समंदर में फैला तेल... ओमान के पास डूबते टैंकर में था 10 लाख बैरल क्रूड
ओमान के तट के पास एक तेल टैंकर के फंसने से समुद्र में करीब 2,000 वर्ग किलोमीटर तक तेल फैल गया है. टैंकर में करीब 10 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल था, जिससे समुद्री जीवों और सुरक्षित समुद्री क्षेत्र पर खतरा बढ़ गया है.
सुखबीर सिंह बादल को लगे 150 टांके, हरसिमरत कौर बादल बोलीं-वे देश-विरोधी ताकतों से नहीं डरे
Sukhbir Singh Badal: पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल पर महाराष्ट्र के नांदेड़ में हमला हुआ था. जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उनकी पत्नी और सांसद हरसिमरत कौर बादल ने बताया कि उन्हें 150 टांके आए हैं.
आजादी के 80 साल बाद भी नहीं जानते होंगे ये सच: 15 अगस्त 1947 को कहां फहरा था पहला तिरंगा?
15 अगस्त 1947 को जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले पर नहीं, प्रिंसेस पार्क में तिरंगा फहराया था। लाल किले पर पहली बार ध्वजारोहण 16 अगस्त को हुआ। जानिए आजादी के पहले दिन की पूरी कहानी।
पहली बार ड्रोन से हुई तिरंगे की डिलिवरी, डाक विभाग ने आर्मी वेटरन तक पहुंचाया तिरंगा
हिमाचल प्रदेश की छोटी काशी मंडी में डाक विभाग ने पहली बार ड्रोन के माध्यम से तिरंगे की डिलीवरी दी. डाक विभाग ने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए तिरंगे को आर्मी वेटरन के घर तक पहुंचाया.
जब गौहर-जैद ने शादी में नहीं बुलाए थे कई रिश्तेदार, अब बताई इसके पीछे की कहानी
बॉलीवुड में कई सेलेब्स के बीच उम्र में काफी अंतर रहा है. गौहर खान और जैद की उम्र के बीच अंतर और उनकी शादी काफी चर्चा में रही थी. बता दें कि दोनों ने अपनी शादी में कुछ रिश्तेदारों को आने से ही मना कर दिया था.
AI से लेकर 100 GW न्यूक्लियर पावर तक... पढ़ें प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की प्रमुख बातें
स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने का संकल्प दोहराया और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। उन्होंने अगले 5-7 वर्षों के विकास के लिए 'सप्त धारा' का रोडमैप प्रस्तुत किया, जिसमें AI प्रशिक्षण और परमाणु ऊर्जा लक्ष्य शामिल हैं।
EPFO Higher Pension Status: सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2022 के आदेश के बाद EPFO ने हायर पेंशन के 1,49,806 पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) जारी कर दिए हैं.जानिए घर बैठे ऐप, पोर्टल और SMS से क्लेम ट्रैक करने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका
क्या स्वतंत्रता दिवस पर 5 हजार रुपये कैश दे रही मोदी सरकार? वायरल दावे का Fact Check
लोगों से अपील है कि वे ऐसे संदिग्ध संदेशों और विज्ञापनों से सावधान रहें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और अज्ञात व्यक्ति या वेबसाइट के साथ बैंक खाता, पासवर्ड, ओटीपी, आधार या अन्य निजी जानकारी साझा न करें।
HR ने बताई तरकीब, हर 6 महीने में करें बस ये 1 काम; बोलीं- 'कॉन्फिडेंस के साथ सैलरी भी बढ़ जाएगी'
डिजिटल कंटेंट क्रिएटर योगिता बहल के अनुसार, 'इंटरव्यू देना नौकरी बदलने के बारे में नहीं है. यह बाजार के लिए तैयार रहने, आत्मविश्वास बनाए रखने और अपनी क्षमता को निखारने के बारे में है.'
2 दिन से बंद था दरवाजा, तोड़ा तो मृत मिली पत्नी, बगल में बेहोश पड़ा था पति
चंदौली के अलीनगर थाना क्षेत्र के कटरिया गांव में किराए के मकान में पति-पत्नी संदिग्ध हालत में मिले. दो दिनों से कमरे का दरवाजा बंद होने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी. दरवाजा तोड़ने पर महिला मृत मिली, जबकि उसका पति आकाश बेहोशी की हालत में मिला.
15 अगस्त 1988 को दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ यह गीत सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि भारत की एकता की पहचान बन गया. इस गाने को 9 सिंगर्स ने अपनी आवाज दी और इसमें एक या दो नहीं बल्कि बॉलीवुड के 23 सितारे नजर आए.
कुल्हाड़ीघाट कभी माओवादियों के प्रभाव वाला इलाका था. जहां कभी गोलियों की तड़तड़ाहट होती थी, वहां अब राष्ट्रगान और भारत माता की जय गूंज रहा है. यह सुरक्षा बलों के अभियान और ग्रामीणों में लौटते भरोसे का प्रतीक है.
सहारनपुर में दबंगों ने युवक को पीटा, फिर जबरन मुंडवा दिए बाल
सहारनपुर में युवक के साथ मारपीट करने और अपमानित करने का मामला सामने आया है. आरोप है कि 29 जुलाई की रात कहासुनी के बाद चार युवकों ने एक युवक के साथ गाली-गलौज और मारपीट की. इसके बाद आरोपियों ने जबरन उसके सिर के बाल मुंडवा दिए और मूंछ व चोटी काट दी. इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है.
स्वतंत्रता दिवस पर लाल किला क्यों नहीं पहुंचे राहुल-खड़गे
80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे लाल किले नहीं पहुंचे। सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेता प्रोटोकॉल और सीटिंग अरेंजमेंट से नाराज थे। बताया गया कि उनके पद के अनुरूप लाइनअप और बैठने की व्यवस्था नहीं की गई थी।
बदन पर सितारे लपेटे हुए... मिस वर्ल्ड में पहुंचीं निकिता, PHOTOS
Miss World 2026: वियतनाम में आयोजित हो रही 73वीं मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में भारतीय सुंदरी निकिता पोरवाल ने धमाकेदार शुरुआत की है. हाल में एक प्रतियोगिता की ओपनिंग सेरेमनी में निकिता सितारों से सजे खूबसूरत शिमरी गाउन में पहुंचीं जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनके लुक की खूब तारीफें हो रही हैं.
रविवार को 6 राशियों के लिए खुलेगा तरक्की का रास्ता, पढ़ें पूरा राशिफल
Kal Ka Rashifal 16 August 2026:कार्ययोजनाओं को गति मिलेगी .प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं. करियर और व्यापार में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे. विभिन्न स्रोतों से आय के अवसर बन सकते हैं.
एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के साथ काम करने का मौका, अप्रेंटिस के 205 पदों पर आवेदन शुरू
एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने अप्रेंटिस के 205 पदों भर्ती का नोटिफिकेशन निकाला है. 205 पदों में ग्रेजुएट के 80, डिप्लोमा के 65 और आईटीआई के 60 पद रखें गए हैं. योग्य उम्मीदवार समय रहते आवेदन कर दें.
Psychology Facts: क्या आप भी हर बात कर ठीक है' कहते हैं?
Psychology Facts: कुछ लोग बातचीत में लगभग हर बात का जवाब सिर्फ ‘ठीक है’ कहकर देते हैं. साइकोलॉजी के मुताबिक, इसके पीछे टकराव से बचने की आदत, अपनी भावनाएं खुलकर न बता पाना, दूसरों को खुश रखने की कोशिश या सिर्फ कम बोलने की पर्सनैलिटीहो सकती है.
Royal Enfield ने लॉन्च की धांसू कैफे रेसर, इतने रुपये है कीमत
रॉयल एनफील्ड ने अपनी 650 सीसी की फ्लैगशिप बाइक का नया अपडेट जारी कर दिया है. हम बात कर रहे हैं रॉयल एनफील्ड कॉन्टिनेंटल जीटी 650 की. कंपनी ने कुछ मॉडर्न फीचर्स के साथ बाइक में कॉस्मेटिक बदलाव भी किए गए हैं. बाइक में एलईडी टर्न लाइट, USB टाइप-सी पोर्ट और दूसरे अपडेट्स मिलते हैं. आइए जानते हैं इसकी खास बातें.
ललित मोदी लौटेंगे 16 साल बाद भारत? सलमान खान के शो बिग बॉस 20 पर तोड़ी चुप्पी
सलमान खान के शो बिग बॉस 20 में ललित मोदी के होने की खबर पर अब नया मामला सामने आया है. ललित मोदी की टीम ने एक लीगल नोटिस जारी करते हुए इस तरह की अफवाहों का विरोध किया है.
Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज व्रत का पारण कब करें? जानें मुहूर्त, विधि और जरूरी नियम
आज यानी 15 अगस्त को हरियाली तीज का पर्व मनाया जा रहा है. इस दिन मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. साथ ही सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत रखती हैं.
PM Modi का ऐलान, भारत बनेगा रक्षा विनिर्माण का वैश्विक केंद्र; सुदर्शन चक्र पर काम तेज
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी एवं ड्रोन प्रणाली जैसी उन्नत क्षमताओं में आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर देते हुए भारत को रक्षा विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने की वकालत की। लालकिले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने संबोधन में मोदी ने देश के सामने मौजूद बाहरी और आंतरिक सुरक्षा खतरों का जिक्र किया तथा घोषणा की कि नागरिक सुरक्षाकर्मियों का एक व्यापक नेटवर्क विकसित किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली ‘सुदर्शन चक्र’ पर काम तेजी से प्रगति पर है। मोदी ने पिछले साल 15 अगस्त को इस परियोजना की घोषणा की थी। ‘सुदर्शन चक्र’ का उद्देश्य महत्वपूर्ण सैन्य और नागरिक प्रतिष्ठानों की रक्षा के लिए भारत की वायु रक्षा प्रणाली को बढ़ावा देना और दुश्मन के किसी भी खतरे का निर्णायक जवाब देना है। पाकिस्तान और चीन से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों पर चिंताओं के बीच सशस्त्र बल इस परियोजना पर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की रणनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए घरेलू रक्षा उत्पादन का विस्तार महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘‘रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना है। दुनिया और भारत ने यह अनुभव कर लिया है कि इसके बिना कोई चारा नहीं है। विश्व जब अपनी-अपनी ही सोच रहा है, तब भारत विश्व के लिए बाजार बनकर नहीं रह सकता है। हमें रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना होगा।’’मोदी ने कहा, ‘‘नयी पीढ़ी की रक्षा प्रौद्योगिकी विकसित करके हमें वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में लक्ष्य लेकर चलना है। हमें ड्रोन, तथा ड्रोन रोधी प्रणाली विकसित करनी होगी और हाइपरसोनिक रक्षा प्रौद्योगिकी में नेतृत्व करना होगा।’’मोदी ने देश में रक्षा उत्पादन में हो रही वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनौती सीमा के भीतर हो या सरहद से बाहर, भारत हर परिस्थिति के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, ‘‘आज युद्ध की प्रकृति बदल रही है। अब युद्ध सीमा पर ही होता है, यह गारंटी नहीं है।’’प्रधानमंत्री ने कहा कि अब युद्ध के दौरान रिफाइनरी, बैंकिंग सेक्टर, डाटा सेंटर को निशाना बनाया जा रहा है और बुनियादी अवसंरचनाओं व कारखानों को नष्ट किया जा रहा है। मोदी ने कोई समयसीमा बताए बिना कहा कि भारत का रक्षा निर्यात 50 गुना बढ़ गया है और लगभग 100 देशों को भारतीय सैन्य हार्डवेयर तथा उपकरणों की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक पटल पर भारत की प्रतिष्ठा धीरे-धीरे बढ़ रही है। बदलते हुए समय में अस्त्र-शस्त्र की तरफ काम करना है, सैन्य बलों का सामर्थ्य बढ़ाना है।’’पिछले कुछ वर्षों में, सरकार ने घरेलू रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत पहल की हैं। नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के घरेलू रक्षा उत्पादन की मात्रा वित्त वर्ष 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई, जो 2014 में 46,000 करोड़ रुपये थी। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा था कि पिछले एक साल में 8.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सैन्य परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है क्योंकि मोदी सरकार सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के साथ-साथ नागरिक सुरक्षा कर्मियों का एक व्यापक नेटवर्क विकसित किए जाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि पिछली शताब्दी के युद्धों के अनुरूप जो ‘सिविल डिफेंस’ की व्यवस्थाएं विकसित हुई हैं, वो पुरानी हो चुकी हैं। मोदी ने कहा, ‘‘इसलिए मैं आज लालकिले से घोषणा कर रहा हूं कि, हम आने वाले दिनों में सिविल डिफेंस का एक ‘वाइब्रेंट नेटवर्क’ खड़ा करेंगे। आधुनिक व्यवस्थाओं से उनको परिचित कराएंगे। आधुनिक संकटों से नागरिकों को रक्षा करने की क्या व्यवस्था हो सकती है, एक बहुत बड़ा वॉलंटरी फोर्स सिविल डिफेंस का आधुनिक चुनौतियों को पार करने वाला हम बनाने वाले हैं।
PM Narendra Modi का पसंदीदा संबोधन 'मेरे प्यारे देशवासियो' रहा, भाषण में 40 बार कहा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को अपने 13वें स्वतंत्रता दिवस संबोधन में सबसे अधिक 40 बार ‘मेरे प्यारे देशवासियो’ कहकर लोगों को संबोधित किया जबकि 10 बार उन्होंने उनके लिए ‘साथियो’ का जिक्र किया। उन्होंने जब नशे और अन्य व्यसनों से मुक्ति के अभियान में युवाओं को शामिल होने का आह्वान किया तब एक बार उन्हें ‘मेरे प्यारे युवा’ कहकर भी संबोधित किया। अपने भाषण के दौरान मोदी ने एक-एक बार ‘देश सेवक’ और ‘भाई-बहनों’ का भी जिक्र किया। अपने कार्यकाल के दौरान स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने भाषणों के दौरान राष्ट्र को संबोधित करने के लिए मोदी का पसंदीदा संबोधन शब्द ‘देशवासियो’ ही रहा है। पिछले साल उन्होंने इस शब्द का 50 बार उल्लेख किया था जबकि 2024 में लगभग 30 बार। इसी प्रकार 2023 में लगभग 15 और 2022 में 40 से अधिक बार उन्होंने इस शब्द का इस्तेमाल किया। साल 2023 में मोदी ने देशवासियों को ‘परिवारजन’ कहकर संबोधत किया था और अपने भाषण के दौरान उन्होंने तकरीबन 50 बार इसका उल्लेख किया था। हाल के वर्षों में अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषणों में उन्होंने ‘साथियो’ शब्द का भी नियमित रूप से इस्तेमाल किया है।
Samrat Choudhary ने Bihar में नवंबर तक 5 लाख करोड़ रुपये निवेश का लक्ष्य तय किया
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को कहा कि राज्य की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने इस साल नवंबर तक पांच लाख करोड़ रुपये का निवेश लाने करने का लक्ष्य रखा है। गांधी मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘बिहार में विकास दर लगातार उच्च स्तर पर दर्ज की जा रही है। आने वाले वर्षों में राज्य समावेशी विकास के साथ आगे बढ़ेगा।’’मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का अगले पांच वर्षों में 25 चीनी मिलें स्थापित करने का भी लक्ष्य है। चौधरी ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने पहले संबोधन में कहा कि सरकार ने इस साल नवंबर तक पांच लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने उद्योगपतियों और व्यापारियों को बिहार में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए आश्वासन दिया कि राज्य में अब उद्योग स्थापित करने के लिए अनुकूल माहौल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार ने 100 से अधिक औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सरकार ने 2030 तक राज्य के लोगों को एक करोड़ सरकारी नौकरियां और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का नया लक्ष्य निर्धारित किया है।’’चौधरी ने कहा कि बिहार कुशल श्रमबल तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी औद्योगिक नीति राज्य में अधिकतम रोजगार पैदा करने पर केंद्रित है।’’मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘लोगों की शिकायतों के समयबद्ध निपटारे के लिए ‘सहयोग शिविर’ नाम से एक नयी पहल शुरू की गई है और यह बेहद प्रभावी साबित हुई है। छह लाख से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 95 प्रतिशत का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया है।’’उन्होंने बताया कि बिहार सरकार ने राशन कार्ड योजना में 30 लाख से अधिक लोगों को शामिल किया है, इसके अलावा एक करोड़ ऐसे पात्र लोगों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा जो अब तक इससे वंचित रह गए थे। चौधरी ने महिला सशक्तीकरण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि पुलिस बल में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है।
Mallikarjun Kharge का आरोप: BJP और RSS शांति भंग करना चाहते हैं, कांग्रेस प्रेम फैलाती है
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को कहा कि उनकी पार्टी ‘मोहब्बत की दुकान’ खोलने की बात करती है ताकि देश में शांति कायम रहे, जबकि भाजपा, आरएसएस और मौजूदा सरकार शांति भंग करना चाहते हैं। खरगे ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में तिरंगा फहराने के बाद अपने संबोधन में कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल स्वतंत्रता संग्राम को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन करने का भी अवसर है कि स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस भारत का सपना देखा था, वह कितना पूरा हुआ है। कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित समारोह में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे। खरगे ने कहा कि आजादी केवल सत्ता परिवर्तन नहीं थी, बल्कि प्रत्येक भारतीय का जीवन बेहतर बनाने का संकल्प था और कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों ने इसी सोच को आगे बढ़ाया। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि शास्त्री ने देश में हरित और श्वेत क्रांति की नींव मजबूत की, जबकि इंदिरा गांधी ने भारत की सैन्य और रणनीतिक शक्ति को मजबूत किया। कांग्रेस अध्यक्ष ने राम मंदिर से जुड़े मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब मंदिर जैसी आस्था की जगहों पर सवाल उठ रहे हैं और गरीब अपनी छोटी-सी कमाई से श्रद्धा के रूप में 50 रुपये भी दान करता है, तो उस धन की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। खरगे ने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्रस्ट बनाया और अपने भरोसेमंद लोगों को उसमें शामिल किया, लेकिन अब “चढ़ावा चोरी” के आरोप सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “मोदी सरकार की जेब में न पैसे हैं और न दिमाग में विचार।देश के लिए कांग्रेस को ही काम करना है और उसका समय जल्द आएगा।’’कांग्रेस अध्यक्ष ने युवाओं के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि 21वीं सदी में दुनिया के सामने मजबूती से खड़े होने का सपना देखने वाले युवाओं के सपने कुचले जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की गलत नीतियों ने युवाओं को ऐसी स्थिति में धकेल दिया है कि देशभर में युवा आंदोलन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, कांग्रेस इन युवाओं के साथ है और उनका समर्थन करती है। खरगे ने कहा कि संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण आंदोलन का अधिकार देता है और अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना राष्ट्रद्रोह नहीं है। उन्होंने कहा कि अपने हक की आवाज उठाने वाला ‘जेन-जी’ देशद्रोही नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जब विपक्ष छात्रों के सवालों के जवाब लोकसभा और राज्यसभा में मांग रहा था, तब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में नहीं आए। खरगे ने कहा कि मोदी सरकार में बुनियादी मुद्दों पर आंदोलन करने वालों के खिलाफ “पेड कैंपेन” चलाए जाते हैं। उन्होंने राहुल गांधी के ‘मोहब्बत की दुकान’ वाले आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य सभी को गले लगाना और देश में प्रेम एवं सद्भाव का माहौल बनाना है। खरगे ने आरोप लगाया कि जैसे आरएसएस के लोगों ने आजादी से पहले देश के खिलाफ काम किया, वैसे ही भाजपा आजादी के बाद देश के खिलाफ काम कर रही है। राहुल गांधी ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने संदेश में कहा, ‘‘आज़ादी हमारे स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा दिया गया सिर्फ़ एक तोहफ़ा नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदारी भी है। यह ज़िम्मेदारी है सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलने की, संविधान और तिरंगे के मूल्यों को अपने दिल में रखने की तथा हर हाल में लोकतंत्र की रक्षा करने की है। मुझे गर्व है कि हमारे देशवासी, खासकर युवा, इन मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट हैं।
Suvendu Adhikari बोले, 2047 तक समृद्ध बंगाल से ही साकार होगा विकसित भारत
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को समृद्ध पश्चिम बंगाल के जरिए साकार किया जाएगा। अधिकारी ने स्वतंत्रता दिवस पर यहां राष्ट्रध्वज फहराने के बाद कहा कि पश्चिम बंगाल राष्ट्रवाद की भूमि है और मातंगिनी हाजरा एवं खुदीराम बोस जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की कर्मभूमि रही है। उन्होंने कहा, ‘‘2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने का हमारे प्रधानमंत्री का सपना उस वर्ष ‘विकसित पश्चिम बंगाल’ के जरिए साकार होगा।’’अधिकारी ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी को पश्चिम बंगाल का शिल्पकार बताते हुए कहा कि राज्य उनके सपनों को पूरा करना चाहता है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे दो महान व्यक्तित्व बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और रवीन्द्रनाथ टैगोर ने क्रमशः राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की रचना की, जिन्होंने पूरे देश में जोश भर दिया।’’मुख्यमंत्री ने राष्ट्रध्वज फहराने से पहले सलामी गारद का निरीक्षण किया और उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पुलिस अधिकारियों को पदक प्रदान किए। ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर राष्ट्रगान के साथ यह गीत भी बजाया गया। इस अवसर पर कोलकाता पुलिस की परेड के बीच रंग-बिरंगी झांकियां ‘रेड रोड’ से गुजरीं। इनमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में निकाली गई झांकी भी शामिल थी।
साल 2000 में शाहरुख खान ने जूही चावला और अजीज मिर्जा के साथ मिलकर एक प्रोडक्शन हाउस शुरू किया, जिसका नाम ड्रीमज अनलिमिटेड था. इसके बैनर तले पहली फिल्म ‘फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’ बनाई गई.
पीएम मोदी की 'दिमागी नक्सल' वाली टिप्पणी पर भड़की कांग्रेस, बोली- हताशा दिख रही है
जयराम रमेश ने कहा कि जब जाति जनगणना की बात उठाई गई तो इन लोगों ने उन्हें अर्बन नक्सल कहा. फिर उन लोगों के ही सुझाव को इस सरकार ने मान लिया.
मुझे तुरंत चाहिए..., Pahalgam हमले पर PM Modi का पहला सवाल, NSA Doval ने किया खुलासा
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने बताया कि 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले यह पूछा था कि इस जानलेवा हमले के पीछे कौन था, जिसमें 26 आम नागरिक मारे गए थे; साथ ही उन्होंने इस पर तुरंत कार्रवाई करने को भी कहा था। डिस्कवरी की डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर के लिए दिए गए एक इंटरव्यू में, डोभाल ने पाकिस्तान-समर्थित सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ सैन्य ऑपरेशन शुरू होने से पहले की घटनाओं को याद किया। इसे भी पढ़ें: Mohan Bhagwat बोले: सही मार्गदर्शन मिले तो युवा देश की ताकत, वरना बन सकते हैं बोझ पूर्व इंटेलिजेंस ऑफ़िसर डोभाल ने बताया कि 88 घंटे चले इस मिलिट्री ऑपरेशन का मकसद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) में मौजूद दुश्मन के कैंपों को नष्ट करना था, खासकर उन कैंपों को जो पहलगाम आतंकी हमले से जुड़े थे। भारतीय सशस्त्र बलों ने पिछले साल मई में 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था। यह ऑपरेशन 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले का जवाब देने के लिए चलाया गया था। उस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी और यह दशकों में कश्मीर में आम नागरिकों पर हुआ सबसे घातक हमला था। 'ऑपरेशन सिंदूर' के एक साल से कुछ ज़्यादा समय बाद अपने पहले इंटरव्यू में, अजीत डोभाल ने सऊदी अरब से अपनी यात्रा बीच में ही छोड़कर लौटने के बाद प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई मुलाक़ात को याद किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लौटे। विदेश सचिव उन्हें लेने आए थे। फिर, एयरपोर्ट पर ही हमारी मुलाक़ात हुई। सबसे पहले, वह सभी तथ्य जानना चाहते थे। NSA डोभाल ने बताया कि प्रधानमंत्री हमले के बारे में जानकारी चाहते थे और यह जानना चाहते थे कि इसके पीछे कौन है। उन्होंने कहा कि और फिर मुझसे उनका पहला सवाल था –– 'यह किसने किया है? कौन ज़िम्मेदार है? हमें बिल्कुल साफ़ पता होना चाहिए कि हमलावर कौन हैं। मुझे यह तुरंत चाहिए। इसे भी पढ़ें: Karnataka में RSS बनाम Congress की जंग हुई तेज, DK Shivakumar Govt के नए Bill से मच गया सियासी तूफान दुनिया को एक साफ़ संदेश देते हुए, NSA ने फिर कहा कि भारत की उदारता को देश की कमज़ोरी नहीं समझना चाहिए। दुनिया के लिए संदेश बहुत साफ़ है – भारत की उदारता या सहनशीलता को उसकी कमज़ोरी नहीं समझना चाहिए। भारत जोखिम उठा सकता है और कड़ा प्रहार भी कर सकता है, चाहे नतीजे कुछ भी हों।
बंगाल की खाड़ी में मॉनसूनी इंजन एक्टिव, पूरे देश में बरसेंगे बादल
IMD ने 21 अगस्त तक देश के कई हिस्सों में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है. ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 17 अगस्त को बेहद भारी बारिश हो सकती है, जबकि दिल्ली-NCR में भी अगले कुछ दिनों तक बादल और हल्की बारिश रहेगी.
'जहरीले सांप्रदायिक एजेंडे के तहत...' : BJP ने सोनिया पर 'वंदे मातरम्' को लेकर आपत्ति का आरोप लगाया
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने कहा कि देशभक्ति की भावना न रखने वाले सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने स्वतंत्रता दिवस पर हमारे गौरवशाली 'वंदे मातरम' का खुलेआम अपमान करके हमारे लोगों और पूरे देश की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है.
भारतीय इतिहास के पन्नों में आज का दिन और छत्तीसगढ़ के भूगोल में कुछ विशेष इलाके हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो गए हैं। देश जब स्वतंत्रता दिवस की 80वीं वर्षगांठ का जश्न मना रहा है, ठीक उसी समय देश के सबसे संवेदनशील, दुर्गम और खूंखार समझे जाने वाले नक्सल प्रभावित इलाकों से एक ऐसी अद्भुत और ऐतिहासिक तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। दशकों तक जहां गोलियों की गूंज, बारूदी सुरंगों का खौफ और लाल आतंक का साया मंडराता था, आज उसी माड़ के जंगलों और सुदूर अंचलों में पहली बार मुख्य धारा का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा पूरी शान के साथ आसमान में लहरा रहा है। कभी इस जगह को नक्सलियों का अजेय गढ़ माना जाता था जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता था, लेकिन हमारे वीर सुरक्षाबलों के अदम्य साहस और पक्के इरादों ने इस इलाके को लाल आतंक से पूरी तरह आजाद करा लिया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि किस प्रकार असंभव लगने वाले इस मिशन को अंजाम दिया गया और कैसे इस दुर्गम इलाके में आजादी की पहली सुबह का सूरज उगा है।दशकों तक लाल आतंक का गढ़ रहा वह इलाका जहां पुलिस का जाना था नामुमकिनछत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के अंतर्गत आने वाले कई ऐसे सुदूर और अंदरूनी इलाके थे जिन्हें देश के सुरक्षा तंत्र और प्रशासन के लिए एक 'नो-गो जोन' (No-Go Zone) माना जाता था। इन इलाकों में पिछले कई दशकों से नक्सलियों का एकछत्र राज चलता था। नक्सलियों ने अपनी समानांतर सरकार जैसी व्यवस्था बना रखी थी, जहां वे स्थानीय आदिवासियों को डर के साये में रखते थे और देश के संविधान तथा कानून को पूरी तरह से नकार देते थे। इन जंगलों में कदम रखते ही सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमले किए जाते थे, जिसके कारण सरकार के लिए वहां तक विकास पहुंचाना या स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व मनाना एक असंभव चुनौती बना हुआ था। तिरंगा फहराने का मतलब सीधे तौर पर मौत को दावत देना समझा जाता था, लेकिन देश के वीर जवानों ने अपनी जान की बाजी लगाकर इस खौफ के साम्राज्य को हमेशा के लिए नेस्तनाबूद करने का संकल्प लिया।सुरक्षाबलों का अदम्य शौर्य और माड़ बचाओ अभियान की ऐतिहासिक सफलताइस नामुमकिन को मुमकिन बनाने के पीछे छत्तीसगढ़ पुलिस, जिला रिजर्व गार्ड (DRG), सीआरपीएफ (CRPF) और कोबरा बटालियन के जवानों की कई महीनों की कड़ी मेहनत, रणनीति और अदम्य साहस की कहानी जुड़ी हुई है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने आपसी तालमेल के जरिए एक सुनियोजित रणनीति के तहत नक्सलियों के इस कोर एरिया में लगातार नए फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) यानी सुरक्षा कैंप स्थापित करने शुरू किए। जैसे-जैसे सुरक्षाबल नक्सलियों के गढ़ के भीतर घुसते गए, वैसे-वैसे लाल आतंक का दायरा सिमटता चला गया। खूंखार नक्सलियों के साथ हुई कई मुठभेड़ों में सुरक्षाबलों ने उनके बड़े कमांडरों को ढेर कर दिया या उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। इन सुरक्षा कैंपों के खुलने से न सिर्फ नक्सलियों की सप्लाई लाइन कटी, बल्कि स्थानीय आदिवासियों का शासन और प्रशासन पर भरोसा भी तेजी से बहाल हुआ।पहली बार जब आदिवासियों और जवानों ने मिलकर फहराया तिरंगाआज स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर उस ऐतिहासिक और दुर्गम इलाके में जो दृश्य देखने को मिला, उसने इतिहास की धारा ही बदल दी। जिस जमीन पर कभी देश विरोधी नारे लिखे जाते थे और तिरंगे को अपमानित किया जाता था, आज उसी धरती पर सुरक्षाबलों के जवानों ने स्थानीय आदिवासी भाई-बहनों, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों के साथ मिलकर गर्व से राष्ट्रीय ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के बाद जब राष्ट्रगान की गूंज उन घने जंगलों और पहाड़ों के बीच गूंजी, तो वहां मौजूद कई आदिवासियों की आंखें खुशी और गर्व के आंसुओं से नम हो गईं। यह पल केवल एक झंडा फहराने भर का नहीं था, बल्कि यह इस बात का प्रमाण था कि लोकतंत्र की ताकत और देश के जवानों का शौर्य हर तरह के आतंकवाद और हिंसा पर भारी पड़ता है। बच्चों के हाथों में तिरंगा देखकर ऐसा लग रहा था मानो उन्हें एक नई जिंदगी और एक सुरक्षित भविष्य मिल गया हो।लाल आतंक के खात्मे के बाद अब विकास और शांति की नई बयारनक्सलियों के इस अजेय गढ़ के ढह जाने और वहां तिरंगा फहराए जाने के साथ ही अब इस पूरे इलाके में विकास के नए द्वार खुल चुके हैं। छत्तीसगढ़ सरकार और स्थानीय प्रशासन ने युद्ध स्तर पर इन क्षेत्रों में पक्की सड़कों, पुल-पुलियों, बिजली, मोबाइल टावर, बैंक शाखाओं और आधुनिक स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण शुरू कर दिया है। जिन आदिवासी युवाओं को कभी जबरन या बहला-फुसलाकर नक्सली संगठनों में शामिल कराया जाता था, वे अब शिक्षा और रोजगार के माध्यम से मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। सरकार की आत्मसमर्पण नीति का असर यह हुआ है कि कई भटके हुए युवा हथियार छोड़कर सामान्य जीवन जीने के लिए आगे आ रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सामने आई यह खबर इस बात का प्रतीक है कि भारत की संप्रभुता और एकता को चुनौती देने वाली हर एक ताकत को आखिरकार घुटने टेकने ही पड़ते हैं।
किश्तवाड़ में बड़ा हादसा, चिनाब नदी में गिरी महिंद्रा स्कॉर्पियो; 5 लोगों की मौत
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के दच्छन इलाके में शनिवार सुबह बड़ा सड़क हादसा हुआ। याइनवान से साउंडर जा रही महिंद्रा स्कॉर्पियो सड़क से फिसलकर चिनाब नदी में जा गिरी। हादसे में अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि पुलिस और स्थानीय लोग ...
54 हजार फॉलोअर्स वाला बेटा सो रहा था... पिता ने हथौड़े से मार डाला
राजकोट में एक घर के अंदर खौफनाक मंजर सामने आया. यहां पिता ने अपने 33 साल के बेटे की हत्या कर दी. बेटे के सोते वक्त उसके सिर और आंख के पास हथौड़े से वार किए गए. इसके बाद आरोपी पिता कुछ देर तक पास के बगीचे में बैठा रहा और फिर खुद पुलिस स्टेशन पहुंचकर हत्या की बात कबूल कर ली.
छत्तीसगढ़ से एक बेहद दहला देने वाली और सनसनीखेज आपराधिक वारदात सामने आई है, जिसने एक बार फिर से शराब के नशे में बढ़ते खूनी संघर्ष और आपसी रंजिश के मामलों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य के एक व्यस्त इलाके में आपसी पुरानी लेनदेन के मामूली विवाद को लेकर दो साथियों के बीच शुरू हुई मामूली कहासुनी इतनी बढ़ गई कि गुस्से में आकर एक दोस्त ने अपने ही साथी के गले पर चाकू से ताबड़तोड़ कई वार कर दिए। इस खूनी हमले में घायल युवक की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है, जिसे आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत दोनों आरोपियों को धर दबोचा है। आइए जानते हैं छत्तीसगढ़ से सामने आई इस खूनी वारदात की पूरी और विस्तृत कहानी।शराब के नशे में धुत दोस्तों के बीच पुराना विवाद बना खूनी संघर्षपुलिस से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार यह पूरी घटना उस समय घटी जब कुछ दोस्त एक साथ बैठकर शराब का सेवन कर रहे थे। शुरुआती दौर में सब कुछ सामान्य लग रहा था और सभी आपस में बातचीत कर रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे शराब का नशा बढ़ता गया, पुरानी बातों और पैसों के लेनदेन को लेकर चर्चा शुरू हो गई। मृतक या घायल साथी के बीच पिछले कुछ समय से पैसों के लेन-देन को लेकर आपसी मनमुटाव चल रहा था। नशे की हालत में वह पुराना जख्म हरा हो गया और दोनों के बीच बहस तीखी नोकझोक में बदल गई। वहां मौजूद अन्य लोगों ने जब तक दोनों को शांत कराने की कोशिश की, तब तक स्थिति इतनी बिगड़ चुकी थी कि गुस्से से आगबबूला हुए आरोपी ने अपने पास मौजूद धारदार हथियार निकाल लिया और सीधे साथी के गले पर हमला बोल दिया।गले पर चाकू से ताबड़तोड़ वार और मची चीख-पुकारशराब के नशे में धुत आरोपी ने बिना कुछ सोचे-समझे अपने ही दोस्त के गले पर चाकू से एक के बाद एक कई खतरनाक वार कर दिए। गले जैसे संवेदनशील हिस्से पर अचानक हुए इस घातक हमले से वहां अफरा-तफरी मच गई और खून से लथपथ होकर युवक वहीं जमीन पर गिर पड़ा। अचानक हुई इस खूनी वारदात को देखकर आसपास मौजूद लोग और अन्य साथी बुरी तरह डर गए और उन्होंने चिल्लाना शुरू कर दिया। खून से सनी हालत में जमीन पर तड़प रहे युवक को देखकर आरोपी वहां से भागने की फिराक में थे, लेकिन मौके पर मौजूद कुछ साहसी लोगों ने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दे दी। इस सनसनीखेज हमले के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल फैल गया और लोग इस बात से हैरान थे कि कैसे मामूली सी पैसों की बात पर कोई अपने ही जिगरी दोस्त की जान लेने पर उतारू हो सकता है।पुलिस की त्वरित कार्रवाई, दोनों आरोपी गिरफ्तारघटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय थाने की पुलिस तुरंत भारी दल-बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने सबसे पहले बिना एक भी पल गंवाए गंभीर रूप से घायल युवक को उठाकर स्थानीय अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज जारी है और उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगालने और चश्मदीदों के बयान दर्ज करने के बाद एक विशेष टीम का गठन किया। पुलिस की मुस्तैदी और त्वरित दबिश के चलते कुछ ही घंटों के भीतर मुख्य आरोपी और उसके एक अन्य सहयोगी को धर दबोचा गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल किया गया खून से सना चाकू भी बरामद कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है और उनके खिलाफ हत्या के प्रयास समेत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।बढ़ते आपराधिक मामलों और नशे की लत पर उठते गंभीर सवालछत्तीसगढ़ की इस घटना ने एक बार फिर समाज के सामने एक बहुत बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर युवा पीढ़ी में सहनशक्ति क्यों खत्म होती जा रही है? शराब के नशे में होने वाले इस तरह के खूनी विवाद न केवल दो परिवारों को तबाह करते हैं बल्कि समाज में कानून व्यवस्था और सुरक्षा के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनते हैं। जानकारों और पुलिस प्रशासन का मानना है कि नशाखोरी और छोटी-छोटी बातों पर तुरंत आवेश में आ जाने की प्रवृत्ति समाज के लिए बेहद घातक है। इस मामले में पुलिस की त्वरित और शानदार कार्रवाई से भले ही आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया हो, लेकिन ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सामाजिक स्तर पर भी जागरूकता की बहुत आवश्यकता है ताकि कोई भी इंसान गुस्से और नशे में आकर किसी की जिंदगी न छीन सके।
80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बच्चों, एनसीसी कैडेटों और ‘माय भारत’ वॉलेंटियर्स के बीच पहुंचे. इस दौरान एक बच्ची की टोपी जमीन पर गिर गई, जिसे प्रधानमंत्री ने उठाकर उसके सिर पर पहनाया. उनके इस व्यवहार की काफी चर्चा हो रही है.
सीएम विष्णुदेव साय ने फहराया तिरंगा, कहा- 'नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ में अब बह रही शांति और विकास की बयार
देशभर में आज स्वतंत्रता दिवस की 80वीं वर्षगांठ का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास, देशभक्ति और सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक और गौरवशाली अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित मुख्य राजकीय समारोह के दौरान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया और भव्य परेड की सलामी ली। स्वतंत्रता दिवस के इस पावन पर्व पर राज्य की जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने एक बहुत ही बड़ा और ऐतिहासिक बयान दिया। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि कभी बस्तर और सुदूर अंचलों में आतंक का पर्याय बन चुका नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है और छत्तीसगढ़ बहुत जल्द पूरी तरह से नक्सलमुक्त होने की ओर बढ़ रहा है। नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब राज्य के इन संवेदनशील इलाकों में खून-खराबे की जगह शांति, समृद्धि और चहुंमुखी विकास की ठंडी बयार बह रही है। आइए जानते हैं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के इस प्रेरणादायक संबोधन और छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा की गई महत्वपूर्ण घोषणाओं से जुड़ी सभी बड़ी बातें।बस्तर और माड़ के इलाकों में विकास की नई सुबहअपने ओजस्वी संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विशेष रूप से बस्तर और दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों का जिक्र किया जो दशकों तक वामपंथी उग्रवाद और हिंसा की आग में झुलसते रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, केंद्रीय सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और स्थानीय प्रशासन के तालमेल के कारण आज नक्सलियों का दायरा सिमटता जा रहा है। जिन इलाकों में कभी गोलियों की आवाज गूंजती थी और स्कूल-अस्पताल खंडहर में तब्दील कर दिए गए थे, आज वहां सुरक्षा कैंपों की स्थापना के बाद विकास की किरणें पहुंच रही हैं। सरकार ने इन दूरदराज के गांवों में पक्की सड़कें, बिजली, शुद्ध पेयजल, मोबाइल कनेक्टिविटी, स्कूल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचानी शुरू कर दी हैं। बस्तर के आदिवासी भाई-बहन अब डर के साये से बाहर निकलकर मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं और अपनी संस्कृति के साथ खुलकर जीवन जी रहे हैं।सुरक्षाबलों के शौर्य और समर्पण को मिला सर्वोच्च सम्मानछत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे निर्णायक अभियानों की सफलता का पूरा श्रेय मुख्यमंत्री ने राज्य पुलिस, डीआरजी (DRG), बस्तर फाइटर्स, सीआरपीएफ (CRPF) और कोबरा बटालियन के वीर जवानों को दिया। उन्होंने कहा कि हमारे सुरक्षाबलों के जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना अदम्य साहस और बहादुरी का परिचय दिया है, जिसके परिणामस्वरूप उग्रवादियों को करारी शिकस्त मिली है। सरकार ने शहीद जवानों के परिवारों के कल्याण और उनके बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष योजनाएं चलाई हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जो नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति बेहद उदार और आकर्षक है, जिससे प्रभावित होकर कई भटके हुए युवा वापस लौट रहे हैं।युवाओं के रोजगार, शिक्षा और किसानों के कल्याण पर बड़ा फोकसकेवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कई बड़ी घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए औद्योगिक नीतियों में बदलाव किए गए हैं और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। किसानों के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए धान खरीदी, कृषि उन्नति योजनाओं और सिंचाई के साधनों को और अधिक पारदर्शी व मजबूत बनाया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधारने के लिए एकलव्य विद्यालयों और बस्तर संभाग में विशेष शैक्षणिक संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है ताकि गरीब से गरीब आदिवासी परिवार का बच्चा भी डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना पूरा कर सके।'विकसित छत्तीसगढ़' के निर्माण का संकल्प और स्वतंत्रता दिवस का जश्नस्वतंत्रता दिवस के इस राष्ट्रीय पर्व के मौके पर छत्तीसगढ़ के सभी जिलों, तहसीलों और गांवों में तिरंगा फहराने के कार्यक्रम धूमधाम से आयोजित किए गए। राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रमों और देशभक्ति गीतों ने उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन के अंत में राज्य के सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपनी व्यक्तिगत और राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर 'विकसित छत्तीसगढ़' के निर्माण में अपना पूर्ण सहयोग दें। उन्होंने कहा कि हमारे अमर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस स्वतंत्र, समृद्ध और शांतिपूर्ण भारत की कल्पना की थी, उसे धरातल पर उतारना ही हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है।
79 साल का सफर: 1962 में हुआ कमजोरी का अहसास, फिर ऐसे मजबूत होती चली गई भारतीय सेना
सुन हमला देश के ऊपर, बंदूक उठा चल देता हूं। है मौत का गम किसको, मैं खून धरा को देता हूं! किसी भी देश की सैन्य ताकत से उसके आवाम में सुरक्षा की भावना पैदा होती है और देश की रक्षा की खातिर अपने जान की बाजी लगाना त्याग का सबसे बड़ा उदाहरण भी माना जाता है। प्राचीन धर्म ग्रंथों तक में लिखा गया है कि 'जननी, जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी' अर्थात माता और मातृभूमि का स्थान स्वर्ग से भी बढ़कर है। आज की दुनिया में किसी देश की ताकत का अंदाजा उसकी सैन्य ताकत से लगाया जाता है। इस लिहाज जिस देश की सेना जितनी बड़ी, अत्याधुनिक और संख्याबल में बड़ी होती है, उसे दुनिया में उतना ही ताकतवर माना जाता। देश महज कागज पर बना नक्शा मात्र नहीं होता है। ये बात तब और भी ज्यादा समझ मे आती है जब पूरे देश मे आजादी का जश्न हो। हर मन में उमंग हो कि हम चाहे छोटे मुल्क हैं या बड़े। लेकिन हम आजाद हैं। इस बार आजादी का 80वां जश्न है। इस जश्न में हम आपको भारतीय सेना के 80 सालों के सफर के बारे में बताते हैं। जब भारत को चीन से युद्ध में कमजोरी का अहसास भी हुआ और फिर आगे चलकर हमारे वीर जवानों ने पाकिस्तान को घर मे घुसकर मारने जैसी घटना को अंजाम दिया। इसे भी पढ़ें: ईरान ने पलटा पूरा गेम, BRICS बैंक में एंट्री से उड़ाए अमेरिका के होश! 1962 में चीन का छलावा अपने इतिहास में हिंदुस्तान ने कई लड़ाइयां लड़ी और लगभग हर बार देश को जीत का गौरव मिला। लेकिन एक युद्ध ऐसा था जो दरअसल युद्ध नहीं छल की दास्तां थी। जब दोस्ती की पीठ पर दगाबाजी का खंजर चलाया जाता है तो उसे 1962 का भारत चीन युद्ध कहते हैं। तब दोस्ती का भरोसा हिंदुस्तान का था, विश्वासघात का खंजर चीन का। उस युद्ध में हार से ज्यादा अपमान का लहू निकला। युद्ध के शुरू होने तक भारत को पूरा भरोसा था कि युद्ध शुरू नहीं होगा, इस वजह से भारत की ओर से तैयारी नहीं की गई। भारतीय सेना इस हमले के लिए तैयार नहीं थी नतीजा ये हुआ कि चीन के 80 हजार जवानों का मुकाबला करने के लिए भारत की ओर से मैदान में थे 10-20 हजार सैनिक। ये युद्ध पूरा एक महीना चला जब तक कि 21 नवंबर 1962 को चीन ने युद्ध विराम की घोषणा नहीं कर दी। 1971 में हुआ बढ़ती ताकत का अहसास 1971 की वो जंग को भला कौन भूल सकता है खासकर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान। जब हिन्दुस्तान ने पूरी दुनिया का नक्शा ही बदल दिया था। हिन्दुस्तान ने महज 13 दिनों के भीतर अपने झूठे दंभ में जी रहे पाकिस्तानी सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था और 93 हजार सैनिक लाचार युद्ध बंदी बन गए। 1971 का युद्ध किस्सा है दुनिया के नक्शे बदलने का, जंग का और बहादुरी का भी। साल 1971 की जंग में पाकिस्तान को भारत के हाथों हार मिली थी। भारत से बुरी तरह पिटने के बाद पाकिस्तान ने अपनी हार मान ली थी। उस वक्त पाकिस्तान के 80 हजार से ज्यादा सैनिकों ने भारत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। जिसके बाद पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने भारतीय सेना प्रमुख के सामने सरेंडर के कागजात पर हस्ताक्षर किये थे। इसे भी पढ़ें: लाल किले से बोल रहे थे मोदी, इजरायल ने बड़ा खेल कर दिया! 18 मई 1974 वर्ष 1974 में 18 मई का दिन एक ऐसी अहम घटना के साथ इतिहास में दर्ज है, जिसने भारत को दुनिया के परमाणु संपन्न देशों की कतार में खड़ा कर दिया। इस परीक्षण को स्माइलिंग बुद्धा का नाम दिया गया था। पोखरण 11 मई 1998 को पोखरण में परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया था। में परमाणु परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया था। ऐसा ताकतवर विस्फोट कि पोखरण की रेतली जमीन कांप उठी, रेत के बवंडर ने सबकुछ ओझल कर दिया और 11 मई 1998 को बुद्ध एक बार फिर से मुस्कुरा उठे। मिलिट्री पर जीडीपी का कितना पर्सेंट खर्च किया साल % 1956 2 1963 4 1965 3.9 1975 3.5 2000 2.9 2007 2.5 2021 2.7 सर्जिकल स्ट्राइक 28- 29 सितंबर 2016 की रात को भारतीय सेना के जांबाजों ने पाकिस्तान में दाखिल हो कर वहां आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की। बड़ी संख्या में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया और आतंकियों को मौत की नींद सुलाया। इससे पहले आतंकियों ने उरी सेक्टर में भारतीय सेना के कैंप पर हमला किया था जिसमें 19 सैनिक शहीद हो गए थे। 26 फरवरी 2019 की रात भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट ने पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हो वहां आतंकियों के एक बड़े ठिकाने पर एयर स्ट्राइक की। गलवान में चीन के सैनिकों से झड़प 14 जून 2020 की रात को गलवान में भारत-चीन के सैनिकों के बीच खूनी झड़प हुई जिसमें भारत के 20 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए। चीन को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा। चीन ने यह नहीं बताया कि इस खूनी झड़प में उसने कितने सैनिकों को खोया। पर कुछ वक्त पहले चीन ने पांच लोगों को सम्मानित किया जिन्होंने गलवान में बहादुरी दिखाते हुए जान गंवाई। पर भारत का कहना है कि चीन को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने इस झड़प में 38 सैनिकों को खोया। हर जंग में दिखाया दम 1962 के युद्ध में 722 चीनी सैनिक मारे गए, 1700 घायल। 1965 के युद्ध में 5988 पाक सैनिक मारे गए। 1971 के युद्ध में 93000 पाकिस्तान सैनिकों ने सरेंडर किया। 1999 के युद्ध में 453 पाकिस्तान सैनिक मारे गए।
देशभर में आज स्वतंत्रता दिवस की 80वीं वर्षगांठ का पर्व अत्यंत धूमधाम, हर्षोल्लास और देशभक्ति के माहौल के साथ मनाया जा रहा है। आज का यह ऐतिहासिक दिन हमें उन महान स्वतंत्रता सेनानियों और वीर अमर शहीदों के बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर हमें इस खुली हवा में सांस लेने का अवसर दिया है। जब देश आजादी का यह महापर्व मना रहा है, तो ऐसे में माता-पिता और शिक्षकों का यह कर्तव्य बनता है कि वे नई पीढ़ी यानी बच्चों को अपने गौरवशाली इतिहास और देश की आजादी के संघर्ष से रूबरू कराएं। इसके लिए देश की राजधानी दिल्ली से बेहतर और कोई दूसरी जगह हो ही नहीं सकती, क्योंकि दिल्ली के चप्पे-चप्पे पर आजादी की अनगिनत कहानियां और ऐतिहासिक स्मारक बिखरे हुए हैं। यदि आप भी इस स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर बच्चों को देशप्रेम की भावना से ओतप्रोत कराना चाहते हैं, तो दिल्ली की इन 5 ऐतिहासिक जगहों की सैर का प्लान जरूर बनाएं, जो बच्चों के मन में देशभक्ति का अलख जगा देंगी। आइए जानते हैं इन खास और ऐतिहासिक स्थलों के बारे में विस्तार से।लाल किला (Red Fort): जहां से गूंजी थी आजादी की सबसे पहली गूंजदिल्ली में स्वतंत्रता दिवस के जश्न की बात हो और लाल किले का नाम सबसे पहले न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। पुरानी दिल्ली में स्थित ऐतिहासिक लाल किले का भारतीय इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यहीं से हर साल 15 अगस्त के दिन देश के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराते हैं और लाल किले की प्राचीर से पूरे देश को संबोधित करते हैं। जब आप बच्चों को लाल किले की सैर पर ले जाएंगे, तो उन्हें मुग़ल वास्तुकला के साथ-साथ ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ी गई लड़ाइयों और आजाद हिंद फौज के मुकदमों का इतिहास नजदीक से जानने का मौका मिलेगा। किले के अंदर बने संग्रहालयों में रखे गए पुराने हथियार, शाही वस्त्र और ऐतिहासिक दस्तावेज बच्चों के मन में इतिहास के प्रति गहरी जिज्ञासा पैदा करते हैं। यहां आकर बच्चों को यह अहसास होता है कि हमारे देश की आजादी कितने संघर्षों और कुर्बानियों के बाद हासिल हुई है।राजघाट (Rajghat): राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि और सादगी का प्रतीकयमुना नदी के किनारे शांत और हरियाली से भरे वातावरण में स्थित 'राजघाट' राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि स्थल है। यह वही पवित्र जगह है जहां देश और दुनिया के बड़े-बड़े राजनेता और गणमान्य लोग आकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। राजघाट के चारों ओर खूबसूरत बगीचे और ऊंचे-ऊंचे पेड़ इसे बेहद शांत और सुकूनदायक बनाते हैं। बच्चों को राजघाट ले जाना इसलिए भी जरूरी है ताकि वे महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के उन सिद्धांतों को समझ सकें, जिन्होंने अंग्रेजों की नींव हिलाकर रख दी थी। समाधि स्थल पर जलती हुई अमर ज्योति बच्चों को देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी और ईमानदारी से जीने की प्रेरणा देती है। यहां की शांति और दिव्यता हर आने वाले आगंतुक के मन को मोह लेती है और उन्हें देश के लिए कुछ करने का जज्बा सिखाती है।इंडिया गेट और अमर जवान ज्योति (India Gate & Amar Jawan Jyoti): देश के वीर शहीदों को समर्पित अमर स्मारकराजपथ पर स्थित 'इंडिया गेट' दिल्ली का एक ऐसा प्रतिष्ठित और भव्य प्रतीक है जिसे देखते ही हर भारतीय के दिल में देशप्रेम की भावना ह हिल्कोरे मारने लगती है। प्रथम विश्व युद्ध और अन्य सैन्य संघर्षों में अपने प्राण न्योछावर करने वाले भारतीय सैनिकों की याद में बनाए गए इस 42 मीटर ऊंचे मेहराब की दीवारों पर हजारों शहीदों के नाम खुदे हुए हैं। इंडिया गेट के ठीक नीचे प्रज्वलित 'अमर जवान ज्योति' देश के उन अमर सपूतों की शहादत की याद दिलाती है जिन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने सीने पर गोलियां खाईं। शाम के वक्त रंग-बिरंगी रोशनी से नहाया हुआ इंडिया गेट और उसके आसपास फैली हरियाली व बच्चों के खेलने का माहौल इस जगह को और भी खास बना देता है। जब बच्चे यहां अमर जवान ज्योति पर फूल चढ़ाते हैं, तो उनके भीतर सेना और देश के प्रति अगाध सम्मान पैदा होता है।प्रधानमंत्री संग्रहालय (Pradhanmantri Sanghralaya): आधुनिक भारत की राजनीतिक यात्रा का अनूठा सफरतीन मूर्ति भवन परिसर में स्थित 'प्रधानमंत्री संग्रहालय' देश के आधुनिक इतिहास और लोकतांत्रिक यात्रा को जानने का सबसे बेहतरीन और हाई-टेक केंद्र है। इस भव्य संग्रहालय में भारत के अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल, उनके द्वारा लिए गए ऐतिहासिक फैसलों और देश के विकास में उनके योगदान को बहुत ही आधुनिक और डिजिटल तकनीकों के माध्यम से दर्शाया गया है। होलोग्राम, वर्चुअल रियलिटी (VR), टच स्क्रीन डिस्प्ले और ऑडियो-विजुअल शोज के जरिए बच्चे बहुत ही कम समय में आसानी से समझ सकते हैं कि स्वतंत्रता के बाद से भारत ने शून्य से लेकर अंतरिक्ष और तकनीकी महाशक्ति बनने तक का सफर कैसे तय किया है। यह संग्रहालय केवल बड़ों के लिए ही नहीं, बल्कि स्कूली बच्चों के ज्ञानवर्धन और प्रेरणा के लिए एक आदर्श शैक्षिक स्थल है।राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial): भारतीय सेना के अदम्य साहस की जीवंत गाथाइंडिया गेट के पास ही स्थित 'राष्ट्रीय युद्ध स्मारक' (National War Memorial) भारत के वीर सैनिकों के पराक्रम, बलिदान और शौर्य को समर्पित एक अत्यंत आधुनिक और भव्य स्मारक है। लगभग 40 एकड़ में फैले इस स्मारक चक्र में उन सभी वीर सैनिकों के नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखे गए हैं जिन्होंने आजादी के बाद विभिन्न युद्धों और अभियानों में देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। यहां की 'परम योद्धा स्थल' गैलरी में देश के उन परमवीर चक्र विजेताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं जिनकी बहादुरी की कहानियां आज भी हर भारतीय को गौरवान्वित करती हैं। जब बच्चे इन वीर गाथाओं को अपनी आंखों से देखते हैं, तो उनके अंदर देश की सेना के प्रति सम्मान और राष्ट्र सेवा की भावना स्वतः ही जागृत हो जाती है। स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर बच्चों को इन ऐतिहासिक और प्रेरणादायक जगहों की सैर कराना उनके भविष्य और संस्कारों के लिए एक अमूल्य उपहार साबित होगा।
कश्मीर से कन्या कुमारी तक, देखें देश से आजादी के जश्न की 80 तस्वीरें
आजादी के 80वें पर्व पर देशभर में जश्न का माहौल है. लाल किले से पीएम मोदी के तिरंगा फहराने, 21 तोपों की सलामी, ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गान और देशभक्ति से सराबोर कार्यक्रमों के साथ कश्मीर से कन्याकुमारी तक तिरंगा शान से लहराता नजर आया. तस्वीरों में राजघाट पर पीएम मोदी की श्रद्धांजलि से लेकर लाल किले पर बच्चों, NCC कैडेट्स और विशेष मेहमानों की मौजूदगी तक आजादी के जश्न की भव्य झलक दिखी. अपने संबोधन में पीएम मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य, युवाओं को AI से जोड़ने, फ्री ऑनलाइन कोचिंग नेटवर्क और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने पर जोर दिया.
बिल गेट्स की बेटी पर लगा 'कूकी स्टफिंग' फ्रॉड का आरोप, हो सकती है 20 साल तक की जेल, जानिए पूरा मामला
Bill Gates Daughter Scam: बिल गेट्स की बेटी फोबे गेट्स के स्टार्टअप 'फिया' पर फर्जी तरीके से कमाई करने का आरोप है.आखिर क्या होता है 'कूकी स्टफिंग' फ्रॉड, जिसमें फंसी बिल गेट्स की बेटी फोबे गेट्स?
'भले ही आप क्रेडिट ले लें, लेकिन...'; महिला आरक्षण को लेकर पीएम मोदी की विपक्ष से अपील
स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर जोर देते हुए सभी दलों से राज्य विधानसभाओं और लोकसभा में 33% महिला आरक्षण सुनिश्चित करने की अपील की।
देश की राजधानी दिल्ली का नाम सुनते ही हमारे जेहन में इंडिया गेट, लाल किला, कुतुब मीनार और चांदनी चौक की व्यस्त सड़कें, भारी ट्रैफिक और मीलों लंबी भीड़भाड़ की तस्वीरें घूमने लगती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस तेज रफ्तार और कंक्रीट के जंगल बन चुके शहर के बीचों-बीच कुछ ऐसे बेहद खूबसूरत, शांत और छिपे हुए ठिकाने (Hidden Gems) भी मौजूद हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं? यदि आप भी शहर के शोरगुल, प्रदूषण और भागदौड़ भरी जिंदगी से तंग आ चुके हैं और कुछ पल सुकून, हरियाली तथा शांति के साथ बिताना चाहते हैं, तो इस वीकेंड आपको उन मशहूर और भीड़भाड़ वाली जगहों को छोड़कर इन 5 अद्भुत ऑफबीट जगहों की सैर जरूर करनी चाहिए। इतिहास, प्रकृति और वास्तुकला के अनूठे संगम वाले ये सीक्रेट स्पॉट्स आपको एक अलग ही दिल्ली की सैर कराएंगे, जहां की आबोहवा आपका मन मोह लेगी। आइए जानते हैं दिल्ली के इन पांचों छिपे हुए और खूबसूरत ठिकानों के बारे में विस्तार से।संजय वन (Sanjay Van): वसंती हवा और हरियाली से भरपूर घना जंगलदिल्ली के वसंत कुंज और महरौली इलाके के पास फैला 'संजय वन' शहर के बीचों-बीच एक विशाल और रहस्यमयी जंगल की तरह है, जिसके बारे में आम पर्यटकों को बहुत कम जानकारी होती है। लगभग 783 एकड़ में फैला यह घना जंगल दिल्ली के सबसे शांत और खूबसूरत प्रकृति प्रेमियों के ठिकानों में से एक है। यहां आपको तरह-तरह के पेड़-पौधे, पक्षियों की चहचहाहट और शहर के प्रदूषण से दूर बिल्कुल शुद्ध हवा मिलेगी। सुबह के वक्त यहां टहलने (Morning Walk), साइक्लिंग करने और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। इस जंगल के अंदर कई प्राचीन ऐतिहासिक खंडहर, मजारें और छोटे तालाब भी बने हुए हैं, जो इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। अगर आप शहर के बीच रहकर भी प्रकृति की गोद में कुछ वक्त बिताना चाहते हैं, तो संजय वन आपकी पहली पसंद होना चाहिए।सुंदर नर्सरी (Sunder Nursery): मुगकालीन विरासत और फूलों का अद्भुत खजानानिजामुद्दीन दरगाह और हुमायूं के मकबरे के पास स्थित 'सुंदर नर्सरी' भले ही अब धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रही है, लेकिन इसकी खूबसूरती और शांति आज भी कई लोगों के लिए एक छिपे हुए खजाने जैसी है। यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट के दायरे में आने वाली यह नर्सरी लगभग 90 एकड़ में फैली हुई है, जिसे बेहद शानदार तरीके से लैंडस्केप किया गया है। यहां आपको देश-विदेश के सैकड़ों प्रजाति के पेड़, रंग-बिरंगे फूल, सुंदर फव्वारे और लेक देखने को मिलेंगी। इसके अलावा यहां कई ऐतिहासिक मुगलकालीन इमारतें और स्मारक भी मौजूद हैं, जो इतिहास प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। सप्ताहांत (Weekend) में परिवार या दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने, धूप सेकने और शांत माहौल में किताबें पढ़ने के लिए यह दिल्ली की सबसे बेहतरीन जगहों में गिनी जाती है।संजय झील और पार्क (Sanjay Lake and Park): पूर्वी दिल्ली का शांत वाटरफ्रंटपूर्वी दिल्ली के पांडव नगर और मयूर विहार इलाके में स्थित 'संजय झील' दिल्ली के उन चुनिंदा स्थानों में से एक है जहां आपको पानी का सुकून और हरियाली एक साथ देखने को मिलती है। लगभग 69 एकड़ में फैली इस झील के चारों ओर एक बेहद खूबसूरत और हरा-भरा पार्क विकसित किया गया है, जहां सुबह और शाम के वक्त स्थानीय लोग वॉक करने आते हैं। इस झील में बोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे आप शांत पानी के बीच बैठकर शहर की हलचल से दूर कुछ पल सुकून से बिता सकते हैं। सर्दियों के मौसम में यहां कई प्रवासी पक्षी भी आते हैं, जो बर्ड वॉचिंग के शौकीनों के लिए एक बड़ा आकर्षण होते हैं। यदि आप पूर्वी दिल्ली के आसपास रहते हैं और बिना ज्यादा दूर जाए शांति की तलाश में हैं, तो यह जगह आपके लिए एकदम परफेक्ट है।महरौली आर्कियोजिकल पार्क (Mehrauli Archaeological Park): इतिहास और खामोशी का अनूठा संगमकुतुब मीनार परिसर के ठीक बगल में स्थित होने के बावजूद 'महरौली आर्कियोजिकल पार्क' पर्यटकों की भीड़भाड़ से कोसों दूर एक शांत और ऐतिहासिक कोना है। लगभग 200 एकड़ में फैला यह पार्क दिल्ली का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां पिछले 1,000 वर्षों के इतिहास के अवशेष एक साथ देखने को मिलते हैं। यहां बलवान की कब्र, राजों की बाओली, मदरसा और कई खूबसूरत मस्जिदें व महल खंडहर के रूप में मौजूद हैं, जो दिल्ली के प्राचीन इतिहास की कहानी बयां करते हैं। इस पार्क के रास्ते पेड़ों से घिरे हुए और बहुत शांत हैं, जहां आप बिना किसी शोर-शराबे के इतिहास के पन्नों के बीच सुकून से टहल सकते हैं। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह जगह किसी ओपन-एयर स्टूडियो से कम नहीं है।अशोक का लघु शिलालेख और बहपुर का जंगल (Ashokan Rock Edict & Bahapur): इतिहास के पन्नों में छिपा रहस्यदक्षिण दिल्ली के कलकाजी और ईस्ट ऑफ कैलाश के पास स्थित 'अशोक का लघु शिलालेख' दिल्ली के सबसे कम चर्चित लेकिन सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में से एक है। एक छोटी सी पहाड़ी की चट्टान पर खुदे मौर्य सम्राट अशोक के इस प्राचीन शिलालेख को देखने के बाद आपको प्राचीन भारतीय इतिहास से सीधे जुड़ने का अहसास होगा। इसके आसपास का इलाका और बहपुर का छोटा सा पहाड़ी और हरा-भरा क्षेत्र शहर के बीच एक शांत कोने की तरह है। यहां आकर आपको आधुनिक दिल्ली की भागदौड़ से बिल्कुल अलग एक शांत और ऐतिहासिक माहौल मिलेगा, जो आपके मन को गहरी शांति और सुकून प्रदान करेगा।
आगरा में पिता पर मासूम बेटी को यमुना में फेंकने का आरोप
आगरा के सिकंदरा थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति पर करीब एक साल की बेटी को यमुना नदी में फेंकने का गंभीर आरोप लगा है। इसके बाद उसने कथित तौर पर पत्नी को भी पुल से नीचे फेंकने की कोशिश की, लेकिन राहगीरों ने महिला को बचा लिया और आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।
पर्यटकों की पहली पसंद बना चंपारण का यह खूबसूरत लोकेशन: रोजाना पहुंच रहे 1,000 से अधिक सैलानी
बिहार के पर्यटन मानचित्र पर इन दिनों एक ऐसा जादुई और मनमोहक नाम तेजी से उभरकर सामने आ रहा है, जिसने पर्यटकों को अपनी ओर खींचने में सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर चंपारण की भूमि की, जहां का एक नया और विशिष्ट लोकेशन इन दिनों देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की पहली पसंद बन गया है। कल तक जिस जगह के बारे में बहुत कम लोग जानते थे, आज वहां हर रोज एक हजार से अधिक सैलानी सुकून के पल बिताने और प्रकृति के अद्भुत नजारों का दीदार करने के लिए पहुंच रहे हैं। हरियाली, शांत वातावरण, कल-कल करती नदियां और समृद्ध इतिहास का यह संगम पर्यटकों के दिलों पर राज कर रहा है। यदि आपने अभी तक इस शानदार टूरिस्ट प्लेस की सैर नहीं की है, तो यकीन मानिए आप किसी बहुत ही खूबसूरत चीज को मिस कर रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि चंपारण के इस लोकप्रिय लोकेशन पर सैलानियों का तांता क्यों लगा हुआ है और यहां की क्या खास विशेषताएं हैं।कुदरत की गोद में बसा चंपारण का यह नया टूरिस्ट पैराडाइजचंपारण का नाम लेते ही हमारे जेहन में महात्मा गांधी के ऐतिहासिक चंपारण सत्याग्रह, नील की खेती और यहां की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत की तस्वीरें घूमने लगती हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से चंपारण ने अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ-साथ प्राकृतिक पर्यटन के क्षेत्र में भी एक लंबी छलांग लगाई है। पश्चिमी और पूर्वी चंपारण के कई ऐसे अनछुए इलाके हैं जो घने जंगलों, वन्यजीवों, वाटरफॉल और नदियों की वजह से पर्यटकों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं हैं। स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग द्वारा इस लोकेशन पर पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए लगातार सौंदर्यीकरण और विकास कार्य किए गए हैं, जिसके बाद से यहां आने वाले सैलानियों की संख्या में अचानक भारी इजाफा देखने को मिला है। परिवार के साथ छुट्टियां बिताने या वीकेंड एन्जॉय करने के लिए यह जगह अब लोगों की जुबान पर चढ़ चुकी है।रोजाना एक हजार से ज्यादा सैलानियों का पहुंचना और स्थानीय अर्थव्यवस्था में सुधारइस लोकेशन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सामान्य दिनों में भी यहां रोजाना कम से कम एक हजार पर्यटक पहुंच रहे हैं। छुट्टियों और त्योहारों के सीजन में तो यह आंकड़ा कई गुना बढ़ जाता है, जिससे यहां का पूरा माहौल एक बड़े मेले जैसा प्रतीत होता है। इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने से न केवल पर्यटन विभाग को राजस्व मिल रहा है, बल्कि स्थानीय युवाओं और दुकानदारों के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुल गए हैं। होमस्टे, लोकल हैंडीक्राफ्ट, पारंपरिक व्यंजनों की दुकानें और गाइड का काम करने वाले स्थानीय लोगों को इससे जबरदस्त फायदा हो रहा है। पर्यटकों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए आसपास के बाजारों में भी रौनक लौट आई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया संबल मिला है।फोटोग्राफी, बर्ड वॉचिंग और नेचर लवर्स के लिए है यह परफेक्ट डेस्टिनेशनयदि आपको फोटोग्राफी का शौक है या आप प्रकृति की गोद में कुछ वक्त शांति से बिताना चाहते हैं, तो चंपारण का यह लोकेशन आपके लिए किसी हसीन सपने से कम नहीं है। सुबह के वक्त उगते सूरज की किरणें जब इस इलाके के पेड़ों और पानी पर पड़ती हैं, तो नजारा देखने लायक होता है। इसके अलावा सर्दियों और मानसून के मौसम में यहां देश-विदेश से कई दुर्लभ प्रजाति के प्रवासी पक्षी भी आते हैं, जिन्हें देखने के लिए बर्ड वॉचिंग के शौकीनों की लंबी कतारें लगती हैं। साफ हवा, प्रदूषण मुक्त वातावरण और शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से कोसों दूर यह जगह मानसिक शांति और रूहानी सुकून देने का काम करती है। पर्यटक यहां बोटिंग, ट्रेकिंग और जंगलों के बीच सफारी का भी खुलकर आनंद उठा रहे हैं।कैसे पहुंचें इस खूबसूरत लोकेशन तक और क्या है सबसे अच्छा समयइस लोकप्रिय टूरिस्ट स्पॉट तक पहुंचना बेहद आसान है। सड़क मार्ग और रेल नेटवर्क के जरिए यह स्थान बिहार के प्रमुख शहरों और पड़ोसी राज्यों से बहुत अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यदि आप ट्रेन से आना चाहते हैं, तो नजदीकी रेलवे स्टेशन पर उतरकर आसानी से कैब या बस के जरिए इस लोकेशन तक पहुंच सकते हैं। वैसे तो साल भर यहां सैलानियों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन अक्टूबर से लेकर मार्च तक का समय इस जगह की सैर करने के लिए सबसे बेहतरीन और सुहाना माना जाता है। इस दौरान मौसम बेहद सुहावना होता है और आप बिना किसी परेशानी के यहां की हर एक खूबसूरती का लुत्फ उठा सकते हैं। अगर आपने अभी तक चंपारण के इस अद्भुत और नए पर्यटन स्थल को अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल नहीं किया है, तो इस बार अपना बैग उठाइए और निकल पड़िए एक नए सफर पर।
AUS vs BAN: डार्विन टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया की हालत खस्ता
बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहला टेस्ट मैच रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है. बांग्लादेश ने मजबूत ऑस्ट्रेलियाई टीम पर अपना शिकंजा कस लिया है. अब चौथे दिन देखना दिलचस्प होगा कि मैच का पलड़ा किस तरफ झुकता है.
क्रिकेट के मैदान पर जब भी दुनिया की सबसे मजबूत और खूंखार मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम उतरती है, तो विरोधी टीमों के पसीने छूट जाते हैं। लेकिन इस बार क्रिकेट जगत से एक ऐसी हैरान करने वाली और अविश्वासनीय खबर सामने आ रही है जिसे सुनकर आप भी अपने कानों पर यकीन नहीं कर पाएंगे। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में अपनी आक्रामक और अनुशासित खेल शैली के लिए पहचानी जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम ने एक ही ओवर में ऐसी दो महाभूल (Blunders) कर दी हैं, जिसने पूरी दुनिया के क्रिकेट पंडितों को हिलाकर रख दिया है। मैदान पर की गई इन साधारण और बचकानी गलतियों का फायदा उठाकर अब बांग्लादेश की टीम मुकाबले में पूरी तरह हावी हो गई है। हालात यह बन चुके हैं कि अगर बांग्लादेश इस ऐतिहासिक टेस्ट मैच को जीतकर कोई बड़ा उलटफेर कर दे, तो किसी को भी चौंकने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आइए विस्तार से जानते हैं कि ऑस्ट्रेलिया ने वह कौन सी दो महाभूल की हैं और कैसे यह मैच अब पूरी तरह रोमांचक मोड़ पर आ गया है।आखिर क्या थीं वे दो महाभूल जिन्होंने पलटी मैच की पूरी बाजीयह पूरा वाकया उस समय घटा जब ऑस्ट्रेलियाई टीम मैदान पर गेंदबाजी कर रही थी और बांग्लादेश के बल्लेबाज क्रीज पर पैर जमाने की जद्दोजहद कर रहे थे। अमूमन अपनी सटीक फील्डिंग और अनुशासित रणनीति के लिए मशहूर कंगारू टीम ने पारी के एक ही ओवर के भीतर दो ऐसी बड़ी गलतियां कर बैठ जो टेस्ट क्रिकेट के स्तर पर बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं। पहली गलती मैदान पर तैनात फील्डर द्वारा एक आसान से कैच को टपकाने के रूप में सामने आई, जो बल्लेबाज के बल्ले का भारी बाहरी किनारा लेकर सीधे स्लिप या विकेट के आसपास आया था। इस जीवनदान से उभरे बल्लेबाज ने अभी संभलने की कोशिश ही की थी कि उस ओवर की आखिरी गेंद पर गेंदबाज ने नियमों को ताक पर रखते हुए एक बेहद खराब और गैर-जिम्मेदाराना नो-बॉल (No-Ball) फेंक दी, जिससे विरोधी टीम को मुफ्त का रन तो मिला ही, साथ ही बल्लेबाज का आत्मविश्वास भी आसमान पर पहुंच गया। एक ही ओवर में कैच छोड़ना और ओवरस्टेपिंग करके नो-बॉल डालना, इन दोनों महाभूलों ने ऑस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीम की लय को पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया।बांग्लादेशी बल्लेबाजों ने उठाया भरपूर फायदा और मजबूत की स्थितिऑस्ट्रेलियाई टीम द्वारा की गई इन दोहरी गलतियों का बांग्लादेश के बल्लेबाजों ने पूरी सूझबूझ और आक्रामकता के साथ फायदा उठाया। जिस बल्लेबाज का कैच छूटा था और जिसे नो-बॉल पर नया जीवनदान मिला था, उसने मैदान पर पैर जमाते हुए कंगारू गेंदबाजों की धज्जियां उड़ानी शुरू कर दीं। क्रीज पर मौजूद बांग्लादेशी बल्लेबाजों ने इसके बाद कोई भी जोखिम भरा शॉट खेलने से परहेज किया और सूझबूझ भरी बल्लेबाजी करते हुए स्कोरबोर्ड को तेजी से आगे बढ़ाया। अचानक मिले इन मुफ्त अवसरों ने बांग्लादेशी खेमे में एक नया जोश भर दिया, और ड्रेसिंग रूम से लेकर मैदान के बीचों-बीच खड़े खिलाड़ियों का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंच गया। टेस्ट मैच के इस अहम मोड़ पर इस तरह की साधारण गलतियां करना ऑस्ट्रेलिया को बहुत भारी पड़ता हुआ नजर आ रहा है, और अब मैच का पूरा momentum (गति) बदल चुका है।क्या बांग्लादेश रच देगा इतिहास और लिख देगा एक नई इबारतक्रिकेट के जानकारों का मानना है कि यदि बांग्लादेशी टीम इसी अनुशासन और बिना किसी दबाव के अपना खेल जारी रखती है, तो वे इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को करारी शिकस्त देकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। टेस्ट क्रिकेट में अक्सर ऐसा देखा गया है कि जब बड़ी टीमें अति-आत्मविश्वास या छोटी-छोटी मानसिक चूकों का शिकार होती हैं, तो छोटी या उभरती हुई टीमें उसका पूरा फायदा उठाकर मैच का नक्शा ही बदल देती हैं। आज का यह मुकाबला उसी पुरानी कहावत को सच साबित करता नजर आ रहा है, जहां मैदान पर रुतबे से नहीं बल्कि अनुशासन और एकाग्रता से मैच जीता जाता है। ऑस्ट्रेलियाई खेमे में इस समय गहरी खामोशी छाई हुई है, और कप्तान से लेकर कोच तक इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि आखिर एक ही ओवर में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई।कंगारू टीम पर बढ़ता दबाव और आने वाले सत्र का रोमांचइस नाटकीय घटनाक्रम के बाद अब पूरे क्रिकेट जगत की निगाहें इस टेस्ट मैच के आगामी सत्रों पर टिकी हुई हैं। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों पर अब अपनी खोई हुई साख को बचाने और जल्द से जल्द विकेट चटकाकर मैच में वापसी करने का भारी दबाव आ गया है। दूसरी ओर, बांग्लादेशी टीम के पास यह अपने क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक जीत दर्ज करने का एक सुनहरा मौका है। अगर कंगारू टीम ने अपनी रणनीतिक भूलों से सीख नहीं ली और मैदान पर अपनी फील्डिंग व गेंदबाजी में सुधार नहीं किया, तो यह तय है कि इस मैच का परिणाम दुनिया भर के खेल प्रेमियों को चौंका देगा। क्या ऑस्ट्रेलिया इस दबाव से उबरकर वापसी कर पाएगा या फिर बांग्लादेश एक नया इतिहास रचेगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि यह मुकाबला अब क्रिकेट इतिहास के सबसे रोमांचक अध्यायों में शामिल हो चुका है।
पीली साड़ी और गजरा लगाए पहुंचीं तृषा, विजय के समारोह में छाईं
विजय के पहले स्वतंत्रता दिवस समारोह में तृषा की मौजूदगी और उनका सादगी भरा लुक चर्चा में है. आखिर ऐसा क्या हुआ कि समारोह का यह पल सोशल मीडिया पर वायरल हो गया?
भारत और श्रीलंका के बीच गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले जा रहे रोमांचक पहले टेस्ट मुकाबले के पहले ही दिन मैदान पर ऐसा हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला जिसने खेल प्रेमियों और क्रिकेट विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। मैच के शुरुआती सत्र के दौरान भारतीय पारी के समय श्रीलंकाई गेंदबाज के साथ युवा ओपनर यशस्वी जायसवाल की बीच पिच पर खतरनाक टक्कर हो गई, जिसके बाद पैदा हुई गफलत में यशस्वी जायसवाल को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रनआउट होकर पवेलियन लौटना पड़ा। इस रनआउट के बाद सोशल मीडिया से लेकर कमेंट्री बॉक्स तक जमकर बवाल मच गया और अंपायरिंग के फैसले तथा खेल भावना को लेकर लंबी बहस छिड़ गई। इस अप्रिय और नाटकीय घटना के बावजूद भारतीय टीम ने खेल पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी। आइए जानते हैं गॉल टेस्ट के पहले दिन घटी इस सनसनीखेज घटना और मैच के पूरे घटनाक्रम की विस्तृत कहानी।मैच के शुरुआती सत्र में शानदार शुरुआत और भारतीय बल्लेबाजी का दबंग अंदाजगॉल टेस्ट के इस ऐतिहासिक मुकाबले में भारतीय कप्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया, जो शुरुआती पलों में काफी हद तक सही साबित होता नजर आया। श्रीलंकाई परिस्थितियों और स्पिन की अनुकूल पिचों पर भारतीय ओपनर्स ने बेहद सूझबूझ और आक्रामक अंदाज में पारी की शुरुआत की। यशस्वी जायसवाल हमेशा की तरह अपनी स्वाभाविक आक्रामक शैली में रन बटोर रहे थे और उन्होंने कुछ बेहतरीन चौके लगाकर श्रीलंकाई गेंदबाजों को दबाव में ला दिया था। केएल राहुल ने भी उनका बखूबी साथ दिया और दोनों बल्लेबाजों ने शुरुआती ओवरों में विकेट बचाते हुए स्कोर बोर्ड को तेजी से आगे बढ़ाया। ऐसा लग रहा था कि भारत का यह ओपनिंग कॉम्बिनेशन पहले दिन एक बड़ा और मजबूत स्कोर खड़ा करने में पूरी तरह कामयाब हो जाएगा, लेकिन तभी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और मैदान पर एक ऐसा नाटकीय मोड़ आया जिसने पूरे मैच का रुख ही बदल दिया।यशस्वी जायसवाल और श्रीलंकाई गेंदबाज के बीच हुई खतरनाक टक्करयह विवादित और नाटकीय घटना भारतीय पारी के दौरान उस वक्त घटी जब यशस्वी जायसवाल स्ट्राइक पर थे और उन्होंने एक शॉट खेलने के बाद तेजी से रन चुराने का प्रयास किया। रन दौड़ते समय पिच के बीचों-बीच अचानक श्रीलंकाई गेंदबाज अपनी फॉलो-थ्रू के दौरान रास्ते में आ गए, जिससे यशस्वी जायसवाल की गेंदबाज के साथ जोरदार टक्कर हो गई। इस टक्कर के कारण यशस्वी अपना संतुलन खो बैठे और कुछ पलों के लिए भ्रमित हो गए कि उन्हें किस तरफ दौड़ना चाहिए। इस बीच श्रीलंकाई फील्डर्स ने तेजी से गेंद को उठाकर विकेटकीपर की तरफ फेंका और गिल्लियां बिखेर दीं। यशस्वी जायसवाल जब तक अपनी क्रीज तक पहुंचते, तब तक उन्हें रनआउट करार दिया जा चुका था। यशस्वी ने 37 गेंदों पर 32 रनों की बेहद शानदार और तेजतर्रार पारी खेली थी, जिसमें 5 शानदार चौके शामिल थे, लेकिन इस अनचाहे हादसे ने उनकी पारी का अंत बहुत जल्दी कर दिया।रनआउट के फैसले पर मचा भारी बवाल और क्रिकेट जगत में तीखी प्रतिक्रियाएंयशस्वी जायसवाल के इस तरह अचानक रनआउट होने के बाद मैदान पर और सोशल मीडिया पर बवाल मच गया। क्रिकेट फैंस और जानकारों का एक धड़ा यह मान रहा था कि चूंकि टक्कर श्रीलंकाई गेंदबाज की गलती के कारण हुई थी, इसलिए यह रनआउट खेल भावना के विपरीत था और अंपायर को इसे 'डेड बॉल' घोषित करना चाहिए था। वहीं दूसरी तरफ मैदानी अंपायरों का यह स्पष्ट तर्क था कि नियमों के मुताबिक गेंद लाइव थी और फील्डिंग टीम ने नियमानुसार रनआउट की प्रक्रिया पूरी की थी, इसलिए फैसला जायसवाल के खिलाफ गया। इस रनआउट के बाद भारतीय खेमे में भी कुछ पलों के लिए मायूसी छा गई थी, लेकिन कप्तान और कोच ने खिलाड़ियों को समझाकर तुरंत खेल पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। इस घटना ने एक बार फिर क्रिकेट के मैदान पर रनिंग बिटवीन द विकेट्स और खिलाड़ियों की सुरक्षा तथा बाधा से जुड़े नियमों पर बड़ी बहस छेड़ दी है।झटके के बाद केएल राहुल और देवदत्त पदीक्कल ने संभाली भारतीय पारीइस अप्रत्याशित झटके और गर्मागर्म माहौल के बाद भी भारतीय टीम ने अपना मानसिक संतुलन नहीं खोया और पारी को बेहद जिम्मेदारी से आगे बढ़ाया। यशस्वी के आउट होने के बाद क्रीज पर आए युवा बल्लेबाज देवदत्त पदीक्कल ने उप-कप्तान केएल राहुल के साथ मिलकर मोर्चा संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने श्रीलंकाई स्पिनरों प्रभाथ जयसूर्या और अन्य गेंदबाजों के खिलाफ बेहतरीन तकनीक का प्रदर्शन करते हुए संभलकर खेलना शुरू किया। केएल राहुल अपनी सधी हुई बल्लेबाजी का परिचय देते हुए टिककर खेल रहे थे, वहीं देवदत्त पदीक्कल ने भी उनका पूरा साथ दिया। लंच ब्रेक तक भारत ने 1 विकेट के नुकसान पर 101 रन बना लिए थे और दोनों बल्लेबाजों के बीच एक मजबूत अर्धशतकीय साझेदारी पनप चुकी थी। पहले दिन के खेल में इस ड्रामे के बाद भारतीय टीम अब मैच पर पूरी तरह अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी हुई है।
भारत की जगह आयरलैंड… PM मोदी के पॉकेट स्क्वायर पर कांग्रेस को क्या आपत्ति
पीएम मोदी के जैकेट के पॉकेट स्क्वायर को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस ने तंज कसते यह भी कहा है कि पीएम मोदी ने उर्दू में तिरंगा पहना है। इससे पहले पीएम मोदी ने अपने संबोधन में विपक्ष पर निशाना साधा था।
गॉल टेस्ट के पहले ही दिन मौसम ने डाला खलल, लंच के बाद मैदान पर लौटने में हुई देरी, जानिए पूरा अपडेट
भारत और श्रीलंका के बीच गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले जा रहे पहले टेस्ट मुकाबले के पहले ही दिन रोमांच और ड्रामे का भरपूर डोज देखने को मिल रहा है। ऐतिहासिक 600वें टेस्ट मैच में कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। मैच के शुरुआती सत्र में भारतीय बल्लेबाजों ने शानदार शुरुआत की और लंच तक 1 विकेट के नुकसान पर 101 रन बना लिए थे। लेकिन जैसे ही दोनों टीमें लंच ब्रेक के लिए पवेलियन लौटीं, अचानक मौसम ने करवट ली और मूसलाधार बारिश ने खेल पर ग्रहण लगा दिया, जिससे मैदानकर्मियों को तुरंत कवर्स लाने पड़े। मौसम के इस अचानक बदलाव के कारण खेल प्रेमियों की धड़कनें एक बार फिर बढ़ गई हैं। आइए जानते हैं गॉल टेस्ट के इस रोमांचक मुकाबले में अब तक क्या-क्या हुआ है और मौसम के चलते क्या स्थिति बनी हुई है।यशस्वी जायसवाल का अनूठा रन-आउट और केएल राहुल के साथ गफलतमुकाबले की शुरुआत में भारतीय ओपनर्स ने संभलकर खेलते हुए अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन पारी के दौरान एक अजीबोगरीब वाकया भी देखने को मिला। युवा ओपनर यशस्वी जायसवाल अच्छी लय में नजर आ रहे थे और उन्होंने 37 गेंदों पर 32 रनों की शानदार पारी खेली, जिसमें 5 चौके शामिल थे। इसी दौरान गेंदबाज से हुई हल्की टक्कर के बाद रन लेने को लेकर गफलत पैदा हो गई। केएल राहुल और यशस्वी जायसवाल दोनों एक ही छोर पर पहुंच गए, जिसके चलते यशस्वी जायसवाल को रन-आउट होकर मैदान से बाहर जाना पड़ा। इस प्रकार एक अच्छी साझेदारी का अंत बेहद दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से हुआ, जिसने भारतीय खेमे को कुछ पलों के लिए चौंका दिया। हालांकि इस झटके के बाद भी भारत की रन गति पर कोई असर नहीं पड़ा और टीम ने संभलकर स्कोर को आगे बढ़ाया।देवदत्त पदीक्कल और केएल राहुल की शानदार साझेदारीयशस्वी जायसवाल के आउट होने के बाद क्रीज पर आए देवदत्त पदीक्कल ने उप-कप्तान केएल राहुल के साथ मिलकर पारी को बेहद जिम्मेदारी से संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने श्रीलंकाई गेंदबाजों और खासकर स्पिनरों के खिलाफ बेहतरीन तकनीक का प्रदर्शन किया। केएल राहुल 32 रन बनाकर जबकि देवदत्त पदीक्कल 35 रन बनाकर नाबाद क्रीज पर डटे हुए थे। दोनों के बीच दूसरे विकेट के लिए अर्धशतकीय (54 रन) साझेदारी हो चुकी थी, जिससे भारतीय टीम मजबूत स्थिति में नजर आ रही थी। श्रीलंका के अनुभवी स्पिनर प्रभाथ जयसूर्या और अन्य गेंदबाजों पर इन दोनों बल्लेबाजों ने कुछ बेहतरीन शॉट भी लगाए, जिससे स्कोर तेजी से आगे बढ़ रहा था।लंच ब्रेक के बाद बारिश का खलल और मैदान पर सन्नाटाभारतीय पारी जब बेहद मजबूत स्थिति में आगे बढ़ रही थी, तभी लंच ब्रेक के दौरान अचानक बारिश शुरू हो गई। गॉल के मैदान पर बारिश इतनी तेज थी कि अंपायरों को खेल के दूसरे सत्र की शुरुआत तय समय पर टालनी पड़ी। आउटफील्ड गीली होने के कारण ग्राउंड स्टाफ को तुरंत मैदान को ढकना पड़ा। इस बारिश के कारण खेल प्रेमियों और दोनों टीमों के प्रशंसकों की सांसे अटक गई थीं, क्योंकि इस टेस्ट सीरीज का दोनों टीमों के लिए विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के लिहाज से बहुत बड़ा महत्व है। हालांकि मौसम साफ होने के बाद अंपायरों ने मैदान का मुआयना किया और जल्द ही खेल दोबारा शुरू होने की पुष्टि की गई, जिससे राहत की सांस ली गई।
Kanpur Metro Extension: कानपुर मेट्रो विस्तार के तहत दक्षिण के इलाके बारादेवी, नौबस्ता, किदवई नगर आदि को जोड़ा जा रहा है. भविष्य में कानपुर मेट्रो का विस्तार पनकी, चकेरी और ट्रांस गंगा सिटी जैसे इलाकों तक होगा.
देशभर में स्वतंत्रता दिवस की 80वीं वर्षगांठ का पर्व बेहद हर्षोल्लास और देशभक्ति के माहौल में मनाया जा रहा है। इस बीच बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान से एक बहुत ही ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने पहली बार गांधी मैदान में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया और भव्य परेड की सलामी ली। लंबे समय से चली आ रही परंपरा के बाद मुख्यमंत्री के तौर पर सम्राट चौधरी का यह पहला ध्वजारोहण समारोह राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है। तिरंगा फहराने के बाद मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बिहार के भविष्य, युवाओं के रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास का एक विस्तृत रोडमैप जनता के सामने रखा। आइए जानते हैं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस पहले स्वतंत्रता दिवस संबोधन और उनके विकास के विजन से जुड़ी सभी बड़ी बातें।ऐतिहासिक गांधी मैदान में गरिमामयी समारोह और कड़ी सुरक्षा व्यवस्थास्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर पटना के गांधी मैदान को तिरंगे के रंगों और फूलों से बेहद भव्य तरीके से सजाया गया था। सुबह से ही स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में और राष्ट्रीय पर्व के जश्न में शामिल होने के लिए भारी संख्या में आम नागरिक, प्रशासनिक अधिकारी और गणमान्य लोग मैदान में उपस्थित थे। निर्धारित समयानुसार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ध्वजारोहण किया, जिसके बाद वायुमंडल 'भारत माता की जय' के नारों से गूंज उठा। इस राजकीय समारोह को पूरी तरह सुरक्षित और शांतिपूर्ण संपन्न कराने के लिए प्रशासन द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मैदान के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ-साथ ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही थी ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को लेकर बड़े ऐलान और रोडमैपअपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की जनता को आश्वस्त किया कि उनकी सरकार बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहे सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए ब्लॉक स्तर पर नए डिग्री कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की स्थापना पर काम तेजी से चल रहा है। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए हर जिले में मॉडल अस्पतालों का विकास किया जा रहा है ताकि मरीजों को इलाज के लिए बार-बार बाहर न भटकना पड़े। रोजगार के मोर्चे पर बड़ा ऐलान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के हर परिवार के कम से कम एक सदस्य को सरकारी या निजी क्षेत्र में आजीविका का साधन मिल सके।निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देने का महत्वाकांक्षी लक्ष्यबिहार को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के दिशा में मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विकास के रोडमैप को भी प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि सरकार उन उद्योगों को सबसे पहले प्राथमिकता दे रही है जो बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा कर सकें और किसानों की उपज के लिए बेहतर बाजार तैयार कर सकें। राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार ने आगामी नवंबर तक पांच लाख करोड़ रुपये के निवेश का नया लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही कृषि आधारित उद्योगों और चीनी मिलों के पुनरुद्धार को लेकर भी सरकार ठोस कदम उठा रही है ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल सके और पलायन की समस्या पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।कानून का राज और जनहितकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयनअपने भाषण के अंत में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सुशासन और कानून व्यवस्था को अपनी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत सख्त कार्रवाई जारी रहेगी ताकि आम नागरिक और विशेषकर महिलाएं सुरक्षित महसूस कर सकें। जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए शुरू किए गए 'सहयोग शिविरों' और प्रशासनिक जवाबदेही की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार जनता के प्रति पूरी तरह उत्तरदायी है। स्वतंत्रता दिवस के इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा पेश किया गया यह विकास का रोडमैप आने वाले दिनों में बिहार की राजनीतिक और आर्थिक दिशा तय करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
कांग्रेस दफ्तर में गाया पूरा वंदे मातरम, लेकिन सोनिया ने जताया ऐतराज? 3 कांग्रेसियों के अलग बयान
Independence Day: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में तिरंगा फहराने के बाद वंदे मातरम गाया गया. लेकिन इसको लेकर एक विवाद भी चर्चा में है. जिस पर कांग्रेस के तीन नेताओं ने अलग-अलग बयान दिए हैं.
घर में हनुमान जी की कौन सी तस्वीर लगाना है शुभ? जानें सही दिशा
Hanuman Ji and Vastu: घर में हनुमान जी की कौन सी तस्वीर और मूर्ति रखना होता है शुभ? जानिए सही दिशा, पंचमुखी हनुमान का महत्व और वास्तु के जरूरी नियम.
संभल में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में स्कूल का छज्जा गिरा, एक बच्चे की मौत- VIDEO
उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया. असमोली थाना क्षेत्र के मदाला गांव स्थित हसनैन पब्लिक निजी स्कूल के मुख्य द्वार का छज्जा अचानक गिर गया, जिससे वहां मौजूद तीन बच्चे दब गए.
करौली कलेक्टर के ध्वजारोहण के दौरान तिरंगा नीचे गिरा, मचा हड़कंप
Karauli District Collector Flag Hoisting: करौली के मुंशी त्रिलोक चंद माथुर स्टेडियम में जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा के ध्वजारोहण के दौरान तिरंगा रस्सी सहित नीचे आकर पैरों के पास गिर गया, जिससे स्वतंत्रता दिवस समारोह में मौजूद लोग कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गए.
चंडीगढ़ में सिख युवकों की रिहाई पर बवाल, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले
कौमी इंसाफ मोर्चा ने बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर राज्यपाल भवन की ओर मार्च किया. इस दौरान सिमरनजीत सिंह मान घायल व्यक्ति का भेष बनाकर वहां पहुंचे, लेकिन चंडीगढ़ पुलिस ने उन्हें पहचान लिया और हिरासत में ले लिया.
सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की फैन फॉलोइंग केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में है. वहीं हाल ही में सुपरस्टार ने खुलासा किया कि उनकी 51 साल पुरानी फिल्म को इटली के 2000 लोगों ने राज के 11 बजे से सुबह के 3 बजे तक देखा था.
अरुणाचल प्रदेश में अचानक आई बाढ़ में बह गए 5 सैनिक, भूस्खलन में दबकर 4 लोगों की मौत
सुबनसिरी जिले के केओजारिंग-ब्याचिंग सड़क कटाई स्थल पर एक बड़ा भूस्खलन हुआ, जिसमें कई मजदूर और लोग मलबे के नीचे दब गए। इस हादसे में 4 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है।
Moto G Max भारत में लॉन्च, मिलेगी 7000mAh की बैटरी, ये है कीमत
Moto G Max भारत में लॉन्च हो गया है, जिसमें 7000mAh की बैटरी, 50 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और 32 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा दिया गया है. यह एक मिड रेंज स्मार्टफोन है. इसमें कंपनी ने Snapdragon 6s Gen 4 4nm चिपसेट का यूज किया है. आइये इसकी कीमत और अन्य डिटेल्स के बारे में जानते हैं.
'मुझे यह तुरंत चाहिए', पहलगाम हमले के बाद PM मोदी ने क्या मांगा था? NSA अजीत डोभाल का बड़ा खुलासा
पहलगाम हमले को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बड़ा खुलासा किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले यह जानना चाहा था कि हमले के पीछे कौन हैं? जानें डोभाल ने क्या क्या बताया है?
अरुणाचल प्रदेश में भूस्खलन और बाढ़ से चार लोगों की मौत, सेना के 5 जवान लापता
अरुणाचल प्रदेश में भूस्खलन और बाढ़ से चार लोगों की जान चली गई है। सेना के पांच जवान भी लापता बताए जा रहे हैं।
'PoK के लोग आज हमारे साथ आते, अगर...' CM उमर अब्दुल्ला ने क्यों कही ऐसी बात?
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नियंत्रण रेखा (LoC) के पार की बदहाली को देखकर जम्मू-कश्मीर के लोगों को यह अहसास होता है कि 1947 में भारत के साथ रहने का हमारे पूर्वजों का फैसला बिल्कुल सही था।
'दिमागी नक्सल' टिप्पणी पर कांग्रेस का PM Modi पर पलटवार, Jairam Ramesh बोले- हताशा की निशानी
कांग्रेस ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान पर पलटवार किया। पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने इसे हताशा की पक्की निशानी बताया। रमेश ने कहा कि मोदी ने पहले अपने विरोधियों को “अर्बन नक्सल कहा था और अब उन्हें “दिमागी नक्सल” कह रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को पॉलिटिकल साइंस में “गालियां देने में माहिर” (मास्टर एब्यूज़र) भी बताया। रमेश ने X पर एक पोस्ट में कहा, “पहले उन्होंने अपने विरोधियों को ‘अर्बन नक्सल’ कहा। अब वे उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कह रहे हैं। यह उनकी हताशा की पक्की निशानी है। इसे भी पढ़ें: Gayaji में जहरीली गैस से 4 लोगों की मौत, कुएं में मोटर मरम्मत के दौरान हादसा उन्होंने आगे कहा कि यह एक अलग बात है कि प्रधानमंत्री ने आखिरकार वही किया, जिसकी मांग या वकालत उन लोगों ने की थी, जिन्हें उन्होंने अर्बन नक्सल या दिमागी नक्सल कहा था। लगातार 13वीं बार देश को स्वतंत्रता दिवस पर संबोधित करते हुए मोदी ने दावा किया कि देश से हथियारबंद नक्सलवाद खत्म हो गया है, लेकिन उन्होंने सतर्कता कम न करने की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि भले ही हथियारबंद नक्सलियों को जंगलों से खदेड़ दिया गया हो, लेकिन दिमागी नक्सली अभी भी हिंसा और अशांति फैलाने और समाज को गलत रास्ते पर ले जाने के मौके तलाश रहे हैं। मोदी ने कहा कि ऐसे बौद्धिक नक्सलियों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की ज़रूरत है। मोदी पर महिला आरक्षण को लेकर लालकिले से ‘‘बेईमानी भरा दावा’’ करने का आरोप लगाया और कहा कि मोदी सरकार की ‘‘दोहरी एवं पाखंडी’’ नीति के कारण यह आरक्षण 2024 के लोकसभा चुनाव से लागू नहीं किया जा सका। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री को पता होना चाहिए कि संसद ने सितंबर, 2023 में सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि कानून 2024 के चुनावों से प्रभावी न हो पाए। कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि यह अधिनियम 16 अप्रैल 2026 की देर शाम ‘‘जल्दबाजी में और चुपचाप’’ अधिसूचित किया गया। इसे भी पढ़ें: NEET UG मामले में 3 गिरफ्तार, Bihar Police EOU के हत्थे चढ़े 2 मेडिकल छात्र रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री को यह भी याद रखना चाहिए कि महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान संविधान में 1993 में पारित 73वें और 74वें संशोधनों के माध्यम से किया गया था और इसे लागू कराने में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सोच एवं दृढ़ संकल्प की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण के मुद्दे पर लगातार अपने रुख पर कायम रही है और मौजूदा लोकसभा सदस्यों की संख्या के भीतर 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने की मांग करती रही है।
गॉल में डराने वाल पल! राहुल के शॉट से श्रीलंकाई फील्डर घायल
गॉल टेस्ट के दौरान केएल राहुल के स्वीप शॉट से श्रीलंका के शॉर्ट लेग फील्डर निशान मदुष्का बुरी तरह चोटिल हो गए. चोट के बाद मेडिकल स्टाफ मैदान पर पहुंचा और मदुष्का को जांच के लिए बाहर ले जाया गया.
CM धामी का बड़ा ऐलान: युवाओं के लिए बनेगा युवा आयोग, 3 जिलों में औद्योगिक पार्क
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देहरादून में ध्वजारोहण किया। उन्होंने युवाओं के रोजगार, प्रशिक्षण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए युवा आयोग के गठन का ऐलान किया। चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में पहले चरण में ...
भारत में इन सेक्टरों में आ सकती है नौकरियों की बाढ़, PM ने बताया
मैन्युफैक्चरिंग और कृषि से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा और क्रिएटिव इकोनॉमी तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले के प्राचीर से विकास के सात प्रमुख क्षेत्रों को लेकर बात की है. उन्होंने इन सात क्षेत्रों को ‘शक्ति की सप्तधारा’ नाम दिया है. पीएम मोदी के मुताबिक, ये सात क्षेत्र भारत के विकास के अगले चरण को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
खड़गे ने तिरंगा फहराने के बाद सरकार के खिलाफ की हमलों की बौछार
कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी मुख्यालय में तिरंगा फहराने के बाद सरकार के खिलाफ हमलों की बौछार की.. उन्होंने कहा कि - नेहरू जी ने आधुनिक, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष भारत की नींव रखी. उन्होंने IIT, IIM और PSU की स्थापना की। खरगे ने कहा कि - मोदी सरकार पिछली सरकारों के कामों का श्रेय ले रही है...बिना काम किए इतिहास में दर्ज होना चाहती है. खरगे ने छात्रों पर फायिरंग को लेकर फिर अमित शाह को घेरा...
तीन नवजात, नर्सें और तिरंगा... दिल छू लेगी अस्पताल की ये तस्वीर
न कोई मंच था, न परेड... बस तीन नन्हे मेहमान थे और तिरंगे के तीन रंग. नाशिक जिला अस्पताल की न्यूबोर्न बेबी केयर यूनिट में स्वतंत्रता दिवस का जश्न कुछ ऐसा मनाया गया, जिसकी तस्वीर देखकर चेहरे पर मुस्कान आ जाए. एक नवजात केसरिया रंग में लिपटा था, दूसरा सफेद और तीसरा हरे रंग में. नर्सों ने तीनों को एक साथ रखकर तिरंगे का स्वरूप बना दिया.
पहलगाम आतंकी हमले के बाद पीएम मोदी का पहला सवाल क्या था? NSA डोभाल ने किया खुलासा
एनएसए अजीत डोभाल ने 'ऑपरेशन सिंदूर' पर अहम खुलासे किए, बताया कि पहलगाम हमले के बाद पीएम मोदी ने तुरंत दोषियों की जानकारी मांगी थी।
तमिलनाडु के सीएम विजय ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर चेन्नई में नवजात शिशुओं के लिए 'थाईमामन थंगा मोथिरम थिट्टम' की घोषणा की।
पत्नी को पोस्टिंग पर नहीं ला सका तो स्कार्फ ले आया जवान, वीडियो वायरल
लद्दाख के उमलिंग ला में तैनात एक जवान का वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का दिल छू रहा है. जवान अपनी पत्नी का स्कार्फ लेकर पोस्टिंग वाली जगह पहुंचा. जब दोस्त ने पूछा कि वह स्कार्फ क्यों लाया है, तो जवान ने कहा कि वह अपनी पत्नी को पोस्टिंग पर नहीं ला सकता, इसलिए उसका स्कार्फ ही साथ ले आया.
1947 में सीमित संसाधनों से शुरू हुई Indian Navy की यात्रा आज एयरक्राफ्ट कैरियर्स, Stealth Warships और Nuclear Submarines से लैस Blue-Water Navy तक पहुंच चुकी है। स्वतंत्रता दिवस पर कमोडोर सी.डी. बालाजी (रिटायर्ड) से जानिए 79 साल के इस शानदार सफर की कहानी।
स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति के रंग में रंगे खिलाड़ी
स्वतंत्रता दिवस के जश्न में भारतीय क्रिकेटर्स भी पूरी तरह से डूबे हुए हैं. सोशल मीडिया पर वह लगातार पोस्ट के जरिए फैन्स को आजादी के इस खास दिन की शुभकामनाएं दे रहे हैं.
दिल्ली का लाल किला कितना विशाल है? जानिए 254 एकड़ में फैले इस ऐतिहासिक किले की हैरान करने वाली बातें
भारत की राजधानी दिल्ली के दिल में स्थित लाल किला (Red Fort) केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं है, बल्कि यह देश की आन, बान और शान का प्रतीक है। हर साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री यहीं से तिरंगा फहराकर देश को संबोधित करते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि मुगलों के काल में बना यह भव्य किला अंदर से कितना बड़ा है और इसकी बनावट से जुड़े हैरान करने वाले तथ्य क्या हैं? यदि आप इसके क्षेत्रफल, लंबी दीवारों और ऊंचाई के बारे में नहीं जानते हैं, तो यह विस्तृत जानकारी आपके लिए बेहद दिलचस्प साबित होगी। आइए जानते हैं कि लाल किला क्षेत्रफल और वास्तुकला के लिहाज से कितना विशाल है।254 एकड़ में फैला हुआ है विशाल लाल किला परिसरमुगल सम्राट शाहजहां ने जब अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली शिफ्ट करने का फैसला किया, तब उन्होंने सन 1638 में इस भव्य किले की नींव रखी थी। इसे बनने में लगभग 10 साल का समय लगा और यह 1648 में बनकर पूरी तरह तैयार हुआ। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लाल किला लगभग 254.67 एकड़ (यानी करीब 255 एकड़) के विशाल भूभाग में फैला हुआ है। इस बड़े परिसर के भीतर केवल एक महल नहीं है, बल्कि कई शानदार इमारतें, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, रंग महल, हमाम और खूबसूरत बगीचे शामिल हैं जो उस दौर की वास्तुकला की उत्कृष्टता को बयां करते हैं।2.4 किलोमीटर लंबी और मजबूत सुरक्षा दीवारेंइस किले की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूत और चौड़ी दीवारें हैं, जो इसे एक अजय किले का स्वरूप देती हैं। लाल किले के चारों तरफ बनी रक्षात्मक दीवारों की कुल लंबाई लगभग 2.4 किलोमीटर (2.41 किमी) है। लाल बलुआ पत्थर से बनी इन दीवारों का मुख्य काम आक्रमणकारियों से शाही परिवार और राजमहल की रक्षा करना था। इन दीवारों की बनावट और मोटाई इतनी जबरदस्त है कि सदियां बीत जाने के बाद भी इनका रोमांच और मजबूती वैसी की वैसी ही बनी हुई है, जिसे देखने के लिए रोजाना देश-विदेश से हजारों पर्यटक पुरानी दिल्ली पहुंचते हैं।108 फीट ऊंची दीवारें और अनोखी वास्तुकलालाल किले की दीवारों की ऊंचाई हर तरफ एक जैसी नहीं है, बल्कि इसकी भौगोलिक स्थिति के अनुसार इसमें अंतर देखने को मिलता है। शहर की तरफ (City Side) यानी मुख्य जमीन की ओर इन दीवारों की ऊंचाई लगभग 108 फीट (करीब 33 मीटर) तक ऊंची है, जो सुरक्षा के लिहाज से बनाई गई थी। वहीं दूसरी ओर, जो हिस्सा कभी यमुना नदी के किनारे हुआ करता था, वहां की दीवारों की ऊंचाई लगभग 59 फीट (18 मीटर) है। इस किले का आकार पूरी तरह चौकोर या गोल नहीं बल्कि अष्टकोणीय (Octagonal) है, जो इसकी बनावट को और भी खास बनाता है।यूनेस्को विश्व धरोहर और इतिहास के पन्नों में इसका महत्वलगभग 200 वर्षों तक लाल किला मुगल बादशाहों का मुख्य निवास स्थान रहा। इसके बाद इस पर अलग-अलग शासकों और बाद में ब्रिटिश साम्राज्य का नियंत्रण रहा। इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए साल 2007 में यूनेस्को (UNESCO) ने इसे 'विश्व धरोहर स्थल' (World Heritage Site) के रूप में मान्यता दी। आज भी जब ऐतिहासिक धरोहरों की बात होती है, तो लाल किले का नाम सबसे ऊपर आता है। इसकी भव्यता, ऐतिहासिक घटनाएं और वास्तुकला आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं और भारत के समृद्ध अतीत की कहानी कहती हैं।
सरकार का बड़ा फैसला, पेट्रोल-डीजल और ATF पर घटा दिया ये टैक्स
केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर विंडफाल टैक्स को कम कर दिया है. यह ऐसे समय में फैसला लिया गया है, जब वेस्ट एशिया में एनर्जी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.
हरियाणा के हिसार जिले में दिल दहला देने वाला जीवन कुंडू हत्याकांड अब एक बड़ा जन-आंदोलन और प्रशासनिक संकट बनता जा रहा है। घटना को 14 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन मुख्य आरोपी रमेश की गिरफ्तारी न होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों ने मृतक का अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया है। न्याय की मांग और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली के विरोध में गुस्साए लोगों ने हांसी-हिसार मुख्य मार्ग को पूरी तरह से जाम कर दिया है, जिससे हाइवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं और यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है। इस सनसनीखेज मामले को लेकर इलाके में तनाव का माहौल है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।क्या है पूरा मामला और क्यों सुलग रहा है हिसार?यह पूरा दर्दनाक मामला हिसार के सूर्यनगर इलाके का है, जहां 4 अगस्त की सुबह डेयरी संचालक जीवन कुंडू पर उसके ही पड़ोसियों ने कातिलाना हमला कर दिया था। पीड़ित परिवार के अनुसार, जीवन जब अपनी बाइक पर ट्रॉली लगाकर गोबर डालने जा रहा था, तभी पुरानी रंजिश के चलते पड़ोसी रमेश और उसके साथियों ने उसे घेर लिया। आरोप है कि आरोपियों ने लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से जीवन को तब तक बेरहमी से पीटा जब तक वह पूरी तरह बेहोश होकर जमीन पर नहीं गिर गया। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मौत से पहले सामने आए एक वीडियो में जीवन ने खुद अपने ऊपर हुए जुल्म और हमलावरों के नाम बयां किए थे, जिसके बाद से पूरे क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है।14 दिन बीतने के बाद भी मुख्य आरोपी रमेश पुलिस की गिरफ्त से दूरहत्या की इस गंभीर घटना के बाद से ही स्थानीय लोग, विभिन्न खाप पंचायतें और किसान संगठन लगातार आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। हालांकि पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए कुछ अन्य आरोपियों को दबोच लिया है और कुल गिरफ्तारियों का आंकड़ा बढ़ गया है, परंतु इस हत्याकांड का मुख्य मास्टरमाइंड और मुख्य आरोपी रमेश अभी भी पुलिस की पकड़ से कोसों दूर है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि मुख्य आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है। इसके बावजूद मुख्य आरोपी के पुलिस के हाथ न आने से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।शव रखकर सड़क जाम और किसानों-खाप पंचायतों का भारी समर्थनमुख्य आरोपी की गिरफ्तारी में हो रही देरी से खफा परिजनों ने यह ठान लिया है कि जब तक मुख्य आरोपी रमेश सलाखों के पीछे नहीं पहुंच जाता, तब तक वे जीवन कुंडू का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। इसी जिद और न्याय की आस में पिछले दो हफ्ते से लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है। बात तब और गंभीर हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने हांसी-हिसार रोड पर जाम लगा दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इस विरोध प्रदर्शन को बल देने के लिए कई बड़े किसान नेता और खाप प्रतिनिधि भी मौके पर पहुंच गए हैं, जिससे यह मामला केवल एक पारिवारिक या स्थानीय विवाद न रहकर एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। प्रदर्शनकारियों की दो टूक मांग है कि आरोपियों पर तुरंत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।पुलिस प्रशासन पर दबाव और भविष्य की बड़ी चेतावनीदिन-प्रतिदिन बिगड़ते हालात को देखते हुए हिसार पुलिस और जिला प्रशासन के हाथ-पांव फूले हुए हैं। हाइवे जाम होने के कारण आम जनता और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसे देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स को तैनात किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे लगातार दबिश दे रहे हैं और आरोपियों के संभावित ठिकानों पर छापेमारी जारी है, साथ ही उनके विदेश भागने की आशंका को लेकर लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया है। वहीं दूसरी ओर, ग्रामीणों और परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने जल्द ही मुख्य आरोपी रमेश को गिरफ्तार नहीं किया, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप धारण कर सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने लाल किले से युवाओं, शिक्षा, खेल और तकनीक के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक घोषणाएं कीं। इनमें 1 करोड़ युवाओं को एआई प्रशिक्षण, मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग, नागरिक सुरक्षा सुधार और परमाणु ऊर्जा विस्तार के लक्ष्य शामिल हैं।
मध्य प्रदेश स्वतंत्रता दिवस 2027 को झंडा फहराने, वंदे मातरम के साथ मनाता है, और समान नागरिक संहिता, किसान कल्याण, युवा व
हरियाणा के हिसार जिले के हांसी में स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक तनाव देखने को मिला है। राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के ध्वजारोहण कार्यक्रम का विरोध करने पहुंचे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई। यह पूरा विवाद कुछ दिन पहले हुए चर्चित डेयरी संचालक जीवन कुंडू हत्याकांड के मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी में हो रही देरी के विरोध में उपजा है। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि पुलिस को उग्र भीड़ को खदेड़ने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके जवाब में प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिस बल पर जमकर पथराव कर दिया। इस हिंसक संघर्ष में हांसी के एसपी और डीएसपी समेत दोनों पक्षों के कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।जीवन कुंडू हत्याकांड और न्याय की मांग को लेकर सुलग रहा है आक्रोशइस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि कुछ दिन पहले हिसार में घटी एक दर्दनाक घटना से जुड़ी हुई है। हिसार में 4 अगस्त को डेयरी संचालक जीवन कुंडू की कुछ लोगों द्वारा लाठी-डंडों से पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज मामले में हालांकि पुलिस ने अब तक कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन मुख्य आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है, जिस कारण स्थानीय ग्रामीणों, परिजनों और विभिन्न खाप पंचायतों में भारी रोष व्याप्त है। न्याय की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में किसान संगठनों और स्थानीय लोगों ने पहले ही यह ऐलान कर दिया था कि यदि मुख्य आरोपी की जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे हांसी में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का विरोध दर्ज कराएंगे।स्वतंत्रता दिवस समारोह से ठीक पहले हांसी में छावनी में बदला इलाकामुख्यमंत्री के दौरे और विरोध प्रदर्शन के ऐलान को देखते हुए प्रशासन पहले से ही पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा था। हांसी आने वाले सभी प्रमुख मार्गों और रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था तथा कड़े पहरे के बीच नाकाबंदी की गई थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और किसान ट्रैक्टरों पर सवार होकर और पैदल ही कार्यक्रम स्थल यानी राजकीय महाविद्यालय के पास पहुंचने में कामयाब हो गए। प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ने की जिद पर अड़े हुए थे, जिसे रोकने के लिए पुलिस ने पूरी ताकत लगा दी। जैसे ही भीड़ बैरिकेड्स पार कर कार्यक्रम के करीब पहुंचने लगी, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई।पुलिस का लाठीचार्ज और उग्र भीड़ का करारा पथरावतनाव जब चरम पर पहुंच गया तो पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने और आगे बढ़ने से रोकने के लिए लाठीचार्ज का सहारा लिया। इस दौरान पुलिस की सख्ती से कई प्रदर्शनकारियों के सिर फूट गए और वे लहूलुहान हो गए। इस कार्रवाई से गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने उग्र रूप धारण कर लिया और पुलिस दल पर ईंट-पत्थरों से हमला बोल दिया। अचानक हुए इस जोरदार पथराव से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस झड़प और पत्थरबाजी में हांसी के पुलिस अधीक्षक (SP) विनोद कुमार और एक डीएसपी (DSP) को भी गंभीर चोटें आईं। हालात को संभालने के लिए एसपी को खुद मोर्चा संभालना पड़ा और चोट लगने के बाद उन्होंने हाथ पर रुमाल बांधकर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। बचाव में पुलिस ने भी स्थिति पर काबू पाने के लिए जवाबी कार्रवाई की।राजनीतिक समर्थन और क्षेत्र में बढ़ा तनावइस हिंसक झड़प के बाद इलाके में भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है और स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है। हंगामे और तनाव के बीच कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी और अधिक बढ़ गई है। घटना की सूचना मिलते ही कांग्रेस विधायक नरेश सेलवाल भी मौके पर पहुंचे और पीड़ित तथा प्रदर्शनकारी किसानों के बीच जाकर उनका समर्थन करने का ऐलान किया। उन्होंने इस संघर्ष में हरसंभव साथ देने का वादा किया है। दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और सुरक्षा में सेंध लगाने तथा पथराव करने वाले उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन अब संवाद और कड़े सुरक्षा प्रबंधों के जरिए माहौल को शांत करने का प्रयास कर रहा है।
लव मैरिज, बच्चा और फिर हत्या! स्वीटी पटेल केस में पूर्व इंस्पेक्टर को उम्रकैद
गुजरात के चर्चित स्वीटी पटेल हत्याकांड में कोर्ट ने स्वीटी पटेल के पति और तत्कालीन पुलिस इंस्पेक्टर अजय देसाई को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है.
उनकी आवाज हमेशा दिलों में जिंदा रहेगी!' 90 के दशक के सुनहरे दौर को याद कर भावुक हुए अनु मलिक
भारतीय संगीत जगत यानी बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री के इतिहास में यदि नब्बे के दशक (90s Decade) को स्वर्ण युग कहा जाए, तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इस दौर में संगीत प्रेमियों को एक से बढ़कर एक बेहतरीन मेलोडियस गाने और रूह को छू लेने वाली आवाजें मिलीं, जिन्होंने पीढ़ियों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी है। इसी सुनहरे दौर के दो सबसे बड़े और दिग्गज सितारे, प्रसिद्ध संगीतकार अनु मलिक (Anu Malik) और सुरों के बेताज बादशाह कुमार सानू (Kumar Sanu) एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। हाल ही में एक खास बातचीत के दौरान संगीतकार अनु मलिक नब्बे के दशक की अपनी सुनहरी यादों में खो गए और उन्होंने अपने जिगरी यार तथा लीजेंड्री सिंगर कुमार सानू की अद्वितीय गायकी की जमकर तारीफ की। अनु मलिक ने दिल से कसीदे पढ़ते हुए कहा कि कुमार सानू जैसी जादुई आवाज और सादगी सदियों में कभी-कभार ही पैदा होती है, और उनकी यह बेमिसाल आवाज इस देश के संगीत प्रेमियों के दिलों में हमेशा-हमेशा के लिए जिंदा रहेगी। इस भावनात्मक और पुरानी यादों से भरे इंटरव्यू ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है और नब्बे के दशक के गानों के दीवाने फैंस इस जोड़ी को एक बार फिर याद करके बेहद भावुक हो रहे हैं।90 के दशक का जादू: जब संगीत सीधे रूह को छू जाता थानब्बे का वह दशक जब कैसेट्स का जमाना था, रेडियो पर फरमाइशों का दौर चलता था और घर-घर में प्यार, दर्द और जुदाई के तराने गूंजा करते थे, आज भी संगीत प्रेमियों के जेहन में तरोताजा है। उस दौर में अनु मलिक ने अपने संगीत निर्देशन से हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर एक चार्टबस्टर गानों की सौगात दी थी, और उन गानों को अपनी जादुई आवाज से अमर बनाने का काम किया था कुमार सानू ने। अनु मलिक ने याद करते हुए बताया कि वह दौर ऐसा था जब म्यूजिक कंपोजर और सिंगर की ट्यूनिंग इतनी मजबूत होती थी कि बिना किसी आधुनिक ऑटो-ट्यून या डिजिटल करेक्शन के गाने पहली ही टेक में रिकॉर्ड हो जाते थे और सीधे सुनने वालों के दिलों में उतर जाते थे। आज के आधुनिक और रीमिक्स के दौर में जहां संगीत बहुत जल्दी पुराना हो जाता है, वहीं 90 के दशक के उन क्लासिक गानों की चमक आज भी वैसी ही बरकरार है, और इसका पूरा श्रेय उस दौर के कलाकारों की बेजोड़ मेहनत और उनकी प्राकृतिक प्रतिभा को जाता है।कुमार सानू की तारीफ में अनु मलिक ने पढ़े कसीदे, बताया बेजोड़ कलाकारकुमार सानू की गायकी की प्रशंसा करते हुए अनु मलिक ने कहा कि उनके जैसी बहुमुखी प्रतिभा वाला गायक मिलना आज के समय में लगभग नामुमकिन सा हो गया है। रोमांटिक गानों की बात हो, दर्द भरे नगमों की बात हो या फिर थिरकाने वाले जोशीले गीतों की, कुमार सानू ने हर विधा में अपनी आवाज का ऐसा जादू चलाया कि सुनने वाला मंत्रमुग्ध हो जाए। अनु मलिक ने अपने पुराने दिनों के संस्मरण साझा करते हुए बताया कि जब वे स्टूडियो में कोई नया गाना तैयार करके कुमार सानू को देते थे, तो वे उस कंपोजिशन को पल भर में समझ जाते थे और अपनी गायकी से उसमें ऐसी जान फूंक देते थे कि गाना एक ही बार में इतिहास रच देता था। अनु मलिक ने बड़े ही आदर भाव से कहा कि आज भले ही संगीत की तकनीक बहुत बदल गई हो, लेकिन कुमार सानू के गले की जो मिठास और गहराई है, उसकी बराबरी आज का कोई भी गायक नहीं कर सकता है, और वे भारतीय संगीत के एक ऐसे चमकते हुए सितारे हैं जो कभी फीके नहीं पड़ सकते।अनु मलिक और कुमार सानू की जोड़ी ने रचे थे कई ऐतिहासिक इतिहाससंगीतकार अनु मलिक और गायक कुमार सानू की इस जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को अनगिनत ऐसे सुपरहिट गाने दिए हैं जो आज भी लोगों की जुबान पर रटे हुए हैं। 'बाजीगर' फिल्म के गाने हों, 'विरासत' के मेलोडियस ट्रैक्स हों या फिर 'फिल्मी दुनिया' के अन्य अनमोल नगमें, इस जोड़ी ने हर बार अपनी कला का लोहा मनवाया है। अनु मलिक ने उस वक्त को याद किया जब उनके द्वारा बनाए गए गानों को रिकॉर्ड करने के लिए स्टूडियो के बाहर फैंस की भीड़ लग जाया करती थी। उन्होंने कहा कि कुमार सानू के साथ काम करना उनके करियर का सबसे शानदार और यादगार अनुभव रहा है। दोनों की जुगलबंदी ने भारतीय संगीत उद्योग को ऐसा स्वर्णिम मुकाम दिया, जिसकी मिसाल आज भी नए दौर के कलाकार देते हैं। यह आपसी सम्मान और पेशेवर दोस्ती इस बात का सबूत है कि सच्ची कला और टैलेंट कभी उम्र या दौर के मोहताज नहीं होते हैं।आधुनिक संगीत और रीमिक्स संस्कृति पर दिग्गजों की गहरी चिंताबातचीत के दौरान दोनों दिग्गज कलाकारों ने आज के समय में बन रहे गानों और रीमिक्स कल्चर (Remix Culture) पर भी खुलकर अपनी राय रखी। उनका मानना था कि आज के गाने बहुत तेजी से बनते हैं और उतनी ही तेजी से लोगों के दिलों से उतर भी जाते हैं, क्योंकि उनमें वो गहराई और ठहराव गायब हो चुका है जो नब्बे के दशक के संगीत में हुआ करता था। गानों में शब्दों के चयन और धुनों की मिठास पर अब पहले जैसा ध्यान नहीं दिया जाता है। अनु मलिक ने नई पीढ़ी के संगीतकारों और गायकों को सलाह दी कि यदि वे लंबे समय तक टिकना चाहते हैं और लोगों के दिलों में जगह बनाना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी जड़ों से जुड़ना होगा और संगीत की मूल आत्मा को समझना होगा। उन्होंने कहा कि तकनीक सिर्फ एक साधन हो सकती है, लेकिन असली संगीत तो दिल से और साधना से ही निकल सकता है, जैसा कि उन्होंने और उनके समकालीन कलाकारों ने अपने दौर में करके दिखाया था।
PM Modi के Tiranga Pocket Square पर कांग्रेस का वार, Pawan Khera बोले, लगता है साहब ने उर्दू में...
लाल किले से भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहनावे पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री के पॉकेट-स्क्वायर पर ध्यान दिलाते हुए पवन खेड़ा ने शनिवार को कहा कि ऐसा लगता है कि पीएम मोदी भारत के बजाय आयरलैंड की आज़ादी का जश्न मना रहे थे। एक्स पर एक पोस्ट में, कांग्रेस सांसद ने पॉकेट स्क्वायर का एक वीडियो साझा किया और कहा कि लगता है साहब ने उर्दू में तिरंगा पहना है। या फिर भारत की जगह आयरलैंड का स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। इसे भी पढ़ें: PM Modi का बड़ा ऐलान: 1 साल में 1 करोड़ युवाओं को मिलेगी AI Training, भारत बनेगा ग्लोबल Innovation Hub आज़ादी के दिन के कार्यक्रम के लिए, मोदी ने अपने सफ़ेद कुर्ते और चॉकलेट ब्राउन वेस्ट (जैकेट) के साथ राजस्थानी और गुजराती संस्कृति में आम पारंपरिक पगड़ी पहनी थी। उन्होंने हरे, सफ़ेद और केसरिया रंग के तीन पॉकेट स्क्वेयर भी लगाए थे। हालांकि पॉकेट स्क्वेयर के रंग तिरंगे वाले ही थे, लेकिन वे राष्ट्रीय ध्वज के क्रम में नहीं थे, इसीलिए कांग्रेस ने 'आयरलैंड' वाली टिप्पणी की। आयरिश झंडे में तीन रंग होते हैं - बाएं से दाएं हरा, सफेद और केसरिया - जो प्रधानमंत्री मोदी के पॉकेट स्क्वेयर में दिखने वाले पैटर्न जैसा ही है। लाल किले से अपने 13वें संबोधन के लिए, प्रधानमंत्री क्लासिक ऑफ-व्हाइट कुर्ता-पायजामा और भूरे रंग की बिना आस्तीन वाली जैकेट पहने हुए दिखाई दिए। मोदी की पगड़ी अपनी शानदार कारीगरी और सांस्कृतिक महत्व के कारण चर्चा का विषय रही। पारंपरिक बांधनी या टाई-एंड-डाई सफा में गहरे लाल रंग के बेस पर बारीक सफ़ेद और पीले रंग के डॉट्स का पैटर्न बना था, और इसे कंधे पर लहराती हुई एक क्लासिक लंबी पूंछ (पल्ला) के साथ खूबसूरती से लपेटा गया था। इसे भी पढ़ें: Independence Day पर PM Modi का विपक्ष से बड़ा आग्रह: Women Reservation पर Political Game छोड़ो! प्रधानमंत्री की स्वतंत्रता दिवस की खास पगड़ियाँ 2014 से ही लाल किले के समारोह का सबसे ज़्यादा इंतज़ार किया जाने वाला आकर्षण रही हैं। 2014 में उन्होंने चमकीले लाल रंग की बांधेज पगड़ी और उसके साथ हरे रंग की पूंछ पहनकर इसकी शुरुआत की थी। पिछले 12 सालों में, प्रधानमंत्री ने कई रंगों वाली बांधनी और सुनहरे धागों के साथ चमकीले पीले रंग; केसरिया रंग; केसरिया और हरी धारियों वाली सफ़ेद पगड़ी; और पीले, हरे, नारंगी व लाल रंगों के मेल वाली बांधनी प्रिंट वाली पगड़ियाँ पहनी हैं।
भारतीय टेलीविजन जगत की सबसे लोकप्रिय और चहेती अभिनेत्रियों में शुमार 'गोपी बहू' यानी देवोलीना भट्टाचार्जी (Devoleena Bhattacharjee) इन दिनों अपनी प्रोफेशनल लाइफ से ज्यादा अपनी पर्सनल लाइफ और मातृत्व के खास पलों को लेकर सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। स्वतंत्रता दिवस के पावन और ऐतिहासिक अवसर पर देश भर में जहां आम नागरिक से लेकर तमाम सेलिब्रिटी अपनी देशभक्ति का इजहार करने में जुटे हुए थे, वहीं नई-नई मां बनीं देवोलीना ने अपने छोटे से एक साल के बेटे के साथ इस राष्ट्रीय पर्व को बेहद अनूठे और प्रेरणादायक तरीके से मनाया। अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर एक दिल को छू लेने वाला खास मैसेज शेयर किया है, जिसमें उन्होंने यह साझा किया है कि कैसे वे अपने महज़ एक साल के मासूम बेटे को अभी से ही देश की आजादी के महत्व, बलिदान और राष्ट्रप्रेम के शुरुआती सबक सिखाना चाहती हैं। देवोलीना का यह विचारशील और भावुक संदेश इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है और देश भर के लाखों फैंस तथा माता-पिता इसे बेहद सराह रहे हैं, क्योंकि आज के आधुनिक दौर में बच्चों के भीतर अपने देश की संस्कृति और स्वतंत्रता के इतिहास के प्रति शुरुआती संस्कार डालना हर पेरेंट्स के लिए एक बड़ी सीख बनता जा रहा है।स्वतंत्रता दिवस पर देवोलीना का वायरल संदेश और मातृत्व की नई परिभाषाअपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए देवोलीना भट्टाचार्जी ने एक बेहद प्यारी सी तस्वीर और एक लंबा-चौड़ा विचारशील नोट साझा किया। उन्होंने लिखा कि एक मां होने के नाते उनका यह सबसे पहला और बड़ा कर्तव्य है कि वे अपने बच्चे को केवल किताबी शिक्षा या आधुनिक चकाचौंध में न रखें, बल्कि उसे यह समझाएं कि आज हम जिस खुली हवा में सांस ले रहे हैं, उसकी कीमत क्या है। देवोलीना ने अपने नोट में जिक्र किया कि भले ही उनका बेटा अभी केवल एक साल का है और वह इन बातों को पूरी तरह से समझ पाने की उम्र में नहीं है, लेकिन एक मां के रूप में उनके दिल में यह इच्छा है कि वे अपने बच्चे की परवरिश की नींव में ही देशभक्ति और स्वतंत्रता के मूल्यों को पिरो दें। जब बच्चा अपने घर के माहौल में तिरंगे की शान, राष्ट्रगान के सम्मान और देश के स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष की कहानियों के बीच बड़ा होता है, तो उसके भीतर एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक स्वतः ही जन्म लेने लगता है।एक साल के बच्चे को आजादी का महत्व सिखाने की अनोखी पहलजब से देवोलीना ने यह बात साझा की है कि वे अपने एक साल के बेटे को स्वतंत्रता का महत्व समझाना चाहती हैं, तब से सोशल मीडिया पर लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी कम उम्र में बच्चे को यह सब कैसे सिखाया जा सकता है? इस पर अभिनेत्री और बाल मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चे बहुत कम उम्र से ही अपने आसपास के माहौल, रंगों, आवाज़ों और माता-पिता के आचरण को बहुत तेजी से ऑब्ज़र्व करते हैं। जब एक साल का बच्चा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को देखता है, देश भक्ति के गीत सुनता है और अपने माता-पिता को राष्ट्र के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए देखता है, तो उसके अवचेतन मन में उन संस्कारों की एक गहरी छाप छूट जाती है। देवोलीना का यह प्रयास इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है कि बच्चों को देशभक्त और संवेदनशील इंसान बनाने की शुरुआत स्कूल जाने की उम्र से नहीं, बल्कि उनके पालने और गोद से ही शुरू हो जानी चाहिए, ताकि बड़े होकर वे देश के प्रति अपने कर्तव्यों को कभी न भूलें।अभिनय की दुनिया से दूर मदरहुड को एंजॉय कर रही हैं देवोलीनाटेलीविजन के सुपरहिट शो 'साथ निभाना साथिया' में संस्कारी गोपी बहू का किरदार निभाकर घर-घर में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाली देवोलीना भट्टाचार्जी इन दिनों अपने मातृत्व (Motherhood) के इस खूबसूरत दौर का भरपूर आनंद ले रही हैं। पिछले साल दिसंबर में अपने जिम पार्टनर शमशेर सिंह के साथ गुपचुप तरीके से शादी करके सबको चौंकाने वाली देवोलीना ने पिछले साल एक प्यारे से बेटे को जन्म दिया था। मां बनने के बाद से ही उन्होंने अभिनय की दुनिया से थोड़ा ब्रेक ले लिया है और अपना पूरा समय अपने परिवार और बच्चे की परवरिश में बिता रही हैं। सोशल मीडिया पर अक्सर वे अपने बेटे के साथ बिताए गए खूबसूरत पलों की झलकियां अपने फैंस के साथ साझा करती रहती हैं, जिन्हें उनके चाहने वाले बहुत पसंद करते हैं। स्वतंत्रता दिवस के इस मौके पर उनका यह मातृ प्रेम और राष्ट्र प्रेम का अनूठा संगम एक बार फिर यह साबित कर देता है कि वे पर्दे पर जितनी बेहतरीन अभिनेत्री हैं, असल जिंदगी में उतनी ही जिम्मेदार और समझदार मां भी हैं।आज की युवा पीढ़ी और सेलिब्रिटीज के लिए एक प्रेरणादायक संदेशदेवोलीना भट्टाचार्जी का यह कदम आज के दौर के उन तमाम युवाओं और सेलिब्रिटीज के लिए एक बहुत बड़ी सीख है जो अक्सर राष्ट्रीय पर्वों को केवल एक छुट्टी या सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग स्टेटस तक ही सीमित मान लेते हैं। जब देश के बड़े और लोकप्रिय चेहरे अपने बच्चों को शुरुआती उम्र से ही देश के इतिहास, बलिदान और स्वतंत्रता के सही मायने से परिचित कराते हैं, तो इसका समाज पर एक बहुत ही सकारात्मक और व्यापक प्रभाव पड़ता है। आज की युवा पीढ़ी को यह समझने की जरूरत है कि हमें जो आजादी बिना किसी संघर्ष के थाली में परोसी हुई मिल गई है, उसे संजोकर रखना और देश को आगे ले जाना हमारी ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। देवोलीना का यह संदेश सिर्फ एक अभिनेत्री की पोस्ट नहीं है, बल्कि हर उस माता-पिता के लिए एक प्रेरणा है जो अपने बच्चों को एक बेहतर इंसान और सच्चा देशवासी बनाना चाहते हैं।
नाग पंचमी के दिन भूलकर भी न करें ये 5 काम, घेर लेंगी मुश्किलें!
Nag Panchami 2026: 17 अगस्त को है नाग पंचमी. इस दिन भूलकर भी जमीन न खोदें और न करें ये 5 गलतियां, वरना नाग देवता की नाराजगी से जीवन में बढ़ सकती हैं मुश्किलें. जानें जरूरी नियम.
भारतीय सिनेमा जगत में अपने बेमिसाल अभिनय और डांस के दम पर 'डिस्को डांसर' के रूप में वैश्विक पहचान बनाने वाले दिग्गज अभिनेता और पद्म पुरस्कार से सम्मानित मिथुन चक्रवर्ती (Mithun Chakraborty) इन दिनों अपने एक बेहद तीखे और भावुक बयान को लेकर सुर्खियों में छाए हुए हैं। हाल ही में कोलकाता अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (KIFF - Kolkata International Film Festival) के दौरान उन्हें कथित तौर पर नजरअंदाज किए जाने और दरकिनार करने का मामला सामने आने के बाद खुद मिथुन दा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। अपने चिरपरिचित अंदाज और बेबाक शैली में बात करते हुए मिथुन चक्रवर्ती ने तंज कसते हुए कहा कि वे तो इंडस्ट्री के बहुत छोटे अभिनेता हैं, शायद इसीलिए उन्हें इस बड़े आयोजन में पूछना जरूरी नहीं समझा गया। इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की संस्कृति और राजनीति दोनों गलियारों में एक नया भूचाल आ गया है, क्योंकि उनके समर्थकों और कई बुद्धिजीवियों का मानना है कि यह महज़ एक अभिनेता की अनदेखी नहीं, बल्कि बंगाल की माटी में जन्मे एक ग्लोबल आइकॉन और बंगाल के बेटे का खुला हुआ अपमान है, जिसपर अब राजनीतिक दलों के बीच भी जुबानी जंग तेज हो गई है।क्या है पूरा विवाद और क्यों गरमाया है कोलकाता फिल्म फेस्टिवल का मुद्दा?कोलकाता अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य के कला-संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित किया जाने वाला एक बेहद प्रतिष्ठित और भव्य वार्षिक आयोजन माना जाता है, जिसमें देश-विदेश की तमाम नामचीन फिल्मी हस्तियां शिरकत करती हैं। इस बार के फेस्टिवल के दौरान जब उद्घाटन और मुख्य कार्यक्रमों की सूचियों से मिथुन चक्रवर्ती का नाम गायब देखा गया और उन्हें किसी भी आधिकारिक आमंत्रण या मंच पर उचित सम्मान नहीं मिला, तो उनके चाहने वालों में भारी आक्रोश फैल गया। पश्चिम बंगाल की धरती से ताल्लुक रखने वाले और अपनी मेहनत के बल पर हिंदी, बंगाली और अन्य भारतीय भाषाओं में सिनेमा के शिखर को छूने वाले मिथुन दा जैसे वरिष्ठ कलाकार को इस तरह से नजरअंदाज किए जाने पर सवाल उठने लाजिमी थे। जब मीडिया और पत्रकारों ने इस बारे में अभिनेता से सवाल किया, तो उनका दर्द छलक उठा और उन्होंने बहुत ही शालीनता लेकिन तीखे शब्दों में अपनी उपेक्षा पर गहरी प्रतिक्रिया दी, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया।'मैं बहुत छोटा एक्टर हूं': मिथुन दा के उस बयान के क्या हैं गहरे मायने?जब मीडिया ने मिथुन चक्रवर्ती से कोलकाता फिल्म फेस्टिवल में उन्हें आमंत्रित न किए जाने और तवज्जो न मिलने को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने बेहद व्यंग्यात्मक और दिल को छू लेने वाले अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि मैं तो बहुत छोटा एक्टर हूं, शायद इसीलिए मुझे इस लायक नहीं समझा गया कि मुझे बुलाया जाए। उनके इस एक वाक्य ने भारतीय सिनेमा जगत और सांस्कृतिक आयोजनों में चल रही अंदरूनी राजनीति की पोल खोलकर रख दी है। मिथुन चक्रवर्ती जैसे अभिनेता, जिन्होंने अपने पूरे जीवन में सैकड़ों सफल फिल्मों में काम किया है और जिन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्म सम्मान के साथ-साथ दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है, यदि वे खुद को 'छोटा एक्टर' कहकर अपनी उपेक्षा पर दर्द बयां करें, तो यह किसी भी सभ्य समाज और सांस्कृतिक मंच के लिए बेहद शर्मनाक स्थिति है। यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि किस तरह से आज के दौर में कला और योग्यता से ऊपर व्यक्तिगत राजनीतिक विचारधारा और चापलूसी को प्राथमिकता दी जा रही है।बाहरी कलाकारों को न्योता, लेकिन बंगाल के अपने बेटे के साथ सौतेला व्यवहारइस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि एक तरफ जहां कोलकाता फिल्म फेस्टिवल की शान बढ़ाने के लिए देश के कोने-कोने से और मुंबई फिल्म इंडस्ट्री से तमाम बड़े बॉलीवुड सितारों, निर्माताओं और बाहरी मेहमानों को शान से आमंत्रित किया जाता है और उनका राजकीय सम्मान किया जाता है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में ही पले-बढ़े और पूरी दुनिया में बंगाल का नाम रोशन करने वाले मिथुन चक्रवर्ती को इस तरह से किनारा कर दिया जाता है। बंगाल के स्थानीय लोगों और कला प्रेमियों का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक भूल नहीं हो सकती, बल्कि इसके पीछे एक गहरी राजनीतिक और वैचारिक पूर्वाग्रह की भावना काम कर रही है। चूंकि मिथुन चक्रवर्ती वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े हुए हैं और राज्य की मौजूदा सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के मुखर आलोचक माने जाते हैं, इसलिए आशंका जताई जा रही है कि इसी राजनीतिक मतभेद के कारण उन्हें बंगाल के ही सबसे बड़े सांस्कृतिक उत्सव से बाहर का रास्ता दिखाया गया है।राजनीति से परे होनी चाहिए कला और कलाकारों की दुनियामिथुन चक्रवर्ती के साथ हुए इस कथित अपमान के बाद देश भर के सांस्कृतिक गलियारों में यह बहस एक बार फिर छिड़ गई है कि क्या कला, साहित्य और सिनेमा को भी अब राजनीति के चश्मे से देखा जाने लगा है? इतिहास गवाह है कि बंगाल हमेशा से कला, साहित्य, संगीत और अभिनय की भूमि रहा है, जहाँ रबींद्रनाथ टैगोर से लेकर सत्यजीत रे और उत्तम कुमार जैसी महान विभूतियों ने कभी भी राजनीतिक सीमाओं में बंधकर अपनी कला को सीमित नहीं किया। एक कलाकार की पहचान उसकी पार्टी या वैचारिक झुकाव से नहीं, बल्कि उसकी फिल्मों, उसके अभिनय और जनता के बीच उसकी लोकप्रियता से होती है। जब सरकारें या सांस्कृतिक संस्थान राजनीतिक द्वेष के कारण अपने ही राज्य के महान सपूतों और दिग्गजों का अपमान करने लगते हैं, तो इससे पूरी संस्कृति की गरिमा को ठेस पहुंचती है। जनता और सिने प्रेमियों का मानना है कि इस तरह की ओछी राजनीति का अंत होना चाहिए और हर कलाकार को उसका बनता हुआ मान-सम्मान मिलना चाहिए, चाहे उसके राजनीतिक विचार सत्ता में बैठे लोगों से मेल खाते हों या नहीं।सोशल मीडिया पर फैंस का गुस्सा और भविष्य के सांस्कृतिक आयोजनों पर सवालजैसे ही मिथुन चक्रवर्ती के इग्नोर होने और उनके इस दर्द भरे बयान की खबरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुईं, उनके लाखों फैंस और समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा। ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #MithunChakraborty और #BoycottKIFF जैसे ट्रेंड्स के जरिए लोग राज्य सरकार और फिल्म फेस्टिवल के आयोजकों की कड़ी आलोचना कर रहे हैं। फैंस का कहना है कि मिथुन दा ने अपनी फिल्मों के जरिए दशकों तक लोगों के दिलों पर राज किया है और उन्हें किसी मंच के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है, लेकिन इस तरह से बंगाल के एक लीजेंड के साथ अन्याय करना ناقابل बर्दाश्त है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि जनता अभी भी अपने चहेते कलाकारों के अपमान को कतई सहन नहीं करती है। आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या राज्य के सांस्कृतिक आयोजकों और सरकार की तरफ से इस मामले पर कोई सफाई या माफी आती है, या फिर यह विवाद बंगाल की सियासत में एक और बड़ा मुद्दा बनकर हमेशा के लिए गूंजता रहता है।
बंगाल विभाजन ने बोये थे देश के बंटवारे के बीज
कांग्रेस से मोह भंग होने के बाद मोहम्मद अली जिन्ना लंदन चले गए थे. जुलाई 1933 में लियाकत अली खान अपनी नव विवाहिता पत्नी के साथ वहां वह मोहम्मद अली जिन्ना से मिले. उनके और उनकी बेगम के निवेदन पर जिन्ना 1934 में भारत आए और मुस्लिम लीग की कमान अपने हाथों में ले लिया.
यूपी के सहारनपुर में 15 अगस्त को भीषण सड़क हादसा, डिवाइडर से टकराई कार, ITBP के DIG की मौत
आईटीबीपी के डीआईजी परमिंदर सिंह अपने ड्राइवर रवि शंकर और एक जवान के साथ मसूरी से ट्रेनिंग पूरी कर स्कॉर्पियो गाड़ी से वापस अंबाला लौट रहे थे. रास्ते में वह हादसे का शिकार हो गए.
NDTV के खास कार्यक्रम 'जय जवान' में सैफ अली खान ने उरी में भारतीय सेना के जवानों के साथ दिन बिताया. इस दौरान उन्होंने जवानों के साथ क्रिकेट खेला, गिटार बजाया, पूड़ियां बनाईं और कमान अमन सेतु का दौरा किया. सैफ ने इस अनुभव को रोमांचक और यादगार बताया.

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