श्रीगंगानगर में पिकअप की टक्कर से पिता की मौत, पुत्री घायल
श्रीगंगानगर। राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ सदर थाना क्षेत्र में मंगलवार को पिकअप की चपेट में आने से मोटरसाइकिल सवार एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि उसकी पुत्री घायल हो गई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मृतक की पहचान टिक्कूराम नायक (48) के रूप में हुई है। वह अपनी पुत्री पूनम (23) को […] The post श्रीगंगानगर में पिकअप की टक्कर से पिता की मौत, पुत्री घायल appeared first on Sabguru News .
भीलवाड़ा : महिला की मौत से गुस्साए पीहर वालों ने किया पति के परिवार पर हमला
भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी थाना क्षेत्र में ककरोलिया माफी गांव में मंगलवार को एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद बवाल हो गया। महिला की मौत से आक्रोशित पीहर पक्ष के लोगों ने ससुराल वालों पर कुल्हाड़ी, तलवार, लोहे की छड़ और पत्थरों से जानलेवा हमला कर दिया। इस खूनी […] The post भीलवाड़ा : महिला की मौत से गुस्साए पीहर वालों ने किया पति के परिवार पर हमला appeared first on Sabguru News .
43 साल पुराने सिनेमा भूखंड विवाद में जेडीए को राहत
जयपुर। राजस्थान में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) को 43 वर्ष पुराने सिनेमा भूखंड आवंटन विवाद में बड़ी कानूनी राहत मिली है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश नीतू भारद्वाज की अदालत ने आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई को चुनौती देते हुए दायर स्थायी निषेधाज्ञा का वाद खारिज कर दिया। मामला शास्त्री नगर के सुभाष नगर क्षेत्र में सिनेमा […] The post 43 साल पुराने सिनेमा भूखंड विवाद में जेडीए को राहत appeared first on Sabguru News .
अलवर में पिकअप की बॉडी के नीचे दबने से चालक की मौत
अलवर। राजस्थान में अलवर के हनुमान सर्किल के पास स्थित जेएस फोर वीलर कंपनी में मंगलवार को पिकअप की बॉडी के नीचे दबने से एक चालक की मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार रामगढ़ निवासी मोनू नायक की पिकअप करीब 15 दिन पहले मरम्मत के लिए जेएस फोर वीलर कंपनी में दी गई थी। […] The post अलवर में पिकअप की बॉडी के नीचे दबने से चालक की मौत appeared first on Sabguru News .
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान केरल के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री पी.सी. विष्णुनाथ को मंगलवार शाम दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद छात्र आंदोलन ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया, जिसमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए।
राजधानी दिल्ली में सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और शिवाजी स्टेडियम के आसपास के इलाकों में प्रदर्शनकारियों की भीड़, पुलिस बैरिकेडिंग और आंसू गैस ...
मध्यप्रदेश विधानसभा में UCC विधेयक पारित, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून के रूप में होगा लागू
मध्यप्रदेश विधानसभा में मंगलवार को UCC विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया है। विधेयक के विधानसभा से पास होने के बाद सीएम डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के दूरदर्शी नेतृत्व में हमारी ...
विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में स्थापित होंगे 'शोधपीठ', योगी कैबिनेट ने दी प्रस्ताव को मंजूरी
Chief Minister Yogi Adityanath : योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में मंगलवार को प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में 'भारतीय ज्ञान परंपरा संवर्धन शोधपीठ' स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। साथ ही योजना के प्रभावी संचालन के ...
पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर पीएम आवास के पास धरने पर बैठे राहुल गांधी को पुलिस उठाकर ले गई। जैसे ही पुलिस राहुल को उठाने आई, राहुल जमीन पर लेट गए। अखिलेश यादव और प्रियंका गांधी को भी पुलिस ने हिरासत ...
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज के विरोध में कांग्रेस ने सोमवार को लोक कल्याण मार्ग तक मार्च निकाला और वहां धरने पर बैठ गई। इस बीच केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह कांग्रेस नेताओं से बातचीत करने के लिए पहुंचे, लेकिन दोनों पक्षों के बीच हुई वार्ता किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी।
पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस के कई नेता दिल्ली में पीएम आवास के पास दोपहर करीब साढ़े 3 बजे से धरने पर बैठे। इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कांग्रेस नेता शामिल थे। ...
राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अपने प्रवक्ता विजेता दहिया को पद से हटा दिया है। यह फैसला ऐसे वीडियो के सामने आने के बाद लिया गया, जिन्हें पार्टी ने असंवेदनशील आचरण बताया है।
सीएम योगी ने बहराइच को दी 352 करोड़ की सौगात: 70 विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण एवं शिलान्यास
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को बहराइच के महसी विधानसभा क्षेत्र स्थित तेजवापुर के बेड़नापुर रामलीला मैदान से 352 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 70 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।
राहुल गांधी की हुंकार, PM जवाब दिए बिना नहीं निकल पाएंगे, कहा- पहले प्रधान इस्तीफा दें फिर...
Congress protest at PMs residence: छात्रों पर लाठीचार्ज के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आवास के बाहर धरने पर बैठे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की आवाज दबाई नहीं जा सकती। प्रधानमंत्री मोदी जवाब दिए बिना बाहर नहीं ...
उत्तर प्रदेश में मॉनसून पूरी तरह से मेहरबान नजर आ रहा है और प्रदेश के लगभग सभी हिस्सों में झमाझम बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में मॉनसून की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए 21 और 22 जुलाई के लिए राज्य के दर्जनों जिलों में भारी बारिश, मेघ गर्जन और आकाशीय बिजली (Lightning) गिरने का रेड व ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) के प्रभाव से पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दोनों संभागों में तेज मानसूनी हवाएं सक्रिय हो गई हैं, जिससे जनजीवन काफी प्रभावित हुआ है।22 जुलाई को इन जिलों में भारी बारिश और बिजली गिरने का खतरा मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में अति भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। जिन प्रमुख जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, उनमें मेरठ, मुजफ्फरनगर, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा), अलीगढ़, मथुरा, आगरा, ललितपुर, झांसी, महोबा, हमीरपुर, बांदा, प्रयागराज, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, आजमगढ़, वाराणसी और गोरखपुर शामिल हैं। इन इलाकों में प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक बाहर न निकलने और जर्जर इमारतों व पेड़ों से दूर रहने की हिदायत दी है।लखनऊ में टूटा 9 साल का रिकॉर्ड, 6.5 डिग्री लुढ़का पारा राजधानी लखनऊ में बीते तीन दिनों से हो रही रुक-रुक कर बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। सोमवार को लखनऊ का अधिकतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस तक नीचे आ गया, जिसने जुलाई महीने में पिछले 9 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अमौसी स्थित मौसम मुख्यालय के अनुसार, इससे पहले 5 जुलाई 2019 को दिन का तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में 22 जुलाई को भी दिनभर काले बादल छाए रहने और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है।26 जुलाई से फिर रफ्तार पकड़ेगा मॉनसून मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 21 और 22 जुलाई को झमाझम बारिश के बाद 23 से 25 जुलाई के दौरान मानसूनी गतिविधियों में थोड़ी कमी देखने को मिल सकती है। इस अवधि में कोई बड़ी चेतावनी जारी नहीं की गई है, हालांकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर बना रहेगा। इसके बाद 26 जुलाई से मॉनसून एक बार फिर प्रचंड वेग के साथ पूरे उत्तर प्रदेश में अपनी रफ्तार पकड़ेगा।यूपी मौसम का ताजा हाल आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) के अनुसार प्रदेश के मौसम के मुख्य बिंदु:सबसे ठंडा शहर: पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.2 डिग्री सेल्सियस हरदोई में दर्ज किया गया।लखनऊ का तापमान: लखनऊ में अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।मॉनसून की स्थिति: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पूरी तरह से सक्रिय और सामान्य से अधिक प्रभावी है।
यूनाइटेड किंगडम (UK) के निराशाजनक दौरे के बाद भारतीय क्रिकेट टीम अब अपने अगले मिशन के लिए तैयार है। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में युवा भारतीय टी-20 टीम 23 जुलाई 2026 से जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी-20 इंटरनेशनल सीरीज खेलने जा रही है। आयरलैंड और इंग्लैंड के हाथों व्हाइटवॉश की शर्मिंदगी झेलने के बाद भारतीय टीम के लिए यह दौरा अपनी साख बचाने का आखिरी मौका है। हालांकि, अपने घरेलू मैदान पर बेहद खतरनाक नजर आ रही जिम्बाब्वे की टीम को हल्के में लेना 'श्रेयस अय्यर एंड कंपनी' को भारी पड़ सकता है।लगातार हार के बाद भारत के लिए साख की लड़ाई भारत का हालिया यूके दौरा बेहद निराशाजनक रहा, जहां 10 मुकाबलों में से भारतीय टीम को केवल 1 मैच में जीत हासिल हुई, जबकि 8 मैचों में हार का सामना करना पड़ा और 1 मैच बेनतीजा रहा। आयरलैंड ने भारत को टी-20 में 2-0 से हराया, वहीं इंग्लैंड ने टी-20 सीरीज में 4-0 से क्लीन स्वीप किया और वनडे सीरीज भी 2-1 से अपने नाम की। इस लगातार खराब प्रदर्शन के बाद अगर भारतीय टीम जिम्बाब्वे के खिलाफ भी सीरीज गंवाती है, तो कप्तान और कोचिंग स्टाफ पर उठ रहे सवाल और अधिक गंभीर हो जाएंगे।घर में 'शेर' है जिम्बाब्वे, बांग्लादेश को चटाई थी धूल घरेलू परिस्थितियों का पूरा फायदा उठाने में जिम्बाब्वे के गेंदबाज बेहद माहिर हैं। हरारे की उछाल भरी पिचों पर 140 किमी/घंटे से अधिक की गति और हार्ड लेंथ गेंदबाजी से जिम्बाब्वे के पेसर्स भारतीय बल्लेबाजों को संकट में डाल सकते हैं। हाल ही में बांग्लादेश के खिलाफ हुई सीरीज में जिम्बाब्वे ने टेस्ट मैच में एक पारी और 85 रनों से बड़ी जीत दर्ज की थी, साथ ही वनडे सीरीज 2-1 से जीती थी। जिम्बाब्वे के इस हालिया प्रदर्शन को देखते हुए भारत को तीसरा बड़ा झटका लगने का खतरा मंडरा रहा है।युवा गेंदबाजों के भरोसे भारत, रिंकू सिंह की हुई वापसी भारतीय टीम मैनेजमेंट इस सीरीज को बदलाव के दौर के रूप में देख रहा है। बल्लेबाजी क्रम में संजू सैमसन के साथ-साथ फिनिशर रिंकू सिंह की वापसी हुई है। वहीं, गेंदबाजी आक्रमण में मयंक यादव, अशोक शर्मा, यश ठाकुर और प्रिंस यादव जैसे कई ऐसे युवा चेहरे शामिल हैं, जो या तो पहली बार देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं या लंबे समय बाद वापसी कर रहे हैं।भारत बनाम जिम्बाब्वे T20 सीरीज आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) के अनुसार टी-20 सीरीज का पूरा शेड्यूल:पहला T20I: 23 जुलाई 2026 (हरारे स्पोर्ट्स क्लब)दूसरा T20I: 25 जुलाई 2026 (हरारे स्पोर्ट्स क्लब)तीसरा T20I: 26 जुलाई 2026 (हरारे स्पोर्ट्स क्लब)भारत बनाम जिम्बाब्वे T20I सीरीज के लिए दोनों टीमों का स्क्वॉड:भारत: श्रेयस अय्यर (कप्तान), वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा (उप-कप्तान), ईशान किशन (विकेटकीपर), शिवम दुबे, सूर्यांश शेडगे, रिंकू सिंह, हर्ष दुबे, प्रिंस यादव, यश ठाकुर, अशोक शर्मा, मयंक यादव, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), रवि बिश्नोई।जिम्बाब्वे: सिकंदर रजा (कप्तान), ब्रायन बेनेट, रयान बर्ल, बेन कुरेन, ब्रैड इवांस, क्लाइव मैडेंडे (विकेटकीपर), टिनोटेंडा मापोसा, तादिवानाशे मारुमानी, वेलिंगटन मसाकाद्जा, ताशिंगा मुसेकिवा, ब्लेसिंग मुजाराबानी, डायोन मायर्स, रिचर्ड नगारवा, न्यूमैन न्यामहूरी, मिल्टन शुंबा।
आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC 2025-27) के तहत बांग्लादेश के खिलाफ होने वाली आगामी दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम का ऐलान कर दिया गया है। 13 अगस्त से शुरू हो रही इस घरेलू सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलियाई चयन समिति ने 13 सदस्यीय मजबूत स्क्वॉड की घोषणा की है। सबसे बड़ी बात यह है कि पीठ की चोट से उबरने के बाद नियमित कप्तान पैट कमिंस की टीम में वापसी हो गई है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई पेस अटैक और कप्तानी को जबरदस्त मजबूती मिली है।'खतरनाक चौकड़ी' एक बार फिर साथ, विरोधियों में खौफ ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी की रीढ़ मानी जाने वाली चार प्रमुख गेंदबाजों की जोड़ी—पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क, जोश हेजलवुड और ऑफ स्पिनर नाथन लियोन एक साथ मैदान पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है। चोटों के कारण हाल के महीनों में यह चारों दिग्गज गेंदबाज एक साथ बहुत कम मैचों में खेल पाए थे। ऑस्ट्रेलिया के मुख्य चयनकर्ता जॉर्ज बेली ने पुष्टि की है कि ये सभी गेंदबाज पूरी तरह फिट हैं और बांग्लादेश के खिलाफ प्लेइंग इलेवन में एक साथ खेल सकते हैं। टीम में बैकअप पेसर के रूप में स्कॉट बोलैंड और ऑलराउंडर ब्यू वेबस्टर व कैमरन ग्रीन को भी शामिल किया गया है।उस्मान ख्वाजा की जगह नए टॉप-ऑर्डर की तलाश जनवरी 2026 में अनुभवी सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा के संन्यास लेने के बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम टॉप-6 बैटिंग ऑर्डर में बदलाव पर विचार कर रही है। बल्लेबाजी विभाग को संभालने के लिए ट्रैविस हेड, स्टीव स्मिथ, मार्नस लाबुशेन, जोश इंग्लिस और जेक वेदरल्ड जैसे खिलाड़ियों को 13 सदस्यीय टीम में जगह दी गई है। वहीं दूसरी ओर, खराब फॉर्म और टीम कॉम्बिनेशन के चलते माइकल नेसर, स्पिनर टॉड मर्फी और पेसर ब्रेंडन डॉगेट को टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।डार्विन और मैकाय में खेले जाएंगे दोनों मुकाबले ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच पहला टेस्ट मैच 13 अगस्त से डार्विन में खेला जाएगा, जबकि सीरीज का दूसरा और अंतिम टेस्ट मैच मैकाय के मैदान पर आयोजित होगा।टेस्ट चैंपियनशिप में ऑस्ट्रेलिया नंबर-1 आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 साइकल के आंकड़ों के अनुसार:ऑस्ट्रेलिया की स्थिति: ऑस्ट्रेलियाई टीम 87.50 प्रतिशत अंकों के साथ डब्ल्यूटीसी (WTC) तालिका में शीर्ष (Top) पर काबिज है। कंगारू टीम ने अपने 8 में से 7 टेस्ट मैच जीते हैं।बांग्लादेश की स्थिति: बांग्लादेश की टीम 58.33 प्रतिशत अंकों के साथ तालिका में चौथे स्थान पर है। उसने अब तक खेले 4 मैचों में से 2 में जीत दर्ज की है, 1 गंवाया है और 1 मैच ड्रॉ रहा है।बांग्लादेश के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया का 13-सदस्यीय टेस्ट स्क्वॉड: पैट कमिंस (कप्तान), स्कॉट बोलैंड, एलेक्स कैरी (विकेटकीपर), कैमरन ग्रीन, जोश हेजलवुड, ट्रैविस हेड, जोश इंग्लिस, स्टीव स्मिथ, मिचेल स्टार्क, जेक वेदरल्ड, ब्यू वेबस्टर, मार्नस लाबुशेन, नाथन लियोन।
शेयर बाजार में जब भी अचानक बड़ी गिरावट आती है या बाजार लाल निशान पर कारोबार करता है, तो नए और अनुभवहीन निवेशकों के हाथ-पांव फूलने लगते हैं। पोर्टफोलियो में लाल रंग देखकर ज्यादातर लोग घबराकर गलत फैसले ले बैठते हैं। हालांकि, एडलवाइस म्यूचुअल फंड की प्रबंध निदेशक (MD) और सीईओ राधिका गुप्ता का मानना है कि यदि आपका निवेश का तरीका और ढांचा सही है, तो बाजार में कितनी ही बड़ी गिरावट क्यों न आ जाए, आप रात में चैन की नींद सो सकते हैं।स्टॉक चुनने के चक्कर में न पड़ें, ढांचे को समझें ग्रो (Groww) द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'द अल्फा बेट्स' में राधिका गुप्ता ने नए और युवा निवेशकों को बेहद व्यावहारिक सलाह दी है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में अधिकांश परिवारों और युवा पेशेवरों के पास रोजाना शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव को ट्रैक करने, कंपनियों की बैलेंस शीट जांचने या वार्षिक रिपोर्ट का विश्लेषण करने का समय नहीं होता है। ऐसे में नए निवेशकों के लिए असली फैसला यह नहीं होना चाहिए कि कौन सा मल्टीबैगर शेयर खरीदें, बल्कि यह होना चाहिए कि वे किस वित्तीय ढांचे का चुनाव करते हैं जो उन्हें बिना किसी मानसिक तनाव के ग्रोथ में हिस्सा बनने का मौका दे।प्रोफेशनल फंड मैनेजरों पर छोड़ें बाजार के फैसले राधिका गुप्ता के अनुसार, म्यूचुअल फंड्स नए निवेशकों की इस सबसे बड़ी समस्या का स्थाई समाधान करते हैं। म्यूचुअल फंड्स में अलग-अलग सेक्टरों और मार्केट कैप (लार्ज, मिड और स्मॉल कैप) वाले शेयरों में पैसा लगाया जाता है। सबसे खास बात यह है कि रोजाना शेयर खरीदने या बेचने का फैसला आपका नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल फंड मैनेजर का होता है। ये फंड मैनेजर सख्त नियमों और रिसर्च के आधार पर फैसले लेते हैं। चूंकि युवा निवेशक अपने करियर को बनाने और कौशल विकसित करने में व्यस्त रहते हैं, इसलिए बाजार पर नजर रखने का यह भावनात्मक और भारी बोझ अनुभवी फंड प्रबंधकों पर छोड़ देना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।नए निवेशकों के लिए राधिका गुप्ता की सीधी और सरल सलाह सोशल मीडिया पर मिलने वाले 'मल्टीबैगर स्टॉक्स' के लुभावने टिप्स से दूर रहने की सलाह देते हुए राधिका गुप्ता ने नए निवेशकों के लिए दो सबसे बेहतरीन रास्ते बताए हैं:डाइवर्सिफाइड एक्टिवली मैनेज्ड इक्विटी फंड (Diversified Actively Managed Equity Fund): इसमें अनुभवी फंड मैनेजर बाजार के रुख के हिसाब से बेहतरीन शेयरों का चयन करते हैं।ब्रॉड-बेस्ड इंडेक्स फंड (Broad-Based Index Fund): यह कम खर्च में बाजार की औसतन ग्रोथ का सीधा लाभ उठाने का सबसे सुरक्षित जरिया है।राधिका गुप्ता ने जोर देकर कहा कि निवेश का शुरुआती मकसद पहले ही साल में सबसे ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं होना चाहिए, बल्कि बाजार में इतने लंबे समय तक बने रहना होना चाहिए कि आपको कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि ब्याज) की असली ताकत का फायदा मिल सके। उन्होंने अपनी निजी जिंदगी का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने खुद अपने नन्हे बेटे के लिए लार्ज और मिड-कैप इंडेक्स फंड में एसआईपी (SIP) शुरू की है, क्योंकि जटिल प्रक्रियाओं के बजाय सादगी ही दीर्घकालिक वेल्थ क्रिएशन की असली कुंजी है।बचत को मानें अनिवार्य कटौती आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) और वित्तीय अनुशासन के दृष्टिकोण से राधिका गुप्ता ने निवेश से भी ज्यादा ध्यान अच्छी वित्तीय आदतों पर देने की सलाह दी है:बचत ही निवेश की नींव है: बिना बचत के निवेश का कोई अस्तित्व नहीं हो सकता।आय की अनिवार्य कटौती: जिस तरह सैलरी से टैक्स की कटौती अपने आप होती है, ठीक वैसे ही अपनी मासिक कमाई का एक हिस्सा बचत के रूप में अलग निकाल देना चाहिए।5 से 10 फीसदी से करें शुरुआत: टैक्स चुकाने के बाद बची हुई कुल कमाई का कम से कम 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा हर महीने अनिवार्य रूप से बचाएं। जैसे-जैसे आपकी आय और करियर बढ़े, निवेश के इस हिस्से को भी बढ़ाते जाएं। यह छोटा सा अनुशासन आगे चलकर आपको बड़ा वेल्थ बनाने में मदद करेगा।
देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission) इस समय सबसे बड़ा और बहुप्रतीक्षित विषय बना हुआ है। हालांकि, वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू होने में अभी लगभग एक साल का समय बाकी है, लेकिन कर्मचारियों ने अपनी संभावित नई बेसिक सैलरी, भत्तों और ग्रॉस सैलरी को लेकर गणित बिठाना शुरू कर दिया है। साल की पहली छमाही में वेतन आयोग का आधिकारिक पोर्टल लॉन्च होने के बाद से ही कर्मचारी संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ बैठकों का दौर जारी है, जिससे सैलरी में बंपर इजाफे की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग और विशेषज्ञों की राय केंद्रीय कर्मचारियों की सबसे बड़ी शीर्ष संस्था 'नेशनल काउंसिल – जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी' (NC-JCM) ने सरकार से 8वें वेतन आयोग के तहत 3.833 फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) लागू करने की पुरजोर मांग की है। हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि 3.833 का आंकड़ा काफी अधिक है और आयोग 2.0 से लेकर 2.25 के बीच फिटमेंट फैक्टर तय कर सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि फिटमेंट फैक्टर 2.25 के आसपास रहता है, तो क्या कर्मचारियों की ग्रॉस सैलरी में उसी अनुपात में सीधा उछाल देखने को मिलेगा?पुराना रिकॉर्ड: ज्यादा फिटमेंट फैक्टर का मतलब हमेशा ज्यादा सैलरी नहीं इतिहास और पिछले वेतन आयोगों के आंकड़ों पर नजर डालें तो गणित थोड़ा अलग नजर आता है।7वां वेतन आयोग: 7वें वेतन आयोग में 2.57 का उच्च फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों की ग्रॉस सैलरी में महज 14.29% का ही वास्तविक इजाफा हुआ था।छठा वेतन आयोग: इसके विपरीत, 6ठे वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर केवल 1.86 था, लेकिन कर्मचारियों की ग्रॉस सैलरी में रिकॉर्ड 54% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।चौथा और पांचवां आयोग: चौथे और पांचवें वेतन आयोग के तहत कुल वेतन वृद्धि क्रमशः 27.60% और 31% रही थी।8वें वेतन आयोग से 31% से 68% तक बढ़ोतरी का अनुमान बैंकबाजार (BankBazaar) के हालिया वित्तीय अनुमानों के मुताबिक, यदि 8वां वेतन आयोग 2.0 से 2.57 के दायरे में भी फिटमेंट फैक्टर तय करता है, तब भी पे मैट्रिक्स के लेवल 1 से लेकर लेवल 18 तक के कर्मचारियों की ग्रॉस सैलरी में 31% से 68% तक की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।डीए (DA) की भूमिका क्यों है सबसे अहम? आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) के अनुसार, फिटमेंट फैक्टर और कुल वेतन वृद्धि में अंतर का सबसे मुख्य कारण तत्कालीन महंगाई भत्ता (Dearness Allowance - DA) होता है।डीए (DA) का प्रभाव: जब नए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं, तो तत्कालीन डीए को शून्य (0) करके उसे बेसिक सैलरी में मर्ज कर दिया जाता है। इसलिए मौजूदा डीए की दर कुल ग्रॉस सैलरी के इजाफे में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।अलाउंस का गणित: कर्मचारियों की कुल सैलरी बेसिक सैलरी, डीए, एचआरए (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TPTA) से मिलकर बनती है। इसके अलावा रिस्क अलाउंस, पोस्टिंग की जगह और जॉब स्टेटस के हिसाब से अन्य भत्ते जुड़ते हैं।वेतन आयोग का गठन और ताजा स्थिति केंद्र सरकार ने पिछले साल नवंबर में आठवें वेतन आयोग के गठन की आधिकारिक मंजूरी दी थी, जिसके बाद वर्ष 2026 में आयोग पूरी तरह सक्रिय रूप से काम कर रहा है। आयोग द्वारा तैयार किया गया नया पोर्टल अब लाइव है और विभिन्न हितधारकों के सुझाव दर्ज किए जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें सरकार को कब सौंपता है और केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होती है।
दिग्गजों के दांव वाला यह शेयर 69% टूटा! IPO प्राइस के करीब पहुंचे दाम, निवेशकों में मचा हड़कंप
शेयर बाजार में दिग्गज निवेशकों के दांव वाले स्टॉक्स भी हमेशा सुरक्षित नहीं रहते, इसका ताजा उदाहरण SME सेगमेंट की कंपनी 'सी2सी एडवांस्ड सिस्टम्स' (C2C Advanced Systems) में देखने को मिला है। कंपनी के शेयरों में इन दिनों भारी बिकवाली का दौर जारी है और स्टॉक ताश के पत्तों की तरह बिखरता नजर आ रहा है। मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में कंपनी का शेयर 20 प्रतिशत के लोअर सर्किट के साथ 268.15 रुपये पर बंद हुआ। बीते महज दो कारोबारी दिनों में ही इस शेयर में 40 पर्सेंट की भारी गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जिससे यह अपने आईपीओ (IPO) प्राइस के बिल्कुल करीब पहुंच गया है।ऑल-टाइम हाई से 69% से ज्यादा टूटे शेयर सी2सी एडवांस्ड सिस्टम्स के शेयरों ने अपने निवेशकों को तगड़ा झटका दिया है। अगर इसके 52 हफ्ते के उच्चतम स्तर की तुलना करें, तो यह स्टॉक 69 प्रतिशत से ज्यादा टूट चुका है। बीते साल 1 सितंबर 2025 को कंपनी का शेयर 888 रुपये के अपने ऑल-टाइम हाई स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो अब घटकर 268.15 रुपये के नए 52-हफ्ते के निचले स्तर (52-week Low) पर आ गया है। साल 2026 की शुरुआत से लेकर अब तक यानी YTD के आधार पर देखें तो इस शेयर में 43 पर्सेंट से अधिक की गिरावट आई है, जिसके चलते कंपनी का कुल मार्केट कैप घटकर 455 करोड़ रुपये पर सिमट गया है।आशीष कचोलिया और मुकुल अग्रवाल जैसे दिग्गजों का लगा है दांव आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) और मार्च 2026 की शेयरहोल्डिंग फाइलिंग के मुताबिक, इस कंपनी में बाजार के बड़े और नामचीन निवेशकों का पैसा लगा हुआ है:आशीष कचोलिया: दिग्गज निवेशक आशीष कचोलिया की इस कंपनी में 3.82 पर्सेंट हिस्सेदारी है।मुकुल अग्रवाल: मशहूर इनवेस्टर मुकुल अग्रवाल के पास कंपनी के 2.75 पर्सेंट शेयर मौजूद हैं।बंगाल फाइनेंस व FII: बंगाल फाइनेंस के पास 1.27 पर्सेंट स्टेक है, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की कुल हिस्सेदारी 3.18 पर्सेंट है।अपने IPO इश्यू प्राइस के मुहाने पर पहुंचा शेयर का भाव डिफेंस और एयरोस्पेस सॉल्यूशंस (Defense and Aerospace Solutions) में विशेषज्ञता रखने वाली सी2सी एडवांस्ड सिस्टम्स का आईपीओ नवंबर 2024 में आया था। उस दौरान कंपनी ने 226 रुपये का इश्यू प्राइस तय किया था। निवेशकों के जबरदस्त उत्साह के कारण यह आईपीओ 125 गुना सब्सक्राइब हुआ था। 3 दिसंबर 2024 को जब इसकी मार्केट में एंट्री हुई, तो यह 226 रुपये के मुकाबले 429.40 रुपये पर शानदार प्रीमियम के साथ लिस्ट हुआ था और लिस्टिंग वाले दिन 450.85 रुपये पर बंद हुआ था। हालांकि, अब ऑल-टाइम हाई से हुई भारी मुनाफावसूली और लगातार गिरावट के बाद शेयर अपने आईपीओ प्राइस 226 रुपये के बेहद करीब आ चुका है, जिससे खुदरा निवेशक असमंजस की स्थिति में हैं।
बॉलीवुड एक्टर अर्जुन कपूर अपनी फिल्मों से ज्यादा अपनी पर्सनल लाइफ और रिलेशनशिप की खबरों को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं। हाल ही में डिजिटल क्रिएटर और एक्ट्रेस साहिबा बाली के साथ उनके अफेयर की अफवाहें सोशल मीडिया पर काफी तेज हो गईं। हालांकि, अब इन अफवाहों पर खुद साहिबा बाली ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और मीडिया कवरेज पर जमकर अपनी भड़ास निकाली है। साहिबा ने साफ शब्दों में कहा है कि उनकी पर्सनल लाइफ या डेटिंग लाइफ कोई 'राष्ट्रीय खबर' नहीं है, जिस पर इतना हंगामा मचाया जाए।लंदन में एक साथ स्पॉट होने पर फैली थीं अफवाहें दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अर्जुन कपूर और साहिबा बाली को लंदन के मशहूर लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे तीसरे वनडे मैच के दौरान एक साथ देखा गया। दोनों को एक साथ स्टेडियम में मैच का लुत्फ उठाते देख सोशल मीडिया पर उनके अफेयर और डेटिंग की अटकलें लगने लगीं। इसके बाद दोनों के रिलेशनशिप स्टेटस को लेकर मीडिया में लगातार खबरें छपने लगीं, जिससे परेशान होकर साहिबा ने सोशल मीडिया का सहारा लिया।साहिबा बाली ने मीडिया को सुनाई खरी-खोटी अपनी पर्सनल लाइफ पर मिल रही बेवजह की अटेंशन पर सख्त ऐतराज जताते हुए साहिबा बाली ने लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर हुई एक सभा की तस्वीर शेयर की। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया की आलोचना करते हुए लिखा, डियर मीडिया, लंदन में मेरी डेटिंग लाइफ या दोस्ती के बारे में अंदाजे लगाना बंद करो। यह कोई नेशनल न्यूज नहीं है। अगर आपको कुछ दिखाना ही है तो कुछ अच्छा और काम का दिखाओ। साहिबा ने साफ किया कि लोगों को उनकी निजी जिंदगी के बजाय देश के अधिक महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।तस्वीर शेयर कर बोलीं: 'हर बात पर यकीन मत करो' अफेयर की चर्चाओं को मजाकिया अंदाज में खारिज करने के लिए साहिबा ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर अर्जुन कपूर के साथ अपनी एक तस्वीर भी शेयर की। इस तस्वीर के कैप्शन में उन्होंने लिखा, हर बात पर यकीन न करें - भाग 2। इससे ठीक पहले उन्होंने एक और पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया था, जिसमें मीडिया द्वारा उन्हें गलती से मशहूर अभिनेत्री अनुष्का शर्मा समझ लिया गया था। उस कन्फ्यूजन का मजाक उड़ाते हुए उन्होंने इसे 'भाग 1' बताया था और फैंस को ऐसे दावों पर यकीन न करने की सलाह दी।नो एंट्री 2 (No Entry 2): अर्जुन कपूर इन दिनों अपने पिता बोनी कपूर के प्रोडक्शन में बन रही मच-अवाइटेड कॉमेडी फिल्म 'नो एंट्री 2' की शूटिंग में व्यस्त हैं।रोमांटिक कॉमेडी फिल्म: हाल ही में उन्होंने निर्देशक मुदस्सर अजीज के निर्देशन में बन रही एक अनाम रोमांटिक कॉमेडी फिल्म के दिल्ली शेड्यूल की शूटिंग पूरी की है।सिंघम अगेन (Singham Again): इससे पहले अर्जुन कपूर रोहित शेट्टी की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'सिंघम अगेन' में खूंखार विलेन 'डेंजर लंका' के दमदार किरदार में नजर आए थे, जिसकी दर्शकों और क्रिटिक्स ने खूब तारीफ की थी।
राजश्री प्रोडक्शंस की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'विवाह' (Vivah) में 'पूनम' की मासूमियत और सादगी से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस अमृता राव को भला कौन भूल सकता है। आज भी जब पारंपरिक और पारिवारिक फिल्मों का जिक्र होता है, तो 'विवाह' का नाम सबसे ऊपर आता है। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि अमृता राव को यह ऐतिहासिक रोल किसी बड़े ऑडिशन या बड़ी हिट फिल्म की वजह से नहीं, बल्कि महज 7 मिनट के एक छोटे से किरदार के बदौलत मिला था। एक्ट्रेस ने खुद एक मीडिया इंटरव्यू में अपनी किस्मत बदलने वाले इस दिलचस्प किस्से का खुलासा किया है।जींस और टी-शर्ट पहनकर सूरज बड़जात्या से मिलने पहुंची थीं अमृता अमृता राव ने राजश्री के दिग्गज डायरेक्टर सूरज बड़जात्या के साथ अपनी पहली मुलाकात की यादों को साझा करते हुए बताया कि जब उन्हें मिलने का बुलावा आया, तो उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि सूरज जी उनके भीतर किस तरह का किरदार तलाश रहे हैं। एक ठेठ मॉडर्न मुंबईया लड़की की तरह अमृता जींस और टी-शर्ट पहनकर उनसे मिलने उनके दफ्तर पहुंच गईं। वहां जाकर जब उन्हें पता चला कि सूरज बड़जात्या उन्हें 'मधुपुर' शहर की बेहद सीधी-सादी और पारंपरिक लड़की 'पूनम' के लीड रोल के लिए देख रहे हैं, तो वह खुद भी हैरान रह गई थीं।'द लीजेंड ऑफ भगत सिंह' के 7 मिनट के रोल ने रचा इतिहास बातचीत के दौरान जब सूरज बड़जात्या ने अमृता से कहा कि उन्होंने उनकी एक फिल्म देखी है और उसमें उनका काम बहुत पसंद आया है, तो अमृता को लगा कि वह उनकी किसी कमर्शियल हिट फिल्म की बात कर रहे हैं। हालांकि, जब सूरज बड़जात्या ने फिल्म का नाम 'द लीजेंड ऑफ भगत सिंह' बताया, तो अमृता की आंखें नम हो गईं। अमृता ने कहा कि उस देशभक्ति फिल्म में उनका स्क्रीन टाइम मुश्किल से महज 7 मिनट का था। इतने छोटे से रोल में भी उनकी मासूमियत ने सूरज बड़जात्या जैसे दिग्गज डायरेक्टर पर इतनी गहरी छाप छोड़ी कि उन्होंने बिना देर किए अमृता को अपनी सबसे बड़ी फिल्म 'विवाह' का मुख्य चेहरा बनाने का फैसला कर लिया।8 करोड़ के बजट में बनी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर रचा था इतिहास आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) और फिल्म इंडस्ट्री के रिकॉर्ड्स के मुताबिक, साल 2006 में रिलीज हुई फिल्म 'विवाह' भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली पारिवारिक फिल्मों में गिनी जाती है:फिल्म का बजट: इस खूबसूरत लव स्टोरी को महज 8 करोड़ रुपये के सीमित बजट में तैयार किया गया था।बॉक्स ऑफिस कलेक्शन: फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई करते हुए कई नए रिकॉर्ड बनाए और रातों-रात ब्लॉकबस्टर साबित हुई।शाहिद-अमृता की जोड़ी: फिल्म में शाहिद कपूर (प्रेम) और अमृता राव (पूनम) की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया।सोशल मीडिया पर क्रेज: आज भी सोशल मीडिया रील्स, मीम्स, डायलॉग्स (जैसे 'जल लीजिए') और गानों के जरिए 'विवाह' फिल्म का क्रेज फैंस के सिर चढ़कर बोलता है।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर डटे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त करते हुए एक बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। कोलकाता में आयोजित वार्षिक शहीद दिवस रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि सीजेपी को शुरू से ही टीएमसी का समर्थन प्राप्त है और यदि आवश्यकता पड़ी तो वह स्वयं जंतर-मंतर जाकर उनके प्रदर्शन में शामिल होंगी। भारी बारिश और पुलिस की कार्रवाई के बावजूद सीजेपी समर्थक अपनी मांगों को लेकर लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।जंतर-मंतर पर CJP का डटे रहना और ममता बनर्जी का खुला समर्थनसंसद चलो मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और रात भर हुई मूसलाधार बारिश के बावजूद सीजेपी कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर जमे रहे। सुबह कार्यकर्ताओं ने स्वयं प्रदर्शन स्थल की सफाई की, जबकि संस्थापक अभिजीत दीपके ने पुलिस कार्रवाई में घायल हुए समर्थकों से माफी मांगी। कोलकाता में बिड़ला तारामंडल के पास टीएमसी की शहीद दिवस रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा के खिलाफ लड़ाई व्यक्तिगत या राजनीतिक अहम् से कहीं बड़ी है, इसलिए वह सीजेपी के न्यायसंगत संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ी हैं।INDIA गठबंधन के घटक दलों से एकजुट होने की अपीलपश्चिम बंगाल में राजनीतिक समीकरणों को नया रूप देने के उद्देश्य से ममता बनर्जी ने कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) सहित विपक्षी गठबंधन 'INDIA' के सभी घटक दलों से अपने आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य स्तर पर भाजपा को परास्त करने के लिए सभी को इंडिया गठबंधन के बैनर तले एक साथ आना होगा। उन्होंने कहा कि उनके भीतर किसी प्रकार का कोई अहम् नहीं है और सभी दलों को एकजुट होकर लड़ाई लड़नी चाहिए।टीएमसी के बागी नेताओं पर सख्त रुख: गद्दारों की पार्टी में वापसी संभव नहींरैली के दौरान ममता बनर्जी ने बागी गुट के नेताओं पर भाजपा के इशारे पर काम करने का तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को कभी वापस नहीं लिया जाएगा और हर खाली जगह को भरने के लिए टीएमसी के युवा और छात्र कार्यकर्ता पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने बागी नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वे छिपकर काम करने के बजाय सीधे भाजपा में शामिल होकर चुनाव लड़ें। इसके साथ ही ममता बनर्जी ने घोषणा की कि वे जल्द ही पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों का तूफानी दौरा शुरू करेंगी।
बारिश में कुछ टेस्टी खाने का है मन? ट्राई करें ये 5 मानसून स्पेशल रेसिपीज
Easy Monsoon Snack Recipes: अगर आप भी बारिश के मौसम का स्वाद दोगुना करना चाहते हैं, तो यहां जानिए मानसून की 5 बेहतरीन रेसिपीज, जिन्हें देखते ही मुंह में पानी आ जाएगा और हर कोई बार-बार इन्हें बनाने की फरमाइश करेगा। होगा बारिश का मजा दोगुना! यहां ...
आधुनिक शिक्षा, संस्कार और निःशुल्क कोचिंग का संगम, नीट में 18 बेटियों की सफलता बनी नई मिसाल
लखनऊ, 20 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा और सामाजिक सशक्तीकरण की योजनाएं सकारात्मक परिणाम दे रही हैं। समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय केवल स्कूली शिक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक ...
एआई सेंसर व कैमरे, जेनरेटिव एआई, डिजिटल साइनेज, कलर कोडिंग आदि से होगा भीड़ प्रबंधन4 घंटे पहले ही अनुमानित भीड़ का चलेगा पता, समय रहते पुलिस कर पाएगी भीड़ प्रबंधन का कार्यरियल-टाइम डेटा और एआई भीड़ वाले मार्गों से बचाते हुए वैकल्पिक गलियों का ...
छत्तीसगढ़ के कोरिया में प्रेगनेट युवती का अपहरण कर गैंगरेप
कोरिया। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में अंतरजातीय विवाह करने वाली एक गर्भवती युवती के कथित अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म तथा जबरन गर्भपात कराने के प्रयास के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। पुलिस से मंगलवार को मिली जानकारी के […] The post छत्तीसगढ़ के कोरिया में प्रेगनेट युवती का अपहरण कर गैंगरेप appeared first on Sabguru News .
राजा रघुवंशी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सोनम रघुवंशी से कहा कि वह आत्मसमर्पण करें, अन्यथा जमानत रद्द करने पर विचार किया जाएगा। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी जमानत का विरोध करते हुए कई अहम दलीलें पेश कीं।
Samsung 22 जुलाई (बुधवार) को लंदन में अपना बहुप्रतीक्षित Galaxy Unpacked 2026 इवेंट आयोजित करने जा रही है। इस इवेंट में कंपनी नई पीढ़ी के फोल्डेबल स्मार्टफोन और स्मार्टवॉच लॉन्च करेगी। लॉन्च से पहले सामने आई कई रिपोर्ट्स और लीक्स में Galaxy Z Fold8 ...
Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें
Low Blood Sugar Symptoms: शरीर को सुचारू रूप से कार्य करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है और इस ऊर्जा का प्रमुख स्रोत ग्लूकोज यानी ब्लड शुगर है। जब शरीर में ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से कम हो जाता है, तो इस स्थिति को हाइपोग्लाइसीमिया ...
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पहली बार प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के बाहर धरने पर बैठे। कांग्रेस नेताओं ने पैदल मार्च कर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई।
भीलवाड़ा जिले में माता बांक्या रानी मंदिर को लेकर विवाद गहराया
भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के बिजोलिया कस्बे में शुक्रवार को देवडूंगरी भीलपुरिया घाटी स्थित प्राचीन धार्मिक स्थल को लेकर विवाद गहरा गया। सर्व समाज के आह्वान पर मंगलवार को मध्याह्न 12 बजे तक बाजार बंद रहा और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए उपखंड अधिकारी (एसडीएम) स्वाति झा को ज्ञापन सौंपकर […] The post भीलवाड़ा जिले में माता बांक्या रानी मंदिर को लेकर विवाद गहराया appeared first on Sabguru News .
आंध्र प्रदेश की मशहूर 'डिब्बा रोटी' बनाने का यह गिलास वाला तरीका देख दीवाने हो जाएंगे आप
भारतीय रसोई में जब भी सुबह के नाश्ते या रात के डिनर की बात आती है, तो सबसे बड़ा सिरदर्द यही रहता है कि कौन सी माथापच्ची करके आटा गूंथा जाए और फिर एक-एक करके रोटियां बेली जाएं। अगर आप भी इस रोजाना की झंझट से तंग आ चुके हैं और कुछ ऐसा आसान, झटपट और स्वादिष्ट ढूंढ रहे हैं जो मिनटों में तैयार हो जाए, तो दक्षिण भारत के स्वाद से जुड़ी यह वायरल रेसिपी आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं होगी। आंध्र प्रदेश की पारंपरिक और बेहद लोकप्रिय 'डिब्बा रोटी' (Dibba Roti) इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर खाने के शौकीनों के दिलों पर राज कर रही है। सबसे मज़ेदार बात यह है कि इसे बनाने के लिए न तो आपको घंटों आटा गूंथने की जरूरत है और न ही बेलन उठाने की, बल्कि किचन में रखे एक सामान्य गिलास और कड़ाही की मदद से आप इसे आसानी से तैयार कर सकते हैं। इस अनोखी और लाजवाब रेसिपी के बारे में आइए विस्तार से जानते हैं।क्या है आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध 'डिब्बा रोटी' और क्यों है यह इतनी खासदक्षिण भारतीय व्यंजनों का नाम सुनते ही इडली, डोसा और वड़ा का ख्याल मन में आता है, लेकिन आंध्र प्रदेश की यह खास डिश 'डिब्बा रोटी' अपने आप में बेहद अनूठी है। यह बाहर से हल्की क्रिस्पी और अंदर से बेहद सॉफ्ट, स्पंजी और मक्खन जैसी मुलायम होती है। इसे पारंपरिक रूप से उड़द दाल और चावल के दरदरे मिश्रण से तैयार किया जाता है, जो खाने में जितनी स्वादिष्ट लगती है, बनाने में उससे कहीं ज्यादा आसान होती है। जिन लोगों के पास सुबह की भागदौड़ में रोटियां बेलने का वक्त नहीं होता, उनके लिए यह डिश किसी जादुई नुस्खे से कम नहीं है।गिलास और कड़ाही का यह अनोखा तरीका बदल देगा आपका कुकिंग अंदाजपारंपरिक तरीकों से हटकर इस डिब्बा रोटी को बनाने का जो नया और आसान तरीका इन दिनों छाया हुआ है, उसमें आपको कोई मेहनत नहीं करनी पड़ती। इस आसान ट्रिक को आजमाने के लिए आपको बस नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करना होगा:बैटर तैयार करना: सबसे पहले इडली-डोसे के बचे हुए या ताजा फर्मेंटेड बैटर में थोड़ा सा नमक, बारीक कटा हुआ प्याज, हरी मिर्च, धनिया पत्ती और स्वादानुसार मसाले मिलाकर एक अच्छा सा घोल तैयार कर लें। यह घोल बहुत ज्यादा पतला नहीं होना चाहिए।कड़ाही का इस्तेमाल: अब गैस पर एक नॉन-स्टिक कड़ाही या पैन गर्म करें और उसमें भरपूर मात्रा में बटर या घी फैलाएं। घी से इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है।गिलास वाला सीक्रेट तरीका: इस रेसिपी का सबसे मजेदार हिस्सा यह है कि आप चाहें तो बैटर को कड़ाही के बीचों-बीच एक साथ उड़ेल सकते हैं या फिर एक निश्चित मोटाई पाने के लिए इसे एक खास तरीके से फैलाते हैं ताकि यह पैनकेक की तरह मोटी और फूली हुई बने। धीमी आंच पर ढककर पकाने से यह अंदर तक अच्छे से पक जाती है और इसका टेक्सचर एकदम डिब्बे जैसा मोटा और स्पंजी हो जाता है।हर फूड लवर को क्यों जरूर ट्राई करनी चाहिए यह रेसिपीइस डिब्बा रोटी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आप इसे बच्चों के टिफिन में दे सकते हैं या फिर शाम की हल्की-फुल्की भूख में नारियल की चटनी और सांभर के साथ परोस सकते हैं। कम मेहनत, बेहतरीन स्वाद और मिनटों में तैयार होने वाला यह नाश्ता एक बार बनाने के बाद आपके घर में सबका पसंदीदा बन जाएगा। तो फिर देर किस बात की, आज ही अपनी रसोई में इस आसान तरीके को आजमाएं और इस पारंपरिक दक्षिण भारतीय स्वाद का लुत्फ उठाएं।
सिक्किम में सुरंग हादसे में 10 मजदूरों की मौत, कई अब भी फंसे, राहत-बचाव अभियान जारी
गंगटोक। सिक्किम के नामची जिले के समरदुंग-झोलुंगे क्षेत्र में एनएचपीसी तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग का एक हिस्सा ढह जाने की घटना में कम से कम 10 श्रमिकों की मौत हो गई तथा कई अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि सोमवार दोपहर सुरंग ढहने के बाद बचाव दल ने […] The post सिक्किम में सुरंग हादसे में 10 मजदूरों की मौत, कई अब भी फंसे, राहत-बचाव अभियान जारी appeared first on Sabguru News .
दिन में सूरज की आग से तपता है रेगिस्तान, लेकिन रात होते ही अचानक क्यों बन जाता है बर्फ सा ठंडा
धरती के सबसे शुष्क और गर्म माने जाने वाले रेगिस्तानी इलाकों की आबोहवा अपने अंदर कई ऐसे हैरान करने वाले रहस्य समेटे हुए है, जिनके बारे में जानकर हर कोई अचंभित रह जाता है। आपने अक्सर गौर किया होगा या किताबों में पढ़ा होगा कि मरुस्थल या रेगिस्तान दिन के समय सूरज की तेज किरणों के कारण किसी भट्टी की तरह खौलते हैं और यहां की रेत पर पैर रखना तक मुश्किल हो जाता है। लेकिन जैसे ही शाम ढलती है और रात का अंधेरा छाता है, यहां का तापमान इतनी तेजी से लुढ़कता है कि ठंड का अहसास होने लगता है। दिन में आसमान छूती गर्मी और रात में अचानक कंपकंपा देने वाली सर्दी के इस अजीबोगरीब खेल के पीछे आखिर क्या वैज्ञानिक कारण छिपा है? आइए इस रहस्य से पर्दा उठाते हैं और इसके पीछे की असली वजह को विस्तार से समझते हैं।रेत की अनोखी तासीर और ऊष्मा का यह पूरा गणितरेगिस्तान के इस अनोखे मौसम के पीछे सबसे बड़ा कारण वहां की मिट्टी यानी बालू की प्रकृति है। विज्ञान के जानकारों के अनुसार, रेत में यह विशेषता होती है कि वह बहुत तेजी से सूरज की गर्मी को अवशोषित (Absorb) करती है और उतनी ही तेजी से उस गर्मी को छोड़ती भी है। जब दिन के समय सूरज आसमान पर चमकता है, तो रेगिस्तान की रेतीली सतह पल भर में बेहद गर्म हो जाती है, जिससे वहां का तापमान बहुत ऊपर चला जाता है। इसके विपरीत, जैसे ही सूर्य अस्त होता है, रेत में गर्मी को रोककर रखने की क्षमता नहीं होती और वह सारी ऊष्मा तेजी से अंतरिक्ष में वापस रेडिएट (Radiate) कर देती है। इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में थर्मल रेडिएशन कहा जाता है।बादलों की गैरमौजूदगी और हवा का शुष्क होना भी है बड़ी वजहरेगिस्तानी इलाकों में रात के समय तापमान अचानक नीचे गिरने के पीछे एक और मुख्य वजह वहां का आसमान और नमी की कमी है। चूंकि रेगिस्तान में पानी और नमी (Humidity) का नामोनिशान नहीं होता और हवा पूरी तरह से सूखी होती है, इसलिए वहां बादलों की चादर नहीं बन पाती। सामान्य इलाकों में बादल रात के समय जमीन से निकलने वाली गर्मी को वापस धरती की तरफ परावर्तित कर देते हैं जिससे एक प्राकृतिक कंबल जैसा असर बनता है और रातें बहुत ज्यादा ठंडी नहीं होतीं। लेकिन मरुस्थल में बादलों के न होने के कारण जमीन की सारी गर्मी बिना किसी रुकावट के सीधे आसमान में गायब हो जाती है, जिसके कारण वहां का पारा तेजी से नीचे गिरने लगता है।प्रकृति का यह संतुलन इंसानों और जीवों को सिखाता है जीने का हुनररेगिस्तान की यह अनोखी जलवायु सिर्फ एक भौगोलिक तथ्य नहीं है, बल्कि यह वहां रहने वाले जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों की जीवनशैली को भी गहराई से प्रभावित करती है। अत्यधिक गर्मी और ठंड के इस भारी अंतर के साथ जीना वहां के बाशिंदों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। प्रकृति का यह अद्भुत करिश्मा हमें यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि कैसे एक ही दिन के भीतर धरती के एक ही हिस्से में दो बिल्कुल विपरीत मौसमों का अनुभव किया जा सकता है।
कल जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोज जनता पार्टी के आंदोलन के बाद आज विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे धरने पर बैठे। कांग्रेस नेताओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। सभी ने खरगे के घर से ...
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान 118 पुलिसकर्मी घायल
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों सहित 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। दिल्ली पुलिस की ओर से मंगलवार को जारी एक बयान के अनुसार सोमवार को झड़पों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, पुलिसकर्मियों पर हमला किया, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया […] The post कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान 118 पुलिसकर्मी घायल appeared first on Sabguru News .
राजस्थान के इकलौते हिल स्टेशन माउंट आबू की खूबसूरती यूं तो सालभर देश-विदेश के सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करती है, लेकिन बारिश के मौसम में इस खूबसूरत वादी का रोमांच और भी ज्यादा बढ़ जाता है। मानसून के दिनों में जब चारों तरफ हरी-भरी वादियां और बादलों की चादर छा जाती है, तो यहां की छटा देखते ही बनती है। अगर आप भी इस मानसून सीजन में माउंट आबू जाने का प्लान बना रहे हैं, तो आम और भीड़भाड़ वाली जगहों से दूर कुछ ऐसे खास और अनछुए ठिकाने हैं, जहां की प्राकृतिक सुंदरता आपका दिल जीत लेगी। माउंट आबू के इन 5 सीक्रेट व्यू पॉइंट्स (Secret View Points) के बारे में आइए विस्तार से जानते हैं, जहां पहुंचते ही आपको बादलों और हरियाली का जादुई अहसास होगा।ट्रेवल लवर्स के लिए खास क्यों है मानसून में माउंट आबू का सफरपहाड़ों की रानी कहे जाने वाले माउंट आबू में मानसून के दौरान प्रकृति अपने सबसे खूबसूरत रूप में नजर आती है। यहां के झरने जीवंत हो उठते हैं, रास्ते बादलों से ढंक जाते हैं और तापमान में भारी गिरावट आ जाती है। हालांकि, ज्यादातर पर्यटक केवल नक्की झील या सनसेट पॉइंट तक ही सीमित रह जाते हैं, जिसकी वजह से वे असली शांति और प्राकृतिक सौंदर्य से चूक जाते हैं। अगर आप भीड़-भाड़ से दूर सुकून के कुछ पल बिताना चाहते हैं और बादलों के बीच समय बिताना चाहते हैं, तो इन पांच गुप्त और खूबसूरत जगहों की सैर जरूर करनी चाहिए।1. ट्रेजरी व्यू पॉइंट (Treasury View Point) - बादलों से ढंकी शांत वादीमुख्य शहर की हलचल से थोड़ा दूर स्थित ट्रेजरी व्यू पॉइंट मानसून के मौसम में किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। यहां खड़े होकर जब आप चारों तरफ देखेंगे, तो ऐसा महसूस होगा मानों बादल आपके बिल्कुल करीब से गुजर रहे हैं। फोटोग्राफी के शौकीन लोगों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है, क्योंकि यहां से हरी-भरी पहाड़ियों और घाटियों का पैनोरमिक व्यू बेहद शानदार दिखाई देता है।2. हनुमान घाट (Hanuman Ghat) - ट्रैकिंग और हरियाली का परफेक्ट मेलअगर आपको एडवेंचर और नेचर वॉल्क का शौक है, तो हनुमान घाट आपके लिए बेस्ट डेस्टिनेशन साबित हो सकता है। बारिश के मौसम में इस पूरे रास्ते पर चारों तरफ घना कोहरा और चारों तरफ फैली हरियाली आपका मन मोह लेगी। यहां का शांत वातावरण और ठंडी हवाएं सैलानियों को घंटों तक यहां रुकने के लिए मजबूर कर देती हैं।3. एक्सप्रेस हाईवे व्यू पॉइंट (Express Highway View Point) - बादलों का अद्भुत खेलमाउंट आबू के रास्तों पर चलते हुए यह व्यू पॉइंट पर्यटकों के बीच धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहा है। मानसून के दिनों में यहां का मौसम पल-पल बदलता है। कभी तेज धूप तो अगले ही पल बादलों का घने कोहरे में बदल जाना यहां की मुख्य विशेषता है। सड़क के किनारे से पहाड़ियों के बीच बादलों के तैरने का यह नजारा अपनी आंखों में बसा लेने लायक होता है।4. साइलेंट वैली (Silent Valley) - शोर-शराबे से दूर सुकून का ठिकानानाम के अनुरूप ही यह घाटी पूरी तरह शांत और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। बारिश के दौरान यहां की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। बादलों की लुकाछिपी और पक्षियों की चहचहाहट के बीच यहां बिगाया गया वक्त आपकी सारी थकान को पल भर में दूर कर देगा। कपल्स और नेचर लवर्स के लिए यह माउंट आबू का सबसे बेहतरीन सीक्रेट स्पॉट माना जाता है।5. अचलगढ़ का निचला क्षेत्र और प्राकृतिक झरने (Achalgarh Hidden Streams)ऐतिहासिक अचलगढ़ किले के आसपास का क्षेत्र मानसून में मौसमी झरनों और हरियाली से भर जाता है। जब आप मुख्य किले के रास्ते से थोड़ा हटकर अंदरूनी प्राकृतिक रास्तों की तरफ जाएंगे, तो आपको पहाड़ों से गिरते छोटे-छोटे झरने और बादलों के आगोश में लिपटी पहाड़ियां देखने को मिलेंगी। मानसून ट्रिप को यादगार बनाने के लिए यह जगह बेहद खास है।
बालोद में इंसानियत शर्मसार! कांकेर की महिला का अपहरण कर तीन ट्रक चालकों ने किया सामूहिक दुष्कर्म
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से इस वक्त एक अत्यंत झकझोर देने वाली और दिल दहला देने वाली सनसनीखेज वारदात सामने आ रही है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। बालोद क्षेत्र में पड़ोसी जिले कांकेर की रहने वाली एक महिला के साथ अपहरण के बाद सामूहिक दुष्कर्म (Gang Rape) जैसी घिनौनी घटना को अंजाम दिया गया है। इस अमानवीय कृत्य का आरोप तीन ट्रक चालकों पर लगा है, जिन्होंने महिला को अपनी हवस का शिकार बनाया। इस जघन्य अपराध के सामने आने के बाद से पुलिस प्रशासन और महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस खौफनाक वारदात और पुलिस की अब तक की कार्रवाई के बारे में आइए विस्तार से जानते हैं।अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म की यह खौफनाक पूरी घटनाप्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता जो मूल रूप से कांकेर जिले की रहने वाली है, किसी कार्यवश बालोद इलाके में आई हुई थी। इसी दौरान तीन ट्रक चालकों ने सुनियोजित तरीके से उसे अपनी साजिश का शिकार बनाते हुए उसका अपहरण कर लिया। आरोपी महिला को किसी एकांत और सुरक्षित ठिकाने पर ले गए, जहां तीनों ने मिलकर उसके साथ जबरदस्ती की और इस गंभीर अपराध को अंजाम दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी महिला को डरा-धमकाकर मौके से फरार हो गए। किसी तरह हिम्मत जुटाकर पीड़िता ने स्थानीय पुलिस थाने पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद पुलिस महकमे में भी तुरंत हड़कंप मच गया।पुलिस ने दर्ज किया मामला, आरोपियों की तलाश में जुटी विशेष टीमेंघटना की गंभीरता को देखते हुए बालोद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत हरकत में आ गए और पीड़िता की शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने पीड़िता को तत्काल चिकित्सीय परीक्षण (Medical Examination) के लिए भेज दिया है और उसकी काउंसलिंग की जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जिलेभर में नाकाबंदी कर दी गई है और संदिग्ध ट्रक चालकों की तलाश में पुलिस की अलग-अलग विशेष टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।महिला सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल, जनता में भारी आक्रोशइस अमानवीय और लज्जाजनक घटना के बाद से स्थानीय नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि राजमार्गों और बाहरी इलाकों में सक्रिय रहने वाले इस तरह के ट्रक चालकों और असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगरानी रखना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि वे इस मामले में बेहद संवेदनशीलता और सख्ती से काम ले रहे हैं तथा जल्द ही सभी आरोपियों को शिकंजे में लेकर अदालत में पेश किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा देने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां जनता के बीच भ्रष्टाचार और मनमानी के खिलाफ जिला प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। बेमेतरा में एक पटवारी द्वारा नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी कानूनी या अदालत के आदेश के ही जमीन के खसरा और नक्शे में बड़ा फेरबदल करने का मामला उजागर हुआ है। राजस्व रिकॉर्ड के साथ की गई इस गंभीर छेड़छाड़ और गंभीर लापरवाही को संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर ने तुरंत कड़ा एक्शन लेते हुए आरोपी पटवारी को सस्पेंड कर दिया है। सरकारी दस्तावेजों के साथ खिलवाड़ करने वाले इस सनसनीखेज मामले और प्रशासनिक कार्रवाई के बारे में आइए विस्तार से जानते हैं।बिना कोर्ट आदेश के खसरा-नक्शा बदलने का गंभीर मामलाप्राप्त विवरण के अनुसार, बेमेतरा जिले के एक हल्के में पदस्थ पटवारी पर यह कार्रवाई तब की गई जब उच्च अधिकारियों को यह शिकायत मिली कि उसने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए राजस्व दस्तावेजों में मनमाने ढंग से बदलाव किए हैं। नियम यह है कि किसी भी खसरे, नक्शे या जमीन के रिकॉर्ड में फेरबदल करने के लिए सक्षम न्यायालय या उच्च प्राधिकारी का वैध आदेश होना अनिवार्य है। लेकिन इस पटवारी ने तमाम शासकीय नियमों और कायदों को दरकिनार करते हुए चुपचाप दस्तावेजों में हेराफेरी कर दी, जिससे भू-अभिलेख की पवित्रता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।कलेक्टर की सख्त कार्रवाई: आरोपी पटवारी तत्काल प्रभाव से सस्पेंडजब इस पूरे फर्जीवाड़े की शिकायत जिला प्रशासन तक पहुंची, तो मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से जांच के आदेश दिए। प्राथमिक जांच में ही पटवारी द्वारा रिकॉर्ड से छेड़छाड़ किए जाने का यह मामला पूरी तरह सही पाया गया। इसके बाद कलेक्टर ने बिना कोई ढिलाई बरतते हुए संबंधित पटवारी को तुरंत प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उसका मुख्यालय निर्धारित कर दिया गया है और यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि इस प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।राजस्व विभाग में मचा हड़कंप, अन्य मामलों की भी हो सकती है जांचबेमेतरा में हुई इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद से जिले के अन्य पटवारियों और राजस्व अमले में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने एक बार फिर यह आईना दिखा दिया है कि यदि कोई कर्मचारी सरकारी रिकॉर्ड के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करेगा, तो प्रशासन उसके खिलाफ कितनी कठोर कार्रवाई कर सकता है। जानकारों का मानना है कि जिला प्रशासन अब इस पटवारी के कार्यकाल के दौरान किए गए अन्य भूमि नामांतरण और डायवर्शन के मामलों की भी फाइलें खंगाल सकता है, जिससे आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है।
राजस्थान के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित खबर सामने आ रही है, जहां राज्य के सबसे बड़े और जमीनी चुनावों यानी पंचायती राज और स्थानीय निकायों के चुनाव का पूरा रोडमैप आधिकारिक तौर पर तय कर लिया गया है। प्रदेश में होने वाले इन चुनावों का पैमाना कितना बड़ा होने वाला है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस बार मैदान में डेढ़ लाख से अधिक राजनीतिक दावेदार अपनी किस्मत आजमाने उतरेंगे, जबकि कुल 5.45 करोड़ से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करके भविष्य की तस्वीर साफ करेंगे। ग्रामीण और शहरी विकास की दिशा तय करने वाले इस सबसे बड़े चुनावी महासमर की पूरी और विस्तृत जानकारी के बारे में आइए विस्तार से जानते हैं।राजस्थान के सबसे बड़े चुनावी महासमर की रूपरेखा तैयारप्राप्त विवरण के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग और प्रशासनिक अमले ने पंचायत से लेकर नगर निकाय चुनावों की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। ग्रामीण अंचल की सरकारों (जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत) से लेकर शहरों के नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं के चुनावों का यह चक्र राज्य की राजनीति की रीढ़ माना जाता है। इस बार के चुनावों में प्रशासनिक स्तर पर पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि हर एक बूथ पर निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से मतदान प्रक्रिया को संपन्न कराया जा सके। गांवों की चौपालों से लेकर शहरी वार्डों तक चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है।डेढ़ लाख से अधिक दावेदार और 5.45 करोड़ वोटर्स की विशाल भागीदारीइस बार के चुनावों के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले और बड़े पैमाने पर हैं। निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान भर में विभिन्न पदों के लिए कुल डेढ़ लाख से ज्यादा उम्मीदवार अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, जिससे हर वार्ड और पंचायत सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिलने वाला है। वहीं दूसरी ओर, राज्य के कुल 5.45 करोड़ से अधिक मतदाता इन उम्मीदवारों के राजनीतिक भाग्य का फैसला करेंगे। इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं की उपस्थिति यह दर्शाती है कि आम जनता अपने स्थानीय नेतृत्व को चुनने के लिए कितनी जागरूक और उत्सुक है।ग्रामीण और शहरी विकास की दिशा तय करेंगे ये चुनावराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत और निकाय चुनाव केवल सत्ता के छोटे केंद्र नहीं होते, बल्कि ये जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन और जनता की बुनियादी समस्याओं के समाधान की असली धुरी होते हैं। इन चुनावों के परिणामों का सीधा असर आने वाले समय में राज्य की मुख्यधारा की राजनीति पर भी पड़ेगा। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों (भाजपा, कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों) ने इन चुनावों में अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी शुरू कर दी है ताकि स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत किया जा सके।
मध्य प्रदेश: अधिकारी की आय से 258 प्रतिशत अधिक संपत्ति के मिले सबूत, लोकायुक्त की 9 ठिकानों पर रेड
मध्य प्रदेश लोकायुक्त ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में मध्य प्रदेश वेस्ट जोन इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के एक वरिष्ठ वित्त अधिकारी के खिलाफ मंगलवार को इंदौर, धार और मुरैना में 9 जगहों पर एक साथ छापेमारी की।
राजस्थान की सियासत में उबाल! जंतर-मंतर पर हुए लाठीचार्ज पर भड़के हनुमान बेनीवाल
राजस्थान की राजनीति से इस वक्त एक बहुत बड़ी और तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है, जिसने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। राजधानी जयपुर या दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान बेटियों और युवाओं पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संयोजक और सांसद हनुमान बेनीवाल इस पूरी घटना के बाद बुरी तरह भड़क उठे हैं। उन्होंने सरकार और प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए तीखे शब्दों में कहा है कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं और हमारी बेटियों पर लाठियां बरसाना किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा और यह सीधे तौर पर देश के लोकतंत्र पर एक बड़ा हमला है। इस सनसनीखेज बयान और पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में आइए विस्तार से जानते हैं।जंतर-मंतर और प्रदर्शन स्थल पर लाठीचार्ज से क्यों गरमाई सियासतप्राप्त विवरण के अनुसार, अपनी विभिन्न न्यायसंगत मांगों को लेकर युवा और महिलाएं लगातार प्रदर्शन कर रहे थे, इसी दौरान स्थिति उस वक्त तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस बल ने उन्हें खदेड़ने के लिए सख्ती बरतनी शुरू कर दी। इस बल प्रयोग के दौरान कई युवाओं और महिलाओं को चोटें आईं, जिसके बाद विपक्ष और विभिन्न क्षेत्रीय दलों के नेताओं ने इसका कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया। हनुमान बेनीवाल ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि जब देश का युवा और अन्नदाता अपनी आवाज उठाने के लिए सड़क पर उतरता है, तो सरकारें संवाद करने के बजाय उन पर दमनकारी नीतियां अपनाती हैं, जो तानाशाही का स्पष्ट प्रमाण है।हनुमान बेनीवाल का कड़ा तेवर: तानाशाही रवैया नहीं होने देंगे बर्दाश्तहनुमान बेनीवाल ने प्रशासनिक अधिकारियों और सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि आरएलपी हमेशा से किसानों, बेरोजगार युवाओं और आम जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ती आई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ अपराधियों जैसा सलूक करना और बल प्रयोग करना पुलिस और शासन के अलोकतांत्रिक चेहरे को बेनकाब करता है। बेनीवाल ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिन पुलिसकर्मियों या अधिकारियों ने लाठीचार्ज का आदेश दिया है, उनके खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है राजनीतिक विरोधइस लाठीचार्ज की घटना के बाद से राजस्थान के राजनीतिक पारे में उबाल आ गया है। विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस कार्रवाई के खिलाफ रोष व्यक्त किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार ने इस मामले में संवेदनशीलता नहीं दिखाई और पीड़ितों को न्याय नहीं मिला, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में एक बड़ा जन आंदोलन बन सकता है, जिससे सत्ताधारी दल की मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं।
पैसों का फ्लो बढ़ाने के लिए घर ले आएं फेंगशुई की ये खास चीजें, चुंबक की तरह खिंचा चला आएगा धन
घर में मौजूद वास्तु दोष और नकारात्मक ऊर्जा अक्सर हमारी वित्तीय स्थिति को कमजोर कर देते हैं, जिससे पैसों का फ्लो रुक जाता है। चीनी वास्तु शास्त्र फेंगशुई में धन लाभ और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के कई अचूक उपाय बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर आर्थिक तंगी से छुटकारा पाया जा सकता है।फेंगशुई कछुआ और मेंढक से बढ़ाएं बरकतफेंगशुई के अनुसार घर की उत्तर दिशा में धातु या क्रिस्टल का कछुआ रखना बेहद शुभ माना जाता है, जिससे धन के देवता कुबेर की कृपा हमेशा बनी रहती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इसके अलावा पैसों की तंगी से जूझ रहे लोगों के लिए फेंगशुई मेंढक बहुत लकी साबित होता है, जिसे घर में लाने से आर्थिक दिक्कतें तेजी से दूर होने लगती हैं।चीनी सिक्के, फिश एक्वेरियम और पानी का फव्वारा चमकाएंगे किस्मतआर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए चीनी सिक्कों को लाल रंग के कपड़े में बांधकर तिजोरी या गुप्त स्थान पर रखना चाहिए जिससे धन का प्रवाह लगातार बना रहता है। घर की उत्तर दिशा में बहते हुए पानी का फव्वारा रखना या फिर फिश एक्वेरियम स्थापित करना सकारात्मक ऊर्जा को संतुलित करता है और नेगेटिव एनर्जी को बाहर का रास्ता दिखाता है, बस इस बात का विशेष ध्यान रखें कि फव्वारे का पानी हमेशा साफ और निरंतर बहता हुआ होना चाहिए।
राजस्थान के कारोबारियों और व्यापारियों के मन में एक बार फिर कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नाम का खौफ किस तरह सिर चढ़कर बोल रहा है, इसका एक और ताजा और दहला देने वाला मामला सामने आया है। राज्य के एक नामी कारोबारी को सीधे तौर पर लॉरेंस गैंग के नाम पर एक करोड़ रुपये की भारी-भरकम फिरौती की मांग वाला धमकी भरा संदेश मिला है। बदमाशों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय के भीतर रंगदारी की यह रकम नहीं पहुंचाई गई, तो वे पूरे परिवार को मौत के घाट उतार देंगे। इस सनसनीखेज और जानलेवा धमकी के बाद से पीड़ित कारोबारी का पूरा परिवार गहरे सदमे और दहशत के साए में जीने को मजबूर है। इस खौफनाक वारदात और पुलिस की अब तक की कार्रवाई के बारे में आइए विस्तार से जानते हैं।लॉरेंस गैंग के नाम पर वसूली का खौफनाक खेल और धमकी का सचप्राप्त जानकारी के अनुसार, राजस्थान के एक प्रतिष्ठित कारोबारी को जब अज्ञात नंबरों से फोन कॉल्स और मैसेज मिलने शुरू हुए, तो शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद यह कोई मामूली फर्जी कॉल होगी। लेकिन जैसे ही फोन करने वाले ने खुद को सीधे तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ बताया और एक करोड़ रुपये की एक्सटॉर्शन मनी (Extortion Money) की मांग की, कारोबारी के पैरों तले जमीन खिसक गई। बदमाशों ने फोन पर साफ शब्दों में धमकी दी कि अगर पुलिस या किसी अन्य को इस बारे में भनक भी लगी, तो उनके पूरे परिवार को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। इस तरह की धमकियों ने एक बार फिर राजस्थान में व्यापारियों की सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।दहशत के साए में कारोबारी का परिवार, पुलिस प्रशासन में मचा हड़कंपलगातार मिल रही जान से मारने की धमकियों के बाद पीड़ित कारोबारी और उनके परिवार ने अपनी सुरक्षा को लेकर स्थानीय पुलिस थाने का दरवाजा खटखटाया है। मामला सीधे तौर पर कुख्यात गैंगस्टर के नाम से जुड़े होने के कारण पुलिस महकमे में भी तुरंत हड़कंप मच गया है। पुलिस के उच्च अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे बेहद संवेदनशील श्रेणी में रखा है और तत्काल प्रभाव से एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन कर दिया है। पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों और इंटरनेट कॉलिंग के जरिएों को ट्रैक करने में जुटी है, जिनका इस्तेमाल करके इस फिरौती की मांग को अंजाम दिया गया था।राजस्थान में लगातार बढ़ रहा गैंगस्टर्स का नेटवर्क और व्यापारियों की चिंतापिछले कुछ समय से राजस्थान में जिस तरह से लगातार कारोबारियों, डॉक्टरों और बड़े व्यवसायियों को टारगेट करके रंगदारी मांगने के मामले सामने आए हैं, उसने पूरे व्यापारिक समुदाय को चिंता में डाल दिया है। आए दिन इस तरह की धमकियों से राज्य के उद्यमियों में असुरक्षा की भावना घर करती जा रही है। हालांकि, पुलिस का यह दावा है कि वे किसी भी अपराधी को बख्शेंगे नहीं और इस पूरी साजिश के पीछे चाहे कोई भी लोकल मददगार या शूटर क्यों न हो, उसे जल्द ही सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा। बावजूद इसके, इस समय उस पीड़ित परिवार की सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से सुरक्षित महसूस कराया जा सके।
बरनाला में खाकी और बदमाशों के बीच खूनी मुठभेड़! पुलिस पर की गई ताबड़तोड़ फायरिंग
पंजाब के बरनाला जिले से इस वक्त एक बड़ी और सनसनीखेज वारदात सामने आ रही है, जहां कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती देने वाले बदमाशों और पुलिस के बीच जबरदस्त मुठभेड़ (Police Encounter) देखने को मिली है। अपराधियों को पकड़ने गई पुलिस टीम पर बदमाशों की तरफ से अचानक गोलियां चलाई गईं, जिसके बाद पुलिस ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। इस रोमांचक और हाई-वोल्टेज एनकाउंटर के बाद पुलिस ने दो कुख्यात बदमाशों को धर दबोचने में बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने कई अवैध पिस्तौल और कारतूस भी बरामद किए हैं। इस खतरनाक मुठभेड़ और पूरी घटना के बारे में आइए विस्तार से जानते हैं।कैसे हुई पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ की शुरुआतप्राप्त जानकारी के अनुसार, बरनाला पुलिस को कुछ संदिग्ध और वांछित अपराधियों के एक इलाके में छिपे होने की पुख्ता सूचना मिली थी। इस इनपुट के आधार पर जब पुलिस और सीआईए (CIA) की संयुक्त टीम ने संदिग्ध ठिकानों की घेराबंदी करनी शुरू की, तो खुद को घिरता देख बदमाशों ने घबराहट में पुलिस पार्टी पर सीधे फायरिंग शुरू कर दी। अपराधियों द्वारा अचानक किए गए इस हमले से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लेकिन मुस्तैद पुलिस जवानों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए तुरंत मोर्चा संभाला और انتہائی सूझबूझ के साथ जवाबी कार्रवाई को अंजाम दिया।जवाबी फायरिंग के बाद दो शातिर बदमाश गिरफ्तार, हथियार बरामदपुलिस की जवाबी और सख्त कार्रवाई के आगे बदमाशों के हौसले पस्त हो गए और वे भागने में नाकाम रहे। पुलिस ने घेराबंदी मजबूत करते हुए दोनों आरोपियों को मौके से ही दबोच लिया। तलाशी के दौरान पुलिस ने इनके पास से दो अवैध पिस्तौल और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि ये बदमाश किसी बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे और इलाके में दहशत फैलाना चाहते थे। गनीमत यह रही कि इस मुठभेड़ में किसी भी पुलिसकर्मी को गंभीर चोट नहीं आई और समय रहते स्थिति पर पूरा नियंत्रण पा लिया गया।पंजाब में लगातार तेज हो रहा अपराधियों पर पुलिस का शिकंजापिछले कुछ समय से पंजाब पुलिस ने राज्य में सक्रिय गैंगस्टरों, हथियार तस्करों और अपराधियों के खिलाफ जिस तरह का आक्रामक अभियान छेड़ रखा है, उसके तहत लगातार इस तरह के एनकाउंटर और गिरफ्तारियां सामने आ रही हैं। बरनाला की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अपराध और अपराधियों के लिए राज्य की धरती पर कोई जगह नहीं बची है। पुलिस अब पकड़े गए दोनों बदमाशों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनके अन्य साथियों के तार कहां-कहां जुड़े हैं और ये हथियार इन्होंने कहां से खरीदे थे।
पंजाब में बड़ा आतंकी षड्यंत्र विफल! मोगा थाना ग्रेनेड हमले के 17 शातिर आरोपी गिरफ्तार
पंजाब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के हाथ एक बहुत बड़ी और शानदार कामयाबी लगी है, जिसने राज्य की शांति और सुरक्षा व्यवस्था को खंडित करने की साजिश रचने वाले असामाजिक तत्वों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। मोगा जिले के एक थाने पर हुए सनसनीखेज ग्रेनेड हमले के मामले में पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए कुल 17 आरोपियों को धर दबोचा है। शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इन सभी बदमाशों को सरहदों पार बैठे आकाओं द्वारा महज पैसों का लालच देकर इस खतरनाक आतंकी वारदात को अंजाम दिलवाया गया था। पंजाब में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले इस बड़े मामले का पर्दाफाश कैसे हुआ और पुलिस ने किस तरह इस पूरी साजिश का ताना-बाना तोड़ा, आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।मोगा थाना ग्रेनेड हमले की गुत्थी सुलझी, पुलिस के हत्थे चढ़े 17 आरोपीकुछ समय पहले पंजाब के मोगा इलाके के एक पुलिस थाने को निशाना बनाकर ग्रेनेड से हमला किया गया था, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। इस गंभीर चुनौती को स्वीकार करते हुए पंजाब पुलिस के शीर्ष अधिकारियों और खुफिया एजेंसियों (Intelligence) ने एक विशेष टीम का गठन किया था। लगातार तकनीकी सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और ह्यूमन इंटेलिजेंस के आधार पर की गई कड़ी छानबीन के बाद पुलिस ने एक के बाद एक कुल 17 आरोपियों को दबोचने में सफलता हासिल की है। इन गिरफ्तारियों के साथ ही पुलिस ने इनके पास से कुछ आपत्तिजनक सामग्री और हथियार भी बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल इस तरह की वारदातों को अंजाम देने के लिए किया जाना था।पैसों के लालच और विदेशी आकाओं के इशारे पर रची गई थी खौफनाक साजिशपुलिस की पूछताछ में जो हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं, वे यह बताते हैं कि कैसे आज के दौर में कुछ अपराधी किस्म के युवा थोड़े से पैसों और विदेश में बैठे हैंडलर्स के झूठे वादों के चक्कर में आकर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं। मोगा थाना हमले के इन आरोपियों को भी सीमा पार से फंडिंग (Money Funding) का लालच दिया गया था और उन्हें यह टास्क सौंपा गया था कि वे स्थानीय स्तर पर पुलिस थानों या संवेदनशील ठिकानों पर ग्रेनेड फेंककर राज्य में डर का माहौल पैदा करें। हालांकि, सतर्क सुरक्षा एजेंसियों और मुस्तैद पुलिस बल ने समय रहते इनके नापाक मंसूबों को पूरी तरह से कुचल दिया और मुख्य सरगनाओं तक अपनी पहुंच बना ली।पंजाब में लगातार कस रहा है कानून का शिकंजा, सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट परइस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद से पंजाब की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर यह साबित हो गया है कि राज्य पुलिस किसी भी आतंकी या आपराधिक गतिविधि से निपटने के लिए कितनी तत्परता से काम कर रही है। पिछले कुछ महीनों में पुलिस ने कई ऐसे स्लीपर सेल और बदमाशों को बेनकाब किया है जो बाहरी ताकतों के इशारे पर शांति व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे। इस बड़ी सफलता के बाद पुलिस अब पकड़े गए सभी 17 आरोपियों से रिमांड पर गहन पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क के तार और कहां-कहां फैले हुए हैं और इनके पीछे कौन-कौन से बड़े चेहरे छिपे हैं।
सीजेपी के संसद तक पहुंचने के बाद सोमवार को दिल्ली पुलिस ने संसद के सभी दरवाजे बंद कर दिए। इस बीच भाजपा सांसद कंगना रनौत ने दावा किया कि प्रदर्शन के समय स्थिति इतनी खतरनाक हो गई थी कि संसद के भीतर मौजूद सभी लोग बुरी तरह घबराए हुए थे।
किसानों के दिल्ली कूच के ऐलान और राजधानी में जारी विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है। विशेष रूप से चिल्ला बॉर्डर पर नोएडा पुलिस ने हाई अलर्ट घोषित करते हुए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की है। सोमवार को छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बाद पुलिस किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है।
क्यों अलग माना जा रहा है जेन-ज़ी का यह छात्र आंदोलन और कहां चूकी मोदी सरकार?
Gen Z student protest in Delhi: दिल्ली में छात्रों के 'संसद मार्च' की शुरुआत परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मांग से हुई थी। लेकिन समय के साथ यह प्रदर्शन केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शन ...
आचार्य चाणक्य ने बताए पुरुषों के वे 4 प्रकार के दोस्त, जिनसे हर पत्नी को रहना चाहिए कोसों दूर
भारतीय इतिहास के सबसे महान कूटनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री और आचार्य चाणक्य की नीतियां आज के आधुनिक दौर में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी वे सदियों पहले हुआ करती थीं। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में मानव जीवन के हर उस पहलू पर खुलकर प्रकाश डाला है जो एक व्यक्ति को सफलता या असफलता की ओर ले जाता है। पारिवारिक जीवन और वैवाहिक संबंधों को लेकर चाणक्य ने कई ऐसे अमूल्य सूत्र दिए हैं, जिन्हें अपनाकर लोग अपने घर-परिवार को बिखरने से बचा सकते हैं। आचार्य चाणक्य का मानना था कि एक खुशहाल दांपत्य जीवन में बाहरी लोगों और गलत संगति का बहुत गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। चाणक्य नीति के अनुसार, पुरुषों के कुछ खास तरह के दोस्तों से उनकी पत्नियों को हमेशा सुरक्षित दूरी बनाकर रखनी चाहिए, क्योंकि ऐसे लोग धीरे-धीरे परिवार की शांति और सुख-चैन को दीमक की तरह चाट जाते हैं। आइए जानते हैं कि चाणक्य ने किन चार प्रकार के मित्रों से महिलाओं और गृहस्थी को दूर रहने की सख्त सलाह दी है।चरित्रहीन और अनैतिक आचरण वाले मित्र से हमेशा बनाएं दूरीआचार्य चाणक्य के अनुसार, जिस पुरुष के मित्र चरित्रहीन, लालची या अनैतिक गतिविधियों में लिप्त रहते हैं, उसका प्रभाव सीधे तौर पर उसके घर और वैवाहिक जीवन पर पड़ता है। ऐसे लोग कभी भी किसी के सगे नहीं हो सकते और अपनी बुरी आदतों के कारण दूसरों को भी गलत रास्ते पर धकेलने में देर नहीं लगाते। यदि किसी पति के दोस्त का आचरण समाज और नैतिकता के विरुद्ध है, तो उसकी पत्नी को ऐसे व्यक्ति से बातचीत या मेल-जोल से पूरी तरह बचना चाहिए। संगति का असर इंसान के स्वभाव पर बहुत जल्दी पड़ता है, और अनैतिक चरित्र वाले मित्रों का साया किसी भी हंसते-खेलते परिवार को बर्बाद करने के लिए काफी माना जाता है।चालाक, मतलबी और धोखेबाज दोस्तों से रहें हमेशा सतर्कजीवन में कई बार लोग ऐसे दोस्तों को पाल लेते हैं जो मुंह पर तो बहुत मीठा बोलते हैं लेकिन पीठ पीछे हमेशा नुकसान पहुंचाने की फिराक में रहते हैं। चाणक्य कहते हैं कि जो मित्र केवल अपने स्वार्थ के लिए रिश्ता निभाते हैं और मुश्किल वक्त में कन्नी काट लेते हैं, वे परिवार के सबसे बड़े दुश्मन होते हैं। ऐसे मतलबी लोग अक्सर पति-पत्नी के बीच गलतफहमियां पैदा करने और घर की अंदरूनी बातों का गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। यदि किसी पुरुष के मित्र धोखेबाज प्रकृति के हैं, तो समझदारी इसी में है कि पत्नी उन लोगों से किसी भी तरह की पारिवारिक चर्चा या मेलजोल न रखे, ताकि घर की गोपनीयता सुरक्षित रह सके।नकारात्मक सोच और हमेशा कलह के बीज बोने वाले लोगकुछ लोगों की फितरत ऐसी होती है कि वे हर परिस्थिति में नेगेटिविटी ही फैलाते हैं और दूसरों के घर में होने वाली तरक्की या खुशी को देखकर जलते रहते हैं। आचार्य चाणक्य का स्पष्ट कहना है कि नकारात्मक ऊर्जा से भरे ऐसे लोग परिवार में हमेशा कलह और तनाव का माहौल पैदा करते हैं। वे ऐसी बातें करते हैं जिससे पति-पत्नी के आपसी रिश्तों में खटास पैदा हो जाए। यदि ऐसे लोग घर आना-जाना शुरू कर दें, तो धीरे-धीरे घर का सुकून गायब होने लगता है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि महिलाओं की नजर ऐसे नकारात्मक मित्रों पर रहे और वे अपने घर की चौखट पर ऐसे लोगों के प्रभाव को बिल्कुल न आने दें।नशे और बुरी लतों के आदी दोस्तों का घर पर साया पड़ना घातकनशा और बुरी आदतें किसी भी इंसान के जीवन को तबाह करने के लिए काफी होती हैं, लेकिन जब कोई पुरुष ऐसे दोस्तों के संपर्क में आता है जो हर वक्त नशे में डूबे रहते हैं, तो उसका पूरा परिवार संकट में आ जाता है। चाणक्य नीति चेतावनी देती है कि नशेड़ी और आवारा किस्म के मित्रों की संगत इंसान की बुद्धि और विवेक दोनों को भ्रष्ट कर देती है। ऐसा पुरुष न तो अपने परिवार की जिम्मेदारी समझ पाता है और न ही अपनी पत्नी का सम्मान कर पाता है। पत्नी और बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए यह अति आवश्यक है कि ऐसे मित्रों को घर से कोसों दूर रखा जाए, ताकि गृहस्थी की गाड़ी पटरी से न उतरे और जीवन में हमेशा शांति बनी रहे।
पूजा के बाद दीया कब तक जलना चाहिए? घी या तेल, जानिए भगवान को प्रसन्न करने के लिए क्या है सबसे उत्तम
सनातन धर्म और हिंदू संस्कृति में दीप प्रज्वलित करने का विधान पूजा-पाठ का सबसे अहम और पवित्र हिस्सा माना जाता है। सुबह और शाम की आरती के दौरान जब हम मंदिर में दीपक जलाते हैं, तो हमारे मन में अक्सर यह सवाल जरूर आता है कि पूजा समाप्त होने के बाद दीया अपने आप कितनी देर तक जलना चाहिए या उसे कब बुझना चाहिए। इसके अलावा, दीया जलाने के लिए गाय का शुद्ध घी इस्तेमाल किया जाना चाहिए या फिर सरसों या तिल का तेल, इसको लेकर भी लोगों के मन में कई तरह की मान्यताएं रहती हैं। वास्तु शास्त्र और धार्मिक ग्रंथों में इन सभी बातों को लेकर बहुत ही सटीक नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं कि पूजा के दीये से जुड़े इन जरूरी नियमों का पालन कैसे करना चाहिए ताकि घर में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि बनी रहे।पूजा के बाद दीया कितनी देर तक जलना चाहिएधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान के सामने जलाया गया दीपक इस बात का प्रतीक होता है कि आपके जीवन से अंधकार दूर हो रहा है और ज्ञान व प्रकाश का प्रवेश हो रहा है। आम तौर पर दीया उतनी देर तक जलना चाहिए जब तक उसमें डाला गया घी या तेल पूरी तरह से समाप्त न हो जाए। यदि किसी कारणवश आपको पूजा के तुरंत बाद मंदिर से बाहर जाना पड़े या घर से निकलना पड़े, तो सुरक्षा की दृष्टि से दीपक को बुझाया जा सकता है, लेकिन जानबूझकर जलते हुए अखंड दीपक या सामान्य दीपक को बीच में बुझाना अशुभ माना जाता है। इसलिए हमेशा अपनी क्षमता और पूजा के समय के अनुसार ही बाती में पर्याप्त घी या तेल डालना चाहिए ताकि वह अपनी स्वाभाविक गति से शांत हो सके।घी या तेल: भगवान की पूजा के लिए क्या है बेहतरदीपक जलाने के लिए किस चीज का प्रयोग किया जाए, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस देवी-देवता की उपासना कर रहे हैं। शास्त्रों के अनुसार, देवताओं को प्रसन्न करने के लिए गाय का शुद्ध घी सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि घी सात्विकता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है। विशेषकर गणेश जी, विष्णु जी और माता लक्ष्मी की पूजा में घी का दीया जलाना बेहद फलदायी माना जाता है। वहीं दूसरी ओर, शनि देव, हनुमान जी या भैरव बाबा की कृपा पाने के लिए सरसों के तेल या तिल के तेल का दीपक जलाना श्रेष्ठ माना जाता है। यदि आप सामान्य देवी-देवताओं की पूजा कर रहे हैं, तो तिलों का तेल या शुद्ध घी दोनों ही विकल्पों का उपयोग किया जा सकता है।दीपक जलाते समय किन बातों का रखना चाहिए विशेष ध्यानपूजा के दौरान दीपक प्रज्वलित करते समय कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है ताकि उसका पूरा आध्यात्मिक और मानसिक लाभ मिल सके। हमेशा भगवान की मूर्ति के ठीक सामने या दाहिनी ओर दीपक रखना शुभ माना जाता है। दीपक की लौ कभी भी दक्षिण दिशा की ओर नहीं होनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है, जिससे अशुभ फल मिल सकता है। इसके अलावा, खंडित या टूटे हुए दीये का इस्तेमाल कभी भी पूजा में नहीं करना चाहिए। साफ-सुथरे मिट्टी या पीतल के दीये का उपयोग करके और सच्चे मन से की गई आराधना आपके घर-परिवार में हमेशा शांति और वैभव बनाए रखती है।
सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने का कोर्ट का आदेश, इलाज के लिए बनेगी डॉक्टरों की टीम
Sonam Wangchuk Medanta Hospital shift: कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरणविद व सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के मामले में मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बड़ा ...
हिंदू धर्म में चातुर्मास और विशेष तौर पर पवित्र सावन महीने का आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। देवाधिदेव महादेव भगवान शिव को समर्पित इस पावन महीने में शिव भक्तों की भारी भीड़ शिवालयों में उमड़ती है और वे सावन सोमवार के व्रत रखकर भोलेनाथ की आराधना करते हैं। इस बीच ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस बार सावन के महीने में एक साथ दो बड़े ग्रहण लगने की खगोलीय घटना सामने आ रही है। इस दुर्लभ संयोग को लेकर देश भर के श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन ग्रहणों का असर सावन के व्रतों, पूजा-पाठ और अनुष्ठानों पर पड़ेगा या नहीं। आइए ज्योतिषीय और धार्मिक नजरिए से जानते हैं कि इस स्थिति में भक्तों को कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए।सावन माह में कब और कैसे लगेंगे ये दो ग्रहणखगोलीय और ज्योतिषीय पंचांग के मुताबिक, इस वर्ष सावन मास के दौरान दो ग्रहणों का यह दुर्लभ योग बन रहा है। आमतौर पर ग्रहण सूर्य या चंद्रमा पर लगते हैं और इनका सूतक काल भी धार्मिक नियमों के अनुसार मान्य होता है। जब भी इस तरह के खगोलीय परिवर्तन किसी पवित्र मास या बड़े त्योहार के आसपास होते हैं, तो उनका प्रभाव ज्योतिषीय रूप से काफी अहम माना जाता है। हालांकि, यह देखना बहुत जरूरी होता है कि क्या इन ग्रहणों की दृश्यता भारत में है या नहीं, क्योंकि जिस देश या क्षेत्र में ग्रहण दिखाई देता है, वहीं पर उसके धार्मिक नियम और सूतक काल प्रभावी होते हैं।क्या सावन के व्रत और महादेव की पूजा पर पड़ेगा कोई असरभक्तों के मन में सबसे बड़ा संशय यह है कि क्या ग्रहण के दौरान या उस दिन भगवान शिव की पूजा और सावन सोमवार का व्रत प्रभावित होगा। ज्योतिष शास्त्र के जानकारों के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना काल, समय और खगोलीय बाधाओं से परे होती है। यदि सूतक काल प्रभावी है, तो मंदिरों के कपाट कुछ समय के लिए बंद जरूर किए जाते हैं, लेकिन मानसिक जाप, मंत्रोच्चार और शिव भक्ति पर कोई रोक नहीं होती है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपने संकल्प के अनुसार नियमों का पालन करना चाहिए, क्योंकि भगवान की सच्ची निष्छल भक्ति और आराधना से सभी प्रकार के नकारात्मक प्रभाव स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।ग्रहण काल के दौरान श्रद्धालुओं को क्या बरतनी चाहिए सावधानियांधार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार जब भी ग्रहण लगता है, तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना बेहद आवश्यक माना जाता है। ग्रहण के सूतक काल के दौरान भोजन पकाने और खाने से परहेज किया जाता है, हालांकि बुजुर्गों, बीमारों और बच्चों पर यह नियम उनकी स्थिति के अनुसार लागू होता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर की शुद्धि करके स्नान करना चाहिए और दान-पुण्य करना शुभ फलदायी माना जाता है। इसके अलावा, सावन के इस पावन महीने में नकारात्मक विचारों से दूर रहकर पूरी तरह से सकारात्मकता के साथ भोलेनाथ के ध्यान में लीन रहना चाहिए।
CJP प्रदर्शन पर क्यों खामोश रहे दिलजीत दोसांझ? आखिरकार तोड़ी चुप्पी, बोले- 'मुझे देश विरोधी कहा गया
मनोरंजन जगत और संगीत की दुनिया के सबसे लोकप्रिय सितारों में शुमार दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपने बयानों को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में छाए हुए हैं। हाल ही में चर्चा का विषय बने CJP से जुड़े प्रदर्शनों और विभिन्न मुद्दों पर अपनी चुप्पी साधने को लेकर आखिरकार दिलजीत ने खुलकर बात की है। सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों पर लगातार उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने दर्द बयां किया कि कैसे अतीत में उन्हें बिना किसी ठोस वजह के 'देश विरोधी' तक करार दे दिया गया था। गायक और अभिनेता के इस बेबाक बयान ने उनके फैंस और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है, आइए जानते हैं कि उन्होंने इस पूरे विवाद पर क्या कुछ कहा है।क्यों सवालों के घेरे में आए थे दिलजीत दोसांझ और क्या था पूरा मामलाअपने गानों और दमदार अभिनय से दुनिया भर में भारत का नाम रोशन करने वाले दिलजीत दोसांझ जब भी किसी बड़े सामाजिक या राजनीतिक मुद्दे पर सीधे तौर पर अपनी राय नहीं रखते हैं, तो सोशल मीडिया पर उनके आलोचक और फैंस दोनों ही सवाल खड़े करने लगते हैं। हालिया CJP प्रदर्शनों के दौरान भी उनकी खामोशी को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। लोगों के मन में यह उत्सुकता थी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका यह कलाकार ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर सामने क्यों नहीं आ रहा है। इसी कशमकश के बीच दिलजीत ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए उन तमाम आलोचकों को करारा जवाब दिया है जो उनकी चुप्पी पर सवाल उठा रहे थे।अतीत के जख्मों को याद कर छलका दर्द, कहा- मुझे देश विरोधी कहा गया थामीडिया इंटरव्यू और अपने हालिया संबोधन में दिलजीत दोसांझ ने बेहद भावुक और स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब भी वे समाज या देश के हित में अपनी बात रखने की कोशिश करते हैं, तो एक वर्ग द्वारा उन्हें निशाना बनाकर 'देश विरोधी' साबित करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोगों को कला और कलाकारों से ज्यादा विवाद पैदा करने में दिलचस्पी होती है। अतीत में उन्हें किस तरह की मानसिक प्रताड़ना और झूठे आरोपों का सामना करना पड़ा था, उसका जिक्र करते हुए उन्होंने यह स्पष्ट किया कि हर बार हर मुद्दे पर अपनी सफाई देना जरूरी नहीं समझता, क्योंकि उनके दिल में अपने देश और संस्कृति के प्रति जो सम्मान है, उसे किसी प्रमाण की जरूरत नहीं है।कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी और जनता की उम्मीदेंदिलजीत दोसांझ का यह बयान इस पुरानी और लंबी बहस को फिर से हवा दे रहा है कि क्या लोकप्रिय हस्तियों के लिए हर राजनीतिक या सामाजिक प्रदर्शन पर अपनी मुहर लगाना अनिवार्य होना चाहिए। एक तरफ जहां फैंस और एक्टिविस्ट्स चाहते हैं कि उनके चहेते सितारे हर बड़े मुद्दे पर खुलकर आवाज उठाएं, वहीं कलाकारों का एक वर्ग यह मानता है कि उन्हें केवल अपनी कला के माध्यम से लोगों का मनोरंजन करने और सकारात्मक संदेश देने तक सीमित रहना चाहिए। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया के इस दौर में किसी भी सेलिब्रिटी के लिए खामोश रहना या बोलना, दोनों ही चीजें बड़ी चर्चा का विषय बन जाती हैं।
नेशनल अवॉर्ड जीतते ही महाकाल के दरबार में पहुंचे कार्तिक आर्यन, भस्म और शयन आरती में टेका माथा
बॉलीवुड के चमकते सितारों में शुमार और अपनी दमदार एक्टिंग के दम पर हर दिल पर राज करने वाले अभिनेता कार्तिक आर्यन इन दिनों अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल दोनों ही वजहों से लगातार सुर्खियों में छाए हुए हैं। हाल ही में अपनी शानदार फिल्म के लिए प्रतिष्ठित नेशनल फिल्म अवॉर्ड की बड़ी उपलब्धि हासिल करने के बाद, कार्तिक अपनी सफलता का जश्न मनाने के सीधे उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। भगवान महाकाल के प्रति उनकी गहरी आस्था एक बार फिर देखने को मिली है, जहां उन्होंने गर्भगृह में पहुंचकर न सिर्फ आशीर्वाद लिया, बल्कि पवित्र शयन आरती में भी पूरे मन से भाग लिया। बाबा महाकाल की भक्ति में पूरी तरह रंगे 'चंदू चैम्पियन' की यह तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर उनके फैंस के बीच तेजी से वायरल हो रहे हैं, आइए जानते हैं इस आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ी खास बातें।नेशनल अवॉर्ड की सफलता के बाद भगवान महाकाल का जताया आभारअपनी बेहतरीन फिल्मों और कड़ी मेहनत के बलबूते हिंदी सिनेमा में एक खास मुकाम हासिल करने वाले कार्तिक आर्यन ने साबित कर दिया है कि वे सफलता मिलने के बाद भी अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े हुए हैं। नेशनल अवॉर्ड जीतने की खुशी और गर्व को महसूस करते हुए वे सबसे पहले महाकालेश्वर के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे। मंदिर पहुंचने पर पुजारियों और प्रबंधन द्वारा उनका स्वागत किया गया। पारंपरिक परिधान में नजर आ रहे कार्तिक ने नंदी हॉल और गर्भगृह में बैठकर विशेष पूजा-अर्चना की और देश व अपने चाहने वालों के लिए सुख-समृद्धि की कामना की। उनकी इस सादगी और धार्मिक निष्ठा की उनके फैंस जमकर तारीफ कर रहे हैं।भस्म और शयन आरती में हुए शामिल, घंटों बिताए भक्ति के माहौल मेंउज्जैन के महाकाल मंदिर की अलौकिक छटा और वहां की धार्मिक ऊर्जा हमेशा से देश-दुनिया के कलाकारों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती रही है। कार्तिक आर्यन ने भी महाकाल की प्रसिद्ध संध्या और शयन आरती में हिस्सा लिया। घंटों तक मंदिर परिसर में बैठकर उन्होंने मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का ध्यान किया। महाकाल की इस पावन नगरी में पहुंचकर वे पूरी तरह से भक्ति भाव में डूबे नजर आए। उनके साथ मौजूद लोगों ने बताया कि वे काफी लंबे समय से महाकाल के दर्शन करने की इच्छा रख रहे थे और नेशनल अवॉर्ड मिलने के बाद उनका यह सपना आखिरकार पूरा हो गया।'चंदू चैम्पियन' के बाद आने वाले प्रोजेक्ट्स पर टिकी हैं निगाहेंकार्तिक आर्यन के लिए यह साल करियर के लिहाज से बेहद शानदार साबित हो रहा है। उनकी फिल्म 'चंदू चैम्पियन' में उनके द्वारा निभाए गए किरदार और उसके लिए की गई शारीरिक मेहनत को दर्शकों और आलोचकों दोनों ने ही खूब सराहा था। इसी का नतीजा है कि उन्हें इस स्तर पर बड़ी पहचान और सम्मान मिल रहा है। महाकाल के दरबार से आशीर्वाद लेने के बाद अब वे अपने आगामी प्रोजेक्ट्स की शूटिंग में पूरे जोश के साथ जुटने वाले हैं। उनकी इस आध्यात्मिक यात्रा ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद भी अपनी संस्कृति और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना उनके स्वभाव का अहम हिस्सा है।
भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में पंजाब से हजारों किसान मंगलवार सुबह से दिल्ली कूच के लिए निकले लेकिन उन्हें शंभू, कुंडली और खनौरी बॉर्डर पर पुलिस द्वारा रोक दिया गया। पुलिस ने सीमा पर भारी बैरिकेडिंग कर रास्ता बंद कर दिया। वहीं, किसानों ने साफ किया कि वे किसी भी बैरिकेड को तोड़ने की कोशिश नहीं करेंगे और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उच्च शिक्षा यानी मास्टर्स डिग्री (M.Tech/Ph.D.) और प्रतिष्ठित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों यानी पीएसयू (PSUs) में नौकरी पाने का सपना देख रहे लाखों युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आ रही है। देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में से एक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी मद्रास (IIT Madras) ने आधिकारिक तौर पर ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग यानी गेट (GATE 2027) का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है। परीक्षा की तैयारियों में जुटे छात्र अब अपनी रणनीति को और अधिक धार दे सकते हैं, क्योंकि संस्थान ने एग्जाम की तारीखों से लेकर आवेदन प्रक्रिया तक की पूरी रूपरेखा स्पष्ट कर दी है। आइए जानते हैं कि इस बार के शेड्यूल, पात्रता के नियमों और परीक्षा पैटर्न में क्या कुछ खास रहने वाला है।GATE 2027 का पूरा शेड्यूल और महत्वपूर्ण तिथियांइंजीनियरिंग स्नातकों के लिए आयोजित होने वाली इस राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा के लिए आईआईटी मद्रास ने टाइमलाइन तैयार कर ली है। परीक्षा से जुड़े आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, इस साल आवेदन प्रक्रिया तय समय पर शुरू होगी, जिससे छात्रों को फॉर्म भरने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। देश भर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर इस प्रवेश परीक्षा का आयोजन फरवरी महीने के निर्धारित सप्ताहांत में दो सत्रों (पूर्वाहन और अपराह्न) में किया जाएगा। जो उम्मीदवार देश के शीर्ष आईआईटी, एनआईटी या अन्य बेहतरीन संस्थानों में दाखिला लेना चाहते हैं, उन्हें समय रहते आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करना होगा, ताकि अंतिम समय में सर्वर या तकनीकी समस्याओं का सामना न करना पड़े।योग्यता के मानदंड और कौन दे सकता है यह परीक्षागेट परीक्षा में शामिल होने के लिए आईआईटी मद्रास द्वारा तय किए गए पात्रता मानदंडों को समझना हर आवेदक के लिए बेहद जरूरी है। इस परीक्षा में वे उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, वास्तुकला, विज्ञान या कला के किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से अपनी स्नातक की डिग्री (B.E./B.Tech/B.Arch/B.Sc) पूरी कर ली है या जो वर्तमान में अपने ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत हैं। इसके अलावा, विदेशी छात्र भी निर्धारित नियमों के तहत इस परीक्षा के लिए पात्र माने जाते हैं। परीक्षा में शामिल होने के लिए आयु सीमा का कोई बंधन नहीं है, जिससे किसी भी उम्र के योग्य पेशेवर और छात्र अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए इसमें हिस्सा ले सकते हैं।परीक्षा पैटर्न और मार्किंग स्कीम में क्या रहेगा खासगेट 2027 के परीक्षा पैटर्न की बात करें तो यह पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित किया जाएगा। प्रश्न पत्र में मुख्य रूप से तीन प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं- बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs), बहु-उत्तर वाले प्रश्न (MSQs), और संख्यात्मक उत्तर प्रकार के प्रश्न (NATs)। कुल 100 अंकों के इस पेपर में जनरल एप्टीट्यूड के साथ-साथ संबंधित इंजीनियरिंग विषय और इंजीनियरिंग गणित से जुड़े सवाल शामिल होते हैं। गलत उत्तरों के लिए नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान केवल एमसीक्यू (MCQs) के लिए होता है, जबकि एमएसक्यू और एनएटी प्रश्नों में नकारात्मक अंक नहीं काटे जाते हैं। सही समय प्रबंधन और पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों का अभ्यास इस परीक्षा में सफलता हासिल करने की सबसे बड़ी कुंजी साबित होता है।
गुजरात में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 28 IAS अधिकारियों के हुए तबादले, नई नियुक्तियां घोषित
गुजरात सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा राज्य के प्रशासनिक तंत्र में बड़ा फेरबदल करते हुए 28 IAS अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए गए हैं। 21 जुलाई, 2026 को जारी इस आदेश के अनुसार महानगर पालिकाओं, जिला पंचायतों, राज्य के निगमों तथा DGVCL और ...
देश भर के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी यानी 'अपार आईडी' (APAAR ID) के निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम और सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई (CBSE) को यह स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि छात्रों की यह विशेष आईडी बनाते समय माता-पिता की सहमति अनिवार्य रूप से ली जानी चाहिए। कोर्ट ने स्कूलों और बोर्ड को साफ कर दिया है कि पेरेंट्स के पास इसके लिए 'हां' या 'ना' कहने का स्पष्ट विकल्प होना चाहिए ताकि किसी भी बच्चे की पहचान से जुड़ा यह डेटा बिना मर्जी के शेयर न हो सके। आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कुछ कहा है और इसका स्कूली शिक्षा प्रणाली पर क्या असर पड़ेगा।क्या है APAAR ID और क्यों उठ रहे थे इस पर सवालकेंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया पहल के तहत 'ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री' यानी अपार आईडी को देश के हर छात्र के लिए एक यूनिक डिजिटल पहचान के रूप में लाया गया है। इस आईडी के जरिए छात्र के शैक्षणिक रिकॉर्ड, खेलकूद, प्रमाणपत्र और अन्य उपलब्धियों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखने का दावा किया जाता है। हालांकि, पिछले कुछ समय से डेटा प्राइवेसी और बच्चों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों और विभिन्न संगठनों के मन में लगातार चिंताएं बनी हुई थीं। कई जगहों पर यह शिकायतें मिल रही थीं कि बिना पूरी जानकारी दिए या माता-पिता की स्पष्ट सहमति के ही स्कूलों द्वारा बच्चों की यह आईडी जबरन बनाई जा रही है।सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश और पेरेंट्स के अधिकारअभिभावकों की इन्हीं चिंताओं और याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने सीबीएसई और संबंधित शिक्षा अधिकारियों से कहा है कि बच्चों की अपार आईडी तैयार करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जानी चाहिए। कोर्ट के इस निर्देश के बाद अब स्कूलों की यह जिम्मेदारी होगी कि वे फॉर्म या डिजिटल पोर्टल पर ऐसा विकल्प प्रदान करें जहां माता-पिता अपनी स्वेच्छा से यह चुन सकें कि वे अपने बच्चे की अपार आईडी बनवाना चाहते हैं या नहीं। यदि कोई पेरेंट्स इसके लिए मना करते हैं, तो बच्चे की शिक्षा या स्कूल की अन्य गतिविधियों पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।डेटा प्राइवेसी और शिक्षा जगत के लिए इसका महत्वआज के डिजिटल युग में बच्चों के डेटा की सुरक्षा और उनकी गोपनीयता सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लाखों-करोड़ों अभिभावकों को यह अधिकार देता है कि वे अपने बच्चों की डिजिटल प्रोफाइल के मामलों में खुद निर्णय ले सकें। शिक्षाविदों और कानूनी जानकारों का मानना है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और नागरिकों की सहमति का अधिकार लोकतंत्र की एक अहम नींव है। आने वाले दिनों में सीबीएसई और अन्य राज्य बोर्डों द्वारा इस निर्देश के तहत नए और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने की उम्मीद है, जिससे स्कूलों में चल रही इस प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जा सके।
देश के सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षाओं में शुमार नीट (NEET UG) का परिणाम आने के बाद हर साल लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के सामने एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है कि यदि स्कोर 500 से कम है, तो क्या डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह जाएगा। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) और राज्य कोटे की काउंसलिंग के दौरान अक्सर यह देखा जाता है कि सरकारी एमबीबीएस सीटों के लिए कटऑफ आसमान छूती रहती है। ऐसे में यदि आपके भी नीट परीक्षा में 500 से कम अंक आए हैं, तो निराश होने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है, क्योंकि देश में ऐसे कई बेहतरीन मेडिकल कॉलेज और अल्टरनेटिव कोर्सेज मौजूद हैं जहां कम स्कोर पर भी आसानी से प्रवेश मिल सकता है। आइए जानते हैं कि कम मार्क्स आने पर आपके पास क्या-क्या शानदार विकल्प उपलब्ध हैं।कम मार्क्स आने पर सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों का गणितनीट में 500 से नीचे का स्कोर हासिल करने वाले छात्रों के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीट मिलना जनरल कैटेगरी के तहत थोड़ा मुश्किल जरूर हो जाता है, लेकिन आरक्षित श्रेणियों या कुछ राज्यों के लो-कटऑफ कॉलेजों में अभी भी उम्मीद की किरण बाकी रहती है। इसके अलावा, देश के कई प्रतिष्ठित प्राइवेट मेडिकल कॉलेज और डीम्ड यूनिवर्सिटीज ऐसी हैं जो कम स्कोर वाले छात्रों को भी एमबीबीएस में प्रवेश का मौका देती हैं, हालांकि इसके लिए ट्यूशन फीस का बजट थोड़ा ज्यादा हो सकता है। यदि आपका स्कोर 400 से 490 के बीच है, तो स्टेट कोटा काउंसलिंग के जरिए सेमी-गवर्नमेंट या मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर विचार किया जा सकता है।बीडीएस, बीएएमएस और अन्य पैरामेडिकल कोर्सेज के बेहतरीन विकल्पयदि एमबीबीएस में प्रवेश पाना संभव नहीं हो पा रहा है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मेडिकल फील्ड में आपके करियर के रास्ते बंद हो गए हैं। आज के समय में बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी यानी बीडीएस (BDS), आयुर्वेद चिकित्सा में बीएएमएस (BAMS), होम्योपैथी में बीएचएमएस (BHMS) और यूनानी चिकित्सा में बीयूएमएस (BUMS) जैसे कोर्स छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय हो रहे हैं। कम मार्क्स वाले छात्र इन आयुष कोर्सेज के जरिए भी एक सफल डॉक्टर बनने का अपना सपना पूरा कर सकते हैं। इसके अलावा फिजियोथेरेपी (BPT), ऑक्यूपेशनल थेरेपी, नर्सिंग (B.Sc Nursing) और विभिन्न पैरामेडिकल एवं फार्मेसी कोर्सेज में भी नीट स्कोर के आधार पर शानदार करियर ऑप्शंस मिल जाते हैं।काउंसलिंग के दौरान सही रणनीति अपनाना है सबसे जरूरीकम मार्क्स आने पर एडमिशन मिलने की संभावना पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि आप काउंसलिंग प्रक्रिया में किस तरह की रणनीति अपनाते हैं। कई बार छात्र सही जानकारी न होने के कारण बेहतरीन विकल्पों से चूक जाते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप मॉप-अप राउंड और स्ट्रे वैकेंसी राउंड तक की सभी काउंसलिंग प्रक्रियाओं पर पैनी नजर रखें। विभिन्न राज्यों की काउंसलिंग वेबसाइट्स की कटऑफ लिस्ट का बारीकी से विश्लेषण करें और अपने बजट व स्कोर के अनुसार सही कॉलेज का चुनाव करें। सही रिसर्च और सूझबूझ से की गई काउंसलिंग आपको कम स्कोर पर भी एक बेहतरीन संस्थान में सीट दिला सकती है।
बंगाल में आज TMC vs TMC! कोलकाता की सड़कों पर ताबड़तोड़ 3 रैलियों से हाई अलर्ट पर पुलिस
पश्चिम बंगाल की राजनीति के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह और घमासान अब खुलकर सड़कों पर आ गया है। राजधानी कोलकाता में आज राजनीतिक तापमान अपने चरम पर है क्योंकि एक ही दिन में टीएमसी के अलग-अलग धड़ों द्वारा ताबड़तोड़ तीन बड़ी रैलियां निकाली जा रही हैं। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और 'टीमीसी बनाम टीएमसी' के इस मुकाबले को देखते हुए कोलकाता पुलिस और प्रशासन को पूरी तरह से हाई अलर्ट पर रखा गया है। आखिर पार्टी के भीतर ऐसा क्या विवाद खड़ा हो गया है कि अपनों ने ही अपनों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, आइए इस पूरी राजनीतिक हलचल को विस्तार से समझते हैं।क्यों आमने-सामने आए टीएमसी के दिग्गज और क्या है विवाद की जड़पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस हमेशा से अपनी एकजुटता के लिए जानी जाती रही है, लेकिन पिछले कुछ समय से पार्टी संगठन के भीतर स्थानीय नेतृत्व और टिकट वितरण या वर्चस्व की जंग को लेकर असंतोष सुलग रहा था। आज कोलकाता में हो रही इन तीन अलग-अलग रैलियों के पीछे मुख्य वजह यही आपसी मतभेद और गुटबाजी बताई जा रही है। पार्टी के कुछ असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपनी ताकत दिखाने और आलाकमान तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए यह शक्ति प्रदर्शन का रास्ता चुना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर का यह घमासान आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति के समीकरणों को बड़ा झटका दे सकता है।कोलकाता में सुरक्षा के कड़े इंतजाम और पुलिस प्रशासन का कड़ा पहराएक ही दिन में शहर के अलग-अलग हिस्सों में तीन बड़ी राजनीतिक रैलियों के आयोजन को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखना कोलकाता पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना, हिंसक झड़प या ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स को तैनात किया गया है। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी खुद सड़कों पर उतरकर स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि शहर की शांति व्यवस्था खतरे में न पड़े। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि किसी भी गुट ने कानून तोड़ने की कोशिश की, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।बंगाल की राजनीति पर इसका क्या होगा दूरगामी असरपश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के भीतर इस तरह का खुला संघर्ष विपक्ष को बड़ा मुद्दा थमाने का काम कर रहा है। तृणमूल कांग्रेस के इस आंतरिक टकराव से यह साफ जाहिर होता है कि संगठन के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। यदि पार्टी आलाकमान ने समय रहते इस असंतोष को नहीं शांत किया, तो यह जमीनी स्तर पर पार्टी के जनाधार को कमजोर कर सकता है। अब पूरे राज्य की निगाहें कोलकाता में आज हो रही इन रैलियों और उसके बाद पार्टी नेतृत्व द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हुई हैं।
विश्व कप विजेता टीम की खुली बस में परेड निकली, लाखों लोगों ने जश्न मनाया
मैड्रिड। स्पेन की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम का सोमवार को लगभग 20 लाख प्रशंसकों ने स्वागत किया। टीम ने अपना दूसरा वर्ल्ड कप जीतने का जश्न मैड्रिड के बीचों-बीच एक ओपन-टॉप बस परेड के साथ मनाया और फिर शहर के मशहूर प्लाज़ा डी सिबेल्स में एक बड़े समारोह में हिस्सा लिया। स्पेन ने रविवार को न्यू […] The post विश्व कप विजेता टीम की खुली बस में परेड निकली, लाखों लोगों ने जश्न मनाया appeared first on Sabguru News .
क्रिस्टोफ़र नोलन की ‘द ओडिसी’ : होमर के महाकाव्य की उदास सिनेमाई पुनर्रचना
‘द ओडिसी’ में भावनाओं का ट्रीटमेंट कुछ टूटा, खोया और दरका हुआ-सा है। मैं एक बार भी किसी दृश्य या किसी जेस्चर पर सिहर नहीं पाया। किंतु इसकी सिनेमाई भव्यता, ओडिसस की ज़िंदगी की त्रासदी और इस कहानी का दृश्य-विन्यास इसे इतना बड़ा बना देते हैं कि हम अपनी ...
विश्व कप विजेता स्पेन के प्रत्येक खिलाड़ी को मिलेगा 863,000 डॉलर का बोनस
मैड्रिड। स्पेन में सोमवार को देश की दूसरी वर्ल्ड कप जीत के बाद जश्न जारी रहा, रविवार को अर्जेंटीना के खिलाफ फेरान टोरेस के अतिरिक्त समय में किए गए गोल ने उन्हें एंड्रेस इनिएस्ता के साथ जगह दिलाई, जिन्होंने 2010 के फाइनल में अहम गोल किया था। नेशनल टीम की शर्ट में दूसरा स्टार जोड़ने […] The post विश्व कप विजेता स्पेन के प्रत्येक खिलाड़ी को मिलेगा 863,000 डॉलर का बोनस appeared first on Sabguru News .
नीट पेपर लीक मामले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा : मोदी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि नीट पेपर लीक मामले में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें सख्त से सख्त सजा दी जाएगी। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को संसद भवन हुई राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि राष्ट्रीय पात्रता सह […] The post नीट पेपर लीक मामले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा : मोदी appeared first on Sabguru News .
भारत ने समुद्री टैंकर पर हमले में 4 भारतीयों की मौत पर रूसी राजनयिक को तलब कर विरोध जताया
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने रूस के यहां स्थित प्रभारी राजदूत को तलब कर यूक्रेन में वाणिज्यिक पोत एमवी गोल्डन लियो पर हमले में चार भारतीय नाविकों की मौत के मामले की कड़ी निंदा की तथा विरोध जताया। भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वाणिज्यिक नौवहन को निशाना बनाया जाना तथा इन हमलों […] The post भारत ने समुद्री टैंकर पर हमले में 4 भारतीयों की मौत पर रूसी राजनयिक को तलब कर विरोध जताया appeared first on Sabguru News .
ईरान का कुवैत, बहरीन में अमरीकी ठिकानों पर रडार एवं एयर डिफेंस सिस्टम तबाह करने का दावा
तेहरान। ईरान ने मंगलवार को कहा कि उसने कुवैत और बहरीन में कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने कई रडार प्रतिष्ठानों और एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम को तबाह करने का दावा किया है। अमरीकी सशस्त्र बलों ने लगातार दसवीं रात ईरान पर हमले जारी रखे। […] The post ईरान का कुवैत, बहरीन में अमरीकी ठिकानों पर रडार एवं एयर डिफेंस सिस्टम तबाह करने का दावा appeared first on Sabguru News .
छात्रों पर लाठीचार्ज पर गरमाई सियासत, राहुल से अखिलेश तक विपक्षी नेताओं से मोदी सरकार से पूछा सवाल
जंतर मंतर से सांसदों के संसद मार्च पर दिल्ली पुलिस के लाठीचार्ज पर सियासी बवाल मचा हुआ है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। किसी ने पीएम मोदी ...
गाजियाबाद में मालगाड़ी के 6 डिब्बे पटरी से उतरे, 53 ट्रेनें हुई प्रभावित
गाजियाबाद। उत्तर रेलवे के गाजियाबाद-नई दिल्ली रेलखंड पर मंगलवार को एक मालगाड़ी के लदे हुए छह डिब्बे पटरी से उतर गए, जिसके कारण इस रेलखंड पर यातायात प्रभावित हो गया। इस दुर्घटना के कारण उत्तर रेलवे ने कई ईएमयू और यात्री ट्रेनों को पूर्ण रूप रद्द, आंशिक रूप से रद्द तथा मार्ग परिवर्तित कर दिया […] The post गाजियाबाद में मालगाड़ी के 6 डिब्बे पटरी से उतरे, 53 ट्रेनें हुई प्रभावित appeared first on Sabguru News .
योगी सरकार की योजना से बदली किस्मत, डेयरी से सालाना हो रही 20 लाख की कमाई*
लखनऊ, 20 जुलाई : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना ग्रामीण युवाओं के लिए सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि जिंदगी बदलने का माध्यम बन रही है। प्रतापगढ़ के सांड़वा चंडिका गांव निवासी शिवम सिंह इसकी जीवंत मिसाल हैं। पांच वर्ष ...
योगी सरकार में बिना भेदभाव सभी जिलों में निर्धारित शेड्यूल से अधिक की जा रही विद्युत आपूर्ति
2017 से पहले चंद जिलों तक सीमित थी बिजली की तय आपूर्ति, योगी सरकार ने आते ही समाप्त किया वीआईपी कल्चरनिर्बाध बिजली के लिए अब गर्मी, बारिश और तेज हवाओं के बीच भी फील्ड में डटे रहते बिजलीकर्मीबरसात के मौसम को देखते हुए सुरक्षा मानकों का कड़ाई ...
बाढ़ हो या सूखा, हर नागरिक की सुरक्षा-सुविधा सुनिश्चित हो: मुख्यमंत्री
लखनऊ, 20 जुलाई:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि बाढ़ हो या सूखा, प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा, किसानों की फसल और आमजन की आजीविका की रक्षा करना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राहत एवं बचाव ...
NDA बैठक में PM मोदी का बड़ा संदेश: NEET पेपर लीक पर सख्त एक्शन, FTA में किसानों को नुकसान नहीं होगा
संसद के मानसून सत्र के बीच मंगलवार को एनडीए संसदीय दल की बैठक 'मंगल मिलन' संसद पुस्तकालय भवन के जी.एम.सी. बालयोगी ऑडिटोरियम में आयोजित की गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में सरकार ने भविष्य में ऐसी घटनाओं ...
संसद मानसून सत्र के दूसरे दिन भी हंगामा, लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित
संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन भी नीट पेपर लीक और छात्रों के प्रदर्शन के मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई।
गाजियाबाद-नई दिल्ली रेलखंड पर मालगाड़ी के 6 डिब्बे पटरी से उतरने से रेल यातायात प्रभावित हो गया। 100 से अधिक ट्रेनें प्रभावित, 24 डायवर्ट, 16 रद्द और कई ट्रेनों का संचालन नियंत्रित किया गया।
यूपी में जीरो पॉवर्टी अभियान के पात्र परिवारों का बने अंत्योदय कार्ड : CM योगी
Yogi Government Zero Poverty Campaign: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की छठी बैठक में प्रदेश में संचालित प्रमुख आधारभूत संरचना, औद्योगिक विकास, निवेश, जनकल्याण और सेवा वितरण से जुड़ी परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा ...
सिक्किम की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में लैंडस्लाइड से 9 लोगों की मौत हो गई। 12 लोगों को बचाया गया है, जबकि 17 से अधिक लोग अब भी फंसे हैं। गैस रिसाव और बारिश से रेस्क्यू अभियान प्रभावित है।
मध्यप्रदेश में मोहन सरकार गुरु पूर्णिमा महोत्सव के तौर पर पूरे प्रदेश में मनाने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गुरुजन सदैव पूजनीय है, वंदनीय हैं। गुरु ही हमें 'गु' (अज्ञान के अंधकार) से 'रु' (ज्ञान-विज्ञान की रश्मि/प्रकाश) की ओर ले ...
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में पंजाब के किसान दिल्ली कूच के लिए रवाना हुए। शंभू बॉर्डर पर पुलिस ने उन्हें रोका। किसान समझौता रद्द करने और महापंचायत की मांग पर अड़े हैं।
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'संसद मार्च' के दौरान हुए भारी बवाल, लाठीचार्ज और कार्यकर्ताओं की धरपकड़ के बाद दिल्ली की सियासत में भूचाल आ गया है। इस पूरे मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के रुख की कड़ी आलोचना करते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा है। आप नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार दिल्ली में लोकतंत्र, संवैधानिक अधिकारों और कानून-व्यवस्था का पूरी तरह मजाक बना रही है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई और संसद मार्ग को पूरी तरह सील किए जाने के बाद दिल्ली की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर काफी तेज हो गया है।आम आदमी पार्टी का हमला: दिल्ली को पुलिस छावनी में बदलाआम आदमी पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ताओं और नेताओं ने प्रेसवार्ता कर केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के नियंत्रण वाली दिल्ली पुलिस पर तीखे सवाल खड़े किए:लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन: 'आप' ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना देश के प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार (Constitutional Right) है। सरकार प्रदर्शनकारियों की जायज मांगों को सुनने के बजाय उन पर लाठियां और आंसू गैस के गोले बरसा रही है।दिल्ली की जनता परेशान: जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के आसपास भारी बैरिकेडिंग और कई मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद किए जाने से आम दिल्लीवासियों को भयंकर जाम और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 'आप' का आरोप है कि केंद्र सरकार की तानाशाही नीतियों की वजह से पूरी दिल्ली पुलिस छावनी में तब्दील हो गई है।सीजेपी (CJP) प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर जताया विरोधआप नेताओं ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे सीजेपी कार्यकर्ताओं, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर दर्ज की गई एफआईआर (FIR) और प्रिवेंटिव डिटेंशन (हिरासत) का कड़ा विरोध किया:कानून का दुरुपयोग: 'आप' का तर्क है कि जब कोई भी संगठन संसद भवन की तरफ शांतिपूर्ण मार्च निकालना चाहता है, तो उसे संवाद के जरिए संभालने के बजाय आपराधिक मामले दर्ज कर जेलों में ठूंसना कानून-व्यवस्था का मजाक उड़ाना है।संसद सत्र के दौरान दमनकारी नीति: मानसून सत्र के दौरान विपक्ष और आम जनता की आवाज को दबाने के लिए केंद्र सरकार पुलिस बल का दुरुपयोग कर रही है।बीजेपी का पलटवारदूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आम आदमी पार्टी के इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। भाजपा का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था और संसद की सुरक्षा बनाए रखने के लिए पूरी तरह नियमानुसार कार्रवाई की है, क्योंकि बिना किसी पुलिस अनुमति के बैरिकेड्स तोड़े गए और उपद्रव मचाया गया था।
कथित नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे प्रसिद्ध शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल (Safdarjung Hospital) में भर्ती कराया गया है। दिल्ली पुलिस और हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद उन्हें अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ट्रांसफर किया गया था। हालांकि, अस्पताल के बेड पर होने के बावजूद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त नहीं किया है और वे केवल नमक-पानी के सहारे अपनी भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो 20 दिनों से अधिक समय से जारी इस अनशन के कारण उनके स्वास्थ्य को लेकर समर्थकों में गहरी चिंता बनी हुई है।सफदरजंग अस्पताल का मेडिकल बुलेटिन: क्या बोले डॉक्टर?सफदरजंग अस्पताल (VMMC & Safdarjung Hospital) के डॉक्टरों की टीम द्वारा जारी किए गए आधिकारिक हेल्थ अपडेट के अनुसार:वाइटल्स स्थिर: सोनम वांगचुक का ब्लड प्रेशर (BP), पल्स रेट (Pulse Rate) और ऑक्सीजन सैचुरेशन (SpO2) सामान्य सीमा के भीतर रिकॉर्ड किया गया है और वे पूरी तरह होश में हैं।गंभीर डिहाइड्रेशन: लगातार 21 दिनों से उपवास के कारण उनके शरीर में डिहाइड्रेशन (पानी की भारी कमी) और कमजोरी के स्पष्ट लक्षण दिखाई दे रहे हैं।इंतरावेनस ड्रिप (IV Fluids) से इनकार: मीडिया रिपोर्टों और मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, वांगचुक ने ओरल लिक्विड या ड्रिप (IV Fluids) लेने से इनकार कर दिया है, जिसके चलते डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि बिना मेडिकल इंटरवेंशन के उनकी स्थिति बिगड़ने का खतरा है।परिवार और समर्थकों ने रखीं मांगेंसोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो (Gitanjali Angmo) ने अस्पताल प्रशासन और दिल्ली पुलिस के रुख पर सवाल उठाए हैं:निजी डॉक्टरों से जांच की मांग: परिवार ने अपील की है कि वांगचुक को कोई भी मुख्य चिकित्सा उपचार देने से पहले परिवार की सहमति और स्वतंत्र (इंडिपेंडेंट) डॉक्टरों द्वारा जांच कराई जाए।आंदोलन जारी रखने का आह्वान: वांगचुक ने अस्पताल से संदेश जारी कर समर्थकों से अपने-अपने स्तर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और संसद मार्च की घोषणा को सफल बनाने की अपील की है।देश भर में छात्रों और सामाजिक संगठनों द्वारा सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से उनकी मांगों पर तुरंत संज्ञान लेने की मांग की जा रही है।
राजधानी दिल्ली में एक तरफ जहाँ 'संसद मार्च' (Parliament March) को लेकर तनाव बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ किसानों के भारी विरोध प्रदर्शन और 'किसान महापंचायत' (Kisan Mahapanchayat) के आह्वान को देखते हुए शंभू बॉर्डर (Shambhu Border) को एक बार फिर सीमेंट के बैरिकेड्स, कंटीले तारों और बड़े-बड़े कंटेनरों से पूरी तरह सील कर दिया गया है। पंजाब-हरियाणा सीमा पर स्थित शंभू बॉर्डर पर अंबाला और हरियाणा पुलिस के साथ-साथ पैरामिलिट्री फोर्सेज की भारी तैनाती कर दी गई है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर दिल्ली कूच कर रहे हजारों किसानों को पंजाब सीमा के भीतर ही रोकने के लिए प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया है।बैरिकेडिंग, ड्रोन से निगरानी और वॉटर कैनन तैनातअंबाला पुलिस और हरियाणा प्रशासन ने शंभू और खनौरी बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था को अत्यधिक कड़ा कर दिया है:मल्टी-लेयर बैरीकेडिंग: घग्गर नदी के पुल पर सीमेंट के भारी ब्लॉक रखकर और सड़क खोदकर गाड़ियों के गुजरने का रास्ता बंद कर दिया गया है।ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी: पंजाब की तरफ से आ रहे किसानों के जत्थों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा किसी भी हंगामे से निपटने के लिए वॉटर कैनन और आंसू गैस की गाड़ियां तैनात हैं।यात्रियों को भारी परेशानी: शंभू बॉर्डर बंद होने से एनएच-44 (NH-44 / दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे) पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे पंजाब और चंडीगढ़ आने-जाने वाले यात्रियों और भारी मालवाहकों को लंबे डायवर्जन रूट लेने पड़ रहे हैं।किसान घाट और जंतर-मंतर महापंचायत का आह्वानकिसान संगठनों (किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा) ने आज दिल्ली के किसान घाट और जंतर-मंतर पर विशाल किसान महापंचायत बुलाई है:प्रमुख मांगें: प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील को रद्द करना, स्वामीनाथन आयोग के सी2+50% फार्मूले पर सभी फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी, और किसान आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेना।किसान नेताओं का बयान: किसान नेताओं ने कहा है कि पुलिस चाहे कितने भी बैरिकेड्स लगा ले, देश के किसान अपनी आवाज उठाने के लिए दिल्ली पहुंचकर ही रहेंगे।दिल्ली-एनसीआर की सीमाओं पर भी गाड़ियों की चेकिंग तेजशंभू बॉर्डर के अलावा दिल्ली पुलिस ने सिंघु (Singhu Border), टिकरी (Tikri Border) और गाजीपुर (Ghazipur Border) सीमाओं पर भी पिकेट्स लगाकर सघन चेकिंग अभियान चलाया है। भारी सुरक्षा जांच के कारण दिल्ली-गुरुग्राम, दिल्ली-नोएडा और दिल्ली-सोनीपत रूटों पर सुबह से ही गाड़ियों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।प्रशासन ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे बहुत जरूरी काम होने पर ही हाईवे का रुख करें और पुलिस द्वारा जारी वैकल्पिक डायवर्जन मार्गों का इस्तेमाल करें।
अभिजीत दिपके ने छात्रों से मांगी माफी, बोले- आपको पुलिस की हिंसा से नहीं बचा सका
कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर मंतर से संसद तक मार्च के दौरान पुलिस द्वारा छात्र प्रदर्शनकारियों से मारपीट से सीजेपी नेता अभिजीत दीपके बेहद दुखी है। उन्होंने पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा महिलाओं की पिटाई से उन्हें नहीं बचा पाने पर माफी भी मांगी।
अमेरिका की शीर्ष संघीय जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) ने एक भारतीय नागरिक हरमनवीर सिंह (Harmanveer Singh) को अपनी मोस्ट वांटेड (Most Wanted) अपराधियों की सूची में शामिल किया है। हरमनवीर पर अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के बीच फैले एक विशाल अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी गिरोह (Transnational Drug Trafficking Syndicate) का हिस्सा होने और भारी मात्रा में कोकीन व मेथेमफेटामाइन जैसे प्रतिबंधित नशीले पदार्थों की तस्करी करने का गंभीर आरोप है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो उत्तर अमेरिका में सक्रिय भारतीय और कनाडाई मूल के संगठित अपराध नेटवर्क पर एफबीआई और अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) की यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।कनाडा का 'रविंदर ढांडा संगठित अपराध समूह' और ड्रग सिंडिकेटएफबीआई द्वारा जारी आधिकारिक वारंट और रिपोर्ट के अनुसार, 29 वर्षीय हरमनवीर सिंह कनाडा के वैंकूवर में स्थित 'द रविंदर ढांडा ऑर्गेनाइज्ड क्राइम ग्रुप' (The Ravinder Dhanda Organized Crime Group) नामक आपराधिक गिरोह के लिए काम करता है:अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क: यह आपराधिक सिंडिकेट अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा के बीच फैले ड्रग कार्टेलों के साथ मिलकर काम करता है।मेथेमफेटामाइन और कोकीन की स्मगलिंग: इस नेटवर्क पर मेक्सिको से भारी मात्रा में कोकीन और मेथेमफेटामाइन (Methamphetamine) जैसे घातक ड्रग्स अमेरिका और कनाडा में गैर-कानूनी तरीके से सप्लाई करने का आरोप है।कैलिफोर्निया कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट: कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने हरमनवीर सिंह के खिलाफ प्रतिबंधित पदार्थों के वितरण, निर्यात और साजिश की गंभीर धाराओं के तहत संघीय गिरफ्तारी वारंट (Federal Arrest Warrant) जारी किया है।एफबीआई ने जारी की हुलिया और पहचान पत्रएफबीआई के 'क्रिमिनल एंटरप्राइज इन्वेस्टिगेशंस' विभाग ने हरमनवीर सिंह का पूरा विवरण और पहचान पत्र साझा करते हुए आम जनता और सुरक्षा एजेंसियों से अलर्ट रहने की अपील की है:जन्म तिथि और नागरिकता: 26 सितंबर 1994, भारतीय नागरिकता।शारीरिक बनावट: कद 5 फीट 7 इंच, काला बाल और आंखें, वजन लगभग 190 पाउंड।नाम और उपनाम: जांच एजेंसियों के अनुसार, वह नाम और पहचान बदलकर अलग-अलग इलाकों में छिपने का काम करता है।संगठित अपराध और भारत-कनाडा लिंक पर फिर गरमाई राजनीतिहाल के वर्षों में कनाडा और अमेरिका में भारतीय मूल के युवाओं और कनाडाई-पंजाबी सिंडिकेट्स द्वारा ड्रग्स, मनी लॉन्ड्रिंग और जबरन वसूली (Extortion) जैसे मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। एफबीआई द्वारा इस नेटवर्क का भंडाफोड़ करने और भारतीय नागरिक पर मोस्ट वांटेड वारंट जारी करने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमा पार अपराध (Transnational Crime) का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है।एफबीआई ने स्पष्ट किया है कि हरमनवीर सिंह के ठिकाने की जानकारी देने वाले या उसे पकड़वाने में मदद करने वाले व्यक्तियों को सुरक्षा और इनाम दिया जाएगा।
कृषि कानूनों के विरोध के बाद एक बार फिर देश भर के किसान संगठन सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। इस बार किसानों के गुस्से की मुख्य वजह भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील (India-US Trade Deal) है। भारतीय किसान यूनियन (BKU), किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) समेत विभिन्न किसान संगठनों ने इस समझौते के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी, सरवन सिंह पंधेर और अन्य किसान प्रतिनिधियों ने इस डील को भारतीय कृषि और पशुपालकों के लिए 'डेथ वारंट' करार दिया है। इसके विरोध में दिल्ली के किसान घाट (Kisan Ghat) पर विशाल 'किसान महापंचायत' का आह्वान किया गया है, जिसके चलते दिल्ली-एनसीआर की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो यह विरोध केवल राजनीति नहीं, बल्कि देश के 80 करोड़ कृषि-निर्भर नागरिकों की रोजी-रोटी से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।आखिर क्यों भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध कर रहे हैं किसान?किसान नेताओं और कृषि विशेषज्ञों का तर्क है कि अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) या कृषि-डेयरी रियायतें देने से भारतीय बाजार को भारी नुकसान पहुंचेगा:डेयरी सेक्टर पर बड़ा खतरा: अमेरिका अपने डेयरी उद्योग (दूध, पनीर, मक्खन) को भारी सरकारी सब्सिडी देता है। यदि अमेरिकी डेयरी प्रोडक्ट्स को भारतीय बाजार में बिना/कम ड्यूटी (Import Duty) के आने की अनुमति मिली, तो भारत के छोटे और मध्यम दूध उत्पादक किसान (अमूल जैसे को-ऑपरेटिव्स से जुड़े पशुपालक) तबाह हो जाएंगे।जीएम फसलों (GM Crops) और पॉल्ट्री का आयात: अमेरिकी मक्का, सोयाबीन और पॉल्ट्री प्रोडक्ट्स (चिकन) का भारतीय बाजार में कम दामों पर पहुंचना स्थानीय किसानों की फसलों के भाव गिरा देगा।एमएसपी (MSP) और सरकारी सब्सिडी पर असर: विश्व व्यापार संगठन (WTO) और अमेरिका लगातार भारत द्वारा दी जाने वाली एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और खाद-बिजली सब्सिडी का विरोध करते रहे हैं। किसानों को डर है कि ट्रेड डील के दबाव में सरकार सब्सिडी में कटौती कर सकती है।किसान घाट पर महापंचायत और आंदोलन की चेतावनीपंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से हजारों किसानों का जत्था दिल्ली की ओर कूच कर रहा है:किसान नेताओं की हुंकार: किसान नेताओं का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर देश के कृषि क्षेत्र को विदेशी कॉर्पोरेट कंपनियों के हाथों नीलाम नहीं होने देंगे।व्यापक आंदोलन की चेतावनी: यदि केंद्र सरकार ने इस ट्रेड डील पर अपने कदम पीछे नहीं खींचे, तो दिल्ली के चारों तरफ 2020-21 जैसा ऐतिहासिक किसान आंदोलन (Kisan Andolan) फिर से शुरू किया जाएगा।
राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस (Connaught Place) और जंतर-मंतर इलाके में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'संसद मार्च' के दौरान हुए भयंकर बवाल, पथराव और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने कड़ा एक्शन लिया है। पुलिस ने हिंसा, तोड़फोड़ और पुलिसकर्मियों पर हमले की गंभीर धाराओं के तहत अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो केंद्रीय दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाले इन उपद्रवियों को बेनकाब करने के लिए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल ने दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है।CP और जंतर-मंतर पर कैसे शुरू हुआ बवाल?बिना पुलिस अनुमति के संसद भवन की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को जब सुरक्षा बलों ने जंतर-मंतर पर रोका, तो स्थिति अचानक हिंसक हो गई:बैरिकेड्स तोड़े और पथराव किया: प्रदर्शनकारियों ने न केवल पुलिस बैरिकेड्स को उखाड़ फेंका, बल्कि आक्रामक होकर पुलिसकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया।कनॉट प्लेस में तोड़फोड़: प्रदर्शनकारियों की भीड़ का एक हिस्सा इनर और आउटर सर्कल (CP) की तरफ बढ़ गया, जहां दुकानों के शीशे तोड़े गए, बसों को निशाना बनाया गया और दुकानों के बाहर लगे बोर्ड उखाड़ दिए गए।दुकानदारों में दहशत: दिल्ली के सबसे प्रमुख कारोबारी हब कनॉट प्लेस में अचानक हुई तोड़फोड़ और उपद्रव के कारण व्यापारियों ने आनन-फानन में अपनी दुकानें बंद कर दीं।दिल्ली पुलिस की FIR में किन धाराओं का हुआ इस्तेमाल?न्यू दिल्ली जिले के संसद मार्ग और कनाट प्लेस पुलिस स्टेशनों में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई सख्त धाराएं जोड़ी गई हैं:सरकारी काम में बाधा डालना और हमला: पुलिसकर्मियों पर हमला करने और उनके ड्यूटी में रुकावट डालने की धाराएं।सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान (PDPP Act): बसों, बैरिकेड्स और दुकानों को पहुंचाए गए नुकसान के लिए प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपरटी एक्ट।गैर-कानूनी जमावड़ा (Unlawful Assembly) और उपद्रव करना: बिना अनुमति बीएनएसएस की धारा 163 (पुराना 144) का उल्लंघन कर भीड़ जुटाने के आरोप।CCTV और डिजिटल साक्ष्यों से हो रही पहचानदिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, उपद्रवियों को चिह्नित करने के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं:सीसीटीवी और वीडियो फुटेज: कनॉट प्लेस और संसद मार्ग पर लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन फुटेज और मीडिया कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं।चेहरों की पहचान (Facial Recognition): एफआरएस (FRS) तकनीक का इस्तेमाल कर पथराव और तोड़फोड़ करने वाले मुख्य साजिशकर्ताओं और उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।अब तक दर्जनों हिरासत में: पुलिस ने मौके से कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था, जिनसे पूछताछ कर अन्य आयोजकों के नाम सामने लाने की कोशिश जारी है।प्रशासन ने साफ कर दिया है कि राजधानी में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
देश भर में बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधारने के दावे भले ही किए जाते हों, लेकिन स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी एक बड़ा और गंभीर मुद्दा बनी हुई है। देश भर के सरकारी स्कूलों में लाखों पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण पठन-पाठन का स्तर प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में बेसिक शिक्षा विभाग से लेकर माध्यमिक विद्यालयों तक में खाली पदों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो जहां एक तरफ करोड़ों बीटीसी (DElEd), बीएड और टीईटी पास युवा भर्तियों का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्वीकृत पदों के मुकाबले रिक्तियों की संख्या लगातार बनी हुई है।देश भर में कितने सरकारी शिक्षक कार्यरत हैं?शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) और यू-डीआईएसई प्लस (UDISE+) की रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, देश के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का ढांचा इस प्रकार है:कुल कार्यरत शिक्षक: भारत भर के सरकारी स्कूलों में लगभग 45 से 50 लाख सरकारी शिक्षक वर्तमान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।शिक्षकों की कुल कमी: पूरे देश में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर मिलाकर स्वीकृत पदों में से लगभग 8 लाख से 10 लाख शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं।आरटीई मानक (RTE Norms): शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1 होना चाहिए, लेकिन कई राज्यों में यह अनुपात 40:1 से भी अधिक है।अकेले उत्तर प्रदेश (UP) में कितने पद खाली हैं?उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों (बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग) में शिक्षकों के खाली पदों का आंकड़ा अभ्यर्थियों के लिए सबसे चिंताजनक विषय बना हुआ है:बेसिक शिक्षा विभाग (प्राथमिक व उच्च प्राथमिक): उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 1.26 लाख से अधिक प्राथमिक शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। वर्ष 2018 में आई 69,000 शिक्षक भर्ती के बाद से कोई नई बड़ी सुपर टीईटी (UP STET) भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं हुआ है।माध्यमिक शिक्षा (TGT-PGT): यूपी के अशासकीय सहायता प्राप्त (Aided) और राजकीय इंटर कॉलेजों (GIC) में टीजीटी, पीजीटी और एलटी ग्रेड (LT Grade) शिक्षकों के लगभग 25,000 से 30,000 पद रिक्त हैं।नए शिक्षा सेवा चयन आयोग का इंतजार: यूपी में नया 'उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग' (UP Education Service Selection Commission) गठित होने के बावजूद लंबित भर्तियों और नई विज्ञापनों को लेकर प्रक्रिया धीमी बनी हुई है।बिहार और अन्य राज्यों की तुलना में यूपी की स्थितिजहां पड़ोसी राज्य बिहार ने BPSC के जरिए शिक्षक भर्ती (TRE) के कई चरण आयोजित कर लाखों शिक्षकों की भर्ती की है, वहीं उत्तर प्रदेश में शिक्षक अभ्यार्थी पिछले कई सालों से इको गार्डन लखनऊ में धरना-प्रदर्शन कर नई शिक्षक भर्ती (New Primary Teacher Vacancy) की मांग उठा रहे हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार जल्द ही खाली पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं करती है, तो ग्रामीण अंचलों के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में गिरावट के साथ-साथ बेरोजगार युवाओं में असंतोष और बढ़ेगा।
कोरोना वायरस (COVID-19) का खतरा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। भारत में कोरोना के एक नए ओमिक्रॉन सब-वेरिएंट 'RF.5' (Omicron RF.5 Sub-lineage) की पुष्टि हुई है। पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) में भेजे गए सैंपलों की जीनोम सीक्वेंसिंग में आंध्र प्रदेश के कडापा (YSR Kadapa) जिले से आए कोरोना मरीजों में RF.5 वेरिएंट पाया गया है। इसके साथ ही देश के विभिन्न राज्यों—विशेषकर आंध्र प्रदेश, केरल और महाराष्ट्र में कोरोना के मामलों की निगरानी बढ़ा दी गई है। एक स्वास्थ्य रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो डराने वाली बात यह नहीं है कि नया वेरिएंट आया है, बल्कि राहत की बात यह है कि विशेषज्ञों ने इसे अधिक घातक नहीं बताया है।सिंगापुर और दक्षिण-पूर्वी एशिया में फैला है RF.5 वेरिएंटविश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) नियमित रूप से इस नए वेरिएंट पर नजर बनाए हुए हैं:सिंगापुर से जुड़ाव: ओमिक्रॉन का यह नया RF.5 सब-वेरिएंट सिंगापुर और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में तेजी से फैला था, जिसके बाद भारत में भी जीनोमिक सर्विलांस के दौरान इसका पता चला है।JN.1 फैमिली का हिस्सा: यह नया वेरिएंट JN.1 लीनियज का ही एक हिस्सा है, जो म्यूटेशन के जरिए विकसित हुआ है।कितना खतरनाक है RF.5 वेरिएंट?स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, आम जनता को पैनिक (घबराने) करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है:संक्रमण दर बनाम गंभीरता: स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि यद्यपि यह वेरिएंट शरीर की इम्युनिटी (प्रतिरोधक क्षमता) को चकमा देकर तेजी से फैलने में सक्षम हो सकता है, लेकिन इससे मरीजों में गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने की नौबत नहीं आ रही है।हल्के लक्षण: इससे संक्रमित अधिकांश लोग घर पर ही सामान्य दवाओं से 3 से 5 दिनों में ठीक हो रहे हैं।कोरोना के नए RF.5 वेरिएंट के मुख्य लक्षणयदि आप या आपके परिवार में किसी को निम्नलिखित लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो सावधानी बरतें:गले में खराश या दर्द (Sore Throat)हल्का या तेज बुखार (Fever)सूखी या बलगम वाली खांसी (Cough)नाक बहना या बंद होना (Runny or Blocked Nose)सिरदर्द और अत्यधिक थकान (Fatigue & Body Aches)राज्यों में अलर्ट और स्वास्थ्य विभाग की सलाहमामले सामने आने के बाद आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की है। सभी बड़े अस्पतालों में आइसोलेशन वॉर्ड और टेस्ट किट रिजर्व में रखने के निर्देश दिए गए हैं:भीड़भाड़ वाले इलाकों में सावधानी: सांस या सर्दी-जुकाम के मरीज सार्वजनिक स्थानों पर मास्क का इस्तेमाल करें।कमजोर वर्ग रखें ध्यान: बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से गंभीर बीमारियों (शुगर, बीपी, किडनी) से पीड़ित लोग भीड़भाड़ से बचें।लक्षण दिखने पर जांच: यदि बुखार या गले में दर्द 3 दिन से ज्यादा बना रहे, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर कोविड टेस्ट (RT-PCR) कराएं।
नौकरियों और टेक इंडस्ट्री (Tech Industry) की दुनिया से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जहां एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI Boom) के तेजी से बढ़ने के चलते दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियों में लाखों सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स और आईटी एम्प्लॉइज की छंटनी (Layoffs) हो रही है, वहीं दूसरी तरफ एक ब्लू-कॉलर जॉब यानी इलेक्ट्रिशियन (Electricians) की मांग आसमान छू रही है। आलम यह है कि सिलिकॉन वैली और बड़े टेक हब्स में स्किल्ड इलेक्ट्रिशियंस और टेक्नीशियन्स को कई सॉफ्टवेयर डेवलपर्स से भी ज्यादा सैलरी पैकेज मिल रहा है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो एआई मॉडल को पावर देने वाले विशाल डेटा सेंटर्स (AI Data Centers) की जरूरत ने आज कुशल हाथ के कारीगरों की कीमत टेक एक्सपर्ट्स से भी ज्यादा बढ़ा दी है।2.7 करोड़ रुपये ($280,000) तक पहुंच गई सालाना सैलरी!इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और 'डर्टी जॉब्स' शो के फाउंडर माइक रो (Mike Rowe) के हवाले से आई रिपोर्ट के अनुसार, 30 साल से कम उम्र के Gen Z (युवा) इलेक्ट्रिशियन अब टेक हब्स में भारी कमाई कर रहे हैं:करोड़ों में पैकेज: कई युवा स्किल्ड इलेक्ट्रिशियंस का सालाना पैकेज $240,000 से $280,000 (लगभग ₹2.3 करोड़ से ₹2.7 करोड़ रुपये) के बीच पहुंच चुका है।सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स को पछाड़ा: कई शुरुआती और मिड-लेवल सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की औसत सैलरी के मुकाबले यह पैकेज काफी ज्यादा है। इसके अलावा ओवरटाइम और इमरजेंसी कॉल-आउट्स पर अलग से भारी बोनस भी दिया जा रहा है।आखिर AI कंपनियों को क्यों पड़ी इलेक्ट्रिशियंस की इतनी जरूरत?एआई मॉडल्स जैसे कि चैटजीपीटी (ChatGPT), जेमिनी या बड़े एलएलएम (LLMs) को ट्रेनिंग देने और चलाने के लिए अत्यधिक बिजली और कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है:हाइपरस्केल डेटा सेंटर्स का निर्माण: एमेज़ॉन (AWS), माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, मेटा और ऑरेकल जैसी दिग्गज कंपनियां दुनिया भर में विशाल एआई डेटा सेंटर्स बना रही हैं।हजारों GPU और पावर ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर: इन डेटा सेंटर्स में लगे हजारों हाई-एंड जीपीयूस (GPUs) और सर्वर रैक्स को सुचारू रूप से चलाने के लिए जटिल इलेक्ट्रिक ग्रिड, हाई-वोल्टेज वायरिंग, बैकअप पावर जनरेटर और कूलिंग सिस्टम की जरूरत होती है।कुशल कारीगरों की भारी किल्लत: सॉफ्टवेयर कोडर्स की संख्या तो बाजार में काफी है, लेकिन हाई-वोल्टेज और एडवांस डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर को संभालने वाले ट्रेंड और लाइसेंसधारी इलेक्ट्रिशियंस, वेल्डर्स और कंस्ट्रक्शन मैनेजर्स की वैश्विक स्तर पर भारी कमी है।स्किल्ड ट्रेड्स का बढ़ा क्रेज: Gen Z का नया रुखइस ट्रेंड ने युवा पीढ़ी (Gen Z) के सोचने के तरीके को भी बदल दिया है। भारी-भरकम एजुकेशन लोन लेकर 4 साल की कंप्यूटर साइंस डिग्री करने के बजाय, अब कई युवा 'ट्रेड स्कूल्स' और वोकेशनल ट्रेनिंग (Vocational Training) की ओर रुख कर रहे हैं। बिना किसी बड़े कर्ज के वे कम उम्र में ही हाई-पेइंग जॉब्स और खुद का कांट्रैक्टर बिजनेस शुरू कर रहे हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में जब तक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार जारी रहेगा, तब तक ऑन-ग्राउंड स्किल्ड वर्कफोर्स की मांग और उनकी तनख्वाह में इसी तरह का उछाल देखने को मिलता रहेगा।

30 C
