नेपाल ने चीन-अमेरिका, भारत से मांगा हर्जाना, UN जाएंगे बालेन शाह
नेपाल ने बागमती प्रदेश में आई भीषण बाढ़ के लिए चीन, भारत और अमेरिका को जलवायु मुआवजे की मांग की है. प्रधानमंत्री बालेन शाह यूएन महासभा में इस मुद्दे को उठाने के लिए न्यूयॉर्क जाने की तैयारी कर रहे हैं.
नीम करोली बाबा-रामबेटी की अधूरी मगर पूरी प्रेम कहानी दिखाती है ‘हनुमान अंश’!
कभी साथ रहकर भी रिश्ते अधूरे रह जाते हैं और कभी दूरी में भी प्रेम पूरा हो जाता है. ‘हनुमान अंश’ में नीम करोली बाबा और रामबेटी की यही अनकही प्रेम कहानी दिल को छू जाती है.
कौशांबी पटाखा ब्लास्ट: एक ही परिवार के 4 मासूमों की हुई मौत
कौशांबी की पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट ने एक परिवार से चार मासूम बच्चों को छीन लिया. मंगलवार शाम शव गांव पहुंचे तो पिता गया प्रसाद साहू बेसुध हो गए और मुआवजे की मांग को लेकर अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया. सड़क जाम के बाद पहुंचे डीएसपी सत्येंद्र तिवारी ने उन्हें गले लगाकर संभाला और प्रशासन के साथ का भरोसा दिया. बुधवार को परिवार को 32 लाख रुपये की सहायता राशि का चेक मिला.
'मैं इस जिम्मेदारी को...', राम मंदिर ट्रस्ट के CEO बनने पर क्या बोले जितेंद्र मिश्र?
भारतीय वायु सेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त किया गया है. वे वेस्टर्न एयर कमांड के पूर्व प्रमुख रहे हैं. ऑपरेशन सिंदूर के हीरो रहे पूर्व वायु सेना के अधिकारी अब मंदिर के प्रशासनिक-वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे. राम मंदिर CEO बनने पर क्या बोले जितेंद्र मिश्र? देखिए Video.
DIY स्किनकेयर में न करें ये 4 गलतियां, ये घरेलू कॉम्बिनेशन आपकी त्वचा को पहुंचा सकते हैं नुकसान
रसोई में मौजूद दो चीजों को मिलाकर चेहरे पर लगाना आपकी स्किन के लिए फायदे की बजाय नुकसानदायक हो सकता है. गलत DIY कॉम्बिनेशन से जलन, लालिमा, ड्राईनेस और स्किन पीलिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
कुछ बेरोजगार लोग खुद को इकोनॉमिस्ट कहते हैं, इनके झांसे में मत आओ; GDP विवाद पर पीयूष गोयल
पीयूष गोयल ने कहा कि पीएम मोदी ने दूर की सोच के साथ देश को लीड किया है। कुछ बेरोजगार लोग खुद को इकोनॉमिस्ट कहते हैं और देश को नुकसान पहुंचाने के लिए टीवी चैनलों पर आते हैं। इनके झांसे में न आएं।
तेज तर्रार प्रवक्ता आसिम वकार का कांग्रेस में जाना ओवैसी के लिए कितना बड़ा झटका?
अब कांग्रेस में शामिल होते वक्त आसिम वकार ने जो कुछ कहा वो AIMIM के लिए वह ओवैसी के लिए राजनीतिक रूप से अच्छा नहीं माना जाएगा.
पंजाब की जेलों में नशे का चौंकाने वाला आंकड़ा, विपक्ष ने पूछे सवाल
पंजाब की जेलों में 44.5% कैदी Opioid Addiction Treatment के लिए OOAT क्लीनिक में रजिस्टर्ड हैं. हाईकोर्ट में सरकार के हलफनामे के बाद AAP सरकार पर विपक्ष ने सवाल उठाए. पढ़ें पूरी कहानी.
कुणाल खेमू ने बताया कैसे मानीं शर्मिला टैगोर, बोले- यह मेरे लिए अंधेरे में तीर चलाने जैसा था
बतौर निर्देशक और अभिनेता कुणाल खेमू एक बार फिर बड़े पर्दे पर अपनी नई फिल्म लेकर आ रहे हैं. उनकी फिल्म का नाम ‘वाइब’ है, जो 18 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है.
फंदे पर लटके मिले पति-पत्नी, दो साल पहले की थी लव मैरिज
सोनीपत के कबीरपुर में प्रेम विवाह करने वाले पति-पत्नी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. ऋतिक और सिमरन ने 2024 में प्रेम विवाह किया था और किराए के मकान में परिवार के साथ रह रहे थे. आत्महत्या की वजह अभी सामने नहीं आई है. सुबह भाई से दुकान को लेकर बात हुई थी, लेकिन बाद में फोन नहीं उठाने पर परिजन घर पहुंचे.
Delhi-Amritsar-Katra Expressway: दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के 6 पैकेज आम लोगों के लिए खोल दिए गए हैं. प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद दिल्ली से अमृतसर का सफर 4 घंटे और कटरा का सफर करीब 6 घंटे में पूरा किया जा सकेगा.
गुलदार पकड़ने को लगाया पिंजरा, मुर्गा निकाला, बच्चे पिंजरे में बंद होकर करने लगे मस्ती
बिजनौर के नजीबाबाद क्षेत्र में गुलदार पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. वीडियो में ग्रामीण पिंजरे के आसपास नजर आ रहे हैं. दावा है कि कुछ लोग इसे देखने पहुंच रहे हैं और पिंजरे में गुलदार को आकर्षित करने के लिए रखा मुर्गा भी बाहर निकालकर ले जाते हैं. इससे वन विभाग की पकड़ने की कोशिश प्रभावित होने की आशंका है.
दंगल: देश के GDP विकास दर को गलत बताने के पीछे विपक्ष के आधार सही हैं?
आज का दंगल देश के विकास पर है, विकास की नई दर पर है. 2 दिन पहले देश में पहली तिमाही के आंकडे आए हैं. पिछले 3 साल के मुकाबले इस बार पहली तिमाही सबसे शानदार रही है. 7.8 फीसदी की विकास दर मिली है. पीएम मोदी खुश हैं. सारे मंत्री खुश हैं. पूरी बीजेपी खुश है कि मोदी सरकार के फैसलों के कारण यूकेन से लेकर ईरान युद्ध के संकट, सप्लाई चेन में रुकावट और तमाम चुनौतियों के बावजूद भारत की विकास की गति 8 फीसदी को छू रही है...लेकिन विपक्ष इस कामयाबी को सच नहीं मान रहा. विपक्ष कह रहा है कि इस विकास में देश का गरीब-नौजवान-बेरोजगार-किसान शामिल नहीं है. देखें...
पढ़ें 2 सितंबर 2026 की शाम की बड़ी खबरें और अन्य समाचार
अयोध्या में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने पहले सीईओ का ऐलान कर दिया है. रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को ट्रस्ट का CEO नियुक्त किया गया है. सीईओ के साथ-साथ ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को शामिल किया गया है, जिनमें मदन मोहन पांडेय, महेश भागचन्दका और निर्मला यादव शामिल हैं.
धरती के बेस्ट कपल हैं इन राशियों के लोग! एक दूसरे के बिना बिल्कुल अधूरे
ज्योतिषविद कुछ राशियों की जोड़ी को बहुत अच्छा मानते हैं. उनका कहना है कि अगर राशियों के आधार पर जोड़ी बनाकर लव लाइफ या शादी-विवाह के मामलों को आगे बढ़ाया जाए, तो लोगों को आगे चलकर बहुत अच्छे परिणाम मिलते हैं.
पहले 10 घर जले... अगले ही दिन 25 और फूंके! मणिपुर के कांगपोकपी में क्या हो रहा है?
ताजा आगजनी टिपोराम गांव में हुई। गांव के एक निवासी के मुताबिक, जलाए गए 25 घरों में से 5 घर नेपाली समुदाय के लोगों के थे। घटना के बाद आग लगाने वाले लोग वहां से चले गए।
कभी ट्रेन में गाए भजन, 'हनुमान अंश' के नेत्रहीन सिंगर को मिला सम्मान
‘हनुमान अंश’ फिल्म के नेत्रहीन सिंगर सुनील लोधी अब किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. कभी ट्रेन में गाना गाने वाला ये सिंगर अब बड़ा स्टार बन चुका है.
Mesh Love Rashifal 3 September 2026: मेष राशि वालों के लिए दिन लव लाइफ, करियर और धन के मामले में अच्छा रह सकता है. आचार्य मदन मोहन ने संतुलन रखने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि शुक्र का प्रभाव रिश्तों में तालमेल बढ़ाने वाला माना जा रहा है.
ICC ने श्रीलंका से छिना हक, चैम्पियंस ट्रॉफी की मेजबानी करेगा भारत
आईसीसी ने पहली बार आयोजित होने वाली विमेन्स चैम्पियंस ट्रॉफी 2027 की मेजबानी भारत को सौंप दी है. टूर्नामेंट की तारीखों और वेन्यू का ऐलान भी कर दिया गया है.
तिब्बत-नेपाल की सीमा पर बसे कस्टम ऑफिस का इलाका अब कैसा दिखता है? NDTV ने हेलीकॉप्टर से क्या देखा
हेलीकॉप्टर से एरियल व्यू के जरिए हमने देखा, जैसे यहां पहले कभी कुछ बसा ही नहीं था. जिस जगह कस्टम ऑफिस था, वह जगह अब किसी बंजर और सपाट लगता है.
दिल्ली से मथुरा तक कान्हा की धूम… आधी रात को गूंजेगा
जन्माष्टमी आते ही दिल्ली से लेकर मथुरा-वृंदावन तक माहौल कृष्णमय हो जाता है। लेकिन इस बार दिल्ली में जन्माष्टमी सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं रहने वाली बाजार से लेकर कॉलोनियों और बड़े धार्मिक स्थलों तक कान्हा के स्वागत की तैयारियां दिखाई दे रही हैं। 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। दिल्ली में आधी रात के आसपास कृष्ण जन्म का उत्सव अपने चरम पर होगा। पंचांग के अनुसार दिल्ली में निशीथ पूजा का समय करीब रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक है।
ग्लास स्किन और हेल्दी स्किन में क्या फर्क है? जानिए चमकदार त्वचा की असली पहचान
असली त्वचा में पोर्स, हल्की फाइन लाइंस, पिगमेंटेशन, कभी-कभार पिंपल्स और थोड़ा टेक्सचर होना बिल्कुल सामान्य है. हर समय फिल्टर और एडिटेड तस्वीरों जैसी स्किन पाने की कोशिश करने से उल्टा नुकसान हो सकता है.
36 साल पहले रिलीज हुई ‘आशिकी’ ने अपनी कहानी से ज्यादा अपने संगीत से इतिहास रच दिया था. 12 गानों वाले इस एल्बम में 9 गानों में कुमार सानू की आवाज गूंजी और ‘धीरे-धीरे से’, ‘नजर के सामने’ जैसे गीत आज भी लोगों के पसंदीदा हैं.
KBC में टाइल फिटर ने जीते 50 लाख, 1 करोड़ के सवाल पर छोड़ा शो, क्या आप जानते हैं उसका सही जवाब
कौन बनेगा करोड़पति के नए सीजन में एक आम आदमी की कहानी ने सबका दिल जीत लिया. राजस्थान के शामपुरा गांव से आए टाइल फिटर कृष्ण कुमावत ने शो में 50 लाख रुपये जीतकर घर लौटने का फैसला किया.
भूल जाएंगे CRETA-SIERRA, हुंडई ला रही नई SUV, CNG पर चलेगी
हुंडई भारतीय बाजार में एक नई कार लॉन्च करने वाली है. इस कार को लेकर कंपनी की तैयारियां तेज है. ब्रांड आने वाले दिनों में इसकी डिटेल्स रिवील कर सकता है. फिलहाल कार को टेस्टिंग के दौरान देखा गया है. ये कार दमदार फीचर्स के साथ क्रेटा वाले सेगमेंट में आएगी. कंपनी का टार्गेट कम कीमत में एक मिडसाइज एसयूवी ऑफर करने का है.
बीता समय भूलें, आगे अच्छा होगा... राम मंदिर के CEO बनने के बाद जीतेंद्र मिश्रा का पहला बयान
राम मंदिर के CEO बनने के बाद जितेंद्र मिश्रा का पहला बयान आया है. नई जिम्मेदारी मिलने पर उन्होंने कहा है कि भगवान श्रीराम की कृपा से आगे सब अच्छा होगा.
मौसम विभाग ने कहा है कि दिल्ली-एनसीआर में गुरुवार को आमतौर पर बादल छाए रहेंगे और सुबह से दोपहर तक, फिर दोपहर से शाम के दौरान कई स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश होने के आसार हैं। इस दौरान 15KM की स्पीड से हवाएं चल सकती हैं।
KBC 18: करीना को क्या बुलाएंगे अमिताभ? सवाल सुन सैफ के छूटे पसीने
अक्षय कुमार और सैफ अली खान अपनी आगामी फिल्म 'हैवान' के प्रमोशन के लिए 'कौन बनेगा करोड़पति 18' के सेट पर पहुंचे. दोनों सितारों ने अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत की और फिल्म से जुड़े मजेदार किस्से शेयर किए.
टाइगर हिल के हीरो अब संभालेंगे राम मंदिर की कमान
पाकिस्तान के खिलाफ जंग में अहम भूमिका निभा चुके पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र अब राम मंदिर की व्यवस्था संभालेंगे. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उन्हें पहला पूर्णकालिक सीईओ नियुक्त किया है. भारतीय वायुसेना में लंबा अनुभव रखने वाले मिश्र ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं. अब उनके सैन्य अनुशासन और प्रशासनिक अनुभव का इस्तेमाल राम मंदिर के प्रशासन, सुरक्षा, वित्तीय व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जाएगा.
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका ने मंगलवार रात ईरान के सिरिक, खुज़ेस्तान, क़ेश्म द्वीप और बंदर अब्बास में मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों में 12 लोगों की मौत और 68 लोग घायल हुए हैं। ईरान का ...
हैदराबाद में AIMIM कार्यकर्ता की हत्या के पीछे काले जादू के शक!
हैदराबाद के वट्टेपल्ली में AIMIM कार्यकर्ता मोहम्मद महबूब अली की चाकू मारकर हत्या कर दी गई. अब पुलिस इस मामले में काले जादू के शक से जुड़ी पुरानी पारिवारिक रंजिश समेत कई एंगल को लेकर जांच कर रही है. पढ़े पूरी कहानी.
10 में कोल्ड ड्रिंक, पानी-आइसक्रीम भी 10 में... मुकेश अंबानी का नया जुगाड़!
मुकेश अंबानी ने अब नए आइसक्रीम ब्रांड के साथ 10 रुपये के सेगमेंट में एंट्री ली है. इससे पहले, अंबानी पानी और कोल्ड ड्रिंक जैसी चीजें भी 10 रुपये में लॉन्च कर चुके हैं.
Success Story: किसान का बेटा पवन राज चीन में दिखाएगा दम, भारतीय रग्बी टीम में चयन
बिहार के नवादा जिले के किसान पुत्र पवन राज का चयन भारतीय अंडर-18 रग्बी टीम में हुआ है. वह 5-6 सितंबर 2026 को चीन में आयोजित एशियाई रग्बी अंडर-18 चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. सीमित संसाधनों में कड़ी मेहनत कर पवन ने यह मुकाम हासिल कर नवादा का मान बढ़ाया है.
Karan Singh ने की Himalayan Authority के गठन की मांग
नयी दिल्ली, दो सितंबर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कर्ण सिंह ने नेपाल की विनाशकारी बाढ़ का हवाला देते हुए बुधवार को कहा कि हिमालय से लगे देशों को एक हिमालयी प्राधिकरण गठित करने की जरूरत है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस दिशा में पहल करने का आग्रह किया। सिंह ने उत्तराखंड में चार धामों को जोड़ने वाले राजमार्ग को चार लेन का किए जाने को ‘‘निंदनीय’’ करार दिया और कहा कि भारत सरकार को हिमालय को विनाश से बचाने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। सिंह ने नेपाल में आपदा के कारण हुई जनहानि पर वहां के लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनकी दिवंगत पत्नी नेपाल की रहने वाली थीं और इसलिए इस ‘‘खूबसूरत देश’’ तथा वहां के लोगों से उनका विशेष लगाव है। सिंह ने कहा, ‘‘नेपाल में हुई विनाशकारी घटनाओं से जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। मैं इस त्रासदी की घड़ी में नेपाल के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करना चाहता हूं।’’उन्होंने कहा कि जिस घटना से यह आपदा शुरू हुई, वह तिब्बत में हुई और इसने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की संवेनदशीलता का स्मरण कराया है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सिंह ने कहा, ‘‘इसीलिए मेरे जैसे हिमालय प्रेमी लगातार यह आग्रह करते रहे हैं कि भारत सरकार को हिमालय को विनाश से बचाने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।’’उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में चार धाम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में चार लेन की सड़कों के लिए बड़े पैमाने पर विस्फोट और सड़कों को चौड़ा किया जाना ‘‘निंदनीय’’ है। उनके अनुसार, हिमालय में चार लेन की सड़कों पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए और पर्यटकों तथा तीर्थयात्रियों के लिए दो लेन की सड़कें पर्याप्त हैं। सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि हिमालयी देशों को एक हिमालयी प्राधिकरण गठित करना चाहिए, जिसमें पाकिस्तान, तिब्बत, भारत से लेकर बांग्लादेश और भूटान तक के क्षेत्र शामिल किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘तभी एक समान नीति अपनाई जा सकेगी। यह उचित होगा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस संबंध में नेपाल के प्रधानमंत्री के साथ पहल करें।
राम मंदिर CEO बनकर भावुक हुए जितेंद्र मिश्र, बोले- इतिहास से सीखूंगा
CEO बनने पर एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रभावुक नजर आए. CEO का दायित्व संभालने पर जितेंद्र मिश्र ने चयन समिति,राम मंदिर ट्रस्ट और भगवान श्री राम का आभार जताया है.
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को जन-जन का पर्व बनाने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग के श्रीकृष्ण पाथेय न्यास द्वारा 4 सितंबर को ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का राज्य स्तरीय व्यापक आयोजन किया जा रहा है। ‘घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल’ की संकल्पना के साथ प्रदेश के ...
बिहार कैबिनेट ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का विस्तार, मेडिकल कॉलेज, औद्योगिक क्षेत्र और शहरी विकास परियोजनाओं को भी हरी झंडी दिखाई है.
फैज की नज्म और फोन पर प्रपोज, तलाक की चर्चा के बीच जानिए यासीन मलिक और मुशाल की प्रेम कहानी
Yasin Malik and Mushaal Hussain mullick love story: कश्मीरी आतंकवादी यासीन मलिक ने अपनी पत्नी मुशाल हुसैन को तलाक देने की इच्छा जाहिर की है। उसने कहा है कि वह पिछले 8 साल से अपनी पत्नी से बात नहीं कर पाए हैं।
माता-पिता मोटे हैं तो आपको भी होगी ये बीमारी? कब है खतरा
भारत में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है, खासकर बच्चों में ये ज्यादा देखी जा रही है. लेकिन क्या माता-पिता से भी ये बीमारी बच्चों में आती है? इस बारे में डॉक्टर ने बताया है.
नौकरी की सिक्योरिटी, भविष्य की भी चिंता... आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को योगी सरकार का 'सुरक्षा कवच'
UP outsourcing employees outsourcing job security: नौकरी सिर्फ हर महीने मिलने वाली तनख्वाह का नाम नहीं होती। नौकरी के साथ कर्मचारी को अपने भविष्य की चिंता होती है, परिवार की जिम्मेदारी होती है और यह भरोसा भी चाहिए होता है कि उसकी मेहनत का रिकॉर्ड ...
यूक्रेन में रूसी मिसाइल हमले में तेलंगाना के प्रवासी मजदूर की मौत, एक अन्य भारतीय घायल
यूक्रेन में रूसी मिसाइल हमले में तेलंगाना के एक भारतीय नागरिक सुदर्शन गौड़ की मौत हो गई, जबकि एक अन्य भारतीय नागरिक गणेश कल्लेडा घायल हो गए। भारतीय दूतावास पार्थिव शरीर को वापस लाने के लिए यूक्रेनी अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है।
राम मंदिर ट्रस्ट को मिला पहला CEO, जानें कौन हैं जितेंद्र मिश्र?
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को अपना पहला सीईओ नियुक्त किया है. अब वे राम मंदिर के प्रशासनिक, वित्तीय और कानूनी प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे. 5500 से अधिक आवेदनों के बाद तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने तीन नामों का पैनल तैयार किया था. भारतीय वायुसेना में लंबा अनुभव रखने वाले मिश्र ने पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व भी किया है. ट्रस्ट को उनसे पेशेवर और पारदर्शी व्यवस्था मजबूत करने की उम्मीद है.
हिंदू अधिकारियों को खतरा क्यों नहीं? कश्मीरी पंडितों को मिल रही धमकियों पर फारूक अब्दुल्ला का बयान
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने आरोप लगाया है कि कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को हाल ही में मिली धमकियां एक साजिश का हिस्सा हैं, जिसका मकसद जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा फिर से मिलने से रोकना है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि केंद्र शासित प्रदेश में तैनात वरिष्ठ हिंदू पुलिस अधिकारियों को ऐसी धमकियों का सामना क्यों नहीं करना पड़ रहा है। इसे भी पढ़ें: Srinagar में NC और BJP आमने-सामने, सड़कों पर एक-दूसरे के खिलाफ किया जोरदार प्रदर्शन कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को हाल ही में मिली धमकियों पर JKNC के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि ये धमकियां कौन दे रहा है? क्या कश्मीरी पंडित यहां नहीं रहते? यहां के अधिकारी—DIG, DG और SP (जिला SP समेत)—सभी बाहर के हिंदू हैं। डिप्टी कमिश्नर भी हिंदू हैं। उन्हें धमकियां क्यों नहीं मिल रही हैं? सवाल यह है कि अगर हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, तो उन्हें धमकियां क्यों नहीं मिल रही हैं? यह एक साजिश है; यह इस इलाके को राज्य का दर्जा न देने और डर का माहौल बनाने की चाल है। वे दुनिया भर में दावा कर रहे हैं कि यहां शांति बहाल हो गई है और उग्रवाद खत्म हो गया है। तो फिर यह सब कहां से आ रहा है? उन्हें इसका जवाब देने दें। अब्दुल्ला की बातों पर राजनीतिक कमेंटेटर प्रदीप भंडारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता की आलोचना की। X पर एक पोस्ट में, भंडारी ने अब्दुल्ला पर कश्मीरी हिंदुओं का मज़ाक उड़ाने का आरोप लगाया और समुदाय को मिली कथित धमकियों पर उनकी प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। भंडारी ने कहा कि हिंदुओं को मिल रही इस्लामी धमकियों का सामना करने के बजाय, वह पूछते हैं: 'हिंदू अधिकारियों को धमकियां क्यों नहीं मिल रही हैं? इसे भी पढ़ें: पूर्व केंद्रीय मंत्री Kaushal Kishore के 'X' पोस्ट से UP में सियासी अटकलें तेज, 2027 चुनाव पर नजर उन्होंने आगे आरोप लगाया कि इन बयानों से आतंकवाद-समर्थक सोच झलकती है और कहा कि इन्हीं की वजह से घाटी से कश्मीरी हिंदुओं को विस्थापित होना पड़ा। भंडारी ने यह भी आरोप लगाया कि 70 कट्टर आतंकवादियों को रिहा किया गया और कश्मीरी हिंदुओं के मुद्दे पर कांग्रेस और फारूक अब्दुल्ला के रुख की आलोचना की। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
Indore में Rahul Gandhi का कार्यक्रम टला, अब 19 सितंबर को होगी छात्रों की गूंज
(इंट्रो में सुधार के साथ)(फाइल फोटो के साथ)इंदौर, दो सितंबर कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में इंदौर में 12 सितंबर को प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की तारीख जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजन की अनुमति नहीं मिलने के कारण बदल दी गई है। कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा स्टेडियम उपलब्ध कराने से इनकार किए जाने के बाद अब यह कार्यक्रम 12 सितंबर के बजाय 19 सितंबर को आयोजित होगा। पटवारी ने यह घोषणा इंदौर में कार्यक्रम की तैयारियों से जुड़ी बैठक के दौरान की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब कार्यक्रम के लिए नया आयोजन स्थल तलाश करके उसे तैयार करेगी। पटवारी ने इससे पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर 12 सितंबर को प्रस्तावित कार्यक्रम के लिए नेहरू स्टेडियम उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। उन्होंने पत्र में कहा था कि राहुल गांधी का कार्यक्रम कोई सामान्य राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि देश के भविष्य, युवाओं के सपनों, शिक्षा के अधिकार और शिक्षा व्यवस्था की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित जनसंवाद है। नेहरू स्टेडियम इंदौर नगर निगम के तहत आता है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा था कि नेहरू स्टेडियम को लेकर उच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश है जिसके तहत वहां खेलकूद गतिविधियों या राज्यस्तरीय शासकीय कार्यक्रमों के आयोजन की ही अनुमति दी जा सकती है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा था कि यदि नेहरू स्टेडियम में गांधी के कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिली, तो आंदोलन किया जाएगा। कांग्रेस ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में इंदौर और आसपास के 50,000 विद्यार्थियों को जुटाने का प्रयास कर रही है। ‘छात्रों की गूंज’ कांग्रेस द्वारा शुरू किया गया विद्यार्थी-संवाद अभियान है जिसके तहत देश के अलग-अलग शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विपक्षी दल इस अभियान के जरिये प्रश्नपत्र लीक, महंगी शिक्षा, सरकारी भर्तियों में अनियमितताओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को घेरने का प्रयास कर रहा है।
मीर जाफर, मीर सादिक… आखिर किस नेता के पार्टी छोड़ने पर भड़की ओवैसी की पार्टी?
एआईएमआईएम के एक राष्ट्रीय प्रवक्ता अब कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। इस पर AIMIM की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष मोहसिन खान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने उनको गद्दार, मीर जाफर
बिना खर्च जन्माष्टमी पर ऐसे सजाएं घर, कान्हा जी हो जाएंगे खुश!
Janmashtami 2026 Decoration Ideas: जन्माष्टमी पर कान्हा जी के स्वागत के लिए घर को खूबसूरत और फेस्टिव लुक देना है तो आपको महंगे डेकोरेशन आइटम खरीदने की जरूरत नहीं है. फूल, मोरपंख, तोरण, फेयरी लाइट्स और घर में मौजूद सजावटी सामान की मदद से आप पूजा की जगह या घर के किसी छोटे से कोने को बेहद खूबसूरत बना सकते हैं. जानिए जन्माष्टमी पर कम खर्च में कान्हा जी के लिए सुंदर पूजा कॉर्नर और घर सजाने के आसान डेकोरेशन आइडिया.
'क्या मैं आपकी कार में चल सकता हूं', राम मंदिर के नए CEO और PM की वो बातचीत!
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र (रि.) अपने करियर की दूसरी पारी शुरू कर रहे हैं. जंग के आसमान में पाकिस्तान को तगड़ी चोट देने वाले जितेंद्र मिश्र अब राम मंदिर ट्रस्ट के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) होंगे. कुछ दिन पहले उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की कहानी साझा की थी.
Srinagar में NC और BJP आमने-सामने, सड़कों पर एक-दूसरे के खिलाफ किया जोरदार प्रदर्शन
श्रीनगर, दो सितंबर सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद हुए पहले बड़े राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में बुधवार को सड़कों पर उतरे और एक-दूसरे पर जम्मू-कश्मीर के लोगों से किए गए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकॉ) ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा पूरा न करने का आरोप लगाया, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया कि नेकॉ सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने में नाकाम रही। नेकॉ द्वारा निकाले जा रहे विरोध मार्च को पुलिस ने जवाहर नगर स्थित भाजपा मुख्यालय की ओर बढ़ने से रोक दिया। इससे पहले नेकॉ के मंत्री, विधायक, नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की मांग को लेकर राजबाग स्थित गिंदुन स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के पास एकत्र हुए। पार्टी ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी को लेकर केंद्र सरकार के विरोध में भाजपा कार्यालय का ‘घेराव’ करने का ऐलान किया था। पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों ने हालांकि प्रदर्शनकारियों को जवाहर नगर की ओर आगे बढ़ने से रोक दिया। पार्टी ने इस दौरान पुलिस पर उसके विधायकों से “बदसलूकी” करने का आरोप लगाया। नेकॉ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “जेकेनेकॉ के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को आगे बढ़ने से रोका गया। लोगों को इसमें शामिल होने से रोका गया और चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ बुरा बर्ताव किया गया। इसके उलट, जब भाजपा ने सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, तो उन्हें आगे बढ़ने दिया गया। कितनी शर्म की बात है!”नेकॉ विधायक और मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा कि जम्मू कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने के वादे को भाजपा ने पूरा नहीं किया। सादिक ने कहा, “राज्य का दर्जा कहां है? चुनाव हुए दो साल हो चुके हैं और वह (शर्मा) इस्तीफे की बात करने की हिम्मत कर रहे हैं?”पांच अगस्त 2019 को केंद्र सरकार द्वारा छीने गए राज्य के दर्जे और संवैधानिक गारंटियों को बहाल करने की मांग करते हुए, सादिक ने कहा कि नेकॉ तब तक अपना विरोध जारी रखेगी जब तक “हमसे जो छीना गया था, वह हमें वापस नहीं मिल जाता”। भाजपा ने भी उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर सरकार की कथित “नाकामी” के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। नेकॉ सरकार के खिलाफ विरोध करने के लिए सैकड़ों भाजपा नेता और कार्यकर्ता लाल चौक पर घंटाघर के पास जमा हुए। प्रदर्शनकारियों ने जम्मू-कश्मीर सरकार के मुख्यालय, सिविल सचिवालय का घेराव करने की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें हरि सिंह हाई स्ट्रीट के पास रोक दिया। पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए कुछ नहीं कर रही है। शर्मा के अनुसार, भाजपा का प्रदर्शन चार प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित था- निष्पक्ष भर्ती के बजाय नौकरियों को ‘‘बेचना’’, स्थानीय निकाय चुनाव नहीं कराना, ‘‘बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार’’ और बिजली दरों में बढ़ोतरी। शर्मा ने अब्दुल्ला और उनकी पार्टी पर यह आरोप भी लगाया कि वे सिर्फ़ राज्य का दर्जा देने के मुद्दे को दोहराते रहते हैं और कामकाज या प्रशासन पर ध्यान नहीं देते। उमर अब्दुल्ला पर निशाना साधते हुए शर्मा ने सवाल किया कि क्या लोगों ने उन्हें ‘‘राजकुमार की तरह रहने और गुलमर्ग तथा पहलगाम में स्कीइंग करने’’ के लिए चुना था? उन्होंने उमर अब्दुल्ला को चुनौती देते हुए कहा कि वह अपनी गृह विधानसभा सीट गांदरबल से इस्तीफा दें और जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर फिर से चुनाव लड़ें। शर्मा ने कहा, ‘‘अगर आपमें थोड़ा भी आत्मसम्मान बचा है तो इस मुद्दे (राज्य का दर्जा) पर चुनाव लड़िए। तभी हम इसे आपका मुद्दा मानेंगे।
'माता सीता का किरदार भगवान राम से भी महान', CM DK शिवकुमार ने महिलाओं से लीडरशिप में आने को कहा
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने माता सीता के किरदार को भगवान राम से भी महान बताया। उन्होंने महिलाओं की शक्ति और त्याग की सराहना की।
राम मंदिर के CEO बने रि. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र, OP सिंदूर में निभाई थी खास भूमिका
भारतीय वायु सेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त किया गया है. वे वेस्टर्न एयर कमांड के पूर्व प्रमुख रहे हैं. ऑपरेशन सिंदूर के हीरो रहे पूर्व वायु सेना के अधिकारी अब राम मंदिर के प्रशासनिक-वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे.
4 करोड़ का चेक, खाते में 10 हजार नहीं, राम मंदिर ट्रस्ट हैरान
श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट को एक दानदाता ने सार्वजनिक रूप से 4 करोड़ और 10 हजार रुपये के दो चेक दिए. बैंक में चेक भेजे जाने पर पता चला कि दानदाता के खाते में बेहद कम रकम थी. यहां तक कि 10 हजार रुपये के चेक के लिए भी पर्याप्त पैसा नहीं था. ट्रस्ट फिलहाल मामले में FIR कराने के पक्ष में नहीं है.
सरयू का जलस्तर घटा, लेकिन तटवर्ती इलाकों में दुश्वारियां बरकरार
Saryu river water level drops: अयोध्या समेत आसपास के जिलों में सरयू और राप्ती नदी का जलस्तर घटने से बाढ़ का खतरा टल गया है, लेकिन कछार के इलाकों में कीचड़, बीमारी और पशुचारे का संकट गहराया हुआ है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, अयोध्या में सरयू का ...
एविएशन सेक्टर में सुधार की तैयारी, राम मोहन नायडू ने की हाई-लेवल बैठक
नागरिक उड्डयन मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के लिए विमानन क्षेत्र में एनओसी प्रक्रिया को पारदर्शी, स्वचालित और समयबद्ध बनाने हेतु 15 दिनों के अंदर रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए गए.
AI Teachers:
राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, गोविंद गिरि को चंपत राय वाली जिम्मेदारियां
राम मंदिर ट्रस्ट की नई टीम में कौन-कौन शामिल हुआ? पहली बार CEO की जिम्मेदारी किसे मिली और चढ़ावे की गिनती को लेकर क्या बड़ा फैसला हुआ? जानिए बैठक के सभी अहम फैसले.
बड़े काम की है दालचीनी, जायफल मिलाकर बनाएं 100% नेचुरल रूम फ्रेशनर
मॉनसून में कपड़ों की सीलन और हवा की नमी के कारण घर में अजीब सी बदबू आने लगती है. बाजार के केमिकल वाले प्रोडक्ट्स से बचने के लिए आप रसोई में मौजूद दो मसालों को पानी में उबालकर 100% नेचुरल रूम फ्रेशनर बना सकते हैं. यह नुस्खा घर को तुरंत ताजगी और आरामदायक माहौल देता है. आइए आपको इसे बनाने का तरीका बताते हैं.
बलिया: नन्हीं रागिनी के आंसुओं के आगे झुका प्रशासन, घर पहुंचे DM
बलिया में एक पैर से 400 मीटर कूदकर स्कूल जाने वाली 7 साल की मासूम रागिनी का वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने मदद का हाथ बढ़ाया है. बुधवार को डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने उसके घर पहुंचकर दो ट्राईसाइकिल, किताबें, खिलौने और चॉकलेट दिए.
बाघ बहुल क्षेत्र में आजीविका व आय सृजन पर चिंतन
नई दिल्ली। पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 'बाघ बहुल क्षेत्र: आजीविका और आय सृजन के स्तंभ क
SBI कस्टमर्स के लिए चेतावनी, इस दिन बंद रहेगा UPI, नहीं होगा लेनदेन
एसबीआई ने अपने ग्राहकों को जानकारी दी है कि कुछ देर के लिए यूपीआई की सर्विस बंद रहने वाली है. ऐसे में अगर आप कोई ट्रांजेक्शन करना चाहते हैं तो इसके बंद रहने से पहले ही कर लें, वरना आपको दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.
तुकाराम मुंढे को मिला FSSAI चीफ का साथ, बोले- अगर चाह है तो रास्त निकल ही जाता है
तुकाराम की कार्रवाई की तारीफ करते हुए पुन्हानी ने कहा कि एनफोर्समेंट ड्राइव बिना मैनपावर बढ़ाए की गई थी। पुन्हानी के हवाले से कहा गया कि आप जानते हैं, उन्होंने यह उसी टीम के साथ किया है।
देवर संग प्यार, प्रॉपर्टी पर नजर... पति का मर्डर करके बोली- सुसाइड किया
बुलंदशहर में पत्नी और देवर ने कथित प्रेम संबंध और संपत्ति के लालच में सुमित की गला दबाकर हत्या कर दी. इसके बाद शव को फंदे पर लटकाकर आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की. पोस्टमार्टम में गला दबाने से मौत की पुष्टि हुई तो पुलिस ने जांच शुरू की. कॉल रिकॉर्डिंग और पूछताछ के बाद पत्नी काजल और देवर उमेश गिरफ्तार हुए.
Pushkar Singh Dhami को अहमदाबाद की धनगौरी ने डाक से भेजी Rakhi, आपदा में माना था भाई
देहरादून, दो सितंबर पिछले साल आयी धराली आपदा के दौरान धर्म बहन बनीं अहमदाबाद की धनगौरी बरोलिया ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस साल डाक द्वारा राखी भेजी है। राखी के साथ बरोलिया ने मुख्यमंत्री को एक भावुक पत्र भी लिखा है जिसमें उन्होंने उत्तरकाशी जिले के धराली में पांच अगस्त को आयी आपदा के बाद उनसे हुई मुलाकात को याद किया है। बरोलिया ने कहा कि धराली में आई भीषण बाढ़ के कारण वहां फंसने वाले लोगों में वह भी शामिल थीं और जब धामी ने वहां पहुंचकर लोगों से मुलाकात की तब उस दौरान उन्हें भी उनसे मिलने का मौका मिला। उन्होंने बताया कि उस समय रक्षाबंधन करीब था और मुख्यमंत्री ने उनसे कहा था कि अगर उनके पास राखी हो तो वह उन्हें राखी बांध सकती हैं। बरोलिया ने कहा कि उस समय उनके पास राखी नहीं थी इसलिए उन्होंने अपने दुपट्टे का एक छोटा सा टुकड़ा फाड़कर उसे ही राखी मानकर मुख्यमंत्री की कलाई पर बांध दिया। उन्होंने पत्र में लिखा कि उसी दिन उन्होंने धामी को अपना धर्म भाई मान लिया था। उन्होंने लिखा कि उनके लिए वह मुलाकात आज भी बहुत खास है और उस पल को वह कभी नहीं भूल सकतीं। बरोलिया ने कहा कि धराली की उस मुश्किल घड़ी में मुख्यमंत्री ने वहां फंसे लोगों का हौसला बढ़ाया और उन्हें भरोसा दिया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह श्रीकृष्ण द्रौपदी की मदद के लिए आगे आए थे, उसी तरह मुख्यमंत्री भी उस कठिन समय में लोगों के लिए सहारा बने। बरोलिया ने कहा कि इस वर्ष वह अहमदाबाद में हैं, लेकिन रक्षाबंधन पर अपने भाई को राखी भेजना वह नहीं भूल सकतीं और इसी भाव के साथ उन्होंने मुख्यमंत्री के लिए राखी भेजी है। पत्र के अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री के स्वस्थ और दीर्घायु रहने की कामना की तथा कहा कि वह इसी तरह उत्तराखंड और प्रदेश की जनता की सेवा करते रहें।
अमेरिका की PrSM मिसाइल पर ईरान में बड़ा खुलासा!
अमेरिका की प्रिसीजन स्ट्राइक मिसाइल यानी PrSM को लेकर ईरान के लामेर्ड हमले के बाद सवाल उठ रहे हैं. एयरवॉर्स के विश्लेषण के मुताबिक तीन मिसाइल हमलों में 21 नागरिकों की मौत हुई और कुछ लोग विस्फोट वाली जगह से 50 मीटर तक दूर मारे गए. नुकसान का दायरा करीब 170 मीटर तक पाया गया. हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने लामेर्ड पर हमला करने की जिम्मेदारी से इनकार किया है.
मंदिर के मैनेजमेंट और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने के मकसद से किए गए एक बड़े प्रशासनिक बदलाव के तहत, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भारतीय वायु सेना (IAF) के पूर्व अधिकारी ग्रुप कैप्टन जितेंद्र मिश्रा (रिटायर्ड) को अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। ग्रुप कैप्टन मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हवाई अभ्यासों की कमान संभालने में अहम भूमिका निभाई थी। एक अनुभवी सैन्य प्रशासक को लाने का यह फ़ैसला ट्रस्ट के उस फोकस को दिखाता है जिसमें ऑपरेशनल अनुशासन, भीड़ प्रबंधन, बुनियादी ढांचे का विस्तार और सुरक्षा की निगरानी को बेहतर बनाना शामिल है, क्योंकि रोज़ाना लाखों श्रद्धालु इस पवित्र स्थल के दर्शन के लिए आते हैं। इसे भी पढ़ें: राहुल गांधी के खिलाफ FIR लोकतंत्र पर हमला: DK Shivakumar बोले- LoP को दलितों के लिए आवाज उठाने का हक 'ऑपरेशन सिंदूर' में अहम भूमिका निभाई रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने वेस्टर्न एयर फ़ोर्स कमांड के चीफ़ के तौर पर सेवा दी। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' में भी अहम भूमिका निभाई। वे 30 अप्रैल, 2026 को रिटायर हुए। कमांडिंग ऑफ़िसर के तौर पर, उनकी समझदारी भरी प्लानिंग और लीडरशिप की वजह से MiG-21 एयरक्राफ़्ट की सर्विसिबिलिटी बहुत अच्छी रही, जिससे पुराने फ़्लीट के बावजूद यूनिट की ऑपरेशनल तैयारी का स्तर बहुत ऊंचा रहा। चीफ टेस्ट पायलट के तौर पर, उनकी लगन और प्रोफ़ेशनलिज़्म की वजह से नए बने Su-30 MKI एयरक्राफ़्ट के स्टैंडर्ड बहुत ऊंचे रहे और कई रुकावटों के बावजूद प्रोडक्शन टारगेट समय पर पूरे हुए। डायरेक्टर (प्रोजेक्ट्स) के तौर पर, उनकी व्यक्तिगत भागीदारी, प्लानिंग और कमिटमेंट की वजह से कई प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट समय पर पूरे हुए, जिनमें Su-30 MKI ब्लॉक IV और ब्रह्मोस इंटीग्रेशन प्रोजेक्ट शामिल हैं। चीफ ऑपरेशन्स ऑफ़िसर के तौर पर, उनकी अथक कोशिशों से बेस के ऑपरेशनल माहौल में काफ़ी सुधार हुआ, साथ ही सुरक्षा और फ़्लाइंग की मात्रा में भी बढ़ोतरी हुई। यूपी के देवरिया से जुड़ाव जितेंद्र मिश्रा उत्तर प्रदेश से जुड़े हैं और मूल रूप से देवरिया ज़िले के भोपतपुरा के रहने वाले हैं, जो अयोध्या से सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे की दूरी पर है। इसके अलावा, वह एक मध्यम-वर्गीय परिवार से आते हैं और उनके पिता लेक्चरर थे। मिश्रा का उत्तर प्रदेश से जुड़ाव तब और मज़बूत हुआ जब उन्होंने अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद संभाला। 10 जून को इस अधिकारी को फ्रांस में होने वाले मल्टीनेशनल एयर एक्सरसाइज़ 'गरुड़ IV' के लिए भारतीय वायु सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करने के लिए भी चुना गया था। यह पूरी तरह से उनकी बारीक़ योजना, दूरदर्शिता और नेतृत्व का ही नतीजा था कि यह एक्सरसाइज़ बिना किसी कमी के सुचारू रूप से संपन्न हुई। असाधारण रूप से आयोजित इस मल्टीनेशनल एक्सरसाइज़ ने न केवल भाग लेने वाले देशों के बीच रक्षा सहयोग का स्तर बढ़ाया, बल्कि अन्य दो वायु सेनाओं पर भारतीय वायु सेना की व्यावसायिकता की गहरी छाप भी छोड़ी। काम और मुख्य ज़िम्मेदारियाँ मंदिर परिसर के CEO के तौर पर, ग्रुप कैप्टन मिश्रा 70 एकड़ में फैले राम जन्मभूमि परिसर के रोज़ाना के प्रशासनिक कामकाज की देखरेख करेंगे। उनकी ज़िम्मेदारी में तीर्थ स्थल की आध्यात्मिक पवित्रता को बनाए रखते हुए मैनेजमेंट के कामों को प्रोफेशनल बनाना शामिल है। इसे भी पढ़ें: Mehbooba Mufti ने प्रशासन पर साधा निशाना, NC और BJP के प्रदर्शनों पर उठाए सवाल उनके प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में मुख्य रूप से ये बातें शामिल हैं: - भीड़ पर नियंत्रण और तीर्थयात्रियों की भलाई: बड़ी संख्या में आने वाले लोगों को सुरक्षित रूप से संभालने के लिए सुचारू कतार प्रबंधन प्रणाली और प्रवेश-निकास नियमों को लागू करना। - बुनियादी ढांचे का काम पूरा करना: मंदिर परिसर के बाकी निर्माण कार्यों में तालमेल बिठाना, जिसमें सहायक मंदिर और आने वाले लोगों के लिए सुविधाएँ शामिल हैं। - सुरक्षा व्यवस्था: मज़बूत सुरक्षा घेरा बनाए रखने के लिए राज्य पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और आंतरिक सुरक्षा टीमों के साथ मिलकर काम करना। - कामकाज में दक्षता: स्टाफ़ मैनेजमेंट, साफ़-सफ़ाई अभियान, IT इंफ्रास्ट्रक्चर और तीर्थयात्री सुविधा केंद्रों के कामकाज को बेहतर और सुव्यवस्थित बनाना। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला Chief Executive Officer (CEO) नियुक्त किया गया है। ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने इसकी घोषणा की। कृष्ण मोहन के ...
चेन्नई से आगरा, 2 हजार किमी का सफर... ऐसे खुला लाल सूटकेस का खूनी राज
तमिलनाडु एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे में मिले लावारिस लाल सूटकेस का राज खुला तो 38 साल की हयात उन निशा की हत्या का मामला सामने आ गया. इस खौफनाक कत्ल की साजिश को हयात के प्रेमी और उसकी लिवइन पार्टनर ने रचा था. पढ़ें ये खौफनाक कहानी.
शनि-मंगल ने बनाया केंद्र योग, इन 4 राशियों को जल्द मिलेगी बड़ी कामयाबी
मंगल और शनि का केंद्र संबंध सामान्य तौर पर तनाव और रुकावट से जुड़ा माना जाता है. मंगल ऊर्जा और अग्नि का प्रतीक है. जबकि शनि ठहराव और अनुशासन से जुड़ा ग्रह है. फिर भी कुछ राशियों के लिए यही प्रभाव मजबूती, मेहनत और सफलता का कारण बन सकता है.
CM योगी की मथुरा को ₹1,051 करोड़ की सैगात, 229 परियोजनाओं का उद्घाटन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को मथुरा को बड़ी सौगातें दी हैं. मुख्यमंत्री ने मथुरा में 229 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया है.
सोसाइटी गेट से टकराया बेकाबू ट्रक, CCTV में कैद हुआ हादसे का खौफनाक मंजर
ग्रेटर नोएडा वेस्ट की आम्रपाली गोल्फ होम्स सोसाइटी में अनियंत्रित ट्रक ने गेट पर बने लकड़ी के तंबू को जोरदार टक्कर मार दी. हादसे में तीन सुरक्षा गार्ड और एक डिलीवरी युवक गंभीर रूप से घायल हो गए. घटना का खौफनाक CCTV फुटेज सामने आया है, जिसमें ट्रक तेज रफ्तार से गेट की तरफ आता दिखाई दे रहा है. पुलिस ने चालक को गिरफ्तार कर लिया है.
‘राहुल गांधी खुद विजय का हाथ पकड़कर उन्हें PM बनाएंगे’! किसने किया इतना बड़ा दावा?
इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि राहुल गांधी खुद विजय का हाथ पकड़कर उन्हें पीएम की कुर्सी पर बैठाएंगे। कनिमोझी के इस बयान के बाद तमिलनाडु के सत्तारूढ़ गठबंधन में खींचतान चरम पर पहुंच गई है।
Bihar में शुरू हुआ 'आपके दरवाजे पर दवा' अभियान, 6 करोड़ लोगों की होगी Health Screening
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 2 सितंबर को जांच और इलाज – आपके दरवाजे पर दवा अभियान की शुरुआत की। इस अभियान का मकसद लगभग छह करोड़ लोगों की जांच करना और हर नागरिक का डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड बनाना है। यह अभियान 30 नवंबर तक चलेगा और इसका उद्घाटन पटना के राजवंशी नगर स्थित एनर्जी ऑडिटोरियम में किया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, इस अभियान के तहत सभी 38 जिलों में जागरूकता रथ भेजे गए। इसे भी पढ़ें: राहुल गांधी के खिलाफ FIR लोकतंत्र पर हमला: DK Shivakumar बोले- LoP को दलितों के लिए आवाज उठाने का हक मुख्यमंत्री चौधरी ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस अभियान पर बारीकी से नज़र रखें और इसे सफलतापूर्वक लागू करना सुनिश्चित करें। उन्होंने समय पर जांच के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि समय पर जांच से बीमारी का पता लगाना और बेहतर इलाज संभव हो पाता है; स्वस्थ परिवार ही समृद्ध बिहार की नींव हैं। CMO ने बताया कि ज़िला अस्पतालों में 45 तरह की सर्जरी शुरू हो गई हैं, जिससे ज़िला अस्पतालों से बड़े अस्पतालों में मरीज़ों को रेफर करने की संख्या में कमी आई है। सर्जरी की संख्या में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है; जून में यह संख्या 2,428 थी, जो इस महीने बढ़कर 8,000 से ज़्यादा हो गई है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने मिशन कायाकल्प शुरू करने की घोषणा की। यह प्रोग्राम राज्य भर में स्वास्थ्य संस्थानों को बेहतर और मज़बूत बनाने के लिए बनाया गया है। इस अभियान का मकसद लोगों के घर के पास स्वास्थ्य जांच और इलाज की सुविधाएँ पहुँचाना और बिहार की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मज़बूत करना है। 1 सितंबर को चौधरी ने घोषणा की कि मोतिहारी में बंद पड़ी चीनी मिल को फिर से शुरू करने का काम जल्द ही शुरू होगा, साथ ही पूर्वी चंपारण ज़िले के लिए कई विकास परियोजनाएँ भी शुरू की जाएँगी। मोतिहारी में बापूधाम महोत्सव के दौरान, उन्होंने ज़िले के लिए 285 करोड़ रुपये की लागत वाली 145 विकास योजनाओं का शिलान्यास या उद्घाटन किया। इसे भी पढ़ें: Mehbooba Mufti ने प्रशासन पर साधा निशाना, NC और BJP के प्रदर्शनों पर उठाए सवाल CMO के अनुसार, योजनाओं में बरियारपुर में एक मेडिकल कॉलेज बनाना और मोतिहारी में एक तारामंडल (प्लेनेटेरियम) का काम शुरू करना शामिल है। इसके अलावा, लोगों की मांग को देखते हुए, पिपराकोठी के लिए पहले प्रस्तावित केंद्रीय विद्यालय को अब बरियारपुर में स्थापित किया जाएगा। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने जितेंद्र मिश्र
अयोध्या में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले सीईओ के नाम का ऐलान हो गया है. रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है. उन्होंने भारतीय वायुसेना में 39 साल से ज्यादा सेवा की और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व किया. इसके साथ ही ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को शामिल किया गया है. सीईओ के पास प्रशासनिक, वित्तीय और वैधानिक जिम्मेदारियां रहेंगी.
'नासमझ को इतिहास सिखाते हैं', स्वरा भास्कर पर कंगना ने साधा निशाना!
स्वरा भास्कर से इस समय विवादों में घिरी हुई हैं. 'पद्मावत' फिल्म के जौहर सीन पर उनके बयान पर बवाल मचा हुआ है. सोशल मीडिया पर स्वरा को जमकर ट्रोल किया जा रहा है. अब कंगना रनौत ने भी अलग अंदाज में स्वरा पर निशाना साधा है.
पूर्व आर्थिक सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने सरकार की जीडीपी गणना को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका दावा है कि अर्थव्यवस्था की विकास दर को ज्यादा चमकदार दिखाने के लिए पिछले साल के आंकड़ों में बदलाव किया गया और महंगाई तथा मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े कुछ आंकड़ों को लेकर भी तस्वीर पूरी तरह साफ […] यह लेख India GDP DEBATE: जीडीपी की तेज रफ्तार या आंकड़ों का खेल? जानिए सच सर्वप्रथम tfipost.in पर प्रकाशित हुआ है
मनन कुमार मिश्रा की पावर हुई कम, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- लोकतांत्रिक रूप से नहीं चुने गए थे
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को 'प्रो-टेम चेयरमैन' घोषित किया है।
Jharkhand के Godda में Form 7 जमा करने पर विवाद, जांच के आदेश
रांची, दो सितंबर झारखंड के गोड्डा जिले में कई मतदान केंद्र पर एक राजनीतिक दल के कुछ बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए-2) द्वारा कुछ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए फॉर्म-7 जमा किए जाने के बाद मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। एक निर्वाचन अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। इन बीएलए ने संबंधित बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को फॉर्म जमा किए, लेकिन जब एजेंट ने प्राप्ति संबंधी दस्तावेज पर बीएलओ के हस्ताक्षर मांगे तो दोनों पक्षों में विवाद हो गया। बीएलओ ने हस्ताक्षर करने से इनकार करते हुए कहा कि फॉर्म में जिन मतदाताओं के नाम दिए गए हैं, वे लंबे समय से संबंधित स्थानों पर रह रहे हैं और उनमें से अधिकतर के नाम 2003 की मतदाता सूची में भी दर्ज हैं। बीएलओ ने फॉर्म भी कथित तौर पर वापस कर दिए। महेशटिकरी के बूथ संख्या नौ पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीएलए संजीव कुमार ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी के निर्देश पर फॉर्म जमा किए थे। कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘पार्टी ने मुझे ऐसे 25 फॉर्म दिए थे। पार्टी के निर्देश के अनुसार मैं सभी कॉलम पहले से भरे हुए फॉर्म लेकर बीएलओ के पास गया, लेकिन उन्होंने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।’’बूथ संख्या नौ की बीएलओ अनीसा बानो ने कहा कि कुमार ने ‘पते पर मौजूद नहीं मिले’ और ‘स्थानांतरित’ श्रेणी के तहत नाम हटाने के अनुरोध वाले प्रिंटेड फॉर्म-7 आवेदन दिए थे। बानो ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘कुमार प्रिंटेड फॉर्म-7 लेकर आए थे, जिनमें कुछ नाम ‘पते पर मौजूद नहीं मिले’ और ‘स्थानांतरित’ श्रेणी में दर्ज थे। मुझे इस पर संदेह हुआ क्योंकि फॉर्म की सभी जानकारियां प्रिंटेड थीं। इसके अलावा, फॉर्म में जिन लोगों के नाम थे, वे लंबे समय से वहीं रह रहे हैं। मैंने फॉर्म उन्हें वापस कर दिए।’’फॉर्म-7 का इस्तेमाल मौजूदा मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है। घटना के एक दिन बाद ग्रामीण कुमार के घर पर एकत्र हुए और उन्हें कथित तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। कुमार ने कहा, ‘‘मुझे धमकियां मिल रही हैं। इसमें मेरी कोई भूमिका नहीं है। मैंने सिर्फ पार्टी के निर्देश का पालन किया। पार्टी ने मुझे जो भी फॉर्म दिए थे, वे सभी मैंने ग्रामीणों को दे दिए।’’ कुमार ने स्वयं को भाजपा का बसंतराय प्रखंड अध्यक्ष होने का दावा किया। इसी तरह, पचुआ कित्ता के बूथ संख्या 48 के बीएलओ मोहम्मद मुखेर ने कहा कि एक राजनीतिक दल के बीएलए-2 ने उनके पास करीब 15 फॉर्म-7 आवेदन लाकर प्राप्ति दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर मांगे। मुखेर ने दावा किया, ‘‘एक राजनीतिक दल का बीएलए-2 करीब 15 फॉर्म-7 के कागज लेकर मेरे पास आया और उसने मेरे हस्ताक्षर मांगे। मैंने उससे पूछा कि क्या उसे इस फॉर्म के महत्व की जानकारी है। बीएलए ने कहा कि उसे ये फॉर्म पार्टी से मिले हैं और उसे इनके बारे में कोई जानकारी नहीं है।’’उन्होंने कहा कि फॉर्म जमा करने के परिणाम समझाने के बाद उन्होंने उन्हें फाड़ दिया। मुखेर ने कहा, ‘‘मैंने उसे बताया कि फॉर्म जमा करने के बाद मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया में वह गवाह होगा। बीएलए ने कहा कि उसके पास ऐसे 70 फॉर्म हैं और वह उन्हें नष्ट करने वाला है।’’वात्रा पंचायत के मुखिया ने दावा किया कि भाजपा के बीएलए ने महेशटिकरी, पचुआ कित्ता, लोचनी और बाघाकोल—इन चार बूथ पर ऐसे फॉर्म वितरित किए थे। बसंतराय प्रखंड विकास अधिकारी और निर्वाचक निबंधन अधिकारी श्रीमन मरांडी ने कहा कि उन्होंने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। मरांडी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘कोई भी आपत्ति दर्ज करा सकता है। मैंने बीएलओ को निर्देश दिया है कि इन फॉर्म को आपत्ति के रूप में स्वीकार करें। किसी भी स्थिति में वास्तविक मतदाताओं के नाम नहीं हटाए जा सकते।’’उन्होंने कहा कि बूथ संख्या नौ के मामले में प्रारंभिक जांच के दौरान फॉर्म में नामित 25 में से 24 मतदाता लंबे समय से क्षेत्र में रहते पाए गए। मरांडी ने कहा, ‘‘एक मतदाता पिछले दो महीने से गांव से बाहर है क्योंकि वह प्रवासी मजदूर है। हमें अंतिम जांच रिपोर्ट एक-दो दिन में मिलने की उम्मीद है।’’झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के. रवि कुमार ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) से रिपोर्ट मांगी है। कुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘बीएलए बड़ी संख्या में फॉर्म जमा कर सकते हैं और बीएलओ उन्हें स्वीकार करने से इनकार नहीं कर सकते। हालांकि, बीएलए को यह घोषणा देनी होती है कि फॉर्म में दी गई जानकारी सही है। हमें यह जांचना होगा कि बीएलए ने घोषणा दी थी या नहीं।’’निर्वाचन आयोग ने झारखंड में 43.61 लाख से अधिक नाम हटाने के बाद बुधवार को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की गणना प्रक्रिया शुरू होने से पहले राज्य में 2.64 करोड़ मतदाता थे। गणना प्रक्रिया के बाद जारी मसौदा मतदाता सूची में 2.21 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 1.12 करोड़ पुरुष, 1.08 करोड़ महिलाएं और 260 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं। गणना प्रक्रिया 30 जून से 29 जुलाई के बीच कराई गई थी। इस दौरान बीएलओ ने घर-घर जाकर गणना फॉर्म वितरित किए, उन्हें एकत्र किया था और उनका सत्यापन किया था। एक अधिकारी ने बताया कि आयोग ने राज्य में मतदाता सूची के एसआईआर के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाकर 15 सितंबर कर दी है, जबकि संशोधित मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तारीख बढ़ाकर 19 अक्टूबर कर दी गई है। इससे पहले दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि पांच अगस्त से चार सितंबर तक थी और अंतिम मतदाता सूची सात अक्टूबर को प्रकाशित की जानी थी।
'PM मोदी पाकिस्तान को दुनिया के नक्शे से हटा सकते हैं', एडिटेड फोटो से नाराज एकनाथ शिंदे का बयान
किर्गिस्तान में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन की एक तस्वीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हटा दिया गया था। इसे लेकर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने नाराजगी जाहिर की है। जानें शिंदे ने क्या कहा?
iPhone 18 Pro को लेकर बड़ा लीक, 3 नए कलर में आ सकता है फोन; Black की हो सकती है वापसी
Apple के अपकमिंग फ्लैगशिप स्मार्टफोन iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लेकर एक नया लीक सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी इस बार Pro मॉडल को तीन नए कलर ऑप्शन में पेश कर सकती है। इनमें Dark Cherry/Burgundy, Sky Blue और Black शामिल बताए जा ...
ईरान में शादी समारोह पर हमले में 5 की मौत, देखें दुनिया आजतक
ईरान में अमेरिकी हमले के बाद एक शादी का जश्न मातम में बदल गया... दक्षिणी ईरान के सिरिक इलाके में एक शादी समारोह के पास कथित अमेरिकी स्ट्राइक की खबर है...ईरानी अधिकारियों और सरकारी मीडिया के मुताबिक, हमले में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई.... मृतकों में 4 साल का एक बच्चा भी शामिल है.... वहीं, 50 से अधिक लोग जख्मी बताए जा रहे हैं.
'पीएम मोदी की तस्वीर सेंसर करना घमंड की हद', SCO ग्रुप फोटो एडिट करने पर पाक की थू-थू
किर्गिस्तान के बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन की ग्रुप फोटो से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पाकिस्तान PMO द्वारा हटाने पर भारत में तीखी प्रतिक्रिया हुई है।
Supreme Court का निर्देश: BCI के नीतिगत फैसले Attorney General की सलाह से ही होंगे
नयी दिल्ली, दो सितंबर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा का पद केवल अस्थायी (प्रो टेम) है, जब तक कि वकीलों की नवगठित संस्था अपने पदाधिकारियों का चुनाव नहीं कर लेती। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि बीसीआई को कोई भी नीतिगत फैसला भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल के परामर्श से लेना होगा। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने कहा कि वह किसी भी आरोप से प्रभावित नहीं होगी और उसका सरोकार किसी व्यक्ति के आचरण से नहीं, बल्कि बीसीआई के संस्थागत कामकाज से है। अदालत ने कहा कि मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्वाचित बीसीआई के गठन तक संस्था की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे। शीर्ष अदालत बीसीआई अध्यक्ष के रूप में मिश्रा के लंबे कार्यकाल की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाओं में उन्हें पद से हटाने और अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष का कार्यकाल 2030 तक बढ़ाने वाली अधिसूचनाओं की वैधता को भी चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति बागची ने कहा, ‘‘हम मौजूदा व्यवस्था पर अपनी मंजूरी की मुहर नहीं लगा रहे हैं। यह स्पष्ट है कि वर्तमान अध्यक्ष केवल तब तक पद पर बने रह सकते हैं, जब तक पहले ही कराए जा चुके राज्य बार काउंसिल के चुनावों के आधार पर बीसीआई का नया चुनाव नहीं हो जाता।’’याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने उस अधिसूचना का हवाला दिया, जिसमें मिश्रा को पांच वर्ष का कार्यकाल दिया गया था। उन्होंने अदालत को बताया कि मिश्रा को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया था और उनका कार्यकाल 17 अप्रैल 2025 से शुरू होकर 16 अप्रैल 2030 तक रहेगा। दीवान ने एक प्रस्ताव पढ़कर सुनाया, जिसमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया गया था, जबकि नियमों में केवल दो वर्ष के कार्यकाल का प्रावधान था। उन्होंने अधिवक्ता अधिनियम की धारा 4(3) के प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रावधान का उद्देश्य प्रशासनिक शून्यता को रोकना है, लेकिन इसका इस्तेमाल चुनावों से बचने और मौजूदा पदाधिकारियों को लगातार पद पर बनाए रखने के लिए किया गया है। याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने 2020 में गठित ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया ट्रस्ट फॉर प्रमोशन ऑफ एजुकेशन’, ‘लीगल एंड प्रोफेशनल रिफॉर्म्स एंड इम्प्रूवमेंट इन रिसर्च’ का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के विलेख (डीड) में 11 प्रबंध न्यासियों को बीसीआई के सदस्य के रूप में उनके कार्यकाल की परवाह किए बिना “स्थायी न्यासी” बनाया गया है। योगमाया एमजी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सी. यू. सिंह ने कहा कि बार के व्यापक परामर्श के बिना ही अध्यक्ष के कार्यालय से प्रस्ताव जारी किए जा रहे थे। बीसीआई अध्यक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गुरु कृष्णकुमार ने अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से परामर्श किए जाने के सुझाव पर सहमति जताते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं को “व्यापक आरोप और परोक्ष आरोप लगाने के लिए अदालत के मंच का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।’’सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि नवगठित राज्य बार काउंसिल अपने सह-सदस्य नामित करने की प्रक्रिया पूरी करेंगी और बीसीआई के लिए नए प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगी। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 23 सितंबर तय की। इससे पहले, बीसीआई के अध्यक्ष के रूप में मिश्रा के लंबे कार्यकाल की वैधता को चुनौती देते हुए और उन्हें पद से हटाने की मांग करते हुए एक याचिका दायर की गई थी।
बिहार में गंडक नदी का तांडव, खुद अपना घर तोड़ रहे लोग!
बिहार के बेतिया में गंडक नदी का कटाव अब आबादी वाले इलाकों के लिए बड़ा खतरा बन गया है. योगापट्टी की सिसवा मंगलपुर पंचायत में नदी तेजी से जमीन काट रही है. खतरा बढ़ता देख कई ग्रामीण अपने पक्के मकान खुद तोड़कर ईंट, लकड़ी और जरूरी सामान सुरक्षित जगह पहुंचा रहे हैं. वर्षों की मेहनत से बनाए घरों को टूटता देख परिवारों में दहशत और विस्थापन की चिंता बढ़ गई है.
'अमेरिका मत आना', आखिर क्यों इस शख्स ने छात्रों से की अपील
अमेरिका मत आना... ये हम नहीं बल्कि एजुकेशन के वीडियो बनाने वाले एक्सपर्ट अनुष्क शर्मा कह रहे हैं. उन्होंने भारतीय छात्र से अपील की है कि वह कहीं और चले जाए पढ़ने के लिए लेकिन अमेरिका न आए. अब सवाल ये है कि आखिर उन्होंने क्यों ऐसी बातें छात्रों से क्यों कही है?
पंड्या के सामने BCCI ने रखी शर्त? बताया वापसी का रास्ता
वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट से पहले बीसीसीआई खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर सख्त कदम उठाने जा रही है. भारत को आने वाले समय में कई अहम मुकाबले खेलने हैं, लिहाजा खिलाड़ियों का फिट रहना बेहद जरूरी है.
आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य की सत्ता से बेदखल होने के बाद मुख्य विपक्षी दल वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) अब अपनी खोई हुई जमीन को वापस पाने और साल 2029 के आम तथा विधानसभा चुनावों में धमाकेदार वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। पार्टी के भीतर संगठन को मजबूत करने और चुनावी मशीनरी को नए सिरे से धार देने के लिए रणनीतिक स्तर पर बड़े बदलावों की तैयारी चल रही है। इस बीच सबसे बड़ा और सनसनीखेज राजनीतिक घटनाक्रम यह सामने आया है कि वाईएसआरसीपी के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी आगामी चुनावों के लिए एक नए और बेहद तेज-तर्रार राजनीतिक रणनीतिकार की तलाश में हैं। इस सिलसिले में सबसे आगे जो नाम चल रहा है, वह किसी और का नहीं बल्कि देश के जाने-माने राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के पूर्व करीबी सहयोगी और दिग्गज रणनीतिकार कपिल साहू का है। पार्टी के भीतर चल रही सुगबुगाहट के मुताबिक, जगनमोहन रेड्डी 2029 की चुनावी वैतरणी पार करने के लिए कपिल साहू को पार्टी की मुख्य कैंपेन स्ट्रैटेजी और प्रचार-प्रसार की कमान सौंप सकते हैं।हाल ही में राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा बहुत तेज हो गई है कि कपिल साहू ने तमिलनाडु के लोकप्रिय तमिल अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय और उनकी नवगठित पार्टी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) के लिए जिस प्रकार की शानदार और आक्रामक प्रचार रणनीति तैयार की थी, उसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। साहू की कुशल रणनीति और डिजिटल आउटरीच के दम पर ही हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों में विजय को अपनी पार्टी को मजबूत करने और तमिलनाडु की राजनीति में एक नया विकल्प के रूप में उभरने में भारी मदद मिली। इसी सफलता ने देश के अन्य दिग्गज नेताओं का भी ध्यान कपिल साहू की ओर आकर्षित किया है। वाईएसआरसीपी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर मीडिया को यह जानकारी दी है कि वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने कुछ हफ्ते पहले ही आंध्र प्रदेश में अगले चुनावों का ताना-बाना बुनने और पार्टी की चुनावी रणनीति तैयार करने के लिए कपिल साहू के साथ शुरुआती दौर की महत्वपूर्ण बातचीत की है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है, लेकिन जगनमोहन रेड्डी द्वारा साहू के शुरुआती प्रेजेंटेशन और उनके विजन की काफी सराहना की जा रही है।कौन हैं कपिल साहू और क्या रहा है उनका राजनीतिक सफर?कपिल साहू का नाम मौजूदा समय में भारतीय चुनावी रणनीतिकारों की सूची में काफी तेजी से ऊपर आया है। साहू ने साल 2024 तक देश की प्रतिष्ठित राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म 'इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी' यानी I-PAC के साथ लंबे समय तक काम किया था। प्रशांत किशोर के नेतृत्व में उन्होंने कई बड़े राज्यों के चुनावों में अपनी तकनीकी और प्रबंधकीय क्षमता का लोहा मनवाया था। हालांकि, बाद में वे I-PAC से अलग हो गए और अपने 12 चुनिंदा सहयोगियों की एक मजबूत टीम के साथ इस कंपनी का दामन छोड़ दिया। I-PAC से अलग होने के बाद उन्होंने अपनी खुद की स्वतंत्र पॉलिटिकल कंसल्टिंग टीम खड़ी की, जिसके जरिए उन्होंने दिल्ली और सिक्किम समेत देश के कई अन्य राजनीतिक संगठनों और नेताओं के साथ काम किया। राजनीतिक रणनीतिकारों के बीच उनकी पहचान एक ऐसे विशेषज्ञ के रूप में है जो डिजिटल आउटरीच, डेटा एनालिटिक्स, मजबूत कैंपेन मैसेजिंग और पब्लिक एंगेजमेंट अभियानों को बेहद पेशेवर तरीके से संचालित करने में माहिर हैं।तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके के साथ कपिल साहू के सफल जुड़ाव ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया है। साहू की कोर टीम ने जिस प्रकार से सोशल मीडिया कैंपेन, जनता के बीच सीधा संवाद और विभिन्न वर्गों के मतदाताओं के बीच विजय की अपील को बढ़ाने के लिए काम किया, उसकी सफलता ने दक्षिण भारत की राजनीति में एक नया संदेश दिया है। यही कारण है कि आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम जगनमोहन रेड्डी जैसे बड़े नेता भी अब उनकी कार्यशैली और चुनावी समझ से काफी प्रभावित नजर आ रहे हैं। जगनमोहन रेड्डी ने अभी तक हालांकि अपने मन की बात पूरी तरह से जाहिर नहीं की है और न ही किसी एक रणनीतिक नाम को अंतिम रूप से फाइनल किया है, लेकिन उन्होंने साहू के साथ हुई अपनी बैठकों में जिस तरह की गहरी दिलचस्पी दिखाई है, उससे यह साफ अंदाजा लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में वे वाईएसआरसीपी के मुख्य रणनीतिकार के तौर पर अपनी भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं।जगनमोहन रेड्डी और I-PAC का पुराना और दिलचस्प चुनावी इतिहासवाईएस जगनमोहन रेड्डी और राजनीतिक रणनीतिकार फर्म I-PAC का इतिहास काफी पुराना और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। जगन ने अपनी राजनीतिक यात्रा के दौरान अब तक I-PAC के साथ दो अलग-अलग नेतृत्व के दौर में दो बड़े चुनावी प्रयोग किए हैं, जिनके परिणाम भी बिल्कुल अलग-अलग रहे हैं। सबसे पहले बात करें साल 2019 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनावों की, तो उस दौरान प्रशांत किशोर खुद सीधे तौर पर मैदान में उतरे थे और उन्होंने जगनमोहन रेड्डी की पूरी चुनावी नैया को अपने कंधों पर संभाला था। प्रशांत किशोर की इनोवेटिव कैंपेन स्ट्रैटेजी, जमीन से जुड़े मुद्दों की सटीक पहचान और जगनमोहन रेड्डी की बहुचर्चित 'पदयात्रा' के डिजाइन ने आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा भूचाल लाया कि वाईएसआरसीपी ने राज्य की कुल 175 विधानसभा सीटों में से रिकॉर्ड 151 सीटों पर ऐतिहासिक और प्रचंड जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में प्रशांत किशोर और उनकी टीम की रणनीति ने जगन को राज्य की सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर बैठा दिया था।हालांकि, समय के साथ परिस्थितियां बदलीं। जब प्रशांत किशोर I-PAC के सक्रिय प्रबंधन से अलग हो गए, तब इस कंपनी की कमान ऋषिराज सिंह और उनकी टीम के हाथों में आ गई। साल 2024 के विधानसभा चुनावों के दौरान भी जगनमोहन रेड्डी ने I-PAC के साथ अपना सहयोग जारी रखा और ऋषिराज सिंह की टीम पर भरोसा जताया। इस बार सिंह और उनकी टीम ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे, विशेष रूप से गांवों और वार्डों में बनाए गए सचिवालय सिस्टम के कामकाज की देखरेख और जमीनी क्रियान्वयन में अपनी मुख्य भूमिका निभाई। लेकिन इस चुनाव में समीकरण पूरी तरह उल्टे पड़ गए। पार्टी के भीतर और वरिष्ठ नेताओं के स्तर पर यह गंभीर आरोप लगाए जाने लगे कि ऋषिराज सिंह और उनकी टीम ने पार्टी संगठन के आंतरिक कामकाज पर लगभग पूरा नियंत्रण या कब्जा सा कर लिया है। यहाँ तक कि पार्टी के उम्मीदवारों के चयन में भी इस कंसल्टेंसी टीम का अत्यधिक दखल होने की बात सामने आई, जिससे पार्टी के जमीनी नेताओं में गहरी नाराजगी फैल गई। नतीजतन, वाईएसआरसीपी साल 2024 के चुनावों में भारी हार का सामना करना पड़ा और पार्टी सत्ता से बाहर हो गई।2029 की बड़ी लड़ाई के लिए YSRCP को मजबूत करने की कवायदसाल 2024 की करारी हार के बाद से ही वाईएसआरसीपी सुप्रीमो जगनमोहन रेड्डी फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। वे अपनी पुरानी चूकों और रणनीतिक कमियों को बहुत ही बारीकी से परख रहे हैं। पार्टी के भीतर कपिल साहू को शामिल करने की संभावनाओं पर विचार किए जाने को साल 2029 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की संपूर्ण चुनावी मशीनरी को नए सिरे से पुनर्जीवित करने और एक लंबी अवधि की अचूक राजनीतिक रणनीति तैयार करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और गंभीर कदम माना जा रहा है। पार्टी के विश्लेषकों का मानना है कि यदि जगनमोहन रेड्डी कपिल साहू जैसे पेशेवर और स्वतंत्र सोच वाले रणनीतिकार को अपने पाले में लाने में सफल हो जाते हैं, तो इससे पार्टी को बूथ स्तर से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक एक नई धार मिलेगी।राजनीतिक जानकारों का यह भी कहना है कि I-PAC के पुराने अनुभवों से सबक लेते हुए जगन इस बार किसी एक पारंपरिक कंसल्टेंसी पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय एक ऐसी स्वतंत्र रणनीति चाहते हैं जो सीधे जनता की नब्ज को पकड़ सके। कपिल साहू की कार्यशैली और उनकी युवा टीम का अनुभव इस कसौटी पर पार्टी के लिए काफी मुफीद साबित हो सकता है। साहू की विशेषज्ञता विशेष रूप से डिजिटल कैंपेनिंग, नैरेटिव सेटिंग और आक्रामक राजनीतिक विपक्षी घेराबंदी में मानी जाती है, जिसकी जरूरत इस समय वाईएसआरसीपी को टीडीपी (TDP) सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने के लिए सबसे ज्यादा है। कुल मिलाकर देखा जाए तो आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से चुनावी रणनीतिकारों का खेल शुरू हो चुका है और आने वाले दिनों में कपिल साहू की भूमिका को लेकर कोई बहुत बड़ा आधिकारिक राजनीतिक ऐलान देखने को मिल सकता है, जो 2029 के सियासी रण की दिशा तय करेगा।
भारत एक तरफ ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत अपनी स्वदेशी रक्षा क्षमता को तेज रफ्तार से खड़ा कर रहा है, दूसरी तरफ रूस से अतिरिक्त S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने जा रहा है। यहां तक कि अत्याधुनिक S-500 Prometheus की खरीद पर विचार करने की संभावनाएं भी खुली हैं। इसलिए सवाल सीधा है कि जब भारत अपना Project Kusha विकसित कर रहा है, तो आखिर हमें और रूसी एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत क्यों पड़ रही है? इस सवाल का जवाब भारत की सुरक्षा जरूरतों, चीन-पाकिस्तान के दोहरे खतरे और आने वाले वर्षों की सामरिक तस्वीर में छिपा है। हम आपको यह भी बता दें कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले मॉस्को ने अपने रक्षा प्रस्तावों को भारत के समक्ष पेश करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। S-500 Prometheus, Su-57 Felon स्टील्थ फाइटर, अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन, Voronezh रणनीतिक अर्ली-वॉर्निंग रडार, Su-30MKI अपग्रेड और Kilo-क्लास पनडुब्बियों के आधुनिकीकरण जैसे प्रस्ताव इस बात का संकेत हैं कि रूस भारत के साथ अपने दशकों पुराने रक्षा संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाना चाहता है। इसे भी पढ़ें: BRICS 2026: क्या विस्तार के बाद Global Economy की दिशा बदल पाएगा भारत? 11 देशों के Leaders पर टिकी नजरें देखा जाये तो भारत के लिए S-400 केवल एक आयातित हथियार प्रणाली नहीं रह गया है। यह देश की बहुस्तरीय एयर डिफेंस संरचना का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान से आने वाले हवाई खतरों के खिलाफ S-400 की व्यापक तैनाती ने इसकी उपयोगिता को और मजबूत किया था। एक S-400 ने बेहद लंबी दूरी पर पाकिस्तानी एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल विमान को भी निशाना बनाया था, जिसने भारतीय सैन्य प्रतिष्ठान में इस सिस्टम की प्रतिष्ठा बढ़ा दी। यही कारण है कि रूस अब भारत को पांच अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन देने की नई पेशकश कर रहा है। यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो भारत के पास पहले से अनुबंधित S-400 क्षमता लगभग दोगुनी हो सकती है। लेकिन यहीं सबसे बड़ा विरोधाभास सामने आता है। भारत उसी समय DRDO के नेतृत्व में Project Kusha विकसित कर रहा है, जिसे भविष्य में S-400 श्रेणी की स्वदेशी लंबी दूरी की एयर डिफेंस क्षमता के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत अपनी ही तकनीक पर भरोसा नहीं करता? लेकिन यहां इस सवाल से ज्यादा यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि भारत भविष्य की आत्मनिर्भरता का इंतजार करते हुए वर्तमान की सुरक्षा को कमजोर नहीं कर सकता। इसमें कोई दो राय नहीं कि Project Kusha भारत के लिए सिर्फ एक नया मिसाइल प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि रणनीतिक आत्मनिर्भरता का बड़ा दांव भी है। इस प्रस्तावित प्रणाली में M1, M2 और M3 जैसे अलग-अलग इंटरसेप्टर शामिल हैं, जिनकी अनुमानित मारक क्षमता लगभग 150, 250 और 350 से 400 किलोमीटर तक हो सकती है। इसका उद्देश्य लड़ाकू विमान, ड्रोन और आने वाली मिसाइलों जैसे हवाई खतरों को नष्ट करना है। इसके इंटरसेप्टर उन्नत Gallium Nitride आधारित AESA सीकर, इनर्शियल नेविगेशन और मिड-कोर्स अपडेट जैसी तकनीकों से लैस बताए गए हैं। यहां तकनीकी रूप से यह सवाल भी उठता है कि क्या S-400 या Project Kusha की मिसाइलों को जरूरत पड़ने पर जमीन पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है? इस सवाल का सैद्धांतिक जवाब है, हां लेकिन ऐसा करना समझदारी नहीं होगी। दरअसल, यूक्रेन युद्ध में रूस ने कुछ परिस्थितियों में S-400 के 48N6 मिसाइल श्रेणी से जुड़े इंटरसेप्टरों को जमीन पर स्थित लक्ष्यों के खिलाफ इस्तेमाल किया। देखा जाये तो सिद्धांत रूप से यदि मिसाइल को किसी स्थिर भू-निर्देशांक की ओर भेजा जाए, तो उसकी गाइडेंस प्रणाली उसे उस दिशा में बैलिस्टिक मार्ग पर ले जा सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि S-400 अचानक एक प्रभावी सतह से सतह पर मार करने वाला हथियार बन गया। S-400 इंटरसेप्टर का वारहेड मुख्य रूप से हवा में उड़ते विमानों और मिसाइलों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका ब्लास्ट-फ्रैगमेंटेशन प्रभाव विमान जैसे अपेक्षाकृत नाजुक लक्ष्यों के लिए उपयोगी है, लेकिन मजबूत बंकरों या कठोर जमीनी संरचनाओं को नष्ट करने के लिए यह समर्पित प्रहारक वारहेड जैसा प्रभावी नहीं है। दूसरे शब्दों में, जमीन पर इस्तेमाल होने पर ऐसा इंटरसेप्टर एक बेहद महंगा और सीमित प्रभाव वाला रॉकेट बन सकता है। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, रूस द्वारा ऐसा उपयोग समर्पित सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों के दबाव या कमी जैसी युद्धकालीन परिस्थितियों का परिणाम हो सकता है, न कि किसी आदर्श सैन्य रणनीति का मॉडल। और यही भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण सबक है कि एयर डिफेंस मिसाइल को जमीन पर खर्च करना, आसमान की सुरक्षा कमजोर करना है। हम आपको बता दें कि भारत के पास पहले से BrahMos, Pralay, Shaurya और Nirbhay जैसे समर्पित सतह से सतह पर प्रहार करने वाले हथियार मौजूद हैं। इन्हें शुरुआत से ही जमीनी लक्ष्यों के खिलाफ सटीक हमला करने के लिए विकसित किया गया है। इनके पास उपयुक्त वारहेड, विशेष गाइडेंस तकनीक और मिशन के अनुरूप उड़ान प्रोफाइल हैं। इसलिए भारत की सैन्य रणनीति स्पष्ट है कि आसमान की लड़ाई एयर डिफेंस लड़ेगा और जमीन पर प्रहार समर्पित स्ट्राइक मिसाइलें करेंगी। उधर, रूस की ओर से जो पेशकश की जा रही हैं उनमें सबसे बड़ा और जटिल हिस्सा S-500 Prometheus है। रूस इसे S-400 के बाद अगली पीढ़ी की लंबी दूरी की एयर और एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रणाली के रूप में पेश कर रहा है। लेकिन भारत के लिए फैसला आसान नहीं होगा। देश पहले से अपना बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम विकसित कर रहा है और Project Kusha भी आगे बढ़ रहा है। इसलिए सवाल केवल यह नहीं होगा कि S-500 कितना शक्तिशाली है। असली सवाल होगा कि क्या यह ऐसी क्षमता देता है जो भारत के पास नहीं है, या फिर यह स्वदेशी कार्यक्रमों के साथ अनावश्यक ओवरलैप पैदा करेगा? देखा जाये तो भारत को तत्काल क्षमता और दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता के बीच बेहद सावधानी से संतुलन बनाना होगा। इसके अलावा, रूस का दूसरा बड़ा प्रस्ताव Su-57 Felon पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर है। भारतीय वायुसेना के सामने लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी और स्वदेशी AMCA के आने में समय लगने की चुनौती है। रूस ने Su-57 के साथ तकनीक हस्तांतरण, स्थानीयकरण और भारत में उत्पादन की संभावना का संकेत दिया है। इसे AMCA आने तक एक संभावित ‘स्टॉपगैप’ के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन मुश्किलें भी कम नहीं हैं। भारतीय वायुसेना के पास पहले ही Su-30MKI, MiG-29, Rafale, Mirage 2000, Jaguar और Tejas जैसे विभिन्न प्लेटफॉर्म हैं। Su-57 आने पर प्रशिक्षण, रखरखाव, हथियार, स्पेयर पार्ट्स और लॉजिस्टिक्स का एक नया तंत्र जोड़ना होगा। फिर भी खतरा वास्तविक है। चीन के पास बड़ी संख्या में J-20 स्टील्थ फाइटर होने की बात कही जा रही है, जबकि पाकिस्तान को भी आने वाले समय में चीनी J-35 मिलने की संभावना है। ऐसे में भारत के सामने सवाल खड़ा है कि AMCA का इंतजार करे या स्टील्थ क्षमता में पैदा हो रहे अंतर को भरने के लिए विदेशी विकल्प चुने? विडंबना यह है कि भारत और रूस का पुराना FGFA कार्यक्रम कभी इसी दिशा में संयुक्त समाधान देने वाला था, लेकिन वह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। हम आपको यह भी बता दें कि रूस की पेशकश केवल S-500 और Su-57 तक सीमित नहीं है। Voronezh रणनीतिक अर्ली-वॉर्निंग रडार, HAL के साथ Su-30MKI अपग्रेड और Kilo-क्लास पनडुब्बियों के आधुनिकीकरण जैसे प्रस्ताव भी महत्वपूर्ण हैं। देखा जाये तो मॉस्को के लिए दांव बहुत बड़ा है क्योंकि भारत पिछले दो दशकों से अमेरिका, फ्रांस, इजरायल और अन्य देशों के साथ भी रक्षा सहयोग बढ़ाकर अपने आपूर्तिकर्ताओं में विविधता ला रहा है। अमेरिकी Javelin मिसाइलों की खरीद की दिशा में कदम और 114 Rafale लड़ाकू विमानों की संभावित बड़ी खरीद इस बदलती तस्वीर का हिस्सा हैं। लेकिन रूस के पास अब भी एक जबरदस्त बढ़त है। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना में रूसी मूल के लड़ाकू विमान, टैंक, पनडुब्बियां, हेलीकॉप्टर, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम गहराई तक मौजूद हैं। बहरहाल, पुतिन की भारत यात्रा के दौरान रक्षा सौदों पर होने वाली चर्चा सिर्फ हथियार खरीदने की बातचीत नहीं होगी। यह बातचीत तय करेगी कि अगले दो दशकों में भारत का एयर डिफेंस कैसा होगा, उसकी वायुसेना कितनी तेजी से पांचवीं पीढ़ी की लड़ाई में प्रवेश करेगी। कुल मिलाकर देखें तो S-400 और Project Kusha के बीच मुकाबला वास्तव में ‘रूस बनाम भारत’ नहीं है। यह आज की तत्काल सुरक्षा बनाम कल की रणनीतिक आत्मनिर्भरता का संतुलन है। पुतिन की यात्रा इसी संतुलन को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है। -नीरज कुमार दुबे
भारतीय चुनावी प्रणाली में गोपनीयता और पारदर्शिता को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने एक बेहद अहम और बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह तीखा सवाल किया है कि मतगणना के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के वोटों को आपस में मिलाने यानी पूल करने के लिए 'टोटलाइजर' (Totaliser) उपकरण का उपयोग कानूनी रूप से क्यों नहीं किया जा रहा है। चुनाव आयोग पिछले लगभग 18 सालों से लगातार यह मांग कर रहा है कि उसे बूथ-वार नतीजों की बारीक जानकारी छिपाने और मतदाताओं की निजता सुरक्षित रखने के लिए टोटलाइजर के इस्तेमाल की अनुमति दी जाए। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को एक विशिष्ट और विस्तृत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह तकनीक वोटरों की पहचान को सुरक्षित रखने और चुनाव के बाद होने वाले संभावित राजनीतिक प्रतिशोध या उत्पीड़न से बचाने में एक बहुत ही कारगर और अच्छा जरिया साबित हो सकती है।वर्तमान समय में चुनावी व्यवस्था का नियम यह कहता है कि मतगणना के दिन हर एक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का कंट्रोल यूनिट एक-एक करके क्रमानुसार खोला जाता है। इसके बाद उसके परिणामों को उस विशिष्ट पोलिंग स्टेशन के नाम और पहचान के साथ सार्वजनिक रूप से दर्ज किया जाता है जहां से वह मशीन लाई गई थी। जब तक मतगणना हॉल में आखिरी मशीन के नतीजे पढ़े जाते हैं, तब तक चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार को केवल यह बात ही पता नहीं चलती कि वह जीत रहा है या हार रहा है, बल्कि उसे यह भी साफ-साफ पता चल जाता है कि विधानसभा क्षेत्र के लगभग दो सौ अलग-अलग इलाकों में से किन-किन बूथों और मोहल्लों ने उसे भारी समर्थन दिया है और किस इलाके के मतदाताओं ने उसके खिलाफ मतदान किया है। यह बेहद संवेदनशील और बारीक चुनावी जानकारी 'चुनाव संचालन नियम, 1961' के तहत ईवीएम वोटों की गिनती के मौजूदा तय तरीके का सीधा नतीजा है। इसी व्यवस्था पर अब सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से जवाब तलब किया है।क्या है टोटलाइजर मशीन और यह कैसे काम करती है?टोटलाइजर तकनीक कोई नई तकनीक नहीं है, बल्कि भारत के निर्वाचन आयोग ने दिसंबर 2016 के अपने एक प्रस्ताव पत्र में इसके इस्तेमाल की जोरदार वकालत की थी। टोटलाइजर अनिवार्य रूप से एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या मशीन है जिसे विशेष केबल के माध्यम से ईवीएम से जोड़ा जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक ही बार में चौदह अलग-अलग वोटिंग मशीनों में दर्ज किए गए वोटों को आपस में जोड़ या मिला देता है। इस तकनीक के माध्यम से उम्मीदवारों और उनके काउंटिंग एजेंटों को यह तो पता चल जाता है कि कुल कितने वोट पड़े हैं और किस उम्मीदवार को कुल कितने मत मिले हैं, लेकिन किसी एक विशिष्ट मशीन यानी विशेष पोलिंग बूथ का अलग से अलग-थलग नतीजा सामने नहीं आता है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि टोटलाइज़र चौदह अलग-अलग बूथों के लिए अलग-अलग टैली दिखाने के बजाय उन चौदह बूथों के लिए एक ही संयुक्त टैली देता है। दिलचस्प बात यह है कि देश की दो प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स इकाइयां—भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL)—ने साल 2007 में ही इस उन्नत तकनीक का सफल प्रदर्शन कर दिखाया था, लेकिन प्रशासनिक और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह ठंडे बस्ते में पड़ी रही।मौजूदा बूथ-वार मतगणना की प्रणाली ने देश के कई हिस्सों में मतदाताओं के लिए एक नया और गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त वी.एस. संपत ने भी साल 2013 में तत्कालीन केंद्रीय कानून मंत्री को एक आधिकारिक पत्र लिखकर गहरी चिंता जताई थी कि बूथ-वार गिनती से चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक दलों या स्थानीय दबंगों द्वारा मतदाताओं को उत्पीड़न, प्रतिशोध, डराने-धमकाने या सामाजिक-आर्थिक भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है। लोकतंत्र में मतदान गुप्त होता है, लेकिन जब किसी छोटे गांव या मोहल्ले के पांच सौ वोटों में से किसी एक पार्टी को सिर्फ दो वोट मिलते हैं, तो स्थानीय नेताओं को यह समझने में देर नहीं लगती कि किसने किसे वोट दिया था। ऐसी खतरनाक और संवेदनशील स्थिति में 'टोटलाइजर' मशीन इस प्रकार के हर खतरे को जड़ से दूर करने का सबसे प्रभावी और अचूक माध्यम बन सकती है, जिससे मतदाता बिना किसी डर के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के अपने तर्क और आपत्तियांभले ही चुनाव आयोग लंबे समय से इस नियम को बदलकर टोटलाइजर प्रणाली को लागू करने की मांग करता रहा है, लेकिन आयोग ने अपने हालिया हलफनामों में कुछ व्यावहारिक और तकनीकी आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं। आयोग के सचिव द्वारा पूर्व में दायर हलफनामे के मुताबिक, वोटों को एक साथ मिलाने से ईवीएम की सुरक्षा और आंकड़ों के सत्यापन (verification) की एक बहुत ही महत्वपूर्ण कड़ी टूट जाएगी। फिलहाल की व्यवस्था के अनुसार, मतदान समाप्त होने के बाद फॉर्म 17सी के भाग I में दर्ज कुल वोटों की संख्या का मिलान मतगणना के दिन भाग II से करके किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या टेंपरिंग का तुरंत पता लगा लिया जाता है। यदि एक साथ चौदह मशीनों के वोटों को आपस में पूल कर दिया गया, तो भविष्य में किसी एक मशीन में आई तकनीकी खराबी या मानवीय त्रुटि को पकड़ पाना लगभग असंभव हो जाएगा।इसके अलावा, राजनीतिक दलों और प्रशासनिक स्तर पर भी इसे लेकर भारी मतभेद देखने को मिले हैं। वर्ष 2016 में सरकार द्वारा गठित मंत्रियों के एक विशेष समूह ने इस प्रस्ताव को यह कहकर खारिज कर दिया था कि बूथ-वार मतदान के विस्तृत आंकड़े राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को यह गहराई से समझने में मदद करते हैं कि किस विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र या पॉकेट में विकास कार्यों, सड़क, बिजली या पानी की अधिक आवश्यकता है। इसके अलावा देश के प्रमुख राजनीतिक दलों में भी इसे लेकर कोई एकराय नहीं है; देश के बड़े राष्ट्रीय दलों और दर्जनों राज्य स्तरीय दलों ने इसके पक्ष और विपक्ष में बंटी हुई प्रतिक्रियाएं दी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी को इस पूरे मामले के सभी जटिल कानूनी पहलुओं और व्यावहारिक बाधाओं की गहराई से जांच करने का निर्देश दिया है। साथ ही, अदालत ने चुनाव आयोग को यह भी सलाह दी है कि वे सरकार और संसद के समक्ष इस महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे पर पुनर्विचार के लिए दोबारा प्रस्ताव लेकर जाएं, क्योंकि चुनावी नियमों में संशोधन करने का अंतिम अधिकार केंद्र सरकार और विधायिका के पास ही निहित है।
ऑनलाइन सट्टे की रकम को कैश में बदलकर, अवैध रेमिटेंस और फर्जी ODI से लगा रहे थे ठिकाने
ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म Parimatch से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर में 12 ठिकानों पर तलाशी ली। कार्रवाई प्रिवेंशन आफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की धारा 17 के तहत की जा रही है। ईडी के मुताबिक, इस कार्रवाई में ऐसे लोगों और संस्थाओं के परिसरों को भी शामिल किया गया है, जिन पर कथित तौर पर सट्टेबाजी से हासिल रकम को नकदी में बदलने, विदेश भेजने और भुगतान व्यवस्था के जरिए आगे बढ़ाने में मदद करने का संदेह है।
घास को माना शव, फिर सामूहिक मुखाग्नि... लापता अपनों को ऐसी विदाई!
नेपाल में पिछले हफ्ते आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई. जिन परिवारों को अब तक अपने परिजनों के शव नहीं मिले हैं, उनके लिए परिवारों ने कुश की घास से प्रतीकात्मक शव बनाकर उनका अंतिम संस्कार किया.
अयोध्या में भगवान श्री राम के भव्य और दिव्य मंदिर के निर्माण के बाद अब इसके प्रशासनिक और प्रबंधकीय ढांचे को अधिक मजबूत, पेशेवर और सुव्यवस्थित बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भारतीय वायु सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यपालक अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया है। हालांकि इस महत्वपूर्ण नियुक्ति को लेकर अभी आधिकारिक और औपचारिक ऐलान होना बाकी है, लेकिन इस फैसले ने देश भर में धार्मिक और प्रशासनिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अयोध्या में प्रतिदिन लाखों की संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालुओं, मंदिर परिसर की सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और निर्माण से जुड़े कार्यों की विशालता को देखते हुए एक अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी की जरूरत महसूस की जा रही थी। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का लगभग चार दशकों का बेदाग सैन्य करियर, बड़े ऑपरेशनल सिस्टम्स को संभालने का उनका तजुर्बा और उनकी उत्कृष्ट कार्यशैली राम मंदिर के भविष्य के प्रबंधन के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।भारतीय वायु सेना में लगभग चार दशक का लंबा और गौरवशाली अनुभव रखने वाले जितेन्द्र मिश्रा देश के उन चुनिंदा सम्मानित सैन्य अधिकारियों में गिने जाते हैं जिन्होंने अपनी वीरता, नेतृत्व क्षमता और तकनीकी दक्षता से भारतीय रक्षा बलों को नई ऊंचाइयां दी हैं। वह भारतीय वायु सेना के अत्यंत महत्वपूर्ण पद यानी वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (AOC-in-C) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। देश की रक्षा में उनके असाधारण योगदान और अदम्य साहस के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मानों में से एक सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM), अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) से अलंकृत किया जा चुका है। एक फाइटर कॉम्बैट लीडर और टेस्ट पायलट के रूप में उनका करियर नई पीढ़ी के सैन्य अधिकारियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहा है।1986 में भारतीय वायु सेना से हुई थी शानदार शुरुआतग्रुप कैप्टन और एयर मार्शल के रूप में देश सेवा करने वाले जितेन्द्र मिश्रा का करियर अनुशासन, उच्च कोटि की तकनीकी समझ और अदम्य साहस की मिसाल रहा है। उन्हें 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना की फ्लाइंग ब्रांच में एक पायलट के रूप में कमीशंड किया गया था। अपनी पेशेवर दक्षता को और अधिक निखारने के लिए उन्होंने अमेरिका स्थित प्रतिष्ठित Air Command and Staff College, Air University से भी उच्च स्तरीय सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया था। अपने लंबे और व्यापक सैन्य सफर के दौरान उन्होंने भारतीय वायु सेना के भीतर कई अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण पदों की कमान संभाली। उन्होंने Air Force Test Pilots' School में सीनियर टेस्ट फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर के रूप में युवा पायलटों को प्रशिक्षित किया, मिग-21 यानी MiG-21 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में अपनी पुरानी मशीनों को भी पूरी तरह ऑपरेशनल और दुरुस्त रखा, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) में चीफ टेस्ट पायलट की भूमिका निभाई, एयरक्राफ्ट अपग्रेड्स के डायरेक्टर (प्रोjects) रहे और साथ ही सु-30 एमकेआई यानी Su-30 MKI ऑपरेशनल एयरबेस के चीफ ऑपरेशंस ऑफिसर के रूप में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी।Su-30 MKI और BrahMos प्रोजेक्ट में निभाई थी बेहद अहम भूमिकारक्षा उत्पादन और सामरिक परियोजनाओं के मोर्चे पर भी एयर मार्शल जितेन्द्र मिश्रा का योगदान अतुलनीय रहा है। डायरेक्टर (प्रोjects) के रूप में उन्होंने कई अत्याधुनिक रक्षा परियोजनाओं को गति दी। विशेष रूप से Su-30 MKI Block IV और भारत-रूस के संयुक्त उपक्रम वाले ब्रह्मोस यानी BrahMos integration projects में उनकी रणनीतिक सूझबूझ और तकनीकी मार्गदर्शन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व, दूरदर्शिता और सटीक समय-योजना के कारण इन जटिल रक्षा परियोजनाओं को तय समयसीमा के भीतर आगे बढ़ाने में मदद मिली। इसके अलावा, जब उन्होंने मिग-21 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी संभाली थी, तब उस समय पुराने होते विमान बेड़े के बावजूद विमान की सर्विसिबिलिटी और ऑपरेशनल रेडीनेस को उच्चतम स्तर पर बनाए रखना एक बड़ी चुनौती था, जिसे उन्होंने अपनी अद्भुत कार्यक्षमता से संभव कर दिखाया।फ्रांस में Garuda IV अभ्यास का किया था शानदार नेतृत्वअंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सैन्य ताकत और कूटनीतिक समन्वय का लोहा मनवाने में भी जितेन्द्र मिश्रा हमेशा सबसे आगे रहे हैं। जून 2010 में उन्हें फ्रांस में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय गरुड़ चतुर्थ यानी Garuda IV Air Exercise में भारतीय वायु सेना के संपूर्ण दल का नेतृत्व करने के लिए चुना गया था। दुनिया भर की वायु सेनाओं के बीच आयोजित इस बड़े सैन्य अभ्यास में उनके कुशल नेतृत्व और सामरिक योजना के कारण भारतीय वायु सेना ने शानदार प्रदर्शन किया। यह अभ्यास पूरी तरह सफल रहा और वैश्विक मंच पर एक बार फिर भारतीय वायु सेना की पेशेवर क्षमता, अनुशासन और आधुनिक युद्ध कौशल का गहरा प्रभाव देखने को मिला।Kargil War यानी ऑपरेशन सफेद सागर से भी रहा है गहरा नाताभारतीय सैन्य इतिहास के सबसे कठिन और गौरवशाली अध्यायों में से एक 1999 के कारगिल युद्ध यानी 'ऑपरेशन सफेद सागर' से भी एयर मार्शल जितेन्द्र मिश्रा का नाम गहराई से जुड़ा हुआ है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों और सैन्य दस्तावेजों के अनुसार, कारगिल संघर्ष के दौरान भारतीय वायु सेना द्वारा मिराज-2000 यानी Mirage-2000 लड़ाकू विमानों से दुश्मन के ठिकानों पर लेजर-गाइडेड बमों के अचूक इस्तेमाल से जुड़े सामरिक अभियानों में उनकी महत्वपूर्ण और प्रत्यक्ष भूमिका रही थी। अत्यधिक दुर्गम पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों और दुश्मन की ऊंचाइयों पर बैठे होने के बावजूद भारतीय वायु सेना ने जो ऐतिहासिक पराक्रम दिखाया था, उसकी रणनीतिक रूपरेखा में ऐसे ही जांबाज अधिकारियों का बड़ा योगदान था।Ram Mandir Trust में तीन नए ट्रस्टी भी किए गए शामिलएयर मार्शल जितेन्द्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला CEO बनाए जाने की सुगबुगाहट के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में एक और बड़ा बदलाव किया गया है। ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टियों को शामिल किया गया है, जिससे मंदिर के प्रबंधकीय और वैधानिक कार्यों को और अधिक गति मिलेगी। इन नए ट्रस्टियों में दिल्ली के प्रमुख उद्यमी और समाजसेवी महेश भगचंदका, अयोध्या के प्रतिष्ठित मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं। विशेष रूप से महेश भगचंदका को दिवंगत और प्रख्यात विश्व हिंदू परिषद (VHP) के दिग्गज नेता अशोक सिंघल का करीबी रिश्तेदार माना जाता है। नए ट्रस्टियों की इस नियुक्ति और एक सेवानिवृत्त एयर मार्शल को सर्वोच्च प्रशासनिक पद (CEO) पर बैठाए जाने के निर्णय को राम मंदिर के प्रशासनिक और वित्तीय ढांचे को पूरी तरह कॉर्पोरेट, पारदर्शी और सैन्य अनुशासन की तर्ज पर ढालने के एक बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।Ram Mandir के लिए नई और बड़ी जिम्मेदारी क्यों है बेहद अहम?अयोध्या में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर में रोजाना दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड तोड़ स्तर पर पहुंच रही है। आने वाले समय में देश-विदेश से आने वाले राम भक्तों की भारी भीड़ को प्रबंधित करना, मंदिर परिसर की त्रि-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखना, चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और गति की निगरानी करना तथा भविष्य की तमाम धार्मिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाना एक बहुत बड़ी चुनौती है। ऐसे में एक ऐसे काबिल अधिकारी की आवश्यकता थी जो बड़े पैमाने पर मैनपावर मैनेजमेंट, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा तंत्र को संभालने का अभूतपूर्व अनुभव रखता हो।भारतीय वायु सेना के सबसे बड़े ऑपरेशनल कमांड्स का सफल नेतृत्व करने वाले एयर मार्शल जितेन्द्र मिश्रा के पास संकट प्रबंधन, अनुशासन, टीम वर्क और आधुनिक तकनीक आधारित प्रशासनिक नियंत्रण का लंबा तजुर्बा है। उनसे यह प्रबल उम्मीद की जा रही है कि वे राम मंदिर ट्रस्ट के दैनिक कामकाज में उच्च कोटि का पेशेवर प्रबंधन, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और एक पारदर्शी व सुचारू प्रशासन स्थापित करेंगे। उनके नेतृत्व में मंदिर का संचालन न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के धार्मिक संस्थानों के लिए एक आधुनिक और अनुशासित मॉडल के रूप में उभरेगा, जिससे अयोध्या आने वाले हर श्रद्धालु को एक दिव्य, सुरक्षित और सहज अनुभव प्राप्त हो सकेगा।

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