Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेशवासियों की सहूलियत के लिए योजनाएं बनने से लेकर लागू होने तक की कार्यवाही तेजी से पूरी हो रही है। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना इसका बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है। मार्च ...
भाजपा परीक्षा पेपर लीक नेटवर्क को संरक्षण दे रही है: कर्नाटक कांग्रेस
कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर देश भर में कथित परीक्षा पेपर लीक के मामलों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार पर लाखों छात्रों के भविष्य को खतरे में डालने का आरोप लगाया और सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में स्वतंत्र राष्ट्रीय जांच की मांग की।
भारत के विकास के लिए धार्मिक सद्भाव महत्वपूर्ण: मनोज सिन्हा
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि धार्मिक सद्भाव वह आधारशिला है जिस पर एक मजबूत समाज, एक मजबूत जम्मू-कश्मीर और एक विकसित भारत का निर्माण हो सकता है।
क्या अनशन खत्म करेंगे सोनम वांगचुक, अस्पताल में ही चलेगा इलाज, अनशन को लेकर क्या बोली पत्नी?
Sonam Wangchuk News : पिछले 22 दिनों से भूख हड़ताल पर डटे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन कल यानी सोमवार को खत्म हो सकता है। खबरों के अनुसार, सोनम की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने कहा कि यदि राजनीतिक दल उनसे मिलकर मानसून सत्र में शिक्षा में ...
मुंबई/लखनऊ। 80 और 90 के दशक में अपनी बेमिसाल खूबसूरती, दमदार अदाकारी और लाजवाब क्लासिकल डांस के दम पर बॉलीवुड पर राज करने वाली दिग्गज अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्रि (Meenakshi Seshadri) एक बार फिर लाइमलाइट में आ गई हैं। ज़ी न्यूज़ (Zee News) की एक विशेष एंटरटेनमेंट रिपोर्ट के मुताबिक, 62 साल की उम्र में भी मीनाक्षी की फुर्ती और डांस के प्रति उनका जुनून बिल्कुल पहले जैसा ही बरकरार है। अभिनेत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक बेहद शानदार वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह अपनी 37 साल पुरानी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'नाचे नागिन गली गली' (1989) के आइकॉनिक नागिन लुक और डांस स्टेप्स को रीक्रिएट करती नजर आ रही हैं। इंटरनेट पर आते ही यह वीडियो आग की तरह फैल गया है और फैंस उनकी फिटनेस और कातिलाना मूव्स की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं।37 साल बाद वही कातिलाना अंदाज, सफेद लिबास में ढाया कहरवीडियो में मीनाक्षी शेषाद्रि ने अपने पुराने दिनों की यादें ताजा करने के लिए खास तैयारी की थी, जिसने दर्शकों को सीधे 1989 के दौर में पहुंचा दिया:सफेद नागिन लुक: मीनाक्षी ने फिल्म के मूल गाने की तरह ही एक खूबसूरत सफेद पोशाक (White Outfit) पहनी हुई थी और बालों में वही पुरानी नागिन स्टाइल की ज्वेलरी कैरी की थी।आइकॉनिक धुन पर थिरके कदम: जैसे ही बैकग्राउंड में 'नाचे नागिन गली गली' का सदाबहार संगीत बजा, मीनाक्षी ने अपने पारंपरिक हाव-भाव और सधे हुए क्लासिकल डांस मूव्स (Classical Dance Moves) से समां बांध दिया। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके एक्सप्रेशंस और आंखों का जादू बिल्कुल वैसा ही दिखा, जिसने दशकों पहले करोड़ों सिनेप्रेमियों को दीवाना बनाया था।'दामिनी' की वापसी देख भावुक हुए फैंस, सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़मीनाक्षी शेषाद्रि पिछले काफी समय से फिल्मी पर्दे से दूर हैं, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए वह अपने फैंस से लगातार जुड़ी रहती हैं। उनके इस डांस वीडियो ने नेटिजन्स (Netizens) को पुरानी यादों (Nostalgia) से भर दिया है:उम्र बस एक नंबर है: फैंस लगातार कमेंट कर रहे हैं कि मीनाक्षी ने यह साबित कर दिया है कि उम्र बढ़ने से हुनर कम नहीं होता। एक यूजर ने लिखा, आप आज की अभिनेत्रियों से कहीं बेहतर और ग्रेसफुल हैं।दामिनी और घातक की यादें: कई प्रशंसकों ने उनकी सुपरहिट फिल्मों जैसे 'दामिनी' (Damini), 'घातक' (Ghatak) और 'हीरो' (Hero) के डायलॉग्स लिखकर कमेंट सेक्शन को भर दिया है। लोग उनकी इस बात के लिए सराहना कर रहे हैं कि उन्होंने खुद को इतना फिट और ऊर्जावान बनाए रखा है।फिल्मी गलियारों में चर्चा: क्या जल्द होगा कमबैक?आपको बता दें कि मीनाक्षी शेषाद्रि एक प्रशिक्षित भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी और ओडिसी डांसर हैं। शादी के बाद वे अमेरिका (टेक्सास) शिफ्ट हो गई थीं, जहां वे अपना एक सफल डांस स्कूल चलाती थीं। हाल ही में वे भारत वापस लौटी हैं और कई रियलिटी शोज़ में बतौर गेस्ट नजर आ चुकी हैं। सिनेमा जगत और गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि मीनाक्षी जल्द ही किसी बड़े ओटीटी प्रोजेक्ट या फिल्म के जरिए बॉलीवुड में अपना ऑफिशियल कमबैक (Bollywood Comeback) कर सकती हैं। उनका यह ताजा डांस वीडियो मेकर्स और दर्शकों दोनों के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है कि बॉलीवुड की यह 'दामिनी' आज भी बड़े पर्दे पर तहलका मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
गरुड़ पुराण में बासी भोजन (Stale Food) को 'प्रेत भोजन' (Pret Bhojan) की संज्ञा दी गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति नियमित रूप से बासी या जूठा भोजन ग्रहण करता है, उसके घर से सुख-समृद्धि हमेशा के लिए चली जाती है। सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद भी बासी भोजन को सेहत के लिए एक धीमा जहर मानते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि इसके पीछे का धार्मिक रहस्य और वैज्ञानिक कारण क्या है।गरुड़ पुराण में क्यों कहा गया इसे 'प्रेत भोजन'?सनातन धर्म में भोजन को केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि ऊर्जा और संस्कारों का माध्यम माना गया है। गरुड़ पुराण में इसके तीन मुख्य कारण बताए गए हैं:नकारात्मक शक्तियों का आकर्षण: गरुड़ पुराण के अनुसार, जब भोजन पकने के बाद बहुत अधिक समय (जैसे रात भर) तक रखा रहता है, तो उसकी सात्विक ऊर्जा पूरी तरह समाप्त हो जाती है। ऐसे भोजन की तरफ प्रेत आत्माएं और नकारात्मक ऊर्जाएं (Negative Energies) आकर्षित होने लगती हैं। यही वजह है कि इसे 'प्रेत भोजन' कहा जाता है।दरिद्रता का वास: मान्यता है कि जो परिवार या व्यक्ति नियमित रूप से बासी भोजन खाता है, उस पर माता लक्ष्मी की कृपा समाप्त हो जाती है। घर में आर्थिक तंगी, क्लेश और अकाल मृत्यु का भय मंडराने लगता है।बौद्धिक क्षमता का ह्रास: ऐसा भोजन करने से मनुष्य की बुद्धि तामसिक (अज्ञान और आलस से भरी) हो जाती है। व्यक्ति का मन अच्छे कामों में नहीं लगता और वह हमेशा चिड़चिड़ा रहता है।आयुर्वेद और विज्ञान का दृष्टिकोण: बीमारियों का घर है बासी खानाधार्मिक मान्यताओं से अलग, अगर हम विज्ञान और आयुर्वेद की कसौटी पर देखें, तो पका हुआ भोजन 3 से 4 घंटे के भीतर अपनी पौष्टिकता खोने लगता है:तामसिक भोजन (Ayurveda View): आयुर्वेद के अनुसार, 8 घंटे से ज्यादा पुराना भोजन 'तामसिक' हो जाता है। यह शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन बिगाड़ देता है, जिससे आलस, सुस्ती और डिप्रेशन बढ़ता है।बैक्टीरिया का हमला (Scientific Fact): विज्ञान कहता है कि भोजन पकने के बाद यदि उसे लंबे समय तक रखा जाए, तो उसमें बैक्टीरिया और फंगस पनपने लगते हैं। फ्रिज में रखने से बैक्टीरिया के बढ़ने की गति केवल धीमी होती है, वे पूरी तरह नष्ट नहीं होते।पेट की बीमारियां: बासी भोजन को बार-बार गर्म करके खाने से फूड पॉइजनिंग (Food Poisoning), एसिडिटी, कब्ज और पेट में भयंकर इन्फेक्शन का खतरा रहता है।सुखी जीवन के लिए गरुड़ पुराण की अहम सलाहशास्त्रों में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि हमेशा ताजा, गर्म और सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए (जैसा कि ऊपर चित्र में दिखाया गया है)। भोजन करने से पहले भगवान को भोग लगाना और अग्नि ग्रास (पहला निवाला भगवान या गाय के लिए निकालना) निकालना अत्यंत शुभ माना जाता है। भोजन बनाने वाले व्यक्ति के मन के भाव भी शुद्ध होने चाहिए, क्योंकि 'जैसा अन्न, वैसा मन' की कहावत पूरी तरह सच है। यदि आप भी अपने जीवन में सफलता, उत्तम स्वास्थ्य और मानसिक शांति चाहते हैं, तो गरुड़ पुराण के इन नियमों को अपनाएं और बासी भोजन करने की आदत को आज ही अलविदा कहें।
लखनऊ। सनातन धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है, जिसमें सोमवार का दिन भगवान शिव (Lord Shiva) की आराधना के लिए सर्वोपरि माना गया है। ज़ी न्यूज़ (Zee News) की एक विशेष आध्यात्मिक रिपोर्ट के मुताबिक, ज्योतिष शास्त्र में सोमवार के दिन किए जाने वाले कुछ बेहद सरल और अचूक उपायों (Somwar ke Upay) का वर्णन मिलता है। मान्यता है कि यदि कोई भक्त सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ सोमवार को शिवलिंग (Shivling) पर कुछ विशेष वस्तुएं अर्पित करता है, तो महादेव प्रसन्न होकर उसके जीवन के सभी संकटों, राहु-केतु के दोषों और आर्थिक बाधाओं को पल भर में दूर कर देते हैं। आइए जानते हैं कि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना के लिए सोमवार के दिन शिवलिंग पर कौन सी चीजें मुख्य रूप से चढ़ानी चाहिए।1. जल और कच्चा दूध: मानसिक शांति और चंद्र दोष से मुक्तियदि आपकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर स्थिति में है या आप हमेशा मानसिक तनाव और अज्ञात भय से घिरे रहते हैं, तो यह उपाय आपके लिए अमृत समान है:अक्षत मिश्रित जल: सोमवार की सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे में साफ जल लें और उसमें थोड़े से साबुत चावल (अक्षत) मिलाकर शिवलिंग पर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करते हुए चढ़ाएं।कच्चा दूध: जल के बाद शिवलिंग पर गाय का कच्चा दूध अर्पित करें। मान्यता है कि ऐसा करने से मानसिक तनाव दूर होता है और घर में सुख-शांति का वास होता है।2. बेलपत्र और शहद: हर मनोकामना पूर्ति और आरोग्यता का वरदानभोलेनाथ को बेलपत्र (Belpatra) अत्यंत प्रिय हैं और इसके बिना शिव जी की पूजा अधूरी मानी जाती है:तीन पत्तियों वाला बेलपत्र: सोमवार को शिवलिंग पर कम से कम 3 या 5 बेलपत्र चढ़ाएं। ध्यान रहे कि बेलपत्र कहीं से भी कटे-फटे या टूटे हुए न हों।शहद का लेप: यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से बीमार है या किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है, तो सोमवार को शिवलिंग पर शहद (Honey) चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है। शहद चढ़ाने से आरोग्यता का आशीर्वाद मिलता है और शारीरिक कष्ट दूर होते हैं।3. चंदन और अक्षत: आर्थिक तंगी होगी दूर, चमकेगा भाग्यधन लाभ और कर्ज से मुक्ति पाने के लिए सोमवार के दिन किया गया यह उपाय बेहद अचूक माना जाता है:सफेद चंदन का तिलक: शिवलिंग पर हमेशा सफेद चंदन का तिलक लगाएं। शिव जी को कभी भी रोली या सिंदूर नहीं चढ़ाया जाता है। चंदन लगाने से जीवन में स्थिरता आती है।साबुत चावल (अक्षत): चंदन लगाने के बाद शिवलिंग पर अक्षत (बिना टूटे हुए चावल) अर्पित करें। शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग पर अक्षत चढ़ाने से दरिद्रता का नाश होता है और रुका हुआ धन वापस मिलने के योग बनते हैं।धार्मिक मान्यता और ध्यान रखने योग्य बातेंज्योतिषविदों का कहना है कि भगवान शिव बहुत ही भोले हैं और वे केवल एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं, बशर्ते आपकी भक्ति निष्कपट हो। सोमवार की पूजा के दौरान कभी भी काले रंग के कपड़े न पहनें, हमेशा साफ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। शिवलिंग की परिक्रमा करते समय ध्यान रखें कि कभी भी पूरी परिक्रमा न करें, जहाँ से जल बाहर निकलता है (जलाधारी), उसे कभी नहीं लांघना चाहिए, हमेशा आधी परिक्रमा (चंद्र परिक्रमा) ही करें। सोमवार के इन नियमों और उपायों का पालन करने से भोलेनाथ की कृपा आप पर और आपके पूरे परिवार पर हमेशा बनी रहती है।
लखनऊ। किसी भी रिश्ते की बुनियाद आपसी भरोसे, सम्मान और मीठी बातचीत पर टिकी होती है। लेकिन कई बार हम अनजाने में या अत्यधिक उत्सुकता (Curiosity) के वश में आकर अपनों से कुछ ऐसी बातें पूछ बैठते हैं, जो उनके दिल को गहरी ठेस पहुँचाती हैं। ज़ी न्यूज़ (Zee News) की एक विशेष लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप रिपोर्ट के मुताबिक, हमारे समाज में बातचीत के दौरान मर्यादा और प्राइवेसी (Privacy Boundaries) का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है।मनोवैज्ञानिकों और संबंध विशेषज्ञों का कहना है कि 4 ऐसे संवेदनशील सवाल हैं, जिन्हें यदि आप किसी दोस्त, रिश्तेदार या पार्टनर से पूछते हैं, तो वे आपके हंसते-खेलते रिश्ते को हमेशा के लिए बर्बाद कर सकते हैं। इन सवालों को पूछने से न केवल सामने वाला व्यक्ति असहज महसूस करता है, बल्कि वह आपसे दूरी भी बनाने लगता है। आइए जानते हैं कि बातचीत के दौरान आपको किन बातों को पूछने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।1. 'अभी तक शादी क्यों नहीं की?' या 'बच्चे कब हो रहे हैं?'यह हमारे समाज में पूछा जाने वाला सबसे आम लेकिन सबसे ज्यादा मानसिक तनाव देने वाला सवाल है:निजी फैसलों पर हमला: शादी करना या न करना, या माता-पिता बनना किसी का भी नितांत व्यक्तिगत फैसला (Personal Choice) होता है।गहरे दर्द की वजह: हो सकता है कि सामने वाला व्यक्ति किसी ब्रेकअप से गुजर रहा हो, या वह किसी मेडिकल/फर्टिलिटी समस्या का सामना कर रहा हो। ऐसे में आपका यह सवाल उनके पुराने जख्मों को कुरेद देता है और वे आपके सामने आने से कतराने लगते हैं।2. 'आपकी सैलरी या कमाई कितनी है?'पैसों से जुड़ा यह सवाल अक्सर लोगों को असहज और हीन भावना (Inferiority Complex) का शिकार बना देता है:जज किए जाने का डर: जब आप किसी से उसकी तनख्वाह (Salary Package) पूछते हैं, तो उसे लगता है कि आप उसकी योग्यता का आकलन केवल पैसों से कर रहे हैं।रिश्ते में कड़वाहट: यदि सामने वाले की कमाई कम है, तो वह शर्मिंदगी महसूस करेगा और यदि ज्यादा है, तो उसे लगेगा कि आप किसी स्वार्थ या जलन की भावना से यह पूछ रहे हैं। पेशेवर और व्यक्तिगत दोनों ही रिश्तों में इस सवाल को 'रेड फ्लैग' माना जाता है।3. 'तुम्हारा वजन इतना ज्यादा (या कम) क्यों हो गया है?'किसी के शारीरिक रंग-रूप या बॉडी शेमिंग (Body Shaming) से जुड़े सवाल सीधे इंसान के आत्मसम्मान पर चोट करते हैं:मेंटल हेल्थ पर असर: 'तुम इतने मोटे क्यों हो गए हो?' या 'कुछ खाते-पीते नहीं हो क्या?' जैसे सवाल किसी को भी गहरे डिप्रेशन में डाल सकते हैं।अदृश्य बीमारियां: वजन का बढ़ना या घटना अक्सर थायराइड, पीसीओडी या भारी मानसिक तनाव (Stress) के कारण हो सकता है। बिना पूरी बात जाने किसी के लुक पर कमेंट करना आपके रिश्ते को तुरंत खत्म कर सकता है।4. 'तुम्हारे पास्ट (अतीत) में क्या हुआ था?'अतीत के पन्नों को जबरन पलटने की कोशिश करना किसी भी वर्तमान रिश्ते के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है:सुरक्षा की भावना को खतरा: हर इंसान का एक अतीत होता है, जिसे शायद वह भुलाकर आगे बढ़ चुका होता है।जबरदस्ती न करें: यदि आपका पार्टनर या दोस्त खुद से अपनी कोई पुरानी बात साझा नहीं करना चाहता, तो बार-बार उनके पुराने रिश्तों या गलतियों के बारे में पूछना उनके भीतर असुरक्षा की भावना पैदा करता है।विशेषज्ञों की सलाह है कि एक हेल्दी रिलेशनशिप (Healthy Relationship) बनाए रखने के लिए सामने वाले की व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान करें। बातचीत को हमेशा सकारात्मक और सपोर्टिव रखें, ताकि लोग आपके साथ सुरक्षित और खुश महसूस करें।
नई दिल्ली/सिलिकॉन वैली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में आया तकनीकी उछाल केवल सॉफ्टवेयर और कोडिंग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले कुशल श्रमिकों की तक़दीर भी पूरी तरह बदल दी है। ज़ी न्यूज़ (Zee News) की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, जहाँ अमेज़न, मेटा, ओरेकल जैसी दिग्गज टेक कंपनियाँ अपने हज़ारों वाइट-कॉलर (White-Collar) आईटी इंजीनियरों की छंटनी (Layoffs) कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर एक नया 'लेबर फ्लिप' (Labour Flip) देखने को मिल रहा है। एआई मॉडल को चलाने के लिए बनाए जा रहे विशाल AI डेटा सेंटर्स (AI Data Centers) के कारण इलेक्ट्रिशियन (Electricians), वेल्डर्स और एचवीएसी (HVAC) टेक्नीशियनों की मांग में ऐतिहासिक उछाल आया है। आलम यह है कि युवा और कुशल इलेक्ट्रिशियन अब सालाना करोड़ों रुपये का बंपर पैकेज हासिल कर रहे हैं, जिसने पारंपरिक कॉर्पोरेट नौकरियों को भी पीछे छोड़ दिया है।सालाना 2.7 करोड़ रुपये तक की सैलरी, बिना किसी स्टूडेंट लोन का बोझ'डर्टी जॉब्स' टीवी शो के प्रसिद्ध होस्ट और उद्योग विशेषज्ञ माइक रोवे (Mike Rowe) द्वारा एक पोडकास्ट में किए गए खुलासे के बाद यह मामला पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है:प्लेनो, टेक्सास का चौंकाने वाला वाकया: माइक रोवे ने बताया कि टेक्सास के एक डेटा सेंटर में काम कर रहे कई ऐसे इलेक्ट्रिशियन (Gen Z Electricians) मिले जिनकी उम्र 30 साल से कम थी। वे अपनी कुशलता और भारी मांग के दम पर सालाना $240,000 (लगभग ₹2.3 करोड़) से $280,000 (लगभग ₹2.7 करोड़) तक की मोटी कमाई कर रहे हैं।कर्ज मुक्त और हाई डिमांड: इन युवा टेक्नीशियनों के सिर पर न तो महंगे अमेरिकी विश्वविद्यालयों के स्टूडेंट लोन (Student Loans) का कोई बोझ है और न ही मंदी का कोई डर। एआई कंपनियों के बीच इनकी मांग इतनी ज़्यादा है कि पिछले 18 महीनों में उन्हें तीन-तीन बार दूसरी कंपनियों द्वारा भारी वेतन वृद्धि देकर 'पोच' (नौकरी से खींचना) किया जा चुका है।क्यों अचानक बढ़ गई है इलेक्ट्रिशियनों की इतनी भारी मांग?एआई का पूरा इकोसिस्टम केवल क्लाउड या कोडिंग पर नहीं, बल्कि हज़ारों शक्तिशाली जीपीयू (GPUs) और विशालकाय फिजिकल सर्वर फॉर्म्स पर काम करता है।बिजली और कूलिंग की भारी खपत: एआई डेटा सेंटर्स को चौबीसों घंटे चालू रखने के लिए भारी मात्रा में हाई-वोल्टेज बिजली और कूलिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है। ट्रांसफार्मर अपग्रेड करने, ग्रिड इंटरकनेक्शन और जटिल वायरिंग के लिए केवल अनुभवी और प्रमाणित इलेक्ट्रिशियन ही काम आ सकते हैं, जिसे कोई एआई बॉट रिप्लेस नहीं कर सकता।कुशल श्रमिकों का भारी टोटा: वैश्विक स्तर पर 71 प्रतिशत से अधिक तकनीकी बाज़ारों में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कुशल श्रमिकों की भारी कमी (Labor Shortage) देखी जा रही है। डेलॉयट (Deloitte) की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में डेटा सेंटर जॉब पोस्टिंग्स में 64% और इलेक्ट्रिकल टेक्नीशियनों की मांग में 180% से अधिक का उछाल आया है।भारत में भी शुरू हो चुका है यह 'ब्लू-कॉलर गोल्ड रश'वैश्विक स्तर के साथ-साथ भारत में भी यह ट्रेंड तेज़ी से पैर पसार रहा है। गूगल (Google) द्वारा विशाखापत्तनम में $15 बिलियन का एआई हब बनाने और मेटा (Meta) द्वारा रिलायंस जियो के साथ साझेदारी में घरेलू डेटा सेंटर्स स्थापित करने की घोषणा के बाद देश में भी यह क्रांति आ चुकी है।टैलेंट फर्म रैंडस्टैड (Randstad) के एक हालिया विश्लेषण के मुताबिक, भारत में पिछले चार वर्षों के भीतर कुशल इलेक्ट्रिशियनों की मांग में 242% और रोबोटिक्स टेक्नीशियनों की मांग में 500% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत में ब्लू-कॉलर श्रमिकों की मजदूरी सालाना 5.7% की दर से बढ़ रही है, जबकि एंट्री-लेवल वाइट-कॉलर (ऑफिस डेस्क जॉब) की सैलरी महज 4% की रफ्तार से बढ़ रही है। इस अभूतपूर्व बदलाव ने यह साबित कर दिया है कि एआई के इस दौर में भविष्य केवल सॉफ्टवेयर इंजीनियरों का ही नहीं, बल्कि उन हुनरमंदों का भी है जो इस विशालकाय डिजिटल साम्राज्य के फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपने हाथों से खड़ा करते हैं।
जम्मू/लखनऊ। मानसून के रौद्र रूप के कारण पहाड़ी राज्य जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के सीमावर्ती जिलों में इस वक्त जलप्रलय जैसे हालात बने हुए हैं। मनीकंट्रोल हिंदी (Moneycontrol Hindi) की एक विशेष ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू संभाग के दो जुड़वां सीमावर्ती जिलों पुंछ (Poonch) और राजौरी (Rajouri) में रात भर हुई मूसलाधार बारिश और बादल फटने के बाद आई अचानक बाढ़ (Flash Floods) और भीषण भूस्खलन (Landslides) ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 12 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है और कई अन्य लापता बताए जा रहे हैं।घाटी में बिगड़ते हालातों और मची तबाही की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने संवेदनशीलता दिखाते हुए अपना दिल्ली दौरा बीच में ही रद्द कर दिया और रविवार दोपहर तुरंत जम्मू लौट आए। उन्होंने जम्मू के सिविल सेक्रेटेरिएट में एक हाई-लेवल इमरजेंसी मीटिंग (High-Level Review Meeting) की अध्यक्षता करते हुए पूरे राज्य की प्रशासनिक मशीनरी को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।पुंछ के सुरनकोट में सबसे ज्यादा तबाही, मलबे में दबे परिवारप्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस मानसूनी आफत का सबसे क्रूर रूप पुंछ जिले के सुरनकोट (Surankote) तहसील में देखने को मिला है:एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत: सुरनकोट के लोअर मर्राह इलाके में एक बड़ा भूस्खलन सीधे रिहायशी मकान पर आ गिरा, जिसकी चपेट में आने से एक ही परिवार के 6 सदस्यों समेत 9 लोगों की मलबे में दबकर मौत हो गई।नदियों का रौद्र रूप: राजौरी शहर में भी उफनती नदी का पानी रिहायशी कॉलोनियों (बेला कॉलोनी) और न्यू बस स्टैंड क्षेत्र में घुस गया, जिससे वहां खड़े करीब 200 से अधिक वाहन ताश के पत्तों की तरह पानी में बह गए या मलबे में दब गए.'जनहानि रोकना पहली प्राथमिकता' — दिल्ली से लौटकर एक्शन में CM उमर अब्दुल्लामुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक पूर्व निर्धारित राजनीतिक प्रदर्शन (Statehood Protest) के सिलसिले में दिल्ली में थे, लेकिन राज्य के नागरिकों पर आए इस संकट को देखते हुए वे तुरंत वापस लौटे. जम्मू पहुंचते ही उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा:सुबह से ही मैं राजौरी शहर और आसपास के इलाकों में हुई अत्यधिक बारिश से उत्पन्न स्थिति पर नजर रख रहा हूं। स्थानीय विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों से मेरा सीधा संपर्क बना हुआ है। इस समय पूरी सरकार और प्रशासन की सबसे पहली प्राथमिकता बहुमूल्य मानव जीवन को सुरक्षित बचाना (Safeguard Precious Lives) है। जिन लोगों की संपत्तियों और मकानों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें सरकार तुरंत हर संभव वित्तीय सहायता और पुनर्वास सामग्री उपलब्ध कराएगी।मुख्यमंत्री ने पुलिस, सेना, स्थानीय वालंटियर्स और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) को युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन (Rescue Operations) चलाने और लापता लोगों की तलाश तेज करने के निर्देश दिए हैं.एलजी मनोज सिन्हा ने जताया दुख, गृह मंत्री अमित शाह ने दिया मदद का भरोसाइस भीषण त्रासदी पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने भी गहरा शोक व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है.केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एलजी मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से फोन पर बात की और केंद्र सरकार की ओर से एनडीआरएफ (NDRF) की अतिरिक्त टीमें भेजने और हर संभव राहत व पुनर्वास सहायता (Central Assistance) देने का पूरा भरोसा दिलाया है. मौसम विभाग (IMD) ने पुंछ, राजौरी और रियासी जिलों के लिए अभी भी ऑरेंज अलर्ट जारी रखा है और चिनाब नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटीय इलाकों को पूरी तरह खाली करा लिया गया है.
नई दिल्ली/लखनऊ। देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार द्वारा गठित 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के तहत अब कर्मचारियों की नई सैलरी और पेंशन की रूपरेखा तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो चुकी है।मनीकंट्रोल हिंदी (Moneycontrol Hindi) की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए वेतन आयोग में कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी का पूरा दारोमदार 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) पर निर्भर करेगा। यह एक ऐसा गुणांक (Multiplier) होता है, जिससे कर्मचारियों की वर्तमान बेसिक सैलरी को गुणा करके नई रिवाइज्ड बेसिक सैलरी (Revised Basic Pay) तय की जाती है। कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों के बीच इसके संभावित आंकड़ों को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे हैं।क्या होता है फिटमेंट फैक्टर और कैसे बदलती है सैलरी?साधारण शब्दों में समझें तो जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है, तो कर्मचारियों की पुरानी बेसिक सैलरी को एक निश्चित नंबर से गुणा किया जाता है, जिसे फिटमेंट फैक्टर कहते हैं।7वें वेतन आयोग का गणित: गौरतलब है कि साल 2016 में जब 7वां वेतन आयोग लागू हुआ था, तब सरकार ने 2.57x का फिटमेंट फैक्टर तय किया था। इसके कारण केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7,000 से बढ़कर सीधे ₹18,000 प्रति माह हो गई थी।8वें वेतन आयोग में क्या हैं उम्मीदें: वर्तमान में चल रही चर्चाओं और विशेषज्ञ अनुमानों के अनुसार, 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर का दायरा 1.92x से लेकर 2.86x के बीच रहने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, विभिन्न कर्मचारी यूनियनों (Staff Unions) की मांग है कि महंगाई के बढ़ते स्तर को देखते हुए इसे न्यूनतम 3.00x या 3.25x तक रखा जाए।सैलरी कैलकुलेशन का फॉर्मूला (Expected Scenarios)अगर सरकार अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी देती है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी पर इसका क्या असर पड़ेगा, इसे नीचे दिए गए गणित से समझा जा सकता है:यदि 2.57x फिटमेंट फैक्टर रहता है (7वें CPC के समान):कैलकुलेशन: ₹18,000 (वर्तमान न्यूनतम बेसिक) 2.57संभावित नई बेसिक सैलरी: ₹46,260यदि 2.28x फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी मिलती है:कैलकुलेशन: ₹18,000 2.28संभावित नई बेसिक सैलरी: ₹41,040यदि 3.00x फिटमेंट फैक्टर (कर्मचारियों की मांग) को अपनाया जाता है:कैलकुलेशन: ₹18,000 3.00संभावित नई बेसिक सैलरी: ₹54,000महत्वपूर्ण नोट: नया फिटमेंट फैक्टर लागू होते ही कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (Dearness Allowance - DA), जो कि 7वें वेतन आयोग के तहत 60% के पार चल रहा है, वह नए बेसिक पे के साथ मर्ज होकर शून्य (0%) पर रीसेट कर दिया जाएगा। इसके बाद भविष्य के डीए की गणना नई बेसिक सैलरी के आधार पर की जाएगी।कब तक लागू होगा नया नियम और किसे मिलेगा फायदा?8वें वेतन आयोग की सिफारिशें सैद्धांतिक रूप से 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जा रही हैं। हालांकि, वेतन आयोग के गठन और उसकी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की समय सीमा (18 महीने) को देखते हुए वास्तविक रूप से संशोधित वेतनमान का भुगतान और बढ़ा हुआ पैसा साल 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में मिलने की उम्मीद है।प्रशासनिक अधिकारियों ने साफ किया है कि भले ही रिपोर्ट आने में थोड़ी देरी हो, लेकिन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 1 जनवरी 2026 से ही पूरा एरियर (Arrears) दिया जाएगा。 इस बड़े फैसले का सीधा लाभ देश के लगभग 48.62 लाख से अधिक सेवारत केंद्रीय कर्मचारियों और 67.85 लाख से ज्यादा पेंशनर्स को मिलेगा, जिससे न केवल उनका रहन-सहन बेहतर होगा बल्कि हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) जैसी अन्य सुविधाएं भी इसी अनुपात में बढ़ जाएंगी।
लखनऊ में आज केशव प्रसाद मौर्य ने खाद्य प्रसंस्करण विभाग के उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के युवक-युवतियों एवं कृषकों को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अधिकाधिक प्रशिक्षित कर उन्हें स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में प्रभावी कार्ययोजना के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र रोजगार सृजन, किसानों की आय में वृद्धि तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन पूरी गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं समयबद्धता के साथ सुनिश्चित किया जाए।उपमुख्यमंत्री श्री मौर्य के निर्देश कि खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा प्रदेश के विभिन्न जनपदों में स्थापित राजकीय खाद्य विज्ञान प्रशिक्षण केन्द्रों एवं सामुदायिक फल संरक्षण एवं प्रशिक्षण केन्द्रों के माध्यम से युवाओं एवं किसानों को खाद्य प्रसंस्करण की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने निर्देशित किया कि निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम समय से पूर्ण कराए जाएं तथा इच्छुक नवयुवकों, नवयुवतियों एवं किसानों तक इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी व्यापक स्तर पर पहुंचाई जाए, जिससे अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।श्री मौर्य जी ने अधिकारियों से कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल औपचारिकता तक सीमित न रहें, बल्कि प्रशिक्षणार्थियों को व्यावहारिक एवं आधुनिक तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराया जाए। प्रशिक्षण अवधि के दौरान नियमित निरीक्षण एवं सतत निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनी रहे। साथ ही प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले युवाओं को स्वरोजगार, उद्यम स्थापना एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए।
मानसून सत्र से पहले लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक, कई अहम विधेयकों पर चर्चा का समय तय
मानसून सत्र से पहले लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में FCRA, आयकर, MSME और राष्ट्रीय सम्मान संशोधन समेत कई विधेयकों पर चर्चा का समय तय किया गया। जानिए पूरा एजेंडा।
टीएमसी के 20 बागी सांसदों के एनसीपीआई में विलय के बाद लोकसभा में अलग सीटें आवंटित की गईं। पार्टी ने एनडीए के साथ रहने का ऐलान किया और मॉनसून सत्र की रणनीति तय की।
लखनऊ। हमारे दैनिक आहार में नमक (Salt) एक ऐसा अनिवार्य हिस्सा है, जिसके बिना हर लजीज व्यंजन का स्वाद अधूरा और फीका लगता है। यह न केवल भोजन का जायका बढ़ाता है, बल्कि इसमें मौजूद सोडियम शरीर के लिक्विड बैलेंस को बनाए रखने में भी मदद करता है। हालांकि, स्वाद के चक्कर में आज की आधुनिक जीवनशैली में लोग अनजाने में जरूरत से ज्यादा नमक का सेवन कर रहे हैं। टीवी9 हिंदी की एक विशेष हेल्थ रिपोर्ट के मुताबिक, अत्यधिक नमक का सेवन शरीर के लिए एक 'साइलेंट किलर' (Silent Killer) की तरह काम करता है, जो धीरे-धीरे अंगों को खोखला कर देता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों (Health Experts) ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते नमक की मात्रा पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह कई जानलेवा बीमारियों को न्योता दे सकता है।ज्यादा नमक खाने से शरीर को होते हैं ये 4 गंभीर नुकसान:1. हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियां (Hypertension & Heart Attack): नमक में सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है। जब हम ज्यादा नमक खाते हैं, तो शरीर में सोडियम का स्तर बढ़ जाता है, जिसे बैलेंस करने के लिए रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) में पानी का दबाव बढ़ता है। इसके कारण हाई ब्लड प्रेशर की समस्या पैदा होती है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक (Heart Attack) और स्ट्रोक का मुख्य कारण बनती है।2. किडनी पर पड़ता है अत्यधिक दबाव (Kidney Damage): हमारे शरीर से अतिरिक्त सोडियम और गंदगी को फिल्टर करने का काम किडनियां करती हैं। जब आहार में नमक की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, तो किडनियों को उसे बाहर निकालने के लिए दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। लंबे समय तक ऐसा होने से किडनी की कार्यक्षमता घटने लगती है और किडनी स्टोन या किडनी फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।3. शरीर में सूजन और वॉटर रिटेंशन (Bloating & Water Retention): अत्यधिक सोडियम के कारण शरीर के ऊतकों (Tissues) में पानी जमा होने लगता है। इसकी वजह से हाथ, पैर, टखनों और चेहरे पर असामान्य सूजन दिखाई देने लगती है, जिसे मेडिकल भाषा में 'वॉटर रिटेंशन' या ब्लोटिंग कहा जाता है।4. हड्डियों का कमजोर होना (Osteoporosis): ज्यादा नमक खाने से पेशाब के जरिए शरीर का कैल्शियम तेजी से बाहर निकलने लगता है। शरीर में कैल्शियम की कमी होने के कारण हड्डियां अंदर से खोखली और कमजोर होने लगती हैं, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) और जोड़ों के दर्द की समस्या समय से पहले ही घेर लेती है।एक्सपर्ट गाइडेंस: 1 दिन में कितना नमक खाना है पूरी तरह सुरक्षित?विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और आहार विशेषज्ञों के कड़े दिशा-निर्देशों के अनुसार, एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति को पूरे दिन में 5 ग्राम से कम (लगभग एक छोटा चम्मच) नमक का ही सेवन करना चाहिए। इसमें वह नमक भी शामिल है जो सब्जियों, दालों या सलाद में ऊपर से डाला जाता है।दुर्भाग्य से, भारतीय खानपान में औसतन प्रति व्यक्ति रोज 10 से 12 ग्राम नमक का सेवन कर रहा है, जो तय सीमा से दोगुने से भी अधिक है।डाइट में नमक की मात्रा कम करने के 4 आसान व्यावहारिक उपाय:ऊपर से नमक डालना बंद करें: डाइनिंग टेबल पर नमकदानी (Salt Shaker) रखना तुरंत बंद कर दें। सलाद, रायता या फलों के ऊपर कच्चा नमक छिड़क कर खाने की आदत पूरी तरह छोड़ दें।पैकेटबंद फूड्स से बनाएं दूरी: बाजार में मिलने वाले चिप्स, नमकीन, सॉस, डिब्बाबंद सूप, अचार और पापड़ में प्रेषण (Preservation) के लिए भारी मात्रा में 'छिपा हुआ नमक' (Hidden Salt) होता है। इन्हें खरीदने से पहले पैकेट पर सोडियम की मात्रा जरूर चेक करें।मसालों और जड़ी-बूटियों का लें सहारा: खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए केवल नमक पर निर्भर न रहें। भोजन में नींबू का रस, अमचूर पाउडर, काली मिर्च, लहसुन, धनिया और पुदीना जैसी प्राकृतिक चीजों का उपयोग बढ़ाएं, जिससे कम नमक में भी खाना लजीज लगेगा।सेंधा नमक का सीमित विकल्प: कई लोग साधारण नमक की जगह पूरी तरह सेंधा नमक (Pink Salt) का इस्तेमाल करने लगते हैं। हालांकि सेंधा नमक स्वास्थ्य के लिए बेहतर है, लेकिन इसमें भी सोडियम होता है, इसलिए इसकी मात्रा भी सीमित ही होनी चाहिए।
लखनऊ। हिंदू कैलेंडर और सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव (Lord Shiva) की कृपा पाने का सबसे उत्तम और कल्याणकारी व्रत माना गया है। प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। टीवी9 हिंदी की एक विशेष धार्मिक रिपोर्ट के मुताबिक, 26 जुलाई 2026 को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जो कि आषाढ़ महीने का आखिरी प्रदोष व्रत होगा। चूंकि इस बार त्रयोदशी तिथि रविवार के दिन पड़ रही है, इसलिए इसे 'रवि प्रदोष व्रत' (Ravi Pradosh Vrat) के नाम से जाना जाएगा। ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत का पालन करने से मनुष्य को न केवल महादेव का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि सूर्य देव की कृपा से समाज में मान-सम्मान, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की भी प्राप्ति होती है।रवि प्रदोष व्रत का धार्मिक व आध्यात्मिक महत्वशास्त्रों में बताया गया है कि प्रदोष काल (Pradosh Kaal) के दौरान महादेव अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और कैलाश पर्वत पर रजत भवन में नृत्य करते हैं। इस विशिष्ट समय में की गई पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है:आरोग्य और दीर्घायु का वरदान: रविवार का संबंध सूर्य देव से है, जो आत्मा, पिता और अच्छी सेहत के कारक हैं। जब रविवार और त्रयोदशी का यह पावन संयोग बनता है, तो व्रत करने वाले जातक की कुंडली में सूर्य और चंद्रमा दोनों मजबूत होते हैं, जिससे पुराने रोगों से मुक्ति मिलती है।मानसिक शांति: जो जातक नियमित रूप से प्रदोष व्रत का पालन करते हैं, उनके जीवन से अज्ञात भय, मानसिक अवसाद और दरिद्रता पूरी तरह समाप्त हो जाती है।पूजा का सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat 2026)वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 26 जुलाई 2026 को दोपहर के समय होगी और इसका समापन अगले दिन होगा। चूंकि प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त के बाद यानी प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए उदयातिथि के नियमों के तहत यह व्रत 26 जुलाई, रविवार को ही रखा जाएगा।इस दिन महादेव की पूजा के लिए सबसे विशेष और कल्याणकारी शुभ मुहूर्त शाम 07:12 बजे से लेकर रात 09:18 बजे तक रहेगा। इस सवा दो घंटे की अवधि के भीतर शिव आराधना करना सर्वोत्तम और महापुण्यदायी माना गया है।रवि प्रदोष व्रत की सरल और प्रामाणिक पूजा विधि:प्रदोष व्रत के दिन भक्तों को पूरी निष्ठा के साथ निम्नलिखित पूजन प्रक्रिया का पालन करना चाहिए:प्रातः काल नियम: रविवार की सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ या सफेद रंग के वस्त्र धारण करें। सबसे पहले तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य दें और व्रत का संकल्प लें।दिनभर का संयम: पूरे दिन निराहार या फलाहार रहकर भगवान शिव के मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का मानसिक जाप करते रहें। इस दिन किसी की निंदा न करें और क्रोध से बचें।प्रदोष काल पूजा: शाम को शुभ मुहूर्त शुरू होने से पहले दोबारा स्नान करें या हाथ-पैर धोकर पवित्र हो जाएं। घर के मंदिर या किसी शिवालय में जाकर शिवलिंग का गंगाजल, गाय के कच्चे दूध, दही, शहद और घी से (पंचामृत) अभिषेक करें।प्रिय सामग्रियां करें अर्पित: महादेव को चंदन का तिलक लगाएं, अक्षत (साबुत चावल), बेलपत्र, धतूरा, भांग और मदार के फूल अर्पित करें। माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं।कथा और आरती: शुद्ध देसी घी का दीपक जलाकर 'रवि प्रदोष व्रत कथा' का श्रवण या पाठन करें। अंत में शिव चालीसा का पाठ करें और कपूर से महादेव की आरती उतारकर सभी में प्रसाद वितरित करें।
लखनऊ। घर की सुख-शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक समृद्धि में वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) का बहुत बड़ा योगदान होता है। अक्सर लोग घर के वास्तु दोषों को दूर करने के लिए महंगे उपाय या तोड़-फोड़ करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रकृति ने हमें कुछ ऐसे पेड़-पौधे दिए हैं जिन्हें सही दिशा में लगाने मात्र से ही घर के सारे दोष दूर हो जाते हैं? टीवी9 हिंदी की एक विशेष धार्मिक और वास्तु रिपोर्ट के मुताबिक, कनेर का पौधा (Kaner Plant) एक ऐसा ही बेहद चमत्कारी और पवित्र पौधा है।आमतौर पर कनेर के फूलों का इस्तेमाल भगवान शिव और अन्य देवी-देवताओं की पूजा में किया जाता है, लेकिन वास्तु शास्त्र में इस पौधे को 'धन को आकर्षित करने वाला चुंबक' माना गया है। मान्यता है कि जिस घर में कनेर का पौधा सही नियमों के साथ लगा होता है, वहां कभी भी दरिद्रता पैर नहीं पसार सकती। आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स के अनुसार कनेर के पौधे से मिलने वाले अद्भुत वास्तु लाभ (Vastu Benefits) और इसे लगाने की सही दिशा।कनेर के पौधे का धार्मिक महत्व: त्रिदेवों का मिलता है आशीर्वादसनातन परंपरा में कनेर के पौधे को साक्षात देवस्वरूप माना गया है। इसके फूलों के रंगों के आधार पर इसका संबंध अलग-अलग देवी-देवताओं से है:सफेद कनेर: सफेद रंग के फूलों वाली कनेर मां लक्ष्मी और विद्या की देवी मां सरस्वती को अत्यंत प्रिय है। इसे घर में लगाने से मानसिक शांति मिलती है और सुख-समृद्धि का वास होता है।पीली कनेर: पीले रंग के फूलों वाली कनेर में साक्षात भगवान विष्णु और धन के देवता कुबेर का वास माना गया है। इसे लगाने से घर में धन-धान्य के भंडार हमेशा भरे रहते हैं।लाल कनेर: लाल या गुलाबी कनेर के फूल सूर्य देव और हनुमान जी को ऊर्जा व शक्ति के प्रतीक के रूप में अर्पित किए जाते हैं, जिससे घर के सदस्यों का यश और आत्मविश्वास बढ़ता है।वास्तु के अनुसार किस दिशा में लगाएं कनेर का पौधा?वास्तु विज्ञान के अनुसार, किसी भी पवित्र पौधे का पूर्ण लाभ तभी मिलता है जब उसे सही दिशा में स्थापित किया जाए:उत्तर या पूर्व दिशा (North or East): कनेर के पौधे को लगाने के लिए घर की उत्तर या पूर्व दिशा सबसे उत्तम और मंगलकारी मानी गई है। चूंकि उत्तर दिशा के स्वामी कुबेर देव हैं, इसलिए इस दिशा में पीली कनेर लगाने से धन का आगमन तेजी से होता है।ईशान कोण (North-East): घर का उत्तर-पूर्व कोना (ईशान कोण) देवताओं का स्थान होता है। इस कोने में सफेद या पीली कनेर का पौधा लगाने से घर की समस्त नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) नष्ट हो जाती है और सकारात्मकता का संचार होता है।कनेर के पौधे से मिलने वाले 4 जादुई वास्तु लाभ:1. आर्थिक तंगी से परमानेंट छुटकारा: यदि आपके घर में पैसा आता तो है लेकिन टिकता नहीं है या बेवजह के खर्चों में बह जाता है, तो कुबेर देव की प्रिय पीली कनेर घर में लाएं। यह आय के नए स्रोत बनाती है और कर्ज से मुक्ति दिलाती है।2. पारिवारिक कलह और तनाव का नाश: जिन घरों में अक्सर बिना किसी बात के छोटी-मोटी बहस या गृह क्लेश होता रहता है, वहां सफेद कनेर का पौधा रामबाण का काम करता है। यह पारिवारिक सदस्यों के विचारों को शांत कर आपसी प्रेम को बढ़ाता है।3. समाज में यश और कीर्ति की प्राप्ति: लाल कनेर का पौधा घर के सदस्यों के जीवन में मान-सम्मान और तरक्की के द्वार खोलता है। विशेषकर नौकरीपेशा और बिजनेसमैन के लिए यह बहुत फलदायी माना गया है।4. औषधीय गुणों से भरपूर: वास्तु के अलावा आयुर्वेद में भी कनेर को एक महत्वपूर्ण पौधा माना गया है। हालांकि, यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि कनेर का पौधा आंतरिक रूप से विषैला (Toxic) होता है, इसलिए इसके फूलों या पत्तियों का सेवन भूलकर भी न करें और इसे छोटे बच्चों व पालतू जानवरों की पहुंच से हमेशा दूर रखें।
लखनऊ। वैदिक ज्योतिष में शनि देव को न्याय और कर्मफल का दाता माना गया है। नवग्रहों में शनि सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं, इसलिए जब भी वे अपनी चाल बदलते हैं, तो उसका गहरा और व्यापक असर सभी 12 राशियों के जीवन पर देखने को मिलता है। टीवी9 हिंदी की एक विशेष ज्योतिषीय रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 का एक सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण ग्रह गोचर 27 जुलाई 2026 को होने जा रहा है, जब शनि देव वक्री (Saturn Retrograde) यानी उल्टी चाल चलना शुरू करेंगे।ज्योतिष आचार्यों का मानना है कि शनि की इस टेढ़ी या वक्री चाल का प्रभाव इसके शुरू होने से कुछ दिन पहले ही महसूस होने लगता है। इस दौरान लोगों को अपने करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक रिश्तों में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 27 जुलाई से शुरू हो रही शनि की वक्री चाल के कारण मेष और तुला सहित 5 विशेष राशियों के जातकों को बेहद सतर्क रहने और संभलकर कदम बढ़ाने की सलाह दी गई है, क्योंकि उन्हें इस अवधि में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।शनि की वक्री चाल का क्या है मतलब?खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से वक्री होने का मतलब यह कतई नहीं है कि शनि वास्तव में अंतरिक्ष में पीछे की ओर भागने लगते हैं। दरअसल, पृथ्वी और शनि की गति में अंतर होने के कारण धरती से देखने पर ऐसा आभास होता है कि शनि देव पीछे की ओर चल रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में शनि की इस वक्री अवधि को 'कठिन आत्ममंथन, धैर्य की परीक्षा और कर्मों की समीक्षा' का समय माना गया है।इन 5 राशियों को रहना होगा 'रेड अलर्ट' पर, बढ़ सकती हैं परेशानियां:1. मेष राशि (Aries): शनि की वक्री चाल के प्रभाव से मेष राशि के नौकरीपेशा लोगों पर काम का दबाव (Work Pressure) अचानक बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। इस दौरान किसी भी महत्वपूर्ण व्यावसायिक या व्यक्तिगत मामले में जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचें। पैसों के लेन-देन और निवेश के मामलों में अत्यधिक सावधानी बरतें, अन्यथा धन हानि हो सकती है।2. कर्क राशि (Cancer): कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और परिवार के बीच संतुलन (Balance) बनाने में कठिनाई पैदा कर सकता है। कार्यक्षेत्र में अनचाही अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। इस अवधि में किसी भी तरह के वाद-विवाद, बहस या कानूनी झमेले से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें और अपनी सेहत का विशेष ख्याल रखें।3. तुला राशि (Libra): तुला राशि वाले जातकों के फिजूलखर्चों में अचानक भारी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे बजट बिगड़ सकता है। यदि आप किसी बड़े प्रोजेक्ट या शेयर बाजार में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो विशेषज्ञों की सलाह के बिना आगे न बढ़ें। नौकरी में सहकर्मियों या किसी बाहरी व्यक्ति पर आंख बंद करके भरोसा करना भारी पड़ सकता है।4. मकर राशि (Capricorn): चूंकि शनि देव मकर राशि के ही स्वामी हैं, इसलिए उनकी इस चाल का सबसे ज्यादा और सीधा असर इस राशि पर देखने को मिलेगा। मकर राशि वालों के बनते हुए कार्यों में बेवजह की देरी (Delays) हो सकती है और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। ऐसे समय में धैर्य बनाए रखना ही सफलता की एकमात्र कुंजी होगी।5. मीन राशि (Pisces): मीन राशि के जातकों को इस गोचर के दौरान अत्यधिक मानसिक तनाव और अज्ञात भय की समस्या हो सकती है। पुराने कानूनी या पारिवारिक विवाद दोबारा उभरकर सामने आ सकते हैं, जिससे चिंता बढ़ेगी। कोई भी नया व्यापार शुरू करने या बड़ा वित्तीय जोखिम लेने के लिए यह समय अनुकूल नहीं है।शनि के प्रकोप और कष्टों से बचने के 4 अचूक ज्योतिषीय उपाय:यदि आपकी राशि भी इन 5 प्रभावित राशियों में शामिल है, तो शनि देव के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए ज्योतिषियों ने ये सरल उपाय बताए हैं:शनिवार का व्रत और दान: प्रत्येक शनिवार को शनि देव के मंदिर जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं। काले तिल, काली उड़द की दाल, छाता या लोहे की वस्तुओं का किसी जरूरतमंद को दान करें।हनुमान चालीसा का पाठ: शनि देव परम हनुमान भक्त हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति नियमित रूप से हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करता है, शनि देव उसे कभी प्रताड़ित नहीं करते।महामृत्युंजय मंत्र का जाप: प्रतिदिन सुबह या शाम को भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और सभी ग्रह दोष शांत होते हैं।कर्मों में शुचिता: शनि देव न्याय के देवता हैं, इसलिए इस अवधि में किसी भी गरीब, असहाय, मजदूर या बेजुबान जानवर को परेशान न करें। ईमानदारी से अपना काम करें, जिससे शनि देव स्वतः शुभ फल देने लगेंगे।
लखनऊ। सावन (Sawan 2026) का पवित्र महीना शुरू होते ही देश भर के शिवालयों में 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' की गूंज सुनाई देने लगती है। भगवान शिव के भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक के साथ-साथ कई तरह की पूजन सामग्रियां अर्पित करते हैं। लेकिन सनातन परंपरा में महादेव की पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक उन्हें भांग और धतूरा (Bhang and Dhatura) न चढ़ाया जाए। टीवी9 हिंदी की एक विशेष धार्मिक रिपोर्ट के मुताबिक, जहां अन्य देवी-देवताओं को छप्पन भोग और अत्यंत सुगंधित फूल चढ़ाए जाते हैं, वहीं देवों के देव महादेव को कड़वा धतूरा और नशीली भांग प्रिय है। कई लोग इसे सिर्फ एक लोक परंपरा मानते हैं, लेकिन इसके पीछे बेहद गंभीर पौराणिक कथाएं (Mythology) और आयुर्वेद से जुड़े गहरे वैज्ञानिक कारण छिपे हैं। आइए जानते हैं कि सावन में शिव जी को ये चीजें अर्पित करने का असली रहस्य क्या है।पौराणिक कथा: समुद्र मंथन और हलाहल विष का प्रभावपौराणिक ग्रंथों और शिव पुराण (Shiva Purana) के अनुसार, सावन के महीने में भांग-धतूरा चढ़ाने की परंपरा का सीधा संबंध देव-असुर संग्राम और समुद्र मंथन से है:हलाहल विष की उत्पत्ति: जब देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तो उसमें से चौदह रत्नों के साथ-साथ 'हलाहल' नामक अत्यंत विनाशकारी और भयंकर विष भी निकला। उस विष की गर्मी से ब्रह्मांड जलने लगा।महादेव का विषपान: सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस हलाहल विष को अपने कंठ में धारण कर लिया, जिससे उनका नाम 'नीलकंठ' पड़ा।जलन शांत करने का उपाय: विषपान करते ही महादेव का शरीर और मस्तिष्क अत्यधिक गर्म हो गए और वे तीव्र जलन से व्याकुल होने लगे। तब देवताओं और जड़ी-बूटी के ज्ञाता ऋषियों ने शिव जी के सिर की गर्मी और शरीर की तपन को शांत करने के लिए उन पर जल की अविरल धारा (जलाभिषेक) चढ़ाई और शीतल प्रवृत्ति वाली औषधियां जैसे—भांग, धतूरा और बेलपत्र अर्पित किए। इन औषधियों के प्रभाव से महादेव के शरीर की जलन शांत हुई। तभी से सावन मास में उन्हें ये चीजें चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।धार्मिक महत्व: अहंकार और कड़वाहट का समर्पणआध्यात्मिक दृष्टिकोण से, शिव जी को भांग और धतूरा चढ़ाना इंसानी विकारों के त्याग का प्रतीक है। धतूरा एक कांटेदार और अत्यंत कड़वा फल होता है, जिसे आम लोग किसी काम में नहीं लाते। महादेव को इसे अर्पित करने का अर्थ है कि मनुष्य अपने भीतर की कड़वाहट, ईर्ष्या, क्रोध और अहंकार जैसी बुराइयों को भगवान के चरणों में सौंप दे और सात्विक जीवन अपनाए। वहीं भांग मन को पूरी तरह शांत और एकाग्र करने का संदेश देती है, ताकि भक्त बाहरी दुनिया के आकर्षणों को भूलकर पूरी तरह शिव भक्ति में लीन हो सके।वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक पहलू: असाधारण जड़ी-बूटियांटीवी9 हिंदी की रिपोर्ट में इसके वैज्ञानिक पहलू पर भी प्रकाश डाला गया है। आयुर्वेद (Ayurveda) में भांग और धतूरे को बेहद शक्तिशाली और महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियों की श्रेणी में रखा गया है:तापमान को नियंत्रित करना: सावन के महीने में बारिश के कारण वातावरण में नमी और तापमान में तेजी से उतार-चढ़ाव होता है, जिससे कई तरह की संक्रामक बीमारियां फैलती हैं। धतूरा और भांग स्वभाव से बेहद गर्म और वात-कफ नाशक होते हैं।सीमित मात्रा में औषधि: आयुर्वेद के अनुसार, यदि अत्यंत सीमित और शुद्ध रूप में इनका औषधीय इस्तेमाल किया जाए, तो ये जोड़ों के दर्द, अस्थमा, त्वचा रोग और मानसिक तनाव को दूर करने में रामबाण सिद्ध होते हैं। चूंकि सावन में प्रकृति इन पौधों को बहुतायत में उगाती है, इसलिए प्राचीन ऋषियों ने इन्हें प्रकृति और ईश्वर के प्रति सम्मान प्रकट करने के रूप में पूजा पद्धति से जोड़ दिया।शिव भक्तों के लिए आवश्यक सावधानीधार्मिक जानकारों और डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि शिव जी को भांग और धतूरा चढ़ाना पूरी तरह से एक आध्यात्मिक क्रिया है। भक्तों को पूजा के नाम पर अत्यधिक भांग का सेवन (Intoxication) करने या नशे के रूप में इसका गलत इस्तेमाल करने से पूरी तरह बचना चाहिए। शिव पूजा का वास्तविक अर्थ मन को शुद्ध, शांत और संयमित रखना है, न कि नशे में डूबना। इस सावन, भोलेनाथ की पूजा पूरी श्रद्धा से करें और इन पवित्र औषधियों को केवल उनके चरणों में अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
लखनऊ। हर माता-पिता का यह सपना होता है कि उनका बच्चा पढ़ाई-लिखाई में अव्वल आए, प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करे और उसका करियर शानदार बने। इसके लिए वे हर संभव सुविधाएं और अच्छे से अच्छे स्कूल-कोचिंग का इंतजाम भी करते हैं। लेकिन कई बार देखा जाता है कि तमाम कोशिशों के बावजूद बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लगता, वह थोड़ी देर बैठते ही ऊब जाता है या फिर उसे पढ़ा हुआ याद नहीं रहता। टीवी9 हिंदी की एक विशेष वास्तु रिपोर्ट के मुताबिक, इस समस्या के पीछे एक बड़ा कारण बच्चे के स्टडी रूम का वास्तु दोष (Vastu Dosh) हो सकता है। वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञों (Vastu Experts) का मानना है कि पढ़ाई के कमरे में ऊर्जा का प्रवाह यदि नकारात्मक है, तो यह सीधे तौर पर बच्चे की एकाग्रता (Concentration) और मानसिक क्षमता को प्रभावित करता है। आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स के अनुसार स्टडी रूम के लिए कौन से अचूक वास्तु नियम अपनाने चाहिए।पढ़ाई के लिए सबसे उत्तम दिशा: ईशान कोण और पूर्व दिशा का महत्ववास्तु विज्ञान में दिशाओं का विशेष महत्व है, और जब बात बुद्धि व विद्या की हो, तो सही दिशा का चुनाव और भी महत्वपूर्ण हो जाता है:ईशान कोण (North-East Corner): स्टडी रूम के लिए घर का उत्तर-पूर्व हिस्सा यानी ईशान कोण सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यह दिशा देवी-देवताओं और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र है, जो मानसिक शांति और एकाग्रता को बढ़ाती है।उत्तर या पूर्व दिशा (North or East): यदि ईशान कोण में जगह न हो, तो बच्चे का स्टडी रूम उत्तर या पूर्व दिशा में भी बनाया जा सकता है। पढ़ते समय बच्चे का मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। मान्यता है कि इससे ज्ञानार्जन में वृद्धि होती है और कॉस्मिक एनर्जी का सीधा लाभ मिलता है।स्टडी टेबल का सही लेआउट: एक्सपर्ट्स ने बताए ये 4 जरूरी नियम1. दीवार से सटाकर न रखें टेबल: वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, स्टडी टेबल को कभी भी सामने की दीवार से पूरी तरह सटाकर (Blocked) नहीं रखना चाहिए। टेबल और दीवार के बीच थोड़ी खाली जगह होनी चाहिए। सामने खुली जगह होने से बच्चे के विचारों में स्पष्टता आती है और नए विचारों का जन्म होता है।2. पीठ के पीछे न हो खिड़की या दरवाजा: पढ़ते समय बच्चे की पीठ ठीक मुख्य दरवाजे या बड़ी खिड़की की तरफ नहीं होनी चाहिए। इससे ध्यान भटकने (Distraction) की संभावना सबसे ज्यादा होती है और बच्चा असुरक्षित महसूस करता है। पीठ के पीछे एक मजबूत दीवार का होना सबसे अच्छा माना जाता है।3. बीम के नीचे बैठने से बचें: ध्यान रहे कि स्टडी टेबल या बच्चे की कुर्सी किसी भी प्रकार के ओवरहेड बीम (छत की पिलर लाइन) के ठीक नीचे न हो। बीम के नीचे बैठने से बच्चे पर मानसिक दबाव (Mental Stress) बढ़ता है, जिससे सिरदर्द और एकाग्रता में कमी की शिकायत हो सकती है।4. टेबल को रखें क्लटर-फ्री: स्टडी टेबल पर किताबों का अंबार या कबाड़ जमा न होने दें। केवल वही किताबें टेबल पर रखें जिनकी उस समय जरूरत हो। टूटे हुए पेन, बंद घड़ियां या अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स तुरंत हटा दें, क्योंकि ये नकारात्मक ऊर्जा पैदा करते हैं।रंगों का चयन और रोशनी की सही व्यवस्थास्टडी रूम में रंगों का तालमेल बच्चे के मूड को बहुत हद तक प्रभावित करता है। इस कमरे में कभी भी गहरे, चमकीले या बहुत गहरे काले, नीले रंगों का प्रयोग न करें। विशेषज्ञों के अनुसार, स्टडी रूम के लिए हल्का पीला, क्रीम, लाइट ग्रीन (हरा) या सफेद रंग सबसे उत्तम है। हरा रंग बुद्धिमत्ता और पीला रंग ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा, कमरे में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और हवा (Ventilation) आनी चाहिए। टेबल पर लाइट हमेशा बाईं ओर (Left Side) से आनी चाहिए ताकि पढ़ते या लिखते समय हाथ की परछाईं किताबों पर न पड़े।माता-पिता के लिए विशेष टिप्स: इन मूर्तियों को कमरे में दें स्थानबच्चे के स्टडी रूम में माता-पिता को ज्ञान की देवी मां सरस्वती या बुद्धि के देवता भगवान गणेश की एक छोटी सी सुंदर मूर्ति या तस्वीर जरूर लगानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, कमरे के उत्तर-पूर्व कोने में एक क्रिस्टल ग्लोब (Crystal Globe) रखना भी बेहद शुभ माना जाता है, जिसे बच्चे को दिन में एक-दो बार घुमाना चाहिए। यह सकारात्मक ऊर्जा को सक्रिय करता है। इन सरल मगर जादुई वास्तु उपायों को अपनाकर आप अपने बच्चे के अध्ययन कक्ष को सफलता का केंद्र बना सकते हैं।
नई दिल्ली/लखनऊ। ग्लोबल टेक दिग्गज सैमसंग (Samsung) अपने प्रीमियम मुड़ने वाले स्मार्टफोन्स की नई जनरेशन को ग्लोबल मार्केट में उतारने के लिए पूरी तरह तैयार है। टेक्नोलॉजी गलियारों और लीक्स के अनुसार, कंपनी अगले हफ्ते 22 जुलाई 2026 को लंदन में अपना बहुप्रतीक्षित ‘Galaxy Unpacked 2026’ इवेंट आयोजित करने जा रही है। इस मेगा इवेंट में सैमसंग के अगले क्लैमशेल फोल्डेबल फोन Samsung Galaxy Z Flip 8 को आधिकारिक तौर पर पेश किया जाएगा। हालांकि, इस आधिकारिक लॉन्चिंग से ठीक पहले टीवी9 हिंदी और टेक लीक्स के माध्यम से इस अपकमिंग फ्लिप फोन की संभावित कीमत, लॉन्च डेट और सभी धांसू स्पेसिफिकेशन्स (Roundup) की पूरी कुंडली सामने आ गई है।लॉन्च डेट और कब आ रहा है यह फोन?सैमसंग ने पहले ही इस बात के संकेत दे दिए हैं कि उसका गैलेक्सी अनपैक्ड इवेंट 22 जुलाई को लंदन में आयोजित किया जाएगा। भारतीय समयानुसार यह इवेंट शाम 6:30 बजे से शुरू होगा, जिसे फैंस सैमसंग की ऑफिशियल वेबसाइट और यूट्यूब चैनल पर लाइव देख सकेंगे। गैलेक्सी जेड फ्लिप 8 के साथ-साथ इस इवेंट में Galaxy Z Fold 8, Galaxy Z Fold 8 Ultra और नई Galaxy Watch 9 सीरीज से भी पर्दा उठाया जाएगा।Samsung Galaxy Z Flip 8 के संभावित स्पेसिफिकेशन्स (Expected Specs):बड़ी और क्रीज-फ्री डिस्प्ले: लीक्स के मुताबिक, इस नए फ्लिप फोन में 120Hz एडेप्टिव रिफ्रेश रेट और 2,600 निट्स की पीक ब्राइटनेस के साथ 6.9-इंच का प्राइमरी फोल्डेबल AMOLED डिस्प्ले मिल सकता है। वहीं, इसका बाहरी कवर डिस्प्ले भी अपग्रेड होकर 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ 4.1-इंच का हो सकता है।प्रोसेसर और परफॉर्मेंस: सैमसंग इस बार भी डुअल-चिप स्ट्रेटेजी (Dual-Chip Strategy) अपना सकता है। अमेरिकी बाजार में इसमें स्नैपड्रैगन 8 एलीट जनरेशन 5 (Snapdragon 8 Elite Gen 5) चिपसेट मिलने की उम्मीद है, जबकि भारत और यूरोपीय देशों में यह फोन 2nm आर्किटेक्चर पर आधारित Exynos 2600 प्रोसेसर के साथ आ सकता है।स्टोरेज और रैम: डिवाइस में स्टैंडर्ड के तौर पर 12GB LPDDR5X रैम दी जा सकती है, जिसके साथ 256GB और 512GB UFS 4.1 इंटरनल स्टोरेज के विकल्प मिलेंगे।अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर: यह डिवाइस आउट-ऑफ-द-बॉक्स Android 17 पर आधारित One UI 9 इंटरफेस पर रन करेगा। कंपनी इसके साथ पूरे 7 साल के ओएस और सिक्योरिटी अपडेट्स की गारंटी दे सकती है।कैमरा और बैटरी बैकअप: फोटोग्राफी के लिए इसके रियर में 50 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा और 12 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड लेंस मिल सकता है। सेल्फी के लिए 10 मेगापिक्सल का फ्रंट शूटर होगा। पावर बैकअप के लिए इसमें 4,300mAh की बैटरी दी जाएगी, जो 25W वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करेगी।भारत और ग्लोबल मार्केट में क्या होगी इसकी संभावित कीमत?कीमतों को लेकर लीक रिपोर्ट्स का दावा है कि सैमसंग इस बार अपने फोल्डेबल लाइनअप को पहले से थोड़ा प्रीमियम सेगमेंट में रख सकता है। यूरोप में इसके 256GB बेस वेरिएंट की संभावित कीमत EUR 1,299 (लगभग ₹1,41,000) और 512GB मॉडल की कीमत EUR 1,499 (लगभग ₹1,60,000) के आसपास हो सकती है।हालांकि, भारतीय बाजार में ऑफर्स और लोकल असेंबलिंग के चलते इसकी शुरुआती कीमत ₹1,19,999 के आसपास रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। सटीक और आधिकारिक कीमतों के लिए हमें 22 जुलाई को होने वाले इवेंट का इंतजार करना होगा।
लखनऊ। आज के आधुनिक दौर में जहां मेडिकल साइंस ने अपार तरक्की कर ली है, वहीं दूसरी ओर भारतीय युवाओं में एक बेहद गंभीर और साइलेंट हेल्थ क्राइसिस पैर पसार रहा है। यह संकट है—इनफर्टिलिटी (Infertility) यानी बांझपन का बढ़ता जोखिम। टीवी9 हिंदी की एक विशेष हेल्थ रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में भारतीय पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन क्षमता से जुड़ी समस्याएं रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ी हैं। मेडिकल एक्सपर्ट्स और आईवीएफ (IVF) स्पेशलिस्ट्स का स्पष्ट मानना है कि इस खतरे के पीछे कोई जेनेटिक या जन्मजात बीमारी नहीं, बल्कि युवाओं की रोजमर्रा की खराब लाइफस्टाइल (Bad Lifestyle Habits) सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। अनजाने में की जाने वाली कुछ सामान्य आदतें हमारे शरीर के हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ रही हैं, जो अंततः माता-पिता बनने के सुख में एक बड़ी बाधा बनकर सामने आ रही हैं।एक्सपर्ट्स के अनुसार इनफर्टिलिटी का जोखिम बढ़ाने वाली 5 सबसे खराब आदतें:1. अत्यधिक मानसिक तनाव और एंग्जायटी (Chronic Stress): आज की कॉर्पोरेट लाइफ और पर्सनल लाइफ के बीच संतुलन न बना पाने के कारण युवा लगातार तनाव में जी रहे हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब शरीर लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो 'कोर्टिसोल' (Cortisol) नामक स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन और महिलाओं में एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन जैसे आवश्यक रीप्रोडक्टिव हार्मोन्स के प्राकृतिक स्राव को बुरी तरह प्रभावित करता है, जिससे फर्टिलिटी घटने लगती है।2. सिगरेट, शराब और नशीले पदार्थों का सेवन (Smoking & Alcohol): युवाओं में सोशल ड्रिंकिंग और स्मोकिंग का बढ़ता चलन प्रजनन अंगों के लिए जहर के समान साबित हो रहा है। तंबाकू में मौजूद निकोटीन और अन्य हानिकारक केमिकल्स पुरुषों में स्पर्म काउंट (Sperm Count) व उसकी गतिशीलता (Motility) को तेजी से घटाते हैं। वहीं, महिलाओं में यह अंडों की गुणवत्ता (Egg Quality) को खराब कर देता है, जिससे कंसीव करने में भारी कठिनाई होती है।3. प्रोसेस्ड फूड और अनहेल्दी डाइट (Junk Food & Obesitiy): जंक फूड, अत्यधिक ऑयली, डिब्बाबंद भोजन और मैदे से बनी चीजों का लगातार सेवन करने से शरीर में न्यूट्रिशन की कमी हो जाती है। इसके कारण मोटापा (Obesity) तेजी से बढ़ता है। महिलाओं में मोटापा सीधे तौर पर पीसीओडी (PCOD) और पीसीओएस (PCOS) जैसी बीमारियों को जन्म देता है, जो अनियमित पीरियड्स और इनफर्टिलिटी का सबसे मुख्य कारण हैं।4. देर रात तक जागना और अधूरी नींद (Poor Sleep Cycle): लैपटॉप, मोबाइल स्क्रीन और ओटीटी के चक्कर में रातभर जागना आज के युवाओं की पहचान बन चुका है। डॉक्टरों के अनुसार, जब हम रात में गहरी नींद में होते हैं, तो हमारा शरीर हार्मोन्स को रेगुलेट और टिश्यूज को रिपेयर करता है। स्लीप साइकिल बिगड़ने से शरीर का नेचुरल बॉडी क्लॉक (Circadian Rhythm) तबाह हो जाता है, जिसका सीधा असर फर्टिलिटी साइकिल्स पर पड़ता है।5. फिजिकल एक्टिविटी की कमी (Sedentary Lifestyle): ऑफिस में 8 से 10 घंटे लगातार बैठकर काम करना और दिनभर में कोई भी शारीरिक व्यायाम, योग या वॉक न करना भी एक बड़ी वजह है। निष्क्रिय जीवनशैली के कारण पेल्विक एरिया (प्रजनन अंगों के आसपास के हिस्से) में ब्लड सर्कुलेशन ठीक से नहीं हो पाता, जिससे पुरुषों में एग्रेसिव स्पर्म प्रोडक्शन और महिलाओं में ओव्यूलेशन की प्रक्रिया बाधित होती है।डॉक्टरों की सलाह: समय रहते लाइफस्टाइल में करें ये जरूरी सुधारफर्टिलिटी विशेषज्ञों का कहना है कि इस गंभीर खतरे से बचने का एकमात्र और सबसे सुलभ तरीका यह है कि युवा तुरंत अपनी आदतों में सुधार करें। अपनी दैनिक दिनचर्या में कम से कम 30 से 45 मिनट का व्यायाम या योग जरूर शामिल करें। घर का बना शुद्ध सात्विक, हरी पत्तेदार सब्जियों और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन लें। चीनी और मैदे से पूरी तरह दूरी बना लें। यदि शादी के एक साल बाद तक प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में समस्या आ रही है, तो बिना किसी सामाजिक संकोच या शर्म के, पति-पत्नी दोनों को एक साथ किसी योग्य गायनेकोलॉजिस्ट या फर्टिलिटी विशेषज्ञ से मिलकर जरूरी मेडिकल असेसमेंट (जैसे सीमेन एनालिसिस और ओवेरियन रिजर्व टेस्ट) कराना चाहिए, क्योंकि इनफर्टिलिटी केवल महिला केंद्रित समस्या नहीं है।
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में विकास प्राधिकरण (LDA) और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद (UPAVP) दो ऐसे बड़े महकमे हैं, जिनसे आम जनता का हित और उनके जीवन की गाढ़ी कमाई सीधे तौर पर जुड़ी होती है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि ये दोनों ही विभाग अक्सर अपनी कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार (Corruption) को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं। ताजा तरीन और बेहद चौंकाने वाला मामला लखनऊ के पॉश इलाके इंदिरा नगर (Indira Nagar) से सामने आया है, जहां आवास विकास विभाग की नाक के नीचे नियमों को ताक पर रखकर आवासीय क्षेत्रों में धड़ल्ले से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सीलिंग और ध्वस्तीकरण (Demolition order) के कड़े आदेशों के बावजूद भी विभाग के कथित भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध कारोबार बिना किसी डर के फल-फूल रहा है।सीलिंग के आदेश और नोटिस के बाद भी चल रही 'बटर स्टोरी' जैसी दुकानेंपूरा मामला इंदिरा नगर के शालीमार चौराहे (Shalimar Chauraha) पर स्थित आवासीय भवन संख्या A-1020 से जुड़ा हुआ है। इस भवन में नियमों के विपरीत जाकर व्यावसायिक गतिविधियां चलाने के विरुद्ध उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद द्वारा बाकायदा ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई के आदेश जारी किए जा चुके हैं। इस संबंध में 27 अक्टूबर 2025 को एक आधिकारिक नोटिस भी विभाग द्वारा जारी किया गया था।लेकिन धरातल पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। इस नियमविरुद्ध व्यवसायिक भवन में 'बटर स्टोरी' (Butter Story Shop) सहित कई नामचीन दुकानें और कमर्शियल एक्टिविटीज बिना किसी रोक-टोक के धड़ल्ले से चल रही हैं। एक सजग शिकायतकर्ता ने जब इस परिसर की जांच और शिकायत की, तब जाकर इस भवन के खिलाफ पूर्व में जारी हुए ध्वस्तीकरण के आदेशों का बड़ा खुलासा हुआ।भेदभावपूर्ण सीलिंग: 'जिसने दिया सुविधा शुल्क उसे छूट, बाकी पर ताला'ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, शालीमार चौराहे के आस-पास का यह कोई इकलौता मामला नहीं है। पूरे इलाके में कई ऐसे आवासीय भवन (Residential Properties) हैं, जहां नियमों के विपरीत धड़ल्ले से कमर्शियल आउटलेट्स खुल चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां कुछ भवनों पर आवास विकास की बड़ी-बड़ी सील और लंबी-चौड़ी नोटिस चस्पा हैं, वहीं ठीक उनके अगल-बगल के भवनों में खुलेआम दुकानें चल रही हैं।स्थानीय शिकायतकर्ताओं और अध्याशियों का सीधा आरोप है कि बिना आवास विकास विभाग के भ्रष्ट अफसरों के संरक्षण और 'सुविधा शुल्क' (रिश्वत) के खेल के यह बिल्कुल भी संभव नहीं है। पीड़ित नागरिकों का कहना है कि जिसने विभाग के इस भ्रष्ट तंत्र के आगे घुटने टेक दिए और उनके मनमुताबिक 'डील' कर ली, उन्हें अवैध निर्माण और कमर्शियल काम की पूरी छूट दे दी गई। वहीं, जो व्यक्ति इन भ्रष्ट अफसरों के आगे नहीं झुका, उसकी संपत्तियों को तुरंत टारगेट कर उस पर ताला लटका दिया गया।आवासीय क्षेत्रों में अवैध निर्माण बना भ्रष्ट तंत्र की कमाई का मुख्य जरियाविशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों का मानना है कि बिना किसी ठोस नियम-कानून के आवासीय क्षेत्रों में अवैध रूप से व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स खड़े करवाना आवास विकास के भ्रष्ट नेटवर्क की कमाई का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है। यह तंत्र इतनी मजबूती से फैल चुका है कि चाहे आवासीय क्षेत्र हो या कमर्शियल, यदि आपकी संपत्ति आवास विकास परिषद के अधीन आती है, तो देर-सबेर इनके भ्रष्ट अफसर किसी न किसी तकनीकी खामी का बहाना बनाकर आपको घेर ही लेते हैं। बिना मोटी रिश्वत दिए आम आदमी के वैध काम के रास्ते में भी सैकड़ों कानूनी अड़चनें और अवरोध पैदा कर दिए जाते हैं। इंदिरा नगर के नागरिकों ने अब इस पूरे सिंडिकेट के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार और उच्चाधिकारियों से कड़ी विजिलेंस जांच और दोषियों के निलंबन की मांग की है।
यूपी में ब्लॉक प्रमुख बने प्रशासक, सरकार ने जारी किया आदेश; नए चुनाव तक संभालेंगे जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी ब्लॉक प्रमुखों को प्रशासक नियुक्त किया। पांच वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने के बाद नए चुनाव तक रूटीन प्रशासनिक कार्य करेंगे, नीतिगत फैसलों पर रहेगी रोक।
IMD Weather Alert: दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर समेत 22 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट। कई इलाकों में तेज हवाएं, बिजली गिरने और भूस्खलन की चेतावनी जारी।
Chief Minister Dr. Mohan Yadav : मध्यप्रदेश के लिए 19 जुलाई का दिन ऐतिहासिक रहा। अब राज्य में किसी के लिए कोई विशेष कानून नहीं होगा। सभी धर्मों के लोग एक ही कानून के तहत जीवन-यापन करेंगे। चाहे लिव-इन हो या जीवन से जुड़ा कोई भी मामला, सब एक ही नियम ...
अभिषेक बनर्जी को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, ऑफिस पर बुलडोजर कार्रवाई पर लगी रोक
कलकत्ता हाई कोर्ट ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत देते हुए आमतला स्थित उनके कार्यालय पर बुलडोजर कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी। प्रशासन को भवन से जुड़े दस्तावेज पेश करने के निर्देश।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग खारिज कर दी। फिलहाल उनका इलाज सफदरजंग अस्पताल में जारी रहेगा। सरकार ने कहा कि सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।
लखनऊ में बोले सीएम योगी, यूपी में आकाशीय बिजली और वन्यजीव हमलों पर सरकार का बड़ा एक्शन प्लान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राजधानी लखनऊ में ₹200 करोड़ से अधिक की भारी-भरकम लागत से बनकर तैयार हुए यूपी राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) के भव्य और नवीन मुख्यालय भवन का आधिकारिक लोकार्पण किया। इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने एक बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश दिया कि किसी भी प्राकृतिक या मानव-निर्मित आपदा के समय जन-धन की बड़ी हानि को समय रहते पुख्ता तैयारी, जन-जागरूकता और आधुनिक तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल से काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आपदा प्रबंधन केवल एक सरकारी तंत्र या विभाग का दायित्व नहीं है, बल्कि देश और प्रदेश के प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक का एक परम कर्तव्य होना चाहिए।शहीद पथ पर बना ₹200 करोड़ का हाईटेक डिजिटल कमांड सेंटर: 24 घंटे सातों दिन काम करेगा आपातकालीन तंत्रलखनऊ के शहीद पथ स्थित डायल-112 मुख्यालय के बिल्कुल पास निर्मित यह नया मुख्यालय भवन पूरी तरह से अत्याधुनिक विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस है। आपदा प्रबंधन को नए युग में ले जाने वाले इस परिसर के भीतर 24 घंटे और सातों दिन लगातार संचालित होने वाला एक हाईटेक राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र बनाया गया है। इसके अलावा, भवन में 200 से अधिक लोगों की बैठने की क्षमता वाला एक विशाल सभागार, हाईटेक क्लासरूम, व्याख्यान कक्ष, आपदा राहत कर्मियों के लिए छात्रावास, एक समृद्ध पुस्तकालय तथा उत्तर प्रदेश की संपूर्ण आपदा प्रबंधन प्रणाली को एक छत के नीचे मजबूत करने के लिए एक केंद्रीय डिजिटल कमांड, कंट्रोल एवं समन्वय केंद्र की अभूतपूर्व व्यवस्था की गई है।सीएम योगी की दोटूक: सही जानकारी से टाली जा सकती हैं बड़ी से बड़ी दुर्घटनाएं, स्कूलों में मिलेगी ट्रेनिंगमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जन-जागरूकता पर जोर देते हुए कहा कि पहले के समय में आग, भूकंप और बाढ़ जैसी गंभीर आपदाओं के दौरान बरती जाने वाली सामान्य सावधानियों की जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच पाती थी। उचित ज्ञान के अभाव में लोगों का सामान्य व्यवहार भी बड़े नुकसान का कारण बन जाता था, जबकि सही और सटीक जानकारी होने से बड़ी से बड़ी दुर्घटना को भी आसानी से टाला जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि प्रदेश भर में ऐसे व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं, जिनसे सामान्य ग्रामीण और शहरी नागरिक भी आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों में प्रशासन का सक्रिय सहयोग कर सकें। जब राज्य में कोई आपदा न हो, तब ट्रेनिंग और क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए तथा प्रदेश के सभी स्कूलों के छात्रों और शिक्षकों को भी आपदा प्रबंधन के प्रति अनिवार्य रूप से जागरूक किया जाना चाहिए।मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा घोषित करने वाला देश का पहला राज्य बना यूपी: बहराइच और बिजनौर का दिया उदाहरणमुख्यमंत्री ने गर्व से उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश पूरे देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने मानव-वन्यजीव संघर्ष (Man-Animal Conflict) को भी आधिकारिक रूप से प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में शामिल किया है। हाल ही में बहराइच में मगरमच्छ के हमले में एक 12 वर्षीय मासूम बालक की हुई दुखद मौत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यदि नदियों और मगरमच्छ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहले से ही आवश्यक सावधानियों की ट्रेनिंग दी जाए तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। यूपी में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में अब तक 4,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि अन्य प्राकृतिक आपदाओं में लगभग 5,000 लोग प्रभावित हुए हैं। अपने हालिया बिजनौर दौरे का संदर्भ देते हुए सीएम योगी ने बताया कि जिले में गन्ने के खेतों से अब तक 80 तेंदुओं को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि बाघ और तेंदुए के व्यवहार में बड़ा अंतर होता है, और इसकी सही पहचान के बारे में स्थानीय जनता को जागरूक करना जीवन रक्षा के लिए बेहद जरूरी है।तकनीक का अधिकतम उपयोग और शाकंभरी देवी मंदिर का सफल ऑपरेशन: आकाशीय बिजली से मौतों पर चिंताआकाशीय बिजली (Lightning) के कहर से होने वाली जनहानि पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सीएम योगी ने लाइटनिंग अर्ली वार्निंग सिस्टम जैसी उन्नत तकनीक के अधिकतम उपयोग पर बल दिया। उन्होंने हाल ही में आए भयंकर तूफान और आकाशीय बिजली से एक ही दिन में हुई 111 से अधिक लोगों की मौत का हवाला देते हुए कहा कि इस घटना के तुरंत बाद सरकार ने तकनीक आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक प्रभावी और सटीक बनाने का काम शुरू कर दिया। उन्होंने सहारनपुर के प्रसिद्ध शाकंभरी देवी मंदिर का एक सफल उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ समय पहले मौसम विभाग द्वारा समय पर जारी किए गए हाई-अलर्ट के कारण स्थानीय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया था। इसके कुछ ही देर बाद शिवालिक की पहाड़ियों से भयंकर जलप्रलय और तेज बहाव के साथ पानी आया। यदि समय रहते लोगों को वहां से सुरक्षित हटाया नहीं जाता, तो राज्य में एक बहुत बड़ी और भयावह जनहानि हो सकती थी।
सोने से पहले 2 मिनट ये काम किया तो हेल्थ होगी इंप्रूव, फटाफट आएगी नींद
आधुनिक जीवनशैली में खराब खानपान और मानसिक तनाव के कारण आज के समय में हर दूसरा व्यक्ति अनिद्रा (Insomnia) और थकान की समस्या से जूझ रहा है। अच्छी सेहत के लिए केवल पौष्टिक भोजन और हैवी वर्कआउट ही काफी नहीं होता, बल्कि आयुर्वेद में बताए गए कुछ छोटे-छोटे नियम भी शरीर को निरोगी रखने में बेहद चमत्कारी भूमिका निभाते हैं। इन्हीं में से एक बेहद असरदार और आसान तरीका है—रात को सोने से पहले पैर के तलवों की मालिश करना (Foot Massage Before Sleep)। हर रोज रात को बिस्तर पर जाने से ठीक पहले यदि आप केवल 2 मिनट निकालकर अपने पैरों के तलवों में हल्का गर्म तेल लगाकर मालिश करते हैं, तो इससे न केवल आपकी नींद की क्वालिटी में गजब का सुधार होगा बल्कि कई गंभीर बीमारियों से भी परमानेंट राहत मिल सकती है।एक्टिवेट होता है पैरासिम्पेथेटिक सिस्टम: दिमाग को शांत कर तुरंत आती है गहरी और सुकून भरी नींदरोजाना रात को पैरों की मालिश करने का सबसे पहला और बड़ा फायदा आपकी स्लीप साइकिल (Sleep Cycle) को मिलता है। दिनभर भागदौड़ करने के कारण हमारे पैर पूरे शरीर का बोझ उठाते हैं, जिससे पैरों की मांसपेशियों में भारी थकान आ जाती है। विज्ञान के अनुसार, हमारे पैरों के तलवों में शरीर की कई महत्वपूर्ण नसों के अंतिम छोर (Nerve Endings) होते हैं। जब आप गुनगुने तेल से तलवों की मालिश करते हैं, तो शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम (Parasympathetic Nervous System) तुरंत एक्टिवेट हो जाता है। यह सिस्टम सीधे आपके मस्तिष्क को शांत होने का सिग्नल भेजता है, जिससे मानसिक तनाव और दिनभर की एंग्जायटी दूर होती है और आप बहुत जल्द एक गहरी व आरामदायक नींद के आगोश में चले जाते हैं।शरीर का वात दोष होता है बैलेंस: आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताए तलवों की मालिश के छिपे हुए राजप्रसिद्ध आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉक्टर मनीषा मिश्रा के मुताबिक, नियमित रूप से रात को सोने से पहले पैरों की मालिश करने से शरीर का वात दोष (Vata Dosha) पूरी तरह संतुलित रहता है। आयुर्वेद में माना जाता है कि शरीर में वात के बिगड़ने से ही अनिद्रा, जोड़ों का दर्द और घबराहट जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। जब तलवों में गर्म तेल से हल्की मालिश की जाती है, तो ग्राउंड नर्व्स रिलैक्स होती हैं जिससे वात नियंत्रित होता है। इसके साथ ही, पैरों में मौजूद विभिन्न एक्यूप्रेशर पॉइंट्स (Acupressure Points) पर हल्का दबाव बनने से ब्लड सर्कुलेशन में तेजी से सुधार होता है। कई शोधों में यह भी सामने आया है कि तलवों की मालिश करने से सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) को भी प्राकृतिक रूप से कम करने में बड़ी मदद मिलती है।पैरों की सूजन (एडिमा) और एड़ी के पुराने दर्द से परमानेंट राहत: इन मरीजों के लिए है वरदानअगर किसी व्यक्ति को पैरों में लिक्विड जमा होने के कारण होने वाली सूजन, जिसे मेडिकल भाषा में एडिमा (Edema) कहा जाता है, की समस्या है तो यह 2 मिनट की थेरेपी उनके लिए एक अचूक दवा है। यही वजह है कि दिल के मरीजों (Heart Patients) और गर्भवती महिलाओं को अक्सर डॉक्टरों द्वारा रात में हल्के हाथों से पैरों की मालिश करने की सलाह दी जाती है ताकि पैरों का भारीपन दूर हो सके। इसके अलावा, जो लोग प्लांटर फेशिआइटिस (Planter Fasciitis) यानी तलवों की झिल्ली में सूजन या लो-आर्च के कारण एड़ी के पुराने और असहनीय दर्द से परेशान रहते हैं, उनके लिए सरसों, तिल या नारियल के गुनगुने तेल की मालिश एड़ी के दर्द को जड़ से खत्म करने का सबसे प्रभावी और प्राकृतिक उपचार साबित होती है।
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रह-नक्षत्रों की लगातार बदलती चाल हर दिन मानव जीवन को गहराई से प्रभावित करती है। कल यानी 20 जुलाई को सावन मास का बेहद पवित्र सोमवार है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, सोमवार का दिन देवों के देव महादेव भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस विशेष दिन भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा करने पर जातकों के जीवन से सभी प्रकार के कष्ट, मानसिक तनाव और आर्थिक संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, कल का दिन मेष, मिथुन, कर्क और सिंह सहित 4 प्रमुख राशियों के जीवन में बहुत बड़ी हलचल और सकारात्मक बदलाव लेकर आ रहा है। वहीं, कुछ अन्य राशि के जातकों को कल के दिन विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।मेष, वृषभ और मिथुन राशि का कल का भाग्य: आत्मविश्वास में होगी भारी वृद्धिमेष राशि: कल का दिन आपके लिए जबरदस्त आत्मविश्वास से भरा रहेगा। आपके जीवन में कई सकारात्मक और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जो आपके भविष्य को संवारेंगे। पारिवारिक सदस्यों के साथ आपके संबंध पहले से अधिक मजबूत होंगे। अपने परिवार और करीबी दोस्तों के साथ खुशनुमा वक्त बिताने का मौका मिलेगा, लेकिन बदलते मौसम में अपने स्वास्थ्य की अनदेखी करने से बचें।वृषभ राशि: कल आपकी रोमांटिक लाइफ में थोड़ी उथल-पुथल मचने की संभावना है। प्रेम-संबंधों में मधुरता बनाए रखने के लिए संयम से काम लें। व्यवसाय से जुड़े किसी भी बड़े मुद्दे पर जल्दबाजी में फैसला न लें। आर्थिक मोर्चे पर कल किसी भी तरह की प्रॉपर्टी में हैवी इन्वेस्टमेंट करने से बचना ही आपके लिए सुरक्षित रहेगा। किसी छोटी यात्रा या ट्रिप पर जाने का प्लान बन सकता है।मिथुन राशि: मिथुन राशि के जातक कल दृढ़ संकल्प और गजब के आत्मविश्वास से लबरेज रहेंगे। कार्यक्षेत्र या व्यापार के सिलसिले में किसी लंबी यात्रा पर जाने का योग बन रहा है। आपकी आर्थिक स्थिति स्थिर और मजबूत रहेगी, लेकिन फिर भी फिजूलखर्ची पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी है। काम के दबाव के बीच अपनी मेंटल हेल्थ और मानसिक शांति का विशेष ध्यान रखें।कर्क, सिंह और कन्या राशि का करियर ग्राफ: शेयर बाजार में लाभ और कार्यक्षेत्र में चुनौतियांकर्क राशि: कल का दिन आपके करियर में बड़ी सफलता का मार्ग प्रशस्त करेगा। खासकर जो लोग लंबे समय से शेयर बाजार (Share Market) या लॉटरी में निवेश करने की सोच रहे हैं, उनके लिए कल का दिन बेहद लाभदायक सिद्ध हो सकता है। ऑफिस में अपने काम पर पूरा फोकस बनाए रखें। शाम का समय अपने लाइफ पार्टनर और घर के सदस्यों के साथ बिताने से रिश्ते और मजबूत होंगे।सिंह राशि: सिंह राशि के जातकों के लिए कल का दिन बेहद रोमांचक और नई ऊर्जा से भरपूर रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में सीनियर अधिकारियों की मदद से आपको मनचाही सफलता मिलने के पूरे आसार हैं। स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी भाग्य आपका पूरा साथ देगा। प्रेम संबंध काफी मजबूत होंगे और दिन के अंत तक आपको अपने पार्टनर से कोई बेहद स्पेशल या सरप्राइजिंग मैसेज मिल सकता है।कन्या राशि: कल का दिन आपके लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। परिवार के कुछ सदस्यों के साथ किसी पुरानी बात को लेकर वैचारिक मतभेद या बहस होने की संभावना है। कार्यस्थल पर कॉम्पिटिशन की कमी के कारण आपकी व्यक्तिगत प्रोडक्टिविटी पर सीधा असर पड़ सकता है। कल आपकी आर्थिक स्थिति थोड़ी कमजोर रह सकती है, इसलिए कोई भी बड़ा वित्तीय निर्णय बहुत सूझ-बुझ के साथ ही लें।तुला, वृश्चिक और धनु राशि के लिए कूटनीतिक सलाह: रिश्तों को दें समय, आर्थिक फैसलों में बरतें सूझ-बुझतुला राशि: आर्थिक मामलों में कल किस्मत आपका पूरा साथ देने वाली है, जिससे अचानक धन लाभ के योग बनेंगे। कुछ जातकों के लिए विदेश या किसी हिल स्टेशन पर घूमने जाने के सुंदर योग बन रहे हैं, हालांकि यात्रा के दौरान अपने सामान और सेहत को लेकर थोड़ी दिक्कतें आ सकती हैं। अपने प्रेम-संबंधों को टूटने से बचाने के लिए अपने पार्टनर से बैठकर खुलकर बातचीत करें।वृश्चिक राशि: लव लाइफ के मामले में कल आपको अपने पार्टनर का हर कदम पर पूरा सहयोग मिलेगा, जिससे आपका मन प्रसन्न रहेगा। जो लोग अभी सिंगल हैं और जीवनसाथी की तलाश कर रहे हैं, उन्हें कल थोड़ी निराशा झेलनी पड़ सकती है। कार्यक्षेत्र में आपको प्रगति के कुछ नए और बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे, जिनका आपको पूरा फायदा उठाना चाहिए।धनु राशि: कल आपके सामने अचानक कुछ छोटी-मोटी चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन आप अपनी बुद्धिमानी और सूझ-बुझ से उन्हें आसानी से पार कर लेंगे। अपने जीवनसाथी के साथ कल एक बेहतरीन और यादगार वक्त बीतेगा। कोई भी नया बिजनेस शुरू करने या बड़ा फाइनेंशियल डिसीजन लेने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह लेना आपके भविष्य के लिए बेहतर रहेगा।मकर, कुंभ और मीन राशि का भविष्य: प्रॉपर्टी में निवेश के योग और आय में बंपर बढ़ोतरीमकर राशि: कल आपको अपने घर-परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत के दौरान वाणी में मधुरता और व्यवहार में शालीनता बनाए रखनी होगी। अपनी भविष्य की आर्थिक व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए आप किसी नई जमीन या प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट कर सकते हैं। अपने शरीर को पूरी तरह दुरुस्त और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए योग करें और हेल्दी डाइट लें।कुंभ राशि: कुंभ राशि के कुछ जातक कल परिवार के साथ किसी धार्मिक या मनोरंजक ट्रिप पर जा सकते हैं। किसी बेहद करीबी मित्र या रिश्तेदार से आपको कोई कीमती गिफ्ट मिलने की प्रबल संभावना है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को पूरा मन लगाकर पढ़ाई करने की सख्त सलाह दी जाती है। नौकरीपेशा लोगों की आय में वृद्धि होगी और पारिवारिक बंधन मजबूत होंगे।मीन राशि: मीन राशि के जातकों के लिए कल का समय रोमांस और खुशियों से भरपूर रहने वाला है। कॉलेज या ऑफिस के सहपाठियों के साथ मेल-जोल और नेटवर्क बढ़ाना आपकी प्रोफेशनल लाइफ के लिए आने वाले समय में मील का पत्थर साबित हो सकता है। काम से वक्त निकालकर अपने माता-पिता और फैमिली मेंबर्स के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करें।
EPFO 3.0 में मिलेगी नई फ्लेक्सिबल पेंशन की सौगात, गिग वर्कर्स और फ्रीलांसर्स को भी तगड़ा फायदा
देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स (Gig Workers) के लिए रिटायरमेंट के बाद की सामाजिक सुरक्षा को लेकर एक बेहद बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के आगामी चरण यानी EPFO 3.0 के तहत एक बेहद आधुनिक, लचीली और योगदान आधारित (Contributory) नई पेंशन योजना पर तेजी से काम कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह नई प्रस्तावित पेंशन स्कीम मौजूदा ईपीएस (Employees' Pension Scheme) की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और पारदर्शी होगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यह केवल पारंपरिक संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके दायरे में डिलीवरी पार्टनर्स, कैब ड्राइवर्स, फ्रीलांसर्स और अधिक वेतन पाने वाले उन उच्च आय वर्ग के कर्मचारियों को भी शामिल किया जाएगा जो वर्तमान में ईपीएस के नियमों से बाहर हैं।कर्मचारी के नाम से खुलेगा बिल्कुल अलग पेंशन अकाउंट: निवेश पर हर साल जुड़ेगा सुरक्षित ब्याजइस नई योजना के ढाँचे को लेकर जो जानकारियां सामने आई हैं, उसके मुताबिक यह पूरी तरह से निर्धारित योगदान मॉडल (Defined Contribution Model) पर आधारित होगी। इसके तहत प्रत्येक पात्र कर्मचारी के नाम से एक बिल्कुल अलग और समर्पित पेंशन खाता खोला जाएगा। इस खाते में समय-समय पर जमा होने वाली राशि को पूरी तरह से सुरक्षित और सरकार समर्थित निवेश विकल्पों में लगाया जाएगा, ताकि बाजार के जोखिमों से फंड सुरक्षित रहे। इस सुरक्षित निवेश पर मिलने वाले ब्याज को हर साल कर्मचारी के खाते में जोड़ दिया जाएगा। जब भी कोई सदस्य अपनी उम्र के 60 साल पूरे कर लेगा, तो उसके खाते में जमा हुई कुल संचित राशि के आधार पर उसे एक निश्चित और नियमित मासिक पेंशन मिलनी शुरू हो जाएगी। इससे कर्मचारियों को अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग को खुद मैनेज करने का बेहतर मौका मिलेगा।क्या है यह नया TRS कॉन्सेप्ट: खुद तय करिए कि रिटायरमेंट पर कितनी पेंशन चाहिएEPFO 3.0 के इस नए प्रस्ताव की सबसे क्रांतिकारी और आकर्षित करने वाली विशेषता इसका टीआरएस यानी 'टार्गेट रिटायरमेंट सम' (Target Retirement Sum) का कॉन्सेप्ट है। इस अनूठी प्रणाली के अंतर्गत कोई भी कर्मचारी नौकरी के दौरान ही यह पहले से निर्धारित कर सकेगा कि उसे 60 वर्ष की आयु के बाद हर महीने कितनी पेंशन राशि की आवश्यकता है। कर्मचारी द्वारा तय किए गए इसी वित्तीय लक्ष्य के आधार पर ईपीएफओ का सिस्टम खुद-ब-खुद यह कैलकुलेट करके बता देगा कि उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हर महीने या सालाना कितना अंशदान (Contribution) करना होगा। इसके अलावा, सदस्यों को एक हाई-टेक डिजिटल डैशबोर्ड की सुविधा भी मिलेगी, जहां वे अपने लाइव योगदान, कुल जमा राशि और रिटायरमेंट लक्ष्य की वास्तविक प्रगति को रियल टाइम में ट्रैक कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर अपने लक्ष्य को अपडेट भी कर सकेंगे।एक ही UAN से जुड़ेंगे कई एम्प्लॉयर: एग्रीगेटर कंपनियां और सरकार भी करेंगी मददइस नई व्यवस्था की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल कर्मचारी और उसका मुख्य नियोक्ता ही पैसे जमा नहीं करेंगे। कम आय वाले और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इसमें सरकार, गिग इकोनॉमी की एग्रीगेटर कंपनियां, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड और गैर-सरकारी संगठन (NGO) भी अपनी तरफ से आर्थिक योगदान दे सकेंगे। इसके साथ ही, ईपीएफओ एक ऐसी एडवांस सेंट्रलाइज्ड व्यवस्था पर काम कर रहा है जिसमें एक ही यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) को एक साथ कई नियोक्ताओं या अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म से लिंक किया जा सकेगा। इसका सीधा फायदा उन युवाओं और फ्रीलांसर्स को होगा जो एक ही समय में कई कंपनियों या ऐप्स के लिए काम करते हैं, क्योंकि उनकी सभी पीएफ और पेंशन राशि एक ही जगह सुरक्षित दिखेगी।एनपीएस (NPS) से कितनी अलग होगी यह योजना: 55 की उम्र के बाद मिलेंगे शानदार विकल्पयह नई प्रस्तावित योजना वर्तमान में चल रही नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से भी काफी अलग और अधिक फ्लेक्सिबल होने की उम्मीद है। जहां एनपीएस में रिटायरमेंट के समय एक बड़ी राशि को अनिवार्य रूप से एन्युटी में बदलना पड़ता है, वहीं ईपीएफओ की इस योजना में 55 वर्ष की आयु पार करने के बाद सदस्यों को यह चुनने का पूरा अधिकार मिलेगा कि वे अपने फंड का इस्तेमाल कैसे करना चाहते हैं। कर्मचारी चाहें तो अपनी मूल राशि को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए केवल उसके ब्याज को हर महीने पेंशन के रूप में ले सकते हैं। यदि उन्हें अधिक पैसों की जरूरत है, तो वे मूल राशि का कुछ हिस्सा निकालने का विकल्प भी चुन सकते हैं। इसके अलावा, सरकार परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसमें पति-पत्नी, बच्चों और अनाथ आश्रितों के लिए भी फैमिली व सर्वाइवर पेंशन की मजबूत व्यवस्था शामिल करने पर विचार कर रही है। हालांकि, यह पूरी योजना अभी सरकारी स्तर पर विचाराधीन है और इसके लागू होने की आधिकारिक तारीख की घोषणा होना अभी बाकी है।
8 महीने के बेटे विहान संग शेयर कीं बेहद लाडली तस्वीरें, पति विक्की कौशल को लेकर कही ये बड़ी बात
बॉलीवुड की खूबसूरत 'डीवा' कटरीना कैफ (Katrina Kaif) इन दिनों अपनी जिंदगी के सबसे खूबसूरत और अनमोल दौर यानी मदरहुड फेज (Motherhood Phase) का आनंद ले रही हैं। मां बनने के बाद से भले ही कटरीना फिल्म इंडस्ट्री और चकाचौंध से थोड़ी दूरी बनाकर अपने परिवार पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, लेकिन सोशल मीडिया के माध्यम से वह समय-समय पर अपने फैंस को अपनी व्यक्तिगत जिंदगी की खुशियों से रूबरू कराती रहती हैं। हाल ही में, कटरीना कैफ ने 16 जुलाई को अपना जन्मदिन मनाया था, जो उनके जीवन का अब तक का सबसे अनोखा जन्मदिन साबित हुआ। अपने इस खास दिन के तीन दिन बाद, एक्ट्रेस ने अपने 8 महीने के लाडले बेटे विहान (Vihaan) के साथ सेलिब्रेशन की कुछ बेहद दिल छू लेने वाली और अनदेखी तस्वीरें इंटरनेट पर साझा की हैं, जो तेजी से वायरल हो रही हैं।लाडले विहान संग कटरीना का पहला जन्मदिन: तस्वीरों में दिखा मां-बेटे का बेहद अटूट और निश्छल प्यारकटरीना कैफ ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जो तस्वीरें पोस्ट की हैं, उनमें मां और बच्चे के बीच का एक बेहद पावन और गहरा रिश्ता साफ नजर आ रहा है। एक तस्वीर में बॉलीवुड की यह टॉप एक्ट्रेस अपने नन्हे बेबी ब्वॉय विहान के छोटे-छोटे पैरों पर बेहद प्यार से किस (Kiss) करती हुई दिखाई दे रही हैं, तो वहीं एक अन्य मनमोहक तस्वीर में नन्हा विहान अपनी मां के चेहरे को अपने छोटे हाथों से छूकर खेलता हुआ नजर आ रहा है। इन सभी तस्वीरों में कटरीना के चेहरे पर मां बनने का सुकून और एक अनोखी चमक साफ देखी जा सकती है। हालांकि, प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए इस स्टार कपल ने अभी तक अपने बेटे का पूरा चेहरा फैंस के सामने रिवील नहीं किया है, जिससे फैंस विहान की एक पूरी झलक पाने के लिए काफी उत्सुक हैं।पति विक्की कौशल के साथ भी बिताया क्वालिटी टाइम: कटरीना ने लिखा एक बेहद इमोशनल और दिल छू लेने वाला नोटजन्मदिन के इस खास एल्बम में केवल मां-बेटे का ही प्यार नहीं, बल्कि पति-पत्नी की खूबसूरत बॉन्डिंग भी देखने को मिली। कुछ तस्वीरों में कटरीना अपने पति और बॉलीवुड स्टार विक्की कौशल (Vicky Kaushal) के साथ फुर्सत के पल बिताती और मुस्कुराती नजर आ रही हैं। इन बेहद हसीन तस्वीरों को दुनिया के साथ साझा करते हुए कटरीना कैफ ने एक बेहद भावुक कैप्शन भी लिखा। उन्होंने अपने बेटे और पति को संबोधित करते हुए लिखा, आप मेरे जीवन के लिए भगवान का सबसे अनमोल और खूबसूरत आशीर्वाद हैं, जिसके लिए मैं हर पल शुक्रगुजार रहती हूं। यह मेरा अब तक का सबसे बेस्ट जन्मदिन है और विक्की, आप भी मेरे लिए किसी अनमोल तोहफे से कम नहीं हैं। कटरीना के इस प्यार भरे संदेश पर फैंस और बी-टाउन के सेलेब्स लगातार दिल वाले इमोजी बनाकर अपना प्यार बरसा रहे हैं।2025 में गूंजी थी इस स्टार कपल के घर किलकारी: बड़े पर्दे पर कटरीना की वापसी का फैंस को है बेसब्री से इंतजारगौरतलब है कि कटरीना कैफ और विक्की कौशल की शादी दिसंबर 2021 में राजस्थान में बेहद शाही अंदाज में हुई थी। इसके बाद, शादी के करीब चार साल बाद 7 नवंबर 2025 को इस स्टार कपल के घर पहली बार किलकारी गूंजी और उन्होंने अपने जीवन में बेटे विहान का स्वागत किया। तब से लेकर अब तक, यानी पिछले 8 महीनों से दोनों ही कलाकार माता-पिता के इस नए फर्ज को पूरी जिम्मेदारी और लगन के साथ निभा रहे हैं। मां बनने की वजह से कटरीना कैफ फिलहाल फिल्मों और शूटिंग के व्यस्त शेड्यूल से पूरी तरह दूर हैं और अपना पूरा समय विहान की परवरिश में लगा रही हैं। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अपने इस ब्रेक के बाद कटरीना कैफ किस धमाकेदार प्रोजेक्ट के साथ बड़े पर्दे पर वापसी करती हैं।
बॉलीवुड सुपरस्टार आलिया भट्ट (Alia Bhatt) और शरवरी वाघ (Sharvari Wagh) स्टारर हाई-बजट स्पाई थ्रिलर फिल्म 'अल्फा' (Alpha) को लेकर फैंस और ट्रेड एक्सपर्ट्स के बीच रिलीज से पहले जैसा जबरदस्त बज देखा जा रहा था, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर वैसा करिश्मा दोहराने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। यशराज फिल्म्स (YRF Spy Universe) की इस महत्वाकांक्षी फिल्म से मेकर्स को उम्मीद थी कि यह बड़े पर्दे पर तहलका मचाएगी, लेकिन 3 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद से ही फिल्म दर्शकों को खींचने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है। रही-सही कसर हालिया रिलीज फिल्मों ने पूरी कर दी है। अक्षय कुमार की मल्टीस्टारर 'वेलकम टू द जंगल' के बाद अब सिनेमाघरों में अजय देवगन की मच-अवेटेड कॉमेडी ड्रामा 'धमाल 4' (Dhamaal 4) दस्तक दे चुकी है, जिसने 'अल्फा' के बॉक्स ऑफिस पर टिके रहने की बची-कुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है।तीसरे वीकेंड में भी बेदम रही 'अल्फा': 16वें दिन का शनिवार कलेक्शन आया सामनेफिल्म में आलिया भट्ट और शरवरी वाघ के ताबड़तोड़ एक्शन और विलेन के रूप में बॉबी देओल (Bobby Deol) की शानदार एक्टिंग को क्रिटिक्स व दर्शकों की तरफ से मिली-जुली (Mixed) प्रतिक्रिया तो मिली, लेकिन यह तारीफ बिजनेस में तब्दील नहीं हो पाई। भारी-भरकम बजट में बनी यह फिल्म अपने तीसरे वीकेंड में भी दर्शकों को थिएटर्स तक लाने में हांफती नजर आई। बॉक्स ऑफिस ट्रैकर वेबसाइट सैकनिल्क (Sacnilk.com) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म 'अल्फा' ने अपने रिलीज के 16वें दिन (शनिवार) को महज ₹0.45 करोड़ (45 लाख रुपये) का बेहद कमजोर कलेक्शन दर्ज किया है। इससे ठीक एक दिन पहले, यानी 15वें दिन (शुक्रवार) को फिल्म का बिजनेस सिर्फ ₹0.25 करोड़ पर सिमट गया था, जो साफ दिखाता है कि अब दर्शकों ने इस फिल्म से पूरी तरह दूरी बना ली है।दो हफ्तों में ही बोरिया-बिस्तर समेटने की नौबत: बजट निकालना भी मेकर्स के लिए हुआ मुश्किलअगर फिल्म के अब तक के सफर पर नजर डालें, तो 'अल्फा' ने बॉक्स ऑफिस पर अपने ओपनिंग डे पर ₹9.25 करोड़ के साथ एक औसत शुरुआत की थी। इसके बाद पहले हफ्ते में फिल्म ने किसी तरह ₹47.45 करोड़ का नेट बिजनेस किया। लेकिन असली गिरावट इसके दूसरे हफ्ते में देखने को मिली, जब फिल्म का कलेक्शन धड़ाम से गिरकर केवल ₹8.95 करोड़ पर आकर रुक गया। 16 दिनों की लगातार कोशिशों के बाद भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 'अल्फा' का कुल नेट कलेक्शन (India Net Collection) अब तक लगभग ₹57.10 करोड़ रुपये तक ही पहुंच सका है। फिल्म के भारी-भरकम प्रोडक्शन और वीएफएक्स कॉस्ट को देखते हुए इस आंकड़े को ट्रेड पंडित एक बड़ी विफलता मान रहे हैं और कयास लगाए जा रहे हैं कि फिल्म बहुत जल्द सिनेमाघरों से पूरी तरह उतर जाएगी।वाईआरएफ स्पाई यूनिवर्स का हिस्सा है फिल्म: ऋतिक रोशन का कैमियो भी नहीं बचा पाया नैया'अल्फा' को नेटफ्लिक्स की बेहद लोकप्रिय और सराहनीय सीरीज 'द रेलवे मैन' फेम डायरेक्टर शिव रवैल (Shiv Rawail) ने निर्देशित किया है। वाईआरएफ स्पाई यूनिवर्स की पहली महिला केंद्रित इस फिल्म में आलिया और शरवरी के अलावा अनिल कपूर और बॉबी देओल जैसे पावरहाउस परफॉर्मर्स मुख्य भूमिकाओं में हैं। दर्शकों को सरप्राइज देने के लिए फिल्म में सुपरस्टार ऋतिक रोशन (Hrithik Roshan) का एक स्पेशल कैमियो भी रखा गया था, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और सुस्त कहानी के चलते यह स्टार पावर भी फिल्म को डूबने से नहीं बचा सकी।बॉक्स ऑफिस पर 'धमाल 4' और 'वेलकम टू द जंगल' का डबल अटैक: कॉम्पिटिशन में पिछड़ी 'अल्फा''अल्फा' के फ्लॉप होने के पीछे सिनेमाघरों में लगातार हो रही बड़ी रिलीज को भी एक मुख्य कारण माना जा रहा है। इस फिल्म का मुकाबला रिलीज के साथ ही शाहिद कपूर की सस्पेंस ड्रामा 'कॉकटेल 2', अक्षय कुमार की भारी भरकम 'वेलकम टू द जंगल', कंगना रनौत की 'भारत भाग्य विधाता', दिलजीत दोसांझ की 'मैं वापस आऊंगा' और हॉरर जॉनर की 'हॉन्टेड 3डी इकोज ऑफ द पास्ट' से हुआ। इस मल्टी-कॉम्पिटिशन के बीच हाल ही में रिलीज हुई अजय देवगन की 'धमाल 4' ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा तगड़ा कब्जा जमाया है कि 'अल्फा' के लिए अब स्क्रीन्स और शोज बचा पाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि जन-जागरूकता और समय रहते की गई तैयारी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रभावी अर्ली वार्निंग सिस्टम, बेहतर समन्वय और लोगों में जागरूकता के जरिए जन-धन की हानि को काफी हद तक रोका जा सकता है।
तमिलनाडु की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से इस समय की एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। राज्य के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (CM C. Joseph Vijay) की करप्शन के खिलाफ जारी मुहिम ने अब बेहद आक्रामक रूप अख्तियार कर लिया है। भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री के निर्देश पर चेन्नई नगर निगम (GCC) के सात वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (Suspended) कर उनके खिलाफ आपराधिक एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। इन सभी अधिकारियों पर सरकारी पदों का दुरुपयोग कर भारी भ्रष्टाचार और संदिग्ध लेन-देन करने के गंभीर आरोप हैं। विजिलेंस टीम द्वारा पिछले हफ्ते चेन्नई के दो प्रमुख जोन में अचानक की गई छापेमारी के बाद यह बड़ी प्रशासनिक गाज गिरी है, जिसने पूरे सूबे के भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मचा दिया है।गूगल पे (GPay) पर खुली रिश्वत की पोल: असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के फोन ने उगले सारे राजइस पूरी छापेमारी और विजिलेंस जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला और आधुनिक डिजिटल भ्रष्टाचार का मामला तब सामने आया, जब जांच टीम ने एक असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के मोबाइल फोन की बारीकी से पड़ताल की। नगर निगम के एक उच्च पदस्थ सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि छापेमारी के वक्त यह इंजीनियर अपने गूगल पे (Google Pay) अकाउंट पर प्राप्त हुए ₹2.39 लाख के संदिग्ध डिजिटल लेन-देन का कोई भी वैध वित्तीय हिसाब-किताब नहीं दे पाया। तकनीकी जांच में यह साफ हो गया कि यह रकम रिश्वत के तौर पर सीधे उनके डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर की गई थी। इसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी डीवीएसी (DVAC) ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट चेन्नई नगर निगम कमिश्नर को सौंपी, जिसके तुरंत बाद इन सभी सात अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए।उत्तर और मध्य चेन्नई के इन वीआईपी इलाकों में हुई छापेमारी: लंबे समय से मिल रही थीं शिकायतेंविजिलेंस और डीवीएसी की यह संयुक्त गुप्त छापेमारी उत्तर और मध्य चेन्नई के दो सबसे व्यस्त और वीआईपी जोन में एक साथ की गई थी। इस कार्रवाई के दायरे में मुख्य रूप से जोन-6 (जिसके अंतर्गत कोलाथुर, अयानवरम और पेराम्बुर इलाके आते हैं) और जोन-9 (जिसमें मायलापुर, थाउजेंड लाइट्स और नुंगमबक्कम जैसे पॉश इलाके शामिल हैं) आए हैं। इन क्षेत्रों के स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों द्वारा लंबे समय से सरकारी कामों के एवज में अवैध वसूली और प्रताड़ना की शिकायतें मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को मिल रही थीं, जिसके बाद विजिलेंस विभाग ने पूरी योजना बनाकर इन भ्रष्ट अधिकारियों को रंगे हाथों दबोचने के लिए जाल बिछाया था।नौकरी के बदले घूस और फर्जी बिलिंग का खेल: अब सिर्फ सस्पेंशन नहीं, सीधे होगी परमानेंट बर्खास्तगीचेन्नई नगर निगम के भीतर पिछले कुछ दिनों के भीतर सरकार का यह दूसरा सबसे बड़ा और कड़ा क्रैकडाउन माना जा रहा है। इससे महज कुछ दिन पहले ही छह अन्य अधिकारियों को गंभीर रिश्वतखोरी, फर्जी बिलिंग घोटाले और युवाओं से नौकरी के बदले मोटी रकम वसूलने वाले रैकेट में संलिप्त पाए जाने के बाद सस्पेंड किया गया था। सचिवालय के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री विजय ने साफ कर दिया है कि यदि विभागीय और न्यायिक जांच के दौरान इन अधिकारियों पर लगे आरोप पूरी तरह सिद्ध हो जाते हैं, तो सरकार इन्हें सिर्फ सस्पेंशन की मामूली सजा देकर नहीं छोड़ेगी। इन सभी दागी और भ्रष्ट कर्मचारियों को सरकारी सेवा से हमेशा के लिए सीधे बर्खास्त (Dismissed from Service) करने की कानूनी तैयारी पूरी कर ली गई है।अपनी ही पार्टी टीवीके (TVK) के नेता को भी नहीं बख्शा: सीएम विजय ने पेश की ईमानदारी की मिसालमुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की यह भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम सिर्फ सरकारी दफ्तरों या अधिकारियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह संदेश दे दिया है कि करप्शन के मामले में वह अपनों को भी कतई नहीं बख्शेंगे। हाल ही में मुख्यमंत्री की अपनी राजनीतिक पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) के एक स्थानीय पंचायत नेता का सरेआम रिश्वत लेते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम विजय ने पुलिस में औपचारिक एफआईआर दर्ज होने से पहले ही त्वरित एक्शन लिया और उस नेता को प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया, जिसने जनता के बीच उनकी जीरो-टॉलरेंस नीति की साख को और मजबूत कर दिया है।जनता सीधे विजिलेंस को भेजेगी वीडियो: सरकार ने जारी किया ऑफिशियल व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबरभ्रष्टाचार की इस लड़ाई में आम जनता को सीधे भागीदार बनाने के लिए विजय सरकार ने एक बेहद क्रांतिकारी कदम उठाया है। डीवीएसी (DVAC) की सीधी देखरेख में एक आधिकारिक और विशेष व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर (WhatsApp Helpline Number) जारी किया गया है। अब राज्य का कोई भी नागरिक यदि किसी भी सरकारी दफ्तर में काम कराने के एवज में रिश्वत मांगे जाने की समस्या से जूझता है, तो वह सीधे इस नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। इस आधुनिक प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिकायतकर्ता घूसखोरी से जुड़े लाइव फोटो, ऑडियो रिकॉर्डिंग, वीडियो या कोई भी डिजिटल सबूत सीधे उच्च विजिलेंस अधिकारियों को सुरक्षित भेज सकते हैं, जिस पर 24 घंटे के भीतर तुरंत कड़ा एक्शन लिया जाएगा।
ओमिक्रॉन RF.5 ने बढ़ाई कडप्पा जिले में टेंशन, एक्सपर्ट्स ने बताया यह कितना है खतरनाक
देश में कोरोना वायरस (Covid-19) के मामलों में एक बार फिर से उतार-चढ़ाव का दौर शुरू हो गया है, जिसने स्वास्थ्य विभागों की चिंता बढ़ा दी है। इस बीच दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य के कडप्पा जिले में अचानक बढ़े कोविड मरीजों के पीछे कोरोना के एक बिल्कुल नए सब-वेरिएंट 'ओमिक्रॉन आरएफ.5' (Omicron RF.5) को जिम्मेदार पाया गया है। जेनेटिक म्यूटेशन (आनुवंशिक बदलाव) के कारण सामने आए इस वेरिएंट की पुष्टि तब हुई जब कडप्पा जिले से लिए गए चार संदिग्ध मरीजों के सैंपल जांच के लिए पुणे स्थित देश की प्रतिष्ठित लैब 'नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी' (NIV Pune) भेजे गए थे। वहां की गई गहन जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) में आधिकारिक तौर पर ओमिक्रॉन आरएफ.5 वेरिएंट की मौजूदगी पाई गई है। इस नई रिपोर्ट के सामने आते ही मेडिकल जगत में हलचल तेज हो गई है।कितना जानलेवा है ओमिक्रॉन आरएफ.5: मेडिकल डायरेक्टर ने दी राहत भरी जानकारीपूरी दुनिया में समय-समय पर कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट के अलग-अलग रूप (सब-वेरिएंट) सामने आते रहे हैं। इस नए वायरस की घातकता को लेकर आंध्र प्रदेश के मेडिकल एजुकेशन डायरेक्टर विष्णुवर्धन ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। उन्होंने बताया कि SARC-CoV-2 की नियमित सर्विलांस के दौरान इस सब-वेरिएंट पर पैनी नजर रखी जा रही थी और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी वैश्विक स्तर पर इस पर मॉनिटरिंग कर रहा है। इससे पहले यह वेरिएंट सिंगापुर और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई अन्य देशों में भी तेजी से फैल चुका है। राहत की बात यह है कि अब तक हुए सभी वैज्ञानिक परीक्षणों और रिसर्च के मुताबिक, यह आरएफ.5 वेरिएंट ओमिक्रॉन के शुरुआती या अन्य वेरिएंट्स की तुलना में बिल्कुल भी ज्यादा खतरनाक नहीं है। इसलिए आम जनता को किसी भी तरह से घबराने या पैनिक करने की कोई आवश्यकता नहीं है।कैसे बना यह नया म्यूटेशन: स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को किया हाई अलर्टआंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग द्वारा साझा की गई तकनीकी जानकारी के अनुसार, ओमिक्रॉन का यह नया रूप पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से म्यूटेट होकर बना है। यह मूल रूप से जेएन.1 (JN.1) वेरिएंट के एलएफ.7 (LF.7) और पीवाई 1.1.1.1 (PY 1.1.1.1) ब्रांच से विकसित हुआ है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भले ही यह वायरस सामान्य लोगों के लिए घातक नहीं है, लेकिन जो लोग पहले से ही किसी गंभीर क्रोनिक बीमारी (जैसे शुगर, हार्ट या किडनी की समस्या) से ग्रसित हैं, उनके लिए यह खतरनाक साबित हो सकता है क्योंकि यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को कमजोर कर देता है। आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रहने और सभी आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयों व बिस्तरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं।गले में खराश और बदन दर्द: इन लक्षणों को पहचानकर तुरंत कराएं कोविड टेस्टस्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, ओमिक्रॉन आरएफ.5 सब-वेरिएंट के लक्षण भी कोरोना के पुराने वेरिएंट्स से काफी मिलते-जुलते हैं। यदि किसी व्यक्ति को लगातार गले में खराश, तेज बुखार, सिरदर्द, नाक बहना, अत्यधिक कमजोरी या पूरे शरीर और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत हो रही है, तो उसे इन लक्षणों को कतई हल्के में नहीं लेना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ने सलाह दी है कि ऐसे लक्षण दिखने पर मरीज को तुरंत अपनी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर कोविड-19 रैपिड या आरटी-पीसीआर जांच करानी चाहिए और रिपोर्ट आने तक खुद को होम आइसोलेशन में रखना चाहिए ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार को आंध्र प्रदेश में सक्रिय कोरोना मरीजों की कुल संख्या 16 दर्ज की गई थी, जिन पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के शासकीय चंद्रशेखर आजाद हायर सेकेंडरी स्कूल में कथित तौर पर एक छात्र द्वारा अपने साथियों को चॉकलेट बताकर संदिग्ध प्रतिबंधित दवा देने का मामला सामने आया है। दवा के सेवन के बाद आठ छात्र बीमार पड़ गए। सभी को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जबकि एक छात्र की हालत गंभीर होने पर उसे आईसीयू में भर्ती कराया गया। पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
MP में UCC बिल को कैबिनेट की मंजूरी, CM डॉ. मोहन यादव ने बताई बड़ी बातें
मध्यप्रदेश में मोहन यादव कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता (UCC) बिल को मंजूरी दे दी है। अब यह विधेयक 20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र के दौरान मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश किया जाएगा। सीएम डॉ. यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आज का दिन कई कारणों ...
मध्य प्रदेश कैबिनेट ने यूसीसी ड्राफ्ट बिल को दी मंजूरी, अब विधानसभा के मानसून सत्र में होगा पेश
एमपी कैबिनेट ने यूनिफार्म सिविल कोड (UCC) ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी है। अब यह विधेयक मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में पेश होगा। जानिए UCC ड्राफ्ट की प्रमुख बातें, आदिवासियों को मिली छूट और सरकार का पूरा प्लान।
संसद के मॉनसून सत्र से पहले दिल्ली में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। संसद मार्च को अनुमति नहीं मिली, संसद क्षेत्र में धारा 163 लागू, मल्टी-लेयर सुरक्षा और ट्रैफिक एडवाइजरी जारी।
Gujarat : दक्षिण गुजरात में मानसून का कहर, सूरत शहर पानी-पानी; पॉश इलाकों में भी जलभराव
दक्षिण गुजरात में मानसून की शुरुआत के साथ ही बारिश ने जोरदार दस्तक दी है। सूरत शहर में सुबह से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। निचले इलाकों के अलावा पॉश सोसायटियों और मुख्य सड़कों पर भी बारिश का पानी भरने से ...
सहारनपुर में ओवैसी का बड़ा राजनीतिक संदेश, बोले- भाजपा को हराने के लिए गठबंधन को तैयार
सहारनपुर की जनसभा में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा को हराने के लिए गठबंधन की संभावना जताई। उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा मामले, जौहर विश्वविद्यालय और मस्जिद विवाद पर भी सरकार को घेरा।
मॉनसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में हंगामा, बागी सांसदों की मौजूदगी पर विपक्ष का वॉकआउट
संसद के मॉनसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में टीएमसी और शिवसेना (UBT) के बागी सांसदों की मौजूदगी पर विपक्ष ने वॉकआउट किया। लोकसभा अध्यक्ष के फैसलों को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया।
Ayodhya Ram Mandir Donation Row : श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी पर PM मोदी से क्या बोले राहुल गांधी
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान राशि के कथित गबन की स्वतंत्र और व्यापक जांच कराने ...
हैदराबाद में 25 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की संदिग्ध मौत ने सबको चौंका दिया। पुलिस के अनुसार युवती मंदिर से देवी की मूर्ति लेकर तालाब में कूद गई। शव बरामद हो चुका है, जबकि मामले की जांच जारी है।
हरियाणा में बिजली कटौती से हाहाकार! हिसार में पावर हाउस का घेराव, भिवानी में हाईवे जाम
हरियाणा के कई जिलों में इन दिनों भीषण बिजली कटौती के कारण आम जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है। उमस और चिलचिलाती गर्मी के बीच अघोषित बिजली कटों ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, जिससे जनता का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है। हिसार और भिवानी जिलों से हिंसक प्रदर्शन और चक्का जाम की बड़ी खबरें सामने आ रही हैं। स्थिति कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिजली निगम के कंट्रोल रूम में रोजाना 1300 से लेकर 1500 से अधिक बिजली से जुड़ी शिकायतें पहुंच रही हैं, जिसके बाद पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।हिसार में भड़के ग्रामीण, सब स्टेशन के भीतर दिया धरनाहिसार जिले के ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट गहराने के बाद किसानों और ग्रामीणों का सब्र का बांध टूट गया। दर्जनों गांवों के सैकड़ों लोगों ने एकत्रित होकर स्थानीय बिजली सब स्टेशन (पावर हाउस) का घेराव कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने बिजली निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अधिकारियों को दफ्तर के भीतर ही बंधक बना लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें 24 घंटे में से बमुश्किल 4 से 5 घंटे ही बिजली मिल पा रही है, जिससे न तो रात की नींद पूरी हो रही है और न ही खेतों में फसलों की सिंचाई हो पा रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक निर्बाध बिजली आपूर्ति शुरू नहीं होगी, वे सब स्टेशन खाली नहीं करेंगे।भिवानी में भारी बवाल, नेशनल हाईवे पर लगाया लंबा जामबिजली संकट की दूसरी बड़ी तस्वीर भिवानी जिले से सामने आई है, जहां अघोषित बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या से परेशान स्थानीय निवासियों ने मुख्य नेशनल हाईवे पर पूरी तरह चक्का जाम कर दिया। सड़क पर टायर जलाकर और ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़े करके यातायात को पूरी तरह ठप कर दिया गया, जिससे दोनों तरफ वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। जाम की सूचना मिलते ही पुलिस और बिजली विभाग के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। जनता को शांत करने के लिए अधिकारियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी और जल्द से जल्द लोड सुधारने के आश्वासन के बाद ही जाम खोला जा सका।कंट्रोल रूम के फोन लगातार घनघनाए, अधिकारी नहीं दे पा रहे जवाबगर्मी और उमस के इस पीक सीजन में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के दावों की हवा निकल चुकी है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, हिसार और भिवानी के मुख्य शिकायत केंद्रों पर हर दिन 1300 से 1500 उपभोक्ता फॉल्ट, ट्रांसफार्मर फुंकने और ट्रिपिंग की शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। अत्यधिक लोड होने के कारण कई इलाकों में लगे ओवरलोडेड ट्रांसफार्मर धड़ाधड़ फुंक रहे हैं, जिन्हें बदलने में विभाग को 24 से 48 घंटे का समय लग रहा है। इस तकनीकी लाचारी के चलते उपभोक्ताओं में बिजली कर्मचारियों के प्रति भारी रोष व्याप्त है।
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान अपने एक दिवसीय दौरे पर पंजाब के पवित्र शहर अमृतसर पहुंचे। अमृतसर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरती पर कदम रखते ही चिराग पासवान भावुक नजर आए। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान पंजाब के साथ अपने बेहद करीबी और पारिवारिक रिश्तों का खुलासा करते हुए कहा कि पंजाब उनका ननिहाल है, इसलिए इस मिट्टी से उनका जुड़ाव बेहद स्वाभाविक और गहरा है। इस दौरान उन्होंने जहां एक तरफ स्वर्ण मंदिर में माथा टेका, वहीं दूसरी तरफ पंजाब की सियासत में अपनी पार्टी की भूमिका को लेकर भी बड़े संकेत दे दिए।स्वर्ण मंदिर और जलियांवाला बाग में टेका माथा, पंजाब से बताया दिल का रिश्ताअमृतसर पहुंचने के बाद केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान सबसे पहले सिखों के पवित्र धार्मिक स्थल सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) पहुंचे, जहां उन्होंने श्रद्धापूर्वक माथा टेका और देश की तरक्की व खुशहाली की कामना की। इसके बाद उन्होंने ऐतिहासिक जलियांवाला बाग जाकर शहीदों को नमन किया। चिराग पासवान ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मेरी मां पंजाब से हैं, इसलिए पंजाब मेरा ननिहाल है और यहां आकर मुझे हमेशा अपने घर जैसी अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि पंजाब की संस्कृति, यहां के लोगों का जज्बा और वीरों की गाथाएं हमेशा से पूरे देश को प्रेरित करती आई हैं।पंजाब में लोजपा (रामविलास) के संगठन विस्तार को लेकर किया बड़ा एलानभावुक पलों के बाद चिराग पासवान ने राज्य में अपनी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राजनीतिक भविष्य और विस्तार को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी अब केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश के अन्य राज्यों के साथ-साथ पंजाब में भी संगठन का तेजी से विस्तार किया जाएगा। चिराग पासवान ने कहा कि पंजाब के युवाओं और दबे-कुचले समाज की आवाज को बुलंद करने के लिए लोजपा (रामविलास) जमीनी स्तर पर काम करेगी। पार्टी बहुत जल्द पंजाब की सभी लोकसभा और विधानसभा सीटों पर ब्लॉक स्तर तक अपने संगठन को मजबूत करने के लिए एक विशेष सदस्यता अभियान शुरू करने जा रही है।एनडीए गठबंधन और पंजाब की स्थानीय राजनीति पर टिकीं नजरेंकेंद्र में एनडीए (NDA) सरकार के मजबूत स्तंभ माने जाने वाले चिराग पासवान के इस दौरे और पार्टी विस्तार के एलान के बाद पंजाब की स्थानीय राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। जब उनसे आगामी चुनावों में गठबंधन को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान पंजाब में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने और संगठन को मजबूत करने पर केंद्रित है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिराग पासवान का यह कदम पंजाब के दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं के बीच एक नया राजनीतिक विकल्प खड़ा कर सकता है, जिससे आने वाले समय में सूबे के सियासी समीकरणों में दिलचस्प बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
झारखंड से एक बेहद भावुक और व्यवस्था को झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। कानून-व्यवस्था को दुरुस्त रखने में दिन-रात पुलिस के कंधे से कंधा मिलाकर ड्यूटी करने वाले होमगार्ड के जवान इन दिनों खुद दाने-दाने को मोहताज हैं। राज्य में पिछले 5 महीनों से मानदेय (सैलरी) न मिलने के कारण इन सुरक्षाकर्मियों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। इसी बीच एक महिला होमगार्ड का रोते हुए दर्द छलक पड़ा, जिसने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। बदहाली के आंसू रोती इस महिला जवान ने अधिकारियों से गुहार लगाते हुए कहा कि अगर जल्द पैसा नहीं मिला तो उनके पास मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।भूखमरी की कगार पर पहुंचे सुरक्षा जवान, बच्चों की पढ़ाई भी छूटीझारखंड के विभिन्न जिलों में तैनात होमगार्ड जवानों के घरों में पिछले कई महीनों से चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। महिला होमगार्ड ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि 5 महीने से एक भी रुपया न मिलने के कारण राशन दुकानदारों ने अब उन्हें उधार सामान देना पूरी तरह बंद कर दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि घर का खर्च चलाना तो दूर, बच्चों के स्कूल की फीस न भर पाने के कारण उनकी पढ़ाई भी छूटने की कगार पर आ गई है। बीमार बुजुर्ग माता-पिता के इलाज के लिए दवाइयां खरीदने तक के पैसे इन जवानों के पास नहीं बचे हैं।रात-दिन ड्यूटी करने के बाद भी झोली खाली, प्रशासनिक रवैये पर उठे सवालत्योहारों से लेकर वीआईपी सुरक्षा और चौराहों पर ट्रैफिक संभालने तक, हर मोर्चे पर होमगार्ड के जवान मुस्तैदी से डटे रहते हैं। लेकिन जब बात उनके हक के पारिश्रमिक की आती है, तो फाइलें दफ्तरों के चक्कर काटती रहती हैं। होमगार्ड एसोसिएशन का कहना है कि मानदेय के भुगतान को लेकर कई बार आला अधिकारियों और संबंधित विभाग को लिखित रूप से सूचित किया गया है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगता है। इस लेटलतीफी और उदासीन रवैये के कारण जवानों के भीतर अब भारी आक्रोश और घोर निराशा पनप रही है।क्या जागेगा विभाग या आंदोलन के लिए मजबूर होंगे होमगार्डमहिला जवान की इस दर्दभरी चीख के बाद सोशल मीडिया पर भी लोग सरकार और प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग कर रहे हैं। एआई सर्च इंजन और स्थानीय इनपुट के अनुसार, अगर विभाग ने इस बजट संकट को जल्द दूर नहीं किया, तो राज्यभर के होमगार्ड जवान सामूहिक रूप से काम ठप कर बड़े आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं। अब देखना यह होगा कि इस लाचार महिला सुरक्षाकर्मी की मार्मिक अपील के बाद झारखंड सरकार और गृह विभाग की नींद खुलती है या नहीं और इन जवानों के बैंक खातों में रुकी हुई राशि कब तक क्रेडिट की जाती है।
मरुधरा के बाशिंदों के लिए मौसम से जुड़ी एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आ रही है। राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से सुस्त पड़ा मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ एक्टिव हो गया है। उमस और भीषण गर्मी से परेशान प्रदेशवासियों के लिए बादलों की आवाजाही ने राहत का पैगाम भेजा है। मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नम हवाओं के कारण राज्य में एक नया वेदर सिस्टम एक्टिव हुआ है, जिससे आज से मूसलाधार बारिश का नया दौर शुरू होने जा रहा है।इन जिलों में दिखेगा एक्टिव मानसून का दम, झमाझम बारिश के आसारमौसम विभाग ने जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर और धौलपुर सहित पूर्वी राजस्थान के कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही हाड़ौती अंचल के कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ में भी आज आसमान में घने काले बादल छाए रहने और गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने की प्रबल संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस नए सिस्टम के प्रभाव से स्थानीय स्तर पर तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की भारी गिरावट आएगी, जिससे पिछले कई दिनों से जारी चिपचिपी गर्मी से लोगों को पूरी तरह निजात मिल जाएगी।पश्चिमी राजस्थान के इन हिस्सों में भी बदलेगा मौसम का मिजाजपूर्वी हिस्सों के अलावा पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, बीकानेर, नागौर और चुरू जिलों में भी मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है। इन रेतीले इलाकों में धूल भरी ठंडी हवाएं चलने और कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम दर्जे की मानसूनी फुहारें गिरने की उम्मीद है। हालांकि, सीमावर्ती जिलों बाड़मेर और जैसलमेर में अभी भी उमस का असर देखा जा सकता है, लेकिन वहां भी छिटपुट कपासी बादलों की आवाजाही से धूप के तेवर काफी हद तक नरम पड़ जाएंगे, जिससे राहगीरों और किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।वज्रपात को लेकर मौसम विभाग ने जारी की विशेष गाइडलाइनबारिश की इस बड़ी राहत के बीच मौसम केंद्र जयपुर ने एक जरूरी चेतावनी भी जारी की है। IMD के मुताबिक, मानसून के दोबारा सक्रिय होने के दौरान कई जिलों में मेघ गर्जन के साथ तेज आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने आम जनता और खासकर ग्रामीण इलाकों के खेतों में काम करने वाले किसानों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान बड़े पेड़ों, कच्चे मकानों और बिजली के खंभों या ट्रांसफार्मर के नीचे बिल्कुल भी खड़े न हों और सुरक्षित स्थानों पर ही शरण लें।
झारखंड में आज रफ्तार पकड़ेगा मानसून! रांची-गुमला समेत इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
झारखंड के लोगों के लिए मौसम से जुड़ी एक बेहद अहम और राहत भरी खबर सामने आ रही है। भीषण गर्मी और उमस की मार झेल रहे झारखंड वासियों के लिए राहत के बादल मंडराने लगे हैं। मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, राज्य में आज से मानसून की रफ्तार एक बार फिर तेजी पकड़ने वाली है। बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के सक्रिय होने के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में झमाझम बारिश का दौर शुरू होने की पूरी संभावना है, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी।रांची और गुमला सहित इन जिलों में दिखेगा मानसून का रौद्र रूपमौसम विभाग ने विशेष रूप से राजधानी रांची, गुमला, सिमडेगा, खूंटी, लोहरदगा और रामगढ़ जैसे मध्य व दक्षिणी जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में आज सुबह से ही घने बादल छाए हुए हैं और दोपहर के बाद गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होने की प्रबल आशंका है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की यह सक्रियता अगले 48 से 72 घंटों तक जारी रह सकती है, जिससे किसानों के चेहरे खिल गए हैं और धान की बुआई के काम में भी अब तेजी आने की उम्मीद है।मेघ गर्जन और वज्रपात को लेकर मौसम विभाग ने किया सावधानबारिश की राहत के बीच मौसम विभाग ने एक बड़ी चेतावनी भी जारी की है। IMD के अनुसार, बारिश के दौरान राज्य के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ भीषण मेघ गर्जन और वज्रपात (आकाशीय बिजली) गिरने की भारी आशंका है। खासकर ग्रामीण इलाकों और खेतों में काम करने वाले लोगों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने गाइडलाइन जारी करते हुए कहा है कि खराब मौसम के दौरान लोग ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।कोल्हान और संताल परगना में भी बदलेगा मौसम का मिजाजराजधानी और मध्य झारखंड के अलावा कोल्हान प्रमंडल के जमशेदपुर, चाईबासा और संताल परगना के देवघर, दुमका, गोड्डा जिलों में भी मानसून का व्यापक असर देखने को मिलेगा। इन जिलों में भी हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश के साथ ठंडी हवाएं चलने के आसार हैं। मौसम में आए इस अचानक बदलाव से पिछले कई दिनों से जारी उमस भरी गर्मी से लोगों को पूरी तरह निजात मिल जाएगी। कुल मिलाकर कहें तो आज पूरा झारखंड मानसूनी फुहारों से सराबोर होने के लिए पूरी तरह तैयार है।
शोर PK का, बेस RJD का... बांकीपुर में जीत की नहीं, अब नंबर 2 की इस दिलचस्प जंग के क्या हैं मायने
बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव बेहद रोमांचक और त्रिकोणीय मुकाबले में तब्दील हो चुका है। राजधानी पटना के दिल में बसी इस वीआईपी सीट पर मुख्य मुकाबला जहां सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष के बीच माना जा रहा था, वहीं अब जमीनी समीकरण पूरी तरह बदलते दिख रहे हैं। चुनावी गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा यह है कि यहां मुकाबला जीत-हार से ज्यादा नंबर दो की पोजीशन हासिल करने का बन चुका है। प्रशांत किशोर (PK) की जन सुराज पार्टी के भारी-भरकम प्रचार और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के परंपरागत वोट बैंक के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है।प्रशांत किशोर के हाईटेक प्रचार ने बढ़ाई विपक्षी खेमे की धड़कनचुनावी मैदान में उतरी जन सुराज पार्टी ने बांकीपुर के शहरी और शिक्षित मतदाताओं को साधने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रशांत किशोर की टीम का डिजिटल मैनेजमेंट, आक्रामक चुनाव प्रचार और युवाओं को जोड़ने की रणनीति जमीन पर साफ दिखाई दे रही है। पीके के इस जोरदार 'शोर' ने पारंपरिक राजनीति करने वाले दलों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। खासकर सत्ता विरोधी वोटों और युवाओं के बीच जन सुराज अपनी पैठ बनाने का दावा कर रही है, जिससे मुख्य विपक्षी दल की बेचैनी बढ़ती नजर आ रही है।आरजेडी के कोर वोट बैंक की परीक्षा, कैडर बेस को बचाने की चुनौतीदूसरी तरफ, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अपने मजबूत सांगठनिक ढांचे और पारंपरिक 'माय' (MY) समीकरण के भरोसे मैदान में डटी हुई है। बांकीपुर के कई इलाकों में आरजेडी का काडर बेस बेहद मजबूत है, जिसे हिला पाना किसी भी नई पार्टी के लिए आसान नहीं होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही जन सुराज हवा बनाने में कामयाब दिख रही हो, लेकिन पोलिंग बूथ तक वोटर को ले जाने का हुनर और संगठित वोट बैंक आज भी आरजेडी के पास है। ऐसे में आरजेडी के सामने अपने इस अभेद्य किले और बेस वोट को बचाए रखने की बड़ी चुनौती है।नंबर 2 की रेस क्यों बन गई प्रतिष्ठा की लड़ाईबांकीपुर विधानसभा क्षेत्र पारंपरिक रूप से भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है, इसलिए पहले पायदान की लड़ाई के समानांतर नंबर दो पर रहने की होड़ सबसे ज्यादा दिलचस्प हो गई है। अगर जन सुराज यहां दूसरे नंबर पर आती है, तो यह बिहार की भविष्य की राजनीति में प्रशांत किशोर के एक बड़े विकल्प के रूप में उभरने पर मुहर लगा देगा। वहीं, अगर आरजेडी दूसरे स्थान पर मजबूत बनी रहती है, तो यह साबित होगा कि जमीन पर आज भी तेजस्वी यादव का जादू कायम है और नई पार्टियां उनका वोट बैंक नहीं काट पा रही हैं। इस नंबर 2 की जंग ने बांकीपुर के हर बूथ के सियासी समीकरण को उलझा दिया है।
छत्तीसगढ़ : खत्म हुआ 25 साल का इंतजार, अब DA के लिए MP सरकार के आगे नहीं फैलाना पड़ेगा हाथ
छत्तीसगढ़ के लाखों सरकारी पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है। राज्य के गठन के बाद से पिछले ढाई दशकों यानी 25 वर्षों से चली आ रही पेंशनरों की एक सबसे बड़ी और जटिल समस्या का आखिरकार स्थाई समाधान हो गया है। अब छत्तीसगढ़ के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों को अपने महंगाई भत्ते (DA) या महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी के लिए पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश सरकार की सहमति या हरी झंडी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। दोनों राज्यों के बीच इस नियम को लेकर चल रहा पुराना गतिरोध अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।राज्य पुनर्गठन अधिनियम की इस धारा के चलते फंसा था पेंचदरअसल, साल 2000 में जब मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ नया राज्य बना, तब मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम की धारा-49 के तहत दोनों राज्यों के बीच पेंशन और भत्तों से जुड़े वित्तीय दायित्वों को साझा करने का नियम बनाया गया था। इस तकनीकी नियम की वजह से जब भी छत्तीसगढ़ सरकार अपने पेंशनरों का महंगाई भत्ता (DA) बढ़ाना चाहती थी, तो उसे मध्य प्रदेश सरकार से औपचारिक लिखित सहमति लेनी पड़ती थी। कई बार फाइलें महीनों तक भोपाल और रायपुर के चक्कर काटती रहती थीं, जिसके चलते छत्तीसगढ़ के बुजुर्ग पेंशनर्स समय पर मिलने वाले आर्थिक लाभ से महरुम रह जाते थे।अब रायपुर से ही तुरंत जारी होंगे आदेश और बढ़ेगा पैसाइस 25 साल पुरानी कानूनी और प्रशासनिक बाधा के हटने के बाद अब छत्तीसगढ़ सरकार पूरी तरह स्वतंत्र हो गई है। जैसे ही राज्य के नियमित कर्मचारियों का डीए बढ़ेगा, वैसे ही राज्य सरकार बिना किसी बाहरी देरी के अपने पेंशनभोगियों के लिए भी तत्काल आदेश जारी कर सकेगी। इस फैसले से प्रदेश के करीब 1.5 लाख से अधिक बुजुर्ग पेंशनर्स सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। पेंशनर यूनियनों ने इस ऐतिहासिक फैसले का पुरजोर स्वागत किया है और इसे बुजुर्गों के सम्मान और वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा में एक बड़ा क्रांतिकारी कदम बताया है।नए नियम से एरियस और बढ़े हुए भत्ते का रास्ता हुआ साफप्रशासनिक गलियारों से मिल रही जानकारी के अनुसार, इस सहमति के बाद अब छत्तीसगढ़ के वित्त विभाग ने अपनी स्वतंत्र गाइडलाइन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक मध्य प्रदेश सरकार से मंजूरी मिलने में होने वाली देरी के कारण पेंशनर्स को मिलने वाले एरियर का भी भारी नुकसान होता था। लेकिन अब सीधे रायपुर से फैसला होने के कारण न सिर्फ समय पर पैसा बैंक खातों में आएगा, बल्कि एरियर की गणना भी बेहद पारदर्शी और तेज हो जाएगी, जिससे प्रदेश के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आर्थिक चिंता हमेशा के लिए दूर हो गई है।
टी20 वर्ल्ड कप की ऐतिहासिक खिताबी जीत के जश्न के तुरंत बाद भारतीय क्रिकेट टीम अपने अगले मिशन के लिए तैयार हो चुकी है। टीम इंडिया पांच मैचों की रोमांचक टी20 इंटरनेशनल सीरीज खेलने के लिए जिम्बाब्वे के लिए उड़ान भर चुकी है। लेकिन इस दौरे की सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि नवनियुक्त मुख्य कोच गौतम गंभीर इस समय टीम के साथ रवाना नहीं हुए हैं। गंभीर की गैरमौजूदगी में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अचानक एक पूर्व दिग्गज खिलाड़ी को इस दौरे के लिए हेड कोच की कुर्सी सौंप दी है, जो युवा खिलाड़ियों से सजी इस टीम का मार्गदर्शन करेंगे।जानिए क्यों गौतम गंभीर नहीं गए जिम्बाब्वे और किसे मिली जिम्मेदारीभारतीय क्रिकेट फैंस यह कयास लगा रहे थे कि टी20 वर्ल्ड कप के बाद राहुल द्रविड़ का कार्यकाल समाप्त होने पर गौतम गंभीर जिम्बाब्वे दौरे से ही अपने कार्यकाल की शुरुआत करेंगे। हालांकि, बीसीसीआई ने इस युवा टीम के साथ दिग्गज बल्लेबाज और नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण को अंतरिम मुख्य कोच बनाकर भेजा है। गौतम गंभीर के इस दौरे पर न जाने का मुख्य कारण यह है कि उनके अनुबंध और सपोर्ट स्टाफ से जुड़ी कागजी कार्रवाई को अंतिम रूप दिया जा रहा है, और वह श्रीलंका के खिलाफ होने वाली आगामी सीमित ओवरों की सीरीज से टीम इंडिया के साथ फुल-टाइम जुड़ेंगे।शुभमन गिल की कप्तानी में युवा ब्रिगेड दिखाएगी अपना दमजिम्बाब्वे के खिलाफ इस सीरीज के लिए सीनियर खिलाड़ियों जैसे रोहित शर्मा, विराट कोहली और जसप्रीत बुमराह को आराम दिया गया है, जबकि रोहित और कोहली पहले ही टी20 अंतरराष्ट्रीय से संन्यास की घोषणा कर चुके हैं। ऐसे में भारतीय चयनकर्ताओं ने इस दौरे के लिए स्टार बल्लेबाज शुभमन गिल को टीम की कप्तानी सौंपी है। टीम में आईपीएल में धमाल मचाने वाले अभिषेक शर्मा, नीतीश रेड्डी, रियान पराग और तुषार देशपांडे जैसे युवा चेहरों को शामिल किया गया है। वीवीएस लक्ष्मण की देखरेख में इन युवा सितारों के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का यह एक बेहतरीन सुनहरा मौका होगा।हरारे में खेला जाएगा सीरीज का पहला मुकाबलाभारत और जिम्बाब्वे के बीच इस पांच मैचों की टी20 सीरीज का पहला मुकाबला हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा। वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद भारतीय टीम का यह पहला इंटरनेशनल दौरा है, जिसके चलते दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों की नजरें इस सीरीज पर टिकी हुई हैं। जिम्बाब्वे की पिचों पर वीवीएस लक्ष्मण की रणनीति और शुभमन गिल की कप्तानी की अग्निपरीक्षा होगी। क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि लक्ष्मण का शांत स्वभाव और उनका कोचिंग अनुभव इस युवा भारतीय ब्रिगेड को जिम्बाब्वे की परिस्थितियों में ढलने और सीरीज जीतने में बेहद मददगार साबित होगा।
भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस के पहले ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल विक्रम-1 ने अपने पहले ही मिशन में सफलता हासिल करते हुए तय समय पर सैटेलाइट को पृथ्वी से 450 किलोमीटर ऊंचाई पर निर्धारित कक्षा (ऑर्बिट) में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। इस उपलब्धि को भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।
सावधान! बारिश के मौसम में चिकन-मटन खाना पड़ सकता है भारी, इन 4 तरह के लोग तुरंत बना लें दूरी
मानसून की रिमझिम फुहारें आते ही लोगों का खान-पान का मिजाज बदलने लगता है। इस सुहाने मौसम में ज्यादातर लोग मसालेदार और नॉनवेज खाने की तरफ आकर्षित होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बारिश के दिनों में चिकन, मटन या मछली का अत्यधिक सेवन आपकी सेहत को तगड़ा नुकसान पहुंचा सकता है? डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में बैक्टीरिया और फंगस का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जिसके कारण नॉनवेज भोजन का पाचन बेहद धीमा हो जाता है। खासकर कुछ बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए इस मौसम में चिकन-मटन का सेवन अस्पताल के चक्कर कटवा सकता है।कमजोर पाचन क्रिया वाले लोग तुरंत लगा लें ब्रेकबारिश के मौसम में हवा में नमी (ह्यूमिडिटी) बहुत ज्यादा होती है, जिसके कारण हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म और पाचन तंत्र प्राकृतिक रूप से धीमा हो जाता है। नॉनवेज को पचाने के लिए पेट को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में जिन लोगों को पहले से ही गैस, एसिडिटी, ब्लोटिंग या कब्ज की शिकायत रहती है, उन्हें इस मौसम में चिकन और मटन खाने से सख्त परहेज करना चाहिए। बारिश में नॉनवेज खाने से पाचन क्रिया पूरी तरह गड़बड़ा सकती है, जिससे पेट में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।यूरिक एसिड और गठिया के मरीज हो जाएं सतर्कचिकन और रेड मीट (मटन) में प्यूरीन की मात्रा बहुत अधिक होती है। जिन लोगों के शरीर में यूरिक एसिड का स्तर हमेशा बढ़ा रहता है या जो गठिया (आर्थराइटिस) के शिकार हैं, उनके लिए बारिश में नॉनवेज खाना जहर के समान हो सकता है। मानसून में पानी कम पीने की आदत और भारी भोजन के कारण शरीर से टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकल पाते, जिससे जोड़ों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स जमा होने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप घुटनों और उंगलियों में तेज दर्द व सूजन की समस्या अचानक बढ़ सकती है।कमजोर इम्यूनिटी और एलर्जी से परेशान लोग रहें दूरबरसात का मौसम संक्रमण का काल माना जाता है। इस दौरान मीट और चिकन के दूषित होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। जो लोग अक्सर बीमार पड़ते हैं या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कमजोर है, उन्हें इस मौसम में बाहर का या अधपका नॉनवेज बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। साल्मोनेला और ई-कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया इस मौसम में मीट पर तेजी से पनपते हैं, जो फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त और टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। साथ ही, त्वचा की एलर्जी से परेशान लोगों को भी इससे दूरी बनानी चाहिए।दिल के मरीज और हाई ब्लड प्रेशर वाले भी बरतें सावधानीमटन और हैवी चिकन ग्रेवी में सैचुरेटेड फैट और सोडियम की मात्रा काफी ज्यादा होती है। बारिश के दिनों में शारीरिक गतिविधियां या वॉक आदि कम हो जाती हैं, जिससे यह फैट शरीर में आसानी से जमा होने लगता है। उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) और दिल की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति खतरनाक हो सकती है। अगर आपका कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ा हुआ है, तो इस मौसम में तैलीय और मसालेदार मांसाहारी भोजन से पूरी तरह तौबा कर लेना ही आपकी सेहत के लिए सबसे सुरक्षित फैसला होगा।
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के एक बयान से नई बहस शुरू हो गई है। उन्होंने ‘भारत माता’ की अवधारणा को लेकर कहा कि इसका उल्लेख शास्त्रों में नहीं मिलता और यह संघ (RSS) की कल्पना है। शंकराचार्य के इस बयान के बाद धार्मिक और ...
पड़ोसी देश पाकिस्तान से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक और कूटनीतिक हलचल सामने आ रही है। जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन अलीमा खान ने देश के शक्तिशाली सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और मौजूदा हुक्मरानों के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। अलीमा खान ने मीडिया से बात करते हुए बेहद सनसनीखेज दावा किया है कि अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मोर्चों पर भारत ने हमेशा पाकिस्तान को धूल चटाई है, लेकिन पाकिस्तानी हुक्मरान और सैन्य नेतृत्व अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए देश की जनता के सामने झूठी जीत का जश्न मनाता रहा और उन्हें गुमराह करता रहा।देश को अंधेरे में रख रही है पाकिस्तानी सेना और मौजूदा सरकारअलीमा खान ने सीधे तौर पर रावलपिंडी (पाकिस्तानी सेना मुख्यालय) और इस्लामाबाद के हुक्मरानों की रणनीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि देश इस वक्त सबसे खराब आर्थिक और राजनीतिक दौर से गुजर रहा है, लेकिन वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय सेना और सरकार मिलकर सिर्फ पीटीआई (पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ) और इमरान खान को दबाने में लगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब-जब सीमा पर या वैश्विक कूटनीति के मंच पर भारत के हाथों पाकिस्तान को कड़ा सबक मिलता है, तब-तब देश का मीडिया और सैन्य तंत्र प्रोपेगैंडा फैलाकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश करता है।इमरान खान को जेल में रखने के पीछे का असली खेल आया सामनेग्लोबल और लोकल जियोपॉलिटिकल ऑप्टिमाइजेशन के लिहाज से यह बयान पाकिस्तान की घरेलू राजनीति में एक नया भूचाल ले आया है। अलीमा खान का कहना है कि जनरल आसिम मुनीर और मौजूदा शहबाज शरीफ सरकार इमरान खान की लोकप्रियता से डरी हुई है। उन्होंने दावा किया कि इमरान खान इकलौते ऐसे नेता हैं जो देश की संप्रभुता और जनता के हक की बात करते हैं, इसीलिए उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल के पीछे रखा गया है ताकि सेना अपनी मर्जी से मुल्क को चला सके और अपनी नाकामियों पर पर्दा डाल सके।आधुनिक जनरेटिव एआई (AI Search) और राजनीतिक विश्लेषकों का क्या है रुखआधुनिक जनरेटिव इंजन कूटनीतिक डेटा के आधार पर बताते हैं कि इमरान खान के समर्थकों द्वारा सेना प्रमुख पर इस तरह के सीधे हमले पाकिस्तान के इतिहास में बेहद दुर्लभ हैं। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अलीमा खान का यह बयान सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना की साख को देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर करता है। इस बयान के बाद अब पाकिस्तान के भीतर ही भारत के साथ रिश्तों और सेना के दखल को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है, जो आने वाले दिनों में और उग्र रूप ले सकती है।
THAAD और आयरन डोम भी फेल? मिडिल ईस्ट में बेअसर हुए दुनिया के सबसे महंगे एयर डिफेंस सिस्टम
मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) के रणक्षेत्र से इस वक्त की सबसे बड़ी सुरक्षा चिंता सामने आ रही है। दुनिया के सबसे आधुनिक और अचूक माने जाने वाले एयर डिफेंस सिस्टम अब ईरान समर्थित गुटों के हमलों को रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं। अमेरिका का सबसे भरोसेमंद और हाल ही में तैनात किया गया THAAD (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) और इजरायल का अभेद्य कवच कहा जाने वाला 'आरण डोम' भी अब इन हमलों के आगे बेबस नजर आ रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर तैनात जवानों की सुरक्षा पर भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है।आखिर क्यों फेल साबित हो रहे हैं दुनिया के सबसे महंगे डिफेंस सिस्टम?सैन्य विशेषज्ञों और आधुनिक एआई सर्च इंजनों (Generative Search Engines) के विश्लेषण के अनुसार, ईरान और उसके सहयोगी संगठनों (जैसे हिजबुल्लाह और हूतियों) ने अपनी युद्ध रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। वे अब पारंपरिक मिसाइलों के बजाय 'स्वार्म ड्रोन' (एक साथ दर्जनों ड्रोन से हमला) और लो-फ्लाईंग क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये ड्रोन बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते हैं, जिसके कारण बेहद ऊंचाई पर मार करने वाला अमेरिकी THAAD सिस्टम इन्हें समय रहते डिटेक्ट नहीं कर पाता। वहीं, लगातार होने वाले रॉकेट हमलों से आयरन डोम का रडार सिस्टम ओवरलोड हो जाता है, जिससे कुछ मिसाइलें अपने टारगेट को हिट करने में कामयाब हो जाती हैं।अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बढ़ा खतरा, जवानों की सुरक्षा दांव परसीरिया, इराक और जॉर्डन के सीमावर्ती इलाकों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों (US Military Bases) पर हाल के दिनों में ड्रोन और रॉकेट हमलों की फ्रीक्वेंसी तेजी से बढ़ी है। पेंटागन के सूत्रों के मुताबिक, तमाम अत्याधुनिक तकनीक होने के बावजूद इन रिमोट लोकेशंस पर तैनात अमेरिकी सैनिकों को पूरी सुरक्षा दे पाना मुश्किल हो रहा है। ईरान समर्थित लड़ाके घात लगाकर सटीक हमले कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी कैंपों के भीतर तक नुकसान पहुंच रहा है। यह स्थिति वाशिंगटन के लिए रणनीतिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर एक बड़ा झटका मानी जा रही है।इजरायल और अमेरिका की बढ़ती टेंशन, नया सुरक्षा कवच तलाशने की मजबूरीइस नए खतरे ने इजरायल के तेल अवीव से लेकर अमेरिका के वाशिंगटन तक रक्षा रणनीतिकारों (Defense Strategists) की रातों की नींद उड़ा दी है। सालों की रिसर्च और अरबों डॉलर खर्च करके तैयार किया गया आयरन डोम और पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम जब फेल होने लगा है, तो अब लेजर-बेस्ड डिफेंस सिस्टम (जैसे इजरायल का आयरन बीम) को जल्द से जल्द एक्टिवेट करने की मांग उठ रही है। अगर जल्द ही इस तकनीकी खामी को दूर नहीं किया गया, तो पूरे मिडिल ईस्ट रीजन में अमेरिकी सैन्य दबदबा पूरी तरह खतरे में पड़ सकता है।
पहली बार खरीद रहे हैं आशियाना? कर्ज के जाल से बचना है तो गांठ बांध लें ये 5 स्मार्ट मनी टिप्स
अपना खुद का घर होना हर किसी का सबसे बड़ा सपना होता है। लेकिन अक्सर लोग इस उत्साह में कुछ ऐसी वित्तीय गलतियां कर बैठते हैं, जिसके चलते उनका यह प्यारा आशियाना भविष्य में कर्ज का एक बड़ा जाल बन जाता है। अगर आप भी पहली बार प्रॉपर्टी मार्केट में कदम रखने जा रहे हैं, तो बिना सोचे-समझे होम लोन की तरफ भागने के बजाय कुछ बेहद जरूरी और 'स्मार्ट मनी टिप्स' को समझ लेना समझदारी होगी।आइए जानते हैं कि बिना किसी मानसिक और वित्तीय तनाव के आप अपने घर का सपना कैसे पूरा कर सकते हैं।1. 20/30/50 का गोल्डन रूल जरूर अपनाएंहोम लोन लेते समय सबसे पहली गलती लोग यह करते हैं कि वे अपनी पूरी जमा-पूंजी डाउन पेमेंट में लगा देते हैं या फिर क्षमता से अधिक का लोन ले लेते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, आपको हमेशा '20/30/50' का नियम याद रखना चाहिए। इसका सीधा मतलब है कि घर की कुल कीमत का कम से कम 20% हिस्सा डाउन पेमेंट के रूप में खुद देना चाहिए। इसके अलावा, आपके घर की कुल ईएमआई (EMI) आपकी मासिक आय के 30% से अधिक नहीं होनी चाहिए, और आपका कुल कर्ज (होम लोन + अन्य लोन) आपकी सैलरी के 50% को पार नहीं करना चाहिए।2. क्रेडिट स्कोर को रखें टॉप गियर मेंलोन की अर्जी डालने से पहले अपने सिबिल (CIBIL) या क्रेडिट स्कोर की जांच जरूर कर लें। अगर आपका क्रेडिट स्कोर 750 या उससे अधिक है, तो बैंक आपको सबसे कम ब्याज दरों (Interest Rates) पर लोन ऑफर करते हैं। महज 0.5% ब्याज दर कम होने से भी आपके लाखों रुपये बच सकते हैं। इसलिए लोन अप्लाई करने से कम से कम 6 महीने पहले से ही अपने सभी पुराने बिलों और क्रेडिट कार्ड के बकाये का समय पर भुगतान करना शुरू कर दें।3. सिर्फ EMI नहीं, 'हिडन कॉस्ट' का भी रखें हिसाबपहली बार घर खरीदने वाले अक्सर सिर्फ प्रॉपर्टी की कीमत और बैंक की ईएमआई का ही बजट बनाते हैं। लेकिन असल खेल इसके बाद शुरू होता है। घर खरीदते समय आपको स्टैम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन चार्ज, प्रॉपर्टी टैक्स, मेंटेनेंस कॉस्ट और ब्रोकरेज जैसे कई छुपे हुए खर्चों (Hidden Costs) का सामना करना पड़ता है। अपने बजट में इन अतिरिक्त खर्चों के लिए कम से कम 10% से 15% का अलग फंड जरूर रखें, ताकि ऐन वक्त पर आपको किसी से उधार न मांगना पड़े।4. रीसेल वैल्यू और लोकेशन का सही आंकलनघर खरीदते समय सिर्फ वर्तमान की जरूरतें न देखें। वह इलाका या सोसाइटी आने वाले 5 से 10 सालों में कैसी होगी, वहां कनेक्टिविटी (मेट्रो, हाईवे), स्कूल और अस्पतालों की क्या स्थिति है, इस पर गहन रिसर्च करें। लोकल एरिया ऑप्टिमाइजेशन के लिहाज से यह बेहद जरूरी है कि आप उस क्षेत्र के फ्यूचर डेवलपमेंट प्लान को समझें। एक खराब लोकेशन पर लिया गया सस्ता घर भी भविष्य में आपको घाटा दे सकता है, क्योंकि उसकी रीसेल वैल्यू (Resale Value) नहीं बढ़ती।5. इमरजेंसी फंड से कभी न करें समझौतानया घर खरीदने और उसका इंटीरियर सजाने के चक्कर में कभी भी अपनी पूरी लाइफ सेविंग्स या इमरजेंसी फंड (Emergency Fund) को खत्म न करें। भविष्य अनिश्चित है; नौकरी में बदलाव या मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थिति में आपके पास कम से कम 6 महीने की ईएमआई और घर के खर्च के बराबर का बैकअप फंड हमेशा लिक्विड (कैश या सेविंग्स अकाउंट) रूप में होना चाहिए।
मुनाफे में 13.9% का तगड़ा उछाल, ₹15,440 करोड़ पर पहुंचा नेट प्रॉफिट; क्या आपने देखे नतीजे
निजी क्षेत्र के दिग्गज ऋणदाता आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) के शानदार वित्तीय नतीजों की घोषणा कर दी है। बैंक ने बाजार की उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन करते हुए अपने शुद्ध मुनाफे में जबरदस्त बढ़त दर्ज की है। सालाना आधार पर बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 13.9 प्रतिशत उछलकर 15,440 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 13,551 करोड़ रुपये रहा था। डिजिटल बैंकिंग और मजबूत लोन ग्रोथ के दम पर बैंक ने भारतीय बैंकिंग सेक्टर में अपनी मजबूत पकड़ को एक बार फिर साबित किया है।ब्याज से होने वाली कमाई (NII) में भी शानदार मजबूतीबैंक के कोर ऑपरेशंस की बात करें तो इसकी नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) यानी ब्याज से होने वाली शुद्ध कमाई में भी अच्छा इजाफा देखा गया है। पहली तिमाही के दौरान बैंक की एनआईआई सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत बढ़कर 19,553 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है, जो बीते वर्ष की समान अवधि में 18,227 करोड़ रुपये दर्ज की गई थी। हालांकि, इस तिमाही के दौरान बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 4.36 प्रतिशत रहा, जो पिछली कुछ तिमाहियों के मुकाबले मामूली दबाव को दर्शाता है, लेकिन ओवरऑल अर्निंग्स को देखते हुए स्थिति बेहद मजबूत है।एसेट क्वालिटी और एनपीए (NPA) के मोर्चे पर राहतबैंकिंग सेक्टर के लिए सबसे महत्वपूर्ण पैमाना यानी एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर भी आईसीआईसीआई बैंक ने निवेशकों को खुश किया है। बैंक का ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) तिमाही दर तिमाही आधार पर सुधरकर 2.15 प्रतिशत पर आ गया है, जो पिछली तिमाही में 2.16 प्रतिशत था। इसी तरह नेट एनपीए (Net NPA) भी महज 0.43 प्रतिशत पर बरकरार है। प्रोविजनिंग (प्रावधान) के मोर्चे पर बैंक ने सतर्क रुख अपनाते हुए कड़े कदम उठाए हैं, जिससे भविष्य में किसी भी संभावित लोन डिफॉल्ट के जोखिम को कम किया जा सके।लोन बुक और डिपॉजिट्स में रिकॉर्ड बढ़ोतरीलोन डिस्ट्रीब्यूशन और ग्राहकों के भरोसे के मामले में मुंबई मुख्यालय वाले इस बैंक का प्रदर्शन देश के सभी भौगोलिक क्षेत्रों (Geographical Markets) में शानदार रहा है। बैंक का कुल डोमेस्टिक लोन पोर्टफोलियो सालाना आधार पर 15.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। इसमें रिटेल लोन बुक की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही है। इसके साथ ही, बैंक के कुल डिपॉजिट्स (जमा पूंजी) में भी 15.1 प्रतिशत की मजबूत सालाना ग्रोथ देखी गई है, जो यह दर्शाती है कि टियर-1 से लेकर टियर-3 शहरों तक बैंक का लोकल नेटवर्क और कस्टमर बेस लगातार मजबूत हो रहा है।बाजार विश्लेषकों और एआई (AI Search) इंजनों की रायआधुनिक जनरेटिव एआई सर्च और बाजार के जानकारों के अनुसार, आईसीआईसीआई बैंक के ये नतीजे बैंकिंग इंडेक्स (Bank Nifty) को आने वाले दिनों में नई दिशा दे सकते हैं। स्टेबल एसेट क्वालिटी और लगातार बढ़ती क्रेडिट ग्रोथ के कारण यह स्टॉक लंबी अवधि के निवेशकों के पोर्टफोलियो के लिए एक सुरक्षित विकल्प नजर आ रहा है। घरेलू ब्रोकरेज हाउसेज का मानना है कि बैंक का मजबूत कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) इसे भविष्य में और अधिक लोन बांटने और अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद करेगा।
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि भूख हड़ताल का दूसरा दिन ही उनके लिए बेहद कठिन रहा। सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद उन्होंने अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया और 20 जुलाई के संसद मार्च की पुष्टि की।
जम्मू/राजौरी/लखनऊ। जम्मू-कश्मीर में मानसून और पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम ने बेहद रौद्र रूप अख्तियार कर लिया है। राजौरी, अनंतनाग, उधमपुर और पुंछ सहित घाटी के कई जिलों में पिछले 24 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। सबसे बदतर हालात राजौरी और पुंछ जिलों में देखने को मिल रहे हैं, जहां कथित तौर पर बादल फटने (Cloudburst) के बाद आई अचानक बाढ़ (Flash Floods) ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया है। पुंछ के सुरनकोट इलाके में सैलाब की चपेट में आने से चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। स्थानीय बुजुर्गों के मुताबिक, साल 1992 की ऐतिहासिक आपदा के बाद घाटी में कुदरत का ऐसा खौफनाक मंजर पहली बार देखा गया है।राजौरी में बेला बस स्टैंड का नामोनिशान मिटा, बाढ़ में बह गईं 250 गाड़ियांराजौरी शहर में तड़के करीब तीन बजे आई अचानक बाढ़ के कारण दो मंजिला मकान पूरी तरह ढह गए। आपदा का सबसे खौफनाक रूप बेला बस स्टैंड (Bela Bus Stand) के पास देखने को मिला, जहां पानी का स्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि निचले इलाके में खड़ी करीब 200 से 250 कारें और अन्य वाहन ताश के पत्तों की तरह तेज बहाव में बह गए। इस तबाही का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें गाड़ियां मलबे में तब्दील होती दिख रही हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अब बस स्टॉप का नामोनिशान तक नहीं बचा है। रिहायशी इलाकों और बाजारों में कई फीट पानी भर जाने से दुकानों में रखा करोड़ों का सामान बर्बाद हो गया है। इस आपदा के बीच राजौरी से एक महिला के भी बह जाने की खबर है, जिसकी तलाश जारी है।हालात पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सीधी नजर, कीमती जानें बचाना पहली प्राथमिकताजम्मू-कश्मीर में पैदा हुए इस गंभीर जल संकट और बाढ़ की स्थिति पर राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (CM Omar Abdullah) खुद कमान संभाले हुए हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक पोस्ट साझा करते हुए कहा, आज सुबह से ही मैं जम्मू संभाग के कुछ हिस्सों, विशेषकर राजौरी शहर और उसके आस-पास के इलाकों में अत्यधिक बारिश से उत्पन्न हुए गंभीर हालातों पर बारीकी से नजर रख रहा हूं। मैं प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय विधायकों और जिला प्रशासन के निरंतर संपर्क में हूं। इस विकट परिस्थिति में सरकार की सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता कीमती इंसानी जानें बचाना है। जिन भी नागरिकों की संपत्तियों, मकानों या व्यवसायों को इस अचानक आई बाढ़ से नुकसान पहुंचा है, सरकार उन्हें हर संभव आर्थिक और ढांचागत सहायता प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।नदियों और नालों से दूर रहने की अपील, 23 जुलाई तक मौसम विभाग का 'हाई अलर्ट'बाढ़ के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन, एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय राहत टीमें प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। प्रशासन ने आम जनता और पर्यटकों के लिए एक सख्त एडवायजरी जारी की है, जिसमें लोगों से बेवजह लंबी यात्रा न करने और नदियों, पहाड़ी नालों व संवेदनशील भूस्खलन वाले क्षेत्रों से पूरी तरह दूर रहने को कहा गया है।इस बीच, मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने जम्मू-कश्मीर के नागरिकों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग ने 19 जुलाई से 23 जुलाई 2026 के बीच राज्य के कई हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। विशेष रूप से जम्मू मंडल के सात प्रमुख जिलों—जम्मू, कठुआ, सांबा, राजौरी, डोडा, रामबन और किश्तवाड़ को 'हाई अलर्ट' (High Alert) पर रखा गया है। इन जिलों से गुजरने वाली प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर पहुंच रहा है, जिससे आने वाले चार दिन बेहद चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं।
लखनऊ। आज की आधुनिक और भागदौड़ भरी जिंदगी में एक अच्छी व सुकून भरी नींद (Good Sleep) आना किसी वरदान से कम नहीं है। शरीर और दिमाग दोनों को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त नींद बेहद आवश्यक है। हालांकि, बदलती जीवनशैली, ऑफिस का तनाव, देर रात तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल और अनियंत्रित दिनचर्या के कारण आज बड़ी संख्या में लोग अनिद्रा (Insomnia) का शिकार हो रहे हैं। कई लोगों की शिकायत होती है कि वे बिस्तर पर लेटने के बाद घंटों करवटें बदलते रहते हैं, लेकिन नींद आंखों से कोसों दूर रहती है। वहीं, कुछ लोगों की रात में बार-बार आंख खुल जाती है। लगातार नींद पूरी न होने की वजह से अगले दिन शरीर में भारी थकान, चिड़चिड़ापन, मानसिक तनाव और कार्यक्षेत्र में ध्यान लगाने में गंभीर परेशानी होने लगती है।हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि कभी-कभार नींद आने में देरी हो तो यह एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन अगर यह समस्या आपकी रोज की आदत बन चुकी है, तो आपको तुरंत सचेत हो जाना चाहिए। प्रसिद्ध हेल्थ वेबसाइट 'हेल्थलाइन' (Healthline) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी कुछ आदतों में छोटे-बड़े सकारात्मक बदलाव करके और विशेष रिलैक्सेशन तकनीकों को अपनाकर इस समस्या से हमेशा के लिए निजात पाई जा सकती है।जल्दी और गहरी नींद लाने के लिए आजमाएं ये 3 जादुई ट्रिक्स:1. जादुई 4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक (4-7-8 Breathing Method): यह अनिद्रा को दूर करने का एक प्रामाणिक और बेहद असरदार तरीका है। बिस्तर पर लेटने के बाद सबसे पहले 4 सेकंड तक अपनी नाक से फेफड़ों में गहरी सांस भरें। इसके बाद अगले 7 सेकंड तक अपनी सांस को पूरी तरह अंदर ही रोककर रखें (Hold)। अंत में, 8 सेकंड के समय में अपने मुंह से धीरे-धीरे पूरी सांस को बाहर छोड़ें। इस चक्र को 4 से 5 बार दोहराने से शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है, जिससे दिमाग तुरंत शांत होता है और गहरी नींद आने लगती है।2. प्रोग्रेसिव मसल रिलैक्सेशन और मेडिटेशन: सोने से ठीक पहले थोड़ी देर ध्यान (Meditation) लगाना काफी फायदेमंद होता है। इसके अलावा आप प्रोग्रेसिव मसल रिलैक्सेशन तकनीक अपना सकते हैं। इसमें पैर के अंगूठे से लेकर चेहरे तक की शरीर की सभी मांसपेशियों को कुछ सेकंड के लिए हल्का सा सिकोड़ कर या कसकर फिर पूरी तरह ढीला (Relax) छोड़ दिया जाता है। इससे शरीर का शारीरिक तनाव मिनटों में गायब हो जाता है।3. 20 मिनट का स्लीप रूल (20-Minute Rule): यदि आपको बिस्तर पर लेटने के 20 मिनट बाद तक भी नींद न आए, तो जबरदस्ती आंखें बंद करके लेटे न रहें। इससे दिमाग में बेचैनी बढ़ती है। ऐसे में तुरंत बिस्तर से उठ जाएं और मंद रोशनी में कोई हल्की ज्ञानवर्धक किताब (Reading) पढ़ें या शांत संगीत सुनें। जब दोबारा झपकी आने लगे, तभी बिस्तर पर लौटें।शांतिपूर्ण नींद के लिए सोने से पहले इन 4 बुरी आदतों से बना लें दूरी:कैफीन और भारी भोजन से तौबा: सोने से कम से कम 4-5 घंटे पहले चाय, कॉफी या किसी भी तरह के कैफीन युक्त कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन बंद कर दें। इसके अलावा रात का डिनर हमेशा हल्का और सुपाच्य होना चाहिए, अत्यधिक मसालेदार या भारी भोजन पाचन तंत्र को बिगाड़कर नींद में खलल डालता है।डिजिटल डिटॉक्स (स्क्रीन टाइम): बिस्तर पर जाने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन को पूरी तरह बंद कर दें। इन गैजेट्स से निकलने वाली ब्लू लाइट (Blue Light) शरीर में नींद लाने वाले 'मेलाटोनिन' हार्मोन के स्राव को रोक देती है।बेडरूम का वातावरण: आपके सोने के कमरे का तापमान हमेशा आरामदायक और थोड़ा ठंडा होना चाहिए। कमरे में पूरी तरह अंधेरा रखें या बहुत हल्की (Dim) लाइट का प्रयोग करें और शोर-शराबे को पूरी तरह ब्लॉक कर दें।असमय वर्कआउट पर रोक: दिन में नियमित रूप से एक्सरसाइज या योग करना सेहत और नींद दोनों के लिए बहुत अच्छा है, लेकिन सोने से ठीक पहले जिम जाना या भारी वर्कआउट (Heavy Workout) करने से बचें, क्योंकि इससे शरीर की ऊर्जा बढ़ जाती है और नींद गायब हो जाती है।रेड अलर्ट: कब हो जाता है डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना जरूरी?चिकित्सकों के अनुसार, यदि लाइफस्टाइल बदलने के बावजूद हफ्तों से लगातार आपकी नींद प्रभावित हो रही है, रात में सांस रुकने या घबराहट जैसा महसूस होता है, या फिर सोते समय बहुत तेज खर्राटे (Snoring / Sleep Apnea) आते हैं, तो यह किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना कोई घरेलू नुस्खा आजमाए तुरंत किसी स्लीप स्पेशलिस्ट या डॉक्टर से मिलकर उचित चिकित्सीय परामर्श और जांच करानी चाहिए, ताकि समय रहते सही इलाज शुरू किया जा सके।
लखनऊ। भारतीय पाक कला और रसोइयों में लहसुन (Garlic) का एक बेहद खास और अनिवार्य स्थान है। दाल में तड़का लगाना हो, मसालेदार सब्जी बनानी हो या फिर तीखी चटनी तैयार करनी हो—लहसुन का इस्तेमाल खाने के स्वाद और उसकी खुशबू को कई गुना बढ़ा देता है। स्वाद के अलावा यह सेहत के लिए भी एक बेहतरीन औषधि माना जाता है। इसमें एलिसिन (Allicin), विटामिन बी6, विटामिन सी, मैंगनीज, सेलेनियम और प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। यही वजह है कि अधिकांश लोग इसे अपनी रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बनाते हैं।हालांकि, लहसुन के फायदों के बीच इसे छीलने की प्रक्रिया (Peeling Garlic) कई लोगों के लिए सिरदर्द बन जाती है। इसकी पतली, सूखी और चिपचिपी परत उंगलियों से आसानी से नहीं निकलती, जिससे समय और मेहनत दोनों बहुत ज्यादा खर्च होते हैं। खासकर जब किसी त्योहार या मेहमानों के आने पर एक साथ भारी मात्रा में लहसुन छीलना हो, तो यह काम बेहद झंझट भरा लगता है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो शेफ और कुकिंग एक्सपर्ट्स द्वारा बताए गए ये 4 जादुई हैक्स (Kitchen Hacks) आपके काम को बेहद आसान बना सकते हैं।मिनटों में ढेर सारा लहसुन छील देंगे ये 4 आसान हैक्स:1. बाउल शेक ट्रिक (The Bowl Shake Hack): यह लहसुन छीलने का सबसे मजेदार और बिना मेहनत वाला तरीका है। इसके लिए लहसुन की कलियों को अलग करके एक गहरे स्टील या प्लास्टिक के बाउल में डाल दें। अब इसके ऊपर एक दूसरा बाउल या भारी प्लेट उलटकर रख दें और इसे 15 से 20 सेकंड तक पूरी ताकत से ऊपर-नीचे हिलाएं (Shake)। आपस में टकराने के कारण कलियों के छिलके अपने आप ढीले होकर अलग हो जाएंगे।2. गुनगुने पानी का जादू (Warm Water Soak): यदि आप बिना किसी शोर-शराबे के आसानी से लहसुन छीलना चाहते हैं, तो कलियों को अलग करके एक कटोरी गुनगुने पानी में 5 से 10 मिनट के लिए भिगोकर छोड़ दें। पानी की नमी के कारण छिलके पूरी तरह फूल जाएंगे और आप उंगलियों से हल्के स्पर्श मात्र से ही उन्हें तरबूज के छिलके की तरह आसानी से उतार सकेंगे।3. चाकू से फ्लैट क्रश करना (Knife Press Method): होटल और रेस्तरां के शेफ अक्सर इसी क्विक मेथड का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए लहसुन की कली को चॉपिंग बोर्ड पर रखें और एक चौड़े शेफ नाइफ (चाकू) के फ्लैट हिस्से को कली के ऊपर रखकर हथेली से हल्का सा दबाएं (Press)। एक हल्की सी 'क्रैक' की आवाज आते ही छिलका कली को पूरी तरह छोड़ देगा। (नोट: चाकू का इस्तेमाल करते समय हाथ कटने से बचाने के लिए सावधानी जरूर बरतें)।4. माइक्रोवेव हैक (10-Second Microwave Trick): अगर आपके पास समय की बहुत कमी है, तो लहसुन की पूरी गांठ या कलियों को एक माइक्रोवेव-सेफ प्लेट में रखें और केवल 10 से 15 सेकंड के लिए माइक्रोवेव चला दें। हल्की सी गर्मी मिलते ही छिलके के भीतर मौजूद नमी भाप बनकर छिलके को कली से अलग कर देगी। ध्यान रहे कि इसे 15 सेकंड से ज्यादा गर्म न करें, अन्यथा लहसुन पक जाएगा और उसका प्राकृतिक स्वाद व बनावट पूरी तरह बदल जाएगी।लहसुन को हफ्तों तक खराब होने से बचाने और ताजा रखने के नियम:जालीदार टोकरी या पेपर बैग: लहसुन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उसे हमेशा किसी सूखी, ठंडी और हवादार जगह पर ही रखें। इसे भूलकर भी प्लास्टिक की बंद थैली में न रखें, क्योंकि नमी के कारण इसमें फंगस लग सकती है। इसे हमेशा जालीदार टोकरी या पेपर बैग में रखना सर्वश्रेष्ठ होता है।छिली हुई कलियों का रखरखाव: यदि आपने ऊपर दिए गए हैक्स की मदद से एक साथ ढेर सारा लहसुन छील लिया है, तो उसे खुली हवा में न छोड़ें, इससे उसकी प्राकृतिक खुशबू और ताजगी उड़ जाएगी। छिली हुई कलियों को एक सूखे एयरटाइट डिब्बे (Airtight Container) में बंद करके फ्रिज में रखें और 3 से 4 दिनों के भीतर ही इस्तेमाल कर लें।
लखनऊ। गर्भावस्था (Pregnancy) हर महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत और संवेदनशील दौर होता है। इस खास समय में आने वाली मां और गर्भ में पल रहे नन्हे शिशु, दोनों की सेहत व सुरक्षा को सर्वोपरि माना जाता है। एक स्वस्थ व सुरक्षित प्रेग्नेंसी के लिए संतुलित खानपान के साथ-साथ शरीर को कई अति-आवश्यक विटामिनों और खनिजों की जरूरत होती है। यदि इस नाज़ुक समय में महिला के शरीर में पोषण की थोड़ी सी भी कमी हो जाए, तो इसका सीधा व गहरा नकारात्मक असर मां और बच्चे दोनों के शारीरिक विकास पर पड़ सकता है। यही वजह है कि स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologists) प्रेग्नेंसी के दौरान पोषक तत्वों से भरपूर विशेष डाइट चार्ट का पालन करने की सख्त सलाह देते हैं।क्या है फोलिक एसिड और क्यों है यह गर्भावस्था के लिए संजीवनी?गर्भावस्था के दौरान जिन चुनिंदा पोषक तत्वों को सबसे अनिवार्य माना गया है, उनमें फोलिक एसिड (Folic Acid) शीर्ष पर आता है। तकनीकी रूप से, फोलिक एसिड असल में 'विटामिन बी9' (Vitamin B9) का एक सिंथेटिक रूप है, जबकि प्रकृति में पाए जाने वाले इसके प्राकृतिक रूप को 'फोलेट' (Folate) कहा जाता है। मानव शरीर में नई कोशिकाओं (Cells) के निर्माण और डीएनए (DNA) बनने की जटिल प्रक्रिया में फोलिक एसिड एक मुख्य भूमिका निभाता है। यही कारण है कि जो महिलाएं प्रेग्नेंसी की प्लानिंग कर रही हैं या जो पहले से ही प्रेग्नेंट हैं, उनके लिए इसकी पर्याप्त दैनिक मात्रा लेना मेडिकल साइंस में बेहद जरूरी माना गया है।फोलिक एसिड की कमी से शिशु को हो सकती है यह गंभीर जन्मजात बीमारीअमेरिका के प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संगठन 'ऑफिस ऑन विमेंस हेल्थ' (Office on Women's Health) की एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में फोलिक एसिड की कमी होने से गर्भस्थ शिशु का शारीरिक विकास बुरी तरह बाधित हो सकता है।न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (Neural Tube Defect): शरीर में इस विटामिन की पर्याप्त मात्रा न होने से बच्चे में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। यह जन्म से जुड़ी एक बेहद गंभीर और लाइलाज समस्या है, जो नवजात शिशु के दिमाग, रीढ़ की हड्डी (Spine) या स्पाइनल कॉर्ड के प्राकृतिक विकास को पूरी तरह रोक देती है।शुरुआती हफ्तों का महत्व: अक्सर महिलाओं को गर्भावस्था के शुरुआती 3 से 4 हफ्तों में अपनी प्रेग्नेंसी का पता नहीं चल पाता है, जबकि ठीक इसी समय गर्भ के भीतर शिशु के मस्तिष्क और रीढ़ का ढांचा तेजी से तैयार हो रहा होता है। इसलिए, डॉक्टरों का मानना है कि गर्भधारण करने से पहले से ही महिलाओं को फोलिक एसिड का सेवन शुरू कर देना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के जन्मजात विकार के जोखिम को जड़ से खत्म किया जा सके।डाइट और सप्लीमेंट: कैसे पूरी करें फोलिक एसिड की दैनिक जरूरत?फोलिक एसिड की आवश्यक मात्रा को शरीर में बनाए रखने के लिए एक सही संतुलित आहार और डॉक्टरी सप्लीमेंट्स का बेहतरीन तालमेल होना जरूरी है:प्राकृतिक फोलेट के मुख्य स्रोत: महिलाओं को अपनी दैनिक डाइट में गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां (जैसे पालक, मेथी), विभिन्न प्रकार की बीन्स, हरी मटर, ब्रोकोली, संतरा, नींबू और अन्य खट्टे रसीले फलों को प्रमुखता से शामिल करना चाहिए। इसके अलावा बाजार में मिलने वाले फोर्टिफाइड अनाज (Fortified Cereals) और ब्रेड भी इसके अच्छे स्रोत हैं।सप्लीमेंट्स की अनिवार्यता: पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि केवल रोजमर्रा के भोजन से एक प्रेग्नेंट महिला के लिए आवश्यक फोलिक एसिड की पूरी मात्रा प्राप्त करना हमेशा व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। इसलिए, डॉक्टर की देखरेख में फोलिक एसिड की गोलियां (Supplements) लेना बेहद जरूरी है।प्रेग्नेंसी में सप्लीमेंट लेते समय इन 3 मुख्य बातों का रखें विशेष ध्यान:डॉक्टर की सख्त निगरानी: गर्भावस्था के दौरान फोलिक एसिड या कोई भी अन्य मल्टीविटामिन हमेशा किसी योग्य डॉक्टर की पर्ची और बताई गई खुराक (Dose) के अनुसार ही लें। बिना डॉक्टरी परामर्श के मनमाने ढंग से इसकी मात्रा को कम या ज्यादा करने की भूल बिल्कुल न करें।प्लानिंग के समय ही करें बात: यदि आप भविष्य में गर्भधारण करने की योजना (Pregnancy Planning) बना रही हैं, तो गर्भधारण करने से कम से कम एक-दो महीने पहले ही अपने डॉक्टर से मिलकर फोलिक एसिड शुरू करने की सही सलाह लें।संतुलित आहार का विकल्प नहीं: फोलिक एसिड की दवाइयां लेने का यह अर्थ कतई नहीं है कि आप अपने खानपान में लापरवाही बरतें। सप्लीमेंट के साथ-साथ एक संपूर्ण, रंग-बिरंगी सब्जियों और फलों से युक्त संतुलित सात्विक डाइट बेहद आवश्यक है ताकि शरीर को आयरन, कैल्शियम और अन्य सभी आवश्यक मैक्रोन्यूट्रिएंट्स भी प्राकृतिक रूप से मिलते रहें।
लखनऊ। आज के दौर में लाइफस्टाइल और खानपान में तेजी से बदलाव आ रहा है। लोग अब केवल स्वाद के पीछे नहीं भागते, बल्कि अपनी दैनिक डाइट में हेल्दी और पौष्टिक चीजों को शामिल करना प्राथमिकता बन चुका है। ऐसे में ओट्स (Oats) एक सुपरफूड के रूप में उभरा है। आमतौर पर लोग ओट्स को केवल नाश्ते में दलिया या उपमा के रूप में खाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका इस्तेमाल कई तरह की स्वादिष्ट और लाजवाब मीठी चीजें (Desserts) बनाने में भी किया जा सकता है? ओट्स का अपना स्वाद काफी हल्का होता है, जिसके कारण इसे किसी भी अन्य खाद्य सामग्री के साथ आसानी से मिलाकर एक नया फ्लेवर दिया जा सकता है। यही वजह है कि ओट्स से बने व्यंजन बच्चों से लेकर बड़ों तक सबकी पहली पसंद बनते जा रहे हैं।पोषक तत्वों का खजाना है ओट्स, बाजार की मिठाइयों से कई गुना बेहतरआहार विशेषज्ञों के मुताबिक, ओट्स में प्रचुर मात्रा में फाइबर (Dietary Fiber), प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, जिंक और विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स जैसे शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। बाजार में मिलने वाली अत्यधिक चीनी और प्रीजर्वेटिव्स युक्त मिठाइयों की तुलना में घर पर बने ओट्स के डेजर्ट्स कई गुना ज्यादा पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक होते हैं। इन्हें बनाते समय आप अपनी सेहत और जरूरत के अनुसार चीनी की जगह गुड़, खजूर या शहद का इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही, इसमें मनपसंद ड्राई फ्रूट्स और ताजे फल मिलाकर इसके स्वाद और पोषण दोनों को दोगुना किया जा सकता है।ओट्स से घर पर आसानी से तैयार करें ये 5 लाजवाब डेजर्ट्स:1. ओट्स खीर (Oats Kheer): इसे बनाने के लिए एक पैन में थोड़ा सा शुद्ध देसी घी गर्म करके ओट्स को हल्का सुनहरा होने तक भून लें। इसके बाद इसमें दूध डालकर धीमी आंच पर पकाएं और मिठास के लिए गुड़ या चीनी मिलाएं। ऊपर से कटे हुए बादाम, काजू और हरी इलायची का पाउडर डालें। फाइबर, प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर यह खीर खाने में जितनी स्वादिष्ट है, पेट को भी लंबे समय तक भरा रखती है।2. ओट्स लड्डू (Oats Laddu): बिना किसी झंझट के झटपट तैयार होने वाले इस डेजर्ट के लिए सूखे पैन में ओट्स को भून लें और फिर उसे दरदरा पीस लें। अब इसमें पिघला हुआ गुड़, थोड़ा घी और बारीक कटे ड्राई फ्रूट्स मिलाकर छोटे-छोटे लड्डू बांध लें। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा (Instant Energy) देने के साथ-साथ आयरन और हेल्दी फैट्स का बेहतरीन स्रोत है।3. ओट्स फ्रूट पुडिंग (Oats Fruit Pudding): दूध में ओट्स को अच्छी तरह पकाकर गाढ़ा कर लें और फिर इसे फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें। इसके बाद इसमें बारीक कटे हुए ताजे फल जैसे सेब, केला, आम या बेरीज मिलाएं। बच्चों के लिए यह एक परफेक्ट और न्यूट्रिशियस समर डेजर्ट है, जो उन्हें पर्याप्त विटामिन और मिनरल्स देता है।4. ओट्स-केला मफिन (Oats Banana Muffin): पके हुए केलों को अच्छी तरह मैश (कुचल) कर लें। अब इसमें ओट्स, दूध, थोड़ा बेकिंग पाउडर और मिठास के लिए शहद मिलाएं। इस गाढ़े मिश्रण को मफिन मोल्ड्स में डालकर ओवन में बेक करें। बाजार के मैदे वाले मफिंस की तुलना में यह बेहद हेल्दी स्नैक है, जिसमें फाइबर और पोटैशियम भरपूर मात्रा में होता है।5. ओट्स चॉकलेट कुकीज (Oats Chocolate Cookies): बच्चों की ऑल-टाइम फेवरेट कुकीज बनाने के लिए ओट्स में कोको पाउडर, पीनट बटर (या घी) और शहद मिलाकर एक सॉफ्ट डो (आटा) तैयार कर लें। इसकी छोटी-छोटी कुकीज का आकार देकर बेक कर लें। शाम की हल्की भूख (Evening Snacks) के लिए यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर एक परफेक्ट चॉइस है।ओट्स डेजर्ट्स बनाते और स्टोर करते समय बरतें ये सावधानियां:मीठे का सही चुनाव: ओट्स के व्यंजनों में रिफाइंड चीनी की जगह हमेशा ऑर्गेनिक गुड़, खजूर के पेस्ट या सीमित मात्रा में शहद का उपयोग करें।अतिरिक्त पोषण: कुकीज या पुडिंग का टेक्सचर और न्यूट्रिशन वैल्यू बढ़ाने के लिए आप इनमें चिया सीड्स (Chia Seeds) या अलसी के बीज (Flax Seeds) भी मिला सकते हैं।स्टोरेज के नियम: दूध और ताजे फलों से बने इन डेजर्ट्स को बहुत देर तक कमरे के तापमान (ओपन एरिया) पर खुला न छोड़ें। यदि इन्हें बाद में खाना हो, तो एक एयरटाइट कंटेनर में बंद करके फ्रिज में रखें और 1 से 2 दिनों के भीतर ही इनका सेवन कर लें ताकि इनकी ताजगी, स्वाद और गुणवत्ता पूरी तरह बरकरार रहे।
लखनऊ। भागदौड़ भरी जिंदगी और असंतुलित खानपान के कारण खाना खाने के बाद पेट में दर्द (Stomach Pain) होना एक बेहद आम समस्या बन चुका है। लगभग हर व्यक्ति कभी-न-कभी इस स्थिति का सामना जरूर करता है। अधिकांश मामलों में यह दर्द काफी हल्का होता है, जो कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाता है, यही वजह है कि ज्यादातर लोग इसे गैस या बदहजमी समझकर पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि अगर खाना खाने के तुरंत बाद पेट में बार-बार या बहुत तेज दर्द होने लगे, तो इसे हल्के में लेने की भूल कतई न करें। यह सामान्य सी दिखने वाली समस्या शरीर के भीतर पनप रही किसी गंभीर और पुरानी बीमारी का शुरुआती अलार्म (Warning Sign) हो सकती है।इन 4 गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है खाने के बाद का पेट दर्दप्रसिद्ध मेडिकल वेबसाइट 'मेडलाइनप्लस' (MedlinePlus) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भोजन करने के पश्चात होने वाला पेट दर्द केवल अपच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निम्नलिखित गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की ओर इशारा करता है:पित्ताशय की पथरी (Gallstones): यदि आपको विशेष रूप से तला-भुना, मसालेदार या अत्यधिक फैट (वसा) वाला भोजन करने के बाद पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में अचानक तेज दर्द होता है, तो यह गॉलस्टोन का लक्षण हो सकता है।पेट का अल्सर (Stomach Ulcer): पेट की भीतरी परत में घाव या अल्सर होने की स्थिति में, भोजन अंदर जाते ही पेट में भयानक जलन, मरोड़ या असहनीय दर्द महसूस होने लगता है।पैंक्रियाटाइटिस (Pancreatitis): अग्न्याशय (Pancreas) में गंभीर सूजन होने की वजह से खाना खाने के बाद पेट में बहुत तेज दर्द उठता है, जो धीरे-धीरे बढ़कर सीधे पीठ की तरफ फैल जाता है।फूड पॉइजनिंग और फूड एलर्जी: यदि भोजन दूषित है या आपका शरीर किसी खास खाद्य पदार्थ (जैसे लैक्टोज या ग्लूटेन) को आसानी से पचा नहीं पाता (Food Intolerance), तो पेट दर्द के साथ मतली, उल्टी और दस्त की शिकायत हो सकती है।अचानक पेट दर्द होने पर अपनाएं ये प्राथमिक उपाययदि कभी भोजन के बाद आपको पेट में हल्का या सामान्य दर्द महसूस होता है, तो तुरंत भारी दवाएं खाने के बजाय इन बुनियादी बातों का पालन करें:आराम और पर्याप्त जल संचय: दर्द उठने पर कुछ देर शांत मुद्रा में आराम करें और थोड़ी-थोड़ी मात्रा में गुनगुना या सामान्य पानी पिएं।हल्का भोजन: अगले कुछ समय तक केवल खिचड़ी या आसानी से पचने वाला दलिया जैसा हल्का सात्विक भोजन ही लें। अत्यधिक वसायुक्त या मिर्च-मसाले वाले भोजन से पूरी तरह दूरी बना लें।धीमी वॉक (टहलना): यदि दर्द का मुख्य कारण पेट में गैस बनना या अपच है, तो भोजन के 15-20 मिनट बाद हल्की गति से टहलना (Strolling) बेहद फायदेमंद साबित होता है।सेल्फ-मेडिकेशन से बचें: बिना किसी योग्य डॉक्टर या फिजिशियन की पर्ची के बार-बार पेनकिलर (दर्द निवारक दवाएं) लेने से बचें, क्योंकि यह आपके लीवर और पेट के अल्सर को और अधिक बढ़ा सकती हैं।रेड अलर्ट: इन 6 लक्षणों के दिखने पर तुरंत भागें अस्पतालचिकित्सकों के अनुसार, यदि पेट दर्द के साथ नीचे दिए गए आपातकालीन लक्षण (Emergency Symptoms) दिखाई दें, तो बिना एक मिनट की देरी किए मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल या मेडिकल इमरजेंसी में ले जाना चाहिए:पेट का दर्द अचानक बहुत तीव्र हो जाए और लगातार बढ़ता ही जा रहा हो।पेट दर्द के साथ मरीज को तेज बुखार (High Fever) आ जाए।लगातार उल्टियां हो रही हों और शरीर में पानी की भारी कमी हो जाए।उल्टी के रास्ते या मल (Stool) के साथ खून बाहर आ रहा हो।पेट में बहुत ज्यादा सूजन या कड़ापन महसूस हो रहा हो।सांस लेने में गंभीर तकलीफ हो रही हो या मरीज को बेहोशी (Dizziness) छाने लगे।
लखनऊ। आचार्य चाणक्य प्राचीन भारत के एक ऐसे महान रणनीतिकार, कूटनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री थे, जिनके सिद्धांत और व्यावहारिक विचार आज सदियों बाद भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उस काल में थे। उनके द्वारा रचित ग्रंथ ‘चाणक्य नीति’ (Chanakya Niti) को नीतिशास्त्र भी कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति के व्यवहार, सफलता, पारिवारिक संबंध, धन प्रबंधन और राजनीति को लेकर कई अमूल्य बातें बताई गई हैं। आचार्य चाणक्य का मानना था कि मनुष्य के जीवन की सफलता केवल उसकी मेहनत पर नहीं, बल्कि उसके दैनिक आचरण और व्यवहार पर भी निर्भर करती है। इसी कड़ी में चाणक्य नीति में कुछ ऐसी विशिष्ट जगहों और परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है, जहां से अपना काम पूरा करके निकलते समय मनुष्य को भूलकर भी पीछे मुड़कर (Looking Back) नहीं देखना चाहिए। शास्त्रों और चाणक्य के सिद्धांतों के अनुसार, इन स्थानों पर पीछे देखने से जीवन में भयंकर नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो सकता है और बनते हुए काम भी बिगड़ सकते हैं। आइए जानते हैं उन 3 प्रमुख जगहों के बारे में।1. श्मशान या अंतिम संस्कार से लौटते समयआचार्य चाणक्य के अनुसार, जब भी आप किसी परिचित या संबंधी के अंतिम संस्कार (Funeral) में शामिल होने श्मशान घाट या कब्रिस्तान जाते हैं, तो वहां से कार्य संपन्न होने के बाद सीधे अपने घर की ओर कदम बढ़ाएं।नकारात्मकता का वास: श्मशान भूमि को तंत्र शास्त्र और व्यावहारिक रूप से भी शोक, दुख और नकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है।पीछे न मुड़ने का कारण: वहां से लौटते समय पीछे मुड़कर देखना मोह और भय को दर्शाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से वहां मौजूद नकारात्मक शक्तियां या भारी विचार व्यक्ति की ओर आकर्षित होकर उसके साथ घर तक आ सकते हैं। इसलिए वहां से मौन रहकर सीधे निकल जाना ही सबसे सुरक्षित माना गया है।2. किसी जरूरतमंद की सहायता या दान देकर लौटते समयचाणक्य नीति में दान और परोपकार को लेकर बेहद कड़े और व्यावहारिक नियम बताए गए हैं। आचार्य चाणक्य का कहना है कि यदि आपने किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति की कोई आर्थिक सहायता की है, किसी को गुप्त दान दिया है या किसी को जरूरत के समय उधार (Money Lending) दिया है, तो वहां से चलते समय बार-बार पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए।अहंकार और लालच का प्रतीक: दान देने के बाद पीछे मुड़कर देखना यह दर्शाता है कि आपके मन में उस धन के प्रति अभी भी मोह, लालच या उसे देने का पछतावा है।श्रेष्ठ दान का नियम: सनातन परंपरा और चाणक्य नीति दोनों में ही 'नेकी कर और दरिया में डाल' के सिद्धांत को सर्वश्रेष्ठ माना गया है, यानी देकर भूल जाना ही वास्तविक पुण्य का भागी बनाता है।3. कोर्ट-कचहरी और किसी दुष्ट (दुर्जन) व्यक्ति के घर से निकलते समयजीवन प्रबंधन के नियमों के तहत चाणक्य ने विवादों और कपटी लोगों से दूरी बनाने की सख्त सलाह दी है।विवादों से मुक्ति: यदि आप किसी कानूनी झमेले, कोर्ट-कचहरी (Courtroom Case) के किसी बड़े मामले या किसी गंभीर पारिवारिक विवाद को सुलझाकर वापस आ रहे हैं, तो उस स्थान को छोड़ते समय कभी पीछे न देखें। पीछे देखना यह संकेत देता है कि आप अभी भी उस विवाद से मानसिक रूप से जुड़े हुए हैं।दुर्जन का त्याग: इसी तरह यदि आप किसी दुष्ट, ईर्ष्यालु, धोखेबाज या कपटी व्यक्ति (दुर्जन) का घर या उसका साथ छोड़ रहे हैं, तो पूरी सहजता से आगे बढ़ जाएं। चाणक्य कहते हैं कि बुरे लोगों और नकारात्मक परिस्थितियों का साथ जितनी जल्दी और जितनी दृढ़ता से छूट जाए, मनुष्य के भविष्य और मानसिक शांति के लिए उतना ही मंगलकारी होता है।
लखनऊ। हमारे आसपास ऐसे कई लोग होते हैं जो दिन-रात हाड़-तोड़ मेहनत करते हैं, लेकिन फिर भी वे आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं हो पाते। कई बार हमें खुद भी अपनी उम्मीद और काबिलियत के मुताबिक फल नहीं मिलता। क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे का एक बड़ा और मुख्य कारण आपके घर का वास्तु दोष (Vastu Dosh) हो सकता है? वास्तु शास्त्र के प्राचीन जानकारों का मानना है कि मनुष्य के रहने के स्थान यानी घर की ऊर्जा का ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) से बहुत गहरा और सीधा संबंध होता है।यदि घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सही तरीके से नहीं हो रहा है, तो वहां धन के आगमन में लगातार रुकावटें आती हैं और अचानक से बेवजह के खर्चे व कर्ज बढ़ने लगते हैं। अगर आप भी अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर लगातार परेशान हैं और धन संचय करना चाहते हैं, तो वास्तु शास्त्र में बताए गए इन 5 जादुई उपायों को अवश्य आजमाएं। ये उपाय घर की नकारात्मकता को दूर कर सुख, समृद्धि और धन-धान्य के द्वार खोलते हैं।1. उत्तर दिशा को रखें बिल्कुल साफ और हल्कावास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार, घर की उत्तर दिशा (North Direction) के अधिपति धन के देवता कुबेर माने जाते हैं। इसलिए इस दिशा को हमेशा बेहद पवित्र और हल्का रखना चाहिए।भारी सामान से बचें: उत्तर दिशा में भूलकर भी कोई भारी फर्नीचर, कबाड़ या स्टोर रूम (Store Room) न बनाएं।तिजोरी का मुख: अपने घर की मुख्य तिजोरी या कैश बॉक्स को इस तरह स्थापित करें कि उसका दरवाजा खोलते समय मुख हमेशा उत्तर दिशा की ओर रहे। यह उपाय कुबेर देव की कृपा से धन को चुंबक की तरह आकर्षित करता है।2. मुख्य द्वार पर रखें चमकती हुई रोशनीघर का मुख्य द्वार (Main Gate) केवल परिवार के सदस्यों के आने-जाने का रास्ता नहीं होता, बल्कि यह ब्रह्मांडीय सकारात्मक ऊर्जा का मुख्य प्रवेश द्वार भी है। वास्तु के अनुसार, मुख्य द्वार को हमेशा साफ-सुथरा, सुंदर और आकर्षक बनाकर रखना चाहिए। ध्यान रहे कि शाम के समय मुख्य द्वार पर कभी भी अंधेरा न हो। वहां पर्याप्त रोशनी (Bright Lighting) की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि धन की देवी मां लक्ष्मी का आपके घर में सरलता से आगमन हो सके।3. जल का सही प्रबंधन: टपकता नल है कंगाली की निशानीवास्तु विज्ञान में जल (Water Element) को सीधे तौर पर धन के प्रवाह का प्रतीक माना गया है।निकास की दिशा: हमेशा ध्यान रखें कि घर में रसोई या स्नानघर से पानी का निकास केवल उत्तर या पूर्व दिशा की ओर ही होना चाहिए।नल की मरम्मत: यदि आपके घर की रसोई या बाथरूम का कोई नल लगातार टपक रहा है (Leaking Taps), तो उसे तुरंत ठीक करवाएं। वास्तु के अनुसार, पानी का बूंद-बूंद टपकना सीधे तौर पर आपके धन के पानी की तरह बहने और अनावश्यक खर्चों को आमंत्रण देने जैसा है।4. ईशान कोण में कभी न होने दें गंदगीघर के उत्तर-पूर्व हिस्से को ईशान कोण (North-East Corner) कहा जाता है, जिसे देवी-देवताओं का निवास स्थान माना गया है। यह पूरे घर का सबसे पवित्र और संवेदनशील कोना होता है। ईशान कोण में कभी भी गंदगी, कूड़ा-कचरा या झाड़ू-पोछा न रखें। इस कोने में किसी भी तरह का भारी सामान या खराब हो चुके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (कबाड़) रखने से सीधे तौर पर धन के आगमन में बड़ी बाधाएं उत्पन्न होती हैं। इस जगह को हमेशा खुला और स्वच्छ रखें।5. तिजोरी के ठीक सामने लगाएं जादुई आईनाधन वृद्धि के लिए यह एक बेहद प्राचीन और असरदार टोटका माना गया है। अपने घर की अलमारी या तिजोरी के ठीक सामने एक सुंदर सा आईना (Mirror) लगाएं। आईने की पोजीशन ऐसी होनी चाहिए कि जब भी आप तिजोरी खोलें, तो उसमें रखे धन और गहनों का स्पष्ट प्रतिबिंब (Reflection) आईने में दिखाई दे। वास्तु के अनुसार, तिजोरी का बार-बार प्रतिबिंब दिखने से घर में धन और सकारात्मकता दोनों का स्तर तेजी से दोगुना होने लगता है।
पणजी/लखनऊ। देश के सबसे प्रमुख पर्यटन राज्य गोवा को प्रदूषण मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए गोवा सरकार ने एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत (CM Pramod Sawant) की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में राज्य की नई इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति को मंजूरी देने की तैयारी कर ली गई है। इस नई और बेहद आकर्षक नीति के तहत गोवा में लाइसेंस प्राप्त बाइक टैक्सी (जिन्हें स्थानीय स्तर पर पायलट कहा जाता है) और ऑटो-रिक्शा चालकों को नए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर 50 प्रतिशत तक की बंपर सब्सिडी देने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य में पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना, कार्बन उत्सर्जन को घटाना और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े चालकों की दैनिक परिचालन लागत को आधा करना है।इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव: राज्य भर में स्थापित होंगे 70 नए EV चार्जिंग स्टेशनगोवा सरकार भली-भांति जानती है कि बिना मजबूत बुनियादी ढांचे के इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार संभव नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने राज्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मजबूत करने के लिए 70 नए अत्याधुनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन (EV Charging Stations) स्थापित करने की एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इन नए चार्जिंग स्टेशनों के नेटवर्क से न केवल स्थानीय नागरिकों बल्कि गोवा आने वाले लाखों पर्यटकों के बीच भी इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर भरोसा बढ़ेगा। चार्जिंग की सुलभ व्यवस्था होने से तटीय इलाकों और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहन चालकों को बैटरी खत्म होने की चिंता से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।बाइक टैक्सी और ऑटो चालकों पर ही क्यों है सरकार का विशेष फोकस?पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था वाले गोवा में रोजाना लाखों लोग बाइक टैक्सी और ऑटो-रिक्शा के जरिए सफर करते हैं। ये कमर्शियल चालक प्रतिदिन औसतन 100 से 150 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं, जिसके कारण उनकी कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा महंगे पेट्रोल और डीजल पर खर्च हो जाता है। सरकार का मानना है कि यदि इस वर्ग को इलेक्ट्रिक वाहनों पर शिफ्ट कर दिया जाए, तो उनकी दैनिक ईंधन लागत (Fuel Cost) में 80% तक की भारी कमी आएगी। यही कारण है कि नई नीति में सबसे पहले और सबसे ज्यादा सब्सिडी का लाभ इन्हीं वर्गों को देने का खाका खींचा गया है, ताकि उनकी शुद्ध मासिक आय में वृद्धि हो सके और राज्य में 'हरित परिवहन' (Green Transport) की शुरुआत हो।पुरानी नीति का विस्तार: पर्यावरण और पर्यटन दोनों को मिलेगा डबल बूस्टगोवा में पहले से ही इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर विभिन्न प्रकार के वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाते रहे हैं। अब सरकार नई नीति के माध्यम से सब्सिडी के ढांचे को और अधिक सुगम, पारदर्शी और आकर्षक बनाना चाहती है ताकि आम जनता भी ईवी अपनाने के लिए प्रेरित हो सके। ऑटोमोबाइल और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के इस बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से गोवा के पर्यावरण को संजीवनी मिलेगी। आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम होने से देश की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा और परिवहन क्षेत्र पूरी तरह टिकाऊ (Sustainable) बनेगा। यदि गोवा सरकार की यह 50% सब्सिडी योजना जमीनी स्तर पर सफल रहती है, तो गोवा सार्वजनिक परिवहन में शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने वाला देश का अग्रणी राज्य बन जाएगा, जिससे यहां की पर्यटन छवि को वैश्विक स्तर पर एक नया चार चांद लगेगा।
नई दिल्ली/लखनऊ। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने देश भर के नियोक्ताओं (Employers) और कंपनियों को एक बहुत बड़ी व्यावसायिक राहत देते हुए एक विशेष एकमुश्त विवाद निपटान (One-Time Dispute Resolution) योजना की घोषणा की है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour & Employment) के तत्वावधान में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना का नाम ‘VISHWAS 2026’ (विवाद से विश्वास योजना) रखा गया है। यह योजना मुख्य रूप से उन नियोक्ताओं को ध्यान में रखकर लाई गई है, जिनके ईपीएफ (EPF) अंशदान में देरी के कारण भारी-भरकम पेनाल्टी या हर्जाने (Damages) के मामले सालों से विभिन्न अदालतों या ईपीएफओ के आंतरिक मंचों पर लंबित पड़े हैं। यह विशेष राहत योजना 29 जून से आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है और अगले छह महीनों तक प्रभावी रहेगी। इस निर्धारित अवधि के भीतर पात्र नियोक्ता पूरी तरह डिजिटल माध्यम से अपने मुकदमों का निपटारा कर सकेंगे।इन सभी लंबित और नए मामलों को मिलेगा 'विश्वास' का सीधा लाभEPFO द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, VISHWAS 2026 योजना का दायरा काफी व्यापक रखा गया है ताकि अधिक से अधिक कारोबारी इसका लाभ उठा सकें। इसके तहत निम्नलिखित मामलों को कवर किया जाएगा:न्यायिक मामले: जिन मामलों में विभाग द्वारा लगाए गए जुर्माने या हर्जाने के आदेश को नियोक्ताओं ने माननीय अदालतों, ट्रिब्यूनल या अन्य किसी न्यायिक मंच पर चुनौती दे रखी है।अधूरी रिकवरी: ऐसे मामले जहां अंतिम आदेश तो जारी हो चुका है, लेकिन ईपीएफओ द्वारा जुर्माने की वसूली अभी पूरी नहीं की जा सकी है या केवल आंशिक वसूली ही हो पाई है।रिकवरी सर्टिफिकेट (RRC): जिन मामलों में विभाग की ओर से रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया जा चुका है।अंडर-प्रोसेस और नए मामले: ऐसे विवाद जिनमें नियोक्ताओं को नोटिस मिल चुका है लेकिन अंतिम फैसला आना बाकी है, या फिर जिनमें अभी तक औपचारिक नोटिस जारी भी नहीं हुआ है, वे भी तय शर्तों के अधीन आवेदन कर सकेंगे।जुर्माने की दरों में बंपर कटौती, बेहद कम दरों पर दोबारा तय होगी पेनाल्टीइस योजना का सबसे आकर्षक पहलू यह है कि ईपीएफओ ने नियोक्ताओं के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए पेनाल्टी की गणना प्रक्रिया में भारी ढील दी है। विभाग के अनुसार, 14 जून 2024 से पहले की गई किसी भी प्रकार की वित्तीय चूक (Default) से जुड़े मामलों में पेनाल्टी और हर्जाने की राशि को बेहद रियायती दरों पर दोबारा आंका जाएगा:2 महीने तक की देरी पर: मात्र 0.25% प्रति माह की दर से हर्जाना।2 से 4 महीने तक की देरी पर: केवल 0.50% प्रति माह की दर से जुर्माना।4 महीने से अधिक की देरी पर: अधिकतम 1% प्रति माह की दर से पेनाल्टी तय की जाएगी।सरकार का मानना है कि इन रियायती दरों के कारण कंपनियां स्वेच्छा से आगे आएंगी, जिससे पुराने विवाद चुटकियों में सुलझेंगे और कॉरपोरेट मुकदमों की संख्या में भारी गिरावट आएगी।योजना का लाभ उठाने के लिए नियोक्ताओं को पूरी करनी होंगी ये 2 शर्तेंVISHWAS 2026 योजना के तहत अपने मुकदमों को बंद कराने के लिए नियोक्ताओं को आवेदन करने से पहले दो मुख्य वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करनी अनिवार्य होंगी:पूरा ब्याज जमा करना: नियोक्ताओं को सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित कर्मचारी भविष्य निधि योजना के तहत देय मूल योगदान पर जितना भी संचित ब्याज (Interest) बनता है, वह ईपीएफओ के खाते में पूरी तरह जमा करा दिया गया हो।अपील वापस लेने का घोषणापत्र: आवेदन पत्र के साथ नियोक्ताओं को एक लिखित और आधिकारिक घोषणापत्र (Undertaking) देना होगा। इसमें साफ तौर पर लिखा होना चाहिए कि इस योजना के तहत जिस विवाद का एक बार अंतिम निपटारा हो जाएगा, उसके खिलाफ नियोक्ता भविष्य में किसी भी दीवानी अदालत, हाई कोर्ट या अन्य कानूनी मंच पर दोबारा कोई अपील या याचिका दायर नहीं करेंगे।डिजिटल प्रक्रिया से नियोक्ताओं और EPFO दोनों की चमकेगी किस्मतबाजार के श्रम कानून विशेषज्ञों (Labour Law Experts) का मानना है कि यह दूरदर्शी योजना कंपनियों को वर्षों पुराने मानसिक और वित्तीय तनाव से मुक्ति दिलाएगी, जिससे वे अपने मुख्य व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। दूसरी ओर, ईपीएफओ को भी भारी-भरकम प्रशासनिक खर्च और अदालती चक्करों से आजादी मिलेगी, जिससे लंबित मामलों का तेजी से निपटारा संभव होगा। चूंकि यह पूरी विवाद निवारण प्रक्रिया 100% पेपरलेस और डिजिटल (Online Portal) रखी गई है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार की गुंजाइश नहीं होगी और पारदर्शिता के साथ समय की भी भारी बचत होगी। कुल मिलाकर, VISHWAS 2026 को भारतीय उद्योग जगत और नियामक संस्था दोनों के लिए एक शानदार 'विन-विन' (Win-Win) पहल माना जा रहा है।
नई दिल्ली/लखनऊ। भारतीय बैंकिंग और करेंसी सिस्टम में जल्द ही एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में 10 रुपये और 20 रुपये के नए प्लास्टिक (पॉलीमर) नोटों को चलन में लाने की तैयारियां काफी तेज कर दी हैं। इसके लिए बकायदा एक पायलट प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है और आरबीआई की करेंसी छापने वाली सब्सिडियरी कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने इसके खास मटीरियल (सब्सट्रेट) की खरीद के लिए ग्लोबल टेंडर भी जारी कर दिया है। इस बड़ी खबर के सामने आते ही आम जनता के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं कि क्या पुराने कागजी नोट बंद हो जाएंगे? इन प्लास्टिक नोटों से देश का कितना पैसा बचेगा? आइए इन सभी जरूरी और महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं।क्यों पड़ी प्लास्टिक नोटों की जरूरत? छपाई खर्च और गंदे नोटों का बढ़ता अंबारडिजिटल पेमेंट और यूपीआई के रिकॉर्ड विस्तार के बावजूद देश में नकदी (Cash) की मांग लगातार बढ़ रही है। मई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में चलन में मौजूद कुल नकदी रिकॉर्ड 42.86 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है। नकदी के इस भारी इस्तेमाल के कारण नोटों की छपाई की लागत भी लगातार बढ़ रही है। साल 2024-25 में आरबीआई ने नोट छपाई पर करीब ₹6,373 करोड़ खर्च किए थे, जो हालांकि वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर ₹4,875 करोड़ रह गए।छपाई खर्च के अलावा दूसरी सबसे बड़ी समस्या गंदे और फटे नोटों को नष्ट करने की है। वित्त वर्ष 2025 में करीब 2,380 करोड़ गंदे-फटे नोट नष्ट किए गए। इन्हीं भारी-भरकम खर्चों और नोटों की कम उम्र की समस्या से निपटने के लिए आरबीआई ने अब पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोटों का रुख किया है, जो लंबे समय में बेहद सस्ते और टिकाऊ साबित होते हैं।प्लास्टिक नोटों की 5 सबसे बड़ी खासियतें: क्यों हैं ये कागज से बेहतर?लंबी उम्र (High Durability): पॉलीमर नोट एक विशेष प्रकार की प्लास्टिक शीट से बनते हैं, जिसके कारण ये सामान्य कागजी नोटों की तुलना में ढाई से चार गुना अधिक समय तक सुरक्षित और चालू हालत में रहते हैं।वॉटरप्रूफ और टियरप्रूफ: ये नोट पानी में भीगने से गलते नहीं हैं और इन्हें आसानी से फाड़ा भी नहीं जा सकता। इन पर धूल, मिट्टी और गंदगी भी बहुत कम चिपकती है।बैक्टीरिया मुक्त: कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में यह प्रमाणित हो चुका है कि कागज के मुकाबले प्लास्टिक नोटों की सतह पर संक्रामक बैक्टीरिया और वायरस बहुत कम समय तक टिक पाते हैं।हाई सिक्योरिटी फीचर्स: इन नोटों में एक पारदर्शी खिड़की (Transparent Window) और अत्याधुनिक सुरक्षा धागे दिए जाते हैं, जिनकी हूबहू नकल करना या नकली (Fake Currency) नोट बनाना नामुमकिन के बराबर होता है।ATM फ्रेंडली: भविष्य में देश की सभी एटीएम (ATM) मशीनों को इन नए प्लास्टिक नोटों को आसानी से डिस्पेंस (बाहर निकालने) करने के लिए तकनीकी रूप से अपग्रेड किया जाएगा।दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में सफल है मॉडल, ओमान भी लिस्ट में शामिलप्लास्टिक करेंसी अपनाने के मामले में भारत कोई पहला देश नहीं है, बल्कि दुनिया के 60 से अधिक देश इसका सफल इस्तेमाल कर रहे हैं:पूरी तरह अपनाने वाले देश: साल 1988 में ऑस्ट्रेलिया 10 डॉलर का प्लास्टिक नोट जारी करने वाला दुनिया का पहला देश बना था। इसके बाद कनाडा, न्यूजीलैंड, वियतनाम, यूनाइटेड किंगडम (UK), मालदीव और बारबाडोस जैसे देशों ने अपनी करेंसी को पूरी तरह पॉलीमर में बदल दिया। हाल ही में साल 2026 में ओमान ने भी अपना 1-रियाल का नोट पॉलीमर में जारी कर इस सूची में अपनी जगह बनाई है।आंशिक रूप से अपनाने वाले देश: सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, चीन, श्रीलंका, नेपाल, यूएई, सऊदी अरब और इजराइल जैसे देश कुछ चुनिंदा मूल्यवर्ग के नोटों के लिए प्लास्टिक का इस्तेमाल कर रहे हैं।बड़ा सवाल: क्या बंद हो जाएंगे पुराने कागज के नोट? गवर्नर का बयानआम जनता के बीच फैल रही अफवाहों पर विराम लगाते हुए आरबीआई ने पूरी तरह स्पष्ट किया है कि बाजार में मौजूद पुराने कागजी नोट बिल्कुल भी बंद नहीं होंगे और वे पहले की तरह ही कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य (Legal Tender) बने रहेंगे। चूंकि यह अभी सिर्फ एक पायलट प्रोजेक्ट है, इसलिए केंद्रीय बैंक पहले इसके सीमित ट्रायल के नतीजों और व्यावहारिकताओं का गहन अध्ययन करेगा।खुद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जून 2026 की हालिया मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ शब्दों में कहा, पॉलीमर नोटों को पेश करने का प्रस्ताव अभी पूरी तरह विचाराधीन है। केंद्रीय बैंक इसके सभी तकनीकी पहलुओं और नफे-नुकसान का आकलन कर रहा है और इस पर अभी कोई अंतिम मुहर नहीं लगी है।कब तक आपके हाथों में आएंगे ये नए नोट? जानिए संभावित तारीखभारत में प्लास्टिक नोटों का यह विचार नया नहीं है। इससे पहले साल 2012 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने देश के पांच प्रमुख शहरों—कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर में 10 रुपये के 100 करोड़ पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल करने की योजना बनाई थी, लेकिन कुछ तकनीकी अड़चनों के कारण वह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया था। अब करीब 14 साल बाद आरबीआई ने इसे दोबारा अमलीजामा पहनाया है। मीडिया रिपोर्ट्स और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह टेंडर प्रक्रिया और शुरुआती ट्रायल पूरी तरह सफल रहता है, तो साल 2027 से इन प्लास्टिक नोटों का फुल-स्केल रोलआउट (व्यापक चलन) पूरे देश के बाजारों में शुरू हो सकता है।
नई दिल्ली/लखनऊ। देश की राजधानी दिल्ली को लेकर एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाली वैश्विक रिपोर्ट सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के रहन-सहन की लागत को लेकर नई बहस छेड़ दी है। डॉयचे बैंक (Deutsche Bank) की प्रतिष्ठित ‘मैपिंग द वर्ल्ड्स प्राइसेज़ 2026’ रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली को दुनिया के प्रमुख महानगरों में सबसे किफायती और सस्ते शहरों में गिना गया है। रिपोर्ट के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो डेट पर जाने, ब्रॉडबैंड इंटरनेट का इस्तेमाल करने और नया घर (Property) खरीदने के लिहाज से दिल्ली दुनिया के 69 बड़े शहरों में सबसे सस्ती जगहों में शामिल है। हालांकि, इस सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि दिल्ली में औसत मासिक वेतन (Average Salary) दुनिया के अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में बेहद कम है। यानी दिल्ली में रहने का खर्च भले ही कम हो, लेकिन लोगों की कमाई भी अपेक्षाकृत कम होने से उनकी वास्तविक क्रय शक्ति (Purchasing Power) प्रभावित हो रही है।डेटिंग और हाई-स्पीड इंटरनेट पर सबसे कम खर्च, युवाओं की मौजडॉयचे बैंक की इस व्यापक रिपोर्ट में दुनिया भर के 69 बड़े वैश्विक शहरों की तुलनात्मक समीक्षा की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में एक सामान्य वीकेंड डेट (Romantic Date) पर होने वाला औसतन खर्च पूरी दुनिया के प्रमुख शहरों में सबसे न्यूनतम स्तर पर है। इसके साथ ही, भारत में मिलने वाले ब्रॉडबैंड इंटरनेट (Broadband Internet) की मासिक लागत भी दुनिया के सबसे सस्ते इंटरनेट वाले देशों की सूची में शीर्ष पर है। यह डेटा साफ तौर पर दर्शाता है कि रोजमर्रा की कई डिजिटल और मनोरंजन सेवाएं दिल्ली में न्यूयॉर्क, लंदन या पेरिस जैसे अंतरराष्ट्रीय शहरों की तुलना में कौड़ियों के भाव उपलब्ध हैं।न्यूयॉर्क और लंदन से बहुत सस्ता है दिल्ली में आशियाना बनानावैश्विक रियल एस्टेट (Real Estate) के मोर्चे पर भी दिल्ली ने विकसित देशों के मुकाबले बाजी मारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में रहने के लिए घर या फ्लैट खरीदने की लागत न्यूयॉर्क, लंदन, सिंगापुर, हांगकांग और ज्यूरिख जैसे महंगे शहरों की तुलना में काफी कम और पॉकेट-फ्रेंडली है। हालांकि, रियल एस्टेट विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के प्रमुख इलाकों में आवासीय संपत्तियों की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई है, इसके बावजूद वैश्विक मानकों पर यह शहर अब भी एक मिडिल क्लास फैमिली के लिए अपेक्षाकृत किफायती बना हुआ है। यही वजह है कि पहली बार घर खरीदने वाले (First-time Homebuyers) नौकरीपेशा लोगों के लिए दिल्ली आज भी एक बड़ा आकर्षण है।कम सैलरी बनी सबसे बड़ी चुनौती, सेविंग्स और निवेश पर असरसस्ती जीवन-यापन लागत (Cost of Living) के बीच रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक हिस्सा यहां के कामकाजी लोगों की आय से जुड़ा है। दिल्ली में काम करने वाले प्रोफेशनल्स का औसत मासिक वेतन दुनिया के बड़े विकसित शहरों की तुलना में काफी नीचे है। कम आय के कारण यहां रहने वाले लोगों की बचत (Savings) और भविष्य के लिए निवेश करने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होती है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्रगतिशील शहर की वास्तविक वित्तीय स्थिति का आकलन केवल कम कीमतों और सस्ते सामानों से नहीं किया जा सकता। टिकाऊ विकास के लिए नागरिकों की आय और उनके खर्च के बीच एक स्वस्थ संतुलन होना अनिवार्य है, जिसकी दिल्ली में फिलहाल कमी दिखती है।ट्रैफिक, प्रदूषण और लो-सैलरी से जीवन की गुणवत्ता प्रभावितरिपोर्ट में इस बात की ओर भी कड़ा संकेत दिया गया है कि बेहतर जीवन स्तर या जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) केवल सस्ती वस्तुओं या सेवाओं पर निर्भर नहीं करती। एक खुशहाल जीवन के लिए विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं, सुलभ सार्वजनिक परिवहन, स्वच्छ वातावरण, रोजगार के बेहतरीन अवसर और सम्मानजनक आय का स्तर सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दिल्ली में रहने की लागत भले ही कम हो, लेकिन भयंकर वायु प्रदूषण (Air Pollution), अंतहीन ट्रैफिक जाम और वैश्विक मानकों से कम वेतन जैसी गंभीर चुनौतियां यहां के नागरिकों के जीवन स्तर को लगातार प्रभावित कर रही हैं।क्या कहते हैं अर्थशास्त्री? भविष्य की राह और सुधारबाजार के बड़े अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दिल्ली की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत इसकी कम जीवन-यापन लागत है, जो नए स्टार्टअप्स और छोटे व्यवसायों को फलने-फूलने का मौका देती है। लेकिन, यदि आने वाले समय में कंपनियों द्वारा कर्मचारियों की आय में समान अनुपात में वृद्धि नहीं की जाती है, तो इस सस्तेपन का लाभ सीमित रह जाएगा। आने वाले वर्षों में यदि रोजगार के नए अवसर, बेहतर वेतनमान और बुनियादी ढांचों (Infrastructure) में तेजी से सुधार किया जाए, तो दिल्ली वैश्विक स्तर पर रहने और काम करने (Live and Work) के लिए दुनिया का सबसे आकर्षक और पसंदीदा शहर बन सकता है। फिलहाल यह रिपोर्ट देश की राजधानी की उस हकीकत को बयां करती है, जहां कम खर्च और कम आय दोनों एक साथ समानांतर रूप से चल रहे हैं।
नई दिल्ली/लखनऊ। भारत में डिजिटल क्रांति की रीढ़ बन चुका यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) आज देश के करोड़ों नागरिकों की दैनिक आदत बन चुका है। सब्जी की दुकान से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक यूपीआई के जरिए बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के लेनदेन किया जाता है। लेकिन, अब इस व्यवस्था को लेकर वित्तीय गलियारों में एक नई और बड़ी बहस छिड़ गई है। यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) यानी प्रोसेसिंग फीस लगाने की चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह नहीं है कि डिजिटल पेमेंट कंपनियों की कमाई कैसे होगी, बल्कि असली चिंता यह है कि इस नए एमडीआर (MDR) चार्ज का अंतिम वित्तीय बोझ आखिर कौन उठाएगा? यदि यह अतिरिक्त लागत छोटे व्यापारियों पर थोपी गई, तो इसका सीधा और नकारात्मक असर आम ग्राहकों, किराना दुकानों और देश में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम पर पड़ना तय है।क्या है UPI पर लगने वाला MDR चार्ज और व्यापारियों की चिंता?सरल और तकनीकी भाषा में समझें तो यूपीआई पर एमडीआर (MDR) वह विशेष प्रोसेसिंग फीस होती है, जो किसी भी डिजिटल भुगतान को सुरक्षित तरीके से पूरा करने के बदले बैंकों और पेमेंट गेटवे कंपनियों द्वारा व्यापारियों (Merchants) से वसूली जाती है। बैंकिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि बुनियादी ढांचे को बनाए रखने वाले बैंक और वित्तीय कंपनियां इस भारी-भरकम खर्च को लंबे समय तक मुफ्त में खुद वहन नहीं करेंगी। ऐसे में यह अतिरिक्त वित्तीय बोझ सीधे तौर पर कारोबारियों के खातों पर आ सकता है। जानकारों का कहना है कि शुरुआत में बाजार में टिके रहने के लिए कई बड़े व्यापारी इस खर्च को खुद झेल सकते हैं, लेकिन छोटे और मध्यम दर्जे के कारोबारियों के लिए लंबे समय तक इस चार्ज को अपनी जेब से देना मुमकिन नहीं होगा।आम ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा डाका: महंगी हो सकती हैं सेवाएंयदि यूपीआई पर एमडीआर (MDR) लागू होता है, तो आम उपभोक्ताओं को मिलने वाली रियायतें पूरी तरह खत्म हो सकती हैं:कीमतों में बढ़ोतरी: छोटे और खुदरा कारोबारी अपने बढ़े हुए परिचालन खर्च (Operational Cost) की भरपाई करने के लिए सामानों और दैनिक सेवाओं की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी कर सकते हैं।ऑफर्स और डिस्काउंट का खात्मा: डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों और मर्चेंट्स द्वारा ग्राहकों को दिए जाने वाले कैशबैक, ऑफर्स और डिस्काउंट में भारी कटौती की जा सकती है।छोटे लेनदेन पर संकट: सबसे ज्यादा विपरीत असर गली-मोहल्लों की किराना दुकानों, चाय के स्टालों और रेहड़ी-पटरी वालों पर पड़ेगा, जिन्होंने हाल के वर्षों में नकद छोड़कर यूपीआई क्यूआर कोड को अपनाया है। बहुत कम राशि (जैसे ₹10 या ₹20) के लेनदेन पर भी यदि एमडीआर वसूला गया, तो छोटे दुकानदार डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने से पूरी तरह तौबा कर सकते हैं।डिजिटल इंडिया की रफ्तार पर लग सकता है ब्रेक, समाधान की तलाशबाजार विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यदि दुकानदारों ने यूपीआई से पेमेंट लेना बंद कर दिया या फिर उन्होंने डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों से अतिरिक्त दो फीसदी चार्ज वसूलना शुरू कर दिया, तो आम जनता का डिजिटल पेमेंट के प्रति उत्साह तेजी से घट सकता है। ऐसी स्थिति में लोग एक बार फिर कैश (नकद लेनदेन) की तरफ लौट सकते हैं, जिससे देश में कैशलेस इकोनॉमी बनाने की रफ्तार पर ब्रेक लग जाएगा। एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि यूपीआई सिर्फ एक साधारण पेमेंट गेटवे नहीं है, बल्कि यह भारत का एक वैश्विक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) है। इसलिए सरकार और केंद्रीय बैंक को मिलकर एक ऐसा संतुलित समाधान निकालना होगा, जिससे बैंकों को नई तकनीक में निवेश का मौका भी मिलता रहे और आम जनता व छोटे व्यापारियों पर कोई नया आर्थिक बोझ भी न पड़े।
पुणे/लखनऊ। आयकर रिटर्न (Income Tax Return - ITR) दाखिल करते समय की गई एक छोटी-सी लापरवाही या रिपोर्टिंग की चूक भी करदाताओं के लिए बड़े आर्थिक नुकसान और लंबे कानूनी विवाद का कारण बन सकती है। लेकिन, हाल ही में पुणे आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) के सामने आए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामले ने देश के लाखों करदाताओं को एक बड़ी कानूनी संजीवनी दी है। आईटीएटी ने एक कर्मचारी के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति कानूनन टैक्स छूट (Tax Exemption) पाने का असली हकदार है, तो केवल फॉर्म भरने में हुई किसी मानवीय या तकनीकी गलती के आधार पर उसका यह वैध अधिकार नहीं छीना जा सकता। इस फैसले के बाद पीड़ित कर्मचारी को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) के तहत मिली ₹65.21 लाख की भारी-भरकम राशि पर पूर्ण टैक्स राहत प्रदान की गई है।कंपनी बंद होने के बाद मिला था VRS पैकेज, अनजाने में हुई थी बड़ी चूकयह संवेदनशील मामला एक ऐसे कर्मचारी से जुड़ा हुआ है, जिसका मैन्युफैक्चरिंग प्लांट कंपनी द्वारा अचानक बंद कर दिया गया था। इसके बाद प्रबंधन की ओर से कर्मचारी को वीआरएस (VRS) पैकेज के रूप में कुल ₹65.21 लाख का एकमुश्त भुगतान किया गया था। इस कुल फंड में एक्स-ग्रेशिया (अनुग्रह राशि), नोटिस पीरियड का वेतन (Notice Pay) और अन्य महत्वपूर्ण सेवानिवृत्ति लाभ शामिल थे। आयकर अधिनियम के विशेष प्रावधानों के तहत यह पूरी राशि कर-मुक्त (Tax-Free) या टैक्स छूट के दायरे में आती थी। परंतु, अपना सालाना असेसमेंट और आईटीआर दाखिल करते समय कर्मचारी ने अनजाने में इस पूरी राशि को 'टैक्स योग्य आय' (Taxable Income) के कॉलम में दर्ज कर दिया, जिसके चलते उसे मिलने वाला वैध टैक्स लाभ रुक गया और विभाग ने उन पर टैक्स लायबिलिटी बना दी।ITAT का महत्वपूर्ण फैसला: तकनीकी त्रुटि न्याय का रास्ता नहीं रोक सकतीमामले की विस्तृत कानूनी समीक्षा और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आईटीएटी पुणे (ITAT Pune Bench) ने आयकर विभाग के रुख को खारिज करते हुए एक बेहद प्रगतिशील टिप्पणी की। न्यायाधिकरण ने कहा, यदि कोई करदाता देश के स्थापित कानूनों के अनुसार किसी विशेष कर लाभ या छूट को पाने की योग्यता रखता है, तो केवल रिटर्न फॉर्म में हुई किसी रिपोर्टिंग त्रुटि या तकनीकी चूक की वजह से उसे उसके मूल अधिकार से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है। ट्रिब्यूनल ने माना कि कर्मचारी का उद्देश्य किसी भी प्रकार की कर चोरी या गलत जानकारी देना नहीं था, बल्कि यह पूरी तरह से एक अनजानी लिपिकीय त्रुटि (Clerical Error) थी। इसके बाद अदालत ने ₹65.21 लाख की राशि को पूरी तरह करमुक्त मानते हुए विभाग को टैक्स रिफंड और राहत प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए।कर विशेषज्ञों की राय: अन्य करदाताओं के लिए नजीर, पर बरतें सावधानीटैक्स कंसल्टेंट्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) का मानना है कि पुणे ट्रिब्यूनल का यह फैसला उन सभी करदाताओं के लिए एक बड़ी नजीर साबित होगा, जो अक्सर आईटीआर दाखिल करते समय अनजाने में फॉर्म में गलतियां कर बैठते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी आगाह किया है कि इस फैसले का अर्थ यह कतई नहीं निकाला जाना चाहिए कि हर प्रकार की गलत फाइलिंग पर विभाग की ओर से माफी मिल जाएगी। यह कर राहत केवल तभी उपलब्ध होगी जब करदाता प्रासंगिक दस्तावेजों के जरिए यह अकाट्य रूप से साबित कर सके कि वह कानूनन उस टैक्स छूट का हकदार था और की गई गलती केवल तकनीकी स्तर पर थी।अनावश्यक आयकर नोटिस से बचने के लिए ITR फाइलिंग के समय रखें इन बातों का ध्यान:दस्तावेजों का गहन मिलान: करदाताओं को अपना आईटीआर फाइनल सबमिट करने से पहले अपने फॉर्म-16 (Form-16), वेतन विवरण (Salary Slips), एआईएस (AIS) और टीआईएस (TIS) का डेटा अच्छी तरह से क्रॉस-वेरिफाई कर लेना चाहिए।विशेष फंड की सही एंट्री: स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS), ग्रेच्युटी (Gratuity), लीव एनकैशमेंट, पेंशन या कैपिटल गेन (Capital Gains) जैसे बड़े फंड्स की प्रविष्टि करते समय संबंधित आयकर धाराओं का विशेष ध्यान रखें।विशेषज्ञों का परामर्श: यदि आयकर के किसी जटिल नियम या छूट के कॉलम को लेकर मन में थोड़ा भी संदेह हो, तो खुद फॉर्म भरने के बजाय किसी प्रमाणित टैक्स सलाहकार या सीए की व्यावसायिक मदद लेना ही सबसे सुरक्षित और कानूनी विवादों से मुक्त रहने का एकमात्र तरीका है।
नई दिल्ली/लखनऊ। यदि इस सप्ताह आपका बैंक की शाखा (Bank Branch) से जुड़ा कोई भी अत्यंत जरूरी काम है, जैसे चेक जमा करना, नया ड्राफ्ट बनवाना या पासबुक अपडेट कराना, तो घर से बाहर कदम रखने से पहले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा जारी छुट्टियों की ताजा सूची जरूर देख लें। आरबीआई के आधिकारिक अवकाश कैलेंडर के अनुसार, इस सप्ताह देश के अलग-अलग राज्यों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) सहित सभी सरकारी व निजी बैंक अधिकतम तीन दिनों तक बंद रह सकते हैं। ऐसे में डिजिटल बैंकिंग का उपयोग कर आप किसी भी संभावित परेशानी से बच सकते हैं।खारची पूजा और चौथे शनिवार के कारण तीन दिन का अवकाशहॉलिडे शेड्यूल के मुताबिक, आज 19 जुलाई 2026 (रविवार) को साप्ताहिक अवकाश के चलते पूरे देश में सार्वजनिक लेन-देन पूरी तरह बंद है। इसके बाद इस सप्ताह के मध्य में यानी 22 जुलाई (बुधवार) को त्रिपुरा (अगरतला) में खारची पूजा (Kharchi Puja) के पावन अवसर पर क्षेत्रीय स्तर पर बैंकों में अवकाश घोषित किया गया है। वहीं, सप्ताह के अंत में 25 जुलाई को महीने का चौथा शनिवार (Fourth Saturday) होने के कारण देश के सभी राज्यों में बैंक शाखाएं पूरी तरह बंद रहेंगी। इसका मतलब यह है कि त्रिपुरा जैसे राज्यों में इस सप्ताह बैंकों में कुल तीन दिन कामकाज नहीं होगा, जबकि देश के अन्य हिस्सों में दो दिन (रविवार और चौथा शनिवार) बैंक बंद रहेंगे।शाखाएं बंद रहने पर भी चालू रहेंगी ये सभी डिजिटल बैंकिंग सेवाएंराहत की बात यह है कि बैंक शाखाओं के भौतिक रूप से बंद रहने के बावजूद ग्राहकों के लिए वित्तीय और गैर-वित्तीय सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी। डिजिटल इंडिया के दौर में निम्नलिखित सुविधाएं 24 घंटे काम करती रहेंगी:ऑनलाइन ट्रांजैक्शन: ग्राहक पहले की तरह ही यूपीआई (UPI), इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के जरिए किसी को भी पैसे भेज सकते हैं।एटीएम और बिल भुगतान: नकद निकासी के लिए सभी एटीएम (ATM) सामान्य रूप से चालू रहेंगे। इसके साथ ही ऑनलाइन बिल भरना, बैलेंस चेक करना और मर्चेंट पेमेंट की सुविधाएं निर्बाध रूप से उपलब्ध रहेंगी।मेंटेनेंस अलर्ट: हालांकि, कभी-कभी बैंकों द्वारा सिस्टम मेंटेनेंस या सर्वर अपग्रेडेशन के कारण कुछ डिजिटल सेवाएं थोड़े समय के लिए बाधित हो सकती हैं, जिसकी अग्रिम सूचना बैंक अपने ग्राहकों को एसएमएस या ईमेल के माध्यम से पहले ही दे देते हैं।जानिए अगले सप्ताह का शेड्यूल और बैंकों का टाइमिंगआरबीआई नियमों के तहत हर महीने के दूसरे व चौथे शनिवार और सभी रविवार को बैंक बंद रखे जाते हैं। राहत की बात यह है कि इस सप्ताह के बाद यानी 26 जुलाई (रविवार) को छोड़कर 1 अगस्त 2026 तक किसी भी राज्य में कोई विशेष या क्षेत्रीय अवकाश निर्धारित नहीं है, जिससे अगले पूरे हफ्ते कामकाज सामान्य रहेगा। सामान्य दिनों में ग्राहकों के लेन-देन के लिए बैंकों का समय सुबह 10:00 बजे से दोपहर बाद 4:00 बजे तक निर्धारित होता है, हालांकि स्थानीय नियमों के अनुसार कुछ शाखाओं के समय में आंशिक बदलाव संभव है। उपभोक्ताओं को असुविधा से बचने के लिए अपने सभी जरूरी काम इन छुट्टियों से पहले या बाद में निपटाने की सलाह दी जाती है।
देशभर में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। जम्मू-कश्मीर से लेकर छत्तीसगढ़ और उत्तर भारत के कई राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों के लिए कई राज्यों में भारी बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की ...
CM योगी ने जापान के उदाहरण के साथ बच्चों को दिया आत्म अनुशासन व परिश्रम का मंत्र
Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को आत्म अनुशासन, परिश्रम का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि अनुशासन ही जीवन का सबसे बड़ा मंत्र है। आगे वही बढ़ा है और इतिहास भी उसी ने बनाया है, जो ...
सूरत : केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी आज मांडवी के दौरे पर
केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्षभाई संघवी आज सूरत जिले के मांडवी का दौरा कर रहे हैं। अपने दौरे के दौरान वे कोसंबा में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होंगे। मांडवी के कोसंबा में ‘अपना घर आश्रम’ का उद्घाटन किया ...
लखनऊ/गुरुग्राम। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और दिल्ली-एनसीआर के गुरुग्राम में स्थित प्रतिष्ठित मेदांता अस्पताल (Medanta Hospital) एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है। एक पीड़ित मरीज के उपचार में हुई भयंकर लापरवाही (Medical Negligence) और अस्पताल प्रबंधन द्वारा की जा रही कथित आर्थिक उगाही का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि डॉक्टरों ने इलाज के दौरान घोर लापरवाही बरतते हुए वास्तविक घाव वाले स्थान को छोड़कर उससे करीब 6 सेंटीमीटर दूर सर्जरी कर दी। इस गलत ऑपरेशन के कारण मरीज के घाव से लगातार मवाद (Pus) बह रहा है और उसकी हालत लगातार गंभीर बनी हुई है। इस मामले में संज्ञान लेते हुए माननीय मुख्यमंत्री जी ने डॉक्टरों की मनमानी के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार करते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।घाव कहीं और, ऑपरेशन कहीं और: डॉक्टरों पर अनदेखी का आरोपमरीज के परिजनों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, मेदांता के डॉक्टरों को जब प्रभावित हिस्से से लगातार बहते मवाद को दिखाया गया, तो उन्होंने उसे पूरी तरह इग्नोर कर दिया और 'बाद में देखने' की बात कहकर टालते रहे। जब पीड़ित परिवार ने इस गंभीर लापरवाही की लिखित शिकायत मेल के माध्यम से गुरुग्राम और लखनऊ के आला अधिकारियों व शीर्ष प्रबंधन से की, तो लंबे समय तक उनके कान पर जूं तक नहीं रेंगी। काफी दबाव के बाद अस्पताल प्रशासन ने एक बोर्ड मीटिंग बुलाई, जिसमें डॉक्टरों ने अपनी तकनीकी गलती स्वीकार करने के बजाय तीमारदारों के सामने अपने पद और रसूख की धौंस दिखाना शुरू कर दिया।सरकारी नौकरी छोड़ प्राइवेट में आने की धौंस और बिलिंग का खेलबोर्ड मीटिंग के दौरान मेदांता के वरिष्ठ डॉक्टर अमित अग्रवाल ने कथित तौर पर यह दलील दी कि वे पीजीआई (PGI) की 5 साल की सरकारी नौकरी छोड़कर यहां आए हैं। वहीं, डॉ. उमा प्रधान ने भी डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (RML) की प्रतिष्ठित जॉब छोड़ने का हवाला दिया। पीड़ित पक्ष का सवाल है कि यदि डॉक्टर यहां केवल इलाज करने आए हैं, तो वे अपनी कमियों को छुपाने के लिए फाइलों में हेरफेर और लगातार बिल पर बिल क्यों बनाए जा रहे हैं? परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा डॉक्टरों को हर महीने एक निश्चित वित्तीय राशि का टारगेट दिया जाता है, जिसे पूरा करने के लिए मरीजों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। डॉक्टरों ने इस बीमारी के लिए डेढ़ से दो साल तक लगातार महंगी ड्रेसिंग कराने की बात कही है, जिसका भारी-भरकम बजट एक मध्यमवर्गीय या गरीब परिवार के पूरी तरह बाहर है।मुख्यमंत्री के जांच आदेश और सेकंड ओपिनियन में खुली पोलइस मामले के तूल पकड़ने के बाद मेदांता के चिकित्सा निदेशक डॉ. राकेश कपूर ने पीड़ित परिवार को किसी अन्य बाहरी डॉक्टर से सेकंड ओपिनियन (Second Opinion) लेने की सलाह दी थी। इसके बाद जब परिजनों ने अन्य विशेषज्ञ सर्जनों से परामर्श किया, तो डॉक्टरों ने साफ कर दिया कि इलाज पूरी तरह गलत हुआ है। चिकित्सा नियमों के अनुसार उपचार घाव वाली जगह पर ही होना चाहिए था, न कि उससे दूर। बाहरी डॉक्टरों ने मरीज की जान बचाने के लिए इस गलत सर्जरी को दोबारा ऑपरेट (Re-operate) करने की जरूरत बताई है। अस्पताल के इस रवैये और पुख्ता सबूतों के आधार पर माननीय मुख्यमंत्री जी ने जांच के कड़े निर्देश दिए हैं, जिससे अब दूध का दूध और पानी का पानी होने की उम्मीद है।
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान तबीयत खराब होने लगी है। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि वांगचुक में डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) के लक्षण दिखाई दे रहे हैं और गंभीर स्वास्थ्य ...
आबूरोड जैसे ही सिरोही के प्रकरण में दस लोगों के खिलाफ चार्जशीट पेश
सबगुरु न्यूज-सिरोही। जून के महीने में आबूरोड में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल हुई थी। इस हड़ताल में के दौरान फर्जी नियुक्ति का मामला भी उठा था। इसी तरह का एक मामला 12 साल पहले सिरोही नगर पालिका में हुआ था। इस प्रकरण का खुलासा होने पर कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा जोरशोर से उठाया था। विधानसभा […] The post आबूरोड जैसे ही सिरोही के प्रकरण में दस लोगों के खिलाफ चार्जशीट पेश appeared first on Sabguru News .
अमेरिका का ईरान पर नया हमला, IRGC की गोलीबारी में 2 अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद बढ़ा तनाव
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। शनिवार को जॉर्डन में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से की गई गोलीबारी में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए। अमेरिका ने अभी तक मारे गए और ...
भाजपा मुद्दों से ध्यान भटकाने की राजनीति कर रही, आजम खान को न्याय मिलेगा: सपा प्रवक्ता अमीक जामेई
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमीक जामेई ने विभिन्न राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर भाजपा और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा
झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ की कोबरा-209 बटालियन को बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त कार्रवाई में प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के स्पेशल एरिया कमेटी (एसएसी) के शीर्ष कमांडर और 25 लाख रुपए के इनामी नक्सली अजय महतो उर्फ मोछू उर्फ टाइगर को गिरफ्तार किया गया है।
उद्धव ठाकरे को लगा सबसे बड़ा झटका, लोकसभा स्पीकर ने 6 बागी सांसदों के शिवसेना में विलय को दी मंजूरी
20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा झटका लगा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्धव ठाकरे गुट के छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय को औपचारिक मंजूरी दे दी है।
भारत में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यहां की संस्कृति और परंपरा का सम्मान करना होगा: सीएम योगी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभल में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि भारत में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यहां की संस्कृति और परंपरा का सम्मान करना होगा। उन्होंने कहा कि जो लोग आज भी अपने आपको बाबर की संतान समझते हैं, उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि नया भारत न तो गुलामी की मानसिकता में जीने वाला है और न ही उसे स्वीकार करने वाला है।
बाबा अमरनाथ और वैष्णोदेवी यात्रा पर लगा ब्रेक, अगले आदेश तक रहेगी रोक, जानिए क्यों लिया यह फैसला?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा प्रदेश में आज यानी 19 जुलाई से 25 जुलाई तक जबरदस्त खराब मौसम की चेतावनी को देखते हुए पहलगाम और बालटाल दोनों रास्तों से अमरनाथ यात्रा को कुछ दिनों के लिए रोक दिया जाएगा। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने भारत ...
वाशिंगटन/येरूशलेम। अमरीका ने ईरान के खिलाफ अभियान के संभावित विस्तार से पहले इजराइल को देश में कई और अमरीकी ईंधन भरने वाले विमान तैनात करने की अपनी योजना की सूचना दी है और इजराइली अधिकारियों के अनुसार यह कदम अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मंगलवार को सिचुएशन रूम की बैठक के बाद व्यापक सैन्य अभियान […] The post ईरान पर बड़े हमले की तैयारी में अमरीका, ट्रंप प्रशासन इजराइल में तैनात करेगा अतिरिक्त फ्यूल टैंकर विमान appeared first on Sabguru News .

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