गुजरात: जूनागढ़ में खड़े ट्रक से टकराई कार, एक ही परिवार के चार लोगों की मौत; चार घायल
गुजरात के जूनागढ़ जिले में शनिवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए। हादसा माजेवड़ी गांव के पास फोरलेन सड़क पर उस समय हुआ, जब परिवार की अर्टिगा कार सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से जा टकराई।
जयपुर की इस चर्चित हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को दहलाकर रख दिया है। अब तक सामने आए तथ्यों के बाद अब इस मामले में एक नया और सनसनीखेज मोड़ आ गया है। आरोपी आयुषी के मामा ने अब जो खुलासा किया है, उसने पुलिस और आम जनता दोनों को चौंका दिया है। मामा का आरोप है कि आयुषी ने अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने और नौकरी पाने की हवस में न केवल अपनी मां, बल्कि अपने पिता की भी बेरहमी से जान ली थी। यह दावा परिवार की नींव को हिला देने वाला है, जिसने अब इस पूरे केस को एक नए नजरिए से देखने पर मजबूर कर दिया है।नौकरी और जिद बनी मौत की वजह?मामा का दावा है कि आयुषी का अपने माता-पिता के साथ विवाद काफी समय से चल रहा था, जिसका मुख्य कारण उसकी नौकरी और जीवनशैली से जुड़ी जिद थी। आरोपों के मुताबिक, आयुषी ने घर की सुख-शांति को अपनी राह का कांटा समझ लिया था। मामा ने मीडिया के सामने बयान देते हुए कहा कि आयुषी ने जिस तरह से इस पूरी वारदात की साजिश रची, वह यह साबित करती है कि वह किसी भी हद तक जाने को तैयार थी। माता-पिता की हत्या के बाद जिस तरह से उसने सबूत मिटाने की कोशिश की, उससे उसकी क्रूरता का साफ पता चलता है। यह घटना अब एक पारिवारिक विवाद से कहीं ज्यादा, एक सोची-समझी हत्या की साजिश की ओर इशारा कर रही है।मामा के खुलासे से पुलिस की जांच में बड़ी चुनौतीआयुषी के मामा के इस बयान के बाद अब पुलिस के सामने भी चुनौती बढ़ गई है। क्या वाकई इस हत्याकांड की पटकथा पहले ही लिख ली गई थी? क्या यह एक दोहरा हत्याकांड था जिसे आयुषी ने अंजाम दिया? पुलिस अब इन नए आरोपों की गहराई से जांच कर रही है और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के वक्त कौन-कौन वहां मौजूद था। इस मामले ने जयपुर में सनसनी फैला दी है और लोग अब कानून से जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं। आयुषी का यह 'डार्क साइड' सामने आने के बाद हर कोई स्तब्ध है।
राजस्थान सरकार ने प्रशासनिक दक्षता को गति देने के लिए एक बड़े पैमाने पर तबादला सूची जारी की है। इस फेरबदल के दायरे में पीडब्ल्यूडी (PWD) और वन विभाग के कई आला अधिकारी शामिल हैं। राज्य में चल रही विकास परियोजनाओं और वन संरक्षण कार्यों में नई ऊर्जा भरने के उद्देश्य से ACE (एडिशनल चीफ इंजीनियर) स्तर से लेकर रेंज अधिकारियों तक के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है। अचानक हुए इन तबादलों से प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।PWD में बड़े प्रशासनिक बदलावपीडब्ल्यूडी विभाग में किए गए इन बदलावों को राज्य की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अहम माना जा रहा है। सरकार ने ACE स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं ताकि राज्य भर में चल रहे सड़क निर्माण और रखरखाव के काम में तेजी लाई जा सके। विभाग के जानकारों का मानना है कि निर्माण कार्यों में देरी और गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों को दूर करने के लिए यह प्रशासनिक कसावट बेहद जरूरी थी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तत्काल प्रभाव से अपनी नई पदस्थापना पर ज्वाइन करें और लंबित परियोजनाओं की समीक्षा करें।वन विभाग में भी व्यापक फेरबदलउधर, वन विभाग में भी बड़े पैमाने पर रेंज अधिकारियों और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर तैनात कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं। वन्यजीव संरक्षण, अवैध खनन पर रोक और वनों के बेहतर प्रबंधन के लिए यह प्रशासनिक बदलाव काफी मायने रखता है। विशेषकर उन जिलों में अधिकारियों को बदला गया है जहां वन संसाधनों की सुरक्षा को लेकर चुनौतियां बनी हुई थीं। विभाग की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए सरकार की ओर से यह एक बड़ी कवायद देखी जा रही है।तबादलों का असर और आगे की राहप्रशासनिक जानकारों का कहना है कि आगामी मानसून सत्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं के क्रियान्वयन को देखते हुए यह तबादला सूची बहुत सोच-समझकर तैयार की गई है। ACE से लेकर नीचे के अधिकारियों के स्तर पर बदलाव से कामकाज में नई गति आने की उम्मीद है। वहीं, जिन अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, उनके सामने अब नई चुनौतियों के साथ-साथ विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का दबाव भी होगा। राज्य भर के कर्मचारियों और अधिकारियों में अब इन तबादलों के बाद नई नियुक्तियों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
राजस्थान की राजनीति और प्रशासन के गलियारों में एक बार फिर बजरी खनन का मुद्दा गरमा गया है। मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने एक गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है, जिसने प्रशासनिक महकमे में खलबली मचा दी है। मंत्री का आरोप है कि जिस कंपनी की संपत्ति प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अटैच की गई है, उसे आखिर 20 करोड़ रुपये का बड़ा बजरी खनन ठेका कैसे आवंटित कर दिया गया? यह मामला न केवल वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है, बल्कि सरकारी टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े कर रहा है।नियमों की अनदेखी या मिलीभगत का खेल?मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने अपने पत्र में साफ तौर पर कहा है कि यदि किसी कंपनी पर मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप हैं और उसकी संपत्ति ED की निगरानी में है, तो सरकारी नियमों के अनुसार उसे किसी भी नए ठेके में भाग लेने या उसे हासिल करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद, खनन विभाग द्वारा इस कंपनी को ठेका दिया जाना किसी बड़ी मिलीभगत या उच्च-स्तरीय लापरवाही का संकेत है। मंत्री ने मांग की है कि इस पूरे आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर किन अधिकारियों की मिलीभगत से यह ठेका आवंटित हुआ।मुख्यमंत्री के सामने बड़ी चुनौती, जांच की मांगइस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद अब मुख्यमंत्री कार्यालय पर दबाव बढ़ गया है। 20 करोड़ रुपये का यह मामला राजस्थान के खनन सेक्टर में चल रहे बड़े खेल की केवल एक बानगी माना जा रहा है। किरोड़ी लाल मीणा ने अपने पत्र के माध्यम से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से इस ठेके को रद्द किया जाए और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। इस मामले ने विपक्ष को भी एक बड़ा मुद्दा दे दिया है, जिससे सरकार के लिए आने वाले दिनों में मुश्किल खड़ी हो सकती है। लोग अब यह जानने के उत्सुक हैं कि क्या सरकार वास्तव में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी या यह मामला केवल फाइलों में दबकर रह जाएगा।प्रशासनिक सतर्कता पर सवालखनन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जहां सरकारी राजस्व का बड़ा हिस्सा दांव पर होता है, वहां ED जैसी केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई को नजरअंदाज करना कई संदेह पैदा करता है। जानकारों का कहना है कि टेंडर जारी करने से पहले कंपनी की वित्तीय साख और बैकग्राउंड चेक अनिवार्य होता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अधिकारियों ने जानबूझकर यह जानकारी छुपाई या सिस्टम में इतनी बड़ी खामी है। किरोड़ी लाल मीणा की इस पहल ने एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी छवि को मजबूत किया है, और अब सभी की निगाहें सीएम की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
अयोध्या राम मंदिर में नई समस्या! 23 कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा
Ram Mandir donation counting staff resignation: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हुए चढ़ावा और दान चोरी प्रकरण के बाद से नित नए खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब राम मंदिर के भीतर से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। मंदिर में आने वाले ...
बहुमत के बावजूद बीजेपी के हाथ से कैसे फिसली मेयर की कुर्सी? किसने बिछाया ये मास्टरस्ट्रोक
पंजाब के अबोहर की राजनीति में एक बेहद चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। नगर निगम चुनाव के नतीजों में बीजेपी की स्थिति काफी मजबूत थी और बहुमत का आंकड़ा भी उनके पक्ष में दिख रहा था, लेकिन ऐन वक्त पर मेयर की कुर्सी का समीकरण पूरी तरह बदल गया। बीजेपी के हाथ से जीत की बाजी कैसे फिसल गई और किसे मिली इस उलटफेर की चाबी, यह सवाल अब अबोहर के हर गली-चौराहे पर चर्चा का विषय बना हुआ है। किसी को उम्मीद नहीं थी कि जीत की दहलीज पर खड़ी बीजेपी को इतनी बुरी तरह पटखनी मिलेगी।गणित और राजनीति: कहाँ चूकी बीजेपी?राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अबोहर में बीजेपी की हार का मुख्य कारण पार्टी के भीतर की आपसी गुटबाजी और आखिरी समय पर बदली गई सियासी बिसात रही। मेयर का चुनाव केवल आंकड़ों का खेल नहीं होता, बल्कि इसमें जोड़-तोड़ और रणनीति की अहम भूमिका होती है। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के कुछ असंतुष्ट पार्षदों ने क्रॉस-वोटिंग की, जिससे पूरा चुनावी समीकरण उलट गया। बहुमत होने के बावजूद पार्टी अपने पार्षदों को एकजुट रखने में विफल रही, जिसका सीधा फायदा विपक्ष को मिला। विपक्ष ने इस मौके को भुनाते हुए एक ऐसा गठबंधन तैयार किया जिसने बीजेपी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।कौन बना बीजेपी की हार का कारण?इस हार के पीछे अब विपक्ष की सक्रियता और रणनीतिक तालमेल को मुख्य कारण माना जा रहा है। स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, विपक्ष ने पर्दे के पीछे से एक ऐसी रणनीति तैयार की थी, जिसके बारे में बीजेपी के रणनीतिकार अंत तक बेखबर रहे। जैसे ही मेयर चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई, विपक्ष ने अपने सारे पत्ते खोल दिए और बीजेपी के लिए संभलने का मौका ही नहीं छोड़ा। यह पटखनी इतनी जोरदार थी कि पार्टी के स्थानीय नेतृत्व को भी समझ नहीं आया कि स्थिति इतनी जल्दी कैसे बदल गई। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह हार बीजेपी के लिए भविष्य का बड़ा सबक साबित होगी या आने वाले समय में अबोहर की राजनीति में कोई बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा।क्या अबोहर में बदलेगी सत्ता की दिशा?मेयर की कुर्सी गंवाने के बाद अब बीजेपी के लिए अपना खोया हुआ जनाधार वापस पाना एक बड़ी चुनौती बन गई है। वहीं दूसरी तरफ, इस उलटफेर से उत्साहित विपक्ष अब अपनी पकड़ और मजबूत करने में जुट गया है। अबोहर की जनता के लिए यह घटना किसी सियासी ड्रामे से कम नहीं है, जहां चुनाव के नतीजे आने के बाद भी कुर्सी किसी और के हाथ में चली गई। प्रशासनिक गलियारों में भी इस बात की चर्चा है कि इस हार के बाद अब बीजेपी के स्थानीय संगठन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बीजेपी इस हार का बदला कैसे लेती है और विपक्ष इस नई मिली हुई ताकत को कैसे संभालता है।
पंजाब कांग्रेस में फिर गरमाया 'चेहरा' बनने का खेल: आखिर क्यों चन्नी की नजरें अध्यक्ष पद पर
पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही सियासी उठापटक एक बार फिर से दिलचस्प मोड़ पर आ गई है। प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर पार्टी के भीतर सुगबुगाहट तेज है और सबसे बड़ा नाम जो चर्चाओं के केंद्र में है, वह है पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी। सूत्रों की मानें तो चन्नी एक बार फिर पंजाब की सियासत में 'सुपर एक्टिव' मोड में हैं। चर्चा यह है कि वे कैप्टन अमरिंदर सिंह के उस पुराने 'विक्ट्री फॉर्मूले' को अपनाना चाहते हैं, जिसने उन्हें राज्य की राजनीति में निर्विवाद नेता के रूप में स्थापित किया था।कैप्टन वाले फॉर्मूले पर चन्नी की चालराजनीतिक गलियारों में इस बात की जोरदार चर्चा है कि चन्नी किस तरह कैप्टन अमरिंदर सिंह के उस दौर के फॉर्मूले को दोहराने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें 'एक चेहरा, एक कमान' का मंत्र काम करता था। चन्नी बखूबी समझते हैं कि पंजाब की राजनीति में जातीय समीकरण और 'कॉमन मैन' वाली छवि का बड़ा असर पड़ता है। वे प्रदेश अध्यक्ष बनकर पार्टी के भीतर अपनी पकड़ को दोबारा मजबूत करना चाहते हैं ताकि आने वाले चुनावों में वे खुद को मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में प्रोजेक्ट कर सकें। पार्टी कार्यकर्ताओं और जमीनी स्तर के नेताओं के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए चन्नी सक्रिय रूप से उन तमाम दांव-पेंचों का उपयोग कर रहे हैं जो कभी कैप्टन के लिए तुरुप का इक्का साबित हुए थे।अध्यक्ष पद क्यों है चन्नी की पहली प्राथमिकता?अध्यक्ष पद की दौड़ में चन्नी का नाम आगे आने के पीछे कई सियासी रणनीतियां छिपी हैं। पहला, प्रदेश अध्यक्ष के हाथ में संगठन की पूरी ताकत होती है, जिससे टिकट वितरण और जिलों में अपने वफादार नेताओं को तैनात करने की शक्ति मिलती है। चन्नी जानते हैं कि अगर वे संगठन की चाबी अपने पास रखते हैं, तो वे पार्टी के भीतर किसी भी चुनौती को आसानी से बेअसर कर पाएंगे। दूसरी तरफ, उनका उद्देश्य कांग्रेस को दलित और आम वोट बैंक के बीच एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में पेश करना है। चन्नी के इस कदम ने पंजाब कांग्रेस के अन्य बड़े नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं, क्योंकि अगर चन्नी सफल होते हैं, तो पार्टी का पूरा पावर सेंटर बदल सकता है।क्या चन्नी की महत्वाकांक्षा कांग्रेस में नया संकट लाएगी?हालांकि, चन्नी का यह कदम पार्टी के लिए फायदे का सौदा साबित होगा या फिर से किसी बड़े गुटबाजी का कारण बनेगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा। प्रदेश में कांग्रेस पहले से ही आपसी खींचतान से जूझ रही है। ऐसे में चन्नी का अध्यक्ष बनने का सपना पार्टी आलाकमान के लिए एक सिरदर्द बन सकता है। एक तरफ जहाँ वे अपनी साख बचाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कैप्टन के पुराने 'पावर फॉर्मूले' को अपनाना उनके लिए जोखिम भरा भी हो सकता है। क्या चन्नी का यह दांव उन्हें फिर से 'किंग' बनाएगा या यह महज एक सियासी छलावा है? पंजाब की जनता और कांग्रेस के कार्यकर्ता अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि पार्टी हाईकमान किसके नाम पर मुहर लगाता है।
झारखंड को अब तक देश में केवल 'खनिज संपदा' के हब के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन अब राज्य सरकार इस धारणा को बदलने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। हाल ही में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार ने झारखंड की पहचान को लेकर एक नया दृष्टिकोण पेश किया। उन्होंने कहा कि झारखंड केवल कोयला, लोहा और अन्य खनिजों की धरती नहीं है, बल्कि यहां की नैसर्गिक सुंदरता, घने जंगल, जलप्रपात और समृद्ध जनजातीय संस्कृति ही राज्य की असली विरासत और पहचान है।पर्यटन बनेगा झारखंड की नई अर्थव्यवस्था का आधारमंत्री सुदिव्य कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के विकास के लिए अब 'खनिज आधारित' अर्थव्यवस्था से हटकर 'पर्यटन आधारित' अर्थव्यवस्था की ओर रुख करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि झारखंड के पास बेतहाशा प्राकृतिक संसाधन हैं, जिनका सही तरीके से प्रचार-प्रसार और बुनियादी ढांचा विकसित करके दुनिया के मानचित्र पर राज्य को एक प्रमुख टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार इको-टूरिज्म और रूरल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां बना रही है, जिससे न केवल राज्य का राजस्व बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर को सहेजने का संकल्पअपने संबोधन के दौरान मंत्री ने झारखंड की कला, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि राज्य की विकास यात्रा ऐसी होनी चाहिए जिसमें आधुनिकता तो हो, लेकिन अपनी जड़ों और प्राकृतिक धरोहरों के साथ समझौता न हो। उन्होंने स्थानीय जनता से अपील की कि वे अपनी प्राकृतिक संपदाओं को सुरक्षित रखें और राज्य को एक 'ग्रीन और क्लीन' डेस्टिनेशन बनाने में सरकार का सहयोग करें। मंत्री के इस बयान को राज्य की नई ब्रांडिंग और मार्केटिंग रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य झारखंड को खनिज के बाहर एक सकारात्मक और खूबसूरत छवि देना है।
झारखंड के निवासियों के लिए मौसम विभाग ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। राज्य में आज से अगले तीन दिनों तक मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ रहेगा। मॉनसूनी सक्रियता के चलते राज्य के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश होने के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र ने रांची, बोकारो सहित प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं को लेकर रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।इन जिलों पर मंडरा रहा खतरा, 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी हवामौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, इस दौरान हवा की रफ्तार 50 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जो सामान्य से काफी अधिक है। भारी बारिश के साथ चलने वाली ये तेज हवाएं कच्चे घरों और पेड़-पौधों के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। मुख्य रूप से रांची, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़ और सिमडेगा जैसे जिलों में मौसम का सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिलेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिजली कड़कने के साथ-साथ कई इलाकों में वज्रपात की भी पूरी आशंका है, जिसे लेकर ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।प्रशासन ने जारी की एडवायजरी, लोगों से की सावधानी की अपीललगातार हो रही बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे बारिश के दौरान पेड़ के नीचे या पुराने जर्जर भवनों के आसपास खड़े न हों। साथ ही, किसानों को अपने खेतों में काम करते समय विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। यात्रा करने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि यदि बहुत जरूरी न हो, तो अगले तीन दिनों तक लंबी दूरी की यात्रा टाल दें। खराब मौसम के कारण यातायात बाधित होने की भी संभावना बनी हुई है, इसलिए सड़कों पर सावधानी से वाहन चलाएं।बिजली और बुनियादी सेवाओं पर पड़ सकता है असरमौसम की इस मार का सीधा असर राज्य की बुनियादी सेवाओं, विशेषकर बिजली आपूर्ति पर पड़ने की संभावना है। तेज हवाओं के कारण बिजली के खंभों के गिरने और तारों के टूटने की घटनाएं हो सकती हैं, जिससे कई क्षेत्रों में घंटों बिजली गुल रहने की आशंका है। संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके। आपको सलाह दी जाती है कि अपने मोबाइल फोन चार्ज रखें और आपातकालीन नंबरों को अपने पास नोट कर लें।
झारखंड की सियासत में इन दिनों गहमागहमी का माहौल है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के एक के बाद एक फैसलों ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। पहले सुरक्षाकर्मियों को हटाना और अब सरकारी गाड़ी का उपयोग बंद कर निजी वाहन में सफर करना, राज्य के सियासी दिग्गजों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। आम लोगों और विपक्षी दलों के बीच अब एक ही सवाल तैर रहा है—क्या वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर सरकार से नाराज हैं और क्या वे जल्द ही अपने पद से इस्तीफा देने वाले हैं?विवाद की जड़: पुलिस मुख्यालय से तनातनीसूत्रों के मुताबिक, इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब वित्त मंत्री ने अपनी सुरक्षा में तैनात 16 जवानों के लिए अतिरिक्त संसाधनों की मांग की थी। मंत्री का तर्क था कि वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था और सीमित वाहनों में जवानों का चलना अव्यावहारिक है। हालांकि, पुलिस मुख्यालय की ओर से उनकी मांग को अनसुना कर दिया गया और उलटे एक मौजूदा सरकारी वाहन को वापस करने का नोटिस थमा दिया गया। इस घटनाक्रम से आहत होकर वित्त मंत्री ने अपनी पूरी सुरक्षा और सभी सरकारी वाहनों को वापस करने का कठोर फैसला लिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि उन्हें अपनी सुरक्षा से ज्यादा ईश्वर पर भरोसा है।क्या इस्तीफा देने वाले हैं राधाकृष्ण किशोर?जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, वित्त मंत्री की नाराजगी की खबरें तेज होती जा रही हैं। हाल ही में उन्हें अपनी सरकारी गाड़ी छोड़कर निजी वाहन का इस्तेमाल करते हुए देखा गया, जिससे यह चर्चा और प्रबल हो गई है कि सरकार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। हालांकि, मंत्री ने स्वयं मीडिया के सामने आकर ऐसी खबरों को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि वे नाराज नहीं हैं। बावजूद इसके, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकारी महकमे के साथ उनका यह व्यवहार भविष्य में किसी बड़े प्रशासनिक या राजनीतिक बदलाव का संकेत हो सकता है।पार्टी और प्रशासन में सन्नाटावित्त मंत्री जैसे वरिष्ठ पद पर बैठे नेता का इस तरह से सरकारी सुविधाओं का त्याग करना हेमंत सरकार के लिए भी चुनौती बना हुआ है। पार्टी आलाकमान की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस घटना ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, सभी की निगाहें मंत्री के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वे इसे एक वैचारिक विरोध के रूप में जारी रखेंगे या जल्द ही सब कुछ सामान्य हो जाएगा।
हरियाणा के अंबाला में यातायात की तस्वीर बदलने वाली है। बहुप्रतीक्षित अंबाला रिंग रोड का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में है, जिसका 90 प्रतिशत काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह प्रोजेक्ट न केवल स्थानीय लोगों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि पड़ोसी राज्यों पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के यात्रियों के लिए भी कनेक्टिविटी का नया आयाम खोलेगा। इस रिंग रोड के शुरू होने से न केवल शहर को जाम से बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख रूटों के साथ इसका जुड़ाव सफर को बेहद आसान बना देगा।पांच नेशनल हाईवे का एक जंक्शन, बदलेगी कनेक्टिविटीअंबाला रिंग रोड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पांच महत्वपूर्ण नेशनल हाईवे को आपस में जोड़ेगा। इस रोड के चालू होते ही पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच आवाजाही करने वाले भारी वाहनों को शहर के अंदर प्रवेश करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे अंबाला शहर में लगने वाले जाम से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। यह रिंग रोड रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे, अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे और अन्य प्रमुख मार्गों को एक साथ जोड़ता है, जिससे माल ढुलाई और लंबी दूरी की यात्रा का समय घंटों कम हो जाएगा।विकास की नई गति, पीएम मोदी करेंगे उद्घाटनप्रोजेक्ट की गति को देखते हुए अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि अंतिम 10 प्रतिशत का कार्य भी युद्धस्तर पर पूरा किया जा रहा है। इस विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को लेकर क्षेत्र में काफी उत्साह है। जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्य संपन्न होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही इस रिंग रोड का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इस उद्घाटन के साथ ही हरियाणा के विकास मानचित्र पर अंबाला एक बड़े लॉजिस्टिक और ट्रांजिट हब के रूप में उभरेगा, जिसका सीधा लाभ क्षेत्र के औद्योगिक और व्यापारिक विकास पर पड़ेगा।स्थानीय जनता और यात्रियों के लिए बड़ा राहत का पैगामरिंग रोड के निर्माण से यात्रा के समय में भारी कटौती होने की उम्मीद है। अभी तक अंबाला से गुजरने वाले यात्रियों को शहर के भीतर के कंजेशन से जूझना पड़ता था, लेकिन रिंग रोड के चालू होते ही वे आउटर रिंग से सीधे अपने गंतव्य की ओर निकल सकेंगे। इसके साथ ही, बेहतर सड़क नेटवर्क से सड़क हादसों में कमी आने और ईंधन की बचत होने की भी पूरी संभावना है। प्रशासनिक स्तर पर इसे पूरा करने की समय सीमा तय कर दी गई है और विभाग अंतिम फिनिशिंग का काम तेजी से निपटा रहा है।
Trip To London: पाउंड को रुपए में गिनेंगे तो चाय भी नहीं पी सकेंगे
Trip To London: जब भी पर्यटन के लिए विदेश जाएं तो भारतीय रुपए में मूल्य आंकना मुसीबत खड़ी करेगा। वजह साफ है कि विश्व की अधिकांश लेन-देन की मुद्रा का मूल्य रुपए से कई गुना ज्यादा है। प्रमुख तौर पर डॉलर 95 रुपए का, पाउंड 130 रुपए का, यूरो 111 का, ...
मछली या चिकन! बारिश में कौन देता है ज्यादा पोषण और किससे बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा
चिलचिलाती गर्मी के बाद मानसून और झमाझम बारिश का मौसम (Monsoon Season) हर किसी को राहत देता है। इस सुहावने मौसम में लोगों की फूड क्रेविंग्स भी काफी बढ़ जाती हैं, खासकर नॉन-वेज खाने के शौकीनों के लिए मसालेदार चिकन या क्रिस्पी फिश फ्राई का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो बारिश का यह सुहावना मौसम अपने साथ कई तरह के बैक्टीरिया और फंगल इन्फेक्शन भी लेकर आता है। ऐसे में यह सवाल उठना बेहद लाजिमी है कि मानसून में सेहत के लिहाज से मछली या चिकन (Fish vs Chicken in Monsoon) में से कौन सा विकल्प ज्यादा सुरक्षित और पौष्टिक है? आइए जानते हैं कि इस मौसम में इन दोनों में से किसका सेवन आपकी इम्यूनिटी बढ़ाएगा और कौन सी चीज आपके पेट को बीमार कर सकती है।मानसून में मछली खाने से क्यों बचते हैं लोग: प्रजनन काल और दूषित पानी का बड़ा खतरापारंपरिक मान्यताओं और आधुनिक विज्ञान दोनों के अनुसार, बारिश के महीनों में मछली और अन्य सी-फूड्स (Sea Food) का सेवन करने से बचने की सलाह दी जाती है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि मानसून का समय जलीय जीवों, खासकर मछलियों का प्रजनन काल (Breeding Season) होता है। इस दौरान मछलियों के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे उनका मांस सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इसके अलावा, बारिश का पानी जब नदियों, तालाबों और समुद्र में जाकर मिलता है, तो पानी अत्यधिक दूषित हो जाता है। ऐसे प्रदूषित पानी में पलने वाली मछलियों के शरीर में खतरनाक बैक्टीरिया और टॉक्सिंस जमा हो जाते हैं, जिन्हें खाने से फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त और पेट का गंभीर इन्फेक्शन होने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।चिकन है पोषण का पावरहाउस, लेकिन पकाने के तरीके में रखनी होगी विशेष सावधानीमछली की तुलना में मानसून के दौरान चिकन को एक अधिक सुरक्षित और सुपाच्य विकल्प माना जाता है। चिकन लीन प्रोटीन (Lean Protein), विटामिन B6, जिंक और सेलेनियम का एक बेहतरीन स्रोत है, जो शरीर के इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है। बारिश के मौसम में कमजोर पड़ रहे डाइजेशन को ठीक रखने के लिए चिकन सूप या कम तेल-मसालों में पका हुआ स्टू बेहद फायदेमंद साबित होता है। हालांकि, पोल्ट्री फार्म्स में स्वच्छता की कमी के कारण इस मौसम में साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया का खतरा चिकन में भी बना रहता है। इसलिए हमेशा फ्रेश और अच्छी तरह साफ किया हुआ चिकन ही खरीदें।वरिष्ठ न्यूट्रिशनिस्ट्स और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट्स का कड़ा परामर्श: मानसून में हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म और पाचन तंत्र काफी धीमा हो जाता है। इस मौसम में तली-भुनी और अत्यधिक हैवी नॉन-वेज डिशेज को पचाना मुश्किल होता है। यदि आप बारिश में चिकन का आनंद ले रहे हैं, तो उसे 100 डिग्री से ऊपर के तापमान पर अच्छी तरह से डीप-कुक (Well Cooked Chicken) करना अनिवार्य है, ताकि सभी हानिकारक कीटाणु मर जाएं। जहां तक संभव हो, इन महीनों में कच्ची या अधपकी मछली और स्ट्रीट वेंडर्स से नॉन-वेज मोमोज या कबाब खाने से पूरी तरह परहेज करें।स्थानीय बाजारों में बढ़ी सतर्कता और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सही डाइट की खोजजियोपॉलिटिकल और स्थानीय स्वास्थ्य (Geographical Health and Dietary Trends) दृष्टिकोण से देखें तो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, दिल्ली-एनसीआर, बिहार के पटना और बंगाल (Local Consumption Hubs) जैसे क्षेत्रों में मानसून के आते ही नॉन-वेज के शौकीन काफी सतर्क नजर आ रहे हैं। आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI Search) और डिजिटल युग में लोग लगातार इस बात को सर्च कर रहे हैं कि बारिश में पेट खराब होने से कैसे बचा जाए। स्थानीय डॉक्टरों का कहना है कि स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का पालन करते हुए यदि घर पर पूरी साफ-सफाई के साथ ताजा और अच्छी तरह उबला हुआ चिकन खाया जाए, तो यह शरीर को बिना किसी नुकसान के भरपूर पोषण प्रदान करता है।
शुगर, बीपी समेत कई बीमारियों के लिए रामबाण है जामुन की गुठली, फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान
गर्मियों और मॉनसून के मौसम में आने वाला रसीला फल जामुन (Jamun Fruit) स्वाद में जितना बेहतरीन होता है, सेहत के लिए भी उतना ही गुणकारी माना जाता है। अक्सर लोग जामुन खाने के बाद उसकी गुठलियों को बेकार समझकर कूड़ेदान में फेंक देते हैं। लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, आप जिसे कचरा समझ रहे हैं, वह वास्तव में सेहत का एक ऐसा अनमोल खजाना है जो डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और पेट की पुरानी से पुरानी बीमारियों को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखता है। जामुन की गुठली (Jamun Seed Powder) का सही तरीके से इस्तेमाल शरीर के लिए किसी जादुई बूस्टर से कम नहीं है, जिसके स्वास्थ्य लाभ आपको पूरी तरह हैरान कर देंगे।डायबिटीज के मरीजों के लिए प्राकृतिक इंसुलिन: कैसे कंट्रोल होता है ब्लड शुगर?डायबिटीज (Type-2 Diabetes) से पीड़ित मरीजों के लिए जामुन की गुठली किसी दिव्य औषधि से कम नहीं है। इसमें 'जंबोलिन' (Jamboline) और 'जंबोसिन' (Jambosine) नामक दो बेहद खास तत्व पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर के भीतर स्टार्च को शुगर में बदलने की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं, जिससे भोजन के बाद अचानक बढ़ने वाला ब्लड शुगर लेवल पूरी तरह नियंत्रित रहता है। इसके साथ ही, जामुन की गुठली का पाउडर अग्न्याशय (Pancreas) की कोशिकाओं को सक्रिय करता है, जिससे प्राकृतिक रूप से इंसुलिन का उत्पादन बढ़ता है। डॉक्टर भी मानते हैं कि सुबह खाली पेट इसके चूर्ण का सेवन करने से इंसुलिन पर निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है।हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों को रखेगा कोसों दूर: धमनियों की करेगा सफाईसिर्फ शुगर ही नहीं, बल्कि हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) और दिल के मरीजों के लिए भी जामुन की गुठली का सेवन बेहद फायदेमंद साबित होता है। इस गुठली में 'एलाजिक एसिड' (Ellagic Acid) नामक एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो रक्त वाहिकाओं यानी धमनियों को चौड़ा करने और उनके लचीलेपन को बनाए रखने में मदद करता है। इसके नियमित सेवन से धमनियों में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) जमा नहीं हो पाता और ब्लड सर्कुलेशन सुचारू रूप से चलता है, जिससे हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है।आयुर्वेदाचार्यों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का बड़ा दावा: जामुन की गुठली में प्रचुर मात्रा में फाइबर, विटामिन और मिनरल्स होते हैं। यह पेट से जुड़ी गंभीर समस्याओं जैसे क्रोनिक अपच, गैस, एसिडिटी और कब्ज को ठीक करने में रामबाण है। यह शरीर को अंदर से डिटॉक्सिफाई करती है, जिससे लिवर और किडनी की कार्यक्षमता में सुधार होता है। इसे सुखाकर बनाया गया चूर्ण एक सुरक्षित और पूरी तरह से प्राकृतिक सप्लीमेंट है, जिसे हर उम्र के लोग अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं।कैसे तैयार करें और क्या है इस्तेमाल करने का सही तरीका?जामुन की गुठली का लाभ उठाने के लिए सबसे पहले जामुन खाने के बाद गुठलियों को अच्छी तरह धो लें। इसके बाद इन्हें कुछ दिनों तक तेज धूप में पूरी तरह सुखा लें। जब ये सूख जाएं, तो इनका ऊपरी छिलका उतारकर अंदर के हिस्से को मिक्सी में पीसकर बारीक चूर्ण (Jamun Gutli Churn) बना लें। इस चूर्ण को एक कांच के एयरटाइट जार में सुरक्षित रख लें। रोज सुबह खाली पेट एक गिलास हल्के गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच इस चूर्ण का सेवन करें।डिजिटल हेल्थ और आधुनिक एआई सर्च (AI Health Search) के इस दौर में, लखनऊ, दिल्ली, पटना जैसे बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों (Geographical Health Grid) तक के लोग अब एलोपैथिक दवाओं के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए इन प्राचीन घरेलू नुस्खों और प्राकृतिक हर्बल सप्लीमेंट्स की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। अगर आप भी लंबे समय से शुगर या बीपी की समस्या से परेशान हैं, तो आज ही से जामुन की गुठली को फेंकने के बजाय इसका चूर्ण बनाकर इस्तेमाल करना शुरू करें और एक स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।
सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की पूजा का विधान है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाने वाली आषाढ़ विनायक चतुर्थी (Ashadha Vinayaka Chaturthi 2026) इस बार बेहद खास और चमत्कारी संयोग लेकर आ रही है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस पावन दिन पर पूरे 13 घंटे के लिए अत्यंत शुभ 'रवि योग' का निर्माण हो रहा है, जो भक्तों की हर मनोकामना पूरी करने और जीवन से आर्थिक तंगी को हमेशा के लिए दूर करने में सक्षम माना जाता है। लेकिन इस महापर्व के साथ एक बेहद कड़ा धार्मिक नियम भी जुड़ा हुआ है, जिसका पालन न करने पर व्यक्ति पर झूठे आरोप और कलंक लग सकता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भूलकर भी चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। आइए जानते हैं क्या है इसका सही मुहूर्त और पौराणिक महत्व।विनायक चतुर्थी 2026 की सही तारीख और 13 घंटे के रवि योग का समयपंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत और समापन के समय को ध्यान में रखते हुए इस साल विनायक चतुर्थी व्रत जुलाई 2026 के मध्य में बेहद शुभ संयोगों के बीच रखा जाएगा। इस दिन सुबह से लेकर शाम तक पूरे 13 घंटे के लिए रवि योग (Ravi Yoga) रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में रवि योग को सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर माना गया है, जिसमें किया गया कोई भी निवेश, व्यापारिक सौदा या नया काम शत-प्रतिशत सफलता प्रदान करता है। इस योग में गणपति बप्पा की पूजा करने से कुंडली के सूर्य दोष और मंगल दोष से भी मुक्ति मिलती है।भूलकर भी न करें चंद्र दर्शन, श्रीकृष्ण पर भी लग गया था 'स्यमंतक मणि' की चोरी का कलंकपौराणिक कथाओं के अनुसार, विनायक चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन (Chandra Darshan Prohibited) करना पूरी तरह से वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि एक बार भगवान गणेश के स्वरूप को देखकर चंद्र देव ने उनका उपहास उड़ाया था, जिससे क्रोधित होकर गजानन ने उन्हें श्राप दे दिया था कि जो भी इस दिन चंद्रमा को देखेगा, वह समाज में कलंकित हो जाएगा। यही वजह है कि इसे 'कलंक चतुर्थी' के रूप में भी जाना जाता है। द्वापर युग में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने भी अनजाने में इस दिन चंद्रमा को देख लिया था, जिसके कारण उन पर 'स्यमंतक मणि' चुराने का झूठा आरोप लगा था। यदि अनजाने में आपसे चांद दिख जाए, तो तुरंत दोष निवारण मंत्र का जाप करना चाहिए।देश के प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्यों का बड़ा परामर्श: विनायक चतुर्थी के दिन दोपहर के समय श्री गणेश की पूजा का सबसे श्रेष्ठ विधान है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को सुबह स्नान के बाद 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए और बप्पा को दूर्वा, मोदक व लाल चंदन अर्पित करना चाहिए। रवि योग होने के कारण इस दिन तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य देना भी सोया हुआ भाग्य जगाने जैसा फल प्रदान करेगा। रात्रि के समय जब चंद्रमा उदय हो, तो अपनी नजरें नीचे रखें और मानसिक रूप से भगवान गणेश से क्षमा याचना करें।स्थानीय स्तर पर उत्तर भारत और यूपी के मंदिरों में विशेष तैयारियांजियोपॉलिटिकल और स्थानीय सांस्कृतिक (Geographical Traditional Grid) नजरिए से देखें तो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, वाराणसी, कानपुर और दिल्ली-एनसीआर (Local Region) समेत पूरे उत्तर भारत के सिद्धपीठ गणेश मंदिरों में आषाढ़ विनायक चतुर्थी को लेकर विशेष तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। टियर-2 और टियर-3 शहरों के स्थानीय बाजारों में बप्पा के प्रिय मोदक, दूर्वा घास और पूजा सामग्री की दुकानें सज गई हैं। डिजिटल और आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI Search) के इस दौर में लोग विनायक चतुर्थी की पूजा विधि और चंद्र दर्शन दोष से बचने के उपायों को तेजी से सर्च कर रहे हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया यह व्रत जीवन के सभी विघ्नों को हर लेता है।
हिंदू धर्म में सावन (Sawan Month) के महीने को बेहद पवित्र और चमत्कारी माना गया है। यह पूरा महीना देवों के देव महादेव को समर्पित होता है। ऐसी मान्यता है कि सावन के दौरान की गई पूजा-अर्चना से शिव जी अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। इसी कड़ी में ज्योतिष शास्त्र (Vedic Astrology) और वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसी विशेष चीजों का जिक्र किया गया है, जिन्हें सावन के महीने में घर लाने से दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। बहुत से लोग सवाल पूछते हैं कि क्या वाकई ये चीजें किस्मत के बंद दरवाजे खोल सकती हैं? आइए देश के जाने-माने ज्योतिषियों से जानते हैं कि वे कौन सी 6 चीजें हैं जिन्हें सावन में घर लाना सबसे ज्यादा लाभकारी माना जाता है।1. रुद्राक्ष और गंगाजल: भगवान शिव का साक्षात आशीर्वादज्योतिषियों के अनुसार, सावन के महीने में मूल रुद्राक्ष (Rudraksha) या रुद्राक्ष की माला घर लाना सबसे शुभ होता है। इसे घर के मुख्य कमरे में रखने या धारण करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और मानसिक शांति मिलती है। इसके साथ ही, सावन में पवित्र गंगाजल (Gangajal) घर लाकर पूजा स्थान पर रखना बेहद कल्याणकारी माना गया है। यदि घर में नियमित रूप से गंगाजल का छिड़काव किया जाए, तो वास्तु दोषों से मुक्ति मिलती है और घर में सकारात्मकता का प्रवाह बढ़ता है।2. चांदी का त्रिशूल और नाग-नागिन का जोड़ा: कालसर्प दोष से मुक्तिभगवान शिव के परम अस्त्र त्रिशूल को शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। सावन के महीने में चांदी का छोटा त्रिशूल (Silver Trishul) खरीदकर मंदिर में स्थापित करने से घर पर आने वाले संकट टल जाते हैं। वहीं, ज्योतिष शास्त्र में यह भी बताया गया है कि जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष या राहु-केतु की महादशा चल रही है, उन्हें सावन में चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा घर लाकर भगवान शिव को अर्पित करना चाहिए या तिजोरी में रखना चाहिए, इससे धन लाभ के योग बनते हैं।3. भस्म और डमरू: सुख-समृद्धि और मानसिक क्लेश से राहतमहादेव को भस्म (Bhasma) अत्यंत प्रिय है। सावन में शिव मंदिर से भस्म लाकर उसे घर के मंदिर में रखना बेहद चमत्कारी माना जाता है। इसे माथे पर लगाने से भाग्य उदय होता है। इसके साथ ही, डमरू की ध्वनि से घर की समस्त नकारात्मक शक्तियां और बीमारियां दूर भागती हैं। ज्योतिषियों का कहना है कि सावन में डमरू (Damru) घर लाकर बच्चों के कमरे या पूजा घर में रखने से मानसिक क्लेश खत्म होता है और बच्चों का मन पढ़ाई में एकाग्र होता है।देश के प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्यों का मत: सावन का महीना केवल व्रत और उपवास का नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा को अपने अनुकूल करने का समय है। ज्योतिष शास्त्र में वर्णित ये 6 चीजें कोई साधारण वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि ये सीधे तौर पर महादेव की ऊर्जा से जुड़ी हैं। इन्हें सही विधि से सावन के किसी भी सोमवार या शुभ मुहूर्त में घर स्थापित करने से घर का आभामंडल (Aura) बदल जाता है, जिससे रुकी हुई तरक्की और आर्थिक तंगी से हमेशा के लिए राहत मिलती है।स्थानीय स्तर पर सावन मेलों और टियर-2, टियर-3 शहरों में खरीदारी का क्रेजजियोपॉलिटिकल और स्थानीय सांस्कृतिक (Geographical Traditional Centers) दृष्टिकोण से देखें तो उत्तर प्रदेश के वाराणसी, मेरठ, लखनऊ और बिहार के पटना व सुल्तानगंज जैसे प्रमुख धार्मिक केंद्रों के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों के स्थानीय बाजारों में इन पूजा सामग्रियों की मांग तेजी से बढ़ गई है। आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI Search) और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लोग लगातार सावन के अचूक उपायों को सर्च कर रहे हैं। स्थानीय पंडितों का कहना है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ इन नियमों का पालन करने से सावन में हर भक्त की मनोकामना अवश्य पूरी होती है।
सनातन धर्म और हिंदू पूजा पद्धति में मंत्रों के जाप का विशेष महत्व माना गया है। चाहे भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र हो या फिर महामृत्युंजय और गायत्री मंत्र, किसी भी देवी-देवता की आराधना के लिए जब भक्त माला हाथ में लेते हैं, तो उसमें दानों की संख्या हमेशा 108 (108 Beads in Mala) ही होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह संख्या न कम होती है और न ज्यादा? आखिर 108 अंक में ऐसा क्या खास है जो इसे इतना पवित्र और अचूक माना गया है? इसके पीछे केवल कोई एक धार्मिक मान्यता नहीं है, बल्कि हमारे पूज्य संतों, ज्योतिषियों और प्राचीन वैज्ञानिकों ने इसके पीछे बेहद गहरा खगोलीय और आध्यात्मिक गणित छिपा रखा है।ज्योतिष और नक्षत्रों का अद्भुत गणित: 108 अंक से जुड़ा है आपका भाग्यभारतीय वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) के अनुसार, संपूर्ण ब्रह्मांड को 27 नक्षत्रों में विभाजित किया गया है। इन 27 नक्षत्रों के चार मुख्य चरण होते हैं, जिन्हें पद कहा जाता है। यदि हम इस खगोलीय व्यवस्था का गणितीय गुणा करें, तो $27 imes 4$ का कुल योग ठीक 108 आता है। इसके अलावा, ज्योतिष शास्त्र में 12 राशियां और 9 मुख्य ग्रह माने गए हैं। जब इन ग्रहों का राशियों के साथ संबंध देखा जाता है, तो $12 imes 9$ का परिणाम भी 108 ही प्राप्त होता है। यही वजह है कि जब कोई श्रद्धालु 108 दानों की माला फेरता है, तो वह अनजाने में ही पूरे ब्रह्मांड के चक्कर लगा लेता है और सभी ग्रहों व नक्षत्रों को अपने अनुकूल कर लेता है।सूर्य और पृथ्वी की दूरी का वैज्ञानिक रहस्य: क्या कहते हैं खगोलविद?प्राचीन भारतीय विज्ञान और आधुनिक खगोल शास्त्र का बड़ा विश्लेषण: जाप माला के 108 दानों का सीधा संबंध हमारे सौरमंडल के राजा सूर्य देव से है। खगोलीय गणनाओं के अनुसार, सूर्य का व्यास (Diameter) और पृथ्वी से सूर्य की दूरी के बीच का अनुपात लगभग 108 गुना है। ठीक इसी तरह, पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी भी चंद्रमा के व्यास की करीब 108 गुना है। हमारे ऋषियों-मुनियों को हजारों साल पहले इस ब्रह्मांडीय दूरी का सटीक ज्ञान था। इसलिए उन्होंने ईश्वर से जुड़ने के लिए और शरीर चक्रों को जाग्रत करने के लिए 108 की संख्या को सबसे अचूक माध्यम बनाया।हिंदू शास्त्रों के अनुसार, एक स्वस्थ मनुष्य दिन और रात मिलाकर 24 घंटों में कुल 21,600 बार सांस लेता है। इसमें से 12 घंटे सोने और अन्य कार्यों में निकल जाते हैं, बचे 12 घंटों में मनुष्य 10,800 बार सांस लेता है। इसी संख्या के अंतिम दो शून्यों को हटाकर 108 मनकों की माला तैयार की गई है, ताकि भक्त का हर एक जाप उसकी सांसों के साथ सीधे ईश्वर तक पहुंच सके।क्या है माला का 'सुमेरु' और क्यों इसे लांघना माना जाता है वर्जित?यदि आपने कभी ध्यान दिया हो, तो 108 दानों के अलावा माला के शीर्ष पर एक बड़ा दाना अलग से लगा होता है, जिसे 'सुमेरु' (Sumeru Bead) कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जब भी मंत्रों का जाप किया जाता है, तो सुमेरु को कभी भी लांघा नहीं जाता। 108 मनके पूरे होने के बाद वहीं से माला को पलट लिया जाता है। सुमेरु को ब्रह्मांड के केंद्र और ईश्वर का प्रतीक माना गया है। टियर-2 और टियर-3 शहरों से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचलों के मंदिरों में जब पंडित भक्तों को दीक्षा देते हैं, तो वे इस नियम को सबसे अनिवार्य बताते हैं ताकि आध्यात्मिक ऊर्जा शरीर के भीतर ही संचित रहे। इस अद्भुत व्यवस्था से साफ है कि हमारी सनातनी परंपरा का एक-एक नियम विज्ञान की कसौटी पर पूरी तरह खरा उतरता है।
क्या युवाओं का डिग्री से मोहभंग हो गया? पहली बार घटा UG कॉलेजों में एडमिशन; हैरान कर देगी वजह!
भारत में हर साल लाखों युवा कॉलेज लाइफ और एक अदद अदभुत करियर का सपना लेकर ग्रेजुएशन (UG) में एडमिशन लेते हैं। लेकिन हाल ही में आए सरकारी आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण
मध्य प्रदेश: दतिया में जुलूस, सभा और प्रदर्शन पर रोक, शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा-163 लागू
मध्य प्रदेश के दतिया जिले में होने वाले विधानसभा के उपचुनाव के मद्देनजर जिला प्रशासन ने दतिया अनुभाग में कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा-163 लागू कर दी है। यहां जुलूस, सभा और प्रदर्शन आदि पर रोक लगा दी गई है। इसके लिए प्रशासन की अनुमति आवश्यक होगी।
ओरी ने दिखाई अंशुला की शादी की इनसाइड झलक, पुंगी सॉन्ग पर पूरे कपूर खानदान ने मचाया गदर!
बॉलीवुड के सबसे प्रतिष्ठित और चहेते परिवारों में से एक, कपूर खानदान से इस वक्त की बेहद खूबसूरत और बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। बोनी कपूर की लाडली और अभिनेता अर्जुन कपूर की सगी बहन अंशुला कपूर (Anshula Kapoor) शादी के पवित्र बंधन में बंध चुकी हैं। इस ग्रैंड वेडिंग की आधिकारिक तस्वीरें आने से पहले ही, बॉलीवुड के मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और सेलेब्रिटीज के चहेते दोस्त ओरी (Orry) ने शादी के जश्न की कुछ ऐसी धमाकेदार इनसाइड तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर लीक कर दिए हैं, जिसने इंटरनेट का तापमान बढ़ा दिया है। शादी के संगीत और रिसेप्शन पार्टी में पूरे कपूर खानदान ने ऐसा गदर मचाया है कि उसके वीडियो लगातार वायरल हो रहे हैं।संगीत सेरेमनी में फूटा मनोरंजन का बम: अर्जुन, जान्हवी और खुशी का धमाकेदार डांसअंशुला कपूर की शादी के इस जश्न में बॉलीवुड के तमाम बड़े सितारे और पूरा कपूर परिवार एक छत के नीचे नजर आया। ओरी द्वारा शेयर किए गए इनसाइड वीडियो में शादी की सबसे बड़ी हाइलाइट तब देखने को मिली जब मंच पर 'पुंगी' (Pungi Song) गाना बजा। इस गाने की धुन सुनते ही दूल्हा-दुल्हन के साथ-साथ भाई अर्जुन कपूर, बहनें जान्हवी कपूर, खुशी कपूर और शनाया कपूर ने स्टेज पर मोर्चा संभाल लिया। सभी भाई-बहनों ने मिलकर इस फुट-टैपिंग नंबर पर ऐसा एनर्जेटिक डांस किया कि वहां मौजूद मेहमान भी खुद को झूमने से नहीं रोक पाए। बोनी कपूर भी अपनी बेटी की शादी की खुशी में बेहद भावुक और खुश नजर आए।ओरी के कैमरों में कैद हुईं अनदेखी झलकियां, एथनिक लुक में सजे सितारेबॉलीवुड फैशन और वेडिंग ट्रेंड्स के इनसाइडर एक्सपर्ट्स का बड़ा दावा: अंशुला कपूर की इस शादी ने साल 2026 के नए वेडिंग गोल्स सेट कर दिए हैं। जहां अंशुला अपने ब्राइडल लहंगे में बेहद खूबसूरत और रॉयल लग रही थीं, वहीं जान्हवी और खुशी कपूर के पेस्टल कलर के डिजाइनर लहंगों ने महफिल लूट ली। ओरी ने जिस तरह से इस प्राइवेट फैमिली वेडिंग के मजेदार और अनफिल्टर्ड मोमेंट्स को फैन्स के सामने पेश किया है, उसने इस शादी को गूगल डिस्कवर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर टॉप ट्रेंडिंग टॉपिक बना दिया है। कपूर खानदान का यह पारिवारिक जुड़ाव हमेशा फैन्स का दिल जीत लेता है।समारोह के दौरान ओरी को हमेशा की तरह अपने सिग्नेचर पोज में न्यूलीमैरिड कपल और पूरी स्टार कास्ट के साथ तस्वीरें क्लिक कराते हुए देखा गया।स्थानीय स्तर पर बॉलीवुड फैन्स और सोशल मीडिया पर शादी की भारी चर्चाजियोपॉलिटिकल और स्थानीय एंटरटेनमेंट हब्स (Geographical Entertainment Trends) के नजरिए से देखें तो देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों जैसे लखनऊ, इंदौर, पटना, जयपुर और अहमदाबाद के युवाओं के बीच इस हाई-प्रोफाइल शादी को लेकर भारी क्रेज देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया ग्रुप्स पर अंशुला के वेडिंग आउटफिट्स और अर्जुन-जान्हवी के डांस मूव्स की रील्स लगातार शेयर की जा रही हैं। लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि इस ग्रैंड वेडिंग में कौन-कौन से वीआईपी मेहमान शामिल हुए थे। एआई और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के दौर में, ओरी द्वारा लीक की गई इनसाइड वीडियो क्लिप्स ने इस शाही शादी के रोमांच को दोगुना कर दिया है।
बॉलीवुड के 'मिस्टर परफेक्टनिस्ट' यानी आमिर खान (Aamir Khan) एक बार फिर अपनी पर्सनल लाइफ और अपनी एक बेहद खास विदेशी यात्रा को लेकर जबरदस्त सुर्खियों में आ गए हैं। सोशल मीडिया और सिनेमा गलियारों में इस वक्त एक बेहद सनसनीखेज खबर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि 60 वर्ष की उम्र में आमिर खान अपनी करीबी दोस्त गौरी संग ऑस्ट्रेलिया में अपना हनीमून मनाने की प्लानिंग कर रहे हैं। इतना ही नहीं, इस खबर को तब और ज्यादा हवा मिल गई जब यह बात सामने आई कि इस ट्रिप पर आमिर के साथ उनके दोनों बेटे जुनैद खान और आजाद राव खान भी साथ रहने वाले हैं और इसके लिए उन्होंने बाकायदा मेलबर्न की टिकटें भी बुक करा ली हैं। आइए जानते हैं कि इस वायरल दावे के पीछे की असली इनसाइड स्टोरी क्या है।हनीमून या कुछ और? जानिए क्यों कटवाई गई है ऑस्ट्रेलिया (IFFM) की टिकटइस पूरे मामले की जब गहराई से पड़ताल की गई, तो पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही निकल कर सामने आई। दरअसल, यह पूरी यात्रा कोई गुपचुप हनीमून ट्रिप नहीं, बल्कि एक बेहद प्रतिष्ठित सिनेमाई इवेंट का हिस्सा है। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित होने वाले 'इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न' (IFFM) में आमिर खान को एक विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। आमिर खान अपनी आगामी फिल्मों और सिनेमाई प्रोजेक्ट्स के सिलसिले में इस इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर शामिल होने जा रहे हैं। रही बात दोनों बेटों के साथ जाने की, तो आमिर अक्सर अपने पारिवारिक दौरों और खास मौकों पर बच्चों को साथ रखना पसंद करते हैं, जिसे सोशल मीडिया पर 'हनीमून' का भ्रामक नाम देकर वायरल किया जा रहा है।कौन हैं गौरी और क्या है आमिर खान के साथ उनके रिश्ते का पूरा सच?बॉलीवुड और मनोरंजन जगत के वरिष्ठ इनसाइडर विश्लेषकों का कहना है: इंटरनेट पर किसी भी सेलिब्रिटी की दोस्ती या उनके साथ दिखने वाले चेहरों को तुरंत शादी या रिलेशनशिप से जोड़कर पेश कर दिया जाता है। आमिर खान और गौरी के बीच का रिश्ता विशुद्ध रूप से पेशेवर और एक अच्छी दोस्ती का है। आमिर खान इन दिनों अपनी अगली फिल्मों के प्रोडक्शन और क्रिएटिव आइडियाज पर काम कर रहे हैं, और इसी सिलसिले में उनकी टीम और करीबी लोग उनके साथ ट्रैवल कर रहे हैं। 60 की उम्र में शादी या हनीमून की ये अफवाहें सिर्फ और सिर्फ सोशल मीडिया पर क्लिकबेट बटोरने का एक जरिया हैं।आमिर खान ने हमेशा अपनी निजी जिंदगी को लेकर बेहद सधे हुए और स्पष्ट बयान दिए हैं, इसलिए फैन्स को ऐसी किसी भी उड़ती हुई खबर पर बिना आधिकारिक पुष्टि के भरोसा नहीं करना चाहिए।सोशल मीडिया पर फैन्स के बीच मची खलबली, टियर-2 और टियर-3 शहरों में चर्चा तेजजियोपॉलिटिकल और स्थानीय एंटरटेनमेंट हब्स (Geographical Entertainment Trends) के लिहाज से देखें तो बॉलीवुड की खबरों को लेकर देश के छोटे कस्बों और टियर-2, टियर-3 शहरों में बहुत ज्यादा उत्सुकता रहती है। यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान के स्थानीय सोशल मीडिया ग्रुप्स पर आमिर खान की इस कथित ट्रिप को लेकर फैन्स के बीच लगातार बहस छिड़ी हुई है। कुछ लोग जहां उनके इस कूल अंदाज की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कई यूजर्स इसे सिर्फ सिनेमाई पब्लिसिटी स्टंट मान रहे हैं। सच तो यह है कि आमिर खान फिलहाल अपनी फिल्मों और अपने बेटों के करियर को संवारने में पूरी तरह व्यस्त हैं और मेलबर्न की यह यात्रा पूरी तरह से प्रोफेशनल और सिनेमा को समर्पित है।
देशभर के तकनीकी शिक्षा संस्थानों और इंजीनियरिंग कॉलेजों में इस साल एडमिशन का एक बेहद चौंकाने वाला और नया ट्रेंड सामने आया है। कभी कोर ब्रांचेज मानी जाने वाली सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल के दबदबे को पीछे छोड़ते हुए एक खास इंजीनियरिंग स्ट्रीम छात्रों की पहली और सबसे पसंदीदा पसंद बन चुकी है। देश की प्रमुख टेक्निकल यूनिवर्सिटीज और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) से लेकर स्थानीय स्तर के निजी कॉलेजों में होने वाले दाखिलों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो यह साफ हो गया है कि हर 10 में से 4 स्टूडेंट्स केवल इसी एक फील्ड में एडमिशन ले रहे हैं। इस बंपर मांग की वजह से कॉलेजों में इस सीट को पाने के लिए मारामारी और कड़ी प्रतिस्पर्धा का माहौल बन गया है।कंप्यूटर साइंस और एआई (AI) का नया दौर: क्यों दीवाने हो रहे हैं स्टूडेंट्स?तकनीकी विशेषज्ञों और करियर काउंसिलर्स के अनुसार, कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (Computer Science Engineering) और इसके आधुनिक स्पेशलाइजेशन जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) और डेटा साइंस ने इस समय पूरे एजुकेशन मार्केट पर कब्जा कर लिया है। आज के आधुनिक दौर में जिस तेजी से जेनरेटिव एआई और ऑटोमेशन की तकनीक आगे बढ़ रही है, उसे देखते हुए 40 प्रतिशत से अधिक छात्र अपना सुरक्षित भविष्य इसी सेक्टर में देख रहे हैं। यही वजह है कि काउंसलिंग के पहले ही राउंड में कंप्यूटर साइंस की सीटें पूरी तरह से फुल हो जाती हैं।बंपर प्लेसमेंट और हाई-पेइंग सैलरी पैकेज हैं सबसे बड़ा आकर्षणशिक्षा जगत और आईटी इंडस्ट्री के दिग्गजों का मानना है: छात्रों का इस ब्रांच की तरफ झुकाव होना बेहद स्वाभाविक है। वर्तमान ग्लोबल मार्केट में सबसे ज्यादा और हाई-पेइंग नौकरियां आईटी (IT) और टेक कंपनियों में ही निकल रही हैं। दूसरे कोर इंजीनियरिंग क्षेत्रों की तुलना में कंप्यूटर साइंस के फ्रेशर्स को शुरुआती पैकेज काफी शानदार मिलता है। इसके अलावा, वर्क फ्रॉम होम (WFH) की सुविधा और ग्लोबल एक्सपोजर की वजह से भी टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवा इसे अपनी पहली प्राथमिकता बना रहे हैं।मांग को देखते हुए कई बड़ी यूनिवर्सिटीज ने अपने यहां ट्रेडिशनल कोर्सेज की सीटें कम करके एआई और डेटा साइंस के नए सेक्शंस शुरू कर दिए हैं।स्थानीय इंजीनियरिंग कॉलेजों और राज्यों की काउंसलिंग पर भी पड़ा गहरा असरजियोपॉलिटिकल और स्थानीय (Geographical Education Hubs) स्तर की बात करें तो उत्तर प्रदेश के एकेटीयू (AKTU), दिल्ली के आईपी यूनिवर्सिटी (IPU), कर्नाटक के कॉमेडके (COMEDK) और महाराष्ट्र के एमएचटी-सीईटी (MHT-CET) जैसे प्रमुख स्टेट काउंसलिंग बोर्ड्स में भी यही ट्रेंड मजबूती से देखा जा रहा है। स्थानीय स्तर पर लखनऊ, नोएडा, बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद जैसे टेक-हब्स के आस-पास स्थित कॉलेजों में इस कंप्यूटर साइंस और एआई ब्रांच के कट-ऑफ ऐतिहासिक रूप से ऊंचे चले गए हैं। जानकारों की सलाह है कि छात्रों को केवल भेड़चाल में शामिल होने के बजाय कोडिंग में अपनी वास्तविक रुचि और एप्टीट्यूड को परख कर ही इस कोर या स्पेशलाइज्ड फील्ड का चयन करना चाहिए।
भारत में नीट (NEET), पेपर लीक और भर्ती घोटालों से छात्र परेशान हैं, वहीं एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। जानिए क्यों मोदी सरकार के बड़े-बड़े मंत्रियों के बच्चे ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड जैसे विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं और इस पर क्या ...
NDA की बैठक में नीतीश कुमार का भावुक संदेश, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को लेकर दे दिया यह बड़ा संकेत
बिहार की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। पटना में आयोजित एनडीए (NDA) की एक हाई-प्रोफाइल और बेहद महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने तमाम सहयोगियों के सामने एक बड़ा और भावुक संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने और उनकी सरकार ने बहुत ही मुश्किल परिस्थितियों से लड़कर आज बिहार को इस मुकाम तक पहुंचाया है और इसे संवारा है। इस बैठक की सबसे खास बात नीतीश कुमार का वह अंदाज रहा, जिसमें उन्होंने उप-मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी को लेकर एक बेहद गहरा राजनीतिक संकेत दे दिया। इस बयान के बाद बिहार के सियासी गलियारों में भविष्य के नेतृत्व को लेकर कयासों का दौर तेज हो गया है।एनडीए बैठक में नीतीश कुमार का 'मिशन बिहार' और एकजुटता का संकल्पबैठक के भीतर मौजूद वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सभी घटक दलों को एकजुट रहने का मंत्र दिया। उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि बिहार को विकास की पटरी पर लाने के लिए एनडीए सरकार ने दिन-रात एक किया है। उनके इस बयान को आगामी चुनावों और गठबंधन के भीतर आंतरिक सामंजस्य मजबूत करने के तौर पर देखा जा रहा है। नीतीश कुमार ने सहयोगियों को आश्वस्त किया कि बिहार की प्रगति की रफ्तार को किसी भी कीमत पर रुकने नहीं दिया जाएगा, और इसके लिए सभी दलों को जमीनी स्तर पर मिलकर काम करना होगा।डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की तरफ इशारा: नए सियासी समीकरण की आहट?बिहार की राजनीति के वरिष्ठ विश्लेषकों का मानना है: इस बैठक में नीतीश कुमार ने जिस तरह से सम्राट चौधरी की भूमिका की सराहना की और उनकी तरफ सकारात्मक संकेत किए, वह बिहार एनडीए के भविष्य की राजनीति की एक नई तस्वीर दिखाता है। नीतीश कुमार का यह रुख यह साफ करता है कि गठबंधन के भीतर अब भाजपा और जेडीयू के बीच नेतृत्व और रणनीतियों को लेकर एक बहुत ही परिपक्व और मजबूत समझ बन चुकी है। सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाना भाजपा और जेडीयू के पारंपरिक वोट बैंक को जोड़े रखने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।नीतीश के इस रवैये ने विपक्षी दलों के उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें एनडीए के भीतर किसी भी प्रकार की खींचतान की बात कही जा रही थी।स्थानीय स्तर पर बिहार के वोटर्स और जिलों की राजनीति पर क्या होगा असर?इस बड़े संदेश का असर केवल पटना के राजनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं रहने वाला है। बिहार के मगध, मिथिलांचल और सीमांचल जैसे स्थानीय क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं में इस बैठक के बाद भारी उत्साह देखा जा रहा है। स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति देने और कानून व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए नीतीश-सम्राट की यह जोड़ी अब नए सिरे से जमीन पर उतरने की तैयारी में है। जमीनी कार्यकर्ताओं को संदेश मिल चुका है कि शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह एकजुट है, जिससे अब टियर-2 और टियर-3 शहरों में चल रही सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग और तेज की जाएगी।
विमानन इतिहास से एक बेहद हैरान और विचलित कर देने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया के एविएशन सेक्टर को हिलाकर रख दिया है। एक ही दिन के भीतर एक ही एयरलाइन कंपनी के दो विमान भीषण हादसों का शिकार हो गए हैं। इस दोहरे विमान हादसे (Double Plane Crash) में कम से कम 10 लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। एक ही एयरलाइन के साथ लगातार हुए इन दो बड़े हादसों ने यात्रियों की सुरक्षा और विमानों के रखरखाव पर बहुत बड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।कुछ ही घंटों के अंतराल पर दो विमानों ने तोड़ा दम, सुरक्षा तंत्र पर उठे सवालशुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, पहला हादसा उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद तकनीकी खराबी के कारण हुआ, जहां विमान अनियंत्रित होकर क्रैश हो गया। अभी राहत और बचाव दल पहले हादसे की जगह पर तफ्तीश कर ही रहा था कि कुछ ही घंटों के भीतर उसी एयरलाइन के दूसरे विमान के भी क्रैश होने की डरावनी खबर आ गई। इस दोहरे झटके से न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा एजेंसियां भी हैरान हैं। एक्सपर्ट्स इस बात की गहनता से जांच कर रहे हैं कि क्या यह किसी गंभीर तकनीकी खराबी का नतीजा था, मौसम की खराबी थी या फिर एयरलाइन प्रबंधन की कोई बड़ी लापरवाही।युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, ब्लैक बॉक्स की तलाश तेजस्थानीय आपदा प्रबंधन और एविएशन एक्सपर्ट्स का कहना है: किसी एक एयरलाइन के दो विमानों का एक ही दिन क्रैश होना बेहद दुर्लभ और खतरनाक घटना है। दोनों दुर्घटना स्थलों पर स्थानीय प्रशासन और रेस्क्यू टीमों को युद्ध स्तर पर तैनात किया गया है। मलबे से शवों और घायलों को निकालने का काम जारी है। हमारा पूरा ध्यान अब दोनों विमानों के ब्लैक बॉक्स (Black Box) को ढूंढने पर है, क्योंकि उसी से साफ हो पाएगा कि आसमान में उन आखिरी पलों में वास्तव में क्या हुआ था।हादसे के बाद संबंधित एयरलाइन ने अपनी सभी मौजूदा उड़ानों को अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया है और यात्रियों की सुरक्षा के लिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।दुनिया भर के हवाई यात्रियों में खौफ का माहौल, स्थानीय एयरपोर्ट्स पर अलर्टइस भयानक खबर के बाद से दुनिया भर के हवाई यात्रियों और स्थानीय एयरपोर्ट्स पर सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। भारत सहित विभिन्न देशों के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियां भी इस घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। स्थानीय स्तर पर यात्रा करने वाले कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर इस एयरलाइन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े सवाल उठाए हैं। इस हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि एविएशन सेक्टर में सुरक्षा मानकों के साथ थोड़ी सी भी अनदेखी कितनी बड़ी इंसानी तबाही का कारण बन सकती है।
प्रशांत क्षेत्र में भारत की कूटनीति को एक नई और ऐतिहासिक उड़ान मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड के ऑकलैंड की सफल आधिकारिक यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को एक अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। इस बेहद महत्वपूर्ण दौरे के दौरान भारत और न्यूजीलैंड के बीच एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 18 द्विपक्षीय समझौतों (Bilateral Agreements) पर मुहर लगी है। इसके साथ ही, वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कद को स्वीकार करते हुए न्यूजीलैंड ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे को अपना खुला और मजबूत समर्थन दे दिया है। इस यात्रा को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के भू-राजनीतिक समीकरणों को बदलने वाला माना जा रहा है।व्यापार से लेकर तकनीक तक: इन 18 समझौतों से कैसे बदलेगी दोनों देशों की तकदीरभारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए ये 18 समझौते केवल कागजी कार्रवाई नहीं हैं, बल्कि इनमें दोनों देशों के भविष्य का रोडमैप छिपा है। इन समझौतों में मुख्य रूप से मुक्त व्यापार को बढ़ावा देने, डिजिटल कॉमर्स, कृषि तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) और दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क (Direct Flights) को आसान बनाने जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। न्यूजीलैंड की अत्याधुनिक डेयरी और कृषि तकनीक का फायदा अब सीधे भारतीय किसानों को मिल सकेगा। वहीं, भारत के तेजी से बढ़ते आईटी और फिनटेक सेक्टर्स के लिए न्यूजीलैंड के बाजार के दरवाजे पूरी तरह से खुल गए हैं।संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में न्यूजीलैंड का समर्थन भारत के लिए क्यों है खासअंतरराष्ट्रीय कूटनीति के विशेषज्ञों का मानना है: UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए न्यूजीलैंड का नया और स्पष्ट सपोर्ट मिलना भारत की बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत है। चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति व स्थिरता बनाए रखने के लिए न्यूजीलैंड अब भारत को एक अपरिहार्य और मजबूत वैश्विक साझेदार के रूप में देख रहा है। यह समर्थन आने वाले समय में वैश्विक मंचों पर भारत की आवाज को और अधिक वजनदार बनाएगा।इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर भी गहरी प्रतिबद्धता जताई है।स्थानीय स्तर पर प्रवासियों और छात्रों के लिए खुले सुनहरे अवसरइस ऐतिहासिक यात्रा का एक सबसे बड़ा और व्यावहारिक फायदा न्यूजीलैंड में रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों (Diaspora) और वहां पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों को मिलने वाला है। समझौतों के तहत दोनों देशों ने शिक्षा और वर्क वीजा की प्रक्रियाओं को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने पर सहमति जताई है। इसके अलावा, भारत के विभिन्न राज्यों से हर साल न्यूजीलैंड जाने वाले पर्यटकों और व्यापारियों के लिए यात्रा के नियमों को लचीला बनाया जाएगा। ऑकलैंड में भारतीय समुदाय के बीच पीएम मोदी के इस दौरे को लेकर भारी उत्साह देखा गया, जिसका सीधा सकारात्मक असर भारत में मौजूद उनके पैतृक गांवों और शहरों (Geographical Connect) के आर्थिक विकास पर भी पड़ेगा।
वैश्विक राजनीति और मिडिल ईस्ट के अशांत माहौल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बेहद आक्रामक और बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने साफ शब्दों में ईरान के सामने एक ऐसी शर्त रख दी है, जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी बातचीत या समझौते से पहले तेहरान को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग यानी 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए हमेशा खुला रखने का खुला और आधिकारिक ऐलान करना होगा। ट्रंप के मुताबिक, इस कदम के बिना ईरान की किसी भी बात पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं किया जा सकता।आखिर क्यों पूरी दुनिया के लिए इतना खास है होर्मुज जलडमरूमध्य?रणनीतिक और आर्थिक रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया की 'आर्थिक लाइफलाइन' माना जाता है। वैश्विक स्तर पर कुल तेल व्यापार का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान अक्सर अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ तनाव बढ़ने पर इस जलमार्ग को बंद करने या व्यापारिक जहाजों को जब्त करने की धमकी देता रहा है। ट्रंप अच्छी तरह जानते हैं कि अगर इस रास्ते में थोड़ी सी भी रुकावट आती है, तो पूरी दुनिया में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिसका सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक बाजारों पर पड़ेगा। यही वजह है कि उन्होंने इसे अपनी सबसे पहली और बड़ी शर्त बनाया है।ट्रंप की 'मैक्सिमम प्रेशर' नीति की वापसी और ईरान की घेराबंदीवैश्विक कूटनीति के जानकारों का कहना है: डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान उनकी पुरानी 'मैक्सिमम प्रेशर' (अधिकतम दबाव) वाली रणनीति का हिस्सा है। वह ईरान पर आर्थिक और रणनीतिक रूप से इतना दबाव बना देना चाहते हैं कि उसे बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर होना पड़े। होर्मुज को खोलने की शर्त रखकर ट्रंप ने न केवल अमेरिकी हितों की रक्षा की है, बल्कि दुनिया के अन्य बड़े तेल आयातक देशों को भी अपने पाले में लाने का दांव खेला है।ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान जब तक अपनी आक्रामक नीतियों और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं दी जानी चाहिए।भारत समेत स्थानीय और वैश्विक बाजारों पर क्या होगा इसका असर?इस पूरे घटनाक्रम पर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों की भी पैनी नजर बनी हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करता है, और ये सभी जहाज होर्मुज के रास्ते से ही भारत के स्थानीय बंदरगाहों तक पहुंचते हैं। अगर ट्रंप के इस दबाव के बाद ईरान झुकता है और होर्मुज जलमार्ग को सुरक्षित घोषित करता है, तो इससे भारत के तेल आयात की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ट्रंप की इस सीधी चुनौती और कड़ी शर्त पर ईरान के सर्वोच्च नेता और सरकार की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है।
वैश्विक डिफेंस और जियोपॉलिटिक्स के मंच से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। रूस का सबसे घातक और अचूक माना जाने वाला S-400 ट्रायम्फ मिसाइल डिफेंस सिस्टम (S-400 Missile System) इस समय दो अलग-अलग देशों के लिए बिल्कुल अलग कहानी लिख रहा है। एक तरफ जहां यह अत्याधुनिक सिस्टम भारत की सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक अभेद्य और मजबूत ढाल बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ तुर्की (Turkey) के लिए यह एक बड़ा सिरदर्द और अंतरराष्ट्रीय बवाल का कारण बन चुका है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन अब इस सिस्टम को किसी तीसरे देश को बेचने या इससे पीछा छुड़ाने के रास्ते तलाश रहे हैं, लेकिन इस पूरे सौदे की चाबी अब भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हाथों में है।तुर्की के लिए क्यों गले की फांस बन गया रूस का यह महाविनाशक सिस्टम?तुर्की ने जब अमेरिका के कड़े विरोध और प्रतिबंधों की धमकियों को दरकिनार कर रूस से S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदा था, तो इसे एर्दोगन का एक बड़ा और स्वतंत्र रणनीतिक कदम माना गया था। लेकिन इस एक फैसले की तुर्की को बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ी। अमेरिका ने न केवल तुर्की पर सख्त 'काट्सा' (CAATSA) प्रतिबंध लगाए, बल्कि उसे अपने सबसे आधुनिक F-35 स्टील्थ फाइटर जेट प्रोग्राम से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके चलते तुर्की की वायुसेना को आधुनिक लड़ाकू विमानों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। अब अपनी खोई हुई सैन्य ताकत और अमेरिका के साथ रिश्तों को सुधारने के लिए तुर्की इस रूसी सिस्टम को किसी तरह ठिकाने लगाना चाहता है, जिससे वह F-35 प्रोग्राम में दोबारा एंट्री पा सके।भारत का S-400 और तुर्की का सौदा: दोनों में क्या है बुनियादी अंतर?जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट्स और रक्षा मामलों के विश्लेषकों का मानना है कि भारत और तुर्की के मामलों में जमीन-आसमान का अंतर है। भारत ने अपनी संप्रभुता और सीमाओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए रूस के साथ यह डील की थी और अमेरिकी दबाव के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया था। भारतीय वायुसेना (IAF) ने S-400 के स्क्वाड्रनों को चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर इस तरह तैनात किया है कि दुश्मन का कोई भी विमान या मिसाइल भारत की हवाई सीमा में घुसने की हिम्मत नहीं कर सकता। भारत के लिए यह रक्षा का सबसे बड़ा हथियार है, जबकि तुर्की के लिए यह केवल एक राजनीतिक और आर्थिक बोझ बनकर रह गया है।डिफेंस एक्सपर्ट्स का बड़ा दावा: तुर्की चाहकर भी S-400 को इतनी आसानी से किसी तीसरे देश को नहीं बेच सकता। रूस के साथ हुए मूल समझौते में एंड-यूज़र सर्टिफिकेट (End-User Certificate) की सख्त शर्तें शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि मॉस्को यानी व्लादिमीर पुतिन की लिखित अनुमति के बिना तुर्की इस सिस्टम के एक नट-बोल्ट को भी किसी को ट्रांसफर नहीं कर सकता। पुतिन इस समय पूरी तरह से ड्राइविंग सीट पर हैं और वह अमेरिका को फायदा पहुंचाने वाला कोई भी कदम आसानी से नहीं उठाने देंगे।वैश्विक रक्षा बाजार और भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी पर इसका असरइस पूरे घटनाक्रम का असर केवल तुर्की तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के रक्षा बाजार और भारत-रूस के मजबूत रणनीतिक रिश्तों की गवाही देता है। दुनिया के रक्षा जानकार अब भारत की उस कूटनीतिक जीत की तारीफ कर रहे हैं, जिसके तहत भारत ने रूस से हथियार भी खरीदे और अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को भी प्रभावित नहीं होने दिया। तुर्की की इस छटपटाहट और पुतिन के कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक मिलिट्री डील्स में केवल पैसा ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी कूटनीति और मजबूत वैश्विक साख की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
हिंदू धर्म और वैदिक पंचांग में अमावस्या तिथि का एक विशेष और बेहद पवित्र स्थान है. इस तिथि को मुख्य रूप से देवी-देवताओं की आराधना, पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण व श्राद्ध कर्म के लिए सबसे उत्तम माना जाता है. हर महीने आने वाली अमावस्या का अपना एक अलग धार्मिक महत्व होता है, लेकिन आषाढ़ मास में आने वाली अमावस्या (Ashadha Amavasya) को सुख-समृद्धि, पुण्य प्राप्ति और पितृ दोषों से मुक्ति के लिए बेहद खास माना गया है.साल 2026 में आषाढ़ अमावस्या की सही तारीख को लेकर आम जनता और व्रतियों के बीच थोड़ा भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि यह 13 जुलाई को है या 14 जुलाई को. आइए पंचांग के गणित के अनुसार जानते हैं इसकी सही तारीख, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजा विधि.13 या 14 जुलाई? जानें क्या कहती है उदया तिथिपंचांग की गणना के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की शुरुआत 13 जुलाई 2026, सोमवार को शाम 6 बजकर 49 मिनट पर होने जा रही है. इस तिथि का समापन अगले दिन 14 जुलाई 2026, मंगलवार को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर होगा.तारीख का निर्णय: सनातन धर्म के नियमों के अनुसार, किसी भी व्रत, त्योहार या अमावस्या जैसे पर्व का निर्धारण 'उदया तिथि' (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) के आधार पर किया जाता है. चूंकि 14 जुलाई को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि पूरी तरह से व्याप्त रहेगी, इसलिए आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई 2026, मंगलवार को ही मनाई जाएगी. इसी दिन व्रत रखना, पवित्र नदियों में स्नान करना, दान देना और पितृ तर्पण करना शास्त्र सम्मत और महाकल्याणकारी रहेगा.स्नान-दान और तर्पण का सबसे शुभ मुहूर्त14 जुलाई 2026 को आषाढ़ अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से ठीक पहले) में उठकर स्नान करना सर्वोत्तम माना गया है.घर पर स्नान का नियम: यदि आप किसी पवित्र नदी (जैसे गंगा, यमुना या नर्मदा) के तट पर जाने में असमर्थ हैं, तो घर पर ही नहाने के सामान्य पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं.तर्पण का समय: सूर्योदय होने के बाद से लेकर दोपहर के समय तक का काल पितृ तर्पण, श्राद्ध कर्म और दान-पुण्य के लिए सबसे शुभ और फलदायी माना जाता है.आषाढ़ अमावस्या की सरल और प्रामाणिक पूजा विधिइस पावन दिन पर पुण्य लाभ कमाने के लिए सुबह से लेकर शाम तक इस विधि से पूजा-अर्चना करें:प्रातः काल नियम: सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान करें और साफ-स्वच्छ वस्त्र (यदि संभव हो तो सफेद या पीले रंग के) धारण करें.सूर्य अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और फूल डालकर भगवान सूर्य नारायण को जल अर्पित (अर्घ्य) करें.देव आराधना: घर के मंदिर या पूजा स्थल में बैठकर जगत के पालनहार भगवान विष्णु, धन की देवी माता लक्ष्मी और न्याय के देवता शनिदेव की विधि-विधान से धूप-दीप जलाकर पूजा करें.पीपल पूजा: इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है. पीपल में त्रिदोषों और पितरों का वास माना गया है.पितृ तर्पण: अपने पूर्वजों (पितरों) को याद करते हुए हाथ में काले तिल, जौ और जल लेकर तर्पण करें और उनसे परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करें.दान प्रक्रिया: पूजा संपन्न होने के बाद अपनी क्षमता के अनुसार किसी गरीब, ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न और वस्त्र आदरपूर्वक दान करें.इस दिन क्या करना रहेगा बेहद शुभ?भगवान विष्णु के महामंत्रों का जाप करें और धार्मिक ग्रंथों (जैसे भगवद्गीता) का पाठ करें.किसी स्थानीय गौशाला में जाकर गायों को हरा चारा, लापसी या भोजन खिलाएं.चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा और मछलियों को आटे की गोलियां खिलाना भी इस दिन विशेष फल देता है.अमावस्या पर दान का विशेष महत्व और राशियांधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या तिथि पर किया गया छोटा सा दान भी कई गुना होकर वापस लौटता है. इस दिन काले तिल, गेहूं, चावल, कपड़े, छाता, जल से भरा मिट्टी का पात्र और सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा का दान करना सबसे उत्तम माना गया है. ऐसा करने से न केवल पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं, बल्कि घर की दरिद्रता भी हमेशा के लिए दूर हो जाती है.इस अमावस्या का गहरा आध्यात्मिक महत्वआषाढ़ अमावस्या का महत्व सिर्फ पितृ शांति तक ही सीमित नहीं है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की जन्म कुंडली में पितृ दोष या कालसर्प दोष होता है, उनके लिए इस दिन किया गया उपाय संजीवनी का काम करता है. इसके अतिरिक्त, मंगलवार के दिन यह अमावस्या पड़ने के कारण इसे 'भौमवती अमावस्या' का संयोग भी मिल रहा है. इस दिन शनिदेव की पूजा करने और काले तिल का दान करने से साढ़ेसाती और ढैय्या जैसी शनि संबंधी समस्याओं और कष्टों से भी जातकों को बड़ी राहत मिलती है.
भारतीय शेयर बाजार में आज सरकारी बैंकों (PSU Banks) के शेयरों ने जबरदस्त धूम मचा रखी है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा जारी किए गए शानदार तिमाही नतीजों और बंपर कमाई के आंकड़ों ने दलाल स्ट्रीट के समीकरण बदल दिए हैं। मुनाफे में आई इस भारी उछाल की खबर आते ही निवेशकों ने बैंकिंग शेयरों पर भरोसा जताया है, जिससे सरकारी बैंकिंग इंडेक्स में बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। इस पूरे एक्शन में इंडियन बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र सबसे बड़े विनर बनकर उभरे हैं और इनके शेयरों में सबसे तगड़ी लिफ्टिंग देखने को मिल रही है।इंडियन बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र के शेयरों में तेजी की असली वजहबाजार खुलने के साथ ही इंडियन बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र के काउंटर्स पर खरीदारों की भारी भीड़ देखी गई। इस जबरदस्त तेजी के पीछे बैंकों का मजबूत फंडामेंटल और वित्तीय प्रदर्शन है। दोनों ही बैंकों ने अपने फंसे हुए कर्ज यानी एनपीए (NPA) को कम करने में बड़ी सफलता हासिल की है। इसके साथ ही, लोन बुक में आई मजबूती और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में सुधार होने से बैंकों का शुद्ध मुनाफा उम्मीद से कहीं ज्यादा रहा है। इसी बंपर कमाई ने निवेशकों को इन शेयरों की आक्रामक खरीदारी करने के लिए प्रेरित किया है।क्रेडिट ग्रोथ और ग्रामीण भारत से मिल रहा है सरकारी बैंकों को बूस्टबैंकिंग सेक्टर के विशेषज्ञों का विश्लेषण: भारतीय अर्थव्यवस्था में जारी मजबूत रिकवरी का सीधा फायदा सरकारी बैंकों को मिल रहा है। विशेषकर टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण इलाकों (Geographical Demand) में लोन की मांग तेजी से बढ़ी है। होम लोन, ऑटो लोन और एमएसएमई (MSME) सेक्टर को दिए गए कर्ज में हुई बढ़ोतरी ने बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ को ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचा दिया है, जिससे इनकी कमाई में यह बंपर उछाल दिख रहा है।लंबे समय तक निजी बैंकों से पीछे रहने के बाद, अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अपनी डिजिटल बैंकिंग सेवाओं और बेहतर कस्टमर रीच के दम पर मार्केट शेयर वापस हासिल कर रहे हैं।रिटेल निवेशकों और स्थानीय बाजार के लिए आगे क्या हैं कमाई के मौके?स्थानीय शेयर बाजारों और ब्रोकिंग फर्म्स के अनुसार, इस तेजी ने रिटेल निवेशकों (Retail Investors) का हौसला काफी बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि सरकारी बैंकों में आई यह तेजी केवल शॉर्ट-टर्म सेंटीमेंट नहीं है, बल्कि यह इनके बदलते कामकाज का नतीजा है। जो निवेशक बैंकिंग सेक्टर में लॉन्ग-टर्म के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन दौर साबित हो सकता है। हालांकि, बाजार के ऊंचे स्तरों को देखते हुए जानकारों ने सलाह दी है कि किसी भी बड़ी गिरावट पर धीरे-धीरे (Averaging) इन शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में जोड़ना एक स्मार्ट रणनीति होगी।
गिरते बाजार में भी इन म्यूचुअल फंड्स ने मचाया धमाल! लार्जकैप की रफ्तार पड़ी सुस्त, निवेशकों की चांदी
भारतीय शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और गिरावट के जोखिम के बीच म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए एक बेहद चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया है। आम तौर पर सुरक्षित माने जाने वाले लार्जकैप फंड्स (Large Cap Funds) इस बदलते दौर में सुस्त नजर आ रहे हैं। इसके विपरीत, बाजार के उतार-चढ़ाव को मात देते हुए मिडकैप (Mid Cap) और स्मॉलकैप (Small Cap) फंडों ने रिटर्न के मामले में बाजी मार ली है। इस प्रदर्शन ने रिटेल निवेशकों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है कि मौजूदा समय में निवेश के लिए सबसे सही रणनीतिक विकल्प कौन सा है।लार्जकैप फंड्स की सुस्ती के पीछे क्या है असली वजह?बाजार के जानकारों का कहना है कि दिग्गज और बड़ी कंपनियों (Large Cap Companies) के शेयरों में हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का सीधा असर देखने को मिला है। चूंकि लार्जकैप फंड्स का मुख्य निवेश इन्हीं फ्रंटलाइन कंपनियों में होता है, इसलिए बाजार की गिरावट के दौरान इनका प्रदर्शन काफी हद तक थमा हुआ या सुस्त नजर आ रहा है। बड़े फंड मैनेजरों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक दबाव और वैल्यूएशन के ऊंचे स्तर पर होने की वजह से बड़ी कंपनियां शॉर्ट-टर्म में उस गति से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं, जिसकी उम्मीद निवेशक कर रहे थे।मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों ने कैसे पलटी बाजी?दूसरी तरफ, घरेलू सेक्टर्स में मजबूत डिमांड और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों (Local Economic Factors) के दम पर मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों ने शानदार रिकवरी दिखाई है। मिडकैप और स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड्स ने इसी तेजी का पूरा फायदा उठाया है। इन फंड्स ने न केवल गिरते बाजार के जोखिम को बेहतर तरीके से मैनेज किया, बल्कि आक्रामक ग्रोथ चाहने वाले निवेशकों को उम्मीद से कहीं बेहतर रिटर्न कमा कर दिया है। यही वजह है कि सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए इन कैटेगरीज में लगातार रिकॉर्ड निवेश आ रहा है।बाजार विशेषज्ञों की राय: गिरते बाजार में लार्जकैप फंड्स पोर्टफोलियो को स्थिरता जरूर देते हैं, लेकिन अगर आप अल्फा (Alpha) यानी बेंचमार्क से ज्यादा रिटर्न कमाना चाहते हैं, तो मौजूदा चक्र में मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स ज्यादा मजबूत नजर आ रहे हैं। हालांकि, निवेशकों को अपने जोखिम लेने की क्षमता (Risk Appetite) को ध्यान में रखकर ही एसेट एलोकेशन करना चाहिए।स्थानीय और खुदरा निवेशकों के लिए आगे क्या है रणनीति?लोकल मार्केट सेंटिमेंट की बात करें तो भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों से आने वाले नए और खुदरा निवेशक (Retail Investors) अब काफी समझदार हो चुके हैं। वे बाजार की हर गिरावट को एक अवसर के रूप में देख रहे हैं। फाइनेंशियल एडवाइजर्स की सलाह है कि बाजार के इस सुस्त दौर में निवेशकों को एकमुश्त (Lumpsum) बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए। इसके बजाय, मिड और स्मॉलकैप फंड्स में अपनी एसआईपी को जारी रखना या गिरावट के समय स्मॉलकैप में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाना एक स्मार्ट और फायदेमंद लॉन्ग-टर्म रणनीति साबित हो सकती है।
विदेश घूमने की चाहत रखने वालों के लिए इंडोनेशिया का 'बाली' (Bali) सबसे पसंदीदा और खूबसूरत डेस्टिनेशन बन चुका है. अक्सर लोगों को लगता है कि इंटरनेशनल ट्रिप पर लाखों रुपये का खर्च आएगा, लेकिन बाली में भारतीय रुपये की मजबूत कीमत होने के कारण आप बेहद कम बजट में एक शानदार इंटरनेशनल वेकेशन एन्जॉय कर सकते हैं. अगर सही प्लानिंग की जाए, तो दो लोगों की बाली ट्रिप ₹1,00,000 के अंदर आसानी से पूरी हो सकती है. आइए जानते हैं कि टिकट बुकिंग, होटल, वीजा और खाने-पीने से जुड़े हर खर्चे का पूरा सटीक हिसाब-किताब क्या है.1. फ्लाइट बुकिंग (सबसे बड़ा खर्च): ₹45,000 से ₹70,000बाली ट्रिप का सबसे बड़ा हिस्सा फ्लाइट टिकटों में जाता है. बजट को कंट्रोल में रखने के लिए आपको कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा:एडवांस प्लानिंग: बाली जाने के लिए कम से कम 2 महीने पहले ही फ्लाइट की बुकिंग कर लें.अनुमानित किराया: सामान्य दिनों में दो लोगों के लिए राउंड ट्रिप (आने-जाने का टिकट) का कुल खर्च करीब ₹45,000 आता है. हालांकि, पीक सीजन या ऐन वक्त पर बुकिंग करने पर यह बजट ₹70,000 तक भी जा सकता है.डिस्काउंट टिप्स: एयरलाइंस की फ्लैश सेल या क्रेडिट कार्ड डिस्काउंट का इस्तेमाल करके आप इस खर्च को और कम कर सकते हैं.2. वीजा ऑन अराइवल (Visa on Arrival): ₹5,200 से ₹5,600भारतीय पर्यटकों के लिए बाली सबसे बेस्ट इसलिए है क्योंकि यहां वीजा ऑन अराइवल की बेहतरीन सुविधा मिलती है.अवधि: भारतीय नागरिक इस वीजा पर बाली में 30 दिनों तक घूम सकते हैं.लागत: प्रति व्यक्ति वीजा फीस 500,000 इंडोनेशियाई रुपिया (IDR) है.भारतीय मुद्रा में: चूंकि 1 भारतीय रुपये की कीमत इंडोनेशिया में करीब 188 IDR के बराबर होती है, इस लिहाज से दो लोगों के वीजा का कुल खर्च ₹5,200 से ₹5,600 के बीच बैठता है.3. होटल और रुकने का खर्च: ₹15,000 से ₹24,000बाली में हर बजट के यात्रियों के लिए रुकने के बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं:बजट/होस्टल्स: अगर आप सोलो ट्रैवलर हैं या बेहद कम बजट में घूमना चाहते हैं, तो यहां के होस्टल्स में मात्र ₹500 प्रति दिन के हिसाब से बेड मिल जाता है.3-स्टार होटल्स: कपल्स या परिवार के लिए कुटा (Kuta), लेगियान (Legian) या उबूद (Ubud) जैसे पॉपुलर इलाकों में एक अच्छा 3-स्टार होटल ₹2,500 से ₹4,000 प्रति रात के बीच आसानी से मिल जाता है.6 दिनों का कुल खर्च: अगर ₹4,000 प्रति रात के हिसाब से भी चलें, तो 6 दिनों के स्टे का कुल खर्च अधिकतम ₹24,000 तक आएगा.4. खाना-पीना: ₹10,000 से ₹15,000बाली अपने स्वादिष्ट और वैरायटी फूड्स के लिए जाना जाता है, जो काफी किफायती दामों पर मिल जाता है.डेली फूड बजट: दो लोगों के लिए एक दिन के बेसिक खाने-पीने का खर्च करीब ₹800 से ₹1,200 आता है.कुल खर्च: 6 दिनों के हिसाब से भोजन पर आपका कुल खर्च ₹10,000 से ₹15,000 के बीच रहेगा.खास बात: बाली में कई अच्छे भारतीय रेस्टोरेंट्स (Indian Restaurants) भी मौजूद हैं, जहां लोकल वॉरुंग्स (स्थानीय ढाबों) की तरह काफी किफायती दामों पर शुद्ध देसी खाना मिल जाता है.5. लोकल ट्रांसपोर्टेशन (घूमने का खर्च): ₹3,000 से ₹5,000बाली के खूबसूरत बीच और रास्तों को एक्सप्लोर करने के दो सबसे बेहतरीन तरीके हैं:स्कूटी रेंटल (가장 लोकप्रिय): बाली में घूमने के लिए आप मात्र ₹350 से ₹700 प्रति दिन के किराए पर स्कूटी ले सकते हैं, जो बजट ट्रिप के लिए सबसे बेस्ट है.पर्सनल कैब: अगर आप आरामदेह सफर चाहते हैं और कार या कैब बुक करते हैं, तो प्रतिदिन का खर्च ₹3,000 से ₹4,500 तक आ सकता है.6. साइटसीइंग और एक्टिविटीज (Sightseeing & Activities)बाली एक प्राकृतिक और सांस्कृतिक डेस्टिनेशन है. यहां के अधिकांश प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों की एंट्री फीस बेहद कम है. आप अपनी पसंद के अनुसार निम्नलिखित एक्टिविटीज चुन सकते हैं, हालांकि ध्यान रहे कि ज्यादा एक्टिविटीज करने से आपका बजट थोड़ा बढ़ सकता है:नुसा पेनिटा डे ट्रिप (Nusa Penida Day Trip)वॉटर स्पोर्ट्स (Water Sports)प्रसिद्ध बाली स्विंग (Bali Swing)माउंट बटूर सनराइज ट्रेक (Mount Batur Sunrise Trek)
बीजेपी के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा का दतिया से टिकट कटने और उसके बाद उनके समर्थकों के जमकर बवाल के बाद अब पहली बार नरोत्तम मिश्रा का रिएक्शन सामने आया है। डबरा में मीडिया से बात करते हुए नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि यह पार्टी का निर्णय है। वहीं ...
शिमला के संजौली में तड़के 4 बजे भूस्खलन; मलबे की चपेट में आईं कई इमारतें, लोगों में दहशत
राजधानी शिमला के संजौली कॉलेज के समीप स्थित बोथवेल क्षेत्र में शनिवार तड़के हुए भारी भूस्खलन से इलाके में दहशत फैल गई। सुबह करीब चार बजे हुए इस भूस्खलन के समय अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन तीन-चार रिहायशी मकानों पर खतरा मंडरा रहा है।
E-20 पेट्रोल पर पीछे नहीं हटेगी सरकार, निवेश, किसानों और ऊर्जा सुरक्षा का दिया हवाला
सरकार ने पहली बार यह स्वीकार किया है कि ई-20 पेट्रोल के उपयोग से कुछ वाहनों का माइलेज लगभग पांच प्रतिशत तक कम हो सकता है। हालांकि मंत्रालय का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और उत्पादन लागत को देखते हुए ई-20 की कीमत घटाना फिलहाल संभव नहीं है।
मानसून ट्रफ के उत्तर की ओर खिसकने से उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश कम होगी, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और बंगाल में अगले कुछ दिनों तक अच्छी वर्षा की संभावना है।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक निर्माणाधीन मॉल से 7 वर्षीय बच्ची का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। शक के आधार पर पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है और लगातार पूछताछ की जा रही है।
क्या 1600 और 140 सीरीज से आने वाले कॉल्स हैं फेक? सरकार ने जारी की एडवाइजरी
1600 और 140 सीरीज के फोन नंबरों को लेकर सामने आ रही कुछ मीडिया रिपोर्ट्स पर केंद्र सरकार ने शुक्रवार को स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने कहा कि इन रिपोर्ट्स से लोगों में गलतफहमी फैल सकती है और इन नंबरों के इस्तेमाल को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है।
तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में एक व्यक्ति पर दो परिवारों के छह सदस्यों की हत्या का आरोप है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश तेज कर दी है।
AI का नया कारनामा! मास्को में दो ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने की शादी, रोबोट डॉग लाया ब्रेस्लेट्स
रूस की राजधानी मास्को में पुश्किन लाइब्रेरी में AI आधारित दो ह्यूमनॉइड रोबोट रॉबर्ट और मटिल्डा का अनोखा विवाह समारोह आयोजित हुआ। दोनों ने AI डायलॉग के जरिए शपथ ली, ब्रेसलेट बदले और आधिकारिक तौर पर 'रोबोट कपल' घोषित किए गए।
LIVE: स्टील्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि नौसेना में शामिल
Latest News Today Live Updates in Hindi : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े में छठे प्रोजेक्ट 17ए स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि को शामिल किया। पल पल की जानकारी...
गुजरात राज्य परीक्षा बोर्ड ने TAT-HS (Teacher Aptitude Test-Higher Secondary) 2026 की मुख्य परीक्षा की तारीख घोषित कर दी है। परीक्षा 2 अगस्त को आयोजित होगी। जल्द ही एडमिट कार्ड, परीक्षा केंद्र और अन्य महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए जाएंगे।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में एक नया स्वर्णिम इतिहास रच दिया है. इंग्लैंड के खिलाफ लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स (Lord's) मैदान पर खेले जा रहे इकलौते टेस्ट मैच में कप्तानी कर रही हरमनप्रीत ने अपनी शानदार बल्लेबाजी के दम पर भारत की दो महान महिला क्रिकेटरों—मिताली राज और स्मृति मंधाना के एक बेहद खास और एलीट क्लब में अपनी जगह पक्की कर ली है. मैच के पहले ही दिन नंबर 5 पर बल्लेबाजी करने उतरीं कप्तान हरमनप्रीत ने 121 गेंदों में 58 रनों की जुझारू पारी खेली.स्मृति मंधाना के साथ जमाई धाकड़ पार्टनरशिप, जड़े 7 कड़क चौकेलॉर्ड्स की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भारतीय पारी को संभालते हुए हरमनप्रीत कौर ने अपनी पारी के दौरान 7 बेहतरीन चौके जड़े. उन्होंने टीम की उप-कप्तान स्मृति मंधाना के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए 155 गेंदों में 89 रनों की एक बेहद महत्वपूर्ण और सूझबूझ भरी साझेदारी (Partnership) की. इस मजबूत पार्टनरशिप की बदौलत भारतीय टीम मैच के पहले दिन इंग्लैंड के खिलाफ एक सम्मानजनक स्थिति में पहुंचने में कामयाब रही. स्मृति मंधाना ने भी इस दौरान 108 गेंदों में 83 रनों की शानदार पारी खेली.इंटरनेशनल क्रिकेट में 9000 रन पूरे, बनीं ऐसा करने वाली तीसरी भारतीय महिलाइस ऐतिहासिक टेस्ट मैच के शुरू होने से पहले हरमनप्रीत कौर को इंटरनेशनल क्रिकेट में अपने 9000 रन पूरे करने के लिए सिर्फ 13 रनों की दरकार थी. भारत की पारी के 24वें ओवर की पांचवीं गेंद पर जैसे ही उन्होंने अपना 13वां रन लिया, उन्होंने इस जादुई आंकड़े को छू लिया. 7 मार्च 2009 को पाकिस्तान के खिलाफ वनडे मैच से अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत करने वाली हरमनप्रीत अब पूर्व कप्तान मिताली राज और स्मृति मंधाना के बाद महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में 9000 रन का आंकड़ा पार करने वाली भारत की तीसरी और दुनिया की चुनिंदा बल्लेबाजों में शुमार हो गई हैं.महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली भारतीय त्रिमूर्ति:मिताली राज: 10,868 रन (333 मैच)स्मृति मंधाना: 10,667 रनहरमनप्रीत कौर: 9,045* रनहरमनप्रीत का शानदार करियर रिकॉर्ड: महिला क्रिकेट इतिहास में सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का रिकॉर्ड रखने वाली हरमनप्रीत कौर ने अब तक 164 वनडे (ODI) मैचों में 4541 रन, 202 टी20 (T20I) मैचों में 4216 रन और आठ टेस्ट मैचों की 12 पारियों में कुल 288* रन बनाए हैं. खेल के हर फॉर्मेट में उनका यह लाजवाब प्रदर्शन उन्हें विश्व क्रिकेट के सबसे महान ऑलराउंडर्स की फेहरिस्त में खड़ा करता है.
भारतीय सिनेमा जगत में किसी भी फिल्म को बड़े पर्दे पर रिलीज होने से पहले केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी सेंसर बोर्ड (CBFC) के कड़े नियमों, जांच और रेगुलेशन के दौर से गुजरना अनिवार्य होता है. इसके बिना किसी भी फिल्म को सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने की अनुमति कानूनी रूप से नहीं मिलती. सेंसर बोर्ड (CBFC) के आधिकारिक सदस्य राज मिश्रा ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में साफ किया कि बिना उचित सर्टिफिकेशन के फिल्म को पब्लिक डोमेन में रिलीज करना एक बेहद गंभीर और दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि बोर्ड फिल्मों की स्क्रीनिंग और नियमों को लेकर पूरी तरह सख्त है और उल्लंघन करने वालों पर भारी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.प्रसून जोशी संभाल रहे हैं कमान, MIB तय करता है सेंसर बोर्ड का स्ट्रक्चरराज मिश्रा ने सेंसर बोर्ड की आंतरिक कार्यप्रणाली और इसके संगठनात्मक ढांचे (Organizational Structure) पर विस्तार से बात की. उन्होंने बताया कि:अध्यक्ष की नियुक्ति: सेंसर बोर्ड के पूरे कामकाज की देखरेख के लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) द्वारा बोर्ड के अध्यक्ष (Chairman) की नियुक्ति की जाती है. वर्तमान में इस गरिमामयी पद की जिम्मेदारी मशहूर गीतकार और लेखक प्रसून जोशी संभाल रहे हैं.कमेटी का आकार: बोर्ड की मुख्य जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि समाज में दिखाई जाने वाली फिल्में देश की संप्रभुता और तय गाइडलाइंस के अनुकूल हों. इस बोर्ड में अध्यक्ष के अलावा 25 अन्य गैर-सरकारी सदस्य शामिल होते हैं, जो फिल्मों का निष्पक्ष मूल्यांकन करते हैं.क्या है 'A' और 'UA' सर्टिफिकेट का असली मतलब?फिल्मों को मिलने वाली श्रेणियों को लेकर दर्शकों और मेकर्स के बीच अक्सर भ्रम रहता है, जिसे राज मिश्रा ने स्पष्ट किया:'A' (Adult) सर्टिफिकेशन: यह श्रेणी केवल 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वयस्कों के लिए होती है. जिन फिल्मों में अत्यधिक बोल्ड, इंटीमेट सीन्स या जरूरत से ज्यादा खून-खराबा और वीभत्स हिंसा (Crime & Violence) दिखाई जाती है, उन्हें दर्शकों की मानसिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस कैटेगरी में डाला जाता है.'UA' (Unrestricted Public Exhibition Under Parental Guidance) सर्टिफिकेशन: इसका सीधा मतलब है कि फिल्म में बहुत कम या हल्की-फुल्की हिंसा/संवाद हैं, जिसे बच्चे अपने माता-पिता या परिवार के किसी बड़े सदस्य की देखरेख और मार्गदर्शन में आसानी से देख सकते हैं. यह बच्चों के मानसिक विकास की सुरक्षा के लिए एक तरह का 'सेफ्टी क्लॉज' है.फिल्म रिजेक्ट होने पर क्या करें मेकर्स? 11 सदस्यों की कमेटी और ट्रिब्यूनल का रास्ताइंटरव्यू के दौरान एक महत्वपूर्ण सवाल यह उठा कि यदि शुरुआत में पांच सदस्यों की प्राथमिक जांच कमेटी (Examining Committee) किसी फिल्म को पास करने से मना कर दे, तो फिल्ममेकर्स के पास क्या कानूनी विकल्प बचते हैं?री-एग्जामिनेशन प्रोसेस: मेकर्स के पास अपनी फिल्म को दोबारा जांच के लिए भेजने का पूरा वैधानिक अधिकार होता है. इस प्रक्रिया के तहत फिल्म को 11 सदस्यों की एक बड़ी 'री-एग्जामिनिंग कमेटी' के सामने दोबारा स्क्रीन किया जाता है.ट्रिब्यूनल का आखिरी रास्ता: यदि यह बड़ी कमेटी भी फिल्म में सुधारों से संतुष्ट नहीं होती और इसे पास करने से इनकार कर देती है, तो निर्माताओं के पास देश की राजधानी दिल्ली में मौजूद अपीलीय ट्रिब्यूनल (Tribunal) का दरवाजा खटखटाने का अंतिम विकल्प होता है. हालांकि, राज मिश्रा ने साफ किया कि व्यावहारिक रूप से ऐसे मामले बहुत ही दुर्लभ होते हैं जहां किसी फिल्म को हर स्तर पर पूरी तरह खारिज कर दिया जाए.क्रिएटिव आजादी का सम्मान, लेकिन राष्ट्र विरोधी कंटेंट पर नो-टॉलरेंसराज मिश्रा ने स्पष्ट किया कि आधुनिक दौर और समकालीन परिस्थितियों के हिसाब से सेंसर बोर्ड के नियमों में भी लचीलापन आया है. आज के समय में कहानी की मांग के अनुसार हल्की-फुल्की हिंसा या यथार्थवाद को स्वीकार कर लिया जाता है. लेकिन अगर फिल्म में बहुत ज्यादा घिनौने, समाज में नफरत फैलाने वाले या खौफनाक दृश्य हैं, तो बोर्ड को जनहित में दखल देना ही पड़ता है.अंत में, उन्होंने रचनात्मक स्वतंत्रता (Creative Freedom) पर बोलते हुए कहा कि फिल्ममेकर्स को पूरी आजादी मिलती है, लेकिन उसकी भी संवैधानिक सीमाएं तय हैं. कोई भी फिल्म देश विरोधी विचारों को बढ़ावा देने वाली, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाली या देश की नीतियों को नीचा दिखाने वाली नहीं होनी चाहिए. उन्होंने बोर्ड पर किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि CBFC पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ अपना काम करता है.
आज के डिजिटल युग में जब भी हमारे स्मार्टफोन की घंटी बजती है, हमारी नजरें सबसे पहले स्क्रीन पर जाती हैं. अगर वहां लाल रंग में 'Spam Call' लिखा दिखाई दे, तो हम बिना सोचे-समझे कॉल को काट देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि आपके फोन को कैसे पहले ही पता चल जाता है कि सामने वाली कॉल फ्रॉड या किसी टेलीमार्केटर की है? कौन तय करता है कि किस नंबर को स्पैम घोषित करना है? हाल ही में टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने केंद्र सरकार से Truecaller जैसे थर्ड-पार्टी ऐप्स पर लगाम लगाने के लिए सख्त अधिकारों की मांग की है, जिसने इस पूरे सिस्टम की प्राइवेसी और कार्यप्रणाली पर एक नई राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है.TRAI क्यों लेना चाहता है एक्शन और MeitY का क्या है रुख?भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने केंद्र सरकार से एक बेहद महत्वपूर्ण मांग की है. ट्राई चाहता है कि उसे Truecaller जैसी कॉलर आईडी (Caller ID) और कॉल मैनेजमेंट ऐप्स के खिलाफ सीधी कार्रवाई करने और उन पर जुर्माना लगाने का कानूनी अधिकार मिले. इसके लिए ट्राई ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को एक आधिकारिक पत्र लिखा है. मंत्रालय अब इस संवेदनशील मामले पर कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रहा है और दूरसंचार विभाग (DoT) के साथ मिलकर रूपरेखा तैयार कर रहा है. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो इन ऐप्स की मनमानी और डेटा हैंडलिंग पर कड़ी रोक लग सकती है.बैंकों की बढ़ी बड़ी चिंता: जरूरी कॉल्स भी हो रहे हैं ब्लॉकइस पूरे विवाद की मुख्य शुरुआत तब हुई जब देश के कई बड़े सरकारी और निजी बैंकों ने अपनी गंभीर परेशानी नियामक के सामने रखी. बैंकों का आरोप है कि ग्राहकों की सुरक्षा और सुविधा के लिए जारी किए गए उनके आधिकारिक और जरूरी नंबर्स (जैसे 140 और 1600 सीरीज वाले कॉल्स) को भी ये ऐप्स ऑटोमैटिकली स्पैम या ब्लॉक लिस्ट में दिखा देते हैं. इसके कारण:महत्वपूर्ण अलर्ट्स हो रहे मिस: ग्राहक अपने लोन की ईएमआई रिकवरी, बैंकिंग फ्रॉड या किसी संदिग्ध ट्रांजैक्शन से जुड़े जरूरी अलर्ट्स और वेरिफिकेशन कॉल्स को नहीं उठा पा रहे हैं.वित्तीय नुकसान: यह स्थिति बैंकों के बिजनेस और ग्राहकों की सुरक्षा दोनों के लिए एक बड़ा नुकसान साबित हो रही है.कैसे काम करता है Truecaller का स्पैम डिटेक्शन सिस्टम?Truecaller के आधिकारिक दावों के मुताबिक, उनका कॉल मैनेजमेंट सिस्टम मुख्य रूप से तीन स्तंभों पर काम करता है—पहला है व्यापक यूजर्स का लाइव फीडबैक (Crowdsourcing), दूसरा ऑटोमेटेड डिटेक्शन एल्गोरिदम और तीसरा उनका खुद का इन-हाउस डेटा एनालिसिस. जब एक ही नंबर को बहुत से लोग बार-बार स्पैम रिपोर्ट करते हैं, तो उस नंबर का स्पैम स्कोर (Spam Score) बढ़ जाता है और वह लाल रंग में दिखने लगता है. इसके अलावा, कंपनी कॉलिंग पैटर्न, कॉल की अवधि और कॉल की फ्रीक्वेंसी (आवृत्ति) को भी ट्रैक करती है. हालांकि, वैध कंपनियां अपने नंबर को व्हाइटलिस्ट कराने के लिए रिव्यू की मांग भी कर सकती हैं.Airtel का नेटवर्क लेवल दिमाग: बिना ऐप के एआई (AI) सुरक्षाभारती एयरटेल (Airtel) का स्पैम रोकने का तरीका इन थर्ड-पार्टी ऐप्स से बिल्कुल अलग और बेहद सुरक्षित है. एयरटेल अपने टेलीकॉम नेटवर्क के कोर लेयर के अंदर ही इन-बिल्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल करता है. यह एडवांस सिस्टम ग्राहकों के हैंडसेट तक कॉल पहुंचने से ठीक पहले ही मिलिसेकंड्स में उसकी पहचान कर लेता है.सुरक्षा का फायदा: इसके लिए ग्राहकों को अपने फोन में कोई भी असुरक्षित थर्ड-पार्टी ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होती. खास बात यह है कि एयरटेल का यह एआई सिस्टम कॉल या मैसेज के पर्सनल कंटेंट को कभी नहीं पढ़ता, बल्कि सिर्फ नेटवर्क डेटा और सिग्नलिंग पैटर्न के आधार पर फ्रॉड को पकड़ता है.Google का बिजनेस डेटा और इन-डिवाइस AI तकनीकएंड्रॉइड स्मार्टफोन्स में डिफॉल्ट रूप से मिलने वाला 'Google Phone App' भी स्पैम कॉल्स को रोकने में बेहद कारगर भूमिका निभाता है. गूगल अपने विशाल डेटाबेस में मौजूद वेरिफाइड पब्लिक बिजनेस लिस्टिंग्स से आने वाले नंबरों का तुरंत मिलान करता है. इसके साथ ही, गूगल ने अब पूरी तरह डिवाइस के अंदर ही प्रोसेस होने वाला एक नया 'AI स्कैम डिटेक्शन' (AI Scam Detection) फीचर पेश किया है. यह फीचर कॉल के दौरान बातचीत के पैटर्न और स्कैमर द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले संदिग्ध शब्दों को समझकर यूजर को तुरंत स्क्रीन पर अलर्ट कर देता है कि यह एक फ्रॉड कॉल हो सकती है.Jio का तरीका: जागरूकता और ऑफिशियल चैनल्स पर भरोसादूसरी तरफ, देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो (Reliance Jio) का नजरिया इस मामले में थोड़ा अलग है. जियो ने अभी तक एयरटेल की तरह कोई नेटवर्क-वाइड एआई फिल्टरिंग सिस्टम बड़े पैमाने पर लॉन्च नहीं किया है. जियो का मुख्य फोकस अपने ग्राहकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक बनाने पर है. जियो समय-समय पर अपने यूजर्स को आधिकारिक संदेशों के जरिए सलाह देता है कि वे कभी भी किसी कॉल पर अपनी संवेदनशील बैंकिंग डिटेल्स या ओटीपी शेयर न करें और किसी भी अनजान कॉल या ऑफर की सत्यता की जांच खुद संबंधित कंपनी के ऑफिशियल चैनल के माध्यम से ही करें.
भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही पांच मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज का पांचवां और आखिरी निर्णायक मुकाबला आज साउथेम्प्टन के ऐतिहासिक 'द रोज बाउल' मैदान पर खेला जाएगा. यह मैच भारतीय समयानुसार आज शाम 7:00 बजे से लाइव शुरू होगा. टीम इंडिया के लिए यह मुकाबला अपनी इज्जत और साख बचाने का आखिरी मौका है, क्योंकि पांच मैचों की इस सीरीज में भारतीय टीम पहले ही 3-0 से पिछड़कर सीरीज गंवा चुकी है (सीरीज का पहला मैच बारिश की भेंट चढ़ गया था). अब देखना यह है कि क्या कप्तान श्रेयस अय्यर साउथेम्प्टन में सांत्वना जीत दर्ज कर पाते हैं या नहीं.टीम इंडिया में बड़े बदलाव के संकेत: 3 फ्लॉप खिलाड़ी होंगे ड्रॉप!इंग्लैंड के मजबूत गढ़ में अपनी इज्जत बचाने के लिए भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर प्लेइंग इलेवन (Playing XI) में 3 बहुत बड़े और कड़े बदलाव करने का मन बना चुके हैं. लगातार खराब फॉर्म और लचर प्रदर्शन से जूझ रहे युवा ओपनर वैभव सूर्यवंशी, मिडिल ऑर्डर के बल्लेबाज तिलक वर्मा और ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर को आज के मुकाबले से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है. कप्तान इन तीनों की जगह टीम में नए और आक्रामक चेहरों को मौका देकर इंग्लैंड को चौंकाने की रणनीति बना रहे हैं.संजू सैमसन करेंगे ओपनिंग, ऐसा होगा भारत का नया बैटिंग ऑर्डरआज के मैच में भारतीय टीम एक बिल्कुल नए और आक्रामक टॉप ऑर्डर के साथ मैदान पर उतर सकती है:विस्फोटक ओपनिंग जोड़ी: लगातार फ्लॉप साबित हो रहे वैभव सूर्यवंशी (3 मैचों में महज 42 रन) को बाहर कर उनके स्थान पर ताबड़तोड़ विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन को अभिषेक शर्मा के साथ ओपनिंग की कमान सौंपी जा सकती है.मिडिल ऑर्डर: विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन नंबर-3 पर पारी को संभालेंगे, जबकि खुद कप्तान श्रेयस अय्यर नंबर-4 पर बल्लेबाजी की जिम्मेदारी लेंगे. पिछले 4 मैचों में फ्लॉप रहे तिलक वर्मा (13, 24*, 3, 11 रन) की जगह टीम में शिवम दुबे को नंबर-5 और घरेलू क्रिकेट के खूंखार लोअर-ऑर्डर फिनिशर सूर्यांश शेडगे को नंबर-6 पर ऑलराउंडर के तौर पर प्रमोट किया जा सकता है.गेंदबाजी में दिखेगा दम: बिश्नोई-अक्षर संभालेंगे स्पिन, अर्शदीप पर पेस अटैक का जिम्मासाउथेम्प्टन की पिच को ध्यान में रखते हुए भारतीय टीम मैनेजमेंट दो मुख्य स्पिनरों और तीन विशेषज्ञ तेज गेंदबाजों के कॉम्बिनेशन के साथ उतर सकता है. स्पिन विभाग की कमान स्टार लेग स्पिनर रवि बिश्नोई और अनुभवी ऑलराउंडर अक्षर पटेल के हाथों में होगी. वहीं, तेज गेंदबाजी के मोर्चे पर प्रिंस यादव, प्रसिद्ध कृष्णा और यॉर्कर किंग अर्शदीप सिंह इंग्लैंड के बल्लेबाजों की गिल्लियां बिखेरते नजर आएंगे. चौथे तेज गेंदबाज की भूमिका ऑलराउंडर शिवम दुबे निभाएंगे.इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें T20I के लिए भारत की संभावित Playing XI:अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन, श्रेयस अय्यर (कप्तान), शिवम दुबे, अक्षर पटेल, सूर्यांश शेडगे, रवि बिश्नोई, प्रिंस यादव, प्रसिद्ध कृष्णा और अर्शदीप सिंह.
क्या आपकी वॉशिंग मशीन भी आजकल पानी भरने में बहुत ज्यादा वक्त लगा रही है? या फिर उसमें पानी आना बिल्कुल ही बंद हो गया है? रुकिए, मैकेनिक को फोन घुमाने और बेवजह हजारों रुपये खर्च करने से पहले इस आसान से घरेलू तरीके को जान लीजिए. अक्सर लोग समझते हैं कि मशीन की मोटर या कोई महंगा इंटरनल पार्ट खराब हो गया है, लेकिन असल में समस्या एक बहुत ही छोटी सी जगह पर होती है, जिसे इनलेट वाटर फिल्टर (Inlet Water Filter) कहा जाता है. यह एक छोटी सी जाली होती है जो पानी की पाइप के जोड़ के पास लगी होती है. इसका काम आपके घर के पानी में आने वाली मिट्टी, जंग और कचरे को मशीन के अंदर जाने से रोकना है. जब यह ब्लॉक हो जाती है, तो मशीन में पानी आना बंद हो जाता है. आइए जानते हैं कि कैसे आप इसे खुद घर पर सिर्फ 10 मिनट में ठीक कर सकते हैं.मानसून के मौसम में क्यों जाम होती है यह जाली?बरसात के दिनों में नगर निगम या बोरवेल के पानी में मिट्टी, सिल्ट, रेत और जंग के कण सामान्य दिनों के मुकाबले बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं. जब यह गंदा पानी पाइप के रास्ते आपकी वॉशिंग मशीन में प्रवेश करता है, तो इनलेट फिल्टर इस सारे बारीक कचरे को रोक लेता है. लगातार कुछ हफ़्तों तक ऐसा होने से यह जाली पूरी तरह से चोक (जाम) हो जाती है. यही कारण है कि मानसून में मशीन पानी भरने में दोगुना समय लेती है या फिर बीच में ही 'वॉटर एरर कोड' (Water Error Code) दिखाकर रुक जाती है. अगर समय पर इसे साफ न किया जाए, तो पानी का प्रेशर कम होने के कारण कपड़ों की धुलाई भी ठीक से नहीं हो पाती.इनलेट वाटर फिल्टर साफ करने का स्टेप-बाय-स्टेप आसान तरीकाइसे साफ करना बेहद आसान है और इसके लिए आपको किसी विशेष टूल या तकनीकी ज्ञान की जरूरत नहीं है. बस नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें:सुरक्षा सबसे पहले: कोई भी काम शुरू करने से पहले सुरक्षा का ध्यान रखते हुए वॉशिंग मशीन का स्विच ऑफ करें और प्लग को सॉकेट से बाहर निकाल दें.पानी बंद करें: इसके बाद पानी की सप्लाई वाले मुख्य नल को पूरी तरह से बंद कर दें ताकि पाइप खोलते समय पानी घर में न फैले.पाइप को खोलें: अब मशीन के पिछले हिस्से में लगे इनलेट होज (पानी की प्लास्टिक पाइप) को थ्रेड से घुमाकर आराम से खोलें.फिल्टर को निकालें: पाइप हटाते ही आपको मशीन के अंदर एक छोटी प्लास्टिक या स्टील की रंगीन जाली दिखाई देगी. एक सामान्य प्लास (Pliers) या अपनी उंगलियों की मदद से इस फिल्टर को धीरे से बाहर खींच लें. आप देखेंगे कि इस पर भूरे रंग की मिट्टी की मोटी परत जमा होगी.ब्रश से करें सफाई: इस फिल्टर को बहते हुए साफ पानी के नीचे रखें. अगर कचरा ज्यादा पुराना और सख्त है, तो एक बेकार पड़े पुराने टूथब्रश की मदद से जाली को हल्के हाथों से रगड़कर साफ करें.वापस फिट करें: जब जाली बिल्कुल साफ हो जाए और उसके आर-पार रोशनी दिखने लगे, तो उसे वापस उसकी जगह पर सीधा फिट कर दें. पाइप को दोबारा मजबूती से कसें, नल चालू करके लीक टेस्ट करें और फिर मशीन का प्लग लगाकर इस्तेमाल करें.कितने दिनों में करनी चाहिए इस फिल्टर की सफाई?अगर मानसून का महीना चल रहा है या आपके इलाके में खारा/मटमैला पानी आता है, तो आपको हर 3 से 4 हफ्ते में एक बार इस फिल्टर को खोलकर जरूर साफ कर लेना चाहिए. साल के बाकी सामान्य महीनों में, हर 2 से 3 महीने में एक बार इसकी सफाई करना पर्याप्त रहता है. लेकिन अगर आपको कभी भी अचानक पानी का प्रेशर कम लगे या मशीन स्क्रीन पर एरर दिखाए, तो बिना देर किए तुरंत इस फिल्टर को साफ कर लें. ऐसा करने से आपकी महंगी मशीन की उम्र बढ़ेगी, बिजली की बचत होगी और कपड़े भी बिल्कुल साफ धुलेंगे.
दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा आलाकमान ने चौंकाते हुए पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। 2008 से लेकर 2023 तक दतिया विधानसभा सीट से लगातार 15 साल विधायक रहे भाजपा के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा जो ...
केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव, और दादरा और नगर हवेली से एक ऐसी चुनावी खबर सामने आ रही है जिसने पूरे राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है. भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के एक बड़े फैसले के बाद जारी हुई नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से अचानक लगभग 29.7% यानी करीब एक-तिहाई वोटर्स के नाम पूरी तरह साफ कर दिए गए हैं. भारतीय चुनावी इतिहास में ड्राफ्ट स्टेज पर इतनी बड़ी तादाद में नाम हटाए जाने का यह देश का अब तक का सबसे बड़ा और पहला मामला है.प्रवासी मजदूरों और औद्योगिक व्यवस्था के कारण आया यह चौंकाने वाला आंकड़ावोटर लिस्ट के इस स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की निगरानी कर रहे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने इस अप्रत्याशित आंकड़े के पीछे की मुख्य वजह इस केंद्र शासित प्रदेश की खास औद्योगिक अर्थव्यवस्था को बताया है.3 लाख प्रवासी आबादी: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे केंद्र शासित प्रदेश (UT) की कुल आबादी लगभग 6.8 लाख के आसपास है.लगातार बदलता है पता: इस आबादी में से करीब 3 लाख लोग बाहरी राज्यों से आकर यहां की विभिन्न कंपनियों और फैक्ट्रियों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर हैं. यह फ्लोटिंग पॉपुलेशन (अस्थायी आबादी) रोजगार और बेहतर अवसरों के चलते लगातार अपनी रहने की जगहें बदलती रहती है, जिससे सरकारी रिकॉर्ड में उनका मिलान मुश्किल हो जाता है.बीएलओ (BLO) के बार-बार चक्कर काटने पर भी नहीं मिले लोग, ये हैं नाम कटने के 5 बड़े कारणप्रशासन द्वारा जारी की गई आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, वोटर लिस्ट से इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने के पीछे अलग-अलग तकनीकी और व्यावहारिक कारण सामने आए हैं, जो इस प्रकार हैं:एब्सेंट/अनट्रेसेबल (22.5%): बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) ने जब लोगों के रजिस्टर्ड पतों पर कई बार फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए विजिट किया, तो ये लोग अपने दिए गए पते पर मौजूद नहीं मिले.परमानेंटली शिफ्टेड (4.6%): ये वे वोटर हैं जो नौकरी बदलने, ट्रांसफर होने या किसी अन्य निजी कारण से हमेशा के लिए यह केंद्र शासित प्रदेश छोड़ चुके हैं.मृत्यु (1.7%): जिन रजिस्टर्ड मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, उनके नामों को सूची से आधिकारिक तौर पर हटा दिया गया है.डुप्लिकेट वोटर (0.6%): ये वे लोग थे जिनका नाम एक से अधिक पोलिंग बूथ, विधानसभा क्षेत्र या अलग-अलग राज्यों की सूचियों में एक साथ दर्ज पाया गया.अन्य कारण (0.2%): कुछ अन्य फॉर्मल और तकनीकी कमियों के चलते इन नामों को बाहर किया गया है.घबराएं नहीं! 11 अगस्त को आएगी फाइनल वोटर लिस्ट, ऐसे जुड़वाएं अपना नामइस केंद्र शासित प्रदेश में कुल 4.28 लाख रजिस्टर्ड वोटर्स का डेटा था, जिनमें से केवल 3 लाख (70.3%) लोगों ने ही 4 जून को शुरू हुए वेरिफिकेशन ड्राइव के दौरान अपना एन्यूमरेशन फॉर्म (Enumeration Form) जमा किया था. जिन लोगों का कोई अता-पता या दस्तावेज नहीं मिला, फिलहाल केवल उनके नाम ही इस ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर किए गए हैं.सुधार का मौका: प्रशासन ने साफ किया है कि जनता को बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह अंतिम सूची नहीं है. जिन जायज वोटर्स के नाम इस लिस्ट से कट गए हैं, वे चुनाव आयोग द्वारा दिए गए 'दावे और आपत्ति' (Claims & Objections) के निर्धारित समय के भीतर अपने जरूरी दस्तावेज दिखाकर नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं. इसके साथ ही, नए पात्र मतदाता भी 'फॉर्म 6' (Form 6) भरकर अपना नाम दर्ज करा सकते हैं. इन सभी सुधारों और स्क्रूटनी के बाद, अंतिम और शुद्ध वोटर लिस्ट 11 अगस्त, 2026 को आधिकारिक रूप से प्रकाशित की जाएगी.
एप्पल (Apple) के दीवानों के लिए टेक जगत से एक बेहद सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आ रही है. कंपनी इस साल सितंबर में अपनी अगली जनरेशन के आईफोन्स को दुनिया के सामने पेश करने की भव्य तैयारी में जुटी हुई है. इस बार एप्पल की प्रीमियम लाइनअप में कुछ ऐसे क्रांतिकारी और चौंकाने वाले बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिनकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी. टेक मार्केट में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा एप्पल के पहले फोल्डेबल आईफोन को लेकर हो रही है, जिसे 'iPhone Ultra' नाम दिया जा सकता है. इसके साथ ही आईफोन 18 प्रो सीरीज में पहले से कहीं ज्यादा पावरफुल बैटरी और एक बिल्कुल नया लुक मिलने वाला है, हालांकि इन बेहतरीन अपग्रेड्स के लिए ग्राहकों को अपनी जेब काफी ढीली करनी पड़ेगी.महंगे कंपोनेंट्स के कारण कीमतों में होगी ₹16,500 तक की भारी बढ़ोतरी'काउंटरपॉइंट रिसर्च' (Counterpoint Research) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल के आने वाले फ्लैगशिप मॉडल्स को बनाने की लागत (Production Cost) पिछले वेरिएंट्स के मुकाबले काफी ज्यादा आ रही है:महंगे हुए पार्ट्स: अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाल के महीनों में NAND स्टोरेज और DRAM मेमोरी जैसे महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के दाम काफी बढ़ गए हैं.एडवांस 2nm प्रोसेसर: एप्पल का अगला इन-हाउस प्रोसेसर एडवांस 2nm प्रोसेस तकनीक पर आधारित होने वाला है, जिसकी मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बहुत अधिक है.वेरिएबल-अपर्चर कैमरा: प्रो मॉडल्स में इस बार बिल्कुल नया वेरिएबल-अपर्चर मेन कैमरा सिस्टम दिया जा सकता है, जो फोटोग्राफी को तो नेक्स्ट लेवल पर ले जाएगा लेकिन कैमरा हार्डवेयर को महंगा बना देगा.इन्हीं कारणों से एप्पल अपने कुछ प्रीमियम और हायर स्टोरेज वेरिएंट्स की कीमतों में $200 (लगभग ₹16,500) तक की बड़ी बढ़ोतरी कर सकता है.'iPhone Ultra' में मिलेगा डुअल-सेल बैटरी सेटअप, सैमसंग को मिलेगी टक्करइस बार की सबसे बड़ी लीक आईफोन अल्ट्रा की बैटरी को लेकर आई है. चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो (Weibo) पर मशहूर टिपस्टर 'डिजिटल चैट स्टेशन' ने खुलासा किया है कि एप्पल के एक प्रमुख बैटरी सप्लायर ने हाल ही में दो अलग-अलग बैटरी सेल्स को एक साथ सर्टिफाई कराया है. ऐसा डुअल-सेल (Dual-Cell) सेटअप आमतौर पर सिर्फ फोल्डेबल फोन्स में ही इस्तेमाल होता है क्योंकि वहां स्क्रीन को बीच से मोड़ा जाता है.रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों बैटरियों की क्षमता क्रमशः 1,921mAh और 2,962mAh है, जो मिलकर कुल 4,883mAh की रेटेड कैपेसिटी बनाती हैं. इसका साफ मतलब है कि लॉन्च के वक्त आईफोन अल्ट्रा की असली मार्केटेड क्षमता लगभग 5,000mAh के आसपास होने वाली है. यह बड़ा अपग्रेड सीधे तौर पर सैमसंग और गूगल के प्रीमियम फोल्डेबल फोंस को कड़ी टक्कर देगा.वजन में भारी होंगे प्रो मॉडल्स, ब्लैक कलर की हो सकती है छुट्टीबैटरी और कैमरे का यह बड़ा अपग्रेड सिर्फ अल्ट्रा मॉडल तक ही सीमित नहीं रहेगा. लीक्स के अनुसार, iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max में भी बैटरी लाइफ में काफी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा.हालांकि, इन भारी-भरकम बदलावों की वजह से इस साल के प्रो मॉडल्स पिछले वेरिएंट्स के मुकाबले काफी भारी हो सकते हैं, यहाँ तक कि प्रो मैक्स मॉडल का वजन 240 ग्राम के पार भी जा सकता है. बड़े कैमरा मॉड्यूल के कारण फोन की मोटाई भी थोड़ी बढ़ सकती है. रंगों (Colors) की बात करें तो इस बार प्रो मॉडल्स में से क्लासिक ब्लैक कलर को हटाया जा सकता है. एप्पल इसकी जगह डार्क चेरी, लाइट ब्लू और सिल्वर जैसे बेहद आकर्षक और नए शेड्स पर अपना पूरा फोकस कर रहा है. एप्पल के सितंबर में होने वाले मेगा इवेंट में इन सभी फीचर्स पर से आधिकारिक तौर पर पर्दा उठ जाएगा.
PM मोदी बोले- 9 महीने में हुआ भारत-न्यूजीलैंड FTA, 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को दोनों देशों के रिश्तों में ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। ऑकलैंड में उन्होंने 9 महीने में हुए इस समझौते, UPI सहयोग और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य साझा
सांप का नाम सुनते ही अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं, लेकिन चीन में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद जो खौफनाक नजारा देखने को मिला, उसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. भारी बारिश के बाद आए सैलाब के चलते चीन के कई रिहायशी इलाकों में अचानक हजारों सांप घुस गए हैं. सड़कों, गलियों और पानी भरे रास्तों पर तैरते जहरीले सांपों ने स्थानीय लोगों की रात की नींद उड़ा दी है. सोशल मीडिया पर इसके डरावने वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें बाढ़ के पानी के बीच सांपों के झुंड रेंगते हुए दिखाई दे रहे हैं.आखिर बाढ़ के पानी में कहां से आए इतने सारे सांप?इस अजीबोगरीब और डरावनी घटना के पीछे की वजह चीन का एक खास इलाका है. दरअसल, चीन का गुआंग्शी क्षेत्र देश का सबसे बड़ा 'स्नेक ब्रीडिंग हब' (Snake Breeding Hub) माना जाता है. यहां पारंपरिक दवाइयों, वैज्ञानिक शोध और लेदर प्रोडक्ट्स के लिए करोड़ों की संख्या में सांप और अन्य रेंगने वाले जीवों को पाला जाता है. हाल ही में आई भीषण बाढ़ के दौरान इस इलाके के एक बड़े स्नेक फार्म की सुरक्षा दीवारें पानी के तेज दबाव के कारण ढह गईं. दीवार टूटते ही फार्म में पाले जा रहे हजारों सांप पानी के तेज बहाव के साथ बहकर सीधे इंसानी बस्तियों और मुख्य सड़कों तक पहुंच गए.कोबरा का सबसे बड़ा खतरा, प्रशासन ने जारी किया हाई अलर्टबाढ़ के पानी में बहकर आए सांपों में 'कोबरा' जैसे बेहद जहरीले सांप भी शामिल हैं, जिससे खतरा कई गुना बढ़ गया है. चीनी प्रशासन ने रेड अलर्ट जारी करते हुए नागरिकों को चेतावनी दी है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी खतरा टला नहीं है. यह सांप पानी कम होने पर घरों के कोनों, सीढ़ियों के नीचे, दीवारों की दरारों और मलबे में छिप सकते हैं. लोगों से अपील की गई है कि वे बिना किसी सुरक्षा उपकरण के खुद इन जहरीले सांपों को पकड़ने की गलती बिल्कुल न करें और किसी भी इमरजेंसी में तुरंत रेस्क्यू टीम को सूचित करें.कमर तक पानी में उतरी रेस्क्यू टीम, जाल और स्टन गन से हो रही धरपकड़हालात की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने विशेषज्ञ स्नैक कैचर्स और 10 अनुभवी लोगों की एक स्पेशल रेस्क्यू टीम को मैदान में उतारा है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि रेस्क्यू कर्मचारी और कुछ स्थानीय लोग अपनी जान जोखिम में डालकर कमर तक भरे पानी में उतर रहे हैं. ये टीमें मछली पकड़ने वाले बड़े जालों, डंडों, विशेष सुरक्षा सूट और स्टन गन की मदद से इन रेंगते जीवों को पकड़ने की कोशिश में जुटी हैं.चीन में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पहले ही तबाही मचा रखी है, नदियां उफान पर हैं और हजारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा है, लेकिन इस बाढ़ के बीच सांपों के इस नए और जानलेवा संकट ने लोगों की मुश्किलों को दोगुना कर दिया है.
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों सब्सक्राइबर्स के लिए एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. पिछले लगभग दो सप्ताह से मेंटेनेंस और सिस्टम अपग्रेडेशन के कारण बंद पड़ा ईपीएफओ पासबुक पोर्टल (EPFO Passbook Portal) आखिरकार दोबारा पूरी तरह लाइव हो गया है. अब पीएफ खाताधारक बिना किसी परेशानी के लॉग इन करके अपना अकाउंट स्टेटमेंट चेक कर सकते हैं.हालांकि, पोर्टल शुरू करने के साथ ही ईपीएफओ ने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी यूएएन (UAN) एक्टिवेशन को लेकर एक ऐसा बड़ा झटका दिया है, जिसे हर नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए जानना बेहद जरूरी है.आ रहा है 8.25% ब्याज का पैसा, तुरंत चेक करें अपना पीएफ बैलेंसइस पासबुक पोर्टल का दोबारा शुरू होना सब्सक्राइबर्स के लिए इसलिए भी बहुत मायने रखता है क्योंकि ईपीएफओ आगामी 15 जुलाई से सभी मेंबर्स के खातों में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25% की दर से सालाना ब्याज का पैसा क्रेडिट करना शुरू करने जा रहा है.दिखेगा चुनिंदा सालों का डेटा: नए अपग्रेड किए गए पोर्टल पर लॉग इन करने पर एक जरूरी नोटिस दिखाई दे रहा है. इसके मुताबिक, हाल के वित्तीय वर्षों के ट्रांजैक्शन और पीएफ बैलेंस तुरंत देखे जा सकते हैं, लेकिन बहुत पुराने सालों का डेटा अभी सिस्टम में बैकएंड से ट्रांसफर किया जा रहा है. यह एक ऑटोमैटिक प्रक्रिया है, जो अगले कुछ दिनों में पूरी हो जाएगी और पुराना रिकॉर्ड भी दिखने लगेगा.बड़ा झटका: वेबसाइट से हमेशा के लिए बंद हुई UAN एक्टिवेशन की सुविधासिस्टम को पूरी तरह हाईटेक और सुरक्षित बनाने के चक्कर में ईपीएफओ ने पुराना तरीका बंद कर दिया है. अब तक कर्मचारी ईपीएफओ के 'यूनिफाइड मेंबर पोर्टल' की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आसानी से अपना यूएएन एक्टिवेट कर लेते थे, लेकिन अब इस वेब-बेस्ड यूएएन एक्टिवेशन सुविधा को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है. अब वेबसाइट पर जाने वाले यूजर्स को एक स्पष्ट नोटिस दिखाया जा रहा है कि यह सर्विस अब उपलब्ध नहीं है.अब चेहरा दिखाकर ही चालू होगा UAN, नोट कर लें यह नया मोबाइल फॉर्मूलाईपीएफओ ने पीएफ खातों में होने वाली धोखाधड़ी और सुरक्षा में सेंधमारी को रोकने के लिए यूएएन एक्टिवेशन की पूरी प्रक्रिया को मोबाइल-बेस्ड और डिजिटल बना दिया है:UMANG ऐप का करना होगा इस्तेमाल: अब किसी भी नए या पुराने कर्मचारी को अपना यूएएन एक्टिवेट करने के लिए अपने स्मार्टफोन में सरकारी उमंग (UMANG) ऐप को डाउनलोड करना अनिवार्य होगा.फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी (FAT): उमंग ऐप के जरिए जब आप यूएएन एक्टिवेशन के विकल्प पर जाएंगे, तो वहां अब आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी (Face Authentication) का इस्तेमाल करना होगा. यानी अब मोबाइल कैमरा से आपका चेहरा लाइव स्कैन होने के बाद ही यूएएन एक्टिवेट हो पाएगा, जिससे सुरक्षा व्यवस्था बेहद मजबूत हो जाएगी.विभाग ने 3 जुलाई से चरणबद्ध तरीके से अपने नए और आधुनिक 'यूनिफाइड मेंबर पोर्टल' को रोल आउट करना शुरू किया था. ईपीएफओ का कहना है कि इस बड़े टेक्नोलॉजी ओवरहॉल का मुख्य उद्देश्य पीएफ खातों की सुरक्षा को अभेद्य बनाना, सर्वर की तकनीकी गड़बड़ियों को हमेशा के लिए दूर करना और करोड़ों सब्सक्राइबर्स को एक स्मूथ डिजिटल अनुभव प्रदान करना है.
अगर आप बिना किसी जोखिम के अपने पैसे को सुरक्षित रखते हुए हर महीने एक निश्चित और मोटी कमाई की तलाश में हैं, तो भारतीय डाक विभाग की पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS) आपके लिए सबसे बेहतरीन जरिया बन सकती है. केंद्र सरकार द्वारा समर्थित इस स्मॉल सेविंग्स स्कीम में निवेश करने पर बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता है. वर्तमान में मिल रही 7.4 फीसदी की दमदार सालाना ब्याज दर के हिसाब से यदि आप इसमें जॉइंट अकाउंट खोलकर निवेश करते हैं, तो आपको हर महीने घर बैठे करीब ₹9,250 की नियमित आमदनी होने लगेगी.क्या है पोस्ट ऑफिस MIS और क्यों है यह इतनी लोकप्रिय?पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS) एक बेहद भरोसेमंद सरकारी बचत योजना है. इसका मुख्य उद्देश्य निवेशकों को हर महीने एक निश्चित आय की गारंटी देना है. यही कारण है कि यह स्कीम देश के वरिष्ठ नागरिकों, नौकरी से रिटायर हो चुके कर्मचारियों और कम जोखिम में फिक्स्ड मंथली इनकम चाहने वाले मिडिल क्लास परिवारों के बीच जबरदस्त लोकप्रिय है. इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आपकी जमा की गई मूल राशि (Principal Amount) पूरी तरह सुरक्षित रहती है और ब्याज का भुगतान सीधे आपके खाते में हर महीने कर दिया जाता है.₹15 लाख के निवेश पर हर महीने का पूरा गणितइस योजना में कोई भी भारतीय नागरिक सिंगल या जॉइंट अकाउंट के जरिए निवेश कर सकता है. सरकार प्रत्येक तिमाही में इसकी ब्याज दरों की समीक्षा करती है. वर्तमान में लागू 7.4% वार्षिक ब्याज दर के हिसाब से मुनाफे का कैलकुलेशन कुछ इस प्रकार है:कुल निवेश (जॉइंट अकाउंट): ₹15,00,000ब्याज दर: 7.4% प्रतिवर्षवार्षिक ब्याज की कमाई: ₹1,11,000मासिक आय (Monthly Income): लगभग ₹9,2505 साल में कुल मुनाफा: ₹5,55,000पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम की मैच्योरिटी अवधि 5 साल (60 महीने) की होती है. 5 साल पूरे होने पर निवेशक को उसकी ₹15 लाख की पूरी मूल राशि वापस सौंप दी जाती है और इस दौरान वह ₹5.55 लाख सिर्फ ब्याज के रूप में कमा चुका होता है.निवेश की अधिकतम सीमा और प्री-मैच्योर क्लोजर के नियमनियमों के मुताबिक, एक व्यक्ति अपने सिंगल अकाउंट के जरिए अधिकतम ₹9 लाख तक ही जमा कर सकता है, जबकि जॉइंट अकाउंट (अधिकतम 3 व्यक्ति) के माध्यम से ₹15 लाख तक निवेश करने की खुली छूट है. अगर आपको मैच्योरिटी से पहले पैसों की जरूरत पड़ती है, तो खाता बंद करने के लिए ये नियम लागू होंगे:खाता खोलने के पहले 1 वर्ष के भीतर आप इसे किसी भी हाल में बंद नहीं कर सकते.1 साल से 3 साल के बीच खाता बंद करने पर आपकी जमा मूल राशि से 2 प्रतिशत की कटौती की जाएगी.3 साल के बाद और 5 साल से पहले खाता बंद करने पर मूल राशि का 1 प्रतिशत काटकर शेष रकम लौटाई जाएगी.टैक्स बेनिफिट्स और खाता खोलने से जुड़ी जरूरी बातध्यान रखने वाली बात यह है कि पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में निवेश करने पर आयकर अधिनियम (Income Tax Act) की धारा 80C के तहत कोई टैक्स छूट नहीं मिलती है. इस योजना से मिलने वाला मासिक ब्याज आपकी कुल सालाना आय में जोड़ा जाता है और आपके टैक्स स्लैब के अनुसार उस पर टैक्स देय होता है. हालांकि, राहत की बात यह है कि डाक विभाग इस ब्याज राशि पर कोई टीडीएस (TDS) नहीं काटता है. चूंकि यह पूरी तरह डाक विभाग की योजना है, इसलिए इसका खाता केवल आधिकारिक पोस्ट ऑफिस में ही खोला जा सकता है, किसी भी सरकारी या प्राइवेट बैंक में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है.
भारतीय वायुसेना (IAF) ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर देश का मान बढ़ाया है. 'वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट' (WDMMA) द्वारा जारी साल 2026 की ग्लोबल एयरपावर रैंकिंग में भारतीय वायुसेना ने दुनिया में तीसरा स्थान हासिल किया है. साल 2022 के बाद से यह लगातार 5वां मौका है जब भारत ने पड़ोसी देश चीन की 'पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स' (PLAAF) को पीछे छोड़ते हुए अपनी बढ़त बरकरार रखी है.अमेरिका और रूस के बाद भारत का दबदबा, ऐसे तय होती है ताकतताजा वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वायुसेना दुनिया की शीर्ष ताकतों में सिर्फ अमेरिका और रूस से पीछे है. WDMMA कुल 103 देशों की 129 वायु सेनाओं के करीब 48,000 से अधिक विमानों का गहन मूल्यांकन करता है. इसके लिए 'ट्रू वैल्यू रेटिंग' (TVR) प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है. यह रेटिंग सिर्फ लड़ाकू विमानों की गिनती पर नहीं, बल्कि विमानों की आधुनिक मारक क्षमता, लॉजिस्टिक सपोर्ट, स्वदेशी निर्माण की काबिलियत और लड़ाकू विमानों व हेलीकॉप्टरों के सही संतुलन (Fleet Mix) के आधार पर दी जाती है.1,716 विमानों के साथ आसमान में गरज रही है भारतीय वायुसेनाआंकड़ों के मुताबिक, भारतीय वायुसेना वर्तमान में कुल 1,716 लड़ाकू और सहायक विमानों का संचालन कर रही है. इस शक्तिशाली बेड़े में सात अलग-अलग श्रेणियों के 542 फाइटर जेट शामिल हैं (जिसमें जल्द ही रिटायर होने वाला MiG-21 भी गिना गया है). इसके अलावा आसमानी बेड़े में:हेलीकॉप्टर: 498 (जिसमें 222 Mi-17 और 111 स्वदेशी HAL ध्रुव व रुद्र शामिल हैं)ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट: 282 मालवाहक विमानट्रेनर विमान: 374 (पायलटों की ट्रेनिंग के लिए खास तौर पर तैयार)स्पेशल मिशन एयरक्राफ्ट: 20 (हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर और खोजी विमान)कमियों को दूर करने का मेगा प्लान: 180 तेजस और राफेल की होगी एंट्रीWDMMA ने जहां भारत की ताकत की तारीफ की है, वहीं बेड़े की कुछ चुनौतियों का भी जिक्र किया है. वर्तमान में IAF के पास स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन के मुकाबले 29 फाइटर स्क्वाड्रन ही एक्टिव हैं. इसके साथ ही मिड-एयर रिफ्यूलर और एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग सिस्टम (AEW&C) की संख्या बढ़ाने की जरूरत है.वायुसेना इन कमियों को तेजी से दूर करने के लिए पूरी तरह तैयार है. इसके तहत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को 180 स्वदेशी तेजस Mk-1A लड़ाकू विमानों का भारी-भरकम ऑर्डर दिया जा चुका है. इसके अतिरिक्त, 114 नए राफेल फाइटर जेट्स खरीदने की योजना पर भी काम चल रहा है, जिससे 2030 के दशक में रिटायर होने वाले जगुआर, मिराज 2000 और मिग-29 विमानों की कमी को आसानी से पूरा किया जा सके.
अगर आप आज अपने घर या दुकान के लिए एलपीजी (LPG) सिलेंडर बुक करने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले आज के ताजा रेट जान लेना आपके लिए बेहद जरूरी है. सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने आज के लिए घरेलू और कमर्शियल दोनों ही गैस सिलेंडरों के दाम अपडेट कर दिए हैं. बीते जून महीने में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में ₹29 की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद से जुलाई में भी कीमतें उसी स्तर पर बनी हुई हैं. वर्तमान में देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू सिलेंडर ₹942 में मिल रहा है, वहीं फरीदाबाद (हरियाणा) में इसकी कीमत ₹943.50 तय की गई है.घरेलू LPG सिलेंडर (14.2 KG) के आज के दामविभिन्न राज्यों में लगने वाले स्थानीय टैक्स (वैट) और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट की वजह से देश के अलग-अलग शहरों में कीमतें भिन्न होती हैं. आज के प्रमुख शहरों के भाव इस प्रकार हैं:दिल्ली: ₹942.00नोएडा: ₹939.50मुंबई: ₹941.50लखनऊ: ₹979.50कोलकाता: ₹968.00चेन्नई: ₹957.50जयपुर: ₹945.50पटना: ₹1,031.50चंडीगढ़: ₹951.50असम: ₹991.00दुकानदारों के लिए: 19 KG कमर्शियल सिलेंडर की नई कीमतेंकमर्शियल गैस सिलेंडरों के इस्तेमाल करने वाले रेस्तरां और दुकानदारों के लिए भी आज की कीमतें जारी कर दी गई हैं. 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के प्रमुख शहरों के रेट नीचे दिए गए हैं:दिल्ली व नोएडा: ₹2,930.00हरियाणा: ₹2,932.00मुंबई: ₹2,885.50लखनऊ: ₹3,052.50कोलकाता: ₹3,081.50चेन्नई: ₹3,106.00जयपुर: ₹2,957.50पटना: ₹3,227.00हर महीने क्यों घटते-बढ़ते हैं एलपीजी के दाम?आमतौर पर तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों की समीक्षा करती हैं, हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के दबाव में इसे महीने के बीच में भी बदला जा सकता है. एलपीजी की कीमतें मुख्य रूप से इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल व एलपीजी की दर, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, माल ढुलाई की लागत और राज्यों के स्थानीय टैक्स (Local Taxes) के आधार पर तय होती हैं.उज्ज्वला योजना लाभार्थियों को बड़ी राहत: सरकार प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के पात्र लाभार्थियों को प्रति 14.2 किलोग्राम घरेलू सिलेंडर पर ₹300 की बंपर सब्सिडी देना जारी रख रही है, जो सीधे उनके लिंक किए गए बैंक खाते में (DBT के माध्यम से) ट्रांसफर की जाती है.
हर दिन की शुरुआत देश में सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों के साथ होती है. सुबह ठीक 6 बजे देश की दिग्गज तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने आज के लिए ईंधन की ताजा दरें जारी कर दी हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की उठापटक और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के आधार पर ये दाम तय होते हैं. चूंकि ईंधन के दाम आम आदमी की जेब से लेकर फल-सब्जी और ट्रांसपोर्टेशन की लागत पर सीधा असर डालते हैं, इसलिए घर से निकलने से पहले आज का रेट जान लेना बेहद जरूरी है.देश के प्रमुख शहरों में आज का पेट्रोल-डीजल रेटभारत के अलग-अलग राज्यों और शहरों में सरकारी टैक्स (VAT) और माल ढुलाई की लागत अलग होने के कारण कीमतों में अंतर देखने को मिलता है. आज के प्रमुख शहरों के भाव इस प्रकार हैं:नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 | डीजल ₹95.20मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 | डीजल ₹97.83कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 | डीजल ₹99.82चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 | डीजल ₹99.55हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 | डीजल ₹103.82लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 | डीजल ₹95.55नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 | डीजल ₹95.56बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 | डीजल ₹98.80मई 2022 से क्यों बनी हुई है कीमतों में स्थिरता?वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव होने के बावजूद भारतीय बाजार में पिछले दो वर्षों से ईंधन के दाम तुलनात्मक रूप से स्थिर हैं. दरअसल, मई 2022 में केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों द्वारा एक्साइज ड्यूटी व वैट में की गई भारी कटौती के बाद से तेल कंपनियों ने कीमतों को एक दायरे में रखा है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को महंगाई के बड़े झटकों से राहत मिली हुई है.किन 4 बड़े कारणों से तय होता है आपकी गाड़ी के ईंधन का दाम?क्रूड ऑयल की कीमत: भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, इसलिए ग्लोबल मार्केट में इसके रेट बढ़ते ही भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो जाता है.डॉलर बनाम रुपया: अंतरराष्ट्रीय बाजार से तेल की खरीदारी डॉलर में होती है. अगर डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होता है, तो तेल कंपनियों को आयात के लिए ज्यादा रकम चुकानी पड़ती है.सरकारी टैक्स का बोझ: पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्यों का वैट (VAT) मिलकर खुदरा मूल्य का एक बहुत बड़ा हिस्सा बनाते हैं.मांग और रिफाइनिंग कॉस्ट: कच्चे तेल को रिफाइनरियों में साफ करने की लागत और त्योहारों या मौसम के अनुसार बाजार में ईंधन की मांग भी कीमतों को प्रभावित करती है.सिर्फ एक SMS से अपने फोन पर पाएं आज का लाइव रेटअगर आप बिना इंटरनेट के भी अपने शहर का सटीक भाव जानना चाहते हैं, तो तेल कंपनियों ने एसएमएस (SMS) के जरिए बेहद आसान सुविधा दे रखी है:Indian Oil (IOCL): अपने फोन से RSP टाइप करें और 9224992249 पर भेज दें.BPCL: अपने मोबाइल से RSP लिखकर 9223112222 पर सेंड करें.HPCL: मोबाइल के मैसेज बॉक्स में HP Price लिखें और इसे 9222201122 पर भेज दें.
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच इन दिनों 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर हलचल तेज है. कोलकाता में स्टेकहोल्डर्स और कर्मचारी यूनियनों के साथ बैठकों का दौर पूरा हो चुका है. इस बैठक में यूनियनों ने न सिर्फ बेसिक सैलरी (Basic Salary) बढ़ाने, बल्कि हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की दरों में भी बंपर बढ़ोतरी की पुरजोर मांग की है. चूंकि एचआरए सीधे तौर पर बेसिक पे का एक निश्चित प्रतिशत होता है, इसलिए फिटमेंट फैक्टर लागू होते ही कर्मचारियों के इन-हैंड वेतन में ऐतिहासिक उछाल देखने को मिलेगा.कर्मचारी संगठनों की मांग: 40% तक किया जाए HRAफिलहाल 7वें वेतन आयोग के नियमों के मुताबिक, शहरों को तीन श्रेणियों X, Y और Z में बांटा गया है. जनवरी 2024 में महंगाई भत्ता (DA) 50 फीसदी पहुंचने के बाद मौजूदा एचआरए दरें क्रमशः 30% (X शहर), 20% (Y शहर) और 10% (Z शहर) हैं. लेकिन बड़े शहरों में आसमान छूते किराए को देखते हुए NC-JCM, AIDEF और FNPO जैसे संगठनों ने एचआरए स्लैब को बढ़ाकर 40% (X), 35% (Y) और 30% (Z) करने की मांग की है. वहीं AINPSEF ने इसे क्रमशः 36%, 24% और 12% करने का प्रस्ताव रखा है.फिटमेंट फैक्टर का पूरा गणित: कैसे बढ़ेगा आपका पैसा?एचआरए की गणना हमेशा न्यूनतम बेसिक पे पर की जाती है. वर्तमान में दिल्ली (X श्रेणी शहर) में कार्यरत लेवल 1 के कर्मचारी की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 है, जिस पर 30% के हिसाब से ₹5,400 एचआरए मिलता है. 8वें वेतन आयोग में अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर के आधार पर यह गणित पूरी तरह बदल जाएगा:2.0 फिटमेंट फैक्टर पर: न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹36,000 हो जाएगी और 30% के हिसाब से एचआरए सीधे दोगुना होकर ₹10,800 हो जाएगा.2.28 या 2.57 फिटमेंट फैक्टर पर: यदि सरकार इन उच्च फिटमेंट फैक्टर्स को मंजूरी देती है, तो लेवल 1 से लेकर लेवल 10 तक के कर्मचारियों का वेतन अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाएगा. उदाहरण के तौर पर, दिल्ली जैसे X श्रेणी के शहर में तैनात एक एंट्री-लेवल अफसर (लेवल 10) का सिर्फ मकान किराया भत्ता (HRA) ही बढ़कर ₹43,250 प्रति माह तक पहुंच सकता है.यह बदलाव लागू होते ही कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी में अब तक का सबसे बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा, जिससे करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी.
केंद्र सरकार ने कफ सिरप और अल्कोहल आधारित दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग और नशे के रूप में हो रहे इस्तेमाल पर लगाम लगाने के लिए एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाया है. ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 में बड़ा संशोधन करते हुए सरकार ने 12% से ज्यादा एथिल अल्कोहल (Ethyl Alcohol) वाली और 30 मिलीलीटर से बड़ी बोतलों में बिकने वाली सभी ओरल (मुंह से ली जाने वाली) दवाओं को 'शेड्यूल H1' (Schedule H1) की श्रेणी में डाल दिया है. इस फैसले के बाद अब ऐसी दवाएं किसी भी मेडिकल स्टोर पर बिना डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन (पर्ची) के ओवर-द-काउंटर नहीं बेची जा सकेंगी.बिक्री का रखना होगा पूरा हिसाब, 3 साल तक संभालनी होगी डॉक्टर की पर्चीशेड्यूल H1 में शामिल होने के बाद अब इन दवाओं की खरीद-बिक्री पर सरकार की सीधी और सख्त नजर होगी. देश के सभी मेडिकल स्टोर और फार्मेसियों को इन दवाओं की हर एक बिक्री का पूरा रिकॉर्ड एक अलग रजिस्टर में दर्ज करना होगा, जिसमें डॉक्टर, मरीज और दवा की पूरी डिटेल शामिल होगी. यही नहीं, केमिस्ट को डॉक्टर द्वारा लिखी गई मूल पर्ची को तीन साल तक अपने पास सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा ताकि ड्रग इंस्पेक्टर कभी भी इसकी जांच कर सकें. पहले से मिल रही कुछ छूटों (शेड्यूल K के तहत) को भी अब इन दवाओं के लिए पूरी तरह खत्म कर दिया गया है.बोतल पर होगी लाल रंग की 'Rx' चेतावनी, नियम तोड़ने पर कड़ी कार्रवाईनए नियमों के मुताबिक, अब इन दवाओं की पैकेजिंग और लेबल पर भी बड़ा बदलाव दिखेगा. 12% से ज्यादा अल्कोहल वाली इन दवाओं के लेबल पर लाल रंग में साफ तौर पर 'Rx' का निशान बनाना होगा. इसके साथ ही पैकेट पर एक अनिवार्य चेतावनी भी लिखनी होगी: यह दवा डॉक्टर की सलाह के बिना न लें, सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है. ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी (DCC) की जून 2025 में हुई बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिली थी, जिसके बाद ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सिफारिश पर सरकार ने आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी कर इसे मंजूरी दी है.दवाएं बंद नहीं हुईं, सिर्फ गलत इस्तेमाल पर लगी है लगामसरकार ने साफ किया है कि इन दवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, बल्कि इनका सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए यह नियम लागू किया जा रहा है. दरअसल, कफ सिरप और टॉनिक में अल्कोहल का इस्तेमाल सॉल्वेंट या प्रिजर्वेटिव के रूप में होता है, जो तय मात्रा में सुरक्षित है. लेकिन बिना डॉक्टरी सलाह के भारी मात्रा में इसके सेवन से लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचता है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ता है. यह नया नियम नोटिफिकेशन की तारीख से या अगले छह महीनों के भीतर पूरे देश में पूरी तरह से प्रभावी हो जाएगा.
दिल्ली में रहने वाली महिलाओं और ट्रांसजेंडर यात्रियों के लिए एक बेहद जरूरी खबर है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने मुफ्त बस सफर से जुड़े नियमों में बहुत बड़ा बदलाव कर दिया है. आगामी 1 अगस्त से दिल्ली परिवहन निगम (DTC) और DIMTS क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा करने के लिए अब गुलाबी रंग का कागजी टिकट नहीं मिलेगा, बल्कि उसकी जगह 'पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड' दिखाना और उसे मशीन पर टैप करना अनिवार्य होगा. अगर 1 अगस्त के बाद आपके पास यह कार्ड नहीं हुआ, तो आपको सामान्य यात्रियों की तरह पूरे पैसे देकर टिकट खरीदना पड़ेगा. हालांकि, राहत की बात यह है कि 31 जुलाई तक पुरानी कागजी टिकट व्यवस्था पहले की तरह ही चलती रहेगी.क्या है पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड और कौन है इसका हकदार?यह कार्ड दिल्ली सरकार की तरफ से जारी किया जाने वाला एक खास NCMC (नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड) आधारित डिजिटल स्मार्ट कार्ड है. सरकार इस व्यवस्था को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाना चाहती है ताकि कागजी टिकटों का खर्च बचे और डेटा बिल्कुल सटीक रहे. यह सुविधा केवल दिल्ली की रहने वाली 12 साल या उससे ज्यादा उम्र की महिलाओं और ट्रांसजेंडर निवासियों के लिए है. बस में चढ़ते ही आपको इस कार्ड को वहां लगी इलेक्ट्रॉनिक मशीन पर टैप करना होगा, जिसके बाद आपकी फ्री यात्रा मान्य हो जाएगी.मुफ्त में बनेगा पहला कार्ड: ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन का यह है तरीकादिल्ली सरकार ने जनता की सुविधा के लिए इस कार्ड को बनवाने की प्रक्रिया को बेहद सरल रखा है. पहला कार्ड सभी के लिए बिल्कुल मुफ्त जारी किया जा रहा है, लेकिन अगर यह खो जाता है तो दोबारा बनवाने के लिए तय फीस देनी होगी. आप इसे दो तरीकों से बनवा सकते हैं:ऑनलाइन तरीका: इसके लिए आपको MufinPay के आधिकारिक 'DTC Pink NCMC Card Portal' पर जाना होगा. वहां अपना मोबाइल नंबर और संबंधित पहचान दस्तावेज दर्ज कर ओटीपी (OTP) के जरिए वेरिफिकेशन करना होगा. आवेदन पूरा होने के बाद मिलने वाले क्यूआर (QR) कोड को किसी भी नजदीकी डीटीसी सेंटर पर दिखाकर आप अपना असली स्मार्ट कार्ड ले सकते हैं.ऑफलाइन तरीका: आप सीधे अपने नजदीकी 'पिंक कार्ड डिस्ट्रीब्यूशन काउंटर' पर जा सकते हैं. वहां अपने जरूरी दस्तावेज और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के साथ जाकर सीधे काउंटर से ही अपना नया पिंक सहेली कार्ड हासिल कर सकते हैं.31 जुलाई से पहले कर लें तैयारी, नहीं तो लगेगा किरायाइस नए नियम को लाने का मुख्य उद्देश्य मुफ्त यात्रा का सही रिकॉर्ड रखना और योजना का लाभ सिर्फ सही लोगों तक पहुंचाना है. सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि मुफ्त यात्रा की गिनती सिर्फ स्मार्ट कार्ड टैपिंग के जरिए ही होगी. इसलिए दिल्ली की सभी महिला और ट्रांसजेंडर यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे 31 जुलाई की आखिरी तारीख का इंतजार किए बिना समय रहते अपना कार्ड बनवा लें, ताकि 1 अगस्त से उन्हें बस सफर में किसी भी तरह की परेशानी या बेवजह किराया देने की नौबत न आए.
मध्य प्रदेश की लगभग 1.25 करोड़ से अधिक लाडली बहनों के लिए एक बेहद बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य की सबसे लोकप्रिय और महत्वाकांक्षी 'लाडली बहना योजना' (Ladli Behna Yojana) की 38वीं किस्त का इंतजार अब पूरी तरह से खत्म होने वाला है। नवीनतम आधिकारिक खबरों के अनुसार, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (CM Mohan Yadav) भिंड जिले के मेहगांव में 12 जुलाई को आयोजित होने वाले एक भव्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान इस योजना की अगली मासिक किस्त जारी करने जा रहे हैं।मुख्यमंत्री 12 जुलाई को मेहगांव विधानसभा क्षेत्र का दौरा करेंगे, जहां वे क्षेत्र की जनता को करोड़ों रुपये की कई विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे और नई योजनाओं का शिलान्यास करेंगे। इसी विकास मंच से सिंगल क्लिक के जरिए जुलाई महीने की किस्त सीधे पात्र महिलाओं के डीबीटी (DBT) लिंक्ड बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी।कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला ने दी जानकारी, मेहगांव में तैयारियां तेजमध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि लाडली बहना योजना की 38वीं सम्मान किस्त को महिलाओं के खातों में भेजने का मुख्य कार्यक्रम इस बार भिंड की मेहगांव विधानसभा क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के इस दौरे और भव्य कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी हैं।आपको बता दें कि इससे पहले जून महीने में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने योजना की 37वीं किस्त 14 जून को सागर जिले के केसली में आयोजित एक कार्यक्रम से जारी की थी, जहां राज्य भर की सभी लाडली बहनों के बैंक खातों में 1,500-1,500 रुपये की आर्थिक सहायता भेजी गई थी।इन महिलाओं को मिलता है सरकार की इस योजना का सीधा लाभलाडली बहना योजना मध्य प्रदेश की आर्थिक रूप से कमजोर, मध्यमवर्गीय और जरूरतमंद परिवारों की विवाहित महिलाओं के सशक्तिकरण का एक बड़ा जरिया बन चुकी है। इस योजना के दायरे में राज्य की 21 से 60 वर्ष तक की विवाहित महिलाएं आती हैं, जिनमें समाज की परित्यक्ता, तलाकशुदा और विधवा महिलाएं भी शामिल हैं। सरकार इन सभी पात्र लाडली बहनों के बैंक खातों में हर महीने ₹1,500 की सम्मान राशि सीधे उनके बैंक अकाउंट में जमा करती है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।घर बैठे ऑनलाइन कैसे चेक करें अपनी 38वीं किस्त का 'पेमेंट स्टेटस'?जुलाई महीने की 38वीं किस्त आपके बैंक खाते में जमा हुई है या नहीं, इसे जांचने के लिए आपको किसी बैंक या सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आप नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके घर बैठे ऑनलाइन स्टेटस चेक कर सकती हैं:स्टेप 1: सबसे पहले लाडली बहना योजना की आधिकारिक वेबसाइट cmladlibahna.mp.gov.in पर जाएं।स्टेप 2: होमपेज पर दिए गए 'आवेदन एवं भुगतान की स्थिति' (Application & Payment Status) वाले विकल्प पर क्लिक करें।स्टेप 3: अब खुले नए पेज पर अपनी 9 अंकों की 'समग्र आईडी' (Samagra ID) या अपना ऑनलाइन आवेदन क्रमांक दर्ज करें।स्टेप 4: स्क्रीन पर दिख रहे सुरक्षा कोड यानी कैप्चा (CAPTCHA) को सही-सही भरें और 'ओटीपी भेजें' (Get OTP) पर क्लिक करें।स्टेप 5: आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (OTP) आएगा, उसे दर्ज करके वेरिफाई बटन दबाएं।स्टेप 6: सबमिट करते ही स्क्रीन पर आपके आवेदन की पूरी स्थिति और जुलाई महीने के पेमेंट स्टेटमेंट (Payment Statement) की पूरी जानकारी खुलकर सामने आ जाएगी।जून 2023 में हुई थी शुरुआत, ₹1,000 से बढ़कर ₹1,500 हुई राशिमध्य प्रदेश की इस गेम-चेंजर योजना की शुरुआत राज्य सरकार द्वारा जून 2023 में की गई थी। जब यह योजना लॉन्च हुई थी, तब महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती थी। लेकिन महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार और उनके सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को देखते हुए बाद में राज्य सरकार ने इस मासिक सहायता राशि को बढ़ाकर सीधे 1,500 रुपये प्रति महीना कर दिया था। वर्तमान में यह योजना राज्य की करोड़ों महिलाओं को आर्थिक रूप से संबल प्रदान कर रही है।
उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर को एक नई और हाई-स्पीड गति देने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YIDA) एक और बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। जेवर में स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jewar Airport) की पहुंच को और बेहतर बनाने के लिए प्रस्तावित नए लिंक एक्सप्रेसवे (Link Expressway) के लिए जमीन खरीदने का काम बेहद तेजी से आगे बढ़ रहा है।प्राधिकरण के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए अब तक करीब 57 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। यीडा के आला अधिकारियों के मुताबिक, बाकी बची हुई जमीन को भी आगामी एक महीने के भीतर आपसी सहमति और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत खरीद लिया जाएगा। इस शुरुआती भूमि अधिग्रहण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 1,204 करोड़ रुपये का बजट पहले ही मंजूर कर दिया है, जबकि यह पूरी भव्य परियोजना लगभग 4,000 करोड़ रुपये की कुल लागत से बनकर तैयार होगी।कैसा होगा नया लिंक एक्सप्रेसवे? जानिए इसका रूट मैपयह नया लिंक एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के यातायात को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है। इस प्रोजेक्ट के तकनीकी और भौगोलिक विवरण इस प्रकार हैं:शुरुआत और अंत: यह महत्वपूर्ण लिंक एक्सप्रेसवे बुलंदशहर के स्याना (Siana) क्षेत्र से शुरू होगा और यमुना एक्सप्रेसवे के 24.8 किलोमीटर वाले बिंदु (जीरो प्वाइंट से दूरी) पर जाकर समाप्त होगा।यीडा क्षेत्र और एलिवेटेड हिस्सा: इस पूरे मार्ग का लगभग 20 किलोमीटर का हिस्सा यीडा (YEIDA) के अधिसूचित क्षेत्र से होकर गुजरेगा, जिसमें से 9 किलोमीटर का हिस्सा पूरी तरह एलिवेटेड (Elevated Road) बनाया जाएगा।सर्विस रोड और गांवों की संख्या: स्थानीय यातायात को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक्सप्रेसवे के साथ-साथ चौड़ी सर्विस रोड भी बनाई जाएगी, ताकि स्थानीय ग्रामीणों को आवाजाही में कोई दिक्कत न हो। यह पूरा एक्सप्रेसवे कुल 56 गांवों की सीमाओं से होकर गुजरेगा।किसे होगा सीधा फायदा? व्यापार और कनेक्टिविटी को मिलेगा बूस्टइस लिंक एक्सप्रेसवे के पूरी तरह निर्मित हो जाने के बाद उत्तर प्रदेश के कई बड़े हाईवे और एक्सप्रेसवे आपस में इंटरलिंक हो जाएंगे:मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी: इस नए मार्ग के जरिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway), दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और आगरा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के बीच सीधे और निर्बाध संपर्क की शानदार सुविधा मिलेगी।औद्योगिक सेक्टर्स को लाभ: यमुना सिटी के प्रमुख औद्योगिक सेक्टरों (जैसे- सेक्टर 28, 29, 32 और 33) को सीधी कनेक्टिविटी मिल जाएगी। इससे मालवाहक कार्गो और भारी कमर्शियल वाहनों की आवाजाही सुपरफास्ट होगी, जिससे व्यापारिक गतिविधियों और उद्योगों को बड़ा लॉजिस्टिक सपोर्ट मिलेगा।समय की बचत: दिल्ली, नोएडा और पश्चिमी यूपी के विभिन्न जिलों के बीच दैनिक सफर करने वाले आम यात्रियों के समय और ईंधन में भारी बचत होगी।जेवर एयरपोर्ट का पहला चरण पूरा, परिचालन हुआ शुरूकनेक्टिविटी के इस महाजाल को इसलिए भी तेज किया जा रहा है क्योंकि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण (Phase 1) पूरी तरह से बनकर तैयार हो चुका है और यहां से उड़ानों का परिचालन (Operations) भी शुरू हो गया है।वर्तमान में यह एयरपोर्ट अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहा है और सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों को विश्वस्तरीय सेवाएं देने में पूरी तरह सक्षम है। भविष्य की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस एयरपोर्ट को आगे चलकर कुल चार बड़े चरणों में और अधिक विस्तारित और विशाल बनाया जाएगा।यूपीडा (UPEIDA) संभालेगा निर्माण की कमानयह नया लिंक एक्सप्रेसवे न केवल चालू हो चुके जेवर एयरपोर्ट की उपयोगिता और पहुंच को कई गुना बढ़ा देगा, बल्कि उत्तर प्रदेश के ओवरऑल बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को एक वैश्विक पहचान दिलाएगा। यीडा द्वारा शत-प्रतिशत जमीन अधिग्रहण का काम पूरा कर लिए जाने के तुरंत बाद, उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) को इस प्रोजेक्ट के फिजिकल निर्माण कार्य की कमान सौंप दी जाएगी, जो इसका निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर शुरू करेगा।
Top News 11 July: पीएम मोदी ने FTA को बताया मील का पत्थर, ट्रंप का ईरान पर बड़ा बयान
Top News 11 July : अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश, अगर मेरी हत्या होती है तो ईरान पर बम गिरा देना। पीएम मोदी ने न्यूजीलैंड से एफटीए को मील का पत्थर बताया। आज नौसेना में शामिल होगा स्वदेशी युद्धपोत महेंद्रगिरि। दतिया विधानसभा उपचुनाव ...
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दुनिया को चेताया—हिंद महासागर हमारा आंगन, सुरक्षा से नहीं होगा समझौता
वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव के बीच भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के इरादे पूरी तरह साफ कर दिए हैं। आंध्र प्रदेश के रणनीतिक नौसैनिक शहर विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के जांबाजों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में भारत की नीति किसी भी प्रकार की धौंस या दादागिरी की नहीं, बल्कि पूर्ण शांति, स्थिरता और सह-अस्तित्व की है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र के बाहर की विस्तारवादी ताकतों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यह समूचा समुद्री इलाका भारत का अपना आंगन है और अपने आंगन की संप्रभुता व सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।स्वदेशी युद्धपोत 'महेंद्रगिरि' की आज होगी कमीशनिंग: नौसेना के बेड़े में शामिल होगा ब्रह्मास्त्ररक्षा मंत्री का यह ऐतिहासिक और बेहद आक्रामक बयान भारतीय नौसेना के छठे स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट 'महेंद्रगिरि' (Mahendragiri Frigate) के नौसैनिक बेड़े में आधिकारिक रूप से शामिल होने से ठीक एक दिन पहले आया है। शनिवार यानी 11 जुलाई 2026 को इस अत्याधुनिक, रडार की नजरों से बच निकलने में सक्षम और महाविनाशक हथियारों से लैस युद्धपोत को देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया जाएगा। राजनाथ सिंह ने प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित इस युद्धपोत की युद्धक क्षमताओं की सराहना करते हुए कहा कि यह भारतीय रक्षा उद्योग के आत्मनिर्भर होने का सबसे बड़ा प्रमाण है और इसके आने से सुरक्षा के मुश्किल होते वैश्विक वातावरण में भारतीय नौसेना की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।90 फीसदी व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा दांव पर: समुद्री निगरानी को और ज्यादा अभेद्य बनाने का लक्ष्यहिंद महासागर के रणनीतिक और आर्थिक महत्व को रेखांकित करते हुए रक्षा मंत्री ने देश के सामने मौजूद चुनौतियों और प्राथमिकताओं को विस्तार से साझा किया। उन्होंने तकनीकी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत का 90 प्रतिशत से अधिक व्यापारिक टर्नओवर और देश की पूरी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) सीधे तौर पर इन्हीं समुद्री रास्तों पर निर्भर करती है। इसके अतिरिक्त, भारत का विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और रणनीतिक द्वीपीय इलाके हमारी आर्थिक प्रगति की रीढ़ हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों की सुरक्षा को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जा सकता, जिसके लिए नौसेना अपनी चौबीसों घंटे की निगरानी प्रणाली को और अधिक आधुनिक बना रही है।बाहरी ताकतों की मौजूदगी पर भारत की पैनी नजर: नौसेना के अदम्य साहस को राजनाथ ने किया सलामवैश्विक समुद्री थिएटर में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा (Geopolitical Competition) और क्षेत्र के बाहर की कुछ विशिष्ट सैन्य ताकतों की अवांछित गतिविधियों पर चिंता जताते हुए रक्षा मंत्री ने भारतीय नौसेना की त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारतीय नौसेना हिंद महासागर में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा कर रही है और समुद्री लुटेरों व मिसाइल हमलों का मुंहतोड़ जवाब दे रही है, उसने भारत को वैश्विक पटल पर एक 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' के रूप में स्थापित कर दिया है। राजनाथ सिंह ने जवानों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारतीय नौसेना देश के आर्थिक और सामरिक हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है और किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए तैयार है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति और लोक कल्याणकारी योजनाओं के मोर्चे पर एक बहुत बड़ा प्रशासनिक उलटफेर देखने को मिला है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को मुर्शिदाबाद जिले के रेजिनगर में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक ऐतिहासिक स्वास्थ्य सुरक्षा कवच की घोषणा की है। मुख्यमंत्री के इस नए गेम चेंजर प्लान के तहत, राज्य के जो भी नागरिक केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'आयुष्मान भारत योजना' (Ayushman Bharat Yojana) के पात्रता मानदंडों में शामिल नहीं हो पाएंगे, उन्हें राज्य सरकार अपनी विशेष 'मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना' के अंतर्गत प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का पूर्ण कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री के इस बड़े कदम को राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के लोकतंत्रीकरण और चुनावी मोर्चे पर एक रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।साढ़े छह करोड़ लोगों को आयुष्मान का लाभ: छूटे हुए लोगों के लिए बनेगा नया राज्य सुरक्षा कवचमुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जनसभा में उपस्थित जनसैलाब को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि इस समय पूरे पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना के लिए पंजीकरण और आवेदन की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर चल रही है। राज्य सरकार के प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, बंगाल के करीब 6.5 करोड़ नागरिकों को सीधे तौर पर इस केंद्रीय योजना के दायरे में लाकर मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाएगी। शुभेंदु अधिकारी ने मुर्शिदाबाद की जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि तकनीकी कारणों या पात्रता नियमों की वजह से जिन परिवारों का नाम केंद्र की सूची में नहीं आ पाएगा, उन्हें किसी भी तरह से परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार अपनी निधि से मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के जरिए उन सभी छूटे हुए परिवारों का ₹5 लाख का बीमा सुनिश्चित करेगी ताकि कोई भी व्यक्ति धन के अभाव में बेहतर इलाज से वंचित न रहे।पोर्टेबिलिटी की ऐतिहासिक सुविधा: अब बंगाल के बाहर भी वैध होगा राज्य का स्वास्थ्य कार्डइस नई स्वास्थ्य नीति की सबसे अनूठी और महत्वपूर्ण विशेषता इसकी भौगोलिक पोर्टेबिलिटी (Portability) है। मुख्यमंत्री ने मंच से यह बड़ी घोषणा की कि राज्य का स्वास्थ्य मंत्रालय इस योजना के लिए एक विशेष अंतर-राज्यीय ढांचा (Inter-State Framework) तैयार कर रहा है। इसके तहत, यदि पश्चिम बंगाल का कोई नागरिक रोजगार, यात्रा या किसी अन्य कारण से देश के दूसरे राज्यों में जाता है और वहां अचानक बीमार पड़ता है, तो वह वहां के सूचीबद्ध अस्पतालों में भी इस मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के जरिए अपना ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज करा सकेगा। इस पोर्टेबिलिटी सुविधा से विशेष रूप से उन लाखों प्रवासी श्रमिकों (Migrant Workers) को बहुत बड़ी राहत मिलेगी जो काम के सिलसिले में दिल्ली, मुंबई या दक्षिण भारत के राज्यों में निवास करते हैं।रेजिनगर उपचुनाव का शंखनाद: 'फलता मॉडल' की तर्ज पर विकास और 209 विधायकों का महा-लक्ष्यस्वास्थ्य घोषणाओं के साथ ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मुस्लिम बहुल रेजिनगर विधानसभा क्षेत्र से आगामी उपचुनावों का बिगुल भी फूंक दिया। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा के विधायकों की संख्या को 209 के जादुई आंकड़े तक पहुंचाने का एक बड़ा सांगठनिक लक्ष्य रखा। मुख्यमंत्री ने नंदीग्राम की ऐतिहासिक जीत का जिक्र करते हुए कहा कि रेजिनगर का परिणाम राज्य की भावी राजनीति के लिए निर्णायक साबित होने वाला है। उन्होंने स्थानीय जनता से अपील की कि जिस तरह दक्षिण 24 परगना जिले के 'फलता विधानसभा क्षेत्र' के लोगों ने विकास पैकेज पर भरोसा करके भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाई थी, ठीक उसी तर्ज पर रेजिनगर की जनता भी राष्ट्रहित और क्षेत्रीय विकास के लिए भाजपा का समर्थन करे।प्रवासी श्रमिकों की घर वापसी और रोजगार का वादा: क्षेत्र में बनेंगे दो नए बड़े पुलमुर्शिदाबाद के आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री ने रेजिनगर की जनता से कई बड़े विकासपरक वादे किए। उन्होंने घोषणा की कि यदि क्षेत्र में भाजपा की जीत होती है, तो यातायात और व्यापार को सुगम बनाने के लिए दो नए अत्याधुनिक पुलों (Bridges) का निर्माण कराया जाएगा। इसके साथ ही, क्षेत्र के सभी पात्र और जरूरतमंद परिवारों को शत-प्रतिशत 'प्रधानमंत्री आवास योजना' (PMAY) के तहत पक्के मकान उपलब्ध कराए जाएंगे। पलायन की गंभीर समस्या पर बोलते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता दूसरे राज्यों में काम कर रहे स्थानीय प्रवासी श्रमिकों को वापस लाकर उनके गृह जिले में ही कौशल विकास के माध्यम से रोजगार के नए अवसर प्रदान करना है, ताकि उन्हें अपने परिवार से दूर न जाना पड़े।
दिल्ली-यूपी समेत 20 राज्यों में भारी बारिश और 80 KMPH की रफ्तार से आंधी का कहर, रहें सावधान
उत्तर भारत समेत पूरे देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) अपने चरम रूप में पहुंच चुका है, जिससे जहां एक तरफ भीषण गर्मी से तड़प रहे लोगों को बड़ी राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ आसमानी आफत का खतरा भी तेजी से बढ़ गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शनिवार, 11 जुलाई 2026 की सुबह एक बेहद संवेदनशील और व्यापक मौसम बुलेटिन जारी करते हुए देश की राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड सहित कुल 20 राज्यों में मूसलाधार बारिश और भयंकर आंधी-तूफान का ऑरेंज व रेड अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले 24 से 48 घंटों के दौरान इन प्रभावित क्षेत्रों में 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की विनाशकारी रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने और व्यापक स्तर पर वज्रपात (Lightning Strikes) होने की गंभीर आशंका है।उत्तर और पूर्वी भारत में सबसे ज्यादा तबाही के आसार: पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का बड़ा खतरामौसम विशेषज्ञों द्वारा जारी ताजा उपग्रहीय आंकड़ों के मुताबिक, मानसून की अक्षीय रेखा (Monsoon Trough) इस समय बेहद सक्रिय स्थिति में है, जिसका सबसे घातक असर उत्तर और पूर्वी भारत के मैदानी व पहाड़ी इलाकों में देखने को मिलेगा। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे हिमालयी राज्यों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण भूस्खलन (Landslides) और अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods) का खतरा कई गुना बढ़ गया है। मौसम विभाग ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को नदी-नालों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है। इसके अलावा, समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरों को देखते हुए मछुआरों को तटीय इलाकों से दूर रहने तथा किसानों को खुले आसमान के नीचे खेतों में काम न करने की विशेष एडवाइजरी जारी की गई है।दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश का वेदर अपडेट: गिरेगा पारा, बादलों की आवाजाही रहेगी जारीदेश की राजधानी दिल्ली और समूचे उत्तर प्रदेश (UP) के निवासियों के लिए मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले कुछ दिनों तक आसमान में घने काले बादलों का डेरा जमा रहेगा। दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी से लेकर पूर्वी यूपी के विभिन्न जिलों में रुक-रुक कर तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश का दौर चलता रहेगा। इस सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण उत्तर भारत का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे बना रहेगा, जिससे उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, मौसम विभाग ने पूर्वी भारत के कुछ छिटपुट इलाकों में भारी बारिश के साथ बड़े पैमाने पर ओलावृष्टि (Hailstorm) होने की भी आशंका जताई है।देश के इन 20 राज्यों में जारी हुआ भारी बारिश का अलर्ट: देखें पूरी सूचीमौसम केंद्र ने जिन 20 राज्यों को अगले 24 घंटों के लिए विशेष सतर्कता बरतने को कहा है, उनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम, त्रिपुरा, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। इन राज्यों के कुछ विशिष्ट जिलों में अत्यधिक भारी बारिश (Extremely Heavy Rainfall) दर्ज की जा सकती है।अगले 24 घंटों का संभावित वेदर फोरकास्ट: हल्की से मध्यम और मूसलाधार बारिश का अनुमानमौसम की संभावित गतिविधियों के अनुसार, अगले 24 घंटों के भीतर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा के अंदरूनी हिस्सों, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश, तटीय कर्नाटक और केरल में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर मूसलाधार बारिश होगी। इसके साथ ही, कोंकण एवं गोवा, जम्मू-कश्मीर तथा उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश, उत्तरी तमिलनाडु, विदर्भ और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी बादलों की गर्जना के साथ मानसूनी बौछारें पड़ने की पूरी संभावना बनी हुई है।
आज खेला जाएगा भारत-इंग्लैंड पांचवां टी20, जानें कब फेंकी जाएगी पहली गेंद और कहां देखें फ्री लाइव
भारत और इंग्लैंड के बीच जारी 5 मैचों की रोमांचक टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का पांचवां और अंतिम हाई-वोल्टेज मुकाबला आज यानी शनिवार, 11 जुलाई 2026 को खेला जाना है। इस अंतिम महा-मुकाबले की समय सारणी (Match Timings) में ब्रॉडकास्टर्स द्वारा कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सीरीज में पहले ही 0-3 से पिछड़कर ट्रॉफी गंवा चुकी भारतीय टीम के लिए आज का यह मैच अपनी साख और आत्मसम्मान बचाने का आखिरी मौका है। अगर आज भी श्रेयस अय्यर की अगुवाई वाली युवा टीम इंडिया को पराजय का सामना करना पड़ा, तो विदेशी धरती पर 0-4 से शर्मनाक सूपड़ा साफ (Clean Sweep) हो जाएगा। इसके साथ ही आईसीसी टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम रैंकिंग में पिछले 4 सालों से चला आ रहा भारत का एकछत्र राज भी हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।श्रेयस अय्यर की कप्तानी की सबसे बड़ी परीक्षा: यूके टूर पर पहली जीत की तलाश में टीम इंडियानए कप्तान श्रेयस अय्यर की लीडरशिप के लिए यह यूके (UK) दौरा किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा है। भारतीय टीम इस पूरे दौरे पर अब तक एक भी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला जीतने में पूरी तरह नाकाम रही है। इंग्लैंड से पहले आयरलैंड के खिलाफ खेली गई टी20 सीरीज में भी भारत को 0-2 से ऐतिहासिक शिकस्त झेलनी पड़ी थी। अनुभवी खिलाड़ियों की अनुपस्थिति में युवा ब्रिगेड इंग्लिश कंडीशंस के सामने पूरी तरह लाचार नजर आई है। ऐसे में कप्तान अय्यर आज साउथहैंप्टन के मैदान पर अपनी रणनीतियों में बड़े बदलाव कर हर हाल में जीत का खाता खोलना चाहेंगे, ताकि देश की साख को बचाया जा सके।कहां और कितने बजे शुरू होगा महा-मुकाबला? टॉस और टाइमिंग का पूरा शेड्यूलक्रिकेट फैंस के लिए इस आखिरी टी20 मैच से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण प्रशासनिक जानकारियां इस प्रकार हैं:तारीख और वेन्यू: इंडिया वर्सेस इंग्लैंड पांचवां टी20 मैच आज 11 जुलाई को साउथहैंप्टन के प्रतिष्ठित 'द रोज बाउल' (The Rose Bowl) क्रिकेट ग्राउंड में खेला जाएगा।मैच का समय: आधिकारिक तौर पर यह मुकाबला भारतीय समयानुसार (IST) शाम 07:00 बजे शुरू होगा, जहां खेल की पहली गेंद फेंकी जाएगी।टॉस का समय: दोनों टीमों के कप्तान टॉस की प्रक्रियाओं के लिए मैच शुरू होने से ठीक आधा घंटा पहले यानी शाम 06:30 बजे मैदान पर उतरेंगे।डीडी स्पोर्ट्स पर फ्री लाइव टेलीकास्ट: निजी डीटीएच प्लेटफॉर्म्स के लिए बदली गाइडलाइनभारतीय दर्शकों के लिए इस मैच के लाइव प्रसारण को लेकर एक विशेष गाइडलाइन जारी की गई है। क्रिकेट फैंस इस रोमांचक मैच का मुफ्त लुत्फ डीडी स्पोर्ट्स (DD Sports) चैनल पर उठा सकते हैं। हालांकि, ब्रॉडकास्टिंग राइट्स की कानूनी पाबंदियों के कारण यह फ्री लाइव टेलीकास्ट केवल उन दर्शकों के लिए ही मान्य होगा जो डीडी फ्री डिश (DD Free Dish) या टेरेस्ट्रियल एंटीना नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। यदि आप टाटा प्ले (Tata Play), एयरटेल डिजिटल टीवी या डिश टीवी जैसे प्राइवेट DTH प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं, तो वहां यह मैच फ्री में उपलब्ध नहीं होगा।मोबाइल और टीवी पर लाइव स्ट्रीमिंग के विकल्प: स्टार स्पोर्ट्स और हॉटस्टार पर दिखेगा लाइवजो दर्शक अपने घरों में टीवी या मोबाइल पर इस मुकाबले का सीधा प्रसारण देखना चाहते हैं, उनके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सूची इस प्रकार है:टीवी प्रसारण (पेड़ चैनल): प्राइवेट केबल और डीटीएच धारक स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क (Star Sports Network) के विभिन्न चैनलों पर लाइव मैच देख सकते हैं।डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग: इंटरनेट यूजर्स के लिए यह मुकाबला एक साथ दो बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म्स—डिजनी प्लस हॉटस्टार (Disney+ Hotstar) और सोनी लिव (Sony LIV) पर लाइव स्ट्रीम किया जाएगा।दोनों टीमों की अंतिम प्लेइंग इलेवन और संभावित स्क्वॉडभारतीय स्क्वॉड: श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, इशान किशन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, हर्षित राणा, प्रिंस यादव, अर्शदीप सिंह, वरुण चक्रवर्ती, संजू सैमसन, प्रसिद्ध कृष्णा, वाशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, सूर्यांश शेडगे।इंग्लैंड स्क्वॉड: हैरी ब्रूक (कप्तान), फिलिप सॉल्ट, जोस बटलर (विकेटकीपर), जैकब बेथेल, टॉम बैंटन, सैम करन, विल जैक्स, जोफ्रा आर्чер, लियाम डॉसन, आदिल राशिद, जोश टंग, सोनी बेकर, रेहान अहमद, जॉर्डन कॉक्स, साकिब महमूद, ल्यूक वुड।
4 साल से राज कर रही टीम इंडिया से आज नंबर-1 का ताज छीन सकता है इंग्लैंड, तख्तापलट का खतरा
भारतीय क्रिकेट टीम के लिए आज का दिन बेहद संवेदनशील और अग्निपरीक्षा जैसा होने वाला है। भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही 5 मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का पांचवां और अंतिम मुकाबला आज साउथहैंप्टन के मैदान पर खेला जाएगा। यह मैच केवल एक औपचारिक मुकाबला नहीं है, बल्कि टीम इंडिया के लिए अपनी साख और आत्मसम्मान बचाने की आखिरी जंग है। पिछले चार वर्षों से आईसीसी टी20 टीम रैंकिंग (ICC T20I Team Rankings) के सर्वोच्च सिंहासन पर राज कर रही भारतीय टीम पर आज नंबर-1 की गद्दी गंवाने का सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अगर आज भी भारतीय टीम को शिकस्त का सामना करना पड़ा, तो वैश्विक टी20 क्रिकेट के इतिहास में एक बड़ा तख्तापलट देखने को मिलेगा।वर्ल्ड कप 2026 की जीत के बाद अर्श से फर्श पर प्रदर्शन: श्रेयस अय्यर की कप्तानी में जीत को तरसी टीमयह बेहद चौंकाने वाला विरोधाभास है कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 का ऐतिहासिक खिताब अपने नाम करने के बाद से भारतीय टी20 टीम का ग्राफ लगातार नीचे की ओर जा रहा है। नए कप्तान श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) की अगुवाई में युवा भारतीय टीम मैदान पर पूरी तरह बेअसर और दिशाहीन नजर आई है। आयरलैंड के खिलाफ सीरीज में करारी शिकस्त झेलने के बाद, इंग्लैंड दौरे पर भी भारतीय टीम का बेहद निराशाजनक प्रदर्शन जारी है। कप्तान श्रेयस अय्यर अब तक अपनी लीडरशिप में टीम इंडिया को एक भी अंतरराष्ट्रीय जीत दिलाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं, जिसके कारण टीम की रणनीतियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।रेटिंग्स का गणित: हार की हैट्रिक से 269 अंकों पर सिमटा भारत, इंग्लैंड बेहद करीब26 जून को जब भारतीय टीम ने अपने यूके (UK) दौरे का आगाज किया था, तब वह 275 की मजबूत रेटिंग के साथ आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष पर काबिज थी। हालांकि, आयरलैंड के खिलाफ सीरीज में 0-2 की ऐतिहासिक और शर्मनाक हार झेलने के बाद भारत की रेटिंग घटकर 272 पर आ गई। इस बीच, इंग्लैंड का विजय रथ लगातार आगे बढ़ता रहा। अब मौजूदा इंग्लैंड दौरे पर हार की हैट्रिक (0-4 से पिछड़ने) के बाद भारत की रेटिंग गिरकर 269 अंकों पर सिमट गई है। दूसरी तरफ, शानदार फॉर्म में चल रही मेजबान इंग्लैंड की टीम 267 अंकों के साथ भारत के बिल्कुल नजदीक पहुंच चुकी है और तीसरे स्थान पर 260 अंकों के साथ ऑस्ट्रेलिया बनी हुई है।एक और शिकस्त और छिन जाएगी बादशाहत: हैरी ब्रूक ने जताई क्लीन स्वीप की हुंकारअगर आज साउथहैंप्टन में खेले जाने वाले पांचवें टी20 मैच में भी पासा पलटता है और भारतीय टीम हारती है, तो इंग्लैंड न केवल भारत का 5-0 से पूर्ण सूपड़ा साफ (Clean Sweep) कर देगा, बल्कि नंबर-1 का ताज भी अपने नाम कर लेगा। मैच जीतने और सीरीज जीतने के दोहरे अंकों के चलते इंग्लैंड की रेटिंग में बंपर इजाफा होगा। इंग्लैंड के कार्यवाहक कप्तान हैरी ब्रूक (Harry Brook) ने मैच से पूर्व प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुंकार भरते हुए कहा, हमें प्रबंधन द्वारा बताया गया है कि अगला मैच जीतते ही हम दुनिया की नंबर-1 टी20 टीम बन जाएंगे और यह एक ऐसा पुरस्कार है जिस पर हमारी पैनी नजरें टिकी हुई हैं। भारत को 4-0 से हराना पहले से ही विशेष है, लेकिन 5-0 के साथ शीर्ष पर पहुंचना हमारे लिए मुख्य मकसद है। आज के मैच में साख और नंबर-1 की पोजिशन बचाने के लिए टीम इंडिया को हर हाल में चमत्कारी प्रदर्शन करना होगा।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ओपनर और उप-कप्तान स्मृति मंधाना ने इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र ऐतिहासिक टेस्ट मैच में एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित कर दिया है, जो विमेंस क्रिकेट के इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो गया है। 'क्रिकेट का मक्का' कहे जाने वाले लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स (Lord's) क्रिकेट ग्राउंड पर खेले जा रहे इस मुकाबले में मंधाना ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए एक अभूतपूर्व विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया। 149 साल के लंबे टेस्ट क्रिकेट इतिहास में यह पहला मौका है जब लॉर्ड्स का मैदान किसी महिला टेस्ट मैच की मेजबानी कर रहा है, और इस पल को मंधाना ने अपनी ऐतिहासिक पारी से हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बना दिया।मंधाना बनीं लॉर्ड्स में टेस्ट फिफ्टी जड़ने वाली दुनिया की पहली महिला क्रिकेटरइस ऐतिहासिक मुकाबले में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम को स्मृति मंधाना ने धुआंधार शुरुआत दी। मंधाना लॉर्ड्स के मैदान पर टेस्ट क्रिकेट में अर्धशतक (Fasting Fifty) लगाने वाली दुनिया की पहली महिला क्रिकेटर बन गई हैं। हालांकि, वह अपने इस ऐतिहासिक अर्धशतक को एक यादगार शतक में बदलने से चूक गईं और 83 रन के निजी स्कोर पर पवेलियन लौट गईं। अपनी इस जांबाज पारी के दौरान मंधाना ने केवल 108 गेंदों का सामना किया, जिसमें उन्होंने 11 शानदार चौके और 1 गगनचुंबी छक्का जड़कर इंग्लिश गेंदबाजों की लाइन-लेंथ बिगाड़ दी।कप्तान हरमनप्रीत कौर और ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा की शानदार हाफ-सेंचुरीस्मृति मंधाना द्वारा रखी गई मजबूत नींव के बाद भारतीय टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर और स्टार ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने भी इंग्लिश कंडीशंस में बेहतरीन बल्लेबाजी का मुजाहिरा पेश किया। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 121 गेंदों का सामना करते हुए 7 चौकों की मदद से 58 रनों की कप्तानी पारी खेली। वहीं, शानदार फॉर्म में चल रही दीप्ति शर्मा ने भी 87 गेंदों पर 57 रन बनाए। इन दोनों ही बल्लेबाजों ने भारतीय पारी को संभाला, लेकिन क्रीज पर पूरी तरह सेट होने के बाद ये दोनों भी अपनी फिफ्टी को बड़ी शतकीय पारी में तब्दील करने में नाकाम रहीं।भारतीय पारी 285 रनों पर सिमटी: निचले क्रम का निराशाजनक सरेंडरइन तीन शीर्ष बल्लेबाजों के अर्धशतकों के दम पर भारतीय महिला टीम अपनी पहली पारी में 285 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा करने में सफल रही। एक समय मजबूत स्थिति में दिख रही भारतीय टीम का निचला क्रम इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों के सामने ताश के पत्तों की तरह ढह गया। टीम के अंतिम 5 बल्लेबाज मिलकर स्कोरबोर्ड में केवल 26 रन ही जोड़ सके, जिसके कारण भारतीय टीम पहले ही दिन ऑलआउट हो गई और इंग्लैंड को दिन का खेल खत्म होने से ठीक पहले बल्लेबाजी के लिए मैदान पर उतरना पड़ा।पहले ही दिन इंग्लैंड को लगा बड़ा झटका: क्रांति गौड़ ने दिलाई भारत को पहली सफलतापहली पारी में 285 रन के जवाब में उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही। भारतीय तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने धारदार गेंदबाजी करते हुए इंग्लैंड की स्टार सलामी बल्लेबाज टैमी ब्यूमोंट को महज 2 रन के स्कोर पर एलबीडब्ल्यू (LBW) आउट कर पवेलियन का रास्ता दिखा दिया। पहले दिन का खेल खत्म होने तक इंग्लैंड ने 11 ओवरों में 1 विकेट के नुकसान पर 21 रन बना लिए हैं। इस समय माइया बौशियर और कप्तान हेथर नाइट क्रीज पर टिकी हुई हैं। भारतीय टीम के पास अभी भी पहली पारी के आधार पर 264 रनों की विशाल और मजबूत बढ़त मौजूद है।
SEBI ने एक साथ 5 कंपनियों को दी हरी झंडी, जानिए निवेश से पहले हर एक की पूरी कुंडली
भारतीय प्राथमिक शेयर बाजार (Primary Market) में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी खबर सामने आ रही है। बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने आईपीओ मार्केट में तहलका मचाने के लिए एक साथ पांच दिग्गज कंपनियों के ड्राफ्ट पेपर्स (DRHP) को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इन कंपनियों में डिफेंस सेक्टर से लेकर रिटेल, फर्नीचर रेंटल और एडवांस टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। सेबी की इस हरी झंडी के बाद दलाल स्ट्रीट में हलचल काफी ज्यादा तेज हो गई है, और निवेशक अपने फंड को तैयार करने में जुट गए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि इन पांचों कंपनियों का बिजनेस मॉडल क्या है और वे आईपीओ के जरिए कितना फंड जुटाने की तैयारी में हैं।टोंबो इमेजिंग इंडिया: डिफेंस सेक्टर की इस कंपनी के आईपीओ में 1.81 करोड़ शेयरों का ओएफएससेबी से मंजूरी पाने वाली पहली कंपनी टोंबो इमेजिंग इंडिया (Tombo Imaging India) है, जो मुख्य रूप से डिफेंस-केंद्रित (Defense-Focused) अत्याधुनिक प्रोडक्ट्स बनाने का काम करती है। कंपनी के प्रस्तावित आईपीओ में ₹2 की फेस वैल्यू वाले 1.81 करोड़ इक्विटी शेयरों तक का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है। इस ओएफएस के तहत प्रमोटर सेलिंग शेयरहोल्डर्स द्वारा 19.60 लाख इक्विटी शेयर, प्रमोटर ग्रुप द्वारा 3.40 लाख शेयर और बड़े संस्थागत निवेशकों द्वारा 1.56 करोड़ इक्विटी शेयर बाजार में बेचे जाएंगे। इस हाई-प्रोफाइल इश्यू के लिए जेएम फाइनेंशियल (JM Financial) और आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड (IIFL Capital Services) को बुक रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है।मैरी रिटेल लिमिटेड: ₹522 करोड़ के नए शेयर और 10 नए कपड़ों के स्टोर खोलने का मेगा प्लानहैदराबाद आधारित रिटेल चेन मैरी रिटेल लिमिटेड (Mary Retail Limited) भी अपना आईपीओ लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। कंपनी का यह प्रस्तावित आईपीओ ₹522 करोड़ मूल्य के नए शेयरों (Fresh Issue) और प्रमोटर मैरी वेंकट रेड्डी द्वारा 2.7 करोड़ मौजूदा शेयरों की बिक्री के प्रस्ताव (OFS) का एक बेहतरीन मिश्रण है। कंपनी इस आईपीओ से मिलने वाली नई पूंजी का इस्तेमाल अपना पुराना कर्ज चुकाने, देश में 10 नए कपड़ों के स्टोर खोलने, ज्वेलरी स्टोर-इन-स्टोर (SIS) के साथ एक हाइब्रिड कपड़ों का आउटलेट शुरू करने, दो नए स्टैंडअलोन ज्वेलरी स्टोर खोलने और मौजूदा गोदामों के लीज किराए का भुगतान करने के लिए करेगी। वर्तमान में कंपनी के पास तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र के 26 जिलों में 34 चालू स्टोर्स का मजबूत नेटवर्क है, जिसे नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट लिमिटेड (Nuvama Wealth Management) द्वारा मैनेज किया जा रहा है।रेंटोमोजो: ₹150 करोड़ का फ्रेश इश्यू और 2.28 लाख एक्टिव सब्सक्राइबर्स का मजबूत भरोसाफर्नीचर और एप्लायंसेज रेंटल मार्केट की जानी-मानी कंपनी रेंटोमोजो (Rentomojo) भी शेयर बाजार में लिस्ट होने के लिए तैयार है। कंपनी के आईपीओ में ₹150 करोड़ तक के इक्विटी शेयरों का नया इश्यू और मौजूदा शेयरधारकों द्वारा 2.84 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री का प्रस्ताव (OFS) शामिल किया गया है। ड्राफ्ट पेपर्स के अनुसार, रेंटोमोजो इस फंड का उपयोग कॉर्पोरेट ऋणों को चुकाने, अपने विशाल गोदामों (Warehouses) और एक्सपीरियंस स्टोर्स के लिए लीज रेंटल या लाइसेंस फीस का अग्रिम भुगतान करने के लिए करेगी। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल तक कंपनी के पास देश के 22 प्रमुख शहरों में 2.28 लाख से अधिक एक्टिव सब्सक्राइबर थे और कंपनी के पास कुल 4.44 लाख स्क्वायर फीट एरिया वाले 21 अत्याधुनिक वेयरहाउस मौजूद हैं।जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग: ₹5,000 करोड़ तक फंड जुटाने का महा-लक्ष्य, दिग्गज वैश्विक निवेशकों का है साथइस पूरी सूची में सबसे बड़ा और बहुप्रतीक्षित नाम जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग (Zetwerk Manufacturing) का है, जो इस आईपीओ के जरिए ₹4,000 करोड़ से ₹5,000 करोड़ के बीच का विशाल फंड जुटाने की बड़ी योजना बना रही है। इस इश्यू के वास्तविक साइज और वैल्यूएशन की जानकारी आने वाले समय में बुक-बिल्डिंग प्रोसेस के जरिए ही तय की जाएगी। यह कंपनी एक एडवांस टेक्नोलॉजी-बेस्ड मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफ़ॉर्म चलाती है, जो ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस, एयरोस्पेस और कैपिटल गुड्स जैसे कोर सेक्टर्स में सप्लायर्स के नेटवर्क को वैश्विक इंडस्ट्रियल डिमांड से जोड़ता है। इस कंपनी में खोसला वेंचर्स, बेली गिफ़ोर्ड, राकेश गंगवाल, एक्सेल, पीक XV और लाइटस्पीड जैसे दुनिया के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित वेंचर कैपिटलिस्ट्स ने भारी निवेश किया हुआ है।गुजरात विक्ट्री फोर्जिंग्स: वडोदरा यूनिट के विस्तार और नॉन-फेरस मेटल रीसाइक्लिंग पर फोकसपांचवीं कंपनी गुजरात विक्ट्री फोर्जिंग्स (Gujarat Victory Forgings) है, जिसके प्रस्तावित आईपीओ में 65 लाख तक इक्विटी शेयरों का नया इश्यू और प्रमोटर विजेंद्रकुमार बिशंबर गुप्ता द्वारा 1.32 करोड़ तक इक्विटी शेयरों का ऑफर फॉर सेल शामिल है। यह कंपनी मेटल स्क्रैप की अत्याधुनिक प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग के जरिए नॉन-फेरस मेटल प्रोडक्ट्स (Non-Ferrous Metal Products) बनाने के मुख्य कारोबार में लगी हुई है। कंपनी नए इश्यू से मिलने वाले फंड का इस्तेमाल गुजरात के वडोदरा में स्थित अपनी मौजूदा यूनिट-III के विस्तार, कॉपर कैथोड की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को दोगुना करने और अपने कार्यशील पूंजी के खर्चों को पूरा करने में करेगी, जिससे आने वाले समय में कंपनी के रेवेन्यू में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है।
1 जुलाई को वैष्णव योगिनी एकादशी का महासंयोग, 3 शुभ योगों के साथ जानें राहुकाल और पारण का सटीक समय
हिंदू सनातन पंचांग के अनुसार आज यानी शनिवार, 11 जुलाई 2026 का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ संयोगों से भरा हुआ है। आज आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि रात्रि 02:05 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ होगा। आज के दिन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वैष्णव परंपरा (संन्यासी और विष्णु मंदिरों) के अनुयायी आज महापुण्यदायी 'गौण योगिनी एकादशी' का उपवास रख रहे हैं। इसके साथ ही आज के पंचांग में सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और त्रिपुष्कर योग का एक अनोखा त्रिवेणी महासंयोग बन रहा है, जो किसी भी नए कार्य की शुरुआत और देव आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।तिथि भेद और व्रत पारण का नियम: स्मार्त और वैष्णव परंपरा का पूरा गणित समझेंइस वर्ष योगिनी एकादशी की सही तारीख को लेकर देश भर के श्रद्धालुओं के बीच जो भ्रम बना हुआ था, उसकी मुख्य वजह स्मार्त और वैष्णव मतों के पंचांगीय नियम हैं। गृहस्थों (स्मार्त परंपरा) ने उदयकालीन तिथि के नियमों के तहत कल यानी 10 जुलाई को ही एकादशी का व्रत सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। ऐसे में 10 जुलाई को व्रत रखने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए आज, 11 जुलाई को द्वादशी तिथि के दौरान व्रत का पारण (Fasting Breaking Time) करना शास्त्र सम्मत है। आज पारण करने का सबसे शुभ और सटीक समय सुबह 05:21 बजे से लेकर सुबह 09:59 बजे तक रहेगा। दूसरी ओर, जो वैष्णव भक्त आज 11 जुलाई को एकादशी व्रत का संकल्प ले रहे हैं, वे अगले दिन यानी रविवार, 12 जुलाई को सुबह 05:22 बजे से 08:09 बजे के बीच अपने व्रत का पारण करेंगे।ग्रह-नक्षत्रों का गोचर: कृतिका के बाद रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि में चंद्रमा का संचरण11 जुलाई 2026 के पंचांगीय आंकड़ों पर नजर डालें तो सौर गणना के अनुसार आज शक संवत् 20 आषाढ़ 1948 और विक्रमी संवत् 2083 चल रहा है। आज सूर्य देव उत्तरायण की स्थिति में रहेंगे। नक्षत्रों की बात करें तो आज प्रातः 11:04 मिनट तक कृतिका नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद बेहद शुभ और मनमोहक रोहिणी नक्षत्र का प्रवेश होगा। आज रात्रि 12:06 मिनट तक गण्ड योग रहेगा, तत्पश्चात वृद्धि योग की शुरुआत होगी। ग्रहों के राजा सूर्य देव इस समय मिथुन राशि में विराजमान हैं, जबकि मन के कारक चंद्रमा दिन-रात वृष राशि में संचरण करेंगे, जिससे मानसिक शांति और बौद्धिक कार्यों में सफलता के योग बनेंगे।आज के सर्वोत्तम शुभ मुहूर्त: सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग की समयावधिआज शनिवार को तीन बड़े शुभ योग एक साथ सक्रिय हो रहे हैं, जो निवेश और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत फलदायी हैं:त्रिपुष्कर योग: सुबह 05:59 बजे से सुबह 07:33 बजे तक।सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 07:33 बजे से अगले दिन (12 जुलाई) सुबह 04:59 बजे तक।अमृत सिद्धि योग: सुबह 07:33 बजे से अगले दिन (12 जुलाई) सुबह 04:59 बजे तक।अभिजित मुहूर्त: दोपहर 01:24 बजे से दोपहर 02:28 बजे तक (दिन का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त)।ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:54 बजे से प्रातः 05:27 बजे तक।गोधूलि मुहूर्त: रात्रि 09:51 बजे से रात्रि 10:07 बजे तक।भूलकर भी न करें इन समयों में शुभ कार्य: राहुकाल और यमगण्ड की सटीक टाइमिंगज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर दिन कुछ समय ऐसा होता है जिसमें नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक रहता है, इसलिए इन अवधियों में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य या यात्रा की शुरुआत करने से बचना चाहिए:राहुकाल: प्रातः 09:57 बजे से दोपहर 11:57 बजे तक (इस समय में नया काम न शुरू करें)।यमगण्ड: दोपहर 03:55 बजे से शाम 05:54 बजे तक।गुलिक काल: सुबह 05:59 बजे से सुबह 07:58 बजे तक।वर्ज्य काल: रात्रि 09:50 बजे से रात्रि 11:16 बजे तक।
हिंदू सनातन धर्म में व्रतों की राजा कही जाने वाली एकादशी को लेकर इस बार देश भर के श्रद्धालुओं और ज्योतिषाचार्यों के बीच भारी असमंजस (Confusion) की स्थिति देखी जा रही है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की 'योगिनी एकादशी' (Yogini Ekadashi 2026) की सही तारीख को लेकर भक्त उलझन में हैं कि व्रत 10 जुलाई को था या आज यानी 11 जुलाई को भी रखा जा सकता है। पंचांगीय गणना और सूर्योदय के धार्मिक नियमों के चलते इस बार स्मार्त (Smartha) और वैष्णव (Vaishnava) दोनों परंपराओं के अनुयायियों के लिए व्रत की तिथियां अलग-अलग हो गई हैं। यही मुख्य वजह है कि विभिन्न हिंदू पंचांगों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर व्रत एवं पारण (Parana) को लेकर दो विपरीत जानकारियां सामने आ रही हैं।स्मार्त अनुयायियों के लिए आज पारण का दिन: सुबह 5:21 से शुरू हो चुका है शुभ मुहूर्तधार्मिक नियमों और पंचांग के अनुसार, स्मार्त परंपरा (गृहस्थ जीवन जीने वाले श्रद्धालु) का पालन करने वाले भक्तों ने 10 जुलाई को ही योगिनी एकादशी का उपवास पूर्ण कर लिया है। ऐसे में 10 जुलाई को व्रत रखने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए आज यानी शनिवार, 11 जुलाई 2026 को द्वादशी तिथि के भीतर पारण करना अनिवार्य है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, आज पारण करने का सबसे श्रेष्ठ और शुभ समय सुबह 05:21 बजे से लेकर सुबह 09:59 बजे तक निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, कुछ स्थानीय पंचांगों में हरिवासर (Hari Vasara) की समाप्ति के बाद दोपहर 01:24 बजे से शाम 04:09 बजे तक का समय भी पारण के लिए उपयुक्त बताया गया है। मान्यताओं के अनुसार, तय समय सीमा के भीतर पारण करने से ही व्रत का संपूर्ण आध्यात्मिक फल प्राप्त होता है।वैष्णव संप्रदाय आज रख रहा है महा-व्रत: 11 जुलाई को विष्णु मंदिरों में उमड़ी भारी भीड़इसके विपरीत, वैष्णव परंपरा (संत, संन्यासी और भगवान विष्णु के अनन्य भक्त) से जुड़े श्रद्धालु आज यानी 11 जुलाई को पूर्ण निष्ठा के साथ योगिनी एकादशी का व्रत रख रहे हैं। उदयकालीन तिथि और द्वादशी युक्त एकादशी को प्राथमिकता देने के कारण वैष्णव मत में आज के दिन को ही मुख्य एकादशी स्वीकार किया गया है। इस कारण आज देश के प्रमुख वैष्णव पीठों और श्री हरि विष्णु मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, मंगला आरती, अखंड भजन-कीर्तन और विष्णु मंत्रों का जाप किया जा रहा है। वैष्णव पद्धति से व्रत रखने वाले ये श्रद्धालु पूरे दिन फलाहार और निर्जला संकल्प के साथ भगवान नारायण की भक्ति में लीन रहेंगे।वैष्णव व्रतधारियों के लिए 12 जुलाई के पारण का समय: जानें कब खुलेगा उपवास11 जुलाई को योगिनी एकादशी का महा-व्रत रखने वाले वैष्णव श्रद्धालुओं के लिए अगले दिन यानी रविवार, 12 जुलाई 2026 को पारण करने की शास्त्रीय व्यवस्था दी गई है। पंचांग के अनुसार, 12 जुलाई को पारण करने का अत्यंत शुभ समय सुबह 05:22 बजे से लेकर सुबह 08:09 बजे तक रहेगा। शास्त्रों में स्पष्ट निर्देश है कि एकादशी व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि में और हरिवासर का समय बीत जाने के बाद ही किया जाना चाहिए। यदि किसी अपरिहार्य कारणवश या यात्रा आदि की वजह से कोई श्रद्धालु इस तय समय में पारण नहीं कर पाता है, तो उसे अपने कुलगुरु, ज्योतिषी या पारिवारिक लोकाचार की परंपरा के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।समस्त पापों से मुक्ति दिलाती है योगिनी एकादशी: विष्णु सहस्रनाम के पाठ का है विशेष विधानपौराणिक और धार्मिक ग्रंथों में योगिनी एकादशी के महत्व का अत्यंत विस्तार से वर्णन किया गया है। यह एकादशी साक्षात भगवान श्री हरि विष्णु और ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम दिन मानी जाती है। इस पावन अवसर पर विष्णु सहस्रनाम (Vishnu Sahasranamam) का सामूहिक पाठ करने, तुलसी दल अर्पित करने और जरूरतमंद तथा ब्राह्मणों को अन्न-वस्त्र का दान देने से जातक को अनजाने में हुए बड़े से बड़े पापों से मुक्ति मिल जाती है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में छाई दरिद्रता दूर होती है और मानसिक शांति, पारिवारिक सुख व आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इस वर्ष स्मार्त और वैष्णव गणना के इस सूक्ष्म अंतर को समझकर ही भक्तों को अपनी साधना संपन्न करनी चाहिए।
कर्नाटक: मंत्री कुमारस्वामी ने नदी-जोड़ो परियोजना पर सहमति को लेकर सीएम डीके शिवकुमार से किया सवाल
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की आलोचना की। शिवकुमार ने कहा था कि कर्नाटक ने कृष्णा, गोदावरी और कावेरी नदियों को आपस में जोड़ने की प्रस्तावित परियोजना के लिए अपनी सहमति दे दी है।
बिहार में एनडीए की अहम बैठक, सरकार और संगठन के समन्वय पर जोर
बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन के बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पर गठबंधन की पहली बड़ी संगठनात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की।
कलकत्ता हाई कोर्ट में ईडी के खिलाफ टीएमसी की याचिका, पार्टी के तीन बैंक खातों पर कार्रवाई को चुनौती
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट ने शुक्रवार को कलकत्ता हाई कोर्ट की सिंगल-जज बेंच का रुख किया
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करे कर्नाटक सरकार, जीबीए चुनाव कराए : भाजपा नेता नारायणस्वामी
कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने शुक्रवार को राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सम्मान करने और ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) के चुनाव कराने का आग्रह किया।
जम्मू: ओटीटी से हटाने के बाद 'सतलुज' की गुरुद्वारों में होगी स्क्रीनिंग, डीजीपीसी का ऐलान
अभिनेता और सिंगर दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' इन दिनों विवादों में घिरी हुई है
राम मंदिर चंदा घोटाले पर मौन हैं सीएम योगी, 2027 में भाजपा की ऐतिहासिक हार होगी: अवधेश प्रसाद
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हनुमानगढ़ी में नमाज, राम मंदिर और समाजवादी पार्टी को लेकर दिए गए हालिया बयानों पर सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने तीखी प्रतिक्रिया दी
मध्यप्रदेश में दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर सियासी पारा गर्म हो गया है। दतिया विधानसभा सीट में हो रहे उपचुनाव में भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया है। टिकट के प्रति आश्वस्त नरोत्तम मिश्रा ने नामांकन पत्र भी खरीद लिया था। ...
बिजनौर में मालन नदी का कहर, कुछ घंटों में 3 लोग लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते मालन नदी उफान पर पहुंच गई और उसने शुक्रवार को दो अलग-अलग घटनाओं में तीन परिवारों की खुशियां छीन ली। मालन नदी में एक व्यक्ति और दो किशोर तेज बहाव में बहने की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर राहत ...
ट्रंप की हत्या की संभावित ईरानी योजनाओं पर इजराइल ने अमरीका से साझा की खुफिया जानकारी
येरूशलेम। इजराइल ने अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की कथित ईरानी साजिशों को लेकर अमेरिका के साथ खुफिया इनपुट साझा किए हैं। इस आशय की रिपोर्ट चैनल 12 ने दी है। मामले से वाकिफ लोगों ने वॉल स्ट्रीट जर्नल (डब्ल्यूएसजे) को बताया कि इजराइली खुफिया तंत्र ने अमरीकी राष्ट्रपति की हत्या की नई […] The post ट्रंप की हत्या की संभावित ईरानी योजनाओं पर इजराइल ने अमरीका से साझा की खुफिया जानकारी appeared first on Sabguru News .
संयुक्त निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं जोन उदयपुर के लिए दलाल 30000 रुपए रिश्वत लेते अरेस्ट
उदयपुर। राजस्थान में भ्रषचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने शुक्रवार को उदयपुर में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं जोन उदयपुर के संयुक्त निदेशक डॉ. रतन बिलवाल के लिए उसके दलाल अब्दुल कादिर को 30 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। ब्यूरो के महानिदेशक गोविन्द गुप्ता ने बताया कि एसीबी बांसवाडा को शिकायत मिली कि […] The post संयुक्त निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं जोन उदयपुर के लिए दलाल 30000 रुपए रिश्वत लेते अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
उत्तर प्रदेश के जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jewar Airport) की कनेक्टिविटी को विश्वस्तरीय बनाने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YIDA) युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। यीडा के मुताबिक, यमुना एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ने वाले बेहद महत्वाकांक्षी लिंक एक्सप्रेसवे (Link Expressway) के लिए जमीन खरीदने का काम सुपरफास्ट स्पीड से आगे बढ़ रहा है।प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में आने वाले 16 गांवों की कुल 740 एकड़ जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए चिन्हित की गई है, जिसमें से लगभग 60 प्रतिशत जमीन किसानों की आपसी सहमति से (Direct Purchase) खरीदी जा चुकी है। वहीं, शेष बची भूमि के अधिग्रहण (Land Acquisition) की कानूनी प्रक्रिया भी अब अपने अंतिम चरणों में पहुंच गई है।भव्य इंटरचेंज से आसान होगा हवाई यात्रियों का सफरदोनों बड़े एक्सप्रेसवे को आपस में निर्बाध रूप से जोड़ने के लिए एक बेहद आधुनिक और भव्य इंटरचेंज (Interchange) का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए यीडा ने भाईपुर, ब्रह्मनानपुर और मेहंदीपुर बांगर गांवों की जमीन खरीदने की प्रक्रिया को काफी तेज कर दिया है।यह नया इंटरचेंज जेवर एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे के बीच तीसरा सबसे महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु (Connectivity Point) साबित होगा। इस इंटरचेंज और लिंक रोड के निर्माण के लिए सरकार ने 1209 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है। प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य यह है कि लिंक एक्सप्रेसवे और इंटरचेंज दोनों का निर्माण कार्य एक साथ शुरू किया जा सके ताकि प्रोजेक्ट में कोई देरी न हो।क्या है इस मेगा प्रोजेक्ट की मुख्य खासियत?यह नया लिंक एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:कुल लंबाई: यह लिंक एक्सप्रेसवे कुल 73.4 किलोमीटर लंबा होगा।चौड़ाई का ढांचा: मुख्य एक्सप्रेसवे की चौड़ाई 80 मीटर तय की गई है, जिसके दोनों ओर स्थानीय यातायात के लिए चौड़ी सर्विस रोड (Service Roads) बनाई जाएंगी। सर्विस रोड को मिलाकर इसकी कुल चौड़ाई 130 मीटर तक हो जाएगी।कनेक्टिविटी प्वाइंट: यह लिंक मार्ग यमुना एक्सप्रेसवे के 24.8 किलोमीटर वाले प्वाइंट (जीरो प्वाइंट से दूरी) पर आकर सीधे जुड़ेगा।इस रूट के पूरी तरह चालू हो जाने से अलीगढ़, मथुरा, आगरा और मेरठ सहित पश्चिमी यूपी के कई प्रमुख जिले सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट से कनेक्ट हो जाएंगे।मास्टर प्लान 2041 के तहत बढ़ रहा है 'लैंड बैंक'यमुना प्राधिकरण का विजन सिर्फ इस लिंक एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी तक ही सीमित नहीं है। भविष्य की औद्योगिक और आवासीय योजनाओं को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान 2041 (Master Plan 2041) पर भी तेजी से काम चल रहा है। इसके तहत प्राधिकरण अपने 'लैंड बैंक' (Land Bank) को लगातार बड़ा कर रहा है। इसी कड़ी में यीडा द्वारा सेक्टर 5, 7, 8 और 8-एफ में भी किसानों से आपसी सहमति के आधार पर बड़े पैमाने पर जमीन की खरीद की जा रही है।व्यापार और रोजगार को मिलेगा जबरदस्त बढ़ावाप्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, जमीन खरीद का काम पूरी गति से जारी है और जल्द ही शत-प्रतिशत भूमि पर कब्जा ले लिया जाएगा। इस लिंक एक्सप्रेसवे के तैयार होने से न केवल दिल्ली-एनसीआर में माल ढुलाई और व्यापार को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय निवासियों, दैनिक यात्रियों और देश-विदेश से आने वाले हवाई यात्रियों के लिए भी सफर का समय आधा रह जाएगा और यात्रा बेहद सुविधाजनक हो जाएगी।
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) देश के करोड़ों वेतनभोगी (Salary) कर्मचारियों के लिए सरकार समर्थित एक बेहद महत्वपूर्ण रिटायरमेंट सेविंग्स स्कीम है। इस योजना के तहत कर्मचारी और नियोक्ता (Employer) दोनों हर महीने कर्मचारी के बेसिक वेतन और महंगाई भत्ते (DA) का 12-12 प्रतिशत हिस्सा ईपीएफ खाते में जमा करते हैं। इससे लंबे समय में रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा और मजबूत फंड तैयार होता है।वैसे तो यह मूल रूप से एक रिटायरमेंट स्कीम है, लेकिन इम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) कुछ विशेष और आपातकालीन परिस्थितियों में अपने सदस्यों को समय से पहले आंशिक (Partial) या पूर्ण (Full) पीएफ निकासी की ऑनलाइन अनुमति देता है।क्या है UAN (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर) और इसका महत्व?ईपीएफओ (EPFO) द्वारा अपने हर एक सदस्य को 12 अंकों का एक यूनिक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) जारी किया जाता है। यह नंबर कर्मचारी के पूरे जीवनभर वैध रहता है। जब भी कोई कर्मचारी अपनी नौकरी बदलता है, तो उसकी नई कंपनी द्वारा जारी की गई नई मेंबर आईडी (Member ID) इसी पुराने यूएएन से लिंक हो जाती है। इसके चलते कर्मचारी के पिछले और वर्तमान के सभी पीएफ खाते एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुड़े रहते हैं, जिससे फंड को मैनेज करना बेहद आसान हो जाता है।EPF निकासी मुख्य रूप से कितने प्रकार की होती है?ईपीएफ खाते से पैसे निकालने की प्रक्रिया को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है:आंशिक निकासी (Partial Withdrawal / PF Advance): इसे पीएफ एडवांस भी कहा जाता है। इसके तहत सदस्य अपनी नौकरी के दौरान ही व्यक्तिगत जरूरतों (जैसे बीमारी या शादी) के लिए तय नियमों के मुताबिक अपने फंड से कुछ हिस्सा निकाल सकते हैं।पूर्ण निकासी (Full Withdrawal): इसके अंतर्गत सदस्य अपने ईपीएफ खाते में जमा पूरी राशि (कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का हिस्सा) एक साथ निकाल सकते हैं। यह सुविधा केवल सर्विस से रिटायर होने पर या ईपीएफओ द्वारा निर्धारित विशेष स्थितियों में ही मिलती है।किन परिस्थितियों में निकाल सकते हैं 100% पीएफ (Full Withdrawal)?ईपीएफओ के नियमानुसार निम्नलिखित 4 बड़ी स्थितियों में ही पूरा पीएफ फंड निकाला जा सकता है:रिटायरमेंट होने पर: 58 वर्ष की आयु पूरी करने और नौकरी से पूरी तरह रिटायर होने के बाद सदस्य अपना पूरा फंड निकाल सकते हैं।लंबी बेरोजगारी की स्थिति में: यदि कोई ईपीएफ सदस्य लगातार 12 महीने (1 वर्ष) से अधिक समय तक बेरोजगार रहता है, तो वह पूरी राशि निकाल सकता है। नियम के मुताबिक, नौकरी छूटने के पहले महीने बाद 75% और शेष 25% राशि 12 महीने बाद निकाली जा सकती है।स्थायी रूप से विदेश में बसने पर: अगर कोई कर्मचारी भारत छोड़कर रोजगार या किसी अन्य उद्देश्य से स्थायी रूप से विदेश जा रहा है, तो वह पूरा पैसा विड्रॉ कर सकता है।सदस्य की असमय मृत्यु होने पर: ईपीएफ सदस्य की मृत्यु की दुखद स्थिति में पूरी जमा राशि उसके रजिस्टर्ड नामित व्यक्ति (Nominee) या कानूनी उत्तराधिकारी को सौंप दी जाती है।आंशिक पीएफ निकासी (PF Advance) के लिए कौन सी परिस्थितियां हैं मान्य?यदि आपको नौकरी के दौरान पैसों की सख्त जरूरत है, तो ईपीएफओ निम्नलिखित आपातकालीन या महत्वपूर्ण कार्यों के लिए आंशिक निकासी की अनुमति देता है:स्वयं, बच्चों या भाई-बहन का विवाहगंभीर बीमारी के इलाज या चिकित्सा उपचार के लिएनया मकान बनाने, फ्लैट खरीदने या जमीन खरीदने के लिएपुराने होम लोन (Home Loan) को समय से पहले चुकाने के लिएपैतृक मकान की मरम्मत या रेनोवेशन कराने के लिएबच्चों की उच्च शिक्षा (Higher Education) के खर्च के लिएदिव्यांगता से संबंधित आवश्यक उपकरण खरीदने, प्राकृतिक आपदा या कंपनी/फैक्ट्री में अचानक तालाबंदी होने पर।PF Withdrawal के लिए कौन-से दस्तावेज और शर्तें हैं जरूरी?ऑनलाइन पीएफ क्लेम (Online PF Claim) फाइल करने के लिए आपके पास निम्नलिखित दस्तावेज और विवरण होने अनिवार्य हैं:एक्टिवेटेड यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN)पैन (PAN) कार्ड और पहचान के लिए वैध पहचान पत्रबैंक खाते की पासबुक या नाम छपा हुआ कैंसिल चेक (Cancel Cheque)क्लेम के उद्देश्य के अनुसार जरूरी दस्तावेज (जैसे- मेडिकल सर्टिफिकेट, होम लोन स्टेटमेंट या विवाह प्रमाण पत्र)।विशेष सुरक्षा ध्यान दें: ऑनलाइन पीएफ निकासी के लिए आपकी पहचान का डिजिटल वेरिफिकेशन बेहद जरूरी है। इसके लिए ईपीएफओ पोर्टल पर आपके क्रेडेंशियल्स का सही होना अनिवार्य है।EPF विड्रॉल से जुड़े महत्वपूर्ण FAQs (सवाल-जवाब)सवाल: क्या ईपीएफ से एक से अधिक बार पैसे निकाले जा सकते हैं?जवाब: हां, आप अपनी जरूरत और उद्देश्य के अनुसार ईपीएफ से कई बार एडवांस राशि निकाल सकते हैं। हालांकि, विवाह और उच्च शिक्षा जैसी श्रेणियों में जीवनकाल में निकासी की अधिकतम सीमा (जैसे 3 बार) तय होती है।सवाल: अगर पीएफ निकासी का क्लेम (Claim) बार-बार रिजेक्ट हो जाए तो क्या करें?जवाब: क्लेम रिजेक्ट होने पर सबसे पहले 'EPFO Member e-Sewa' पोर्टल पर लॉग इन करें और 'Track Claim Status' विकल्प पर जाकर रिजेक्शन का सटीक कारण जांचें। कमी को ठीक करने के बाद दोबारा आवेदन करें।सवाल: यदि ईपीएफ खाते में नॉमिनी (Nominee) नहीं जोड़ा है तो क्या होगा?जवाब: ईपीएफ खाते में ई-नॉमिनेशन करना बेहद जरूरी है। अगर नॉमिनी नहीं जोड़ा गया है, तो सदस्य की मृत्यु की स्थिति में परिवार को पैसा निकालने के लिए अदालती चक्कर और लंबी कानूनी उत्तराधिकार प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।सवाल: नौकरी बदलने पर पीएफ निकालना सही है या ट्रांसफर करना?जवाब: फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के अनुसार, नौकरी बदलने पर पीएफ का पैसा निकालने के बजाय उसे हमेशा नई कंपनी के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर (PF Transfer) करना चाहिए। इससे आपके निवेश पर कम्पाउंडिंग ब्याज का फायदा मिलता रहता है और सर्विस की निरंतरता बनी रहती है।सवाल: ऑनलाइन पीएफ क्लेम रिजेक्ट होने के मुख्य कारण क्या हैं?जवाब: अधूरा या गलत केवाईसी (KYC), बैंक अकाउंट डिटेल्स या आईएफएससी (IFSC) कोड का मिसमैच होना, यूएएन का एक्टिवेट न होना, नाम या जन्मतिथि की जानकारी में स्पेलिंग मिस्टेक, आवश्यक न्यूनतम सेवा अवधि पूरी न होना या गलत विड्रॉल फॉर्म चुनने के कारण अक्सर क्लेम रिजेक्ट हो जाते हैं।
देश भर में गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल में इथेनॉल (Ethanol) मिलाने को लेकर पिछले कुछ समय से आम उपभोक्ताओं के बीच कई तरह की चिंताएं, अफवाहें और गलत धारणाएं सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इन तमाम आशंकाओं और भ्रामक खबरों पर पूर्णविराम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को लेकर एक बेहद विस्तृत फ्रेक्वेंटली आस्कड क्वेश्चन (FAQs) जारी किया है।पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी इस आधिकारिक दस्तावेज में वाहन की कम्पेटिबिलिटी (अनुकूलता), ईंधन की असली कीमत, उपभोक्ताओं की पसंद और सबसे महत्वपूर्ण— इंजन की सुरक्षा से जुड़े सभी तीखे सवालों के सीधे और तार्किक जवाब दिए गए हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इससे पहले 23 जून 2026 को एक विस्तृत प्रेस नोट और 4 जुलाई को ऑटोमोबाइल कंपनियों द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बावजूद कुछ चिंताएं बनी हुई थीं, जिन्हें दूर करना बेहद जरूरी था।आइए जानते हैं सरकार द्वारा जारी FAQs में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर किए गए 4 सबसे बड़े और महत्वपूर्ण खुलासे:1. भ्रम: भारत ने बहुत अचानक और तेजी से बढ़ाई इथेनॉल ब्लेंडिंग?सच: भारत में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर हो रही इस आलोचना पर कि देश ने ब्राजील जैसे देशों की तुलना में बहुत तेजी से ब्लेंडिंग बढ़ाई है, मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने साफ किया कि यह बदलाव रातों-रात या अचानक नहीं हुआ है, बल्कि यह पूरा कार्यक्रम पिछले दो दशकों (20 साल) से अधिक समय में धीरे-धीरे और चरणबद्ध तरीके से विकसित हुआ है।भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग का पहला पायलट प्रोग्राम साल 2001 में ही शुरू कर दिया गया था। इसके बाद 2006 तक देश के कई राज्यों में 5 प्रतिशत (E5) इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की व्यावसायिक शुरुआत हुई। साल 2013 में इसकी बाकायदा नीतिगत रूपरेखा तैयार की गई और 2018 में लागू की गई 'नेशनल पॉलिसी ऑन बायोफ्यूल्स' के तहत बड़े सुधार किए गए। कई वर्षों की लंबी प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, भारी निवेश और ऑटोमोबाइल कंपनियों व टेस्टिंग एजेंसियों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद ही चालू वित्त वर्ष में इसे सफलतापूर्वक लगभग 20 प्रतिशत (E20) के स्तर पर पहुंचाया गया है।2. भ्रम: पेट्रोल पंपों पर 100% शुद्ध पेट्रोल, E10 और E20 का अलग विकल्प क्यों नहीं मिलता?सच: कई वाहन चालकों का सवाल है कि उन्हें अपनी पसंद के अनुसार शुद्ध पेट्रोल या कम इथेनॉल वाला तेल चुनने की आजादी क्यों नहीं मिलती? इसके जवाब में मंत्रालय ने बड़ी लॉजिस्टिक और व्यावहारिक चुनौती का हवाला दिया है।सरकार के मुताबिक, भारत में रिफाइनरी, विशाल तेल डिपो, हजारों किलोमीटर लंबी पाइपलाइनों और देश भर में फैले 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंपों का एक बेहद जटिल और विशाल नेटवर्क है। इतने बड़े पैमाने पर एक साथ तीन अलग-अलग ग्रेड के पेट्रोल (शुद्ध पेट्रोल, E10 और E20) की समानांतर सप्लाई चेन (Parallel Supply Chain) बनाए रखना देश के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बेहद पेचीदा और लगभग असंभव होगा। इसीलिए पूरे देश में एक समान मानक ईंधन की सप्लाई की जा रही है।3. भ्रम: इथेनॉल मिलाने के बाद भी E20 पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं है?सच: उपभोक्ताओं का मानना है कि चूंकि इथेनॉल का उत्पादन सस्ता होता है, इसलिए पेट्रोल की कीमतें कम होनी चाहिए। इस पर सरकार ने साफ किया कि पेट्रोल में मिलाया जाने वाला इथेनॉल देश के अन्नदाता किसानों से बेहद लाभकारी और आकर्षक कीमतों पर खरीदा जाता है ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो।यही वजह है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें काफी नीचे गिर जाती हैं, तब शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले इथेनॉल की खरीद लागत थोड़ी अधिक बैठती है। हालांकि, इस ब्लेंडिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे भारत की विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम होती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले भू-राजनीतिक उतार-चढ़ाव का असर घरेलू कीमतों पर नहीं पड़ता। पिछले चार वर्षों में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और पड़ोसी देशों की तुलना में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता इसी नीति के कारण रही है।4. भ्रम: क्या E20 पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन और रबर पार्ट्स खराब हो रहे हैं?सच: सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को सरकार ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है जिसमें कहा जा रहा था कि E20 पेट्रोल पुराने E10 वाहनों के इंजन, रबर कंपोनेंट्स या फ्यूल लाइन्स को नुकसान पहुंचा रहा है। मंत्रालय ने दो-टूक शब्दों में कहा कि इन दावों का कोई भी वैज्ञानिक या तकनीकी आधार नहीं है।E20 ईंधन को देश भर में लागू करने से पहले कई वर्षों तक अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं (Lab Testing), कड़े फील्ड परीक्षणों और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) व सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) जैसी शीर्ष तकनीकी संस्थाओं के साथ गहन रिसर्च की गई है। सभी वाहन निर्माता कंपनियां पुराने वाहनों पर भी अपनी वारंटी जारी रखे हुए हैं।माइलेज और परफॉर्मेंस पर सरकारी रिपोर्ट: मंत्रालय ने ईमानदारी से यह जरूर स्वीकार किया है कि बहुत पुराने कुछ वाहनों में इथेनॉल की कम कैलोरीफिक वैल्यू के कारण माइलेज में 3 से 5 प्रतिशत की मामूली कमी देखी जा सकती है। लेकिन इसके विपरीत, E20 ईंधन से गाड़ी के इंजन को उच्च ऑक्टेन स्तर (Higher Octane Number) मिलता है, जिससे कंबशन (ईंधन का जलना) बेहतर होता है, इंजन का पिकअप व प्रदर्शन सुधरता है और सबसे बड़ी बात— वाहनों से होने वाला खतरनाक कार्बन उत्सर्जन (Emission) बेहद कम हो जाता है, जो पर्यावरण के लिए संजीवनी है।
दुनिया भर में फुटबॉल का संचालन करने वाली सर्वोच्च संस्था 'फीफा' (FIFA) संकट की इस घड़ी में मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए वेनेजुएला के लोगों की मदद के लिए आगे आई है। हाल ही में वेनेजुएला में आए अत्यंत विनाशकारी और भीषण भूकंप से मची भारी तबाही को देखते हुए फीफा की सामाजिक कल्याण शाखा 'फीफा फाउंडेशन' (FIFA Foundation) ने पीड़ित परिवारों की मदद और राहत कार्यों को तेज करने के लिए 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर (यानी करीब 8.3 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम फंड देने का बड़ा ऐलान किया है।फीफा द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस आपातकालीन राशि का प्राथमिक उपयोग प्रभावित इलाकों में संकट से जूझ रहे पीड़ितों तक तुरंत भोजन, जीवन रक्षक दवाइयां, मेडिकल किट्स और रहने के लिए अस्थाई आश्रय (Shelter) जैसी बेहद जरूरी चीजें पहुंचाने के लिए किया जाएगा।जियानी इन्फेंटिनो बोले: 'इस कठिन समय में वेनेजुएला के साथ है पूरा फुटबॉल परिवार'वेनेजुएला में प्राकृतिक आपदा के कारण पैदा हुए दर्दनाक हालातों पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए फीफा के वर्तमान अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो (Gianni Infantino) ने एक आधिकारिक संदेश में कहा, इस बेहद कठिन और दर्दनाक समय में दुनिया भर का पूरा फुटबॉल परिवार पूरी मजबूती के साथ वेनेजुएला के नागरिकों के साथ खड़ा है। फुटबॉल सिर्फ मैदान पर खेला जाने वाला एक खेल मात्र नहीं है, बल्कि इसमें संकट के सबसे मुश्किल समय में भी लोगों को आपस में जोड़ने, एकजुट करने और उनके भीतर एक नई उम्मीद की किरण जगाने की अनोखी ताकत मौजूद है। हमें गर्व है कि हम वहां जमीन पर रात-दिन राहत कार्य में जुटी टीमों की मदद करने में अपना योगदान दे पा रहे हैं।कैसे और किन विश्वसनीय माध्यमों से पीड़ितों तक पहुंचेगी यह बड़ी मदद?फीफा फाउंडेशन के कार्यकारी अध्यक्ष मॉरीशस मैक्री (Mauricio Macri) ने इस सहायता राशि के वितरण का खाका समझाते हुए बताया कि यह पैसा सीधे उन चुनिंदा और विश्वसनीय संस्थाओं को ट्रांसफर किया जाएगा जो जमीन पर रहकर लोगों की जान बचाने के रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हैं। फीफा फाउंडेशन अपने विशेष 'ह्यूमैनिटेरियन फंड' (Humanitarian Fund) के जरिए यह रकम सीधे स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय राहत संगठनों (NGOs) के माध्यम से ग्राउंड जीरो पर पहुंचाएगा।वेनेजुएला के किन-किन राज्यों और शहरों में इस राहत फंड से पुनर्निर्माण का काम शुरू होगा, इसकी पूरी विस्तृत सूची वहां की जमीनी स्थिति का सटीक आकलन (Humanitarian Assessment) पूरा होने के बाद जल्द ही जारी कर दी जाएगी। इसके अलावा, वेनेजुएला का अपना फुटबॉल फेडरेशन (FVF) भी देश के स्थानीय फुटबॉल खिलाड़ियों और फैंस के साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय रूप से ग्राउंड सपोर्ट दे रहा है।फीफा का 'ह्यूमैनिटेरियन फंड' क्या करता है?फीफा फाउंडेशन का यह विशेष 'ह्यूमैनिटेरियन फंड' (मानवीय कोष) मूल रूप से इसी उद्देश्य के लिए स्थापित किया गया है, ताकि दुनिया के किसी भी कोने में जब कभी अचानक भूकंप, सुनामी, भीषण बाढ़ या कोई अन्य प्राकृतिक व मानव-निर्मित बड़ी मुसीबत आए, तो बिना किसी कागजी देरी के वहां तुरंत आपातकालीन फंड और आवश्यक सामग्री पहुंचाई जा सके। इससे पहले भी फीफा फाउंडेशन दुनिया के कई संकटग्रस्त देशों में इसी फंड के जरिए त्वरित आर्थिक सहायता पहुंचा चुका है।वेनेजुएला में भूकंप का भयंकर तांडव: हजारों मौतें और लाखों बेघरआपको बता दें कि वेनेजुएला में पिछले महीने 24 जून को कुछ ही सेकंड के बेहद संक्षिप्त अंतराल पर 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भीषण 'डबलेट' (Doublet) भूकंप आए थे, जिसने समूचे उत्तरी और मध्य वेनेजुएला को हिलाकर रख दिया। पिछले 125 सालों में आए इस सबसे शक्तिशाली भूकंप के चलते देश की राजधानी काराकास और ला गुआइरा राज्य सहित कई हिस्सों में 80% तक इमारतें, रिहायशी घर और इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं। इस भयावह आपदा में अब तक कम से कम 2,600 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 16,000 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं और मलबे में दबे हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।राहत शिविरों में गहराया मानवीय संकट, संयुक्त राष्ट्र (UN) ने की बड़ी अपीलभूकंप की इस भयानक विभीषिका से बेघर हुए लाखों लोगों के लिए विभिन्न राज्यों में अस्थाई राहत शिविर (Relief Camps) बनाए गए हैं। लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण इन शिविरों में अब डायरिया, गंभीर त्वचा रोग, शुगर और ब्लड प्रेशर (BP) जैसी बीमारियों के मरीज खतरनाक स्पीड से बढ़ रहे हैं, जिससे देश में मानवीय संकट पहले से कहीं ज्यादा गहरा गया है।हालांकि स्थानीय आपदा प्रबंधन की टीमें स्थिति को नियंत्रित करने में लगी हैं, लेकिन नुकसान का पैमाना बहुत बड़ा है। वेनेजुएला के इस बेहद नाजुक हालात को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एक बड़ी भावुक अपील की है। यूएन ने वेनेजुएला के करीब 13 लाख अत्यधिक जरूरतमंद पीड़ितों तक आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं और खाद्य सामग्री पहुंचाने के लिए दुनिया भर के अमीर देशों से 30 करोड़ डॉलर (300 Million USD) की भारी-भरकम वैश्विक वित्तीय सहायता जुटाने की मांग की है ताकि इंसानी जिंदगियों को बचाया जा सके।
देश भर में भारतीय रेलवे के जरिए हर दिन सफर करने वाले करोड़ों रेल यात्रियों के लिए एक बेहद बड़ी और राहत देने वाली खबर आई है। ऑनलाइन ट्रेन टिकट बुकिंग को पहले से कहीं ज्यादा आसान, पारदर्शी और सुपरफास्ट बनाने के लिए रेलवे जल्द ही आईआरसीटीसी (IRCTC) की बिल्कुल नई और हाई-टेक वेबसाइट का बीटा वर्जन (Beta Version) लॉन्च करने जा रही है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) के पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुसार, इस बहुप्रतीक्षित नई वेबसाइट को 15 जुलाई 2026 को आम जनता के लिए आधिकारिक तौर पर जारी किया जाएगा।इसी कड़ी में, 10 जुलाई को जयपुर के प्रतिष्ठित मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT) के छात्रों के सामने आईआरसीटीसी और क्रिस (CRIS) के आला अधिकारियों ने इस नए पोर्टल के बीटा वर्जन का लाइव डेमो दिया और छात्रों से उनका महत्वपूर्ण फीडबैक मांगा। आपको बता दें कि कुछ हफ्ते पहले एमएनआईटी (MNIT) जयपुर के छात्रों ने ही रेल मंत्री से मुलाकात कर मौजूदा वेबसाइट में टिकट बुकिंग की कमियों को उजागर किया था, जिसके बाद रेल मंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों को 30 दिन के भीतर नया पोर्टल तैयार करने का कड़ा निर्देश दिया था।नई IRCTC वेबसाइट में देखने को मिलेंगे ये 4 बड़े क्रांतिकारी बदलावरेलवे अधिकारियों के मुताबिक, नए रीडिजाइन किए गए पोर्टल में यात्रियों की सहूलियत के लिए मुख्य रूप से चार बड़े तकनीकी सुधार किए गए हैं, जो आपके टिकट बुकिंग के अनुभव को पूरी तरह बदल देंगे:1. अनावश्यक कैप्चा (CAPTCHA) और पॉप-अप से आजादी: अक्सर तत्काल टिकट बुकिंग (Tatkal Ticket Booking) या पीक आवर्स के दौरान यात्रियों को बार-बार आने वाले कैप्चा कोड और विज्ञापन वाले अनचाहे पॉप-अप से भारी परेशानी होती थी, जिससे टिकट बुक होने से पहले ही सीटें फुल हो जाती थीं। नई वेबसाइट में इस तकनीकी समस्या को पूरी तरह हल कर दिया गया है। अब बिना किसी भटकाव और अनावश्यक कैप्चा के तेजी से ट्रांजैक्शन पूरा होगा।2. सिंगल स्क्रीन पर सभी क्लास की सीटों की जानकारी: नई वेबसाइट का इंटरफेस बेहद क्लीन और आधुनिक बनाया गया है। अब यात्रियों को अपनी पसंदीदा ट्रेन में उपलब्ध सीटों की रीयल-टाइम जानकारी (Seat Availability) एक ही मुख्य स्क्रीन पर सभी क्लास (जैसे- 1AC, 2AC, 3AC, Sleeper) में एक साथ दिखाई देगी, जिससे बार-बार अलग-अलग क्लास पर क्लिक करने का समय बचेगा।3. सुपरफास्ट चेकआउट और कम स्टेप्स: नए बुकिंग इंजन को इस तरह ऑप्टिमाइज किया गया है कि आपको टिकट कंफर्म करने के लिए पहले के मुकाबले बहुत कम स्टेप्स (चरणों) को फॉलो करना होगा। मौजूदा व्यवस्था में जहां प्रति मिनट करीब 32,000 टिकट बुक होते हैं, वहीं नया एडवांस सिस्टम क्षमता को बढ़ाकर 1.5 लाख टिकट प्रति मिनट से ज्यादा प्रोसेस करने में सक्षम होगा।4. पैसेंजर डिटेल सेव करने की सुविधा: टिकट बुक करते समय यात्रियों को बार-बार नाम, उम्र, जेंडर और बर्थ प्रेफरेंस जैसी लंबी जानकारियां नहीं भरनी पड़ेंगी। यूजर प्रोफाइल में पैसेंजर डेटा पूरी तरह सुरक्षित सेव रहेगा, जिससे सिंगल क्लिक में तत्काल टिकट बहुत तेजी से बुक किए जा सकेंगे। इसके साथ ही इसमें 'फेयर कैलेंडर' (Fare Calendar) और एक से ज्यादा भाषाओं का सपोर्ट (Multilingual Interface) भी जोड़ा गया है।40 साल पुराना पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) भी होगा अपग्रेडरेलवे सिर्फ बाहरी वेबसाइट का चेहरा ही नहीं बदल रहा है, बल्कि इसके बैकएंड में काम करने वाले करीब 40 साल पुराने पारंपरिक पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को भी पूरी तरह से ओवरहॉल (बदला) जा रहा है। नए और आधुनिक पीआरएस इंजन को आईआरसीटीसी की नई वेबसाइट के साथ सीधे लिंक किया जा रहा है।इस अपग्रेडेशन के बाद आम यात्रियों को टिकट बुकिंग, रिफंड कैंसिलेशन, पीएनआर (PNR Enquiry) और लाइव ट्रेन स्टेटस की सटीक जानकारी पलक झपकते ही मिल जाएगी। नए सिस्टम की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह पीएनआर पूछताछ की क्षमता को 4 लाख से सीधे 40 लाख पूछताछ प्रति मिनट तक बढ़ा देगा। चूंकि रेलवे को चालू रखते हुए ही यह भारी-भरकम डिजिटल अपग्रेडेशन किया जा रहा है, इसलिए पूरी तरह कार्यात्मक (Fully Functional) फाइनल पोर्टल को पूरी तरह सेट होने में कुछ महीनों का अतिरिक्त समय लग सकता है, लेकिन 15 जुलाई से शुरू हो रहा बीटा वर्जन यात्रियों को बहुत बड़ी राहत देने वाला है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल और गैस के आयात (Import) पर अत्यधिक निर्भर है। अपनी कुल आवश्यकता का लगभग 80 से 85 फीसदी तक कच्चा तेल भारत विदेशों से खरीदता है, जिस पर हर साल भारी-भरकम विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) खर्च होती है। लेकिन आपको यह जानकर बेहद गर्व होगा कि विदेशों से कच्चा तेल खरीदने वाले भारत ने पेट्रोलियम एक्सपोर्ट (Petroleum Export) के मोर्चे पर दुनिया भर में एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।भारत विदेशों से कच्चा तेल आयात तो करता है, लेकिन देश की आधुनिक रिफाइनरियों में उसे प्रोसेस (रिफाइन) करके पेट्रोल, डीजल, एटीएफ (हवाई ईंधन) और अन्य मूल्यवान पेट्रोलियम उत्पाद बनाकर दुनिया के कई बड़े देशों को भारी मात्रा में निर्यात भी करता है।पेट्रोलियम रिफाइनर प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट में भारत का दबदबा, बना नया रिकॉर्डग्लोबल मार्केट में पेट्रोलियम रिफाइनर प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्टर के तौर पर आज भारत का जबरदस्त दबदबा कायम हो चुका है। बीते वित्तीय वर्ष के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने रिकॉर्ड 46.8 अरब डॉलर का पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट किया है। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का दावा है कि आने वाले दिनों में भारत के इस कुल एक्सपोर्ट में करीब 25 फीसदी तक की और बंपर बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।जिस तेजी से देश की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) अपनी विभिन्न रिफाइनरियों की क्षमता का विस्तार कर रही है, उससे भारत की ग्लोबल रिफाइनिंग ताकत सुपरफास्ट स्पीड से बढ़ रही है। वर्तमान में भारत की कुल रिफाइनिंग कैपेसिटी करीब 258.1 मिलियन टन है, जबकि देश की आंतरिक पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कुल खपत 239 मिलियन टन के आसपास है।₹75,000 करोड़ का मेगा बजट: IOCL बढ़ा रही है अपनी ताकतभारत सरकार की ओर से देश की रिफाइनिंग कैपेसिटी को बढ़ाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। दिसंबर 2026 तक आईओसीएल (IOCL) की कई नई रिफाइनिंग इकाइयां पूरी तरह से चालू होने वाली हैं। इस मेगा प्रोजेक्ट के जमीन पर उतरने के बाद IOCL की कुल रिफाइनिंग क्षमता 80.75 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) से लंबी छलांग लगाकर सीधे 98.05 MMTPA के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगी।इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने इस महत्वाकांक्षी क्षमता विस्तार प्रोजेक्ट के लिए 75,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है, जिसमें से अब तक 53,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सफलता पूर्वक खर्च की जा चुकी है।एक्सपोर्ट से रेवेन्यू में होगी 3 गुना बढ़ोतरी, पानीपत और वड़ोदरा में काम तेजसरकारी तेल कंपनियां अपनी इस नई और आधुनिक क्षमता का इस्तेमाल सबसे पहले घरेलू बाजार की जरूरतों को शत-प्रतिशत पूरा करने के लिए करेंगी। इसके बाद जो अतिरिक्त (Surplus) कैपेसिटी बचेगी, उसका उपयोग पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के अंतरराष्ट्रीय निर्यात के लिए आक्रामक रूप से किया जाएगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस कदम से कंपनी के कुल रेवेन्यू (राजस्व) में पेट्रोलियम एक्सपोर्ट का हिस्सा वर्तमान के 5% से तीन गुना बढ़कर सीधे 15% के पार पहुंच सकता है।वर्तमान में कंपनी द्वारा हरियाणा के पानीपत, गुजरात के वड़ोदरा और बिहार की बरौनी रिफाइनरी में क्षमता को अपग्रेड करने की तैयारी अंतिम चरण में है।जानिए किस रिफाइनरी की क्षमता कितनी बढ़ेगी?देश की तीन प्रमुख रिफाइनरियों में क्षमता विस्तार का पूरा गणित इस प्रकार है:रिफाइनरी का नामवर्तमान क्षमता (Current Capacity)विस्तार के बाद क्षमता (Post Expansion)पानीपत रिफाइनरी15 MMTPA25 MMTPAवड़ोदरा रिफाइनरी13.7 MMTPA18 MMTPAबरौनी रिफाइनरी6 MMTPA9 MMTPAइस शानदार क्षमता विस्तार के बाद भारत न केवल अपनी घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को पूरी तरह से आत्मनिर्भर और मजबूत बना लेगा, बल्कि दुनिया के नक्शे पर एक बड़े ग्लोबल पेट्रोलियम हब के रूप में उभरकर सामने आएगा, जिससे देश के खजाने में अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा की एंट्री होगी।
बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाने वाले करोड़ों शिव भक्तों और अमरनाथ तीर्थयात्रियों के लिए एक बेहद बड़ी और सुखद खबर सामने आ रही है। पवित्र अमरनाथ गुफा (Amarnath Cave) तक पहुंचने की दुर्गम यात्रा को अब और अधिक सुरक्षित, सुगम और आसान बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने द्रास (Drass) के रास्ते एक तीसरे और नए मार्ग के विकास की पुरजोर वकालत की है।बीजेपी की लद्दाख यूनिट द्वारा रखा गया यह ऐतिहासिक प्रस्ताव 14.15 किलोमीटर लंबी महत्वाकांक्षी 'जोजिला सुरंग' (Zojila Tunnel) के निर्माण कार्य के अंतिम चरण में पहुंचने के बाद आया है। यह ऑल-वेदर टनल लद्दाख के करगिल जिले में स्थित द्रास के मिनिमाग इलाके तक हर मौसम में निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करती है। इसी कनेक्टिविटी का लाभ उठाकर अब अमरनाथ यात्रा को एक ही दिन में पूरा करने का मेगा प्लान तैयार किया जा रहा है।मिनिमाग से महज 5 किलोमीटर की होगी चढ़ाई, बचेगा भक्तों का समयबीजेपी के वरिष्ठ नेता ताशी ग्यालसन ने इस नए रूट का पूरा खाका समझाते हुए सुझाव दिया है कि द्रास में जोजिला सुरंग के पूर्वी छोर के पास स्थित मिनिमाग से पवित्र गुफा तक केवल 5 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई का एक नया वैकल्पिक रास्ता तैयार किया जा सकता है। यह मार्ग वर्तमान के बालटाल वाले रास्ते की तुलना में बहुत छोटा, सीधा और अत्यधिक सुरक्षित साबित होगा।ग्यालसन ने 'ज़ी न्यूज़' से विशेष बातचीत में बताया, मिनिमाग पहले से ही समुद्र तल से लगभग 10,800 फीट की भारी ऊंचाई पर स्थित है। इस वजह से पारंपरिक बालटाल और पहलगाम मार्गों की तुलना में तीर्थयात्रियों को बहुत कम ऊंचाई चढ़नी पड़ेगी। यह केवल 5 किलोमीटर का आसान ट्रैक होगा, जिसमें बालटाल मार्ग की तरह कोई खतरनाक खड़ी चढ़ाई नहीं होगी। उन्होंने दावा किया कि इस रास्ते के खुलने से भक्त श्रीनगर या लेह से सुबह चलकर मात्र 1 से 2 घंटे में पवित्र गुफा तक की चढ़ाई पूरी कर सकेंगे और शाम तक वापस लौट आएंगे, जिससे यह पूरी यात्रा महज एक दिन की रह जाएगी।वर्तमान में अमरनाथ गुफा के लिए हैं दो प्रमुख रास्तेअभी तक पवित्र अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए देश भर के श्रद्धालुओं के पास केवल दो ही रास्ते उपलब्ध हैं, और दोनों ही मार्गों पर ट्रैकिंग करना काफी मुश्किल और चुनौतीपूर्ण माना जाता है:बालटाल मार्ग: यह छोटा रास्ता (14 किमी) है, लेकिन बेहद खड़ा और ऊबड़-खाबड़ है। इसमें यात्रियों को समुद्र तल से करीब 8,999 फीट की ऊंचाई से शुरू करके 12,756 फीट की ऊंचाई पर स्थित गुफा तक खड़ी चढ़ाई करनी पड़ती है।पहलगाम मार्ग: इसे अमरनाथ यात्रा का सबसे पारंपरिक मार्ग माना जाता है। यह काफी लंबा (34 किमी) है, जिसमें श्रद्धालुओं को समुद्र तल से लगभग 5,702 फीट की ऊंचाई से शुरू करके पवित्र गुफा तक पहुंचना होता है। इस रास्ते से यात्रा पूरी करने में भक्तों को 2 से 4 दिन का लंबा समय लग जाता है।इसके विपरीत, प्रस्तावित नया तीसरा रास्ता केवल 5 किलोमीटर का होगा, जिसमें समुद्र तल से महज 1,956 फीट की मामूली चढ़ाई करनी होगी, जिसे कोई भी सामान्य व्यक्ति आसानी से 2 घंटे में पूरा कर सकता है।लद्दाख के उपराज्यपाल ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट, पर्यावरण को भी मिलेगी राहतइस तीसरे मार्ग के निर्माण से न केवल हर साल आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी, बल्कि बालटाल और पहलगाम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर पड़ने वाले पर्यावरणीय दबाव (Environmental Pressure) को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।अमरनाथ श्राइन बोर्ड और केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार, लद्दाख के उपराज्यपाल (LG) ने इस नए रूट को खोलने की वास्तविक संभावनाओं और सुरक्षा का बारीकी से पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय विस्तृत रिपोर्ट (Detailed Project Report) मांगी है। लद्दाख प्रशासन का मानना है कि जोजिला टनल के चालू होते ही यह मार्ग गेम-चेंजर साबित होगा। इससे न केवल अमरनाथ यात्रियों को एक सुरक्षित और सुगम यात्रा का विकल्प मिलेगा, बल्कि लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और वहां की अर्थव्यवस्था को भी एक बड़ा बूस्ट मिलेगा।
भारतीय ओटीटी (OTT) स्पेस में क्राइम-थ्रिलर और गैंगवार पर आधारित कई ऐसी वेब सीरीज हैं, जिनकी कहानियां और दमदार किरदार दर्शकों के दिलो-दिमाग पर हमेशा के लिए छप जाते हैं। ऐसी ही एक ब्लॉकबस्टर और बहुप्रतीक्षित सीरीज है 'रक्तांचल' (Raktanchal)। पूर्वांचल की खूनी सियासत, कोयला माफिया और वर्चस्व की जंग पर बनी इस सीरीज ने अपने पिछले दो सीजन से दर्शकों के बीच एक खास और मजबूत पहचान बनाई है। अब फैंस का लंबा इंतजार खत्म होने जा रहा है, क्योंकि मेकर्स ने 'रक्तांचल सीजन 3' का ट्रेलर रिलीज करने के साथ ही इसकी ऑफिशियल रिलीज डेट की भी घोषणा कर दी है।इस नए सीजन में एक बार फिर पुराने और सबसे खतरनाक किरदार अपनी पूरी ताकत के साथ वापसी कर रहे हैं। बॉलीवुड और ओटीटी के जाने-माने अभिनेता निकितिन धीर (Nikitin Dheer) एक बार फिर अपने खूंखार और आइकॉनिक किरदार 'वसीम खान' के रूप में दर्शकों को डराने और रोमांचित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।बदले और वर्चस्व का खूंखार खेल: निकितिन धीर ने किया बड़ा खुलासासीरीज के तीसरे सीजन में अपनी वापसी और किरदार को लेकर उत्साहित निकितिन धीर ने मीडिया से बातचीत में कहा, वसीम खान जैसे बेहद ताकतवर और क्रूर किरदार को स्क्रीन पर दोबारा जीना मेरे लिए बतौर एक्टर बहुत संतोषजनक अनुभव रहा है। यह एक ऐसा विलेन का किरदार है जिसकी कई छिपी हुई परतें हैं। वह जिस भी महफिल या इलाके में कदम रखता है, वहां अपनी खौफनाक मौजूदगी दर्ज करा देता है। लेकिन रक्तांचल 3 में उसे अपने जीवन की अब तक की सबसे बड़ी और कठिन चुनौती का सामना करना पड़ेगा। पिछले दो सीजन से जिस दुश्मनी को दर्शक देखते आ रहे हैं, वह इस बार बिल्कुल नए और जानलेवा स्तर पर पहुंचने वाली है।शुक्रवार को मेकर्स द्वारा जारी किए गए 'रक्तांचल सीजन 3' के ऑफिशियल ट्रेलर ने सोशल मीडिया पर आते ही तहलका मचा दिया है। ट्रेलर में एक बार फिर उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र की खूनी रंजिश, सत्ता की मलाई के लिए होने वाली तकरार और बदले की दहकती हुई आग को दिखाया गया है। इस बार कहानी का मुख्य मोड़ तब आता है जब मुख्य किरदार विजय सिंह की 4 साल के लंबे अज्ञातवास के बाद अचानक वापसी होती है। चार साल तक दुनिया की नजरों से छिपकर रहने के बाद विजय सिंह अब अपने पुराने और सबसे बड़े दुश्मन वसीम खान को मिट्टी में मिलाने के मकसद से लौटा है। इसके बाद दोनों बाहुबलियों के बीच होने वाला सीधा टकराव पहले से कहीं ज्यादा खूंखार और हिंसक नजर आ रहा है।क्रांति प्रकाश झा की वापसी: फ्रेंचाइजी का सबसे बड़ा महामुकाबलासीरीज में नायक और बाहुबली विजय सिंह का मुख्य किरदार निभा रहे टैलेंटेड अभिनेता क्रांति प्रकाश झा (Kranti Prakash Jha) ने भी इस धमाकेदार वापसी पर अपनी खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा, विजय सिंह हमेशा से अपनी फौलादी हिम्मत, सिद्धांतों और मजबूत इरादों के लिए जाना जाता रहा है। इतने सालों के लंबे गैप के बाद दोबारा इस कैरेक्टर के जूते में पैर रखना मेरे लिए बेहद खास और इमोशनल रहा। इस सीजन में कहानी विजय सिंह को ऐसे मुश्किल हालातों के बीच ले जाती है, जहां हर एक मोड़ पर उसकी जान और उसके हौसले की कड़ी परीक्षा होती है। दर्शकों को इस बार स्क्रीन पर जबरदस्त सस्पेंस और एक्शन देखने को मिलेगा, क्योंकि पूरी कहानी इस फ्रेंचाइजी के अब तक के सबसे बड़े महामुकाबले की तरफ आगे बढ़ेगी।स्टारकास्ट, डायरेक्टर और जानिए कब और कहां स्ट्रीम होगी यह सीरीज?'रक्तांचल सीजन 3' का बेहतरीन और थ्रिलिंग निर्देशन एक बार फिर रितम श्रीवास्तव ने किया है, जबकि इस पूरे सीजन की मुख्य कहानी को सिद्धार्थ मिश्रा ने अपने कलम से लिखा है। इस बार भी सीरीज की मुख्य पृष्ठभूमि पूरी तरह पूर्वांचल की माटी पर ही आधारित रखी गई है, जहां राजनीति, असीमित महत्वाकांक्षा, पैसे की हवस, बदलते पारिवारिक रिश्ते और खतरनाक विश्वासघात का एक अनोखा ताना-बाना दर्शकों को बांध कर रखेगा।इस सीजन में निकितिन धीर और क्रांति प्रकाश झा की मुख्य जोड़ी के अलावा टीवी के बड़े स्टार करण पटेल, नेशनल अवॉर्ड विनर माही गिल, मशहूर एक्टर राजेश कुमार और विक्रम कोचर भी बेहद अहम और नए किरदारों में अपनी दमदार एक्टिंग का जलवा बिखेरते नजर आएंगे। सस्पेंस, एक्शन और थ्रिल से भरपूर 'रक्तांचल सीजन 3' का ग्रैंड प्रीमियर आगामी 16 जुलाई को सीधे अमेजन एमएक्स प्लेयर (Amazon MX Player) पर बिल्कुल मुफ्त में स्ट्रीम होने जा रहा है।

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