इंटरनेट डेस्क। उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में बारिश परेशानी का कारण बनी हुई है। यूपी 4 दिनों से लगातार हो रही बारिश ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है। इसके कारण कई नदियां उफान पर हैं। गोंडा और बदायूं में छोटे पुलों के ऊपर से पानी बहने लगा है। आंधी-बारिश से पिछले 2 दिनों में 63 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। खबरों के अनुसार, प्रदेश में 8 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कुशीनगर में दो गांवों के 1,400 परिवार प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। मौसम विभाग की ओर से अभी प्रदेश के 46 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में आज सुबह जंगलिख पुल के पास लैंडस्लाइड होने से सड़क बंद हो गई है। इसके अलावा नेपाल से गंडक नदी में पानी छोड़े जाने के बाद बिहार के पश्चिम चंपारण और सुपौल के 23 गांव में बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। बाढ़ से करीब 82 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश भी भारी बारिश की चपेट में हैं। PC:ndtv अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
Ujjain में Simhastha 2028 road widening के दौरान विवाद, पुलिस पर पथराव
मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ के मद्देनजर चल रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत एक मस्जिद का हिस्सा हटाए जाने के दौरान सोमवार को विवाद हो गया। इस दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का बल प्रयोग किया। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 15 लोगों को हिरासत में लिया गया है। साथ ही सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जिनमें सोशल मीडिया पर प्रभाव रखने वाले कुछ लोग भी शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने संवाददाताओं से कहा कि सिंहस्थ-2028 को लेकर सभी पक्षों की सहमति से काम किया जा रहा है और इसी क्रम में शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि शहर की मंदिर-मस्जिद समिति के सदस्यों की ओर से यह काम किया जा रहा है और प्रक्रिया जारी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत शाही मस्जिद के करीब नौ फुट लंबे और चार फुट चौड़े हिस्से को हटाया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि इसे हटाने को लेकर रविवार देर रात मंदिर-मस्जिद समिति और प्रशासन के बीच सहमति बन गई थी। शर्मा ने कहा कि एहतियात के तौर पर इलाके में सुबह से ही पुलिस बल तैनात कर दिया गया था, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने प्रदर्शन करने का प्रयास किया और इस दौरान पथराव किया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि घटना में कोई घायल नहीं हुआ है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इलाके में सीसीटीवी लगाए गए हैं और ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा, इनके जरिए पथराव में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बाद में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए शर्मा ने कहा, कुछ ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो शहर के बाहर से आकर माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे थे। 15 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि सात लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उनमें कुछ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स भी शामिल हैं, जिन्होंने कथित तौर पर भड़काऊ बयान साझा किए और लोगों को उकसाया। शर्मा ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस तरह की पोस्ट करने वालों पर लगातार नजर रखी जा रही है और पुलिस की ओर से शहर में फ्लैग मार्च किया जा रहा है। इस बीच, शहर काजी खलीलुर्रहमान ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि शाही मस्जिद कमेटी खुद अपने हाथों से मस्जिद का हिस्सा हटा रही है, लेकिन कुछ लोग सोशल मीडिया पर फिजूल का माहौल बना रहे हैं। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, शहर अपना है, इसकी हिफाजत भी हमें ही करनी है। इसके बाद कुछ लोगों ने उनके घर के बाहर प्रदर्शन भी किया। इंदौर उच्च न्यायालय ने नौ सितंबर को शाही मस्जिद के प्रस्तावित योजना क्षेत्र में आने वाले हिस्से को हटाने के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इस मामले में मस्जिद अधिकारियों की अपील पर सोमवार को सुनवाई होनी है। सिंहस्थ से पहले शहर के कंथल चौराहे से गोपाल मंदिर तक की सड़क को 15 मीटर तक चौड़ा किया जा रहा है। परियोजना के तहत करीब 900 मीटर लंबे मार्ग का चौड़ीकरण किया जाना है और इसके दायरे में आने वाली संरचनाओं को हटाया या संशोधित किया जाना है। इसके तहत धार्मिक स्थलों सहित 272 संरचनाएं प्रभावित होंगी। राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए करीब 9.80 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को सड़क चौड़ीकरण कार्य की शुरुआत अपने पुश्तैनी घर के एक हिस्से को हटाने से की थी। उन्होंने खुद फावड़ा चलाकर इसकी शुरुआत की थी।
क्रिकेट से सॉफ्ट टेनिस की ओर, इत्तेफाक ने कैसे बदला देवास के जय मीणा का सफर
सॉफ्ट टेनिस में एशियाई खेलों में भारत के पहले पदक विजेता जय मीणा का सफ़र लगभग इत्तेफ़ाक से शुरू हुआ। बचपन में उनकी दिलचस्पी क्रिकेट में ज़्यादा थी और शुरू में वे क्रिकेटर बनना चाहते थे। देवास के पायनियर पब्लिक स्कूल में जाने के बाद, उन्हें एक सॉफ्ट ...
TMC विधायकों की अयोग्यता याचिका पर समय सीमा में फैसला लें Speaker, Supreme Court का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उम्मीद जताई कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल के आरोपों को लेकर रिताब्रत बनर्जी गुट के 10 विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर उचित समय में फैसला करेंगे। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने तृणमूल कांग्रेस के विधायक सोहनदेब चट्टोपाध्याय (ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट) की ओर से दायर एक रिट याचिका का निपटारा किया, जिसमें अयोग्यता याचिकाओं के जल्द निपटारे की मांग की गई थी। बेंच ने 'केशम मेघचंद्र सिंह बनाम स्पीकर, मणिपुर विधानसभा' मामले में अपने फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि अयोग्यता याचिकाओं पर आम तौर पर उचित समय के भीतर फैसला किया जाना चाहिए, जिसे लगभग तीन महीने माना गया है। इसे भी पढ़ें: Bhupesh Baghel को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, पाटन चुनाव याचिका के खिलाफ अर्जी खारिज इस मामले में अयोग्यता की याचिकाएँ 8 जुलाई को दायर की गई थीं। बेंच ने ध्यान दिलाया कि तीन महीने की समय-सीमा 8 अक्टूबर को खत्म हो जाएगी और उम्मीद जताई कि स्पीकर उस समय के भीतर सही फ़ैसला लेंगे। बेंच ने अपने आदेश में कहा हमें पूरा भरोसा है कि राज्य विधानसभा के स्पीकर इस कोर्ट द्वारा तय किए गए सिद्धांतों को अच्छी तरह समझते हैं और (उस समय-सीमा के भीतर) सही फ़ैसला लेने की पूरी कोशिश करेंगे। चट्टोपाध्याय की ओर से पेश सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अयोग्यता याचिकाओं पर फ़ैसला करने में देरी का एक पैटर्न रहा है, जिसमें बाद में अलग हुए गुट खुद को असली राजनीतिक पार्टी बताते हैं। इन याचिकाओं में अरूप रॉय, रिताब्रता बनर्जी, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, सेउली साहा, अखरुज्जमां, सबीना यास्मीन, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा और जावेद अहमद खान को अयोग्य ठहराने की मांग की गई है। एक अन्य मामले में, 23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने 20 बागी तृणमूल कांग्रेस (TMC) लोकसभा सांसदों के ख़िलाफ़ अयोग्यता याचिकाओं पर फ़ैसला करने में तीन महीने की देरी को रेड फ़्लैग (गंभीर चिंता का विषय) बताया, हालांकि स्पीकर ओम बिरला के लिए कोई तय समय-सीमा नहीं तय की। इसे भी पढ़ें: Asian Games में Esha Singh ने जीता रजत, Supreme Court पहुंचा सोहराबुद्दीन मामला हर मामले की अपनी अलग स्थिति होती है। कुछ महीने बीत जाना एक चेतावनी का संकेत हो सकता है और इस बात को समझा जा सकता है। मिस्टर चंद्रा की याचिका में इस बात पर चिंता जताई गई है कि तीन महीने बीत चुके हैं। जस्टिस बागची ने कहा, आपने इसे पूरा क्यों नहीं किया, जबकि यह कुछ ही पल का काम है और इसके कई अन्य मामलों और देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी असर पड़ते हैं?
क्यों दोपहर में श्राद्ध कराना होता है श्रेष्ठ? इसकी सही विधि भी समझें
सुबह और शाम का समय देव कार्यों के लिए उत्तम माना गया है. जबकि घोर अंधकार को आसुरी और नकारात्मक शक्तियों की सक्रियता से जोड़ा जाता है. वहीं दोपहर का समय पितरों को समर्पित माना गया है. इसलिए पितृपक्ष में लोग इसी पहर में श्राद्धकर्म करना उत्तम मानते हैं.
SIR पर झूठ का पर्दाफाश होने के बाद भी विपक्ष फैला रहा भ्रम: JP Nadda
(फाइल फोटो के साथ जारी)नयी दिल्ली, 28 सितंबर केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा ने सोमवार को कहा कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगियों के झूठ का निर्वाचन आयोग के सदस्यों द्वारा पर्दाफाश किए जाने के बावजूद विपक्षी दल देश का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। नड्डा ने यहां पत्रकारों से कहा कि देश की प्रगति से हताश और निराश विपक्षी ‘‘इंडी गठबंधन’’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) ‘‘भ्रम और अराजकता’’ फैलाने के नए तरीके तलाश रहा है। भाजपा के नेता ‘इंडिया’ गठबंधन को ‘इंडी गठबंधन’ कह कर संबोधित करते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘हम सभी ने देखा कि कुछ ही दिन पहले एक मनगढ़ंत कहानी को लेकर पूरे देश में किस तरह हंगामा किया गया। अब जब निर्वाचन आयोग के सदस्यों ने हर झूठ का पर्दाफाश कर दिया है तो वे (विपक्षी दल) एक बार फिर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।’’उन्होंने आरोप लगाया कि यह वही ‘‘टूलकिट वाली मानसिकता’’ (तयशुदा रणनीति के तहत काम करने की सोच) है जो देश के विकास को रोकने के लिए हर सुबह एक नयी साजिश रचती है। नड्डा ने कहा, ‘‘आरोप लगाओ, देश का माहौल खराब करो और फिर भाग जाओ-यह विपक्ष के काम करने का तरीका बन गया है।’’उन्होंने कहा, ‘‘कोई ठोस नीति या दूरदृष्टि नहीं होने के कारण वे अब पूरे देश में भ्रम और अराजकता फैलाने के नए तरीके तलाश रहे हैं।’’‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने 25 सितंबर को खबर दी थी कि निर्वाचन आयोग के भीतर कार्य आवंटन से संबंधित एक आदेश जारी होने के बाद निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखे थे। खबर के अनुसार, इस आदेश से राज्य स्तर के अधिकारियों के बजाय मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने और रिकॉर्ड अपडेट करने की शक्तियां केंद्रीय स्तर पर आयोग में केंद्रित होने की आशंका जताई गई थी। नड्डा ने आरोप लगाया कि देश की स्वायत्त एवं संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम और कमजोर करना कांग्रेस नेता राहुल गांधी, आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एकमात्र एजेंडा बन गया है। भाजपा नेता ने कहा, ‘‘उन्हें न राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता है, न जनकल्याण की और न ही देश के सम्मान एवं गरिमा की। उनका एकमात्र मकसद सत्ता हासिल करना है और वह भी जनसेवा के लिए नहीं, बल्कि वंशवादी राजनीति को बढ़ावा देने और निजी लाभ उठाने के लिए।’’उन्होंने कहा, ‘‘राहुल गांधी जी, ध्यान से सुनिए: किसी झूठ को सौ बार दोहराने से वह सच नहीं हो जाता।’’नड्डा ने कहा कि देश की जनता विपक्ष के दोहरे मापदंड और उसकी नकारात्मक राजनीति को पूरी तरह समझ चुकी है। उन्होंने कहा, ‘‘देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करने वाली ताकतों को जनता ने पहले भी करारा सबक सिखाया है और वह भविष्य में भी ऐसा ही करेगी।’’नड्डा ने कहा कि भाजपा के लिए सत्ता ऐशो-आराम का साधन नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘बल्कि यह ‘अंत्योदय’ (समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान) और 1.40 करोड़ नागरिकों की सेवा का एक पवित्र माध्यम है। उनकी साजिशें और भ्रम फैलाने की कोशिशें जनता की अदालत में चकनाचूर हो जाएंगी।’’नड्डा ने कहा कि भारत अपने 1.40 करोड़ लोगों के अथक प्रयासों से ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने में जुटा है और वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान बना रहा है। भाजपा नेता ने कहा, ‘‘दुर्भाग्य से कांग्रेस और पूरा ‘इंडी गठबंधन’ इस प्रगति से हताश और निराश है।’’उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष द्वारा लगाए गए सभी मनगढ़ंत आरोप तथ्यों की कसौटी पर बार-बार धराशायी हुए हैं। निर्वाचन आयोग से लेकर देश की शीर्ष अदालतों तक, उनके फैलाए हर झूठ का पर्दाफाश हुआ है।
Delhi-NCR में प्रदूषण रोकने का प्लान तैयार, जल्द लागू होगा सख्त No PUCC No Fuel नियम
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में 28 सितंबर को हुई बैठक के बाद, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण से निपटने के लिए कई उपायों की घोषणा की। इस बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री प्रवेश वर्मा भी शामिल हुए। सिरसा ने कहा कि बैठक में प्रदूषण कम करने के लिए ठोस कार्रवाई वाली योजना और दिल्ली व NCR की भूमिकाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसे भी पढ़ें: बस और पार्क High Risk Zone नहीं बन सकते, Supreme Court ने Delhi Police से मांगा जवाब सिरसा ने कहा कि आज केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में दिल्ली और NCR में प्रदूषण पर एक बैठक हुई, जिसमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली PWD मंत्री प्रवेश वर्मा और मैं शामिल हुए। इसमें ठोस कार्रवाई वाली योजना पर चर्चा हुई। हमने NCR में प्रदूषण को कम करने के तरीकों और इस प्रयास में दिल्ली व NCR की भूमिकाओं पर बातचीत की। उन्होंने कन्फर्म किया कि तय किए गए कामों के तहत नो PUCC, नो फ्यूल पॉलिसी को और सख़्त किया जाएगा। सिरसा ने सड़कों की हर दो हफ़्ते में अच्छी तरह सफ़ाई करने और ठंड से राहत देने के लिए खास हीटिंग स्पॉट बनाने की योजना के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि योजना यह है कि हर दो हफ़्ते में सड़कों की अच्छी तरह सफ़ाई की जाए ताकि सारी मिट्टी और धूल हटाई जा सके। हमारी टीमों में हर गाड़ी पर चार लोग होंगे, जिनमें DPCC और MCD के प्रतिनिधि शामिल होंगे—और हम दिल्ली पुलिस के साथ भी मिलकर काम कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Delhi Pollution: 10 दिसंबर से कंस्ट्रक्शन पर पूर्ण रोक, MCD और GNCTD दफ्तरों के बदले समय, पार्किंग फीस दोगुनी सर्दियों में गर्माहट देने के बारे में उन्होंने कहा कि 'ज़ीरो बर्निंग' पहल के तहत, हमने पिछली बार हीटर बांटे थे। इस बार, 'हीटिंग स्पॉट' बनाए जाएंगे। हीटिंग की सुविधा वाले अस्थायी शेल्टर बनाए जाएंगे। अंदर ठंड से बचाव के इंतज़ाम किए जाएंगे। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बारे में सिरसा ने बताया कि दिल्ली में अभी 588 इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं और 150 और बसें शामिल की जानी हैं। उन्होंने एक व्यापक सरकारी योजना के ज़रिए प्रदूषण और ट्रैफ़िक जाम वाले हॉटस्पॉट की समस्या से निपटने की कोशिशों पर ज़ोर दिया। वे इन हॉटस्पॉट के तीन किलोमीटर के दायरे में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों का जायज़ा लेने के लिए सभी 11 ज़िला मजिस्ट्रेट के दफ़्तरों का दौरा कर रहे हैं। वे श्मशान घाट, डंपिंग यार्ड और कंस्ट्रक्शन व डिमोलिशन वेस्ट साइट्स जैसी जगहों पर खास ध्यान दे रहे हैं।
Ather Konarc : इस Electric Scooter पर मिल रहा बड़ा फायदा, जानें किस वेरिएंट पर कितनी सब्सिडी
Ather ने अपने नए फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर Konarc को दिल्ली में खास शुरुआती कीमत के साथ लॉन्च किया है। दिल्ली में लागू EV Policy 2026 की वजह से Ather Konarc की प्रभावी कीमत यहां दूसरे शहरों की तुलना में अलग हो सकती है। कंपनी के अनुसार Konarc की ...
एमएलसी चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम पर भाजपा क्यों बरत रही है बेहद सावधानी
बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के उभार और उनकी आक्रामक राजनीतिक सक्रियता के बाद से राज्य के सभी प्रमुख दलों ने अपनी कार्यशैली में भारी बदलाव करना शुरू कर दिया है। इसी सियासी सरगर्मी के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) आगामी विधान परिषद (MLC) चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों के चयन को लेकर बेहद फूंक-फूंक कर और सावधानी से कदम बढ़ा रही है। पार्टी के भीतर इस बात को लेकर गहन मंथन चल रहा है कि किस चेहरे को मैदान में उतारा जाए ताकि किसी भी प्रकार की एंटी-इन्कंबेंसी या अंदरूनी कलह का सामना न करना पड़े। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि क्या यह सतर्कता प्रशांत किशोर द्वारा लगातार बनाई जा रही राजनीतिक दबाव की स्थिति का परिणाम है, या फिर यह एनडीए की किसी सोची-समझी बड़ी चुनावी रणनीति का हिस्सा है जो सही समय पर अपने पत्तों का खुलासा करेगी।प्रशांत किशोर के बढ़ते प्रभाव और राजनीतिक जमीन की बदलती नब्जबिहार के कोने-कोने में प्रशांत किशोर द्वारा चलाई जा रही पदयात्राओं और आम जनता के बीच सीधे संवाद ने पारंपरिक राजनीतिक दलों की पेशानी पर बल ला दिया है। बीजेपी जैसे बड़े संगठन के रणनीतिकार भी इस बात को भली-भांति समझ रहे हैं कि अब जनता केवल जातिगत समीकरणों के भरोसे वोट देने वाली नहीं है, बल्कि वह सुशासन, पारदर्शिता और विकास के पुख्ता विकल्प की तलाश में है। यही कारण है कि एमएलसी चुनावों जैसे महत्वपूर्ण मंच पर किसी भी दांव को चलने से पहले पार्टी आलाकमान राज्य के हर एक जिले की जमीनी रिपोर्ट को बारीकी से खंगाल रहा है। विपक्ष की हर चाल और जन सुराज की बढ़ती मुखरता के बीच भाजपा यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उसका हर एक उम्मीदवार पूरी तरह से बेदाग और जिताऊ साबित हो, ताकि किसी भी मोर्चे पर मात न खानी पड़े।एमएलसी चुनावों में उम्मीदवारों के चयन पर बरकरार सस्पेंस और अंदरखाने का मंथनविधान परिषद के आगामी चुनावों को लेकर भाजपा कार्यालयों में बैठकों का दौर लगातार जारी है, लेकिन अभी तक आधिकारिक तौर पर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा न होना इस बात का प्रमाण है कि पार्टी इस बार कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। टिकट चाहने वाले तमाम दावेदार पटना से लेकर दिल्ली तक अपनी गोटी बिछाने में जुटे हुए हैं, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश के वरिष्ठ पदाधिकारी हर एक नाम की स्क्रूटनी बेहद कड़े मानदंडों के आधार पर कर रहे हैं। उम्मीदवारों की सूची में देरी होने के पीछे मुख्य वजह यह भी बताई जा रही है कि पार्टी जातीय संतुलन, स्थानीय प्रभाव और बौद्धिक वर्ग की स्वीकार्यता—तीनों पैमानों पर शत-प्रतिशत खरा उतरने वाले चेहरे को ही मैदान में उतारना चाहती है। इस सस्पेंस ने जहां एक तरफ पार्टी के भीतर उत्सुकता बढ़ा दी है, वहीं विरोधी दलों को भी कशमकश में डाल रखा है कि आखिर भाजपा का अगला तुरुप का इक्का कौन होगा।एनडीए की एकजुटता और आगामी चुनावों के लिए नई सियासी बिसातबिहार में एनडीए गठबंधन के भीतर भी सीटों के तालमेल और उम्मीदवारों के चयन को लेकर आपसी संवाद और समन्वय का दौर पूरी गंभीरता से चल रहा है। भाजपा अकेले अपने दम पर कोई भी जल्दबाजी दिखाने के बजाय अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक ऐसा फूलप्रूफ प्लान तैयार करने में जुटी है जो चुनाव के अंतिम परिणामों को पूरी तरह से प्रभावित कर सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर के आने से भले ही राजनीतिक समीकरणों में नयापन आया हो, लेकिन एनडीए के पास प्रशासनिक अनुभव और मजबूत कैडर बेस की जो ताकत है, वह उसे हर चुनौती से निपटने की क्षमता प्रदान करती है। एमएलसी चुनाव का यह रण इस बात की स्पष्ट बानगी पेश करेगा कि क्या पारंपरिक दलों की रणनीति नए राजनीतिक विकल्पों पर भारी पड़ती है या फिर समीकरणों में कोई बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिलता है।जमीनी कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने और पारदर्शी राजनीति पर जोरभाजपा इस चुनाव में केवल शीर्ष नेतृत्व के फैसलों पर निर्भर रहने के बजाय जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और स्थानीय पदाधिकारियों के फीडबैक को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रही है। पार्टी इस बात से अच्छी तरह वाकिफ है कि यदि टिकट वितरण में जरा भी चूक हुई, तो भीतरघात का खतरा बढ़ सकता है, जिसका सीधा फायदा विपक्ष या नए राजनीतिक दलों को मिल सकता है। यही वजह है कि हर एक संभावित उम्मीदवार की पृष्ठभूमि, उसकी सामाजिक पैठ और जनता के बीच उसकी छवि की स्वतंत्र एजेंसियों के माध्यम से जांच कराई जा रही है। यह पूरी प्रक्रिया दर्शाती है कि बदलते हुए राजनीतिक परिदृश्य में अब किसी भी पार्टी के लिए हल्के में चुनाव लड़ना मुमकिन नहीं रह गया है और हर एक कदम बहुत ही नपे-तुले तरीके से उठाया जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव: लखनऊ में सपा की बड़ी बैठक, अखिलेश यादव करेंगे मंथन
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ अब समाजवादी पार्टी भी अपनी रणनीति बनाने में जुट गई है. लखनऊ में समाजवादी पार्टी की एक महत्वपूर्ण मंथन बैठक बुलाई गई है. इस बैठक की अध्यक्षता खुद पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव कर रहे हैं.
खाना-बोली अलग, पर तर्जुबे एक से... NCR के PG में बनीं दोस्ती की कहानियां
दिल्ली एनसीआर की पीजी में रह रहीं लड़कियों की दोस्ती की कहानियां बहुत खास होती हैं. अनजान शहरों से आई ये लड़कियां जिनका रहन-सहन से लेकर खानपान, पढ़ाई, परिवार का स्तर, सोच सब अलग होता है, लेकिन यहां पीजी के एक छोटे से कमरे में जिंदगी जो सिखाती है वो काफी कुछ एक जैसे होते हैं. तभी ये लड़कियां सिर्फ एक दूसरे की दोस्त ही नहीं होतीं, बल्कि वो कभी बहन कभी मां होती हैं. उनमें हर रिश्ता छिपा होता है. यहां ऐसे ही दोस्ती के किस्से हम साझा कर रहे हैं जो आपको पीजी की लाइफ को समझने में मददगार होगा.
लखनऊ में मूसलाधार बारिश का कहर, भरभराकर गिरा जर्जर मकान
लखनऊ में लगातार चार दिनों से हो रही भारी बारिश के चलते एक जर्जर मकान अचानक ढह गया. इस हादसे में आसपास के मकानों को नुकसान पहुंचा है और मलबे से रास्ता बंद हो गया है full stop गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ.
'मेरे साथ सोना चाहता था', 50 साल के फिल्ममेकर ने की डिमांड
एक्ट्रेस ने बताया कि वो थियेटर कर चुकी हैं. वो काम जानती हैं. सुहाना ने बताया कि इंटीमेट सीन्स कैसे शूट होते हैं. पीयुष भूटानी के पॉडकास्ट में उन्होंने बोल्ड इंडस्ट्री की पोल खोली है.
अक्षय खन्ना ने मालाबार हिल में खरीदा ₹33.26 करोड़ का लग्जरी अपार्टमेंट
सितंबर 2026 में हुई इस डील में उन्हें 2,500 वर्ग फुट से ज्यादा की प्रॉपर्टी के साथ तीन पार्किंग यूनिट भी मिली हैं. संपत्ति पंजीकरण दस्तावेजों के मुताबिक, इस सौदे पर करीब ₹1.99 करोड़ की स्टांप ड्यूटी भी चुकाई गई है.
'जब जीते तो ठीक, हारे तो EC गलत', नितिन नवीन की TMC-कांग्रेस को खरी-खरी
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर हैं, जहां उन्होंने युवा सांसद कॉन्क्लेव में हिस्सा लिया और ममता बनर्जी की पिछली सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशंसा की और युवाओं की मौलिकता की बात की.
बिहार में टेंडर टेंपरिंग का बड़ा खुलासा: 5 करोड़ से अधिक के सभी ठेकों की उच्चस्तरीय जांच शुरू
बिहार के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों उस वक्त भारी खलबली मच गई है जब राज्य सरकार और जांच एजेंसियों ने टेंडर टेंपरिंग यानी ठेकों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और धांधली के खिलाफ एक बहुत बड़ा और निर्णायक अभियान छेड़ दिया है। भ्रष्टाचार की इन गहरी जड़ों पर प्रहार करते हुए प्रदेश सरकार ने पांच करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के सभी सरकारी ठेकों और विज्ञापित टेंडरों की पारदर्शी और गहराई से जांच के आदेश दे दिए हैं। इस अचानक हुई कड़ी कार्रवाई के दायरे में फिलहाल राज्य के 9 सबसे महत्वपूर्ण और मलाईदार विभाग सीधे तौर पर आ गए हैं, जहां पिछले कुछ सालों में जारी हुए टेंडरों की फाइलों को खंगाला जा रहा है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से न सिर्फ ठेकेदारों और बिचौलियों में हड़कंप मचा हुआ है, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की नींद भी उड़ चुकी है, क्योंकि माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई बड़े चेहरे इस जांच की आंधियों में बेनकाब हो सकते हैं।पांच करोड़ से ज्यादा के टेंडरों की जांच और भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य सरकार का कड़ा रुखबिहार में सरकारी योजनाओं के नाम पर मचे लूट-खसोट और भाई-भतीजेवाद पर लगाम कसने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। जिन ठेकों की लागत पांच करोड़ रुपये या उससे अधिक है, उनमें किस तरह से नियमों को ताक पर रखकर चहेती कंपनियों को उपकृत किया गया, इसकी एक-एक परत अब एंटी करप्शन ब्यूरो और अन्य उच्चस्तरीय जांच एजेंसियों द्वारा खोली जा रही है। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां टेंडर की शर्तों में जानबूझकर ऐसे बदलाव किए गए ताकि चुनिंदा सिंडिकेट के अलावा कोई दूसरी कंपनी प्रतियोगिता में हिस्सा ही न ले सके। इस प्रकार की टेंडर टेंपरिंग से न केवल सरकारी खजाने को भारी-भरकम वित्तीय चूना लगा है, बल्कि विकास कार्यों की गुणवत्ता भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, जिसे अब और अधिक बर्दाश्त करने के मूड में सरकार नहीं दिखाई दे रही है।फिलहाल 9 प्रमुख विभाग आए एसीबी और जांच एजेंसियों के रडार परइस व्यापक जांच अभियान के तहत जिन नौ प्रमुख विभागों को सबसे पहले घेरे में लिया गया है, वे राज्य के बुनियादी ढांचे, सड़क निर्माण, भवन निर्माण, जल संसाधन और ग्रामीण विकास जैसे अति-संवेदनशील और भारी बजट वाले विभाग माने जाते हैं। इन विभागों के पिछले कुछ वित्तीय वर्षों के दौरान जारी किए गए बड़े टेंडरों का पूरा कच्चा-चिट्ठा अब जांच अधिकारियों की मेज पर पहुंच चुका है, जहां डिजिटल टेंडर अपलोडिंग से लेकर वित्तीय बिड्स खोलने की प्रक्रियाओं तक की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। जानकारों का कहना है कि इन विभागों में कुछ खास ठेकेदार और सिंडिकेट बरसों से जड़े जमाए बैठे थे जो हर बड़े प्रोजेक्ट को आपस में बांट लिया करते थे। अब जब इन तमाम फाइलों की स्क्रूटनी शुरू हो चुकी है, तो यह साफ नजर आने लगा है कि अंदरखाने किस सुनियोजित तरीके से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।टेंडर सिंडिकेट और राजनीतिक-प्रशासनिक गठजोड़ की गहरी पड़तालबिहार के ठेकेदारी बाजार में यह बात लंबे समय से खुली चर्चा का विषय रही है कि बिना किसी राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर टेंडर टेंपरिंग होना असंभव है। जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण टास्क इसी गहरे गठजोड़ को बेनकाब करने का है, जो फाइल मूवमेंट से लेकर टेंडर अलॉटमेंट तक अपनी धौंस जमाए रखता था। कई मामलों में यह भी देखा गया है कि कागजों पर सबसे कम बोली लगाने वाली योग्य कंपनियों को तकनीकी खामी बताकर बाहर कर दिया जाता था और मनचाही फर्म को ठेका थमा दिया जाता था। इस तरह के कारनामों ने राज्य की पारदर्शी कार्यप्रणाली पर एक बड़ा धब्बा लगा रखा था, जिसे साफ करने के लिए इस सामूहिक और निष्पक्ष जांच की सख्त जरूरत महसूस की जा रही थी।प्रशासनिक सुधार की उम्मीद और आने वाले दिनों में संभावित बड़ी गिरफ्तारियांइस बड़े भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के धरातल पर उतरने के बाद से बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था में एक नई सुगबुगाहट शुरू हो गई है और ईमानदार अधिकारियों तथा जनता के बीच इसकी सराहना हो रही है। लोगों को उम्मीद है कि इस बार जांच केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दोषियों के खिलाफ मिसाल कायम करने वाली सख्त कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। जैसे-जैसे इन नौ विभागों की फाइलों की जांच आगे बढ़ेगी, कई जूनियर और सीनियर इंजीनियरों, टेंडर प्रबंधकों तथा बड़े ठेकेदारों पर कानूनी शिकंजा कसने की पूरी संभावना है। यह पूरा प्रकरण न सिर्फ बिहार की राजनीति में एक नया भूचाल ला सकता है, बल्कि भविष्य के लिए सरकारी ठेकों की प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
राजस्थान नापाक साजिश: ड्रोन के जरिए 5.50 करोड़ की हेरोइन तस्करी का भंडाफोड़
राजस्थान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान अपनी काली हरकतों से बाज आने का नाम नहीं ले रहा है, और एक बार फिर उसने भारतीय सीमा में ड्रग्स और हथियारों की तस्करी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करके एक बड़ा खौफनाक षड्यंत्र रचा है। सुरक्षा एजेंसियों और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की सतर्कता के चलते इस बार भी दुश्मन देश की यह कायराना चाल नाकाम हो गई, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमावर्ती इलाकों की संवेदनशीलता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तस्करों ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए आसमान के रास्ते भारतीय सीमा में पांच करोड़ पचास लाख रुपये मूल्य की अवैध हेरोइन गिराने की साजिश रची थी, जिसे चौकस जवानों ने समय रहते विफल कर दिया। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से ही राजस्थान के सीमावर्ती जिलों से लेकर राजधानी जयपुर तक खुफिया और सुरक्षा महकमों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।बीएसएफ की सतर्कता से नाकाम हुई पाकिस्तानी ड्रोन की घुसपैठ और करोड़ों की तस्करीसीमा सुरक्षा बल (BSF) के जांबाज जवानों ने एक बार फिर अपनी मुस्तैदी का परिचय देते हुए साबित कर दिया है कि राजस्थान की सरहद पर परिंदा भी पर नहीं मार सकता। बीती रात जैसे ही पाकिस्तानी सीमा की तरफ से एक संदिग्ध ड्रोन ने भारतीय वायु सीमा में प्रवेश करने की हिमाकत की, वैसे ही सतर्क जवानों ने अपनी आधुनिक तकनीक और एंटी-ड्रोन प्रणालियों के जरिए उसकी हर हरकत पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी। अंधेरे का फायदा उठाकर तस्करों द्वारा गिराए गए इस भारी-भरकम खेप के पैकेट को जब सुरक्षा बलों ने अपने कब्जे में लिया, तो जांच के दौरान उसमें से करोड़ों रुपए की उच्च कोटि की हेरोइन बरामद हुई। जवानों की इस त्वरित और सटीक कार्रवाई ने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों पर एक बार फिर पानी फेर दिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैठे ड्रग्स माफियाओं को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा है।5,50,00,000 की हेरोइन और तस्करी के इस बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की गहरी पड़तालसुरक्षा एजेंसियों द्वारा बरामद की गई इस अवैध नशीले पदार्थ की कुल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत पांच करोड़ पचास लाख रुपए आंकी जा रही है, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत के युवाओं को नशे के दलदल में धकेलने के लिए किस पैमाने पर साजिशें रची जा रही हैं। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इस खेप को मंगवाने के पीछे सीमा के दोनों ओर बैठे कुख्यात तस्करों का एक बहुत बड़ा और पुराना सिंडिकेट काम कर रहा है, जो स्थानीय सहयोगियों की मदद से इस माल को देश के विभिन्न राज्यों में सप्लाई करने की फिराक में था। खुफिया एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि राजस्थान के इस विशेष इलाके में ड्रोन के जरिए ड्रॉप किए गए इस सामान को रिसीव करने के लिए कौन-कौन से स्थानीय चेहरे सक्रिय थे। इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद से ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े कई संदिग्ध लोगों पर शिकंजा कसना शुरू हो चुका है।आधुनिक तकनीक और ड्रोन के जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा के सामने खड़ी नई चुनौतियांपाकिस्तान द्वारा लगातार भारतीय सीमा में हथियारों, कारतूसों और हेरोइन की तस्करी के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जाना भारतीय सुरक्षा तंत्र के लिए एक चिंता का विषय बनता जा रहा है। पारंपरिक सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ अब सुरक्षा बलों को आसमान से होने वाली इन छिपकर की जाने वाली गतिविधियों से निपटने के लिए और अधिक अत्याधुनिक तकनीकों और रडार प्रणालियों की आवश्यकता महसूस हो रही है। ड्रोन के छोटे आकार और रातों-रात अंधेरे में उड़ान भरने की क्षमता का फायदा उठाकर तस्कर कानून की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश करते हैं, लेकिन हमारे सुरक्षाबलों की चौकस निगाहें हर बार उनके इस खेल को बिगाड़ देती हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि देश की आंतरिक सुरक्षा को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियों का हाई-टेक होना कितना ज्यादा जरूरी है।स्थानीय सहयोगियों की तलाश और सीमावर्ती गांवों में सुरक्षा एजेंसियों का कड़ा पहराइस सनसनीखेज तस्करी के खुलासे के बाद से राजस्थान के सीमावर्ती जिलों के गांवों में खुफिया तंत्र को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया गया है और हर आने-जाने वाले संदिग्ध व्यक्ति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि बिना स्थानीय समर्थन के ड्रोन के जरिए गिराए गए इस माल को सुरक्षित ठिकाने तक पहुंचाना असंभव है, इसलिए उन सभी लोगों की शिनाख्त की जा रही है जो तस्करों के संपर्क में हो सकते हैं। पुलिस और बीएसएफ का संयुक्त सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है ताकि इस सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचकर इसके हर एक मोहरे को सलाखों के पीछे पहुंचाया जा सके। देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले इन देशविरोधी तत्वों के खिलाफ आने वाले दिनों में और भी बड़े स्तर पर कड़े एक्शन लिए जाने की पूरी उम्मीद है, जिससे सरहद पार बैठे दुश्मनों के हौसले पूरी तरह पस्त हो सकें।
मुंबई में सीवर लाइन की सफाई के दौरान हादसा, एक मजदूर की मौत, एक घायल
मुंबई के सांताक्रुज ईस्ट स्थित एक हाउसिंग सोसायटी में सीवर लाइन साफ करने उतरे दो मजदूरों में से एक की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल बताया जा रहा है.
यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव में भाजपा और सपा के बीच मुकाबला रोचक हो सकता है। अखिलेश यादव के तीसरे उम्मीदवार के दांव से आठवीं सीट पर पेंच फंस सकता है।
महाकाल की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियां जोरों पर हैं। इसकी व्यवस्थाओं में हर समुदाए बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है। लोग विकास कार्यों के लिए खुद आगे आकर अपने घरों-धर्मस्थलों को हटा रहे हैं। दूसरी ओर, उज्जैन प्रशासन और शहर काजी ने भी आम जनता ...
SIR Row: जयपुर की सड़कों पर गरमाई सियासत, वोट चोरी के आरोप में सुखजिंदर रंधावा
राजधानी जयपुर इन दिनों एक बड़े सियासी संग्राम का केंद्र बन चुका है, जहां एसआईआर (SIR) रो और कथित वोट चोरी के गंभीर मुद्दों को लेकर कांग्रेस पार्टी ने सड़क से लेकर प्रशासन तक हड़कंप मचा दिया है। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को वॉटर कैनन यानी पानी की तेज बौछारों का इस्तेमाल करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता अपने स्थान पर चट्टान की तरह डटे रहे। इस तीखे विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस के दिग्गज नेताओं—प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अंततः अपनी गिरफ्तारियां देकर सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में इस हाई-वोल्टेज ड्रामे की गूंज दूर-दूर तक सुनाई दे रही है, और यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।जयपुर में एसआईआर और वोट चोरी के खिलाफ कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन और वॉटर कैनन का प्रहारजयपुर की सड़कों पर आज जो राजनीतिक दृश्य देखने को मिला, उसने प्रशासनिक महकमे के साथ-साथ सत्ता पक्ष की भी नींद उड़ा दी है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जब एसआईआर और वोट चोरी के मामलों के विरोध में मोर्चा निकाला, तो पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने पूरी ताकत झोंक दी और सुरक्षा घेरे को पार करने से रोकने के वास्ते वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। ठंडे पानी की बौछारों के बीच भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश कम होने का नाम नहीं ले रहा था और वे सरकार विरोधी नारों के साथ लगातार आगे बढ़ते जा रहे थे। इस उग्र प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि विपक्ष इस मुद्दे को आसानी से छोड़ने वाला नहीं है और वह सड़क पर उतरकर सरकार को घेरने की कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगा।सुखजिंदर रंधावा, गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली की सामूहिक गिरफ्तारी का सियासी संदेशइस विरोध प्रदर्शन के दौरान उस समय राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया जब कांग्रेस के शीर्ष नेताओं—सुखजिंदर सिंह रंधावा, गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली ने पुलिस की तमाम बंदिशों को दरकिनार करते हुए खुद को गिरफ्तार करवा लिया। नेताओं का यह कदम केवल एक सांकेतिक विरोध नहीं था, बल्कि यह राज्य सरकार को एक कड़ा राजनीतिक संदेश देने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। गिरफ्तारी के बाद इन नेताओं ने मीडिया और समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र की आवाज को दबाने की हर कोशिश का डटकर मुकाबला किया जाएगा। इन तीन प्रमुख चेहरों की एक साथ गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि कांग्रेस पार्टी इस पूरे आंदोलन को जमीनी स्तर पर एक बड़ा जनआंदोलन बनाने की पूरी तैयारी में है।वोट चोरी के आरोपों पर घिरी सरकार और विपक्ष का आक्रामक रुखकांग्रेस पार्टी द्वारा लगातार उठाए जा रहे 'वोट चोरी' के मुद्दे ने राज्य की मौजूदा राजनीतिक हवा का रुख पूरी तरह से बदल दिया है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग करके लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जयपुर के इस हालिया प्रदर्शन ने जनता के बीच इस बहस को और तेज कर दिया है कि क्या वास्तव में चुनावी निष्पक्षता पर कोई बड़ा संकट मंडरा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक सरकार इस मामले में कोई ठोस और संतोषजनक सफाई नहीं देती, तब तक विपक्ष इसे एक बड़े जनमुद्दे के रूप में जनता के बीच ले जाता रहेगा। यह टकराव आने वाले समय में विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगहों पर गर्मागर्म बहस का मुख्य विषय बना रहेगा।इस आंदोलन का आगामी राजनीतिक भविष्य और जनता की प्रतिक्रियाजयपुर में हुई इन गिरफ्तारियों और पुलिस कार्रवाई के बाद राजस्थान की राजनीति का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। एक तरफ जहां कांग्रेस पार्टी इसे जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए दी गई एक बड़ी कुर्बानी बता रही है, वहीं सत्ता पक्ष इसे केवल राजनीतिक स्टंट करार दे रहा है। हालांकि, धरातल पर इस घटना ने आम नागरिकों और युवाओं का ध्यान अपनी ओर जरूर खींच लिया है। सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक इसी बात की चर्चा है कि आखिर यह एसआईआर और वोट चोरी का पूरा प्रकरण आने वाले चुनावों को किस हद तक प्रभावित करेगा। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी और राजनीतिक दल अपनी अगली रणनीतियों का खुलासा करेंगे, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि जनता इस सियासी रस्साकशी में किसका साथ देती है।
सचिन की तरह विराट ने छुआ आसमान, पर अपने स्वैग में, 5 आंकड़ों ने खोला राज
विराट कोहली ने वनडे क्रिकेट में 15 हजार रन पूरे कर इतिहास रच दिया है. खास बात यह है कि विराट ने यह मुकाम सिर्फ 303 पारियों में हासिल किया, जबकि सचिन तेंदुलकर को 15 हजार रन तक पहुंचने में 377 पारियां लगी थीं. यानी विराट ने सचिन से 74 पारियां कम खेलकर यह आंकड़ा छुआ. लेकिन कहानी सिर्फ इतनी नहीं है, शतक, 50+ स्कोर और बल्लेबाजी औसत के आंकड़े भी दोनों दिग्गजों के बीच बड़ा फर्क दिखाते हैं.
ASP मुकेश सोनी कौन हैं? विवादों के बाद भी कैसे मिलती रहीं मलाईदार पोस्टिंग्स
राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) के अधिकारी और एडिशनल एसपी (ASP) मुकेश सोनी इन दिनों अपने ऊपर लगे गंभीर भ्रष्टाचार और दो करोड़ रुपये की घूसखोरी के आरोपों को लेकर प्रदेश की सुर्खियों में छाए हुए हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की रडार पर आए मुकेश सोनी का नाम एक बार फिर से किसी बड़े विवाद से जुड़ा है, जिसने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता से लेकर राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर बार-बार विवादों और शिकायतों के घेरे में आने के बावजूद इस तरह के अधिकारियों को लगातार मलाईदार और महत्वपूर्ण पोस्टिंग कैसे मिलती रहती हैं। एसीबी की शुरुआती जांच और खुलासों के बाद से ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है, और हर कोई यह जानना चाहता है कि इस पूरे रिश्वत कांड के पीछे की असली और गहरी कहानी क्या है।एसीबी के शिकंजे में फंसे ASP मुकेश सोनी का विवादित प्रशासनिक सफरएडिशनल एसपी मुकेश सोनी का करियर शुरू से ही विवादों की परछाई में घिरा रहा है। प्रशासनिक हलकों में उन्हें एक ऐसे तेज-तर्रार लेकिन विवादित अधिकारी के रूप में जाना जाता है, जिन पर पहले भी कई बार भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लग चुके हैं। इसके बावजूद, सिस्टम की अनदेखी कहें या राजनीतिक संरक्षण का असर, उन्हें हर बार बचाने वाले हाथ मिल जाते थे और वे किसी न किसी तरह मलाईदार पदों पर काबिज होने में सफल रहे। जानकारों का कहना है कि पुलिस विभाग में कई ऐसे पद होते हैं जहाँ भ्रष्टाचार की संभावनाएं सबसे ज्यादा होती हैं, और ऐसे पदों पर बार-बार एक ही तरह की छवि वाले अधिकारियों की नियुक्ति होना सिस्टम के भीतर की गंभीर कमियों को उजागर करता है। इस बार दो करोड़ रुपये के बड़े घूसकांड में नाम सामने आने के बाद मुकेश सोनी के प्रशासनिक रसूख और उनकी कार्यशैली पर सबसे बड़ा और निर्णायक सवालिया निशान लग गया है।दो करोड़ के घूसकांड की परतें और भ्रष्टाचार के खिलाफ उठ रहे गंभीर सवालयह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को एक मामले में भारी-भरकम रिश्वत के लेन-देन और सौदेबाजी के पुख्ता सबूत मिले। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे खेल में दो करोड़ रुपये जैसी बड़ी रकम की घूस का मामला सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर एएसपी मुकेश सोनी की संलिप्तता की गहरी आशंका जताई जा रही है। राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियानों के बीच एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का इस तरह के गंभीर रिश्वत कांड में नाम आना राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। आम नागरिकों और सामाजिक संगठनों का सवाल है कि जिस पुलिस महकमे पर राज्य में अपराध और भ्रष्टाचार रोकने की जिम्मेदारी है, जब वही महकमा ऐसे मामलों में घिर जाए, तो आम जनता का न्याय व्यवस्था से भरोसा कैसे कायम रह पाएगा।राजनीतिक संरक्षण और मलाईदार पोस्टिंग का खेल: सिस्टम की अंदरूनी सच्चाईराजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा बहुत आम है कि कुछ चुनिंदा अधिकारियों को तमाम शिकायतों और जांच के बावजूद वीआईपी और मलाईदार पोस्टिंग कैसे मिल जाती है। एएसपी मुकेश सोनी का यह प्रकरण इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण माना जा रहा है कि कैसे प्रशासनिक तंत्र में बैठे कुछ प्रभावशाली लोग अपने रसूख के दम पर हर नियम और कायदे को ताक पर रख देते हैं। विपक्ष और विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा भी इस मामले को लेकर सरकार और गृह विभाग पर निशाना साधा जा रहा है, जिसमें यह मांग उठ रही है कि केवल एक अधिकारी पर कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि उन सभी चेहरों को भी बेनकाब किया जाना चाहिए जिन्होंने परोक्ष या अपरोक्ष रूप से ऐसे अधिकारियों को संरक्षण दिया। यह पूरा घटनाक्रम इस बात की ओर इशारा करता है कि प्रशासनिक सुधारों और पारदर्शी तबादला नीतियों के दावों के बावजूद धरातल पर स्थिति कितनी चिंताजनक बनी हुई है।भविष्य की जांच, विभागीय कार्रवाई और राजस्थान पुलिस की साख पर असरएएसपी मुकेश सोनी के खिलाफ चल रही इस उच्चस्तरीय एसीबी जांच के निष्कर्ष आने वाले दिनों में राजस्थान पुलिस और प्रशासनिक महकमे के कई अन्य बड़े राज खोल सकते हैं। इस बात की पूरी संभावना है कि जैसे-जैसे जांच का दायरा आगे बढ़ेगा, इस घूसकांड में लिप्त अन्य बिचौलियों, पुलिसकर्मियों और रसूखदार लोगों के नाम भी सामने आएंगे। विभाग के भीतर इस बात को लेकर मंथन शुरू हो चुका है कि इस तरह की घटनाओं से पुलिस की छवि को जो भारी नुकसान पहुंच रहा है, उसकी भरपाई कैसे की जाए। जनता और मीडिया की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि क्या इस बार कानून निष्पक्षता से अपना काम करते हुए दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाएगा, या फिर यह मामला भी फाइल के किसी कोने में दबकर रह जाएगा। यह प्रकरण केवल एक व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि संपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था की ईमानदारी और जवाबदेही की एक बड़ी अग्निपरीक्षा बन चुका है।
Maharashtra में NCP गुटों के विलय से Sharad Pawar का इनकार, संगठन मजबूती पर रहेगा जोर
नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने सोमवार को अपनी पार्टी के सुनेत्रा पवार की NCP में विलय और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) में शामिल होने की अफ़वाहों पर अपनी स्थिति साफ़ की। उन्होंने कहा कि वह किसी और के साथ हाथ नहीं मिलाएंगे, बल्कि NCP(SP) को मज़बूत करने पर ध्यान देंगे। मुंबई में अपने 'सिल्वर ओक' आवास पर पार्टी नेताओं के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए, राज्यसभा सदस्य ने कहा कि NCP(SP) एक 'सेक्युलर' पार्टी बनी हुई है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जो लोग उनकी पार्टी का समर्थन करना चाहते हैं, उन्हें इसमें शामिल हो जाना चाहिए। इसे भी पढ़ें: MMDR Act के खिलाफ आखिरी सांस तक लड़ूंगा, नवीन पटनायक ने ओडिशा में किया विरोध का आह्वान शरद पवार ने कहा कि हमारी पार्टी को लेकर कुछ चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन असल बात यह है कि नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार), जिसका मैं नेतृत्व करता हूं, एक सेक्युलर पार्टी है। अगर कोई हमारे साथ आना चाहता है, तो उन्हें सिर्फ़ हमारे करीब नहीं आना चाहिए, बल्कि हमारी पार्टी में शामिल हो जाना चाहिए। हम किसी के साथ नहीं जाएंगे; हम अपनी पार्टी को मज़बूत करेंगे। NCP के दोनों गुटों के विलय को लेकर पिछले कई महीनों से अटकलें लगाई जा रही हैं। खबर थी कि NCP(SP) गुट BJP के नेतृत्व वाले NDA में शामिल हो सकता है। इसके लिए एक विस्तृत योजना भी तैयार की गई थी। सूत्रों ने पहले India TV को बताया था कि NDA में शामिल होने से पहले, NCP(SP) का विलय सुनेत्रा पवार गुट के साथ होगा और बाद में वे BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो जाएंगे। पवार ने जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी, जिससे विलय और NDA में शामिल होने की संभावनाओं को और बल मिला। हालांकि, बाद में इस वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के साथ उनकी मुलाकात NEET पेपर लीक के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध प्रदर्शन के संबंध में थी। इसे भी पढ़ें: Aligarh Moradabad Expressway निर्माण में किसानों को बाजार दर पर मिले मुआवजा, Akhilesh Yadav की मांग पूर्व केंद्रीय मंत्री ने तब कहा था कि मैंने व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री से मुलाकात की और उनसे कहा कि लोकतंत्र में बातचीत ज़रूरी है। मैंने अभिजीत दिपके और अन्य युवा प्रदर्शनकारियों से भी कहा था कि अगर सरकार बातचीत के लिए तैयार होती है, तो उन्हें भी बातचीत के लिए तैयार रहना चाहिए।
अमृतपाल सिंह की एंट्री से अकाली दल की सियासी जमीन पर मंडराया संकट
पंजाब की राजनीति अपनी जटिल जातीय समीकरणों, धार्मिक भावनाओं और अप्रत्याशित उठापटक के लिए पूरे देश में हमेशा से एक अलग पहचान रखती है। जैसे-जैसे राज्य में विधानसभा चुनावों का वक्त नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे वहां की राजनीतिक फिजा में नए-नए समीकरण और चुनौतियां आकार लेने लगी हैं। इस चुनावी सरगर्मी के बीच शिरोमणि अकाली दल (SAD) के लिए एक ऐसा नया और संवेदनशील राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है जिसने पार्टी के वरिष्ठ रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है। अमृतपाल सिंह (Amritpal Singh) और उनके संगठन 'वारिस पंजाब दे' (Waris Punjab De) की बढ़ती सक्रियता और उसके वैचारिक प्रभाव ने अकाली दल के पारंपरिक सिख वोटबैंक में सेंध लगाने की पूरी तैयारी कर ली है। एक ऐसी पार्टी जो खुद को सिखों की एकमात्र नुमाइंदा होने का दावा करती आई है, उसके लिए पंथक राजनीति के इस नए और आक्रामक चेहरे से निपटना किसी बड़ी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में गहराई से समझते हैं कि चुनाव के मुहाने पर खड़े पंजाब में 'वारिस पंजाब दे' का यह उभार अकाली दल के लिए एक बड़ी चुनौती क्यों बनता जा रहा है और इसके आगामी चुनावी नतीजों पर क्या गहरे प्रभाव पड़ सकते हैं।शिरोमणि अकाली दल की पंथक राजनीति और उसकी पारंपरिक ज़मीन पर मंडराता नया खतराशिरोमणि अकाली दल का यह राजनीतिक इतिहास रहा है कि उसने दशकों तक पंजाब में सिख पंथ, गुरुद्वारों के प्रबंधन और धार्मिक मुद्दों को अपनी राजनीति की मुख्य धुरी बनाकर शासन किया है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में तेजी से बदलाव आया है और युवा पीढ़ी के एक बड़े वर्ग का झुकाव अधिक आक्रामक और कट्टर धार्मिक तथा क्षेत्रीय मुद्दों की तरफ बढ़ा है। अमृतपाल सिंह और उनके संगठन 'वारिस पंजाब दे' ने जिस प्रकार से ग्रामीण युवाओं के बीच अपनी पैठ बनाई है और पंथक अधिकारों तथा बेअदबी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर आक्रामक तेवर दिखाए हैं, उसने अकाली दल के सामने एक गंभीर वैचारिक संकट पैदा कर दिया है। अकाली दल के नेता जो पारंपरिक तरीके से अपनी रोटियां सेकते आए हैं, वे इस नए और अप्रत्याशित राजनीतिक तेवर का सटीक और प्रभावी जवाब देने में फिलहाल संघर्ष करते नजर आ रहे हैं, जिससे पार्टी का पारंपरिक वोट बैंक छिटकता हुआ दिखाई दे रहा है।'वारिस पंजाब दे' की कार्यशैली और युवाओं के बीच उसकी अपील का बढ़ता हुआ दायराअमृतपाल सिंह और 'वारिस पंजाब दे' संगठन की सबसे बड़ी ताकत यह रही है कि उन्होंने सीधे तौर पर ग्रामीण इलाकों के बेरोजगार और धर्म के प्रति संवेदनशील युवाओं को अपने साथ जोड़ने में सफलता हासिल की है। अमृत बंचन, नशामुक्ति अभियानों के नाम पर शुरू किए गए उनके दौरों और पंजाब के अधिकारों की हुंकार ने कम समय में ही एक बड़ा जनसमूह जुटा लिया है, भले ही इसके कानूनी और प्रशासनिक परिणाम काफी विवादित रहे हों। जेल की सलाखों के पीछे होने के बावजूद अमृतपाल सिंह और उनके समर्थकों का प्रभाव राजनीतिक गलियारों में पूरी तरह कायम है, और चुनाव के समय उनकी वैचारिक उपस्थिति का असर प्रत्याशियों की हार-जीत पर पड़ना तय माना जा रहा है। अकाली दल के रणनीतिकार इस बात से सबसे ज्यादा डरे हुए हैं कि यदि यह पंथक और कट्टरपंथी वोट बैंक पारंपरिक अकाली खेमे से अलग होकर किसी अन्य विकल्प या निर्दलीय उम्मीदवारों के पाले में चला गया, तो पार्टी के लिए अपनी पुरानी सियासी जमीन बचाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।चुनावों पर पड़ने वाला दूरगामी असर: क्या अकाली दल अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने में होगा कामयाब?पंजाब का हर एक चुनाव केवल सीटों की हार-जीत का खेल नहीं होता, बल्कि यह राज्य के अस्तित्व, पहचान और सामाजिक ताने-बाने की परीक्षा होती है। आगामी विधानसभा चुनावों में जब मतदाता अपने मत का प्रयोग करने पोलिंग बूथ पर पहुंचेंगे, तो उनके मन में आर्थिक विकास के साथ-साथ धार्मिक और क्षेत्रीय अस्मिता के मुद्दे भी प्रमुख रूप से हावी रहेंगे। शिरोमणि अकाली दल के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह एक तरफ तो उदार और विकासवादी छवि पेश करे, और दूसरी तरफ अपनी पारंपरिक पंथक पहचान को भी बचाए रखे ताकि 'वारिस पंजाब दे' के प्रभाव वाले युवाओं को काउंटर किया जा सके। राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि यदि अकाली दल इस नाजुक संतुलन को साधने में नाकाम रहता है, तो सिख राजनीति का एक बहुत बड़ा हिस्सा हमेशा के लिए उसके हाथ से निकल सकता है, जो दल के भविष्य के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा।पंजाब की राजनीति का नया मोड़ और आने वाले सियासी समीकरणों की एक झलककुल मिलाकर, चुनाव से ठीक पहले अमृतपाल सिंह और 'वारिस पंजाब दे' का फैक्टर पंजाब की राजनीति को एक ऐसे अनिश्चित दौर में धकेल चुका है जहां हर राजनीतिक दल को फूंक-फूंक कर कदम रखना पड़ रहा है। शिरोमणि अकाली दल के लिए यह समय आत्ममंथन और अपनी खोई हुई राजनीतिक साख को पुनर्जीवित करने का अंतिम अवसर साबित हो सकता है, बशर्ते वे समय रहते जनता के नब्ज को पहचान सकें। चुनावी मंचों से लेकर सोशल मीडिया के गलियारों तक, इस बात की चर्चा आम हो चुकी है कि इस बार का मुकाबला केवल पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि वैचारिक वर्चस्व की एक लंबी लड़ाई है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अकाली दल इस दोधारी तलवार जैसी चुनौती का सामना किस राजनीतिक कौशल और रणनीति के साथ करता है, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
सड़क पर लाल बिछौना! हाईवे पर भिड़े दो कंटेनर, टमाटर बिखरने से लगा जाम
Samruddhi Mahamarg Accident: छत्रपति संभाजीनगर के वैजापुर में समृद्धि महामार्ग पर टकराए दो कंटेनर. सड़क पर टमाटर बिखरने से लगा लंबा जाम. पढ़ें पूरी रिपोर्ट...
पहाड़ी स्टाइल में बनाएं लहसुन के पत्तों की चटनी, चाट-चाटकर खाएंगे सब
लहसुन के पत्तों की चटनी एक पारंपरिक और स्वादिष्ट पहाड़ी डिश है, जो खाने का जायका कई गुना बढ़ा देती है. हरे लहसुन, भुने जीरे, भांग के बीज और नींबू के रस से बनी यह तीखी चटनी दाल-चावल, पराठे या पकौड़ों के साथ सर्व करने के लिए एकदम परफेक्ट साइड डिश है. आइए आपको इसे बनाने का आसान तरीका बताते हैं.
जर्मनी बनाएगा धरती पर 'छोटा सूरज', पैदा होगी भविष्य की बिजली
सूरज जैसी ऊर्जा अब धरती पर पैदा करने की कोशिश तेज हो गई है. जर्मनी Stellarator तकनीक के जरिए फ्यूजन एनर्जी को बिजली में बदलने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए वैज्ञानिक करोड़ों डिग्री गर्म प्लाज्मा को चुंबकीय क्षेत्र से कंट्रोल करेंगे.
UP Assembly Election से पहले Voter List विवाद, क्या Congress का विरोध केवल एक चुनावी दांव है?
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव है। ऐसे में 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया को वहां भी बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश विपक्ष की ओर से की जा रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हाल में ही मीडिया रिपोर्ट में चुनाव आयोग को लेकर जो खुलासे हुए है, उससे विपक्ष को एक बड़ा मौका मिल गया है। अप्रैस में जारी अंतिम सूची से पता चला है कि उत्तर प्रदेश में 166 दिनों तक चली 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया के बाद राज्य की वोटर लिस्ट से 2.04 करोड़ से ज़्यादा वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं। हटाए गए नाम उन कुल वोटरों का 13.21 प्रतिशत हैं जो पिछले साल अक्टूबर में SIR शुरू होने से पहले लिस्ट में शामिल थे। इसे भी पढ़ें: CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर Youth Congress का दिल्ली में प्रदर्शन SIR से पहले, उत्तर प्रदेश में 15.44 करोड़ वोटर थे। अंतिम वोटर लिस्ट में यह संख्या 13.39 करोड़ है। इनमें से 7.3 करोड़ (कुल वोटरों का 54.54 प्रतिशत) पुरुष हैं और 6.09 करोड़ (45.46 प्रतिशत) महिलाएं हैं। थर्ड जेंडर के 4,206 वोटर हैं। यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नदीप रिन्वा द्वारा जारी अंतिम मतदाता सूची से पता चला है कि 18-19 साल की उम्र के ग्रुप में 17.63 लाख मतदाता हैं। अंतिम सूची में लिंगानुपात 834 है, जो पहले के 824 के अनुपात से बेहतर है। चुनाव आयोग ने क्या कहा चुनाव आयोग ने बुधवार को वोटर लिस्ट के देशव्यापी 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) को लेकर तीन सदस्यों वाले पैनल में मतभेद की खबरों को कम करके आंकने की कोशिश की। आयोग ने कहा कि चुनाव आयुक्तों की ओर से ज़ाहिर की गई व्यक्तिगत राय को आयोग का फ़ैसला नहीं माना जा सकता। सूत्रों के मुताबिक, SIR से जुड़े फ़ैसलों समेत आयोग के सभी फ़ैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंज़ूरी से सर्वसम्मति से लिए गए थे। रिपोर्ट पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए, EC के सूत्रों ने कहा कि दोनों कमिश्नरों ने वोटर लिस्ट को ठीक करने के दौरान अलग-अलग राज्यों में नाम हटाने और वोटर डेटाबेस को संभालने से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई थी। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि इन मामलों को SIR को लेकर कमीशन के अंदर असहमति के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। EC सूत्रों ने कहा कि चूंकि दिमाग इंसानी होता है, कंप्यूटर नहीं, इसलिए विचारों में अंतर होना स्वाभाविक है। लेकिन तालमेल बिठाकर और आम सहमति बनाकर ही चीजें आगे बढ़ती हैं। सूत्रों ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि चुनाव आयोग के सभी फ़ैसले सर्वसम्मति से और मुख्य चुनाव आयुक्त तथा दोनों आयुक्तों की मंज़ूरी से लिए गए थे। क्यों देना पड़ा स्पष्टीकरण यह स्पष्टीकरण 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के बाद आया, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार SIR प्रक्रिया के दौरान जारी किए गए फैसलों और आदेशों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी। इस रिपोर्ट से बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया; विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट से दखल देने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। चुनाव आयोग के अंदर मतभेद की रिपोर्ट पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि कुमार ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को खत्म कर दिया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने वोट चोरी के अपने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि यह संविधान पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी, आरएसएस और चुनाव आयोग, जिन्होंने इसका आयोजन किया, उन्होंने देशद्रोह का काम किया है। इसे भी पढ़ें: CPI ने पटना में निकाला मार्च, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और SIR रद्द करने की मांग कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उत्तर प्रदेश के आगरा में मुख्य चुनाव आयुक्त के घर के मुख्य गेट पर स्प्रे पेंट से निशान भी बनाए गए। विरोध-प्रदर्शन के वीडियो शेयर करते हुए, पार्टी की युवा शाखा 'इंडियन यूथ कांग्रेस' ने X पर लिखा, आगरा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने 'ज्ञानेश गद्दार' के घर पर काली स्याही पोत दी। चुनाव आयोग के कामकाज और स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रक्रिया को लेकर बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच, कांग्रेस विरोध-प्रदर्शन कर रही है और CEC के इस्तीफ़े की मांग कर रही है। शुक्रवार को भी कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई ने विरोध प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने शुक्रवार को कहा कि चुनाव आयोग स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा है। विपक्ष को फायदे की उम्मीद इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद से चुनाव आयोग विपक्ष के निशाने पर आ गया है। विपक्ष को लगता है कि चुनाव आयोग को निशाना बनाकर हम जनता के बीच यह संदेश दे सकते हैं कि देश में भाजपा की सरकार वोट चोरी की सरकार है जैसा कि राहुल गांधी बार-बार कह रहे हैं। इसके साथ ही विपक्ष एसआईआर को लेकर भी लोगों के मन में भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी एसआईआर को राहुल गांधी ने बड़ा मुद्दा बनाया था लेकिन उन्हें बिहार चुनाव के दौरान इसका कोई फायदा नहीं हुआ। यहां तक की चुनाव के दौरान भी एसआईआर को लेकर लोगों में चर्चा तक नहीं थी। लेकिन अब विपक्ष को एक नया हथियार मिला है। ऐसे में फिर से इसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है। UP SIR ड्राफ़्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम कैसे चेक करें - वोटर सर्च पोर्टल पर जाएँ - चुनाव आयोग के वोटर सर्विस पोर्टल या सीधे इलेक्टोरल सर्च पेज पर जाएँ। - SIR सेक्शन ढूँढ़ें - मुख्य पेज पर, “Special Intensive Revision (SIR)‑2026” सेक्शन देखें। EPIC नंबर से सर्च करें - “Search your name by EPIC number in draft electoral roll SIR‑2026” पर क्लिक करें। - अपना EPIC (वोटर ID) नंबर डालें। - कैप्चा टाइप करें और सर्च पर क्लिक करें। - अगर आपका नाम ड्राफ़्ट लिस्ट में है, तो ज़िला, निर्वाचन क्षेत्र और पोलिंग स्टेशन जैसी जानकारी दिखाई देगी। - अगर “No result found” दिखाता है, तो आपका नाम ड्राफ़्ट लिस्ट में नहीं है।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सवाल उठाए। दिल्ली, ...
यूपी MLC और राज्यसभा चुनाव के लिए BJP का 'माइक्रो मैनेजमेंट' प्लान तैयार
उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है क्योंकि राज्य में जल्द ही 10 राज्यसभा सीटों और 11 विधान परिषद (एमएलसी) सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं. इन चुनावों में जीत दर्ज करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. बीजेपी ने इन चुनावों को लेकर अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. इसी सिलसिले में लखनऊ में पार्टी की कोर कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है, जिसमें उम्मीदवारों के नामों पर मंथन किया जा रहा है.
भारत की जीत के बाद बस से फिसले Rohit Sharma
वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे में भारत की शानदार जीत के बाद रोहित शर्मा के साथ होटल के बाहर छोटा हादसा हो गया. टीम बस से उतरते समय रोहित अचानक फिसलकर लड़खड़ा गए. पास मौजूद स्टाफ और पुलिसकर्मी ने उन्हें तुरंत संभाला. विराट कोहली भी इस दौरान रोहित की ओर देखते नजर आए. रोहित ने मुकाबले में 32 रन बनाए थे, जबकि कोहली और शुभमन गिल ने शतक जड़कर भारत को जीत दिलाई.
गायत्री बिश्नोई को सरकारी आवास आवंटन को लेकर विपक्ष के बीच छिड़ी जंग
देश के किसी भी राज्य में जब विधानसभा चुनाव या चुनावी सरगर्मी का दौर नजदीक आता है, तो वहां की राजनीतिक फिजा में आरोप-प्रत्यारोप और बयानों के तीर चलना एक आम बात बन जाती है। पंजाब (Punjab) राज्य में आगामी चुनावों के मद्देनजर इस समय राजनीतिक गलियारों से एक बेहद गरमागरम और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने सूबे के सियासी तापमान को अचानक बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। चुनावी सरगर्मी के बीच राजधानी में एक हाई-प्रोफाइल सरकारी बंगले और आवास के आवंटन को लेकर सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) और विपक्षी दलों के बीच एक भयंकर राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। मामला गायत्री बिश्नोई (Gayatri Bishnoi) को एक प्रमुख सरकारी आवास आवंटित किए जाने से जुड़ा हुआ है, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर भाई-भतीजावाद और नियमों की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया है। दूसरी तरफ, सत्ता पक्ष का यह दावा है कि यह आवंटन पूरी तरह से प्रशासनिक और कानूनी नियमों के दायरे में रहकर किया गया है। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि पंजाब चुनाव से ठीक पहले बंगले की इस सियासत के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है और इससे राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ रहा है।क्या है पूरा मामला? गायत्री बिश्नोई के सरकारी बंगले के आवंटन पर क्यों मचा है सियासी बवालविवाद की शुरुआत तब हुई जब प्रशासनिक स्तर पर गायत्री बिश्नोई को एक प्रतिष्ठित सरकारी आवास आवंटित किए जाने की फाइल को मंजूरी मिली और इसकी भनक विपक्षी दलों के नेताओं तक पहुंची। विपक्षी दलों का यह कहना है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले या चुनावी सुगबुगाहट के दौर में इस तरह के बड़े सरकारी बंगलों का आवंटन करना सरासर सत्ता का दुरुपयोग है और इसके जरिए राजनीतिक रोटियां सेंकने की कोशिश की जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब की राजनीति में प्रतीकों का बहुत बड़ा महत्व होता है, और ऐसे में किसी विशिष्ट हस्ती को सरकारी आवास दिया जाना विपक्षी दलों के हाथ में एक बड़ा चुनावी मुद्दा थमा देता है। जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, विभिन्न दलों के प्रवक्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और इसे लेकर सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक बयानबाजी का दौर शुरू हो गया।आम आदमी पार्टी (AAP) का तीखा पलटवार: 'विपक्ष के पास और कोई मुद्दा नहीं बचा, इसलिए फैला रहे हैं भ्रम'विपक्षी दलों के लगातार तीखे हमलों और आरोपों से घिरी आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी बिना देर किए बहुत ही आक्रामक रुख अपनाते हुए विपक्ष के सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने यह स्पष्ट किया है कि गायत्री बिश्नोई को आवास का आवंटन पूरी तरह से निर्धारित नियमों, पात्रता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए किया गया है, और इसमें किसी भी प्रकार के विशेष पक्षपात का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। आप नेताओं ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए यह कहा कि जब भी राज्य में विकास के कार्य होते हैं या सरकार पारदर्शी तरीके से अपने प्रशासनिक निर्णय लेती है, तो विपक्ष के पास केवल झूठी बयानबाजी करने के अलावा और कोई काम नहीं बचता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते देखकर विपक्षी दल जानबूझकर जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के बेबुनियाद मुद्दों को तूल दे रहे हैं, जिन्हें पंजाब की जनता अच्छी तरह समझती है।चुनावी माहौल और क्षेत्रीय राजनीति पर पड़ने वाले प्रभाव: क्या विपक्ष को मिल गया एक नया हथियार?पंजाब की राजनीति अपनी अप्रत्याशित चालों और क्षेत्रीय समीकरणों के लिए पूरे देश में मशहूर है, जहां एक छोटा सा विवाद भी रातों-रात बड़े चुनावी मुद्दे में तब्दील हो सकता है। चुनाव से ठीक पहले बंगले की इस राजनीति ने राजनीतिक दलों को जनता के बीच एक-दूसरे को घेरने का बेहतरीन मौका दे दिया है, और हर कोई यह साबित करने में लगा है कि कौन सा दल जनता के हितों के प्रति ज्यादा वफादार है। ग्रामीण और शहरी इलाकों में इस बात की चर्चाएं आम हो चुकी हैं कि राजनेता जनता के वास्तविक मुद्दों—जैसे बेरोजगारी, कानून व्यवस्था और कृषि संकट—को छोड़कर केवल आवास और महलों की राजनीति में उलझे हुए हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा चुनावी रैलियों और जनसभाओं में विपक्षी दलों द्वारा सरकार के खिलाफ एक बड़े अस्त्र के रूप में इस्तेमाल किए जाने की पूरी संभावना है, जिससे चुनावी मुकाबला और अधिक दिलचस्प होता जा रहा है।निष्पक्षता और प्रशासनिक पारदर्शिता की मांग: जनता की अदालत में क्या तय होगी सही दिशा?इस पूरे राजनीतिक ड्रामे के बीच आम नागरिकों और बुद्धिजीवियों का यह मानना है कि सरकार और प्रशासन को ऐसे संवेदनशील मामलों में पूरी तरह से पारदर्शिता बरतनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के अनर्गल संदेह की कोई गुंजाइश ही न बचे। चुनावी मौसम में जब हर एक फैसले को राजनीतिक चश्मे से देखा जाता है, तब प्रशासन की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह दूध का दूध और पानी का पानी करके सच्चाई को जनता के सामने रखे। पंजाब की जनता हमेशा से ही जागरूक रही है और वह जानती है कि किसे चुनना है और किसे नकारा साबित करना है। कुल मिलाकर, गायत्री बिश्नोई के सरकारी आवास आवंटन को लेकर शुरू हुई यह रार तब तक थमने वाली नहीं है जब तक चुनावी रण का मैदान शांत नहीं हो जाता, और इस पर राजनीतिक विशेषज्ञों की पैनी नजर लगातार बनी हुई है।
Election Commission विवाद पर Congress Working Committee मंगलवार को तय करेगी रणनीति
कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच मंगलवार को इस मुद्दे पर आगे की रणनीति पर चर्चा करेगी। पार्टी सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सहित चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हो सकता है। निर्वाचन आयोग के भीतर मतदाता सूची और एसआईआर से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर कथित तौर पर मतभेद सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर में दावा किया गया है कि पिछले 10 महीने में दो निर्वाचन आयुक्तों ने ऐसे मामलों में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने कहा है कि आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और सुझाव सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है तथा उसके फैसले सर्वसम्मति से और स्थापित वैधानिक प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। खरगे ने सोमवार को कहा कि उन्होंने मंगलवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक बुलाई है, जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा होगी और सभी सदस्य अपने सुझाव देंगे। उन्होंने कहा, “हम इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएंगे। यह मुद्दा पूरे देश के लोगों, हमारे लोकतंत्र के अस्तित्व और भारत के भविष्य से जुड़ा हुआ है। इसलिए हम इस विषय को लेकर बहुत गंभीर हैं।”कांग्रेस अध्यक्ष ने निर्वाचन आयोग के भीतर से कथित तौर पर सामने आई आपत्तियों का भी हवाला दिया और केरलम के पूर्व मुख्य सचिव जीजी थॉमसन के उस कथित बयान का जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने उनसे चुनाव लड़ने के लिए कहा था। खरगे ने आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विचारधारा का प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए और उनके खिलाफ उनके इस्तीफे के बाद भी कार्रवाई की जानी चाहिए। कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों, देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और आगे की राजनीतिक रणनीति पर भी चर्चा किए जाने की संभावना है। कांग्रेस ने इससे पहले 19 अगस्त को हुई कार्य समिति बैठक में छात्रों से जुड़े मुद्दों और कुछ अन्य विषयों पर पर विस्तार से चर्चा की थी।
'बेटा दोषी है तो सजा दो...' गुवाहाटी के होमस्टे में छात्रा की मौत पर आरोपी आसिफ अली की मां
गुवाहाटी के बाहरी इलाके में होमस्टे में एक छात्रा की रहस्यमयी मौत के बाद पुलिस हत्या की आशंका जता रही है। परिवार का आरोप है कि मौत से पहले मारपीट हुई, जबकि गिरफ्तार युवक की मां ने कहा कि अगर बेटा दोषी है तो उसे सजा मिले।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के स्वर्ण मंदिर दौरे के दौरान लगे खालिस्तान जिंदाबाद के नारे
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, वैश्विक संबंधों और ऐतिहासिक धरोहरों के दीदार के लिए दुनिया भर के बड़े राजनायिक और वीआईपी हस्तियां समय-समय पर भारत के विभिन्न धार्मिक स्थलों का दौरा करते रहते हैं। इसी क्रम में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) का ऐतिहासिक नगरी अमृतसर स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री हरमंदिर साहिब यानी स्वर्ण मंदिर (Golden Temple) का दौरा इन दिनों देश-विदेश के मीडिया गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। इस यात्रा के दौरान एक ऐसा अप्रिय और संवेदनशील वाकया सामने आया जिसने सभी को चौंका दिया और सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए। जब अमेरिकी राजदूत स्वर्ण मंदिर परिसर के भीतर माथा टेकने और वहां की आध्यात्मिक शांति का अनुभव करने पहुंचे, तो कुछ असामाजिक तत्वों और प्रदर्शनकारियों ने अचानक भीड़ का फायदा उठाकर 'खालिस्तान जिंदाबाद' के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस अप्रत्याशित घटना ने तुरंत सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी और मौके पर मौजूद पुलिस तथा खुफिया तंत्र के अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि अमेरिकी राजदूत के इस दौरे के दौरान स्वर्ण मंदिर परिसर के भीतर वास्तव में क्या-क्या हुआ और इस पूरी घटना के बाद किस तरह के कड़े प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं।अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का स्वर्ण मंदिर दौरा: आध्यात्मिक शांति और सांस्कृतिक विरासत की सराहनाअपनी इस भारत यात्रा के दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सिख धर्म के सबसे पवित्र स्थल श्री हरमंदिर साहिब में मत्था टेकने की इच्छा जताई थी, जिसके तहत वे कड़ी सुरक्षा के बीच अमृतसर पहुंचे थे। स्वर्ण मंदिर की भव्य वास्तुकला, सरोवर के पवित्र जल और वहां गूंज रही गुरुबाणी की अलौकिक धुनों ने राजदूत को बेहद प्रभावित किया, और उन्होंने इस बात की खुलकर प्रशंसा भी की कि यह स्थान मानवता, समानता और आध्यात्मिक शांति का एक अनूठा प्रतीक है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अधिकारियों और स्थानीय प्रशासनिक अमले ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया तथा उन्हें स्वर्ण मंदिर के इतिहास एवं इसकी महान परंपराओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। एक विदेशी राजनयिक का इस प्रकार दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक केंद्रों में आना भारत की सांस्कृतिक कूटनीति के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा था, लेकिन इस दौरे के अंतिम चरण में हुई एक घटना ने इस पूरी यात्रा के रंग में भंग डालने का प्रयास किया।अचानक गूंजे 'खालिस्तान जिंदाबाद' के नारे: स्वर्ण मंदिर परिसर में मची खलबली और सुरक्षा में सेंधजब अमेरिकी राजदूत स्वर्ण मंदिर के परिक्रमा मार्ग पर चल रहे थे और मीडिया कर्मी उनकी गतिविधियों को कवर कर रहे थे, तभी अचानक भीड़ के एक हिस्से से कुछ युवकों ने खालिस्तान के समर्थन में नारेबाज़ी शुरू कर दी। अचानक लगे इन नारों की गूंज से वहां मौजूद श्रद्धालु एक पल के लिए सन्न रह गए और सुरक्षा में तैनात पंजाब पुलिस तथा खुफिया एजेंसियों के होश उड़ गए। नारेबाजी करने वाले युवकों ने हाथों में कुछ खास तख्तियां या बैनर लहराने की भी कोशिश की और खालिस्तानी विचारधारा के समर्थन में नारे लगाने लगे, जिससे कुछ समय के लिए वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि मौके पर मौजूद सतर्क सुरक्षाकर्मियों और सादे कपड़ों में तैनात पुलिस बल ने तुरंत स्थिति को भांपते हुए तेजी से कार्रवाई की और नारेबाजी करने वाले उपद्रवियों को तुरंत वहां से खदेड़ने तथा हिरासत में लेने का प्रयास किया, जिससे कोई बड़ा सांप्रदायिक या कानून-व्यवस्था का संकट पैदा होने से बच गया।एसजीपीसी और सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया: उपद्रवियों की पहचान और खुफिया जांच शुरूइस घटना के तुरंत बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के टास्क फोर्स और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी विदेशी मेहमान की सुरक्षा या पवित्र स्थल की मर्यादा पर कोई आंच न आए। अधिकारियों ने स्वर्ण मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों (CCTV Cameras) की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है ताकि उन सभी चेहरों की पहचान की जा सके जिन्होंने इस संवेदनशील मौके का फायदा उठाकर माहौल खराब करने की कोशिश की थी। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आ रही है कि कुछ असामाजिक तत्व मीडिया कवरेज और विदेशी राजनयिक की मौजूदगी का फायदा उठाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने और सनसनी फैलाने के मकसद से वहां पहुंचे थे। प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि स्वर्ण मंदिर की पवित्रता को भंग करने वाले और देश विरोधी नारे लगाने वाले किसी भी बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और भारत-अमेरिका कूटनीतिक संबंधों पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषणइस घटना के तूल पकड़ने के बाद से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि आखिर हाई-सिक्योरिटी जोन माने जाने वाले स्वर्ण मंदिर के भीतर इस तरह की नारेबाजी कैसे संभव हो गई। विश्लेषकों का यह मानना है कि इस प्रकार की घटनाएं देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाती हैं, खासकर तब जब देश का कोई विशिष्ट विदेशी मेहमान दौरे पर हो। हालांकि अमेरिकी दूतावास या राजदूत की तरफ से इस छोटी सी घटना को लेकर कोई बहुत बड़ा आधिकारिक नकारात्मक बयान सामने नहीं आया है, और उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान मिले आतिथ्य सत्कार के लिए आभार व्यक्त किया है। इसके बावजूद, भारत सरकार और पंजाब प्रशासन इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की सुरक्षा चूकों को पूरी तरह से रोका जा सके। कुल मिलाकर, सर्जियो गोर का यह दौरा अपनी आध्यात्मिक भव्यता के साथ-साथ इस अप्रिय घटना के कारण लंबे समय तक याद रखा जाएगा, जो हमें यह सिखाता है कि आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र को हमेशा कितना सतर्क रहने की आवश्यकता है।
फरीदाबाद बोरवेल हादसा: 200 फीट गहरे खुले बोरवेल में गिरी मासूम बच्ची
देश के विभिन्न राज्यों से आए दिन लापरवाही और प्रशासनिक अनदेखी के कारण बोरवेल में बच्चों के गिरने की खौफनाक और दिल दहला देने वाली खबरें सामने आती रहती हैं, जो हर संवेदनशील इंसान की रूह को कंपा देती हैं। हरियाणा के औद्योगिक और घनी आबादी वाले शहर फरीदाबाद (Faridabad) से इस समय एक बेहद दुखद, हृदयविदारक और झकझोर देने वाली बड़ी खबर सामने आई है, जिसने पूरे देश को शोक में डुबो दिया है। फरीदाबाद के एक सुनसान और खुले पड़े इलाके में खेलते-खेलते एक मासूम बच्ची लगभग 200 फीट गहरे खतरनाक बोरवेल के गड्ढे में जा गिरी। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस, दमकल विभाग और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन लगभग 10 लंबे और संघर्षपूर्ण घंटों तक बच्ची उस गहरे बोरवेल के अंदर उल्टी अवस्था में फंसी रही। हालांकि बचाव दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंककर बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि इस भीषण दुर्घटना की पूरी दास्तान क्या है और देश में खुले बोरवेलों को लेकर बरती जाने वाली लापरवाही पर अब क्या बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।खेलते-खेलते अचानक काल के मुंह में समा गई मासूम: 200 फीट गहरे बोरवेल में गिरने की खौफनाक दास्तानघटनास्थल के आसपास मौजूद स्थानीय लोगों और चश्मदीदों के बयनों के मुताबिक, मासूम बच्ची रोज की तरह अपने घर के पास खुले मैदान में अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। खेलते-खेलते उसका ध्यान इस बात पर नहीं गया कि वहां जमीन पर बिना ढक्कन के एक बहुत ही गहरा बोरवेल का गड्ढा खुला पड़ा है, जिसे किसी बोरिंग के बाद बिना सुरक्षा उपायों के यूं ही खुला छोड़ दिया गया था। जैसे ही बच्ची उस बोरवेल के मु मुहाने पर पहुंची, उसका पैर फिसला और वह सीधे नीचे की तरफ फिसलती चली गई और लगभग 200 फीट की गहराई पर जाकर फंस गई। जब परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों को इस भयानक हादसे की भनक लगी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई और वे चीखते-चिल्लाते हुए मौके की तरफ दौड़े। बोरवेल के अंदर से जब बच्ची के रोने और कराहने की हल्की आवाजें आनी शुरू हुईं, तो परिजनों का कलेजा फट गया और तुरंत पुलिस तथा प्रशासन को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद राहत कार्यों का दौर शुरू हुआ।10 घंटे तक चला मैराथन रेस्क्यू ऑपरेशन: एनडीआरएफ और डॉक्टरों की टीम ने बचाई सांसों की आखिरी उम्मीदसूचना मिलते ही फरीदाबाद जिला प्रशासन के तमाम आला अधिकारी, पुलिस बल, दमकल विभाग की गाड़ियां और एनडीआरएफ (NDRF) की विशेष बचाव टीमें कुछ ही मिनटों में घटनास्थल पर पहुंच गईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत अत्याधुनिक कैमरों, ऑक्सीजन पाइप्स और समानांतर गड्ढा खोदने वाली अर्थमूविंग मशीनों को काम पर लगाया गया ताकि बोरवेल के भीतर फंसी बच्ची तक हवा और सुरक्षित मदद पहुंचाई जा सके। रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि बच्ची लगभग 200 फीट की अत्यधिक गहराई पर उल्टी अवस्था में फंसी हुई थी, जिसके कारण ऑक्सीजन की कमी और शारीरिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था। लगातार 10 घंटे तक चले इस मैराथन और बेहद तनावपूर्ण अभियान के दौरान देश भर की निगाहें फरीदाबाद के इस रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हुई थीं और हर कोई यही प्रार्थना कर रहा था कि किसी तरह बच्ची सुरक्षित बाहर आ जाए।अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने दी दुखद खबर: जिंदगी की जंग हार गई मासूम, पसरा मातमबचाव कर्मियों ने अथक परिश्रम और तकनीकी कौशल का परिचय देते हुए आखिरकार उस बोरवेल के पास एक समानांतर सुरंग खोदकर बच्ची को बाहर निकाल लिया और बिना एक सेकंड गंवाए उसे ग्रीन कॉरिडोर बनाकर तुरंत नजदीकी बड़े अस्पताल में पहुंचाया। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मौजूद डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने बच्ची का तुरंत स्वास्थ्य परीक्षण किया, लेकिन उनकी तमाम कोशिशें और सीपीआर (CPR) देने के प्रयास भी असफल साबित हुए, क्योंकि लंबे समय तक उल्टी अवस्था में रहने और ऑक्सीजन न मिलने के कारण बच्ची की सांसें पहले ही थम चुकी थीं। डॉक्टरों ने जैसे ही बच्ची की मौत की आधिकारिक पुष्टि की, अस्पताल के बाहर खड़े परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और पूरे इलाके में शोक की एक गहरी लहर दौड़ गई। एक हंसती-खेलती मासूम जिंदगी इस तरह लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगी, यह किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था।सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सरेआम धज्जियां: खुले बोरवेल छोड़ने वालों पर कब होगी सख्त कानूनी कार्रवाई?इस दर्दनाक हादसे के बाद से देश भर में एक बार फिर से इस बात को लेकर भारी गुस्सा और बहस छिड़ गई है कि सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा खुले बोरवेलों को लेकर जारी किए गए कड़े दिशा-निर्देशों का पालन जमीन पर क्यों नहीं किया जाता। बोरवेल खोदने के बाद उसे खुला छोड़ देना या उस पर कमजोर ढक्कन लगाना सीधे तौर पर आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आता है, जिसके लिए न केवल बोरवेल मालिक बल्कि संबंधित स्थानीय विभागों के अधिकारी भी बराबर के जिम्मेदार हैं। नागरिकों और सामाजिक संगठनों का यह कहना है कि अब समय आ गया है कि सरकार ऐसे लापरवाह लोगों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज करे, ताकि भविष्य में किसी अन्य मासूम को इस तरह की अकाल मौत का शिकार न होना पड़े। कुल मिलाकर, फरीदाबाद का यह बोरवेल हादसा हमारे सिस्टम की उस गहरी खामी का आईना है जिसे सुधारने के लिए कड़े प्रशासनिक फैसलों की सख्त जरूरत है।
चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर एक मीडिया रिपोर्ट के बाद कांग्रेस आक्रमक है। राजधानी भोपाल में चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष ...
'वो जिसके साथ...', गोविंदा के अफेयर पर सुनीता ने तोड़ी चुुप्पी
गोविंदा के अफेयर की खबरों पर पत्नी सुनीता आहूजा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. सुनीता ने बेहद शांत और बेबाक अंदाज में कहा कि गोविंदा जिसके साथ भी खुश हैं, वो वहां खुश रहें. अब उन्हें फर्क नहीं पड़ता.
Akhilesh Yadav का दावा: 2027 में सपा सरकार बनते ही पुरानी पेंशन और मदरसा शिक्षकों का वेतन होगा बहाल
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को दावा किया कि 2027 में सपा की सरकार बनने जा रही है और सत्ता में आने पर कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाएगी। लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में पार्टी के सभी विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमीनों पर कब्जा करने और अवैध गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया, ‘‘2027 में उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनेगी।’’सपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीट पर होने वाले चुनाव के लिए पार्टी के प्रत्याशियों की भी घोषणा की। उन्होंने मिर्जापुर-बनारस शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लाल बिहारी यादव, लखनऊ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सुशील कुमार, आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. प्रकाश चंद्र गुप्ता, गोरखपुर-फैजाबाद से कमलेश यादव, मुरादाबाद-बरेली से दानिश अख्तर और मेरठ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. नितिन तोमर को उम्मीदवार बनाया। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में वाराणसी से आशुतोष सिन्हा, इलाहाबाद-झांसी से डॉ. मान सिंह, आगरा से शशांक यादव, मेरठ से परमिंदर भाटी और लखनऊ खंड से कांति सिंह को प्रत्याशी घोषित किया गया। यादव ने सभी प्रत्याशियों के लिए सहयोग की अपील करते हुए उनकी जीत का दावा किया। उन्होंने कहा, ‘‘2027 के विधानसभा चुनाव के बाद सपा की सरकार बनने पर कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना लागू की जाएगी और इसके लिए आवश्यक वित्तीय प्रबंधन भी किया जाएगा।’’यादव ने कहा कि इसे 2022 के विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में शामिल किया गया था और आगामी घोषणापत्र में भी इसे शामिल किया जाएगा। उन्होंने भाजपा सरकार पर नफरत फैलाने, समाज में खाई पैदा करने और तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। यादव ने आरोप लगाया कि सरकार ने मदरसों के साथ भेदभाव किया है। उन्होंने कहा, ‘‘सपा की सरकार बनने पर मदरसों से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा, आधुनिक मदरसे बनाए जाएंगे, शिक्षकों का वेतन बहाल किया जाएगा और बकाया वेतन का भी भुगतान किया जाएगा।’’उन्होंने कहा कि संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं का भी समाधान किया जाएगा।
अरुणाचल प्रदेश की बड़ी उपलब्धि, राज्य में पहला किडनी ट्रांसप्लांट सफल
अरुणाचल प्रदेश के इटानगर स्थित टीआरआईएचएमएस में राज्य का पहला किडनी ट्रांसप्लांट सर गंगाराम अस्पताल की विशेषज्ञ टीम के सहयोग से सफलतापूर्वक किया गया. मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इसे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ा पड़ाव बताया और कहा कि इससे लोगों को एडवांस इलाज के लिए बाहर जाने की जरूरत कम होगी.
Weather Update : पहाड़ों पर बर्फबारी से बढ़ी ठंड, IMD इन राज्यों में बारिश का अलर्ट
Weather Update 28 September : मैदान से लेकर पहाड़ तक भारी बारिश व बर्फबारी के चलते उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश से लेकर नेपाल तक हालात खराब हैं। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में हुई बर्फबारी से मौसम में ठंडक महसूस की गई। दिल्ली में 18 साल ...
₹25 पेट्रोल का खर्च! आ रही है धांसू Innova, अक्टूबर में लॉन्च
Toyota Innova Flex Fuel: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि, उन्हें टोयोटा की तरफ से अक्टूबर में लॉन्च होने वाली एक फ्लेक्स-फ्यूल कार का निमंत्रण मिला है. ये कार 100 इथेनॉल (Ethanol) पर चलेगी. इतना ही नहीं, इसकी रनिंग कॉस्ट तकरीबन 25 रुपये प्रतिलीटर पेट्रोल के बराबर होगी.
दिल्ली से मात्र 2 घंटे की दूरी पर स्थित है एक ऐसा जादुई उल्टा घर
भागदौड़ भरी इस आधुनिक जिंदगी और रोजमर्रा के तनाव से दूर जब भी कोई इंसान वीकेंड पर घूमने के लिए किसी ऐसी जगह की तलाश करता है जो उसे हैरान और रोमांचित कर दे, तो उसके जेहन में अक्सर हिल स्टेशन या ऐतिहासिक किलों के नाम आते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी अनोखी, विचित्र और आश्चर्य से भरी हुई जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में जानकर आपकी आंखें खुली की खुली रह जाएंगी और आपका सिर चकरा जाएगा। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से महज दो घंटे की आरामदायक ड्राइव की दूरी पर एक ऐसा जादुई और अनूठा 'उल्टा घर' (Upside Down House) बनकर तैयार हुआ है जहां कदम रखते ही इस पूरी दुनिया के भौतिक नियम और गुरुत्वाकर्षण (Gravity) का अहसास उल्टा हो जाता है। इस अनोखी जगह पर पहुंचते ही आपको ऐसा प्रतीत होगा मानो आप किसी दूसरी ही दुनिया में आ गए हैं जहां जमीन आपकी छत बन चुकी है और छत पर आपका सामान उल्टा टंगा हुआ है। सोशल मीडिया के इस दौर में यह विचित्र स्थान रील्स और वीडियो बनाने वाले कंटेंट क्रिएटर्स के साथ-साथ परिवारों और बच्चों के बीच बहुत कम समय में एक बेहद लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन चुका है। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि दिल्ली के पास स्थित इस जादुई और उल्टी-पुल्टी दुनिया की असल सच्चाई क्या है और यहां जाकर आपको किस प्रकार का अनोखा अनुभव मिलने वाला है।दिल्ली से महज 2 घंटे की दूरी पर स्थित है यह अजूबा: पर्यटकों के लिए बना नया आकर्षण का केंद्रदिल्ली-एनसीआर के आसपास वीकेंड पर घूमने के लिए वैसे तो कई वाटर पार्क, मॉल और ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से जिस अनोखे प्लेस ने लोगों का सबसे ज्यादा ध्यान अपनी ओर खींचा है, वह अपनी वास्तुकला की विचित्रता के लिए पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। जब आप अपनी गाड़ी या कैब से दिल्ली की व्यस्त सड़कों को छोड़कर इस गंतव्य की तरफ आगे बढ़ते हैं, तो रास्ते का सुहाना सफर ही आपके आधे तनाव को दूर कर देता है। जैसे ही आप उस विचित्र इमारत के मुख्य द्वार के सामने पहुंचते हैं, आपकी पहली नजर जिस चीज पर पड़ती है वह है एक ऐसा मकान जो जमीन पर सीधा खड़ा होने के बजाय अपनी छत के बल उल्टा टिका हुआ है और उसकी खिड़कियां, दरवाजे तथा बाहर खड़ी गाड़ियां तक हवा में या उल्टी दिशा में नजर आती हैं। वास्तुकला के इस नायाब नमूने को देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक परिवार और दोस्तों के साथ पहुंच रहे हैं ताकि वे अपनी आंखों से इस कायनात के नियमों को चुनौती देते हुए उस नजारे को देख सकें जो किसी जादुई फिल्म के सेट जैसा प्रतीत होता है।घर के अंदर कदम रखते ही घूम जाएगा सिर: जमीन पर सोफा और छत पर टंगे होते हैं पंखेइस 'उल्टी-पुल्टी' दुनिया का असली रोमांच इसके मुख्य दरवाजे के अंदर कदम रखते ही शुरू होता है, जहां प्रवेश करते ही आपके मस्तिष्क का संतुलन एक पल के लिए डगमगा जाता है। जब आप घर के भीतर दाखिल होते हैं, तो आप पाते हैं कि आपके पैर जिस सतह पर टिके हैं वह वास्तव में उस मकान की छत है जिसे फर्श की तरह डिजाइन किया गया है, और सोफा, डाइनिंग टेबल, टीवी, फ्रिज तथा अन्य घरेलू सामान आपकी सिर के ऊपर हवा में उल्टे लटके हुए हैं। विज्ञान के नियमों के अनुसार हमारे कान का भीतरी हिस्सा हमारे शरीर के संतुलन को बनाए रखता है, लेकिन इस घर के अंदर की तिरछी बनावट और गुरुत्वाकर्षण के भ्रम के कारण इंसान का दिमाग कुछ पलों के लिए यह तय नहीं कर पाता कि ऊपर क्या है और नीचे क्या है। बच्चे इस अनोखे माहौल में उछल-कूद मचाते हुए बेहद रोमांचित महसूस करते हैं, क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है कि वे किसी अंतरिक्ष यात्रा पर आ गए हैं जहां हवा में तैरने का अहसास मिल रहा है।फोटोग्राफी और सोशल मीडिया रील्स के शौकीनों के लिए स्वर्ग है यह जगह: हर कोने में छिपा है एक नया भ्रमआज के डिजिटल और इंस्टाग्राम रील्स के जमाने में हर कोई कुछ ऐसा अलग और हटकर करना चाहता है जो सोशल मीडिया पर आते ही वायरल हो जाए, और इस लिहाज से यह उल्टा घर फोटोग्राफर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। इस घर के हर एक कमरे—चाहे वह बेडरूम हो, किचन हो या फिर ड्राइंग रूम—को इस खूबी के साथ डिजाइन किया गया है कि जब आप वहां खड़े होकर तस्वीर खींचते हैं और फोन को थोड़ा सा घुमाते हैं, तो ऐसा लगता है कि आप छत पर उल्टे लटककर या गुरुत्वाकर्षण को मात देकर हवा में खड़े हैं। कपल्स और यूथ इन तस्वीरों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर शेयर करके अपने दोस्तों को हैरान कर रहे हैं, क्योंकि पहली नजर में किसी के लिए भी यह पहचान पाना मुश्किल होता है कि तस्वीर असली है या कोई विशेष वीएफएक्स इफेक्ट है। इस अनोखे अनुभव को कैमरे में कैद करने की होड़ ही इस जगह को दिल्ली के आसपास का सबसे तेजी से उभरता हुआ टूरिस्ट हॉटस्पॉट बना रही है।बच्चों की जिज्ञासा और बड़ों के बचपन को जिंदा करने का बेहतरीन ठिकाना: वीकेंड पर जरूर बनाएं प्लानभागदौड़ भरी जिंदगी में जब बड़े लोग अपने दफ्तरों के तनाव से थक जाते हैं और बच्चों की दुनिया केवल वीडियो गेम्स या किताबों तक सिमट कर रह जाती है, तब इस तरह की जगहें उनके भीतर छिपे हुए बच्चे को फिर से बाहर निकाल लाती हैं। यहां आकर न केवल बच्चों को वास्तुकला और भौतिकी के भ्रम को नजदीक से देखने का मौका मिलता है, बल्कि पूरे परिवार को एक साथ खुलकर हंसने और क्वालिटी टाइम बिताने का अनमोल अवसर प्राप्त होता है। स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग भी इस प्रकार के थीम आधारित पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है ताकि लोगों को मनोरंजन के साथ-साथ कुछ नया सीखने को भी मिल सके। यदि आप भी इस आगामी वीकेंड पर अपने परिवार या दोस्तों के साथ शहर की भीड़भाड़ से दूर कुछ पल हंसी-मजाक और आश्चर्य से भरे बिताना चाहते हैं, तो दिल्ली से मात्र दो घंटे की दूरी पर स्थित इस उल्टे-पुल्टी जादुई घर की यात्रा आपके लिए एक बेहद यादगार और कभी न भूलने वाला अनुभव साबित होगी।
दिल्ली की ठंडक पर मत जाइए, कल के बाद मौसम फिर दिखाएगा अपना दूसरा रंग
दिल्ली-NCR में पिछले दो-तीन दिनों से बदला मौसम कल तक बना रह सकता है. बारिश और ठंडक के बाद तापमान में फिर बढ़ोतरी की संभावना है. बंगाल की खाड़ी से उठे डीप डिप्रेशन के उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ने और पहाड़ी राज्यों में बारिश-बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों पर पड़ा है. दिल्ली-NCR से मानसून की विदाई हो चुकी है.
जीवन के वो हसीन पल जो कैमरे की कैद से ज्यादा सीधे दिल में उतर जाएंगे
दुनिया भर के खूबसूरत और जादुई पर्यटन स्थलों की जब भी फेहरिस्त तैयार की जाती है, तो 'धरती का स्वर्ग' कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर (Kashmir) का नाम हमेशा सबसे ऊपर स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज मिलता है। बर्फ से ढकी ऊंची-ऊंची पहाड़ियों, कलकल बहती बर्फीली नदियों, केसर के खेतों की सोंधी खुशबू और देवदार के लंबे पेड़ों के बीच जब कोई अपने किसी बेहद खास और अजीज के साथ हाथों में हाथ डाले सफर तय करता है, तो वह नजारा किसी परी कथा से कम नहीं लगता। हाल ही में सोशल मीडिया से लेकर यात्रा प्रेमियों के बीच कश्मीर की वादियों से जुड़ा एक ऐसा ही बेहद खूबसूरत, भावनात्मक और रोंगटे खड़े कर देने वाला संस्मरण वायरल हो रहा है, जो यह बयां करता है कि कश्मीर केवल घूमने की एक जगह नहीं है, बल्कि यह अहसास है जो रूह को छू लेता है। भागदौड़ भरी इस आधुनिक जिंदगी से दूर जब दो लोग इस शांत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर वादियों में कुछ पल बिताते हैं, तो कैमरे के लेंस में कैद होने वाली तस्वीरें तो खूबसूरत होती ही हैं, लेकिन उससे कहीं ज्यादा गहरी और अमिट छाप उनके दिलों पर हमेशा के लिए अंकित हो जाती है। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि कश्मीर की इन हसीन वादियों में बिताए गए वे पल इंसान के जीवन को कैसे बदलकर रख देते हैं और क्यों यह सफर हर प्रेमी जोड़े की विशलिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए।कश्मीर की वादियों का जादुई आकर्षण: क्यों हर प्रेमी जोड़े की पहली पसंद है यह धरती का स्वर्ग?जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक बनावट और यहां की आबोहवा में कुछ ऐसा प्राकृतिक जादू है जो आने वाले हर मुसाफिर को अपना दीवाना बना लेता है। श्रीनगर की प्रसिद्ध डल झील में शिकारे की सवारी करना, हाउसबोट के बरामदे में बैठकर सूरज ढलने का नजारा देखना और गुलमर्ग के बर्फ से ढके ढलानों पर हाथों में हाथ डालकर टहलना—ये वे अनुभव हैं जिन्हें शब्दों में पूरी तरह बयां नहीं किया जा सकता। जब आप अपनी व्यस्त दिनचर्या और शहर के शोर-शराब से दूर इन वादियों में कदम रखते हैं, तो यहां की ठंडी हवाएं और चारों तरफ फैली खामोशी आपके मन के सारे तनाव और कोलाहल को पल भर में शांत कर देती है। पर्यटन विशेषज्ञों का यह मानना है कि कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता में एक ऐसा सुकून है जो मानसिक शांति चाहने वाले हर यात्री को अपनी तरफ खींचता है, और जब इस खूबसूरती को किसी अपने के साथ साझा किया जाता है, तो इस सफर का आनंद दोगुना हो जाता है।हाथों में हाथ और सामने कश्मीर: वह जादुई पल जो कैमरे के फ्रेम से बहुत परे होता हैआज के डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में हर कोई अपनी हर खूबसूरत याद को कैमरे में कैद करने और तुरंत रील्स या तस्वीरें अपलोड करने की होड़ में लगा रहता है, लेकिन कश्मीर की वादी कुछ ऐसी है जो आपको कैमरा नीचे रखकर सिर्फ महसूस करने पर मजबूर कर देती है। जब आप बर्फ से ढकी पहाड़ियों के सामने खड़े होकर अपने हमसफर के हाथों में हाथ डालते हैं, तो हवाओं की सरसराहट के बीच जो खामोश संवाद होता है, उसे दुनिया का कोई भी महंगा कैमरा या लेंस रिकॉर्ड नहीं कर सकता। वे पल ऐसे होते हैं जो समय की आंधी में भी कभी धुंधले नहीं पड़ते और इंसान जब भी कभी उदास होता है, तो केवल उन यादों को आंखें बंद करके याद करते ही उसके चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान तैर जाती है। कश्मीर का यह अहसास इस बात की गवाही देता है कि जीवन के सबसे खूबसूरत लम्हे वे होते हैं जिन्हें पैसों से नहीं, बल्कि सच्चे जज्बातों और अपनों के साथ से कमाया जाता है।गुलमर्ग, पहलगाम और सोनमर्ग का वह स्वर्णिम सौंदर्य: जहां प्रकृति हर कदम पर बिखेरती है रंगकश्मीर के अलग-अलग कोने अपनी अलग पहचान और अद्वितीय सुंदरता के लिए पूरी तरह जाने जाते हैं, चाहे वह गुलमर्ग की हरी-भरी वादियां हों जो सर्दियों में सफेद बर्फ की चादर ओढ़ लेती हैं, या फिर पहलगाम की वह शांत घाटियां जहां लिद्दर नदी का संगीत कानों में रस घोलता है। जब पर्यटक इन जगहों पर पहुंचते हैं, तो उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे वे किसी दूसरी ही दुनिया में आ गए हों जहां इंसानी दुखों और चिंताओं के लिए कोई जगह नहीं है। स्थानीय कश्मीरी लोगों की मेहमाननवाज संस्कृति, उनकी सादगी और 'कहवा' (Kashmiri Kahwa) की सोंधी खुशबू इस सफर के अनुभव को और अधिक समृद्ध और यादगार बना देती है। स्थानीय पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का भी यही कहना है कि जो पर्यटक एक बार कश्मीर की इन वादियों में आ जाता है, वह यहां की आतिथ्य सत्कार और प्राकृतिक वैभव से इस तरह बंध जाता है कि बार-बार यहां लौटने को मजबूर हो जाता है।इस जादुई सफर से मिलने वाला जीवन का संदेश: रिश्तों में ताजगी और रूहानी सुकूनजिंदगी की भागदौड़ में अक्सर हम अपने सबसे करीबी लोगों को वह वक्त और ध्यान नहीं दे पाते जिसके वे हकदार होते हैं, और ऐसे में कश्मीर जैसी शांत और खूबसूरत जगह पर बिताए गए कुछ दिन रिश्तों की पुरानी नमी को फिर से जिंदा कर देते हैं। हाथों में हाथ डालकर पहाड़ों के बीच चलना, एक-दूसरे की आंखों में देखकर जिंदगी के अनकहे सपनों को साझा करना और प्रकृति की इस गोद में खुद को बिल्कुल अकेला और सुरक्षित महसूस करना हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी एक बेहतरीन हीलिंग थेरेपी की तरह काम करता है। यह सफर हमें यह सिखाता है कि भौतिक सुख-सुविधाओं की अंधी दौड़ से बाहर निकलकर कभी-कभी प्रकृति के करीब बैठना और अपनों के साथ वक्त बिताना ही जिंदगी का सबसे बड़ा और असली सच है। कुल मिलाकर, कश्मीर की वादियों में बिताए गए वे हसीन पल केवल एक वेकेशन की यादें नहीं हैं, बल्कि वे जीवन भर की ऐसी पूंजी हैं जो इंसान के दिल में हमेशा जीवित रहती हैं और उसे हर मुश्किल वक्त में मुस्कुराने की ताकत देती हैं।
पीएम मोदी ने की छत्तीसगढ़ के 'हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा' अभियान की दिल खोलकर तारीफ
भारतीय लोक कल्याणकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास के इतिहास में जब भी जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सुधार और कुपोषण मुक्त समाज की बात की जाएगी, तो छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू किए गए अभियानों का नाम हमेशा सबसे ऊपर लिया जाएगा। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक हालिया संबोधन के दौरान छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) राज्य में चलाए जा रहे बेहद लोकप्रिय और स्वास्थ्यवर्धक अभियान 'हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा' (Sahjan / Drumstick Campaign) की खुले दिल से जमकर सराहना की है, जिसके बाद से पूरे राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री द्वारा इस लोक-कल्याणकारी पहल की राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा किए जाने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए यह गर्व से कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य सुधार के नवाचारों को अब पूरे देश में एक नई और बड़ी पहचान मिल रही है। मुनगा यानी सहजन के पौधे में मौजूद औषधीय गुणों और पोषक तत्वों को घर-घर तक पहुंचाने वाले इस अभियान ने बच्चों और महिलाओं में कुपोषण की समस्या से निपटने में एक बहुत बड़ी क्रांति ला दी है। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि इस अभियान की क्या खासियत है और क्यों प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी इतनी सराहना की है।'हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा' अभियान की परिकल्पना और इसके पीछे का स्वास्थ्य उद्देश्यछत्तीसगढ़ के दूरदराज और आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के बीच कुपोषण (Malnutrition) और आयरन की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने कुछ समय पहले 'हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा' नाम से एक अनूठा जन-अभियान शुरू किया था। सहजन या ड्रमस्टिक (Drumstick / Moringa) को वनस्पति विज्ञान और आयुर्वेद में पोषक तत्वों का पावरहाउस माना जाता है, जिसमें दूध से कई गुना अधिक कैल्शियम, संतरे से ज्यादा विटामिन सी और गाजर से अधिक विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। सरकार का यह उद्देश्य था कि लोग महंगे सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहने के बजाय अपने घरों के आसपास या बाड़ी में आसानी से उगने वाले मुनगा के पेड़ लगाएं और इसके पत्तों, फूलों तथा फलियों को अपने दैनिक भोजन में शामिल करें ताकि शरीर को सभी जरूरी विटामिन्स मुफ्त में मिल सकें। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात या अन्य राष्ट्रीय मंचों पर इस अभियान की सफलता का जिक्र करते हुए ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी की तारीफ की, तो इसने इस योजना को एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दे दिया।प्रधानमंत्री मोदी की सराहना से बढ़ा छत्तीसगढ़ का मान: मुख्यमंत्री ने जताया आभारजब देश के प्रधानमंत्री किसी राज्य की किसी छोटी से छोटी और जमीनी योजना की तारीफ करते हैं, तो उससे न केवल प्रशासनिक अमले का मनोबल बढ़ता है, बल्कि उस योजना से जुड़े आम नागरिकों को भी एक नया सम्मान मिलता है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 'हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा' अभियान की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना होना राज्य के हर एक नागरिक के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह सफलता छत्तीसगढ़ के मेहनती किसानों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, महिलाओं और स्थानीय प्रशासन की उस संयुक्त मेहनत का परिणाम है जिन्होंने इस अभियान को केवल कागजों तक सीमित न रखकर हर गांव और हर घर के चूल्हे तक पहुंचाया है। इस राष्ट्रीय मान्यता के मिलने से अब राज्य सरकार को ऐसे अन्य स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रमों को और अधिक तेजी से लागू करने की प्रेरणा मिली है, जिससे ग्रामीण इलाकों की तस्वीर तेजी से बदल रही है।कुपोषण मुक्ति की दिशा में मुनगा (सहजन) बना एक वरदान: वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक महत्वआधुनिक चिकित्सा विज्ञान और प्राचीन आयुर्वेद—दोनों ही इस बात पर एकमत हैं कि सहजन का पौधा किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है, क्योंकि इसका हर एक हिस्सा मानव शरीर के लिए औषधीय रूप से बेहद फायदेमंद होता है। छत्तीसगढ़ के जंगलों और ग्रामीण अंचलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाले इस पौधे की खासियत यह है कि इसके लिए किसी विशेष सिंचाई या महंगे उर्वरकों की जरूरत नहीं पड़ती, और यह कम पानी में भी तेजी से बढ़ता है। अभियान के तहत ग्रामीण महिलाओं को यह प्रशिक्षित किया गया कि वे मुनगा की पत्तियों को सुखाकर उसका पाउडर कैसे बनाएं और कैसे उसे बच्चों के दैनिक दलिया, सूप या दाल में मिलाकर उनके पोषण स्तर को मजबूत करें। जिन क्षेत्रों में कुपोषण दर एक बड़ी चुनौती हुआ करती थी, वहां इस अभियान के लागू होने के बाद से बच्चों के स्वास्थ्य में एक अभूतपूर्व और सकारात्मक सुधार देखने को मिला है, जिसे देश के शीर्ष वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी अपने शोध में सराहा है।ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण का एक नया मॉडल बनकर उभरा यह अभियानयह अभियान केवल स्वास्थ्य और पोषण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) और महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) की रीढ़ भी मजबूत कर रहा है। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं को मुनगा की खेती, इसके प्रोसेसिंग और इसके विभिन्न उत्पादों को बाजार में बेचने की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे उन्हें एक अतिरिक्त और स्थिर आमदनी का जरिया मिल रहा है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनती हैं, तो पूरे परिवार और समाज का विकास तेजी से होने लगता है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस मॉडल की प्रशंसा किए जाने का अर्थ यह है कि अब देश के अन्य राज्य भी छत्तीसगढ़ के इस सफल फॉर्मूले को अपने यहां लागू करने पर विचार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह अभियान देश के अन्य राज्यों के लिए भी ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार का एक बेहतरीन ब्लूप्रिंट साबित होगा।भविष्य की योजनाएं और छत्तीसगढ़ में सतत विकास का नया अध्यायप्रधानमंत्री की इस सराहना के बाद छत्तीसगढ़ सरकार के हौसले और अधिक बुलंद हो चुके हैं, और प्रशासन अब इस अभियान के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने की योजना पर काम कर रहा है। राज्य के हर जिले में सहजन के लाखों पौधों का निःशुल्क वितरण करने के साथ-साथ स्कूलों और अस्पतालों के परिसरों में भी मुनगा वाटिकाएं विकसित की जा रही हैं ताकि आने वाली पीढ़ी इसके औषधीय गुणों से अच्छी तरह वाकिफ हो सके। कुपोषण मुक्त भारत के सपने को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ का यह 'हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा' अभियान आज पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन चुका है। कुल मिलाकर, यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि जब सही दिशा में जमीनी स्तर पर काम किया जाता है, तो उसकी गूंज देश की राजधानी तक सुनाई देती है और वह नवाचार इतिहास के पन्नों में अमर हो जाता है।
3 राहत शिविरों में शरण लिए बैठे हैं 5,000 से अधिक लोग, लापता नागरिकों की तलाश जारी
देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज एक बार फिर से बेहद डरावना और विकराल रूप धारण कर चुका है, जिसके कारण आम जनजीवन पूरी तरह से पटरी से उतर गया है। प्राकृतिक आपदाओं और मानसूनी बारिश के इस दौर में छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) राज्य से इस समय एक बेहद चिंताजनक, दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है, जहां लगातार मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान पर होने के कारण बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। राज्य के कई जिलों में जलभराव की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, बेघर हुए और बाढ़ से प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए कुल 43 राहत शिविरों (Relief Camps) का निर्माण किया गया है, जिनमें इस समय 5,000 से अधिक बेबस लोग शरण लेकर रह रहे हैं। इसके साथ ही, तेज बहाव और बाढ़ के पानी में लापता हुए लोगों को ढूंढने के लिए राज्य और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF & SDRF) की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन को पूरी मुस्तैदी से चलाया जा रहा है। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि छत्तीसगढ़ के इस आपदा प्रभावित इलाके में इस समय जमीन पर हालात कैसे हैं और प्रशासन की तरफ से क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं।छत्तीसगढ़ में मूसलाधार बारिश का तांडव: नदियां उफान पर और गांवों में भर गया सैलाब का पानीबीते कई दिनों से छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में आकाश से आफत बनकर बरस रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार हो रही भारी वर्षा के कारण राज्य की कई प्रमुख नदियां और नाले खतरे के निशान से ऊपर बह रहे हैं, जिसके चलते उनका पानी आसपास के निचले इलाकों और रिहायशी बस्तियों में तेजी से घुस गया है। कई ग्रामीण इलाकों में तो स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि लोगों के घरों की छतों तक पानी पहुंच गया है, और उन्हें अपना सब कुछ छोड़कर केवल अपनी जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों की तरफ भागना पड़ा है। मौसम विभाग ने पहले ही कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया था, लेकिन बारिश की बेहिसाब रफ्तार ने जल निकासी के सभी प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है। सड़कों पर सैलाब जैसा नजारा देखने को मिल रहा है और कई जगहों पर पुल-पुलिया बह जाने के कारण सड़क संपर्क पूरी तरह से कट चुका है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।43 राहत शिविरों का गठन: 5,000 से अधिक बेघर लोगों के लिए प्रशासन ने की भोजन और चिकित्सा की व्यवस्थाइस भीषण प्राकृतिक आपदा के बीच सरकार और स्थानीय प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए प्रभावित परिवारों को सुरक्षित निकालने के लिए युद्ध स्तर पर अभियान चलाया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित जिलों में कुल 43 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां इस समय 5,000 से अधिक विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं। इन राहत शिविरों में लोगों को भोजन, पीने का शुद्ध पानी, कपड़े और कंबल उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भी तैनात किया गया है ताकि समय पर दवाइयां और चिकित्सीय सहायता दी जा सके। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार इन कैंपों का दौरा कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी पीड़ित को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े। इसके अलावा, सामाजिक संगठनों और स्थानीय स्वयंसेवकों ने भी आगे आकर राहत सामग्री बांटने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना शुरू कर दिया है, जो इस संकट की घड़ी में इंसानियत की एक बड़ी मिसाल पेश कर रहा है।लापता लोगों की तलाश के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर जारीबाढ़ के इस तेज बहाव और जलभराव के बीच छत्तीसगढ़ के कई इलाकों से लोगों के लापता होने की हृदयविदारक खबरें भी लगातार सामने आ रही हैं, जिससे परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमों ने एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) के जवानों के साथ मिलकर लापता नागरिकों को ढूंढने के लिए एक बहुत बड़ा सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। मोटरबोट और अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से उन इलाकों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है जहां पानी का स्तर अभी भी बहुत ज्यादा खतरनाक बना हुआ है। राज्य के मुख्यमंत्री और उच्चाधिकारियों ने खुद इस पूरे राहत अभियान की कमान अपने हाथ में ले रखी है और हर घंटे ग्राउंड जीरो की रिपोर्ट ली जा रही है। सरकार ने यह निर्देश दिए हैं कि जब तक हर एक लापता व्यक्ति की सही सलामत खोज खबर नहीं मिल जाती और बाढ़ का पानी पूरी तरह उतर नहीं जाता, तब तक राहत एवं बचाव का यह कार्य पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा।भारी बारिश के बीच जनजीवन को पटरी पर लाने की चुनौती और मौसम विभाग का आगामी अनुमानइस आपदा के कारण छत्तीसगढ़ की आर्थिक गतिविधियों, खेती-किसानी और दैनिक मजदूरी करने वाले गरीब तबके के लोगों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। धान के खेतों में पानी भर जाने से किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है, जिससे अन्नदाताओं के चेहरों पर गहरी चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। हालांकि मौसम विभाग का यह अनुमान है कि आने वाले कुछ घंटों में बारिश की रफ्तार में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन तब तक प्रशासन और आम जनता को पूरी तरह सतर्क रहने की आवश्यकता है। इस प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि पर्यावरण संरक्षण और जल निकासी के पुख्ता इंतजाम कितने जरूरी हैं। कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ इस समय एक बहुत बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है, और सरकार, प्रशासन तथा आम नागरिकों की सामूहिक एकजुटता ही इस आपदा के आंसुओं को पोंछकर एक बार फिर से जीवन को सामान्य बनाने में पूरी तरह कामयाब होगी।
माओवादियों के सीक्रेट बंकर से मिले 22 करोड़ रुपये दबा गए दो डीएसपी
भारतीय पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था के इतिहास में कई बार ऐसे हैरान करने वाले और सनसनीखेज खुलासे सामने आते हैं, जिन पर आसानी से विश्वास करना नामुमकिन सा प्रतीत होता है। देश के नक्सल प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों द्वारा माओवादियों (Maoists) के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियानों के दौरान अक्सर भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक और अवैध रूप से छुपाकर रखा गया कैश बरामद होने की खबरें सामने आती रहती हैं। हाल ही में एक ऐसे ही खुफिया ऑपरेशन और उससे जुड़ी एक बेहद गंभीर अंदरूनी जांच ने पूरे पुलिस महकमे में भूचाल ला दिया है। सोशल मीडिया और कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि एक बड़े माओवादी बंकर से सुरक्षा बलों को छापेमारी के दौरान लगभग 22 करोड़ रुपये की भारी-भरकम नकदी हाथ लगी थी, लेकिन आरोप यह है कि वहां तैनात दो डीएसपी (DSP) स्तर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस पूरी रकम को आपस में दबा लिया यानी गबन कर लिया। इस सनसनीखेज खबर के सामने आते ही पुलिस मुख्यालय में हड़कंप मच गया और तुरंत एक उच्चस्तरीय गोपनीय जांच बिठा दी गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस दावे में कितना सच है और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि इस पूरे मामले की तह तक जाने पर क्या सच्चाई सामने आई है और इस पर प्रशासनिक स्तर पर क्या कार्रवाई की जा रही है।माओवादियों के खिलाफ खुफिया ऑपरेशन और बंकर से बरामदगी का सनसनीखेज दावादेश के उन अंदरूनी और दुर्ग घने जंगलों वाले इलाकों में, जहां लंबे समय से नक्सलवाद और माओवादियों की गतिविधियां एक बड़ा नासूर बनी हुई हैं, सुरक्षा बल लगातार सर्च ऑपरेशन चलाते रहते हैं। कुछ हफ्ते पहले इसी प्रकार के एक बेहद गोपनीय और सुनियोजित अभियान के दौरान खुफिया विभाग को यह इनपुट मिला था कि एक खास इलाके में स्थित माओवादियों के मुख्य कमांडर ने जमीन के नीचे एक बेहद गुप्त और सुरक्षित बंकर बना रखा है, जहां भारी मात्रा में लेवी का पैसा, हथियार और दस्तावेज छुपाए गए हैं। जब सुरक्षा बलों और स्पेशल टास्क फोर्स की संयुक्त टीम ने उस ठिकाने पर धावा बोला, तो वहां से कुछ संदेहास्पद सामग्रियां और दस्तावेज बरामद किए गए। लेकिन जैसे ही यह ऑपरेशन खत्म हुआ, उसके कुछ दिनों बाद महकमे के भीतर ही यह सुगबुगाहट शुरू हो गई कि उस बंकर से मिलने वाली नकदी का आंकड़ा जितना कागजों में दिखाया गया है, असलियत में वह उससे कई गुना ज्यादा था और मौके पर मौजूद कुछ बड़े अधिकारियों ने उस पर हाथ साफ कर दिया है।क्या वाकई 22 करोड़ रुपये बरामद हुए थे? जांच रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले तथ्यजब इस प्रकार की गंभीर आंतरिक शिकायतें पुलिस के शीर्ष अधिकारियों और राज्य के गृह विभाग तक पहुंचीं, तो मामले की नजाकत को देखते हुए तुरंत एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया ताकि इस बात की सत्यता की जांच की जा सके कि क्या वाकई 22 करोड़ रुपये की कोई भारी रकम बरामद हुई थी। गोपनीय जांच के दौरान जब उस ऑपरेशन में शामिल जवानों, स्थानीय मुखबिरों और वहां तैनात दोनों डीएसपी स्तर के अधिकारियों से पूछताछ की गई, तो कई परस्पर विरोधी बयान सामने आए। शुरुआती दौर में मीडिया और सोशल प्लेटफार्म्स पर यह दावा किया गया कि माओवादियों के पास से इतनी बड़ी नकदी मिलने की पुख्ता जानकारी थी, लेकिन जब आधिकारिक जब्ती सूची (Seizure List) और मौके के पंचनामा दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई, तो उस पर दर्ज आंकड़े और दावों में जमीन-आसमान का अंतर पाया गया। जांच अधिकारियों के अनुसार, इस बात के कोई ठोस और अकाट्य प्रमाण अभी तक हाथ नहीं लगे हैं कि वहां से 22 करोड़ रुपये बरामद हुए थे, हालांकि कुछ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और लापरवाही के संकेत जरूर मिले हैं।दो डीएसपी अधिकारियों की भूमिका पर क्यों उठे गंभीर सवाल और क्या है विभागीय कार्रवाई?इस पूरे प्रकरण में जिन दो डीएसपी रैंक के अधिकारियों पर उंगलियां उठाई जा रही हैं, उनकी कार्यप्रणाली और उस ऑपरेशन के दौरान उनकी संदिग्ध गतिविधियों को लेकर आंतरिक जांच एजेंसी अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। नियमों के मुताबिक, जब भी इस तरह के बड़े नक्सल विरोधी अभियानों में कोई भी कैश या अवैध संपत्ति बरामद होती है, तो उसकी वीडियोग्राफी कराई जाती है, स्वतंत्र गवाहों के सामने जब्ती सूची बनाई जाती है और तुरंत इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दी जाती है। लेकिन इस मामले में यह बात सामने आई कि शुरुआती स्तर पर कुछ प्रक्रियागत खामियां छोड़ी गईं, जिसके कारण अफवाहों और शंकाओं का बाजार गर्म हो गया कि अधिकारियों ने बड़ी रकम दबा ली है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने इस मामले पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए यह स्पष्ट किया है कि यदि जांच में कोई भी अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सबसे कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।नक्सल अभियानों की पारदर्शिता और इस घटना से पुलिस विभाग को मिला कड़ा सबकइस तरह की घटनाएं न केवल पुलिस बल के मनोबल को प्रभावित करती हैं, बल्कि आम जनता के मन में कानून और व्यवस्था की निष्पक्षता को लेकर भी कई तरह के सवाल खड़े कर देती हैं। माओवादियों के खिलाफ जंग लड़ने वाले हमारे सुरक्षा बल देश की रीढ़ हैं, और कुछ भ्रष्ट या लापरवाह अधिकारियों की वजह से पूरी संस्था की छवि पर आंच आना बेहद चिंताजनक विषय है। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर से इस बात की आवश्यकता को रेखांकित कर दिया है कि भविष्य में इस तरह के संवेदनशील ऑपरेशंस के दौरान हर एक कदम पर डिजिटल मॉनिटरिंग, अनिवार्य वीडियोग्राफी और पारदर्शी दस्तावेजीकरण की व्यवस्था को और अधिक पुख्ता किया जाना चाहिए। जैसे-जैसे इस गोपनीय जांच के नतीजे बाहर आएंगे, यह साफ हो जाएगा कि इस सनसनीखेज दावे में कितनी सच्चाई थी, लेकिन इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और भ्रष्टाचार की परतों को छिपाना अब आसान नहीं रह गया है।
MMDR Act के खिलाफ आखिरी सांस तक लड़ूंगा, नवीन पटनायक ने ओडिशा में किया विरोध का आह्वान
बीजू जनता दल (बीजद) प्रमुख नवीन पटनायक ने सोमवार को कहा कि वह ‘‘जेन जी के भविष्य की रक्षा’’ के लिए एमएमडीआर अधिनियम के खिलाफ ‘‘आखिरी सांस तक’’ लड़ेंगे। ओडिशा विधानसभा के बाहर खनिज एवं खनन (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को निरस्त करने की मांग को लेकर आयोजित बीजद की रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य की जनता और राजनीतिक दलों से नए खनन कानून का मिलकर विरोध करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह कानून ‘‘राज्य के अधिकार छीन लेता है’’। पांच बार ओडिशा के मुख्यमंत्री रह चुके पटनायक ने कहा, ‘‘यह नया कानून राज्य की जमीन और संसाधनों पर उसके अधिकार छीनने की कोशिश करता है। इसलिए, मैं एमएमडीआर अधिनियम के खिलाफ अपनी आखिरी सांस तक लड़ूंगा।’’साल 2024 के चुनावों के बाद भुवनेश्वर में अपनी पहली जनसभा को संबोधित करते हुए पटनायक ने दावा किया कि नए खनन कानून के लागू होने के बाद ओडिशा को राजस्व के रूप में करोड़ों रुपये का नुकसान होगा। उन्होंने कहा, ‘‘मैं सभी लोगों और राजनीतिक दलों से आह्वान करता हूं कि वे हाथ मिलाएं और हमारी जेन जी के भविष्य के लिए एमएमडीआर अधिनियम का विरोध करें। ओडिशा की भावी पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी, अगर हम इस कानून के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ते, जो हमारे वैध अधिकार छीन लेता है।’’बीजद अध्यक्ष ने राज्य के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसदों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि अगस्त में जब एमएमडीआर संशोधन विधेयक पारित किया गया, तब वे संसद में चुप रहे। उन्होंने पूछा, ‘‘जब इस अधिनियम के कारण ओडिशा को हर साल हजारों करोड़ रुपये का नुकसान होने वाला है, तब राज्य की भाजपा सरकार और पार्टी के करीब 20 सांसद चुप क्यों हैं?’’पटनायक ने कहा कि एमएमडीआर अधिनियम ‘‘कोई साधारण कानून नहीं है’’ और इसका संबंध राज्य के अधिकारों से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने पूछा, ‘ओडिशा की जनता ही राज्य के खनिजों और भूमि की वास्तविक मालिक है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक को संसद में बिना किसी चर्चा के पारित कर दिया गया। राज्य के 20 भाजपा सांसद किसके हितों की पूर्ति के लिए चुप रहे?’’उन्होंने कहा, ‘‘ओडिशा सरकार भी चुप रही... किसके डर से?’’संसद में एमएमडीआर अधिनियम पारित होने के बाद इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को लिखे अपने पत्रों का जिक्र करते हुए पटनायक ने कहा कि उन्होंने उनसे दो बार पत्र लिखकर आग्रह किया था कि कानून का विरोध करने और इसके खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मुझे मुख्यमंत्री की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। मुझे इस बात पर भी हैरानी हुई कि 20 सांसदों को लिखे मेरे पत्रों का भी कोई जवाब नहीं आया।’’पटनायक ने 29 अगस्त को ओडिशा के भाजपा सांसदों को भी पत्र लिखकर नए खनन कानून को वापस लेने की मांग करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि इन बदलावों से खनिज अधिकारों और खनिज वाले भूखंडों पर कर लगाने की राज्य की शक्तियां सीमित हो जाएंगी। उन्होंने पत्र में कहा था, ‘‘मैं आप (भाजपा सांसदों) से गंभीरतापूर्वक अपील करता हूं कि अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें और ओडिशा की भावी पीढ़ियों के बारे में सोचें। मैं आपसे अपील करता हूं कि एमएमडीआर अधिनियम में किए गए उस संशोधन को चुनौती दें और उसे वापस लेने की मांग करें, जो राज्य सरकार की शक्तियां छीन लेता है।’’नेता प्रतिपक्ष ने राज्य की भाजपा सरकार की भी आलोचना की, जिसने 24 वर्षों के बाद उनकी सरकार को बेदखल किया था। उन्होंने माझी प्रशासन को खोखले भाषणबाज़ी का उस्ताद करार दिया। संसद ने अगस्त में खनिज एवं खनन (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया। इस कानून का उद्देश्य खनिज अधिकारों और खनिज वाले भूखंडों पर कर लगाने की राज्यों की शक्तियों को सीमित करना है।
नेपाल में बारिश से नदियां उफान पर, बिहार और यूपी में बाढ़ का खतरा
नेपाल में हो रही मूसलाधार बारिश के कारण एक बार फिर तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है. त्रिशूली और नारायणी नदियां उफान पर हैं, जिसका सीधा असर अब भारत के पड़ोसी राज्यों बिहार और उत्तर प्रदेश पर भी पड़ रहा है. नेपाल से आ रहे भारी पानी के कारण उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में बाढ़ का खतरा काफी बढ़ गया है. बिहार के वाल्मीकि नगर बैराज से लाखों क्यूसेक पानी गंडक नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे आसपास के रिहायशी इलाके जलमग्न हो गए हैं.
ईशा सिंह को सलाम: शुरुआती पिछड़ने के बाद गजब की वापसी
अंतरराष्ट्रीय खेल जगत और शूटिंग रेंज से इस समय भारत के लिए एक बेहद गर्व से भर देने वाली, रोंगटे खड़े कर देने वाली और प्रेरणादायक खबर सामने आ रही है, जिसने देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। आईएसएसएफ (ISSF) विश्व कप और एशियाई स्तर की प्रतियोगिताओं में भारत का परचम लहराने वाली युवा और प्रतिभाशाली स्टार शूटर ईशा सिंह (Esha Singh) ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि असली चैंपियन वह होता है जो विपरीत परिस्थितियों और शुरुआती असफलताओं से घबराने के बजाय मैदान पर दोगुनी ताकत से पलटवार करता है। इस बार के बेहद कड़े और सांस रोक देने वाले मुकाबले के दौरान ईशा सिंह की शुरुआत वैसी नहीं रही जैसी उन्होंने और उनके प्रशंसकों ने उम्मीद की थी, और एक समय ऐसा लग रहा था कि वे पदक की दौड़ से पूरी तरह बाहर हो जाएंगी। लेकिन इसके बाद उन्होंने मानसिक दृढ़ता, गजब के संयम और अटूट आत्मविश्वास का परिचय देते हुए जिस प्रकार शानदार वापसी की और एक के बाद एक कई रोमांचक शूट-ऑफ (Shoot-off) मुकाबले जीते, उसने पूरी दुनिया के खेल विशेषज्ञों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। हालांकि अंत में बेहद मामूली अंतर से उन्हें स्वर्ण पदक से चूकना पड़ा और रजत पदक (Silver Medal) से संतोष करना पड़ा, लेकिन खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों का यह एक सुर में मानना है कि ईशा सिंह का यह सिल्वर मेडल किसी भी स्वर्ण पदक से कम नहीं है, बल्कि यह उनकी अटूट जिजीविषा की सबसे बड़ी मिसाल है। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि उस हाई-वोल्टेज फाइनल मुकाबले के दौरान ईशा सिंह ने कैसे इतिहास रच दिया और उनकी इस जादुई वापसी के पीछे की पूरी कहानी क्या है।मुकाबले की तनावपूर्ण शुरुआत: जब शुरुआती दौर में पिछड़ गई थीं भारतीय स्टार ईशा सिंहकिसी भी अंतरराष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला शारीरिक कौशल से ज्यादा मानसिक और भावनात्मक स्थिरता का इम्तिहान होता है, जहां दुनिया के सर्वश्रेष्ठ निशानेबाज एक-एक अंक के लिए आपस में जूझते हैं। इस खिताबी मुकाबले की जब शुरुआत हुई, तो ईशा सिंह का निशाना शुरुआती सीरीज में उस स्तर पर नहीं चल पाया जिसके लिए वे जानी जाती हैं, और उन्होंने कुछ बेहद करीबी शॉट गंवा दिए। स्कोरबोर्ड पर पिछड़ते देख स्टेडियम में मौजूद भारतीय समर्थकों की सांसें थम गईं और ऐसा लगने लगा कि दबाव का यह भारी बोझ इस युवा निशानेबाज के आत्मविश्वास को तोड़ देगा। खेल के इस नाजुक मोड़ पर जहां कई बार अच्छे-अच्छे दिग्गज खिलाड़ी घबराकर अपनी लय खो बैठते हैं, वहीं ईशा सिंह ने अपने भीतर के संयम को टूटने नहीं दिया। उन्होंने अपनी श्वास और मानसिक एकाग्रता को नियंत्रित करते हुए यह साबित किया कि एक सच्चे एथलीट की असली पहचान तब होती है जब वह संकट के बादलों के बीच से रास्ता निकालकर बाहर आता है।शूट-ऑफ पर शूट-ऑफ का रोमांच: ईशा सिंह के अचूक निशानों ने दुनिया को चौंकायाजब मुकाबला अपने अंतिम और सबसे निर्णायक दौर में पहुंचा, तो स्कोर बराबर हो जाने के कारण तनाव अपने चरम पर पहुंच गया और परिणाम का फैसला करने के लिए एक के बाद एक लगातार शूट-ऑफ (Shoot-Off) मुकाबले शुरू हो गए। शूटिंग के खेल में शूट-ऑफ वह स्थिति होती है जहाँ एक-एक शॉट पर पूरा पदक दांव पर लगा होता है और जरा सी मानसिक चूक आपको सीधे पोडियम से बाहर कर देती है। ऐसे अकल्पनीय दबाव वाले माहौल में ईशा सिंह ने जिस फौलादी जिगर और मशीन जैसी सटीकता के साथ अपने निशाने साधे, उसने हर देखने वाले को अंचित कर दिया। उन्होंने एक के बाद एक लगातार कई शूट-ऑफ मुकाबलों में अपने प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ा और हर बार बिल्कुल केंद्र यानी बुलसआई पर निशाना लगाकर यह दिखा दिया कि उनका मानसिक संतुलन कितना मजबूत है। वहां मौजूद विदेशी कोच और कमेंटेटर्स भी ईशा की इस अद्भुत वापसी और शांत चित्त होकर खेलने की कला की तारीफ करते नहीं थक रहे थे, क्योंकि इस स्तर का दबाव झेलना हर किसी के बस की बात नहीं होती है।गोल्ड से चूकीं लेकिन जीता करोड़ों दिलों का सम्मान: इस सिल्वर मेडल का ऐतिहासिक महत्वअंततः बहुत ही रोमांचक और कांटे की टक्कर वाले अंतिम शॉट के बाद ईशा सिंह को स्वर्ण पदक से मामूली अंतर से पिछड़ना पड़ा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा, लेकिन परिणाम आते ही पूरा स्टेडियम उनकी इस संघर्षी पारी के सम्मान में तालियों से गूंज उठा। खेल के मैदान पर कई बार मेडल का रंग महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि उस पदक को जीतने के लिए खिलाड़ी ने जिस पसीने, संघर्ष और मानसिक लड़ाई का सामना किया है, उसका मूल्य सबसे बड़ा होता है। ईशा सिंह का यह रजत पदक इस बात का जीवंत प्रमाण है कि भारत के युवा खिलाड़ी अब दुनिया के किसी भी दबाव वाले मंच पर घबराने वाले नहीं हैं, बल्कि वे हार को जीत में बदलने का हुनर अच्छी तरह जानते हैं। इस पदक ने न केवल भारत की पदक तालिका को समृद्ध किया है, बल्कि देश भर के उन लाखों उभरते हुए खिलाड़ियों को एक नया सपना और उम्मीद दी है जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने की ठान चुके हैं।भविष्य के लिए एक नई उम्मीद और खेल जगत में ईशा सिंह का बढ़ता हुआ कदइस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद ईशा सिंह ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि वे आने वाले समय में भारतीय शूटिंग की सबसे बड़ी और चमकदार उम्मीद हैं। उनके इस सफर से यह स्पष्ट सीख मिलती है कि जीवन या खेल में कभी भी शुरुआती असफलता या पिछड़ जाने से हार नहीं माननी चाहिए, क्योंकि असली विजेता वही है जो आखिरी सीटी बजने तक मैदान नहीं छोड़ता। भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और राष्ट्रीय शूटिंग महासंघ ने भी ईशा की इस साहसिक वापसी की जमकर सराहना की है और उम्मीद जताई है कि आगामी ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में वे देश के लिए और भी बड़े रिकॉर्ड बनाएंगी। कुल मिलाकर, ईशा सिंह का यह सिल्वर मेडल केवल एक धातु का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह उनके अटूट संघर्ष, देश के प्रति समर्पण और उस कभी न हार मानने वाले जज्बे की सबसे बड़ी दास्तान है, जो हमेशा इतिहास के पन्नों में अमर रहेगी।
साथी खिलाड़ियों को बीच-बचाव के लिए करना पड़ा बीच में दखल
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मैदान पर जब भी दो चिर-प्रतिद्वंद्वी टीमें आमने-सामने होती हैं, तो मैच का रोमांच और खिलाड़ियों का जोश अपने चरम पर होता है, लेकिन कई बार यह आक्रामकता इतनी बढ़ जाती है कि मैदान पर हीसानी-सुनी और तीखी झड़प देखने को मिलने लगती है। क्रिकेट जगत से इस समय एक बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसे देखकर स्टेडियम में बैठे दर्शक और टीवी स्क्रीन के सामने बैठे करोड़ों क्रिकेट प्रेमी सन्न रह गए। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले जा रहे एक अति-महत्वपूर्ण और रोमांचक मुकाबले के दौरान दक्षिण अफ्रीका के अनुभवी और स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज क्विंटन डिकॉक (Quinton de Kock) मैदान के बीचों-बीच अपने ही टीम के कप्तान से तीखी बहस करते हुए भिड़ गए। दोनों के बीच बढ़ते तनाव और गुस्से को देखकर स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अन्य साथी खिलाड़ियों और अम्पायर्स को तुरंत दौड़कर बीच-बचाव करना पड़ा ताकि बात हाथापाई तक न पहुंच सके। मैदान पर हुआ यह हाई-वोल्टेज ड्रामा सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल चुका है और हर तरफ बस इसी बात की चर्चा हो रही है कि आखिर ऐसी कौन सी बात थी जिसने दक्षिण अफ्रीकी खेमे में अंदरूनी कलوب को सबके सामने लाकर खड़ा कर दिया। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि इस सनसनीखेज वाकये के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है और मैदान पर उस वक्त क्या कुछ घटा था।मैच के दौरान मैदान पर कैसे भड़की चिंगारी और क्यों कप्तान से भिड़ गए क्विंटन डिकॉक?ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाफ चल रहे इस कड़े मुकाबले में पिच पर रन बनाना और अपनी गेंदबाजी यूनिट से सही समय पर विकेट निकालना दोनों ही टीमों के लिए बेहद जरूरी था, और मैच का दबाव हर खिलाड़ी के चेहरे पर साफ तौर पर नजर आ रहा था। खेल के एक अहम मोड़ पर जब विपक्षी टीम के बल्लेबाज मैदान पर टिक कर रन बना रहे थे और दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाज संघर्ष कर रहे थे, तब फील्ड प्लेसमेंट और रणनीति को लेकर कप्तान और विकेटकीपर के बीच वैचारिक मतभेद शुरू हो गया। मैदान पर स्टंप माइक (Stump Mic) के जरिए यह साफ सुनाई दे रहा था कि क्विंटन डिकॉक किसी खास रणनीति को लेकर कप्तान के फैसले से पूरी तरह असहमत थे और वे अपनी बात बहुत ही आक्रामक तरीके से रख रहे थे। कप्तान ने जब उनकी बात को नजरअंदाज करते हुए अपने फैसले पर अडिग रहने का इशारा किया, तो डिकॉक का गुस्सा फूट पड़ा और वे तेजी से चलते हुए सीधे कप्तान के सामने जा पहुंचे, जिसके बाद दोनों के बीच मैदान पर ही तीखी बहस शुरू हो गई। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में ऐसा नजारा बहुत कम देखने को मिलता है जब एक ही टीम के दो सीनियर खिलाड़ी अपनी टीम की रणनीति को लेकर इस तरह खुलेआम मैदान पर एक-दूसरे के आमने-सामने आ जाएं।साथी खिलाड़ियों और अम्पायर्स का तुरंत बीच-बचाव: कैसे टाली गई एक बड़ी शर्मनाक स्थिति?जब मैदान के बीचों-बीच कप्तान और क्विंटन डिकॉक के बीच तीखी नोकझोंक और गर्मागर्मी बढ़ती चली गई, तो ड्रेसिंग रूम और मैदान पर मौजूद बाकी खिलाड़ियों की सांसें थम गईं क्योंकि यह दृश्य दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट टीम के लिए बेहद शर्मनाक साबित हो सकता था। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए टीम के अन्य सीनियर खिलाड़ियों और अनुभवी फील्डर्स ने तुरंत दौड़कर दोनों के बीच में आकर स्थिति को संभाला और दोनों को अलग किया। इसके साथ ही मैदानी अम्पायर्स ने भी बीच-बचाव करते हुए दोनों खिलाड़ियों को शांत रहने की हिदायत दी, जिसके बाद खेल को दोबारा शुरू कराया जा सका। इस अप्रत्याशित घटना के बाद कुछ पलों के लिए पूरी टीम का फोकस खेल से हटकर आपसी तनाव पर आ गया था, जिसका असर मैच के अगले कुछ ओवरों में टीम के प्रदर्शन पर भी साफ-साफ देखने को मिला। खेल विश्लेषकों का यह मानना है कि मैदान पर इस तरह का अनुशासनहीन व्यवहार टीम के मनोबल को बुरी तरह तोड़ सकता है और आने वाले मैचों में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।ड्रेसिंग रूम का अंदरूनी माहौल और दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट बोर्ड की कड़ी प्रतिक्रियामैदान पर घटी इस शर्मनाक घटना के बाद से क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका (CSA) और टीम मैनेजमेंट के भीतर भी भारी हलचल मच गई है, और यह कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों खिलाड़ियों पर आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर सख्त कार्रवाई की जा सकती है। मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब कप्तान से इस मामले पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्थिति को संभालते हुए इसे 'मैच के तनाव का एक क्षण' करार दिया और यह कहा कि खेल के मैदान पर कई बार खिलाड़ियों का खून खौल जाता है, लेकिन ड्रेसिंग रूम में सब कुछ ठीक है। हालांकि, अंदरूनी सूत्रों का यह कहना है कि टीम के भीतर लंबे समय से रणनीतिक फैसलों को लेकर कप्तानी और सीनियर खिलाड़ियों के बीच जो अनबन चल रही थी, वह आखिरकार इस मुकाबले में खुलकर बाहर आ ही गई। इस तरह की घटनाएं न केवल टीम की छवि को धूमिल करती हैं, बल्कि विश्व स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर रहे खिलाड़ियों से इस प्रकार के गैर-जिम्मेदाराना रवैये की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं की जाती है।इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद टीम के भविष्य और आगामी मुकाबलों पर पड़ने वाले असरऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इस ऐतिहासिक भिड़ंत में जीत-हार का खेल तो अपनी जगह है, लेकिन क्विंटन डिकॉक और कप्तान के बीच हुई इस भिड़ंत ने दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट की पोल खोलकर रख दी है। आगामी दौरों और बड़े टूर्नामेंट्स को देखते हुए टीम प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे खिलाड़ियों के बीच के इस मनमुटाव को जल्द से जल्द दूर करें ताकि टीम एकजुट होकर मैदान पर उतर सके। यदि ड्रेसिंग रूम की यह फूट समय रहते नहीं सुलझाई गई, तो टीम का प्रदर्शन आने वाले समय में और अधिक गिर सकता है, जिससे प्रशंसकों को भारी निराशा का सामना करना पड़ेगा। कुल मिलाकर, क्विंटन डिकॉक का अपने ही कप्तान से इस तरह मैदान पर भिड़ना क्रिकेट जगत के लिए एक बड़ी चर्चा का विषय बन चुका है, और आने वाले दिनों में इस अनुशासनहीनता पर बोर्ड क्या कड़े कदम उठाता है, इस पर पूरी दुनिया के क्रिकेट प्रेमियों की पैनी नजर टिकी रहेगी।
उज्जैन की शाही मस्जिद पर क्यों मचा बवाल, देखें देश-दुनिया की बड़ी खबरें
मध्य प्रदेश के उज्जैन में शाही मस्जिद के अतिक्रमण को हटाने को लेकर विवाद लगातार जारी है. मस्जिद के बाहर बहुत बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग जुटे हैं और वहां भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. प्रशासन की जेसीबी और पोकलेन मशीनों के पहुंचने के बाद रातभर प्रदर्शन चला और पुलिस ने भीड़ को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े. वहीं, उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी भारी हलचल तेज है. बीजेपी कोर कमेटी की बैठक में एमएलसी चुनाव के लिए माइक्रो मैनेजमेंट की विशेष रणनीति तैयार की गई है. देखें नॉनस्टॉप खबरें.
स्कूल ने बैन किया चैट जीपीटी तो छात्रा ने खड़ी की अपनी AI कंपनी!
जहां एक तरफ पूरी दुनिया के स्कूल इस बात से परेशान हैं कि बच्चे होमवर्क के लिए AI का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं 17 साल की नव्या टुटेजा ने स्कूल में लगी पाबंदी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया. वाई-फाई पर चैट जीपीटी ब्लॉक होने पर नव्या ने खुद का दिमाग चलाया और 'राहा' नाम से अपना खुद का एआई स्टार्टअप खड़ा कर दिया. आज उनके इस प्लेटफॉर्म पर 20 हजार से ज्यादा नौकरियां और 1000 से ज्यादा एक्टिव यूजर्स मौजूद हैं.
फ्री किक पर किया ऐसा जादुई कमाल कि मैदान पर खड़े साथी खिलाड़ी पर यकीन
अंतरराष्ट्रीय और क्लब फुटबॉल के इतिहास में जब भी दुनिया के सबसे महान और चमत्कारिक खिलाड़ियों का जिक्र किया जाएगा, तो अर्जेंटीना के जादुई फुटबॉलर लियोनल मेसी (Lionel Messi) का नाम हमेशा सबसे ऊपर स्वर्णिम अक्षरों में लिखा मिलेगा। फुटबॉल के इस जीवंत लीजेंड ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उम्र केवल एक संख्या मात्र है और उनकी कलाकारी तथा फुटबॉल की सूझबूझ समय के साथ और अधिक धारदार होती जा रही है। हाल ही में खेले गए एक रोमांचक और सांस रोक देने वाले मुकाबले के दौरान लियोनल मेसी ने मैदान पर एक ऐसा हैरतअंगेज और असंभव दिखने वाला गोल दाग दिया, जिसे देखकर स्टेडियम में बैठे दर्शक तो दूर, उनके अपने साथी खिलाड़ी और विरोधी टीम के गोलकीपर तक सन्न रह गए। फुटबॉल प्रेमियों के बीच 'मैजिक मैन' के नाम से मशहूर मेसी ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि दबाव के क्षणों में कैसे मैच का पासा पूरी तरह पलटा जाता है। इस ऐतिहासिक और करिश्माई गोल के बाद से पूरी दुनिया के खेल गलियारों में सिर्फ और सिर्फ लियोनल मेसी के इस जादुई प्रदर्शन की ही चर्चा हो रही है। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि उस रोमांचक मुकाबले के दौरान आखिर वह कौन सा पल था जब मेसी ने अपनी फ्री किक से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया।मैच का वह रोमांचक पल: जब लियोनल मेसी के पैरों से निकला फुटबॉल बना कालजयी करिश्माफुटबॉल के मैदान पर सेट-पीस या फ्री किक (Free Kick) को गोल में बदलना दुनिया के सबसे कुशल खिलाड़ियों के लिए भी एक बड़ी चुनौती माना जाता है, क्योंकि दीवार बनकर खड़े डिफेंडर्स और गोलकीपर की चौकसी को भेदना आसान नहीं होता। उस मुकाबले के दौरान जब मैच अपने सबसे तनावपूर्ण और निर्णायक मोड़ पर था, तब अर्जेंटीना के इस महान कप्तान को विपक्षी टीम के पेनल्टी बॉक्स के ठीक बाहर एक कठिन कोण से फ्री किक लेने का मौका मिला। हर कोई यह उम्मीद कर रहा था कि वे हमेशा की तरह गेंद को साथी खिलाड़ी की तरफ पास करेंगे या फिर एक सामान्य शॉट लेंगे, लेकिन मेसी के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में पैर की हल्की सी कलात्मक थपकी के साथ गेंद को हवा में ऐसा घुमाया (Curled Shot) कि गेंद फिजिक्स के नियमों को चुनौती देती हुई सीधे गोलपोस्ट के ऊपरी कोने में जाकर चिपक गई। स्टेडियम में मौजूद हजारों प्रशंसकों का शोर उस पल थम गया और हर कोई बस यही सोच रहा था कि आखिर कोई खिलाड़ी इतने सटीक और नामुमकिन शॉट को अंजाम कैसे दे सकता है।साथी खिलाड़ियों की हैरान करने वाली प्रतिक्रियाएं और विरोधी टीम के होश हुए फाख्ताजब गेंद तेजी से नेट के अंदर जा गिरी, तो सबसे पहले हैरान होने वाले लोग कोई और नहीं बल्कि मेसी की अपनी टीम के साथी खिलाड़ी थे, जो अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं कर पा रहे थे। मैदान पर दौड़ते हुए उनके साथी खिलाड़ी अपने सिर पर हाथ रखकर अविश्वास की मुद्रा में खड़े हो गए और कुछ ही पलों बाद वे खुशी से झूमते हुए मेसी की तरफ दौड़े ताकि इस जादुई पल का जश्न मना सकें। दूसरी तरफ, विरोधी टीम के डिफेंडर्स और गोलकीपर, जिन्होंने इस फ्री किक को रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, वे बस शून्य में देखते रह गए क्योंकि उनके पास इस बेहतरीन शॉट का कोई जवाब नहीं था। खेल के जानकारों और पूर्व दिग्गज फुटबॉलरों ने इस गोल को दशक के सबसे खूबसूरत और तकनीकी रूप से परफेक्ट गोल में से एक करार दिया है। यह इस बात का प्रमाण है कि लियोनल मेसी केवल एक खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि वे फुटबॉल की पिच पर एक ऐसे कलाकार हैं जो अपनी हर एक चाल से दर्शकों को सम्मोहित करने की अद्भुत क्षमता रखते हैं।आधुनिक फुटबॉल में लियोनल मेसी का दबदबा और उनके खेल की बेजोड़ कलाकारीजब से लियोनल मेसी ने अमेरिकी मेजर लीग सॉकर (MLS) और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने खेल का नया अध्याय शुरू किया है, तब से उनके प्रशंसकों का दायरा और अधिक व्यापक हो गया है। बढ़ती उम्र के बावजूद उनकी ड्रिबलिंग स्पीड, मैदान को पढ़ने की दूरदृष्टि और गोल करने की अचूक क्षमता में कोई कमी नहीं आई है। खेल वैज्ञानिकों का यह मानना है कि मेसी के पास शारीरिक ऊर्जा के साथ-साथ मानसिक एकाग्रता का जो स्तर है, वह उन्हें दुनिया के अन्य खिलाड़ियों से कोसों आगे रखता है। जब भी उनकी टीम किसी मुश्किल परिस्थिति में फंसती है, तो पूरी दुनिया की निगाहें केवल मेसी के पैरों पर टिक जाती हैं, और वे हर बार अपनी टीम को निराश करने के बजाय इस तरह के जादुई कारनामों से जीत दिला देते हैं। इस हालिया फ्री किक गोल ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि जब तक लियोनल मेसी मैदान पर मौजूद हैं, तब तक फुटबॉल के खेल में रोमांच और अनहोनी के होने की उम्मीद कभी खत्म नहीं हो सकती।विश्वभर के खेल प्रेमियों में उत्साह और सोशल मीडिया पर छाया मेसी का जादुई शॉटसोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जैसे ही इस हैरतअंगेज गोल का वीडियो सामने आया, वह कुछ ही मिनटों के भीतर इंटरनेट पर वायरल हो गया और दुनिया भर के खेलप्रेमियों ने इस पर अपनी दीवानगी जाहिर करनी शुरू कर दी। ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर 'Messi Free Kick Magic' ट्रेंड करने लगा और लाखों लोगों ने इस वीडियो को शेयर करते हुए इसे फुटबॉल इतिहास का सबसे बेहतरीन पल बताया। खेल विश्लेषक और पत्रकार इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि मेसी ने अपने पूरे करियर में न जाने कितने ऐसे अविश्वसनीय गोल किए हैं, फिर भी हर नया गोल पिछले वाले से ज्यादा खूबसूरत और जादुई नजर आता है। यह क्षण केवल एक मैच की जीत या हार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस महान खिलाड़ी के प्रति दुनिया भर के लोगों के अगाध प्रेम और सम्मान का प्रतीक है जिसने अपनी पूरी जिंदगी फुटबॉल के नाम कर दी है। लियोनल मेसी का यह करिश्मा आने वाले कई दशकों तक फुटबॉल प्रेमियों के दिलों में जिंदा रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
बस और पार्क High Risk Zone नहीं बन सकते, Supreme Court ने Delhi Police से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली-NCR इलाके में चलती बस में 16 साल की लड़की के साथ कथित गैंग-रेप का मामला खुद संज्ञान में लिया और सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं कानून लागू करने वाली एजेंसियों और प्रशासन की बुनियादी सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकामी को दिखाती हैं। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा और कहा कि पार्क, बस और सड़कों जैसी जगहों को हाई रिस्क ज़ोन नहीं बनने दिया जा सकता। जस्टिस जेबी पारदीवाला और के विनोद चंद्रन की बेंच ने मीडिया की उन खबरों पर ध्यान दिया जिनमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में नाबालिगों के साथ यौन हिंसा की हालिया कई घटनाओं का ज़िक्र था। कोर्ट ने जिन मामलों का ज़िक्र किया, उनमें लेडी श्रीराम कॉलेज के पास आस्था कुंज पार्क में 17 साल की लड़की के साथ कथित रेप, स्वरूप नगर में एक नाबालिग के साथ कथित गैंग-रेप और ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जा रही बस में एक और नाबालिग के साथ कथित यौन उत्पीड़न की घटना शामिल है। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता के बीच उठाया गया है। आस्था कुंज मामले ने, जिसमें पुलिसकर्मी बनकर आए तीन लोगों ने 17 साल की लड़की के साथ कथित तौर पर गैंग-रेप किया था, इलाके में सुरक्षा और हिफ़ाज़त को लेकर पहले ही बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इसे भी पढ़ें: IMD Weather Alert: मौसम ने लिया यू-टर्न! एक साथ तीन सिस्टम एक्टिव, 15 राज्यों में अलर्ट सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के निर्भया केस से तुलना की सुनवाई के दौरान, बेंच ने यौन उत्पीड़न के मामलों के बार-बार होने पर दुख जताया और सवाल किया कि क्या 2012 के निर्भया केस से सच में कोई सबक सीखा गया है। कोर्ट ने कहा, 2012 के निर्भया केस से दुखद तुलना किए बिना नहीं रहा जा सकता और यह सोचना पड़ता है कि क्या कोई सबक सीखा गया है। लोगों की सुरक्षा की गारंटी के बावजूद NCR में यौन उत्पीड़न की घटनाएं हो रही हैं। हिंसा से मुक्त और सम्मान के साथ जीने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है। इसे भी पढ़ें: भारत की Energy Needs को पूरा करने के लिए US बढ़ा रहा हाइड्रोकार्बन सप्लाई चलती बस के अंदर क्या हुआ केस की जानकारी के मुताबिक, 16 साल की लड़की 4 अगस्त को ग्रेटर नोएडा में नोएडा जाने के लिए एक स्लीपर बस में चढ़ी थी। आरोप है कि बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने चलती बस में उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद लड़की को पुरानी दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके के पास छोड़ दिया गया, जो उस जगह से 40 किलोमीटर से ज़्यादा दूर था जहाँ से वह बस में चढ़ी थी।
8 सीटों पर नए चेहरों को उतारने की तैयारी, इन दिग्गज नेताओं के नामों पर मंथन तेज
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से सरगर्मी का दौर बेहद तेज हो गया है, क्योंकि आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राज्य कोटे की राज्यसभा सीटों (Rajya Sabha Elections) के लिए चुनाव का ऐलान हो चुका है। निर्वाचन आयोग की ओर से जारी चुनावी कार्यक्रम के मुताबिक उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर 16 अक्टूबर को मतदान होना है। इन 10 सीटों में से मौजूदा समय में 8 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कब्जा है, जबकि एक सीट समाजवादी पार्टी और एक सीट बहुजन समाज पार्टी के पास है। आगामी साल 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सत्ताधारी दल बीजेपी ने इस बार एक बेहद बड़ा और अचंभित करने वाला प्लान तैयार किया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बीजेपी इस बार के उच्च सदन के चुनाव में कई मौजूदा सांसदों के टिकट काटकर नए और चौंकाने वाले चेहरों को मैदान में उतारने की बड़ी तैयारी कर रही है। जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए हो रहे इस मंथन से राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि बीजेपी की इस नई रणनीति के पीछे का पूरा गणित क्या है और किन-किन बड़े नामों पर चर्चा चल रही है।राज्यसभा चुनाव का पूरा गणित और बीजेपी की रणनीति का मुख्य फोकसउत्तर प्रदेश की वर्तमान विधानसभा के संख्या बल को यदि देखा जाए तो 403 सदस्यीय सदन में विधायकों की स्थिति के अनुसार भाजपा और उसके सहयोगी दलों का पलड़ा पूरी तरह भारी है। भाजपा के पास एनडीए गठबंधन के रूप में मजबूत संख्या बल है, जिसके दम पर पार्टी अपनी अधिकांश सीटों को आसानी से जीत सकती है। हालांकि, पार्टी इस बार केवल संख्या बल के सहारे जीतने के बजाय 2027 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने की जुगत में है। जानकारों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व का पूरा जोर इस बात पर है कि समाज के हर वर्ग—विशेषकर ओबीसी, दलित और युवा चेहरों—को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए ताकि आने वाले चुनावों में किसी भी तरह की एंटी-इम्बेंसी या क्षेत्रीय असंतोष की गुंजाइश न बचे। यही वजह है कि इस बार के राज्यसभा चुनाव महज संसद में सदस्यों को भेजने का जरिया नहीं रह गए हैं, बल्कि यह बीजेपी के लिए आगामी विधानसभा विजय का एक बड़ा सेमीफाइनल बन चुके हैं।नए चेहरों और बड़े नामों पर मंथन: क्या स्मृति ईरानी की होगी उच्च सदन में वापसी?जैसे-जैसे नामांकन की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे संभावित उम्मीदवारों के नामों को लेकर दिल्ली से लेकर लखनऊ तक बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि क्या साल 2024 के लोकसभा चुनावों में अमेठी से हार का सामना करने वाली वरिष्ठ नेत्री स्मृति ईरानी (Smriti Irani) को पार्टी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के रास्ते एक बार फिर संसद के उच्च सदन में भेज सकती है? इसके अलावा, संगठन और सरकार में संतुलन बनाने के लिए कुछ केंद्रीय मंत्रियों के भविष्य को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं। पार्टी के भीतर जिन नए और प्रभावशाली नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा चल रही है, उनमें कई ऐसे नेता शामिल हैं जो लंबे समय से संगठन में निष्ठापूर्वक काम कर रहे हैं और जिनका अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत जनाधार है। ब्राह्मण, ठाकुर, दलित और पिछड़ी जातियों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए पार्टी आलाकमान फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है ताकि हर समीकरण को पूरी तरह साधा जा सके।जातीय समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कवायद: पिछड़ों और दलितों पर विशेष नजरउत्तर प्रदेश की राजनीति में बिना सोशल इंजीनियरिंग के कोई भी दल अपनी नैया पार नहीं लगा सकता, और इस बात को बीजेपी बहुत अच्छी तरह जानती है। जिन मौजूदा सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें से कई ऐसे चेहरे हैं जिनकी जगह पार्टी इस बार नए और ऊर्जावान स्थानीय नेताओं को मौका दे सकती है। ओबीसी और दलित कोटे से नए और मजबूत दावेदारों के नामों पर पार्टी के भीतर गहन विचार-विमर्श चल रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक के क्षेत्रीय संतुलन को दुरुस्त करने के लिए पार्टी ऐसे चेहरों को आगे लाना चाहती है जो ज़मीन पर जनता के बीच सीधे पैठ रखते हों। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य यह है कि विपक्ष के किसी भी प्रकार के नैरेटिव को काटने के लिए सत्ता पक्ष के पास हर जाति और वर्ग का एक मजबूत और भरोसेमंद प्रतिनिधि मौजूद हो।विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और आगामी चुनावों पर पड़ने वाले दूरगामी प्रभावभारतीय जनता पार्टी के इस अंदरूनी मंथन और नए चेहरों को उतारने की सुगबुगाहट से विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी (SP) की धड़कनें भी तेज हो गई हैं। सपा इस बात का आकलन करने में जुटी है कि यदि बीजेपी अपने पुराने दिग्गजों के बजाय नए और आक्रामक चेहरों को मैदान में लाती है, तो इसका असर 2027 के चुनावी रण पर किस रूप में पड़ेगा। 16 अक्टूबर को होने वाले इन चुनावों के नतीजे भले ही संख्या बल के आधार पर पहले से तय नजर आते हों, लेकिन इसके जरिए बनने वाले राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की दिशा तय करेंगे। कुल मिलाकर, बीजेपी का यह बड़ा प्लान साबित करता है कि पार्टी चुनाव कोई भी हो, हर मुकाबले को एक बड़े विजन और अचूक रणनीति के साथ लड़ने में विश्वास रखती है, जिस पर राज्य की जनता और राजनीतिक पंडितों की गहरी नजर टिकी हुई है।
यूपी में 15 अक्टूबर से खुले में बिकने वाली मिठाइयों पर 'यूज बाय डेट' दिखाना होगा अनिवार्य
भारतीय खाद्य सुरक्षा और त्योहारी सीजन की तैयारियों के बीच उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और जनहित को ध्यान में रखते हुए एक बेहद कड़ा, ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। आगामी त्योहारों के सीजन में मिलावटी, पुरानी और सड़ी-गली मिठाइयों की बिक्री पर लगाम कसने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने यह नियम बनाया है कि अब राज्य भर में 15 अक्टूबर से खुली (Non-packaged) मिठाइयों की बिक्री के दौरान उनकी 'यूज बाय डेट' यानी उपभोग की अंतिम तिथि दुकानदारों को प्रदर्शित करनी होगी। खाद्य सुरक्षा विभाग की सचिव और आयुक्त रोशन जैकब (Roshan Jacob) द्वारा जारी किए गए इस सख्त आदेश के बाद से पूरे उत्तर प्रदेश के हलवाइयों, मिठाई विक्रेताओं और दुकानदारों के बीच हड़कंप मच गया है। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि त्योहारों के इस पावन अवसर पर मिठाइयों की मांग अचानक आसमान छूने लगती है, जिसका फायदा उठाकर कुछ मुनाफाखोर व्यापारी कई दिनों पुरानी और बासी मिठाइयों को बाजार में बेच देते हैं, जिससे आम जनता का स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित होता है। इस नई और सख्त व्यवस्था के लागू होने से न केवल उपभोक्ताओं को शुद्ध और ताजी मिठाइयां मिल सकेंगी, बल्कि खाद्य पदार्थों में होने वाली मिलावटखोरी पर भी बहुत हद तक रोक लगेगी। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि रोशन जैकब द्वारा जारी किए गए इस नए आदेश के क्या नियम हैं और इसका आम जनता तथा दुकानदारों पर क्या असर पड़ेगा।रोशन जैकब का सख्त आदेश: 15 अक्टूबर से उत्तर प्रदेश में लागू होगा नया खाद्य सुरक्षा नियमउत्तर प्रदेश सरकार में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की प्रमुख सचिव और आयुक्त रोशन जैकब ने अपने महकमे को यह स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य के हर जिले में खाद्य सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए। इसी कड़ी में जारी किए गए नए फरमान के अनुसार, आगामी 15 अक्टूबर से उत्तर प्रदेश की सीमा के भीतर जितने भी मिष्ठान भंडार, बेकरी और रेस्टोरेंट हैं, उन्हें अपनी काउंटर पर सजाई जाने वाली खुली मिठाइयों की ट्रे या डिब्बों के बाहर यह साफ-साफ लिखना होगा कि वह मिठाई किस तारीख और समय तक खाने के लिए सुरक्षित है। अभी तक यह नियम केवल पैक बंद (Packaged) खाद्य पदार्थों पर ही लागू होता था, जिसके कारण खुली मिठाइयों के मामले में दुकानदारों की मनमानी चलती थी और ग्राहक चाहकर भी यह नहीं जान पाते थे कि वह मिठाई कितने दिन पुरानी है। खाद्य आयुक्त रोशन जैकब के इस साहसिक और जनहितैषी कदम की हर तरफ सराहना हो रही है, क्योंकि यह सीधे तौर पर आम आदमी की सेहत और जीवन की सुरक्षा से जुड़ा हुआ एक बहुत बड़ा निर्णय है।त्योहारी सीजन में मिलावट और बासी मिठाइयों के काले कारोबार पर कसेगा शिकंजाभारत में जैसे ही दीपावली, दशहरा, भैयादूज और अन्य बड़े त्योहारों का दौर शुरू होता है, वैसे ही बाजार में मिलावटी खोआ, नकली दूध और मिठाइयों की मांग तेजी से बढ़ने लगती है। मुनाफा कमाने की होड़ में कुछ बेईमान व्यापारी महीनों पुरानी मिठाइयों को रीसायकल करके या केमिकल का इस्तेमाल करके दोबारा बेच देते हैं, जिन्हें खाने से छोटे बच्चों और बुजुर्गों को फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द, दस्त और गंभीर उल्टी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 'यूज बाय डेट' (Use By Date) का यह नियम लागू हो जाने के बाद अब कोई भी दुकानदार अपनी ट्रे पर यह तारीख लिखने से बच नहीं सकेगा, और यदि कोई व्यापारी नियमों की अनदेखी करते हुए पुरानी मिठाई बेचता पकड़ा गया, तो खाद्य विभाग की टीम उसके खिलाफ भारी जुर्माने से लेकर लाइसेंस रद्द करने तक की कड़ी कार्रवाई करेगी। इस व्यवस्था के आने से उपभोक्ताओं के भीतर एक आत्मविश्वास जागेगा कि वे जो पैसे खर्च कर रहे हैं, उसके बदले उन्हें पूरी तरह से शुद्ध, ताजी और सुरक्षित खाने की चीजें मिल रही हैं।दुकानदारों और हलवाइयों के लिए गाइडलाइन: कैसे करना होगा इस नए नियम का पालन?खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, राज्य के सभी मिठाई विक्रेताओं को अपनी दुकानों के बाहर या मुख्य काउंटर पर एक बड़ा सा डिस्प्ले बोर्ड लगाना होगा, जिस पर उस दिन की बनी हुई प्रमुख मिठाइयों और उनके उपभोग की समय-सीमा स्पष्ट अक्षरों में लिखी होगी। इसके अलावा, यदि कोई ग्राहक खुली मिठाई खरीदता है, तो बिल या थैली पर भी यह जानकारी दी जानी चाहिए कि वह उत्पाद कब तक खाने योग्य है। इस नए आदेश के बाद से उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों में मिठाई विक्रेताओं की बैठकें शुरू हो चुकी हैं, जिसमें उन्हें यह समझाया जा रहा है कि वे स्टॉक का प्रबंधन कैसे करें ताकि उन्हें पुराना सामान फेंकना न पड़े और वे समय पर ताजा मिठाइयों का ही निर्माण करें। हालांकि, कुछ छोटे दुकानदारों का यह मानना है कि इस नियम का पालन करने के लिए उन्हें अपनी कार्यशैली में थोड़ा बदलाव करना होगा, लेकिन जनहित और कानून के दायरे में यह हर व्यापारी की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह अपने ग्राहकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराए।स्वास्थ्य सुरक्षा और खाद्य मानकों की दिशा में एक क्रांतिकारी और दूरगामी कदमरोशन जैकब द्वारा उठाया गया यह कदम केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा तंत्र को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। जब देश का नागरिक बाजार में जाकर अपनी और अपने परिवार की सेहत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त महसूस करेगा, तभी एक स्वस्थ समाज की कल्पना साकार हो सकती है। आने वाले 15 अक्टूबर से जब यह नियम पूरे उत्तर प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू हो जाएगा, तो विभाग के फूड इंस्पेक्टर लगातार औचक निरीक्षण (Raid) करेंगे और सैंपलिंग की प्रक्रिया को तेज करेंगे ताकि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन न हो सके। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला त्योहारों की मिठास को और अधिक सुरक्षित बनाने के साथ-साथ मिलावटखोरों के दिलों में कड़ा डर पैदा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है, जिस पर हर जागरूक नागरिक की निगाहें टिकी रहेंगी।
फूट गया बुलबुला... सोना ₹4000, तो चांदी अचानक 9000 रुपये सस्ती
Gold-Silver Price Crash Today: सोना-चांदी की कीमतों में सोमवार को बड़ी गिरावट आई है. एक झटके में जहां सोने की कीमत 4000 रुपये प्रति 10 ग्राम घट गई, तो वहीं 1 Kg Silver Price 9000 रुपये से ज्यादा कम हो गया.
प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने नए उपायों का ऐलान कर दिया है. दिल्ली में प्रदूषण को काबू में करने के लिए पार्किंग चार्ज भी बढ़ा दिया जाएगा.
LPU में छात्रों के प्रदर्शन पर Punjab DGP बोले: पुलिस ने बरता संयम, किया न्यूनतम बल प्रयोग
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में दुष्कर्म की कथित घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के हिंसा पर उतरने के आरोप के एक दिन बाद सोमवार को पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने विश्वविद्यालय का दौरा किया और कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ न्यूनतम बल प्रयोग किया गया। परिसर में रविवार को कथित हंगामे और तोड़फोड़ की घटना पर यादव ने कहा कि पुलिस ने अब तक संयम बरता है, लेकिन तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। छात्र विश्वविद्यालय परिसर में दुष्कर्म की कथित घटना को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। राष्ट्रीय राजधानी में हाल में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए छात्रों के आंदोलन का जिक्र करते हुए यादव ने छात्रों में व्याप्त नाराजगी को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा घटना से निपटने में पुलिस ने रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाया है और न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। डीजीपी ने पंजाब में कपूरथला जिले के फगवाड़ा में स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) का दौरा मुख्यमंत्री भगवंत मान के स्थिति का आकलन करने का निर्देश देने के बाद किया। पत्रकारों से बातचीत में डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पुलिस ने विश्वविद्यालय प्रशासन को लेकर छात्रों की शिकायतों को दूर कराने के लिए इस निजी विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत कराई। यादव ने कहा, ‘‘हमारे अधिकारियों ने तय किया कि न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया जाएगा। छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं करने का फैसला बहुत सोच-समझकर लिया गया।’’उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़ी छात्रों की शिकायतों को बातचीत के जरिए सुलझाने के प्रयास किए गए। छात्रों द्वारा दुष्कर्म की कथित घटना का दावा किए जाने के बारे में यादव ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले की विस्तृत जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रशासन से जुड़ी शिकायतों में लड़कियों के छात्रावासों में केवल महिला कर्मचारियों की तैनाती की मांग और कुछ अन्य मुद्दे शामिल थे। हमने इन शिकायतों को सुलझाने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाई।’’रविवार शाम प्रदर्शन के कथित तौर पर हिंसक हो जाने पर यादव ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कुछ तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की और पुलिस के वाहनों पर पथराव किया गया। उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस ने काफी संयम बरता। पुलिसकर्मियों ने यह सोचकर संयम से काम लिया कि छात्र हमारे बच्चों जैसे हैं और उनकी शिकायतों का समाधान होना चाहिए। इनमें से ज्यादातर शिकायतें विश्वविद्यालय प्रशासन से संबंधित थीं। बैठकें आयोजित की गईं।’’तोड़फोड़ में शामिल लोगों को संदेश देते हुए डीजीपी ने कहा कि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है। उन्होंने छात्रों से बेबुनियाद अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की भी अपील की। परिसर में वॉकी-टॉकी मिलने की कथित खबरों के आधार पर बाहरी लोगों की संभावित भूमिका के बारे में पूछे जाने पर यादव ने कहा, ‘‘मैं स्थिति का समग्र आकलन करने और यह देखने आया हूं कि पर्याप्त पुलिस बल तैनात है या नहीं। हम आपको उचित जानकारी देंगे। हर घटना की बारीकी से जांच की जाएगी।’’एसआईटी की जांच और प्राथमिकी के बारे में उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। एलपीयू और चितकारा विश्वविद्यालय में हुए प्रदर्शनों के बीच किसी संबंध के बारे में पूछे जाने पर यादव ने कहा, ‘‘हम सभी ने जंतर-मंतर पर हुई घटना देखी है। छात्र समुदाय में नाराजगी है। हमारा दृष्टिकोण रचनात्मक रहा है और हम छात्रों को साथ लेकर उनकी शिकायतों का समाधान करना चाहते हैं।’’एलपीयू में यह घटना पटियाला स्थित चितकारा विश्वविद्यालय के छात्रों के प्रदर्शन के एक दिन बाद हुई। वहां भी दो छात्राओं द्वारा परिसर में कथित तौर पर आत्महत्या किए जाने की अपुष्ट खबरों को लेकर छात्रों ने प्रदर्शन किया था और कथित तौर पर पुलिस के एक वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया था। एलपीयू के छात्रों ने रविवार को विश्वविद्यालय परिसर के बाहर नयी दिल्ली-अमृतसर राजमार्ग के एक हिस्से को अवरुद्ध कर दिया था। उनका दावा था कि किसी बाहरी व्यक्ति ने विश्वविद्यालय परिसर में एक छात्रा से दुष्कर्म किया। अधिकारियों ने सोमवार सुबह बताया कि सड़क से प्रदर्शनकारियों को हटा दिया गया है और यातायात बहाल कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, रविवार शाम प्रदर्शन ने उस समय हिंसक रूप ले लिया, जब प्रदर्शनकारी छात्रों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर पथराव किया, उनके वाहनों पर हमला किया और कुछ वस्तुओं में आग लगा दी। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
‘जिंदगी ने ज्ञानू को विनम्र बना दिया’, CEC ज्ञानेश कुमार पर कॉकरोच पार्टी के सौरव दास का तंज
इसके साथ ही CJP ने न्यायपालिका पर अत्यधिक निर्भरता पर सवाल उठाते हुए साफ किया कि चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग को केवल 'अदालतों के कमरों' तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
दो टायरों पर दौड़ता ऑटो अचानक ट्रक से भिड़ा, दो महिलाओं की मौत, Video
तेलंगाना के मैनचेरियल जिले में सोमवार सुबह नासपुर गेट के पास तेज सड़क हादसा हुआ. ऑटो और सामने से आ रही लॉरी की टक्कर में दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हुए हैं. हादसे का CCTV फुटेज सामने आया है, जिसमें ऑटो अचानक लॉरी के रास्ते में आता दिखाई दे रहा है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
बैंक कर्मचारियों की हड़ताल टली, 5-डे वीक पर बनेगी कमेटी
28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित देशव्यापी बैंक हड़ताल फिलहाल टाल दी गई है. रविवार रात IBA और UFBU के बीच हुई बैठक के बाद हड़ताल स्थगित करने का फैसला लिया गया. 5-डे वर्किंग की मांग पर हाई लेवल कमेटी बनाने पर सहमति बनी है. PLI समेत अन्य मुद्दों पर भी बातचीत आगे बढ़ेगी. हालांकि, पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था अभी मंजूर नहीं हुई है और अंतिम फैसला बाकी है.
Aligarh Moradabad Expressway निर्माण में किसानों को बाजार दर पर मिले मुआवजा, Akhilesh Yadav की मांग
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अलीगढ़-मुरादाबाद ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे के लिए ज़मीन अधिग्रहण की नीति को लेकर बीजेपी की आलोचना की और आरोप लगाया कि किसानों को मुआवज़ा देने में भेदभाव किया जा रहा है। 28 सितंबर को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, यादव ने बीजेपी को सबसे बड़ी 'लैंड माफिया' पार्टी बताया और इसे 'भारतीय ज़मीन पार्टी' कहा। उन्होंने ज़मीन की असल बाज़ार कीमत के हिसाब से सर्कल रेट में बदलाव की मांग की। उन्होंने कहा कि बीजेपी सबसे बड़ी 'लैंड माफिया' पार्टी है; यह 'भारतीय ज़मीन पार्टी' है जो ज़मीन हड़पने में सबसे आगे है। फिर भी, जब किसानों को मुआवज़ा देने की बात आती है, तो वे भेदभाव करते हैं। इसे भी पढ़ें: Jammu Kashmir Assembly में राज्य के दर्जे पर भारी हंगामा, चार MLA सदन से निष्कासित यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार के उस दावे पर सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि माफिया से 84,000 हेक्टेयर ज़मीन वापस ली गई है। उन्होंने पूछा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उस ज़मीन का इस्तेमाल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने के लिए क्यों नहीं किया। उन्होंने आगे कहा, मुख्यमंत्री दावा करते थे कि उन्होंने माफिया से 84,000 हेक्टेयर ज़मीन वापस ली और उसे कब्ज़े से मुक्त कराया; तो फिर आप वहाँ उद्योग क्यों नहीं लगा रहे हैं? आप किसानों से ज़मीन क्यों छीन रहे हैं? और अगर आप इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए ज़मीन ले रहे हैं, तो आपको सर्कल रेट बढ़ाकर बाज़ार के हिसाब से कीमत देनी चाहिए। उन्होंने मदरसों के प्रति सरकार के रवैये की भी आलोचना की और सरकार पर समाज में बंटवारा करने और पिछले दस सालों में युवाओं को रोज़गार के अवसर न दे पाने का आरोप लगाया। यादव ने कहा कि वे चाहते हैं कि 1 लाख नौकरियों पर बहस हो। आपने दस सालों तक युवाओं को बेरोज़गार रखा। आपने आरक्षण छीन लिया। आपने पेपर लीक किए। आप सरकारी नौकरी नहीं देना चाहते। आपने मदरसों के साथ भेदभाव किया। आपने शिक्षकों के साथ भेदभाव किया। आपने बिना सरकारी मदद वाले संस्थानों के शिक्षकों के मानदेय (honorarium) का बजट हड़प लिया। कैशलेस के नाम पर आप शिक्षकों और वकीलों को धोखा दे रहे हैं। आपके अस्पतालों को ही इलाज की ज़रूरत है। इसे भी पढ़ें: Tripura TTAADC: 587 ग्राम समितियों की 2,950 सीटों पर मतदान शुरू उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने नफ़रत फैलाने और समाज में बंटवारा करने की नीति अपनाई है। यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में मदरसों से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस सरकार का कोई और एजेंडा नहीं है। इन्होंने लगातार नफ़रत फैलाने, बंटवारा करने, दूरियां बढ़ाने और तुष्टीकरण की नीति अपनाने का काम किया है। सरकार ने मदरसों के साथ भेदभाव किया है। समाजवादी सरकार में मदरसों से जुड़े सभी मुद्दों को हल किया जाएगा।
65 साल के बुजुर्ग संग की मारपीट, गिरफ्तार हुईं दिव्या शिंदे
बिग बॉस मराठी 6 की पूर्व कंटेस्टेंट और इन्फ्लुएंसर दिव्या शिंदे को पुणे पुलिस ने गिरफ्तार किया है. उन पर 65 वर्षीय रिटायर्ड मेडिकल ऑफिसर संग मारपीट करने, धमकाने और पैसे मांगने का आरोप है.
सर्दियों के महीनों में प्रदूषण का स्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए दिल्ली सरकार कई तरह की पाबंदियां और प्रशासनिक बदलाव लागू करने की तैयारी कर रही है। इन उपायों में धूल उड़ाने वाले तोड़-फोड़ के कामों और बाहर होने वाले सिविल निर्माण कार्यों पर रोक, निर्माण और तोड़-फोड़ की गतिविधियों पर कुछ समय के लिए पूरी तरह रोक, पार्किंग की ज़्यादा फीस और ऑफिस के समय में बदलाव शामिल हैं। दिल्ली सरकार ने घोषणा की है कि ये उपाय नवंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच अलग-अलग समय पर लागू किए जाएंगे, और कड़ाके की ठंड के दौरान ज़्यादा सख्त पाबंदियां लागू होंगी। इसे भी पढ़ें: CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर Youth Congress का दिल्ली में प्रदर्शन धूल उड़ाने वाले तोड़-फोड़ और निर्माण कार्यों पर रोक दिल्ली सरकार ने 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक धूल उड़ाने वाली तोड़-फोड़ की गतिविधियों और बाहर होने वाले सिविल निर्माण कार्यों पर रोक लगाने का आदेश दिया है। इन पाबंदियों का मकसद उन गतिविधियों को सीमित करना है जिनसे सर्दियों के महीनों में धूल उड़ सकती है, क्योंकि इस दौरान दिल्ली की हवा की गुणवत्ता एक बड़ी चिंता का विषय बन जाती है। सरकार ने 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 तक निर्माण और तोड़-फोड़ की गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने की भी घोषणा की है। यह सख्त रोक उस समय के लिए होगी जब सरकार को लगता है कि प्रदूषण-नियंत्रण उपायों के बीच निर्माण और तोड़-फोड़ की गतिविधियां जारी रखना बहुत मुश्किल होगा। पार्किंग चार्ज दोगुने होंगे निजी गाड़ियों के इस्तेमाल को कम करने के मकसद से एक और कदम उठाते हुए, दिल्ली सरकार ने अधिकृत पार्किंग जगहों पर मौजूदा पार्किंग चार्ज को दोगुना करने का फैसला किया है। बदले हुए पार्किंग चार्ज 1 नवंबर, 2026 से 28 फरवरी, 2027 तक लागू रहेंगे। हालांकि, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के मालिकाना हक और मैनेजमेंट वाली पार्किंग जगहों को इस फैसले से बाहर रखा जाएगा। इस कदम का मकसद सर्दियों के दौरान लोगों को निजी गाड़ियों का इस्तेमाल करने से रोकना और ट्रांसपोर्ट के दूसरे साधनों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। सरकारी दफ्तरों में बदले हुए समय का पालन होगा दिल्ली सरकार ने 1 नवंबर से 28 फरवरी तक दफ्तर के समय में भी बदलाव की घोषणा की है। म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ़ दिल्ली (MCD) के तहत आने वाले दफ्तर सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक काम करेंगे। गवर्नमेंट ऑफ़ नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ़ दिल्ली (GNCTD) के तहत आने वाले दफ्तर सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक काम करेंगे। सरकार ने कहा है कि समय में यह बदलाव सर्दियों के मौसम के लिए उठाए जा रहे कदमों का हिस्सा है। सरकारी और स्वायत्त कार्यालयों में 50 प्रतिशत 'वर्क फ्रॉम होम' सरकार ने सरकारी और स्वायत्त कार्यालयों को 50 प्रतिशत 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम करने) की व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है। इस व्यवस्था के तहत, 50 प्रतिशत कर्मचारी घर से काम करेंगे, जबकि बाकी 50 प्रतिशत कार्यालय से काम करेंगे। यह उपाय 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगा। निर्माण और तोड़-फोड़ पर रोक, पार्किंग शुल्क में बढ़ोतरी, कार्यालय के समय में बदलाव और 'वर्क फ्रॉम होम' की व्यवस्था - ये सभी दिल्ली सरकार द्वारा सर्दियों के महीनों में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों का हिस्सा हैं। इन उपायों को चरणों में लागू किया जाएगा; कुछ प्रतिबंध 1 नवंबर से शुरू होंगे और निर्माण व तोड़-फोड़ की गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध 10 दिसंबर से लागू होगा।
Who Is Tanya Mishra:
घर पर बनाएं कर्नाटक की शाही 'चिरोटे' मिठाई, आसान है बनाना
Chirote Recipe: क्या आपने कभी कर्नाटक की मशहूर मिठाई 'चिरोटे' चखी है? अगर नहीं, तो आप इस वीकेंड घर पर उसे बना सकते हैं. ये मिठाई बाहर से कुरकुरी और अंदर से रसीली होती है. संजीव कपूर ने इसे घर पर बनाने का बहुत ही आसान तरीका बताया है.
30KM का माइलेज, सनरूफ, ADAS और 360° कैमरा.. Tata Nexon को टक्कर देगी ये 9 लाख वाली SUV
Tata Nexon को टक्कर देने 30km/l माइलेज वाली नई हाइब्रिड SUV Renault Bridger आ रही है. इसको 9 लाख की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया जा सकता है.
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर Youth Congress का दिल्ली में प्रदर्शन
भारतीय युवा कांग्रेस ने सोमवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया और उनके इस्तीफे तथा ‘देशद्रोह के आरोप’’ में उनकी गिरफ्तारी की मांग की। युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में संगठन के कार्यकर्ताओं ने यहां युवा कांग्रेस कार्यालय से निर्वाचन आयोग की ओर मार्च किया। दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। चिब ने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग किसी राजनीतिक दल या सरकार की संपत्ति नहीं है। यह भारत की जनता की संस्था है। जब हमारी चुनावी संस्थाओं के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, तो देश जवाब, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करता है।’’युवा कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा उठाई गई आपत्तियों तथा एसआईआर को लेकर सामने आई खबरों ने आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि उठाए गए सभी सवालों की स्वतंत्र जांच का रास्ता साफ होना चाहिए। चिब ने कहा, ‘‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और उन्हें देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया जाए।
'आप कम्प्लीट वुमन, IAS बनवाऊंगा' मैसेज करने वाला सपा नेता अरेस्ट
मथुरा की थाना कोतवाली पुलिस ने समाजवादी पार्टी अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश महासचिव राजन रिजवी को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी पर एक महिला बैंक कर्मचारी को अश्लील मैसेज भेजने, पीछा करने और परेशान करने का आरोप है. पुलिस ने उसे अलीगढ़ के क्वार्सी इलाके से पकड़ा.
किन जगहों पर कार-बाइक पर एक्शन नहीं ले सकती ट्रैफिक पुलिस?
क्या आप जानते हैं दिल्ली में 60 फीट से छोटी सड़क पर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ओर से गाड़ियों पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है, वहां स्थानीय पुलिस या नगर निगम कार्रवाई करते हैं.
यूक्रेन पर रूसी हमले लगातार जारी, कहां बरपा कहर, देखें दुनिया आजतक
यूक्रेन पर रूसी हमले लगातार जारी हैं. रविवार को राजधानी कीव और ओडेसा में हुए ड्रोन हमलों में बड़ी तबाही मची है. रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के ताजा बयान से ये साफ है कि शांतिवार्ता में रूस अपने ही हितों के मुताबिक ही आगे बढ़ेगा. देश-दुनिया की ऐसी ही ताजातरीन और अहम खबरों के लिए देखें दुनिया आजतक.
उज्जैन में शाही मस्जिद का एक हिस्सा तोड़े जाने पर हुआ हंगामा, पांच लोग गिरफ्तार
इंटरनेट डेस्क। मध्यप्रदेश में महाकाल की नगरी उज्जैन में शाही मस्जिद का एक हिस्सा तोड़े जाने पर आज जमकर हंगामा हुआ। इस दौरान लोगों ने पुलिस पर पथराव किया गया। जवाब में पुलिस को भी लाठीचार्ज और आंसू गैस का उपयोग करना पड़ा। भीड़ को हटाने के दौरान महिला थाना प्रभारी घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। शहर काजी की अपील को न मानते हुए उपद्रवियों ने पत्थरबाजी की। स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज किया। पुलिस ने इस मामले में 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। वहीं पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले उज्जैन प्रशासन और शहर काजी की ओर से लोगों से किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की गई थी। विवाद बढ़ने के बाद यहां पर फोर्स तैनात की गई। दोपहर होते-होते लोगों ने फिर पथराव कर दिया। इसके बाद पुलिस ने दोबारा लाठीचार्ज कर आंसू गैस छोड़ी। नमाज के समय इसे रोकने के बाद मामला शांत हो गया। PC:jagran अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
न्यूयॉर्क में बारिश बनी आफत, निचले इलाकों में भरा पानी... Photos
अमेरिका के न्यूयॉर्क में नॉरईस्टर तूफान ने भारी बारिश, तेज हवाओं और तटीय बाढ़ से हालात बिगाड़ दिए हैं. सीबीएस न्यूयॉर्क के मुताबिक, हॉवर्ड बीच जैसे इलाकों में कई इंच से लेकर एक फुट से ज्यादा पानी भर गया, जबकि कुछ जगहों पर लोग बाढ़ वाली सड़कों पर कयाक चलाते नजर आए.
दिवाली से पहले किसानों के खाते में आएंगे 2,000 ! 24वीं किस्त के लिए तुरंत पूरे करें ये 3 जरूरी काम
देश के करोड़ों किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त का इंतजार है. जून 2026 में 23वीं किस्त जारी होने के बाद अब दिवाली और त्योहारों के सीजन से ठीक पहले अक्टूबर 2026 में 24वीं किस्त के 2,000 किसानों के खाते में ट्रांसफर किए जा सकते हैं.
यूपी राज्यसभा चुनाव में भी टाइट फाइट, तीसरा कैंडिडेट उतारेंगे अखिलेश यादव; कौन किसमें लगाएगा सेंध
तीसरे कैंडिडेट के लिए विधायक कैसे जुटाए जाएंगे, यह देखना अहम होगा. बसपा के पास अब कोई विधायक नहीं है, इसलिए बसपा इस बार राज्यसभा में शून्य पर आ जाएगी.
कोर्ट ने केंद्र से कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों के लिए ऐसी व्यवस्था पर विचार किया जाए, जिसके तहत 18 वर्ष से कम उम्र के लोग स्वतंत्र रूप से अपना सोशल मीडिया अकाउंट न बना सकें।
अलीशा ने बताया सिंगिंग के अलावा, मैं एक एक्ट्रेस भी बनना चाहती थी. यह एक ऐसी कहानी है जो आमिर जानते हैं. यह कयामत से कयामत तक के लिए था. मैं एक ऑडिशन के लिए गई और उन्होंने मेरे साथ डायलॉग्स की रिहर्सल की.
'Gen Z के भविष्य के लिए...', MMDR एक्ट के खिलाफ नवीन पटनायक ने तेज की लड़ाई
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल प्रमुख नवीन पटनायक ने MMDR एक्ट 2026 के खिलाफ अपनी लड़ाई तेज कर दी है. उन्होंने इसे राज्य के अधिकारों पर हमला और भविष्य की पीढ़ियों के लिए खतरा बताया.
दांतों की सफाई के लिए फिटकरी आपकी मदद कर सकती है. फिटकरी का सही इस्तेमाल करने से दांतों की समस्या और पीलेपन से छुटकारा मिल सकता है. यहां जानिए फिटकरी के दांत कैसे साफ करें.
बॉलीवुड फिल्मों में अपनी कॉमेडी रोल के साथ सीरियस किरदारों के लिए जाने जाने वाले विजय राज ने अपने करियर की शुरुआत दूरदर्शन के टीवी शो से की थी. इस शो के बाद ही उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा और उनकी किस्मत बदल गई.
100 बार गिन लीजिए, फिर भी होगी गलती! इस तस्वीर में कितनी गेंदें हैं?
Optical Illusion: इस ऑप्टिकल इल्यूजन तस्वीर में सफेद गेंदों को गिनना आसान नहीं है. पहली नजर में कुछ और संख्या दिख सकती है, लेकिन ध्यान से गिनने पर तस्वीर का असली खेल समझ आएगा.
Bhupesh Baghel को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, पाटन चुनाव याचिका के खिलाफ अर्जी खारिज
(फाइल फोटो के साथ जारी)नयी दिल्ली, 28 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उस याचिका में हस्तक्षेप करने से सोमवार को इनकार कर दिया जिसमें उन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से उनके निर्वाचन के खिलाफ भाजपा नेता विजय बघेल की चुनाव याचिका को चुनौती दी है। भूपेश बघेल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष दलील दी कि चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 81 के तहत निर्धारित 45 दिन की अनिवार्य समय-सीमा के कारण विचारणीय नहीं थी। सिब्बल ने कहा कि चुनाव याचिका को शुरुआती चरण में ही खारिज कर दिया जाना चाहिए था। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता विजय बघेल द्वारा दाखिल हलफनामे की तारीख का विशेष रूप से हवाला दिया। सिब्बल ने कहा कि हलफनामे पर 22 जनवरी 2024 की तारीख है जबकि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद 45 दिन की समय-सीमा 17 जनवरी 2024 को समाप्त हो गई थी। उन्होंने कहा, ‘‘जब हलफनामा समय पर दाखिल नहीं हुआ तो चुनाव याचिका पर कार्यवाही कैसे आगे बढ़ सकती है? हलफनामा समय पर दाखिल किया जाना जरूरी है।’’हालांकि, पीठ ने कहा कि तारीखों की सत्यता और उनके कानूनी प्रभाव को साक्ष्यों के आधार पर साबित करना होगा। सिब्बल ने दलील दी कि समय-सीमा से जुड़ी आपत्ति मामले की जड़ से संबंधित है और इसे दीवानी प्रक्रिया संहिता के तहत किसी भी चरण में उठाया जा सकता है। इस पर पीठ ने पूछा, ‘‘यह आपत्ति पहले क्यों नहीं उठाई गई?’’सिब्बल ने स्वीकार किया कि यह मुद्दा इस चरण में उठाया जा रहा है लेकिन उन्होंने साथ ही कहा कि संबंधित हलफनामा पहले से रिकॉर्ड में है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस चूक को स्वीकार करता हूं, लेकिन जब कानून इतना स्पष्ट है तो मेरी इस चूक को मेरे खिलाफ न माना जाए। कृपया हलफनामे की तारीख देखिए। यह उनका अपना हलफनामा है। नीचे 22 जनवरी की तारीख है जबकि अंतिम तारीख 17 जनवरी थी।’’पीठ ने इस बात पर गौर किया कि हलफनामा रिकॉर्ड का हिस्सा है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मौजूदा चरण में कार्यवाही में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। उसने साथ ही संकेत दिया कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय समय-सीमा के मुद्दे पर कानून के अनुसार विचार कर सकता है। यह विवाद विजय बघेल द्वारा दायर उस चुनाव याचिका से जुड़ा है जिसमें उन्होंने 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती दी है। विजय बघेल ने आरोप लगाया है कि भूपेश बघेल ने मतदान से पहले लागू 48 घंटे की प्रचार-निषेध अवधि के दौरान निर्वाचन क्षेत्र में रैली निकाली और उन्होंने उनका चुनाव रद्द करने का अनुरोध किया है।
उत्तराखंड में सितंबर के महीने में अब तक तीन बार बर्फबारी हो चुकी है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पहाड़ों में बर्फबारी का पैटर्न तेजी से बदल रहा है. यह एक तरफ तो अच्छा संकेत है, लेकिन दूसरी तरफ चिंता बढ़ाने वाला भी है.
पंजाब की LPU में एक छात्रा के कथित रेप और आत्महत्या की खबरों के बीच छात्रों का प्रदर्शन हिंसक हो गया. यूनिवर्सिटी ने 10 दिन क्लास और मिड-टर्म एग्जाम सस्पेंड किए. दूसरी तरफ पंजाब पुलिस ने रविवार की रात लाठीचार्ज किया जिसपर बीजेपी और अकाली दल हमलावर है.
आगरा में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के घर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रोटेस्ट, गेट पर लिखे अपशब्द
आगरा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार के विजय नगर आवास के बाहर प्रदर्शन किया और गेट-दीवार पर स्प्रे पेंट से नारे लिख दिए. यूथ कांग्रेस ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए सजा दिलाने की बात कही.
BPSC TRE-4: STET अभ्यर्थियों के लिए जरूरी अपडेट, आवेदन करते हुए करना होगा ये काम
BPSC TRE 4.0 Form Filling: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की तरफ से टीआरई-4 शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ा अपडेट दिया गया है. इसमें बताया गया है कि STET परीक्षा में शामिल हो रहे अभ्यर्थियों को कौन से विकल्प का चुनाव करना है.

26 C
