महाराष्ट्र में 1 से 8 जुलाई तक मानसून से संबंधित घटनाओं में 63 लोगों की मौत
महाराष्ट्र में 1 जून से 8 जुलाई के बीच भारी बारिश और मानसून से संबंधित विभिन्न घटनाओं में कम से कम 63 लोगों की जान चली गई और 78 अन्य घायल हो गए।
उत्तर प्रदेश में मानसून की आक्रामक एंट्री के साथ ही हाहाकार मचा हुआ है। पश्चिमी और मध्य यूपी में मौसम विभाग (IMD) द्वारा जारी किए गए भारी बारिश के अलर्ट के बीच बदायूं जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पिछले दो दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और भयंकर जलभराव को देखते हुए जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बदायूं के जिलाधिकारी (DM) ने कक्षा 8वीं तक के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को आगामी दो दिनों के लिए पूरी तरह से बंद रखने का आपातकालीन आदेश जारी कर दिया है। लगातार हो रही इस मानसूनी आफत ने पूरे जिले की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।10 और 11 जुलाई को स्कूलों में पूर्ण अवकाश: नियम तोड़ा तो स्कूल प्रबंधन पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाईबदायूं के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) नवीन कुमार ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि जिलाधिकारी के विशेष निर्देश पर मौसम की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए 10 जुलाई शुक्रवार और 11 जुलाई शनिवार को कक्षा एक से आठ तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। शिक्षा विभाग ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि सभी बोर्डों के विद्यालय इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें। यदि किसी भी शिक्षण संस्थान ने नियमों का उल्लंघन कर बच्चों को स्कूल बुलाया, तो उनके खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत तुरंत कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी।12 जुलाई को रविवार के बावजूद खुलेंगे स्कूल: 'हरितमा ऐप' पर जियोटैगिंग के साथ मनेगा पौधरोपण उत्सवहालांकि, इस मानसूनी छुट्टी के बीच एक विशेष प्रशासनिक व्यवस्था भी की गई है। बीएसए नवीन कुमार ने स्पष्ट किया कि 12 जुलाई रविवार को प्रदेश सरकार के महत्वाकांक्षी 'वृहद पौधरोपण अभियान' को सफल बनाने के लिए सभी स्कूल अनिवार्य रूप से खोले जाएंगे। इस दिन सभी शिक्षक, छात्र और उनके अभिभावक एक साथ मिलकर विद्यालय परिसरों में सघन पौधरोपण करेंगे। रोपे गए इन पौधों की लाइव प्रगति और प्रामाणिकता दर्ज करने के लिए सरकार के आधिकारिक 'हरितमा ऐप' (Haritma App) पर जियोटैगिंग (Geotagging) कर उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया और विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप्स पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।बदायूं में 9 दिन में रिकॉर्ड 197.75 MM मूसलाधार बारिश: उफने नाले, 2 फीट तक डूबी शहर की गलियांमौसम के आंकड़ों की बात करें तो जुलाई के शुरुआती नौ दिनों के भीतर ही बदायूं में रिकॉर्ड 197.75 मिलीमीटर (MM) बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो कि इस महीने की औसत वर्षा (268.50 MM) के बेहद करीब है। गुरुवार सुबह तक ही जिले में 46.75 एमएम और बदायूं शहर में अकेले 57 एमएम झमाझम बारिश दर्ज की गई। इस मूसलाधार बरसात से जहां एक तरफ लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय बिजली व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। चौक नाले उफनकर मुख्य मार्गों पर आ गए हैं, जिससे गांधी ग्राउंड समेत शहर की प्रमुख गलियों में दो-दो फीट तक पानी भर गया है और ग्रामीण इलाकों में लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं।वीआईपी कॉलोनियों और मुख्य बाजारों में घुसा पानी: फसलों को भारी नुकसान, सब्जियों के दाम आसमान परजल निकासी के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण यह मानसूनी बारिश आम जनता के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। शहर की पॉश कॉलोनियों से लेकर प्रमुख व्यावसायिक बाजारों तक में पानी जमा हो गया है, जिससे सैकड़ों दुकानों और घरों के अंदर पानी घुसने से व्यापारियों और आम लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। कृषि क्षेत्र की बात करें तो इस बारिश से धान की रोपाई के काम में तो तेजी आई है, लेकिन मक्के की खड़ी फसल, हरी सब्जियों और टमाटर के खेतों को भारी नुकसान पहुंचा है। इस बर्बादी का सीधा असर स्थानीय मंडियों पर पड़ा है, जिससे बाजार में हरी सब्जियों की कीमतों में अचानक भारी उछाल आ गया है।कानपुर देहात में भी आज कक्षा 8वीं तक के स्कूलों में छुट्टी घोषित: बीएसए ने जारी किया आदेशबदायूं के साथ-साथ मध्य उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में भी मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी का बड़ा असर देखा जा रहा है। कानपुर देहात के बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार पांडेय ने 10 जुलाई को मूसलाधार बारिश की प्रबल संभावना को देखते हुए छात्रों की सुरक्षा के मद्देनजर कक्षा 1 से 8वीं तक के सभी बोर्डों (UP Board, CBSE, ICSE) के स्कूलों में आज एक दिन का अवकाश घोषित कर दिया है। उन्होंने कहा कि मौसम की पल-पल की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और छात्रों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
भारी बारिश और जलभराव के चलते मेरठ-हापुड़ समेत 9 जिलों में आज स्कूल बंद, डीएम का सख्त एक्शन
उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता ने अब एक बेहद गंभीर और आक्रामक रूप ले लिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अगले 24 घंटों के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश का 'रेड अलर्ट' (Red Alert) जारी किए जाने के बाद, शासन और प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पश्चिमी यूपी के मेरठ, हापुड़ और बागपत समेत नौ प्रमुख जिलों के जिलाधिकारियों (DM) ने आज, 10 जुलाई 2026 शुक्रवार को कक्षा 12वीं तक के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को पूरी तरह से बंद रखने का एक आपातकालीन आदेश जारी कर दिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण इन क्षेत्रों के जनजीवन पर बहुत बुरा असर पड़ा है।इन 9 जिलों में कक्षा 12वीं तक पूर्ण अवकाश घोषित: आदेश का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर होगी एफआईआरप्रशासनिक सूत्रों से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, जिन नौ प्रमुख जिलों में आज स्कूल बंद रखने का सख्त फैसला लिया गया है, उनमें मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, सहारनपुर, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, हापुड़ और कासगंज शामिल हैं, जहां 12वीं तक के सभी शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) ने सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्रबंधकों को निर्देश जारी किया है कि वे जिलाधिकारी के इस आदेश का कड़ाई से और बिना किसी लापरवाही के अनुपालन सुनिश्चित करें। शिक्षा विभाग ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि कोई भी स्कूल या कॉलेज इस आपातकालीन आदेश का उल्लंघन करता हुआ पाया गया या बच्चों को स्कूल बुलाता है, तो उस शिक्षण संस्थान के खिलाफ महामारी और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत तत्काल कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।बदायूं में 2 दिनों के लिए कक्षा 8 तक के स्कूल बंद: 12 जुलाई को हरितमा ऐप पर जियोटैगिंग के साथ खुलेंगे संस्थानइसी बीच, बदायूं जिले से एक और बड़ी प्रशासनिक अपडेट सामने आई है। बदायूं के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी नवीन कुमार ने सूचित किया है कि डीएम के विशेष आदेश पर मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए कक्षा 1 से लेकर कक्षा 8 तक के सभी विद्यालयों में शुक्रवार 10 जुलाई और शनिवार 11 जुलाई को दो दिनों का पूर्ण अवकाश घोषित किया गया है। हालांकि, रविवार 12 जुलाई को एक विशेष राजकीय व्यवस्था के तहत सभी स्कूल खोले जाएंगे। इस दिन प्रदेश सरकार के वृहद पौधरोपण अभियान को सफल बनाने के लिए सभी शिक्षक, छात्र और उनके अभिभावक मिलकर स्कूल परिसरों में पौधे लगाएंगे। इन पौधों की लाइव जियोटैगिंग (Geotagging) करने के लिए सरकार के आधिकारिक 'हरितमा ऐप' (Haritma App) पर तस्वीरें अपलोड की जाएंगी और उन्हें सोशल मीडिया व विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप्स पर अनिवार्य रूप से साझा करना होगा।मौसम विभाग की खौफनाक चेतावनी: 11 जुलाई तक पूरे यूपी में मूसलाधार आफत, गिरेगा पाराआईएमडी लखनऊ (IMD Lucknow) के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, संभल और बदायूं समेत कई जिलों में प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिल सकता है, जहां अत्यधिक भारी वर्षा की आशंका जताई गई है। मौसम कार्यालय ने पूरे प्रदेश के लिए बुलेटिन जारी करते हुए कहा है कि 11 जुलाई तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में व्यापक और मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहेगा, जिससे अगले दो से तीन दिनों के भीतर तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है। राजधानी लखनऊ में भी बृहस्पतिवार को रिकॉर्ड 27.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिससे वहां की सापेक्ष आर्द्रता 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है। लखनऊ और उसके आसपास के इलाकों में अगले 24 घंटों में कड़कड़ाती बिजली और गरज के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है।बुलंदशहर में दीवार गिरने से बड़ा हादसा, गाजियाबाद-नोएडा में जलभराव से धंसी सड़केंइस मानसूनी बारिश ने उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में तबाही की कहानियां भी लिखनी शुरू कर दी हैं। बुलंदशहर के पुलिस क्षेत्राधिकारी शोभित कुमार ने बताया कि जिले के मुंडाखेड़ा गांव में शाम करीब पांच बजे मूसलाधार बारिश के दबाव के कारण एक विशाल दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। इस मलबे के नीचे एक खाली भूखंड के बगल में अस्थायी तंबू लगाकर रह रहे छह मजदूर बुरी तरह दब गए। स्थानीय पुलिस और रेस्क्यू टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर सभी को बाहर निकाला, लेकिन दुर्भाग्यवश इस दर्दनाक हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली से सटे गाजियाबाद और नोएडा में भी भारी बारिश से सड़कें समंदर में तब्दील हो गई हैं, जिससे घंटों लंबा ट्रैफिक जाम लगा रहा। गाजियाबाद के वसुंधरा सेक्टर-13 इलाके में तो पानी के भारी दबाव के चलते एक मुख्य सड़क का बड़ा हिस्सा गहरे गड्ढे में तब्दील होकर धंस गया, जिससे प्रशासन ने उस रूट को तुरंत सील कर दिया है।
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण और व्यावहारिक संदेश दिया है। कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के 41वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए राज्यपाल ने साफ कहा कि युवतियों को प्रशासनिक सेवा (IAS) या शिक्षक जैसे बड़े पदों पर जाने की इच्छा रखने से पहले एक 'विशेषज्ञ मां' (Expert Mom) बनने का गुण सीखना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यावसायिक सफलता कभी भी पारिवारिक जिम्मेदारियों और संस्कारों की कीमत पर नहीं मिलनी चाहिए। बेटियों को आत्मनिर्भर और शिक्षित बनने के साथ-साथ अपनी मां से वे मूल्य भी सीखने चाहिए जिससे वे शादी के बाद अपने नए परिवार को सुचारू रूप से संभाल सकें।सास हलुआ बनाने को कहे तो मोबाइल न निकालें बेटियां: राज्यपाल ने दिया घरेलू कला का व्यावहारिक उदाहरणअपने संबोधन के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आज की आधुनिक जीवनशैली पर चुटकी लेते हुए एक बेहद व्यावहारिक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा कतई नहीं होना चाहिए कि शादी के बाद जब सास घर में हलुआ बनाने को बोले, तो बहू तुरंत अपना मोबाइल फोन निकालकर यूट्यूब पर रेसिपी देखने लगे और अधपका खाना तैयार कर दे। उन्होंने बेटियों को सीख दी कि घर के कामकाज और खाना बनाने की बुनियादी कला हर किसी को आनी चाहिए। राज्यपाल ने भारतीय पारिवारिक व्यवस्था की वकालत करते हुए कहा कि बहुएं अपनी सास की जितनी सेवा करेंगी, घर में उतनी ही सुख-शांति रहेगी। इससे नौकरी करने में आने वाली बाधाएं और छोटी-मोटी पारिवारिक समस्याएं अपने आप ही खत्म हो जाएंगी।सभी यूनिवर्सिटी तैयार करें 'गर्भसंस्कार' का सिलेबस: देश में बढ़ती दिव्यांगता पर जताई गहरी चिंतादीक्षांत समारोह के मंच से राज्यपाल ने समाज के स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ी के चरित्र निर्माण को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक निर्देश जारी किया। उन्होंने सीएसजेएमयू सहित उत्तर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को अपने पाठ्यक्रम में 'गर्भसंस्कार' (Garbh Sanskar) से जुड़ा एक विशेष सिलेबस शामिल करने का कड़ा निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस पाठ्यक्रम में हर गर्भवती महिला को शामिल करने का प्रयास किया जाना चाहिए। देश में दिव्यांगता की दर 3 फीसदी से बढ़कर 4 फीसदी होने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि शहरों से लेकर गांवों तक की हर गर्भवती महिला को समय पर अल्ट्रासाउंड कराना चाहिए और डॉक्टरों की सलाह लेनी चाहिए। कई बार गर्भ में शिशु के अंगों का विकास सही से नहीं हो पाता, ऐसे में चिकित्सकीय परामर्श पर सख्ती से अमल करना अनिवार्य है।शादी के बाद भी जारी रखें शिक्षा और करियर: मेडल जीतने में बेटियों ने रचा 82% का स्वर्णिम इतिहासछात्राओं का हौसला बढ़ाते हुए आनंदीबेन पटेल ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि युवतियों को शादी के बंधन में बंधने के बाद अपनी शिक्षा और करियर को बीच में बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि शादी के बाद भी अपनी पढ़ाई जारी रखें और अपने अर्जित ज्ञान व कौशल का उपयोग राष्ट्र निर्माण (Nation Building) के लिए करें। इस भव्य दीक्षांत समारोह में कुल 1,07,713 छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिसमें सबसे गौरवशाली बात यह रही कि कुल पदकों (Medals) में से लगभग 82 प्रतिशत मेडल बेटियों ने अपने नाम किए। राज्यपाल ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर छात्राओं की जमकर सराहना की और उन्हें समाज का असली मार्गदर्शक बताया।माता-पिता की निगरानी में थोड़ी सी चूक भी बर्बाद कर सकती है भविष्य: गिरते नैतिक मूल्यों पर कड़ा प्रहारअभिभावकों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए राज्यपाल ने आगाह किया कि बच्चों का स्कूल या कॉलेज में एडमिशन करवा देने मात्र से माता-पिता का कर्तव्य पूरा नहीं हो जाता। उन्होंने कहा, अभिभावकों को हर पल यह पता होना चाहिए कि उनके बच्चे शैक्षणिक संस्थानों में जाने के बाद क्या कर रहे हैं। आपकी निगरानी में हुई एक छोटी सी चूक भी उनके पूरे भविष्य को अंधकार में धकेल सकती है। समाज में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों और घरेलू हिंसा का जिक्र करते हुए उन्होंने एक बेहद दुखद घटना का भी संदर्भ दिया जहां एक बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसकी मृत्यु हो गई थी। उन्होंने कहा कि यदि देश में डिग्रियां बढ़ रही हैं लेकिन नैतिक मूल्य गिर रहे हैं और महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराध जारी हैं, तो यह हमारी शिक्षा प्रणाली की वास्तविक और चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है। शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर चरित्र निर्माण का माध्यम बनाना होगा।
ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड पर खेले गए चौथे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम की वापसी की तमाम उम्मीदें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। एक बार फिर भारतीय बल्लेबाजी क्रम के बेहद निराशाजनक और फ्लॉप प्रदर्शन के चलते मेहमान टीम को 9 विकेट की करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। इस एकतरफा जीत के साथ ही इंग्लैंड ने पांच मैचों की इस हाई-प्रोफाइल टी20 सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है। भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ा झटका यह है कि पिछले 7 सालों के क्रिकेट इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब टीम इंडिया ने लगातार दो टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज गंवाई हैं, जिसने टीम के मौजूदा टी20 फॉर्मेट और रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।श्रेयस अय्यर की 80 रनों की जुझारू पारी भी गई बेकार, बाकी बल्लेबाजों ने किया सरेंडरलगातार मिल रही हार के बाद इस करो या मरो वाले मुकाबले में भारतीय टॉप ऑर्डर से एक दमदार और एकजुट प्रदर्शन की उम्मीद थी। इसके विपरीत, पूरी बैटिंग यूनिट इंग्लिश गेंदबाजों के सामने पूरी तरह लाचार नजर आई। इस पूरे खराब दौर में सिर्फ कार्यवाहक कप्तान श्रेयस अय्यर ही अकेले फाइटर की तरह क्रीज पर डटे रहे। अय्यर ने मुश्किल परिस्थितियों में सूझबूझ का परिचय देते हुए 49 गेंदों में नाबाद 80 रनों की एक बेहद शानदार और जुझारू पारी खेली, जिसने टीम को एक बेहद शर्मनाक स्कोर पर सिमटने से बचा लिया। हालांकि, दूसरे छोर से किसी भी बल्लेबाज का साथ न मिलने के कारण भारतीय टीम निर्धारित 20 ओवरों में केवल 158 रनों का मामूली स्कोर ही खड़ा कर सकी, जो ब्रिस्टल की इस खूबसूरत बैटिंग पिच पर बहुत कम था।हैरी ब्रूक और फिल सॉल्ट का तूफान: 37 गेंद पहले इंग्लैंड ने एकतरफा अंदाज में जीता मैच159 रनों के इस लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लिश टीम के लिए राह बिल्कुल आसान रही। ओपनर फिल सॉल्ट और कप्तान हैरी ब्रूक ने मैदान के चारों तरफ आकर्षक और आक्रामक स्ट्रोक्स लगाते हुए भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा दीं। दोनों ने शुरू से ही रन चेज को पूरी तरह से एकतरफा बना दिया और भारतीय गेंदबाजों को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। कप्तान हैरी ब्रूक ने नाबाद 79 और फिल सॉल्ट ने नाबाद 59 रनों की आतिशी पारियां खेलकर अपनी टीम को 37 गेंद शेष रहते ही एक ऐतिहासिक और नौ विकेट की विशाल जीत दिला दी। यह हार साफ दर्शाती है कि खेल के सबसे छोटे प्रारूप में भारतीय टीम इस समय इंग्लैंड के मुकाबले कितनी पीछे छूट गई है।'हम रणनीति को मैदान पर लागू करने में पूरी तरह फेल रहे'—हार के बाद बोले कप्तान श्रेयस अय्यरमैच के बाद हुई पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन सेरेमनी में कप्तान श्रेयस अय्यर ने अपनी निराशा छुपाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने ईमानदारी से स्वीकार किया कि 158 रन का स्कोर बोर्ड पर बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं था। श्रेयस ने गेंदबाजों के बचाव और अपनी रणनीति का खुलासा करते हुए कहा, यह नतीजा हमारे लिए बेहद निराशाजनक है। जब हम गेंदबाजी करने उतरे, तो मैंने गेंदबाजों से साफ कहा था कि वे अपनी लाइन और लेंथ को लगातार रिपीट करें, क्योंकि मिडिल और लेग स्टंप के टॉप पर रन बनाना इस पिच पर आसान नहीं था। लेकिन हमारे गेंदबाज उस प्लान को मैदान पर एक्जीक्यूट करने में बुरी तरह विफल रहे, जिसका नतीजा यह हुआ कि विपक्षी टीम ने इतनी आसानी और तेजी से इस लक्ष्य को हासिल कर लिया।संजू सैमसन की होगी वापसी? 15 साल के वैभव सूर्यवंशी के फ्लॉप शो के बाद प्लेइंग इलेवन पर उठे सवालअब भारतीय टीम प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती साउथैम्पटन में होने वाले पांचवें और अंतिम टी20 मैच में अपनी साख बचाने की होगी। सीरीज हारने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारतीय प्लेइंग इलेवन (Playing XI) में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलता है या नहीं। युवा सनसनी के रूप में टीम में शामिल किए गए 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को मौका देने का दांव पूरी तरह उल्टा पड़ गया है। हालांकि इस युवा खिलाड़ी ने प्रतिभा की झलक जरूर दिखाई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दबाव उनके लिए फिलहाल काफी मुश्किल साबित हो रहा है। ऐसे में क्रिकेट फैंस और विश्लेषकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या अगले मैच में अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन (Sanju Samson) को अंतिम एकादश में मौका देकर बल्लेबाजी को मजबूती दी जाएगी।
फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) के नॉकआउट चरण में इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी मोरक्कन फुटबॉल टीम को एक बहुत बड़ा और तगड़ा झटका लगा है। फ्रांस के खिलाफ होने वाले हाई-प्रोफाइल क्वार्टर फाइनल मुकाबले से ठीक पहले टीम के सबसे इन-फॉर्म और खतरनाक अटैकर इस्माइल सैबारी (Ismael Saibari) आधिकारिक तौर पर टीम से बाहर हो गए हैं। मैसाचुसेट्स के खेल मैदान पर होने वाले इस ऐतिहासिक मैच में मोरक्को को अपने इस स्टार खिलाड़ी की कमी बेहद खलने वाली है। चिकित्सा टीम और कोच द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सैबारी की हैमस्ट्रिंग इंजरी (Hamstring Injury) इतनी गंभीर है कि वे इस महत्वपूर्ण मैच के लिए मैदान पर उतरने की स्थिति में बिल्कुल नहीं हैं।कनाडा के खिलाफ मैच में लगी थी चोट: सिर्फ 22 मिनट में छोड़ना पड़ा था मैदानइस 25 वर्षीय होनहार फॉरवर्ड खिलाड़ी के चोटिल होने का यह पूरा वाकया कनाडा के खिलाफ राउंड ऑफ 16 के बेहद कड़े मुकाबले के दौरान हुआ था। मैच में अभी केवल 22 मिनट का ही खेल पूरा हुआ था कि एक तेज अटैकिंग रन लेते समय इस्माइल सैबारी अचानक मैदान पर ही रुक गए और उन्होंने दर्द से कराहते हुए अपने पैर को पकड़ लिया। उन्होंने तुरंत टीम के मेडिकल स्टाफ को इशारा किया कि वे अब आगे खेल जारी नहीं रख पाएंगे, जिसके बाद उन्हें मैदान से बाहर ले जाया गया। तभी से मोरक्को के फुटबॉल प्रेमियों और खेल विश्लेषकों के बीच इस बात की चिंता चरम पर थी कि क्या वे फ्रांस जैसी दिग्गज टीम के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मैच के लिए समय पर फिट हो पाएंगे या नहीं।मुख्य कोच मोहम्मद ओउआबी ने की पुष्टि: वर्ल्ड कप कैंपेन खत्म होने का मंडराया खतरामुकाबले से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मोरक्को के मुख्य कोच मोहम्मद ओउआबी (Mohamed Ouabi) ने खेल जगत की इन आशंकाओं पर अपनी आधिकारिक मुहर लगा दी। कोच ने बेहद निराश मन से पुष्टि की कि दो मैचों के बीच का समय बहुत कम होने के कारण सैबारी की रिकवरी समय पर पूरी नहीं हो सकी है, जिसके चलते 'लेस ब्लेस' (फ्रांसीसी टीम) के खिलाफ उनका खेलना पूरी तरह नामुमकिन हो चुका है। हालांकि, कोच ओउआबी ने एक उम्मीद की किरण जगाते हुए कहा कि वे प्रार्थना कर रहे हैं कि सैबारी की यह चोट उनके पूरे वर्ल्ड कप कैंपेन को यहीं खत्म न करे और यदि मोरक्को आगे क्वालीफाई करता है तो वे वापसी कर सकें। टूर्नामेंट के ग्रुप स्टेज में लगातार गोल दागकर मोरक्को को शीर्ष पर पहुंचाने वाले खिलाड़ी का बाहर होना एटलस लायंस के लिए एक अपूरणीय क्षति है।सौफियाने रहीमी संभालेंगे सैबारी का मोर्चा: कप्तान अचरफ हकीमी के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारीइस्माइल सैबारी की अनुपस्थिति ने मोरक्कन टीम के कॉम्बिनेशन और सिलेक्शन के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है, विशेष रूप से तब जब सामने डिफेंडिंग चैंपियन फ्रांस जैसी दुनिया की सबसे आक्रामक टीम खड़ी हो। इस शून्य को भरने के लिए मुख्य कोच ने स्टार खिलाड़ी सौफियान रहीमी (Soufiane Rahimi) को फ्रंटलाइन पर भेजने का फैसला किया है। रहीमी से अब अटैकिंग थर्ड में सबसे ज्यादा जिम्मेदारी संभालने की उम्मीद की जा रही है ताकि टीम अपनी उसी आक्रामक रफ्तार और सीधे अप्रोच को बरकरार रख सके जिसने उन्हें क्वार्टर फाइनल तक पहुंचाया है। 2022 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल के इस रीमैच में, जहां फ्रांस ने मोरक्को को 2-0 से हराया था, कप्तान अचरफ हकीमी (Achraf Hakimi) की लीडरशिप वाली इस टीम के पास खुद को साबित करने और पुरानी हार का बदला लेने की बहुत बड़ी चुनौती होगी।
DA बढ़ोतरी के बाद अब मिलेगा 11 साल का बकाया DR एरियर, ममता सरकार ने जारी किया बंपर फंड
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के लाखों बुजुर्ग सरकारी पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनर्स (Family Pensioners) को एक साथ दोहरा बड़ा तोहफा देते हुए वित्तीय गलियारों में हलचल मचा दी है। हाल ही में महंगाई भत्ते (DA) में शानदार बढ़ोतरी करने के बाद अब राज्य प्रशासन ने एक और ऐतिहासिक कल्याणकारी कदम उठाया है। सरकार ने आधिकारिक घोषणा की है कि कोलकाता नगर निगम (KMC) क्षेत्र में बैंकों के माध्यम से पेंशन प्राप्त करने वाले सभी पात्र लाभार्थियों को पिछले 11 वर्षों से अटके हुए डीयरनेस रिलीफ (DR) एरियर का 50 फीसदी हिस्सा अंतरिम राहत (Interim Relief) के रूप में तुरंत प्रदान किया जाएगा। सरकार के इस बड़े फैसले से उन वरिष्ठ नागरिकों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है जो सालों से प्रशासनिक फाइलों में फंसी अपनी गाढ़ी कमाई का इंतजार कर रहे थे।रिकॉर्ड्स वेरिफिकेशन का झंझट खत्म, सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर होगी 50 फीसदी अंतरिम राशिराज्य सरकार के इस क्रांतिकारी फैसले के पीछे एक बेहद संवेदनशील और व्यावहारिक सोच काम कर रही है। दरअसल, कई संबंधित व्यावसायिक बैंकों के पास पुराने पेंशन भुगतान रिकॉर्ड पूरी तरह से प्रमाणित (Certified) नहीं हो पाए थे, जिसकी वजह से पिछले कई वर्षों से बुजुर्गों के एरियर का भुगतान तकनीकी तौर पर अटका हुआ था। सरकारी प्रबंधकों ने यह साफ कर दिया है कि केवल तकनीकी खामियों और रिकॉर्ड सत्यापन में लगने वाले लंबे समय की वजह से राज्य के वरिष्ठ नागरिकों को उनकी वित्तीय राहत से वंचित नहीं रखा जा सकता। इसलिए राज्य के वित्त विभाग ने एक बीच का रास्ता निकालते हुए अंतरिम व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत कुल अनुमानित एरियर की आधी रकम बिना किसी देरी के सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में क्रेडिट कर दी जाएगी और बाकी की 50 फीसदी राशि का भुगतान रिकॉर्ड्स के पूर्ण सत्यापन के बाद चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।वर्ष 2008 से 2019 तक का मिलेगा मोटा पैसा, ROPA और AICPI फॉर्मूले से होगा सटीक कैलकुलेशनवित्त विभाग द्वारा आधिकारिक रूप से जारी की गई नवीनतम अधिसूचना के अनुसार, इस बंपर वित्तीय पैकेज का भुगतान 1 अप्रैल 2008 से लेकर 31 दिसंबर 2019 तक की एक लंबी अवधि के संचित बकाया (Estimated DR Arrears) के आधार पर किया जाएगा। इस भारी-भरकम एरियर राशि की सटीक गणना करने के लिए अकाउंटेंट जनरल (AG), पश्चिम बंगाल के पास उपलब्ध प्रामाणिक दस्तावेजों, तत्कालीन ROPA 2009 के तहत घोषित की गई आधिकारिक डीआर दरों और ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI) से जुड़े स्थापित फॉर्मूले को आधार बनाया गया है। इस पारदर्शी वित्तीय गणना के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर एक पेंशनभोगी को उनकी पात्रता के अनुसार बिल्कुल सटीक और न्यायसंगत राशि का भुगतान मिल सके।WBiFMS के तहत लॉन्च हुआ बैंक पेंशन मैनेजमेंट पोर्टल, बैंकों को युद्धस्तर पर डेटा अपडेट करने के निर्देशइस पूरी जटिल भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने आधुनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल किया है। सरकार ने 'वेस्ट बंगाल इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम' (WBiFMS) के अंतर्गत एक विशेष 'बैंक पेंशन मैनेजमेंट पोर्टल' (Bank Pension Management Portal) को लाइव कर दिया है। राज्य सरकार ने सभी संबंधित सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बैंकों को सख्त कूटनीतिक निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने बैंक में पंजीकृत पेंशनर्स का संपूर्ण डेटा इस केंद्रीय पोर्टल पर तत्काल सत्यापित करें। बैंकों को पुरानी पेंशन भुगतानों की हिस्ट्री को युद्धस्तर पर अपडेट करने को कहा गया है ताकि जैसे ही डेटा वेरिफिकेशन का काम आगे बढ़े, बकाया वित्तीय राहत की शेष राशि की समयसीमा और भुगतान प्रक्रिया की अलग से घोषणा की जा सके।20% DA बढ़ोतरी के बाद पेंशनर्स के लिए दूसरी बड़ी राहत, छठे वेतन आयोग के बीच मिला सहारागौरतलब है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में अपने राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 1 अक्टूबर से महंगाई भत्ते (DA) में 20 प्रतिशत की एकमुश्त भारी बढ़ोतरी की घोषणा की थी, जिससे राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के डीए का फासला काफी हद तक सिमट गया है। हालांकि, जहां एक तरफ केंद्र सरकार में आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लागू करने की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है, वहीं पश्चिम बंगाल के कर्मचारी वर्तमान में 5वें और 6ठे वेतन आयोग के ढांचे के तहत वेतन और भत्ते प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में 11 साल की लंबी अवधि के डीआर एरियर के 50 प्रतिशत हिस्से का यह त्वरित भुगतान राज्य के बुजुर्ग पेंशनभोगियों के लिए इस महंगाई के दौर में एक बेहद संजीवनी और बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
धमाल 4 की रिलीज के बीच जानें पिछले तीन पार्ट्स का बजट और कमाई का पूरा लेखा-जोखा
बॉलीवुड के सबसे प्रतिष्ठित और लोकप्रिय कॉमेडी फ्रेंचाइजी में से एक 'धमाल' का चौथा इंस्टॉलमेंट यानी 'धमाल 4' (Dhamaal 4) आज 10 जुलाई 2026 को देश भर के सिनेमाघरों में रिलीज हो चुका है। अजय देवगन और रितेश देशमुख की मुख्य भूमिकाओं से सजी इस एक्शन-एडवेंचर कॉमेडी फिल्म को लेकर दर्शकों और समीक्षकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इस फ्रेंचाइजी की हर फिल्म ने दर्शकों को हंसने पर मजबूर किया है, जिसके कारण 'धमाल 4' से भी बॉक्स ऑफिस पर बंपर ओपनिंग की उम्मीदें लगाई जा रही हैं। फिल्म की ग्रैंड रिलीज के इस खास मौके पर आइए विस्तार से जानते हैं कि धमाल सीरीज के पिछले तीनों सीक्वल्स का बॉक्स ऑफिस पर कैसा प्रदर्शन रहा था और किस फिल्म ने कितने करोड़ का कारोबार किया था।साल 2007 में शुरू हुआ था सफर: जानें सिर्फ 19 करोड़ के बजट में बनी 'धमाल' की कुल कमाईइस सुपरहिट कॉमेडी फ्रेंचाइजी की शुरुआत साल 2007 में हुई थी, जब निर्देशक इंद्र कुमार के मार्गदर्शन में पहली फिल्म 'धमाल' (Dhamaal) 7 सितंबर 2007 को बड़े पर्दे पर उतारी गई थी। संजय दत्त, अरशद वारसी, रितेश देशमुख, आशीष चौधरी और जावेद जाफरी की प्रतिष्ठित चौकड़ी से सजी इस फिल्म का निर्माण महज 19 करोड़ रुपये के सीमित बजट में किया गया था। बॉक्स ऑफिस इंडिया के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, फिल्म ने भारतीय बाजार में शानदार प्रदर्शन करते हुए 45.63 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया था। अपने बेहतरीन वन-लाइनर्स और गुदगुदाने वाली कहानी के दम पर यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 'सेमी-हिट' प्रमाणित हुई थी और इसने कल्ट कॉमेडी फिल्मों की सूची में अपनी जगह बनाई।'डबल धमाल' का एवरेज प्रदर्शन: कंगना रनौत और मल्लिका शेरावत की एंट्री के बाद का कलेक्शनफ्रेंचाइजी की भारी सफलता को देखते हुए साल 2011 में इसका दूसरा पार्ट 'डबल धमाल' (Double Dhamaal) रिलीज किया गया। इस बार निर्देशक इंद्र कुमार ने फिल्म के बजट को बढ़ाकर 29 करोड़ रुपये कर दिया था और स्टार कास्ट में कंगना रनौत, मल्लिका शेरावत और सतीश कौशिक जैसे कलाकारों को भी शामिल किया गया। 'डबल धमाल' ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर कुल 61.23 करोड़ रुपये का कारोबार किया था। हालांकि फिल्म अपनी लागत निकालने में पूरी तरह सफल रही, लेकिन समीक्षकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया और दर्शकों के औसत रुझान के चलते इसे बॉक्स ऑफिस पर केवल एक 'एवरेज' फिल्म का टैग मिल सका।180 करोड़ कमाकर 'टोटल धमाल' ने तोड़े थे रिकॉर्ड: अजय देवगन और माधुरी दीक्षित का धमाकाइसके बाद 22 फरवरी 2019 को इस फ्रेंचाइजी का तीसरा और सबसे भव्य सीक्वल 'टोटल धमाल' (Total Dhamaal) सिनेमाघरों में रिलीज हुआ। 113 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ तैयार की गई इस फिल्म में सुपरस्टार अजय देवगन, अनिल कपूर, माधुरी दीक्षित और बोमन ईरानी जैसे दिग्गज कलाकारों की एंट्री हुई। इस मल्टी-स्टारर फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाते हुए भारत में लगभग 180.68 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक कलेक्शन किया। दर्शकों द्वारा फिल्म के क्रेजी स्टंट्स और कॉमेडी टाइमिंग को बेहद पसंद किया गया, जिसके परिणामस्वरूप यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर एक ब्लॉकबस्टर 'हिट' साबित हुई।धुरंधर से क्लैश टलने के बाद आज रिलीज हुई 'धमाल 4': शूटिंग टाइमलाइन और सेंसर सर्टिफिकेटअब बात करते हैं आज रिलीज हुई 'धमाल 4' की, जिसके निर्देशन की कमान एक बार फिर अनुभवी डायरेक्टर इंद्र कुमार ने संभाली है। इस बार फिल्म में अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी और जावेद जाफरी के साथ-साथ रवि किशन, संजय मिश्रा, संजीदा शेख, अंजलि आनंद और विजय पाटकर जैसे टैलेंटेड एक्टर्स स्क्रीन शेयर कर रहे हैं। इस फिल्म की घोषणा निर्देशक ने साल 2024 में की थी और इसका आखिरी शेड्यूल 6 सितंबर 2025 को पूरा हुआ था। यह फिल्म पहले मार्च 2026 में रिलीज होने वाली थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर बड़ी फिल्म 'धुरंधर' के साथ होने वाले महा-क्लैश से बचने के लिए मेकर्स ने इसकी रिलीज डेट को टालकर 10 जुलाई तय किया था। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने धमाल 4 को U/A 13+ सर्टिफिकेट के साथ पास किया है, जो इसे एक परफेक्ट फैमिली एंटरटेनर बनाता है।
वैश्विक कूटनीति और रक्षा समीकरणों को पूरी तरह से उलटते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक बेहद चौंकाने वाला और ऐतिहासिक ऐलान किया है। अंकारा में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) साल 2020 में तुर्की के खिलाफ लगाए गए सभी सख्त आर्थिक और सैन्य प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटाने जा रहा है। गौरतलब है कि यह वही तुर्की है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद की पनाहगाह माने जाने वाले पाकिस्तान (Pakistan) का सबसे करीबी रणनीतिक जोड़ीदार माना जाता है। भारत के खिलाफ हालिया 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान इसी तुर्की के घातक ड्रोनों की मदद से पाकिस्तान ने भारतीय सीमाओं पर नापाक हिमाकत की थी, जिसे भारतीय सेना ने बहादुरी से नाकाम कर दिया था। अब अमेरिका के इस फैसले से दक्षिण एशिया से लेकर पश्चिम एशिया तक खलबली मच गई है।नाटो समिट में एर्दोगन के साथ मंच साझा कर ट्रंप ने दिया बयान, F-35 फाइटर जेट डील पर सस्पेंस बरकरारतुर्की के ऐतिहासिक बेस्टेपे प्रेसिडेंशियल कंपाउंड (Bestepe Presidential Compound) में नाटो शिखर सम्मेलन (NATO Summit) के दौरान तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdogan) के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होकर डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को यह बड़ा संदेश दिया। ट्रंप ने कहा, हम तुर्की पर लगे प्रतिबंधों को आधिकारिक रूप से खत्म करने जा रहे हैं। हालांकि, जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने ट्रंप से सवाल दागा कि क्या इस बैन के हटने के बाद तुर्की को अमेरिका के सबसे खतरनाक पांचवीं पीढ़ी के F-35 स्टील्थ फाइटर जेट बेचे जाएंगे, तो ट्रंप ने कोई सीधा वादा नहीं किया। उन्होंने चालाकी से जवाब देते हुए कहा कि यह फैसला हम आने वाले दिनों में सामूहिक रूप से करेंगे, लेकिन उन्होंने F-35 को दुनिया का अब तक का सबसे अचूक और शक्तिशाली लड़ाकू विमान जरूर स्वीकार किया।रूस से S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने पर लगा था CAATSA बैन, जानिए इतिहासआपको बता दें कि साल 2020 में तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन ने काट्सा (CAATSA) कानून के तहत तुर्की पर यह कड़े प्रतिबंध थोपे थे। तुर्की ने वाशिंगटन की सख्त चेतावनियों को दरकिनार करते हुए रूस से अत्याधुनिक S-400 ट्रम्प मिसाइल डिफेंस सिस्टम (S-400 Missile System) की खरीद की थी। इस सौदे से नाराज होकर अमेरिका ने तुर्की को अपने महत्वाकांक्षी F-35 जॉइंट स्ट्राइक फाइटर प्रोग्राम से बाहर निकाल दिया था और उसके सैन्य अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिए थे। अमेरिकी कांग्रेस द्वारा 2017 में पारित यह अधिनियम स्पष्ट रूप से किसी भी देश को रूस के साथ बड़े रक्षा या खुफिया लेनदेन करने से रोकता है।अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में ट्रंप के फैसले का तीखा विरोध संभव, सीनेटरों ने दी खुली चेतावनीभले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तुर्की को इस सैन्य दलदल से बाहर निकालने के लिए आतुर दिख रहे हों, लेकिन वाशिंगटन की संसद में उनकी इस राह में बड़े रोड़े अटक सकते हैं। अमेरिकी कानून के मुताबिक, प्रतिबंध हटाने के किसी भी कार्यकारी फैसले को कांग्रेस की समीक्षा (Congressional Review) से गुजरना होगा, जहां रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही दलों के सांसद इस पर गंभीर आपत्ति जता सकते हैं। ट्रंप के बेहद करीबी माने जाने वाले सेनेटर लिंडसे ग्राहम (Lindsey Graham) ने पहले ही साफ कर दिया है कि संसद में इस कदम का तगड़ा विरोध होगा। ग्राहम ने 'टर्की टुडे' अखबार से बातचीत में स्पष्ट कहा, कांग्रेस में इस फैसले को लेकर भारी नाराजगी हो सकती है, क्योंकि वर्तमान में इजरायल के साथ तुर्की के तनावपूर्ण संबंध अमेरिकी सांसदों के लिए कतई स्वीकार्य नहीं हैं।पांच F-35 लड़ाकू विमानों की उम्मीद में एर्दोगन; जेडी वेंस और पेंटागन कर रहे हैं कानूनी समीक्षाइस बीच, तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने ट्रंप के इस दोस्ताना रुख पर भारी भरोसा जताते हुए उम्मीद जताई है कि वाशिंगटन जल्द ही उनके फाइटर जेट के ऑर्डर को हरी झंडी देगा। एर्दोगन ने मीडिया के सामने दावा किया कि पूर्व में तुर्की को पांच अत्याधुनिक F-35 एयरक्राफ्ट देने का वादा खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने किया था और वे हमेशा अपनी बात पर कायम रहते हैं। दूसरी ओर, हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) के नेतृत्व में पेंटागन के शीर्ष अधिकारी इस बात की बारीकी से कानूनी समीक्षा कर रहे हैं कि क्या तुर्की ने F-35 तकनीक हासिल करने के लिए अमेरिका द्वारा निर्धारित सख्त सुरक्षा और कानूनी मानदंडों को पूरा कर लिया है या नहीं।
चीन में हाहाकार! चीन के जिनजियांग में जूतों की फैक्ट्री में लगी भीषण आग
पूर्वी चीन के फुजियान प्रांत के जिनजियांग शहर से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को दोपहर के समय यहां स्थित एक विशाल बहुमंजिला जूतों की फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। इस विनाशकारी अग्निकांड में कम से कम 28 लोगों की जिंदा झुलसने से दर्दनाक मौत हो गई। चीन के आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय ने हालात की गंभीरता को देखते हुए फौरन रेस्क्यू टीमों और एक उच्च स्तरीय संयुक्त कार्य दल को घटनास्थल के लिए रवाना किया है। फैक्ट्री से उठती आग की गगनचुंबी लपटों और घने काले धुएं के वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है, जिसे देखकर हर कोई दहल उठा है।दोपहर 12 बजे फूटा मौत का तांडव: धुएं के गुबार के बीच छत पर जिंदगी की भीख मांगते रहे मजदूरसरकारी समाचार एजेंसी 'शिन्हुआ' (Xinhua) और स्टेट ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी (CCTV) से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह भीषण आग दोपहर करीब 12 बजे लगी, जब फैक्ट्री के भीतर सैकड़ों मजदूर काम कर रहे थे। आग जिनजियांग शहर में स्थित 'हुईटेंग शू कंपनी' (Huiteng Shoe Company) की एक बड़ी निर्माण इकाई में लगी। देखते ही देखते आग ने कई मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि मजदूरों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला और दर्जनों लोग जान बचाने के लिए इमारत की छत पर भाग खड़े हुए, जहां वे लंबे समय तक फंसे रहे। वीडियो फुटेज में पूरी इमारत जली हुई, काली और धुएं के विशाल गुबार से घिरी नजर आ रही है।राष्ट्रपति शी जिनपिंग का सख्त फरमान: तलाश अभियान में झोंकी ताकत, जवाबदेही तय करने के कड़े निर्देशइस जघन्य हादसे की खबर मिलते ही बीजिंग में हड़कंप मच गया। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने इस राष्ट्रीय त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को बेहद सख्त लहजे में निर्देश जारी किए हैं। जिनपिंग ने आदेश दिया है कि मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए तलाश और बचाव (Search and Rescue) अभियानों में पूरी ताकत झोंक दी जाए। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि हादसे के असली कारणों का तुरंत पता लगाया जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व प्रबंधन की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ ऐसी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए जो मिसाल बने।फैक्ट्री मालिक और मैनेजर सलाखों के पीछे, कंपनी के सभी बैंक अकाउंट्स पर लगा तालाचीन के कड़े सुरक्षा कानूनों के तहत कार्रवाई करते हुए पुलिस प्रशासन ने त्वरित एक्शन लिया है। शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, हुईटेंग शू कंपनी के मालिक और कारखाने के मुख्य प्रभारियों (Incharges) को पुलिस ने तुरंत हिरासत में ले लिया है। इसके साथ ही भविष्य में कानूनी मुआवजे और जांच को प्रभावित होने से रोकने के लिए कंपनी के सभी कॉर्पोरेट बैंक खातों (Bank Accounts) को तत्काल प्रभाव से सील यानी फ्रीज कर दिया गया है। शहर के फायर डिपार्टमेंट ने बताया कि जिनजियांग को चीन में 'जूतों की राजधानी' कहा जाता है, जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी की बातें सामने आती रही हैं। फिलहाल आग लगने के सटीक तकनीकी कारणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है, और यह भी पता लगाया जा रहा है कि अस्पताल में भर्ती घायलों की वास्तविक स्थिति क्या है।
धर्मांतरण विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन! जबरन इस्लाम कबूल कराने के आरोपी को मिली अंतरिम राहत
मध्य प्रदेश के एक बेहद संवेदनशील और पेचीदा जबरन धर्म परिवर्तन मामले में देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को एक बड़ा और महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने उस व्यक्ति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को आगे बढ़ाने पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिस पर एक पूरे परिवार को डरा-धमकाकर इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर करने का गंभीर आरोप लगा है। इस पूरे कानूनी विवाद में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब मुख्य आरोपी ने खुद को कट्टर सनातनी और हिंदू धर्म का अनुयायी बताते हुए अदालत के सामने अपनी बेगुनाही के पुख्ता सबूत पेश किए।सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ का कड़ा रुख: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को दी चुनौतीजस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस चंद्रशेखर की विशेष खंडपीठ ने इस मामले की गहन सुनवाई करने के बाद याचिकाकर्ता हरमन टेलर के पक्ष में यह अंतरिम आदेश जारी किया। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (MP High Court) के उस पुराने आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस भी जारी किया है, जिसमें हाई कोर्ट ने 'मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम' (MP Freedom of Religion Act) की धारा 3 और 5 के तहत दर्ज एफआईआर (FIR) को निरस्त करने से साफ इनकार कर दिया था। सर्वोच्च अदालत में आरोपी के वकील ने दलील दी कि यह पूरी कानूनी कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है क्योंकि यह एफआईआर शिकायतकर्ता के पति द्वारा इस्लाम अपनाने के करीब आठ साल के लंबे अंतराल के बाद दर्ज की गई है।खुद के हिंदू होने का दावा: क्या है 8 साल पुराने इस धर्मांतरण विवाद की इनसाइड स्टोरी?यह पूरा विवाद एक महिला द्वारा दर्ज कराई गई पुलिस शिकायत से शुरू हुआ था, जिसके पति ने कथित तौर पर हरमन टेलर के प्रभाव में आकर सालों पहले अपना मूल धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था। आरोपी टेलर के कानूनी सलाहकारों ने अदालत के पटल पर आधिकारिक दस्तावेज रखते हुए स्पष्ट किया कि टेलर और उनका पूरा परिवार पीढ़ियों से हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करता आ रहा है, ऐसे में उनके द्वारा किसी को इस्लामिक धर्मांतरण के लिए उकसाने का आरोप पूरी तरह निराधार और तर्कहीन प्रतीत होता है। दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष का दावा है कि आरोपी के प्रभाव में आने के बाद उस व्यक्ति ने अपनी पत्नी और नाबालिग बेटे पर भी मुस्लिम बनने का भारी दबाव बनाना शुरू कर दिया था, जिसके बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी।हाई कोर्ट ने ट्रायल को बताया था जरूरी, बयानों के आधार पर याचिका की थी खारिजसुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से पहले याचिकाकर्ता हरमन टेलर ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में आपराधिक कार्यवाही को रद्द (Quash) करने की गुहार लगाई थी। उस समय टेलर ने दलील दी थी कि केस डायरी में ऐसा कोई भी प्रत्यक्ष या वैज्ञानिक सबूत मौजूद नहीं है जो यह साबित कर सके कि उन्होंने कभी भी शिकायतकर्ता महिला या उसके मासूम बेटे का जबरन मजहब बदलने का प्रयास किया था। हालांकि, तत्कालीन हाई कोर्ट बेंच ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा था कि आरोपी पर लगे आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं और महिला व उसके नाबालिग बेटे के बयानों में याचिकाकर्ता की भूमिका का स्पष्ट उल्लेख है। हाई कोर्ट ने इसे ट्रायल कोर्ट का विषय बताते हुए राहत देने से मना कर दिया था, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
'गोली कांड' पर कपिल देव का बड़ा धमाका! योगराज सिंह के पिस्तौल वाले विवाद पर पहली बार तोड़ी चुप्पी
भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे महान ऑलराउंडर और 1983 विश्व कप विजेता कप्तान कपिल देव ने आखिरकार युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह द्वारा दिए गए बेहद सनसनीखेज और विवादित 'गोली कांड' वाले बयान पर अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दे दी है। लंबे समय से इस मामले पर मौन साधे रहे 'हरियाणा हरिकेन' ने साफ लफ्जों में कहा कि वे योगराज को आज भी अपना एक पुराना और अच्छा दोस्त मानते हैं, लेकिन वे अपनी खूबसूरत जिंदगी में कड़वाहट और नकारात्मकता को कोई जगह देने के बिल्कुल भी पक्ष में नहीं हैं। कपिल देव के इस परिपक्व और संतुलित बयान ने सोशल मीडिया से लेकर पूरे क्रिकेट गलियारे में एक नई बहस छेड़ दी है।क्या था योगराज सिंह का पिस्तौल वाला 'गोली कांड' विवाद, जिसने मचाया था तहलका?दरअसल, टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज योगराज सिंह हमेशा से ही अपने बेबाक और कई बार बेहद विवादित बयानों के लिए सुर्खियों में रहते हैं। कुछ समय पहले उन्होंने एक इंटरव्यू में बेहद चौंकाने वाला दावा किया था। योगराज का आरोप था कि कपिल देव के नॉर्थ जोन, हरियाणा और फिर भारतीय टीम का कप्तान बनने के बाद उन्हें बिना किसी ठोस वजह के जानबूझकर टीम से ड्रॉप कर दिया गया था। इसी खुन्नस और गुस्से में आकर योगराज ने दावा किया था कि वे एक बार पिस्तौल (पिस्तौल कांड) लेकर चंडीगढ़ के सेक्टर-9 स्थित कपिल देव के घर पहुंच गए थे और वहां उन्होंने जमकर गालियां दी थीं। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भारी बवाल मच गया था और उनके बेटे युवराज सिंह को इस पर बेहद शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी।'मुझे कड़वे लोगों से मिलना पसंद नहीं'—कपिल देव ने पॉडकास्ट में खोलकर रख दिया अपना दिलहाल ही में स्पोर्ट्स तक (Sports Tak) के एक विशेष पॉडकास्ट में जब शो के एंकर ने कपिल देव से योगराज के इस डरावने और विवादित दावे पर सवाल पूछा, तो दिग्गज क्रिकेटर ने बेहद सहजता से मुस्कुराते हुए जवाब दिया। कपिल देव ने कहा कि मुझे नहीं पता कि वह असल में क्या कहना चाह रहे हैं, लेकिन मेरी तरफ से आज भी दोस्ती का हाथ बढ़ा हुआ है। उन्होंने आगे एक बेहद गहरी बात कही कि मुझे अपनी जिंदगी में कड़वे और नकारात्मक सोच वाले लोगों के साथ वक्त बिताना कतई पसंद नहीं है। मैं हमेशा खुश रहने वाले और सकारात्मक लोगों के आसपास रहना चाहता हूं। जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन इंसान को पुरानी बातें भूलकर हमेशा आगे बढ़ना चाहिए।युवराज सिंह की सफलता का जिक्र कर दी खास सलाह: कड़वे इंसान के लिए दुनिया में जगह नहींकपिल देव ने बिना किसी लाग-लपेट के योगराज सिंह को अपने बेटे युवराज सिंह की महानता और सफलता की याद दिलाते हुए एक पितातुल्य सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि योगराज के बेटे (युवराज सिंह) ने भारतीय क्रिकेट के लिए जो किया है, वह बेहद अद्भुत है। योगराज को एक बेहद खुश और संतुष्ट इंसान होना चाहिए। इस दुनिया में किसी भी व्यक्ति को सबकुछ नहीं मिलता—कभी आपको सफलता मिलती है, तो कभी आपके परिवार या बच्चों को। आखिर में आपकी खुशी मायने रखती है, आपका कड़वापन नहीं। इस पूरी दुनिया में एक कड़वे और ईर्ष्यालु इंसान के लिए कोई अच्छी जगह नहीं है। किसी भी परिस्थिति पर आपका रिएक्शन ही यह तय करता है कि आप अंदर से कैसे इंसान हैं।बचपन की दोस्ती और तलाक का उदाहरण देकर पुरानी यादों को किया ताजाइंटरव्यू के आखिरी हिस्से में कपिल देव थोड़े भावुक भी नजर आए। उन्होंने अपने और योगराज के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि हम दोनों बचपन के दोस्त हैं, हम एक साथ चंडीगढ़ की गलियों में क्रिकेट खेलकर बड़े हुए और हमने एक साथ बेहद खूबसूरत वक्त बिताया है। बाद में हमारे रास्ते अलग हो गए। कपिल ने एक अनोखा उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे शादी के बाद अगर किसी का तलाक हो जाता है, तो भी इंसान को उस शादी के अच्छे और खूबसूरत पलों को नहीं भूलना चाहिए। ठीक उसी तरह, मैं भी योगराज के साथ बिताए सिर्फ अच्छे दिनों को याद रखना चाहता हूं। अगर योगराज कभी सामने आकर मुझे गले लगाना चाहेंगे, तो मुझे उसमें कोई आपत्ति नहीं होगी।
केंद्र में सत्ता की बागडोर संभालने के बाद से ही देश की आधी आबादी को उनका हक दिलाने की दिशा में मोदी सरकार अपने सबसे महत्वाकांक्षी एजेंडे 'महिला आरक्षण विधेयक' (Women's Reservation Bill) को अमलीजामा पहनाने के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी है। बीते संसदीय सत्र में इस ऐतिहासिक विधेयक के साथ-साथ परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने के कारण सरकार को रणनीतिक रूप से कदम पीछे खींचने पड़े थे। इस विधायी झटके को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिपहसालारों ने बेहद गंभीरता से लिया है। सूत्रों के मुताबिक, आगामी मॉनसून सत्र में इस बिल को हर हाल में पारित कराकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को पूरी तरह अलग-थलग करने के लिए एनडीए (NDA) के फ्लोर मैनेजरों ने पर्दे के पीछे से एक अभूतपूर्व और अचूक चक्रव्यूह तैयार कर लिया है।द्रमुक की कांग्रेस से टूटी कसम: तमिलनाडु का सियासी भूचाल अब दिल्ली में लाएगा बड़ा बदलावइस पूरे सियासी अंकगणित में सबसे दिलचस्प और गेम-चेंजर मोड़ दक्षिण भारत की राजनीति से आ रहा है। तमिलनाडु में कांग्रेस और द्रमुक (DMK) का पुराना गठबंधन आधिकारिक तौर पर टूटने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) लगातार द्रमुक नेतृत्व के साथ अनौपचारिक संवाद बनाए हुए है। लोकसभा में 22 सांसदों की भारी-भरकम ताकत रखने वाली द्रमुक ने बीते सत्र में इस विधेयक का पुरजोर विरोध किया था, लेकिन अब बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच द्रमुक कांग्रेस को कड़ा संदेश देने के लिए संसद के पटल पर सरकार की परोक्ष मदद कर सकती है। द्रमुक के रणनीतिकारों ने संकेत दिए हैं कि वे सत्र के दौरान अपनी अंतिम रणनीति का खुलासा करेंगे, जो विपक्षी खेमे की एकजुटता को बड़ा झटका दे सकता है।यूपी चुनाव 2027 पर टिकी सपा की नजर: 'आरक्षण के भीतर आरक्षण' की शर्तों से गरमाई सियासतदूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले समाजवादी पार्टी (SP) के मुखिया भी इस बहती गंगा में हाथ धोने की फिराक में हैं। वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सपा ने महिला वोट बैंक को साधने के लिए सरकार के सामने अपनी शर्तें रखनी शुरू कर दी हैं। सपा की मांग है कि इस आरक्षण को आगामी 2027 के यूपी चुनाव से ही लागू किया जाए, इसे राज्यसभा में भी विस्तार मिले और सबसे महत्वपूर्ण रूप से इसमें 'आरक्षण के भीतर आरक्षण' (कोटा भीतर कोटा) की व्यवस्था हो। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा का तात्कालिक लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता को बचाना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में खुद की सरकार बनाने के लिए जमीन मजबूत करना है।शिंदे के कक्ष में शरद पवार की गुप्त दस्तक: महाराष्ट्र से दिल्ली तक नए गठबंधन की सुगबुगाहटसंसदीय अंकगणित को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए एनडीए ने महाराष्ट्र के सबसे अनुभवी राजनेता और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार को भी साधना शुरू कर दिया है। हाल ही में महाराष्ट्र विधानसभा के भीतर एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में शरद पवार का अपने विधायकों के साथ उप मुख्यमंत्री व शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के आधिकारिक कक्ष में पहुंचना महज एक इत्तेफाक नहीं था। इस गुप्त बैठक के बाद दिल्ली के सियासी गलियारों में यह कयास तेज हो गए हैं कि शरद पवार के 8 सांसद लोकसभा में मतदान के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला रुख अख्तियार कर सकते हैं, जिससे सरकार का पलड़ा पूरी तरह भारी हो जाएगा।लोकसभा का जादुई आंकड़ा: वोटिंग से दूरी और पाला बदलने वाले सांसदों का पूरा गणित समझिए543 सदस्यों वाली लोकसभा में इस संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 360 के जादुई आंकड़े की आवश्यकता है। बीते सत्र में सरकार के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, यानी बहुमत से 62 सीटें कम थीं। हालांकि, हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 और शिवसेना यूबीटी (Shiv Sena UBT) के 6 सांसदों के पाला बदलकर सरकार के पाले में आ जाने से एनडीए का बेस आंकड़ा बढ़कर 324 तक पहुंच चुका है। यदि द्रमुक के 22 सांसद साथ आते हैं तो यह संख्या 346 हो जाएगी। इसके अलावा, केंद्रीय प्रबंधकों की नजर शरद पवार की एनसीपी (8 सांसद), झारखंड मुक्ति मोर्चा (3 सांसद) और आम आदमी पार्टी (3 सांसद) पर भी है। यदि इन 14 सांसदों का मौन या प्रत्यक्ष समर्थन मिल जाता है, तो समाजवादी पार्टी के बिना भी सरकार आसानी से 360 का आंकड़ा पार कर नया इतिहास रच देगी।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में हुए जघन्य स्कूली छात्रा बलात्कार और हत्याकांड के मुख्य आरोपी प्रभाष मंडल के पुलिस एनकाउंटर मामले ने एक नया और बेहद संवेदनशील मोड़ ले लिया है। मंगलवार आधी रात को सुर्जापुर के दलदली इलाके में हुए इस कथित एनकाउंटर की कमान अब राज्य की शीर्ष जांच एजेंसी सीआईडी (CID) को सौंप दी गई है। मानवाधिकार गाइडलाइंस और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत इस मामले में न्यायिक जांच पहले ही शुरू की जा चुकी है। अब सीआईडी की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर फॉरेंसिक मैपिंग और बैलिस्टिक साक्ष्यों के जरिए इस पूरे एनकाउंटर की प्रामाणिकता की कड़ाई से पड़ताल करने में जुट गई है।पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सनसनीखेज खुलासा: पीठ की तरफ से बेहद करीब से मारी गईं दोनों गोलियांपुलिस और फॉरेंसिक सूत्रों से मिली प्रभाष मंडल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस मुठभेड़ की पूरी तस्वीर को साफ कर दिया है। डॉक्टरों के शुरुआती निष्कर्षों के अनुसार, भागने की कोशिश के दौरान प्रभाष को बहुत ही नजदीक से दो गोलियां मारी गई थीं। ये दोनों गोलियां उसकी पीठ की तरफ से शरीर के भीतर प्रवेश कर गईं और सामने के हिस्से से आर-पार निकल गईं। डॉक्टरों को आरोपी के शरीर के भीतर किसी भी गोली या धातु का टुकड़ा फंसा हुआ नहीं मिला है। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, एक गोली प्रभाष के दाहिने फेफड़े को पूरी तरह से चीरती हुई बाहर निकल गई, जबकि दूसरी गोली ने उसकी दाहिनी किडनी को बुरी तरह क्षतिग्रस्त करते हुए शरीर को पार कर दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।आधी रात को क्यों हुआ क्राइम सीन रीक्रिएशन? पुलिस अधिकारियों ने सीआईडी के सामने दी ये दलीलविपक्ष और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा रात के समय आरोपी को घटना स्थल पर ले जाने को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर बारुईपुर पुलिस प्रशासन ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे दिन के उजाले में प्रभाष को सुर्जापुर के उस संवेदनशील इलाके में ले जाने का जोखिम नहीं उठा सकते थे। वहां की स्थानीय जनता में 12 साल की मासूम बच्ची की हत्या को लेकर भारी आक्रोश था और कानून-व्यवस्था बिगड़ने या उग्र भीड़ द्वारा आरोपी की मॉब लिंचिंग (पीट-पीटकर हत्या) करने का भारी खतरा मंडरा रहा था। चूंकि यह जघन्य अपराध भी रात के घने अंधेरे में ही अंजाम दिया गया था, इसलिए जांच टीम आरोपी की वास्तविक गतिविधियों और भागने के रास्तों को बिल्कुल सटीक ढंग से समझने के लिए उसे रात करीब 12:45 बजे वहां लेकर गई थी।सर्विस रिवॉल्वर छीनकर चलाई थी गोली; आत्मरक्षा के दावों की कसौटी पर छह पुलिसकर्मियों के बयानघटनाक्रम के अनुसार, कैनिंग पुलिस सर्कल के प्रभारी रोनी सरकार जब वारदात वाली जगह पर आरोपी के बिल्कुल नजदीक खड़े थे, तभी प्रभाष ने बिजली की तेजी से उनकी कमर में लगी सर्विस रिवॉल्वर छीन ली और फायरिंग करते हुए दलदली रास्ते की तरफ भागने लगा। उसने पुलिस टीम पर एक राउंड फायर भी किया। इसके बाद अपनी और साथी पुलिसकर्मियों की जान बचाने के लिए बारुईपुर थाने के पीसी इनचार्ज सब-इंस्पेक्टर अर्घ्य मंडल ने अपनी रिवॉल्वर से जवाबी फायरिंग की। सीआईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य यह स्थापित करना है कि क्या पुलिस की यह जवाबी कार्रवाई वास्तव में आत्मरक्षा के दायरे में अनिवार्य थी। इस ऑपरेशन में शामिल सभी छह पुलिसकर्मियों को सीआईडी टीम के सामने पेश होकर अपना आधिकारिक बयान दर्ज कराना होगा, हालांकि अभी किसी भी पुलिसकर्मी को सस्पेंड नहीं किया गया है।बैलिस्टिक जांच शुरू और चौथा आरोपी कबीर मोल्ला 20 जुलाई तक पुलिस रिमांड परसीआईडी की फॉरेंसिक और डिटेक्टिव विंग ने गुरुवार सुबह ही सुर्जापुर में एनकाउंटर वाले दलदली मैदान का दौरा कर पूरे दृश्य की थ्री-डी मैपिंग पूरी कर ली है। घटनास्थल से बरामद किए गए खाली खोखे, पुलिसकर्मियों के सर्विस वेपन और बैलिस्टिक साक्ष्यों को जांच प्रयोगशाला में भेज दिया गया है। दूसरी ओर, इस जघन्य सामूहिक बलात्कार कांड के चौथे वांछित आरोपी कबीर मोल्ला को पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए बारुईपुर की स्थानीय अदालत में पेश किया। विशेष लोक अभियोजक बिभास चटर्जी ने कोर्ट में अकाट्य दलीलें पेश करते हुए साबित किया कि कबीर मोल्ला भी आनंद सरदार और दिवाकर सरदार की तरह ही इस घिनौने कृत्य में बराबर का भागीदार था। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कबीर मोल्ला को 20 जुलाई 2026 तक के लिए पुलिस कस्टडी में भेज दिया है।
विपक्ष का मकसद हर मुद्दे को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत कर जनता के बीच असंतोष पैदा करना : भाजपा
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव के हालिया बयानों को लेकर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी
ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय छात्रों को दिया भरोसा, वीजा नियम सख्त लेकिन अवसर रहेंगे खुले : विक्रम मिस्री
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान ऑस्ट्रेलियाई नेताओं के साथ हुई बातचीत में भारतीय छात्रों की वीजा प्रक्रिया में हुए बदलाव और आवेदन निपटाने में हो रही देरी को लेकर चिंताओं पर भी चर्चा हुई।
लखनऊ, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से संचालित एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 12 जुलाई को 35 करोड़ पौधे रोपित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करते हुए मा० उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी ने ग्राम्य विकास विभाग के उच्चाधिकारियों को निर्देशित किया कि इस महाभियान को पूर्ण गरिमा, भव्यता और शत-प्रतिशत सफलता के साथ धरातल पर उतारा जाए एवं आईईसी (Information, Education and Communication) सोशल मीडिया, होर्डिंग्स, और स्थानीय प्रचार माध्यमों से जनपदों में ब्लॉक और गाँव स्तर पर प्रदेश्वशियों को पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के महत्व को समझाते हुए प्रेरित किया जाए।आज उत्तर प्रदेश के मा० उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आगामी 12 जुलाई को आयोजित होने वाले पौधरोपण महायज्ञ-2026 को सफल एवं ऐतिहासिक बनाने के लिए ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मा० प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की प्रेरणा से संचालित एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 35 करोड़ पौधे रोपित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन तथा भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए जनभागीदारी का महाअभियान है।
US-Iran war : ईरान का सनसनीखेज दावा- अमेरिका ने बुशेहर परमाणु संयंत्र पर किया हमला
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका द्वारा ईरान पर ताजा सैन्य हमले किए जाने के बाद ईरान ने दावा किया है कि गुरुवार को अमेरिकी सेना ने बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Bushehr Nuclear Power Plant) को निशाना बनाया। हालांकि, अमेरिका ने अभी ...
जब भी भारत में महंगे और प्रीमियम मोबाइल फोन्स की बात आती है, तो अमूमन लोगों के दिमाग में Apple iPhone 17, iPhone 17 Pro या Samsung Galaxy S26 Ultra जैसे फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स के नाम ही आते हैं। लेकिन इन दिनों पूरे देश में सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के एक ऐसे नए फोन की चर्चा हो रही है, जिसकी कीमत इन सभी प्रीमियम स्मार्टफोन्स से भी कहीं ज्यादा है।इस फोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे काम करने के लिए किसी मोबाइल टावर या सिम नेटवर्क की जरूरत नहीं होती। आइए जानते हैं BSNL के इस अनोखे फोन की कीमत, इसके गजब के फीचर्स और इसे खरीदने के कड़े सरकारी नियमों के बारे में सबकुछ।क्या है BSNL के इस फोन की कीमत?यदि आप सोच रहे हैं कि यह कोई आम टच-स्क्रीन स्मार्टफोन है, तो आप बिल्कुल गलत हैं। यह एक सैटेलाइट फोन (Satellite Phone) है, जिसकी आधिकारिक जानकारी बीएसएनएल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'X' (पहले ट्विटर) पर शेयर की है।कुल कीमत: सभी प्रकार के टैक्स और सरकारी ड्यूटी मिलाकर इस सैटेलाइट फोन की कीमत ₹1,34,166 तय की गई है। यही वजह है कि इसकी कीमत की तुलना दुनिया के सबसे महंगे और लग्जरी फोन्स से की जा रही है।क्या आम जनता खरीद सकती है यह सैटेलाइट फोन?₹1.34 लाख की कीमत सुनकर कई टेक लवर्स के मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि क्या वे इसे अपने शौक के लिए खरीद सकते हैं? तो इसका सीधा जवाब है— नहीं।यह एक कमर्शियल सैटेलाइट फोन है, जिसे भारत की आम जनता बिना अनुमति के नहीं खरीद सकती। दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications - DoT) के सख्त सुरक्षा नियमों के मुताबिक, भारत में सैटेलाइट फोन का मालिकाना हक रखने या उसका इस्तेमाल करने के लिए विशेष सरकारी मंजूरी, गृह मंत्रालय की क्लियरेंस और आधिकारिक लाइसेंस की आवश्यकता होती है। कोई भी सामान्य नागरिक कानूनन इसे बिना इजाजत के पास नहीं रख सकता।किन लोगों के लिए वरदान है यह फोन?BSNL के मुताबिक, इस फोन को आम शहरी जिंदगी के लिए नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण और खतरनाक परिस्थितियों में काम करने वाले चुनिंदा क्षेत्रों और लोगों के लिए डिजाइन किया गया है:डिफेंस और सुरक्षा बल: दुर्गम सीमाओं और जंगलों में तैनात भारतीय सेना और अर्धसैनिक बल।समुद्री कार्य (Maritime): गहरे समंदर में महीनों रहने वाले मर्चेंट नेवी के क्रू और मछुआरे।आपदा प्रबंधन (NDRF): भूकंप, बाढ़ या चक्रवात जैसी आपदाओं के समय संचार व्यवस्था ठप होने पर काम करने वाली टीमें।माइनिंग और माउंटेनियरिंग: जमीन के सैकड़ों फीट नीचे खदानों में काम करने वाले लोग या ऊंचे पहाड़ों (जैसे हिमालय) पर ट्रैकिंग करने वाले एडवेंचरर्स।दूर-दराज के तीर्थयात्री: अमरनाथ या कैलाश मानसरोवर जैसी बेहद कठिन और नो-नेटवर्क जोन वाली यात्राओं पर जाने वाले विशेष दल।आखिर क्यों इतनी खास और अलग होती है सैटेलाइट फोन की तकनीक?जहां हमारे सामान्य एंड्रॉयड या आईफोन जमीन पर लगे मोबाइल टावरों के सिग्नल (4G/5G) पर निर्भर करते हैं, वहीं यह सैटेलाइट फोन सीधे अंतरिक्ष (Space) में पृथ्वी की कक्षा में चक्कर काट रहे सैटेलाइट्स से कनेक्ट होता है। इसकी मुख्य खूबियां इस प्रकार हैं:'नो-नेटवर्क जोन' में भी कॉलिंग: घने अमेज़न जैसे जंगलों, गहरे महासागरों, बर्फ से ढके ऊंचे पहाड़ों या विशाल रेगिस्तानों में, जहाँ दुनिया का कोई भी मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करता, वहाँ भी इससे क्रिस्टल क्लियर वॉयस कॉलिंग और मैसेजिंग की जा सकती है।इमरजेंसी में जीवन रक्षक: किसी भी युद्ध, बड़े आतंकी हमले या प्राकृतिक आपदा में जब सारे मोबाइल टावर गिर जाते हैं, तब यह सैटेलाइट फोन ही एकमात्र सहारा होता है जो प्रशासन और रेस्क्यू टीमों को आपस में जोड़े रखता है।महीनों चलने वाली बैटरी लाइफ: इस फोन में अत्यधिक टिकाऊ और दमदार बैटरी बैकअप दिया गया है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि बिजली और चार्जर की अनुपलब्धता के बावजूद यह कई दिनों या हफ्तों तक स्टैंडबाय पर काम कर सके।रफ-एंड-टफ मिलिट्री ग्रेड बॉडी: यह फोन बेहद मजबूत और कठोर मटेरियल से बनाया जाता है। इस पर भयंकर पानी (Waterproof), धूल-मिट्टी (Dustproof) और ऊंचाई से गिरने या बर्फ जमने का भी कोई असर नहीं होता। यह हर मौसम में काम करने के लिए तैयार रहता है।अधिक जानकारी और संपर्क का माध्यमअगर आप किसी आधिकारिक संस्था, माइनिंग कंपनी या सुरक्षा एजेंसी से जुड़े हैं और इसके कमर्शियल इस्तेमाल, तकनीकी स्पेसिफिकेशन या लाइसेंसिंग की प्रक्रिया को विस्तार से जानना चाहते हैं, तो आप अपने नजदीकी BSNL मुख्य कार्यालय (Head Office) में विजिट कर सकते हैं। इसके अलावा, बीएसएनएल द्वारा इस सेवा के लिए जारी किए गए आधिकारिक नंबर 9768866652 पर कॉल करके भी जरूरी मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है।
मानसून ने गुरुवार (9 जुलाई 2026) को आधिकारिक तौर पर पूरे देश को अपनी आगोश में ले लिया है। इसके साथ ही देश के लगभग सभी राज्यों में झमाझम बारिश का दौर शुरू हो चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, दादरा-नगर हवेली, दमन-दीव, अंडमान-निकोबार, लद्दाख और तमिलनाडु में सामान्य से काफी ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा सिक्किम, ओडिशा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में भी मानसून मेहरबान रहा है। वहीं, पूर्वोत्तर भारत के राज्यों (मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड) और बिहार में शुरुआती चरण में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है।इस बीच, आईएमडी (IMD) ने अगले 48 घंटों के लिए वेदर बुलेटिन जारी करते हुए दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत देश के 18 राज्यों में भारी बारिश, वज्रपात (आकाशीय बिजली) और तीव्र आंधी का अलर्ट जारी किया है। आइए जानते हैं शुक्रवार को आपके शहर में कैसा रहेगा मौसम का मिजाज।आखिर क्यों हो रही है इतनी भारी बारिश?मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय देश में दो बड़ी मौसमी प्रणालियां (Weather Systems) एक साथ सक्रिय हैं:निम्न दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area): उत्तर-पश्चिमी मध्य प्रदेश और उससे सटे दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक बेहद स्पष्ट लो-प्रेशर एरिया बना हुआ है, जो अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से भारी नमी खींच रहा है।मानसून ट्रफ (Monsoon Trough): मानसून की अक्षीय रेखा (Trough Line) इस समय उत्तरी राजस्थान से लेकर पूर्वोत्तर भारत तक फैली हुई है, जिससे मध्य और उत्तर भारत में बादलों का भारी जमावड़ा है।इन 18 राज्यों में 85 KM की रफ्तार से आंधी और ओलावृष्टि की चेतावनीमौसम विभाग ने शुक्रवार (10 जुलाई) को देश के 18 राज्यों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मेघालय, महाराष्ट्र और केरल शामिल हैं।तूफान की रफ्तार: इन राज्यों में बारिश के दौरान 80 से 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी आंधी चल सकती है।ओले गिरने का अलर्ट: आईएमडी ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के कुछ इलाकों में तेज बारिश के साथ ओले (Hailstorm) भी गिर सकते हैं। पूर्वी भारत में आकाशीय बिजली गिरने का भी भारी खतरा है।प्रमुख राज्यों और महानगरों के मौसम का विस्तृत हाल1. दिल्ली-एनसीआर (Delhi Weather)राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को 95% बारिश का पूर्वानुमान है। आईएमडी ने दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में भारी बारिश और गरज-चमक के साथ तूफान का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। इस दौरान 70 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।तापमान: शुक्रवार को अधिकतम तापमान 33C और न्यूनतम तापमान 27C रहने की उम्मीद है।कहाँ हुई कितनी बारिश: पिछले 24 घंटों में दिल्ली के तुखमीरपुर (उत्तर-पूर्वी दिल्ली) में सबसे ज्यादा 6.3 इंच (160 मिमी) बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा मयूर विहार में 103 मिमी, दिल्ली यूनिवर्सिटी में 90 मिमी, महरौली में 86 मिमी और सफदरजंग में 72.6 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई है।2. उत्तर प्रदेश (UP Weather)यूपी के अधिकांश हिस्सों में चक्रवाती हवाओं के साथ भारी बारिश का अलर्ट है। मेरठ, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा), मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, कानपुर, बांदा, बिजनौर, पीलीभीत, मुरादाबाद, बरेली, बहराइच, सीतापुर, बलरामपुर, कुशीनगर, हरदोई, अयोध्या, उन्नाव, सुल्तानपुर, अमेठी और आजमगढ़ में 80 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी और भारी बारिश की चेतावनी है।विशेष नोट (लखनऊ): राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को मौसम इसके विपरीत रहेगा। लखनऊ में आसमान साफ रहने की उम्मीद है, जहां अधिकतम तापमान 33C और न्यूनतम तापमान 28C तक रह सकता है।3. बिहार (Bihar Weather)बिहार के लिए 10 और 11 जुलाई को आकाशीय बिजली (Lightening) का तांडव देखने को मिल सकता है। गया, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, पटना, सारण, बक्सर, भोजपुर, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल, भागलपुर, कटिहार और किशनगंज में भारी बारिश का अलर्ट है।तापमान: पटना में बारिश के चलते उमस से राहत मिलेगी। यहां अधिकतम तापमान 31C और न्यूनतम तापमान 28C के आसपास रहेगा।4. झारखंड (Jharkhand Weather)झारखंड के हजारीबाग, रामगढ़, जामताड़ा, बोकारो, रांची, सिमडेगा, गिरिडीह, सरायकेला, दुमका, गुमला, खूंटी, धनबाद, देवघर और जमशेदपुर में 60 से 70 किमी/घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। रांची में अधिकतम तापमान 28C और न्यूनतम तापमान 24C तक गिरेगा।5. पश्चिम बंगाल (West Bengal Weather)झाड़ग्राम, बांकुड़ा, पुरुलिया, अलीपुरद्वार, नादिया, मालदा, हुगली, कूचबिहार और कालिम्पोंग में शुक्रवार और शनिवार को गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ सकती हैं। कोलकाता में अधिकतम तापमान 32C और न्यूनतम तापमान 28C रहने का अनुमान है।6. उत्तराखंड (Uttarakhand Weather)पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के हरिद्वार, नैनीताल, ऋषिकेश, अल्मोड़ा, चंपावत, पौड़ी गढ़वाल, उत्तरकाशी, बागेश्वर और टिहरी गढ़वाल में भूस्खलन (Landslide) और भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। राजधानी देहरादून में मौसम ठंडा रहेगा, जहाँ अधिकतम तापमान 26C और न्यूनतम तापमान 23C तक रहने की उम्मीद है।
फीफा विश्वकप (FIFA World Cup) 2026 अब सिर्फ फुटबॉल का एक टूर्नामेंट नहीं रह गया है, बल्कि यह खेल, वैश्विक संगीत और दुनिया भर के फैंस की भावनाओं का एक महा-उत्सव बन चुका है। स्टेडियम में खिलाड़ियों के मैदान पर उतरने से लेकर, गोल होने के जश्न और मैच खत्म होने तक गूंजने वाले गानों का मकसद सिर्फ मनोरंजन करना नहीं होता। इनका असली काम खिलाड़ियों में जोश भरना और दर्शकों के बीच एक अटूट जुड़ाव बनाना है। यही वजह है कि फीफा ने इस बार हर टीम के लिए एक अलग स्टेडियम साउंडट्रैक तैयार किया है।स्टेडियम में कौन तय करता है कि कौन-सा गाना बजेगा?विश्वकप के दौरान बजने वाले गानों का फैसला फीफा (FIFA) अकेले बंद कमरों में नहीं करता। इसके लिए एक बेहद लोकतांत्रिक और संगठित प्रक्रिया अपनाई जाती है:संयुक्त टीम वर्क: फीफा की स्टेडियम एंटरटेनमेंट टीम, टूर्नामेंट में भाग ले रहे सभी 48 देशों की फुटबॉल एसोसिएशन, खुद खिलाड़ी और स्थानीय आयोजन समिति मिलकर गानों का चयन करती है।सांस्कृतिक पहचान: हर देश की फुटबॉल एसोसिएशन अपनी संस्कृति, इतिहास और फुटबॉल पहचान को दर्शाने वाले गानों की एक आधिकारिक सूची फीफा को भेजती है।खिलाड़ियों की पसंद: वार्म-अप (Warm-up), गोल सेलिब्रेशन (Goal Celebration) और मैच जीतने के बाद बजने वाले कुछ खास गानों को खुद खिलाड़ी अपनी पसंद के आधार पर चुनते हैं। यदि किसी गाने पर फैंस का रिस्पॉन्स शानदार रहता है, तो उसे आगामी मैचों की प्लेलिस्ट में भी जगह मिलती है।750 से ज्यादा गानों का म्यूजिक बैंक कैसे हुआ तैयार?रॉयटर्स (Reuters) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस साल के विश्वकप के लिए 750 से ज्यादा गानों का एक विशाल म्यूजिक कलेक्शन तैयार किया गया है। फीफा इस महा-प्लेलिस्ट को तैयार करने के लिए एक विशेष प्रक्रिया अपनाता है:घरेलू लीग की स्टडी: फीफा सबसे पहले भाग लेने वाले देशों की घरेलू फुटबॉल लीग (जैसे इंग्लिश प्रीमियर लीग, ला लीगा आदि) में बजने वाले गानों और चैंट्स (नारों) की गहराई से स्टडी करता है।फैंस का जुड़ाव: यह देखा जाता है कि कौन-से गानों को गाते समय फैंस सबसे ज्यादा झूमते हैं और किन धुनों से खिलाड़ियों का मोटिवेशन बढ़ता है।सिचुएशनल प्लेलिस्ट: इसके बाद मैच के अलग-अलग चरणों जैसे— टीम लाइन-अप, वार्म-अप, गोल होने के तुरंत बाद और मैच खत्म होने (Full-time) के लिए अलग-अलग सब-प्लेलिस्ट बनाई जाती है।हर टीम का क्यों होता है अपना अलग 'सिग्नेचर म्यूजिक'?दुनिया के हर देश की अपनी अनूठी संस्कृति, भाषा और फुटबॉल की अलग परंपराएं हैं। फीफा हर टीम के लिए अलग स्टेडियम साउंडट्रैक इसलिए तैयार करता है ताकि खिलाड़ियों को सात समंदर पार भी अपने घर (Homeland) जैसा माहौल मिल सके।इसके अलावा, जिन देशों में फुटबॉल संस्कृति अभी नई है या तेजी से विकसित हो रही है, वे इन खास गानों और धुनों के जरिए अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी एक नई पहचान बनाने की कोशिश करते हैं। यह संगीत समय के साथ उस देश की अपनी फुटबॉल विरासत का एक अहम हिस्सा बन जाता है।मनोवैज्ञानिक स्तर पर खिलाड़ियों और फैंस को बूस्ट करता है संगीतखेल विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर सही बीट्स का बजना खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों के मनोविज्ञान पर गहरा और सकारात्मक असर डालता है।खिलाड़ियों के लिए: मैच से पहले वार्म-अप के दौरान बजने वाले हाई-रैपिड (तेज रफ्तार) गाने खिलाड़ियों के एड्रेनालाईन रश ($Adrenaline Rush$) को बढ़ाते हैं और उन्हें मानसिक रूप से मुकाबले के लिए तैयार करते हैं।फैंस के लिए: गोल होने के बाद जब पूरा स्टेडियम एक ही धुन पर एक साथ गाता है, तो दर्शकों का जुड़ाव और जोश चरम पर पहुंच जाता है, जो मैच डे के अनुभव को ताउम्र के लिए यादगार बना देता है।'वाका वाका' से लेकर के-पॉप और टेक्नो तक: बदल गया वर्ल्ड कप का संगीतएक दौर था जब शुरुआती वर्ल्ड कप मैचों में केवल कुछ पारंपरिक नारे या चुनिंदा धुनें ही सुनाई देती थीं। साल 2010 में शकीरा के 'वाका वाका' ($Waka Waka$) और के'नान के 'वेविंग फ्लैग' ($Wavin' Flag$) जैसे गानों ने वर्ल्ड कप संगीत की परिभाषा को हमेशा के लिए बदल दिया।आज 2026 के विश्वकप की आधिकारिक प्लेलिस्ट में रॉक, पॉप, कोरियन के-पॉप (K-Pop), लातिनो रेगेटन, टेक्नो और पारंपरिक लोक संगीत (Folk Music) का एक अद्भुत फ्यूजन देखने को मिल रहा है। यह विविधता फीफा विश्वकप को सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि वैश्विक संस्कृतियों और कला का सबसे बड़ा मंच बनाती है।
यदि आपकी तिजोरी, घर के किसी कोने या गुल्लक में अब भी ₹2000 के नोट पड़े हैं, तो आपके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से एक बेहद महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। अक्सर लोगों के मन में यह डर रहता है कि क्या उनके ये नोट अब पूरी तरह रद्दी हो चुके हैं? तो इसका जवाब है— नहीं।आरबीआई (RBI) ने साफ किया है कि ₹2000 के नोट अभी भी लीगल टेंडर (Legal Tender) यानी कानूनी रूप से मान्य हैं। हालांकि, बैंकों में इन्हें बदलने की समय-सीमा काफी पहले समाप्त हो चुकी है, लेकिन रिजर्व बैंक ने आम जनता की सुविधा के लिए नोट बदलने और अकाउंट में जमा करने का विकल्प अभी भी खुला रखा है। आइए जानते हैं आरबीआई के इस ताजा फैसले से जुड़ी अपने मतलब की हर बात।98% से ज्यादा नोट बैंकिंग सिस्टम में लौटेकेंद्रीय बैंक द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2023 में जब ₹2000 के नोटों को सर्कुलेशन (चलन) से वापस लेने का ऐतिहासिक फैसला किया गया था, तब से लेकर अब तक 98% से अधिक नोट बैंकिंग सिस्टम में सुरक्षित वापस लौट चुके हैं। वर्तमान में बाजार में बहुत ही कम मात्रा में ₹2000 के नोट बचे हैं, जिन्हें वापस लाने के लिए आरबीआई लगातार प्रयास कर रहा है।अब बैंकों में नहीं, इन 19 जगहों पर बदले जाएंगे नोटआम कमर्शियल बैंकों (जैसे SBI, PNB, HDFC) में ₹2000 के नोट जमा करने या बदलने की आखिरी तारीख 7 अक्टूबर 2023 को ही समाप्त हो चुकी है। इसलिए अब आप इन्हें सीधे किसी सामान्य बैंक शाखा में जाकर नहीं बदल सकते। इसके लिए आरबीआई ने देश भर में अपने 19 इश्यू ऑफिस (Issue Offices) निर्धारित किए हैं। आप इन 19 कार्यालयों में जाकर अपने नोट बदलवा सकते हैं, जहां नोट की कुल वैल्यू सीधे आपके बैंक खाते में क्रेडिट (जमा) कर दी जाएगी।देश के इन 19 शहरों में हैं RBI के इश्यू ऑफिस:अहमदाबाद, बेंगलुरु, बेलापुर, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना और तिरुवनंतपुरम।ऑफिस का समय: आप इन कार्यालयों में वर्किंग डेज के दौरान सुबह 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे के बीच जा सकते हैं। ध्यान रखें कि महीने के दूसरे व चौथे शनिवार, सभी रविवार और सरकारी अवकाश के दिनों में ये कार्यालय बंद रहते हैं।घर बैठे डाक (Post Office) से भी भेज सकते हैं नोटयदि आप ऊपर दिए गए 19 शहरों में नहीं रहते हैं या आरबीआई के दफ्तर जाने में असमर्थ हैं, तो आपके लिए इंडिया पोस्ट (India Post) का विकल्प मौजूद है। आप देश के किसी भी डाकघर में जाकर बीमाकृत डाक (Insured Post) के जरिए अपने ₹2000 के नोटों को सीधे आरबीआई के इश्यू ऑफिस भेज सकते हैं। डाक के जरिए नोट जैसे ही आरबीआई कार्यालय पहुंचेंगे, उनके मूल्य के बराबर की राशि सीधे आपके निर्दिष्ट बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।क्या नोट बदलने के लिए किसी आईडी प्रूफ (ID Proof) की जरूरत है?आरबीआई की आधिकारिक गाइडलाइन के मुताबिक, इश्यू ऑफिस में जाकर नोट एक्सचेंज कराने के लिए किसी भी प्रकार के दस्तावेज या पहचान पत्र (जैसे पैन कार्ड, वोटर आईडी आदि) की कोई आवश्यकता नहीं है। आप बिना किसी कागजी कार्रवाई के बेहद आसान प्रक्रिया के तहत अपने नोट बदलवा सकते हैं।एक बार की तय सीमा (Limit): आप एक बार में अधिकतम ₹20,000 की सीमा तक ही ₹2000 के नोटों को काउंटर पर सीधे दूसरे डिनॉमिनेशन (जैसे ₹500, ₹200, ₹100 के नोटों) में एक्सचेंज करवा सकते हैं।क्यों बंद किए गए थे ₹2000 के नोट?इतिहास: 8 नवंबर 2016 को हुई ऐतिहासिक नोटबंदी के बाद जब पुराने ₹500 और ₹1000 के नोट बंद हुए, तब बाजार में नकदी की भारी कमी को तुरंत पूरा करने के लिए ₹2000 का यह बड़ा नोट पेश किया गया था।छपाई कब बंद हुई: जब बाजार में ₹500 और अन्य छोटे नोट पर्याप्त मात्रा में आ गए, तब आरबीआई ने साल 2018-19 से ही ₹2000 के नोटों की छपाई पूरी तरह बंद कर दी थी।नकली नोटों का खतरा: इस बड़े नोट को बंद करने की एक मुख्य वजह जाली नोटों (Fake Currency) का बढ़ता नेटवर्क भी था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, नोटबंदी के शुरुआती दो वर्षों में देश में जितने भी नकली नोट पकड़े गए, उनमें से करीब 56% हिस्सेदारी अकेले ₹2000 के जाली नोटों की थी।
खाने के तुरंत बाद की गई ये 4 गलतियां बिगाड़ सकती हैं आपका डाइजेशन, जानें वॉक और सोने का सही समय
खाना सिर्फ भूख मिटाने का जरिया नहीं है, बल्कि हमारे शरीर को सुचारू रूप से चलाने के लिए ऊर्जा (Energy) और जरूरी पोषक तत्व देने का भी मुख्य स्रोत है। इसलिए जितना जरूरी एक संतुलित और पौष्टिक भोजन करना है, उतना ही जरूरी भोजन करने के बाद सही आदतों को अपनाना भी माना जाता है।अक्सर लोग अनजाने में खाना खाने के तुरंत बाद कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका सीधा और नकारात्मक असर उनकी पाचन प्रक्रिया (Digestion) पर पड़ता है। दरअसल, भोजन करने के बाद हमारा शरीर उसे पचाने और उसमें मौजूद विटामिंस व मिनरल्स को एब्जॉर्ब (सोखने) करने के काम में जुट जाता है, जिससे पेट और आंतों की तरफ ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है। ऐसे में कुछ गलत एक्टिविटीज इस प्राकृतिक प्रक्रिया में बाधा डाल सकती हैं। आइए जानते हैं कि भोजन के तुरंत बाद किन 4 गलतियों से बचना चाहिए और सेहतमंद रहने के सही नियम क्या हैं।खाना खाने के तुरंत बाद भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां1. भारी या तेज एक्सरसाइज (Heavy Workout) करनाप्रसिद्ध हेल्थ वेबसाइट Healthline के अनुसार, खाना खाने के तुरंत बाद हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज (जैसे रनिंग, जिम या भारी वजन उठाना) करने से पेट में भयंकर ऐंठन, मतली (जी मिचलाना), उल्टी और अपच की समस्या हो सकती है। इसका कारण यह है कि इस समय शरीर का पूरा ध्यान भोजन पचाने पर होता है, और एक्सरसाइज करने से ब्लड फ्लो पेट के बजाय मांसपेशियों की तरफ डाइवर्ट हो जाता है।2. बहुत तेज चाल से वॉक (Brisk Walking) करनाकई लोग खाना पचाने के चक्कर में भोजन के तुरंत बाद बहुत तेजी से दौड़ने या तेज कदमों से चलने लगते हैं। Healthline के मुताबिक, भोजन के तुरंत बाद तेज गति से चलना पाचन तंत्र में असहजता और दर्द पैदा कर सकता है। अगर आपको वॉक करनी ही है, तो हमेशा बेहद हल्की, धीमी और आरामदायक गति से ही करें।3. रात का खाना खाकर तुरंत बिस्तर पर लेट जानाCleveland Clinic की एक रिपोर्ट बताती है कि रात में भोजन करने के तुरंत बाद सीधे बिस्तर पर लेट जाने या सो जाने से एसिड रिफ्लक्स (Acid Reflux) और हार्टबर्न (सीने में जलन) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। जब आप सीधे लेट जाते हैं, तो पेट का पाचक एसिड वापस भोजन नली (Esophagus) की तरफ आने लगता है।4. जरूरत से ज्यादा भोजन (Overeating) करनाCleveland Clinic के अनुसार, स्वाद के चक्कर में या भूख से ज्यादा खाना खाने से पेट पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इससे पेट का भारी लगना, गंभीर गैस, खट्टी डकारें, ब्लोटिंग और अपच जैसी समस्याएं घेर लेती हैं। इसलिए हमेशा अपनी भूख से थोड़ा कम और संतुलित मात्रा में ही भोजन करना सबसे बेहतर माना जाता है।खाना खाने के कितनी देर बाद वॉक, एक्सरसाइज और सोना है सही?अगर आप अपनी लाइफस्टाइल को सेहतमंद बनाना चाहते हैं, तो भोजन और अपनी रूटीन एक्टिविटीज के बीच समय का यह सही अनुपात ($Ratio$) जरूर याद रखें:वर्कआउट/भारी एक्सरसाइज के लिए: यदि आप कोई भारी वर्कआउट या योग करना चाहते हैं, तो भारी भोजन (Heavy Meal) करने के बाद कम से कम 1 से 2 घंटे का अंतर अवश्य रखें।सोने या लेटने के लिए: रात का भोजन करने और सोने के समय के बीच कम से कम 2 से 3 घंटे का गैप होना चाहिए। इससे सोते समय आपके पेट का खाना काफी हद तक पच चुका होता है और नींद भी गहरी आती है।हल्की वॉक के लिए: भोजन के तुरंत बाद केवल 10 से 15 मिनट की बेहद धीमी वॉक (जैसे शतपदी या वज्रासन में बैठना) की जा सकती है, जो पाचन में मददगार होती है।बेहतर स्वास्थ्य के लिए इन बातों का भी रखें खास ख्यालचबाकर खाएं: भोजन हमेशा शांत दिमाग से, आराम से और अच्छी तरह चबाकर खाएं ताकि पेट को उसे पचाने में ज्यादा मेहनत न करनी पड़े।पानी पीने का नियम: भोजन के तुरंत बाद गट-गट करके बहुत अधिक मात्रा में पानी पीने से बचें, क्योंकि यह पाचक रसों (Digestive Enzymes) को पतला कर देता है। खाने के आधे घंटे बाद पानी पीना सबसे बेस्ट है।नशे से दूरी: खाने के तुरंत बाद धूम्रपान (स्मोकिंग) या शराब का सेवन शरीर को सामान्य से दोगुना ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।डॉक्टरी सलाह: यदि भोजन के बाद आपको रोजाना सीने में तेज जलन, पेट फूलना, कब्ज या अपच की लगातार समस्या बनी रहती है, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें और तुरंत किसी अच्छे गैस्ट्रोलॉजिस्ट (पेट रोग विशेषज्ञ) से सलाह लें।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक को 24 जुलाई को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना ...
रसोई की असली 'औषधि' है अदरक: जानें इसकी 5 चटपटी रेसिपीज़ और पोषण बढ़ाने के जादुई तरीके
अदरक भारतीय रसोई का एक ऐसा अहम हिस्सा है, जिसके बिना सुबह की चाय से लेकर दोपहर की स्पेशल ग्रेवी तक का स्वाद अधूरा रहता है। इसका उपयोग सिर्फ व्यंजनों का जायका और खुशबू बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि पारंपरिक खानपान और आयुर्वेद में भी सदियों से एक अचूक औषधि के रूप में किया जाता रहा है।अदरक में विटामिन सी, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस और प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसके अलावा, इसमें जिंजरोल ($Gingerol$) नाम का एक बेहद शक्तिशाली बायोएक्टिव कंपाउंड होता है। संतुलित मात्रा में इसका नियमित सेवन पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने, शरीर की अंदरूनी सूजन (Inflammation) को कम करने, इम्यूनिटी मजबूत करने और मतली (जी मिचलाना) जैसी समस्याओं से तुरंत राहत दिलाने में मदद करता है। आइए जानते हैं अदरक से बनने वाली 5 लाजवाब रेसिपीज़ और इसके सही इस्तेमाल के तरीके।1. इम्यूनिटी बूस्टर 'अदरक वाली दाल' (Ginger Dal)मूंग या मसूर की साधारण दाल को आप अदरक के तड़के से सुपर-हेल्दी बना सकते हैं। दाल को सामान्य तरीके से पकाने के बाद, एक पैन में हल्का घी या तेल गर्म करें। इसमें जीरा, बारीक कटा लहसुन और प्रचुर मात्रा में कद्दूकस किया हुआ ताजा अदरक डालकर तड़का तैयार करें। यह दाल न सिर्फ प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है, बल्कि अदरक के मिलने से यह पेट पर बहुत हल्की हो जाती है और गैस या अपच की समस्या नहीं होने देती।2. खुशबूदार 'जिंजर राइस' (Ginger Rice)यदि आप बचे हुए चावलों को एक नया और फ्रेश ट्विस्ट देना चाहते हैं, तो जिंजर राइस एक बेहतरीन विकल्प है। पके हुए चावलों को हल्के तेल में कद्दूकस किए हुए अदरक, करी पत्ता, राई, तीखी हरी मिर्च और क्रंची मूंगफली के साथ अच्छे से टॉस करें। ऊपर से थोड़ा सा नींबू का रस निचोड़कर परोसें। यह एक हल्की, सुगंधित और स्वादिष्ट डिश है, जो कार्बोहाइड्रेट और हेल्दी फैट्स का एक बढ़िया संतुलन प्रदान करती है।3. पाचक 'अदरक की चटनी' (Ginger Chutney)भोजन का स्वाद दोगुना करने के लिए यह चटनी एकदम परफेक्ट है। ताजा अदरक, हरी मिर्च, थोड़ी सी इमली, हल्का सा गुड़ और नमक को एक साथ मिलाकर पीस लें। स्वाद को और निखारने के लिए ऊपर से राई और करी पत्ते का हल्का सा छौंक लगाएं। यह खट्टी-मीठी चटनी न केवल खाने का जायका बढ़ाती है, बल्कि भारी भोजन को भी आसानी से पचाने में मदद करती है।4. गर्मागर्म 'जिंजर सूप' (Ginger Soup)सर्दियों के दिनों में या कफ-कोल्ड होने पर यह सूप शरीर के लिए अमृत समान है। एक गहरे पैन में अदरक, लहसुन और अपनी पसंद की बारीक कटी मौसमी सब्जियों (जैसे गाजर, पत्तागोभी, बीन्स) को हल्का सा भून लें। अब इसमें पानी या वेजिटेबल स्टॉक डालकर अच्छे से उबालें। अंत में स्वादानुसार नमक और कुटी हुई काली मिर्च मिलाएं। यह पौष्टिक सूप शरीर को अंदर से गर्माहट देता है और तुरंत हाइड्रेट करता है।5. घरेलू 'अदरक का लच्छा अचार' (Ginger Pickle)यह बिना तेल का एक बेहद सेहतमंद अचार है। अदरक को पतले और लंबे लच्छों में काट लें। अब इसमें फ्रेश नींबू का रस, नमक, थोड़ी सी हल्दी और कटी हुई हरी मिर्च मिलाएं। इस मिश्रण को एक कांच के जार में भरकर 2 से 3 दिन के लिए धूप में रख दें। तैयार होने पर भोजन के साथ इसका आनंद लें। यह अचार आपकी भूख जगाने (Appetite Stimulator) का काम करता है।अदरक को और ज्यादा गुणकारी कैसे बनाएं?अदरक के औषधीय गुणों को कई गुना बढ़ाने के लिए आप इसे इन चीजों के साथ कंबाइन कर सकते हैं:शहद और नींबू का मेल: अदरक के रस के साथ शहद और नींबू मिलाने से यह सर्दी-खांसी और गले की खराश के लिए एक अचूक सीरप बन जाता है।हल्दी और काली मिर्च: सूप या कढ़े में अदरक के साथ हल्दी और काली मिर्च मिलाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) तेजी से बढ़ती है।ताजी जड़ी-बूटियाँ: चटनी या रायते में अदरक के साथ फ्रेश हरा धनिया और पुदीना मिलाने से शरीर को भरपूर विटामिंस और फाइबर मिलते हैं।अदरक का सेवन करते समय इन सावधानियों का रखें ध्यानअदरक भले ही पूरी तरह प्राकृतिक और गुणकारी है, लेकिन इसका सेवन हमेशा सीमित और संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए।पेट की समस्याएं: बहुत अधिक मात्रा में अदरक का जूस या कच्चा अदरक चबाने से कुछ संवेदनशील लोगों को पेट में जलन, एसिडिटी, गैस या सीने में जलन (Heartburn) की शिकायत हो सकती है।मेडिकल कंडीशन: यदि आप ब्लड थिनर (खून पतला करने वाली) दवाएं ले रहे हैं, आपको पित्त की थैली (Gallbladder) से जुड़ी कोई समस्या या पथरी है, या आप किसी गंभीर बीमारी के दौर से गुजर रहे हैं, तो अपनी डाइट में अदरक की मात्रा बढ़ाने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।क्वालिटी का ध्यान: हमेशा साफ, सख्त और ताजा अदरक ही खरीदें। सड़ी हुई, सूखी या फंगस लगी अदरक का इस्तेमाल करने से पेट का इन्फेक्शन हो सकता है।
रिलायंस जियो (Reliance Jio) के ग्राहकों के लिए एक बेहद शानदार और फायदेमंद खबर है। अगर आप अपने मोबाइल के लिए एक नया और वैल्यू-फॉर-मनी रिचार्ज प्लान तलाश रहे हैं, तो जियो के कुछ चुनिंदा प्रीपेड प्लान्स पर चल रहे धमाकेदार ऑफर्स को जरूर जान लें। जियो अपने यूजर्स को कुछ खास प्रीपेड पैक्स के साथ बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के 5 GB से लेकर 20 GB तक एक्स्ट्रा डेटा (Free Data) दे रहा है।इन प्लान्स की कीमत ₹459 से शुरू होकर ₹899 तक जाती है। सबसे बड़ी और हैरान करने वाली बात यह है कि डेटा के साथ इन प्लान्स में प्रीमियम ओटीटी (OTT) सब्सक्रिप्शन और ₹35,100 की भारी-भरकम कीमत वाला गूगल जेमिनी प्रो (Google Gemini Pro) का एक्सेस भी पूरी तरह मुफ्त दिया जा रहा है। आइए जानते हैं इन चारों बंपर प्लान्स की पूरी डिटेल:1. जियो का ₹459 वाला प्लान (Jio ₹459 Plan)यह प्लान उन यूजर्स के लिए सबसे बेस्ट है जो कम दिनों की वैलिडिटी में ज्यादा से ज्यादा डेटा और वीआईपी बेनिफिट्स चाहते हैं।वैधता (Validity): 28 दिननियमित डेटा: 2 GB प्रति दिनएक्स्ट्रा डेटा: 5 GB अतिरिक्त डेटा पूरी तरह मुफ्तअन्य बेनिफिट्स: अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और डेली 100 SMS।प्रीमियम सब्सक्रिप्शन: ₹35,100 की कीमत वाला गूगल जेमिनी प्रो का फ्री एक्सेस, 5000 GB (5 TB) विशाल क्लाउड स्टोरेज और जियो हॉटस्टार मोबाइल का फ्री सब्सक्रिप्शन।रोजाना का खर्च: इस प्लान का डेली खर्च लगभग ₹16.39 आता है।2. जियो का ₹495 वाला प्लान (Jio ₹495 Plan)यदि आप गेमिंग और लाइव स्पोर्ट्स (खेल) देखने के बेहद शौकीन हैं, तो यह प्लान आपके लिए ही डिजाइन किया गया है।वैधता (Validity): 28 दिननियमित डेटा: 1.5 GB प्रति दिनएक्स्ट्रा डेटा: 5 GB अतिरिक्त डेटा बिल्कुल मुफ्तअन्य बेनिफिट्स: अनलिमिटेड कॉलिंग और हर दिन 100 SMS।प्रीमियम सब्सक्रिप्शन: 28 दिनों के लिए FanCode और JioGames Cloud का मुफ्त एक्सेस (500 से ज्यादा प्रीमियम वीडियो गेम्स) और साथ में गूगल जेमिनी प्रो का फ्री सब्सक्रिप्शन।रोजाना का खर्च: इस प्लान का दैनिक खर्च लगभग ₹17.68 बैठता है।3. जियो का ₹749 वाला प्लान (Jio ₹749 Plan)यह प्लान लंबी वैलिडिटी और भारी-भरकम इंटरनेट डेटा का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए एकदम सटीक है।वैधता (Validity): 72 दिननियमित डेटा: 2 GB प्रति दिनएक्स्ट्रा डेटा: 20 GB एक्स्ट्रा डेटा का बंपर ऑफरअन्य बेनिफिट्स: अनलिमिटेड कॉलिंग और रोजाना 100 SMS।प्रीमियम सब्सक्रिप्शन: पूरे 3 महीने (90 दिन) के लिए जियो हॉटस्टार मोबाइल का मुफ्त सब्सक्रिप्शन, 50 GB जियो क्लाउड स्टोरेज और गूगल जेमिनी प्रो का बिल्कुल फ्री एक्सेस।रोजाना का खर्च: लंबी अवधि के कारण इसका रोजाना का खर्च घटकर मात्र ₹10.40 रह जाता है।4. जियो का ₹899 वाला प्लान (Jio ₹899 Plan)यह जियो का सबसे शानदार और पैसा वसूल (Value for Money) प्लान है, जिसमें रोजाना का खर्च सबसे कम और फायदे सबसे ज्यादा मिलते हैं।वैधता (Validity): 90 दिन (पूरे 3 महीने)नियमित डेटा: 2 GB प्रति दिनएक्स्ट्रा डेटा: 20 GB एक्स्ट्रा डेटा पूरी तरह फ्रीअन्य बेनिफिट्स: अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और डेली 100 SMS।प्रीमियम सब्सक्रिप्शन: 3 महीने के लिए जियो हॉटस्टार मोबाइल, 50 GB जियो क्लाउड स्टोरेज और गूगल जेमिनी प्रो का मुफ्त प्रीमियम एक्सेस।रोजाना का खर्च: इस जबरदस्त प्लान का रोजाना का खर्च सबसे कम यानी लगभग ₹9.99 आता है।
आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन अपने चरम पर है। ऐसे में विदेश में रहने वाले भारतीयों (NRIs) और विदेशी संपत्ति (Foreign Assets) रखने वाले करदाताओं के मन में अक्सर एक बड़ा असमंजस रहता है कि क्या उन्हें भी अपने टैक्स रिटर्न में विदेशी संपत्तियों का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य है? टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसका सीधा और साफ जवाब ‘नहीं’ है। केवल एनआरआई (NRI) होने की वजह से आपको 'Schedule FA' (Foreign Assets) भरना जरूरी नहीं होता। यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि संबंधित वित्त वर्ष (Financial Year) में आयकर कानून के तहत आपका रेजिडेंशियल स्टेटस (Residential Status) क्या रहा है।किसे भरना होगा Schedule FA? रेजिडेंशियल स्टेटस से समझेंभारतीय आयकर कानून के अनुसार, विदेशी संपत्तियों का खुलासा करने का नियम आपकी नागरिकता पर नहीं, बल्कि आपकी टैक्स रेजिडेंसी पर तय होता है:Resident and Ordinarily Resident (ROR): यदि कोई करदाता इस श्रेणी (यानी भारत का सामान्य निवासी) में आता है, तो उसके लिए ITR में Schedule FA भरना 100% अनिवार्य है। चाहे आपकी संपत्ति दुनिया के किसी भी कोने में हो, आपको उसका विवरण देना ही होगा।NRI (Non-Resident Indian) या RNOR (Resident but Not Ordinarily Resident): यदि आप आयकर नियमों के तहत एनआरआई या आरएनओआर की श्रेणी में आते हैं, तो सामान्य परिस्थितियों में आपको Schedule FA भरने की कोई आवश्यकता नहीं होती।इसलिए, कोई भी विदेशी संपत्ति रखने वाले व्यक्ति को अपना रिटर्न दाखिल करने से ठीक पहले अपना सटीक रेजिडेंशियल स्टेटस जरूर कैलकुलेट कर लेना चाहिए।Schedule FA में विदेशी संपत्ति की कौन-कौन सी जानकारियां देनी होती हैं?जिन करदाताओं (ROR श्रेणी वाले) पर यह नियम लागू होता है, उन्हें अपनी निम्नलिखित विदेशी परिसंपत्तियों का पूरा और पारदर्शी विवरण देना पड़ता है:विदेश में स्थित सभी बैंक खाते (Savings and Current Accounts)कस्टडी या डिपॉजिटरी अकाउंट और वित्तीय कंपनियों में जमा पूंजीविदेशी कंपनियों के शेयर (Stocks), म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) और बॉन्ड्सविदेश में खरीदी गई कोई भी अचल संपत्ति (जैसे मकान, दुकान या जमीन)किसी विदेशी ट्रस्ट में हिस्सेदारी या अन्य कोई वित्तीय हित (Financial Interest)महत्वपूर्ण बिंदु: इस शेड्यूल में न केवल संपत्ति का विवरण, बल्कि संबंधित वित्त वर्ष के दौरान उस खाते का अधिकतम बैलेंस (Peak Balance) और निवेश का कुल मूल्य भी बताना पड़ता है। इसके अलावा, यदि उस विदेशी संपत्ति से कोई कमाई या ब्याज (Income) हुआ है, तो उसे भी ITR में दिखाना कानूनी रूप से अनिवार्य है।गलत जानकारी देने या छुपाने पर 'ब्लैक मनी एक्ट' के तहत ऐक्शनटैक्स एक्सपर्ट्स सचेत करते हुए कहते हैं कि विदेशी संपत्ति की जानकारी को छिपाना, छुपाने का प्रयास करना या गलत विवरण देना एक बेहद गंभीर आर्थिक अपराध माना जाता है।ऐसा करने पर आयकर विभाग द्वारा ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियां) और कर अधिरोपण कानून, 2015 (Black Money Act) के तहत सख्त जांच बैठाई जा सकती है। इसके अंतर्गत करदाता पर भारी-भरकम जुर्माना (Penalty), टैक्स और गंभीर परिस्थितियों में जेल (अभियोजन) जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।सही ITR फॉर्म का चुनाव करना है सबसे आवश्यकयदि आप पर Schedule FA का नियम लागू होता है और आप अपनी विदेशी संपत्ति का ब्योरा दे रहे हैं, तो फॉर्म चुनते समय विशेष सावधानी बरतें:ऐसे करदाता ITR-1 (सहज) या ITR-4 (सुगम) फॉर्म का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं कर सकते, क्योंकि इन फॉर्म्स में विदेशी संपत्तियों का विवरण दर्ज करने के लिए 'Schedule FA' का विकल्प ही मौजूद नहीं होता।विदेशी संपत्ति धारकों को अनिवार्य रूप से ITR-2 या व्यावसायिक आय होने पर संबंधित अन्य विस्तृत ITR फॉर्म (जैसे ITR-3) ही भरना पड़ता है।टैक्स एक्सपर्ट्स की अंतिम सलाह: अपना आईटीआर (ITR) फाइनल सबमिट करने से पहले अपने रेजिडेंशियल स्टेटस, विदेशी आय के स्रोतों और विदेशी संपत्तियों के बैंक स्टेटमेंट की बारीकी से जांच कर लें। इससे आपका रिटर्न त्रुटिहीन दाखिल होगा और भविष्य में आयकर विभाग (Income Tax Department) की ओर से किसी भी प्रकार के स्क्रूटनी नोटिस या कानूनी पचड़े की आशंका न के बराबर हो जाएगी।
बिहार के जहानाबाद जिले से एक बेहद हैरान करने वाला और फिल्मी मोड़ सा दिखने वाला मामला सामने आया है। यहाँ पश्चिम बंगाल का रहने वाला एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को 'सरप्राइज' देने और उससे गुपचुप तरीके से मिलने के लिए काले रंग का बुर्का पहनकर उसके मोहल्ले में पहुंच गया। हालांकि, उसकी यह चालाकी धरी की धरी रह गई। मोहल्ले के लोगों को उसकी चाल-ढाल संदिग्ध लगी, जिसके बाद उन्होंने उसे रोक लिया। जब उसका नकाब हटाया गया, तो बुर्के के अंदर लड़की नहीं बल्कि एक पुरुष को देखकर लोग दंग रह गए। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने कानून हाथ में लेते हुए युवक की बेरहमी से पिटाई कर दी। गनीमत रही कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और युवक को भीड़ के चंगुल से छुड़ाकर थाने ले गई।जहानाबाद में टाइल्स लगाने के दौरान हुआ था प्यारयह पूरी घटना जहानाबाद के नगर थाना क्षेत्र के फिदा हुसैन रोड की है। पुलिस द्वारा की गई शुरुआती पूछताछ के बाद पकड़े गए युवक की पहचान पश्चिम बंगाल के रहने वाले किशोर राठौर के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, किशोर कुछ समय पहले जहानाबाद आया था और यहाँ रहकर घरों में टाइल्स लगाने का काम करता था। इसी काम के दौरान उसकी पहचान फिदा हुसैन रोड की रहने वाली एक मुस्लिम युवती से हुई। धीरे-धीरे दोनों की यह जान-पहचान प्यार में बदल गई। जहानाबाद से काम खत्म करके वापस बंगाल लौट जाने के बाद भी दोनों लंबे समय से फोन और सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में थे।चाल-ढाल ने खोल दी पोल; घबराहट देख लोगों ने हटाया नकाबगुरुवार को किशोर अपनी प्रेमिका से मिलने और उसे अचानक चौंकाने के इरादे से बिना बताए जहानाबाद पहुंच गया। युवती के रूढ़िवादी मोहल्ले और स्थानीय लोगों की नजरों से बचने के लिए उसने अपनी पहचान छिपाने का एक अनोखा रास्ता चुना और काले रंग का बुर्का पहन लिया।किशोर बुर्का पहनकर गली में दाखिल तो हो गया, लेकिन एक पुरुष होने के नाते वह बुर्के में महिलाओं जैसी चाल-ढाल (Body Language) कॉपी नहीं कर पाया। मोहल्ले के कुछ युवकों को उसकी अजीब चाल और हाव-भाव देखकर गहरा शक हुआ। युवकों ने जब उसे रोककर सामान्य पूछताछ शुरू की, तो वह बुरी तरह घबरा गया। उसकी घबराहट देख लोगों का संदेह पक्का हो गया और उन्होंने जबरन उसका नकाब हटा दिया।भीड़ ने लात-घूंसों से किया स्वागत, डायल 112 ने बचाई जानबुर्के के अंदर से एक गैर-समुदाय के युवक को निकलते देख वहां मौजूद कुछ लोग बुरी तरह उग्र हो गए। देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और लोगों ने युवक को चोर या कोई संदिग्ध मानकर लात-घूंसों व डंडों से पीटना शुरू कर दिया।मामले को हिंसक रूप लेता देख मोहल्ले के ही कुछ समझदार नागरिकों ने तुरंत आपातकालीन पुलिस सेवा डायल 112 को इसकी सूचना दी। खबर मिलते ही नगर थाना पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और लहूलुहान हो रहे युवक को उग्र भीड़ के बीच से सुरक्षित बाहर निकाला और हिरासत में लेकर थाने ले आई।पुलिस कर रही है असली मंशा की जांचनगर थाना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि युवक किशोर राठौर को हिरासत में रखकर लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या युवक सिर्फ अपनी प्रेमिका से मिलने के उद्देश्य से बुर्का पहनकर आया था या इसके पीछे उसकी कोई अन्य संदिग्ध मंशा थी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, युवती और उसके परिवार के बयान और सभी तथ्यों का पूरी तरह सत्यापन (Verification) करने के बाद ही आगे की उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, बुर्के वाले इस आशिक की पिटाई का यह वीडियो और घटना पूरे इलाके में सनसनी और चर्चा का विषय बनी हुई है।
पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य (आर्किटेक्चरल) विरासत को उसके मूल गौरव के साथ पुनर्जीवित करने की दिशा में दिल्ली सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने पुरानी दिल्ली के संरक्षण और कायाकल्प के उद्देश्य से गठित 'शाहजहानाबाद री-डेवलपमेंट कॉरपोरेशन' (SRDC) का नाम बदलकर अब इंद्रप्रस्थ विरासत पुनर्विकास निगम (Indraprastha Heritage Redevelopment Corporation - IVPN) कर दिया है।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस निगम के माध्यम से पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक और पारंपरिक पहचान को अक्षुण्ण रखते हुए उसे विश्वस्तरीय आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित बनाने की एक व्यापक और गंभीर पहल शुरू हो चुकी है।मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई सालाना बैठक; लिए गए कई बड़े फैसलेइंद्रप्रस्थ विरासत पुनर्विकास निगम (IVPN) की चेयरपर्सन व मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में निगम की एक हाई-लेवल सालाना बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में शहरी विकास मंत्री और निगम के उपाध्यक्ष आशीष सूद, मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप कुमार सहित तमाम संबंधित विभागों के सीनियर अधिकारी शामिल हुए। बैठक में पुरानी दिल्ली के ओवरऑल पुनर्विकास, हेरिटेज कंजर्वेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और पर्यटन (Tourism) को बढ़ावा देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण रोडमैप तैयार किए गए, जिसमें ऐतिहासिक चांदनी चौक के पुनर्विकास को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा गया है।चांदनी चौक का गौरव लौटेगा: व्यापारियों और पर्यटकों के हितों का समन्वयमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि चांदनी चौक बाजार का डिजाइन इस तरह से रि-डेवलप किया जाए, जिससे उसका 350 साल पुराना ऐतिहासिक स्वरूप और सांस्कृतिक गरिमा स्पष्ट रूप से दिखाई दे।नागरिक सुविधाएं: चांदनी चौक में प्रतिदिन आने वाले लाखों खरीदारों और पर्यटकों की सुविधा के लिए आधुनिक और साफ-सुथरे सार्वजनिक शौचालय (टॉयलेट ब्लॉक्स) विकसित किए जाएंगे।व्यापारिक संतुलन: बैठक में स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों के हितों का पूरा ध्यान रखने पर जोर दिया गया। सीएम ने कहा कि चांदनी चौक का वजूद यहाँ के बाजारों से ही है, इसलिए हेरिटेज संरक्षण और व्यापारिक गतिविधियों के बीच एक सटीक संतुलन स्थापित किया जाएगा।पर्यटक कंट्रोल रूम व पार्किंग: देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के मार्गदर्शन और सुरक्षा के लिए बाजार में एक अत्याधुनिक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। साथ ही, इलाके को जाम-मुक्त करने के लिए व्यवस्थित पार्किंग सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया गया।टाउन हॉल, जामा मस्जिद और हनुमान मंदिर का होगा सुंदरीकरणपुरानी दिल्ली के पुनर्विकास का दायरा केवल चांदनी चौक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें कई अन्य ऐतिहासिक केंद्रों को भी जोड़ा गया है:टाउन हॉल (Town Hall): ऐतिहासिक टाउन हॉल के पुनर्विकास की समीक्षा करते हुए सीएम ने निर्देश दिया कि इसका एक मुख्य प्रवेश और निकास (Entry/Exit) द्वार सीधे चांदनी चौक की ओर खोला जाए, ताकि यह इमारत एक प्रमुख विरासत पर्यटन केंद्र के रूप में उभर सके।यमुना बाजार हनुमान मंदिर: परियोजना के तहत यमुना बाजार स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर और उसके पीछे के पूरे क्षेत्र के विकास का एक विस्तृत ब्लू प्रिंट (Detailed Project Report) तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।जामा मस्जिद व ओल्ड दिल्ली रेलवे स्टेशन: जामा मस्जिद क्षेत्र और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के ठीक सामने स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी मार्ग (SPM Marg) के सौंदर्यीकरण और पुनर्विकास की नई कार्ययोजना तैयार करने के भी निर्देश मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए हैं।7.12 वर्ग किलोमीटर में फैला है इतिहास का खजानाबैठक में अधिकारियों ने दिल्ली के ऐतिहासिक महत्व के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि पुरानी दिल्ली लगभग 7.12 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली हुई है। 350 साल से भी अधिक पुराने इस जीवंत शहर के अंदर:1 विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site - लाल किला)10 राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक (National Protected Monuments)10 राज्य संरक्षित स्मारक (State Protected Monuments)700 से अधिक स्थानीय स्तर पर अधिसूचित विरासत स्थल मौजूद हैं।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अंत में कहा कि दिल्ली की ऐतिहासिक विरासत सिर्फ हमारी सांस्कृतिक पहचान ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर भी है। विकास कार्य इस तरह किए जा रहे हैं जिससे पुरानी दिल्ली एक विश्वस्तरीय हेरिटेज हब के रूप में अपनी नई वैश्विक पहचान बना सके।
भारतीय संस्कृति और सनातन सभ्यता में पर्यावरण संरक्षण को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया गया है। हमारे पूर्वजों ने प्रकृति को कभी सिर्फ उपभोग की वस्तु नहीं माना, बल्कि उससे श्रद्धा और सहभागिता का रिश्ता जोड़ा। मत्स्य पुराण का एक बेहद प्रसिद्ध श्लोक इस बात का सबसे बड़ा लिखित प्रमाण है:दशकूपसमा वापी, दशवापीसमो ह्रदः।दशह्रदसमः पुत्रो, दशपुत्रसमो द्रुमः॥अर्थात: दस कुओं के बराबर एक बावड़ी (जल संचयन केंद्र) होती है, दस बावड़ियों के बराबर एक विशाल तालाब होता है, दस तालाबों के बराबर एक योग्य पुत्र होता है और दस पुत्रों के बराबर एक अकेला वृक्ष (पेड़) होता है।इस श्लोक में वृक्ष की महत्ता को पुत्र से भी अधिक इसलिए आंका गया है क्योंकि एक पुत्र केवल एक परिवार का आधार बनता है, जबकि एक वृक्ष आने वाली कई पीढ़ियों का आधार बनता है। आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश जिस व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चला रहा है, वह वास्तव में इसी प्राचीन भारतीय ऋषि परंपरा का आधुनिक और प्रशासनिक विस्तार है।एक दशक पहले की विडंबना और 2017 का संकटउत्तर प्रदेश भले ही ऋषि-मुनियों की पावन तपोभूमि रहा हो, लेकिन पिछले दशकों में यहाँ पर्यावरण चेतना का घोर अभाव देखा गया। अंधाधुंध शहरीकरण के कारण वन भूमि सिकुड़ती गई, तालाबों को पाटकर अवैध निर्माण किए गए और भूजल का बेरहमी से दोहन हुआ। पूर्ववर्ती सरकारों की इस प्रशासनिक उदासीनता का सबसे बड़ा और चिंताजनक प्रमाण यह था कि साल 2017 में जब योगी सरकार ने राज्य की कमान संभाली, तब पूरे वन विभाग की सरकारी नर्सरियों में सिर्फ 5 लाख पौधे उपलब्ध थे। यह स्थिति आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को अंधकार में धकेलने जैसी थी।242 करोड़ पौधों का ऐतिहासिक कीर्तिमान और 35 करोड़ का महालक्ष्यमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यावरण के इस बड़े संकट को भांपते हुए इसे एक सरकारी कार्यक्रम के बजाय जन-आंदोलन का रूप दिया। इसके तहत समाज के हर वर्ग की भागीदारी तय की गई।2017 से अब तक का सफर: उत्तर प्रदेश में पिछले 9 वर्षों में रिकॉर्ड 242 करोड़ से अधिक पौधे रोपे जा चुके हैं।विश्व पर्यावरण दिवस का रिकॉर्ड: इसी वर्ष पर्यावरण दिवस के मौके पर रिकॉर्ड एक दिन में 5 करोड़ पौधे लगाए गए।12 जुलाई का महालक्ष्य: आगामी 12 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार एक ही दिन में 35 करोड़ पौधे रोपने का एक नया वैश्विक कीर्तिमान बनाने जा रही है।भविष्य की तैयारी: इस हरित क्रांति को निरंतर बनाए रखने के लिए यूपी वन विभाग की नर्सरियों में वर्तमान में 57 करोड़ से अधिक पौधे पूरी तरह तैयार हैं।रोपण के साथ 'रक्षण' पर जोर; बदल रहा है यूपी का भूगोलसुनील चौधरी (प्रधान मुख्य वन संरक्षक व विभागाध्यक्ष, वन विभाग, यूपी) के अनुसार, आजादी के बाद से देश और प्रदेश में कई वन महोत्सव मनाए गए और कागजी घोषणाएं हुईं, लेकिन वे सब इसलिए बेअसर रहीं क्योंकि रोपण के बाद पौधों की सुरक्षा का कोई मजबूत सिस्टम नहीं था।आज योगी सरकार सिर्फ पौधे लगा नहीं रही है, बल्कि जिओ-टैगिंग और सुरक्षा तंत्र के जरिए उनके वृक्ष बनने तक की निगरानी कर रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि लगाए गए 242 करोड़ पौधों में से लगभग दो-तिहाई (Two-Thirds) पौधे सुरक्षित रहकर विशाल वृक्ष का रूप ले रहे हैं, जो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के भूगोल और पर्यावरण की दिशा बदल देंगे।'एक पेड़ माँ के नाम': पर्यावरण चेतना को मिला भावनात्मक संबलइस महाअभियान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान ने संजीवनी का काम किया है। आम तौर पर लोग जानते हैं कि पेड़ लगाना पर्यावरण के लिए अच्छा है, लेकिन लापरवाही वश वे ऐसा नहीं करते। जब देश के प्रधानमंत्री ने इस अभियान को प्रत्येक नागरिक की मां की ममता से जोड़ दिया, तो यह एक सामाजिक और पारिवारिक दायित्व बन गया। भारतीय समाज में मां के प्रति जो अगाध श्रद्धा है, उसे इस अभियान ने पर्यावरण चेतना का जरिया बना दिया।बदलते मौसम चक्र से जूझते किसानों के लिए वरदानपिछले 25 वर्षों के आंकड़ों को देखें तो ग्लोबल वार्मिंग और वनों की कटाई के कारण उत्तर प्रदेश के मौसम चक्र में करीब डेढ़ महीने का विचलन (Shift) आ चुका है। मानसून का देरी से आना, सर्दियों का समय से पहले खत्म होना और अचानक ओलावृष्टि होना— ये सब पर्यावरण असंतुलन के विनाशकारी लक्षण हैं।उत्तर प्रदेश के उस छोटे किसान के लिए जिसके पास महज दो बीघा खेत है, यह डेढ़ महीने का मौसम परिवर्तन उसकी पूरी आजीविका को बर्बाद कर देता है। व्यापक स्तर पर हो रहा यह वृक्षारोपण और खेतों की मेड़ों पर पेड़ लगाने की नीति, इस पर्यावरणीय संकट का सबसे सटीक और सुलभ समाधान है।सनातन ज्ञान: सरकारी योजना नहीं, सामाजिक मूल्य बने जल और वनहमारे पूर्वजों ने पीपल, बरगद और नीम जैसे पेड़ों को धार्मिक रूप से पवित्र और पूजनीय इसलिए बनाया था क्योंकि वे वैज्ञानिक रूप से सर्वाधिक ऑक्सीजन देने वाले और पर्यावरण के अनुकूल वृक्ष हैं। पुराने समय में कुआं या तालाब खुदवाने को महापुण्य का काम माना जाता था, ताकि जल प्रबंधन समाज की रगों में एक संस्कार की तरह बहे, न कि किसी सरकारी योजना के भरोसे रहे।उत्तर प्रदेश सरकार आज उसी प्राचीन ऋषि ज्ञान को आधुनिक प्रशासनिक इच्छाशक्ति के साथ धरातल पर उतार रही है। आज यूपी पूरी दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि 'नेट जीरो' (Net Zero) का लक्ष्य केवल अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों या कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर पेड़ लगाकर हासिल किया जा सकता है।
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को देश में पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने अंतरराष्ट्रीय बाजार (Global Market) के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गए हैं, तो देश की आम जनता को इसका सीधा फायदा क्यों नहीं मिल रहा है? उन्होंने दावा किया कि सही कैलकुलेशन की जाए तो देश में इस समय पेट्रोल की कीमत काफी कम होनी चाहिए।अंतरराष्ट्रीय बाजार में $115 से गिरकर $70 पर आया क्रूड ऑयलएक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, “इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल से भारी गिरावट के साथ अब 70 डॉलर प्रति बैरल पर आ चुकी है। जब कच्चे तेल की कीमत इतनी कम हो गई है, तो हमारे देश में भी तेल के दाम तुरंत घटने चाहिए।”उन्होंने आगे कहा कि हमारे देश में पेट्रोल की कीमत ₹102 प्रति लीटर तक कर दी गई है। उन्होंने आम जनता को राहत देने का एक नया गणित पेश करते हुए कहा:सामान्य कैलकुलेशन के हिसाब से: देश में पेट्रोल की कीमत ₹82 प्रति लीटर होनी चाहिए।E20 (20% एथनॉल मिश्रित) के हिसाब से: अगर सरकार एथनॉल ब्लेंडेड फ्यूल दे रही है, तो पेट्रोल की कीमत घटकर ₹70 प्रति लीटर हो जानी चाहिए।केजरीवाल ने कहा कि यही नियम डीजल पर भी लागू होना चाहिए। अगर डीजल के दाम घटेंगे, तो माल ढुलाई सस्ती होगी और इससे देश में हर चीज की महंगाई अपने आप कम हो जाएगी।बंपर मुनाफे से नुकसान की भरपाई क्यों नहीं करती सरकार?सरकार और तेल कंपनियों द्वारा पुराने नुकसान की भरपाई करने के तर्कों पर सवाल उठाते हुए केजरीवाल ने कहा, “जब-जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल बेहद सस्ता हुआ, केंद्र सरकार ने देश में कीमतें कम नहीं कीं। उस दौरान तेल कंपनियों को जो बंपर प्रॉफिट (भारी मुनाफा) हुआ, क्या उससे युद्ध या अन्य संकटों के समय हुए नुकसान को सेट-ऑफ (भरपाई) नहीं किया जा सकता? जनता से जो अभी ₹102 वसूले जा रहे हैं, उसे तुरंत कम किया जाना चाहिए।”E20 ईंधन को लेकर 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों को अल्टीमेटमपेट्रोल की कीमतों के अलावा अरविंद केजरीवाल ने एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20 Fuel) के इस्तेमाल से गाड़ियों को होने वाले नुकसान और माइलेज की चिंताओं को लेकर भी मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने बुधवार को देश की 29 बड़ी ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियों को आधिकारिक पत्र लिखकर गाड़ी के माइलेज और इंजन की सुरक्षा पर E20 ईंधन के पड़ने वाले असर पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। केजरीवाल ने सभी कंपनियों को 7 दिनों के भीतर अपना जवाब सौंपने का अल्टीमेटम दिया है।उन्होंने बताया कि मारुति सुजुकी इंडिया (Maruti Suzuki), टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (Toyota Kirloskar) और हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp) को विशिष्ट तकनीकी बिंदुओं पर अलग से पत्र भेजे गए हैं। जबकि बाकी 26 वाहन निर्माताओं को एक सामान्य पत्र भेजकर E20 ईंधन के इस्तेमाल और उपभोक्ताओं के मन में बैठी चिंताओं पर उनकी राय और डेटा मांगा गया है।दिल्ली में मानसून की बदहाली पर भी बरसे केजरीवालदिल्ली में मानसून की पहली बारिश के बाद हुए भीषण जलभराव और चरमराए इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर केजरीवाल ने वर्तमान प्रशासन पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने कहा:“मुझे हंसी आती है कि मीडिया और विपक्षी लोग बार-बार केवल मिंटो ब्रिज की तस्वीर दिखाते हैं, जबकि मिंटो ब्रिज पर जलभराव की समस्या को हमारी सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान ही पूरी तरह ठीक कर दिया था। आज दिल्ली की स्थिति देखिए, जगह-जगह पानी भरा हुआ है, सड़कों पर कूड़े के ढेर हैं और सड़कें बुरी तरह टूट रही हैं। महज एक साल के अंदर इन्होंने दिल्ली का वो हाल कर दिया है जो यहाँ के लोगों ने पहले कभी नहीं देखा था।”
देशभर में मानसून की मूसलाधार बारिश आफत बनकर बरस रही है। उत्तर से लेकर पश्चिम तक, भारत के कई राज्य इस समय भीषण जलभराव, बाढ़ और भूस्खलन (Landslide) की चपेट में हैं। मैदानों में गलियां दलदल और सड़कें समंदर बन चुकी हैं, तो पहाड़ों में दरकते ग्लेशियर और मलबे इंसानी जिंदगी को लील रहे हैं। बड़े-बड़े महानगरों को पेरिस और लंदन बनाने के दावे करने वाले प्रशासन की पोल महज कुछ घंटों की बारिश ने खोल दी है। दिल्ली-एनसीआर से लेकर मुंबई और गुजरात के सूरत तक करोड़ों लोगों की जिंदगी बेतरतीब बहते पानी के भरोसे छूट गई है।दिल्ली-एनसीआर का बुरा हाल: 4 मंजिला इमारत गिरी, बालकनी ढहीदेश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे नोएडा-गाजियाबाद में आसमानी आफत ने जनजीवन थाम दिया है।गाजियाबाद (वसुंधरा व इंदिरापुरम): वसुंधरा इलाके में भारी बारिश के चलते सड़क धंसने से एक कार अचानक 'पाताल लोक' की तरह जमीन के अंदर समा गई, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। इंदिरापुरम की सड़कें स्विमिंग पूल बन चुकी हैं, जहाँ NH-24 पर पैदल चलने वाले लोग कमर तक पानी में डूबकर जाने को मजबूर हैं।दिल्ली की लाचारी: जहांगीरपुरी में डीटीसी बसों के अंदर तक पानी भर गया, वहीं संगम विहार की सड़कें नदियों में तब्दील हो गईं। रोहिणी सेक्टर-16 में एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां भारी बारिश के चलते एक 4 मंजिला निर्माणाधीन इमारत भरभराकर ढह गई। मलबे में दबने से 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोगों को रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बाहर निकाला। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता खुद हालात का जायजा लेने जमीनी निरीक्षण पर उतरीं।गुरुग्राम का हादसा: साइबर सिटी गुरुग्राम में सड़कों पर जलभराव के बीच एक हाईराइज सोसाइटी की पूरी बालकनी अचानक नीचे गिर गई। गनीमत रही कि हादसे के वक्त वहां कोई मौजूद नहीं था।पश्चिमी और उत्तर प्रदेश: अस्पतालों और मंदिरों में घुसा पानीदिल्ली से आगे उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, मेरठ और मथुरा में भी मानसून ने हाहाकार मचाया है। मेरठ के एक नामी अस्पताल के वार्डों में पानी घुस गया, जहां कर्मचारी वाइपर से पानी साफ करते नजर आए। वहीं, मथुरा-वृंदावन में विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के मुख्य रास्तों और बाजारों में कई फीट गंदा पानी भर गया, जिससे देश-विदेश से आए श्रद्धालु बेहद दयनीय स्थिति में दर्शन करने को मजबूर हैं। सहारनपुर में उफनती नदी के तेज बहाव में बहे दो बाइक सवारों को स्थानीय लोगों ने देवदूत बनकर बचाया।महाराष्ट्र: पातालगंगा नदी उफनी, बह गए 3000 एलपीजी सिलेंडरमहाराष्ट्र के रायगढ़ जिले की पनवेल तहसील से एक बेहद हैरान करने वाला और खतरनाक मंजर सामने आया है। भारी बारिश के कारण यहाँ की पातालगंगा नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ का पानी सीधे HPCL पातालगंगा एलपीजी बॉटलिंग प्लांट के अंदर घुस गया। बाढ़ के तेज बहाव के कारण प्लांट में रखे करीब 3,000 कमर्शियल और डोमेस्टिक गैस सिलेंडर नदी में बह गए।नदी में तैरते हजारों सिलेंडरों को देखने के लिए किनारे पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। कई लोग जान जोखिम में डालकर बहते सिलेंडरों को लूटने के लिए पानी में कूद पड़े। प्रशासन ने सख्त चेतावनी जारी करते हुए लोगों से अपील की है कि इन सिलेंडरों में अत्यधिक ज्वलनशील गैस हो सकती है, इसलिए इन्हें छूने या घर ले जाने का प्रयास बिल्कुल न करें, यह जानलेवा साबित हो सकता है।गुजरात: सूरत में 400 mm बारिश, 100 टेक्सटाइल मार्केट डूबेडायमंड और कपड़ा नगरी सूरत की सूरत इस बारिश ने पूरी तरह बिगाड़ दी है। शहर में पिछले 48 घंटों के भीतर 400 मिलीमीटर (mm) से ज्यादा की मूसलाधार बारिश दर्ज की गई है। रिहायशी इलाकों से लेकर पेट्रोल पंप और बीआरटीएस बस स्टैंड पानी में समा चुके हैं। हालात से निपटने के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और फायर ब्रिगेड की टीमों को बोट (नाव) लेकर सड़कों पर उतरना पड़ा है, जिन्होंने अब तक 300 से अधिक लोगों का सफल रेस्क्यू किया है।इस आपदा का सबसे बड़ा आर्थिक झटका सूरत के कपड़ा उद्योग को लगा है। शहर के करीब 100 टेक्सटाइल मार्केट के बेसमेंट पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। इसके चलते व्यापारियों की बेसमेंट में रखीं करोड़ों रुपये की कीमती साड़ियां, लहंगे और ड्रेस मटेरियल पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक, व्यापारियों को हजारों करोड़ रुपये का व्यापारिक नुकसान हुआ है।पहाड़ों में तबाही: पांगी और टिहरी में लैंडस्लाइड, वैष्णो देवी मार्ग प्रभावितमैदानों की यह लाचारी पहाड़ों पर पहुंचकर और अधिक खौफनाक रूप अख्तियार कर रही है:हिमाचल प्रदेश: पांगी इलाके में एक विशालकाय पहाड़ का हिस्सा ताश के पत्तों की तरह टूटकर मुख्य हाईवे पर आ गिरा। समय रहते ट्रैफिक रुका होने के कारण कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई।उत्तराखंड (टिहरी): टिहरी में भीषण लैंडस्लाइड के चलते पहाड़ से भारी मलबा नीचे गिरा, जिसकी चपेट में आकर एक पुरानी खाली इमारत जमींदोज हो गई। प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए पहले ही आसपास की दुकानें खाली करा ली थीं।जम्मू-कश्मीर (वैष्णो देवी): माता वैष्णो देवी भवन के मुख्य मार्ग पर भी भूस्खलन हुआ है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर चलने वाले बैटरी चालित ऑटो पर फिलहाल पूरी तरह रोक लगा दी है, हालांकि पैदल यात्रियों को सावधानी के साथ जाने की अनुमति दी जा रही है।मौसम वैज्ञानिकों और एक्सपर्ट्स ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि आने वाले दिनों में यह पानी और रुलाएगा। मानसून की यह भयावह रफ्तार भारत के अनियोजित ड्रेनेज सिस्टम और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है।
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) 2026 के नतीजों का इंतजार कर रहे लाखों मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नीट यूजी 2026 का रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में वर्तमान में उम्मीदवारों की ओएमआर (OMR) शीट का मूल्यांकन युद्ध स्तर पर चल रहा है।दरअसल, इस साल पेपर लीक विवाद के बाद मुख्य परीक्षा को रद्द करना पड़ा था, जिसके बाद 21 जून 2026 को दोबारा (Re-Exam) परीक्षा आयोजित की गई थी। इस पूरे घटनाक्रम के कारण नया शैक्षणिक सत्र (Academic Session) काफी लेट हो चुका है। सत्र को और अधिक पिछड़ने से बचाने के लिए मेडिकल काउंसलिंग कमिटी (MCC) और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसके तहत जल्द ही नया एमबीबीएस (MBBS) सीट मैट्रिक्स जारी किया जाएगा, जिसमें सीटों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।डेढ़ महीना लेट हुआ शेड्यूल; काउंसलिंग जल्द खत्म करने के लिए मंत्रालयों की बैठकनीट यूजी पेपर लीक और दोबारा परीक्षा होने के चलते एनटीए का पूरा शेड्यूल करीब डेढ़ महीने पीछे चल रहा है। समय पर सत्र शुरू करना इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती है। इसी सिलसिले में बीते दिनों शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) और काउंसलिंग कमिटी के शीर्ष अधिकारियों के बीच एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा एमबीबीएस एडमिशन के लिए होने वाली काउंसलिंग प्रक्रिया को बेहद कम समय में और सरल तरीके से पूरा करना था। बैठक में यह रणनीति बनाई गई है कि जैसे ही NTA नीट यूजी का रिजल्ट घोषित करेगा, बिना किसी देरी के तुरंत काउंसलिंग शुरू कर दी जाएगी ताकि एडमिशन प्रोसेस को जल्द से जल्द खत्म किया जा सके।15 जुलाई से पहले आ सकता है MBBS सीट मैट्रिक्सकाउंसलिंग प्रक्रिया को रफ्तार देने के लिए NMC इस बार नीट यूजी रिजल्ट जारी होने से पहले ही देश के सभी मेडिकल कॉलेजों का MBBS सीट मैट्रिक्स 2026 आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर देगा। माना जा रहा है कि 15 जुलाई 2026 से पहले यह सीट मैट्रिक्स जारी हो सकता है, जिससे छात्रों को चॉइस फिलिंग (कॉलेज चुनने की प्रक्रिया) के दौरान काफी आसानी होगी।10,000 नई सीटें बढ़ने की संभावना; कुल आंकड़ा 1.40 लाख के पारसीट मैट्रिक्स जारी होने के बाद ही देश में एमबीबीएस की सटीक सीटों की स्थिति साफ होगी, लेकिन सूत्रों और विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार मेडिकल के छात्रों को बड़ा तोहफा मिल सकता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस सत्र से देश के विभिन्न राज्यों में कई नए सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेज शुरू होने जा रहे हैं। इसके चलते इस साल एमबीबीएस की सीटों में 10 हजार तक की बंपर बढ़ोतरी की जा सकती है।वर्तमान में कुल सीटें: लगभग 1.29 लाखबढ़ोतरी के बाद संभावित सीटें: लगभग 1.40 लाखसीटों के बढ़ने से न केवल कट-ऑफ में थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, बल्कि अधिक से अधिक होनहार छात्रों को देश में ही डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने का मौका मिलेगा।
केंद्रीय भंडार निगम ने मदन दिलावर को सौंपा 44 लाख रुपए का चेक
कोटा। केन्द्रीय भंडार निगम ने राजस्थान में कोटा जिले में रामगंजमंडी क्षेत्र के राजकीय चिकित्सा संस्थानों में चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए लगभग 44 लाख रुपए मूल्य के आवश्यक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है। निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक प्रिंस कुमार ने गुरुवार को शिक्षा एवं पंचायती राज […] The post केंद्रीय भंडार निगम ने मदन दिलावर को सौंपा 44 लाख रुपए का चेक appeared first on Sabguru News .
कृषि शिक्षा में अध्ययनरत पात्र छात्राओं को मिलेगी प्रोत्साहन राशि
राज किसान साथी पोर्टल पर होंगे ऑनलाइन आवेदन अजमेर। कृषि विभाग की राज्य योजना के अंतर्गत कृषि शिक्षा में अध्ययनरत छात्राओं को प्रोत्साहन राशि प्रदान करने के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया प्रारम्भ हो गई है। पात्र छात्राएं राज किसान साथी पोर्टल के माध्यम से आगामी 31 जनवरी 2027 तक आवेदन कर सकती हैं। कृषि विभाग […] The post कृषि शिक्षा में अध्ययनरत पात्र छात्राओं को मिलेगी प्रोत्साहन राशि appeared first on Sabguru News .
शहरी सेवा शिविरों में विशेष योग्यजनों के सर्वे हेतु नोडल अधिकारी नियुक्त
पात्र दिव्यांगजन योजनाओं के लाभ से नहीं रहेंगे वंचित अजमेर। जिले में संचालित शहरी सेवा शिविरों के माध्यम से विशेष योग्यजनों को राज्य एवं केन्द्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने सभी नगरीय निकायों में नोडल अधिकारी एवं सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं। इन अधिकारियों की […] The post शहरी सेवा शिविरों में विशेष योग्यजनों के सर्वे हेतु नोडल अधिकारी नियुक्त appeared first on Sabguru News .
भोपाल में मानसिक रूप से कमजोर नाबालिग से गैंगरेप, भाई को भेजा वीडियो
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में 16 वर्षीय मानसिक रूप से कमजोर नाबालिग लड़की से गैंगरेप का मामला सामने आया है। आरोपियों ने वारदात का वीडियो बनाकर पीड़िता के भाई के मोबाइल पर भेजा, जिसके बाद परिजन ने पुलिस से शिकायत की। पुलिस सूत्रों के अनुसार पीड़िता ने स्कूल जाना […] The post भोपाल में मानसिक रूप से कमजोर नाबालिग से गैंगरेप, भाई को भेजा वीडियो appeared first on Sabguru News .
देश के ईवी बाजार में 18% हुई UP की हिस्सेदारी, 30 फीसदी तक पहुंचने का लक्ष्य
Uttar Pradesh EV market: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) विनिर्माण एवं गतिशीलता नीति-2022 का प्रभाव अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2025-26 में पिछले वर्ष ...
35 करोड़ रुपए की कर चोरी की आशंका पर फर्म के ठिकानों पर सर्च
जयपुर/पाली। राजस्थान में राज्य जीएसटी वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा कर चोरी के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत मुख्यालय की प्रवर्तन शाखा-तृतीय जयपुर द्वारा मेसर्स प्रेम ग्रीन प्राइवेट लिमिटेड एवं उससे संबंधित चार अन्य फर्मों के कई ठिकानों पर सर्च कार्यवाही की गई। समूह की फर्मों द्वारा मेहन्दी पाउडर, मेहन्दी कोन, हेयर कलर […] The post 35 करोड़ रुपए की कर चोरी की आशंका पर फर्म के ठिकानों पर सर्च appeared first on Sabguru News .
निःशुल्क नेत्र जांच शिविर में उमड़ी मरीजों की भीड़, विशेषज्ञों ने दिए आंखों की देखभाल के टिप्स
अजमेर। भारत विकास परिषद महाराणा प्रताप शाखा एवं शंकर आयुर्वेद सिविल लाइंस अजमेर के संयुक्त तत्वावधान में निःशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में दिल्ली के वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक एवं रेटिना व नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्ञानेंद्र शर्मा ने मरीजों की आंखों की जांच कर आवश्यक परामर्श दिया। परिषद सचिव दीपक चोपड़ा […] The post निःशुल्क नेत्र जांच शिविर में उमड़ी मरीजों की भीड़, विशेषज्ञों ने दिए आंखों की देखभाल के टिप्स appeared first on Sabguru News .
जीतू पटवारी का भाई नाना पुलिस हिरासत में, ड्रग नेटवर्क में आया नाम
Jeetu Patwari Bhai Nana Patwari detained: मध्य प्रदेश की सियासत और पुलिस महकमे से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी को पुलिस ने हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई 10 ग्राम एमडी ...
जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक का नाराजगी भरा वीडियो सामने आया है। जिसमें वे कहते दिखाई दे रहे हैं कि वे भूख हड़ताल पर बैठे हैं और लोग यहां ठूंस-ठूंसकर खा रहे हैं। कहीं उनका इशारा 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत ...
वीरांगना रानी अवंतीबाई ने देश की रक्षा व आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर किया : योगी आदित्यनाथ
Chief Minister Yogi Adityanath : वीरांगना रानी अवंती बाई ने भारत की आन-बान-शान की रक्षा और देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका बलिदान और त्याग आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को ...
अमरनाथ गुफा केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि प्रकृति का अद्भुत चमत्कार भी है। प्राकृतिक रूप से बनने वाला हिम शिवलिंग (बाबा बर्फानी) श्रद्धालुओं के लिए भगवान शिव का साक्षात स्वरूप माना जाता है, लेकिन इस साल प्राकृतिक बर्फ का शिवलिंग लगभग पूरी तरह ...
अप्रैल का महीना था। मौसम पूरी तरह से नए पौधे लगाने के अनुकूल नहीं था, फिर भी घूमने के दौरान एक सुंदर सा पौधा मन को इतना भा गया कि उसे अपने साथ घर ले आए। घर पहुँचते ही उसे एक बड़े गमले में सावधानी से लगा दिया। यह जानते हुए भी कि समय शायद सही नहीं है, ...
सीएम डॉ. मोहन यादव ने कालापीपल को दी 30.86 करोड़ की सौगात, दोहराया UCC को लागू करने का संकल्प
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को शाजापुर जिले के कालापीपल को 30.86 करोड़ लागत के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने यहां कई कामों के लोकार्पण और भूमिपूजन किए। उन्होंने यहां आयोजित किसान समृद्धि संकल्प सम्मेलन एवं ...
ईरान के सरकारी मीडिया ने गुरुवार को पहली बार वह वीडियो जारी किया है, जिसमें पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के तेहरान स्थित परिसर के अंदर हुई भारी तबाही दिखाई गई है। यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब एक सप्ताह तक चले अंतिम संस्कार के बाद ...
फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) का रोमांच इस समय पूरी दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा है और टूर्नामेंट अब अपने सबसे दिलचस्प मोड़ यानी क्वार्टर फाइनल की तरफ बढ़ चुका है। इस महाकुंभ में मेसी, रोनाल्डो और एम्बापे जैसे दिग्गज खिलाड़ी जिस फुटबॉल से मैदान पर जादू बिखेर रहे हैं, वह कोई साधारण गेंद नहीं है। 'ट्रियोन्डा' (Trionda) नाम की इस आधिकारिक फुटबॉल के भीतर अत्याधुनिक सेंसर और बैटरी की हाई-टेक तकनीक छिपी हुई है, जिसका सीधा कनेक्शन हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान के सियालकोट (Sialkot) शहर से है। आइए समझते हैं इस स्मार्ट फुटबॉल के पीछे का पूरा विज्ञान और इसकी हैरान करने वाली खासियतें।सियालकोट: दुनिया की फुटबॉल राजधानी में बनी सबसे एडवांस्ड गेंदपाकिस्तान के सियालकोट को दुनिया की 'फुटबॉल राजधानी' कहा जाता है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर इस्तेमाल होने वाली दो-तिहाई से ज्यादा फुटबॉल इसी शहर में मैनुफैक्चर की जाती हैं। ट्रियोन्डा फुटबॉल को जर्मनी में डिजाइन किया गया है, लेकिन इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन सियालकोट में हुआ है। एडिडास (Adidas) की यह अब तक की सबसे एडवांस्ड गेंद है, जो पूरी तरह से डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर काम करती है।500 हर्ट्ज का मोशन सेंसर: हर सेकंड 500 बार रिकॉर्ड होती है मूवमेंटइस फुटबॉल के बिल्कुल सेंटर में एक बेहद शक्तिशाली 500 हर्ट्ज (Hz) का सस्पेंडेड मोशन सेंसर लगाया गया है।लाइव डेटा ट्रैकिंग: यह सेंसर हर एक सेकंड में 500 बार गेंद की हर एक मूवमेंट, उसकी स्पिन (घूमना), स्पीड, खिलाड़ियों का टच और शॉट की पावर को रिकॉर्ड करता है।रेफरी को सटीक मदद: गेंद से मिलने वाला यह सारा डेटा रियल-टाइम में वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) रूम और कनेक्टेड एआई सिस्टम को भेजा जाता है। इसकी मदद से ऑफसाइड (Offside) और गोल-लाइन जैसे विवादित फैसलों को रेफरी पलक झपकते ही बिल्कुल सटीक तरीके से सुलझा लेते हैं।मैच से पहले चार्ज होती है फुटबॉल, जीरो ग्रेविटी में हुआ है टेस्टचूँकि गेंद के अंदर इलेक्ट्रॉनिक सेंसर और ट्रांसमीटर लगे हैं, इसलिए इन्हें पावर देने के लिए एक छोटी रीचार्जबल बैटरी भी फिट की गई है। यही वजह है कि हर वर्ल्ड कप मैच से ठीक पहले इन फुटबॉल को किसी स्मार्टफोन की तरह बाकायदा चार्जिंग पॉइंट पर लगाकर चार्ज किया जाता है।गेंद का संतुलन (Balance) इतना परफेक्ट है कि इसे अंतरिक्ष में, जीरो ग्रेविटी (Zero Gravity) के माहौल में भी टेस्ट किया जा चुका है, जहाँ इसकी फ्लाइट और बैलेंस 100% सटीक पाए गए। भारतीय मुद्रा में इस एक ऑफिशियल मैच बॉल की कीमत लगभग 14,000 से 15,000 रुपये के बीच है।कम पैनल्स और गजब का एयर कंट्रोलडिजाइन की बात करें तो ट्रियोन्डा को बेहद कम पैनल्स को आपस में जोड़कर (थर्मल बॉन्डिंग तकनीक से) बनाया गया है। कम जोड़ होने की वजह से हवा में इस गेंद की रफ्तार (Flight) बेहद स्मूद और प्रेडिक्टेबल यानी अनुमान लगाने योग्य होती है। यह अनोखा डिजाइन खिलाड़ियों को मैदान पर गजब का ग्रिप, स्विंग और शॉट पर बेहतरीन कंट्रोल देता है। जहाँ एक तरफ इस फुटबॉल की बदौलत खेल की दुनिया में पाकिस्तान की तकनीक का डंका बज रहा है, वहीं दूसरी तरफ क्रिकेट जैसे पारंपरिक खेलों में पाकिस्तान का ग्राफ लगातार नीचे गिरता जा रहा है।
हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए सावन (श्रावण) के महीने को सबसे उत्तम और परम फलदायी माना गया है। सावन का पूरा महीना ही शिव भक्ति के रंग में रंगा होता है, लेकिन इस दौरान कुछ विशेष व्रत और त्योहार ऐसे आते हैं जिनमें शिवलिंग का जलाभिषेक करने से भोलेनाथ अति शीघ्र प्रसन्न होते हैं। साल 2026 का सावन मास कई मायनों में बेहद अनूठा और दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है। आइए जानते हैं सावन के उन 6 महा-अवसरों की पूरी लिस्ट, जिन दिनों शिव जी की उपासना करने से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं।1. सावन के सोमवार (4 सोमवार का अद्भुत संयोग)सावन मास में सोमवार के व्रत का अत्यधिक महत्व है। साल 2026 में सावन के महीने में कुल 4 सोमवार पड़ रहे हैं, जिनमें कई विशेष संयोग बन रहे हैं:पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026दूसरा सावन सोमवार (सोम प्रदोष व्रत): 10 अगस्त 2026तीसरा सावन सोमवार (नाग पंचमी): 17 अगस्त 2026चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 20262. सावन के महा-अचूक प्रदोष व्रत (Som & Bhaum Pradosh)प्रदोष व्रत साक्षात भगवान शिव को समर्पित होता है। इस बार सावन में दो बेहद शुभ प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं:सोम प्रदोष व्रत (10 अगस्त 2026): सावन के दूसरे सोमवार को ही प्रदोष व्रत का होना एक महासंयोग है। इस दिन जलाभिषेक करने से दुर्लभ फलों की प्राप्ति होती है।भौम प्रदोष व्रत (25 अगस्त 2026): मंगलवार के दिन पड़ने वाले इस प्रदोष व्रत को कर्ज मुक्ति और हनुमान जी की कृपा के लिए भी उत्तम माना जाता है।3. सावन शिवरात्रि (11 अगस्त 2026)सावन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि मनाई जाती है, जो इस साल 11 अगस्त 2026 को है। यदि किसी के विवाह में लगातार बाधाएं आ रही हैं या वैवाहिक जीवन में अनबन चल रही है, तो इस दिन व्रत रखकर चार पहर की पूजा और शिवलिंग पर पंचामृत अभिषेक करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।4. हरियाली तीज (15 अगस्त 2026)महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए अखंड सौभाग्य का पर्व हरियाली तीज इस साल 15 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस पावन तिथि पर माता पार्वती और देवाधिदेव महादेव की संयुक्त रूप से पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा से व्रत रखने पर सुयोग्य, मनचाहा जीवनसाथी मिलता है और सुहागिनों के पति की आयु लंबी होती है।5. नाग पंचमी पर दुर्लभ सोमवार का योग (17 अगस्त 2026)इस साल नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा और सबसे विशेष बात यह है कि इस दिन सावन का तीसरा सोमवार भी है। सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ होना बेहद कल्याणकारी माना जाता है। इस दिन महादेव के साथ-साथ उनके गले के आभूषण नाग देवता की दूध और जल से विशेष पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से कालसर्प दोष, अज्ञात भय और सर्पदंश के खतरों से मुक्ति मिलती है।6. सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन (28 अगस्त 2026)सावन महीने का समापन श्रावण पूर्णिमा के साथ होता है, जो इस साल 28 अगस्त 2026 को है। इसी पावन तिथि पर भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा। सावन की पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान, दान और भोलेनाथ का गंगाजल से जलाभिषेक करने से पूरे परिवार पर शिव जी का वरदहस्त बना रहता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
झारखंड के पलामू जिले में पारिवारिक विवाद के बाद एक महिला ने अपनी दो मासूम बेटियों के साथ कुएं में छलांग लगा दी। इस घटना में दोनों बच्चियों की मौत हो गई, जबकि महिला को ग्रामीणों ने जीवित निकाल लिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
अमरीकी हमलों की दूसरी रात के बाद ईरानी नेतृत्व ने ट्रंप को चेताया, हमला करोगे तो जवाब मिलेगा
तेहरान। अमरीका और ईरान के बीच लगातार दूसरी रात हमलों के आदान-प्रदान के बाद ईरानी नेतृत्व ने अमेरिकी प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य अभियान का दायरा होर्मुज जलडमरूमध्य से आगे बढ़ाते हुए ईरान के रणनीतिक बंदरगाह शहर चाबहार तक कर दिया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड […] The post अमरीकी हमलों की दूसरी रात के बाद ईरानी नेतृत्व ने ट्रंप को चेताया, हमला करोगे तो जवाब मिलेगा appeared first on Sabguru News .
भारतीय कॉर्पोरेट जगत (Corporate Sector) में इन दिनों एक नया और चौंकाने वाला वर्क कल्चर तेजी से पैर पसार रहा है। अब कर्मचारी दफ्तर आते हैं, अपनी डेस्क संभालते हैं, सिर्फ उतना ही काम करते हैं जितना उनके कॉन्ट्रैक्ट या जॉब डिस्क्रिप्शन (JD) में लिखा है, और समय होते ही लॉग-ऑफ कर देते हैं—न एक मिनट कम, न एक मिनट ज्यादा। मैनेजमेंट और एचआर की भाषा में इस नए ट्रेंड को 'एफर्ट रिसेशन' (Effort Recession यानी प्रयासों में मंदी) का नाम दिया गया है, जिसने देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों के कप्तानों की नींद उड़ा दी है।क्या होता है 'डिस्क्रीशनरी एफर्ट' जो अब गायब हो रहा है?किसी भी नौकरी में एक ऐसा हिस्सा होता है, जिसे कोई भी कंपनी अपने कर्मचारियों से जबरन या नियम कानून के दम पर नहीं करवा सकती। जैसे—बिना कहे देर रात तक रुकना, अपनी जिम्मेदारी से बाहर जाकर किसी कलीग की मदद करना, या किसी प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए अपनी क्षमता से बढ़कर योगदान देना। इसे मैनेजमेंट विज्ञान में 'डिस्क्रीशनरी एफर्ट' (Discretionary Effort - स्वैच्छिक प्रयास) कहा जाता है। यही वो एक्स्ट्रा पुश होता है जो किसी साधारण कर्मचारी को लीडर बनाता है और कंपनियों को आगे बढ़ाता है, लेकिन अब भारतीय वर्कफोर्स से यह स्वैच्छिक प्रयास पूरी तरह गायब होता दिख रहा है।'ग्रेट प्लेस टू वर्क' की रिपोर्ट का चौंकाने वाला खुलासा'ग्रेट प्लेस टू वर्क इंडिया' (Great Place to Work India) की साल 2026 की एक हालिया स्टडी ने इस ट्रेंड पर मुहर लगाई है।10 में से 6 कंपनियां परेशान: सर्वे में शामिल देश की लगभग 63% कंपनियों (380 में से 240 संगठनों) ने स्वीकार किया है कि पिछले एक साल में उनके कर्मचारियों के 'स्वैच्छिक प्रयास' में औसतन 5% की भारी गिरावट आई है।रिटेल और आईटी पर सबसे ज्यादा मार: इस मंदी का सबसे बुरा असर रिटेल सेक्टर (88%) में देखा गया है। इसके बाद आईटी (IT) और प्रोफेशनल सर्विसेज (77%) तथा कंस्ट्रक्शन व रियल एस्टेट (71%) का नंबर आता है। वहीं, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर इस मामले में सबसे मजबूत रहा, जहाँ सिर्फ 44% कंपनियों ने ही इस गिरावट को महसूस किया।'मूड वैसा, काम जैसा' — मैनेजर के व्यवहार पर टिका है एक्स्ट्रा एफर्टरिपोर्ट के निष्कर्ष साफ इशारा करते हैं कि कर्मचारी अब 'अंधभक्ति' के मूड में नहीं हैं। उनका एक्स्ट्रा काम पूरी तरह से कंपनी के लीडरशिप और भरोसे पर टिका है:केयरिंग मैनेजर = 99% एफर्ट: जिन कर्मचारियों को लगता है कि उनका मैनेजर सच में उनकी परवाह करता है और उन्हें काम के बदले सही पैसे व सम्मान मिलेगा, उनका अतिरिक्त प्रयास का स्तर 99 फीसदी तक देखा गया।भरोसे की कमी = सिर्फ 29% काम: जहाँ कर्मचारियों और मैनेजमेंट के बीच भरोसे की कमी है, वहाँ यह स्वैच्छिक योगदान गिरकर महज 29 फीसदी पर सिमट जाता है। इसी तरह, प्रेरणादायक लीडरशिप मिलने पर एक्स्ट्रा एफर्ट 98% रहता है, अन्यथा केवल 32% रह जाता है।Gen Z और AI के दौर में एचआर (HR) के सामने नई चुनौतीभारतीय कार्यबल (Workforce) में अब जेन-जी (Gen Z) यानी नई पीढ़ी के कर्मचारियों की हिस्सेदारी बढ़कर 26% हो चुकी है। इसके साथ ही कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बड़े बदलावों से गुजर रही हैं।लगभग 58% चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर्स (CHROs) का मानना है कि उन्हें एक तरफ एआई (AI) को अपनाना पड़ रहा है, तो दूसरी तरफ नई पीढ़ी की उम्मीदों के हिसाब से ऑफिस का माहौल बदलना पड़ रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि करीब 50% एचआर प्रमुखों ने माना कि वे आज भी जेन-जी कर्मचारियों की प्राथमिकताओं (वर्क-लाइफ बैलेंस, मेंटल पीस) को पूरी तरह समझने में नाकाम रहे हैं। कर्मचारी अब 'क्वाइट क्विटिंग' (Quiet Quitting) को अपना रहे हैं, जो सीधे तौर पर कॉर्पोरेट जगत के लिए 'एफर्ट रिसेशन' बन चुका है।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026 की प्रोविजनल आंसर की (Provisional Answer Key) और रिस्पॉन्स शीट आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दी है। जो उम्मीदवार 2 से 4 जुलाई 2026 के बीच आयोजित हुई इस परीक्षा में शामिल हुए थे, वे अब ऑनलाइन माध्यम से अपनी उत्तर कुंजी चेक और डाउनलोड कर सकते हैं। इसके साथ ही आयोग ने प्रश्नों या उत्तरों पर आपत्ति (Objection) दर्ज करने की तारीखों का भी ऐलान कर दिया है।14 जुलाई है आपत्ति दर्ज करने की लास्ट डेट, प्रति प्रश्न लगेंगे ₹500अगर किसी उम्मीदवार को आयोग द्वारा जारी किए गए किसी प्रश्न या उसके उत्तर पर कोई आपत्ति है, तो वह ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपना चैलेंज सबमिट कर सकता है। आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तिथि 14 जुलाई 2026 को रात 11:59 बजे तक तय की गई है। उम्मीदवारों को ध्यान रखना होगा कि प्रत्येक आपत्ति के लिए ₹500 की फीस ऑनलाइन जमा करनी होगी। इसके साथ ही साक्ष्य के रूप में एनसीईआरटी (NCERT) या एससीईआरटी (SCERT) जैसी प्रामाणिक किताबों के स्कैन दस्तावेज अपलोड करने होंगे। यदि उम्मीदवार की आपत्ति सही पाई जाती है, तो यह फीस उनके खाते में वापस (Refund) कर दी जाएगी।OMR Sheet से कैसे कैलकुलेट करें अपना संभावित स्कोर?UPTET एक ऑफलाइन पेन-पेपर आधारित परीक्षा है, जिसमें उत्तरों का मूल्यांकन कंप्यूटर आधारित ऑप्टिकल मार्क रिकॉग्निशन (OMR) स्कैनर द्वारा किया जाता है। परीक्षा के बाद आपको मिली ओएमआर शीट की 'स्टूडेंट कार्बन कॉपी' और आधिकारिक आंसर की की मदद से आप घर बैठे अपना सटीक स्कोर जान सकते हैं।इस परीक्षा की मार्किंग स्कीम बेहद सरल है क्योंकि इसमें कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं है। परीक्षा में कुल 150 प्रश्न पूछे गए थे, जो 150 अंकों के थे। हर सही उत्तर के लिए आपको +1 अंक जोड़ना है, जबकि गलत या बिना हल किए गए प्रश्नों के लिए 0 अंक मिलेंगे (यानी कोई नंबर नहीं काटा जाएगा)। अपनी ओएमआर शीट के गोलों का आधिकारिक मास्टर आंसर की से मिलान करें और जितने विकल्प सही मिल रहे हैं, उन्हें जोड़कर अपना स्कोर निकाल लें। सामान्य वर्ग के लिए क्वालीफाइंग मार्क्स 90 (60%) और आरक्षित वर्ग (OBC/SC/ST) के लिए 82 (55%) तय हैं।UPTET Answer Key 2026 कैसे डाउनलोड करें?आंसर की डाउनलोड करने और आपत्ति दर्ज करने के लिए उम्मीदवार इन आसान स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं:सबसे पहले उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट upessc.up.gov.in पर जाएं।होमपेज पर फ्लैश हो रहे लिंक 'शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET-2026) -: प्रश्न आपत्ति (Qs. Objection)' पर क्लिक करें।अब आपके सामने एक नया लॉगिन पेज खुलेगा, जहाँ आपको अपना रोल नंबर (या रजिस्ट्रेशन नंबर) और जन्मतिथि (DOB) दर्ज करनी होगी।डिटेल्स सबमिट करते ही आपका डैशबोर्ड खुल जाएगा, जहाँ से आप पेपर-1 और पेपर-2 की प्रोविजनल आंसर की पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं।यदि ऑब्जेक्शन करना हो, तो ड्रॉप-डाउन मेनू से प्रश्न संख्या चुनकर, अपना दावा दर्ज करें और प्रमाण पत्र अटैच करके ऑनलाइन फीस का भुगतान करें।
पिछले कुछ वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) केवल बड़ी टेक कंपनियों या दफ्तरों तक सीमित रहने वाली तकनीक नहीं रह गया है, बल्कि यह चुपचाप हमारे घरों का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुका है। पैसों के लेनदेन और रास्तों की खोज से आगे बढ़कर AI अब हमारे लिविंग रूम, किचन और बाथरूम तक पहुंच चुका है। हालिया ग्लोबल रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दशक के अंत तक वैश्विक एआई बाजार 1.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का होने की उम्मीद है। यह तकनीक अब सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और एक बेहतर, तनावमुक्त जीवनशैली को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे 'स्मार्ट होम इकोसिस्टम' (Smart Home Ecosystem) की नींव बन चुकी है।बीमारी आने के बाद नहीं, बीमारी से पहले ही मिलेगा समाधानदशकों से भारतीयों की यह आदत रही है कि जब सेहत खराब होती है, हम तभी डॉक्टर या समाधान की तरफ भागते हैं। जैसे- खांसी या सांस की तकलीफ बढ़ने पर एयर प्यूरीफायर का ख्याल आता है या पेट खराब होने पर पानी के टीडीएस (TDS) की चिंता होती है। लेकिन एआई और ऑटोमेशन (Automation) ने अब इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है।भविष्यवाणी करने वाली तकनीक: आधुनिक स्मार्ट होम अब अपने आसपास के माहौल को खुद समझते हैं, यूजर की आदतों से सीखते हैं और संभावित स्वास्थ्य समस्याओं का पहले से अनुमान लगाकर समय रहते जरूरी कदम उठा लेते हैं।बाजार में रिकॉर्ड तेजी: यही वजह है कि साल 2024 में जो वैश्विक स्मार्ट होम मार्केट लगभग 128 अरब अमेरिकी डॉलर का था, वह 2030 तक तेजी से बढ़कर 537 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।कोविड-19 के बाद बदली सोच: हेल्थ और हाइजीन बनी पहली प्राथमिकताइस तकनीकी क्रांति के पीछे सबसे बड़ी वजह कोविड-19 (COVID-19) महामारी के बाद लोगों की बदली हुई मानसिकता है। अब लोग अपनी इम्युनिटी और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर बेहद गंभीर हो चुके हैं। भारत के बड़े महानगरों से लेकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी सस्ता इंटरनेट, स्मार्टफोन की पहुंच और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित गैजेट्स ने स्मार्ट लिविंग को हर घर तक पहुंचा दिया है।AI एयर प्यूरीफायर और स्मार्ट वॉटर फिल्टर: सांस और पानी पर कड़ा पहराबढ़ते प्रदूषण के इस दौर में घर के अंदर की हवा को शुद्ध रखना अब विलासिता नहीं बल्कि मजबूरी बन चुका है।स्मार्ट एयर प्यूरीफिकेशन: पारंपरिक फिल्टरों के उलट, एआई-आधारित एयर प्यूरीफायर हवा में मौजूद धूल के सूक्ष्म कणों (PM 2.5), नमी, बैक्टीरिया और एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों पर लाइव नजर रखते हैं। अगर बाहर अचानक प्रदूषण बढ़ता है, तो ये सिस्टम खुद-ब-खुद अपनी क्लीनिंग स्पीड बढ़ा देते हैं और कमरा खाली होने पर बिजली बचाने के लिए स्लीप मोड में चले जाते हैं।खुद डॉक्टर बनने वाले वॉटर प्यूरीफायर: पानी को शुद्ध करने के लिए अब एआई वॉटर प्यूरीफायर आ चुके हैं, जो पानी के टीडीएस (TDS) के स्तर की लगातार जांच करते रहते हैं। ये फिल्टर की लाइफ पर खुद नजर रखते हैं और स्थानीय पानी की गुणवत्ता के आधार पर मोबाइल ऐप के जरिए पहले ही यूजर को अलर्ट कर देते हैं कि सर्विसिंग की जरूरत कब पड़ने वाली है। आजकल 2.5 साल तक चलने वाले लॉन्ग-लाइफ फिल्टर और सब्सक्रिप्शन आधारित मेंटेनेंस मॉडल ने इसे और आसान बना दिया है।स्मार्ट किचन और चिमनी: वॉइस कमांड पर बदल जाती है सेटिंगयह एआई बदलाव केवल हवा और पानी तक सीमित नहीं है, बल्कि अब आपके किचन को भी हाइटेक बना रहा है। आधुनिक स्मार्ट किचन (Smart Kitchen) घर के सदस्यों की खानपान की आदतों, कैलोरी की जरूरत और पसंद के आधार पर खुद ब खुद हेल्दी रेसिपीज के विकल्प सुझाने लगे हैं। वहीं, किचन में लगने वाली एआई चिमनी अब वॉइस कमांड (Voice Command), गेस्चर कंट्रोल, IoT कनेक्टिविटी और सीधे मोबाइल ऐप के जरिए धुएं के स्तर को भांपकर अपनी सक्शन पावर और सेटिंग्स को ऑटो-एडजस्ट कर लेती हैं।रोज-रोज के छोटे फैसलों और मानसिक थकान से मिलेगी मुक्तिइन एडवांस होम ऑटोमेशन तकनीकों का सबसे बड़ा फायदा सिर्फ गैजेट्स का दिखावा करना नहीं है, बल्कि इंसानी दिमाग से रोजमर्रा के छोटे-छोटे फैसलों का मानसिक बोझ (Decision Fatigue) कम करना है। 'क्या पानी पीने के लिए सुरक्षित है?', 'क्या कमरे की हवा साफ हो चुकी है?', या 'क्या खाना ठीक से पक गया है?'— इन तमाम चिंताओं पर अब एआई खुद चौबीसों घंटे निगरानी रखता है। ये सिस्टम बैकग्राउंड में चुपचाप काम करते हैं और केवल तभी यूजर को नोटिफिकेशन भेजते हैं जब वास्तव में किसी इंसानी एक्शन या फिल्टर बदलने की जरूरत होती है। इससे हमारा घर मानसिक तनाव की वजह बनने के बजाय हमें मानसिक सुकून देने वाला एक सुरक्षित स्पेस बन जाता है।भारत की जरूरत के हिसाब से बदलने होंगे विदेशी मॉडलभले ही ये तकनीकें डेटा और यूजर्स की आदतों को ट्रैक करके चलती हैं, इसलिए कंपनियों के लिए डेटा प्राइवेसी, कंज्यूमर ट्रस्ट और पारदर्शिता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी। भारत में जिस तरह से पर्यावरण और शहरी जीवन की चुनौतियां बढ़ रही हैं, उसे देखते हुए भारत को केवल पश्चिमी देशों के स्मार्ट होम मॉडल को कॉपी-पेस्ट करने से बचना होगा। हमें भारतीय घरों की बनावट, बिजली-पानी की उपलब्धता और यहां के परिवारों की खास आदतों को ध्यान में रखकर इस तकनीक को कस्टमाइज करना होगा। भविष्य ऐसी दुनिया का है जहां तकनीक दीवारों पर लगी स्क्रीन्स में चिल्लाएगी नहीं, बल्कि बैकग्राउंड में चुपचाप रहकर हमारी जिंदगी को सुरक्षित, टिकाऊ और सेहतमंद बनाएगी।
निसान ने दुनिया के लिए पेश की भारत में बनी नई टेकटॉन, कीमत 10.49 लाख रुपए से शुरू
नई दिल्ली। जापानी कार निर्माता कंपनी निसान मोटर की भारतीय इकाई निसान मोटर इंडिया ने गुरुवार को भारत में आयोजित विश्व प्रीमियर के दौरान नयी निसान टेकटॉन बाजार में पेश की। इस साल भारत में पेश किया गया यह निसान का दूसरा नया मॉडल है। यह दो इंजन विकल्पों टर्बो टी160 औ टर्बो टी280 में […] The post निसान ने दुनिया के लिए पेश की भारत में बनी नई टेकटॉन, कीमत 10.49 लाख रुपए से शुरू appeared first on Sabguru News .
बॉलीवुड के 'सिंघम' यानी अजय देवगन एक बार फिर दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोटपोट करने के लिए सिनेमाघरों में दस्तक दे रहे हैं। कई बार टलने के बाद आखिरकार उनकी मोस्ट अवेटेड कॉमेडी फिल्म 'धमाल 4' रिलीज के लिए पूरी तरह तैयार है। जुलाई की शुरुआत में रिलीज हुई बड़े बजट की फिल्में 'ऐल्फा' और 'बेबी डू एंड डाई' बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं, जिसके बाद अब पूरी फिल्म इंडस्ट्री और सिनेमाप्रेमियों की उम्मीदें 'धमाल 4' पर टिकी हैं। फिल्म के शुरुआती एडवांस बुकिंग के आंकड़े सामने आ चुके हैं, जो इशारा कर रहे हैं कि थिएटर्स में एक बार फिर दर्शकों का मेला लगने वाला है।एडवांस बुकिंग में 'धमाल 4' की शानदार रफ्तार, बिके 50 हजार से ज्यादा टिकटट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क (Sacnilk) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 'धमाल 4' की एडवांस बुकिंग को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म ने बिना ब्लॉक सीट्स के ऑल इंडिया लेवल पर 1.45 करोड़ रुपये से ज्यादा का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है, वहीं ब्लॉक सीट्स को शामिल करने पर यह आंकड़ा 5 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। अब तक पहले दिन के लिए फिल्म के 57,000 से ज्यादा टिकट धड़ाधड़ बिक चुके हैं। फिल्म की इस रफ्तार को देखकर ट्रेड एक्सपर्ट्स अनुमान लगा रहे हैं कि यह ओपनिंग डे पर 13 से 16 करोड़ रुपये का दमदार बिजनेस कर सकती है।दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में सबसे ज्यादा क्रेज'धमाल' फ्रेंचाइजी की तगड़ी फैन फॉलोइंग का फायदा फिल्म को प्री-बुकिंग में साफ मिल रहा है। देशभर में फिल्म के लिए करीब 7,894 शोज अलॉट किए जा चुके हैं। अगर शहरों के हिसाब से बात करें तो सबसे ज्यादा दीवानगी दिल्ली-एनसीआर में देखी जा रही है, जहां से फिल्म ने करीब 60 लाख रुपये का बिजनेस कर लिया है। इसके बाद मुंबई सर्किट से 40 लाख रुपये, हैदराबाद से 19 लाख रुपये, बेंगलुरु से 11 लाख रुपये और पुणे-अहमदाबाद जैसे शहरों से 9-9 लाख रुपये की कमाई हो चुकी है।पुरानी पलटन के साथ रवि किशन और ईशा गुप्ता का डबल डोजइस बार की कहानी में वही पुराना पागलपन और बड़ा खजाना ढूंढने का एडवेंचर देखने को मिलने वाला है। फिल्म का निर्देशन दिग्गज डायरेक्टर इंद्र कुमार ने किया है। स्टार कास्ट की बात करें तो अजय देवगन के साथ रितेश देशमुख, अरशद वारसी, जावेद जाफरी और संजय मिश्रा जैसे फ्रेंचाइजी के परमानेंट चेहरों की वापसी हुई है। कॉमेडी के इस डोज को और मजेदार बनाने के लिए इस बार भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन, ईशा गुप्ता, संजीदा शेख और अंजलि आनंद की भी एंट्री हुई है। सेंसर बोर्ड ने फिल्म को 'UA 13+' सर्टिफिकेट दिया है।क्या 'टोटल धमाल' का रिकॉर्ड तोड़ पाएगी चौथी किस्त?'धमाल' सीरीज का इतिहास बॉक्स ऑफिस पर हमेशा शानदार रहा है। साल 2007 में आई पहली 'धमाल' ब्लॉकबस्टर रही थी, जिसके बाद 2011 में 'डबल धमाल' और 2019 में आई 'टोटल धमाल' ने भी बंपर कमाई की थी। 'टोटल धमाल' ने अपने पहले दिन 16.50 करोड़ रुपये की ओपनिंग ली थी। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या अजय देवगन की यह नई फिल्म 'ऐल्फा' की सुस्त रफ्तार का फायदा उठाकर अपने ही पिछले पार्ट का रिकॉर्ड तोड़ पाती है या नहीं।
श्रीगंगानगर : नाबालिग पुत्र की हत्या करने के दोषी पिता को आजीवन कारावास
श्रीगंगानगर। राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने अपने ही नाबालिग पुत्र की हत्या करने के आरोपी को गुरुवार को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विपिन बिश्नोई ने अभियुक्त राजकुमार उर्फ निक्कू को शराब के नशे में उसके 13 वर्षीय पुत्र […] The post श्रीगंगानगर : नाबालिग पुत्र की हत्या करने के दोषी पिता को आजीवन कारावास appeared first on Sabguru News .
भारत के पेंशन रेगुलेटर पीएफआरडीए (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को और अधिक मजबूत और मुनाफेदार बनाने के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। पीएफआरडीए ने दुनियाभर के दिग्गज और लंबी अवधि वाले विदेशी पेंशन फंड्स की अरबों डॉलर की पूंजी को भारतीय बाजार में आकर्षित करने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है। इस बड़ी पहल का सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ-साथ एनपीएस के मौजूदा खाताधारकों को बेहतर रिटर्न के रूप में मिलने की उम्मीद है।क्या है पीएफआरडीए की नई 'ASCEND' समिति?विदेशी पूंजी को भारत के पेंशन सेक्टर में खींचने के लिए बनाई गई इस स्पेशल कमेटी का नाम 'असेंड' (ASCEND - Accelerated Scaling of Global Capital Ecosystem and NPS Development) रखा गया है। इस कमेटी में फाइनेंशियल सेक्टर के दिग्गज दिग्गजों का एक मजबूत पैनल शामिल है। यह पैनल ऐसे रास्ते और नियम सुझाएगा जिससे भारतीय पेंशन फंड, दुनिया के बड़े को-इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म्स और रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnerships) के जरिए विदेशी फंडों के साथ हाथ मिला सकें।दिनेश खारा के हाथों में होगी 'असेंड' कमेटी की कमानइस बेहद महत्वपूर्ण 'ASCEND' कमेटी का चेयरमैन एनपीएस ट्रस्ट के मुखिया और एसबीआई के पूर्व चेयरमैन दिनेश खारा को बनाया गया है। दिनेश खारा के अलावा इस हाई-लेवल पैनल में देश की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हैं, जिनमें:टीमलीज सर्विसेज के चेयरमैन नारायण रामचंद्रनसेबी (SEBI) के पूर्व पूर्णकालिक सदस्य अनंत नारायणअश्विन पारेख एडवाइजरी सर्विसेज के मैनेजिंग पार्टनर अश्विन पारेखएनपीएस ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अरविंद गुप्ताएनपीएस ट्रस्ट की सीईओ (CEO) सुपर्णा टंडन को सदस्य बनाया गया है।एनपीएस खाताधारकों (NPS Customers) को कैसे होगा तगड़ा फायदा?ग्लोबल पेंशन फंड्स और भारतीय एनपीएस फंड के बीच होने वाले इस तालमेल से देश के आम पेंशन खाताधारकों को बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा।शानदार लॉन्ग-टर्म रिटर्न: विदेशी फंडों के आने से देश के पेंशन सिस्टम में लंबे समय तक टिकने वाला 'धैर्यवान पैसा' (Patient Money) आएगा।निवेश में विविधता (Diversification): एनपीएस सब्सक्राइबर्स के निवेश पोर्टफोलियो में विविधता आएगी, जिससे जोखिम (Risk) काफी कम हो जाएगा।बेहतर फंड मैनेजमेंट: ग्राहकों को भविष्य में अपने बुढ़ापे की पूंजी पर बेहतरीन रिस्क-समायोजित लंबी अवधि का रिटर्न (Risk-Adjusted Returns) मिल सकेगा।क्या होते हैं ग्लोबल पेंशन फंड्स और कितनी मजबूत है NPS?ग्लोबल पेंशन फंड्स दरअसल दुनिया भर के नौकरीपेशा लोगों के रिटायरमेंट की बचत को संभालते हैं। इनके पास दुनिया का सबसे बड़ा निवेश फंड होता है, जो भारत जैसे तेजी से बढ़ते देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं के लिए सबसे सटीक माना जाता है। अगर नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) की बात करें, तो वर्तमान में पीएफआरडीए के तहत लगभग 185 बिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 17.50 लाख करोड़ रुपये) का फंड मैनेज किया जा रहा है, जो भारत की कुल जीडीपी (GDP) का लगभग 5 फीसदी हिस्सा है।
चीन की कम्युनिस्ट सरकार और उसकी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले हस्तियों की संदिग्ध परिस्थितियों में गायब होने या मौत होने की लिस्ट में अब एक और बड़ा नाम जुड़ गया है। चीन की अर्थव्यवस्था और कैपिटल मार्केट पर बेहद बेबाक व स्वतंत्र राय रखने वाले 55 वर्षीय दिग्गज मैक्रो-इकोनॉमिस्ट गाओ शानवेन (Gao Shanwen) का निधन हो गया है। चीनी सरकारी मीडिया 'शंघाई सिक्योरिटीज न्यूज' के मुताबिक, उनकी मौत एक गंभीर बीमारी (कैंसर) के चलते हुई है। हालांकि, चीन में सरकार विरोधी सुर अलापने वालों के इतिहास को देखते हुए इस मौत को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।चीनी सरकार के 5% GDP के दावों की निकाल दी थी हवागाओ शानवेन चीन के सबसे प्रभावशाली और प्रसिद्ध संस्थागत अर्थशास्त्रियों में से एक थे। वह सरकारी नियंत्रण वाले इन्वेस्टमेंट ग्रुप 'SDIC सिक्योरिटीज' के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री के रूप में कार्यरत थे। गाओ सबसे पहले साल 2024 के आखिर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तब सुर्खियों में आए, जब उन्होंने वाशिंगटन में 'पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स' के एक मंच पर बीजिंग को सीधे चुनौती दे डाली थी। उन्होंने आधिकारिक आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि साल 2021 से 2023 के बीच चीन की वास्तविक औसतन GDP ग्रोथ सिर्फ 2 फीसदी के आसपास रही होगी, जबकि चीनी सरकार इसे बढ़ा-चढ़ाकर 5 फीसदी (लगभग 10% संचयी अंतर) बताती रही है।युवाओं की बेरोजगारी पर खोला था मोर्चा, कहा- 'युवा बेजान हैं'अपने दावों को साबित करने के लिए गाओ ने चीन के रोजगार, घरेलू खपत और गहरे रियल एस्टेट संकट के आंकड़ों में भारी हेरफेर का पर्दाफाश किया था। उन्होंने देश में युवाओं की रिकॉर्ड तोड़ बेरोजगारी पर गहरी चिंता जताते हुए एक विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि आज के चीन में बुजुर्ग ऊर्जा से भरे हैं और सार्वजनिक जगहों पर नाच रहे हैं, जबकि देश का युवा बेजान हो चुका है और अपनी कमाई घटने के कारण अंधेरे में बैठकर नूडल्स खाने को मजबूर है। उनके इस बयान ने शी जिनपिंग सरकार के उस नैरेटिव की धज्जियां उड़ा दी थीं, जिसमें दावा किया जा रहा था कि युवाओं की खपत से चीन की अर्थव्यवस्था महामारी के बाद तेजी से सुधर रही है।बयान के बाद लगा बैन, नौकरी से भी धोना पड़ा था हाथबीजिंग के आधिकारिक आर्थिक डेटा को इस तरह सरेआम चुनौती देना चीन की सरकार को बिल्कुल रास नहीं आया। इस बयान के ठीक बाद चीनी प्रशासन ने उन पर सख्त कार्रवाई की। गाओ शानवेन के पब्लिक स्पीकिंग और मीडिया इंटरव्यूज पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया। उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स, ब्लॉग्स, वीडियो और आर्टिकल्स को चीनी इंटरनेट से पूरी तरह सेंसर या डिलीट कर दिया गया। 'सिक्योरिटीज एसोसिएशन ऑफ चाइना' ने उन्हें सरकार की नीतियों का केवल सकारात्मक प्रचार करने की सख्त हिदायत दी। इसके बाद साल 2025 के अंत में उन्हें उनकी नौकरी से भी बर्खास्त कर दिया गया और उनका हांगकांग इन्वेस्टमेंट एडवाइजर लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया।सच बोलने वाले एक और चीनी चेहरे का अंतचीन में लियू शियाओबो (Liu Xiaobo) और ली वांगयांग (Li Wangyang) जैसे कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विचारकों की मौत पहले भी रहस्यमयी हालात में हो चुकी है। चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'वीबो' (Weibo) और 'श्याओहोंगशू' पर लोग गाओ शानवेन को नम आंखों से श्रद्धांजलि दे रहे हैं। चीन के कड़े सेंसरशिप के बावजूद एक यूजर ने लिखा, चीन में सच बोलने वाला आखिरी अर्थशास्त्री भी चला गया, अब यहाँ सिर्फ सरकार की झूठी तारीफ करने वाले 'आशावादी' चाटुकार ही बचे हैं।
झुंझुनूं में पुत्र ने चाकू से वार करके मां को मार डाला
झुंझुनूं। राजस्थान में झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ थाना क्षेत्र में बुधवार को एक व्यक्ति ने मां की चाकुओं के वार से हत्या कर दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार सार्वजनिक निर्माण विभाग में बाबू के पद पर पदस्थ राजवीर (28) ने अपनी मां प्रभाती देवी (59) पर चाकुओं के कई वार किए, जिससे उसकी मौके पर […] The post झुंझुनूं में पुत्र ने चाकू से वार करके मां को मार डाला appeared first on Sabguru News .
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की शानदार सफलता के बाद अब केंद्र सरकार दिल्ली-एनसीआर को देश के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का सबसे बड़ा जंक्शन बनाने जा रही है। इस महायोजना के तहत दिल्ली से देश के अलग-अलग कोनों को जोड़ने वाले चार नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का खाका तैयार किया गया है। केंद्रीय बजट में सात प्रमुख हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में से दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी रूट को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी गई है, जिस पर सरकार लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश करने की तैयारी में है।दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी रूट: यूपी के इन शहरों की चमकेगी किस्मतप्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर के जरिए उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, राजनीतिक और औद्योगिक शहरों को आपस में कनेक्ट किया जाएगा। यह आधुनिक रूट दिल्ली से शुरू होकर नोएडा, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज और न्यू भदोही होते हुए सीधे वाराणसी पहुंचेगी। इतना ही नहीं, लखनऊ को सीधे रामनगरी अयोध्या से जोड़ने के लिए भी 124 से 135 किलोमीटर लंबा एक अलग हाई-स्पीड लिंक बनाने का शानदार प्लान है।देश का सबसे लंबा बुलेट ट्रेन रूट: दिल्ली से सिलीगुड़ी सिर्फ 6 घंटे मेंयह बुलेट ट्रेन कॉरिडोर भारत का सबसे लंबा हाई-स्पीड रेल रूट बनने जा रहा है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इसके सिविल स्ट्रक्चर डिजाइन के लिए टेंडर भी जारी कर दिए हैं। पहले से तय दिल्ली-वाराणसी लाइन को अब आगे बढ़ाकर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक ले जाया जाएगा। लगभग 1705 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर दिल्ली, यूपी के बाद बिहार के बक्सर, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार और पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी (सिलीगुड़ी) से होकर गुजरेगा। इस रूट पर ट्रेनें 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी, जिससे दिल्ली से सिलीगुड़ी का सफर महज 6 घंटे में पूरा हो जाएगा, जबकि दिल्ली से लखनऊ सिर्फ 2 घंटे 10 मिनट और वाराणसी 3 घंटे 50 मिनट की दूरी पर रह जाएगा।दिल्ली से मुंबई का सफर भी होगा आसानदूसरा बड़ा कॉरिडोर दिल्ली को राजस्थान और गुजरात के रास्ते सीधे आर्थिक राजधानी मुंबई से जोड़ेगा। इस रूट पर सफर करने वाले यात्री बिना किसी रुकावट के हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का आनंद ले सकेंगे। इसके तहत द्वारका, बिजवासन, गुरुग्राम, मानेसर, रेवाड़ी, बहरोड़ (नीमराना), शाहपुरा, जयपुर, किशनगढ़ (अजमेर), बिजयनगर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, डूंगरपुर, हिम्मतनगर और साबरमती (अहमदाबाद) जैसे स्टेशनों को शामिल करने का प्रस्ताव है।दिल्ली से कटरा: माता वैष्णो देवी के दर्शन होंगे बेहद आसानधार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली-अमृतसर कॉरिडोर का भी प्लान तैयार है। यह रूट रोहतक, जींद, कैथल, चंडीगढ़, मोहाली, लुधियाना और जालंधर होते हुए अमृतसर पहुंचेगा। भविष्य में इसे जालंधर से पठानकोट होते हुए सीधे जम्मू और कटरा तक विस्तार दिया जाएगा, जिससे वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी और दिल्ली से अमृतसर की दूरी घटकर महज दो घंटे रह जाएगी।
नवाबों के शहर और बॉलीवुड के गलियारों में पटौदी पैलेस की भव्यता के किस्से तो आपने बहुत सुने होंगे, लेकिन इस आलीशान महल के पीछे एक बेहद दिलचस्प कहानी भी छिपी है। जहाँ एक तरफ इस विशाल महल के मालिक बॉलीवुड स्टार सैफ अली खान हैं, वहीं उनकी छोटी बहन सोहा अली खान इस शाही प्रॉपर्टी के उस हिस्से की मालकिन हैं जो कभी जनरेटर रूम हुआ करता था। जी हाँ, सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन आज यह जनरेटर रूम किसी लग्जरी फ्लैट से कम नहीं है।जनरेटर रूम से 2BHK अपार्टमेंट बनने का दिलचस्प किस्सासोहा अली खान ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्हें यह अनोखा हिस्सा विरासत में कैसे मिला। दरअसल, साल 2005 से 2014 के बीच जब पटौदी पैलेस को 'नीमराना होटल्स' चेन को लीज पर दिया गया था, तब सोहा के माता-पिता यानी मंसूर अली खान पटौदी और शर्मिला टैगोर को पैलेस में रहने के लिए एक निजी जगह की जरूरत थी। उस समय पैलेस के पुराने जनरेटर रूम को मॉडिफाई करके एक बेहद खूबसूरत और आरामदायक 2BHK अपार्टमेंट में बदल दिया गया। सोहा कहती हैं, होटल के समय मेरे माता-पिता इसी जगह शिफ्ट हो गए थे और आज यह खूबसूरत प्रॉपर्टी मेरी है, जिसके रखरखाव का पूरा खर्च मैं खुद उठाती हूँ।शाही महल में पेंट नहीं, आज भी होती है सफेदी; जानिए क्यों?भारत के सबसे महंगे और मशहूर शाही घरों में शुमार होने के बावजूद, पटौदी परिवार दिखावे से ज्यादा व्यावहारिकता पर भरोसा करता है। सोहा ने बताया कि उनकी माँ शर्मिला टैगोर आज भी खुद पटौदी पैलेस का पाई-पाई का हिसाब रखती हैं। बजट को कंट्रोल में रखने के लिए इस महल की दीवारों पर महंगा पेंट कराने के बजाय आज भी पारंपरिक सफेदी (चुना) कराई जाती है, क्योंकि यह काफी सस्ती पड़ती है। सालों से यहाँ कोई फिजूलखर्ची या नई चीजें नहीं खरीदी गईं, बल्कि इसकी पुरानी ऐतिहासिक बनावट को ही सहेज कर रखा गया है।सैफ अली खान ने भारी रकम चुकाकर वापस पाया अपना हकमंसूर अली खान पटौदी के निधन के बाद सैफ अली खान ने होटल चेन से लीज को खत्म करवाया और करोड़ों रुपये की डील के बाद इस पैलेस को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया। सैफ अली खान के मुताबिक, उनकी दादी हमेशा कहती थीं कि इस ऐतिहासिक धरोहर को कभी कमर्शियल होटल नहीं बनने देना चाहिए, क्योंकि इसका अपना एक गौरवशाली इतिहास है।इसी जमीन में दफन है पटौदी खानदान का इतिहाससैफ और सोहा के लिए यह पैलेस महज एक आलीशान बंगला नहीं बल्कि भावनाओं का समंदर है। इसी पैलेस के परिसर में सैफ-सोहा के दादा-दादी और उनके पिता मंसूर अली खान पटौदी की कब्रें मौजूद हैं। आज यह महल पटौदी परिवार का प्राइवेट हॉलिडे होम है, जिसे कभी-कभी चुनिंदा बॉलीवुड फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग के लिए किराए पर दिया जाता है।
झारखंड में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। मौसम विभाग ने राज्य के 18 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जिसमें रांची और धनबाद जैसे प्रमुख शहर भी शामिल हैं। अगले कुछ घंटों में इन इलाकों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई गई है। बारिश के साथ-साथ तेज हवाएं चलने और वज्रपात (बिजली गिरने) की भी चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण लेने से बचें।किन जिलों पर है सबसे ज्यादा असर?मौसम विभाग के अनुसार, रांची, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, हजारीबाग, कोडरमा, रामगढ़, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, जामताड़ा, देवघर, दुमका और पाकुड़ जिलों में मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। इन क्षेत्रों में मेघ गर्जन के साथ आंधी-तूफान की आशंका बनी हुई है। कृषि कार्य में लगे किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। खेत में काम करते समय यदि बादल गरजते दिखें, तो तुरंत पक्के मकान या सुरक्षित स्थान की ओर चले जाना ही समझदारी है।सावधानी ही बचाव: विभाग की एडवाइजरीलगातार हो रही बारिश के कारण राज्य के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है, जिससे यातायात प्रभावित होने की आशंका है। मौसम केंद्र ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना जरूरी काम के घर से बाहर न निकलें। बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए मोबाइल फोन का उपयोग करते समय भी सावधानी बरतें और खुले मैदान में जाने से परहेज करें। विभाग द्वारा जारी यह अलर्ट अगले 24 से 48 घंटों तक प्रभावी रहने की उम्मीद है, जिसके बाद स्थिति का आकलन कर आगे की जानकारी दी जाएगी।तापमान में गिरावट से मिली राहतमानसून की इस सक्रियता के कारण लंबे समय से भीषण गर्मी और उमस से जूझ रहे झारखंडवासियों को बड़ी राहत मिली है। पिछले कुछ दिनों से तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वातावरण में ठंडक घुल गई है। हालांकि, यह बारिश न केवल तापमान को नियंत्रित करने में सहायक है, बल्कि आने वाले खरीफ सीजन की फसलों के लिए भी काफी फायदेमंद मानी जा रही है। किसान मानसून के इस दौर को फसलों के लिए 'जीवनदान' मान रहे हैं, बशर्ते वज्रपात जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव रहे।
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने राज्य के भविष्य को तकनीक की नई ऊंचाई देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए बदलाव लाने के लिए ₹1150 करोड़ के एक महत्वाकांक्षी मेगा प्लान को मंजूरी दी गई है। इस पहल का सीधा लक्ष्य न केवल प्रशासनिक और औद्योगिक कार्यों को आधुनिक बनाना है, बल्कि राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलना भी है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से सरकार अगले कुछ वर्षों में 1 लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जो झारखंड को एक नई पहचान दिलाएगा।क्या है हेमंत सरकार का 'AI विजन'?राज्य सरकार का यह मेगा प्लान मुख्य रूप से 'स्किल इंडिया' और 'डिजिटल झारखंड' के विजन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और सरकारी सेवाओं की डिलीवरी को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के लागू होने से झारखंड देश के प्रमुख 'टेक हब' की दौड़ में शामिल हो जाएगा। सरकार का जोर इस बात पर है कि तकनीक केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका लाभ युवाओं तक पहुंचे, जिससे पलायन की समस्या पर भी लगाम लग सके।1 लाख युवाओं के लिए रोजगार का सुनहरा मौकाइस योजना की सबसे बड़ी खूबी इसमें शामिल 'रोजगार सृजन' का पहलू है। ₹1150 करोड़ की इस परियोजना से डेटा एनालिटिक्स, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, मशीन लर्निंग और AI आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इससे राज्य के युवाओं को अपने ही गृह राज्य में बेहतर वेतन वाली नौकरियां मिल सकेंगी। सरकार युवाओं को AI और अत्याधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित करने के लिए विशेष सेंटर भी खोलने की तैयारी में है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर तकनीकी प्रतिभाओं का विकास होगा, बल्कि झारखंड के युवाओं के लिए वैश्विक स्तर के अवसर भी पैदा होंगे।झारखंड के भविष्य के लिए एक 'गेम चेंजर'झारखंड के औद्योगिक परिदृश्य में यह पहल एक 'गेम चेंजर' साबित हो सकती है। खनिज संसाधनों से समृद्ध राज्य अब तकनीक और नवाचार की ओर कदम बढ़ा रहा है। इस मेगा प्लान से न केवल राज्य का जीडीपी (GDP) बढ़ेगा, बल्कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और तेजी भी आएगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना का लाभ आगामी वर्षों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री की इस बड़ी पहल ने प्रदेश के युवाओं में एक नई ऊर्जा का संचार किया है और वे अब तकनीकी क्षेत्र में अपना करियर संवारने के लिए उत्साहित हैं।
जापानी ऑटोमोबाइल कंपनी Honda ने यूरोप में अपनी पहली फुल-साइज इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल WN7 को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। यह बाइक अब यूरोप के डीलरशिप पर उपलब्ध है और इसके साथ ही कंपनी ने प्रीमियम इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल सेगमेंट में कदम रख दिया है।
Avatar Meher Baba: अवतार मेहेर बाबा कौन थे, कब और क्यों मनाया जाता है मौन पर्व?
10 July Silence Day: अवतार मेहेर बाबा भारत के एक महान रहस्यवादी, आध्यात्मिक गुरु और दार्शनिक थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन मानवता को निस्वार्थ प्रेम, करुणा और सेवा का संदेश देने में समर्पित कर दिया। उनके अनुयायी उन्हें इस युग का 'पूर्ण अवतार' मानते ...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेलबर्न में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए ऑपरेशन सिंदूर, भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध, विकसित भारत, टॉप-3 अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य और भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान पर विस्तार से बात की। जानिए उनके भाषण की प्रमुख ...
उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। 2024 के लोकसभा चुनावों में मिले झटकों के बाद भाजपा अब अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए 'एक्शन मोड' में है। वहीं, विपक्षी खेमे में 'PDA' की राजनीति और कांग्रेस के नए तेवर सत्ताधारी दल के लिए नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं। आखिर 2027 का रण किसके लिए कितना मुश्किल और आसान है? आइए इसे 4-4 प्रमुख बिंदुओं में समझते हैं।भाजपा की सबसे बड़ी 'ताकत' (Strength)संगठनात्मक ढांचा: भाजपा का बूथ-स्तर तक फैला नेटवर्क देश में सबसे मजबूत माना जाता है। शक्ति केंद्र संयोजकों और सक्रिय कार्यकर्ताओं की फौज पार्टी के लिए सबसे बड़ी बैकबोन है।नेतृत्व और चेहरा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करिश्माई नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 'लॉ एंड ऑर्डर' मॉडल आज भी ग्रामीण और शहरी इलाकों में पार्टी की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) है।कल्याणकारी योजनाएं: केंद्र और राज्य सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ आम जनता तक पहुँचाना पार्टी की चुनावी तैयारी का मुख्य आधार है, जो वोट बैंक को साधे रखने में मदद करता है।NDA का एकजुट मोर्चा: निषाद पार्टी, अपना दल (एस), आरएलडी (RLD) और सुभासपा जैसे सहयोगियों के साथ भाजपा अपने सामाजिक समीकरणों को और अधिक समावेशी बनाने की कोशिश कर रही है।भाजपा के सामने 'खतरे' और चुनौतियां (Challenges)बेरोजगारी और पेपर लीक: भर्ती परीक्षाओं में हो रही धांधली और बेरोजगारी का मुद्दा युवाओं के बीच भाजपा के खिलाफ एक बड़ा असंतोष पैदा कर रहा है, जो चुनाव में निर्णायक साबित हो सकता है।महंगाई और सत्ता-विरोधी लहर: 10 साल के शासन के बाद स्थानीय स्तर पर एंटी-इंकम्बेंसी (सत्ता-विरोधी लहर) का सामना करना पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसे कम करना आसान नहीं होगा।जातिगत समीकरण और PDA: अखिलेश यादव का 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला जातियों की एकजुटता को तोड़ रहा है, जिससे बीजेपी का पारंपरिक वोट बैंक छिटकने का खतरा बना हुआ है।विपक्ष की '3 नंबर' की चुनौती: विपक्षी गठबंधन (इंडिया ब्लॉक) की बढ़ती आक्रामकता, खासकर कांग्रेस का नई ऊर्जा के साथ मैदान में उतरना और सीटों के बंटवारे पर 'सम्मानजनक' रुख, बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है।चुनावी भविष्य का विश्लेषणराजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 2027 का चुनाव केवल सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि 'नैरेटिव' की लड़ाई है। बीजेपी जहाँ अपनी पुरानी जीत के रिकॉर्ड को तोड़कर 'उत्तम प्रदेश' का संकल्प दोहरा रही है, वहीं विपक्ष संविधान और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर जमीन पर मजबूत तैयारी कर रहा है। '3 नंबर' यानी विपक्ष का एकजुट होकर लड़ना बीजेपी के लिए वह खतरे की घंटी है जिसे नजरअंदाज करना अब संभव नहीं रहा। पार्टी के नए संगठन प्रमुख नितिन नबिन के दौरे और बैठकों से यह स्पष्ट है कि भाजपा अब किसी भी स्तर पर चूक नहीं करना चाहती।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक नाम ने अचानक सुर्खियां बटोर ली हैं। राजनीतिक और सांस्कृतिक गलियारों में चर्चा है कि मशहूर लेखक और विचारक यतींद्र मोहन मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। इस चर्चा ने तब और जोर पकड़ लिया जब अयोध्या के कई प्रमुख संतों और ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने उनके नाम का समर्थन करते हुए राम मंदिर आंदोलन में उनके योगदान को याद किया। आखिर कौन हैं यतींद्र मोहन मिश्रा और उनकी दावेदारी को लेकर क्यों हो रही है इतनी चर्चा, आइए विस्तार से जानते हैं।कौन हैं यतींद्र मोहन मिश्रा?यतींद्र मोहन मिश्रा एक प्रसिद्ध हिंदी कवि, लेखक, संपादक और कला समीक्षक हैं। अयोध्या में पले-बढ़े यतींद्र मोहन ने भारतीय शास्त्रीय संगीत, कला और संस्कृति पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं। 'अमर उजाला' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े रहे और साहित्य के क्षेत्र में 'भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार' जैसे सम्मान पा चुके यतींद्र मोहन का अयोध्या के सांस्कृतिक और बौद्धिक विमर्श में एक बड़ा नाम है। अयोध्या की परंपराओं, वहां के इतिहास और राम कथा के मर्म को समझने वाले विद्वानों में उनकी गिनती होती है।राम मंदिर आंदोलन और यतींद्र मोहन का योगदानअयोध्या के संतों का कहना है कि यतींद्र मोहन मिश्रा केवल एक लेखक ही नहीं, बल्कि उस लंबी वैचारिक लड़ाई के सिपाही रहे हैं, जिसने राम मंदिर के लिए आधार तैयार किया। संतों के अनुसार, राम मंदिर आंदोलन के दौरान जब यह मुद्दा केवल सड़कों का संघर्ष नहीं, बल्कि बौद्धिक और कानूनी लड़ाई भी था, तब यतींद्र मोहन ने अपनी लेखनी और विचारों के माध्यम से इसे तार्किक रूप से स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके इसी बौद्धिक योगदान के कारण अब उन्हें ट्रस्ट में शामिल करने की मांग उठ रही है ताकि मंदिर की व्यवस्था और उसकी सांस्कृतिक भव्यता को और बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके।ट्रस्ट में शामिल होने के क्या हैं मायने?यदि यतींद्र मोहन मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट का हिस्सा बनते हैं, तो यह ट्रस्ट के लिए एक बड़ा बदलाव माना जाएगा। अभी तक ट्रस्ट में अधिकतर प्रशासनिक और धार्मिक हस्तियां शामिल हैं। यतींद्र मोहन के आने से ट्रस्ट में साहित्य, कला और सांस्कृतिक चेतना का एक नया आयाम जुड़ेगा। राम मंदिर न केवल एक पूजा स्थल है, बल्कि भारतीय संस्कृति का केंद्र भी है, और यतींद्र मोहन का अनुभव मंदिर के भविष्य की योजनाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रबंधन में मील का पत्थर साबित हो सकता है। फिलहाल, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन अयोध्या की हवाओं में यह नाम चर्चा का विषय बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश की सियासत में जुबानी जंग अब अपने चरम पर पहुंच गई है। आगामी यूपी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दौरे से ठीक पहले विपक्ष पर बड़ा सियासी हमला बोला है। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए 'राम मंदिर चंदा चोरी' के गंभीर आरोपों पर पलटवार करते हुए सीएम योगी ने अपने चिर-परिचित अंदाज में जवाब दिया है। उन्होंने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि सपा और कांग्रेस को प्रदेश का विकास नहीं, बल्कि 'कब्रिस्तान' पसंद है। सीएम के इस एक बयान ने यूपी की राजनीति में चुनावी एजेंडा पूरी तरह से सेट कर दिया है।अयोध्या दौरे से पहले सेट किया हिंदुत्व का एजेंडाराम नगरी अयोध्या के अपने अहम दौरे से ठीक पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान बेहद रणनीतिक माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों और चुनावी विश्लेषकों के अनुसार, सीएम योगी ने अपने इस पलटवार से स्पष्ट कर दिया है कि आगामी चुनावों में बीजेपी का मुख्य फोकस राम मंदिर, सुशासन और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर ही रहने वाला है। अयोध्या में चल रहे ऐतिहासिक विकास कार्यों का जायजा लेने से पहले विपक्ष पर उनका यह प्रहार, सीधे तौर पर सपा और कांग्रेस की पुरानी नीतियों को घेरने की एक बड़ी कोशिश है।अखिलेश के 'चंदा चोरी' वाले बयान का करारा जवाबदरअसल, इस पूरी सियासी खींचतान की शुरुआत तब हुई जब पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित धांधली और चोरी का आरोप लगाया था। इसी का जवाब देते हुए सीएम योगी ने अखिलेश यादव और कांग्रेस को एक ही कटघरे में खड़ा कर दिया। 'कब्रिस्तान' शब्द का इस्तेमाल कर सीएम योगी ने सीधे तौर पर विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया है, और जनता को यह याद दिलाने की कोशिश की है कि पिछली सरकारों के दौरान किन योजनाओं को प्राथमिकता दी जाती थी।यूपी चुनाव: तुष्टिकरण बनाम विकास के मुद्दे पर आर-पार की जंगउत्तर प्रदेश की सियासत में तुष्टिकरण और ध्रुवीकरण का मुद्दा हमेशा से हावी रहा है। आधुनिक जनरेटिव एआई (AI) सर्च और डिजिटल मीडिया के इस दौर में नेताओं के बयान मिनटों में वायरल होकर जनता का मूड सेट करते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीएम योगी का यह बयान यूपी चुनाव में नैरेटिव को पूरी तरह बदल देगा। एक तरफ विपक्ष राम मंदिर के नाम पर बीजेपी को घेरने की जुगत में है, तो दूसरी तरफ सत्ताधारी दल ने विपक्ष को उनके पुराने कार्यकाल के 'कब्रिस्तान और श्मशान' वाले विवादों में घसीट कर अपना चुनावी एजेंडा साफ कर दिया है।
बारिश में स्वर्ग जैसा अहसास: अलवर की सिलीसेढ़ झील, जहाँ बोटिंग और हरियाली बना देगी आपकी ट्रिप यादगार
राजस्थान के अलवर जिले में स्थित सिलीसेढ़ झील मानसून के दौरान किसी जन्नत से कम नहीं लगती। अरावली की पहाड़ियों की गोद में बसी यह झील बारिश में अपनी खूबसूरती के नए रंग बिखेरती है। चारों तरफ फैली हरियाली, बादलों से घिरी हुई पहाड़ियाँ और झील के शांत पानी में बोटिंग का अनुभव इस जगह को राजस्थान के सबसे पसंदीदा मानसून टूरिस्ट डेस्टिनेशन में से एक बनाता है। अगर आप प्रकृति की शांति और सुकून भरी ट्रिप की तलाश में हैं, तो सिलीसेढ़ झील इस वीकेंड के लिए आपके लिए बेस्ट स्पॉट है।मानसून में जादुई हो जाती है सिलीसेढ़ की खूबसूरतीबारिश के मौसम में यहाँ का नजारा पूरी तरह बदल जाता है। झील के चारों ओर अरावली की चोटियों पर छाई धुंध और पहाड़ों से गिरते छोटे-छोटे झरने किसी पेंटिंग की तरह दिखते हैं। पानी का स्तर बढ़ने के साथ ही इसका किनारा और भी अधिक मनमोहक हो जाता है। यहाँ का वातावरण इतना ठंडा और ताजी हवाओं से भरा होता है कि यहाँ पहुँचते ही शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी का तनाव पल भर में छूमंतर हो जाता है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए मानसून में यह जगह किसी वरदान से कम नहीं है।बोटिंग और शानदार व्यू का आनंदसिलीसेढ़ झील की असली पहचान यहाँ की बोटिंग है। झील के नीले पानी के बीच बोट की सवारी करना एक अद्भुत अनुभव है। मानसून में जब चारों ओर हरियाली और ठंडी हवाएं चलती हैं, तो बोटिंग का मज़ा दोगुना हो जाता है। झील के किनारे बना 'लेक पैलेस' होटल इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगाता है। आप यहाँ बैठकर चाय और पकौड़ों के साथ बारिश का लुत्फ उठा सकते हैं। परिवार या दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए इससे बेहतर जगह अलवर के पास और कोई नहीं है।कैसे पहुँचें और यात्रा के टिप्सअलवर शहर से सिलीसेढ़ झील की दूरी महज 15-20 किलोमीटर है, जहाँ आप अपनी कार या टैक्सी से आसानी से पहुँच सकते हैं। दिल्ली या जयपुर से आने वाले पर्यटकों के लिए अलवर रेलवे स्टेशन सबसे नजदीकी पॉइंट है। मानसून में यहाँ भीड़ थोड़ी ज्यादा हो सकती है, इसलिए बेहतर होगा कि आप सुबह जल्दी पहुँचें। झील परिसर के पास खाने-पीने के अच्छे विकल्प मौजूद हैं, लेकिन साथ में कुछ जरूरी सामान और छाता जरूर रखें ताकि बारिश में आपकी ट्रिप में कोई बाधा न आए। यह जगह वीकेंड गेटअवे के लिए एक बेहतरीन विकल्प है।
कूड़े के ढेर से बना 'ग्रीन पैराडाइज': नोएडा का यह अनूठा पार्क जल संरक्षण और खूबसूरती की बनी नई मिसाल
क्या आपने कभी सोचा है कि कचरे से पटे एक बदबूदार इलाके को शहर का सबसे खूबसूरत 'ईको-पार्क' बनाया जा सकता है? नोएडा के सेक्टर-91 स्थित यह पार्क आज शहर की एक ऐसी पहचान बन चुका है, जो न केवल हरियाली का स्वर्ग है, बल्कि जल संरक्षण की एक अद्भुत मिसाल भी पेश कर रहा है। कभी कूड़े के ढेरों से घिरी यह जगह आज हजारों पेड़-पौधों और वन्यजीवों का सुरक्षित ठिकाना बन चुकी है, जिसे देखकर शहर के अन्य इलाकों के लिए भी प्रेरणा की एक नई किरण जगी है।कचरे से कंचन: कूड़े के पहाड़ का कायाकल्पएक समय था जब इस क्षेत्र में सिर्फ गंदगी और कूड़े के ढेर नजर आते थे, लेकिन स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण प्रेमियों की मेहनत ने इसे पूरी तरह से बदल दिया है। यहाँ कचरे को वैज्ञानिक तरीके से निपटाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता को वापस लौटाया गया। आज यहाँ सघन वृक्षारोपण के कारण एक छोटा सा जंगल विकसित हो चुका है, जो शहर के बढ़ते प्रदूषण के बीच शुद्ध ऑक्सीजन का केंद्र बना हुआ है। लोग यहाँ सुबह-शाम टहलने के लिए आते हैं और पर्यावरण की शुद्धता का अहसास करते हैं।जल संरक्षण की अनूठी तकनीकइस पार्क की सबसे बड़ी उपलब्धि इसका 'वाटर हार्वेस्टिंग' सिस्टम है। यहाँ बारिश के पानी को बर्बाद होने से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। पार्क के चारों ओर बने तालाब और जल निकासी की व्यवस्था इस तरह से की गई है कि पानी जमीन के अंदर जाकर भूजल स्तर को रिचार्ज करता है। यह न केवल आसपास के इलाकों में पानी की कमी को दूर करने में मदद कर रहा है, बल्कि भीषण गर्मी में भी पौधों को जीवित रखने में सहायक सिद्ध हो रहा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए यह मॉडल पूरे देश के लिए एक केस स्टडी बन सकता है।खरगोशों की अठखेलियां और पर्यटन का केंद्रइस पार्क में हरियाली और जल संरक्षण के अलावा एक और खास आकर्षण है, जो बच्चों और बड़ों का मन मोह लेता है—यहाँ की खरगोश कॉलोनी! पार्क के विशेष क्षेत्रों में खरगोशों को स्वच्छंद रूप से घूमते और अठखेलियां करते देखना किसी एडवेंचर से कम नहीं है। प्राकृतिक वातावरण में इन नन्हें जीवों का बसेरा यह साबित करता है कि अगर हम प्रकृति को सहेजें, तो वह हमें दोगुना लौटाती है। यह पार्क अब न केवल एक पिकनिक स्पॉट है, बल्कि नोएडा का प्रमुख ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन भी बन चुका है।
गडग में मानसिक रूप से दिव्यांग महिला से बार-बार रेप, प्रेगनेंट होने पर खुला राज
गडग। कर्नाटक के गडग जिले में मानसिक रूप से एक दिव्यांग युवती के साथ कथित तौर पर बार-बार दुष्कर्म करने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पीड़िता लगभग छह महीने की गर्भवती पाई गई है, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार रोना तालुक के […] The post गडग में मानसिक रूप से दिव्यांग महिला से बार-बार रेप, प्रेगनेंट होने पर खुला राज appeared first on Sabguru News .
गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में लिखी यह चौपाई केवल धर्म का उपदेश नहीं, बल्कि सत्ता, समाज और व्यवस्था—तीनों के लिए मर्यादा का संदेश भी है। परहित सबसे बड़ा धर्म है और किसी की आस्था को पीड़ा देना सबसे बड़ा अधर्म। आज अयोध्या की गलियों में यही भाव ...
बरसात का मौसम आते ही बाजारों में बैगनी रंग के रसीले जामुन दिखने लगते हैं। स्वाद में खट्टे-मीठे और सेहत के गुणों से भरपूर जामुन को आयुर्वेद में मानसून का सबसे बेहतरीन 'सुपरफूड' माना जाता है। न केवल इसका स्वाद लाजवाब है, बल्कि यह शरीर को बीमारियों से लड़ने की शक्ति भी प्रदान करता है। हालांकि, इतने फायदों के बावजूद हर किसी के लिए जामुन खाना सही नहीं होता। चलिए जानते हैं कि जामुन आपके स्वास्थ्य के लिए क्यों जरूरी है और मानसून में किन लोगों को इसे खाने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।इम्यूनिटी बूस्टर और हृदय का रक्षकजामुन विटामिन सी, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स का पावरहाउस है। मानसून के दौरान जब वायरस और बैक्टीरिया का खतरा बढ़ जाता है, तब जामुन का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें मौजूद पोटेशियम और मैग्नीशियम हृदय को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं, जो रक्तचाप को नियंत्रित करने और धमनियों को सुचारू रखने में सहायक होते हैं। इसका नियमित सेवन शरीर को डिटॉक्सिफाई करने के साथ ही ऊर्जा का स्तर भी बनाए रखता है।शुगर कंट्रोल और पाचन में जादुई प्रभावमधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों के लिए जामुन किसी वरदान से कम नहीं है। इसमें मौजूद 'जामुनलीन' नामक तत्व ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ने से रोकने में मदद करता है। इसके अलावा, जामुन में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है। बरसात में अक्सर होने वाली पेट संबंधी समस्याओं, जैसे अपच या दस्त में भी जामुन का सीमित सेवन राहत पहुँचा सकता है। इसमें मौजूद आयरन की प्रचुर मात्रा एनीमिया के रोगियों के लिए भी काफी फायदेमंद साबित होती है।सावधान! इन लोगों के लिए मुसीबत बन सकते हैं जामुनजामुन के फायदों के बाद यह जानना भी जरूरी है कि कुछ लोगों को इससे परहेज क्यों करना चाहिए। खाली पेट जामुन का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, क्योंकि इससे पेट में गैस और एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा, जिन लोगों को हाइपोग्लाइसीमिया (शुगर लेवल कम होना) की समस्या है, उन्हें जामुन खाने से बचना चाहिए क्योंकि यह शुगर को और कम कर सकता है। साथ ही, बहुत अधिक मात्रा में जामुन खाने से जोड़ों में दर्द या गले में खराश जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं। हमेशा याद रखें कि जामुन को दूध के साथ या दूध पीने के तुरंत बाद नहीं खाना चाहिए।
बारामूला में यूएपीए मामले में जांच के तहत छापेमारी, पुलिस ने डिजिटल उपकरण किए सीज
जम्मू-कश्मीर की बारामूला पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए ) से जुड़े एक मामले की जांच के तहत जिले में कई स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। मौके से कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं।
बढ़ती उम्र के साथ शरीर की कार्यक्षमता और हृदय की धमनियों में बदलाव आना स्वाभाविक है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, 40 की उम्र का पड़ाव वह समय होता है जब आपके हृदय की कार्यप्रणाली पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। आधुनिक जीवनशैली, तनाव और खान-पान में अनियमितता के कारण आजकल कम उम्र में भी हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कार्डियोलॉजिस्ट्स का मानना है कि यदि आप 40 के बाद अपनी जीवनशैली में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव कर लें, तो दिल की बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं वे 7 जरूरी आदतें जो आपके दिल को लंबे समय तक जवान और स्वस्थ रखेंगी।रोजाना 30 मिनट का व्यायाम और सक्रियतादिल को स्वस्थ रखने का सबसे पहला मंत्र है शारीरिक सक्रियता। रोजाना कम से कम 30 मिनट का तेज चलना (ब्रिस्क वॉकिंग), योग, या कोई भी एरोबिक एक्सरसाइज हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है। यह न केवल रक्तचाप को नियंत्रित रखता है, बल्कि कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी सामान्य बनाए रखने में मदद करता है। यदि आप जिम नहीं जा सकते, तो सीढ़ियां चढ़ना या घर के काम में सक्रिय रहना भी हृदय गति के लिए फायदेमंद हो सकता है।खान-पान में सात्विक और पोषक तत्वों का संतुलनदिल की सेहत सीधे आपकी थाली से जुड़ी है। 40 के बाद अपने आहार से अत्यधिक नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट (जैसे तली-भुनी चीजें) को बाहर का रास्ता दिखाएं। अपनी डाइट में ओमेगा-3 फैटी एसिड, हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज और फलों को शामिल करें। अधिक फाइबर वाला भोजन धमनियों में ब्लॉकेज होने से रोकता है और हृदय तक रक्त का प्रवाह सुचारू बनाए रखता है।तनाव मुक्त जीवन के लिए योग और मेडिटेशनआज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव हार्ट अटैक का एक बड़ा कारण बन गया है। मानसिक तनाव के दौरान शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो हृदय की धमनियों पर दबाव डालता है। दिन में कम से कम 10 से 15 मिनट का ध्यान (मेडिटेशन) या डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें। यह आपके नर्वस सिस्टम को शांत करता है और ब्लड प्रेशर को स्थिर रखने में मदद करता है।नियमित हेल्थ चेकअप और स्क्रीनिंगअक्सर हृदय संबंधी समस्याएं शुरुआती दौर में कोई लक्षण नहीं दिखातीं। 40 की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार फुल बॉडी चेकअप जरूर करवाएं। लिपिड प्रोफाइल, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की नियमित मॉनिटरिंग आपको किसी भी संभावित खतरे के प्रति पहले से सचेत कर सकती है। समय पर पहचान ही हार्ट अटैक जैसी आपातकालीन स्थिति से बचने का सबसे प्रभावी रास्ता है।धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूरीतंबाकू, धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन हृदय की धमनियों को अंदर से सख्त और कमजोर बना देता है। यह धमनियों में प्लाक जमने की प्रक्रिया को तेज करता है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए इन व्यसनों का पूरी तरह से त्याग करना ही एकमात्र विकल्प है।पर्याप्त नींद है अनिवार्यनींद की कमी का सीधा असर आपके हृदय स्वास्थ्य पर पड़ता है। जो लोग रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद नहीं ले पाते, उनमें उच्च रक्तचाप और हृदय रोग होने की संभावना अधिक होती है। सोते समय शरीर खुद की मरम्मत करता है और हृदय को आराम मिलता है। इसलिए, रात में जल्दी सोने और सुबह समय पर उठने की आदत डालें।वजन पर नियंत्रण और बॉडी मास इंडेक्स (BMI)बढ़ता हुआ वजन, विशेषकर पेट के आसपास की चर्बी, मेटाबॉलिक सिंड्रोम का संकेत है जो सीधे हृदय पर दबाव डालता है। अपना बीएमआई (BMI) चेक करते रहें और इसे एक स्वस्थ सीमा के भीतर बनाए रखें। वजन नियंत्रित रहने से हृदय को शरीर में रक्त पंप करने के लिए अतिरिक्त मेहनत नहीं करनी पड़ती, जिससे इसकी उम्र बढ़ती है।
आयुर्वेद में 'वन तुलसी' को साक्षात औषधि का भंडार माना गया है। सामान्य तुलसी से भिन्न, यह दुर्लभ जड़ी-बूटी जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से पनपती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो वन तुलसी न केवल रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को बूस्ट करने में सक्षम है, बल्कि यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के खिलाफ भी एक सुरक्षा कवच का काम करती है। यदि आप भी प्राकृतिक उपचार में रुचि रखते हैं, तो वन तुलसी के ये औषधीय गुण आपके लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं।सर्दी, खांसी और सांस संबंधी रोगों में असरदारबदलते मौसम के साथ होने वाली सर्दी, जुकाम और सूखी खांसी में वन तुलसी का सेवन बेहद राहत प्रदान करता है। इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल तत्व श्वसन नली में जमा कफ को बाहर निकालने में मदद करते हैं। इसके पत्तों का काढ़ा या चाय पीने से गले की खराश दूर होती है और फेफड़ों को मजबूती मिलती है। अस्थमा और सांस से जुड़ी अन्य परेशानियों में भी इसके अर्क का नियमित सेवन जादुई असर दिखाता है।त्वचा रोगों और संक्रमण से बचाववन तुलसी के पत्तों में एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि यह त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे दाद, खाज, खुजली और एक्जिमा में अत्यंत कारगर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पेस्ट को प्रभावित स्थान पर लगाने से संक्रमण फैलने से रुकता है और त्वचा जल्दी ठीक होने लगती है। यह त्वचा को गहराई से डिटॉक्स करने का भी कार्य करती है, जिससे प्राकृतिक चमक बनी रहती है।ब्लैक फंगस जैसी समस्याओं में सुरक्षा कवचहाल के वर्षों में चर्चा में रही 'ब्लैक फंगस' जैसी फंगल इन्फेक्शन की समस्याओं के दौरान भी वन तुलसी के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। इसके बायो-एक्टिव कंपाउंड्स शरीर में हानिकारक सूक्ष्मजीवों के विकास को रोकने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, गंभीर बीमारियों में इसे केवल एक सहायक उपचार के रूप में देखा जाना चाहिए और चिकित्सक के परामर्श का पालन करना सर्वोपरि है। विशेषज्ञों की सलाह है कि इसकी पत्तियों का सेवन या इसका पानी पीना शरीर के आंतरिक सिस्टम को फंगल हमलों से बचाने में सहायक हो सकता है।
आध्यात्मिक ऊर्जा और तंत्र साधना के लिए सबसे विशेष माने जाने वाले गुप्त नवरात्रि का पर्व इस वर्ष 15 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होने वाली यह गुप्त नवरात्रि साधकों के लिए मां दुर्गा की विशेष कृपा पाने का सबसे उत्तम समय माना जाता है। हिंदू धर्म में वर्ष में चार नवरात्रि मनाई जाती हैं, जिनमें से दो गुप्त नवरात्रि होती हैं, जो विशेष रूप से गुप्त सिद्धियों, मनोकामनाओं की पूर्ति और नकारात्मक शक्तियों के विनाश के लिए समर्पित होती हैं।गुप्त नवरात्रि 2026: तिथि और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्तइस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 15 जुलाई 2026 को हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। कलश स्थापना के लिए 15 जुलाई को सुबह 05:45 से 07:22 बजे तक का समय सबसे शुभ माना जा रहा है। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है, जो कि दोपहर 11:58 से 12:53 बजे तक रहेगा। यह समय साधना और पूजा-पाठ की शुरुआत के लिए अत्यंत फलदायी है।गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि और नियमगुप्त नवरात्रि का अर्थ ही है अपनी साधना को गुप्त रखना, इसलिए इस दौरान पूजा की प्रक्रिया को जितना संभव हो सके गोपनीय रखा जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नानादि के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और अपने पूजा स्थान पर कलश स्थापित करें। कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा के नौ स्वरूपों और विशेष रूप से दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। यदि आप घर पर पूजा कर रहे हैं, तो दुर्गा सप्तशती का पाठ करना और मां के मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी होता है। पूजा के दौरान पूरी तरह से सात्विक आहार का पालन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य माना जाता है। अपनी साधना को किसी से साझा न करें, क्योंकि गुप्त नवरात्रि की शक्ति गोपनीयता में ही निहित होती है।आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महत्वआषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पर्व मुख्य रूप से तांत्रिकों, अघोरियों और उन भक्तों के लिए विशेष है जो जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करना चाहते हैं। इस दौरान मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी यानी दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। माना जाता है कि जो भक्त पूरे मन और श्रद्धा के साथ इन नौ दिनों में गुप्त रूप से मां की आराधना करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। यह समय जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करने वाला माना गया है।
अशोक सिंह ने कांग्रेस छोड़ी, अनुशासन समिति के नोटिस से नाराज होकर दिया इस्तीफा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एआईसीसी सदस्य अशोक सिंह ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा है। इस्तीफे में उन्होंने उत्तर प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस पर नाराजगी जताते हुए इसे अपने फैसले की प्रमुख […] The post अशोक सिंह ने कांग्रेस छोड़ी, अनुशासन समिति के नोटिस से नाराज होकर दिया इस्तीफा appeared first on Sabguru News .
आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को 'योगिनी एकादशी' के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस व्रत का अत्यंत विशेष महत्व बताया गया है। साल 2026 में यह पावन तिथि 10 और 11 जुलाई को पड़ रही है। शास्त्रों के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत समस्त पापों का नाश करने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी के बारे में कहा जाता है कि जो भक्त पूरी श्रद्धा के साथ इस व्रत को संपन्न करता है, उसे 80 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। अगर आप भी जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति की तलाश में हैं, तो यह व्रत आपके लिए विशेष फलदायी हो सकता है।योगिनी एकादशी की कथा: क्या है इसके पीछे का पौराणिक महत्व?योगिनी एकादशी की पौराणिक कथा के अनुसार, कुबेर के माली हेम और उनकी पत्नी की कहानी प्रचलित है। इस कथा में बताया गया है कि कैसे अपनी गलती के कारण माली को कोढ़ (कुष्ठ रोग) का श्राप मिला और कैसे योगिनी एकादशी का व्रत करने से उन्हें उस श्राप से मुक्ति मिली। भगवान विष्णु की कृपा से इस व्रत के प्रभाव ने उनके पापों का नाश कर दिया। व्रत के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा के बाद इस कथा को सुनने या पढ़ने का विशेष फल मिलता है। माना जाता है कि जो भक्त इस कथा का श्रवण करता है, उसके घर में दरिद्रता का नाश होता है और लक्ष्मी का वास होता है।पूजा विधि और शुभ मुहूर्त: ऐसे करें भगवान विष्णु को प्रसन्नयोगिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान के बाद संकल्प लेकर व्रत की शुरुआत करनी चाहिए। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल, अक्षत, धूप, दीप और पंचामृत अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। एकादशी की तिथि पर सात्विक भोजन ग्रहण करें और संभव हो तो निर्जला या फलाहारी रहकर व्रत का पालन करें। ध्यान रहे कि इस दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है। शाम के समय विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और अगले दिन द्वादशी तिथि पर ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करें। आपकी छोटी सी निष्ठा और भक्ति से आप 80 हजार ब्राह्मणों को भोज कराने के समान अक्षय पुण्य अर्जित कर सकते हैं।
सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का अनुभव ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। सोशल मीडिया और अपने ब्लॉग के जरिए फैंस के साथ लगातार जुड़े रहने वाले 'बिग बी' ने हाल ही में जीवन में सफलता पाने का एक अनमोल मंत्र साझा किया है। उन्होंने अपने करोड़ों चाहने वालों को सलाह दी है कि वे अपनी गलतियों से डरें नहीं, बल्कि उन्हें सीखने का जरिया बनाएं। अमिताभ के अनुसार, सफलता की राह आसान नहीं होती और उस सफर में ठोकरें खाना स्वाभाविक है, लेकिन जो अपनी गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ता है, वही अंत में विजेता बनता है। महानायक की यह सीख आज के युवाओं के लिए बेहद प्रेरणादायक है, जो अक्सर छोटी-छोटी असफलताओं से घबराकर अपना रास्ता बदल लेते हैं।क्यों जरूरी है गलतियों को अपनाना?अमिताभ बच्चन ने अपने पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि हम अक्सर परफेक्ट बनने की कोशिश में नई चीजों को आज़माने से कतराते हैं। उन्होंने कहा कि 'सफलता के लिए यह बहुत जरूरी है कि आप गिरने से न डरें।' बिग बी का मानना है कि जीवन के किसी भी पड़ाव पर, चाहे वह करियर हो या व्यक्तिगत जीवन, गलतियां बहुत कुछ सिखाती हैं। वे आगे कहते हैं कि अगर आप कभी फेल नहीं हुए, तो इसका मतलब है कि आपने कुछ नया करने की कोशिश ही नहीं की। उनके यह विचार आज के दौर में उस 'परफेक्शन' के दबाव को कम करने में मदद करते हैं, जिससे आज की युवा पीढ़ी गुजर रही है।सफलता का असली आधार और बिग बी का नजरियाअमिताभ बच्चन के इस 'लाइफ लेसन' को उनके फैंस काफी पसंद कर रहे हैं। वे मानते हैं कि सफलता सिर्फ मंजिल तक पहुंचना नहीं, बल्कि उस रास्ते में आने वाली बाधाओं को पार करना और उनसे सीखना है। महानायक की यह सलाह न केवल करियर में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है, बल्कि यह मानसिक मजबूती भी प्रदान करती है। उन्होंने संकेत दिया है कि बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए लगातार प्रयास और उन प्रयासों के दौरान होने वाली चूक को सुधारते रहना ही एकमात्र रास्ता है। जो लोग अमिताभ बच्चन की इस सलाह को जीवन में उतारते हैं, उनके लिए असफलता एक अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत बन जाती है।
'सतलुज' फिल्म पर अब आर-पार की लड़ाई: बैन के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे दिलजीत दोसांझ
पंजाबी सुपरस्टार और ग्लोबल आइकन दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। फिल्म की रिलीज पर लगे बैन को चुनौती देते हुए अब मामला सीधे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है। फिल्म के बैन के खिलाफ एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें रिलीज पर लगी रोक को असंवैधानिक बताया गया है। दिलजीत दोसांझ के फैंस और फिल्म से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि अदालत इस मामले में हस्तक्षेप कर फिल्म को सिनेमाघरों तक पहुंचने का रास्ता साफ करेगी। वहीं, दूसरी तरफ फिल्म के कंटेंट को लेकर विरोध करने वाले पक्ष भी अपनी दलीलों के साथ तैयार हैं, जिससे यह मामला अब एक लंबी कानूनी जंग में तब्दील होता नजर आ रहा है।क्यों हो रहा है विरोध और क्या है PIL का आधार?'सतलुज' फिल्म की कहानी और उसके संवेदनशील विषयों को लेकर कुछ सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने तीखी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इस पर रोक लगा दी थी। हालांकि, याचिकाकर्ता का तर्क है कि सेंसर बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद फिल्म को रोकना अभिव्यक्ति की आजादी का सीधा उल्लंघन है। PIL में इस बात पर जोर दिया गया है कि फिल्म को बिना देखे या केवल अनुमानों के आधार पर बैन करना गलत है। अदालत में अब यह बहस का मुख्य मुद्दा होगा कि क्या किसी फिल्म के कंटेंट से उपजे विरोध के कारण उसकी पूरी रिलीज को रोकना उचित है। यह सुनवाई न केवल दिलजीत दोसांझ की इस फिल्म के भविष्य को तय करेगी, बल्कि भविष्य में बनने वाली ऐसी फिल्मों के लिए भी एक नजीर (Precedent) साबित हो सकती है।पंजाब की राजनीति और दिलजीत के फैंस की निगाहेंपंजाब के साथ-साथ दिल्ली और अन्य राज्यों में भी दिलजीत दोसांझ के प्रशंसकों के बीच इस फिल्म को लेकर भारी उत्सुकता बनी हुई है। सोशल मीडिया पर #ReleaseSatluj जैसे ट्रेंड्स के जरिए फैंस लगातार अपना समर्थन दिखा रहे हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट का रुख इस मामले में बहुत कुछ स्पष्ट कर देगा। यदि अदालत याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाती है, तो फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ हो जाएगा, लेकिन यदि प्रशासन की दलीलें मजबूत रहीं, तो फिल्म का विवाद और गहरा सकता है। मामला अब पूरी तरह से न्यायपालिका के पाले में है और हर किसी की नजरें आने वाली सुनवाई की तारीख पर टिकी हैं कि आखिर कब 'सतलुज' पर्दे पर दस्तक देगी।
बॉलीवुड में अक्सर ऐसी फिल्में आती हैं जिनमें मुख्य स्टार का जादू चलता है, लेकिन कभी-कभी कोई ऐसा कलाकार दस्तक देता है जो पर्दे पर अपनी मौजूदगी से बड़े से बड़े दिग्गज की चमक को भी चुनौती दे देता है। कुछ ऐसा ही हुआ एक फिल्म के सेकंड हाफ में, जहाँ एक नौसिखिया एक्टर की एंट्री ने पूरी कहानी का रुख मोड़ दिया। महज़ 40 मिनट के अपने किरदार के साथ इस कलाकार ने न केवल दर्शकों का दिल जीता, बल्कि स्क्रीन पर दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर जैसे मंजे हुए कलाकार की मौजूदगी को भी जबरदस्त टक्कर दे दी। इस अचानक आई एंट्री ने फिल्म की पूरी रेटिंग को बदल दिया और आज यह फिल्म अपनी दमदार परफॉर्मेंस के कारण IMDb पर शानदार रेटिंग के साथ दर्शकों की पसंदीदा बनी हुई है।सेकंड हाफ का मास्टरस्ट्रोक: जब एंट्री ने बदल दी फिल्म की किस्मतफिल्म की कहानी जब अपने चरम पर होती है, तब एक नए चेहरे का आना किसी भी फिल्म के लिए जोखिम भरा हो सकता है। लेकिन इस फिल्म में उस नए कलाकार की एंट्री ने फिल्म में नई जान फूंक दी। नौसिखिया होने के बावजूद, उसने जिस सहजता के साथ अपने किरदार को निभाया, उसने आलोचकों को भी हैरान कर दिया। ऋषि कपूर जैसे दिग्गज अभिनेता के साथ स्क्रीन शेयर करना कोई छोटी बात नहीं है, लेकिन इस एक्टर ने अपनी अदाकारी से साबित कर दिया कि स्टारडम से ऊपर भी कुछ है, और वह है 'प्योर टैलेंट'। दर्शकों को इस कलाकार का काम इतना पसंद आया कि आज भी सोशल मीडिया पर उस 40 मिनट के रोल की चर्चा कम नहीं होती।IMDb रेटिंग और दर्शकों का क्रेज: आखिर क्या है इस परफॉर्मेंस में खास?इस परफॉर्मेंस की सबसे बड़ी खूबी उसका 'नैचुरल' होना है। फिल्म का सेकंड हाफ जिस तरह से इस एक्टर ने संभाला, उसने न केवल फिल्म को एक इमोशनल गहराई दी बल्कि इसे एक क्लासिक का दर्जा भी दिला दिया। IMDb पर इस फिल्म को मिली बेहतरीन रेटिंग के पीछे सबसे बड़ा कारण इसी कलाकार का वह छोटा लेकिन प्रभावकारी रोल है। फिल्म की पूरी टीम का मानना है कि उस एक फैसले—यानी इस एक्टर को कास्ट करने का—ने फिल्म को औसत दर्जे से उठाकर ब्लॉकबस्टर कैटेगरी में खड़ा कर दिया। यदि आप आज भी उस फिल्म को देखेंगे, तो पाएंगे कि वह एक्टर महज़ 40 मिनट के लिए नहीं, बल्कि पूरी फिल्म की यादों पर छा जाने के लिए आया था।
कर्नाटक में एमयूवी और लॉरी की टक्कर में 7 लोगों की मौत, दो गंभीर घायल
कारवार। कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में गुरुवार तड़के एक बहु उपयोगी वाहन (एमयूवी) की लॉरी से आमने-सामने की टक्कर में 7 लोगों की मौत हो गई और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा रात करीब 1.30 बजे येल्लापुर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग 52 पर अराबैल घाट […] The post कर्नाटक में एमयूवी और लॉरी की टक्कर में 7 लोगों की मौत, दो गंभीर घायल appeared first on Sabguru News .
सिर्फ 6 महीने की मेहनत और 80 लाख का पैकेज! 10 नौकरियों पर सिर्फ एक दावेदार
नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक बेहद शानदार और रोमांचक खबर सामने आई है। बाजार में एक ऐसा क्षेत्र उभरकर सामने आया है जहाँ प्रतिभाओं की भारी कमी है, जिसके कारण यहां 10 नौकरियों के लिए बमुश्किल एक ही दावेदार मिल पा रहा है। इसका सीधा सा मतलब है कि यदि आपके पास सही कौशल है, तो नौकरी मिलना तय है। रिपोर्ट के अनुसार, इस सेक्टर में स्किल्ड प्रोफेशनल्स को 80 लाख रुपये सालाना तक का भारी-भरकम पैकेज मिल रहा है। सबसे अच्छी बात यह है कि आपको इस मुकाम तक पहुंचने के लिए सालों का इंतजार नहीं करना है, बल्कि मात्र 6 महीने की सही दिशा में की गई मेहनत आपको करियर के शिखर पर पहुंचा सकती है।क्यों है इस सेक्टर में भारी डिमांड और कम सप्लाई?इस सेक्टर में डिमांड और सप्लाई का अंतर इसलिए है क्योंकि तकनीक बहुत तेजी से बदल रही है और बहुत कम लोग नए दौर की इन स्किल्स को सीख पा रहे हैं। कंपनियां ऐसे प्रोफेशनल्स की तलाश में हैं जो न केवल थ्योरी जानते हों, बल्कि रियल-टाइम प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अनुभव रखते हों। चाहे वह डेटा एनालिटिक्स हो, एडवांस्ड एआई इंटीग्रेशन हो या फिर स्पेशलाइज्ड इंजीनियरिंग, जिन लोगों ने इन 6 महीनों में खुद को इंडस्ट्री-रेडी बना लिया है, उनके लिए सैलरी का पैमाना आसमान छू रहा है। यह उन लोगों के लिए एक सुनहरा अवसर है जो अपने करियर में एक बड़ा जंप लेना चाहते हैं और जिन्होंने अब तक अपनी मेहनत को सही दिशा नहीं दी थी।6 महीने में कैसे पाएं कामयाबी?इस सुनहरे मौके को भुनाने के लिए आपको किसी लंबी डिग्री के बजाय 'इंटेंसिव स्किल-बेस्ड' लर्निंग पर ध्यान केंद्रित करना होगा। पिछले कुछ समय में देखे गए ट्रेंड्स बताते हैं कि जो उम्मीदवार केवल रटने के बजाय व्यावहारिक ज्ञान (Practical Knowledge) पर काम करते हैं, उन्हें कंपनियां हाथों-हाथ ले रही हैं। यदि आप अगले 6 महीने पूरी लगन के साथ उन तकनीकों को सीख लेते हैं जिनकी बाजार में भारी कमी है, तो आप न केवल एक सुरक्षित करियर पाएंगे बल्कि आर्थिक रूप से भी एक बड़ा उछाल हासिल करेंगे। यह समय अपनी स्किल्स को अपडेट करने का है, क्योंकि बाजार में मंदी के बावजूद इन खास क्षेत्रों में टैलेंट की कमी बनी हुई है और कंपनियों का बजट भारी पैकेज देने के लिए तैयार है।
दुनिया इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ChatGPT की क्रांति के बीच खड़ी है। हर तरफ यह चर्चा है कि क्या AI हमारी नौकरियों को खत्म कर देगा या फिर यह करियर बनाने का एक नया स्वर्ण युग लेकर आया है? आज के समय में मशीन लर्निंग (Machine Learning) और AI के क्षेत्र में स्किल्स की मांग आसमान छू रही है। जो युवा इन तकनीकों को समझ रहे हैं, वे न केवल लाखों का पैकेज पा रहे हैं, बल्कि भविष्य की बड़ी कंपनियों का आधार भी बन रहे हैं। क्या आप भी इस डिजिटल बदलाव का हिस्सा बनने को तैयार हैं? अगर आप अपने करियर को AI के साथ सुरक्षित करना चाहते हैं, तो यह सही समय है यह समझने का कि आखिर कौन सी स्किल आपको बाजार में सबसे आगे खड़ा करेगी।मशीन लर्निंग बनाम AI: किसे चुनें और कहाँ है पैसा?मशीन लर्निंग (ML) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का वह हिस्सा है जहाँ कंप्यूटर डेटा से खुद सीखते हैं, जबकि AI एक बड़ा अंब्रेला टर्म है जिसमें मशीन लर्निंग के साथ-साथ न्यूरल नेटवर्क्स और डेटा प्रोसेसिंग भी शामिल है। अगर आप एक टेक्निकल करियर बनाना चाहते हैं, तो मशीन लर्निंग में कोडिंग और एल्गोरिदम की गहराई आपको किसी भी मल्टीनेशनल कंपनी में ऊंची सैलरी दिलाने की गारंटी दे सकती है। दूसरी तरफ, अगर आप जनरेटिव AI (जैसे ChatGPT के मॉडल) के साथ जुड़ते हैं, तो यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो क्रिएटिविटी और प्रॉब्लम सॉल्विंग में माहिर हैं। कंपनियां आज ऐसे प्रोफेशनल्स की तलाश में हैं जो न केवल AI मॉडल बनाना जानते हों, बल्कि उनके जरिए बिजनेस की समस्याओं को सुलझाना भी जानते हों।करियर में सफलता के लिए अपनाएं 'AI-First' दृष्टिकोणChatGPT के आने के बाद अब सिर्फ कोडिंग जानना ही काफी नहीं है, बल्कि अब 'प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग' और 'AI टूल इंटीग्रेशन' जैसी नई स्किल्स की मांग तेजी से बढ़ी है। भविष्य उन लोगों का है जो AI को एक दुश्मन के रूप में नहीं बल्कि एक 'को-पायलट' के रूप में देखते हैं। यदि आप डेटा साइंस, पाइथन प्रोग्रामिंग और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) में महारत हासिल करते हैं, तो आप उन चुनिंदा लोगों में होंगे जिनकी डिमांड अगले दशक में सबसे ज्यादा होगी। यह केवल एक नौकरी पाने की बात नहीं है, बल्कि एक ऐसा कौशल विकसित करने की है जो आपको ऑटोमेशन के दौर में अपरिहार्य बना दे। सफलता की कुंजी इसी में है कि आप आज ही इन उभरती हुई तकनीकों को सीखना शुरू करें।
आजकल युवाओं में टैटू बनवाने का क्रेज काफी बढ़ गया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर पर बना एक छोटा सा टैटू आपके सरकारी नौकरी के सपने को तोड़ सकता है? अक्सर उम्मीदवार इस असमंजस में रहते हैं कि टैटू के साथ वे किन विभागों में आवेदन कर सकते हैं और कहाँ उन्हें रिजेक्शन का सामना करना पड़ सकता है। भारतीय सेना (Indian Army), पुलिस बल और UPSC जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं में टैटू को लेकर बेहद स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश हैं। किसी भी भर्ती प्रक्रिया में आगे बढ़ने से पहले इन नियमों को समझना बहुत जरूरी है, ताकि डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन या मेडिकल टेस्ट के दौरान आपको किसी निराशा का सामना न करना पड़े।सेना और पुलिस भर्ती में टैटू के कड़े नियमभारतीय सेना और पुलिस सेवाओं में शारीरिक फिटनेस और अनुशासन को सर्वोपरि माना जाता है। सेना के नियमों के अनुसार, टैटू केवल शरीर के कुछ विशिष्ट हिस्सों पर ही मान्य हैं। उदाहरण के तौर पर, कोहनी से नीचे के अंदरूनी हिस्से या हथेली के पिछले हिस्से पर धार्मिक या छोटे टैटू की अनुमति दी जा सकती है, बशर्ते वे आपत्तिजनक न हों। यदि टैटू चेहरा, गर्दन या हाथ के बाहर के हिस्से पर है, तो इसे अक्सर अयोग्य माना जाता है। वहीं, राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों (CAPF) में भी टैटू को लेकर कड़ाई बरती जाती है। टैटू का आकार, उसकी स्थिति और उसका संदेश (जैसे किसी का नाम या कोई चिन्ह) मेडिकल बोर्ड द्वारा जांचा जाता है। यदि टैटू भड़काऊ है या उससे पहचान छिपने का अंदेशा है, तो उम्मीदवार को भर्ती प्रक्रिया से बाहर किया जा सकता है।UPSC और सिविल सेवा में क्या है टैटू की नीति?UPSC द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षाओं (IAS, IPS, IFS) के नियम सेना की तुलना में थोड़े अलग हैं। प्रशासनिक सेवाओं में आपकी बुद्धिमत्ता और योग्यता को प्राथमिकता दी जाती है, इसलिए एक छोटा या सामान्य टैटू आमतौर पर आपकी उम्मीदवारी को प्रभावित नहीं करता है। हालांकि, यदि आप IPS (इंडियन पुलिस सर्विस) के लिए चयनित होते हैं, तो आपको पुलिस नियमों के तहत कड़े मेडिकल मानकों से गुजरना होगा। यहाँ भी टैटू का शरीर के किस हिस्से पर होना और उसकी प्रकृति क्या है, यह मायने रखता है। यदि टैटू शालीन है और कोई गलत संदेश नहीं देता, तो यह आपकी नौकरी में बाधा नहीं बनता है। फिर भी, किसी भी सरकारी पद के लिए आवेदन करते समय टैटू को लेकर विभाग के आधिकारिक नोटिफिकेशन में दिए गए 'Medical Standards' को ध्यान से पढ़ना ही सबसे सही रास्ता है।
आधुनिक दौर की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, अनियमित खानपान और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण दिल की बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई हैं। आज के समय में युवा भी तेजी से गंभीर हार्ट से जुड़ी परेशानियों और कार्डियक अरेस्ट का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में अपने दिल की सेहत का ख्याल रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। अच्छी बात यह है कि दिल को अभेद्य और मजबूत बनाने के लिए आपको अपनी जिंदगी में कोई बहुत बड़े या कठिन बदलाव करने की जरूरत नहीं है।देश के जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ (Cardiologist) डॉ. संजय भोजराज ने हाल ही में उन 6 बेहद आसान और असरदार नियमों का खुलासा किया है, जिन्हें वे अपने दिल को 100% फिट रखने के लिए खुद भी हर दिन बिना चूके फॉलो करते हैं।रात के भोजन के बाद 10 मिनट की वॉक और सुबह की जादुई धूप है जरूरीडॉ. संजय भोजराज के अनुसार, रात का भारी या हल्का भोजन करने के तुरंत बाद बिस्तर पर जाने की गलती कभी न करें। डिनर के बाद कम से कम दस मिनट तक सामान्य गति से पैदल जरूर टहलें। यह छोटी सी आदत आपके भोजन को आसानी से पचाने में मदद करती है और रात के समय अचानक बढ़ने वाले ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) को नियंत्रित रखती है।इसके साथ ही, सुबह सोकर उठने के बाद बेड-टी या कॉफी का कप थामने से पहले कुछ देर प्राकृतिक धूप में बिताने की आदत डालें। सुबह की ताजी धूप हमारे शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) को संतुलित करती है, जिससे तनाव कम होता है और दिनभर के लिए भरपूर एनर्जी मिलती है।सिर्फ वजन ही नहीं, कमर के बढ़ते साइज पर रखें पैनी नजरअक्सर लोग वजन तोलने वाली मशीन पर अपना वजन देखकर संतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन डॉक्टर का मानना है कि यह पैमाना अधूरा है। अगर आपके वजन के मुकाबले आपकी कमर के आसपास (Visceral Fat) चर्बी बढ़ रही है, तो यह सीधे तौर पर दिल की बीमारी के आने का अलार्म है। इसलिए केवल वजन कम करने के बजाय पेट और कमर की चर्बी को नियंत्रित करने और शरीर के समग्र स्वास्थ्य (Overall Fitness) को सुधारने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।पौष्टिक भोजन में करें निवेश, भविष्य में दवाओं का खर्च होगा साफडॉ. भोजराज का एक बेहद सटीक सिद्धांत है— आज अच्छा भोजन चुनेंगे, तो भविष्य में महंगी दवाओं और डॉक्टरों की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे अच्छे और शुद्ध खानपान को शरीर के लिए सबसे बड़ा और सुरक्षित निवेश मानते हैं। अपनी दैनिक डाइट में पैकेटबंद और प्रोसेस्ड फूड को पूरी तरह से बंद करके ताजे मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज और ओमेगा-3 से भरपूर संतुलित भोजन को शामिल करें।साइलेंट किलर है मानसिक तनाव, मन खुश तो दिल भी रहेगा तंदुरुस्तआजकल की कॉपोरेट लाइफस्टाइल में तनाव (Stress) को एक सामान्य बात मान लिया जाता है, लेकिन यह दिल के लिए सबसे बड़ा साइलेंट किलर है। जब आप लगातार मानसिक तनाव या डिप्रेशन में रहते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल नामक हार्मोन बढ़ता है जो सीधे आपकी धमनियों पर दबाव डालता है। दिल की लंबी उम्र के लिए सिर्फ शरीर का ही नहीं, बल्कि मन का शांत और खुश रहना भी बेहद अनिवार्य है। इसके लिए मेडिटेशन या अपनी पसंद के शौक को समय दें।ऐसी वर्कआउट रूटीन चुनें, जिसे आप अगले 10 साल तक निभा सकेंफिटनेस के जोश में आकर अचानक जिम में जाकर भारी वजन उठाना या बेहद कठिन व्यायाम शुरू कर देना हमेशा फायदेमंद नहीं होता। डॉक्टर की सलाह है कि हमेशा ऐसी शारीरिक गतिविधि या आदत चुनें, जिसे आप बिना थके सालों-साल मजे से जारी रख सकें। जिम की भारी कसरत के बजाय रोज 30 मिनट तेज गति से चलना, साइकिल चलाना, स्विमिंग या हल्का योग करना भी आपके हार्ट रेट को दुरुस्त रखने और दिल को हमेशा युवा बनाए रखने के लिए पर्याप्त है।लक्षणों का इंतजार न करें, समय पर करवाएं प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअपहृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय भोजराज चेतावनी देते हुए कहते हैं कि दिल की अधिकांश बीमारियां शरीर के भीतर कई साल पहले ही पनपना शुरू हो जाती हैं, लेकिन उनके गंभीर लक्षण (जैसे सीने में दर्द या सांस फूलना) काफी बाद में दिखाई देते हैं। इसलिए किसी अनहोनी या लक्षण का इंतजार करने के बजाय 30 की उम्र के बाद नियमित रूप से अपना लिपिड प्रोफाइल, ब्लड प्रेशर और प्रिवेंटिव हार्ट चेकअप करवाते रहना ही सबसे समझदारी भरा और सुरक्षित कदम है।
दान की गणना पर चंपत राय ने उठाए सवाल! आखिर किस पर साधा निशाना
Champat Rai viral letter: राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक के बाद मंदिर में दान व चढ़ावे की चोरी को लेकर नित नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। अब इस पूरे प्रकरण में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान व चढ़ावे की ...

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