नेतन्याहू का बड़ा ऐलान: लेबनान से सीधी वार्ता को मंजूरी
ईरान-इजरायल तनाव के बीच पश्चिम एशिया में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है
मध्य पूर्व तनाव के बीच भारत की बड़ी कूटनीति ; जानें क्या है हरदीप पुरी का मिशन कतर
मध्य पूर्व संकट के बीच भारत के तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी कतर दौरे पर, एलपीजी-एलएनजी आपूर्ति बाधित। ईरानी हमलों से कतर की गैस क्षमता प्रभावित, भारत ने अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया से वैकल्पिक आयात बढ़ाया। विदेश मंत्री एस जयशंकर भी UAE दौरे पर, ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस।
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्धविराम का समझौता कर शांतिदूत बने पाकिस्तान की की टेंशन अब बढ़ रही है। पिछले 24 घंटों से विरोधाभासों का दौर जारी है। समझौते की शर्तों, विशेषकर लेबनान की स्थिति को लेकर तीनों पक्ष एक-दूसरे के दावों को झुठला रहे हैं। ...
कोंडागांव, 9 अप्रैल को 188वीं बटालियन सीआरपीएफ मुख्यालय चिकलपुट्टी, कोंडागांव में शौर्य दिवस मनाया गया। इस अवसर पर देश के लिए बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ कमांडेंट भवेश चौधरी ने राष्ट्रीय राजमार्ग-30 स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इसके बाद एक सैनिक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें जवानों को शौर्य दिवस की गौरवगाथा सुनाई गई और वीर जवानों के पराक्रम को याद किया गया। CRPF ने पाकिस्तानी सेना के हमले को विफल किया था कमांडेंट चौधरी ने अपने संबोधन में बताया कि 9 अप्रैल 1965 को गुजरात के कच्छ के रण में सरदार पोस्ट और टाक पोस्ट पर तैनात सीआरपीएफ के जवानों ने पाकिस्तानी सेना के बड़े हमले को विफल कर दिया था। इस लड़ाई में दुश्मन के 34 सैनिक मारे गए और 4 को जीवित पकड़ा गया था। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सीआरपीएफ ने देश के विभिन्न हिस्सों जैसे पंजाब, जम्मू-कश्मीर, आंध्रप्रदेश और छत्तीसगढ़ में आतंकवाद, नक्सलवाद और उग्रवाद के खिलाफ लगातार साहस का प्रदर्शन किया है। इस अवसर पर बटालियन के वीरता पदक विजेताओं को सम्मानित किया गया। साथ ही, उत्कृष्ट कार्य करने वाले जवानों को प्रशस्ति पत्र देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों और जवानों को भविष्य में और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान द्वितीय कमान अधिकारी नीतीन्द्र नाथ, उप कमांडेंट कमल सिंह मीणा, सहायक कमांडेंट ओमप्रकाश विष्णोई, बन्ना राम, अमर सिंह मीणा सहित सभी अधिकारी और जवान मौजूद थे।
युद्ध के लक्ष्य विफल: दुश्मन ईरान की शर्तों पर युद्धविराम के लिए सहमत, सेना के प्रवक्ता का दावा
ईरानी सेना के प्रवक्ता के अनुसार अमेरिका-इजरायल युद्ध में अपने रणनीतिक और गुप्त उद्देश्यों में विफल रहने के बाद दुश्मन ने ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव पर युद्धविराम स्वीकार किया। जानिए पूरे घटनाक्रम और इसके क्षेत्रीय प्रभाव।
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। जहां एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्तों के सीजफायर (US Iran Ceasefire) की घोषणा हो चुकी है। दूसरी तरफ इजराइल के लेबनान पर हमले जारी है। इजराइल एक के बाद एक लेबनान पर हमले कर रहा ...
अबोहर में महिला पर हमला करने वाला आरोपी गिरफ्तार:एकतरफा प्यार में की वारदात, दोनों यूपी के रहने वाले
अबोहर के गांव रामगढ़ की भंगाला कॉलोनी में एक महिला पर जानलेवा हमला करने के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। महिला को गंभीर हालत में फरीदकोट के सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां उसके चेहरे पर 28 से 30 टांके आए हैं। सदर अबोहर पुलिस ने आरोपी अर्जुन सिंह पुत्र रघुवर दयाल निवासी भंगाला को काबू कर लिया है। आरोपी अर्जुन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले का रहने वाला है। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 109, 115 (2), 118 (2), 304, 329 (3) और 333 के तहत मामला दर्ज किया गया है। महिला को एक साल से जानता था आरोपी पुलिस के अनुसार, यह हमला एकतरफा प्यार के चलते किया गया। आरोपी अर्जुन सिंह ने स्वीकार किया है कि वह पिछले करीब एक साल से पीड़ित महिला रमा निवासी इटावा उत्तर प्रदेश को जानता था। आोरपी ने बताया कि रमा के किसी और व्यक्ति के संपर्क में आने की बात उसे बर्दाश्त नहीं हुई, जिसके चलते उसने महिला पर हमला कर दिया। महिला के पति की हो चुकी मौत घायल रमा के पति की करीब 4 साल पहले मौत हो गई थी। वह अपनी गर्भवती बहन की देखभाल के लिए लगभग 15 दिन पहले ही अपने बहन के गांव आई थी। आरोपी अर्जुन उसे कई दिनों से परेशान कर रहा था। संबंधित थाने के पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार युवक को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस रिमांड पर लेकर उससे कड़ी पूछताछ की जाएगी। पुलिस हमले में इस्तेमाल किया गया हथियार बरामद करने और आरोपी के फोन की गहनता से जांच करने की तैयारी कर रही है, ताकि मामले का पूरा खुलासा हो सके।
युद्धविराम पर संकट के बादल, लेबनान में इजरायली हमले में 254 लोगों की मौत, ईरान की कड़ी चेतावनी
लेबनान पर हमलों के बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा है कि यदि इजरायल ने अपने हमले जारी रखे, तो तेहरान युद्धविराम से पीछे हट सकता है।
लेबनान सीजफायर पर अमेरिका-ईरान के बीच महायुद्ध पाकिस्तान की एक गलती ने दुनिया भर में मचाया बवाल
ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध का असर मध्य प्रदेश के फार्मा सेक्टर पर गहराता जा रहा है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव इस उद्योग के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के चलते मध्य प्रदेश की फार्मा कंपनियों का करीब 1000 करोड़ रुपए का निर्यात अटक गया है। एमपी से हर महीने 20,000 से अधिक दवाइयों के कंटेनर दुनिया के 190 देशों में भेजे जाते हैं। वहीं, उद्योगपतियों का कहना है कि भले ही युद्धविराम हो गया हो, लेकिन स्थिति सामान्य होने में 6 महीने से लेकर डेढ़ साल तक का समय लग सकता है। प्रदेश की लगभग 100 फार्मा कंपनियों का निर्यात पूरी तरह प्रभावित हुआ है। इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के चेयरमैन परेश चावला का कहना है कि युद्धविराम के बाद उम्मीद है कि अगले दो से तीन महीनों में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगेगी। लेकिन इस युद्ध ने इंडस्ट्री को काफी नुकसान पहुंचाया है। ये तीन कारण, जिनसे एक्सपोर्ट अटका मध्य प्रदेश से बड़ी मात्रा में दवाइयां और रॉ मटेरियल गल्फ देशों, अफ्रीकी देशों, यूरोपीय देशों और अमेरिका को निर्यात किए जाते हैं। वर्तमान में निर्यात प्रभावित होने के पीछे तीन प्रमुख कारण सामने आए हैं… 190 देशों में जाती हैं भारत की दवाइयां चावला ने आगे बताया कि भारत से करीब 180 से 190 देशों में दवाइयां निर्यात की जाती हैं। भारत को ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ भी कहा जाता है। अमेरिका तक भारत की जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है। अमेरिका से लेकर सोमालिया और कांगो जैसे छोटे देशों तक, कई देश पूरी तरह भारतीय दवाओं पर निर्भर हैं। युद्ध के कारण जिस तरह सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, उसका असर पूरी दुनिया पर देखने को मिलेगा। प्रदेश के प्रमुख फार्मा उद्यमियों और एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि इस युद्ध ने केवल तात्कालिक नुकसान ही नहीं पहुंचाया, बल्कि बाजार की संरचना को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, भारत का फार्मा एक्सपोर्ट करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है। इंदौर से 3 हजार करोड़ का होता है एक्सपोर्ट इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के सचिव अनिल कुमार सबरवाल ने बताया कि इंदौर से हर महीने करीब ढाई से तीन हजार करोड़ रुपए का निर्यात होता है। इसमें फार्मा, कन्फेक्शनरी, केमिकल और टेक्सटाइल इंडस्ट्री का एक्सपोर्ट शामिल है। फार्मा सेक्टर की बात करें तो मध्य प्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री का 1 हजार करोड़ रुपए से अधिक का निर्यात पूरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके पीछे वेसल (जहाज) महंगे होना और कंटेनर की कमी प्रमुख कारण हैं। रॉ मटेरियल पर भी प्राइस कंट्रोल जरूरी फार्मा इंडस्ट्री के उद्योगपतियों का कहना है कि इस समय रॉ मटेरियल की कीमतें सबसे ज्यादा बढ़ गई हैं। उनका मानना है कि जैसे सरकार दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण रखती है, वैसे ही दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले रॉ मटेरियल पर भी प्राइस कंट्रोल होना चाहिए।वर्तमान में रॉ मटेरियल पर किसी प्रकार का मूल्य नियंत्रण नहीं है। उद्योगपतियों का यह भी कहना है कि सरकार को दवा निर्माण में उपयोग होने वाले रॉ मटेरियल की जमाखोरी पर सख्त नियंत्रण करना चाहिए। यदि ऐसा किया जाता है, तो बाजार में दबा हुआ 25-30 प्रतिशत रॉ मटेरियल बाहर आ सकता है और जमाखोरी की समस्या कम हो सकती है। सरकार के ऐसे कदम से एक-दो महीने के भीतर रॉ मटेरियल और पैकेजिंग मटेरियल की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे दवाओं को लेकर बनी मौजूदा समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। एमपी में 300 यूनिट्स कर रही हैं काम फार्मा एसोसिएशन के अनुसार, मध्य प्रदेश में लगभग 350 छोटी-बड़ी इंडस्ट्री दवाओं का उत्पादन करती हैं। हालांकि, वर्तमान में करीब 300 इंडस्ट्री ही संचालित हो रही हैं। एमपी सरकार ने पिछले एक साल में तय मानकों का पालन नहीं करने पर करीब 50 इंडस्ट्री को बंद कराया है। इन 300 सक्रिय इंडस्ट्री में से लगभग 100 कंपनियां ऐसी हैं, जो दवाओं का निर्यात भी करती हैं। ये दवाइयां होती हैं एमपी से एक्सपोर्ट मध्य प्रदेश से निर्यात होने वाली प्रमुख दवाओं में पैरासिटामोल, मेटफॉर्मिन, एमोक्सिसिलिन, एजीथ्रोमाइसिन, ओमेप्राजोल, एटोरवास्टेटिन और इबुप्रोफेन जैसी सामान्य दवाएं शामिल हैं। इसके साथ ही टीकों (वैक्सीन) का भी बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता है। यह खबर भी पढ़ें… 10-15% उद्योगों में एक ही शिफ्ट में काम इजराइल-ईरान युद्ध का असर अब मध्य प्रदेश के उद्योगों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे माल की कीमतें 20 से 30 फीसदी तक बढ़ गई हैं। वहीं, लॉजिस्टिक लागत भी 5 गुना महंगी हो गई है। इसका सीधा असर उत्पादन और सप्लाई पर पड़ रहा है। पूरी खबर यहां पढ़ें...
मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास तथा संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बुधवार रात जबलपुर पहुंचे, जहां उन्होंने विभिन्न स्थानीय कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से लेकर पश्चिम बंगाल के आगामी चुनाव तक कई विषयों पर खुलकर बात की। देर रात वे इंदौर के लिए रवाना हो गए। इजराइल-ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे तनाव पर टिप्पणी करते हुए विजयवर्गीय ने अमेरिका की भूमिका पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि यह विवाद ईरान और इजराइल के बीच है, लेकिन अमेरिका इसमें “बिल्ली” की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने इसे बिल्ली-बंदर की कहानी से जोड़ते हुए कहा कि जैसे दो बंदरों की लड़ाई में बिल्ली तराजू लेकर बैठती है और दोनों तरफ से रोटी खाती जाती है, उसी तरह अमेरिका इस संघर्ष में अपना फायदा देख रहा है, जबकि असली पक्ष लड़ते रह जाते हैं। मोदी की विदेश नीति की तारीफ विजयवर्गीय ने मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा कि आज भारत की स्थिति ऐसी है कि ईरान और इजराइल—दोनों ही भारत को अपना मित्र मानते हैं। उन्होंने कहा कि यह सफल कूटनीति का उदाहरण है कि वैश्विक तनाव के बीच भी भारत दोनों देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए हुए है। बंगाल चुनाव को लेकर दावा मीडिया से बातचीत में उन्होंने पश्चिम बंगाल के आगामी चुनावों पर भी बड़ा दावा किया। विजयवर्गीय ने कहा कि इस बार भाजपा न केवल चुनाव जीतेगी, बल्कि राज्य में सरकार भी बनाएगी। ‘वफादारी’ पर बयान बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा कि देश में कुछ लोग ऐसे हैं जो यहां रहते हैं, लेकिन देश के प्रति वफादारी नहीं रखते। उन्होंने सभी से अपनी जिम्मेदारी समझने की अपील करते हुए कहा कि समय के साथ ऐसे लोगों में भी समझ आएगी।
मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ा तनाव, सीजफायर की शर्तों पर क्या पाकिस्तान ने किया गुमराह?
सीजफायर लागू होने के कुछ ही घंटों बाद इजराइल ने लेबनान पर बड़ा हमला कर दिया। इसमें 254 लोगों की मौत हो गई जबकि 1165 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इस हमले से नाराज ईरान ने फिर स्ट्रेट ऑफ हार्मुज बंद कर दिया है। उसने इजराइल पर सीजफायर की शर्तों की ...
Top News : लेबनान पर इजराइली हमले से संकट में सीजफायर, तेल कीमतों में उछाल
Top News 9 April: इजराइल के लेबनान पर हमले से भड़का ईरान। स्ट्रेट ऑफ हार्मुद बंद कर सीजफायर तोड़ने की धमकी दी। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से फिर क्रूड ऑयल में तेजी दर्ज की गई। असम, केरलम और पुडुचेरी में सुबह 7 बजे से मतदान जारी। 9 अप्रैल की बड़ी खबरे ...
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध फिलहाल स्थगित हो गया है। लेकिन राजधानी रांची में गैस की किल्लत से निपटने का जंग अभी भी जारी है। क्योंकि, ऑयल कंपनियां, जिला प्रशासन से लेकर गैस एजेंसियां गैस की आपूर्ति करने का दावा कर रही है। होम डिलेवरी बढ़ाई गई है। इससे नियमित उपभोक्ताओं को कुछ राहत ज़रुर हुई है। लेकिन एक तबका ऐसा है जो गैस की किल्लत का खामियाजा भुगत रहा है। वह है रांची के हजारों लॉज-हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स। शहर के मेन रोड, हरमू रोड, अपर बाजार, थड़पखना, लालपुर, सर्कुलर रोड, कोकर, रातू रोड सहित अन्य क्षेत्रों में लॉज-हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राओं की दिनचर्या बदल गई है। गैस की किल्लत से छात्र-छात्राओं और उनके परिवार का बजट बिगड़ गया है। हालात ऐसे है कि 80 प्रतिशत छात्र-छात्राएं अपना पेट काटकर पढ़ाई करने को विवश हैं। वे तीन बार के बजाय एक बार भोजन कर रहे हैं। सुबह का नाश्ता और रात का खाना छोड़कर दोपहर में एक समय होटल या स्ट्रीट फूड खाकर दिन काट रहे है। कई हॉस्टल में रहने वाली छात्राएं चूड़ा-सत्तू व बाहर मिलने वाले चाईनीज फूड के भरोसे चल रही है। गैस नहीं मिलने की वजह से हॉस्टल के मेस में खाने में कटौती की गई है। इस वजह से कई हॉस्टल के छात्र अपने घर लौट रहे हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने बुधवार को शहर के 30 हॉस्टल-लॉज की पड़ताल की तो कई छात्राओं की आंखों से आंसू निकल गए। उन्होंने भास्कर के साथ ऐसे अपना दर्द साझा किया... इंटर्न: कृति वर्द्धन, वर्षा सोनी, चन्द्रदेव उरांव, काजोल यादव, ईशा उपाध्याय, प्रियांशु गुप्ता की रिपोर्ट करमटोली रोड स्थित आदिवासी हॉस्टल में अलग-अलग ब्लॉक है। सभी ब्लॉक में खाना बनाने का अलग-अलग तरीका है। अमर शहीद टाना भगत हॉस्टल बिल्डिंग में मेस नहीं है। छात्र कुंवर उरांव ने बताया कि सभी छात्र गैस पर ही खाना बनाते थे। लेकिन पिछले एक माह से गैस नहीं मिल रही है। छोटू सिलेंडर बाजार से रिफिलिंग कराते थे, वह भी नहीं मिल रहा है। ब्लैक में 300 रुपए प्रति किलो मांगा जा रहा है। इतना पैसा कहां से लाएंगे। इसलिए बिजली के हीटर का इस्तेमाल कर रहे हैं। छात्रों को बिजली का बिल नहीं देना होता है, इसलिए हीटर पर ही खाना बनाना मजबूरी है। जिस बिल्डिंग में मेस है, वहां कोयला और लकड़ी पर खाना बनता है। लेकिन कोयला भी महंगा हो गया है। हीटर और चूल्हा दोनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। खाने में कटौती की गई है। परेशानी की वजह : लॉज-हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राएं घरेलू गैस सिलेंडर का कनेक्शन नहीं लेते हैं। वे अपने घर से सिलेंडर लेकर आते हैं, या मार्केट से पांच-दस किलो वाला सिलेंडर लेकर उसमें गैस रिफिलिंग कराते हैं। गैस किल्लत की वजह से रिफिलिंग वाले अंडरग्राउंड हो गए हैं। चोरी-छिपे कुछ लोग गैस रिफिलिंग कर रहे हैं,लेकिन 250 से 300 रुपए प्रति किलो तक वसूल रहे हैं। इसलिए छात्रों को समस्या हो रही है। थड़पखना : 15 दिनों से बाहर खाना पड़ रहा थड़पखना क्षेत्र में स्थित वर्मा गर्ल्स हॉस्टल की छात्रा शालिनी गुप्ता बताती है कि पहले मासिक बजट चार हजार रुपए में पूरा हो जाता था। अब पांच हजार रुपए लग रहा है। इसलिए खाने में कटौती करनी पड़ रही है। चौधरी गर्ल्स हॉस्टल में 50 छात्राएं रहती हैं। छात्रा साक्षी कुमारी ने बताया कि पहले 90 रु. किलो गैस मिलता था, अब 300 रु. किलो में मिल रहा है। इसलिए बाहर खाना मजबूरी है। करीब दस छात्राएं अपने घर लौट गई। छात्रा जयंती कुमारी ने बताया कि गैस बुक करने के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल रहा है। सोनमति पैलेस हॉस्टल में रह रही साक्षी कुमारी और निशा रंजन का दर्द भी छलक गया। उन्होंने बताया कि गैस ने दिनचर्या के साथ बजट बिगाड़ दिया। यहां 50 छात्राएं रहती थी, लेकिन अब कई हॉस्टल छोड़कर जा रही है। जो यहां रह गए हैं वे ढाबा या स्ट्रीट फूड के सहारे हैं। खर्च मैनेज करने के लिए एक टाइम ही खाना खा रहे हैं।
ईरान ने फिर बंद किया Strait of Hormuz, लेबनान में 254 मौत के बाद भड़का तनाव, समझौता तोड़ने की धमकी
ईरान ने बुधवार को स्पष्ट कहा कि इजराइल अगर लेबनान पर हमले जारी रखता है और सीजफायर का उल्लंघन करता है तो वह इस समझौते से बाहर हो जाएगा। Tasnim न्यूज एजेंसी के अनुसार इजरायली हमलों के बाद ईरान ने Strait of Hormuz से तेल टैंकरों की आवाजाही भी रोक दी ...
संभल में श्रीराम कथा का समापन:महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि ने राम-रावण युद्ध और राजतिलक प्रसंग सुनाए
संभल के बहजोई नगर स्थित कलेक्ट्रेट के निकट बड़े मैदान में आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम कथा का बुधवार को समापन हो गया। अंतिम दिन कथा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सुबह से ही दूर-दराज के क्षेत्रों से भक्त पहुंचने लगे थे। परिसर जय श्रीराम और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। निरंजनी पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. कैलाशानंद गिरी महाराज ने समापन के दिन भगवान श्रीराम की स्तुति श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन के साथ कथा का शुभारंभ किया। उन्होंने पंचवटी प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया और सूर्पणखा प्रसंग को प्रस्तुत किया। महाराज ने मारीच और रावण संवाद, सीता हरण, भगवान राम का विरह तथा रावण-मारीच के छल का वर्णन किया। इसके बाद हनुमान जी के लंका गमन, अशोक वाटिका में माता सीता की खोज और राम की मुद्रिका सौंपने के प्रसंग सुनाए। लंका दहन के वर्णन के दौरान पंडाल तालियों और जयघोष से गूंज उठा। कथा के अंतिम चरण में राम-रावण युद्ध का विस्तृत वर्णन किया गया, जिसमें धर्म और अधर्म के संघर्ष को समझाया गया। कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि सत्य, मर्यादा और धर्म की सदैव विजय होती है। भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन और राजतिलक के प्रसंग के साथ कथा का समापन हुआ। कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों ने वातावरण को आध्यात्मिक बनाया। इस आयोजन ने क्षेत्र में धार्मिक चेतना को बढ़ावा दिया। श्रीराम कथा के अंतिम दिन यूपी सरकार की माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी, डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया, बनियाखेड़ा ब्लॉक प्रमुख डॉ. सुगंधा सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष हरेंद्र सिंह रिंकू, साध्वी गीता प्रधान, भवनेश कुमार राघव, भाजपा नेत्री मंजू दिलेर, पालिका अध्यक्ष राजेश शंकर राजू, पूर्व एमएलसी परमेश्वर लाल सैनी, श्रीवंशगोपाल तीर्थ के महंत भगवतप्रिय महाराज, कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम, अलीगढ़ महापौर प्रशांत सिंघल, सीडीओ गोरखनाथ भट्ट, सीएमओ डॉ. तरुण पाठक, एडीएम प्रदीप प्रदीप वर्मा समेत सैकड़ों कार्यकर्ता एवं अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।
चीन की मध्यस्थता और ईरान में 'सत्ता परिवर्तन' से पलटी युद्ध की बाजी; जाने पूरी कहानी
Iran War के बीच 2 हफ्ते का सीजफायर! ट्रंप का दावा- ईरान में हुआ सत्ता परिवर्तन, अब यूरेनियम संवर्धन होगा बंद। चीन की मध्यस्थता ने वैश्विक राजनीति में मचाया तहलका।
Iran-US Ceasefire News : ईरान और अमेरिका के बीच हुए 2 सप्ताह के युद्धविराम को ईरान की जीत बताते हुए कश्मीर के साथ-साथ लद्दाख में भी खुशियां मनाई गई हैं। इस युद्धविराम पर नेताओं द्वारा प्रतिक्रियाएं भी दी गई हैं। जैसे ही संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान ...
युद्ध विराम की घोषणा से सेंसेक्स 2,946 अंक उछला
मुंबई। अमरीका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्ध विराम की घोषणा से बुधवार को घरेलू शेयर बाजारों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली और बीएसई का सेंसेक्स चार फीसदी के करीब उछल गया। सेंसेक्स की शुरुआत सुबह 2,674 अंक की मजबूती के साथ हुई। पूरे दिन यह 2,300 अंक से अधिक की बढ़त […] The post युद्ध विराम की घोषणा से सेंसेक्स 2,946 अंक उछला appeared first on Sabguru News .
युद्ध के कारण राजसमंद का मार्बल और पाउडर उद्योग ठप, 50 हजार श्रमिक प्रभावित
मोरबी के टाइल्स कारखाने बंद होने से राजसमंद के 80 प्रतिशत पाउडर प्लांट बंद हुए, बेरोजगार मजदूर पलायन करने को मजबूर।
मध्य पूर्व में 40 दिनों के बाद युद्धविराम की घोषणा का स्वागत
अमेरिका और ईरान के बीच लगभग 40 दिनों तक चले भीषण युद्ध के बाद 2 सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की गई है, जिससे अस्थाई विराम की उम्मीद जागी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने युद्धविराम की घोषणा को, व्यापक शान्ति की दिशा में एक सकारात्मक ...
अमेरिका-ईरान सीजफायर पर संकट, लेबनान में इजराइल की जंग से 2 हफ्ते भी नहीं टिकेगा समझौता?
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर एक महीने से अधिक समय तक हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद बुधवार को दोनों पक्षों ने दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान किया। हालांकि, इस समझौते की नाजुक स्थिति ईरान द्वारा साझा की गई शर्तों से ही साफ नजर आ रही है। ईरान ने पूरे ...
जापान के पास गिरीं उत्तर कोरियाई मिसाइलें ; क्या North Korea शुरू करेगा एक और नया महायुद्ध?
उत्तर कोरिया ने लगातार दूसरे दिन कई बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण कर जापान के पास समुद्र में गिराया, जिससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। दक्षिण कोरिया के साथ संबंधों में सुधार की उम्मीदों को झटका लगा है और यह कदम संयुक्त राष्ट्र नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है।
मई-जून में शुरू होगा विनाशकारी खप्पर योग, पिछले साल इस योग में हुआ था भारत-पाक युद्ध
पिछले साल यानी वर्ष 2025 में 15 मार्च से 11 जून और इसके बाद 11 जुलाई से लेकर 7 अक्टूबर तक खप्पर योग बना था। सभी ने देखा है कि इसी दौरान ईरान-इजराल का युद्ध और फिर भारत-पाकिस्तान का युद्ध हुआ था। इस वर्ष भी ऐसा ही योग 1 मई से 29 जून के बीच बन रहा है। ...
महाविनाश के दहलीज से लौटी दुनिया; जाने कैसे हुआ 14 दिनों के ऐतिहासिक युद्धविराम का एलान ?
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बमबारी को 14 दिनों के लिए टाला। पाकिस्तान की मध्यस्थता से शुरू हुआ युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर टिकी नजर।
अबोहर के गांव रामगढ़ में 8 अप्रैल को एक युवक ने विधवा प्रवासी महिला पर कापे से हमला कर दिया। युवक ने महिला के चेहरे पर कई वार किए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे लहूलुहान हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उसे रेफर कर दिया गया। जानकारी के अनुसार, 28 वर्षीय पीड़ित महिला रमा, जो उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सनोड़ी गांव की निवासी है, के पति की करीब चार साल पहले मौत हो गई थी। उसके दो बच्चे हैं। वह पिछले 15 दिनों से अपनी गर्भवती बहन की देखभाल के लिए अबोहर के सदर थाना क्षेत्र के गांव रामगढ़ में उसके घर आई हुई थी। आते-जाते करता था छेड़छाड़ इसी दौरान गांव का ही एक युवक अर्जुन, जो गांव के एक प्रभावशाली व्यक्ति का रसोइया है, रमा को परेशान करने लगा। वह अक्सर गली में आते-जाते उसके साथ छेड़छाड़ करता था। हालांकि, महिला ने उसे साफ तौर पर मना कर दिया था। महिला का चेहरा बुरी तरह बिगड़ाएकतरफा प्यार में असफल होने पर अर्जुन ने रमा पर कापे से हमला कर दिया। उसने महिला के चेहरे पर इतने वार किए कि उसका चेहरा बुरी तरह बिगड़ गया। घटना के बाद महिला के परिजनों और अन्य लोगों ने युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
ईरान-अमेरिका युद्ध में ऐतिहासिक मोड़ ; ट्रंप के सीजफायर पर मुज्तबा खामेनेई ने दी पहली प्रतिक्रिया
डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर पर ईरान के मुज्तबा खामेनेई का बड़ा बयान। सेना को दी गोलीबारी रोकने की सलाह लेकिन कहा- 'ये युद्ध का अंत नहीं, हाथ अभी भी ट्रिगर पर हैं।'
ट्रंप-ईरान वार्ता: 14 दिन का युद्धविराम, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक अहम कूटनीतिक मोड़ सामने आया है
ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव: युद्ध खत्म करने की शर्तें तय
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि अमेरिका के साथ दो हफ्ते का सीजफायर युद्ध के खत्म होने का संकेत नहीं है
Middle East सीजफायर का असर—दलाल स्ट्रीट पर जश्न, सेंसेक्स में ऐतिहासिक उछाल
वैश्विक शांति की खबर से भारतीय बाजारों में उत्सव का माहौल, निफ्टी ने 24,000 का ऐतिहासिक स्तर पार किया।
मुझे परिवार ने 50 लाख रुपए सालाना किराए पर जमीन देने की सहमति दी थी। इसके लिए बकायदा रेमन के दोनों भाईयों, उनकी पत्नी और मां ने घर बुलाकर मुझसे डील की थी। एफआईआर करने से पहले मेरा पक्ष भी नहीं जाना गया और एकतरफा एफआईआर कर दी गई। यह कहना है इंदौर के शराब कारोबारी और क्रिकेट टीम के मालिक सूरज रजक का। सूरज का कहना है कि यह आरोप पूरे निराधार हैं और रेमन कक्कर ने जो मेरे खिलाफ एफआईआर कराई है, यह बिल्कुल गलत है। उस जमीन पर कब्जे जैसी बात तो कभी हुई ही नहीं है। यह पूरा परिवार डिस्प्यूटेड परिवार है। इन लोगों ने पहले भी उक्त जमीन का किसी के साथ सौदा किया था और उसके पैसे हड़प लिए थे, जिसको लेकर कोर्ट में बाकायदा कैस चल रहा है। 50 लाख रुपए में दी थी जमीन सूरज ने परिवार के साथ हुई चैटिंग और बातचीत को दैनिक भास्कर के साथ शेयर करते हुए बताया कि जमीन किराए पर देने को लेकर इनके परिवार की सहमति मुझे दी गई थी। इनके परिवार ने मुझे बताया था कि यह सरकारी जमीन है इस जमीन को लेकर हमारा अभी डिस्प्यूट भी चल रहा है, इसलिए हम लिखा पड़ी अभी नहीं कर सकते, लेकिन यह जमीन हम आपको 50 लाख रुपए सालाना किराए पर दे रहे हैं। रेमन कक्कर के भाई ने मुझे घर बुलाया था। उस दौरान इनकी मां, इनके दोनों भाई, दोनों भाईयों की पत्नियां और उनके बड़े भाई की एक बेटी मिली थी। उनकी सहमति देने के बाद मैंने जमीन पर काम शुरू कराया था, अगर मुझे कब्जा ही करना होता तो क्या मैं घर जा के बात करता? जमीन को लेकर कोर्ट में केस चल रहा है सूरज ने बताया कि मैंने वर्तमान में जमीन के बारे में जानकारी निकाली तो मुझे पता चला है कि इन लोगों ने शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी से इस जमीन को बेचने के लिए सौदा कर लिया था और सौदा करने के बाद उनके करोड़ों रुपए हड़प गए। रुपए हड़पने के बाद यह लोग सौदा करने से भी पलट गए। जिसके बाद इनकी जमीन के बदले पैसे लेने के मामले में कोर्ट में केस भी चल रहा है। मेरी जानकारी के अनुसार इनके परिवार पर उक्त जमीन को लेकर चार से पांच केस कोर्ट में चल रहे हैं। जिसमें से दो या तीन केस सामने वाली पार्टी जीत भी चुकी है वहीं एक या दो में डिसीजन होना बाकी है। रेमन का भाई खुद जमीन दिखाने लेकर गया था मेरा रेमन के भाई रणधीर सलूजा से इस जमीन के विषय में बात हुई थी। जिसके बाद रणधीर उर्फ बंटी सलूजा खुद मुझे जमीन पर लेकर गए थे। जमीन देखने के बाद उन्होंने मुझसे कहा कि आप एक नक्शा बनवा लीजिए, इसके बाद मैंने नक्शा तैयार करवाकर बंटी सलूजा और उनके परिवार को भेजा था। मैंने नक्शा बनाकर दिया उसमें बताया कि सरकारी जगह कौन सी है और इनकी निजी जगह कौन सी है। बाद में जब मैंने काम शुरू कर दिया तब रेमन अचानक आई ओर इनके परिवार के आपसी डिस्प्यूट की वजह से रेमन ने मेरे पर एफआईआर दर्ज करवाई। रेमन के पति ने कहा था आप बंटी से बात कर लीजिए सूरज ने बताया कि जमीन को लेकर मेरी रेमन कक्कर के पति से भी बात हुई थी, उन्होंने भी यही कहा मुझे कि आप बंटी सलूजा से बात कर लीजिए। अगर मुझे पता होता कि इनके परिवार की खासतौर पर रेमन की राजी-मर्जी नहीं है तो मैं वहां पर काम हीं नहीं करता। वहीं इस जमीन को लेकर जब मैं रेमन कक्कर की मां से मिला तो उन्होंने कहा कि बेटा हम यह जमीन आपको बेचना चाहते हैं, आप इसे खरीद लीजिए। सूरज ने कहा कि रेमन अपना मानसिक संतुलन खो चुकी हैं। उनके परिवार में ही आपस में सामंजस्य नहीं है। उन्होंने पहले भी कई लोगों से करोड़ों रुपए हड़पे हैं। आज भी उस जमीन पर नगर निगम का कुर्की का बोर्ड लगा हुआ है। आज यह शहर हित की बात करते हैं तो शहर हित में आज तक इन्होंने अपनी जमीन का टैक्स क्यों नहीं भरा हुआ है। रेमन के परिवार ने जानकारी दी वह एफआईआर करवा रही सूरज ने बताया कि रेमन के परिवार के लोग सतत मेरे संपर्क में थे। जिस दिन रेमन FIR करने जा रही थीं, इनके घर से निकलने के पहले इनके घर के लोगों का फोन मेरे पास आया की भैया रेमन FIR करने के लिए जा रही हैं। आप वहां पर एक आवेदन भिजवा दीजिए। मैंने परिवार के कहने के बाद आवेदन थाने पर भिजवाया और कहा कि हम सरकारी जमीन पर दुकान बनवा रहे हैं। एकतरफा हुई एफआईआर, मेरा पक्ष नहीं जाना सूरज ने बताया कि मुझ पर इस मामले में सीधे एफआईआर हुई है। इसमें मुझसे किसी ने बात करने की कोशिश नहीं की। मुझे लगता है पुलिस को एफआईआर लिखने से पहले मेरे से बात करना चाहिए थी, मेरा पक्ष लेना चाहिए था। रात को 9:30 बजे की FIR की कॉपी मेरे पास मीडिया के माध्यम से आई। रेमन भी उस जमीन में मालिक हैं यह मुझे जानकारी नहीं थी।
लोग परेशान, युद्ध समाप्ति के लिए हस्तक्षेप करे राष्ट्रमंडल संसदीय संघ: राधाकृष्ण
संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राष्ट्रमंडल संसदीय संघ को अपने उद्देश्यों को अस्तित्व देने के लिए मूक दर्शक बने रहने के बजाय युद्ध समाप्त करने और वैश्विक स्तर पर शांति स्थापित करने की दिशा में हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के बाद राष्ट्रमंडल संसदीय संघ विश्व का दूसरा व्यापक लोकतांत्रिक मंच माना जाता है। राष्ट्रमंडल संसदीय संघ का उद्देश्य लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना तथा मानवाधिकारों एवं समावेशी शासन को बढ़ावा देना है। राष्ट्रमंडल संसदीय संघ में विश्व के 56 से अधिक देशों की सहभागिता है और 180 से अधिक शाखाओं का एक विशाल नेटवर्क है। संसदीय कार्यमंत्री मंगलवार को झारखंड विधान सभा के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रमंडल संसदीय संघ, झारखंड शाखा की वार्षिक आम बैठक में बोल रहे थे। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि विगत कई दिनों से ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच अनावश्यक युद्ध जारी है। तीनों देशों के बीच युद्ध का परिणाम विश्व के अन्य देशों को झेलना पड़ रहा है। महंगाई बढ़ गई है। आम लोग गैस की किल्लत का सामना कर रहे हैं। विधानसभा के स्पीकर रबींद्र नाथ महतो ने की अध्यक्षता बैठक की अध्यक्षता करते हुए झारखंड विधानसभा के स्पीकर रबींद्र नाथ महतो ने राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की स्थापना एवं संगठन की भूमिका के संबंध में कहा कि वर्ष 1911 में गठित राष्ट्रमंडल संसदीय संघ 56 देशों का भव्य संगठन बनकर उभरा है। जो संयुक्त राष्ट्र संघ के बाद दूसरा सबसे बड़ा संगठन है। सुशासन लोकतंत्र एवं मानव अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए तथा विधायिकाओं की क्षमता का विकास करता है। यह भी कहा कि राष्ट्रमंडल संसदीय संघ जैसे बड़े संगठन में हम अपनी उपस्थिति दर्ज कराने तक सीमित न होकर, ऐसे सम्मेलन से राष्ट्र की तरक्की में हम अपनी भागीदारी किस तरह निभा पाए, इस पर भी हमें सोचना चाहिए। उन्होंने जानकारी दी कि अगला 69वां सम्मेलन केप टाउन साउथ अफ्रीका में आयोजित होगी । रामदास सोरेन व रामचंद्र नायक को श्रद्धांजलि : सीपीए झारखंड शाखा के पूर्व सदस्य रामदास सोरेन एवं रामचंद्र नायक के निधन पर 1 मिनट का मौन धारण भी किया गया। प्रभारी सचिव विधानसभा सह सचिव राष्ट्रमंडल संसदीय संघ झारखंड शाखा रंजीत कुमार ने बैठक में वार्षिक लेखा जोखा प्रस्तुत किए। बैठक में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी व अन्य शामिल हुए।
वैश्विक शांति व सद्भाव के लिए चौथी अयोध्या राम मंदिर तीर्थ यात्रा: डॉ. जौली अमेरिका-ईरान-इजराइल व रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्ति हेतु वैश्विक भारत ब्रांड एम्बेस्डर व अध्यक्ष दिल्ली स्ट्डी ग्रुप डॉ. विजय जौली द्वारा चौथी अयोध्या राम मंदिर तीर्थ यात्रा का आयोजन 9 से 11 अप्रैल तक किया जा रहा है। 10 अप्रैल 2026 प्रातः 9.30 बजे अयोध्या राम मंदिर के दर्शन सभी राम भक्त करेंगे। डॉ. विजय जौली ने बताया कि यह तीर्थ यात्रा वैश्विक शांति व सद्भाव बनाए रखने, अमेरिका-ईरान-इजराइल तथा रूस व यूक्रेन युद्ध की समाप्ति के लिए आयोजित की जा रही है। राम लला दर्शन से पहले शुक्रवार 10 अप्रैल 2026 को प्रातः 8 से 9 बजे अयोध्या में जानकी महल धर्मशाला में हवन का आयोजन किया जायेगा। सभी तीर्थ यात्री वर्तमान युद्ध की समाप्ति के लिए विशेष प्रार्थना करेंगे। इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपत राय से विशेष भेंट वार्ता भी होगी। इस तीर्थ यात्रा में दिल्ली से 101 राम भक्त सहित सिंगापुर देश के 6 राम भक्त भी शामिल हैं। ज्ञात रहे 23 अप्रैल 2023 को भाजपा नेता डॉ. विजय जौली के नेतृत्व में 156 देशों की नदियों व समुंद्रों की जल से अयोध्या राम मंदिर का ‘‘जलाभिषेक’’ धूम-धाम से अयोध्या में आयोजित किया गया था। इसके बाद दिल्ली के रामभक्त डॉ. जौली की अगुवाई में प्रतिवर्ष अयोध्या राम मंदिर की यात्रा करते हैं। इस वर्ष क्रमानुसार यह चौथी तीर्थ यात्रा है। अयोध्या के कई मंदिरों में दर्शन-पूजन करेंगे तीर्थ यात्री श्री जानकी महल ट्रस्ट धर्मशाला, अयोध्या में ठहरेंगे। अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी, कनक भवन, नागेश्वरनाथ मंदिर, रमणीय सरयू घाट (राम की पौड़ी), गुप्त घाट व अन्य पौराणिक स्थलों का भ्रमण सहित पूजा अर्चना भी करेंगे।
युद्ध के माहौल में विश्व शांति का शंखनाद है विश्व णमोकार दिवस
विश्व णमोकार दिवस- 9 अप्रैल, 2026 विश्व इतिहास के इस संक्रमणकाल में, जब मानवता युद्ध, हिंसा, आतंक, तनाव और असहिष्णुता के बोझ तले कराह रही है, ऐसे समय में 9 अप्रैल 2026 को मनाया जाने वाला विश्व णमोकार मंत्र दिवस एक अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा-विस्फोट के रूप में सामने आ रहा है। यह दिवस केवल एक ... Read more
ट्रंप ने ईरान को दी 'सभ्यता के अंत' की चेतावनी; युद्धविराम का अल्टीमेटम
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर: ट्रंप ने दी 'सभ्यता के अंत' की धमकी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने और युद्धविराम के अल्टीमेटम से वैश्विक तेल बाजार में मची खलबली।
ईरान युद्ध के बीच DGCA का फरमान; अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए जाने क्या है नए नियम ?
ईरान युद्ध के चलते DGCA ने पायलटों के ड्यूटी टाइम नियमों में दी राहत। लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बढ़ा समय। सुरक्षा और थकान प्रबंधन पर कड़ी निगरानी के निर्देश।
युद्ध के वैश्विक तनाव के बीच आम आदमी को राहत; बंपर पैदावार से सस्ती हुई खाने की थाली
मार्च 2026 में आलू और प्याज की कीमतों में भारी गिरावट के कारण वेज और नॉन-वेज थाली की लागत में कमी आई है, जिससे आम आदमी को राहत मिली है।
अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के असर से इंदौर-पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन घटने और रोजगार प्रभावित होने के मामले को मध्यप्रदेश सरकार ने गंभीरता से लिया है। सरकार ने स्थानीय औद्योगिक संगठनों से उद्योगों में आ रही दिक्कतों पर रिपोर्ट मांगी, जिसके बाद संगठनों ने विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है। दैनिक भास्कर ने युद्ध के कारण आ रही समस्याओं को प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद सरकार ने औद्योगिक संगठनों से स्थिति की जानकारी ली। आला अधिकारियों ने संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा कर एमएसएमई और बड़ी इकाइयों की स्थिति पर नजर रखने की बात कही है। एमएसएमई और छोटे उद्योगों की हालत बिगड़ीपीथमपुर औद्योगिक संगठन ने सरकार को भेजे नोट में बताया कि हालात आर्थिक आपातकाल जैसे बन गए हैं। कई इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। भुगतान संतुलन बिगड़ने से उद्योगों के सामने पूंजी का संकट गहरा गया है। रिपोर्ट में बताया गया कि कच्चे माल, गैस और अन्य सामग्री के लिए उद्योगों को अग्रिम भुगतान करना पड़ रहा है। वहीं सप्लाई के बाद भुगतान में देरी हो रही है, जिससे आर्थिक चक्र प्रभावित हो रहा है और वर्किंग कैपिटल पर दबाव बढ़ गया है। कच्चे माल की कमी और कीमतों में बढ़ोतरीउद्योग कच्चे माल के लिए 70% से अधिक आयात पर निर्भर हैं। युद्ध के कारण इसकी उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं और उत्पादन लागत में वृद्धि हो रही है। पीएनजी और एलपीजी की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। एलपीजी की कमी बनी हुई है, जबकि पीएनजी के दाम बढ़ गए हैं। साथ ही कंपनियों ने पहले दी जा रही राहत भी वापस ले ली है। निर्यात प्रभावित, माल बंदरगाहों पर अटकापीथमपुर से निर्यात भी प्रभावित हुआ है। बड़ी मात्रा में माल बंदरगाहों पर अटका है, जिससे बैंकों में पूंजी ब्लॉक हो रही है और उद्योगों की वित्तीय स्थिति कमजोर हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार फ्रेट लागत बढ़कर 2400 डॉलर तक पहुंच गई है, जो पहले की तुलना में लगभग दोगुनी है। इसके अलावा युद्ध सरचार्ज भी अतिरिक्त रूप से लगाया जा रहा है। उद्योग संगठनों ने रखीं अपनी समस्याएं एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्री एमपी, फार्मा, प्लास्टिक, ऑटो एंसिलरी और पैकेजिंग उद्योगों ने भी अपनी-अपनी समस्याएं सरकार के सामने रखी हैं और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। सरकार से राहत पैकेज और सपोर्ट की मांगऔद्योगिक संगठनों ने सरकार से एलपीजी और गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने, बढ़ी कीमतों पर नियंत्रण करने और वैट में कमी करने की मांग की है। वर्तमान में वैट 14% है, जबकि अन्य राज्यों में यह करीब 5% है। संगठनों ने बिजली दरों में बढ़ोतरी को स्थगित करने और पॉवर पर टैरिफ सब्सिडी देने की मांग की है, ताकि उत्पादन लागत को नियंत्रित किया जा सके। वर्किंग कैपिटल और रोजगार बचाने के उपाय सुझाएउद्योगों ने वर्किंग कैपिटल के लिए ब्याज सहायता, पूंजी सपोर्ट और रोजगार बनाए रखने के लिए इम्प्लॉयमेंट सब्सिडी देने की मांग भी सरकार के सामने रखी है। ये खबर भी पढ़ें… MP में 5,600 फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर:20 हजार कर्मचारी निकाले ईरान और इजराइल-अमेरिका के युद्ध का असर मध्य प्रदेश के 'डेट्रॉयट' कहे जाने वाले औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर पर बढ़ता जा रहा है। पहले एक्सपोर्ट ठप हुआ, तो अब कर्मचारियों-मजदूरों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। उद्योग संचालकों का कहना है कि हालात जल्द नहीं सुधरे तो मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। पूरी खबर पढ़ें…
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने मंगलवार को हावड़ा टाउन में जनसभा को संबोधित किया और सत्तारूढ़ TMC और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने ममता बनर्जी की तुलना लालू यादव से कर दी। सम्राट ने कहा कि बिहार में जब तक लालू यादव का राज था तो इस तरह से गुंडागर्दी होती थी। अब बिहार में NDA की सरकार है। वहां कानून का राज है। डिप्टी सीएम ने कहा, “अगर आप चाहते हैं कि बंगाल में महिलाएं सुरक्षित रहें, तो यहां भी बीजेपी की सरकार बनाइए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बंगाल का मुख्यमंत्री राज्य का ही बेटा या बेटी होगा।” सम्राट यहीं नहीं रुके। उन्होंने पीएम मोदी की विदेश नीति की तारीफ करते हुए कहा कि उनके एक फोन पर व्लादिमीर पुतिन ने युद्ध रोक दिया। उन्होंने यह दावा किया कि भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अपने 9 जहाज सुरक्षित बाहर निकाले। PM मोदी के कहने पर पुतिन ने युद्ध रोका बिहार के डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने कहा, “दुनिया में पिछले चार साल से युद्ध चल रहा है। जब हमारे बच्चे यूक्रेन में फंस गए, तो उन्होंने मेल और फोन के जरिए मदद मांगी। हमने वहां से साढ़े तीन लाख बच्चों को निकाला।” उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्लादिमीर पुतिन को फोन कर युद्ध रोकने के लिए कहा और युद्ध रुक गया। पुतिन ने पूछा कि भारतीय बच्चों की पहचान कैसे होगी, तो मोदी जी ने कहा कि जिसके हाथ में तिरंगा होगा, वह भारत का नागरिक होगा। तिरंगा लेकर दूसरे देशों के लोग भी वहां से निकल गए।” सम्राट ने घुसपैठ का मुद्दा उठाया बिहार के डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा, “अगर आप बंगाल को ‘सोनार बंगला’ बनाना चाहते हैं, तो बीजेपी की सरकार बनाइए। मुंबई तीन ओर से समुद्र से घिरा है, जबकि आपके यहां चारों ओर समुद्र है।” उन्होंने आगे कहा, “बंगाल में घुसपैठिए आपका हिस्सा खा रहे हैं। राज्य को लूटा जा रहा है। ममता बनर्जी ने झूठे वादों के जरिए बंगाल को नुकसान पहुंचाया है। वे घुसपैठियों के लिए दरवाजे खोलती हैं। हमारी सरकार बनाइए, हम सबसे पहले बंगाल के लोगों के लिए दरवाजे खोलने का काम करेंगे।” इस दौरान उन्होंने 5 लाख रोजगार देने का भी वादा किया। ममता ने राष्ट्रपति का अपमान किया अपने भाषण के दौरान डिप्टी CM ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि ममता बनर्जी उसमें शामिल नहीं हुईं। उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति का अपमान किया। जब वह यहां आईं, तो उन्हें प्रोटोकॉल के मुताबिक सम्मान नहीं दिया गया।” बिहार में इंडस्ट्री लगाने का काम कर रहे सम्राट ने कहा, “बिहार में हम इंडस्ट्री स्थापित कर रहे हैं। PM सूर्य घर योजना के तहत सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “बिहार में जब महागठबंधन की सरकार थी, तब लोगों के आयुष्मान कार्ड नहीं बनते थे। हमारी सरकार बनते ही 15 दिनों के भीतर 2 करोड़ लोगों को आयुष्मान कार्ड दिए गए।” डिप्टी सीएम ने बंगाल के लोगों से कहा, “हमारी सरकार बनाइए, हम बंगाल के हर व्यक्ति का आयुष्मान भारत योजना के तहत कार्ड बनवाएंगे।” बिहार मॉडल के सहारे वोटरों को साधने की कोशिश बिहार के डिप्टी CM सम्राट चौधरी अपने भाषणों में राज्य में NDA सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। खासकर नीतीश कुमार के नेतृत्व में महिलाओं की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे में सुधार जैसे मुद्दों को वे बंगाल के मतदाताओं के सामने रख रहे हैं। बीजेपी का मानना है कि बंगाल में बसे बिहार मूल के मतदाता इन मुद्दों से जुड़ाव महसूस करेंगे और इससे पार्टी को चुनाव में फायदा मिल सकता है। राजनीतिक संदेश और रणनीतिक संकेत बिहार के डिप्टी CM सम्राट चौधरी का यह अभियान सिर्फ चुनाव प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक राजनीतिक संदेश भी देता है। बीजेपी बंगाल में क्षेत्रीय पहचान के साथ-साथ प्रवासी समुदायों को भी साधने की कोशिश कर रही है। पार्टी बिहार मूल के मतदाताओं को एक संगठित वोट बैंक के रूप में देख रही है, जो चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी ने जिस तरह से सम्राट चौधरी को आगे किया है, उससे यह साफ संकेत मिलता है कि पार्टी हर संभव सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण को साधने में जुटी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि “सोनार बंगला” का नारा और बिहार फैक्टर चुनावी नतीजों में कितना असर डालते हैं।
US-Iran War: अमेरिका-इजराइल vs ईरान युद्ध कब रुकेगा? ज्योतिष के संकेत चौंकाने वाले
US-Iran War: अमेरिका इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर ज्योतिष क्या संकेत देता है? जानिए ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर युद्ध और शांति को लेकर संभावित भविष्यवाणी।
एक सामयिक व्यंग्य: विश्वशांति का महायुद्ध
Iran and America War; ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी को देखिए। दोनों ही पक्ष अत्यंत गंभीर, जिम्मेदार और विश्वशांति के कट्टर समर्थक हैं। दोनों के बयान सुनिए तो लगेगा कि वे युद्ध नहीं, कोई आध्यात्मिक सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं। फर्क इतना है कि ...
अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते कोटा के सैंड स्टोन, राइस और मसाला इंडस्ट्रीज प्रभावित हुए हैं। डिमांड घटने से करीब 150 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट अटक गया है। सबसे ज्यादा असर स्टोन और राइस एक्सपोर्ट पर पड़ा है। इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि अगर युद्ध 15 दिन और चला तो करीब 30 हजार लोगों पर रोजगार का संकट आ सकता है। लगभग 200 स्टोन यूनिट बंद हो जाएंगी। वॉर के कारण शिपिंग चार्ज (भाड़ा) बढ़ने से मसाले, चावल की भी डिमांड घट गई। इस कारण मजदूरों के लिए भी इन फैक्ट्रियों में काम नहीं है। छोटे उद्योग बंद होने की कगार पर हैं स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज (SSI) कोटा के संस्थापक सदस्य गोविंद राम मित्तल ने कहा- युद्ध अमेरिका और ईरान के बीच हो रहा है, लेकिन इसका अप्रत्यक्ष (इनडायरेक्ट) असर भारत पर भी पड़ रहा है। खासकर छोटे उद्योग बंद होने की कगार पर हैं। हाड़ौती संभाग (कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़) से सैंड स्टोन, कोटा स्टोन, राइस, मसाला, केमिकल एक्सपोर्ट किया जाता है। कोटा स्टोन और सैंड स्टोन की 25-25 बड़ी और 100-100 छोटी खदानें हैं, जहां से पत्थर निकलता है और 400 से ज्यादा यूनिट हैं। जहां खान से पत्थर निकलने के बाद कटिंग पॉलिश का काम होता है। हर महीने 100 करोड़ रुपए का स्टोन एक्सपोर्ट होता है। एक यूनिट में 30 से ज्यादा लेबर (कटिंग, पॉलिशिंग, पैकिंग) काम करती हैं। इनमें 50 फीसदी लेबर बाहर (बिहार व अन्य जगहों) की है। लेबर पर रोजगार का संकट कोटा स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज के मेंबर गोविंद राम ने बताया कि- डिमांड नहीं होने के चलते कई स्टोन यूनिट में काम बंद हो गया है। लेबर भी चली गई है। खाड़ी युद्ध के चलते मसाला उद्योग भी बहुत प्रभावित हुआ है। मसाला इंडस्ट्रीज में भी 5 से 6 हजार लेबर काम करती है। पहले हर महीने 5 से 6 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट होता था, लेकिन अभी डिमांड नहीं होने के कारण प्लांट बंद होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। राइस और केमिकल इंडस्ट्री भी प्रभावित मित्तल ने बताया कि- कोटा-बूंदी में 20-22 राइस मिल हैं। यहां से हर महीने 25 करोड़ रुपए का चावल खाड़ी देशों में एक्सपोर्ट होता है। एक राइस मिल में 50-60 मजदूर काम करते हैं। डिमांड घटने से प्रोडक्शन पर असर हुआ है और 25 फीसदी लेबर वापस लौट गई है। ऐसी ही स्थिति केमिकल इंडस्ट्री (यूरिया, फर्टिलाइजर) में भी है। कच्चा माल नहीं आने और डिमांड नहीं होने के कारण प्रोडक्शन लगभग ना के बराबर है। लेबर के पास काम नहीं है, इसलिए वे फसल कटाई में लगे हैं। मित्तल ने कहा कि अगर अमेरिका व ईरान के बीच 15 दिन और युद्ध खिंचा तो 30 हजार लेबर पर रोजगार का संकट आ जाएगा और डिमांड नहीं होने से यूनिटें बंद हो जाएंगी। शिपिंग भाड़ा बढ़ने से स्टोन इंडस्ट्री पर संकट SSI के पूर्व अध्यक्ष और सैंड स्टोन एक्सपोर्टर बीएल गुप्ता ने बताया- कोटा में स्टोन की 400 से 500 छोटी-बड़ी यूनिट हैं और 20 से 25 बड़े एक्सपोर्टर हैं। यहां से हर महीने दो से ढाई हजार कंटेनर का एक्सपोर्ट होता है, जो करीब 100 करोड़ रुपए के आसपास रहता है। 90 प्रतिशत सैंड स्टोन यूके और यूरोपीय देशों में जाता है। युद्ध के कारण शिपिंग का भाड़ा दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गया है। युद्ध के पहले 800 से 1000 डॉलर प्रति कंटेनर का भाड़ा था, जो बढ़कर 1800 से 2200 डॉलर प्रति कंटेनर हो गया है। भाड़ा बढ़ने से कस्टमर ने ऑर्डर होल्ड पर डाल दिए हैं, जिसके कारण प्रोडक्शन कम हो गया है। प्रोडक्शन कम होने से मजदूर भी कम करने पड़ रहे हैं। युद्ध लंबा खिंचा तो इसका व्यापक असर स्टोन इंडस्ट्री पर होगा। हाड़ौती के कोटा स्टोन का एक्सपोर्ट प्रभावित हाड़ौती कोटा स्टोन एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और कोटा स्टोन व्यापारी देवेंद्र जैन ने बताया कि खाड़ी देशों में हर महीने 15 से 20 करोड़ रुपए का कोटा स्टोन एक्सपोर्ट होता है। इसमें ब्राउन कोटा स्टोन, लेदर कोटा स्टोन और रिवर पॉलिश कोटा स्टोन का एक्सपोर्ट लगभग बंद हो गया है, जबकि यूके व यूएस का शिपिंग चार्ज बढ़ जाने के कारण इन देशों में भी माल नहीं भेज पा रहे हैं। --- अमेरिका-ईरान युद्ध के साइड इफेक्ट से जुड़ी ये 2 खबरें भी पढ़िए… 1. राजस्थान के सोजत में मेहंदी की फैक्ट्रियों में काम बंद:250 करोड़ से ज्यादा का ऑर्डर अटका, व्यापारी बोले-मजदूरों को घर भेजना पड़ रहा है अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की आग में मारवाड़ की विश्व प्रसिद्ध मेहंदी उद्योग भी झुलस रहा है। राजस्थान के सोजत (पाली) में 150 से ज्यादा फैक्ट्रियों में मशीनों के पहिए थम गए हैं। 2200 से ज्यादा मजदूरों को घर भेजा जा चुका है। (पढ़ें पूरी खबर)2. राजस्थान में सैकड़ों फैक्ट्रियां बंद, हजारों लोग बेरोजगार, डिमांड लगातार कम हो रही, घाटा करोड़ों में अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के कारण राजस्थान का मिनरल उद्योग प्रभावित हुआ है। गुजरात के मोरबी की सिरेमिक इंडस्ट्रीज में डिमांड घटने से करीब 2300 से ज्यादा मिनरल्स-ग्राइंडिंग यूनिट्स बंद हो गई हैं। (पढ़ें पूरी खबर)
Top News : ट्रंप के बाद हेगसेथ ने भी ईरान को धमकाया, नेतन्याहू बोले- नहीं होगा युद्ध विराम
Top News 7 April : अमेरिका-इजराइल और अमेरिका के बीच 39वें दिन भी युद्ध जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक रात में बर्बाद करने की धमकी दी तो रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी दावा कि ईरान पर हमले और घातक होंगे। ट्रंप कभी मजाक नहीं ...
हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष : पोस्टर का विमोचन
उदयपुर | मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय और महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में संगोष्ठी का पोस्टर जारी हुआ। 10 और 11 अप्रैल को हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष पर राष्ट्रीय संगोष्ठी होगी। पोस्टर का विमोचन कुलगुरु प्रो. बी. पी. सारस्वत ने किया। आयोजन सचिव डॉ. मनीष श्रीमाली ने जानकारी दी। कार्यक्रम में प्रो. दिग्विजय भटनागर, डॉ. वी. सी. गर्ग, प्रो. प्रतिभा, डॉ. पीयूष भादविया और मुकेश बारबर मौजूद रहे। संगोष्ठी में प्रो. रवीन्द्र कुमार शर्मा और प्रो. शिव कुमार मिश्रा मुख्य वक्ता होंगे।
ईरान -अमेरिका युद्ध:संकट के बीच प्रवासियों को राहत, पलायन रोकने की मानवीय पहल
लुधियाना| ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते वैश्विक तनाव का सीधा असर स्थानीय गैस आपूर्ति पर भी पड़ा है। ईंधन की कमी और बढ़ती कीमतों से उपजे डर के कारण जब श्रमिकों ने पलायन का मन बनाना शुरू किया तब भगवान महावीर सेवा संस्थान ने एक महत्वपूर्ण मानवीय पहल की। जैन स्थानक सिविल लाइंस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान संस्थान ने 11 अत्यंत जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त गैस सिलेंडर वितरित किए। संस्थान के अध्यक्ष राकेश जैन ने कहा, जब घर में चूल्हा नहीं जलता तो श्रमिक वर्ग असुरक्षित महसूस करने लगता है और घर लौटने का विचार करने लगता है। प्रवासी भाई हमारे शहर के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखना हमारा कर्तव्य है। हमने अपने बेटे के जन्मदिन को इन परिवारों की मदद के लिए चुना जो गैस की किल्लत के कारण बेहद परेशान थे। इस दौरान राजेश जैन, सह मंत्री सुनील गुप्ता, राष्ट्रपति अवार्ड विजेता गुरदेव सिंह, ऋचा जैन, रमा जैन, सुषमा जैन, किरण जैन, समाजसेवी मीना देवी, शिवा, सुलोचना जैन और प्रिया जैन आदि मौजूद थे। छोटू गैस सिलेंडर योजना ... • इस 5 किलो के (एफटीएल) नीले सिलेंडर के लिए स्थानीय पते के सबूत की जरूरत नहीं है। • सिर्फ आधार कार्ड या कोई भी एक फोटो पहचान पत्र देकर तुरंत नया कनेक्शन मिलेगा।• पहली बार में सिक्योरिटी और टैक्स मिलाकर करीब ₹1550 का खर्च है। रिफिलिंग ₹606 में उपलब्ध है। • उपभोक्ता महीने में 3 बार तक रिफिल ले सकता है।
तीसरे विश्वयुद्ध की आहट और गांधी
इतिहास विजय-पराजय-विनाश का मृत दस्तावेज नहीं है, न वह किसी की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कहानी का विवरण है।
जेकेएसए ने विदेश मंत्री जयशंकर को लिखा पत्र, सऊदी अरब में गिरफ्तार कश्मीरी युवक की रिहाई की मांग
जम्मू-कश्मीर छात्र संघ (जेकेएसए) ने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को पत्र लिखकर सऊदी अरब में हिरासत में लिए गए एक कश्मीरी युवक के मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की और उसकी सुरक्षा, कानूनी स्थिति और लंबे समय से संपर्क न हो पाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की
बाबा जयगुरुदेव महाराज के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी परम संत बाबा उमाकान्त महाराज ने अजमेर रोड स्थित ठिकरिया आश्रम में आयोजित सत्संग कार्यक्रम में कहा कि लोगों के भीतर से दया समाप्त होती जा रही है और इसका कारण दूषित भोजन तथा मांसाहार है। उन्होंने कहा कि जब दया खत्म होती है तो धर्म का मूल कमजोर हो जाता है और धर्म कमजोर होने पर कर्म बिगड़ते हैं, जिसका दुष्परिणाम मनुष्य को भुगतना पड़ता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवों पर दया करने और धर्म के मूल तत्वों को अपनाने की अपील की। उमाकान्त महाराज बोले- “प्रकृति नाराज़ है” बाबा उमाकान्त महाराज ने कहा कि हथियारों की गोलाबारी से हवा दूषित हो रही है, जिससे पवन देवता नाराज़ हैं। धरती में अत्यधिक खुदाई और असलाह रखने से पृथ्वी नाराज़ है, जबकि आग से पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के जलने से अग्नि देवता भी अप्रसन्न हैं। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि प्रकृति तरह-तरह की आपदाओं के रूप में प्रतिक्रिया दे रही है। युद्ध पर शांति का संदेश पश्चिम एशिया के युद्ध हालातों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।उन्होंने विश्व के बड़े देशों से हथियार निर्माण कम कर छोटे देशों के विकास में सहयोग देने की अपील की, ताकि दुनिया में शांति का माहौल बन सके। आने वाला समय ऐसा होगा जब एक मिनट में नास्तिक को भी भगवान याद आ जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रकृति और पंच देवता मनुष्य के कर्मों से नाराज़ हैं, जिसके चलते तरह-तरह की आपदाएं सामने आ सकती हैं। ठिकरिया आश्रम में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में गुलाबी वस्त्र पहने श्रद्धालु शामिल हुए। सत्संग में बाबा उमाकान्त महाराज ने कहा कि वर्तमान समय कठिन है, लेकिन गुरु भक्तों की साधना और दया धर्म के कारण कई बड़ी आफतें टल रही हैं। उन्होंने कहा कि गुरु महाराज द्वारा जागृत किया गया ‘जय गुरु देव’ नाम इस समय रक्षा का उपाय है। संकट के समय इस नाम का स्मरण करने से मुसीबत कम हो सकती है।
मोगा पुलिस द्वारा नशा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे 'युद्ध नशों के विरुद्ध' अभियान के तहत, मोगा जिले के थाना बधनी कलां पुलिस ने इलाके में एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया है। इसका उद्देश्य लोगों को नशों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए सहयोग मांगना है। इस दौरान, पुलिस टीम ने गांवों और स्थानीय क्षेत्रों में जाकर लोगों से सीधा संवाद किया। उन्होंने नशों के कारण होने वाले व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक नुकसान पर विस्तार से जानकारी दी। थाना प्रभारी बोले- युवा नशे से दूर रहें थाना प्रभारी गुरमेल सिंह ने लोगों को संबोधित करते हुए युवाओं को विशेष रूप से नशे से दूर रहने और अपने भविष्य को सुरक्षित बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों पर ध्यान दें और उन्हें गलत संगत से बचाएं। अभियान के तहत, पुलिस ने आम जनता से आग्रह किया कि यदि उनके आसपास कोई व्यक्ति नशा बेचने या तस्करी करने में शामिल है, तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। नशे के खिलाफ जारी रहेगा जागरूकता अभियान थाना बधनी कलां के प्रभारी गुरमेल सिंह ने बताया कि यह जागरूकता अभियान लगातार जारी रहेगा। आने वाले दिनों में भी विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पुलिस का लक्ष्य केवल नशा तस्करों पर कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक कर नशे के खिलाफ एक मजबूत सामाजिक आंदोलन खड़ा करना भी है। मोगा पुलिस ने इस बात पर जोर दिया कि नशा मुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रशासन और जनता का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। पुलिस के ये प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
मिडिल ईस्ट में हो सकता है 45 दिन का सीजफायर, जंग पर नई रिपोर्ट, ईरान-अमेरिका में चल रही बात
ईरान और अमेरिका के बीच 45 दिन के सीजफायर को लेकर बातचीत चल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान पर बड़े हमले किए जा सकते हैं, जिसकी तैयारी अमेरिका और इजराइल ने कर ली है।
किशनगंज में ईरान-इजराइल युद्ध का असर:50 से अधिक होटल-रेस्टोरेंट बंद, कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत
किशनगंज में ईरान-इजराइल युद्ध का असर अब स्थानीय रसोई पर दिखने लगा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज की खाड़ी में एलपीजी आयात बाधित हुआ है, जिससे कमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत हो गई है। जिले में 50 से अधिक छोटे-बड़े होटल और रेस्टोरेंट या तो पूरी तरह बंद हो गए हैं या आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं। बचे हुए प्रतिष्ठानों में भी खाना बनाने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। कमर्शियल LPG सिलेंडर उपलब्ध नहीं स्थानीय होटल मालिकों के अनुसार, बाजार में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध नहीं हैं। यदि वे काला बाजार में मिलते भी हैं, तो उनकी कीमतें बहुत अधिक हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए कई होटलों ने वैकल्पिक व्यवस्थाएं अपनाई हैं। लगभग 20 से अधिक होटल-रेस्टोरेंट अब इलेक्ट्रिक चूल्हे या इंडक्शन का उपयोग कर रहे हैं, जिससे बिजली का बिल बढ़ गया है और भोजन के स्वाद पर भी असर पड़ रहा है। 25 होटलों में कोयले पर बन रहा खाना वहीं, 25 से अधिक होटलों ने कोयले पर खाना बनाना शुरू कर दिया है, जबकि कुछ छोटे होटल जलावन (लकड़ी) का उपयोग कर रहे हैं। इस संकट का सबसे अधिक प्रभाव छोटे ठेले और फास्ट फूड विक्रेताओं पर पड़ा है। वे न तो महंगे इलेक्ट्रिक उपकरण खरीद सकते हैं और न ही नियमित रूप से कोयला या लकड़ी का इंतजाम कर पाते हैं। नतीजतन, कई ठेले बंद हो गए हैं या बहुत सीमित मेन्यू के साथ काम कर रहे हैं।एक स्थानीय होटल संचालक ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा, 'सिलेंडर न मिलने के कारण मजबूरी में इलेक्ट्रिक चूल्हा लगाना पड़ा, लेकिन बिजली कटौती और महंगे बिल से मुश्किलें और बढ़ गई हैं।' एक अन्य व्यापारी ने ठेले वालों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उनका रोजगार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। जिला प्रशासन ने दावा किया है कि घरेलू सिलेंडरों की उपलब्धता पर्याप्त है और उनकी होम डिलीवरी सुचारू रूप से चल रही है, लेकिन कमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत पर अभी कोई राहत नहीं मिली है। कुछ लोगों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचा, तो स्थिति और भी खराब हो सकती है।
युद्ध की आहट के बीच ईरान हुआ भारत का मुरीद, जयशंकर की विदेश नीति का दुनिया में बजा डंका
ईरान के विदेश मंत्री की भारतीय और रूसी समकक्षों के साथ फोन पर बातचीत, युद्ध के हालातों पर हुई चर्चा
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे क्षेत्रीय संघर्ष पर रूस और भारत के विदेश मंत्रियों से बातचीत की
दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समागमों में शुमार हज यात्रा इस साल 18 अप्रैल से शुरू हो रही है, लेकिन इस बार माहौल कुछ अलग है। मध्य पूर्व में जारी तनाव, मिसाइल हमलों और अनिश्चित हालातों के बीच भी हज पर जाने वाले जायरीन के हौसले और आस्था में कोई कमी नहीं दिख रही। भोपाल से हज पर जाने की तैयारी कर रहे लोगों से बातचीत में एक बात साफ नजर आई डर से ज्यादा भरोसा है, और हालात से ज्यादा अहम है “बुलावा”। मध्य प्रदेश से इस साल हज कमेटी द्वारा 7116 लोग हज के लिए जा रहे हैं। वहीं प्राइवेट लोगों की संख्या को भी गिन लिया जाए तो प्रदेश भर से यह संख्या करीब 8 हजार के करीब होती है। अगर वहां मौत लिखी है तो वो भी कबूल तीसरी बार सऊदी अरब जा रहे कलीमुद्दीन सिद्दीकी इस बार पहली बार हज अदा करने जा रहे हैं। इससे पहले वे दो बार उमरा का सफर कर चुके हैं, लेकिन इस बार का सफर उनके लिए सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि जिंदगी का सबसे बड़ा मुकाम है। मौजूदा हालात, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और लगातार आ रही मिसाइल हमलों की खबरों के बावजूद उनके इरादों में कोई डगमगाहट नहीं है। वे पूरे यकीन के साथ कहते हैं, “डर जैसी कोई चीज हमारे दिल में है ही नहीं। मौत तो एक सच्चाई है, जिसे कोई टाल नहीं सकता। अगर अल्लाह ने हमारी मौत वहां लिखी है, उस मुकद्दस जमीन पर, तो इससे बड़ी खुशनसीबी क्या हो सकती है। हम तो इसे भी अपनी किस्मत की नेमत मानेंगे। जिसने हमें इस सफर के लिए चुना है, वही हमारी हिफाजत भी करेगा। इंसान को अपने डर से नहीं, अपने ईमान से चलना चाहिए… और हमारा ईमान हमें रोकने नहीं, आगे बढ़ने का हौसला देता है। हालात देख रहे हैं, लेकिन जज्बा कम नहीं हुआ डॉ. शोएब अंसारी कहते हैं, “हमने हज की ट्रेनिंग ली है, अलग-अलग सेशन अटेंड किए हैं। पहले जब ट्रेनिंग ली थी, तब ऐसे हालात नहीं थे, लेकिन अब हमें यही बताया जा रहा है कि आप दुआ करें, अपने लिए भी और पूरी दुनिया में अमन के लिए भी। फ्लाइट्स के शेड्यूल बदलने की बातें सुनने में आ रही हैं, लेकिन अभी तक कोई ऑफिशियल अपडेट नहीं है। हम अपनी पूरी तैयारी में लगे हुए हैं। वे आगे कहते हैं, देखिए, हम सब देख रहे हैं कि आसपास क्या हो रहा है, मिसाइलें, तनाव सब खबरें मिल रही हैं। लेकिन सच ये है कि डर का माहौल हमारे अंदर बिल्कुल नहीं है। ईमान हमें यही सिखाता है कि जो लिखा है वही होगा। अगर हमारा जाना लिखा है, तो हम जरूर जाएंगे। और अगर नहीं लिखा, तो कोई ताकत हमें वहां नहीं ले जा सकती। डॉ. अंसारी अपने जज्बे को और साफ शब्दों में यूं बयान करते हैं, “अगर अल्लाह ने वहां मौत लिखी है हमारी, तो बहुत बेहतर है कि वो एक मुबारक जगह पर हो। उसने हमें इस सफर के लिए चुना है, तो वही हमारी हिफाजत भी करेगा। और अगर वहां मौत लिखी है, तो बेशक वो भी कबूल है। लेकिन सच कहूं तो दिल में डर बिल्कुल नहीं है। बुलावा मिला है, डर की गुंजाइश नहीं नाज, जो 17 मई को हज के लिए रवाना होंगी, लगातार टीवी और मोबाइल पर मिडिल ईस्ट के हालात देख रही हैं। चारों तरफ जंग, हमले और तनाव की खबरें हैं, लेकिन इन सबके बावजूद उनके दिल में कोई घबराहट नहीं है। बल्कि उनके अंदर एक अलग ही सुकून और यकीन नजर आता है। वे कहती हैं, “लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं, डर जता रहे हैं, लेकिन सच तो ये है कि हर किसी को ये मुकद्दस बुलावा नहीं मिलता। हम सालों तक इंतजार करते हैं इस मौके के लिए, दुआ करते हैं कि एक बार बुलावा आ जाए। अब जब अल्लाह ने खुद हमें अपने घर बुलाया है, तो डरने का सवाल ही नहीं उठता। वहां जाना ही हमारी सबसे बड़ी खुशी है। आगे क्या होगा, ये इंसान नहीं तय करते, ये सब अल्लाह की मर्जी है। अफवाहों से दूर रहकर करें तैयारी, ट्रेनिंग लगातार जारी फैय्याज अहमद, जो मस्जिद बैतुल मुकर्रम सब्जी मंडी में इमाम-खतीब हैं और राज्य स्तर पर हज ट्रेनिंग से जुड़े हैं, उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि हाजियों को किसी भी तरह की अफवाहों या भ्रामक खबरों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक हज यात्रा 18 अप्रैल से तय कार्यक्रम के अनुसार ही शुरू होगी और व्यवस्थाएं पूरी तरह सामान्य हैं। उन्होंने बताया कि भोपाल समेत आसपास के जिलों में लगातार ट्रेनिंग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जहां हाजियों को न सिर्फ हज के अरकान और वाजिबात की जानकारी दी जा रही है, बल्कि सफर के दौरान जरूरी सावधानियों के बारे में भी समझाया जा रहा है। जामिया अबू तल्हा, मुकद्दस नगर, निजामुद्दीन कॉलोनी के साथ ही सीहोर और राजगढ़ में भी प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सेहत और सुरक्षा पर फोकस, हालात को लेकर न घबराएं उन्होंने हाजियों को सेहत को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी है। बताया गया है कि सऊदी अरब में गर्मी और लंबी पैदल दूरी को देखते हुए यात्रियों को अभी से रोजाना कम से कम 10 किलोमीटर चलने की आदत डालनी चाहिए। पर्याप्त पानी पीना, ऊर्जा देने वाले पेय लेना और धूप से बचाव के लिए छाता व सनग्लास रखना जरूरी है। मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात को लेकर उठ रही चिंताओं पर उन्होंने कहा कि हज यात्रा की व्यवस्थाएं अलग और सुरक्षित होती हैं, इसलिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है। अगर आगे किसी तरह की स्थिति बनती है तो हज कमेटी की ओर से आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, फिलहाल सभी हाजियों को पूरी तैयारी और सुकून के साथ अपने इस मुकद्दस सफर की तैयारी में जुटे रहना चाहिए। हज 2026: अब 48 घंटे नहीं, उड़ान से 24 घंटे पहले ही रिपोर्टिंग अनिवार्य हज 2026 पर जाने वाले यात्रियों के लिए हज कमेटी ऑफ इंडिया ने बड़ा बदलाव करते हुए रिपोर्टिंग समय को लेकर नया सर्कुलर जारी किया है। अब मुंबई एंबार्केशन पॉइंट से यात्रा करने वाले हाजियों को अपनी उड़ान से 48 घंटे पहले नहीं, बल्कि सिर्फ 24 घंटे पहले हाज हाउस, मुंबई में रिपोर्ट करना होगा। जारी इस आदेश से यात्रियों को काफी राहत मिलेगी, क्योंकि पहले दो दिन पहले पहुंचने की बाध्यता के चलते उन्हें अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ता था। हज कमेटी ने सभी यात्रियों को सलाह दी है कि वे अपने घरेलू यात्रा कार्यक्रम इसी नए निर्देश के अनुसार तय करें, ताकि किसी तरह की असुविधा से बचा जा सके। सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम एमपी स्टेट हज कमेटी की सीईओ एवं सेक्रेटरी फरजाना गजाल ने बताया कि पवित्र हज यात्रा का संपूर्ण प्रबंधन भारत सरकार और सऊदी अरब सरकार के बीच हुए द्विपक्षीय अनुबंध के तहत किया जा रहा है। हज 2026 में मध्य प्रदेश राज्य हज कमेटी की ओर से 7101 यात्री देश के विभिन्न विमानतलों से रवाना होंगे, जबकि भारत के हाजियों की पहली उड़ान 18 अप्रैल 2026 से शुरू होगी। मध्य प्रदेश के हाजियों की रवानगी भी इसी दिन मुंबई विमानतल से प्रारंभ होगी। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए दोनों देशों की सरकारों ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए विशेष और व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। इसके साथ ही हज हाउस भोपाल में 24 घंटे संचालित कॉल सेंटर (07552530139) 18 अप्रैल से शुरू किया जा रहा है, जहां हाजियों के परिजन कॉल कर जरूरी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। जंग से मिडिल ईस्ट को ₹18 लाख करोड़ का नुकसान यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) ने कहा है कि मध्य पूर्व में चल रहा युद्ध पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक यह संघर्ष अब सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा संकट बन गया है। भोपाल में 7 अप्रैल को हज ट्रेनिंग कैम्पहज यात्रा 2026 की तैयारियों के तहत भोपाल में 7 अप्रैल को रेतघाट स्थित वीआईपी रोड की मस्जिद माजी साहिबा में एक दिवसीय हज प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा। यह शिविर सुबह 9 बजे से शुरू होकर ईशा तक चलेगा। इसमें हज के अरकान, यात्रा की प्रक्रिया, स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां और जरूरी दिशा-निर्देश विस्तार से बताए जाएंगे, ताकि आज़मीन सही तरीके से हज अदा कर सकें। आयोजकों के अनुसार महिलाओं के लिए पर्दे के साथ अलग व्यवस्था भी की गई है। ये खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- ईरान जंग में शामिल हो सकता है UAE संयुक्त अरब अमीरात (UAE) US-ईरान जंग में सीधे तौर पर शामिल होने की तैयारी कर रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, UAE संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहा हैं। इस प्रस्ताव में होर्मुज स्ट्रेट को जबरन खोलने के लिए सभी तरीकों का इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी जा रही है। इसके तहत हार्मुज सिक्योरिटी फोर्स बनाई जाएगी, जो जहाजों की सुरक्षा तय करेगी। पढ़ें पूरी खबर
एमपी में गेहूं की सरकारी खरीदी अब 9-10 अप्रैल से शुरू हो जाएगी। सीएम डॉ. मोहन यादव ने रविवार को दो बार अफसरों के साथ गेहूं खरीदी को लेकर बैठक की। बैठक में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, पशुपालन मंत्री लखन पटेल और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खंडेलवाल सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। छोटे किसानों का गेहूं पहले खरीदा जाएगा बैठक में सीएम ने कहा प्रदेश में इस साल गेहूं की खरीदी तय समय पर शुरू होगी। खास बात यह है कि इस बार खरीदी प्रक्रिया में छोटे किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी। छोटे किसानों का गेहूं पहले खरीदा जाएगा, उसके बाद मध्यम और बड़े किसानों की बारी आएगी। प्रदेश में बारदानों की 3.12 लाख गठानों की जरूरत है, सरकार का दावा है कि बारदानों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने 10 अप्रैल से पहले सभी तौल केंद्रों का गहन निरीक्षण करने के आदेश दिए हैं। कब और कहां होगी खरीदी? 7 अप्रैल से इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभागों के लिए स्लॉट बुकिंग शुरू हो जाएगी। 9-10 अप्रैल से: इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में खरीदी शुरू होगी। 15 अप्रैल से: प्रदेश के बाकी सभी संभागों में उपार्जन शुरू होगा। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत से दैनिक भास्कर ने गेहूं खरीदी को लेकर चर्चा की। सवाल: गेहूं खरीदी देरी से क्यों शुरू हो रही है? मंत्री राजपूत- ये बात पूरे देश, प्रदेश में पक्ष-विपक्ष और सबको मालूम है कि युद्ध की स्थिति बनी हुई है। इस कारण से कई समस्याएं आईं। जितना गेहूं बाहर निर्यात होता था, संभवत: उतना निर्यात नहीं हो पा रहा। हमें तारीख इसलिए बढ़ानी पड़ी क्योंकि बारदाना जूट कमिश्नर कलकत्ता के माध्यम से आता है। बारदाना आने में विलंब हुआ। हम ये नहीं चाहते थे कि पर्याप्त बारदाने के बिना हम खरीद शुरू करें। ताकि हमारे किसानों को और कोई परेशानी हो। जब हमारे पास पर्याप्त बारदाना आ गया, तब हमने खरीदी शुरू की है। करीब 50 हजार गठानें हमारे पास आ चुकी हैं। 50 हजार गठानें और आने वाली हैं। अब हमारे पास पर्याप्त मात्रा में बारदाना आ गया है और समस्या होगी तो हमें भारत सरकार ने पीपीपी बैग खरीदने की अनुमति दी है। उसके टेंडर भी हो गए हैं। जितना हम खरीदेंगे, उतना वारदाना हमारे पास आ चुका है। सवाल: गेहूं खरीदी की तारीखों में कुछ बदलाव कर रहे हैं? मंत्री राजपूत- 7 अप्रैल से स्लॉट बुकिंग शुरू हो जाएगी। हम 9 और 10 तारीख से खरीदी शुरू कर देंगे। इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 9-10 तारीख से खरीद शुरू होगी। बाकी संभागों में 15 अप्रैल से खरीद शुरू होगी। सवाल: मप्र में कितना गेहूं खरीदेंगे और प्रदेश में कितनी भंडारण क्षमता है? मंत्री राजपूत- मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में हम पिछले साल की तुलना में ज्यादा गेहूं खरीदेंगे। पिछले साल 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा था। इस वर्ष 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदेंगे। लोग अफवाहें उड़ा रहे हैं, हमारे पास भंडारण की कोई दिक्कत नहीं है। हमारे पास ढाई करोड़ टन भंडारण क्षमता है। इसके अलावा साइलो बैग के टेंडर भी बुलाए गए हैं। हमारे पास स्टील साइलो भी हैं। कुल मिलाकर जितनी खरीदी करेंगे, उसे रखने की पर्याप्त व्यवस्था है। सवाल: बारिश की वजह से किसी का गेहूं खराब न हो, उसके लिए क्या व्यवस्था है? मंत्री राजपूत: पर्याप्त मात्रा में बारदाना आ गया है। मुख्यमंत्री जी के निर्देश हैं कि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। पीने के पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था रहे। खरीदी के साथ ही ट्रांसपोर्टेशन भी होता रहे। खरीदी मंडियों और वेयरहाउस के आसपास होगी। हमारी कोशिश होगी कि गेहूं को जल्द से जल्द परिवहन कर सुरक्षित भंडारण में रखा जाए। सवाल: मुख्यमंत्री जी ने एक दिन में दो बार इसी विषय पर बैठक की, उसमें क्या चर्चा हुई? मंत्री राजपूत: मुख्यमंत्री जी का स्पष्ट निर्देश है कि किसानों को कोई परेशानी न हो। यदि बारदाने और अन्य व्यवस्थाओं की समस्या सुलझ गई है, तो गेहूं खरीदी शुरू की जाए। बैठक सकारात्मक माहौल में हुई और उनके निर्देशों का पूर्णतः पालन किया जाएगा।
दैनिक भास्कर यूपी की 403 विधानसभा सीटो पर सर्वे कर रहा है। किस सीट पर अब किसकी हवा है। जनता की पसंद कौन है, मौजूद विधायक या कोई और। इस सर्वे मे भाग लेकर आप बताइए। अमरोहा जिले की नौगावां सादात विधानसभा पर सपा विधायक चौधरी समरपाल सिंह को क्या आप उम्मीदवार बनाना चाहते है या यहां से तैयारी कर रहे अशफ़ाक अली खां को मौका देंगे? सपा नेता जावेद आब्दी या नावेंद्र गुड्डू में आपकी पसंद है तो उनके लिए सर्वे मे भाग लीजिए। कोई और पसंद है तो अन्य में जाकर उसका नाम भी आप दे सकते हैं। भाजपा से आप किसे उम्मीदवार बनाना चाहेंगे। देवेंद्र नागपाल या चौधरी युद्धवीर सिंह में कौन पसंद है? BJP नेता सुधीर चौहान पसंद है तो उसका नाम भी आप दे सकते हैं। बसपा से फुरकान अली, नावेद अयाज या कासिम हुसैन में आप किसे चुनना चाहेंगे। यह सर्वे पूरी तरह गोपनीय है, आपकी पहचान कभी भी उजागर नहीं होगी। इस लिंक पर क्लिक करके आप सर्वे में भाग ले सकते हैं। अगर आपके पास भास्कर एप नहीं है तो पहले डाउनलोड करें, फिर सर्वे में भाग लें- लिंक
इजराइल-ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस सप्लाई प्रभावित होने के कारण पंजाब के अमृतसर में LPG गैस सिलेंडरों की भारी कमी हो गई है। शहर में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन कई घंटों के इंतजार के बाद भी लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा। इस संकट का सबसे ज्यादा असर प्रवासी मजदूरों पर पड़ा है। दिहाड़ी मजदूरी करने वाले ये लोग रोजाना 600 से 650 रुपये तक कमाते हैं, लेकिन अब उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा गैस सिलेंडर भरवाने में ही खर्च हो रहा है। ऐसे में उनके लिए घर का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। रोजाना कमाई गैस सिलेंडर में खर्च, परिवार को पैसे भेजना मुश्किल उत्तर प्रदेश के रहने वाले महेश, जो पिछले 9 वर्षों से अमृतसर में मजदूरी कर रहे हैं, बताते हैं कि हालात अब पहले जैसे नहीं रहे। उनका कहना है कि जितनी कमाई होती है, वह गैस सिलेंडर में ही खर्च हो जाती है, जिससे परिवार को पैसे भेजना मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि कई दिनों से वे गुरुद्वारों में लंगर खाकर गुजारा कर रहे हैं, लेकिन वहां तक रोज पहुंचना भी आसान नहीं है। क्योंकि मेरा काम ऐसा है कि मैं रोज गुरुद्वारे नहीं जा सकता। मेरे घर से गुरुद्वारा भी दूर है और मेरा कोई निश्चित समय नहीं है कि कब मैं घर लौटू। काले बाजार से महंगे सिलेंडर, बाहर खाना महंगा वहीं बिहार के रहने वाले राजेश ने बताया कि इस हालात को देखते हुए उनके कई साथी पहले ही अपने घर लौट चुके हैं और अब वे खुद भी वापस जा रहें हैं। उन्होंने कहा कि गैस न होने के कारण मुझे बाहर, ढाबों और होटलों से खाना लेना पड़ रहा है, जो मेरी आमदनी के हिसाब से बहुत महंगा है। मुझे सिलेंडर तो मिल रहा है, लेकिन काले बाजार में, और वह भी पहले से काफी अधिक कीमत पर, जिससे मेरा गुजारा मुश्किल हो रहा है। मैं परेशान हो रहा हू। और अब मैं अपने घर जा रहा हुं। गंभीर हालात के चलते बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अमृतसर छोड़कर अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। मजदूरों के इस पलायन का असर अब स्थानीय कारोबार पर भी पड़ने लगा है।
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की आग में मारवाड़ की विश्व प्रसिद्ध मेहंदी उद्योग भी झुलस रहा है। राजस्थान के सोजत (पाली) में 150 से ज्यादा फैक्ट्रियों में मशीनों के पहिए थम गए हैं। 2200 से ज्यादा मजदूरों को घर भेजा जा चुका है।सोजत के निर्यातकों का करीब 250 करोड़ रुपए का माल पोर्ट और गोदामों में फंसा हुआ है। 4 से 5 हजार रुपए सालाना टर्नओवर वाले इस कारोबार पर ब्रेक लग गया है। प्रोडक्शन 80% गिरा, फैक्ट्रियां बंद होने की कगार परव्यापारियों के अनुसार, पिछले एक महीने से एक्सपोर्ट पूरी तरह ठप है। सोजत में करीब 35 ऐसी बड़ी फैक्ट्रियां हैं, जो खास तौर पर मिडिल ईस्ट के लिए नेचुरल मेहंदी और हेयर डाई बनाती हैं। मांग न होने के कारण उत्पादन 20% तक सिमट गया है। व्यापारी नितेश अग्रवाल का कहना है कि कोरोना काल के बाद पहली बार ऐसे हालात बने हैं। पलायन बनी मजबूरीमेहंदी व्यापारी अनिल हिरानी ने बताया कि काम बंद होने के कारण अब तक करीब 2200 मजदूरों को घर भेजा जा चुका है। इनमें से 80% श्रमिक यूपी, बिहार और कोटपूतली (राजस्थान) के हैं। काम न मिलने के कारण श्रमिक पलायन को मजबूर हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और मंडी सप्लायर्स पर भी बुरा असर पड़ा है। माल भाड़ा हुआ डबल, पेमेंट भी फंसानिर्यातक विनोद लोढ़ा के अनुसार, मुंबई पोर्ट और दिल्ली एयर कार्गो में करीब 150 करोड़ का माल अटका हुआ है। युद्ध के कारण खाड़ी देशों की ओर जाने वाले जहाजों का जोखिम बढ़ गया है, जिससे शिपिंग कंपनियों ने माल भाड़ा दोगुना कर दिया है। पुराने भेजे गए माल का पेमेंट भी समय पर नहीं मिल पा रहा है। रमजान के बाद आए ऑर्डर ठप, 100 करोड़ का माल गोदामों में कैदसोजत के मैन्युफैक्चरर और एक्सपोर्टर विनोद लोढ़ा ने बताया- रमजान से पहले के ऑर्डर तो समय पर चले गए थे, लेकिन उसके बाद आए सभी ऑर्डर युद्ध के कारण रुक गए हैं। वर्तमान में करीब 100 करोड़ रुपए की मेहंदी अकेले सोजत के गोदामों में तैयार पड़ी है, जिसे दुबई भेजा जाना था। लेकिन न तो नए ऑर्डर मिल रहे हैं और न ही पुराने ऑर्डर्स की डिस्पैचिंग हो पा रही है। गुजरात से आने वाला कच्चा माल हुआ महंगामेहंदी व्यापारी सुरेन हिरानी ने बताया कि मेहंदी के कोन और पाउडर बनाने के लिए जरूरी रॉ-मटेरियल मुख्य रूप से गुजरात से आता है। युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने से वहां के सप्लायर्स ने रेट बढ़ा दिए हैं। 10 ग्राम से लेकर 1 किलो तक की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाला मटेरियल, जो पहले 250 रुपए किलो मिलता था, वह अब 350 रुपए तक पहुंच गया है। एक्सपोट्र्स बोले- न दाम बढ़ा सकते, न माल बेच सकते हैंएक्सपोट्र्स की सबसे बड़ी दुविधा यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंदी और डिमांड की कमी के चलते वे अपनी फिनिश्ड गुड्स (तैयार माल) की कॉस्ट नहीं बढ़ा पा रहे हैं। लागत में 40% तक की बढ़ोतरी होने के बावजूद पुरानी रेट पर भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं। घरेलू बाजार में भी माल भेजना अब महंगा हो गया है, क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ चुकी है। 130 देशों का 'ग्लोबल मार्केट' अब अधर मेंसोजत की मेहंदी का रसूख इतना बड़ा है कि यह केवल भारत या खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है। यह फ्रांस, पेरिस, आयरलैंड, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों तक अपनी पहुंच बना चुकी है। व्यापारियों के अनुसार, सोजत से निकलने वाली प्रीमियम मेहंदी और नेचुरल हेयर डाई की मांग यूरोपीय देशों में साल भर रहती है, लेकिन मौजूदा युद्ध ने शिपिंग रूट्स को इतना असुरक्षित बना दिया है कि 130 देशों का यह विशाल नेटवर्क ठप होने की कगार पर है।जो मेहंदी स्पेन, यूनान और माल्टा जैसे देशों के बाजारों की शोभा बढ़ाती थी, वह अब ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स की समस्याओं के कारण सोजत के गोदामों से बाहर नहीं निकल पा रही है। क्वालिटी का डर- 1 महीने में खराब हो जाता है मेहंदी कोनव्यापारियों की सबसे बड़ी चिंता क्वालिटी को लेकर है। मेहंदी कोन की लाइफ महज एक महीना होती है, जिसके बाद वह खराब होने लगता है। हेयर डाई की क्वालिटी भी 6 महीने बाद गिरने लगती है। अगर युद्ध लंबा चला, तो व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। 4 से 5 हजार रुपए का सालाना टर्नओवरसोजत का मेहंदी कारोबार का सालाना टर्नओवर 4 से 5 हजार रुपए सालाना है। व्यापारियों ने दावा किया- यदि युद्ध आज भी रुक जाए, तो स्थिति को सामान्य होने में कम से कम 4 से 6 महीने का समय लगेगा। व्यापारी बोले- समझ नहीं आ रहा उद्योग कैसे बचाएंमेहंदी व्यापारी सुरेन हिरानी कहते हैं- सोजत की मेहंदी का सीधा कनेक्शन मिडिल ईस्ट से है। वहां युद्ध शुरू होते ही हमारी सप्लाई लाइन कट गई। अब गुजरात से आने वाला कच्चा माल महंगा हो गया और ट्रांसपोर्ट के दाम बढ़ गए। समझ नहीं आ रहा कि उद्योग को कैसे बचाएं। 80% श्रमिक बाहरी राज्यों के, रोजी-रोटी का संकटसोजत के मेहंदी उद्योग में उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान के कोटपूतली (राजस्थान) क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रमिक आते हैं। कुल निकाले गए मजदूरों में 80 फीसदी प्रवासी हैं, जबकि 20 फीसदी स्थानीय लोग हैं। इन मजदूरों के लिए मेहंदी सीजन ही साल भर की कमाई का मुख्य जरिया होता है, लेकिन युद्ध ने उनके इस भरोसे को तोड़ दिया है। केवल मजदूर नहीं, पूरी 'सप्लाई चेन' प्रभावित काम बंद होने का असर केवल फैक्ट्री के भीतर तक सीमित नहीं है। इसका 'चेन रिएक्शन' पूरे सिस्टम पर दिख रहा है। किसान: मेहंदी की फसल बेचने वाले किसानों को खरीदार नहीं मिल रहे। मंडी: सोजत मंडी में व्यापारिक गतिविधियां सुस्त पड़ गई हैं। सप्लायर: पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और कच्चा माल सप्लाई करने वालों का काम भी रुक गया है। खाड़ी देशों की पहली पसंद है 'सोजत मेहंदी'सोजत की मेहंदी अपनी ए-ग्रेड क्वालिटी के लिए जानी जाती है। यहां मेहंदी में केमिकल के बजाय लौंग, नीलगिरी और टी-3 नेचुरल ऑयल का इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि इसकी डिमांड मिडिल ईस्ट के अलावा दुनिया के 130 देशों में है। लेकिन वर्तमान युद्ध की स्थिति ने इस चमक को फिलहाल धुंधला कर दिया है। लातविया से लेकर पुर्तगाल तक... हर जगह सोजत का डंकासोजत की मेहंदी की गुणवत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह एस्टोनिया, लिथुआनिया, बुल्गारिया, स्लोवाकिया, और क्रोएशिया जैसे देशों में भी निर्यात की जाती है। यूरोप का बाजार- यहां नेचुरल कॉस्मेटिक्स की भारी डिमांड है, जिसे सोजत पूरा करता है। एशियाई बाजार- नेपाल और मलेशिया जैसे देशों में सोजत की मेहंदी एक अनिवार्य ब्रांड बन चुकी है। पेरिस के फैशन से रूस के बाजार तकसोजत की मेहंदी की सबसे बड़ी खूबी इसका 'केमिकल फ्री' होना है। इसी कारण पेरिस (फ्रांस) जैसे फैशन हब और रूस व बेलारूस जैसे ठंडे देशों में भी इसे स्किन-फ्रेंडली हेयर डाई के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। फिलहाल इन सभी देशों से आने वाले नए ऑर्डर्स पर युद्ध की अनिश्चितता के कारण 'ब्रेक' लग गया है। 38 हजार हेक्टेयर में फैला है ‘मेहंदी का साम्राज्य’पाली जिले का सोजत और उसके पड़ोसी क्षेत्र रायपुर व जैतारण मिलकर दुनिया का सबसे बड़ा मेहंदी उत्पादक हब बनाते हैं। कुल 38 हजार हेक्टेयर भूमि पर होने वाली यह खेती यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यहां की मिट्टी और जलवायु मेहंदी के लिए इतनी अनुकूल है कि यहां पैदा होने वाली मेहंदी में लॉसोने (रंग देने वाला तत्व) की मात्रा दुनिया में सर्वाधिक पाई जाती है। प्रति हेक्टेयर 15 क्विंटल का उत्पादन, पर बाजार में सन्नाटा इस क्षेत्र में औसतन 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मेहंदी का उत्पादन होता है। इस साल भी पैदावार बंपर होने की उम्मीद है, लेकिन युद्ध के कारण सोजत की मंडी और फैक्ट्रियों में रौनक गायब है। बंपर स्टॉक: खेतों से मंडी तक माल पहुंच रहा है, लेकिन निर्यात रुकने से स्टॉक जमा होता जा रहा है। भाव का डर: मांग कम होने से किसानों को डर है कि उन्हें अपनी फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पाएगा। क्यों खास है सोजत की मेहंदी?सोजत की मेहंदी को इसकी शुद्धता और गहरे रंग के लिए GI टैग (Geographical Indication) भी मिल चुका है। यहां की मेहंदी में किसी भी प्रकार के हानिकारक केमिकल के बजाय प्राकृतिक तेलों का उपयोग किया जाता है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतारता है। ------ अमेरिका-ईरान युद्ध के साइड इफेक्ट की यह खबर भी पढ़िए… राजस्थान में सैकड़ों फैक्ट्रियां बंद, हजारों लोग बेरोजगार, डिमांड लगातार कम हो रही, घाटा करोड़ों में अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के कारण राजस्थान का मिनरल उद्योग प्रभावित हुआ है। गुजरात के मोरबी की सिरेमिक इंडस्ट्रीज में डिमांड घटने से करीब 2300 से ज्यादा मिनरल्स-ग्राइंडिंग यूनिट्स बंद हो गई हैं। पढ़ें पूरी खबर...
सिवनी में जेबकतरा गिरफ्तार:मंदिर से श्रद्धालु का उड़ाया था पर्स, 17 हजार लेकर हुआ था फरार
सिवनी जिले में सक्रिय जेबकतरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत कोतवाली पुलिस ने शनिवार की रात एक शातिर चोर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के पास से चोरी की नकदी और पर्स बरामद किया। कोतवाली थाना प्रभारी सतीश तिवारी ने बताया कि 2 अप्रैल 2026 को सिवनी निवासी अमित राजपूत (42) ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि हनुमान प्रकटोत्सव के दौरान बालस्वरूप हनुमान मंदिर में पूजा करते समय रात करीब 8 बजे किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी जेब से लगभग 17 हजार रुपए चुरा लिए थे। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना स्तर पर एक टीम गठित की गई। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास पूछताछ, संदिग्धों की गतिविधियों का विश्लेषण और तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग किया। इसके आधार पर सिवनी के टिग्गा मोहल्ला निवासी इस्लाम खान (30) की पहचान संदिग्ध के रूप में हुई। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने चोरी की वारदात को अंजाम देना स्वीकार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने चोरी की गई राशि में से कुछ पैसे खर्च कर दिए थे। उसके पास से 7,250 रुपये नकद और एक पर्स बरामद किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी इस्लाम खान के खिलाफ पहले भी कोतवाली थाने में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज है। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी सतीश तिवारी के नेतृत्व में प्रधान आरक्षक संजय यादव, मनोज पाल, मुकेश चौरिया और राजेंद्र राजपूत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे भीड़भाड़ वाले आयोजनों में सतर्क रहें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
ईरान-इजरायल युद्ध ने भोपाल के औद्योगिक ढांचे को भी झकझोर दिया है। राजधानी के मंडीदीप, गोविंदपुरा और बगरोदा औद्योगिक क्षेत्रों में कच्चे माल की कमी, कमर्शियल गैस की अनुपलब्धता और बढ़ती लागत ने उत्पादन, निर्यात और रोजगार तीनों पर एक साथ दबाव बना दिया है। भोपाल: गोविंदपुरा में 25 यूनिट बंद; मंडीदीप से निर्यात आधा मंडीदीप इंडस्ट्रियल एरिया में उत्पादन 30% तक घट गया है। प्लास्टिक, पैकेजिंग, फार्मा और इंजीनियरिंग सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इंजीनियरिंग इकाइयों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने से काम प्रभावित हुआ है, जबकि फार्मा कंपनियां कच्चे माल और पैकेजिंग मटेरियल के 10 से 15% बढ़े दाम से जूझ रही हैं। प्लास्टिक इंडस्ट्री में पेट्रोकेमिकल्स की सप्लाई रुकने से कच्चे माल की कीमत करीब 20% तक बढ़ गई है। एसोसिएशन ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज मंडीदीप के संरक्षक राजीव अग्रवाल के मुताबिक, फिलहाल कंपनियां पुराने स्टॉक के सहारे काम चला रही हैं। सप्लाई नहीं सुधरी तो 4000 से अधिक कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा होगा। गोविंदपुरा: 20 साल में पहली बार जल्दी बंद हो रहीं फैक्ट्रियां : गोविंदपुरा में 1157 यूनिट्स में से 25 बंद हो चुकी हैं, 600 आधी क्षमता पर चल रही हैं। 500 यूनिट्स ने शिफ्ट घटा दी है। जो फैक्ट्रियां रात 9:30 बजे तक चलती थीं, वे शाम 5:30 बजे ही बंद होने लगी हैं। कोविडकाल को छोड़ दें तो दो दशकों में यह पहली बार है, इतनी जल्दी काम बंद हो रहा है। हमें ऐसे लग रहे जंग के झटके ग्वालियर: मालनपुर में 50 यूनिट बंद तो बानमोर में उत्पादन 50% मालनपुर से प्रवीण चतुर्वेदीबानमोर से विजय सिंह राठौरग्वालियर-चंबल संभाग के औद्योगिक क्षेत्रों मालनपुर और बानमोर में कच्चे माल की कमी, गैस सप्लाई में कटौती और बढ़ती लागत के कारण उद्योगों की स्थिति बिगड़ रही है। बड़े उद्योगों का उत्पादन 40% तक घट गया है, वहीं छोटी इकाइयों में बंदी का दौर शुरू हो गया है। मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र में 17 बड़ी और 127 छोटी इकाइयां हैं, जिनमें से करीब 50 छोटी इकाइयों ने उत्पादन बंद कर दिया है। इसका असर रोजगार पर पड़ा है। पिछले एक महीने में 1500 से ज्यादा श्रमिक गांव लौट चुके हैं, जबकि नई लेबर भी आना बंद हो गई है। कॉन्ट्रैक्ट लेबर सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। मजदूरों को करीब 520 रुपए रोज मिलते थे, जिसमें पीएफ-ईएसआई शामिल था। एक समय का खाना फैक्ट्री में और दूसरा गैस सिलेंडर से बनता था, लेकिन अब गैस की कमी के कारण सिलेंडर भरवाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने लौटना ही बेहतर समझा। मालनपुर के उद्योगों में नेचुरल और प्रोपेन गैस का इस्तेमाल होता है। नेचुरल गैस की सप्लाई 45% घट गई है, जबकि प्रोपेन मिल नहीं रही। इससे कई यूनिट्स में उत्पादन आधा रह गया है। कुछ पूरी तरह ठप हो गए हैं। हमें ऐसे लग रहे जंग के झटके इंदौर: 30% उत्पादन ठप, 35 हजार वर्कर्स की नौकरी गई पीथमपुर से संदीप पारे युद्ध की आंच इंदौर के औद्योगिक क्षेत्रों पीथमपुर, राऊ और सांवेर रोड तक पहुंच गई है। कच्चे माल की कमी और लागत में भारी बढ़ोतरी के कारण 25 से 30% उत्पादन ठप हो गया है। सीधा असर रोजगार पर पड़ा है। करीब 20 हजार कॉन्ट्रैक्ट वर्करों की छुट्टी हो चुकी है, जबकि 15 से 20 हजार स्थायी कर्मचारियों को ले-ऑफ (अस्थायी छुट्टी) पर भेजा गया है। इंदौर-पीथमपुर के करीब 5600 उद्योगों में से 1000 से ज्यादा यूनिट्स के सामने बंद होने की कगार पर हैं। अधिकांश कंपनियों ने काम के घंटे घटा दिए हैं। वे आधी क्षमता पर चल रही हैं। एडवांस पेमेंट पर भी 50% कच्चा माल ही मिल पा रहा : होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण मिडिल ईस्ट से सप्लाई प्रभावित हुई है। उद्योगपतियों के मुताबिक, कच्चा माल अब 50% भी नहीं मिल पा रहा है। जो मिल रहा है, उसके दाम 60 से 100% तक बढ़ चुके हैं। कच्चा माल एडवांस पेमेंट पर खरीदना पड़ रहा है। तैयार माल का भुगतान 60 से 90 दिन में मिल रहा है। इंश्योरेंस और माल भाड़ा भी महंगा हो गया है, जिससे उत्पादन लागत निकलना मुश्किल हो गया है। हमें ऐसे लग रहे जंग के झटके
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अब कानपुर के रसोईघरों और होटलों के चूल्हों तक पहुंचने लगा है। युद्ध की स्थिति के चलते एलपीजी (LPG) गैस की आपूर्ति प्रभावित होने और सिलेंडरों की किल्लत की आशंका के बीच शहर के व्यापारियों ने पाइप वाली गैस यानी पीएनजी (PNG) की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। शनिवार को ‘भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल’ के बैनर तले व्यापारियों ने साकेत नगर स्थित सीयूजीएल (CUGL) कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने मुख्य महाप्रबंधक के नाम सात सूत्रीय ज्ञापन वरिष्ठ प्रबंधक पंकज राज को सौंपा और मांग की कि शहर में घरेलू और कमर्शियल पीएनजी कनेक्शन की प्रक्रिया को सरल, सुलभ और किफायती बनाया जाए। रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकानों पर संकटप्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने वार्ता के दौरान कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के कारण देशभर में एलपीजी गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। कानपुर में भी कमर्शियल सिलेंडरों की अनियमित उपलब्धता से रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानें और गेस्ट हाउस संचालक परेशान हैं। इससे न केवल व्यापार बाधित हो रहा है, बल्कि उपभोक्ता आपूर्ति श्रृंखला पर भी बुरा असर पड़ रहा है। व्यापारियों का तर्क है कि पीएनजी सुरक्षित और निरंतर मिलने वाला विकल्प है, लेकिन विभाग की जटिल प्रक्रिया के कारण लोग इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। विधानसभा वार सहायता केंद्र खोलने की मांगव्यापारियों ने विभाग से मांग की कि कानपुर महानगर के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में सहायता केंद्र खोला जाए और वहां सक्षम अधिकारी की नियुक्ति की जाए। इसके साथ ही विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी करने और कमर्शियल कनेक्शन के लिए निश्चित समय सीमा तय करने की भी जरूरत बताई गई। व्यापारियों ने कहा कि होटल और रेस्टोरेंट्स को जल्द से जल्द कनेक्शन देकर उन्हें एलपीजी से पीएनजी की ओर शिफ्ट करने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए। 90 दिन का इंतजार और तकनीकी उलझनेंसीयूजीएल के वरिष्ठ प्रबंधक पंकज राज ने बताया कि घरेलू पीएनजी कनेक्शन के लिए एक ऐप उपलब्ध है, जिस पर आवेदन स्वीकृत होने के बाद 90 दिनों के भीतर कनेक्शन दिए जा रहे हैं। हालांकि, कमर्शियल कनेक्शन को लेकर विभाग की चुनौतियां भी सामने आईं। उन्होंने कहा कि कमर्शियल कनेक्शन के लिए फिलहाल कोई ऐप नहीं है और उपभोक्ताओं को विभाग की वेबसाइट के माध्यम से ही आवेदन करना होगा। वरिष्ठ प्रबंधक ने कमर्शियल कनेक्शन में आ रही दिक्कतों को स्वीकार करते हुए व्यापारियों को आश्वासन दिया कि उनका ज्ञापन उच्चाधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। ज्ञापन देने वालों में दक्षिण अध्यक्ष कमल त्रिपाठी, युवा प्रदेश संगठन महामंत्री विनायक पोद्दार, अशोक शुक्ला, जितेंद्र सिंह, अरविंद गुप्ता, पवन गौड़, शैलेंद्र सेंगर, सत्यम मिश्र, विवेक गुप्ता, सुरेंद्र मिश्र सहित अन्य व्यापारी नेता शामिल रहे।
गुना की भगत सिंह कॉलोनी में शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात बदमाशों ने पांच सूने घरों के ताले चटकाकर लगभग दो लाख रुपए नकद और सोने-चांदी के गहने चोरी कर लिए। स्कूलों की छुट्टियों के कारण इन सभी घरों में रहने वाले किराएदार अपने गांव गए हुए थे, जिसका फायदा उठाकर चोरों ने इस वारदात को अंजाम दिया। घटना की सूचना मिलते ही कैंट पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल शुरू कर दी है और आरोपियों की पहचान के लिए इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। किराएदार गांव गए थे, एक ही गली के 5 घरों को बनाया निशाना भगत सिंह कॉलोनी में बदमाशों ने जिन पांच घरों पर धावा बोला, उनके मकान मालिक वहां नहीं रहते हैं और सभी घर किराए से चल रहे थे। इन दिनों स्कूलों की छुट्टियों के कारण सभी किराएदार अपने गांव गए हुए थे और घरों में ताले लटके हुए थे। बदमाशों ने एक ही गली में इन पांच घरों को निशाना बनाया और अलमारियों का सामान बिखेर दिया। हालांकि, चोरों को अन्य घरों से ज्यादा सामान नहीं मिल पाया, लेकिन केवल एक घर से उन्हें डेढ़ लाख नकद और कुछ गहने मिल गए, जिन्हें लेकर वे फरार हो गए। जिन घरों में चोरी हुई, उनमें से किसी भी घर में कैमरे नहीं लगे हुए थे, इसलिए कैंट पुलिस अब यह पता लगाने के लिए सीसीटीवी खंगालने में लगी हुई है कि बदमाश किस तरफ से आए थे। पीड़ित बोला- ताले टूटे हुए थे और सारा सामान बिखरा पड़ा था पीड़ित सईद खान ने बताया कि, वह सुबह करीब 5 बजे सूचना मिलने पर अपनी बहन के घर पहुंचे तो देखा कि ताले टूटे हुए थे और घर का सारा सामान बिखरा पड़ा था। कॉलोनी के अन्य घरों में भी चोरों ने ताले तोड़े, लेकिन वहां से कोई खास सामान नहीं मिला, जिससे अंदेशा है कि चोर पूरी तैयारी के साथ आए थे।
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब स्थानीय बाजारों तक दिखने लगा है। अपनी खास पहचान रखने वाली मुजफ्फरपुर की मशहूर 'लाह की लहठियां' (चूड़ियां) महंगी हो गई हैं। जिससे कारोबार पर सीधा असर पड़ा है। शादी-विवाह के सीजन से ठीक पहले कीमतों में 30 से 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी ने ग्राहकों की खरीदारी कम कर दी है, वहीं दुकानदारों की चिंता बढ़ गई है। शहर के इस्लामपुर स्थित सबसे बड़ी लाठी मंडी में इन दिनों रौनक कम नजर आ रही है। आमतौर पर लगन के मौसम में जहां भारी भीड़ उमड़ती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है। दुकानदारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस की कीमतों में बढ़ोतरी और कच्चे माल की महंगाई का सीधा असर कारोबार पर पड़ा है। 55 साल पुरानी दुकान में भी घटी बिक्री करीब 50-55 साल पुरानी दुकान चलाने वाले व्यापारी मोहम्मद फिरोज बताते हैं, 'मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण कच्चे माल और उत्पादन लागत बढ़ गई है। पहले जो लहठियां 100 रुपए में मिलती थी, अब उनकी कीमत 140-150 रुपए तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ा है, जिससे बिक्री 50 से 60 फीसदी तक घट गई है।' मुजफ्फरपुर की लहठी का देश-विदेश में डिमांड मुजफ्फरपुर की ये पारंपरिक लहठियां सिर्फ बिहार या भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों तक अपनी पहचान रखती हैं। खासतौर पर यहां की चूड़ियों की डिमांड शादी-विवाह के सीजन में काफी बढ़ जाती है। स्थानीय कारीगरों का दावा है कि इन चूड़ियों की खूबसूरती और डिजाइन के कारण बॉलीवुड हस्तियां भी इन्हें पसंद करती रही हैं, जिनमें ऐश्वर्या राय का नाम भी लिया जाता है। लगन के बावजूद बाजार सुस्त हालांकि, इस बार 15 अप्रैल से शुरू हो रहे लगन सीजन से पहले बाजार में उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं दिख रही है। महंगाई के कारण ग्राहक सीमित खरीदारी कर रहे हैं, जिससे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। दुकानदारों का कहना है कि अगर जल्द ही कीमतों में स्थिरता नहीं आई, तो पारंपरिक 'लाख उद्योग' पर इसका दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। वहीं, कारीगरों के सामने भी रोजगार का संकट गहराने लगा है।
रूस की सेना में जबरन भर्ती करके यूक्रेन में युद्ध में धकेले गए फतेहाबाद जिले के गांव कुम्हारिया के दो युवकों में से एक की मौत हो गई है। युवक अंकित जांगड़ा की डेडबॉडी दिल्ली पहुंच गई है। जहां परिजन डेडबॉडी लेने पहुंच गए हैं। आज (शनिवार) दोपहर बाद तक डेडबॉडी दिल्ली से गांव कुम्हारिया लाई जाएगी। मृतक अंकित जांगड़ा के बड़े भाई रघुवीर जांगड़ा ने बताया कि परिवार के पास कल शुक्रवार को ही डेडबॉडी भारत भेजने की सूचना पहुंची थी। इसके बाद परिवार आज सुबह दिल्ली रवाना हुआ। दोपहर बाद गांव में अंकित के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया जाएगा। वहीं, दूसरे युवक विजय पूनिया का अभी कोई सुराग नहीं लगा है। बता दें कि, इन दोनों युवकों की वापसी के लिए परिवार की ओर से काफी प्रयास किए गए थे। परिजन दिल्ली और चंडीगढ़ में रूसी एंबेसी, विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय से मदद की गुहार लगाने के लिए गए। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं सिरसा सांसद कुमारी सैलजा, रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी विदेश मंत्री जयशंकर को इस मामले में पत्र लिखा था। अब जानिए यूक्रेन में आखिर कैसे फंसे युवक... स्टडी वीजा पर गए थे दोनों युवक: गांव कुम्हारिया के अंकित जांगड़ा (23) और विजय पूनिया (25) स्टडी वीजा पर रूस गए थे। अंकित के भाई रघुवीर ने बताया कि सात महीने पहले अंकित की कॉल आई थी। उसके साथ तब विजय भी था। अंकित ने उधर से कहा, हमें बचा लो। हमारे पास एक-दो दिन ही बचे हैं। इसके बाद हमें युद्ध में भेज दिया जाएगा। 12वीं के बाद गया अंकित: रघुवीर ने बताया कि अंकित 12वीं की पढ़ाई पूरी कर 14 फरवरी 2025 को स्टडी वीजा पर रूस गया था। इसमें फरीदाबाद की एजेंट ने उनकी मदद की थी। अंकित ने मॉस्को के एमएसएलयू कॉलेज में लेंग्वेज कोर्स में दाखिला लिया था। अंकित के पिता रामप्रसाद ने बताया कि अंकित ने पढ़ाई के दौरान फ्री टाइम में किसी रेस्टोरेंट में हेल्पर का काम शुरू किया, ताकि अपना खर्चा निकाल सके। दोबारा बिजनेस वीजा से गया विजय: विजय पूनिया जुलाई 2024 में स्टडी वीजा पर गया था। वीजा एक्सटेंड नहीं हुआ, तो एक महीने बाद वापस आ गया था। फिर अक्टूबर 2024 में दोबारा गया। 6 महीने रहकर मार्च के आखिर में वापस गांव आया। इसके बाद 15 जुलाई 2025 को विजय एक साल का बिजनेस वीजा लगवाकर रशिया गया। परिवार का कहना है कि लोन लेकर उसे विदेश भेजा था। रूस में महिला ने लालच देकर फंसाया: रघुवीर ने बताया कि करीब आठ महीने पहले एक महिला ने अंकित व विजय के साथ अन्य 13 लोगों को रशियन आर्मी में नौकरी दिलाने की लालच दिया था। 15 लोगों का एक बैच बनाया। जाॅब दिलाने वाली को वॉट्सऐप पर कॉल की, तो महिला ने कहा कि अंकित और विजय तो मर गए हैं। इसके बाद महिला ने नंबर ब्लॉक कर दिया। 11 सितंबर 2025 के बाद से नहीं हुआ संपर्क इन दोनों युवकों से परिवार के सदस्यों का 11 सितंबर 2025 के बाद से कोई संपर्क नहीं हुआ था। लगातार दोनों परिवार उनकी सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे थे। मगर इसी बीच अंकित की डेडबॉडी भारत भेज दी गई है। वहीं, दूसरे युवक विजय का भी अभी तक कोई पता नहीं चल पा रहा है।
ईरान-इजरायल युद्ध की मार, मार्बल-माइनिंग सेक्टर को हर माह 300 करोड़ रुपए का घाटा
ईरान-इजरायल के बीच छिड़े युद्ध ने उदयपुर के विश्वप्रसिद्ध मार्बल और माइनिंग उद्योग की कमर तोड़ दी है। वैश्विक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय परिवहन मार्ग बाधित होने से उदयपुर का व्यापारिक गणित पूरी तरह बिगड़ गया है। तुर्किए और ओमान जैसे देशों से कच्चे माल का आयात रुकने और अमेरिका-खाड़ी देशों को होने वाले निर्यात पर ब्रेक लगने से प्रति माह औसतन 250 से 300 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा, मोरबी का टाइल्स उद्योग ठप होने से उदयपुर के मिनरल सेक्टर को प्रतिदिन 10 करोड़ रुपए से ज्यादा की चपत लग रही है। विशेषज्ञों ने जताई चिंता- संकट और बढ़ेगा आयात पूरी तरह थमा, जाने वाले कंटेनर भी अटके, खदानों पर संकट खनन लागत में 10% का उछाल : युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और रसायनों की कीमतें बढ़ी हैं। माइनिंग में पत्थर काटने के लिए उपयोग होने वाले केमिकल और भारी मशीनरी के दाम 10 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जिससे स्थानीय खदान मालिकों पर दोहरी मार पड़ी है। मोरबी कनेक्शन से खदानें संकट में : मोरबी (गुजरात) में टाइल्स फैक्ट्रियां बंद होने से उदयपुर के फेल्सपार और सोपस्टोन की मांग खत्म हो गई है। जिले की करीब 100 खदानों से रोजाना निकलने वाले 250 ट्रक (100 मोरबी व 150 रीको एरिया) की सप्लाई रुक गई है। आयात-निर्यात पर प्रहार : उदयपुर की सुखेर मंडी में तुर्की और ओमान से हर महीने आने वाला 15 हजार टन (करीब 100 करोड़ रुपये) मार्बल ब्लॉक का आयात पूरी तरह थम गया है। वहीं, खाड़ी देशों और अमेरिका के लिए रोजाना रवाना होने वाले 25 से 30 कंटेनर समुद्री मार्ग में तनाव के कारण अटक गए हैं।
बारदानों की कमी को लेकर कांग्रेस के हमले के बीच खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश में गेहूं खरीदी के लिए इस वर्ष 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। उधर, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा है कि मोहन सरकार किसान शोषण वर्ष मना रही है और किसानों को सुविधा नहीं दे रही है। खाद्य मंत्री गोविंद राजपूत ने कहा कि किसानों को इस वर्ष 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के साथ ही 40 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जा रहा है। उन्होंने बताया है कि इस वर्ष किसानों का पंजीकृत रकबा 41.58 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले साल से 6.65 लाख हेक्टेयर अधिक है। मंत्री राजपूत ने कहा कि किसानों को उपार्जन केंद्रों पर इंतजार न करना पड़े, इसके लिए उपार्जन प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से शुरू की जा रही है। इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 10 अप्रैल 2026 से तथा शेष संभागों में 15 अप्रैल 2026 से समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा था। इस वर्ष वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी चुनौतियों के बावजूद किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य तय किया है। मंत्री राजपूत ने कहा कि पश्चिम एशिया में पिछले एक माह से युद्ध की स्थिति के कारण पेट्रोल, डीजल, एलपीजी गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका थी, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की नियमित आपूर्ति की जा रही है, जिससे आमजन को किसी प्रकार की समस्या न हो। 50 हजार जूट की गठानों का अतिरिक्त आवंटन मंत्री राजपूत ने कहा कि एलपीजी गैस की उपलब्धता बनाए रखने और औद्योगिक उपयोग में पेट्रोलियम पदार्थों की सीमाओं के कारण बारदानों की उपलब्धता में आई संभावित कठिनाइयों का भी समाधान कर लिया है। भारत सरकार ने मध्यप्रदेश को 50 हजार जूट की गठानों का अतिरिक्त आवंटन किया है। साथ ही गेहूं उपार्जन के लिए HDP/PP बैग और एक बार उपयोग होने वाले जूट बारदाने के उपयोग की अनुमति भी दी गई है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार लगातार बारदाना उपलब्धता और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा कर राज्य सरकार को सहयोग प्रदान कर रही है। प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए आवश्यक बारदानों की व्यवस्था उपार्जन प्रारंभ होने से पूर्व पूरी कर ली जाएगी। मंत्री राजपूत ने बताया कि जिन जिलों में भंडारण क्षमता सीमित है, वहां संयुक्त भागीदारी योजना के तहत गोदाम की क्षमता के 120 प्रतिशत तक भंडारण की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। साथ ही केंद्र सरकार के निर्देशानुसार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत मार्च-अप्रैल तथा मई-जून 2026 का खाद्यान्न एक साथ वितरित किया जाएगा, जिससे लगभग 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक अतिरिक्त भंडारण क्षमता उपलब्ध हो सकेगी। “किसान कल्याण वर्ष नहीं, किसान शोषण वर्ष”- पटवारी दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश में “किसान कल्याण वर्ष” के नाम पर “किसान शोषण वर्ष” मनाया जा रहा है। प्रदेशभर में किसानों को खाद के लिए लंबी-लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ा, जहां महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की हुई, लाठियां चलीं और कई बुजुर्गों की जान तक चली गई, जबकि सरकार लगातार खाद की कमी से इनकार करती रही। पटवारी ने कहा कि सरकार युद्ध का हवाला देकर गेहूं खरीदी में देरी कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि वर्ष 2026 में 10 करोड़ बारदाने की आवश्यकता थी, लेकिन सरकार ने मात्र 2 करोड़ 60 लाख बारदाने का ही आवेदन किया। लगभग 7.5 करोड़ बारदाने की कमी सरकार की घोर लापरवाही को दर्शाती है। पटवारी ने कहा कि बारदाना (जूट बैग) की कमी को लेकर सरकार युद्ध का हवाला देकर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि सच्चाई कुछ और है। उन्होंने कहा, यह कमी किसी युद्ध या बाहरी कारण से नहीं, बल्कि सरकार की अकर्मण्यता और लापरवाही का परिणाम है, जिसका खामियाजा प्रदेश के किसान भुगत रहे हैं। कांग्रेस करेगी मंडियों में प्रदर्शन पीसीसी चीफ पटवारी ने कहा कि गेहूं खरीदी की तारीखें लगातार आगे बढ़ाई जा रही हैं। पहले 16 मार्च, फिर 1 अप्रैल और अब 10 अप्रैल, और आगे भी बढ़ने की संभावना है। इस कुप्रबंधन के कारण किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर व्यापारियों को बेचनी पड़ी,लगभग 50 प्रतिशत किसान डिफाल्टर हो गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी किसानों के समर्थन में प्रदेशभर की मंडियों में प्रदर्शन करेगी। भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ता एक दिन के उपवास पर बैठेंगे और कृषि मंत्री के निवास के बाहर धरना देकर किसानों की आवाज बुलंद करेंगे।
विशाखापत्तनम में आयोजित कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वदेशी युद्धपोत ‘तारागिरी’ को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया। इस कार्यक्रम में मझगांव डॉक शिप बिल्डर्स लिमिटेड के स्वतंत्र निदेशक केदारनाथ गुप्ता अतिथि के रूप में मौजूद रहे। एनएस तारागिरी भारतीय नौसेना का एक अत्याधुनिक, स्वदेशी गाइडेड-मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट है, जिसे 3 अप्रैल 2026 को विशाखापत्तनम में औपचारिक रूप से शामिल किया गया। यह युद्धपोत ‘प्रोजेक्ट 17ए’ के तहत तैयार किया गया है और इसका निर्माण मझगांव डॉक शिप बिल्डर्स लिमिटेड ने किया है। करीब 6,670 टन वजनी यह युद्धपोत 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री से बना है, जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती देता है। इसकी स्टील्थ तकनीक इसे दुश्मन के रडार से बचाने में सक्षम बनाती है। तारागिरी में ब्रह्मोस मिसाइल जैसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें तैनात हैं, जो लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम हैं। इसके अलावा इसमें उन्नत रडार सिस्टम, ‘कवच’ जैसे डिफेंस मैकेनिज्म और पनडुब्बी रोधी क्षमताएं भी शामिल हैं। यह युद्धपोत समुद्र के ऊपर, सतह और पानी के अंदर तीनों स्तरों पर दुश्मन से मुकाबला करने में सक्षम है। इसकी मल्टी-रोल क्षमता भारतीय नौसेना की ताकत को और मजबूत करती है। कार्यक्रम में मौजूद केदारनाथ गुप्ता ने इसे देश की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि भारत अब युद्धपोत निर्माण से लेकर आधुनिक हथियार प्रणालियों तक में तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा है। ‘तारागिरी’ का नौसेना में शामिल होना इस बात का संकेत है कि भारत अपनी समुद्री सुरक्षा को स्वदेशी तकनीक के दम पर लगातार मजबूत कर रहा है।
कांग्रेस के दो नेताओं ने इस बार पार्टी लाइन से हटकर रुख अपनाया है। आनंद शर्मा ने इस विषय पर अपनी 11 पोस्ट में से एक में कहा कि संभावित जोखिमों से बचते हुए संकट से निपटने में भारतीय कूटनीतिक प्रयास परिपक्व और कुशल रहे हैं।
कुशीनगर में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध कॉन्क्लेव 2026 का समापन हो गया। इस आयोजन के दौरान आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक कार्यक्रमों के माध्यम से विश्व शांति, करुणा और सहिष्णुता का संदेश दिया गया। समापन समारोह में प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की और विश्व शांति, मानव कल्याण तथा आपसी सौहार्द की कामना की। अपने संबोधन में मंत्री शाही ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भगवान बुद्ध के विचार अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, आज दुनिया को युद्ध की नहीं, बल्कि बुद्ध की आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा कि विश्व की जटिल समस्याओं का समाधान शांति, करुणा और सह-अस्तित्व के मार्ग पर चलकर ही संभव है। मंत्री ने अहंकार त्यागने और संतुलित जीवनशैली अपनाने का भी संदेश दिया। कॉन्क्लेव के दौरान 'धम्मा, डायलॉग एंड डेवलपमेंट' विषय पर कई सत्र आयोजित किए गए। इनमें बौद्ध दर्शन, वैश्विक शांति, सतत विकास, पर्यटन और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर देश-विदेश के विद्वानों ने अपने विचार साझा किए। देखें तस्वीरें… जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि इस अंतर्राष्ट्रीय आयोजन में लगभग 2000 बौद्ध भिक्षुओं, स्कॉलर्स, उद्योगपतियों, होटल व्यवसायियों, सिविल एविएशन विशेषज्ञों और टूर ऑपरेटर्स ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन कुशीनगर के लिए सीखने, विकास और वैश्विक पहचान का एक महत्वपूर्ण माध्यम साबित हुआ है। समापन अवसर पर विश्व शांति के लिए कैंडल लाइट पीस मार्च का भी आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर शांति और भाईचारे का संदेश दिया। इस कॉन्क्लेव के माध्यम से कुशीनगर ने एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में सफल रहा, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देने वाला साबित हुआ है।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से पैदा हुए संभावित गैस संकट को लेकर केंद्र सरकार ने केरोसिन वितरण की बात कही है, लेकिन जमीन पर इसकी तस्वीर बिल्कुल उलट दिख रही है। सरकारी घोषणा और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा फासला साफ नजर आ रहा है। दैनिक भास्कर की टीम आमस प्रखंड के चंडी स्थान स्थित केरोसिन डिपो पहुंची, तो वहां न कोई तैयारी दिखी और न ही किसी तरह की हलचल। हालात यह कि पूरी योजना अभी कागजों तक ही सीमित है। पढ़ें, पूरी रिपोर्ट। आमस, गुरारू, टिकारी और इमामगंज में केरोसिन डिपो गयाजी जिले में आमस, गुरारू, टिकारी और इमामगंज को छोड़ पूरे बिहार में कहीं भी डिपो नहीं है। इन चार डिपो से ही जनवितरण प्रणाली के डीलर जरूरत पड़ने पर केरोसिन उठाते हैं। हालांकि हकीकत यह है कि रूटीन में कोई भी डीलर केरोसिन लेने नहीं पहुंचता। डिपो संचालकों को भी सिर्फ राशन डीलरों को ही केरोसिन देने की अनुमति है। किसी निजी या अन्य संस्थान को देने का अधिकार नहीं है। आमस प्रखंड के चंडी स्थान स्थित कलिंगा इंटरप्राइजेज के मालिक चंद्रिका सिंह बताते हैं कि उन्हें प्रशासन जितना ऑर्डर देता है, उतना ही केरोसिन देना होता है। लेकिन मौजूदा हालात में डिमांड लगभग खत्म हो चुकी है। महीने में बमुश्किल एक या दो डीलर ही केरोसिन लेने आते हैं। वजह साफ है। अब इसकी जरूरत ही नहीं रह गई। बिजली और एलपीजी गैस के चलते केरोसिन का इस्तेमाल लगभग खत्म हो चुका है। बिक्री ठप्प होने के बाद एक-एक कर बंद होते गए केरोसिन के डिपो चंद्रिका सिंह आगे बताते हैं कि एक समय जिले में कई डिपो हुआ करते थे, लेकिन बिक्री ठप होने के कारण एक-एक कर सभी बंद हो गए। हम लोग बरौनी से केरोसिन उठाते हैं। पिछले साल अगस्त में 12 हजार लीटर उठाया था। उसमें से अब भी करीब 5 हजार लीटर स्टॉक में पड़ा है। इसके बाद हाल ही में मार्च में फिर 12 हजार लीटर उठाने का आदेश मिला, लेकिन डिमांड नहीं होने के कारण अब तक नहीं उठाया। लाखों रुपए फंसा कर रखना आसान नहीं है। सरकार की नई घोषणा के तहत पेट्रोल पंपों के जरिए केरोसिन वितरण की बात कही गई है। इस पर डिपो संचालक इसे अपने लिए राहत जरूर मान रहे हैं। लेकिन आदेश का इंतजार कर रहे हैं। चंद्रिका सिंह कहते हैं कि अब तक न प्रशासन से कोई निर्देश आया है और न ही हिंदुस्तान पेट्रोलियम की ओर से। हम तैयार हैं, लेकिन बिना आदेश कुछ नहीं कर सकते। केरोसिन वितरण योजना पर कई सवाल हो रहे खड़े हालांकि इस योजना पर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह कि पेट्रोल पंप केरोसिन का वितरण कैसे करेंगे। फिलहाल पेट्रोल पंपों पर सिर्फ पेट्रोल और डीजल के लिए ही नोजल और स्टोरेज सिस्टम होता है। ऐसे में तीसरे ईंधन के तौर पर केरोसिन को कैसे शामिल किया जाएगा। इस पर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं है। केरोसिन की प्रकृति भी अलग और कुछ हद तक खतरनाक मानी जाती है। ऐसे में सुरक्षा का पहलू भी बड़ा मुद्दा है। गांवों में कुछ लोगों ने निकाले स्टोव, बोले- अब यही काम आएगा इधर, आमस के गांवों में एक अलग ही तस्वीर उभर रही है। संभावित संकट की आशंका के बीच लोग पुराने केरोसिन स्टोव को फिर से दुरुस्त कराने में जुट गए हैं। आमस के कोरमथु गांव निवासी पिंटू कुमार बताते हैं कि घर में पुराना स्टोव है, लेकिन खराब हो गया है। उसे ठीक कराने शेरघाटी बाजार जा रहा हूं। गैस खत्म हो रही है और इस बीच किल्लत भी बढ़ रही है। अगर केरोसिन मिलेगा तो स्टोव काम आएगा। पिंटू बताते हैं कि सरकार की घोषणा के बाद ही उन्होंने स्टोव ठीक कराने का फैसला लिया। सुना है कि सरकार केरोसिन देगी, इसलिए पहले से तैयारी कर रहे हैं। हालांकि बाजार की स्थिति भी निराशाजनक है। केरोसिन स्टोव अब बाजार से लगभग गायब हो चुके हैं। न तो इसका निर्माण हो रहा है और न ही इसे ठीक करने वाले कारीगर आसानी से मिल रहे हैं। शहर के रमना रोड बाजार के हार्डवेयर दुकानदार मनोज केसरी बताते हैं कि हर दिन 6-7 लोग स्टोव पूछने आते हैं। लेकिन हमारे पास नहीं है। पूरे बाजार में कहीं स्टोव नहीं मिल रहा। अब इसका न निर्माण हो रहा है और न कारीगर बचे हैं। केरोसिन वितरण का आदेश मिला तो है, लागू करने को स्पष्ट निर्देश नहीं मामले पर जिलापूर्ति अधिकारी अशोक चौधरी का भी जवाब साफ तस्वीर नहीं देता। वे कहते हैं कि केरोसिन वितरण को लेकर आदेश तो मिला है, लेकिन यह कब से लागू होगा, इस पर अब तक स्पष्ट निर्देश नहीं आया है। जब उनसे पूछा गया कि गांव के लोग केरोसिन का क्या करेंगे, तो उनका जवाब और भी चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि लोग स्टोव जलाने या रोशनी के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं। हालांकि यह जवाब खुद ही सवाल खड़ा करता है। क्योंकि जिले के लगभग हर गांव और घर में बिजली पहुंच चुकी है। ऐसे में रोशनी के लिए केरोसिन का उपयोग कितना व्यावहारिक होगा। यह समझ से परे है।कुल मिलाकर, ईरान युद्ध के बीच संभावित संकट को लेकर सरकार की तैयारी अभी जमीन पर नजर नहीं आ रही। डिपो खाली पड़े हैं, डिमांड नहीं है, बाजार में स्टोव नहीं है और प्रशासन के पास भी स्पष्ट रोडमैप नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान युद्ध की वजह से शेयर बाजार में आई अस्थिरता ने पानीपत के एक परिवार में संकट खड़ा कर दिया है। शहर के सेक्टर 11 के एक 46 वर्षीय शेयर मार्केट ब्रोकर, गगन आहुजा, बाजार में हुए भारी नुकसान और मानसिक तनाव के चलते संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए हैं। परिजनों ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराई है। पानीपत पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर गगन की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस मोबाइल लोकेशन और आसपास के सीसीटीवी फुटेज के जरिए उनका पता लगाने का प्रयास कर रही है। नाइट सूट में पार्क गए थे, मोबाइल-कैश साथ ले गए लापता ब्रोकर के पिता केएल आहुजा ने जानकारी देते हुए बताया कि 30 अप्रैल की सुबह करीब 7:00 बजे गगन घर से नाइट सूट पहनकर पास के पार्क में मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे। वह अपने साथ मोबाइल फोन और करीब 1500 रुपए नकद भी ले गए थे। जब वह सुबह 10 बजे तक वापस नहीं लौटे और उनका कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने पुलिस को शिकायत दी, जिसके आधार पर गुमशुदगी का मामला दर्ज किया गया है। युद्ध के चलते क्लाइंट्स को हुआ नुकसान परिजनों के अनुसार, गगन लंबे समय से शेयर मार्केट ब्रोकर का काम कर रहे थे। पिछले कुछ समय से मध्य पूर्व में जारी वैश्विक संघर्ष और युद्ध की वजह से बाजार में बड़ी गिरावट आई, जिससे गगन के कई क्लाइंट्स को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस बात को लेकर वह अत्यधिक मानसिक तनाव और परेशानी में थे। पिता का मानना है कि संभवतः इसी दबाव के चलते उन्होंने घर छोड़ने का कदम उठाया है। 10वीं में होना है बेटे का दाखिला गगन के अचानक लापता होने से घर में कोहराम मचा हुआ है। उनकी मां और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार की चिंता इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि गगन के बेटे का इसी महीने 10वीं कक्षा में एडमिशन होना है। पूरा परिवार उनकी सुरक्षित वापसी की आस लगाए बैठा है। 4 करोड़ की देनदारी के आरोप निराधार- पिता ब्रोकर के गायब होने के बाद सोशल मीडिया और शहर में ऐसी चर्चाएं फैल रही हैं कि उन पर 4 करोड़ रुपए की देनदारी है, जिसके कारण वह लापता हुए हैं। हालांकि, पिता ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि उनके बेटे पर लेन-देन के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उनमें कोई सच्चाई नहीं है।
ईरान-ईजराइल-अमेरिका युद्ध के कारण औद्योगिक क्षेत्र में आने वाला समय संकट से भरा होगा, यह बात खुद उद्योग संचालक कह रहे हैं। पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष गौतम कोठारी का कहना है कि युद्ध लंबा चला तो कई उद्योगपतियों के साथ दिवालिया होने की स्थिति भी बन सकती है। उद्योगपतियों ने कर्मचारियों को लेऑफ(आधी सैलरी) दे दिया है। फैक्ट्रियों में शटडाउन की स्थिति बन रही है। अस्थायी कर्मचारियों का पलायन शुरू हो गया है। दूसरी तरफ मौजूदा परिस्थिति से निपटने के लिए प्रशासन की तरफ से कोई सकारात्मक पहल अब तक नहीं की गई है। औद्योगिक संगठनों के साथ ना कोई बैठक हुई है और न ही आगे का कोई एक्शन प्लान तैयार किया गया है। 20 हजार मजदूर बाहर होने की स्थिति में पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष डॉ. गौतम कोठारी ने बताया कि पीथमपुर से अधिकांश एक्सपोर्ट का काम होता है। एक्सपोर्ट पूरी तरह से रुक गया है। उद्योगपतियों में एक प्रकार का अंदर डर बैठ गया है। वह कोशिश यहीं कर रहे हैं कि जितना कम से कम हो सके उतना ही प्रोडक्शन करें। प्रोडक्शन कम करने के कारण फैक्ट्रियों में शिफ्ट कम हो गई हैं और बेरोजगारी बढ़ गई है। पीथमपुर में कांट्रैक्ट लेबर करीब-करीब बाहर होने की स्थिति में हैं। ऐसे कम से कम 20 हजार मजदूर हैं जो पीथमपुर में काम कर रहे थे, अब बाहर हो चुके हैं। इसके अलावा जो फैक्ट्रियों में शटडाउन हो रहा है, उसके कारण स्थायी लेबर को लेऑफ यानी आधी तनख्वाह दी जाएगी। कई लेबर पीथमपुर से पलायन कर गए युद्ध का सबसे ज्यादा असर उद्योगों पर देखने के लिए मिल रहा है। पीथमपुर औद्योगिक संगठन से मिली जानकारी के अनुसार पीथमपुर में एलपीजी की समस्या होने और कंपनियों में काम कम होने के कारण अधिकांश लेबर यहां से अपने गांव के लिए जा चुके हैं। लेबर कांट्रैक्टर सद्दाम पटेल ने बताया कि पीथमपुर में लेबर बाहर से आती है, उनको गैस छोटे-छोटे बॉटलें लेना पड़ती हैं। पिछले दिनों गैस की सप्लाई प्रभावित होने से उन्हें गैस महंगी मिल रही थी। अब 300 रुपए की गैस लेबर को भरवाने में दिक्कत होती है, क्योंकि इतनी पेमेंट उनकी नहीं है। 550 रुपए सैलरी में 300 की गैस कैसे भरवाएंसेज सेक्टर की एक फार्मा कंपनी में काम करने वाले लेबर नीतेश बघेल ने बताया कि मैं प्लास्टिक फैक्ट्री में काम करता हूं, लेकिन कंपनी में प्लास्टीक दाना महंगा होने से पिछले 5 दिन से काम बंद हो गया है, इसलिए हमारी भी छुट्टी कर दी गई है। हां घर की महिलाएं कपड़ा फैक्टी में पैकिंग का काम करने जाती है उन्हें जरूर 10 अप्रैल तक के लिए काम पर बुलाया जा रहा है, उनका काम बंद होने के बाद हम गांव चले जाएंगे। सरकार क्राइसेस का कोई मैनेजमेंट नहीं कर रही पीथमपुर औद्योगिक संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि ऐसी क्राइसेस में हम सरकार का मुंह देखते हैं, बाकी समय तो सरकार हमारा मुंह देखती है, क्योंकि हम उनको टैक्स देते हैं। उनको जीडीपी में योगदान देते हैं। सरकार वर्तमान की स्थिति में क्राइसेस को लेकर कोई काम नहीं कर रही है। क्राइसेस में क्राइसेस मैनेजमेंट किया जाता है, लेकिन अभी सरकार कोई मैनेजमेंट नहीं कर रही। अगर आपने गैस कम कर दी तो यह कोई क्राइसेस मैनेजमेंट नहीं है, मैनेजमेंट तो तब होता जब इंडस्ट्री की आवश्यकता के अनुसार हर चीज का निर्धारण होता है। सरकार समस्या को नकारते हुए बाहरी रूप से अगर उसको मैनेज कर रही है तो यह क्राइसेस मैनेजमेंट नहीं है बल्कि अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना है। मध्य प्रदेश का 'डेट्रॉयट' अब संकट में पीथमपुर को मध्य प्रदेश का औद्योगिक इंजन कहा जाता है। यहां ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मा, प्लास्टिक, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग सेक्टर की 5,600 से ज्यादा इकाइयां हैं। SEZ से हर महीने करोड़ों डॉलर का एक्सपोर्ट होता था। अमेरिका, यूरोप और मिडिल ईस्ट के बाजारों में पीथमपुर के पुर्जे, दवाइयां और पैकेजिंग सामग्री पहुंचती थी। हॉर्मुज स्ट्रेट और सूज कैनाल पर तनाव से फ्रेट चार्ज पांच गुना बढ़ गए। बीमा प्रीमियम आसमान छू रहा है। ये खबर भी पढ़ें… शुगर-बीपी, बुखार सहित इन्फेक्शन की दवाएं महंगी मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण चीन से आने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स की सप्लाई बाधित होने और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से मध्यप्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री में शटडाउन का खतरा मंडरा रहा है। फार्मा इंडस्ट्री में लगने वाले रॉ मटेरियल के रेट में 30% से लेकर 50% तक की बढ़ोत्तरी हुई है।पूरी खबर पढ़ें
धीरे-धीरे हकीकत में बदल रहे हैं भारत के ईरान युद्ध के डर
ईरान युद्ध को लेकर भारत की सबसे गहरी आर्थिक चिंताएं अब काल्पनिक नहीं रह गई हैं
युद्ध को लेकर मोदी का देश को डराने वाला संदेश
देश में जहां भी और जब भी चुनाव होते हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दूसरे सारे काम छोड़कर अपनी भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार में जुट जाते हैं
पश्चिम एशिया में युद्ध के दुष्प्रभाव से निपटने के लिए बेहतर नीतियों की ज़रूरत
वित्त वर्ष 2026-27 की ठीक शुरुआत में, जो 1 अप्रैल, 2026 से शुरू हो रहा है, भारत को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है
युद्ध के माहौल में महावीर के दर्शन की उपादेयता
सदियों पहले महावीर जनमे। वे जन्म से महावीर नहीं थे। उन्होंने जीवन भर अनगिनत संघर्षों को झेला, कष्टों को सहा, दुख में से सुख खोजा और गहन तप एवं साधना के बल पर सत्य तक पहुंचे, इसलिये वे हमारे लिए आदर्शों की ऊंची मीनार बन गये। उन्होंने समझ दी कि महानता कभी भौतिक पदार्थों, सुख-सुविधाओं, ... Read more
युद्धग्रस्त विश्व में महावीर की अहिंसा: शांति की एकमात्र राह
संदर्भ – तीर्थंकर महावीर स्वामी जन्म कल्याणक 2625वां (31 मार्च 2026) आज का विश्व एक विचित्र विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर विज्ञान, तकनीक और वैश्वीकरण ने मानव जीवन को अभूतपूर्व सुविधाएं दी हैं, वहीं दूसरी ओर युद्ध, हिंसा और असहिष्णुता ने मानवता के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विश्व के ... Read more
मिडिल ईस्ट युद्ध ने ट्रम्प की मुश्किलों को बढ़ाया
युद्ध के मामले में अमेरिका-इजरायल की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं।
पश्चिम एशिया युद्ध में परमाणु खतरे के प्रति लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अंतिम घोषित तिथि बढ़ा दी है।
अब युद्धविराम को लालायित ट्रंप
अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह लड़ाई अमेरिका को पहले ही महंगी पड़ रही है
पश्चिम एशिया में युद्ध फैलने से एक और वैश्विक आर्थिक संकट का खतरा
पश्चिम एशिया का संकट अब एक वैश्विक आर्थिक चुनौती में बदल गया है
फैक्ट चेक: इजरायल के डिमोना पर हमले के दावे से इराक का वीडियो हुआ वायरल
बूम ने पाया कि वायरल हो रहा वीडियो इराक के Nasiriyah स्थित एक रेस्टोरेंट में लगी आग का है.
ईरान युद्ध के सबक मौजूदा संघर्ष से कहीं आगे बाजार का आकार तय करेंगे
ऊर्जा बाजार एक ऐसे दौर में जा रहा है, जहां मूल्य निर्धारण मॉडल के आधार पर बनी पारंपरिक धारणाएं संघर्ष के बदलते स्वरूप से पूरी तरह बदल रही हैं
ईरान युद्ध में नाटो से अलग-थलग पड़े ट्रंप की परीक्षा की घड़ी
बुधवार को, अमेरिका-इजरायल गठबंधन के ईरान के खिलाफ युद्ध के 18वें दिन, ट्रंप को एक साथ दो बुरी खबरें मिलीं
लीजा रे ने दुबई से शेयर की दर्दभरी कविता, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच जताई चिंता
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। हर तरफ धमाकों और सायरन का शोर सुनाई दे रहा है। एक्ट्रेस लीजा रे भी इन हालातों के बीच दुंबई में अपने घर ...
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता, बेटी के साथ सुरक्षित लौटीं भारत, सुनाई आपबीती
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता भी अपनी 14 साल की बेटी सायरा के साथ यूएई में ...
1914 के विश्व युद्ध का इतिहास दोहराएगा 2026, दोनों साल के कैलेंडर में चौंकाने वाली समानता
इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि वक्त का पहिया घूमकर वापस आता है, लेकिन क्या तारीखें भी खुद को दोहराती हैं? सोशल मीडिया पर यह खबर बहुत वायरल हो रही है और ज्योतिषियों के बीच एक चौंकाने वाली समानता चर्चा का विषय बनी हुई है। गणितीय गणना बताती है कि वर्ष ...
Middle East war के कारण खड़ी तेल समस्या मे भारत बना आशा का किरण; जाने क्यों अमेरिका ने जताया आभार ?
डोनाल्ड ट्रम्प ने टेक्सास में $300 अरब की नई रिफाइनरी का ऐलान किया। भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज के भारी निवेश के साथ अमेरिका 50 साल बाद रचेगा नया ऊर्जा इतिहास।
ईरान के अखबार तेहरान टाइम्स ने अपने पहले पन्ने पर एक मार्मिक और भीतर तक झकझोरने वाली तस्वीर छापी है
ईरान युद्ध से भारतीय अर्थव्यवस्था को जोरदार झटका संभव
पश्चिम एशिया में चल रहे व्यापक युद्ध, जिसमें अमेरिका-इज़राइल जोड़ी और ईरान शामिल हैं
ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश ने आपातकालीन कदम उठाए
बांग्लादेश ने आने वाले दिनों में ईंधन की भारी कमी से बचने के लिए पेट्रोल राशनिंग का सहारा लिया है
ललित सुरजन की कलम से - युद्ध नहीं, शांति चाहिए
'एक कटु सत्य है कि भारत ने युद्ध की विभीषिका का बहुत सीमित अनुभव किया है। बातें हम भले ही बड़ी-बड़ी कर लें
क्या ट्रंप ने कहा कि 'भारत-पाकिस्तान युद्ध बढ़ता तो शहबाज शरीफ की मौत हो जाती?'
बूम ने पाया कि वायरल दावा भ्रामक है. मूल भाषण में ट्रंप ने कहा था, 'पाकिस्तानी पीएम ने उनसे कहा था कि अगर पड़ोसी देशों के बीच परमाणु युद्ध होता तो 3.5 करोड़ लोग मारे जाते.'
अमेरिकी राष्ट्रपति के टैरिफ युद्ध से ज़्यादा फ़ायदा उठा रहे हैं शी
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ब्रिटिश प्रधान मंत्री कीर स्टारमर के बीच गुरुवार, 29 जनवरी को बीजिंग में हुई मीटिंग खास मायने रखती है
मनाली: बर्फबारी में फिसलती गाड़ियों के दावे से तुर्की का वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि भारी बर्फबारी में फिसलती गाड़ियों का यह वीडियो मनाली का नहीं बल्कि दिसंबर 2025 का तुर्की के Malatya शहर का है.
युद्धक्षेत्र में बढ़त हासिल करने में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम निभाएगा अहम भूमिका : एक्सपर्ट्स
नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम, पारंपरिक युद्धक्षेत्र के साथ-साथ युद्ध का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभरा है और 'सेंस, सिक्योर एंड स्ट्राइक' का एसएसएस मंत्र इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम में बढ़त हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह जानकारी एक्सपर्ट्स की ओर से दी गई।
एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज़ की '120 बहादुर' को लेकर चर्चा अब अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। फिल्म ट्रेलर ने पूरी तरह से रोमांच और प्रेरणा का सही मिश्रण पेश किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बलिदान दिवस पर मेजर शैतान सिंह ...
War 2 रिव्यू: लचर स्क्रिप्ट और निर्देशन के कारण रितिक और एनटीआर हारे युद्ध, पढ़ें पूरी समीक्षा
रितिक रोशन और एनटीआर स्टारर War 2 ‘स्पाई यूनिवर्स’ की बड़ी पेशकश मानी जा रही थी, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और औसत निर्देशन ने इसे निराशाजनक बना दिया। शानदार एक्शन सीक्वेंस और एनटीआर के दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद फिल्म का सेकंड हाफ बिखर गया। कहानी में ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला अपनी खूबसूरती से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। उर्वशी ने बेहद ही कम समय में एक अलग मुकाम हासिल किया है। वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों के साथ 'मिलने और अभिवादन' के क्षणों में संलग्न रहती है। ऐसा ही एक क्षण था जब ...
सलमान खान की सिकंदर के आखिरी गाने में दिखेगा जबरदस्त जलवा, तुर्की से बुलाए गए 500 डांसर्स!
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की 'सिकंदर' इस साल की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके एक्शन-पैक्ड टीजर ने इसकी भव्य एंट्री के लिए एकदम परफेक्ट माहौल तैयार कर दिया है। भव्य पैमाने पर बनाई गई इस फिल्म में ...
केसरी वीर के लिए सूरज पंचोली ने की कड़ी ट्रेनिंग, ऐसे सीखा युद्ध कौशल
बॉलीवुड एक्टर सूरज पंचोली अपनी पहली बायोपिक में वीर हामीरजी गोहिल के ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने जा रहे हैं। सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय और सूरज पंचोली अभिनीत फिल्म 'केसरी वीर : लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ' का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ...
फरहान अख्तर लेकर आ रहे भारत-चीन युद्ध पर आधारित फिल्म 120 बहादुर, निभाएंगे मेजर शैतान सिंह का रोल
Movie 120 Bahadur : रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट, ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज के साथ मिलकर '120 बहादुर' को पेश करने के लिए उत्साहित हैं। यह फिल्म मेजर शैतान सिंह (पीवीसी) और चार्ली कंपनी, 13 कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिकों की कहानी कहती ...
Adil Hussain: दुनियाभर में इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 की धूम मची हुई है। पेरिस ओलंपिक में दुनियाभर के खिलाड़ियों ने भाग लिया है। भारत के कई खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। हाल ही में तुर्की के शूटर यूसुफ डिकेक ने सिल्वर मेडल जीता।
बॉर्डर की 27वीं सालगिरह पर, अभिनेता सनी देओल ने एक घोषणा वीडियो के ज़रिए फ़्रैंचाइज़ी के दूसरे संस्करण की पुष्टि की है। अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सनी ने बॉर्डर 2 में अपनी वापसी की आधिकारिक घोषणा करते हुए एक वीडियो शेयर किया और इसे 'भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म' बताया। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ''एक फौजी अपने 27 साल पुराने वादे को पूरा करने के बाद, आ रहा है फिर से। भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म, बॉर्डर 2।'' इस फिल्म का निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता करेंगे। आगामी युद्ध फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह करेंगे। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | पति से तकरार के बीच केन्या लौट गई हैं Dalljiet Kaur? शादी को बचाने की कर रही कोशिश सनी द्वारा घोषणा वीडियो शेयर किए जाने के तुरंत बाद, सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए कमेंट सेक्शन में बाढ़ ला दी। एक यूज़र ने लिखा, ''वाह, यह बहुत बढ़िया घोषणा है सर जी, जय हिंद।'' दूसरे ने लिखा, ''बहुत उत्साहित हूँ।'' तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, ''बॉर्डर 2 के लिए बहुत उत्साहित हूं।'' इसे भी पढ़ें: NDA पर इमोशनल बयान, काले सूट में ली मंत्री पद की शपथ और शर्मिला अंदाज, Tripti Dimri की तरह रातों रात भारत के Sensation बन गये Chirag Paswan सनी देओल की अन्य परियोजनाएं उन्हें आखिरी बार अमीषा पटेल के साथ गदर 2 में देखा गया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही और इसे ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर घोषित किया गया। गदर 2 की सफलता के बाद, सनी ने लाहौर 1947 सहित कई फिल्में साइन कीं, जिसे आमिर खान के प्रोडक्शन बैनर के तहत बनाया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जिन्होंने आमिर को कल्ट क्लासिक अंदाज़ अपना अपना (1994) में निर्देशित किया था। View this post on Instagram A post shared by Sunny Deol (@iamsunnydeol)
Kalki 2898 AD: शुरू हो गया नया युद्ध, पूरे ट्रेलर की अहम कड़ी हैं अमिताभ, प्रभास करेंगे इम्प्रेस
Kalki 2898 AD के ट्रेलर को देखें तो, फिल्म कल्कि 2898 एडी के मेकर्स ने विश्वास दिलाया है कि ये फिल्म लोगों को बांधने में कामयाब होगी. टफ सीक्वेंस, क्लियर एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर आपका ध्यान खींचते हैं. वीएफएक्स पर भी अच्छा काम किया गया है.
आशुतोष राणा ने डीपफेक वीडियो को बताया 'माया युद्ध', बोले- ये सालों से चल रहा
आशुतोष ने कहा कि ऐसी बातों में खुद को डिफेंड करने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि जो लोग आपको जानते हैं वो सवाल करेंगे ही नहीं. और जो नहीं जानते, उन्हें किसी रिस्पॉन्स से फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वो दिमाग में आपकी एक छवि बना चुके होते हैं.
रानीति बालाकोट एंड बियॉन्ड: जिमी शेरगिल की नई सीरीज भारत की आधुनिक युद्ध की ऐतिहासिक कहानी को प्रदर्शित करेगी। जिमी शेरगिल दो मिनट के ट्रेलर की शुरुआत पुलवामा हमले की झलक से होती है। एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाने वाले आशीष कहते हैं, ये एक नया रण है या इसे जीतने के लिए एक नई रणनीति की जरूरत है। इसे भी पढ़ें: नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन प्रहार', कमांडर शंकर राव समेत अब तक 79 हुए ढेर, हिट लिस्ट में और भी कई नाम शामिल आगामी वेब शो आधुनिक युद्ध को डिकोड करता है जो केवल भौतिक सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता है बल्कि सोशल मीडिया, डिजिटल रणनीति और गुप्त राजनीतिक चालों के क्षेत्र से परे है जो भू-राजनीति को नया आकार देने की शक्ति रखता है। वेब श्रृंखला उन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है जिन्होंने 2019 में देश को हिलाकर रख दिया था। शो में कुछ हवाई दृश्य, शानदार प्रदर्शन और एक शक्तिशाली कथा है जो युद्ध के मैदान के अंदर और बाहर हर पहलू को चतुराई से पकड़ती है। इसे भी पढ़ें: Biden को सोचना पड़ेगा फिर एक बार, Iran पर प्रहार तो रूस करेगा पलटवार, रक्षा मंत्रायल ने चिट्ठी लिखकर जता दी मंशा आगामी वेब श्रृंखला के बारे में बात करते हुए, जिमी ने कहा: यह मेरे द्वारा अतीत में की गई किसी भी भूमिका से भिन्न है। कम से कम यह कहना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन भारत की पहली वॉर-रूम केंद्रित वेब-श्रृंखला का हिस्सा बनना बेहद संतोषजनक भी है। वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित जिसने देश को हिलाकर रख दिया। एनएसए प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए, आशीष ने कहा, एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन रक्षा बलों के कुछ सदस्यों के साथ बैठकों ने मुझे अपने चरित्र की बारीकियों को समझने में मदद की। तैयारी कार्य और कार्यशालाएं मुझे वापस ले गईं मेरे एनएसडी के दिनों में। संतोष सिंह द्वारा निर्देशित, श्रृंखला का निर्माण स्फीयरओरिजिन्स मल्टीविजन प्राइवेट लिमिटेड के सुंजॉय वाधवा और कॉमल सुंजय डब्ल्यू द्वारा किया गया है। इसमें प्रसन्ना भी हैं। शो का प्रीमियर 25 अप्रैल को JioCinema पर होगा।
दर्शक काफी समय से रैपर बादशाह और हनी सिंह के बीच जुबानी जंग देख रहे हैं। दोनों का रिश्ता सालों से विवादों से भरा रहा है। हालांकि करियर के शुरुआती दिनों में बादशाह और हनी सिंह के बीच अच्छी दोस्ती हुआ करती थी। हालाँकि, ऐसा लगता है कि सफलता और पैसे ने धीरे-धीरे इस दोस्ती को पूरी तरह से खत्म कर दिया। अब दोनों अक्सर एक दूसरे पर तंज कसते नजर आते हैं। हाल ही में हनी सिंह एक होली पार्टी में शामिल हुए, जहां उन्होंने बादशाह के 'पापा कमबैक' वाले कमेंट का करारा जवाब दिया। रैपर का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसे भी पढ़ें: Punjab Kings के खिलाफ जीत के बाद इंटरनेट पर Virat Kohli का Anushka Sharma के साथ वीडियो कॉल, FLY KISS देते नजर आये खिलाड़ी हनी सिंह ने बादशाह पर किया पलटवार बादशाह कुछ दिनों पहले हनी सिंह पर अपनी टिप्पणी को लेकर चर्चा में थे, जिसमें उन्होंने हनी सिंह की वापसी पर कटाक्ष किया था। अब सिंगर और रैपर हनी सिंह ने एक कमेंट के जरिए बादशाह को करारा जवाब दिया है और कहा है कि उन्हें बादशाह को जवाब देने के लिए मुंह खोलने की जरूरत नहीं है। उनके फैन ही काफी हैं जो हर चीज पर बात कर सकते हैं। उन्होंने अपने गाली वाले अंदाज में अपने फैंस से बात करते हुए बादशाह का जवाब दिया। हनी सिंह को सोमवार को मुंबई में एक होली पार्टी में परफॉर्म करते देखा गया और यहीं उन्होंने बादशाह पर कटाक्ष किया। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा, हर कोई कहता है, रिप्लाई करो, रिप्लाई करो... मैं क्या रिप्लाई करूं... आप लोग तो उनके सारे कमेंट्स का बहुत अच्छे से रिप्लाई कर चुके हैं। मुझे मुंह खोलने की जरूरत है। ऐसा नहीं होता है। जैसे ही भीड़ ने उनके लिए तालियां बजाईं, गायक ने कहा, मुझे बोलने की जरूरत नहीं है। आप लोग खुद पागल हैं। हनी सिंह पागल हैं और उनके प्रशंसक भी पागल हैं। इसे भी पढ़ें: Taapsee Pannu के पति Mathias Boe आखिर कौन है? जब सफल भी नहीं थी एक्ट्रेस तब से उन्हें प्यार करते थे बैडमिंटन खिलाड़ी रैपर बादशाह ने क्या कहा? आपको बता दें कि हाल ही में बादशाह ने हनी सिंह पर कमेंट करते हुए कहा था, ''मुझे एक पेन और कागज दो। मैं तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लाया हूं। मैं कुछ गाने लिखूंगा और तुम्हें दूंगा। पापा की वापसी तुम्हारे साथ होगी।'' Kalesh Controversy B/w Honey Singh and Badshah (Honey Singh Replied to Badshah) pic.twitter.com/o74t423bgS — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 25, 2024 Kalesh Between Badshah & Honey Singh Fans on Stage during Live Concert pic.twitter.com/M4VqSqLSc3 — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 19, 2024
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'सावरकर' रिव्यू: खोखली, एकतरफा फिल्म में एकमात्र अच्छी चीज है रणदीप हुड्डा का काम
आज के दौर में 'गुमनाम' हो चुके एक स्वतंत्रता नायक की कहानी कहने निकली ये फिल्म, एक अनजान कहानी बताने से ज्यादा अपने हीरो विनायक दामोदर सावरकर को बाकियों के मुकाबले अधिक 'वीर' बताने पर फोकस करने लगती है.
अस्तित्व और बदले के लिएब्रह्मांड में शुरू होने वाला है महायुद्ध, एक्शन और रोमांच से भरपूर हैRebel Moon 2 का धांसू ट्रेलर

