CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि भूख हड़ताल का दूसरा दिन ही उनके लिए बेहद कठिन रहा। सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद उन्होंने अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया और 20 जुलाई के संसद मार्च की पुष्टि की।
जम्मू/राजौरी/लखनऊ। जम्मू-कश्मीर में मानसून और पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम ने बेहद रौद्र रूप अख्तियार कर लिया है। राजौरी, अनंतनाग, उधमपुर और पुंछ सहित घाटी के कई जिलों में पिछले 24 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। सबसे बदतर हालात राजौरी और पुंछ जिलों में देखने को मिल रहे हैं, जहां कथित तौर पर बादल फटने (Cloudburst) के बाद आई अचानक बाढ़ (Flash Floods) ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया है। पुंछ के सुरनकोट इलाके में सैलाब की चपेट में आने से चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। स्थानीय बुजुर्गों के मुताबिक, साल 1992 की ऐतिहासिक आपदा के बाद घाटी में कुदरत का ऐसा खौफनाक मंजर पहली बार देखा गया है।राजौरी में बेला बस स्टैंड का नामोनिशान मिटा, बाढ़ में बह गईं 250 गाड़ियांराजौरी शहर में तड़के करीब तीन बजे आई अचानक बाढ़ के कारण दो मंजिला मकान पूरी तरह ढह गए। आपदा का सबसे खौफनाक रूप बेला बस स्टैंड (Bela Bus Stand) के पास देखने को मिला, जहां पानी का स्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि निचले इलाके में खड़ी करीब 200 से 250 कारें और अन्य वाहन ताश के पत्तों की तरह तेज बहाव में बह गए। इस तबाही का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें गाड़ियां मलबे में तब्दील होती दिख रही हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अब बस स्टॉप का नामोनिशान तक नहीं बचा है। रिहायशी इलाकों और बाजारों में कई फीट पानी भर जाने से दुकानों में रखा करोड़ों का सामान बर्बाद हो गया है। इस आपदा के बीच राजौरी से एक महिला के भी बह जाने की खबर है, जिसकी तलाश जारी है।हालात पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सीधी नजर, कीमती जानें बचाना पहली प्राथमिकताजम्मू-कश्मीर में पैदा हुए इस गंभीर जल संकट और बाढ़ की स्थिति पर राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (CM Omar Abdullah) खुद कमान संभाले हुए हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक पोस्ट साझा करते हुए कहा, आज सुबह से ही मैं जम्मू संभाग के कुछ हिस्सों, विशेषकर राजौरी शहर और उसके आस-पास के इलाकों में अत्यधिक बारिश से उत्पन्न हुए गंभीर हालातों पर बारीकी से नजर रख रहा हूं। मैं प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय विधायकों और जिला प्रशासन के निरंतर संपर्क में हूं। इस विकट परिस्थिति में सरकार की सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता कीमती इंसानी जानें बचाना है। जिन भी नागरिकों की संपत्तियों, मकानों या व्यवसायों को इस अचानक आई बाढ़ से नुकसान पहुंचा है, सरकार उन्हें हर संभव आर्थिक और ढांचागत सहायता प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।नदियों और नालों से दूर रहने की अपील, 23 जुलाई तक मौसम विभाग का 'हाई अलर्ट'बाढ़ के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन, एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय राहत टीमें प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। प्रशासन ने आम जनता और पर्यटकों के लिए एक सख्त एडवायजरी जारी की है, जिसमें लोगों से बेवजह लंबी यात्रा न करने और नदियों, पहाड़ी नालों व संवेदनशील भूस्खलन वाले क्षेत्रों से पूरी तरह दूर रहने को कहा गया है।इस बीच, मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने जम्मू-कश्मीर के नागरिकों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग ने 19 जुलाई से 23 जुलाई 2026 के बीच राज्य के कई हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। विशेष रूप से जम्मू मंडल के सात प्रमुख जिलों—जम्मू, कठुआ, सांबा, राजौरी, डोडा, रामबन और किश्तवाड़ को 'हाई अलर्ट' (High Alert) पर रखा गया है। इन जिलों से गुजरने वाली प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर पहुंच रहा है, जिससे आने वाले चार दिन बेहद चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं।
लखनऊ। आज की आधुनिक और भागदौड़ भरी जिंदगी में एक अच्छी व सुकून भरी नींद (Good Sleep) आना किसी वरदान से कम नहीं है। शरीर और दिमाग दोनों को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त नींद बेहद आवश्यक है। हालांकि, बदलती जीवनशैली, ऑफिस का तनाव, देर रात तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल और अनियंत्रित दिनचर्या के कारण आज बड़ी संख्या में लोग अनिद्रा (Insomnia) का शिकार हो रहे हैं। कई लोगों की शिकायत होती है कि वे बिस्तर पर लेटने के बाद घंटों करवटें बदलते रहते हैं, लेकिन नींद आंखों से कोसों दूर रहती है। वहीं, कुछ लोगों की रात में बार-बार आंख खुल जाती है। लगातार नींद पूरी न होने की वजह से अगले दिन शरीर में भारी थकान, चिड़चिड़ापन, मानसिक तनाव और कार्यक्षेत्र में ध्यान लगाने में गंभीर परेशानी होने लगती है।हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि कभी-कभार नींद आने में देरी हो तो यह एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन अगर यह समस्या आपकी रोज की आदत बन चुकी है, तो आपको तुरंत सचेत हो जाना चाहिए। प्रसिद्ध हेल्थ वेबसाइट 'हेल्थलाइन' (Healthline) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी कुछ आदतों में छोटे-बड़े सकारात्मक बदलाव करके और विशेष रिलैक्सेशन तकनीकों को अपनाकर इस समस्या से हमेशा के लिए निजात पाई जा सकती है।जल्दी और गहरी नींद लाने के लिए आजमाएं ये 3 जादुई ट्रिक्स:1. जादुई 4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक (4-7-8 Breathing Method): यह अनिद्रा को दूर करने का एक प्रामाणिक और बेहद असरदार तरीका है। बिस्तर पर लेटने के बाद सबसे पहले 4 सेकंड तक अपनी नाक से फेफड़ों में गहरी सांस भरें। इसके बाद अगले 7 सेकंड तक अपनी सांस को पूरी तरह अंदर ही रोककर रखें (Hold)। अंत में, 8 सेकंड के समय में अपने मुंह से धीरे-धीरे पूरी सांस को बाहर छोड़ें। इस चक्र को 4 से 5 बार दोहराने से शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है, जिससे दिमाग तुरंत शांत होता है और गहरी नींद आने लगती है।2. प्रोग्रेसिव मसल रिलैक्सेशन और मेडिटेशन: सोने से ठीक पहले थोड़ी देर ध्यान (Meditation) लगाना काफी फायदेमंद होता है। इसके अलावा आप प्रोग्रेसिव मसल रिलैक्सेशन तकनीक अपना सकते हैं। इसमें पैर के अंगूठे से लेकर चेहरे तक की शरीर की सभी मांसपेशियों को कुछ सेकंड के लिए हल्का सा सिकोड़ कर या कसकर फिर पूरी तरह ढीला (Relax) छोड़ दिया जाता है। इससे शरीर का शारीरिक तनाव मिनटों में गायब हो जाता है।3. 20 मिनट का स्लीप रूल (20-Minute Rule): यदि आपको बिस्तर पर लेटने के 20 मिनट बाद तक भी नींद न आए, तो जबरदस्ती आंखें बंद करके लेटे न रहें। इससे दिमाग में बेचैनी बढ़ती है। ऐसे में तुरंत बिस्तर से उठ जाएं और मंद रोशनी में कोई हल्की ज्ञानवर्धक किताब (Reading) पढ़ें या शांत संगीत सुनें। जब दोबारा झपकी आने लगे, तभी बिस्तर पर लौटें।शांतिपूर्ण नींद के लिए सोने से पहले इन 4 बुरी आदतों से बना लें दूरी:कैफीन और भारी भोजन से तौबा: सोने से कम से कम 4-5 घंटे पहले चाय, कॉफी या किसी भी तरह के कैफीन युक्त कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन बंद कर दें। इसके अलावा रात का डिनर हमेशा हल्का और सुपाच्य होना चाहिए, अत्यधिक मसालेदार या भारी भोजन पाचन तंत्र को बिगाड़कर नींद में खलल डालता है।डिजिटल डिटॉक्स (स्क्रीन टाइम): बिस्तर पर जाने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन को पूरी तरह बंद कर दें। इन गैजेट्स से निकलने वाली ब्लू लाइट (Blue Light) शरीर में नींद लाने वाले 'मेलाटोनिन' हार्मोन के स्राव को रोक देती है।बेडरूम का वातावरण: आपके सोने के कमरे का तापमान हमेशा आरामदायक और थोड़ा ठंडा होना चाहिए। कमरे में पूरी तरह अंधेरा रखें या बहुत हल्की (Dim) लाइट का प्रयोग करें और शोर-शराबे को पूरी तरह ब्लॉक कर दें।असमय वर्कआउट पर रोक: दिन में नियमित रूप से एक्सरसाइज या योग करना सेहत और नींद दोनों के लिए बहुत अच्छा है, लेकिन सोने से ठीक पहले जिम जाना या भारी वर्कआउट (Heavy Workout) करने से बचें, क्योंकि इससे शरीर की ऊर्जा बढ़ जाती है और नींद गायब हो जाती है।रेड अलर्ट: कब हो जाता है डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना जरूरी?चिकित्सकों के अनुसार, यदि लाइफस्टाइल बदलने के बावजूद हफ्तों से लगातार आपकी नींद प्रभावित हो रही है, रात में सांस रुकने या घबराहट जैसा महसूस होता है, या फिर सोते समय बहुत तेज खर्राटे (Snoring / Sleep Apnea) आते हैं, तो यह किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना कोई घरेलू नुस्खा आजमाए तुरंत किसी स्लीप स्पेशलिस्ट या डॉक्टर से मिलकर उचित चिकित्सीय परामर्श और जांच करानी चाहिए, ताकि समय रहते सही इलाज शुरू किया जा सके।
लखनऊ। भारतीय पाक कला और रसोइयों में लहसुन (Garlic) का एक बेहद खास और अनिवार्य स्थान है। दाल में तड़का लगाना हो, मसालेदार सब्जी बनानी हो या फिर तीखी चटनी तैयार करनी हो—लहसुन का इस्तेमाल खाने के स्वाद और उसकी खुशबू को कई गुना बढ़ा देता है। स्वाद के अलावा यह सेहत के लिए भी एक बेहतरीन औषधि माना जाता है। इसमें एलिसिन (Allicin), विटामिन बी6, विटामिन सी, मैंगनीज, सेलेनियम और प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। यही वजह है कि अधिकांश लोग इसे अपनी रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बनाते हैं।हालांकि, लहसुन के फायदों के बीच इसे छीलने की प्रक्रिया (Peeling Garlic) कई लोगों के लिए सिरदर्द बन जाती है। इसकी पतली, सूखी और चिपचिपी परत उंगलियों से आसानी से नहीं निकलती, जिससे समय और मेहनत दोनों बहुत ज्यादा खर्च होते हैं। खासकर जब किसी त्योहार या मेहमानों के आने पर एक साथ भारी मात्रा में लहसुन छीलना हो, तो यह काम बेहद झंझट भरा लगता है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो शेफ और कुकिंग एक्सपर्ट्स द्वारा बताए गए ये 4 जादुई हैक्स (Kitchen Hacks) आपके काम को बेहद आसान बना सकते हैं।मिनटों में ढेर सारा लहसुन छील देंगे ये 4 आसान हैक्स:1. बाउल शेक ट्रिक (The Bowl Shake Hack): यह लहसुन छीलने का सबसे मजेदार और बिना मेहनत वाला तरीका है। इसके लिए लहसुन की कलियों को अलग करके एक गहरे स्टील या प्लास्टिक के बाउल में डाल दें। अब इसके ऊपर एक दूसरा बाउल या भारी प्लेट उलटकर रख दें और इसे 15 से 20 सेकंड तक पूरी ताकत से ऊपर-नीचे हिलाएं (Shake)। आपस में टकराने के कारण कलियों के छिलके अपने आप ढीले होकर अलग हो जाएंगे।2. गुनगुने पानी का जादू (Warm Water Soak): यदि आप बिना किसी शोर-शराबे के आसानी से लहसुन छीलना चाहते हैं, तो कलियों को अलग करके एक कटोरी गुनगुने पानी में 5 से 10 मिनट के लिए भिगोकर छोड़ दें। पानी की नमी के कारण छिलके पूरी तरह फूल जाएंगे और आप उंगलियों से हल्के स्पर्श मात्र से ही उन्हें तरबूज के छिलके की तरह आसानी से उतार सकेंगे।3. चाकू से फ्लैट क्रश करना (Knife Press Method): होटल और रेस्तरां के शेफ अक्सर इसी क्विक मेथड का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए लहसुन की कली को चॉपिंग बोर्ड पर रखें और एक चौड़े शेफ नाइफ (चाकू) के फ्लैट हिस्से को कली के ऊपर रखकर हथेली से हल्का सा दबाएं (Press)। एक हल्की सी 'क्रैक' की आवाज आते ही छिलका कली को पूरी तरह छोड़ देगा। (नोट: चाकू का इस्तेमाल करते समय हाथ कटने से बचाने के लिए सावधानी जरूर बरतें)।4. माइक्रोवेव हैक (10-Second Microwave Trick): अगर आपके पास समय की बहुत कमी है, तो लहसुन की पूरी गांठ या कलियों को एक माइक्रोवेव-सेफ प्लेट में रखें और केवल 10 से 15 सेकंड के लिए माइक्रोवेव चला दें। हल्की सी गर्मी मिलते ही छिलके के भीतर मौजूद नमी भाप बनकर छिलके को कली से अलग कर देगी। ध्यान रहे कि इसे 15 सेकंड से ज्यादा गर्म न करें, अन्यथा लहसुन पक जाएगा और उसका प्राकृतिक स्वाद व बनावट पूरी तरह बदल जाएगी।लहसुन को हफ्तों तक खराब होने से बचाने और ताजा रखने के नियम:जालीदार टोकरी या पेपर बैग: लहसुन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उसे हमेशा किसी सूखी, ठंडी और हवादार जगह पर ही रखें। इसे भूलकर भी प्लास्टिक की बंद थैली में न रखें, क्योंकि नमी के कारण इसमें फंगस लग सकती है। इसे हमेशा जालीदार टोकरी या पेपर बैग में रखना सर्वश्रेष्ठ होता है।छिली हुई कलियों का रखरखाव: यदि आपने ऊपर दिए गए हैक्स की मदद से एक साथ ढेर सारा लहसुन छील लिया है, तो उसे खुली हवा में न छोड़ें, इससे उसकी प्राकृतिक खुशबू और ताजगी उड़ जाएगी। छिली हुई कलियों को एक सूखे एयरटाइट डिब्बे (Airtight Container) में बंद करके फ्रिज में रखें और 3 से 4 दिनों के भीतर ही इस्तेमाल कर लें।
लखनऊ। गर्भावस्था (Pregnancy) हर महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत और संवेदनशील दौर होता है। इस खास समय में आने वाली मां और गर्भ में पल रहे नन्हे शिशु, दोनों की सेहत व सुरक्षा को सर्वोपरि माना जाता है। एक स्वस्थ व सुरक्षित प्रेग्नेंसी के लिए संतुलित खानपान के साथ-साथ शरीर को कई अति-आवश्यक विटामिनों और खनिजों की जरूरत होती है। यदि इस नाज़ुक समय में महिला के शरीर में पोषण की थोड़ी सी भी कमी हो जाए, तो इसका सीधा व गहरा नकारात्मक असर मां और बच्चे दोनों के शारीरिक विकास पर पड़ सकता है। यही वजह है कि स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologists) प्रेग्नेंसी के दौरान पोषक तत्वों से भरपूर विशेष डाइट चार्ट का पालन करने की सख्त सलाह देते हैं।क्या है फोलिक एसिड और क्यों है यह गर्भावस्था के लिए संजीवनी?गर्भावस्था के दौरान जिन चुनिंदा पोषक तत्वों को सबसे अनिवार्य माना गया है, उनमें फोलिक एसिड (Folic Acid) शीर्ष पर आता है। तकनीकी रूप से, फोलिक एसिड असल में 'विटामिन बी9' (Vitamin B9) का एक सिंथेटिक रूप है, जबकि प्रकृति में पाए जाने वाले इसके प्राकृतिक रूप को 'फोलेट' (Folate) कहा जाता है। मानव शरीर में नई कोशिकाओं (Cells) के निर्माण और डीएनए (DNA) बनने की जटिल प्रक्रिया में फोलिक एसिड एक मुख्य भूमिका निभाता है। यही कारण है कि जो महिलाएं प्रेग्नेंसी की प्लानिंग कर रही हैं या जो पहले से ही प्रेग्नेंट हैं, उनके लिए इसकी पर्याप्त दैनिक मात्रा लेना मेडिकल साइंस में बेहद जरूरी माना गया है।फोलिक एसिड की कमी से शिशु को हो सकती है यह गंभीर जन्मजात बीमारीअमेरिका के प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संगठन 'ऑफिस ऑन विमेंस हेल्थ' (Office on Women's Health) की एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में फोलिक एसिड की कमी होने से गर्भस्थ शिशु का शारीरिक विकास बुरी तरह बाधित हो सकता है।न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (Neural Tube Defect): शरीर में इस विटामिन की पर्याप्त मात्रा न होने से बच्चे में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। यह जन्म से जुड़ी एक बेहद गंभीर और लाइलाज समस्या है, जो नवजात शिशु के दिमाग, रीढ़ की हड्डी (Spine) या स्पाइनल कॉर्ड के प्राकृतिक विकास को पूरी तरह रोक देती है।शुरुआती हफ्तों का महत्व: अक्सर महिलाओं को गर्भावस्था के शुरुआती 3 से 4 हफ्तों में अपनी प्रेग्नेंसी का पता नहीं चल पाता है, जबकि ठीक इसी समय गर्भ के भीतर शिशु के मस्तिष्क और रीढ़ का ढांचा तेजी से तैयार हो रहा होता है। इसलिए, डॉक्टरों का मानना है कि गर्भधारण करने से पहले से ही महिलाओं को फोलिक एसिड का सेवन शुरू कर देना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के जन्मजात विकार के जोखिम को जड़ से खत्म किया जा सके।डाइट और सप्लीमेंट: कैसे पूरी करें फोलिक एसिड की दैनिक जरूरत?फोलिक एसिड की आवश्यक मात्रा को शरीर में बनाए रखने के लिए एक सही संतुलित आहार और डॉक्टरी सप्लीमेंट्स का बेहतरीन तालमेल होना जरूरी है:प्राकृतिक फोलेट के मुख्य स्रोत: महिलाओं को अपनी दैनिक डाइट में गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां (जैसे पालक, मेथी), विभिन्न प्रकार की बीन्स, हरी मटर, ब्रोकोली, संतरा, नींबू और अन्य खट्टे रसीले फलों को प्रमुखता से शामिल करना चाहिए। इसके अलावा बाजार में मिलने वाले फोर्टिफाइड अनाज (Fortified Cereals) और ब्रेड भी इसके अच्छे स्रोत हैं।सप्लीमेंट्स की अनिवार्यता: पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि केवल रोजमर्रा के भोजन से एक प्रेग्नेंट महिला के लिए आवश्यक फोलिक एसिड की पूरी मात्रा प्राप्त करना हमेशा व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। इसलिए, डॉक्टर की देखरेख में फोलिक एसिड की गोलियां (Supplements) लेना बेहद जरूरी है।प्रेग्नेंसी में सप्लीमेंट लेते समय इन 3 मुख्य बातों का रखें विशेष ध्यान:डॉक्टर की सख्त निगरानी: गर्भावस्था के दौरान फोलिक एसिड या कोई भी अन्य मल्टीविटामिन हमेशा किसी योग्य डॉक्टर की पर्ची और बताई गई खुराक (Dose) के अनुसार ही लें। बिना डॉक्टरी परामर्श के मनमाने ढंग से इसकी मात्रा को कम या ज्यादा करने की भूल बिल्कुल न करें।प्लानिंग के समय ही करें बात: यदि आप भविष्य में गर्भधारण करने की योजना (Pregnancy Planning) बना रही हैं, तो गर्भधारण करने से कम से कम एक-दो महीने पहले ही अपने डॉक्टर से मिलकर फोलिक एसिड शुरू करने की सही सलाह लें।संतुलित आहार का विकल्प नहीं: फोलिक एसिड की दवाइयां लेने का यह अर्थ कतई नहीं है कि आप अपने खानपान में लापरवाही बरतें। सप्लीमेंट के साथ-साथ एक संपूर्ण, रंग-बिरंगी सब्जियों और फलों से युक्त संतुलित सात्विक डाइट बेहद आवश्यक है ताकि शरीर को आयरन, कैल्शियम और अन्य सभी आवश्यक मैक्रोन्यूट्रिएंट्स भी प्राकृतिक रूप से मिलते रहें।
लखनऊ। आज के दौर में लाइफस्टाइल और खानपान में तेजी से बदलाव आ रहा है। लोग अब केवल स्वाद के पीछे नहीं भागते, बल्कि अपनी दैनिक डाइट में हेल्दी और पौष्टिक चीजों को शामिल करना प्राथमिकता बन चुका है। ऐसे में ओट्स (Oats) एक सुपरफूड के रूप में उभरा है। आमतौर पर लोग ओट्स को केवल नाश्ते में दलिया या उपमा के रूप में खाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका इस्तेमाल कई तरह की स्वादिष्ट और लाजवाब मीठी चीजें (Desserts) बनाने में भी किया जा सकता है? ओट्स का अपना स्वाद काफी हल्का होता है, जिसके कारण इसे किसी भी अन्य खाद्य सामग्री के साथ आसानी से मिलाकर एक नया फ्लेवर दिया जा सकता है। यही वजह है कि ओट्स से बने व्यंजन बच्चों से लेकर बड़ों तक सबकी पहली पसंद बनते जा रहे हैं।पोषक तत्वों का खजाना है ओट्स, बाजार की मिठाइयों से कई गुना बेहतरआहार विशेषज्ञों के मुताबिक, ओट्स में प्रचुर मात्रा में फाइबर (Dietary Fiber), प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, जिंक और विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स जैसे शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। बाजार में मिलने वाली अत्यधिक चीनी और प्रीजर्वेटिव्स युक्त मिठाइयों की तुलना में घर पर बने ओट्स के डेजर्ट्स कई गुना ज्यादा पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक होते हैं। इन्हें बनाते समय आप अपनी सेहत और जरूरत के अनुसार चीनी की जगह गुड़, खजूर या शहद का इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही, इसमें मनपसंद ड्राई फ्रूट्स और ताजे फल मिलाकर इसके स्वाद और पोषण दोनों को दोगुना किया जा सकता है।ओट्स से घर पर आसानी से तैयार करें ये 5 लाजवाब डेजर्ट्स:1. ओट्स खीर (Oats Kheer): इसे बनाने के लिए एक पैन में थोड़ा सा शुद्ध देसी घी गर्म करके ओट्स को हल्का सुनहरा होने तक भून लें। इसके बाद इसमें दूध डालकर धीमी आंच पर पकाएं और मिठास के लिए गुड़ या चीनी मिलाएं। ऊपर से कटे हुए बादाम, काजू और हरी इलायची का पाउडर डालें। फाइबर, प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर यह खीर खाने में जितनी स्वादिष्ट है, पेट को भी लंबे समय तक भरा रखती है।2. ओट्स लड्डू (Oats Laddu): बिना किसी झंझट के झटपट तैयार होने वाले इस डेजर्ट के लिए सूखे पैन में ओट्स को भून लें और फिर उसे दरदरा पीस लें। अब इसमें पिघला हुआ गुड़, थोड़ा घी और बारीक कटे ड्राई फ्रूट्स मिलाकर छोटे-छोटे लड्डू बांध लें। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा (Instant Energy) देने के साथ-साथ आयरन और हेल्दी फैट्स का बेहतरीन स्रोत है।3. ओट्स फ्रूट पुडिंग (Oats Fruit Pudding): दूध में ओट्स को अच्छी तरह पकाकर गाढ़ा कर लें और फिर इसे फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें। इसके बाद इसमें बारीक कटे हुए ताजे फल जैसे सेब, केला, आम या बेरीज मिलाएं। बच्चों के लिए यह एक परफेक्ट और न्यूट्रिशियस समर डेजर्ट है, जो उन्हें पर्याप्त विटामिन और मिनरल्स देता है।4. ओट्स-केला मफिन (Oats Banana Muffin): पके हुए केलों को अच्छी तरह मैश (कुचल) कर लें। अब इसमें ओट्स, दूध, थोड़ा बेकिंग पाउडर और मिठास के लिए शहद मिलाएं। इस गाढ़े मिश्रण को मफिन मोल्ड्स में डालकर ओवन में बेक करें। बाजार के मैदे वाले मफिंस की तुलना में यह बेहद हेल्दी स्नैक है, जिसमें फाइबर और पोटैशियम भरपूर मात्रा में होता है।5. ओट्स चॉकलेट कुकीज (Oats Chocolate Cookies): बच्चों की ऑल-टाइम फेवरेट कुकीज बनाने के लिए ओट्स में कोको पाउडर, पीनट बटर (या घी) और शहद मिलाकर एक सॉफ्ट डो (आटा) तैयार कर लें। इसकी छोटी-छोटी कुकीज का आकार देकर बेक कर लें। शाम की हल्की भूख (Evening Snacks) के लिए यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर एक परफेक्ट चॉइस है।ओट्स डेजर्ट्स बनाते और स्टोर करते समय बरतें ये सावधानियां:मीठे का सही चुनाव: ओट्स के व्यंजनों में रिफाइंड चीनी की जगह हमेशा ऑर्गेनिक गुड़, खजूर के पेस्ट या सीमित मात्रा में शहद का उपयोग करें।अतिरिक्त पोषण: कुकीज या पुडिंग का टेक्सचर और न्यूट्रिशन वैल्यू बढ़ाने के लिए आप इनमें चिया सीड्स (Chia Seeds) या अलसी के बीज (Flax Seeds) भी मिला सकते हैं।स्टोरेज के नियम: दूध और ताजे फलों से बने इन डेजर्ट्स को बहुत देर तक कमरे के तापमान (ओपन एरिया) पर खुला न छोड़ें। यदि इन्हें बाद में खाना हो, तो एक एयरटाइट कंटेनर में बंद करके फ्रिज में रखें और 1 से 2 दिनों के भीतर ही इनका सेवन कर लें ताकि इनकी ताजगी, स्वाद और गुणवत्ता पूरी तरह बरकरार रहे।
लखनऊ। आचार्य चाणक्य प्राचीन भारत के एक ऐसे महान रणनीतिकार, कूटनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री थे, जिनके सिद्धांत और व्यावहारिक विचार आज सदियों बाद भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उस काल में थे। उनके द्वारा रचित ग्रंथ ‘चाणक्य नीति’ (Chanakya Niti) को नीतिशास्त्र भी कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति के व्यवहार, सफलता, पारिवारिक संबंध, धन प्रबंधन और राजनीति को लेकर कई अमूल्य बातें बताई गई हैं। आचार्य चाणक्य का मानना था कि मनुष्य के जीवन की सफलता केवल उसकी मेहनत पर नहीं, बल्कि उसके दैनिक आचरण और व्यवहार पर भी निर्भर करती है। इसी कड़ी में चाणक्य नीति में कुछ ऐसी विशिष्ट जगहों और परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है, जहां से अपना काम पूरा करके निकलते समय मनुष्य को भूलकर भी पीछे मुड़कर (Looking Back) नहीं देखना चाहिए। शास्त्रों और चाणक्य के सिद्धांतों के अनुसार, इन स्थानों पर पीछे देखने से जीवन में भयंकर नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो सकता है और बनते हुए काम भी बिगड़ सकते हैं। आइए जानते हैं उन 3 प्रमुख जगहों के बारे में।1. श्मशान या अंतिम संस्कार से लौटते समयआचार्य चाणक्य के अनुसार, जब भी आप किसी परिचित या संबंधी के अंतिम संस्कार (Funeral) में शामिल होने श्मशान घाट या कब्रिस्तान जाते हैं, तो वहां से कार्य संपन्न होने के बाद सीधे अपने घर की ओर कदम बढ़ाएं।नकारात्मकता का वास: श्मशान भूमि को तंत्र शास्त्र और व्यावहारिक रूप से भी शोक, दुख और नकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है।पीछे न मुड़ने का कारण: वहां से लौटते समय पीछे मुड़कर देखना मोह और भय को दर्शाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से वहां मौजूद नकारात्मक शक्तियां या भारी विचार व्यक्ति की ओर आकर्षित होकर उसके साथ घर तक आ सकते हैं। इसलिए वहां से मौन रहकर सीधे निकल जाना ही सबसे सुरक्षित माना गया है।2. किसी जरूरतमंद की सहायता या दान देकर लौटते समयचाणक्य नीति में दान और परोपकार को लेकर बेहद कड़े और व्यावहारिक नियम बताए गए हैं। आचार्य चाणक्य का कहना है कि यदि आपने किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति की कोई आर्थिक सहायता की है, किसी को गुप्त दान दिया है या किसी को जरूरत के समय उधार (Money Lending) दिया है, तो वहां से चलते समय बार-बार पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए।अहंकार और लालच का प्रतीक: दान देने के बाद पीछे मुड़कर देखना यह दर्शाता है कि आपके मन में उस धन के प्रति अभी भी मोह, लालच या उसे देने का पछतावा है।श्रेष्ठ दान का नियम: सनातन परंपरा और चाणक्य नीति दोनों में ही 'नेकी कर और दरिया में डाल' के सिद्धांत को सर्वश्रेष्ठ माना गया है, यानी देकर भूल जाना ही वास्तविक पुण्य का भागी बनाता है।3. कोर्ट-कचहरी और किसी दुष्ट (दुर्जन) व्यक्ति के घर से निकलते समयजीवन प्रबंधन के नियमों के तहत चाणक्य ने विवादों और कपटी लोगों से दूरी बनाने की सख्त सलाह दी है।विवादों से मुक्ति: यदि आप किसी कानूनी झमेले, कोर्ट-कचहरी (Courtroom Case) के किसी बड़े मामले या किसी गंभीर पारिवारिक विवाद को सुलझाकर वापस आ रहे हैं, तो उस स्थान को छोड़ते समय कभी पीछे न देखें। पीछे देखना यह संकेत देता है कि आप अभी भी उस विवाद से मानसिक रूप से जुड़े हुए हैं।दुर्जन का त्याग: इसी तरह यदि आप किसी दुष्ट, ईर्ष्यालु, धोखेबाज या कपटी व्यक्ति (दुर्जन) का घर या उसका साथ छोड़ रहे हैं, तो पूरी सहजता से आगे बढ़ जाएं। चाणक्य कहते हैं कि बुरे लोगों और नकारात्मक परिस्थितियों का साथ जितनी जल्दी और जितनी दृढ़ता से छूट जाए, मनुष्य के भविष्य और मानसिक शांति के लिए उतना ही मंगलकारी होता है।
लखनऊ। हमारे आसपास ऐसे कई लोग होते हैं जो दिन-रात हाड़-तोड़ मेहनत करते हैं, लेकिन फिर भी वे आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं हो पाते। कई बार हमें खुद भी अपनी उम्मीद और काबिलियत के मुताबिक फल नहीं मिलता। क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे का एक बड़ा और मुख्य कारण आपके घर का वास्तु दोष (Vastu Dosh) हो सकता है? वास्तु शास्त्र के प्राचीन जानकारों का मानना है कि मनुष्य के रहने के स्थान यानी घर की ऊर्जा का ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) से बहुत गहरा और सीधा संबंध होता है।यदि घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सही तरीके से नहीं हो रहा है, तो वहां धन के आगमन में लगातार रुकावटें आती हैं और अचानक से बेवजह के खर्चे व कर्ज बढ़ने लगते हैं। अगर आप भी अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर लगातार परेशान हैं और धन संचय करना चाहते हैं, तो वास्तु शास्त्र में बताए गए इन 5 जादुई उपायों को अवश्य आजमाएं। ये उपाय घर की नकारात्मकता को दूर कर सुख, समृद्धि और धन-धान्य के द्वार खोलते हैं।1. उत्तर दिशा को रखें बिल्कुल साफ और हल्कावास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार, घर की उत्तर दिशा (North Direction) के अधिपति धन के देवता कुबेर माने जाते हैं। इसलिए इस दिशा को हमेशा बेहद पवित्र और हल्का रखना चाहिए।भारी सामान से बचें: उत्तर दिशा में भूलकर भी कोई भारी फर्नीचर, कबाड़ या स्टोर रूम (Store Room) न बनाएं।तिजोरी का मुख: अपने घर की मुख्य तिजोरी या कैश बॉक्स को इस तरह स्थापित करें कि उसका दरवाजा खोलते समय मुख हमेशा उत्तर दिशा की ओर रहे। यह उपाय कुबेर देव की कृपा से धन को चुंबक की तरह आकर्षित करता है।2. मुख्य द्वार पर रखें चमकती हुई रोशनीघर का मुख्य द्वार (Main Gate) केवल परिवार के सदस्यों के आने-जाने का रास्ता नहीं होता, बल्कि यह ब्रह्मांडीय सकारात्मक ऊर्जा का मुख्य प्रवेश द्वार भी है। वास्तु के अनुसार, मुख्य द्वार को हमेशा साफ-सुथरा, सुंदर और आकर्षक बनाकर रखना चाहिए। ध्यान रहे कि शाम के समय मुख्य द्वार पर कभी भी अंधेरा न हो। वहां पर्याप्त रोशनी (Bright Lighting) की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि धन की देवी मां लक्ष्मी का आपके घर में सरलता से आगमन हो सके।3. जल का सही प्रबंधन: टपकता नल है कंगाली की निशानीवास्तु विज्ञान में जल (Water Element) को सीधे तौर पर धन के प्रवाह का प्रतीक माना गया है।निकास की दिशा: हमेशा ध्यान रखें कि घर में रसोई या स्नानघर से पानी का निकास केवल उत्तर या पूर्व दिशा की ओर ही होना चाहिए।नल की मरम्मत: यदि आपके घर की रसोई या बाथरूम का कोई नल लगातार टपक रहा है (Leaking Taps), तो उसे तुरंत ठीक करवाएं। वास्तु के अनुसार, पानी का बूंद-बूंद टपकना सीधे तौर पर आपके धन के पानी की तरह बहने और अनावश्यक खर्चों को आमंत्रण देने जैसा है।4. ईशान कोण में कभी न होने दें गंदगीघर के उत्तर-पूर्व हिस्से को ईशान कोण (North-East Corner) कहा जाता है, जिसे देवी-देवताओं का निवास स्थान माना गया है। यह पूरे घर का सबसे पवित्र और संवेदनशील कोना होता है। ईशान कोण में कभी भी गंदगी, कूड़ा-कचरा या झाड़ू-पोछा न रखें। इस कोने में किसी भी तरह का भारी सामान या खराब हो चुके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (कबाड़) रखने से सीधे तौर पर धन के आगमन में बड़ी बाधाएं उत्पन्न होती हैं। इस जगह को हमेशा खुला और स्वच्छ रखें।5. तिजोरी के ठीक सामने लगाएं जादुई आईनाधन वृद्धि के लिए यह एक बेहद प्राचीन और असरदार टोटका माना गया है। अपने घर की अलमारी या तिजोरी के ठीक सामने एक सुंदर सा आईना (Mirror) लगाएं। आईने की पोजीशन ऐसी होनी चाहिए कि जब भी आप तिजोरी खोलें, तो उसमें रखे धन और गहनों का स्पष्ट प्रतिबिंब (Reflection) आईने में दिखाई दे। वास्तु के अनुसार, तिजोरी का बार-बार प्रतिबिंब दिखने से घर में धन और सकारात्मकता दोनों का स्तर तेजी से दोगुना होने लगता है।
लखनऊ। सनातन धर्म (Sanatan Dharma) में पूजा-पाठ, यज्ञ या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के संपन्न होने के बाद दान करने की परंपरा सदियों पुरानी है। दान को केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि एक परम नेक, स्वेच्छा, कृतज्ञता और पूर्ण आध्यात्मिक समर्पण का माध्यम माना गया है। हमारे पवित्र शास्त्रों और पुराणों में स्पष्ट उल्लेख है कि निस्वार्थ भाव से किया गया दान मनुष्य के मन को पावन करता है और मृत्यु के पश्चात आत्मा के लिए मोक्ष (Salvation) का मार्ग प्रशस्त करता है। अत्यंत पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता (Shrimad Bhagavad Gita) में भी कहा गया है कि जो मनुष्य पूर्ण श्रद्धा और विनम्रता के साथ दान करता है, उसके जीवन में कभी सुख-समृद्धि की कमी नहीं होती। अक्सर लोग मंदिरों में जाकर केवल धन या पैसे दान करते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार, मंदिर में नकद राशि चढ़ाने के मुकाबले कुछ विशेष भौतिक और सेवा रूपी चीजों का दान करना कई गुना अधिक प्रभावशाली और महापुण्यदायी माना गया है। आइए जानते हैं उन महादानों के बारे में जिनका सनातन धर्म में सर्वोच्च स्थान है।1. महादान है अन्न का दान (भोजन और अनाज)सनातन परंपरा में अन्नदान (भोजन का दान) को सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली बताया गया है। शास्त्रों में इसे 'दान का सबसे उत्तम रूप' माना गया है। मंदिर में या मंदिर के माध्यम से जरूरतमंदों को चावल, गेहूं, दाल, शुद्ध अनाज या पका हुआ सात्विक भोजन दान करना चाहिए। यह दान न केवल भूखे को शारीरिक पोषण देता है, बल्कि दानवीर को आध्यात्मिक तृप्ति भी प्रदान करता है। मान्यता है कि सच्ची समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा तिजोरी में पैसा रखने से नहीं, बल्कि भूखों को भोजन कराने से आती है।2. वस्त्र दान से दूर होता है अहंकारमंदिरों में वस्त्रों का दान करना बेहद शुभ और मंगलकारी माना गया है। वस्त्र दान (Clothes Donation) को आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टिकोण से आवश्यक माना गया है। इस दान के जरिए समाज के वंचित और जरूरतमंद लोगों का तन सम्मान के साथ ढकता है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार नए या साफ-सुथरे हल्के पुराने कपड़ों का दान करने से मनुष्य के भीतर का अहंकार, अभिमान और झूठे दिखावे की भावना का नाश होता है।3. दीप, तेल या शुद्ध घी का दान: अज्ञानता के अंधकार पर विजयदेव स्थानों और मंदिरों में दीप प्रज्वलन के लिए घी या तेल का दान करने की प्राचीन परंपरा है। दीपक को हमेशा आत्म-जागरूकता, ज्ञान और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। मंदिर में सरसों का तेल, तिल का तेल या गाय का शुद्ध देसी घी दान करने से, और फिर उससे भगवान के सम्मुख अखंड ज्योति या दीपक जलाने से मनुष्य के जीवन से भ्रम, अज्ञानता और सभी प्रकार के नकारात्मक विचार (Negative Energies) पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं।4. गौ सेवा और गौदान: सभी देवी-देवताओं का आशीर्वादसनातन धर्म में गाय (Cow) को पूजनीय और साक्षात देवस्वरूप माना गया है। विशेषकर भगवान श्री कृष्ण और देवाधिदेव महादेव के मंदिरों में गौ पालन का अत्यधिक महत्व होता है। मंदिर की गौशालाओं में गाय का दान करना, या फिर गौ माता के भरण-पोषण के लिए हरा चारा, घास, अनाज और चोकर का दान देना अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि गौ सेवा करने से कुंडली के सभी ग्रह दोष शांत होते हैं और ३३ कोटि देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।5. समय और श्रमदान (सेवा): सबसे शक्तिशाली समर्पणशास्त्रों के अनुसार, धन या किसी भौतिक वस्तु के दान से भी ऊपर 'समय और सेवा का दान' (Shramdaan) आता है, जिसे सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत शक्तिशाली माना गया है। धन और संपत्ति दोबारा अर्जित की जा सकती है, लेकिन बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता। जब कोई व्यक्ति मंदिर के कार्यों में, सफाई में या भक्तों की सुविधा के लिए शारीरिक रूप से सेवा करता है, तो उसके भीतर का 'मैं' यानी अहंकार पूरी तरह विलीन हो जाता है। यह मानसिक शांति और ईश्वर के प्रति सच्चे समर्पण का सबसे उत्तम मार्ग है।
पणजी/लखनऊ। देश के सबसे प्रमुख पर्यटन राज्य गोवा को प्रदूषण मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए गोवा सरकार ने एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत (CM Pramod Sawant) की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में राज्य की नई इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति को मंजूरी देने की तैयारी कर ली गई है। इस नई और बेहद आकर्षक नीति के तहत गोवा में लाइसेंस प्राप्त बाइक टैक्सी (जिन्हें स्थानीय स्तर पर पायलट कहा जाता है) और ऑटो-रिक्शा चालकों को नए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर 50 प्रतिशत तक की बंपर सब्सिडी देने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य में पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना, कार्बन उत्सर्जन को घटाना और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े चालकों की दैनिक परिचालन लागत को आधा करना है।इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव: राज्य भर में स्थापित होंगे 70 नए EV चार्जिंग स्टेशनगोवा सरकार भली-भांति जानती है कि बिना मजबूत बुनियादी ढांचे के इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार संभव नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने राज्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मजबूत करने के लिए 70 नए अत्याधुनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन (EV Charging Stations) स्थापित करने की एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इन नए चार्जिंग स्टेशनों के नेटवर्क से न केवल स्थानीय नागरिकों बल्कि गोवा आने वाले लाखों पर्यटकों के बीच भी इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर भरोसा बढ़ेगा। चार्जिंग की सुलभ व्यवस्था होने से तटीय इलाकों और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहन चालकों को बैटरी खत्म होने की चिंता से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।बाइक टैक्सी और ऑटो चालकों पर ही क्यों है सरकार का विशेष फोकस?पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था वाले गोवा में रोजाना लाखों लोग बाइक टैक्सी और ऑटो-रिक्शा के जरिए सफर करते हैं। ये कमर्शियल चालक प्रतिदिन औसतन 100 से 150 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं, जिसके कारण उनकी कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा महंगे पेट्रोल और डीजल पर खर्च हो जाता है। सरकार का मानना है कि यदि इस वर्ग को इलेक्ट्रिक वाहनों पर शिफ्ट कर दिया जाए, तो उनकी दैनिक ईंधन लागत (Fuel Cost) में 80% तक की भारी कमी आएगी। यही कारण है कि नई नीति में सबसे पहले और सबसे ज्यादा सब्सिडी का लाभ इन्हीं वर्गों को देने का खाका खींचा गया है, ताकि उनकी शुद्ध मासिक आय में वृद्धि हो सके और राज्य में 'हरित परिवहन' (Green Transport) की शुरुआत हो।पुरानी नीति का विस्तार: पर्यावरण और पर्यटन दोनों को मिलेगा डबल बूस्टगोवा में पहले से ही इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर विभिन्न प्रकार के वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाते रहे हैं। अब सरकार नई नीति के माध्यम से सब्सिडी के ढांचे को और अधिक सुगम, पारदर्शी और आकर्षक बनाना चाहती है ताकि आम जनता भी ईवी अपनाने के लिए प्रेरित हो सके। ऑटोमोबाइल और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के इस बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से गोवा के पर्यावरण को संजीवनी मिलेगी। आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम होने से देश की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा और परिवहन क्षेत्र पूरी तरह टिकाऊ (Sustainable) बनेगा। यदि गोवा सरकार की यह 50% सब्सिडी योजना जमीनी स्तर पर सफल रहती है, तो गोवा सार्वजनिक परिवहन में शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने वाला देश का अग्रणी राज्य बन जाएगा, जिससे यहां की पर्यटन छवि को वैश्विक स्तर पर एक नया चार चांद लगेगा।
नई दिल्ली/लखनऊ। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने देश भर के नियोक्ताओं (Employers) और कंपनियों को एक बहुत बड़ी व्यावसायिक राहत देते हुए एक विशेष एकमुश्त विवाद निपटान (One-Time Dispute Resolution) योजना की घोषणा की है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour & Employment) के तत्वावधान में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना का नाम ‘VISHWAS 2026’ (विवाद से विश्वास योजना) रखा गया है। यह योजना मुख्य रूप से उन नियोक्ताओं को ध्यान में रखकर लाई गई है, जिनके ईपीएफ (EPF) अंशदान में देरी के कारण भारी-भरकम पेनाल्टी या हर्जाने (Damages) के मामले सालों से विभिन्न अदालतों या ईपीएफओ के आंतरिक मंचों पर लंबित पड़े हैं। यह विशेष राहत योजना 29 जून से आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है और अगले छह महीनों तक प्रभावी रहेगी। इस निर्धारित अवधि के भीतर पात्र नियोक्ता पूरी तरह डिजिटल माध्यम से अपने मुकदमों का निपटारा कर सकेंगे।इन सभी लंबित और नए मामलों को मिलेगा 'विश्वास' का सीधा लाभEPFO द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, VISHWAS 2026 योजना का दायरा काफी व्यापक रखा गया है ताकि अधिक से अधिक कारोबारी इसका लाभ उठा सकें। इसके तहत निम्नलिखित मामलों को कवर किया जाएगा:न्यायिक मामले: जिन मामलों में विभाग द्वारा लगाए गए जुर्माने या हर्जाने के आदेश को नियोक्ताओं ने माननीय अदालतों, ट्रिब्यूनल या अन्य किसी न्यायिक मंच पर चुनौती दे रखी है।अधूरी रिकवरी: ऐसे मामले जहां अंतिम आदेश तो जारी हो चुका है, लेकिन ईपीएफओ द्वारा जुर्माने की वसूली अभी पूरी नहीं की जा सकी है या केवल आंशिक वसूली ही हो पाई है।रिकवरी सर्टिफिकेट (RRC): जिन मामलों में विभाग की ओर से रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया जा चुका है।अंडर-प्रोसेस और नए मामले: ऐसे विवाद जिनमें नियोक्ताओं को नोटिस मिल चुका है लेकिन अंतिम फैसला आना बाकी है, या फिर जिनमें अभी तक औपचारिक नोटिस जारी भी नहीं हुआ है, वे भी तय शर्तों के अधीन आवेदन कर सकेंगे।जुर्माने की दरों में बंपर कटौती, बेहद कम दरों पर दोबारा तय होगी पेनाल्टीइस योजना का सबसे आकर्षक पहलू यह है कि ईपीएफओ ने नियोक्ताओं के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए पेनाल्टी की गणना प्रक्रिया में भारी ढील दी है। विभाग के अनुसार, 14 जून 2024 से पहले की गई किसी भी प्रकार की वित्तीय चूक (Default) से जुड़े मामलों में पेनाल्टी और हर्जाने की राशि को बेहद रियायती दरों पर दोबारा आंका जाएगा:2 महीने तक की देरी पर: मात्र 0.25% प्रति माह की दर से हर्जाना।2 से 4 महीने तक की देरी पर: केवल 0.50% प्रति माह की दर से जुर्माना।4 महीने से अधिक की देरी पर: अधिकतम 1% प्रति माह की दर से पेनाल्टी तय की जाएगी।सरकार का मानना है कि इन रियायती दरों के कारण कंपनियां स्वेच्छा से आगे आएंगी, जिससे पुराने विवाद चुटकियों में सुलझेंगे और कॉरपोरेट मुकदमों की संख्या में भारी गिरावट आएगी।योजना का लाभ उठाने के लिए नियोक्ताओं को पूरी करनी होंगी ये 2 शर्तेंVISHWAS 2026 योजना के तहत अपने मुकदमों को बंद कराने के लिए नियोक्ताओं को आवेदन करने से पहले दो मुख्य वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करनी अनिवार्य होंगी:पूरा ब्याज जमा करना: नियोक्ताओं को सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित कर्मचारी भविष्य निधि योजना के तहत देय मूल योगदान पर जितना भी संचित ब्याज (Interest) बनता है, वह ईपीएफओ के खाते में पूरी तरह जमा करा दिया गया हो।अपील वापस लेने का घोषणापत्र: आवेदन पत्र के साथ नियोक्ताओं को एक लिखित और आधिकारिक घोषणापत्र (Undertaking) देना होगा। इसमें साफ तौर पर लिखा होना चाहिए कि इस योजना के तहत जिस विवाद का एक बार अंतिम निपटारा हो जाएगा, उसके खिलाफ नियोक्ता भविष्य में किसी भी दीवानी अदालत, हाई कोर्ट या अन्य कानूनी मंच पर दोबारा कोई अपील या याचिका दायर नहीं करेंगे।डिजिटल प्रक्रिया से नियोक्ताओं और EPFO दोनों की चमकेगी किस्मतबाजार के श्रम कानून विशेषज्ञों (Labour Law Experts) का मानना है कि यह दूरदर्शी योजना कंपनियों को वर्षों पुराने मानसिक और वित्तीय तनाव से मुक्ति दिलाएगी, जिससे वे अपने मुख्य व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। दूसरी ओर, ईपीएफओ को भी भारी-भरकम प्रशासनिक खर्च और अदालती चक्करों से आजादी मिलेगी, जिससे लंबित मामलों का तेजी से निपटारा संभव होगा। चूंकि यह पूरी विवाद निवारण प्रक्रिया 100% पेपरलेस और डिजिटल (Online Portal) रखी गई है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार की गुंजाइश नहीं होगी और पारदर्शिता के साथ समय की भी भारी बचत होगी। कुल मिलाकर, VISHWAS 2026 को भारतीय उद्योग जगत और नियामक संस्था दोनों के लिए एक शानदार 'विन-विन' (Win-Win) पहल माना जा रहा है।
नई दिल्ली/लखनऊ। भारतीय बैंकिंग और करेंसी सिस्टम में जल्द ही एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में 10 रुपये और 20 रुपये के नए प्लास्टिक (पॉलीमर) नोटों को चलन में लाने की तैयारियां काफी तेज कर दी हैं। इसके लिए बकायदा एक पायलट प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है और आरबीआई की करेंसी छापने वाली सब्सिडियरी कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने इसके खास मटीरियल (सब्सट्रेट) की खरीद के लिए ग्लोबल टेंडर भी जारी कर दिया है। इस बड़ी खबर के सामने आते ही आम जनता के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं कि क्या पुराने कागजी नोट बंद हो जाएंगे? इन प्लास्टिक नोटों से देश का कितना पैसा बचेगा? आइए इन सभी जरूरी और महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं।क्यों पड़ी प्लास्टिक नोटों की जरूरत? छपाई खर्च और गंदे नोटों का बढ़ता अंबारडिजिटल पेमेंट और यूपीआई के रिकॉर्ड विस्तार के बावजूद देश में नकदी (Cash) की मांग लगातार बढ़ रही है। मई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में चलन में मौजूद कुल नकदी रिकॉर्ड 42.86 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है। नकदी के इस भारी इस्तेमाल के कारण नोटों की छपाई की लागत भी लगातार बढ़ रही है। साल 2024-25 में आरबीआई ने नोट छपाई पर करीब ₹6,373 करोड़ खर्च किए थे, जो हालांकि वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर ₹4,875 करोड़ रह गए।छपाई खर्च के अलावा दूसरी सबसे बड़ी समस्या गंदे और फटे नोटों को नष्ट करने की है। वित्त वर्ष 2025 में करीब 2,380 करोड़ गंदे-फटे नोट नष्ट किए गए। इन्हीं भारी-भरकम खर्चों और नोटों की कम उम्र की समस्या से निपटने के लिए आरबीआई ने अब पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोटों का रुख किया है, जो लंबे समय में बेहद सस्ते और टिकाऊ साबित होते हैं।प्लास्टिक नोटों की 5 सबसे बड़ी खासियतें: क्यों हैं ये कागज से बेहतर?लंबी उम्र (High Durability): पॉलीमर नोट एक विशेष प्रकार की प्लास्टिक शीट से बनते हैं, जिसके कारण ये सामान्य कागजी नोटों की तुलना में ढाई से चार गुना अधिक समय तक सुरक्षित और चालू हालत में रहते हैं।वॉटरप्रूफ और टियरप्रूफ: ये नोट पानी में भीगने से गलते नहीं हैं और इन्हें आसानी से फाड़ा भी नहीं जा सकता। इन पर धूल, मिट्टी और गंदगी भी बहुत कम चिपकती है।बैक्टीरिया मुक्त: कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में यह प्रमाणित हो चुका है कि कागज के मुकाबले प्लास्टिक नोटों की सतह पर संक्रामक बैक्टीरिया और वायरस बहुत कम समय तक टिक पाते हैं।हाई सिक्योरिटी फीचर्स: इन नोटों में एक पारदर्शी खिड़की (Transparent Window) और अत्याधुनिक सुरक्षा धागे दिए जाते हैं, जिनकी हूबहू नकल करना या नकली (Fake Currency) नोट बनाना नामुमकिन के बराबर होता है।ATM फ्रेंडली: भविष्य में देश की सभी एटीएम (ATM) मशीनों को इन नए प्लास्टिक नोटों को आसानी से डिस्पेंस (बाहर निकालने) करने के लिए तकनीकी रूप से अपग्रेड किया जाएगा।दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में सफल है मॉडल, ओमान भी लिस्ट में शामिलप्लास्टिक करेंसी अपनाने के मामले में भारत कोई पहला देश नहीं है, बल्कि दुनिया के 60 से अधिक देश इसका सफल इस्तेमाल कर रहे हैं:पूरी तरह अपनाने वाले देश: साल 1988 में ऑस्ट्रेलिया 10 डॉलर का प्लास्टिक नोट जारी करने वाला दुनिया का पहला देश बना था। इसके बाद कनाडा, न्यूजीलैंड, वियतनाम, यूनाइटेड किंगडम (UK), मालदीव और बारबाडोस जैसे देशों ने अपनी करेंसी को पूरी तरह पॉलीमर में बदल दिया। हाल ही में साल 2026 में ओमान ने भी अपना 1-रियाल का नोट पॉलीमर में जारी कर इस सूची में अपनी जगह बनाई है।आंशिक रूप से अपनाने वाले देश: सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, चीन, श्रीलंका, नेपाल, यूएई, सऊदी अरब और इजराइल जैसे देश कुछ चुनिंदा मूल्यवर्ग के नोटों के लिए प्लास्टिक का इस्तेमाल कर रहे हैं।बड़ा सवाल: क्या बंद हो जाएंगे पुराने कागज के नोट? गवर्नर का बयानआम जनता के बीच फैल रही अफवाहों पर विराम लगाते हुए आरबीआई ने पूरी तरह स्पष्ट किया है कि बाजार में मौजूद पुराने कागजी नोट बिल्कुल भी बंद नहीं होंगे और वे पहले की तरह ही कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य (Legal Tender) बने रहेंगे। चूंकि यह अभी सिर्फ एक पायलट प्रोजेक्ट है, इसलिए केंद्रीय बैंक पहले इसके सीमित ट्रायल के नतीजों और व्यावहारिकताओं का गहन अध्ययन करेगा।खुद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जून 2026 की हालिया मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ शब्दों में कहा, पॉलीमर नोटों को पेश करने का प्रस्ताव अभी पूरी तरह विचाराधीन है। केंद्रीय बैंक इसके सभी तकनीकी पहलुओं और नफे-नुकसान का आकलन कर रहा है और इस पर अभी कोई अंतिम मुहर नहीं लगी है।कब तक आपके हाथों में आएंगे ये नए नोट? जानिए संभावित तारीखभारत में प्लास्टिक नोटों का यह विचार नया नहीं है। इससे पहले साल 2012 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने देश के पांच प्रमुख शहरों—कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर में 10 रुपये के 100 करोड़ पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल करने की योजना बनाई थी, लेकिन कुछ तकनीकी अड़चनों के कारण वह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया था। अब करीब 14 साल बाद आरबीआई ने इसे दोबारा अमलीजामा पहनाया है। मीडिया रिपोर्ट्स और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह टेंडर प्रक्रिया और शुरुआती ट्रायल पूरी तरह सफल रहता है, तो साल 2027 से इन प्लास्टिक नोटों का फुल-स्केल रोलआउट (व्यापक चलन) पूरे देश के बाजारों में शुरू हो सकता है।
नई दिल्ली/लखनऊ। देश की राजधानी दिल्ली को लेकर एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाली वैश्विक रिपोर्ट सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के रहन-सहन की लागत को लेकर नई बहस छेड़ दी है। डॉयचे बैंक (Deutsche Bank) की प्रतिष्ठित ‘मैपिंग द वर्ल्ड्स प्राइसेज़ 2026’ रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली को दुनिया के प्रमुख महानगरों में सबसे किफायती और सस्ते शहरों में गिना गया है। रिपोर्ट के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो डेट पर जाने, ब्रॉडबैंड इंटरनेट का इस्तेमाल करने और नया घर (Property) खरीदने के लिहाज से दिल्ली दुनिया के 69 बड़े शहरों में सबसे सस्ती जगहों में शामिल है। हालांकि, इस सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि दिल्ली में औसत मासिक वेतन (Average Salary) दुनिया के अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में बेहद कम है। यानी दिल्ली में रहने का खर्च भले ही कम हो, लेकिन लोगों की कमाई भी अपेक्षाकृत कम होने से उनकी वास्तविक क्रय शक्ति (Purchasing Power) प्रभावित हो रही है।डेटिंग और हाई-स्पीड इंटरनेट पर सबसे कम खर्च, युवाओं की मौजडॉयचे बैंक की इस व्यापक रिपोर्ट में दुनिया भर के 69 बड़े वैश्विक शहरों की तुलनात्मक समीक्षा की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में एक सामान्य वीकेंड डेट (Romantic Date) पर होने वाला औसतन खर्च पूरी दुनिया के प्रमुख शहरों में सबसे न्यूनतम स्तर पर है। इसके साथ ही, भारत में मिलने वाले ब्रॉडबैंड इंटरनेट (Broadband Internet) की मासिक लागत भी दुनिया के सबसे सस्ते इंटरनेट वाले देशों की सूची में शीर्ष पर है। यह डेटा साफ तौर पर दर्शाता है कि रोजमर्रा की कई डिजिटल और मनोरंजन सेवाएं दिल्ली में न्यूयॉर्क, लंदन या पेरिस जैसे अंतरराष्ट्रीय शहरों की तुलना में कौड़ियों के भाव उपलब्ध हैं।न्यूयॉर्क और लंदन से बहुत सस्ता है दिल्ली में आशियाना बनानावैश्विक रियल एस्टेट (Real Estate) के मोर्चे पर भी दिल्ली ने विकसित देशों के मुकाबले बाजी मारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में रहने के लिए घर या फ्लैट खरीदने की लागत न्यूयॉर्क, लंदन, सिंगापुर, हांगकांग और ज्यूरिख जैसे महंगे शहरों की तुलना में काफी कम और पॉकेट-फ्रेंडली है। हालांकि, रियल एस्टेट विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के प्रमुख इलाकों में आवासीय संपत्तियों की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई है, इसके बावजूद वैश्विक मानकों पर यह शहर अब भी एक मिडिल क्लास फैमिली के लिए अपेक्षाकृत किफायती बना हुआ है। यही वजह है कि पहली बार घर खरीदने वाले (First-time Homebuyers) नौकरीपेशा लोगों के लिए दिल्ली आज भी एक बड़ा आकर्षण है।कम सैलरी बनी सबसे बड़ी चुनौती, सेविंग्स और निवेश पर असरसस्ती जीवन-यापन लागत (Cost of Living) के बीच रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक हिस्सा यहां के कामकाजी लोगों की आय से जुड़ा है। दिल्ली में काम करने वाले प्रोफेशनल्स का औसत मासिक वेतन दुनिया के बड़े विकसित शहरों की तुलना में काफी नीचे है। कम आय के कारण यहां रहने वाले लोगों की बचत (Savings) और भविष्य के लिए निवेश करने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होती है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्रगतिशील शहर की वास्तविक वित्तीय स्थिति का आकलन केवल कम कीमतों और सस्ते सामानों से नहीं किया जा सकता। टिकाऊ विकास के लिए नागरिकों की आय और उनके खर्च के बीच एक स्वस्थ संतुलन होना अनिवार्य है, जिसकी दिल्ली में फिलहाल कमी दिखती है।ट्रैफिक, प्रदूषण और लो-सैलरी से जीवन की गुणवत्ता प्रभावितरिपोर्ट में इस बात की ओर भी कड़ा संकेत दिया गया है कि बेहतर जीवन स्तर या जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) केवल सस्ती वस्तुओं या सेवाओं पर निर्भर नहीं करती। एक खुशहाल जीवन के लिए विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं, सुलभ सार्वजनिक परिवहन, स्वच्छ वातावरण, रोजगार के बेहतरीन अवसर और सम्मानजनक आय का स्तर सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दिल्ली में रहने की लागत भले ही कम हो, लेकिन भयंकर वायु प्रदूषण (Air Pollution), अंतहीन ट्रैफिक जाम और वैश्विक मानकों से कम वेतन जैसी गंभीर चुनौतियां यहां के नागरिकों के जीवन स्तर को लगातार प्रभावित कर रही हैं।क्या कहते हैं अर्थशास्त्री? भविष्य की राह और सुधारबाजार के बड़े अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दिल्ली की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत इसकी कम जीवन-यापन लागत है, जो नए स्टार्टअप्स और छोटे व्यवसायों को फलने-फूलने का मौका देती है। लेकिन, यदि आने वाले समय में कंपनियों द्वारा कर्मचारियों की आय में समान अनुपात में वृद्धि नहीं की जाती है, तो इस सस्तेपन का लाभ सीमित रह जाएगा। आने वाले वर्षों में यदि रोजगार के नए अवसर, बेहतर वेतनमान और बुनियादी ढांचों (Infrastructure) में तेजी से सुधार किया जाए, तो दिल्ली वैश्विक स्तर पर रहने और काम करने (Live and Work) के लिए दुनिया का सबसे आकर्षक और पसंदीदा शहर बन सकता है। फिलहाल यह रिपोर्ट देश की राजधानी की उस हकीकत को बयां करती है, जहां कम खर्च और कम आय दोनों एक साथ समानांतर रूप से चल रहे हैं।
नई दिल्ली/लखनऊ। भारत में डिजिटल क्रांति की रीढ़ बन चुका यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) आज देश के करोड़ों नागरिकों की दैनिक आदत बन चुका है। सब्जी की दुकान से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक यूपीआई के जरिए बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के लेनदेन किया जाता है। लेकिन, अब इस व्यवस्था को लेकर वित्तीय गलियारों में एक नई और बड़ी बहस छिड़ गई है। यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) यानी प्रोसेसिंग फीस लगाने की चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह नहीं है कि डिजिटल पेमेंट कंपनियों की कमाई कैसे होगी, बल्कि असली चिंता यह है कि इस नए एमडीआर (MDR) चार्ज का अंतिम वित्तीय बोझ आखिर कौन उठाएगा? यदि यह अतिरिक्त लागत छोटे व्यापारियों पर थोपी गई, तो इसका सीधा और नकारात्मक असर आम ग्राहकों, किराना दुकानों और देश में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम पर पड़ना तय है।क्या है UPI पर लगने वाला MDR चार्ज और व्यापारियों की चिंता?सरल और तकनीकी भाषा में समझें तो यूपीआई पर एमडीआर (MDR) वह विशेष प्रोसेसिंग फीस होती है, जो किसी भी डिजिटल भुगतान को सुरक्षित तरीके से पूरा करने के बदले बैंकों और पेमेंट गेटवे कंपनियों द्वारा व्यापारियों (Merchants) से वसूली जाती है। बैंकिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि बुनियादी ढांचे को बनाए रखने वाले बैंक और वित्तीय कंपनियां इस भारी-भरकम खर्च को लंबे समय तक मुफ्त में खुद वहन नहीं करेंगी। ऐसे में यह अतिरिक्त वित्तीय बोझ सीधे तौर पर कारोबारियों के खातों पर आ सकता है। जानकारों का कहना है कि शुरुआत में बाजार में टिके रहने के लिए कई बड़े व्यापारी इस खर्च को खुद झेल सकते हैं, लेकिन छोटे और मध्यम दर्जे के कारोबारियों के लिए लंबे समय तक इस चार्ज को अपनी जेब से देना मुमकिन नहीं होगा।आम ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा डाका: महंगी हो सकती हैं सेवाएंयदि यूपीआई पर एमडीआर (MDR) लागू होता है, तो आम उपभोक्ताओं को मिलने वाली रियायतें पूरी तरह खत्म हो सकती हैं:कीमतों में बढ़ोतरी: छोटे और खुदरा कारोबारी अपने बढ़े हुए परिचालन खर्च (Operational Cost) की भरपाई करने के लिए सामानों और दैनिक सेवाओं की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी कर सकते हैं।ऑफर्स और डिस्काउंट का खात्मा: डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों और मर्चेंट्स द्वारा ग्राहकों को दिए जाने वाले कैशबैक, ऑफर्स और डिस्काउंट में भारी कटौती की जा सकती है।छोटे लेनदेन पर संकट: सबसे ज्यादा विपरीत असर गली-मोहल्लों की किराना दुकानों, चाय के स्टालों और रेहड़ी-पटरी वालों पर पड़ेगा, जिन्होंने हाल के वर्षों में नकद छोड़कर यूपीआई क्यूआर कोड को अपनाया है। बहुत कम राशि (जैसे ₹10 या ₹20) के लेनदेन पर भी यदि एमडीआर वसूला गया, तो छोटे दुकानदार डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने से पूरी तरह तौबा कर सकते हैं।डिजिटल इंडिया की रफ्तार पर लग सकता है ब्रेक, समाधान की तलाशबाजार विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यदि दुकानदारों ने यूपीआई से पेमेंट लेना बंद कर दिया या फिर उन्होंने डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों से अतिरिक्त दो फीसदी चार्ज वसूलना शुरू कर दिया, तो आम जनता का डिजिटल पेमेंट के प्रति उत्साह तेजी से घट सकता है। ऐसी स्थिति में लोग एक बार फिर कैश (नकद लेनदेन) की तरफ लौट सकते हैं, जिससे देश में कैशलेस इकोनॉमी बनाने की रफ्तार पर ब्रेक लग जाएगा। एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि यूपीआई सिर्फ एक साधारण पेमेंट गेटवे नहीं है, बल्कि यह भारत का एक वैश्विक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) है। इसलिए सरकार और केंद्रीय बैंक को मिलकर एक ऐसा संतुलित समाधान निकालना होगा, जिससे बैंकों को नई तकनीक में निवेश का मौका भी मिलता रहे और आम जनता व छोटे व्यापारियों पर कोई नया आर्थिक बोझ भी न पड़े।
नई दिल्ली/लखनऊ। यदि इस सप्ताह आपका बैंक की शाखा (Bank Branch) से जुड़ा कोई भी अत्यंत जरूरी काम है, जैसे चेक जमा करना, नया ड्राफ्ट बनवाना या पासबुक अपडेट कराना, तो घर से बाहर कदम रखने से पहले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा जारी छुट्टियों की ताजा सूची जरूर देख लें। आरबीआई के आधिकारिक अवकाश कैलेंडर के अनुसार, इस सप्ताह देश के अलग-अलग राज्यों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) सहित सभी सरकारी व निजी बैंक अधिकतम तीन दिनों तक बंद रह सकते हैं। ऐसे में डिजिटल बैंकिंग का उपयोग कर आप किसी भी संभावित परेशानी से बच सकते हैं।खारची पूजा और चौथे शनिवार के कारण तीन दिन का अवकाशहॉलिडे शेड्यूल के मुताबिक, आज 19 जुलाई 2026 (रविवार) को साप्ताहिक अवकाश के चलते पूरे देश में सार्वजनिक लेन-देन पूरी तरह बंद है। इसके बाद इस सप्ताह के मध्य में यानी 22 जुलाई (बुधवार) को त्रिपुरा (अगरतला) में खारची पूजा (Kharchi Puja) के पावन अवसर पर क्षेत्रीय स्तर पर बैंकों में अवकाश घोषित किया गया है। वहीं, सप्ताह के अंत में 25 जुलाई को महीने का चौथा शनिवार (Fourth Saturday) होने के कारण देश के सभी राज्यों में बैंक शाखाएं पूरी तरह बंद रहेंगी। इसका मतलब यह है कि त्रिपुरा जैसे राज्यों में इस सप्ताह बैंकों में कुल तीन दिन कामकाज नहीं होगा, जबकि देश के अन्य हिस्सों में दो दिन (रविवार और चौथा शनिवार) बैंक बंद रहेंगे।शाखाएं बंद रहने पर भी चालू रहेंगी ये सभी डिजिटल बैंकिंग सेवाएंराहत की बात यह है कि बैंक शाखाओं के भौतिक रूप से बंद रहने के बावजूद ग्राहकों के लिए वित्तीय और गैर-वित्तीय सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी। डिजिटल इंडिया के दौर में निम्नलिखित सुविधाएं 24 घंटे काम करती रहेंगी:ऑनलाइन ट्रांजैक्शन: ग्राहक पहले की तरह ही यूपीआई (UPI), इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के जरिए किसी को भी पैसे भेज सकते हैं।एटीएम और बिल भुगतान: नकद निकासी के लिए सभी एटीएम (ATM) सामान्य रूप से चालू रहेंगे। इसके साथ ही ऑनलाइन बिल भरना, बैलेंस चेक करना और मर्चेंट पेमेंट की सुविधाएं निर्बाध रूप से उपलब्ध रहेंगी।मेंटेनेंस अलर्ट: हालांकि, कभी-कभी बैंकों द्वारा सिस्टम मेंटेनेंस या सर्वर अपग्रेडेशन के कारण कुछ डिजिटल सेवाएं थोड़े समय के लिए बाधित हो सकती हैं, जिसकी अग्रिम सूचना बैंक अपने ग्राहकों को एसएमएस या ईमेल के माध्यम से पहले ही दे देते हैं।जानिए अगले सप्ताह का शेड्यूल और बैंकों का टाइमिंगआरबीआई नियमों के तहत हर महीने के दूसरे व चौथे शनिवार और सभी रविवार को बैंक बंद रखे जाते हैं। राहत की बात यह है कि इस सप्ताह के बाद यानी 26 जुलाई (रविवार) को छोड़कर 1 अगस्त 2026 तक किसी भी राज्य में कोई विशेष या क्षेत्रीय अवकाश निर्धारित नहीं है, जिससे अगले पूरे हफ्ते कामकाज सामान्य रहेगा। सामान्य दिनों में ग्राहकों के लेन-देन के लिए बैंकों का समय सुबह 10:00 बजे से दोपहर बाद 4:00 बजे तक निर्धारित होता है, हालांकि स्थानीय नियमों के अनुसार कुछ शाखाओं के समय में आंशिक बदलाव संभव है। उपभोक्ताओं को असुविधा से बचने के लिए अपने सभी जरूरी काम इन छुट्टियों से पहले या बाद में निपटाने की सलाह दी जाती है।
देशभर में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। जम्मू-कश्मीर से लेकर छत्तीसगढ़ और उत्तर भारत के कई राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों के लिए कई राज्यों में भारी बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की ...
CM मोहन यादव का 'डेस्टिनेशन कैबिनेट' विजन विकास को दे रहा नई दिशा, जनता को ला रहा करीब
Chief Minister Dr. Mohan Yadav : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शासन की पारंपरिक शैली और विकास को अपने विजन से नई दिशा दी है। राजधानी भोपाल के वल्लभ भवन से बाहर निकलकर प्रदेश के विभिन्न शहरों, ऐतिहासिक स्थलों और पिछड़े क्षेत्रों में ...
CM योगी ने जापान के उदाहरण के साथ बच्चों को दिया आत्म अनुशासन व परिश्रम का मंत्र
Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को आत्म अनुशासन, परिश्रम का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि अनुशासन ही जीवन का सबसे बड़ा मंत्र है। आगे वही बढ़ा है और इतिहास भी उसी ने बनाया है, जो ...
सूरत : केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी आज मांडवी के दौरे पर
केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्षभाई संघवी आज सूरत जिले के मांडवी का दौरा कर रहे हैं। अपने दौरे के दौरान वे कोसंबा में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होंगे। मांडवी के कोसंबा में ‘अपना घर आश्रम’ का उद्घाटन किया ...
लखनऊ/गुरुग्राम। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और दिल्ली-एनसीआर के गुरुग्राम में स्थित प्रतिष्ठित मेदांता अस्पताल (Medanta Hospital) एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है। एक पीड़ित मरीज के उपचार में हुई भयंकर लापरवाही (Medical Negligence) और अस्पताल प्रबंधन द्वारा की जा रही कथित आर्थिक उगाही का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि डॉक्टरों ने इलाज के दौरान घोर लापरवाही बरतते हुए वास्तविक घाव वाले स्थान को छोड़कर उससे करीब 6 सेंटीमीटर दूर सर्जरी कर दी। इस गलत ऑपरेशन के कारण मरीज के घाव से लगातार मवाद (Pus) बह रहा है और उसकी हालत लगातार गंभीर बनी हुई है। इस मामले में संज्ञान लेते हुए माननीय मुख्यमंत्री जी ने डॉक्टरों की मनमानी के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार करते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।घाव कहीं और, ऑपरेशन कहीं और: डॉक्टरों पर अनदेखी का आरोपमरीज के परिजनों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, मेदांता के डॉक्टरों को जब प्रभावित हिस्से से लगातार बहते मवाद को दिखाया गया, तो उन्होंने उसे पूरी तरह इग्नोर कर दिया और 'बाद में देखने' की बात कहकर टालते रहे। जब पीड़ित परिवार ने इस गंभीर लापरवाही की लिखित शिकायत मेल के माध्यम से गुरुग्राम और लखनऊ के आला अधिकारियों व शीर्ष प्रबंधन से की, तो लंबे समय तक उनके कान पर जूं तक नहीं रेंगी। काफी दबाव के बाद अस्पताल प्रशासन ने एक बोर्ड मीटिंग बुलाई, जिसमें डॉक्टरों ने अपनी तकनीकी गलती स्वीकार करने के बजाय तीमारदारों के सामने अपने पद और रसूख की धौंस दिखाना शुरू कर दिया।सरकारी नौकरी छोड़ प्राइवेट में आने की धौंस और बिलिंग का खेलबोर्ड मीटिंग के दौरान मेदांता के वरिष्ठ डॉक्टर अमित अग्रवाल ने कथित तौर पर यह दलील दी कि वे पीजीआई (PGI) की 5 साल की सरकारी नौकरी छोड़कर यहां आए हैं। वहीं, डॉ. उमा प्रधान ने भी डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (RML) की प्रतिष्ठित जॉब छोड़ने का हवाला दिया। पीड़ित पक्ष का सवाल है कि यदि डॉक्टर यहां केवल इलाज करने आए हैं, तो वे अपनी कमियों को छुपाने के लिए फाइलों में हेरफेर और लगातार बिल पर बिल क्यों बनाए जा रहे हैं? परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा डॉक्टरों को हर महीने एक निश्चित वित्तीय राशि का टारगेट दिया जाता है, जिसे पूरा करने के लिए मरीजों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। डॉक्टरों ने इस बीमारी के लिए डेढ़ से दो साल तक लगातार महंगी ड्रेसिंग कराने की बात कही है, जिसका भारी-भरकम बजट एक मध्यमवर्गीय या गरीब परिवार के पूरी तरह बाहर है।मुख्यमंत्री के जांच आदेश और सेकंड ओपिनियन में खुली पोलइस मामले के तूल पकड़ने के बाद मेदांता के चिकित्सा निदेशक डॉ. राकेश कपूर ने पीड़ित परिवार को किसी अन्य बाहरी डॉक्टर से सेकंड ओपिनियन (Second Opinion) लेने की सलाह दी थी। इसके बाद जब परिजनों ने अन्य विशेषज्ञ सर्जनों से परामर्श किया, तो डॉक्टरों ने साफ कर दिया कि इलाज पूरी तरह गलत हुआ है। चिकित्सा नियमों के अनुसार उपचार घाव वाली जगह पर ही होना चाहिए था, न कि उससे दूर। बाहरी डॉक्टरों ने मरीज की जान बचाने के लिए इस गलत सर्जरी को दोबारा ऑपरेट (Re-operate) करने की जरूरत बताई है। अस्पताल के इस रवैये और पुख्ता सबूतों के आधार पर माननीय मुख्यमंत्री जी ने जांच के कड़े निर्देश दिए हैं, जिससे अब दूध का दूध और पानी का पानी होने की उम्मीद है।
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान तबीयत खराब होने लगी है। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि वांगचुक में डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) के लक्षण दिखाई दे रहे हैं और गंभीर स्वास्थ्य ...
आबूरोड जैसे ही सिरोही के प्रकरण में दस लोगों के खिलाफ चार्जशीट पेश
सबगुरु न्यूज-सिरोही। जून के महीने में आबूरोड में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल हुई थी। इस हड़ताल में के दौरान फर्जी नियुक्ति का मामला भी उठा था। इसी तरह का एक मामला 12 साल पहले सिरोही नगर पालिका में हुआ था। इस प्रकरण का खुलासा होने पर कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा जोरशोर से उठाया था। विधानसभा […] The post आबूरोड जैसे ही सिरोही के प्रकरण में दस लोगों के खिलाफ चार्जशीट पेश appeared first on Sabguru News .
भाजपा मुद्दों से ध्यान भटकाने की राजनीति कर रही, आजम खान को न्याय मिलेगा: सपा प्रवक्ता अमीक जामेई
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमीक जामेई ने विभिन्न राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर भाजपा और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा
झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ की कोबरा-209 बटालियन को बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त कार्रवाई में प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के स्पेशल एरिया कमेटी (एसएसी) के शीर्ष कमांडर और 25 लाख रुपए के इनामी नक्सली अजय महतो उर्फ मोछू उर्फ टाइगर को गिरफ्तार किया गया है।
उद्धव ठाकरे को लगा सबसे बड़ा झटका, लोकसभा स्पीकर ने 6 बागी सांसदों के शिवसेना में विलय को दी मंजूरी
20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा झटका लगा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्धव ठाकरे गुट के छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय को औपचारिक मंजूरी दे दी है।
भारत में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यहां की संस्कृति और परंपरा का सम्मान करना होगा: सीएम योगी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभल में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि भारत में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यहां की संस्कृति और परंपरा का सम्मान करना होगा। उन्होंने कहा कि जो लोग आज भी अपने आपको बाबर की संतान समझते हैं, उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि नया भारत न तो गुलामी की मानसिकता में जीने वाला है और न ही उसे स्वीकार करने वाला है।
बाबा अमरनाथ और वैष्णोदेवी यात्रा पर लगा ब्रेक, अगले आदेश तक रहेगी रोक, जानिए क्यों लिया यह फैसला?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा प्रदेश में आज यानी 19 जुलाई से 25 जुलाई तक जबरदस्त खराब मौसम की चेतावनी को देखते हुए पहलगाम और बालटाल दोनों रास्तों से अमरनाथ यात्रा को कुछ दिनों के लिए रोक दिया जाएगा। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने भारत ...
वाशिंगटन/येरूशलेम। अमरीका ने ईरान के खिलाफ अभियान के संभावित विस्तार से पहले इजराइल को देश में कई और अमरीकी ईंधन भरने वाले विमान तैनात करने की अपनी योजना की सूचना दी है और इजराइली अधिकारियों के अनुसार यह कदम अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मंगलवार को सिचुएशन रूम की बैठक के बाद व्यापक सैन्य अभियान […] The post ईरान पर बड़े हमले की तैयारी में अमरीका, ट्रंप प्रशासन इजराइल में तैनात करेगा अतिरिक्त फ्यूल टैंकर विमान appeared first on Sabguru News .
सोनम वांगचुक की हालत स्थिर, लेकिन इलाज से किया इनकार : सफदरजंग अस्पताल
नई दिल्ली। बीस दिन से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस सफदरजंग अस्पताल लेकर पहुंची, जहां चिकित्सकों ने उनके शरीर में निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) और पोटेशियम की कमी के लक्षण पाए। उन्होंने नस के जरिए (आईवी) तरल, ओआरएस जैसे पेय तथा अन्य दवाएं लेने से इनकार कर दिया है। […] The post सोनम वांगचुक की हालत स्थिर, लेकिन इलाज से किया इनकार : सफदरजंग अस्पताल appeared first on Sabguru News .
जंतर-मंतर पर हिंदू देवताओं का अपमान,कुणाल कामरा और प्रकाश राज पर दर्ज हो एफआईआर
हिन्दू जनजागृति समिति एवं सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की मांग नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और सोनम वांगचुक के नेतृत्व में नीट (NEET) मुद्दे को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के मंच से खुलेआम सनातन धर्म का अपमान और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने का गंभीर मामला सामने आया है। इसके विरुद्ध […] The post जंतर-मंतर पर हिंदू देवताओं का अपमान,कुणाल कामरा और प्रकाश राज पर दर्ज हो एफआईआर appeared first on Sabguru News .
बागियों की वापसी पर अभिषेक बनर्जी ने दिया पद छोड़ने का प्रस्ताव
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को पार्टी के बागी नेताओं को बड़ा प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें जिम्मेदार ठहराकर तृणमूल छोड़ने वाले सांसद और विधायक पार्टी में वापस लौट आते हैं तो वे एक घंटे के भीतर पार्टी के सभी पदों से […] The post बागियों की वापसी पर अभिषेक बनर्जी ने दिया पद छोड़ने का प्रस्ताव appeared first on Sabguru News .
वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर ममता ने केंद्र पर साधा निशाना
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर चिंता जताते हुए शनिवार को केंद्र सरकार से बातचीत शुरू करने और शांतिपूर्ण असहमति के लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान करने का आग्रह किया।
बागेश्वर में स्कूल के प्रधानाचार्य की हत्या में प्रशासनिक अधिकारी अरेस्ट
बागेश्वर। उत्तराखंड के बागेश्वर में शनिवार को स्कूल के प्रधानाचार्य दयानंद टम्टा की हत्या के आरोप में पुलिस ने विद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधीक्षक जितेंद्र मेहरा के अनुसार दिल दहला देने वाली यह घटना आज सुबह हुई। उन्होंने बताया कि जीआईसी भटखोला के समीप विद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी नवल […] The post बागेश्वर में स्कूल के प्रधानाचार्य की हत्या में प्रशासनिक अधिकारी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
गुंटूर में महिला को सरेआम निर्वस्त्र कर पीटने के मामले में तेदेपा नेता निलंबित
गुंटूर/विजयवाड़ा। आंध्र प्रदेश के तटीय शहर गुंटूर स्थित कृष्णाबाबू कॉलोनी में सार्वजनिक नल से पानी भरने के मामूली विवाद में एक महिला को सरेआम निर्वस्त्र कर पीटने का बेहद झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। इस घटना में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के स्थानीय नेता की संलिप्तता के बाद राज्य में भारी राजनीतिक […] The post गुंटूर में महिला को सरेआम निर्वस्त्र कर पीटने के मामले में तेदेपा नेता निलंबित appeared first on Sabguru News .
भिवाड़ी में एटीएम कार्ड बदलकर 73 हजार की ठगी करने वाला शातिर अरेस्ट
खैरथल तिजारा। राजस्थान में खैरथल तिजारा जिले के भिवाड़ी थाना क्षेत्र में पुलिस ने एटीएम कार्ड बदलकर लोगों के खातों से रुपए उड़ाने वाले एक शातिर ठग को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक बृजेश उपाध्याय ने शनिवार को बताया कि आरोपी करीब दो वर्ष से फरार था। पुलिस ने उसे हरियाणा के पलवल जिले से […] The post भिवाड़ी में एटीएम कार्ड बदलकर 73 हजार की ठगी करने वाला शातिर अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
सिरोही के दो नेताओं की जंग में पिसा अधिकारी
सबगुरु न्यूज-सिरोही। सिरोही भाजपा में पिछले चैबीस घंटों से ये चर्चा गर्म है कि यहां के दो नेता एक दूसरे का नीचा दिखाने और पटखनी देने के लिए हर स्तर पर आ चुके हैं। वर्चस्व की ये लडाई अब पिण्डवाडा विधानसभा क्षेत्र में चरम पर पहुंच चुकी है। सिरोही विधानसभा में भी ये खींचतान है। […] The post सिरोही के दो नेताओं की जंग में पिसा अधिकारी appeared first on Sabguru News .
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह पाटा सहित हत्या के 9 दोषियों को उम्रकैद
अलवर। राजस्थान में अलवर के जिला एवं सत्र न्यायालय ने चुनावी रंजिश को लेकर की गई हत्या के नौ आरोपियों को शनिवार को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत भंडारी ने अभियुक्त भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह पाटा सहित अनूप सिंह, कमलजीत सिंह, गुरवचन […] The post भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह पाटा सहित हत्या के 9 दोषियों को उम्रकैद appeared first on Sabguru News .
देश का पहला निजी अंतरिक्ष यान ‘विक्रम-1’अपनी कक्षा तक पहुंचने में सफल
श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश)। देश के पहले निजी तौर पर विकसित आर्बिटल क्लास रॉकेट ‘विक्रम-1’ ने शनिवार को यहां से सफलतापूर्वक अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी और अपनी लक्षित कक्षा तक पहुंचने में सफल रहा। इस उड़ान को देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। हैदराबाद स्थित ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ द्वारा विकसित […] The post देश का पहला निजी अंतरिक्ष यान ‘विक्रम-1’ अपनी कक्षा तक पहुंचने में सफल appeared first on Sabguru News .
सोनम वांगचुक की जगह अभिजीत दीपके अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे
नई दिल्ली। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ अनशन पर बैठे शिक्षाविद सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर मंतर से हटाकर अस्पताल में भर्ती करवाए जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने भूख हड़ताल पर बैठने का फैसला किया। दीपके ने सोशल मीडिया मंच […] The post सोनम वांगचुक की जगह अभिजीत दीपके अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे appeared first on Sabguru News .
Maharashtra politics News : महाराष्ट्र की सियासत से बड़ी खबर सामने आई है। उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका लगा है। खबरों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट से अलग हुए 6 सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। इतना ही नहीं बागी सांसदों के इस ...
सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से हटाकर पुलिस ने अस्पताल में कराया भर्ती
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से शनिवार सुबह हटा कर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कर दिया। वांगचुक विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक होने से रोकने, शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के […] The post सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से हटाकर पुलिस ने अस्पताल में कराया भर्ती appeared first on Sabguru News .
इंसानी शरीर में कई बीमारियां ऐसी होती हैं जो शुरुआत में बेहद सामान्य लगती हैं, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर वे जानलेवा साबित हो सकती हैं। ऐसा ही एक गंभीर लक्षण है पेशाब में खून दिखाई देना (Blood in Urine)। अधिकांश लोग यूरिन में हल्का लाल या गुलाबी रंग दिखने पर उसे डिहाइड्रेशन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) या किडनी स्टोन का मामूली असर मानकर आसानी से नजरअंदाज कर देते हैं, खासकर तब जब उन्हें कोई दर्द या तकलीफ महसूस नहीं हो रही हो। लेकिन चेन्नई के प्रतिष्ठित एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रोलॉजी एंड यूरोलॉजी के मैनेजिंग डायरेक्टर और प्रमुख यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अरुण कुमार बालकृष्णन के अनुसार, बिना दर्द के पेशाब में खून आना 'किडनी कैंसर' (Kidney Cancer) का सबसे पहला और मुख्य चेतावनी संकेत हो सकता है। चूंकि यह कैंसर शुरुआती चरणों में बिना किसी शोर के चुपचाप शरीर के अंदर फैलता है, इसलिए इसकी एक भी घटना को अनदेखा करना भारी पड़ सकता है।मेडिकल भाषा में क्या है हेमट्यूरिया: यह कैसे आपके पूरे शरीर के लिए एक बड़ा रेड फ्लैग है?चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) में पेशाब के साथ रक्त आने की इस स्थिति को 'हेमट्यूरिया' (Hematuria) कहा जाता है। डॉ. बालकृष्णन स्पष्ट करते हैं कि हेमट्यूरिया का रंग पूरी तरह से लाल, हल्का गुलाबी या कोला (Dark Brown) जैसा हो सकता है। कई बार यह ब्लीडिंग इतनी सूक्ष्म होती है कि नग्न आंखों से दिखाई नहीं देती और इसका पता केवल रूटीन यूरिन टेस्ट के दौरान ही चलता है। यूरोलॉजिस्ट के मुताबिक, चाहे यूरिन में खून केवल एक बार आया हो या बार-बार आ रहा हो, इसके साथ पेट में दर्द हो या न हो, आपको तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। किडनी कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह बहुत धीमी गति से बढ़ता है और जब तक मरीज को लगातार पीठ दर्द, पेट में बड़ी गांठ महसूस होना, अचानक वजन कम होना या अत्यधिक थकान जैसे गंभीर लक्षण दिखने शुरू होते हैं, तब तक यह खतरनाक रूप से एडवांस स्टेज (अंतिम चरण) में पहुंच चुका होता है।जरूरी नहीं कि हर ब्लीडिंग कैंसर ही हो: यूरोलॉजिस्ट ने बताया पूरी जांच का सही तरीकाविशेषज्ञों का कहना है कि यूरिन में खून दिखने का मतलब यह कतई नहीं है कि आपको शत-प्रतिशत किडनी कैंसर ही है। यूरिनरी ट्रैक्ट में किसी भी प्रकार का बैक्टीरियल इन्फेक्शन, गुर्दे की पथरी (Kidney Stone), पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ जाना (Enlarged Prostate) या किडनी से जुड़ी अन्य पुरानी बीमारियां भी इस आंतरिक रक्तस्राव का मुख्य कारण हो सकती हैं। हालांकि, असली समस्या का सटीक पता लगाने के लिए एक संपूर्ण मेडिकल डायग्नोसिस की आवश्यकता होती है। डॉ. बालकृष्णन सलाह देते हैं कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले एक अनुभवी यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेकर यूरिन एनालिसिस (मूत्र जांच), पेट का अल्ट्रासाउंड (Ultrasound), सीटी स्कैन (CT Scan) या आवश्यकतानुसार एमआरआई (MRI) जैसी आधुनिक रेडियोलॉजिकल जांच करानी चाहिए ताकि सही समय पर सही बीमारी का इलाज सुनिश्चित किया जा सके।किडनी कैंसर के मुख्य रिस्क फैक्टर्स: 50 की उम्र पार कर चुके लोग और स्मोकर्स रहें बेहद सावधानआमतौर पर किडनी कैंसर के अधिकांश मामले 50 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में देखे जाते हैं, लेकिन आजकल की बदलती जीवनशैली के कारण युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। डॉ. बालकृष्णन के अनुसार, तंबाकू और सिगरेट का सेवन (Smoking) इस बीमारी का सबसे मजबूत और सबसे बड़ा रोके जा सकने वाला रिस्क फैक्टर है। इसके अलावा, अत्यधिक मोटापा (Obesity), अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension), क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित होना और परिवार में पहले किसी को किडनी कैंसर होने का इतिहास (Family History) भी इस खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। चेन्नई के इस रोबोटिक सर्जन का कहना है कि शरीर के वजन को संतुलित रखकर, तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाकर, नियमित शारीरिक व्यायाम और सालाना हेल्थ चेक-अप के माध्यम से इस घातक बीमारी की चपेट में आने की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।रोबोटिक सर्जरी से अब आसान हुआ इलाज: शरीर के चीखने से पहले उसकी फुसफुसाहट को पहचानेंचिकित्सा जगत में आई आधुनिक तकनीकों की बदौलत आज शुरुआती चरण में पता चलने पर किडनी कैंसर का इलाज बेहद प्रभावी और आसान हो गया है। यूरोलॉजिकल केयर में हुई प्रगति के कारण अब मरीजों को पुराने समय की तरह बड़े चीरे लगवाने की जरूरत नहीं पड़ती। मिनिमली इनवेसिव लैप्रोस्कोपिक (Laparoscopic) और रोबोट-असिस्टेड सर्जरी (Robot-Assisted Surgery) की मदद से बेहद छोटे चीरों के जरिए कैंसरग्रस्त ट्यूमर को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। इससे मरीज की रिकवरी बहुत तेजी से होती है, ऑपरेशन के बाद होने वाला दर्द न्यूनतम होता है और सबसे अच्छी बात यह है कि मरीज के शरीर के स्वस्थ किडनी टिश्यूज को पूरी तरह सुरक्षित बचा लिया जाता है, जिससे जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) प्रभावित नहीं होती। डॉ. बालकृष्णन ने चेतावनी देते हुए एक बेहद खूबसूरत बात कही कि आपका शरीर अक्सर बड़ी तबाही से पहले छोटी फुसफुसाहटों के जरिए संकेत देता है; यूरिन में खून आना भी उसी का हिस्सा है, इसे पहचानें और अपनी जान बचाएं।
वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर एक बेहद डरावनी और आंखें खोल देने वाली चेतावनी सामने आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी की गई 'कैंसर पर ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट 2026' के अनुसार, यदि दुनिया भर के देशों ने इस जानलेवा बीमारी की रोकथाम, शुरुआती जांच (स्क्रीनिंग) और इलाज की बुनियादी सुविधाओं में तत्काल प्रभाव से बड़े सुधार नहीं किए, तो अगले 25 वर्षों में कैंसर एक महामारी का रूप ले सकता है। रिपोर्ट के चौंकाने वाले अनुमानों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर कैंसर के नए मामलों की संख्या आज के 20.6 मिलियन (लगभग 2.06 करोड़) से बढ़कर साल 2050 तक सालाना 35 मिलियन (साढ़े तीन करोड़) के पार पहुंच सकती है। संयुक्त राष्ट्र की इस स्वास्थ्य संस्था ने दुनिया भर में कैंसर के इलाज और उसकी उपलब्धता में मौजूद भारी और अमानवीय असमानताओं को लेकर भी वैश्विक स्तर पर सरकारों को आड़े हाथों लिया है।दिल की बीमारी के बाद मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण: हर दिन 26 हजार से ज्यादा लोग तोड़ रहे हैं दममौजूदा स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण करें तो कैंसर इस समय वैश्विक स्तर पर हृदय रोगों (Heart Diseases) के बाद मानव मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। वर्तमान में हर साल लगभग 10 मिलियन (एक करोड़) लोग इस खामोश हत्यारे की वजह से अपनी जान गंवा देते हैं, जिसका सीधा मतलब है कि हर single दिन दुनिया भर में 26,000 से अधिक मौतें सिर्फ कैंसर के कारण हो रही हैं। डब्लूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि कैंसर न केवल पीड़ित व्यक्ति के शरीर को तोड़ता है, बल्कि यह पूरे परिवार को एक भयंकर मानसिक आघात, सामाजिक अलगाव और अत्यधिक वित्तीय संकट (Financial Crisis) के दलदल में धकेल देता है। इलाज के भारी-भरकम खर्च के कारण लाखों मध्यमवर्गीय परिवार हर साल गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं।गरीब और अमीर देशों के बीच जीवन की असमानता: कम आय वाले मुल्कों में बचने की दर आधी से भी कमइस वैश्विक रिपोर्ट ने हेल्थकेयर सिस्टम के उस कड़वे सच को उजागर किया है, जहां अमीर और गरीब देशों के मरीजों के जीने के अधिकार में भी बड़ा फासला है। उच्च आय वाले विकसित देशों में जहां ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) से पीड़ित लगभग 87% महिलाएं आधुनिक इलाज की बदौलत कम से कम पांच साल या उससे अधिक समय तक जीवित रह जाती हैं, वहीं कम आय वाले विकासशील और गरीब देशों में यह जीवन दर घटकर महज 42% पर सिमट जाती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि दुनिया भर में वर्तमान में तीन में से एक देश भी ऐसा नहीं है जो अपने नागरिकों को यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) के अंतर्गत संपूर्ण कैंसर केयर और मुफ्त दवाएं प्रदान करता हो।एशिया में सबसे ज्यादा तबाही और फेफड़ों का कैंसर बना नंबर वन किलर: जानिए क्या कहते हैं आंकड़ेभौगोलिक दृष्टिकोण से देखें तो पूरे विश्व में कैंसर का सबसे बड़ा और भयावह बोझ एशिया (Asia) महाद्वीप पर आ गिरा है। दुनिया भर में कैंसर के कुल मामलों और इसके कारण होने वाली मौतों में से आधी से अधिक (50% से ज्यादा) हिस्सेदारी अकेले एशियाई देशों में दर्ज की जा रही है। इसके विपरीत, यूरोप के पास दुनिया की कुल आबादी का केवल 9% हिस्सा है, लेकिन वैश्विक स्तर पर कैंसर के कुल मामलों और मौतों में उसका योगदान लगभग पांचवां (20%) बना हुआ है। अगर कैंसर के प्रकारों की बात करें, तो 'फेफड़ों का कैंसर' (Lung Cancer) दुनिया भर में सबसे घातक साबित हो रहा है। पुरुषों में फेफड़े, प्रोस्टेट और कोलोरेक्टल कैंसर के मामले सबसे ज्यादा देखे जा रहे हैं, जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट, फेफड़े और कोलोरेक्टल कैंसर की हिस्सेदारी सबसे तेजी से बढ़ रही है।40% कैंसर के मामलों को रोकना संभव: तंबाकू में गिरावट के बीच लाइफस्टाइल सुधारने की सख्त जरूरतएक तरफ जहां रिपोर्ट भविष्य की भयानक तस्वीर दिखाती है, वहीं दूसरी तरफ यह उम्मीद की एक किरण भी जगाती है। डब्लूएचओ के विशेषज्ञों का अनुमान है कि दुनिया भर में होने वाले कुल कैंसर के मामलों में से लगभग 40% मामलों को केवल जागरूक रहकर और रिस्क फैक्टर्स को नियंत्रित करके पूरी तरह रोका जा सकता है। इनमें तंबाकू का अत्यधिक सेवन, शराब पीना, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, अस्वस्थ खान-पान और कुछ गंभीर संक्रमण जैसे कि ह्यूमन पेपिलोमावायरस (HPV), हेपेटाइटिस B और C शामिल हैं। राहत की बात यह है कि मजबूत पब्लिक हेल्थ पॉलिसियों के कारण साल 2010 के बाद से दुनिया भर में तंबाकू के इस्तेमाल में 27% की कमी आई है, लेकिन अब भी कम और मध्यम आय वाले देशों में कैंसर की आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं की पहुंच बेहद सीमित है, जिसके लिए सरकारों को तुरंत स्वास्थ्य बजट में निवेश बढ़ाना होगा।
वैश्विक खेल मंच से भारत के लिए एक बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (Commonwealth Games 2026) के भव्य उद्घाटन समारोह के लिए भारत की दो दिग्गज महिला एथलीटों को एक बहुत बड़ा सम्मान सौंपा गया है। स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) और चैंपियन मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन (Lovlina Borgohain) को इस प्रतिष्ठित खेल आयोजन में भारतीय दल का आधिकारिक ध्वजवाहक (Flag Bearer) और बैटन वाहक चुना गया है। इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) द्वारा की गई इस आधिकारिक घोषणा के बाद खेल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह है। यह दोनों चैंपियन खिलाड़ी आगामी 23 जुलाई को ग्लासगो के प्रसिद्ध द हाइड्रो (OVO Hydro) में होने वाली ओपनिंग सेरेमनी में भारतीय एथलीटों के पूरे दल का नेतृत्व करती हुई नजर आएंगी, जो वैश्विक मंच पर भारतीय महिला शक्ति की गूंज को और मजबूत करेगा।आईओए ने लगाई मुहर: मीराबाई चानू थामेंगी तिरंगा, लवलीना के हाथों में होगी क्वीन बैटनइंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) ने 18 जुलाई 2026 को इस संबंध में औपचारिक घोषणा करते हुए दोनों एथलीटों के नामों पर मुहर लगाई। तय किए गए प्रोटोकॉल के मुताबिक, उद्घाटन समारोह के दौरान जहां टोक्यो ओलंपिक की सिल्वर मेडलिस्ट मीराबाई चानू गर्व से भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा थामकर आगे चलेंगी, वहीं दूसरी ओर ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन हाथ में प्रतिष्ठित बैटन लेकर भारतीय टीम को लीड करेंगी। ग्लासगो खेलों के आधिकारिक नियमों के तहत प्रतियोगिता की शुरुआत से ठीक पहले सभी 74 राष्ट्रमंडल देशों और क्षेत्रों की बैटन्स को एक साथ लाया जाएगा, जिसके बाद इस भव्य सेरेमनी का आगाज होगा। इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए पूरी दुनिया के खेल प्रेमियों की नजरें ग्लासगो पर टिकी हुई हैं।अध्यक्ष पीटी उषा ने जताया गर्व: यूनाइटेड किंगडम में पसीना बहा रही हैं देश की दोनों स्टार एथलीटइस ऐतिहासिक घोषणा के तुरंत बाद भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष और महान धाविका पीटी उषा ने मीडिया के सामने आकर देश की इन दोनों बेटियों की जमकर सराहना की। पीटी उषा ने बेहद भावुक और गर्व भरे शब्दों में कहा कि मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन के नामों की घोषणा करना पूरे संगठन और देश के लिए एक परम सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि ओवीओ हाइड्रो जैसे प्रतिष्ठित स्टेडियम में इन दोनों महिला एथलीटों को यह सम्मान मिलना पूरी टीम इंडिया का हौसला बढ़ाएगा। अध्यक्ष ने आगे जानकारी दी कि दोनों खिलाड़ी इस समय यूनाइटेड किंगडम (UK) में बेहद कड़े और अनुशासित माहौल में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर रही हैं और वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को बार-बार साबित करने के बाद अब कॉमनवेल्थ में भी पोडियम फिनिश के लिए पूरी तरह तैयार हैं।मेडल की सबसे बड़ी उम्मीदें: टोक्यो ओलंपिक से लेकर एशियन गेम्स तक का शानदार सफरभारतीय खेल दल के दृष्टिकोण से देखा जाए तो मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पोडियम पर तिरंगा लहराने की सबसे मजबूत दावेदार हैं। मीराबाई चानू ने साल 2021 के टोक्यो ओलंपिक्स में वेटलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचा था और इस बार भी फैंस को उनसे गोल्ड की पूरी उम्मीद है। दूसरी तरफ, बॉक्सिंग रिंग में भारत का लोहा मनवाने वाली लवलीना बोरगोहेन ने टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद साल 2023 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में शानदार गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। इसके अलावा एशियन गेम्स 2023 में सिल्वर मेडल जीतने वाली लवलीना का आक्रामक फॉर्म इस समय चरम पर है। इन दोनों दिग्गजों की अगुवाई में भारतीय दल ग्लासगो में नए रिकॉर्ड बनाने के इरादे से मैदान में उतरेगा।
भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही तीन मैचों की वनडे सीरीज का आखिरी और निर्णायक मुकाबला रविवार, 19 जुलाई 2026 को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेला जाना है। इस महामुकाबले से पहले क्रिकेट गलियारों में भारतीय टीम के दिग्गज बल्लेबाज रोहित शर्मा को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि लॉर्ड्स का यह मैदान रोहित शर्मा के अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी मैच साबित हो सकता है क्योंकि चयनकर्ता 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए यशस्वी जायसवाल जैसे युवाओं को तैयार करना चाहते हैं। इन खबरों के बीच कार्डिफ में खेले गए दूसरे वनडे में रोहित के बल्ले से 47 गेंदों में केवल 26 रनों की धीमी पारी निकली, जिसने आलोचकों को सवाल उठाने का मौका दे दिया। 39 वर्षीय रोहित इस सीरीज के पहले मैच में भी महज 11 रन ही बना सके थे, जिससे उनकी टाइमिंग और फॉर्म को लेकर बहस छिड़ गई थी।फॉर्म की कोई चिंता नहीं, नई गेंद के सामने बल्लेबाजी रही मुश्किल: गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल का रोहित को समर्थनलॉर्ड्स वनडे की पूर्व संध्या पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने इन सभी चिंताओं को सिरे से खारिज करते हुए रोहित शर्मा का खुलकर समर्थन किया है। मोर्केल ने अनुभवी बल्लेबाज की काबिलियत पर भरोसा जताते हुए कहा कि पूरी सीरीज के दौरान नई गेंद के सामने बल्लेबाजी करना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है क्योंकि पिच से गेंदबाजों को अच्छी स्विंग मिल रही है। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि रोहित एक बेहद अनुभवी खिलाड़ी हैं और वह जानते हैं कि इस तरह की मुश्किल परिस्थितियों से बाहर कैसे निकला जाता है। कोच ने यह भी साफ किया कि रोहित शर्मा की फॉर्म या उनके काम करने के तरीके को लेकर टीम मैनेजमेंट में किसी भी तरह की कोई परेशानी या चिंता का माहौल नहीं है।टीम में लाते हैं शांति: मोर्कल ने रोहित शर्मा के अनुभव को सराहामोर्ने मोर्कल ने रोहित शर्मा की बल्लेबाजी शैली और ड्रेसिंग रूम में उनकी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब रोहित शीर्ष क्रम में बल्लेबाजी के लिए उतरते हैं, तो वह पूरे बैटिंग लाइनअप में एक खास तरह की शांति और स्थिरता लेकर आते हैं। उनका विशाल अनुभव युवाओं के लिए बेहद मददगार साबित होता है। गेंदबाजी कोच ने उम्मीद जताई कि लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर रोहित निश्चित रूप से अपनी तकनीक में जरूरी सुधार करके बड़ी पारी खेलेंगे और मैच का रुख भारत के पक्ष में मोड़ देंगे। कोच के इस सकारात्मक बयान के बाद भारतीय क्रिकेट प्रेमियों और रोहित के फैंस ने बड़ी राहत की सांस ली है।बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया का बड़ा स्पष्टीकरण: लॉर्ड्स में खेला जाने वाला मैच नहीं होगा रोहित का आखिरी वनडेगेंदबाजी कोच से पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव देवजीत सैकिया ने भी रोहित शर्मा के संन्यास की सभी अफवाहों पर पूरी तरह से पूर्णविराम लगा दिया था। समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) से बातचीत के दौरान सैकिया ने स्पष्ट किया कि मीडिया में रोहित के भविष्य को लेकर चल रही सभी खबरें और अटकलें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। उन्होंने आधिकारिक तौर पर कहा कि बोर्ड या चयन समिति के बीच ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई है कि रविवार को लॉर्ड्स में खेला जाने वाला मैच रोहित शर्मा का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होगा। सैकिया ने साफ शब्दों में कहा कि रोहित भारतीय वनडे टीम के नियमित और बेहद महत्वपूर्ण सदस्य हैं और वह आगे भी देश का प्रतिनिधित्व करना जारी रखेंगे।
प्राथमिक शेयर बाजार (IPO Market) के निवेशकों के लिए अगला हफ्ता बेहद रोमांचक और भारी हलचल वाला साबित होने जा रहा है। दलाल स्ट्रीट में दो बड़े और बहुप्रतीक्षित आईपीओ— एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट (SBI Funds Management) और अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड (Alpine Texworld) के शेयरों की लिस्टिंग होने वाली है। बाजार के जानकारों और रीटेल निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इन दोनों कंपनियों की शेयर बाजार में कैसी धमाकेदार या सुस्त एंट्री होगी। यदि आप भी इन दोनों में से किसी भी आईपीओ में पैसा लगा चुके हैं या लिस्टिंग के दिन खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) से आ रहे ताजा और धमाकेदार संकेत आपकी आंखें खोल देंगे, क्योंकि एक तरफ जहां एसबीआई फंड्स भारी मुनाफे की ओर इशारा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड में निवेशकों की सांसें थमी हुई हैं।एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट आईपीओ का नया धमाका: ₹90 के पार पहुंचा जीएमपी, बंपर कमाई के संकेतदेश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की सहयोगी कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ को लेकर ग्रे मार्केट में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। आईपीओ वॉच के लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, कंपनी का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) वर्तमान में ₹97 के स्तर पर मजबूती से ट्रेड कर रहा है। कंपनी ने अपने पब्लिक इश्यू का अपर प्राइस बैंड ₹574 प्रति इक्विटी शेयर तय किया था। इस लिहाज से देखें तो वर्तमान ट्रेंड के अनुसार एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयर की बाजार में लिस्टिंग ₹670 के पार शानदार प्रीमियम के साथ हो सकती है, जो निवेशकों को लिस्टिंग के पहले ही दिन बंपर मुनाफा देने के लिए तैयार है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, इस आईपीओ को निवेशकों का ऐतिहासिक रेस्पॉन्स मिला और यह कुल 41.66 गुना सब्सक्राइब हुआ, जिसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का हिस्सा रिकॉर्ड 140.11 गुना भरा था।₹11,693 करोड़ का मेगा ओएफएस: एसबीआई और अमुंडी इंडिया होल्डिंग्स बेच रहे अपनी हिस्सेदारीएसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का यह विशाल पब्लिक इश्यू करीब ₹11,693 करोड़ का है, जो पूरी तरह से 20.37 करोड़ इक्विटी शेयरों का 100% ऑफर फॉर सेल (OFS) है। इसका सीधा मतलब यह है कि आईपीओ के जरिए जुटाई गई पूरी रकम कंपनी के मुख्य बिजनेस में नहीं जाएगी, बल्कि इसे बेचने वाले मौजूदा शेयरधारक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और विदेशी पार्टनर अमुंडी इंडिया होल्डिंग (Amundi India Holding) के पास जाएगी। इस बंपर आईपीओ के सफल समापन के बाद देश के सबसे बड़े कमर्शियल बैंक एसबीआई की इस म्यूचुअल फंड हाउस में प्रमोटर हिस्सेदारी 61.76% से घटकर 55.46% पर आ जाएगी, जबकि वैश्विक निवेश फर्म अमुंडी की हिस्सेदारी 32.56% के स्तर पर बनी रहेगी।अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड आईपीओ की रफ्तार थमी: महज ₹1 पर पहुंचा जीएमपी, रीटेलर्स को भारी उम्मीदेंएसबीआई फंड्स के विपरीत, कपड़ा क्षेत्र की कंपनी अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड (Alpine Texworld IPO) के आईपीओ को लेकर ग्रे मार्केट का रुख बेहद ठंडा और सुस्त बना हुआ है। बाजार के सूत्रों के अनुसार, इसका जीएमपी फिलहाल मात्र ₹1 के स्तर पर रेंग रहा है। कंपनी ने इस आईपीओ के लिए ₹100 से ₹105 प्रति इक्विटी शेयर का प्राइस बैंड निर्धारित किया था, जिसके आधार पर इसकी अनुमानित लिस्टिंग प्राइस ₹106 प्रति शेयर के आसपास देखी जा रही है, जो बिल्कुल फ्लैट या मामूली बढ़त के साथ शुरुआत का संकेत है। हालांकि, सब्सक्रिप्शन के दौरान इस आईपीओ को कुल 1.40 गुना आवेदन मिले थे, जिसमें रीटेल इनवेस्टर्स (Retail Investors) की तरफ से सबसे अधिक दिलचस्पी और मांग दर्ज की गई थी।₹126.25 करोड़ के फ्रेश इश्यू का इनसाइड प्लान: गुजरात में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाएगी कंपनीअल्पाइन टेक्सवर्ल्ड का यह आईपीओ पूरी तरह से 1.20 करोड़ इक्विटी शेयरों का फ्रेश इश्यू (Fresh Issue) है, यानी इसमें कोई ऑफर फॉर सेल शामिल नहीं है और जुटाया गया पूरा पैसा सीधे कंपनी के पास जाएगा। कंपनी प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि आईपीओ से प्राप्त होने वाली शुद्ध वित्तीय रकम का प्राथमिक उपयोग गुजरात के अहमदाबाद में उनकी प्रस्तावित तीसरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में एक नई आधुनिक वीविंग यूनिट (Weaving Unit) स्थापित करने के लिए किया जाएगा, जिससे कंपनी के ग्रे फैब्रिक उत्पादन की क्षमता में भारी बढ़ोतरी होगी। इसके अतिरिक्त, इस फंड का एक बड़ा हिस्सा कंपनी के पुराने बकाया कर्जों को समय से पहले चुकाने और सामान्य कॉर्पोरेट कामकाजी खर्चों को पूरा करने के लिए आवंटित किया जाएगा, जो दीर्घकालिक दृष्टिकोण से कंपनी की बैलेंस शीट को मजबूत बनाएगा।
पर्सनल लोन की EMI से हैं परेशान? दूसरे लोन में जोड़ने से पहले जान लें ये बातें, वरना होगा नुकसान
आज के आधुनिक दौर में अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए एक से अधिक पर्सनल लोन लेना बेहद आम बात हो चुकी है। लेकिन जब हर महीने दो, तीन या उससे ज्यादा लोन की ईएमआई (EMI) अलग-अलग तारीखों पर बैंक खाते से कटती है, तो मध्यमवर्गीय परिवारों का पूरा बजट पूरी तरह चरमरा जाता है। इस मानसिक और आर्थिक तनाव से बचने के लिए इन दिनों 'लोन कंसोलिडेशन' (Loan Consolidation) यानी सभी छोटे-छोटे कर्जों को मिलाकर एक बड़े लोन में बदलने का चलन तेजी से बढ़ा है। सुनने में एक ईएमआई और एक ही बैंक का यह विकल्प जितना आसान और आकर्षक लगता है, हकीकत में यह हर बार आपके लिए फायदे का सौदा नहीं होता। बिना सोचे-समझे लिया गया एक गलत वित्तीय फैसला आपकी कुल ब्याज लागत को बेतहाशा बढ़ाकर आपको जिंदगी भर के लिए कर्ज के दलदल में धकेल सकता है।क्या होता है लोन कंसोलिडेशन और कब मिलता है इसका असली फायदा: समझें ब्याज दरों का गणितलोन कंसोलिडेशन के तहत वित्तीय संस्थान या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) आपके मौजूदा सभी एक्टिव पर्सनल लोन को एक नए लोन खाते में ट्रांसफर कर देती हैं, जिससे आपको अलग-अलग लोन की भुगतान तारीखें याद रखने के झंझट से मुक्ति मिल जाती है। बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रक्रिया का असली फायदा आपको केवल और केवल तभी मिल सकता है जब नए लोन की वार्षिक ब्याज दर (Interest Rate) आपके पुराने सभी लोनों की औसत ब्याज दर से काफी कम हो। यदि नई ब्याज दर में कोई बड़ा अंतर नहीं है, तो बैंक द्वारा वसूले जाने वाले नए प्रोसेसिंग शुल्क (Processing Fees), भारी-भरकम डॉक्यूमेंटेशन चार्ज और अन्य छिपे हुए प्रशासनिक शुल्क आपकी सारी अनुमानित बचत को पल भर में पूरी तरह खत्म कर देंगे।कम EMI के छलावे में न आएं: लोन की अवधि बढ़ने से जेब पर पड़ेगा दोगुना बोझअक्सर लोन मर्ज करने वाले विज्ञापन ग्राहकों को बेहद कम मासिक ईएमआई का लालच देकर अपनी ओर आकर्षित करते हैं, लेकिन समझदार उपभोक्ता को इस छलावे से बचना चाहिए। बैंक और वित्तीय कंपनियां हर महीने की किस्त को कम करने के लिए चतुराई से आपके लोन की भुगतान अवधि (Tenure) को बढ़ा देती हैं। उदाहरण के लिए, जो कर्ज आपको दो साल में चुकाना था, उसकी अवधि बढ़कर पांच साल हो जाती है। किस्त छोटी होने से हर महीने राहत तो मिलती है, लेकिन लंबे समय तक चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) लगने के कारण अंत में आपको मूलधन से कहीं ज्यादा रकम ब्याज के रूप में चुकानी पड़ती है, जिससे कुल मिलाकर आपको भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ता है।क्रेडिट स्कोर का खेल और प्रीपेमेंट चार्ज: नया कर्ज लेने से पहले इन बातों का रखें खास ख्याललोन मर्ज करने का आवेदन करने से पहले आपको अपने वर्तमान क्रेडिट स्कोर (Credit Score) का बारीकी से आकलन करना चाहिए। यदि पिछले कुछ वर्षों में आपकी समय पर भुगतान की आदतों के कारण आपका सिबिल स्कोर बेहतर हुआ है, तो आप बैंक से कम ब्याज दर और बेहतर शर्तों पर सौदेबाजी कर सकते हैं। इसके विपरीत, यदि आपकी आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है, तो बैंक आपको पहले से भी अधिक ब्याज दर का प्रस्ताव दे सकता है। एक और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब आप अपने पुराने लोन को समय से पहले पूरी तरह बंद (Foreclosure) करेंगे, तो पुराने बैंक आपसे प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर पेनल्टी वसूलेंगे। इसलिए नए लोन के लिए हामी भरने से पहले इन सभी शुल्कों को एक कागज पर लिखकर कुल खर्च का हिसाब जरूर लगा लें।दोबारा कर्ज के जाल में फंसने का खतरा: वित्तीय अनुशासन है सबसे जरूरी हथियारलोन कंसोलिडेशन के बाद जब कई ईएमआई घटकर सिर्फ एक छोटी किस्त में बदल जाती है, तो कई उपभोक्ता अपनी डिस्पोजेबल इनकम को बढ़ा हुआ मानकर दोबारा से क्रेडिट कार्ड या नया पर्सनल लोन लेना शुरू कर देते हैं। यह आदत उन्हें एक ऐसे भयंकर ऋण जाल (Debt Trap) में फंसा देती है जिससे बाहर निकलना नामुमकिन हो जाता है। यदि आप पूरी वित्तीय योजना और अनुशासन के साथ लोन मर्ज कर रहे हैं, तभी यह आपके सिबिल स्कोर को सुधारने और कर्ज मुक्त होने में मददगार साबित होगा। केवल मासिक ईएमआई का आकार देखकर जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला आपकी वित्तीय स्वतंत्रता को लंबे समय के लिए छीन सकता है।
भारतीय टेलीविजन इतिहास के सबसे बड़े और लोकप्रिय रियलिटी क्विज शो 'कौन बनेगा करोड़पति' (Kaun Banega Crorepati) के फैंस के लिए एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आई है। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन एक बार फिर 'केबीसी सीजन 18' (KBC 18) के साथ छोटे पर्दे पर धमाकेदार वापसी करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सोनी टीवी (Sony TV) ने सोशल मीडिया पर शो के कई आधिकारिक प्रोमो जारी कर दिए हैं, जिसने दर्शकों के बीच खलबली मचा दी है। इस बार हॉटसीट पर बैठने वाले कंटेस्टेंट्स के लिए सिर्फ सामान्य ज्ञान का होना काफी नहीं होगा। मेकर्स ने खुलासा किया है कि आगामी 10 अगस्त 2026 से शुरू हो रहे इस नए सीजन में गेम का पूरा नियम और खेलने का अंदाज बदल दिया गया है, जिसके बाद अब महज रट्टा मारकर आए प्रतियोगी करोड़पति बनने का सपना पूरा नहीं कर पाएंगे।केबीसी 18 का नया ट्विस्ट: इतिहास, विज्ञान और खेल का ज्ञान भी पड़ जाएगा कम, बिग बी ने बताया नया नियमसोनी टीवी द्वारा जारी किए गए पहले प्रोमो में खुद शो के होस्ट अमिताभ बच्चन ने नए सीजन के कड़े नियमों की ओर इशारा करते हुए सबको हैरान कर दिया है। बिग बी ने प्रोमो में साफ शब्दों में कहा है कि इस बार केबीसी के मंच पर इतिहास, खेल और विज्ञान का रटा-रटाया ज्ञान आपके किसी काम नहीं आने वाला है, क्योंकि पूरा खेल अब पूरी तरह बदल चुका है। अब हॉटसीट पर बैठकर केवल सही विकल्प चुन लेना या सीधा जवाब दे देना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्रतियोगियों को अपनी तार्किक क्षमता का प्रदर्शन करना होगा। इस नए बदलाव के तहत अब कंटेस्टेंट्स को किसी भी सवाल का जवाब देने के पीछे का लॉजिक (तर्क) भी समझाना पड़ सकता है, जिससे यह गेम शो अब पहले से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण और बौद्धिक होने वाला है।दुनिया को बदलने वाले AI का केबीसी पर असर: महानायक ने दिया बदलते वक्त के साथ ढलने का मंत्ररिलीज हुए दूसरे प्रोमो में दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन ने आज के आधुनिक दौर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जिक्र करते हुए शो के नए प्रारूप के पीछे की मुख्य वजह बताई है। उन्होंने कहा कि आज एआई ने पूरी दुनिया को बदल कर रख दिया है और इस तकनीकी बदलाव की रफ्तार को रोकना अब किसी के वश में नहीं है। जो चीजें कल तक पूरी तरह असंभव लगती थीं, वे आज तकनीक की मदद से पल भर में मुमकिन हो रही हैं। बिग बी ने आगे कहा कि इस तेजी से बदलती हुई दुनिया में हम सभी को खुद को ढालना होगा, और इसी सोच के साथ इस साल हमने केबीसी के नियमों में भी कुछ बेहद क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। अब हॉटसीट पर आने वाले हर खिलाड़ी को कोई भी उत्तर लॉक करने से पहले गहराई से सोचना और विचार करना होगा।अपकमिंग फिल्में: 'सेक्शन 84' की रिलीज के साथ 'कल्कि 2898 एडी' के सीक्वल में नजर आएंगे अमिताभ बच्चन'कौन बनेगा करोड़पति 18' के जरिए टीवी पर व्यस्त होने के साथ-साथ 80 पार के इस महानायक का फिल्मी करियर भी इस समय पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। अमिताभ बच्चन के पास इस समय बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के कई बड़े प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं। उनकी बहुप्रतीक्षित कोर्टरूम ड्रामा फिल्म 'सेक्शन 84' (Section 84) पूरी तरह बनकर तैयार है और जल्द ही सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इसके अलावा, हाल ही में बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचने वाली ब्लॉकबस्टर फिल्म 'कल्कि 2898 एडी' (Kalki 2898 AD) में अश्वत्थामा के किरदार से तहलका मचाने के बाद बिग बी इसके दूसरे भाग यानी सीक्वल की शूटिंग में व्यस्त हैं, जो साल 2027 में बड़े पर्दे पर रिलीज होगी। छोटे पर्दे पर केबीसी के नए अवतार और बड़े पर्दे पर उनके किरदारों को लेकर दर्शकों में जबरदस्त क्रेज बना हुआ है।
भारतीय सिनेमा के सबसे भरोसेमंद एक्शन सुपरस्टार सनी देओल की आगामी ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म 'बंटवारा 1947' (Batwara 1947) का दूसरा धमाकेदार टीजर आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। फिल्म का पहला टीजर जहां बेहद भावुक और दिल को झकझोर देने वाले दृश्यों से भरपूर था, वहीं मेकर्स द्वारा रिलीज किया गया यह दूसरा टीजर पूरी तरह से सनी देओल के चिरपरिचित एग्रेसिव लुक और रोंगटे खड़े कर देने वाले एक्शन अवतार को समर्पित है। आमिर खान प्रोडक्शंस (Aamir Khan Productions) के बैनर तले बन रही इस मेगा-बजट फिल्म के नए टीजर ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है, जिसमें सनी देओल अपने ढाई किलो के हाथ की ताकत दिखाते हुए एक ही मुक्के में दुश्मनों को हवा में उछालते और पूरी रफ्तार से दौड़ते हुए तांगे को अकेले अपने दम पर रोकते हुए नजर आ रहे हैं।नफरत के खिलाफ जंग की दास्तान: टीजर में दिखा प्रीति जिंटा और अली फजल का लुक, सनी के वॉयस ओवर ने बांधा समांनिर्देशक राजकुमार संतोषी की इस फिल्म का नाम पहले कुछ और तय किया गया था, लेकिन आमिर खान के विशेष सुझाव के बाद फिल्म की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे 'बंटवारा 1947' किया गया। फिल्म की मूल कहानी सन 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय भड़के भीषण सांप्रदायिक दंगों, हिंसा और मानवीय त्रासदी के बीच नफरत की दीवार को ढहाने वाले एक निडर शख्स के संघर्ष पर आधारित है। टीजर-2 में जहां विभाजन के खौफनाक मंजर, आगजनी और चीख-पुकार को दिखाया गया है, वहीं सनी देओल की कड़क आवाज में एक दमदार वॉयस ओवर बैकग्राउंड में गूंजता है जिसमें वह कहते हैं कि 'डर रहे हैं लोग, मर रहे हैं लोग, मैं जीते जी मरना नहीं चाहता।' इस टीजर में सनी के अलावा अली फजल, करण देओल, शबाना आजमी और लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रही प्रीति जिंटा की भी बेहद प्रभावशाली झलकियां देखने को मिल रही हैं।30 साल बाद इतिहास दोहराएगी ब्लॉकबस्टर जोड़ी: 'घायल' और 'घातक' के बाद राजकुमार संतोषी संग महामुकाबलासिनेमा प्रेमियों के लिए यह फिल्म इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि इसके जरिए भारतीय सिनेमा की एक ऐसी जोड़ी पर्दे पर लौट रही है जिसने 90 के दशक में बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक राजकुमार संतोषी और सनी देओल की जोड़ी पूरे 30 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक साथ बड़े पर्दे पर वापसी कर रही है। इससे पहले इस कल्ट जोड़ी ने 'घायल', 'दामिनी' और 'घातक' जैसी कालजयी और सुपरहिट फिल्में फिल्म इंडस्ट्री को दी हैं। टीजर में साफ दिख रहा है कि संतोषी ने एक बार फिर सनी देओल के भीतर के उस उग्र अभिनेता को जीवंत किया है जो अन्याय के खिलाफ अकेले ही पूरी फौज से टकरा जाता है, जिससे सिनेमाघरों में एक बार फिर दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिलना तय है।नेटफ्लिक्स पर 'इक्का' की कामयाबी के बाद थिएटर्स में तहलका: वकील के बाद अब एक्शन मोड में दिखे सनी पाजीसिल्वर स्क्रीन पर दस्तक देने से ठीक पहले सनी देओल इन दिनों ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी अपनी धाक जमाए हुए हैं। हाल ही में उनकी कोर्टरूम ड्रामा फिल्म 'इक्का' (Ikka) ओटीटी दिग्गज नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हुई है, जिसमें सनी देओल ने एक बेहद कड़क और दिमाग से खेलने वाले वकील का किरदार निभाया है। इस फिल्म में उनके साथ अक्षय खन्ना भी मुख्य भूमिका में हैं और फिल्म को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों और समीक्षकों की ओर से बेहद शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है। ओटीटी पर एक संजीदा वकील के रूप में तारीफें बटोरने के बाद अब दर्शक सनी देओल को थिएटर्स के बड़े पर्दे पर उनके असली और भारी-भरकम एक्शन वाले अंदाज में देखने के लिए बेताब हैं, जिसकी शुरुआत इस नए टीजर ने कर दी है।
अपार आईडी निर्माण में यूपी नंबर-1, स्कूल और उच्च शिक्षा में बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड
UP ranks first in APAAR ID: उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर शिक्षा के डिजिटलीकरण के क्षेत्र में देशभर में अपनी अग्रणी भूमिका साबित की है। डिजिटल इंडिया के तहत अपार (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) आईडी निर्माण में उत्तर प्रदेश ने स्कूल शिक्षा ...
...तो बंद हो गया होता यूपी का चीनी उद्योग : सीएम योगी
CM Yogi Amroha rally: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले विकास, औद्योगिक निवेश व किसानों को गन्ना भुगतान संभव नहीं था। 2007 से 2017 के बीच सरकारों ने 29 चीनी मिलों को बंद किया था और 21 चीनी मिलों को ...
सपनों को मिले पंख, अमरोहा में CM योगी ने बांटी खुशियों की चाबी
CM Yogi Amroha visit: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अमरोहा दौरा जिले के विकास को एक नई रफ्तार देने के साथ-साथ आम जनमानस के जीवन में खुशियों का नया सवेरा लाया। शनिवार को श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, गजरौला में आयोजित विशाल जनसभा में मुख्यमंत्री ने ...
सोनम वांगचुक के शरीर में डिहाइड्रेशन और बढ़ते कीटोन के संकेत, इलाज से किया इनकार
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ने शनिवार दोपहर करीब 3:30 बजे जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर नया मेडिकल बुलेटिन जारी किया। अस्पताल के अनुसार, वांगचुक में डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण), कॉम्पेन्सेटेड एसिडोसिस, सीरम पोटैशियम का स्तर कम होने और यूरिन में कीटोन का स्तर बढ़ने के संकेत मिले हैं। हालांकि उन्होंने इंट्रावेनस (आईवी) फ्लूइड, ओरल रीहाइड्रेशन फ्लूइड और दवाएं लेने से इनकार कर दिया है।
केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश शिशु देखभालकर्ता महिला को निर्धारित मजदूरी दर के अनुसार किया जाए भुगतान
श्री केशव प्रसाद मौर्य जी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि *बदलते मौसम के दृष्टिगत कार्यस्थलों पर बुनियादी सुविधाओं में कोई कोताही न बरती जाए।* सभी कार्यस्थलों पर स्वच्छ एवं पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता अनिवार्य रूप से हो इसके साथ ही, वर्तमान में चल रही भीषण गर्मी तथा आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए श्रमिकों को मौसम के थपेड़ों से बचाने के लिए शेड (छायादार स्थान) एवं अन्य सुरक्षात्मक साधनों की पर्याप्त व्यवस्था कराई जाए, ताकि किसी भी श्रमिक के स्वास्थ्य पर विपरीत असर न पड़े।उन्होंने निर्देश दिया कि *जिन भी कार्यस्थलों पर 5 वर्ष से कम आयु के 5 या उससे अधिक बच्चे होंगे, वहाँ उनकी उचित देखभाल और सुरक्षा के लिए एक समर्पित महिला की नियुक्ति की जाएगी। इस महिला को उनके कार्य के बदले निर्धारित मजदूरी दर के अनुसार ससमय भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।* इससे जहाँ एक ओर कामकाजी माताओं को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर एक अन्य महिला को रोजगार का अवसर भी प्राप्त होगा।उपमुख्यमंत्री जी ने सरकार के मूल मंत्र को दोहराते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार का एक ही सपना, हर मजदूर सुरक्षित हो अपना। उन्होंने कहा कि *आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार में सभी वर्ग के श्रमिको को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रहा है।* विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने और नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए अधिकारियों को धरातल पर उतरकर नियमित निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार और हाल ही में सक्रिय राजनीति में कदम रखने वाले थलपति विजय के अभिनय करियर की अंतिम और बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जन नायकन' (Jana Nayakan) को लेकर फिल्म इंडस्ट्री और दर्शकों के बीच उत्सुकता चरम पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल होने से पहले विजय की इस विदाई फिल्म को लेकर केवीएन प्रोडक्शंस (KVN Productions) के प्रमुख निर्माता के. वेंकट नारायण ने एक बेहद सनसनीखेज और बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले फिल्म के संवेदनशील दृश्यों के इंटरनेट पर अवैध रूप से लीक होने और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के साथ चले लंबे कानूनी विवाद के बाद, क्रिएटिव टीम ने फिल्म में इतने व्यापक बदलाव किए हैं कि अब दर्शक सिनेमाघरों में पूरी तरह से एक फ्रेश और नई फिल्म का अनुभव करेंगे। एच. विनोथ के निर्देशन में बनी यह हाई-वोल्टेज पॉलिटिकल एक्शन थ्रिलर आगामी २३ जुलाई को दुनिया भर के सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है।ऑनलाइन लीक और सेंसर विवाद के बाद भारी फेरबदल: री-शूटिंग, नए गाने और बदले हुए सीन्स के साथ आएगी मूवीएनडीटीवी को दिए एक विशेष साक्षात्कार में जब प्रोड्यूसर वेंकट नारायण से फिल्म में थलपति विजय के राजनीतिक दल 'तमिझागा वेत्री कड़गम' (TVK) और बाबासाहेब अंबेडकर के संदर्भों को हटाने व विजय का नाम छोटा करने को लेकर तीखे सवाल पूछे गए, तो उन्होंने काफी सतर्कता से जवाब दिया। निर्माता ने कहा कि वे इस समय फिल्म की रणनीतिक सुरक्षा के कारण सभी तकनीकी बातें उजागर नहीं कर सकते, लेकिन यह पूरी तरह सच है कि लीक कांड के बाद फिल्म के मूल ढांचे में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं और अनेक नए सीन्स जोड़े गए हैं। उन्होंने प्रशंसकों को आश्वस्त किया कि सिनेमाघरों में जो वर्जन दिखाया जाएगा, वह लीक हुए कंटेंट से बिल्कुल अलग होगा, जिसमें कई नए गानों को शामिल किया गया है और कुछ गानों को पूरी तरह से री-एडिट और री-शूट किया गया है, ताकि दर्शकों को कोई स्पॉइलर न मिले और उनका उत्साह बना रहे।सीबीएफसी के कट्स और 'ए' सर्टिफिकेट: कोर्ट की जद्दोजहद के बाद मिली हरी झंडी'जन नायकन' को इस साल के शुरुआत में जनवरी के महीने में ही पोंगल के बड़े मौके पर रिलीज किया जाना था, लेकिन ऐन वक्त पर सेंसर बोर्ड (CBFC) ने फिल्म के कड़े राजनीतिक संवादों और सामाजिक मुद्दों पर गहरी आपत्ति जताते हुए सर्टिफिकेट रोकने का फैसला किया था। यह मामला इतना पेचीदा हो गया था कि मेकर्स को राहत के लिए माननीय अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा था, जहां लंबी कानूनी जद्दोजहद के बाद सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाए गए महत्वपूर्ण कट्स, विशेष रूप से राजनीतिक और सामाजिक प्रतीकों के रेफरेंस को संशोधित करने के बाद फिल्म को 'ए' (Adults Only) सर्टिफिकेट के साथ रिलीज की अंतिम मंजूरी दी गई। इन तमाम चुनौतियों और पाइरेसी करने वाले अपराधियों की गिरफ्तारियों के बाद अब फिल्म का नया रूप थिएटर्स में धमाल मचाने को तैयार है।स्टार कास्ट और दमदार कहानी: अनिल रविपुडी की 'भगवंत केसरी' का तमिल अडैप्टेशनराजनीतिक गलियारों और सिनेमाई हलकों में हलचल मचाने वाली यह फिल्म दरअसल प्रसिद्ध तेलुगु फिल्म निर्माता अनिल रविपुडी की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'भगवंत केसरी' का आधिकारिक तमिल रूपांतरण (Adaptation) है। थलपति विजय की चिरपरिचित शैली के अनुरूप यह फिल्म भी एक बेहद मजबूत और संवेदनशील सामाजिक मुद्दे के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो हर आयु वर्ग के दर्शकों को गहराई से जोड़ेगी। फिल्म में थलपति विजय के साथ मुख्य भूमिकाओं में ममिता बैजू, पूजा हेगड़े और खतरनाक विलेन के रूप में बॉलीवुड स्टार बॉबी देओल नजर आने वाले हैं। मुख्यमंत्री बनने से ठीक पहले विजय को आखिरी बार बड़े पर्दे पर एक्शन अवतार में देखने के लिए एडवांस बुकिंग में केवल ६० मिनट के भीतर हजारों टिकटें बिक चुकी हैं, जो बॉक्स ऑफिस पर एक नए इतिहास की ओर इशारा कर रहा है।
दक्षिण एशिया के सबसे अशांत और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र बलूचिस्तान से आ रही स्वतंत्रता की घोषणा के दावों ने अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति और राजनयिक गलियारों में एक अभूतपूर्व भूचाल ला दिया है। यद्यपि अभी तक वैश्विक मंच पर किसी भी संप्रभु देश ने बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में आधिकारिक मान्यता नहीं दी है, परंतु इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने चीन और पाकिस्तान की संयुक्त रीढ़ माने जाने वाले 'चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे' (CPEC) के अस्तित्व पर सबसे बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। करीब ६५ अरब डॉलर (लगभग ५.४ लाख करोड़ रुपये) की भारी-भरकम लागत से बन रहा सीपेक प्रोजेक्ट चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) का सबसे महत्वपूर्ण मुकुट माना जाता है, जो अब बलूचिस्तान की बगावत के चलते पूरी तरह खटाई में पड़ता नजर आ रहा है।ग्वादर बंदरगाह पर संप्रभुता का कानूनी पेंच: अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत फंस सकता है चीन का अरबों का निवेशइस पूरे भू-राजनीतिक विवाद का मुख्य केंद्र बिंदु रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील ग्वादर बंदरगाह (Gwadar Port) है, जो सीधे अरब सागर के मुहाने पर स्थित है। वर्तमान व्यवस्था के तहत इस गहरे पानी के बंदरगाह का संपूर्ण संचालन बीजिंग की सरकारी कंपनी 'चाइना ओवरसीज पोर्ट्स होल्डिंग कंपनी' द्वारा पाकिस्तान सरकार के साथ हुए एक द्विपक्षीय समझौते के तहत किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक संधि के तहत चीन को केवल व्यावसायिक संचालन और टोल वसूलने का अधिकार प्राप्त है, जबकि बंदरगाह की वास्तविक संप्रभुता (Sovereignty) कानूनी रूप से इस्लामाबाद के पास सुरक्षित है। अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यदि बलूचिस्तान एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित होता है, तो ग्वादर बंदरगाह स्वतः ही बलूचिस्तान की संप्रभु सीमा का हिस्सा बन जाएगा, जिससे पूर्व में पाकिस्तान के साथ किए गए चीन के सभी समझौते तकनीकी रूप से अवैध या शून्य घोषित हो सकते हैं।ड्रैगन पर चौतरफा मार: चीनी इंजीनियरों की सुरक्षा, नए वीजा नियम और बीमा लागत में बेतहाशा वृद्धि की आशंकाअंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक, यदि बलूचिस्तान में कोई नई संप्रभु सरकार का गठन होता है, तो उसे यह पूर्ण विधिक अधिकार होगा कि वह चीन के साथ पुराने सीपेक समझौतों को जारी रखे, उनमें अपनी शर्तों पर संशोधन करे, अथवा उन्हें पूरी तरह से निरस्त कर दे। ऐसी विकट स्थिति में चीनी निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालतों (International Arbitration) का दरवाजा खटखटाना पड़ सकता है, जो एक बेहद लंबी और अनिश्चित प्रक्रिया है। इसके अतिरिक्त, ३,००० किलोमीटर लंबे इस आर्थिक गलियारे में काम कर रहे हजारों चीनी इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों के वीजा नियम, स्थानीय श्रम कानून और सबसे महत्वपूर्ण उनकी सुरक्षा (Security Core) की पूरी जिम्मेदारी नए सिरे से तय करनी होगी। बलूच लिबरेशन आर्मी जैसी अलगाववादी ताकतों की सक्रियता बढ़ने से परियोजनाओं की बीमा लागत (Insurance Cost) और बुनियादी ढांचा सुरक्षा खर्च कई गुना बढ़ जाएगा, जिससे चीनी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ना तय है।इस्लामाबाद की लूट के खिलाफ बलूच विद्रोह: स्थानीय संसाधनों के दोहन और रोजगार से वंचित रखने का गंभीर आरोपपाकिस्तान के लिए ग्वादर बंदरगाह और बलूचिस्तान का विशाल भूभाग उसकी सबसे बड़ी रणनीतिक और आर्थिक थाती माना जाता है, लेकिन धरातल पर बलूचिस्तान के स्थानीय नागरिक लंबे समय से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। 'ज्वाइंट बलूच राइट्स कमिटी' और अन्य क्षेत्रीय संगठनों का स्पष्ट आरोप है कि बलूचिस्तान के सोने, तांबे और प्राकृतिक गैस जैसे असीमित प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन करके इसका पूरा वित्तीय लाभ केवल इस्लामाबाद के हुक्मरानों और विदेशी चीनी निवेशकों की जेबों में जा रहा है। बलूच अवाम आज भी बुनियादी सुविधाओं जैसे साफ पीने के पानी, स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा और सम्मानजनक रोजगार के अवसरों से पूरी तरह महरूम है, जिसने अंततः इस क्षेत्र के लोगों को पाकिस्तान से पूरी तरह नाता तोड़कर अपनी आजादी की हुंकार भरने के लिए विवश कर दिया है।
पड़ोसी देश बांग्लादेश में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर भीषण राजनीतिक व सामाजिक उबाल आ गया है। गायकबंधा जिले के पलाशबाड़ी इलाके में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की 81 फीट ऊंची भव्य और विशालकाय मूर्ति का ऐतिहासिक निर्माण करवा रहे एक हिंदू युवक हरिदास चंद्र तारनी दास की अचानक हुई गिरफ्तारी के बाद पूरे देश का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। इस दमनकारी कार्रवाई के खिलाफ शनिवार को राजधानी ढाका स्थित नेशनल प्रेस क्लब के बाहर हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों के शीर्ष नेताओं ने एकजुट होकर विशाल विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर सीधा आरोप लगाया है कि बहुसंख्यक समाज के कट्टरपंथियों के दबाव में आकर मूर्ति निर्माण कार्य को बाधित करने के लिए हरिदास को मनी लॉन्ड्रिंग के एक पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठे केस में फंसाकर जेल भेजा गया है।सीआईडी का मनी लॉन्ड्रिंग का दावा: संदिग्ध लेन-देन और जबरन धर्म परिवर्तन की थ्योरी पर उठे गंभीर सवालबांग्लादेश की आपराधिक जांच विभाग (CID) ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में हरिदास चंद्र को ९.३५ करोड़ टका (बांग्लादेशी मुद्रा) के संदिग्ध लेन-देन और अवैध वित्तीय हेरफेर के संगीन आरोपों के तहत गिरफ्तार किया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी जांच में यह सनसनीखेज दावा किया है कि हरिदास वर्ष २०१० में अवैध रूप से सीमा पार कर भारत चला गया था और बाद में २०१९ में उसने कथित तौर पर इस्लाम धर्म कबूल कर लिया था। हालांकि, स्थानीय अदालत द्वारा हरिदास को बिना किसी विस्तृत जांच के सीधे न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने के फैसले के बाद से ही देश के अल्पसंख्यक संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा है, जो पुलिस की इस धर्म परिवर्तन और वित्तीय हेरफेर वाली थ्योरी को एक सुनियोजित साजिश करार दे रहे हैं।अल्पसंख्यक एकता परिषद का बड़ा अल्टीमेटम: रिहाई न होने पर पूरे बांग्लादेश में उग्र आंदोलन की दी चेतावनी'बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद' के बैनर तले आयोजित इस विशाल विरोध प्रदर्शन में अंतरिम सरकार को बेहद सख्त और सीधी चेतावनी जारी की गई है। परिषद के केंद्रीय महासचिव मनिंद्र कुमार नाथ ने इस दमनकारी गिरफ्तारी की तीव्र शब्दों में भर्त्सना करते हुए कहा कि राज्य मशीनरी जानबूझकर धार्मिक आस्था के काम में रोड़े अटका रही है, जिसे देश का अल्पसंख्यक समाज किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। वहीं, परिषद के वरिष्ठ और प्रखर नेता सुब्रत चौधरी ने प्रशासन को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया कि यदि बेकसूर हरिदास को ससम्मान तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में तीनों अल्पसंख्यक समुदाय सामूहिक रूप से सड़कों पर उतरकर एक राष्ट्रव्यापी उग्र आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने सवाल दागा कि आखिर किसके इशारे पर देश का सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का यह घिनौना खेल खेला जा रहा है?एक साल में 3000 से अधिक अत्याचार की घटनाएं: नरसिंगदी के चंचल भौमिक हत्याकांड से दहला हिंदू समाजमनिंद्र कुमार नाथ ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया के समक्ष बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही लगातार हिंसक वारदातों के भयावह आंकड़े भी सार्वजनिक किए। उन्होंने बताया कि पिछले महज एक वर्ष के भीतर पूरे बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों पर बर्बर अत्याचार की करीब ३,००० से अधिक हिंसक घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें सुनियोजित तरीके से ६६ मासूम लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई और दर्जनों प्राचीन मंदिरों को कट्टरपंथियों द्वारा खंडित कर दिया गया। हाल ही में नरसिंगदी जिले में २५ वर्षीय हिंदू युवा चंचल भौमिक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला भी काफी गरमाया हुआ है, जिसकी सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद उसकी बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या किए जाने की पुष्टि हो रही है। इसके पूर्व गायकबंधा जिले में ही एक इस्लामी जुलूस के दौरान भगवान राम के चित्रों के सरेआम अपमान किए जाने की घटना पर भी भारी आक्रोश देखा गया था।भारत सरकार ने भी वैश्विक मंच पर जताई कड़ी चिंता: विदेश मंत्रालय ने ढाका को दी सुरक्षा पुख्ता करने की नसीहतबांग्लादेश के भीतर हिंदुओं और उनके धार्मिक प्रतीकों पर हो रहे इन लगातार हमलों पर भारत सरकार भी बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपना चुकी है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस संवेदनशील विषय पर बयान जारी करते हुए कहा था कि बांग्लादेश में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों और धार्मिक तस्वीरों के लगातार हो रहे अपमान व तोड़फोड़ की घटनाओं पर नई दिल्ली बेहद बारीक नजर बनाए हुए है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक नियमों के तहत बांग्लादेश की तत्कालीन सरकार से इन चरमपंथी और कट्टरपंथी तत्वों पर तत्काल प्रभाव से कड़ी कानूनी लगाम कसने, दोषियों को जेल भेजने और संपूर्ण अल्पसंख्यक आबादी के जान-माल की पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने की पुरजोर अपील की थी।
राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा हटाए जाने के बाद शुरू हुआ घटनाक्रम अब एक बेहद हिंसक और विवादित मोड़ ले चुका है। वांगचुक के समर्थन में और उनके स्थान पर भूख हड़ताल पर बैठे एक्टिविस्ट अभिजीत दीपके पर एक महिला ने अचानक मंच पर चढ़कर सरेआम नीली स्याही फेंक दी। इस हाई-प्रोफाइल घटना के तुरंत बाद हमलावर महिला की पहचान बरखा त्रेहन के रूप में हुई है। इस सनसनीखेज घटनाक्रम ने जंतर-मंतर पर मौजूद सुरक्षा व्यवस्था और विभिन्न राजनीतिक गुटों के बीच जारी भारी तनाव को एक बार फिर जगजाहिर कर दिया है, जिसके तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी महिला को हिरासत में ले लिया।पुरुष आयोग की संस्थापक बरखा त्रेहन कौन हैं: जानें उनका सामाजिक और राजनीतिक बैकग्राउंडअभिजीत दीपके पर हुए इस हमले के तुरंत बाद फैक्ट-चेकर्स और सोशल मीडिया पर बरखा त्रेहन के इतिहास को लेकर जानकारियां तेजी से वायरल होने लगीं। बरखा त्रेहन खुद को एक 'मेन्स राइट्स एक्टिविस्ट' (पुरुष अधिकार कार्यकर्ता) और 'पुरुष आयोग' नामक एक गैर-सरकारी संस्था की संस्थापक और अध्यक्ष बताती हैं। पेशेवर नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह खुद को एक उद्यमी, समतावादी (इगैलिटेरियन), और जेंडर-न्यूट्रल समाज की पैरवी करने वाली संवैधानिक कार्यकर्ता के रूप में प्रस्तुत करती हैं। वह पिछले कई वर्षों से विभिन्न मंचों पर पुरुषों के कानूनी अधिकारों और उनके पक्ष में पुरजोर तरीके से अपनी आवाज मुखर करती आई हैं।रेपिस्ट कुलदीप सिंह सेंगर का कर चुकी हैं खुला समर्थन: उन्नाव मामले में आईं थीं चर्चा मेंबरखा त्रेहन का विवादों से नाता नया नहीं है; वह पिछले साल उन्नाव सामूहिक बलात्कार मामले के मुख्य दोषी और पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का खुलेआम समर्थन करने के कारण भारी विवादों और चर्चाओं में घिरी थीं। उस दौरान जब दिल्ली की एक अदालत ने सेंगर की उम्रकैद की सजा को अस्थाई रूप से निलंबित करने की अर्जी पर विचार किया था, तब त्रेहन ने जंतर-मंतर पर 'आई सपोर्ट कुलदीप सेंगर' लिखे हुए तख्तों के साथ प्रदर्शन किया था। उन्होंने दलील दी थी कि बलात्कार जैसे संवेदनशील मामलों पर राजनीति बंद होनी चाहिए और अदालतों के फैसलों का हर हाल में सम्मान किया जाना चाहिए, जिसके चलते महिला संगठनों ने उनकी तीखी आलोचना की थी।स्याही कांड के बाद मारपीट का आरोप और हिरासत: जंतर-मंतर पर लगे जय श्रीराम और जय भीम के नारेशनिवार को हुए इस ताजा घटनाक्रम के वीडियो फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि बरखा त्रेहन अचानक उस मंच की ओर बढ़ती हैं जहां अभिजीत दीपके अनशन पर बैठे थे और उन पर स्याही फेंक देती हैं। स्याही फेंकने के तुरंत बाद वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों और त्रेहन के बीच भारी धक्का-मुक्की शुरू हो गई। जब दिल्ली पुलिस के जवान त्रेहन को हिरासत में लेकर गाड़ी की तरफ ले जा रहे थे, तब उन्होंने हाथ जोड़कर रोते हुए आरोप लगाया कि उनके साथ वहां मौजूद लोगों ने मारपीट की है। इस पूरे हंगामे के दौरान जहां बरखा त्रेहन 'जय श्रीराम' के नारे लगाती दिखीं, वहीं दूसरी ओर नीली स्याही से सराबोर एक्टिविस्ट अभिजीत दीपके ने नीले रंग को अपना पसंदीदा बताते हुए 'जय भीम' के नारे लगाकर अपना अनशन जारी रखने का संकल्प दोहराया।
जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय राजनीति में इस समय एक बहुत बड़ा वैचारिक और रणनीतिक मोड़ आ गया है। केंद्र शासित प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) द्वारा नई दिल्ली में आयोजित किए जाने वाले 'दिल्ली चलो' आंदोलन को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने एक बड़ा झटका दिया है। शनिवार को आधिकारिक बयान जारी करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी इस विरोध प्रदर्शन में केवल एक ही सूरत में शामिल होगी, जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इस आंदोलन के मुख्य एजेंडे में जम्मू-कश्मीर के बुनियादी मुद्दों से जुड़ी कुछ अन्य अनिवार्य और सख्त मांगों को भी शामिल करेंगे।केवल राज्य का दर्जा मांगना अवाम से विश्वासघात: महबूबा मुफ्ती ने फारुख अब्दुल्ला को खत लिख रखा अपना स्टैंडपीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला को एक औपचारिक पत्र भेजकर अपनी शर्तों से अवगत करा दिया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बेहद तल्ख लहजे में कहा कि अगर आंदोलन केवल पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित रहता है, तो इससे यह गलत संदेश जाएगा कि हम ५ अगस्त २०१९ को केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले को स्वीकार कर चुके हैं। महबूबा ने जोर देकर कहा कि प्रदेश की अवाम ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को केवल राज्य का दर्जा वापस पाने के लिए भारी बहुमत नहीं दिया है; इसलिए एजेंडे में ऐतिहासिक आर्टिकल ३70 की बहाली, जेलों में बंद स्थानीय राजनीतिक कैदियों की बिना शर्त रिहाई और जमात-ए-इस्लामी जैसे सामाजिक-राजनीतिक संगठनों पर से प्रतिबंध हटाने की मांग को तुरंत जोड़ा जाना चाहिए।लद्दाख की तर्ज पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की वकालत: सामूहिक नेतृत्व से ही निकलेगा कश्मीर का समाधानमहबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा बिना किसी पूर्व विमर्श के इस तरह के एकतरफा आंदोलन की घोषणा करने पर गहरी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने सुझाव दिया कि लद्दाख के राजनीतिक नेतृत्व की तरह जम्मू-कश्मीर की सभी छोटी-बड़ी राजनीतिक पार्टियों को आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले एक व्यापक सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) बुलाई जानी चाहिए, जिसमें न केवल राजनीतिक दलों के प्रमुख बल्कि नागरिक समाज (सिविल सोसाइटी) के प्रतिनिधि भी हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि एक ईमानदार और सार्थक राजनीतिक प्रक्रिया तभी शुरू हो सकती है जब तक बुनियादी और अमानवीय परिस्थितियों को हल करने के लिए सभी नेता एक सुर में केंद्र सरकार के सामने अपनी मांगें न रखें।जंतर-मंतर पर २० मार्च को शक्ति प्रदर्शन की तैयारी: मीरवाइज को न्योते पर भड़की भाजपाज्ञात हो कि जम्मू-कश्मीर की सत्ता संभाल रहे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आगामी २० मार्च २०२6 को देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर एक विशाल धरने और प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की है। उमर अब्दुल्ला का आरोप है कि केंद्र सरकार उनके धैर्य की परीक्षा ले रही है और पूर्ण राज्य का दर्जा देने के वादे को लगातार टाल रही है। इस राष्ट्रीय आंदोलन को सफल बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने देश के तमाम विपक्षी नेताओं के साथ-साथ कश्मीर के प्रमुख धार्मिक और अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारुख को भी औपचारिक निमंत्रण भेजा है, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उमर अब्दुल्ला पर अलगाववाद को दोबारा बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया है और इस पूरी कवायद का कड़ा विरोध किया है।
वांगचुक की हालत बेहद नाजुक! सोनम ने अस्पताल में दवा और ड्रिप लेने से किया इनकार
Sonam Wangchuk Health Update: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से अनशन पर बैठे लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। शनिवार तड़के दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने ...
दिल्ली से सीधे ऋषिकेश तक दौड़ेगी रैपिड रेल, 5 घंटे का थकाऊ सफर अब सिर्फ 150 मिनट में होगा पूरा!
दिल्ली-एनसीआर से देवभूमि उत्तराखंड के पहाड़ों और पवित्र धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक बेहद शानदार और युगांतरकारी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को हाई-स्पीड कनेक्टिविटी देने वाली देश की सबसे तेज रीजनल रेल 'नमो भारत' (Namo Bharat) अब सीधे हिमालय की तलहटी तक का सफर तय करने जा रही है। केंद्र सरकार ने दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर को मेरठ के मोदिपुरम स्टेशन से आगे बढ़ाते हुए विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्रों हरिद्वार और ऋषिकेश तक ले जाने के ऐतिहासिक प्रस्ताव को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यह लगभग १५० किलोमीटर लंबा नया एक्सटेंशन कॉरिडोर देश के सबसे बड़े पर्यटन हब को दिल्ली से जोड़कर सफर के समय को आधा कर देगा।उत्तराखंड के प्रयासों को मिली हरी झंडी: 'गंगा ग्रोथ कॉरिडोर' के लिए ग्राउंड वर्क और डीपीआर की तैयारी शुरूयह महापरियोजना उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर के समक्ष लगातार की गई मजबूत पैरवी का परिणाम है। केंद्र सरकार से औपचारिक हरी झंडी मिलने के बाद अब उत्तराखंड सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) संयुक्त रूप से इस ड्रीम प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने में जुट गए हैं। इस पूरे रूट का व्यापक हवाई और जमीनी सर्वे करने के साथ-साथ एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है, जिसमें स्टेशनों की संख्या, आवश्यक भूमि अधिग्रहण और जटिल इंजीनियरिंग रूट मैप को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उत्तराखंड शासन ने इस मेगा प्रोजेक्ट के त्वरित क्रियान्वयन के लिए अतिरिक्त सचिव रीना जोशी को विशेष नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया है।मेरठ से लक्ष्मण झूला तक का रूट मैप: जानिए किन-किन बड़े शहरों से होकर गुजरेगी नमो भारतयह अत्याधुनिक सेमी-हाई-स्पीड रेल ट्रैक वर्तमान में संचालित हो रहे दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के अंतिम छोर यानी मोदिपुरम (मेरठ) से आगे विस्तार पकड़ेगा। उत्तर प्रदेश के हिस्से में यह कॉरिडोर मोदिपुरम से शुरू होकर दौराला, खतौली, मुजफ्फरनगर औद्योगिक क्षेत्र और उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड की भौगोलिक सीमा पर स्थित पुरकाजी कस्बे से होकर गुजरेगा। इसके बाद सीमा पार करते हुए यह ट्रेन शिक्षा के बड़े केंद्र रुड़की (IIT रुड़की) और हरिद्वार में पवित्र हर की पौड़ी के करीब से गुजरती हुई सीधे ऋषिकेश में प्रतिष्ठित लक्ष्मण झूला के समीप नवनिर्मित टर्मिनल स्टेशन पर जाकर समाप्त होगी। इस विशाल नेटवर्क का सबसे अनूठा लाभ यह होगा कि हरिद्वार और ऋषिकेश के यात्री बिना किसी रुकावट के गाजियाबाद, आनंद विहार और सराय काले खान पहुंच सकेंगे, जिसे भविष्य में दिल्ली-पानीपत और जेवर एयरपोर्ट रैपिड रेल रूट से भी इंटरचेन्ज के जरिए जोड़ा जाएगा।भारी ट्रैफिक जाम से मिलेगी बड़ी राहत: १६० किमी की रफ्तार से वीकेंड टूरिज्म को मिलेगा जबरदस्त बूस्टवर्तमान समय में दिल्ली से ऋषिकेश या हरिद्वार जाने वाले मुसाफिरों को राष्ट्रीय राजमार्ग-५८ (NH-58) पर मिलने वाले भीषण ट्रैफिक जाम और जटिल मोड़ों से जूझना पड़ता है, जिससे सड़क मार्ग से यात्रा तय करने में औसतन ५ से ६ घंटे का लंबा समय बर्बाद होता है। चूंकि नमो भारत ट्रेनें १६० किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड से पटरियों पर दौड़ने की क्षमता रखती हैं, इसलिए इस डेडीकेटेड ट्रैक के चालू होने के बाद दिल्ली से ऋषिकेश की कुल दूरी महज ढाई से तीन घंटे (१५० मिनट) में आसानी से नापी जा सकेगी। इस क्रांतिकारी परिवहन प्रणाली के विकसित होने से दिल्ली-एनसीआर के कामकाजी लोग और युवा वीकेंड पर आसानी से एडवेंचर स्पोर्ट्स और आध्यात्मिक शांति के लिए ऋषिकेश आ-जा सकेंगे और सुबह जाकर शाम तक वापस अपने घर लौट सकेंगे।निवेश और फंडिंग का महायोजना: वैश्विक बैंकों की मदद से आकार लेगी कई हजार करोड़ की यह परियोजनायद्यपि सरकार ने विस्तृत सर्वे और डीपीआर पूरा होने से पहले इस बड़े प्रोजेक्ट की सटीक आधिकारिक लागत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन बुनियादी ढांचे के विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह एक बेहद विशाल पूंजी निवेश वाला प्रोजेक्ट होगा। संदर्भ के लिए, ८२.१५ किलोमीटर लंबे मौजूदा दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के निर्माण में करीब ₹३०,२७4 करोड़ का बड़ा खर्च आया था, और चूंकि यह नया ऋषिकेश एक्सटेंशन कॉरिडोर उससे लगभग दोगुना लंबा है, इसलिए इसमें भारी बजटीय आवंटन की आवश्यकता होगी। इस वित्तीय आवश्यकता को पूरा करने के लिए केंद्र और दोनों राज्य सरकारों के अंशदान के साथ-साथ एशियाई विकास बैंक (ADB) और एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से बड़े ऋण समझौते किए जा सकते हैं, जबकि उत्तराखंड सरकार ने कुंभ क्षेत्र के बिजली बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ₹७५0 करोड़ की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता मांगी है।केवल तीर्थयात्रा नहीं बल्कि व्यापारिक क्रांति: रियल एस्टेट, वेयरहाउसिंग और महाकुंभ २०२७ के लिए गेम चेंजरआर्थिक जगत के विश्लेषकों और लोहिया वर्ल्डस्पेस के प्रबंध निदेशक पीयूष लोहिया का स्पष्ट मानना है कि इस कॉरिडोर के आने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की पूरी व्यावसायिक तस्वीर बदल जाएगी। इस कॉरिडोर के चालू होने से मुजफ्फरनगर के वेयरहाउसिंग सेक्टर और रुड़की के छात्र-आवास (हॉस्टल्स) व रियल एस्टेट मार्केट में जबरदस्त तेजी देखी जाएगी, साथ ही मुरादाबाद के पीतल उद्योग के निर्यातकों को भी हाईवे पर जाम कम होने से माल को दिल्ली भेजने में बड़ी लॉजिस्टिक्स राहत मिलेगी। दिल्ली-एनसीआर के बड़े निवेशकों द्वारा हरिद्वार और ऋषिकेश में हॉलिडे होम्स, लग्जरी विला और सर्विस अपार्टमेंट्स में भारी निवेश करने की उम्मीद है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि साल २०२७ में आयोजित होने वाले भव्य महाकुंभ और वार्षिक चारधाम यात्रा के दौरान जब उत्तराखंड के मार्ग वाहनों के अत्यधिक दबाव से हांफने लगते हैं, तब यह हाई-स्पीड रैपिड रेल प्रणाली राज्य के संपूर्ण ट्रैफिक मैनेजमेंट और पर्यटन अर्थव्यवस्था के लिए एक अचूक सुरक्षा कवच साबित होगी।
सोनम वांगचुक के अनशन पर पहली बार बोले राहुल गांधी, आधी रात के पुलिस एक्शन पर मोदी सरकार को घेरा
लद्दाख के पर्यावरण और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा जबरन हटाए जाने के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम पर पहली बार अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। शनिवार को केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा मोदी सरकार के मूल सिद्धांत पूरी तरह से असत्य और हिंसा पर टिके हुए हैं। उन्होंने जंतर-मंतर से वांगचुक को हटाए जाने की पुलिसिया कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर करारी चोट बताते हुए स्पष्ट किया कि एक अहिंसक और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को बलपूर्वक दबाना पूरी तरह से अलोकतांत्रिक और निंदनीय है।दिल्ली पुलिस का सीक्रेट ऑपरेशन: जैमर, सादे कपड़े और सफेद चादरों के घेरे में ऐसे हटाए गए वांगचुकसोनम वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने के बाद शनिवार तड़के दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर एक बेहद सुनियोजित और विशेष रणनीति के तहत ऑपरेशन को अंजाम दिया। दिल्ली उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों और डॉक्टरों की आपातकालीन सलाह के बाद शुक्रवार रात करीब १:३० बजे पुलिस मुख्यालय से वरिष्ठ अधिकारियों को वांगचुक की मेडिकल जांच और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के सख्त निर्देश मिले। इसके तुरंत बाद नई दिल्ली जिले के आला अधिकारी मंदिर मार्ग थाने में एकत्र हुए और बिना किसी टकराव के वांगचुक को एक मिनट से भी कम समय में वहां से निकालने का विशेष अभ्यास किया गया। सुबह करीब ५ बजे सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों ने पूरे मंच को बड़ी-बड़ी सफेद चादरों से ढक दिया और विरोध प्रदर्शनकारियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को रोकने के लिए इलाके में मोबाइल नेटवर्क जैमर तक लगा दिए गए, जिसके बाद वांगचुक को तुरंत अस्पताल ले जाया गया।शिक्षा व्यवस्था पर राहुल गांधी का बड़ा हमला: पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्याओं को बताया राष्ट्रीय संकटसोनम वांगचुक के मुद्दे के साथ-साथ राहुल गांधी ने देश के छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर भी मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि लगातार होते प्रश्नपत्र लीक (पेपर लीक), शिक्षा की आसमान छूती लागत और इसके कारण डिप्रेशन में आकर छात्रों द्वारा की जा रही आत्महत्याएं भारत के भविष्य से जुड़े सबसे गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर सरकार को राजनीति से ऊपर उठकर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के लिए किया जाने वाला कोई भी बल प्रयोग देश के युवाओं को उनके हकों की लड़ाई लड़ने से नहीं रोक सकता क्योंकि छात्रों की निर्भीक आवाज ही जीवंत लोकतंत्र की असली पहचान है।देहरादून रैली का भावुक वीडियो साझा: नीट परीक्षा और रिया की आत्महत्या पर टूटे पिता का दर्द बयां कियाअपने बयानों को आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी ने देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को बिल्कुल नए सिरे से तैयार करने की पुरजोर वकालत की ताकि बच्चों के लिए तनावमुक्त व सुरक्षित माहौल का निर्माण हो सके। उन्होंने देहरादून में आयोजित 'छात्रों की गूंज' रैली का एक बेहद भावुक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने मंच पर रिया कुमारी के पिता राजेश कुमार को आमंत्रित किया था। ज्ञात हो कि नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में बड़े पैमाने पर लगे पेपर लीक के आरोपों और परीक्षा रद्द होने के बाद मानसिक तनाव के कारण मई में रिया ने आत्महत्या कर ली थी। राहुल ने भावुक होते हुए लिखा कि अपनी बेटी को खोकर राजेश जी इस कदर टूट चुके हैं कि उन्हें देखकर हर आंख नम हो गई; यह सिर्फ एक परिवार का व्यक्तिगत दर्द नहीं है बल्कि देश में पेपर लीक के माफियाओं ने ऐसे कई हंसते-खेलते परिवारों के बच्चों को उनसे हमेशा के लिए छीन लिया है।
रविवार को जगदीशपुर में होगी मोहन कैबिनेट की अहम बैठक, UCC समेेत कई अहम फैसलों पर टिकी नजर
20 जुलाई से शुरु हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र से पहले रविवार को मोहन कैबिनेट की अहम बैठक जगदीशपुर में होगी। कैबिनेट की बैठक में UCC समेत कई अहम मसौदों को मंजूरी दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जगदीशपुर में कैबिनेट की बैठक लेकर कहा कि भोपाल ...
ये हमारी कहानी नहीं हैं, हमारी कहानी कुछ और है, जिसे हमें खोजना है
जैसे-जैसे हम में संविधान के मूल्य और अधिकारों की समझ बढ़ने लगती है, हम अधिक बेहतर इंसान और बेहतर भारतीय नागरिक बनने की तरफ बढ़ने लगते हैं। एक व्यक्ति अगर अपने अधिकार और खासतौर से संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूक होगा तो वो बेहतर इंसान भी होगा। ...
दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस में टिकट वितरण के बाद उठे घमासान के बाद अब दोनों ही सियासी दलों में डैमेज कंट्रोल होता दिख रहा है। कांग्रेस में घनश्याम सिंह का टिकट होने के बाद टिकट के प्रबल दावेदार रहे अवधेश नायक की नाराजगी और उनको ...
गुजरात ATS ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद बड़ा खुलासा किया है। जांच में जम्मू-कश्मीर में कथित आतंकी प्रशिक्षण, विस्फोट परीक्षण और विदेशी हैंडलर से संपर्क के आरोपों की जांच जारी है।
सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने पर राहुल गांधी का हमला, बोले- शांतिपूर्ण आंदोलन दबाना गलत
सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल भेजे जाने पर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। NEET परीक्षा अनियमितताओं, शिक्षा सुधार और छात्रों के मुद्दों को लेकर विपक्ष ने कार्रवाई पर सवाल उठाए।
पश्चिम बंगाल दौरे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिलीगुड़ी स्थित BSF चौकी का दौरा कर भारत-बांग्लादेश सीमा और ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर की सुरक्षा की समीक्षा की। IB, BSF और NIA अधिकारियों के साथ हुई हाईलेवल बैठक।
दिल्ली पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके आज से भूख हड़ताल पर बैठ गए। जब वे अनशनस्थल पर कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे तभी एक महिला ने उन पर स्याही फेंक दी। इससे वहां अफरातफरी ...
दिल्ली-NCR, यूपी, हरियाणा और राजस्थान में 10 दिन से अच्छी बारिश क्यों नहीं हो रही? जानिए IMD के अनुसार 'ब्रेक इन मॉनसून', अल नीनो और मानसून ट्रफ का पूरा असर तथा कब लौटेगी झमाझम बारिश।
भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी एक सैनिक का जज्बा कभी रिटायर नहीं होता। इसका सटीक उदाहरण हैं पूर्व सैनिक प्रवीण पुंडीर, जिन्होंने खुद देश की सीमाओं की रक्षा करने के बाद अब युवाओं को वर्दी पहनाने का बीड़ा उठा लिया है। वे केवल एक मेंटॉर नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण हैं जो भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और पुलिस में भर्ती होकर देश सेवा का सपना संजोए बैठे हैं। प्रवीण पुंडीर की कहानी आज हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो संघर्षों से लड़कर सफलता की इबारत लिखना चाहता है।सेना के अनुशासन से युवाओं में भर रहे हैं जोशप्रवीण पुंडीर का मानना है कि सेना में भर्ती केवल शारीरिक क्षमता का परीक्षण नहीं है, बल्कि यह मानसिक मजबूती और अनुशासन का एक अनूठा संगम है। उन्होंने अपनी सेवा के वर्षों में जो अनुभव प्राप्त किए, उसे वे अब पूरी निष्ठा के साथ आने वाली पीढ़ी को दे रहे हैं। उनके प्रशिक्षण केंद्र में अनुशासन का स्तर सेना जैसा ही होता है, जिससे युवाओं को पहले दिन से ही एक फौजी की जीवनशैली और मानसिकता का अनुभव मिलने लगता है। वे अपने छात्रों को न केवल फिजिकल ट्रेनिंग देते हैं, बल्कि उन्हें देश प्रेम और समर्पण की भावना से भी ओत-प्रोत करते हैं।कैसे तैयार होते हैं देश के भविष्य के रक्षक?प्रवीण पुंडीर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं की सफलता का ग्राफ तेजी से ऊपर बढ़ा है। वे मानते हैं कि अगर सही दिशा, सटीक मार्गदर्शन और अटूट मेहनत मिल जाए, तो किसी भी ग्रामीण या मध्यम वर्गीय परिवार का युवा देश की सबसे बड़ी सेवा का हिस्सा बन सकता है। वे अपने प्रशिक्षण के दौरान शारीरिक फिटनेस के साथ-साथ लिखित परीक्षा और इंटरव्यू की तैयारी पर भी समान रूप से जोर देते हैं। उनके छात्रों का कहना है कि पुंडीर सर की रणनीति और उनकी व्यावहारिक सीख ही उन्हें बाकी प्रतियोगियों से अलग खड़ा करती है।वर्दी के सपने को सच करने का मिशनएक सैनिक जब अपनी वर्दी उतारता है, तो उसके पास ढेर सारी यादें और अनुभव होते हैं, लेकिन प्रवीण पुंडीर ने अपने इन अनुभवों को समाज सेवा में बदलने का रास्ता चुना। आज जब देश को युवा और ऊर्जावान सुरक्षाकर्मियों की जरूरत है, तब पुंडीर जैसे पूर्व सैनिक अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं। उनका यह सफर इस बात को साबित करता है कि वर्दी सेवा का एक माध्यम मात्र है, और उसे पहनने के बाद भी समाज के प्रति जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। युवाओं को सही राह दिखाकर वे असल मायने में 'देश के रक्षक' तैयार कर रहे हैं, जो आने वाले कल में भारत की सुरक्षा की बागडोर संभालेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्यावरण संरक्षण और हरित परिवहन (Green Transportation) की सोच को हरियाणा की धरती पर एक नई दिशा मिली है। जींद में आयोजित एक विशाल रैली के दौरान 466 इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का एक साथ उपयोग किया गया, जो न केवल भारत के बढ़ते ई-मोबिलिटी संकल्प को दर्शाता है, बल्कि हरियाणा के लोगों की पीएम मोदी के विजन के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है। यह आयोजन देश के भविष्य को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।पर्यावरण संरक्षण और ई-मोबिलिटी का अनूठा संगमजींद की इस रैली में इलेक्ट्रिक वाहनों की भारी संख्या में मौजूदगी ने यह संदेश दिया है कि आम जनता अब 'ग्रीन एनर्जी' को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए पीएम मोदी का जोर लगातार इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग पर रहा है। इस रैली में शामिल हुए 466 इलेक्ट्रिक वाहनों ने न केवल रैली में आने वाले लोगों को सुविधा प्रदान की, बल्कि पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन को कम करने का एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश किया। स्थानीय लोगों के बीच भी इन वाहनों को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।हरियाणा में बढ़ रहा है इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रेजहरियाणा सरकार भी केंद्र की इस पहल को धरातल पर उतारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाया जा रहा है, जिससे लोग अब बेझिझक इलेक्ट्रिक वाहनों का चुनाव कर रहे हैं। जींद की रैली में हुए इतने बड़े पैमाने पर ई-वाहनों का उपयोग यह साबित करता है कि प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों का इकोसिस्टम मजबूती से पनप रहा है। यह न केवल किफायती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक अनिवार्य कदम भी है।पीएम मोदी का विजन और भारत का भविष्यप्रधानमंत्री का सपना एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जो 'आत्मनिर्भर' होने के साथ-साथ 'प्रदूषण मुक्त' भी हो। जींद में दिखा यह जनसमर्थन पीएम मोदी के उस विजन की पुष्टि करता है, जिसमें वे देश की ऊर्जा जरूरतों को अक्षय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के माध्यम से पूरा करना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी प्रकार का जनभागीदारी वाला मॉडल देश भर में अपनाया गया, तो भारत बहुत जल्द ही वैश्विक स्तर पर ग्रीन ट्रांसपोर्ट का नेतृत्व करने में सक्षम होगा। रैली में इतनी बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक वाहनों का आना एक राजनीतिक संदेश के साथ-साथ सामाजिक बदलाव की एक बड़ी दस्तक भी है।
कैथल ग्रेनेड हमला मामला: साल 2025 की इस बड़ी घटना में नाबालिग आरोपी को मिली हाईकोर्ट से जमानत
कैथल में हुए चर्चित ग्रेनेड हमले के मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए नाबालिग आरोपी को जमानत दे दी है। साल 2025 में हुए इस दहला देने वाले ग्रेनेड अटैक ने पूरे हरियाणा में सनसनी फैला दी थी। आरोपी के नाबालिग होने और मामले की गंभीरता के बीच हाईकोर्ट ने कानूनी प्रावधानों और किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) के तहत सुनवाई करते हुए यह राहत प्रदान की है। इस फैसले के बाद से केस से जुड़े सभी पक्षों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म है।क्या था साल 2025 का कैथल ग्रेनेड अटैक मामला?साल 2025 में कैथल शहर में हुए ग्रेनेड हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े किए थे। इस घटना में विस्फोटक का इस्तेमाल कर दहशत फैलाने का प्रयास किया गया था, जिसमें कई लोग बाल-बाल बचे थे। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई थी कि हमले के पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय था, जिसमें किशोरों का इस्तेमाल किया गया था। इस मामले ने न केवल पुलिस बल्कि राज्य की सुरक्षा एजेंसियों को भी हिलाकर रख दिया था, जिसके बाद कई गिरफ्तारियां हुई थीं और गहन छानबीन की गई थी।हाईकोर्ट का फैसला और जमानत की शर्तेंनाबालिग आरोपी की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने तर्क दिया था कि आरोपी घटना के समय किशोर था और उसे सुधारने की जरूरत है, न कि उसे जेल के माहौल में रखने की। हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड और तथ्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी को शर्तों के साथ जमानत देने का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि जमानत के दौरान किशोर की निगरानी उचित सुधार गृह के माध्यम से हो या उसके अभिभावकों की देखरेख में रहे। अदालत का यह आदेश इस दृष्टिकोण पर आधारित है कि किशोर अपराधियों के साथ कानून का रुख सुधारवादी होना चाहिए।जांच पर पड़ेगा क्या असर और आगे की राह?इस जमानत के बाद कानून के जानकारों का मानना है कि इससे मुख्य मामले की जांच की गति पर असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, आम लोगों के मन में अब भी इस हमले को लेकर कई सवाल बाकी हैं। कैथल पुलिस ने पहले ही इस केस में चार्जशीट दाखिल कर दी है। कोर्ट के इस आदेश ने एक बार फिर से इस बात पर बहस छेड़ दी है कि गंभीर अपराधों में संलिप्त नाबालिगों के लिए न्याय का स्वरूप क्या होना चाहिए। फिलहाल, इस हाई-प्रोफाइल मामले में सरकार और पुलिस की अगली कानूनी रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
RGHS में 'एक मरीज, कई बार भर्ती': फर्जी क्लेम का हुआ बड़ा खुलासा, अब सरकार ने उठाया ये सख्त कदम
राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में एक बड़े घोटाले की परतें खुल गई हैं। हाल ही में सामने आई अनियमितताओं में एक ही मरीज को बार-बार अस्पताल में भर्ती दिखाकर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का भुगतान उठाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और शासन स्तर पर हड़कंप मच गया है। सरकार ने अब उन निजी अस्पतालों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जो मरीजों के नाम पर फर्जी क्लेम उठाकर सरकारी राशि का दुरुपयोग कर रहे थे।क्या है RGHS में करोड़ों के फर्जी क्लेम का खेल?जांच में यह बात सामने आई कि कई निजी अस्पताल RGHS के तहत आने वाले मरीजों की बीमारी को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते थे या फिर एक ही मरीज को एक ही बीमारी के लिए बार-बार भर्ती दिखाया जाता था। इन अस्पतालों का लक्ष्य केवल सरकारी क्लेम की राशि को हड़पना था। इस प्रक्रिया में मरीज को तो इलाज का नाम मात्र लाभ मिलता था, लेकिन कागजों में भारी-भरकम बिल बनाकर सरकार को चूना लगाया जा रहा था। राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों ने जब डेटा का विश्लेषण किया, तो इस संगठित घोटाले का पता चला, जिसमें करोड़ों रुपये की हेराफेरी का अंदेशा जताया जा रहा है।सरकार का बड़ा एक्शन: ऑडिट के बाद अब होगी रिकवरीइस फर्जीवाड़े के खिलाफ सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए एक बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार, अब राज्य भर के उन सभी अस्पतालों की विशेष ऑडिट की जा रही है, जिनके क्लेम संदिग्ध पाए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि दोषी अस्पतालों को न केवल काली सूची (Blacklist) में डाला जाएगा, बल्कि उनसे वसूली (Recovery) भी की जाएगी। इसके अलावा, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए RGHS पोर्टल पर क्लेम की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और डिजिटल वेरिफिकेशन के दायरे में लाया जा रहा है, ताकि कोई भी अस्पताल मरीजों की जान या उनके कार्ड का दुरुपयोग न कर सके।सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स के लिए क्यों जरूरी है यह सख्ती?RGHS का मुख्य उद्देश्य राज्य के कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों को कैशलेस और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपलब्ध कराना है। इस तरह के घोटालों से न केवल सरकारी खजाने को नुकसान हो रहा है, बल्कि उन वास्तविक मरीजों का हक भी मारा जा रहा है जिन्हें समय पर इलाज की जरूरत है। सरकार की इस कार्रवाई का उद्देश्य व्यवस्था में सुधार करना है ताकि ईमानदार अस्पतालों को परेशानी न हो और भ्रष्ट तत्वों पर लगाम लगाई जा सके। प्रशासन ने लाभार्थियों से भी अपील की है कि अगर उन्हें अपने नाम से अस्पताल में फर्जी भर्ती होने का संदेह हो, तो वे इसकी सूचना तुरंत संबंधित पोर्टल पर दें।
अगर आपको भी WhatsApp या किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'घर बैठे लाखों कमाने' या 'गारंटीड रिटर्न' का लालच देने वाले मैसेज मिल रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। राजस्थान पुलिस ने साइबर ठगों के बढ़ते नेटवर्क को देखते हुए एक सख्त एडवाइजरी जारी की है। साइबर अपराधी आजकल निवेश के नाम पर फर्जी ऐप्स और व्हाट्सएप ग्रुप का जाल बिछा रहे हैं, जिसमें फंसकर लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं। पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है और बताया है कि कैसे ये ठग आपकी गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे हैं।ऐसे काम करता है फर्जी निवेश का साइबर जालसाइबर अपराधी सबसे पहले लोगों को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ते हैं, जहाँ वे खुद को एक्सपर्ट बताकर शेयर बाजार, क्रिप्टो या किसी अज्ञात स्कीम में निवेश करने पर भारी मुनाफे का दावा करते हैं। शुरुआत में ये ठग छोटा निवेश करवाकर थोड़ा रिटर्न देते हैं ताकि विश्वास जीत सकें, लेकिन जैसे ही आप बड़ी रकम निवेश करते हैं, ये आपका पैसा लेकर गायब हो जाते हैं। इन गिरोहों द्वारा बनाए गए फर्जी ऐप्स दिखने में बिल्कुल असली जैसे लगते हैं, लेकिन इनका एकमात्र उद्देश्य आपका पैसा हड़पना होता है। पुलिस के अनुसार, किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करना या किसी संदिग्ध ऐप को डाउनलोड करना आपकी वित्तीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हो सकता है।पुलिस की सलाह: इन संकेतों को पहचानें और सुरक्षित रहेंराजस्थान पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी वैध निवेश योजना कभी भी व्हाट्सएप पर इस तरह के अनचाहे मैसेज नहीं भेजती। पुलिस की एडवाइजरी में कहा गया है कि अगर कोई ऐप आपको बहुत कम समय में दोगुना या तिगुना रिटर्न देने का वादा कर रहा है, तो समझ लीजिए कि यह एक स्कैम है। किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी लें और केवल सेबी (SEBI) या आरबीआई (RBI) द्वारा मान्यता प्राप्त प्लेटफार्मों का ही उपयोग करें। अगर आपके साथ ऐसी कोई घटना होती है, तो तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करें। अनजान व्यक्ति के खाते में कभी भी पैसे ट्रांसफर न करें और न ही किसी भी अज्ञात निवेश ग्रुप में शामिल हों।डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा है जरूरीऑनलाइन निवेश का चलन बढ़ने के साथ ही साइबर धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 'लालच' ही ठगों का सबसे बड़ा हथियार है। स्मार्ट निवेश वही है जो पूरी जानकारी और सावधानी के साथ किया जाए। अपनी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी किसी भी अनवेरिफाइड सोर्स के साथ साझा न करें। राजस्थान पुलिस का यह कदम नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की एक कोशिश है, ताकि आम जनता अपनी गाढ़ी कमाई को इन शातिर अपराधियों से बचा सके। याद रखें, सावधानी ही साइबर ठगी से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।
करौली का 400 साल पुराना शिव मंदिर: यहाँ शिवलिंग पर चढ़ाया जल नंदी तक कैसे पहुंचता है? जानिये चमत्कार
राजस्थान के करौली जिले में एक ऐसा प्राचीन शिव मंदिर स्थित है जो अपनी स्थापत्य कला से कहीं अधिक अपने एक रहस्यमयी चमत्कार के लिए श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। करीब 400 साल पुराने इस शिवालय की महिमा ऐसी है कि यहाँ वैज्ञानिक और भक्त दोनों ही हैरान रह जाते हैं। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल अभिषेक के बाद अपने आप ही नंदी महाराज के चरणों तक पहुँच जाता है। यह जल कहाँ जाता है और इसका मार्ग क्या है, यह आज भी एक अनसुलझा रहस्य बना हुआ है।सदियों पुराना इतिहास और भक्तों की अटूट आस्थाकरौली के इस प्राचीन मंदिर का इतिहास चार शताब्दियों पुराना बताया जाता है। स्थानीय निवासियों और बुजुर्गों के अनुसार, यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र है। मंदिर की बनावट को लेकर पुरातत्वविदों का मानना है कि इसे बहुत ही बारीकी और तकनीक के साथ निर्मित किया गया था। मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग पर जब भक्त श्रद्धा से जल चढ़ाते हैं, तो वह जल चमत्कारिक रूप से बाहर निकलने के बजाय सीधे नंदी की प्रतिमा तक पहुँच जाता है। यह दृश्य न केवल लोगों को भावविभोर करता है, बल्कि मंदिर के शिल्पकारों की अद्भुत इंजीनियरिंग क्षमता को भी प्रदर्शित करता है।क्या वाकई यह चमत्कार है या प्राचीन इंजीनियरिंग का कमाल?भक्त इसे महादेव का साक्षात आशीर्वाद और चमत्कार मानते हैं, वहीं जिज्ञासु लोग इसे प्राचीन भारत की जल प्रबंधन प्रणाली (Water Management System) का एक उत्कृष्ट नमूना मानते हैं। सदियों पहले बनाई गई यह व्यवस्था आज के आधुनिक युग में भी चर्चा का विषय बनी हुई है। मंदिर के पुजारियों का कहना है कि जल के इस रहस्यमयी मार्ग को आज तक कोई भी पूरी तरह से नहीं समझ पाया है। यह नंदी की प्रतिमा से जुड़ा एक ऐसा पाइप या गुप्त जल निकासी प्रणाली हो सकती है जिसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि जल शिवलिंग से नंदी के पास तक बिना किसी रुकावट के पहुँचता है।श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्रकरौली में स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि देश भर से लोग इस अनूठे नजारे को अपनी आँखों से देखने के लिए आते हैं। मंदिर का वातावरण अत्यंत शांत और सकारात्मक है, जो आने वाले हर व्यक्ति को आत्मिक शांति का अनुभव कराता है। विशेष अवसरों पर, जैसे कि महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। यदि आप राजस्थान यात्रा पर निकल रहे हैं, तो करौली के इस चमत्कारी शिव मंदिर के दर्शन जरूर करें। यह मंदिर आपको भारतीय संस्कृति के उस गौरवशाली अतीत से जोड़ता है, जहाँ विज्ञान और अध्यात्म एक साथ चलते थे।
पलामू के जंगलों की रौनक भले ही अभी सफारी के बंद होने से थोड़ी थम गई हो, लेकिन प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। बेतला नेशनल पार्क के मुख्य सफारी मार्ग के बंद होने के बाद भी, पलामू के घने जंगलों के बीच एक 'सीक्रेट रूट' पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। सोशल मीडिया पर इस नए रास्ते की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जो पर्यटकों को जंगल के उस अनछुए हिस्से से रूबरू करा रहे हैं, जिसे अब तक केवल स्थानीय लोग ही जानते थे।क्या है पलामू का ये नया 'सीक्रेट रूट' और क्यों हो रहा है चर्चा?बेतला नेशनल पार्क, जो अपनी जैव विविधता और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है, इन दिनों अपने एक गुप्त रास्ते को लेकर चर्चा में है। जानकारों के अनुसार, यह रास्ता पलामू के जंगलों के उन दुर्गम और शांत हिस्सों से होकर गुजरता है, जहाँ पहले पहुँच पाना आम पर्यटकों के लिए मुश्किल था। सफारी बंद होने के बावजूद, प्रकृति की गोद में शांति तलाशने वाले लोग इस रूट के जरिए जंगलों की अद्भुत सुंदरता का लुत्फ उठा रहे हैं। यहाँ के ऊंचे पहाड़, घने साल के वृक्ष और वन्यजीवों की प्राकृतिक हलचल इस सफर को अविस्मरणीय बना देती है।पलामू की लुभावनी खूबसूरती और वन्य जीवन की झलकइस रूट की सबसे बड़ी खासियत यहाँ की शांति और प्राकृतिक दृश्य हैं। यहाँ आप न केवल पलामू की पहाड़ियों की चोटियों का दीदार कर सकते हैं, बल्कि जंगल के उस प्राकृतिक सौंदर्य को भी देख सकते हैं जो सफारी के शोर-शराबे से दूर रहता है। यदि आप किस्मत वाले रहे, तो रास्ते में आपको हिरणों के झुंड या दुर्लभ पक्षियों की चहचहाहट भी सुनाई दे सकती है। यह रूट पलामू के जंगलों के उस रहस्यमय पक्ष को उजागर करता है, जो अब तक पर्यटकों की नजरों से छिपा था। यदि आप प्रकृति के करीब जाकर फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो यह जगह आपके लिए किसी जन्नत से कम नहीं है।यात्रा से पहले जरूरी सावधानियां और सुझावभले ही यह रास्ता रोमांच से भरा हो, लेकिन यह याद रखना आवश्यक है कि यह एक संरक्षित क्षेत्र है। जंगल के इस 'सीक्रेट रूट' पर जाने से पहले स्थानीय वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन जरूर करें। अपनी सुरक्षा का ध्यान रखें और जंगल की शांति को बनाए रखने के लिए किसी भी तरह की गंदगी न फैलाएं। पलामू के इस रहस्यमय रास्ते का लुत्फ उठाने का सबसे अच्छा समय सुबह की पहली किरण के साथ होता है, जब जंगल अपनी पूरी जीवंतता के साथ जागता है।
झारखंड के मौसम में आज अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के कई हिस्सों में आसमान काले बादलों से घिर गया है और हवाओं के साथ भारी बारिश का सिलसिला शुरू हो चुका है। मौसम विभाग (IMD) ने रांची समेत 6 प्रमुख जिलों के लिए 'येलो' और 'ऑरेंज' अलर्ट जारी किया है। भारी बारिश के साथ-साथ आसमान से गिरती बिजली यानी वज्रपात की चेतावनी ने प्रशासन और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल, मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे या खुले मैदानों में न रहें और अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।इन जिलों पर मंडरा रहा है सबसे बड़ा खतरामौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, रांची, रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो, गुमला और खूंटी जिलों में आज झमाझम बारिश होने की प्रबल संभावना है। इन क्षेत्रों में दोपहर के बाद से ही गरज और चमक के साथ बारिश का दौर तेज हो गया है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की सक्रियता और कम दबाव के क्षेत्र के कारण इन जिलों में अगले कुछ घंटों तक रुक-रुक कर भारी बारिश जारी रह सकती है। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है, जिसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।वज्रपात: जान बचाने के लिए बरतें ये सावधानियांभारी बारिश के साथ वज्रपात (Thunderstorm) की चेतावनी ने सबसे ज्यादा डर पैदा किया है। पिछले कुछ वर्षों में झारखंड में बिजली गिरने से हुई घटनाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने गाइडलाइन जारी की है। यदि आप घर से बाहर हैं और अचानक बिजली कड़कने लगे, तो किसी पक्के मकान या सुरक्षित शेल्टर का सहारा लें। खेतों में काम कर रहे किसानों को विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा गया है। धातु की वस्तुओं, बिजली के खंभों और ऊंचे पेड़ों से दूर रहना ही बचाव का एकमात्र तरीका है। अपने स्मार्टफोन पर मौसम के अपडेट्स पर नजर बनाए रखें और घबराएं नहीं।यातायात और जनजीवन पर असररांची शहर और आसपास के इलाकों में लगातार हो रही बारिश का असर यातायात पर भी दिख रहा है। सड़कों पर दृश्यता (Visibility) कम होने के कारण वाहनों की गति धीमी हो गई है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची सड़कों पर जलभराव की वजह से आवागमन बाधित हुआ है। अगर आपको आज कहीं बहुत जरूरी काम से बाहर जाना है, तो पहले मौसम के ताजा हाल को जरूर जांच लें। सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें स्थिति पर नजर रखे हुए हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। सुरक्षित रहें और सतर्क रहें!
भारतीय क्रिकेट के 'हिटमैन' रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर मची अटकलों पर BCCI सचिव ने भले ही विराम लगाने की कोशिश की हो, लेकिन क्रिकेट के गलियारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। आधिकारिक बयानों के इतर, रोहित शर्मा की हालिया गतिविधियां और उनके खेल के प्रति नजरिए में आए बदलावों ने उनके करोड़ों चाहने वालों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। BCCI की ओर से भले ही सब कुछ सामान्य बताया जा रहा हो, लेकिन ये 3 बड़े संकेत इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि रोहित शर्मा शायद अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के आखिरी पड़ाव पर खड़े हैं। फैंस अब इस बात को लेकर सहमे हुए हैं कि क्या उनका पसंदीदा खिलाड़ी जल्द ही कोई बड़ा फैसला लेने वाला है।1. अहम सीरीज से लगातार ब्रेक और बढ़ती दूरियांरोहित शर्मा का हालिया समय में लगातार बड़े मैचों और महत्वपूर्ण सीरीज से ब्रेक लेना फैंस के लिए एक चिंता का सबब बन गया है। पहले इसे वर्कलोड मैनेजमेंट का नाम दिया जा रहा था, लेकिन अब यह चर्चा जोरों पर है कि क्या यह ब्रेक केवल थकान दूर करने के लिए है या फिर रोहित खुद को धीरे-धीरे खेल से दूर कर रहे हैं? पिछले कुछ महीनों में उनकी टीम से अनुपस्थिति ने इस सवाल को और बड़ा कर दिया है कि क्या 'हिटमैन' अब केवल बड़े टूर्नामेंट्स पर ही फोकस करना चाहते हैं?2. मैदान पर बॉडी लैंग्वेज और बॉडी फेटिग का संकेतहालिया कुछ मैचों में रोहित शर्मा की बॉडी लैंग्वेज में एक अजीब सा ठहराव और कभी-कभी थकान साफ देखी गई है। फील्डिंग के दौरान जिस ऊर्जा की उम्मीद उनसे की जाती है, उसमें एक बदलाव महसूस हो रहा है। मैदान पर उनके हाव-भाव और साथियों के साथ चर्चाओं में जिस तरह की गंभीरता दिखाई देती है, वह अनुभवी खिलाड़ियों के उस दौर की याद दिलाती है जब वे संन्यास की दहलीज पर होते हैं। फैंस की निगाहें उनके हर कदम पर हैं और यह 'शांति' उन्हें अंदर तक डरा रही है।3. भविष्य की योजना और कप्तानी का 'हैंडओवर'तीसरा और सबसे बड़ा इशारा है टीम में युवा खिलाड़ियों को कमान सौंपने की प्रक्रिया का तेज होना। रोहित शर्मा जिस तरह से युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और उन्हें खुलकर खेलने की आजादी दे रहे हैं, वह किसी 'लीजेंड' के विदाई से ठीक पहले का माहौल जैसा है। क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि रोहित शर्मा अब अपनी भूमिका को केवल रन बनाने तक ही सीमित नहीं रख रहे, बल्कि वे आने वाली पीढ़ी को तैयार करने के मिशन पर हैं। जब एक खिलाड़ी खुद से ज्यादा टीम के भविष्य की चिंता करने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि वह अपनी अंतिम पारी की तैयारी कर रहा है। BCCI की लाख सफाई के बाद भी, ये तीन इशारे रोहित शर्मा के फैंस के लिए एक 'अलार्म' से कम नहीं हैं।
बद्रीनाथ धाम विवाद: पांडा पंचायत की सीएम धामी से मांग, पैसे लेकर विशेष दर्शन कराने की भी हो जांच
चमोली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तराखंड के श्री बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे के गबन मामले की जांच के बीच श्री बद्रीश पांडा पंचायत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर जांच का दायरा बढ़ाने की मांग की है। पंचायत ने आरोप लगाया है कि मंदिर में विशेष दर्शन के नाम पर रिश्वत लेने और बिना अनुमति लोगों को मंदिर परिसर में प्रवेश दिलाने के मामलों की भी जांच कराई जानी चाहिए।
अगर आप बॉलीवुड के 'दबंग' सलमान खान के जबरा फैन हैं और इस वीकेंड घर बैठे फुल एंटरटेनमेंट की तलाश में हैं, तो आपकी खोज अब खत्म होती है। सलमान खान की फिल्में न केवल बॉक्स ऑफिस पर करोड़ों की कमाई करती हैं, बल्कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स (OTT Platforms) पर भी सबसे ज्यादा देखी जाने वाली फिल्मों में शुमार रहती हैं। चाहे 'बजरंगी भाईजान' का इमोशनल ड्रामा हो या फिर 'टाइगर' सीरीज का खूंखार एक्शन, भाईजान के पास हर तरह की फिल्मों का खजाना है। आपकी सुविधा के लिए हमने चुनी हैं वो 8 ब्लॉकबस्टर फिल्में, जो आप आज ही अपने ओटीटी ऐप्स पर स्ट्रीम कर सकते हैं।एक्शन और रोमांच का डबल डोज: टाइगर और दबंगसलमान खान की 'टाइगर' सीरीज—'एक था टाइगर', 'टाइगर जिंदा है' और 'टाइगर 3'—एक्शन प्रेमियों के लिए किसी ट्रीट से कम नहीं है। स्पाई-थ्रिलर से भरपूर ये फिल्में आपको अपनी सीट से हिलने नहीं देंगी। वहीं, अगर आपको चुलबुल पांडे का अंदाज पसंद है, तो 'दबंग' फ्रैंचाइजी की फिल्में आज भी ओटीटी पर उतनी ही मजेदार लगती हैं। इनके अलावा, 'वांटेड' जैसी फिल्म ने सलमान को एक नए अवतार में पेश किया था, जो आज भी एक्शन लवर्स की पहली पसंद बनी हुई है।दिल जीत लेने वाली इमोशनल और रोमांटिक फिल्मेंसिर्फ एक्शन ही नहीं, सलमान खान ने 'बजरंगी भाईजान' जैसी फिल्म से साबित किया है कि वे इमोशनल किरदारों में भी कितने माहिर हैं। यह फिल्म ओटीटी पर मौजूद सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक है। इसके अलावा, अगर आपको रोमांस और कॉमेडी का तड़का चाहिए, तो 'हम दिल दे चुके सनम' और 'प्रेम रतन धन पायो' जैसी फिल्में देख सकते हैं, जो आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाएंगी। इन फिल्मों में भाईजान का जो सौम्य और प्रेमी अंदाज देखने को मिलता है, वह फैंस का हमेशा से पसंदीदा रहा है।कैसे और कहां देखें ये फिल्में?आजकल डिज्नी प्लस हॉटस्टार, अमेज़न प्राइम वीडियो, नेटफ्लिक्स और जी5 जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सलमान खान की ये तमाम फिल्में आसानी से उपलब्ध हैं। इनमें से कई फिल्में हाई-डेफिनिशन (HD) और कई भाषाओं में भी मौजूद हैं। आप अपने स्मार्ट टीवी, लैपटॉप या मोबाइल पर आराम से बैठकर भाईजान का जलवा देख सकते हैं। तो देर किस बात की? अपनी पसंद की फिल्म चुनिए, साथ में पॉपकॉर्न रखिए और इस वीकेंड को 'सलमान स्पेशल' बना लीजिए। ये 8 फिल्में न केवल आपको एंटरटेन करेंगी, बल्कि सलमान खान के अभिनय की रेंज का भी एहसास कराएंगी।
NEET UG का धमाकेदार रिजल्ट: किस राज्य के छात्रों ने मचाया धमाल? 1.70 लाख क्वालीफाई करके रचा इतिहास
नीट यूजी (NEET UG) के परिणाम घोषित होते ही देश भर के मेडिकल एस्पिरेंट्स के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है। इस साल की परीक्षा ने न केवल रिकॉर्ड तोड़ प्रतिभा दिखाई है, बल्कि देश के शैक्षणिक मानचित्र पर कुछ राज्यों को 'मेडिकल हब' के रूप में स्थापित कर दिया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस बार कुल 1.70 लाख से अधिक छात्रों ने नीट यूजी की कठिन परीक्षा को क्वालीफाई कर एक नया बेंचमार्क सेट किया है। हर साल की तरह इस बार भी कुछ राज्यों का दबदबा बरकरार रहा है, जहाँ के छात्रों ने अपनी मेहनत और रणनीति के दम पर टॉपर्स की सूची में अपनी जगह पक्की की है।इन राज्यों ने मारी बाजी, टॉपर्स की लिस्ट में रहा दबदबारिजल्ट का विश्लेषण करें तो उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान ने इस साल भी सबसे अधिक सफल उम्मीदवार दिए हैं। उत्तर प्रदेश से सबसे बड़ी संख्या में छात्र क्वालीफाई हुए हैं, जो राज्य में बढ़ती कोचिंग संस्कृति और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं का प्रमाण है। वहीं, शिक्षा की राजधानी कोटा के कारण राजस्थान से भी सफल होने वाले छात्रों का प्रतिशत देश में सबसे ऊपर रहा है। महाराष्ट्र और दिल्ली-एनसीआर ने भी इस बार शानदार प्रदर्शन किया है, जहां से हजारों छात्रों ने बेहतरीन स्कोर के साथ मेडिकल कॉलेज में अपनी सीट सुरक्षित करने की राह आसान कर ली है।क्यों बढ़ रहा है सफल छात्रों का आंकड़ा?विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा और बेहतर स्टडी मैटेरियल की सुलभता ने सफलता का आंकड़ा बढ़ाया है। ऑनलाइन एजुकेशन, बेहतर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और एआई (AI) आधारित लर्निंग टूल्स ने ग्रामीण इलाकों के छात्रों के लिए भी टॉपर्स के साथ कदमताल करना संभव बना दिया है। लखनऊ, पटना और इंदौर जैसे टियर-2 शहरों से भी इस बार बड़ी संख्या में छात्रों ने 650 से ऊपर स्कोर किया है, जो इस बात का संकेत है कि अब नीट की तैयारी किसी एक शहर या बड़े महानगर तक सीमित नहीं रह गई है। 1.70 लाख क्वालीफायर्स का यह आंकड़ा यह भी बताता है कि मेडिकल शिक्षा की चाह रखने वाले युवाओं में जोश और जुनून चरम पर है।अगले कदम की तैयारी: काउंसलिंग और एडमिशन का दौर शुरूक्वालीफाई करने वाले इन 1.70 लाख छात्रों के लिए अब काउंसलिंग का अहम पड़ाव शुरू होने जा रहा है। अब छात्रों को अपने अंकों के आधार पर सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सीट के लिए आवेदन करना होगा। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि इस बार कट-ऑफ में मामूली बदलाव हो सकता है, इसलिए छात्रों को अपनी पसंद के कॉलेज के चयन में सावधानी बरतनी चाहिए। ऑल इंडिया कोटा (AIQ) और स्टेट कोटा के माध्यम से होने वाली यह काउंसलिंग प्रक्रिया आने वाले हफ्तों में पूरी की जाएगी। सफल छात्रों को अब अपने दस्तावेजों को तैयार रखने और काउंसलिंग पोर्टल पर लगातार नजर रखने की जरूरत है ताकि वे अपनी पसंदीदा मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पा सकें।
10 लाख में बिका पेपर, फिर भी मिली री-एग्जाम की छूट! नीट धांधली के बीच NTA ने अचानक क्यों रोका रिजल्ट
नीट (NEET) परीक्षा की शुचिता पर इस समय पूरे देश में सवाल उठ रहे हैं। एक ओर जहां पेपर लीक की खबरें और आर्थिक लेनदेन के खुलासे ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा तोड़ दिया है, वहीं दूसरी ओर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के फैसलों ने इस मामले को और अधिक रहस्यमयी बना दिया है। ताजा जानकारी के अनुसार, नीट का पेपर 10 लाख रुपये में बेचने वाले एक आरोपी को री-एग्जाम (पुनः परीक्षा) में बैठने की कानूनी अनुमति मिल गई, लेकिन जैसे ही यह मामला सामने आया, NTA ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संबंधित छात्रों का रिजल्ट ही होल्ड पर डाल दिया। आखिर इसके पीछे क्या खेल है, यह अब बड़ा सवाल बन गया है।10 लाख की डील और सवालों के घेरे में NTA की निष्पक्षताजांच एजेंसियों के मुताबिक, नीट पेपर लीक में शामिल गिरोहों ने 10 लाख रुपये प्रति छात्र की दर से पेपर का सौदा किया था। पुलिस ने जब इस रैकेट का भंडाफोड़ किया, तो कई ऐसे अभ्यर्थी सामने आए जिन्हें पहले पेपर मिल चुका था। हैरान करने वाली बात यह है कि इस धांधली में शामिल कुछ उम्मीदवारों को कोर्ट या संबंधित अथॉरिटी से दोबारा परीक्षा देने का मौका मिल गया। इस छूट ने न केवल आम छात्रों में असंतोष पैदा किया, बल्कि नीट की पूरी प्रक्रिया पर ही एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जो छात्र धांधली में सीधे तौर पर लिप्त थे, उन्हें दोबारा परीक्षा का मौका क्यों दिया जा रहा है?रिजल्ट क्यों रोका गया? NTA का स्टैंड और छात्रों का गुस्साजब विवाद बढ़ा और सोशल मीडिया पर NTA के खिलाफ छात्रों ने मोर्चा खोल दिया, तो नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने मामले को दबाने के बजाय संबंधित छात्रों के रिजल्ट पर रोक लगा दी। विशेषज्ञों का मानना है कि NTA यह सुनिश्चित करना चाहता है कि दागदार उम्मीदवारों को मेरिट लिस्ट में जगह न मिले। हालांकि, देरी से लिए गए इस फैसले ने लाखों उन छात्रों के भविष्य को अधर में लटका दिया है जिन्होंने पूरी ईमानदारी से परीक्षा दी थी। लखनऊ, पटना, कोटा और दिल्ली जैसे प्रमुख शिक्षण केंद्रों पर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि नीट का रिजल्ट रद्द कर फिर से पारदर्शिता के साथ परीक्षा आयोजित की जाए।भविष्य पर मंडराता खतरा और न्याय की मांगइस पूरी घटनाक्रम ने शिक्षा व्यवस्था में तकनीकी और सुरक्षा खामियों की पोल खोल दी है। अगर धांधली के आरोपी दोबारा परीक्षा देकर मुख्य धारा में शामिल होते हैं, तो यह उन हजारों होनहारों के साथ अन्याय होगा जिन्होंने रात-दिन मेहनत की है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की ओर हैं, जहां नीट धांधली और NTA की कार्यप्रणाली को लेकर कई याचिकाएं दायर की गई हैं। क्या NTA भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए कोई पुख्ता डिजिटल सिक्योरिटी सिस्टम अपनाएगा? या फिर हर बार इसी तरह छात्रों का भविष्य दांव पर लगता रहेगा? फिलहाल, देश का युवा केवल एक ही मांग कर रहा है—निष्पक्ष जांच और त्वरित न्याय।
भारत के नक्शे पर नजर डालें, तो आपको ऐसे सैकड़ों शहर और कस्बे मिल जाएंगे जिनके नाम के अंत में 'पुर' (pur) जुड़ा होता है। चाहे राजस्थान का गुलाबी शहर जयपुर हो, झीलों की नगरी उदयपुर हो या फिर उत्तर प्रदेश का औद्योगिक केंद्र कानपुर, इन सभी नामों के पीछे एक गहरा भाषाई और ऐतिहासिक कारण छिपा है। अक्सर लोग इसे केवल एक भौगोलिक प्रत्यय (suffix) मान लेते हैं, लेकिन इसका वास्तविक अर्थ भारतीय इतिहास के उन पन्नों से जुड़ा है, जहां नगर बसाने की परंपरा का विकास हुआ था। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि आखिर 'पुर' का असली मतलब क्या है और ये नाम कैसे अस्तित्व में आए, तो यह खबर आपके लिए ही है।'पुर' का शब्दिक अर्थ: केवल एक नगर नहीं, एक व्यवस्थासंस्कृत भाषा के शब्दकोश में 'पुर' का अर्थ होता है—'नगर', 'शहर' या 'किलेबंद बस्ती'। प्राचीन काल में जब भी कोई राजा या शासक किसी नई जगह को बसाता था, तो वह उसे सुरक्षा की दृष्टि से चारों तरफ से ऊंची दीवारों या परकोटे से घेर देता था। इसी सुरक्षित और सुव्यवस्थित नगरीय ढांचे को 'पुर' कहा जाता था। 'पुर' शब्द 'पुरी' (जैसे हस्तिनापुरी या द्वारकापुरी) का ही एक रूप है। समय के साथ-साथ यह शब्द भारतीय संस्कृति और वास्तुकला का पर्याय बन गया, जहां हर 'पुर' का मतलब एक ऐसी जगह से था जहां जीवन के तमाम साधन उपलब्ध थे और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे।राजाओं और शासकों की पहचान बन गए ये नामभारत में शहरों के नामकरण की परंपरा में शासक का नाम और स्थान का महत्व सबसे ऊपर होता था। उदाहरण के तौर पर, जयपुर की स्थापना सवाई जयसिंह ने की थी, इसलिए इसे 'जय' (शासक) + 'पुर' (नगर) यानी 'जयपुर' कहा गया। इसी तरह, उदयपुर की स्थापना महाराणा उदय सिंह ने की थी। कानपुर का नाम भी 'कन्हैयापुर' से बिगड़कर कानपुर हुआ माना जाता है, जिसे कभी राजा कान देव ने बसाया था। इस प्रकार, 'पुर' का इस्तेमाल अक्सर शहर के संस्थापक या उस क्षेत्र की किसी ऐतिहासिक विशेषता को दर्शाने के लिए किया जाता था, जो आज भी भारतीय शहरों की गौरवशाली पहचान बना हुआ है।बदलते भारत में 'पुर' का महत्वआज के आधुनिक युग में जब हम स्मार्ट सिटी की बात करते हैं, तब भी 'पुर' शब्द हमें हमारी जड़ों से जोड़कर रखता है। लखनऊ, जयपुर, कानपुर जैसे शहरों ने अपनी प्राचीन पहचान को बचाए रखा है। शोधकर्ताओं का मानना है कि नाम के पीछे का यह 'पुर' प्रत्यय न केवल भूगोल को परिभाषित करता है, बल्कि यह उस कालखंड के सामाजिक, राजनीतिक और स्थापत्य विकास की कहानी भी सुनाता है। तो अगली बार जब आप किसी 'पुर' वाले शहर से गुजरें, तो समझ लीजिए कि आप किसी ऐसे ऐतिहासिक नगर में हैं जिसे प्राचीन काल में एक सुनियोजित और सुरक्षित बस्ती के रूप में विकसित किया गया था। यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की भारतीय नगरीय सभ्यता का जीता-जागता प्रमाण है।
बिहार की सियासत में मानसून सत्र से पहले ही गर्मी का पारा अपने चरम पर है। आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र के ठीक पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। सत्ताधारी एनडीए (BJP-JDU) गठबंधन ने तेजस्वी यादव के सत्र से पहले राज्य में न होने या सक्रियता न दिखाने पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष के इस प्रमुख चेहरे की चुप्पी और अनुपस्थिति पर सत्ता पक्ष ने इसे जनता से दूरी और जिम्मेदारी से भागने के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया है, जिससे सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।सत्ता पक्ष का हमला, 'विपक्ष का नेता ही गायब'बीजेपी और जेडीयू के नेताओं ने इसे बड़ा मुद्दा बनाते हुए कहा है कि मानसून सत्र जैसे महत्वपूर्ण समय में जब राज्य बाढ़, विकास और कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने वाला है, तब विपक्ष का चेहरा ही नदारद है। एनडीए प्रवक्ताओं का कहना है कि तेजस्वी यादव अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों को छोड़कर विदेश यात्रा पर हैं या निजी व्यस्तताओं में हैं, जो साफ तौर पर बिहार की जनता की अनदेखी को दर्शाता है। बीजेपी का दावा है कि विपक्ष के पास सदन में चर्चा के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वे सत्र के माहौल को भांपकर ही भागने की कोशिश कर रहे हैं।आरजेडी का पलटवार, कहा- 'राजनीति चमकाने का काम न करें'दूसरी ओर, आरजेडी के नेताओं ने इन दावों को पूरी तरह से सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी यादव की पूर्व निर्धारित व्यस्तताएं हैं और वे सत्र के दौरान सदन में पूरी मजबूती के साथ मौजूद रहेंगे। आरजेडी का आरोप है कि सरकार अपने नाकामियों को छिपाने के लिए विपक्ष पर बेबुनियाद सवाल उठा रही है ताकि ध्यान भटकाया जा सके। पार्टी ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार को इस बात की चिंता करनी चाहिए कि कैसे वह इस बार बाढ़ पीड़ितों के लिए काम करेगी, न कि इस बात पर कि विपक्ष का नेता कब और कहां है।मानसून सत्र में क्या होगा बड़ा धमाका?20 जुलाई से शुरू होने वाला यह मानसून सत्र बिहार के लिए काफी अहम माना जा रहा है। इसमें बिहार की वर्तमान आर्थिक स्थिति, शिक्षा विभाग के नए नियम, और हालिया अपराध की घटनाओं को लेकर सदन में हंगामे के पूरे आसार हैं। जानकार मान रहे हैं कि तेजस्वी यादव की वापसी के साथ ही विपक्ष सरकार को घेरने की कोई बड़ी रणनीति तैयार कर चुका है। एनडीए और आरजेडी दोनों के बीच जारी इस वार-पलटवार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार बिहार विधानसभा का सत्र हंगामेदार और चुनौतीपूर्ण होने वाला है, जिसमें आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति की आग और भड़क सकती है।
पटना से दिल्ली तक हलचल! लालू यादव को दिल्ली AIIMS किया गया शिफ्ट, मीसा भारती ने प्रशासन को घेरा
आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की तबीयत एक बार फिर से चिंता का विषय बनी हुई है। पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में इलाज करा रहे लालू यादव को अब बेहतर चिकित्सा देखभाल के लिए दिल्ली एम्स (AIIMS) शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया है। इस दौरान उनकी बड़ी बेटी और सांसद मीसा भारती ने पिता के स्वास्थ्य को लेकर ताजा जानकारी साझा की है, साथ ही पटना प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर अपना सख्त गुस्सा भी जाहिर किया है। लालू यादव के स्वास्थ्य को लेकर आरजेडी समर्थकों और बिहार के राजनीतिक गलियारों में खलबली मची हुई है।मीसा भारती का खुलासा, स्वास्थ्य को लेकर दी बड़ी जानकारीमीसा भारती ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पटना में इलाज के दौरान लालू यादव की सेहत में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा था, जिसके चलते डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें दिल्ली ले जाने का फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि लालू जी की स्थिति नाजुक बनी हुई है और उन्हें विशेष देखभाल की जरूरत है। मीसा ने अपने पिता की सेहत पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि उनकी पुरानी बीमारियों और बढ़ती उम्र को देखते हुए कोई भी जोखिम नहीं लिया जा सकता। दिल्ली में डॉक्टरों की विशेष टीम उनकी निगरानी करेगी।अस्पताल की व्यवस्था पर फूटा मीसा का गुस्सालालू यादव को शिफ्ट करने के दौरान पटना प्रशासन और अस्पताल की व्यवस्था पर मीसा भारती खासी नाराज दिखीं। उन्होंने आरोप लगाया कि आईजीआईएमएस में सुविधाएं और प्रबंधन का स्तर संतोषजनक नहीं रहा, जिससे इलाज में बाधाएं आ रही थीं। उन्होंने सीधे तौर पर पटना प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि व्यवस्था में भारी चूक हुई है और सहयोग के बजाय बाधाएं पैदा की गईं। मीसा ने कहा कि एक वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री के साथ इस तरह का व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है।राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चालालू यादव को दिल्ली शिफ्ट करने की खबर मिलते ही समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा। दिल्ली एम्स में भी उनके पहुंचने से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। लालू यादव के साथ मीसा भारती और परिवार के अन्य सदस्य भी दिल्ली रवाना हो गए हैं। बिहार की राजनीति में लालू यादव का स्वास्थ्य हमेशा से केंद्र बिंदु रहा है, और अब उनके दिल्ली जाने के बाद पटना के सियासी समीकरणों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। समर्थक लगातार उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।
बिहार शिक्षकों के लिए बड़ी अपडेट: तीन चरणों में होंगे बंपर तबादले, देखें पूरा टाइम-टेबल और प्रक्रिया
बिहार शिक्षा विभाग ने राज्य के लाखों शिक्षकों के लिए तबादले की बहुप्रतीक्षित प्रक्रिया का ऐलान कर दिया है। शिक्षा विभाग के नए निर्देश के अनुसार, शिक्षकों का ट्रांसफर अब मनमाने तरीके से नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित तीन-चरणीय प्रक्रिया (Three-Phase Transfer Process) के तहत किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की संख्या को संतुलित करना और उन्हें उनके पसंद के या नजदीकी शिक्षण संस्थानों में पदस्थापित करना है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए विस्तृत टाइम-टेबल और शेड्यूल जारी कर दिया गया है, ताकि शिक्षकों को किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति का सामना न करना पड़े।तीन चरणों में होगा शिक्षकों का ट्रांसफर, जानें कैसे काम करेगा सिस्टमशिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक, तबादले की यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी। पहले चरण में उन शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी जो लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं, या फिर गंभीर बीमारी या अन्य विशेष कारणों से स्थानांतरण के हकदार हैं। दूसरे चरण में पारस्परिक (Mutual) तबादलों को मौका दिया जाएगा, जबकि तीसरे और अंतिम चरण में शेष बचे हुए शिक्षकों को रिक्त पदों पर पदस्थापित किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी न हो, इसलिए पूरी मैपिंग सॉफ्टवेयर के माध्यम से की जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।कब से शुरू होगी प्रक्रिया और कब तक चलेगी?शिक्षा विभाग द्वारा जारी आधिकारिक कैलेंडर के अनुसार, तबादला आवेदन के लिए पोर्टल को अगले सप्ताह से खोल दिया जाएगा। पहले चरण के आवेदनों की समीक्षा के बाद, अगस्त के मध्य तक ड्राफ्ट लिस्ट जारी कर दी जाएगी। पूरे तीन चरणों की यह प्रक्रिया सितंबर के अंतिम सप्ताह तक पूरी कर ली जाएगी, ताकि अक्टूबर के नए शैक्षणिक सत्र या तिमाही से पहले सभी शिक्षक अपने नए स्कूलों में कार्यभार संभाल सकें। विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को निर्देश दिए हैं कि वे रिक्त पदों की संख्या को समय रहते अपडेट करें ताकि आवेदन में कोई तकनीकी बाधा न आए।शिक्षकों को इन बातों का रखना होगा खास ध्यानतबादले की इस पूरी प्रक्रिया में भाग लेने वाले शिक्षकों को अपने सभी जरूरी दस्तावेज, जैसे कि सेवा पुस्तिका (Service Book) और अन्य व्यक्तिगत जानकारी, एनआईसी (NIC) के पोर्टल पर अपडेट रखनी होगी। विभाग की ओर से स्पष्ट कहा गया है कि गलत जानकारी देने वाले या नियमों का उल्लंघन करने वाले आवेदनों को बिना किसी सूचना के रद्द कर दिया जाएगा। अपनी पसंद के स्कूलों का चयन करते समय शिक्षकों को वरिष्ठता और स्कूल की वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखना होगा। यह कवायद बिहार के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई है, जिससे राज्य के दूर-दराज के स्कूलों में भी शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
पश्चिम बंगाल के निवासियों के लिए अगले 48 घंटे बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के अधिकांश हिस्सों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी करते हुए लोगों को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी है। बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव के कारण सोमवार तक मूसलाधार बारिश का अनुमान है, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। कोलकाता से लेकर दार्जिलिंग और तटीय इलाकों तक, स्थिति गंभीर बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि जब तक बहुत जरूरी न हो, सोमवार तक घर से बाहर निकलना जान जोखिम में डालने जैसा हो सकता है।इन जिलों में सबसे ज्यादा खतरा, प्रशासन हाई अलर्ट परमौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, दक्षिण बंगाल के जिलों में जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हो सकती है, जबकि उत्तर बंगाल के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन (Landslide) का खतरा बना हुआ है। कोलकाता, हावड़ा, हुगली और उत्तर 24 परगना के निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका है। आपदा प्रबंधन की टीमें पहले से ही तैनात कर दी गई हैं। प्रशासन ने स्थानीय लोगों को नदियों के किनारे न जाने और जर्जर इमारतों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है। लखनऊ और राज्य के अन्य हिस्सों से आने वाले यात्रियों को भी सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना मौसम के मिजाज को देखते हुए ही बनाएं।सोमवार तक स्कूलों और दफ्तरों पर हो सकता है असररेड अलर्ट को देखते हुए सरकार ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सोमवार तक कई स्कूलों और कॉलेजों में अवकाश घोषित किया जा सकता है। इसके अलावा, सरकारी दफ्तरों में भी उपस्थिति कम रहने की उम्मीद है। परिवहन व्यवस्था भी चरमरा सकती है, क्योंकि भारी बारिश के चलते ट्रेन और बस सेवाओं में देरी की संभावना है। स्थानीय नगर पालिकाओं को जल निकासी के पंप सक्रिय करने और आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों को 24 घंटे चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं।क्या करें और क्या न करें? प्रशासन की गाइडलाइंसआपदा प्रबंधन विभाग ने आम जनता के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। लोगों से अपील की गई है कि वे अपने साथ पावर बैंक, जरूरी दवाइयां और सूखा राशन तैयार रखें। बिजली के तारों और खंभों के पास न जाएं, क्योंकि बारिश के साथ तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है। यदि आप सड़क पर हैं और जलभराव का सामना कर रहे हैं, तो अपने वाहन को सुरक्षित स्थान पर पार्क करें और पानी के बहाव में गाड़ी न डालें। किसी भी आपात स्थिति के लिए स्थानीय पुलिस या आपदा सहायता नंबर पर तुरंत संपर्क करें। यह समय संयम और सतर्कता बरतने का है।
सोनम वांगचुक के बाद अब अभिजीत दिपके ने भरी हुंकार, अनशन की घोषणा से गरमाया लद्दाख का पारा
लद्दाख की स्वायत्तता और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन एक नए मोड़ पर आ पहुंचा है। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य खराब होने के चलते जबरन अस्पताल ले जाए जाने के बाद, अब आंदोलन की कमान अभिजीत दिपके ने अपने हाथों में ले ली है। अभिजीत दिपके ने साफ ऐलान कर दिया है कि वे सोनम वांगचुक की उस अधूरी लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे और उन्होंने भूख हड़ताल पर बैठने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस घटनाक्रम ने लद्दाख के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, और अब यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गया है।अस्पताल भेजे गए सोनम वांगचुक, लेकिन हौसले अब भी बुलंदपिछले कई दिनों से लद्दाख के अधिकारों को लेकर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य बीते 24 घंटों में काफी गिर गया था। डॉक्टरों की सलाह और प्रशासन के दबाव के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। हालांकि, उनके समर्थकों का दावा है कि वांगचुक अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अस्पताल से भी उन्होंने अपने साथियों को आंदोलन जारी रखने का संदेश दिया है, जिसके तुरंत बाद अभिजीत दिपके का सामने आना यह दर्शाता है कि यह मुहिम अब एक व्यक्ति से निकलकर एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है।क्या है लद्दाख आंदोलन का असली मकसद?लद्दाख के लोग मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगों को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देना, इसे संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करना ताकि वहां की जमीन और संस्कृति सुरक्षित रह सके, और लद्दाख के लिए अलग से लोक सेवा आयोग का गठन करना शामिल है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से उनकी स्थानीय आवाज दब गई है और लद्दाख के पारिस्थितिक तंत्र को औद्योगिक विकास के नाम पर खतरा पैदा हो रहा है। यही कारण है कि स्थानीय युवा अब सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके जैसे चेहरों के साथ सड़क पर उतरकर अपना भविष्य सुरक्षित करने की मांग कर रहे हैं।लखनऊ से लेह तक गूंज रही है मांग, प्रशासन पर बढ़ा दबावइस आंदोलन की गूंज सिर्फ लेह-लद्दाख की वादियों में ही नहीं, बल्कि दिल्ली और लखनऊ जैसे बड़े शहरों में भी सुनाई दे रही है। सोशल मीडिया और एआई सर्च प्लेटफॉर्म्स पर भी लद्दाख के मुद्दे को लेकर काफी सर्च वॉल्यूम देखा जा रहा है। अभिजीत दिपके के अनशन पर बैठने के ऐलान के बाद स्थानीय प्रशासन और सरकार पर वार्ता के लिए दबाव और अधिक बढ़ गया है। जानकारों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ही लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ सार्थक बातचीत शुरू नहीं की, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक उग्र हो सकता है, जिससे वहां की शांति और व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
विक्रम-1 की धमाकेदार कामयाबी पर बोले PM मोदी, स्काईरूट की पूरी टीम को दिया ये खास संदेश
अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत ने एक और मील का पत्थर स्थापित कर दिया है। स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) द्वारा विकसित भारत के निजी रॉकेट 'विक्रम-1' ने अपनी पहली उड़ान में ही सफलता का परचम लहरा दिया है। इस बड़ी उपलब्धि को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'आत्मनिर्भर भारत' का सबसे ठोस सबूत करार दिया है। प्रधानमंत्री ने इस मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों और स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को न केवल बधाई दी, बल्कि इसे भविष्य के स्पेस मिशनों के लिए एक गेम-चेंजर बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता दर्शाती है कि भारत के युवा अब वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष की दौड़ में नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।निजी क्षेत्र की भागीदारी से बदला भारत का स्पेस गेमविक्रम-1 की यह कामयाबी केवल एक रॉकेट का प्रक्षेपण नहीं है, बल्कि भारतीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र (Space Ecosystem) में निजी क्षेत्र की बढ़ती धमक का प्रमाण है। इसरो (ISRO) की देखरेख और गाइडेंस में स्काईरूट जैसी स्टार्टअप कंपनियों ने जो तकनीकी कौशल दिखाया है, उसने यह साबित कर दिया है कि भारत अब कम लागत में बेहतर तकनीक के साथ दुनिया को सेवाएं दे सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, विक्रम-1 जैसे रॉकेट भविष्य में छोटे उपग्रहों (Small Satellites) को अंतरिक्ष में भेजने का सबसे सस्ता और सुरक्षित जरिया बनेंगे, जिससे वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी और अधिक बढ़ेगी।PM मोदी की नजर में क्यों खास है विक्रम-1 का मिशन?प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में विशेष रूप से 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से भारत आज रक्षा, डिजिटल और स्टार्टअप की दुनिया में आगे बढ़ रहा है, उसी तरह अंतरिक्ष क्षेत्र में भी हमारी निजी कंपनियों की यह प्रगति पूरे देश के लिए गौरव की बात है। विक्रम-1 में इस्तेमाल की गई स्वदेशी तकनीक, हल्की निर्माण सामग्री और बेहतर ईंधन दक्षता इसे दुनिया के अन्य निजी रॉकेटों की तुलना में काफी प्रतिस्पर्धी बनाती है। यह सफलता लखनऊ से लेकर बेंगलुरु तक, भारत के युवा इंजीनियरों और उद्यमियों के लिए एक नई प्रेरणा बन गई है।अंतरिक्ष की दौड़ में भारत अब वैश्विक लीडर बनने की राह परआने वाले समय में स्काईरूट एयरोस्पेस जैसे स्टार्टअप्स का लक्ष्य न केवल उपग्रहों को लॉन्च करना है, बल्कि भारत को 'ग्लोबल स्पेस हब' के रूप में स्थापित करना भी है। विक्रम-1 की इस सफलता के बाद अब अंतरराष्ट्रीय निवेशक भी भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स में भारी रुचि दिखा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि विक्रम-1 के बाद अब भारत अपने स्पेस मिशन की संख्या को दोगुना कर सकता है, जिससे न केवल आर्थिक लाभ होगा, बल्कि दुनिया भर के देशों के साथ भारत के तकनीकी संबंध और अधिक गहरे होंगे। पीएम मोदी का यह प्रोत्साहन स्टार्टअप्स को नए प्रयोग करने का और भी बड़ा साहस देगा।

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