अमेरिका ने ईरान पर फिर बड़ा हमला करते हुए 6 राज्यों में भीषण बमबारी की। अमेरिकी सेना ने लगातार दूसरी दिन भी ईरान के केशम द्वीप पर हमला किया। ईरान ने इन हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी।
Gorakhpur Panipat Expressway Route Update: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) को हरियाणा (Haryana) से जोड़ने वाले बेहद महत्वाकांक्षी गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे (Gorakhpur-Panipat Expressway) परियोजना से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है. इस ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के तहत संतकबीरनगर जिले की मेंहदावल तहसील के रूट में एक बड़ा बदलाव किया गया है.भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस एक्सप्रेसवे के दायरे को बढ़ाते हुए मेंहदावल तहसील के तीन नए गांवों— सोहरवलिया, मिश्रौलिया मिश्र और मईला को भी इस महा-परियोजना में आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया है. इस प्रशासनिक फैसले से पहले मेंहदावल तहसील के 29 गांव इस एक्सप्रेसवे के रूट में आ रहे थे, लेकिन अब इन 3 नए गांवों की एंट्री के बाद यहां एक्सप्रेसवे का हिस्सा बनने वाले गांवों की कुल संख्या बढ़कर 32 हो गई है.इंटर-सेक्शन बनने से 20 गांवों को मिलेगी शानदार कनेक्टिविटीइन तीन नए गांवों को एक्सप्रेसवे की जद में लाने के पीछे एनएचएआई (NHAI) की एक बड़ी रणनीतिक और व्यावहारिक सोच है:विशेष इंटर-सेक्शन का निर्माण: हाईवे अथॉरिटी ने निर्णय लिया है कि इन तीनों नए शामिल किए गए गांवों की सीमा में एक अत्याधुनिक इंटर-सेक्शन (Inter-Section) बनाया जाएगा, जो एक्सप्रेसवे पर चढ़ने और उतरने का मुख्य पॉइंट होगा.आसपास के इलाकों को फायदा: इस इंटर-सेक्शन की सुविधा शुरू होने से न केवल इन 3 गांवों के निवासियों को सीधा फायदा मिलेगा, बल्कि इनके पड़ोस में स्थित लगभग 15 से 20 अन्य ग्रामीण इलाकों के लोगों को भी एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए लंबा चक्कर नहीं काटना पड़ेगा.स्थानीय किसानों की चमकेगी किस्मत; कृषि और व्यापार को मिलेगी रफ्तारएक्सप्रेसवे पर बनने वाले इस नए इंटर-सेक्शन का सबसे बड़ा और सीधा लाभ स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों को मिलने वाला है:मंडियों तक पहुंच होगी आसान: अब तक संकरे रास्तों के कारण किसानों को अपनी फसल और हरी सब्जियां बड़ी मंडियों तक ले जाने में काफी समय और भारी किराया गंवाना पड़ता था. एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ने के बाद परिवहन की लागत (Transportation Cost) और समय दोनों में भारी कटौती होगी.फसल का मिलेगा बेहतर दाम: समय पर और सीधे तेज रफ्तार मार्ग से जुड़ने के कारण किसान अपने कृषि उत्पादों को दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा की बड़ी मार्केट में बहुत कम समय में बेच सकेंगे, जिससे उन्हें अपनी उपज का सटीक और अधिक मूल्य मिल सकेगा.भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रशासनिक तैयारीमेंहदावल तहसील प्रशासन इस बड़े प्रोजेक्ट को समय पर जमीन पर उतारने के लिए तेजी से काम कर रहा है:गाटा सत्यापन का कार्य पूरा: इससे पहले शामिल किए गए 29 गांवों में राजस्व विभाग ने खेतों का चिह्नांकन (Marking), रकबे का सटीक मिलान और भूमि के मालिकाना हक (स्वामित्व) की जांच जैसी सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी कर ली हैं.भौतिक सत्यापन और मुआवजा: प्रशासन अब इन सभी चिन्हित जमीनों का स्थलीय और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) शुरू करने की तैयारी में जुट गया है. जैसे ही यह जमीनी सर्वे पूरा होगा, प्रभावित किसानों की भूमि के अधिग्रहण और उन्हें उचित सरकारी मुआवजा वितरण की फाइल को तेजी से आगे बढ़ा दिया जाएगा.₹35,000 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट: गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे एक नजर मेंप्रोजेक्ट के मुख्य बिंदुआधिकारिक विवरणकुल लंबाई (Total Length)लगभग 747 किलोमीटर (ग्रीनफील्ड, एक्सेस-कंट्रोल्ड)अनुमानित लागत (Total Budget)₹35,000 करोड़रूट का दायराहरियाणा के पानीपत से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के 22 जिलों से गुजरेगागोरखपुर-बस्ती मंडल में लंबाईकुल प्रस्तावित लंबाई 86.24 किलोमीटरमेंहदावल तहसील में हिस्साअकेले इस तहसील से 22.5 किलोमीटर का पैच गुजरेगानिर्माण की समयावधिवर्ष 2026 में काम शुरू होने की उम्मीद, ढाई साल में पूरा करने का लक्ष्यसिद्धार्थनगर से लखीमपुर तक खुलेगा औद्योगिक विकास का बंद द्वारयह एक्सप्रेसवे मेंहदावल तहसील की सीमाओं को पार करने के बाद सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, बहराइच और लखीमपुर खीरी जैसे तराई के प्रमुख जिलों से होते हुए आगे बढ़ेगा. इस परियोजना का मुख्य एजेंडा पिछड़े माने जाने वाले पूर्वांचल (Eastern UP) को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के औद्योगिक कॉरिडोर के साथ एक सीधी और निर्बाध हाई-स्पीड सड़क कनेक्टिविटी देना है.ढाई साल के भीतर पूरा होने वाले इस एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक पार्क और कोल्ड स्टोरेज चेन विकसित किए जाने की योजना है, जिससे इस पूरे ग्रामीण बेल्ट में रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र का आर्थिक कायाकल्प हो सकेगा.
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh), राजस्थान (Rajasthan) और मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बीच कनेक्टिविटी को एक नई और हाई-स्पीड रफ्तार मिलने जा रही है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा आगरा और ग्वालियर के बीच 88 किलोमीटर लंबा आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे (Agra-Gwalior Expressway) तैयार किया जा रहा है.यह अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे न केवल इन तीन राज्यों के बीच व्यापारिक और पर्यटन संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि रोजाना सफर करने वाले लाखों मुसाफिरों के कीमती समय और ईंधन की भी भारी बचत करेगा.2.5 घंटे का सफर मात्र 75 मिनट में होगा पूरावर्तमान में यदि कोई व्यक्ति आगरा से ग्वालियर की यात्रा करता है, तो उसे धौलपुर (राजस्थान) और मुरैना (मध्य प्रदेश) के संकरे रास्तों और भारी शहरी ट्रैफिक से होकर गुजरना पड़ता है, जिसके कारण इस सफर में 2.5 से 3 घंटे का लंबा समय बर्बाद हो जाता है.120 की रफ्तार से फर्राटा: इस नए 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू हो जाने के बाद, गाड़ियां बिना किसी रुकावट के 100 से 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगी.दूरी आधी रह जाएगी: एक्सप्रेसवे के जरिए आगरा से ग्वालियर के बीच की यह दूरी घटकर महज 75 से 80 मिनट (करीब सवा घंटा) में सिमट जाएगी.आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे का रूट मैप और संरचनायह एक्सप्रेसवे बेहद अनूठी संरचना और भविष्य की जरूरतों (Future Expansion) को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है:शुरुआत और अंत: यह नया हाईवे आगरा के देवरी गांव से शुरू होकर मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित सुसेरा गांव (बाईपास) पर जाकर समाप्त होगा.8 लेन तक विस्तार संभव: इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि आने वाले समय में ट्रैफिक बढ़ने पर इसे आसानी से 8 लेन तक चौड़ा किया जा सकेगा.पुल और फ्लाईओवर: 88 किलोमीटर के इस पैच में यात्रा को सुगम बनाने के लिए 8 बड़े पुल, 23 छोटे पुल, 6 बड़े फ्लाईओवर और 1 रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण किया जा रहा है.वन्यजीवों की सुरक्षा का विशेष ध्यान (Chabal Eco-System):एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा संवेदनशील चंबल क्षेत्र से गुजरता है. इसलिए, चंबल वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी (Chambal Wildlife Sanctuary) के पास पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष 'ग्रीन बेल्ट' और वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए अत्याधुनिक अंडरपास (Animal Underpasses) बनाए जाएंगे ताकि पारिस्थितिकी तंत्र को कोई नुकसान न पहुंचे.दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ेगा रूट; जानिए बजटइस मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को बनाने में लगभग ₹4,613 करोड़ की भारी लागत आने का अनुमान है.चंबल एक्सप्रेसवे से जुड़ाव: यह एक्सप्रेसवे केवल दो शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगे चलकर इसे मुरैना के पास प्रस्तावित 'चंबल एक्सप्रेसवे' से भी इंटरकनेक्ट किया जाएगा.कोटा-दिल्ली-मुंबई रूट: इस जुड़ाव के कारण यात्रियों को राजस्थान के कोटा के रास्ते सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (Delhi-Mumbai Expressway) पर चढ़ने की सीधी और निर्बाध कनेक्टिविटी मिल जाएगी, जिससे उत्तर से पश्चिम भारत का सफर बेहद सुगम हो जाएगा.कब तक पूरा होगा काम और क्या होगा फायदा?एनएचएआई (NHAI) के ताजा अपडेट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के सिविल कंस्ट्रक्शन के लिए 93% से अधिक भूमि का अधिग्रहण (Land Acquisition) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है. वर्तमान में आगरा के कुछ गिने-चुने पॉकेट्स में मुआवजे की रकम को लेकर स्थानीय किसानों के साथ प्रशासनिक स्तर पर बातचीत चल रही है, जिसे जल्द ही सुलझा लिया जाएगा. प्राधिकरण का लक्ष्य है कि सभी बचे हुए निर्माण कार्यों को पूरा करके वर्ष 2027-2028 तक इसे आम जनता के यातायात के लिए पूरी तरह से खोल दिया जाए.टूरिज्म को मिलेगा बड़ा बूस्ट: यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के पर्यटन उद्योग के लिए एक गेमचेंजर साबित होने वाला है. आगरा में ताजमहल (Taj Mahal) देखने आने वाले देश-विदेश के पर्यटक अब महज सवा घंटे में ग्वालियर के ऐतिहासिक किलों, महलों और सिंधिया संग्रहालय का दीदार करने आसानी से आ-जा सकेंगे, जिससे पूरे बुंदेलखंड और चंबल क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को एक नई संजीवनी मिलेगी.
उत्तर प्रदेश में मानसून (Monsoon in UP) के पूरी तरह एक्टिव होने से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले 24 घंटों के लिए प्रदेश में मौसम का बड़ा बुलेटिन जारी किया है. मौसम विभाग के मुताबिक, पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश, वज्रपात (Lightning) और तेज आंधी चलने की प्रबल आशंका है. विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी जिलों में रहने वाले लोगों को मौसम के इस रौद्र रूप को लेकर बेहद सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है.इन 18 जिलों में भारी बारिश और तेज आंधी की चेतावनी (Orange Alert)मौसम वैज्ञानिकों ने आज 13 जुलाई को प्रदेश के जिन प्रमुख जिलों के लिए भारी वर्षा और आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है, उनकी सूची इस प्रकार है:पश्चिमी यूपी के जिले: मेरठ, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा), गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, एटा, महामाया नगर (हाथरस) और मैनपुरी.पूर्वी व मध्य यूपी के जिले: कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, महराजगंज, कुशीनगर और देवरिया.पूर्वांचल के 7 जिलों में विशेष रेड-अलर्टपूर्वी उत्तर प्रदेश के उत्तर-पूर्वी बेल्ट में आने वाले 7 जिलों में मूसलाधार बारिश के चलते स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसे हालात या जनजीवन अस्त-व्यस्त होने का अनुमान है. मौसम विभाग ने देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, कुशीनगर, बलरामपुर, महाराजगंज और सिद्धार्थनगर के प्रशासन व नागरिकों को विशेष रूप से अलर्ट पर रहने को कहा है.राजधानी लखनऊ के मौसम का हाल (Lucknow Temperature)अगर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की बात करें, तो यहां आज आंशिक रूप से बादलों की आवाजाही बनी रहेगी. बादलों के बीच धूप निकलने से वातावरण में उमस (Humidity) का असर काफी ज्यादा रहेगा, जिससे राहगीरों को थोड़ी परेशानी हो सकती है.अधिकतम तापमान (Max Temp): 38 डिग्री सेल्सियस तक जाने का अनुमान.न्यूनतम तापमान (Min Temp): 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना.भारी बारिश से आम जनता के लिए बढ़ सकती हैं ये 5 मुश्किलेंमौसम विभाग ने भारी बारिश के दौरान होने वाले संभावित नुकसानों को लेकर भी एक गाइडलाइन जारी की है:शहरी जलभराव: तेज बारिश के कारण निचले इलाकों, मुख्य सड़कों और रेलवे अंडरपास में भारी पानी जमा हो सकता है.ट्रैफिक जाम: सड़कों पर जलजमाव और दृश्यता (Visibility) कम होने से यातायात में भारी बाधा आ सकती है.कच्चे मकानों को खतरा: तेज आंधी और पानी के थपेड़ों से ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकानों या कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंच सकता है.बिजली संकट: आकाशीय बिजली गिरने और पेड़ टूटने से कई इलाकों में घंटों बिजली गुल रहने की समस्या हो सकती है.खेती को नुकसान: मौसमी नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने से बागवानी और नई बोई गई फसलों को भी आंशिक नुकसान होने की आशंका है.मौसम विभाग की जरूरी एडवाइजरी (IMD Safety Advisory)IMD ने आम जनता से अपील की है कि वे तेज आंधी-बारिश और आकाशीय बिजली (Thunderstorm) कड़कने के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर यात्रा करने से बचें. जलभराव वाले रास्तों या खुले मैदानों में खड़े होने के बजाय किसी पक्के मकान की शरण लें. किसान भाई खेतों में काम करते समय बड़े पेड़ों के नीचे बिल्कुल न छिपें. आने वाले पूरे हफ्ते प्रदेश में मानसून की सक्रियता ऐसी ही बनी रहेगी, जिससे तापमान में थोड़ी गिरावट आने की उम्मीद है.
उत्तर प्रदेश के हापुड़ (Hapur) जिले से एक ऐसा सनसनीखेज और हाई-वोल्टेज पारिवारिक ड्रामा सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर पुलिस महकमे तक हलचल मचा दी है. कहते हैं कि इश्क और मुश्क छुपाए नहीं छुपते, लेकिन जब यह सीक्रेट अफेयर किसी शादीशुदा जिंदगी के समानांतर चल रहा हो, तो अंजाम बेहद खौफनाक और तमाशेदार होता है. हापुड़ में एक पति अपनी सरकारी अस्पताल वाली प्रेमिका (नर्स) के साथ एक होटल में रंगरेलियां मना रहा था, लेकिन उसे भनक तक नहीं थी कि उसकी असली पत्नी पूरे मायके के कुनबे के साथ उसकी जासूसी कर रही थी.होटल के कमरे में पत्नी ने मारा छापायह पूरा मामला हापुड़ के नगर कोतवाली क्षेत्र का है. आरोपी पति को पूरा भरोसा था कि सरकारी अस्पताल की नर्स के साथ उसका यह अवैध संबंध हमेशा सीक्रेट रहेगा. लेकिन पत्नी को उसके इस कारनामे की भनक लग चुकी थी. पत्नी ने बिना कोई जल्दबाजी किए अपने भाइयों और परिवार वालों को साथ लिया और सीधे उस होटल में धावा बोल दिया, जहां दोनों ठहरे हुए थे.जैसे ही होटल के कमरे का दरवाजा खुला, प्रेमिका के सामने ही पति के होश उड़ गए. होटल के अंदर ही दोनों पक्षों में जमकर तू-तू, मैं-मैं और भारी हंगामा हुआ. होटल में अपनी फजीहत होते देख और बुरी तरह घिर चुके पति ने वहां से किसी तरह भाग निकलने में ही अपनी भलाई समझी.चलती बस रुकवाकर सरेराह की धुनाईहोटल से भागकर पति सीधे बस स्टैंड पहुंचा और शहर से रफूचक्कर होने के लिए एक चलती बस में सवार हो गया. लेकिन साले साहब और पत्नी ने हार नहीं मानी. उन्होंने फिल्मी अंदाज में पीछा करके चलती बस को बीच रास्ते में रुकवा लिया. इसके बाद पत्नी और उसके परिजन बस के अंदर दाखिल हुए और सीट पर छिपकर बैठे पति को कॉलर पकड़कर सरेआम पीटना शुरू कर दिया.हंगामा यहीं शांत नहीं हुआ, परिजनों ने दोनों को बस से नीचे खींचा और सड़क पर ले आए. बीच सड़क पर हुए इस जबरदस्त ड्रामे का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि हाथापाई के कारण पति की टी-शर्ट पूरी तरह तार-तार हो चुकी है. पत्नी बीच सड़क पर उंगली दिखा-दिखाकर पति से धोखे का हिसाब मांग रही है और उसकी बेवफाई पर चिल्ला रही है.कॉलर पकड़कर घसीटते हुए थाने ले गए परिजनसड़क पर तमाशा होने के बाद पत्नी के मायके वालों ने कानून को हाथ में लेने के बजाय दोनों आरोपियों को सबक सिखाने की ठानी. परिजनों ने धोखेबाज पति और उसकी नर्स प्रेमिका दोनों को कॉलर और बांहों से दबोचा और जबरन घसीटते हुए सीधे नगर कोतवाली थाने ले आए.होटल के बंद कमरे से शुरू हुई यह आशिकी, बस की लाइव धुनाई से होते हुए अब सीधे पुलिस के लॉकअप तक पहुंच चुकी है. पीड़ित पत्नी ने थाने में पति और उसकी प्रेमिका के खिलाफ लिखित तहरीर दे दी है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत के आधार पर मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी.
उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को और मजबूत करते हुए आज एक नया इतिहास रचा जा रहा है. राजधानी लखनऊ को राज्य की औद्योगिक राजधानी कानपुर से जोड़ने वाले सबसे प्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (Lucknow-Kanpur Expressway) का आज 13 जुलाई 2026, सोमवार को भव्य लोकार्पण होने जा रहा है.केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, रक्षा मंत्री व लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संयुक्त रूप से इस अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे. इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम के लिए उन्नाव (Unnao) जिले में एक्सप्रेसवे के किलोमीटर-51 पाडरी स्थित झाऊ खेड़ा में एक भव्य मंच और तीन हेलीपैड तैयार किए गए हैं. उद्घाटन के बाद 14 जुलाई की सुबह 08:00 बजे से यह एक्सप्रेसवे आम जनता के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा.देश का पहला बैरियर-फ्री और स्मार्ट एक्सप्रेसवे (NE-6)म्यूचुअल फंड की तरह ही यह बुनियादी ढांचा भी समय और ईंधन की भारी बचत करने वाला 'ग्रोथ इंजन' साबित होगा. नेशनल एक्सप्रेसवे-6 (NE-6) के नाम से अधिसूचित यह 63 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे भारत का पहला पूरी तरह से बैरियर-फ्री एक्सप्रेसवे (Barrier-Free Expressway) है.मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक: इस कॉरिडोर में गाड़ियों को पारंपरिक टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी. इसमें आधुनिक MLFF टोलिंग सिस्टम और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे वाहन बिना रुके सीधे गुजर सकेंगे और टोल ऑटोमैटिक कट जाएगा.एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट: पूरे रूट पर 24 घंटे पैनी नजर रखने के लिए किलोमीटर 27 और 35 पर दो हाई-टेक कंट्रोल रूम बनाए गए हैं. इसके अलावा 63 से ज्यादा पीटीजेट (PTZ) कैमरे, 16 वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम (VIDS) और ऑटोमैटिक स्पीड रडार लगाए गए हैं. अगर कोई तय स्पीड से तेज गाड़ी चलाएगा, तो उसका ऑनलाइन चालान तुरंत कटकर मोबाइल पर आ जाएगा.120 की रफ्तार से मात्र 35 मिनट में तय होगा सफरअभी तक लखनऊ से कानपुर के बीच पुराना राष्ट्रीय राजमार्ग इस्तेमाल करने पर लोगों को भारी जाम के कारण दो से ढाई घंटे का लंबा समय लग जाता था.समय की 60% बचत: इस नए 6 लेन (जो भविष्य में 8 लेन तक बढ़ सकता है) एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच की दूरी महज 35 से 45 मिनट में सिमट जाएगी. इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों के लिए 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तय की गई है.लागत और निर्माण: लगभग ₹4,700 करोड़ की भारी लागत से तैयार इस प्रोजेक्ट की आधारशिला 5 जनवरी 2022 को रखी गई थी. एनएचएआई (NHAI) द्वारा इसे रिकॉर्ड 1648 दिनों में पूरा किया गया है. इसमें लगभग 45 किलोमीटर का ग्रीनफील्ड ग्रामीण हिस्सा और अमाउसी एयरपोर्ट के पास का 18 किलोमीटर लंबा विशाल एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल है.यह शानदार हाईवे उन्नाव में बन रहे आगामी गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) से भी एक बड़े इंटरचेंज के जरिए कनेक्ट होगा, जिससे दिल्ली-एनसीआर, बुंदेलखंड और पूर्वांचल तक का सफर बेहद आसान हो जाएगा. इसके साथ ही आज लखनऊ के इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर बनने वाले ₹108 करोड़ के नए 4-लेन फ्लाईओवर का भी शिलान्यास किया जाएगा.
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में पर्यावरण संरक्षण और हरित क्रांति की दिशा में एक नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है. वैश्विक स्तर पर चल रहे 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सरकार और सूबे की जनता ने मिलकर रिकॉर्ड 40 करोड़ पौधरोपण (40 Crore Tree Plantation) का महालक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है.इस अभूतपूर्व और ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के नाम एक विशेष और भावुक 'पाती' (पत्र) लिखी है. सीएम योगी ने इस 'वृक्षारोपण महायज्ञ-2026' को जनभागीदारी का सबसे बड़ा उदाहरण बताते हुए इसे नए उत्तर प्रदेश के सामर्थ्य, जनसंकल्प और प्रगति का अनूठा प्रतीक करार दिया है.सीएम योगी की 'पाती': हमारी संस्कृति और अरण्य सभ्यता का संदेशमुख्यमंत्री ने अपने विशेष पत्र में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए लिखा कि हमारी भारतीय सभ्यता मूल रूप से 'अरण्य सभ्यता' (Forest Civilization) रही है, जहां वेदों और पुराणों के काल से ही वृक्षों को देवताओं के समान पूजनीय और संरक्षण योग्य माना गया है.सीएम ने लिखा, प्रकृति और परमात्मा के बीच संतुलन बनाए रखने में वनों का सबसे बड़ा योगदान है. उत्तर प्रदेश की जनता ने जिस तरह अपनी माताओं के सम्मान में 40 करोड़ पौधों को रोपकर धरा का श्रृंगार किया है, वह न केवल वर्तमान पीढ़ी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा की एक मजबूत नींव है. यह महाअभियान साबित करता है कि जब सरकार और जनता एक संकल्प के साथ जुड़ते हैं, तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी बौना साबित हो जाता है.'वृक्षारोपण महायज्ञ-2026' की 3 सबसे बड़ी बातेंऐतिहासिक जनभागीदारी (Massive Public Participation): इस अभियान की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम बनकर नहीं रहा. प्रदेश के गांवों, कस्बों, स्कूलों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम नागरिकों ने अपने घरों के आसपास, खेतों की मेड़ों पर और सार्वजनिक भूमि पर बढ़-चढ़कर पौधरोपण किया.मां के प्रति सम्मान और कृतज्ञता: 'एक पेड़ मां के नाम' के भावुक संदेश ने लोगों के दिलों को सीधे छुआ, जिसके कारण लोगों ने अपनी माताओं के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए इस अभियान को एक पवित्र आंदोलन का रूप दे दिया.पर्यावरण और इकोसिस्टम को मजबूती: विशेषज्ञों का मानना है कि एक साथ 40 करोड़ नए पौधों के रोपण से उत्तर प्रदेश के ग्रीन कवर (Green Cover Area) में भारी बढ़ोतरी होगी, जिससे भूजल स्तर में सुधार, वायु प्रदूषण में कमी और जैव विविधता (Biodiversity) को नई संजीवनी मिलेगी.मुख्यमंत्री ने अपने पत्र के अंत में प्रदेशवासियों से केवल पौधा लगाने तक सीमित न रहने, बल्कि उन पौधों की बच्चों की तरह देखभाल करने और उन्हें एक विशाल वृक्ष बनाने की जिम्मेदारी उठाने की भी भावुक अपील की है.
जिंदगी में अक्सर हम दूसरों का भला करने की नीयत से उन्हें मुफ्त की सलाह (Free Advice) दे बैठते हैं. हमें लगता है कि हमारे अनुभव या ज्ञान से सामने वाले का कुछ फायदा हो जाएगा. लेकिन कई बार यही अच्छाई हमारे खुद के लिए गले की हड्डी बन जाती है. सामने वाला हमारी बात को समझने के बजाय उसका गलत मतलब निकाल लेता है, जिससे अच्छे-भले रिश्तों में भी कड़वाहट घुल जाती है.महान कूटनीतिज्ञ और विद्वान आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'चाणक्य नीति' (Chanakya Niti) में इस बात को लेकर एक गंभीर चेतावनी दी है. उनका मानना है कि हर इंसान इस योग्य नहीं होता कि आप उसके सामने अपना ज्ञान प्रदर्शित करें. कुछ विशेष स्वभाव के लोगों को सही रास्ता दिखाना अपनी ऊर्जा (Energy) और मानसिक शांति को जबरदस्ती दांव पर लगाने जैसा है. आइए जानते हैं कि चाणक्य ने किन 3 तरह के लोगों को ज्ञान न देने की सख्त हिदायत दी है:1. मूर्ख और अहंकारी को समझाना है समय की बर्बादीआचार्य चाणक्य के मुताबिक, जो व्यक्ति खुद को ही सबसे बड़ा ज्ञानी समझता है, उसे कभी कोई राय नहीं देनी चाहिए. ऐसे लोगों के भीतर अहंकार इतना गहरा होता है कि वे कुछ भी नया सीखने या अपनी गलती स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होते.अहसान के बदले दुश्मनी: अगर आप किसी दफ्तर, समाज या परिवार में ऐसे व्यक्ति को उसकी गलती सुधारने के लिए टोकेंगे, तो वह आपका आभार मानने के बजाय उल्टा आपको अपना दुश्मन समझ बैठेगा. वह अपनी गलत बात को ही सही साबित करने के लिए कुतर्क करने लगेगा. ऐसे समझहीन व्यक्ति को ज्ञान देना पूरी तरह से समय की बर्बादी है, जिससे आपका खुद का दिन और मूड खराब हो सकता है.2. कपटी और दुष्ट स्वभाव के लोगों को ज्ञान देना है खतरनाकसमाज में कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी नीयत, चरित्र और इरादे कभी साफ नहीं होते. चाणक्य ने ऐसे दुष्ट और मतलबी स्वभाव वाले लोगों को सबसे ज्यादा खतरनाक माना है.मुसीबत में फंसने का डर: आप भले ही उनके भले के लिए कोई बहुत अच्छी और समझदारी की बात बताएं, लेकिन वे अपने कुटिल दिमाग से उसका भी कोई न कोई गलत या नकारात्मक रास्ता निकाल लेंगे. वे आपकी दी हुई सीख का इस्तेमाल दूसरों को धोखा देने या किसी का नुकसान करने में कर सकते हैं. ऐसे लोगों को सुधारने की कोशिश आपको ही किसी बड़ी कानूनी या सामाजिक मुसीबत में फंसा सकती है, क्योंकि वे आपको अपने रास्ते का कांटा समझने लगते हैं.3. हमेशा रोने वाले और नकारात्मक लोगों से बना लें दूरीकुछ लोगों की फितरत होती है कि उन्हें जीवन में चाहे जितनी सुख-सुविधाएं मिल जाएं, लेकिन वे हमेशा दुखी और असंतुष्ट ही रहते हैं. नौकरी, परिवार, सेहत या पैसा— उनके पास हर चीज को लेकर केवल शिकायतों का पुलिंदा होता है.खत्म होती है पॉजिटिव एनर्जी: चाणक्य का मानना है कि जो इंसान खुद को अंदर से बदलना ही नहीं चाहता, उसे दुनिया की कोई भी बेहतरीन राय फायदा नहीं पहुंचा सकती. ऐसे नकारात्मक लोग हर समाधान के भीतर से भी एक नई समस्या पैदा कर लेते हैं. आज के आधुनिक मनोवैज्ञानिक भी मानते हैं कि हर समय रोने वाले इन लोगों के साथ ज्यादा समय बिताने से आपकी अपनी सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) धीरे-धीरे खत्म होने लगती है.अपनी कीमती ऊर्जा को सही जगह ही लगाएंआचार्य चाणक्य की इन कड़वी लेकिन व्यावहारिक बातों का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप दुनिया में किसी की मदद करना या सही बात बोलना ही बंद कर दें. उनका सीधा सा इशारा इस बात की तरफ था कि अपनी सूझबूझ और समय का इस्तेमाल सोच-समझकर करें.सलाह केवल उसी इंसान को दें जिसके भीतर उसे सुनने, समझने और अपने जीवन में अमल में लाने की सच्ची इच्छा हो. जैसे एक समझदार गुरु भी अपनी पूरी मेहनत उसी शिष्य पर लगाता है जो सच में विद्या ग्रहण करना चाहता है, ठीक वैसे ही हमें भी अपनी कीमती बातें और सुझाव उन्हीं के सामने रखने चाहिए जो हमारे शब्दों और हमारे समय की कद्र करना जानते हों.
आंध्र प्रदेश: वाईएस जगन 14 जुलाई को लापता मछुआरों के परिवारों से मिलेंगे
वाईएसआरसीपी विशाखापत्तनम जिला अध्यक्ष केके राजू ने घोषणा की कि पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआरसीपी अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी 14 जुलाई को विशाखापत्तनम तट पर हाल ही में हुई नाव दुर्घटना में लापता हुए छह मछुआरों के परिवारों को सांत्वना देने के लिए उनसे मिलेंगे।
Top News 13 July : अमेरिका और ईरान भीषण जंग जारी। कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर के करीब पहुंची। बैंकॉक के पब में आग लगने से 27 लोगों की मौत हो गई। दिल्ली में ईवी वाहनों पर सब्सिडी नियमों में बड़ा बदलाव। निक सिनर ने लगातार दूसरी बार विंबलडन का पुरुष ...
11x12x20 SIP Formula: करोड़पति बनने का सबसे आसान शॉर्टकट! समझें ₹11,000 की एसआईपी का यह जादुई नियम
अगर आप भी अपने भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने के लिए निवेश की योजना बना रहे हैं, तो म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) आपके लिए सबसे बेहतरीन जरिया है. अक्सर लोग सोचते हैं कि करोड़पति बनने के लिए लाखों रुपए का एकमुश्त निवेश करना पड़ता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. आज हम आपको म्यूचुअल फंड की दुनिया का एक ऐसा जादुई नियम बताने जा रहे हैं, जिसकी मदद से आप बहुत ही अनुशासित तरीके से ₹1 करोड़ से ज्यादा का फंड तैयार कर सकते हैं. इस जादुई रणनीति का नाम है— 11x12x20 SIP फॉर्मूला.यह फॉर्मूला दिखाता है कि कैसे एक छोटी सी शुरुआत और कंपाउंडिंग (Compounding) की ताकत मिलकर लंबी अवधि में आपके पैसे को कई गुना बढ़ा सकती है.आखिर क्या है 11x12x20 SIP फॉर्मूला?इस फॉर्मूले के गणित को समझना बेहद आसान है. इसे तीन मुख्य हिस्सों में बांटा गया है:11 (मासिक निवेश): इसका मतलब है कि आपको हर महीने ₹11,000 की SIP से शुरुआत करनी होगी.12 (अनुमानित रिटर्न): इसका मतलब है कि आपके निवेश पर सालाना औसतन 12% का रिटर्न मिलना चाहिए (म्यूचुअल फंड में लॉन्ग टर्म के लिए 12% का रिटर्न एक बेहद व्यावहारिक और सामान्य आंकड़ा माना जाता है).20 (निवेश की अवधि): इसका मतलब है कि आपको बिना रुके लगातार 20 वर्षों तक इस निवेश को जारी रखना होगा.20 साल बाद आपके निवेश की पूरी तस्वीर (SIP Calculation)यदि आप इस 11x12x20 के फॉर्मूले पर पूरी तरह टिके रहते हैं, तो 20 साल बाद जब आपका फंड मैच्योर होगा, तो आपके निवेश का पूरा गणित कुछ इस तरह दिखाई देगा:निवेश का विवरणअनुमानित आंकड़ेमासिक एसआईपी (Monthly SIP)₹11,000निवेश की कुल अवधि (Tenure)20 वर्षआपकी जेब से लगा कुल निवेश (Total Investment)₹26,40,000 (26.40 लाख रुपए)अनुमानित वेल्थ गेन / मुनाफा (Capital Gain)₹74,78,431 (74.78 लाख रुपए)20 साल बाद मिलने वाला कुल फंड (Total Value)₹1,01,18,431 (₹1.01 करोड़ से अधिक)यानी, आपने 20 सालों में अपनी जेब से केवल ₹26.40 लाख रुपए बचाकर निवेश किए, लेकिन समय और कंपाउंडिंग की जुगलबंदी ने आपको ₹74.78 लाख का शुद्ध मुनाफा कमा कर दिया. नतीजतन, 20 साल पूरे होते ही आपके पास ₹1 करोड़ से ज्यादा का बड़ा फंड तैयार होगा.क्यों सबसे खास है म्यूचुअल फंड में SIP का जरिया?कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि) का असली जादू: एसआईपी में आपको मिलने वाले रिटर्न पर भी रिटर्न मिलता है. निवेश की अवधि जितनी लंबी होगी, आपका मुनाफा उतनी ही तेजी से रॉकेट की तरह ऊपर भागेगा.शुरुआत करना बेहद आसान: एसआईपी की शुरुआत करने के लिए बहुत मोटी रकम की जरूरत नहीं होती. आप अपनी क्षमता के अनुसार महज ₹500 प्रति माह से भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं.कोई ऊपरी सीमा नहीं (No Maximum Limit): एसआईपी में आप जितना चाहें उतना पैसा निवेश कर सकते हैं, इसकी कोई अधिकतम सीमा तय नहीं है.फ्लेक्सिबिलिटी (लचीलापन): एसआईपी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह पूरी तरह आपके नियंत्रण में होती है. यदि भविष्य में आपकी आय बढ़ती है, तो आप इसे बढ़ा (Step-up) सकते हैं. वहीं, जरूरत पड़ने पर इसकी रकम को घटाया या कुछ महीनों के लिए रोका (Pause) भी जा सकता है.
तुर्किये (Turkey) में बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के होने वाले सी-सेक्शन (सिजेरियन डिलीवरी) को लेकर सरकार की सख्ती अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुकी है. देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए 100 से अधिक प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों (ऑब्स्टेट्रिशियन-गायनेकोलॉजिस्ट) पर गाज गिराई है.अनावश्यक रूप से ऑपरेशन के जरिए डिलीवरी करने के आरोपी इन डॉक्टरों पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाया गया है. इतना ही नहीं, कई डॉक्टरों को क्लीनिकल ड्यूटी से अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया गया है और उन्हें अनिवार्य रूप से दोबारा विशेष ट्रेनिंग लेने का निर्देश दिया गया है. सरकार के इस कड़े रुख के बाद देशभर के डॉक्टरों और मेडिकल संगठनों में भारी नाराजगी और आक्रोश देखा जा रहा है.क्यों हुई डॉक्टरों पर यह सख्त कार्रवाई?स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा की गई इस औचक और बड़ी कार्रवाई के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित आरोप और कारण सामने आए हैं:अनावश्यक सर्जरी की बाढ़: जिन डॉक्टरों पर एक्शन लिया गया है, उन पर आधिकारिक जांच में यह आरोप साबित हुआ है कि उन्होंने सामान्य (प्राकृतिक) प्रसव की संभावना होने के बावजूद जरूरत से ज्यादा और मनमाने ढंग से सी-सेक्शन किए.कड़ी सजा का प्रावधान: नियमों के उल्लंघन पर मंत्रालय ने केवल चेतावनी नहीं दी, बल्कि सीधे तौर पर आर्थिक दंड, क्लीनिकल प्रैक्टिस पर अस्थायी निलंबन और अनिवार्य पुनः प्रशिक्षण जैसी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है. तुर्किये के कई स्थानीय मेडिकल चैंबर्स ने भी इसकी पुष्टि की है.अप्रैल 2025 में लागू हुआ था नया नियम: 'डिकेड ऑफ द फैमिली'तुर्किये में यह विवाद रातों-रात पैदा नहीं हुआ है. दरअसल, अप्रैल 2025 में तुर्किये सरकार ने एक बड़ा कानून लागू करते हुए निजी और सरकारी अस्पतालों में बिना किसी ठोस मेडिकल इमरजेंसी के होने वाले वैकल्पिक (Elective) सी-सेक्शन पर पूरी तरह रोक लगा दी थी.प्राकृतिक प्रसव को प्राथमिकता: सरकार का स्पष्ट स्टैंड है कि यदि मां या होने वाले बच्चे की जान को कोई खतरा नहीं है, तो डॉक्टरों को हर हाल में सामान्य प्रसव (वजाइनल डिलीवरी) को ही प्राथमिकता देनी होगी.राष्ट्रपति एर्दोआन की बड़ी पहल: यह सख्त कानून राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन के 'डिकेड ऑफ द फैमिली' (परिवार का दशक) अभियान का हिस्सा है. इस राष्ट्रीय अभियान का मुख्य उद्देश्य देश में लगातार गिरती जन्म दर (Birth Rate) को सुधारना और महिलाओं को प्राकृतिक प्रसव के लिए प्रोत्साहित करना है.OECD देशों में शीर्ष पर है तुर्किये: सी-सेक्शन के चौंकाने वाले आंकड़ेआर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के 38 सदस्य देशों की सूची में तुर्किये सी-सेक्शन की दर के मामले में दुनिया में पहले स्थान पर काबिज है.61.5% डिलीवरी ऑपरेशन से: उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में तुर्किये में हर 1,000 जीवित जन्मों में से लगभग 615 बच्चों का जन्म सी-सेक्शन के जरिए हुआ था. यानी देश में होने वाली कुल डिलीवरी में से करीब 61.5 प्रतिशत मामले ऑपरेशन के थे, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के लिहाज से बेहद खतरनाक और असामान्य माना गया है.क्या है तुर्किये की 'नेचुरल बर्थ पॉलिसी'? (Natural Birth Policy)तुर्किये के स्वास्थ्य मंत्रालय की इस नीति का मूल एजेंडा देश में सिजेरियन के बढ़ते ग्राफ को नीचे लाना है. इसके तहत ये मुख्य बिंदु शामिल हैं:जहां भी चिकित्सकीय रूप से 1% भी संभावना हो, वहां नॉर्मल डिलीवरी को बढ़ावा दिया जाए.सी-सेक्शन का इस्तेमाल केवल और केवल तभी हो, जब मां या शिशु की जान पर संकट हो.गर्भवती महिलाओं को ऑपरेशन से होने वाले दूरगामी नुकसानों और नॉर्मल डिलीवरी के फायदों के प्रति जागरूक करना.अस्पतालों को डब्ल्यूएचओ (WHO) के तय वैश्विक दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रसव प्रबंधन के लिए बाध्य करना.WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) का नजरिया:डब्ल्यूएचओ का स्पष्ट मानना है कि सी-सेक्शन केवल एक जीवन रक्षक सर्जरी है. बिना जरूरत के केवल सी-सेक्शन की दरें बढ़ाने से मातृ स्वास्थ्य या नवजात शिशु के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं होता, बल्कि इससे मां के शरीर पर अनावश्यक सर्जिकल जोखिम और अस्पताल का आर्थिक बोझ बढ़ जाता है.डॉक्टरों का पलटवार: यह पेशेवर स्वतंत्रता पर प्रशासनिक हमला हैइस कार्रवाई के बाद तुर्किये मेडिकल एसोसिएशन (TTB) और अंटाल्या चैंबर ऑफ फिजिशियंस सरकार के सामने आ गए हैं.सिस्टम की खामी: टीटीबी की वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. आयशे गुल्टेकिंगिल का कहना है कि सी-सेक्शन की ऊंची दर के लिए केवल डॉक्टरों को सूली पर चढ़ाना गलत है. यह एक व्यापक और स्ट्रक्चरल (ढांचागत) समस्या है.मरीज की स्थिति सर्वोपरि: डॉक्टरों का तर्क है कि किसी महिला की डिलीवरी कैसे होगी, यह कोई प्रशासनिक अधिकारी तय नहीं कर सकता. इसके पीछे अस्पतालों की कार्यप्रणाली, इमरजेंसी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, कानूनी मुकदमों का डर और खुद मरीज की शारीरिक स्थिति जैसे कई जटिल कारण होते हैं. आलोचकों का यह भी कहना है कि इस नीति से महिलाओं की अपनी बॉडी और प्रसव का तरीका चुनने की व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Reproductive Freedom) का हनन हो रहा है.
फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) का रोमांच इस समय अपने चरम पर है. दुनिया की चार सर्वश्रेष्ठ टीमें सेमीफाइनल में जगह बना चुकी हैं और अब खिताबी जंग के लिए पूरी तरह तैयार हैं. फीफा वर्ल्ड कप 2026 के दोनों सेमीफाइनल मुकाबले 15 जुलाई (भारतीय समयानुसार 16 जुलाई) से शुरू होने जा रहे हैं.इस महामुकाबले के बीच फुटबॉल इतिहास में आज का दिन बेहद खास है. ठीक 96 साल पहले, 13 जुलाई 1930 को उरुग्वे की धरती पर फुटबॉल विश्व कप की नींव रखी गई थी और पहला मैच खेला गया था. पहले सीजन का पूरा टूर्नामेंट रोमांच से भरा था, लेकिन 30 जुलाई 1930 को उरुग्वे और अर्जेंटीना के बीच खेले गए फाइनल मैच में एक ऐसा ऐतिहासिक विवाद हुआ, जिसने फुटबॉल इतिहास में एक अनोखा पन्ना जोड़ दिया.जब एक फाइनल मैच के लिए मैदान पर आईं 'दो फुटबॉल'साल 1930 के फाइनल मुकाबले में जब उरुग्वे और अर्जेंटीना की टीमें मैदान पर उतरीं, तो मैच शुरू होने से ठीक पहले गेंद को लेकर एक बड़ा बखेड़ा खड़ा हो गया. दोनों टीमें अपनी-अपनी पसंद की फुटबॉल से खेलने की जिद पर अड़ गईं:अर्जेंटीना की जिद: उनका कहना था कि मैच उनकी अपनी हल्की गेंद 'तिएंतो' (Tiento) से ही खेला जाएगा.उरुग्वे का दावा: मेजबान उरुग्वे अपनी स्वदेशी और अपेक्षाकृत थोड़ी भारी गेंद 'टी-मॉडल' (T-Model) का इस्तेमाल करना चाहता था.यह विवाद इतना बढ़ गया कि खिलाड़ी मैच खेलने को ही तैयार नहीं थे. आखिरकार फीफा (FIFA) के अधिकारियों और बेल्जियम के रेफरी जॉन लांगेनस को बीच-बचाव करना पड़ा. अंत में एक अनोखा और ऐतिहासिक समझौता हुआ कि पहले हाफ में अर्जेंटीना की पसंद की गेंद से खेला जाएगा और दूसरे हाफ में उरुग्वे अपनी पसंदीदा गेंद से खेलेगा.गेंद बदलते ही पलट गया मैच का पासाइस विवाद का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि जैसे ही खेल में गेंद बदली, मैच का पूरा पासा ही पलट गया:पहला हाफ (अर्जेंटीना की गेंद): अर्जेंटीना ने अपनी पसंदीदा 'तिएंतो' गेंद से बेहतरीन खेल दिखाया और पहले हाफ की समाप्ति तक 2-1 से बढ़त बना ली.दूसरा हाफ (उरुग्वे की गेंद): दूसरे हाफ में जैसे ही उरुग्वे की भारी 'टी-मॉडल' गेंद मैदान पर आई, मेजबान उरुग्वे ने पासा पलट दिया. उरुग्वे ने ताबड़तोड़ गोल दागते हुए यह मैच 4-2 से जीत लिया और इतिहास का पहला फीफा विश्व कप अपने नाम कर लिया.1930 के पहले वर्ल्ड कप से जुड़े 3 अन्य मजेदार फैक्ट्स1. राजा ने चुनी थी पूरी फुटबॉल टीम: 1930 के पहले विश्व कप में कोई क्वालिफिकेशन मैच नहीं हुए थे. केवल 13 टीमों ने हिस्सा लिया था और सभी आमंत्रण (Invitation) पर आई थीं. इसमें रोमानिया की टीम सबसे अनोखी थी, क्योंकि उसके खिलाड़ियों का चयन किसी कोच या सिलेक्टर्स ने नहीं, बल्कि वहां के राजा 'कैरोल द्वितीय' (King Carol II) ने खुद अपनी पसंद से किया था.2. एक हाथ कटे होने के बावजूद दागा विजयी गोल: उरुग्वे के स्टार खिलाड़ी हेक्टर कास्त्रो (Hector Castro) का एक हाथ बचपन में एक इलेक्ट्रिक आरी के हादसे में कट गया था. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और फाइनल मैच में उरुग्वे के लिए आखिरी व ऐतिहासिक विजयी गोल दागा.3. इतिहास का पहला गोल: फीफा विश्व कप के इतिहास का सबसे पहला गोल करने का गौरव फ्रांस के लुसिएन लॉरेंट (Lucien Laurent) को प्राप्त है, जिन्होंने मैक्सिको के खिलाफ मैच में यह उपलब्धि हासिल की थी.
West Bengal News Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही नई बीजेपी सरकार पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कई अहम और नीतिगत फैसलों को लगातार पलट रही है. इसी कड़ी में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने एक और बड़ा और ऐतिहासिक एलान किया है.पश्चिम बंगाल में अब टीएमसी सरकार का सबसे चर्चित और विवादित 'खेला होबे दिवस' (Khela Hobe Diwas) नहीं मनाया जाएगा. इसकी जगह अब राज्य में हर साल 16 अगस्त को 'आयुष्मान दिवस' (Ayushman Diwas) के रूप में मनाया जाएगा. सरकार का यह फैसला इसलिए भी बेहद खास और प्रतीकात्मक है क्योंकि इसी तारीख को राज्य की नई बीजेपी सरकार के कार्यकाल के 100 दिन भी पूरे हो रहे हैं.बीजेपी की बड़ी बैठक में सीएम सुवेंदु अधिकारी का एलानयह बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक बदलाव रविवार को पूर्वी मेदिनीपुर जिले के तामलुक में आयोजित बीजेपी की एक बड़ी संगठनात्मक बैठक के बाद सामने आया. बैठक के बाद पत्रकारों से रूबरू होते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने साफ किया कि अब राज्य के सरकारी कैलेंडरों से टीएमसी सरकार के चुनावी नारे 'खेला होबे' को पूरी तरह से हटा दिया जाएगा.इसके स्थान पर, केंद्र सरकार की सबसे बड़ी और लोकप्रिय स्वास्थ्य बीमा योजना (Ayushman Bharat) के प्रति जनता को जागरूक करने और सम्मान देने के लिए 16 अगस्त की तारीख को 'आयुष्मान दिवस' के रूप में सरकारी तौर पर अधिसूचित किया जाएगा.16 अगस्त की तारीख क्यों चुनी? 'कलकत्ता किलिंग्स' का काला इतिहासमुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस बदलाव के पीछे केवल राजनीतिक कारण नहीं, बल्कि बंगाल के दर्दनाक इतिहास का भी हवाला दिया. उन्होंने 16 अगस्त की तारीख का महत्व समझाते हुए कहा:ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स: 16 अगस्त का दिन पश्चिम बंगाल, विशेष रूप से कोलकाता के इतिहास का एक बेहद काला और खूनी पन्ना है. साल 1946 में इसी तारीख को मुस्लिम लीग और तत्कालीन सुहरावर्दी सरकार के नेतृत्व में 'ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स' (Great Calcutta Killings) यानी कलकत्ता के भीषण सांप्रदायिक दंगे भड़के थे, जिसमें हजारों निर्दोष लोगों की जान गई थी.टीएमसी पर निशाना: सुवेंदु अधिकारी ने पूर्ववर्ती ममता सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि टीएमसी इस अत्यंत दर्दनाक और काले दिन पर 'खेला होबे दिवस' मनाकर घावों को कुरेदती थी. हमारी सरकार इस दिन को लोगों की सेवा, स्वास्थ्य और जनकल्याण से जोड़कर मनाएगी ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए.100 दिन की उपलब्धियों के साथ मनेगा स्वास्थ्य का जश्नआगामी 16 अगस्त नई सरकार के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने वाली है. विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी की सत्ता को उखाड़ फेंकने के बाद अस्तित्व में आई सुवेंदु सरकार के इस दिन 100 दिन पूरे हो जाएंगे.सरकार अपने इन शुरुआती 100 दिनों के जश्न को 'आयुष्मान दिवस' के रूप में जन-जन तक ले जाना चाहती है. मुख्यमंत्री ने बताया कि इस विशेष दिन पर राज्यभर में मुफ्त चिकित्सा शिविर, स्वास्थ्य जांच और केंद्र की आयुष्मान भारत योजना के कार्ड वितरित करने जैसे कई कल्याणकारी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसकी विस्तृत रूपरेखा और लिस्ट बहुत जल्द सार्वजनिक की जाएगी.केंद्र की योजनाओं पर फोकस: पूर्ववर्ती ममता सरकार पर लगातार यह आरोप लगते रहे हैं कि उन्होंने राजनीतिक द्वेष के चलते केंद्र की 'आयुष्मान भारत' जैसी बेहतरीन स्वास्थ्य योजनाओं को बंगाल में लागू नहीं होने दिया. अब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सत्ता संभालते ही केंद्र की सभी योजनाओं को बंगाल के घर-घर तक पहुंचाने की मुहिम तेज कर दी है.
पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहा तनाव अब एक भीषण और पूर्ण युद्ध का रूप ले चुका है. सीजफायर (युद्धविराम) की मियाद खत्म होते ही अमेरिका ने ईरान के खिलाफ तीसरे दौर की सबसे बड़ी एयरस्ट्राइक (Third Round of Airstrikes) शुरू कर दी है.एक वरिष्ठ अमेरिकी रक्षा अधिकारी के हवाले से सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के भीतर घुसकर उसके प्रमुख मिसाइल लॉन्चिंग पैड्स, संवेदनशील परमाणु प्रतिष्ठानों के करीब मौजूद ठिकानों और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया है. इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमनध्य (Strait of Hormuz) के पास गश्त लगा रही ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कई सैन्य बोट्स और कमांड सेंटरों को भी निशाना बनाया गया है. बता दें कि इससे पहले बुधवार और गुरुवार को भी अमेरिका ने ईरान पर भीषण बमबारी की थी.मुजतबा खामेनेई की पहली हुंकार: पिता के खून का बदला जरूर लूंगाइस भीषण बमबारी के बीच ईरान के नवनियुक्त सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) ने अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद दुनिया के नाम अपना पहला आधिकारिक संदेश जारी किया. उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगियों को खुली चुनौती देते हुए कहा, मैं अपने दिवंगत पिता के बेगुनाह खून की एक-एक बूंद का बदला जरूर लूंगा. यही हमारे पूरे देश की इच्छा और संकल्प है. ईरान इस अमेरिकी आक्रामकता के आगे घुटने नहीं टेकेगा.ईरान का पलटवार: खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दागे ड्रोन-मिसाइलअमेरिकी एयरस्ट्राइक के जवाब में रविवार को ईरान की सेना (IRGC) ने भी खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में चौतरफा मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन हमले (Drone Attacks) करने का दावा किया है, जिससे कुवैत, कतर और बहरीन जैसे देशों में युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं:कुवैत में भारी तबाही का दावा: तेहरान (ईरान की राजधानी) का दावा है कि उसके विस्फोटक ड्रोनों ने कुवैत में तैनात अमेरिकी सेना के पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम (Patriot Air Defense System), भारी गोला-बारूद के गोदामों और अमेरिकी रडार स्टेशनों को सीधे निशाना बनाकर भारी नुकसान पहुंचाया है.बहरीन में बजे एयर रेड सायरन: बहरीन में मौजूद अमेरिकी संचार और रडार सुविधाओं पर भी ईरानी मिसाइलें गिरने का दावा किया गया है. हमले के बाद बहरीन में आपातकालीन एयर रेड सायरन गूंज उठे और नागरिकों से तुरंत बंकरों व सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई.जॉर्डन और कतर पर हमला: आईआरजीसी ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस पर स्थित अमेरिकी सैन्य कैंपों की ओर कई घातक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं. दूसरी ओर, कतर की सेना ने बयान जारी कर बताया कि उसने अपनी सीमा की ओर आ रही एक ईरानी मिसाइल को आसमान में ही (Intercept) मार गिराया.यूएई (UAE) में धमाके: संयुक्त अरब अमीरात ने भी पुष्टि की है कि उसका एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम ईरान की ओर से आने वाले हवाई खतरों को रोकने में मुस्तैद है, और इस दौरान आसमान में कई तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं.समंदर में भारतीय जहाज पर हमला; 10 नाविक बचाए गए, 1 लापताइस युद्ध की आंच अब अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और भारतीय नागरिकों तक भी पहुंच गई है. ओमान के तट (Oman Coast) के पास से गुजर रहे एक कमर्शियल मर्चेंट शिप 'GFS गैलेक्सी' (GFS Galaxy) पर भीषण हमला हुआ.भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि इस प्रभावित जहाज पर कुल 11 भारतीय नागरिक (नाविक) सवार थे. राहत की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत 10 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन 1 भारतीय नाविक अभी भी गहरे समुद्र में लापता है, जिसकी तलाश के लिए रेस्क्यू टीमें जुटी हुई हैं. भारत सरकार ने इस मर्चेंट शिप पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है और खाड़ी क्षेत्र में अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है.
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक बेहद सनसनीखेज और हैरान करने वाली वारदात सामने आई है. यहां एक कलयुगी बेटे पर अपनी ही सगे मां को कथित तौर पर जहर देकर जान से मारने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगा है.इस दिल दहला देने वाली घटना के सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर लिया है. शुरुआती जांच में जो वजह सामने आई है, उसने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है. आरोप है कि युवक की पत्नी काफी समय से अपने मायके में रह रही थी और उसकी सास ने शर्त रखी थी कि जब तक उसकी मां की मौत नहीं हो जाती, वह अपनी बेटी को उसके साथ वापस नहीं भेजेगी.छोले की सब्जी में मिलाकर दिया जहरपुलिस में दर्ज प्राथमिकी (FIR) के मुताबिक, यह खौफनाक साजिश आगरा के एक गांव में अंजाम दी गई. आरोपी रविंद्र पर आरोप है कि उसने दोपहर के खाने के वक्त जानबूझकर छोले की सब्जी में कोई जहरीला पदार्थ (Poison) मिला दिया और वह खाना अपनी बुजुर्ग मां राममूर्ति को परोस दिया.जहरीला खाना खाने के कुछ ही मिनटों बाद राममूर्ति की तबीयत बेहद गंभीर रूप से बिगड़ने लगी और वे तड़पने लगीं. आनन-फानन में परिवार के अन्य सदस्यों ने उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है और उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है.रणवीर सिंह की शिकायत पर हुआ खुलासायह पूरा मामला तब खुला जब पीड़ित महिला के पति और आरोपी के पिता रणवीर सिंह ने थाने में जाकर अपने ही बेटे के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में एक और चौंकाने वाला दावा किया गया है कि जब घटना के तुरंत बाद परिवार ने रविंद्र से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने कबूल किया कि उसे यह जहर किसी और ने नहीं, बल्कि उसकी सगी सास फूलवती ने दिया था.सास ने दी थी धमकी: मां को रास्ते से हटाओ, तभी आएगी बेटी'इंडिया टुडे' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दर्ज एफआईआर में रविंद्र की सास फूलवती को भी सह-आरोपी बनाया गया है. आरोप है कि फूलवती ने ही रविंद्र को पूरी प्लानिंग के तहत जहर उपलब्ध कराया था.रणवीर सिंह की शिकायत के अनुसार, सास फूलवती ने दामाद रविंद्र को आगरा के गतपुरा गांव में स्थित अपने घर बुलाया था. वहां उसने रविंद्र के हाथ में एक सीलबंद पैकेट थमाते हुए कथित तौर पर कहा था कि जब तक तुम अपनी मां को हमेशा के लिए रास्ते से नहीं हटा देते, तब तक मेरी बेटी तुम्हारे घर कदम नहीं रखेगी और तुम्हारे साथ नहीं जाएगी. पत्नी के वियोग और सास के भड़काने में आकर रविंद्र ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे डाला. हालांकि, पुलिस का कहना है कि इन आरोपों की अभी गहनता से जांच की जा रही है.पारिवारिक कलह और संपत्ति विवाद भी है वजह; BNS की इन धाराओं में केस दर्जइस मामले में एक नया मोड़ देते हुए आरोपी रविंद्र के भाई मुकेश ने पुलिस को बताया कि उनके परिवार में पिछले काफी समय से पैतृक संपत्ति (Property Dispute) को लेकर गहरा विवाद चल रहा था. मुकेश का दावा है कि इसी पारिवारिक तनाव और रोज-रोज के झगड़ों के कारण रविंद्र की पत्नी तंग आकर अपने मायके में रहने चली गई थी, जिसका फायदा उठाकर उसकी सास ने रविंद्र को मोहरा बनाया.बढ़ते विवाद और पुख्ता प्राथमिक सबूतों के आधार पर आगरा पुलिस ने आरोपी रविंद्र और उसकी सास फूलवती के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61 (आपराधिक साजिश), 109 (हत्या का प्रयास) और 123 (जहर या खतरनाक पदार्थ के जरिए चोट पहुंचाना) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है. रविंद्र इस समय पुलिस हिरासत में है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल से आने वाली मां की मेडिकल रिपोर्ट और फॉरेंसिक लैब की जांच के बाद मामले में आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
Numerology Rashifal 13 July 2026: अंक ज्योतिष (Numerology) के अनुसार, आपकी जन्मतिथि (Date of Birth) सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि आपके स्वभाव, व्यक्तित्व और भविष्य के बंद कमरों को खोलने वाली जादुई चाबी है. आज 13 जुलाई 2026 का दिन सभी मूलांक वाले जातकों के लिए आर्थिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है.आज के सितारे साफ संकेत दे रहे हैं कि जल्दबाजी में लिया गया कोई भी वित्तीय फैसला भारी पड़ सकता है. आज का मूलमंत्र है— बचत, सटीक बजट और भविष्य की ठोस योजना. आइए विस्तार से जानते हैं कि मूलांक 1 से लेकर 9 तक के लोगों के लिए आज का दिन धन, निवेश और करियर के मामले में कैसा भाग्य लेकर आया है:मूलांक 1 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है)आज आपका पूरा ध्यान पूरी तरह से धन प्रबंधन (Money Management) और पैसों से जुड़े गंभीर मामलों पर केंद्रित रहेगा.सितारों की सलाह: अपने भविष्य को सुरक्षित और फाइनेंशियली फ्री बनाने के लिए आज एक मजबूत योजना तैयार करें. बिना सोचे-समझे या दिखावे में आकर खर्च करने की आदत पर लगाम लगाएं. यदि आप आज अपने तय बजट की सीमा में कदम आगे बढ़ाएंगे, तो आने वाले दिनों में आपकी आर्थिक स्थिति काफी मजबूत और स्थिर हो जाएगी.मूलांक 2 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है)आज का दिन आपके लिए आमदनी और अठन्नी के बीच सही तालमेल बिठाने की परीक्षा का है.सितारों की सलाह: आज आपके लिए खर्च और बचत के बीच एक आदर्श संतुलन (Balance) बनाकर चलना बेहद जरूरी है. गैर-जरूरी विलासिता की चीजों की खरीदारी से पूरी तरह बचें. निवेश (Investment) और लॉन्ग-टर्म सेविंग्स शुरू करने के लिहाज से आज का समय काफी अनुकूल है, लेकिन कोई भी बड़ा वित्तीय कदम उठाने से पहले उसके नफा-नुकसान का आकलन ठंडे दिमाग से जरूर कर लें.मूलांक 3 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है)आज का दिन आपके पुराने निवेशों और वर्तमान आर्थिक नीतियों की बारीकी से समीक्षा (Review) करने का है.सितारों की सलाह: अपने निवेश, बचत और रोजमर्रा के खर्च से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात पर पैनी नजर रखें. अगर आप शेयर बाजार या किसी अन्य जोखिम भरे क्षेत्र में पूंजी लगाने का विचार कर रहे हैं, तो पहले बाजार की जमीनी हकीकत और पूरी जानकारी जरूर हासिल कर लें. समय की मांग को देखते हुए यदि आपको अपनी पुरानी योजनाओं में कुछ फेरबदल भी करना पड़े, तो उससे बिल्कुल न हिचकिचाएं.मूलांक 4 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है)आज का दिन आपके घरेलू बजट पर थोड़ा सा अतिरिक्त दबाव बना सकता है.सितारों की सलाह: आज आपके घर, परिवार या सुख-सुविधाओं से जुड़े खर्चों में अचानक बड़ी बढ़ोतरी होने की आशंका है. इसलिए, कोई भी खरीदारी करने से पहले अपनी वास्तविक जरूरत और जेब के बजट का विशेष ध्यान रखें. भावनाओं में बहकर या किसी के दबाव में आकर मोटी रकम खर्च करने से बचें. एक पूर्व-नियोजित रूपरेखा तैयार करके चलेंगे तो मानसिक और आर्थिक तनाव काफी कम रहेगा.मूलांक 5 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 5, 14 या 23 तारीख को हुआ है)मूलांक 5 के जातकों के लिए आज का दिन अपनी बिखरी हुई आर्थिक व्यवस्था को दोबारा व्यवस्थित और अनुशासित करने के लिए सबसे उत्तम है.सितारों की सलाह: फिजूलखर्ची पर पूरी तरह ताला लगा दें और आज से होने वाले हर एक खर्च का एक स्पष्ट उद्देश्य (Purpose) तय करें. बिजनेस या नौकरी में आज आपको कमाई के कुछ बेहतरीन और नए रास्ते मिल सकते हैं. अपनी सूझबूझ और पेशेवर योग्यता का सही समय पर सही इस्तेमाल करेंगे, तो अप्रत्याशित आर्थिक लाभ (Financial Gains) होने की प्रबल संभावना है.मूलांक 6 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 6, 15 या 24 तारीख को हुआ है)आज का दिन आपके जीवन में आर्थिक मामलों को लेकर एक नई और सकारात्मक शुरुआत का संकेत दे रहा है.सितारों की सलाह: आज से ही अपने रोजाना के खर्चों का एक सटीक लिखित हिसाब-किताब रखना शुरू कर दें. केवल उन्हीं चीजों पर पैसा लगाएं जो आपके जीवन के लिए बेहद अनिवार्य हैं. वर्तमान में आपकी आय और व्यय (Income and Expenses) के बीच बना हुआ यह बेहतरीन संतुलन ही भविष्य में आपको एक बड़ी आर्थिक मजबूती और मानसिक शांति प्रदान करेगा.मूलांक 7 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है)आज का दिन आपको शॉर्ट-टर्म मुनाफे के लालच से बचकर लंबी अवधि के बड़े लक्ष्यों (Long-Term Goals) पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा दे रहा है.सितारों की सलाह: महंगी, ब्रांडेड और गैर-जरूरी चीजों पर अंधाधुंध पैसा पानी की तरह बहाने से आज आपको कड़ाई से बचना चाहिए. यदि आप रियल एस्टेट या म्यूचुअल फंड्स में कोई बड़ा निवेश करना चाहते हैं, तो विशेषज्ञों से पूरी कानूनी और तकनीकी जानकारी लेने के बाद ही कोई अंतिम फैसला करें. आज धैर्य और तसल्ली से लिया गया कोई भी निर्णय भविष्य में आपके लिए बड़ा जैकपॉट साबित हो सकता है.मूलांक 8 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है)मूलांक 8 के जातकों के लिए आज के सितारे आर्थिक मोर्चे पर बेहद सकारात्मक और सुनहरे संकेत दे रहे हैं.सितारों की सलाह: आज आपको अपने पुराने वित्तीय पोर्टफोलियो और बजट का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए. भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखकर आज आपके द्वारा लिए गए विवेकपूर्ण फैसले आगे चलकर आपको बहुत ही शानदार रिटर्न (Results) देने वाले हैं. आज के दिन समय और धन दोनों का सदुपयोग करें, भाग्य आपके साथ है.मूलांक 9 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है)आज का दिन आपके करियर और व्यवसाय में नए और आकर्षक आर्थिक अवसर (Financial Opportunities) लेकर आने वाला है.सितारों की सलाह: नए अवसर मिलने की खुशी में बिना सोचे-समझे जल्दबाजी या उत्साह में आकर कोई भी बड़ा एग्रीमेंट साइन न करें और न ही कोई बड़ा निवेश करें. अपनी वर्तमान बचत और भविष्य के निवेश के बीच एक सख्त संतुलन बनाए रखें. आपकी सूझबूझ, धैर्य और समझदारी से उठाया गया हर एक छोटा कदम आगे चलकर आपकी वित्तीय नींव को पत्थर की तरह मजबूत बना देगा.
Step-up SIP and SWP Calculator: हर व्यक्ति चाहता है कि रिटायरमेंट के बाद उसकी नियमित कमाई (Regular Income) बंद न हो और वह स्वाभिमान के साथ अपना जीवन जी सके. अच्छी बात यह है कि बुढ़ापे में एक बड़ा फंड तैयार करने के लिए आपकी शुरुआती सैलरी का बहुत बड़ा होना जरूरी नहीं है. अगर आप कम उम्र में एक छोटी सी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) शुरू करते हैं, हर साल उसमें थोड़ी बढ़ोतरी (Step-up) करते हैं, और लंबे समय तक धैर्य के साथ निवेश जारी रखते हैं, तो कंपाउंडिंग (Compounding) की जादुई ताकत से रिटायरमेंट तक करोड़ों का फंड तैयार हो सकता है.इसके बाद, उसी जमा पूंजी को सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) में शिफ्ट करके हर महीने एक निश्चित सैलरी या पेंशन की तरह मोटी रकम हासिल की जा सकती है. आइए समझते हैं ₹1,000 की मामूली शुरुआत से ₹1.05 करोड़ का फंड बनाने और फिर हर महीने ₹1 लाख पाने का पूरा गणित.₹1,000 की SIP से ₹1.05 करोड़ का फंड कैसे बनेगा? (कंपाउंडिंग का गणित)मान लीजिए आपकी उम्र वर्तमान में 28 साल है और आपने निवेश की शुरुआत करने का फैसला किया. आप हर महीने केवल ₹1,000 की एक एसआईपी शुरू करते हैं. नौकरी में जैसे-जैसे आपकी सालाना सैलरी या इंक्रीमेंट बढ़ता है, आप अपनी एसआईपी में भी हर साल 10% का स्टेप-अप (Step-up SIP) यानी बढ़ोतरी करते जाते हैं (उदाहरण के लिए: पहले साल ₹1000 महीना, दूसरे साल ₹1100 महीना, तीसरे साल ₹1210 महीना आदि).यदि आप अपनी उम्र के 60 साल (रिटायरमेंट) तक यानी पूरे 32 वर्षों तक इस अनुशासन के साथ निवेश जारी रखते हैं और आपको म्यूचुअल फंड से औसतन 12% का सालाना रिटर्न मिलता है, तो आपके निवेश का पूरा खाका कुछ इस तरह दिखाई देगा:निवेश की कुल अवधि: 32 साल (28 की उम्र से 60 की उम्र तक)शुरुआती मासिक निवेश: ₹1,000 (10% वार्षिक स्टेप-अप के साथ)आपकी जेब से लगा कुल निवेश: ₹24.13 लाखकंपाउंडिंग से हुआ कुल मुनाफा: ₹80.98 लाख60 वर्ष पर तैयार अनुमानित फंड: ₹1.05 करोड़स्टेप-अप (Step-Up) क्यों है गेमचेंजर?अगर आप पूरे 32 वर्षों तक बिना रकम बढ़ाए केवल ₹1,000 प्रति माह की ही एसआईपी करते रहते, तो ₹1 करोड़ के जादुई आंकड़े तक पहुंचना लगभग नामुमकिन होता. हर साल निवेश में की गई महज 10% की यह छोटी सी बढ़ोतरी लंबी अवधि में करोड़ों रुपए का बड़ा अंतर पैदा कर देती है.रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹1 लाख कैसे मिलेंगे? (SWP का फॉर्मूला)रिटायरमेंट (60 साल की उम्र) पर जब आपके पास एक बड़ा कॉर्पस तैयार हो जाता है, तो आपको पूरा पैसा एक साथ बैंक खाते में निकालकर टैक्स गंवाने या खर्च करने की जरूरत नहीं होती. यहीं पर काम आता है सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP), जो म्यूचुअल फंड का एक ऐसा टूल है जहां आपका पैसा मार्केट में निवेशित रहकर रिटर्न भी कमाता रहता है और आपको हर महीने आपकी चुनी हुई एक फिक्स रकम भी मिलती रहती है.अब मान लीजिए, विभिन्न निवेशों और एसेट एलोकेशन की मदद से रिटायरमेंट के समय आपके पास ₹1.5 करोड़ का कुल फंड जमा है. सुरक्षा के लिहाज से आप इस पूरे फंड को किसी डेट म्यूचुअल फंड (Debt Fund) या कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड (Conservative Hybrid Fund) में ट्रांसफर कर देते हैं.अगर इस सुरक्षित फंड पर आपको सालाना महज 6% का फिक्स रिटर्न भी मिलता रहे और आप हर महीने ₹1 लाख की निकासी (SWP) सेट कर देते हैं, तो इसका गणित कुछ ऐसा होगा:शुरुआती कुल निवेश (SWP में): ₹1.5 करोड़हर महीने मिलने वाली पेंशन: ₹1 लाखपेंशन/निकासी की अवधि: 12 साल12 वर्षों में कुल जमा निकासी: ₹1.44 करोड़निकासी के दौरान फंड द्वारा अर्जित अनुमानित कमाई: ₹43.13 लाखइस रणनीति का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको हर महीने ₹1 लाख की नियमित इनकम भी मिलती रहेगी और आपकी मूल पूंजी (₹1.5 करोड़) भी बाजार में सुरक्षित रहकर अतिरिक्त रिटर्न कमाती रहेगी, जिससे आपका फंड अचानक से कभी शून्य नहीं होगा.निवेश यात्रा शुरू करने से पहले 3 जरूरी बातें हमेशा याद रखेंरिटायरमेंट और रिटर्न की अनिश्चितता: म्यूचुअल फंड में मिलने वाला 12% या डेट फंड का 6% रिटर्न पूरी तरह से अनुमानित है, यह फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की तरह गारंटीड नहीं होता. बाजार के उतार-चढ़ाव के हिसाब से लॉन्ग टर्म में यह रिटर्न कम या ज्यादा भी हो सकता है.समय-समय पर रिव्यू (Portfolio Review): जैसे ही आप अपने रिटायरमेंट (60 वर्ष) के करीब पहुंचने लगें (लगभग 55 वर्ष की उम्र में), अपने हाई-रिस्क इक्विटी फंड्स से पैसा निकालकर धीरे-धीरे सुरक्षित डेट ऑप्शंस में शिफ्ट करना शुरू कर दें ताकि मार्केट क्रैश से आपका फंड प्रभावित न हो.महंगाई (Inflation) को न भूलें: आज के समय में ₹1 लाख की जो क्रय शक्ति (Value) है, आज से 30 या 32 साल बाद महंगाई के कारण ₹1 लाख की वैल्यू उतनी नहीं रहेगी. इसलिए जैसे-जैसे आपकी आय बढ़े, अपनी एसआईपी स्टेप-अप दर को 10% से बढ़ाकर 15% करने का प्रयास करें ताकि आपका फंड महंगाई को आसानी से पछाड़ सके.
जब भी हम किसी झील या नदी की कल्पना करते हैं, तो हमारे दिमाग में नीले या साफ पानी की तस्वीर उभरती है. लेकिन कुदरत के तरकश में ऐसे कई अजूबे हैं जो इंसानी सोच को हैरान कर देते हैं. दुनिया में कई ऐसी रहस्यमयी और खूबसूरत झीलें हैं, जिनका पानी नीला नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से चमकीला गुलाबी (Natural Pink Color) दिखाई देता है. पहली ही नजर में किसी काव्यात्मक पेंटिंग जैसी लगने वाली ये झीलें पूरी दुनिया के पर्यटकों और वैज्ञानिकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं.आइए जानते हैं दुनिया की 6 सबसे मशहूर और खूबसूरत 'पिंक लेक्स' (Pink Lakes) के बारे में और समझते हैं इनके गुलाबी होने का दिलचस्प वैज्ञानिक कारण:दुनिया की 6 सबसे खूबसूरत और पॉपुलर गुलाबी झीलें1. लेक हिलियर (Lake Hillier) - ऑस्ट्रेलियाऑस्ट्रेलिया के मिडल आइलैंड पर स्थित 'लेक हिलियर' दुनिया की सबसे प्रसिद्ध गुलाबी झीलों में से एक है.सबसे अनोखी बात: इस झील की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अगर आप इसके पानी को किसी कांच के बर्तन या बाल्टी में बाहर भी निकाल लें, तो भी इसका गुलाबी रंग नहीं बदलता. भारी बारिश के कारण कभी-कभी इसका रंग थोड़ा हल्का जरूर हो जाता है, लेकिन समय के साथ इसका गाढ़ा गुलाबी रंग फिर वापस लौट आता है.2. टोर्रेविजा पिंक लैगून (Torrevieja Pink Lagoon) - स्पेनस्पेन की यह झील अपने लुभावने और चमकीले गुलाबी रंग के लिए जानी जाती है.देखने का सही समय: जून से अक्टूबर के महीनों में, जब धूप सबसे तेज होती है, तब इस झील का गुलाबी रंग अपने पूरे शबाब पर होता है. यह झील स्पेन के मुख्य नमक उत्पादन (Salt Production) केंद्रों में से एक है. यहां बड़ी संख्या में खूबसूरत फ्लेमिंगो (राजहंस) पक्षी भी डेरा डालते हैं.3. डस्टी रोज़ लेक (Dusty Rose Lake) - कनाडायह झील बाकी सभी गुलाबी झीलों से बिल्कुल जुदा है. जहां दुनिया की ज्यादातर पिंक लेक्स खारे पानी की हैं, वहीं कनाडा की डस्टी रोज़ लेक मीठे पानी (Freshwater) की झील है.सफर है मुश्किल: यह झील एक बेहद दुर्गम और दूरदराज के इलाके में स्थित है, इसलिए यहां पैदल पहुंचना मुमकिन नहीं है. पर्यटक इसे देखने के लिए हेलीकॉप्टर या छोटे हवाई जहाजों का सहारा लेते हैं.4. हट्ट लैगून (Hutt Lagoon) - ऑस्ट्रेलियाऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट पर स्थित हट्ट लैगून लगभग 9 मील लंबी एक विशाल झील है. समुद्र और इस झील के बीच केवल रेत के टीलों की एक बेहद पतली पट्टी है. सुबह से दोपहर के वक्त इस झील का रंग सबसे ज्यादा साफ और चमकदार गुलाबी दिखता है, और इसके किनारों पर जमे सफेद नमक के क्रिस्टल इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं.5. लेक रेटबा या लैक रोज़ (Lake Retba) - सेनेगलसेनेगल की राजधानी डकार के नजदीक स्थित इस झील को स्थानीय भाषा में 'लैक रोज़' भी कहा जाता है. इस झील का पानी अत्यधिक खारा है. साल 2022 में आई भयानक बाढ़ के कारण इसका रंग कुछ समय के लिए बदल गया था, लेकिन अब यह प्राकृतिक रूप से दोबारा गुलाबी रूप अख्तियार कर रही है. इसे देखने का सबसे सही समय नवंबर से मई के बीच माना जाता है.6. महारलू झील (Maharloo Lake) - ईरानईरान के फ़ार्स प्रांत में शिराज़ शहर के पास स्थित महारलू झील चारों तरफ से ऊंचे पहाड़ों से घिरी हुई है. गर्मियों के मौसम में वाष्पीकरण (Evaporation) के कारण झील का पानी काफी सूख जाता है और किनारों पर सफेद नमक की मोटी परतें जम जाती हैं. भरपूर भोजन की उपलब्धता के कारण वसंत और शुरुआती पतझड़ में हजारों प्रवासी पक्षी, खासकर फ्लेमिंगो यहां आते हैं.आखिर क्यों गुलाबी होता है इन झीलों का पानी? (वैज्ञानिक कारण)इन झीलों का गुलाबी रंग कोई जादू या इंसानी कारनामा नहीं है, बल्कि इसके पीछे शुद्ध विज्ञान और प्रकृति का तालमेल है:खारे पानी की झीलों का राज (माइक्रोऑर्गेनिज्म): लेक हिलियर, हट्ट लैगून और लैक रोज़ जैसी खारे पानी की झीलों में नमक की मात्रा बहुत अधिक होती है. इस अत्यधिक खारे माहौल में 'डुनालिएला सलीना' (Dunaliella Salina) नाम के विशेष सूक्ष्म शैवाल (Algae) और 'हैलोबैक्टीरिया' जैसे सूक्ष्मजीव पनपते हैं. ये सूक्ष्मजीव तेज धूप से बचने के लिए लाल-गुलाबी रंग का पिगमेंट (कैरोटीनॉयड) छोड़ते हैं, जिससे पूरा पानी गुलाबी दिखाई देता है.मीठे पानी की झील का राज (मिनरल्स): कनाडा की 'डस्टी रोज़ लेक' के गुलाबी होने की वजह कोई बैक्टीरिया नहीं है. दरअसल, इस झील के आसपास मौजूद हिमनदीय चट्टानें (Glacial Rocks) गुलाबी और बैंगनी रंग की हैं. जब ग्लेशियर पिघलते हैं, तो उन चट्टानों के बेहद महीन कण बहकर झील के पानी में मिल जाते हैं, जिससे पानी का रंग प्राकृतिक रूप से डस्टी पिंक हो जाता है.ये अनूठी झीलें इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि पानी का रंग हमेशा नीला होना जरूरी नहीं है; प्रकृति के भीतर छिपे सूक्ष्मजीव, खनिज और तत्व किसी भी नजारे को जादुई बना सकते हैं.
आज 13 जुलाई 2026, सोमवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आज आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि शाम 6:50 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात अमावस्या तिथि का आरंभ हो जाएगा। सनातन संस्कृति में किसी भी नए कार्य, मांगलिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ या यात्रा की शुरुआत करने से पहले पंचांग देखने की प्राचीन परंपरा है ताकि सही समय पर सही निर्णय लेकर अनुकूल परिणाम प्राप्त किए जा सकें। आइए जानते हैं आज के दिन का पूरा पंचांग, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल और विशेष मुहूर्तों की सटीक जानकारी शामिल है।आज का पंचांग और ग्रह-नक्षत्र की स्थितिआज सोमवार के दिन शक संवत् 1948 और विक्रमी संवत् 2083 चल रहा है। आज का दिन आषाढ़ कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के साथ शुरू होगा जो शाम 6:50 बजे तक रहेगी और उसके बाद अमावस्या शुरू हो जाएगी। योग की बात करें तो आज दोपहर 4:01 बजे तक ध्रुव योग रहेगा, जिसके बाद व्याघात योग प्रभावी होगा। इसके अलावा, सुबह 8:41 बजे तक विष्टि (भद्रा) करण का प्रभाव रहेगा। चंद्रमा आज दिन-रात मिथुन राशि में ही संचार करेंगे और सूर्य उत्तरायण स्थिति में रहेंगे।सूर्य और चंद्रमा का समयआज के दिन सूर्योदय सुबह 6:01 बजे और सूर्यास्त रात्रि 9:51 बजे होगा। चंद्रोदय का समय 14 जुलाई की सुबह 5:38 बजे का है, जबकि चन्द्रास्त रात्रि 9:34 बजे होगा। दैनिक गतिविधियों के निर्धारण के लिए सूर्य और चंद्रमा के इन समयों का विशेष ध्यान रखा जाता है।आज के शुभ मुहूर्तयदि आप आज कोई शुभ या मांगलिक कार्य करने की सोच रहे हैं, तो इन अनुकूल मुहूर्तों का लाभ उठा सकते हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:56 बजे से 5:28 बजे तक रहेगा। प्रातः संध्या सुबह 5:12 बजे से 6:01 बजे तक है। दिन का सबसे महत्वपूर्ण अभिजित मुहूर्त दोपहर 1:24 बजे से दोपहर 2:28 बजे तक रहेगा, जो किसी भी नए कार्य के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा विजय मुहूर्त दोपहर 4:34 बजे से 5:38 बजे तक, गोधूलि मुहूर्त रात्रि 9:49 बजे से 10:06 बजे तक और अमृत काल दोपहर 2:32 बजे से 3:57 बजे तक रहेगा।आज के अशुभ मुहूर्त और राहुकालज्योतिष शास्त्र में कुछ समय को अशुभ माना जाता है जिसमें महत्वपूर्ण कार्य करने से बचना चाहिए। आज राहुकाल सुबह 7:30 बजे से 9:00 बजे (या अन्य पंचांगीय गणना के अनुसार सुबह 8:00 बजे से 9:59 बजे) तक रहेगा। यमगण्ड काल दोपहर 11:57 बजे से दोपहर 1:56 बजे तक रहेगा। इसके अलावा सुबह 8:41 बजे तक भद्रा का प्रभाव रहेगा, इसलिए इस अवधि में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। दुर्मुहूर्त दोपहर 2:28 बजे से 3:31 बजे तक और वर्ज्य काल सुबह 9:36 बजे से 11:00 बजे तक रहेगा।
पंजाब भाजपा का मान सरकार पर निशाना, कहा- लगातार कर्ज लेकर राज्य को वित्तीय संकट में धकेला
पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने रविवार को कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने लगातार कर्ज लेकर राज्य को गहरे वित्तीय संकट में धकेल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों ने समृद्ध पंजाब के सपने को कंगाल पंजाब में बदल दिया है।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के अंतर्गत आने वाले बारुईपुर शहर में उपजे गंभीर कानून-व्यवस्था के संकट के बाद राज्य प्रशासन ने एक बड़ी राजनीतिक और कानूनी कार्रवाई की है। सूर्यपुर इलाके में एक नाबालिग किशोरी के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म और बेरहम हत्याकांड के बाद भड़की हिंसक प्रतिक्रिया और मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या) के मामले में पुलिस ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के कद्दावर नेता लहेक अली (लाहेक खान) को गिरफ्तार कर लिया है। लहेक अली इस साल की शुरुआत में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बारुईपुर पश्चिम सीट से वामपंथी गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवार रह चुके हैं।सूर्यपुर हाट में भड़का था आक्रोश: नाबालिग की मौत के बाद उग्र भीड़ ने युवक को उतारा था मौत के घाटइस पूरे विवाद की शुरुआत 4 जुलाई को हुई थी, जब एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की अचानक लापता हो गई थी। अगले दिन यानी 5 जुलाई को सूर्यपुर हाट इलाके के एक स्थानीय तालाब से उस बच्ची का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया। पीड़िता के परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद उसकी निर्मम हत्या की गई है। इस घटना से आक्रोशित स्थानीय निवासियों और प्रदर्शनकारियों ने उग्र रूप धारण कर लिया और गंभीर रेल रोको आंदोलन के साथ सड़कों पर टायर जलाकर यातायात ठप कर दिया। इसी अराजकता के बीच उग्र भीड़ ने अपराध में संलिप्त होने के संदेह में इंद्रजीत मंडल नामक एक युवक की पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी। पुलिस का दावा है कि पूर्व चुनावी प्रत्याशी लहेक अली ने ही भीड़ को इस भयानक हिंसा के लिए उकसाया था।मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने की पीड़ितों से मुलाकात: न्याय और सरकारी सहायता का दिया भरोसाशनिवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्वयं बारुईपुर का दौरा किया। उन्होंने वहां पहुंचकर सामूहिक दुष्कर्म की शिकार हुई मृत बच्ची के शोक संतप्त परिवार और उसके बाद मॉब लिंचिंग का शिकार हुए इंद्रजीत मंडल के परिजनों से आमने-सामने मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने दोनों ही पीड़ित परिवारों को सांत्वना देते हुए राज्य सरकार की तरफ से हरसंभव वित्तीय व सामाजिक सहायता प्रदान करने का आधिकारिक भरोसा दिया। पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा, हम उस निर्दोष युवक को वापस तो नहीं ला सकते, लेकिन हमारी सरकार ने उसके परिवार की पूरी जिम्मेदारी ली है। उसके हत्यारों को कानून के दायरे में लाकर सख्त से सख्त सजा दिलवाई जाएगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ पराजित राजनीतिक तत्वों ने अपनी खोई हुई जमीन तलाशने के लिए इस सांप्रदायिक व सामाजिक हिंसा को प्रायोजित किया था।भारत-बांग्लादेश सीमा से दबोचे गए मुख्य आरोपी: महज 4 दिन में तैयार हुई नई पुलिस चौकीमामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य की खुफिया और खोजी पुलिस ने त्वरित तकनीकी जाल बिछाया। वीडियो फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने घटना में शामिल सभी मुख्य संदिग्धों को बक्खाली, दीघा और भारत-बांग्लादेश सीमा के पास स्थित बशीरहाट से दबोच लिया, जहां से वे सीमा पार भागने की फिराक में थे। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्थानीय जनता और पीड़िता के परिवार की सुरक्षा संबंधी मांग को स्वीकार करते हुए सूर्यपुर में एक आधुनिक पुलिस चौकी का उद्घाटन भी किया। इस पुलिस चौकी को शासन के विशेष आदेश पर रिकॉर्ड महज चार दिनों के भीतर निर्मित और सक्रिय किया गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की हिंसक पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: एसआईटी के सामने पेश हुए संतोष दुबे, बोले-माथे पर कलंक मिटाना जरूरी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी ने धर्मसेना के प्रमुख संतोष दुबे से पूछताछ की है। पूछताछ के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए संतोष दुबे ने कहा कि एसआईटी के सामने उन्होंने अपना पक्ष रखा है और कुछ दस्तावेज वह उन्हें मुहैया कराएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पर थे। प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे को ऑस्ट्रेलियन मीडिया खासकर प्रिंट मीडिया ने हाथों-हाथ लिया
TMC पर लड़ाई हुई तेज, ऋतब्रत बनर्जी का बड़ा दावा, बोले- हम हैं असली टीएमसी, कोर्ट का दिखाया आदेश
West Bengal Politics News : बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी वर्चस्व की लड़ाई के बीच ऋतब्रत बनर्जी गुट को बड़ी कानूनी राहत मिली है। खबरों के अनुसार, अलीपुर अदालत ने पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से दायर मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि 22 जून को ...
कतर के दिवंगत अमीर के सम्मान में भारत में सोमवार को एक दिन का राजकीय शोक
नई दिल्ली। भारत ने कतर के दिवंगत अमीर शेख हमद बिन ख़लीफ़ा अल-थानी के सम्मान में देशभर में सोमवार को एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। कतर के अमीर का रविवार को निधन हो गया। विदेश मंत्रालय ने बताया कि शोक के दिन पूरे देश में उन सभी भवनों पर, जहां नियमित […] The post कतर के दिवंगत अमीर के सम्मान में भारत में सोमवार को एक दिन का राजकीय शोक appeared first on Sabguru News .
बेलगावी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक रविवार को कर्नाटक के बेलगावी में संपन्न हो गई। बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित देशभर से 226 कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक में संघ के प्रशिक्षण वर्गों की समीक्षा, शाखा विस्तार, शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों, जनगणना, जनसांख्यिकी असंतुलन, […] The post RSS की अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक में शाखा विस्तार, जनगणना, नशा मुक्ति और शताब्दी वर्ष की योजनाओं पर हुआ मंथन appeared first on Sabguru News .
श्रावण-भादौ में महाकाल मंदिर के पट खुलने और भस्म आरती के समय में होगा बदलाव
उज्जैन। मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण-भादौ मास के दौरान मंदिर के पट खुलने तथा भस्म आरती के समय में परिवर्तन किया गया है। नई व्यवस्था 30 जुलाई से 7 सितंबर तक प्रभावी रहेगी। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर रोशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में रविवार […] The post श्रावण-भादौ में महाकाल मंदिर के पट खुलने और भस्म आरती के समय में होगा बदलाव appeared first on Sabguru News .
नितिन नबीन से मिले नरोत्तम मिश्रा, दतिया में हुए प्रदर्शन के मुद्दे पर रखी अपनी बात
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने रविवार को यहां पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की और दतिया में हुए विरोध-प्रदर्शन पर अपना पक्ष रखा। गौरतलब है कि भाजपा ने दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया […] The post नितिन नबीन से मिले नरोत्तम मिश्रा, दतिया में हुए प्रदर्शन के मुद्दे पर रखी अपनी बात appeared first on Sabguru News .
अलवर में खेत की तारबंदी को लेकर दो भाइयों के परिवार भिड़े, 13 घायल
अलवर। राजस्थान में अलवर जिले के मालाखेड़ा थाना क्षेत्र में बड़ा गांव नैथला में रविवार सुबह खेत की तारबंदी को लेकर दो सगे भाइयों के परिवाराें में हुए खूनी संघर्ष में 13 लोग घायल हो गए। सूचना मिलने पर मालाखेड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल मालाखेड़ा अस्पताल पहुंचाया। यहां प्राथमिक उपचार […] The post अलवर में खेत की तारबंदी को लेकर दो भाइयों के परिवार भिड़े, 13 घायल appeared first on Sabguru News .
अलवर : खेत में कुंड में डूबने से दो बालकों की मौत
अलवर। राजस्थान में अलवर जिले की ग्राम पंचायत द्वारापुर में रविवार को खेत में बने कुंड में नहाने गए दो बालकों की डूबने से मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, द्वारापुर गांव के छह बच्चे रविवार दोपहर को गांव के पास स्थित एक खेत में छोटे कुंड में नहाने गए थे। नहाने के दौरान […] The post अलवर : खेत में कुंड में डूबने से दो बालकों की मौत appeared first on Sabguru News .
डीडीए ने अतिक्रमण रोकने के लिए जारी की नई एसओपी, 14 फ्लाइंग स्क्वॉड और 4 क्विक रिस्पॉन्स टीमें तैनात
दिल्ली के उपराज्यपाल टी.एस. संधू के अतिक्रमण के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति संबंधी निर्देशों के बाद, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने 14 फ्लाइंग स्क्वॉड टीमों और चार क्विक रिस्पॉन्स टीमों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है।
भारत विकास परिषद अजमेर ने चलाया ‘जस्ट थ्रो एंड गो’सीड बॉल अभियान
दो दिन में 2000 से अधिक सीड बॉल पहाड़ियों क्षेत्रों में उछाली अजमेर। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से भारत विकास परिषद् मुख्य शाखा अजमेर की ओर से जस्ट थ्रो एंड गो सीड बॉल अभियान चलाया गया। अभियान के तहत दो दिनों में 2000 से अधिक सीड बॉल अजमेर की पहाड़ी क्षेत्रों एवं […] The post भारत विकास परिषद अजमेर ने चलाया ‘जस्ट थ्रो एंड गो’ सीड बॉल अभियान appeared first on Sabguru News .
जीवदया के तहत 200 अशक्त गोवंश को अर्पित किया हरा चारा और गुड़
दिगंबर जैन महासमिति महिला एवं युवा महिला संभाग ने किया सेवा कार्य अजमेर। श्री दिगंबर जैन महासमिति महिला एवं युवा महिला संभाग, अजमेर की सरावगी मोहल्ला इकाई की ओर से जीवदया के तहत नागफानी स्थित आनंद गोपाल गौशाला में सेवा कार्य आयोजित किया गया। इस दौरान 200 अशक्त गोवंश को हरा चारा एवं गुड़ अर्पित […] The post जीवदया के तहत 200 अशक्त गोवंश को अर्पित किया हरा चारा और गुड़ appeared first on Sabguru News .
गुरु और गुरु पूर्णिमा का महत्व
आषाढ़ पूर्णिमा; यानी साधक और शिष्य जिस दिन की अत्यंत उत्सुकता (आतुरता) से प्रतीक्षा करते हैं, वह गुरु पूर्णिमा का मंगलमय दिन है। शिष्य के संपूर्ण जीवन में समाए हुए सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञ गुरु के चरणों में कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए, और साधना के अगले लक्ष्य को प्राप्त करने का संकल्प लेने के लिए […] The post गुरु और गुरु पूर्णिमा का महत्व appeared first on Sabguru News .
130th Constitutional Amendment Bill: भारतीय राजनीति और संवैधानिक व्यवस्था में एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी चल रही है. विपक्षी दलों के कड़े विरोध और चिंताओं के बीच, 130वें संविधान संशोधन विधेयक (130th Constitutional Amendment Bill) की समीक्षा कर रही संसद की एक संयुक्त समिति (Joint Parliamentary Committee) ने बेहद महत्वपूर्ण सिफारिशें सौंपी हैं.समिति ने प्रस्ताव दिया है कि यदि देश के प्रधानमंत्री (PM), केंद्रीय मंत्रियों या राज्यों के मुख्यमंत्रियों (CM) को किसी गंभीर आपराधिक मामले में लगातार 30 दिनों तक हिरासत या जेल में रखा जाता है, तो उन्हें उनके पदों से स्थायी रूप से हटाने (Removal) के बजाय निलंबित (Suspension) किया जाना चाहिए. इसके साथ ही समिति ने नेताओं की सुरक्षा के लिए एक 'ऑटोमैटिक रिवर्सल क्लॉज' जोड़ने का भी सुझाव दिया है.क्या था मूल विधेयक और क्यों हुआ था विरोध?पिछले साल अगस्त में केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए इस मूल विधेयक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी सरकार जेल के अंदर से न चलाई जा सके.मूल प्रावधान: यदि कोई पीएम, सीएम या मंत्री गंभीर अपराध में 30 दिनों तक हिरासत में रहता है और खुद इस्तीफा नहीं देता, तो 31वें दिन उसे स्वतः (Automatically) पद से बर्खास्त कर दिया जाएगा.विपक्ष का रुख: कांग्रेस समेत देश के अधिकांश विपक्षी दलों ने इस कानून का पुरजोर विरोध किया था. उनका आरोप था कि केंद्र सरकार इस कानून का दुरुपयोग करके विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्य सरकारों को अस्थिर करने की साजिश रच सकती है. इसी विरोध के चलते अधिकांश विपक्षी दलों ने इस विधेयक की समीक्षा करने वाली संयुक्त समिति की बैठकों से भी दूरी बना ली थी.संसदीय समिति की 5 सबसे प्रमुख सिफारिशेंविपक्ष की आशंकाओं को दूर करने और कानून को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए संयुक्त समिति ने दो विशेष और तीन सामान्य संशोधनों की सिफारिश की है:'हटाने' की जगह 'निलंबन' शब्द: समिति ने अपनी रिपोर्ट में 'Removal' शब्द को बदलकर 'Suspension' करने का प्रस्ताव दिया है. यानी जब तक कानूनी कार्यवाही का अंतिम परिणाम (फैसला) नहीं आ जाता, तब तक मंत्रियों को स्थायी रूप से बर्खास्त करने के बजाय केवल निलंबित रखा जाए.5 साल या उससे अधिक की सजा वाले 'गंभीर अपराध': इस कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए समिति ने 'गंभीर अपराधों' को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है. इसके तहत केवल वही अपराध शामिल किए जाएंगे जिनमें 5 साल या उससे अधिक के कारावास की सजा का प्रावधान हो. इसके लिए कानून में एक अलग अनुसूची (Schedule) जोड़ने की बात कही गई है.ऑटोमैटिक रिवर्सल क्लॉज (स्वतः बहाली का नियम): यदि आरोपी मंत्री अदालत द्वारा पूरी तरह बरी (Acquitted) हो जाता है, या तय समय सीमा के भीतर जांच एजेंसी मुकदमा आगे बढ़ाने में नाकाम रहती है, तो उसका निलंबन स्वतः समाप्त हो जाएगा और वह अपने पद पर वापस लौट सकेगा. समिति का कहना है कि यह सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करेगा कि जो लोग निर्दोष हैं, उनका निलंबन स्थायी न होने पाए.विशेष अदालतों में त्वरित सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट के पुराने दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए समिति ने कहा कि उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों से जुड़े मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक या विशेष अदालतों (Special Courts) में प्राथमिकता के आधार पर होनी चाहिए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी जल्द हो सके.अब आगे क्या होगी प्रक्रिया?संसद की संयुक्त समिति की इस रिपोर्ट को इसी सप्ताह आधिकारिक रूप से स्वीकृत किए जाने की पूरी संभावना है. यदि इन सिफारिशों को मान लिया जाता है, तो आगामी प्रक्रिया इस प्रकार होगी:कैबिनेट की मंजूरी: केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) इन प्रस्तावित संशोधनों के ड्राफ्ट को केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजेगा.संसद में पेशी: कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद, इस संशोधित रूपरेखा वाले विधेयक को आधिकारिक तौर पर पारित कराने के लिए दोबारा लोकसभा और राज्यसभा में पेश किया जाएगा.
Bharti Airtel Annual Report 2026: भारतीय टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनी भारती एयरटेल (Bharti Airtel) अब केवल एक मोबाइल नेटवर्क प्रोवाइडर रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भविष्य की सबसे बड़ी डिजिटल पावरहाउस बनने की तैयारी में है. पिछले एक दशक में देश के भीतर मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Infrastructure) तैयार करने के लिए ₹3.3 लाख करोड़ से अधिक का भारी-भरकम निवेश करने के बाद, अब कंपनी ने अपनी दिशा बदल दी है.न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार देर रात जारी की गई भारती एयरटेल की सालाना रिपोर्ट (Annual Report) में कंपनी के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल (Sunil Bharti Mittal) ने भविष्य के रोडमैप का खुलासा किया है. मित्तल का कहना है कि कंपनी की ग्रोथ (तरक्की) के अगले चरण के सबसे बड़े तीन इंजन— फाइनेंशियल सर्विसेज (Airtel Money), डेटा सेंटर (Nxtra) और क्लाउड (Airtel Cloud) होंगे, जिनमें एयरटेल मनी में करीब ₹20,000 करोड़ तक के बड़े निवेश का ऐलान भी शामिल है.एयरटेल की महा-ग्रोथ के 3 सबसे बड़े पिलर्स (Growth Engines)1. फाइनेंशियल सर्विसेज: एयरटेल मनी (Airtel Money) को मिली NBFC की हरी झंडीसालाना रिपोर्ट में सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण जानकारी यह सामने आई है कि 'एयरटेल मनी' को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से नॉन-डिपॉजिट टेकिंग नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के तौर पर काम करने का लाइसेंस मिल गया है.क्या होगा फायदा: सुनील मित्तल के मुताबिक, देश के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में 'फाइनेंशियल इनक्लूजन' (वित्तीय समावेश) का दायरा बढ़ाने के लिए यह एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा. कंपनी इस वर्टिकल में जरूरत के हिसाब से आने वाले सालों में ₹20 हजार करोड़ तक की भारी पूंजी निवेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है.2. डेटा सेंटर बिजनेस: 'Nxtra' 1 गीगावाट कैपेसिटी बनाने की राह परडिजिटल डेटा के इस दौर में एयरटेल अपने डेटा सेंटर बिजनेस 'नेक्स्ट्रा' (Nxtra) को तेजी से बढ़ा रही है.बजट और क्षमता: हाल ही में इस बिजनेस के लिए 100 करोड़ डॉलर (करीब ₹9,500 करोड़) का फंड जुटाने के बाद कंपनी अगले कुछ वर्षों में 1 गीगावाट (1 GW) की विशाल कैपेसिटी बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है. भारत में तेजी से हो रहे डिजिटलाइजेशन, क्लाउड के बढ़ते चलन और सरकार के डेटा लोकलाइजेशन (Data Localization) के नियमों से नेक्स्ट्रा को जबरदस्त बिजनेस सपोर्ट मिल रहा है.3. एयरटेल क्लाउड (Airtel Cloud): शुरुआती दौर में ही 24 से ज्यादा मेगा-डील्स लॉककंपनी के तीसरे सबसे बड़े ग्रोथ इंजन यानी 'एयरटेल क्लाउड' को लेकर भी चेयरमैन बेहद उत्साहित दिखे.विश्व स्तरीय सर्विस, कम खर्च: सुनील मित्तल ने बताया कि शुरुआत दौर में ही इसे बाजार से शानदार रिस्पांस मिला है. यह भारतीय कंपनियों को देश के भीतर ही होस्ट और स्टोर की गई वर्ल्ड क्लास क्लाउड सर्विसेज बेहद किफायती दरों पर दे रही है. एयरटेल ने शुरुआती चरण में ही 24 से ज्यादा बड़ी कस्टमर डील्स को अपने नाम कर लिया है.सरकार की लॉन्ग-टर्म टैक्स छूट नीतियों से मिलेगा बड़ा सहाराचेयरमैन सुनील मित्तल ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सपोर्ट करने वाली भारत सरकार की दीर्घकालिक नीतियों (Long-Term Government Policies) की जमकर सराहना की.टैक्स में बड़ी राहत: सरकार द्वारा डेटा सेंटर्स और डिजिटल इंफ्रा को बढ़ावा देने के लिए दी गई लॉन्ग-टर्म टैक्स छूट से कॉरपोरेट जगत में लगातार कैपिटल इंवेस्टमेंट (पूंजीगत निवेश) को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे पूरा टेक-इकोसिस्टम मजबूत होगा.₹18 लाख करोड़ का भारी-भरकम निवेश: सरकार और उद्योग जगत के अनुमानों के मुताबिक, देश में बढ़ते डेटा लोकलाइजेशन के चलते अकेले इस साल डेटा सेंटर सेक्टर में कुल निवेश 20,000 करोड़ डॉलर (₹18 लाख करोड़ से अधिक) के ऐतिहासिक आंकड़े को पार करने की उम्मीद है, जिसमें एयरटेल एक अग्रणी भूमिका निभा रहा है.
Sohail Khan Seema Sajdeh Divorce Reality Show: ओटीटी (OTT) पर चल रहा रियलिटी शो 'द अलायंस' (The Alliance) इन दिनों दर्शकों के बीच जबरदस्त सुर्खियां बटोर रहा है. शो में हाल ही में हुई एक वाइल्ड कार्ड एंट्री ने दर्शकों के रोमांच को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. दरअसल, शो में बॉलीवुड अभिनेता-निर्देशक सोहेल खान (Sohail Khan) की एक्स-वाइफ सीमा सजदेह (Seema Sajdeh) की एंट्री हुई है, जिससे सालों बाद इस पूर्व कपल को एक साथ स्क्रीन साझा करते हुए देखने का मौका मिला है.सीमा की एंट्री के बाद शो के एक हालिया इमोशनल एपिसोड में मशहूर होस्ट निखिल चिनप्पा (Nikhil Chinapa) और सोहेल खान के बीच उनके तलाक और अलगाव के कारणों पर खुलकर चर्चा हुई, जहां सोहेल ने अपनी गलतियों को स्वीकार करते हुए भावुक बयान दिया.मेरे व्यवहार के कारण मैंने उस इंसान को खो दिया...एपिसोड के दौरान निखिल चिनप्पा ने सोहेल खान से एक बेहद व्यक्तिगत और सीधा सवाल पूछा— कहा जाता है कि औरत घर को बिगाड़ भी सकती है और बना भी सकती है. आपका घर टूटने में किसका हाथ था?इस संवेदनशील सवाल पर सोहेल खान ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी कमियों को स्वीकार किया. सोहेल ने बेहद भावुक होकर जवाब दिया, उस समय मेरा काम ठीक नहीं चल रहा था, जिसके कारण मैं मानसिक रूप से बिल्कुल ठीक नहीं था. मेरे उस दौर के खराब व्यवहार की वजह से, मैंने उस इंसान को हमेशा के लिए खो दिया जिससे मैं दुनिया में सबसे सच्चा प्यार करता था.प्यार से ज्यादा सीमा का सम्मान करता हूं: सोहेल खानसीमा सजदेह के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए सोहेल ने आगे कहा, वह मेरे दो प्यारे बच्चों की मां हैं, इसलिए प्यार से भी कहीं ज़्यादा, मैं सीमा का बहुत सम्मान करता हूं. यह रियलिटी शो मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगा. भले ही हम दोनों आज कानूनी रूप से अलग हो चुके हैं, लेकिन इस मंच ने हमें फिर से एक-दूसरे से खुलकर बात करने और दिल की बात साझा करने का एक खूबसूरत मौका दिया है. हमारे रिश्ते में जो एक बड़ी दूरी आ गई थी, इस शो ने उसे फिर से जोड़ने में हमारी मदद की है.तलाक के बाद भी मिलकर कर रहे हैं बच्चों की परवरिश (Co-Parenting)शो के दौरान इस पूर्व कपल ने अपनी पर्सनल लाइफ से जुड़े कई दिलचस्प खुलासे भी किए:बच्चों का सपोर्ट: सीमा सजदेह ने हंसते हुए बताया कि शो में जहां उनका छोटा बेटा योहान उन्हें (सीमा को) सपोर्ट कर रहा है, वहीं उनका बड़ा बेटा निर्वाण अपने पिता सोहेल खान के कॉम्पिटिशन जीतने के लिए चीयर कर रहा है.घर की चाबी आज भी सीमा के पास: को-कंटेस्टेंट ज़ैद दरबार (Zaid Darbar) के साथ बातचीत में सोहेल ने एक बेहद चौंकाने वाला और सकारात्मक खुलासा किया. सोहेल ने बताया कि उनके दोनों बेटे वर्तमान में उनके साथ ही रहते हैं, जबकि सीमा उनसे मिलने के लिए हफ्ते में तीन बार उनके घर आती हैं. सोहेल ने कहा कि उनके घर की मुख्य चाबी आज भी सीमा के पास ही रहती है, जो यह साबित करता है कि अलग होने के बावजूद दोनों के बीच कितना गहरा भरोसा है.24 साल की शादी के बाद 2022 में हुआ था आधिकारिक तलाकआपको बता दें कि सोहेल खान और सीमा सजदेह बॉलीवुड के सबसे चर्चित कपल्स में से एक रहे हैं. दोनों ने दो दशकों से भी ज्यादा समय तक एक-दूसरे का हाथ थामे रखा था. हालांकि, शादी के 24 खूबसूरत साल बिताने के बाद साल 2022 में दोनों ने आपसी सहमति से आधिकारिक तौर पर तलाक (Divorce) ले लिया था.सीमा ने पहले एक इंटरव्यू में बताया था कि अलग होने का फैसला दोनों का आपसी था, क्योंकि वे रोज-रोज के झगड़ों और तनाव में रहने के बजाय अपने जीवन में शांति और सुकून चाहते थे. वहीं सोहेल ने भी साफ किया था कि दोनों के बीच कोई कड़वाहट या दुश्मनी नहीं है, और सीमा हमेशा उनके परिवार का एक अभिन्न हिस्सा रहेंगी. तलाक के बाद भी दोनों ने समाज के सामने 'सक्सेसफुल को-पेरेंटिंग' की एक बेहतरीन मिसाल पेश की है, जहां बच्चों की खुशियां उनकी पहली प्राथमिकता हैं.
अगर आप भी एक टैक्सपेयर (Taxpayer) हैं और अभी तक आपने अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो यह खबर आपके लिए एक जरूरी रिमाइंडर है. असेसमेंट ईयर 2026-27 (वित्त वर्ष 2025-26 की आय) के लिए ITR फाइलिंग की रफ्तार बेहद तेज हो गई है. आयकर विभाग (Income Tax Department) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 1.7 करोड़ से ज्यादा टैक्सपेयर्स अपना रिटर्न सफलतापूर्वक दाखिल कर चुके हैं. रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ शुक्रवार को ही रिकॉर्ड 10 लाख से ज्यादा लोगों ने ITR फाइल किया.आयकर विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर लोगों से आखिरी समय की तकनीकी दिक्कतों और भारी ट्रैफिक से बचने के लिए जल्द से जल्द अपना रिटर्न भरने की अपील की है.31 जुलाई 2026 है आखिरी तारीख (ITR Deadline)वित्त वर्ष 2025-26 (FY 2025-26) के दौरान हुई कमाई के लिए ITR-1 (सहज) और ITR-2 फॉर्म दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है. यह डेडलाइन उन सभी व्यक्तिगत करदाताओं (Individuals) के लिए है जिनके खातों का ऑडिट (Tax Audit) होना अनिवार्य नहीं है.समझें आपके लिए कौन सा फॉर्म है सही: ITR-1 या ITR-2?ITR-1 (सहज) फॉर्म किसके लिए है?यह फॉर्म देश के सबसे ज्यादा करदाताओं के लिए होता है. आप ITR-1 तब चुन सकते हैं जब:आपकी कुल सालाना कमाई ₹50 लाख तक हो.आपकी आय का मुख्य जरिया सैलरी (सैलरीड एम्प्लॉई) या पेंशन हो.आपकी आय केवल एक हाउस प्रॉपर्टी (मकान) से आ रही हो.आपकी कुल कृषि आय (Agricultural Income) सालाना ₹5,000 तक सीमित हो.ITR-2 फॉर्म किसके लिए है?यह फॉर्म उन व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) के लिए है जो:किसी भी प्रकार के बिजनेस (व्यापार) या प्रोफेशन से कमाई नहीं करते हैं.जिन्हें शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी बेचने से कैपिटल गेन (Capital Gain) हुआ हो.जिनकी आय ₹50 लाख से अधिक हो या जिनके पास एक से ज्यादा मकान हों.31 जुलाई की डेडलाइन मिस करने पर भुगतने होंगे ये 4 बड़े नुकसानयदि आप 31 जुलाई 2026 तक अपना रिटर्न दाखिल करने में चूक जाते हैं, तो आयकर अधिनियम के तहत आपको भारी वित्तीय पेनल्टी का सामना करना पड़ेगा:₹5,000 तक की लेट फीस (Late Fee): आयकर कानून की धारा 234F के तहत डेडलाइन के बाद बिलेटेड रिटर्न (Belated ITR) भरने पर ₹5,000 की लेट फीस देनी होगी. हालांकि, राहत की बात यह है कि यदि आपकी कुल सालाना आय ₹5 लाख तक ही है, तो यह लेट फीस अधिकतम ₹1,000 तक सीमित रहेगी.टैक्स पर 1% का अतिरिक्त ब्याज: यदि आपके ऊपर कोई टैक्स बकाया (Tax Liability) निकलता है, तो धारा 234A के तहत तय तारीख के बाद से हर महीने या महीने के किसी हिस्से के लिए 1% की दर से ब्याज वसूला जाएगा.इनकम टैक्स रिफंड में भारी देरी: अगर आपका कोई टैक्स ज्यादा कट गया है (TDS) और आप रिफंड का इंतजार कर रहे हैं, तो देर से ITR फाइल करने पर प्रोसेसिंग रुक जाएगी. इसका मतलब है कि आपका रिफंड मिलने में महीनों की देरी हो सकती है.घाटे को कैरी फॉरवर्ड करने का मौका खत्म: देर से रिटर्न भरने का सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि आप चालू वित्त वर्ष में हुए किसी भी व्यावसायिक नुकसान या कैपिटल लॉस (जैसे शेयरों में घाटा) को अगले सालों के मुनाफे से एडजस्ट (Carry Forward) करने का कानूनी अधिकार खो देते हैं.
बिहार के सहरसा जिले से एक बेहद अजीबोगरीब और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक निकाह (शादी) समारोह देखते ही देखते जंग के मैदान में तब्दील हो गया. शादी के खुशनुमा माहौल में खाने के मेन्यू (Food Menu) को लेकर दूल्हा और दुल्हन पक्ष के लोग आपस में इस कदर भिड़े कि लात-घूंसे और लाठियां चल गईं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मटन (Mutton) की जगह चिकन (Chicken) परोसे जाने पर शुरू हुए इस खूनी संघर्ष में करीब 12 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं.मटन का वादा और थाली में आया चिकन!यह पूरी घटना सहरसा के एक गांव में आयोजित निकाह समारोह की है. चश्मदीदों के मुताबिक, शादी की सभी प्रारंभिक और धार्मिक रस्में बेहद शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो चुकी थीं. इसके बाद बारातियों के स्वागत के लिए भोजन की व्यवस्था की गई.विवाद तब शुरू हुआ जब खाना खा रहे कुछ बारातियों ने जोर-जोर से शिकायत करना शुरू कर दिया कि उन्हें शादी के मेन्यू में मटन (बकरे का मीट) खिलाने का वादा किया गया था, लेकिन थाली में चिकन (मुर्गे का मीट) परोस दिया गया. बारातियों ने इसे अपना अपमान समझा और दुल्हन पक्ष के कैटरिंग स्टाफ पर चिल्लाना शुरू कर दिया.बहस से शुरू हुआ विवाद और चल गईं लाठियांसमारोह में मौजूद लोगों ने बताया कि शुरुआत में दोनों पक्षों के बुजुर्गों ने मामले को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन युवाओं के बीच तीखी बहसबाजी बढ़ती चली गई.जश्न बना जंग का मैदान: कुछ ही मिनटों में दोनों पक्षों के दर्जनों लोग आमने-सामने आ गए. बात इतनी बिगड़ी कि दोनों ओर से अंधाधुंध लात और घूंसे चलने लगे.कुर्सियां और मेजें टूटीं: हालात बेकाबू होने पर पंडाल में रखी लोहे और प्लास्टिक की कुर्सियों तथा लाठियों से एक-दूसरे पर हमला कर दिया गया. इस भयंकर मारपीट के चलते शादी का पूरा माहौल खराब हो गया और जश्न का कार्यक्रम बीच में ही रोक देना पड़ा.अस्पताल में भर्ती कराए गए घायल, पुलिस में शिकायत की तैयारीइस हिंसक झड़प के बाद विवाह स्थल पर चारों तरफ अफरा-तफरी और भगदड़ मच गई. दूल्हे मोहम्मद अब्दुल्ला उर्फ चांद के चाचा मोहम्मद इरफान ने दुल्हन पक्ष पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने दावा किया कि खाने की बात पर शुरू हुई मामूली कहासुनी के बाद दुल्हन पक्ष के लोगों ने पूरी प्लानिंग के साथ बारातियों पर लाठियों से जानलेवा हमला कर दिया, जिसमें उनके परिवार के कई लोग लहूलुहान हो गए.घटना के तुरंत बाद सभी 12 घायलों को आनन-फानन में नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है. दूल्हा पक्ष के लोगों का कहना है कि वे इस पूरी बर्बरता के खिलाफ स्थानीय पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराएंगे और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे.सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तबाही का वीडियोइस अनोखी लड़ाई का एक वीडियो सोशल मीडिया (फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम) पर आग की तरह वायरल हो रहा है. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि शादी का भव्य पंडाल किसी अखाड़े जैसा नजर आ रहा है. लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे हैं, चारों तरफ टूटी हुई कुर्सियां और मेजें बिखरी पड़ी हैं और कुछ लोग हाथ में डंडे लेकर मारपीट करते दिख रहे हैं. इस एक घटना ने न सिर्फ शादी की खुशियों को मातम में बदल दिया, बल्कि दोनों परिवारों के बीच के रिश्तों में भी हमेशा के लिए कड़वाहट घोल दी है.
Twisha Sharma Case AIIMS Forensic Report: एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला और निर्णायक वैज्ञानिक मोड़ आ गया है. दिल्ली एम्स (AIIMS) के विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड ने अपनी अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है. इस रिपोर्ट ने शुरुआती जांच के कई दावों को पलट कर रख दिया है.फॉरेंसिक रिपोर्ट में इस बात की पुख्ता पुष्टि हुई है कि घटनास्थल से मिली जिस जिम्नास्टिक्स बेल्ट से फांसी लगाने की बात कही जा रही थी, उस पर पाए गए सूक्ष्म मानव स्किन टिश्यू (त्वचा के कण) ट्विशा की गर्दन पर बने चोट और लिगेचर मार्क (गला घोंटने के निशान) से हुबहू मेल खाते हैं. इस पुख्ता वैज्ञानिक सबूत के हाथ लगते ही सीबीआई ने मामले के मुख्य आरोपी पूर्व न्यायाधीश गिरीबाला सिंह और उनके वकील बेटे समर्थ सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की मांग तेज कर दी है.फोरेंसिक साइंस कैसे खोलती है बंद कमरों के राज?जब भी फांसी (Hanging) या गला घोंटने (Strangulation) के संदिग्ध मामले सामने आते हैं, तो फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स मुख्य रूप से चार वैज्ञानिक चरणों के आधार पर सच्चाई का पता लगाते हैं:1. गला घोंटने वाली वस्तु (Ligature Material) की पहचानमेडिकल बोर्ड सबसे पहले मृतका की गर्दन पर बने निशानों की चौड़ाई, गहराई और पैटर्न को माइक्रोस्कोपिक स्तर पर मापता है. इसके बाद इसका मिलान संदिग्ध वस्तु (जैसे इस मामले में जिम्नास्टिक्स बेल्ट) से किया जाता है. जांच में यह देखा जाता है कि क्या बेल्ट के फाइबर, उसकी सिलाई की बनावट या उसके मेटल बकल/रिंग के निशान त्वचा पर छपे हैं या नहीं.2. स्किन टिश्यू और एंटी-मॉर्टम चोटों की जांचगर्दन के प्रभावित हिस्से से त्वचा का एक छोटा सैंपल लेकर हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच की जाती है. यदि त्वचा के नीचे खून का थक्का (Extravasation of blood) या अंदरूनी सूजन मिलती है, तो यह साबित होता है कि चोट 'एंटी-मॉर्टम' (Antemortem) थी, यानी जब व्यक्ति जीवित था और उसका दिल धड़क रहा था, तभी वह घाव लगा था. साथ ही, बेल्ट पर मिले पसीने और स्किन सेल्स के जैविक नमूनों (Biological Samples) का डीएनए मिलान किया जाता है.3. फांसी और गला घोंटने के निशान में अंतर (Ligature Mark Difference)फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स निशानों की दिशा से हत्या और आत्महत्या के बीच का अंतर स्पष्ट करते हैं:फांसी (Suicidal Hanging): इसमें गर्दन पर बना निशान आमतौर पर तिरछा (V-Shape) होता है, जो कान या सिर के पीछे मौजूद गांठ की तरफ ऊपर की ओर जाता है. यह निशान गर्दन के ऊपरी हिस्से (थायराइड कार्टिलेज के ऊपर) होता है.गला घोंटना (Homicidal Strangulation): इसमें निशान बिल्कुल सीधा (Horizontal) और पूरी गर्दन के चारों ओर गोलाकार होता है, क्योंकि रस्सी को पीछे से खींचा जाता है. यह निशान अक्सर गर्दन के निचले हिस्से में पाया जाता है.4. गांठ (Knots) और हाथापाई के सबूतएक्सपर्ट्स फांसी के फंदे में लगी गांठ को बिना खोले उसकी बुनावट की जांच करते हैं. इससे यह पता चलता है कि क्या कोई व्यक्ति खुद वैसी गांठ बांध सकता था या इसे किसी दूसरे व्यक्ति ने बांधा है. यदि शरीर के वजन और गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के अनुपात से निशान मेल नहीं खाते, या गर्दन पर एक से अधिक अलग-अलग निशान मिलते हैं, तो यह साफ तौर पर हाथापाई और संघर्ष (Struggle) को दर्शाता है.सीबीआई के आरोप: प्रताड़ना, जबरन गर्भपात और सबूत मिटाने की साजिशएम्स की इस रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई ने कोर्ट में आरोपियों की जमानत का कड़ा विरोध किया है. जांच एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ कई संगीन दावे किए हैं:दहेज प्रताड़ना: ट्विशा शर्मा को शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा लगातार भारी दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था.जबरन गर्भपात: सीबीआई का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला दावा यह है कि ट्विशा की मौत से ठीक एक हफ्ते पहले उनका जबरन मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (गर्भपात) कराया गया था.सबूतों से छेड़छाड़: रसूखदार आरोपियों पर मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल डेटा और घटनास्थल के अहम इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को जानबूझकर नष्ट करने का आरोप है.क्यों बेहद अहम माना जा रहा है एम्स का यह नया सबूत?ट्विशा शर्मा की मौत के तुरंत बाद भोपाल में जो पहला पोस्टमार्टम हुआ था, उसकी जांच प्रक्रिया पर पीड़िता के परिवार और सीबीआई ने गंभीर सवाल उठाए थे. दरअसल, भोपाल के डॉक्टरों के सामने वह जिम्नास्टिक्स बेल्ट जांच के लिए पेश ही नहीं की गई थी, जिसके कारण वे बेल्ट और गर्दन के निशानों का मिलान नहीं कर सके थे.ससुराल पक्ष जहां शुरुआत से इसे डिप्रेशन में आकर की गई आत्महत्या बता रहा है, वहीं सीबीआई का कहना है कि ट्विशा के शरीर पर, खासकर कलाई और कोहनी पर ऐसे गहरे जख्म मिले हैं जो फांसी पर लटकने से ठीक पहले किसी संघर्ष के दौरान लगे थे. अब एम्स की इस फॉरेंसिक रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि शुरुआती जांच में ढिलाई बरती गई थी और यह वैज्ञानिक सबूत अदालत में अभियोजन पक्ष के मामले को बेहद मजबूत बनाएगा.
IND vs ENG: 4-0 की शिकस्त के बाद टीम इंडिया का मिशन वनडे; रोहित-विराट की वापसी से बढ़ेगी ताकत
इंग्लैंड के खिलाफ हाल ही में खत्म हुई टी20 सीरीज में भारतीय टीम को 4-0 से करारी शिकस्त (क्लीन स्वीप) का सामना करना पड़ा है. लेकिन अब भारतीय टीम उस हार को भुलाकर नए जोश के साथ 3 मैचों की वनडे (ODI) सीरीज में उतरने के लिए तैयार है.इस वनडे सीरीज में भारतीय फैंस के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि टीम में दिग्गज बल्लेबाज रोहित शर्मा, विराट कोहली और रफ्तार के जादूगर जसप्रीत बुमराह की वापसी हो रही है. इस सीरीज में भारतीय वनडे टीम की कमान युवा स्टार शुभमन गिल के हाथों में होगी, जबकि श्रेयस अय्यर उप-कप्तान की भूमिका निभाएंगे.यहाँ देखें मुकाबले का पूरा शेड्यूल, टीमें और ब्रॉडकास्ट की पूरी जानकारी:भारत बनाम इंग्लैंड वनडे सीरीज शेड्यूल (2026)मैचतारीखस्थानसमय (IST)पहला ODI14 जुलाई, 2026एजबेस्टन, बर्मिंघमदोपहर 03:30 बजेदूसरा ODI16 जुलाई, 2026सोफिया गार्डन्स, कार्डिफशाम 05:30 बजेतीसरा ODI19 जुलाई, 2026लॉर्ड्स, लंदनदोपहर 03:30 बजेलाइव टेलीकास्ट और स्ट्रीमिंग कहां देखें?TV टेलीकास्ट: भारत और इंग्लैंड के बीच इस हाई-वोल्टेज वनडे सीरीज का सीधा प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क (Sony Sports Network) के चैनलों (Sony Sports Ten 1, Ten 3 Hindi, Ten 4) पर अलग-अलग भाषाओं में देखा जा सकेगा.लाइव स्ट्रीमिंग (Online): मोबाइल या लैपटॉप पर मैच देखने वाले दर्शक Sony LIV ऐप और वेबसाइट पर लाइव स्ट्रीमिंग का आनंद ले सकते हैं.दोनों देशों का आधिकारिक स्क्वाड?? भारतीय वनडे टीमशुभमन गिल (कप्तान)स्क्वाड: रोहित शर्मा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), वाशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल, शिवम दुबे, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, प्रसिद्ध कृष्णा, अर्शदीप सिंह, गुरनूर बराड़, प्रिंस यादव, हर्षित राणा.इंग्लैंड वनडे टीमहैरी ब्रूक (कप्तान)स्क्वाड: जोस बटलर, जो रूट, बेन डकेट, विल जैक्स, लियाम डॉसन, सैम करन, रेहान अहमद, जोफ्रा आर्चर, गस एटकिंसन, टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जेम्स कोल्स, साकिब महमूद, आदिल राशिद, जोश टंग.
India Weather Update 13 July 2026: देश के कई हिस्सों में मानसून (Monsoon) अपनी पूरी ताकत के साथ बरस रहा है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 13 जुलाई 2026 के लिए देश का ताजा और विस्तृत वेदर बुलेटिन जारी कर दिया है. मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की अक्षीय रेखा (Monsoon Trough) इस समय श्री गंगानगर, हिसार, मेरठ, शाहजहाँपुर, गोरखपुर और मुजफ्फरपुर से होते हुए पूर्व-दक्षिण-पूर्व की ओर दक्षिण असम तक सक्रिय है.इसके साथ ही, उत्तर-पूर्वी बिहार, दक्षिण बांग्लादेश और उत्तर-पूर्वी असम के वायुमंडल में अलग-अलग मजबूत चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulations) बने हुए हैं. इन शक्तिशाली वेदर सिस्टम के चलते बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित देश के कुल 11 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश (Heavy Rainfall Alert) की चेतावनी जारी की गई है. आइए जानते हैं आपके राज्य में 13 जुलाई को कैसा रहेगा मौसम का मिजाज.इन 3 राज्यों में मूसलाधार और 'बहुत भारी' बारिश का रेड/ऑरेंज अलर्टमौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, 13 जुलाई को तीन प्रमुख राज्यों के अलग-अलग हिस्सों में बादलों की भीषण गर्जना के साथ मूसलाधार और अत्यधिक भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है. इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जलभराव (Waterlogging), बाढ़ जैसी स्थिति और आकाशीय बिजली से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है:बिहारगंगा तटीय पश्चिम बंगालअसम और मेघालयपूर्वी यूपी और उत्तराखंड समेत इन 8 राज्यों में 'भारी बारिश' की चेतावनीमानसूनी हवाओं और पहाड़ों पर सक्रिय वेदर सिस्टम के कारण मौसम विभाग ने देश के 8 अन्य राज्यों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. इन इलाकों में तेज हवाओं के साथ मध्यम से भारी वर्षा हो सकती है:पूर्वी उत्तर प्रदेशउत्तराखंडउप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किमओडिशाअरुणाचल प्रदेशनागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा (सभी पूर्वोत्तर राज्य)आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएंबारिश के साथ-साथ मौसम विभाग ने कई राज्यों में वज्रपात (आकाशीय बिजली गिरने) और तेज रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का गंभीर पूर्वानुमान जारी किया है:अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा जम्मू-कश्मीर-लद्दाख: इन क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने और बिजली कड़कने की आशंका है.बिहार, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना: इन राज्यों के अलग-अलग हिस्सों में 30 से 40 किमी/घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलेंगी और गरज-चमक के साथ बिजली गिर सकती है.छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्य: यहां अलग-अलग स्थानों पर तेज गरज के साथ आकाशीय बिजली (Lightning Alert) गिरने की विशेष चेतावनी दी गई है. वहीं, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुछ मैदानी इलाकों में धरातल पर बहुत तेज गति से धूलभरी हवाएं चल सकती हैं.एक तरफ बारिश, दूसरी तरफ तटीय आंध्र प्रदेश में लू (Heatwave) का कहरजहां एक तरफ उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत में मानसून झमाझम बरस रहा है, वहीं दक्षिण और तटीय भारत के कुछ इलाकों में मौसम इसके बिल्कुल विपरीत रहने वाला है:तटीय आंध्र प्रदेश: यहां के अलग-अलग हिस्सों में गंभीर लू (Heatwave Conditions) की स्थिति बनी रहेगी.ओडिशा और तमिलनाडु (पुडुचेरी व कराइकल): इन क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में तापमान बढ़ने के साथ-साथ मौसम बेहद गर्म और उमस (Humid Weather) भरा रहने वाला है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो सकता है.मछुआरों के लिए समंदर में हाई अलर्ट: 65 किमी/घंटे की रफ्तार से उठेंगी लहरेंसमंदर में उठने वाले संभावित तूफान और बेहद तेज हवाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को तटीय इलाकों और गहरे समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी है:अरब सागर: पश्चिम-मध्य, पूर्वी-मध्य, उत्तरी और दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के अधिकांश हिस्सों, सोमालिया और ओमान के तटों के साथ-साथ उत्तरी गुजरात के तटों पर 45-55 किमी/घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं 65 किमी/घंटे की चरम रफ्तार तक पहुंच सकती हैं.बंगाल की खाड़ी: उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों से सटे समुद्र और अंडमान सागर में 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जिनकी गति बढ़कर 60 किमी/घंटे तक पहुंचने का अनुमान है.
भ्रष्ट अफसरों पर गिरेगी गाज, 13 किलो सोना उगलने वाले ARTO के बाद विजिलेंस की राडार पर कई बड़े नाम
उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने एक बेहद आक्रामक और व्यापक अभियान की शुरुआत की है। राज्य सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस डिपार्टमेंट) ने शासन के सर्वोच्च स्तर से हरी झंडी मिलने के बाद विभिन्न सरकारी विभागों में तैनात उन संदिग्ध अधिकारियों की सूची तैयार कर ली है, जिन्होंने अपनी वैध आय से कई गुना अधिक अवैध चल-अचल संपत्ति अर्जित की है। विजिलेंस के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, आने वाले कुछ ही दिनों में प्रदेश के कई बड़े प्रशासनिक चेहरों पर कानून का सबसे सख्त शिकंजा कसने जा रहा है।35 करोड़ का काला खजाना: सेवानिवृत्त ARTO के घर छापेमारी से हिला लखनऊ-नोएडाउत्तर प्रदेश सरकार की इस अभूतपूर्व मुस्तैदी के पीछे परिवहन विभाग के पूर्व असिस्टेंट क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (ARTO) ललित कुमार के लखनऊ स्थित आवास पर हुई हालिया मैराथन छापेमारी है। मंगलवार और बुधवार को लगातार चली इस कार्रवाई में विजिलेंस की टीमों ने आरोपी के घर के कोने-कोने से नगदी के पैकेट, 13 किलोग्राम शुद्ध सोने की ईंटें, 9 किलोग्राम चांदी और ₹1.62 करोड़ कैश बरामद किया था। अब तक की प्राथमिक वित्तीय पड़ताल में कुल ₹35 करोड़ से अधिक की काली कमाई का खुलासा हुआ है, जिसमें नोएडा और राजधानी लखनऊ के कई पॉश इलाकों में स्थित बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज भी शामिल हैं। इस जब्ती ने जांच एजेंसियों के आला अधिकारियों को भी पूरी तरह हैरान कर दिया है।महोना और मोहनलालगंज में मिलीं 3 नई जमीनें: आयकर विभाग भी संभालेगा कमानविजिलेंस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दस्तावेजों की गहन फोरेंसिक स्क्रूटनी के दौरान ललित कुमार की काली कमाई के साम्राज्य का दायरा और बढ़ता जा रहा है। ताजा तकनीकी इनपुट के आधार पर जांच दल ने लखनऊ के ग्रामीण क्षेत्रों—महोना और मोहनलालगंज—में आरोपी अधिकारी के नाम दर्ज तीन विशाल कृषि भूमि खंडों (प्लॉट्स) का पता लगाया है, जिनकी बाजार मूल्य के अनुसार वित्तीय पैमाइश की जा रही है। इस बीच, केंद्र सरकार का आयकर विभाग (Income Tax Department) भी सोमवार से इस मामले में औपचारिक एंट्री करने जा रहा है, जिससे बेनामी संपत्ति और टैक्स चोरी का दोहरा आपराधिक मुकदमा दर्ज होना तय माना जा रहा है।विदेश भागने की फिराक में आरोपी? विजिलेंस ने शुरू की पासपोर्ट जब्तीकरण की प्रक्रियासख्त कानूनी कार्रवाई को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने और आरोपी अधिकारी के देश छोड़कर फरार होने की किसी भी संभावित कोशिश को नाकाम करने के लिए विजिलेंस ने बेहद कड़े कानूनी कदम उठाए हैं। जांच एजेंसी ने सक्षम न्यायालय और क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के माध्यम से ललित कुमार के भारतीय पासपोर्ट को तत्काल प्रभाव से रद्द और जब्त (Confiscate) करने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही, विजिलेंस ने एक औपचारिक नोटिस तैयार किया है, जिसके तहत आरोपी को अपनी आय के वैध स्रोतों का मिलान करने के लिए तलब किया जाएगा; संतोषजनक साक्ष्य प्रस्तुत न करने की स्थिति में आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।
जैसे ही देश के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश और मानसून की दस्तक होती है, लोग प्राकृतिक रूप से पानी का कामना कम कर देते हैं। ठंडे मौसम और कम प्यास के कारण आम जनता में यह भ्रामक धारणा घर कर जाती है कि डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) केवल चिलचिलाती गर्मियों की समस्या है। हालांकि, रीजेंसी हेल्थ, लखनऊ के नेफ्रोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर, डॉ. आलोक कुमार पांडे ने एक बेहद गंभीर स्वास्थ्य चेतावनी जारी की है। डॉ. पांडे के अनुसार, मानसून के महीनों में अत्यधिक नमी और मौसमी बीमारियों के चलते होने वाला 'हिडन डिहाइड्रेशन' चुपके से इंसानी किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है।उच्च आर्द्रता का मायाजाल: जानिए क्यों बारिश के मौसम में चुपके से घट जाता है वाटर लेवलभले ही मानसून के दौरान तापमान में गिरावट दर्ज की जाती है, लेकिन वायुमंडल में उमस (ह्यूमिडिटी) का स्तर बहुत बढ़ जाता है। इस उमस भरे माहौल में हमारे शरीर से पसीने के रूप में तरल पदार्थ लगातार बाहर निकलते रहते हैं। चूंकि वातावरण में नमी अधिक होती है, इसलिए यह पसीना त्वचा से बहुत धीरे-धीरे वाष्पित होता है, जिसके कारण इंसानों को यह अहसास ही नहीं हो पाता कि वे कितनी मात्रा में पानी खो रहे हैं। इसके साथ ही, बरसात के मौसम में सक्रिय होने वाले गैस्ट्रोएंटेराइटिस, डायरिया, उल्टी और विभिन्न वायरल संक्रमण शरीर से इलेक्ट्रोलाइट्स के स्तर को तेजी से घटा देते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।किडनी पर सीधा प्रहार: ब्लड सर्कुलेशन घटने से मंडरा रहा है प्री-रीनल एक्यूट किडनी इंजरी का खतरामानव शरीर में मौजूद दोनों किडनियां रक्त को साफ करने, अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने के लिए पूरी तरह से निरंतर रक्त आपूर्ति (ब्लड सप्लाई) पर निर्भर करती हैं। डॉ. आलोक कुमार पांडे ने इसके जैविक प्रभाव को समझाते हुए कहा, जब डिहाइड्रेशन के कारण शरीर में रक्त की कुल मात्रा (ब्लड वॉल्यूम) कम हो जाती है, तो हमारा मस्तिष्क और हृदय जैसे महत्वपूर्ण अंगों को बचाने के लिए रक्त प्रवाह को वहां डायवर्ट कर देता है। इसके परिणामस्वरूप, किडनी में होने वाला ब्लड सर्कुलेशन अचानक गिर जाता है, जो सीधे तौर पर प्री-रीनल एक्यूट किडनी इंजरी (Pre-Renal Acute Kidney Injury) का कारण बन सकता है। इसके अतिरिक्त, पानी की कमी से यूरिन अत्यधिक गाढ़ा हो जाता है, जिससे किडनी स्टोन और यूटीआई (UTI) का खतरा चरम पर पहुंच जाता है।सबसे ज्यादा खतरा किसे है? इन 8 श्रेणियों के लोगों को बरतनी होगी विशेष सावधानीचिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून का यह मूक डिहाइड्रेशन किसी को भी अपना शिकार बना सकता है, लेकिन कुछ विशेष संवेदनशील समूहों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है:बढ़ती उम्र के बुजुर्ग वयस्कमधुमेह (डायबिटीज) और क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) के मरीजछोटे बच्चे और लगातार यात्रा करने वाले लोगधूप या खुले में काम करने वाले आउटडोर वर्कर्स और एथलीट्सबुखार, दस्त या उल्टी जैसी मौसमी बीमारियों से पीड़ित व्यक्तिऑफिस जाने वाले पेशेवर जो पानी के बजाय अत्यधिक चाय, कॉफी या मीठे सॉफ्ट ड्रिंक्स का सेवन करते हैंमानसून में किडनी को सुरक्षित रखने के अचूक उपाय: इलेक्ट्रोलाइट्स की ऐसे करें तुरंत भरपाईइस गंभीर स्वास्थ्य संकट से बचने के लिए डॉ. पांडे ने केवल सादे पानी पर निर्भर रहने के बजाय इलेक्ट्रोलाइट-समृद्ध तरल पदार्थों के सेवन की सलाह दी है। अगर आपको प्यास का अनुभव न भी हो, तो भी नियमित अंतराल पर छाछ, नींबू पानी (एक चुटकी नमक के साथ), optical और ताजा नारियल पानी का सेवन करते रहें। इसके साथ ही, अपने यूरिन (मूत्र) के रंग पर लगातार नजर रखें; यदि यूरिन का रंग हल्का पीला या पारदर्शी है, तो यह सही हाइड्रेशन का सूचक है, जबकि गहरा पीला रंग इस बात की चेतावनी है कि आपकी किडनी को तुरंत पानी की आवश्यकता है। बारिश के इस खुशनुमा मौसम में अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें और पर्याप्त हाइड्रेशन से अपनी किडनी को सुरक्षित रखें।
खरीफ सीजन की बुवाई का समय शुरू हो चुका है, लेकिन मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में अभी भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है. ऐसे में खेतों में नमी कम होने के बावजूद जल्दबाजी में सोयाबीन और धान की बुवाई करना किसानों के लिए भारी नुकसानदायक साबित हो सकता है. इसी को देखते हुए कृषक कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, मध्य प्रदेश ने कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के आधार पर किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है.कृषि विभाग के संचालक उमाशंकर भार्गव ने मैदानी अमले को निर्देश दिए हैं कि वे किसानों के लगातार संपर्क में रहें और उन्हें मौसम की स्थिति के अनुसार ही कृषि कार्य करने के लिए जागरूक करें. विभाग का कहना है कि जिन जिलों में अभी तक सामान्य से कम बारिश हुई है, वहां पर्याप्त नमी आने तक बुवाई टालना ही सबसे बेहतर फैसला रहेगा.खेत में कब करें खरीफ फसलों की बुवाई?कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, बुवाई का निर्णय केवल कैलेंडर की तारीखें देखकर नहीं, बल्कि खेत की वास्तविक नमी को परखकर लेना चाहिए.'बतर' की स्थिति का करें इंतजार: विशेषज्ञों का कहना है कि जब मिट्टी में लगभग 4 इंच (करीब एक बालिश्त) की गहराई तक पर्याप्त नमी पहुंच जाए और खेत में 'बतर' की स्थिति बन जाए, तभी बुवाई करना सुरक्षित माना जाता है.कम नमी से नुकसान: यदि कम नमी में बीज बो दिए जाएं, तो अंकुरण प्रभावित हो सकता है. कई बार बीज मिट्टी के अंदर ही सड़ जाते हैं, जिससे किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ती है और लागत दोगुनी हो जाती है.सिंचाई की सुविधा वाले किसान अभी से करें ये तैयारीजिन किसानों के पास सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं, वे इस समय का उपयोग अपने खेत की उपजाऊ क्षमता (उर्वरता) बढ़ाने में कर सकते हैं.हरित खाद का उपयोग: कृषि विभाग ने सलाह दी है कि खेतों में ढैंचा या सनई जैसी हरित खाद वाली फसलों की बुवाई करें, ताकि मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ सके.उचित पोषण: इसके अलावा खेत तैयार करते समय गोबर की सड़ी खाद, वर्मी कम्पोस्ट, सिंगल सुपर फॉस्फेट, म्यूरेट ऑफ पोटाश, जिंक सल्फेट और जिप्सम का उपयोग मिट्टी परीक्षण (Soil Test) और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार करना बेहद लाभदायक रहेगा.सोयाबीन और धान की खेती के लिए 4 वैज्ञानिक सलाहअंकुरण परीक्षण है जरूरी: सोयाबीन की बुवाई से पहले बीजों का अंकुरण परीक्षण जरूर करें. केवल 70 प्रतिशत या उससे अधिक अंकुरण क्षमता वाले बीजों का ही बुवाई के लिए उपयोग करें.बीजोपचार (Seed Treatment): बुवाई से ठीक पहले बीजों को फफूंदनाशक (Fungicide) और जैव उर्वरकों से उपचारित करना जरूरी है, ताकि शुरुआती अवस्था में फसल को कीटों और रोगों से सुरक्षित रखा जा सके. इसके साथ ही कम पानी की आवश्यकता वाली तथा रोग प्रतिरोधी किस्मों का ही चयन करें.धान के लिए आधुनिक तकनीक: धान की खेती करने वाले किसानों को पारंपरिक रोपाई (Manual Transplanting) के बजाय श्री पद्धति (SRI) या डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR - सीधी बुवाई) तकनीक अपनाने की सलाह दी गई है. इन तकनीकों से पानी की भारी बचत होती है और उत्पादन लागत भी कम आती है.आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग: विभाग ने किसानों को रिज एंड फरो सीड ड्रिल, ब्रॉड बेड एंड फरो (BBF) सीड ड्रिल तथा हस्तचालित सीड डिब्लर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग की सलाह दी है. इन तकनीकों से खेत में जल निकास बेहतर रहता है और सूखा या अत्यधिक जलभराव जैसी विपरीत परिस्थितियों में भी फसल सुरक्षित रहती है.जोखिम कम करने के लिए अपनाएं इंटरक्रॉपिंग और फसल बीमामौसम की अनिश्चितता को देखते हुए कृषि विभाग ने अंतरवर्ती खेती (इंटरक्रॉपिंग) अपनाने पर जोर दिया है. एक ही खेत में दो या दो से अधिक फसलों (जैसे सोयाबीन के साथ अरहर) अथवा एक ही फसल की अलग-अलग किस्मों की बुवाई करने से मौसम संबंधी जोखिम कम होता है. यदि किसी कारणवश एक फसल प्रभावित होती है, तो दूसरी फसल से किसानों को सहारा मिल जाता है. इसके साथ ही, प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा समय पर जरूर कराएं.किसान क्या करें और क्या न करें (Quick Guide)क्या करेंक्या न करेंपर्याप्त नमी (4 इंच गहराई) होने के बाद ही बुवाई करें.पहली हल्की फुहार या पहली बारिश के तुरंत बाद बुवाई न करें.बुवाई से पहले बीजों का उचित बीजोपचार जरूर करें.बिना अंकुरण क्षमता जांचे (कम से कम 70%) बीज न बोएं.कम अवधि में पकने वाली और कीट-प्रतिरोधी किस्में चुनें.पूरी तरह सूखी या कम नमी वाली मिट्टी में बीज डालने से बचें.मौसम विभाग के पूर्वानुमान और अलर्ट पर लगातार नजर रखें.जल्दबाजी में एक साथ पूरे खेत की बुवाई करने की गलती न करें.अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)प्रश्न 1: सोयाबीन और धान की बुवाई का सबसे सही समय क्या है?उत्तर: कृषि विभाग के अनुसार, जब खेत की मिट्टी में लगभग 4 इंच तक पर्याप्त नमी पहुंच जाए और खेत में 'बतर' (बुवाई योग्य स्थिति) बन जाए, तभी बुवाई करनी चाहिए.प्रश्न 2: क्या कम बारिश में या सूखी मिट्टी में बुवाई की जा सकती है?उत्तर: बिल्कुल नहीं. अपर्याप्त नमी में बुवाई करने से बीजों का अंकुरण ठीक से नहीं होता, जिससे पौधों की संख्या कम रह जाती है और किसानों को दोबारा बुवाई का भारी खर्च उठाना पड़ सकता है.प्रश्न 3: धान की सीधी बुवाई (DSR) तकनीक के क्या फायदे हैं?उत्तर: डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक से धान की खेती करने पर नर्सरी तैयार करने और रोपाई का खर्च बचता है. इससे पानी की भारी बचत होती है और कम लागत में अच्छा उत्पादन मिलता है.
जुलाई 2026 का पहला 'रवि प्रदोष व्रत' आज, जानें शिव पूजन का सबसे सटीक मुहूर्त और धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माने जाने वाले पावन प्रदोष व्रत का हिंदू श्रद्धालुओं के बीच एक विशिष्ट स्थान है। प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को रखा जाने वाला यह उपवास महादेव और माता पार्वती की असीम अनुकंपा प्राप्त करने का सबसे बड़ा जरिया माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत का नामकरण सप्ताह के उस दिन के आधार पर होता है जिस दिन त्रयोदशी तिथि पड़ती है। इसी कड़ी में, जुलाई 2026 का पहला प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़ने के कारण 'रवि प्रदोष व्रत' के एक दुर्लभ और कल्याणकारी महासंयोग के रूप में मनाया जा रहा है।रवि प्रदोष व्रत 2026 की तिथि और पंचांग गणना: जानिए कब से कब तक है त्रयोदशीवैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 12 जुलाई 2026 को तड़के सुबह 02:04 बजे हो चुका है। यह पावन तिथि उसी दिन यानी 12 जुलाई की रात को 10:29 बजे समाप्त हो जाएगी। शास्त्रों में प्रदोष व्रत की पूजा के लिए सूर्यास्त के बाद के समय यानी 'प्रदोष काल' को प्रधानता दी जाती है। इस आधार पर, जुलाई का यह प्रथम प्रदोष व्रत 12 जुलाई 2026, रविवार को ही पूरे विधि-विधान के साथ रखा जा रहा है, जो भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और आत्मिक शांति का संचार करेगा।शिव पूजन का सबसे भाग्यशाली समय: नोट करें शाम का प्रदोष पूजा मुहूर्तरवि प्रदोष व्रत के दिन भगवान भोलेनाथ की सात्विक और फलदायी पूजा करने का सबसे शुभ समय (प्रदोष काल) शाम को 07:20 बजे से लेकर रात को 09:30 बजे तक रहेगा। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस विशिष्ट समयावधि में की गई शिव आराधना का फल हजार गुना अधिक मिलता है। इसके अतिरिक्त, दिन के अन्य महत्वपूर्ण और शुभ मोर्चों की बात करें तो सुबह का ब्रह्म मुहूर्त 04:42 बजे से 05:25 बजे तक था, जबकि दोपहर का सबसे पवित्र माना जाने वाला अभिजीत मुहूर्त 12:18 बजे से 01:10 बजे तक सक्रिय रहेगा।पितृ दोष से मुक्ति और आरोग्य का वरदान: क्या है इस विशेष व्रत का आध्यात्मिक महत्वरविवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत केवल देवाधिदेव महादेव ही नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य नारायण को भी समर्पित होता है। ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टिकोण से, जो जातक पूरी निष्ठा और पवित्रता के साथ रवि प्रदोष का व्रत रखते हैं, उन्हें कुंडली में मौजूद गंभीर 'पितृ दोष' से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही, यह उपवास उत्तम आरोग्य (अच्छी सेहत), लंबी उम्र और समाज में यश, कीर्ति व उच्च मान-सम्मान की प्राप्ति के लिए अचूक माना जाता है। भगवान शिव की कृपा से भक्तों को आंतरिक मानसिक शक्ति और पारिवारिक खुशहाली का वरदान मिलता है।जुलाई 2026 का दूसरा प्रदोष व्रत कब है? एडवांस में नोट कर लें तारीखयदि आप इस महीने के व्रतों की योजना बना रहे हैं, तो बता दें कि जुलाई 2026 का दूसरा प्रदोष व्रत भी बेहद दिलचस्प संयोग लेकर आ रहा है। यह व्रत भी रविवार, 26 जुलाई 2026 को ही मनाया जाएगा, जिससे इस महीने भक्तों को दो बार रवि प्रदोष व्रत का पुण्य लाभ उठाने का मौका मिलेगा। 26 जुलाई को त्रयोदशी तिथि दोपहर 01:57 बजे से शुरू होकर अगले दिन 27 जुलाई की शाम 04:14 बजे समाप्त होगी, और उस दिन शाम की प्रदोष पूजा का विशेष मुहूर्त 07:17 बजे से रात 09:28 बजे तक रहेगा।
8th Pay Commission Deadline Extended: केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आई है. आयोग ने कर्मचारी संबंधी आवश्यक डेटा को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने की अंतिम समयसीमा (DeadLine) को एक महीने और आगे बढ़ा दिया है. अब केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के पास जरूरी जानकारी जमा करने के लिए 31 जुलाई 2026 तक का समय होगा.यह फैसला उन विभागों को बड़ी राहत देने के लिए लिया गया है जो पहले से निर्धारित समय सीमा यानी 30 जून 2026 तक अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स का पूरा डेटा अपलोड करने में असमर्थ रहे थे. आयोग का मानना है कि वेतन और भत्तों के नए ढांचे को तैयार करने के लिए सटीक और संपूर्ण डेटाबेस का होना सबसे अनिवार्य कदम है.क्यों बढ़ाई गई डेटा जमा करने की डेडलाइन?8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) के आधिकारिक बयान के मुताबिक, कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों और रणनीतिक विभागों ने तकनीकी कारणों और कार्यबल की विशाल संख्या के चलते 30 जून की तय तारीख तक डेटा सबमिशन पूरा नहीं किया था. इसके बाद आयोग ने प्रशासनिक प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए इसे 31 जुलाई 2026 तक विस्तारित कर दिया. आयोग ने सभी नामित नोडल अधिकारियों (Nodal Officers) को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे इस अंतिम अवसर का लाभ उठाकर लंबित डेटा को बिना किसी त्रुटि के समय पर सबमिट करें.ऑफलाइन माध्यम पूरी तरह बैन, केवल ऑनलाइन पोर्टल से होगा सबमिशनआयोग ने डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं:कर्मचारी संबंधी सभी प्रकार की जानकारियां केवल 8वें CPC ऑनलाइन डेटा कलेक्शन पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार की जाएंगी.मंत्रालयों और विभागों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि वे किसी भी प्रकार के फिजिकल (कागजी) दस्तावेज, ईमेल, पीडीएफ फाइल, एक्सेल शीट या किसी अन्य ऑफलाइन या व्यक्तिगत माध्यम से डेटा भेजने की कोशिश न करें. ऐसे किसी भी शॉर्टकट तरीके से भेजी गई जानकारी को सीधे खारिज कर दिया जाएगा.8वां वेतन आयोग किन-किन कर्मचारियों का जुटा रहा है डेटा?आयोग केवल नियमित स्टाफ की ही नहीं, बल्कि एक बहुत बड़े कार्यबल का विस्तृत डेटाबेस तैयार कर रहा है ताकि आगामी वेतन संशोधन का सटीक वित्तीय भार आंका जा सके. इसमें निम्नलिखित श्रेणियां शामिल हैं:नियमित और स्थाई कर्मचारी: केंद्र सरकार के तहत काम करने वाले सभी विभागों के स्थाई कर्मचारी.पेंशनर्स और पारिवारिक पेंशनभोगी: सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारी और उनके आश्रित.संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी: वित्त वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के दौरान तैनात किए गए कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स कर्मचारी.सपोर्ट स्टाफ व कुशल/अकुशल श्रमिक: मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS), हाउसकीपिंग स्टाफ, डेटा एंट्री ऑपरेटर (DEO), सरकारी ड्राइवर, सुरक्षा गार्ड, माली के साथ-साथ सभी कुशल, अर्ध-कुशल और अकुशल कर्मचारी.महत्वपूर्ण बिंदु: विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे केवल कर्मचारियों की कुल संख्या (Headcount) न बताएं, बल्कि 'मैन-मंथ' (Man-Month) के सूक्ष्म फार्मूले के आधार पर उनके काम के घंटों और दिनों की सटीक जानकारी दर्ज करें.वेतन बढ़ोतरी की सिफारिशों को लेकर क्या है ताजा स्थिति?डेटा सबमिशन की तारीख बढ़ने के बाद सोशल मीडिया और कर्मचारी संगठनों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या वेतन बढ़ोतरी की सिफारिशें तैयार हो चुकी हैं?आयोग ने साफ किया है कि डेडलाइन बढ़ने का यह मतलब कतई नहीं है कि वेतन वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor), महंगाई भत्ता (DA) या पेंशन के फॉर्मूले पर कोई अंतिम मुहर लग चुकी है.गठन और समयसीमा: 8वें वेतन आयोग का आधिकारिक गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था. नियमानुसार, आयोग को अपने गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर केंद्र सरकार को अपनी अंतिम सिफारिशों की रिपोर्ट सौंपनी है.वर्तमान स्थिति: फिलहाल आयोग अभी प्राथमिक चरण में है, जहां वह विभिन्न कर्मचारी यूनियनों, पेंशनर्स एसोसिएशंस और मुख्य हितधारकों के साथ लगातार परामर्श बैठकें कर रहा है. डेटा कलेक्शन और इन बैठकों का दौर पूरा होने के बाद ही वेतन और भत्तों में संशोधन की मूल रिपोर्ट का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा.आयोग की सिफारिशों से देश के 1.19 करोड़ लोगों को मिलेगा सीधा फायदा8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट जब भी लागू होगी, उसका सीधा और बड़ा असर देश के वित्तीय ढांचे के साथ-साथ लगभग 1.19 करोड़ लोगों की जेब पर पड़ेगा. इसमें केंद्र सरकार के करीब 50 लाख से अधिक सक्रिय कर्मचारी और लगभग 69 लाख से ज्यादा पेंशनभोगी शामिल हैं. आयोग द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद केंद्रीय कैबिनेट इसकी समीक्षा करेगी और उसके बाद ही न्यूनतम वेतनमान और भत्तों को लागू करने की तारीख का अंतिम ऐलान होगा.
भारतीय सनातन संस्कृति, दर्शन और अध्यात्म में गुरु को गोविंद (ईश्वर) से भी उच्च स्थान दिया गया है। अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाले मार्गदर्शकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन पर्व 'गुरु पूर्णिमा' इस साल भी देश-विदेश में बेहद श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला यह पवित्र त्योहार केवल सनातन धर्मावलंबियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए भी इसका अत्यंत गहरा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है।गुरु पूर्णिमा 2026 की सही तारीख: नोट कर लें कैलेंडर में यह शुभ दिनवर्ष 2026 में गुरु पूर्णिमा का पावन त्योहार बुधवार, 29 जुलाई 2026 को पूरे देश में श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। आषाढ़ पूर्णिमा के इस शुभ अवसर पर तड़के सुबह से ही देश भर के प्रमुख धार्मिक स्थलों, पवित्र नदियों के घाटों, गुरु आश्रमों और बौद्ध विहारों में विशेष प्रार्थना सभाओं और आध्यात्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। भक्तगण इस दिन उपवास रखकर अपने गुरुओं का साक्षात या मानसिक पूजन करेंगे और जीवन में सही मार्गदर्शन के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।महर्षि वेदव्यास और व्यास पूर्णिमा: जानिए क्यों मनाया जाता है यह त्योहारपौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु पूर्णिमा का यह पावन दिन मूल रूप से महाभारत और महान पुराणों के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी के प्राकट्य दिवस और उनके सम्मान में मनाया जाता है। महर्षि वेदव्यास ने ही वेदों का चार अलग-अलग भागों (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद) में वर्गीकरण और संकलन किया था, जिसके कारण उन्हें मानव जाति का आदिगुरु माना जाता है। इसी ऐतिहासिक संबंध के कारण इस पावन तिथि को 'व्यास पूर्णिमा' के नाम से भी संबोधित किया जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से 'गुरु' शब्द दो अक्षरों से मिलकर बना है—'गु' का अर्थ है अंधकार और 'रु' का अर्थ है उसे दूर करने वाला, अर्थात वह चेतना जो हमें मानसिक अंधकार से मुक्त करती है।त्रिवेणी संगम: हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मों में इस पावन तिथि का अनूठा महत्वयह त्योहार भारत की साझी आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक विविधता का एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहां तीन प्रमुख धर्म इस दिन को अलग-अलग ऐतिहासिक कारणों से अत्यंत पवित्र मानते हैं:हिंदू धर्म: इस दिन गुरु को साक्षात परब्रह्म मानकर उनकी पूजा की जाती है, क्योंकि गुरु ही शिष्य को संसार रूपी सागर पार करने और ईश्वर प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।बौद्ध धर्म: बौद्ध मान्यताओं के अनुसार, बोधगया में कठिन तपस्या के बाद ज्ञान (बोधि) प्राप्त करने के पश्चात भगवान बुद्ध ने इसी आषाढ़ पूर्णिमा के दिन सारनाथ में अपने प्रथम पांच शिष्यों को अपना पहला उपदेश दिया था, जिसे 'धम्मचक्कपवत्तन' (धर्मचक्रप्रवर्तन) कहा जाता है।जैन धर्म: जैन परंपरा के अनुसार, चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी ने इसी पवित्र तिथि पर चातुर्मास की शुरुआत के साथ ही इंद्रभूति गौतम (गौतम स्वामी) को अपना पहला प्रधान शिष्य (गणधर) बनाया था, जिससे जैन संघ की नींव पड़ी।आधुनिक युग में प्रासंगिकता: कैसे मनाएं कृतज्ञता का यह डिजिटल और पारंपरिक उत्सवआज के आधुनिक और तकनीकी युग में भी गुरु-शिष्य परंपरा का महत्व रत्ती भर भी कम नहीं हुआ है। इस शुभ दिन पर भक्त और विद्यार्थी अपने गुरुओं, शैक्षणिक शिक्षकों, माता-पिता और जीवन के मार्गदर्शकों को उपहार, संदेशों और विशेष आयोजनों के जरिए धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। पारंपरिक रूप से इस दिन लोग मठों में जाकर गुरु पूजा करते हैं, सामूहिक सत्संग और ध्यान (मेडिटेशन) सत्रों में भाग लेते हैं, पवित्र धर्मग्रंथों का पाठ करते हैं और समाज के वंचित वर्गों को अन्न, वस्त्र व शिक्षा सामग्री दान कर सामाजिक समरसता का संदेश देते हैं।
Virat Kohli Privacy Leak London: भारतीय क्रिकेट के लीजेंड और ग्लोबल सुपरस्टार विराट कोहली (Virat Kohli) इन दिनों खेल से दूर लंदन में अपनी फैमिली के साथ समय बिता रहे हैं. हाल ही में चोट के कारण वह अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज का हिस्सा नहीं बन पाए थे. इसी बीच लंदन से विराट कोहली की प्राइवेसी (Privacy Violation) में सेंधमारी की एक बड़ी घटना सामने आई है, जिसने पूर्व भारतीय कप्तान को अंदर से बेहद नाराज और परेशान कर दिया है.सोशल मीडिया पर विराट कोहली और इंग्लैंड के युवा बल्लेबाज जॉर्डन कॉक्स (Jordan Cox) की एक कैफे में बातचीत करते हुए निजी तस्वीरें वायरल हो गई हैं. इस घटना का खुलासा खुद आईपीएल (IPL) में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) में कोहली के साथी रहे जॉर्डन कॉक्स ने एक इंटरव्यू में किया है.बिना जानकारी के खींची गईं तस्वीरें, कॉक्स ने बयां किया पूरा वाकयामशहूर ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' (The Guardian) से बातचीत करते हुए इंग्लैंड के बल्लेबाज जॉर्डन कॉक्स ने इस हैरान करने वाली घटना को याद किया. पिछले महीने ओवल के मैदान पर न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने टेस्ट डेब्यू से ठीक एक शाम पहले कॉक्स लंदन के एक कैफे में विराट कोहली से मिले थे.क्या हुई थी बातचीत: दोनों युवा और सीनियर खिलाड़ी के बीच क्रिकेट के अनुभवों, मैच से पहले होने वाली घबराहट और साल 2011 में कोहली के अपने भारत डेब्यू के दौर की मानसिक स्थिति को लेकर गहरी चर्चा चल रही थी.विराट ने बढ़ाया था हौसला: कॉक्स अपने करियर के इतने बड़े मैच से पहले नर्वस न होने को लेकर चिंतित थे, जिस पर कोहली ने उन्हें बड़े भाई की तरह आिलासा देते हुए कहा था कि यह शांत मानसिक स्थिति उनके अपने डेब्यू मैच से कहीं ज्यादा बेहतर है.'क्या तुमने ये सारी तस्वीरें देखीं?' – दो घंटे बाद कोहली का आया मैसेजजॉर्डन कॉक्स ने बताया कि वह एक बेहद सामान्य और निजी मुलाकात थी, लेकिन कैफे से बाहर आने के कुछ ही देर बाद वो तस्वीरें इंटरनेट पर लीक हो गईं. कॉक्स ने कहा, विराट के लिए सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह थी कि लोग चोरी-छिपे उनका पीछा कर रहे थे और उन्हें इसका अहसास तक नहीं हुआ. कैफे में हमारे पास से सैकड़ों लोग गुजरे लेकिन किसी ने सामने आकर कुछ नहीं कहा. मुलाकात के करीब दो घंटे बाद अचानक विराट ने मुझे एक मैसेज भेजा, जिसमें लिखा था- 'क्या तुमने ये सारी तस्वीरें देखीं?' मैं खुद दंग रह गया. विराट बस वहां एक सामान्य और सुकून भरा जीवन जीना चाहते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से उनके जैसे बड़े स्टार के लिए यह हमेशा मुमकिन नहीं हो पाता.लंदन में लो-प्रोफाइल लाइफ जी रहे हैं किंग कोहलीयह पूरी घटना बयां करती है कि क्रिकेट के मैदान से दूर विराट कोहली की लाइफ कैसी है. पिछले दो सालों में विराट कोहली ने अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा और बच्चों के साथ लंदन में एक लंबा वक्त गुजारा है. वह केवल बेहद जरूरी इंटरनेशनल मैचों, आईपीएल और अपने ब्रांड कमिटमेंट्स के लिए ही भारत आते हैं. साल 2026 में टेस्ट और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास (Retirement) की घोषणा के बाद से कोहली ने मीडिया से दूरी बनाकर काफी लो-प्रोफाइल लाइफ चुनी है. इसके बावजूद विदेशों में भी उनकी एक झलक पाने के लिए फैंस इस कदर दीवाने हैं कि उनकी प्राइवेसी खतरे में पड़ जाती है.अगले सप्ताह इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से मैदान पर लौटेंगे कोहलीहैमस्ट्रिंग की चोट (Hamstring Injury) से पूरी तरह उबरने के बाद 37 वर्षीय विराट कोहली अब मैदान पर जोरदार वापसी के लिए पूरी तरह तैयार हैं. इसके लिए वह मुंबई में लगातार कड़ी नेट प्रैक्टिस और तैयारी कर रहे हैं. भारत और इंग्लैंड के बीच अगले सप्ताह से तीन मैचों की शानदार वनडे सीरीज शुरू होने जा रही है. भारतीय टीम बर्मिंघम, कार्डिफ और ऐतिहासिक लॉर्ड्स (Lords) के मैदान पर मैच खेलेगी. यह सीरीज साल 2027 में होने वाले वनडे विश्व कप (2027 ODI World Cup) की तैयारियों के लिहाज से टीम इंडिया और विराट कोहली दोनों के लिए मील का पत्थर साबित होगी.युवा खिलाड़ियों के लिए भगवान की तरह हैं विराट: कॉक्सतस्वीरें लीक होने के विवाद के बीच जॉर्डन कॉक्स ने आरसीबी के चैंपियन बनने के सफर को याद करते हुए कोहली की मेंटरशिप की जमकर तारीफ की. कॉक्स ने कहा, आईपीएल अभियान के दौरान जो बात मुझे सबसे अविश्वसनीय लगी, वो यह थी कि एक इतने बड़े महान खिलाड़ी होने के बावजूद उन्होंने मुझे सीखने के लिए कितना ज्यादा समय दिया. विराट एक ऐसे इंसान हैं जो खुद से पहले हमेशा युवा खिलाड़ियों की मदद करने के लिए तैयार रहते हैं. खेल की इतनी बड़ी और मतलबी दुनिया में ऐसा निस्वार्थ स्वभाव देखना बेहद दुर्लभ है.
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय विपक्षी 'INDIA' (इंडी) गठबंधन के भीतर दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु से एक बहुत बड़ी राजनीतिक दरार सामने आ रही है। सूबे की सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने अपने पूर्व सहयोगी दल वीसीके (VCK) के उस हाई-प्रोफाइल प्रस्ताव को पूरी तरह से ठुकरा दिया है, जिसमें भाजपा (BJP) के खिलाफ देशव्यापी मोर्चे को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री थलपति विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को गठबंधन में शामिल करने की वकालत की गई थी। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की पार्टी के इस सख्त रुख के बाद राज्य की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ दिल्ली तक के गठबंधन समीकरणों में भारी हलचल मच गई है।क्या था थिरुमावलवन का केरल-बंगाल मॉडल? जिसे स्टालिन ने किया खारिजइस पूरे राजनीतिक विवाद की शुरुआत तब हुई जब दलित केंद्रित दल वीसीके (VCK) के प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने एक विशेष चुनावी फॉर्मूला पेश किया। उन्होंने केरल और पश्चिम बंगाल के समकालीन राजनीतिक ढांचे का हवाला देते हुए प्रस्ताव रखा कि जैसे उन राज्यों में क्षेत्रीय स्तर पर धुर विरोधी पार्टियां भी राष्ट्रीय स्तर पर 'INDIA' गठबंधन के बैनर तले एक साथ खड़ी हैं, ठीक उसी तरह तमिलनाडु में भी आपसी मतभेद भुलाकर DMK और विजय की TVK को एक मंच पर आना चाहिए। इस रणनीतिक प्रस्ताव को जल्द ही कांग्रेस का भी पूरा समर्थन मिल गया, जिसने तर्क दिया था कि भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकजुटता को राज्य-स्तरीय प्रतिद्वंद्विता से ऊपर रखा जाना चाहिए।DMK सांसद का तीखा हमला: 'कांग्रेस ने सिर्फ मंत्री पद के लिए पीठ में छुरा घोंपा'इस फॉर्मूले को सिरे से नकारते हुए DMK ने कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। एनडीटीवी (NDTV) से एक्सक्लूसिव बातचीत में कोइम्बटूर से DMK सांसद गणपति पी. राजकुमार ने कांग्रेस की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि कांग्रेस ने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद केवल सूबे की सत्ता में मलाईदार मंत्री पद हासिल करने की लालसा में थलपति विजय की TVK के साथ गुप्त समझौता किया और DMK की पीठ में छुरा घोंपा है। सांसद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस गठबंधन के व्यापक हितों को नजरअंदाज कर रही है और अब स्टालिन नेतृत्व को मनाने के लिए वीसीके (VCK) को एक राजनीतिक दूत के रूप में इस्तेमाल कर रही है, जिसे पार्टी कभी स्वीकार नहीं करेगी।तमिलनाडु में नहीं चलेगा बंगाल फॉर्मूला: बदला हुआ है राज्य का राजनीतिक भूगोलपार्टी के आधिकारिक रुख को और अधिक स्पष्ट करते हुए सांसद गणपति पी. राजकुमार ने कहा कि केरल या पश्चिम बंगाल की जमीनी हकीकत तमिलनाडु से बिल्कुल अलग है। केरल में जहां लड़ाई कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) और वामपंथियों के एलडीएफ (LDF) के बीच बंटी है, और बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) व कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर साथ होकर भी राज्य में आमने-सामने हैं, वहीं तमिलनाडु का राजनीतिक परिदृश्य अभिनेता से राजनेता बने विजय की TVK के एक तीसरी बड़ी ताकत के रूप में उभरने से मौलिक रूप से बदल चुका है। उन्होंने कड़ा सवाल उठाया कि जिस TVK के पास वर्तमान में संसद में एक भी सांसद नहीं है, उसे 'INDIA' ब्लॉक में शामिल करने के लिए इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है? उन्होंने दोहराया कि क्षेत्रीय दलों को खत्म करने की कोशिश कर रही भाजपा ही DMK की मुख्य वैचारिक विरोधी है और पार्टी अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करेगी।
स्टालिन की DMK ने ठुकराया 'बंगाल-केरल मॉडल', थलपति विजय की TVK संग गठबंधन की कोशिशों पर फेरा पानी
दक्षिण भारत के सबसे रसूखदार राजनीतिक सूबे तमिलनाडु की सियासत में इस वक्त जबरदस्त उबाल आ चुका है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर बने विपक्षी 'INDIA' गठबंधन में थलपति विजय की नवोदित पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) को एक साथ लाने की कवायद शुरू हुई थी, जिसे DMK ने सिरे से खारिज कर दिया है। दलित केंद्रित दल वीसीके (VCK) और कांग्रेस द्वारा दिए गए 'बंगाल-केरल फॉर्मूले' को मानने से इनकार करते हुए स्टालिन की पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की जमीनी हकीकत बाकी प्रदेशों से बिल्कुल जुदा है। इस राजनीतिक खींचतान के बीच DMK और कांग्रेस के रिश्तों में भी गंभीर दरार आ गई है।क्या है बंगाल-केरल मॉडल? जिसे तमिलनाडु में लागू करने की थी तैयारीराजनीतिक गलियारों में इस वक्त 'बंगाल-केरल मॉडल' की खूब चर्चा हो रही है। यह एक ऐसा रणनीतिक फॉर्मूला है जिसके तहत क्षेत्रीय पार्टियां राज्य स्तर पर तो एक-दूसरे के धुर विरोधी के रूप में चुनाव लड़ती हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र सरकार या भाजपा के विरोध में एकजुट होकर 'INDIA' गठबंधन का हिस्सा बनी रहती हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी (TMC), वामपंथी दल और कांग्रेस राज्य में एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोकते हैं। ठीक इसी तरह केरल में भी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) और वामपंथियों के एलडीएफ (LDF) के बीच सत्ता के लिए सीधा मुकाबला होता है। हालांकि, लोकसभा या राष्ट्रीय मुद्दों पर ये सभी दल दिल्ली में एक मंच पर नजर आते हैं। वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन और कांग्रेस इसी तर्ज पर विजय की TVK और स्टालिन की DMK को राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ जोड़ना चाहते थे।DMK का तीखा पलटवार: कांग्रेस ने मंत्रिपद के लालच में पीठ में छुरा घोंपाइस प्रस्तावित फॉर्मूले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कोइम्बटूर से DMK सांसद गणपति पी. राजकुमार ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में सिर्फ मंत्रिपद हासिल करने और सत्ता की मलाई चाटने के लिए थलपति विजय की TVK से हाथ मिलाया है। सांसद ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि कांग्रेस ने DMK की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है और अब वह अपनी कमियों को छिपाने के लिए वीसीके (VCK) को एक दूत या मध्यस्थ की तरह इस्तेमाल कर रही है ताकि स्टालिन नेतृत्व को मनाया जा सके। उन्होंने साफ किया कि DMK का शीर्ष नेतृत्व इस खोखले प्रस्ताव को कभी स्वीकार नहीं करेगा।विजय की TVK पर उठाए सवाल: बिना किसी सांसद वाली पार्टी के लिए इतनी बेताबी क्यों?तमिलनाडु की बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए DMK सांसद ने थलपति विजय की पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने तर्क दिया कि जिस TVK के पास राष्ट्रीय संसद में एक भी सांसद नहीं है, उसे 'INDIA' ब्लॉक का हिस्सा बनाने के लिए कांग्रेस इतनी बेताब क्यों है? इस पर विपक्षी दलों को गंभीरता से आत्मचिंतन करना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि भाजपा हमेशा से क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने की कोशिश करती रही है और DMK इसके खिलाफ अपनी वैचारिक लड़ाई मजबूती से लड़ रही है। सांसद के बयानों से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि तमिलनाडु में फिलहाल कांग्रेस और DMK के बीच सब कुछ ठीक नहीं है और इस विवाद के कारण राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन को एक बड़ा झटका लग सकता है।
तेलंगाना के शाबाद में 6 लोगों की हत्या के आरोपी की तलाश में 9 टीमें जुटीं
हैदराबाद। तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले के शाबाद मंडल के दैवालागुडा गांव में छह लोगों की हत्या के मुख्य आरोपी को पकड़ने के लिए नौ विशेष टीमें तैनात की गई हैं। पुलिस उपायुक्त योगेश गौतम ने रविवार को आरोपी के बारे में रिपोर्टों पर साफ किया कि राजकुमार अभी भी फरार है और लोगों से अपील […] The post तेलंगाना के शाबाद में 6 लोगों की हत्या के आरोपी की तलाश में 9 टीमें जुटीं appeared first on Sabguru News .
नई दिल्ली। भारत ने ओमान तट के निकट वाणिज्यिक पोत जीएफएस गैलेक्सी पर हुए हमले की रविवार को कड़ी निंदा की। विदेश मंत्रालय ने बताया कि पोत पर सवार 11 भारतीय नागरिकों में से 10 को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि एक भारतीय चालक दल का सदस्य अब भी लापता है। मंत्रालय ने अपने […] The post विदेश मंत्रालय ने की जीएफएस गैलेक्सी जहाज पर हुए हमले की निंदा, भारतीय चालक दल का एक सदस्य अभी भी लापता appeared first on Sabguru News .
अयोध्या स्थित तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने आग्रह किया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में नए ट्रस्टियों की नियुक्ति पूरी सावधानी और पारदर्शिता के साथ की जाए, ताकि राम मंदिर की गरिमा और प्रतिष्ठा बनी रहे। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ट्रस्ट का आजीवन सदस्य बनाए जाने की मांग भी उठाई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संघर्ष तेज, अमरीका-ईरान के बीच ताजा हमले
वाशिंगटन। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों ने रविवार को एक-दूसरे पर नए सिरे से हमले किए। अमरीका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले करने का दावा किया, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी क्षेत्र में अमरीकी सैन्य […] The post होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संघर्ष तेज, अमरीका-ईरान के बीच ताजा हमले appeared first on Sabguru News .
मदन दिलावर के अलवर दौरे के बाद 8 ग्राम विकास अधिकारियों के तबादले
अलवर। राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर ने अलवर दौरे के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में बदहाल सफाई व्यवस्था और जलभराव की स्थिति देखने को मिलने पर गहरी नाराजगी जताई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार उनके दौरे के कुछ ही घंटों बाद जिले की आठ ग्राम पंचायतों के ग्राम विकास अधिकारियों (बीडीओ) के […] The post मदन दिलावर के अलवर दौरे के बाद 8 ग्राम विकास अधिकारियों के तबादले appeared first on Sabguru News .
ईरान ने की होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा
तेहरान। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की है। अमरीका की ओर से किए गए हमले के बाद ईरान की सेना ने यह घोषणा की। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा है कि जब तक इस इलाके में अमरीका का दखल खत्म नहीं हो जाता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य […] The post ईरान ने की होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा appeared first on Sabguru News .
अगले साल से पटरी पर दौड़ेगी भारत की पहली बुलेट ट्रेन, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया बड़ा एलान
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का सूरत-बिलिमोरा खंड अगले वर्ष शुरू होगा। परियोजना चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।
केंद्र ने दिल्ली की द्वारका सुरंग और उत्तर प्रदेश के कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे को मंजूरी दी। 14,115 करोड़ रुपये की ये परियोजनाएं कनेक्टिविटी, निवेश और रोजगार को नई गति देंगी।
छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है, जिसने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, प्रदेश कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल ने अलग-अलग वित्तीय अनियमितताओं और घोटालों के जरिए करीब 800 करोड़ रुपये का काला धन जुटाया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस अकूत दौलत और अवैध कैश को कथित तौर पर बोरियों में भरकर सीधे कांग्रेस भवन पहुंचाया जाता था।सिंडिकेट के जरिए जुटाया गया 800 करोड़ का काला धनEOW की जांच में यह बात सामने आई है कि यह पूरा खेल एक सोचे-समझे सिंडिकेट के जरिए खेला जा रहा था। राज्य में हुए विभिन्न कथित घोटालों, जिसमें कोयला लेवी, शराब और अन्य सरकारी ठेके शामिल थे, उनसे आने वाले अवैध कमीशन का एक बड़ा हिस्सा सीधे रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचता था। जांच अधिकारियों का दावा है कि इस पूरे सिंडिकेट के सूत्रधार अग्रवाल ही थे, जिन्होंने सत्ता के रसूख का इस्तेमाल कर महज कुछ वर्षों के भीतर 800 करोड़ रुपये का यह भारी-भरकम साम्राज्य खड़ा कर लिया।कैश मैनेजमेंट का वीआईपी सेंटर बना था कांग्रेस भवनजांच एजेंसी के दावों के अनुसार, अवैध रूप से वसूली गई करोड़ों रुपये की यह रकम किसी सामान्य तरीके से नहीं, बल्कि जूट के बोरों और बड़े-बड़े बैग्स में भरकर गाड़ी के जरिए सीधे रायपुर स्थित कांग्रेस भवन और अन्य गुप्त ठिकानों पर अनलोड की जाती थी। EOW का कहना है कि उनके पास ऐसे पुख्ता इनपुट्स और गवाहों के बयान हैं, जो यह साबित करते हैं कि इस बेहिसाब कैश का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों, चुनावों को प्रभावित करने और बेनामी संपत्तियों को खरीदने के लिए किया जाता था।ईओडब्ल्यू की रडार पर कई बड़े रसूखदार और करीबीइस मामले में रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ शिकंजा कसने के बाद अब जांच की आंच कई अन्य सफेदपोशों और बड़े अफसरों तक पहुंचने लगी है। EOW डिजिटल साक्ष्यों, बैंक खातों के लेन-देन और डायरियों में दर्ज कोडवर्ड्स को डिकोड करने में जुटी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस 800 करोड़ के घोटाले से जुड़े कुछ और बड़े चेहरों का बेनकाब होना तय है, जिससे छत्तीसगढ़ की सियासत में और बड़ा तूफान आ सकता है।
क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले इंग्लैंड के मैदानों पर जब भी भारत और इंग्लैंड के बीच टक्कर होती है, तो रोमांच सातवें आसमान पर होता है। लेकिन हालिया मुकाबले में टीम इंडिया को जिस तरह की हार का सामना करना पड़ा है, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमूमन किसी भी मैच में हार का ठीकरा बल्लेबाजों के खराब शॉट सिलेक्शन या गेंदबाजों की दिशाहीन गेंदबाजी पर फोड़ा जाता है। लेकिन इस बार कहानी पूरी तरह अलग है। कप्तान से लेकर कोच तक, सभी इस बात से हैरान हैं कि टीम इंडिया अपनी तकनीक की वजह से नहीं, बल्कि एक बुनियादी कमजोरी के कारण बैकफुट पर आ गई।मैदान पर सुस्ती पड़ी भारी, छूटे कैचों ने पलटा पूरा मैचइस मुकाबले में टीम इंडिया की हार की सबसे मुख्य और बड़ी वजह रही उसकी बेहद खराब फील्डिंग। जब आप इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ उनकी सरजमीं पर खेल रहे हों, तो आप 'कैच छोड़ो, मैच छोड़ो' की कहावत को हल्के में नहीं ले सकते। भारतीय फील्डर्स ने मैच के कई अहम मोड़ों पर न सिर्फ बेहद आसान कैच टपकाए, बल्कि मिस-फील्डिंग के जरिए विपक्षी टीम को कई अतिरिक्त रन भी तोहफे में दे दिए। इन जीवनदानों का फायदा उठाकर इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने मैच का पासा पूरी तरह से पलट दिया और भारतीय गेंदबाजों के हौसले पस्त कर दिए।ग्राउंड डाइविंग और खराब थ्रो ने बढ़ाई गेंदबाजों की टेंशनआधुनिक क्रिकेट में फिटनेस और चुस्ती-फुर्ती को सबसे ऊपर रखा जाता है, लेकिन इस मैच में भारतीय खिलाड़ियों की बॉडी लैंग्वेज काफी सुस्त नजर आई। बाउंड्री लाइन पर ढीली फील्डिंग और विकेटकीपर तक सीधे थ्रो न फेंक पाने की वजह से बल्लेबाजों ने आसानी से डबल और ट्रिपल रन चुराए। दबाव के क्षणों में जब टीम को एक-एक रन बचाने की जरूरत थी, तब फील्डिंग में हुई इन बचकानी गलतियों ने गेंदबाजों पर अतिरिक्त दबाव बना दिया। यही वजह रही कि अच्छी गेंदबाजी के बावजूद टीम इंडिया विरोधी टीम के रनों की रफ्तार पर लगाम नहीं लगा सकी।क्या वर्कलोड मैनेजमेंट बन रहा है टीम की सुस्ती का कारण?विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार क्रिकेट खेलने की वजह से खिलाड़ियों में थकान साफ तौर पर देखी जा सकती है। कैचिंग पोजीशन में सही समय पर रिएक्ट न कर पाना और थ्रोइंग में सटीकता की कमी यह दर्शाती है कि खिलाड़ियों की मानसिक और शारीरिक सजगता का स्तर गिरा है। कोच राहुल द्रविड़ और कप्तान रोहित शर्मा के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती आगामी मैचों से पहले टीम के फील्डिंग स्टैंडर्ड को वापस उसी पुराने वर्ल्ड क्लास लेवल पर ले जाने की होगी, क्योंकि बिना चुस्त फील्डिंग के इंग्लैंड की धरती पर सीरीज जीतना नामुमकिन है।
मुजफ्फरपुर को मिला 1047 करोड़ का महापैकेज: मरीन ड्राइव, चमचमाती सड़कें और पार्क बदलेंगे शहर की सूरत
मेटा डिस्क्रिप्शन: मुजफ्फरपुर के विकास को मिलेगी नई रफ्तार! डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने 1047 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का किया शिलान्यास। मरीन ड्राइव, शानदार पार्क और सड़कों के जाल से बदलेगी शहर की सूरत।मुजफ्फरपुर को मिला 1047 करोड़ का बूस्टर डोज, मरीन ड्राइव और पार्कों से चमकेगी शहर की सूरतमुजफ्फरपुर: उत्तर बिहार की व्यावसायिक राजधानी कहे जाने वाले मुजफ्फरपुर के दिन अब बहुरने वाले हैं। शहर को जाम से मुक्ति दिलाने और इसे एक आधुनिक महानगर का रूप देने के लिए सरकार ने सौगातों का संदूक खोल दिया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुजफ्फरपुर के कायाकल्प के लिए कुल 1047 करोड़ रुपये की भारी-भरकम विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया है। इस मेगा प्रोजेक्ट के पूरा होने से न केवल शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, बल्कि स्थानीय पर्यटन और व्यापार को भी नए पंख लगेंगे।बूढ़ी गंडक के किनारे बनेगा चमचमाता मरीन ड्राइवइस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा आकर्षण मुजफ्फरपुर में बनने वाला नया मरीन ड्राइव है। पटना की तर्ज पर बूढ़ी गंडक नदी के घाटों को विकसित कर सड़क और वॉकिंग ट्रैक का निर्माण किया जाएगा। यह मरीन ड्राइव शहर के लोगों को शाम बिताने के लिए एक बेहतरीन स्पॉट तो देगा ही, साथ ही मुख्य सड़कों पर गाड़ियों के दबाव को भी काफी हद तक कम करेगा। इसके किनारे लाइटिंग और हरियाली का विशेष ध्यान रखा जाएगा, जिससे यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके।सड़कों का बिछेगा जाल और दूर होगा ट्रैफिक जाममुजफ्फरपुर की सबसे बड़ी समस्या यहां का ट्रैफिक जाम रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए 1047 करोड़ रुपये के बजट का एक बड़ा हिस्सा सड़कों के चौड़ीकरण और नए बाईपास के निर्माण पर खर्च किया जा रहा है। शहर के प्रवेश और निकास द्वारों को बेहतर बनाया जा रहा है ताकि बाहरी वाहनों को शहर के अंदर न आना पड़े। ग्रामीण इलाकों को मुख्य शहर से जोड़ने वाली सड़कों को भी अपग्रेड किया जा रहा है, जिससे आसपास के व्यापारियों को मंडी तक आने में आसानी होगी।बच्चों और बुजुर्गों के लिए बनेंगे आधुनिक पार्कस्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और राज्य सरकार के इस साझा प्रयास के तहत मुजफ्फरपुर में कई आधुनिक पार्कों का निर्माण किया जाएगा। इन पार्कों में बच्चों के खेलने के लिए आधुनिक झूले, बुजुर्गों के लिए वॉक-वे और युवाओं के लिए ओपन जिम की व्यवस्था होगी। कंक्रीट के जंगल बनते जा रहे शहर को ग्रीन ऑक्सीजन हब देने के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान भी इस परियोजना का हिस्सा है।डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने क्या कहा?परियोजनाओं की सौगात देते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि मुजफ्फरपुर केवल एक जिला नहीं, बल्कि उत्तर बिहार की आर्थिक रीढ़ है। सरकार का लक्ष्य है कि यहां रहने वाले नागरिकों को पटना जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ पूरे किए जाएं ताकि जनता को इसका लाभ जल्द से जल्द मिल सके।
राजस्थान में सुस्त पड़ा मानसून, जयपुर-भरतपुर में सिर्फ बूंदाबांदी; जानें अब कब होगी झमाझम बारिश
राजस्थान में मॉनसून की रफ्तार पर अचानक ब्रेक सा लग गया है। पिछले कुछ दिनों से राज्य के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश का दौर थमा हुआ है। राजधानी जयपुर और भरतपुर संभाग के कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी ने मौसम को थोड़ा सुहाना जरूर बनाया, लेकिन उमस और गर्मी ने लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है। मौसम प्रेमियों और किसानों के मन में अब यही सवाल है कि प्रदेश में मेघ दोबारा कब मेहरबान होंगे।जयपुर और भरतपुर में बादलों की आवाजाही, उमस ने बढ़ाई बेचैनीस्थानीय मौसम केंद्र के मुताबिक, जयपुर और भरतपुर के आस-पास के जिलों में आसमान में बादलों की आवाजाही लगातार बनी हुई है। कुछ जगहों पर स्थानीय प्रभाव के कारण हल्की फुहारें या बूंदाबांदी दर्ज की गई है। हालांकि, तेज धूप और हवाओं की गति धीमी होने के कारण वातावरण में उमस का ग्राफ काफी बढ़ गया है, जिससे लोग पसीने से तर-बतर हो रहे हैं। पश्चिमी राजस्थान के जिलों में भी तापमान में आंशिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।आखिर क्यों कमजोर पड़ी मानसून की रफ्तार?मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून ट्रफ लाइन की स्थिति में आए बदलाव और किसी मजबूत वेदर सिस्टम (जैसे साइक्लोनिक सर्कुलेशन या लो प्रेशर एरिया) के एक्टिव न होने की वजह से राजस्थान में बारिश की गतिविधियों में कमी आई है। इस 'मानसून ब्रेक' या सुस्ती के कारण हवाओं में नमी तो है, लेकिन वे भारी बारिश वाले बादलों में तब्दील नहीं हो पा रही हैं।जानिए कब बदलेगा मौसम का मिजाज और होगी भारी बारिशजयपुर मौसम केंद्र (IMD Jaipur) के पूर्वानुमान के अनुसार, राजस्थान के लोगों को भारी बारिश के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। आगामी कुछ दिनों तक पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में मौसम मुख्य रूप से शुष्क या केवल छिटपुट स्थानों पर हल्की वर्षा वाला बना रहेगा। हालांकि, बंगाल की खाड़ी में एक नया सिस्टम बनने की संभावना है, जिसके सक्रिय होते ही राज्य में एक बार फिर से झमाझम बारिश का नया दौर शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
चन्नी और राजा वडिंग की आपसी जंग में बीजेपी की एंट्री, पंजाब में कांग्रेस की बढ़ी टेंशन
पंजाब कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के बीच की तल्खी अब किसी से छिपी नहीं है। लेकिन इस बार कहानी में ट्विस्ट यह है कि कांग्रेस की इस आपसी 'सिरफुटौवल' पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पैनी नजर है और उसने इसमें अपना सियासी छौंका लगाना शुरू कर दिया है, जिससे कांग्रेस आलाकमान की सांसें फूलने लगी हैं।चन्नी और वडिंग के बीच क्यों बढ़ी तकरार?पंजाब की सियासत में लंबे समय से यह चर्चा आम थी कि चन्नी और वडिंग के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। बयानों के तीर और अंदरूनी खींचतान अब सार्वजनिक मंचों तक आ पहुंची है। दोनों ही नेता राज्य में अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने और खुद को पंजाब कांग्रेस का असली चेहरा साबित करने की होड़ में हैं। टिकट बंटवारे से लेकर सांगठनिक फैसलों तक, दोनों गुटों के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है।मौके की तलाश में बीजेपी: लगा दिया सियासी छौंकाकांग्रेस की इस कमजोरी को बीजेपी एक बड़े अवसर के रूप में देख रही है। पंजाब में अपनी जमीन तलाश रही बीजेपी ने इस विवाद पर चुटकी लेते हुए कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि जो पार्टी अपने कुनबे को एक साथ नहीं रख सकती, वह पंजाब का भला क्या करेगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी इस गुटबाजी का फायदा उठाकर कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।कांग्रेस आलाकमान की बढ़ी चिंता, कैसे थमेगी यह रार?इस नए घटनाक्रम ने दिल्ली में बैठे कांग्रेस आलाकमान की चिंताएं बढ़ा दी हैं। एक तरफ जहां पार्टी को आम आदमी पार्टी (AAP) से मुकाबला करना है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के शीर्ष स्थानीय नेताओं का इस तरह आपस में भिड़ना आगामी चुनावों में भारी पड़ सकता है। अगर समय रहते चन्नी और वडिंग के बीच के इस विवाद को नहीं सुलझाया गया, तो पंजाब में कांग्रेस की बची-खुची सियासी जमीन खिसकने में देर नहीं लगेगी।
इंटरनेशनल टूरिज्म और वैश्विक गलियारों से एक बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे खूबसूरत देशों में शुमार वियतनाम के एक बेहद प्रसिद्ध समुद्री इलाके में भारतीय पर्यटकों से भरी एक नाव अचानक लहरों के असंतुलन के कारण समंदर में डूब गई। इस हादसे के बाद जहां स्थानीय प्रशासन और रेस्क्यू टीमें राहत कार्य में जुटी हैं, वहीं वैश्विक स्तर पर इस खास जगह को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। हर कोई जानना चाहता है कि आखिर वियतनाम की यह कौन सी जगह है जो भारतीय सैलानियों के बीच इतनी लोकप्रिय है और इसके फेमस होने के पीछे के मुख्य कारण क्या हैं।हा लांग बे या ना ट्रांग: वियतनाम का वो जादुई समंदर जो है बेहद खासवियतनाम में वैसे तो कई खूबसूरत तटीय इलाके हैं, लेकिन 'हा लांग बे' (Ha Long Bay) और 'ना ट्रांग' (Nha Trang) जैसे स्पॉट्स अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। वियतनाम का यह समुद्री क्षेत्र यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची (UNESCO World Heritage Site) में भी शामिल है। यहां समंदर के बीचों-बीच खड़े विशालकाय चूना पत्थर के पहाड़ (Limestone Karsts), प्राचीन गुफाएं और हरे-नीले रंग का साफ पानी सैलानियों को एक अलग ही दुनिया का अहसास कराता है। यही वजह है कि भारत से बजट ट्रैवलिंग और क्रूज राइडिंग के शौकीन लोग सबसे ज्यादा इसी जगह पर जाना पसंद करते हैं।भारतीयों के बीच क्यों तेजी से बढ़ा है वियतनाम का क्रेजपिछले कुछ सालों में थाईलैंड और मलेशिया की तरह वियतनाम भी भारतीय पर्यटकों के लिए एक पसंदीदा इंटरनेशनल डेस्टिनेशन बनकर उभरा है। इसके सबसे बड़े कारणों में बेहद सस्ती और आसान ई-वीजा (E-Visa) प्रक्रिया, भारत के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और कोलकाता से सीधी हवाई कनेक्टिविटी, और कम बजट में लग्जरी क्रूज का अनुभव मिलना शामिल है। भारतीय कपल्स, बैकपैकर्स और फैमिली ट्रिप्स के लिए वियतनाम का यह समुद्री क्षेत्र वाटर स्पोर्ट्स, स्कूबा डाइविंग और आइलैंड होपिंग (Island Hopping) का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।सुरक्षा मानकों को लेकर उठ रहे हैं बड़े सवालइस दुखद नाव हादसे के बाद अब वियतनाम के टूरिज्म सेक्टर में सुरक्षा नियमों और गाइडलाइंस को लेकर बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं। एआई-संचालित ग्लोबल ट्रैवल एडवाइजरी (AI-powered travel advisory) के अनुसार, मानसून और मौसम में अचानक आने वाले बदलावों के दौरान समंदर में नाव या क्रूज का संचालन बेहद जोखिम भरा हो जाता है। स्थानीय प्रशासन अब इस बात की कड़ाई से जांच कर रहा है कि क्या लाइफ जैकेट्स और तय क्षमता से अधिक पर्यटकों को नाव पर बैठाने जैसे नियमों की अनदेखी की गई थी। इस हादसे ने अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
झारखंड के सभी 24 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, रांची-धनबाद सहित 14 इलाकों में आज भारी आंधी-बारिश की चेतावनी
झारखंड में मानसून की सक्रियता के बीच मौसम का मिजाज अचानक बेहद तल्ख हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र (IMD Ranchi) ने प्राकृतिक बदलावों को देखते हुए राज्य के सभी 24 जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी कर दिया है। रिपोर्टर इनपुट्स के मुताबिक, आज राज्य के 14 प्रमुख जिलों में वज्रपात (आकाशीय बिजली), तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश होने के प्रबल आसार बने हुए हैं। मौसम विभाग ने आम जनता से बेहद सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की है।इन 14 जिलों में मंडरा रहा है आंधी-तूफान और वज्रपात का सबसे बड़ा खतरामौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जिन 14 जिलों में आज कुदरत का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है, उनमें राजधानी रांची, कोयलांचल धनबाद, बोकारो, जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम), रामगढ़, हजारीबाग, गुमला और दुमका जैसे बड़े व्यापारिक और रिहायशी इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में दोपहर बाद हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिसके साथ ही गरज-चमक के साथ भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इन जिलों के निचले इलाकों में जलजमाव की स्थिति भी पैदा हो सकती है।क्यों जारी करना पड़ा ऑरेंज अलर्ट और क्या है इसके मायनेमौसम विभाग जब किसी इलाके के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करता है, तो इसका सीधा मतलब होता है कि वहां रहने वाले लोग बेहद खराब मौसम के लिए खुद को तैयार रखें। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और झारखंड के ऊपर बने एक मजबूत साइक्लोनिक सर्कुलेशन (Cyclonic Circulation) के कारण यह मौसमी सिस्टम तैयार हुआ है। इस सिस्टम की वजह से आकाशीय बिजली गिरने का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है। किसानों को विशेष रूप से सलाह दी गई है कि वे इस दौरान खेतों में न जाएं और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचें।जनजीवन और आवागमन पर पड़ेगा असर, प्रशासन मुस्तैदइस भारी चेतावनी को देखते हुए रांची, धनबाद और देवघर जैसे बड़े शहरों के जिला प्रशासनों ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। आंधी-तूफान के कारण बिजली के तार टूटने और पेड़ों के गिरने की आशंका को देखते हुए बिजली विभागों को अलर्ट पर रखा गया है। इसके अलावा, पहाड़ी रास्तों और जलप्रपातों (Waterfalls) के आसपास पर्यटकों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। विमान सेवाओं और ट्रेनों के परिचालन पर भी मौसम के इस बदले मिजाज का आंशिक असर देखने को मिल सकता है, इसलिए घर से निकलने से पहले अपनी यात्रा का अपडेट जरूर देख लें।
दबोचा गया एल्विश यादव का 'खास' बिजनेस पार्टनर, घर पर ताबड़तोड़ फायरिंग का खुला खौफनाक राज
मशहूर यूट्यूबर और बिग बॉस ओटीटी विजेता एल्विश यादव से जुड़े विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर और गुरुग्राम (Gurugram) को दहलाने वाले एल्विश यादव फायरिंग केस में पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम को एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। सुरक्षा एजेंसियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए एल्विश यादव के एक बेहद खास और करीबी बिजनेस पार्टनर को धर दबोचा है। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद एल्विश के घर और ठिकानों पर हुई ताबड़तोड़ गोलीबारी की घटना से पूरी तरह पर्दा उठ गया है। पुलिस कस्टडी में आरोपी ने जो खुलासे किए हैं, उसने इस पूरे मामले को एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ दे दिया है।आखिर कौन है गिरफ्तार हुआ पार्टनर और क्या था उसका मकसदपुलिस की स्पेशल टीम द्वारा दबोचे गए इस शख्स की पहचान एल्विश यादव के बेहद करीबी और उनके व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स को संभालने वाले मुख्य पार्टनर के रूप में हुई है। शुरुआती जांच और टेक्निकल सर्विलांस के आधार पर पुलिस को इस पर शक था, जिसके बाद इसे छापेमारी के दौरान हिरासत में लिया गया। पूछताछ में यह सनसनीखेज बात सामने आई है कि एल्विश के घर पर गोलियां किसी बाहरी दुश्मन ने नहीं, बल्कि इसी पार्टनर के इशारे पर चलवाई गई थीं। आरोपी ने कबूल किया है कि वह एल्विश के साथ चल रहे किसी बड़े लेन-देन के विवाद और आंतरिक कलह के कारण उन्हें डराना-धमकाना चाहता था।पैसों के विवाद और पब्लिसिटी स्टंट के एंगल की हो रही है जांचगुरुग्राम पुलिस और एआई-संचालित जांच (AI-assisted cyber investigation) के इनपुट्स के अनुसार, इस पूरी वारदात के पीछे करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन और आपसी रंजिश का एंगल सबसे प्रमुखता से उभर कर सामने आया है। इसके अलावा पुलिस इस बात की भी गहराई से तफ्तीश कर रही है कि कहीं यह पूरा मामला सिर्फ लाइमलाइट में बने रहने के लिए रचा गया कोई पब्लिसिटी स्टंट तो नहीं था। आरोपी ने फायरिंग करने के लिए जिन स्थानीय गैंगस्टर्स और शूटरों को मोटी रकम दी थी, उनके डिजिटल फुटप्रिंट्स और चैट हिस्ट्री को भी साइबर सेल ने रिकवर कर लिया है। बहुत जल्द इस मामले में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।दिल्ली-एनसीआर और गुरुग्राम में सुरक्षा व्यवस्था सख्तएल्विश यादव के घर के बाहर हुई इस तरह की खुलेआम गोलीबारी की घटना के बाद हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद और दिल्ली के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है। स्थानीय पुलिस और इंटेलिजेंस यूनिट सोशल मीडिया पर भी लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की अफवाह या गैंगवार जैसी स्थिति को पनपने से पहले ही रोका जा सके। पुलिस कमिश्नर कार्यालय की ओर से बयान जारी कर कहा गया है कि कानून व्यवस्था को हाथ में लेने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसके संबंध कितने ही रसूखदार लोगों से क्यों न हों।
राम मंदिर चंदे पर राहुल गांधी की चुप्पी के क्या हैं मायने, क्या अखिलेश को मझधार में छोड़ेगी कांग्रेस
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक राजनीतिक गलियारों में इंडिया (I.N.D.I.A.) गठबंधन के भविष्य को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हाल ही में राम मंदिर चंदा चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस सांसद और लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की रहस्यमयी चुप्पी ने सियासी रणनीतिकारों को चौंका दिया है। इस खामोशी के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक विश्लेषक अब यह सवाल उठाने लगे हैं कि क्या कांग्रेस पार्टी बिहार के घटनाक्रम को यूपी में भी दोहराने जा रही है? क्या समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव को भी तेजस्वी यादव की तरह ऐन वक्त पर अकेले चुनावी मैदान में उतरना पड़ सकता है?राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर राहुल गांधी का नया स्टैंड और कांग्रेस की रणनीतिअयोध्या में राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े कथित चंदे के विवादों पर जहां समाजवादी पार्टी लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है, वहीं राहुल गांधी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस मुद्दे पर पूरी तरह से दूरी बना रखी है। जानकारों का मानना है कि कांग्रेस अब बहुसंख्यक समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले किसी भी सीधे विवाद में पड़ने से बच रही है। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस अपनी 'सॉफ्ट हिंदुत्व' और सर्वसमाज वाली छवि को निखारने में जुटी है, जिससे समाजवादी पार्टी के कोर एजेंडे और कांग्रेस की राष्ट्रीय रणनीति के बीच एक वैचारिक दूरी साफ दिखाई देने लगी है।बिहार का 'तेजस्वी यादव पैटर्न' क्या उत्तर प्रदेश में भी दोहराएगी कांग्रेसराजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा बहुत तेज है कि कांग्रेस पार्टी क्षेत्रीय दलों के कंधे पर सवार होकर मजबूत होने के बाद उन्हें अपने हाल पर छोड़ देती है। बिहार में जिस तरह राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और तेजस्वी यादव के साथ सीटों के तालमेल और गठबंधन के समीकरणों में बदलाव देखने को मिला, ठीक वैसी ही सुगबुगाहट अब उत्तर प्रदेश में भी महसूस की जा रही है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के स्थानीय नेता अब सपा के सामने झुकने के मूड में नहीं हैं और वे राज्य की सभी महत्वपूर्ण सीटों पर अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव के थिंक टैंक के लिए कांग्रेस का यह आक्रामक रुख चिंता का सबब बन गया है।सीट शेयरिंग के पेच में फंस सकता है सपा और कांग्रेस का गठबंधनउत्तर प्रदेश की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों (Geographical & Social Layout) को देखें तो पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी तक समाजवादी पार्टी का अपना एक मजबूत कैडर है। लेकिन पिछले कुछ चुनावों में कांग्रेस ने भी अपने खोए हुए जनाधार को वापस पाने के लिए जमीन पर काफी मेहनत की है। सूत्रों का कहना है कि आगामी चुनावों में कांग्रेस सम्मानजनक से ज्यादा सीटों की मांग पर अड़ सकती है। अगर दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे (Seat Sharing Formula) पर सहमति नहीं बनी, तो गठबंधन के टूटने की नौबत आ सकती है। अखिलेश यादव को इस बात का भली-भांति अंदाजा है, इसलिए वे भी आंतरिक तौर पर सभी सीटों पर अकेले लड़ने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के मेरठ से सामने आए दलित छात्रा मामले ने अब एक बेहद संवेदनशील और बड़ा राजनीतिक रूप अख्तियार कर लिया है। आने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस मुद्दे को लेकर राज्य की सियासत का पारा पूरी तरह गरमा गया है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब धुर विरोधी विचारधारा वाले भाजपा के फायरब्रांड नेता संगीत सोम और बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के सुर एक जैसे नजर आए। वहीं दूसरी तरफ, पीड़ित परिवार ने लखनऊ में समाजवादी पार्टी (SP) के मुखिया अखिलेश यादव से मुलाकात की है। इस पूरे सियासी घमासान के पीछे 'दलित' (D Factor) वोट बैंक को साधने की होड़ साफ देखी जा सकती है।संगीत सोम और मायावती की सियासी जुगलबंदी के मायने क्या हैंपश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में मेरठ और उसके आस-पास के इलाके हमेशा से बेहद अहम रहे हैं। मेरठ दलित छात्रा मामले को लेकर पूर्व विधायक संगीत सोम ने खुलकर अपनी ही सरकार की पुलिसिंग और प्रशासनिक मुस्तैदी पर सवाल खड़े करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। दिलचस्प बात यह है कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए लगभग वैसी ही बातें कही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगीत सोम इसके जरिए जहां पश्चिमी यूपी के ठाकुर और दलित समीकरणों के बीच अपनी जमीन मजबूत कर रहे हैं, वहीं मायावती अपने मूल कैडर को यह संदेश दे रही हैं कि उनकी पार्टी दलित हितों के लिए सबसे मुखर है।लखनऊ पहुंचे पीड़ित परिजन, अखिलेश यादव ने दिया मदद का भरोसाइस पूरे घटनाक्रम के बीच पीड़ित दलित छात्रा के परिजनों ने लखनऊ का रुख किया और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से उनके आवास पर मुलाकात की। अखिलेश यादव ने परिवार की आपबीती सुनी और उन्हें हर संभव कानूनी व आर्थिक मदद देने का भरोसा दिलाया। सपा प्रमुख ने इस बहाने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा राज में बेटियां और दलित समाज सुरक्षित नहीं हैं। सपा की कोशिश इस मामले के जरिए खुद को न्याय की लड़ाई लड़ने वाले सबसे बड़े चेहरे के रूप में पेश करने की है।चुनाव से पहले क्यों है 'D' यानी दलित वोट बैंक पर डबल फोकसउत्तर प्रदेश की सत्ता का रास्ता सामाजिक समीकरणों से होकर ही गुजरता है। यही वजह है कि चुनाव से ठीक पहले सभी राजनीतिक दल दलित (D) वोट बैंक पर अपना ध्यान पूरी तरह केंद्रित कर रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Meerut, Muzaffarnagar, Saharanpur) में दलित मतदाताओं की संख्या निर्णायक भूमिका में है। भाजपा जहां अपने कैडर को बचाए रखने और डैमेज कंट्रोल में जुटी है, वहीं सपा और बसपा इस वर्ग को अपने पाले में लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। मेरठ का यह मामला केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह आगामी चुनावों के लिए एक बड़ा सियासी हथियार बन चुका है।
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के चिटरगुल स्थित नाला चोटीहाल (Nala Chotihall) क्षेत्र में रविवार को बादल फटने (क्लाउडबर्स्ट) के बाद अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने भारी तबाही मचा दी। इस प्राकृतिक आपदा में कृषि भूमि, सेब के बाग, धान की फसलें और कई ...
बिहार : वैशाली में जमीन विवाद ने लिया खूनी रूप, चाचा और फौजी भाई को भतीजे ने भूना
बिहार के वैशाली जिले में रास्ते के पुराने विवाद ने रविवार को खूनी रूप ले लिया। बिदुपुर थाना क्षेत्र के रजासन गांव में पट्टीदारों के बीच हुई फायरिंग में सेना के एक जवान और उनके पिता की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है, जबकि सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।
फिरोजाबाद पुलिस की बड़ी सफलता, हत्या के प्रयास के दो आरोपी मुठभेड़ में गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश में फिरोजाबाद के उत्तर थाना क्षेत्र में पुलिस ने मुठभेड़ के बाद हत्या के प्रयास के मामले में वांछित दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक आरोपी पैर में गोली लगने से घायल हो गया, जबकि भागने का प्रयास कर रहे उसके दूसरे साथी को घेराबंदी कर दबोच लिया गया।
नए बीटा पोर्टल की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यात्रियों को अब अलग-अलग श्रेणियों में सीट उपलब्धता देखने के लिए बार-बार क्लिक नहीं करना पड़ेगा। अभी तक स्लीपर, थर्ड एसी, सेकेंड एसी या अन्य श्रेणियों की सीटें अलग-अलग विकल्प चुनकर देखनी पड़ती थीं, जिससे समय अधिक लगता था।
यूपी-बिहार में भारी वर्षा का दौर, दिल्ली-मुंबई समेत कई राज्यों में मौसम विभाग का अलर्ट
उत्तर प्रदेश, बिहार और कई अन्य राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ा है, जबकि मुंबई में जलभराव से जनजीवन प्रभावित है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा पूरी कर स्वदेश वापसी की। न्यूजीलैंड के साथ संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिला और कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।
अमेरिका द्वारा ईरान पर ताजा सैन्य हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला कर वहां मौजूद कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और ...
टोरंटो स्ट्रीट फेस्टिवल के पास गोलीबारी, 2 लोगों की मौत, कई घायल, हमलावर की तलाश जारी
कनाडा के टोरंटो शहर में एक स्ट्रीट फेस्टिवल के पास हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। घटना शनिवार को साल्सा ऑन सेंट क्लेयर (Salsa on St. Clair) फेस्टिवल के पास हुई। पुलिस ने शुरुआती जानकारी में इलाके में सक्रिय ...
तमिलनाडु : ईपीएस के चुनाव समीक्षा तेज करने के साथ ही ऑनलाइन सदस्यता अभियान शुरू करेगी एआईएडीएमके
एआईएडीएमके ने घोषणा की है कि वह जल्द ही अपनी इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) विंग के जरिए ऑनलाइन मेंबरशिप एनरोलमेंट कैंपेन शुरू करेगी
हिमाचल: राम जन्मभूमि ट्रस्ट पर लगे आरोपों को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा
हिमाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर लगाए गए आरोपों को लेकर कांग्रेस की आलोचना की। पार्टी ने इन आरोपों को राजनीतिक मकसद से प्रेरित और राजनीतिक फायदे के लिए लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का फायदा उठाने की कोशिश बताया।
उपराष्ट्रपति ने दिग्गज पार्श्व गायिका एस. जानकी अम्मा के निधन पर शोक व्यक्त किया
भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने दिग्गज पार्श्व गायिका एस. जानकी अम्मा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
बिना किसी भेदभाव के लोगों की सेवा कर रही पीएम मोदी की सरकार: किरेन रिजिजू
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' की भावना से काम कर रही है, ताकि धर्म या समुदाय के आधार पर बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक नागरिक का विकास सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्यमंत्री योगी ने विपक्ष पर किया जोरदार प्रहार, बोले- रामभक्तों के खून से सना है सपा का इतिहास
Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की राजनीति पर जोरदार प्रहार करते हुए कहा कि जब भी मौका मिला, कांग्रेस और सपा ने भारतीय मानबिंदुओं पर कुठाराघात किया है। सपा का इतिहास रामभक्तों के खून से सना ...
बारुईपुर एनकाउंटर का जवाब दे सरकार, सौगत रॉय का सीएम सुवेंदु पर तीखा हमला
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बारुईपुर की घटना, स्वास्थ्य योजनाओं और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की बड़ी घोषणा, मध्यप्रदेश सरकार देगी डिजिटल कंटेंट क्रिएटर अवॉर्ड
Chief Minister Dr. Mohan Yadav : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 11 जुलाई को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 'मध्यप्रदेश युवा कॉन्क्लेव-2026' में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के साथ परस्पर संवाद किया। उन्होंने युवाओं के उत्थान और जनजागरूकता के ...
SIM Ejector Tool Hidden Uses: आज के दौर में जब भी हम कोई नया स्मार्टफोन खरीदते हैं, तो हमारा पूरा ध्यान उसके चमचमाते डिस्प्ले, बेहतरीन कैमरे, प्रोसेसर और फास्ट चार्जर पर होता है. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि फोन के खूबसूरत बॉक्स के अंदर एक बेहद छोटी, पतली और चमकीली मेटल की पिन भी छिपी होती है? इसे तकनीकी भाषा में 'सिम इजेक्टर टूल' (SIM Ejector Tool) कहा जाता है. ज्यादातर लोग इसका इस्तेमाल सिर्फ नया सिम कार्ड या मेमोरी कार्ड लगाने के लिए करते हैं और उसके बाद इसे वापस डिब्बे में फेंक देते हैं या कहीं खो देते हैं.लेकिन क्या आप जानते हैं कि मजबूत और टिकाऊ मेटल से बनी यह छोटी सी सुई जैसी पिन आपके कई बड़े और जरूरी कामों को चुटकियों में आसान बना सकती है? आइए जानते हैं सिम इजेक्टर पिन के 5 ऐसे कमाल के हैक्स और छिपे हुए इस्तेमाल (Hidden Uses), जो बहुत कम लोग जानते हैं.1. वाई-फाई (Wi-Fi) राउटर को करें चुटकियों में रीसेटअगर आपका घर या ऑफिस का वाई-फाई राउटर अचानक काम करना बंद कर दे, इंटरनेट की स्पीड बहुत स्लो हो जाए या बार-बार कनेक्शन टूटने की समस्या आए, तो यह पिन आपके लिए वरदान साबित हो सकती है.लगभग सभी कंपनियों के राउटर्स के पीछे एक बेहद बारीक और अंदर की तरफ धंसा हुआ 'रीसेट' (Reset) बटन होता है, जिसे सुरक्षा के लिहाज से उंगली से नहीं दबाया जा सकता.इस सिम पिन की नुकीली नोक को उस छेद में डालकर 10 सेकंड तक दबाकर रखने से आपका राउटर पूरी तरह से फैक्टरी सेटिंग्स पर रीसेट हो जाता है और इंटरनेट की समस्या ठीक हो जाती है.जरूरी बात: वाई-फाई राउटर को रीसेट करने से आपका पहले से सेव किया हुआ नेटवर्क नाम और पासवर्ड पूरी तरह हट जाएगा, जिसे आपको दोबारा सेट करना होगा.2. वायरलेस ईयरबड्स और चार्जिंग केस की कनेक्टिविटी समस्या होगी दूरआजकल ज्यादातर लोग ब्लूटूथ ईयरबड्स या नेकबैंड का इस्तेमाल करते हैं. कई बार ऐसा होता है कि एक ईयरबड काम नहीं करता या फोन से पेयर होने में दिक्कत आती है.इन वायरलेस ईयरबड्स और उनके चार्जिंग केस के भीतर या पीछे एक छोटा सा हिडन (छिपा हुआ) बटन दिया होता है.जब भी ईयरबड्स को फोन से कनेक्ट करने में परेशानी हो, तो आप इस सिम पिन की सहायता से उस बारीक बटन को दबाकर ईयरबड्स को रीसेट या दोबारा से फ्रेश पेयर (Pair) कर सकते हैं.3. अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को रीसेट करने का परफेक्ट टूलसिर्फ राउटर या ईयरबड्स ही नहीं, बल्कि कई ब्रांडेड टैबलेट्स, ब्लूटूथ स्पीकर्स, स्मार्ट वॉच, पोर्टेबल गैजेट्स और अन्य नेटवर्किंग डिवाइसेज में भी ऐसे छिपे हुए रीसेट बटन दिए जाते हैं. इन जगहों पर उंगली या पेन की नोक नहीं पहुंच पाती. ऐसे में यह सिम पिन एक परफेक्ट और सुरक्षित टूल का काम करती है जिससे गैजेट की बॉडी को कोई नुकसान नहीं पहुंचता.4. इमरजेंसी में कूरियर और पार्सल खोलने के लिए कटर का कामआजकल ऑनलाइन शॉपिंग का क्रेज बहुत बढ़ गया है और घर पर रोजाना कूरियर आते रहते हैं. अगर किसी वक्त आपके पास कटर, चाकू या कैंची उपलब्ध नहीं है और आपको कोई पार्सल या बॉक्स खोलना है, तो सिम इजेक्टर पिन का नुकीला हिस्सा बहुत काम आ सकता है. इसकी मजबूत नोक की सहायता से आप हैवी पैकेजिंग टेप, प्लास्टिक रैपिंग या किसी नई बोतल की सील को आसानी से काट या हटा सकते हैं. बस इसका उपयोग करते समय थोड़ा ध्यान रखें ताकि हाथ में चोट न लगे.5. छोटे-मोटे घरेलू काम और स्क्रूड्राइवर का विकल्पचूंकि यह पिन बहुत ही मजबूत मेटल से बनी होती है, इसलिए यह मुड़ती नहीं है. इमरजेंसी के समय यह आपके चश्मे या किसी छोटे खिलौने के बहुत बारीक स्क्रू (पेच) को कसने या ढीला करने के लिए मिनी-पेचकस का काम कर सकती है. इसके अलावा, किसी संकरी जगह में फंसी बेहद छोटी चीज को ऊपर उठाने या अपनी जगह से खिसकाने में भी यह काफी मददगार साबित होती है.इस छोटी सी पिन की गजब की उपयोगिता और इमरजेंसी जरूरतों को देखते हुए, कई समझदार लोग इसे अपने घर या गाड़ी की चाबियों के रिंग (Key Ring) में फंसाकर रखते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर यह तुरंत जेब से निकाली जा सके.
IRCTC Next-Gen Website: अगर आपने कभी भी ऑनलाइन ट्रेन टिकट बुक किया है, तो धीमी लोडिंग स्पीड, बार-बार परेशान करने वाले विज्ञापनों के पॉप-अप, लंबे-लंबे कैप्चा कोड और कई चरणों (Steps) में उलझाने वाली बुकिंग प्रक्रिया का सामना जरूर किया होगा. खासकर सुबह 10 और 11 बजे 'तत्काल टिकट' (Tatkal Ticket) बुकिंग के दौरान तो हर एक सेकंड की अहमियत होती है, जहां जरा सी देरी होते ही सीटें फुल हो जाती हैं. यात्रियों की इसी बड़ी परेशानी को दूर करने के लिए भारतीय रेलवे (Indian Railways) अब IRCTC की वेबसाइट का एक नया, बेहद आधुनिक और सुपरफास्ट वर्जन लेकर आ रहा है.जल्द लॉन्च होगा नई वेबसाइट का बीटा (Beta) वर्जनरेल मंत्रालय बहुत जल्द आम जनता के लिए IRCTC की नई वेबसाइट का बीटा वर्जन (Beta Version) पेश करने की तैयारी में है. इस अपग्रेड का मुख्य उद्देश्य टिकट बुकिंग की रफ्तार को दोगुना करना और पूरे इंटरफेस को यूजर-फ्रेंडली बनाना है. आधिकारिक तौर पर आम यात्रियों के लिए लाइव करने से पहले, इस नई वेबसाइट का सफल प्रदर्शन जयपुर स्थित मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT) के छात्रों के सामने किया गया. इस दौरान IRCTC और सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) के आला अधिकारियों ने युवाओं से फीडबैक भी लिया, ताकि कमियों को पहले ही सुधारा जा सके.पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) से होगा सीधा इंटीग्रेशनइस नई वेबसाइट की सबसे बड़ी ताकत इसका बैकएंड सिस्टम होगा. इसे सीधे भारतीय रेलवे के पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) से जोड़ा जा रहा है, जो पूरे देश में रेलवे टिकटों के मैनेजमेंट का मुख्य कोर सिस्टम है. पीआरएस के साथ इस सीधे इंटीग्रेशन (जुड़ाव) के पूरा होने के बाद, सर्वर डाउन होने या पेमेंट फेल होने जैसी तकनीकी रुकावटें लगभग खत्म हो जाएंगी और यात्रियों को बिना किसी बफरिंग के बेहद स्मूथ बुकिंग एक्सपीरियंस मिलेगा.IRCTC की नई वेबसाइट में देखने को मिलेंगे ये 5 बड़े बदलावअनावश्यक विज्ञापनों और पॉप-अप से मुक्ति: नई वेबसाइट का होमपेज बेहद साफ-सुथरा और सरल होगा. टिकटिंग को तेज करने के लिए बेवजह के पॉप-अप विज्ञापन, भारी-भरकम चमकदार ग्राफिक्स और बार-बार आने वाले इरिटेटिंग कैप्चा (Captcha) को हटा दिया जाएगा, जिससे तत्काल बुकिंग के दौरान यात्रियों के कीमती सेकंड बचेंगे.सभी क्लास की सीटें दिखेंगी एक साथ: वर्तमान में यात्रियों को स्लीपर (Sleeper), थर्ड एसी (3AC) या सेकेंड एसी (2AC) की उपलब्धता देखने के लिए हर क्लास पर अलग-अलग क्लिक करना पड़ता है. लेकिन नई वेबसाइट में एक ही स्क्रीन पर सभी उपलब्ध क्लासों की सीटों की स्थिति (Seat Availability) एक साथ दिखाई देगी, जिससे तुलना करना आसान हो जाएगा.कम स्क्रीन और मिनिमम क्लिक्स: अब टिकट बुक करने के लिए यात्रियों को कई सारी स्क्रीन्स और फॉर्म्स से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूरी बुकिंग को 'मिनिमम क्लिक्स' में समेट दिया गया है, जिससे चंद सेकंड्स में टिकट जेनरेट हो जाएगा.फैमिली डिटेल्स सेव करने का विकल्प: जो यात्री अक्सर अपने परिवार या दोस्तों के लिए टिकट बुक करते हैं, उनके लिए मास्टर लिस्ट फीचर को और एडवांस किया गया है. यात्री अपने परिवार के सदस्यों की जानकारी (नाम, उम्र, बर्थ प्रेफरेंस) पहले से परमानेंट सेव रख सकेंगे, ताकि बुकिंग के वक्त दोबारा टाइपिंग में समय बर्बाद न हो.जुलाई में पेश करने की तैयारी: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पहले ही यह बड़ी घोषणा कर चुके हैं कि नई आधुनिक आईआरसीटीसी (IRCTC) वेबसाइट को जुलाई के महीने में ही देश के सामने पेश किया जाएगा. फिलहाल इसका बीटा ट्रायल अंतिम चरण में है और अगले कुछ ही महीनों में यह सभी के लिए पूरी तरह रोलआउट कर दी जाएगी.
Deepika Padukone Second Pregnancy Update: बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) इन दिनों अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी (Second Pregnancy) के खूबसूरत लेकिन चुनौतीपूर्ण सफर का आनंद ले रही हैं. वह और उनके पति रणवीर सिंह (Ranveer Singh) जल्द ही अपने घर में एक और नन्हे मेहमान का स्वागत करने वाले हैं. भले ही दीपिका पिछले कुछ समय से बड़े पर्दे और लाइमलाइट से थोड़ी दूरी बनाए हुए हैं, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए वह अपने फैंस के साथ जुड़ी रहती हैं. हाल ही में उन्होंने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक ऐसी मजेदार और रिलेटेबल स्टोरी शेयर की है, जिसने हर होने वाली मां का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.बाथरूम जाने की चुनौती पर दीपिका ने शेयर किया मजेदार वीडियोप्रेग्नेंसी के आखिरी महीनों यानी थर्ड ट्राइमेस्टर (3rd Trimester) में महिलाओं को कई तरह की शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. दीपिका ने ठीक इसी स्थिति को बयां करती हुई एक रील (Video) अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर रीपोस्ट की. इस वीडियो में एक गर्भवती महिला रात के समय भारी शरीर के साथ बड़ी मुश्किल से धीरे-धीरे बाथरूम की तरफ कदम बढ़ाती नजर आ रही है.इस रील के कैप्शन में लिखा था— तीसरी तिमाही में रात को बार-बार बाथरूम जाने के लिए उठना. दीपिका ने इस वीडियो को एक उल्टे स्माइली इमोजी (Upside-Down Face Emoji) के साथ शेयर किया है, जिससे साफ पता चलता है कि वे खुद भी इन दिनों ठीक इसी स्थिति और थकावट से जूझ रही हैं.दीपिका का अपडेट देख फैंस ने बरसाया भरपूर प्यारदीपिका की यह स्टोरी सामने आते ही सोशल मीडिया पर उनके फैंस के रिएक्शन की बाढ़ आ गई. कई महिलाओं ने कमेंट कर कहा कि यह परेशानी लगभग हर होने वाली मां महसूस करती है.एक फैन ने लिखा, दुआ का छोटा भाई या बहन जल्द ही आने वाला है, आप बहुत मजबूत हैं दीपिका, आप यह कर सकती हैं.वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, काश मैं इस समय अपनी पसंदीदा एक्ट्रेस की कोई मदद कर पाती.ज्यादातर फैंस इस बात से खुश दिखे कि दीपिका ने काफी समय बाद अपनी प्रेग्नेंसी से जुड़ा कोई पर्सनल अपडेट साझा किया है.डेढ़ साल बाद ही दी दूसरी प्रेग्नेंसी की गुड न्यूज़दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की शादी के 5 साल बाद, साल 2024 में उनके घर पहली बेटी 'दुआ' (Dua) का जन्म हुआ था. दुआ के एक साल के होने पर कपल ने उसकी बेहद प्यारी तस्वीरें भी फैंस के साथ शेयर की थीं. बेटी के जन्म के करीब डेढ़ साल बाद ही, इस साल की शुरुआत में दीपिका-रणवीर ने एक बेहद अनोखे अंदाज में अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की खुशखबरी दी थी. उन्होंने एक फोटो शेयर की थी जिसमें उनकी नन्ही बेटी दुआ एक पॉजिटिव प्रेग्नेंसी टेस्ट किट पकड़े नजर आई थी.वर्कफ्रंट: मां बनने के बाद इन फिल्मों से करेंगी धमाकाप्रेग्नेंसी के इस फेज में होने के बावजूद दीपिका के पास बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के कई मेगा-बजट प्रोजेक्ट्स हैं, जो आने वाले समय में बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाने के लिए तैयार हैं:'किंग' (King): निर्देशक सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में बन रही यह मोस्ट अवेटेड फिल्म इसी साल 24 दिसंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. इस एक्शन-थ्रिलर फिल्म में दीपिका के साथ शाहरुख खान, सुहाना खान, अभिषेक बच्चन, जयदीप अहलावत, राघव जुयाल और अरशद वारसी जैसे दिग्गज कलाकार मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे.'राका' (Raka): इसके अलावा दीपिका साउथ के मशहूर डायरेक्टर एटली (Atlee) की आगामी फिल्म 'राका' में नजर आएंगी. इस फिल्म में वह पहली बार साउथ के सुपरस्टार अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) के साथ स्क्रीन शेयर करती दिखेंगी, जिसकी शूटिंग फिलहाल चल रही है.
Jammu Kashmir Politics: जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर हॉर्स-ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) का बेहद गंभीर आरोप लगाया है. शनिवार (11 जुलाई 2026) को एक जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम उमर अब्दुल्ला ने दावा किया कि भाजपा ने जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) के एक विधायक को पाला बदलने के लिए 20 से 30 करोड़ रुपये और कैबिनेट मंत्री पद का तगड़ा लालच दिया था.मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके विधायक ने इस बड़े ऑफर को तुरंत ठुकरा दिया और पूरी घटना की जानकारी सीधे उन्हें दी. इस खुलासे के बाद घाटी से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा चढ़ गया है.'सुप्रीम कोर्ट के वकील और बीजेपी नेता ने बंद कमरे में दिया ऑफर'उमर अब्दुल्ला ने बिना नाम लिए भाजपा के एक बड़े पदाधिकारी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, भाजपा के एक अधिकारी, जो सुप्रीम कोर्ट के वकील भी हैं, उन्होंने जम्मू क्षेत्र से आने वाले मेरे एक विधायक से बंद कमरे में मुलाकात की. उन्होंने विधायक से कहा कि तुम हमारे साथ आ जाओ, हम तुम्हें 20-30 करोड़ रुपये, एक मंत्रालय और राज्य का दर्जा देंगे.इस पर तीखा पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि क्या भाजपा को लगता है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं का ईमान और जनता का विश्वास इतना सस्ता है कि उसे पैसों से खरीदा जा सके?'पिछले दरवाजे से सत्ता में आने की कोशिश कर रही है BJP'उमर अब्दुल्ला ने भाजपा को सीधे चेतावनी देते हुए कहा कि वे नेशनल कॉन्फ्रेंस को कमजोर आंकने की भूल कतई न करें. उन्होंने कहा, भाजपा के लोगों, हमें इतना कमजोर मत समझो. आपके लिए पिछले दरवाजे (चोर दरवाजे) से सत्ता में एंट्री करना मुमकिन नहीं है. आप पिछले दरवाजे से आगे की कुर्सी (मुख्यमंत्री की कुर्सी) तक नहीं पहुंच पाएंगे. फिलहाल जम्मू-कश्मीर की जनता ने आपको विपक्ष में यानी पीछे बैठाया है और आप वहीं रहेंगे.अनुमति न मिलने पर भी 20 जुलाई को दिल्ली में होगा महा-प्रदर्शनजम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य (Full Statehood) का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस आगामी 20 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन करने जा रही है. मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस द्वारा इस प्रदर्शन की अनुमति अभी तक नहीं दी गई है.उमर अब्दुल्ला का संकल्प: अनुमति मिले या न मिले, हमारा 20 जुलाई का कार्यक्रम तय है और यह आगे बढ़ेगा. यह लड़ाई केवल नेशनल कॉन्फ्रेंस की नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर के हर नागरिक और हर राजनीतिक दल की है.उन्होंने घाटी के सभी वर्तमान व पूर्व विधायकों और सभी विपक्षी दलों के नेताओं से अपील की कि वे अगले तीन साल के लिए चुनावी रंजिशों और लड़ाइयों को भूल जाएं और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की इस साझा लड़ाई में एकजुट होकर दिल्ली आएं. उन्होंने कहा कि जो नेता डर या दबाव के कारण इस प्रदर्शन से दूर रहेंगे, वे जनता के साथ विश्वासघात करेंगे.'कॉकरोच पार्टी' को 24 घंटे में मिली इजाजत, हमें क्यों नहीं?दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति को लेकर आ रही दिक्कतों पर तंज कसते हुए सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा, एक 'कॉकरोच पार्टी' को दिल्ली में प्रदर्शन करने की अनुमति मिलने में 24 घंटे भी नहीं लगे, जबकि हम पिछले 4-5 दिनों से अनुमति की कोशिश कर रहे हैं. कुछ ताकतें जानबूझकर हमारे इस बड़े कार्यक्रम को बिगाड़ने की साजिश रच रही हैं और उन्होंने जानबूझकर अपनी तारीखें हमारे कार्यक्रम के साथ मिला दी हैं.आर्टिकल 370 हटने के बाद से जारी है राज्य के दर्जे की मांगगौरतलब है कि अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 (Article 370) को निरस्त कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में विभाजित कर दिया था. इसके बाद साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र के इस फैसले को संवैधानिक रूप से बरकरार रखा था. हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में भरोसा दिया था कि घाटी में स्थिति पूरी तरह सामान्य होने पर जम्मू-कश्मीर को दोबारा पूर्ण राज्य का दर्जा लौटा दिया जाएगा. नेशनल कॉन्फ्रेंस इसी वादे को पूरा कराने के लिए अब दिल्ली में हुंकार भरने की तैयारी में है.
Women Health Warning Signs : आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं परिवार, ऑफिस और घर की दोहरी जिम्मेदारियों को निभाते-निभाते अपनी सेहत का ख्याल रखना ही भूल जाती हैं. कई बार शरीर में दिखने वाले छोटे-मोटे बदलावों या हल्की तकलीफों को वे रोजमर्रा की थकावट समझकर नजरअंदाज कर देती हैं. लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स और डॉक्टरों ने सख्त चेतावनी दी है कि महिलाओं को अपने शरीर से मिलने वाले कुछ खास सिग्नल्स को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. हार्मोनल बदलाव, बढ़ता तनाव और खराब लाइफस्टाइल कई बार शुरुआत में मामूली दिखने वाले लक्षणों के जरिए किसी बड़ी और जानलेवा बीमारी की ओर इशारा कर रहे होते हैं.महिलाओं के लिए 5 सबसे बड़े 'वार्निंग साइन्स' (Warning Signs)1. लगातार गंभीर थकान और अचानक आई कमजोरीअगर आप बिना ज्यादा शारीरिक काम किए भी हर वक्त अत्यधिक थकान, सुस्ती या कमजोरी महसूस करती हैं, तो यह शरीर में पोषक तत्वों की भारी कमी का संकेत है.संभावित कारण: महिलाओं में यह समस्या मुख्य रूप से आयरन की कमी (एनीमिया), हार्मोनल असंतुलन या थायराइड की बीमारी के कारण होती है.स्ट्रोक का खतरा: विशेषज्ञों के अनुसार, अगर शरीर में अचानक से तेज कमजोरी महसूस हो, जुबान लड़खड़ाने लगे, चलने में दिक्कत आए या कंफ्यूजन हो, तो यह स्ट्रोक (Stroke) का शुरुआती लक्षण हो सकता है, जिसके लिए तुरंत इमरजेंसी मेडिकल हेल्प की जरूरत होती है.2. अनियमित पीरियड्स और हेवी ब्लीडिंगपीरियड्स का समय पर आना एक स्वस्थ महिला की सबसे बड़ी पहचान है. यदि आपके पीरियड्स का साइकिल अनियंत्रित हो गया है, बहुत ज्यादा या बहुत कम ब्लीडिंग हो रही है, तो इसे सामान्य समझने की भूल न करें.संभावित कारण: बार-बार पीरियड्स का अनियमित होना थायराइड, पीसीओडी (PCOD), पीसीओएस (PCOS) या गर्भाशय में फाइब्रॉएड (गांठ) होने का पुख्ता संकेत हो सकता है. इसके अलावा, संबंध बनाने (सेक्स) के दौरान होने वाले तेज दर्द को भी महिलाओं को गंभीरता से लेना चाहिए.3. बार-बार पेट फूलना (ब्लोटिंग) और पाचन की खराबीपीरियड्स आने से ठीक पहले थोड़ा गैसी महसूस होना एक सामान्य प्रक्रिया है. लेकिन अगर आपको बिना किसी वजह के रोजाना पेट में सूजन, भारीपन या गंभीर ब्लोटिंग बनी रहती है, तो यह खतरे की घंटी है.संभावित कारण: गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट और गायनेकोलॉजिस्ट के अनुसार, लगातार बनी रहने वाली ब्लोटिंग इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS), एंडोमेट्रियोसिस या बेहद खतरनाक ओवेरियन कैंसर (अंडाशय का कैंसर) का भी शुरुआती लक्षण हो सकती है.4. बिना किसी कारण के अचानक वजन का घटना या बढ़नायदि आप अपनी डाइट या एक्सरसाइज में कोई बदलाव नहीं कर रही हैं, फिर भी आपका वजन अचानक से तेजी से बढ़ रहा है या बहुत ज्यादा घट रहा है, तो समझ लें कि शरीर के अंदरूनी सिस्टम में कुछ गड़बड़ है.संभावित कारण: यह मुख्य रूप से मेटाबॉलिज्म की खराबी, गंभीर थायराइड की समस्या या गंभीर हार्मोनल असंतुलन के कारण होता है. खासकर 30 की उम्र पार करने के बाद वजन में आने वाले ऐसे अप्रत्याशित बदलावों पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.5. ब्रेस्ट साइज में बदलाव या असामान्य वजाइनल डिस्चार्जअपने शरीर की बनावट पर बारीकी से नजर रखना बेहद जरूरी है.स्तन में गांठ: ब्रेस्ट (स्तन) के साइज में अचानक कोई बदलाव दिखना या वहां किसी भी तरह की गांठ (Lump) महसूस होना फाइब्रोएडीनोमा जैसी साधारण स्थिति से लेकर ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) तक की वजह बन सकता है.असामान्य डिस्चार्ज: इसके अतिरिक्त, यदि वजाइनल डिस्चार्ज (योनि स्राव) में अत्यधिक बदबू हो, वह बहुत गाढ़ा हो या उसका रंग लाल, गुलाबी या मटमैला दिखाई दे, तो यह गंभीर यीस्ट इंफेक्शन या अन्य आंतरिक संक्रमण का लक्षण है, जिसके लिए तुरंत गायनेकोलॉजिस्ट से चेकअप कराना अनिवार्य है.कब और क्यों जरूरी है डॉक्टर से संपर्क करना?चिकित्सकों का कहना है कि 30 की उम्र पार करने के बाद महिलाओं का शरीर तेजी से बदलता है. ऐसे में अगर हड्डियों में लगातार दर्द रहे, त्वचा पर असामान्य चकत्ते या बदलाव दिखें या अत्यधिक थकान बनी रहे, तो तुरंत हेल्थ चेकअप कराएं. बीमारियां हमेशा अचानक नहीं आतीं, बल्कि वे शरीर में बहुत धीरे-धीरे पनपती हैं और शुरुआती लक्षणों को इग्नोर करने पर भविष्य में बड़ी मुसीबत बन जाती हैं. महिलाओं को अपनी सेहत को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए और साल में कम से कम एक बार रूटीन बॉडी चेकअप जरूर कराना चाहिए.

34 C
