार सहयोग संस्थागत होता है और ‘एक पर हमला, सभी पर हमला’ सिर्फ कागज की लाइन न रहकर वास्तविक सैन्य नीति बन जाती है, तो आने वाले वर्षों में पश्चिम एशिया का नक्शा बदल सकता है। -नीरज कुमार दुबे
Moradabad News: नए खरीदार, नए बाजार...पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच निर्यातकों का 10 देशों पर फोकस
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Body brought to ancestral village from Saudi Arabia; family members broke down in grief.
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Iran America war होगी तेज, UAE, Saudi Arabia और Qatar तक फैलेगी जंग की आग! | Middle East
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब पूरे खाड़ी क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। अब तक ईरान की प्रतिक्रिया मुख्य रूप से क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक सीमित मानी जा रही थी, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया है कि यदि टकराव और गहराया तो इसका दायरा कहीं अधिक व्यापक हो सकता है।
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धनबाद के कतरास में 20 फीट धंसी जमीन, 10 घर जमींदोज; घर में फंसे 8 लोग सीढ़ी के सहारे निकाले गए
धनबाद के कतरास में भारी ब्लास्टिंग के कारण 20 फीट जमीन धंस गई, जिससे 10 घर जमींदोज हो गए और 8 लोग फंस गए।
Jammu News: जम्मू में भाजपा विधायक युद्धवीर सेठी ने वार्ड नंबर 16,न्यू प्लॉट के निवासियों के साथ बिजली कनेक्शन काटे जाने और भारी बिलों के खिलाफ सड़क पर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के कारण जानीपुर मार्ग अवरुद्ध हो गया।
Islamic NATO बनाने को लेकर डील फाइनल, Saudi Arabia, Pakistan,Turkiye जल्द करेंगे ऐलान। Israel
पश्चिम एशिया में जारी जंग और बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच संभावित त्रिपक्षीय रक्षा समझौते ने भू-राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। CNN-News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों देशों के बीच डिफेंस डील को अंतिम रूप देने की कोशिश चल रही है
Amethi News: सऊदी अरब में हार्ट अटैक से युवक की मौत
young man in amethi
मध्य प्रदेश के सीहोर के सेठ जुम्मा लाल रुठिया ने प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान 1917 में ब्रिटिश हुकूमत द्वारा कर्ज मांगे जाने पर 35 हजार रुपये दिए थे। अब रुठिया के उत्तराधिकारियों ने ब्रिटेन सरकार से कर्ज का भुगतान करने के लिए पत्राचार किया है।
पंजाब सरकार द्वारा चलाए जा रहे राज्यव्यापी 'युद्ध नशों के विरुद्ध' (War Against Drugs) अभियान को सरकारी कॉलेज गुरदासपुर में व्यापक जनसमर्थन और अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली है। अभियान के अंतर्गत कॉलेज के सैकड़ों विद्यार्थियों और समस्त शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक स्टाफ ने एकजुट होकर नशा विरोधी शपथ ली। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने ऑनलाइन प्लेज (E-Pledge) लेकर नशा मुक्ति अभियान के आधिकारिक प्रमाण-पत्र भी प्राप्त किए। समारोह के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) अश्वनी कुमार भल्ला ने कहा कि नशा केवल किसी एक व्यक्ति या परिवार की समस्या नहीं है, बल्कि यह समूचे समाज और देश के समग्र विकास के रास्ते में एक गंभीर बाधा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब के युवाओं के भीतर अपार प्रतिभा, क्षमता और ऊर्जा छिपी है, जिसे नशे की गर्त में जाने से बचाना और सही दिशा देना हम सभी का परम और सामूहिक दायित्व है। प्राचार्य भल्ला ने छात्रों का आह्वान किया कि वे अपने जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें और शिक्षा, उच्च अनुसंधान, खेलकूद, नवाचार, उद्यमिता व समाज सेवा जैसे रचनात्मक क्षेत्रों में अपनी ऊर्जा लगाएं। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं हर प्रकार के व्यसन से दूर रहने तथा दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की अपील की। विद्यार्थियों ने ली कभी नशा न करने और पीड़ितों की मदद करने की प्रतिज्ञा अभियान के दौरान विद्यार्थियों ने पूरे आत्मबल के साथ संकल्प लिया कि वे जीवन में कभी भी किसी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करेंगे। इसके अलावा, उन्होंने अपने परिवार, दोस्तों और समाज को भी इस सामाजिक बुराई से दूर रहने के लिए प्रेरित करने का वचन दिया। छात्रों ने प्रतिज्ञा की कि वे नशे की लत से पीड़ित व्यक्तियों को सही इलाज, नशामुक्ति केंद्रों और उचित परामर्श तक पहुंचाने में पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे, ताकि पंजाब और भारत को नशा मुक्त, स्वस्थ एवं समृद्ध बनाया जा सके। पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान कॉलेज परिसर में आयोजित होंगी नशा विरोधी गतिविधियां प्राचार्य प्रो. (डॉ.) अश्वनी कुमार भल्ला ने घोषणा की कि सरकारी कॉलेज गुरदासपुर को पूर्णतः नशा मुक्त परिसर (Drug-Free Campus) बनाए रखने के लिए यह अभियान पूरे शैक्षणिक सत्र में निरंतर जारी रहेगा। इसके तहत सेमिनार और जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि युवाओं में नशा विरोधी चेतना को और अधिक मजबूत किया जा सके। इस मौके पर उपस्थित समस्त प्राध्यापकों ने भी विद्यार्थियों को अच्छी संगति चुनने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और अपने उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए सदैव प्रयासरत रहने की प्रेरणा दी। ये कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जागरूकता रैलियां और संगोष्ठियां (Seminars) विषय-विशेषज्ञों के व्याख्यान और काउंसलिंग सेशन पोस्टर मेकिंग, स्लोगन राइटिंग, निबंध व भाषण प्रतियोगिताएं नुक्कड़ नाटक और खेल गतिविधियां एन.एस.एस. (NSS), रेड रिबन क्लब और अन्य कमेटियों के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम
टेलर ने कपड़े की कतरन वापस लौटा दी तो फेंकने की बजाय 4 तरीके से करें इस्तेमाल
आपके पास ढेर सारी कपड़े की कतरन बची रहती है या फिर टेलर ने सूट या ब्लाउज की बची हुई कतरन को वापस कर दिया है। इसे फेंकने की बजाय आप बहुत ही काम के तरीकों से दोबारा से इस्तेमाल में ला सकते हैं।
500 साल में बस एक बार हारा कुंभलगढ़ किला, वजह युद्ध नहीं; पढ़िए मेवाड़ की आन-बान और शौर्य की अनोखी कहानी
सबसे अहम युद्ध पर किसी का ध्यान नहीं: तेजी से फैल रहे नफरत और भेदभाव, जीत तभी होगी, जब हम धरती को हारने न दें--The Most Important War We Ignore: Why Climate Change and Environmental Crisis Need Urgent Global Attention
युद्ध नहीं, शांति ही मानवता का भविष्य
विश्व भर में 6 अगस्त को हिरोशिमा दिवस मनाया जाता है। यही वह दिन है, जब वर्ष 1945 में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा शहर पर पहला परमाणु बम गिराया था। इस दिन हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है…
Iran America War: ईरान ने Iraq और Kuwait बार्डर के करीब क्यों भेजे T 72 Tanks|Trump
मिडिल ईस्ट एक ऐसे ज्वालामुखी पर बैठा है जो कभी भी फट सकता है..जी हां जंग के बादल कभी भी छा सकते हैं...अमेरिका चाहे लाख मना करे...लेकिन जब तक इजरायल खित्ते में आक्रामक है तब तक जंग पूरी तरह नहीं रुक सकती..यही वजह है कि ईरान ने ्अपने टैंक इराक से लगी सरहद के करीब जमा करना शुरु कर दिए हैं…
कतर से रुकी सप्लाई, फिर भी 15% कैसे बढ़ा भारत का LNG आयात? देखें कूटनीति
कूटनीति' में आज बात भारत की उस रणनीतिक चाल की, जिसने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाज़ारों को हैरान कर दिया है. जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जंग छिड़ी, तो दुनिया को लगा कि भारत में बड़ा गैस संकट आने वाला है. वजह साफ थी-भारत अपनी 60 फीसदी एलएनजी (LNG) गैस इसी समुद्री रास्ते से मंगाता था. लगा कि कतर से सप्लाई रुकते ही भारत की फैक्ट्रियां और रसोई गैस थम जाएगी. लेकिन भारत ने ऐसा कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक खेला कि इस पूरे संकट के बावजूद देश में एलएनजी का आयात घटने के बजाय 15 फीसदी और बढ़ गया.
ईरान-ओमान वार्ता पर कतर ने दिया अपडेट, क्या आज हो पाएगी डील?
कतर ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की भाषा तैयार हो चुकी है और उसका मसौदा अभी पक्षों के बीच साझा किया जा रहा है, जबकि कतर और ओमान वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत आसान बनाने के लिए करीबी तालमेल से काम कर रहे हैं.
कंगना के ‘जेबकतरों जैसी ड्रेस’ वाले बयान को यूजर्स ने सोनाक्षी से जोड़ा
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों को लेकर दिए गए बयान से सियासत गरमा गई है। उन्होंने कहा कि मदरसे आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, जिस पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
'जेबकतरों की तरह...', कंगना ने सोनाक्षी पर किया कमेंट!
कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर बिना नाम लिए इंडस्ट्री की एक हीरोइन पर तीखा हमला किया है. यूजर्स का मानना है कंगना ने ये अटैक सोनाक्षी सिन्हा पर किया है.
Iran US War Update: महायुद्ध से डरा Saudi Arab? MBS ने Donald Trump को फोन कर दी बड़ी चेतावनी!
Iran-US War: महायुद्ध से डरा Saudi Arab? MBS ने Donald Trump को फोन कर दी बड़ी चेतावनी!
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
गाजा में कत्लेआम पर भड़के कतर-तुर्की-मिस्र, इजरायल नहीं रोक रहा बमबारी
कतर, मिस्र और तुर्की ने गाजा में इजरायली कार्रवाई, खासकर नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और स्वास्थ्य ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की है. इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है. गाजा सिटी के दक्षिण-पश्चिम में ताजा हमले में कम से कम दो लोग मारे गए हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
'दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा हमला?', ट्रंप ने ईरान पर अब किया ये ऐलान
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित बड़ा हमला फिलहाल रोक दिया है. दूसरी तरफ तेहरान ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए सैन्य सतर्कता बनाए रखने, सऊदी अरब और पाकिस्तान से तेज संपर्क बढ़ाने और यह साफ करने का संदेश दिया है कि क्षेत्रीय सुरक्षा, जवाबी तैयारी और राजनीतिक समाधान अब साथ साथ चलेंगे.
युद्ध, डर और उम्मीद... आखिर क्यों गढ़े गए सुपरहीरो?
सुपरहीरो कभी भी सिर्फ असाधारण शक्तियों वाले किरदार नहीं रहे. वे हर दौर के समाज की इच्छाओं, आशंकाओं और सपनों का प्रतिबिंब रहे हैं. वे हमें याद दिलाते हैं कि असली ताकत केवल असाधारण शक्तियों में नहीं बल्कि सही समय पर सही फैसला लेने, कमजोरों के साथ खड़े होने और दूसरों के लिए जोखिम उठाने के साहस में होती है.
इराक के सुलेमानिया पर ईरानी ड्रोन ने बरपाया कहर, सामने आया Video
इराक के सुलेमानिया में ईरान-विरोधी समूहों के एक ठिकाने को ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया है. माना जा रहा है कि ये हमला ईरान ने किया है जिसमें अलगाववादी समूहों के मुख्यालय पर दो प्रोजेक्टाइल सीधे जाकर लगे. ईरान ने ड्रोन से ये हमला किया. देखें वीडियो.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
Iran US War: Iran ने जारी कर दी अपनी Hitlist, सऊदी, UAE और कतर पर क्यों मंडराया खतरा?
पश्चिम एशिया (Middle East) का युद्ध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से तीसरे विश्व युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है। ईरान (Iran) ने अमेरिका (US) और उसके सहयोगी देशों को खुली चेतावनी दी है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' पहल से खत्म होगा गाजा युद्ध? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'बोर्ड ऑफ पीस' पहल को लेकर साइप्रस में बैठक हुई है. यह बोर्ड गाजा युद्ध खत्म करने और पुनिर्माण योजना की निगरानी के लिए बनाया गया है. ट्रंप के कई देशों के नेताओं को इसमें शामिल होने का मौका दिया है. हालांकि कुछ देशों ने समर्थन किया है. वहीं कुछ ने इसकी भूमिका और और संयुक्त राष्ट्र पर असर को लेकर चिंता जताई है.
'टैरिफ धमकी से टला भारत-पाक परमाणु युद्ध', 'ऑपरेशन सिंदूर' पर ट्रंप का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध टालने में अपनी भूमिका का दावा किया है. उन्होंने कहा कि उनके कूटनीतिक दबाव और टैरिफ की धमकी से होने जा रहा युद्ध रुक गया. ट्रंप ने दावा किया कि इसी तरह उन्होंने 5 युद्ध रोक दिए.
Houthis vs Saudi Arabia: Iran के प्रॉक्सी से तीन तरफा घिरा सऊदी, क्या अब युद्ध की उपाय? Red Sea। US
अमेरिका और इज़राइल की ओर से 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू होने के बाद पश्चिम एशिया लगातार तनाव के दौर से गुजर रहा है। अब तक सऊदी अरब इस संघर्ष से दूरी बनाए रखने की कोशिश करता रहा,
Houthis Attack on Saudi Arabia और Iraq में Iran के रजिस्टेंस की ताकत पर Bobby Naqvi को सुनिए | PMF
Saudi Arabia और Iraq में Iran के रजिस्टेंस की ताकत पर Bobby Naqvi को सुनिए | PMF सऊदी के यमन पर अटैक और हूतियों के पलटवार के बीच..इराक से भी सऊदी से बदले की उठ रही आवाजें..मिडिल ईस्ट में जंग के इस नए मोर्चे पर..गल्फ न्यूज के पूर्व एडिटर बॉबी नकवी को सुनिए
The Odyssey Review: युद्ध से लौटते योद्धा की नहीं, खुद तक लौटते इंसान की कहानी
क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' सिर्फ होमर के महाकाव्य का रूपांतरण नहीं, बल्कि युद्ध, अपराधबोध और आत्म-स्वीकृति की गहरी कहानी है। मैट डेमन का शानदार अभिनय, अद्भुत सिनेमैटोग्राफी और भावनात्मक निर्देशन इसे सिर्फ एक पौराणिक एडवेंचर नहीं रहने देते। शुरुआती ...
गाजा संघर्ष : नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल
सयुक्त राष्ट्र की हालिया स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की रिपोर्ट ने इजरायल और कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में जारी हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों की गंभीर तस्वीर पेश की है।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
युद्धविराम से आगे: क्या विश्व अहिंसा की ओर बढ़ेगा?
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हाल ही में हुआ युद्धविराम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया युद्ध की लपटों में घिरकर वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका था। कई सप्ताह तक चले संघर्ष ने क्षेत्र को ऐसे ज्वालामुखी में बदल दिया था, जिसकी प्रत्येक विस्फोटक घटना विश्व अर्थव्यवस्था ... Read more
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
'वाराणसी' में दिखेगा महायुद्ध, भगवान राम और कुंभकर्ण के बीच होगा 30 मिनट का ऐतिहासिक टकराव!
दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली जब भी कोई नया प्रोजेक्ट लाते हैं, तो वह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक उत्सव बन जाता है। 'बाहुबली' और 'आरआरआर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद, राजामौली अब सुपरस्टार महेश बाबू के साथ अपनी अगली महात्वाकांक्षी ...
इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) हर हफ्ते दुनिया भर यूजर्स के सर्च और प्रोफाइल विजिट के आधार पर 'मोस्ट पॉपुलर इंडियन सेलिब्रिटीज' की लिस्ट जारी करता है। आमतौर पर इस लिस्ट के शीर्ष पर वही सुपरस्टार्स नजर आते हैं जिनकी बड़ी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज ...
खाड़ी युद्ध से निपटने की मोदी की तजबीज
मोदीजी ने एक बार फिर राष्ट्र की जनता को उसके कर्तव्यों के प्रति सचेत किया है।
लीजा रे ने दुबई से शेयर की दर्दभरी कविता, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच जताई चिंता
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। हर तरफ धमाकों और सायरन का शोर सुनाई दे रहा है। एक्ट्रेस लीजा रे भी इन हालातों के बीच दुंबई में अपने घर ...
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता, बेटी के साथ सुरक्षित लौटीं भारत, सुनाई आपबीती
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता भी अपनी 14 साल की बेटी सायरा के साथ यूएई में ...
एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज़ की '120 बहादुर' को लेकर चर्चा अब अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। फिल्म ट्रेलर ने पूरी तरह से रोमांच और प्रेरणा का सही मिश्रण पेश किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बलिदान दिवस पर मेजर शैतान सिंह ...
War 2 रिव्यू: लचर स्क्रिप्ट और निर्देशन के कारण रितिक और एनटीआर हारे युद्ध, पढ़ें पूरी समीक्षा
रितिक रोशन और एनटीआर स्टारर War 2 ‘स्पाई यूनिवर्स’ की बड़ी पेशकश मानी जा रही थी, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और औसत निर्देशन ने इसे निराशाजनक बना दिया। शानदार एक्शन सीक्वेंस और एनटीआर के दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद फिल्म का सेकंड हाफ बिखर गया। कहानी में ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला अपनी खूबसूरती से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। उर्वशी ने बेहद ही कम समय में एक अलग मुकाम हासिल किया है। वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों के साथ 'मिलने और अभिवादन' के क्षणों में संलग्न रहती है। ऐसा ही एक क्षण था जब ...
सलमान खान की सिकंदर के आखिरी गाने में दिखेगा जबरदस्त जलवा, तुर्की से बुलाए गए 500 डांसर्स!
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की 'सिकंदर' इस साल की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके एक्शन-पैक्ड टीजर ने इसकी भव्य एंट्री के लिए एकदम परफेक्ट माहौल तैयार कर दिया है। भव्य पैमाने पर बनाई गई इस फिल्म में ...
केसरी वीर के लिए सूरज पंचोली ने की कड़ी ट्रेनिंग, ऐसे सीखा युद्ध कौशल
बॉलीवुड एक्टर सूरज पंचोली अपनी पहली बायोपिक में वीर हामीरजी गोहिल के ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने जा रहे हैं। सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय और सूरज पंचोली अभिनीत फिल्म 'केसरी वीर : लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ' का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ...
फरहान अख्तर लेकर आ रहे भारत-चीन युद्ध पर आधारित फिल्म 120 बहादुर, निभाएंगे मेजर शैतान सिंह का रोल
Movie 120 Bahadur : रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट, ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज के साथ मिलकर '120 बहादुर' को पेश करने के लिए उत्साहित हैं। यह फिल्म मेजर शैतान सिंह (पीवीसी) और चार्ली कंपनी, 13 कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिकों की कहानी कहती ...
Adil Hussain: दुनियाभर में इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 की धूम मची हुई है। पेरिस ओलंपिक में दुनियाभर के खिलाड़ियों ने भाग लिया है। भारत के कई खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। हाल ही में तुर्की के शूटर यूसुफ डिकेक ने सिल्वर मेडल जीता।
बॉर्डर की 27वीं सालगिरह पर, अभिनेता सनी देओल ने एक घोषणा वीडियो के ज़रिए फ़्रैंचाइज़ी के दूसरे संस्करण की पुष्टि की है। अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सनी ने बॉर्डर 2 में अपनी वापसी की आधिकारिक घोषणा करते हुए एक वीडियो शेयर किया और इसे 'भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म' बताया। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ''एक फौजी अपने 27 साल पुराने वादे को पूरा करने के बाद, आ रहा है फिर से। भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म, बॉर्डर 2।'' इस फिल्म का निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता करेंगे। आगामी युद्ध फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह करेंगे। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | पति से तकरार के बीच केन्या लौट गई हैं Dalljiet Kaur? शादी को बचाने की कर रही कोशिश सनी द्वारा घोषणा वीडियो शेयर किए जाने के तुरंत बाद, सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए कमेंट सेक्शन में बाढ़ ला दी। एक यूज़र ने लिखा, ''वाह, यह बहुत बढ़िया घोषणा है सर जी, जय हिंद।'' दूसरे ने लिखा, ''बहुत उत्साहित हूँ।'' तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, ''बॉर्डर 2 के लिए बहुत उत्साहित हूं।'' इसे भी पढ़ें: NDA पर इमोशनल बयान, काले सूट में ली मंत्री पद की शपथ और शर्मिला अंदाज, Tripti Dimri की तरह रातों रात भारत के Sensation बन गये Chirag Paswan सनी देओल की अन्य परियोजनाएं उन्हें आखिरी बार अमीषा पटेल के साथ गदर 2 में देखा गया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही और इसे ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर घोषित किया गया। गदर 2 की सफलता के बाद, सनी ने लाहौर 1947 सहित कई फिल्में साइन कीं, जिसे आमिर खान के प्रोडक्शन बैनर के तहत बनाया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जिन्होंने आमिर को कल्ट क्लासिक अंदाज़ अपना अपना (1994) में निर्देशित किया था। View this post on Instagram A post shared by Sunny Deol (@iamsunnydeol)
Kalki 2898 AD: शुरू हो गया नया युद्ध, पूरे ट्रेलर की अहम कड़ी हैं अमिताभ, प्रभास करेंगे इम्प्रेस
Kalki 2898 AD के ट्रेलर को देखें तो, फिल्म कल्कि 2898 एडी के मेकर्स ने विश्वास दिलाया है कि ये फिल्म लोगों को बांधने में कामयाब होगी. टफ सीक्वेंस, क्लियर एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर आपका ध्यान खींचते हैं. वीएफएक्स पर भी अच्छा काम किया गया है.
आशुतोष राणा ने डीपफेक वीडियो को बताया 'माया युद्ध', बोले- ये सालों से चल रहा
आशुतोष ने कहा कि ऐसी बातों में खुद को डिफेंड करने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि जो लोग आपको जानते हैं वो सवाल करेंगे ही नहीं. और जो नहीं जानते, उन्हें किसी रिस्पॉन्स से फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वो दिमाग में आपकी एक छवि बना चुके होते हैं.
रानीति बालाकोट एंड बियॉन्ड: जिमी शेरगिल की नई सीरीज भारत की आधुनिक युद्ध की ऐतिहासिक कहानी को प्रदर्शित करेगी। जिमी शेरगिल दो मिनट के ट्रेलर की शुरुआत पुलवामा हमले की झलक से होती है। एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाने वाले आशीष कहते हैं, ये एक नया रण है या इसे जीतने के लिए एक नई रणनीति की जरूरत है। इसे भी पढ़ें: नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन प्रहार', कमांडर शंकर राव समेत अब तक 79 हुए ढेर, हिट लिस्ट में और भी कई नाम शामिल आगामी वेब शो आधुनिक युद्ध को डिकोड करता है जो केवल भौतिक सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता है बल्कि सोशल मीडिया, डिजिटल रणनीति और गुप्त राजनीतिक चालों के क्षेत्र से परे है जो भू-राजनीति को नया आकार देने की शक्ति रखता है। वेब श्रृंखला उन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है जिन्होंने 2019 में देश को हिलाकर रख दिया था। शो में कुछ हवाई दृश्य, शानदार प्रदर्शन और एक शक्तिशाली कथा है जो युद्ध के मैदान के अंदर और बाहर हर पहलू को चतुराई से पकड़ती है। इसे भी पढ़ें: Biden को सोचना पड़ेगा फिर एक बार, Iran पर प्रहार तो रूस करेगा पलटवार, रक्षा मंत्रायल ने चिट्ठी लिखकर जता दी मंशा आगामी वेब श्रृंखला के बारे में बात करते हुए, जिमी ने कहा: यह मेरे द्वारा अतीत में की गई किसी भी भूमिका से भिन्न है। कम से कम यह कहना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन भारत की पहली वॉर-रूम केंद्रित वेब-श्रृंखला का हिस्सा बनना बेहद संतोषजनक भी है। वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित जिसने देश को हिलाकर रख दिया। एनएसए प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए, आशीष ने कहा, एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन रक्षा बलों के कुछ सदस्यों के साथ बैठकों ने मुझे अपने चरित्र की बारीकियों को समझने में मदद की। तैयारी कार्य और कार्यशालाएं मुझे वापस ले गईं मेरे एनएसडी के दिनों में। संतोष सिंह द्वारा निर्देशित, श्रृंखला का निर्माण स्फीयरओरिजिन्स मल्टीविजन प्राइवेट लिमिटेड के सुंजॉय वाधवा और कॉमल सुंजय डब्ल्यू द्वारा किया गया है। इसमें प्रसन्ना भी हैं। शो का प्रीमियर 25 अप्रैल को JioCinema पर होगा।
दर्शक काफी समय से रैपर बादशाह और हनी सिंह के बीच जुबानी जंग देख रहे हैं। दोनों का रिश्ता सालों से विवादों से भरा रहा है। हालांकि करियर के शुरुआती दिनों में बादशाह और हनी सिंह के बीच अच्छी दोस्ती हुआ करती थी। हालाँकि, ऐसा लगता है कि सफलता और पैसे ने धीरे-धीरे इस दोस्ती को पूरी तरह से खत्म कर दिया। अब दोनों अक्सर एक दूसरे पर तंज कसते नजर आते हैं। हाल ही में हनी सिंह एक होली पार्टी में शामिल हुए, जहां उन्होंने बादशाह के 'पापा कमबैक' वाले कमेंट का करारा जवाब दिया। रैपर का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसे भी पढ़ें: Punjab Kings के खिलाफ जीत के बाद इंटरनेट पर Virat Kohli का Anushka Sharma के साथ वीडियो कॉल, FLY KISS देते नजर आये खिलाड़ी हनी सिंह ने बादशाह पर किया पलटवार बादशाह कुछ दिनों पहले हनी सिंह पर अपनी टिप्पणी को लेकर चर्चा में थे, जिसमें उन्होंने हनी सिंह की वापसी पर कटाक्ष किया था। अब सिंगर और रैपर हनी सिंह ने एक कमेंट के जरिए बादशाह को करारा जवाब दिया है और कहा है कि उन्हें बादशाह को जवाब देने के लिए मुंह खोलने की जरूरत नहीं है। उनके फैन ही काफी हैं जो हर चीज पर बात कर सकते हैं। उन्होंने अपने गाली वाले अंदाज में अपने फैंस से बात करते हुए बादशाह का जवाब दिया। हनी सिंह को सोमवार को मुंबई में एक होली पार्टी में परफॉर्म करते देखा गया और यहीं उन्होंने बादशाह पर कटाक्ष किया। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा, हर कोई कहता है, रिप्लाई करो, रिप्लाई करो... मैं क्या रिप्लाई करूं... आप लोग तो उनके सारे कमेंट्स का बहुत अच्छे से रिप्लाई कर चुके हैं। मुझे मुंह खोलने की जरूरत है। ऐसा नहीं होता है। जैसे ही भीड़ ने उनके लिए तालियां बजाईं, गायक ने कहा, मुझे बोलने की जरूरत नहीं है। आप लोग खुद पागल हैं। हनी सिंह पागल हैं और उनके प्रशंसक भी पागल हैं। इसे भी पढ़ें: Taapsee Pannu के पति Mathias Boe आखिर कौन है? जब सफल भी नहीं थी एक्ट्रेस तब से उन्हें प्यार करते थे बैडमिंटन खिलाड़ी रैपर बादशाह ने क्या कहा? आपको बता दें कि हाल ही में बादशाह ने हनी सिंह पर कमेंट करते हुए कहा था, ''मुझे एक पेन और कागज दो। मैं तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लाया हूं। मैं कुछ गाने लिखूंगा और तुम्हें दूंगा। पापा की वापसी तुम्हारे साथ होगी।'' Kalesh Controversy B/w Honey Singh and Badshah (Honey Singh Replied to Badshah) pic.twitter.com/o74t423bgS — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 25, 2024 Kalesh Between Badshah & Honey Singh Fans on Stage during Live Concert pic.twitter.com/M4VqSqLSc3 — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 19, 2024
आखिर क्यों Indira Gandhi ने Aandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध, आज भी देखने से कतराते हैं लोग
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'सावरकर' रिव्यू: खोखली, एकतरफा फिल्म में एकमात्र अच्छी चीज है रणदीप हुड्डा का काम
आज के दौर में 'गुमनाम' हो चुके एक स्वतंत्रता नायक की कहानी कहने निकली ये फिल्म, एक अनजान कहानी बताने से ज्यादा अपने हीरो विनायक दामोदर सावरकर को बाकियों के मुकाबले अधिक 'वीर' बताने पर फोकस करने लगती है.
अस्तित्व और बदले के लिएब्रह्मांड में शुरू होने वाला है महायुद्ध, एक्शन और रोमांच से भरपूर हैRebel Moon 2 का धांसू ट्रेलर

