केप वर्डे ने सऊदी अरब के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ के साथ ही फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नॉकआउट स्टेज में पहुंचकर इतिहास रच दिया
इजरायल-लेबनान शांति की दिशा में अहम पहल, वाशिंगटन में फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर
कई दिनों तक चली बातचीत के बाद यह फ्रेमवर्क तैयार किया गया। वाशिंगटन स्थित अमेरिकी विदेश मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में अमेरिका में लेबनान की राजदूत नाडा हमादेह मोवाद और उनके इजरायली समकक्ष येचियल लिटर ने अमेरिकी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में इस त्रिपक्षीय दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में शांति स्थापित करने की तमाम वैश्विक कोशिशों और हाल ही में हुए सीजफायर समझौते को एक बहुत बड़ा और जानलेवा झटका लगा है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच युद्ध को पूरी तरह खत्म करने के लिए अभी बातचीत का दौर चल ही रहा था कि अमेरिकी फाइटर जेट्स ने ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी (Airstrike) कर पूरे क्षेत्र को दहला दिया।इस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान आगबबूला हो उठा है। ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने शनिवार को अमेरिका को बेहद सख्त और सीधे लहजे में चेतावनी दी है कि इस दुस्साहस के बाद वाशिंगटन को सिर्फ 'पीछे हटना और पछताना' पड़ेगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोलते हुए साफ कहा कि अब अमेरिका का यह 'ब्लेम गेम' यानी खुद हमला करके दूसरों पर दोष मढ़ने का खेल बिल्कुल नहीं चलेगा। आइए जानते हैं कि शांति समझौते के बीच अचानक भड़के इस महाविवाद की असल वजह क्या है।क्यों भड़का विवाद? जानिए अमेरिकी सेना के ताबड़तोड़ हवाई हमलों की वजहयह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के लड़ाकू विमानों ने शुक्रवार को ईरान के भीतर मौजूद मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज लोकेशन्स के साथ-साथ उनकी तटीय रडार साइटों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें बरसा दीं। व्हाइट हाउस और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इस कार्रवाई को पूरी तरह जायज ठहराते हुए साफ किया कि यह हमला ईरान द्वारा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग में एक कमर्शियल जहाज पर किए गए कायरतापूर्ण हमले का सीधा और कड़ा जवाब है।अमेरिकी सेना द्वारा जारी आधिकारिक टाइमलाइन के मुताबिक, बीते 25 जून को ईरान ने ओमान के तट के पास जलडमरूमध्य से गुजर रहे सिंगापुर के झंडे वाले एक विशाल मालवाहक जहाज 'एम/वी एवर लवली' (M/V Ever Lovely) पर वन-वे सुसाइड अटैक ड्रोन से हमला किया था। यह हमला रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हुआ था, जो पूरी दुनिया के कुल ऊर्जा और कच्चे तेल के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) संभालता है। अमेरिका ने इसी अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के उल्लंघन को आधार बनाकर ईरान के खिलाफ यह बड़ा सैन्य एक्शन लिया है।ईरान का पलटवार: 'अमेरिका ने बातचीत के बीच में पीठ पर छुरा घोंपा'अमेरिकी बमबारी से भड़के ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व शीर्ष कमांडर और वर्तमान सांसद इब्राहिम अजीजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अमेरिका को आड़े हाथों लेते हुए एक लंबी पोस्ट लिखी। अजीजी ने कहा, 'सफेदपोश अमेरिका ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसकी कथनी और करनी में कितना फर्क है। उसने शांति वार्ता के बीच में ही हमारे देश पर हमला करके पीठ पर छुरा घोंपा है। नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को दिखा दिया है कि वे किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानून, बातचीत या सीजफायर के सिद्धांतों को नहीं मानते हैं।'अजीजी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सीजफायर का यह लापरवाह उल्लंघन अमेरिका के लिए आत्मघाती साबित होगा। ईरानी सांसद के इस तीखे बयान के ठीक कुछ घंटों बाद IRGC के मुख्यालय से भी एक बड़ा और डराने वाला ऐलान कर दिया गया। ईरानी सेना ने कहा कि उसने देश के दक्षिणी हिस्से पर हुए अमेरिकी हमलों के प्रतिशोध में पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में फैले अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उनके दूतावासों को सीधे अपने मिसाइल निशाने पर लेना शुरू कर दिया है।'हिंसा का जवाब सिर्फ हिंसा' - अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस की दोटूकईरानी धमकियों के बीच अमेरिका ने भी झुकने से साफ इनकार कर दिया है। अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने ईरान को आड़े हाथों लेते हुए 'X' पर दोटूक शब्दों में चेतावनी दी। वेंस ने लिखा, 'ईरान ने खुद टेबल पर बैठकर सीजफायर समझौते पर दस्तखत किए थे और हमारी सेना ने उस समझौते का पूरा सम्मान किया। अगर ईरानी प्रशासन को एमओयू (MOU) के नियमों या उसे लागू करने के तरीके को लेकर कोई भी आपत्ति या असहमति थी, तो वे राजनयिक चैनलों के जरिए बात कर सकते थे। लेकिन उन्होंने हथियारों का रास्ता चुना, और याद रहे कि हमारे देश के खिलाफ की गई हिंसा का जवाब हमेशा दोगुनी हिंसा से ही दिया जाएगा।' इसके साथ ही वेंस ने ईरान से आखिरी अपील करते हुए कहा कि वे आगे की तबाही को रोकने के लिए तुरंत हिंसा रोककर बातचीत की मेज पर आएं।नाजुक मोड़ पर शांति वार्ता: क्या तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही दुनिया?यह पूरा सैन्य टकराव एक ऐसे नाजुक और ऐतिहासिक मोड़ पर हुआ है जब दोनों देशों के बीच दशकों पुराने तनाव को खत्म करने के लिए पर्दे के पीछे से बड़ी डिप्लोमैटिक बातचीत चल रही थी। पिछले हफ्ते ही दोनों पक्षों के बीच एक अस्थाई सीजफायर का औपचारिक ऐलान हुआ था, जिसके तहत एक व्यापक फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों को 60 दिनों का समय दिया गया था। लेकिन इन ताजा हवाई हमलों और पलटवार के बाद दुनिया भर के शेयर बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उथल-पुथल शुरू हो गई है। शांति की सभी उम्मीदों को गहरा झटका लगा है और मिडिल ईस्ट एक बार फिर भयंकर क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) की आग में झुलसने की कगार पर आ खड़ा हुआ है।
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के अशांत मोर्चे से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को हिला देने वाली खबर सामने आ रही है। लंबे समय से जारी भीषण सैन्य टकराव के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले समझौते पर सहमति बनी है। लेकिन इस डील के सार्वजनिक होते ही लेबनान का सबसे शक्तिशाली अर्धसैनिक संगठन हिजबुल्लाह पूरी तरह आगबबूला हो गया है। हिजबुल्लाह के शीर्ष नेतृत्व ने इस अमेरिकी समझौते को पूरी तरह खारिज करते हुए बेहद आक्रामक अंदाज में खुली चेतावनी दी है कि यदि इस डील को जबरन थोपा गया, तो लेबनान में भयानक 'गृहयुद्ध' (Civil War) छिड़ जाएगा।अमेरिकी मध्यस्थता में हुआ सीक्रेट समझौता और हिजबुल्लाह की नाराजगीवाशिंगटन और यरूशलेम से आ रही रणनीतिक रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राजनयिकों ने पर्दे के पीछे रहकर इजरायल और लेबनान की सरकार के बीच सीमा विवाद और सुरक्षा गारंटी को लेकर एक कड़ा ड्राफ्ट तैयार कराया था। इस डील का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सीमाओं पर जारी गोलाबारी को स्थायी रूप से रोकना और विस्थापित नागरिकों को उनके घरों तक वापस लाना है। हालांकि, हिजबुल्लाह का आरोप है कि लेबनान सरकार ने अमेरिकी दबाव में आकर देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से समझौता किया है, जो उन्हें किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है।'गृहयुद्ध छिड़ जाएगा' – हिजबुल्लाह की लेबनान सरकार को खुली धमकीहिजबुल्लाह के प्रमुख ने एक विशेष संबोधन में लेबनान प्रशासन को सीधे शब्दों में आगाह किया है कि वे इजरायल या अमेरिका के किसी भी एजेंडे को देश की धरती पर लागू नहीं होने देंगे। हिजबुल्लाह ने कहा कि इस डील के जरिए उनके हथियारों को सरेंडर कराने और दक्षिण लेबनान से उनकी मौजूदगी को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। अगर सरकार ने इस समझौते को आगे बढ़ाया, तो देश के भीतर विभिन्न गुटों और लेबनानी सेना के बीच सीधे टकराव की स्थिति बन जाएगी, जिससे पूरे देश में गृहयुद्ध की भयावह आग लग सकती है।बेरूत से लेकर यरूशलेम तक सैन्य अलर्ट और सुरक्षा रणनीति में बदलावइस खुली धमकी के बाद लेबनान की राजधानी बेरूत, इजरायल की उत्तरी सीमा और पूरे भूमध्यसागरीय क्षेत्र (Mediterranean Region) में स्थानीय सुरक्षा तंत्र को हाई अलर्ट पर डाल दिया गया है। इजरायली सेना (IDF) ने किसी भी संभावित रॉकेट हमले या घुसपैठ का मुकाबला करने के लिए अपनी सीमाओं पर पेट्रोलिंग और एयर डिफेंस सिस्टम 'आयरन डोम' को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। वहीं, लेबनान के स्थानीय नागरिक इस नई सैन्य और राजनीतिक खींचतान के बाद भारी दहशत में हैं और देश में एक बार फिर पुराने काले दौर के लौटने की आशंका से डरे हुए हैं।वैश्विक कूटनीति, एआई सर्च और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर असरइस नए संकट ने वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। आधुनिक जनरेटिव इंजन और वैश्विक थिंक टैंक इस बात का गहन विश्लेषण कर रहे हैं कि क्या अमेरिका द्वारा कराई गई यह पीस डील वाकई शांति लाएगी या फिर यह एक और बड़े विनाशकारी युद्ध की वजह बन जाएगी। अगर लेबनान के भीतर गृहयुद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो इसका सीधा असर पूरे खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ेगा, जिससे वैश्विक तेल बाजारों, व्यापारिक मार्गों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा समीकरणों में भारी उथल-पुथल मचनी तय मानी जा रही है।
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) से इस वक्त की सबसे बड़ी और वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला देने वाली सैन्य खबर सामने आ रही है। महाशक्ति अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब सीधे और खतरनाक युद्ध में तब्दील हो चुका है। अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए एक बड़ा हवाई और मिसाइल हमला किया है, जिसके तुरंत बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए तेहरान ने भी अमेरिकी बेस और सैन्य संपत्तियों पर ताबड़तोड़ रॉकेट दागे हैं। इस भीषण सैन्य टकराव के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज जलडमरूमध्य) में युद्ध की लपटें उठने लगी हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर हड़कंप मच गया है।अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद ईरान का बड़ा मिलिट्री पलटवारवाशिंगटन से मिली शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी कमांड ने इस हमले को आत्मरक्षा और ईरान समर्थित मिलिशिया की बढ़ती गतिविधियों को रोकने के लिए उठाया गया कदम बताया है। अमेरिकी लड़ाकू विमानों और ड्रोनों ने ईरान की मुख्य सैन्य चौकियों और मिसाइल डिपो को भारी नुकसान पहुंचाया है। हालांकि, अमेरिकी हमले से बेखौफ ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बिना कोई समय गंवाए बेहद आक्रामक रुख अपनाया और अमेरिकी ठिकानों पर अपनी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों से पलटवार कर दिया। तेहरान ने साफ संदेश दिया है कि वे किसी भी तरह के आक्रमण का पूरी ताकत से जवाब देने के लिए तैयार हैं।स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जंग की आहट और ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर संकटइस पूरी जंग का सबसे संवेदनशील केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बन गया है, जहां दोनों देशों की नौसेनाएं आमने-सामने आ गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह सबसे अहम समुद्री रास्ता है जहां से वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की कुल सप्लाई का लगभग एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है। इस इलाके में सैन्य तनाव बढ़ने और संभावित नाकेबंदी की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने का खतरा पैदा हो गया है। अगर यह समुद्री मार्ग पूरी तरह प्रभावित होता है, तो भारत सहित पूरी दुनिया में ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं और वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो सकती है।नई दिल्ली से लेकर वाशिंगटन तक कूटनीतिक गलियारों में मची खलबलीइस अचानक भड़के सैन्य संकट ने नई दिल्ली, लंदन, टोक्यो और वाशिंगटन सहित दुनिया के तमाम बड़े देशों के कूटनीतिक तंत्र को हाई अलर्ट पर डाल दिया है। भारत के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि खाड़ी देशों में लाखों भारतीय प्रवासी रहते हैं और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी समुद्री मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है। वैश्विक थिंक टैंक और आधुनिक एआई सर्च इंजन इस बात का विश्लेषण कर रहे हैं कि क्या यह टकराव केवल सीमित हवाई हमलों तक रहेगा या फिर यह तीसरे विश्व युद्ध की तरह एक पूर्ण पैमाने के क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले लेगा।अंतरराष्ट्रीय समुदाय की शांति की अपील और परमाणु प्रतिष्ठानों पर खतराइस भीषण गोलाबारी के बीच संयुक्त राष्ट्र (UN) और दुनिया के कई बड़े देशों ने दोनों पक्षों से तुरंत युद्धविराम करने और संयम बरतने की अपील की है। सबसे बड़ा डर इस बात को लेकर है कि अगर अमेरिकी हमलों का दायरा बढ़ा, तो ईरान के परमाणु प्रतिष्ठान भी इसकी जद में आ सकते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में विनाशकारी परिणाम देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल दोनों ओर से मिलिट्री मूवमेंट बेहद तेज है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में युद्धपोतों की तैनाती लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे आने वाले कुछ घंटे पूरी दुनिया के लिए बेहद नाजुक माने जा रहे हैं।
ईरान के मिसाइल ठिकानों पर अमेरिकी हमला, तेहरान का पलटवार; मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा बढ़ा
US Iran Tension : अमेरिकी और ईरान के बीच तनाव उस समय बड़ गया जब अमेरिकी सेना ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण ठिकानों व तटीय रडार साइट्स पर हमले किए। यह कार्रवाई तब की गई, जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाया। बहरहाल इन ...
खगड़िया में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व धार्मिक आस्था, गम और भाईचारे के माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाले गए, जिनमें हजारों अकीदतमंद शामिल हुए। पूरे जिले में 'या हुसैन' के नारों के साथ करबला के शहीद हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानी को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। मोहर्रम इस्लाम धर्म का एक पवित्र अवसर है, जो पैगंबर हजरत मुहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की करबला में दी गई शहादत की याद में मनाया जाता है। यह पर्व त्याग, धैर्य, इंसाफ और मानवता का संदेश देता है। जिले के मानसी प्रखंड स्थित सैदपुर गांव, परबत्ता के मड़ैया, बड़हरा, बन्देहरा, चौथम, गोगरी, मुस्कीपुर और नौगढ़ सहित अन्य क्षेत्रों में निर्धारित मार्गों से ताजिया जुलूस निकाले गए। सैदपुर में जुलूस गांव के विभिन्न मार्गों से होते हुए दरगाह परिसर पहुंचा। इन जुलूसों के दौरान युवाओं ने लाठी, तलवार और फरसा सहित पारंपरिक युद्धक कलाओं का शानदार प्रदर्शन किया। मड़ैया, बन्देहरा, चौथम, गोगरी और मुस्कीपुर जैसे स्थानों पर भी युवाओं ने हैरतअंगेज करतब दिखाए, जिन्होंने सड़क के दोनों ओर खड़े लोगों का मन मोह लिया। बड़ी संख्या में लोग इन प्रदर्शनों को देखने के लिए घंटों डटे रहे। सभी जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से अपने निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला एवं दरगाह स्थलों तक पहुंचे। यहां धार्मिक रस्में अदा की गईं और अकीदतमंदों ने मातम कर इमाम हुसैन की शहादत को श्रद्धांजलि अर्पित की। शाम को सैदपुर दरगाह परिसर में एक भव्य मेले का आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। मेले में बच्चों के लिए झूले, मीना बाजार, मिठाइयों की दुकानें और विभिन्न आकर्षक स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। मोहर्रम को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल, दंडाधिकारी और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई थी। जिलाधिकारी विक्रम वीरकर, पुलिस अधीक्षक भानु प्रताप सिंह, संबंधित एसडीपीओ, सीओ और थाना प्रभारी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने जुलूस मार्ग का लगातार निरीक्षण किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ईरान के साथ चल रहा तनाव अब केवल बाहरी मोर्चे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के भीतर एक बड़े राजनीतिक संकट के रूप में उभर रहा है। बुधवार को बंद कमरे में हुई एक बैठक के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप और रिपब्लिकन सीनेटर बिल कैसिडी के बीच हुई तीखी बहस ने पार्टी के भीतर की दरार को सार्वजनिक कर दिया है। इस टकराव का मुख्य केंद्र ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान युद्ध के खर्च के लिए कांग्रेस से मांगी गई 70 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि और तेहरान के साथ हुई हालिया रूपरेखा समझौते की शर्तें हैं।समझौते पर छिड़ा घमासान: क्या सच छिपाया जा रहा है?सीनेटर बिल कैसिडी ने ट्रंप प्रशासन पर तीखे हमले करते हुए ईरान के साथ हुए उस हालिया समझौते पर स्पष्टीकरण मांगा है, जिसमें तेहरान को वित्तीय प्रोत्साहन देने की बात कही गई है। कैसिडी का स्पष्ट मानना है कि यह समझौता उन लक्ष्यों से काफी पीछे है जो युद्ध शुरू होने के समय प्रशासन ने जनता के सामने रखे थे। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में दो टूक कहा कि अमेरिकी नागरिकों को सच्चाई जानने का पूरा अधिकार है और फिलहाल जमीनी हालात उन दावों से मेल नहीं खाते जो सरकार द्वारा किए जा रहे हैं। नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर, यह घरेलू असंतोष ट्रंप के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है।सीनेट में देर रात तक चली रस्साकशीट्रंप के साथ बैठक के तुरंत बाद, सीनेट में रिपब्लिकन नेतृत्व ने युद्ध को समाप्त करने से जुड़े 'युद्धाधिकार प्रस्ताव' को रोकने के लिए एक बड़ा दांव खेला। देर रात हुए मतदान में 50 मतों के साथ इस प्रस्ताव को आगे बढ़ने से रोक दिया गया, जबकि 47 सीनेटरों ने इसके समर्थन में वोट डाला। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के इस प्रयास के बावजूद उनकी अपनी पार्टी की सीनेटर सुसान कोलिन्स और लिसा मर्कोव्स्की जैसे प्रमुख चेहरों ने डेमोक्रेट सांसदों के साथ खड़े होकर ट्रंप की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस मतदान को ईरान के लिए एक कड़ा संदेश करार दिया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह स्पष्ट है कि ईरान युद्ध के मुद्दे पर व्हाइट हाउस को अपने ही घर में कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है।
फीफा ने कतर के आसिम मादिबो को पांच मैचों के लिए सस्पेंड किया
ज़्यूरिख। फीफा ने कतर के मिडफील्डर आसिम मादिबो को पांच मैचों के लिए सस्पेंड कर दिया है। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के दौरान कनाडा के इस्माइल कोने के पैर में गंभीर चोट लगने वाले उनके लापरवाह चैलेंज के कारण यह कार्रवाई की गई है, जिससे सह-मेजबान टीम के शानदार अभियान पर संकट के बादल मंडराने […] The post फीफा ने कतर के आसिम मादिबो को पांच मैचों के लिए सस्पेंड किया appeared first on Sabguru News .
सीनेट ने रोकी ट्रंप की युद्ध शक्तियां
वॉशिंगटन: अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति Donald Trump की ईरान नीति को लेकर एक महत्वपूर्ण War Powers Resolution (युद्ध शक्तियां प्रस्ताव) पारित कर दिया है। सीनेट में यह प्रस्ताव 50-48 मतों से मंजूर हुआ। इसका उद्देश्य राष्ट्रपति को कांग्रेस की अनुमति के बिना ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने या दोबारा शुरू करने से रोकना […]
यूएन रिपोर्ट के अनुसार 2025 में युद्धग्रस्त क्षेत्रों में 24 हजार से अधिक बच्चे प्रभावित हुए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निष्क्रियता पर संयुक्त राष्ट्र ने गंभीर चिंता जताई
छिंदवाड़ा के बैल बाजार चौक में मोहर्रम के अवसर पर जिला स्तरीय अखाड़ा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। रात 10 बजे से शुरू हुई यह प्रतियोगिता लगातार 5 घंटे चलकर देर रात 3 बजे तक संपन्न हुई। इसमें जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से आए विभिन्न ग्रुपों ने तलवारबाजी, लाठी और पारंपरिक युद्ध कला का प्रदर्शन किया। आयोजन ठिग्गा ग्रुप समिति की ओर से किया गया। प्रतियोगिता में बेहतरीन और अनुशासित प्रदर्शन करने वाले अखाड़ा ग्रुपों को पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली विजेता टीम को 25 हजार रुपए का नकद इनाम प्रदान किया गया। हिंदू-मुस्लिम समाज के लोगों ने की हौसलाअफजाईदेर रात तक चले इस अखाड़े को देखने के लिए बड़ी संख्या में शहरवासी मौजूद रहे। इस दौरान मुस्लिम समाज के साथ-साथ हिंदू समाज के लोगों ने भी आयोजन में शामिल होकर करतब दिखाने वाले दलों का उत्साहवर्धन किया। शहर में दोनों समुदायों की यह मौजूदगी आपसी सद्भाव का केंद्र रही। पूरे मध्यप्रदेश में बनी इस आयोजन की पहचानआयोजक समिति के सदस्यों के अनुसार, हर साल होने वाली यह प्रतियोगिता अब सिर्फ छिंदवाड़ा तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसने पूरे मध्यप्रदेश में अपनी एक अलग पहचान बना ली है। जामा मस्जिद छिंदवाड़ा के सदर आमसाल खान ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा, ठिग्गा ग्रुप द्वारा हर साल शानदार तरीके से यह प्रतियोगिता कराई जाती है। इस बार भी अलग-अलग जिलों से आए अखाड़ा ग्रुपों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी हैं।
भाई कन्हैया जी की युद्ध भूमि में ‘अद्वैत’ मिसाल ने बढ़ाया सेवा का दायरा
भास्कर न्यूज | लुधियाना तपती-जलती गर्मी में जहां पूरे भारतवर्ष में निर्जला एकादशी के दिन जगह-जगह ठंडे-मीठे जल की छबीलें पिलाकर राहगीरों को राहत दी जाती है, वहीं पंजाब में नि:स्वार्थ भाव से पानी पिलाने की यह सेवा किसी विशेष दिन या तारीख की मोहताज नहीं है। पंजाब के इतिहास और संस्कृति में पानी पिलाने की परंपरा ‘प्याऊ’ का स्थान सामाजिक और आध्यात्मिक लिहाज से बेहद खास है। यहां पानी पिलाने की इस रीत को सिर्फ सामाजिक भलाई नहीं, बल्कि परमात्मा की भक्ति और मानवता की सबसे बड़ी सेवा के रूप में देखा गया है। पंजाब में प्याऊ केवल ईंट-पत्थरों या मटकों का एक ढांचा नहीं है, बल्कि यह हमारे गुरु साहिबान द्वारा शुरू की गई वह महान परंपरा है जो सिखाती है कि नि:स्वार्थ भाव से की गई ‘जल सेवा’ ही सच्ची मानवता है। यही कारण है कि पंजाब में यह सेवा केवल ज्येष्ठ मास की एकादशी तक सीमित न रहकर साल के 12 महीने निरंतर चलती रहती है। पंजाब के इतिहास में पानी पिलाने की सबसे अद्भुत और रूहानी मिसाल सन 1704 में आनंदपुर साहिब के युद्ध के दौरान देखने को मिलती है, जो आज के समाज को बिना किसी भेदभाव के सेवा करने का संदेश देती है। गुरु गोबिंद सिंह जी के एक परम सेवक भाई कन्हैया जी युद्ध के मैदान में पीठ पर मशक लादकर घायल सैनिकों को पानी पिलाया करते थे। कुछ सिखों ने गुरु जी से शिकायत की कि भाई कन्हैया जी हमारी सेना के साथ-साथ दुश्मन मुगलों के घायल सैनिकों को भी पानी पिला रहे हैं। जब गुरु जी ने उनसे इसका कारण पूछा, तो भाई कन्हैया जी ने उत्तर दिया, “सच्चे पातशाह! मुझे युद्ध के मैदान में कोई सिख या कोई दुश्मन दिखाई नहीं देता, मुझे तो हर घायल व्यक्ति में आप ही का रूप (परमात्मा) नजर आता है।” गुरु जी ने मुस्कुराकर उन्हें मरहम भी दी और कहा , उनके जख्मों पर मरहम भी लगाया करो। यह इतिहास पंजाब में बिना किसी जाति, धर्म या वर्ग के भेदभाव के हर इंसान को पानी पिलाने की शाश्वत सीख देता है। पंजाब की धरती पर प्याऊ- छबील का यह आध्यात्मिक स्वरूप ही है कि यहां कड़कती धूप हो या सामान्य दिन, राहगीरों के लिए पानी के मटके या वाटर कूलर हमेशा सजे रहते हैं। निर्जला एकादशी का दिन इस महान परंपरा को नमन करने और इसे और आगे बढ़ाने का अवसर है। आइए, इस एकादशी पर सेवा के इतिहास को याद कर मानव कल्याण का संकल्प लें। पंजाब में पानी पिलाने के इतिहास की जड़ें सिखों के पहले गुरु, श्री गुरु नानक देव जी के समय से जुड़ी हैं। सन 1505 में अपनी उदासी के दौरान गुरु नानक देव जी जब दिल्ली (जो उस समय पंजाब प्रांत के ऐतिहासिक रास्तों का हिस्सा थी) पहुंचे, तो उन्होंने एक बाग में डेरा जमाया। वहां यात्रियों के लिए पानी की भारी किल्लत थी, जो पानी उपलब्ध था, वह बेहद खारा था। गुरु जी के वचनों और प्रयासों से वहां एक कुआं खोदा गया जिसका पानी बेहद मीठा निकला। गुरु जी ने वहां स्वयं राहगीरों को पानी पिलाने के लिए एक ‘प्याऊ’ लगाया। थके-हारे यात्रियों को वहां मीठा जल-लंगर मिलता था। जीवंत इतिहास: इसी महान इतिहास के कारण आज भी दिल्ली के जीटी रोड करनाल पर ऐतिहासिक गुरुद्वारा नानक प्याऊ साहिब सुशोभित है, जो सदियों से मानवता को जल सेवा की सीख दे रहा है। लुधियाना के जालंधर बाईपास समेत अनेकों स्थानों पर आज भी प्याऊ की परंपरा जीवंत है।
FIFA वर्ल्ड कप 2026 में आज रात जर्मनी का सामना इक्वाडोर से होगा। इक्वाडोर इंटरनेशनल फुटबॉल में जर्मनी को कभी हरा नहीं पाया है। मैच रात 1:30 बजे से न्यू जर्सी स्टेडियम में खेला जाएगा। वहीं तुर्की की भिड़ंत अमेरिका से सुबह 7:30 बजे से होगी। तुर्की इस टूर्नामेंट में अब तक एक भी गोल नहीं दाग सका है। कुल 6 मुकाबले खेले जाएंगे। ये सभी मैच भारतीय समयानुसार 26 जून को होंगे। मैच-55: आइवरी कोस्ट को नॉकआउट के लिए सिर्फ ड्रॉ की जरुरत ग्रुप-E में शामिल कोटे डी आइवर 3 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है। उसे अगले दौर में पहुंचने के लिए सिर्फ एक ड्रॉ की जरूरत है। वहीं 1 अंक के साथ टेबल में सबसे नीचे चल रही कुरासाओ को हर हाल में यह मैच जीतना होगा। दोनों देशों के बीच यह पहला इंटरनेशनल मुकाबला होगा। कुरासाओ को मिडफील्डर ताहित चोंग से करिश्मे की उम्मीद होगी। वहीं आइवरी कोस्ट की टीम अनुभवी मिडफील्डर फ्रैंक केसी के खेल पर निर्भर होगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: कुरासाओ: रूम, ब्रीनत, फ्लोरानस, गारी, ओबिसपो, फोंविले, चोंग, कोमेनेनसिया, एल बाकुना, जे बाकुना, लोकाडिया। आइवरी कोस्ट: वाई फोफाना, जी दोउ, कोसोनौ, अग्बादौ, कोनान, संगारे, केसी, औलाई, दियालो, बोनी, डियोमंडे। मैच-56: जर्मनी के खिलाफ इक्वाडोर को जीतना ही होगा सुपर-32 में जगह बना चुकी जर्मनी का सामना इक्वाडोर से होगा। जर्मनी 2 मैचों में 6 अंकों के साथ ग्रुप-E में टॉप पर है। वहीं इक्वाडोर सिर्फ 1 अंक के साथ तीसरे स्थान पर है। उसे नॉकआउट की उम्मीदें कायम रखने के लिए हर हाल में यह मैच जीतना होगा। दोनों देशों के बीच 2 इंटरनेशनल मैच खेले गए हैं। दोनों बार जर्मनी ने जीत दर्ज की है। वर्ल्ड कप के इतिहास में यह दोनों की दूसरी भिड़ंत होगी। 2006 विश्व कप में जर्मनी ने इक्वाडोर को 3-0 से हराया था। इक्वाडोर को अपने स्टार फॉरवर्ड एनर वैलेंसिया से गोल की उम्मीद होगी। वहीं जर्मनी के लिए फॉर्म में चल रहे विंगर जमाल मुसियाला अटैकिंग खेल दिखा सकते हैं। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: इक्वाडोर: डोमिंगुएज, प्रेसियाडो, टोरेस, पैचो, हिंकापी, फ्रेंको, ग्रुएजो, एम कैसिडो, पाज, वैलेंसिया, रोड्रिगेज। जर्मनी: न्यूर, किमिश, रुडिगर, टाह, मितलस्टाट, एंड्रीच, क्रूस, साने, मुसियाला, विर्ट्ज, हावेर्ट्ज। मैच-57: स्वीडन से ड्रा खेलते ही नॉकआउट में पहुंचेगा जापान ग्रुप-F में शामिल जापान 4 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है। वहीं स्वीडन 3 अंकों के साथ तीसरे पायदान पर है। जापान की टीम अगर यह मैच ड्रॉ भी खेल लेती है तो वह नॉकआउट में पहुंच जाएगी। वहीं स्वीडन को आगे बढ़ने के लिए जीत की दरकार है। वर्ल्ड कप में दोनों देशों के बीच यह पहली भिड़ंत होगी। दोनों के बीच अब तक 2 इंटरनेशनल मैच खेले गए हैं। जापान ने 1 मैच जीता है, जबकि 1 मुकाबला ड्रॉ रहा है। जापान को अपने स्टार स्ट्राइकर अयासे उएदा से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी। वहीं स्वीडन की नजरें इन-फॉर्म फॉरवर्ड अलेक्जेंडर इसाक पर टिकी रहेंगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: जापान: सुजुकी, इताकुरा, तानिगुची, माचिदा, डोआन, एंडो, मोरीता, मिनामाइनो, कामादा, कुबो, उएदा। स्वीडन: ओल्सन, लिंडेलोफ, Hइएन, लेगरबीलके, गुदमुंडसन, अयारी, निग्रेन, कार्लस्ट्रोम, बर्नहार्डसन, ग्योकेरेस, इसाक। मैच-58: टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी ट्यूनीशिया का नीदरलैंड से मुकाबला नीदरलैंड और ट्यूनीशिया ग्रुप-F में शामिल हैं। लगातार दो हार के साथ ट्यूनीशिया टूर्नामेंट से पहले ही बाहर हो चुकी है। दूसरी ओर नीदरलैंड 4 अंकों के साथ टॉप पर है। दोनों देशों के बीच कुल 3 इंटरनेशनल मैच खेले गए हैं। नीदरलैंड ने 1 मैच जीता है। वहीं 2 मुकाबले ड्रॉ रहे हैं। वर्ल्ड कप में दोनों की यह पहली भिड़ंत होगी। नीदरलैंड की उम्मीदें उनके स्टार फॉरवर्ड मेम्फिस डेपे पर टिकी होंगी। वहीं ट्यूनीशिया को कप्तान यूसुफ मषाकनी से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद होगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: ट्यूनीशिया: बेन सईद, वालरी, मेरियाह, तल्बी, अब्दी, स्केरी, लैदौनी, रफिया, बेन रमाने, अचौरी, मषाकनी। नीदरलैंड: वर्ब्रूगेन, डमफ्रीज, डी विलेज, वैन डिज्क, एके, शाउटन, रीजेंडर्स, सिमंस, विज्नल्डम, गाकपो, डेपे। मैच-59: मेजबान अमेरिका को चुनौती देगा तुर्की ग्रुप-D में शामिल अमेरिका लगातार 2 जीत के साथ नॉकआउट में जगह बना चुका है। वह 6 अंकों के साथ ग्रुप में पहले स्थान पर है। वहीं तुर्की लगातार 2 हार के साथ बाहर हो चुकी है। वह टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं कर सकी है। दोनों के बीच सिर्फ 1 इंटरनेशनल मैच खेला गया है। इसमें तुर्की ने 2-1 से जीत हासिल की थी। वर्ल्ड कप में दोनों टीमों की यह पहली भिड़ंत होगी। अमेरिका को मेन स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन से गोल की उम्मीद होगी। वहीं तुर्की अपने युवा स्टार अरदा गुलर पर निर्भर है। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: तुर्की: ओजर, चेलिक, सोयुनकु, डेमिरल, एलमाली, युक्सेक, कोकचू, गुलर, अकटुरकोग्लू, यिल्दिज, यिल्माज। अमेरिका: टर्नर, स्काली, रिचर्ड्स, रीम, रॉबिन्सन, मैकेनी, एडम्स, मूसाह, पुलिसिक, बालोगुन, वेआ। मैच-60: पराग्वे और ऑस्ट्रेलिया में जीतने वाली टीम नॉकआउट खेलेगी ग्रुप-D में पराग्वे और ऑस्ट्रेलिया के बीच अहम मुकाबला खेला जाएगा। दोनों टीमों के पास नॉकआउट में पहुंचने का यह आखिरी मौका है। दोनों टीमों अभी 3-3 अंक पर है। यह मैच जीतने वाली टीम सीधे नॉकआउट के लिए क्वालिफाई कर जाएगी। दोनों देशों के बीच अब तक कुल 5 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें से ऑस्ट्रेलिया ने 2 जीते हैं और 3 मैच ड्रॉ रहे हैं। वर्ल्ड कप के इतिहास में यह दोनों की पहली भिड़ंत होगी। पराग्वे को युवा फॉरवर्ड जूलियो एनसिसो से बड़ी उम्मीदें होंगी। वहीं ऑस्ट्रेलिया को अपने कप्तान और अनुभवी गोलकीपर मैथ्यू रयान से बेहतरीन प्रदर्शन की जरुरत होगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: पराग्वे: मोरिनीगो, वेलास्केज़, बाल्बुएना, अल्डरेटे, एस्पिनोज़ा, क्युबास, विलासांती, रोमेरो, अल्मिरोन, एनसिसो, सानाब्रिया। ऑस्ट्रेलिया: रयान, एटकिंसन, सुतार, बर्गस, रोल्स, बकस, इरविन, मेटकाफ, गुडविन, येंगी, बोरेल।
पंजाब सरकार के 'युद्ध नशों के विरुद्ध' अभियान के तहत कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने बुधवार को पठानकोट के मलिकपुर स्थित जिला प्रबंधकीय परिसर में एक जिला स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य राज्य को नशा मुक्त बनाने की दिशा में चल रहे प्रयासों का मूल्यांकन करना था। बैठक में डिप्टी कमिश्नर डॉ. पल्लवी, एसएसपी दलजिंदर सिंह ढिल्लों, अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (जनरल) अरशदीप सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त, ब्लॉक कोऑर्डिनेटरों, ग्रामीण रक्षा समितियों और आम आदमी पार्टी के पदाधिकारियों ने भी इसमें भाग लिया। कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि नशे के खिलाफ पंजाब सरकार की लड़ाई निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशा तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पंजाब सरकार नशों के खिलाफ शून्य टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और इस दिशा में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। नशे के खिलाफ सिर्फ सरकार की नहीं समाज की भी लड़ाईमंत्री ने कहा कि नशों के खिलाफ यह लड़ाई केवल सरकार या प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक जागरूक नागरिक इस अभियान में अपना योगदान दे, तो आने वाली पीढ़ियों को नशों के दुष्प्रभावों से बचाया जा सकता है। कोऑर्डिनेटरों, हलका इंचार्जों की सराहना की कटारूचक्क ने अभियान से जुड़े कोऑर्डिनेटरों, हलका इंचार्जों, पुलिस और सिविल प्रशासन के अधिकारियों के कार्यों की सराहना की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज किया जाए और अभियान को अधिक प्रभावी बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं।
वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक कोशिशों और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही सामान्य होने के चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। बुधवार, २४ जून २०२६ को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम और ज्यादा फिसल गए।फरवरी के अंत में शुरू हुए इस बड़े सैन्य संघर्ष के दौरान कच्चा तेल जिस रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था, वहां से अब इसकी कीमतों में एक-तिहाई (३३% से अधिक) की भारी गिरावट आ चुकी है।कच्चे तेल का ताजा भाव: ब्रेंट क्रूड $७६ और WTI $७२ के करीब फिसलावैश्विक बाजारों में दोनों प्रमुख बेंचमार्क फ्यूचर्स लाल निशान (Negative Zone) में कारोबार कर रहे हैं:ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): अंतरराष्ट्रीय मानक माना जाने वाला अगस्त डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स पिछले सत्र में १.१% टूटने के बाद आज फिर ०.४५% गिरकर $७६.७३ प्रति बैरल पर आ गया है।यूएस डब्ल्यूटीआई (WTI Crude): अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड फ्यूचर्स भी आज ०.४८% की गिरावट के साथ $७२.८६ प्रति बैरल पर ट्रेंड कर रहा है।तेल की कीमतों में गिरावट के ४ मुख्य कारण (Global Developments)वैश्विक कमोडिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार, तेल की कीमतों पर दबाव और आपूर्ति (Supply) बढ़ने के पीछे निम्नलिखित चार बड़े कूटनीतिक और रणनीतिक घटनाक्रम जिम्मेदार हैं:१. अमेरिका-ईरान के बीच डिप्लोमैटिक बातचीतवाशिंगटन और तेहरान के बीच फरवरी से चले आ रहे सैन्य तनाव को खत्म करने के लिए शुरुआती मोर्चे पर सकारात्मक प्रगति के संकेत मिले हैं। हालांकि यह बातचीत काफी लंबी खिंचने की उम्मीद है, लेकिन डिप्लोमैटिक प्रोसेस के तहत अमेरिका ने अस्थायी रूप से ईरानी तेल खरीदने की छूट (Waiver) दे दी है। इस छूट के मिलते ही ईरानी एक्सपोर्टर्स एक बार फिर एशिया के बड़े रिफाइनिंग देशों के साथ व्यापारिक रूप से जुड़ गए हैं, जिससे बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ गई है।२. होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग एक्टिविटी हुई नॉर्मलदुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' से अब जहाजों और ऑयल टैंकर्स की आवाजाही पूरी तरह सामान्य हो गई है। इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइज़ेशन (IMO) को सुरक्षा का भरोसा मिलने के बाद फारस की खाड़ी में फंसे सैकड़ों जहाज सुरक्षित बाहर निकल आए हैं। जहाज मालिकों का भरोसा इतना बढ़ा है कि वे अब अपने सैटेलाइट ट्रैकिंग सिस्टम को लगातार एक्टिव रख रहे हैं।३. खाड़ी देशों ने युद्ध स्तर पर बढ़ाया प्रोडक्शनफारस की खाड़ी के प्रमुख तेल उत्पादक देश बाजार में अपना एक्सपोर्ट फिर से स्थापित करने के लिए तेजी से उत्पादन बढ़ा रहे हैं:यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE): इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के मुताबिक, यूएई ने युद्ध से पहले के अपने प्रोडक्शन लेवल का ८५% हिस्सा दोबारा हासिल कर लिया है।कुवैत और इराक: कुवैत ने तेल सप्लाई को लेकर लगाए गए अपने सभी 'फोर्स मेज्योर' (Force Majeure - आपातकालीन प्रतिबंध) उपायों को वापस ले लिया है, जबकि इराक भी लगातार उत्पादन में बढ़ोतरी कर रहा है।४. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीनेट से चुनौतीअमेरिकी घरेलू राजनीति में भी इस युद्ध को लेकर बड़ा उलटफेर हुआ है। रिपब्लिकन-कंट्रोल्ड सीनेट ने ईरान के साथ चल रही इस सैन्य लड़ाई में अमेरिकी दखल को खत्म करने के लिए एक ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि इस सिंबॉलिक (प्रतीकात्मक) कदम से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की मुख्य नीतियों में तुरंत बदलाव की उम्मीद नहीं है, लेकिन यह साफ दिखाता है कि इस मिलिट्री कैंपेन के लिए अमेरिका के भीतर राजनीतिक और घरेलू सपोर्ट बेहद सीमित है।आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?कच्चे तेल के बाजार की नजर अब इस बात पर टिकी है कि ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट के प्रशासन को कंट्रोल करने वाले नए एग्रीमेंट का क्या नतीजा निकलता है। बाजार में इस बात की मामूली चिंता जरूर है कि तेहरान इस रणनीतिक रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर अतिरिक्त ट्रांजिट चार्ज (अतिरिक्त फीस) लगा सकता है। यदि यह बातचीत भी सुलझ जाती है, तो आने वाले दिनों में भारतीय बाजारों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बड़ी राहत देखने को मिल सकती है।
सूडान युद्ध में यौन हिंसा बनी ‘युद्ध का हथियार’: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में 546 मामलों का खुलासा
संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सूडान युद्ध में यौन हिंसा का व्यापक इस्तेमाल किया गया। 546 मामलों की पुष्टि, महिलाएं और बच्चियां सबसे अधिक प्रभावित
महिला टी20 विश्व कप: ऑस्ट्रेलिया का विजय रथ जारी, पाकिस्तान को एकतरफा मुकाबले में 113 रनों से रौंदा
महिला टी20 विश्व कप 2026 में ऑस्ट्रेलियाई टीम का विजय रथ जारी है। टूर्नामेंट के 21वें मुकाबले में हेडिंग्ले के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को 113 रनों से रौंदा। ऑस्ट्रेलिया से मिले 200 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान की पूरी टीम सिर्फ 86 रन बनाकर सिमट गई। लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। गुल फिरोजा महज एक रन बनाकर रन आउट हुईं। इसके बाद सायरा जबीन भी बल्ले से कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकीं और वह महज 5 रन बनाकर आउट हुईं। आयशा जफर अपना खाता तक नहीं खोल सकीं और रन आउट होकर पवेलियन लौटीं। इरम जावेद 9 गेंदों में 14 रन बनाने के बाद जॉर्जिया वेयरहम का शिकार बनीं। मुनीबा अली अच्छी शुरुआत का फायदा उठाने में नाकाम रहीं और वह 25 गेंदों में 32 रन बनाने के बाद एलिसा पेरी की गेंद पर गार्डनर को कैच देकर आउट हुईं। आलिया रियाज भी कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकीं और 7 रन बनाकर पवेलियन लौटीं। कप्तान फातिमा सना का बल्ला भी खामोश रहा और वह 12 गेंदों में 17 रन बनाने के बाद एनाबेल सदरलैंड का शिकार बनीं। रमीन शमीम भी बिना खाता खोले रन आउट हुईं। पाकिस्तान की 8 बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा तक पार करने में नाकाम रहीं, जबकि तीन बल्लेबाज खाता तक नहीं खोल सकीं। गेंदबाजी में ऑस्ट्रेलिया की ओर से एलिसा पेरी, सोफी मोलिनक्स और सरदलैंड ने दो-दो विकेट अपने नाम किए। वहीं, वेयरहम ने एक विकेट चटकाया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। गुल फिरोजा महज एक रन बनाकर रन आउट हुईं। इसके बाद सायरा जबीन भी बल्ले से कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकीं और वह महज 5 रन बनाकर आउट हुईं। आयशा जफर अपना खाता तक नहीं खोल सकीं और रन आउट होकर पवेलियन लौटीं। इरम जावेद 9 गेंदों में 14 रन बनाने के बाद जॉर्जिया वेयरहम का शिकार बनीं। मुनीबा अली अच्छी शुरुआत का फायदा उठाने में नाकाम रहीं और वह 25 गेंदों में 32 रन बनाने के बाद एलिसा पेरी की गेंद पर गार्डनर को कैच देकर आउट हुईं। Also Read: LIVE Cricket Score एश्ले गार्डनर बिना खाता खोले आउट हुईं। जॉर्जिया वेयरहम ने 5 रन बनाए। एनाबेल सदरलैंड ने 18 गेंदों में 4 चौकों की मदद से 27 रनों का योगदान दिया, जबकि निकोला केरी ने 13 गेंदों में नाबाद 26 रन बनाए। गेंदबाजी में पाकिस्तान की तरफ से सादिया इकबाल, रमीन शमीम और नाशरा संधू ने दो-दो विकेट चटकाए। Article Source: IANS
लेबनान से नहीं हटेंगे इजरायली सैनिक, अमेरिका-ईरान शांति समझौते से इजरायल को किस बात का डर
पश्चिम एशिया में शांति की बहाली के लिए अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को गहरी चिंता में डाल दिया है। हाल ही में हुए 14-सूत्रीय समझौते (MoU) के बाद जहां दुनिया उम्मीद कर रही है कि तनाव कम होगा, वहीं इजरायल को लग रहा है कि यह समझौता लेबनान में ईरान और उसके सहयोगी हिजबुल्लाह को नई ताकत दे सकता है। इसी आशंका के चलते नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि इजरायली सेना तब तक दक्षिणी लेबनान से नहीं हटेगी जब तक उन्हें अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए वहां मौजूदगी जरूरी महसूस होगी।क्या है विवाद की जड़?फरवरी 2026 में अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के साथ शुरू हुआ यह संघर्ष अब एक नए कूटनीतिक मोड़ पर है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए ताजा समझौता ज्ञापन (MoU) में युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने और लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित करने की बात कही गई है। हालांकि, इजरायल इसे एक खतरे के रूप में देख रहा है। इजरायली सरकार को शक है कि इस समझौते की आड़ में वाशिंगटन लेबनान में ईरान के प्रभाव को अनजाने में मजबूत कर रहा है, जो भविष्य में इजरायल की सुरक्षा के लिए घातक हो सकता है।इजरायल को सता रहा है इन तीन बड़े खतरों का डरइजरायली रणनीतिकारों और सरकारी सूत्रों का मानना है कि यह समझौता इजरायल की सैन्य क्षमता को सीमित कर सकता है:सैन्य कार्रवाई पर लगाम: अब तक इजरायल हिजबुल्लाह के ठिकानों पर जब चाहे हमला करने को स्वतंत्र था। उन्हें डर है कि अब वाशिंगटन हर हमले पर आपत्ति दर्ज कराएगा और इजरायल की 'ऑपरेशनल फ्रीडम' खत्म हो जाएगी।सैनिकों की वापसी का दबाव: ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि ट्रंप प्रशासन इजरायल पर दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना हटाने का दबाव बना सकता है, जिसे नेतन्याहू मानने को तैयार नहीं हैं।हिजबुल्लाह को संजीवनी: इजरायल का मानना है कि यह समझौता हिजबुल्लाह के खिलाफ जारी संयुक्त प्रयासों को कमजोर कर रहा है, जिससे आतंकी संगठन को फिर से संगठित होने का मौका मिल सकता है।'बीबी' की बढ़ती बेचैनीसूत्रों के मुताबिक, नेतन्याहू—जिन्हें इजरायल में प्यार से 'बीबी' कहा जाता है—इस समझौते को लेकर बेहद परेशान हैं। इजरायल का तर्क है कि इस अंतरिम समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से ज्यादा खतरनाक 'लेबनान वाला हिस्सा' है। इजरायली सरकार का मानना है कि अमेरिका और ईरान की यह नजदीकी न केवल सुरक्षा संतुलन को बिगाड़ रही है, बल्कि इससे इजरायल की भविष्य की सुरक्षा रणनीति भी दांव पर लग गई है। अब देखना यह है कि क्या ट्रंप प्रशासन इजरायल के इन संदेहों को दूर कर पाएगा या नेतन्याहू अपनी सुरक्षा नीतियों पर अडिग रहेंगे।
नर्मदापुरम में मंगलवार को जिला कांग्रेस कमेटी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र और राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी, मूंग खरीदी और खाद-यूरिया की किल्लत जैसे कई बड़े मुद्दों को उठाया। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष शिवाकांत पांडेय के नेतृत्व में निजी होटल में यह कॉन्फ्रेंस रखी गई थी। बिना पेपर लीक कराए एक परीक्षा नहीं करवा पा रही सरकार पूर्व विधायक गिरजाशंकर शर्मा ने नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक मामले पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पहले पेपर लीक होना और फिर दोबारा परीक्षा कराना, देश के लाखों छात्र-छात्राओं के भविष्य और उनकी मेहनत के साथ खिलवाड़ है। हालात इतने खराब हैं कि सरकार बिना किसी गड़बड़ी या पेपर लीक के एक भी परीक्षा ठीक से नहीं करवा पा रही है। परीक्षा केंद्र थे या कोई युद्ध का मैदान? गिरजाशंकर शर्मा ने दोबारा हुई नीट परीक्षा के इंतजामों पर तंज कसते हुए कहा कि परीक्षा कराने के लिए सेना की मदद लेनी पड़ी। परीक्षा केंद्रों पर इतनी पाबंदियां और इतनी ज्यादा सुरक्षा लगाई गई, मानो वहां कोई परीक्षा नहीं बल्कि कोई युद्ध या आतंकी हमला होने वाला हो। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि इतनी सख्त पाबंदी थी कि महज एक मिनट की देरी से पहुंचने वाले बच्चों को भी अंदर नहीं जाने दिया गया। भाजपा नेताओं पर लगाया 'बंदरबांट' का आरोप कांग्रेस ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि नीट का पेपर बनाने से लेकर परीक्षा आयोजित कराने तक, नीचे से लेकर ऊपर तक भाजपा के लोग शामिल हैं। पूर्व विधायक ने कहा कि सब कुछ ऊपर से पहले से ही तय रहता है कि पेपर कहां छपेगा और किन अपने लोगों को अच्छी जगहों पर बैठाना है। इसके बाद जो करोड़ों रुपयों का भ्रष्टाचार होता है, उसकी आपस में बंदरबांट की जाती है। कांग्रेस नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब पहली बार पेपर लीक हुआ, तो किसी ने भी इसकी जिम्मेदारी नहीं ली। लेकिन जब सेना की मदद से दोबारा परीक्षा कराई गई, तो शिक्षा मंत्री तुरंत आगे आ गए और श्रेय (क्रेडिट) लेते हुए कहने लगे कि दूसरी परीक्षा में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। स्थानीय मुद्दों पर भी घेरा नीट परीक्षा के अलावा जिला कांग्रेस कमेटी ने नर्मदापुरम के स्थानीय किसानों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इलाके के किसान इस समय मूंग खरीदी की समस्याओं, खाद और यूरिया की भारी किल्लत से परेशान हैं, लेकिन सरकार उनकी सुध नहीं ले रही है।
पंजाब को नशा मुक्त बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के तहत मंगलवार को फरीदकोट के अशोक चक्र हॉल में एक जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस अहम बैठक की अध्यक्षता पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और राजस्व एवं पुनर्वास मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने संयुक्त रूप से की। बैठक में विधायक गुरदित्त सिंह सेखों, विधायक अमोलक सिंह, डिप्टी कमिश्नर राहुल चाबा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और ग्रामीण समितियों के सदस्य मौजूद रहे। नशा तस्करों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति: स्पीकर संधवां इस मौके पर विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा नशों के खिलाफ शुरू किया गया यह महा-अभियान अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। उन्होंने नशा तस्करों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि इस काले धंधे में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पूरी सख्ती से लागू की जा रही है। उन्होंने जोर दिया कि नशों के खिलाफ यह लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है। सरकारी केंद्रों में मिल रहा मुफ्त इलाज और बढ़ रही जागरूकता बैठक को संबोधित करते हुए विधायक गुरदित्त सिंह सेखों ने कहा कि नशे की लत का शिकार हो चुके लोगों का इलाज पूरी तरह संभव है। ऐसे व्यक्तियों को सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिल करवाकर सरकार द्वारा मुफ्त उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, विधायक अमोलक सिंह ने कहा कि जमीनी स्तर पर इस अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और अब युवाओं में नशों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता पहले से कहीं अधिक बढ़ी है। समागम के दौरान नगर सुधार ट्रस्ट के चेयरमैन गगनदीप सिंह धालीवाल ने भी अपने विचार साझा किए। गांव-गांव में बनेंगे खेल स्टेडियम: कैबिनेट मंत्री मुंडियां कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने साफ शब्दों में कहा कि पंजाब से नशे के पूर्ण खात्मे तक यह अभियान इसी तरह लगातार जारी रहेगा। उन्होंने सरकार की भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा में लगाने और उन्हें नशों से दूर रखने के लिए पंजाब सरकार गांव-गांव में खेल स्टेडियमों का निर्माण करवा रही है। इसका मकसद युवाओं को खेलों के बेहतर अवसर प्रदान करना है ताकि वे एक स्वस्थ और बेहतर जीवन की ओर अग्रसर हो सकें।
मोहाली पुलिस ने 'युद्ध नशों के विरुद्ध' अभियान के तहत संवेदनशीलता दिखाते हुए एक युवक को नई जिंदगी देने की अनूठी पहल की है। पुलिस ने नशे की लत से जूझ रहे एक युवक को गिरफ्तार करने या सजा देने के बजाय, उसे नशा मुक्ति केंद्र (रिहैब सेंटर) में भर्ती कराया है ताकि उसका उचित उपचार हो सके। पुलिस का यह कदम उनके मानवीय चेहरे को दर्शाता है। परिवार से संपर्क कर इलाज के लिए किया तैयार पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, नशे की समस्या सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौती है। इसी सोच के साथ पुलिस ने इस युवक की पहचान की, उसके परिवार से संपर्क साधा और काउंसलिंग के जरिए युवक को इलाज कराने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया। सही मार्गदर्शन से अपराध की राह पर जाने से बचेंगे युवा अधिकारियों ने बताया कि कई युवा सही समय पर सही सलाह और इलाज न मिलने के कारण अपराध और गंभीर बीमारियों के दलदल में धंस जाते हैं। ऐसे में युवाओं को समय पर इलाज मिलना बहुत जरूरी है ताकि वे मुख्यधारा में लौटकर एक सामान्य जीवन जी सकें। पुलिस का मानना है कि नशा मुक्ति की यह लड़ाई सिर्फ तस्करों को पकड़ने से नहीं, बल्कि पीड़ितों के पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) से ही जीती जा सकती है। पुलिस की जनता से अपील: नशा पीड़ितों को छुपाएं नहीं, सामने लाएं मोहाली पुलिस ने आम जनता से भी एक बेहद जरूरी अपील की है। पुलिस ने कहा है कि अगर उनके आसपास या परिवार में कोई व्यक्ति नशे की लत से परेशान है, तो उसे समाज के डर से छुपाने के बजाय इलाज के लिए आगे लाएं। परिवार का साथ और समय पर मिला डॉक्टर का सहयोग किसी भी व्यक्ति को नशे के चंगुल से बाहर निकाल सकता है।
कतर के गैस प्लांट में भयंकर विस्फोट! 12 भारतीयों समेत 13 की मौत, 66 गंभीर रूप से घायल
खाड़ी देश कतर से एक बेहद ही दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। यहां के एक प्रमुख गैस प्लांट में अचानक हुए भीषण विस्फोट (Blast) के कारण चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। इस भयावह औद्योगिक हादसे में अब तक कुल 13 लोगों की मौत होने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से 12 मृतक भारतीय नागरिक बताए जा रहे हैं। धमाका इतना जबरदस्त था कि प्लांट का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गया। स्थानीय प्रशासन और बचाव दलों ने मलबे से अब तक 66 घायलों को बाहर निकाला है, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें से कई श्रमिकों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।गैस लीकेज के बाद आसमान में उठा आग का गुबारस्थानीय चश्मदीदों और शुरुआती जांच रिपोर्टों के अनुसार, यह हादसा गैस प्लांट के एक मुख्य प्रोसेसिंग यूनिट में संदिग्ध गैस लीकेज के कारण हुआ। लीकेज के कुछ ही सेकंड के भीतर वहां एक जोरदार धमाका हुआ, जिसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। धमाके के तुरंत बाद पूरे इलाके में आसमान छूती आग की लपटें और काले धुएं का गुबार छा गया। प्लांट में काम कर रहे सुरक्षाकर्मियों और मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कतर के दमकल विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमों ने कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक जान-माल का भारी नुकसान हो चुका था।पीड़ितों में भारतीय प्रवासियों की संख्या सबसे अधिकइस भीषण त्रासदी ने एक बार फिर खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय मूल के श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता खड़ी कर दी है। कतर में मौजूद भारतीय दूतावास इस पूरी स्थिति पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। दूतावास के अधिकारियों ने कतरी प्रशासन से संपर्क साधकर मृतकों की पहचान सुनिश्चित करने और घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। भारत में रह रहे प्रभावित परिवारों को सूचित करने और उनके शवों को वापस स्वदेश लाने की कानूनी प्रक्रियाओं को तेज कर दिया गया है। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि मरने वाले अधिकांश भारतीय श्रमिक इसी प्लांट में तकनीकी और मैन्युअल विभागों में कार्यरत थे।सुरक्षा मानकों की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठितइस बड़े इंडस्ट्रियल एक्सीडेंट के बाद कतर सरकार ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। गैस कॉर्पोरेशन और स्थानीय मंत्रालय ने इस बात की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं कि क्या प्लांट में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों (Safety Protocols) की अनदेखी की गई थी। ऑटोमैटिक गैस डिटेक्शन और अलार्म सिस्टम ने समय पर काम क्यों नहीं किया, इसकी भी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। इस बीच, कतर में रह रहे भारतीय समुदाय के संगठनों ने भी दुख व्यक्त करते हुए पीड़ितों के परिवारों के लिए मुआवजे और कड़े सुरक्षा नियमों की मांग उठाई है ताकि भविष्य में ऐसी किसी बड़ी लापरवाही से निर्दोष मजदूरों की जान न जाए।
लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में हुए अग्निकांड के बाद जौनपुर जिले में भी सुरक्षा मानकों को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है। जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन ने जिले में मानक के विपरीत संचालित कोचिंग सेंटरों की जांच के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के अनुपालन में, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) परमानंद झा के नेतृत्व में मुख्य अग्निशमन अधिकारी के साथ जिले के आठ कोचिंग सेंटरों की जांच की गई। एडीएम परमानंद झा ने बताया कि सुबह के समय अधिकतर कोचिंग सेंटर बंद पाए गए, जिसके कारण जांच लगभग 10 बजे के बाद शुरू हो सकी। जांच दल ने उन स्थानों का निरीक्षण किया जहां छात्र पढ़ाई करते हैं या लाइब्रेरी के रूप में उपयोग किए जाते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से आपदा या किसी आपात स्थिति में निकासी मार्गों की उपलब्धता की भी जांच की गई। कुछ स्थानों पर व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं, लेकिन अधिकांश कोचिंग सेंटर सुरक्षा मानकों के विपरीत संचालित होते मिले। एडीएम झा ने जानकारी दी कि जांचे गए सेंटरों में से केवल दो ने पंजीकृत होने का दावा किया, लेकिन वे कोई संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए। कई कोचिंग सेंटरों में सीढ़ियों के पास खुले तार जैसी गंभीर सुरक्षा खामियां भी पाई गईं। अपर जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जहां भी खामियां मिली हैं, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। एक विस्तृत जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी, जिसके बाद आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय अपनाए जाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित सेंटरों को नोटिस जारी किए जा सकते हैं या उन्हें बंद करने का आदेश भी दिया जा सकता है। जिले में कुल 37 कोचिंग सेंटर संचालित हैं। भविष्य में कोचिंग सेंटरों के अलावा अस्पतालों और होटलों की भी जांच की जाएगी।
युद्धविराम से आगे: क्या विश्व अहिंसा की ओर बढ़ेगा?
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हाल ही में हुआ युद्धविराम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया युद्ध की लपटों में घिरकर वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका था। कई सप्ताह तक चले संघर्ष ने क्षेत्र को ऐसे ज्वालामुखी में बदल दिया था, जिसकी प्रत्येक विस्फोटक घटना विश्व अर्थव्यवस्था ... Read more
गोरक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा के दौरान ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि यह यात्रा केवल गो माता की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर निकाली जा रही है
कर्णप्रयाग में हुए विवाद को लेकर पंजाब से आए सिख प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड सरकार और पुलिस प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि घटना में शामिल सिख युवकों के साथ अन्याय हुआ है और मामले में एकतरफा कार्रवाई की गई है। रविवार को प्रतिनिधिमंडल हरिद्वार पहुंचा, जहां उसने SSP नवनीत सिंह भुल्लर से मुलाकात की। बातचीत के बाद SSP ने प्रतिनिधिमंडल की फोन पर पुलिस महानिदेशक (DGP) दीपम सेठ से बात कराई। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल देहरादून के लिए रवाना हो गया, जहां वह DGP से मुलाकात करेगा। मामले को लेकर शाम को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ भी बैठक संभावित है। पंजाब से सांसद सर्वजीत सिंह खालसा ने कहा कि उनकी हरिद्वार के एसएसपी से बातचीत हुई है और उनके माध्यम से डीजीपी से भी संपर्क किया है। उन्होंने बताया कि उन्हें आश्वासन दिया गया है कि वे देहरादून जाकर अपनी सभी मांगों और शिकायतों को डीजीपी के समक्ष रख सकते हैं। खालसा ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में मामले में क्रॉस केस दर्ज करना, गिरफ्तार युवकों की रिहाई और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच शामिल है। 'सिख युवकों ने किसी पर हमला नहीं किया' सांसद खालसा ने आगे कहा कि संबंधित सिख युवकों ने किसी पर हमला नहीं किया, बल्कि उन्होंने आत्मरक्षा में कार्रवाई की। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि युवकों ने अपना बचाव नहीं किया होता तो उनके साथ गंभीर अनहोनी हो सकती थी। सांसद ने कहा कि जिन लोगों ने हमला किया, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सीएम धामी से भी इस मामले पर बात की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट में पेशी के दौरान सिख युवकों को बिना दस्तार और नंगे सिर प्रस्तुत किए जाने पर आपत्ति जताई। उनके अनुसार सिख समाज में इसे अत्यंत गंभीर और अपमानजनक माना जाता है। खालसा ने कहा कि सिख समुदाय के लोगों द्वारा कृपाण या तलवार धारण करना उनका संवैधानिक अधिकार है और इसे किसी भी स्तर पर प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। 'सिख युवकों के साथ पक्षपात नहीं होना चाहिए' प्रतिनिधिमंडल में शामिल विधायक मनप्रीत सिंह ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल इतना है कि घटना में शामिल सिख युवकों को न्याय मिले और उनके साथ किसी प्रकार का पक्षपात न किया जाए। उन्होंने बताया कि डीजीपी ने उन्हें मिलने का समय दिया है और वे पूरे मामले को उनके समक्ष विस्तार से रखेंगे। मनप्रीत सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री से भी उनकी पहले बातचीत हो चुकी है और आवश्यकता पड़ने पर वे दोबारा मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं, विशेषकर सिख यात्रियों, को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए तथा दोनों राज्यों में सौहार्द और शांति बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में बसे सिख समुदाय के बीच इस घटना को लेकर रोष व्याप्त है। उनके अनुसार सिख युवकों पर हमला किया गया, बाद में उनके खिलाफ एकतरफा मुकदमा दर्ज किया गया और अदालत में भी उन्हें बिना पगड़ी के पेश किया गया, जिससे समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा भी युवकों के साथ मारपीट की गई, जिसके कारण समुदाय में नाराजगी बढ़ी है। ‘पूरे सिख जगत में रोष और चिंता’ खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने कहा कि पंजाब सहित देश-विदेश में बसे सिख समुदाय के लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले युवकों के साथ मारपीट हुई और उसके बाद पुलिस कार्रवाई के दौरान भी उनके साथ अत्याचार किया गया। तरसेम सिंह ने कहा कि कोर्ट में पेशी के दौरान युवकों के सिर से दस्तार हटाई गई, जिसे सिख धर्म में अत्यंत गंभीर विषय माना जाता है। उन्होंने कहा कि इसी कारण दुनिया भर के सिख समुदाय में इस घटना को लेकर चिंता और असंतोष है। उन्होंने बताया कि पंजाब से कई जत्थे उत्तराखंड आने की इच्छा जता रहे हैं, लेकिन फिलहाल प्रतिनिधिमंडल बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि मामले का शीघ्र समाधान किया जाए, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और गिरफ्तार युवकों को बिना शर्त रिहा किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। एसएसपी बोले- प्रतिनिधिमंडल की मांग वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि पंजाब से आए सांसदों और अन्य प्रतिनिधियों ने प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की इच्छा व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि कर्णप्रयाग में हुए विवाद के संबंध में प्रतिनिधिमंडल किसी वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखना चाहता है। एसएसपी ने बताया कि उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि उनकी बात उचित माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा दी गई है। उन्होंने कहा कि एक प्रतिनिधिमंडल वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात करेगा और आगे की कार्रवाई उसी के अनुरूप की जाएगी। भुल्लर ने स्पष्ट किया कि प्रतिनिधिमंडल की मांगें सीधे तौर पर हरिद्वार से संबंधित नहीं हैं, इसलिए उनके पास सभी बिंदुओं की विस्तृत जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात संबंधी मांग को पुलिस मुख्यालय और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा दिया गया है तथा आगे जो भी निर्णय होगा, उसकी जानकारी साझा की जाएगी। एक दिन पहले गुरुद्वारे पर कब्जा किया उत्तराखंड के चमोली स्थित कर्णप्रयाग में 16 जून को हुए विवाद के बाद शनिवार देर शाम रुद्रप्रयाग के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में पंजाब से आए निहंगों ने कब्जा कर लिया। उन्होंने दो लोगों को बंधक भी बनाया। हालांकि, विवाद बढ़ने पर निहंगों ने एक व्यक्ति को छोड़ दिया, जबकि एक सेवादार को बंधक बनाए रखा। निहंगों ने चेतावनी दी है कि गुरुद्वारे में घुसने वाले को काट देंगे। रविवार सुबह रुद्रप्रयाग के डीएम विशाल मिश्रा निहंगों से बातचीत करने पहुंचे, लेकिन उन्होंने बाचचीत से इनकार कर दिया। इससे पहले एसपी निहारिका तोमर ने दो दौर की बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन बाचचीत विफल रही। गुरुद्वारे के सेवादारों ने बताया कि इस दौरान निहंगों ने एसपी निहारिका तोमर को धमकी दी। सेवादारों के मुताबिक, प्रशासन ने निहंगों को बातचीत के लिए बुलाया, लेकिन उन्होंने नीचे आने से इनकार कर दिया। उन्होंने एसपी से कहा कि यदि कोई ऊपर आया तो उसे काट देंगे। सेवादारों ने प्रशासन से मांग की है कि पकड़े गए लोगों को बिना किसी केस के सम्मानपूर्वक पंजाब भेज दिया जाए। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर गुरुद्वारे के आसपास करीब 15 किलोमीटर क्षेत्र में अगले आदेश तक इंटरनेट सेवा बंद कर दी है। यह इलाका हमेकुंड साहिब के यात्रा मार्ग पर पड़ता है। --------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… उत्तराखंड में निहंग बोले- गुरुद्वारे में घुसने वाले को काट देंगे: एक दिन पहले कब्जा किया, SP समझाने पहुंचीं तो धमकी दी; इंटरनेट बंद, ITBP-PAC तैनात उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में 16 जून को हुए विवाद से नाराज पंजाब के 7 निहंगों ने रुद्रप्रयाग के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में कब्जा कर लिया है। शनिवार देर शाम कब्जे के बाद निहंगों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। निहंगों ने चेतावनी दी है कि गुरुद्वारे में घुसने वाले को काट देंगे और लोगों को गुरुद्वारे के पास नहीं आने को कहा है। (पढ़ें पूरी खबर)
दुनिया में जब जब युद्ध होते हैं एक सवाल ज़रूर उभरता है कि युद्ध से क्या हासिल। फिर यह कहा जाता है कि युद्ध से कुछ हासिल नहीं होता लेकिन फिर भी दुनिया के सबसे ताक़तवर देश सालों तक युद्ध लड़ते रहते हैं। युद्ध करवाने वाले ताकतवर नेता कुछ तो हासिल करते ही होंगे। दर्जनों देशों के प्रभावशाली, प्रशासक, मंत्री अपने अपने तरीकों और चुने हुए शब्दों में समझाते रहते हैं कि युद्ध से बहुत नुकसान हो रहा है, दुनिया की आर्थिक स्थिति परेशान होकर उलझी पड़ी है, हज़ारों मौतें हो चुकी हैं लेकिन युद्ध है कि जारी रखा जाता है। रूस युक्रेन युद्ध इसकी सबसे बड़ी मिसाल है। दूसरी मिसाल है, अमरीका इजराइल ईरान की लड़ाई जिसके सौंवे दिवस के अशुभ अवसर पर अमरीका और ईरान ने एक दूसरे पर हमले किए। मानो या न मानो युद्ध से कुछ तो हासिल हो रहा है। युद्ध विराम और शांति बातचीत की राख के नीचे शोले बुझते ही नहीं, माहौल में तनाव उबलता रहता है युद्ध के ड्रोन मंडराते रहते हैं। युद्ध का सबसे बड़ा हासिल व्याव्सायिक फायदा है। खालिस व्यवसायी राष्ट्रपति, अपना नुक्सान ज़्यादा नहीं होने देंगे, दूसरों का बेड़ा गर्क करवा देंगे। उनके हिसाब से युद्ध भी एक सौदा है। उनकी हर चाल ऐसा दिखाती है। कुछ भी सोच सकते हैं। बड़ा सोचना, ज्यादा मांगना उनकी व्यावसायिक शैली में शामिल है। ज़्यादा मांगेंगे तो ज्यादा मिलेगा, कम मांगोगे तो कम ही मिलने वाला है। उन्हें खुद को खबर बनाना आता है। चर्चा में बनाए रखना आता है। वे व्याव्सायिक राजनीतिज्ञों की तरह परिस्थितियों के सभी दरवाज़े खुले रखते हैं। खूब शोर करते हैं और दूसरों को डराते रहते हैं। कहकर मुकर जाते हैं। जैसा बंदा वैसी डील करने को तत्पर रहते हैं। अब तो वैसे भी हर चीज़ में व्यापार और बाज़ार मिला दिया गया है। बड़ा दांव ज्यादा खतरा लेकिन फायदा भी उसी अनुपात में। आम लोग ही तो मरते हैं, घायल हो जाते हैं, विस्थापित होते हैं। ईमारतें और हथियार तबाह होते रहते हैं फिर नए बनाने के लिए मरम्मत के लिए, उद्योग क्षेत्र को काम मिलता है। कुछ भी हो जाए व्यवसाय फैलता रहता है। महंगाई का कर्तव्य तो हमेशा बढ़ते जाना है। इसे भी पढ़ें: विश्वगुरु न होते हुए (व्यंग्य) अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं हारकर उदास बैठी हैं। युद्ध जारी रखने वाले अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधकों को यह संतुष्टि रहती है कि युद्ध निरंतर है। उन्हें अनिश्चितताओं से घिरी दुनिया से क्या लेना। धार्मिक कट्टरता शत्रुता बढ़े तो बढ़े। राजनीति को तो यह सब फैलाकर ही रखना होता है। कितने ही अनुभवी, यशस्वी नेताओं की सामरिक शक्ति, रुआब और प्रभाव की पोल खुलती जाती है लेकिन युद्ध से उनकी नाक ऊंची रहती है। स्वार्थ पूरा होता है और नकली इज्ज़त बनी रहती है। जो शांति स्थापित करने के लिए युद्ध जारी रखते हैं इतिहास उन्हें भूलता नहीं। क्या फर्क पड़ता है अगर युद्ध के कारण याद रखता है। अगर युद्ध से फायदा न हो तो कई तरह का नुक्सान करने वाले इस खतरनाक काम को कौन महीनों तक करता रहेगा। हर व्यवसाय में छिपे हुए फायदे होते हैं जिनका किसी को भी पता नहीं चलता सिर्फ उन्हें पता होता है जो उनके मालिक होते हैं। युद्ध एक व्यवसाय ही तो है जिसका हासिल, ख़ास लोगों को होने वाला किसी न किसी तरह का अशुभ लाभ है। - संतोष उत्सुक
अमर स्वाभिमान का प्रतीक हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष
Battle of Haldighati: 18 जून भारतीय इतिहास की वह अमर तिथि है, जो केवल एक युद्ध का स्मरण नहीं कराती बल्कि त्याग, स्वाभिमान, साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण की गाथा सुनाती है। यह वह दिन है जब मेवाड़ की धरती पर एक ऐसा संघर्ष हुआ, जिसने इतिहास के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) हर हफ्ते दुनिया भर यूजर्स के सर्च और प्रोफाइल विजिट के आधार पर 'मोस्ट पॉपुलर इंडियन सेलिब्रिटीज' की लिस्ट जारी करता है। आमतौर पर इस लिस्ट के शीर्ष पर वही सुपरस्टार्स नजर आते हैं जिनकी बड़ी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज ...
खाड़ी युद्ध से निपटने की मोदी की तजबीज
मोदीजी ने एक बार फिर राष्ट्र की जनता को उसके कर्तव्यों के प्रति सचेत किया है।
ललित सुरजन की कलम से युद्ध नहीं, शांति चाहिए
जब एक तरफ सिर्फ एक सैनिक की गिरफ्तारी से उपजे भय और रिहाई की घोषणा से मिली राहत है, तब दूसरी तरफ आक्रामक मुद्रा अपनाकर हम क्या हासिल करना चाहते हैं?
युद्धविराम और हाशिए पर धकेल दिया गया भारत
यह युद्ध स्पष्ट रूप से नेतन्याहू की देन है और ट्रम्प इसके परिणामों के बारे में सोचे-समझे बिना ही इसमें फंस गए।
युद्ध के माहौल में विश्व शांति का शंखनाद है विश्व णमोकार दिवस
विश्व णमोकार दिवस- 9 अप्रैल, 2026 विश्व इतिहास के इस संक्रमणकाल में, जब मानवता युद्ध, हिंसा, आतंक, तनाव और असहिष्णुता के बोझ तले कराह रही है, ऐसे समय में 9 अप्रैल 2026 को मनाया जाने वाला विश्व णमोकार मंत्र दिवस एक अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा-विस्फोट के रूप में सामने आ रहा है। यह दिवस केवल एक ... Read more
तीसरे विश्वयुद्ध की आहट और गांधी
इतिहास विजय-पराजय-विनाश का मृत दस्तावेज नहीं है, न वह किसी की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कहानी का विवरण है।
धीरे-धीरे हकीकत में बदल रहे हैं भारत के ईरान युद्ध के डर
ईरान युद्ध को लेकर भारत की सबसे गहरी आर्थिक चिंताएं अब काल्पनिक नहीं रह गई हैं
युद्ध को लेकर मोदी का देश को डराने वाला संदेश
देश में जहां भी और जब भी चुनाव होते हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दूसरे सारे काम छोड़कर अपनी भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार में जुट जाते हैं
युद्ध के माहौल में महावीर के दर्शन की उपादेयता
सदियों पहले महावीर जनमे। वे जन्म से महावीर नहीं थे। उन्होंने जीवन भर अनगिनत संघर्षों को झेला, कष्टों को सहा, दुख में से सुख खोजा और गहन तप एवं साधना के बल पर सत्य तक पहुंचे, इसलिये वे हमारे लिए आदर्शों की ऊंची मीनार बन गये। उन्होंने समझ दी कि महानता कभी भौतिक पदार्थों, सुख-सुविधाओं, ... Read more
युद्धग्रस्त विश्व में महावीर की अहिंसा: शांति की एकमात्र राह
संदर्भ – तीर्थंकर महावीर स्वामी जन्म कल्याणक 2625वां (31 मार्च 2026) आज का विश्व एक विचित्र विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर विज्ञान, तकनीक और वैश्वीकरण ने मानव जीवन को अभूतपूर्व सुविधाएं दी हैं, वहीं दूसरी ओर युद्ध, हिंसा और असहिष्णुता ने मानवता के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विश्व के ... Read more
मिडिल ईस्ट युद्ध ने ट्रम्प की मुश्किलों को बढ़ाया
युद्ध के मामले में अमेरिका-इजरायल की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं।
पश्चिम एशिया युद्ध में परमाणु खतरे के प्रति लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अंतिम घोषित तिथि बढ़ा दी है।
अब युद्धविराम को लालायित ट्रंप
अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह लड़ाई अमेरिका को पहले ही महंगी पड़ रही है
पश्चिम एशिया में युद्ध फैलने से एक और वैश्विक आर्थिक संकट का खतरा
पश्चिम एशिया का संकट अब एक वैश्विक आर्थिक चुनौती में बदल गया है
फैक्ट चेक: इजरायल के डिमोना पर हमले के दावे से इराक का वीडियो हुआ वायरल
बूम ने पाया कि वायरल हो रहा वीडियो इराक के Nasiriyah स्थित एक रेस्टोरेंट में लगी आग का है.
ईरान युद्ध के सबक मौजूदा संघर्ष से कहीं आगे बाजार का आकार तय करेंगे
ऊर्जा बाजार एक ऐसे दौर में जा रहा है, जहां मूल्य निर्धारण मॉडल के आधार पर बनी पारंपरिक धारणाएं संघर्ष के बदलते स्वरूप से पूरी तरह बदल रही हैं
लीजा रे ने दुबई से शेयर की दर्दभरी कविता, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच जताई चिंता
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। हर तरफ धमाकों और सायरन का शोर सुनाई दे रहा है। एक्ट्रेस लीजा रे भी इन हालातों के बीच दुंबई में अपने घर ...
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता, बेटी के साथ सुरक्षित लौटीं भारत, सुनाई आपबीती
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता भी अपनी 14 साल की बेटी सायरा के साथ यूएई में ...
ईरान के अखबार तेहरान टाइम्स ने अपने पहले पन्ने पर एक मार्मिक और भीतर तक झकझोरने वाली तस्वीर छापी है
ईरान युद्ध से भारतीय अर्थव्यवस्था को जोरदार झटका संभव
पश्चिम एशिया में चल रहे व्यापक युद्ध, जिसमें अमेरिका-इज़राइल जोड़ी और ईरान शामिल हैं
ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश ने आपातकालीन कदम उठाए
बांग्लादेश ने आने वाले दिनों में ईंधन की भारी कमी से बचने के लिए पेट्रोल राशनिंग का सहारा लिया है
ललित सुरजन की कलम से - युद्ध नहीं, शांति चाहिए
'एक कटु सत्य है कि भारत ने युद्ध की विभीषिका का बहुत सीमित अनुभव किया है। बातें हम भले ही बड़ी-बड़ी कर लें
एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज़ की '120 बहादुर' को लेकर चर्चा अब अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। फिल्म ट्रेलर ने पूरी तरह से रोमांच और प्रेरणा का सही मिश्रण पेश किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बलिदान दिवस पर मेजर शैतान सिंह ...
War 2 रिव्यू: लचर स्क्रिप्ट और निर्देशन के कारण रितिक और एनटीआर हारे युद्ध, पढ़ें पूरी समीक्षा
रितिक रोशन और एनटीआर स्टारर War 2 ‘स्पाई यूनिवर्स’ की बड़ी पेशकश मानी जा रही थी, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और औसत निर्देशन ने इसे निराशाजनक बना दिया। शानदार एक्शन सीक्वेंस और एनटीआर के दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद फिल्म का सेकंड हाफ बिखर गया। कहानी में ...
सलमान खान की सिकंदर के आखिरी गाने में दिखेगा जबरदस्त जलवा, तुर्की से बुलाए गए 500 डांसर्स!
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की 'सिकंदर' इस साल की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके एक्शन-पैक्ड टीजर ने इसकी भव्य एंट्री के लिए एकदम परफेक्ट माहौल तैयार कर दिया है। भव्य पैमाने पर बनाई गई इस फिल्म में ...
केसरी वीर के लिए सूरज पंचोली ने की कड़ी ट्रेनिंग, ऐसे सीखा युद्ध कौशल
बॉलीवुड एक्टर सूरज पंचोली अपनी पहली बायोपिक में वीर हामीरजी गोहिल के ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने जा रहे हैं। सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय और सूरज पंचोली अभिनीत फिल्म 'केसरी वीर : लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ' का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ...
फरहान अख्तर लेकर आ रहे भारत-चीन युद्ध पर आधारित फिल्म 120 बहादुर, निभाएंगे मेजर शैतान सिंह का रोल
Movie 120 Bahadur : रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट, ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज के साथ मिलकर '120 बहादुर' को पेश करने के लिए उत्साहित हैं। यह फिल्म मेजर शैतान सिंह (पीवीसी) और चार्ली कंपनी, 13 कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिकों की कहानी कहती ...
Adil Hussain: दुनियाभर में इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 की धूम मची हुई है। पेरिस ओलंपिक में दुनियाभर के खिलाड़ियों ने भाग लिया है। भारत के कई खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। हाल ही में तुर्की के शूटर यूसुफ डिकेक ने सिल्वर मेडल जीता।
बॉर्डर की 27वीं सालगिरह पर, अभिनेता सनी देओल ने एक घोषणा वीडियो के ज़रिए फ़्रैंचाइज़ी के दूसरे संस्करण की पुष्टि की है। अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सनी ने बॉर्डर 2 में अपनी वापसी की आधिकारिक घोषणा करते हुए एक वीडियो शेयर किया और इसे 'भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म' बताया। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ''एक फौजी अपने 27 साल पुराने वादे को पूरा करने के बाद, आ रहा है फिर से। भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म, बॉर्डर 2।'' इस फिल्म का निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता करेंगे। आगामी युद्ध फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह करेंगे। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | पति से तकरार के बीच केन्या लौट गई हैं Dalljiet Kaur? शादी को बचाने की कर रही कोशिश सनी द्वारा घोषणा वीडियो शेयर किए जाने के तुरंत बाद, सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए कमेंट सेक्शन में बाढ़ ला दी। एक यूज़र ने लिखा, ''वाह, यह बहुत बढ़िया घोषणा है सर जी, जय हिंद।'' दूसरे ने लिखा, ''बहुत उत्साहित हूँ।'' तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, ''बॉर्डर 2 के लिए बहुत उत्साहित हूं।'' इसे भी पढ़ें: NDA पर इमोशनल बयान, काले सूट में ली मंत्री पद की शपथ और शर्मिला अंदाज, Tripti Dimri की तरह रातों रात भारत के Sensation बन गये Chirag Paswan सनी देओल की अन्य परियोजनाएं उन्हें आखिरी बार अमीषा पटेल के साथ गदर 2 में देखा गया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही और इसे ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर घोषित किया गया। गदर 2 की सफलता के बाद, सनी ने लाहौर 1947 सहित कई फिल्में साइन कीं, जिसे आमिर खान के प्रोडक्शन बैनर के तहत बनाया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जिन्होंने आमिर को कल्ट क्लासिक अंदाज़ अपना अपना (1994) में निर्देशित किया था। View this post on Instagram A post shared by Sunny Deol (@iamsunnydeol)
Kalki 2898 AD: शुरू हो गया नया युद्ध, पूरे ट्रेलर की अहम कड़ी हैं अमिताभ, प्रभास करेंगे इम्प्रेस
Kalki 2898 AD के ट्रेलर को देखें तो, फिल्म कल्कि 2898 एडी के मेकर्स ने विश्वास दिलाया है कि ये फिल्म लोगों को बांधने में कामयाब होगी. टफ सीक्वेंस, क्लियर एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर आपका ध्यान खींचते हैं. वीएफएक्स पर भी अच्छा काम किया गया है.
आशुतोष राणा ने डीपफेक वीडियो को बताया 'माया युद्ध', बोले- ये सालों से चल रहा
आशुतोष ने कहा कि ऐसी बातों में खुद को डिफेंड करने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि जो लोग आपको जानते हैं वो सवाल करेंगे ही नहीं. और जो नहीं जानते, उन्हें किसी रिस्पॉन्स से फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वो दिमाग में आपकी एक छवि बना चुके होते हैं.
रानीति बालाकोट एंड बियॉन्ड: जिमी शेरगिल की नई सीरीज भारत की आधुनिक युद्ध की ऐतिहासिक कहानी को प्रदर्शित करेगी। जिमी शेरगिल दो मिनट के ट्रेलर की शुरुआत पुलवामा हमले की झलक से होती है। एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाने वाले आशीष कहते हैं, ये एक नया रण है या इसे जीतने के लिए एक नई रणनीति की जरूरत है। इसे भी पढ़ें: नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन प्रहार', कमांडर शंकर राव समेत अब तक 79 हुए ढेर, हिट लिस्ट में और भी कई नाम शामिल आगामी वेब शो आधुनिक युद्ध को डिकोड करता है जो केवल भौतिक सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता है बल्कि सोशल मीडिया, डिजिटल रणनीति और गुप्त राजनीतिक चालों के क्षेत्र से परे है जो भू-राजनीति को नया आकार देने की शक्ति रखता है। वेब श्रृंखला उन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है जिन्होंने 2019 में देश को हिलाकर रख दिया था। शो में कुछ हवाई दृश्य, शानदार प्रदर्शन और एक शक्तिशाली कथा है जो युद्ध के मैदान के अंदर और बाहर हर पहलू को चतुराई से पकड़ती है। इसे भी पढ़ें: Biden को सोचना पड़ेगा फिर एक बार, Iran पर प्रहार तो रूस करेगा पलटवार, रक्षा मंत्रायल ने चिट्ठी लिखकर जता दी मंशा आगामी वेब श्रृंखला के बारे में बात करते हुए, जिमी ने कहा: यह मेरे द्वारा अतीत में की गई किसी भी भूमिका से भिन्न है। कम से कम यह कहना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन भारत की पहली वॉर-रूम केंद्रित वेब-श्रृंखला का हिस्सा बनना बेहद संतोषजनक भी है। वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित जिसने देश को हिलाकर रख दिया। एनएसए प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए, आशीष ने कहा, एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन रक्षा बलों के कुछ सदस्यों के साथ बैठकों ने मुझे अपने चरित्र की बारीकियों को समझने में मदद की। तैयारी कार्य और कार्यशालाएं मुझे वापस ले गईं मेरे एनएसडी के दिनों में। संतोष सिंह द्वारा निर्देशित, श्रृंखला का निर्माण स्फीयरओरिजिन्स मल्टीविजन प्राइवेट लिमिटेड के सुंजॉय वाधवा और कॉमल सुंजय डब्ल्यू द्वारा किया गया है। इसमें प्रसन्ना भी हैं। शो का प्रीमियर 25 अप्रैल को JioCinema पर होगा।
आखिर क्यों Indira Gandhi ने Aandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध, आज भी देखने से कतराते हैं लोग
आखिर क्यों Indira Gandhi नेAandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध,आज भी देखने से कतराते हैं लोग
'सावरकर' रिव्यू: खोखली, एकतरफा फिल्म में एकमात्र अच्छी चीज है रणदीप हुड्डा का काम
आज के दौर में 'गुमनाम' हो चुके एक स्वतंत्रता नायक की कहानी कहने निकली ये फिल्म, एक अनजान कहानी बताने से ज्यादा अपने हीरो विनायक दामोदर सावरकर को बाकियों के मुकाबले अधिक 'वीर' बताने पर फोकस करने लगती है.
अस्तित्व और बदले के लिएब्रह्मांड में शुरू होने वाला है महायुद्ध, एक्शन और रोमांच से भरपूर हैRebel Moon 2 का धांसू ट्रेलर

