CJP ने सरकार पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।
अयोध्या राम मंदिर में बड़ा बदलाव, ऑनलाइन दान करते ही तुरंत मिलेगी डिजिटल रसीद
Ram Mandir online donation: अयोध्या में श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के हालिया मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब राम भक्तों के लिए ऑनलाइन ...
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, आरोपों से मुक्ति के लिए चंपत राय की कठोर साधना!
Champat Rai Chaturmas: राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े विवादों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने आध्यात्मिक साधना का मार्ग चुन लिया है। अपने ऊपर लगे आरोपों से मुक्ति और आत्मिक शांति के लिए 80 वर्षीय चंपत राय ने ...
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की पहल और सदन में लगातार बनाए गए संवाद का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। संसद में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) विधेयक, 2026 पर गतिरोध समाप्त हो गया है और सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने मंगलवार से इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा शुरू करने पर सहमति व्यक्त की है।
यह सिर्फ एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और पीढ़ीगत अंतराल (Generation Gap) पर छिड़ी एक अंतहीन बहस बन गया है। देश की साहित्यिक और लेखक बिरादरी इस मुद्दे पर दो स्पष्ट और विपरीत ध्रुवों पर बंट गई है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने बच्चों और बेटियों के भविष्य को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए एक छोटी बच्ची से हुई मुलाकात का जिक्र किया।
जस्टिस उज्जल भुइयां बोले, गंगा में नाव पर बिरयानी खाना अपराध नहीं, तो लोगों को गिरफ्तार क्यों किया
न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि देश में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन और अपनी बात रखने के अधिकार का दायरा कई बार सीमित होता दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने वाले विद्यार्थियों की गिरफ्तारी और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले लोगों के साथ कठोर व्यवहार जैसे मामलों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
अगर गालियों से समाज का पतन होता है तो इसकी शुरुआत आपके बेडरूम से हो चुकी है
ओटीटी, स्टैंडअप्स और पॉडकास्ट में गालियों को 'कूल' और 'रॉ' बताकर जिस तरह से आप और हम कूल बनते हैं तो यह भी बता दें कि इस जनरेशन को अपनी गालियों के साथ कौनसे श्लोक और मंत्र शामिल करने चाहिए थे, जिससे ये गालियां इतनी अश्लील और भद्दी न हो?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोमवार को चेतावनी दी कि यदि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं रोकी गई तो वह अपना आंदोलन दोबारा शुरू करेगी। पार्टी का आरोप है कि देशव्यापी प्रदर्शन वापस लेने के बाद केंद्र के साथ हुए समझौते का उल्लंघन किया ...
श्रावण मास में शाक खाना क्यों है वर्जित?
Why leafy vegetables are avoided in Shravan: श्रावण मास/ सावन में हरे पत्तेदार साग या शाक न खाने का नियम केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण भी है। इसे धार्मिक ग्रंथों और आधुनिक विज्ञान दोनों ...
फर्जी Air Suvidha 2.0 वेबसाइटों से रहें सावधान, सरकार ने यात्रियों के लिए जारी की चेतावनी
नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने शनिवार को हवाई यात्रियों के लिए एक अहम एडवाइजरी जारी करते हुए फर्जी Air Suvidha 2.0 वेबसाइटों और पोर्टलों से सतर्क रहने की अपील की है। मंत्रालय ने कहा है कि कुछ अनधिकृत वेबसाइटें खुद को Air ...
श्रेयस अय्यर थे तो बच गए... वरना रोहित-विराट के सामने इस हरकत पर ईशान किशन की खटिया खड़ी होना तय
भारतीय क्रिकेट टीम के ड्रेसिंग रूम का माहौल और मैदान पर खिलाड़ियों के बीच की आपसी मस्ती अक्सर कैमरे में कैद हो जाती है, जो फैंस के बीच चर्चा का बड़ा केंद्र बनती है। इन दिनों सोशल मीडिया पर विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन (Ishan Kishan) से जुड़ा एक मजेदार और दिलचस्प वाकया तेजी से वायरल हो रहा है। मैदान पर खेल के दौरान ईशान द्वारा की गई एक अनूठी हरकत को देखकर क्रिकेट प्रेमियों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि गनीमत रही कि उस समय क्रीज पर समझदार और शांत स्वभाव के श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) मौजूद थे। अगर उनकी जगह कप्तान रोहित शर्मा या दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली होते, तो मैदान पर ही ईशान की क्लास लग जाती और उनकी खटिया खड़ी होना पूरी तरह तय था।मैदान पर क्या थी वह हरकत जिसने खींचा सबका ध्यान?भारतीय खिलाड़ी अपनी आक्रामक ऊर्जा और मैदान पर हाई-वोल्टेज मनोरंजन के लिए जाने जाते हैं। मैच के दौरान जब माहौल थोड़ा तनावपूर्ण या रोमांचक होता है, तो खिलाड़ी आपस में हल्का-फुल्का मजाक करके दबाव को कम करने की कोशिश करते हैं। ईशान किशन अक्सर अपनी जिंदादिल और नटखट शैली के लिए जाने जाते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने मैदान पर कुछ ऐसा कर दिया जिसे देखकर वहां मौजूद साथी खिलाड़ी भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। हालांकि, इस तरह की गैर-गंभीर हरकतें कई बार सीनियर खिलाड़ियों को रास नहीं आती हैं, और यही वजह है कि इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद से ही फैंस इस पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।श्रेयस अय्यर के शांत स्वभाव ने कैसे बचा लिया मामला?घटना के वक्त मैदान पर मौजूद श्रेयस अय्यर ने जिस तरह से परिपक्वता दिखाते हुए इस पूरी स्थिति को संभाला, उसकी सराहना की जानी चाहिए। श्रेयस अपने शांत और कूल अंदाज के लिए जाने जाते हैं, जो दबाव के क्षणों में भी अपना आपा नहीं खोते हैं। उन्होंने ईशान की इस हरकत को बड़े ही दोस्ताना अंदाज में टाल दिया और खेल पर पूरा ध्यान केंद्रित रखा। यदि श्रेयस की जगह टीम के सीनियर और सख्त अनुशासन वाले कप्तान रोहित शर्मा या रन मशीन विराट कोहली होते, तो खेल की गरिमा को ध्यान में रखते हुए वे मैदान पर ही अपनी नाराजगी जाहिर करने से बिल्कुल नहीं चूकते।सीनियर खिलाड़ियों का अनुशासन और युवा खिलाड़ियों की मस्तीभारतीय टीम में अनुशासन और मैदान पर आक्रामकता का एक लंबा इतिहास रहा है। जहां एक तरफ टीम के युवा खिलाड़ी अपनी ऊर्जा और मस्ती भरे अंदाज से ड्रेसिंग रूम का माहौल हल्का रखते हैं, वहीं रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे वरिष्ठ खिलाड़ी हर गेंद पर सौ प्रतिशत एकाग्रता और अनुशासित रवैये की वकालत करते हैं। यही कारण है कि क्रिकेट प्रेमी इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि युवा खिलाड़ियों को सीनियरों के सामने हमेशा अपनी हरकतों पर थोड़ा नियंत्रण रखना पड़ता है, जबकि श्रेयस अय्यर जैसे दोस्तों के साथ उन्हें थोड़ी छूट मिल जाती है।
क्या विपक्ष के नेता पद से बर्खास्त होंगे राहुल गांधी, निशिकांत दुबे ने उठाए सवाल
Nishikant Dubey Attacks Rahul Gandhi : भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के विदेश दौरों पर सवाल उठाते हुए उन्हें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पद से बर्खास्त करने की मांग की है।
भारतीय क्रिकेट टीम के भीतर इन दिनों मैदान के बाहर चल रही रणनीतिक चर्चाएं और बयानों के तीर सुर्खियों में छाए हुए हैं। इसी कड़ी में विस्फोटक बल्लेबाज श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) का एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने क्रिकेट गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां उन्होंने नेशनल क्रिकेट एकेडमी के प्रमुख और समय-समय पर टीम के साथ जुड़ने वाले वीवीएस लक्ष्मण (VVS Laxman) की शांत और सपोर्टिव कार्यशैली की जमकर तारीफ की है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) के कोचिंग कल्चर और मौजूदा सेटअप पर उनके इस बयान को एक बड़ा कटाक्ष या निशाना माना जा रहा है। कप्तान और खिलाड़ियों के साथ तालमेल को लेकर दिए गए इस इंटरव्यू ने खेल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।वीवीएस लक्ष्मण की शांत कमान और 'टेंपरेरी कोच' वाले अंदाज के मु मुरीद हुए श्रेयसजब भी टीम इंडिया के साथ वीवीएस लक्ष्मण बतौर कार्यवाहक या अंतरिम कोच (Temporary Coach) जुड़े हैं, खिलाड़ियों के साथ उनका तालमेल हमेशा से बेहद सौहार्दपूर्ण रहा है। श्रेयस अय्यर ने खुलकर बात करते हुए बताया कि कैसे लक्ष्मण दबाव के क्षणों में खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत करते हैं और ड्रेसिंग रूम का माहौल एकदम तनावमुक्त रखते हैं। खिलाड़ियों पर बिना किसी अतिरिक्त दबाव के खुलकर अपना स्वाभाविक खेल खेलने की छूट देने का उनका यह अंदाज युवाओं और सीनियर खिलाड़ियों दोनों को बेहद पसंद आता है। श्रेयस के इन शब्दों को लक्ष्मण के प्रति गहरे सम्मान और उनकी कोचिंग शैली की सराहना के रूप में देखा जा रहा है।क्या गौतम गंभीर की आक्रामक कार्यशैली पर साधा गया है निशाना?गौतम गंभीर अपनी सख्त अनुशासनप्रियता, स्पष्टवादी रवैये और आक्रामक क्रिकेट शैली के लिए जाने जाते हैं। मुख्य कोच के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद से ही टीम के भीतर और बाहर लगातार समीकरण बदलते रहे हैं। ऐसे में श्रेयस अय्यर द्वारा 'टेंपरेरी कोच' मॉडल और शांत स्वभाव वाले नेतृत्व की इतनी खुलकर तारीफ करना कई राजनीतिक और क्रिकेट पंडितों के कान खड़े कर रहा है। इसे गंभीर के कड़े तेवरों और मैनेजमेंट के साथ खिलाड़ियों के बीच चल रही वैचारिक असहजता के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिससे यह साफ होता है कि ड्रेसिंग रूम के अंदर विचारों के कई स्तर पर अलग-अलग आयाम मौजूद हैं।कप्तान की प्राथमिकताओं और टीम के भविष्य पर पड़ेगा इसका असरभारतीय क्रिकेट टीम इस समय भविष्य के कई बड़े दौरों और आईसीसी प्रतियोगिताओं की तैयारियों में जुटी हुई है। ऐसे समय में खिलाड़ियों के इस तरह के बयान टीम के भीतर चल रही आंतरिक स्थिति की एक झलक पेश करते हैं। मैनेजमेंट और खिलाड़ियों के बीच का यह संवाद आगामी दौरों में चयन और रणनीतिक फैसलों पर कितना असर डालेगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इस बयानबाजी ने फिलहाल क्रिकेट फैंस के बीच चर्चाओं का बाजार जरूर गर्म कर दिया है।
भारतीय क्रिकेट के गलियारों में इन दिनों एक ऐसे युवा खिलाड़ी की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है जिसने अपनी प्रतिभा के दम पर बड़े-बड़े दिग्गजों को हैरान कर दिया है। महज़ कुछ साल पहले दुनिया के सामने आए इस कम उम्र के युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) ने अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी और अद्भुत कला से हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। उनकी इसी असाधारण सफलता और लगातार बढ़ती लोकप्रियता ने टीम इंडिया के स्टाइलिश विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन (Sanju Samson) के समर्थकों और क्रिकेट पंडितों की नींद उड़ा दी है। सोशल मीडिया से लेकर खेल विशेषज्ञों के बीच यह बहस छिड़ गई है कि आखिर कैसे यह छोटा सा बच्चा संजू सैमसन के इंटरनेशनल और घरेलू करियर के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती और टेंशन बनता जा रहा है।कम उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने दिखाई ऐसी आक्रामक प्रतिभाक्रिकेट के मैदान पर जब भी कोई असाधारण प्रतिभा कम उम्र में उतरती है, तो वह स्थापित खिलाड़ियों के लिए प्रतिस्पर्धा का दायरा तुरंत बदल देती है। वैभव सूर्यवंशी ने अपनी बेखौफ बल्लेबाजी और रिकॉर्डतोड़ पारियों से यह साबित कर दिया है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। चाहे घरेलू क्रिकेट हो या फिर फ्रेंचाइजी सर्किट, उनके द्वारा खेली जा रही पारियों में वह परिपक्वता और आक्रामकता नजर आती है जो आमतौर पर लंबे समय से खेल रहे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों में दिखती है। गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने की उनकी क्षमता ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर पूरी तरह से आकर्षित कर लिया है, जिससे आने वाले समय में चयन के समीकरण पूरी तरह बदलने लगे हैं।संजू सैमसन के लिए क्यों बन गई है एक बड़ी सिरदर्दी?भारतीय टीम में अपने पैर जमाने और विकेटकीपर-बल्लेबाज के तौर पर अपनी जगह पक्की करने के लिए संघर्ष कर रहे संजू सैमसन के लिए यह स्थिति बेहद पेचीदा होती जा रही है। संजू को पहले से ही अत्यधिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा था, और अब इस युवा खिलाड़ी के तेजी से उभरने के कारण टीम प्रबंधन के पास विकल्पों की भरमार हो गई है। जब कोई बेहद युवा खिलाड़ी लगातार शानदार प्रदर्शन कर कम उम्र में ही मैच जिताने की क्षमता दिखाने लगता है, तो चयनकर्ताओं का झुकाव स्वाभाविक रूप से भविष्य की योजनाओं की ओर हो जाता है। यही कारण है कि क्रिकेट प्रेमी और विश्लेषक यह चर्चा कर रहे हैं कि वैभव की यह रफ्तार संजू सैमसन के करियर के रास्ते में कितनी बड़ी बाधा बन सकती है।भविष्य के मुकाबलों और चयन पर पड़ेगा गहरा असरआगामी दौरों और राष्ट्रीय टीम के चयन को लेकर भारतीय क्रिकेट में जो रेस चल रही है, उसमें टिके रहने के लिए अब हर खिलाड़ी को अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म दिखानी होगी। वैभव सूर्यवंशी की यह तूफानी दस्तक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य बहुत आक्रामक हाथों में सुरक्षित है। हालांकि, इसके चलते संजू सैमसन जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी जगह बचाने के लिए दोगुनी मेहनत करनी होगी। आने वाले महीनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि चयनकर्ता अनुभव और युवा जोश के इस संतुलन को कैसे साधते हैं और संजू इस बढ़ती हुई टेंशन से पार पाने के लिए क्या नई रणनीति अपनाते हैं।
छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचल से समाज सुधार की एक बेहद प्रेरणादायक और अनूठी खबर सामने आ रही है। भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा 'विशेष पिछड़ी जनजाति' (PVTG) के रूप में गोद लिए गए और 'राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र' के नाम से पहचाने जाने वाले बैगा समाज (Baiga Samaj) ने एक बहुत बड़ा और साहसिक फैसला लिया है। समाज ने अपनी प्राचीन संस्कृति, परंपराओं और आर्थिक स्थिति को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से शादियों और अन्य आयोजनों में डीजे (DJ) के शोर-शराबे और शराब के सेवन पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद से न केवल स्थानीय प्रशासनिक हलकों में बल्कि पूरे राज्य में बैगा समाज की इस अनुकरणीय पहल की सराहना की जा रही है।फिजूलखर्ची और आधुनिक कुरीतियों पर लगाम कसने का फैसलापारंपरिक रूप से प्रकृति प्रेमी और अपनी समृद्ध संस्कृति के लिए पहचाने जाने वाले बैगा समाज के बुजुर्गों और युवाओं ने मिलकर यह महसूस किया कि पिछले कुछ वर्षों में आधुनिकता की अंधी दौड़ के चलते शादियों में होने वाला बेहिसाब खर्च गरीब परिवारों की कमर तोड़ रहा है। विवाह समारोहों में भारी-भरकम रकम खर्च करके डीजे बजाने और शराब परोसने की संस्कृति तेजी से पैर पसार रही थी, जिससे कई परिवार कर्ज के जाल में फंसते जा रहे थे। इसी गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए समाज की पंचायत ने एकूमत होकर यह कड़ा निर्णय लिया है कि अब किसी भी वैवाहिक कार्यक्रम में इन दोनों चीजों का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित रहेगा।नियम तोड़ने वालों पर लगेगा कड़ा सामाजिक दंडबैगा समाज की हुई इस महापंचायत में सर्वसम्मति से यह भी तय किया गया है कि यदि समाज का कोई भी व्यक्ति इस नियम की अवहेलना करता पाया गया, तो उस पर कड़ा सामाजिक दंड (Social Penalty) लगाया जाएगा। पंचायत के इस कड़े रुख से साफ है कि समाज अपनी खोई हुई सादगी और पारिवारिक ताने-बाने को बचाने के लिए बेहद गंभीर है। बुजुर्गों का मानना है कि डीजे के कर्कश शोर से जहां एक तरफ पर्यावरण और बुजुर्गों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है, वहीं शराब के कारण आपसी विवाद और आर्थिक तंगी बढ़ती है। इस प्रतिबंध के लागू होने से अब शादियां फिर से शांत, सांस्कृतिक और पारंपरिक तरीके से संपन्न हो सकेंगी।जनजातीय अंचल में सुधर रही है सामाजिक और आर्थिक स्थितिछत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में फैले बैगा समाज के इस कदम को एक बड़े सामाजिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। अन्य आदिवासी समुदायों के लिए भी यह पहल एक प्रेरणा बन रही है कि कैसे वे अपनी परंपराओं को आधुनिक कुरीतियों से बचा सकते हैं। स्थानीय प्रशासनिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि इससे न केवल शादियों में होने वाली अनैतिक गतिविधियों पर रोक लगेगी, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और सादगी से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा।
छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का तांडव! मौसम विभाग ने प्रदेश के इन 7 जिलों में जारी किया येलो अलर्ट
मॉनसून के रफ्तार पकड़ने के साथ ही छत्तीसगढ़ (CG Weather Update) के मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदल गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के कई संभागों में आगामी दिनों में मूसलाधार बारिश की संभावना जताते हुए बड़ा अपडेट जारी किया है। खासकर प्रदेश के सात चुनिंदा जिलों में बादलों के आक्रामक तेवर को देखते हुए मौसम विभाग (IMD) ने 'येलो अलर्ट' (Yellow Alert) घोषित किया है। पिछले कुछ दिनों से उमस और गर्मी से बेहाल आम जनता को बारिश से राहत जरूर मिलेगी, लेकिन लगातार बरस रहे पानी के कारण निचले इलाकों में जलभराव और आवागमन बाधित होने की पूरी आशंका बनी हुई है।इन 7 जिलों में झमाझम बरसेंगे बदरा, मौसम विभाग की कड़ी चेतावनीमौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, छत्तीसगढ़ के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के सात जिलों में भारी बारिश (Heavy Rain Warning) का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। इन जिलों में लगातार हो रही मानसूनी गतिविधियों के चलते मेघगर्जन, तेज हवाओं के साथ झमाझम पानी गिरने की उम्मीद है। प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर इन सभी इलाकों के स्थानीय प्रशासनिक अमले को पूरी तरह मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी आपदा या जलभराव की स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि एक्टिव वेदर सिस्टम के कारण बादलों का डेरा इन क्षेत्रों में अगले कुछ घंटों तक और अधिक गहरा सकता है।नदियों का बढ़ा जलस्तर और निचले इलाकों में बढ़ी मुश्किलेंभौगोलिक दृष्टि से वनों और पहाड़ों से घिरे छत्तीसगढ़ में लगातार भारी बारिश होने से कई स्थानीय नदियों, नालों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से ऊपर उठने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी इलाकों की निचली बस्तियों में पानी भरने की समस्याएं सामने आने लगी हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए भी एडवाइजरी जारी की है कि वे खेतों में पानी के उचित निकास का प्रबंध रखें और वज्रपात (Thunderstorm) की चेतावनी के दौरान पेड़ों या खुले मैदानों में शरण लेने से बचें।सफर करने से पहले एक बार जरूर चेक कर लें मौसम का हालयदि आप छत्तीसगढ़ के इन सात जिलों या आसपास के रूटों पर यात्रा करने का प्लान बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले मौसम की ताजा जानकारी जरूर ले लें। सड़कों पर जलभराव और खराब विजिबिलिटी के कारण ट्रैफिक धीमी गति से चल सकता है, जिससे समय अधिक लग सकता है। आपदा प्रबंधन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि बहुत जरूरी होने पर ही खराब मौसम के दौरान अपने घरों से बाहर निकलें और पूरी सावधानी बरतें।
बंद पड़े जीएसटी नंबरों से चल रहा था करोड़ों का फर्जी कारोबार! विभाग ने की 3 हजार नंबरों की पहचान
देशभर में टैक्स चोरी और फर्जी बिलिंग नेटवर्क के खिलाफ चल रहे देशव्यापी अभियानों के बीच कर विभाग (GST Department) की तरफ से एक बेहद सनसनीखेज और बड़ा खुलासा सामने आया है। टैक्स इंटेलिजेंस और डेटा एनालिसिस के जरिए विभाग ने ऐसे करीब तीन हजार जीएसटी (GST) नंबरों की पहचान की है जो आधिकारिक तौर पर काफी पहले बंद या रद्द (Cancelled) किए जा चुके थे, लेकिन हैरानी की बात यह है कि कागजों और सिस्टम में बंद होने के बावजूद इन नंबरों के जरिए धड़ल्ले से करोड़ों रुपये का कारोबार (Turnover) किया जा रहा था। इस भारी-भरकम फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद से व्यापारिक और औद्योगिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। विभाग ने इन सभी संदिग्ध जीएसटी नंबर धारकों को कड़े नोटिस जारी कर दिए हैं और चेतावनी दी है कि यदि समय पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो बिना किसी देरी के सीधी एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी।कैसे चल रहा था बंद जीएसटी नंबरों से करोड़ों के लेनदेन का खेल?जीएसटी विंग के शुरुआती तकनीकी विश्लेषण से पता चला है कि शातिर ठगों और फर्जी फर्मों ने उन कारोबारियों के पैन या जीएसटी पंजीकरण को निशाना बनाया जिन्होंने अपने व्यवसाय बंद कर दिए थे या जिनके रजिस्ट्रेशन कैंसल हो चुके थे। इन बंद नंबरों का इस्तेमाल करके बिना किसी वास्तविक माल की आवाजाही (Goods Movement) के केवल फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए जा रहे थे। इसके जरिए करोड़ों रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम करके सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई जा रही थी। इस तरह के सुनियोजित सिंडिकेट यह उम्मीद कर रहे थे कि बंद हो चुके नंबरों पर विभाग की पैनी नजर नहीं जाएगी, लेकिन एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स और एआई-बेस्ड टूल्स ने इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कर दिया।विभाग की दो टूक: नोटिस का जवाब नहीं दिया तो होगी सीधी कानूनी कार्रवाईकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि जिन लगभग तीन हजार संदिग्ध जीएसटी नंबरों की सूची तैयार की गई है, उनके संचालकों और फर्म मालिकों को तुरंत प्रभाव से कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) भेज दिए गए हैं। विभाग ने इन सभी मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने वित्तीय लेनदेन और कारोबार का वैध प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। यदि कोई भी व्यक्ति या फर्म नोटिस का जवाब देने में असफल रहती है या फर्जीवाड़ा सही पाया जाता है, तो उनके खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा और स्थानीय थानों में तुरंत एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।भौगोलिक और व्यापारिक स्तर पर बढ़ाई गई निगरानीइस बड़े खुलासे के बाद से देश के विभिन्न वाणिज्यिक केंद्रों और औद्योगिक जिलों में टैक्स अधिकारियों की टीमें पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गई हैं। विभाग यह भी जांच कर रहा है कि इस फर्जी नेटवर्क के पीछे कौन-कौन से बड़े मास्टरमाइंड और सीए (Chartered Accountants) या सिंडिकेट सक्रिय हैं। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट और बोगस बिलिंग के इस नासूर को जड़ से खत्म करने के लिए आने वाले दिनों में इस तरह की औचक जांच और सख्त चेकिंग का अभियान और अधिक तीव्र किया जाएगा।
मॉनसून की सक्रियता के बीच बिहार (Bihar Weather Update) के मौसम का मिजाज एक बार फिर से पूरी तरह बदल गया है। मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने राज्य के कई जिलों में आगामी 28 जुलाई को मूसलाधार बारिश की संभावना जताते हुए 'येलो अलर्ट' (Yellow Alert) जारी किया है। पिछले कुछ दिनों से उमसभरी गर्मी और तीखी धूप से परेशान लोगों को बारिश से राहत जरूर मिलेगी, लेकिन लगातार हो रही बरसात के चलते जनजीवन प्रभावित होने की पूरी आशंका है। मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग भी पूरी तरह मुस्तैद हो गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।इन जिलों में झमाझम बरसेंगे बदरा, मौसम विभाग की कड़ी चेतावनीमौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर बिहार और तराई वाले क्षेत्रों के साथ-साथ दक्षिण-मध्य बिहार के कई जिलों में बादलों का डेरा रहेगा। राजधानी पटना सहित मुजफ्फरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, बेगूसराय, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया जैसे जिलों में भारी बारिश और वज्रपात (Thunderstorm) की आशंका जताई गई है। इन इलाकों में मेघगर्जन के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं और कुछ स्थानों पर झमाझम पानी बरसने से सड़कें पानी से लबालब हो सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉनसून ट्रफ लाइन के गुजरने के कारण बादलों का यह नया दौर शुरू हुआ है, जो अगले कुछ दिनों तक राज्य के मौसम को प्रभावित करता रहेगा।नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में मंडराया खतराभौगोलिक और जल संसाधनों से समृद्ध बिहार में लगातार भारी बारिश होने से प्रमुख नदियों और सहायक धाराओं का जलस्तर तेजी से ऊपर चढ़ने लगा है। कई ग्रामीण और शहरी निचले इलाकों में जलभराव (Waterlogging) की समस्या उत्पन्न होने लगी है, जिससे आवागमन करने वाले राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने किसानों को भी सलाह दी है कि वे खेतों में जल निकासी का उचित प्रबंध रखें और वज्रपात की चेतावनी के दौरान खुले खेतों या पेड़ों के नीचे शरण लेने से बचें।सफर करने से पहले चेक करें अपने जिले का मौसम हालयदि आप 28 जुलाई यानी कल कहीं बाहर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो अपने स्थानीय मौसम के मिजाज की जानकारी जरूर ले लें। सड़कों पर जलभराव और भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति से बचने के लिए समय से पहले घर से निकलें। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम और भारी बारिश के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें और सुरक्षित स्थानों पर रहें ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की ई 20 नीति को लेकर एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश के युवाओं से एकजुट होकर इस मुद्दे पर अपनी राय रखने और आंदोलन का हिस्सा बनने की अपील की है।
बिहार की हॉट सीट माने जाने वाली बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव (Bankipur Assembly By-Election) का राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुँच चुका है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, राज्य का सियासी समीकरण बहुत तेजी से बदलता हुआ नजर आ रहा है। इस हाई-प्रोफाइल सीट पर मुख्य विपक्षी दल आरजेडी (RJD) के नेता तेजस्वी यादव की आक्रामक एंट्री ने मुकाबले को पूरी तरह से पलट कर रख दिया है। तेजस्वी के मैदान में उतरने के बाद से जहाँ पारंपरिक विरोधी दल एक्टिव मोड में आ गए हैं, वहीं चुनावी रणनीतिकार से राजनीतिक खिलाड़ी बने प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की पार्टी के लिए यहाँ वजूद बचाने और तीसरे नंबर पर फिसलने का बड़ा खतरा मंडराने लगा है। इसके उलट, इस पूरे घटनाक्रम के बीच सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राह बेहद सुरक्षित और आसान दिख रही है।तेजस्वी यादव की एंट्री से कैसे बदला बांकीपुर का सियासी समीकरण?बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र हमेशा से शहरी और पारंपरिक रूप से एक खास राजनीतिक मिजाज वाला इलाका माना जाता रहा है, जहाँ बीजेपी का मजबूत कैडर बेस रहा है। हालांकि, चुनाव प्रचार के दौरान तेजस्वी यादव की ओर से धुआंधार रैलियों और जनसंपर्क अभियानों ने इस सीट पर समीकरणों को पूरी तरह हिला दिया है। तेजस्वी के मैदान में आने से आरजेडी का कोर वोटर और युवा वर्ग पूरी एकजुटता के साथ पार्टी के पक्ष में लामबंद होता दिख रहा है। उनकी आक्रामक भाषण शैली और जमीनी मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने की रणनीति ने अन्य विपक्षी दलों की नींद उड़ा दी है, जिससे इस चुनावी मुकाबले में सीधा संघर्ष और अधिक पेचीदा हो गया है।प्रशांत किशोर (PK) के लिए क्यों बढ़ गया तीसरे नंबर पर खिसकने का जोखिम?अपनी चुनावी रणनीतियों के दम पर बड़े-बड़े दलों को मात देने का दावा करने वाले प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी के लिए बांकीपुर की यह लड़ाई अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जैसे ही इस सीट पर मुकाबला दो ध्रुवीय (Bipolar) यानी बीजेपी बनाम आरजेडी की तर्ज पर सिमटने लगा है, वैसे ही तीसरे विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रही पीके की पार्टी हाशिए पर जाती दिख रही है। यदि शहरी मतदाताओं का ध्रुवीकरण पारंपरिक दलों के पक्ष में मजबूती से हो जाता है, तो प्रशांत किशोर समर्थित प्रत्याशी के लिए वोटों के समीकरण साधना बेहद मुश्किल हो जाएगा और उनका तीसरे स्थान पर खिसक जाना तय माना जा रहा है।बीजेपी की राह बांकीपुर में क्यों दिखाई दे रही है बेहद आसान?भौगोलिक और सामाजिक रूप से शहरी मतदाताओं के बहुल्य वाले बांकीपुर क्षेत्र में बीजेपी की पकड़ पारंपरिक रूप से काफी मजबूत रही है। विपक्षी खेमे में वोटों के बिखराव और तेजस्वी यादव की एंट्री से गैर-आरजेडी वोटों के और अधिक एकजुट होने की संभावना बढ़ गई है, जिसका सीधा फायदा भगवा पार्टी को मिलता दिख रहा है। डबल इंजन सरकार की नीतियों, स्थानीय विकास कार्यों और मजबूत सांगठनिक ढांचे के दम पर बीजेपी इस सीट पर अपनी बादशाहत बरकरार रखने के लिए सबसे मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। यही वजह है कि राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस उठापटक के बीच बांकीपुर में बीजेपी की जीत की राह काफी हद तक सुगम होती जा रही है।
बिहार की राजनीति के लिहाज से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य में आगामी बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव (Bankipur Assembly Election) की सरगर्मियों के बीच विपक्षी दलों और नए सियासी रणनीतिकारों को एक के बाद एक करारे झटके लग रहे हैं। राजद (RJD) नेता तेजस्वी यादव और राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की पार्टी को बड़ा झटका देते हुए कई नामचीन दिग्गज नेताओं और स्थानीय पदाधिकारियों ने अपने पुराने दलों का साथ छोड़ दिया है। इन सभी ने राजधानी पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में एक भव्य मिलन समारोह के दौरान आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण कर ली है, जिससे सियासी गलियारों में भारी हलचल मच गई है।बांकीपुर उपचुनाव से पहले सियासी समीकरणों में बड़ा बदलावकिसी भी चुनाव से ठीक पहले इस तरह का दलबदल विरोधी खेमे की रणनीति को कमजोर करने के लिए काफी माना जाता है। बांकीपुर सीट को राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और वीआईपी सीट माना जाता है, जहाँ हर दल अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। ऐसे में चुनाव की तारीखों के नजदीक आते ही तेजस्वी यादव के पाले से कई प्रभावशाली नेताओं का छिटक जाना और प्रशांत किशोर के संगठन से जुड़े चेहरों का बीजेपी का दामन थामना, विपक्षी दलों के लिए एक बड़ा मानसिक और रणनीतिक झटका साबित हो रहा है।बीजेपी मुख्यालय में हुआ दिग्गजों का स्वागत, पार्टी का कुनबा हुआ मजबूतपार्टी में शामिल होने वाले इन दिग्गज नेताओं का स्वागत करने के लिए भाजपा के कई वरिष्ठ प्रदेश पदाधिकारी और स्थानीय विधायक मौके पर मौजूद रहे। बीजेपी नेताओं ने नए शामिल हुए सदस्यों को पार्टी का अंगवस्त्र पहनाकर विधिवत स्वागत किया और विश्वास जताया कि उनके आने से बांकीपुर समेत आसपास के शहरी क्षेत्रों में पार्टी का जनाधार और अधिक मजबूत होगा। शामिल होने वाले नेताओं का कहना था कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकासवादी नीतियों, डबल इंजन सरकार के कार्यों और राज्य के चहुंमुखी विकास से प्रभावित होकर बीजेपी परिवार का हिस्सा बने हैं।चुनावी मैदान में असर और आगे की राजनीतिक रणनीतियाँभौगोलिक और सामाजिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में इस राजनीतिक उठापटक का सीधा असर आगामी मतदान पर देखने को मिल सकता है। जानकारों का मानना है कि इन नेताओं के अपने-अपने क्षेत्रों में अच्छे खासे व्यक्तिगत प्रभाव और कैडर बेस होने के कारण, विपक्षी दलों के वोटों में सेंध लग सकती है। चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे बिहार की राजनीति में जोड़-तोड़ और रणनीतिक बदलाव का दौर और अधिक तेज होने की पूरी संभावना है।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सोनम वांगचुक पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ राजघाट पहुंचे। उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि अहिंसा और संवाद का रास्ता आज भी सबसे प्रासंगिक है।
हरियाणा से जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करने वाली सनसनीखेज खबर सामने आई है। राज्य की एक जिला जेल में बंद विचाराधीन कैदी (हवालाती) की अचानक तबियत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हवालाती को सीने में तेज दर्द (Chest Pain) उठा था, जिसके बाद जेल अधिकारियों ने आनन-फानन में उसे इलाज के लिए नजदीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। हालाँकि, डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकेगी और उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मृतक की गिरफ्तारी महज तीन दिन पहले ही हुई थी और इतनी जल्दी जेल के भीतर हुई इस घटना ने प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है।महज तीन दिन पहले हुई थी गिरफ्तारी, अचानक बिगड़ी तबियतपुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मृतक को किसी मामले में गिरफ्तार कर अदालत में पेश करने के बाद तीन दिन पहले ही न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेजा गया था। जेल के अंदर आने के शुरुआती दिनों में ही अचानक उसके सीने में असहनीय दर्द और घबराहट की शिकायत शुरू हो गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जेल मेडिकल स्टाफ ने तुरंत उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दी और उसे आपातकालीन स्थिति में जेल से अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों की टीम ने उसका इलाज शुरू कर दिया, लेकिन कार्डियक अरेस्ट या अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई।न्यायिक जांच के घेरे में जेल प्रशासन, परिवार ने उठाए गंभीर सवालइस अचानक हुई मौत के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मच गया है और परिजनों ने जेल प्रशासन की सुरक्षा तथा स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। परिवार वालों का आरोप है कि गिरफ्तारी के समय युवक पूरी तरह स्वस्थ था, ऐसे में महज तीन दिन के भीतर जेल के अंदर उसकी ऐसी हालत कैसे हो गई। इस हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और न्यायिक अधिकारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दे दिए हैं। नियमानुसार न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate) की निगरानी में शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है, ताकि मौत के असली कारणों का खुलासा हो सके।स्थानीय कानून व्यवस्था और जेल सुरक्षा पर उठ रहे बड़े सवालभौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखें तो हरियाणा की जेलों में कैदियों की स्वास्थ्य सुरक्षा और मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के दावों की इस घटना ने पोल खोलकर रख दी है। जेल के भीतर बंदियों की लगातार हो रही इस तरह की मौतों ने मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय नागरिकों को भी चिंतित कर दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर जेल मैनुअल और सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया है।
चंडीगढ़ से एक बेहद हैरान करने वाली, दर्दनाक और सनसनीखेज घटना सामने आई है, जिसने पूरे शहर और शिक्षा जगत को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ एक 32 साल की महिला टीचर अपने ही स्कूल के एक छात्र के इश्क में इस कदर अंधी हो गई कि उसने अपने परिवार, समाज और वैवाहिक जीवन की तमाम मर्यादाओं को ताक पर रख दिया। टीचर की इस जिद और धोखे से बुरी तरह आहत होकर उसके पति ने आखिरकार अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मरने से पहले पति ने जो दर्द बयां किया, उसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन के पास पहुंचा यह हाई-प्रोफाइल मामला अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है, जहाँ लोग एक शादीशुदा महिला शिक्षिका के इस गैर-कानूनी और अनैतिक कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।टीचर-स्टूडेंट का अवैध रिश्ता और पत्नी की जिद ने उजाड़ा घरप्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी महिला टीचर का नाम कोमल है, जो चंडीगढ़ के एक प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ाती थी। शिक्षण कार्य के दौरान उसका संपर्क एक छात्र (सनी) के साथ जरूरत से ज्यादा गहरा हो गया। देखते ही देखते यह मेल-जोल एक गहरे और अवैध प्रेम प्रसंग में तब्दील हो गया। जब कोमल के पति को अपनी पत्नी और छात्र के इस रिश्ते के बारे में भनक लगी, तो घर में कोहराम मच गया। पति ने अपनी पत्नी को समझाने और परिवार को बचाने की लाख कोशिश की, लेकिन कोमल अपने इस पागलपन में इस कदर आगे निकल चुकी थी कि उसने साफ कह दिया कि वह अब अपने पति के साथ नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ सनी के साथ ही अपनी पूरी जिंदगी बिताएगी।पत्नी के धोखे और धमकियों से टूट चुका था पतिकोमल के इस बेतुके और क्रूर रवैये ने उसके पति को अंदर से पूरी तरह तोड़ कर रख दिया था। एक तरफ समाज का डर और दूसरी तरफ अपनी ही पत्नी द्वारा दिए गए धोखे का गहरा सदमा, पति सहन नहीं कर सका। महिला का अपनी जिद पर अड़े रहना और लगातार छात्र के समर्थन में खड़े होने से आजिज आकर पति ने अंततः मौत को गले लगाने का खौफनाक रास्ता चुन लिया। आत्महत्या करने से पहले उसने अपने सुसाइड नोट और परिजनों के सामने अपनी पत्नी के इस अवैध रिश्ते का कच्चा-चिट्ठा खोलकर रख दिया, जिससे यह साबित हो गया कि किस तरह एक शिक्षक और छात्र के रिश्ते की आड़ में इस घर को पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया।पुलिस जांच और समाज के लिए एक गंभीर सबकइस दर्दनाक घटना के सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी है और महिला शिक्षिका तथा उस छात्र से जुड़े तमाम पहलुओं को खंगाला जा रहा है। कानून के जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों में यदि कोई नाबालिग संलिप्त है, तो इसमें कानूनी पेंच और भी ज्यादा गंभीर हो जाते हैं। यह घटना आज के आधुनिक समाज, नैतिक मूल्यों के पतन और रिश्तों में आ रही दरार पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है, जहाँ एक पल की सनक और गलत अफेयर ने हंसते-खेलते परिवार को मातम में बदल दिया।
उत्तर प्रदेश के दो सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त शहरों के बीच सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए एक बेहद राहत भरी और शानदार खबर सामने आ रही है। बहुत जल्द बहुप्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (Lucknow Kanpur Expressway) पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की हाई-स्पीड रोडवेज बसें फर्राटा भरती हुई नजर आएंगी। इस आधुनिक एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों औद्योगिक और शैक्षणिक राजधानियों के बीच की दूरी सिमट जाएगी, जिससे यात्रियों का कीमती समय बचेगा। खास बात यह है कि इस सुपरफास्ट सफर के लिए यात्रियों को अपनी जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी, क्योंकि बसों का किराया बेहद किफायती रखा गया है, जिससे आम जनता आसानी से इसका लाभ उठा सकेगी।महज 1 घंटे 45 मिनट में तय होगा लखनऊ से कानपुर का सफरपारंपरिक राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम और भारी वाहनों की भीड़भाड़ से परेशान होने वाले यात्रियों के लिए यह एक्सप्रेसवे किसी वरदान से कम साबित नहीं होगा। परिवहन विभाग की योजना के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे के जरिए लखनऊ से कानपुर या कानपुर से लखनऊ की पूरी दूरी मात्र 1 घंटे 45 मिनट में आसानी से पूरी कर ली जाएगी। तेज रफ्तार और सिग्नल-फ्री सफर होने के कारण बसों की औसत गति बेहतरीन रहेगी, जिससे यात्रियों को रोजाना के आने-जाने (Daily Commute) में भारी सहूलियत मिलेगी। नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और छात्रों के लिए यह सेवा आवागमन का सबसे सुगम माध्यम बन जाएगी।किफायती किराया और यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएंआम यात्रियों के बजट को ध्यान में रखते हुए रोडवेज बसों का किराया बेहद कम और सुलभ तय किया गया है, ताकि हर वर्ग के लोग इस आधुनिक सड़क मार्ग का फायदा उठा सकें। साधारण रोडवेज बसों के साथ-साथ इस रूट पर एसी (AC) बसों का संचालन भी किया जाएगा, जिससे यात्री आरामदायक सफर का आनंद ले सकेंगे। एक्सप्रेसवे पर बसों के संचालन से न केवल सड़क यात्रा सुरक्षित होगी, बल्कि समय की भी भारी बचत होगी। स्थानीय प्रशासनिक और परिवहन अधिकारियों द्वारा इस रूट के टोल प्लाजा और बस स्टॉप्स के निर्धारण की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि सेवा शुरू होते ही यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे और लोकल कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावाभौगोलिक और आर्थिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश के विकास में लखनऊ और कानपुर का यह नया एक्सप्रेसवे मील का पत्थर साबित हो रहा है। इसके शुरू होने से दोनों शहरों के बीच व्यापारिक गतिविधियों, औद्योगिक विकास और पर्यटन को एक नया पंख मिलेगा। एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर भविष्य में होने वाले विकास कार्यों से लोकल रोजगार और आर्थिकी को भी बढ़ावा मिलेगा। यदि आप भी अक्सर लखनऊ से कानपुर की यात्रा करते हैं, तो आने वाले दिनों में इस एक्सप्रेसवे पर रोडवेज बस का सफर आपके लिए बेहद आरामदायक, तेज और किफायती होने वाला है।
अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण और उससे जुड़े धन संग्रह अभियान को लेकर समय-समय पर कई तरह के विवाद सामने आते रहे हैं। इसी कड़ी में राम मंदिर चंदा चोरी और वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े संवेदनशील मामले की जांच को गति देने के लिए एक नई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष अदालत और संबंधित प्रशासनिक स्तर पर कड़े कदम उठाए गए हैं। नई एसआईटी में शामिल तेज-तर्रार और अनुभवी पुलिस अधिकारियों ने मामलों की फाइलों को खंगालना शुरू कर दिया है। इन अधिकारियों ने अभी तक अपनी जांच में क्या-क्या अहम सबूत जुटाए हैं और आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है, इसकी एक विस्तृत और गोपनीय रिपोर्ट जल्द ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश की जाएगी।नई एसआईटी में शामिल किए गए हैं उत्तर प्रदेश के अनुभवी और तेज-तर्रार अफसरराम मंदिर चंदा चोरी और धोखाधड़ी के मामलों की तह तक जाने के लिए बनाई गई इस नई एसआईटी में उत्तर प्रदेश पुलिस के चुनिंदा और बेदाग छवि वाले अधिकारियों को जगह दी गई है। स्थानीय भौगोलिक और कानूनी पेचीदों को बारीकी से समझने वाले इन अधिकारियों को विशेष तौर पर इसलिए जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो सके। एसआईटी के गठन के बाद से ही जांच टीम ने अपनी कार्यप्रणाली तेज कर दी है और उन सभी शिकायतों की दोबारा समीक्षा की जा रही है, जिनमें चंदे के नाम पर हेराफेरी या फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लगाए गए थे।अफसरों ने अब तक क्या-क्या एक्शन लिया? सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी रिपोर्टजांच अधिकारियों ने पिछले कुछ हफ्तों में कई संदिग्ध ठिकानों पर दस्तावेजों की छानबीन की है और इस घोटाले से जुड़े प्रमुख गवाहों व पीड़ितों के बयान दर्ज किए हैं। बैंक खातों के ट्रांजैक्शन, डिजिटल मनी ट्रेल और चंदा जुटाने वाली संस्थाओं के रिकॉर्ड्स को खंगालकर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़े इस पवित्र धन का दुरुपयोग कहाँ और कैसे हुआ। एसआईटी के इन तमाम अब तक के प्रयासों और बरामद किए गए सबूतों का पूरा कच्चा-चिट्ठा तैयार कर लिया गया है, जिसे आने वाले दिनों में सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपा जाएगा।देश भर के राम भक्तों की टिकी निगाहें, आगे क्या होगी कार्रवाई?इस बहुचर्चित मामले पर देश भर के करोड़ों राम भक्तों और कानूनी जानकारों की पैनी नजर बनी हुई है। कोर्ट की निगरानी में चल रही इस जांच के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा तथा इस प्रकार के संवेदनशील मामलों में फर्जीवाड़ा करने वाले दोषियों को कानून के शिकंजे में कसकर कड़ी सजा दिलाई जाएगी। एसआईटी की यह रिपोर्ट आने वाले दिनों में इस पूरे कानूनी प्रकरण का रुख तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाली है।
उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में भले ही अभी विधानसभा चुनाव (UP Chunav 2027) में वक्त हो, लेकिन सूबे की राजनीति का तापमान अभी से सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP) के बीच जुबानी जंग और तंज कसने का दौर रोज नए आयाम छू रहा है। प्रदेश की कमान संभाल रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के बीच सोशल मीडिया से लेकर चुनावी मंचों तक एक अलग ही राजनीतिक 'मल्लयुद्ध' छिड़ा हुआ है। दोनों दिग्गज नेता एक-दूसरे के बयानों पर तीखा पलटवार करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं, जिससे उत्तर प्रदेश का राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गर्माया हुआ है।सीएम योगी की आक्रामक कार्यशैली और तीखे बयानों के वारमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी आक्रामक भाषण शैली और प्रशासनिक फैसलों के दम पर विपक्ष पर लगातार कड़े प्रहार कर रहे हैं। कानून व्यवस्था, विकास कार्यों और तुष्टिकरण के मुद्दों पर सीएम योगी का अंदाज हमेशा से आक्रामक रहा है, जिससे वे विपक्ष को डिफेंसिव होने पर मजबूर कर देते हैं। उनके बयानों में राज्य की सुरक्षा और पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली पर सीधे तौर पर सवाल उठाए जाते हैं, जो बीजेपी के काडर और कोर वोटर के बीच जोश भरने का काम करते हैं। जनता के बीच उनकी छवि एक सख्त प्रशासक के रूप में है, जो विपक्षी दलों के हर हमले का जवाब आंकड़ों और जमीनी विकास के जरिए देते हैं।अखिलेश यादव का सोशल मीडिया वार और पीडीए (PDA) का दांवदूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस चुनावी मुकाबले में पूरी तरह से आक्रामक रुख अपना लिया है। वे हर छोटे-बड़े मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। पीडीए (PDA - पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले और बेरोजगारी-महंगाई जैसे मुद्दों को आधार बनाकर अखिलेश लगातार सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उनके चुटीले तंज और व्यंग्यात्मक अंदाज वाले बयान अक्सर इंटरनेट पर तेजी से वायरल होते हैं, जो युवाओं और ग्रामीण इलाकों के मतदाताओं का ध्यान खींचने में सफल साबित हो रहे हैं।जनता के दरबार में कौन पड़ रहा है भारी? सियासी जानकारों की रायभौगोलिक और राजनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले राज्य उत्तर प्रदेश में यह मुकाबला बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। स्थानीय जनता और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जहां एक तरफ सीएम योगी की मजबूत लीडरशिप और प्रशासनिक पकड़ उन्हें प्रशासनिक मोर्चे पर बढ़त दिलाती है, वहीं अखिलेश यादव का आक्रामक विपक्ष का तेवर और जातीय समीकरणों को साधने की रणनीति उन्हें कड़ी टक्कर दे रही है। 2027 के इस सियासी रण में कौन किस पर भारी पड़ेगा, इसका फैसला तो आने वाला वक्त ही करेगा, लेकिन फिलहाल इन दोनों नेताओं की जुबानी जंग ने यूपी की राजनीति को बेहद रोमांचक बना दिया है।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर गोरखपुर से नेपाल बॉर्डर से सटे सोनौली तक का सफर करने वाले यात्रियों और पर्यटकों के लिए एक बहुत ही रोमांचक और खूबसूरत अपडेट सामने आ रही है। गोरखपुर से सोनौली हाईवे (Gorakhpur to Sonauli Route) पर सफर करना अब केवल एक आम यात्रा नहीं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति के अनूठे संगम का अहसास कराने वाला एक बेहतरीन अनुभव बन गया है। इस नेशनल हाईवे पर सफर के दौरान रास्ते में मिलने वाले 4 ऐसे मंत्रमुग्ध कर देने वाले और रमणीय नजारे देखने को मिलते हैं, जिन्हें देखते ही पर्यटकों का दिल बाग-बाग हो जाता है। अगर आप भी इस रूट से गुजरने का प्लान बना रहे हैं, तो रास्ते के इन खास आकर्षणों के बारे में जरूर जान लें।1. घने जंगलों और हरियाली से गुजरती सड़क का सुहाना अहसासगोरखपुर से सोनौली मार्ग पर आगे बढ़ते ही तराई क्षेत्र के जंगलों और प्रकृति की गोद का अद्भुत नजारा शुरू हो जाता है। सड़क के दोनों ओर फैली लंबी और हरी-भरी पेड़-पौधों की कतारें इस सफर को बेहद शांत और मनमोहक बना देती हैं। खासकर मानसून और सर्दियों के मौसम में इस रास्ते की हरियाली और ठंडी हवाएं यात्रियों की सारी थकान पल भर में दूर कर देती हैं। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह हरा-भरा रास्ता किसी जन्नत से कम नहीं है, जहां वाहन से गुजरते हुए कुदरत के बेहद करीब होने का अहसास होता है।2. स्थानीय संस्कृति और जीवंत ग्रामीण बस्तियों की झलकइस हाईवे के सफर की दूसरी सबसे बड़ी खासियत यहाँ के पारंपरिक तराई वाले गांव और स्थानीय जीवनशैली है। सड़क मार्ग के दोनों तरफ सजे छोटे-छोटे बाजार, मिट्टी के खूबसूरत घर और पारंपरिक रहन-सहन उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत की गहरी छाप छोड़ते हैं। यहाँ की स्थानीय जीवनशैली को देखना और ग्रामीण भारत की सादगी को महसूस करना पर्यटकों के लिए एक अलग ही अनुभव होता है, जो शहरी कोलाहल से कोसों दूर मानसिक शांति प्रदान करता है।3. रास्तों में बहने वाली शांत नदियाँ और जल स्रोतों के खूबसूरत घाटगोरखपुर-सोनौली रूट पर सफर के दौरान कई छोटी-छोटी नदियाँ और जल स्रोत रास्ते में पड़ते हैं, जिन पर बने पुलों से गुजरते वक्त पानी का कल-कल करता बहाव बहुत ही आकर्षक लगता है। पानी के इन प्राकृतिक स्रोतों के आसपास का शांत वातावरण और डूबते सूरज का नजारा इस यात्रा में चार चांद लगा देता है। स्थानीय भौगोलिक और प्राकृतिक बनावट के कारण यहाँ का मौसम हमेशा सुहाना बना रहता है, जो यात्रियों को कुछ पल ठहरकर प्रकृति का आनंद लेने के लिए मजबूर कर देता है।4. भारत-नेपाल सीमा के पास पहुँचते ही बदलता सांस्कृतिक परिदृश्यजैसे-जैसे वाहन सोनौली बॉर्डर के करीब पहुंचते हैं, वैसे-वैसे यहाँ की संस्कृति और माहौल में एक नया रोमांच घुलने लगता है। नेपाल सीमा से सटा यह क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, संस्कृति और मेल-जोल का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहाँ का चहल-पहल भरा माहौल और भारत-नेपाल के बीच की सांस्कृतिक साझ को देखना इस पूरी रोड ट्रिप का सबसे शानदार क्लाइमैक्स साबित होता है। यदि आप भी वीकेंड पर किसी सड़क मार्ग की रोमांचक यात्रा पर निकलने की सोच रहे हैं, तो गोरखपुर से सोनौली का यह मार्ग आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।
राजस्थान की खूबसूरती और शाही संस्कृति की जब भी बात आती है, तो झीलों की नगरी 'उदयपुर' का नाम सबसे पहले जुबान पर आता है। अरावली की पहाड़ियों की गोद में और पिछोला झील के तट पर स्थित उदयपुर का 'सिटी पैलेस' (Udaipur City Palace) राजस्थान की सबसे भव्य, विशाल और ऐतिहासिक धरोहरों में शुमार है। इस शानदार महल की वास्तुकला और इसका इतिहास इतना समृद्ध है कि यहाँ आने वाला हर देसी-विदेशी पर्यटक इसकी भव्यता को देखकर हैरान रह जाता है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस विशाल महल का निर्माण किसी एक राजा ने नहीं, बल्कि मेवाड़ के सात अलग-अलग महाराणाओं के शासनकाल में क्रमिक रूप से पूरा किया गया था, जो इसकी अनूठी निर्माण शैली को दर्शाता है।महाराणा उदय सिंह द्वितीय से शुरू हुआ था इस भव्य महल का सफरइतिहास के पन्नों के अनुसार, उदयपुर शहर की स्थापना करने वाले महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने साल 1559 में इस भव्य पैलेस की नींव रखी थी। उनके बाद मेवाड़ के सिंहासन पर बैठने वाले अन्य प्रतापी महाराणाओं ने अपनी सूझबूझ और कलाप्रेम के चलते इस महल में अपनी पसंद के अनुसार नए महलों, कक्षों, बालकनियों और मीनारों का निर्माण करवाया। लगभग चार सौ वर्षों से अधिक समय तक चले इस निर्माण कार्य में कुल सात महाराणाओं का योगदान रहा है। यही वजह है कि सिटी पैलेस के भीतर राजस्थानी, मुगल, यूरोपीय और चीनी वास्तुकला (Architecture) का एक अद्भुत और बेजोड़ संगम देखने को मिलता है, जो देश-विदेश के इतिहास प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।सिटी पैलेस के अंदर छिपे हैं इतिहास के अनगिनत हैरान करने वाले राजपिछोला झील के पानी के ठीक ऊपर खड़े इस विशाल संगमरमर और ग्रेनाइट के महल के भीतर प्रवेश करते ही राजा-महाराजाओं के वैभवशाली जीवन की झलक मिलने लगती है। यहाँ स्थित 'मोर चौक' (Mor Chowk), 'शीश महल' और 'दिलकुश महल' अपनी नायाब कांच की कारीगरी और मोजेक टाइल्स के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं। इसके अलावा, पैलेस का 'जनाना महल' और 'मर्दानी महल' उस दौर की शाही जीवनशैली, कला और युद्ध कौशल की कहानियों को बयां करते हैं। यहाँ का 'म्यूज़ियम' (Amar Vilas & Museum) पुरानी तलवारें, शाही पोशाकें, कलाकृतियां और मेवाड़ के शूरवीरों के इतिहास को संजोकर रखता है, जिसे देखकर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है।पर्यटन और स्थानीय संस्कृति का सबसे बड़ा केंद्रभौगोलिक और सांस्कृतिक दृष्टि से देखा जाए, तो उदयपुर का यह सिटी पैलेस राजस्थान के पर्यटन उद्योग का सबसे बड़ा मुकुट मणि है। हर साल लाखों की संख्या में सैलानी इस ऐतिहासिक धरोहर को देखने के लिए राजस्थान के इस खूबसूरत शहर का रुख करते हैं। शाम के समय पैलेस पर होने वाली लाइटिंग और यहाँ से झील का नज़ारा पर्यटकों के दिलों पर एक कभी न मिटने वाली छाप छोड़ता है। यदि आपने अभी तक इस ऐतिहासिक और जादुई धरोहर का दीदार नहीं किया है, तो अपनी अगली वेकेशन लिस्ट में उदयपुर के इस भव्य सिटी पैलेस को जरूर शामिल करें।
मानसून का मौसम आते ही चिलचिलाती गर्मी से राहत तो मिलती है, लेकिन अपने साथ कई तरह की बीमारियां और इंफेक्शन भी लेकर आता है। इस मौसम में सबसे ज्यादा संवेदनशील बच्चों का नाजुक स्वास्थ्य होता है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) वयस्कों के मुकाबले कमजोर होती है। नमी भरे इस मौसम में पानी से होने वाली बीमारियां, सर्दी-जुकाम और पेट का संक्रमण तेजी से फैलता है। यही वजह है कि बाल रोग विशेषज्ञों और डाइटीशियन का मानना है कि बरसात के दिनों में बच्चों की डाइट (Kids Diet in Monsoon) पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है। यदि इस दौरान खान-पान में जरा सी भी लापरवाही बरती जाए, तो बच्चों की सेहत को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।मानसून में बच्चों को भूलकर भी न खिलाएं ये चीजेंडाइटीशियन और हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, बरसात के मौसम में बैक्टीरिया और फंगस बहुत तेजी से पनपते हैं, इसलिए बाहर का खुला खाना या स्ट्रीट फूड बच्चों को बिल्कुल नहीं देना चाहिए। बाजार में मिलने वाली कटी हुई फल-सब्जियां, चाट-पकौड़ी और बाहर की तली-भुनी चीजें बच्चों के पेट में इंफेक्शन का मुख्य कारण बनती हैं। इसके अलावा सी-फूड और पानी में उगने वाली हरी पत्तेदार सब्जियों (जैसे पालक या पत्ता गोभी) को इस सीजन में खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें नमी के कारण कीड़े और जर्म्स छिपे होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। जंक फूड और पैक्ड स्नैक्स भी बच्चों की इम्युनिटी को कमजोर करते हैं।बच्चों की थाली में क्या शामिल करना है सबसे फायदेमंद?बरसाती मौसम में बच्चों को अंदर से मजबूत रखने के लिए उनकी डाइट में पोषक तत्वों से भरपूर और आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करें। ताजे फल जैसे पपीता, अनार, सेब और उबली हुई सब्जियां बच्चों को दें। खाना हमेशा ताजा और घर का बना हुआ ही खिलाएं, जिसमें हल्दी, जीरा और लहसुन जैसे नेचुरल एंटी-बैक्टीरियल मसालों का इस्तेमाल किया गया हो। हाइड्रेशन का खास ख्याल रखें और बच्चों को हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ गुनगुना पानी ही पीने के लिए दें। सूप, दलिया, खिचड़ी और नींबू पानी जैसी चीजें बच्चों की पाचन क्रिया को दुरुस्त रखती हैं।पैरेंट्स के लिए जरूरी टिप्स: इम्युनिटी बढ़ाने के आसान उपायस्थानीय और मौसमी बदलावों को ध्यान में रखते हुए पैरेंट्स को बच्चों की साफ-सफाई और खान-पान को लेकर अत्यधिक सतर्क रहना चाहिए। बच्चों को बाहर खेलने के बाद हाथ-पैर अच्छी तरह साबुन से धोने की आदत डालें। सुबह के समय उन्हें दूध के साथ हल्दी या च्यवनप्राश जैसी चीजें दें ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता प्राकृतिक रूप से मजबूत हो सके। थोड़ी सी सावधानी और सही डाइट चार्ट अपनाकर आप अपने बच्चों को इस मानसून सीजन में हर तरह के वायरल इंफेक्शन और बीमारियों से पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं।
आज के दौर में जैसे-जैसे लोगों की उम्र 40 साल के पार पहुंचती है, उन्हें शारीरिक थकान, कमजोरी और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याएं आम लगने लगती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उम्र के इस पड़ाव पर हमारे शरीर की मांसपेशियां (Muscles) इतनी तेजी से कमजोर क्यों होने लगती हैं? मेडिकल एक्सपर्ट्स और हेल्थ रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में पिछले कुछ सालों में 40 की उम्र के बाद 'सारकोपेनिया' यानी मसल्स लॉस (Muscle Loss) की समस्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। खान-पान में प्रोटीन की कमी, शारीरिक गतिविधि का अभाव और बदलती जीवनशैली इस गंभीर समस्या के मुख्य कारण बनते जा रहे हैं। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह उम्र के साथ शरीर को अंदर से खोखला कर सकती है।40 की उम्र के बाद क्यों शुरू हो जाता है तेजी से मसल्स लॉस?चिकित्सकीय भाषा में उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों के घनत्व और ताकत में होने वाली प्राकृतिक गिरावट को सारकोपेनिया कहा जाता है। आमतौर पर 30 की उम्र के बाद हर दशक में शरीर की मांसपेशियां प्राकृतिक रूप से घटने लगती हैं, लेकिन 40 साल के बाद यह प्रक्रिया रफ्तार पकड़ लेती है। शहरी जीवनशैली में लगातार घंटों डेस्क जॉब करना, फिजिकल एक्टिविटी या एक्सरसाइज बिल्कुल न करना और सैर-सपाटे से दूरी बनाना इसके बड़े कारण हैं। इसके अलावा हमारे खान-पान में मैक्रोन्यूट्रिएंट्स, खासकर उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन (Protein) की भारी कमी होना इस समस्या को और ज्यादा विकराल बना देता है।मसल्स लॉस के शुरुआती लक्षण और शरीर पर इसके गंभीर प्रभावजब शरीर में मसल्स लॉस होने लगता है, तो व्यक्ति को रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम जैसे सीढ़ियां चढ़ना, भारी सामान उठाना या कुर्सी से उठना भी थकाऊ और मुश्किल लगने लगता है। मांसपेशियों के कमजोर होने से शरीर का मेटाबॉलिज्म भी धीमा पड़ जाता है, जिससे वजन बढ़ने और फैट जमा होने की समस्या शुरू हो जाती है। इसके साथ ही हड्डियों का घनत्व (Bone Density) भी घटने लगता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्थानीय स्तर पर खान-पान में जंक फूड और अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट का सेवन इस स्थिति को और अधिक गंभीर बना देता है।मसल्स लॉस से बचने और मांसपेशियों को मजबूत रखने के आसान उपायहेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि थोड़ी सी सतर्कता और सही जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से आसानी से बचा जा सकता है। अपनी डेली डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाएं, जिसमें दालें, पनीर, सोयाबीन, अंडे, और लीन मीट शामिल हों। इसके अलावा हफ्ते में कम से कम 3 से 4 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (Strength Training) या हल्की रेसिस्टेंस एक्सरसाइज जरूर करें, जिससे मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, विटामिन डी और कैल्शियम से भरपूर आहार लें ताकि उम्र के हर पड़ाव पर आपका शरीर फिट, एक्टिव और ऊर्जावान बना रहे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर भाजपा सांसद की बेटी की पोस्ट से विवाद, ओडिशा भाजपा में बढ़ी हलचल
सूत्रों के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान के कार्यालय की ओर से संपर्क किए जाने के बाद सांसद अपराजिता सारंगी ने अपनी बेटी से संबंधित पोस्ट हटाने के लिए कहा था। हालांकि, आरोप है कि अर्चिता ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। फिलहाल, हाईकोर्ट ने गडकरी की याचिका को मंजूर किया है और अंतरिम राहत की मांग पर सुनवाई तय की है।
Foreign media on CJP: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन ने न सिर्फ भारत की राजनीति में हलचल मचा दी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान भी खींच लिया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार के झुकने को लेकर विदेशी अखबारों और चैनलों ने ...
मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज हुए सोनम वांगचुक, बोले- अब राजघाट जाकर गांधीजी को दूंगा श्रद्धांजलि
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में वह अस्पताल के कमरे में कुर्सी पर बैठे दिखाई देते हैं और मुस्कुराते हुए अपनी सेहत में सुधार की जानकारी देते हैं।
दिल्ली की राऊज एवेन्यू फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई का पक्ष रखने के लिए एक प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति का निर्देश दिया है। इसी बीच, कोर्ट ने आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई टाल दी। अब इस मामले में सुनवाई 3 अगस्त को होगी।
लखनऊ, 26 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बदलते दौर में शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें छात्रों को सच और झूठ में अंतर पता करना, सोशल मीडिया के दुष्प्रचार से बचने का तरीका और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी नई तकनीकों का ...
योगी सरकार की बड़ी सौगात, 48.79 करोड़ से काशी की तर्ज पर संवरेगा लोधेश्वर महादेव धाम
बाराबंकी, 26 जुलाई। जिले के प्राचीन लोधेश्वर महादेव मंदिर को शीघ्र ही काशी जैसा भव्य स्वरूप मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर पर्यटन विभाग द्वारा स्वीकृत लगभग 48.79 करोड़ रुपये की समेकित पर्यटन विकास परियोजना के तहत मंदिर परिसर ...
उनकी किडनियां और लिवर इंदौर में ट्रांसप्लांट किए जा रहे हैं, जबकि आंखें आई बैंक को दान की गई है। दिल अहमदाबाद के मरीज को लगाया जाएगा। बता दें कि गौरव ब्रेन डेड हो गए थे। जिसके बाद उनके परिवार ने यह फैसला लिया। अंगों के ट्रांसप्लांट के लिए इंदौर में ...
केसरिया और भगवा कपड़ों से समाजवादी पार्टी की जन्मजात दुश्मनी: मुख्यमंत्री योगी
लखनऊ, 26 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी कहती थी, कांवड़ यात्रा में शिव भक्त आएंगे तो दंगा हो जाएगा। सपा शंख व घंटा भी नहीं बजाने देती थी। समाजवादी पार्टी की केसरिया और भगवा कपड़ों से मानो जन्मजात दुश्मनी थी। हालांकि अब ...
बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान और फिल्म 'काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी' के बीच चल रहे विवाद मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और यूट्यूब पर मौजूद फिल्म से जुड़े लिंक हटाने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं, अदालत ने फिल्म के निर्माता अमित जानी के रवैये पर भी नाराजगी जताई और उन्हें कड़ी फटकार लगाई।
मुलायम सिंह यादव का सपना था सैफई ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान, भाजपा ने पूरा किया : मुख्यमंत्री योगी
इटावा, 26 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सैफई मेडिकल संस्थान का जिक्र करते हुए कहा कि स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव ने सैफई ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान बनाने का निर्णय लिया था, लेकिन पांच वर्ष तक मुख्यमंत्री रहने के बावजूद अखिलेश यादव उसे आगे ...
देश की राजधानी दिल्ली के सबसे बड़े धरना स्थल जंतर-मंतर पर जारी एक बड़े विरोध प्रदर्शन के मामले में देश की सर्वोच्च अदालत से बहुत बड़ी और ऐतिहासिक टिप्पणी सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले नागरिकों के अधिकारों को लेकर एक नई और बेहद स्पष्ट लक्ष्मण रेखा खींच दी है। अदालत ने दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि सिर्फ इसलिए कि कहीं कोई आंदोलन या विरोध प्रदर्शन चल रहा है, सुरक्षा बल नागरिकों पर सीधे लाठीचार्ज या बल प्रयोग नहीं कर सकते।लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन मौलिक अधिकार, पुलिसिया कार्रवाई पर उठे सवालसुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए एक प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान सीजेआई (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ किया कि भारत के संविधान में हर नागरिक को शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के एकत्र होने व विरोध जताने का मौलिक अधिकार मिला हुआ है। कोर्ट ने कहा कि जब तक प्रदर्शनकारी किसी भी तरह की हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करने में लिप्त न हों, तब तक पुलिस बल को बेहद संयम बरतने की जरूरत है।कानून व्यवस्था और पुलिस बल के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी व्याख्यामुख्य न्यायाधीश ने अपनी टिप्पणी में सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के लिए गाइडलाइंस की ओर इशारा करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था (Law and Order) बनाए रखना बेहद जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि नागरिकों की आवाज को दबाने के लिए लाठीचार्ज या आंसू गैस के गोलों का अंधाधुंध इस्तेमाल किया जाए। अदालत ने साफ किया कि प्रशासन को किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बल प्रयोग की बजाय बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों को प्राथमिकता देनी चाहिए। इस टिप्पणी को भविष्य में होने वाले तमाम जन आंदोलनों और पुलिसिया एक्शन के लिहाज से एक नजीर के रूप में देखा जा रहा है।दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा और कानून के मोर्चे पर बड़ा बदलावभौगोलिक और स्थानीय सुरक्षा के नजरिए से देखें तो जंतर-मंतर, लुटियंस दिल्ली और संसद भवन के आसपास का पूरा इलाका बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहाँ हर छोटे-बड़े आंदोलन पर पूरे देश की नजर रहती है। सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े फैसले के बाद अब दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को अपनी रणनीतियों में बड़ा बदलाव करना होगा। आने वाले दिनों में नई दिल्ली जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रदर्शनों के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक और अहिंसक तौर-तरीकों का इस्तेमाल किया जाए, ताकि देश की राजधानी से सुरक्षा के मोर्चे पर कोई भी नकारात्मक संदेश न जाए।
सोने-चांदी की कीमतों में लगी आग! सोना ₹757 महंगा, चांदी ₹2266 उछली; क्रूड ऑयल की नरमी का बड़ा असर
घरेलू सर्राफा बाजार में आज एक बार फिर रौनक लौट आई है, जिससे सोना और चांदी खरीदने वालों को बड़ा झटका लगा है। लगातार कुछ दिनों की सुस्ती के बाद हफ्ते के शुरुआती कारोबारी दिन ही कीमती धातुओं की कीमतों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज सोने का भाव 757 रुपये प्रति 10 ग्राम तक चढ़ गया है, वहीं चांदी में भी 2,266 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी तेजी देखी जा रही है। इस बड़ी रिकवरी के बाद सर्राफा बाजार के व्यापारियों और निवेशकों की धड़कनें बढ़ गई हैं।कच्चे तेल की सुस्ती ने सोने और चांदी को दिया तगड़ा बूस्टरबाजार के जानकारों का कहना है कि आज सोने और चांदी की कीमतों में आई इस बड़ी तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई नरमी है। दरअसल, वैश्विक स्तर पर क्रूड की कीमतों में गिरावट आने से अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर दबाव देखा जा रहा है। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर कमजोर पड़ता है या कच्चे तेल के दाम घटते हैं, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की तरफ रुख करते हैं। इसी का सीधा असर भारतीय सर्राफा बाजार में देखने को मिल रहा है।आपके शहर में क्या है आज 22 कैरेट और 24 कैरेट गोल्ड का रेट?इस ताजा उछाल के बाद दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत देश के तमाम बड़े शहरों के रिटेल接收 बाजार में भी सोने के दाम बदल गए हैं। 24 कैरेट (शुद्ध सोने) का भाव एक बार फिर रिकॉर्ड स्तर की तरफ बढ़ता दिख रहा है, जबकि 22 कैरेट (ज्वेलरी गोल्ड) की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। वहीं, औद्योगिक मांग और वैश्विक बाजार से मिले मजबूत संकेतों के कारण चांदी की चमक भी काफी बढ़ गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में अगर भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है या डॉलर में कमजोरी जारी रहती है, तो सोने-चांदी की कीमतों में और तेजी आ सकती है।फेस्टिव सीजन से पहले खरीदारी या निवेश का सही मौका?भारत में फेस्टिव और शादियों का सीजन शुरू होने से पहले सोने-चांदी के दामों में आ रहे इस उतार-चढ़ाव ने आम उपभोक्ताओं को सोच में डाल दिया है। जेम एंड ज्वेलरी काउंसिल से जुड़े जानकारों का मानना है कि जो लोग लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह डिजिटल गोल्ड या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के जरिए निवेश का एक बेहतरीन मौका हो सकता है। हालांकि, रिटेल बाजार में गहने खरीदने वालों को सलाह दी जाती है कि वे हॉलमार्क (HUID) देखकर ही शुद्धता की पूरी जांच करने के बाद खरीदारी का फैसला लें।
वेदांता की इस दिग्गज कंपनी ने खोला ₹25,000 करोड़ का पिटारा, बाजार में मचेगी हलचल
भारतीय कॉर्पोरेट जगत और शेयर बाजार के निवेशकों के लिए वेदांता समूह की ओर से एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता ग्रुप की प्रमुख सहयोगी कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (Hindustan Zinc) ने देश के माइनिंग और मेटल सेक्टर में एक नया इतिहास रचने का पूरा खाका तैयार कर लिया है। कंपनी ने भारतीय बाजार में अपनी स्थिति को और मजबूत करने के लिए अगले 3 से 5 सालों में 25,000 करोड़ रुपये के विशालकाय निवेश (Mega Investment Plan) की घोषणा की है। इस भारी-भरकम निवेश की खबर के बाद से ही बाजार के जानकारों और निवेशकों के बीच हलचल काफी तेज हो गई है।क्या है हिंदुस्तान जिंक का यह 25 हजार करोड़ का मेगा प्लान?हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के इस बड़े कदम का मुख्य उद्देश्य अपनी उत्पादन क्षमता को दोगुना करना है। कंपनी इस फंड का इस्तेमाल मुख्य रूप से राजस्थान के उदयपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और राजसमंद जिलों में स्थित अपनी प्रमुख खदानों (Mines) और स्मेल्टिंग प्लांट्स के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए करेगी। कंपनी का लक्ष्य अपने मौजूदा मेटल प्रोडक्शन को 1.2 मिलियन टन से बढ़ाकर सीधे 2 मिलियन टन प्रति वर्ष तक पहुंचाना है। इस विस्तार योजना में पर्यावरण अनुकूल और सस्टेनेबल माइनिंग तकनीकों पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।वेदांता ग्रुप और शेयर बाजार के निवेशकों पर क्या होगा असर?हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड का यह कदम मूल कंपनी वेदांता लिमिटेड (Vedanta Ltd) के लिए एक बहुत बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है। वेदांता समूह इस समय अपने कर्ज को कम करने और विभिन्न सेक्टरों में डिमर्जर (Dimerger) की प्रक्रिया पर काम कर रहा है। ऐसे में हिंदुस्तान जिंक से मिलने वाला मजबूत कैश फ्लो और भविष्य की ग्रोथ वेदांता के बैलेंस शीट को भारी सपोर्ट देगी। इस बड़े निवेश की खबर से आने वाले दिनों में वेदांता और हिंदुस्तान जिंक दोनों के शेयरों में निवेशकों की तगड़ी खरीदारी देखने को मिल सकती है, जिससे शेयर बाजार के सूचकांकों को भी बूस्ट मिलेगा।स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा जबरदस्त बूस्टर डोजभौगोलिक और स्थानीय स्तर पर देखें तो इस मेगा प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा राजस्थान को मिलने वाला है। 25,000 करोड़ रुपये के निवेश से स्थानीय स्तर पर हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। खदानों के आस-पास के ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा और लोकल वेंडर्स व एमएसएमई (MSME) सेक्टर को बड़े पैमाने पर बिजनेस मिलेगा। इसके अलावा, राज्य सरकार को रॉयल्टी और टैक्स के रूप में भारी राजस्व (Revenue) मिलने की उम्मीद है, जिससे पूरे प्रदेश की आर्थिक तस्वीर में एक सकारात्मक बदलाव आएगा।
अमेरिका में फिर खूनी खेल! सिएटल फूड फेस्टिवल में अंधाधुंध गोलीबारी, 2 लोगों की मौत, कई घायल
अमेरिका में गन कल्चर और मास शूटिंग का खूनी सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। वॉशिंगटन राज्य के प्रमुख शहर सिएटल से एक बेहद दर्दनाक और डराने वाली खबर सामने आई है। यहाँ आयोजित एक बेहद लोकप्रिय और भारी भीड़भाड़ वाले फूड फेस्टिवल के दौरान अज्ञात बंदूकधारियों ने अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा त्योहार का माहौल चीख-पुकार और दहशत में बदल गया। स्थानीय पुलिस से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस भीषण गोलीबारी में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है।जश्न के बीच अचानक बरसीं गोलियां और मच गई भगदड़सिएटल के डाउनटाउन इलाके के पास आयोजित इस कम्युनिटी फूड फेस्टिवल में सप्ताहांत की छुट्टी होने के कारण सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग और सैलानी मौजूद थे। चश्मदीदों के मुताबिक, लोग खाने-पीने और संगीत का लुत्फ उठा रहे थे कि अचानक एक के बाद एक कई राउंड गोलियां चलने की आवाजें आईं। गोलीबारी शुरू होते ही लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, जिससे कार्यक्रम स्थल पर भारी भगदड़ मच गई। चश्मदीदों का कहना है कि हमलावर ने बिना किसी चेतावनी के भीड़ पर सीधे गोलियां बरसाना शुरू कर दिया था, जिससे किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।सिएटल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा सर्च ऑपरेशन जारीइस सनसनीखेज वारदात की सूचना मिलते ही सिएटल पुलिस विभाग की भारी फोर्स और स्पेशल स्वैट टीमें एम्बुलेंस के साथ मौके पर पहुंच गईं। सुरक्षा बलों ने तुरंत पूरे फेस्टिवल एरिया को सील कर दिया और घायलों को इलाज के लिए हार्बरव्यू मेडिकल सेंटर भेजा, जहां कुछ की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। पुलिस प्रमुख ने स्थानीय मीडिया को बताया कि हमलावर वारदात को अंजाम देकर भीड़ का फायदा उठाते हुए मौके से फरार होने में कामयाब रहा। हमलावर की पहचान और उसकी धरपकड़ के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और आसपास के लोकल इलाकों में नाकेबंदी कर दी गई है।अमेरिका में बढ़ते गन वायलेंस ने फिर खड़े किए गंभीर सवालसिएटल में हुई इस मास शूटिंग ने एक बार फिर अमेरिका में सख्त गन कंट्रोल कानूनों की बहस को हवा दे दी है। इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और मानवाधिकार संगठनों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी देखी जा रही है। फेडरल इनवेस्टिगेशन एजेंसियां भी इस बात की जांच कर रही हैं कि यह किसी आपसी रंजिश का नतीजा था या फिर एक सोची-समझी आतंकी या हेट-क्राइम की साजिश। इस दुखद घटना के बाद सिएटल के इस इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है और लोगों को फिलहाल इस रूट पर न जाने की सलाह दी गई है।
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के रणक्षेत्र से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली राजनयिक खबर सामने आ रही है। वैश्विक महाशक्तियों के बीच जारी शह-मात के खेल में ईरान ने एक ऐसा बड़ा दांव चल दिया है, जिसने इजरायल और अमेरिका दोनों की रणनीतिक चिंताओं को चरम पर पहुंचा दिया है। ईरान के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने लेबनान के सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह के साथ पूरी ताकत से खड़े होने का आधिकारिक एलान कर दिया है। इसके साथ ही तेहरान ने नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के सामने बातचीत को लेकर एक नई और बेहद सख्त शर्त रख दी है, जिसके बाद इस पूरे क्षेत्र में युद्ध के समीकरण पूरी तरह बदलते दिख रहे हैं।अयातुल्ला खामेनेई का खुला एलान और हिजबुल्लाह को संजीवनीईरान की राजधानी तेहरान से जारी एक कड़े और सीधे संदेश में अयातुल्ला अली खामेनेई ने साफ कर दिया है कि हिजबुल्लाह को कमजोर या अलग-अलग समझने की भूल न की जाए। ईरान अपनी पूरी सैन्य, वित्तीय और कूटनीतिक ताकत के साथ लेबनानी प्रतिरोध के पीछे मुस्तैदी से खड़ा है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि खामेनेई के इस कड़े रुख से इजरायल के उत्तरी मोर्चे पर तनाव और अधिक आक्रामक रूप ले सकता है। ईरान का यह कदम सीधे तौर पर तेल अवीव को यह चेतावनी है कि हिजबुल्लाह के कमांड स्ट्रक्चर पर किए जा रहे हमलों का जवाब अब और अधिक संगठित तरीके से दिया जाएगा, जिससे इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) पर दबाव काफी बढ़ गया है।डोनाल्ड ट्रंप के सामने ईरान की नई शर्त ने वाशिंगटन में मचाई हलचलइस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब ईरानी प्रशासन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संभावित बातचीत या समझौतों को लेकर एक नई शर्त मेज पर रख दी है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर बातचीत तभी आगे बढ़ सकती है, जब वाशिंगटन मिडिल ईस्ट में इजरायल की सैन्य आक्रामकता पर पूरी तरह से लगाम लगाए और ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की दिशा में ठोस कदम उठाए। ट्रंप प्रशासन के लिए यह शर्त एक बड़ी राजनयिक चुनौती बन गई है, क्योंकि ट्रंप एक तरफ इजरायल के सबसे बड़े पैरोकार रहे हैं और दूसरी तरफ वे क्षेत्र में नए युद्धों को टालने का वादा भी कर चुके हैं।रणनीतिक चक्रव्यूह में फंसा इजरायल, अब क्या होंगे आगे के रास्ते?ईरान और हिजबुल्लाह की इस जुगलबंदी और अमेरिका के सामने रखी गई नई शर्त ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने एक नई सुरक्षा चुनौती खड़ी कर दी है। इजरायल इस समय गाजा से लेकर लेबनान तक कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रहा है। ऐसे में अगर अमेरिका ईरान की शर्तों के दबाव में आकर अपनी नीतियों में थोड़ा भी बदलाव करता है, तो इजरायल खुद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पा सकता है। लोकल और ग्लोबल इंटेलिजेंस एजेंसियों की मानें तो आने वाले कुछ दिन बेहद संवेदनशील होने वाले हैं, क्योंकि ट्रंप प्रशासन का अगला कदम ही यह तय करेगा कि यह क्षेत्र शांति की ओर बढ़ेगा या एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आग में झुलस जाएगा।
जोहरान ममदानी की खुली धमकी पर बेंजामिन नेतन्याहू का पलटवार, बोले- 'न्यूयॉर्क आकर ही रहूंगा
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और अमेरिकी राजनीति के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और न्यूयॉर्क के चर्चित असेंबली मेंबर जोहरान ममदानी के बीच जारी जुबानी जंग ने वैश्विक स्तर पर तूल पकड़ लिया है। दरअसल, भारतीय मूल के अमेरिकी राजनेता और डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट जोहरान ममदानी ने नेतन्याहू के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें न्यूयॉर्क आने पर गिरफ्तार करने और बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने की खुली चेतावनी दी थी। अब इस धमकी पर इजरायली पीएमओ ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि नेतन्याहू किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं और वे अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक न्यूयॉर्क का दौरा जरूर करेंगे।अंतरराष्ट्रीय वारंट और जोहरान ममदानी की तीखी घेराबंदीइस पूरे विवाद की जड़ इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) द्वारा बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ जारी किए गए अरेस्ट वारंट से जुड़ी हुई है। गाजा में जारी सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालत के इस फैसले के बाद, न्यूयॉर्क से विधायक जोहरान ममदानी ने अमेरिकी प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों से मांग की थी कि अगर इजरायली प्रधानमंत्री न्यूयॉर्क की धरती पर कदम रखते हैं, तो उन्हें तुरंत हिरासत में लिया जाना चाहिए। ममदानी ने साफ किया था कि मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपी किसी भी नेता का न्यूयॉर्क में स्वागत नहीं किया जा सकता। उनके इस बयान ने अमेरिका में मौजूद इजरायल समर्थकों और विरोधियों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया था।नेतन्याहू का दोटूक जवाब और संयुक्त राष्ट्र में आने का पक्का इरादाजोहरान ममदानी और विभिन्न मानवाधिकार संगठनों की ओर से मिल रही धमकियों के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया है। यरूशलेम से आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेतन्याहू ने कहा है कि लोकतांत्रिक देशों के नेताओं को इस तरह की धमकियों से डराया नहीं जा सकता। वे संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र में हिस्सा लेने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर इजरायल का पक्ष मजबूती से रखने के लिए न्यूयॉर्क की यात्रा पर अडिग हैं। इजरायली सुरक्षा एजेंसियों ने इस दौरे को देखते हुए अपनी तैयारियां और पुख्ता कर दी हैं, ताकि अमेरिकी धरती पर सुरक्षा में कोई चूक न हो सके।न्यूयॉर्क की सड़कों पर भारी तनाव की आशंका और सुरक्षा के कड़े इंतजामबेंजामिन नेतन्याहू के इस कड़े रुख के बाद न्यूयॉर्क सिटी पुलिस डिपार्टमेंट (NYPD) और अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के सामने एक बहुत बड़ी सुरक्षा चुनौती खड़ी हो गई है। जोहरान ममदानी के नेतृत्व में कई फिलिस्तीन समर्थक और वामपंथी संगठन मैनहट्टन और संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने की रणनीति बना रहे हैं। स्थानीय खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, नेतन्याहू के आगमन के दौरान न्यूयॉर्क की सड़कों पर भारी विरोध प्रदर्शन और रैलियां देखने को मिल सकती हैं। स्थानीय प्रशासन संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने और सुरक्षा घेरा मजबूत करने की योजना पर काम कर रहा है।
पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख राज्य असम इस समय कुदरत की भारी मार झेल रहा है। हालांकि, रविवार (26 जुलाई) को जारी आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक असम में बाढ़ की स्थिति में आंशिक सुधार देखा गया है, लेकिन इसके बावजूद दो और मासूमों की जान चली गई। इसके साथ ही इस मानसून सीज़न में बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 68 तक पहुंच गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, राज्य के 5 जिलों में 5.24 लाख (5,24,700) से ज्यादा लोग अब भी बाढ़ के गंदे पानी के बीच जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।चराइदेव जिले में सबसे ज्यादा तबाही, 2 लोगों की डूबने से मौतASDMA द्वारा देर रात जारी बुलेटिन के मुताबिक, पिछले 24 घंटों के दौरान चराइदेव जिले में बाढ़ के पानी में डूबने से दो लोगों की मौत हो गई। इस त्रासदी में सबसे ज्यादा प्रभावित भी चराइदेव जिला ही हुआ है, जहां करीब 1.9 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हैं। इसके बाद शिवसागर जिले का नंबर आता है, जहां 1.5 लाख से अधिक लोग और जोरहाट में लगभग 1.4 लाख लोग बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। इनके अलावा गोलाघाट और नागांव जिलों में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि शनिवार के मुकाबले (जब 6 जिलों में 6.55 लाख लोग प्रभावित थे) कुल प्रभावितों की संख्या में कुछ कमी आई है।राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर 37 हजार से अधिक लोगबाढ़ के तांडव को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। चार सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में प्रशासन की ओर से 354 राहत शिविर (Relief Camps) और राहत वितरण केंद्र चलाए जा रहे हैं। इन शिविरों में वर्तमान में 37,724 विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं, जिन्हें भोजन, साफ पानी और दवाइयां मुहैया कराई जा रही हैं।सेना और NDRF का मोर्चा, 763 गांव पानी में डूबेऊपरी असम के संवेदनशील और दूर-दराज के इलाकों में भारतीय सेना (Indian Army), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), फायर एंड इमरजेंसी सर्विस और असम पुलिस की संयुक्त टीमें राहत और बचाव अभियानों में जुटी हुई हैं। ASDMA के अनुसार, वर्तमान में राज्य के 763 गांव पूरी तरह से जलमग्न हैं, जबकि 48,742 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि में लगी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं।धनसिरी नदी खतरे के निशान के पार, इन्फ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसानबाढ़ के प्रचंड वेग के कारण राज्य के कई जिलों में तटबंध (Embankments), सड़कें, पुल और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी (Dhansiri River) अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जो आसपास के इलाकों के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है। इंसानों के साथ-साथ इस प्राकृतिक आपदा की गाज बेजुबानों पर भी गिरी है—असम भर में 88,240 से अधिक पालतू मवेशी और मुर्गियां भी इस भयावह बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
राजधानी दिल्ली में रविवार (26 जुलाई) को मौसम सामान्य से अधिक गर्म और उमस भरा रहा, जिससे दिल्लीवासियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज (सोमवार, 27 जुलाई) के लिए राहत भरी खबर दी है। मौसम विभाग के अनुसार, आज दिल्ली-एनसीआर में दिनभर बादल छाए रहेंगे और कई इलाकों में रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश होने का पूर्वानुमान जताया गया है।रविवार को 36.6C तक पहुंचा तापमान, उमस से छूटे पसीनेIMD की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.7 डिग्री अधिक था। वहीं न्यूनतम तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस रहा। शाम के समय हवा में नमी का स्तर (सापेक्ष आर्द्रता) 63 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिससे वास्तविक तापमान के मुकाबले काफी ज्यादा चिपचिपी गर्मी महसूस हुई। हालांकि, उमस के बावजूद दिल्ली की हवा साफ बनी रही और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 83 के साथ 'संतोषजनक' श्रेणी में दर्ज किया गया।सोमवार को कैसा रहेगा मौसम का मिजाज?मौसम विभाग ने सोमवार को सुबह से लेकर दोपहर के बीच राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान जताया है, जबकि रात के समय हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है।तापमान: दिन का अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।हवा की रफ्तार: सुबह के समय दक्षिण-पश्चिम दिशा से 10 से 15 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, जो दोपहर और शाम तक बढ़कर 15 से 20 किमी/घंटा हो सकती हैं।अगले 3 दिनों तक जारी रहेगा बारिश का दौरदिल्लीवासियों को मंगलवार से गर्मी और उमस से और अधिक राहत मिलने की उम्मीद है। IMD के अनुसार:मंगलवार और बुधवार: राजधानी में मौसम की गतिविधियां तेज होंगी और ज्यादातर इलाकों में मध्यम स्तर की बारिश दर्ज की जा सकती है।सप्ताह का तापमान: बारिश के कारण तापमान में गिरावट आएगी और पूरे हफ्ते अधिकतम पारा 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहेगा।यात्रियों के लिए सावधानी की सलाहभले ही बारिश से तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन IMD ने निचले इलाकों में जलभराव (Waterlogging) और सड़कों पर धीमी रफ्तार वाले ट्रैफिक जाम (Traffic Jam) की चेतावनी दी है। ऐसे में दफ्तर या काम पर निकलने वाले लोगों को थोड़ा अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है।
वलसाड बाढ़ में रक्षक बनी गुजरात पुलिस, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने वीडियो शेयर कर की तारीफ
गुजरात में भारी बारिश और बाढ़ के बीच राहत और बचाव अभियान तेजी से चल रहा है। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने वलसाड में लोगों की जान बचाने वाले पुलिसकर्मियों के साहस की खुलकर सराहना की है।
नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोमवार को लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर नए दल-बदल विरोधी कानून की आवश्यकता पर चर्चा कराने की मांग की। उनका कहना है कि अवसरवाद से प्रेरित बड़े पैमाने पर राजनीतिक दल-बदल पर रोक लगाने के साथ-साथ वास्तविक वैचारिक असहमति की भी रक्षा की जानी चाहिए।
दिल्ली के जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन में पैलेट गन के कथित इस्तेमाल की जांच तेज हो गई है। RAF जवान की पहचान कर ली गई है और CRPF की जांच रिपोर्ट अगले सप्ताह आने की संभावना है।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। इस खास मौके पर सीएम योगी ने एक विशेष पाती जारी कर समाज को गुरु के आध्यात्मिक महत्व, सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहरों और शिक्षकों के प्रति आदर भाव बनाए रखने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह अपने पथप्रदर्शकों और गुरुओं के प्रति अटूट श्रद्धा, सर्वोच्च सम्मान और कृतज्ञता अर्पित करने का पावन दिन है।महर्षि वेदव्यास और सनातन की पौराणिक धरोहरअपने संदेश में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गुरु पूर्णिमा का यह पर्व महान ऋषि महर्षि वेदव्यास की स्मृति में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है, जिन्होंने संपूर्ण मानव जाति को वेदों का दिव्य ज्ञान प्रदान किया था। उन्होंने पौराणिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए बताया कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने गुरु वशिष्ठ से और योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु सांदीपनि के आश्रम में दीक्षा प्राप्त की थी। यह ऐतिहासिक परंपरा साबित करती है कि जीवन में सफलता, चरित्र निर्माण और उच्च आदर्शों की स्थापना के लिए गुरु का मार्गदर्शन कितना अनिवार्य है।सर्वधर्म समभाव और सर्वव्यापी चेतना का प्रतीकसीएम योगी ने जोर देकर कहा कि गुरु पूर्णिमा का यह पर्व किसी एक धर्म या संप्रदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता की आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। बौद्ध परंपरा में इसे भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश यानी 'धर्मचक्र प्रवर्तन' के स्मृति दिवस के रूप में आदर से याद किया जाता है। वहीं, जैन धर्म में इसका जुड़ाव भगवान महावीर के प्रमुख शिष्य गौतम स्वामी के ज्ञान-दीक्षा प्रसंग से है और सिख परंपरा में 'गुरु' व 'गुरु-वाणी' को ही सर्वोपरि स्थान दिया गया है।शिक्षकों का सम्मान ही समृद्ध समाज का आधारशिक्षकों की भूमिका पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस समाज में गुरु और शिक्षकों को पूरा मान-सम्मान दिया जाता है, वही समाज विकास की नई बुलंदियों को छूता है। राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य समाज के हर वर्ग को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर सशक्त बनाना है। उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले 9 वर्षों के दौरान सरकार ने अध्यापकों के सम्मान, सुरक्षा और उनके सशक्तीकरण को अपनी प्राथमिकता में शीर्ष पर रखा है, क्योंकि गुरुओं के बिना एक सशक्त और विकसित भारत की कल्पना नहीं की जा सकती।
भारत लगातार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहा है। दुनिया भर में तहलका मचाने वाली ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल के बाद अब भारत का स्वदेशी 'पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम' (MBRS) रक्षा निर्यात का अगला बड़ा ब्रह्मास्त्र बनने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में करीब 12 देश भारत के इस अत्याधुनिक और बेहद अचूक हथियार को खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत तैयार हुए इस रॉकेट सिस्टम को लेकर भारत जल्द ही अपने मित्र देशों के साथ निर्यात के बड़े सौदे फाइनल कर सकता है, जिससे रक्षा उत्पादन क्षेत्र को एक नई और मजबूत उड़ान मिलेगी।मलेशिया, फिलीपींस और थाईलैंड हैं सबसे आगेअंतरराष्ट्रीय बाजार में पिनाका सिस्टम की बढ़ती मांग को देखते हुए कई एशियाई देश इसे अपनी सेना में शामिल करने को बेताब हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिलहाल मलेशिया, फिलीपींस और थाईलैंड इसे खरीदने की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। भारत के रक्षा निर्यात का ग्राफ बीते कुछ सालों में काफी तेजी से ऊपर गया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि भारत ने हाल ही में इंडोनेशिया को ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल बेचने पर सहमति जताई है, जबकि फिलीपींस पहले ही भारत से ब्रह्मोस मिसाइल की सफल खेप प्राप्त कर चुका है।स्वदेशी तकनीक और पिनाका की अचूक मारक क्षमतापिनाका रॉकेट लॉन्चर पूरी तरह से भारतीय तकनीक का शानदार नमूना है। इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है, जबकि इसका निर्माण भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियों द्वारा किया जाता है। भारतीय सेना में पहले से ही इसे ऑपरेशनल तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।पिनाका की ताकत की बात करें तो यह सिस्टम अपनी मारक क्षमता के लिए जाना जाता है:रफ्तार: यह सिस्टम मात्र 44 सेकंड के भीतर एक साथ 12 खतरनाक रॉकेट दागने में पूरी तरह सक्षम है।सटीक निशाना: बेस वर्जन के साथ यह 40 किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन पर जीपीएस (GPS) और आईएनएस (INS) गाइडेंस तकनीक की मदद से बेहद सटीकता के साथ हमला कर सकता है।बचाव प्रणाली: यह 'शूट एंड स्कूट' क्षमता से लैस है, यानी फायर करने के तुरंत बाद लॉन्चिंग वाहन अपनी जगह तेजी से बदल लेता है, ताकि दुश्मन के जवाबी हमले से बचा जा सके।तबाही: इसे दुश्मन के बंकरों, भारी हथियारों के डिपो और जमीनी सैन्य ठिकानों को पल भर में राख करने के लिए ही डिजाइन किया गया है।ब्रह्मोस के मुरीद हुए दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देशपिनाका के साथ-साथ ब्रह्मोस मिसाइल के विदेशी खरीदारों की सूची भी लगातार लंबी होती जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि दुनिया के कई बड़े मुस्लिम देश भारत से ब्रह्मोस खरीदने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। फिलीपींस और वियतनाम के बाद अब दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया ब्रह्मोस मिसाइल का तीसरा सबसे बड़ा वैश्विक ग्राहक बनने जा रहा है। इसके साथ ही खाड़ी देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी इस खतरनाक मिसाइल को अपने बेड़े में शामिल करने की इच्छा जताई है। कुल मिलाकर लगभग आधा दर्जन देश ब्रह्मोस खरीदने की कतार में खड़े हैं, जो वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती सैन्य कूटनीति का साफ संकेत है।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में भारी विरोध प्रदर्शनों और सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच आज, 27 जुलाई से विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग शुरू हो गई है। पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने क्षेत्र में जारी जनाक्रोश और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए इस बार तीन चरणों में मतदान कराने का फैसला किया है। पहले चरण में आज मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं, जबकि दूसरे चरण में 2 अगस्त और तीसरे चरण में 10 अगस्त को वोटिंग होगी। कुल 53 सीटों पर होने वाले इस चुनाव पर न केवल पाकिस्तान, बल्कि भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी पैनी नजर बनी हुई है।3 चरणों में चुनाव और 12 शरणार्थी सीटों पर खड़ा हुआ बड़ा विवादचुनाव आयोग के शेड्यूल के अनुसार 2 अगस्त को मुजफ्फराबाद डिवीजन की 9 सीटों के साथ-साथ शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों पर भी वोट डाले जाएंगे। वहीं 10 अगस्त को अंतिम चरण में पुंछ की 11 सीटों पर मतदान संपन्न होगा। इस पूरे चुनाव में सबसे बड़ा विवाद इन 12 शरणार्थी सीटों को लेकर ही है। स्थानीय संगठनों और 'जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JKJAAC) का गंभीर आरोप है कि पाकिस्तान सरकार इन सीटों की आड़ में अपने पसंदीदा दल को फायदा पहुंचाने और चुनाव नतीजों में धांधली करने का काम करती है, जिससे स्थानीय लोगों का वास्तविक प्रतिनिधित्व कमजोर पड़ता है।कैसे चलता है PoK का प्रशासन और किस पार्टी के बीच है मुख्य मुकाबलाव्यावहारिक रूप से PoK की पूरी व्यवस्था पाकिस्तान के कड़े नियंत्रण में काम करती है। कहने को तो यहां चुने गए विधायक क्षेत्र के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं, लेकिन प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर असल फैसले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली 'कश्मीर काउंसिल' और वहां की सेना ही लेती है। इस बार चुनाव में मुख्य मुकाबला पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के बीच माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि केंद्र में एक साथ सरकार चलाने वाले ये दोनों दल PoK में सत्ता के लिए आमने-सामने हैं। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने मुजफ्फराबाद में रैली कर खुद PoK का प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जताकर सियासत गरमा दी है।महंगाई से भड़का जनआंदोलन और भारत का कड़ा संदेशबीते कई महीनों से PoK के लोग भारी महंगाई, बिजली के बेतहाशा बिलों और पाकिस्तानी नीतियों के खिलाफ लगातार सड़कों पर उतरे हुए हैं। यह आंदोलन अब पाकिस्तान सरकार और सेना की मौजूदगी के खिलाफ एक बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है। दूसरी ओर, भारत ने एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। नई दिल्ली का साफ कहना है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान सहित पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न व अविभाज्य अंग है। भारत इस गैर-कानूनी चुनाव प्रक्रिया को सिरे से खारिज करता है और PoK से जुड़े हर मुद्दे को अपना पूर्ण आंतरिक विषय मानता है।
7 दिन में ध्वस्त हुए सचिन के 7 ऐतिहासिक रिकॉर्ड: रोहित, विराट और नए नवेले वैभव ने किया बड़ा कमाल
क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड्स को एक समय अजेय माना जाता था। लेकिन मॉडर्न क्रिकेट में अब उनका युग बदलता दिख रहा है। महज एक हफ्ते के अंदर रोहित शर्मा, विराट कोहली और युवा सितारे वैभव सूर्यवंशी ने सचिन के 7 बड़े और ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़कर क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया है। आइए जानते हैं कि कौन से रिकॉर्ड टूटे हैं।वैभव सूर्यवंशी ने छीने सचिन के तीन युवा रिकॉर्डभारतीय क्रिकेट का भविष्य बेहद सुरक्षित हाथों में है, यह युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने साबित कर दिया है। इंग्लैंड दौरे पर डेब्यू करने के बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए वैभव ने सचिन को पछाड़कर तीन बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए:सबसे युवा डेब्यू: वैभव भारत के लिए सबसे कम उम्र में इंटरनेशनल डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं।सबसे युवा अर्धशतक: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 50 रन (हाफ-सेंचुरी) बनाने वाले सबसे युवा भारतीय भी अब वैभव ही हैं।सबसे युवा प्लेयर ऑफ द मैच: जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच जिताऊ प्रदर्शन कर उन्होंने सबसे कम उम्र में यह अवॉर्ड जीतने का सचिन का बरसों पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।'हिटमैन' रोहित शर्मा ने तोड़े तीन कीर्तिमानभारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ आखिरी वनडे में बेहतरीन शतक जड़कर इतिहास रच दिया। इस दमदार पारी के साथ हिटमैन ने मास्टर ब्लास्टर के तीन रिकॉर्ड ध्वस्त किए:बतौर ओपनर सबसे ज्यादा शतक: रोहित भारत के लिए ओपनिंग करते हुए सबसे ज्यादा इंटरनेशनल शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं।विदेशी धरती पर दबदबा: रोहित ने भारत के बाहर (विदेश में) जाकर सबसे ज्यादा वनडे शतक लगाने का सचिन का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है।सबसे उम्रदराज शतकवीर: रोहित शर्मा वनडे क्रिकेट में भारत की तरफ से शतक जड़ने वाले सबसे अधिक उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं।विराट कोहली ने भी किया एक रिकॉर्ड अपने नामइस रिकॉर्ड तोड़ हफ्ते में विराट कोहली भी पीछे नहीं रहे। इंग्लैंड के खिलाफ वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा बार 50 से अधिक का स्कोर (50+ स्कोर) बनाने के मामले में विराट ने सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ दिया है और एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
संसद में विपक्ष का जोरदार हंगामा, लोकसभा-राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित
संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। आज लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक पेश किया जाएगा, जबकि विपक्ष ने छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा।
थिएटर में रुलाने के बाद अब OTT पर आ रही है इम्तियाज अली की 'मैं वापस आऊंगा', जानें रिलीज डेट
अगर आप सिनेमाघरों में इम्तियाज अली की जादूगरी देखने से चूक गए हैं, तो आपके लिए एक बेहतरीन खबर है। 12 जून को बड़े पर्दे पर रिलीज हुई और दर्शकों की आंखों में आंसू ला देने वाली फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' अब ओटीटी पर आ रही है। थिएटर्स में शानदार कमाई और लोगों का बेशुमार प्यार बटोरने के बाद यह फिल्म अब सीधे आपके घरों तक पहुंचने वाली है।कब और कहां देख सकेंगे फिल्म?अगर आप इस इमोशनल सफर का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो बता दें कि 7 अगस्त से यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स (Netflix) पर स्ट्रीम होने जा रही है।सरहद पार के प्यार और वादे की कहानी'मैं वापस आऊंगा' की कहानी भारत-पाकिस्तान बंटवारे के दर्द और उस दौरान बिछड़ गए दो प्रेमियों के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक पोता (दिलजीत दोसांझ) अपने बुजुर्ग दादा जी (नसीरुद्दीन शाह) को उनके प्यार से किए गए एक पुराने वादे को पूरा कराने के लिए बॉर्डर के उस पार ले जाता है। कहानी में जज्बात हैं, पुरानी यादें हैं और सरहदों को पार कर जाने वाली मोहब्बत है।शानदार है फिल्म की स्टार कास्टफिल्म में एक्टिंग का जबरदस्त डोज देखने को मिलेगा। दादा के किरदार में दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने जान डाल दी है, वहीं उनके पोते के रूप में दिलजीत दोसांझ का काम लोगों को खूब पसंद आया है। जवानी के दिनों वाले नसीरुद्दीन शाह का रोल वेदांग रैना ने निभाया है, जबकि उनकी प्रेमिका के किरदार में शरवरी वाघ नजर आई हैं।इम्तियाज अली का चिर-परिचित अंदाजइम्तियाज अली को स्क्रीन पर प्यार और जिंदगी के फलसफे को बेहद खूबसूरती से उकेरने के लिए जाना जाता है। चाहे बात 2009 की 'लव आज कल' की हो, 'रॉकस्टार' के जुनून की हो या फिर 'तमाशा' की, उन्होंने हमेशा दर्शकों को रोमांस का एक अलग ही नजरिया दिया है। 'मैं वापस आऊंगा' में भी उनके इसी खूबसूरत डायरेक्शन और बेहतरीन गानों ने एक बार फिर से दर्शकों को अपना दीवाना बना लिया है।
छत्तीसगढ़ में मानसूनी हवाएं एक बार फिर पूरी तरह से मेहरबान हो गई हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के रायपुर केंद्र के अनुसार उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उत्तरी ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट पर बना कम दबाव का क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है। इसके साथ ही मानसून ट्रफ भी मध्य भारत से होकर गुजर रहा है। इन दोनों मौसमी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से प्रदेश में तेजी से नमी आ रही है, जिसके चलते आगामी 31 जुलाई और 1 अगस्त तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम और कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहेगा।तापमान में 4 डिग्री तक गिरावट, उमस से मिलेगी राहतलगातार हो रही बारिश और बादलों की आवाजाही के कारण अगले 24 घंटों के भीतर छत्तीसगढ़ के अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। इसके बाद तापमान में ज्यादा बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। अचानक आए इस मौसमी बदलाव से लोगों को पिछले कुछ दिनों से सता रही भीषण उमस और गर्मी से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों ने बारिश के साथ-साथ तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) की आशंका जताते हुए लोगों को सतर्क रहने को कहा है।ऑरेंज और येलो अलर्ट वाले प्रमुख जिलेमौसम विभाग ने भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी देते हुए कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, बिलासपुर, दुर्ग, बेमेतरा और मुंगेली सहित कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं रायपुर, बस्तर, सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कोरबा, जशपुर, सरगुजा और बलरामपुर जैसे जिलों में येलो अलर्ट रहेगा, जहां 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। प्रशासन ने बारिश और तूफान के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों तथा बिजली के खंभों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है।
आजकल हर कोई नए स्टार्टअप और इनोवेटिव बिजनेस आइडिया की बात कर रहा है। कोई एआई से पैसे बना रहा है तो कोई कबाड़ से करोड़ों का कारोबार खड़ा कर रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस देश में कुएं, तालाब और नदियों का पानी बिल्कुल मुफ्त मिलता हो, वहां कोई पानी बेचकर अरबपति बन सकता है? साल 1969 में जब जयंतीलाल चौहान ने यह आइडिया दुनिया के सामने रखा, तो लोगों ने उन्हें पागल समझकर उनका खूब मजाक उड़ाया। लेकिन उनकी उसी दूरदर्शी सोच और जिद ने आज बिसलेरी को 7000 करोड़ रुपये की विशाल कंपनी बना दिया है।इटली की दवा कंपनी से भारत का नंबर वन ब्रांड बनने का सफरबिसलेरी का इतिहास काफी दिलचस्प है। यह मूल रूप से इटली की एक फार्मा कंपनी थी जो मलेरिया की दवाएं बेचा करती थी। इसके असली मालिक फेलिस बिसलेरी थे। भारतीय बाजार की क्षमता को देखते हुए बाद में पारले ग्रुप ने इसे सिर्फ चार लाख रुपये में खरीद लिया। 1969 में रमेश चौहान ने बिसलेरी की कमान अपने हाथों में ली। उनका शुरुआती मकसद इसे एक सोडा ब्रांड के रूप में स्थापित करना था, लेकिन उन्होंने बोतलबंद पानी बेचना भी जारी रखा। साठ के दशक में कांच की बोतलों में पानी बेचना एक बेवकूफी माना जाता था, लेकिन धीरे-धीरे लोगों को सुरक्षित और शुद्ध पानी की अहमियत समझ आने लगी और यह ब्रांड हर भारतीय की जरूरत बन गया।टाटा से डील की अफवाहों पर लगा विराम, बेटी ने संभाली कमानकुछ समय पहले बाजार में यह खबर जोरों पर थी कि 82 वर्षीय रमेश चौहान अपनी बढ़ती उम्र के कारण कंपनी बेचना चाहते हैं। टाटा और रिलायंस जैसी दिग्गज कंपनियों के इस रेस में शामिल होने की खबरें भी आईं। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि उनकी इकलौती बेटी जयंती चौहान की इस बिजनेस में कोई खास दिलचस्पी नहीं है। हालांकि, बाद में ये सारी बातें महज अफवाह साबित हुईं। आज जयंती चौहान ही पूरी मजबूती के साथ बिसलेरी का यह विशाल कारोबार संभाल रही हैं। वर्तमान में कंपनी के पास 122 से ज्यादा ऑपरेशनल प्लांट, 5000 ट्रकों का बेड़ा और 4500 से अधिक डिस्ट्रीब्यूटर्स का एक बेहद मजबूत नेटवर्क मौजूद है।भारत में तेजी से बढ़ता बोतलबंद पानी का बाजारभारत में बोतलबंद पानी का बिजनेस अब एक बहुत बड़ा उद्योग बन चुका है। मौजूदा समय में भारत दुनिया के उन टॉप दस देशों में शामिल है जहां पैक्ड वाटर का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 तक यह बाजार 9.14 अरब डॉलर का हो चुका है और 2031 तक इसके 14.9 अरब डॉलर के आंकड़े को छूने की पूरी संभावना है। इस विशाल बाजार में किनले और एक्वाफिना जैसे बड़े प्रतिद्वंदियों के बावजूद, करीब 40 फीसदी की भारी-भरकम हिस्सेदारी के साथ बिसलेरी आज भी नंबर वन की कुर्सी पर काबिज है।
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों और वैज्ञानिकों के लिए एक बेहद सुखद खबर सामने आई है। अपनी अनोखी बनावट और चमकदार लाल रंग के लिए जाना जाने वाला दुर्लभ 'रेड कोरल खुकरी' (लाल मूंगा खुकरी) सांप एक बार फिर जंगलों में रेंगता हुआ देखा गया है। बेहद कम नजर आने वाले इस जीव का दिखना वन विभाग और शोधकर्ताओं के लिए कौतूहल और खुशी का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रजाति की मौजूदगी दुधवा के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का एक बड़ा प्रमाण है।1936 में पहली बार आया था नजर, दशकों बाद फिर दिखाऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, इस प्रजाति को सबसे पहले साल 1936 में दुधवा के जंगलों में ही दर्ज किया गया था। इसके बाद कई दशकों तक यह इंसानी नजरों से पूरी तरह ओझल रहा। लगभग 80 साल के लंबे अंतराल के बाद इसे दुधवा टाइगर रिजर्व के दक्षिण सुनारीपुर रेंज में रेलवे ट्रैक के पास देखा गया। जंगलों के बीच इस जीव का दोबारा दिखना यह साबित करता है कि यहां जैव विविधता और प्राकृतिक आवास पूरी तरह सुरक्षित हैं।खुकरी जैसे दांत और बिना जहर वाला स्वभावलाल मूंगा खुकरी सांप की सबसे बड़ी खासियत इसका एक समान चमकदार मूंगा लाल रंग है, जो इसे बाकी सांपों से बिल्कुल अलग बनाता है। इसके दांत हल्के घुमावदार होते हैं, जिनकी आकृति पारंपरिक नेपाली खंजर 'खुकरी' जैसी होती है, इसी वजह से इसका नाम खुकरी पड़ा है। हालांकि, इसका चटख लाल रंग देखकर लोग डर जाते हैं, लेकिन विशेषज्ञ बताते हैं कि यह सांप पूरी तरह से गैर-विषैला (Non-venomous) होता है। यह इंसानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता और इसका मुख्य भोजन छिपकलियां, छोटे कीड़े-मकोड़े और अन्य जीव हैं।रात के अंधेरे में रहता है सक्रिययह सांप मुख्य रूप से एक निशाचर (Nocturnal) जीव है, जो दिन के समय सूखे पत्तों, झाड़ियों या जमीन की दरारों में छिपा रहता है। रात ढलते ही यह भोजन की तलाश में बाहर निकलता है, यही वजह है कि यह आम तौर पर लोगों को दिखाई नहीं देता। यह दुर्लभ प्रजाति उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों, बिहार, पश्चिम बंगाल और नेपाल के जंगलों में सीमित संख्या में पाई जाती है। सीमित आबादी के कारण इसे विशेष संरक्षण की श्रेणी में रखा गया है।
NEET पेपर लीक प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की सभी याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई का फैसला किया है। कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय स्तर की गाइडलाइन तैयार की जाएगी।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि मंत्री केशव महंता की बेटी के पीएम मोदी पर दिए बयान से उन्हें दुख पहुंचा है। उन्होंने कहा हर वयस्क व्यक्ति अपनी अलग राजनीतिक सोच रख सकता है। बच्चों के विचारों के लिए माता-पिता को जिम्मेदार नहीं ठहराया ...
पुण्यतिथि विशेष: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन परिचय और महत्वपूर्ण कार्य
APJ Abdul Kalam Death Anniversary Special: हर वर्ष 27 जुलाई को भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक और 'मिसाइल मैन ऑफ इंडिया' के नाम से प्रसिद्ध रहे डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि मनाई जाती है। उन्होंने भारत के रक्षा एवं अंतरिक्ष ...
LIVE: लोकसभा में पेश होगा पेपर लीक संशोधन बिल, पेलेट गन पर हंगामे के आसार
Latest News Today Live Updates in Hindi : मोदी सरकार आज दोपहर 12 बजे लोकसभा में पेपर लीक संशोधन बिल पेश करेगी। संसद में विपक्ष आज युवाओं पर पेलेट गन चलाने हंगामा कर सकता है। पल पल की जानकारी...
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को सुरक्षा देने की मांग तेज हो गई है। महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट ने परिवार से मुलाकात कर मुख्यमंत्री से सुरक्षा उपलब्ध कराने की बात कही। टाइफाइड के कारण दीपके अब तक घर नहीं लौटे हैं।
असम, गुजरात और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित किया है। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में बादल फटने से पुल और सड़क बह गई। असम में बाढ़ से अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है तो गुजरात में भारी ...
पीएम मोदी पर आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर दिल्ली पुलिस सख्त, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भेजा नोटिस
दिल्ली पुलिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक पोस्ट, वीडियो और तस्वीरों को हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेजा है। जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी बढ़ा दी गई है।
APJ Abdul Kalam Death Anniversary: गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोमवार को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि कलाम जी के उच्च आदर्श, सादगी और प्रगतिशील विचारधारा देशवासियों ...
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अपने पीएचडी दाखिला नियमों में बहुत बड़ा बदलाव किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत लागू किए गए राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा योग्यता फ्रेमवर्क (NHEQF) को अपनाते हुए डीयू ने पीएचडी अध्यादेश में संशोधन किया है। इस नए नियम के तहत अब चार साल का ग्रेजुएशन पूरा करने वाले मेधावी छात्र बिना पोस्ट-ग्रेजुएशन (मास्टर डिग्री) के सीधे पीएचडी में दाखिला पा सकेंगे। इस कदम का उद्देश्य प्रतिभाशाली युवाओं का समय बचाना और उन्हें कम उम्र में ही रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ने के शानदार अवसर प्रदान करना है।मास्टर डिग्री की अनिवार्यता हुई खत्म, बचेगा छात्रों का समयपारंपरिक अकादमिक व्यवस्था के अनुसार, किसी भी छात्र को पीएचडी में एडमिशन लेने के लिए पहले 3 साल की स्नातक डिग्री और उसके बाद 2 साल की मास्टर डिग्री (जैसे एमए, एमएससी या एमकॉम) पास करना अनिवार्य होता था। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था। लेकिन अब नए नियमों के लागू होने के बाद, जिन विद्यार्थियों ने 8-सेमेस्टर यानी 4 साल का अंडरग्रेजुएट कोर्स पूरा कर लिया है, वे बिना किसी मास्टर डिग्री के सीधे पीएचडी रिसर्च के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे। इससे छात्रों का एक से दो साल का कीमती समय बचेगा और वे सीधे शोध की दुनिया में कदम रख सकेंगे।सीधे पीएचडी एडमिशन के लिए 75% अंकों की कड़ी शर्तचार साल के ग्रेजुएशन के बाद सीधे पीएचडी में दाखिला पाना हालांकि आसान नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कड़े पात्रता मानदंड तय किए हैं। इस श्रेणी के तहत आवेदन करने वाले सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के 4-वर्षीय स्नातक कोर्स में कम से कम 75% अंक या इसके समकक्ष सीजीपीए (CGPA) होना अनिवार्य किया गया है।इसके साथ ही, आरक्षित वर्गों के छात्रों को राहत दी गई है। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC-NCL), दिव्यांगजन (PwBD) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम अंकों की सीमा में 5% की छूट का प्रावधान किया गया है। इसका मतलब यह है कि इन आरक्षित श्रेणियों के छात्रों के लिए 4-वर्षीय स्नातक में कम से कम 70% अंक होना आवश्यक होगा।3-वर्षीय ग्रेजुएशन और पारंपरिक पोस्ट-ग्रेजुएशन वालों के लिए क्या हैं नियम?डीयू ने स्पष्ट किया है कि पुरानी शिक्षा प्रणाली के तहत पढ़ने वाले विद्यार्थियों के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जो इस प्रकार हैं:1-वर्षीय मास्टर डिग्री: जिन छात्रों ने 4-वर्षीय ग्रेजुएशन के बाद 1 साल की मास्टर डिग्री की है, उन्हें पीजी स्तर पर कम से कम 55% अंक (आरक्षित वर्ग के लिए 50%) प्राप्त करने होंगे।2-वर्षीय मास्टर डिग्री: पारंपरिक 3-वर्षीय ग्रेजुएशन के बाद 2 साल की मास्टर डिग्री पूरी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी न्यूनतम 55% अंकों की पात्रता पूर्ववत लागू रहेगी।एम.फिल (M.Phil) धारक: जिन विद्यार्थियों ने कम से कम 55% अंकों के साथ एम.फिल कोर्स पूरा किया है, वे भी पीएचडी में प्रवेश के लिए पूरी तरह योग्य माने जाएंगे।प्रवेश परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर होगा अंतिम चयनचार साल के ग्रेजुएशन के बाद सीधे पीएचडी में दाखिला चाहने वाले सभी अभ्यर्थियों को विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके तहत उम्मीदवारों को राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा (जैसे यूजीसी नेट, सीएसआईआर नेट या डीयू की प्रवेश परीक्षा) पास करनी होगी। परीक्षा में सफल होने के बाद संबंधित विभाग के इंटरव्यू (साक्षात्कार) के आधार पर अंतिम रूप से छात्रों का चयन किया जाएगा। डीयू के इस दूरदर्शी कदम से यूनिवर्सिटी में रिसर्च का स्तर और अधिक उन्नत होगा तथा युवा शोधकर्ता कम उम्र में ही देश के विकास में अपना वैज्ञानिक व शैक्षणिक योगदान दे सकेंगे।
सोमवार, 27 जुलाई 2026 के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50 के हरे निशान के साथ मजबूत शुरुआत करने की पूरी उम्मीद है। पिछले सत्र में गिरावट का सामना करने वाले दलाल स्ट्रीट के लिए आज का दिन राहत भरा साबित हो सकता है। ग्लोबल मार्केट से मिल रहे सकारात्मक संकेतों, अमेरिका-ईरान के बीच तनाव घटने और कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के चलते आज शेयर बाजार में जोरदार उड़ान देखने को मिल सकती है। निवेशकों की धारणा को मजबूत करने वाले ऐसे ही 7 प्रमुख संकेतों और बाजार के लेटेस्ट अपडेट पर आइए एक नजर डालते हैं।1. गिफ्ट निफ्टी दे रहा है शानदार गैप-अप की शुरुआत का संकेतभारतीय शेयर बाजार के लिए प्री-ओपनिंग में ही अच्छी खबर सामने आ रही है। गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) आज 23,934 के आसपास कारोबार करता नजर आया, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद भाव से करीब 127.5 अंकों का मजबूत प्रीमियम है। यह साफ तौर पर इस बात का संकेत दे रहा है कि आज घरेलू बाजार की शुरुआत एक शानदार गैप-अप के साथ हो सकती है।2. कच्चे तेल (Crude Oil) के दामों में 5% की बड़ी गिरावटबाजार के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर क्रूड ऑयल के मोर्चे से आई है। ईरान द्वारा हमलों को रोकने की घोषणा करने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 5% से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फिसलकर करीब 92 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जबकि यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड भी गिरकर लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। तेल सस्ता होने से भारत जैसे आयातक देशों को बड़ा आर्थिक फायदा मिलता है।3. एशियाई बाजारों में चौतरफा जोरदार तेजीवैश्विक मोर्चे पर एशियाई बाजारों की शुरुआत भी आज जबरदस्त बढ़त के साथ हुई है। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 0.24% और टॉपिक्स 0.60% मजबूत हुआ है। इसके अलावा दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 0.44% और स्मॉल-कैप कोस्डैक 1.49% की छलांग के साथ कारोबार कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया का बेंचमार्क S&P/ASX 200 भी 0.97% की तेजी के साथ हरे निशान में है, जिसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिलेगा।4. अमरीकी बाजार वॉल स्ट्रीट से मिले मजबूत संकेतसप्ताहांत में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद वॉल स्ट्रीट के फ्यूचर्स में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में रविवार रात जोरदार उछाल दर्ज हुआ। डॉऊ जोन्स फ्यूचर्स में 244 अंक (0.5%) की बढ़त आई, एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.6% चढ़ा, जबकि टेक शेयरों की अगुवाई वाले नैस्डैक 100 फ्यूचर्स ने 1.2% की शानदार तेजी के साथ मार्केट का नेतृत्व किया।5. अमेरिका-ईरान तनाव में नरमी और युद्ध के माहौल पर ब्रेकईरान पर पिछले 13 दिनों से लगातार चल रहे हमलों के बाद शुक्रवार देर रात से अमेरिका ने फिलहाल नए हमलों से परहेज किया है। इससे भू-राजनीतिक तनाव में काफी कमी आई है। वहीं, ईरान की सेना ने भी यह बयान दिया है कि तेहरान ने अपनी जवाबी सैन्य प्रतिक्रियाओं को फिलहाल रोक दिया है। हालांकि यमन के हूती विद्रोहियों की कुछ छिटपुट हरकतों के बावजूद ग्लोबल लेवल पर युद्ध का डर कम हुआ है, जिससे शेयर बाजारों ने राहत की सांस ली है।6. आज आने वाले हैं दिग्गज कंपनियों के Q1 नतीजेकॉर्पोरेट जगत के लिहाज से भी आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। आज देश भर की करीब 68 प्रमुख कंपनियां अपनी अप्रैल-जून तिमाही (Q1 FY27) के वित्तीय परिणाम घोषित करने वाली हैं। इनमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), कोल इंडिया, इंडस टावर्स, कोफोर्ज, केनरा बैंक और टाटा पावर जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों के नतीजों के आधार पर आज चुनिंदा शेयरों में जबरदस्त एक्शन देखने को मिल सकता है।7. सोने की कीमतों में एक फीसदी से अधिक की तेजीकमोडिटी मार्केट की बात करें तो आज सोने के भावों में फिर से उछाल आया है। वैश्विक मांग और निवेश के कारण सोने की कीमतें सोमवार को 1% से ज्यादा चढ़ गईं। स्पॉट गोल्ड बढ़कर 4,103.99 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि अगस्त डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.9 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,106.10 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है।
Gold Price Fall 2026: अपने पीक से 37,000 रुपये धड़ाम हुआ सोना! जानें क्या यह है निवेश का सही समय
साल 2026 की शुरुआत में आसमान छूने वाली सोने की कीमतों (Gold Price Today) में अब भारी गिरावट देखने को मिल रही है। जनवरी 2026 में भारत में सोना 1 लाख 80 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के अपने रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था, जो अब घटकर करीब 1.43 लाख रुपये पर आ गया है। यानी सोना अपने उच्चतम स्तर से सीधा 37,000 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है। वैश्विक स्तर पर भी सोने की चमक फीकी पड़ी है और जनवरी के 5,602 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर से करीब 28 फीसदी टूटकर यह अब 4,040 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। ऐसे में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या लगातार गिरते बाजार में अब सोना खरीदना चाहिए या अभी कीमतों में और गिरावट आने का इंतजार करना चाहिए?सोने की कीमतों में भारी गिरावट के प्रमुख कारणआर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों पर दबाव के पीछे दो सबसे बड़े कारण हैं: पहला, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की सख्त मौद्रिक नीति और दूसरा, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव। फेड के चेयरमैन केविन वॉर्श ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता सिर्फ महंगाई पर काबू पाना है। बाजार को उम्मीद नहीं है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कोई कटौती होगी, बल्कि सितंबर की बैठक में दरें और बढ़ने की आशंका है। जब ब्याज दरें ज्यादा होती हैं, तो निवेशक सोने के बजाय बेहतर रिटर्न देने वाले अन्य विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे गोल्ड पर दबाव बढ़ता है। इसके अलावा ईरान युद्ध, सैन्य कार्रवाई और कच्चे तेल की कीमतों में जारी अनिश्चितता का भी सोने के ग्लोबल मार्केट पर गहरा असर पड़ा है।क्या अब सोना खरीदना फायदे का सौदा है? ( ऐतिहासिक आंकड़े)अगर आप सोने में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो इसके ऐतिहासिक ट्रेंड को समझना बेहद जरूरी है। भले ही शॉर्ट टर्म में सोने में भयंकर उतार-चढ़ाव देखा जा रहा हो, लेकिन लॉन्ग टर्म में गोल्ड हमेशा मुनाफे का सौदा रहा है। पिछले 30 सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सोने ने निवेशकों को करीब 950 फीसदी का शानदार रिटर्न दिया है। वहीं, पिछले 5 सालों में भी इसकी सालाना चक्रवृद्धि दर (CAGR) 19 फीसदी के आसपास रही है। हालांकि, बाजार का इतिहास यह भी गवाह है कि जब भी सोना रिकॉर्ड हाई बनाता है, तो उसके बाद उसमें 40% तक का तगड़ा करेक्शन (गिरावट) भी देखने को मिलता है।निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?बाजार के जानकारों और वेल्थ मैनेजर्स का मानना है कि ग्लोबल टेंशन और फेड रेट्स के कारण शॉर्ट टर्म में सोने की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। इसलिए, अगर आप लंबी अवधि के नजरिए से अपने पोर्टफोलियो में 10 से 15 फीसदी गोल्ड रखना चाहते हैं, तो एक साथ सारा पैसा लगाने से बचें। इसके बजाय, गिरावट वाले इस बाजार में अलग-अलग समय पर धीरे-धीरे (SIP की तर्ज पर) सोने में खरीदारी करना एक समझदारी भरी और सुरक्षित रणनीति साबित हो सकती है।
उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के शिक्षकों को ऐतिहासिक सौगात देते हुए 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस योजना' का शुभारंभ किया है। इस योजना के तहत अब राज्य के सरकारी, अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) और स्ववित्त पोषित विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को शानदार स्वास्थ्य बीमा और कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए उच्च शिक्षा विभाग और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) साइन किया गया है, जिससे प्रदेश के लगभग 10 लाख लोगों को सीधा और बड़ा सामाजिक सुरक्षा कवर प्राप्त होगा।1.5 करोड़ से 3 करोड़ तक की आर्थिक सहायता और कई बड़े फायदेयोजना का शुभारंभ करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने बताया कि इसका दायरा व्यापक रखते हुए इसमें 50 हजार से अधिक शिक्षणेतर कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। पंजाब नेशनल बैंक के साथ हुए इस समझौते के मुताबिक, किसी भी अनहोनी या दुर्घटना की स्थिति में शिक्षकों के परिवार को 1.5 करोड़ से 3 करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता राशि दी जाएगी। इसके अलावा, अस्पताल में 60,000 रुपये तक का नकद लाभ और 12 लाख रुपये तक का टर्म लाइफ बीमा कवर भी प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने पीएनबी से निजी विश्वविद्यालयों और स्ववित्त पोषित संस्थानों के शिक्षकों को भी इस सुरक्षा दायरे से पूरी तरह जोड़ने का विशेष आग्रह किया है।हर परिवार को मिलेगा 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाजमुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना से प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत 1.28 लाख से अधिक शिक्षकों को सीधा लाभ पहुंचेगा। इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को सूबे के सूचीबद्ध सरकारी व निजी अस्पतालों में हर साल 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि कार्ड बनते ही पहले दिन से ही लाभार्थी इसका इस्तेमाल कर सकेंगे। अस्पताल में भर्ती होने से लेकर दवाइयों, जांच और डिस्चार्ज होने तक का सारा खर्च राज्य सरकार द्वारा उठाया जाएगा। इसके संचालन की जिम्मेदारी साचीज संस्था को दी गई है और इसमें आयुष्मान भारत योजना की दरें ही लागू होंगी।कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का भी होगा मुफ्त इलाजइस योजना के दायरे में आने वाले पैनल के अस्पतालों में 1900 से अधिक बीमारियों के इलाज का पैकेज मिलेगा, जिसमें कैंसर, किडनी की गंभीर समस्या, हृदय रोग और बड़ी सर्जरी जैसी महंगी चिकित्सा प्रक्रियाएं भी शामिल हैं। योजना को धरातल पर उतारने के लिए सभी जिलों में विशेष कैंप लगाकर योग्य शिक्षकों और कर्मचारियों को कार्ड वितरित किए जाएंगे। इस मौके पर आगरा कॉलेज, सेंट जॉन्स कॉलेज, आरबीएस कॉलेज और डॉ. भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी समेत विभिन्न संस्थानों के शिक्षकों को मुख्यमंत्री के हाथों सांकेतिक रूप से योजना के कार्ड सौंपे गए।सोशल मीडिया की अफवाहों से युवाओं को बचाएं शिक्षक: सीएम योगीइस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों को महत्वपूर्ण नसीहत देते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया और इंटरनेट पर बहुत निर्भर है। ऐसे में फर्जी और अनाम अकाउंट्स के जरिए फैलाई जाने वाली अफवाहें समाज में विद्वेष पैदा कर सकती हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे डिजिटल युग में युवाओं को सही और गलत का फर्क समझाएं और उन्हें देश विरोधी ताकतों की साजिशों के प्रति सतर्क रखें। इस अवसर पर कई दिग्गज मंत्री, सांसद, विधायक और विश्वविद्यालयों के कुलपति व अधिकारी मौजूद रहे।
हरियाणा के नूंह जिले से एक बेहद चौंकाने और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की बड़ी लापरवाही का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक चार साल के मासूम बच्चे के बाएं पैर के बजाय दाहिने पैर की सर्जरी कर दी गई। जब परिजनों को इस गंभीर गलती का पता चला तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। हालांकि, मामला बढ़ने के बाद डॉक्टर ने अपनी गलती स्वीकार भी कर ली, लेकिन परिजनों की शिकायत पर अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ गया है और इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए चार डॉक्टरों की एक विशेष कमेटी का गठन कर दिया गया है।क्या है पूरा मामला? जानिए कैसे हुआ लापरवाही का यह खेलयह पूरी शर्मनाक घटना नूंह जिले के नल्हड़ स्थित शहीद हसन खान मेवाती सरकारी मेडिकल कॉलेज की है। बच्चे के पिता आरिफ द्वारा दी गई शिकायत के मुताबिक, उनके चार साल के बेटे के बाएं पैर में फोड़ा हो गया था, जिसके इलाज के लिए वे 20 जुलाई को इस अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टरों की सलाह पर बच्चे को भर्ती किया गया, लेकिन जब सर्जरी के बाद बच्चे को ऑपरेशन थिएटर से बाहर लाया गया, तो परिवारवालों के होश उड़ गए। डॉक्टरों ने बाएं पैर की जगह बच्चे के दाहिने पैर का ऑपरेशन कर दिया था, जबकि उस पैर में किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं थी।डॉक्टर ने कबूली गलती और बाद में किया दूसरा ऑपरेशनपरिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने इस गंभीर चूक का विरोध किया, तो संबंधित सर्जन ने अपनी गलती मान ली। पिता आरिफ के अनुसार, मामले में आरोपी ऑर्थोपेडिक्स (अस्थि रोग विशेषज्ञ) डॉ. पवन कुमार ने अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखने के बाद यह स्वीकार किया कि सर्जरी वास्तव में बाएं पैर में की जानी थी। अपनी गलती छिपाने या सुधारने के चक्कर में डॉक्टर ने कथित तौर पर परिवार से कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है और इसके बाद उन्होंने बच्चे के दूसरे (असली) पैर की भी सर्जरी कर दी। इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना हरकत ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने बनाई 4 डॉक्टरों की जांच कमेटीपरिजनों ने इस पूरी लापरवाही को लेकर अस्पताल प्रशासन को एक लिखित शिकायत सौंपी है, जिसके बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच बिठा दी है। शहीद हसन खान मेवाती सरकारी मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. मुकेश कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें इस मामले में एक लिखित शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए चार वरिष्ठ डॉक्टरों की एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है। निदेशक ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
क्या आपकी भी सुबह की शुरुआत बिना फोन की स्क्रीन देखे नहीं होती? क्या आप भी रात में सोते समय अपना फोन अपने तकिए के पास रखते हैं ताकि आंख खुलते ही सबसे पहले आप सोशल मीडिया या नोटिफिकेशन्स चेक कर सकें? अगर आपका जवाब हां है, तो आप अकेले नहीं हैं। आज की इस डिजिटल दुनिया में ज्यादातर लोगों की सुबह इसी तरह मोबाइल स्क्रीन के साथ होती है। अक्सर हम और आप इसे केवल एक बुरी लत (Addiction) मान लेते हैं, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इसके पीछे सिर्फ लत नहीं, बल्कि हमारे दिमाग का एक खास व्यवहार और प्राकृतिक जरूरत जुड़ी हुई है। आइए विज्ञान की नजर से समझते हैं कि सुबह उठते ही दिमाग हमारे साथ यह खेल क्यों खेलता है।नई जानकारी की तलाश करता है हमारा दिमागसुबह आंख खुलते ही सबसे पहले फोन चेक करने की आदत का सीधा संबंध हमारे मस्तिष्क के व्यवहार से है। जब हम रात भर की लंबी नींद के बाद सुबह जागते हैं, तो हमारा दिमाग तुरंत बाहरी दुनिया से दोबारा जुड़ने और नई जानकारियों की तलाश करने के लिए उत्सुक हो जाता है। इस दुनिया में क्या नया चल रहा है, किसी का कोई मैसेज तो नहीं आया या कोई जरूरी अपडेट तो नहीं छूट गया, इन सब बातों को जानने की जिज्ञासा दिमाग के अंदर बनी रहती है। फोमो (FOMO - Fear Of Missing Out) यानी कुछ छूट जाने के डर को कम करने के लिए दिमाग हमें मजबूर करता है कि हम सबसे पहले अपना फोन उठाएं। धीरे-धीरे यह उत्सुकता एक पक्की आदत में बदल जाती है और हम बिना सोचे-समझे यह काम ऑटोमैटिक तरीके से करने लगते हैं।'क्यू-रूटीन-रिवॉर्ड' साइकिल का जाल है यह आदतमनोविज्ञान के अनुसार, सुबह उठते ही फोन देखने की यह पूरी प्रक्रिया एक तयशुदा 'क्यू-रूटीन-रिवॉर्ड' साइकिल पर काम करती है। सबसे पहले आपको 'क्यू' यानी संकेत मिलता है, जैसे ही आपकी आंखें खुलती हैं, आपका दिमाग आपको फोन चेक करने का सिग्नल भेजता है। इसके बाद 'रूटीन' शुरू होता है जिसमें आप तुरंत अपना फोन अनलॉक करके सोशल मीडिया या चैट्स को स्क्रॉल करने लगते हैं। अंत में आता है 'रिवॉर्ड', जैसे ही स्क्रीन पर कोई नया नोटिफिकेशन या मैसेज दिखाई देता है, दिमाग को एक प्रकार का संतोष और राहत मिलती है कि आप दुनिया से कटे नहीं हैं। यह मानसिक संतोष दिमाग के लिए एक रिवॉर्ड बन जाता है और फिर वह इस साइकिल को हर रोज दोहराने की जिद करने लगता है।क्या यह सच में स्मार्टफोन की गंभीर लत है?यह समझना बेहद जरूरी है कि सुबह उठते ही कुछ पलों के लिए फोन देखना हमेशा कोई गंभीर एडिक्शन नहीं होता। यह सिर्फ आपके दिमाग की नेचुरल उत्सुकता और नया जानने की चाहत का नतीजा हो सकता है। हालांकि, अगर यह छोटी सी आदत देखते ही देखते बिना किसी काम के घंटों तक सोशल मीडिया स्क्रॉल करने में बदल जाती है, तो यह आपकी मानसिक सेहत, फोकस और पूरे दिन की प्रोडक्टिविटी को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। इसलिए सुबह की शुरुआत मेडिटेशन, वॉक या गहरी सांसों के साथ करें, न कि मोबाइल स्क्रीन की नीली रोशनी के साथ।
आज की तेज-तर्रार और आधुनिक लाइफस्टाइल में लंबे समय तक कंप्यूटर, लैपटॉप और स्मार्टफोन की स्क्रीन पर चिपके रहना आम बात हो गई है। गलत पोश्चर में बैठकर घंटों काम करने, लगातार तनाव लेने और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण आज के समय में गर्दन का दर्द और अकड़न हर दूसरे व्यक्ति की समस्या बन चुकी है। यही वजह है कि युवाओं से लेकर कामकाजी लोगों में सर्वाइकल पेन, कंधों में जकड़न और सिरदर्द की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं। अगर आप भी दिनभर स्क्रीन देखने के कारण गर्दन के दर्द से परेशान हैं, तो दवाइयों का सहारा लेने के बजाय योग को अपनाना सबसे सुरक्षित और प्राकृतिक उपाय है। नियमित रूप से कुछ खास योगासन करने से न सिर्फ मसल्स रिलैक्स होती हैं, बल्कि ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है। आइए जानते हैं गर्दन के दर्द से हमेशा के लिए छुटकारा पाने वाले कुछ बेहद असरदार योगासन और उनके फायदों के बारे में।गर्दन की जकड़न और दर्द को दूर करने वाले असरदार योगासनगर्दन और कंधों के तनाव को चुटकियों में दूर करने के लिए आप अपनी डेली रूटीन में इन आसान योगासनों को शामिल कर सकते हैं:ग्रीवा संचलन (Neck Rotation): सीधे बैठकर अपनी गर्दन को धीरे-धीरे बाएं-दाएं और आगे-पीछे घुमाएं। यह बहुत ही आसान एक्सरसाइज है जिसे आप ऑफिस में कुर्सी पर बैठे-बैठे भी कर सकते हैं। इससे मांसपेशियों की जकड़न खुलती है और ब्लड फ्लो तेज होता है।भुजंगासन (Cobra Pose): पेट के बल लेटकर अपनी हथेलियों के सहारे छाती को ऊपर की ओर उठाएं। यह आसन आपकी गर्दन, कंधों और रीढ़ की हड्डी की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और सर्वाइकल के दर्द में बहुत राहत देता है।मार्जरी-बिटिलासन (Cat-Cow Pose): घुटनों के बल बैठकर अपनी रीढ़ की हड्डी को ऊपर और नीचे की तरफ मूव करें। इससे गर्दन और रीढ़ में गजब का लचीलापन आता है और दिनभर का मानसिक तनाव धीरे-धीरे कम होने लगता है।सेतु बंधासन (Bridge Pose): पीठ के बल लेटकर अपनी कमर को हवा में उठाएं और गर्दन को पूरी तरह रिलैक्स रखें। यह योगासन गर्दन के हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और मेंटल प्रेशर को घटाता है।बालासन (Child's Pose): घुटनों के बल बैठकर अपने सिर को जमीन पर टिकाएं। यह आसन गर्दन, कंधे और पीठ की सारी थकान को दूर कर देता है और दिमाग को पूरी तरह शांत रखता है।गोमुखासन (Cow Face Pose): इस आसन के अभ्यास से कंधे और गर्दन की मसल्स में बहुत अच्छा खिंचाव (स्ट्रेच) होता है, जिससे जकड़न छूमंतर हो जाती है और शरीर का पोश्चर सुधरता है।ताड़ासन (Mountain Pose): सीधे खड़े होकर अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर खींचते हुए शरीर को स्ट्रेच करें। यह रीढ़ को सीधा रखता है, गर्दन पर पड़ने वाले दबाव को कम करता है और शरीर का संतुलन सुधारता है।अर्ध मत्स्येन्द्रासन (Half Lord of the Fishes Pose): रीढ़ की हड्डी को ट्विस्ट करने वाले इस आसन से गर्दन और कंधों की नसों का ब्लॉकेज दूर होता है और लचीलापन बढ़ता है।शवासन (Corpse Pose): पूरे शरीर को ढीला छोड़कर आंखें बंद कर लें और गहरी सांस लें। यह मेंटल स्ट्रेस, सिरदर्द और गर्दन की थकान को मिटाने का सबसे बेहतरीन तरीका है।प्राणायाम (Breathing Exercises): सही तरीके से गहरी सांस लेने वाले प्राणायाम करने से शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ती है, नसों को शांति मिलती है और तनाव छूमंतर हो जाता है।इन बातों का भी रखें खास ख्यालअगर आप रोजाना महज 20 से 30 मिनट निकालकर इन योगासनों का अभ्यास करते हैं, तो गर्दन के दर्द और अकड़न से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकते हैं। इसके अलावा काम के दौरान हर एक घंटे पर स्क्रीन ब्रेक लें, सही पोश्चर में बैठें, भरपूर मात्रा में पानी पिएं और बीच-बीच में हल्की स्ट्रेचिंग जरूर करें ताकि आपकी सेहत हमेशा दुरुस्त बनी रहे।
Aaj Ka Panchang 27 July 2026: जानिए आज की त्रयोदशी तिथि, शुभ रवि योग, राहुकाल और सभी जरूरी मुहूर्त
आज 27 जुलाई 2026, सोमवार का दिन है और हिंदू पंचांग के अनुसार यह दिन धार्मिक दृष्टिकोण से बेहद खास माना जा रहा है। आज आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शाम 4:15 बजे तक रहेगी, जिसके बाद चतुर्दशी तिथि का आरंभ हो जाएगा। इसके अलावा, आज नक्षत्रों और योगों के खास संयोग के बीच कई महत्वपूर्ण कार्य संपन्न किए जा सकेंगे। अगर आप भी आज कोई नया काम शुरू करने जा रहे हैं, पूजा-पाठ का प्लान बना रहे हैं या किसी शुभ मुहूर्त की तलाश में हैं, तो यहां जानिए आज का पूरा और सटीक पंचांग।आज का पंचांग और मुख्य खगोलीय गणनाएंहिंदू धर्म में किसी भी नए कार्य, व्रत, त्योहार या मांगलिक आयोजन की शुरुआत करने से पहले पंचांग देखने की प्राचीन परंपरा रही है। आज शक संवत 1948 और विक्रम संवत 2083 के अनुसार आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी तिथि है। नक्षत्रों की बात करें तो मूल नक्षत्र सुबह 10:29 बजे तक रहेगा, जिसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार आज वैधृति योग रात्रि 10:55 बजे तक रहेगा और इसके बाद विष्कुम्भ योग लग जाएगा। करण की दृष्टि से तैतिल करण प्रभावी रहेगा और चंद्रमा पूरे दिन-रात धनु राशि में ही संचरण करेंगे। सूर्यदेव दक्षिणायन स्थिति में हैं।सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समयआज के दिन की शुरुआत और रात्रि के समय की बात करें तो पंचांग के अनुसार सूर्योदय सुबह 06:17 बजे हुआ है, जबकि सूर्यास्त रात 09:36 बजे होगा। वहीं, चंद्रोदय का समय रात 08:59 बजे का है और अगले दिन यानी 28 जुलाई की सुबह 04:28 बजे चंद्रास्त होगा।आज के शुभ मुहूर्त और रवि योग का महत्वआज के दिन कई खास और शुभ मुहूर्त बन रहे हैं, जिनका लाभ उठाकर आप अपने जरूरी काम पूरे कर सकते हैं। आज सुबह से ही 'रवि योग' बना हुआ है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में सभी प्रकार के दोषों को दूर करने और शुभ कार्यों को संपन्न करने के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:08 बजे से 05:43 बजे तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 01:26 बजे से दोपहर 02:27 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 04:30 बजे से शाम 05:31 बजे तक रहेगा। अमृत काल का समय अगली सुबह 04:20 बजे से 06:07 बजे के बीच रहेगा।राहुकाल और अशुभ समय से रहें सावधानज्योतिष शास्त्र में किसी भी नए या मांगलिक कार्य को शुरू करने से पहले अशुभ समय या राहुकाल का खास ध्यान रखा जाता है ताकि किसी बाधा का सामना न करना पड़े। आज के दिन राहुकाल सुबह 08:12 बजे से सुबह 10:07 बजे तक रहेगा। इसके अलावा यमगण्ड दोपहर 12:02 बजे से दोपहर 01:57 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 03:52 बजे से शाम 05:46 बजे तक रहेगा। दुर्मुहूर्त दोपहर 02:27 बजे से दोपहर 03:29 बजे के बीच रहेगा। जानकारों की सलाह है कि इन अशुभ मुहूर्तों में किसी भी तरह के नए या महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए।
भारतीय क्रिकेट टीम को आगामी दिनों में श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की एक रोमांचक टेस्ट सीरीज खेलनी है, जिसके लिए टीम के ऐलान की तारीख नजदीक आ चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीसीसीआई के चयनकर्ता कल यानी मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टेस्ट स्क्वाड का आधिकारिक ऐलान कर सकते हैं। हालांकि इस सीरीज से पहले कई खिलाड़ियों की चोट ने चयनकर्ताओं की चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन इसी बीच भारतीय खेमे से एक बेहद राहत भरी और शानदार खबर सामने आई है। टीम का एक प्रमुख और अनुभवी ऑलराउंडर अपनी खतरनाक चोट से पूरी तरह उबरकर मैदान पर वापसी करने के लिए बिल्कुल तैयार है।फिट होकर लौटे रविंद्र जडेजा, श्रीलंका सीरीज के लिए हुए उपलब्धहम बात कर रहे हैं टीम इंडिया के स्टार ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा की, जो पिछले कुछ समय से चोट के कारण भारतीय टीम से बाहर चल रहे थे। जडेजा को आईपीएल 2026 के दौरान टेनिस एल्बो (Tennis Elbow) की समस्या का सामना करना पड़ा था, जिसके चलते उन्हें क्रिकेट से दो महीने से ज्यादा का लंबा ब्रेक लेना पड़ा था। इस गंभीर चोट के कारण वह अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच का भी हिस्सा नहीं बन पाए थे। हालांकि, अब जो रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं उनके अनुसार जडेजा ने पूरी तरह से रिकवरी कर ली है और वह श्रीलंका के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज के लिए चयन के लिए पूरी तरह उपलब्ध हैं।वॉशिंगटन सुंदर की फिटनेस पर टिकी हैं नजरें, चयनकर्ताओं का असमंजसश्रीलंका दौरे के लिए टीम चुनते समय चयनकर्ताओं के सामने कुछ मुश्किलें भी खड़ी हैं। एक तरफ जहां वॉशिंगटन सुंदर और तेज गेंदबाज हर्षित राणा की फिटनेस रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ जडेजा की वापसी से चयन समिति को बड़ी राहत मिली है। क्रिकइन्फो की रिपोर्ट्स के अनुसार, चयनकर्ता वॉशिंगटन सुंदर की फाइनल फिटनेस रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं। यदि सुंदर पहले टेस्ट के लिए पूरी तरह फिट नहीं होते हैं, तो उन्हें केवल दूसरे टेस्ट के लिए 16वें सदस्य के रूप में टीम में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा, श्रीलंका की टीम में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की भरमार को देखते हुए ऑफ स्पिनर के विकल्प के तौर पर सारांश जैन के नाम पर भी विचार किया जा सकता है।लंबे समय बाद लाल गेंद के फॉर्मेट में दिखेंगे जडेजारविंद्र जडेजा ने इस साल की शुरुआत में जनवरी महीने में न्यूजीलैंड के खिलाफ आखिरी अंतरराष्ट्रीय वनडे सीरीज खेली थी। टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट को पहले ही अलविदा कह चुके जडेजा अब केवल टेस्ट और वनडे फॉर्मेट में ही देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में उनकी मौजूदगी भारतीय बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों को बेहद मजबूती प्रदान करेगी। आगामी 15 अगस्त से शुरू हो रही इस दो मैचों की टेस्ट सीरीज में फैंस एक बार फिर अपने चहेते ऑलराउंडर को मैदान पर चौके-छक्के लगाते और अपनी फिरकी का जादू बिखेरते हुए देख सकेंगे।
Top News 27 July : संसद में आज पेश होगा पेपर लीक संशोधन बिल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में एक्शन में पुलिस। सोनम वांगचुक को आज अस्पताल से छुट्टी मिलेगी। मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी ...
संसद में आज NEET और छात्र आंदोलन के मुद्दे पर हंगामे का आसार
संसद के मानसून सत्र में आज विपक्ष NEET पेपर लीक और छात्र आंदोलन का मुद्दा जोर-शोर से उठाने वाला है
'16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध', अंबुमणि रामदास का केंद्र से आग्रह
पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए देशव्यापी कानून बनाए
दिनांक 27 जुलाई, 2026 को प्रयागराज जनपद में विभिन्न सामाजिक, संगठनात्मक एवं जनसंवाद कार्यक्रमों में सहभागिता का कार्यक्रम निर्धारित है। अपने प्रवास के दौरान मा० उप मुख्यमंत्री कार्यकर्ताओं, व्यापारियों, प्रबुद्धजनों तथा स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद कर संगठनात्मक गतिविधियों, विकास कार्यों एवं जनहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे।निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रातः 11:30 बजे मा० उप मुख्यमंत्री बीबीएस इंजीनियरिंग कॉलेज, गद्दोपुर, फ़ाफ़ामऊ विधानसभा क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे।इसके उपरांत दोपहर 1:15 बजे वह श्री राजेन्द्र मिश्र 'बबुआन' के आवास पर स्थानीय जनों के साथ चाय पर चर्चा कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे तथा स्थानीय विषयों एवं जनभावनाओं पर संवाद करेंगे।अपराह्न 3:50 बजे मा० उप मुख्यमंत्री आर्य कन्या इंटर कॉलेज, प्रयागराज में आयोजित व्यापारी संवाद कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे, जहां व्यापारियों के साथ व्यापार, उद्योग, निवेश एवं प्रदेश के आर्थिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।सायं 4:30 बजे वह होटल रामा कॉन्टिनेंटल, सिविल लाइंस, प्रयागराज में आयोजित प्रयागराज की बात – विकास एवं नवाचार विषयक परिचर्चा में भाग लेंगे। इस अवसर पर शहर के समग्र विकास, नवाचार, आधारभूत संरचना तथा भविष्य की विकास योजनाओं पर चर्चा की जाएगी।इसके पश्चात सायं 5:20 बजे मा० उप मुख्यमंत्री होटल कम्फर्ट इन में विभिन्न क्षेत्रों के वरिष्ठजनों एवं प्रबुद्ध नागरिकों के साथ वार्ता करेंगे।दौरे के अंतिम चरण में मा० उप मुख्यमंत्री सायं 6:05 बजे श्री आशुतोष त्रिपाठी के आवास, 6:20 बजे पूर्व विधायक श्री प्रशांत सिंह के आवास तथा 6:40 बजे श्री अमन वलेचा के आवास पर पहुंचकर शिष्टाचार भेंट करेंगे।
राहुल गांधी बचकाना राजनीति छोड़ें, कर्नाटक पेपर लीक पर माफी मांगें : भाजपा सांसद दिनेश शर्मा
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, प्रह्लाद जोशी के शिक्षा मंत्री का पद संभालने, छात्र विरोध पर राहुल गांधी के पत्र पर प्रतिक्रिया दी।
'छात्रों के मुद्दे पर राजनीति नहीं, समाधान जरूरी', भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर साधा निशाना
बिहार की राजधानी पटना में भाजपा नेताओं ने नीट पेपर लीक विवाद, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, प्रह्लाद जोशी को नई जिम्मेदारी, छात्रों के विरोध प्रदर्शन और आगामी उपचुनाव सहित कई मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी
संसद में विपक्ष छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई, पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। राहुल गांधी ने अमित शाह को पत्र लिखकर जवाब मांगा।
केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज में ₹323.9775 लाख लागत के 60 विकास कार्यों का किया शिलान्यास
केशव प्रसाद मौर्य ने आज प्रयागराज में आयोजित विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रम के दौरान बच्चों को अन्नप्राशन संस्कार कराया तथा गर्भवती माताओं की गोदभराई की रस्म संपन्न कर उन्हें स्वस्थ एवं सुरक्षित मातृत्व के लिए शुभकामनाएँ दीं। वीबी जी राम जी योजना के अंतर्गत जनपद के 23 विकास खण्डों में लगभग ₹323.9775 लाख की लागत से प्रस्तावित 60 विकास कार्यों का शिलान्यास किया।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी नेतृत्व में डबल इंजन सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास तथा गरीबों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार की प्रत्येक योजना का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाना है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक एवं वित्तीय रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। आज प्रदेश की लाखों महिलाएँ स्वरोजगार, लघु उद्योग, कृषि आधारित गतिविधियों तथा विभिन्न उद्यमों के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं बल्कि विकास प्रक्रिया की सहभागी बनाना है। इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होगा। उन्होंने स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने का सशक्त माध्यम बन चुके हैं और आज महिलाएँ आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। प्रत्येक गरीब परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराना सरकार का संकल्प है, जिसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ पूरा किया जा रहा है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि संगठन जल्द अपनी नई रणनीति घोषित करेगा। पंजाब पेपर लीक मामला भी संगठन के एजेंडे में शामिल है।
कलाधाम की घटना पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की बड़ी कार्रवाई
वरिष्ठ प्रबंधक, प्रबंधक और सहायक प्रबंधक को सभी दायित्वों से मुक्त कर ग्रेनो वेस्ट ऑफिस से किया संबद्ध

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