Congress का केंद्र पर हमला, China के साथ बढ़ता ट्रेड डेफिसिट आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा
कांग्रेस ने चीन के साथ भारत के बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर शुक्रवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ अब ‘इम्पोर्ट फ्रॉम चाइना’ बन गया है तथा रिकॉर्ड व्यापार घाटा देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए अपने आप में एक बहुत बड़ा खतरा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि चीन के प्रति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘‘सोची-समझी रियायतों’’ के बीच भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के आमने-सामने आने की हालिया घटनाओं में इस सुरक्षा बल के कामकाज की सराहना की है, लेकिन प्रधानमंत्री और उनकी सरकार ने इस विषय पर ‘‘चुप्पी’’ साध रखी है। कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले महीने तक्सिंग में आमने-सामने आने की घटना के बाद अरुणाचल प्रदेश के वाचा और दमाई में कोर कमांडर स्तर की वार्ता हुई थी। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय लोगों ने लद्दाख की तरह एक बार फिर कुछ गश्ती बिंदुओं तक पहुंच प्रभावित होने की बात कही है। रमेश ने यह भी कहा कि चीन अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों का नाम बदलता रहा है और 60,000 मेगावाट क्षमता का बांध बना रहा है, जो भारत की पारिस्थितिक और जल सुरक्षा के लिए खतरा है। उनका कहना है कि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 112 अरब डॉलर हो गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 99 अरब डॉलर था। रमेश ने आरोप लगाया, ‘‘मेक इन इंडिया अब इम्पोर्ट फ्रॉम चाइना बन गया है। यह भारी व्यापार घाटा अपने आप में हमारी आर्थिक सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है।’’उन्होंने कहा कि चीन से बड़े पैमाने पर आयात के कारण कई क्षेत्रों में देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) पर प्रतिकूल असर पड़ा है। कांग्रेस महासचिव ने जून, 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की एक टिप्पणी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद 19 जून, 2020 को प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘‘न कोई वहां हमारी सीमा में घुस आया है और न ही कोई घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है।’’रमेश ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे के हवाले से यह दावा भी किया कि लद्दाख में चीनी गतिविधियों के समय उन्हें शीर्ष स्तर से केवल यह निर्देश मिला था कि ‘‘जो उचित समझो वो करो।’’कांग्रेस नेता ने जुलाई, 2025 में तत्कालीन उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह की उन सार्वजनिक टिप्पणियों का भी उल्लेख किया, जिनमें उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन से मिली मदद की बात की थी। रमेश ने दावा किया कि इसके बाद अगस्त, 2026 में पूर्व प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने सार्वजनिक रूप से इन टिप्पणियों से अलग रुख व्यक्त किया और बाद में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस)-भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तंत्र’ से जुड़े एक थिंक टैंक से संबद्ध हो गए। कांग्रेस नेता ने इन घटनाक्रम को चीन के प्रति केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाने वाला बताते हुए आरोप लगाया कि सीमा पर तनाव और बढ़ते व्यापार असंतुलन के बावजूद सरकार चीन के मुद्दे पर देश को पूरी जानकारी नहीं दे रही है।
Income Tax Challan क्या है? भरने में हो जाए गलती तो कैसे सुधारें? जानें ऑनलाइन प्रोसेस और समय सीमा
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय या एडवांस टैक्स भरते वक्त हर करदाता का पाला 'इनकम टैक्स चालान' (Income Tax Challan) से जरूर पड़ता है। यह सरकार के खजाने में प्रत्यक्ष कर जमा करने की आधिकारिक रसीद होती है। कई बार जल्दबाजी, असावधानी या तकनीकी समझ की कमी के चलते करदाता चालान भरते समय गंभीर मानवीय गलतियां कर बैठते हैं—जैसे गलत असेसमेंट ईयर (Assessment Year) चुन लेना, गलत पैन (PAN) नंबर दर्ज हो जाना, या सेल्फ असेसमेंट टैक्स (Minor Head 300) के बदले एडवांस टैक्स (Minor Head 100) सिलेक्ट कर देना। ऐसी गलती होने पर आपका पैसा तो बैंक खाते से कट जाता है, लेकिन आयकर विभाग के रिकॉर्ड में आपका टैक्स बकाया (Outstanding Demand) दिखता रहता है। राहत की बात यह है कि आयकर विभाग ने इसके लिए ऑनलाइन 'चालान करेक्शन' की बेहद सुगम व्यवस्था दी है।इनकम टैक्स चालान क्या होता है और यह क्यों जरूरी है?इनकम टैक्स चालान एक ऐसा वित्तीय दस्तावेज और कानूनी रसीद है, जिसके जरिए कोई भी व्यक्ति, फर्म या कंपनी केंद्र सरकार के खाते में अपना आयकर जमा करती है। पहले यह काम बैंकों में फिजिकल फॉर्म (जैसे ITNS 280 या ITNS 281) भरकर होता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल के माध्यम से पूरी तरह डिजिटल हो चुकी है।चालान में करदाता का नाम, पैन (PAN), टैक्स का प्रकार, वित्तीय वर्ष और जमा की गई राशि दर्ज होती है। जब आप चालान के जरिए टैक्स का भुगतान करते हैं, तो सिस्टम से तीन सबसे महत्वपूर्ण यूनिक डेटा पॉइंट्स जनरेट होते हैं:BSR कोड (BSR Code): यह बैंक की उस शाखा का 7 अंकों का कोड होता है जहां से भुगतान प्रोसेस हुआ।चालान की तारीख (Challan Date): जिस दिन टैक्स जमा किया गया।चालान सीरियल नंबर (Challan Serial Number): उस दिन आपके भुगतान को दिया गया विशेष 5 अंकों का नंबर।इन तीनों को मिलाकर सीआईएन (Challan Identification Number - CIN) बनता है, जिसे ITR फॉर्म के 'Tax Paid' शेड्यूल में दर्ज करने के बाद ही टैक्स का क्रेडिट मिलता है और रिटर्न प्रोसेस होता है।चालान भरते समय आमतौर पर होने वाली 4 बड़ी गलतियांअसेसमेंट ईयर (AY) का गलत चयन: यह सबसे आम गलती है। उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए असेसमेंट ईयर 2026-27 चुनना होता है, लेकिन लोग गलती से चालू वित्त वर्ष को ही असेसमेंट ईयर मानकर पुराना साल सिलेक्ट कर देते हैं।गलत माइनर हेड (Type of Payment): एडवांस टैक्स भरने वाले अक्सर गलती से 'Self-Assessment Tax (300)' चुन लेते हैं, या रिटर्न फाइल करने के बाद टैक्स भरते समय 'Advance Tax (100)' या 'Tax on Regular Assessment (400)' टिक कर देते हैं।मेजर हेड में चूक (Major Head): कंपनियों के लिए '0020' (Corporation Tax) और गैर-कॉरपोरेट/व्यक्तिगत करदाताओं के लिए '0028' (Income Tax other than Companies) होता है। कभी-कभी व्यक्ति कंपनी वाला हेड चुन लेता है।पैन नंबर (PAN) में टाइपो: किसी अन्य व्यक्ति या रिश्तेदार का पैन नंबर दर्ज हो जाना, जिससे टैक्स का क्रेडिट किसी और के फॉर्म 26AS/AIS में रिफ्लेक्ट होने लगता है।गलती सुधारने के लिए कितने दिनों की मिलती है मोहलत?चालान में सुधार के लिए आयकर विभाग और बैंकों ने स्पष्ट समय सीमा (Time Limit) निर्धारित कर रखी है:ई-फाइलिंग पोर्टल पर ऑनलाइन सुधार (Self-Correction): करदाता टैक्स भुगतान की तारीख से लेकर 7 दिनों के बाद (जब चालान ई-पोर्टल पर अपडेट हो जाए) से लेकर निर्धारण वर्ष के भीतर ऑनलाइन सुधार की रिक्वेस्ट डाल सकता है।बैंक शाखा के जरिए सुधार: यदि आपने बैंक काउंटर पर जाकर ओवर-द-काउंटर चालान भरा था, तो आप भुगतान के 30 दिनों के भीतर संबंधित बैंक शाखा में आवेदन देकर असेसमेंट ईयर, पैन और मेजर/माइनर हेड में सुधार करा सकते हैं।समय सीमा बीतने पर: यदि 30 दिन या प्राथमिक समय सीमा बीत चुकी है, तो पोर्टल पर 'Challan Correction' मॉड्यूल के जरिए या अपने न्यायक्षेत्रीय निर्धारण अधिकारी (Jurisdictional Assessing Officer - AO) को धारा 154 के तहत रेक्टिफिकेशन अर्जी देकर सुधार कराया जा सकता है।ई-फाइलिंग पोर्टल पर चालान सुधारने का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेसयदि आपने ऑनलाइन नेट बैंकिंग, यूपीआई या डेबिट कार्ड से टैक्स भरा है और चालान में गलती हो गई है, तो घर बैठे इसे सुधारने की प्रक्रिया इस प्रकार है:सबसे पहले आयकर विभाग के आधिकारिक पोर्टल incometax.gov.in पर जाएं और अपने पैन व पासवर्ड से लॉगइन करें।ऊपर मेन्यू बार में दिए गए 'Services' टैब पर क्लिक करें और ड्रॉपडाउन से 'Challan Correction' (चालान करेक्शन) का विकल्प चुनें।अगले पेज पर दाईं ओर 'Create Challan Correction Request' बटन पर क्लिक करें।अब आपको उस सुधार के प्रकार को चुनना होगा जिसे आप बदलना चाहते हैं:Change in Assessment Year (कर निर्धारण वर्ष बदलना)Change in Tax Applicable - Major Head (मेजर हेड बदलना)Change in Type of Payment - Minor Head (माइनर हेड बदलना)इसके बाद आपको जिस चालान में गलती हुई है, उसका CIN (BSR कोड, चालान की तारीख और सीरियल नंबर) या 'Assessment Year' डालकर सर्च करना होगा। संबंधित चालान स्क्रीन पर आ जाएगा।चालान सिलेक्ट करने के बाद सही विवरण (Correct Details) दर्ज करें (जैसे सही AY या सही माइनर हेड चुनें)।विवरण जांचने के बाद 'Continue' पर क्लिक करें और अपने आधार ओटीपी (Aadhaar OTP), नेट बैंकिंग या ईवीसी (EVC) के जरिए रिक्वेस्ट को इलेक्ट्रॉनिकली वेरिफाई करें।ई-वेरिफिकेशन पूरा होते ही आपको एक 'सक्सेस एक्नॉलेजमेंट नंबर' मिल जाएगा। आम तौर पर 3 से 7 कार्यदिवसों के भीतर चालान में सुधार होकर आपके फॉर्म 26AS और AIS/TIS में सही रिकॉर्ड दिखने लगता है।अगर पैन नंबर ही गलत दर्ज हो गया हो तो क्या करें?यदि चालान में पैन नंबर गलत भर गया है, तो इसे सामान्य ऑनलाइन पोर्टल से सीधे नहीं बदला जा सकता, क्योंकि सिस्टम एक पैन के डेटा को दूसरे व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर करने से पहले कड़े सुरक्षा उपाय अपनाता है।यदि बैंक से भरा है: भुगतान के 7 दिनों के भीतर मूल चालान की रसीद, सही पैन कार्ड की कॉपी और गलती से लिखे गए पैन कार्ड धारक का नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (यदि उपलब्ध हो) लेकर बैंक शाखा में जाएं।ऑनलाइन भुगतान के मामले में: आपको अपने असेसिंग ऑफिसर (AO) को एक लिखित प्रार्थना पत्र देना होगा। इसमें बैंक स्टेटमेंट (जिससे यह साबित हो कि पैसा आपके खाते से कटा है), चालान की कॉपी और शपथ पत्र संलग्न करना होगा। अधिकारी जांच और सत्यापन के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज / एनएसडीएल और सीपीसी सिस्टम में इंटरनल ट्रांसफर का आदेश जारी करता है।चालान भरते समय हमेशा फाइनल पेमेंट गेटवे पर जाने से पहले स्क्रीन पर दिखने वाले 'Assessment Year' और 'PAN' को दो बार जरूर री-चेक करें, ताकि किसी भी तरह के नोटिस या ऑनलाइन सुधार की मशक्कत से बचा जा सके।
बॉलीवुड के नवाब और दिग्गज अभिनेता सैफ अली खान ने मुंबई के सबसे प्रतिष्ठित और महंगे रिहायशी इलाकों में शुमार बांद्रा वेस्ट (Bandra West) में स्थित अपनी 19 साल पुरानी एक प्रीमियम आवासीय संपत्ति को बेचकर शानदार रिटर्न हासिल किया है। रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म 'सीआरई मैट्रिक्स' (CRE Matrix) द्वारा हासिल किए गए आधिकारिक संपत्ति पंजीकरण दस्तावेजों के अनुसार, सैफ अली खान पटौदी ने बांद्रा वेस्ट की 'हाई-कॉन्स रेजीडेंसी' (Hi-Cons Residency) इमारत में स्थित 797 वर्ग फुट (Carpet Area) का एक अपार्टमेंट दो ओपन कार पार्किंग स्पेस के साथ कुल ₹4.11 करोड़ में बेचा है। दस्तावेजों के मुताबिक, इस सौदे की औपचारिक सेल डीड (Sale Deed) अक्टूबर महीने में निष्पादित और रजिस्टर्ड कराई गई है, जिस पर खरीदार ने ₹24.66 लाख की स्टाम्प ड्यूटी अदा की है। इस बिक्री की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि यह सौदा महाराष्ट्र सरकार द्वारा तय आधिकारिक रेडी रेकनर रेट (सर्किल रेट) से लगभग 1.4 गुना (1.4x Premium) अधिक कीमत पर हुआ है, जो बांद्रा वेस्ट के लग्जरी माइक्रो-मार्केट में लगातार बढ़ती रीसेल डिमांड और सेलिब्रिटी प्रीमियम को साफ दर्शाता है।2007 में खरीदी थी पूरी यूनिट: जानिए कैसे बना यह 797 वर्ग फुट का फ्लैटइस प्रॉपर्टी की खरीद और मुनाफे की कहानी लगभग दो दशक पुरानी है। आधिकारिक पंजीकरण अभिलेखों के मुताबिक, सैफ अली खान ने 30 मार्च 2007 को बिल्डर 'हाई-कॉन कंस्ट्रक्शंस' से हाई-कॉन्स रेजीडेंसी की दो ऊपरी मंजिलों पर फैला लगभग 6,000 वर्ग फुट कारपेट एरिया वाला एक विशाल पेंटहाउस/अपार्टमेंट ₹9.7 करोड़ में खरीदा था। उस मूल सौदे में पार्किंग स्पेस भी शामिल थे।इसके लगभग सात साल बाद, यानी 19 जून 2014 को इस विशाल 6,000 वर्ग फुट की यूनिट को औपचारिक और कानूनी तौर पर तीन अलग-अलग स्वतंत्र अपार्टमेंट्स में विभाजित (Split) कर दिया गया:पहला फ्लैट: निचली मंजिल पर लगभग 2,997 वर्ग फुट कारपेट एरिया।दूसरा फ्लैट: उसी मंजिल पर लगभग 2,205 वर्ग फुट कारपेट एरिया।तीसरा फ्लैट: ऊपरी मंजिल पर स्थित लगभग 797 वर्ग फुट कारपेट एरिया।अब सैफ अली खान ने इसी तीसरे 797 वर्ग फुट वाले फ्लैट को ₹4.11 करोड़ में सफलतापूर्वक बेचा है। यदि 2007 के मूल अधिग्रहण भाव (लगभग ₹16,100 प्रति वर्ग फुट) के अनुपातिक हिस्से की तुलना की जाए, तो उस समय इस 797 वर्ग फुट के हिस्से की लागत लगभग ₹1.28 करोड़ के आसपास बैठती थी। आज यह हिस्सा ₹4.11 करोड़ में बिका है, यानी सिर्फ इसी एक हिस्से पर सैफ को मूल लागत से तीन गुना से अधिक की सीधी पूंजीगत बढ़त (Capital Appreciation) मिली है, जबकि शेष 5,200 वर्ग फुट से अधिक का विशाल हिस्सा अभी भी उनके पोर्टफोलियो में सुरक्षित है।प्रति वर्ग फुट ₹51,500 से अधिक की दर: 1.4x सरकारी प्रीमियम का गणितमुंबई रियल एस्टेट मार्केट के विश्लेषकों के अनुसार, इस सौदे में प्रति वर्ग फुट का भाव लगभग ₹51,568 प्रति वर्ग फुट (कारपेट एरिया) दर्ज किया गया है। महाराष्ट्र सरकार के नगर नियोजन और पंजीकरण विभाग द्वारा बांद्रा वेस्ट के इस संबंधित विलेज/जोन के लिए तय न्यूनतम रेडी रेकनर (RR) दर लगभग ₹36,000 से ₹37,000 प्रति वर्ग फुट के आसपास आंकी जाती है।बाजार में वास्तविक लेनदेन जब सरकारी सर्किल रेट से अधिक पर होता है, तो उसे 'प्रीमियम ऑन रेडी रेकनर' कहा जाता है। ₹51,500 प्रति वर्ग फुट का यह सौदा सरकारी बेस रेट से 1.4 गुना यानी 40% प्रीमियम पर निष्पादित हुआ है। संपत्ति सलाहकारों का कहना है कि पुरानी इमारत होने के बावजूद बांद्रा जैसे प्राइम लोकेशन में स्थित इमारतों का पुनर्विकास (Redevelopment Potential) बहुत मजबूत होता है, जिसके चलते निवेशक और एंड-यूजर्स सेलिब्रिटी-ओन्ड प्रॉपर्टीज के लिए प्रीमियम चुकाने में जरा भी नहीं हिचकते।हाल ही में अंधेरी में कमर्शियल स्पेस से की थी ₹22.76 लाख महीने के किराए की डीलसैफ अली खान न केवल आवासीय संपत्तियों को भुनाने में माहिर हैं, बल्कि मुंबई के कमर्शियल रियल एस्टेट सेगमेंट में भी वे एक समझदार निवेशक के तौर पर जाने जाते हैं। कुछ ही समय पहले पंजीकरण दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ था कि सैफ ने अंधेरी-कुर्ला रोड (Andheri Kurla Road) पर स्थित 'कनाकिया वॉलस्ट्रीट' (Kanakia Wallstreet) बिजनेस हब में अपने दो प्रीमियम कमर्शियल ऑफिस स्पेस को 5 साल की लीज पर दिया है।कमर्शियल स्पेस का क्षेत्रफल: 5,692 वर्ग फुट रेरा कारपेट एरिया।किराएदार: दुर्वा फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड (Durva Fintech Pvt Ltd)।मासिक किराया: ₹22.76 लाख प्रति माह (यानी सालाना ₹2.73 करोड़ का नियमित रेंटल यील्ड)।पट्टा अवधि: 10 मई 2026 से लेकर 9 मई 2031 तक के लिए पांच साल का एग्रीमेंट।इस प्रकार सैफ अली खान एक तरफ जहां पुराने आवासीय एसेट्स से मुनाफा वसूलकर अपनी पूंजी को लिक्विडेट कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ हाई-यील्ड कमर्शियल संपत्तियों से लगातार मोटा कैश-फ्लो जुटा रहे हैं।सैफ अली खान का रियल एस्टेट साम्राज्य: सतगुरु शरण से पटौदी पैलेस तकबॉलीवुड के 'नवाब' का रियल एस्टेट पोर्टफोलियो देश के सबसे अमीर अभिनेताओं में गिना जाता है:सतगुरु शरण (Satguru Sharan, बांद्रा): वर्तमान में सैफ अली खान अपनी पत्नी करीना कपूर खान और दोनों बेटों (तैमूर और जेह) के साथ बांद्रा के सतगुरु शरण अपार्टमेंट में रहते हैं। चार मंजिलों में फैला यह भव्य पेंटहाउस 6,500 वर्ग फुट से अधिक का है, जिसे उन्होंने 2012 में सतगुरु बिल्डर्स से ₹23.50 करोड़ में खरीदा था और वर्तमान में इसका बाजार मूल्य ₹40 करोड़ से अधिक आंका जाता है।फॉर्च्यून हाइट्स (Fortune Heights): सतगुरु शरण में शिफ्ट होने से पहले सैफ और करीना इसी बिल्डिंग में रहते थे, जहां उनके पास कई फ्लैट्स और छत का बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा अप्रैल 2016 में उन्होंने यहीं 950 वर्ग फुट का एक अतिरिक्त फ्लैट ₹7 करोड़ में खरीदा था।पटौदी पैलेस (Pataudi Palace, हरियाणा): गुरुग्राम के पटौदी में स्थित उनका पुश्तैनी महल 'इब्राहिम कोठी' 10 एकड़ में फैला है, जिसकी ऐतिहासिक और बाजार कीमत ₹800 करोड़ से अधिक मानी जाती है।अंतरराष्ट्रीय संपत्ति (Gstaad, स्विट्जरलैंड): यूरोप के लग्जरी बर्फीले रिसॉर्ट टाउन गस्टाड में भी सैफ का एक शानदार हॉलिडे शैले (Chalet) है, जिसकी कीमत ₹33 करोड़ के आसपास आंकी जाती है।19 साल पुरानी प्रॉपर्टी के एक छोटे हिस्से की इस सफल बिक्री ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मुंबई का प्राइम रियल एस्टेट बाजार सही लोकेशन और लंबे होल्डिंग पीरियड के साथ हमेशा निवेशकों को बेजोड़ वेल्थ क्रिएशन का मौका देता है।
भारत में स्मार्टफोन और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स इस्तेमाल करने के तौर-तरीकों में बहुत बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है। यदि आप भी अपने पुराने फोन या सेकेंडरी डिवाइस में बिना सिम कार्ड डाले केवल वाई-फाई (Wi-Fi) के जरिए वॉट्सऐप (WhatsApp) या टेलीग्राम (Telegram) चलाते हैं, तो यह खबर आपके लिए सीधे तौर पर काम की है। केंद्र सरकार के संचार मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले दूरसंचार विभाग (DoT) ने साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट और फर्जीवाड़े पर नकेल कसने के लिए सभी प्रमुख मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए 'सिम बाइंडिंग' (SIM Binding) नियम को अनिवार्य बनाने का फैसला लिया है। सरकार ने कंपनियों को 31 दिसंबर तक तकनीकी बदलाव पूरे करने का निर्देश दिया है, जिसके बाद 1 जनवरी से यह कड़ा नियम पूरी तरह लागू हो जाएगा। नए नियम के तहत जिस मोबाइल नंबर से आपका वॉट्सऐप या टेलीग्राम अकाउंट रजिस्टर्ड है, वह फिजिकल सिम कार्ड या एक्टिव ई-सिम (eSIM) उसी हैंडसेट में लगातार मौजूद और सक्रिय रहना जरूरी होगा। जैसे ही सिम कार्ड फोन से निकाला जाएगा या निष्क्रिय होगा, ऐप का सेशन तुरंत समाप्त हो जाएगा और वह काम करना बंद कर देगा।सिम बाइंडिंग (SIM Binding) क्या है और यह कैसे काम करेगा?अब तक इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स में खाता बनाने की व्यवस्था यह थी कि यूजर को केवल वन टाइम पासवर्ड (OTP) से अपना मोबाइल नंबर वेरिफाई करना होता था। एक बार ओटीपी दर्ज होते ही अकाउंट सक्रिय हो जाता था। इसके बाद भले ही यूजर फोन से सिम कार्ड निकाल दे, सिम को दूसरे फोन में डाल दे, या सिम सेवा प्रदाता द्वारा बंद ही क्यों न कर दी जाए, वह डिवाइस केवल इंटरनेट या वाई-फाई कनेक्शन के दम पर महीनों और सालों तक वॉट्सऐप चलाता रहता था।सिम बाइंडिंग ठीक उसी सुरक्षा तकनीक पर आधारित है, जैसा वर्तमान में गूगल पे (Google Pay), फोनपे (PhonePe) या भीम (BHIM) जैसे यूपीआई (UPI) और बैंकिंग ऐप्स में देखा जाता है। नए नियम के तहत:मैसेजिंग ऐप बैकग्राउंड में समय-समय पर डिवाइस हार्डवेयर और सिम स्लॉट की पड़ताल (Handshake Verification) करेगा कि रजिस्टर्ड नंबर का सिम उसी फोन में लगा है या नहीं।यदि सिस्टम को पता चलता है कि सिम कार्ड निकाल लिया गया है, बदल दिया गया है या सिम की नेटवर्क कनेक्टिविटी स्थायी रूप से खत्म हो चुकी है, तो ऐप की सुरक्षा परत तुरंत यूजर को लॉगआउट कर देगी।हालांकि, राहत की बात यह है कि इससे यूजर का चैट बैकअप या डेटा डिलीट नहीं होगा। जैसे ही संबंधित सिम दोबारा उसी हैंडसेट में लगाया जाएगा, ऐप फिर से सामान्य रूप से काम करने लगेगा।सरकार को क्यों उठाना पड़ा यह सख्त कदम: डिजिटल अरेस्ट और साइबर सिंडिकेट पर चोटदूरसंचार विभाग और गृह मंत्रालय के तहत संचालित 'इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर' (I4C) की जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया था कि देश में हो रहे बड़े वित्तीय घोटालों, फर्जी ईडी/सीबीआई अधिकारी बनकर किए जा रहे 'डिजिटल अरेस्ट' और निवेश फ्रॉड में इसी तकनीकी खामी का जमकर दुरुपयोग हो रहा था।साइबर अपराधी गिरोह भारत के स्थानीय नागरिकों के नाम पर फर्जी केवाईसी (Fake KYC) से सिम कार्ड खरीदते थे, उससे वॉट्सऐप और टेलीग्राम पर फर्जी अकाउंट रजिस्टर करते थे, और उसके बाद सिम को नष्ट कर देते थे या कंबोडिया, म्यांमार व लाओस जैसे देशों में बैठे ठगों को सिर्फ अकाउंट हैंडओवर कर देते थे। विदेशी धरती पर बैठे ठग भारतीय नंबरों वाले वॉट्सऐप अकाउंट्स से आम नागरिकों को फोन और मैसेज कर करोड़ों की ठगी करते थे। जब पुलिस जांच करती थी, तो जिस सिम नंबर पर अपराध दर्ज होता था, वह महीनों पहले ही बंद मिलता था। सिम बाइंडिंग लागू होने के बाद ठगों के लिए रिमोटली बिना फिजिकल सिम के भारतीय नंबरों से अकाउंट चलाना पूरी तरह असंभव हो जाएगा, क्योंकि हर एक्टिव सेशन के लिए डिवाइस में लाइव सिम का होना जरूरी होगा।किन-किन ऐप्स पर लागू होगा नियम और किन्हें मिली छूट?सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के दायरे में देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले सभी प्रमुख ओवर-द-टॉप (OTT) मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को लाया गया है:लागू होने वाले प्रमुख प्लेटफॉर्म्स: वॉट्सऐप (WhatsApp), टेलीग्राम (Telegram), सिग्नल (Signal), शेयरचैट (ShareChat), जियोचैट (JioChat), जोश (Josh) और अरात्तई (Arattai)।छूट की स्थिति: प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार, केवल मैसेजिंग पर केंद्रित न होकर मुख्य रूप से फोटो/वीडियो शेयरिंग और सोशल मीडिया श्रेणी में आने वाले स्नैपचैट (Snapchat) को इस अनिवार्य बाइंडिंग से अलग रखा गया है। वहीं अन्य सभी प्रमुख चैट ऐप्स को दूरसंचार अधिनियम (Telecom Act) के प्रावधानों के तहत इसका अनिवार्य अनुपालन करना होगा।eSIM, iPhone और WhatsApp Web इस्तेमाल करने वालों का क्या होगा?इस नए नियम के ऐलान के बाद आम यूजर्स के मन में विभिन्न डिवाइसेज और फीचर्स को लेकर कई संशय हैं, जिनका तकनीकी समाधान स्पष्ट हो चुका है:eSIM यूजर्स: अगर आपके फोन में प्लास्टिक वाला फिजिकल सिम नहीं है और आप डिजिटल ई-सिम (eSIM) इस्तेमाल करते हैं, तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। डिवाइस का ऑपरेटिंग सिस्टम एक्टिव eSIM को भी वैध सिम कनेक्शन के रूप में ही सत्यापित करता है, इसलिए eSIM यूजर्स की सेवाएं बिना रुकावट चलती रहेंगी।Apple iPhone यूजर्स: आईओएस (iOS) के कड़े प्राइवेसी आर्किटेक्चर के चलते पहले ऐप्पल डिवाइसेज में सिम बाइंडिंग लागू करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था। हालांकि, हालिया सॉफ्टवेयर अपडेट्स के जरिए ऐप्पल ने भी अपने सिस्टम में जरूरी एपीआई (APIs) सपोर्ट दे दिया है, जिससे ऐप सिम की स्थिति जांच सके।WhatsApp Web / Desktop यूजर्स के लिए बड़ी राहत: पहले सरकार की योजना थी कि डेस्कटॉप और लैपटॉप पर चलने वाले वॉट्सऐप वेब को सुरक्षा कारणों से हर 6 घंटे में अपने आप लॉगआउट कर दिया जाए। लेकिन ऑफिस कर्मचारियों और कॉरपोरेट काम में आने वाली भारी असुविधा को देखते हुए सरकार ने इस 6 घंटे वाली बाध्यता को वापस ले लिया है। जब तक आपका मुख्य स्मार्टफोन (जिसमें सिम मौजूद है) एक्टिव रहेगा, तब तक आप कंप्यूटर पर वॉट्सऐप वेब सामान्य रूप से चला सकेंगे।टैबलेट और केवल वाई-फाई वाले डिवाइसेज: यदि आप बिना सिम स्लॉट वाले किसी आईपैड (iPad) या एंड्रॉयड टैबलेट में प्राइमरी वॉट्सऐप अकाउंट चलाते हैं, तो 1 जनवरी के बाद वह सीधे काम नहीं करेगा। ऐसे डिवाइसेज को 'लिंक्ड डिवाइस' (Companion Mode) के जरिए मुख्य फोन से कनेक्ट करके ही इस्तेमाल किया जा सकेगा।1 जनवरी से पहले आम यूजर्स को क्या सावधानियां बरतनी होंगी?नियम प्रभावी होने पर आपकी जरूरी बातचीत और डेटा में कोई बाधा न आए, इसके लिए समय रहते कुछ बुनियादी कदम उठाना जरूरी है:सिम को सही फोन में लगाएं: यदि आपका वॉट्सऐप किसी दूसरे हैंडसेट में चल रहा है और उसका सिम किसी अन्य कीपैड फोन या अलमारी में पड़ा है, तो उस सिम को तुरंत उसी स्मार्टफोन में डाल लें जिसमें आप ऐप चलाते हैं।सिम को एक्टिव और रिचार्ज रखें: यदि आपके वॉट्सऐप वाले नंबर पर लंबे समय से कोई रिचार्ज नहीं हुआ है और इनकमिंग/आउटगोइंग बंद होने की कगार पर है, तो उसमें न्यूनतम वैधता (Validity) रिचार्ज जरूर कराएं, ताकि सिम टेलीकॉम नेटवर्क पर हमेशा सक्रिय दिखे।विदेश यात्रा के दौरान सावधानी: यदि आप विदेश यात्रा पर जा रहे हैं और वहां का लोकल सिम लगाने के लिए भारतीय सिम निकालते हैं, तो डुअल सिम फोन या eSIM का उपयोग करें ताकि भारतीय नंबर भी फोन में चालू रहे और आपका मुख्य वॉट्सऐप बंद न हो।
EV खरीदूं और छत पर सोलर लगाऊं तो कितने साल में वसूल होगा पूरा पैसा? 10-15 साल का फुल कैलकुलेशन
पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों और हर महीने हजारों रुपये में आने वाले भारी-भरकम बिजली बिलों के बीच आज हर मध्यमवर्गीय परिवार के मन में एक ही बड़ा सवाल घूम रहा है—क्या मुझे पेट्रोल गाड़ी छोड़कर इलेक्ट्रिक कार (EV) खरीद लेनी चाहिए? और क्या घर की छत पर सोलर पैनल लगवा लेना सही फैसला होगा? ऊपर से यह विचार बेहद लुभावना लगता है कि छत पर मुफ्त सूरज की रोशनी से बिजली बनेगी और उसी से कार चार्ज होकर दिन-रात बिना किसी ईंधन खर्च के दौड़ेगी। लेकिन हकीकत यह भी है कि पेट्रोल कार के मुकाबले ईवी का शुरुआती दाम (Upfront Cost) 4 से 5 लाख रुपये अधिक होता है और घर पर 3 से 5 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगवाने में भी डेढ़ से ढाई लाख रुपये का प्रारंभिक निवेश करना पड़ता है। आम आदमी का सबसे व्यावहारिक सवाल यही है कि जेब से लगने वाला यह अतिरिक्त ₹6 से ₹7 लाख का निवेश आखिर कितने सालों में वसूल (Payback Period / Break-even) होगा और अगले 10 से 15 सालों में कुल कितनी शुद्ध बचत होगी? आइए बिना किसी जटिलता के बिल्कुल सीधे और आसान गणित से इसका पाई-पाई का हिसाब समझते हैं।पेट्रोल कार का 10 साल का खर्च: तेल ही निगल जाता है लाखों रुपयेमान लेते हैं कि आपका दैनिक आवागमन (Daily Running) लगभग 40 किलोमीटर का है, जो किसी भी नौकरीपेशा या कारोबारी व्यक्ति के लिए सामान्य है। इस हिसाब से आपकी कार महीने में लगभग 1,200 किलोमीटर और साल में लगभग 15,000 किलोमीटर चलती है।यदि आप ₹10 से ₹12 लाख के बजट में एक सामान्य 1200cc पेट्रोल कार (जैसे मारुति ब्रेजा, हुंडई वेन्यू या टाटा नेक्सन पेट्रोल) खरीदते हैं:पेट्रोल माइलेज: शहर और हाईवे मिलाकर वास्तविक औसत लगभग 15 किमी प्रति लीटर।सालाना ईंधन की खपत: 15,000 किमी 15 = 1,000 लीटर पेट्रोल।सालाना ईंधन का खर्च (₹100 प्रति लीटर के भाव से): ₹1,00,000 प्रति वर्ष।सालाना मेंटेनेंस और सर्विस (इंजन ऑयल, फिल्टर, स्पार्क प्लग आदि): लगभग ₹10,000 से ₹12,000।10 साल का कुल पेट्रोल खर्च: ₹10,00,000 (यदि पेट्रोल का भाव न बढ़े, जबकि असल में यह बढ़ेगा)।10 साल का मेंटेनेंस खर्च: लगभग ₹1,20,000।पेट्रोल कार पर 10 साल का कुल रनिंग खर्च: लगभग ₹11,20,000।EV + सोलर का जादुई गठजोड़: प्रति किलोमीटर लागत कैसे बनेगी शून्य?अब दूसरी स्थिति पर गौर करते हैं। आपने पेट्रोल कार के बदले लगभग ₹14 से ₹15 लाख में एक इलेक्ट्रिक कार (जैसे टाटा नेक्सन ईवी या पंच ईवी) खरीदी, जिसमें लगभग 35 से 40 kWh की बैटरी मिलती है और जो वास्तविक परिस्थितियों में 250 से 300 किमी की रेंज देती है।ईवी की बिजली खपत: एक सामान्य इलेक्ट्रिक कार 1 यूनिट (kWh) बिजली में लगभग 7 से 8 किलोमीटर की दूरी तय करती है।सालाना बिजली यूनिट्स की जरूरत: 15,000 किमी चलाने के लिए आपको साल भर में लगभग 2,000 यूनिट बिजली की आवश्यकता होगी।यदि आप ग्रिड (सरकारी बिजली) से चार्ज करें: ₹8 प्रति यूनिट की दर से 2,000 यूनिट का सालाना खर्च मात्र ₹16,000 आएगा (यानी लगभग ₹1.05 प्रति किमी)।लेकिन यदि आप छत पर सोलर लगवा लें: केंद्र सरकार की 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के तहत 3 किलोवाट (kW) का रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने पर ₹78,000 की सीधी केंद्रीय सब्सिडी मिलती है। सब्सिडी काटने के बाद 3kW सिस्टम लगाने का शुद्ध खर्च लगभग ₹1,40,000 से ₹1,50,000 के आसपास बैठता है।सोलर का आउटपुट: 3kW का सोलर सिस्टम साल भर में लगभग 4,000 से 4,200 यूनिट बिजली पैदा करता है। इसमें से 2,000 यूनिट आपकी कार को 15,000 किमी दौड़ाने में खर्च हो जाएगी, और बची हुई 2,000 से 2,200 यूनिट आपके घर के पंखे, फ्रिज, टीवी और एसी का बिल शून्य या न्यूनतम कर देगी। यानी कार चलाने की ईंधन लागत शून्य रुपये प्रति किलोमीटर हो जाती है।ब्रेक-ईवन का गणित: कितने सालों में जेब से लगा अतिरिक्त पैसा होगा वसूल?अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल—आपने जो अतिरिक्त पूंजी लगाई, वह कितने दिन में रिकवर होगी?अतिरिक्त प्रारंभिक निवेश:पेट्रोल कार के मुकाबले ईवी का अतिरिक्त मूल्य: ~ ₹4,00,000सोलर रूफटॉप सिस्टम का शुद्ध खर्च (सब्सिडी घटाकर): ~ ₹1,50,000कुल अतिरिक्त निवेश (Extra Upfront Investment): ₹5,50,000सालाना होने वाली बचत:पेट्रोल के मद में सीधी बचत: ₹1,00,000 प्रति वर्षपेट्रोल इंजन के मुकाबले ईवी के मेंटेनेंस में बचत: ₹7,000 प्रति वर्ष (ईवी में मोबिल ऑयल, क्लच प्लेट, एग्जॉस्ट नहीं होते)सोलर से घर की बिजली बिल में अतिरिक्त बचत: ~ ₹15,000 प्रति वर्ष (जो सरप्लस यूनिट्स बचीं)कुल सालाना शुद्ध बचत: लगभग ₹1,22,000 प्रति वर्षपैसा वसूल (Break-even Period) होने का समय:$$ ext{ब्रेक-ईवन समय} = frac{₹5,50,000}{₹1,22,000} approx mathbf{4.5 ext{ वर्ष}}$$यानी ठीक साढ़े 4 साल (लगभग 4 वर्ष 6 महीने) के भीतर आपका लगाया गया एक-एक अतिरिक्त रुपया शत-प्रतिशत वसूल हो जाता है। यदि आपकी रोज की रनिंग 40 किमी से ज्यादा यानी 60 से 70 किमी है, तो यह ब्रेक-ईवन महज 3 से 3.5 साल में ही पूरा हो जाएगा।10 से 15 साल का पूरा वित्तीय बैलेंस शीट: जेब में बचेंगे ₹10 लाख से ज्यादासोलर पैनल्स की वारंटी 25 साल की होती है और आज की तारीख में आधुनिक एलएफपी (LFP - लिथियम आयरन फॉस्फेट) ईवी बैटरियों पर कंपनियां 8 साल या 1.6 लाख किलोमीटर की वारंटी देती हैं। 10 से 15 साल के दीर्घकालिक नजरिए से दोनों विकल्पों का तुलनात्मक खाका इस प्रकार है:खर्च का मद (10 वर्षों में)पेट्रोल कार (15,000 किमी/वर्ष)EV + होम सोलर रूफटॉपवाहन की ऑन-रोड खरीद कीमत₹11,00,000₹15,00,000सोलर सिस्टम की लागत (सब्सिडी बाद)₹0₹1,50,00010 साल का ईंधन / चार्जिंग खर्च₹10,00,000₹0 (सोलर जनरेशन से)10 साल की मेंटेनेंस लागत₹1,20,000₹40,000 (टायर, सस्पेंशन, ब्रेक पैड)घर के बिजली बिल में बचत (10 साल)₹0- ₹1,50,000 (बची यूनिट्स का लाभ)10 साल का कुल समग्र खर्च₹22,20,000₹15,40,000शुद्ध बचत (Net Total Savings)-₹6,80,000 (लगभग ₹7 लाख)यदि इसे 15 वर्षों के पैमाने पर आंका जाए, तो जहां पेट्रोल की कीमतें ₹100 से बढ़कर ₹120 या ₹130 तक जाने की पूरी संभावना है, वहीं सोलर पैनल बिना किसी नए निवेश के अगले 15 वर्षों तक बिजली देना जारी रखेगा। 15 साल के चक्र में आपकी शुद्ध बचत ₹11 से ₹13 लाख के पार पहुंच जाती है, जो कि आपकी मूल कार की पूरी खरीद कीमत के बराबर है।किन लोगों को तुरंत लेना चाहिए यह फैसला और किन्हें रुकना चाहिए?भले ही आंकड़े बेहद आकर्षक हैं, लेकिन यह मॉडल हर व्यक्ति के लिए एक जैसा उपयुक्त नहीं हो सकता।यह फैसला किसके लिए वरदान है:जिनका अपना निजी स्वतंत्र मकान या विला है, जहां छत पर सोलर लगाने की जगह (कम से कम 300 वर्ग फुट शैडो-फ्री एरिया) और ग्राउंड फ्लोर पर सुरक्षित होम-चार्जर लगाने की पार्किंग उपलब्ध है।जिनकी कार का मासिक आवागमन कम से कम 1,000 से 1,500 किलोमीटर अनिवार्य रूप से रहता है।जिनका घरेलू बिजली बिल पहले से ही ₹2,500 से ₹4,000 के बीच आ रहा है।किन्हें अभी थोड़ा इंतजार करना चाहिए:जो लोग हाई-राइज मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट्स (फ्लैट्स) में रहते हैं, जहां छत पर निजी सोलर पैनल लगाने का कानूनी अधिकार नहीं होता और बेसमेंट पार्किंग में फास्ट चार्जर लगाने के लिए आरडब्ल्यूए (RWA) से अनुमति मिलना टेढ़ी खीर होता है।जिनकी कार महीने में केवल 300 से 400 किलोमीटर ही चलती है (ऐसे मामलों में ब्रेक-ईवन आने में 9 से 10 साल लग जाएंगे, जिससे वित्तीय लाभ घट जाता है)।यदि आपके पास अपनी छत और पार्किंग की सुविधा है तथा आपकी रनिंग औसत या उससे ज्यादा है, तो ईवी और सोलर का कॉम्बो सिर्फ पर्यावरण बचाने का कोई शौक नहीं, बल्कि वित्तीय रूप से बैंक एफडी और म्यूचुअल फंड से भी ज्यादा ठोस और सुनिश्चित रिटर्न देने वाला सबसे समझदारी भरा निवेश साबित होता है।
ग्रामीण भारत में प्राथमिक और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान बनाने में जुटी हेल्थटेक कंपनी क्योरबे (CureBay) ने अपने विस्तार के लिए एक बड़ा वित्तीय संबल हासिल किया है। भुवनेश्वर स्थित इस रूरल हेल्थकेयर स्टार्टअप ने अपने प्री-सीरीज सी (Pre-Series C) फंडिंग राउंड में करीब ₹100 करोड़ ($10.5 मिलियन से अधिक) की पूंजी जुटाई है। देश के सुदूर गांवों, कस्बों और छोटे शहरों में डॉक्टरों की कमी, डायग्नोस्टिक सुविधाओं का अभाव और दवाइयों की अनुपलब्धता हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। क्योरबे अपने 'हाइब्रिड क्लिनिक मॉडल' यानी फिजिकल ई-क्लिनिक और डिजिटल टेलीकंसल्टेशन के तालमेल से ग्रामीण मरीजों को बड़े शहरों के विशेषज्ञ डॉक्टरों और गुणवत्तापूर्ण दवाओं से जोड़ रहा है। इस नए फंडिंग राउंड से मिले फंड का इस्तेमाल कंपनी अपने क्लिनिक नेटवर्क को तीन गुना करने और स्वास्थ्य जांच के लिए आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स विकसित करने में करेगी।किस-किस ने लगाए पैसे: इक्विटी और वेंचर डेट का बना मजबूत गठजोड़क्योरबे के इस ₹100 करोड़ के फंडिंग राउंड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें इक्विटी निवेश के साथ-साथ संस्थागत वेंचर डेट (ऋण पूंजी) का संतुलित मिश्रण शामिल है।लीड इन्वेस्टर (इक्विटी): इस राउंड का नेतृत्व प्रमुख वेंचर कैपिटल फर्म आईवीकैप वेंचर्स (IvyCap Ventures) ने किया है। आईवीकैप ने कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों के साथ मिलकर कुल पूंजी में से लगभग ₹69 करोड़ का इक्विटी निवेश किया है।वेंचर डेट पार्टनर्स: शेष बची हुई ₹30 करोड़ से अधिक की राशि वेंचर डेट के रूप में जुटाई गई है। इसमें देश के शीर्ष ऋण फंड—ट्राइफेक्टा कैपिटल (Trifecta Capital), अल्टेरिया कैपिटल (Alteria Capital) और वेंचरसोल पार्टनर्स (VentureSoul Partners)—ने संयुक्त रूप से भागीदारी की है।पुराने बड़े निवेशक: इससे पहले क्योरबे बर्तेल्समैन इंडिया इन्वेस्टमेंट्स (Bertelsmann India Investments), ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट (BII) और एलेवार इक्विटी (Elevar Equity) जैसे वैश्विक निवेशकों से करीब 3.4 करोड़ डॉलर (लगभग ₹280 करोड़) से अधिक की पूंजी जुटा चुकी है। ग्रामीण क्लिनिक मॉडल पर संस्थागत ऋणदाताओं द्वारा इतना बड़ा चेक जारी करना यह दर्शाता है कि कंपनी के कैश-फ्लो और ग्रामीण बाजार के रेवेन्यू मॉडल पर निवेशकों का भरोसा गहरा हुआ है।250 से 800 क्लिनिक तक पहुंचेगा दायरा: 3 साल का मेगा प्लानकंपनी जुटाए गए फंड का एक बड़ा हिस्सा अपने जमीनी नेटवर्क को अभूतपूर्व विस्तार देने में खर्च करेगी।क्लिनिक्स का तिगुना विस्तार: वर्तमान में क्योरबे ओडिशा, छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों के ग्रामीण अंचलों में लगभग 250 ई-क्लिनिक्स संचालित कर रही है। कंपनी का लक्ष्य अगले तीन वर्षों के भीतर इन ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 800 तक पहुंचाना है।टियर-3 और टियर-4 शहरों का जुड़ाव: इन क्लिनिक्स के माध्यम से गांव के मरीजों को उनके घर के 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में ही प्राथमिक डॉक्टर परामर्श, ईसीजी, ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट और आवश्यक दवाएं एक ही छत के नीचे मिल जाती हैं।बड़े अस्पतालों से रेफरल समन्वय: यदि किसी मरीज को गंभीर बीमारी (टर्शियरी केयर) या सर्जरी की आवश्यकता होती है, तो कंपनी अपने पार्टनर अस्पतालों के साथ मिलकर मरीज की भर्ती, एम्बुलेंस और इलाज की पारदर्शी व्यवस्था में मदद करती है।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेटेड स्क्रीनिंग पर बड़ा निवेशक्योरबे केवल फिजिकल सेंटर खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह मेडिकल तकनीक और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भी इस पूंजी का उपयोग कर रही है। कंपनी हाई-एंड ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) हासिल कर अपने खुद के एआई डायग्नोस्टिक और स्क्रीनिंग मॉडल्स को प्रशिक्षित कर रही है। वर्तमान में कंपनी ने त्वचा रोग (Dermatology), दांतों की शुरुआती जांच (Dental) और हीमोग्लोबिन स्तर की गैर-आक्रामक जांच के लिए आधुनिक सॉफ्टवेयर टूल्स तैयार किए हैं। इससे ग्रामीण स्तर पर तैनात पैरामेडिकल स्टाफ बिना किसी बड़े विशेषज्ञ की मौजूदगी के भी मरीज की शुरुआती जांच सटीकता से कर सकता है और डेटा को सीधे शहर के विशेषज्ञ डॉक्टर के पास टेली-रिव्यू के लिए भेज सकता है।वित्तीय प्रदर्शन में लंबी छलांग: 'कवच' सब्सक्रिप्शन से बढ़ा भरोसासाल 2021 में प्रियदर्शी महापात्रा, शोभन महापात्रा और संजय स्वैन द्वारा स्थापित क्योरबे ने पिछले कुछ वर्षों में व्यावसायिक मोर्चे पर जबर्दस्त रफ्तार पकड़ी है। कंपनी का वित्त वर्ष 2024-25 का राजस्व ₹70.41 करोड़ दर्ज हुआ था, जो इससे पिछले वर्ष के ₹12.4 करोड़ के मुकाबले 467% का बड़ा उछाल था। वर्तमान में कंपनी का एनुअल रिकरिंग रेवेन्यू (ARR) लगभग ₹170 करोड़ के पार पहुंच रहा है और कंपनी ऑपरेटिंग एबिटा (Operating EBITDA) स्तर पर ब्रेक-ईवन हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी का ग्रामीण स्वास्थ्य सुरक्षा सब्सक्रिप्शन प्लान 'कवच' (Kavach) भी ग्रामीण परिवारों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है, जो मामूली वार्षिक शुल्क में पूरे परिवार को नियमित हेल्थ चेकअप, मुफ्त डॉक्टर कंसल्टेशन और रियायती दरों पर दवाओं की होम-डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध कराता है।
तिब्बत के स्वायत्त क्षेत्र और उससे सटे हिमालयी भूभाग में प्रकृति के भीषण प्रहार ने भारी दहशत फैला दी है। शुक्रवार की सुबह ढाई घंटे के बेहद कम अंतराल के भीतर धरती एक या दो बार नहीं, बल्कि कुल 11 बार जोरदार झटकों से दहल उठी। भूकंपीय निगरानी केंद्रों के अनुसार, सुबह का सबसे पहला और विनाशकारी झटका रिक्टर पैमाने पर 7.0 की प्रचंड तीव्रता के साथ दर्ज किया गया। इस महाझटके की धमक इतनी तीव्र थी कि इसका असर सैकड़ों किलोमीटर दूर हिमालय की तलहटी और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार तक महसूस किया गया। अभी लोग इस भीषण झटके के खौफ से संभल भी नहीं पाए थे कि जमीन के भीतर लगातार आफ्टरशॉक्स (Aftershocks) का सिलसिला शुरू हो गया और अगले ढाई घंटों में एक के बाद एक 10 और मध्यम से तेज तीव्रता के झटके दर्ज किए गए। अचानक आई इस भूकंपीय श्रृंखला (Earthquake Swarm) के चलते लोग घरों और इमारतों से बाहर खुले मैदानों की ओर भाग खड़े हुए।7.0 तीव्रता का मुख्य झटका: जमीन के 10 किमी नीचे था केंद्रभूकंप विज्ञान केंद्र (National Center for Seismology) और वैश्विक भूगर्भीय एजेंसियों (USGS) के प्राथमिक आंकड़ों के अनुसार, सुबह लगभग 6:00 से 6:30 बजे के बीच आए सबसे बड़े भूकंप का केंद्र तिब्बत के कम आबादी वाले लेकिन सामरिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी इलाके में स्थित था।तीव्रता (Magnitude): 7.0 रिक्टर स्केलकेंद्र की गहराई (Depth): जमीन से महज 10 किलोमीटर नीचे (Shallow Earthquake)प्रभाव: उथली गहराई में आए इस भूकंप के कारण सतह पर ऊर्जा का उत्सर्जन अत्यधिक हिंसक रहा, जिससे कई स्थानों पर भूस्खलन (Landslides) होने और पुरानी इमारतों व संपर्क मार्गों में दरारें आने की खबरें सामने आ रही हैं। स्थानीय प्रशासन और आपदा राहत दल सुदूर पहाड़ी गांवों में नुकसान का जायजा लेने के लिए रवाना हो चुके हैं।ढाई घंटे में 10 बैक-टू-बैक आफ्टरशॉक्स: 4.2 से 5.8 तक मापी गई तीव्रतामुख्य भूकंप के आने के तुरंत बाद धरती शांत नहीं हुई। भूगर्भीय तनाव के पुनर्संतुलन के चलते अगले 150 मिनटों (ढाई घंटे) तक जमीन लगातार हिलती रही। इस दौरान दर्ज किए गए 10 अन्य झटकों की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.2 से लेकर 5.8 के बीच मापी गई:पहला बड़ा झटका: मुख्य कंपन के ठीक 12 मिनट बाद (तीव्रता 5.8)दूसरा व तीसरा झटका: 15 मिनट के अंतराल पर (तीव्रता 5.2 और 4.9)चौथे से सातवें झटके: अगले एक घंटे के दौरान लगातार 4.5 से 4.8 तीव्रता के मध्य झटके दर्जआठवें से दसवें झटके: धीमी गति के बावजूद 4.2 से 4.6 की तीव्रता वाले लगातार कंपनबार-बार आ रहे इन आफ्टरशॉक्स के कारण राहत और बचाव कार्यों में भारी मुश्किलें पेश आ रही हैं, क्योंकि पहले से कमजोर हो चुकी इमारतों और पहाड़ी ढलानों के ढहने का खतरा लगातार बना हुआ है।हिमालयी फॉल्ट लाइन पर क्यों मच रही है इतनी बड़ी खलबली?भूवैज्ञानिकों और सिस्मोलॉजिस्ट्स के मुताबिक, तिब्बत और समूचा हिमालयी क्षेत्र दुनिया के सबसे सक्रिय और खतरनाक भूकंपीय क्षेत्रों (Seismic Zone V) में शामिल है। इस पूरे क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना बेहद संवेदनशील है:टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर: भारतीय प्लेट (Indian Plate) लगातार उत्तर की ओर यूरेशियन प्लेट (Eurasian Plate) की तरफ लगभग 4 से 5 सेंटीमीटर प्रति वर्ष की दर से खिसक रही है। इन दोनों विशाल चट्टानी प्लेटों के आपस में टकराने से हिमालय के नीचे भारी मात्रा में भूगर्भीय ऊर्जा (Stress Energy) जमा होती रहती है।तनाव रिलीज होने का परिणाम: जब यह संचित ऊर्जा चट्टानों की सहनशीलता से अधिक हो जाती है, तो वे अचानक टूटती या खिसकती हैं, जिसके परिणामस्वरूप 7 या उससे अधिक तीव्रता के बड़े भूकंप आते हैं।उथले केंद्र का जोखिम: जब भूकंप का केंद्र जमीन से 10 से 15 किमी की उथली गहराई पर होता है, तो सतह पर ऊर्जा का बिखराव बहुत तेज होता है, जिससे व्यापक झटके महसूस होते हैं और आफ्टरशॉक्स की संख्या भी बढ़ जाती है।क्या भारत और पड़ोसी देशों के सीमावर्ती इलाकों में भी दिखा असर?तिब्बत में आए 7.0 तीव्रता के इस भारी भूकंप के झटके भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख की सीमा से लगे इलाकों और नेपाल के उत्तरी भागों तक महसूस किए गए। हालांकि, सुदूर और उथली पर्वतमालाओं के बीच ऊर्जा का अधिकांश हिस्सा तिब्बती पठार पर ही केंद्रित रहा, जिससे भारतीय सीमा के भीतर किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। फिर भी, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और सीमावर्ती क्षेत्रों के स्थानीय प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि सीमा पार नदियों के प्रवाह में किसी भूस्खलन के कारण बनने वाली झीलों या बांधों की स्थिति पर नजर रखी जा सके।लगातार आफ्टरशॉक्स के बीच प्रशासन ने जारी किए सुरक्षा प्रोटोकॉलस्थानीय नागरिक सुरक्षा एजेंसियों ने भूकंप प्रभावित इलाकों में लोगों को फिलहाल पक्के और बहुमंजिला मकानों के भीतर न लौटने की सख्त हिदायत दी है:सुरक्षित स्थानों पर शरण: नागरिकों से कहा गया है कि वे खुले मैदानों, पार्कों और चौड़ी सड़कों पर ही रहें, जब तक कि आफ्टरशॉक्स की आवृत्ति पूरी तरह थम न जाए।इलेक्ट्रिक व गैस लाइनें बंद रखें: भूकंप के बाद गैस रिसाव या बिजली के शॉर्ट सर्किट से आग लगने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है, इसलिए मुख्य मीटर और एलपीजी कनेक्शन बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।पहाड़ी ढलानों से दूरी: आफ्टरशॉक्स के कारण कमजोर चट्टानें कभी भी नीचे गिर सकती हैं, इसलिए राजमार्गों और पहाड़ी रास्तों पर गैर-जरूरी आवागमन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
देशभर के अन्नदाताओं के लिए खेती की बढ़ती लागत हमेशा से एक बड़ी चिंता का विषय रही है। रासायनिक उर्वरकों (यूरिया, डीएपी), महंगे कीटनाशकों और हाइब्रिड बीजों के चक्कर में किसानों की जेब पर भारी बोझ पड़ता है, जिससे फसल तैयार होने के बाद भी शुद्ध मुनाफा नाममात्र का रह जाता है। इसके साथ ही मिट्टी की उपजाऊ क्षमता भी साल-दर-साल घटती जा रही है और खेत बंजर होने की कगार पर पहुंच रहे हैं। इस दोहरी समस्या से किसानों को उबारने और धरती की सेहत सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (National Mission on Natural Farming - NMNF) के तहत एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना लागू की है। इस मिशन के अंतर्गत जो किसान रसायनों को छोड़कर देसी गाय आधारित प्राकृतिक खेती अपनाते हैं, उन्हें सरकार की तरफ से प्रति एकड़ ₹8,000 की सीधी आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह राशि सीधे किसानों के आधार से जुड़े बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है, ताकि संक्रमण काल में होने वाले शुरुआती खर्चों को आसानी से संभाला जा सके।2 साल में मिलेंगे ₹8,000: जानिए किस्तों का पूरा गणितजब कोई किसान रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाता है, तो पहले एक-दो साल मिट्टी को पुराने रसायनों के प्रभाव से मुक्त होने और अपनी प्राकृतिक उर्वरता हासिल करने में समय लगता है। इसी बदलाव के दौर (Transition Period) में किसानों के जोखिम को कम करने के लिए सरकार ने यह प्रोत्साहन पैकेज तैयार किया है।सालाना ₹4,000 की मदद: योजना के नियमों के अनुसार, पात्र किसान को एक एकड़ जमीन पर प्राकृतिक खेती करने के लिए हर साल ₹4,000 की वित्तीय सहायता दी जाती है।लगातार 2 वर्षों तक लाभ: यह मदद लगातार 2 साल तक जारी रहती है, जिससे किसान को कुल ₹8,000 प्रति एकड़ का अनुदान मिलता है।डीबीटी (DBT) से सीधे खाते में ट्रांसफर: यह पूरी रकम बिना किसी बिचौलिए के सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए किसान के बैंक खाते में किस्तों में जमा की जाती है।योजना का उद्देश्य यह है कि किसान बाहर से खरीदे जाने वाले रासायनिक इनपुट्स पर निर्भर न रहें और स्थानीय स्तर पर ही प्राकृतिक खाद व कीटनाशक तैयार कर सकें।जीवामृत, बीजामृत और नीमास्त्र बनाना सिखाएगी सरकार: फ्री मिलेगी ट्रेनिंगआर्थिक मदद के अलावा इस मिशन का सबसे मजबूत स्तंभ किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है। कई बार किसानों को यह नहीं पता होता कि बिना यूरिया और पोटाश के फसल को पोषण कैसे दें या कीड़ों से बचाव कैसे करें। इसके लिए कृषि मंत्रालय द्वारा देश भर के कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), कृषि विश्वविद्यालयों और ब्लॉक स्तर पर विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाए जा रहे हैं।बीजामृत: बुवाई से पहले बीजों को फफूंद और मिट्टी जनित बीमारियों से बचाने के लिए देसी गाय के गोबर, गोमूत्र और चूने से जैविक उपचार सिखाया जाता है।जीवामृत व घनजीवामृत: मिट्टी में सूक्ष्म जीवाणुओं और केंचुओं की सक्रियता बढ़ाने के लिए बेसन, गुड़, सजीव मिट्टी और गोबर-गोमूत्र से तैयार होने वाले प्राकृतिक खाद के घोल का निर्माण सिखाया जाता है।नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र व दशपर्णी अर्क: कीटनाशकों के विकल्प के रूप में नीम की पत्तियां, धतूरा, मदार, करंज और तंबाकू के पत्तों से प्राकृतिक कीटनाशक तैयार करने की पूरी विधि बताई जाती है।कृषि सखियों का सहयोग: गांवों में प्रशिक्षित 'कृषि सखियां' और 'सीआरपी' (Community Resource Persons) खेतों पर जाकर किसानों को प्रैक्टिकल डेमो देती हैं।कौन-से किसान हैं पात्र? जानिए आवश्यक शर्तेंइस योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने बेहद सरल और पारदर्शी पात्रता शर्तें तय की हैं:भूमि की पात्रता: आवेदक किसान के नाम पर स्वयं की खेती योग्य जमीन होनी चाहिए (छोटे और सीमांत किसानों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है)। कुछ राज्यों में बटाईदार या पट्टेदार किसान भी किसान समूह (FIG/FPO) के माध्यम से जुड़ सकते हैं।देसी गाय या स्थानीय संसाधन: प्राकृतिक खेती की मुख्य धुरी देसी गोवंश का गोबर और गोमूत्र है। यदि किसान के पास अपनी देसी गाय है या वह स्थानीय स्तर पर गोमूत्र व गोबर की व्यवस्था कर सकता है, तो वह आसानी से पात्र बन जाता है।रसायनों का पूर्ण त्याग: किसान को अपनी चयनित जमीन के उस हिस्से पर किसी भी तरह के रासायनिक कीटनाशक या फर्टिलाइजर का इस्तेमाल न करने का औपचारिक संकल्प लेना होता है।आधार लिंक्ड बैंक खाता: सरकारी सब्सिडी की राशि प्राप्त करने के लिए किसान का बैंक खाता उसके आधार कार्ड और एनपीसीआई (NPCI) मैपर से लिंक होना अनिवार्य है।योजना के लिए कैसे करें आवेदन? ये हैं आसान स्टेप्सअगर आप भी अपनी खेती का खर्च घटाकर इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, तो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से जुड़ सकते हैं:ऑफलाइन माध्यम (सबसे सुलभ): अपने ब्लॉक या तहसील में स्थित कृषि विभाग कार्यालय (Agriculture Department) या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) जाएं। वहां सहायक कृषि अधिकारी (ADO) या किसान मित्र से मिलकर प्राकृतिक खेती क्लस्टर में शामिल होने का फॉर्म भरें। इसके अलावा ग्राम पंचायत स्तर पर तैनात ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव से भी संपर्क किया जा सकता है।ऑनलाइन पोर्टल पंजीकरण: केंद्र सरकार के आधिकारिक पोर्टल naturalfarming.dac.gov.in पर जाकर किसान 'Farmer Registration' विकल्प के माध्यम से अपना विवरण, खसरा-खतौनी और बैंक डिटेल भरकर सीधे आवेदन कर सकते हैं।आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज: आधार कार्ड, जमीन की खतौनी/भूलेख दस्तावेज, बैंक पासबुक की साफ प्रति, पासपोर्ट साइज फोटो और मोबाइल नंबर।मिट्टी की सेहत और जेब दोनों का होगा फायदापारंपरिक रासायनिक खेती की तुलना में प्राकृतिक खेती से मिट्टी की नमी सोखने की क्षमता बढ़ती है, जिससे सिंचाई के लिए पानी की खपत 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो जाती है। सबसे बड़ी बात यह है कि बाजार से महंगी यूरिया और डीएपी की बोरियां खरीदने का खर्च पूरी तरह शून्य हो जाता है। वर्तमान में उपभोक्ताओं के बीच भी बिना केमिकल वाले प्राकृतिक और जैविक अनाज, दालों व सब्जियों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों को स्थानीय स्तर पर अपनी उपज का बेहतर बाजार भाव मिल रहा है। सरकार द्वारा दिए जा रहे ₹8,000 की इस मदद से किसान बिना किसी आर्थिक दबाव के प्रकृति के अनुकूल खेती की शुरुआत कर सकते हैं।
Bihar Legislative Council की 8 सीटों पर वोटिंग, 933 बूथों पर मतदान जारी
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए शुक्रवार सुबह आठ बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान शुरू हो गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतदान शाम चार बजे तक होगा। इन चुनावों में कुल 5,32,847 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के पात्र हैं। इनमें 1,46,611 महिलाएं और थर्डजेंडर के 37 मतदाता शामिल हैं। मतदान के लिए कुल 933 केंद्र बनाए गए हैं। मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जनता दल (यूनाइटेड) के भीतर खुलकर सामने आई खींचतान के कारण मुकाबले पर विशेष नजर है। मोकामा के विधायक अनंत सिंह अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाए जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन कर रहे हैं। पूर्व मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले नीरज कुमार इस सीट से लगातार चौथी बार जीत हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। अनंत सिंह ने अनुज सिंह को समर्थन देते हुए आरोप लगाया है कि नीरज कुमार ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के दौरान उनके खिलाफ काम किया था। पटना स्नातक के अलावा दरभंगा स्नातक, तिरहुत स्नातक, कोसी स्नातक, पटना शिक्षक, दरभंगा शिक्षक, तिरहुत शिक्षक और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भी मतदान हो रहा है। मौजूदा विधान पार्षदों का कार्यकाल 16 नवंबर को समाप्त होने वाला है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चार निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें तीन मौजूदा विधान पार्षद फिर से चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, जदयू ने शेष चार सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं। भाजपा के उम्मीदवारों में विधान पार्षद नवल किशोर यादव, एनके यादव और सर्वेश कुमार शामिल हैं। ये क्रमशः पटना शिक्षक, कोसी स्नातक और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से फिर से चुनाव लड़ रहे हैं। प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली जन सुराज पार्टी (जेएसपी) सभी आठ सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और उल्लास के महापर्व 'दुर्गा पूजा' के दौरान 'सिटी ऑफ जॉय' कोलकाता की जीवनरेखा कही जाने वाली कोलकाता मेट्रो ने आवागमन का एक नया ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। देवी दुर्गा की आराधना और भव्य पंडालों के दर्शन के लिए उमड़े जनसैलाब ने सड़कों के जाम से बचने के लिए भूमिगत और एलिवेटेड मेट्रो नेटवर्क पर जबर्दस्त भरोसा जताया। कोलकाता मेट्रो रेलवे द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष दुर्गा पूजा उत्सव के मुख्य छह दिनों—यानी महापंचमी से लेकर विजयादशमी तक—के दौरान कुल 61.51 लाख (6.15 मिलियन) से अधिक यात्रियों ने मेट्रो की विभिन्न लाइनों पर सुरक्षित और आरामदायक सफर तय किया। यह आंकड़ा पिछले कई वर्षों के त्योहारी ट्रैफिक के सभी पिछले रिकॉर्ड्स को तोड़ते हुए एक नया शिखर छू चुका है। त्योहार के दौरान विशेष रूप से महाषष्ठी के दिन स्टेशनों पर यात्रियों की अभूतपूर्व भीड़ देखने को मिली, जिसने अकेले एक ही दिन में रिकॉर्ड कायम कर दिया।महाषष्ठी पर उमड़ा सबसे बड़ा रेला: 12.59 लाख यात्रियों ने तोड़े रिकॉर्डदुर्गा पूजा में पंडाल-हॉपिंग (Pandal Hopping) का असली रोमांच पंचमी और षष्ठी से ही शुरू हो जाता है। मेट्रो प्रशासन के विश्लेषण के अनुसार, इन छह दिनों में सबसे ज्यादा भीड़ महाषष्ठी के दिन दर्ज की गई। उस एक दिन में शहर भर के विभिन्न मेट्रो कॉरिडोर पर 12,59,322 (12.59 लाख) यात्रियों ने सफर किया। दोपहर होते-होते दक्षिण कोलकाता से लेकर उत्तर कोलकाता के प्रमुख पंडालों से जुड़े स्टेशनों पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा था। इसके अलावा महासप्तमी को 12.18 लाख, महाष्टमी को 11.95 लाख और महानवमी के दिन भी 10.80 लाख से अधिक लोगों ने मेट्रो से अपनी यात्रा पूरी की। दशमी को विसर्जन और उत्सव के समापन के बावजूद लाखों लोग मां को विदाई देने के लिए गंगा घाटों और पूजा स्थलों तक मेट्रो के जरिए ही पहुंचे।ब्लू लाइन बनी 'लाइफलाइन', ग्रीन लाइन और अंडरवाटर टनल में भी जबर्दस्त उत्साहकोलकाता मेट्रो के विभिन्न कॉरिडोरों में सबसे पुराना और व्यस्त कॉरिडोर यानी ब्लू लाइन (नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर: दक्षिणेश्वर से कवि सुभाष/न्यू गरिया) भीड़ का सबसे बड़ा केंद्र बना रहा। शहर के सबसे प्रसिद्ध और पारंपरिक पूजा पंडाल इसी कॉरिडोर के स्टेशनों—जैसे कालीघाट, जतिन दास पार्क, शोवाबाजार सुतानुति, दमदम और रवींद्र सरोवर—के आसपास स्थित हैं। केवल ब्लू लाइन पर ही इन छह दिनों में 45 लाख से अधिक यात्रियों ने आवागमन किया।वहीं दूसरी ओर, हुगली नदी के नीचे से गुजरने वाली देश की पहली अंडरवाटर मेट्रो यानी ग्रीन लाइन (हावड़ा मैदान से सेक्टर-5/एस्प्लेनेड) पर भी यात्रियों का जबर्दस्त आकर्षण देखने को मिला। हावड़ा रेलवे स्टेशन पर लोकल और लंबी दूरी की ट्रेनों से उतरने वाले लाखों उपनगरीय यात्रियों ने सीधे अंडरवाटर ग्रीन लाइन पकड़ी और महज कुछ मिनटों में नदी पार करके कोलकाता के मध्य हिस्से में पहुंच गए। पर्पल लाइन (जोका से तारातला) और ऑरेंज लाइन (कवि सुभाष से रूबी मोड़) ने भी स्थानीय स्तर पर भीड़ को नियंत्रित करने में अहम योगदान दिया।रातभर दौड़ीं पूजा स्पेशल ट्रेनें: 24 घंटे मुस्तैद रहा मेट्रो प्रशासनयात्रियों की भारी तादाद और रातभर चलने वाली पंडाल परिक्रमा को सुगम बनाने के लिए कोलकाता मेट्रो रेलवे ने इस बार व्यापक तैयारियां की थीं:नाइट-लॉन्ग सर्विसेज (रातभर संचालन): सप्तमी, अष्टमी और नवमी की रातों में मेट्रो ने पूरी रात ट्रेनों का संचालन किया। सामान्य दिनों में रात 9:45 बजे बंद होने वाली सेवाएं तड़के 4:00 से 5:00 बजे तक लगातार 10 से 15 मिनट के अंतराल पर जारी रहीं।अतिरिक्त फेरे: सामान्य समय सारिणी के मुकाबले हर दिन दर्जनों अतिरिक्त 'पूजा स्पेशल' ट्रेनें ट्रैक पर उतारी गईं, जिससे स्टेशनों पर यात्रियों को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ा।क्राउड मैनेजमेंट और सुरक्षा: प्रमुख और संवेदनशील स्टेशनों पर अतिरिक्त आरपीएफ (RPF) के जवान, महिला सुरक्षा बल और सिविल डिफेंस कर्मी तैनात रहे। बुजुर्गों और बच्चों के लिए अलग लाइनें बनाई गईं और स्वचालित टिकट वेंडिंग मशीनों (ATVM) के पास 'मे आई हेल्प यू' बूथ सक्रिय रहे ताकि टोकन और क्यूआर कोड टिकटिंग में कोई रुकावट न आए।सड़कों के ट्रैफिक जाम से बचाने का सबसे भरोसेमंद साथी बनी मेट्रोदुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता की सड़कों पर भारी वाहनों, बसों और टैक्सियों का प्रवेश कई इलाकों में प्रतिबंधित रहता है और संकरी गलियों में पैदल चलने वालों की भारी भीड़ के चलते घंटों लंबा जाम लग जाता है। ऐसे में कोलकाता मेट्रो ने न केवल प्रदूषण-मुक्त और वातानुकूलित यात्रा मुहैया कराई, बल्कि शहरवासियों और बाहर से आए लाखों विदेशी व घरेलू पर्यटकों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाया। समयबद्ध संचालन और बिना किसी अप्रिय घटना के 61.51 लाख यात्रियों का सफल प्रबंधन कर कोलकाता मेट्रो ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह बंगाल के सबसे बड़े सांस्कृतिक उत्सव का सबसे मजबूत बुनियादी ढांचा है।
निजी या सरकारी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट या नौकरी बदलने के समय मिलने वाली ग्रेच्युटी (Gratuity) एक बहुत बड़ा वित्तीय संबल होती है। 'पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972' (Payment of Gratuity Act, 1972) के अनुसार, जब कोई कर्मचारी किसी संस्थान में लगातार कम से कम 5 वर्ष की सेवा पूरी कर लेता है, तो संस्थान की ओर से उसकी लंबी और निष्ठावान सेवा के सम्मान स्वरूप ग्रेच्युटी की एकमुश्त राशि दी जाती है। अक्सर कर्मचारियों के मन में यह सवाल रहता है कि उनकी मौजूदा सैलरी और सर्विस के आधार पर उन्हें कंपनी छोड़ते समय कुल कितना पैसा मिलेगा। यदि आपकी अंतिम बेसिक सैलरी और डीए मिलाकर ₹50,000 प्रति माह है और आपने उस कंपनी में 10 वर्ष तक काम किया है, तो आपको ग्रेच्युटी के रूप में एक अच्छी-खासी रकम मिलने वाली है। आइए जानते हैं ग्रेच्युटी की गणना का आधिकारिक फॉर्मूला और इसका सटीक हिसाब-किताब।ग्रेच्युटी की गणना का आधिकारिक फॉर्मूला: 15/26 का क्या है नियम?जो कंपनियां या कारखाने ग्रेच्युटी कानून के दायरे में आते हैं (यानी जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं), वहां ग्रेच्युटी तय करने के लिए एक मानक कानूनी फॉर्मूला लागू होता है। इस फॉर्मूले में महीने के 30 दिनों के बजाय केवल 26 कार्यदिवसों (Working Days) की गणना की जाती है, क्योंकि महीने में 4 रविवार को अवकाश माना जाता है। वहीं हर एक साल की सेवा के बदले कर्मचारी को 15 दिनों का वेतन ग्रेच्युटी के रूप में दिया जाता है।ग्रेच्युटी गणना का फॉर्मूला इस प्रकार है:$$ ext{ग्रेच्युटी राशि} = frac{15 imes ext{अंतिम मूल वेतन + DA} imes ext{सेवा के कुल वर्ष}}{26}$$यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि सैलरी का मतलब आपकी 'इन-हैंड' या 'सीटीसी' (CTC) नहीं है, बल्कि आपकी सैलरी स्लिप में दर्ज अंतिम महीने का बेसिक पे (Basic Salary) और महंगाई भत्ता (DA) है। यदि आपको कोई कमीशन मिलता है जो बिक्री पर तय प्रतिशत के रूप में है, तो वह भी इसमें जुड़ता है; लेकिन एचआरए (HRA), स्पेशल अलाउंस या अन्य भत्ते इसमें शामिल नहीं होते।₹50,000 सैलरी और 10 साल की नौकरी पर कितना मिलेगा पैसा?अब आपके आंकड़े के आधार पर स्टेप-बाय-स्टेप गणना करते हैं:अंतिम वेतन (मूल वेतन + महंगाई भत्ता): ₹50,000कुल सेवा अवधि: 10 वर्षमानक अनुपात: 15/26फॉर्मूले में इन मानों को रखने पर:$$ ext{ग्रेच्युटी} = frac{15 imes 50,000 imes 10}{26}$$$$ ext{ग्रेच्युटी} = frac{75,00,000}{26} approx ₹2,88,461.53$$यानी अगर आपकी अंतिम बेसिक सैलरी ₹50,000 है और आपने संस्थान में पूरे 10 साल सेवा दी है, तो कंपनी छोड़ने या रिटायरमेंट के समय आपको ₹2,88,462 (लगभग दो लाख अठासी हजार रुपये) की ग्रेच्युटी राशि एकमुश्त प्राप्त होगी।सेवा वर्षों की गणना का राउंड-ऑफ नियम (6 महीने से ज्यादा का फायदा)ग्रेच्युटी कानून में कर्मचारियों की सुविधा के लिए महीनों को राउंड-ऑफ करने का एक बेहद उपयोगी नियम है। यदि किसी कर्मचारी ने 5 साल पूरे करने के बाद अगले साल में 6 महीने से अधिक समय तक काम किया है, तो उस अतिरिक्त समय को पूरा एक वर्ष मान लिया जाता है:उदाहरण 1: यदि आपकी नौकरी 10 साल 7 महीने रही है, तो फॉर्मूले में सेवा वर्षों की संख्या 10 के बजाय सीधे 11 वर्ष मानी जाएगी। इस स्थिति में ग्रेच्युटी राशि बढ़कर लगभग ₹3,17,308 हो जाएगी।उदाहरण 2: यदि आपकी नौकरी 10 साल 4 महीने रही है, तो 6 महीने से कम होने के कारण केवल 10 वर्ष की ही गणना होगी और राशि ₹2,88,462 ही रहेगी।क्या इस ₹2.88 लाख की रकम पर इनकम टैक्स लगेगा?कर नियमों के अनुसार, आपको मिलने वाली इस पूरी राशि पर एक भी रुपया टैक्स नहीं देना होगा।आयकर अधिनियम की धारा 10(10) के तहत निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए जीवनकाल में अधिकतम ₹20 लाख तक की ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स-फ्री (Tax-Free) रखी गई है। चूंकि आपकी गणना में मिलने वाली राशि ₹2,88,462 है, जो कि ₹20 लाख की वैधानिक सीमा से काफी कम है, इसलिए फुल एंड फाइनल सेटलमेंट के दौरान आपके खाते में यह पूरा पैसा बिना किसी टीडीएस (TDS) कटौती के जमा होगा।ग्रेच्युटी के लिए 5 साल की अनिवार्यता और अपवादग्रेच्युटी प्राप्त करने के लिए कर्मचारी का एक ही संस्थान में लगातार 5 वर्ष की सेवा पूरी करना अनिवार्य है। यदि कोई कर्मचारी 4 साल 11 महीने में भी इस्तीफा दे देता है, तो वह कानूनी तौर पर ग्रेच्युटी का दावा नहीं कर सकता। हालांकि, इस नियम में एक बड़ा अपवाद है—यदि सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है या किसी दुर्घटना अथवा बीमारी के चलते वह स्थायी रूप से दिव्यांग (अपंग) हो जाता है, तो 5 साल की न्यूनतम सेवा की शर्त पूरी तरह माफ हो जाती है और उसके परिजनों या नॉमिनी को पूरी ग्रेच्युटी का भुगतान तुरंत किया जाता है।
चीन से Face-Off जारी... ITBP डीजी ने बताया हमारे जवान दे रहे मुंहतोड़ जवाब
आईटीबीपी महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में जुलाई से जारी चीनी पीएलए सैनिकों के साथ आमने-सामने की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि की. कई स्थानों पर तनाव जारी है. आईटीबीपी ड्रोन प्लाटून, स्ट्राइक ट्रेनिंग और भूमिगत बंकर बनाकर चीन के खिलाफ तैयारियां तेज कर रहा है.
प्रेमानंद पर बयानबाजी पड़ी भारी! दिनेश फलाहारी पर संतों का एक्शन
वृंदावन के सिद्धपीठ हनुमान टेकरी आश्रम में संत समाज की महापंचायत आयोजित हुई। इसमें प्रेमानंद जी महाराज व संतों पर निराधार आरोप लगाने पर दिनेश शर्मा उर्फ दिनेश फलाहारी का कड़ा विरोध किया गया. संतों ने सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित कर उनके सामाजिक एवं धार्मिक बहिष्कार की घोषणा की.
1 नवंबर से नया नियम, अनजान कॉल आने पर भी दिखेगा असली नाम
Rule Change From 1 November : भारत में करोड़ों मोबाइल यूजर्स के लिए 1 नवंबर से नियम बदलने जा रहा है. संचार मंत्रालय (DoT) के आदेश के तहत 1 नवंबर से सभी कंपनियों को कॉलर नेम प्रजेंटेशन (CNAP) को लागू करने का ऐलान कर दिया है. अब यूजर्स को अनजान नंबर से आने वाले कॉलर का नाम पता चल जाएगा.
सनातन धर्म में त्रयोदशी तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। यह पावन तिथि देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती की संयुक्त आराधना के लिए समर्पित होती है। जब त्रयोदशी तिथि शुक्रवार के दिन पड़ती है, तो इसे 'शुक्र प्रदोष व्रत' कहा जाता है। ज्योतिष और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शुक्र प्रदोष व्रत रखने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है, वैवाहिक जीवन के तनाव दूर होते हैं और साधक को जीवन में भौतिक सुख, धन, ऐश्वर्य व उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। प्रदोष व्रत का वास्तविक फल सूर्यास्त के समय यानी 'प्रदोष काल' में किए गए शिव पूजन से मिलता है। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव अपने संपूर्ण परिवार के साथ कैलाश पर आनंद तांडव करते हैं और अपने भक्तों के समस्त कष्टों का निवारण करते हैं। आइए जानते हैं आज का संपूर्ण पंचांग, प्रदोष काल का सटीक समय और पूजा की शास्त्र सम्मत विधि।आज का पंचांग और ग्रह-नक्षत्रों की स्थितिआज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रभाव रहेगा। आज के पंचांग की खगोलीय और ज्योतिषीय स्थिति इस प्रकार है:संवत: विक्रम संवत 2083, शक संवत 1948मास व पक्ष: आश्विन मास, शुक्ल पक्षतिथि: त्रयोदशी तिथिदिन: शुक्रवार (माता लक्ष्मी और शुक्र ग्रह को समर्पित)नक्षत्र: पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र (उपरान्त उत्तराभाद्रपद नक्षत्र)करण: कौलव करण (उपरान्त तैतिल)सूर्य राशि: तुला राशिचंद्र राशि: मीन राशि में संचरणसूर्योदय: प्रातः 06:27 बजेसूर्यास्त: सायं 05:43 बजेप्रदोष काल पूजा का सबसे शुभ मुहूर्तप्रदोष व्रत में मुख्य पूजा सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक के समय (प्रदोष काल) में की जाती है। इस समयावधि में की गई आराधना सीधे शिवलोक तक पहुंचती है:प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: सायं 05:43 बजे से रात्रि 08:14 बजे तक (कुल अवधि लगभग 2 घंटे 31 मिनट)अभिजीत मुहूर्त: दिन में 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक (सभी सामान्य शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ)विजय मुहूर्त: दोपहर 01:58 बजे से 02:43 बजे तकगोधूलि वेला: सायं 05:43 बजे से 06:08 बजे तकराहुकाल और अशुभ समय का रखें ध्यानपूजा की तैयारी या किसी नए संकल्प के दौरान आज के अशुभ समय से परहेज करना श्रेयस्कर रहता है:राहुकाल: पूर्वाह्न 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक (इस समय में कोई नया मांगलिक कार्य न करें)यमगंड काल: अपराह्न 03:00 बजे से 04:30 बजे तकगुलिक काल: प्रातः 07:30 बजे से 09:00 बजे तकदुर्मुहूर्त: प्रातः 08:44 बजे से 09:29 बजे तक और दोपहर 12:28 बजे से 01:13 बजे तकशुक्र प्रदोष व्रत पर भगवान शिव और माता पार्वती की संपूर्ण पूजा विधिप्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ श्वेत या हल्के गुलाबी वस्त्र धारण करें और दिनभर मन ही मन ॐ नमः शिवाय का जप करते हुए फलाहार व्रत का संकल्प लें। प्रदोष काल शुरू होने से पहले दोबारा हाथ-मुंह धोकर पूजा स्थल पर बैठें:पंचामृत अभिषेक: शिवलिंग को गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद कच्चा गाय का दूध, दही, शुद्ध घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से विधिवत अभिषेक करें। अंत में पुनः शुद्ध जल या गंधोदक से स्नान कराएं।श्रृंगार और सामग्री अर्पण: महादेव को सफेद चंदन का त्रिपुंड लगाएं, अक्षत (अखंडित चावल), श्वेत आंकड़े के फूल, धतूरा, भांग और शमी पत्र अर्पित करें। ध्यान रखें कि शिवलिंग पर कभी भी खंडित बेलपत्र न चढ़ाएं; कम से कम 11 या 21 चिकने बेलपत्र ॐ नमः शिवाय बोलते हुए अर्पित करें।माता पार्वती का पूजन: चूंकि आज शुक्र प्रदोष है, इसलिए शिवलिंग के साथ-साथ मां पार्वती को लाल चुनरी, सिंदूर और 16 श्रृंगार की सामग्री अवश्य भेंट करें। इससे दांपत्य सुख में वृद्धि होती है।धूप-दीप और भोग: शुद्ध गाय के घी का दीपक और सुगंधित धूपबत्ती जलाएं। भगवान को मौसमी फल और सफेद मिठाई (जैसे मावे के पेड़े या खीर) का भोग लगाएं।आरती व क्षमा प्रार्थना: अंत में 'शिव चालीसा', 'दारिद्र्य दहन स्तोत्र' या 'रुद्राष्टकम' का पाठ करें और कपूर से प्रेमपूर्वक आरती उतारें। पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।शुक्र प्रदोष का अचूक उपाय: दूर होगी दांपत्य और आर्थिक तंगीशुक्र ग्रह धन, वैभव, विलासिता और दांपत्य प्रेम का कारक माना जाता है। यदि वैवाहिक जीवन में बार-बार कलह होती है या घर में बरकत नहीं रुक रही है, तो आज शाम प्रदोष काल में शिवलिंग पर थोड़ा सा गाय का कच्चा दूध और मिश्री अर्पित करें। इसके साथ ही भगवान शिव के मंदिर में सुगंधित सफेद इत्र और सफेद कनेर या चमेली के फूल चढ़ाने से कुंडली में शुक्र दोष समाप्त होता है और परिवार में सुख, शांति व समृद्धि का वास होता है।
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव: पांच सीटों पर 182 उम्मीदवार; महायुति और एमवीए की ताकत का इम्तिहान क्यों?maharashtra legislative council election voting updates mahayuti mva candidates results 2026
दिवाली से पहले 3 राशियों पर बरसेगा पैसा, बनेगा गजकेसरी राजयोग
Gajkesari Rajyog 2026: वैदिक ज्योतिष के अनुसार, नवंबर में चंद्रमा सिंह राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से गुरु बृहस्पति विराजमान हैं. दोनों ग्रहों की युति से गजकेसरी राजयोग बनेगा. ऐसे में इस योग से कुछ राशि के जातकों को लाभ मिल सकता है.
Maharashtra Legislative Council की 5 सीटों पर वोटिंग, 182 उम्मीदवार आजमा रहे किस्मत
महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के लिए शुक्रवार सुबह आठ बजे मतदान शुरू हुआ। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इस चुनाव में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीटें शामिल हैं और इसे राज्य विधानमंडल के उच्च सदन में सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महा विकास आघाडी (एमवीए) की ताकत की परीक्षा माना जा रहा है। चुनाव में कुल 182 उम्मीदवार मैदान में हैं। दोनों गठबंधनों को बगावत का सामना करना पड़ा है। अधिकारियों ने बताया कि मतदान शाम चार बजे तक चलेगा। कुल 2,419 मतदान केंद्रों पर 10,68,072 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के पात्र हैं। मतगणना 27 अक्टूबर को होगी, जबकि चुनाव प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी। राज्य की 78 सदस्यीय विधान परिषद में पांच सीटों-तीन स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों-के लिए द्विवार्षिक चुनाव हो रहे हैं। ये निर्वाचन क्षेत्र हैं: पुणे संभाग स्नातक, नागपुर संभाग स्नातक, पुणे संभाग शिक्षक, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) स्नातक और अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र। इन सीटों पर चुनाव मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल छह दिसंबर को समाप्त होने के कारण कराए जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) से मिलकर बने महायुति गठबंधन तथा कांग्रेस, शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शरदचंद्र पवार) और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से मिलकर बने विपक्षी महा विकास आघाडी (एमवीए) गठबंधन ने सभी पांच सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक 47 उम्मीदवार मैदान में हैं। इसके बाद छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 41, नागपुर स्नातक में 38, पुणे शिक्षक में 30 और अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 26 उम्मीदवार हैं। छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक 842 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इसके बाद पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 741, नागपुर स्नातक में 445, पुणे शिक्षक में 310 और अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 81 मतदान केंद्र हैं। महाराष्ट्र विधान परिषद में भाजपा 35 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। इसके बाद शिवसेना के 12 और राकांपा के 10 सदस्य हैं। विपक्षी दलों में कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के पांच-पांच विधान परिषद सदस्य हैं, जबकि राकांपा (शप) के दो सदस्य हैं। सदन में चार निर्दलीय विधान परिषद सदस्य भी हैं।
'ऐश्वर्या को छुआ क्यों?' प्यार में लिमिट भूले सलमान! भंसाली ने फटकारा
सलमान खान ने ‘हम दिल दे चुके सनम’ की शूटिंग में ऐश्वर्या राय का बाजू क्यों छुआ था? स्मिता जायकर ने बताया कैसे संजय लीला भंसाली ने सलमान को डांट लगाई और दोनों के प्यार के किस्से सुनाए.
31 पर 4 विकेट, कोहली का बैकफुट सिक्स... और पाकिस्तान हो गया ढेर
मेलबर्न में खेला गया वो मुकाबला भारत-पाकिस्तान की प्रतिद्वंद्विता के कारण यादगार नहीं बना. मुश्किल हालात में विराट कोहली की बल्लेबाजी, आखिरी ओवर का रोमांच और अश्विन का शांत दिमाग इस मैच को खास बना गया. मेलबर्न में उस रात भारत ने दिखाया कि क्रिकेट में आखिरी गेंद फेंके जाने तक मुकाबला खत्म नहीं होता.
विधान परिषद चुनाव 2026: यूपी की 11 सीटों पर वोटिंग शुरु,बैलेट पेपर से डाले जा रहे वोट
उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद की 28 सीटों के लिए मतदान जारी है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक, वोटिंग सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगी
कच्चे तेल की ढुलाई लागत 8 गुना बढ़ी, क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
पश्चिम एशिया से कच्चे तेल की सप्लाई में सुधार के बावजूद भारत को सस्ते तेल का फायदा तुरंत मिलता नहीं दिख रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह ढुलाई का बढ़ता खर्च है. एक साल पहले जहां कच्चे तेल को पहुंचाने का मालभाड़ा करीब 3 डॉलर प्रति बैरल था, वहीं अब यह 20 डॉलर के पार पहुंच गया है. इससे भारतीय तेल कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ रहा है. क्या इस महंगी ढुलाई का असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी पड़ेगा?
26KM का माइलेज, ऑटोमैटिक गियर, कीमत 5 लाख से कम, दिवाली में लेने के लिए पहली कार
दिवाली में अगर आप अपने लिए सबसे सस्ती ऑटोमैटिक कार लेना चाहते हैं तो आपके पास कई ऑप्शन्स हैं. इस लिस्ट में आपको 6 ऐसी ही कारों के बारे में बता रहे हैं.
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें जेल से बाहर आने के बाद भी कम नहीं हुई हैं। द
ECI में आंतरिक कलह! संधू-जोशी ने कैबिनेट सचिव से की थी सीनियर अधिकारी की शिकायत, RTI में बड़ा खुलासा
Election Commission of India: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) में अधिकारियों के बीच में कामकाज और मतदाता सूची में IT सिस्टम को लेकर नई जानकारी सामने आई है. जो RTI के जरिए पता चली है.
पुरानी चीजों से सजाएं घर, दिवाली पर काम आएंगे दुपट्टे और जार
Diwali Decoration Ideas: दिवाली पर घर को खूबसूरत बनाने के लिए महंगे डेकोरेशन आइटम खरीदने की जरूरत नहीं है. पुराने दुपट्टे, कांच के जार, मिट्टी के दीये, सजावटी ट्रे और कुशन कवर से घर को शानदार फेस्टिव लुक दिया जा सकता है. चलिए जानते हैं इसके 5 आसान और बजट-फ्रेंडली तरीके.
एकादशी का पारण कितने बजे तक करें? जानें पापांकुशा एकादशी व्रत खोलने की सही विधि
इस साल पापाकुंशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर दिन गुरुवार को रखा जा रहा है. इस दिन भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करने से भक्तों को विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है. यहां जानिए एकादशी का पारण कितने बजे तक कर सकते हैं?
टीवी पर लाइव रिपोर्टिंग कर रहे स्पेनिश रिपोर्टर से टकराई तूफानी लहर, कैमरे में कैद हुआ खौफनाक मंजर
स्पेन में खराब मौसम की लाइव रिपोर्टिंग के दौरान समुद्र में उठी एक तूफानी लहर रिपोर्टर से आकर टकरा गई, जिससे वो सीधा जमीन पर आ गिरा. ये पूरी घटना कैमरे पर कैद हो गई.
SCL Recruitment 2026: सेमी-कंडक्टर लेबोरेटरी में 83 पदों पर निकली भर्ती, एक लाख तक सैलरी
SCL Recruitment 2026: सेमी-कंडक्टर लेबोरेटरी (SCL) ने कुल 83 पदों के लिए ये आवेदन मांगे गए हैं, जिनके लिए 1 नवंबर से रजिस्ट्रेशन विंडो खुल जाएगी. नोटिफिकेशन में योग्यता और बाकी जरूरी जानकारी दी गई है.
यूपी की वोटर लिस्ट में Ramhit Yadav की जगह ‘राम ने यादव को मारा’ कैसे हुआ
उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में नामों की अजीबोगरीब गलतियों पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने सफाई दी है. पहली बार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के दौरान अंग्रेजी नामों को हिंदी में अनुवाद किए जाने से गड़बड़ियां हुईं. आयोग के अनुसार, 14 लाख प्रविष्टियों में से 158 में गलतियां हुईं. वहीं, पीलीभीत में 10,470 वोटर एंट्री में अनियमितताएं मिलने पर दो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए और कंप्यूटर ऑपरेटर को बर्खास्त कर दिया गया.
चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भूकंप के झटके
23 अक्टूबर की सुबह चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में 4.1 से 4.9 तीव्रता तक के भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, चीन में 4.4, पाकिस्तान में 4.9 और अफगानिस्तान में 4.1 तीव्रता का भूकंप आया।
जो रूट ने रचा इतिहास, ODI में ऐसा करने वाले पहले इंग्लिश बल्लेबाज
जो रूट को हाल ही में इंग्लैंड की टेस्ट टीम का दोबाराकप्तान बनाया गया था. टेस्ट के साथ-साथवनडे इंटनरेशनल में भी उनका प्रदर्शन लगातार मजबूत रहा है. 2017 से 2019 तक उन्होंने हर साल ओडीआई क्रिकेट में 900 प्लस रन बनाए.
इंटरनेट डेस्क। राजस्थान में एक बार फिर से मौसम बदलने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में कल एक नया पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव होने की संभावना है। इसके प्रभाव से श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, बीकानेर एरिया में बारिश, ओलावृष्टि होने की संभावना है। गत 24 घंटे में प्रदेश के अधिकतर इलाकों में मौसम ड्राई रहा है। गुरुवार को सबसे ज्यादा तापमान जैसलमेर में 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। हालांकि देर शाम जैसलमेर के कई इलाकों में बादल छाए और बूंदाबांदी भी देखने को मिली है। प्रदेश के कई जिलों में तापमान में गिरावट आने से लोगों को अभी भीषण गर्मी से राहत मिली हुई है। इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट दूसरी ओर मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित देश के 11 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने आज दिल्ली-एनसीआर,उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब,उत्तराखंड,हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, केरलम, कर्नाटक,आंध्र प्रदेश और ओडिशा में आज भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की है। तमिलनाडु, केरल में रात से ही झमाझम बारिश का दौर जारी है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी का दौर जारी मौसम विभाग के अनुसार, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में लगातार तीसरे दिन बर्फबारी का दौर जारी है। इसके कारण यहां पर तापमान माइनस में चला गया है। केदारनाथ में बर्फबारी के बीच चारधाम यात्रा जारी है। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम में हवा का स्तर लगातार खराब होने से लोगाें की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही है। सुबह और शाम के तापमान में लगातार गिरावट होने की वजह से ठंड का असर अब नजर आने लगा है। PC:indiatv अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
क्योंकि सास भी कभी बहू थी के फिनाले के बाद एकता कपूर के नए शो की चर्चा हो रही है, जिसमें श्रद्धा कपूर और गौरव खन्ना अहम किरदार में नजर आ रहे हैं.
आतंकियों के अधिकार की वकालत करने वाले... संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को फिर रगड़ा
आतंकवाद, धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यकों के अधिकार सहित अन्य मामलों को लेकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को एक बार फिर आड़े हाथों लिया है. भारत की सचिव ने पाकिस्तान के दोहरे मापदंड का जिक्र करते हुए हमला किया.
कंपनियां बंद, पानी की सप्लाई बाधित... हड़ताल से हरियाणा में पैनिक
बिजली विभाग के करीब 40,000 कर्मचारियों और इंजीनियरों की स्ट्राइक से हरियाणा में बड़ा संकट खड़ा हो गया है. स्ट्राइक के कारण गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह सहित कई इलाकों में बिजली कटौती, पानी की सप्लाई और उद्योग पर भारी असर देखने को मिल रहा है.
सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर के अबूझमाड़ समेत पूर्व नक्सल प्रभावित इलाकों के करीब 50 गांवों के देवी-देवता पहली बार विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा में शामिल हुए. वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज जगदलपुर पहुंचकर मुरिया दरबार और आमसभा में भाग लेंगी.
UP Bihar MLC Election Live Updates: उत्तर प्रदेश की 11 और बिहार की 8 विधान परिषद सीटों के लिए आज मतदान हो रहा है. इस चुनाव से जुड़े पल-पल के हर बड़े अपडेट जानें NDTV के इस लाइव ब्लॉग पर.
LIVE: 4 राज्यों की 28 सीटों पर मतदान, 27 अक्टूबर को आएंगे नतीजे
Latest News Today Live Updates in Hindi : उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद की 28 सीटों के लिए मतदान सुबह 8 बजे से जारी। पल पल की जानकारी...
मुंबई:10 साल की बच्ची पर हत्या का आरोप, क्यों हिंसक हो जाते हैं बच्चे?
मुंबई के गोरेगांव में 24 महीने की बच्ची की मौत के मामले में उसकी 10 साल की पड़ोसी बच्ची पर हत्या का आरोप लगा है, पुलिस को शक है कि 10 साल की बच्ची ने मासूम को 6वीं मंजिल से धक्का दिया था. घटना सीसीटीवी में कैद हुई है.
Business Idea: दिवाली पर रॉकेट की तरह चलेगा ये बिजनेस, सिर्फ ₹10,000 में शुरू कर होगी बंपर कमाई
Candle Making Business: दिवाली के मौके पर आप सिर्फ ₹10,000 से ₹15,000 लगाकर मोमबत्ती बनाने का बिजनेस शुरू कर सकते हैं. जानिए कच्चा माल कहां से खरीदें, मोमबत्ती कैसे बनाएं और इसे ऑनलाइन बेचकर कमाई कैसे करें.
‘11 साल से फूटी कौड़ी नहीं दी’, पीयूष गोयल ने जर्मनी में खोला पश्चिम के पापों का बही खाता
बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में एक गोलमेज चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने विकसित देशों को खरी-खोटी सुनाई. उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूषण इन्हीं अमीर देशों ने फैलाया है, लेकिन अब ये पेरिस समझौते में गरीब और विकासशील देशों की मदद करने के अपने वादे से मुकर रहे हैं.
22-23 अक्टूबर तक NDTV World Summit 2026 का नई दिल्ली में आयोजन हो रहा है. इस बार का थीम है A World Between Orders. यहां दुनिया के बदलते राजनीतिक समीकरणों, वैश्विक अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), तकनीक, सुरक्षा और इंटरनेशनल मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका पर चर्चा हो रही है.
46 साल पहले ‘कर्ज’ में ऋषि कपूर और टीना मुनीम पर फिल्माया गया ‘मैं सोलह बरस की’ आज भी लोगों की जुबां पर है. किशोर कुमार और लता मंगेशकर की आवाज में सजा यह गाना कम उम्र के प्यार और मीठी नोकझोंक को खूबसूरती से बयां करता है.
Rajasthan Panchayat Election के पहले चरण में 63 फीसदी वोटिंग दर्ज
राजस्थान में पंचायती राज चुनाव के पहले चरण के लिए बृहस्पतिवार को 63 प्रतिशत मतदान हुआ। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, राज्य के गांवों में मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं और मतदान प्रतिशत 63 फीसदी दर्ज किया गया। पहले चरण में 16 जिला परिषदों और 104 पंचायत समितियों के लिए मतदान हो रहा है। जिला परिषदों और पंचायत समितियों के सदस्यों का चुनाव करने के लिए 85 लाख से अधिक मतदाता पात्र हैं। कुल 41 जिला परिषदों और 457 पंचायत समितियों के चुनाव तीन चरणों में कराए जा रहे हैं। इसके अलावा, 14,403 ग्राम पंचायतों में पंच और सरपंच के चुनाव भी होने हैं। पहले चरण में 2,081 सीटों के लिए कुल 6,976 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें जिला परिषद के 293 वार्ड और पंचायत समिति के 1,788 वार्ड शामिल हैं। पहले चरण में कुल 85,07,306 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के पात्र हैं। ये चुनाव अजमेर, अलवर, बाड़मेर, भीलवाड़ा, बीकानेर, डूंगरपुर, जयपुर, झालावाड़, जोधपुर, कोटा, नागौर, पाली, फलोदी, राजसमंद, सिरोही और उदयपुर जिलों में हो रहे हैं। जिला परिषद की 293 सीटों के लिए 1,693 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि पंचायत समिति की 1,788 सीटों के लिए 5,283 उम्मीदवार मैदान में हैं। जिला परिषदों में सबसे अधिक 28 वार्ड भीलवाड़ा में हैं। इसके बाद उदयपुर में 25, बाड़मेर में 24 और जयपुर में 22 वार्ड हैं। जिला परिषद की सीटों के लिए जयपुर में सबसे अधिक 154 उम्मीदवार हैं। इसके बाद बीकानेर में 138 और अलवर तथा जोधपुर में 133-133 उम्मीदवार मैदान में हैं। पंचायत समिति चुनावों में नागौर में सबसे अधिक 470 उम्मीदवार हैं। इसके बाद बाड़मेर में 467 और भीलवाड़ा में 466 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। दूसरे चरण में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए 28 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि तीसरे चरण का मतदान तीन नवंबर को होगा। तीसरे चरण में पंच और सरपंच के चुनाव पांच नवंबर को कराए जाएंगे। इसके बाद छह नवंबर को उपसरपंचों के लिए अप्रत्यक्ष चुनाव होंगे।
Karwa Chauth Songs: मेहंदी, चूड़ियों और 16 श्रृंगार लिए करवाचौथ का व्रत फिल्मों का भी हिस्सा रहा है. आज हम आपके लिए 90 के दशक का एक गाना लाए हैं जिसमें ममता कुलकर्णी बिल्कुल सजधज कर अपने पिया के दीदार की कामना करती नजर आई थीं. इस गाने को साधना सरगम ने गाया था.
3 लाख का iPhone Duo, ठीक कराने में आएगा इतने लाख का खर्च
Apple iPhone Duo की आज पहले शुरू हो चुकी है. भारत समेत इसकी पहली सेल दुनियाभर में 23 अक्तूबर से शुरू हुई है. प्री ऑर्डर करने वालों को ही ऐपल स्टोर्स से Apple iPhone Duo मिला. एक शख्स मैक्सिमम दो iPhone Duo खरीद सकेगा. कंपनी इसकी रिपेयरिंग कॉस्ट का भी खुलासा कर चुकी है, आइये उसके बारे में भी डिटेल्स में जानते हैं.
MARUTI की इस कार ने पलट दिया SUVs का खेल... सभी को किया पीछे
भारतीय पैसेंजर कार मार्केट के लिए वित्तवर्ष 2027 के शुरुआती 6 महीने शानदार रहे हैं. टॉप -10 कारों की बात करें, तो इनकी कंबाइन्ड सेल्स 11.01 लाख यूनिट्स के पार पहुंच गई है. पिछले साल के इसी टाइम पीरियड में इन 10 गाड़ियों की 8.66 लाख यूनिट्स बिकी थीं.
लद्दाख में विधानसभा से कम कुछ भी मंजूर नहीं; केंद्र सरकार पर फिर भड़के सोनम वांगचुक
वांगचुक ने कहा कि 22 मई को हुई बैठक से लद्दाख के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था बनने की उम्मीद जगी थी। वांगचुक के अनुसार, प्रतिनिधियों ने शुरुआत में पूर्ण राज्य का दर्जा मांगा था।
दिल्ली HC से सौरव गांगुली को झटका, फिल्म पर रोक की याचिका खारिज
बॉलीवुड फिल्म दूसरा आज सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. मगर उससे ठीक पहले पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली इसपर रोक की मांग करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गए थे. हालांकि उनकी याचिका खारिज हो गई है. आखिर क्या था ये विवाद?
इजरायल के स्वतंत्रता दिवस पर मशाल जलाएंगे PM मोदी?
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की और दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर चर्चा की। नेतन्याहू ने मोदी को इजरायल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में फ्लाईदुबई के भारतीय कैप्टन स्मित मछार के साथ मशाल जलाने का न्योता दिया।
तिब्बत में 7.0 तीव्रता के भूकंप से तबाही; मलबे में दबी कई इमारतें, 16 की मौत
तिब्बत एक बार फिर भीषण प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गया है। यहां आए 7.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई है और दर्जनों लोग घायल हैं। पिछले 5 वर्षों में इस क्षेत्र में आया यह सबसे बड़ा भूकंप है। ...
पहले पति की मौत, 4 घंटे बाद पत्नी ने भी दम तोड़ा, एक साथ उठी अर्थी
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में एक परिवार पर ऐसा दुखों का पहाड़ टूटा कि कुछ घंटों के भीतर सब कुछ बदल गया. पहले 48 साल के मुकेश कुमार की डेंगू से मौत हुई और फिर करीब चार घंटे बाद उनकी 42 साल की पत्नी दीपा ने भी दम तोड़ दिया. दोनों का इलाज आगरा के अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा था. पति-पत्नी के शव गांव पहुंचे, तो एक ही चिता पर दोनों का अंतिम संस्कार किया गया.
'हमें फूटी कौड़ी भी नहीं मिली': पीयूष गोयल ने विकसित देशों को क्यों फटकारा? 100 अरब डॉलर के वादे की दिलाई याद
बंगाल पंडाल हादसा: 'अंधेरा और संकरे रास्ते...', SIT चीफ ने बताई 19 मौतों की वजह
पश्चिम बंगाल के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ की जांच कर रही SIT ने पाया कि पंडाल में रोशनी कम थी और प्रवेश-निकास के रास्ते संकरे थे. हादसे में 19 लोगों की मौत और 25 लोग घायल हुए थे.
TMC विधायक मदन मित्रा ने दिया राजनीति छोड़ने का संकेत, बोले- राजनेता के रूप में खुद से भी नफरत
बंगाल की राजनीति में अपने अलग अंदाज के लिए चर्चित कामारहाटी के टीएमसी विधायक मदन मित्रा ने राजनीति से संन्यास लेने के संकेत दिए हैं। विजयादशमी के मौके पर भावुक होते हुए कहा कि मौजूदा राजनीति में अनैतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं और अब उन्हें इससे नफरत होने लगी है।
UP MLC चुनाव: 11 सीटों पर आज वोटिंग, 152 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे मतदाता
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर आज को मतदान होना है. चुनाव मैदान में 152 प्रत्याशी हैं. 14,81,310 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. मतदान सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक जारी रहेगा.
हूतियों का बड़ा दावा- सऊदी अरब ने भारतीयों से भरी नाव पर किया हमला, हमने बचाया
यमन के हूती विद्रोहियों का दावा है कि लाल सागर में जबल जुकर द्वीप के पास हमले की चपेट में आई नाव पर 14 भारतीय सवार थे। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने हमले के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया है।
इंदौर में जुटेगा RSS का शीर्ष नेतृत्व, 3 दिन की बैठक में तय होगी भविष्य की रणनीति
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक इस वर्ष मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में 2, 3 और 4 नवंबर को आयोजित की जाएगी
Top News 23 October : तिब्बत में भूकंप से तबाही, 13 शहरों की हवा दिल्ली से ज्यादा खराब
Top News : तिब्बत में भूकंप से भारी तबाही, 13 शहरों की हवा दिल्ली से भी ज्यादा खराब, नेहा बोरा ने सीजेपी प्रोटस्ट से बनाई दूरी, यूपी समेत 4 राज्यों में विधान परिषद की 28 सीटों पर मतदान, भारत ने न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराया। पल पल की जानकारी...
2014 में मिला 'रामायण' का संकेत! एआर रहमान ने सुनाया किस्सा
एआर रहमान ने बताया कि कैसे 2014 के एक ईमेल में रामायण के साथ उनके जुड़ने का संकेत मिल गया था. संगीतकार ने फिल्म के चेन्नई इवेंट में एक दशक पुराने इस मैसेज को शेयर किया.
बंगाल की खाड़ी में हलचल! 11 राज्यों में बदलेगा मौसम, आंधी-पानी का अलर्ट
देशभर में मौसम का मिजाज बदल रहा है. अंडमान सागर के ऊपर सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण से बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है. मौसम विभाग के मुताबिक इस वेदर सिस्टम के प्रभाव से देश के कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है. दिल्ली-NCR में हवा दमघोंटू बनी हुई है.
बिहार की 8 MLC सीटों पर वोटिंग, पटना स्नातक सीट पर अनंत सिंह फैक्टर से बढ़ा रोमांच
पटना स्नातक सीट MLC चुनाव की सबसे चर्चित सीट है, क्योंकि जेडीयू के ही मोकामा विधायक अनंत सिंह अपनी पार्टी के प्रत्याशी नीरज कुमार के बजाय जन सुराज के अनुज सिंह का खुला समर्थन कर रहे हैं.
तिब्बत में आए शक्तिशाली भूकंप में कम से कम 16 लोगों की मौत, सैकड़ों ज़ख़्मी - BBC
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खिड़की-दरवाजे बंद, फिर भी घर में धूल? अपनाएं ये 8 आसान टिप्स
How To Keep Home Dust Free: घर की खिड़की-दरवाजे बंद रखने के बावजूद फर्नीचर और फर्श पर बार-बार धूल जम जाती है? अगर हां, तो कपड़ा उठाकर डस्टिंग करने बजाय धूल क्यों जम रही है इस पर ध्यान देना जरूरी है. आज हम आपको घर में धूल कम करने के 8 आसान तरीके बताने वाले हैं, जो घर को लंबे समय तक डस्टफ्री रखने में मदद कर सकते हैं.
डेब्यू मैच में ही फंसा बांग्लादेशी स्पिनर, ICC ने लिया एक्शन
अफगानिस्तान के खिलाफ मुकाबले में बांग्लादेश को सात विकेट से हार का सामना करना पड़ा. यह त्रिकोणीय वनडे सीरीज में टीम की लगातार दूसरी हार थी. इससे पहले उसे जिम्बाब्वे के खिलाफ भी शिकस्त मिली थी. ऐसे में टीम का अभियान निराशाजनक रहा, जबकि एलिस के लिए अब व्यक्तिगत तौर पर भी एक्शन की जांच बड़ी चुनौती बन गई है.
बार-बार थकान, पेट में भारीपन और वजन बढ़ना? पुरुषों में फैटी लिवर के संकेत हो सकते हैं ये लक्षण
क्या आपको लगातार थकान, पेट में भारीपन और बढ़ता वजन परेशान कर रहा है? अगर हां, तो ये फैटी लिवर के लक्षण हो सकते हैं. यहां जानते हैं पुरुषों में फैटी लिवर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
मैच्योर FD 10 साल तक नहीं निकाला, तो क्या होगा? जानें RBI के नियम
अगर आपने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की मैच्योरिटी के बाद भी अपनी रकम नहीं निकाली है, तो यह जानना जरूरी है कि आपके पैसे का क्या होगा. बैंक के नियमों के मुताबिक, मैच्योरिटी के बाद रकम खाते में ट्रांसफर हो सकती है या FD रिन्यू हो सकती है. वहीं, 10 साल तक दावा नहीं करने पर अनक्लेम्ड रकम RBI के DEA फंड में ट्रांसफर की जा सकती है.
प्रयागराज में 60 KM के दो मेट्रो कॉरिडोर का प्रस्ताव, बमरौली से झूंसी तक चलेगी हेवी मेट्रो
Prayagraj Heavy Metro System: प्रयागराज मेट्रो रेल परियोजना पर नया अपडेट आया है. शहर में मेट्रो-लाइट चलाने वाली योजना को पूरी तरह से निरस्त कर दिया गया है, जबकि अब प्रयागराज में हेवी मेट्रो सिस्टम की सौगात दी जा रही है.
Today Weather Update: दिल्ली, यूपी, एमपी, बिहार समेत अगले 15 घंटों में देश के 11 राज्यों में बारिश का अलर्ट है. वहीं उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में जारी बर्फबारी से ठंड का असर भी बढ़ना शुरू हो गया है.
बांग्लादेश को भेजी गई दोषी करार दिए गए बांग्लादेशियों की लिस्ट में 22 लोगों का नाम था. इनमें नजरुल इस्लाम और स्वीटी अख्तर भी शामिल थे, उन्हें मक्का मस्जिद में अनैतिक आचरण के लिए मौत की सजा दिए जाने की खबर से बांग्लादेश के लोगों में भारी आक्रोश है. बाकी 20 लोगों का क्या होगा, यह अभी अनिश्चित है.
iPhone Duo की आज पहली सेल, रातभर से लोग कर रहे इंतजार
Apple iPhone Duo की आज पहली सेल है. भारत में सिर्फ उन लोगों को मिलेगा, जिन्होंने इसको प्री ऑर्डर में बुक किया है. 16 अक्टूबर को प्री ऑर्डर शुरू हुआ और कुछ ही मिनट के अंदर अक्तूबर के यूनिट आउट ऑफ स्टॉक हो गए. आइए इसकी कीमत और अन्य डिटेल्स जानते हैं.
बिहार, यूपी, महाराष्ट्र और कर्नाटक की 28 विधान परिषद सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हो गई है। बिहार और यूपी में इसे लेकर सियासत तेज है और फैसले पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी। जानें कब आएगा रिजल्ट?
देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल उज्जैन के महाकाल मंदिर में देर रात अचानक NSG कमांडो, STF और पुलिस की गतिविधियां बढ़ गईं. दरअसल यह किसी खतरे की चेतावनी नहीं, बल्कि मंदिर की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए किया गया हाई-लेवल मॉक ड्रिल था, जिसमें 100 से ज्यादा जवान शामिल हुए.
LIVE: बिहार-यूपी समेत 4 राज्यों की 28 MLC सीटों पर आज वोटिंग
यूपी, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र की विधान परिषद की 28 सीटों पर आज वोटिंग होगी. इन सीटों पर स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे. चारों राज्यों में बिहार की 8, कर्नाटक की 4, महाराष्ट्र की 5 और उत्तर प्रदेश की 11 सीटों पर मतदान होगा.
रामलीला मैदान की रैली से पहले विपक्ष ने टाल दी बड़ी बैठक, सरकार के एक फैसले का इंतजार
1 नवंबर को रामलीला मैदान में विपक्ष की बड़ी रैली होने वाली है। इससे पहले गुरुवार को ही विपक्षी दलों ने रणनीतिक बैठक करने का फैसला किया था जिसे अचानक टाल दिया गया। इसके पीछे की वजह नहीं बताई गई है।
टेस्ट में 300, ODI में 200 और T20I में 100: दुनिया के सिर्फ 2 बल्लेबाज कर पाए ये करिश्मा
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में किसी भी बल्लेबाज के लिए तीनों प्रारूपों में शतक जड़ना एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है, लेकिन खेल के तीनों अलग-अलग फॉर्मेट में व्यक्तिगत उच्चतम स्कोर की सीमाओं को लांघकर टेस्ट में तिहरा शतक, वनडे में दोहरा शतक और टी20 अंतरराष्ट्रीय में शतक ठोकना एक ऐसा दुर्लभतम कारनामा है जिसकी कल्पना भी कम ही खिलाड़ी कर पाते हैं। इंग्लैंड के युवा आक्रामक बल्लेबाज हैरी ब्रूक ने एकदिवसीय क्रिकेट में तूफानी अंदाज में दोहरा शतक ठोककर विश्व क्रिकेट में तहलका मचा दिया है। इस ऐतिहासिक पारी के साथ ही ब्रूक वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज 'यूनिवर्स बॉस' क्रिस गेल के उस अत्यंत विशिष्ट क्लब में शामिल हो गए हैं, जहां टेस्ट में 300 से अधिक, वनडे में 200 से अधिक और टी20आई में शतक लगाने का अद्वितीय रिकॉर्ड दर्ज है। क्रिकेट इतिहास के 149 वर्षों के लंबे सफर में अब तक दुनिया का कोई भी अन्य धुरंधर इस मुकाम तक नहीं पहुंच सका था।114 गेंदों में ठोका सबसे तेज दोहरा शतक: हैरी ब्रूक ने तोड़ा शुभमन गिल का बड़ा कीर्तिमानइंग्लैंड और श्रीलंका के बीच खेले गए रोमांचक एकदिवसीय मुकाबले में हैरी ब्रूक ने मैदान के चारों तरफ चौकों और छक्कों की ऐसी आतिशबाजी की कि विरोधी गेंदबाज बेबस नजर आए। ब्रूक ने केवल 116 गेंदों का सामना करते हुए 202 रनों की मैराथन और विध्वंसक पारी खेली। इस पारी के दौरान उन्होंने 21 गगनचुंबी चौके और 10 विशालकाय छक्के जड़े। ब्रूक ने अपना दोहरा शतक महज 114 गेंदों में पूरा किया, जो अब एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय (ODI) क्रिकेट के इतिहास का सबसे तेज दोहरा शतक बन गया है। इससे पहले यह विश्व रिकॉर्ड भारतीय स्टार बल्लेबाज शुभमन गिल के नाम दर्ज था, जिन्होंने 117 गेंदों में अपना दोहरा शतक पूरा किया था। इसके साथ ही हैरी ब्रूक इंग्लैंड क्रिकेट के इतिहास में वनडे फॉर्मेट में दोहरा शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज बनकर इतिहास के पन्नों में अमर हो गए हैं।मुल्तान में टेस्ट का 317 रन का पहाड़: जो रूट के साथ रचा था 454 रनों की साझेदारी का इतिहासहैरी ब्रूक की यह आक्रामक शैली केवल सीमित ओवरों के खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि लाल गेंद की क्रिकेट में भी वे अपनी धाक पहले ही साबित कर चुके हैं। अक्टूबर 2024 में पाकिस्तान के खिलाफ मुल्तान में खेले गए ऐतिहासिक टेस्ट मैच में ब्रूक ने 322 गेंदों पर 317 रनों की अद्भुत तिहरी शतकीय पारी खेली थी। उस मुकाबले में उन्होंने जो रूट के साथ मिलकर तीसरे विकेट के लिए 454 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी की थी, जिसने टेस्ट क्रिकेट में आधुनिक आक्रामक शैली को एक नई ऊंचाई दी थी। टेस्ट में तिहरा शतक लगाने के बाद अब वनडे में दोहरा शतक पूरा कर उन्होंने आधुनिक दौर के सबसे खतरनाक और बहुमुखी बल्लेबाजों में अपना नाम मजबूती से दर्ज करा दिया है।'यूनिवर्स बॉस' क्रिस गेल का अमर रिकॉर्ड: दो तिहरे शतक, एक दोहरा शतक और टी20 का तूफानहैरी ब्रूक से पहले यह अकल्पनीय रिकॉर्ड सिर्फ वेस्टइंडीज के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज क्रिस गेल के नाम पर दर्ज था। गेल ने अपने सुनहरे अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान टेस्ट क्रिकेट में दो बार तिहरा शतक बनाने का गौरव हासिल किया था। उन्होंने साल 2005 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 317 रनों की पारी खेली थी और उसके बाद 2010 में श्रीलंका के खिलाफ गाले के मैदान पर 333 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था। सीमित ओवरों के खेल में गेल ने आईसीसी विश्व कप 2015 के दौरान जिम्बाब्वे के खिलाफ कैनबरा में 215 रनों की विध्वंसक पारी खेलकर दोहरा शतक बनाया था। इसके अलावा टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के पहले ही विश्व कप (2007) के उद्घाटन मैच में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शतक जड़कर गेल ने तीनों फॉर्मेट में अपनी बादशाहत कायम की थी।आधुनिक क्रिकेट का नया युग: ब्रूक और गेल के इस दुर्लभ क्लब में क्या कोई और बना पाएगा जगह?टी20 क्रिकेट के तेजी से बढ़ते प्रसार के बीच बल्लेबाजों की आक्रामकता बढ़ी जरूर है, लेकिन टेस्ट में 300 रन, वनडे में 200 रन और टी20आई में शतक लगाने के लिए जिस तकनीक, मानसिक धैर्य, शारीरिक सहनशक्ति और आक्रामक गियर बदलने की क्षमता की दरकार होती है, वह बहुत कम खिलाड़ियों के पास होती है। रोहित शर्मा, वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गजों ने वनडे और टेस्ट में तो बड़े रिकॉर्ड बनाए, लेकिन तीनों प्रारूपों के इन तीनों मील के पत्थरों को एक साथ छूने का सौभाग्य अब तक केवल क्रिस गेल और हैरी ब्रूक को ही प्राप्त हुआ है। 22 अक्टूबर 2026 की इस ऐतिहासिक पारी के बाद क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि हैरी ब्रूक की यह उपलब्धि आने वाली कई पीढ़ियों के बल्लेबाजों के लिए एक ऐसा बेंचमार्क बन गई है, जिसे पार कर पाना किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा।
IND vs NZ: 225 रन बनाकर भी हारा न्यूजीलैंड, मिचेल सैंटनर ने इन गलतियों को ठहराया हार का जिम्मेदार
क्राइस्टचर्च के हेगले ओवल मैदान पर खेले गए पहले टी20 मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम ने अपने आक्रामक और निडर खेल के दम पर असंभव दिख रहे 226 रनों के विशाल लक्ष्य को हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। पहले बल्लेबाजी करते हुए जब न्यूजीलैंड की टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 225 रनों का विशालकाय स्कोर खड़ा किया, तब क्रिकेट पंडितों से लेकर डिजिटल विन प्रिडिक्टर तक मेजबान कीवी टीम की जीत की संभावना 72 प्रतिशत से ज्यादा बता रहे थे। इस सपाट और बल्लेबाजी के अनुकूल पिच पर कीवियों को पूरा भरोसा था कि वे इतने बड़े स्कोर का सफलतापूर्वक बचाव कर लेंगे। हालांकि, भारतीय बल्लेबाजों ने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों की जमकर धुनाई करते हुए मैच को अंतिम ओवर में दो गेंद शेष रहते अपनी झोली में डाल लिया। 225 रन जैसा मजबूत स्कोर बनाने के बाद भी मिली इस दर्दनाक हार से कीवी कप्तान मिचेल सैंटनर काफी हताश और निराश नजर आए। मैच के बाद प्रेजेंटेशन सेरेमनी में सैंटनर ने अपनी टीम की उन रणनीतिक कमियों और गलतियों का खुलकर विश्लेषण किया, जिसने उनकी बनी-बनाई जीत को अचानक हार में बदल दिया।पावरप्ले में संजू-अभिषेक का विध्वंसक तूफान: 6 ओवर में 93 रन लुटाकर बैकफुट पर धकेली गई कीवी टीममैच के बाद कप्तान मिचेल सैंटनर ने स्वीकार किया कि भारतीय टीम ने शुरुआत से ही उन पर कड़ा दबाव बना दिया था। भारतीय सलामी जोड़ी संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा ने पहले ओवर से ही कीवी तेज गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। दोनों युवा भारतीय बल्लेबाजों ने मैदान के हर कोने में चौकों-छक्कों की बरसात करते हुए शुरुआती 6 ओवरों यानी पावरप्ले में ही 93 रन कूट डाले। सैंटनर ने कहा कि उनकी टीम पहले से यह जानती थी कि भारतीय बल्लेबाज इसी विस्फोटक अंदाज में काउंटर-अटैक करेंगे, इसके बावजूद कीवी गेंदबाज अपनी सटीक लाइन और लेंथ से भटक गए। पावरप्ले में 15 से अधिक के रन रेट से रन लुटने के कारण कीवी टीम खेल के शुरुआती 30 मिनट में ही पूरी तरह से बैकफुट पर चली गई, जिससे बाहर निकलना उनके गेंदबाजों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।बीच के ओवरों में कीवी टीम ने की थी तगड़ी वापसी: ईशान किशन के विकेट के बाद फिर पलट गया था खेलविशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम जब तेजी से आगे बढ़ रही थी, तब मिचेल सैंटनर और उनके स्पिन गेंदबाजों ने बीच के ओवरों में खेल की गति को थामने की जोरदार कोशिश की। संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा के तूफानी अंदाज के बाद जब मध्यक्रम में विस्फोटक बल्लेबाज ईशान किशन आउट होकर पवेलियन लौटे, तो मैच एक बार फिर रोमांचक मोड़ पर आ गया। उस नाजुक मोड़ पर विन प्रिडिक्टर एक बार फिर न्यूजीलैंड की जीत की संभावना 70 प्रतिशत दिखाने लगा था। सैंटनर ने इस सकारात्मक पहलू को रेखांकित करते हुए कहा कि बीच के ओवरों में उनकी टीम ने अच्छी वापसी की थी और भारतीय बल्लेबाजों को कुछ समय के लिए बांधकर रखा था। उस समय मैच का पलड़ा दोनों तरफ झुक सकता था, लेकिन भारतीय निचले-मध्यक्रम ने धैर्य बनाए रखा और अहम मौकों पर बाउंड्री निकालकर मैच को कीवियों की पकड़ से दूर खींच लिया।अतिरिक्त रन और छूटे हुए कैच बने विलेन: सैंटनर ने गिनाईं फील्डिंग और डेथ ओवरों की बड़ी खामियांप्रेस कॉन्फ्रेंस में जब सैंटनर से पूछा गया कि आखिर टीम से सबसे बड़ी चूक कहां हुई, तो उन्होंने खुले तौर पर खराब अनुशासन, अतिरिक्त (एक्स्ट्रा) रनों और फील्डिंग के दौरान छूटे महत्वपूर्ण अवसरों को हार का मुख्य कारण माना। कीवी कप्तान ने दर्द बयां करते हुए कहा कि नई गेंद से गेंदबाजी करते समय गेंदबाजों ने दिशाहीन लाइन फेंकी और वाइड तथा नो-बॉल के जरिए कई अतिरिक्त रन दिए, जिसने भारत के काम को और आसान बना दिया। इसके अलावा हेगले ओवल की ठंडी हवाओं और रोशनी के बीच फील्डरों ने कुछ अहम कैच और हाफ-चांस गंवाए। सैंटनर ने कहा कि हालांकि इस मैदान पर हवा के रुख के कारण कैच पकड़ना हमेशा से मुश्किल होता है, लेकिन अगर वे उन मौकों को भुना लेते तो मुकाबला उनकी मुट्ठी में हो सकता था। साथ ही उन्होंने डेथ ओवरों में अपनी रणनीति और यॉर्कर के निष्पादन में सुधार की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया।पावरप्ले में 80 रन तक रोकने की नई रणनीति: अगले मैच में रणनीति बदलने की तैयारी में कीवी टीमइस करारी हार के बाद अब कीवी कप्तान और टीम मैनेजमेंट अगले टी20 मैच के लिए अपनी रणनीति में व्यापक बदलाव करने की तैयारी में जुट गए हैं। सैंटनर ने कहा कि दोनों ही टीमों के पास सीखने और सुधार करने के लिए काफी कुछ है, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती भारत के आक्रामक पावरप्ले को धीमा करना है। उन्होंने कहा कि हेगले ओवल की पिच पर गेंद के व्यवहार को देखते हुए अब उन्हें यह भलीभांति समझ आ गया है कि गति में विविधता लाकर भारतीय बल्लेबाजों को कैसे शांत रखा जा सकता है। सैंटनर ने कहा कि यदि वे पावरप्ले में 100 के करीब रन लुटाने के बजाय भारतीय टीम को 75 से 80 रनों के दायरे में सीमित रखने में सफल हो जाते हैं, तो उनके गेंदबाज मैच पर पूरी तरह नियंत्रण बना सकते हैं। 225 रन जैसे स्कोर को गंवाने के बाद कीवी खेमा निश्चित रूप से अब अपनी गेंदबाजी और फील्डिंग को दुरुस्त कर सीरीज में बराबरी करने के लिए पूरी ताकत झोंकेगा।
ODI के 5 सबसे बड़े रन चेज़: श्रीलंका ने इंग्लैंड के खिलाफ 430 रन चेज कर रचा इतिहास
वनडे इंटरनेशनल (ODI) क्रिकेट के इतिहास में जब भी 400 से अधिक रनों का स्कोर स्कोरबोर्ड पर टंगता है, तो अमूमन यही माना जाता है कि मैच का नतीजा पहली पारी में ही तय हो चुका है। लेकिन रावलपिंडी के ऐतिहासिक मैदान पर गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को त्रिकोणीय सीरीज (Tri-Series) के महामुकाबले में जो कुछ हुआ, उसने पूरी दुनिया के क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों को हैरत में डाल दिया। इंग्लैंड ने निर्धारित 50 ओवरों में 4 विकेट के नुकसान पर 430 रनों का विशालकाय और अजेय दिखने वाला स्कोर खड़ा किया था। इसके बावजूद श्रीलंकाई शेरों ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा और अंतिम ओवर की पांचवीं गेंद तक चले रोंगटे खड़े कर देने वाले संघर्ष में 430 रनों का लक्ष्य हासिल कर इतिहास के पन्नों में अपना नाम अमर कर दिया। 49.5 ओवरों में 8 विकेट खोकर दर्ज की गई इस अविश्वसनीय जीत ने वनडे क्रिकेट के इतिहास में सबसे बड़े सफल रन चेज़ की बहस को एक बार फिर गरमा दिया है। आइए विस्तार से जानते हैं वनडे क्रिकेट इतिहास के उन पांच सबसे विशाल और चमत्कारी रन चेज़ के बारे में, जिन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया।दक्षिण अफ्रीका बनाम ऑस्ट्रेलिया 2006: जब जोहान्सबर्ग में 438 रन बनाकर बना था दुनिया का सबसे बड़ा रिकॉर्डवनडे क्रिकेट के इतिहास में सबसे बड़े और सबसे रोमांचक सफल रन चेज़ का विश्व रिकॉर्ड आज भी दक्षिण अफ्रीका की टीम के नाम दर्ज है। 12 मार्च 2006 को जोहान्सबर्ग के न्यू वांडरर्स स्टेडियम में खेले गए उस ऐतिहासिक मुकाबले में रिकी पोंटिंग के 164 रनों के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने 4 विकेट पर 434 रनों का तब तक का सबसे बड़ा वनडे स्कोर खड़ा किया था। उस दौर में 435 रनों के लक्ष्य का पीछा करने की कल्पना भी किसी ने नहीं की थी। लेकिन दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाजों, खासकर हर्शल गिब्स (175 रन) और कप्तान ग्रीम स्मिथ (90 रन) ने अविश्वसनीय जवाबी हमला बोला। अंतिम क्षणों में मार्क बाउचर के अर्धशतक और अंतिम ओवर की पांचवीं गेंद पर लगाए गए चौके की बदौलत दक्षिण अफ्रीका ने 49.5 ओवर में 9 विकेट खोकर 438 रन बनाए और एक विकेट से जीत दर्ज कर ली। यह मैच आज भी क्रिकेट पंडितों द्वारा सदी का सबसे महान वनडे मैच माना जाता है।श्रीलंका बनाम इंग्लैंड 2026: पवन रथनायके का शतक और 430 रनों का असंभव टारगेट हुआ ध्वस्तरावलपिंडी में 22 अक्टूबर 2026 को खेला गया यह मुकाबला वनडे इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा सफल रन चेज़ बन गया है। इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने श्रीलंकाई गेंदबाजों की जमकर धुनाई करते हुए 4 विकेट पर 430 रन ठोके थे। इतने बड़े स्कोर का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम की शुरुआत भले ही दबाव भरी रही हो, लेकिन मध्यक्रम ने इतिहास रचने की ठान ली थी। युवा बल्लेबाज पवन रथनायके ने मैदान के चारों तरफ चौकों-छक्कों की बारिश करते हुए 130 रनों की धुआंधार शतकीय पारी खेली। उनका बखूबी साथ दिया सलामी बल्लेबाज अविष्का फर्नांडो और अनुभवी दसुन शनाका ने, जिन्होंने 97-97 रनों की विस्फोटक पारियां खेलीं। अंतिम ओवर में जब जीत के लिए जरूरी रनों की दरकार थी, तब पुछल्ले बल्लेबाजों ने संयम बनाए रखा और 49.5 ओवर में 8 विकेट पर लक्ष्य हासिल कर इंग्लैंड के जबड़े से जीत छीन ली।भारत बनाम वेस्टइंडीज 2026: गुवाहाटी में टीम इंडिया ने 406 रन बनाकर रचा था कीर्तिमानवनडे क्रिकेट में 400 से अधिक रनों का सफल पीछा करने वाले विशिष्ट क्लब में भारतीय क्रिकेट टीम का नाम भी प्रमुखता से शामिल है। वर्ष 2026 में गुवाहाटी के एसीए स्टेडियम में खेले गए एक रोमांचक वनडे मैच में वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ रनों का पहाड़ खड़ा किया था और 405 रन बनाए थे। 406 रनों के विशाल लक्ष्य के जवाब में भारतीय टॉप ऑर्डर ने ऐसी तूफानी बल्लेबाजी की कि कैरेबियाई गेंदबाज बेबस नजर आए। टीम इंडिया ने मैदान पर चौतरफा आक्रमण करते हुए महज 43.3 ओवर में सिर्फ 2 विकेट खोकर 406 रन बना लिए और मैच को एकतरफा अंदाज में जीत लिया। 39 गेंदें शेष रहते इतना बड़ा लक्ष्य हासिल करना भारतीय बल्लेबाजी क्रम के आधुनिक प्रभुत्व और ताकत का सबसे बड़ा प्रमाण बना।नीदरलैंड्स बनाम वेस्टइंडीज 2023: हरारे में 375 रन चेज कर टाई हुआ था मैच, सुपर ओवर में मिली थी ऐतिहासिक जीतवनडे इतिहास के सबसे सनसनीखेज मुकाबलों में एसोसिएट देश नीदरलैंड्स की वह जीत हमेशा याद रखी जाएगी जो उसने आईसीसी वनडे विश्व कप क्वालिफायर 2023 के दौरान हरारे में दर्ज की थी। वेस्टइंडीज ने पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवर में 374 रन बनाए थे और नीदरलैंड्स के सामने 375 रनों का बेहद कठिन लक्ष्य रखा था। डच ऑलराउंडर तेजा निदामनुरु के शानदार शतक और लोगान वैन बीक की ताबड़तोड़ पारी की बदौलत नीदरलैंड्स ने ठीक 50 ओवर में 9 विकेट पर 375 रन बनाकर मुकाबला टाई करा दिया। इसके बाद सुपर ओवर में लोगान वैन बीक ने वेस्टइंडीज के गेंदबाज जेसन होल्डर के एक ही ओवर में 30 रन ठोक डाले और फिर गेंद से भी कमाल करते हुए कैरेबियाई टीम को रोककर नीदरलैंड्स को ऐतिहासिक जीत दिलाई।दक्षिण अफ्रीका बनाम ऑस्ट्रेलिया 2016: डरबन के मैदान पर कंगारुओं के 372 रनों को किया था बेअसरऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बड़े स्कोर चेज करने के मामले में दक्षिण अफ्रीका का रिकॉर्ड हमेशा से असाधारण रहा है। 5 अक्टूबर 2016 को डरबन के किंग्समीड मैदान पर खेले गए सीरीज के तीसरे वनडे में ऑस्ट्रेलिया ने डेविड वॉर्नर और स्टीव स्मिथ के शतकों की बदौलत 6 विकेट पर 371 रनों का मजबूत स्कोर बनाया था। 372 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी प्रोटीज टीम ने लगातार विकेट गिरने के बावजूद रन गति को धीमा नहीं पड़ने दिया। डेविड मिलर ने 79 गेंदों पर नाबाद 118 रनों की आंधी जैसी पारी खेली और ऑलराउंडर एंडिले फेहलुकवायो के साथ मिलकर सातवें विकेट के लिए अटूट शतकीय साझेदारी की। दक्षिण अफ्रीका ने 49.2 ओवर में 6 विकेट खोकर 372 रन बना लिए और 4 विकेट से यादगार जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम की थी।
'हम दिल दे चुके सनम' के सेट पर जब ऐश्वर्या को बार-बार छू रहे थे सलमान खान
हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी प्रेम, विरह और भव्यता से सजी यादगार फिल्मों का जिक्र होता है, तो निर्देशक संजय लीला भंसाली की कल्ट क्लासिक फिल्म 'हम दिल दे चुके सनम' का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। साल 1999 में रिलीज हुई इस ब्लॉकबस्टर फिल्म ने न केवल बड़े पर्दे पर रोमांस की नई परिभाषा गढ़ी, बल्कि इसने बॉलीवुड के दो सबसे बड़े सुपरस्टार्स—सलमान खान और ऐश्वर्या राय—की असल जिंदगी की प्रेम कहानी की भी नींव रखी थी। 27 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भी इस फिल्म के सेट्स, इसके मधुर संगीत और दोनों कलाकारों की ऑन-स्क्रीन व ऑफ-स्क्रीन केमिस्ट्री से जुड़े अनसुने किस्से आज भी सिनेप्रेमियों के बीच बेहद दिलचस्पी से सुने जाते हैं। अब इस ऐतिहासिक फिल्म की शूटिंग के दौरान का एक बेहद मजेदार और दिलचस्प किस्सा फिल्म में ऐश्वर्या राय की मां का किरदार निभाने वाली मशहूर वेटरन एक्ट्रेस स्मिता जयकर ने सार्वजनिक किया है। उन्होंने बताया कि कैसे एक रोमांटिक गाने की शूटिंग के दौरान ऐश्वर्या को बार-बार टच करने पर निर्देशक संजय लीला भंसाली का पारा चढ़ गया था और उन्होंने सेट पर ही सबके सामने सलमान खान को जमकर फटकार लगा दी थी।'आंखों की गुस्ताखियां' गाने की शूटिंग के दौरान भड़के थे भंसाली: जानिए सेट पर क्या हुआ था वाकयास्मिता जयकर हिंदी सिनेमा और टेलीविजन जगत की एक अत्यंत सम्मानित और वरिष्ठ अभिनेत्री हैं, जिन्होंने भंसाली की इस महागाथा में नंदिनी (ऐश्वर्या राय) की मां 'अमृता' के रूप में एक बेहद संजीदा और गरिमामय भूमिका अदा की थी। हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार और चर्चित पॉडकास्टर सिद्धार्थ कनन के शो में शिरकत करते हुए स्मिता जयकर ने फिल्म निर्माण के सुनहरे दौर को याद किया। उन्होंने बताया कि यह किस्सा फिल्म के अमर और आइकॉनिक गाने 'आंखों की गुस्ताखियां माफ हों' के फिल्मांकन के समय का है। निर्देशक संजय लीला भंसाली अपने हर सीन में परफेक्शन और बारीकियों के लिए जाने जाते हैं। वे पूरे क्रू और मुख्य कलाकारों को गाने के उस खास सीक्वेंस का विजुअल कॉन्सेप्ट समझा रहे थे। भंसाली का स्पष्ट निर्देश था कि इस पूरे रोमांटिक सीक्वेंस की नजाकत केवल आंखों के इशारों, चेहरे की भाव-भंगिमाओं और बिना शारीरिक स्पर्श के पैदा होने वाले आकर्षण पर टिकी होनी चाहिए। यानी पूरी सिचुएशन में सलमान खान को ऐश्वर्या राय को बिल्कुल भी छूना नहीं था, बल्कि दूर रहकर सिर्फ अपनी नजरों से प्रेम का इजहार करना था।'क्यों छू रहे हो इसे?': जब भंसाली ने रोक दी थी रिहर्सल और सलमान खान को लगाई थी डांटस्मिता जयकर ने उस पल का आंखों देखा हाल बयां करते हुए बताया कि भंसाली के सख्त निर्देशों के बावजूद सलमान खान अपने चुलबुले और शरारती अंदाज से बाज नहीं आ रहे थे। शॉट की रिहर्सल के दौरान सलमान बार-बार ऐश्वर्या राय के हाथ और बांह को हल्के से टच कर रहे थे। एक-दो बार तो माहौल सामान्य रहा, लेकिन जब सलमान ने दोबारा वही हरकत दोहराई, तो मॉनिटर पर नजर गड़ाए बैठे संजय लीला भंसाली का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। भंसाली ने तुरंत रिहर्सल रुकवाई और पूरे सेट के सामने ऊंची आवाज में सलमान खान को डांटते हुए कहा, सलमान, तुम इसे बार-बार क्यों छू रहे हो? जब मना किया है कि छूना नहीं है, तो हाथ क्यों लगा रहे हो! वेटरन एक्ट्रेस ने मुस्कुराते हुए बताया कि भंसाली की उस अचानक डांट से सेट पर मौजूद सभी लोग अवाक रह गए थे, लेकिन सलमान ने इसे बहुत ही सहजता से लिया क्योंकि वे भंसाली के काम के प्रति समर्पण को अच्छी तरह समझते थे। हालांकि सेट पर काम के दौरान इस तरह की नोक-झोंक आम थी, क्योंकि संजय लीला भंसाली और सलमान खान असल जिंदगी में बेहद गहरे दोस्त रहे हैं और दोनों एक-दूसरे की कला का दिल से आदर करते हैं।यहीं से परवान चढ़ी थी सलमान और ऐश्वर्या की प्रेम कहानी: सेट की दोस्ती प्यार में बदलीसिनेमा विश्लेषकों का मानना है कि 'हम दिल दे चुके सनम' केवल एक फिल्म नहीं थी, बल्कि इसने भारतीय मनोरंजन जगत के सबसे चर्चित और चर्चित प्रेम प्रसंग को जन्म दिया था। इस फिल्म से पहले दोनों कलाकारों ने कभी एक साथ फुल-टाइम स्क्रीन शेयर नहीं की थी। गुजरात के खूबसूरत महलों और राजस्थान की हवेलियों में सजे इस फिल्म के भव्य सेट्स पर ही सलमान खान और पूर्व मिस वर्ल्ड ऐश्वर्या राय के बीच नजदीकियां बढ़ी थीं। 'समीर' और 'नंदिनी' के किरदारों को निभाते-निभाते दोनों असल जिंदगी में एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए थे। उस दौर में फिल्म मैगजीन्स और गॉसिप कॉलम इन दोनों के प्यार के किस्सों से पटे रहते थे। पर्दे पर जो बेपनाह प्यार, कशिश और तड़प दर्शकों को नजर आई थी, वह दरअसल उनके दिलों में पनप रही वास्तविक भावनाओं का ही अक्स थी। यही कारण रहा कि फिल्म का हर एक सीन आज भी दर्शकों के दिलों को छू जाता है।दर्दनाक मोड़ पर हुआ था बॉलीवुड के सबसे चर्चित रिश्ते का अंत: आज भी जिंदा हैं यादेंहालांकि 'हम दिल दे चुके सनम' के सेट से शुरू हुई यह परीकथा जैसी प्रेम कहानी लंबे समय तक सुखद नहीं रह सकी और कुछ वर्षों के बाद इसका अंत बेहद तनावपूर्ण, विवादित और दर्दनाक मोड़ पर हुआ। दोनों ने अपनी राहें हमेशा के लिए अलग कर लीं और दोबारा कभी किसी फिल्म में एक साथ काम नहीं किया। इसके बावजूद जब भी 90 के दशक के आखिरी दौर के क्लासिक सिनेमा की बात होती है, तो इस फिल्म की जादुई दुनिया, इस्माइल दरबार का कालजयी संगीत, महबूब के बोल और सलमान-ऐश की बेमिसाल केमिस्ट्री सिनेमाई इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज मिलती है। स्मिता जयकर द्वारा साझा किया गया यह किस्सा इस बात का जीवंत प्रमाण है कि एक मास्टरपीस फिल्म के निर्माण के पीछे किस तरह के तनाव, अनुशासन, मासूमियत और यादगार लम्हे छिपे होते हैं।
TV का पहला 'सास-बहू' सीरियल जिसने बदल दिया भारतीय टेलीविजन का इतिहास
भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक ऐसा सुनहरा दौर भी रहा है जब रात के ठीक साढ़े दस बजते ही देश के करोड़ों घरों में सन्नाटा पसर जाता था और लोग अपने सारे जरूरी काम निपटाकर टीवी स्क्रीन के सामने बैठ जाते थे। आज ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और वेब सीरीज के अत्यधिक प्रसार के कारण भले ही पारंपरिक टेलीविजन सीरियल्स का वह पुराना जलवा थोड़ा धीमा पड़ गया हो, लेकिन 2000 के दशक में स्थिति बिल्कुल जुदा थी। उस दौर में रात का भोजन समय से पहले सिर्फ इसलिए बना लिया जाता था ताकि परिवार का हर सदस्य एक साथ बैठकर अपने पसंदीदा धारावाहिक का आनंद ले सके। महिलाएं टीवी स्क्रीन पर आने वाले किरदारों के सुख-दुख में इस कदर डूब जाती थीं कि सीरियल की कहानी उनके निजी जीवन का हिस्सा लगने लगती थी। भारतीय टीवी जगत में कई ऐतिहासिक धारावाहिक आए जो बाद में कल्ट क्लासिक साबित हुए, लेकिन जिसने भारतीय घरों में 'सास-बहू' और संयुक्त परिवार के हाई-वोल्टेज ड्रामा का ऐसा क्रांतिकारी ट्रेंड शुरू किया जो अगले दो दशकों तक पूरे मनोरंजन जगत पर राज करता रहा, वह सीरियल कोई और नहीं बल्कि एकता कपूर का ऐतिहासिक शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' था।एकता कपूर का वो मास्टरस्ट्रोक जिसने बदल दी भारतीय घरों की रातें: 2000 में शुरू हुआ था डेली सोप का नया युगसाल 2000 में जब स्टार प्लस पर 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' (Kyunki Saas Bhi Kabhi Bahu Thi) का पहला एपिसोड टेलीकास्ट हुआ, तो किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह शो भारतीय समाज के सांस्कृतिक और टेलीविजन ताने-बाने को पूरी तरह बदलकर रख देगा। बालाजी टेलीफिल्म्स के बैनर तले टेलीविजन क्वीन एकता कपूर द्वारा निर्मित इस धारावाहिक ने भारतीय मनोरंजन उद्योग में 'डेली सोप' की एक बिल्कुल नई परिभाषा गढ़ी। शो की मुख्य नायिका 'तुलसी विरानी' के रूप में अभिनेत्री स्मृति ईरानी ने अभिनय किया, जिन्होंने अपने सधे हुए और गरिमामय अंदाज से हर भारतीय गृहणी के दिल में अमिट छाप छोड़ दी। तुलसी विरानी केवल एक काल्पनिक किरदार नहीं रह गई थीं, बल्कि वह देश के करोड़ों परिवारों के लिए एक आदर्श बहू, ममतामयी मां और मजबूत स्त्री शक्ति का जीवंत प्रतीक बन गईं। वहीं उनके पति 'मिहिर विरानी' के किरदार में अभिनेता अमर उपाध्याय ने ऐसी लोकप्रियता हासिल की कि वे उस समय देश के हर घर के चहेते दामाद और बेटे के रूप में देखे जाने लगे।जब मिहिर विरानी की मौत पर सड़कों पर भड़क उठी थी जनता: प्रोडक्शन हाउस के दफ्तर पर फेंके गए थे पत्थरइस धारावाहिक के प्रति दर्शकों की दीवानगी और भावनात्मक जुड़ाव किस चरम स्तर पर था, इसका सबसे बड़ा और अविश्वसनीय उदाहरण तब सामने आया जब शो की कहानी में एक अप्रत्याशित मोड़ लाते हुए मिहिर विरानी का अचानक कार एक्सीडेंट और मौत का सीन दिखाया गया। इस एपिसोड के ऑन-एयर होते ही पूरे देश में मानो शोक की लहर दौड़ गई थी। महिलाएं अपने घरों में रोने लगी थीं और कई जगहों पर लोगों ने भोजन तक त्याग दिया था। बात सिर्फ आंसुओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि नाराज दर्शक मिहिर विरानी के किरदार की कहानी में तुरंत वापसी की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए और सार्वजनिक धरने-प्रदर्शन शुरू हो गए। मीडिया रिपोर्ट्स और ईटाइम्स के खुलासे के अनुसार, गुस्से से बेकाबू हुए कुछ लोगों ने एकता कपूर के प्रोडक्शन हाउस के दफ्तर पर पत्थरबाजी तक कर दी थी और लगातार धमकियां दी जा रही थीं। जनभावनाओं के इस प्रचंड दबाव के आगे आखिरकार मेकर्स को झुकना पड़ा और कहानी में नाटकीय बदलाव कर मिहिर विरानी को दोबारा जीवित वापस लाना पड़ा। जिस दिन मिहिर की वापसी का विशेष एपिसोड प्रसारित हुआ, उसने उस समय के टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट्स (TRP) के सारे पुराने रिकॉर्ड्स को चकनाचूर कर दिया और वह भारतीय टीवी इतिहास का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला सिंगल एपिसोड बन गया।'रिश्तों के भी रूप बदलते हैं...': घर-घर में गूंजा वो टाइटल ट्रैक जिसे आज भी गुनगुनाते हैं लोगकिसी भी धारावाहिक की सफलता में उसके शीर्षक गीत का बहुत बड़ा योगदान होता है, लेकिन 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' का टाइटल ट्रैक केवल एक गाना नहीं था बल्कि हर परिवार का एंथम बन गया था। इस गाने के बोल 'रिश्तों के भी रूप बदलते हैं, नए नए सांचों में ढलते हैं, एक पीढ़ी आती है एक पीढ़ी जाती है, बनती कहानी नई...' आज भी करोड़ों लोगों की जुबान पर ताजा हैं। इस अमर गीत को गायक पंकज सरावगी और गायिका प्रिया भट्टाचार्य ने अपनी बेहद सुरीली और भावुक आवाज से सजाया था। गाने के विजुअल में तुलसी का हाथ जोड़कर मुख्य द्वार पर विरानी परिवार के सभी सदस्यों का परिचय कराने का सिग्नेचर अंदाज इतना मशहूर हुआ कि आज भी शादी-ब्याह, सोशल मीडिया रील्स और फैमिली गेट-टुगेदर में लोग इस सीन को उसी अंदाज में रीक्रिएट करते नजर आते हैं।1000 एपिसोड्स का जादुई आंकड़ा पार कर लिम्का बुक में नाम दर्ज: 90s के शोज से क्यों अलग था यह सफर'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' ने सफलता के ऐसे झंडे गाड़े कि इसका नाम आधिकारिक रूप से 'लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में दर्ज किया गया। यह भारतीय टेलीविजन पर प्रसारित होने वाला पहला ऐसा लॉन्ग-रनिंग डेली सोप बना जिसने सफलतापूर्वक 1,000 एपिसोड्स पूरे करने का ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया। यह शो साल 2000 से लेकर 2008 तक लगातार आठ वर्षों तक सफलतापूर्वक प्रसारित हुआ और कई बड़े विदेशी लोकेशंस पर भी इसकी शूटिंग की गई थी। हालांकि कई लोग यह सवाल उठाते हैं कि क्या 90 के दशक में सास-बहू के रिश्ते पर सीरियल नहीं बने थे? इसका जवाब यह है कि साल 1994 में रीमा लागू और सुप्रिया पिलगांवकर अभिनीत मशहूर शो 'तू तू मैं मैं' आया जरूर था, लेकिन वह पूरी तरह एक कॉमेडी और सिटकॉम शो था जिसमें सास-बहू की हल्की-फुल्की और मजेदार नोंक-झोंक दिखाई जाती थी। इसके विपरीत, 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' ने पहली बार शुद्ध ड्रामा, पारिवारिक राजनीति, षड्यंत्र, रिश्तों की जटिलताओं और भव्य भारतीय संस्कृति को केंद्र में रखकर डेली सोप के रूप में प्रस्तुत किया, जिसके बाद टीवी इंडस्ट्री में 'कहानी घर घर की' और 'कसौटी जिंदगी की' जैसे दर्जनों सफल सीरियल्स की बाढ़ आ गई।
'100 बार शादी के लिए पूछा तब मानी...', रश्मिका को लेकर विजय देवरकोंडा के बयान पर भड़के फैंस
साउथ सिनेमा से लेकर बॉलीवुड तक अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता विजय देवरकोंडा इस समय सोशल मीडिया पर नेटिजन्स के निशाने पर आ गए हैं। इस बार चर्चा का केंद्र उनकी हालिया रिलीज फिल्म 'रणबाली' (Ranabaali) की सफलता नहीं, बल्कि उनकी निजी जिंदगी और शादी को लेकर दिया गया एक चौंकाने वाला बयान है। विजय देवरकोंडा और उनकी पत्नी रश्मिका मंदाना हाल ही में मशहूर फिल्ममेकर करण जौहर के लोकप्रिय सेलिब्रिटी चैट शो 'कॉफी विद करण सीजन 9' के काउच पर एक साथ नजर आए थे। शो के दौरान बातचीत में जब शादी के प्रपोजल का जिक्र आया, तो विजय ने कुछ ऐसा खुलासा कर दिया जिसे सुनकर न केवल शो के होस्ट हैरान रह गए, बल्कि इंटरनेट पर भी लोगों का गुस्सा भड़क उठा। फैंस का आरोप है कि विजय ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर अपनी ही पत्नी के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई है और उन्हें सार्वजनिक तौर पर मजाक का पात्र बना दिया है।'100 बार शादी के लिए पूछने की रखी थी शर्त': चैट शो में विजय देवरकोंडा का वो बयान जिस पर छिड़ा महासंग्रामशो में जब करण जौहर ने दोनों से उनके रिश्ते की शुरुआत और शादी के प्रपोजल के बारे में सवाल किया, तो विजय देवरकोंडा ने हंसते हुए बताया कि उन्होंने रश्मिका के सामने शादी के लिए हां कहने से पहले एक अजीबोगरीब शर्त रखी थी। विजय ने कहा कि उन्होंने रश्मिका से कहा था कि जब वह उनसे कम से कम 100 बार शादी के लिए पूछेंगी, तभी वह शादी का फैसला लेंगे। विजय के अनुसार, रश्मिका ने लगभग एक साल तक लगातार उनसे शादी के लिए विनती की और बार-बार पूछा, तब जाकर उन्होंने रिश्ते को शादी के मुकाम तक पहुंचाने के लिए अपनी सहमति दी। हालांकि विजय ने यह बात हल्के-फुल्के और मजाकिया अंदाज में कही थी, लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स को उनका यह रवैया कतई रास नहीं आया और इसे सीधे तौर पर अहंकार और असंवेदनशीलता से जोड़कर देखा जाने लगा।सोशल मीडिया पर फूटा यूजर्स का गुस्सा: एक्टर को 'रेड फ्लैग' बताकर रश्मिका के आत्मसम्मान पर उठाए सवालविजय का यह बयान सामने आते ही एक्स (पहले ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। यूजर्स ने विजय देवरकोंडा को जमकर ट्रोल करना शुरू कर दिया और उन्हें 'टॉक्सिक' व 'रेड फ्लैग' का टैग दे दिया। एक यूजर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि कैजुअल मजाक करने और अपनी ही पत्नी को सार्वजनिक रूप से नीचा दिखाने में बहुत बड़ा फर्क होता है, कुछ बातों को बंद कमरों में ही रखना बेहतर होता है। वहीं कई नेटिजन्स ने रश्मिका मंदाना की तरफदारी करते हुए चिंता जताई और कहा कि रश्मिका जैसी सफल, आत्मनिर्भर और देश की शीर्ष अभिनेत्रियों में शुमार महिला को शादी के लिए किसी के आगे इस तरह गिड़गिड़ाने की क्या जरूरत थी। यूजर्स ने लिखा कि रश्मिका विजय से सच्चा प्यार करती हैं, लेकिन विजय केवल खुद के अहंकार से प्यार करते हैं।'गीता गोविंदम' से 'रणबाली' तक की केमिस्ट्री: बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने 6 दिनों में कमाए 42 करोड़विवादों के बीच अगर दोनों के वर्क फ्रंट की बात करें, तो रश्मिका और विजय की ऑन-स्क्रीन जोड़ी हमेशा से दर्शकों की पसंदीदा रही है। 'गीता गोविंदम' और 'डियर कॉमरेड' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में साथ काम करने के बाद दोनों हाल ही में रिलीज हुई पैन-इंडिया फिल्म 'रणबाली' में मुख्य भूमिका में दिखाई दिए हैं। इस फिल्म को क्रिटिक्स और दर्शकों दोनों से सकारात्मक समीक्षाएं मिली हैं। बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों पर नजर डालें तो 'रणबाली' ने शुरुआती 6 दिनों के भीतर घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 42 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की कुल कमाई 59 करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुकी है। पर्दे पर दोनों की अदाकारी और केमिस्ट्री की खूब तारीफ हो रही है, लेकिन निजी जिंदगी को लेकर दिए गए बयान ने फिल्म की कामयाबी पर विवादों का साया डाल दिया है।
अमित शाह ने क्या कहा? पंजाब में भाजपा और अकाली दल के गठबंधन की अटकलें तेज
अमित शाह ने यह बयान केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू की मौजूदगी में दी। दोनों ही नेताओं ने 2019 और 2024 में पंजाब के अमृतसर से लोकसभा चुनाव लड़ा था।
‘ये गड़बड़ी आपने की, जिम्मेदार भारत को ठहराते हैं’, यूरोप को उसी के घर में सुना आए पीयूष गोयल
पीयूष गोयल ने बर्लिन में कार्बन उत्सर्जन को लेकर यूरोप पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दुनिया की 17% आबादी वाले भारत का वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में योगदान 3% से कम है।
राशिफल: मेष और तुला समेत इन राशियों को मिल सकता है धन लाभ, कर्क-मकर रहें सतर्क
मेष राशि के जातकों को समस्याओं से राहत मिल सकती है, वहीं वृषभ और मिथुन राशि वालों के लिए योजनाओं को आगे बढ़ाने का अच्छा समय रह सकता है। तुला राशि के जातकों.....
दिलजीत दोसांझ को सपोर्ट करने लगे अभिजीत दीपके, पहले मारे ताने; पुलिस ने बदला मूड
मशहूर पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ के कार्यक्रम को दिल्ली पुलिस की तरफ से अनुमति नहीं मिली है। इस मुद्दे पर जमकर सियायी बयानबाजी शुरू हो गई है। अब कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने भी इसपर प्रतिक्रिया दी है।
मुंबई को मिलेगी विश्वस्तरीय याट मरीना की सौगात: विक्टोरिया डॉक पर 922.67 करोड़ की परियोजना; जानें पूरा प्लान---Mumbai Yacht Marina Project: ₹922.67 Crore Plan for 604 Yacht Berths at Victoria Dock
Silver Import: चांदी को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, 6,500 टन इंपोर्ट को मंजूरी, क्या और घटेंगे दाम?
Silver Import Rules: भारत सरकार ने अगले छह महीने में 6,500 टन चांदी के आयात को मंजूरी दी है. कमजोर मांग और कीमतों में भारी गिरावट के बीच जानें, इसका घरेलू बाजार पर क्या असर पड़ सकता है.
ट्रेन के कोच में कॉकरोच, गंदे वाशरूम और सीलिंग से पानी टपकने जैसी अव्यवस्थाओं को जिला उपभोक्ता आयोग ने रेलवे की सेवा में कमी माना है। यात्रियों की शिकायतों के बावजूद समस्या का उचित निराकरण नहीं करने पर आयोग ने पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल को परिवादियों को 10 हजार रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया है।

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