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तस्वीर में छिपे हैं 11 चेहरे, 10 सेकंड में खोजने का चैलेंज

एक वायरल ऑप्टिकल इल्यूजन तस्वीर में 11 चेहरे छिपे हुए हैं. कुछ चेहरे आसानी से दिखाई देते हैं, जबकि कुछ को खोजने के लिए तस्वीर को ध्यान से देखना पड़ता है. यह मजेदार पहेली आपकी ऑब्जर्वेशन और पैटर्न पहचानने की क्षमता को चैलेंजदेती है.

आज तक 9 Sep 2026 1:39 pm

शरिया अदालत के फैसले के खिलाफ मुस्लिम महिलाओं की बड़ी ऐतिहासिक जीत: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की दो टूक

भारतीय न्याय व्यवस्था में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, संविधान की सर्वोच्चता और मानवाधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है, जिसने देश के कानूनी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक मुस्लिम महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए शरिया अदालतों और मुफ्ती-काजियों द्वारा पारिवारिक मामलों या विवादों में सुनाए जाने वाले पारंपरिक फैसलों के खिलाफ एक बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। अदालत ने अपने इस महत्वपूर्ण फैसले में दो टूक शब्दों में यह साफ कर दिया है कि इस लोकतांत्रिक देश के भीतर संविधान और देश के प्रचलित कानूनों से ऊपर कोई भी अनौपचारिक या समानांतर न्यायिक तंत्र (Parallel Judicial System) चलाने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती है। यह मामला एक ऐसी मुस्लिम महिला से जुड़ा था जिसे रूढ़िवादी धार्मिक पंचायतों या तथाकथित शरिया अदालतों के दबाव और उनके द्वारा थोपे गए फैसलों के कारण भारी मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था। हाईकोर्ट के इस न्यायोचित कदम ने न केवल उस पीड़िता को बड़ी राहत दी है, बल्कि उन तमाम महिलाओं के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगाई है जो धर्म की आड़ में चलने वाली इन समानांतर व्यवस्थाओं की चक्की में वर्षों से पिसती आ रही हैं।क्या था पूरा मामला और कैसे शुरू हुई इस लंबी कानूनी लड़ाई की दास्तान?यह पूरा प्रकरण एक प्रताड़ित मुस्लिम महिला के व्यक्तिगत जीवन और उसके संघर्ष से जुड़ा हुआ है, जिसने समाज के तथाकथित ठेकेदारों और रूढ़िवादी धार्मिक संस्थाओं के खिलाफ बगावत करने की हिम्मत जुटाई। जब उस महिला के पारिवारिक जीवन में कुछ विवाद उत्पन्न हुए, तो मामले को अदालतों में ले जाने के बजाय कुछ स्थानीय धार्मिक संगठनों, मुफ्ती और शरिया पंचायतों के सामने खींच लाया गया। इन पंचायतों और अनौपचारिक अदालतों ने बिना कानून के समुचित सिद्धांतों का पालन किए और महिला का पक्ष सुने बिना एकतरफा शरिया फैसले सुना दिए, जिनमें उसके मौलिक अधिकारों, वैवाहिक हकों और संपत्ति या बच्चों से जुड़े मामलों पर मनमाने प्रतिबंध लगा दिए गए। महिला पर इन धार्मिक आदेशों को मानने के लिए लगातार सामाजिक दबाव बनाया जा रहा था, और ऐसा न करने पर उसे समाज से बहिष्कृत करने की धमकियां भी दी जा रही थीं। इन परिस्थितियों से तंग आकर उस साहसी महिला ने अपनी हार नहीं मानी और पारंपरिक व्यवस्था के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद न्याय के मंदिर से एक ऐसा फैसला आया जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: संविधान सर्वोपरि, कोई दूसरा कानून मान्य नहींछत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति ने इस मामले की सुनवाई के दौरान बेहद सख्त और क्रांतिकारी टिप्पणियां कीं, जो आने वाले समय में देश के कानूनी इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होंगी। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि भारत एक संप्रभु, समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष गणराज्य है जो देश के सर्वोच्च संविधान से संचालित होता है, न कि किसी निजी या धार्मिक संस्था द्वारा बनाए गए अनौपचारिक नियमों से। हाईकोर्ट ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि कैसे कुछ लोग या संगठन अपने स्तर पर अदालतें चलाकर लोगों के नागरिक अधिकारों का हनन कर रहे हैं और उनके फैसलों को लोगों पर जबरन थोपने की कोशिश कर रहे हैं। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि देश के किसी भी कोने में कोई भी संगठन या पंचायत कानून से ऊपर नहीं हो सकती और न ही देश के अंदर किसी भी प्रकार के समानांतर न्यायिक तंत्र (Parallel Judiciary) को बर्दाश्त किया जाएगा। यदि किसी नागरिक को कोई पारिवारिक या सामाजिक विवाद सुलझाना है, तो उसके लिए देश की संवैधानिक अदालतें और कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, और कोई भी धार्मिक समझौता या शरिया फैसला देश के कानून और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकता।मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक न्याय की दिशा में एक नया मील का पत्थरइस ऐतिहासिक फैसले का प्रभाव केवल एक महिला के मुकदमे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की उन लाखों मुस्लिम महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ी राहत है जो अक्सर रूढ़िवादी पारिवारिक और सामाजिक ताने-बाने के बीच अपनी आवाज उठाने से डरती हैं। शरिया अदालतों या दारुल कजा द्वारा दिए जाने वाले कई फैसले अक्सर पितृसत्तात्मक सोच और लैंगिक असमानता से ग्रस्त होते हैं, जिनमें महिलाओं के अधिकारों को ताक पर रखकर फैसले सुना दिए जाते हैं। जब अदालतें इस तरह के अनौपचारिक तंत्रों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाती हैं, तो यह समाज में एक मजबूत संदेश जाता है कि कानून की नजर में हर नागरिक बराबर है और किसी को भी परंपराओं के नाम पर किसी के मानवाधिकारों का शोषण करने की छूट नहीं दी जा सकती। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से उन महिलाओं को खुलकर सामने आने और अपने कानूनी अधिकारों के लिए लड़ने का संबल मिलेगा जो अब तक डर के साये में जी रही थीं।देश भर में गूंजता यह फैसला और भविष्य के कानूनी सुधारों की रूपरेखाछत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश के भीतर समान नागरिक संहिता (UCC) और व्यक्तिगत कानूनों में सुधार को लेकर लगातार बहस चल रही है। यह आदेश इस बात को पुख्ता करता है कि देश में केवल एक ही कानून चलेगा और वह है भारत का संविधान। इस फैसले के बाद से देश भर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों और प्रबुद्ध वर्ग द्वारा अदालत के इस कदम की चौतरफा सराहना की जा रही है। यह मामला यह भी सिखाता है कि कैसे न्यायपालिका आम आदमी के हकों की रक्षा के लिए सबसे बड़ा कवच है। आने वाले दिनों में यह फैसला कई अन्य अदालतों में चल रहे ऐसे ही मामलों में एक मजबूत नजीर (Precedent) के रूप में पेश किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी धार्मिक या सामाजिक पंचायत देश के संविधान और कानून से ऊपर खुद को न समझ सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Sep 2026 1:38 pm

छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय सरकार के 2.5 साल पूरे: महतारी वंदन योजना और लखपति दीदी अभियान ने बदली तस्वीर

छत्तीसगढ़ की राजनीति और विकास के सफर में एक नया मील का पत्थर पार करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने कार्यकाल के ढाई साल सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इस अपेक्षाकृत कम समय में ही राज्य सरकार ने सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याणकारी योजनाओं के बलबूते जिस तरह से आम आदमी के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है, उसकी चर्चा अब पूरे देश में हो रही है। ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी बस्तियों तक, हर तरफ सरकार की योजनाओं की गूंज सुनाई दे रही है और खासकर महिलाओं, युवाओं तथा किसानों के चेहरे पर एक नई संतुष्टि और उम्मीद का भाव साफ तौर पर देखा जा सकता है। पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल की कमियों को पीछे छोड़ते हुए वर्तमान सरकार ने जिस आक्रामक और जनहितैषी रुख के साथ प्रशासनिक पहिए को घुमाया है, उसने छत्तीसगढ़ की पूरी सामाजिक और आर्थिक तस्वीर को ही बदलकर रख दिया है। विकास के इन अढ़ाई वर्षों में राज्य ने न केवल अपनी पुरानी प्राथमिकताओं को नए सिरे से परिभाषित किया है, बल्कि भविष्य के छत्तीसगढ़ के लिए एक मजबूत और आत्मनिर्भर नींव भी रख दी है।महतारी वंदन योजना: महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की सबसे बड़ी क्रांतिविष्णु देव साय सरकार के इन ढाई वर्षों के कार्यकाल की सबसे बड़ी सफलता और मुकुट का हीरा यदि किसी योजना को कहा जाए, तो वह निश्चित रूप से 'महतारी वंदन योजना' ही है। छत्तीसगढ़ की माताओं और बहनों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी और आत्मसम्मान से परिपूर्ण जीवन देने के लिए शुरू की गई इस योजना ने राज्य की महिलाओं के जीवन में एक अभूतपूर्व क्रांति ला दी है। इस योजना के तहत हर महीने पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सीधे आर्थिक सहायता राशि भेजी जाती है, जिससे उन्हें अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए किसी पर आश्रित नहीं रहना पड़ता। गांवों की चौपालों से लेकर शहर के घरों तक, इस बात की चर्चा आम है कि कैसे इस एक योजना ने महिलाओं के भीतर निर्णय लेने की क्षमता और पारिवारिक सम्मान को कई गुना बढ़ा दिया है। सरकार की इस दूरदर्शी सोच ने यह साबित कर दिया है कि यदि महिलाओं के हाथ में सीधी आर्थिक ताकत दी जाए, तो वे पूरे परिवार और समाज के विकास की धुरी बन सकती हैं। महतारी वंदन योजना के जरिए महिलाओं के चेहरों पर आई यह चमक ही सरकार के सुशासन का सबसे बड़ा और जीवंत प्रमाण है।लखपति दीदी अभियान और स्वयं सहायता समूहों का कमालकेवल सीधी आर्थिक सहायता तक ही सरकार सीमित नहीं रही, बल्कि छत्तीसगढ़ की महिलाओं को स्थायी रूप से आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए 'लखपति दीदी' अभियान को मिशन मोड में लागू किया गया है। राज्यभर में सक्रिय महिला स्व सहायता समूहों (SHGs) को जिस तरह से कम ब्याज पर लोन, तकनीकी प्रशिक्षण, पैकेजिंग और उनके उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, उसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार दी है। आज छत्तीसगढ़ की हजारों महिलाएं सिर्फ गृहिणी बनकर नहीं रह गई हैं, बल्कि वे छोटे-छोटे उद्योग, मशरूम उत्पादन, जैविक खेती, हस्तशिल्प और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स के जरिए खुद की मालकिन बन चुकी हैं और सालाना एक लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रही हैं। सरकार की इन समावेशी नीतियों ने महिलाओं को आत्मनिर्भरता के उस रास्ते पर ला खड़ा किया है जहां वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य और परिवार की आर्थिक तरक्की में एक समान साझीदार बन चुकी हैं। महिला सशक्तिकरण की यह बानगी छत्तीसगढ़ के गांवों में एक नए सवेरे की तरह आई है।बुनियादी ढांचे, कृषि और युवाओं के विकास पर सरकार का विशेष जोरमहतारी वंदन और लखपति दीदी जैसी योजनाओं के अलावा, सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास, किसानों की समृद्धि और युवाओं के रोजगार को भी अपनी प्राथमिकताओं के केंद्र में रखा है। धान खरीदी की पारदर्शी व्यवस्था और किसानों को समय पर भुगतान मिलने से अन्नदाताओं का भरोसा राज्य सरकार पर और अधिक मजबूत हुआ है। इसके साथ ही, राज्य के दूरदराज के नक्सल प्रभावित इलाकों में भी सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार तेजी से किया जा रहा है, जिससे विकास की किरणें वहां तक पहुंच रही हैं जहां कभी अंधकार हुआ करता था। युवाओं के लिए कौशल विकास और सरकारी नौकरियों में निष्पक्ष व पारदर्शी चयन प्रक्रियाओं ने उनके भविष्य को सुरक्षित करने का काम किया है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि राज्य का कोई भी वर्ग विकास की मुख्यधारा से अछूता न रहे, और यही सबका साथ, सबका विकास वाला विजन आज छत्तीसगढ़ को देश के तेजी से उभरते हुए राज्यों की श्रेणी में ला खड़ा कर रहा है।सुशासन के ढाई साल और छत्तीसगढ़ के सुनहरे भविष्य की मजबूत उड़ानविष्णु देव साय सरकार के ये ढाई साल इस बात का गवाह हैं कि यदि नीयत साफ हो और प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो कम समय में भी बड़े और ऐतिहासिक परिवर्तन लाए जा सकते हैं। महतारी वंदन योजना की सफलता और लखपति दीदी अभियान की गूंज ने यह साबित कर दिया है कि सरकार जनता की नब्ज़ को अच्छी तरह समझती है और उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुसार नीतियां बना रही है। आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ को देश का एक विकसित और अग्रणी राज्य बनाने का जो सपना सरकार ने देखा है, उसकी नींव इन अढ़ाई वर्षों में पूरी मजबूती के साथ रख दी गई है। जनता के बीच से मिल रहे समर्थन और विश्वास को देखकर यह साफ कहा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा अब रुकने वाली नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में नई ऊंचाइयों को छूने के लिए पूरी तरह तैयार है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Sep 2026 1:37 pm

सऊदी पर हमला यानी PAK पर हमला! शहबाज के मंत्री की हूतियों को चेतावनी

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि सऊदी अरब पर हमलों का जवाब देना हर बार उसी तरीके से जरूरी नहीं है. उन्होंने मक्का समझौते को एक बड़ा डिटरेंट बताया और कहा कि अगर सऊदी अरब पर बेवजह हमला होता है या यमन का तनाव वहां तक पहुंचता है, तो यह समझौता अपने आप लागू हो जाएगा.

आज तक 9 Sep 2026 1:36 pm

जेल की चार दीवारों से निकलकर राजा बनने तक का सफर: कभी सलाखों के पीछे काटने वाला था उम्र

दुनिया में किस्मत और संघर्ष की कहानियां अक्सर फिल्मी पर्दों पर ही अच्छी लगती हैं, लेकिन कभी-कभी हकीकत किसी भी सिनेमाई पटकथा से कहीं ज्यादा रोमांचक और हैरान करने वाली साबित होती है। फुटबॉल के मैदान पर अपनी रफ्तार और कलात्मक ड्रिबलिंग से विरोधियों के होश उड़ा देने वाले एक साधारण फुटबॉलर की जिंदगी में ऐसा ऐतिहासिक और जादुई मोड़ आया है, जिस पर यकीन करना किसी के लिए भी आसान नहीं है। एक ऐसा दौर भी था जब इस खिलाड़ी की जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा अंधेरी और तंग जेल की कोठरी के भीतर बीत रहा था, जहां भविष्य को लेकर सिर्फ नाउम्मीदी और आंसुओं के सिवाय कुछ नहीं था। कानून के शिकंजे में फंसे होने के कारण हर किसी ने यह मान लिया था कि इस शख्स का अध्याय हमेशा के लिए समाप्त हो चुका है। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था, और वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि सलाखों के पीछे की वह भयानक रातें अब इतिहास बन चुकी हैं। आज वही खिलाड़ी अपने देश और राजघराने की सर्वोच्च गद्दी पर बैठकर राजा बनने की दहलीज पर खड़ा है, जिसे देखकर पूरी दुनिया के लोग हैरान हैं और यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि आखिर एक झटके में किसी इंसान की पूरी तकदीर कैसे पूरी तरह पलट सकती है।जेल की अंधेरी कोठरी और अनिश्चितता से भरा वह दौरहर इंसान की जिंदगी में संघर्ष के दिन आते हैं, लेकिन इस फुटबॉलर के शुरुआती जीवन में संघर्ष ने जो रूप दिखाया, वह किसी भी मजबूत इंसान को अंदर से तोड़ देने के लिए काफी था। कम उम्र में ही गलत संगति या परिस्थितियों के फेर में फंसकर यह खिलाड़ी एक ऐसी कानूनी उलझन में उलझ गया जिसके कारण उसे सीधे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचना पड़ा। आजादी छिन जाने और चार दीवारों के बीच दिन-रात बिताने का वह दर्द क्या होता है, इसे वही शख्स समझ सकता है जिसने उस नर्क जैसी जिंदगी को झेला हो। परिवार से दूर, दुनिया की चकाचौंध से कोसों दूर और समाज के ताने सुनते हुए उस खिलाड़ी ने अपनी जिंदगी के कई महत्वपूर्ण साल उस कोठरी में बिताए। किसी को भी यह उम्मीद नहीं थी कि कभी यह शख्स वापस हरी घास वाले फुटबॉल के मैदान पर लौट पाएगा, क्योंकि कानूनी मामलों का बोझ इतना भारी था कि हर कोई उसके करियर के अंत की घोषणा कर चुका था। उस कठिन समय में मानसिक और शारीरिक रूप से टूटने के बावजूद, उस खिलाड़ी के भीतर एक ऐसी आंतरिक जिजीविषा और उम्मीद जीवित थी जिसने उसे अंदर से जिंदा रखा और आने वाले बड़े बदलाव के लिए तैयार किया।मैदान पर वापसी और फुटबॉल के जरिए जिंदगी की नई जंग जीतनाजब जेल की कैद से इस खिलाड़ी को रिहाई मिली, तो समाज का सामना करना और फिर से अपने पैरों पर खड़ा होना सबसे बड़ी चुनौती थी। अधिकांश लोग ऐसी परिस्थितियों में या तो अवसाद में चले जाते हैं या फिर अपराध की दुनिया में दोबारा लौटने को मजबूर हो जाते हैं, लेकिन इस शख्स ने रास्ता बिल्कुल अलग चुना। उसने अपने सारे गुस्से, कुंठा और ऊर्जा को फुटबॉल के मैदान पर झोंक दिया और कड़ी मेहनत के बल पर एक बार फिर से प्रोफेशनल फुटबॉल की दुनिया में धमाकेदार वापसी की। मैदान पर उसकी दौड़, उसका समर्पण और गोल दागने की उसकी अद्भुत क्षमता ने न सिर्फ खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया, बल्कि क्लब प्रबंधकों को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि यह खिलाड़ी सामान्य नहीं है। स्थानीय लीग से शुरू हुआ उसका यह सफर राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर की बड़ी प्रतियोगिताओं तक जा पहुंचा, जहां उसने अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर कई प्रतिष्ठित ट्रॉफियां अपने नाम कीं। खेल के प्रति उसकी इस अटूट निष्ठा और असाधारण वापसी ने उसे एक बार फिर से सुर्खियों के केंद्र में ला खड़ा किया, जहां लोग अब उसे एक अपराधी के रूप में नहीं बल्कि एक प्रेरणादायक फाइटर के रूप में देखने लगे।शाही खून का रहस्य और अचानक से देश का राजा बनने का बुलावाफुटबॉल के मैदान पर अपनी चमक बिखेर रहे इस खिलाड़ी की असल पहचान तब उजागर हुई जब उसके पारिवारिक इतिहास और राजघराने के गुप्त दस्तावेजों से पर्दा उठा। दुनिया को तब यह चौंकाने वाला सच पता चला कि यह फुटबॉलर साधारण परिवार से ताल्लुक नहीं रखता, बल्कि इसके रगों में विशुद्ध शाही खून दौड़ रहा है। शाही वंश के उत्तराधिकारियों की लंबी और जटिल श्रृंखला में राजनीतिक उठापटक और पारिवारिक विवादों के कारण इस खिलाड़ी को बचपन में ही उस विरासत से दूर कर दिया गया था और इसी पृष्ठभूमि के चलते वह उन कानूनी पचड़ों में फंसा था जिसके कारण उसे जेल जाना पड़ा था। जैसे-जैसे देश के राजनीतिक समीकरण बदले और राजसी परंपराओं के जानकारों ने उत्तराधिकार के नियमों की नए सिरे से समीक्षा की, तो यह बात शीशे की तरह साफ हो गई कि सिंहासन पर बैठने का असली हकदार और कोई नहीं बल्कि यही फुटबॉलर है। एक तरफ जहां खेल की दुनिया में वह अपने खेल का लोहा मनवा रहा था, वहीं दूसरी तरफ शाही महलों से उसके पास देश की कमान संभालने और ताजपोशी के लिए आधिकारिक बुलावा आ गया, जिसने दुनिया भर के मीडिया को हैरान कर दिया।एक झटके में बदली तकदीर और इतिहास के पन्नों में दर्ज होती यह अनोखी दास्तानफुटबॉल के बूट्स पहनकर मैदान पर पसीना बहाने वाले इस खिलाड़ी के सिर पर अब पारंपरिक मुकुट स सजने वाला है, जो किसी भी परी कथा से कम नहीं है। खेल के मैदान से सीधे राजसिंहासन तक का यह सफर इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि इंसान की किस्मत कब और किस मोड़ पर पलट जाएगी, इसका अनुमान लगाना नामुमकिन है। कभी जिस शख्स को समाज ने अपराधी मानकर किनारा कर लिया था, आज पूरा देश उसी के स्वागत में पलकें बिछाए बैठा है और उसकी एक झलक पाने के लिए बेताब है। यह परिवर्तन केवल एक व्यक्ति की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि जीवन में कितनी भी बड़ी बाधाएं क्यों न आएं, अगर आप खुद पर भरोसा रखते हैं और हार नहीं मानते, तो वक्त बदलते देर नहीं लगती। आने वाले दिनों में जब यह फुटबॉलर राजा के रूप में अपने देश की बागडोर संभालेगा, तो यह आधुनिक इतिहास के सबसे अनूठे और प्रेरणादायक अध्यायों में से एक के रूप में हमेशा-हमेशा के लिए दर्ज हो जाएगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Sep 2026 1:35 pm

मैदान पर गजब का ड्रामा: एर्लिंग हालैंड का ऐसा आक्रामक रूप कभी नहीं देखा होगा, विरोधी खिलाड़ी को जमीन पर गिराकर जड़ दिए ताबड़तोड़ मुक्के

फुटबॉल के मैदान पर गोल की बारिश करने के लिए पूरी दुनिया में मशहूर मैनचेस्टर सिटी के स्टार स्ट्राइकर एर्लिंग हालैंड (Erling Haaland) का एक ऐसा रूप सामने आया है जिसे देखकर खेल जगत के तमाम दिग्गज और फैंस हैरान रह गए हैं। आमतौर पर अपने शांत स्वभाव, गोल सेलिब्रेशन और अपनी घातक फिनिशिंग के लिए जाने जाने वाले इस নরवेईयन स्ट्राइकर का एक बेहद आक्रामक और हैरान करने वाला अवतार देखने को मिला है। एक मुकाबले के दौरान खेल के रोमांच और बढ़ते तनाव के बीच हालैंड का मानसिक संतुलन इस कदर डगमगाया कि उन्होंने विरोधी टीम के खिलाड़ी को मैदान पर ही जमीन पर पटक दिया और ताबड़तोड़ मुक्के बरसाने शुरू कर दिए। इस पूरी घटना के बाद खेल के मैदान पर जो हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू हुआ, उसने न केवल उस मैच के माहौल को पूरी तरह बदल दिया, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इस घटना के वीडियो और तस्वीरों ने तहलका मचा दिया है। मैदान के भीतर खिलाड़ियों के इस तरह के आक्रामक व्यवहार को लेकर अब खेल अनुशासन समितियों और रेफरी के फैसलों पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।तनाव से भरा वह पल जब काबू से बाहर हो गए मैनचेस्टर सिटी के गोल मशीन हालैंडयह पूरा वाकया उस समय का है जब मैच अपने सबसे रोमांचक और निर्णायक मोड़ पर चल रहा था। दोनों टीमों के बीच स्कोर को लेकर कांटे की टक्कर थी और मैदान पर खिलाड़ियों के बीच शारीरिक व मानसिक दबाव अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका था। एर्लिंग हालैंड जैसे बड़े खिलाड़ी को जब विरोधी टीम के डिफेंडर लगातार शारीरिक रूप से घेरने और उनके मूव्स को रोकने की कोशिश करते हैं, तो कई बार खेल की गर्माहट मैदान पर खिलाड़ियों के बीच व्यक्तिगत झड़प में बदल जाती है। उस मुकाबले के दौरान भी हालैंड और विरोधी टीम के एक खिलाड़ी के बीच बॉक्स के भीतर पोजीशन लेने को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि दोनों के बीच केवल मौखिक झड़प नहीं रही, बल्कि इसने शारीरिक संघर्ष का रूप ले लिया। खेल के कैमरों में कैद हुए इन पलों ने साफ दिखा दिया कि कैसे एक पल का गुस्सा दुनिया के सबसे महंगे और अनुशासित माने जाने वाले खिलाड़ियों में से एक को कितना आक्रामक बना सकता है।जमीन पर गिराकर मुक्के बरसाना: खेल भावना के बिल्कुल विपरीत था यह खतरनाक दृश्यजब स्थिति हाथ से निकलती हुई दिखी, तो एर्लिंग हालैंड ने अपना आपा पूरी तरह खो दिया। उन्होंने विरोधी खिलाड़ी को इस तरह से जमीन पर गिराया और उसके बाद जिस आक्रामक अंदाज में मुक्के बरसाने जैसी हरकत की, वह फुटबॉल जैसे महान खेल की शालीनता और उसकी बुनियादी खेल भावना पर एक बहुत बड़ा कलंक थी। फुटबॉल को जेंटलमैन गेम माना जाता है, जहां शारीरिक संघर्ष खेल के नियमों के दायरे में होते हैं, लेकिन इस तरह की व्यक्तिगत हिंसा या हाथापाई के लिए खेल में कोई जगह नहीं होती है। मैच रेफरी ने तुरंत हस्तक्षेप किया और अन्य खिलाड़ियों ने बीच-बचाव कर दोनों को अलग किया, वरना यह विवाद और भी बड़ा रूप ले सकता था। इस घटना के तुरंत बाद मैदान पर जो ड्रामा देखने को मिला, उसमें दोनों टीमों के खिलाड़ी आपस में भिड़ गए और रेफरी को स्थिति संभालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों का मानना है कि हालैंड का यह रूप उनके शानदार करियर पर एक बहुत बड़ा धब्बा है जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस घटना पर फैंस की तीखी प्रतिक्रियाएं और बहसजैसे ही मैदान की यह फुटेज और तस्वीरें इंटरनेट पर आईं, पूरी दुनिया के फुटबॉल फैंस दो गुटों में बंट गए। एक तरफ जहां मैनचेस्टर सिटी के कट्टर समर्थक अपने चहेते खिलाड़ी के इस आक्रामक तेवर को खेल के दौरान के स्वाभाविक तनाव और दबाव का नतीजा बताकर उसका बचाव करते नजर आए, वहीं दूसरी तरफ खेल के निष्पक्ष प्रेमियों और विरोधी टीमों के फैंस ने इसे एक गैर-जिम्मेदाराना और शर्मनाक हरकत करार दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर #ErlingHaaland ट्रेंड करने लगा और लोग इस बात की मांग करने लगे कि इस तरह के हिंसक व्यवहार के लिए क्लब और फुटबॉल संघ को बेहद सख्त कदम उठाने चाहिए। खेल के जानकारों का यह भी कहना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी जब मैदान पर इस तरह का अनुशासनहीन प्रदर्शन करते हैं, तो इसका बहुत ही गलत संदेश उन लाखों युवा और उभरते खिलाड़ियों पर जाता है जो इन्हें अपना आदर्श मानते हैं।अनुशासन पर उठते गंभीर सवाल और संभावित कड़े प्रतिबंधों का खतराइस सनसनीखेज घटना के बाद अब एर्लिंग हालैंड के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होना लगभग तय माना जा रहा है। मैच अधिकारियों की रिपोर्ट और वीडियो फुटेज के आधार पर फुटबॉल एसोसिएशन (FA) या संबंधित टूर्नामेंट कमेटी इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। यदि हालैंड को इस हिंसात्मक रवैये के लिए दोषी पाया जाता है, तो उन पर कई मैचों का प्रतिबंध (Match Ban) और भारी-भरकम आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है, जिससे उनकी टीम मैनचेस्टर सिटी को आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों में बड़ा झटका लग सकता है। यह घटना इस बात की एक बड़ी सीख भी है कि खेल कितना भी बड़ा हो और दबाव कितना भी अधिक क्यों न हो, एक खिलाड़ी को हमेशा अपने मानसिक संतुलन और अनुशासन को बनाए रखना चाहिए। हालैंड के इस रूप ने यह साबित कर दिया है कि मैदान के भीतर चमकने वाले सितारे भी अंततः इंसान ही हैं, जिनका गुस्सा कई बार उनकी प्रतिभा और लोकप्रियता पर भारी पड़ जाता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Sep 2026 1:34 pm

Vande Mataram के पूर्ण संस्करण पर Congress और National Conference में तकरार, KC Venugopal ने उठाए सवाल

'वंदे मातरम' को लेकर विपक्ष में मतभेद देखने को मिला, क्योंकि कांग्रेस ने मंगलवार को श्रीनगर में एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगीत के पूरे संस्करण को गाए जाने पर आपत्ति जताई। इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के राष्ट्रगीत के पूरे संस्करण के दौरान खड़े होने पर पार्टी ने असहमति जताई। कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने मंगलवार को इस कार्यक्रम का एक वीडियो शेयर किया और लिखा, वंदे मातरम का पूरा वर्शन उस मिली-जुली और अनेकता वाली सोच के साथ मेल नहीं खाता, जिसकी कल्पना हमारे आज़ादी के दीवानों ने भारत के लिए की थी और जिसे उन्होंने आगे बढ़ाया था। उन्होंने अपने सहयोगियों से अपील की कि वे देश के आज़ादी के दीवानों के उस फ़ैसले का सम्मान करें, जिन्होंने इस गाने के सिर्फ़ शुरुआती दो पैराग्राफ़ को अपनाने का निर्णय लिया था। इसे भी पढ़ें: Vande Mataram विवाद पर Anurag Thakur का Congress पर तंज, बोले- खुद को संविधान से ऊपर समझता है गांधी परिवार वेणुगोपाल की पोस्ट में कहा गया, हमारे लिए महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, आचार्य नरेंद्र देव, मौलाना आज़ाद, सरोजिनी नायडू और जे.बी. कृपलानी का सोच-समझकर लिया गया फ़ैसला जिसमें गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह की भी अहम भूमिका थी —सबसे ऊपर है। इसे भी पढ़ें: Hydrogen Train को 110 किमी प्रति घंटा रफ्तार से चलाने की तैयारी, Railway Board ने दी जानकारी NC का कहना है कि J&K सरकार अपनी आधिकारिक ज़िम्मेदारी निभा रही है अपने सहयोगी दल की आलोचना का जवाब देते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार सिर्फ़ अपनी आधिकारिक ड्यूटी निभा रही है, क्योंकि राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े होना अब एक कानूनी बाध्यता बन गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा, संसद द्वारा कानून पारित किए जाने के बाद, किसी भी पार्टी, समूह या गठबंधन की विचारधारा चाहे जो भी हो, वंदे मातरम गाना और उसके सम्मान में खड़े होना एक कानूनी बाध्यता (अनिवार्य कानूनी कर्तव्य) बन गया है।

प्रभासाक्षी 9 Sep 2026 1:33 pm

पटना स्नातक निर्वाचन सीट पर 2002 जैसे सियासी खतरे की आहट: अनंत सिंह की बगावत के बाद जेडीयू में बढ़ी हलचल

बिहार की राजनीति में विधान परिषद की सीटों को लेकर घमासान हमेशा से दिलचस्प रहा है, लेकिन इस बार पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव सत्ताधारी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। स्थिति ऐसी बन चुकी है कि राजनीतिक गलियारों में साल 2002 के उस पुराने और डरावने सियासी समीकरण की चर्चा फिर से होने लगी है, जब अपनों की नाराजगी और भीतरघात के कारण एनडीए को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार मोकामा के बाहुबली विधायक और जेडीयू नेता अनंत सिंह के तीखे तेवरों ने पार्टी के अंदरखाने खलबली मचा दी है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार इस सीट से एक बार फिर चुनावी मैदान में उतरकर जीत का चौका लगाने की फिराक में हैं, लेकिन उनके रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा कोई विपक्षी दल नहीं बल्कि उनकी ही पार्टी के भीतर से उठ रहा विरोध है। हालात की नजाकत को भांपते हुए पार्टी नेतृत्व पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और इस अंतरकलह को थामने के लिए ताबड़तोड़ बैठकों का दौर शुरू हो गया है।क्या है साल 2002 का वह खतरा जो डरा रहा है जेडीयू के रणनीतिकारों को?बिहार के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो साल 2002 में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव आपसी कलह और बगावत का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है। उस दौरान एनडीए समर्थित उम्मीदवार के रूप में नीरज कुमार मैदान में थे, लेकिन पार्टी के भीतर टिकट बंटवारे और आपसी खींचतान के कारण वरिष्ठ नेता रमेश प्रसाद सिंह बगावत कर निर्दलीय मैदान में कूद पड़े थे। उस त्रिकोणीय मुकाबले में सवर्ण वोटों का भारी ध्रुवीकरण और बिखराव हो गया था, जिसका सीधा फायदा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार को मिला और वे चुनाव जीत गए, जबकि मजबूत मानी जाने वाली एनडीए समर्थित ताकतें पीछे छूट गईं। आज साल 2026 के इस चुनावी मोड़ पर ठीक वैसा ही इतिहास दोहराए जाने का खतरा मंडरा रहा है। वर्तमान में भी समीकरण कुछ ऐसे ही उलझते नजर आ रहे हैं जहां अपनों की नाराजगी पार्टी के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकती है।अनंत सिंह के बगावती तेवर और डॉ. अनुज सिंह के समर्थन का नया दांवइस बार विवाद की शुरुआत तब हुई जब मोकामा विधायक अनंत सिंह ने बाढ़ इलाके में एक जनसंपर्क के दौरान आगामी एमएलसी चुनाव में पार्टी के घोषित या संभावित अधिकृत दांव के उलट निर्दलीय या वैकल्पिक चेहरे के रूप में डॉ. अनुज सिंह को खुला समर्थन देने का ऐलान कर दिया। अनंत सिंह के इस ऐलान के बाद उनके समर्थकों में गजब का उत्साह देखा गया और यह संदेश गया कि 'छोटे सरकार' जिस तरफ खड़े हैं, मुकाबला उसी दिशा में मोड़ेगा। हालांकि पार्टी के भीतर अनुशासन और समन्वय बनाए रखने के लिए तुरंत शीर्ष नेतृत्व ने हस्तक्षेप किया और अनंत सिंह को पटना स्थित पार्टी कार्यालय बुलाकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की गई। बैठक के दौरान हालांकि यह दिखाने की कोशिश की गई कि सब कुछ सामान्य है और आपसी मतभेदों को बातचीत से सुलझा लिया गया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टेबल टॉक से भले ही ऊपरी तौर पर मामला शांत हुआ हो, पर अंदरूनी मनभेद और कड़वाहट अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।पार्टी के भीतर डैमेज कंट्रोल और शीर्ष नेतृत्व की सक्रियताबगावत के इस खतरे को भांपते हुए जेडीयू ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तथा मंत्रियों ने मोर्चा संभाल लिया है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की इस प्रतिष्ठा वाली सीट पर पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश कार्यालय में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें क्षेत्र से जुड़े सभी विधायकों, विधान पार्षदों और प्रमुख रणनीतिकारों ने हिस्सा लिया। पार्टी के तमाम दिग्गज यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि किसी भी तरह के व्यक्तिगत असंतोष को चुनावी नतीजों पर हावी न होने दिया जाए। नेताओं का यह भी मानना है कि यदि अनंत सिंह जैसे कद्दावर क्षेत्रीय क्षत्रप को पूरी तरह संतुष्ट नहीं किया गया, तो स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के सुशिक्षित मतदाताओं के बीच भी गलत संदेश जा सकता है, जिसका सीधा असर मतदान के दिन देखने को मिल सकता है।स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का जटिल समीकरण और चुनावी भविष्यस्नातक निर्वाचन क्षेत्र आम चुनावों से बिल्कुल अलग होते हैं, जहां राजनीतिक रैलियों और हवाबाजी के बजाय व्यक्तिगत संपर्क, जमीनी नेटवर्क और प्रबंधकीय कौशल की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इस सीट पर एक-एक वोट की कीमत होती है क्योंकि मतदाता सामान्य जनता न होकर डिग्री धारी युवा और पेशेवर लोग होते हैं। ऐसे में यदि पार्टी के भीतर का यह घमासान और अंतर्कलह समय रहते शांत नहीं हुआ, तो यह सत्ता पक्ष के लिए एक बहुत बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है। फिलहाल पार्टी के शीर्ष स्तर से लेकर मैदानी कार्यकर्ताओं तक सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह सियासी रंजिश पूरी तरह थमती है या फिर बगावत के सुर चुनाव के वक्त पार्टी की गणित को पूरी तरह बिगाड़ कर रख देते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Sep 2026 1:32 pm

Rajasthan निकाय चुनाव: Ashok Gehlot बोले- Congress को मिलेगा जनादेश, BJP सरकार पर बरसे

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भरोसा जताया कि कांग्रेस पार्टी चल रहे निकाय चुनावों में जीत हासिल करेगी। साथ ही, उन्होंने पिछले ढाई सालों में बीजेपी सरकार के कामकाज की आलोचना भी की। जोधपुर जाने से पहले जयपुर में मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने कहा कि मैंने पहले भी कहा है कि इस बार लोगों का मूड कांग्रेस को जिताने का है। सरकार ने पिछले ढाई सालों में कोई काम नहीं किया है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी से उम्मीदें पूरी न होने के कारण जनता नाराज है और उसने पहले ही अपना मन बना लिया है। इसे भी पढ़ें: दिल्ली की मतदाता सूची में राघव चड्ढा का नाम शामिल, AAP ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल गहलोत ने ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में हालात की गंभीरता पर ज़ोर देते हुए कहा कि लोगों को सरकार से बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन उन पर काम नहीं हुआ। चाहे गाँव हों या शहर, हर जगह स्थिति गंभीर है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी की चुनावी रैलियाँ बेअसर रहीं। उन्होंने टिप्पणी की कि अब रैलियाँ निकालने का कोई फ़ायदा नहीं है। अगर सरकार ने काम किया होता, तो रैलियाँ निकालने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले चुनाव के नतीजे राज्य प्रशासन के लिए एक सबक होंगे। इसे भी पढ़ें: महिपाल ढांडा को ‘जाट समाज पर कलंक’ बताना ओछी और संकीर्ण राजनीति: शमशेर खरक इस बीच, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा राजस्थान शहरी निकाय चुनाव 2026 के तहत जयपुर में बीजेपी उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने वाले हैं। अपना चुनावी रोड शो शुरू करने से पहले शर्मा ने सांगानेरी गेट स्थित हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की; यह रोड शो चाँदपोल गेट स्थित हनुमान मंदिर की ओर आगे बढ़ेगा। उम्मीद है कि रोड शो के दौरान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौर और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व निकाय चुनाव प्रभारी हरीश द्विवेदी भी शर्मा के साथ शामिल होंगे। इस चुनावी कार्यक्रम का मकसद निकाय चुनाव लड़ रहे बीजेपी उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाना है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।

प्रभासाक्षी 9 Sep 2026 1:32 pm

बिहार : 12 साल की नौकरी में बना बैठे करोड़ों के मालिक, EOU के छापे में खुली पोल देखकर उड़ गए अधिकारियों के होश

बिहार में सरकारी सेवा के दौरान अकूत संपत्ति अर्जित करने का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक प्रखंड विकास पदाधिकारी यानी BDO ने महज 12 साल की छोटी सी सेवा अवधि में ही उम्मीदों और कानून के दायरे से कोसों दूर जाकर बेशकीमती साम्राज्य खड़ा कर लिया है। जब आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU की विशेष टीम ने करप्शन के इस मामले में इन अधिकारी के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की, तो सामने आए दस्तावेज और चल-अचल संपत्ति के आंकड़े देखकर खुद जांच अधिकारियों के भी होश उड़ गए। एक तरफ जहां राज्य सरकार और आम जनता पारदर्शी प्रशासन और सुशासन की उम्मीद लगाए बैठी है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक महकमे में बैठे कुछ नुमाइंदे अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग कर कैसे जनता के पैसों पर डाका डालते हैं, यह मामला उसकी एक बानगी भर है। इस सनसनीखेज कार्रवाई ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सिस्टम के भीतर बैठे इन भ्रष्ट चेहरों को इतना संरक्षण कैसे मिल जाता है और वे इतने कम समय में अकूत संपत्ति के मालिक कैसे बन बैठते हैं।12 साल का सफर और करोड़ों का साम्राज्य: कैसे हुआ काले कारनामों का खुलासा?सरकारी नौकरी में आने के बाद से ही तरक्की और धन-दौलत कमाने की रफ्तार इतनी तेज हो सकती है, आम आदमी इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता है। जिस BDO की यह पूरी कहानी है, उन्होंने सेवा में आने के बाद से ही अपनी कार्यशैली और कथित तौर पर भ्रष्टाचार के जरिए अवैध कमाई के कई रास्ते तलाश लिए थे। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को पिछले काफी समय से इस अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की गुप्त शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद पुख्ता सबूत इकट्ठा कर अदालत से सर्च वारंट हासिल किया गया। जब विजिलेंस और EOU की संयुक्त टीमों ने पटना समेत कई ठिकानों पर एक साथ दबिश दी, तो कागजों पर दर्ज सैलरी और असलियत में मौजूद संपत्तियों के बीच का अंतर देखकर हर कोई दंग रह गया। शुरुआती जांच में ही ऐसे कई दस्तावेज हाथ लगे हैं जो यह साबित करने के लिए काफी हैं कि सेवाकाल के इन 12 वर्षों में वेतन के मुकाबले कई गुना ज्यादा संपत्ति जुटाई गई, जिसमें महंगे प्लॉट, आलीशान फ्लैट और भारी मात्रा में सोने-चांदी के जेवरात शामिल हैं।EOU की रेड में मिले अकूत बेनामी ठिकाने और विलासिता के साधनछापेमारी के दौरान आर्थिक अपराध इकाई के हाथ जो दस्तावेज लगे हैं, वे किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं हैं। BDO साहब के नाम पर राजधानी पटना और उनके पैतृक जिलों में एक से बढ़कर एक आलीशान मकान, व्यावसायिक इमारतें और प्राइम लोकेशन पर कीमती जमीनों के कागजात बरामद हुए हैं। इसके अलावा, उनके कई रिश्तेदारों और करीबियों के नाम पर भी संपत्तियों में भारी निवेश किए जाने के पुख्ता सुराग मिले हैं, जिससे यह साफ होता है कि कालेधन को ठिकाने लगाने के लिए सुनियोजित तरीके से बेनामी संपत्तियां बनाई गई थीं। घर की तलाशी के दौरान बैंक खातों में भारी रकम, एलआईसी पॉलिसी, शेयर बाजार में निवेश और लॉकरों से करोड़ों रुपये के जेवरात भी मिले हैं। एक सरकारी सेवक के घर इस तरह की विलासिता और अकूत संपत्ति को देखकर वहां मौजूद स्थानीय लोग भी हैरान थे, क्योंकि जो अधिकारी आम जनता के कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए तैनात किया गया था, वह खुद अपनी तिजोरी भरने में व्यस्त था।बिहार में लगातार बढ़ रहे भ्रष्टाचार के मामले और प्रशासनिक चिंताएंबिहार में आय से अधिक संपत्ति का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में विजिलेंस और EOU की कार्रवाई में कई इंजीनियर, राजस्व कर्मचारी, थानेदार और प्रखंड स्तर के अधिकारी करोड़ों की संपत्ति के साथ पकड़े जा चुके हैं। यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि भ्रष्टाचार की जड़ें प्रशासनिक ढांचे के भीतर कितनी गहरी हो चुकी हैं। जब निचली और मध्य स्तर की प्रशासनिक इकाइयों में इस तरह की अंधेरगर्दी मचती है, तो सबसे ज्यादा पिसता आम नागरिक है जिसे छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं और रिश्वत देनी पड़ती है। इस प्रकार की घटनाएं न केवल सरकार की छवि को धूमिल करती हैं, बल्कि उन ईमानदार अधिकारियों के मनोबल को भी तोड़ती हैं जो पूरी निष्ठा के साथ अपनी ड्यूटी निभाते हैं। जनता के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर ट्रांसफर-पोस्टिंग और मलाईदार पदों पर तैनाती का यह खेल कब तक चलेगा और क्या केवल छापेमार कार्रवाई से इस दीमक को रोका जा सकता है।कड़ी कार्रवाई की मांग और भविष्य की कानूनी चुनौतियांछापेमारी की इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब आरोपी BDO पर कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है। EOU की टीम जब्त किए गए दस्तावेजों और संपत्तियों का पूरा मूल्यांकन कर रही है, जिसके आधार पर आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) का एक पुख्ता मामला दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा, मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की एंट्री होने की भी पूरी संभावना जताई जा रही है ताकि अवैध तरीके से अर्जित किए गए इस पूरे साम्राज्य को जब्त किया जा सके। भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही इस मुहिम में यह मामला एक बार फिर से एक बड़ा नजीर बनने जा रहा है, बशर्ते इस जांच को उसके तार्किक और सजा वाले मुकाम तक पहुंचाया जाए। जनता और मीडिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य सरकार और जांच एजेंसियां कितनी सख्ती से पेश आती हैं और क्या ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को उनकी करनी की पूरी सजा मिल पाती है या फिर मामला कागजी बहसों में ही सिमट कर रह जाता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Sep 2026 1:31 pm

बिहार की बाढ़ पर सियासत और मंथन: क्या सिस्टम की नाकामी छुपाने के लिए खोजे जा रहे हैं नए बहाने

बिहार में बाढ़ की विभीषिका ने एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। हर साल आने वाली इस आपदा से निपटने के पारंपरिक तरीकों पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहे बयानों के दौर में यह सवाल सबसे बड़ा हो गया है कि क्या हर साल होने वाली इस फजीहत से बचने के लिए अब सिर्फ बहाने तलाशने का दौर चलेगा या फिर ठोस नीति बनेगी? नदी के सीने में गाद यानी सिल्ट की मौजूदगी से लेकर फरक्का बैराज की कार्यप्रणाली तक, हर मोर्चे पर बहस छिड़ चुकी है। आइए जानते हैं कि इस बार बाढ़ के इस दर्दनाक चक्रव्यूह और उस पर हो रही सियासत के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है।बिहार में बाढ़ और जलप्रलय की दास्तानबिहार की भौगोलिक बनावट और यहां की नदियां राज्य को हर साल कुदरती मार झेलने के लिए मजबूर कर देती हैं। नेपाल से आने वाली नदियां अपने साथ भारी मात्रा में पानी और मलबा लेकर आती हैं, जिससे राज्य के उत्तर और मध्य हिस्से जलमग्न हो जाते हैं। कोसी, गंडक, बागमती और कमला बलान जैसी नदियां जब उफनती हैं, तो लाखों लोगों की जिंदगी थम जाती है। इस साल भी बाढ़ के पानी ने तबाही मचा रखी है, जिसके बाद सरकार की तैयारियों और दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। राहत और बचाव कार्य कागजों पर भले ही दुरुस्त दिखते हों, लेकिन जमीन पर स्थिति काफी भयावह बनी हुई है। गांवों के गांव डूब चुके हैं, फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और लोग सड़क के किनारे या ऊंचे बांधों पर शरण लेने को मजबूर हैं।नदी में गाद का संकट और बढ़ती मुश्किलेंबाढ़ की इस तबाही के पीछे जानकारों और स्थानीय लोगों का एक बड़ा तर्क नदियों में बढ़ती गाद यानी सिल्ट को लेकर है। बिहार में यह मुद्दा लंबे समय से चर्चा के केंद्र में रहा है। जानकारों का मानना है कि गंगा और उसकी सहायक नदियों की तली में गाद लगातार जमा होती जा रही है, जिससे नदियों की गहराई कम हो गई है। जब गहराई कम होगी, तो पानी की जरा सी भी आवक होने पर नदियां अपने किनारों को तोड़कर बाहर बहने लगेंगी। बिहार सरकार पहले भी केंद्र के सामने नदी में गाद के मुद्दे को जोर-शोर से उठाती रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते नदियों की डेजिंग यानी गाद निकालने का काम बड़े पैमाने पर नहीं किया गया, तो बाढ़ की यह समस्या और अधिक विकराल रूप लेती जाएगी। हालांकि, गाद निकालने की प्रक्रिया अपने आप में तकनीकी रूप से बेहद जटिल और खर्चीली है, जिसके चलते इस दिशा में अपेक्षित गति नहीं मिल पा रही है।फरक्का डैम बना बहस का नया केंद्रबिहार में बाढ़ की विभीषिका के लिए फरक्का बैराज को भी जिम्मेदार ठहराए जाने का पुराना सिलसिला एक बार फिर तेज हो गया है। पश्चिम बंगाल में स्थित फरक्का डैम को लेकर बिहार के राजनीतिक हलकों में अक्सर आवाज उठती रही है। आलोचकों और कई विशेषज्ञों का मानना है कि फरक्का बांध के कारण गंगा नदी के बहाव की गति धीमी हो गई है, जिससे upstream यानी ऊपरी हिस्से में पानी का बैकवाटर इफेक्ट बनता है। इस प्रभाव के कारण पटना और उसके आसपास के इलाकों में जलस्तर उम्मीद से ज्यादा तेजी से बढ़ता है और नदियां आसानी से ड्रेन नहीं हो पाती हैं। इस तकनीकी पक्ष को लेकर समय-समय पर विभिन्न दलों के नेताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। हालांकि, केंद्रीय और तकनीकी एजेंसियों का अपना तर्क है कि बांध का संचालन स्थापित नियमों के तहत होता है, लेकिन बाढ़ के इस मोर्चे पर फरक्का की भूमिका एक बार फिर बहस के केंद्र में आ गई है।बहानेबाजी बनाम ठोस समाधान की तलाशबाढ़ आने के बाद राजनेताओं और अधिकारियों के बीच जुबानी जंग शुरू होना कोई नई बात नहीं है। जब भी जनजीवन अस्त-व्यस्त होता है, एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ने का खेल शुरू हो जाता है। कोई केंद्र सरकार को दोषी ठहराता है, तो कोई राज्य तंत्र की नाकामी गिनाता है। लेकिन इन सबके बीच पिसता सिर्फ आम इंसान है जो अपनी गाढ़ी कमाई से बनाए आशियाने को आंसुओं के समंदर में डूबते देखता है। जनता अब सिर्फ आश्वासनों और बयानों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। उन्हें ऐसे स्थाई समाधान चाहिए जो हर साल आने वाली इस आफत से सुरक्षा दे सकें। चाहे वह वैज्ञानिक तरीके से नदियों की सफाई हो, मजबूत तटबंधों का निर्माण हो या फिर नेपाल के साथ मिलकर कोई दीर्घकालिक जल प्रबंधन नीति बनाना हो, अब हर मोर्चे पर पारदर्शी और जवाबदेह पहल की जरूरत महसूस की जाने लगी है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Sep 2026 1:30 pm

बाजार की महंगी क्रीम को कहें बाय, घर पर बनाएं नेचुरल कोलेजन क्रीम

Homemade Collagen Cream: अगर आप भी अपनी स्किन को टाइट और जवान रखना चाहते हैं तो बाजार से महंगी क्रीम खरीदने की जगह घर पर ही नेचुरल कोलेजन क्रीम बना सकते हैं. यहां हम आपको इसकी आसान ट्रिक बता रहे हैं.

आज तक 9 Sep 2026 1:30 pm

राजस्थान निकाय चुनाव 2026: पहले चरण का मतदान आज शुरू, बिना मतदाता पर्ची के भी ऐसे करें वोट, जानें पूरी प्रक्रिया

राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनाव 2026 के पहले चरण के तहत आज सुबह से ही राज्य के निर्धारित शहरी क्षेत्रों में मतदान की प्रक्रिया पूरी कड़ाई और उत्साह के साथ शुरू हो चुकी है। सुबह होते ही मतदान केंद्रों के बाहर अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए उत्सुक मतदाताओं की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, जो इस बात का सबूत हैं कि लोकतंत्र के इस महापर्व में भाग लेने के प्रति आम जनता में भारी जागरूकता है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी चुनाव संपन्न कराने के लिए सभी पोलिंग बूथों पर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल, अर्धसैनिक बलों के जवानों और माइक्रो ऑब्जर्वर्स की तैनाती की गई है ताकि मतदाता बिना किसी भय या दबाव के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का खुलकर इस्तेमाल कर सकें। प्रशासन ने बुजुर्गों, दिव्यांगों और महिलाओं के लिए मतदान केंद्रों पर विशेष सुविधाएं मुहैया कराई हैं ताकि उन्हें लाइनों में खड़े होने के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।क्या आपके पास मतदाता पर्ची नहीं है, तो न हों परेशान, ऐसे कर सकते हैं अपने मताधिकार का प्रयोगकई बार मतदान के दिन यह देखने को मिलता है कि बहुत से मतदाताओं के पास बीएलओ द्वारा बांटी जाने वाली पर्ची यानी वोटर इंफॉर्मेशन स्लिप नहीं पहुंच पाती है या फिर वह कहीं खो जाती है, जिसके कारण लोग यह सोचकर परेशान हो जाते हैं कि क्या वे आज वोट नहीं डाल पाएंगे। चुनाव आयोग के स्पष्ट और सरल नियमों के अनुसार, यदि आपके पास भौतिक मतदाता पर्ची नहीं भी है, तो भी आप अपना वोट बहुत आसानी से डाल सकते हैं, बशर्ते आपका नाम संबंधित मतदान केंद्र की फाइनल मतदाता सूची में दर्ज होना चाहिए। इसके लिए आपको अपने पोलिंग बूथ पर पहुंचकर मतदान अधिकारियों को अपनी पहचान सत्यापित करानी होगी और आयोग द्वारा मान्य किए गए वैकल्पिक पहचान पत्रों में से कोई एक दस्तावेज दिखाना होगा। इस व्यवस्था के कारण किसी भी योग्य मतदाता को उसके मताधिकार से वंचित नहीं होना पड़ेगा, और प्रशासन ने सभी बूथों पर हेल्प डेस्क भी बनाए हैं जहाँ मतदाता सूची में अपना नाम और सीरियल नंबर आसानी से चेक किया जा सकता है।मतदान केंद्र पर कौन-कौन से पहचान पत्र हैं मान्य, जानें जरूरी दस्तावेज की पूरी सूचीबिना मतदाता पर्ची के मतदान केंद्र पर जाने वाले नागरिकों के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे अपने साथ चुनाव आयोग द्वारा स्वीकृत कम से कम एक आधिकारिक फोटो पहचान पत्र जरूर लेकर जाएं ताकि पहचान को लेकर कोई भ्रम न रहे। आयोग के नियमों के मुताबिक, मतदाता अपनी पहचान साबित करने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण द्वारा जारी आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र यानी वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, केंद्र या राज्य सरकार के उपक्रमों द्वारा जारी सेवा पहचान पत्र का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीयकृत बैंकों या डाकघरों द्वारा जारी फोटोयुक्त पासबुक, मनरेगा जॉब कार्ड, श्रम मंत्रालय की योजना के तहत जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड और सांसदों या विधायकों द्वारा जारी किए गए आधिकारिक पहचान पत्र भी पूरी तरह मान्य किए गए हैं। इनमें से कोई भी एक वैध दस्तावेज दिखाकर आप बिना किसी रुकावट के अपने मतदान कक्ष तक पहुंच सकते हैं और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम का बटन दबाकर अपनी पसंद के प्रतिनिधि का चुनाव कर सकते हैं।लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और शहर के विकास में अपनी भागीदारी निभाएंस्थानीय निकाय चुनाव हमारे गांवों, कस्बों और शहरों की बुनियादी सुविधाओं, साफ-सफाई, सड़क, पानी और बिजली जैसे स्थानीय मुद्दों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं, इसलिए इसमें हर एक वोट का बहुत बड़ा मूल्य होता है। कई बार लोग यह सोचकर अपने घरों से बाहर नहीं निकलते कि एक वोट से क्या फर्क पड़ता है, लेकिन हकीकत यह है कि आपकी एक छोटी सी वोटिंग आपके पूरे शहर के अगले पांच सालों का भविष्य तय करती है। आज पहले चरण के मतदान के दौरान सभी राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो जाएगी, और जनता का यह फैसला आने वाले दिनों में स्पष्ट कर देगा कि शहर की सरकार किसके हाथों में सुरक्षित रहने वाली है। राज्य निर्वाचन आयोग ने भी सभी शहरवासियों से यह अपील की है कि वे अपने सभी काम छोड़कर सबसे पहले मतदान केंद्र पहुंचें और अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करें। आइए, इस लोकतांत्रिक उत्सव में अपनी पूरी जिम्मेदारी के साथ हिस्सा लें और एक मजबूत, ईमानदार तथा विकासोन्मुख निकाय सरकार के गठन में अपनी निर्णायक भूमिका निभाएं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Sep 2026 1:27 pm

अचानक 7 महीने पहले चेयरमैन ने छोड़ा पद, धड़ाधड़ लोग बेचने लगे शेयर

आईटी सेक्‍टर की एक कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट आई है, क्‍योंकि कंपनी के चेयरमैन ने इस्‍तीफा दे दिया है. यह शेयर इंट्रा-डे के दौरान 8 फीसदी से ज्‍यादा गिरा है.

आज तक 9 Sep 2026 1:26 pm

Supreme Court on Rahul Gandhi: हमारे लिए सब बराबर हैं, मानहानि मामले में VVIP ट्रीटमेंट के आरोपों पर सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि उसके सामने सभी बराबर हैं। कोर्ट ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ख़िलाफ़ आपराधिक मानहानि के मामले में शिकायतकर्ता से कहा कि अगर वह जल्द सुनवाई चाहते हैं, तो तय प्रक्रिया का पालन करें। शिकायतकर्ता के वकील ने आरोप लगाया था कि कोर्ट की रजिस्ट्री कांग्रेस नेता के साथ VVIP जैसा बर्ताव कर रही है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव की ओर से पेश सीनियर वकील गौरव भाटिया ने शिकायत की कि गांधी की अपील पर सुनवाई के लिए पहले दिए गए अदालती आदेश के बावजूद इसे लिस्ट नहीं किया गया था। इसे भी पढ़ें: Naman Dhir का T20 में तूफान! KL Rahul का रिकॉर्ड तोड़ बने नंबर 1 भारतीय बल्लेबाज भाटिया ने कोर्ट के दिसंबर 2025 के उस आदेश का ज़िक्र करते हुए कहा, वह कोई VVIP नहीं हैं। यह मामला पांच महीने पहले भी लिस्ट किया गया था और इस पर सुनवाई नहीं हुई थी। यह संस्थान के लिए भी अच्छी बात नहीं है। उस आदेश में मामले को 22 अप्रैल को लिस्ट करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, बेंच ने उनसे जल्द सुनवाई के लिए अर्ज़ी दाखिल करने को कहा। बेंच ने कहा, हमें प्रक्रिया का पालन करने दें। जल्द सुनवाई के लिए अर्ज़ी दाखिल करें... हमारे सामने सब बराबर हैं। कृपया जल्द सुनवाई के लिए अर्ज़ी दाखिल करें। हम उस पर विचार करेंगे। यह बातचीत गांधी की उस अपील के दौरान हुई जिसमें उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प के बारे में दिसंबर 2022 में 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान की गई उनकी टिप्पणियों से जुड़ी आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया था। इसे भी पढ़ें: Rahul Gandhi ने पंजाब सरकार पर साधा निशाना, Harpal Cheema के इस्तीफे की मांग यह मामला पहले जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच के सामने आया था, जिसने 4 अगस्त, 2025 को आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। उस बेंच ने गांधी से उस दावे का आधार पूछा था कि चीनी सैनिकों ने भारत के 2,000 वर्ग किलोमीटर इलाके पर कब्ज़ा कर लिया है, और यह भी कहा था कि सीमा विवाद से जुड़े ऐसे मुद्दों को संसद में उठाया जाना चाहिए। गांधी ने कहा कि वह अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी के अधिकार का इस्तेमाल कर रहे थे और जनता का ध्यान उन मुद्दों की ओर खींचना चाहते थे जिन्हें उनकी नज़र में ठीक से नहीं उठाया जा रहा था।

प्रभासाक्षी 9 Sep 2026 1:25 pm

दिल्ली में MCD की डिमोलिशन ड्राइव, गिराई गईं खतरनाक इमारतें, देखें

दिल्ली में एमसीडी एक्शन में है. मंगलवार को कई जगहों पर डिमोलिशन ड्राइव चलाई. ताजा तस्वीर पांडवनगर से आ रही है, जहां खतरनाक इमारत को तोड़ा गया. इससे पहले सत्य निकेतन में उस इमारत को भी गिराने का काम शुरू हुआ जो हादसे का शिकार हुई पांच मंजिला इमारत के बगल में है. देखें वीडियो.

आज तक 9 Sep 2026 1:24 pm

राहुल गांधी रायबरेली में लौटा पाएंगे कांग्रेस के 'सुनहरे दिन', 0 का संकट कैसे होगा खत्म?

रायबरेली से सांसद चुने जाने के बाद राहुल गांधी लगातार स्थानीय दौरों के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं और जन-प्रतिनिधियों से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं. 2024 के लोकसभा नतीजों से उत्साहित कांग्रेस अब जिले में 'सोनिया एरा' की वापसी की उम्मीद के साथ 2027 के विधानसभा चुनाव में अपना सूखा खत्म करने की तैयारी में जुट गई है.

आज तक 9 Sep 2026 1:22 pm

SC Order Violation: Noida छात्र को नोटिस पर भड़के CJI Chandrachud, बोले- मजिस्ट्रेट की इतनी हिम्मत कैसे हुई?

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गौतम बुद्ध नगर प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। प्रशासन ने कानून की पढ़ाई कर रहे एक 20 साल के छात्र को 'सरकार-विरोधी प्रचार' फैलाने और दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए साथी छात्रों को उकसाने के आरोप में प्रिवेंटिव नोटिस (एहतियाती नोटिस) जारी किया था। कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शनों में शामिल होने वाले छात्रों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद कोई भी एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ऐसा आदेश जारी नहीं कर सकता था। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि जब सीनियर वकील विश्वजीत भट्टाचार्य ने बेंच का ध्यान गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को 4 सितंबर को जारी किए गए नोटिस की ओर दिलाया, तो कोर्ट गौतम बुद्ध नगर ज़िले और एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट से इस बारे में जवाब मांगेगा। इसे भी पढ़ें: Delhi Police ने Bulandshahr से Swatantra Bhardwaj को हिरासत में लिया CJI ने कहा कोई मजिस्ट्रेट नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे कर सकता है? हमने साफ़ कर दिया था कि किसी भी छात्र के ख़िलाफ़ कोई सख़्त कार्रवाई नहीं की जाएगी! कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता। CJI ने भट्टाचार्य की इस बात से सहमति जताई कि नोटिस जारी करना—भले ही उसे अगले दिन वापस ले लिया गया हो—प्रथम दृष्टया सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर के आदेश का उल्लंघन था। CJI ने कहा, हमारे स्पष्ट और साफ़ आदेश को देखते हुए किसी युवा के ख़िलाफ़ कार्रवाई का सवाल ही नहीं उठता। किसी की हिम्मत नहीं कि हमारे आदेशों का उल्लंघन करे। इसे भी पढ़ें: Sam Pitroda ANI Interview | 'गाली-गलौज ठीक है, ये हमारे बच्चे हैं', PM Modi के खिलाफ अभद्र भाषा पर सैम पित्रोदा ने किया प्रदर्शनकारियों का बचाव छात्रों के खिलाफ कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश मुख्य न्यायाधीश 1 सितंबर के उस आदेश का जिक्र कर रहे थे, जिसमें उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए जुलाई में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों से संबंधित आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया था। कोर्ट ने आदेश दिया कि विरोध प्रदर्शनों के संबंध में 20 से 25 जुलाई के बीच विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज एफआईआर पर आगे कोई कार्रवाई या जांच नहीं की जाएगी और उन्हें सभी उद्देश्यों के लिए बंद माना जाएगा। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और के.वी. मोहन सहित उस पीठ ने यह भी निर्देश दिया था कि इन घटनाओं के संबंध में कोई नई एफआईआर दर्ज न की जाए और यह स्पष्ट किया था कि केवल विरोध प्रदर्शनों में भाग लेना दंड संहिता के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। यह आदेश केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली पुलिस के माध्यम से और महाराष्ट्र, असम, बिहार और पश्चिम बंगाल सरकारों द्वारा विरोध प्रदर्शनों से संबंधित आपराधिक मामलों को रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं के बाद आया था।

प्रभासाक्षी 9 Sep 2026 1:22 pm

बिना इंटरनेट होगा UPI पेमेंट, बस डायल करें ये कोड!

इंटरनेट खत्म हो गया है या फोन में डेटा नहीं बचा? फिर भी आपको UPI पेमेंट करने के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है.बिना इंटरनेट के भी पैसे भेजे जा सकते हैं. इसके लिए *99# कोड का इस्तेमाल कर सकते हैं. कुछ सर्विस की मदद से QR कोड स्कैन करके भी ऑफलाइन पेमेंट का ऑप्शन मिलता है. जानिए पूरा तरीका.

आज तक 9 Sep 2026 1:21 pm

अलग-अलग हैं छज्जा और बालकनी बनाने के नियम! कितना लंबा बना सकते हैं?

घर का एक अहम हिस्सा होता है छज्जा और बालकनी. इसे बनाने से पहले सिर्फ इसकी मजबूती ही नहीं, बल्कि इसे बनाने के नियमों की जानकारी होना भी जरूरी है. चलिए जानते हैं कि नियम के मुताबिक हम कितना लंबा छज्जा बना सकते हैं?

आज तक 9 Sep 2026 1:20 pm

बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी बंटवारा 1947, बेपरवाह रहीं प्रीति जिंटा!

सनी देओल के साथ कमबैक फिल्म Batwara 1947 के बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होने पर प्रीति जिंटा ने रिएक्ट किया है. एक्ट्रेस ने कहा कि वह अपना 1000 फीसदी देती हैं और नतीजा भगवान पर छोड़ देती हैं.

आज तक 9 Sep 2026 1:20 pm

'उसकी मूंछें बहुत छोटी थीं' मैनपुरी CO पर अखिलेश का फिर तंज

दरअसल, एक प्रदर्शन के दौरान सीओ अशोक सिंह भड़क गए थे. उन्होंने अपनी वर्दी की नेमप्लेट दिखाते हुए मूंछों पर ताव देकर कहा था- बना लो वीडियो, वायरल कर देना और अखिलेश यादव को दे देना.

आज तक 9 Sep 2026 1:17 pm

छोटे बच्चों का दाह संस्कार क्यों नहीं किया जाता? जानें इसका कारण

Garud Puran: हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद शव को जलाने की परंपरा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि 2 साल तक की उम्र के बच्चों और नवजात शिशुओं की मृत्यु होने पर उन्हें जलाने के बजाय जमीन में क्यों दफनाया जाता है? जानते हैं कारण.

आज तक 9 Sep 2026 1:12 pm

मंत्रालय के सामने धरने पर बैठे कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा पुलिस हिरासत में, स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग

मंत्रालय के सामने धरना दे रहे कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा को पुलिस ने हिरासत में लिया। भोपाल में मंत्रालय के सामने बुधवार को उस समय हंगामा हो गया, जब रीवा के कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा को पुलिस ने धरना स्थल से जबरन हटा दिया। विधायक रीवा के संजय गांधी ...

वेब दुनिया 9 Sep 2026 1:10 pm

DDA कर्मयोगी आवास योजना बुकिंग की डेडलाइन बढ़ी, 25% तक डिस्काउंट

खरीदारों को बुकिंग से पहले चुने गए फ्लैट की पूरी लागत और डिमांड डिटेल्स की जांच करनी चाहिए. सिर्फ इसलिए जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहिए कि फ्लैट पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मिल रहा है.

आज तक 9 Sep 2026 1:09 pm

त‍िलक वर्मा ने 4 दिन पहले जो क‍िया, वैभव सूर्यवंशी ने द‍िया उसका जवाब

दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईस्ट जोन के वैभव सूर्यवंशी और साउथ जोन कप्तान तिलक वर्मा के बीच मैदान पर फिर जुबानी जंग देखने को मिली. पहले द‍िन जहां तिलक ने वैभव से कुछ बातें की थीं. चार दिन बाद वैभव ने मौका मिलते ही पलटवार किया. यह मामला खूब चर्चा में है.

आज तक 9 Sep 2026 1:07 pm

13 साल बाद भी सचिन का जलवा बरकरार! ब्रांड वैल्यू में विराट को टक्कर

सचिन तेंदुलकर की कहानी बताती है कि किसी खिलाड़ी का ब्रांड सिर्फ उसके खेलते रहने तक सीमित नहीं होता. करीब 13 साल पहले क्रिकेट को अलविदा कहने के बावजूद उनकी लोकप्रियता, भरोसे और विश्वसनीयता ने 'ब्रैंड सचिन' को रिटायर नहीं होने दिया.

आज तक 9 Sep 2026 1:03 pm

Satya Niketan Building Collapse: पांचवीं गिरफ्तारी, PG संचालक सुधांशु को दिल्ली पुलिस ने पकड़ा

नयी दिल्ली, नौ सितंबर दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को ढह गई इमारत में ‘पेइंग गेस्ट’ (पीजी) का संचालन करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह इस मामले में अब तक हुई पांचवीं गिरफ्तारी है। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर को एक इमारत गिरने से सात लोगों की मौत हो गई थी। इस इमारत का इस्तेमाल छात्रों के लिए पीजी आवास के रूप में किया जा रहा था। इमारत के मलबे से 12 लोगों को निकाला गया था जिनमें से सात लोगों की मौत हो गई थी और पांच अन्य ज़ख्मी हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पीजी संचालक सुधांशु को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। इससे पहले पुलिस ने भवन ढहने के सिलसिले में इमारत की मालकिन 75 वर्षीय उर्मिला गुप्ता, वायु सेना से सेवानिवृत्त 81 साल के उनके पति हरिराम गुप्ता और उनके बेटे महेश गुप्ता (52) को गिरफ्तार किया था। वहीं, इमारत के तलघर में मरम्मत का काम संभाल रहे ठेकेदार सोनाज को उत्तर प्रदेश के कासगंज से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान महेश ने कहा कि वह अपने माता-पिता की ओर से इमारत की रख-रखाव का काम देखता था और परिवार ने अगस्त, 2025 में पीजी संचालक ‘हॉस्टल डेज’ को यह इमारत पट्टे पर दी थी। सूत्रों ने बताया कि सुधांशु हॉस्टल डेज़ पीजी संचालित करने वाले दो कारोबारी साझेदार में से एक है। पुलिस सूत्रों ने कहा कि इमारत के मालिक महेश ने अगस्त 2025 में सुधांशु और उसके कारोबारी साझेदार शुभम त्यागी को संपत्ति पट्टे पर दी थी। बाद में दोनों ने परिसर को हॉस्टल डेज़ नाम से पेइंग गेस्ट आवास के रूप में संचालित करना शुरू कर दिया। सूत्रों ने बताया कि त्यागी फिलहाल फरार है और उसका पता लगाने के प्रयास जारी हैं। जांचकर्ता किराएदारों के साथ हुए समझौते की जांच कर रहे हैं जिसके तहत पीजी संचालित किया जा रहा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दस्तावेज़ में लिखा है कि पीजी संचालक किरायेदारों के साथ होने वाली किसी भी जनहानि या खतरे के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। इसमें कथित तौर पर यह भी कहा गया है कि छात्रावास सीलिंग, आग, भूकंप, भारी बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं सहित उसके नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण व्यक्तिगत चोट, हानि या सामान की क्षति के लिए मुआवजे का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। समझौते में कहा गया है कि निर्धारित अवधि से पहले छात्रावास छोड़ने वाले किरायेदार छात्रावास शुल्क या सुरक्षा राशि को वापस पाने के हकदार नहीं होंगे। इसमें कहा गया है कि पीजी आवास बुक करने के लिए भुगतान की गई पंजीकरण राशि वापस नहीं की जाएगी। समझौते में छात्रावास शुल्क और सुरक्षा राशि वापस नहीं किए जाने से संबंधित प्रावधान भी थे। इसमें संचालकों को अनुशासनहीनता, दुर्व्यवहार, बकाया राशि का भुगतान न करने या अन्य नियमों के उल्लंघन के मामले में किरायेदारों को हॉस्टल से बाहर निकालने का अधिकार दिया गया था। समझौते के अनुसार, माता-पिता और अभिभावकों को किरायेदारों के कमरे में प्रवेश करने से प्रतिबंधित किया गया था।

प्रभासाक्षी 9 Sep 2026 1:03 pm

'ठीक हूं...', 2 साल बाद बोलीं अलका याग्निक, इमोशनल हुए फैन्स

बॉलीवुड की मशहूर सिंगर अलका याग्निक को 23 जून 2026 को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. वो पिछले दो साल से सेंसरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस नामक दुर्लभ सुनने की बीमारी से जूझ रही हैं. इलाज के दौरान वो स्पॉटलाइट से दूर थीं. अब उन्होंने फैन्स से दिल की बात की है.

आज तक 9 Sep 2026 1:00 pm

राहुल गांधी VVIP नहीं… जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हमारे लिए सभी बराबर

गौरव भाटिया ने अदालत के सामने कहा कि राहुल गांधी कोई वीआईपी या वीवीआईपी नहीं हैं और उनकी ओर से मजिस्ट्रेट के संज्ञान लेने के खिलाफ दाखिल अपील पिछले करीब पांच महीनों से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है।

देशबन्धु 9 Sep 2026 12:58 pm

भारत रत्न वैज्ञानिक को साबित करनी होगी पहचान! SIR नोटिस

भारत रत्न प्रोफेसर सीएनआर राव को चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया में नाम की स्पेलिंग गलती के चलते नोटिस भेजा गया है. पुरानी वोटर लिस्ट में उनका नाम प्रोफ सीएनआर राव था, लेकिन नई लिस्ट में गलती से Proff लिख दिया गया, जिसे सेल्फ नेम मिसमैच कहा गया है.

आज तक 9 Sep 2026 12:57 pm

CBSE के थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर SC में सुनवाई, छात्रों को राहत देने पर विचार 

CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिस पर लगातार छात्रोंं और अभिभावकों के बीच चिंता देखने को मिल रही है. इसे लेकर आज 2026-27 शैक्षणिक सत्र से तीसरी भाषा अनिवार्य करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र से कक्षा 6 के छात्रों को कुछ राहत देने पर विचार करने को कहा है.

आज तक 9 Sep 2026 12:56 pm

रोटी-सब्जी खाकर हो गए बोर? ट्राई करें गुजरात की पालक दाल ढोकली

दाल, चावल, रोटी और सब्जी खाने का कभी मन नहीं करता है और ना ही बनाने का इच्छा होती है. ऐसे में आप गुजराती पालक की दाल ढोकली बना सकते हैं, जिसका स्वाद कमाल होता है और इसे बनाने में भी कुछ ही समय लगता है. जानें आसान रेसिपी.

आज तक 9 Sep 2026 12:52 pm

Justice Ravindra Ghuge ने Calcutta High Court के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली

कोलकाता, नौ सितंबर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि ने न्यायमूर्ति रवींद्र विठ्ठलराव घुगे को कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की बुधवार को शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के बाद मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में लंबित मामलों से निपटने और यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि ‘‘इस महान संस्थान में अंतिम हितधारक आम लोगों का विश्वास अडिग रहे।’’अदालत कक्ष-एक में आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। मुख्य न्यायाधीश ने अदालतों को अधिक सुलभ बनाने और उनके कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल का आह्वान करते हुए कहा, ‘‘जैसा कि हम भविष्य की ओर देख रहे हैं, हमें यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि समाज के सबसे हाशिए पर पड़े लोगों के लिए न्याय के दरवाजे खुले रहें।’’मुख्य न्यायाधीश ने पीठ और बार को ‘‘न्याय रथ के दो पहिए बताते हुए कहा, ‘‘मैं अपनी बहन और भाई न्यायाधीशों तथा इस जीवंत बार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए उत्सुक हूं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह रथ सुचारू और निष्पक्ष रूप से आगे बढ़े। पीठ और बार को न्याय के स्वर्ण रथ के दो पहिए बताते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, मैं सहयोगियों तथा इस जीवंत बार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए उत्सुक हूं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह रथ सुचारू और निष्पक्ष रूप से आगे बढ़े।’’शपथ ग्रहण और नागरिक अभिनंदन के बाद अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ‘‘मैंने पश्चिमी तट से पूर्वी तट तक का सफर किया और कुछ ज्यादा अंतर नहीं पाया। हमारे महान राष्ट्र, भारत के सबसे पुराने उच्च न्यायालय का नेतृत्व सौंपा जाना एक सम्मान की बात है जिसे शब्दों से बयां नहीं किया जा सकता।’’उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय को एक ऐसा संस्थान बताया जिसने भारत के संवैधानिक मूल्यों और न्यायिक परिदृश्य को आकार दिया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से बंगाल भारत के पुनर्जागरण का प्रमुख केंद्र और स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण धरती रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘मुंबई उच्च न्यायालय जैसे एक अन्य ऐतिहासिक एवं प्रतिष्ठित संस्थान से यहां आने के बाद मैं निरंतरता, जिम्मेदारी और साझा संवैधानिक उद्देश्य की गहरी भावना महसूस कर रहा हूं।’’न्यायमूर्ति घुगे को 21 जून 2013 को मुंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था और एक जून 2026 को उन्हें वहां कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। उच्च न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार, 1990 में कोल्हापुर स्थित शाहजी विधि महाविद्यालय और औरंगाबाद स्थित एमपी विधि महाविद्यालय से पांच वर्षीय विधि पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद उन्होंने उसी वर्ष मुंबई उच्च न्यायालय में वकालत शुरू की थी। उन्होंने शुरूआत में लगभग 2,000 मामलों में श्रमिकों और यूनियनों का प्रतिनिधित्व किया और उच्च न्यायालय, श्रम और औद्योगिक अदालतों और न्यायाधिकरणों में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निजी उद्योगों सहित लगभग 250 उद्योगों के लिए मामलों की पैरवी की।

प्रभासाक्षी 9 Sep 2026 12:52 pm

यूपी के बाहुबली की बेटी भी अब राजनीति में! जानिए कौन हैं शालिनी सिंह

who is Shalini Singh: उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर पूर्वांचल के सबसे असरदार और चर्चित राजनीतिक परिवारों में से एक, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के कुनबे से एक और सदस्य राजनीति में एंट्री करने जा रहा है। बृजभूषण की बेटी शालिनी ...

वेब दुनिया 9 Sep 2026 12:52 pm

सूरत में स्टंट पड़ा भारी! ऑटो ने बचाई युवक की जान!

सूरत के कीम रेलवे ओवरब्रिज से एक युवक करीब 40 फीट नीचे गिर गया. बताया जा रहा है कि मोनू नाम का 21 वर्षीय युवक स्टंट या शॉर्टकट के दौरान संतुलन बिगड़ने से गिरा. नीचे खड़े ऑटो रिक्शा पर गिरने से उसकी जान बच गई, हालांकि वाहन क्षतिग्रस्त हुआ. पुलिस के सामने युवक ने टिकट लेने की जल्दी में शॉर्टकट लेने की बात कही. मामले की जांच अब जारी है.

आज तक 9 Sep 2026 12:51 pm

ऑटो से 3 करोड़ ले जा रहा था कारोबारी का स्टाफ, 1 करोड़ लूट कर फरार हुए बदमाश

दिल्ली के ITO के पास सोमवार शाम स्कूटी सवार दो बदमाशों ने पिस्टल की नोक पर एक ऑटो को रोककर करीब एक करोड़ रुपये की लूट कर ली. बताया जा रहा है कि ऑटो में एक नामी कारोबारी का स्टाफ करीब 3 करोड़ रुपये की नकदी लेकर जा रहा था. बदमाश नोटों से भरा एक बैग लेकर फरार हो गए.

आज तक 9 Sep 2026 12:50 pm

UP Elections से पहले SP का 'नीला' दांव: Student Wing का ड्रेस कोड बदला, Dalit वोटर आएंगे साथ?

समाजवादी पार्टी (SP) ने दलित वोटरों और युवाओं से जुड़ने की कोशिश में अपने छात्र संगठन, 'समाजवादी पार्टी छात्र सभा' ​​का ड्रेस कोड बदल दिया है। अब पारंपरिक लाल रंग की जगह नीली जींस और नीली टी-शर्ट पहनी जाएगी। यह फ़ैसला 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच लिया गया है। मंगलवार को लखनऊ में होने वाले छात्र सभा के सम्मेलन में यह नया ड्रेस कोड देखने को मिलेगा, जहाँ पदाधिकारी और कार्यकर्ता नई नीली पोशाक में नज़र आ सकते हैं। इसे भी पढ़ें: दिल्ली की मतदाता सूची में राघव चड्ढा का नाम शामिल, AAP ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल इस बदलाव को सिर्फ़ संगठन का फ़ैसला नहीं, बल्कि दलित युवाओं के बीच पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ाने की एक राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में रंगों का पारंपरिक रूप से राजनीतिक महत्व रहा है। जहाँ नीला रंग दलित राजनीति और बी.आर. अंबेडकर की विचारधारा से जुड़ा है, वहीं समाजवादी पार्टी की पहचान पारंपरिक रूप से लाल और हरे रंगों से रही है। इस माहौल में, स्टूडेंट विंग के लिए मुख्य रंग के तौर पर नीले रंग को चुनने के फैसले को एक राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि SP अपने पारंपरिक यादव-मुस्लिम सपोर्ट बेस से आगे बढ़कर दलित वोटरों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फ़ॉर्मूले को 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान चुनावी अहमियत भी मिली। इस बदलाव के समय को भी राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह आने वाले चुनावों की तैयारियों और युवा वोटरों को संगठित करने की कोशिशों के बीच हो रहा है। उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव 2027 में होंगे, जिसमें दो सबसे प्रमुख पार्टियों - भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी - के बीच कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। इसे भी पढ़ें: महिपाल ढांडा को ‘जाट समाज पर कलंक’ बताना ओछी और संकीर्ण राजनीति: शमशेर खरक मौजूदा सत्र में उत्तर प्रदेश विधानसभा के 403 चुने हुए सदस्य हैं, जिनमें से 258 भारतीय जनता पार्टी से, 107 समाजवादी पार्टी से और 13 अपना दल से हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके उत्तर प्रदेश में वापसी करने की कोशिश कर रही है और 2027 के चुनावों में जीत पर नज़र बनाए हुए है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।

प्रभासाक्षी 9 Sep 2026 12:47 pm

राज कुंद्रा ने जन्मदिन पर किया बड़ा ऐलान, लॉन्च किया अपना प्रोडक्शन हाउस 'अकाल फिल्म्स

बिजनेसमैन-अभिनेता राज कुंद्रा ने बुधवार को अपने जन्मदिन के अवसर पर कहानी कहने की दुनिया में नए सफर की शुरुआत की, जिसके लिए उन्होंने प्रोडक्शन हाउस का अनावरण किया।

खास खबर 9 Sep 2026 12:46 pm

दिल्ली-यूपी और बिहार समेत 16 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, जानिए कहां कैसा है मौसम?

Weather Update : सितंबर में मानसून की विदाई से पहले देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने आज भी दिल्ली-यूपी और बिहार समेत 16 राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है।

वेब दुनिया 9 Sep 2026 12:46 pm

अब ISKCON के होटलों पर चला तुकाराम मुंढे का डंडा, IRCTC सप्लायर पर भी गिरी गाज

FDA के मुताबिक ISKCON के गोविंदा रेस्टोरेंट में फूड टेस्टिंग, पीने के पानी, सफाई, ड्रेनेज, पेस्ट कंट्रोल और कर्मचारियों की हाइजीन और ट्रेनिंग से जुड़े कई नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। इसके बाद बड़ा एक्शन लिया गया है।

लाइव हिन्दुस्तान 9 Sep 2026 12:45 pm

जनधन योजना को लेकर Gehlot का केन्द्र सरकार पर निशाना, कहा- मोदी सरकार की गलत नीतियों से...

जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अब जनधन योजना को लेकर केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इस संबंध में आज एक्स के माध्यम से कहा कि जनधन योजना का हर चौथा खाता निष्क्रिय, 5.72 करोड़ खातों में एक रुपया तक नहीं। यह है मोदी सरकार के गरीब कल्याण के दावों की असली तस्वीर। यह स्पष्ट संकेत है कि मोदी सरकार की गलत नीतियों से देश में गरीबी बढ़ती जा रही है जिसके कारण बैंके खाते खाली हो गए हैं। दूसरी तरफ देश के चंद अमीर लगातार और अमीर होते जा रहे हैं। अशोक गहलोत ने कहा कि राहुल गांधीलगातार आवाज उठा रहे हैं कि देश में अमीर और गरीब की खाई बढ़ती जा रही है। मनरेगा जैसी गरीब कल्याण की योजना को बन्द करने के दुष्परिणाम अभी आएंगे तब स्थिति बद से बदतर हो जाएगी। यह बढ़ती असमानता चिंता का विषय है और केंद्र सरकार को गंभीरता से इस दिशा पर ध्यान देना चाहिए। भजनलाल जी, गौ सेवा सिर्फ नारों में नहीं, टीकाकरण और मुआवजे की व्यवस्था में दिखनी चाहिए वहीं अशोक गहलोत ने लंपी वायरस को लेकर प्रदेश सरकार को भी निशाने पर लिया है। उन्होंने एक्स के माध्यम से कहा कि चार साल बाद राजस्थान में लंपी वायरस ने फिर दस्तक दे दी है, भरतपुर, डीग, धौलपुर, करौली सहित कई जिलों में 10 हजार से ज्यादा गोवंश संक्रमित हो चुके हैं और 6 गायों की मौत हो चुकी है। जब 2022 में लंपी ने कहर बरपाया था, तब हमारी कांग्रेस सरकार ने उस दौर में गायों को फ्री टीका लगवाया और जिन गोवंश की जान गई, उनके मालिकों को 40 हजार रुपए प्रति गाय मुआवजा दिया था। लेकिन भाजपा सरकार के राज में आज टीकाकरण तक नहीं हो पाया, नतीजा गोवंश फिर मर रहे हैं। सवाल यह है कि भाजपा सरकार कोई काम क्यों नहीं कर रही? भजनलाल जी, गौ सेवा सिर्फ नारों में नहीं, टीकाकरण और मुआवजे की व्यवस्था में दिखनी चाहिए। PC:livehindustan अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें

समाचार जगत 9 Sep 2026 12:45 pm

अक्षरा सिंह ने टाइगर श्रॉफ के साथ तस्वीरें शेयर कर बढ़ाई हलचल, बोलीं- 'कुछ तस्वीरें गैलरी में रखने के लिए नहीं होतीं'

भोजपुरी सिनेमा में अपनी खास पहचान बनाने के बाद अक्षरा सिंह अब हिंदी फिल्मों की तरफ भी कदम बढ़ा रही हैं

खास खबर 9 Sep 2026 12:43 pm

PG छोड़ कॉलेज में जमीन पर डाल ल‍िया गद्दा, हादसे से डरे छात्रों की आपबीती

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने के दो दिन बाद भी छात्रों में डर देखा जा रहा है और यही वजह है कि बच्चे इलाके को खाली कर रहे हैं और कहीं और शिफ्ट हो रहे हैं. कुछ छात्र तो कॉलेज के क्लासेस में भी रात बिताने को मजबूर हैं.

आज तक 9 Sep 2026 12:43 pm

त‍िलक का बैडलक, 99 पर हो गया 'धोखा', ईस्ट वालों ने कर द‍िया खेला

दलीप ट्रॉफी फाइनल में बुधवार (9 स‍ितंबर) को मैच के चौथे द‍िन त‍िलक वर्मा ने 99 रन बनाए. ईस्ट जोन के ख‍िलाफ इस मुकाबले में साउथ जोन की टीम के कुछ बल्लेबाजों को छोड़ द‍िया जाए तो बाकी बल्लेबाजी फ्लॉप रही. त‍िलक के आउट होते ही ईस्ट जोन की पारी भी 336 रनों पर न‍िपट गई.

आज तक 9 Sep 2026 12:39 pm

PM मोदी के जन्मदिन पर क्या है BJP का खास प्लान? नितिन नवीन ने बताया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे करने पर बीजेपी कई कार्यक्रम करने जा रही है. बुधवार को बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने ये ऐलान किया. 7 अक्टूबर से सेवा ज्योति कलश यात्रा निकाली जाएगी. वाराणसी से वडनगर तक ये सेवा यात्रा निकाली जाएगी. 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 'सेवा संकल्प अभियान' चलाया जाएगा. देखें वीडियो.

आज तक 9 Sep 2026 12:38 pm

बिलखती मां, चीखती बहन और बदहवास पिता... दिल्ली से दुर्ग पहुंचा बेटे का शव

दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने के हादसे ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग के एक परिवार से उनका इकलौता बेटा छीन लिया. हादसे में जान गंवाने वाले छात्र युवराज सोनी का पार्थिव शरीर दो दिन बाद जब दुर्ग पहुंचा तो पूरा इलाका गम में डूब गया. शव घर पहुंचा तो परिवार के सब्र का बांध टूट गया. अपने इकलौते बेटे को देखकर माता-पिता बदहवास हो गए. वहीं बहन शव से लिपटकर बिलखती रही.

आज तक 9 Sep 2026 12:37 pm

मैथ्यू वैन डाइक पर लगा आतंकवादी चार्ज हटा, सर्जियो गोर की मीटिंग के बाद NIA का फैसला

इससे पहले अमेरिकी नागरिक के परिवार ने कहा था कि भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश सचिव विक्रम मिसरी और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने यह मुद्दा उठाया है।

लाइव हिन्दुस्तान 9 Sep 2026 12:36 pm

हरियाणा में प्रशासनिक फेरबदल: नायब सरकार ने ताबड़तोड़ तबादले करते हुए 16 IAS और 10 HCS अधिकारियों को सौंपी नई जिम्मेदारियां

हरियाणा की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इस समय एक बहुत बड़ा और अहम घटनाक्रम सामने आया है, जहां राज्य की नायब सिंह सैनी सरकार ने प्रशासनिक मशीनरी को और अधिक चुस्त-दुरुस्त और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। सरकार की ओर से जारी किए गए आधिकारिक आदेशों के अनुसार, राज्य में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक सर्जरी करते हुए कुल 16 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और 10 हरियाणा सिविल सेवा (HCS) अधिकारियों के विभागों और कार्यक्षेत्र में फेरबदल किया गया है। चुनाव के बाद या शासन की गति को तेज करने के लिए इस प्रकार के प्रशासनिक फेरबदल को एक सामान्य लेकिन बेहद प्रभावी कदम माना जाता है, ताकि सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन धरातल पर तेजी से हो सके और आम जनता को किसी भी तरह की प्रशासनिक असुविधा का सामना न करना पड़े। सरकार के इस अचानक उठाए गए कदम से पूरे राज्य के प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है और अधिकारी अपनी नई नियुक्तियों और चार्ज संभालने की तैयारियों में जुट गए हैं।कई जिलों के डीसी और प्रमुख विभागों के सचिव बदले गए, शासन व्यवस्था को दी गई नई रफ्तारनायब सरकार द्वारा जारी की गई इस नई ट्रांसफर लिस्ट में कई महत्वपूर्ण जिलों के उपायुक्त (Deputy Commissioners), विभिन्न विभागों के प्रशासनिक सचिव और निदेशक स्तर के अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है। सरकार का मुख्य फोकस उन जिलों और विभागों पर अधिक रहा है जहां विकास कार्यों की गति को तेज करने की सबसे ज्यादा आवश्यकता महसूस की जा रही थी। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इन बदलावों के पीछे सरकार की यह मंशा साफ झलकती है कि वह अपनी नीतियों को जमीनी स्तर पर पूरी ईमानदारी और तेजी के साथ लागू करना चाहती है। जिन अधिकारियों को नए और महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उनकी कार्यकुशलता और प्रशासनिक पकड़ को ध्यान में रखते हुए यह नियुक्तियां की गई हैं ताकि राज्य में कानून-व्यवस्था, जन-कल्याणकारी योजनाओं के वितरण और प्रशासनिक पारदर्शिता को और अधिक ऊंचाई पर ले जाया जा सके।प्रशासनिक कसावट और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के लिए सरकार का कड़ा संदेशहरियाणा सरकार के इस हालिया प्रशासनिक फेरबदल को राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषक राज्य में सुशासन (Good Governance) को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहे हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासनिक अमले में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जो अधिकारी जनता के प्रति जवाबदेह रहकर काम करेंगे, उन्हें ही मुख्य जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। ताबड़तोड़ किए गए इन तबादलों के जरिए सरकार ने यह संदेश दे दिया है कि नौकरशाही को पूरी तरह से जनता के हितों के अनुकूल और संवेदनशील बनना होगा। इस प्रकार के फेरबदल से न केवल प्रशासनिक अधिकारियों में काम करने की प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, बल्कि फाइलों के निस्तारण में आने वाली सुस्ती भी दूर होती है, जिसका सीधा और सकारात्मक लाभ अंततः राज्य के आम नागरिकों को मिलता है।ट्रांसफर लिस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों और नौकरशाही में चर्चाओं का बाजार गर्मजैसे ही हरियाणा सरकार द्वारा 16 IAS और 10 HCS अधिकारियों के तबादले की यह सूची सार्वजनिक हुई, वैसे ही राज्य के राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक दफ्तरों में सुगबुगाहट तेज हो गई। विपक्षी दल और राजनीतिक विश्लेषक इन तबादलों के अपने-अपने मायने निकालने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक सेवा से जुड़े लोग इसे एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया मान रहे हैं जो सरकार की कार्यप्रणाली का हिस्सा होती है। जिन अधिकारियों के प्रभार बदले गए हैं, उन्होंने अपनी नई जगहों पर कार्यभार संभालना भी शुरू कर दिया है और अपने-अपने विभागों की समीक्षा बैठकों का दौर भी शुरू हो चुका है। जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि इन नए बदलावों के बाद राज्य के विभिन्न जिलों में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं की रफ्तार में कितनी तेजी आती है और आम आदमी की समस्याएं कितनी जल्दी हल होती हैं।आने वाले समय में विकास कार्यों को गति देने के लिए प्रशासनिक अमला पूरी तरह तैयारहरियाणा में हुए इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद अब यह पूरी तरह से स्पष्ट हो चुका है कि सरकार आने वाले दिनों में नीतिगत फैसलों और विकास परियोजनाओं को लेकर बेहद गंभीर रुख अपनाने वाली है। नए पदों पर तैनात किए गए युवा और अनुभवी अधिकारियों के कंधਿਆਂ पर अब यह बड़ी जिम्मेदारी आ गई है कि वे शासन की मंशा के अनुरूप धरातल पर परिणाम लाकर दिखाएं। चाहे बात ग्रामीण विकास की हो, औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की या फिर कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की, हर मोर्चे पर नए अधिकारियों को अपनी दक्षता साबित करनी होगी। नायब सरकार के इन सुनियोजित और बड़े प्रशासनिक बदलावों ने यह साबित कर दिया है कि राज्य में सुशासन और विकास ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है, जिससे आने वाले समय में हरियाणा को प्रगति के पथ पर और तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Sep 2026 12:35 pm

FIR में दर्ज है मणिपुरी म्यूजिशियन के कत्ल की पूरी कहानी

मणिपुरी म्यूजिशियन सी. विक्रम सिंह की मौत के मामले में बेटे याइफाबा की FIR सामने आई है. FIR में 4-5 लड़कों पर मारपीट का आरोप लगाया गया है. और क्या लिखा है एफआईआर में... जानें पूरी घटना.

आज तक 9 Sep 2026 12:35 pm

ऋतिक रोशन की मां पिंकी रोशन ने मुंबई में खरीदे 67.30 करोड़ रुपये के दो लग्जरी अपार्टमेंट

बॉलीवुड के ग्रीक गॉड कहे जाने वाले सुपरस्टार ऋतिक रोशन के परिवार से जुड़ी एक बहुत बड़ी और दिलचस्प खबर इस समय रियल एस्टेट और मनोरंजन जगत में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। अभिनेता की मां और राकेश रोशन की धर्मपत्नी पिंकी रोशन ने मुंबई के एक बेहद प्रीमियम और पॉश इलाके में रियल एस्टेट मार्केट में एक बहुत बड़ा दांव खेला है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिंकी रोशन ने एक रिहायशी इमारत की 24वीं मंजिल पर दो शानदार और विशाल अपार्टमेंट्स की खरीदारी की है, जिनकी कुल कीमत लगभग 67.30 करोड़ रुपये आंका जा रही है। मुंबई के प्राइम लोकेशन पर खरीदे गए इन दोनों आलीशान घरों की भव्यता और इंटीरियर किसी पांच सितारा होटल से कम नहीं है। इस हाई-प्रोफाइल डील के सामने आने के बाद से ही यह साफ हो गया है कि रोशन परिवार न केवल फिल्मों के निर्माण में माहिर है, बल्कि अपनी संपत्ति और निवेश को बढ़ाने के मामले में भी काफी दूरदर्शी सोच रखता है।फिल्म 'कृष 4' की बहुप्रतीक्षित घोषणा से पहले बड़े पैमाने पर हो रहे हैं ताबड़तोड़ निवेशबॉलीवुड के गलियारों में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा जिस फिल्म को लेकर हो रही है, वह है ऋतिक रोशन की सुपरहिट सुपरहीरो फ्रेंचाइजी 'कृष' का अगला भाग यानी 'कृष 4'। फिल्म की शूटिंग और आधिकारिक घोषणा से ठीक पहले परिवार द्वारा करोड़ों रुपये के इस तरह के ताबड़तोड़ निवेश किए जाने ने फैंस और बाजार विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। फिल्म निर्माण से जुड़े सूत्रों का मानना है कि रोशन परिवार आने वाले समय में अपने बैनर 'फिल्मक्राफ्ट' के तहत एक बहुत बड़े पैमाने पर इस मेगा-बजट प्रोजेक्ट को उतारने की तैयारी कर रहा है। ऐसे समय में जब पारिवारिक और व्यावसायिक मोर्चे पर बड़े वित्तीय निर्णय लिए जा रहे हैं, पिंकी रोशन द्वारा मुंबई के रियल एस्टेट में इतनी भारी-भरकम पूंजी लगाना इस बात का संकेत है कि आने वाले प्रोजेक्ट्स को लेकर उनकी वित्तीय योजनाएं बेहद मजबूत और सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ रही हैं।मुंबई का रियल एस्टेट मार्केट और सेलिब्रिटी निवेश का बढ़ता नया क्रेजमुंबई का प्रॉपर्टी बाजार हमेशा से दुनिया भर के हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) और फिल्म स्टार्स के लिए निवेश का सबसे पसंदीदा ठिकाना रहा है। समुद्र के करीब स्थित और स्काईलाइन का खूबसूरत नजारा पेश करने वाली ऊंची इमारतों में घर खरीदना अब बॉलीवुड हस्तियों के बीच स्टेटस सिंबल के साथ-साथ एक बेहद सुरक्षित लॉन्ग-त्र्म इन्वेस्टमेंट बन चुका है। पिंकी रोशन द्वारा 24वीं मंजिल पर खरीदे गए इन दोनों नए अपार्टमेंट्स से पूरे शहर का पैनोरमिक व्यू मिलता है, जो आधुनिक वास्तुकला और लग्जरी लाइफस्टाइल का बेहतरीन नमूना है। सेलिब्रिटीज जब भी इस तरह की बड़ी संपत्तियों में पैसा लगाते हैं, तो इसका सीधा असर आसपास के इलाकों के प्रॉपर्टी रेट्स और मार्केट सेंटिमेंट पर भी देखने को मिलता है। इस डील ने यह साबित कर दिया है कि मंदी या उतार-चढ़ाव के दौर में भी मुंबई के प्रीमियम रियल एस्टेट की चमक फीकी नहीं पड़ने वाली है।रोशन परिवार की व्यावसायिक समझ और पारिवारिक एकजुटता की मिसालराकेश रोशन और पिंकी रोशन का परिवार बॉलीवुड इंडस्ट्री में सबसे अनुशासित और सफल परिवारों में से एक माना जाता है। पिछले कई दशकों से इस परिवार ने भारतीय सिनेमा को एक से बढ़कर एक बेहतरीन और ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं, जिसमें 'कहो ना प्यार है', 'कोई मिल गया' और 'कृष' सीरीज शामिल हैं। फिल्मों से होने वाली कमाई को सही जगह निवेश करना और अपने परिवार की संपत्ति को सुरक्षित रखना इस परिवार की पुरानी खूबी रही है। पिंकी रोशन द्वारा लिया गया यह नया संपत्ति का फैसला इस बात का गवाह है कि रोशन परिवार केवल रचनात्मक रूप से ही मजबूत नहीं है, बल्कि अपनी वित्तीय संपत्तियों को बढ़ाने और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी पूरी तरह से आगे है। उनके शुभचिंतक और फैंस इस नई उपलब्धि पर उन्हें लगातार बधाइयां दे रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही 'कृष 4' से जुड़ी कोई बड़ी खुशखबरी भी सामने आएगी।भविष्य के प्रोजेक्ट्स और बॉक्स ऑफिस पर आने वाले तूफान की सुगबुगाहटजैसे-जैसे ऋतिक रोशन की आने वाली फिल्मों और विशेष तौर पर 'कृष 4' को लेकर सुगबुगाहट तेज हो रही है, वैसे-वैसे उनके फैंस का उत्साह भी सातवें आसमान पर पहुंच रहा है। भारतीय सिनेमा में सुपरहीरो जॉनर को एक नई पहचान दिलाने वाले इस प्रोजेक्ट से दर्शकों को बहुत ज्यादा उम्मीदें हैं। परिवार के स्तर पर हो रहे ये बड़े निवेश इस बात का स्पष्ट संकेत देते हैं कि आने वाला समय रोशन परिवार के लिए बेहद व्यस्त और उपलब्धियों से भरा रहने वाला है। चाहे बात बड़े पर्दे पर बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड तोड़ने की हो या फिर रियल एस्टेट बाजार में करोड़ों की डील करने की, रोशन परिवार हर मोर्चे पर अपनी धाक जमाने में कामयाब हो रहा है। इस भव्य निवेश ने यह दिखा दिया है कि बॉलीवुड के ये दिग्गज सितारे अपनी सफलता के साथ-साथ अपने भविष्य के वित्तीय साम्राज्य को भी कितनी मजबूती से संवारने में लगे हुए हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Sep 2026 12:34 pm

क्या है हिंदू संगठन BAPS जिसके एफिल टावर दौरे से फ्रांस में छिड़ा विवाद

Eiffel Tower Controversy: एफिल टावर पर BAPS के निजी दौरे के बाद महिला कर्मचारियों को कथित तौर पर पीछे रखने के आरोप लगे हैं, जिसके बाद स्टाफ ने हड़ताल कर दी थी. इसकी वजह से एफिल टावर बंद रहा था. हालांकि, अब एफिल टावर दोबारा खोल दिया गया है. जानें BAPS क्या है, इसका इतिहास, दुनिया भर के मशहूर मंदिर और महिलाओं से जुड़े पुराने विवाद.

आज तक 9 Sep 2026 12:33 pm

बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचने वाली फिल्म 'हनुमान अंश' की टीम ने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात

भारतीय सिनेमा जगत में इन दिनों कम बजट में बनकर बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ने वाली आध्यात्मिक फिल्म 'हनुमान अंश' चारों तरफ चर्चा का विषय बनी हुई है। फिल्म की अभूतपूर्व सफलता और इसकी ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद निर्माता-निर्देशक और मुख्य कलाकारों की पूरी टीम ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर राज्य के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एक उच्च स्तरीय और शिष्टाचार मुलाकात की। इस खास मुलाकात के दौरान फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी और मुख्य भूमिका में नजर आने वाले अभिनेता शोभिनव सत्या ने मुख्यमंत्री को फिल्म की मूल कहानी, इसके निर्माण से जुड़े संघर्षों और इसके पीछे छिपी आध्यात्मिक यात्रा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिल्म की टीम के इस प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा की और उन्हें भविष्य के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं।नाथ संप्रदाय और नीम करोली बाबा के आध्यात्मिक रिश्तों पर हुई विशेष चर्चामुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हुई इस मुलाकात के दौरान फिल्म 'हनुमान अंश' के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी और अभिनेता शोभिनव सत्या ने फिल्म के उन चुनिंदा दृश्यों और पहलुओं पर भी लंबी चर्चा की, जो महान संत नीम करोली बाबा और नाथ संप्रदाय के बीच के ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाते हैं। निर्देशक ने मुख्यमंत्री को बताया कि किस प्रकार फिल्म में यह चित्रित किया गया है कि अपने शुरुआती जीवन और साधना काल के दौरान बाबा नीब करौरी ने नाथ संप्रदाय के संतों के सान्निध्य में रहकर दिव्य ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्तियों को आत्मसात किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जो खुद गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर और नाथ परंपरा के प्रमुख संवाहक हैं, ने इस विषय में गहरी रुचि दिखाई और फिल्म में संतों की जीवन शैली तथा सनातन संस्कृति के सटीक चित्रण की सराहना की।अभिनेता शोभिनव सत्या ने साझा किए शूटिंग के दौरान के अपने संस्मरण और संघर्षफिल्म में नीम करोली बाबा की मुख्य भूमिका निभाकर रातों-रात देश भर में सुर्खियों में आए अभिनेता शोभिनव सत्या ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने अपनी शूटिंग के दौरान के खट्टे-मीठे और आध्यात्मिक अनुभवों को साझा किया। शोभिनव ने बताया कि कैसे वे इस फिल्म के सेट पर एक साधारण सहायक के रूप में प्रॉप्स संभालने का काम कर रहे थे, लेकिन ईश्वरीय कृपा और अचानक बने संयोग ने उन्हें सीधे पर्दे पर मुख्य भूमिका में ला खड़ा किया। उन्होंने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि शूटिंग के दौरान कई बार उन्हें ग्रामीण इलाकों में छोटे मंदिरों के परिसरों में रात गुजारनी पड़ी और वहां के स्थानीय ग्रामीणों व साधुओं द्वारा बनाए गए सादे भोजन को ही उन्होंने प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। शोभिनव के इन जमीनी और सच्चे अनुभवों को सुनकर वहां मौजूद सभी लोग भावुक और प्रभावित हो गए।छोटे बजट की फिल्म 'हनुमान अंश' का बॉक्स ऑफिस पर विराट प्रदर्शनसिनेमाघरों में अपनी रिलीज के बाद से ही इस फिल्म ने बड़े-बड़े बजट की मसाला फिल्मों और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स को बॉक्स ऑफिस की रेस में पीछे छोड़ दिया है। महज कुछ करोड़ रुपये के छोटे बजट में तैयार की गई इस आध्यात्मिक फिल्म ने दर्शकों के दिलों पर ऐसा जादू चलाया है कि इसने बॉक्स ऑफिस पर 160 से 170 करोड़ रुपये से अधिक का ग्रॉस कलेक्शन कर एक नया मील का पत्थर स्थापित कर दिया है। दर्शक बड़ी संख्या में परिवार सहित इस फिल्म को देखने पहुंच रहे हैं, जिससे यह साबित होता है कि आज के दौर में भी भारतीय दर्शक अपनी संस्कृति, परंपरा, संत समाज और आध्यात्मिक कहानियों से जुड़ने के लिए पूरी तरह से उत्सुक रहते हैं। फिल्म की इस अपार सफलता ने यह दिखा दिया है कि यदि कंटेंट में सच्चाई और निष्ठा हो, तो कम संसाधनों में भी ब्लॉकबस्टर फिल्में बनाई जा सकती हैं।उत्तर प्रदेश में फिल्म को टैक्स-फ्री किए जाने को लेकर तेज हुई कयासबाजियांमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ 'हनुमान अंश' की टीम की इस मुलाकात के बाद से ही राजनीतिक और फिल्मी गलियारों में इस बात की अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार इस फिल्म को पूरे राज्य में टैक्स-फ्री (Tax-Free) घोषित कर सकती है। इससे पहले यह फिल्म पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में टैक्स-फ्री की जा चुकी है, जहां के मुख्यमंत्री ने भी इसकी जमकर सराहना की थी। चूँकि यह फिल्म सनातन संस्कृति, लोककल्याण और महान संतों के जीवन दर्शन को बढ़ावा देती है, इसलिए उत्तर प्रदेश के दर्शकों और फिल्म मेकर्स के बीच यह उम्मीद मजबूत हो गई है कि जल्द ही इसे लेकर कोई बड़ा आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है। मुख्यमंत्री से हुई इस सकारात्मक मुलाकात ने न केवल फिल्म की टीम का मनोबल बढ़ाया है, बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में आध्यात्मिक फिल्मों के एक नए और स्वर्णिम दौर की शुरुआत का भी स्पष्ट संकेत दे दिया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Sep 2026 12:31 pm

खड़े हनुमान जी के दर्शन के लिए उमड़े भक्त, प्रशासन ने अब क्या कहा?

उज्जैन में कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत लगभग 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर के मुख्य ढांचे को हटा दिया गया है, लेकिन तमाम मशीनों और तकनीकी प्रयासों के बावजूद हनुमान जी की प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई।

अमर उजाला 9 Sep 2026 12:30 pm

गुलजार सिंह की मौत पर राहुल गांधी का पंजाब सरकार पर हमला, बोले- सवाल पूछने वालों को धमकाना लोकतंत्र के लिए खतरनाक

गुलजार सिंह की मौत के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक रूप से गरमा गया है। कांग्रेस ने जहां इसे सरकार की कथित संवेदनहीनता से जोड़कर सवाल उठाए हैं, वहीं पूरे मामले में जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

देशबन्धु 9 Sep 2026 12:30 pm

ग्लेशियर को लगी गर्मी! वैज्ञानिकों ने बर्फ को ओढ़ाया कंबल

क्या भेड़ की ऊन अब ग्लेशियरों की ढाल बनेगी? स्विट्जरलैंड में वैज्ञानिकों ने बर्फ को पिघलने से रोकने के लिए ऊन की चादरें बिछाईं. शुरुआती नतीजों ने वैज्ञानिकों को भी चौंकाया है, ऊन ने सिंथेटिक कवर जितना ही अच्छा काम किया.

आज तक 9 Sep 2026 12:29 pm

बंगाल समेत 5 राज्यों के चुनावी संग्राम में बीजेपी को मिले 1,472 करोड़ रुपये चंदा, पार्टी का कुल खजाना पहुंचा आसमान पर

भारतीय राजनीतिक गलियारों और चुनावी फंडिंग के इतिहास में एक बार फिर से यह साबित हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) चुनावी प्रबंधन और संसाधनों के मामले में सभी दलों से कोसों आगे निकल चुकी है। हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल समेत देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे और वित्तीय ब्यौरे की जो रिपोर्ट्स सामने आई हैं, उन्होंने सबको हैरान कर दिया है। निर्वाचन आयोग (Election Commission) के आंकड़ों और चुनावी ट्रस्टों से मिले दस्तावेजों के अनुसार, अकेले इन पांच राज्यों के चुनावी अभियानों और सांगठनिक गतिविधियों के दौरान बीजेपी को देश भर से कुल 1,472 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि दान और चंदे के रूप में प्राप्त हुई है। यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि देश के बड़े कॉरपोरेट घरानों, निवेशकों और आम जनता का एक बड़ा वर्ग आज भी अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं के रूप में बीजेपी की नीतियों और उसके नेतृत्व पर कितना अटूट भरोसा जता रहा है।चुनावी राज्यों में बीजेपी का आक्रामक प्रचार और मजबूत होती वित्तीय स्थितिपश्चिम बंगाल जैसे राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और कड़े मुकाबले वाले राज्य के साथ-साथ अन्य चार राज्यों में लड़े गए चुनावों के दौरान बीजेपी ने जिस स्तर पर प्रचार प्रसार, रैलियों, डिजिटल कैंपेन और रथ यात्राओं का आयोजन किया था, उसके पीछे इसी मजबूत वित्तीय समर्थन का बहुत बड़ा हाथ था। चुनावी रणक्षेत्र में संसाधनों की कोई कमी न हो, इसके लिए पार्टी ने अपने केंद्रीय और प्रांतीय नेटवर्क को पूरी ताकत से सक्रिय कर दिया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक चुनाव में जीत हासिल करने के लिए केवल वैचारिक समर्थन ही काफी नहीं होता, बल्कि एक मजबूत और पारदर्शी वित्तीय आधार भी उतना ही जरूरी होता है। बंगाल के रण में तृणमूल कांग्रेस को कड़ी टक्कर देने और बाकी राज्यों में अपनी राजनीतिक जमीन को और अधिक मजबूत करने के लिए बीजेपी ने इन 1,472 करोड़ रुपये का रणनीतिक रूप से बेहतरीन इस्तेमाल किया, जिसका असर चुनावी परिणामों में भी स्पष्ट रूप से देखने को मिला।चुनावी ट्रस्टों और कॉरपोरेट सेक्टर से खुला दिल से मिला दानबीजेपी को मिले इस 1,472 करोड़ रुपये के विशाल फंड में सबसे बड़ा योगदान देश के प्रमुख चुनावी ट्रस्टों (Electoral Trusts), औद्योगिक घरानों और कॉरपोरेट कंपनियों का रहा है। पारदर्शिता के नियमों के तहत मिलने वाले इन फंड्स का बड़ा हिस्सा चुनावी बॉन्ड के विकल्प बंद होने के बाद विभिन्न रजिस्टर्ड ट्रस्टों के माध्यम से राजनीतिक दलों तक पहुंचा है। देश की आर्थिक नीतियों, औद्योगिक विकास और स्थिर शासन प्रणाली पर भरोसा जताते हुए बड़े-बड़े निवेशकों ने बीजेपी के फंड में दिल खोलकर दान दिया है। विपक्षी दल भले ही इस वित्तीय अंतर को लेकर अक्सर सवाल उठाते रहे हों, लेकिन धरातल पर यह सच्चाई है कि राजनीतिक चंदा जुटाने की कला और पार्टी कैडर का मजबूत वित्तीय प्रबंधन जिस प्रभावी तरीके से बीजेपी के पास है, उसका मुकाबला फिलहाल देश का कोई दूसरा राजनीतिक दल नहीं कर पा रहा है।बीजेपी का कुल खजाना पहुंचा रिकॉर्ड स्तर पर, पार्टी की बढ़ी ताकतइन पांच राज्यों के चुनावों के दौरान मिले 1,472 करोड़ रुपये के जुड़ने के बाद भारतीय जनता पार्टी का कुल खजाना (Party Treasury and Reserves) अब देश के सभी राजनीतिक दलों में सबसे अधिक और रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। पार्टी के पास मौजूद यह विशाल रिजर्व फंड आने वाले समय में देश भर में होने वाले अन्य स्थानीय निकाय, विधानसभा और राष्ट्रीय स्तर के चुनावों के लिए एक मजबूत ढाल का काम करेगा। एक तरफ जहां अन्य क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दल अक्सर आर्थिक तंगी या फंड की कमी के चलते अपने चुनाव अभियानों को ठीक से गति नहीं दे पाते हैं, वहीं बीजेपी अपनी इस वित्तीय मजबूती के दम पर साल के बारह महीने चुनावी मोड में रहने और हर मोर्चे पर आक्रामक प्रचार करने की क्षमता रखती है। पार्टी का यह खजाना केवल कागजी आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह उनकी सांगठनिक दक्षता और राष्ट्रव्यापी अपील का जीवंत प्रमाण हैं।चुनावी राजनीति और भारतीय लोकतंत्र में धन बल की भूमिका पर नई बहसराजनीतिक दलों को मिलने वाले इस प्रकार के हजारों करोड़ रुपये के चंदे ने देश में एक बार फिर से इस बात की बहस को छेड़ दिया है कि क्या भारतीय लोकतंत्र में चुनावों को अधिक पारदर्शी और कम खर्चीला बनाने के लिए वित्तीय सुधारों की अभी और अधिक आवश्यकता है या नहीं। हालांकि, चुनाव आयोग के कड़े नियमों और ऑडिट प्रक्रियाओं के तहत यह सभी आंकड़े सार्वजनिक किए जाते हैं ताकि जनता यह देख सके कि किस पार्टी को कहां से और कितना धन मिल रहा है। बहरहाल, बंगाल और पांच राज्यों के इस चुनावी दंगल में बीजेपी ने जिस प्रकार वित्तीय मोर्चे पर अपनी बादशाहत साबित की है, उसने यह दिखा दिया है कि आधुनिक राजनीति में टेक्नोलॉजी, जन-संपर्क और मजबूत धन प्रबंधन के बिना कोई भी पार्टी बड़ी जीत हासिल नहीं कर सकती। बीजेपी के इस बढ़ते खजाने और रणनीतिक खर्च ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले राजनीतिक भविष्य में भी वे अपने विरोधियों पर हर तरह से भारी पड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठे हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Sep 2026 12:28 pm

Bihar Flood से 55 लाख लोग प्रभावित, Pappu Yadav बोले- पटना में हाहाकार, जिंदगी बेहाल

पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने बिहार में बढ़ते बाढ़ संकट पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर आई बाढ़ के कारण 22 ज़िलों में लगभग 55 लाख लोग भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। यादव ने बताया कि इस बाढ़ का असर हर आर्थिक वर्ग पर पड़ा है, जिसमें निम्न-मध्यम वर्ग, मध्यम वर्ग और गरीब लोग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि बाढ़ का दायरा बक्सर से मनिहारी तक फैला हुआ है और भागलपुर, पटना, बेगूसराय और मुंगेर के कुछ हिस्से भी आंशिक रूप से जलमग्न हो गए हैं। इसे भी पढ़ें: Bihar में World Bank की मदद से ₹4415 करोड़ की Irrigation Project लागू उन्होंने पटना के हालात को बहुत गंभीर बताया और कहा कि शहर में सिर्फ़ चार-पांच किलोमीटर का ऊँचा इलाका ही दिखाई दे रहा है। यादव ने अलग-अलग घाटों पर लोगों की परेशानी का ज़िक्र करते हुए कहा कि वहाँ महिलाएँ ज़मीन पर सो रही हैं और जानवर बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि आप किसी भी घाट पर चले जाएँ, आपको महिलाएँ ज़मीन पर सोती हुई मिलेंगी, जानवर पानी में हैं और चारा भी गीला हो गया है। उन्होंने बेघर हुए लोगों और बाढ़ वाले इलाकों में फँसे लोगों की मुश्किलों पर ज़ोर दिया। यादव ने प्रभावित लोगों को सप्लाई किए जा रहे पीने के पानी की क्वालिटी पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि टैंकरों से जो पानी भेजा जा रहा है, वह इतना खराब है कि नेता खुद उसे नहीं पिएँगे। उन्होंने यह भी कहा कि ज़रूरी चीज़ों की सप्लाई भी खराब हो रही है; बच्चों को दूध नहीं मिल रहा है और दवाइयाँ भी उपलब्ध नहीं हैं, जबकि कुछ जगहों पर बिजली पूरी तरह से गुल है। उन्होंने कहा कि टैंकर का पानी इतना खराब है कि कोई भी नेता इसे नहीं पिएगा। बच्चों को दूध नहीं मिल रहा है और दवाइयां भी उपलब्ध नहीं हैं। एक भी मोमबत्ती नहीं है। बिजली भी नहीं है। इसे भी पढ़ें: Bihar Flood: Ganga का जलस्तर घटने से राहत, स्थिति जल्द सामान्य होने की उम्मीद उन्होंने मवेशियों और चारे पर पड़े असर का भी ज़िक्र किया; जानवर बाढ़ के पानी में खड़े हैं और चारा इस्तेमाल के लायक नहीं रहा, जिससे संकट और गहरा हो गया है—सिर्फ़ रहने की जगह और खाने की जरूरत से कहीं ज़्यादा। ये बातें बिहार में बड़े पैमाने पर आई बाढ़ के बीच कही गई हैं, जहाँ कई इलाकों में लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में रुकावटें आ रही हैं और उन्हें बुनियादी ज़रूरत की चीज़ें भी मुश्किल से मिल पा रही हैं। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।

प्रभासाक्षी 9 Sep 2026 12:28 pm

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 गौरवशाली वर्ष और बीजेपी की भव्य तैयारी

भारतीय राजनीतिक इतिहास के पटल पर एक ऐसा स्वर्णिम और अभूतपूर्व अध्याय जुड़ने जा रहा है, जिसने देश की राजनीति की दिशा और दशा को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया है। राष्ट्र सेवा, सुशासन और जनहित को ही अपने जीवन का एकमात्र लक्ष्य बनाने वाले देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सफलतापूर्वक 25 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इस ऐतिहासिक और गौरवशाली मील के पत्थर को बेहद भव्य और यादगार तरीके से मनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने देशव्यापी स्तर पर एक बहुत बड़ी और व्यापक योजना तैयार कर ली है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और वरिष्ठ पदाधिकारियों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह ढाई दशक का सफर केवल एक व्यक्ति की राजनीतिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों देशवासियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक ऐसा जीवंत दस्तावेज है जिसने भारत को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दिलाई है।नितिन नवीन ने किया बड़ा ऐलान, देश भर में एक महीने तक चलेगा सेवा संकल्प अभियानभारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं में शुमार और संगठन की गतिविधियों में अहम भूमिका निभाने वाले नेता नितिन नवीन ने एक आधिकारिक घोषणा करते हुए यह जानकारी दी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के इस खास अवसर पर पार्टी पूरे देश में एक महीने का लंबा 'सेवा संकल्प अभियान' चलाने जा रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल राजनीतिक उत्सव मनाना नहीं है, बल्कि समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में जन-भागीदारी को बढ़ाना है। नितिन नवीन ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सेवाकाल के दौरान जिस प्रकार से त्याग, समर्पण और निष्ठा के साथ देश की सेवा की है, उसे देखते हुए कार्यकर्ता इस एक महीने के दौरान विभिन्न प्रकार के सामाजिक, सांस्कृतिक और जनसेवा के कार्यक्रमों का आयोजन करके इस milestone को ऐतिहासिक बनाएंगे।देश के कोने-कोने में आयोजित होंगे सेवा और समर्पण के अनूठे कार्यक्रमइस एक महीने तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत देश के हर राज्य, जिले और गांव स्तर पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता और स्वयंसेवी संगठन मिलकर इस दौरान मेगा हेल्थ कैंप, रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, गरीब बच्चों के लिए शिक्षा सामग्री का वितरण और किसानों व महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़ी कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के कार्यकाल के दौरान देश में हुए बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल क्रांति, और आर्थिक सुधारों को दर्शाने वाली विशेष प्रदर्शनियों का आयोजन भी प्रमुख शहरों में किया जाएगा। पार्टी का यह प्रयास है कि आम जनता सीधे तौर पर इस अभियान से जुड़े और प्रधानमंत्री के विकसित भारत के सपने को साकार करने में अपना योगदान देने का संकल्प लें।जमीनी स्तर पर जन-कल्याण और गरीबों के सशक्तिकरण को समर्पित रहेगा पूरा महीनाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली हमेशा से आम जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं का समाधान करने और देश के विकास को गति देने की रही है। यही कारण है कि उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के जश्न को पूरी तरह से 'सेवा और गरीब कल्याण' को समर्पित किया गया है। अभियान के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी योजनाओं से छूटे हुए पत्र लाभार्थियों को तुरंत जोड़ा जाए और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया जाए। चाहे वो प्रधानमंत्री आवास योजना हो, आयुष्मान भारत हो या फिर मुद्रा लोन जैसी योजनाएं, इनके जरिए समाज के हर वर्ग को सशक्त करने का काम युद्ध स्तर पर किया जाएगा। नितिन नवीन ने कहा कि यह अभियान इस बात का प्रतीक है कि बीजेपी केवल एक राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र सेवा और जन-कल्याण के लिए समर्पित एक ऐसा परिवार है जो हर पल देश की उन्नति के लिए संकल्पित रहता है।नए भारत के निर्माण और विकसित राष्ट्र के संकल्प को मिलेगी नई ऊर्जापिछले 25 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री के रूप में गुजरात की तस्वीर बदलने से लेकर देश के प्रधानमंत्री के रूप में भारत को दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने तक का जो सफर तय किया है, वह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। उनके नेतृत्व में देश ने आर्टिकल 370 की समाप्ति, राम मंदिर निर्माण, और अंतरिक्ष से लेकर रक्षा क्षेत्र तक में जो ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं, उन्होंने भारत का डंका पूरी दुनिया में बजा दिया है। यह एक महीने का सेवा संकल्प अभियान न केवल उनके इस महान राजनीतिक सफर का जश्न होगा, बल्कि यह आने वाले समय में 2047 तक भारत को एक पूरी तरह से विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को और अधिक मजबूत ऊर्जा प्रदान करेगा। देश भर के करोड़ों कार्यकर्ता इस अभियान को सफल बनाने के लिए पूरी तरह से जुट चुके हैं, जिससे यह साबित होता है कि जनता और नेतृत्व के बीच का यह अटूट रिश्ता भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Sep 2026 12:26 pm

जापान का अत्याधुनिक बॉम्बिंग जहाज F-2 उतरा भारतीय धरती पर और बढ़ी पड़ोसी देशों की धड़कनें

अंतरराष्ट्रीय रक्षा गलियारों और सामरिक दुनिया से इस समय एक बेहद चौंकाने वाली और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है, जिसने एशियाई महाद्वीप के भू-राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है। जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JASDF) का सबसे मारक और अत्याधुनिक बॉम्बिंग फाइटर जेट F-2 पहली बार भारत की धरती पर आ पहुंचा है। इस रणनीतिक आगमन के साथ ही भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग का एक नया और स्वर्णिम अध्याय शुरू हो गया है। जैसे ही जापानी वायुसेना के इन घातक विमानों ने भारतीय सीमाओं के भीतर कदम रखा, वैसे ही बीजिंग से लेकर रावलपिंडी तक यानी चीन और पाकिस्तान के रक्षा मुख्यालयों में हड़कंप मच गया है। दोनों पड़ोसी देशों की खुफिया एजेंसियां और सैन्य ठिकाने अब भारत की इस नई और बड़ी कूटनीतिक-सैन्य तैयारी पर अपनी पैनी नजर गड़ाए बैठे हैं, क्योंकि यह तैनाती केवल एक सामान्य अभ्यास नहीं बल्कि भविष्य के बड़े सामरिक गठजोड़ का स्पष्ट संदेश है।किसी गुप्त भारतीय एयरबेस के मैदान पर एक साथ गरजेंगे राफेल, तेजस और सुखोईभारत के किसी अतिसुरक्षित और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण एयरबेस के विशाल मैदान और टैक्सीवे पर अब दुनिया के कुछ सबसे बेहतरीन और मारक फाइटर जेट्स एक साथ हुंकार भरते हुए नजर आएंगे। एक तरफ जहां भारत के अपने गर्व और स्वदेशी तकनीकी का प्रतीक तेजस (Tejas), अचूक सटीकता वाले फ्रांसीसी राफेल (Rafale) और आसमान के सुल्तान कहे जाने वाले रूसी मूल के सुखोई-30MKI (Sukhoi-30MKI) विमान अपनी ताकत दिखाएंगे, वहीं उनके बगल में जापान का यह शक्तिशाली F-2 बॉम्बिंग जहाज खड़ा होगा। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इन सभी बहुराष्ट्रीय विमानों का एक ही मैदान या एयरबेस पर जमा होना इस बात का संकेत है कि भारतीय वायुसेना अब दुनिया की चुनिंदा महाशक्तियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संयुक्त हवाई युद्ध अभ्यास करने जा रही है। यह अभ्यास आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्धक कला, बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल कॉम्बैट और सटीक बमबारी के नए पैटर्न्स को परखने के लिए बेहद अहम साबित होने वाला है।चीन और पाकिस्तान की बढ़ी नींद, आसमान में मंडराता देख रहे हैं भारत-जापान की बढ़ती नजदीकियों कोभारत और जापान के बीच बढ़ते इस रक्षा और सामरिक सहयोग ने चीन की रातों की नींद उड़ा दी है। दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद महासागर तक अपने आक्रामक तेवर दिखाने वाले ड्रैगन यानी चीन को अब यह अच्छी तरह समझ आ रहा है कि भारत अपने मजबूत होते ग्लोबल नेटवर्क के जरिए उसे काउंटर करने की पूरी तैयारी कर चुका है। जापानी बॉम्बिंग जहाज F-2 की मारक क्षमता, उसकी एंटी-शिप मिसाइलें और दुश्मन के रडार को चकमा देने की तकनीक इतनी उन्नत है कि यदि भारत के राफेल और सुखोई के साथ यह बेड़ा मिलकर किसी अभ्यास को अंजाम देता है, तो यह किसी भी विरोधी देश के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है। पाकिस्तान, जो पहले से ही अंदरूनी आर्थिक और सैन्य बदहाली से जूझ रहा है, वह भी भारत के इस हाई-टेक रक्षा अभ्यास को देखकर सकते में है कि आखिर भारत किस तेजी से दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के साथ अपनी सामरिक पार्टनरशिप को मजबूत कर रहा है।इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और शांति का नया खाका तैयार कर रहे हैं भारत और जापानवर्तमान समय में जब पूरी दुनिया इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंतित है, तब भारत और जापान की यह रणनीतिक साझेदारी इस क्षेत्र में स्थिरता का एक नया खंभा बनकर उभर रही है। दोनों ही देश लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वतंत्र व्यापारिक मार्गों के प्रबल समर्थक हैं, ऐसे में उनका यह संयुक्त सैन्य अभ्यास किसी भी बाहरी विस्तारवादी शक्ति को यह कड़ा संदेश देने के लिए काफी है कि इस क्षेत्र में दादागिरी नहीं चलने दी जाएगी। जापानी पायलटों और भारतीय वायुसेना के टॉप गन लड़ाकू पायलटों के बीच होने वाला यह तकनीकी और सामरिक आदान-प्रदान दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल को और अधिक पुर्ण बनाएगा। आने वाले दिनों में इस तरह के संयुक्त अभियानों से न केवल रक्षा उपकरणों के रखरखाव में मदद मिलेगी, बल्कि क्रिटिकल टेक्नोलॉजी शेयरिंग के रास्ते भी पूरी तरह से खुल जाएंगे।भविष्य के युद्धक मैदानों के लिए भारत की अभेद्य तैयारी का स्पष्ट संदेशजापान के F-2 बॉम्बिंग जहाज का भारत की धरती पर उतरना और यहां के स्वदेशी व अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ मैदान साझा करना यह साबित करता है कि भारत अब रक्षा के मामले में केवल खरीदार नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीति तय करने वाला एक प्रमुख खिलाड़ी बन चुका है। भारतीय वायुसेना किसी भी आधुनिक और हाइब्रिड युद्ध की हर चुनौती से निपटने के लिए अपनी मारक क्षमता को लगातार अपग्रेड कर रही है। जब राफेल की रफ्तार, तेजस की फुर्ती, सुखोई का दम और जापान के F-2 की बॉम्बिंग ताकत एक मंच पर मिलती है, तो यह दुनिया के किसी भी आधुनिक दुश्मन के डिफेंस सिस्टम के पसीने छुड़ाने के लिए काफी होती है। भारत की यह सामरिक पहल देश की सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित रखने के साथ-साथ यह भी बता देती है कि राष्ट्र की संप्रभुता के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए भारत और उसके मित्र देश हमेशा पूरी तरह से तैयार खड़े हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Sep 2026 12:25 pm

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेगा बैठक के कूटनीतिक मायने

अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में इस समय एक बहुत बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है, जिसके तहत संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच आगामी 'ब्रिक्स' (BRICS) सम्मेलन के दौरान एक उच्च स्तरीय और बेहद खास द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है। वैश्विक शांति, सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे गंभीर मुद्दों के बीच होने वाली यह मुलाकात कूटनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जब दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के शीर्ष नेता और संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च प्रशासनिक प्रमुख आपस में विचार-विमर्श करेंगे, तो वैश्विक मंच पर इसके क्या गहरे और दूरगामी प्रभाव पड़ेंगे। इस बैठक के माध्यम से भारत एक बार फिर ग्लोबल साउथ की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से उठाने और वैश्विक संस्थाओं की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने का मजबूत संदेश देने की तैयारी कर रहा है।ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन के दौरान भारत का मुख्य एजेंडा और वैश्विक प्राथमिकताओं का खाकाभारत की मेजबानी या सहभागिता में होने वाले इस बहुपक्षीय सम्मेलन के दौरान देश का एजेंडा बेहद स्पष्ट और दूरदर्शी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत हमेशा से बहुपक्षीयवाद (Multilateralism) और समावेशी विकास का प्रबल समर्थक रहा है। इस बार के ब्रिक्स सम्मेलन और यूएन चीफ के साथ होने वाली बैठक में भारत का मुख्य जोर आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को दुनिया के सामने रखने, विकासशील देशों के आर्थिक हितों की रक्षा करने, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने पर रहेगा। इसके साथ ही, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), हरित ऊर्जा संक्रमण (Green Energy Transition) और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाने पर भी विशेष रूप से चर्चा की जाएगी, ताकि दुनिया के कमजोर और पिछड़े देशों को मुख्यधारा में लाया जा सके।संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता का मुद्दाएंटोनियो गुटेरेस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बहुप्रतीक्षित बैठक में सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और अन्य वैश्विक प्रशासनिक निकायों में तत्काल सुधार लाने का रहेगा। भारत लंबे समय से यह आवाज उठाता रहा है कि आज की 21वीं सदी की बदलती वास्तविकताओं के अनुसार यूएन जैसी संस्थाओं का ढांचा पूरी तरह से पुराना पड़ चुका है और इसमें व्यापक बदलाव की सख्त जरूरत है। सुरक्षा परिषद में दुनिया की एक-तिहाई से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत को स्थायी सदस्यता न मिलना वर्तमान वैश्विक व्यवस्था की विसंगति को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी इस मुलाकात के दौरान यूएन प्रमुख के समक्ष इस बात पर जोर देंगे कि जब तक दुनिया के प्रमुख विकासशील और ग्लोबल साउथ के देशों को वैश्विक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में उचित और न्यायसंगत हिस्सेदारी नहीं मिलती, तब तक वैश्विक शांति और सुरक्षा के दावे अधूरे ही रहेंगे।जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल साउथ की आवाज और आर्थिक सुरक्षा पर मंथनआज के समय में जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों, ग्लोबल वार्मिंग, खाद्य सुरक्षा और भीषण आर्थिक अनिश्चितताओं से जूझ रही है, तब भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच का तालमेल और अधिक प्रासंगिक हो जाता है। भारत ने 'मिशन लाइफ' (LiFE - Lifestyle for Environment) और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) जैसे अनूठे वैश्विक अभियानों के जरिए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में दुनिया को एक नया रास्ता दिखाया है। यूएन चीफ गुटेरेस के साथ होने वाली इस बैठक में इस बात पर भी गहन मंथन होगा कि कैसे विकसित देश अपने वादे के मुताबिक जलवायु वित्त पोषण (Climate Finance) और तकनीक हस्तांतरण के मोर्चे पर विकासशील देशों की मदद करें। प्रधानमंत्री मोदी यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर विकासशील देशों की आर्थिक तरक्की पर कोई अनावश्यक दबाव न डाला जाए, बल्कि उन्हें बराबरी के हक के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिले।वैश्विक कूटनीति में भारत की बढ़ती भूमिका और भविष्य की दिशासंयुक्त राष्ट्र महासचिव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह मुलाकात इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि आज अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में भारत की स्थिति कितनी मजबूत और निर्णायक हो चुकी है। दुनिया की हर बड़ी समस्या के समाधान के लिए आज पश्चिमी देश हों या पूर्वी, सभी की निगाहें भारत की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देखती हैं। ब्रिक्स जैसे शक्तिशाली मंच का उपयोग करके भारत न केवल अपनी आर्थिक ताकत का लोहा मनवा रहा है, बल्कि दुनिया के तमाम देशों को एक साथ लेकर चलने की अपनी ऐतिहासिक परंपरा को भी बखूबी निभा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल बैठक के परिणाम आने वाले समय में वैश्विक राजनीति की दिशा और दशा तय करने में मील का पत्थर साबित होंगे, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि भारत अब दुनिया की तय की गई चाल पर चलने वाला देश नहीं, बल्कि खुद दुनिया के लिए एक नया रास्ता बनाने वाला राष्ट्र बन चुका है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Sep 2026 12:24 pm

उनकी आवाज में दम नहीं, युवाओं पर ‘गूंज’ का नहीं होगा असर; राहुल गांधी पर नितिन नवीन का तंज

इससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को भव्य तरीके मनाने और इसको लेकर देशभर में एक महीने तक 'सेवा संकल्प अभियान' चलाने का निर्णय लिया है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने इस पर विस्तार से बताया।

लाइव हिन्दुस्तान 9 Sep 2026 12:23 pm

NHRC ने चित्रकूट में Snakebite से युवक की मौत पर सभी राज्यों को भेजा नोटिस

नई दिल्ली, नौ सितंबर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में सांप के काटने के बाद इलाज नहीं हो पाने के कारण एक युवक की मौत के मामले में सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को नोटिस जारी किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। आयोग ने यह कदम एक शिकायत के आधार पर उठाया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि चित्रकूट के जिला अस्पताल में चिकित्सकीय लापरवाही और आपात जीवन रक्षक सुविधाओं की कमी के कारण युवक की मौत हुई। मामले की एक सितंबर की कार्यवाही के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सांप के काटने के तुरंत बाद पीड़ित को जिला स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था, लेकिन उसे समय पर आपात चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई। उसे एंटी स्नेक वेनम (एएसवी), वेंटिलेटर या आईसीयू जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं और पर्याप्त आपात परिवहन व्यवस्था के बिना प्रयागराज रेफर कर दिया गया, जहां रास्ते में उसकी मौत हो गई। अधिकारियों के अनुसार, शिकायत में कहा गया है कि जिला अस्पताल में जीवन रक्षक चिकित्सा सामग्री की अनुपलब्धता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के खंडेहा गांव में जहरीले सांप के काटने के बाद युवक की मौत गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही, इलाज में देरी और जिला अस्पताल में आपात जीवन रक्षक सुविधाओं के पूरी तरह अभाव के कारण हुई। शिकायतकर्ता ने आयोग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार डॉक्टरों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने, सभी जिला अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम की अनिवार्य उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने का निर्देश देने का अनुरोध किया। मानवाधिकार आयोग ने शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। आयोग ने कहा कि प्रथम दृष्टया ये आरोप पीड़ित के मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े प्रतीत होते हैं। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लिया है। आयोग ने राज्य प्राधिकारियों को उच्च जोखिम वाले ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने, सांप काटने की घटनाओं का आंकड़ा जुटाने और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। कानूनगो ने बाद में ‘पीटीआई वीडियो’ से बातचीत में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे गए नोटिस के बारे में जानकारी दी।

प्रभासाक्षी 9 Sep 2026 12:23 pm

किसान सुरक्षा के लिए New Seed Act: कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने बुलाई बड़ी बैठक

केंद्र सरकार नकली और घटिया बीजों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए एक नया और सख्त 'बीज कानून' (Seed Act) लाने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस प्रस्तावित कानून पर चर्चा करने के लिए 10 सितंबर को देश भर के किसान नेताओं के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई है। यह बैठक संसद के आगामी सत्र से पहले गुरुवार को कृषि भवन में होगी। मंत्री चौहान का मकसद बीज कानून और कृषि के व्यापक विकास के मुद्दों पर अलग-अलग किसान संगठनों के साथ सीधे बातचीत करना है। इसे भी पढ़ें: दिल्ली की मतदाता सूची में राघव चड्ढा का नाम शामिल, AAP ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल भारतीय किसान संघ, भारतीय किसान यूनियन (BKU), ऑल इंडिया किसान कोऑर्डिनेशन कमिटी (AIKCC) और साउथ इंडियन फार्मर्स एसोसिएशन (SIFA) समेत दर्जनों किसान संगठनों के इसमें शामिल होने की उम्मीद है। बातचीत के दौरान, चौहान ड्राफ्ट बिल पर राय लेंगे और ज़मीनी स्तर पर किसानों को आने वाली चुनौतियों को समझने की कोशिश करेंगे। खबरों के मुताबिक, प्रस्तावित कानून में नकली या घटिया बीज बेचने वालों के लिए भारी जुर्माना और जेल की सज़ा जैसे कड़े प्रावधान शामिल हैं। चौहान कई महीनों से संकेत दे रहे हैं कि सरकार इस नए कानून के ज़रिए बीज की गुणवत्ता के नियमों को बेहतर बनाना चाहती है। इस साल की शुरुआत में, मंत्री ने इस बिल को किसानों की सुरक्षा और पूरी सप्लाई चेन में बीज की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाला एक ऐतिहासिक कदम बताया था। बिल की मुख्य विशेषताओं में QR कोड से ट्रैकिंग और 30 लाख रुपये तक का जुर्माना शामिल है। चौहान ने कहा कि 1966 का मौजूदा बीज कानून पुराना हो चुका है और इसमें आधुनिक टेक्नोलॉजी और डेटा सिस्टम की कमी है। उन्होंने कहा, हम अब ट्रेसेबिलिटी, डिजिटल रिकॉर्ड और जवाबदेही पर आधारित एक आधुनिक कानून ला रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी भी किसान के साथ धोखाधड़ी न हो। इसे भी पढ़ें: महिपाल ढांडा को ‘जाट समाज पर कलंक’ बताना ओछी और संकीर्ण राजनीति: शमशेर खरक उन्होंने आगे कहा कि सरकार का मकसद यह पक्का करना है कि हर किसान को अच्छी क्वालिटी के बीज मिलें। अच्छी कंपनियों को बढ़ावा दिया जाएगा और गलत काम करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यही इस कानून का मुख्य मकसद है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।

प्रभासाक्षी 9 Sep 2026 12:21 pm

पाकिस्तान से डरा अफगानिस्तान, डिलीट किया भारत के नक्शे वाला वीडियो; कश्मीर के मैप से किया खेल

भारत-अफगानिस्तान टी20 सीरीज से पहले ACB के प्रमोशनल VIDEO में PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान को भारत के नक्शे में दिखाया गया। इसे देखकर पाकिस्तान में बवाल मच गया और फैंस ने PCB से कार्रवाई की मांग कर दी। जानें पूरा मामला।

लाइव हिन्दुस्तान 9 Sep 2026 12:17 pm

कौशाम्बी में जरा सी टक्कर पर युवक की खौफनाक पिटाई!

उत्तर प्रदेश के कौशांबी में कार और बाइक के मामूली टकराव के बाद मारपीट का मामला सामने आया है. आरोप है कि कार सवार युवकों ने बाइक सवार मनोज कुमार के साथ पेट्रोल पंप पर मारपीट की. पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हुई है, जिसमें युवक थप्पड़ मारते दिख रहे हैं. शिकायत के बाद पुलिस ने फुटेज कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश जारी है.

आज तक 9 Sep 2026 12:16 pm

मंदिर में 'हनुमान अंश' शोभिनव ने किया गुजारा, गांववालों से मांगकर खाई रोटी

‘हनुमान अंश’ ने 2 करोड़ के बजट में 169 करोड़ से ज्यादा कमा लिए. लेकिन शोभिनव सत्या अचानक नीम करोली बाबा बने और इस रोल को लेकर डरे हुए थे. उन्हें लोग असली में बाबा समझने लगे थे.

आज तक 9 Sep 2026 12:15 pm

Delhi CEO ने राघव चड्ढा की Voter List पर AAP के आरोप खारिज किए, नियमों का हुआ पालन

दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) ने उन आरोपों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम राष्ट्रीय राजधानी की मतदाता सूची में सही प्रक्रिया का पालन किए बिना जोड़ा गया था। AAP का दावा था कि उनका नाम शामिल करने में नियमों को नजरअंदाज किया गया। यह आरोप तब लगाया गया जब चड्ढा ने पंजाब की AAP सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना का आरोप लगाया था, क्योंकि राज्य की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में उनका नाम शिफ्टेड (स्थानांतरित) कैटेगरी में डाल दिया गया था। चड्ढा, जो अप्रैल में BJP में शामिल होने वाले अपर हाउस के 10 AAP सदस्यों में से सात में से एक थे, मोहाली में वोटर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: दिल्ली की मतदाता सूची में राघव चड्ढा का नाम शामिल, AAP ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार को कहा कि चड्ढा ने दावा किया था कि वह पंजाब में वोटर हैं और जब भारत निर्वाचन आयोग (ECI) वोटर लिस्ट को फ्रीज करेगा, तो वह अपना वोट वहां फिर से रजिस्टर करवा लेंगे। उन्होंने दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का ज़िक्र करते हुए पूछा कि चड्ढा का नाम उसमें कैसे आया, जबकि पंजाब और दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) एक ही समय पर हो रहा था। भारद्वाज ने ECI से पूछा कि चड्ढा ने क्या प्रक्रिया अपनाई। उन्होंने कहा कि हमें नहीं लगता कि यह कोई सामान्य प्रक्रिया है। यह असामान्य है, और हमने ऐसा पहले कभी नहीं देखा है। AAP ने चड्ढा पर दिल्ली के राजिंदर नगर में वोटर लिस्ट में पिछली तारीख से एंट्री करवाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। चड्ढा का कहना है कि उन्होंने सभी ज़रूरी गाइडलाइंस और प्रक्रियाओं का पालन किया और तय तरीकों का इस्तेमाल किया। AAP ने 'वोटर लिस्ट' और 'पार्टी मेंबरशिप रजिस्टर' के बीच कन्फ्यूजन पैदा कर दिया है। वे उन सभी लोगों को हटाना चाहते हैं जो [पार्टी चीफ अरविंद] केजरीवाल और उनकी भ्रष्ट AAP से अलग हो रहे हैं। इसे भी पढ़ें: महिपाल ढांडा को ‘जाट समाज पर कलंक’ बताना ओछी और संकीर्ण राजनीति: शमशेर खरक दिल्ली के CEO अशोक कुमार ने एक बयान जारी कर कहा कि वोटर्स को जोड़ने, हटाने या उनमें बदलाव करने का काम सिर्फ़ फ़ॉर्म 6, 7 और 8 के ज़रिए किया जाता है। इन फ़ॉर्म्स पर 'रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपुल एक्ट, 1950' और 'रजिस्ट्रेशन ऑफ़ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' के तहत कार्रवाई की जाती है। बयान में यह भी कहा गया कि कोई भी वोटर साल में कभी भी ये फ़ॉर्म जमा कर सकता है। साथ ही, पारदर्शी और समावेशी रिविज़न प्रोसेस के प्रति अपनी पक्की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।

प्रभासाक्षी 9 Sep 2026 12:15 pm

‘मजिस्ट्रेट की हिम्मत कैसे हुई’: छात्र को नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार; ग्रेटर नोएडा में क्या हुआ?

‘मजिस्ट्रेट की हिम्मत कैसे हुई’: छात्र को नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार; ग्रेटर नोएडा में क्या हुआ?supreme court cjp protest student notice greater noida magistrate

अमर उजाला 9 Sep 2026 12:14 pm

Giridih में फर्जी फ्यूल बिल रोकने पर क्लर्क की हत्या, 4 गिरफ्तार

गिरिडीह (झारखंड), नौ सितंबर झारखंड के गिरिडीह जिले में एक निजी निर्माण कंपनी के कर्मचारी का कथित तौर पर अपहरण कर हत्या कर दी गई, जिसके बाद इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बुधवार को बताया कि कर्मचारी ने बढ़ा-चढ़ाकर ईंधन के बिल तैयार करने से इनकार कर दिया था। बिहार के लखीसराय जिले के रहने वाले मंजेश सिंह कंपनी में क्लर्क के रूप में नौकरी शुरू करने के महज 15 दिन बाद लापता हो गए थे। झारखंड पुलिस ने उनके लापता होने की जांच शुरू की, जो उन्हें मुख्य आरोपी एवं ट्रैक्टर चालक पिंटू यादव तक ले गई। पुलिस ने बताया कि यादव से पूछताछ के बाद उसके द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर लापता मंजेश सिंह का शव बिहार के जमुई जिले के एक जंगल से बरामद किया गया। यह स्थान गिरिडीह से करीब चार किलोमीटर दूर है। खोरीमहुआ के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) अमरेंद्र कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हमने कंपनी के दो कर्मचारियों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी ट्रैक्टर चालक पिंटू यादव से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने मंगलवार को मृतक का शव बरामद किया।’’पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे ट्रैक्टरों के डीजल के बिल में हेराफेरी कर अतिरिक्त भुगतान हासिल कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक, सिंह ने बिल में हेराफेरी की अनुमति नहीं दी, जिसके कारण उनके सहकर्मियों और परियोजना प्रबंधक उपेंद्र चौधरी के साथ उनके संबंध खराब हो गए। इसके बाद सहकर्मियों और परियोजना प्रबंधक ने यादव के साथ मिलकर सिंह की हत्या की साजिश रची। पुलिस अधिकारी ने बताया कि रविवार को छह लोगों ने खटपोंक इलाके में मोटरसाइकिल से जा रहे सिंह का कथित तौर पर अपहरण कर लिया। वे उन्हें पास के जंगल में ले गए, जहां मारपीट कर उनकी हत्या कर दी और फिर पत्थर से उनका सिर कुचल दिया। तिसरी थाने के प्रभारी शंभू नंद ईश्वर ने बताया कि पुलिस ने घटनास्थल से हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार बरामद कर लिए हैं। अधिकारी ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले में शामिल दो अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है, जिनमें परियोजना प्रबंधक भी शामिल है।

प्रभासाक्षी 9 Sep 2026 12:13 pm

PM मोदी के जन्मदिन पर BJP का 'सेवा संकल्प अभियान', नितिन नवीन ने बताया प्लान

PM मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से BJP का एक महीने का ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू होगा. 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में रक्तदान, स्वच्छता अभियान, ‘आशीर्वाद का दीया’, पदयात्रा और बाइक रैली जैसे कार्यक्रम होंगे.

आज तक 9 Sep 2026 12:11 pm

Punjab से नाम आउट, Delhi में एंट्री पर विवाद: Raghav Chadha के वोटर स्टेटस पर बहस!

पंजाब से आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम दिल्ली की वोटर लिस्ट में तब जोड़ा गया, जब वहां 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) चल रहा था। इससे कुछ दिन पहले ही उन्होंने पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से अपना नाम हटाए जाने के पीछे राजनीतिक बदले की भावना का आरोप लगाया था। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के लिए ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 31 अगस्त को जारी की गई थी, जबकि चड्ढा का नाम 8 सितंबर को दिल्ली में लिस्ट में शामिल किए गए 700 लोगों में से एक था। इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद चड्ढा का नाम दिल्ली की वोटर लिस्ट में कैसे शामिल किया गया। इसे भी पढ़ें: दिल्ली की मतदाता सूची में राघव चड्ढा का नाम शामिल, AAP ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल AAP ने आरोप लगाया कि चड्ढा ने दिल्ली में गैर-कानूनी तरीके से खुद को वोटर के तौर पर रजिस्टर कराया। राज्यसभा सांसद ने अपनी पुरानी पार्टी पर छोड़े गए प्रेमी जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया। चड्ढा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग की सभी प्रक्रियाओं का पालन किया। दिल्ली के चुनाव अधिकारियों ने बताया कि चड्ढा का नाम अपडेशन प्रोसेस के ज़रिए वोटर लिस्ट में जोड़ा गया था। AAP के पूर्व सांसद 2024 से पंजाब में वोटर के तौर पर रजिस्टर्ड हैं। दिल्ली की ड्राफ्ट लिस्ट में उनका नाम राजिंदर नगर विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में शामिल किया गया था। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि मंगलवार तक दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में EROs ने वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए कुल 700 फॉर्म मंज़ूर किए। चड्ढा का नाम भी उनमें शामिल था। इस विवाद ने चड्ढा के वोटर रजिस्ट्रेशन पर सबका ध्यान खींचा है। इससे एक दिलचस्प सवाल भी उठा है। ड्राफ्ट रोल (प्रारंभिक सूची) के पब्लिश होने के बाद दिल्ली की वोटर लिस्ट में उनका नाम कैसे शामिल किया गया? इंडिया टुडे ने इस मामले पर सफाई के लिए चुनाव आयोग से संपर्क किया है। इसे भी पढ़ें: DK Shivakumar ने Ballari में BJP की रैली को दी अनुमति, अधिकारियों को दिए निर्देश SIR प्रक्रिया के लिए दिल्ली की वोटर लिस्ट को 16 जून से 31 अगस्त के बीच रोक दिया गया था। दिल्ली के लिए ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 31 अगस्त को पब्लिश की गई थी। 3 सितंबर को पंजाब की ड्राफ्ट लिस्ट से चड्ढा का नाम हटा दिया गया। दिल्ली के CEO ने एक बयान में कहा कि 31 अगस्त तक लगभग 2.14 लाख 'फॉर्म 6' मिले थे। 'फॉर्म 6' का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में नए वोटर के रजिस्ट्रेशन के लिए किया जाता है। दावों और आपत्तियों के दौरान, फाइनल वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए 7 सितंबर तक 25,011 और 'फॉर्म 6' जमा किए गए। फाइनल वोटर लिस्ट 4 नवंबर को पब्लिश की जाएगी। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।

प्रभासाक्षी 9 Sep 2026 12:10 pm

पाकिस्तान... ऊपर सूरज, नीचे 1000°C का भट्ठा और बीच में मजदूर

पाकिस्तान में बढ़ती गर्मी के बीच ईंट भट्ठों पर काम करना मजदूरों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. ऊपर 40C से ज्यादा तपता सूरज और नीचे 1000C से ज्यादा गर्म भट्ठे, रोजी-रोटी के लिए उन्हें इसी आग के बीच घंटों काम करना पड़ता है.

आज तक 9 Sep 2026 12:09 pm

Meta का नया AI करेगा आपके सारे काम, ईमेल से टिकट बुकिंग तक

मेटा ने अपना नया पर्सनल AI एजेंट Muse लॉन्च कर दिया है, जो सिर्फ आपके सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रहेगा. कंपनी का दावा है कि यह यूजर्स के रोजमर्रा के कई काम आसान करने में मदद करेगा. ईमेल से लेकर ट्रैवल प्लानिंग और दूसरे टास्क तक, Muse AI के जरिए काम को ज्यादा आसान और ऑटोमेटेड बनाने की कोशिश की गई है.

आज तक 9 Sep 2026 12:06 pm

'हिम्मत कैसे हुई...', CJP प्रोटेस्ट पर स्टूडेंट को नोटिस भेजने पर SC नाराज

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान नोटिस जारी करने पर कड़ी फटकार लगाई है. अदालत ने पूछा है कि रोक के बावजूद डीएम ने नोटिस क्यों भेजा. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस कार्रवाई को अदालत की अवमानना माना है और जिलाधिकारी से जवाब तलब किया है.

आज तक 9 Sep 2026 12:06 pm

चलती ट्रेन के दरवाजे पर खड़े हो सकते हैं? जानें रेलवे का नियम

चलती ट्रेन के दरवाजे या फुटबोर्ड पर खड़े होकर सफर करना बेहद खतरनाक है. अचानक झटका लगने, संतुलन बिगड़ने या रेलवे ट्रैक के पास मौजूद किसी वस्तु से टकराने पर गंभीर हादसा हो सकता है. रेलवे ऐसे यात्रियों को चेतावनी देने के साथ नियमों के तहत कार्रवाई भी कर सकती है.

आज तक 9 Sep 2026 12:05 pm

लंदन जाना था, पहुंच गए स्विट्जरलैंड! 9 घंटे से फंसे यात्री

मुंबई से लंदन जा रही फ्लाइट को ब्रिटेन के एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी के चलते डायवर्ट करना पड़ा.फ्लाइट के अचानक रुकने से यात्रियों का सफर अधर में अटक गया और वे ज्यूरिख एयरपोर्ट के वेटिंग एरिया में करीब 9 घंटे से इंतजार कर रहे हैं.

आज तक 9 Sep 2026 12:03 pm

Rajeev Chandrasekhar और P Chidambaram में Chhattisgarh Naxal Attack पर तीखी बहस

तिरुवनंतपुरम, नौ सितंबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केरलम इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम के बीच 2013 में छत्तीसगढ़ में हुए नक्सली हमले को लेकर जुबानी जंग छिड़ गई है। इस हमले में कांग्रेस के कई नेता मारे गए थे। यह बहस अदालत के उस फैसले के कुछ दिन बाद शुरू हुई, जिसमें बस्तर क्षेत्र में 25 मई 2013 को कांग्रेस के काफिले पर हुए भीषण हमले के मामले में 10 लोगों को दोषी ठहराया गया। इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और पूर्व केंद्रीय मंत्री वी.सी. शुक्ला समेत कई प्रमुख नेता मारे गए थे। चंद्रशेखर ने मंगलवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए पूर्व गृह मंत्री चिदंबरम पर निशाना साधा और सत्ता में रहते हुए नक्सली समस्या से निपटने के कांग्रेस के तौर-तरीके पर सवाल उठाए। चंद्रशेखर ने कहा, ‘‘ 2013 में नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के नेतृत्व का सफाया कर दिया था। कुछ दिन पहले अदालत ने 10 लोगों को दोषी ठहराया।’’इसके बाद उन्होंने चिदंबरम की हालिया टिप्पणी का हवाला दिया, जिसमें कांग्रेस नेता ने खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताया था। यह एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल भाजपा नेता उन लोगों पर हमला करने के लिए करते हैं, जिन पर वे नक्सलवाद के वैचारिक समर्थक होने का आरोप लगाते हैं। चंद्रशेखर ने पूछा, ‘‘ तो गृह मंत्री रहे पी. चिदंबरम स्वीकार करते हैं कि वह ‘दिमागी नक्सल’ थे या हैं। तो क्या कांग्रेस की छत्तीसगढ़ इकाई के नेता भी इस विचारधारा के शिकार हुए?’’उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नक्सलवाद और आतंकवाद जैसी समस्याएं दशकों तक अनसुलझी क्यों रहीं। उन्होंने पूछा, ‘‘ क्या आपने कभी सोचा कि जड़ जमा चुकी नक्सल और आतंकवाद जैसी समस्याओं से निपटने और उन्हें हराने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आने का इंतजार क्यों करना पड़ा?’’इस पर चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने छत्तीसगढ़ हमले से पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय का पद छोड़ दिया था। चिदंबरम ने कहा, ‘‘ राजीव चंद्रशेखर की याददाश्त कमजोर हो गई है। मैंने अगस्त 2012 में गृह मंत्रालय छोड़ दिया था। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं पर कायराना हमला मई 2013 में हुआ था।’’चंद्रशेखर ने पलटवार करते हुए कहा कि चिदंबरम की जिम्मेदारी केवल हमले की तारीख तक सीमित नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, ‘‘ मान लिया कि जिस दिन या जिस वक्त नक्सली हमला हुआ, उस वक्त आप गृह मंत्री नहीं थे। लेकिन आप लगभग चार साल तक गृह मंत्री रहे।’’चंद्रशेखर ने कहा, ‘‘ मई 2013 में आपके कांग्रेस सहयोगियों की हत्या करने वाले नक्सली उस दिन जादू से सामने नहीं आए जिस दिन आप वित्त मंत्रालय में चले गए थे।’उन्होंने आरोप लगाया कि चिदंबरम के गृह मंत्री रहने के दौरान ही माओवादी ‘फले-फूले, हथियार रखने लगे और सक्रिय होते गए’। चंद्रशेखर ने कहा कि हमले के समय गृह मंत्रालय में न होने का हवाला देना इस घटना में मारे गए कांग्रेस नेताओं की स्मृति का ‘अपमान’ है। दोनों नेताओं के बीच यह तीखी बहस चिदंबरम द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी पर कटाक्ष करने के कुछ सप्ताह बाद सामने आई है। चिदंबरम ने तब कहा था, ‘‘मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है।’’चिदंबरम की प्रधानमंत्री पर यह टिप्पणी मोदी की उस चेतावनी के जवाब में आई थी, जिसमें उन्होंने देश को उन “दिमागी नक्सलियों” से सावधान रहने को कहा था, जो कथित तौर पर व्यवस्था में पैठ बना चुके हैं और नीतियों में हेरफेर करके समाज के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। मोदी ने नागरिकों से ऐसे लोगों को ‘‘पहचानने और अलग-थलग करने’’ का आग्रह किया था।

प्रभासाक्षी 9 Sep 2026 12:02 pm

Pakistan Air Forc Deployed HQ-17AE | भारत के लिए नई चुनौती! पाकिस्तान ने तैनात किया चीन का HQ-17AE सिस्टम, जानिए भारतीय सेना के लिए क्यों बढ़ा सिरदर्द!

पाकिस्तान एयर फोर्स (PAF) ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक प्रोमोशनल वीडियो जारी कर चीन निर्मित HQ-17AE शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम को अपने बेड़े में शामिल करने की घोषणा की है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से पाकिस्तान को अपनी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस क्षमताओं में मौजूद कमियों को दूर करने और ड्रोन जैसे कम ऊंचाई वाले आधुनिक खतरों का मुकाबला करने में बड़ी मदद मिलेगी। पाकिस्तान के एयर डिफेंस नेटवर्क की रीढ़ बने चीनी हथियार चीन के सैन्य मामलों के विशेषज्ञ वांग युनफेई के अनुसार, पाकिस्तान इससे पहले चीन के लंबी दूरी के HQ-9 सिस्टम (HQ-9/P और HQ-9BE) और मध्यम से लंबी दूरी के HQ-16 सीरीज (LY-80 से लेकर HQ-16FE/AE) को अपनी थलसेना और वायुसेना में तैनात कर चुका है। हालांकि, ये सिस्टम रणनीतिक सुरक्षा प्रदान करते हैं, लेकिन सैनिकों के जमावड़े और बख्तरबंद टुकड़ियों की 'पॉइंट डिफेंस' (सटीक सुरक्षा) के लिए शॉर्ट-रेंज सिस्टम की सख्त जरूरत थी, जिसे अब HQ-17AE पूरा करेगा। इसे भी पढ़ें: Mirzapur The Movie का बॉक्स ऑफिस पर धमाल! 150 करोड़ का आंकड़ा पार, बड़े पर्दे पर भी छाए कालीन भैया और गुड्डू पंडित वांग ने कहा कि साथ ही, पाकिस्तान ने चीन के HQ-16 सीरीज़ के एयर डिफ़ेंस सिस्टम को भी शामिल किया है, जिसमें LY-80 से लेकर ज़्यादा रेंज वाले HQ-16FE/AE तक शामिल हैं। ये सभी मिलकर पाकिस्तान की आर्मी और एयर फ़ोर्स के रीजनल मीडियम-टू-लॉन्ग-रेंज एयर डिफ़ेंस नेटवर्क की रीढ़ की हड्डी बनाते हैं। ये सभी सिस्टम नेशनल स्ट्रैटेजिक एयर डिफ़ेंस के अहम हिस्से हैं। हालांकि, एक्सपर्ट ने कहा कि शॉर्ट-टू-मीडियम-रेंज एयर डिफ़ेंस सिस्टम 'पॉइंट डिफ़ेंस' का मुख्य हिस्सा होते हैं और इस क्षेत्र में पाकिस्तान की क्षमताओं में सुधार की गुंजाइश रही है। अगर दुश्मन मीडियम-टू-लॉन्ग-रेंज एयर डिफ़ेंस नेटवर्क को भेदकर अंदर आ जाते हैं, तो सैनिकों के इकट्ठा होने की जगहों और बख्तरबंद टुकड़ियों को खतरा हो सकता है। वांग ने आगे कहा कि चूंकि पाकिस्तान HQ-17AE सिस्टम का इस्तेमाल करने वाला एक और इंटरनेशनल देश बन गया है, इसलिए यह सिस्टम शॉर्ट-रेंज एयर डिफ़ेंस की कमी को पूरा करने और ड्रोन जैसे कम ऊंचाई वाले खतरों से निपटने की पाकिस्तान की क्षमता को मज़बूत करने में मदद कर सकता है। HQ-17AE पहली बार दक्षिणी चीन के ग्वांगडोंग प्रांत के ज़ुहाई में 13वीं चीन इंटरनेशनल एविएशन एंड एयरोस्पेस एग्ज़िबिशन (या एयरशो चाइना 2021) में दिखाई दिया था। यह देश में ही विकसित किया गया एक मल्टीफ़ंक्शनल एयर डिफ़ेंस मिसाइल सिस्टम है। इसे भी पढ़ें: Adani Airport वैश्विक निवेशकों से जुटाएगी 1 अरब डॉलर, कंपनी का मूल्यांकन 18 अरब डॉलर सरकारी कंपनी 'चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉरपोरेशन' (CASIC) की 'सेकंड एकेडमी' द्वारा विकसित यह सिस्टम हाई-परफ़ॉर्मेंस टारगेट को रोकने और सैचुरेशन हमलों का सामना करने में सक्षम है। साथ ही, इसमें सभी फ़ंक्शन एक ही गाड़ी में इंटीग्रेटेड हैं, जिसमें ज़्यादा मोबिलिटी के लिए व्हील्ड ऑफ़-रोड चेसिस लगा है। मार्च 2021 में CASIC ने 'ग्लोबल टाइम्स' को भेजे एक बयान में इसे कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों का शिकारी (low-altitude aircraft hunter) कहा था। इसके डेवलपर के अनुसार, HQ-17AE में कई एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जैसे कि ऑल-सॉलिड-स्टेट फेज़्ड ऐरे रडार, वर्टिकल कोल्ड लॉन्च मिसाइल सिस्टम, डायरेक्ट फ़ोर्स फ़ास्ट टर्न सिस्टम और घूमने वाले टेल विंग्स। ये खूबियां इस एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम को तेज़ी से प्रतिक्रिया करने और युद्ध के मैदान में जटिल इलेक्ट्रोमैग्नेटिक माहौल के हिसाब से खुद को ढालने की क्षमता देती हैं। 'ग्लोबल टाइम्स' की एक पिछली रिपोर्ट के मुताबिक, यह वाहन चलते-चलते मिसाइल लॉन्च कर सकता है और लड़ाई के दौरान दूसरे वाहनों के साथ जुड़कर एक नेटवर्क बना सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हर HQ-17AE वाहन आठ मिसाइलें ले जा सकता है और एक साथ चार टारगेट पर हमला करने के लिए चार मिसाइलों को गाइड करने में सक्षम है, क्योंकि इसमें कई टारगेट को रोकने (इंटरसेप्ट करने) की बेहतरीन क्षमता है। जून 2024 में क्रुशेवैक शहर में एक मिलिट्री परेड के दौरान, सर्बिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री मिलोस वुसेविक ने कहा कि देश चीन से हाल ही में खरीदे गए HQ-17AE शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम का प्रदर्शन करेगा। वुसेविक ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि HQ-17AE सिस्टम सर्बिया के एयरस्पेस को और बेहतर सुरक्षा देगा और देश के सबसे शक्तिशाली एयर डिफेंस हथियार, FK-3 के साथ बेहतरीन तालमेल बिठाएगा।

प्रभासाक्षी 9 Sep 2026 12:01 pm

BJP का 'सेवा संकल्प अभियान': PM Modi के 25 साल पर बोले अध्यक्ष - Modi सरकार में हर Indian बढ़ रहा सम्मान से आगे

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन-सेवा के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक महीने तक चलने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत की घोषणा की। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा। नई दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नवीन ने कहा कि 7 अक्टूबर को मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने (7 अक्टूबर, 2001) के बाद से 25 साल पूरे होने का मील का पत्थर साबित होगा। इसे भी पढ़ें: दिल्ली की मतदाता सूची में राघव चड्ढा का नाम शामिल, AAP ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल नवीन ने कहा कि आज हम यहां ‘सेवा संकल्प अभियान’ पर चर्चा करने के लिए इकट्ठा हुए हैं। 7 अक्टूबर, 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जन-सेवा के 25 साल पूरे कर लेंगे; यह सफर तब शुरू हुआ था जब उन्होंने 7 अक्टूबर, 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री का पद संभाला था। पिछले 25 वर्षों में, उन्होंने जन-सेवा से राष्ट्र-सेवा की ओर बढ़ने के मंत्र को अपनाते हुए सेवा का यह सफर पूरी निष्ठा के साथ जारी रखा है। नबिन ने उन आर्थिक चुनौतियों को याद किया जिनका सामना भारत को तब करना पड़ा था जब मोदी ने राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व संभाला था। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने देश की बागडोर संभाली, तो भारत 'पॉलिसी पैरालिसिस' (नीतिगत गतिरोध) से जूझ रहा था और उसे 'फ्रैजाइल फाइव' (कमज़ोर पाँच) अर्थव्यवस्थाओं में से एक माना जाता था। आज, भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने आगे कहा कि एक समय था जब माहौल निराशा और अंधकार से भरा था। हमारी अर्थव्यवस्था को 'फ्रैजाइल फाइव' का हिस्सा माना जाता था। लेकिन आज, भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। इसे भी पढ़ें: महिपाल ढांडा को ‘जाट समाज पर कलंक’ बताना ओछी और संकीर्ण राजनीति: शमशेर खरक उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में वैश्विक स्तर पर भारत का कद काफ़ी बढ़ा है और 2014 से युवाओं में निराशा की जगह उम्मीद जगाने के मोदी के प्रयासों पर ज़ोर दिया। नबिन ने कहा कि एक समय था जब देश के युवा निराशा के माहौल में डूबे हुए थे। यह माननीय प्रधानमंत्री ही थे जिन्होंने 2014 से उन्हें उम्मीद और सकारात्मकता के माहौल में लाने का काम किया। भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम पर बात करते हुए नबिन ने कहा कि स्टार्टअप और यूनिकॉर्न के ज़रिए, भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप देश बन गया है। स्टार्टअप और यूनिकॉर्न के क्षेत्र में हमारे युवा आगे आए हैं और सिर्फ नौकरी चाहने वालों के बजाय नौकरी देने वालों के रूप में उभरे हैं। उन्होंने 'खेलो इंडिया' और 'फिट इंडिया' जैसी पहलों का भी ज़िक्र किया और विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं की भागीदारी पर ज़ोर दिया। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।

प्रभासाक्षी 9 Sep 2026 12:01 pm

चीन के लिए काल बनती जा रही है ब्रह्मोस मिसाइल, बैठे-बैठे ही भारत मचा देगा समुद्र में तबाही

जब भारत ने पाकिस्तानी एयर बेस पर हमला किया तो इसकी सटीकता और लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता का पता चला। ब्रह्मोस के कारण ही पाकिस्तान को युद्धविराम के लिए मजबूर होना पड़ा।

लाइव हिन्दुस्तान 9 Sep 2026 11:58 am

आदमी के पेट में मिली बच्चेदानी, डॉक्टर भी हैरान

द‍िल्ली के एक अस्पताल में आया एक केस हर तरफ डिस्कस हो रहा है. जब डॉक्टरों की टीम एक 26 साल के शादीशुदा लड़के का ऑपरेशन कर रही थी तो उसके पेट के भीतर यूट्र्रस और फेलोप‍ियन ट्यूब देखकर आंखें खुली की खुली रह गईं. आइए जानते हैं इस अनोखे केस के बारे में, क्यों हो रही इसकी चर्चा?

आज तक 9 Sep 2026 11:58 am

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में दरोगा की धमकी का वीडियो हुआ वायरल!

गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्रों के धरने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया. इसी बीच दारोगा का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह छात्रों को सख्त लहजे में चेतावनी देते सुनाई दे रहे हैं. विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों को प्रशासनिक भवन परिसर से हटाने पहुंचा था. इसके बाद बहस और धक्का मुक्की हुई. प्रदर्शन छात्रों की समस्याओं और कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा है. मामला चर्चा में है.

आज तक 9 Sep 2026 11:57 am

कम ब्‍याज पर SBI दे रहा 25 करोड़ का लोन, सिर्फ ये लोग ले सकते हैं

भारतीय स्‍टेट बैंक के तहत 25 करोड़ रुपये का लोन मिल सकता है, लेकिन इसकी कुछ शर्तों को पूरा करना होगा. यह लोन कम ब्‍याज पर दिया जा सकता है और इससे आप अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं.

आज तक 9 Sep 2026 11:56 am

‘राहुल गांधी VVIP नहीं...’, सुप्रीम कोर्ट में दलील; CJI बोले- सभी के लिए समान प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी की उस अपील पर सुनवाई हुई, जिसमें भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भारतीय सेना और चीनी सैनिकों को लेकर दिए बयान पर चल रही आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी गई है. शिकायतकर्ता के वकील गौरव भाटिया ने मामले को जल्द सुनवाई के लिए अलग करने की मांग की और कहा कि राहुल गांधी वीवीआईपी नहीं हैं.

आज तक 9 Sep 2026 11:56 am

US Open स्टार हारा, गर्लफ्रेंड ने मचाया तहलका! बोल्ड लुक ने लगाई ‘आग’

US Open से लुसियानो डार्डेरी के बाहर होने के बाद उनकी गर्लफ्रेंड ब्रियाना गुआग्लियार्डो सुर्खियों में हैं. मॉडल और प्रशिक्षित बैले डांसर ब्रियाना की डांस स्टूडियो से शेयर की गई बोल्ड तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर फैन्स का ध्यान खींच लिया. उनके ग्लैमरस अंदाज पर यूजर्स जमकर कमेंट कर रहे हैं.

आज तक 9 Sep 2026 11:56 am

कौन है 'रिबेल किड' अपूर्वा का मुस्लिम बॉयफ्रेंड? किस वीडियो वायरल

अपूर्वा का अपने बॉयफ्रेंड को पार्टी में किस (KISS) करने वाला वीडियो खूब सुर्खियों में है. ऐसे में हर कोई जानना चाहता है कि आखिर कौन है उनका बॉयफ्रेंड, जिनके प्यार में इंटरनेट की 'रिबेल किड' पड़ गई हैं.

आज तक 9 Sep 2026 11:56 am

घर पर बनाएं चावल के आटे वाले उकडिचे मोदक, आसान है रेसिपी

Modak Recipe: अगर आप भी इस बार गणेशोत्सव के लिए घर पर मोदक बनाने का सोच रहे हैं तो यहां हम आपको पारंपरिक चावल के आटे और नारियल से बनने वाले मोदक की रेसिपी बता रहे हैं. इसे बनाना आसान है और ये खाने में बहुत टेस्टी लगते हैं.

आज तक 9 Sep 2026 11:54 am