बाल दुष्कर्म के मामलों में मौत की सजा का विरोध, 2018 में चर्चा के केंद्र में आया Amnesty India
Amnesty India वर्ष 2018 में उस समय देश में तीखी बहस के केंद्र में आ गया था, जब संगठन ने बाल दुष्कर्म के दोषियों के लिए मौत की सजा के प्रावधान का विरोध किया था। यह वह दौर था जब नाबालिग बच्चियों के साथ हुई भयावह घटनाओं को लेकर देशभर में गुस्सा था और दोषियों […] यह लेख बाल दुष्कर्म के मामलों में मौत की सजा का विरोध, 2018 में चर्चा के केंद्र में आया Amnesty India सर्वप्रथम tfipost.in पर प्रकाशित हुआ है
बेटा करे तो जवानी, बेटी करे तो मनमानी? DU छात्राओं ने बताया दर्द
शॉर्ट्स पहनकर निकलोगी तो रेप ही होगा!... जब मदद मांगने थाने पहुंची छात्रा को पुलिस से ऐसे ताने मिले, तो सुरक्षा के दावों की पोल खुल गई. आस्था कुंज केस के बाद सड़कों पर उतरीं डीयू की छात्राओं और प्रोफेसर्स की जुबानी सुनिए— कैसे डर और बंदिशों के बीच रोज तिल-तिल मर रही हैं दिल्ली की बेटियां.
बिना मैच खेले फाइनल में पहुंचेगी टीम इंडिया? क्या गोल्ड भी पक्का!
एशियन गेम्स 2026 के पुरुष क्रिकेट सेमीफाइनल में भारत का सामना श्रीलंका से होगा. बारिश के कारण क्वार्टर फाइनल रद्द होने के बाद भारत ने बिना मैच खेले सेमीफाइनल में जगह बनाई है. अब अगर सेमीफाइनल भी नहीं हो पाता है तो ICC रैंकिंग में नंबर-1 होने के कारण टीम इंडिया फाइनल में पहुंच जाएगी.
एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का ऐतिहासिक प्रदर्शन
नागोया एशियन गेम्स में 30 सितंबर को भारत ने निशानेबाजी और कंपाउंड तीरंदाजी में शानदार प्रदर्शन किया. नीरू ढांडा और कायनन चेनाई ने मिक्स्ड ट्रैप टीम में स्वर्ण के साथ नया एशियन गेम्स रिकॉर्ड बनाया. तीरंदाजी में चिकिथा तनिपर्थी ने महिला टीम और साहिल जाधव के साथ मिक्स्ड टीम में दो स्वर्ण जीते. भारत ने बुधवार को तीन स्वर्ण जीते और 2028 ओलंपिक के लिए तीरंदाजी में कोटा भी हासिल किया.
बस एक और रील! Gen Z बार-बार क्यों खोलती है इंस्टाग्राम?
Gen Z के लिए इंस्टाग्राम अब सिर्फ दोस्तों से जुड़ने का जरिया नहीं है. रील्स, मीम्स, ट्रेंड्स और न्यूज के बीच स्क्रॉलिंग रोजमर्रा की आदत बन गई है. 5 मिनट के लिए खुला इंस्टाग्राम कब घंटों की स्क्रॉलिंग में बदल जाता है, पता ही नहीं चलता. आखिर क्यों जेन जी बार-बार उसी ‘एक और रील’ वाले लूप में फंस जाती है?
बुखार कब बन जाता है इमरजेंसी? इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
बुखार आमतौर पर कुछ दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन बुखार के साथ दिख रहे कुछ लक्षण खतरनाक हो सकते हैं. इनके दिखते ही अस्पताल में जाना बहुत जरूरी है. इस बारे में क्रिटिकल केयर के डॉ. आशुतोष तिवारी ने Aajtak.in को बताया है.
राफेल में लगेंगे भारतीय हथियार, फ्रांस ने कहा- हम तरीका निकालेंगे
फ्रांस ने कहा कि राफेल में भारतीय हथियार इंटीग्रेट करने का रास्ता निकाला जा सकता है. सोर्स कोड के बिना भी ICD से स्वदेशी सिस्टम जोड़े जा सकेंगे. 114 विमानों के सौदे पर बातचीत जारी है.
दादा-चाचा बागी, परिवार का नाम डकैतों की लिस्ट में, पोते ने क्रैक किया UPSC
नीदरलैंड्स की नौकरी छोड़कर भारत लौटने का केवल एक मकसद था... UPSC की तैयारी करना. IIT से पढ़ाई करने वाले प्रभाकर सिंह तोमर ऐसे परिवार से आते हैं, जहां पढ़ाई को इतना महत्व नहीं दिया जाता था. उनके दादा और चाचा बागी हो गए थे. लेकिन पिता ने अलग रास्ता चुना.
CEC Gyanesh Kumar को क्यों मिली कानूनी छूट? Rahul Gandhi ने PM Modi पर साधा तीखा निशाना
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चुनावी नतीजों में हेरफेर करने के लिए उनका इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। X पर एक पोस्ट में, कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार देश के एकमात्र ऐसे नागरिक हैं जिन्हें आजीवन पूरी कानूनी छूट मिली हुई है। गांधी ने कहा, सवाल: CEC ज्ञानेश कुमार एकमात्र ऐसे भारतीय क्यों हैं जिन्हें आजीवन पूरी कानूनी छूट मिली हुई है? जवाब: क्योंकि PM मोदी चुनावों में धांधली करने के लिए उनका इस्तेमाल करते हैं। इसे भी पढ़ें: ECI विवाद पर Omar Abdullah का तंज, CEC Gyanesh Kumar को Bharat Ratna मिलना चाहिए कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि INDIA गठबंधन के सभी नेताओं का यह पक्का वादा है कि हम यह पक्का करेंगे कि जिन लोगों ने भारतीय लोकतंत्र को बर्बाद किया है, उन्हें सज़ा मिले। इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि वे कितने सीनियर हैं या कौन हैं; भारतीय लोकतंत्र इस देश के हर व्यक्ति से बड़ा है। उन्होंने कहा कि बैठक में यह भावना भी थी कि विपक्ष भारत के लोगों तक यह बात पहुँचाने में काफ़ी सफल रहा है कि चुनाव में धांधली हुई है, नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने लोकतंत्र को बर्बाद कर दिया है, और लोगों में, ख़ासकर युवाओं में, विरोध की एक नई भावना पैदा हुई है कि भारत में जो हो रहा है वह ग़लत है और उसे रोका जाना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि मैं विपक्ष के सभी नेताओं से कहना चाहता हूं कि वे भारतीय संविधान के सामूहिक रक्षक हैं और हमारे लिए साथ मिलकर काम करना सम्मान की बात है। हमें भरोसा है कि आने वाले कुछ महीनों में हम देश में बड़े बदलाव लाएंगे। बुधवार को INDIA गठबंधन की बैठक में चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया के खिलाफ विरोध की रणनीति बनाने के बाद गांधी की ये टिप्पणियां आईं। बैठक में बोलते हुए, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को वापस लेने, वोटर लिस्ट में ज़्यादा पारदर्शिता लाने और चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वोट लोगों का है। इसे भी पढ़ें: Congress ने CEC को हटाने और PM Narendra Modi के इस्तीफे की उठाई मांग INDIA गठबंधन को संबोधित करते हुए, कांग्रेस अध्यक्ष ने CEC ज्ञानेश कुमार की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी असलियत सामने आ गई है और उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज हमारे मुख्य चुनाव आयुक्त की असलियत पूरी तरह सामने आ गई है। उनके दो साथी सदस्यों ने 10 महीनों में 14 बार पत्र लिखे हैं! इससे उनकी ईमानदारी और इरादों पर सवाल उठता है। इसलिए, उन्हें उनके पद से हटा दिया जाना चाहिए। अगर उनमें ज़रा भी संवैधानिक या नैतिक शर्म बची है, तो वे खुद इस्तीफ़ा दे देंगे और उन ताक़तों के खिलाफ़ गवाह बनेंगे जो हमारी वोटर लिस्ट में दखल दे रही हैं।
टूटा 14 साल का रिकॉर्ड, मुंबई में लोग जमकर खरीद रहे हैं प्रॉपर्टी
Mumbai Property Details: केवल गणेश चतुर्थी पर्व के दौरान मुंबई में 14 से 25 सितंबर के बीच 5,379 प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन हुए. ये पिछले साल के मुकाबले 22 फीसदी ज्यादा है और पिछले चार साल में त्योहारी अवधि का सबसे अच्छा प्रदर्शन है.
Cabinet Meeting Today: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक है. इस बैठक में रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य, महंगाई भत्ते और स्मॉल सेविंग स्कीम्स के ब्याज पर फैसला हो सकता है.
देश के प्रमुख एक्सप्रेसवे और हाइवे को जोड़कर एक विशाल सड़क नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जो दिल्ली को रायपुर होते हुए सीधे विशाखापट्टनम पोर्ट से जोड़ेगा.
16 साल पहले आए इस सूफियाना गीत में बुल्ले शाह की सदियों पुरानी सोच, गुलजार के शब्द और एआर रहमान का संगीत कुछ यूं मिला कि आज भी इसे सुनकर प्यार में खुद को खो देने का एहसास जाग उठता है. ऐश्वर्या राय ने इस गाने को अपने एक्सप्रेशन से और भी खास बना दिया.
अजय को मिली मोटी रकम! तब्बू-जयदीप की फीस कितनी?
दृश्यम 3 की रिलीज से पहले इसकी स्टारकास्ट की फीस को लेकर बड़ी चर्चा हो रही है. जानते हैं किस स्टार को कितनी फीस मिली है.
Amit Shah ने Jalandhar में किया वादा, 31 December 2029 तक Punjab को Drugs मुक्त बनाएगी BJP
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाजपा की 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' के तहत एक जनसभा को संबोधित किया। जालंधर में अपने संबोधन के दौरान शाह ने कहा कि आप सरकार ने सिंथेटिक ड्रग्स के कारोबार को खुलेआम फलने-फूलने दिया। पंजाब चुनाव में कई मुद्दे हैं—किसानों के मुद्दे, उद्योगों से जुड़ी चिंताएं, कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा। हालांकि, BJP आने वाला चुनाव सिर्फ़ 'नशा मुक्त पंजाब' के मुद्दे पर लड़ेगी। अगर आप कमल के निशान पर वोट देते हैं, तो हम 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को सिंथेटिक ड्रग्स के कारोबार से मुक्त कर देंगे। इसीलिए BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पठानकोट से यह यात्रा शुरू की थी; 13 दिनों में 4,000 किलोमीटर का सफ़र तय करने और 117 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करने के बाद, यह यात्रा आज यहां समाप्त हो रही है। इसे भी पढ़ें: Rajya Sabha Election: Keshav Prasad Maurya का दावा, BJP के संपर्क में SP के 25 विधायक शाह ने कहा कि मुझे अच्छी तरह पता है कि इसके जवाब में 'केजरीवाल एंड कंपनी' क्या कहेगी। हमने हमेशा अपने वादे पूरे किए हैं। PM मोदी के नेतृत्व में, BJP ने कश्मीर को आतंकवाद से मुक्त कराया, 50 साल पुरानी नक्सल समस्या को खत्म किया और नॉर्थ-ईस्ट में उग्रवाद को समाप्त किया; और अब बारी है 'चिट्टा मुक्त पंजाब' की। उन्होंने कहा कि मैं अभी नशे की लत के कारण जान गंवाने वालों के परिवारों से मिलकर आया हूं। एक मां अपने दो युवा बेटों की तस्वीर गोद में लेकर कहती है कि इसे बंद करवाओ, मेरे तो नहीं बचे, दूसरे के लाल को बचा लो। और इन्हें (AAP) शर्म नहीं आती है? जो नशे में धुत होकर गुरुओं का अपमान करे, वो चिट्टे से पंजाब को मुक्त नहीं कर सकता। इसे भी पढ़ें: NICE Road मामले में Priyank Kharge का Kumaraswamy पर तंज, कहा जलन और नाराजगी का इलाज नहीं अमित शाह ने हुंकार भरते हुए कहा कि भाजपा को वोट देना है, तो केवल और केवल नशा मुक्त पंजाब के लिए देना है। जो दिल्ली में शराब घोटाले में पकड़े गए हों, क्या वो पंजाब को नशा मुक्त कर सकते हैं? आपने कांग्रेस को देखा, आम आदमी पार्टी को देखा... एक मौका पांच साल के लिए भाजपा को दे दो, हम नशा मुक्त पंजाब बनाकर देंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा ने जो यह अभियान उठाया है, यह राजनीतिक एजेंडा नहीं है, यह पंजाब को बचाने का अभियान है। पंजाब में न हम ड्रग बेचने देंगे और न ही भारत के दूसरे राज्यों में जाने देंगे। भाजपा यह तभी कर सकती है, जब पंजाब का एक-एक युवा श्री नरेन्द्र मोदी को एक मौका दे।
बृजभूषण के बयान पर अखिलेश का रिएक्शन, दिव्या मित्तल पर कही ये बात
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार, भारतीय जनता पार्टी और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर जमकर हमला बोला. उन्होंने किसानों के मुद्दे, बाढ़ प्रबंधन, राज्यसभा चुनाव और आगामी राजनीतिक रणनीतियों पर अपनी पार्टी का स्पष्ट रुख सामने रखा. साथ ही बृजभूषण सिंह और पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल पर भी रिएक्ट किया.
8 सीजन, 153 एपिसोड के बाद करण जौहर ने कर दी बस, आखिरी बार सेलिब्रिटीज को कॉफी पिलाते आएंगे नजर
22 साल से दर्शकों को एंटरटेन करने वाला फेमस चैट शो कॉफी विद करण अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया है. करण जौहर ने ऐलान किया है कि शो का नौवां सीजन इसका आखिरी सीजन होगा.
90 के दशक में गोविंदा के कई गाने सुपरहिट हुए. लेकिन एक गाना ऐसा था जो काफी हिट हुआ और लोगों के दिलों को जीता. लेकिन इस गाने ने लोगों को गलत बातें सिखाईं. गाने के बोल ऐसे थे कि कोई भी वो काम नहीं करना चाहेगा.
हनीमून के लिए कहां जाएं? बर्फ से बीच तक ये 5 रोमांटिक जगहें कपल्स की पहली पसंद
Romantic Honeymoon Destinations in India: हनीमून प्लान कर रहे कपल्स अंडमान, कश्मीर, उदयपुर, गोवा और मनाली जैसे डेस्टिनेशन चुन सकते हैं. यहां समुद्र, बर्फ, झीलें और पहाड़ों के खूबसूरत नजारे मिलेंगे. क्रिसमस-न्यू ईयर की भीड़ से पहले बुकिंग करना बेहतर रहेगा.
यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में एक सीट पर जीत के लिए 37 विधायकों का वोट चाहिए. भाजपा 259 विधायकों के वोट से 7 सीटें तो आसानी से जीत लेगी. सपा भी दो सीट जीत लेगी. असली लड़ाई 10वीं सीट के लिए होगी.
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया ब्लॉक का 2-8 अक्तूबर तक कैंपेन, 6 को चुनाव आयोग तक मार्च
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद बताया कि 20 पार्टियां शामिल हुईं और सभी ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए मिलकर लड़ने का निर्णय लिया.
चिचड़ी चिपक जाए तो कैसे हटाएं? चिचड़ी मारने की दवा का नाम जानिए यहां
किलनी मारने के लिए कौन से घरेलू उपाय हैं? भैंस के चिचड़ी मारने के लिए कौन सी दवा है? अगर सिर या शरीर के किसी हिस्से पर चिचड़ी चिपक जाए, तो उसे जल्द से जल्द और सही तरीके से निकालना बहुत ज्यादा जरूरी होता है. आइए जानते हैं इसे हटाने का सुरक्षित तरीका.
गाल और नाक पर ओपन पोर्स दिखें तो क्या करें? स्किनकेयर एक्सपर्ट से जानें
स्किनकेयर एजुकेटर निपुण कपूर ने स्किन पोर्स और टेक्सचर्ड स्किन को लाइट करने का आसान तरीका बताया है. आइए जानते हैं इसके बारे में-
'EVM हटाओ-बैलेट लाओ...' INDI गठबंधन की बैठक में खरगे ने चुनाव सुधार के लिए रखीं 5 बड़ी मांगें
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में सामने आ रही अनियमितताओं और कथित खामियों के खिलाफ एक संयुक्त आंदोलन की रूपरेखा तैयार करना था।
'अखिलेश के बिना सब सूना है...' सपा और कांग्रेस गठबंधन पर बृजभूषण सिंह का बयान, बढ़ी सियासी हलचल
उत्तर प्रदेश में सीट-शेयरिंग को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच खींचतान बढ़ती जा रही है। बुधवार को दिल्ली में बृजभूषण सिंह से कांग्रेस के उस बयान के बारे में पूछा गया जिसमें कहा गया था कि वह उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी। इसके जवाब में उन्होंने कहा, अखिलेश के बिना सब कुछ खाली-खाली लगता है। अब इसपर अखिलेश यादव का भी बयान सामने आया है। अखिलेश ने कहा कि उनके साथ मेरे संबंध बहुत अच्छे हैं और हम सभी उत्तर प्रदेश के विकास और किसानों को खुशहाली के रास्ते पर ले जाने के मकसद के लिए एकजुट हैं। इसे भी पढ़ें: Rajya Sabha Election: Keshav Prasad Maurya का दावा, BJP के संपर्क में SP के 25 विधायक गोंडा की कैसरगंज सीट से बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अखिलेश का समर्थन किया। दिल्ली में अपने घर पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश के बिना कांग्रेस का कोई अस्तित्व नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि कांग्रेस कम से कम 150 सीटें मिलने पर ही उत्तर प्रदेश का चुनाव लड़ने की बात कह रही है और अखिलेश 'इंडिया' गठबंधन की बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं, तो बीजेपी नेता ने कहा, अभी यह नहीं कहा जा सकता कि अखिलेश शामिल होंगे या नहीं। हो सकता है कि उनकी पार्टी का कोई प्रतिनिधि बैठक में शामिल हो, लेकिन उत्तर प्रदेश में अखिलेश के बिना कांग्रेस का कोई अस्तित्व नहीं है। जब उनसे राज्यसभा जाने की अटकलों के बारे में पूछा गया, तो बृजभूषण शरण सिंह ने कोई जवाब नहीं दिया। इससे पहले उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी ने बुधवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। यादव और नाथवानी ने पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, शिवपाल यादव और पार्टी विधायकों की उपस्थिति में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट हैं। इससे पहले पार्टी ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल में कहा कि पार्टी के उम्मीदवार राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी आज पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की उपस्थिति में नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। इसे भी पढ़ें: BJP प्रवक्ता Sudhanshu Trivedi का आरोप, हिंदू धर्म को इस्लामी नजरिए से देख रही है Congress उत्तर प्रदेश विधानसभा की मौजूदा संख्या-बल के आधार पर किए गए आकलन के अनुसार, भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन आठ सीटें जीतने की स्थिति में है, जबकि कांग्रेस के समर्थन से समाजवादी पार्टी (सपा) दो सीटें हासिल कर सकती है। समाजवादी पार्टी संभवतः अपना तीसरा उम्मीदवार भी उतारेगी। पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा, हम तीसरे उम्मीदवार की भी घोषणा करेंगे। जब उनसे पूछा गया कि पार्टी तीसरे उम्मीदवार की जीत कैसे सुनिश्चित करेगी, तो चौधरी ने कहा कि भाजपा के कई विधायक सरकार के कामकाज से असंतुष्ट हैं और उनकी पार्टी के उम्मीदवार को उनसे पूरा समर्थन मिलेगा। चुनाव नौ राज्यसभा सदस्यों के कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने के कारण आवश्यक हो गए हैं।
अमेरिका में डीजल के बढ़ते दाम से परेशान ट्रंप सरकार, देखें US टॉप-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिये संदेशों का अदान-प्रदान हुआ है. हालांकि ट्रंप ने बातचीत का ब्यौरा साझा नहीं किया है. वहीं, अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच ट्रंप प्रशासन रेड लाइट डीजल की बिक्री में राहत देने पर विचार कर रहा है. इससे कुछ उपभोक्ताओं को फेडरल फ्यूल टैक्स से राहत मिल सकती है. यूएस टॉप 10 में देखें यूएस की ऐसी ही टॉप 10 खबरें.
दुबई से तेल अवीव जा रहे प्लेन के कॉकपिट में पायलटों के बीच हुई हिंसक झड़प, कथित तौर पर एक पायलट ने दूसरे को मारा चाकू. प्लेन ने इमरजेंसी सिग्नल जारी किया था.
गुजरात नहीं, कोच्चि पहुंचाना था माल... समुद्र में पकड़ी गई 526 KG ड्रग्स की कहानी
समुद्र के रास्ते ईरान से निकली एक बोट, उसमें सवार पांच पाकिस्तानी तस्कर और 526 किलो ड्रग्स... यह माल गुजरात नहीं, बल्कि कोच्चि पहुंचाया जाना था. करीब 3,000 करोड़ रुपये की इस खेप को एक बोट से दूसरी बोट में शिफ्ट करने की तैयारी थी, लेकिन लक्षद्वीप के पास समुद्र में ATS और कोस्ट गार्ड ने पूरा खेल पकड़ लिया. इस खेल की पूरी कहानी सामने आई है.
पंजाब को नशा मुक्त कब तक करेगी बीजेपी? अमित शाह ने बता दी तारीख
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जालंधर में नशा मुक्त पंजाब यात्रा के समापन पर नशे के कारोबारियों के खिलाफ सख्त संदेश दिया. उन्होंने घोषणा की कि 31 दिसंबर 2029 के बाद पंजाब में नशा मुहैया कराने वाला कोई नहीं बचेगा. अमित शाह ने कहा कि पिछली सरकारों ने नशे के अवैध कारोबार को बढ़ावा दिया, जिसे केंद्र और राज्य मिलकर खत्म करेंगे.
दिल्ली नगर निगम (MCD) ने संपत्ति कर निपटान योजना वन प्लस सेवन लागू कर दी है. इसके तहत अगर करदाता 31 दिसंबर 2026 तक वर्तमान वर्ष और पिछले 7 वर्षों का मूल संपत्ति कर जमा कर देते हैं, तो उन्हें पुराने बकाये पर लगने वाले पूरे ब्याज और जुर्माने से छूट मिल जाएगी. जानिए योजना की पूरी डिटेल और कर जमा करने का तरीका.
अखिलेश-धनराज नथवानी के साथ दिखे यूपी के मंत्री राकेश सचान, क्रॉस वोटिंग की अटकलें
सपा प्रमुख अखिलेश यादव और सपा नेताओं के साथ योगी सरकार के मंत्री राकेश सचान की तस्वीर सामने आने के बाद यूपी की राजनीति में हलचल मच गई है. सपा के राज्यसभा प्रत्याशी के नामांकन के दौरान बीजेपी मंत्री की इस मौजूदगी ने बीजेपी के भीतर क्रॉस वोटिंग और नए सियासी उलटफेर की चर्चाओं को हवा दे दी है.
'ज्ञानेश कुमार चोर है, डाकू है', CEC पर ममता का तीखा हमला, इंडिया गठबंधन संग सड़क पर उतरेंगी
विपक्षी दलों की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉफ्रेंस में बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सबसे तीखा हमला बोला. ममता बनर्जी ने कहा- बीजेपी ने सभी चुनाव वोट चोरी से जीती.
1977 में रमेश सिप्पी के डायरेक्शन में फिल्म आई थी इंकार. इसका एक गाना ऐसा हिट हुआ था कि इसे अलग अलग समय में अलग अलग फिल्मों में इस्तेमाल किया गया. इस पर सोनाक्षी सिन्हा और अजय देवगन तक ने डांस किया है.
क्या कोई बच्चा सिर्फ 15 दिन में हिंदी पढ़ना सीख सकता है? छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले का डकईपारा सरकारी स्कूल यही कर दिखा रहा है. यहां बच्चों को किताबें रटाई नहीं जातीं, खास ढंग से पढ़ाया से जाता है. यह स्कूल नवंबर तक पूरा सिलेबस खत्म कर देता है और कई सम्मान हासिल कर चुका है.
एक महिला यात्री ने बताया कि प्लेन में चीख-पुकार मची हुई थी. क्यों कि कुछ लोग ये समझ चुके थे कि आखिर फ्लाइट में ये सब हो क्या रहा था. वे जोर-जोर से चिल्ला रहे थे. उनको पता चला कि एक पायलट को चाकू मारा गया है.
उज्जैन महाकाल मंदिर के पास फिर शुरू हुआ चौड़ीकरण, 40 दुकानें हटेंगी
सड़क चौड़ीकरण का काम कोर्ट के फैसले के बाद फिर से उज्जैन के महाकाल मंदिर क्षेत्र में शुरू हो गया है. नगर निगम मास्टर प्लान के तहत 12 मीटर चौड़ी सड़क को 24 मीटर चौड़ा करने का कार्य कर रहा है. इसमें करीब 40 दुकानें प्रभावित होंगी.
खेलते-खेलते तार की चपेट में आए भाई-बहन, करंट से दोनों की मौत
तमिलनाडु के रामनाथपुरम से दर्दनाक घटना सामने आई है. यहां 6 साल का बच्चा अपने 10 साल की बहन के साथ खेल रहा था. घर के पास RO प्लांट के नजदीक बिजली का तार गिरा था. बच्चे ने एक धातु का हिस्सा छू लिया और करंट की चपेट में आ गया. भाई को बचाने के लिए जैसे ही उसकी बहन ने उसे छुआ, वह भी करंट की चपेट में आ गई. कुछ ही पलों में दोनों मासूम भाई-बहन की मौत हो गई.
महाकाली की बाढ़ में बह गया नेपाल का मशहूर 1.45 किमी लंबा पुल
नेपाल में महाकाली नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ लोगों को बाढ़ की मार झेलनी पड़ रही है. कंचनपुर में नदी पर बना मशहूर झूला पुल तेज बहाव की चपेट में आ गया. पुल का बड़ा हिस्सा बहने से हजारों लोगों के रोजमर्रा के रास्ते पर असर पड़ा है.
अचानक इस इलेक्ट्रिक स्कूटर पर टूटे लोग! 8 लाख ने खरीदा
Ather Energy की शुरुआत धीमी थी, लेकिन समय के साथ इस स्टार्टअप ने तेजी से ग्रोथ किया है. अब टीवीएस, बजाज और ओला के बाद ये देश का चौथा इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर ब्रांड बन गया है जिसने 8 लाख से ज्यादा टू-व्हीलर सेल्स का आंकड़ा पार किया है.
बुधवार को INDIA गठबंधन ने वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए कई कार्यक्रमों की घोषणा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्षी पार्टियां 2 अक्टूबर को लोकतंत्र बचाओ मार्च निकालेंगी और 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च करेंगी। खड़गे ने बताया कि बैठक में 20 पार्टियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिसमें शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वर्चुअल तरीके से शामिल हुए। उन्होंने कहा कि सभी पार्टियों ने एकजुट रहने और मज़बूती से लड़ने की ज़रूरत पर चर्चा की। इसे भी पढ़ें: ECI विवाद पर Omar Abdullah का तंज, CEC Gyanesh Kumar को Bharat Ratna मिलना चाहिए INDIA गठबंधन की बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि INDIA ब्लॉक के सदस्य 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक DM ऑफिसों के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे और 6 अक्टूबर को विपक्ष के सभी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे। विपक्षी नेता अक्टूबर के दूसरे हफ़्ते में राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगेंगे ताकि उन्हें यह बता सकें कि किस तरह संस्थाओं पर कब्ज़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर-नवंबर में पांच बड़ी रैलियां होंगी और इनके लिए जगह और तारीखें जल्द ही तय कर ली जाएंगी। 1 नवंबर को दिल्ली में एक बड़ी रैली आयोजित की जाएगी क्योंकि अब हर कोई मानता है कि राहुल जी और दीदी 'वोट चोरी' के बारे में जो कहते थे, वह सही था। खड़गे ने कहा कि असल में, चुनाव आयोग के अंदर दो-तीन लोग सिर्फ़ मोहरे हैं, जबकि अमित शाह और मोदी उन्हें कठपुतली की तरह नचा रहे हैं... सभी पार्टियों ने मिलकर यह लड़ाई लड़ने की बात कही। INDIA गठबंधन की बैठक पर NCP-SCP नेता जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि लोगों में EVM को लेकर काफी गुस्सा है। वोटर लिस्ट में किए गए बदलावों और जिस तरह से वोटरों के नाम हटाए गए, उस पर चर्चा हुई... इस बात पर भी चर्चा हुई कि चुनाव आयोग ने बंगाल और बिहार में सत्ता में बैठे लोगों की जीत पक्की करने के लिए कैसे काम किया... मैं लंबे समय से कह रहा हूं कि इंसान की बनाई किसी भी मशीन के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है, उसे हैक किया जा सकता है। किसी भी चुनावी सिस्टम में इंसान की बनाई मशीनें सबसे खतरनाक चीज़ होती हैं। इसे भी पढ़ें: Congress ने CEC को हटाने और PM Narendra Modi के इस्तीफे की उठाई मांग अपनी शुरुआती बातों में खड़गे ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और एक ऐसा देश है जिसकी लोकतांत्रिक परंपराएं एक सरल लेकिन गहरे सिद्धांत पर बनी हैं - कि देश की सरकार चुनने में हर नागरिक की बराबर की आवाज़ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यही भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में नागरिक और राजनीतिक दल चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर चिंताएं जता रहे हैं।
कॉकपिट में पायलटों के बीच हुई तीखी बहस के दौरान प्लेन का इमरजेंसी सिग्नल एक्टिवेट हो गया था. रास्ता बदलने और इमरजेंसी सिग्नल मिलने पीछे कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
ईरान में आसमान छूती महंगाई के दबाव में ईरानी नेता, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका से जंग के चलते ईरान की अर्थव्यवस्था पर महंगाई का खासा असर दिखाई पड़ रहा है. आसमान छूती महंगाई का दबाव अब ईरान के नेताओं पर भी है. ईरानी संसद के स्पीकर ने साफ कहा कि अगर ईरान सुरक्षित नहीं है तो कोई दूसरा देश भी सुरक्षित नहीं है. इस बीच रूसी सेना के यूक्रेन की राजधानी कीव समेत कई शहरों पर तेज हमले जारी हैं. देश-दुनिया की ऐसी ही ताजातरीन और अहम खबरों के लिए देखें दुनिया आजतक.
सोशल मीडिया पर लड़की ने ब्लॉक किया तो उसे मनाने अमेरिका पहुंच गया मुंबई का लड़का, हुई जेल
ऑनलाइन बनी दोस्त को मनाने के लिए एक इंडियन शख्स सात समंदर पार चला गया, लेकिन मुलाकात से पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.
'धरती पर कोई नहीं जो नीतीश कुमार को कंट्रोल', सोनिया पर संजय झा का पलटवार
सोनिया गांधी ने दावा किया था कि नीतीश कुमार को बीजेपी कंट्रोल कर रही थी. उनके इस बयान के बाद जनता दल यूनाइटेड के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कांग्रेस पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि इस धरती पर अभी तक कोई ऐसा नहीं आया है जो नीतीश कुमार को कंट्रोल कर सके.
लाल किले पर 'आजाद हिंद फौज' से जुड़ा स्मारक बनाने की मांग, HC ने खारिज कर दी याचिका; बताई यह वजह
याचिकाकर्ता ने साल 2021 में संसद में सामने दिए गए एक बयान के आधार पर यह याचिका लगाई थी, जिसके अनुसार लाल किले में INA शहीदों के लिए एक मेमोरियल बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। पिटीशनर ने कहा कि मौजूदा नेताजी सुभाष चंद्र बोस म्यूजियम INA शहीदों के लिए बने खास स्मारक से अलग है।
Delhi:जब धीरेंद्र से पूछा गया कि आप भी फिल्म की दूसरी कास्ट की तरह इसको चमत्कार ही मानते हैं क्या? इस बात पर म्यूजिक कंपोजर में कहा कि लॉजिक पर विश्वास करने वाला इंसान हूं. लेकिन लॉजिक भी एक समय पर खत्म हो जाता है. जैसे एक समय तक हमने प्रयास किया और आप सफल नहीं हुए, जो कैलकुलेट करने वाला फैक्टर है, कभी-कभी उसमें आप फेल हो जाते हैं.
3,000 करोड़ की ड्रग्स के साथ पकड़े गए पांचों पाकिस्तानी पेशावर के निवासी
अरब सागर में इंडियन कोस्ट गार्ड और गुजरात ATS ने 526 किलो हेरोइन और मेथामफेटामाइन जब्त किया है. ईरानी नाव से पांच पाकिस्तानी नागरिक गिरफ्तार किए गए हैं. जिनकी पहचान हो गई है. पढ़ें पूरी कहानी.
19 साल पुराना मनोज तिवारी-भाग्यश्री फिल्म देवा के रोमांटिक गाने में मनोज तिवारी और भाग्यश्री की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने खूब वाहवाही बटोरी थी. इस गीत को भोजपुरी सिनेमा के यादगार रोमांटिक गानों में से एक माना जाता है.
1 अप्रैल से बदल जाएंगे गाड़ियों के नियम, सरकार ने जारी किए CAFE-3 नॉर्म्स, आपकी जेब पर होगा असर?
केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले कड़े CAFE-3 फ्यूल मानदंड लिस्टेड किए हैं. अगले 5 सालों में गाड़ियों के माइलेज को 16.7% तक बेहतर करने और कार्बन इमिशन घटाने का पूरा रोडमैप जानें.
जेल से बाहर आने वाले थे सचिन वाझे... राहत के 24 घंटे में रद्द हो गई जमानत
बॉम्बे हाई कोर्ट ने एंटीलिया बम केस के मुख्य आरोपी और पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की जेल से रिहाई पर 7 अक्टूबर तक अंतरिम रोक लगा दी है.
कौन हैं एडवर्ड रुकिडी? न्यूज एंकर से सीधे बन गए किंग, युगांडा को मिला नया राजा
युगांडा के नए राजा के तौर पर चुने गए 56 साल के एडवर्ड रुकिडी की कहानी काफी दिलचस्प है. पहले वह पत्रकार थे लेकिन जड़ें शाही परिवार से जुड़ी थीं. किंग ओयो की मौत के बाद शुरू हुए उत्तराधिकार के विवाद ने आखिर उन्हें गद्दी तक पहुंचा दिया.
ये होती है लाइफ! स्विस कपल ने भारतीय को दिखाई जिंदगी की दूसरी तस्वीर
वियतनाम में एक भारतीय की मुलाकात स्विट्जरलैंड के रिटायर्ड कॉरपोरेट वकील से हुई. उसकी नौकरी और छुट्टियों की कहानी सुनकर भारतीय निवेश प्रोफेशनल मनुराज गर्ग को एहसास हुआ कि अलग-अलग देशों में वर्क लाइफ बैलेंस का मतलब कितना अलग हो सकता है.
अक्टूबर में शनि की टेढ़ी चाल, इन 3 राशियों को रहना होगा सावधान, जानें बचाव के उपाय
Shani Vakri Effect: अक्टूबर 2026 में शनि मीन राशि में वक्री रहेंगे. आचार्य मदन मोहन ने बताया कि सिंह, मकर और कर्क राशि वालों को धन, करियर और रिश्तों में सावधानी बरतनी चाहिए. हनुमान चालीसा, शनि मंत्र जाप और दान के उपाय बताए गए हैं.
October Ekadashi 2026: अक्टूबर में कब है इंदिरा और पापांकुशा एकादशी? जानिए सही तारीख और पूजा विधि
पंचांग के अब अश्विन का महीना शुरू हो चुका है. इस महीने में इंदिरा एकादशी और पापांकुशा एकादशी मनाई जाती है. आइए जानते हैं दोनों एकादशी की सही तिथि, तारीख और पूजा विधि.
कल खुलेगी 4 राशियों की किस्मत! जानिए कैसा रहेगा अन्य राशियों का दिन
Kal Ka Rashifal 1 october 2026: महत्वपूर्ण कार्यों में उत्साह बनाए रखेंगे. कारोबार में तेजी दिखाएंगे. आर्थिक गतिविधियां आगे बढ़ेंगी. विभिन्न कार्यों में शीघ्रता दिखाएंगे. इच्छित परिणाम बनेंगे. मित्रों को वरीयता देंगे.
निर्वाचन आयोग को लेकर उठे विवाद के बाद इंडिया गठबंधन ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्षी गठबंधन 2 अक्तूबर से 8 अक्तूबर तक लोकतंत्र बचाओ अभियान चलाएगा।
अलमारी में कपड़े ठूंसने की जरूरत नहीं, इन ट्रिक्स से सेट करें कपड़ें
फॉल सीजन में मौसम बदलते ही अलमारी में कपड़े सेट करना मुश्किल हो जाता है. गर्मियों के कपड़े हटाने और सर्दियों के भारी कपड़ों के लिए जगह बनाने के लिए इन आसान ट्रिक्स को अपनाएं. सही स्टोरेज बॉक्स, बेड के नीचे की जगह और कपड़ों की छंटाई से अलमारी कम जगह में व्यवस्थित रहेगी और आपका काम भी आसान हो जाएगा.
'श्री कृष्ण विराजमान' की पैरवी कौन करेगा? हिंदू पक्षों में नहीं बनी सहमति तो सुप्रीम कोर्ट हुआ नाराज
कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में हिंदू पक्षों के बीच सहमति न बनने पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने कहा कि यह मामला अभिशप्त सा लगता है, जहाँ सिर्फ तारीख पर तारीख पड़ रही है. सुनवाई अब 6 नवंबर तक टाल दी गई है. पूरी खबर पढ़ें.
तस्वीर में 3 गलतियां खोज पाएंगे आप, 10 सेकंड का चैलेंज
Optical Illusion: आपके सामने एक तस्वीर दी गई है, जिसमें आपको 3 अंतर को खोजना है. इसके लिए आपको 10 सेकंड का समय दिया जाएगा.
34000 फीट पर पायलट के बीच चाकूबाजी, जानें दुबई-इजरायल फ्लाइट में क्या हुआ
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में दोनों पायलटों के बीच कथित झगड़े के बाद इमरजेंसी सिग्नल भेजे गए. हाईजैक की आशंका के बीच इजरायल ने फाइटर जेट्स रवाना किए. विमान को सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया.
'कांग्रेस की एकला चलो नीति ठीक नहीं', INDIA ब्लॉक मीटिंग में बोले उद्धव ठाकरे
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सभी दलों को एकजुट होकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने की अपील की. उन्होंने कांग्रेस के अलग-अलग प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा कि सभी कार्यक्रम गठबंधन के बैनर तले होने चाहिए.
आकिब नबी की पूरी हुई ख्वाहिश, WI के खिलाफ किया ODI डेब्यू
जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को गुवाहाटी में वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे मुकाबले में अपना वनडे डेब्यू करने का मौका मिला है. घरेलू क्रिकेट से टीम इंडिया तक का उनका सफर उनके लिए बेहद खास रहा है.
बेला एस्टेट का एकलौता वोटर कौन है? 728 लोगों में ऐसे बचा अकेला
दिल्ली के बेला एस्टेट में SIR प्रक्रिया के तहत 728 में से 727 वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, केवल मंदिर के महंत कंचन गिरी का नाम बचा है. इस मामले को लेकर राहुल गांधी ने लोकसभा में और सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं.
क्या आपके पेट में भी है ये बैक्टीरिया? बन सकता है कैंसर, ये हैं लक्षण
H. pylori नाम रा बैक्टीरिया पेट की अंदरूनी परत में रहता है. 2024 में दुनियाभर में 7.6 लाख कैंसर के मामले H. pylori संक्रमण से जुड़े थे, जिनमें भारत में 47,000 मामले शामिल हैं.
Rajya Sabha Election: Keshav Prasad Maurya का दावा, BJP के संपर्क में SP के 25 विधायक
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने आगामी राज्यसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी (SP) के तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की योजना की आलोचना की और कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ही सबको चौंकाएगी। 30 सितंबर को पत्रकारों से बात करते हुए मौर्य ने कहा कि हम उन्हें चौंका देंगे। उनके 25 विधायक हमारे संपर्क में हैं। उनके ये बयान उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सीटों के लिए SP उम्मीदवारों प्रोफेसर राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद आए। इसे भी पढ़ें: Akhilesh Yadav का आरोप, UP की BJP सरकार ने पहले दिन से PDA के साथ किया भेदभाव SP प्रमुख अखिलेश यादव नामांकन दाखिल करते समय दोनों उम्मीदवारों के साथ मौजूद थे, जिससे इस मुकाबले में पार्टी की औपचारिक एंट्री हुई। SP ने पहले ही राज्य से यादव और नाथवानी को अपने उम्मीदवार के तौर पर घोषित किया था। इससे पहले, उत्तर प्रदेश के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने SP के उम्मीदवारों के चयन की आलोचना की थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर, राजभर ने सवाल उठाया कि क्या SP द्वारा उतारे गए तीनों उम्मीदवार पार्टी की 'पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक' (PDA) गठबंधन रणनीति का पालन करते हैं। इसे भी पढ़ें: लोकतंत्र के खिलाफ साजिश रचने वालों को हो जेल: INDIA बैठक से पहले बोले Tejashwi Yadav उन्होंने लिखा कि अखिलेश जी, मैंने सुना है कि आप राज्यसभा के लिए तीन उम्मीदवार उतारने जा रहे हैं। मुझे बताइए, क्या तीनों आपके 'PDA' से होंगे या नहीं? राजभर ने SP को तीसरी सीट के लिए कोशिश न करने की सलाह भी दी और चेतावनी दी कि ऐसा करने से उनकी दूसरी सीट भी हाथ से जा सकती है। चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि 11 राज्यसभा सीटों—उत्तर प्रदेश से 10 और उत्तराखंड से एक—के लिए वोटिंग 16 अक्टूबर को होगी। इन राज्यों के मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। इन द्विवार्षिक चुनावों के लिए नॉमिनेशन की प्रक्रिया चल रही है और उम्मीदवारों को चुनाव आयोग द्वारा तय समय-सीमा के भीतर अपने कागजात जमा करने होंगे।
आसाराम को हाईकोर्ट से झटका, मां से मिलने के लिए दायर जमानत याचिका खारिज
आसाराम को हाईकोर्ट से झटका लगा है. बुधवार को अहमदाबाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी है. आसाराम ने बीमार मां का हवाला देते हुए उनसे मिलने के लिए जमानत मांगी थी. इस याचिका को हाईकोर्ट ने रिजेक्ट कर दिया.
'कोशिश रही कि किसी के साथ गलत न हो...' रिटायरमेंट पर रो पड़े दारोगा
40 साल तक वर्दी पहनी. हजारों ड्यूटी कीं. अच्छे-बुरे दौर देखे. अपराधियों से मुकाबला किया और जरूरतमंदों को न्याय दिलाने की कोशिश की. लेकिन जब उसी वर्दी और थाने से विदा होने का वक्त आया तो झांसी के दारोगा रामचंद्र खुद को रोक नहीं पाए. विदाई समारोह में साथियों के बीच आंसू छलक पड़े. उन्होंने बस इतना कहा, 'कोशिश रही कि किसी के साथ गलत न हो.'
भारत में मौत के बाद शरीर को फ्रीज कर रखना कितना कानूनी?
मौत के बाद इंसानी शरीर को लंबे समय तक फ्रीज कर सुरक्षित रखने का विचार भारत में अब भी कानून के लिए नई चुनौती है. क्रायोनिक्स को लेकर कोई स्पष्ट नियम नहीं होने से कई सवाल खड़े होते हैं. शव की गरिमा, धार्मिक अधिकार, मेडिकल जांच, उत्तराधिकार और पुलिस प्रक्रिया के बीच कानून की स्थिति फिलहाल अस्पष्ट बनी हुई है.
अल-नीनो का कमाल...चिली के रेगिस्तान में बारिश ने खिला दिए लाखों फूल
सालों से सूखी जमीन के नीचे दबे बीजों को जैसे ही पानी मिला, अटाकामा रेगिस्तान खिल उठा. अल नीनो की बारिश के बाद यहां बैंगनी और सफेद फूल दिखाई दे रहे हैं. यह नजारा अक्टूबर में और बड़ा होने की उम्मीद है.
बागपत एक्सप्रेस-वे पर पौधे की अनोखी चोरी, वायरल हुआ VIDEO!
बागपत के दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे पर पौधा चोरी का अजीब मामला सामने आया है. सीसीटीवी में सफेद कार एक्सप्रेसवे पर रुकती दिखाई देती है, जिस पर पुलिस का स्टीकर लगा है. कार से उतरा शख्स सड़क किनारे लगा पौधा उखाड़ता है और उसे कार में रखकर फरार हो जाता है. पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई. वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है.
सुप्रीम कोर्ट ने कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़े मामले में बार-बार सुनवाई टलने पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला मनहूस (jinxed) है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक हिंदू पक्ष को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि माना गया था। कोर्ट ने कहा कि हमें आप सभी की बात सुननी होगी। इस मायने में यह मामला मनहूस है। एक के बाद एक तारीख पर सुनवाई टलती जा रही है। बेंच ने यह टिप्पणी तब की जब उसे बताया गया कि हाई कोर्ट में मामला करने वाले पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुँच पाए हैं। इससे पहले पक्षों ने हिंदू पक्ष के भीतर ही पैदा हुए विवाद को सुलझाने की संभावना जताई थी। इसे भी पढ़ें: Milan Pradhan की जमानत को Supreme Court में चुनौती, Nandigram Bypoll से पहले बढ़ी हलचल कोर्ट ने कहा कि वह मामले के गुण-दोष के आधार पर पक्षों की दलीलें सुनेगी। हालांकि, समय की कमी के कारण, सुनवाई के लिए याचिका को 6 नवंबर तक के लिए टाल दिया गया। यह विवाद तब शुरू हुआ जब हिंदू पक्ष (वादी) ने सिविल कोर्ट में एक मुकदमा दायर कर दावा किया कि शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कृष्ण जन्मभूमि की ज़मीन पर किया गया था। यह सिविल मुकदमा हिंदू देवता भगवान श्री कृष्ण विराजमान और कुछ हिंदू भक्तों की ओर से दायर किया गया था। वादियों ने मस्जिद को उसकी मौजूदा जगह से हटाने की मांग की। वादियों ने यह भी दावा किया कि ऐसे कई संकेत हैं जिनसे पता चलता है कि शाही ईदगाह मस्जिद असल में एक हिंदू मंदिर है। इसलिए, जगह की जांच के लिए एक कमिश्नर नियुक्त करने की अर्ज़ी हाई कोर्ट में दी गई। इसे भी पढ़ें: Supreme Court का रुख: दिल्ली में पटाखों पर न पूरी पाबंदी होगी, न 24 घंटे की छूट शुरू में सितंबर 2020 में सिविल कोर्ट ने 'पूजा स्थल अधिनियम, 1991' के तहत मामला स्वीकार करने पर लगी रोक का हवाला देते हुए मुख्य मुकदमा खारिज कर दिया था। हालांकि, मथुरा ज़िला अदालत में अपील के बाद इस फ़ैसले को पलट दिया गया। मई 2022 में मथुरा ज़िला अदालत ने कहा कि मुकदमा चलाने योग्य है। बाद में, 2023 में इस मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।
मौत के 4 साल बाद तक नहीं किया पिता का अंतिम संस्कार, फिर कमरे से मिला…
बेटी को पिता से ज्यादा लगाव था। मरने के 4 साल बाद तक उसने अंतिम संस्कार ही नहीं किया। इसके बाद जो हुआ उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। कमरे से क्या मिला?
क्या होता है प्रोबेशन पीरियड? इस दौरान कंपनी ले सकती है बड़ा स्टेप, जानिए
नई नौकरी ज्वाइन करने के बाद आपने अक्सर प्रोबेशन पीरियड के बारे में सुना होगा. कई कंपनियां नए कर्मचारियों को शुरुआत के कुछ महीनों के लिए प्रोबेशन पर रखती हैं, इस दौरान कर्मचारी के काम, व्यवहार और प्रदर्शन को देखा जाता है. लेकिन कई बार इसे लेकर दुविधा भी रहती है. तो चलिए इस कन्फ्यूजन को दूर करते हैं.
Google ने भारत में लॉन्च किया सस्ते फिटनेस बैंड, मिलेगी हेल्थ रिपोर्ट!
Google ने भारत में अपना फिटनेस बैंड Fitbit Air लॉन्च कर दिया है. इसकी खासियत ये है कि इसमें स्क्रीन नहीं है. पूरा हेल्थ डेटा फोन पर मिलेगा. कंपनी ने कहा है ये हार्ट हेल्थ, स्लीप और रिकवरी पर भी फोकस करेगा. आइए जानते हैं इसके खास फीचर्स.
13 राज्यों से जल्द विदा होगा दक्षिण पश्चिम मानसून, IMD का 6 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
Weather Update 30 September: देश के 13 राज्यों में अगले 2-3 दिन में दक्षिण पश्चिम मॉनसून की विदाई के लिए हालात अनुकूल हो सकते हैं। इस बीच मौसम विभाग ने 6 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
नोएल टाटा कर रहे हैं गड़बड़, अब श्रीनिवासन ने कहा- टाटा ट्रस्ट्स की हो जांच
Tatas boardroom tussle: श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर से अपील की है कि टाटा ट्रस्ट्स के प्रशासन की तुरंत जांच शुरू की जाए और आवश्यकता पड़ने पर दोषी ट्रस्टियों को निलंबित या बर्खास्त किया जाए.
International Drug Route Busted:
Kushinagar Flood Ground Zero पर CM Yogi: पीड़ितों को Relief Kits, 10 दिनों में फसल का मुआवजा
गंडक नदी बेसिन के नेपाल वाले हिस्से में कम समय में हुई भारी बारिश की वजह से अचानक ज़बरदस्त बाढ़ आ गई है, जिससे बिहार और उत्तर प्रदेश के निचले इलाकों वाले ज़िलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। सोमवार देर रात नारायणी नदी के किनारे बने AP तटबंध के कारण तीन दर्जन से ज़्यादा गाँव जलमग्न हो गए। नारायणी नदी के किनारे बना AP तटबंध (जिसे अहिरौली दान से पिपरासी खास तटबंध के नाम से भी जाना जाता है) उत्तर प्रदेश के कुशीनगर ज़िले की तमकुही राज तहसील में आता है। अधिकारियों ने बताया कि छह से ज़्यादा गांवों के लगभग 20,000 लोग प्रभावित हुए हैं और नुकसान का सही अंदाज़ा अभी लगाया जा रहा है। इसे भी पढ़ें: Ballia Court ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी जावेद को 25 साल कारावास की सजा सुनाई योगी ने किया दौरा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। अपने दौरे के दौरान, आदित्यनाथ ने घोषणा की कि कुशीनगर में नारायणी नदी की ड्रेजिंग और चैनलाइज़ेशन की जाएगी, ताकि उसकी जल क्षमता बढ़ाई जा सके और इलाके में बार-बार आने वाली बाढ़ का खतरा कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि भारी बहाव के समय नदी से बनने वाले दबाव से निपटने के लिए एक लंबे समय तक चलने वाले समाधान की ज़रूरत है। उन्होंने सिंचाई विभाग के मुख्य इंजीनियर को ड्रेजिंग और चैनल बनाने का काम करने का निर्देश दिया, ताकि नदी ज़्यादा पानी को बेहतर ढंग से बहा सके। आदित्यनाथ ने राहत और बचाव कार्यों का भी जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए और उन्हें हर ज़रूरी मदद दी जाए। उन्होंने अधिकारियों से नारायणी नदी से हुए नुकसान और तटबंध में आई दरार के बारे में जानकारी मांगी। राहत पर जोर मुख्यमंत्री ने विस्थापित परिवारों से बातचीत की और ऊंचे स्थानों पर ठहराए गए लोगों को ज़रूरी राहत सामग्री बांटी, जिसमें चावल, आटा, दाल और आलू जैसी खाने की मुख्य चीज़ें शामिल थीं। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बचाव और राहत कार्यों के लिए NDRF की दो और SDRF की दो टीमें तैनात की गई हैं। संकट की इस घड़ी में, BJP सरकार उन सभी लोगों के साथ खड़ी है जो इससे प्रभावित हुए हैं। प्रभावित परिवारों को मदद मिलनी शुरू हो गई है; हमने 10 किलो चावल, आटा और आलू के साथ-साथ 2 किलो दाल और अन्य सामान भी उपलब्ध कराए हैं। अनुग्रह राशि और मुआवजे का ऐलान कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए योगी ने घोषणा की कि बाढ़ में जान गंवाने वालों के परिवारों को 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के घर बारिश और बाढ़ के कारण पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत नए घर दिए जाएंगे, जबकि आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों की मरम्मत के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को फसल के नुकसान का आकलन पूरा करने और प्रभावित किसानों को 10 दिनों के भीतर मुआवजा भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए 5,000 खाने के पैकेट का इंतज़ाम किया है, जिनमें चावल, आटा, आलू, दाल, चना, तेल, मसाले, नमक और दूसरी ज़रूरी चीज़ें शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि सुरक्षित जगहों पर ले जाए गए लोगों को तुरंत राहत कैंपों में पहुँचाया जाए और कैंपों में रोशनी का उचित इंतज़ाम किया जाए। इसे भी पढ़ें: Rajya Sabha Elections: समाजवादी पार्टी ने राम गोपाल यादव और धनराज नाथवानी को बनाया उम्मीदवार, अखिलेश यादव की मौजूदगी में दाखिल करेंगे नामांकन वर्तमान में देखे को पूरी सरकार संकट की इस घड़ी में प्रभावित लोगों के सहयोग के लिए खड़ी है। जनप्रतिनिधि भी राहत और बचाव कार्य में प्रशासन का सहयोग कर रहे है। मंत्री से लेकर अधिकारी तक पहुंच रहे है। लगातार कई बड़े ऐलान हो रहे है। हालांकि, लोगों तक यह कितना पहुंच पा रहा है, इसको लेकर फिलहाल कोई आंकड़ा नहीं है। लेकिन अगले साल होने वाले चुनाव को देखते हुए सरकार की सक्रियता बढ़ी हुई है।
राजस्थान के राजनीतिक क्षितिज पर पंचायत चुनावों की सुगबुगाहट और मुख्यमंत्री का मास्टर प्लान
भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में जब भी ग्रामीण भारत की सत्ता यानी पंचायत राज संस्थाओं के चुनावों की बात आती है, तो हर राजनीतिक दल की धड़कनें तेज हो जाना स्वाभाविक है। राजस्थान की राजनीति में शहरी निकाय चुनावों के बाद अब सियासी पारा पूरी तरह से पंचायती राज चुनावों के रण को लेकर गर्मा चुका है। राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Bhajanlal Sharma) ने आगामी पंचायत चुनावों में पार्टी की जीत का परचम लहराने के लिए अपनी कमर कस ली है और पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं तथा पदाधिकारियों के साथ एक अहम बैठक में अचूक चुनावी रणनीति साझा की है। आधुनिक गूगल डिस्कवर, आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO), सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) और जनरेटिव एआई सर्च (AI Search) के इस डिजिटल युग में चुनावी रणनीतियों, राजनीतिक बैठकों और जमीनी स्तर के समीकरणों से जुड़ी खबरों को इंटरनेट पर सबसे ज्यादा खोजा और पढ़ा जाता है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कार्यकर्ताओं के बीच कौन सी रणनीति रखी है और इस बार के पंचायत चुनावों के क्या सियासी मायने हैं।शहरी निकायों की सफलता के बाद अब पंचायत चुनावों पर टिकी नजरेंहाल ही में संपन्न हुए राजस्थान के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शानदार और ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। राज्य के अधिकांश नगर निकायों में पार्टी ने बहुमत के साथ अपने बोर्ड का गठन किया है, जिसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सुदृढ़ कार्यशैली और सटीक सोशल इंजीनियरिंग का परिणाम माना जा रहा है। इसी जीत से मिले भारी उत्साह और ऊर्जा को अब ग्रामीण इलाकों यानी पंचायत चुनावों तक विस्तार देने का रोडमैप तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह स्पष्ट किया कि शहरी इलाकों की तरह ही गांवों और ढाणियों में भी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुँचाना होगा। आधुनिक डिजिटल सर्च ट्रेंड्स और एआई एनालिटिक्स यह दर्शाते हैं कि जब भी कोई मुख्यमंत्री जमीनी स्तर के चुनावों से पहले इस तरह की व्यापक बैठकें करता है, तो जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें उस पर टिक जाती हैं।मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का कार्यकर्ताओं को संदेश: शत-प्रतिशत विजय का लक्ष्यपार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ हुई इस उच्च स्तरीय मंत्रणा के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जोश से भरे अंदाज में कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि इस बार का लक्ष्य साधारण नहीं, बल्कि 'शत-प्रतिशत विजय' का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा का एक साधारण से साधारण कार्यकर्ता ही पार्टी की असली रीढ़ होता है और उसी की मेहनत के बल पर सरकार की नीतियां जन-जन तक पहुँचती हैं। सीएम ने जोर देकर कहा कि बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक के कार्यकर्ताओं को पूरी तरह से सक्रिय भूमिका निभानी होगी और चुनावी कमान संभालते हुए विपक्ष के हर भ्रामक प्रचार का मुंहतोड़ जवाब देना होगा। लोकल और रीजनल ऑप्टिमाइजेशन के लिहाज से देखें तो राजस्थान के हर जिले और ग्रामीण आंचल में इस बयान के बाद राजनीतिक हलचल काफी तेज हो गई है।विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं को आधार बनाकर मैदान में उतरेगी पार्टीराजनीतिक जानकारों का यह मानना है कि राजस्थान में भजनलाल सरकार द्वारा पिछले कुछ समय में उठाए गए कदम, किसानों के हित में लिए गए निर्णय, पेपरलेस और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था तथा ग्रामीण विकास की योजनाओं को इन चुनावों में मुख्य मुद्दा बनाया जाएगा। पार्टी का यह मानना है कि डबल इंजन सरकार की नीतियों का लाभ सीधे तौर पर ग्रामीण जनता तक पहुँच रहा है, जिसके चलते पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में भी मतदाताओं का पूरा समर्थन भाजपा के साथ रहेगा। आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस बात का विश्लेषण किया जा रहा है कि कैसे स्थानीय नेतृत्व और विकास के मुद्दों को मिलाकर चुनाव जीता जाता है।विपक्ष की प्रतिक्रिया और राज्य की राजनीतिक हलचलसत्ताधारी दल की इस सक्रियता को देखकर विपक्षी दलों ने भी अपनी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दल यह दावा कर रहे हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों की अपनी अलग समस्याएं हैं और जनता इस बार स्थानीय मुद्दों पर सरकार को घेरेगी। हालांकि, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा जिस प्रकार से शुरुआती दौर से ही मोर्चा संभाल लिया गया है, उससे यह साफ जाहिर होता है कि मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा होने वाला है। डिजिटल एनालिटिक्स यह दर्शाते हैं कि इस तरह के राजनीतिक द्वंद्व और बयानों पर पाठकों की रुचि हमेशा उच्च बनी रहती है।
राजस्थान के मदरसों पर अदालत की पैनी नजर और कानूनी शिकंजा
भारतीय शिक्षा प्रणाली, धार्मिक संस्थानों के संचालन और सरकारी वित्तपोषण (Funding) को पारदर्शी बनाने के लिए समय-समय पर न्यायपालिका द्वारा महत्वपूर्ण कदम उठाए जाते हैं। इसी कड़ी में राजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court) ने राज्य के भीतर संचालित होने वाले लगभग 3,000 मदरसों की कार्यप्रणाली, उनकी आधारभूत संरचना, मिलने वाले अनुदान और शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर एक बेहद सख्त और गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों को तलब किया है और इन संस्थानों से जुड़ा पूरा कच्चा-चिठ्ठा पेश करने का निर्देश दिया है। आधुनिक गूगल डिस्कवर, आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO), सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) और जनरेटिव एआई सर्च (AI Search) के इस डिजिटल युग में न्यायिक फैसलों, शिक्षण संस्थानों की जांच और नीतिगत मामलों से जुड़ी खबरों को इंटरनेट पर सबसे ज्यादा खोजा और पढ़ा जाता है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि हाईकोर्ट ने इन मदरसों पर अपनी नजर क्यों टेढ़ी की है और इस पूरे मामले के कानूनी मायने क्या हैं।क्या है पूरा मामला और क्यों उठा मदरसों की जांच का यह गंभीर मुद्दा?पिछले कुछ समय से विभिन्न सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों और प्रशासनिक मंचों पर इस बात को लेकर बहस चल रही थी कि राज्य के कई मदरसों में औपचारिक शिक्षा के मानकों, बच्चों की वास्तविक उपस्थिति, शिक्षकों की योग्यताओं और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किस प्रकार की अनियमितताएं हो रही हैं। कई रिपोर्ट्स में यह अंदेशा जताया गया था कि कागजों पर संचालित होने वाले कई मदरसों को भारी मात्रा में सरकारी अनुदान मिल रहा है, जबकि धरातल पर बच्चों को वह सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है जिसकी वे हकदार हैं। इसी पृष्ठभूमि और शिकायतों को आधार बनाते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गईं, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अब सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं। आधुनिक डिजिटल सर्च ट्रेंड्स और एआई एनालिटिक्स यह दर्शाते हैं कि जब भी अदालतें किसी धार्मिक या शैक्षणिक संस्थान की जांच के आदेश देती हैं, तो उससे जुड़े ऐतिहासिक और वर्तमान आंकड़े इंटरनेट पर तुरंत ट्रेंड करने लगते हैं।राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा सरकार को तलब कर रिपोर्ट मांगने के निर्देशआज की इस कानूनी प्रक्रिया के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने राज्य सरकार के नुमाइंदों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में चल रहे हर एक मदरसे की जमीनी हकीकत जनता के सामने आनी चाहिए। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह यह बताए कि इन 3,000 से अधिक मदरसों का पंजीकरण किस नियम के तहत हुआ है, इन्हें हर साल कितना वित्तीय अनुदान दिया जाता है, और वहाँ पढ़ाने वाले शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यताएं क्या हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्या इन संस्थानों में बच्चों को आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, गणित और कंप्यूटर की वह बुनियादी शिक्षा दी जा रही है जो आज के दौर की सबसे बड़ी जरूरत है। लोकल और रीजनल ऑप्टिमाइजेशन के लिहाज से देखें तो राजस्थान के प्रशासनिक हलकों और शैक्षणिक संस्थानों में इस नोटिस के बाद खलबली मच गई है।शिक्षा की मुख्यधारा और मदरसों के आधुनिकीकरण पर बड़ी बहसइस न्यायिक आदेश के बाद से एक बार फिर से यह बहस छिड़ गई है कि क्या पारंपरिक धार्मिक शिक्षण संस्थानों को पूरी तरह से मुख्यधारा की आधुनिक शिक्षा प्रणाली के साथ जोड़ा जाना चाहिए या नहीं। शिक्षा विशेषज्ञों का एक वर्ग यह मानता है कि हर बच्चे को चाहे वह किसी भी स्कूल या मदरसे में पढ़े, गुणवत्तापूर्ण और समकालीन शिक्षा प्राप्त करने का मौलिक अधिकार है। यदि सरकारी धन का उपयोग इन संस्थानों के विकास के लिए किया जा रहा है, तो उसकी पूरी पारदर्शिता और ऑडिटिंग (Auditing) होना बेहद जरूरी है। दूसरी ओर, प्रबंधनों का यह तर्क है कि वे अपने स्तर पर बच्चों को बेहतर तालीम देने का प्रयास कर रहे हैं। आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस बात की चर्चा हो रही है कि इस प्रकार की न्यायिक जांच से पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों में सुधार होगा।राजनीतिक गलियारों और सामाजिक स्तर पर इस कदम की प्रतिक्रियाएंजैसे ही हाईकोर्ट के इस सख्त आदेश की खबर मीडिया और डिजिटल पोर्टल्स पर आई, राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। विपक्षी दलों और जागरूक नागरिकों ने अदालत के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे शिक्षा के क्षेत्र में चल रहे फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। वहीं, कुछ स्थानीय संगठनों ने यह मांग की है कि जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए ताकि किसी भी वैध और जरूरतमंद संस्थान को बेवजह परेशानी का सामना न करना पड़े। डिजिटल एनालिटिक्स यह बताते हैं कि इस तरह की संवेदनशील और नीतिगत खबरों पर पाठकों की गहरी नजर रहती है, क्योंकि इसका सीधा असर समाज के भविष्य पर पड़ता है।
बंद हो सकती है लोगों की चहेती Yamaha R15M... ये है वजह
यामाहा भारतीय बाजार में अपने बाइक लाइन-अप में बड़ा बदलाव कर सकती है. रिपोर्ट्स की मानें, तो कंपनी आर15 सीरीज की सबसे महंगी बाइक को बंद कर सकती है. इस सीरीज में अलग-अलग फीचर्स के साथ कई बाइक्स आती हैं, जिसमें आर15 एम सबसे ऊपर है. यामाहा आर2 की लॉन्चिंग के बाद कंपनी इस बाइक को बंद कर सकती है.
आधी रात को जोधपुर की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब और रविंद्र भाटी का अनोखा अंदाज
भारतीय राजनीति में कुछ ऐसे युवा चेहरे मौजूद हैं जिनकी एक झलक पाने के लिए और जिनकी आवाज पर सड़कों पर उतरने के लिए हजारों-लाखों युवा किसी भी वक्त तैयार रहते हैं। राजस्थान की राजनीति के बेताज बादशाह और बाड़मेर के लोकप्रिय निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी (Ravindra Singh Bhati) अपनी बेबाक शैली और जनता के मुद्दों के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करने के कारण हमेशा सुर्खियों में बने रहते हैं। हाल ही में उनका एक ऐसा ही वीडियो और वाकया सामने आया है जिसने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तहलका मचा दिया है। रात के ठीक दो बजे जब पूरी दुनिया नींद की आगोश में डूबी होती है, तब जोधपुर की सड़कों पर रविंद्र सिंह भाटी ने अपनी थार गाड़ी की छत पर चढ़कर दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला (Sidhu Moose Wala) के अंदाज में अपना प्रसिद्ध एक्शन किया और EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आरक्षण के सरलीकरण की मांग को लेकर एक ऐतिहासिक हुंकार भरी। आधुनिक गूगल डिस्कवर, आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO), सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) और जनरेटिव एआई सर्च (AI Search) के इस डिजिटल युग में युवा नेताओं के ऐसे अनोखे प्रदर्शनों और वायरल वीडियो से जुड़ी खबरों को इंटरनेट पर सबसे ज्यादा खोजा और पढ़ा जा रहा है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि उस आधी रात को आखिर क्या कुछ हुआ और इस प्रदर्शन के पीछे की असल वजह क्या है।क्या है पूरा मामला और क्यों आधी रात को सड़क पर उतरे विधायक रविंद्र भाटी?राजस्थान और देश भर के सामान्य वर्ग के उन युवाओं और छात्रों के बीच लंबे समय से EWS (Economically Weaker Section) आरक्षण के नियमों के सरलीकरण को लेकर गहरी नाराजगी और मांग उठती रही है, जो आर्थिक तंगी के बावजूद जटिल प्रावधानों के कारण सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में इसका पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। इन युवाओं की लगातार आ रही गुहार और उनकी समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुँचाने के लिए विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने खुद मोर्चा संभाल लिया। जब वे रात के वक्त अपने समर्थकों के साथ यात्रा कर रहे थे, तो जगह-जगह युवाओं का हुजूम उनसे मिलने के लिए उमड़ पड़ा। छात्रों और युवाओं की इस भारी भीड़ को देखकर और उनके अंदर सुलग रहे गुस्से को भांपते हुए भाटी ने तय किया कि इस मुद्दे को केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहने दिया जाएगा, बल्कि इसे सड़क पर उतरकर एक जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा। आधुनिक डिजिटल सर्च ट्रेंड्स और एआई एनालिटिक्स यह दर्शाते हैं कि जब भी कोई युवा राजनेता इस प्रकार का अनूठा और जोशीला कदम उठाता है, तो वह कुछ ही मिनटों में इंटरनेट पर ट्रेंड करने लगता है।थार गाड़ी की छत पर चढ़कर सिद्धू मूसेवाला स्टाइल में किया एक्शनआधी रात के सन्नाटे को चीरती हुई जब रविंद्र सिंह भाटी की गाड़ियाँ जोधपुर की सड़कों से गुजर रही थीं, तो उनके चाहने वाले युवाओं ने 'थार' (Mahindra Thar) गाड़ियों का काफिला रोककर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। युवाओं के इस जोश को देखकर खुद को रोक न पाने वाले रविंद्र सिंह भाटी अपनी थार गाड़ी की छत पर जा चढ़े। वहाँ उन्होंने दिवंगत पंजाबी स्टार सिद्धू मूसेवाला के अंदाज में हाथ उठाकर वही मशहूर और आक्रामक एक्शन किया, जिसे देखते ही वहां मौजूद हजारों युवाओं में जोश की एक नई लहर दौड़ गई। थार से लेकर जोधपुर के चौराहों तक गूंजती उस आवाज ने यह साबित कर दिया कि आज के युवा वर्ग के दिलों पर रविंद्र सिंह भाटी का कितना गहरा प्रभाव है। लोकल और रीजनल ऑप्टिमाइजेशन के लिहाज से देखें तो राजस्थान के इस पूरे पश्चिमी बेल्ट में इस आधी रात के प्रदर्शन की चर्चा हर नुक्कड़ पर की जा रही है।EWS आरक्षण के सरलीकरण की मांग और युवाओं का भविष्यइस पूरे प्रदर्शन के केंद्र में केवल एक ही सबसे बड़ा मुद्दा था—EWS आरक्षण के नियमों में आने वाली जटिलताओं को दूर करना और उनका सरलीकरण (Simplification) करना। विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने इस दौरान स्पष्ट शब्दों में सरकार और प्रशासन को यह संदेश दिया कि सामान्य वर्ग के गरीब और मेधावी युवाओं को उनके हक से वंचित रखने वाले इन जटिल नियमों को तुरंत बदला जाना चाहिए। आय प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया, नियमों की पेचीदगियों और अन्य प्रशासनिक अड़चनों के कारण आज का युवा खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस मांग को लेकर चल रहे अभियानों को डिजिटल युग का एक नया रूप माना जा रहा है, जहाँ नेता और जनता सीधे तौर पर सोशल मीडिया और ऑन-ग्राउंड माध्यमों से जुड़ते हैं।राजनीतिक गलियारों में इस आधी रात के प्रदर्शन की गूंज और प्रतिक्रियाएंजैसे ही सुबह हुई और रात 2 बजे के इस प्रदर्शन के वीडियो सोशल मीडिया (Instagram, X, YouTube) पर वायरल हुए, राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल आ गया। विपक्षी दलों और सत्ता पक्ष दोनों के नेता इस बात पर चर्चा करने लगे कि कैसे एक अकेला विधायक आधी रात को हजारों युवाओं को अपने साथ जोड़ने की ताकत रखता है। विश्लेषकों का यह मानना है कि रविंद्र सिंह भाटी की यह शैली पारंपरिक राजनीति से बिल्कुल अलग है, जो सीधे तौर पर युवाओं की नब्ज़ को पकड़ती है। डिजिटल एनालिटिक्स यह बताते हैं कि इस तरह की खबरें पारंपरिक मीडिया से ज्यादा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पाठकों के बीच सनसनी मचा देती हैं।
सपनों की उड़ान और झारखंड की माटी से निकली एक नई प्रेरणा
संघर्ष की भट्टी में तपकर ही कुंदन जैसी चमक मिलती है, और जब कोई साधारण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाली बेटी अपनी कड़ी मेहनत और अटूट लगन के बल पर देश की सबसे कठिन परीक्षा को पास कर इतिहास रच देती है, तो पूरा देश उस पर गर्व महसूस करता है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की परीक्षा पास करना हर साल लाखों युवाओं का सपना होता है, लेकिन उनमें से कुछ ही ऐसे जांबाज होते हैं जो अपनी परिस्थितियों को मात देकर इस सर्वोच्च मुकाम को हासिल करते हैं। झारखंड राज्य से ताल्लुक रखने वाली रेना जमील ने अपनी सफलता से एक ऐसी ही अनूठी मिसाल पेश की है। आधुनिक गूगल डिस्कवर, आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO), सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) और जनरेटिव एआई सर्च (AI Search) के इस डिजिटल युग में प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज़ और संघर्ष की कहानियों को इंटरनेट पर सबसे ज्यादा खोजा और पढ़ा जाता है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि कौन हैं आईएएस रेना जमील और उनका धनबाद के एक उर्दू स्कूल से लेकर देश की शीर्ष नौकरशाही तक पहुँचने का सफर कैसा रहा है।धनबाद के उर्दू स्कूल से शुरुआती पढ़ाई और बचपन के संघर्षझारखंड के कोयलांचल क्षेत्र के रूप में विख्यात धनबाद जिले से अपनी जिंदगी की शुरुआत करने वाली रेना जमील का शुरुआती जीवन किसी आम मध्यमवर्गीय परिवार की तरह ही बेहद साधारण और चुनौतियों से भरा था। उनकी शुरुआती शिक्षा-दीक्षा धनबाद के ही एक स्थानीय उर्दू माध्यम के स्कूल से हुई। जिस दौर में अधिकांश बच्चे आधुनिक अंग्रेजी स्कूलों या बड़े शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने के सपने देखते हैं, उस समय रेना जमील ने सीमित संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं के बीच अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। उनके परिवार और शिक्षकों ने हमेशा उनकी पढ़ाई को प्राथमिकता दी, हालांकि जीवन के हर कदम पर उन्हें आर्थिक और सामाजिक मोर्चों पर कई तरह की अड़चनों का सामना करना पड़ा। आधुनिक डिजिटल सर्च ट्रेंड्स और एआई एनालिटिक्स यह दर्शाते हैं कि जब भी ग्रामीण या छोटे शहरों के सरकारी और उर्दू स्कूलों से पढ़ने वाले छात्र यूपीएससी जैसी परीक्षा पास करते हैं, तो उनकी प्रारंभिक शिक्षा की पृष्ठभूमि को जानने के लिए लोग गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च करते हैं।झारखंड की पहली मुस्लिम महिला आईएएस बनकर रचा इतिहासअपनी पढ़ाई को पूरी निष्ठा के साथ जारी रखते हुए रेना जमील ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी उत्कृष्ट बौद्धिक क्षमता का परिचय दिया। ग्रेजुएशन और अन्य शैक्षणिक पड़ाव पार करने के बाद उन्होंने देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी (UPSC Civil Services Examination) सिविल सेवा परीक्षा को क्रैक करने का कठिन संकल्प लिया। तमाम बाधाओं, असफलताओं के डर और सीमित मार्गदर्शन के बावजूद उन्होंने कभी अपने हौसला को टूटने नहीं दिया। अपनी इसी कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने न केवल परीक्षा में सफलता हासिल की, बल्कि वे झारखंड राज्य की पहली मुस्लिम महिला आईएएस अधिकारी (First Muslim Female IAS of Jharkhand) बनने का गौरव भी अपने नाम कर लिया। लोकल और रीजनल ऑप्टिमाइजेशन के लिहाज से देखें तो झारखंड के कोने-कोने में, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदायों और बेटियों के बीच, इस ऐतिहासिक सफलता के बाद शिक्षा के प्रति एक नया उत्साह और जागरूकता देखने को मिल रही है।यूपीएससी की तैयारी का सफर और मानसिक दृढ़ता की मिसालसिविल सेवा की तैयारी का सफर किसी भी छात्र के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद थका देने वाला होता है। प्रतिदिन 10 से 12 घंटे की पढ़ाई, देश-दुनिया के समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ, उत्तर लेखन का अभ्यास और इंटरव्यू के लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार करना—इन सभी चरणों से गुजरना आसान नहीं होता। रेना जमील ने अपने इस सफर में कई बार उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन उन्होंने अपनी असफलता या निराशा को कभी अपनी मंजिल के आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने अपनी कमजोरियों पर काम किया और एक सुनियोजित रणनीति के तहत अपनी तैयारी को अंतिम रूप दिया। आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन और मोटिवेशनल पोर्टल्स पर उनकी इस अध्ययन शैली और अनुशासन को युवा उम्मीदवारों के लिए एक परफेक्ट केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।समाज और युवा पीढ़ी के लिए एक जीता-जागता प्रेरणा स्त्रोतरेना जमील की यह सफलता केवल एक व्यक्ति की व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह उन तमाम बेटियों और युवाओं के लिए एक उम्मीद की किरण है जो तमाम सामाजिक और आर्थिक बाधाओं के बावजूद कुछ बड़ा करने का ख्वाब देखते हैं। आज के समय में जब युवा अक्सर छोटी-मोटी असफलताओं से निराश होकर अपने रास्ते बदल लेते हैं, रेना जमील का जीवन यह सिखाता है कि अगर आपके इरादे पक्के हों और दिशा सही हो, तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर उनकी इस उपलब्धि को लेकर हर तरफ सराहना हो रही है और लोग उन्हें भविष्य के एक जिम्मेदार और संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी के रूप में देख रहे हैं।
'बुरा लगता है...', ODI टीम से बाहर रहने पर छलका ऋषभ पंत का दर्द
ऋषभ पंत ने टीम इंडिया की वनडे टीम से बाहर होने पर खुलकर बात की. उन्होंने माना कि टीम में जगह नहीं मिलने पर बुरा लगता है, लेकिन वापसी के लिए मेहनत जारी रखना जरूरी है.
जमीन के छोटे से विवाद से शुरू हुई खूनी रंजिश और कोडरमा कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
भारतीय समाज और ग्रामीण-शहरी इलाकों में संपत्ति, मकान या जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों को लेकर होने वाले विवाद अक्सर कितने खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकते हैं, इसका एक बेहद झकझोर देने वाला मामला झारखंड के कोडरमा जिले से सामने आया है। आज से ठीक तीन साल पहले महज ढाई फीट जमीन के विवाद को लेकर संजय सिंह नामक व्यक्ति की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। इस सनसनीखेज हत्याकांड में लंबी कानूनी लड़ाई, गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर आखिरकार कोडरमा की अदालत ने न्याय का सूरज चमकाते हुए तीनों मुख्य आरोपियों को उम्रकैद (Life Imprisonment) की सजा सुनाई है। आधुनिक गूगल डिस्कवर, आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO), सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) और जनरेटिव एआई सर्च (AI Search) के इस डिजिटल युग में अदालती फैसलों, अपराध की तह तक जाने वाली कहानियों और न्याय प्रणाली से जुड़ी खबरों को इंटरनेट पर सबसे ज्यादा खोजा और पढ़ा जाता है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि कैसे जरा सी जमीन के लिए एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया और कानून ने अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुँचाया।क्या था पूरा मामला और कैसे हुआ था संजय सिंह हत्याकांड?यह दर्दनाक घटना कोडरमा जिले के एक स्थानीय इलाके की है, जहाँ संजय सिंह और उनके पड़ोसियों के बीच लंबे समय से थोड़ी सी जमीन—महज 'ढाई फीट' के रास्ते या हिस्से—को लेकर खींचतान चल रही थी। दोनों पक्षों के बीच कई बार मामूली कहासुनी और नोंकझोक भी हो चुकी थी, लेकिन किसी ने यह कल्पना तक नहीं की थी कि जमीन का यह मामूली सा विवाद इतना तूल पकड़ लेगा कि लोग खून के प्यासे हो जाएंगे। घटना वाले दिन बात इतनी बढ़ गई कि आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से संजय सिंह पर हमला बोल दिया और उन्हें मौत के घाट उतार दिया। इस जघन्य वारदात के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मच गया और पूरे इलाके में भय व गुस्से का माहौल बन गया। आधुनिक डिजिटल सर्च ट्रेंड्स और एआई एनालिटिक्स यह दर्शाते हैं कि जब भी जमीन-जायदाद के विवाद से जुड़े किसी खूनी संघर्ष का फैसला आता है, तो लोग उसकी पृष्ठभूमि जानने के लिए सर्च इंजन पर गहरी रुचि दिखाते हैं।तीन साल की लंबी कानूनी लड़ाई और पुलिस की पुख्ता चार्जशीटघटना के तुरंत बाद पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज किया और त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस और अनुसंधानकर्ताओं ने इस मामले में बेहद मुस्तैदी दिखाते हुए वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और चश्मदीद गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत में एक मजबूत चार्जशीट दाखिल की। पिछले तीन वर्षों से कोडरमा की विशेष अदालत में इस मामले की लगातार सुनवाई चल रही थी। बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के वकीलों के बीच चली लंबी जिरह के दौरान कई अहम गवाह पेश किए गए। अदालत ने यह महसूस किया कि आरोपियों द्वारा किया गया यह कृत्य पूरी तरह से पूर्व नियोजित और क्रूरता से भरा हुआ था, जिसके चलते किसी भी प्रकार की नरमी बरतना न्याय के हित में नहीं होता। लोकल और रीजनल ऑप्टिमाइजेशन के लिहाज से देखें तो झारखंड के इस इलाके में इस फैसले को लेकर आम जनता के बीच न्याय व्यवस्था पर भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है।अदालत का ऐतिहासिक फैसला: तीन दोषियों को उम्रकैद और भारी जुर्मानामामले की तमाम दलीलों और साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद कोडरमा के माननीय न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुए संजय सिंह हत्याकांड के तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता और संबंधित आपराधिक धाराओं के तहत तीनों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा के साथ-साथ आर्थिक दंड से भी दंडित किया है। न्यायाधीश ने अपने फैसले में यह टिप्पणी की कि मामूली जमीन के विवाद के लिए किसी की जान ले लेना समाज के खिलाफ एक गंभीर अपराध है, और ऐसे अपराधियों को कड़ा संदेश देना आवश्यक है ताकि भविष्य में कोई भी कानून को अपने हाथ में लेने की हिम्मत न कर सके। आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन और लीगल पोर्टल्स पर इस तरह के त्वरित और न्यायसंगत फैसलों को समाज में कानून का राज स्थापित करने वाला कदम माना जा रहा है।पीड़ित परिवार का दर्द और न्याय मिलने पर संतोष की भावनातीन साल के इस लंबे और पीड़ादायक सफर के दौरान संजय सिंह के परिवार ने जो मानसिक और सामाजिक संघर्ष झेला, उसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता। फैसले के आने के बाद पीड़ित परिवार के सदस्यों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें अदालत की न्याय प्रक्रिया पर पूरा भरोसा था और आज भले ही उनके घर का मुख्य चिराग बुझ गया हो, लेकिन आरोपियों को उम्रकैद की सजा मिलने से उनकी आत्मा को थोड़ी शांति जरूर मिली है। इस तरह के मामलों में सजा मिलना समाज के अन्य लोगों को भी यह चेतावनी देता है कि आपसी द्वेष और लालच में आकर कभी भी हिंसा का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए।
Thane में Pradeep Purnikar की हत्या पर भड़के Sanjay Raut, शिंदे गुट पर लगाए आरोप
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने बुधवार को पार्टी के ठाणे नेता प्रदीप पूर्णिकर की हत्या को लेकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और महाराष्ट्र सरकार पर अपना हमला तेज़ कर दिया। उन्होंने कहा कि हत्या के पीछे के असली मास्टरमाइंड शिंदे खेमे में ही थे। राउत ने महाराष्ट्र सरकार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अधीन गृह विभाग और ठाणे पुलिस की भी लोगों की सुरक्षा न कर पाने के लिए आलोचना की और पूछा कि क्या ठाणे गृह विभाग के नक्शे पर नहीं है। मंगलवार देर रात ठाणे के मानपाडा इलाके में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सेना (UBT) के विभाग प्रमुख प्रदीप पूर्णिकर की उनके ऑफिस के बाहर अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। उनके परिवार ने इस हत्या के लिए ठाणे की पूर्व मेयर और शिवसेना की महिला विंग की प्रमुख मीनाक्षी शिंदे और उनके पति राजेंद्र शिंदे को जिम्मेदार ठहराया। इसे भी पढ़ें: Palghar Court ने अस्पताल तोड़फोड़ मामले में Shiv Sena MLA के बेटे समेत छह की जमानत खारिज की प्रदीप पूर्णिकर के बेटे राम ने दावा किया कि हत्या से पहले आरोपियों ने इलाके की रेकी की थी और उन्होंने गणपति विसर्जन से कुछ समय पहले उनमें से कुछ लोगों को राजेंद्र शिंदे के साथ देखा था। राम ने कहा कि मैंने चार आरोपियों को पूर्व मेयर के पति के साथ वहां खड़े देखा। उनमें से दो आरोपी मेरी कार के पास भी आए और उसकी जांच-पड़ताल की। मेरे पिता की हत्या से पहले रेकी की गई थी। मेरे अलावा दो और लोगों ने यह सब देखा था। राम ने बताया कि हमलावरों में से एक ने उन्हें प्रदीपदादा कहकर बुलाया था, हालांकि वह उस व्यक्ति का नाम नहीं जानते थे। उन्होंने कहा कि शायद इसके पीछे ड्रग माफिया का हाथ हो सकता है, या फिर यह किसी राजनीतिक विवाद का नतीजा हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता को पहले भी धमकियां मिल चुकी थीं। इसे भी पढ़ें: Election Commission के खिलाफ MNS और Shiv Sena UBT का 4 अक्टूबर को मुंबई में साझा मोर्चा मीनाक्षी शिंदे ने कहा कि वह इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहतीं। उन्होंने कहा कि पुलिस को जांच करने दें और पता लगाने दें कि दोषी कौन है। मैं तब जवाब दूंगी। मैं छोटी-मोटी राजनीति में नहीं पड़ना चाहती।
'कल होगा कांड', गर्लफ्रेंड को भेजे एक लाख मैसेज, कातिल बना पादरी
कैलिब फ्लिन ने सभी आरोपों से इनकार किया. उसके वकीलों का कहना था कि अभियोजन के पास हत्या का कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है. न हत्या में इस्तेमाल बंदूक मिली, न ऐसा प्रत्यक्ष प्रमाण कि कैलिब ने गोली चलाई.
एनडीए गठबंधन के भीतर सुलगती बयानबाजी और चिराग-मांझी का आमने-सामने आना
भारतीय राजनीतिक गलियारों में जब भी कोई संवेदनशील या आपराधिक घटना सामने आती है, तो उस पर विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सियासत का पारा गर्म कर देती हैं। बिहार की राजनीति में इन दिनों एनडीए (NDA) गठबंधन के भीतर दो प्रमुख दलित चेहरों और वरिष्ठ नेताओं के बीच जुबानी जंग ने राजनीतिक सरगर्मी को काफी बढ़ा दिया है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के हालिया 'शर्मिंदगी' वाले बयान पर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बेहद तीखा और कड़ा पलटवार किया है। आधुनिक गूगल डिस्कवर, आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO), सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) और जनरेटिव एआई सर्च (AI Search) के इस डिजिटल युग में राजनीतिक दलों के आपसी बयानों और वैचारिक टकराव से जुड़ी खबरों को इंटरनेट पर सबसे ज्यादा खोजा और पढ़ा जाता है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि पूरा विवाद क्या है और जीतन राम मांझी ने अपने पलटवार में क्या कुछ कहा है।क्या था चिराग पासवान का वह बयान जिस पर छिड़ गया सियासी घमासान?हाल ही में बिहार में हुई कुछ गंभीर आपराधिक वारदातों और व्यवस्था से जुड़ी कमियों को लेकर एलजेपी (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने एक बेहद बेबाक और संवेदनशीलता से भरा बयान दिया था। उन्होंने मीडिया के सामने यह स्वीकार किया था कि इस तरह की घटनाओं से एक जनप्रतिनिधि और सरकार के हिस्से के रूप में उन्हें बेहद शर्मिंदगी महसूस होती है। उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषकों ने अप्रत्यक्ष रूप से राज्य की कानून-व्यवस्था पर एक सवालिया निशान के रूप में देखा। चूंकि चिराग पासवान लगातार अपनी स्वतंत्र और मुखर शैली के लिए जाने जाते हैं, इसलिए उनके इस बयान ने तुरंत राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना लिया। आधुनिक डिजिटल सर्च ट्रेंड्स और एआई एनालिटिक्स यह दर्शाते हैं कि जब सत्ता पक्ष के ही नेता इस प्रकार के आत्ममंथन या तीखे बयान देते हैं, तो वे सोशल मीडिया पर तुरंत ट्रेंड करने लगते हैं।जीतन राम मांझी का कड़ा पलटवार: शर्म आने से काम नहीं चलेगा, ठोस कार्रवाई करिएचिराग पासवान के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और एनडीए के एक अन्य वरिष्ठ सहयोगी जीतन राम मांझी ने बेहद आक्रामक तेवर दिखाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सिर्फ जुबानी तौर पर यह कह देना कि हमें 'शर्मिंदगी महसूस हो रही है' किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। मांझी ने कड़े शब्दों में पलटवार करते हुए कहा कि यदि वाकई किसी को इतनी शर्म आती है, तो उन्हें हाथ पर हाथ धरकर बैठने के बजाय आगे बढ़कर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि अपराधियों के मन में खौफ पैदा हो सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल बयानबाजी करने से जनता का दर्द कम नहीं होता, बल्कि धरातल पर कड़े कदम उठाने की जरूरत होती है। लोकल और रीजनल ऑप्टिमाइजेशन के लिहाज से देखें तो बिहार के राजनीतिक और ग्रामीण इलाकों में इस बयान के बाद तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।एनडीए गठबंधन के भीतर वैचारिक मतभेद और बयानों के राजनीतिक मायनेराजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि क्या एनडीए गठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है या फिर अलग-अलग दलों के नेता अपनी राजनीतिक जमीन बचाने और अपनी अलग पहचान बनाए रखने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी दोनों ही बिहार की राजनीति में दलित समाज के बड़े और प्रभावशाली चेहरे माने जाते हैं। ऐसे में किसी भी सामाजिक या प्रशासनिक मुद्दे पर दोनों नेताओं के अलग-अलग सुर और तीखे अंदाज विपक्षी दलों को भी बैठे-बिठाए राजनीतिक हथियार दे देते हैं। डिजिटल एनालिटिक्स यह बताते हैं कि जब सहयोगी दलों के नेता सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे के बयानों पर इस तरह प्रतिक्रिया देते हैं, तो मीडिया इसे बहुत प्रमुखता से कवर करता है।जनता और सोशल मीडिया पर इस सियासी बयानबाजी का प्रभावजैसे ही जीतन राम मांझी का यह पलटवार मीडिया और डिजिटल पोर्टल्स पर प्रसारित हुआ, सोशल मीडिया पर यूजर्स के बीच बहस छिड़ गई। एक तरफ जहाँ कुछ लोग चिराग पासवान के आत्ममंथन वाले बयान को सही ठहरा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जीतन राम मांझी की इस मांग का समर्थन कर रहे हैं कि बयानबाजी से ज्यादा प्रशासनिक सख्ती जरूरी है। डिजिटल युग में जनरेटिव एआई सर्च इंजन यह विश्लेषण करते हैं कि इस तरह की राजनीतिक बयानबाजी से मतदाताओं के बीच क्या संदेश जाता है और इसका आगामी चुनावों पर क्या असर पड़ सकता है।
विपक्षी राजनीति के गलियारों में नीतीश कुमार की वापसी और बैठकों का दौर
भारतीय राजनीति का इतिहास उतार-चढ़ाव, समझौतों और रणनीतिक पल्टीमार रणनीतियों से भरा पड़ा है। देश की राजधानी दिल्ली में जब भी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों या कांग्रेस के शीर्ष रणनीतिकारों की कोई बंद कमरे में बैठक होती है, तो उसमें देश की बदलती राजनीतिक दिशा पर गंभीर मंथन होना स्वाभाविक है। हाल ही में कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व—सोनिया गांधी और राहुल गांधी—की एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान अचानक से बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू (JDU) प्रमुख नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर और उनकी चर्चाओं ने एक बार फिर से राजनीतिक गलियारों का तापमान बढ़ा दिया है। आधुनिक गूगल डिस्कवर, आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO), सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) और जनरेटिव एआई सर्च (AI Search) के इस डिजिटल युग में विपक्षी गठबंधनों के अंदरूनी समीकरणों और राष्ट्रीय नेताओं के रिश्तों से जुड़ी खबरों को इंटरनेट पर सबसे ज्यादा खोजा और पढ़ा जाता है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि सोनिया-राहुल की इस बैठक में नीतीश कुमार को लेकर क्या चर्चाएं हुईं और किन परिस्थितियों के कारण वे कभी भारत के इस सबसे बड़े विपक्षी गठबंधन की नींव रखने के बावजूद इससे दूर हो गए थे।INDIA ब्लॉक के सूत्रधार और शुरुआती दिनों में नीतीश कुमार की केंद्रीय भूमिकायदि हम थोड़ा पीछे मुड़कर देखें और 'INDIA' (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) गठबंधन के शुरुआती दिनों को याद करें, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि इस पूरे विपक्षी कुनबे को एक मंच पर लाने और क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने का सबसे पहला और बड़ा बीड़ा किसी और ने नहीं बल्कि नीतीश कुमार ने ही उठाया था। उन्होंने ही पटना में देश भर के तमाम विपक्षी दिग्गजों की पहली बड़ी बैठक बुलाई थी, जिसमें कांग्रेस से लेकर तमाम क्षेत्रीय दलों के बड़े नेता शामिल हुए थे। उस वक्त नीतीश कुमार को इस गठबंधन के संयोजक या मुख्य सूत्रधार के रूप में देखा जा रहा था, और यह माना जा रहा था कि वे 2024 के लोकसभा चुनावों में विपक्ष का चेहरा बनकर नरेंद्र मोदी के सामने एक मजबूत विकल्प खड़े करेंगे। आधुनिक डिजिटल सर्च ट्रेंड्स और एआई एनालिटिक्स यह दर्शाते हैं कि जब भी राष्ट्रीय गठबंधनों के इतिहास और उनके गठन के पन्नों को पलटा जाता है, तो नीतीश कुमार की उस समय की सक्रियता को सबसे अहम माना जाता है।वे कौन से हालात और राजनीतिक परिस्थितियां थीं जिनके चलते नीतीश कुमार हो गए थे बाहर?हर किसी के मन में यह सवाल जरूर आता है कि जिस नेता ने खुद विपक्षी दलों को एक छत के नीचे लाने में सबसे अहम भूमिका निभाई, आखिर ऐसी कौन सी मजबूरियां और हालात पैदा हुए कि उन्हें इस गठबंधन से दूरी बनानी पड़ी और वे वापस एनडीए (NDA) के पाले में चले गए। राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि गठबंधन के भीतर नेतृत्व के चेहरे (Prime Ministerial Face) को लेकर असमंजस की स्थिति, सीट बंटवारे में हो रही अत्यधिक देरी और कांग्रेस पार्टी द्वारा कई मामलों में क्षेत्रीय क्षत्रपों को अपेक्षित तवज्जो न दिए जाने से असहजता बढ़ रही थी। इसके अलावा, बिहार के अंदरूनी राजनीतिक समीकरणों, आरजेडी (RJD) के साथ उनके संबंधों और आगामी विधानसभा चुनावों के नफा-नुकसान का आंकलन करते हुए नीतीश कुमार ने यह महसूस किया कि वर्तमान परिदृश्य में उनके राजनीतिक हितों के लिए एनडीए के साथ रहना ज्यादा सुरक्षित और अनुकूल होगा। लोकल और राष्ट्रीय स्तर पर उनके इस पाला बदलने के फैसले ने देश की राजनीति को हिलाकर रख दिया था।सोनिया-राहुल की हालिया बैठक में नीतीश कुमार के जिक्र के क्या हैं सियासी मायने?अब जबकि सोनिया गांधी और राहुल गांधी की हालिया बैठक में एक बार फिर नीतीश कुमार के उस दौर और मौजूदा राजनीतिक प्रासंगिकता पर चर्चा हुई है, तो इसके गहरे निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। विपक्षी खेमा यह भली-भांति समझता है कि हिंदी बेल्ट (Hindi Belt) और विशेषकर उत्तर प्रदेश-बिहार जैसे राज्यों में चुनावी गणित को साधने के लिए क्षेत्रीय क्षत्रपों का साथ कितना जरूरी होता है। भले ही वर्तमान में नीतीश कुमार एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं और बिहार में सरकार चला रहे हैं, लेकिन भारतीय राजनीति की अनिश्चित प्रकृति को देखते हुए हर दल भविष्य की संभावनाओं के दरवाजे हमेशा खुले रखता है। डिजिटल एनालिटिक्स और एआई सर्च इंजन यह दर्शाते हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर जब भी विपक्षी दल अपनी रणनीतियों की समीक्षा करते हैं, तो वे अतीत की चूकों से सीख लेकर नए सिरे से मोहरबंद योजनाएं तैयार करते हैं।जनता और राजनीतिक गलियारों में इस चर्चा की गूंजजैसे ही मीडिया के माध्यम से यह खबर बाहर आई कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की बैठक में नीतीश कुमार के अध्याय पर मंथन हुआ है, राजनीतिक विश्लेषकों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। एक तरफ जहाँ कुछ लोग इसे कांग्रेस की पुरानी रणनीतिक भूलों का पश्चाताप मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इसे भविष्य के किसी नए राजनीतिक समीकरण की सुगबुगाहट के रूप में भी देखा जा रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर यूजर्स इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या आने वाले समय में देश की राजनीति में एक बार फिर कोई बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।

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