लेबनान से नहीं हटेंगे इजरायली सैनिक, अमेरिका-ईरान शांति समझौते से इजरायल को किस बात का डर
पश्चिम एशिया में शांति की बहाली के लिए अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को गहरी चिंता में डाल दिया है। हाल ही में हुए 14-सूत्रीय समझौते (MoU) के बाद जहां दुनिया उम्मीद कर रही है कि तनाव कम होगा, वहीं इजरायल को लग रहा है कि यह समझौता लेबनान में ईरान और उसके सहयोगी हिजबुल्लाह को नई ताकत दे सकता है। इसी आशंका के चलते नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि इजरायली सेना तब तक दक्षिणी लेबनान से नहीं हटेगी जब तक उन्हें अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए वहां मौजूदगी जरूरी महसूस होगी।क्या है विवाद की जड़?फरवरी 2026 में अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के साथ शुरू हुआ यह संघर्ष अब एक नए कूटनीतिक मोड़ पर है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए ताजा समझौता ज्ञापन (MoU) में युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने और लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित करने की बात कही गई है। हालांकि, इजरायल इसे एक खतरे के रूप में देख रहा है। इजरायली सरकार को शक है कि इस समझौते की आड़ में वाशिंगटन लेबनान में ईरान के प्रभाव को अनजाने में मजबूत कर रहा है, जो भविष्य में इजरायल की सुरक्षा के लिए घातक हो सकता है।इजरायल को सता रहा है इन तीन बड़े खतरों का डरइजरायली रणनीतिकारों और सरकारी सूत्रों का मानना है कि यह समझौता इजरायल की सैन्य क्षमता को सीमित कर सकता है:सैन्य कार्रवाई पर लगाम: अब तक इजरायल हिजबुल्लाह के ठिकानों पर जब चाहे हमला करने को स्वतंत्र था। उन्हें डर है कि अब वाशिंगटन हर हमले पर आपत्ति दर्ज कराएगा और इजरायल की 'ऑपरेशनल फ्रीडम' खत्म हो जाएगी।सैनिकों की वापसी का दबाव: ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि ट्रंप प्रशासन इजरायल पर दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना हटाने का दबाव बना सकता है, जिसे नेतन्याहू मानने को तैयार नहीं हैं।हिजबुल्लाह को संजीवनी: इजरायल का मानना है कि यह समझौता हिजबुल्लाह के खिलाफ जारी संयुक्त प्रयासों को कमजोर कर रहा है, जिससे आतंकी संगठन को फिर से संगठित होने का मौका मिल सकता है।'बीबी' की बढ़ती बेचैनीसूत्रों के मुताबिक, नेतन्याहू—जिन्हें इजरायल में प्यार से 'बीबी' कहा जाता है—इस समझौते को लेकर बेहद परेशान हैं। इजरायल का तर्क है कि इस अंतरिम समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से ज्यादा खतरनाक 'लेबनान वाला हिस्सा' है। इजरायली सरकार का मानना है कि अमेरिका और ईरान की यह नजदीकी न केवल सुरक्षा संतुलन को बिगाड़ रही है, बल्कि इससे इजरायल की भविष्य की सुरक्षा रणनीति भी दांव पर लग गई है। अब देखना यह है कि क्या ट्रंप प्रशासन इजरायल के इन संदेहों को दूर कर पाएगा या नेतन्याहू अपनी सुरक्षा नीतियों पर अडिग रहेंगे।
नर्मदापुरम में मंगलवार को जिला कांग्रेस कमेटी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र और राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी, मूंग खरीदी और खाद-यूरिया की किल्लत जैसे कई बड़े मुद्दों को उठाया। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष शिवाकांत पांडेय के नेतृत्व में निजी होटल में यह कॉन्फ्रेंस रखी गई थी। बिना पेपर लीक कराए एक परीक्षा नहीं करवा पा रही सरकार पूर्व विधायक गिरजाशंकर शर्मा ने नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक मामले पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पहले पेपर लीक होना और फिर दोबारा परीक्षा कराना, देश के लाखों छात्र-छात्राओं के भविष्य और उनकी मेहनत के साथ खिलवाड़ है। हालात इतने खराब हैं कि सरकार बिना किसी गड़बड़ी या पेपर लीक के एक भी परीक्षा ठीक से नहीं करवा पा रही है। परीक्षा केंद्र थे या कोई युद्ध का मैदान? गिरजाशंकर शर्मा ने दोबारा हुई नीट परीक्षा के इंतजामों पर तंज कसते हुए कहा कि परीक्षा कराने के लिए सेना की मदद लेनी पड़ी। परीक्षा केंद्रों पर इतनी पाबंदियां और इतनी ज्यादा सुरक्षा लगाई गई, मानो वहां कोई परीक्षा नहीं बल्कि कोई युद्ध या आतंकी हमला होने वाला हो। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि इतनी सख्त पाबंदी थी कि महज एक मिनट की देरी से पहुंचने वाले बच्चों को भी अंदर नहीं जाने दिया गया। भाजपा नेताओं पर लगाया 'बंदरबांट' का आरोप कांग्रेस ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि नीट का पेपर बनाने से लेकर परीक्षा आयोजित कराने तक, नीचे से लेकर ऊपर तक भाजपा के लोग शामिल हैं। पूर्व विधायक ने कहा कि सब कुछ ऊपर से पहले से ही तय रहता है कि पेपर कहां छपेगा और किन अपने लोगों को अच्छी जगहों पर बैठाना है। इसके बाद जो करोड़ों रुपयों का भ्रष्टाचार होता है, उसकी आपस में बंदरबांट की जाती है। कांग्रेस नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब पहली बार पेपर लीक हुआ, तो किसी ने भी इसकी जिम्मेदारी नहीं ली। लेकिन जब सेना की मदद से दोबारा परीक्षा कराई गई, तो शिक्षा मंत्री तुरंत आगे आ गए और श्रेय (क्रेडिट) लेते हुए कहने लगे कि दूसरी परीक्षा में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। स्थानीय मुद्दों पर भी घेरा नीट परीक्षा के अलावा जिला कांग्रेस कमेटी ने नर्मदापुरम के स्थानीय किसानों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इलाके के किसान इस समय मूंग खरीदी की समस्याओं, खाद और यूरिया की भारी किल्लत से परेशान हैं, लेकिन सरकार उनकी सुध नहीं ले रही है।
पंजाब को नशा मुक्त बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के तहत मंगलवार को फरीदकोट के अशोक चक्र हॉल में एक जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस अहम बैठक की अध्यक्षता पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और राजस्व एवं पुनर्वास मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने संयुक्त रूप से की। बैठक में विधायक गुरदित्त सिंह सेखों, विधायक अमोलक सिंह, डिप्टी कमिश्नर राहुल चाबा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और ग्रामीण समितियों के सदस्य मौजूद रहे। नशा तस्करों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति: स्पीकर संधवां इस मौके पर विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा नशों के खिलाफ शुरू किया गया यह महा-अभियान अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। उन्होंने नशा तस्करों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि इस काले धंधे में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पूरी सख्ती से लागू की जा रही है। उन्होंने जोर दिया कि नशों के खिलाफ यह लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है। सरकारी केंद्रों में मिल रहा मुफ्त इलाज और बढ़ रही जागरूकता बैठक को संबोधित करते हुए विधायक गुरदित्त सिंह सेखों ने कहा कि नशे की लत का शिकार हो चुके लोगों का इलाज पूरी तरह संभव है। ऐसे व्यक्तियों को सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिल करवाकर सरकार द्वारा मुफ्त उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, विधायक अमोलक सिंह ने कहा कि जमीनी स्तर पर इस अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और अब युवाओं में नशों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता पहले से कहीं अधिक बढ़ी है। समागम के दौरान नगर सुधार ट्रस्ट के चेयरमैन गगनदीप सिंह धालीवाल ने भी अपने विचार साझा किए। गांव-गांव में बनेंगे खेल स्टेडियम: कैबिनेट मंत्री मुंडियां कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने साफ शब्दों में कहा कि पंजाब से नशे के पूर्ण खात्मे तक यह अभियान इसी तरह लगातार जारी रहेगा। उन्होंने सरकार की भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा में लगाने और उन्हें नशों से दूर रखने के लिए पंजाब सरकार गांव-गांव में खेल स्टेडियमों का निर्माण करवा रही है। इसका मकसद युवाओं को खेलों के बेहतर अवसर प्रदान करना है ताकि वे एक स्वस्थ और बेहतर जीवन की ओर अग्रसर हो सकें।
मोहाली पुलिस ने 'युद्ध नशों के विरुद्ध' अभियान के तहत संवेदनशीलता दिखाते हुए एक युवक को नई जिंदगी देने की अनूठी पहल की है। पुलिस ने नशे की लत से जूझ रहे एक युवक को गिरफ्तार करने या सजा देने के बजाय, उसे नशा मुक्ति केंद्र (रिहैब सेंटर) में भर्ती कराया है ताकि उसका उचित उपचार हो सके। पुलिस का यह कदम उनके मानवीय चेहरे को दर्शाता है। परिवार से संपर्क कर इलाज के लिए किया तैयार पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, नशे की समस्या सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौती है। इसी सोच के साथ पुलिस ने इस युवक की पहचान की, उसके परिवार से संपर्क साधा और काउंसलिंग के जरिए युवक को इलाज कराने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया। सही मार्गदर्शन से अपराध की राह पर जाने से बचेंगे युवा अधिकारियों ने बताया कि कई युवा सही समय पर सही सलाह और इलाज न मिलने के कारण अपराध और गंभीर बीमारियों के दलदल में धंस जाते हैं। ऐसे में युवाओं को समय पर इलाज मिलना बहुत जरूरी है ताकि वे मुख्यधारा में लौटकर एक सामान्य जीवन जी सकें। पुलिस का मानना है कि नशा मुक्ति की यह लड़ाई सिर्फ तस्करों को पकड़ने से नहीं, बल्कि पीड़ितों के पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) से ही जीती जा सकती है। पुलिस की जनता से अपील: नशा पीड़ितों को छुपाएं नहीं, सामने लाएं मोहाली पुलिस ने आम जनता से भी एक बेहद जरूरी अपील की है। पुलिस ने कहा है कि अगर उनके आसपास या परिवार में कोई व्यक्ति नशे की लत से परेशान है, तो उसे समाज के डर से छुपाने के बजाय इलाज के लिए आगे लाएं। परिवार का साथ और समय पर मिला डॉक्टर का सहयोग किसी भी व्यक्ति को नशे के चंगुल से बाहर निकाल सकता है।
ईरान युद्ध में इजराइल और महाशक्ति अमेरिका से भी ज्यादा भारतीय नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं। यह बेहद चौंकाने वाली और दर्दनाक हकीकत तब सामने आई है, जब भारत इस विनाशकारी जंग में किसी भी तरह से शामिल नहीं है। सोमवार (22 जून, 2026) को कतर के रास लाफान पर हुए एक भीषण हमले में 12 भारतीय कामगारों की मौत हो गई, जिसके बाद इस युद्ध की चपेट में आकर मरने वाले बेकसूर भारतीयों की कुल संख्या 25 पर पहुंच गई है। वहीं, अगर जंग में सीधे तौर पर शामिल देशों की बात करें, तो इस लड़ाई में अब तक अमेरिका के 13 और इजराइल के 24 नागरिक मारे गए हैं। इस युद्ध की विभीषिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इजराइल के हमलों से अब तक सबसे ज्यादा लेबनान के 4 हजार और ईरान के 3600 लोग मारे जा चुके हैं।इस खाड़ी युद्ध की शुरुआत इसी साल 28 फरवरी को हुई थी। इन चंद महीनों की जंग में ईरान को बहुत बड़े झटके लगे हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई से लेकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के प्रमुख मोहम्मद पाकपूर और ईरान सर्वोच्च सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारिजानी जैसे शीर्ष नेताओं की इस युद्ध में हत्या की जा चुकी है।कब और कहां कितने भारतीयों ने गंवाई अपनी जान?कतर के रास लाफान में हुए ताजा हमले में 12 भारतीयों की मौत के अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में भी भारत के 6 नागरिक मारे गए हैं। होर्मुज में हुए एक अमेरिकी हमले में 3 भारतीय नागरिकों की मौत हो गई थी, जिस पर भारत सरकार ने अमेरिका के खिलाफ बेहद कड़ी नाराजगी जाहिर की थी। खुद भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री को फोन कर इस पर कड़ा विरोध और प्रतिरोध दर्ज कराया था। इसके अलावा कतर में ही पिछले दिनों हुए एक अन्य हमले में एक भारतीय की मौत हुई थी, जबकि एक भारतीय की मौत कुवैत में ईरानी हमले के दौरान हुई थी। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भी भारतीय नागरिक इस युद्ध का शिकार बन चुके हैं। इन सब को मिलाकर अब तक कुल 25 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है।युद्ध में इजराइल और अमेरिका से ज्यादा भारतीय क्यों मारे गए?बिना किसी दुश्मनी और बिना युद्ध में शामिल हुए भारतीयों की इतनी बड़ी तादाद में मौत के पीछे तीन सबसे मुख्य और जमीनी कारण हैं:कुवैत और यूएई पर अंधाधुंध हमले और इजराइली बंकर: ईरान ने इस जंग के दौरान इजराइल से कहीं ज्यादा कुवैत और यूएई के इलाकों को निशाना बनाया है। इजराइल पर ईरान ने सिर्फ शुरुआत में ही कुछ बड़े अटैक किए थे, जिसमें कुछ इजराइली नागरिक मारे गए। इसके तुरंत बाद इजराइल ने अपने सभी नागरिकों को बेहद सुरक्षित अंडरग्राउंड बंकरों में शिफ्ट कर दिया, जिसके कारण ईरान इजराइल के नागरिकों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाया। दूसरी तरफ, दूरदर्शी अमेरिका ने जंग छिड़ने के संकेत मिलते ही अपने नागरिकों को खाड़ी देशों से वापस बुला लिया था, इसलिए जंग में सिर्फ अमेरिकी सैनिक ही हताहत हुए हैं।खाड़ी देशों में प्रवासियों की भारी तादाद: खाड़ी (Gulf) के देशों में भारतीय मूल के लोगों की आबादी बहुत बड़ी है। आंकड़ों के मुताबिक, सऊदी अरब में करीब 27 लाख और यूएई में 43 लाख भारतीय रहते हैं। इसी तरह कुवैत में 10 लाख और कतर में 8 लाख प्रवासी भारतीय कार्यरत हैं। कतर का रास लाफान जहां सोमवार को हमला हुआ, वह एक बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है और वहां भारी संख्या में भारतीय मजदूर और इंजीनियर काम करते हैं, जो सीधे तौर पर इस हमले की चपेट में आ गए।होर्मुज में फंसे जहाजों पर भारतीय क्रू मेंबर्स: होर्मुज की खाड़ी में जो व्यापारिक जहाज फंसे हुए हैं, उनमें काम करने वाले अधिकांश कामगार और नाविक भारतीय ही हैं। हालिया डेटा के अनुसार, इस डेंजर जोन में फंसे लगभग 550 जहाजों पर 18 हजार से ज्यादा भारतीय कामगार मौजूद हैं। जब भी इन जहाजों पर हवाई या मिसाइल हमले होते हैं, तो वहां तैनात भारतीय इसकी चपेट में आ जाते हैं।बेकसूर भारतीयों की इन मौतों के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है?इस खाड़ी युद्ध में मारे गए कुल भारतीयों में से आधे से अधिक लोगों की मौत सीधे तौर पर ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों की वजह से हुई है। वहीं, 3 भारतीयों की मौत अमेरिकी सेना के हमले में हुई। अमेरिका ने इसी महीने की शुरुआत में होर्मुज की नाकाबंदी को पार करने की कोशिश कर रहे एक संदिग्ध वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाया था, जिसमें भारतीय सवार थे। इसके विपरीत रास लाफान, कुवैत और कतर के रिहायशी व औद्योगिक इलाकों में जो भारतीय मारे गए हैं, वो ईरान के हमलों का शिकार हुए हैं। हालांकि, वैश्विक दबाव के बीच दोनों ही देशों (अमेरिका और ईरान) ने सफाई देते हुए कहा है कि ये मौतें सक्रिय युद्ध क्षेत्र (War Zone) में होने के कारण हुई हैं, यानी किसी भी भारतीय को जानबूझकर या टारगेट करके नहीं मारा गया है।
कतर के गैस प्लांट में भयंकर विस्फोट! 12 भारतीयों समेत 13 की मौत, 66 गंभीर रूप से घायल
खाड़ी देश कतर से एक बेहद ही दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। यहां के एक प्रमुख गैस प्लांट में अचानक हुए भीषण विस्फोट (Blast) के कारण चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। इस भयावह औद्योगिक हादसे में अब तक कुल 13 लोगों की मौत होने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से 12 मृतक भारतीय नागरिक बताए जा रहे हैं। धमाका इतना जबरदस्त था कि प्लांट का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गया। स्थानीय प्रशासन और बचाव दलों ने मलबे से अब तक 66 घायलों को बाहर निकाला है, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें से कई श्रमिकों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।गैस लीकेज के बाद आसमान में उठा आग का गुबारस्थानीय चश्मदीदों और शुरुआती जांच रिपोर्टों के अनुसार, यह हादसा गैस प्लांट के एक मुख्य प्रोसेसिंग यूनिट में संदिग्ध गैस लीकेज के कारण हुआ। लीकेज के कुछ ही सेकंड के भीतर वहां एक जोरदार धमाका हुआ, जिसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। धमाके के तुरंत बाद पूरे इलाके में आसमान छूती आग की लपटें और काले धुएं का गुबार छा गया। प्लांट में काम कर रहे सुरक्षाकर्मियों और मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कतर के दमकल विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमों ने कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक जान-माल का भारी नुकसान हो चुका था।पीड़ितों में भारतीय प्रवासियों की संख्या सबसे अधिकइस भीषण त्रासदी ने एक बार फिर खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय मूल के श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता खड़ी कर दी है। कतर में मौजूद भारतीय दूतावास इस पूरी स्थिति पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। दूतावास के अधिकारियों ने कतरी प्रशासन से संपर्क साधकर मृतकों की पहचान सुनिश्चित करने और घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। भारत में रह रहे प्रभावित परिवारों को सूचित करने और उनके शवों को वापस स्वदेश लाने की कानूनी प्रक्रियाओं को तेज कर दिया गया है। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि मरने वाले अधिकांश भारतीय श्रमिक इसी प्लांट में तकनीकी और मैन्युअल विभागों में कार्यरत थे।सुरक्षा मानकों की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठितइस बड़े इंडस्ट्रियल एक्सीडेंट के बाद कतर सरकार ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। गैस कॉर्पोरेशन और स्थानीय मंत्रालय ने इस बात की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं कि क्या प्लांट में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों (Safety Protocols) की अनदेखी की गई थी। ऑटोमैटिक गैस डिटेक्शन और अलार्म सिस्टम ने समय पर काम क्यों नहीं किया, इसकी भी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। इस बीच, कतर में रह रहे भारतीय समुदाय के संगठनों ने भी दुख व्यक्त करते हुए पीड़ितों के परिवारों के लिए मुआवजे और कड़े सुरक्षा नियमों की मांग उठाई है ताकि भविष्य में ऐसी किसी बड़ी लापरवाही से निर्दोष मजदूरों की जान न जाए।
युद्धविराम से आगे: क्या विश्व अहिंसा की ओर बढ़ेगा?
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हाल ही में हुआ युद्धविराम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया युद्ध की लपटों में घिरकर वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका था। कई सप्ताह तक चले संघर्ष ने क्षेत्र को ऐसे ज्वालामुखी में बदल दिया था, जिसकी प्रत्येक विस्फोटक घटना विश्व अर्थव्यवस्था ... Read more
नेतन्याहू का बड़ा बयान, दक्षिणी लेबनान में आईडीएफ को कार्रवाई की पूरी छूट
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि दक्षिणी लेबनान में तैनात इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) के सैनिकों को अपने खिलाफ या उत्तरी इजरायल के निवासियों के खिलाफ किसी भी सीधे या उभरते खतरे को रोकने के लिए पूरी कार्रवाई की स्वतंत्रता है।
दुनिया के सबसे बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) उत्पादक देशों में शुमार कतर से एक बेहद परेशान करने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। कतर के सबसे प्रमुख और विशालकाय औद्योगिक शहर रास लफान (Ras Laffan Industrial City) स्थित सबसे बड़े गैस प्रोसेसिंग प्लांट में एक भीषण धमाका हुआ है। धमाका इतना जोरदार था कि इसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई और देखते ही देखते प्लांट से हाहाकारी लपटें और काले धुएं का विशाल गुबार आसमान की तरफ उठने लगा। इस अप्रत्याशित हादसे के बाद पूरे औद्योगिक परिसर और आस-पास के रिहायशी इलाकों में हड़कंप मच गया है और चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल देखा जा रहा है।रास लफान कॉम्प्लेक्स में इमरजेंसी घोषित और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरूहादसे की भयावहता को देखते हुए कतर की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों और रास लफान के फायर एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने पूरे इंडस्ट्रियल टाउनशिप में रेड अलर्ट और इमरजेंसी घोषित कर दी है। दर्जनों फायर टेंडर्स और एम्बुलेंस को तुरंत मौके पर रवाना किया गया है। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, आग की लपटों पर काबू पाने और प्लांट के भीतर फंसे कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। कतरी अधिकारियों की ओर से अभी तक हादसे में हताहत होने वाले लोगों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं की गई है, लेकिन रिफाइनरी और गैस यूनिट्स को एहतियातन पूरी तरह से शटडाउन कर दिया गया है।वैश्विक एलएनजी सप्लाई ठप होने का डर और भारत की बढ़ेगी टेंशनरास लफान इंडस्ट्रियल सिटी सिर्फ कतर के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) के लिए रीढ़ की हड्डी मानी जाती है। यहीं से दुनिया के कोने-कोने में गैस का निर्यात किया जाता है। दिल्ली, मुंबई सहित भारत के विभिन्न हिस्सों में आयात होने वाली एलएनजी का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी प्लांट से आता है। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस धमाके के कारण प्लांट को भारी नुकसान पहुंचा है और उत्पादन लंबे समय के लिए ठप होता है, तो वैश्विक बाजार में प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिससे भारत जैसी निर्भर अर्थव्यवस्थाओं का बजट बिगड़ सकता है।तकनीकी खराबी या कुछ और, जांच में जुटी कतर की सुरक्षा एजेंसियांइस भीषण विस्फोट की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी तक कतर गैस या सरकारी स्तर पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। कतर की सुरक्षा एजेंसियां इस बात की गहन जांच कर रही हैं कि यह हादसा किसी तकनीकी खराबी, गैस पाइपलाइन में लीकेज या प्रेशर बढ़ने की वजह से हुआ है या फिर इसके पीछे कोई अन्य बाहरी कारण है। दुनिया भर के कमोडिटी मार्केट, शेयर बाजारों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विश्लेषकों की नजरें इस वक्त दोहा से आने वाले हर छोटे-बड़े अपडेट पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इस हादसे के कूटनीतिक और आर्थिक असर बेहद व्यापक हो सकते हैं।
ट्रंप की खुली चेतावनी: सुधर जाओ वरना होगा अब तक का सबसे बड़ा हमला, ईरान से बढ़ा महायुद्ध का खतरा
वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे से इस वक्त की बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया और बेहद आक्रामक बयान ने मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) सहित पूरी दुनिया में युद्ध की आशंका को गहरा कर दिया है। ट्रंप ने ईरान को बेहद सख्त लहजे में नई धमकी देते हुए साफ कर दिया है कि अगर वह अपनी परमाणु और सैन्य गतिविधियों को तुरंत नहीं रोकता है, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। अमेरिकी प्रशासन की ओर से संकेत दिए गए हैं कि यदि ईरान इस अंतिम चेतावनी के बाद भी नहीं माना, तो उस पर एक ऐसा सैन्य हमला किया जाएगा जो इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया है।ट्रंप के सख्त तेवर और व्हाइट हाउस की नई रणनीतिअंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच पहले से जारी तनाव अब अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर आ चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने ताजा संबोधन में कहा है कि उनकी सरकार किसी भी कीमत पर अमेरिकी हितों और उसके सहयोगी देशों, विशेष रूप से इजरायल की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगी। इस बयान के बाद पेंटागन और अमेरिकी रक्षा विभाग ने भी अपनी रणनीतियों को री-चेक करना शुरू कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख सिर्फ एक चेतावनी नहीं बल्कि एक बड़ी सैन्य कार्रवाई की पूर्वपीठिका भी हो सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच सीधे टकराव का रास्ता खुल सकता है।मिडल ईस्ट में हाई अलर्ट और वैश्विक बाजारों पर असरट्रंप की इस नई धमकी के बाद पूरे मिडल ईस्ट के देशों में भारी हलचल देखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रख दिया गया है। इस बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) का सीधा असर नई दिल्ली, मुंबई, लंदन और न्यूयॉर्क समेत दुनिया भर के शेयर बाजारों और कमोडिटी मार्केट पर भी दिखने लगा है। विशेषज्ञों को डर है कि अगर दोनों देशों के बीच तनाव और अधिक बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के आयात बिल और महंगाई दर पर पड़ेगा।क्या युद्ध टालने के लिए आगे आएंगे वैश्विक संगठनइस बेहद तनावपूर्ण स्थिति के बीच संयुक्त राष्ट्र (UN) और दुनिया के अन्य प्रमुख देश जैसे भारत, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ लगातार दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं। हालांकि, ईरान की ओर से भी अभी तक कोई नरमी के संकेत नहीं मिले हैं, जिससे कूटनीतिक रास्ते बंद होते दिखाई दे रहे हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान अमेरिकी शर्तों के आगे झुकेगा या फिर दुनिया को एक और भीषण महायुद्ध का सामना करना पड़ेगा। आने वाले कुछ दिन वैश्विक शांति और स्थिरता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।
कतर में फैक्टरी में विस्फोट से 54 घायल, 18 लापता
दोहा। कतर की एक फैक्टरी में विस्फोट होने से कम से कम 54 लोग घायल हो गये और 18 लापता हैं। देश के आंतरिक मंत्रालय ने सोमवार तड़के सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि यह विस्फोट तकनीकी खराबी के कारण रास लफ्फान औद्योगिक शहर में हुआ। इसके बाद लापता लोगों की […] The post कतर में फैक्टरी में विस्फोट से 54 घायल, 18 लापता appeared first on Sabguru News .
कतर के रास लाफान गैस प्लांट में धमाका: 54 लोग घायल, 18 लापता, बचाव अभियान तेज
कतर के मुख्य प्राकृतिक गैस निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर में हुए एक धमाके में कम से कम 54 लोग घायल हो गए, जबकि 18 अन्य लोग लापता हैं।
रास लाफान क्षेत्र स्थित बरजान गैस आपूर्ति संयंत्र को ईरान के साथ संघर्ष के दौरान हुए हमलों में भारी नुकसान पहुंचा था। इसके बाद सुरक्षा कारणों से उत्पादन गतिविधियों को रोक दिया गया था।
गोरक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा के दौरान ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि यह यात्रा केवल गो माता की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर निकाली जा रही है
FIFA वर्ल्ड कप 2026 में आज रात अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी और फ्रांस के किलियन एम्बापे खेलते दिखेंगे। अर्जेंटीना का मुकाबला ऑस्ट्रिया से रात 10:30 बजे से डलास स्टेडियम में खेला जाएगा। पिछले मैच में हैट्रिक गोल करने वाले मेसी से फिर अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी। दूसरा मैच फ्रांस और इराक के बीच रात 2:30 बजे से फिलाडेल्फिया स्टेडियम में होगा। नॉर्वे और सेनेगल का मैच सुबह 5:30 बजे से, जबकि जॉर्डन और अल्जीरिया का मुकाबला सुबह 8:30 बजे से खेला जाएगा। मैच-43: लगातार दूसरी जीत के इरादे से उतरेगी चैंपियन अर्जेंटीना ग्रुप-J में शामिल डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना का मुकाबला ऑस्ट्रिया से होगा। इनके बीच दो फेंडली मैच खेले गए हैं। 1980 के मैच में अर्जेंटीना ने 5-1 से जीत दर्ज की थी। वहीं 1990 में मुकाबला 1-1 से ड्रॉ रहा था। अर्जेंटीना ने इस टूर्नामेंट के पहले मैच में लियोनेल मेसी के हैट्रिक गोल की बदौलत अल्जीरिया को 3-0 से हराया था। वहीं ऑस्ट्रिया ने जॉर्डन के खिलाफ 3-1 से जीत दर्ज की थी। अर्जेंटीना को कप्तान लियोनेल मेसी से फिर गोल की उम्मीद होगी। वहीं रोड्रिगो डी पॉल और अल्वारेज भी अच्छा प्रदर्शन करना चाहेंगे। वहीं स्टार डेविड अलाबा और मार्सेल सबित्जर के कंधों पर ऑस्ट्रिया की जिम्मेदारी होगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: अर्जेंटीना: एमिलियानो मार्टिनेज, नाहुएल मोलिना, क्रिस्टियन रोमेरो, लिसैंड्रो मार्टिनेज, फैकुंडो मदीना, रोड्रिगो डी पॉल, एलेक्सिस मैक एलिस्टर, एन्जो फर्नांडीज, थियागो अल्माडा, लियोनेल मेसी, जूलियन अल्वारेज। ऑस्ट्रिया: श्लेगर, म्वेने, डैनसो, लियनहार्ट, पोश, सीवाल्ड, लैमर, सबित्ज़र, बाउमगार्टनर, श्मिड, अरनाउतोविच। मैच-42: इराक के सामने एम्बापे की चुनौती ग्रुप-I में शामिल फ्रांस और इराक की टीमें पहली बार किसी इंटरनेशनल मैच में आमने-सामने होंगी। फ्रांस ने अपने पहले मैच में सेनेगल को 3-1 से हराकर दमदार शुरुआत की थी। दूसरी तरफ इराक को नार्वे से 1-4 की हार झेलनी पड़ी थी। फ्रांस को कप्तान और स्ट्राइकर किलियन एम्बाप्पे से गोल की उम्मीद होगी। एम्बापे और गोलकीपर माइक मैग्नन का अच्छा प्रदर्शन टीम की जीत तय कर सकते हैं। वहीं इराक को अपने स्टार फॉरवर्ड अयमान हुसैन से काउंटर-अटैक में गोल दागने की उम्मीद होगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: फ्रांस: मैग्नन, कुंडे, उपामेकानो, सालिबा, हर्नांडीज, चुआमेनी, कैमाविंगा, ग्रीजमैन, डेम्बेले, बारकोला, किलियन एम्बाप्पे। इराक: हाशिम, अली, सुलाका, अदन, अल-हज्जाज, रशीद, अमारी, इकबाल, जसीम, रेसान, अयमान हुसैन। मैच-41: इनफॉर्म अर्लिंग हालैंड को रोकने उतरेगी सेनेगल ग्रुप-I में शामिल नार्वे का सामना सेनेगल से होगा। वर्ल्ड कप के मंच पर दोनों टीमें पहली बार टकराएंगी। दोनों टीमें सिर्फ एक बार इंटरनेशनल फ्रेंडली मैच में आमने-सामने थीं, जहां सेनेगल ने जीत दर्ज की थी। नार्वे के स्टार स्ट्राइकर अर्लिंग हालैंड जबरदस्त फॉर्म में हैं, जिन्होंने इराक के खिलाफ हैट्रिक जमाई थी। यह मैच नॉर्वे ने 4-1 से जीता था। वहीं सेनेगल पहला मैच फ्रांस से 1-3 से हारी थी। अर्लिंग हालैंड और कप्तान मार्टिन ओडेगार्ड की जोड़ी नार्वे की सबसे बड़ी ताकत है। वहीं सेनेगल सादियो माने और निकोलस जैक्सन पर निर्भर है। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: नार्वे: नाइलैंड, रायरसन, अयेर, हेगम, वोल्फ, एउर्सनेस, बर्गे, थॉर्स्टवेड, ओडेगार्ड, ऑस्कर बॉब, अर्लिंग हालैंड। सेनेगल: मेंडी, डियट्टा, कौलीबाली, नियाखाते, डियोफ, कैमारा, इद्रिसा गेये, पापे गेये, इसमाइला सार, निकोलस जैक्सन, सादियो माने। मैच-44: जॉर्डन और अल्जीरिया के लिए जीत जरुरी ग्रुप-J में शामिल दोनों टीमें अपना पहला मैच हार चुकी हैं। जॉर्डन को ऑस्ट्रिया ने 3-1 से और अल्जीरिया को अर्जेंटीना ने 3-0 से हराया था। जॉर्डन और अल्जीरिया के बीच 3 मैच खेले गए हैं। अल्जीरिया ने 1974 में 6-0 से, जॉर्डन ने 1988 में 2-1 से जीत दर्ज की थी। वहीं 2004 का मैच 1-1 से ड्रॉ रहा था। वर्ल्ड कप के इतिहास में दोनों अरब देशों की यह पहली भिड़ंत है। जॉर्डन को अली ओलवान और मूसा तामरी पर से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी। वहीं अल्जीरिया का दारोमदार अनुभवी विंगर रियाद महरेज और अमीन गौरी पर होगा। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: जॉर्डन: अबुलैला, अबुआलनादी, यजान अल-अरब, नसीब, एहसान हदाद, अल-रश्दान, अल-रवाबदेह, अबू ताहा, अली ओलवान, फखौरी, मूसा तामरी। अल्जीरिया: लुका जिदान, बेलघाली, बेंसेबैनी, ईसा मांडी, ऐत-नूरी, बेंटालेब, बौदाउई, जेरौकी, रियाद महरेज, अमीन गौरी, फारेस चैबी।
इतिहास फिर से खुल गया है: ईरान–अमेरिका–इज़राइल युद्ध, इस्लामाबाद एमओयू और अमेरिकी प्रभुत्व की दरारें
ईरान–अमेरिका–इज़राइल युद्ध और इस्लामाबाद एमओयू ने अमेरिकी प्रभुत्व, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और इतिहास की वापसी पर नई बहस छेड़ दी है
कर्णप्रयाग में हुए विवाद को लेकर पंजाब से आए सिख प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड सरकार और पुलिस प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि घटना में शामिल सिख युवकों के साथ अन्याय हुआ है और मामले में एकतरफा कार्रवाई की गई है। रविवार को प्रतिनिधिमंडल हरिद्वार पहुंचा, जहां उसने SSP नवनीत सिंह भुल्लर से मुलाकात की। बातचीत के बाद SSP ने प्रतिनिधिमंडल की फोन पर पुलिस महानिदेशक (DGP) दीपम सेठ से बात कराई। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल देहरादून के लिए रवाना हो गया, जहां वह DGP से मुलाकात करेगा। मामले को लेकर शाम को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ भी बैठक संभावित है। पंजाब से सांसद सर्वजीत सिंह खालसा ने कहा कि उनकी हरिद्वार के एसएसपी से बातचीत हुई है और उनके माध्यम से डीजीपी से भी संपर्क किया है। उन्होंने बताया कि उन्हें आश्वासन दिया गया है कि वे देहरादून जाकर अपनी सभी मांगों और शिकायतों को डीजीपी के समक्ष रख सकते हैं। खालसा ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में मामले में क्रॉस केस दर्ज करना, गिरफ्तार युवकों की रिहाई और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच शामिल है। 'सिख युवकों ने किसी पर हमला नहीं किया' सांसद खालसा ने आगे कहा कि संबंधित सिख युवकों ने किसी पर हमला नहीं किया, बल्कि उन्होंने आत्मरक्षा में कार्रवाई की। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि युवकों ने अपना बचाव नहीं किया होता तो उनके साथ गंभीर अनहोनी हो सकती थी। सांसद ने कहा कि जिन लोगों ने हमला किया, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सीएम धामी से भी इस मामले पर बात की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट में पेशी के दौरान सिख युवकों को बिना दस्तार और नंगे सिर प्रस्तुत किए जाने पर आपत्ति जताई। उनके अनुसार सिख समाज में इसे अत्यंत गंभीर और अपमानजनक माना जाता है। खालसा ने कहा कि सिख समुदाय के लोगों द्वारा कृपाण या तलवार धारण करना उनका संवैधानिक अधिकार है और इसे किसी भी स्तर पर प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। 'सिख युवकों के साथ पक्षपात नहीं होना चाहिए' प्रतिनिधिमंडल में शामिल विधायक मनप्रीत सिंह ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल इतना है कि घटना में शामिल सिख युवकों को न्याय मिले और उनके साथ किसी प्रकार का पक्षपात न किया जाए। उन्होंने बताया कि डीजीपी ने उन्हें मिलने का समय दिया है और वे पूरे मामले को उनके समक्ष विस्तार से रखेंगे। मनप्रीत सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री से भी उनकी पहले बातचीत हो चुकी है और आवश्यकता पड़ने पर वे दोबारा मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं, विशेषकर सिख यात्रियों, को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए तथा दोनों राज्यों में सौहार्द और शांति बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में बसे सिख समुदाय के बीच इस घटना को लेकर रोष व्याप्त है। उनके अनुसार सिख युवकों पर हमला किया गया, बाद में उनके खिलाफ एकतरफा मुकदमा दर्ज किया गया और अदालत में भी उन्हें बिना पगड़ी के पेश किया गया, जिससे समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा भी युवकों के साथ मारपीट की गई, जिसके कारण समुदाय में नाराजगी बढ़ी है। ‘पूरे सिख जगत में रोष और चिंता’ खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने कहा कि पंजाब सहित देश-विदेश में बसे सिख समुदाय के लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले युवकों के साथ मारपीट हुई और उसके बाद पुलिस कार्रवाई के दौरान भी उनके साथ अत्याचार किया गया। तरसेम सिंह ने कहा कि कोर्ट में पेशी के दौरान युवकों के सिर से दस्तार हटाई गई, जिसे सिख धर्म में अत्यंत गंभीर विषय माना जाता है। उन्होंने कहा कि इसी कारण दुनिया भर के सिख समुदाय में इस घटना को लेकर चिंता और असंतोष है। उन्होंने बताया कि पंजाब से कई जत्थे उत्तराखंड आने की इच्छा जता रहे हैं, लेकिन फिलहाल प्रतिनिधिमंडल बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि मामले का शीघ्र समाधान किया जाए, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और गिरफ्तार युवकों को बिना शर्त रिहा किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। एसएसपी बोले- प्रतिनिधिमंडल की मांग वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि पंजाब से आए सांसदों और अन्य प्रतिनिधियों ने प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की इच्छा व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि कर्णप्रयाग में हुए विवाद के संबंध में प्रतिनिधिमंडल किसी वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखना चाहता है। एसएसपी ने बताया कि उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि उनकी बात उचित माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा दी गई है। उन्होंने कहा कि एक प्रतिनिधिमंडल वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात करेगा और आगे की कार्रवाई उसी के अनुरूप की जाएगी। भुल्लर ने स्पष्ट किया कि प्रतिनिधिमंडल की मांगें सीधे तौर पर हरिद्वार से संबंधित नहीं हैं, इसलिए उनके पास सभी बिंदुओं की विस्तृत जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात संबंधी मांग को पुलिस मुख्यालय और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा दिया गया है तथा आगे जो भी निर्णय होगा, उसकी जानकारी साझा की जाएगी। एक दिन पहले गुरुद्वारे पर कब्जा किया उत्तराखंड के चमोली स्थित कर्णप्रयाग में 16 जून को हुए विवाद के बाद शनिवार देर शाम रुद्रप्रयाग के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में पंजाब से आए निहंगों ने कब्जा कर लिया। उन्होंने दो लोगों को बंधक भी बनाया। हालांकि, विवाद बढ़ने पर निहंगों ने एक व्यक्ति को छोड़ दिया, जबकि एक सेवादार को बंधक बनाए रखा। निहंगों ने चेतावनी दी है कि गुरुद्वारे में घुसने वाले को काट देंगे। रविवार सुबह रुद्रप्रयाग के डीएम विशाल मिश्रा निहंगों से बातचीत करने पहुंचे, लेकिन उन्होंने बाचचीत से इनकार कर दिया। इससे पहले एसपी निहारिका तोमर ने दो दौर की बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन बाचचीत विफल रही। गुरुद्वारे के सेवादारों ने बताया कि इस दौरान निहंगों ने एसपी निहारिका तोमर को धमकी दी। सेवादारों के मुताबिक, प्रशासन ने निहंगों को बातचीत के लिए बुलाया, लेकिन उन्होंने नीचे आने से इनकार कर दिया। उन्होंने एसपी से कहा कि यदि कोई ऊपर आया तो उसे काट देंगे। सेवादारों ने प्रशासन से मांग की है कि पकड़े गए लोगों को बिना किसी केस के सम्मानपूर्वक पंजाब भेज दिया जाए। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर गुरुद्वारे के आसपास करीब 15 किलोमीटर क्षेत्र में अगले आदेश तक इंटरनेट सेवा बंद कर दी है। यह इलाका हमेकुंड साहिब के यात्रा मार्ग पर पड़ता है। --------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… उत्तराखंड में निहंग बोले- गुरुद्वारे में घुसने वाले को काट देंगे: एक दिन पहले कब्जा किया, SP समझाने पहुंचीं तो धमकी दी; इंटरनेट बंद, ITBP-PAC तैनात उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में 16 जून को हुए विवाद से नाराज पंजाब के 7 निहंगों ने रुद्रप्रयाग के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में कब्जा कर लिया है। शनिवार देर शाम कब्जे के बाद निहंगों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। निहंगों ने चेतावनी दी है कि गुरुद्वारे में घुसने वाले को काट देंगे और लोगों को गुरुद्वारे के पास नहीं आने को कहा है। (पढ़ें पूरी खबर)
नौसेना को मिलेगी नई ताकत, पीएम मोदी कोलकाता में तीन स्वदेशी युद्धपोत करेंगे समर्पित
भारतीय नौसेना के अनुसार, तीनों युद्धपोत पूरी तरह स्वदेशी तकनीक और डिजाइन पर आधारित हैं। इनका डिजाइन नौसेना के वारशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, जबकि इनका निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) में किया गया है।
60 दिन या टोल टैक्स! ट्रंप की नई धमकी से मिडिल ईस्ट में हड़कंप, होर्मुज में अब वसूली करेगा अमेरिका
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) की राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बेहद सख्त और आक्रामक रुख अपनाते हुए सीधी चेतावनी जारी की है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के साथ अंतिम और स्थायी शांति समझौता नहीं हुआ, तो वाशिंगटन (अमेरिका) खुद कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक जहाजों पर अपना समुद्री टोल टैक्स लगा देगा। ट्रंप की इस अप्रत्याशित धमकी के बाद वैश्विक तेल बाजार और कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।घरेलू दबाव के आगे झुके ट्रंप? अंतरिम समझौते की शर्तों पर खड़े हुए सवालदरअसल, हाल ही में अमेरिका और तेहरान (ईरान) के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत केवल दो महीने (60 दिन) के लिए इस रणनीतिक समुद्री रूट से बिना किसी टैक्स या बाधा के व्यापारिक जहाजों को आने-जाने की खुली छूट दी गई थी।इसी बात को लेकर अमेरिका के भीतर ही ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव तेजी से बढ़ रहा था। आलोचकों का कहना था कि इस छूट से ईरान को फायदा हो रहा है। घरेलू स्तर पर घिरने के बाद ही राष्ट्रपति ट्रम्प ने यह कड़ा रुख अख्तियार किया है और 60 दिन का अल्टीमेटम दे डाला है।अमेरिका बनेगा 'गार्जियन एंजेल': ट्रंप बोले— सेना के खर्च की भरपाई के लिए वसूलेंगे टैक्सकैंप डेविड से सोशल मीडिया पर जारी एक बेहद आक्रामक बयान में राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी रणनीति साफ की। उन्होंने घरेलू और वैश्विक चिंताओं को शांत करने की कोशिश करते हुए स्पष्ट कर दिया कि 60 दिनों की इस समयसीमा के दौरान या इसके खत्म होने के बाद किसी भी अन्य देश (विशेषकर ईरान) को इस रूट पर समुद्री टैक्स वसूलने की इजाजत कतई नहीं दी जाएगी। अगर टैक्स लिया भी जाएगा, तो वह पैसा सीधे अमेरिका के खाते में आएगा।ट्रंप ने इस संभावित अमेरिकी टोल टैक्स को सही ठहराते हुए एक अजीब तर्क दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना मिडिल ईस्ट के देशों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए एक 'गार्जियन एंजेल' (रक्षक) की तरह काम करती है और उन्हें सुरक्षा देती है। इसलिए, अमेरिकी सेना द्वारा दी जा रही इन सेवाओं के बदले अतीत में हुए और भविष्य में होने वाले भारी-भरकम ऑपरेशनल खर्च की भरपाई इसी टैक्स के जरिए की जाएगी।स्विट्जरलैंड में महामंथन: पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में परमाणु वार्ताट्रंप की यह अचानक आई धमकी ऐसे समय में आई है जब स्विट्जरलैंड में बेहद नाजुक और संवेदनशील दौर की कूटनीतिक बातचीत शुरू होने जा रही है। इस हाई-प्रोफाइल वार्ता में पाकिस्तान और कतर मुख्य मध्यस्थ (मिडिएटर) की भूमिका निभा रहे हैं, जो दोनों महाशक्तियों को एक मेज पर लाने की कोशिश में जुटे हैं।इस गुप्त और महत्वपूर्ण बातचीत का मुख्य मकसद एक व्यापक परमाणु समझौते को अंतिम रूप देना और क्षेत्र में युद्ध के तनाव को कम करना है। इस बातचीत को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष (स्पीकर) मोहम्मद बागेर कलीबाफ सहित कई बड़े वैश्विक नेता इस महामंथन के लिए यूरोप पहुंच रहे हैं। लेकिन ट्रंप की टोल टैक्स वाली शर्त ने वार्ता की राह कठिन कर दी है।लेबनान हमले का बहाना बनाकर ईरान ने दी थी रास्ता ब्लॉक करने की धमकीआपको बता दें कि इस अंतरिम समझौते की मजबूती पर पहले दिन से ही सवाल उठ रहे थे। हाल ही में लेबनान में हुए इजरायली सैन्य हमलों का हवाला देते हुए ईरान के शीर्ष सैन्य कमांड ने शुरू में होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी जहाजों के लिए पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया था।ईरान ने वाशिंगटन पर अपने कूटनीतिक वादों से मुकरने और सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाया था। तेहरान का तर्क था कि शुरुआती समझौते की पहली शर्त के तहत सभी मोर्चों पर तुरंत दुश्मनी और जंग रुकनी चाहिए थी, जो कि नहीं हुआ।आर्थिक मोर्चे पर क्या दांव पर लगा है? अरब देशों की बढ़ी टेंशनईरान की इस तीखी बयानबाजी और नाकेबंदी की धमकी के बावजूद, वाशिंगटन ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन पर ईरान के संप्रभु अधिकार के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि पश्चिमी देशों की नौसेना की कड़ी निगरानी में होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात पूरी तरह सुचारू रूप से चल रहा है। इस कूटनीतिक विवाद के तुरंत बाद भी दर्जनों विशाल व्यापारिक जहाज लाखों बैरल कच्चा तेल लेकर सुरक्षित रूप से इस रास्ते से गुजरे हैं।हालांकि, खाड़ी के अरब देश (Gulf Countries) किसी भी ऐसे नए समुद्री नियम या अमेरिकी टोल टैक्स के सख्त खिलाफ हैं जिससे अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो या तेल का परिवहन महंगा हो जाए। ऐसे में ट्रंप द्वारा टैक्स लगाने की इस नई शर्त ने स्विट्जरलैंड में होने वाली बातचीत को और उलझा दिया है। अब वैश्विक राजनयिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे दुनिया को एक बड़े आर्थिक व ऊर्जा संकट से भी बचाएं और अमेरिका की इस आक्रामक मांग का कोई बीच का रास्ता भी निकालें।
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) से इस समय की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक सीजफायर समझौते के महज तीन दिन बाद ही शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को सभी प्रकार के कमर्शियल जहाजों के लिए फिर से बंद करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। ईरान ने इसके पीछे लेबनान पर इजरायल की जारी सैन्य कार्रवाई और अमेरिका द्वारा वादों को पूरा न करने का हवाला दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होने वाली थी।समझौते के तीन दिन बाद ही पलटा ईरान, अमेरिका पर लगाया वादाखिलाफी का आरोपईरान और अमेरिका के बीच बीते 18 जून को ही तीन महीने से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर डिजिटल माध्यम से हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सहमति जताई थी, जिसके बाद होर्मुज स्ट्रेट से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बहाल की गई थी।हालांकि, ईरान के शीर्ष संयुक्त सैन्य कमान 'खातम अल-अंबिया सेंट्रल मुख्यालय' ने एक आपातकालीन बयान जारी कर कहा कि अमेरिका और इजरायल ने युद्धविराम समझौते की पहली और सबसे मुख्य शर्त का स्पष्ट उल्लंघन किया है। ईरान का आरोप है कि दक्षिणी लेबनान में इजरायल के हमले लगातार जारी हैं और अमेरिका इस वैचारिक व सैन्य हिंसा को रोकने में पूरी तरह विफल रहा है। तेहरान ने साफ किया कि वादों को न निभाने की वजह से अमेरिका पर से उनका भरोसा उठ गया है और इसी के विरोध में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा ब्लॉक किया जा रही है।ट्रंप की दोटूक धमकी: 'अगर डील नहीं हुई, तो होर्मुज में वसूलेंगे अमेरिकी टोल टैक्स'दूसरी तरफ, अमेरिका ने ईरान के इस कदम और समुद्री मार्ग पर उसके एकाधिकार के दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अमेरिकी सेना और सेंट्रल कमांड ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी बलों ने ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों की अपनी समुद्री नाकेबंदी को पहले ही पूरी तरह समाप्त कर दिया था और वे किसी भी जहाज को नहीं रोक रहे हैं।इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सख्त अंदाज में ईरान को सीधी चेतावनी दे डाली है। ट्रंप ने कहा है कि यदि तेहरान के साथ तकनीकी पहलुओं पर अंतिम समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका इस वैश्विक शिपिंग लेन (होर्मुज स्ट्रेट) से गुजरने वाले जहाजों पर अपना खुद का 'अमेरिकी टोल टैक्स' लागू कर देगा। ट्रंप की इस नई धमकी के बाद खाड़ी देशों और वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के कुल तेल परिवहन का सबसे बड़ा लाइफलाइन मार्ग है।स्विट्जरलैंड पहुंचे मध्यस्थ और प्रतिनिधिमंडल, पाकिस्तान के पीएम और सेना प्रमुख भी शामिलतनाव के इस माहौल के बीच, तकनीकी स्तर की इस महत्वपूर्ण वार्ता को मुकाम तक पहुंचाने के लिए स्विट्जरलैंड में हलचल तेज हो गई है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, ईरान का एक हाई-लेवल प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड पहुंच चुका है, जिसकी अगुवाई संसद के अध्यक्ष (स्पीकर) मोहम्मद बाघेरी ग़ालिबाफ कर रहे हैं। ईरानी पक्ष का कहना है कि वे वहां पहले से तय समझौते को लागू करने की प्रक्रिया पर काम करने गए हैं, न कि किसी नए दौर की बातचीत के लिए।स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ईरानी डेलीगेशन का स्वागत करते हुए उनके 'बर्गेनस्टॉक' के लिए रवाना होने की पुष्टि की है। इस महावार्ता में मध्यस्थता और क्षेत्रीय सुरक्षा के मद्देनजर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी देर रात स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो गए हैं, जो अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली इस तकनीकी बातचीत में अहम भूमिका निभा सकते हैं।क्या था 18 जून का ऐतिहासिक समझौता और ईरान के नए नियम?18 जून को हुए इस डिजिटल समझौते के तहत दोनों देशों ने सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयों को तत्काल और स्थायी रूप से रोकने तथा भविष्य में किसी भी प्रकार के बल प्रयोग या सैन्य धमकी से बचने की कसम खाई थी। इसके तहत रणनीतिक समुद्री मार्ग पर कमर्शियल शिपिंग को सुरक्षित ढंग से बहाल करने के लिए 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' का गठन भी किया गया था।ईरान ने इसके तहत जहाजों के लिए कड़े नियम बनाए थे, जिसमें पहले से रजिस्ट्रेशन कराना, विशेष अनुमति पत्र लेना और अनिवार्य बीमा औपचारिकताएं शामिल थीं। लेकिन अब सीजफायर टूटने के आरोपों और होर्मुज की नई नाकेबंदी के बाद इस पूरे क्षेत्र में एक बार फिर अमेरिका-ईरान युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं।
युद्ध का असर...कीमोथेरेपी 20% तक होगी महंगी, 2 हजार मरीजों को झटका
ईरान-अमेरिका युद्ध का असर कैंसर के इलाज पर भी पड़ने वाला है। दरअसर कैंसर के उपचार में कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाला प्लाटिन की सप्लाई रूस, अफ्रीका जैसा देशों से होती है। युद्ध के चलते इसकी सप्लाई प्रभावित हो गई है। इसके चलते कीमोथेरेपी करवाने वाले का इलाज अब 10 से 20 प्रतिशत महंगा होने जा रहा है, क्योंकि प्लाटिन की कमी के चलते अब कंपनियां कम दवा बना रही हैं। इसके चलते अब रेट बढ़ने जा रहे हैं। कीमोथेरेपी में सिस्प्लाटिन और कार्बोप्लाटिन का उपयोग होता है। जो अलग-अलग मात्रा में मरीजों पर उपयोग की जाती है। बाजार में नए रेट की दवा अगले महीने तक आएगी। इसके बाद मरीजों में इसका असर देखने को मिलेगा। जिले में कैंसर के 2 हजार से अधिक मरीज हैं। इसमें हर तीसरे मरीज को कीमोथेरेपी की जरूरत होती है। लेकिन, इंटरनेशनल लेवल पर प्लाटिन की कम आपूर्ति होने के चलते कीमोथेरेपी ट्रीटमेंट महंगा होने जा रहा है। सिस्प्लाटिन आधारित कीमों में 10 एमजी का 75 रुपये और 150 एमएजी का 375 रुपये रेट है। जबकि कार्बोप्लाटिन आधारित कीमोथेरेपी के 150 एमजी का 990 रुपये और 450 एमजी का 2890 रुपये है। लेकिन, अब इसके दाम 10 से 20 प्रतिशत कंपनियां बढ़ाने जा रही हैं। हालांकि अभी नए रेट आए नहीं हैं। कैमिस्टों के मुताबिक अगले महीने तक सही दामों की जानकारी मिलेगी। लुधियाना में करीब 80 से 85 कैमिस्ट की दुकानों में कैंसर की यह दवाएं मिल रही हैं। सिविल अस्पताल में भी मरीजों की कीमोथेरेपी हो रही है। बता दें कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली दो प्रमुख दवाओं के रेट 50 प्रतिशत तक बढ़ाए। इसका असर एक महीने में देखने को मिलेगा। कैमिस्ट हरजिंदर लाडी ने बताया कि दवा की कमी नहीं है। लेकिन प्लाटिन की कमी चल रही है। अगले महीने 20 तक कीमों की दवाओं के रेट बढ़ने की संभावना है। जिसके बाद धीरे-धीरे कर 40 प्रतिशत रेट बढ़ सकते है। पड़ोसी जिलों के मरीजों का भी लुधियाना पर दबाव दवाओं की कमी का असर केवल लुधियाना तक सीमित नहीं है। पटियाला और संगरूर जैसे जिलों में भी इन दवाओं की किल्लत देखी जा रही है। इस कारण वहां के मरीज भी कीमोथेरेपी के लिए लुधियाना का रुख कर रहे हैं। इससे जिले के स्वास्थ्य ढांचे पर मरीजों का दबाव बढ़ गया है, वहीं निजी अस्पतालों में मांग बढ़ गई है। प्लाटिन की कमी से कंपनियां कम दवा बना रहीं क्या है कीमोथेरेपी: कीमोथेरेपी कैंसर के इलाज की एक प्रभावी चिकित्सा पद्धति है। इसमें दवाओं का उपयोग किया जाता है, जो शरीर में तेजी से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती हैं या उन्हें बढ़ने से रोकती हैं। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से ब्रेस्ट, फेफड़ों, लिवर, ब्लड और सर्वाइकल (बच्चेदानी के मुंह) जैसे विभिन्न प्रकार के कैंसर के उपचार में की जाती है। कीमोथेरेपी कैंसर के स्टेज और प्रकार के आधार पर दी जाती है। यह न केवल ट्यूमर को सिकोड़ने में मदद करती है, बल्कि सर्जरी या रेडिएशन के बाद बची हुई कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपचार विकल्प है।
FIFA वर्ल्ड कप 2026 में आज रात मजबूत स्पेन का मुकाबला सऊदी अरब से होगा। मैच रात 9:30 बजे से अटलांटा स्टेडियम में खेला जाएगा। सभी की निगाहें स्पेन के युवा खिलाड़ी लामिन यमाल पर होंगी। हैमस्ट्रिंग की चोट से वापसी कर रहे यमाल पहले मैच में 71 मिनट बेंच पर बैठे रहे। दूसरा मुकाबला बेल्जियम और ईरान के बीच रात 12:30 बजे से लॉस एंजिल्स स्टेडियम में होगा। न्यूजीलैंड के खिलाफ अमेरिका के लॉस एंजिल्स में ईरान के मोहम्मद मोहेबी ने गोल करने के बाद गन सेलिब्रेशन किया था। इसको लेकर खूब विवाद हुआ। टीम का इराद इससे ध्यान हटाकर मैच जीतने पर होगा। इसके बाद सुबह 3:30 बजे से उरुग्वे और काबो वर्डे का मैच मियामी स्टेडियम में होगा। वहीं दिन का आखिरी मुकाबला सुबह 6:30 बजे से न्यूजीलैंड और मिस्र के बीच खेला जाएगा। मैच-37: स्पेन ने सऊदी अरब से तीनों मुकाबले जीते ग्रुप-H में शामिल स्पेन और सऊदी अरब के बीच अब तक 3 मैच खेले गए हैं। तीनों ही बार स्पेन ने जीत दर्ज की है। वर्ल्ड कप में दूसरी बार दोनों टीमें आमने-सामने होंगी। 2006 वर्ल्ड कप में हुई भिड़ंत में स्पेन ने 1-0 से जीत दर्ज की थी। स्पेन को अपने यंग स्टार लामिन यमाल, फॉरवर्ड अल्वारो मोराटा और मिडफील्डर रोड्री से बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद होगी। वहीं सऊदी अरब के सलेम अल-दौसारी पर अटैकिंग लाइन को लीड करने की जिम्मेदारी होगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: स्पेन: राया, कार्वाहाल, ले नोरमंद, लापोर्टे, कुकुरेला, रोड्री, फैबियन रुइज, डैनी ओल्मो, यमाल, निको विलियम्स, मोराटा। सऊदी अरब: अल-ओवैस, अब्दुलहामिद, लाजामी, अल-बुलैही, अल-कद्देश, अल-खाबरानी, कान्नो, अल-जौआन, अल-मुअल्लाद, अल-शेहरी, अल-दौसारी। मैच-38: बेल्जियम और ईरान के बीच वर्ल्ड कप में पहली भिड़ंत बेल्जियम और ईरान ग्रुप-G में शामिल हैं। दोनों के बीच सिर्फ एक इंटरनेशनल मुकाबला खेला गया है। यह मैच ड्रॉ रहा था। यह वर्ल्ड कप में इनकी पहली भिड़ंंत होगी। बेल्जियम को स्टार केविन डी ब्रुइन, जेरेमी डोकु और स्ट्राइकर रोमेलु लुकाकू से गोल की उम्मीद होगी। वहीं ईरान के स्टार स्ट्राइकर मेहदी तारेमी और सरदार अजमौन ईरानी अटैक की मुख्य कड़ी होंगे। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: बेल्जियम: कास्टील्स, फाएस, वर्टोंघेन, थेएट, कास्टाने, ओनाना, मैंगला, डी ब्रुइन, ट्रोसार्ड, डोकु, लुकाकू। ईरान: बेइरानवंद, रेजाइयान, कनानी, शोजाए, मोहम्मदी, गोडोस, एजातोलाही, जाहानबख्श, तारेमी, गयाहदी, अजमौन। मैच-39: पहली बार उरुग्वे और काबो वर्डे की भिड़ंत ग्रुप-H में दो बार की वर्ल्ड चैंपियन उरुग्वे का सामना काबो वर्डे से होगा। इंटरनेशनल फुटबॉल में दोनों टीमें पहली बार आमने-सामने होंगी। उरुग्वे को लिवरपूल के स्टार स्ट्राइकर डार्विन नुनेज और रियल मैड्रिड के स्टार मिडफील्डर फेडेरिको वाल्वेर्डे से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी। वहीं काबो वर्डे को कप्तान रयान मेंडेस और फॉरवर्ड बेबे से उम्मीदें होंगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: उरुग्वे: रोशेट, नान्देज, अरूहो, जिमेनेज, ओलिवेरा, उगारते, वाल्वेर्डे, दे ला क्रूज, पेलेस्ट्री, अराउजो, नुनेज। काबो वर्डे: वोजिन्हा, पिना, कोस्टा, लोपेज, फर्नांडीस, रोचा, लील, मोंटेइरो, मेंडेस, बेबे, रोड्रिग्स। मैच-40: न्यूजीलैंड और मिस्र के बीच कड़ी टक्कर न्यूजीलैंड और मिस्र ग्रुप-G में शामिल हैं। दोनों टीमों के बीच कुल 3 इंटरनेशनल मैच खेले गए थे। इनमें दोनों टीमों ने 1-1 मैच जीता। वहीं 1 मुकाबला ड्रॉ रहा है। वर्ल्ड कप में दोनों टीमों की यह पहली भिड़ंत होगी। न्यूजीलैंड को स्टार स्ट्राइकर और कप्तान क्रिस वुड से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी। वहीं मिस्र स्टार फॉरवर्ड खिलाड़ी मुस्तफा मोहम्मद और ट्रेजेगुएट के आक्रामक खेल पर निर्भर होगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: न्यूजीलैंड: क्रोकोम्बे, पाइन, बक्साल, बिंदोन, काकासे, बेल, गरबेट, स्टैमेनिक्स, माता, जस्ट, क्रिस वुड। मिस्र: शनावी, हानी, अब्देलमोनेम, हेगाजी, हम्दी, अत्तिया, फथी, आशुर, मुस्तफा मोहम्मद, मार्मश, ट्रेजेगुएट।
पाकिस्तानी नौसेना में एक नाम लौट आया है ‘PNS हैंगोर’। ये है चीन में बनी नई पाकिस्तानी पनडुब्बी। ये 11 जून को कराची पहुंची। पाकिस्तान इसे बंगाल की खाड़ी में तैनात करेगा। इसी हैंगोर नाम की पनडुब्बी ने 1971 की जंग में भारतीय युद्धपोत ‘INS खुखरी’ को डुबो दिया था। जंग के दौरान किसी भारतीय पोत के डूबने की यह इकलौती घटना है। आखिर क्या है 1971 का वो पूरा किस्सा, नई हैंगोर पनडुब्बी कितनी ताकतवर है और भारत इससे कैसे निपटेगा; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: हैंगोर पनडुब्बी ने 55 साल पहले भारतीय युद्धपोत को कैसे डुबोया था? जवाब: 1971 की जंग के दौरान 6 दिसंबर को भारतीय नौसेना का पता चला कि एक पाकिस्तानी पनडुब्बी PNS (Pakistan Naval Ship) हैंगोर दीव के पास मौजूद है। जवाब में भारत ने एंटी सबमरीन युद्धपोत 'INS (Indian Naval Ship) खुखरी' और INS कृपाण' को उस इलाके में भेज दिया। PNS का मतलब पाकिस्तान नेवल शिप और INS का मतलब इंडियन नेवल शिप होता है। 'PNS हैंगोर' में 25 किमी दूर तक के युद्धपोत की टोह लेने की क्षमता थी। जबकि खुखरी सिर्फ 2.5 किमी दूर तक ही दुश्मन के पोत या पनडुब्बी को डिटेक्ट कर सकता था। हैंगोर को खुखरी और कृपाण का पहले से पता चल गया। उसने दोनों के नजदीक आने का इंतजार किया। हैंगोर के कैप्टन लेफ्टिनेंट कमांडर तसनीम अहमद ने बाद में एक इंटरव्यू में बताया, 'हमने कृपाण पर जो टॉरपीडो दागा, वो बिना फटे उसके नीचे से गुजर गया। भारतीय युद्धपोतों को हमारी पोजीशन का पता चल चुका था। इसलिए मैंने तेजी से INS खुखरी पर पीछे से दो फायर और किए।’ टॉरपीडो खुखरी के नीचे फटा था। जिससे 3 मिनट के अंदर जहाज डूबने लगा था। इस हमले में खुखरी के कैप्टन महेंद्रनाथ मुल्ला सहित कुल 18 नेवी ऑफिसर्स, 176 क्रू और बाकी स्टाफ सहित कुल 194 लोग शहीद हुए। 'द सिंकिंग ऑफ INS खुखरी: सर्वाइवर्स स्टोरीज' किताब लिखने वाले मेजर जनरल इयान कारडोजो के मुताबिक, 'अगर किसी इलाके में पनडुब्बी का खतरा हो, तो युद्धपोत टेढ़े-मेढ़े तरीके से चलते हैं। खुखरी भी यही कर रहा था, इसलिए उसकी स्पीड कम थी। उसी समय खुखरी पर एक नए किस्म के सोनार का भी परीक्षण चल रहा था, इससे रफ्तार और धीमी हो गई थी। यही वजह थी कि हैंगोर ने उसे आसानी से निशाना बना लिया।' हालांकि इस हमले से 1971 की जंग का नतीजा नहीं बदला। बंगाल की खाड़ी से पाकिस्तानी नेवी को भी वापस लौटना पड़ा था। अब 55 साल बाद अब हैंगोर के नाम पर एक नई पनडुब्बी फिर सुर्खियों में है। सवाल-2: पाकिस्तान की नई हैंगोर पनडुब्बी कितनी घातक है? जवाबः पाकिस्तान की नई हैंगोर क्लास सबमरीन को चीन की सरकारी कंपनी 'चाइना शिपबिल्डिंग एंड ऑफशोर इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन लिमिटेड', यानी CSOC ने बनाया है। ये डीजल और इलेक्ट्रिक बैटरी से चलने वाली अटैक सबमरीन है। 2015 में पाकिस्तान ने चीन से करीब 5 अरब डॉलर में 8 हैंगोर पनडुब्बियों का सौदा किया था। अभी पाकिस्तानी नेवी को पहली हैंगोर पनडुब्बी मिली है। तीन और पनडुब्बियों का समुद्र में ट्रायल चल रहा है। बाकी 4 पनडुब्बियां पाकिस्तान में ही बनाई जाएंगी। सवाल-3: हैंगोर पनडुब्बी बंगाल की खाड़ी में क्यों भेजना चाहता है पाकिस्तान? जवाब: इसकी 2 मुख्य वजहें हैं... 1. बंगाल की खाड़ी में पाकिस्तान की मौजूदगी दोबारा बढ़ाना 1971 की जंग हारने के बाद पाकिस्तानी नेवी बंगाल की खाड़ी से गायब हो गई। इस इलाके में भारतीय नौसेना का वर्चस्व है… हैंगोर को चीन से कराची लाने वाली नेवी फ्लीट के कमांडर उमर फारूक ने कहा, 'ये पनडुब्बी गेमचेंजर है। इसके जरिए पाकिस्तान को बंगाल की खाड़ी में अपनी मौजूदगी बनाए रखने में मदद मिलेगी।' बंगाल की खाड़ी से भारत के अलावा बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया और श्रीलंका जुड़े हैं। खाड़ी में अपने तट से 22 किमी तक के समुद्र को उस देश का 'टेरिटोरियल सी' कहा जाता है। फिर 200 किमी का 'विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र' यानी EEZ होता है। बाकी समुद्र को 'इंटरनेशनल वाटर जोन' कहते हैं, जहां किसी भी देश के सैन्य जहाज या पनडुब्बी आ सकती हैं। इस मैप में देखिए… 2. बांग्लादेश से शुरू हुए रिश्ते मजबूत करना 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश के अंतरिम राष्ट्रपति बने मोहम्मद यूनुस का पाकिस्तान की ओर था। उन्होंने 2 बार पाकिस्तानी पीएम शाहबाज शरीफ से मुलाकात की थी। पाक विदेश मंत्री इशाक डार भी ढाका दौरे पर गए। इसके बाद दोनों देशों में 1971 से बंद समुद्री व्यापार दोबारा खुला। 12 साल बाद जनवरी 2026 में इस्लामाबाद-ढाका के बीच सीधी फ्लाइट शुरू हुई। वीजा रूल्स में भी ढील दी गई। दिसंबर 2025 में पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच कारोबार पिछले साल के मुकाबले 20% बढ़ा। दोनों देशों के बीच 100 करोड़ डॉलर के आर्थिक समझौते हुए। इसलिए इस इलाके में पाकिस्तान अपनी नौसैनिक ताकत बढ़ाना चाहता है। सवाल-4: पाकिस्तानी नेवी को कैसे तेजी से मजबूत बना रहा है चीन? जवाब: पाकिस्तान 80% हथियार चीन से खरीदता है। पाकिस्तानी नौसेना को एडवांस बनाने में भी चीन 3 तरह से मदद कर रहा है… सवाल-5: ये भारत के लिए कितनी चिंता की बात है, कैसे जवाब देगा? जवाब: बंगाल की खाड़ी में पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियां बढ़ती हैं, तो भारत के लिए 3 बड़े खतरे हैं… 1. निशाने पर भारत के अहम ठिकानेः PNS हैंगोर के 6 हैवीवेट टॉरपीडो ट्यूब में पाकिस्तान की 450 किमी रेंज वाली 'बाबर-3' क्रूज मिसाइल लग सकती है। अगर बाबर-3 के साथ पनडुब्बी बंगाल की खाड़ी में उतरी, तो भारत के अहम ठिकाने जैसे- नेवी की ईस्टर्न कमांड, अंडमान निकोबार कमांड और आंध्र प्रदेश में पनडुब्बी अड्डा ‘INS वर्षा’ और ISRO का सतीश धवन स्पेस सेंटर, वगैरह इसकी जद में आ सकते हैं। 2. खुफिया जानकारी चुराने का खतराः पाकिस्तान समुद्री गश्त बढ़ाकर भारतीय जहाजों, बंदरगाहों और नौसैनिक अड्डों की खुफिया जानकारी जुटा सकता है। इसका जंग की स्थिति में इस्तेमाल करेगा। मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस में रिसर्च एनालिस्ट नमिता बर्थवाल के मुताबिक, चिंता की बात ये है कि पर्दे के पीछे चीन है, जिसे ये खुफिया इन्फॉर्मेशन मिलती रहेंगी। 3. महीनों तक एक्टिव सकती है पनडुब्बी: नवंबर 2025 में पाक युद्धपोत 'PNS सैफ' ने 1971 के बाद पहली बार बांग्लादेश के चटगांव पोर्ट का दौरा किया। अगर हैंगोर को बांग्लादेश के पोर्ट्स पर 'लॉजिस्टिक्स सपोर्ट' जैसे- ईंधन, राशन वगैरह मिलने लगा, तो वह इस इलाके में और देर तक रह सकेगी। हालांकि ऐसी चुनौतियों के लिए भारतीय नौसेना पूरी तरह तैयार है… -------------------- ये खबर भी पढ़िए… भारत ने अचानक 12 परमाणु बम क्यों तैनात किए; 3 साल से जखीरा बढ़ा रहा, चीन-पाक से एकसाथ निपटने को तैयार भारत ने पिछले 3 साल में 26 परमाणु हथियार बढ़ाए। अब परमाणु जखीरा 190 तक पहुंच गया है। भारत ने पहली बार 12 न्यूक्लियर बम मिसाइल्स पर लोड करके तैनात कर दिए हैं। ये खुलासा स्वीडिश थिंकटैंक SIPRI की लेटेस्ट रिपोर्ट में हुआ है। पूरी खबर पढ़िए…
फीफा विश्व कप 2026 (FIFA World Cup 2026) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को बे एरिया स्टेडियम में खेले गए ग्रुप डी के एक बेहद रोमांचक और करो या मरो के मुकाबले में पैराग्वे ने बड़ा उलटफेर करते हुए तुर्की को 1-0 से शिकस्त दे दी है। इस करारी हार के साथ ही टूर्नामेंट की 'डार्क हॉर्स' (अप्रत्याशित दावेदार) मानी जा रही तुर्की की टीम आधिकारिक तौर पर विश्व कप की दौड़ से बाहर हो गई है। तुर्की के इस शर्मनाक प्रदर्शन और इतनी जल्दी बाहर होने से दुनिया भर के फुटबॉल फैंस को गहरा सदमा लगा है।दूसरे ही मिनट में हुआ मैच का एकमात्र गोल, शुरुआती झटके से नहीं उबर पाया तुर्कीमैच की शुरुआत से ही पैराग्वे की टीम ने आक्रामक रुख अपनाया। खेल के दूसरे ही मिनट में पैराग्वे के स्टार खिलाड़ी मटियास गलार्ज़ा (Matias Galarza) ने तुर्की के डिफेंस को भेदते हुए एक शानदार मैदानी गोल दाग दिया। इस शुरुआती बढ़त ने पैराग्वे को मैच में मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना पहला मैच 2-0 से हारने के बाद तुर्की को इस मैच में वापसी की पूरी उम्मीद थी, लेकिन मैच के आखिरी मिनट तक कड़े संघर्ष के बाद भी टीम बराबरी का गोल नहीं दाग सकी और पैराग्वे ने रक्षात्मक खेल दिखाते हुए मुकाबला 1-0 से अपने नाम कर लिया।ग्रुप डी का ताजा समीकरण: शून्य अंकों के साथ सबसे नीचे फिसला तुर्कीइस जीत के साथ ही पैराग्वे ने टूर्नामेंट में अपनी पहली जीत दर्ज कर 3 अंक हासिल कर लिए हैं और खुद को नॉकआउट की रेस में बनाए रखा है। अगर ग्रुप डी की अंक तालिका (Points Table) पर नजर डालें तो मेजबान अमेरिका 6 अंकों के साथ शीर्ष पर काबिज है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 3 अंकों के साथ दूसरे और पैराग्वे 3 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है। लगातार दो मैच हारने के बाद तुर्की शून्य अंकों के साथ सबसे निचले पायदान पर है, जिसके चलते उसका अगले दौर में पहुंचने का रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है।रियल मैड्रिड के वंडरकिड अर्दा गुलेर रहे फ्लॉप, कोच की तारीफ भी नहीं आई कामइस पूरे टूर्नामेंट में फैंस और फुटबॉल पंडितों की निगाहें तुर्की के युवा सनसनी और स्पेनिश क्लब रियल मैड्रिड के स्टार खिलाड़ी अर्दा गुलेर (Arda Guler) पर टिकी थीं। उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ युवा खिलाड़ियों में से एक माना जाता है। मैच से पहले तुर्की के मुख्य कोच विन्सेन्ज़ो मोंटेला ने गुलेर की तारीफ करते हुए कहा था, उसमें कमाल की प्रतिभा और खेल की गहरी समझ है। वह जानता है कि खेल को कब धीमा करना है और कब तेज। उसका चेहरा मासूम है, लेकिन वह मैदान पर बहुत चालाक है। मगर पैराग्वे के खिलाफ इस महत्वपूर्ण मैच में गुलेर का जादू नहीं चल पाया और वे टीम को ऐतिहासिक हार से बचा नहीं सके।अब अपराजित अमेरिका से होगी तुर्की की प्रतिष्ठा की जंगविश्व कप से बाहर होने के बाद अब तुर्की के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। टीम को ग्रुप स्टेज का अपना आखिरी औपचारिक मैच 26 जून को इंग्लेवुड के लॉस एंजिल्स स्टेडियम में मजबूत मेजबान टीम अमेरिका के खिलाफ खेलना है। अमेरिका इस समय शानदार फॉर्म में है और उसने अपने शुरुआती दोनों मैचों में पैराग्वे और ऑस्ट्रेलिया को पटखनी दी है। तुर्की के मौजूदा खराब फॉर्म को देखते हुए अपराजित अमेरिका के खिलाफ अपनी साख बचाना उसके लिए एक बेहद कठिन चुनौती होने वाला है।
जींद जिले में उचाना उपमंडल कार्यालय और नागरिक अस्पताल परिसर में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। इससे मरीजों, उनके परिजनों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोग अपने हाथों में खाने-पीने का सामान लेकर निकलने से भी कतराने लगे हैं, क्योंकि कई बार बंदर उनके हाथों से सामान छीन लेते हैं। नागरिक अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि बंदर अस्पताल परिसर में दिनभर घूमते रहते हैं। बंदरों को भगाने के लिए नागरिक अस्पताल के पास पुरानी बिल्डिंग, जहां आयुर्वेदिक अस्पताल चलता है, वहां एक लंगूर का पोस्टर लगाया गया है। यह माना जाता है कि लंगूर की तस्वीर देखकर बंदर उस क्षेत्र से दूर रहते हैं। लोगों ने की समस्या के समाधान की मांग हालांकि, उपमंडल कार्यालय में काम करवाने आने वाले लोगों को भी बंदरों के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि केवल पोस्टर लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। बंदरों का आतंक लगातार बना हुआ है और उनकी संख्या में भी कमी नहीं आ रही है। मंजीत, सुनील, राजबीर और मनोज सहित कई स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाए और इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। उनका कहना है कि जब तक बंदरों को हटाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक आमजन और मरीजों को इसी प्रकार परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। एसडीएम बोले- नगर पालिका प्रशासन से करेंगे बात लोगों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर उपमंडल कार्यालय और नागरिक अस्पताल परिसर को बंदरों के आतंक से मुक्त कराने की अपील की है, ताकि आमजन बिना किसी भय के अपने कार्य कर सकें और मरीजों को भी राहत मिल सके। इस संबंध में एसडीएम रमित यादव ने बताया कि बंदरों के आतंक से छुटकारा दिलाने के लिए नगर पालिका प्रशासन से बातचीत की जाएगी।
सीजफायर के कुछ घंटों बाद ही इजरायल ने लेबनान पर किया हमला , 5 की मौत
दक्षिण लेबनान में इजरायली हमले जारी है। हालिया हमले में 5 लोगों की मौत हो गई है। लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी (एनएनए) ने शनिवार को बताया कि, हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच युद्धविराम लागू होने के 24 घंटों के भीतर ही दक्षिणी लेबनानी शहर सज्द के निकट स्थित जबल अल-रफी क्षेत्र पर एयर स्ट्राइक की गई।
छतरपुर शहर के बस स्टैंड क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान मची अफरा-तफरी में एक जेबकतरा पकड़ा गया। भीड़ का फायदा उठाकर एक व्यक्ति की जेब काटने की कोशिश कर रहे इस युवक को स्थानीय लोगों ने रंगेहाथ दबोच लिया। इसके बाद लोगों ने उसे सिटी कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया, जो अब उससे पूछताछ कर रही है। शुक्रवार शाम बस स्टैंड पर प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान कुछ लोगों के विरोध के चलते सड़क पर जाम लग गया और बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए। क्षेत्र में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इसी भीड़भाड़ का फायदा उठाकर कुछ जेबकतरे सक्रिय हो गए और लोगों की जेबों पर हाथ साफ करने की कोशिश करने लगे। रंगेहाथ पकड़ा गया तो बनाने लगा बहानेइसी दौरान एक युवक को संदिग्ध गतिविधि करते हुए लोगों ने पकड़ लिया। आरोप है कि वह एक व्यक्ति की जेब काटने का प्रयास कर रहा था, तभी लोगों की नजर उस पर पड़ गई और उसे मौके पर ही दबोच लिया गया। पकड़े गए युवक ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह जेब नहीं काट रहा था। उसका तर्क था कि भीड़ में धक्का-मुक्की हो रही थी, जिसके कारण उसका हाथ गलती से दूसरे व्यक्ति की जेब पर चला गया था। कोतवाली पुलिस कर रही मामले की विस्तृत जांचहालांकि, मौके पर मौजूद लोगों ने उसकी किसी भी सफाई पर विश्वास नहीं किया और तुरंत पुलिस को घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और युवक को हिरासत में लेकर थाने ले गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। पूछताछ और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इजराइल हिजबुल्ला में सीजफायर, अमेरिका, कतर और ईरान ने कैसे दोनों को मनाया?
अमेरिका ईरान शांति समझौते के बाद तल्ख तेवर दिखाने वाला इजराइल आखिरकार हिजबुल्ला से सीजफायर के लिए राजी हो गया। बताया जा रहा है कि अमेरिका और कतर इजराइल को समझाकर युद्ध विराम के लिए राजी किया तो ईरान ने हिजबुल्ला को मनाया। अब लेबनान और ईरान के ...
Top News 20 June : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच सीजफायर कराने का दावा किया। भारत के लिए ईरान से गैस आयात का रास्ता खुला। उद्धव ठाकरे ने शिवसेना यूबीटी अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश की। ट्रेन में अब महंगी पड़ेगी बगैर ...
इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष में राहत, युद्धविराम पर बनी सहमति
इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच युद्धविराम पर सहमति बन गई है। यह जानकारी शुक्रवार को इजरायली अधिकारियों के हवाले से दी गई।
कैडेटों ने सीखे युद्ध कौशल व मैप रीडिंग के गुर
भास्कर न्यूज | यमुनानगर 14 हरियाणा बटालियन एनसीसी द्वारा सरस्वती विद्या मंदिर जगाधरी में आयोजित अम्बाला ग्रुप थल सैनिक कैंप-सह-संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर के सातवें दिन कैडेटों को अनुशासन, सैन्य कौशल और सामाजिक जागरूकता का पाठ पढ़ाया गया। कमांडिंग ऑफिसर कर्नल पंकज पारीक के नेतृत्व और लेफ्टिनेंट कर्नल कुमुद मैनी के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। दिन की शुरुआत नशा मुक्त हरियाणा विषय पर एक प्रेरणादायक व्याख्यान के साथ हुई। मुख्य वक्ता डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने कैडेटों को संबोधित करते हुए नशे के घातक परिणामों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि नशा न केवल व्यक्ति, बल्कि परिवार और समाज के लिए भी एक अभिशाप है। उन्होंने युवाओं से नशा मुक्त हरियाणा अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने और अपने आसपास के क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। प्रशिक्षण शिविर में हवलदार अरविंद ने फील्ड क्राफ्ट एवं बैटल क्राफ्ट के गुर सिखाए। कैडेटों को युद्ध क्षेत्र की बारीकियां, जैसे कि छलावरण (कैमूफ्लाज एंड कंसीलमेंट), सही तरीके से छिपने की तकनीक, फील्ड मूवमेंट और सैन्य अभियानों के दौरान व्यक्तिगत सुरक्षा के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई। इस सत्र से कैडेटों में सतर्कता और टीम भावना का विकास हुआ।
अलकतरा महंगा, बालू गायब:स्टॉक में बालू, रॉयल्टी चालान ने रोका शहर की 60 सड़क-नाली का निर्माण
राजधानी के विकास में अलकतरा की बढ़ती कीमत और बालू की किल्लत ने ग्रहण लगा दिया है। मानसून शुरू होने से पहले शहर के गली-मुहल्लों की सड़कों और नालियों का निर्माण किया जाना था, लेकिन कई स्थानों पर काम शुरू ही नहीं हुआ। क्योंकि एनजीटी की रोक के बाद रॉयल्टी चालान मिलना बंद हो गया, जिससे बालू नहीं मिल रहा है और काम अधूरे छोड़ दिए गए हैं। खान विभाग ने मानसून से पहले राज्य में 3 करोड़ सीएफटी बालू का स्टॉक रखने का दावा किया था, लेकिन सच्चाई यह है कि बालू नहीं मिलने की वजह से शहर के 53 वार्डों में 60 सड़कों और नालियों का काम ठप पड़ गया है। दूसरी ओर अलकतरा की बढ़ती कीमत ने कांट्रेक्टरों के होश उड़ा दिए हैं। क्योंकि मिडिल ईस्ट के तनाव की वजह से अलकतरा की कीमत में करीब 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है। पहले 156 किलो के एक ड्रम अलकतरा की कीमत 10,500 रुपए थी, लेकिन अब 17 से 18 हजार रुपए में मिल रहा है। इसके बावजूद कांट्रेक्टर महंगा अलकतरा खरीद कर काम करने को विवश हैं। क्योंकि नगर निगम के इंजीनियर मानसून में काम बंद होने का हवाला देकर कांट्रेक्टरों पर दबाव बना रहे हैं। कांट्रेक्टर इस मामले की जानकारी नगर आयुक्त को देंगे। मुहल्लेवासियों को जर्जर सड़क-बदहाल नालियों से नहीं मिलेगी निजात हिंदपीढ़ी नाला रोड में सड़क के बीच में 2850 फीट लंबी नाली और दो गलियों में 2200-2200 फीट लंबी छोटी नाली का निर्माण चल रहा था। यहां 600 फीट लंबा पीसीसी रोड का भी निर्माण होना है। करीब 5 करोड़ रुपए की यह योजना है। पिछले वर्ष मानसून में बारिश की वजह से काम नहीं हुआ था। इसके बाद से अब तक मात्र 50 प्रतिशत नाली बनी है। अब बालू का रॉयल्टी चालान नहीं होने की वजह से ठेकेदार ने काम बंद कर दिया है। ऐसे में इस बार भी बारिश में नाला रोड के लोगों को भारी जलजमाव का सामना करना पड़ेगा। पीसीसी सड़क का टेंडर हुआ, काम शुरू नहीं वार्ड नंबर 34 में राजू महतो के घर तक पीसीसी सड़क का निर्माण होना है। करीब 11.82 लाख रुपए से सड़क बननी है। इसका टेंडर पिछले माह हो गया, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ। जबकि 90 दिनों के अंदर काम किया जाना है। बालू की किल्लत से काम शुरू नहीं हुआ है। नामकुम के जोरार में इस वर्ष भी नहीं बनी नाली वार्ड नंबर 47 के नामकुम जोरार स्थित सांई नगर में नाली बनाने के लिए 23 मई को ही टेंडर किया गया है। करीब 21.73 लाख रुपए की लागत से आरसीसी ड्रेन और स्लैब बनना है। लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ। इस क्षेत्र के लोग पिछले दो साल से जलजमाव से परेशान हैं। रॉयल्टी चालान अनिवार्य होने से फंसे ठेकेदार : सरकार ने निर्माण कार्यों से जुड़े कांट्रेक्टरों के लिए बालू, मिट्टी और गिट्टी के लिए रॉयल्टी चालान अनिवार्य कर दिया है। पहले चालान नहीं देने पर रॉयल्टी मद का पैसा पेनाल्टी के साथ काटकर ठेकेदारों को भुगतान किया जाता था। लेकिन अब चालान अनिवार्य होने से ठेकेदार फंस गए हैं। क्योंकि एनजीटी की रोक लगने के बाद बालू का चालान लेना मुश्किल हो गया है। गिट्टी का भी क्रशर संचालक चालान देने में दिक्कत करते हैं। बालू नहीं मिल रहा, चालान कहां से देंगे एनजीटी की रोक की वजह से बालू मिलना मुश्किल हो गया है। रॉयल्टी चालान भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में निगम में ठेकेदारों का पेमेंट भी फंस रहा है। निर्माण सामग्री और चालान उपलब्ध होगा, तभी काम हो पाएगा। अन्यथा मानसून तक काम बंद करना ही होगा। - रणधीर सिंह, सचिव, नगर निगम संवेदक संघ बारिश से पहले काम में तेजी का निर्देश दिया है बारिश से पहले जो योजना अधूरी है, उसे हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया गया है। ठेकेदारों को अगर परेशानी आ रही है तो अधिकारियों को समन्वय स्थापित करके उनकी समस्याओं का समाधान भी करना चाहिए, ताकि विकास योजनाओं में तेजी आ सके। जल्द ही इसकी समीक्षा करूंगी। - रोशनी खलखो, मेयर
उत्तराखंड पुलिस की कार्रवाई को एकतरफा, दोषी पुलिस अधिकारियों पर हो कार्रवाई
भास्कर न्यूज | अमृतसर श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने उत्तराखंड में सिख युवाओं को हो रही परेशानी का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से श्री हेमकुंट साहिब की तीर्थ यात्रा पर जाने वाले सिख संगत की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। जत्थेदार ने गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के प्रतिनिधियों को फटकार लगाते हुए कहा कि सिखों से हथियार छोड़कर तीर्थ यात्रा पर आने के लिए कहना दुर्भाग्यपूर्ण है। जल्द ही गुरुद्वारा ट्रस्ट के प्रतिनिधियों से इसका जवाब मांगा जाएगा। उन्होंने कहा कि श्री हेमकुंट साहिब गुरुद्वारा ट्रस्ट के प्रतिनिधियों की यह पहली जिम्मेदारी है कि उत्तराखंड सरकार से बात करें और यह सुनिश्चित करें कि यात्रा शुरू होने से पहले रास्ते में किसी भी सिख तीर्थयात्री को स्थानीय लोग धक्केशाही न करें। हाल ही में कर्णप्रयाग में हुई घटना के बारे में जत्थेदार गड़गज्ज ने उत्तराखंड पुलिस की कार्रवाई को एकतरफा बताया। जिस तरह एक आम रास्ते के झगड़े के मामले में सिख युवकों पर सख्त धाराओं के तहत केस करके उन्हें सरेआम घुमाया गया, हिरासत में टॉर्चर, मारपीट और पगड़ी उतारने की सजा दी गई, उसी तरह इस मामले की भी हाई लेवल जांच होनी चाहिए और सिखों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। जानकारी के अनुसार, स्थानीय लोगों ने पहले सिख युवकों पर हाथ उठाया था, जिसके बाद सिखों ने अपनी सुरक्षा के लिए कृपाण का इस्तेमाल किया। जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी पहले ऐसी घटनाएं हुई हैं, लेकिन पंजाब सरकार ने सिखों के हक के लिए कोई कदम नहीं उठाया। उन्हें पता है कि पंजाब सरकार इन मामलों में सिखों का साथ नहीं देगी, इसलिए सिख अब ऐसे मामलों से खुद निपटेंगे।
अजमेर की दरगाह थाना पुलिस ने भीड़भाड़ वाले इलाकों में मोबाइल चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाली एक शातिर गैंग का पर्दाफाश करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से करीब 18 लाख रुपए कीमत के 42 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। आरोपियों के खिलाफ विभिन्न थानों में पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। जिला पुलिस अधीक्षक उमा यादव के निर्देश पर चोरी, नकबजनी और लूट की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। दरगाह थाना प्रभारी दिनेश कुमार जीवनानी के नेतृत्व में गठित टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया। थाना प्रभारी दिनेश जीवनानी ने बताया कि 16 जून को दरगाह क्षेत्र में मोबाइल चोरी की वारदातों की जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की मदद से सात आरोपियों को चिन्हित किया गया। पुलिस ने दबिश देकर सभी को गिरफ्तार कर लिया और उनके कब्जे से विभिन्न कंपनियों के 42 चोरी के मोबाइल फोन बरामद किए। ये आरोपी हुए गिरफ्तार भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में करते वारदात पुलिस के अनुसार, आरोपी भीड़भाड़ वाले स्थानों, धार्मिक आयोजनों और बाजारों में लोगों की जेब और बैग से मोबाइल चोरी कर फरार हो जाते थे। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनसे गैंग के अन्य सदस्यों तथा चोरी के मोबाइलों की खरीद-फरोख्त से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस को और मोबाइल बरामद होने की भी संभावना है। कई मामलों में पहले भी जा चुके हैं जेल पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ दरगाह, क्लॉक टावर सहित अन्य थानों में चोरी, एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट और आबकारी अधिनियम के तहत कई मामले दर्ज हैं। कुछ आरोपियों को पूर्व में सजा भी हो चुकी है।
दुनिया में जब जब युद्ध होते हैं एक सवाल ज़रूर उभरता है कि युद्ध से क्या हासिल। फिर यह कहा जाता है कि युद्ध से कुछ हासिल नहीं होता लेकिन फिर भी दुनिया के सबसे ताक़तवर देश सालों तक युद्ध लड़ते रहते हैं। युद्ध करवाने वाले ताकतवर नेता कुछ तो हासिल करते ही होंगे। दर्जनों देशों के प्रभावशाली, प्रशासक, मंत्री अपने अपने तरीकों और चुने हुए शब्दों में समझाते रहते हैं कि युद्ध से बहुत नुकसान हो रहा है, दुनिया की आर्थिक स्थिति परेशान होकर उलझी पड़ी है, हज़ारों मौतें हो चुकी हैं लेकिन युद्ध है कि जारी रखा जाता है। रूस युक्रेन युद्ध इसकी सबसे बड़ी मिसाल है। दूसरी मिसाल है, अमरीका इजराइल ईरान की लड़ाई जिसके सौंवे दिवस के अशुभ अवसर पर अमरीका और ईरान ने एक दूसरे पर हमले किए। मानो या न मानो युद्ध से कुछ तो हासिल हो रहा है। युद्ध विराम और शांति बातचीत की राख के नीचे शोले बुझते ही नहीं, माहौल में तनाव उबलता रहता है युद्ध के ड्रोन मंडराते रहते हैं। युद्ध का सबसे बड़ा हासिल व्याव्सायिक फायदा है। खालिस व्यवसायी राष्ट्रपति, अपना नुक्सान ज़्यादा नहीं होने देंगे, दूसरों का बेड़ा गर्क करवा देंगे। उनके हिसाब से युद्ध भी एक सौदा है। उनकी हर चाल ऐसा दिखाती है। कुछ भी सोच सकते हैं। बड़ा सोचना, ज्यादा मांगना उनकी व्यावसायिक शैली में शामिल है। ज़्यादा मांगेंगे तो ज्यादा मिलेगा, कम मांगोगे तो कम ही मिलने वाला है। उन्हें खुद को खबर बनाना आता है। चर्चा में बनाए रखना आता है। वे व्याव्सायिक राजनीतिज्ञों की तरह परिस्थितियों के सभी दरवाज़े खुले रखते हैं। खूब शोर करते हैं और दूसरों को डराते रहते हैं। कहकर मुकर जाते हैं। जैसा बंदा वैसी डील करने को तत्पर रहते हैं। अब तो वैसे भी हर चीज़ में व्यापार और बाज़ार मिला दिया गया है। बड़ा दांव ज्यादा खतरा लेकिन फायदा भी उसी अनुपात में। आम लोग ही तो मरते हैं, घायल हो जाते हैं, विस्थापित होते हैं। ईमारतें और हथियार तबाह होते रहते हैं फिर नए बनाने के लिए मरम्मत के लिए, उद्योग क्षेत्र को काम मिलता है। कुछ भी हो जाए व्यवसाय फैलता रहता है। महंगाई का कर्तव्य तो हमेशा बढ़ते जाना है। इसे भी पढ़ें: विश्वगुरु न होते हुए (व्यंग्य) अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं हारकर उदास बैठी हैं। युद्ध जारी रखने वाले अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधकों को यह संतुष्टि रहती है कि युद्ध निरंतर है। उन्हें अनिश्चितताओं से घिरी दुनिया से क्या लेना। धार्मिक कट्टरता शत्रुता बढ़े तो बढ़े। राजनीति को तो यह सब फैलाकर ही रखना होता है। कितने ही अनुभवी, यशस्वी नेताओं की सामरिक शक्ति, रुआब और प्रभाव की पोल खुलती जाती है लेकिन युद्ध से उनकी नाक ऊंची रहती है। स्वार्थ पूरा होता है और नकली इज्ज़त बनी रहती है। जो शांति स्थापित करने के लिए युद्ध जारी रखते हैं इतिहास उन्हें भूलता नहीं। क्या फर्क पड़ता है अगर युद्ध के कारण याद रखता है। अगर युद्ध से फायदा न हो तो कई तरह का नुक्सान करने वाले इस खतरनाक काम को कौन महीनों तक करता रहेगा। हर व्यवसाय में छिपे हुए फायदे होते हैं जिनका किसी को भी पता नहीं चलता सिर्फ उन्हें पता होता है जो उनके मालिक होते हैं। युद्ध एक व्यवसाय ही तो है जिसका हासिल, ख़ास लोगों को होने वाला किसी न किसी तरह का अशुभ लाभ है। - संतोष उत्सुक
अमर स्वाभिमान का प्रतीक हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष
Battle of Haldighati: 18 जून भारतीय इतिहास की वह अमर तिथि है, जो केवल एक युद्ध का स्मरण नहीं कराती बल्कि त्याग, स्वाभिमान, साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण की गाथा सुनाती है। यह वह दिन है जब मेवाड़ की धरती पर एक ऐसा संघर्ष हुआ, जिसने इतिहास के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
'वाराणसी' में दिखेगा महायुद्ध, भगवान राम और कुंभकर्ण के बीच होगा 30 मिनट का ऐतिहासिक टकराव!
दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली जब भी कोई नया प्रोजेक्ट लाते हैं, तो वह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक उत्सव बन जाता है। 'बाहुबली' और 'आरआरआर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद, राजामौली अब सुपरस्टार महेश बाबू के साथ अपनी अगली महात्वाकांक्षी ...
खाड़ी युद्ध से निपटने की मोदी की तजबीज
मोदीजी ने एक बार फिर राष्ट्र की जनता को उसके कर्तव्यों के प्रति सचेत किया है।
ललित सुरजन की कलम से युद्ध नहीं, शांति चाहिए
जब एक तरफ सिर्फ एक सैनिक की गिरफ्तारी से उपजे भय और रिहाई की घोषणा से मिली राहत है, तब दूसरी तरफ आक्रामक मुद्रा अपनाकर हम क्या हासिल करना चाहते हैं?
युद्धविराम और हाशिए पर धकेल दिया गया भारत
यह युद्ध स्पष्ट रूप से नेतन्याहू की देन है और ट्रम्प इसके परिणामों के बारे में सोचे-समझे बिना ही इसमें फंस गए।
युद्ध के माहौल में विश्व शांति का शंखनाद है विश्व णमोकार दिवस
विश्व णमोकार दिवस- 9 अप्रैल, 2026 विश्व इतिहास के इस संक्रमणकाल में, जब मानवता युद्ध, हिंसा, आतंक, तनाव और असहिष्णुता के बोझ तले कराह रही है, ऐसे समय में 9 अप्रैल 2026 को मनाया जाने वाला विश्व णमोकार मंत्र दिवस एक अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा-विस्फोट के रूप में सामने आ रहा है। यह दिवस केवल एक ... Read more
तीसरे विश्वयुद्ध की आहट और गांधी
इतिहास विजय-पराजय-विनाश का मृत दस्तावेज नहीं है, न वह किसी की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कहानी का विवरण है।
धीरे-धीरे हकीकत में बदल रहे हैं भारत के ईरान युद्ध के डर
ईरान युद्ध को लेकर भारत की सबसे गहरी आर्थिक चिंताएं अब काल्पनिक नहीं रह गई हैं
युद्ध को लेकर मोदी का देश को डराने वाला संदेश
देश में जहां भी और जब भी चुनाव होते हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दूसरे सारे काम छोड़कर अपनी भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार में जुट जाते हैं
पश्चिम एशिया में युद्ध के दुष्प्रभाव से निपटने के लिए बेहतर नीतियों की ज़रूरत
वित्त वर्ष 2026-27 की ठीक शुरुआत में, जो 1 अप्रैल, 2026 से शुरू हो रहा है, भारत को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है
युद्धग्रस्त विश्व में महावीर की अहिंसा: शांति की एकमात्र राह
संदर्भ – तीर्थंकर महावीर स्वामी जन्म कल्याणक 2625वां (31 मार्च 2026) आज का विश्व एक विचित्र विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर विज्ञान, तकनीक और वैश्वीकरण ने मानव जीवन को अभूतपूर्व सुविधाएं दी हैं, वहीं दूसरी ओर युद्ध, हिंसा और असहिष्णुता ने मानवता के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विश्व के ... Read more
मिडिल ईस्ट युद्ध ने ट्रम्प की मुश्किलों को बढ़ाया
युद्ध के मामले में अमेरिका-इजरायल की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं।
पश्चिम एशिया युद्ध में परमाणु खतरे के प्रति लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अंतिम घोषित तिथि बढ़ा दी है।
अब युद्धविराम को लालायित ट्रंप
अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह लड़ाई अमेरिका को पहले ही महंगी पड़ रही है
पश्चिम एशिया में युद्ध फैलने से एक और वैश्विक आर्थिक संकट का खतरा
पश्चिम एशिया का संकट अब एक वैश्विक आर्थिक चुनौती में बदल गया है
फैक्ट चेक: इजरायल के डिमोना पर हमले के दावे से इराक का वीडियो हुआ वायरल
बूम ने पाया कि वायरल हो रहा वीडियो इराक के Nasiriyah स्थित एक रेस्टोरेंट में लगी आग का है.
ईरान युद्ध के सबक मौजूदा संघर्ष से कहीं आगे बाजार का आकार तय करेंगे
ऊर्जा बाजार एक ऐसे दौर में जा रहा है, जहां मूल्य निर्धारण मॉडल के आधार पर बनी पारंपरिक धारणाएं संघर्ष के बदलते स्वरूप से पूरी तरह बदल रही हैं
ईरान युद्ध में नाटो से अलग-थलग पड़े ट्रंप की परीक्षा की घड़ी
बुधवार को, अमेरिका-इजरायल गठबंधन के ईरान के खिलाफ युद्ध के 18वें दिन, ट्रंप को एक साथ दो बुरी खबरें मिलीं
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता, बेटी के साथ सुरक्षित लौटीं भारत, सुनाई आपबीती
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता भी अपनी 14 साल की बेटी सायरा के साथ यूएई में ...
ईरान के अखबार तेहरान टाइम्स ने अपने पहले पन्ने पर एक मार्मिक और भीतर तक झकझोरने वाली तस्वीर छापी है
ईरान युद्ध से भारतीय अर्थव्यवस्था को जोरदार झटका संभव
पश्चिम एशिया में चल रहे व्यापक युद्ध, जिसमें अमेरिका-इज़राइल जोड़ी और ईरान शामिल हैं
ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश ने आपातकालीन कदम उठाए
बांग्लादेश ने आने वाले दिनों में ईंधन की भारी कमी से बचने के लिए पेट्रोल राशनिंग का सहारा लिया है
ललित सुरजन की कलम से - युद्ध नहीं, शांति चाहिए
'एक कटु सत्य है कि भारत ने युद्ध की विभीषिका का बहुत सीमित अनुभव किया है। बातें हम भले ही बड़ी-बड़ी कर लें
क्या ट्रंप ने कहा कि 'भारत-पाकिस्तान युद्ध बढ़ता तो शहबाज शरीफ की मौत हो जाती?'
बूम ने पाया कि वायरल दावा भ्रामक है. मूल भाषण में ट्रंप ने कहा था, 'पाकिस्तानी पीएम ने उनसे कहा था कि अगर पड़ोसी देशों के बीच परमाणु युद्ध होता तो 3.5 करोड़ लोग मारे जाते.'
एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज़ की '120 बहादुर' को लेकर चर्चा अब अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। फिल्म ट्रेलर ने पूरी तरह से रोमांच और प्रेरणा का सही मिश्रण पेश किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बलिदान दिवस पर मेजर शैतान सिंह ...
War 2 रिव्यू: लचर स्क्रिप्ट और निर्देशन के कारण रितिक और एनटीआर हारे युद्ध, पढ़ें पूरी समीक्षा
रितिक रोशन और एनटीआर स्टारर War 2 ‘स्पाई यूनिवर्स’ की बड़ी पेशकश मानी जा रही थी, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और औसत निर्देशन ने इसे निराशाजनक बना दिया। शानदार एक्शन सीक्वेंस और एनटीआर के दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद फिल्म का सेकंड हाफ बिखर गया। कहानी में ...
सलमान खान की सिकंदर के आखिरी गाने में दिखेगा जबरदस्त जलवा, तुर्की से बुलाए गए 500 डांसर्स!
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की 'सिकंदर' इस साल की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके एक्शन-पैक्ड टीजर ने इसकी भव्य एंट्री के लिए एकदम परफेक्ट माहौल तैयार कर दिया है। भव्य पैमाने पर बनाई गई इस फिल्म में ...
केसरी वीर के लिए सूरज पंचोली ने की कड़ी ट्रेनिंग, ऐसे सीखा युद्ध कौशल
बॉलीवुड एक्टर सूरज पंचोली अपनी पहली बायोपिक में वीर हामीरजी गोहिल के ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने जा रहे हैं। सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय और सूरज पंचोली अभिनीत फिल्म 'केसरी वीर : लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ' का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ...
फरहान अख्तर लेकर आ रहे भारत-चीन युद्ध पर आधारित फिल्म 120 बहादुर, निभाएंगे मेजर शैतान सिंह का रोल
Movie 120 Bahadur : रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट, ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज के साथ मिलकर '120 बहादुर' को पेश करने के लिए उत्साहित हैं। यह फिल्म मेजर शैतान सिंह (पीवीसी) और चार्ली कंपनी, 13 कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिकों की कहानी कहती ...
Adil Hussain: दुनियाभर में इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 की धूम मची हुई है। पेरिस ओलंपिक में दुनियाभर के खिलाड़ियों ने भाग लिया है। भारत के कई खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। हाल ही में तुर्की के शूटर यूसुफ डिकेक ने सिल्वर मेडल जीता।
बॉर्डर की 27वीं सालगिरह पर, अभिनेता सनी देओल ने एक घोषणा वीडियो के ज़रिए फ़्रैंचाइज़ी के दूसरे संस्करण की पुष्टि की है। अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सनी ने बॉर्डर 2 में अपनी वापसी की आधिकारिक घोषणा करते हुए एक वीडियो शेयर किया और इसे 'भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म' बताया। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ''एक फौजी अपने 27 साल पुराने वादे को पूरा करने के बाद, आ रहा है फिर से। भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म, बॉर्डर 2।'' इस फिल्म का निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता करेंगे। आगामी युद्ध फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह करेंगे। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | पति से तकरार के बीच केन्या लौट गई हैं Dalljiet Kaur? शादी को बचाने की कर रही कोशिश सनी द्वारा घोषणा वीडियो शेयर किए जाने के तुरंत बाद, सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए कमेंट सेक्शन में बाढ़ ला दी। एक यूज़र ने लिखा, ''वाह, यह बहुत बढ़िया घोषणा है सर जी, जय हिंद।'' दूसरे ने लिखा, ''बहुत उत्साहित हूँ।'' तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, ''बॉर्डर 2 के लिए बहुत उत्साहित हूं।'' इसे भी पढ़ें: NDA पर इमोशनल बयान, काले सूट में ली मंत्री पद की शपथ और शर्मिला अंदाज, Tripti Dimri की तरह रातों रात भारत के Sensation बन गये Chirag Paswan सनी देओल की अन्य परियोजनाएं उन्हें आखिरी बार अमीषा पटेल के साथ गदर 2 में देखा गया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही और इसे ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर घोषित किया गया। गदर 2 की सफलता के बाद, सनी ने लाहौर 1947 सहित कई फिल्में साइन कीं, जिसे आमिर खान के प्रोडक्शन बैनर के तहत बनाया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जिन्होंने आमिर को कल्ट क्लासिक अंदाज़ अपना अपना (1994) में निर्देशित किया था। View this post on Instagram A post shared by Sunny Deol (@iamsunnydeol)
Kalki 2898 AD: शुरू हो गया नया युद्ध, पूरे ट्रेलर की अहम कड़ी हैं अमिताभ, प्रभास करेंगे इम्प्रेस
Kalki 2898 AD के ट्रेलर को देखें तो, फिल्म कल्कि 2898 एडी के मेकर्स ने विश्वास दिलाया है कि ये फिल्म लोगों को बांधने में कामयाब होगी. टफ सीक्वेंस, क्लियर एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर आपका ध्यान खींचते हैं. वीएफएक्स पर भी अच्छा काम किया गया है.
आशुतोष राणा ने डीपफेक वीडियो को बताया 'माया युद्ध', बोले- ये सालों से चल रहा
आशुतोष ने कहा कि ऐसी बातों में खुद को डिफेंड करने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि जो लोग आपको जानते हैं वो सवाल करेंगे ही नहीं. और जो नहीं जानते, उन्हें किसी रिस्पॉन्स से फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वो दिमाग में आपकी एक छवि बना चुके होते हैं.
रानीति बालाकोट एंड बियॉन्ड: जिमी शेरगिल की नई सीरीज भारत की आधुनिक युद्ध की ऐतिहासिक कहानी को प्रदर्शित करेगी। जिमी शेरगिल दो मिनट के ट्रेलर की शुरुआत पुलवामा हमले की झलक से होती है। एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाने वाले आशीष कहते हैं, ये एक नया रण है या इसे जीतने के लिए एक नई रणनीति की जरूरत है। इसे भी पढ़ें: नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन प्रहार', कमांडर शंकर राव समेत अब तक 79 हुए ढेर, हिट लिस्ट में और भी कई नाम शामिल आगामी वेब शो आधुनिक युद्ध को डिकोड करता है जो केवल भौतिक सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता है बल्कि सोशल मीडिया, डिजिटल रणनीति और गुप्त राजनीतिक चालों के क्षेत्र से परे है जो भू-राजनीति को नया आकार देने की शक्ति रखता है। वेब श्रृंखला उन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है जिन्होंने 2019 में देश को हिलाकर रख दिया था। शो में कुछ हवाई दृश्य, शानदार प्रदर्शन और एक शक्तिशाली कथा है जो युद्ध के मैदान के अंदर और बाहर हर पहलू को चतुराई से पकड़ती है। इसे भी पढ़ें: Biden को सोचना पड़ेगा फिर एक बार, Iran पर प्रहार तो रूस करेगा पलटवार, रक्षा मंत्रायल ने चिट्ठी लिखकर जता दी मंशा आगामी वेब श्रृंखला के बारे में बात करते हुए, जिमी ने कहा: यह मेरे द्वारा अतीत में की गई किसी भी भूमिका से भिन्न है। कम से कम यह कहना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन भारत की पहली वॉर-रूम केंद्रित वेब-श्रृंखला का हिस्सा बनना बेहद संतोषजनक भी है। वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित जिसने देश को हिलाकर रख दिया। एनएसए प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए, आशीष ने कहा, एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन रक्षा बलों के कुछ सदस्यों के साथ बैठकों ने मुझे अपने चरित्र की बारीकियों को समझने में मदद की। तैयारी कार्य और कार्यशालाएं मुझे वापस ले गईं मेरे एनएसडी के दिनों में। संतोष सिंह द्वारा निर्देशित, श्रृंखला का निर्माण स्फीयरओरिजिन्स मल्टीविजन प्राइवेट लिमिटेड के सुंजॉय वाधवा और कॉमल सुंजय डब्ल्यू द्वारा किया गया है। इसमें प्रसन्ना भी हैं। शो का प्रीमियर 25 अप्रैल को JioCinema पर होगा।
आखिर क्यों Indira Gandhi ने Aandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध, आज भी देखने से कतराते हैं लोग
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'सावरकर' रिव्यू: खोखली, एकतरफा फिल्म में एकमात्र अच्छी चीज है रणदीप हुड्डा का काम
आज के दौर में 'गुमनाम' हो चुके एक स्वतंत्रता नायक की कहानी कहने निकली ये फिल्म, एक अनजान कहानी बताने से ज्यादा अपने हीरो विनायक दामोदर सावरकर को बाकियों के मुकाबले अधिक 'वीर' बताने पर फोकस करने लगती है.
अस्तित्व और बदले के लिएब्रह्मांड में शुरू होने वाला है महायुद्ध, एक्शन और रोमांच से भरपूर हैRebel Moon 2 का धांसू ट्रेलर

