दिल्ली के अलीपुर में बड़ा हादसा, भरभराकर ढहा निर्माणाधीन गोदाम
दिल्ली के आउटर नॉर्थ जिले के अलीपुर के बुधपुर इलाके में निर्माणाधीन गोदाम का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया. हादसे के बाद पुलिस, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं. शुरुआती जानकारी में दो लोगों के मलबे में दबने की बात सामने आई.
हिमाचल के ऊंचे पर्वतीय इलाकों में ट्रेकिंग पर लगे कड़े प्रतिबंध और सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक सख्ती
देवभूमि हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक खूबसूरती, ऊंचे-ऊंचे बर्फ से ढके पहाड़ और रोमांचक ट्रैक देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के एडवेंचर प्रेमियों को हमेशा से अपनी ओर आकर्षित करते रहे हैं। लेकिन हाल के दिनों में मौसम के बदलते मिजाज, लगातार हो रहे भूस्खलन, बादल फटने की घटनाओं और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पर्यटकों के फंसने के बढ़ते मामलों को देखते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन ने एक बहुत बड़ा और सख्त कदम उठाया है। प्रशासन ने राज्य में 3000 मीटर यानी लगभग 10,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले सभी ट्रेकिंग रूट्स और पर्वतीय मार्गों पर अग्रिम आदेशों तक पूरी तरह से रोक लगा दी है। पर्वतारोहण और ट्रेकिंग के शौकीन लोग अक्सर बिना मौसम की स्थिति का आंकलन किए जोखिम भरे रास्तों पर निकल जाते हैं, जिससे उनकी जान पर बड़ा खतरा बन जाता है। इस कड़े फैसले के बाद अब कोई भी व्यक्ति या ट्रेकिंग दल अपनी मर्जी से इन ऊंचाई वाले रास्तों पर सफर नहीं कर सकेगा। पर्यटन विभाग और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि पर्यटकों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, और जब तक मौसम पूरी तरह से अनुकूल नहीं हो जाता और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित नहीं किए जाते, तब तक इस प्रतिबंध में किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी। इस अचानक लगे बैन के बाद से उन हजारों सैलानियों और ट्रेकर्स के बीच हड़कंप मच गया है जिन्होंने महीनों पहले से अपनी बुकिंग करवा रखी थी और अपने गर्मियों या छुट्टियों के प्लान बना चुके थे।यदि आपने गाइड को दे दिए हैं पैसे और बुक कर लिया है पैकेज, तो अब आगे क्या करें और कैसे मिलेगी अनुमतिजो सैलानी पहले ही अपनी ट्रेकिंग की योजना बना चुके हैं, एडवांस बुकिंग करा चुके हैं और स्थानीय गाइड या ट्रेकिंग एजेंसियों को हजारों-लाखों रुपये का भुगतान कर चुके हैं, उनके मन में अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि उनके पैसों का क्या होगा और क्या उन्हें किसी भी स्थिति में यात्रा करने की अनुमति मिल सकती है। इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों और टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि जिन लोगों ने अधिकृत और पंजीकृत (Registered) एजेंसियों के माध्यम से बुकिंग की है, वे संबंधित एजेंसी से संपर्क करके अपने पैसों की रिफंड पॉलिसी या डेट री-शेड्यूलिंग (Date Rescheduling) के बारे में बात कर सकते हैं। इसके अलावा, यदि कोई ट्रेकर ग्रुप विशेष वैज्ञानिक या व्यावसायिक शोध के उद्देश्य से या फिर बेहद अनुभवी पर्वतारोही के रूप में जाना चाहता है, तो उसे जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) से लिखित रूप में विशेष अनुमति लेनी होगी। इस अनुमति को पाने के लिए ट्रेकर्स को अपना पूरा फिटनेस सर्टिफिकेट, मेडिकल रिपोर्ट, यात्रा का रूट मैप, आपातकालीन बचाव योजना (Emergency Evacuation Plan) और पंजीकृत गाइड का पूरा ब्योरा प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। प्रशासन केवल उन्हीं मामलों में सीमित अनुमति देगा जहां सुरक्षा के सभी मानदंडों का शत-प्रतिशत पालन किया जा रहा हो, अन्यथा अनाधिकृत रूप से ट्रेकिंग करते पकड़े जाने पर कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।सुरक्षित पर्यटन और साहसिक खेलों के नए नियम, ट्रेकर्स के लिए सरकार की सख्त गाइडलाइंसहिमाचल प्रदेश में बढ़ते पर्यटन के साथ-साथ पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार अब पूरी तरह से गंभीर और एक्टिव मोड में नजर आ रही है। आए दिन पहाड़ों पर होने वाले हादसों को रोकने के लिए यह जरूरी हो गया था कि साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) के क्षेत्र में कड़े नियम लागू किए जाएं। नई गाइडलाइंस के तहत अब हर ट्रेकिंग एजेंसी के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे बिना प्रशासन की पूर्व अनुमति के किसी भी पर्यटक को 3000 मीटर से ऊपर के ट्रैक पर न ले जाएं। इसके साथ ही, ट्रेकर्स के पास सैटेलाइट फोन, जीपीएस ट्रैकर और पर्याप्त मात्रा में मेडिकल किट होना भी जरूरी कर दिया गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत संपर्क साधा जा सके। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही इस प्रतिबंध से शुरुआती दौर में पर्यटन कारोबार को थोड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा हो, लेकिन यह लंबी अवधि में पर्यटकों की जान बचाने के लिए एक बेहद सराहनीय और जरूरी कदम है। पहाड़ों की यात्रा हमेशा रोमांचक होती है, लेकिन लापरवाही कई बार भारी पड़ जाती है, इसलिए प्रशासन के इन नए नियमों का पालन करना हर पर्यटक और ट्रेकर की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। यदि आप भी आने वाले दिनों में हिमाचल के पहाड़ों की सैर या ट्रेकिंग का प्लान बना रहे हैं, तो यात्रा पर निकलने से पहले ताजा मौसम अपडेट और आधिकारिक दिशा-निर्देशों की पूरी जानकारी जरूर हासिल कर लें, ताकि आपकी छुट्टियां बिना किसी परेशानी के सुरक्षित और यादगार बन सकें।
भारत के सुरक्षा बलों और छत्तीसगढ़ पुलिस ने लाल आतंक के खिलाफ चलाए जा रहे अपने अभियानों के इतिहास में एक ऐसा सनसनीखेज और अभूतपूर्व अध्याय जोड़ दिया है, जिसके बारे में शायद ही किसी ने कल्पना की होगी। छत्तीसगढ़ के सबसे संवेदनशील और माओवादी प्रभावित माने जाने वाले बस्तर क्षेत्र के घने जंगलों और बीहड़ों के भीतर सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने एक ऐसा खुफिया अभियान चलाया, जिसने नक्सलियों की पूरी आर्थिक कमर तोड़कर रख दी है। सुरक्षा बलों को लंबे समय से इस बात की पुख्ता खुफिया जानकारियां मिल रही थीं कि बस्तर के इन अछूते और दुर्गम इलाकों में नक्सलियों के शीर्ष कमांडरों ने भारी मात्रा में अवैध हथियार, गोला-बारूद और बेहिसाब संपत्ति छुपा रखी है। इसी इनपुट के आधार पर सुरक्षा बलों के सैकड़ों जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर जंगलों के भीतर कई किलोमीटर पैदल मार्च किया और नक्सलियों के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ठिकानों को चारों तरफ से घेर लिया। जैसे ही पुलिस ने चिन्हित स्थानों पर आधुनिक मेटल डिटेक्टर्स और अर्थ-मूविंग टूल्स की मदद से खुदाई शुरू की, तो जमीन के भीतर का ऐसा खौफनाक और हैरान कर देने वाला सच बाहर आया जिसे देखकर खुद ऑपरेशन में शामिल सुरक्षा अधिकारी भी अछंभे में पड़ गए। माओवादी संगठन जो हमेशा गरीबों और आदिवासियों के नाम पर हथियार उठाने का ढोंग करते हैं, वे असल में जंगलों के भीतर अकूत अवैध संपत्ति और खजाने के मालिक बनकर बैठे थे, जिसका पर्दाफाश अब पूरी दुनिया के सामने हो चुका है।जमीन के भीतर गाड़े गए ड्रमों से निकला सोने के बिस्किट का जखीरा और आधुनिक घातक हथियारों का बड़ा जंजालइस सनसनीखेज सर्च ऑपरेशन के दौरान जब सुरक्षा बलों ने बस्तर के जंगलों में एक खास जगह की खुदाई की, तो उन्हें जमीन के कई फीट नीचे प्लास्टिक के भारी-भरकम और एयर-टाइट ड्रम दबे हुए मिले। जब इन ड्रमों को सावधानीपूर्वक बाहर निकालकर काटा गया, तो अंदर का नजारा किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था। उन ड्रमों के भीतर से सोने के चमकदार बिस्किट, करोड़ों रुपये की बेहिसाब नकदी और देश-विदेश में प्रतिबंधित अत्याधुनिक हथियार बरामद हुए। नक्सलियों के इस खजाने में आधुनिक असॉल्ट राइफलें जैसे कि AK-47, इंसास और अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर के साथ-साथ भारी मात्रा में कारतूस और विस्फोटक सामग्रियां भरी हुई थीं। माओवादी दशकों से इन जंगलों में बैठकर अवैध वसूली, लेवी वसूलने, ठेकेदारों से रंगदारी और सरकारी योजनाओं के फंड को लूटकर जो काला धन इकट्ठा कर रहे थे, उसे उन्होंने इस तरह जमीन के नीचे सुरक्षित छुपा रखा था ताकि आपातकाल के समय या पुलिस की दबिश के दौरान इसका इस्तेमाल किया जा सके। इतने बड़े पैमाने पर सोने के बिस्किट और हथियारों का मिलना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि बस्तर के भोले-भाले आदिवासियों को बरगलाकर नक्सली संगठन केवल अपनी तिजोरी भरने और आपराधिक साम्राज्य को मजबूत करने का काम कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह जब्ती पिछले कई दशकों में नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान पकड़ी गई सबसे बड़ी संपत्तियों में से एक है, जिससे माओवादियों के शीर्ष नेतृत्व को मानसिक और आर्थिक रूप से बहुत बड़ा आघात लगा है।लाल आतंक के खात्मे की ओर एक और बड़ा कदम, बस्तर की बदलती तस्वीर और सुरक्षा बलों की ऐतिहासिक कामयाबीबस्तर के जंगलों से नक्सलियों के इस गुप्त खजाने और हथियारों के जखीरे का बरामद होना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि अब सुरक्षा बलों की पहुंच उन गुप्त ठिकानों तक भी हो चुकी है जिन्हें नक्सली कभी अपना अजय किला मानते थे। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त रणनीतिक नीतियों, सुरक्षा कैंपों के विस्तार और विकास कार्यों के कारण नक्सलियों का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है, और अब उनके पास न तो सुरक्षित ठिकाने बचे हैं और न ही जनता का समर्थन। जब आदिवासियों को यह सच्चाई पता चलती है कि उनके तथाकथित क्रांतिकारी नेता जंगलों में सोने के बिस्किट और अवैध हथियारों के ढेर दबाकर ऐश की जिंदगी जी रहे हैं, तो उनका मोहभंग तेजी से हो रहा है और वे मुख्यधारा में लौटने लगे हैं। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब इस बात की गहनता से जांच कर रही हैं कि इस खजाने को छिपाने में किन-किन बाहरी तस्करों, सफेदपोश सहयोगियों और भूमिगत मददगारों का हाथ था, ताकि उन तक भी कानून का शिकंजा कसा जा सके। बस्तर के इन सुदूर जंगलों में मिली यह सफलता भारतीय सुरक्षा बलों के अदम्य साहस, उनकी पैनी रणनीति और पक्के इरादों की एक ऐसी मिसाल बन चुकी है जो आने वाले समय में देश से नक्सलवाद के पूर्ण सफाए की इबारत लिखने का काम करेगी।
दिल्ली समेत चार हाईकोर्ट में कुल 14 नए जजों की नियुक्ति
दिल्ली हाईकोर्ट को जल्द सात नए जज मिलने जा रहे हैं. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर सात नामों को मंजूरी दे दी है. सोमवार को शपथ के बाद ये जज न्यायिक जिम्मेदारी संभाल सकते हैं. वहीं, आठवें नाम गुरविंदर पाल सिंह की नियुक्ति फिलहाल लंबित है.
पत्रकार Ravi Nair की गिरफ्तारी पर Gujarat High Court ने सरकार और Adani Enterprises को भेजा नोटिस
गुजरात उच्च न्यायालय ने पत्रकार रवि नायर की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार और ‘अदाणी एंटरप्राइजेज’ को नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति एम. के. ठक्कर की एकल पीठ ने शनिवार को प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और मामले को आगे की सुनवाई के लिए सोमवार को सूचीबद्ध किया। गांधीनगर की एक जिला अदालत ने मानहानि के मामले में नायर की दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई के दौरान पत्रकार के व्यक्तिगत रूप से पेश न होने पर गैर-जमानती वारंट जारी किया था। इसके बाद 17 सितंबर को नायर को गिरफ्तार कर लिया गया। मानसा अदालत ने नायर की कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और खबरों को लेकर ‘अदाणी एंटरप्राइजेज’ की ओर से उनके खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि के मामले में इस साल 10 फरवरी को उन्हें एक साल के कारावास की सजा सुनाई थी। नायर ने गांधीनगर की एक अपीलीय अदालत में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती दी थी। अदालत ने इस शर्त पर नौ मार्च को उन्हें जमानत दे दी थी कि वह अपील की सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होंगे। नायर के वकीलों ने कहा कि खराब स्वास्थ्य के कारण पत्रकार तीन सितंबर को सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, क्योंकि उन्हें अपने गृह राज्य केरलम से यात्रा करनी थी। वकीलों का दावा है कि अपीलीय अदालत ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट देने की उनकी याचिका खारिज कर दी और बिना किसी पूर्व सूचना के उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया जिस पर 17 सितंबर तक अमल किया जाना था। अदालत ने नायर को हिरासत में लेने का निर्देश दिया, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। उच्च न्यायालय ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष जल्द से जल्द सुनवाई का अनुरोध किए जाने के बाद शनिवार शाम नायर की याचिका पर सुनवाई की। आवेदन में कहा गया था कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 21 और व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा है। नायर ने अपने वकील रोनित जॉय और अभिक चिमनी के माध्यम से दाखिल हलफनामे में कहा कि जिला अदालत ने पहले समन या जमानती वारंट जारी किए बिना सीधे गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। उन्होंने दावा किया कि यह एक मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश के विपरीत है। उन्होंने उच्च न्यायालय में दायर अपनी याचिका में कहा कि 17 सितंबर को अदालत के समक्ष उपस्थित होने और वारंट रद्द करने का अनुरोध करते हुए आवेदन दायर करने के बावजूद जिला अदालत ने आवेदन खारिज कर दिया तथा उन्हें हिरासत में लेने का आदेश पारित कर दिया।
एशियन गेम्स के ठीक पहले ट्रेनिंग कैंप में मची अफरा-तफरी, वरुण सान्याल के साथ हुआ बड़ा हादसा
अंतरराष्ट्रीय खेल जगत से भारत के लिए एक बेहद निराशाजनक और दिल तोड़ने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने देश भर के खेल प्रेमियों को गहरे सदमे में डाल दिया है। मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स यानी एमएमए (MMA) की दुनिया में भारत का नाम रौशन करने वाले स्टार फाइटर वरुण सान्याल (Varun Sanyal) आगामी एशियन गेम्स से आधिकारिक रूप से बाहर हो चुके हैं। उनके इस तरह अचानक बाहर होने की मुख्य वजह उनकी कोई चोट नहीं, बल्कि रिंग में उतरने से ठीक पहले वजन घटाने (Weight Cutting) के लिए की गई बेहद कठिन और खतरनाक ट्रेनिंग प्रक्रिया बनी है। खेल जगत के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रतियोगिता के तय वजन वर्ग (Weight Category) में आने के लिए वरुण पिछले कई दिनों से अत्यधिक पसीना बहा रहे थे और उन्होंने अपने खान-पान पर बेहद कड़ा नियंत्रण रखा हुआ था। इसी अत्यधिक शारीरिक और मानसिक दबाव के बीच अचानक उनका शरीर जवाब दे गया और वे ट्रेनिंग सेशन के दौरान ही बुरी तरह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। जैसे ही यह घटना घटी, वैसे ही कैंप में मौजूद कोचों और सपोर्ट स्टाफ के हाथ-पांव फूल गए और उन्हें तुरंत बिना किसी देरी के नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज शुरू किया गया। इस अप्रत्याशित घटना ने एक बार फिर से कॉम्बैट स्पोर्ट्स में खिलाड़ियों द्वारा वजन घटाने के नाम पर उठाए जाने वाले जानलेवा जोखिमों और उसकी वैज्ञानिक सीमाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस पर खेल विशेषज्ञों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है।वजन घटाने का जानलेवा खेल और एमएमए फाइटर्स की शारीरिक सीमाओं का कड़ा इम्तिहानमिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) या बॉक्सिंग जैसे खेलों में यह एक आम चलन है कि खिलाड़ी अपने नेचुरल वेट क्लास से नीचे उतरकर खेलने के लिए कुछ ही दिनों में कई-कई किलोग्राम वजन तेजी से कम करते हैं, जिसे तकनीकी भाषा में 'एक्सट्रीम वेट कटिंग' कहा जाता है। वरुण सान्याल भी अपनी कैटेगिरी के मुताबिक तय वजन सीमा को पार करने के लिए पिछले कुछ हफ्तों से लगातार डिहाइड्रेशन (शरीर से पानी की कमी) और अत्यधिक कठोर वर्कआउट के दौर से गुजर रहे थे। शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की भारी कमी होने के कारण उनके आंतरिक अंगों और तंत्रिका तंत्र पर बहुत अधिक दबाव पड़ गया, जिसे उनका शरीर सहन नहीं कर पाया। जब कोई एथलीट अपने शरीर को भूखा रखकर और बिना पानी पिए घंटों पसीना बहाता है, तो मस्तिष्क और हृदय को मिलने वाला रक्त संचार बाधित हो जाता है, जिससे बेहोशी या कार्डियक अरेस्ट जैसी खतरनाक स्थितियां पैदा हो जाती हैं। वरुण के साथ भी ठीक ऐसा ही हुआ, जहां मेडल जीतने की दीवानगी और देश के लिए स्वर्ण पदक हासिल करने के जुनून ने उन्हें अपनी शारीरिक क्षमता से कहीं अधिक आगे जाने पर मजबूर कर दिया। इस घटना ने देश भर के खेल अकादमियों और न्यूट्रिशनिस्ट्स को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या खिलाड़ियों की सुरक्षा से समझौता करके उन्हें इस तरह के जानलेवा वजन घटाने के चक्रव्यूह में धकेलना उचित है या नहीं।मेडल की उम्मीदों को लगा करारा झटका, वरुण सान्याल के एशियन गेम्स से बाहर होने का देश को मलालवरुण सान्याल का इस तरह से अचानक एशियन गेम्स से बाहर होना न केवल उनके व्यक्तिगत खेल करियर के लिए एक बहुत बड़ा झटका है, बल्कि यह भारत की मेडल तालिका (Medal Tally) के लिए भी एक अपूरणीय क्षति के समान है। देश को उनसे स्वर्ण पदक जीतने की बहुत अधिक उम्मीदें थीं, क्योंकि वे अपनी बेहतरीन ग्रैपलिंग और स्ट्राइकिंग स्किल्स के लिए जाने जाते हैं। इस प्रतिष्ठित बहु-खेल महाकुंभ में भाग लेने के लिए उन्होंने पिछले कई महीनों से दिन-रात एक करके पसीना बहाया था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जब अस्पताल में होश आने के बाद उन्हें यह पता चला कि वे अब इस टूर्नामेंट का हिस्सा नहीं बन पाएंगे और उन्हें डॉक्टर की सख्त सलाह पर पूरी तरह से रेस्ट करना होगा, तो उनका और उनके कोचों का दिल टूट गया। खेल मंत्रालय और भारतीय एमएमए महासंघ ने उनके इस स्वास्थ्य संकट पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उनके जल्द से जल्द पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना की है। साथ ही, इस घटना के बाद खेल प्रशासन ने भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए खिलाड़ियों के स्वास्थ्य प्रबंधन और वैज्ञानिक न्यूट्रिशन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश जारी किए हैं, ताकि किसी भी अन्य एथलीट को इस तरह के खतरनाक दौर से न गुजरना पड़े। वरुण सान्याल की यह कहानी हर उस युवा एथलीट के लिए एक बड़ी सीख है जो खेल में सफलता पाने के लिए अपनी सेहत को दांव पर लगा देते हैं, क्योंकि जान है तो जहान है और खेल का मैदान तभी खूबसूरत लगता है जब खिलाड़ी सुरक्षित और स्वस्थ रहता है।
गुजरात से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर जमुई पहुंची नाबालिग प्रेमिका और फिल्मी अंदाज में रचाई शादी
प्यार की कोई सरहद नहीं होती और न ही उम्र या दूरी इसके आड़े आती है, इस बात को साबित करती हुई एक बेहद चौंकाने वाली और फिल्मी कहानी इन दिनों बिहार के जमुई जिले से सामने आई है। इस प्रेम प्रसंग की शुरुआत देश के पश्चिमी छोर पर स्थित गुजरात की धरती से हुई, जहां एक नाबालिग लड़की का दिल जमुई जिले के रहने वाले एक युवक पर आ गया। दोनों के बीच फोन पर हुई बातचीत धीरे-धीरे गहरे प्यार में बदल गई और मिलने-मिलाने का सिलसिला शुरू हो गया। जब परिजनों और समाज के पहरे ने उनके इस रिश्ते को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, तो उस नाबालिग प्रेमिका ने अपने प्यार को पाने के लिए एक बहुत बड़ा और साहसिक कदम उठाने का फैसला किया। उसने घर की चारदीवारी और तमाम दूरियों की परवाह न करते हुए गुजरात से हजारों किलोमीटर लंबा सफर अकेले ही तय किया और सीधे बिहार के जमुई जा पहुंची। जमुई पहुंचने पर उसके प्रेमी ने उसका बाहें फैलाकर स्वागत किया और स्थानीय स्तर पर मंदिर या अन्य रीति-रिवाजों के अनुसार उसके साथ धूमधाम से शादी रचा ली। उस समय दोनों की प्रेम कहानी किसी परीकथा की तरह लग रही थी, जहां हर बाधा को पार करके दो प्रेमी हमेशा के लिए एक-दूसरे के हो चुके थे, और उनकी इन खुशियों को देखकर ऐसा लग रहा था कि उनकी दुनिया अब पूरी तरह से आबाद हो चुकी है।शादी के जश्न के सात दिन भी पूरे नहीं हुए थे कि खुशियों पर लग गया कानून और समाज का भारी 'ग्रहण'लेकिन कहते हैं कि हकीकत अक्सर सपनों की दुनिया से बहुत अलग और कठोर होती है, और इस प्रेम कहानी के साथ भी कुछ ऐसा ही दर्दनाक अंत सामने आया। जिस लड़की ने अपनी जिंदगी के सबसे हसीन सपने सजाए थे और सात जन्म तक साथ निभाने की कसमें खाई थीं, उसकी यह नई नवेली खुशियां महज सात दिनों के भीतर ही एक काले 'ग्रहण' की तरह बिखर गईं। जैसे ही गुजरात पुलिस और स्थानीय प्रशासन को इस बात की भनक लगी कि एक नाबालिग लड़की अपने घर से भागकर बिहार के जमुई में छिपी हुई है और उसने वहां शादी कर ली है, तो प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। लड़की के परिजनों द्वारा लिखाई गई गुमशुदगी और बहला-फुसलाकर भगा ले जाने की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस एक्शन मोड में आ गई। जमुई स्थानीय पुलिस के सहयोग से बाहर से आई पुलिस टीम ने उस ठिकाने पर छापा मारा जहां यह नया जोड़ा अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने की उम्मीद में रह रहा था। पुलिस की गाड़ी और खाकी वर्दी को देखते ही दोनों के पैरों तले जमीन खिसक गई और वह सात दिन की सुहागिन पल भर में बेबस होकर रोने बिलखने लगी। इस अचानक हुई कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि कानूनी रूप से नाबालिग होने के कारण उस प्रेम प्रसंग की कोई भी मान्यता नहीं थी, और कानून अपनी सख्त प्रक्रिया के तहत अपना काम करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध था।बाल विवाह और कानूनी पेचीदगियों के बीच उलझकर रह गई प्रेम कहानी, अब आगे क्या होगा?इस संपूर्ण घटनाक्रम ने एक बार फिर से समाज के सामने बाल विवाह, कानूनी उम्र सीमा और प्रेम प्रसंग से जुड़े कई गंभीर और संवेदनशील सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय कानून के अनुसार जब तक लड़की की उम्र 18 वर्ष पूरी नहीं हो जाती, तब तक उसकी मर्जी से की गई शादी या इस तरह के कदम को कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता, भले ही वे दोनों एक-दूसरे से कितना भी प्रेम क्यों न करते हों। पुलिस ने नाबालिग लड़की को अपने कब्जे में ले लिया है और उसे मेडिकल जांच तथा बयान दर्ज कराने के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके बाद उसे उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ, जिस प्रेमी युवक ने सात दिन पहले अपनी महबूबा को अपनी दुल्हन बनाकर घर लाया था, वह अब कानूनी शिकंजे और अपहरण तथा पोक्सो एक्ट जैसी गंभीर धाराओं के कानूनी मामलों में उलझता हुआ नजर आ रहा है। जमुई और गुजरात दोनों ही जगहों पर इस अनोखी और दुखद प्रेम कहानी की चर्चा हर चौराहे पर हो रही है, जहां लोग इस बात पर विचार कर रहे हैं किशोरावस्था में लिए गए बिना सोचे-समझे फैसले किस तरह से पूरी जिंदगी को एक झटके में तबाह कर सकते हैं। यह मामला उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है जो कानून की सीमाओं को लांघकर इस तरह के कदम उठाते हैं, क्योंकि अंततः कानून और सच्चाई की ही जीत होती है और भावनाओं के आगे नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।
राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा नाम सबसे ज्यादा चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जिसने अपने राजनीतिक जीवन के उतार-चढ़ाव और संघर्षों से सबको हैरान कर दिया है। हम बात कर रहे हैं वरिष्ठ और कद्दावर नेता सुनील कोठारी (Sunil Kothari) की, जिनकी राजनीतिक वापसी को उनके समर्थक और स्थानीय कार्यकर्ता किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं मान रहे हैं। एक समय ऐसा भी था जब राजनीतिक समीकरणों, आपसी खींचतान और अंदरखाने के भारी दबाव के चलते उन्हें अपने संगठन में जिलाध्यक्ष के महत्वपूर्ण पद से इस्तीफा देकर पीछे हटना पड़ा था। उस वक्त उनके विरोधियों ने यह मान लिया था कि शायद अब जयपुर की सक्रिय राजनीति में उनका प्रभाव कम हो जाएगा और वे हाशिए पर चले जाएंगे। लेकिन राजनीति भी खेल निराले दिखाती है, और जो लोग जमीन से जुड़े होते हैं तथा जनता के बीच अपनी पकड़ रखते हैं, उन्हें लंबे समय तक मैदान से बाहर नहीं रखा जा सकता। सुनील कोठारी ने अपने ऊपर आए राजनीतिक संकट को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदला और चुपचाप अपने संगठन के प्रति वफादार रहते हुए जनता के बीच काम करते रहे। उनके इसी लंबे धैर्य, अनुशासन और सांगठनिक क्षमताओं का परिणाम है कि आज एक बार फिर से जयपुर से लेकर प्रदेश स्तर तक उनके नाम की गूंज सुनाई दे रही है, और उनकी यह वापसी किसी भी लिहाज से एक आम घटना नहीं कही जा सकती है।'टाइगर इज बैक' स्टाइल में सुनील कोठारी की धमाकेदार एंट्री और कार्यकर्ताओं में उमड़ा भारी जोशजैसे ही सुनील कोठारी की एक बार फिर से मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय और मजबूत वापसी की खबर सामने आई, उनके समर्थकों और चाहने वालों में जश्न का माहौल बन गया। सोशल मीडिया से लेकर जयपुर की सड़कों तक उनके स्वागत में 'टाइगर इज बैक' (Tiger is Back) के नारे गूंजने लगे, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जमीनी स्तर पर उनकी पकड़ आज भी कितनी मजबूत और असरदार है। जब किसी नेता को उसके ही राजनीतिक सफर में अनपेक्षित झटके लगते हैं, तो अक्सर उसका राजनीतिक वजूद कमजोर पड़ जाता है, लेकिन सुनील कोठारी ने अपने आलोचकों को अपने काम और जनता के समर्थन से करारा जवाब दिया है। इस वापसी के पीछे उनकी कुशल रणनीतिक समझ, स्थानीय मुद्दों पर गहरी पकड़ और हर वर्ग के कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने की अनूठी शैली ने बहुत बड़ा योगदान दिया है। जब उन्होंने अपने विरोधियों के बीच दोबारा मजबूती के साथ कदम रखा, तो उनका अंदाज और तेवर पूरी तरह बदला हुआ था, जिसे देखकर विरोधी खेमे में भी खलबली मच गई है। इस 'टाइगर इज बैक' वाली एंट्री ने यह साबित कर दिया है कि राजनीति में असली ताकत कुर्सियों या पदों से नहीं, बल्कि जनता के दिलों में बनाई गई जगह से मिलती है, और सुनील कोठारी ने इस बात को एक बार फिर से सच साबित करके दिखा दिया है।आगामी राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा गहरा असर और जयपुर की स्थानीय सियासत का नया भविष्यसुनील कोठारी की इस जोरदार और धमाकेदार वापसी का असर केवल उनके व्यक्तिगत राजनीतिक करियर तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि इसका सीधा और दूरगामी प्रभाव जयपुर और आसपास के क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ने की पूरी संभावना है। जब कोई मजबूत नेता तमाम बाधाओं को पार करके फिर से उभरता है, तो पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह शक्ति संतुलन में बदलाव आने लगता है। स्थानीय कार्यकर्ता अब पूरी ऊर्जा के साथ आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं, और कोठारी का अनुभव पार्टी की नैया पार लगाने में बेहद मददगार साबित हो सकता है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस वापसी के बाद अब जयपुर की राजनीति में सुनील कोठारी की भूमिका और अधिक अहम हो जाएगी, और हर दल को उनके प्रभाव को ध्यान में रखकर ही अपनी नीतियां तय करनी पड़ेंगी। यह पूरी कहानी इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि राजनीति में कभी भी किसी को कम नहीं आंकना चाहिए, क्योंकि सही समय और मजबूत इरादों के साथ की गई वापसी इतिहास बदल देती है। आने वाले दिनों में उनकी यह सक्रियता राज्य की मुख्यधारा की राजनीति में नए आयाम गढ़ने का काम करेगी, जिस पर हर राजनीतिक विश्लेषक की पैनी नजर बनी रहेगी।
STF ने मर्डर के आरोपी को घेरा तो फ्लाईओवर से लगाई छलांग
हरियाणा के सोनीपत में हिसार टोल मैनेजर हत्याकांड के फरार आरोपी मनोज उर्फ फिल्मी और सचिन को पकड़ने पहुंची STF ने NH-44 पर घेराबंदी की। पुलिस को सामने देखकर मनोज ने भिगान फ्लाईओवर से छलांग लगा दी और गंभीर रूप से घायल हो गया।
आईआरएस अधिकारी निशा उरांव का तीखा हमला और आदिवासियों की संस्कृति पर छिड़ी नई बहस
भारतीय प्रशासनिक सेवा और आयकर विभाग की जानी-मानी वरिष्ठ अधिकारी निशा उरांव एक बार फिर अपने बयानों के कारण देश भर की सुर्खियों में आ चुकी हैं। इस बार उनका गुस्सा किसी प्रशासनिक लापरवाही या विभागीय मनमानी पर नहीं, बल्कि उस मानसिकता पर फूटा है जो अक्सर देश के मूलनिवासी यानी आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को बिना पूरी जानकारी के तोड़-मरोड़कर पेश करती है। अपने तीखे और बेबाक अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली आईआरएस अधिकारी निशा उरांव ने खुलकर यह आरोप लगाया है कि समाज के एक खास वर्ग और मुख्यधारा के विचारकों की यह पुरानी और दबी हुई आदत बन चुकी है कि वे किसी एक व्यक्ति या घटना की आधी-अधूरी जानकारी को पूरे आदिवासी समाज की पहचान बताकर उसे सार्वजनिक मंचों पर थोपने का काम करते हैं। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में आदिवासी अस्मिता, उनके धार्मिक अधिकारों और रूढ़िवादी परंपराओं को लेकर बौद्धिक और राजनीतिक गलियारों में लगातार बहस छिड़ी हुई है। निशा उरांव ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि किस तरह से फिल्मों, साहित्यों और मीडिया के एक बड़े हिस्से में आदिवासियों को लेकर रूढ़िवादिता फैलाई जाती है, जिससे उनकी वास्तविक पहचान और उनके महान इतिहास के साथ अन्याय होता है। उनके इस मुखर विरोध ने एक बार फिर से इस संवेदनशील मुद्दे को राष्ट्रीय पटल पर ला खड़ा किया है, जिस पर देश भर के बुद्धिजीवी अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।आधी-अधूरी जानकारी को पूरे समाज पर थोपने की प्रवृत्ति पर गहरी आपत्ति और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षाअपने बयानों के जरिए निशा उरांव ने इस बात को बहुत स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है कि आदिवासी समाज कोई एकरंगी (Monolithic) समुदाय नहीं है, बल्कि इसमें सैकड़ों अलग-अलग जनजातियां, उनकी अपनी अनूठी बोलियां, खान-पान, कला और प्रकृति के साथ जीने की बेहद समृद्ध परंपराएं शामिल हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि किसी सुदूर इलाके में घटने वाली किसी व्यक्तिगत घटना या अज्ञानतावश फैलाई गई अफवाह को आधार बनाकर पूरे आदिवासी समाज के चरित्र या उसकी संस्कृति का आकलन करना सरासर गलत और वैचारिक रूप से बेईमानी है। समाज के तथाकथित संभ्रांत वर्ग पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी हमेशा से प्रकृति के सबसे बड़े संरक्षक रहे हैं और उनका जीवन दर्शन इंसानियत, समानता और सह-अस्तित्व पर आधारित है, लेकिन इसके बावजूद एक सोची-समझी रणनीति के तहत उनकी पहचान को धुंधला करने का प्रयास किया जाता रहा है। उन्होंने आदिवासी युवाओं और बुद्धिजीवियों से आह्वान किया कि वे अपनी संस्कृति के खिलाफ होने वाले ऐसे बौद्धिक हमलों का तथ्यात्मक और मजबूत विरोध करें। जब तक समाज के लोग खुद आगे आकर अपनी सही बात दुनिया के सामने नहीं रखेंगे, तब तक बाहरी लोग उनके बारे में अपनी मर्जी की अधूरी और भ्रामक कहानियां गढ़ते रहेंगे। उनके इस बयान ने आदिवासी समुदायों के बीच एक नई चेतना जगाने का काम किया है, और लोग सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक इस पर अपनी सहमति जता रहे हैं।मुख्यधारा के समाज और आदिवासी अस्मिता के बीच की खाई, भविष्य की दिशा और सुधार की जरूरतIRS अधिकारी निशा उरांव द्वारा उठाया गया यह मुद्दा केवल एक बयान भर नहीं है, बल्कि यह भारत के सामाजिक ताने-बाने में लंबे समय से चली आ रही उस उपेक्षा की कहानी है जो आदिवासी समुदायों को अक्सर हाशिए पर धकेल देती है। मुख्यधारा के समाज को यह समझने की सख्त जरूरत है कि आदिवासियों की अपनी एक स्वायत्त कानूनी, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान है, जिसे संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत विशेष संरक्षण प्राप्त है। जब तक देश के नीति-निर्माता, शिक्षाविद और मीडियाकर्मी आदिवासियों को सहानुभूति की दृष्टि से देखने के बजाय उन्हें उनके बराबर के नागरिक और राष्ट्र निर्माता के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे, तब तक इस तरह के वैचारिक टकराव सामने आते रहेंगे। निशा उरांव की यह बेबाक टिप्पणी इस बात की याद दिलाती है कि प्रशासनिक पदों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों जब अपनी जड़ों और समाज के अधिकारों के लिए मुखर होते हैं, तो वह आवाज दूर तक जाती है। आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि उनके इस तीखे हमले के बाद मुख्यधारा की सोच में कितना बदलाव आता है और क्या आदिवासी संस्कृति को लेकर समाज का रवैया अधिक संवेदनशील और तथ्यात्मक बनता है या नहीं।
यूपी चुनाव के सियासी रण से पहले भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव के तीखे और सुरीले बोल
उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में इन दिनों विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट के साथ ही फिल्मी दुनिया के सितारों की एंट्री ने राजनीतिक सरगर्मी को और अधिक तेज कर दिया है। इसी कड़ी में भोजपुरी सिनेमा के मेगास्टार और अपनी गायकी से लाखों दिलों पर राज करने वाले खेसारी लाल यादव ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक चौपालों तक हलचल मचा दी है। एक हालिया इंटरव्यू और सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान बातचीत करते हुए खेसारी लाल यादव ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की जमकर तारीफ की है। उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के खुले मंच से यह ऐलान कर दिया कि उनके लिए राजनीति की दुनिया में अखिलेश यादव से बड़ा कोई दूसरा हीरो नहीं है। भोजपुरी बेल्ट में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान रखने वाले किसी लोकप्रिय कलाकार द्वारा इस तरह से किसी राजनेता की खुलकर तारीफ करना और उन्हें अपना आदर्श या हीरो बताना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आने वाले यूपी चुनावों में क्षेत्रीय कलाकारों और स्टार प्रचारकों का रुख किस तरफ रहने वाला है। जैसे ही खेसारी लाल का यह बयान सामने आया, वैसे ही राजनीतिक विश्लेಷकों ने इसके सियासी मायने तलाशने शुरू कर दिए, क्योंकि चुनाव के ठीक पहले इस तरह के बयानों का असर सीधे तौर पर वोटर्स और युवाओं के बीच पड़ता है।अखिलेश यादव की कार्यशैली और उनके व्यक्तित्व के मुरीद हुए खेसारी लाल, बताए तारीफ की वजहेंअपनी बेबाक शैली के लिए जाने जाने वाले खेसारी लाल यादव ने सिर्फ अखिलेश यादव को अपना हीरो ही नहीं बताया, बल्कि इसके पीछे की ठोस वजहों का भी खुलकर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की सादगी, युवाओं के प्रति उनका विजन और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की उनकी राजनीतिक शैली उन्हें बाकी नेताओं से बिल्कुल अलग और खास बनाती है। भोजपुरी स्टार ने यह भी कहा कि जब वे समाज के विभिन्न मुद्दों पर सोचते हैं और उत्तर प्रदेश के विकास की बात करते हैं, तो उन्हें अखिलेश यादव के काम करने का तरीका सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए और जनता के बीच अपनी पैٹھ का जिक्र करते हुए खेसारी ने कहा कि एक राजनेता के रूप में अखिलेश यादव ने हमेशा आम आदमी और पिछड़ों की आवाज को बुलंद करने का काम किया है, और यही वजह है कि आज युवा पीढ़ी उनके साथ मजबूती से खड़ी है। इस बयान के जरिए उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की है कि उनका यह समर्थन किसी राजनीतिक सौदेबाजी का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक कलाकार की नजर में एक सच्चे जननेता के प्रति सम्मान की भावना है। इस प्रकार की टिप्पणियों से समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है, और वे इसे आगामी चुनावी समर में एक बड़ा मनोवैज्ञानिक लाभ मान रहे हैं।भोजपुरी सिनेमा और सियासत का पुराना नाता, क्या चुनाव में रंग लाएगी सितारों की यह जोड़ीउत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति में सिनेमाई सितारों का आना और उनका किसी खास राजनीतिक दल के पक्ष में समर्थन जताना कोई नया ट्रेंड नहीं है, लेकिन खेसारी लाल यादव जैसे दिग्गज कलाकार का सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो के पक्ष में खड़े होना एक बड़ा संदेश देता है। भोजपुरी गानों और फिल्मों के जरिए पूर्वांचल से लेकर देश के कोने-कोने तक फैले करोड़ों फैंस के बीच खेसारी लाल की जबरदस्त लोकप्रियता है, और उनके इस बयान से उनके चाहने वालों के बीच एक सकारात्मक राजनीतिक संदेश जरूर पहुंचेगा। हालांकि, राजनीति के जानकार मानते हैं कि कला और सियासत का यह संगम चुनावी वैतरणी पार करने में कितना मददगार साबित होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इस तरह के बयानों से राजनीतिक माहौल में गर्माहट बनी रहती है। विपक्षी दल इस पर अपनी अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं, वहीं सपा खेमे में इसे एक बड़ी कूटनीतिक और सांस्कृतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, खेसारी लाल यादव द्वारा अखिलेश यादव की तारीफ के पुल बांधे जाने का यह पूरा एपिसोड आने वाले यूपी चुनावों के रंगमंच पर एक नए और दिलचस्प अध्याय की शुरुआत कर चुका है, जिस पर हर राजनीतिक दल और मीडिया की पैनी नजर बनी रहेगी।
स्लीप पैरालिसिस का भयानक अहसास और नींद के दौरान शरीर के सुन्न पड़ने की यह रहस्यमयी बीमारी
भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली, अत्यधिक मानसिक तनाव, अनियमित दिनचर्या और पूरी नींद न ले पाने के कारण आज के दौर में लोगों को कई तरह की अजीबोगरीब स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं में से एक बेहद डरावनी और मानसिक रूप से परेशान कर देने वाली स्थिति है 'स्लीप पैरालिसिस' (Sleep Paralysis), जिसे आम बोलचाल की भाषा में सोते समय शरीर का लॉक होना या सुन्न पड़ जाना कहा जाता है। कई बार रात को सोते समय अचानक व्यक्ति की आंखें तो पूरी तरह खुल जाती हैं, उसका दिमाग भी पूरी तरह से जाग चुका होता है, लेकिन उसके शरीर का एक भी अंग हरकत नहीं कर पाता है। वह चाहकर भी अपने हाथ-पैर हिला नहीं पाता, किसी को आवाज नहीं दे पाता और न ही बिस्तर से उठ पाता है। यह अहसास इतना डरावना होता है कि व्यक्ति को ऐसा लगने लगता है कि उसके सीने पर किसी भारी चीज का वजन रखा हुआ है या कोई अदृश्य शक्ति उसे जकड़े हुए है। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में यह नींद से जुड़ी एक अवस्था है, जो तब पैदा होती है जब व्यक्ति रैपिड आई मूवमेंट यानी REM स्लीप साइकल के दौरान अचानक जाग जाता है, लेकिन उसका शरीर उस समय गहरी नींद की पक्षाघात अवस्था में ही रहता है। इस अजीबोगरीब स्थिति के कारण लोगों के मन में भारी डर बैठ जाता है, और वे इसे किसी भूत-प्रेत या मानसिक बीमारी से जोड़कर देखने लगते हैं, जबकि इसके पीछे गहरे वैज्ञानिक कारण छिपे हुए होते हैं।क्यों और कैसे होता है स्लीप पैरालिसिस, दिमाग और मांसपेशियों के बीच के तालमेल का टूटनाइस संपूर्ण प्रक्रिया को वैज्ञानिक नजरिए से समझें तो जब हम नींद में होते हैं, विशेषकर जब हमें सपने आने वाली अवस्था यानी REM स्लीप होती है, तब हमारा मस्तिष्क हमारी मांसपेशियों को अस्थायी रूप से पैरालाइज या निष्क्रिय कर देता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि हम सपने में जो कुछ भी देख रहे हैं, शारीरिक रूप से वैसी हरकतें करके खुद को या अपने पास लेटे व्यक्ति को चोट न पहुंचा सकें। आमतौर पर जब हमारी नींद पूरी हो जाती है, तो दिमाग और मांसपेशियां दोनों एक साथ सामान्य स्थिति में आ जाते हैं और हम आसानी से उठकर खड़े हो जाते हैं। लेकिन स्लीप पैरालिसिस के मामले में यही संतुलन बीच में ही टूट जाता है। आपका दिमाग तो अचानक पूरी तरह से एक्टिव होकर जाग जाता है, लेकिन मांसपेशियों को लकवाग्रस्त रखने वाले न्यूरोट्रांसमीटर का प्रभाव तुरंत खत्म नहीं हो पाता है, जिसके कारण दिमाग जागने के बावजूद शरीर को हिलने-डुलने का आदेश नहीं दे पाता है। इस तकनीकी अंतराल के दौरान व्यक्ति कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनटों तक पूरी तरह लाचार महसूस करता है। इसके पीछे अत्यधिक थकान, नींद का चक्र गड़बड़ा जाना (Sleep Deprivation), सिजोफ्रेनिया का पारिवारिक इतिहास, एंग्जायटी, या सोने की गलत पोजीशन जैसे कई प्रमुख कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। जो लोग रात में बहुत देर तक जागते हैं और सुबह देर तक सोते हैं, उनके शरीर की यह आंतरिक घड़ी (Circadian Rhythm) बिगड़ जाती है, जिससे इस तरह की समस्याएं उत्पन्न होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।स्लीप पैरालिसिस से बचने के आसान उपाय, बेहतर नींद और जीवनशैली में बदलाव लाने के जरूरी तरीकेयदि आप या आपके परिवार में से कोई भी व्यक्ति इस डरावनी स्थिति यानी स्लीप पैरालिसिस का बार-बार शिकार हो रहा है, तो घबराने के बजाय अपनी जीवनशैली में कुछ सकारात्मक और अनुशासित बदलाव लाने की बेहद आवश्यकता है। सबसे पहले अपने सोने और जागने का एक निश्चित समय तय करें और हर रोज कम से कम सात से आठ घंटे की गहरी और गुणवत्तापूर्ण नींद अवश्य लें। सोने से ठीक पहले मोबाइल फोन, लैपटॉप या टीवी स्क्रीन के अत्यधिक इस्तेमाल से बचें, क्योंकि इनसे निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) आपके मस्तिष्क को भ्रमित कर देती है और नींद का चक्र बिगड़ जाता है। इसके अलावा, रात के समय अत्यधिक भारी भोजन, कैफीन, अल्कोहल या निकोटीन का सेवन करने से पूरी तरह परहेज करें, क्योंकि ये तत्व आपके तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करके नींद की गुणवत्ता को खराब कर देते हैं। यदि कभी आपको रात में स्लीप पैरालिसिस का अनुभव हो भी जाए, तो उस समय घबराने या पैनिक होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, बल्कि खुद को शांत रखने का प्रयास करें और अपनी उंगलियों या पलकों को धीरे-धीरे हिलाने की कोशिश करें। कुछ ही पलों में मांसपेशियों का यह अस्थायी लॉक अपने आप खुल जाता है और आप सामान्य महसूस करने लगते हैं। यदि यह समस्या बहुत अधिक बार होने लगे और आपकी मानसिक शांति को प्रभावित करे, तो किसी अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट या स्लीप स्पेशलिस्ट डॉक्टर से सलाह लेकर उचित चिकित्सीय मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए।
भारतीय सनातन संस्कृति और ज्योतिष शास्त्र में इस बात का बहुत गहरा और वैज्ञानिक उल्लेख मिलता है कि मनुष्य का जीवन और उसका परिवेश एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। जब भी हम किसी नए मकान का निर्माण करते हैं या किसी घर में रहने के लिए प्रवेश करते हैं, तो उस मकान की बनावट, उसकी दिशा, वहां आने वाली प्राकृतिक रोशनी और हवा का सीधा संबंध हमारे जन्मकुंडली के ग्रहों से जुड़ जाता है। वास्तु शास्त्र और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, प्रत्येक मकान का अपना एक ऊर्जा क्षेत्र होता है, जो वहां रहने वाले सदस्यों के भाग्य, स्वास्थ्य, करियर और मानसिक शांति को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। यदि आपके मकान की संरचना और ग्रहों की स्थिति के बीच एक बेहतरीन सामंजस्य स्थापित हो जाता है, तो जीवन में आने वाली बाधाएं स्वतः समाप्त होने लगती हैं और सफलता के नए द्वार खुलने लगते हैं। इसके विपरीत, यदि घर का वास्तु और ग्रहों की चाल एक-दूसरे के विपरीत हो, तो तमाम कोशिशों के बावजूद असफलता, मानसिक तनाव और आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि प्राचीन काल से ही घर खरीदने या बनवाने से पहले ज्योतिषीय सलाह और वास्तु नियमों का पालन करने पर विशेष जोर दिया जाता रहा है, ताकि घर की चारदीवारी के भीतर केवल सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हो और नकारात्मक शक्तियां कोसों दूर रहें।ग्रहों के अनुकूल मकान से जीवन में बढ़ती है सुख-शांति, जानें कैसे निर्धारित होती है ग्रहों की दिशाज्योतिष शास्त्र के जानकारों का मानना है कि सौरमंडल के नौ ग्रह हमारे जीवन के हर एक पहलू को नियंत्रित करते हैं, और ठीक इसी प्रकार हमारे घर के अलग-अलग कोने और दिशाएं अलग-अलग ग्रहों का प्रतिनिधित्व करती हैं। उदाहरण के लिए, घर की पूर्व दिशा का संबंध सूर्य ग्रह से माना जाता है, जो मान-सम्मान और ऊर्जा का प्रतीक है; वहीं उत्तर दिशा का संबंध धन के देवता कुबेर और ग्रहराज बुध से होता है, जो व्यापार और बुद्धि को बल देते हैं। यदि आपका मकान इन ग्रहों की अनुकूल दिशाओं के अनुसार बना हुआ है और वहां स्वच्छता तथा प्राकृतिक प्रकाश का भरपूर संचार है, तो संबंधित ग्रहों के शुभ प्रभाव आपके जीवन में चौगुनी तरक्की लेकर आते हैं। जिन घरों में ग्रहों के अनुकूल कमरे और रसोईघर बने होते हैं, वहां रहने वाले लोगों के बीच आपसी प्रेम, सौहार्द और मानसिक शांति हमेशा बनी रहती है। इसके अलावा, शनि, राहु और केतु जैसे छाया ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को शांत करने के लिए भी घर के निर्माण में विशेष सावधानियां बरतनी जरूरी होती हैं। जब किसी व्यक्ति की कुंडली के ग्रह उसके निवास स्थान के वास्तु से मेल खाने लगते हैं, तो उसका सोया हुआ भाग्य भी जाग जाता है और उसे हर कार्य में अपार सफलता मिलने लगती है, जिससे जीवन एक सुखी और समृद्ध मार्ग पर अग्रसर हो जाता है।वास्तु और ज्योतिष का सही तालमेल, इस प्रकार अपने आशियाने को बनाएं तरक्की और खुशहाली का जरियाअपने वर्तमान घर या नए बनाए जाने वाले मकान में वास्तु और ज्योतिष के इस अचूक सामंजस्य को स्थापित करने के लिए कुछ छोटे लेकिन बेहद प्रभावशाली बदलाव किए जा सकते हैं। सबसे पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि घर का मुख्य द्वार हमेशा साफ-सुथरा और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर हो, क्योंकि यहीं से ग्रहों की ऊर्जाएं आपके घर के भीतर प्रवेश करती हैं। घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को हमेशा हल्का और खुला रखना चाहिए, क्योंकि यह देवस्थान माना जाता है और इसका संबंध गुरु ग्रह से होता है, जो ज्ञान और समृद्धि के दाता हैं। इसके अलावा, रसोईघर का दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्नेय कोण में होना अग्नि तत्व को संतुलित रखता है, जिससे घर के सदस्यों का स्वास्थ्य उत्तम रहता है और मंगल ग्रह के शुभ फल प्राप्त होते हैं। यदि आपके जीवन में लगातार परेशानियां बनी हुई हैं, तो किसी योग्य ज्योतिषी या वास्तु विशेषज्ञ से अपने घर की नक्शे की जांच कराकर मामूली बदलाव या रंगों का चयन करके ग्रहों के प्रतिकूल प्रभावों को काफी हद तक अनुकूल बनाया जा सकता है। याद रखिए, आपका घर केवल ईंट और सीमेंट से बनी इमारत नहीं है, बल्कि यह वह ऊर्जावान केंद्र है जहाँ आपका भविष्य आकार लेता है, इसलिए मकान और ग्रहों का यह सामंजस्य आपके जीवन को पूरी तरह से बदलकर रख सकता है।
यूजीसी का बड़ा फैसला: नए सेशन से MPT और MOT की डिग्री में जुड़ेंगी स्पेशलाइजेशन
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में देश भर के मेडिकल और पैरामेडिकल छात्रों के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला लिया है। यूजीसी ने एलाइड और हेल्थकेयर एजुकेशन (Allied and Healthcare Education) से जुड़े डिग्री पाठ्यक्रमों के नियमों में बड़ा संशोधन करते हुए नया फ्रेमवर्क जारी किया है। इस नए बदलाव के तहत अब मास्टर ऑफ फिजियोथैरेपी (M.PT) और मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (M.OT) की डिग्रियां किसी सामान्य मास्टर डिग्री के रूप में नहीं दी जाएंगी, बल्कि इन्हें सीधे तौर पर संबंधित स्पेशलाइजेशन यानी विशेषज्ञता के नाम के साथ जोड़ा जाएगा। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इस अधिसूचना को आधिकारिक गजट में भी प्रकाशित कर दिया गया है, जो शैक्षणिक सत्र से पूरे देश के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रभावी रूप से लागू होने जा रहा है। इस नए बदलाव का मुख्य उद्देश्य छात्रों को मिलने वाली डिग्रियों को अधिक पारदर्शी, पेशेवर और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है, ताकि मेडिकल और हेल्थकेयर सेक्टर में जॉब मार्केट की जरूरतों के अनुसार योग्य विशेषज्ञ तैयार किए जा सकें।M.PT और M.OT कोर्सेज में तय किए गए नए स्पेशलाइजेशन और कोर्स का ढांचायूजीसी के इस नए संशोधित नियमों के अनुसार, M.PT और M.OT दोनों ही मास्टर कोर्सेज की न्यूनतम अवधि 2 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसके लिए छात्रों के पास संबंधित विषय में बैचलर डिग्री होना अनिवार्य होगा। मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (M.OT) के अंतर्गत कुल 8 प्रमुख स्पेशलाइजेशन शामिल किए गए हैं, जिनमें मस्कुलोस्केलेटल साइंसेज, पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटोलॉजी, न्यूरोसाइंसेज, मेंटल हेल्थ, कार्डियोवास्कुलर एंड पल्मोनरी साइंसेज, रिहैबिलिटेशन, जेरियाट्रिक्स, हैंड और ऑन्कोलॉजिकल साइंसेज जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। ठीक इसी प्रकार, मास्टर ऑफ फिजियोथैरेपी (M.PT) कोर्स के ढांचे में भी बड़े बदलाव करते हुए इसे स्पेशलाइजेशन के आधार पर बांट दिया गया है, जिसमें मस्कुलोस्केलेटल साइंसेज, न्यूरोसाइंसेज, कार्डियोवास्कुलर एंड पल्मोनरी साइंसेज, स्पोर्ट्स साइंसेज, पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटल साइंसेज, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी साइंसेज, ऑन्कोलॉजी साइंसेज और कम्युनिटी रिहैबिलिटेशन साइंसेज को प्रमुखता से स्थान दिया गया है। इन तमाम बदलावों से छात्रों को अपनी पसंद और विशेषज्ञता के क्षेत्र में गहराई से अध्ययन करने का अवसर मिलेगा और उनकी डिग्री पर सीधे तौर पर उनकी महारत का नाम दर्ज होगा, जिससे देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी उनके लिए रोजगार के नए और बेहतर रास्ते खुलेंगे।पुराने छात्रों के लिए नियम और हेल्थकेयर सेक्टर से जुड़े अन्य पाठ्यक्रमों का विस्तारइस नए बदलाव को लेकर छात्रों के मन में उठने वाली शंकाओं को दूर करते हुए यूजीसी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह नया नियम उन स्टूडेंट्स पर बिल्कुल भी लागू नहीं होगा जिन्होंने निर्धारित शैक्षणिक सत्र से पहले ही M.PT या M.OT पाठ्यक्रमों में अपना एडमिशन ले लिया था। पुराने छात्रों को उनके पुराने नियमों और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार ही डिग्री प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स (NCAHP) की सिफारिशों के आधार पर इस पांचवें संशोधन में कई अन्य महत्वपूर्ण पैरामेडिकल और हेल्थकेयर कोर्सेज को भी जोड़ा गया है। इनमें मेडिकल लेबोरेटरी साइंस, एनेस्थीसिया एंड ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी, न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स, मेडिकल रेडियोलॉजी, डायलिसिस थेरेपी और रेस्पिरेटरी टेक्नोलॉजी जैसे कई आधुनिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूजीसी का यह कदम देश के मेडिकल एजुकेशन सिस्टम को पूरी तरह से आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर का बना देगा, जिससे आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा के क्षेत्र में कुशल पेशेवरों की मांग और आपूर्ति के बीच का संतुलन और अधिक मजबूत हो सकेगा।
20 साल की युवती को सुनसान इमारत में ले गए... अब पकड़े गए आरोपी
महाराष्ट्र के संभाजीनगर में सरकारी घाटी अस्पताल में आंखों के इलाज के लिए आई 20 साल की युवती के साथ जबरदस्ती की कोशिश का मामला सामने आया है. पुलिस के मुताबिक, दो युवक रास्ता दिखाने के बहाने युवती को सुनसान और जर्जर इमारत की छत पर ले गए, जहां एक आरोपी ने उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की. पुलिस ने अब दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.
मुख्य द्वार पर किस भगवान की फोटो लगानी चाहिए? जानें नियम
Vastu Tips : घर के मुख्य द्वार पर भगवान की मूर्ति रखना शुभ माना जाता है. जानें गणेश जी, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की मूर्ति रखने के वास्तु नियम और जरूरी सावधानियां.
नशे के लिए बिक रही थी Pregabalin कैप्सूल! छापेमारी में खुली कई चौंकाने वाली पोल
दिल्ली के आउटर नॉर्थ जिले के पूठ खुर्द इलाके में पुलिस और ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने मेडिकल स्टोर पर छापा मारकर बिना प्रिस्क्रिप्शन प्रेगाबालिन कैप्सूल बेचने का खुलासा किया. नकली ग्राहक को भेजकर बिना पर्ची दवा खरीदने की पुष्टि की गई.
कौन हैं इलावेनिल वलारिवन? जिन्होंने एशियन गेम्स में जीते 2 सिल्वर
एशियन गेम्स 2026 में भारत की स्टार शूटर इलावेनिल वलारिवन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 मीटर एयर राइफल में दो रजत पदक अपने नाम किए. जानिए कौन हैं इलावेनिल वलारिवन, उनका शूटिंग करियर, उपलब्धियां, वर्ल्ड नंबर-1 बनने का सफर.
आकाश के बाद अब दीपिका भी बाहर, Mayawati ने अब ईशान आनंद को दिया मौका
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने परिवार के राजनीतिक भविष्य को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला किया है। ताजा जानकारी के मुताबिक, अब उनके भाई आनंद कुमार की बेटी कुमारी दीपिका आनंद को भी पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही मायावती ने अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को पार्टी में जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाने की बात कही है। मायावती ने अपने फैसले को परिवार से ज्यादा पार्टी और बहुजन समाज के हित से जोड़ते हुए कई पुराने उदाहरण भी दिए हैं। परिवार को लेकर मायावती ने क्या कहा? मायावती ने कहा कि राजनीति में सफल होने और समाज के लिए काम करने के लिए भाई-बहनों और करीबी रिश्तेदारों के मोह से ऊपर उठकर ईमानदारी और निष्ठा से काम करना जरूरी है। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीति में आने के बाद उन्होंने अपने करीबी रिश्तेदारों को राजनीतिक फायदा देने से दूरी बनाए रखी थी। उनके मुताबिक, रिश्तेदारों को केवल पार्टी संगठन में बिना किसी निजी लाभ के काम करने की अनुमति थी। मायावती ने कहा कि उन्होंने भी कांशीराम के इसी रास्ते पर चलने का फैसला किया और अपना पूरा जीवन बहुजन समाज के लिए समर्पित किया। 1. आज मेरा पुनः पार्टी के लोगों से यही कहना है कि मेरे ख़ुद के अनुभव को मद्देनज़र रखते हुये यदि इनको राजनीति में कामयाब होना है और समाज के लिए कुछ करना है तो उन्हें मेरी तरह अपने भाई-बहिनों व नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि के मोह से ऊपर उठकर अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से कार्य करना… — Mayawati (@Mayawati) September 20, 2026 इसे भी पढ़ें: Chhatron Ki Goonj: इंदौर के मंच पर Rahul Gandhi ने ऐसा क्या किया, जिस पर BJP भड़क गई? आकाश आनंद पर भी मायावती का निशाना मायावती ने अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आनंद कुमार के खास आग्रह पर उन्होंने आकाश आनंद को राजनीति में आगे बढ़ाया था। हालांकि, मायावती के मुताबिक शादी के बाद आकाश के व्यवहार और गतिविधियों में बदलाव आया। मायावती ने कहा कि इसी वजह से उन्हें पार्टी से अलग करना पड़ा। उन्होंने आकाश पर अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में काम करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में आकाश को दोबारा पार्टी में शामिल करना पार्टी के साथ विश्वासघात होगा। अब दीपिका आनंद को भी नहीं मिलेगी जिम्मेदारी मायावती ने अब यह साफ किया है कि दीपिका आनंद को भी पार्टी में कोई राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। उन्होंने परिवार के सदस्यों को जिम्मेदारी देने के मामले में सावधानी बरतने की बात कही है। मायावती का कहना है कि शादी के बाद दीपिका भी आकाश की तरह ससुराल पक्ष के प्रभाव में आ सकती हैं। इसी संभावना को देखते हुए उन्होंने दीपिका को पार्टी की जिम्मेदारी से दूर रखने का फैसला किया है। यह फैसला कुछ दिन पहले के उनके रुख से अलग है। 12 सितंबर को मायावती ने कहा था कि अगर आनंद कुमार को पार्टी के काम में परिवार के किसी सदस्य की मदद की जरूरत हो तो उनकी बेटी दीपिका इसमें मदद कर सकती हैं। इसे भी पढ़ें: Matoshree के बाहर Disha Salian के पिता सतीश सालियन का हाई-वोल्टेज ड्रामा ईशान आनंद को फिर मिलेगा मौका दीपिका को जिम्मेदारी से दूर रखने के बाद मायावती ने अब ईशान आनंद को फिर से मौका देने की बात कही है। हालांकि, उन्होंने ईशान को भी साफ चेतावनी दी है कि पार्टी विरोधी किसी गंभीर गतिविधि में शामिल होने पर उन्हें भी पार्टी से बाहर किया जा सकता है। मायावती ने कहा कि अगर ईशान के साथ भी ऐसी स्थिति बनती है तो आनंद कुमार के परिवार के किसी दूसरे सदस्य को पार्टी में छोटी या बड़ी कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके बजाय पार्टी में काम कर रहे किसी मिशनरी और वफादार कार्यकर्ता को आगे बढ़ाया जाएगा। कांशीराम और डॉ. आंबेडकर का उदाहरण अपने फैसले को समझाते हुए मायावती ने कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर का उदाहरण दिया। उन्होंने 23 फरवरी 1956 के उस पत्र का भी जिक्र किया, जो उनके मुताबिक डॉ. आंबेडकर ने अपने बेटे यशवंत आंबेडकर को लिखा था। मायावती ने कहा कि इस उदाहरण से यह साफ होता है कि सार्वजनिक काम और आंदोलन के हित में जरूरत पड़ने पर परिवार के सदस्यों के खिलाफ भी फैसला लिया जा सकता है। बहुजन समाज ही मेरा असली परिवार मायावती ने अपने संदेश के अंत में कहा कि समस्त बहुजन समाज ही मेरा असली परिवार है। उन्होंने कहा कि सत्ता की मास्टर चाबी के जरिए बहुजन समाज को शोषित से शासक वर्ग बनाना और उनके हित व कल्याण को सुनिश्चित करना उनका मिशन है। मायावती ने यह भी कहा कि इस लक्ष्य के लिए वह अपने भाई-बहनों और रिश्तेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगी। 23 सितंबर को अहम बैठक बीएसपी ने 23 सितंबर को लखनऊ में एक और अखिल भारतीय बैठक बुलाई है। यह एक महीने के भीतर पार्टी की दूसरी राष्ट्रीय स्तर की बैठक होगी। इस बैठक से पहले परिवार के सदस्यों की भूमिका को लेकर मायावती के लगातार बदलते फैसले पार्टी के भीतर चर्चा का विषय बने हुए हैं।
एयर होस्टेस की छोड़ी ट्रेनिंग, अब ट्रक चलाकर कर रही कमाई
एयर होस्टेस की ट्रेनिंग छोड़कर हिमाचल प्रदेश की पहली महिला ट्रक ड्राइवर नेहा की कहानी हर ओर तेजी से वायरल हो रही है. मंडी की रहने वाली नेहा ठाकुर ने बचपन के शौक को अपना करियर बनाया और आज हाईवे पर अपनी अनूठी ड्राइविंग से सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. जानिए उन्होंने करियर बदलने का फैसला क्यों लिया.
Mumbai में Metro निर्माण का बैरिकेड गिरने से 54 वर्षीय बाइक सवार की मौत
मुंबई में मेट्रो निर्माण कार्य के लिए लगाया गया भारी लोहे का बैरिकेड मोटरसाइकिल सवार पर गिरने से 54 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। यह हादसा शुक्रवार को घाटकोपर के एलबीएस रोड पर हुआ। पार्कसाइट थाने के एक अधिकारी ने बताया कि घाटकोपर के अशोक नगर निवासी वसीम हैदर रिजवी मोटरसाइकिल से जा रहे थे, तभी बायोटेक कंपनी की इमारत के पास करीब छह बाई आठ फुट का लोहे का बैरिकेड अचानक उनके ऊपर गिर गया। पुलिस के अनुसार, रिजवी को तत्काल उपचार के लिए सरकारी राजवाड़ी अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पार्कसाइट पुलिस ने बाद में मामला दर्ज कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी। मुंबई में मेट्रो निर्माण परियोजनाओं के दौरान सुरक्षा को लेकर पहले भी चिंता जताई जाती रही है। इससे पहले 14 फरवरी को मुलुंड इलाके में मेट्रो निर्माण स्थल पर कंक्रीट की दीवार का एक हिस्सा वाहनों पर गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और तीन अन्य घायल हुए थे।
4 महिलाएं, 3 युवक और कोडवर्ड में बातें... गेस्ट हाउस में स्पेशल सर्विस की कहानी
वाराणसी के सिगरा थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक गेस्ट हाउस पर छापेमारी कर 4 महिलाओं और 3 युवकों को पकड़ा है. पुलिस के मुताबिक, कैंट रेलवे स्टेशन के सामने परेड कोठी इलाके में स्थित गेस्ट हाउस में 'स्पेशल सर्विस' के नाम पर कथित तौर पर देह व्यापार चलाया जा रहा था. छापेमारी के दौरान अलग-अलग कमरों से पकड़े गए लोगों के पास से कुछ आपत्तिजनक सामग्री भी मिली है.
VIDEO: तालाब में कूदते ही अचेत हुआ युवक और हो गई मौत
गोरखपुर के तिवारीपुर थाना क्षेत्र स्थित सूरजकुंड तालाब में 35 वर्षीय भरत उर्फ रुदल की डूबने से मौत हो गई. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें युवक तालाब से बाहर निकलने की कोशिश करता नजर आ रहा है.
4 दिन में बदली चांदी की चाल, सोने का रेट इतना चेंज, New Rates
Gold-Silver Price Weekly Update: बीते सप्ताह सिर्फ चार दिन कारोबार हुआ और इन चार दिनों में चांदी की कीमत में तगड़ा बदलाव देखने को मिला है. हालांकि, ये कीमती धातु अपने हाई लेवल से अभी भी काफी सस्ती मिल रही है.
जेनिफर विंगेट ने गोवा में पति विलियम संग फिर रचाई शादी
जेनिफर विंगेट ने विदेशी बिजनेसमैन विलियम इश्माएल संग गोवा में दोबारा शादी का जश्न मनाया। जुलाई 2026 में दोनों ने यूके में क्रिश्चियन रीति-रिवाज से शादी की थी, लेकिन करीबी लोग शामिल नहीं हो सके थे।
नंदीग्राम में मुस्लिम वोटर किस तरफ, शुभेंदु के ‘टेस्ट’ वाले बयान के बाद क्या है माहौल?
एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सीधे तौर पर कहा, जो लोग मुझे वोट नहीं देते, जो बीजेपी को वोट नहीं देते... मैं उन अल्पसंख्यकों से अपील करता हूं। आपके पास एक मौका आया है- आप सरकार के साथ रहना चाहते हैं या नहीं?
उड़द दाल से बनाएं हिमाचली खस्ता कचौड़ी, इस आसान रेसिपी से होगी तैयार!
Himachali Kachori Recipe: पहाड़ी खाने का स्वाद पसंद है तो इस बार हिमाचली कचौड़ी जरूर ट्राई करें. उड़द दाल की मसालेदार स्टफिंग से तैयार यह कचौड़ी बाहर से कुरकुरी और अंदर से बेहद स्वादिष्ट होती है. इसे घर पर बनाना भी काफी आसान है.
दलाई लामा के कारण बिगड़ा भारत-चीन का संबंध? पूर्व IFS ऑफिसर ने समझाया तिब्बत का विवाद
उन्होंने कहा कि जब-जब चीन की आर्थिक स्थिति मजबूत होती जाती है, तब-तब वह अपनी विस्तारवाद की नीति को बढ़ावा देता है। आज के समय में चीन की जीडीपी भारत की तुलना में पांच गुना अधिक है।
Jobs 2026 : सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह सप्ताह बेहद खास है, क्योंकि एक साथ कई बड़े विभागों में भर्ती प्रक्रिया चल रही है.
कब से शुरू होंगे शारदीय नवरात्र? जानें अष्टमी, नवमी और दशहरे की तारीख
Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होंगे. जानें घटस्थापना, अष्टमी, नवमी और दशहरा की सही तारीख और पूजा से जुड़ी जरूरी जानकारी.
DIY Face Scrub: गर्मियों में धूप, पसीने और धूल से त्वचा की समस्याएं बढ़ सकती हैं. घर पर चीनी-शहद, बेसन-दूध और ओट्स-दही से फेस स्क्रब तैयार किया जा सकता है. हालांकि, संवेदनशील त्वचा वालों को पैच टेस्ट और हल्की स्क्रबिंग का ध्यान रखना चाहिए.
AI की रफ्तार पर ब्रेक का आरोप, OpenAI, Google समेत 4 पर केस
AI कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने मिलकर AI के विकास की रफ्तार धीमी करने की कोशिश की. OpenAI, Google, Anthropic और SpaceXAI के खिलाफ अमेरिका में एंटीट्रस्ट मुकदमा दायर किया गया है. जानिए क्या है पूरा मामला, कंपनियों पर क्या आरोप लगे हैं और AI की तेज होती रफ्तार को लेकर यह केस क्यों चर्चा में है.
बिहार MLC चुनाव: जन सुराज ने 5 उम्मीदवारों का किया ऐलान
जन सुराज ने बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से 5 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं. इनमें दरभंगा शिक्षक से एसपी राय, दरभंगा स्नातक से रवींद्र यादव, सारण शिक्षक से अफाक अहमद, पटना शिक्षक से दिव्या ज्योति और कोसी स्नातक से रजनीश रंजन शामिल हैं.
करोड़ों की कार में बैठकर ट्रोल हुईं मैथिली, कंगना ने दिया जवाब
मैथिली ठाकुर को कुछ लोग सोशल मीडिया पर लगातार ट्रोल कर रहे हैं क्योंकि वो महंगी रोल्स रॉयस गाड़ी में घूम रही थीं. उन्हें मिल रही नफरत पर कंगना रनौत का गुस्सा फूटता हुआ नजर आया है. उन्होंने अपने अंदाज में ट्रोल्स को फटकारा है.
मुंबई में ब्रिज से नीचे जा गिरी तेज रफ्तार BMW, CCTV में कैद हादसा
मुंबई के कोस्टल रोड पर एक बेहद भयानक सड़क हादसा सामने आया है. मरीन ड्राइव से हाजी अली की तरफ जा रही एक तेज रफ्तार बीएमडब्ल्यू कार अनियंत्रित होकर कोस्टल रोड के ब्रिज से नीचे गिर गई. यह पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि कार की रफ्तार बहुत तेज थी. ब्रिज की रेलिंग को तोड़ते हुए यह लग्जरी कार सीधे नीचे जा गिरी.
UP: जातीय समीकरण पीछे, संगठन का अनुभव आगे, BJP जिला प्रभारियों की लिस्ट जारी
बीजेपी ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले 98 जिलों के जिला प्रभारियों की नई सूची जारी की है. इसमें संगठन के पुराने और अनुभवी नेताओं की वापसी हुई है. इस सूची में जातीय संतुलन और महिला-दलित प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं. संगठन ने जातीय समीकरण की बजाय अनुभव को प्राथमिकता दी है.
गुरुग्राम के सेक्टर-38 में बलेनो कार ने कैब को टक्कर मार दी, फिर कैब ने भी बलेनो को टक्कर मारी. आरोप है कि बलेनो ड्राइवर ने युवक को कुचलने की कोशिश की.
भाजपा मंत्री की भतीजी स्वीडन में बनीं सांसद, जानें कौन हैं नीला विखे पाटिल?
नीला के दादा बालासाहेब विखे पाटिल भारत की वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री और आठ बार के सांसद रह चुके हैं. नीला विखे के चाचा राधाकृष्ण विखे पाटिल महाराष्ट्र सरकार में भाजपा के कोटे से मंत्री हैं.
आज हम प्यासा के उस गाने के बारे में बताने जा रहे हैं , जो आज भी खूब पसंद की जाती है.यह गाना उस मतलबी और स्वार्थी समाज पर करारा कटाक्ष करता है जो केवल धन, शोहरत और दिखावे को महत्व देता है और मानवीय मूल्यों की उपेक्षा करता है.
थर्मल पावर प्लांट में कॉपर चोरी, सुरक्षा में तैनात 3 जवान भी पकड़े गए
महाराष्ट्र के चंद्रपुर स्थित चंद्रपुर सुपर थर्मल पावर स्टेशन यानी CSTPS में लगातार हो रही कॉपर केबल चोरी के मामले में दुर्गापुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. पुलिस ने इस मामले में Maharashtra Security Force से जुड़े 3 जवानों समेत कुल 10 आरोपियों को हिरासत में लिया है. आरोपियों के पास से करीब 6 क्विंटल कॉपर वायर और चोरी में इस्तेमाल किया जा रहा ट्रक बरामद हुआ है.
Nandigram Bypoll में Mamata Banerjee ने Congress उम्मीदवार को दिया समर्थन
(फाइल फोटो के साथ जारी)(सौगत मुखोपाध्याय)कोलकाता, 20 सितंबर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देना राज्य में विपक्ष की राजनीति में नए समीकरण बनने का संकेत हो सकता है। पर्यवेक्षकों का मानना है कि जब तृणमूल कांग्रेस अपने सबसे गंभीर संगठनात्मक संकट से जूझ रही है, तब ऐसे समय में यह कदम राज्य में विपक्ष की राजनीति में बहुत मायने रखता है। बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का फैसला ऐसे समय में किया जब उनके धड़े की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से कोलकाता में मुलाकात के बाद उपचुनाव से अपना नाम वापस ले लिया। उपचुनाव छह अक्टूबर को होना है। बनर्जी ने 18 सितंबर को प्रधान को समर्थन देने की घोषणा करते हुए कांग्रेस को ‘‘सहयोगी दल’’ और ‘‘स्वाभाविक सहयोगी’’ बताया था। उन्होंने कहा था कि यह फैसला देश के व्यापक हित और ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) गठबंधन को मजबूत करने के लिए लिया गया है। बनर्जी ने यह भी कहा था कि वह विपक्षी गठबंधन के भविष्य को लेकर बंगाल से एक संदेश देना चाहती हैं। हालांकि, यह कदम जिस समय उठाया गया है, उसके स्पष्ट रणनीतिक मायने हैं। बनर्जी के खेमे ने शुरुआत में नंदीग्राम से अपना उम्मीदवार उतारा था और उम्मीदवार के चुनाव मैदान से हटने के बाद उसने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया। पर्यवेक्षकों का कहना है कि कांग्रेस को उनका समर्थन देना भाजपा विरोधी मतों को बंटने से रोकने की कोशिश होने के साथ ही उनके खेमे के लिए असामान्य रूप से मुश्किल दौर का राजनीतिक जवाब भी है। बनर्जी की घोषणा के कुछ ही समय बाद प्रधान को 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने से इस घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर 1990 के दशक के आखिर में तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था। उन्होंने वाम मोर्चे को चुनौती देने के लिए तृणमूल कांग्रेस बनाई थी और उनका मानना था कि माकपा का विरोध करने में कांग्रेस पर्याप्त रूप से प्रभावी नहीं थी। इसके बावजूद दोनों दल किसी बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी का सामना करते समय बीच-बीच में एक साथ आते रहे हैं। बनर्जी के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से नाता तोड़ने के बाद दोनों दलों ने 2001 का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा और 2009 के लोकसभा चुनाव में भी फिर साथ आए। यह गठबंधन 2011 में अपने चरम पर पहुंचा, जब कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने मिलकर पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे के 34 साल के शासन का अंत किया लेकिन बाद में नीतियों, सीट बंटवारे और राज्य सरकार के कामकाज को लेकर मतभेद बढ़ने के साथ यह साझेदारी टूट गई। पर्यवेक्षकों का कहना है कि बनर्जी का हालिया कदम उपचुनाव के सामान्य राजनीतिक गणित से कहीं अधिक महत्व रखता है। यह एक असामान्य मौका है जब उन्होंने बंगाल में भाजपा विरोधी चुनावी रणनीति के केंद्र में सार्वजनिक रूप से कांग्रेस को जगह दी है। हालांकि, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने दोनों दलों के बीच तत्काल राजनीतिक नजदीकी की किसी संभावना को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। बनर्जी के कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए चौधरी ने कहा कि वह कांग्रेस को ‘‘गिरे हुए पत्ते की तरह कमजोर न समझें, बल्कि उसे बरगद की तरह मजबूत मानकर उसका साथ दें।’’चौधरी ने कहा, ‘‘समर्थन कब दिया गया है, इस पर गौर किया जाना चाहिए। यह तब दिया गया जब उनकी उम्मीदवार चुनाव मैदान से हट गईं। अब उनके पास ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न है, लेकिन उनका खेल खेलने के लिए कोई खिलाड़ी नहीं बचा है।’’उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के नाम एवं चुनाव चिह्न को लेकर पार्टी के गुटों में जारी टकराव के बाद निर्वाचन आयोग द्वारा बनर्जी के धड़े को अस्थायी रूप से आवंटित चुनाव चिह्न का जिक्र करते हुए यह बात की। हालांकि, पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार की राय इससे अलग है। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस राज्य की भाजपा विरोधी और धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक ताकतों से मिलने वाले हर समर्थन का स्वागत करती है। क्या पता कि बंगाल का यह घटनाक्रम विपक्ष को और मजबूती से एकजुट करने वाला कोई नया राजनीतिक रास्ता खोल दे।’’कांग्रेस नेताओं ने प्रधान की गिरफ्तारी की आलोचना की है। राहुल गांधी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए कहा है कि पार्टी ‘‘लड़ेगी और जीतेगी।
CM योगी का जारी है सेल्फी कनेक्शन, नियुक्ति पत्र बांटने के बाद ली तस्वीर
यूपी में 912 छात्रों का चयम यूपी पुलिस के विभिन्न पदों पर हुआ है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवचयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए और बाद में उन्होंने अभ्यर्थियों और अफसरों के साथ सेल्फी भी ली.
टीम इंडिया गोल्ड से एक कदम दूर, बांग्लादेश को सेमीफाइनल में धो डाला
शेफाली वर्मा के शतक के बाद गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के दम पर हरमनप्रीत कौर ब्रिगेड ने एशियन गेम्स 2026 में फाइनल का टिकट कटा लिया है. अब गोल्ड मेडल मैच में भारतीय टीम श्रीलंका से भिड़ेगी. भारत ने विमेंस एशिया कप 2026 में श्रीलंका को ही हराकर खिताब जीता था.
सऊदी अरब की राजधानी रियाद में जोरदार ब्लास्ट, देखें दुनिया आजतक
सऊदी अरब की राजधानी रियाद में धमाकों की तेज़ आवाज़ सुनाई. एयरपोर्ट के पास आसमान में उठता काले धुएं का गुबार दिखा. कई जिलों में अलर्ट जारी किया. सऊदी अरेबियन सिविल डिफेंस ऑगेनाइजेशन ने वॉर्निंग सिस्टम को एक्टिव फिर किया. सऊदी अधिकारियों ने लोगों को भीड़ से दूर रहने को कहा. देखें दुनिया आजतक.
Dating में भी ‘Maxxing’! Gen Z क्यों कर रही Attraction को अपग्रेड?
Gen Z की Dating में 'Maxxing' Trend तेजी से जगह बना रहा है. इसका मतलब खुद को ज्यादा Attractive और बेहतर बनाने के लिए ट्राय करना है. Looksmaxxing, Smellmaxxing, Aura-maxxing और Voicemaxxing जैसे Terms इसी माइंड सेट से जुड़े हैं. वहीं Solomaxxing में Single रहकर खुद पर Focus करने की बात होती है. लेकिन क्या Dating में खुद को बेहतर बनाना अब इतना इम्पॉर्टेंट हो गया है?
इंदौर में ‘गूंज’, DUSU में झटका; राहुल गांधी के युवा दांव का असली इम्तिहान अब
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने तंज किया, 'मैंने गूंज तो नहीं सुनी, लेकिन धमाका जरूर सुना.' इंदौर में राहुल के कार्यक्रम पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का जवाब था ‘झूठ की गूंज’.
घर बैठे चेक करें राशन कार्ड से आधार लिंक का स्टेटस, जानिए ईकेवाईसी कराने की पूरी प्रक्रिया
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने सभी राशन कार्डधारकों के लिए ई-केवाईसी कराना जरूरी कर दिया है. अगर आपने अभी तक अपना केवाईसी पूरा नहीं किया है, तो राशन रुकने का खतरा हो सकता है. जानिए घर बैठे ई-केवाईसी कराने का पूरा तरीका.
'हर नए कस्टमर से डरती हूं...' पटाया में काम कर रही लड़की की आपबीती
पटाया की चमकती नाइटलाइफ के पीछे की जिंदगी उतनी आसान नहीं है. यहां 20 साल से काम कर रही एमिली ने बताया कि हर नए कस्टमर को लेकर उनके मन में डर और सुरक्षा की चिंता रहती है. एएफपी की रिपोर्ट में उन्होंने पटाया में काम करने वाली महिलाओं की जिंदगी, कमाई और जोखिम से जुड़े कई पहलुओं के बारे में बताया.
Matoshree के बाहर Disha Salian के पिता सतीश सालियन का हाई-वोल्टेज ड्रामा
दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियन के पिता सतीश सालियन ने शनिवार को शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे को 500 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा। यह नोटिस दिशा की मौत की दोबारा जांच की मांग को लेकर आदित्य ठाकरे की ओर से की गई कथित टिप्पणी के बाद दिया गया है। सतीश सालियन अपने वकील नीलेश ओझा और कानूनी टीम के साथ मुंबई के बांद्रा ईस्ट स्थित कलानगर में मातोश्री पहुंचे। आदित्य ठाकरे के वकील राहुल दिवाते और अनिल जाधव ने नोटिस स्वीकार किया। भारी पुलिस बल के बीच मातोश्री पहुंचे सतीश सालियन सतीश सालियन करीब शाम 4 बजे मातोश्री पहुंचे। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और मीडिया मौजूद था। शिवसेना (यूबीटी) के कई कार्यकर्ता भी वहां जुटे हुए थे। पुलिस ने सतीश सालियन और उनकी कानूनी टीम को कलानगर में प्रवेश की अनुमति दी, लेकिन सुरक्षा कारणों से ठाकरे परिवार के आवास के दरवाजे बंद रखे गए। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अनिल देसाई और विधान परिषद सदस्य अनिल परब भी अपनी कानूनी टीम के साथ वहां मौजूद थे। #WATCH | Disha Salian death case | Mumbai: After reaching outside the residence of Shiv Sena (UBT) leader Aaditya Thackeray, Disha Salian's father, Satish Salian, says, The notice concerns defamation. The compensation is Rs 500 crore. He (Aaditya Thackeray) lies every day... pic.twitter.com/Uc6uRjjrQD — ANI (@ANI) September 19, 2026 इसे भी पढ़ें: दिशा सालियान मामले में Sanjay Raut का आरोप, ठाकरे परिवार को फंसाने के लिए दूसरों का इस्तेमाल दिशा सालियन की मौत की फिर से जांच का मामला दिशा सालियन की 2020 में मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद मौत हो गई थी। मुंबई पुलिस ने पहले जांच में किसी साजिश की बात से इनकार किया था। इसके बाद उनके पिता सतीश सालियन ने बॉम्बे हाई कोर्ट में उनकी मौत की परिस्थितियों की नए सिरे से जांच की मांग की। 2 सितंबर 2026 को हाई कोर्ट ने सीबीआई को मामले की जांच करने, सतीश सालियन का बयान दर्ज करने और एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। साथ ही अदालत ने कहा था कि जांच में पर्याप्त सामग्री मिलने तक किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाए। सीबीआई ने 14 सितंबर को एफआईआर दर्ज की, जिसमें आदित्य ठाकरे समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं। हालांकि, हाई कोर्ट के निर्देश के मुताबिक किसी व्यक्ति को पर्याप्त सबूत मिलने तक आरोपी नहीं माना जाना है। आदित्य ठाकरे ने आरोपों से किया इनकार गुरुवार को आदित्य ठाकरे ने दिशा सालियन को जानने या उनसे कभी मिलने से इनकार किया था। उन्होंने दिशा की मौत से उनका नाम जोड़ने की कोशिशों को राजनीतिक मकसद से की गई कार्रवाई बताया था। सतीश सालियन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, केवल भगवान ही मुझे नियंत्रित कर सकते हैं, कोई और नहीं। उनके वकील नीलेश ओझा ने कहा, आदित्य ठाकरे को माफी मांगनी चाहिए या मानहानि की कार्रवाई का सामना करना चाहिए। इसे भी पढ़ें: Chhatron Ki Goonj: इंदौर के मंच पर Rahul Gandhi ने ऐसा क्या किया, जिस पर BJP भड़क गई? 500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग रिपोर्टों के मुताबिक, मानहानि नोटिस में माफी मांगने, संबंधित बयानों को वापस लेने और 500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की गई है। नोटिस में जवाब के लिए सात दिन का समय दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। दिशा सालियन की मौत से जुड़ा मामला फिलहाल सीबीआई जांच के अधीन है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
राधा अष्टमी पर CM शुभेंदु ने भक्तों संग कीर्तन पर झूमें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी राधा अष्टमी पर कोलकाता के बागबाजार स्थित श्री गौड़ीय मठ पहुंचे। उन्होंने पूजा-अर्चना के साथ भक्तों के बीच कीर्तन में हिस्सा लिया। इस दौरान वह भक्ति गीत गाते, तालियां बजाते, ढोलक बजाते और श्रद्धालुओं के साथ नाचते नजर आए।
शादी के लिए बदला मजहब, दीपिका ने घर में बनाया नमाज रूम, रखी कुरान
दीपिका और शोएब यूट्यूब, म्यूजिक वीडियो, ब्रांड एंडोर्समेंट से भी तगड़ी कमाई करते हैं. मुंबई में कपल का आलीशान 5 BHK घर है. आइए आपको उनके घर का हाउस टूर देते हैं.
मृत्यु के 3 दिन बाद ही क्यों चुनी जाती हैं मृतक की अस्थियां? जानें
Garud Puran: अस्थि विसर्जन किसी मृत व्यक्ति के दाह संस्कार के बाद किया जाने वाला एक अनुष्ठान है. इसका अर्थ होता है चिता में जल गए मृत व्यक्ति की हड्डियों और राख को जल में विसर्जन करना. शास्त्रों के अनुसार अस्थियां को पवित्र नदियों में ही विसर्जित करना चाहिए, जिसमें सबसे ज्यादा महत्व गंगा नदी का है. अस्थि विसर्जन में समय का बहुत महत्व होता है, और इसलिए दाह संस्कार के बाद अधिकतम तीसरे या चौथे दिन तक को ही उपयुक्त माना गया है.
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने परिवारवाद को लेकर एक बार फिर अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित में वह अपने भाई-बहनों और नजदीकी रिश्तेदारों के मोह से ऊपर उठकर फैसले लेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आकाश आनंद और उनकी बहन को अब पार्टी की कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके स्थान पर अपने भाई आनंद कुमार के परिवार से केवल ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाया जाएगा।
आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति के रंग में रंगा ब्यावर, श्री वीर तेजा मेले का विधिवत शुभारंभ
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मेले में नजर आया राजस्थान का पारंपरिक लोक रंग ब्यावर। वीर तेजाजी महाराज के प्रति आस्था, राजस्थान की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक ऐतिहासिक श्री वीर तेजा मेला रविवार को धार्मिक माहौल के बीच विधिवत शुरू हुआ। मेले के शुभारंभ के साथ ही ब्यावर शहर […] The post आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति के रंग में रंगा ब्यावर, श्री वीर तेजा मेले का विधिवत शुभारंभ appeared first on Sabguru News .
गोद में बेटी, सामने नदी और 3 KM का रास्ता... छत्तीसगढ़ की लेडी टीचर्स की कहानी
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से लेडी टीचर्स की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सोचने पर मजबूर कर देगी. वाड्रफनगर ब्लॉक के धौरपुर गांव में तैनात दो महिला शिक्षिकाओं को बारिश में स्कूल पहुंचने के लिए करीब 3 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. फिर मोरन और इरिआ नदियों को पार करना होता है. शिक्षिका संध्या अपनी 9 महीने की बेटी को गोद में लेकर नदी पार करती हैं. पानी ज्यादा बढ़ जाए तो उन्हें वापस लौटना पड़ता है.
वंदे मातरम्: कैसे हुआ आतंक के 'उस' चैप्टर का अंत? देखें ऑपरेशन महादेव की कहानी
पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन महादेव चलाकर उन आतंकवादियों को निशाना बनाकर ढेर किया, जिन्होंने पहलगाम में भारतीयों पर हमला किया था. इन आतंकवादियों में लश्कर का टॉप कमांडर सुलेमान शाह भी शामिल था. सेना ने कैसे किया पहलगाम का बदला? देखें...
ट्रंप का ईरान जंग जल्द खत्म होने का दावा, देखें US Top-10
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के साथ जारी जंग के जल्द खत्म होने का दावा किया. ट्रंप ने कहा, कोई नहीं चाहता कि ईरान के पास परमाणु हथियार हों. उन्होंने साथ ही कहा कि जंग खत्म होते ही पेट्रोल और तेल की कीमतें पहले के स्तर पर लौट सकती हैं या उससे भी नीचे जा सकती हैं. देखें यूएस टॉप-10.
'साइबर हमलों और अन्य खतरों के लिए तैयार रहें': सेमीकंडक्टर उद्योग को वैष्णव ने किया आगाह, और क्या कहा? ashwini-vaishnaw-warns-semiconductor-industry-cyberattacks-india-chip-growth
'देवा श्री गणेशा देवा', भजन पर खूब नाचीं नीता अंबानी, VIDEO
Nita Ambani Dance: मुकेश अंबानी और नीता अंबानी ने अपने घर गणपति उत्सव और एंटीलिया चा राजा की विदाई बेहद धूमधाम से मनाई. पूरा परिवार बाप्पा की भक्ति में लीन नजर आया जिसके वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हैं. सामने आए एक वीडियो में नीता अंबानी गणेश भजन पर सुंदर डांस करती दिखाई दीं.
शादी का वादा, CCTV से निगरानी... तंग महिला कॉन्स्टेबल ने दी जान
गुजरात के गांधीनगर में 28 वर्षीय महिला कॉन्स्टेबल जाह्नवी की आत्महत्या के मामले में उसके प्रेमी प्रकाश चौहान को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक जाह्नवी चार साल से प्रकाश के साथ रिलेशन में थी और उसके कहने पर पति से तलाक लिया था.
SIR का मतलब ‘शाह इंस्टिगेटेड रिमूवल’; वोटर लिस्ट रिवीजन पर फिर भड़की कांग्रेस
चुनाव आयोग का कहना है कि 22 साल बाद हो रहे इस संशोधन से वोटर लिस्ट से अयोग्य लोगों और डुप्लिकेट नामों को हटाया जाएगा और कानून के मुताबिक वोट देने के योग्य लोगों को इसमें शामिल किया जाएगा।
'उस बच्ची के सवाल का कोई जवाब है?' राहुल गांधी का PM से सवाल
राहुल गांधी ने इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में एक छात्रा के हॉस्टल और रहने के खर्च से जुड़ी समस्या को उठाया. उन्होंने पीएम मोदी से सवाल किया कि सरकार के पास दीया जलाने के लिए पैसा है, लेकिन हॉस्टल के लिए क्यों नहीं. राहुल ने पीएम से सवालिया लहजे में पूछा कि बच्ची के सवाल का जवाब है क्या आपके पास.
कौन हैं विशेष यादव? ABVP-NSUI को दी कड़ी टक्कर, अखिलेश ने की तारीफ!
कौन हैं विशेष यादव? ABVP-NSUI को दी कड़ी टक्कर, अखिलेश ने की तारीफ!
9 छक्के और तूफानी शतक... शेफाली ने एशियन गेम्स में उड़ाया गर्दा
एशियन गेम्स 2026 के महिला क्रिकेट सेमीफाइनल में शेफाली वर्मा ने बांग्लादेश के खिलाफ तूफानी शतक जड़कर भारत को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया. शेफाली ने 49 गेंदों में नाबाद 100 रन बनाए, जिसमें 3 चौके और 9 छक्के शामिल रहे.
आकाश और दीपिका आनंद नहीं, BSP में इस भतीजे को बड़ा जिम्मा... मायावती ने फिर चौंकाया!
मायावती ने कहा है कि आकाश आनंद और उनकी बहन को बीएसपी में अब कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी. आनंद कुमार के परिवार से केवल ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे किया जाएगा.
Election Commission के SIR अभियान में करोड़ों नाम हटाने पर Congress का अमित शाह पर बड़ा आरोप
कांग्रेस ने रविवार को निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि एसआईआर वास्तव में मतदाताओं के नाम हटाने की एक बड़े पैमाने की ‘‘शाह इंस्टीगेटेड रिमूवल’’ (शाह के इशारे पर मतदाताओं के नाम हटाने की) प्रक्रिया तथा ‘‘संविधान पर हमला’’ है। कांग्रेस ने कहा कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर हटाए गए नामों में सबसे अधिक संख्या समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से सबसे कमजोर तथा वंचित वर्गों से आने वाले मतदाताओं की है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने जून 2025 में बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की पहले चरण की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद नवंबर 2025 में नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में दूसरा चरण शुरू किया गया। रमेश ने एक बयान में कहा कि चरण-1 और चरण-2 में 7.8 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। उन्होंने कहा कि एसआईआर से पहले की मतदाता सूची में दर्ज कुल नामों में से 13 प्रतिशत नाम हटा दिए गए हैं। रमेश ने कहा कि तीसरे चरण की शुरुआत 2026 के मध्य में 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में हुई। उन्होंने बताया कि तीसरे चरण के दौरान अब तक 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल 36.06 करोड़ मतदाताओं में से 6.18 करोड़ के नाम हटा दिए गए हैं। रमेश ने कहा, ‘‘नाम हटाए जाने की दर 17 प्रतिशत से अधिक है। इसके अलावा 5.43 करोड़ मतदाताओं को अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं, ताकि मतदाता सूची में उनके नाम बरकरार रखे जा सकें। इससे नाम हटाए जाने का जोखिम और 15 प्रतिशत बढ़ जाता है। यह असामान्य रूप से बड़ा अनुपात है, जो पूरी एसआईआर प्रक्रिया में संरचनात्मक खामियों को दर्शाता है।’’उन्होंने सवाल किया कि इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बाद भी इतने अधिक मतदाताओं को अपने नाम ‘‘सत्यापित’’ कराने की जरूरत कैसे पड़ रही है। उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह कुल 32 प्रतिशत यानी करीब हर तीन में से एक मतदाता का नाम या तो हटा दिया गया है या उसके हटाए जाने का खतरा है। इस संबंध में राज्यों की स्थिति इस प्रकार है : दिल्ली (53.73 प्रतिशत), चंडीगढ़ (52.58 प्रतिशत), झारखंड (39.57 प्रतिशत), उत्तराखंड (35.71 प्रतिशत), मेघालय (35.36 प्रतिशत), महाराष्ट्र (33.88 प्रतिशत), तेलंगाना (48.90 प्रतिशत), कर्नाटक (27.6 प्रतिशत), हरियाणा (37.5 प्रतिशत), ओडिशा (23.67 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (21.17 प्रतिशत) और पंजाब (15.23 प्रतिशत)। कर्नाटक, तेलंगाना और झारखंड में जिन मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खतरा है, उनकी सूची सार्वजनिक कर दी गई है, ताकि मतदाता उसमें अपना नाम देख सकें।’’उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली ने यह सूची 19 सितंबर 2026 को सार्वजनिक की और वह भी केवल जन दबाव के कारण। भाजपा शासित अन्य राज्यों के साथ-साथ पंजाब ने अब तक ऐसा नहीं किया है।’’रमेश ने आरोप लगाया कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर हटाए गए नामों में मुख्य रूप से समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से सबसे कमजोर तथा वंचित वर्गों के मतदाता शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि ज्यादातर बड़े राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से पुरुषों की तुलना में महिलाओं के अधिक नाम हटाए गए हैं। रमेश ने कहा कि एसआईआर के जरिए सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है और मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए जरूरी दस्तावेज जुटाने का बोझ नागरिकों पर डाल दिया है, जबकि संभव है कि इनमें से कुछ दस्तावेज सरकार ने उन्हें कभी जारी ही न किए हों। उन्होंने कहा कि ऐसी जांच प्रक्रिया, जिसे देश के अधिकांश नागरिक पूरा ही नहीं कर सकते, दरअसल लोगों को मतदाता सूची से बाहर करने का माध्यम बनकर रह जाती है। कांग्रेस महासचिव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का स्पष्ट संदर्भ देते हुए कहा, ‘‘एसआईआर वास्तव में मतदाताओं को हटाने की एक बड़े पैमाने की ‘शाह इंस्टीगेटेड रिमूवल’ प्रक्रिया है। यह हमारे संविधान पर हमला है।
‘माही' की फेक इंस्टा ID, बर्थडे सरप्राइज का झांसा... सिया ने केतन को लोहागढ़ फोर्ट कैसे बुलाया?
सिया केतना हत्याकांड: चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि तीनों आरोपियों ने इस हत्या को अंजाम देने के लिए महीनों तक बाकायदा रिसर्च और प्लानिंग की थी।
रोहतक में कुत्ते का खौफ, आधे घंटे में 5-6 लोगों को काटा
रोहतक की ओल्ड हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में आवारा कुत्ते ने युवती पर हमला कर पैर काट लिया। CCTV में कुत्ते को लोगों पर झपटते देखा गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब आधे घंटे में कुत्ते ने 5-6 लोगों को काटा।
क्या बंगाल में बदलेगी विपक्ष की सियासी तस्वीर?: नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस के साथ ममता, किया ये बड़ा इशारा mamata-banerjee-congress-support-nandigram-bypoll-may-possible-reset-in-bengal-opposition-politics
'मेरा कोई काम नहीं रहा...' AI के दौर में टेकी ने बयां किया अपना डर
कॉरपोरेट में एआई की बढ़ती दखल के बीच कर्मचारियों के मन में नौकरी और भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. एक डेवलपर ने इसी डर और असुरक्षा को अपनी कहानी के जरिए बयां किया है, जो अब सोशल मीडिया पर चर्चा में है.
असम CM हिमंत बिस्वा सरमा ने ममता बनर्जी गुट के चुनाव चिन्ह पर कसा तंज, बोले- पिचक जाएगा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ममता बनर्जी गुट के नए चुनाव चिन्ह पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि दो फूल चला गया, अब जल्दी ही फुटबॉल भी चला जाएगा। नंदीग्राम उप चुनाव में प्रचार करने के लिए पहुंचे असम सीएम ने कहा कि जल्दी ही पिचक जाएगा।
पिता मुंबई के चॉल में करते हैं गुजारा, अब बेटा बनेगा डॉक्टर
कहते हैं न सपने क्लास नहीं देखती है. जौनपुर के महेंद्र यादव मुंबई में ऑटो चलाते हैं और अपने बेटे को डॉक्टर बनाना चाहते हैं. अब उन्हें बेटे को KGMU लखनऊ में MBBS में एडमिशन मिल गया है.
पंजाब के सीमावर्ती जिले अमृतसर में कानून-व्यवस्था को सीधी चुनौती देने वाले सहायक उप-निरीक्षक (ASI) हरजीत सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपी को पंजाब पुलिस ने एक भीषण मुठभेड़ के बाद मार गिराया है। शहर में पेट्रोलिंग ड्यूटी के दौरान खाकी वर्दी पर हमला करने की इस दुस्साहसिक वारदात के महज कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस कमिश्नरेट की स्पेशल विंग ने हत्यारे को घेर लिया। पुलिस टीम द्वारा आत्मसमर्पण के लिए दिए गए अल्टीमेटम को नजरअंदाज करते हुए जब आरोपी ने सीधे पुलिस पार्टी पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, तो जवाबी आत्मरक्षा में चली गोलियों से वह गंभीर रूप से घायल हो गया और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। इस एनकाउंटर के तुरंत बाद अमृतसर के पुलिस कमिश्नर हरमनबीर सिंह गिल ने एक विस्तृत प्रेस ब्रीफिंग में जो खुलासे किए, उसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में यह साबित हुआ है कि इस बर्बर हत्याकांड के तार सीधे सीमा पार पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी और ड्रग सिंडिकेट के आकाओं से जुड़े हुए थे।ठंडा रोड पर नाकेबंदी के दौरान मुठभेड़: 4 राउंड गोलीबारी के जवाब में पुलिस ने दागीं 6 गोलियांअमृतसर के पुलिस कमिश्नर हरमनबीर सिंह गिल ने आधिकारिक विवरण साझा करते हुए बताया कि 18 सितंबर 2026 की रात को ड्यूटी के दौरान एएसआई हरजीत सिंह की नृशंस हत्या की घटना के बाद से ही पूरी पुलिस फोर्स अत्यधिक अलर्ट मोड पर थी। हत्याकांड में शामिल शूटरों की धरपकड़ के लिए अमृतसर शहर और उसके सीमावर्ती बाहरी इलाकों में विशेष खुफिया नाके और चेकपॉइंट स्थापित किए गए थे। तकनीकी निगरानी और फील्ड इनपुट के आधार पर पुलिस को जब पुख्ता सूचना मिली, तो शहर में तुरंत 'रेड अलर्ट' घोषित कर दिया गया।शनिवार की देर रात ठंडा रोड पर बने चेकपॉइंट पर जब स्पेशल पुलिस टीम ने मोटरसाइकिल सवार संदिग्ध को रुकने का स्पष्ट इशारा किया, तो उसने रुकने के बजाय अपनी अवैध पिस्तौल निकालकर पुलिस टीम पर सीधे चार राउंड गोलियां दाग दीं। गोलियों की आवाज से इलाका दहल उठा और पुलिसकर्मियों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई में नियंत्रित तरीके से छह राउंड फायरिंग की। इस क्रास-फायरिंग में पुलिस की एक गोली मुख्य शूटर को जा लगी, जिसके बाद वह लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़ा। पुलिस टीम ने तुरंत उसे प्राथमिक उपचार देते हुए नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के उपरांत उसे अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत (ब्रॉट डेड) घोषित कर दिया।अंधेरे का लाभ उठाकर दूसरा संदिग्ध फरार: पंजाब पुलिस की स्पेशल टीमें कर रही हैं कांबिंग ऑपरेशनपुलिस कमिश्नर गिल ने पुष्टि की कि इस मुठभेड़ के दौरान मुख्य शूटर के साथ उसका एक अन्य साथी भी मौजूद था। जैसे ही मुठभेड़ शुरू हुई और गोलियां चलने लगीं, दूसरा संदिग्ध घने अंधेरे और आसपास के संकरे रास्तों का फायदा उठाकर मौके से भागने में सफल रहा। फरार आरोपी की पहचान स्थापित कर ली गई है और अमृतसर ग्रामीण व शहरी पुलिस की कई विशेष टीमें डॉग स्क्वॉड और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के साथ पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर सर्च और कांबिंग ऑपरेशन चला रही हैं। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि सभी संभावित निकास मार्गों को सील कर दिया गया है और बहुत जल्द दूसरे फरार अपराधी को भी कानून के शिकंजे में ले लिया जाएगा।पाकिस्तान में बैठे हैंडलर का खौफनाक सिंडिकेट: ड्रग्स के धंधे और पैसों के लालच में दिया वारदात को अंजामइस मुठभेड़ के बाद पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक तकनीकी जांच में इस हत्याकांड के पीछे का सबसे चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। सीपी हरमनबीर सिंह गिल ने खुलासा किया कि इन स्थानीय अपराधियों को विदेश में बैठे एक पाकिस्तानी हैंडलर द्वारा लगातार दिशा-निर्देश दिए जा रहे थे। यह पाकिस्तानी हैंडलर सीमा पार से हेरोइन और अवैध हथियारों की तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क संचालित करता है। उसने इन युवाओं को भारी नकदी देने और पंजाब में नशीले पदार्थों के अत्यधिक आकर्षक सिंडिकेट का स्थायी डिस्ट्रीब्यूटर बनाने का सुनहरा ख्वाब दिखाया था।पाकिस्तानी हैंडलर ने इन गुर्गों को अपने नेटवर्क में शामिल करने से पहले उनके सामने एक बेहद क्रूर और खौफनाक शर्त रखी थी। वह यह परखना चाहता था कि क्या ये शूटर उसके प्रति पूरी तरह वफादार हैं और क्या वे उसके इशारे पर किसी भी हद तक जा सकते हैं। इस तथाकथित 'वफादारी के इम्तिहान' (Test of Loyalty) के तहत पाकिस्तानी आका ने उन्हें स्पष्ट निर्देश दिया था कि वे शहर में अकेले गश्त कर रहे किसी भी पुलिस अधिकारी को चिन्हित करें, उसे प्वाइंट-ब्लैंक रेंज से गोली मारकर मौत के घाट उतारें और इस पूरी घटना का स्पष्ट वीडियो रिकॉर्ड करके उसे सीमा पार भेजें, ताकि वे उसके स्थायी नियंत्रण और मानसिक दबाव में बने रहें।हत्या का वीडियो बनाकर सीमा पार भेजा: फॉरेंसिक जांच और जीपीएस कोऑर्डिनेट्स से बनेगा पुख्ता केसपुलिस कमिश्नर ने बताया कि जांच में यह साबित हो चुका है कि जब एएसआई हरजीत सिंह गोली लगने के बाद लहूलुहान होकर जमीन पर गिरे, तब इन बेरहम शूटरों ने अपने मोबाइल फोन के कैमरे से उनकी तड़पती हुई हालत का वीडियो शूट किया और उसे तुरंत एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर के ठिकाने पर अपलोड कर दिया। मुठभेड़ स्थल से बरामद किए गए मुख्य आरोपी के स्मार्टफोन को तुरंत राज्य फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (FSL) भेज दिया गया है।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर और फॉरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा फोन के डेटा की रिकवरी की जा रही है, जिससे वह विवादित मर्डर वीडियो, कॉलिंग लॉग्स और पाकिस्तानी आईपी एड्रेस के साथ चैटिंग के पुख्ता प्रमाण सामने आ जाएंगे। इसके साथ ही, वारदात के समय और वीडियो ट्रांसमिशन के दौरान इस्तेमाल किए गए सेल टावर डंप डेटा और जीपीएस लोकेशन कोऑर्डिनेट्स का वैज्ञानिक मिलान किया जा रहा है। पुलिस इस पूरे डिजिटल और तकनीकी साक्ष्य को अदालत के समक्ष एक अचूक और अभेद्य चार्जशीट के रूप में पेश करेगी, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय आतंकी-अपराधिक गठजोड़ पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो सके।
बिहार विधान परिषद (MLC) के आगामी शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के द्विवार्षिक चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। चुनावी रणनीतिकार से पूर्णकालिक राजनेता बने प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली जन सुराज पार्टी ने पारंपरिक सियासी समीकरणों को चुनौती देते हुए रविवार, 20 सितंबर 2026 को अपने पांच प्रमुख उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। पार्टी के प्रदेश मुख्यालय से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, जन सुराज ने शिक्षक और स्नातक कोटे की महत्वपूर्ण सीटों पर सुशिक्षित, सामाजिक रूप से सक्रिय और जमीन से जुड़े चेहरों को चुनावी अखाड़े में उतारने की रणनीति अपनाई है। इन घोषित पांच सीटों में दरभंगा शिक्षक, दरभंगा स्नातक, सारण शिक्षक, पटना शिक्षक और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं, जहां पार्टी लंबे समय से कैडर निर्माण और मतदाता संपर्क अभियान में जुटी हुई थी।दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: जन सुराज ने एसपी राय पर जताया भरोसामिथिलांचल की राजनीति के केंद्र माने जाने वाले दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज ने प्रो. एसपी राय को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया है। दरभंगा शिक्षक सीट को राज्य के शैक्षणिक गलियारों में वैचारिक रूप से बेहद संवेदनशील और प्रतिष्ठित माना जाता है। जन सुराज की कोर कमेटी काफी समय से इस क्षेत्र के माध्यमिक, उच्च माध्यमिक विद्यालयों और वित्तपोषित डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों के वेतनमान, सेवा शर्तों और पेंशन से जुड़े मुद्दों को लेकर संगठनात्मक जमीन तैयार कर रही थी। एसपी राय के नाम पर अंतिम मुहर लगने के बाद अब इस सीट पर एनडीए (NDA) और महागठबंधन समर्थित शिक्षक संगठनों के बीच त्रिकोणीय और कड़ा मुकाबला तय माना जा रहा है। पार्टी का दावा है कि शिक्षकों की लंबित समस्याओं को लेकर उनका अभियान इस बार निर्णायक साबित होगा।दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: रवींद्र यादव संभालेंगे चुनावी कमानशिक्षक सीट के साथ-साथ जन सुराज ने दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से रवींद्र यादव को चुनावी मैदान में उतारकर बड़ा सामाजिक दांव चला है। दरभंगा प्रमंडल के विभिन्न जिलों में फैले शिक्षित बेरोजगार युवाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और विभिन्न पेशों से जुड़े ग्रेजुएट मतदाताओं के बीच रवींद्र यादव की सक्रियता को देखते हुए उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। उल्लेखनीय है कि सितंबर की शुरुआत में ही प्रख्यात शिक्षाविद डॉ. सुरेंद्र प्रसाद राय के जन सुराज में शामिल होने के बाद पार्टी ने इस क्षेत्र में अपने मतदाता पंजीकरण अभियान को काफी तेज कर दिया था। रवींद्र यादव की उम्मीदवारी से स्नातक मतदाताओं के बीच जन सुराज ने स्थानीय स्तर पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर दी है।सारण शिक्षक से एमएलसी अफाक अहमद और पटना शिक्षक से डॉ. दिव्या ज्योति पर दांवसारण और राजधानी पटना के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भी जन सुराज ने बेहद सधे हुए नामों का चयन किया है। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी ने एक बार फिर अपने वरिष्ठ नेता अफाक अहमद को टिकट थमाया है। अफाक अहमद का राजनीतिक रिकॉर्ड इस क्षेत्र में काफी मजबूत रहा है और वे पूर्व में भी जन सुराज समर्थित स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर सारण शिक्षक सीट से ऐतिहासिक जीत दर्ज कर विधान परिषद की दहलीज तक पहुंच चुके हैं। शिक्षकों के बीच उनकी गहरी पैठ और निरंतर जमीनी सक्रियता को देखते हुए पार्टी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया है। वहीं दूसरी ओर, राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल मानी जाने वाली पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज ने महिला सशक्तिकरण और शैक्षणिक शुचिता का संदेश देते हुए डॉ. दिव्या ज्योति को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया है।कोसी स्नातक सीट पर रजनीश रंजन उम्मीदवार: 8 सीटों के महासंग्राम की पूरी रूपरेखासीमांचल और कोसी के विस्तृत भूगोल को कवर करने वाले कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज ने रजनीश रंजन के नाम का आधिकारिक ऐलान किया है। कोसी क्षेत्र के स्नातक मतदाताओं के बीच रोजगार, उच्च शिक्षा के गिरते स्तर और पलायन एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना हुआ है, जिसे रजनीश रंजन अपने प्रचार अभियान का मुख्य आधार बनाएंगे। गौरतलब है कि बिहार विधान परिषद में इस बार कुल आठ सीटों पर चुनाव होना है, जिसमें चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। जन सुराज ने इन आठ में से पांच प्रमुख सीटों पर सबसे पहले अपने पत्ते खोलकर अपने प्रतिद्वंद्वियों राष्ट्रीय जनता दल (RJD), जनता दल यूनाइटेड (JDU) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने का प्रयास किया है। पार्टी शेष बची तीन सीटों पर भी बहुत जल्द अपने प्रत्याशियों की घोषणा करने की तैयारी कर रही है।
Digital Gold Rules: रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार अबडिजिटल गोल्डमार्केट को आरबीआई और सेबी की निगरानी में लाने जा रही है. इससे आपका पैसा ज्यादा सुरक्षित रहेगा और फर्जी कंपनियों पर नकेल कसेगी.
एशियन गेम्स 2026 के महिला क्रिकेट टूर्नामेंट के पहले हाई-वोल्टेज सेमीफाइनल मुकाबले में श्रीलंका की महिला क्रिकेट टीम ने अपने आक्रामक खेल और बेहतरीन टीम संयोजन के दम पर पाकिस्तान को 8 विकेट के बड़े अंतर से करारी शिकस्त देकर खिताबी मुकाबले का टिकट पक्का कर लिया है। टूर्नामेंट की प्रबल दावेदार मानी जा रही पाकिस्तानी टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए बड़ा स्कोर खड़ा करने के बावजूद श्रीलंकाई बल्लेबाजों के सामने पूरी तरह बेबस नजर आई। पाकिस्तान द्वारा निर्धारित किए गए 178 रनों के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को श्रीलंकाई टीम ने 13 गेंद शेष रहते ही बेहद आसानी से हासिल कर लिया। इस एकतरफा जीत के साथ ही श्रीलंकाई महिलाओं ने न केवल फाइनल में जगह बनाई, बल्कि अपने देश के लिए कम से कम सिल्वर मेडल भी पक्का कर लिया है। अब गोल्ड मेडल के महा-मुकाबले में श्रीलंका का सामना दूसरे सेमीफाइनल मैच के विजेता से होगा, जबकि इस शर्मनाक हार के बाद पाकिस्तानी टीम टूर्नामेंट के स्वर्ण और रजत पदक की होड़ से बाहर हो चुकी है।शवाल जुल्फिकार और आयेशा जफर की विस्फोटक पारियां: पाकिस्तान ने खड़ा किया था 177 रनों का स्कोरटॉस हारकर पहले बल्लेबाजी के लिए मैदान में उतरी पाकिस्तानी टीम ने पारी की शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया था। पाकिस्तान की सलामी बल्लेबाज शवाल जुल्फिकार और मध्यक्रम की अनुभवी बल्लेबाज आयेशा जफर ने श्रीलंकाई स्पिनरों और तेज गेंदबाजों की कमजोर गेंदों पर कड़े प्रहार करते हुए रनों की गति को लगातार बनाए रखा। शवाल जुल्फिकार ने तकनीकी रूप से सधी हुई पारी खेलते हुए 54 रनों का बहुमूल्य अर्धशतक जड़ा। दूसरी छोर से आयेशा जफर ने अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में केवल बाउंड्रीज पर ध्यान केंद्रित किया और महज कुछ ही ओवरों के भीतर 71 रनों की धुआंधार पारी खेलकर श्रीलंकाई खेमे में खलबली मचा दी। इन दोनों शीर्ष बल्लेबाजों के अर्धशतकों की बदौलत पाकिस्तानी टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में स्कोरबोर्ड पर 177 रनों का एक बेहद मजबूत और प्रतिस्पर्धी स्कोर खड़ा किया। उस समय क्रिकेट विश्लेषकों का मानना था कि नॉकआउट दबाव और धीमी होती पिच पर 178 रनों का लक्ष्य हासिल करना श्रीलंका के लिए आसान नहीं होगा।कप्तान चमारी अटापट्टू का महातूफान: 50 गेंदों में 83 रन ठोक उड़ाई पाकिस्तानी गेंदबाजी की धज्जियां178 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम को उनकी करिश्माई कप्तान चमारी अटापट्टू ने फ्रंट फुट से लीड किया। अटापट्टू ने पहले ही ओवर से पाकिस्तानी गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक तेवर अपनाए और मैदान के चारों ओर चौकों और छक्कों की बरसात कर दी। कप्तान अटापट्टू ने सिर्फ 50 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 83 रनों की मैच-विजेता पारी खेली, जिसमें 7 दर्शनीय चौके और 6 गगनचुंबी छक्के शामिल थे। उनका स्ट्राइक रेट पूरे समय 160 से ऊपर बना रहा, जिसने पाकिस्तानी फील्डरों और कप्तान के सारे रणनीतिक प्लान ध्वस्त कर दिए। अटापट्टू का बल्ला इस कदर गरजा कि पाकिस्तान की प्रमुख स्पिनर नशरा संधू, जो आमतौर पर काफी कसी हुई गेंदबाजी के लिए जानी जाती हैं, अपने 3.5 ओवरों में बिना कोई बड़ा प्रभाव छोड़े 38 रन लुटा बैठीं। वहीं दूसरी ओर तेज गेंदबाज मोमिना रियासत पाकिस्तान की सबसे महंगी गेंदबाज साबित हुईं, जिन्होंने अपने दो ओवरों के स्पेल में 15.50 की इकोनॉमी से 31 रन खर्च कर डाले।हसीनी परेरा और इमेशा दुलानी का मजबूत साथ: श्रीलंका ने 13 गेंद पहले ही खत्म किया मैचकप्तान चमारी अटापट्टू के इस विध्वंसक प्रहार के साथ-साथ शीर्ष क्रम की अन्य बल्लेबाजों ने भी बखूबी जिम्मेदारी निभाई। हसीनी परेरा ने एक छोर संभालते हुए तेज गति से 42 रनों की सधी हुई पारी खेली और कप्तान के साथ दूसरे विकेट के लिए मैच-जिताऊ साझेदारी की। वहीं इमेशा दुलानी ने भी सूझबूझ भरी बल्लेबाजी का मुजाहिरा पेश करते हुए उपयोगी 27 रन जोड़े, जिससे आवश्यक रन रेट कभी भी श्रीलंका की पहुंच से बाहर नहीं गया। दोनों छोर से लगातार बाउंड्रीज आने के कारण पाकिस्तानी कप्तान फील्डिंग में लगातार बदलाव करती रहीं, लेकिन गेंदबाजों की दिशाहीन लाइन और लेंथ ने कोई मौका नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि श्रीलंका ने 18वें ओवर की पांचवीं गेंद पर ही 178 रनों का लक्ष्य 2 विकेट खोकर हासिल कर लिया और 13 गेंद बाकी रहते ही मैदान पर जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया।एशियन गेम्स इतिहास में दूसरी बार फाइनल में श्रीलंका: क्या दोहराया जाएगा 2022 का फाइनल?एशियाई खेलों के महिला क्रिकेट इतिहास में यह कुल दूसरा अवसर है जब श्रीलंका की महिला टीम ने फाइनल में अपनी जगह पक्की की है। इससे पहले साल 2022 के हांगझोउ एशियाई खेलों में भी महिला क्रिकेट स्पर्धा का फाइनल मुकाबला भारत और श्रीलंका के बीच खेला गया था। चार साल पहले खेले गए उस ऐतिहासिक खिताबी मुकाबले में भारतीय महिला टीम ने श्रीलंका को 19 रनों से पराजित करके स्वर्ण पदक पर अपना कब्जा जमाया था, जबकि श्रीलंका को रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। खेल पंडितों का आकलन है कि इस बार भी एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में एक बार फिर भारत और श्रीलंका के बीच महा-मुकाबला देखने को मिल सकता है। हाल ही में दोनों टीमें महिला एशिया कप 2026 के फाइनल में भी आमने-सामने आई थीं, जहां दोनों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली थी।हरमनप्रीत कौर के विश्व रिकॉर्ड के करीब पहुंचीं अटापट्टू: T20I में 4282 रनों का जादुई आंकड़ाअपनी इस नाबाद 83 रनों की पारी के साथ श्रीलंकाई कप्तान चमारी अटापट्टू ने अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स की फेहरिस्त में भी एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। महिला टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में अब अटापट्टू के नाम कुल 4,282 रन दर्ज हो चुके हैं। इस धमाकेदार पारी के दम पर वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा रन बनाने वाली शीर्ष महिला क्रिकेटरों की सूची में भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर को पछाड़ने के बेहद करीब पहुंच गई हैं। हरमनप्रीत कौर और अटापट्टू के रनों के बीच अब बेहद मामूली अंतर रह गया है, और उम्मीद जताई जा रही है कि फाइनल मुकाबले के दौरान अटापट्टू महिला टी20 क्रिकेट इतिहास के नए कीर्तिमान स्थापित कर सकती हैं।पाकिस्तान के हाथ से निकला गोल्ड, लेकिन ब्रॉन्ज मेडल जीतने की उम्मीदें अभी भी बाकीसेमीफाइनल में श्रीलंका के हाथों 8 विकेट की करारी शिकस्त झेलने के बाद भले ही पाकिस्तान की महिला टीम का गोल्ड या सिल्वर मेडल जीतने का सपना चकनाचूर हो गया हो, लेकिन उनका एशियाई खेलों का सफर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। टूर्नामेंट के आधिकारिक प्रारूप के अनुसार, सेमीफाइनल हारने वाली टीमों के बीच कांस्य पदक (Bronze Medal) के लिए प्ले-ऑफ मुकाबला आयोजित किया जाएगा। पाकिस्तान की टीम अब ब्रॉन्ज मेडल के लिए उस टीम से भिड़ेगी जो भारत और बांग्लादेश के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल में पराजित होगी। यदि दूसरा सेमीफाइनल मैच भारत जीत जाता है, तो भारत और श्रीलंका के बीच गोल्ड मेडल का मुकाबला होगा, जबकि हारने वाली बांग्लादेश की टीम कांस्य पदक के लिए पाकिस्तान के सामने चुनौती पेश करेगी।
PM Modi Rahul Gandhi Indore chhatron-ki-goonj Event Mimicry row BJP-Congress Row Jairam Ramesh- छात्रों की गूंज कार्यक्रम पर बवाल: मिमिक्री विवाद के बाद राहुल के बचाव में उतरी कांग्रेस, भाजपा पर साधा निशाना
CID का दावा-अभिषेक बनर्जी के PA ने TMC के खाते में जमा किए थे 7 करोड़ रुपये, क्या है यह जमीन घोटाला
अभिषेक बनर्जी के PA पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खाते में 7 करोड़ रुपए जमा करने की जानकारी सामने आई है. यह जानकारी CID की तरफ से पश्चिम मिदनापुर की एक जिला अदालत में दी गई है.
आज हम बताने जा रहे फिल्म के उस गाने के बारे में, जिसे DDLJ में लेने के बाद रिजेक्ट कर दिया गया था. हालांकि 4 साल बाद यह गाना शाहरुख खान की दूसरी फिल्म में रिलीज हुआ और इस गाने ने रिकॉर्ड तोड़ दिया.
इस देश में हाहाकार, हर 9 में से एक Petrol Pump पर पेट्रोल-डीजल खत्म
Petrol-Diesel Crisis: फ्रांस में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत हो गई है और यहां हर नौ में से एक पेट्रोल पंप खाली हो गया है. एक्सपर्ट कह रहे हैं कि स्थिति आंकड़ों से कहीं ज्यादा गंभीर हो सकती है.
सोनीपतः कुख्यात गैंगस्टर काला जठेड़ी पहुंचा अपने गांव, ढोल-नगाड़ों से स्वागत, पुलिस की भारी सुरक्षा
संदीप उर्फ काला जठेड़ी ने लेडी डॉन के नाम से मशहूर अनुराधा चौधरी से मार्च 2024 में शादी की थी. उस समय भी काला जठेड़ी जेल में ही था. शादी के लिए उनसे कस्टडी पैरोल मिली थी.
मरीन ड्राइव से हाजी अली जा रही BMW पुल से नीचे गिरी, 3 की मौत
मुंबई में रविवार तड़के कोस्टल रोड पर एक तेज रफ्तार बीएमडब्ल्यू पुल से नीचे गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल बताया जा रहा है। कार में कुल चार लोग सवार थे। हादसा 20 सितंबर 2026 को सुबह करीब 5:20 बजे लाला कॉलेज के सामने, लोटस जेट्टी के पास हुआ। काली बीएमडब्ल्यू मरीन ड्राइव से हाजी अली की ओर जा रही थी। इसी दौरान कार तेज रफ्तार के कारण हादसे का शिकार हो गई और सड़क पर मौजूद लोगों को भी टक्कर मार दी। #WATCH | Mumbai, Maharashtra: Visuals from the spot following a fatal accident on the Coastal Road near Lotus Jetty. According to the BMC, an overspeeding BMW heading towards Haji Ali from Marine Drive crashed, leaving three dead and one critically injured. pic.twitter.com/Oj8MSiKH9n — ANI (@ANI) September 20, 2026 इसे भी पढ़ें: Chhatron Ki Goonj: इंदौर के मंच पर Rahul Gandhi ने ऐसा क्या किया, जिस पर BJP भड़क गई? तीन लोगों की मौत हादसे के बाद घायलों को तुरंत नायर अस्पताल ले जाया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हादसे में 20 वर्षीय एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ है। उसे अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में भर्ती कराया गया है। वहीं, 21 वर्षीय शनाय गज्जल, 17 वर्षीय धिर्या सेठ और करीब 25 वर्षीय एक अज्ञात युवक को अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दिया गया। तेज रफ्तार को बताया जा रहा हादसे का कारण शुरुआती जानकारी में बीएमडब्ल्यू की तेज रफ्तार को हादसे की वजह बताया जा रहा है। हालांकि, हादसा किस वजह से हुआ, इसकी पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे से जुड़े दूसरे तथ्यों की जानकारी जुटा रही है। फिलहाल मृतकों और घायल की पहचान से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जा रही है। इसे भी पढ़ें: देश के सिस्टम पर 6 लोगों का कब्जा, शिक्षा तंत्र हुआ बदहाल: इंदौर में बोले Rahul Gandhi हादसे के बाद मची अफरा-तफरी हादसे के बाद कोस्टल रोड पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात संभाले और हादसे से जुड़ी जानकारी जुटाई।
6 घंटे की पैरोल पर घर पहुंचा काला जठेड़ी, जुड़वां बेटियों का होना है नामकरण
कुख्यात गैंगस्टर संदीप उर्फ काला जठेड़ी को अदालत से 6 घंटे की कस्टडी पैरोल मिली है. उसके घर पहुंचते ही ढोल नगाड़े बजने लगे. वह शाम 5 बजे तक सोनीपत के जठेड़ी गांव स्थित अपने घर पर रहेगा. इस दौरान वह अपनी जुड़वां बेटियों के नामकरण कार्यक्रम में शामिल होगा. सुरक्षा को देखते हुए घर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है.
हिंदी सिनेमा में 'बैड मैन' के नाम से पहचान बनाने वाले अभिनेता गुलशन ग्रोवर को खतरनाक 'खलनायक' के तौर पर जाना जाता है. फिल्मों में उन्होंने खतरनाक विलेन की भूमिका को नए आयाम दिए.
VIDEO: इंसान नहीं, सांप को दी जिंदगी, CPR देकर बचाई जान
गुजरात के वलसाड जिले के वापी में इंसानियत की मिसाल देखने को मिली. औद्योगिक क्षेत्र की एक कंपनी से रेस्क्यू किया गया बिनजहरीला सांप लगभग बेहोशी की हालत में था. उसकी हालत देखकर जीवदया प्रेमी संजय पवार ने उसे CPR देने की कोशिश की. उन्होंने सांप को मुंह से सांस दी. ऐसे में सांप बच गया.
रूस में वोटिंग के बीच यूक्रेन का बड़ा अटैक, ऑयल रिफाइनरी में लगी आग
रूस में संसदीय चुनाव के आखिरी दिन मॉस्को की ऑयल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला हुआ. इससे घटनास्थल पर आग लग गई. इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. रूसी अधिकारियों ने यूक्रेन पर आरोप लगाया है, जबकि यूक्रेन ने जिम्मेदारी नहीं ली है.
झारखंड के उपभोक्ता आयोग ने ट्रेन 8 घंटे 48 मिनट लेट होने पर दक्षिण पूर्व रेलवे को 35,000 रुपये का मुआवजा और मुकदमे का खर्च यात्री को देने का आदेश दिया गया है. अगर आपकी ट्रेन भी 3 घंटे या उससे ज्यादा लेट होती है, तो आप 100 प्रतिशत फुल रिफंड और मुआवजे के हकदार हैं. जानिए टीडीआर फाइल करने और अपने अधिकारों के इस्तेमाल की पूरी जानकारी.
भारत के इतिहास में 20 सितंबर की तारीख बहुत अहम है। वर्ष 1857 में इसी दिन अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को आत्मसमर्पण करना पड़ा था और उन्हें ब्रिटिश मेजर होसॉन ने पकड़ लिया था। दरअसल, मई 1857 में आजादी की पहली लड़ाई शुरू हुई थी, जिसके बाद अंग्रेजों ने मौजूदा पुरानी दिल्ली की तीन महीने तक घेराबंदी की थी। 14 सितंबर को ब्रिटिश फौज की जीत हुई थी तथा शहर पर उसका कब्जा हो गया था। 17 सितंबर को बहादुर शाह जफर को लालकिला छोड़ना पड़ा, जबकि 20 सितंबर को उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद उन्हें कैदी बनाकर उसी किले में लाया गया था जहां उनका हुक्म चलता था। देश-दुनिया के इतिहास में 20 सितंबर की तारीख में दर्ज अन्य घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:-1831 : भाप से चलने वाली पहली बस बनाई गयी। 1857 : अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर ने आत्मसमर्पण किया। कैदी बनाकर लाल किले लाए गए। 1878 : मद्रास के अखबार ‘द हिंदू’ के साप्ताहिक संस्करण का प्रकाशन शुरू। जी. एस. अय्यर इसके संपादक थे। 1933 : सामाजिक कार्यकर्ता और भारत की स्वतंत्रता के लिए कार्य करने वाली अंग्रेज महिला एनी बेसेंट का निधन। 1942 : भारतीय महिला स्वतंत्रता सेनानी कनकलता बरुआ का निधन। 1949 : प्रसिद्ध फिल्म निर्माता निर्देशक महेश भट्ट का जन्म। 1983: एप्पल उपग्रह ने कार्य करना बंद किया। 1999 : तमिल सिनेमा की स्वप्न सुंदरी के नाम से प्रसिद्ध अभिनेत्री राजकुमारी का निधन। उनकी फिल्म हरिदास 114 सप्ताह तक चेन्नई के सिनेमाघर में चली थी। 2001 : अमेरिका ने 150 लड़ाकू विमान खाड़ी में उतारे। 2006 : ब्रिटेन के रॉयल बॉटैनिक गार्डन्स के वैज्ञानिकों को 200 वर्ष पुराने बीज उगाने में कामयाबी मिली। 2018 : भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और विश्व चैंपियन भारोत्तोलक मीराबाई चानू को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार देने की घोषणा। 2021: चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के 16वें मुख्यमंत्री बने। 2024: रूस के दो नागरिकों ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में सबसे लंबे समय तक रहने का रिकॉर्ड बनाया। 2025: गाजा शहर पर इजराइली हमलों में 14 लोगों की मौत।
सैलामेंडर को भगाने का क्या तरीका है? घर से सैलामेंडर भगाने के क्या घरेलू उपाय हैं?
How to Get Rid of Salamanders: बारिश और उमस के मौसम में घर के आसपास कई ऐसे जीव दिखाई देने लगते हैं, जिन्हें देखकर लोग घबरा जाते हैं. सैलामेंडर भी इन्हीं में से एक है. यह देखने में कुछ हद तक छिपकली जैसा लग सकता है और आमतौर पर नमी वाली जगहों पर नजर आता है.
एक्टर बीमार, फाइनेंसर फरार, कैसे 300 करोड़ी हिट बनी 'हनुमान अंश'?
फाइनेंसरों के भागने से लेकर लीड एक्टर की बीमारी तक, कई चुनौतियों के बावजूद फिल्म 'हनुमान अंश' आज बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ कमाई कर रही है. नीम करोली बाबा के भक्तों और चमत्कारिक घटनाओं के सहारे बनी इस हिट की कहानी किसी फिल्मी चमत्कार से कम नहीं है.

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