सियासत: भाजपा में असमंजस, बढ़ रही बागी तृणमूल सांसदों की बेचैनी; क्या पार्टी की बंगाल इकाई का विरोध बना कारण?
गुजरात के अहमदाबाद शहर में साबरमती केंद्रीय कारागर के कैदियों की ओर से संचालित मशहूर ‘जेल भजिया हाउस’ को ढाई करोड़ रुपये से अधिक लागत से तीन मंजिला विरासत-आधारित परिसर में तब्दील किया जा रहा है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में मंगलवार को यह जानकारी दी गई। विज्ञप्ति के मुताबिक, अहमदाबाद में आरटीओ सर्किल पर साबरमती जेल के पास स्थित इस तीन-मंजिला परिसर का निर्माण कार्य गुजरात के पुलिस महानिदेशक (कारागार) केएलएन राव की देखरेख में किया जा रहा है और यह पूरा होने के करीब है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि नयी इमारत का मकसद कैदियों के कौशल को बढ़ावा देना और जेल से रिहाई के बाद समाज में उनके सुधार एवं पुनर्वास के प्रति सकारात्मक सोच पैदा करना है। इसमें कहा गया है कि इमारत के भूतल पर पारंपरिक ‘भजिया’ और अन्य तले हुए पकवानों की बिक्री की जाएगी, जहां ग्राहकों के बैठने की भी सुविधा होगी। विज्ञप्ति के अनुसार, पहली मंजिल पर एक ‘डाइनिंग एरिया’ बनाया गया है, जहां आगंतुकों को कैदियों की ओर से तैयार विशेष ‘गांधी थाली’ परोसी जाएगी, जिसमें सात्विक भोजन यानी फलों, सब्जियों और साबुत अनाज पर आधारित आहार शामिल होगा। इसमें कहा गया है कि दूसरी मंजिल पर एक संग्रहालय बनाया जाएगा, जिसमें आजादी की लड़ाई के दौरान साबरमती जेल में समय बिताने वाले स्वतंत्रता सेनानियों का इतिहास दिखाया जाएगा। विज्ञप्ति में कहा गया है कि इमारत में एक ‘फोटो गैलरी’ भी होगी, जिसमें महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, महादेवभाई देसाई, जावेरचंद मेघाणी और लोकमान्य तिलक समेत कई स्वतंत्रता सेनानियों के चित्र प्रदर्शित किए जाएंगे।
UPI पेमेंट अब फ्री नहीं कारोबारी अब ग्राहक से वसूलेंगे ये रकम,समझें पूरा गणित?
UPI पेमेंट अब फ्री नहीं कारोबारी अब ग्राहक से वसूलेंगे ये रकम,समझें पूरा गणित?
UPI करने पर आपको चार्ज देना होगा या नहीं? समझ लीजिए MDR का पूरा सिस्टम
बिजनेसमैन, व्यापारियों के लिए लगभग पूरी तरह से मुफ़्त रहे यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPT) नेटवर्क को खत्म करते हुए सरकार ने मंगलवार को 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज़्यादा के पेमेंट पर 0.4% ट्रांज़ैक्शन फ़ीस लगाने का ऐलान किया है. सरकार ने आम लोगों के बीच होने वाले रोज़ाना के लेन-देन को किसी भी तरह के चार्ज से पूरी तरह अलग रखा है. लेकिन असली दुविधा बिजनेस क्लास के लिए होगी, जब उनके मुनाफे पर चपत लगेगी.
एक्सप्लेनर: 21 राज्यों में UCC लागू करने का भाजपा ने बनाया प्लान, 2029 तक इसे जमीन पर उतारने की क्या है योजना? Explainer: BJP’s Plan to Implement UCC in 21 States by 2029, What’s the Roadmap?
गरबा-डांडिया में मुसलमानों का प्रवेश रोकेगी विहिप?: गणेशोत्सव के बाद शुरू होगा अभियान; संगठन ने क्या कहा?
अमेरिका इजरायल को देगा 40 हजार बम! डील को लेकर चर्चा तेज
ट्रंप प्रशासन इज़राइल को 2,000 पाउंड वाले शक्तिशाली बम देने की प्लानिंग कर रहा है. इस 2.8 अरब डॉलर के पैकेज में 40,000 बम शामिल हैं. इसमें 20,000 Mk84 और 20,000 BLU-117 बम हैं.
Gurugram में महिला बाइकर को कार से टक्कर मारने का HSWC ने लिया संज्ञान, पुलिस से मांगी सुरक्षा
गुरुग्राम में एक जिम मालिक द्वारा तेज रफ्तार कार से एक बाइक सवार महिला को कथित तौर पर टक्कर मारने की घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए हरियाणा राज्य महिला आयोग (एचएसडब्ल्यूसी) ने पुलिस को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि महिला और उसके परिवार को किसी भी तरह की धमकी, दबाव या उत्पीड़न का सामना न करना पड़े। एचएसडब्ल्यूसी की अध्यक्ष उषा प्रियदर्शनी द्वारा गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त को 14 सितंबर को लिखे गए एक पत्र में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर इस घटना का एक वीडियो सामने आने के बाद आयोग ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया है। पत्र में कहा गया है, ‘‘सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो के माध्यम से हरियाणा राज्य महिला आयोग के संज्ञान में एक घटना आई है, जिसमें कार चालक एक महिला बाइक सवार को कथित तौर पर जानबूझकर वाहन से टक्कर मारता हुआ दिखाई दे रहा है।’’एचएसडब्ल्यूसी ने इस मामले में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने सहित कानून के मुताबिक त्वरित कार्रवाई करने को कहा है। आयोग ने अपने पत्र में आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास का अपराध जोड़ने पर विचार करने की भी सिफारिश की है।
मशहूर न्यूट्रिशनिस्ट और डाइटिशियन सोनिया नारंग ने बंद नाक की समस्या से तुरंत राहत पाने का एक आसान सा नुस्खा बताया है. आइए जानते हैं इसके बारे में-
AISA अध्यक्ष Neha Bora का आरोप: धर्म और राम मंदिर के नाम पर अयोध्या के निवासियों को हुआ भारी नुकसान
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने मंगलवार को आरोप लगाया कि धर्म और राम मंदिर के नाम पर फैलाए गए “डर, हिंसा और नफरत” का सबसे अधिक नुकसान अयोध्या-फैजाबाद के आम लोगों को हुआ है। फैजाबाद प्रेस क्लब में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बोरा ने कहा कि 1990 के दशक में शुरू हुआ ‘‘नफरत का अभियान’’ अयोध्या को डर का केंद्र बना गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने बच्चों और युवाओं को इस अभियान का हिस्सा बनाया, वे आज उत्तर प्रदेश में सत्ता में हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान का नेतृत्व करने वाले लोग आज सत्ता में हैं और युवा पीढ़ी का भविष्य खराब कर रहे हैं। उन्होंने किसी संगठन या व्यक्ति का नाम लिए बिना कहा, ‘‘जिन लोगों ने आपके बच्चों को डर के अभियान का हिस्सा बनाया, वे आज आपके राज्य में सत्ता में बैठे हैं और उन्हीं बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं।’’बोरा ने आरोप लगाया कि जब भी अयोध्या और धर्म के नाम पर हिंसा व नफरत को बढ़ावा दिया गया, तो सबसे ज्यादा नुकसान फैजाबाद-अयोध्या के आम निवासियों को उठाना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि मंदिर निर्माण और राजनीतिक सत्ता हासिल करने की प्रक्रिया में जिन लोगों के घर ढहाए गए और दुकानें तोड़ी गईं, वे भी इसी शहर के आम निवासी थे। बोरा ने राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि धर्म का इस्तेमाल राजनीतिक और आर्थिक लाभ के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिरों में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाया जाने वाला चढ़ावा धर्म या मंदिरों के बजाय सत्ता में बैठे लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की “बुलडोजर न्याय” व्यवस्था की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि जिन लोगों के घर गिराए गए, उनमें गरीब, दलित और मुस्लिम परिवारों समेत आम लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि “सत्ता का प्रतीक” बना बुलडोजर प्रदेश के लोगों की बेबसी का भी प्रतीक है। बोरा ने कहा कि अयोध्या के लोग “हिंसा, नफरत और लूट” से छुटकारा चाहते हैं। आइसा अध्यक्ष अयोध्या में संगठन के उत्तर प्रदेश में चल रहे ‘जेन-जी महाजुटान’ अभियान के तहत पहुंची थीं। अभियान के तहत बेरोजगारी, महंगाई, सामाजिक न्याय और सरकारी भर्ती परीक्षाओं तथा नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों को उठाया जा रहा है। आइसा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मनीष ने बताया कि अभियान बुधवार को लखनऊ पहुंचेगा, जहां संवाददाता सम्मेलन के बाद रायबरेली और अलीगढ़ का दौरा किया जाएगा।
मध्य प्रदेश: व्यापम आरक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा, 13 साल बाद दो पर FIR
मध्य प्रदेश में व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) में घपले वर्षों बाद भी सामने आ रहे हैं। वर्ष 2013 में आयोजित आरक्षक चयन परीक्षा में अभ्यर्थी ने साल्वर से परीक्षा दिलवाई और चयनित हो गया।
Weather Forecast 16 Sep 2026: देखिए क्या है आपके यहां मौसम का हाल | Weather Report Today
Weather Forecast 16 Sep 2026: देखिए क्या है आपके यहां मौसम का हाल | Weather Report Today
अगर आप भी आज बुधवार को गणेश जी की पूजा कर रहे हैं, तो पूजा के अंत में उनकी आरती जरूर करें. इसके साथ ही आप गणेश जी के मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं. यहां पढ़ें गणपति बप्पा की आरती और मंत्र-
40 साल का इंतजार खत्म, छत्तीसगढ़ के बस्तर में इंद्रावती बाघ अभयारण्य पर्यटकों के लिए खुलेगा
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में स्थित इंद्रावती बाघ अभयारण्य (इंद्रावती टाइगर रिजर्व) एक नवंबर 2026 से पर्यटकों के लिए फिर से खुल जाएगा।
इंडिया गठबंधन के मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के विदेश नीति की तारीफ की है। वहीं दूसरी तरफ भारत ने मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान की पोल खोल दी। एक क्लिक पर पढ़ें 15 सितंबर की बड़ी खबरों का रीकैप-
सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई छात्र प्रदर्शन मामले में गठित हाई पावर्ड एनक्वायरी कमेटी को प्राथमिक जांच बिंदु सौंप दिए हैं. अदालत ने पैलेट गन, महिला प्रदर्शनकारियों पर हिंसा और पुलिसकर्मियों को लगी चोटों के आरोपों की जांच पहले करने को कहा है.
CRPF ने DIG बिधान चंद्र पात्रा का निलंबन तत्काल प्रभाव से वापस लिया
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने उप-महानिरीक्षक (डीआईजी) स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी का निलंबन मंगलवार को रद्द कर दिया, जिन पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 के पारित होने के बाद सोशल मीडिया पर सरकार में “बदलाव” की मांग करने वाली सामग्री साझा करने का आरोप लगाया गया था। अधिकारियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सीआरपीएफ मुख्यालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डीआईजी बिधान चंद्र पात्रा का निलंबन “तत्काल प्रभाव” से रद्द किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह आदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से मामले के तथ्यों पर विचार करने और 27 अगस्त को सीआरपीएफ को निलंबन वापस लेने का निर्देश देने के लगभग 20 दिन बाद जारी किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, आदेश में कहा गया है कि सीएपीएफ विधेयक पारित होने के बाद की गई कथित टिप्पणियों को लेकर 18 जून से शुरू हुई पात्रा की निलंबन अवधि को उनके खिलाफ लंबित जांच पूरी होने के बाद “नियमित” किया जाएगा। पात्रा सीआरपीएफ कैडर के 1994-बैच के प्रतिष्ठित अधिकारी हैं। वह केंद्रीय आतंकवाद रोधी कमांडो बल एनएसजी में प्रतिनियुक्ति पूरी करने के बाद अप्रैल में सीआरपीएफ में लौटे थे। उन्हें लगभग तीन महीने पहले केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 की संबंधित धाराओं के तहत निलंबित किया गया था।
बम की धमकी मामले में गूगल से पूछताछ करेगी गुजरात पुलिस; अभिषेक बनर्जी पर सीएम शुभेंदु अधिकारी के गंभीर आरोप
सुर्खियां: पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा, सरकार ने तलब किए मेटा के अधिकारी; यूपी में 15000 शिक्षकों की बंपर भर्ती
दिल्ली एनसीआर में रात से तेज हवाएं चल रही हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने आज के लिए देश के कई राज्यों में बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है।
भारत पर आ रही भयंकर आफत? US में 100 फीसदी टैरिफ वाला बिल पास होना तय
भारत पर टैरिफ की मार फिर से पड़ सकती है। इसकी वजह अमेरिका में लाए गए विधेयक लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट है। इस बिल में संशोधन के साथ खासतौर पर भारत का नाम जोड़ा गया है। अब इसपर अंतिम वोटिंग की तैयारी है।
'UPI की लंबे समय तक निरंतरता के लिए लागू किया शुल्क', यूपीआई चार्ज पर रिजर्व बैंक का बड़ा बयान
भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को कहा कि 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क (एमडीआर) लागू करना भारत के डिजिटल पेमेंट ईकोसिस्टम की लंबे समय तक निरंतरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
समिट बिल्डिंग Cyber Fraud: 119 आरोपियों की गिरफ्तारी Allahabad HC से वैध करार
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने विभूति खंड स्थित समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर कथित फर्जी साइबर कॉल सेंटर से पकड़े गए 119 लोगों की गिरफ्तारी को वैध माना है और कहा कि गिरफ्तारी में कुछ प्रक्रियात्मक कमियां होने मात्र से उसे अवैध नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति रजनीश कुमार और न्यायमूर्ति बबिता रानी की पीठ ने मंगलवार को 14 आरोपियों की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि आरोपियो को गिरफ्तारी के आधार और कारण बरामदगी मेमो के माध्यम से बताए गए थे और उसकी प्रति भी दी गई थी। मामला 30 जून 2026 की रात का है। पुलिस ने सूचना के आधार पर समिट बिल्डिंग में छापा मारकर 119 लोगों को पकड़ा था। मौके से 103 लैपटॉप, 109 मोबाइल फोन, 68 आईफोन, 116 हेडफोन समेत बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए थे। पुलिस का आरोप है कि कॉल सेंटर में अमेरिकी नागरिकों को विभिन्न सरकारी एजेंसियों और कंपनियों के अधिकारी बनकर ठगा जाता था। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें 24 घंटे से अधिक समय तक अवैध हिरासत में रखा गया और गिरफ्तारी के आधार की जानकारी नहीं दी गई। अदालत ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया। पीठ ने कहा कि पुलिस ने एक जुलाई को प्राथमिकी दर्ज की और दो जुलाई को सभी आरोपियो को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। परिजनों को गिरफ्तारी की सूचना देने के मामले में अदालत ने माना कि पुलिस ने फोन के जरिए सूचना दी थी, हालांकि अभिलेख में इसकी प्रविष्टि नहीं की गई। इसे प्रक्रियात्मक कमी मानते हुए पीठ ने कहा कि ऐसी कमी पूरी गिरफ्तारी को अवैध नहीं बनाती। अदालत ने कहा कि कानून तकनीकी अनुपालन की बजाय पर्याप्त अनुपालन को प्राथमिकता देता है। मामले की परिस्थितियों में गिरफ्तारी मेमो से जुड़ी कमियों को महज अनियमितता माना जाएगा, ऐसी अवैधता नहीं जिससे गिरफ्तारी और न्यायिक रिमांड निरस्त हो जाए।
ईरान के केशन द्वीप पर सुनाई दीं धमाकों की आवाज, इलाके में हलचल तेज
ईरान के रणनीतिक केशम द्वीप पर कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं, जो समुद्र की दिशा से आ रही थीं. स्थानीय सूत्रों और सरकारी मीडिया ने इन आवाजों की पुष्टि की है, जिससे इलाके में चिंता और हलचल बढ़ गई है.
पत्रकार Satyam Varma की जमानत याचिका पर Allahabad High Court में सुनवाई टली
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नोएडा में अप्रैल, 2026 में कामगारों के प्रदर्शन के संबंध में पत्रकार सत्यम वर्मा के खिलाफ दर्ज 11 आपराधिक मामलों में से एक मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई मंगलवार को टाल दी। राज्य सरकार के वकील द्वारा समानता के आधार पर जमानत देने की दलील पर आपत्ति दाखिल करने के लिए समय मांगा गया जिस पर न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने सुनवाई 23 सितंबर तक के लिए टाल दी। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि वर्मा को समानता के आधार पर जमानत दी जानी चाहिए क्योंकि सह आरोपी को इसी मामले में 23 जून को जमानत प्रदान की गई थी। हालांकि, सत्यम वर्मा को भले ही मौजूदा मामले में जमानत मिल जाए, उनके जेल से बाहर आने की संभावना नहीं है क्योंकि वह अन्य आपराधिक मामलों के संबंध में जेल में रहेंगे। उन्हें अलग से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत भी हिरासत में लिया गया है। उल्लेखनीय है कि 23 जून को उच्च न्यायालय ने सह आरोपी शिव कुमार उर्फ शिवा को इसी मामले में जमानत प्रदान की थी। अपने आदेश में अदालत ने कहा था कि शिव कुमार उस प्राथमिकी में नामजद नहीं था और प्राथमिकी एक भीड़ के खिलाफ दर्ज की गई थी। मजदूर बिगुल दस्ता के संपादक वर्मा को लखनऊ में 17 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। बाद में 13 मई को विद्यार्थी कार्यकर्ता आकृति चौधरी के साथ ही उन पर भी अलग से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाया गया। हालांकि, दो सितंबर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा आकृति चौधरी की रासुका के तहत हिरासत रद्द कर दी गई और अदालत ने नोएडा की जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम के खिलाफ सख्त टिप्पणी भी की थी। उत्तर प्रदेश पुलिस का आरोप है कि वर्मा ने कामगारों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी और अशांति फैलाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विभिन्न इलाकों में लोगों को कथित तौर पर भड़का कर कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब की। मीडिया में आयी खबरों के मुताबिक, 13 अप्रैल को कुछ स्थानों पर वाहनों को जलाने और पथराव सहित कई घटनाएं हुई थीं जिसके बाद पुलिस ने कामगारों पर लाठीचार्ज किया और सैकड़ों कामगारों एवं सात कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था।
मजदूर पिता ने पसीने से सींचा सपना: एक ही परिवार के पांच बच्चे बनेंगे डॉक्टर;आदिवासी परिवार का कीर्तिमान मिसाल
कमरे पर था ताला, अंदर मिली लाश... बदरपुर की घटना से मची सनसनी
राजधानी दिल्ली के बदरपुर इलाके में एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है. रात को ही महिला अपने पिता से मिलकर लौटी थी. और सुबह कमरे में उसकी लाश मिली. फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच में जुटी है.
UCC पर JDU बीजेपी के इशारे पर कर रही काम: Tejashwi Yadav
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने मंगलवार को आरोप लगाया कि बिहार में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के सवाल पर स्पष्ट रुख अपनाने से हिचकिचाकर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ‘‘भाजपा के इशारे पर काम’’ कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू की मौजूदा स्थिति के लिए यादव ने उसके राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा को जिम्मेदार ठहराया। पूर्व उपमुख्यमंत्री यादव ने पत्रकारों से कहा, “संजय झा ने जदयू को बर्बाद कर दिया है। वह भाजपा की इच्छा के अनुसार पार्टी चला रहे हैं। अब जदयू केवल भाजपा के इशारे पर काम करती है। इस मामले में भी वही हुआ है।”तेजस्वी यादव केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस हालिया बयान पर पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें शाह ने कहा था कि “2029 तक राजग शासित 22 राज्यों में यूसीसी लागू की जाएगी।”करीब एक दशक पहले भाजपा छोड़कर जदयू में शामिल हुए संजय झा ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर अमित शाह से चर्चा करेंगे, जबकि बिहार में पार्टी के नेता अलग-अलग राय रखते नजर आ रहे हैं। उपमुख्यमंत्री एवं जदयू के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने कहा है कि पार्टी यूसीसी विधेयक के प्रावधानों का अध्ययन करेगी और यदि उसमें कोई आपत्तिजनक बात नहीं होगी तो “सिर्फ विरोध के लिए विरोध नहीं करेगी।”वहीं, जदयू के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कहा था कि संसद में यूसीसी विधेयक लाए जाने के समय नीतीश कुमार ने केंद्र से कहा था कि विधेयक का समर्थन करने के बावजूद जदयू बिहार में इसे लागू किए जाने का विरोध करेगी। यूसीसी का लगातार विरोध करते रहे तेजस्वी यादव ने दोहराया, “हम इस तरह के कानून के विरोध में रहे हैं और हर स्तर पर इसका विरोध करते रहेंगे।”बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बुधवार को बिहार दौरे के संबंध में पूछे जाने पर यादव ने राज्य सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा, “क्या केंद्र को बिहार की भाजपा नीत सरकार पर भरोसा नहीं है? जाहिर है कि उन्हें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आकलन पर विश्वास नहीं है। जो भी हो, भाजपा नीत राजग के पास बिहार के लिए कोई मॉडल नहीं है।
ट्रंप पर गोली चलाने वाले शूटर पर मिला नया इनपुट, अटॉर्नी जनरल का खुलासा
अमेरिकी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने मंगलवार को खुलासा किया कि 2024 में पेंसिल्वेनिया के बटलर में डोनाल्ड ट्रंप पर जानलेवा हमला करने वाले शूटर के बारे में एफबीआई को नई जानकारियां मिली हैं.
त्योहारी सीजन में रेलवे चलाएगा स्पेशल ट्रेन, जानें पूरा रूट और टाइम टेबल!
त्योहारी सीजन में रेलवे चलाएगा स्पेशल ट्रेन, जानें पूरा रूट और टाइम टेबल!
नेपाल में बाढ़ से तबाह हुए हाइड्रो प्रोजेक्ट्स में रोका गया रेस्क्यू, 868 लोग अब भी लापता
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद क्षतिग्रस्त 13 जलविद्युत परियोजनाओं में से 10 में लापता लोगों की तलाश रोक दी गई है. अब सिर्फ चिलिमे, अपर त्रिशूली-1 और अपर त्रिशूली-3 ‘बी’ में बचाव कार्य जारी है. बताया जा रहा है कि 868 लोग अब भी लापता हैं.
सऊदी पर हूती हमलों से भारत चिंतित, कहा- बाब-अल-मंदेब में नेविगेशन को खतरा
सऊदी अरब पर अचानक हुए हूती हमलों के बीच भारत की प्रतिक्रिया आई है. भारत का कहना है कि इस तरह के हमलों से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही को खतरा है.
हूती हमलों ने बढ़ाई सऊदी की चिंता, मांगा मिस्र का समर्थन
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देह फतह अल सीसी से काहिरा में मुलाकात की. इस बातचीत में एक बढ़ते क्षेत्रीय संकट पर ज़ोर दिया गया.
मेल-इन बैलेट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाराज हुए ट्रंप, जजों पर भड़के
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मिडटर्म चुनावों से पहले डाक मतपत्रों को सीमित करने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोशिश को बहाल करने से इनकार कर दिया है. अदालत के इस फैसले पर नाराजगी व्यक्त करते हुए ट्रंप ने जजों पर तीखा हमला बोला और इसे बेहद राजनीतिक फैसला बताया.
होर्मुज के पास अमेरिकी ड्रोन जहाज पर कब्जे की कोशिश, US ने तबाह कीं ईरान की दो नावें
अमेरिकी सेना ने बताया कि होर्मुज के पास अमेरिका ड्रोन पोत पर कब्जा करने की कोशिश कर रहीं ईरान की दो छोटी बोट्स को तबाह कर दिया है. हालांकि, ईरानी मीडिया ने इन बोट्स को मछली पकड़ने वाली नाव बताया है.
मुंबई: कैफे मोंडेगर पर तुकाराम मुंढे की टीम का एक्शन, लाइसेंस सस्पेंड
महाराष्ट्र में त्योहारी सीज़न को देखते हुए FDA खाद्य प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर रही है. ऐसे में, FDA ने कोलाबा में मशहूर बार और रेस्तरां कैफे मोंडेगर में खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कमियां पाए जाने पर रेस्तरां का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है.
पुलिस की तत्परता से महाराष्ट्र के ठाणे जिले में एक ही परिवार के चार लोगों को आत्महत्या करने से बचाया गया।
Gemini Tarot Card Rashifal: नौकरी में हो सकती है तरक्की, पुराने काम होंगे पूरे
Gemini Tarot Card Horoscope 16 September:- Nine of cups की ऊर्जा पुराने कार्यों के पूरे होने से राहत की उम्मीद, नौकरी में बदलने के साथ वेतन वृद्धि की संभावना और बच्चों की दैनिक गतिविधियों पर नजर रखने की बात लेकर आ सकती है. आईए जानते है, मिथुन राशि वाले जातकों के जीवन, रिश्तों, आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य के बारे में.
Taurus Tarot Card Rashifal: मेहनत से मिलेगी सफलता, आर्थिक स्थिति में हो सकता है सुधार
Taurus Tarot Card Horoscope 16 September:- Knight of cups की ऊर्जा किसी की बातों में आकर गैरकानूनी कार्य न करने का प्रयास,विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और संयम के साथ आत्मविश्वास बनाए रखने की आवश्यकता और बदलावों को लेकर नकारात्मक विचार न लाने की बात कर सकती है. आईए जानते हैं ,वृषभ राशि वाले जातकों के जीवन, रिश्तों, आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य के बारे में.
सीडीएससीओ ने जांच के बाद पुष्टि की है कि पाकिस्तान में निर्मित गोरी ब्यूटी क्रीम और चांदनी व्हाइटनिंग क्रीम अनधिकृत हैं और इनका आयात प्रमाण पत्र नहीं है। इन उत्पादों में भारी धातुएं शामिल हैं, जो स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं।
सीबीआई ने पर्यावरण कार्यकर्ता और वकील भानु तातक के खिलाफ एफसीआरए के तहत बिना पंजीकरण या पूर्व अनुमति के 20.94 लाख रुपये विदेशी फंड प्राप्त करने के आरोप में मामला दर्ज किया है।
Aries Tarot Card Rashifal: करियर में बदलाव के संकेत, जल्दबाजी से बचें
Aries Tarot Card Horoscope 16 September:- The Moon की ऊर्जा बदलावों को लेकर नकारात्मक विचारों से दूरी, छोटी-छोटी बातों को लेकर जीवनसाथी की भावनाओं को ठेस न पहुंचने की बात और बिना बाजार की स्थिति समझे नए स्टार्टअप शुरू करने की योजना स्थगित की बात लेकर आ सकती है. आईए जानते हैं, मेष राशि वाले जातकों के जीवन, रिश्तों, आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य के बारे में.
छत्तीसगढ़ में अतिरिक्त जमीन का मुआवजा मांगना पड़ा भारी, एनएचएआई वसूलेगा 50 से 70 लाख
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के ग्राम सकरी में खसरा नंबर 407/5 के भू-स्वामियों द्वारा तीन से चार डिसमिल अतिरिक्त जमीन का दावा करना भारी पड़ गया है।
बंगाल में पहली बार 100 किलो स्वर्ण आभूषणों से सजेगा दुर्गा दरबार, टूटेगा भव्यता का हर रिकॉर्ड
बंगाल में इस बार दुर्गापूजा के दौरान दार्जिलिंग जिले के अधीन सिलीगुड़ी की सेंट्रल कालोनी दुर्गा पूजा समिति का आयोजन खास आकर्षण का केंद्र रहेगा।
Pisces Aaj Ka Rashifal: आर्थिक मामलों में एक छोटी गलती पड़ सकती है भारी, पुष्टि करना रहेगा जरूरी
Pisces Horoscope Today 16 September 2026, Meen Rashifal:किसी पुराने आर्थिक या व्यक्तिगत मामले की परत खुल सकती है.दिन की शुरुआत में ही पूरा बजट खर्च करने से बचें. आपकी परिस्थितियां धीरे-धीरे स्पष्ट होंगी.
Capricorn Horoscope Today 16 September 2026, Makar Rashifal: नौकरी में अधिकार बढ़ने के साथ जवाबदेही भी बढ़ सकती है.निजी राय व्यक्त करते समय सावधानी बरतें.आर्थिक लाभ के साथ खर्च करने का उत्साह भी बढ़ सकता है.
Sagittarius Horoscope Today 16 September 2026, Dhanu Rashifal: किसी परिचित, पुराने ग्राहक या सामाजिक संपर्क के माध्यम से उपयोगी सूचना मिल सकती है.आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत मिल सकते हैं.कुछ समय शांत रहना विचारों को व्यवस्थित करने में मदद करेगा.
Scorpio Aaj Ka Rashifal 16 September 2026: ऑनलाइन लेनदेन में रहें सतर्क, छोटी चूक पड़ सकती है भारी
Scorpio Horoscope Today 16 September 2026, Vrishchik Rashifal:आज मन में कुछ निराशा या कुछ पीछे छूटने की भावना परेशानी का कारण बन सकती है.खर्चों पर नियंत्रण आवश्यक होगा.शरीर को आराम देने की जरूरत महसूस हो तो उसे नजरअंदाज न करें.
Libra Horoscope Today 16 September 2026, Tula Rashifal: आत्ममंथन और अपने निर्णयों पर दोबारा विचार करना लाभकारी रहेगा. धन और वाणी से जुड़े विषय प्रमुख रहेंगे.परिवार में आपकी कही हुई बात का असर अपेक्षा से अधिक हो सकता है.
Virgo Horoscope Today 16 September 2026, kanya Rashifal:आज दिन का पहला भाग धन, वाणी और व्यवहार से संबंधित रहेगा. भुगतान, बचत या आगामी खर्च की योजना बनाने का अवसर मिलेगा.
लंदन में सुरक्षा कारणों से रद्द हुआ CM विजय का कार्यक्रम, निराश हुए फैंस
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की एक झलक पाने के लिए मंगलवार को लंदन की सबसे ऊंची इमारत 'द शार्ड' के बाहर सैकड़ों प्रशंसक जुट गए, जिसके बाद सुरक्षा कारणों से उनके एक आयोजित कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है.
5 रुपये से 300 रुपये तक चार्ज... जानें- UPI लेनदेन पर किसे MDR देना है, किसे नहीं
नए यूपीआई फ्रेमवर्क में आम लोगों के लिए सभी पर्सन-टू-पर्सन लेन-देन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे. एमडीआर केवल 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट लेन-देन पर लागू होगा. 96 प्रतिशत व्यापारिक भुगतान और छोटे दुकानदार इस दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे.
दिशा सालियान केस: सूरज पंचोली का नाम आने पर फिर छलका जिया खान की मां का दर्द, कहा- सच छिपाने का खेल चल रहा है
बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर मेटा को नोटिस: आज फिर तलब किए अधिकारी; क्या है पूरा मामला?
बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर मेटा को नोटिस: आज फिर तलब किए अधिकारी; क्या है पूरा मामला?
बम की झूठी धमकियां, 5 लाख फर्जी Gmail अकाउंट; गुजरात पुलिस गूगल से करेगी पूछताछ
गुजरात पुलिस बम की झूठी धमकियों के लिए इस्तेमाल किए गए 5 लाख से ज्यादा फर्जी जीमेल अकाउंट्स के मामले में गूगल से पूछताछ करेगी। गिरोह ने सुरक्षा को बाईपास किया था।
डीआरडीओ ने हाई-फ्रीक्वेंसी रक्षा प्रणालियों के लिए स्वदेशी गैलियम नाइट्राइड सेमीकंडक्टर तकनीक का सफल परीक्षण किया है। यह उपलब्धि भारत को रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और संचार में आत्मनिर्भर बनाएगी।
पंजाब में अपराध करने वाला गैंगस्टर दुनिया में कहीं भी छिप नहीं सकता: AAP
पंजाब की भगवंत मान सरकार नशे के खिलाफ अभियान चला रही है. पंजाब AAP मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू का दावा है कि भगवंत मान सरकार के नेतृत्व में पंजाब पुलिस ने नशे और गैंगस्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है.
मेटा पर सरकार सख्त, अधिकारियों को कर लिया तलब; आज होगी सुनवाई
बच्चों की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग अब कोई भी ढील देने के मूड में नहीं है। आयोग ने इस मामले के तथ्यों का पता लगाने के लिए औपचारिक जांच शुरू करने का फैसला किया है।
16 सितम्बर को आजमगढ़ एवं रायबरेली के भ्रमण पर केशव प्रसाद मौर्य
उपमुख्यमंत्री दोपहर 2:30 बजे जनपद रायबरेली में चडरई टोल प्लाजा, निकट बाबूगंज, ऊंचाहार पहुंचेंगे, जहां मा० मंत्री खाद्य एवं रसद विभाग मनोज कुमार पाण्डेय के यहां आयोजित भव्य शिव महापुराण कथा कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे।इसके उपरान्त उपमुख्यमंत्रीनिरीक्षण भवन, एनटीपीसी, रायबरेली में पार्टी पदाधिकारियों, मा० जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करेंगे। इस दौरान संगठनात्मक विषयों तथा क्षेत्रीय विकास से संबंधित विषयों पर चर्चा की जाएगी। भ्रमण के अंतिम चरण में उपमुख्यमंत्रीविभागीय अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे तथा जनपद में संचालित विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान करेंगे। बैठक में विकास कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्धता तथा शासन की योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। केशव प्रसाद मौर्य दिनांक 16 सितम्बर, 2026 को जनपद आजमगढ़ एवं रायबरेली के भ्रमण पर रहेंगे। इस दौरान उपमुख्यमंत्री विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मिलित होने के साथ-साथ जनपद की विकासशील एवं निर्माणाधीन परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण करेंगे तथा पार्टी पदाधिकारियों, मा० जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। उपमुख्यमंत्री प्रातः 12:05 बजे जनपद आजमगढ़ के ग्राम एवं पोस्ट गंभीरपुर, तहसील निजामाबाद स्थित अवधेश कुमार मौर्या के आवास पर जाएंगे। इसके उपरान्त मा० उपमुख्यमंत्री जी जनपद में संचालित विभिन्न विकासशील एवं निर्माणाधीन परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों से कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता एवं समयबद्धता की जानकारी प्राप्त करेंगे।इसके पश्चात उपमुख्यमंत्री ग्राम जिवली, थाना बरदह, तहसील लालगंज, जनपद आजमगढ़ में श्री विनोद राय जी, क्षेत्रीय अध्यक्ष गोरखपुर के आवास पर जाएंगे। इसके उपरान्त उपमुख्यमंत्री जनपद रायबरेली के लिए प्रस्थान करेंगे।
आम आदमी पार्टी ने दावा किया है कि भगवंत मान सरकार के नशे और गैंगस्टर विरोधी अभियान का असर विदेशों तक पहुंचा है.
किसानों, छात्रों और अग्निवीरों के लिए बड़ी सौगात, योगी कैबिनेट ने दी 23 प्रस्तावों को मंजूरी
CM योगी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 23 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. इनमें चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, स्मार्ट स्कूल, किसानों को लोन और अग्निवीरों को सरकारी भर्ती में आरक्षण जैसे फैसले शामिल हैं.
Ayodhya में NSG रीजनल हब के लिए 26 हेक्टेयर जमीन मुफ्त देगी UP सरकार
उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने अयोध्या धाम-राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए मिल्कीपुर तहसील में 26 हेक्टेयर (करीब 65 एकड़) बंजर भूमि राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को निशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला किया गया। सरकार के अनुसार, एनएसजी की स्थायी मौजूदगी से अयोध्या में संभावित सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता मजबूत करने में मदद मिलेगी। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि राम मंदिर के निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र के रूप में उभरा है तथा यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक और विशिष्ट अतिथि पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर एनएसजी के क्षेत्रीय केंद्र की स्थायी तैनाती जरूरी है। उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल ने ग्राम पूरे लालखां में स्थित 26 हेक्टेयर बंजर भूमि गृह मंत्रालय को निशुल्क हस्तांतरित करने की औपचारिक मंजूरी दी है। इस भूमि का बाजार मूल्य 16.90 करोड़ रुपये बताया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भूमि का इस्तेमाल केवल एनएसजी क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना के लिए किया जा सकेगा और किसी अन्य उद्देश्य के लिए इसका उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। यदि तीन वर्ष के भीतर भूमि का निर्धारित उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया जाता है या भविष्य में इसकी आवश्यकता समाप्त हो जाती है, तो यह स्वत: उत्तर प्रदेश राजस्व विभाग को वापस हो जाएगी।
UP में 17 सितंबर से एक महीने चलेगा 'सेवा संकल्प अभियान', होगी साप्ताहिक समीक्षा
उत्तर प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सेवा संकल्प अभियान चलाया जाएगा. इस अभियान के तहत प्रदेशभर में 12 प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और हर जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे.
पीएम मोदी और भगवान गणेश की 'चाय पे चर्चा' पर उठे सवाल, क्या है मामला?
पश्चिम बंगाल के बेलूर बाजार में गणेश पूजा की 'हिंदू राष्ट्र' थीम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. पंडाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भगवान गणेश को 'चाय पे चर्चा' के अंदाज में दिखाया गया है.
पीएम मोदी ने चिनंफिग से किन मुद्दों पर की चर्चा? रणधीर जायसवाल ने बताई अंदर की बात
विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और शी चिनफिंग के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें मोदी ने आपसी सम्मान और संवेदनशीलता पर जोर दिया।
MP दौरे पर आएंगे BJP अध्यक्ष Nitin Nabin और Rahul Gandhi, इंदौर में होंगे कार्यक्रम
मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के इस सप्ताह होने वाले दौरों को लेकर सियासी हलचल बढ़ गई है। दोनों नेता ऐसे वक्त भाजपा शासित राज्य का दौरा करने वाले हैं, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले दिनों कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की अगुवाई में हुए छात्र आंदोलन के बाद नयी पीढ़ी के मुद्दों, खासकर शिक्षा और परीक्षाओं की व्यवस्था में सुधार को लेकर राजनीतिक विमर्श तेज है। भाजपा ने एक बयान में बताया कि नवीन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर 17 सितंबर को इंदौर में केंद्र सरकार की ‘स्वामित्व योजना’ के तहत नयी राज्यव्यापी पंजीयन प्रक्रिया की शुरुआत करेंगे। इसके बाद भाजपा प्रमुख उज्जैन में क्षिप्रा नदी की आरती और ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में शामिल होंगे जहां करीब 25 लाख दीप जलाए जाएंगे। वह 18 सितंबर को महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में शामिल होंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद नवीन पहली बार मध्यप्रदेश आ रहे हैं। इसके बाद 19 सितंबर को राहुल गांधी राज्य के प्रमुख शैक्षणिक केंद्र इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं से संवाद करेंगे। सूबे के काबीना मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने संवाददाताओं को बताया, “इंदौर और इसके आस-पास के 30,000 लोगों को स्वामित्व योजना के तहत उनकी संपत्ति का अधिकार पत्र देने का निर्णय लिया गया है। नवीन इस अभियान की औपचारिक शुरुआत करेंगे।’’उन्होंने बताया कि बहुत कम वक्त के लिए इंदौर आ रहे भाजपा प्रमुख ने किसी स्वागत रैली में शामिल होने से इनकार कर दिया है और वह केवल ‘स्वामित्व योजना’ के कार्यक्रम में भाग लेंगे। विजयवर्गीय ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में रैप गायकों को बुलाए जाने पर कटाक्ष किया, ‘‘वे (कांग्रेस) इन गायकों को बेवजह बुला रहे हैं। ऐसे कामों के लिए तो राहुल गांधी ही पर्याप्त हैं।’’उधर, प्रदेश कांग्रेस समिति के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने कहा कि भाजपा के राज में शिक्षा व्यवस्था में लगातार गिरावट दर्ज की गई है और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में नयी पीढ़ी के मुद्दों को उठाएंगे। नायक ने कॉजपा से जुड़े एक सवाल पर कहा, “पिछले दिनों जंतर-मंतर पर छात्रों ने आंदोलन करके देश की झिझक मिटाई और साहस का परिचय दिया। इस आंदोलन ने विपक्षी नेताओं को काम करने के लिए एक लोकतांत्रिक जगह दे दी है।”उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश के युवाओं के प्रासंगिक मुद्दों को विमर्श के केंद्र में लाने के लिए इस लोकतांत्रिक जगह का बहुत अच्छे से इस्तेमाल कर रहे हैं। कांग्रेस ने पहले इंदौर के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में गांधी का कार्यक्रम 12 सितंबर को आयोजित करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा था कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के एक पुराने आदेश के तहत यह स्टेडियम सिर्फ खेलकूद या राज्यस्तरीय शासकीय आयोजनों के लिए ही दिया जा सकता है। इसके बाद कांग्रेस ने आयोजन की तारीख आगे बढ़ाकर 19 सितंबर कर दी थी और उसे शहर के रीजनल पार्क के सामने एक मैदान में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के आयोजन के लिए जगह आवंटित की गई है। ‘छात्रों की गूंज’ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा शुरू किया गया विद्यार्थी-संवाद अभियान है जिसके जरिये वह प्रश्नपत्र लीक, महंगी शिक्षा, सरकारी भर्तियों में अनियमितताओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को घेरने का प्रयास कर रहे हैं। गांधी की अगुवाई में अब तक कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के चार संस्करण आयोजित किए गए हैं।
भाजपा ने राहुल गांधी पर कांग्रेस नेताओं के भ्रष्टाचार पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में ईडी की कार्रवाई का हवाला दिया।
बुलंदियों को छूने के लिए भारत संकल्पित: जयशंकर बोले- वैश्विक मंचों पर बढ़ा देश का प्रभाव
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत अशांत वैश्विक परिवेश में भी बुलंदियों को छूने के लिए संकल्पित है और वैश्विक पटल पर देश का प्रभाव बढ़ा है।
'माई के लाल हो तो बताओ...', भोपाल में BJP विधायक पर भड़के ओवैसी
Bhopal Owaisi Speech UCC: भोपाल में असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा के 'मिसाइल' बयान पर बोला हमला. काजी कैंप पर दी सीधी चुनौती. UCC को बताया विविधता खत्म करने की साजिश. पढ़ें पूरी खबर.
UCC पर अमित शाह को मिला TDP और शिवसेना का साथ, JDU का भी आया जवाब
NDA के प्रमुख सहयोगी TDP और शिवसेना ने गृह मंत्री अमित शाह के सभी राजग-शासित राज्यों में यूसीसी लागू करने के बयान का समर्थन किया है। हालांकि, भाजपा के सहयोगी जदयू ने सतर्क प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह यूसीसी बिल का अध्ययन करेगी।
निजी क्षेत्र और संगठित उद्योग में काम करने वाले 6 करोड़ से अधिक नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने डिजिटल सेवाओं के विस्तार में एक बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब तक पीएफ खाताधारकों को अपना बैलेंस चेक करने, क्लेम का स्टेटस ट्रैक करने या पासबुक डाउनलोड करने के लिए ईपीएफओ के आधिकारिक एकीकृत सदस्य पोर्टल (Unified Member Portal) या उमंग (UMANG) ऐप पर निर्भर रहना पड़ता था। महीने की शुरुआत में या सर्वर पर अत्यधिक ट्रैफिक होने के दौरान पोर्टल का डाउन हो जाना, ओटीपी (OTP) आने में देरी होना और तकनीकी खराबी के चलते लॉग-इन फेल हो जाना लाखों अंशधारकों के लिए आम परेशानी बन चुका था। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, वाराणसी से लेकर दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, मुंबई और पुणे जैसे प्रमुख औद्योगिक व कॉर्पोरेट केंद्रों में काम करने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों की इस रोजमर्रा की समस्या को हल करते हुए ईपीएफओ ने अपनी सेवाओं को सीधे सोशल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म 'वॉट्सऐप' (WhatsApp) से जोड़ दिया है। अब सिर्फ एक साधारण टेक्स्ट मैसेज के जरिए कर्मचारी अपने पीएफ खाते का पूरा लेखा-जोखा अपनी उंगलियों पर प्राप्त कर सकते हैं।वॉट्सऐप पर कौन-कौन सी सेवाएं मिलेंगी? बैलेंस से लेकर क्लेम स्टेटस तक सब उपलब्धईपीएफओ द्वारा शुरू की गई इस वॉट्सऐप-आधारित सपोर्ट और चैटबॉट प्रणाली के माध्यम से सदस्यों को कई प्रकार की आवश्यक सेवाएं रियल-टाइम में उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें सबसे पहली और प्रमुख सुविधा 'पीएफ बैलेंस इंक्वायरी' (PF Balance Check) है, जिसके जरिए आप यह जान सकते हैं कि आपके और आपकी कंपनी के अंशदान को मिलाकर कुल कितना फंड जमा हो चुका है। दूसरी बड़ी सेवा 'क्लेम स्टेटस ट्रैकिंग' (Claim Status Tracking) है; यदि आपने नौकरी बदलने पर पीएफ ट्रांसफर, इलाज या शादी के लिए पीएफ एडवांस (Form 31) या नौकरी छोड़ने पर फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (Form 19 व 10C) के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है, तो आपको बार-बार पोर्टल पर लॉग-इन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आप सीधे चैट विंडो में अपना पावती नंबर डालकर क्लेम की वर्तमान स्थिति जान सकते हैं। इसके अतिरिक्त, ईपीएफओ के 138 से अधिक क्षेत्रीय कार्यालयों (Regional Offices) ने अपने आधिकारिक वॉट्सऐप हेल्पलाइन नंबर सक्रिय किए हैं, जहां सदस्य अपने यूएएन (UAN), केवाईसी (KYC), नाम या जन्मतिथि की गलतियों से जुड़ी शिकायतों का सीधा समाधान पा सकते हैं।MyGov हेल्पडेस्क और डिजिलॉकर के जरिए कैसे काम करता है WhatsApp सिस्टम?कर्मचारियों को वॉट्सऐप पर सुरक्षित सेवाएं देने के लिए भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के 'MyGov हेल्पडेस्क' और 'डिजिलॉकर' (DigiLocker) प्लेटफॉर्म का सहयोग लिया गया है। इस व्यवस्था के तहत सरकार का आधिकारिक और ब्लू टिक (सत्यापित) वॉट्सऐप बॉट सीधे ईपीएफओ और डिजिलॉकर के डेटाबेस से कनेक्ट रहता है।यदि आप वॉट्सऐप पर अपनी पीएफ पासबुक या बैलेंस देखना चाहते हैं, तो इसकी प्रक्रिया बेहद सरल है:सबसे पहले भारत सरकार के आधिकारिक MyGov हेल्पडेस्क नंबर +91-9013151515 को अपने मोबाइल के कॉन्टैक्ट्स में सेव करें।अपने उसी मोबाइल नंबर से वॉट्सऐप खोलें जो आपके आधार और ईपीएफओ के यूएएन (UAN) से रजिस्टर्ड है।चैट विंडो में जाकर Hi या Namaste लिखकर भेजें।चैटबॉट की तरफ से आपको दो मुख्य विकल्प दिखाई देंगे—'MyGov Services' और 'DigiLocker Services'। यहां 'DigiLocker Services' का विकल्प चुनें।सिस्टम आपसे पूछेगा कि क्या आपका डिजिलॉकर खाता है; 'Yes' चुनें और अपना 12 अंकों का आधार नंबर दर्ज करें।आपके आधार-रजिस्टर्ड मोबाइल पर एक बार का सुरक्षा ओटीपी (OTP) आएगा, उसे चैट में प्रविष्ट करें।प्रमाणीकरण सफल होते ही डिजिलॉकर में उपलब्ध सभी सरकारी दस्तावेजों की सूची खुल जाएगी। यहां 'EPFO UAN Services' या 'UAN Card / Passbook' के विकल्प का चयन करें।चयन करते ही कुछ ही सेकंडों में आपकी नवीनतम पीएफ पासबुक और बैलेंस का विवरण पीडीएफ (PDF) फाइल के रूप में सीधे आपकी वॉट्सऐप चैट में डाउनलोड के लिए आ जाएगा।ईपीएफओ के 138 क्षेत्रीय कार्यालयों के डायरेक्ट व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबरयदि आपकी समस्या केवल बैलेंस चेक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आपका क्लेम 20 दिनों से अटका हुआ है, कंपनी एग्जिट डेट नहीं डाल रही है या बैंक केवाईसी रिजेक्ट हो रहा है, तो ईपीएफओ ने देश भर के सभी 138 क्षेत्रीय कार्यालयों के लिए अलग-अलग डेडीकेटेड वॉट्सऐप हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। ईपीएफओ के आधिकारिक पोर्टल (epfindia.gov.in) के 'WhatsApp Helpline' सेक्शन में जाकर कोई भी खाताधारक अपने जिले या संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय (जैसे लखनऊ, कानपुर, मेरठ, नोएडा, दिल्ली नॉर्थ, बांद्रा आदि) का विशिष्ट वॉट्सऐप नंबर निकाल सकता है। इन नंबरों पर सीधे व्हाट्सएप मैसेज भेजकर अपनी शिकायत और दस्तावेजों की कॉपी साझा की जा सकती है, जहां ईपीएफओ के पीआरओ (PRO) और ग्रीवांस सेल के अधिकारी सीधे तौर पर मामलों की निगरानी करते हैं और तय समयसीमा के भीतर समाधान उपलब्ध कराते हैं।बिना इंटरनेट के बैलेंस जानने के 2 अन्य आसान और सुपरफास्ट तरीकेयदि किसी कारणवश आप वॉट्सऐप का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं या आपके फोन में इंटरनेट डेटा खत्म हो गया है, तब भी आप बिना किसी रुकावट के अपने पीएफ बैलेंस की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ईपीएफओ इसके लिए दो मुफ्त और विश्वसनीय सेवाएं देता है:मिस्ड कॉल सर्विस (Missed Call Facility): अपने ईपीएफओ-पंजीकृत मोबाइल नंबर से टोल-फ्री नंबर 9966022424 पर सिर्फ एक मिस्ड कॉल दें। दो रिंग के बाद कॉल अपने आप कट जाएगी। इसके कुछ ही सेकंडों बाद ईपीएफओ के सिस्टम से एक आधिकारिक एसएमएस आएगा, जिसमें आपके यूएएन, नाम, जन्मतिथि, आधार सीडिंग स्थिति और खाते में मौजूद कुल पीएफ बैलेंस का पूरा विवरण दर्ज होगा।एसएमएस सेवा (SMS Service): अपने रजिस्टर्ड फोन से 7738299899 पर एक टेक्स्ट मैसेज भेजें। मैसेज बॉक्स में टाइप करें: EPFOHO UAN HIN (यदि आपको हिंदी में जानकारी चाहिए) या EPFOHO UAN ENG (अंग्रेजी के लिए)। मैसेज भेजते ही तुरंत रिटर्न एसएमएस में आपके पिछले और कुल अंशदान की जानकारी प्राप्त हो जाएगी।वॉट्सऐप पर पीएफ अपडेट लेते समय साइबर फ्रॉड से बचने के 4 कड़े नियमवॉट्सऐप पर डिजिटल सेवाओं के प्रसार के साथ ही साइबर ठगों और फर्जी गिरोहों की सक्रियता भी बढ़ जाती है। ईपीएफओ ने देश के सभी खाताधारकों को सख्त चेतावनी जारी करते हुए इन सुरक्षा सावधानियों का पालन करने का आग्रह किया है:ब्लू टिक (Green/Blue Verified Badge) जरूर जांचें: किसी भी सरकारी या आधिकारिक चैटबॉट से बातचीत करते समय यह सुनिश्चित करें कि प्रोफाइल पर हरा या नीला 'वेरिफाइड चेकमार्क' लगा हो। किसी भी अज्ञात या व्यक्तिगत मोबाइल नंबर से आने वाले 'ईपीएफओ सपोर्ट' के दावों पर कतई भरोसा न करें।ओटीपी और यूएएन पासवर्ड कभी शेयर न करें: ईपीएफओ का कोई भी वास्तविक प्रतिनिधि या अधिकृत सिस्टम कभी भी आपसे चैट पर आपका लॉगिन पासवर्ड, बैंक का सीवीवी (CVV) या यूपीआई पिन नहीं मांगता। प्रमाणीकरण के लिए केवल सरकारी गेटवे द्वारा भेजा गया सिस्टम ओटीपी ही अधिकृत होता है।फर्जी एपीके (APK) फाइल्स से सावधान: यदि वॉट्सऐप पर कोई व्यक्ति आपको यह कहकर कोई फाइल भेजता है कि 'इस ऐप से तुरंत पीएफ का पूरा पैसा निकल जाएगा', तो ऐसी किसी भी संदिग्ध फाइल को डाउनलोड न करें। यह आपके फोन को हैक करने वाला ट्रोजन या मैलवेयर हो सकता है।पैसे की मांग पर तुरंत शिकायत करें: ईपीएफओ की सभी वॉट्सऐप और ऑनलाइन सेवाएं 100% निशुल्क हैं। यदि कोई व्यक्ति क्लेम पास कराने या बैलेंस चेक करने के बदले पैसे मांगता है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या epfigms.gov.in पर लिखित शिकायत दर्ज कराएं।ईपीएफओ का यह कदम दिखाता है कि आम नागरिकों तक सामाजिक सुरक्षा के लाभ पहुंचाने के लिए प्रशासन तकनीक का बेहतरीन इस्तेमाल कर रहा है। अब जटिल वेबसाइटों के एरर और दफ्तरों के चक्कर काटने के दिन लद चुके हैं; अपने स्मार्टफोन में सही नंबर सेव रखें और जरूरत पड़ने पर एक आसान मैसेज से अपनी गाढ़ी कमाई का पूरा ब्योरा तुरंत हासिल करें।
सलवार पहने फांसी पर लटका था पति, गंगा किनारे मिली पत्नी, पुलिस हैरान
Bijnor Husband Wife Mysterious Death: बिजनौर में पति-पत्नी की संदिग्ध हालात में मौत. पत्नी की सलवार में फांसी पर लटका मिला पति, गंगा किनारे मिली पत्नी की लाश. पुलिस जांच जारी.
दिल्ली कोर्ट से Swatantra Bhardwaj को 3 हफ्ते की अंतरिम जमानत, पुलिस को दिए जांच के निर्देश
दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को हिंदुत्व समर्थक ‘इन्फ्लुएंसर’ स्वतंत्र भारद्वाज को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत देते हुए हमले से जुड़े मामले की जांच के संबंध में पुलिस को कई निर्देश जारी किए। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत एक विशेष अदालत होने के नाते, जांच एजेंसी को निर्देश दिया जाता है कि वह तेजी से जांच करे। जांच अधिकारी के कानून के तहत कोई अन्य कदम उठाने के अधिकार प्रभावित हुए बिना वह विशेष तौर पर सभी उपलब्ध सरकारी और निजी स्रोतों से जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन वाली जगह, खासकर घटना वाली जगह या उसके आस-पास की 23 जून, 2026 की सीसीटीवी फुटेज एकत्र करेगा और उसे सुरक्षित रखेगा।’’अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि उस दिन विरोध-प्रदर्शन के दौरान तैनात दिल्ली पुलिस के कर्मचारियों द्वारा रिकॉर्ड किए गए किसी भी वीडियो या तस्वीर (जिसमें घटना की सर्विलांस फ़ुटेज भी शामिल हो) को हासिल किया जाए; आरोपी के विरोध-प्रदर्शन शुरू होने से लेकर उसकी गिरफ्तारी तक का ‘कॉल डिटेल रिकॉर्ड’ और टावर लोकेशन डेटा प्राप्त किए जाएं। इसने यह भी कहा कि विवादित पॉडकास्ट से संबंधित मंच या चैनलों से ‘सब्सक्राइबर’ की जानकारी, अपलोड लॉग, आईपी एड्रेस और मूल फाइल हासिल की जाएं; और यह सुनिश्चित किया जाए कि डेटा सुरक्षित रखा जाए। अदालत ने कहा, ‘‘उस चैनल को प्रबंधित या संचालित करने वाले व्यक्ति की जांच करें और रिकॉर्डिंग का स्रोत, तारीख तथा स्थिति का पता लगाया जाए; दोनों पक्षों की ओर से पेश किए गए पेन ड्राइव, पॉडकास्ट और वीडियो को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजें ताकि यह पता चल सके कि वे असली हैं या उनमें कोई बदलाव किया गया है या उन्हें कृत्रिम तरीके से बनाया गया है, और जहां भी ज़रूरी हो, भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के तहत प्रमाण हासिल करें।’’इसमें शिकायतकर्ता और उसकी बेटी को धमकी भरे या अपशब्दों वाले संदेश भेजने के लिए ज़िम्मेदार लोगों की पहचान करने और यह पता लगाने के भी निर्देश दिए गए कि क्या इनमें से कोई व्यक्ति भारद्वाज से जुड़ा है। अदालत ने सह-आरोपी सूरज कुमार के ठिकाने और दूसरे साथियों की पहचान में हुई प्रगति के बारे में रिपोर्ट मांगी, साथ ही मेडिकल बोर्ड की राय पर आगे की कार्रवाई की जानकारी तलब की। इसने कहा, ‘‘सुनवाई की अगली तारीख पर, जांच अधिकारी द्वारा उपरोक्त हर बात पर वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल की जाएगी। इस रिपोर्ट में अंतरिम जमानत के दौरान आवेदक के व्यवहार (जिसमें उससे जुड़ी सोशल मीडिया गतिविधियां भी शामिल हैं) और शिकायतकर्ता व उसकी नाबालिग बेटी को मिली धमकियों पर की गई कार्रवाई का भी ज़िक्र होगा।’’अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता और जांच अधिकारी को यह छूट है कि वे ज़मानत की शर्तों के किसी भी उल्लंघन की जानकारी तुरंत अदालत को दें, और इसके लिए अगली तारीख का इंतज़ार न करें, ताकि अंतरिम जमानत की समीक्षा की जा सके या उसे रद्द किया जा सके। इसने कहा, ‘‘नियमित जमानत की अर्जी लंबित रहेगी और अगली तारीख पर आवेदक के आचरण तथा वस्तुस्थिति रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए इस पर विचार किया जाएगा।
निजी क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) केवल एक बचत खाता नहीं, बल्कि उनके पूरे जीवन की गाढ़ी कमाई और आपातकालीन जरूरतों की सबसे बड़ी ढाल है। नौकरी छूटने पर घर चलाना हो, गंभीर बीमारी का इलाज कराना हो, बच्चों की उच्च शिक्षा की फीस भरनी हो या फिर रिटायरमेंट के बाद सम्मानजनक जीवन जीना हो, हर कर्मचारी अपने प्रोविडेंट फंड के पैसे पर ही निर्भर रहता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में लाखों पीएफ अंशधारकों के सामने सबसे बड़ी मानसिक प्रताड़ना 'पीएफ क्लेम का महीनों तक लटकना' या तकनीकी आधार पर बार-बार खारिज (Reject) होना बनकर उभरी है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, वाराणसी से लेकर देश भर के औद्योगिक केंद्रों में काम करने वाले कर्मचारी अक्सर शिकायत करते हैं कि ऑनलाइन क्लेम सबमिट करने के हफ्तों बाद भी पोर्टल पर केवल 'Under Process' दिखाई देता है। अब ऐसे परेशान खाताधारकों के लिए भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और उपभोक्ता अदालतों ने एक बेहद कड़ा और कर्मचारी-हितैषी रुख अपनाया है। नए अधिसूचित नियमों के अनुसार, यदि सभी दस्तावेज सही होने के बावजूद कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) 20 दिनों के भीतर क्लेम का निपटारा नहीं करता है, तो दोषी अधिकारियों पर 12 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से दंडात्मक ब्याज (Penal Interest) ठोका जा सकता है।मुंबई कंज्यूमर फोरम का ऐतिहासिक फैसला: ₹14 लाख के क्लेम में 35 दिन की देरी पर EPFO पर लगा भारी जुर्मानाकर्मचारियों के अधिकारों को लेकर अदालतों की सख्ती का सबसे ताजा और बड़ा उदाहरण मुंबई उपनगरीय जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का वह ऐतिहासिक फैसला है, जिसने ईपीएफओ के प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया है। यह मामला 'फ्लीट मैरीटाइम सर्विसेज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड' के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से जुड़ा हुआ था, जिन्होंने 19 अक्टूबर को अपने पीएफ खाते से 14,06,272 रुपये (लगभग ₹14.06 लाख) की अंतिम निकासी के लिए विधिवत आवेदन किया था। नियमानुसार ईपीएफओ को इस आवेदन को 20 दिनों के भीतर प्रोसेस करना था, लेकिन विभाग ने इसमें 35 दिनों की अनावश्यक देरी की और क्लेम 14 दिसंबर को जाकर सेटल किया।ईपीएफओ ने अदालत में अपना बचाव करते हुए दलील दी कि आवेदन के साथ जॉइंट डिक्लेरेशन फॉर्म संलग्न नहीं था, इसलिए फाइल वापस भेजी गई थी। हालांकि, उपभोक्ता आयोग के सामने ईपीएफओ ऐसा कोई लिखित रिकॉर्ड, पावती या आधिकारिक रिजेक्शन लेटर पेश नहीं कर सका जिससे यह साबित हो कि आवेदन अधूरा था। अदालत ने इसे ईपीएफओ की तरफ से 'सेवा में गंभीर कमी' (Deficiency in Service) और घोर प्रशासनिक लापरवाही करार दिया। आयोग ने ईपीएफओ को सख्त आदेश दिया कि वह 35 दिनों की इस देरी के लिए 6 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज का भुगतान करे और 45 दिनों के भीतर इस आदेश की अनुपालन रिपोर्ट पेश करे। इस ऐतिहासिक फैसले ने देश भर के 6 करोड़ से अधिक पीएफ सब्सक्राइबर्स को यह कानूनी भरोसा दिया है कि वे अपनी ही गाढ़ी कमाई के लिए सरकारी लेट-लतीफी के आगे लाचार नहीं हैं।12% की पेनल्टी और अधिकारी के वेतन से वसूली: जानिए क्या कहता है ईपीएफओ का संशोधित नियमश्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security) के अंतर्गत अधिसूचित कर्मचारी भविष्य निधि योजना के संशोधित दिशा-निर्देशों में क्लेम सेटलमेंट की समयसीमा को लेकर बेहद सख्त प्रावधान किए गए हैं। पहले के नियमों (EPF Scheme 1952 के पैरा 72(7)) में भी 20 दिनों की सीमा तय थी, लेकिन उस समय दंडात्मक ब्याज को केवल ईपीएफ की घोषित सामान्य ब्याज दर से जोड़ा जाता था। नए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में इस जुर्माने को फिक्स करते हुए 12 प्रतिशत प्रति वर्ष कर दिया गया है।सर्कुलर के तहत तय किए गए मुख्य वैधानिक बिंदु इस प्रकार हैं:20 दिन की अधिकतम समयसीमा: भविष्य निधि (PF Withdrawal), पेंशन (EPS Pension) और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा (EDLI Life Insurance) से जुड़े सभी दावों का निपटारा आवेदन प्राप्ति के 20 दिनों के भीतर करना अनिवार्य है, बशर्ते आवेदन सभी प्रकार से पूर्ण हो।3 दिन का सुपर-फास्ट ऑटो-सेटलमेंट: पूरी तरह से केवाईसी-अनुपालित (KYC-Compliant), आधार-लिंक्ड और सत्यापित बैंक खाते वाले दावों को आईटी सिस्टम के जरिए 3 कार्यदिवसों (72 घंटे) के भीतर निपटाने का लक्ष्य तय किया गया है।अधिकारी के वेतन से कटेगा हर्जाना: यदि संबंधित क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त (RPFC) या अधिकृत अधिकारी बिना किसी वैध और पर्याप्त कारण के 20 दिनों की समयसीमा का उल्लंघन करता है, तो 12% की दर से लगने वाला दंडात्मक ब्याज ईपीएफओ के सरकारी कोष से नहीं, बल्कि सीधे उस जिम्मेदार अधिकारी के व्यक्तिगत वेतन (Salary) से वसूलने का कड़ा नियम बनाया गया है।किन वजहों से अटकता है पीएफ का क्लेम? रिजेक्शन से बचने के लिए तुरंत करें ये 5 सुधारअधिकांश मामलों में ईपीएफओ के फील्ड ऑफिस क्लेम को खारिज करने के लिए तकनीकी विसंगतियों का सहारा लेते हैं। यदि आप चाहते हैं कि आपका क्लेम 20 दिन की कानूनी मियाद के भीतर या मात्र 3 दिनों में सीधे बैंक खाते में क्रेडिट हो जाए, तो क्लेम फॉर्म (Form 19, 10C, 31) भरने से पहले इन 5 जरूरी चीजों की गहन जांच कर लें:नाम, जन्मतिथि और पिता के नाम का मिलान: आपके आधार कार्ड, पैन कार्ड और ईपीएफओ के डेटाबेस में आपके नाम की स्पेलिंग, जन्मतिथि और पिता का नाम शत-प्रतिशत एक समान होना चाहिए। एक अक्षर का भी अंतर होने पर सिस्टम क्लेम को ऑटो-रिजेक्ट कर देता है।बैंक खाता और IFSC कोड का सत्यापन: आपका बैंक खाता आपके यूएएन (UAN) से सीडेड होना चाहिए और उस पर बैंक द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर (DSC/e-Sign) के जरिए अप्रूवल होना चाहिए। यदि आपके बैंक का किसी दूसरे बैंक में विलय हुआ है (जैसे ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का पीएनबी में या सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक में), तो नया आईएफएससी (IFSC) कोड पोर्टल पर अपडेट करें।चेकबुक या पासबुक की स्पष्ट कॉपी: क्लेम अपलोड करते समय बैंक पासबुक के पहले पन्ने की या कैंसिल्ड चेक की बिल्कुल साफ, पठनीय रंगीन कॉपी (100 KB से 500 KB के बीच, जेपीजी/पीडीएफ फॉर्मेट) ही अपलोड करें, जिस पर आपका नाम, खाता संख्या और आईएफएससी साफ दिख रहा हो।नौकरी छोड़ने की तारीख (Date of Exit): यदि आप नौकरी छोड़ चुके हैं और पूरा पीएफ निकालना चाहते हैं, तो सुनिश्चित करें कि आपकी पिछली कंपनी ने ईपीएफओ पोर्टल पर आपकी 'Date of Exit' दर्ज कर दी हो। डेट ऑफ एग्जिट दर्ज न होने की स्थिति में आप केवल आंशिक एडवांस ही निकाल पाएंगे, पूरा फंड नहीं।सर्विस हिस्ट्री और ट्रांसफर (Overlap Issues): यदि आपने अपने करियर में 2 या 3 कंपनियां बदली हैं, तो सुनिश्चित करें कि पुरानी कंपनियों का पीएफ बैलेंस आपके वर्तमान यूएएन में ऑनलाइन ट्रांसफर हो चुका हो। कई बार सर्विस ओवरलैप होने पर भी फील्ड ऑफिसर क्लेम रोक देते हैं।अगर 20 दिन बाद भी न आए पैसा, तो कहां और कैसे करें शिकायत? ये हैं 4 कानूनी रास्तेयदि आपके सभी कागजात, केवाईसी और बैंक विवरण पूरी तरह दुरुस्त हैं और फिर भी आपका पीएफ क्लेम 20 दिनों से अधिक समय से 'अंडर प्रोसेस' पड़ा हुआ है या बिना ठोस कारण के बार-बार खारिज किया जा रहा है, तो हाथ पर हाथ धरकर बैठने के बजाय इन 4 आधिकारिक मंचों पर तुरंत कार्रवाई करें:1. EPFiGMS पोर्टल पर ऑनलाइन ग्रीवांस दर्ज करें: ईपीएफओ के आधिकारिक शिकायत निवारण पोर्टल epfigms.gov.in पर जाएं। 'Register Grievance' पर क्लिक करें, अपना स्टेटस 'PF Member' चुनें और 12 अंकों का UAN दर्ज करें। इसके बाद अपने क्लेम का पावती नंबर (Claim ID) दर्ज करते हुए विस्तार से लिखें कि 20 दिन की वैधानिक सीमा समाप्त हो चुकी है। सामान्यतः 7 से 15 दिनों के भीतर इस पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा संज्ञान लिया जाता है।2. 'निधि आपके निकट 2.0' (Nidhi Aapke Nikat) में व्यक्तिगत सुनवाई: ईपीएफओ हर महीने की तय तारीख (सामान्यतः 27 तारीख) को देश के प्रत्येक जिले में 'निधि आपके निकट' जनसुनवाई शिविर आयोजित करता है। आप अपने जिले के शिविर में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर सीधे क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त के समक्ष अपने क्लेम की रसीद और दस्तावेज रखकर तत्काल समाधान की मांग कर सकते हैं।3. सीपीग्राम्स (CPGRAMS) पर पीएमओ को शिकायत: यदि ईपीएफओ का स्थानीय कार्यालय आपकी नहीं सुन रहा है, तो केंद्र सरकार के लोक शिकायत पोर्टल pgportal.gov.in (CPGRAMS) पर श्रम मंत्रालय के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराएं। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा मॉनिटर किए जाने वाले इस पोर्टल पर शिकायत दर्ज होते ही उच्चाधिकारियों की जवाबदेही तय हो जाती है।4. जिला उपभोक्ता आयोग (Consumer Forum) का दरवाजा खटखटाएं: मुंबई के फैसले ने यह नजीर साबित कर दी है कि पीएफ सब्सक्राइबर 'उपभोक्ता' की श्रेणी में आता है। यदि ईपीएफओ की मनमानी से आपको वित्तीय नुकसान, मानसिक तनाव या इलाज में देरी हुई है, तो आप अपने नजदीकी जिला उपभोक्ता आयोग में 'सेवा में कमी' का मुकदमा दायर कर सकते हैं, जहां से आपको ब्याज सहित हर्जाना और कानूनी खर्च मिलने का पूरा कानूनी अधिकार है।पीएफ सब्सक्राइबर्स रखें लिखित रिकॉर्ड: कागजी सबूत ही दिलाएंगे अदालत में जीतउपभोक्ता संरक्षण मामलों के अधिवक्ताओं और श्रम कानून विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी कानूनी लड़ाई में कागजी और डिजिटल साक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। जब भी आप ईपीएफओ पोर्टल पर ऑनलाइन क्लेम सबमिट करें, तो स्क्रीन पर दिखने वाली पावती पर्ची (Acknowledgement Receipt), क्लेम आईडी और तारीख का स्क्रीनशॉट या प्रिंटआउट अवश्य सुरक्षित रख लें। यदि ईपीएफओ आपके क्लेम को खारिज करता है, तो उस रिजेक्शन के पीछे दर्ज तकनीकी कारण (Rejection Remarks) की प्रति भी संभाल कर रखें।यदि विभाग बार-बार एक ही कारण बताकर क्लेम लौटा रहा है, तो अपने नियोक्ता (Employer) से एक औपचारिक ईमेल या जॉइंट डिक्लेरेशन लेटर लेकर उसका पीडीएफ बना लें। जब आप उपभोक्ता फोरम या सीपीग्राम्स पर जाते हैं, तो यही तारीखें और दस्तावेज यह साबित करते हैं कि कर्मचारी की ओर से कोई गलती नहीं थी और पूरा विलंब ईपीएफओ के फील्ड ऑफिस की कार्यप्रणाली के कारण हुआ।डिजिटल इंडिया के इस युग में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उद्देश्य नागरिकों को समय पर उनका हक दिलाना है। 20 दिन की वैधानिक मियाद और 12% के दंडात्मक ब्याज का यह नया नियम ईपीएफओ के बाबू-राज और लेट-लतीफी पर एक बेहद जरूरी लगाम है। यदि आपका पैसा भी बिना वजह अटका है, तो अपने अधिकारों को पहचानें और समय रहते उचित मंच पर आवाज उठाएं।
भारत में तेजी से बढ़ती मेडिकल महंगाई (Medical Inflation) आज 14 से 15 प्रतिशत के स्तर को छू रही है। किसी भी गंभीर बीमारी, अचानक सर्जरी या दुर्घटना के समय निजी अस्पतालों का एक हफ्ते का बिल आम मध्यमवर्गीय परिवार की बरसों की बचत को साफ कर देता है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, नोएडा और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों से लेकर देश भर के छोटे कस्बों में लोग अब हेल्थ इंश्योरेंस (स्वास्थ्य बीमा) को प्राथमिकता दे रहे हैं। लेकिन आज सबसे बड़ी विडंबना यह है कि लाखों लोग केवल सम इंश्योर्ड (जैसे ₹5 लाख या ₹10 लाख) और सस्ता प्रीमियम देखकर ऑनलाइन पॉलिसी खरीद लेते हैं। जब परिवार में कोई बीमार पड़ता है और अस्पताल के टीपीए (TPA) डेस्क पर क्लेम पेश किया जाता है, तब बीमा कंपनी के क्लॉज सामने आते हैं और पता चलता है कि ₹5 लाख के बिल में से केवल ₹3 लाख ही पास हुए, जबकि ₹2 लाख अपनी जेब से भरने पड़ गए। कई मामलों में तो तकनीकी खामियों का हवाला देकर क्लेम पूरी तरह खारिज (Reject) कर दिया जाता है। बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) द्वारा उपभोक्ता-हितैषी नियम बनाने के बावजूद यदि ग्राहक पॉलिसी के 'पॉलिसी वर्डिंग' और 7 बुनियादी क्लॉज को नहीं समझता, तो मुश्किल वक्त में भारी आर्थिक नुकसान तय है।शर्त 1: वेटिंग पीरियड का जाल (Waiting Period) - कब और किन बीमारियों पर लागू होता है प्रतिबंध?हेल्थ इंश्योरेंस में सबसे ज्यादा विवाद 'वेटिंग पीरियड' को लेकर होते हैं। जब आप पॉलिसी खरीदते हैं, तो पहले ही दिन से हर बीमारी कवर नहीं होती। बीमा पॉलिसियों में मुख्य रूप से तीन प्रकार के वेटिंग पीरियड होते हैं:प्रारंभिक वेटिंग पीरियड (Initial 30-Day Waiting Period): पॉलिसी शुरू होने के शुरुआती 30 दिनों के भीतर किसी भी सामान्य बीमारी (जैसे डेंगू, मलेरिया, वायरल बुखार या दिल की बीमारी) का क्लेम नहीं मिलता। इस दौरान केवल आकस्मिक दुर्घटना (Accidental Emergency) के कारण होने वाले इलाज को ही पहले दिन से कवर किया जाता है।विशिष्ट बीमारियों का वेटिंग पीरियड (Specific Disease Waiting Period): मोतियाबिंद (Cataract), हर्निया, पथरी (Kidney Stone), पाइल्स और घुटने के प्रत्यारोपण (Joint Replacement) जैसी गैर-आपातकालीन बीमारियों के लिए कंपनियों के पास 1 से 2 साल का तय वेटिंग पीरियड होता है।पहले से मौजूद बीमारियां (Pre-Existing Diseases - PED): पॉलिसी लेते समय यदि आपको डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, थायरॉयड या अस्थमा है, तो उसे पहले से मौजूद बीमारी माना जाता है। आईआरडीएआई के संशोधित नियमों के अनुसार, अब कोई भी बीमा कंपनी पहले से मौजूद बीमारियों पर अधिकतम 3 साल (पहले 4 साल था) से ज्यादा का वेटिंग पीरियड नहीं लगा सकती। पॉलिसी खरीदते समय हमेशा यह जांचें कि कंपनी पीईडी पर न्यूनतम वेटिंग पीरियड (1 या 2 साल) का विकल्प दे रही है या नहीं।शर्त 2: रूम रेंट कैपिंग और प्रोपोर्शनट डिडक्शन (Room Rent Capping) - अस्पताल के बिल का सबसे बड़ा झटकारूम रेंट लिमिट किसी भी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी का सबसे खतरनाक और छुपा हुआ नियम होता है। कई कंपनियां अपने प्लान में शर्त जोड़ देती हैं कि प्रति दिन के कमरे का किराया कुल सम इंश्योर्ड का केवल 1 प्रतिशत (और आईसीयू के लिए 2 प्रतिशत) होगा।यदि आपके पास ₹5 लाख की पॉलिसी है, तो आपका रूम रेंट केवल ₹5,000 प्रति दिन तय होगा। अब यदि आप अस्पताल में ₹8,000 प्रति दिन वाला कमरा चुन लेते हैं, तो केवल ₹3,000 का अतिरिक्त किराया ही नहीं कटता, बल्कि 'प्रोपोर्शनट डिडक्शन' (Proportionate Deduction) का नियम लागू हो जाता है। इसके तहत बीमा कंपनी यह मानती है कि आपने प्रीमियम कमरा लिया, इसलिए डॉक्टर विजिट फीस, सर्जरी चार्ज, नर्सिंग चार्ज और ओटी (OT) का खर्च भी उसी अनुपात में बढ़ गया। परिणाम यह होता है कि बीमा कंपनी आपके कुल अस्पताल बिल से 30 से 40 प्रतिशत तक की कटौती कर देती है।सलाह: हमेशा ऐसी पॉलिसी चुनें जिसमें 'No Room Rent Capping' यानी कमरे के किराए पर कोई पाबंदी न हो या कम से कम 'Single Private AC Room' तक की स्पष्ट अनुमति हो।शर्त 3: को-पेमेंट (Co-Payment) और डिडक्टिबल्स - क्या बिल का एक हिस्सा खुद भरना पड़ेगा?को-पेमेंट का सीधा अर्थ है कि इलाज के कुल बिल का एक निश्चित प्रतिशत हिस्सा आपको अपनी जेब से वहन करना होगा और शेष राशि ही बीमा कंपनी देगी। उदाहरण के लिए, यदि आपकी पॉलिसी में 20% का को-पेमेंट क्लॉज है और अस्पताल का फाइनल बिल ₹2,00,000 आता है, तो ₹40,000 आपको खुद देने होंगे और बीमा कंपनी केवल ₹1,60,000 का ही क्लेम पास करेगी।कंपनियां अक्सर 60 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों की पॉलिसी में, या भौगोलिक जोन (Zone A vs Zone B - जैसे दिल्ली/मुंबई बनाम लखनऊ/कानपुर) के आधार पर को-पेमेंट की शर्त जोड़ देती हैं। कम प्रीमियम के लालच में कई युवा भी को-पेमेंट वाला प्लान ले लेते हैं, जो बाद में भारी पड़ता है। पॉलिसी लेते समय यह पक्का करें कि बेस पॉलिसी में 'Zero Co-payment' का क्लॉज हो। इसी तरह 'डिडक्टिबल' (Deductible) वह बेस रकम होती है, जिसे पार करने के बाद ही बीमा का क्लेम शुरू होता है; सामान्य व्यक्तिगत पॉलिसियों में डिडक्टिबल क्लॉज से बचना चाहिए।शर्त 4: नॉन-मेडिकल आइटम्स और कंज्यूमेबल्स (Consumables Coverage) का अतिरिक्त खर्चअस्पताल में भर्ती होने पर फाइनल बिल का 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा ऐसी चीजों का होता है जिन्हें बीमा की तकनीकी भाषा में 'कंज्यूमेबल्स' (Consumables / Non-Medical Items) कहा जाता है। इसमें दस्ताने (Gloves), सिरिंज, सर्जिकल टेप, पीपीई किट, कॉटन, थर्मामीटर, डायपर, प्रशासनिक फाइलिंग चार्ज और डिस्चार्ज समरी शुल्क शामिल होते हैं।आईआरडीएआई की मानक सूची के अनुसार, सामान्य स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियां इन नॉन-मेडिकल खर्चों का भुगतान नहीं करती हैं। ₹3 लाख के बिल में लगभग ₹30,000 से ₹45,000 का खर्च केवल कंज्यूमेबल्स का हो सकता है। इससे बचने के लिए पॉलिसी लेते समय नाममात्र के अतिरिक्त प्रीमियम पर 'कंज्यूमेबल्स कवर' (Consumables Rider / Claim Shield) का राइडर जरूर जोड़ें। यह छोटा सा राइडर अस्पताल के इन सभी रोजमर्रा के मेडिकल सामानों का पूरा बिल बीमा कंपनी से पास करवा देता है।शर्त 5: प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन (Pre & Post-Hospitalisation Expenses) की समयसीमाकिसी भी बीमारी का इलाज अस्पताल में भर्ती होने से कई दिन पहले शुरू हो जाता है और छुट्टी मिलने के बाद भी लंबे समय तक चलता रहता है। अस्पताल में दाखिल होने से पहले कराए गए डॉक्टर कंसल्टेशन, एमआरआई, सीटी स्कैन, ब्लड टेस्ट और सोनोग्राफी के खर्चे 'प्री-हॉस्पिटलाइजेशन' कहलाते हैं। वहीं, अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद 2 से 3 महीने तक चलने वाली दवाइयां, ड्रेसिंग, फिजियोथेरेपी और फॉलो-अप चेकअप के खर्च 'पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन' के दायरे में आते हैं।एक बेहतरीन पॉलिसी वही मानी जाती है जिसमें कम से कम:प्री-हॉस्पिटलाइजेशन: न्यूनतम 60 दिन (कम से कम 30 दिन मानक)।पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन: न्यूनतम 90 दिन से लेकर 180 दिन तक का कवरेज मिले।अक्सर लोग अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद इन ओपीडी और जांच के बिलों को संभाल कर नहीं रखते। यदि आप डिस्चार्ज के बाद सभी ओरिजिनल बिल और डॉक्टर के पर्चे (Prescriptions) 30 दिनों के भीतर बीमा कंपनी को सबमिट करते हैं, तो यह पूरा पैसा आपके बैंक खाते में रिइंबर्स हो जाता है।शर्त 6: रीस्टोरेशन बेनिफिट (Restoration Benefit) और नो क्लेम बोनस (NCB) का पैमानायदि एक ही वित्तीय वर्ष में परिवार के दो सदस्य बीमार पड़ जाएं या किसी एक सदस्य का लंबा इलाज चले, तो क्या पॉलिसी का सम इंश्योर्ड खत्म होने पर बीमा कंपनी दोबारा बैकअप देगी? इसी सुविधा को 'रीस्टोरेशन' या 'रिफिल बेनिफिट' (Restoration Benefit) कहा जाता है।पॉलिसी में रीस्टोरेशन की दो मुख्य शर्तें जरूर जांचें:क्या यह 'उसी बीमारी' (Same Illness) के दोबारा उभरने पर काम करेगा या केवल 'अलग बीमारी' (Different Illness) के लिए ही पैसा रिस्टोर होगा? आधुनिक पॉलिसियों में उसी बीमारी के लिए भी 100% अनलिमिटेड रीस्टोरेशन का विकल्प मिलता है।क्या रीस्टोरेशन सम इंश्योर्ड पूरी तरह शून्य होने पर ट्रिगर होता है या आंशिक रूप से खत्म होने पर भी शुरू हो जाता है?इसके साथ ही 'नो क्लेम बोनस' (NCB) की जांच करें। यदि आप किसी साल कोई क्लेम नहीं लेते हैं, तो अच्छी कंपनियां आपके सम इंश्योर्ड को बिना कोई अतिरिक्त प्रीमियम लिए 10% से लेकर 50% तक बढ़ा देती हैं। कुछ पॉलिसियों में 5 वर्षों में सम इंश्योर्ड 100% से लेकर 500% तक (सुपर एनसीबी राइडर के साथ) बढ़ जाता है, जो महंगाई से लड़ने के लिए सबसे मजबूत हथियार है।शर्त 7: कैशलेस एवरीवेयर (Cashless Everywhere) और नेटवर्क अस्पतालों का दायराआईआरडीएआई ने देश भर में 'कैशलेस एवरीवेयर' (Cashless Everywhere) की क्रांतिकारी व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत बीमाधारक किसी भी ऐसे अस्पताल में कैशलेस इलाज करा सकता है जो बीमा कंपनी के आधिकारिक नेटवर्क में शामिल नहीं है। लेकिन इस सुविधा के लिए भी कुछ पूर्व-शर्तें हैं जिन्हें जानना अनिवार्य है।यदि सर्जरी या इलाज पहले से नियोजित (Planned Treatment) है, तो अस्पताल में भर्ती होने से कम से कम 48 घंटे पहले बीमा कंपनी या टीपीए को सूचना देनी होती है। यदि कोई आपातकालीन स्थिति (Emergency Admission) है, तो भर्ती होने के 24 से 48 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को इंटिमेट करना जरूरी होता है। इसके अलावा, पॉलिसी लेते समय यह जांचें कि आपके शहर, जिले या आसपास के प्रमुख मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल उस बीमा कंपनी के एक्टिव कैशलेस पैनल पर हैं या नहीं। यदि अस्पताल ब्लैकलिस्टेड (Excluded Hospitals) श्रेणी में होगा, तो वहां किसी भी सूरत में क्लेम नहीं मिलेगा।आदर्श हेल्थ इंश्योरेंस बनाम जोखिम भरा प्लान: एक नजर में त्वरित चेकलिस्टपॉलिसी का चुनाव आसान बनाने के लिए मुख्य अंतरों को इस तालिका के माध्यम से समझें:पैमाना / फीचरजोखिम भरा प्लान (बचने योग्य)आदर्श पॉलिसी (खरीदने योग्य)रूम रेंट लिमिटसम इंश्योर्ड का 1% या तय ₹3,000/दिननो रूम रेंट कैपिंग / सिंगल प्राइवेट एसी रूमपीईडी वेटिंग पीरियड3 से 4 साल का लंबा इंतजार1 से 2 साल का कम वेटिंग पीरियड (राइडर के साथ)को-पेमेंट क्लॉज10% से 20% अनिवार्य को-पेमेंट0% (Zero Co-pay) अनिवार्यकंज्यूमेबल्स खर्चस्वयं वहन करना होगा (10-15% कटौती)कंज्यूमेबल्स राइडर के तहत 100% कवरपोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशनमात्र 30 से 60 दिन90 से 180 दिन तक का कवरेजरीस्टोरेशन सुविधाकेवल अलग बीमारी पर एक बारउसी बीमारी पर भी 100% अनलिमिटेड रिस्टोरक्लेम रिजेक्शन से बचने के 4 अचूक नियम: कभी न छुपाएं मेडिकल हिस्ट्रीपॉलिसी की शर्तों के अलावा क्लेम के समय सबसे बड़ा पेंच उपभोक्ता की अपनी गलतियों से फंसता है। बीमा कंपनियों के पास दावों को खारिज करने का सबसे बड़ा कानूनी आधार 'तथ्यों को छुपाना' (Non-Disclosure of Material Facts) होता है। यदि आपको बीपी, शुगर, थायरॉयड है, या आप सिगरेट/शराब का सेवन करते हैं, तो प्रस्ताव पत्र (Proposal Form) में इसका 100% सच-सच खुलासा करें। भले ही इसके लिए कंपनी आपसे ₹1,000 अधिक प्रीमियम मांग ले या मेडिकल चेकअप कराए, लेकिन भविष्य में आपका क्लेम कभी रिजेक्ट नहीं होगा।इसके अतिरिक्त, आईआरडीएआई का 'मोरेटोरियम पीरियड' (Moratorium Period) नियम याद रखें। नए नियमों के तहत यदि किसी पॉलिसीधारक ने लगातार 5 वर्ष (60 माह) तक बिना किसी ब्रेक के प्रीमियम भरा है, तो 5 साल पूरे होने के बाद बीमा कंपनी किसी भी पुराने रोग या गैर-खुलासे के आधार पर क्लेम खारिज नहीं कर सकती (सिवाय सीधे धोखाधड़ी के)। अस्पताल में भर्ती होते ही अपने टीपीए डेस्क को सही पॉलिसी नंबर दें, डॉक्टर की पहली ओपीडी पर्ची और सभी पैथोलॉजी रिपोर्ट्स को संभाल कर रखें। सही जानकारी और इन 7 शर्तों का समय रहते विश्लेषण ही यह सुनिश्चित करेगा कि बीमारी के कठिन वक्त में आपका हेल्थ इंश्योरेंस सचमुच एक मजबूत ढाल बनकर खड़ा रहे।
क्या ₹500 का छोटा बकाया सचमुच बिगाड़ सकता है आपका CIBIL स्कोर? जानिए क्रेडिट ब्यूरो का एल्गोरिदम
आज के डिजिटल और कैशलेस दौर में क्रेडिट कार्ड और 'बाय नाउ पे लेटर' (BNPL) सेवाओं का इस्तेमाल आम बात हो चुका है। शॉपिंग, यूटिलिटी बिलों और ऑनलाइन फूड डिलीवरी के लिए लोग धड़ल्ले से क्रेडिट कार्ड स्वाइप करते हैं। लेकिन अक्सर कई बार ऐसा होता है कि कोई यूजर अपने भारी-भरकम खर्चों का भुगतान तो कर देता है, लेकिन किसी पुराने चार्ज, ऑटो-सब्सक्रिप्शन या मामूली खरीदारी के कारण बिल में ₹300, ₹500 या ₹700 का छोटा सा बकाया छूट जाता है। ज्यादातर लोग यह सोचकर बेफिक्र हो जाते हैं कि सिर्फ 500 रुपये ही तो हैं, इतनी छोटी सी रकम के लिए बैंक क्या करेगा, अगले महीने देख लेंगे। यदि आप भी ऐसा सोचते हैं, तो यह लापरवाही आपकी वित्तीय साख (Credit Profile) के लिए सबसे घातक साबित हो सकती है।भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मान्यता प्राप्त देश के चार प्रमुख क्रेडिट सूचना ब्यूरो—ट्रांसयूनियन सिबिल (TransUnion CIBIL), एक्सपेरियन (Experian), इक्विफैक्स (Equifax) और सीआरआईएफ हाई मार्क (CRIF High Mark)—के एल्गोरिदम में डिफॉल्ट की गई 'रकम के आकार' से कहीं ज्यादा महत्व आपके 'भुगतान के अनुशासन' (Repayment History) को दिया जाता है। सिबिल स्कोर की 300 से 900 अंकों की गणना में लगभग 35 प्रतिशत वेटेज सिर्फ और सिर्फ इस बात का होता है कि आपने अपनी देय राशि को समय पर चुकाया या नहीं। क्रेडिट स्कोरिंग मॉडल यह नहीं देखता कि आपका बकाया ₹5 लाख का था या मात्र ₹500 का; सिस्टम के लिए दोनों ही मामलों में देय तिथि (Due Date) के बाद पैसा न चुकाना एक गंभीर डिफॉल्ट और वित्तीय अनुशासनहीनता माना जाता है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद से लेकर देश भर के मेट्रो शहरों में काम करने वाले कई प्रोफेशनल्स तब चौंक जाते हैं जब उनका सिबिल स्कोर 780 से लुढ़ककर सीधे 700 के नीचे पहुंच जाता है और किसी नए होम लोन या कार लोन के आवेदन पर बैंक उन्हें रिजेक्ट कर देते हैं।RBI का 3-डे ग्रेस पीरियड नियम: क्या ड्यू डेट के अगले ही दिन क्रेडिट स्कोर गिर जाता है?क्रेडिट कार्ड धारकों के मन में यह सबसे बड़ा डर रहता है कि यदि वे बिल भरने की अंतिम तारीख (Due Date) भूल गए, तो क्या बैंक अगले ही दिन सिबिल को डिफॉल्ट की सूचना भेज देगा? इस पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने उपभोक्ताओं को एक मजबूत सुरक्षा कवच दिया हुआ है। आरबीआई के मास्टर डायरेक्शन (Master Direction on Credit Card and Debit Card) के तहत सभी बैंकों और क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता संस्थानों के लिए 'कम से कम 3 दिन का अनिवार्य ग्रेस पीरियड' (3-Day Grace Period) देना कानूनी रूप से अनिवार्य है।आरबीआई के नियमों के अनुसार:यदि आपके क्रेडिट कार्ड बिल की अंतिम तारीख महीने की 5 तारीख है, तो बैंक 8 तारीख तक न तो आप पर कोई लेट पेमेंट फीस (Late Payment Charges) लगा सकता है और न ही आपके खाते को क्रेडिट ब्यूरो को 'Past Due' (अतिदेय) के रूप में रिपोर्ट कर सकता है।यदि आप इस 3 दिन की मोहलत के भीतर ₹500 का पूरा भुगतान कर देते हैं, तो आपके क्रेडिट स्कोर पर शून्य (0%) असर पड़ेगा और आपका सिबिल स्कोर पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।हालांकि, यह समझना जरूरी है कि यह 3 दिन का ग्रेस पीरियड केवल लेट फीस और सिबिल रिपोर्टिंग से बचाता है; यदि आपने देय तिथि तक बिल नहीं भरा है, तो उस बकाया राशि पर खरीदारी की मूल तारीख से लगने वाला नियमित फाइनेंस चार्ज (ब्याज) लागू रह सकता है।3 दिन के बाद क्या होता है? ₹500 की भूल पर लेट फीस और ब्याज का चक्रव्यूहयदि 3 दिन का ग्रेस पीरियड बीत गया और आपने फिर भी वह ₹500 जमा नहीं किए, तो बैंक की प्रणाली तुरंत दंडात्मक मोड में आ जाती है। अधिकांश बैंकों में लेट पेमेंट फीस के अलग-अलग स्लैब होते हैं:₹100 से कम के बकाए पर सामान्यतः कोई लेट फीस नहीं होती।₹100 से ₹500 के बकाया स्लैब में HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे प्रमुख बैंक ₹100 की लेट पेमेंट फीस वसूलते हैं (एसबीआई कार्ड ₹500 तक लेट फीस शून्य रखता है)।यदि आपका बकाया ₹501 या उससे अधिक हो जाता है, तो लेट फीस सीधे बढ़कर ₹400 से ₹500 तक पहुंच जाती है।इस लेट फीस पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी (GST) अलग से जुड़ता है।इसके ऊपर, लगभग 3.5% से 3.75% प्रति माह (वार्षिक आधार पर 42% से 45% APR) का भारी-भरकम चक्रवृद्धित ब्याज खरीदारी की तारीख से जुड़ने लगता है।नतीजतन, जिस ₹500 को आपने मामूली समझकर छोड़ दिया था, वह अगले महीने के बिल में लेट फीस, ब्याज और टैक्स जुड़कर ₹1,000 से ₹1,200 का बन जाता है।DPD (Days Past Due) का खेल: 30, 60 और 90 दिन में कैसे बर्बाद होता है सिबिल?क्रेडिट रिपोर्ट में सबसे संवेदनशील और खतरनाक कॉलम 'DPD' यानी डेज पास्ट ड्यू (Days Past Due) का होता है। जब कोई कर्जदाता या बैंक आपकी सिबिल रिपोर्ट देखता है, तो वह सबसे पहले इसी DPD ट्रैक को चेक करता है। सामान्य और स्वस्थ खाते में DPD की जगह '000' या 'STD' (Standard) लिखा होता है, जिसका अर्थ है कि हर पेमेंट समय पर हुई है।लेकिन यदि ₹500 का भुगतान लगातार टाला जाता है, तो इसका चरणबद्ध असर इस प्रकार होता है:1 से 29 दिन की देरी: खाता ओवरड्यू हो जाता है, लेट फीस लग जाती है, लेकिन ज्यादातर बैंक इसे सामान्यतः 30 दिन पूरे होने तक औपचारिक 'डिफ़ॉल्ट श्रेणी' में रिपोर्ट नहीं करते।30 दिन से अधिक की देरी (30+ DPD): यदि बिल आए हुए 30 दिन से ज्यादा का समय बीत गया और न्यूनतम देय राशि (Minimum Amount Due) भी जमा नहीं की गई, तो बैंक क्रेडिट ब्यूरो को '030 DPD' रिपोर्ट कर देता है। जैसे ही रिपोर्ट में 30 DPD दर्ज होता है, आपका सिबिल स्कोर एक झटके में 50 से 80 अंक तक नीचे गिर सकता है।60 से 89 दिन की देरी (60+ DPD): रिकवरी कॉल्स और एसएमएस शुरू हो जाते हैं, खाता 'स्पेशल मेंशन अकाउंट' (SMA) में चला जाता है और स्कोर 100 अंक से अधिक टूट जाता है।90 दिन से अधिक की देरी (90+ DPD / NPA): ₹500 का यह छोटा सा खाता बैंक की किताबों में 'नॉन-परफॉर्मिंग एसेट' (NPA) या 'सब-स्टैंडर्ड' घोषित हो जाता है। इसके बाद बैंक कार्ड को ब्लॉक कर देते हैं और सिबिल में आपका प्रोफाइल 'डिफॉल्टर' के रूप में दर्ज हो जाता है। एक बार 90+ DPD लगने पर सिबिल स्कोर 150 से 200 अंक तक धड़ाम हो जाता है।RBI के नए क्रेडिट रिपोर्टिंग नियम: अब महीने में 4 बार अपडेट होता है आपका डेटापहले के वर्षों में बैंक महीने में केवल एक बार या 30 से 45 दिनों के अंतराल पर क्रेडिट ब्यूरो को डेटा भेजते थे, जिससे ग्राहकों को अपनी चूक सुधारने का थोड़ा समय मिल जाता था। लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक ने क्रेडिट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क में पारदर्शिता लाने के लिए नियमों को बेहद सख्त बना दिया है। अब बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को महीने में चार निश्चित तारीखों (9वीं, 16वीं, 23वीं और महीने के अंतिम दिन) पर अनिवार्य रूप से ताजा डेटा क्रेडिट ब्यूरो को भेजना होता है।इस साप्ताहिक और पाक्षिक रिपोर्टिंग चक्र का सीधा मतलब यह है कि आपकी एक छोटी सी चूक अब कुछ ही दिनों के भीतर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दर्ज हो जाएगी। हालांकि, नए नियमों में एक बड़ा उपभोक्ता-हितैषी प्रावधान यह भी जोड़ा गया है कि किसी भी बैंक को ग्राहक का डिफॉल्ट क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट करने से पहले ग्राहक को एसएमएस या आधिकारिक ईमेल के जरिए अग्रिम चेतावनी देना अनिवार्य है। यदि बैंक बिना पूर्व सूचना दिए सीधे डिफॉल्ट रिपोर्ट करता है, तो ग्राहक बैंकिंग लोकपाल (RBI Ombudsman) के पास शिकायत दर्ज करा सकता है।क्या ₹500 के डिफ़ॉल्ट से भविष्य में लोन मिलना बंद हो सकता है?यह सवाल हर वित्तीय जागरूक नागरिक को परेशान करता है। जब आप भविष्य में 50 लाख रुपये का होम लोन या 10 लाख रुपये का कार लोन लेने बैंक जाते हैं, तो बैंक का लोन ऑफिसर यह नहीं देखता कि आपने ₹500 नहीं चुकाए थे। लोन देने वाले बैंक का स्वचालित रिस्क असेसमेंट सॉफ्टवेयर आपकी रिपोर्ट में केवल 'Past Due' या 'Missed Payment Flag' और आपके सिबिल स्कोर को पढ़ता है।क्रेडिट स्कोर 750 से गिरकर यदि 680 या 650 पर आ जाता है, तो इसके तीन गंभीर परिणाम होते हैं:लोन का सीधा रिजेक्शन: कई प्रमुख बैंक (जैसे SBI, HDFC, ICICI) 750 से कम स्कोर वाले आवेदनों को अपने ऑनलाइन सिस्टम में ऑटो-रिजेक्ट कर देते हैं।महंगी ब्याज दरें: यदि कोई बैंक लोन मंजूर भी करता है, तो वह आपको 'हाई रिस्क बॉरोअर' मानकर 1.5% से 2.5% तक अधिक ब्याज दर वसूलता है। 30 साल के होम लोन पर 1% अधिक ब्याज लगने का मतलब लाखों रुपये का अतिरिक्त नुकसान होता है।क्रेडिट कार्ड लिमिट में कटौती: मौजूदा बैंक आपके कार्ड की क्रेडिट लिमिट घटा सकते हैं या नए कार्ड के आवेदन निरस्त कर सकते हैं।अगर गलती से ₹500 की पेमेंट मिस हो गई है, तो तुरंत क्या करें? 4 जरूरी कदमयदि आपको अचानक पता चलता है कि आपके क्रेडिट कार्ड या छोटे लोन की ₹500 की पेमेंट ड्यू डेट और 3-दिन के ग्रेस पीरियड के बाद भी छूट गई है, तो घबराने के बजाय इन 4 कदमों को तुरंत उठाएं:बिना 1 मिनट गंवाए तुरंत पूरा भुगतान करें: सबसे पहले मोबाइल ऐप या यूपीआई के जरिए पूरे बकाए और उस पर लगी लेट फीस का 100% भुगतान तुरंत कर दें।कस्टमर केयर को कॉल करें और 'गुडविल रिवर्सल' मांगें: यदि आपका पिछला रिकॉर्ड एकदम साफ रहा है और आपने पहली बार गलती से पेमेंट मिस की है, तो बैंक के कस्टमर केयर पर कॉल करके विनम्रता से बताएं कि यह एक अनजाने में हुई तकनीकी या व्यक्तिगत चूक थी। यदि आप लगातार समय पर पेमेंट करने वाले ग्राहक रहे हैं, तो बैंक अक्सर 'गुडविल जेस्चर' (Goodwill Gesture) के तौर पर लेट फीस माफ कर देते हैं।बैंक से सिबिल सुधारने का लिखित अनुरोध करें: कस्टमर केयर से यह विशेष आग्रह करें कि चूंकि आपने पूरा भुगतान कर दिया है, इसलिए आगामी रिपोर्टिंग चक्र में इस खाते को ओवरड्यू के रूप में सिबिल को न भेजा जाए।ऑटो-डेबिट (Auto-Debit) सक्रिय करें: भविष्य में ऐसी मानवीय भूलों से बचने के लिए अपने बैंक खाते से 'ऑटो-पे' (AutoPay) या 'NACH मैंडेट' अनिवार्य रूप से चालू कर लें। हमेशा 'Total Amount Due' पर ऑटो-डेबिट सेट करें, ताकि ₹1 का भी बकाया न छूटे।पैसे के मामले में कभी भी किसी रकम को छोटा समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वित्तीय जगत में आपका ₹500 का बकाया भले ही बैंक की बैलेंस शीट के लिए मामूली हो, लेकिन आपकी व्यक्तिगत साख और सिबिल स्कोर के लिए यह एक बहुत बड़ा दाग साबित हो सकता है। समय पर भुगतान और डिजिटल अलर्ट्स ही आपकी क्रेडिट प्रोफाइल को हमेशा 750+ के सुनहरे दायरे में बनाए रखने का एकमात्र अचूक फॉर्मूला हैं।
Flipkart Smartphone Deals: 10 हजार से कम में 5G स्पीड, 50MP कैमरा और 6000mAh की बड़ी बैटरी
भारतीय स्मार्टफोन बाजार में बजट सेगमेंट यानी 10,000 रुपये से कम कीमत वाले फोंस की मांग हमेशा सबसे ज्यादा रहती है। कॉलेज जाने वाले युवाओं, ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले छात्रों, गिग वर्कर्स और बुजुर्ग माता-पिता के लिए यह बजट कैटेगरी सबसे मुफीद मानी जाती है। कुछ साल पहले तक इस रेंज में केवल बेसिक 4G स्मार्टफोन मिलते थे जो कुछ महीनों में हैंग होने लगते थे, लेकिन अब तकनीक इतनी तेजी से बदली है कि ₹10 हजार के अंदर भी 5G कनेक्टिविटी, 90Hz रिफ्रेश रेट वाला डिस्प्ले, 50 से 108 मेगापिक्सल तक का प्राइमरी कैमरा और 6000mAh की विशाल बैटरी मिलने लगी है। ई-कॉमर्स दिग्गज फ्लिपकार्ट (Flipkart) पर चल रहे स्पेशल डिस्काउंट्स, बैंक ऑफर्स और एक्सचेंज डील्स के चलते कई दिग्गज ब्रांड्स के लोकप्रिय हैंडसेट्स इस जादुई आंकड़े के भीतर आ चुके हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, वाराणसी से लेकर देश भर के टियर-2 और टियर-3 शहरों के खरीदारों के लिए यह सही फोन चुनने का सबसे बेहतरीन मौका है। लेकिन इतने सारे विकल्पों के बीच यह समझना जरूरी है कि आपकी व्यक्तिगत जरूरत के हिसाब से कौन सा डिवाइस सबसे खरा उतरेगा।POCO M6 5G: सबसे सस्ता 5G फोन, डाइमेंसिटी 6100+ प्रोसेसर और 90Hz डिस्प्ले का कॉम्बोयदि आपकी पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता सबसे कम दाम में एक तेज-तर्रार 5G स्मार्टफोन पाना है, तो पोको का POCO M6 5G इस समय फ्लिपकार्ट पर सबसे आक्रामक विकल्प बना हुआ है। बैंक ऑफर के साथ यह फोन अमूमन ₹8,499 से ₹8,999 की प्रभावी कीमत पर उपलब्ध हो जाता है। इस फोन की सबसे बड़ी यूएसपी इसका मीडियाटेक डाइमेंसिटी 6100+ (MediaTek Dimensity 6100+) 6nm ऑक्टा-कोर 5G प्रोसेसर है, जो इस बजट में मल्टीटास्किंग और हल्की गेमिंग के लिए बेहतरीन परफॉर्मेंस देता है। फोन में 6.74 इंच का बड़ा एचडी प्लस डिस्प्ले दिया गया है, जो 90Hz रिफ्रेश रेट और कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 3 की सुरक्षा के साथ आता है। फोटोग्राफी के लिए इसमें 50 मेगापिक्सल का एआई डुअल कैमरा सेटअप और सेल्फी के लिए 5MP का फ्रंट कैमरा है। 5,000mAh की बैटरी 18W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। प्रीमियम ग्लास-बैक डिजाइन के साथ आने वाला यह फोन उन कॉलेज छात्रों और युवाओं के लिए सबसे बेहतरीन है जो ₹9 हजार से कम में बिना किसी लैग के अल्ट्रा-फास्ट 5G इंटरनेट की दुनिया में कदम रखना चाहते हैं।Moto G04s / Moto G24 Power: क्लीन स्टॉक एंड्रॉइड, 6000mAh की दमदार बैटरी और प्रीमियम डिजाइनयदि आप अपने फोन में फालतू विज्ञापनों, अनचाहे ऐप्स (Bloatware) और लगातार आने वाले नोटिफिकेशंस से नफरत करते हैं, तो मोटोरोला के बजट फोंस आपकी पहली पसंद होने चाहिए। फ्लिपकार्ट पर Moto G04s और Moto G24 Power इस सेगमेंट में क्लीन सॉफ्टवेयर अनुभव के मामले में सबसे आगे हैं। मोटोरोला का यह फोन लगभग स्टॉक एंड्रॉइड (Android 14) पर चलता है, जिससे 4GB रैम होने के बावजूद फोन मक्खन की तरह स्मूथ काम करता है। Moto G04s में 6.56 इंच का 90Hz आईपीएस एलसीडी पंच-होल डिस्प्ले और कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 3 का प्रोटेक्शन मिलता है। इसके रियर में 50 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा दिया गया है, जो सेगमेंट के अन्य फोनों की तुलना में प्राकृतिक और बैलेंस्ड तस्वीरें खींचता है। वहीं, यदि आपको लंबी बैटरी लाइफ चाहिए, तो Moto G24 Power में दी गई 6,000mAh की विशाल बैटरी और 33W का टर्बोपावर फास्ट चार्जर एक बार चार्ज करने पर आसानी से ढाई दिन का बैकअप देता है। इसका वीगन लेदर और मैट फिनिश डिजाइन इसे हाथ में पकड़ने पर ₹20,000 वाले प्रीमियम फोन जैसा लुक देता है।Samsung Galaxy F14 5G: सैमसंग का ब्रांड भरोसा, 5nm चिपसेट और 2 दिन चलने वाली महा-बैटरीभारतीय उपभोक्ताओं के बीच दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग की मजबूती और उसके 'One UI' सॉफ्टवेयर पर अटूट भरोसा है। फ्लिपकार्ट पर सेल और डिस्काउंट के दौरान Samsung Galaxy F14 5G अक्सर ₹9,499 से ₹9,999 के ब्रैकेट में मिल जाता है। इस स्मार्टफोन की सबसे बड़ी ताकत इसका 5 नैनोमीटर फैब्रिकेशन पर बना इन-हाउस 'Exynos 1330' 5G प्रोसेसर है, जो बैटरी की भारी बचत करते हुए जबरदस्त प्रोसेसिंग पावर देता है। दूसरा बड़ा आकर्षण इसका 6.6 इंच का फुल एचडी प्लस (FHD+) 90Hz डिस्प्ले है, जिस पर गोरिल्ला ग्लास 5 का मजबूत सुरक्षा कवच चढ़ा है। इस बजट में जहां बाकी कंपनियां केवल एचडी+ स्क्रीन देती हैं, वहां सैमसंग की फुल एचडी स्क्रीन वीडियो स्ट्रीमिंग और यूट्यूब देखने के अनुभव को कई गुना बेहतर बना देती है। साथ ही इसमें दी गई 6,000mAh की महा-बैटरी सामान्य उपयोग में पूरे 2 दिन तक बिना चार्जर के चलती है। इसके अलावा सैमसंग 2 साल के प्रमुख ओएस अपडेट और 4 साल के सिक्योरिटी पैच की गारंटी देता है, जो इस फोन को 3 से 4 साल तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प बनाता है।Realme C53 / C65: 108MP का धांसू कैमरा, 33W फास्ट चार्जिंग और मिनी कैप्सूल का जलवाफोटोग्राफी के शौकीन और सोशल मीडिया पर रील व तस्वीरें पोस्ट करने वाले यूजर्स के लिए रियलमी (Realme) का C-सीरीज पोर्टफोलियो हमेशा आकर्षण का केंद्र रहा है। फ्लिपकार्ट पर Realme C53 इस सेगमेंट का अकेला ऐसा फोन है जो 108 मेगापिक्सल के अल्ट्रा-क्लियर प्राइमरी सेंसर के साथ आता है। 3X इन-सेंसर जूम के साथ यह कैमरा दिन के उजाले में बारीक से बारीक डिटेल कैप्चर करता है। डिजाइन के मामले में इसका 'शाइनी गोल्ड' और बॉक्सी फ्रेम इसे बिल्कुल आईफोन जैसा प्रीमियम लुक देता है। फोन का एक और यूनीक फीचर है इसका 'मिनी कैप्सूल' (Mini Capsule), जो एप्पल के डायनेमिक आइलैंड की तरह चार्जिंग स्टेटस, डेटा यूसेज और स्टेप ट्रैकिंग को पंच-होल के दोनों तरफ खूबसूरती से दिखाता है। इसमें 5,000mAh की बैटरी के साथ 33W की सुपरवूक (SUPERVOOC) फास्ट चार्जिंग मिलती है, जो मात्र 30 मिनट में फोन को 50 फीसदी तक चार्ज कर देती है। यदि आपको कैमरा परफॉर्मेंस और स्लिम-ट्रेंडी डिजाइन सबसे ज्यादा पसंद है, तो रियलमी की यह डिवाइस सीधे तौर पर आपकी विशलिस्ट में होनी चाहिए।Vivo T3 Lite 5G और Infinix Hot 50: कॉलेज स्टूडेंट्स और गेमर्स के लिए बजट में ऑल-राउंडर विकल्पबजट स्मार्टफोन की रेस में वीवो का सब-ब्रांड और इनफिनिक्स भी किसी से पीछे नहीं हैं। Flipkart पर Vivo T3 Lite 5G को हाल ही में एक किफायती 5G विकल्प के रूप में उतारा गया है। इसमें मीडियाटेक डाइमेंसिटी 6300 प्रोसेसर, 50 मेगापिक्सल का सोनी सेंसर कैमरा और IP64 डस्ट व वाटर रेसिस्टेंस की रेटिंग दी गई है। बारिश के मौसम में या पसीने वाले हाथों से फोन का इस्तेमाल करने पर भी यह डिवाइस सुरक्षित रहती है। वहीं दूसरी तरफ, Infinix Hot 50 5G या Hot 40i उन यूजर्स के लिए है जिन्हें कम पैसे में सबसे ज्यादा स्टोरेज और रैम चाहिए। इनफिनिक्स इस सेगमेंट में 8GB तक की फिजिकल रैम और 128GB या 256GB तक की इनबिल्ट स्टोरेज की पेशकश करता है। यदि आप ढेर सारे गाने, फिल्में और भारी फाइल्स फोन में स्टोर करना चाहते हैं और आपका बजट ₹9,000 से ऊपर नहीं जा सकता, तो इनफिनिक्स का बड़ा स्टोरेज मॉडल आपके लिए सबसे किफायती सौदा साबित हो सकता है।तुलनात्मक गाइड: आपकी जरूरत के हिसाब से कौन-सा फोन खरीदना रहेगा सबसे सही?बाजार में इतने सारे विकल्प होने के बाद अक्सर खरीदार असमंजस में पड़ जाते हैं। आपकी पसंद को बिल्कुल आसान बनाने के लिए मुख्य प्राथमिकताओं के आधार पर यह संक्षिप्त मार्गदर्शिका तैयार की गई है:सस्ती कीमत पर तेज 5G इंटरनेट के लिए: POCO M6 5G को चुनें, क्योंकि ₹8,500 के आसपास 6nm 5G चिपसेट मिलना सबसे बड़ी वैल्यू-फॉर-मनी डील है।क्लीन सॉफ्टवेयर और बुजुर्गों के उपयोग के लिए: Moto G04s या Moto G24 Power सबसे उपयुक्त हैं, क्योंकि इनमें कोई विज्ञापन नहीं आते और इंटरफेस इस्तेमाल करने में बेहद सीधा व सुरक्षित है।लंबी उम्र, बेहतर डिस्प्ले और 2 दिन की बैटरी के लिए: Samsung Galaxy F14 5G सबसे मजबूत दावेदार है, जिसमें फुल एचडी+ स्क्रीन और 6000mAh की बड़ी बैटरी मिलती है।शानदार कैमरा और स्टाइलिश लुक के लिए: Realme C53 बेझिझक खरीदें, क्योंकि इसका 108MP कैमरा और 33W चार्जिंग इस रेंज में सबसे अलग है।मल्टीटास्किंग और भारी स्टोरेज के लिए: Infinix Hot 50 या Vivo T3 Lite 5G को प्राथमिकता दें, जहां ज्यादा रैम और डस्ट-वाटर प्रोटेक्शन मिलता है।बैंक ऑफर्स, एक्सचेंज बोनस और फ्लिपकार्ट से खरीदारी करते समय ध्यान रखने वाली 4 जरूरी बातेंफ्लिपकार्ट पर स्मार्टफोन खरीदते समय केवल लिस्टेड एमआरपी देखकर ऑर्डर न करें, बल्कि कुछ आसान टूल्स और ऑफर्स का इस्तेमाल करके आप ₹1,000 से ₹1,500 की अतिरिक्त बचत कर सकते हैं:क्रेडिट/डेबिट कार्ड डिस्काउंट: फ्लिपकार्ट पर लगभग हर हफ्ते फ्लिपकार्ट एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड पर 5% का अनलिमिटेड कैशबैक मिलता है। इसके अलावा एसबीआई, एचडीएफसी या आईसीआईसीआई बैंक के कार्ड्स पर ₹750 से ₹1,000 का सीधा इंस्टेंट डिस्काउंट दिया जाता है।पुराने फोन का एक्सचेंज (Exchange Offer): यदि आपके घर में कोई 4 या 5 साल पुराना 4G स्मार्टफोन बेकार पड़ा है, तो उसे एक्सचेंज करके आप ₹1,500 से ₹2,500 तक की अतिरिक्त छूट पा सकते हैं।बॉक्स में चार्जर की जांच: सैमसंग जैसे कुछ ब्रांड्स अब बजट फोनों के डिब्बे में चार्जर एडॉप्टर नहीं देते, केवल टाइप-सी केबल देते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले स्पेसिफिकेशन में जांच लें कि चार्जर साथ है या अलग से खरीदना पड़ेगा (मोटोरोला और रियलमी बॉक्स में फास्ट चार्जर देते हैं)।ओपन बॉक्स डिलीवरी (Open Box Delivery): जब डिलीवरी बॉय आपके घर फोन लेकर आए, तो उसके सामने ही सील खुलवाकर फोन के ऑन होने और स्क्रीन के ठीक होने की पुष्टि करें। ओटीपी तभी शेयर करें जब आप हैंडसेट की भौतिक स्थिति से पूरी तरह संतुष्ट हों।
Hawkins Cookers FD Scheme: कुकर वाली भरोसेमंद कंपनी लेकर आई बैंक से ज्यादा ब्याज वाली एफडी
रसोई के बर्तनों और खासकर प्रेशर कुकर की दुनिया में पिछले साढ़े छह दशकों से हर भारतीय घर की पहली पसंद बनी कंपनी हॉकिन्स कुकर्स लिमिटेड (Hawkins Cookers Ltd) अब आम निवेशकों के लिए मुनाफेदार कमाई का एक बड़ा मौका लेकर आई है। 1959 से भारत में कुकर बना रही और अब तक 14 करोड़ से ज्यादा यूनिट्स बेच चुकी यह प्रतिष्ठित किचनवेयर कंपनी 16 सितंबर 2026 से अपनी नई फिक्स्ड डिपॉजिट (Corporate FD) स्कीम लॉन्च करने जा रही है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पीएनबी और एचडीएफसी जैसे बड़े कमर्शियल बैंकों में जहां 3 साल की एफडी पर ब्याज दरें 6.50% से 7.10% के आसपास सिमटी हुई हैं, वहीं हॉकिन्स कुकर्स अपनी इस स्कीम के तहत निवेशकों को 8 प्रतिशत तक का आकर्षक वार्षिक ब्याज ऑफर कर रही है। कंपनी का यह पब्लिक डिपॉजिट प्रोग्राम 16 सितंबर की सुबह ठीक 9:30 बजे से शुरू होगा और इसे 'पहले आओ, पहले पाओ' (First-Come, First-Served) के आधार पर स्वीकार किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, नोएडा, वाराणसी से लेकर देश भर के रिटेल इन्वेस्टर्स और सीनियर सिटीजंस के बीच इस स्कीम को लेकर जबरदस्त सुगबुगाहट देखी जा रही है।ब्याज दरें और मैच्योरिटी का गणित: 13, 24 और 36 महीने में ₹25,000 लगाने पर कितने मिलेंगे?हॉकिन्स कुकर्स ने अपनी इस अनसिक्योर्ड फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम को तीन अलग-अलग समयावधियों (Tenures)—13 महीने, 24 महीने और 36 महीने—के लिए डिजाइन किया है। इस स्कीम में न्यूनतम निवेश राशि ₹25,000 तय की गई है। इसके बाद कोई भी निवेशक ₹1,000 के गुणकों (Multiples of ₹1,000) में अतिरिक्त राशि जमा कर सकता है। नए या रिन्यूअल डिपॉजिट के तहत एक व्यक्ति अधिकतम ₹50 लाख तक का निवेश कर सकता है।कंपनी द्वारा जारी आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार ब्याज दरों और न्यूनतम ₹25,000 के निवेश पर मैच्योरिटी राशि का पूरा ब्योरा इस प्रकार है:जमा अवधि (Tenure)वार्षिक ब्याज दर (p.a.)न्यूनतम निवेशमैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम (क्युम्युलेटिव)13 महीने7.50%₹25,000₹27,10924 महीने (2 साल)7.75%₹25,000₹29,17736 महीने (3 साल)8.00%₹25,000₹31,756इस तालिका से साफ है कि यदि कोई निवेशक ₹1 लाख की राशि 36 महीने (3 साल) के लिए लगाता है, तो 8% की दर से मैच्योरिटी पर उसे लगभग ₹1,27,024 मिलेंगे। वहीं ₹5 लाख के निवेश पर 3 साल में यह रकम बढ़कर करीब ₹6,35,120 हो जाएगी।क्युम्युलेटिव बनाम नॉन-क्युम्युलेटिव: जानिए दोनों विकल्पों में क्या है खास अंतरकंपनी ने निवेशकों की अलग-अलग वित्तीय जरूरतों को देखते हुए दो तरह के विकल्प उपलब्ध कराए हैं:क्युम्युलेटिव स्कीम (Cumulative Scheme): यह विकल्प उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो अपने पैसे पर चक्रवृद्धि वृद्धि (Compounding Growth) चाहते हैं। इसमें ब्याज हर महीने (Monthly Compounding) जुड़ता है और पूरी मूल राशि ब्याज सहित केवल मैच्योरिटी की अवधि पूरी होने पर एकमुश्त मिलती है। मासिक कंपाउंडिंग के कारण प्रभावी वार्षिक रिटर्न (Effective Yield) 8% की सामान्य दर से भी अधिक बैठता है।नॉन-क्युम्युलेटिव स्कीम (Non-Cumulative Scheme): यह विकल्प उन रिटायर्ड कर्मचारियों या निवेशकों के लिए मुफीद है जो अपने खर्चों के लिए नियमित आय (Regular Cash Flow) चाहते हैं। इस विकल्प में ब्याज का भुगतान हर 6 महीने (Half-Yearly Basis) पर सीधे निवेशक के बैंक खाते में ईसीएस (ECS), एनईएफटी या आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर कर दिया जाता है।ICRA AA- रेटिंग और सेफ्टी: क्या हॉकिन्स की इस कॉरपोरेट एफडी में पैसा लगाना सुरक्षित है?कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने से पहले सुरक्षा और क्रेडिट रेटिंग सबसे अहम पैमाना होता है। हॉकिन्स कुकर्स की इस अनसिक्योर्ड एफडी को प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) ने [ICRA] AA- (Stable) रेटिंग प्रदान की है। वित्तीय परिभाषा में इस रेटिंग का मतलब 'हाई क्रेडिट क्वालिटी' और 'अत्यंत कम क्रेडिट रिस्क' (Low Credit Risk) माना जाता है। कंपनी का पिछले कई दशकों का ट्रैक रिकॉर्ड बेदाग रहा है। हॉकिन्स ने अपने सर्कुलर में स्पष्ट किया है कि उसके ऊपर बैंकों, वित्तीय संस्थानों या सांविधिक बकायों (Statutory Dues) के भुगतान में किसी भी प्रकार के डिफॉल्ट का कोई इतिहास नहीं रहा है।हालांकि, निवेशकों को यह बुनियादी अंतर हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि यह एक 'अनसिक्योर्ड कॉर्पोरेट डिपॉजिट' है। बैंक एफडी पर जहां आरबीआई के डीआईसीजीसी (DICGC) नियम के तहत ₹5 लाख तक की सरकारी इंश्योरेंस गारंटी मिलती है, वहीं कॉरपोरेट एफडी पर ऐसी कोई सरकारी सुरक्षा नहीं होती। इसलिए कंपनी की वित्तीय स्थिति, ब्रांड वैल्यू और क्रेडिट रेटिंग ही पूंजी की सुरक्षा का मुख्य आधार होती है।बैंक एफडी बनाम हॉकिन्स कुकर्स एफडी: कहां मिलेगा ज्यादा मुनाफा?वर्तमान में देश के शीर्ष बैंकों की 3 साल की एफडी दरों से तुलना करें तो हॉकिन्स कुकर्स का पलड़ा रिटर्न के मामले में भारी नजर आता है:SBI / PNB / BoB: 3 साल की एफडी पर सामान्य नागरिकों को 6.50% से 6.75% और सीनियर सिटीजंस को 7.00% से 7.25% का ब्याज दे रहे हैं।HDFC Bank / ICICI Bank: 3 वर्ष की अवधि के लिए 7.00% का ब्याज ऑफर कर रहे हैं।हॉकिन्स कुकर्स एफडी: सामान्य और वरिष्ठ नागरिक दोनों के लिए 36 महीने पर सीधा 8.00% का ब्याज दे रही है, जो बड़े सरकारी और निजी बैंकों की तुलना में 1% से 1.50% तक ज्यादा है।हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि साल 2019 में हॉकिन्स ने अपनी 3 साल की एफडी पर 10.50% का सालाना ब्याज दिया था। ब्याज दरों के मौजूदा चक्र में गिरावट के चलते इस बार कंपनी ने इसे घटाकर 8% किया है, लेकिन वर्तमान बाजार परिदृश्य में भी 8% का रिटर्न कई पारंपरिक विकल्पों से काफी बेहतर माना जा रहा है।जुटाए जाने वाले ₹130 करोड़ का क्या करेगी कंपनी? जानिए वित्तीय सेहतहॉकिन्स कुकर्स इस फिक्स्ड डिपॉजिट योजना के माध्यम से कुल ₹129.92 करोड़ की पूंजी जुटाने की योजना बना रही है। इसमें से ₹37.12 करोड़ कंपनी के मौजूदा सदस्यों/शेयरधारकों से और ₹92.80 करोड़ आम जनता (Public) से जुटाए जाएंगे। 29 जुलाई 2026 तक कंपनी के पास पहले से ₹27.30 करोड़ के डिपॉजिट्स मौजूद थे। कंपनी ने बताया है कि इस फंड का इस्तेमाल कार्यशील पूंजी (Working Capital), रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), निर्माण क्षमता के विस्तार और भविष्य की आकस्मिक जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा।कंपनी की वित्तीय सेहत पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2025-26 में हॉकिन्स कुकर्स का कर-पश्चात शुद्ध लाभ (PAT) बढ़कर ₹131 करोड़ के मजबूत स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, परिचालन से मिलने वाला कैश फ्लो (Cash Flow from Operations) वित्त वर्ष 2024 के ₹174 करोड़ से घटकर वित्त वर्ष 2026 में ₹88 करोड़ दर्ज किया गया है। कुल मिलाकर कंपनी एक जीरो-डेट या न्यूनतम कर्ज वाली मजबूत बैलेंस शीट के साथ काम कर रही है।टैक्स, टीडीएस और प्री-मैच्योर विड्रॉल के नियम: निवेश से पहले जान लें ये 3 बातेंकॉरपोरेट एफडी में निवेश करते समय इन तीन नियमों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए:टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स: हॉकिन्स एफडी से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह कर योग्य (Taxable) होता है। इसे आपकी 'इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज' में जोड़ा जाएगा और आपके लागू इनकम टैक्स स्लैब (जैसे 10%, 20% या 30%) के अनुसार टैक्स लगेगा।टीडीएस (TDS) की सीमा: बैंक एफडी में जहां ब्याज ₹40,000 (सीनियर सिटीजन के लिए ₹50,000) से ऊपर होने पर टीडीएस कटता है, वहीं कॉरपोरेट एफडी में आयकर अधिनियम की धारा 194A के तहत वित्तीय वर्ष में कुल ब्याज ₹5,000 से अधिक होते ही 10% की दर से टीडीएस काट लिया जाता है। यदि आपकी कुल आय टैक्स छूट सीमा से कम है, तो आप फॉर्म 15G (वरिष्ठ नागरिकों के लिए फॉर्म 15H) जमा करके टीडीएस से बच सकते हैं।प्री-मैच्योर विड्रॉल (समय से पहले निकासी): कंपनीज (एक्सेप्टेंस ऑफ डिपॉजिट्स) रूल्स के तहत शुरुआती 6 महीने (छह माह का लॉक-इन) तक कोई भी निकासी अनुमन्य नहीं होती। 6 महीने के बाद और मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालने पर ब्याज दरों में 1% से 2% की कटौती की जा सकती है।कैसे करें अप्लाई? 16 सितंबर सुबह 9:30 बजे से 'पहले आओ, पहले पाओ' का पूरा ऑनलाइन प्रोसेसचूंकि कंपनी को कुल ₹92.80 करोड़ ही जनता से जुटाने हैं, इसलिए कोटा बहुत तेजी से भरने की संभावना है। इच्छुक निवेशक घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से सीधे आवेदन कर सकते हैं:आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं: हॉकिन्स कुकर्स के आधिकारिक पोर्टल hawkinscookers.com/fd_home.aspx पर जाएं।रजिस्ट्रेशन और फॉर्म भरना: 16 सितंबर को सुबह 9:30 बजे लिंक एक्टिव होते ही अपना नाम, पैन नंबर, बैंक खाता संख्या, पता और नॉमिनी का विवरण दर्ज करें।स्कीम और अवधि चुनें: क्युम्युलेटिव या नॉन-क्युम्युलेटिव में से अपनी पसंद का विकल्प चुनें और अवधि (13, 24 या 36 माह) सिलेक्ट करें।राशि का ऑनलाइन भुगतान: न्यूनतम ₹25,000 या उससे अधिक की रकम नेट बैंकिंग, एनईएफटी (NEFT), आरटीजीएस या अधिकृत चेक/ड्राफ्ट के जरिए ट्रांसफर करें।एफडी रसीद (FDR) प्राप्त करें: भुगतान का सत्यापन पूरा होने के बाद कंपनी द्वारा पंजीकृत पते या ईमेल पर फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद जारी कर दी जाएगी।निष्कर्ष: यदि आप पारंपरिक बैंक एफडी से 1% से 1.5% अधिक का सुरक्षित और स्थिर रिटर्न तलाश रहे हैं और एक प्रतिष्ठित ब्रांड में 1 से 3 साल के लिए पैसा पार्क करना चाहते हैं, तो हॉकिन्स कुकर्स की यह एफडी स्कीम एक संतुलित और आकर्षक विकल्प साबित हो सकती है। हालांकि, अपने संपूर्ण निवेश पोर्टफोलियो का केवल 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा ही कॉरपोरेट एफडी में लगाने का अनुशासन बनाए रखें।
निर्दलीयों ने बिगाड़ा खेल? UGC पर राजपूतों की नाराजगी से BJP को टेंशन
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में स्थानीय मुद्दों के साथ UGC के जाति आधारित नियमों को लेकर राजपूत समाज की नाराजगी ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया.
CRPF की कोबरा यूनिट की पहली महिला IG बनीं संजुक्ता परासर, 2006 बैच की हैं आईपीएस अधिकारी
आईपीएस अधिकारी संजुक्ता परासर को सीआरपीएफ की स्पेशल जंगल वारफेयर कमांडो यूनिट, कोबरा का आइजी नियुक्त किया गया है, जो इस पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला हैं।
सोने के आयात में 57% की ऐतिहासिक गिरावट: अगस्त में 3.1 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार की सीधी बचत
भारतीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक बुलियन बाजार के मोर्चे पर एक चौंकाने वाला और सुखद आंकड़ा सामने आया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा विदेशी व्यापार आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में भारत के सोने के आयात (Gold Imports) में सालाना आधार पर 57.7 प्रतिशत यानी लगभग 57 फीसदी की भारी-भरकम गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल अगस्त 2025 में भारत ने विदेशों से 5.4 अरब अमेरिकी डॉलर का सोना खरीदा था, जो इस बार के अगस्त महीने में सिमटकर मात्र 2.3 अरब अमेरिकी डॉलर पर आ गया है। यदि इसकी तुलना ठीक पिछले महीने यानी जुलाई 2026 के 4.16 अरब डॉलर के सोने के आयात से भी करें, तब भी इसमें महीने-दर-महीने करीब 45 फीसदी की भारी कमी देखी गई है। केवल एक महीने के भीतर सोने के आयात बिल में आई 3.1 अरब डॉलर (लगभग 26,000 करोड़ रुपये से अधिक) की इस भारी कटौती ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को न केवल बड़ा सहारा दिया है, बल्कि भारत के चालू खाता घाटे (CAD) पर पड़ने वाले अवांछित दबाव को भी काफी हद तक हल्का कर दिया है।पीएम मोदी की अपील का असर: फिजूलखर्ची, शादियों और सोने की खरीद पर ब्रेक लगाने का क्या था विजन?आयात बिल में आई इस ऐतिहासिक गिरावट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस बारंबार की गई सार्वजनिक अपील से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से गैर-जरूरी विदेशी वस्तुओं और सोने की अंधाधुंध खरीद को सीमित करने का आह्वान किया था। प्रधानमंत्री ने अपने हालिया संबोधनों में रेखांकित किया था कि भारत जब 5 ट्रिलियन डॉलर और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेज विकास दर से आगे बढ़ रहा है, तो देश को अपनी बहुमूल्य विदेशी मुद्रा (Forex) का इस्तेमाल उत्पादक संपत्तियों के निर्माण में करना चाहिए। पीएम मोदी का तर्क था कि भारत को अपने विनिर्माण, सेमीकंडक्टर मिशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए अत्याधुनिक मशीनरी, जीपीयू (GPU), सीपीयू (CPU), हाई-टेक कंपोनेंट्स और कच्चे तेल के आयात के लिए विदेशी मुद्रा की भारी दरकार है। ऐसे में यदि खरबों रुपये का डॉलर केवल गैर-उत्पादक भौतिक सोने (Physical Gold) के आयात में खर्च हो जाएगा, तो देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर अनावश्यक जोखिम बढ़ेगा। प्रधानमंत्री द्वारा विदेश यात्राओं, भव्य शादियों के फिजूलखर्च और सोने की अनावश्यक होल्डिंग को कम करने की अपील ने मध्यमवर्ग और संस्थागत खरीदारों के मानस पर गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव डाला है, जिसका प्रत्यक्ष प्रतिबिंब अब व्यापारिक आंकड़ों में साफ दिखने लगा है।रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे सोने के दाम और ज्वैलर्स की सुस्ती: घरेलू बाजार में क्यों ठंडी पड़ी खरीदारी?प्रधानमंत्री की अपील के साथ-साथ बुलियन मार्केट के तकनीकी और मूल्य निर्धारण कारकों ने भी सोने के आयात को थामने में बड़ी भूमिका निभाई है। अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और अमेरिकी ब्याज दरों के अनुमानों के चलते सोने की कीमतें अपने सर्वकालिक उच्च स्तर (All-Time High) के आसपास बनी हुई हैं। घरेलू वायदा बाजार यानी एमसीएक्स (MCX) और स्थानीय सराफा बाजारों में 24 कैरेट सोने की कीमतें 74,000 से 76,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड दायरे में कारोबार कर रही हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ के चौक सराफा बाजार, कानपुर के बिरहाना रोड, वाराणसी के ठठेरी बाजार से लेकर दिल्ली के चांदनी चौक और मुंबई के जवेरी बाजार तक खुदरा खरीदारों ने इस रिकॉर्ड महंगाई के चलते नई खरीदारी से हाथ खींच लिया है। आम मध्यमवर्गीय ग्राहक सोने की इतनी ऊंची कीमतों पर नए गहने बनवाने के बजाय पुराने आभूषणों को गलाकर एक्सचेंज कराने (Old Gold Recycling) को प्राथमिकता दे रहे हैं। खुदरा मांग में आई इस नरमी के चलते बड़े ज्वैलर्स और बुलियन डीलरों के पास पहले से ही पर्याप्त इनवेंटरी मौजूद थी, जिसके चलते उन्होंने अगस्त के दौरान विदेशों से नया सोना मंगाने के ऑर्डर्स को काफी हद तक टाल दिया या रद्द कर दिया।भारत के ट्रेड डेफिसिट को मिली बड़ी संजीवनी: 32 अरब डॉलर से घटकर 26.9 अरब डॉलर पर आया व्यापार घाटासोने के आयात में आई 3.1 अरब डॉलर की इस सीधी बचत का सबसे बड़ा और सकारात्मक असर देश के व्यापार घाटे (Trade Deficit) पर देखने को मिला है। ब्लूमबर्ग और वैश्विक अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया था कि कच्चे तेल और विनिर्माण इनपुट्स के बढ़ते आयात के कारण अगस्त में भारत का व्यापार घाटा 32.15 अरब डॉलर के पार निकल सकता है। लेकिन वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों ने सभी विश्लेषकों को चौंका दिया। अगस्त महीने में भारत का व्यापार घाटा घटकर 26.86 अरब डॉलर (लगभग 26.9 अरब डॉलर) पर सिमट गया, जो जुलाई में 31.98 अरब डॉलर के स्तर पर था। सीधे शब्दों में कहें तो व्यापार घाटे में एक महीने के भीतर 5 अरब डॉलर से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई। जहां एक तरफ देश का कुल मर्चेंडाइज आयात घरेलू औद्योगिक मांग और ऊर्जा जरूरतों के चलते 14.1 प्रतिशत बढ़कर 70.67 अरब डॉलर रहा, वहीं सोने के आयात में आई 57% की गिरावट ने आयात बिल के बेकाबू होने की आशंका को पूरी तरह कुचल दिया।एक्सपोर्ट में 26% का बूम और रुपये को मजबूती: हाई-टेक मशीनरी और चिप्स खरीदने में काम आएगा बचाया गया डॉलरअगस्त के व्यापारिक आंकड़ों की सबसे चमकदार तस्वीर भारत के निर्यात (Exports) के मोर्चे पर देखने को मिली है। जहां सोने की खरीद में कमी आई, वहीं भारतीय वस्तुओं का कुल वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 26.12 प्रतिशत की छलांग लगाकर 43.81 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने नई दिल्ली में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स और टेक्सटाइल्स की मांग अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिक्स देशों और दक्षिण-पूर्व एशियाई उभरती अर्थव्यवस्थाओं में जबरदस्त बनी हुई है। सोने के आयात पर विदेशी मुद्रा की बचत और निर्यात से होने वाली डॉलर की इस रिकॉर्ड आमद ने भारतीय रुपये (INR) को भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले स्थिरता प्रदान की है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि जो 3.1 अरब डॉलर सोने के लॉकरों में बंद होने से बचाए गए हैं, उनका उपयोग देश में आगामी सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट्स, डेटा सेंटर्स, सोलर पीवी मॉड्यूल्स और कैपिटल गुड्स के आयात में किया जा सकेगा, जो आने वाले वर्षों में देश की जीडीपी ग्रोथ को 7 से 8 प्रतिशत की दर से रफ्तार देने के लिए सबसे बड़ा ईंधन बनेंगे।त्योहारी सीजन से पहले क्या है बुलियन मार्केट का मूड? धनतेरस और दिवाली पर क्या फिर उछलेगी मांग?अगस्त में सोने के आयात में आई इस ऐतिहासिक गिरावट के बाद अब पूरे बुलियन उद्योग की निगाहें आगामी त्योहारी और वैवाहिक सीजन पर टिक गई हैं। भारतीय संस्कृति में पितृपक्ष की समाप्ति के बाद नवरात्रि, दशहरा, करवाचौथ, धनतेरस और दिवाली पर सोने-चांदी की खरीदारी को अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके ठीक बाद नवंबर और दिसंबर में हिंदू शादियों का सबसे बड़ा लग्न सीजन शुरू होगा। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) और जेम्स एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) के प्रतिनिधियों का मानना है कि अगस्त की यह गिरावट एक 'अस्थायी ठहराव' हो सकती है। बुलियन विश्लेषकों का आकलन है कि अगर सितंबर के अंतिम सप्ताह तक सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में थोड़ा भी करेक्शन (मुनाफावसूली) आता है, तो भारतीय ज्वैलर्स धनतेरस की भारी मांग को पूरा करने के लिए सितंबर के आखिर और अक्टूबर के शुरुआती पखवाड़े में सोने के आयात में दोबारा तेजी ला सकते हैं। हालांकि, सरकार द्वारा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) के प्रति निवेशकों के बढ़ते रुझान और डिजिटल गोल्ड व गोल्ड ईटीएफ (ETF) में आ रहे निवेश ने यह भी सुनिश्चित किया है कि लोग अब लॉकर में ईंटें या बिस्कुट रखने के बजाय वित्तीय संपत्तियों में निवेश कर रहे हैं, जिससे देश के आयात बिल को लंबे समय तक सुरक्षित और संतुलित रखने में मदद मिल रही है।
चलती ट्रेन में आग या धुआं: घबराहट नहीं, सही समय पर सही एक्शन ही बचाएगा जान
भारतीय रेल देश की जीवनरेखा है, जिसमें प्रतिदिन 2 करोड़ से अधिक यात्री सफर करते हैं। सफर के दौरान सुरक्षा रेलवे और यात्रियों दोनों की पहली प्राथमिकता होती है, लेकिन कभी-कभी तकनीकी खराबी, शॉर्ट सर्किट, पैंट्री कार में चूल्हा जलने, सिगरेट की चिंगारी या यात्रियों द्वारा ले जाए गए ज्वलनशील पदार्थों की वजह से ट्रेन के कोच में आग लगने या जहरीला धुआं भरने जैसी अप्रत्याशित आपात स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसी किसी भी आकस्मिक दुर्घटना के समय सबसे बड़ा दुश्मन आग नहीं, बल्कि बोगी के भीतर फैलने वाली 'अंधी घबराहट' (Panic) और भगदड़ होती है। बोगी के बंद वातावरण में जब अचानक सायरन बजता है या धुआं भरता है, तो लोग दिशा भूल जाते हैं और एक-दूसरे पर गिरकर जान गंवा बैठते हैं। भारतीय रेलवे और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि आग लगने के शुरुआती 3 से 5 मिनट 'गोल्डन मिनट्स' होते हैं। यदि यात्री संयम बनाए रखते हुए सही और वैज्ञानिक सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करें, तो न केवल अपनी जान बचा सकते हैं बल्कि सैकड़ों सह-यात्रियों को भी सुरक्षित बाहर निकाल सकते हैं।अलार्म चेन पुलिंग (ACP): कब, कैसे खींचें और पुल या सुरंग में ट्रेन रोकने से क्यों बचें?जैसे ही कोच में आग की लपटें या घना धुआं दिखाई दे, पहला और सबसे बुनियादी कदम ट्रेन को तुरंत रोकने का प्रयास करना होता है। हर बोगी में खिड़कियों के पास और कोच के दोनों सिरों पर लाल रंग की आपातकालीन अलार्म चेन (Alarm Chain) लगी होती है। इसे नीचे की ओर पूरी ताकत से खींचें। अलार्म चेन खींचते ही ट्रेन के ब्रेक पाइप का प्रेशर रिलीज होता है और लोको पायलट (ट्रेन ड्राइवर) व ट्रेन मैनेजर (गार्ड) को केबिन में ऑडियो-विजुअल अलर्ट मिल जाता है, जिससे ट्रेन अपने आप रुकने लगती है।हालांकि, चेन खींचते समय एक अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीकी सावधानी बरतनी चाहिए। यदि ट्रेन किसी लंबी नदी के पुल (Railway Bridge), संकरे वायडक्ट या गहरी सुरंग (Tunnel) के भीतर से गुजर रही हो, तो वहां चेन खींचने से बचें। पुल या सुरंग के अंदर ट्रेन रुकने पर दोनों तरफ निकलने का रास्ता नहीं होता और बचाव कार्य लगभग असंभव हो जाता है। ऐसी स्थिति में ट्रेन को पहले पुल या सुरंग से बाहर निकलने दें और खुले मैदान या किसी स्टेशन के नजदीक आते ही तुरंत चेन खींचें। यदि आग विकराल हो, तो तुरंत कोच अटेंडेंट या टीटीई के जरिए गार्ड तक वॉकी-टॉकी से संदेश पहुंचाएं।हर कोच में मौजूद अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher): जानिए कहां रखा होता है और 'PASS' फॉर्मूले से कैसे चलाएंभारतीय रेलवे के सभी वातानुकूलित (AC) कोचों, पैंट्री कार, ब्रेक वैन और गार्ड के डिब्बे में अनिवार्य रूप से ड्राई केमिकल पाउडर (DCP) या आधुनिक एबीसी (ABC) टाइप फायर एक्सटिंग्विशर लगाए जाते हैं। स्लीपर और जनरल कोचों में भी ये दोनों सिरों पर टॉयलेट के पास या कोच अटेंडेंट की सीट के ऊपर लगे होते हैं। यदि आग शुरुआती दौर में हो—जैसे किसी चार्जर सॉकेट, पर्दे या सीट के नीचे छोटी सी चिंगारी—तो बिना समय गंवाए कांच तोड़कर या ब्रैकेट खोलकर इस लाल रंग के सिलेंडर को निकालें।अग्निशामक यंत्र को चलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य 'PASS' फॉर्मूले का पालन करें:P (Pull): सिलेंडर के हैंडल पर लगी सुरक्षा पिन और सील को जोर से खींचकर निकालें।A (Aim): नोजल या पाइप के मुंह को आग की लपटों के ऊपर नहीं, बल्कि आग की जड़ यानी आधार (Base of the fire) की तरफ तानें।S (Squeeze): सिलेंडर के ऊपरी लीवर या हैंडल को पूरी ताकत से दबाएं ताकि रासायनिक पाउडर बाहर निकले।S (Sweep): नोजल को आग की जड़ पर झाड़ू की तरह दाएं-बाएं (Side to Side) घुमाते हुए छिड़काव करें। याद रखें कि बिजली के उपकरणों या तारों में लगी आग पर कभी भी पानी न डालें, हमेशा केमिकल पाउडर या रेत की बाल्टी का ही उपयोग करें।जहरीले धुएं से कैसे बचें? जमीन पर रेंगें और गीले कपड़े से ढकें नाक-मुंहट्रेन हादसों के वैज्ञानिक आंकड़े बताते हैं कि आग लगने की घटनाओं में 80 प्रतिशत मौतें जलने से नहीं, बल्कि जहरीले धुएं (Toxic Smoke) और दम घुटने (Asphyxiation) से होती हैं। ट्रेनों की सीटों में इस्तेमाल होने वाला रेक्सिन, फोम, प्लास्टिक पैनल्स और इंसुलेशन मटीरियल जलने पर कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन साइनाइड जैसी घातक गैसें छोड़ते हैं।इस स्थिति में जान बचाने के लिए दो अचूक नियम याद रखें:हमेशा जमीन के करीब रहें (Crawl Low): भौतिक विज्ञान के नियम के अनुसार गर्म हवा और जहरीला धुआं तेजी से ऊपर की ओर उठकर कोच की छत पर जमा होता है। फर्श से 1 से 2 फीट की ऊंचाई पर ताजी ऑक्सीजन की परत सबसे ज्यादा समय तक बनी रहती है। इसलिए सीधे खड़े होकर दौड़ने के बजाय झुककर चलें या घुटनों और कोहनियों के बल रेंगते हुए आगे बढ़ें।गीले कपड़े का मास्क बनाएं: अपनी पानी की बोतल से रुमाल, गमछा, तौलिया, दुपट्टा या टी-शर्ट का कोई हिस्सा पूरी तरह गीला कर लें और उसे अपनी नाक और मुंह पर मजबूती से दबा लें। गीला कपड़ा एक प्राकृतिक एयर फिल्टर का काम करता है, जो गर्म कालिख, धुएं के जहरीले कणों और फेफड़ों को झुलसाने वाली गर्म गैसों को रोक लेता है।इमरजेंसी विंडो (Emergency Window) का इस्तेमाल: लाल निशान वाली खिड़की को कैसे खोलें?जब कोच के दोनों मुख्य दरवाजे धुएं या आग के कारण ब्लॉक हो जाएं, तो बाहर निकलने का एकमात्र सुरक्षित जीवनरक्षक रास्ता 'इमरजेंसी एग्जिट विंडो' होता है। भारतीय रेलवे के हर कोच में 4 आपातकालीन खिड़कियां होती हैं, जिन्हें लाल रंग के फ्लोरोसेंट पेंट और लाल स्टिकर से चिह्नित किया जाता है।आपातकालीन खिड़की से बाहर निकलने का सही तरीका:लाल निशान वाली खिड़की के पास जाएं। खिड़की के नीचे एक लाल रंग का हैंडल या लीवर लगा होता है, जो वायर सील से बंधा होता है।इस सुरक्षा सील को झटके से तोड़ें और हैंडल को ऊपर की ओर खींचें।हैंडल खींचते ही खिड़की की जाली या लोहे की ग्रिल बाहर या ऊपर की तरफ खुल जाती है।यदि एसी कोच है और खिड़की भारी शीशे से सील है, तो बोगी के कोने में लगे इमरजेंसी हैमर (Emergency Hammer) से शीशे के चारों कोनों पर वार करके उसे तोड़ दें।खिड़की से कूदने से पहले सुनिश्चित करें कि ट्रेन पूरी तरह रुक चुकी है। चलती ट्रेन से कभी न कूदें।खिड़की से उतरते समय पहले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को बाहर निकालें और पटरियों के दोनों तरफ आने-जाने वाली अन्य ट्रेनों पर नजर रखें ताकि किसी दूसरी पटरी पर आ रही ट्रेन की चपेट में न आएं।वेस्टिब्यूल दरवाजे बंद करें और 139 पर दें सूचना: आग को दूसरे डिब्बे में फैलने से रोकेंआग को पूरी ट्रेन में फैलने से रोकने के लिए सबसे प्रभावी कदम 'कंपार्टमेंटलाइजेशन' (Compartmentalization) होता है। यदि आग किसी एक बोगी में बेकाबू हो रही है, तो दोनों कोचों को जोड़ने वाले वेस्टिब्यूल (गलियारे) के भारी धातुई दरवाजे को तुरंत बंद कर दें और उसकी कुंडी लगा दें। यह दरवाजा एक फायर-बैरियर की तरह काम करता है, जिससे आग की लपटें और धुआं अगले कोच में नहीं घुस पाता। इसके साथ ही, कोच में मौजूद ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग स्टाफ (OBHS), टिकट परीक्षक (Tट्रेन यात्रा के दौरान आग या धुआं दिखे तो क्या करें? जानें भारतीय रेलवे के जरूरी लाइफ-सेविंग सेफ्टी टिप्स और इमरजेंसी प्रोटोकॉलMeta Description: ट्रेन में सफर के दौरान आग या धुआं दिखने पर घबराएं नहीं। रेलवे के जरूरी सेफ्टी नियमों, अलार्म चेन खींचने के सही तरीके, हेल्पलाइन 139 और इमरजेंसी विंडो के इस्तेमाल से जुड़ी पूरी गाइड। (Indian Railways Fire Safety Tips)भारतीय रेल (Indian Railways) में सफर के दौरान किसी कोच में अचानक धुआं उठना या आग लगना एक बेहद संवेदनशील आपात स्थिति है। ऐसी स्थिति में घबराने या भगदड़ मचाने के बजाय त्वरित और सही कदम उठाना ही यात्रियों की जान बचा सकता है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और आपदा प्रबंधन दिशानिर्देशों के अनुसार, आपात स्थिति उत्पन्न होने पर तुरंत इन सुरक्षा उपायों को अपनाना चाहिए।धुआं या आग दिखते ही तुरंत उठाएं ये 5 जरूरी कदमअलार्म चेन खींचकर ट्रेन रोकें (Alarm Chain Pulling - ACP): डिब्बे में धुआं या चिंगारी देखते ही बिना देर किए अलार्म चेन खींचें। हालांकि, यदि संभव हो तो ध्यान रखें कि ट्रेन किसी लंबी सुरंग (tunnel) या ऊंचे पुल (bridge) पर न रुके, क्योंकि खुले ट्रैक पर रेस्क्यू और इवैक्यूएशन (निकास) अधिक सुरक्षित तरीके से हो पाता है।कोच में मौजूद फायर एक्सटिंग्विशर का इस्तेमाल करें: सभी एसी (AC) और नए एलएचबी (LHB) कोचों में दरवाजों के पास या अटेंडेंट केबिन में ड्राई केमिकल पाउडर (DCP) अग्निशामक यंत्र लगे होते हैं। इसकी सील तोड़कर पिन निकालें और नोजल को आग की लपटों के निचले हिस्से (base) की तरफ रखकर लीवर दबाएं।इमरजेंसी विंडो (Emergency Window) खोलें: यदि आग या धुएं के कारण कोच के मुख्य दरवाजे तक पहुंचना संभव न हो, तो कोच के मध्य में स्थित लाल रंग से चिह्नित इमरजेंसी खिड़की का उपयोग करें। इसका हैंडल खींचकर या पास में लगे सेफ्टी हैमर से शीशा तोड़कर सुरक्षित बाहर निकला जा सकता है।फर्श के करीब झुककर चलें (Crawl Low): आग की लपटों से ज्यादा खतरनाक जहरीला धुआं (toxic smoke) और कार्बन मोनोऑक्साइड गैस होती है। धुआं हमेशा ऊपर की ओर उठता है, इसलिए सांस लेने के लिए फर्श के करीब झुकें या रेंगते हुए आगे बढ़ें। मुंह और नाक को गीले रुमाल या पानी से भीगे कपड़े से अच्छी तरह ढकें।विद्युत आपूर्ति (Power Supply) कटवाएं: शॉर्ट सर्किट से लगने वाली आग को तेजी से फैलने से रोकने के लिए ऑन-बोर्ड स्टाफ या टीटीई (TTE) से कहकर कोच का मुख्य सर्किट ब्रेकर (MCB) तुरंत ट्रिप करवाएं।हेल्पलाइन 139 और रेलमदद पर तुरंत दें सूचनाघटना की जानकारी तत्काल ट्रेन में मौजूद टिकट चेकर, कोच अटेंडेंट या गार्ड को दें। इसके साथ ही तकनीकी और मेडिकल सहायता के लिए इन माध्यमों का प्रयोग करें:डायल 139: रेलवे की 24x7 ऑल-इन-वन हेल्पलाइन 139 पर कॉल करके अपनी ट्रेन संख्या, बोगी नंबर और वर्तमान लोकेशन साझा करें।रेलमदद (RailMadad): रेलमदद ऐप या वेब पोर्टल के माध्यम से तुरंत 'Security/Medical Emergency' का अलर्ट भेजें, जिससे अगले स्टेशन पर फायर ब्रिगेड और मेडिकल टीम पहले से तैयार रहे।सफर के दौरान क्या करें और क्या न करें (Dos and Don'ts)सामान का मोह न करें: आपात स्थिति में सूटकेस या भारी बैग निकालने के चक्कर में कीमती समय बर्बाद न करें; जीवन बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।भगदड़ (Stampede) से बचें: कोच के संकरे गलियारे में चिल्लाने या धक्का-मुक्की करने से निकास द्वार जाम हो जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को पहले निकलने दें।ज्वलनशील वस्तुएं साथ न ले जाएं: रेलवे अधिनियम की धारा 164 (Section 164 of Railways Act) के तहत ट्रेन में गैस सिलेंडर, पेट्रोल, केरोसिन, तेजाब या पटाखे ले जाना दंडनीय अपराध है, जिसके तहत 3 साल तक की जेल हो सकती है।कोच या टॉयलेट में धूम्रपान न करें: ट्रेन में बीड़ी, सिगरेट पीना या जलती तीली/माचिस कचरे में फेंकना सख्त प्रतिबंधित है। ऐसा करते पाए जाने पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाती है।रेल यात्रा के दौरान यात्रियों की सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। किसी भी अनहोनी की आशंका होते ही समय रहते सही कदम उठाने से बड़े हादसों को टाला जा सकता है।
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UPI payment rules: सरकार ने यूपीआई पेमेंट्स पर शुल्क लगाने का फैसला कई वर्षों के दबाव और वित्तीय चुनौतियों के कारण लिया है।

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