गांधी पर सवाल उठाने वाले आजादी के समय कहां थे, राजभर को इलाज की जरूरत: सपा
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर आरएसएस प्रचारक इंद्रेश कुमार की टिप्पणी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान समेत कई मुद्दों पर तल्ख टिप्पणी की
दिल्ली में आयोजित 'राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन' में 'लखपति दीदी डेस्कबोर्ड' का शुभारम्भ किया गया जिसमें देश के विभिन्न राज्यों के जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों, नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों एवं ग्रामीण विकास से जुड़े अनेक हितधारकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं, नवाचारों तथा सफल मॉडलों पर विस्तृत चर्चा की गई तथा राज्यों के बीच श्रेष्ठ अनुभवों के आदान-प्रदान पर बल दिया गया। ग्रामीण विकास से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता और देश भर के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधि उपस्थित रहे।उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अपनी राय रखते हुए कहा कियह डेस्कबोर्ड स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की प्रगति की निगरानी, उनकी आय में वृद्धि, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा वास्तविक समय में उपलब्ध आंकड़ों के माध्यम से बेहतर योजना निर्माण एवं नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सतत आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ग्रामीण विकास को नई गति मिली है। सरकार का उद्देश्य केवल आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं, युवाओं और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाना भी है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान की है और 'लखपति दीदी' अभियान महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है।
नई दिल्ली में 'राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन' के समापन पर माननीय उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी की मीडिया वार्ता के मुख्य अंश:'राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन' के सफल समापन के उपरान्त उत्तर प्रदेश के माननीय उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी ने मीडिया बंधुओं से वार्ता की। बातचीत के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:विकसित भारत और उत्तर प्रदेश का संकल्प: हम 'विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित गाँव' बनाने के लक्ष्य को हर हाल में पूरा करेंगे।अयोध्या बार एसोसिएशन का आभार: अयोध्या बार एसोसिएशन ने प्रारंभ से ही राम लला के मंदिर की कानूनी लड़ाई पूरी दृढ़ता से लड़ी है, हम उनका सहृदय अभिनंदन करते हैं।विपक्ष पर तीखा हमला: विपक्ष घड़ियाली आंसू बहाना बंद करे। राम भक्तों पर लाठी और गोली चलाने वाले असल में 'राम द्रोही' हैं।सपा प्रमुख पर निशाना: समाजवादी पार्टी के प्रमुख (श्री अखिलेश यादव) जानबूझकर राम लला के दर्शन करने अयोध्या नहीं गए।तुष्टिकरण की राजनीति: विपक्ष पूरी तरह से मुद्दाविहीन हो चुका है और वह सिर्फ और सिर्फ तुष्टिकरण की राजनीति कर रहा है।नैतिक अधिकार नहीं: श्री अखिलेश यादव को राम मंदिर के विषय पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
कुख्यात दस्यु जगन गुर्जर की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या
अजमेर। कुख्यात दस्यु जगन गुर्जर की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में साथी कैदी द्वारा गला दबाकर हत्या कर दी। 11 लाख रुपए के इनामी रहे पूर्व दस्यु जगन गुर्जर का राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा में आतंक फैला हुआ था। जगन गुर्जर राजस्थान का खूंखार अपराधी रहा है। पुलिस ने बताया कि […] The post कुख्यात दस्यु जगन गुर्जर की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या appeared first on Sabguru News .
अजमेर की बेटी एवं 5 बार की गिनीज़ विश्व रिकॉर्ड धारक सूफिया सूफी का स्वागत
अजमेर। अजमेर की बेटी एवं भारत की प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय अल्ट्रा धाविका तथा पांच बार की गिनीज़ विश्व रिकॉर्ड धारक सूफिया सूफी का सोमवार सुबह पटेल स्टेडियम में उनके ऐतिहासिक 5,000 किलोमीटर रन अक्रॉस इंडिया (कन्याकुमारी से काराकोरम) अभियान के दौरान हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर हार्टफुलनेस संस्थान अजमेर एवं टीम ग्रीन […] The post अजमेर की बेटी एवं 5 बार की गिनीज़ विश्व रिकॉर्ड धारक सूफिया सूफी का स्वागत appeared first on Sabguru News .
हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए एक्शन में योगी सरकार, जल जीवन मिशन की होगी जमीनी मॉनिटरिंग
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार जल जीवन मिशन को केवल योजनाओं तक सीमित न रखकर उसकी जमीनी गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में भी लगातार सक्रिय है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की प्रदेश ...
री-नीट परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल के आरोप में अरेस्ट हिमांशी को जमानत मंजूर
जयपुर। राजस्थान में परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल के आरोप में गिरफ्तार की गई री-नीट 2026 की परीक्षार्थी हिमांशी को जयपुर की जिला अदालत से जमानत मिल गई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार गुप्ता ने 22 वर्षीय आरोपी हिमांशी को सोमवार को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए। मामला 21 […] The post री-नीट परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल के आरोप में अरेस्ट हिमांशी को जमानत मंजूर appeared first on Sabguru News .
क्या Pakistan के साथ Track 2 Dialogue करेगा भारत, विदेश सचिव का बड़ा बयान
भारत सरकार ने भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे कथित Track 2 Dialogue को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए इससे दूरी बना ली है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि इस तरह की बैठकें पूरी तरह निजी पहल होती हैं और इनमें भारत सरकार की कोई आधिकारिक भागीदारी या ...
मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की तैयारी, किसे मिलेगा मौका और किसकी होगी छुट्टी, किसका बदलेगा विभाग
modi cabinet reshuffle: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मोदी सरकार 3.0 के पहले बड़े 'मिड-टर्म रीसेट' यानी केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल की तैयारियां अंतिम चरण में मानी जा रही हैं। हाल ही में केंद्रीय ...
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण : आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा
अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में सोमवार को मंडलीय कारागार से ही वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से सभी आठ आरोपियों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, वीडियो कांफ्रेसिंग से सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में मंडल कारागार में पुनः निरुद्ध कर दिया गया। […] The post राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण : आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा appeared first on Sabguru News .
करौली : 11 केवी के बिजली की तार की चपेट में आने से 3 श्रमिकों की मौत
करौली। राजस्थान में करौली के टोडाभीम थाना क्षेत्र में भोपर नदी के पास सोमवार को 11 केवी की विद्युत लाइन की चपेट में आने से मोटर साइकिल पर सवार तीन श्रमिकों की मौत हो गई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि रामबाबू, विष्णु और चौबे जाटव हिंडौन से मजदूरी करके मोटर साइकिल से गांव की ओर […] The post करौली : 11 केवी के बिजली की तार की चपेट में आने से 3 श्रमिकों की मौत appeared first on Sabguru News .
श्रीराम मंदिर की दानपेटी में चोरी मामले में दोषियों पर हो कठोर कार्रवाई : हिन्दू जनजागृति समिति
नई दिल्ली। अयोध्या का श्रीराम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह दुनियाभर के करोड़ों हिन्दुओं के सदियों के बलिदान, दीर्घकालिक संघर्ष और श्रद्धा का प्रतीक है। मंदिर की दानपेटी के अर्पण में चोरी करना एक महापाप है और प्रभु श्रीराम उन्हें उनके कर्मों की सजा अवश्य देंगे। लेकिन सरकार को इस मामले […] The post श्रीराम मंदिर की दानपेटी में चोरी मामले में दोषियों पर हो कठोर कार्रवाई : हिन्दू जनजागृति समिति appeared first on Sabguru News .
ओबीसी युवाओं को डिजिटल ताकत दे रही योगी सरकार, ओ लेवल-सीसीसी प्रशिक्षण बना सहारा
Yogi Government OBC Digital Training: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगारपरक योजनाओं को नई दिशा मिली ...
नसरापुर रेप-मर्डर केस में पुणे की कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा, राजनीतिक जगत ने किया स्वागत
मुंबई/पुणे। त्वरित न्याय की नई मिसाल पेश करने वाले ऐतिहासिक फैसले में पुणे जिला एवं सत्र न्यायालय ने आज पुणे जिले के नसरापुर में साढ़े तीन वर्ष की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में भीमराव कांबले (65) को मौत की सजा सुनाई। इस अपराध को दुर्लभ से दुर्लभतम बताते हुए अदालत ने […] The post नसरापुर रेप-मर्डर केस में पुणे की कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा, राजनीतिक जगत ने किया स्वागत appeared first on Sabguru News .
नगर निगम जयपुर के कनिष्ठ अभियंता संजय कुमार बैरवा रिश्वत लेते अरेस्ट
जयपुर। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने सोमवार को जयपुर नगर निगम में सिविल लाइन जोन कार्यालय उपायुक्त एवं कनिष्ठ अभियंता संजय कुमार बैरवा को 80 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। ब्यूरो के पुलिस महानिदेशक गोविन्द गुप्ता ने बताया कि इस मामले में निगम के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दीनदयाल को हिरासत […] The post नगर निगम जयपुर के कनिष्ठ अभियंता संजय कुमार बैरवा रिश्वत लेते अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
1 जुलाई से पेट्रोल-डीजल बिक्री पर लागू अस्थायी प्रतिबंध हटेंगे, केंद्र ने 12 जून का आदेश लिया वापस
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति स्थिति सामान्य होने के बाद 12 जून 2026 को जारी अस्थायी नियंत्रण संबंधी आदेश को वापस लेने का निर्णय लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा। सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार 12 जून […] The post 1 जुलाई से पेट्रोल-डीजल बिक्री पर लागू अस्थायी प्रतिबंध हटेंगे, केंद्र ने 12 जून का आदेश लिया वापस appeared first on Sabguru News .
पंजीकृत न होने के बावजूद खरगे पर आरएसएस कर सकता है मानहानि का मुकदमा : न्यायालय
बेंगलूरु। बेंगलूरु की एक विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि पंजीकृत संगठन न होने के बावजूद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के व्यक्तिगत सदस्य मानहानि का मुकदमा कर सकते हैं। न्यायालय ने कहा कि केवल औपचारिक पंजीकरण या सदस्यता के दस्तावेजी सबूत न होने के आधार पर ऐसी शिकायतों को शुरुआत में […] The post पंजीकृत न होने के बावजूद खरगे पर आरएसएस कर सकता है मानहानि का मुकदमा : न्यायालय appeared first on Sabguru News .
बयाना के सरकारी अस्पताल में बोतल में सांप लेकर पहुंचा सर्पदंश पीड़ित
भरतपुर। राजस्थान में भरतपुर के बयाना के राजकीय चिकित्सालय में सोमवार को सुबह एक मरीज के हाथ में प्लास्टिक की बोतल में बंद एक जिंदा सांप को देखकर अस्पताल में हड़कंप मच गया। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि सालाबाद निवासी जोगेंद्र सिंह (40) को रविवार रात करीब दो बजे सांप ने डस लिया। उसने बिना […] The post बयाना के सरकारी अस्पताल में बोतल में सांप लेकर पहुंचा सर्पदंश पीड़ित appeared first on Sabguru News .
हनुमानगढ़ में सगे भाई ने किया नाबालिग बहन का रेप
हनुमानगढ़। राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले के फेफाना थाना क्षेत्र में एक किशोरी ने सगे भाई के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार यह घटना 26 जून की शाम की है। आरोपी भाई अपनी नाबालिग बहन को ननिहाल गांव से मोटरसाइकिल पर अपने गांव ला रहा था। गांव से करीब दो […] The post हनुमानगढ़ में सगे भाई ने किया नाबालिग बहन का रेप appeared first on Sabguru News .
दिल्ली सरकार ने सोमवार को इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2.0 को मंजूरी दे दी। नई नीति के तहत 1 जुलाई 2026 से 31 मार्च 2030 तक लगभग 15,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक दिल्ली में 95 प्रतिशत नए वाहन पंजीकरण इलेक्ट्रिक ...
श्रीगंगानगर में युवक की हत्या के आरोप में पिता-पुत्र समेत एक ही परिवार के 4 सदस्य अरेस्ट
श्रीगंगानगर। राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले में हिंदूमलकोट थाना क्षेत्र में सीमावर्ती खाट लबाना गांव में पिछले हफ्ते एक युवक की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में पुलिस ने पिता पुत्र सहित एक ही परिवार के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। थाना प्रभारी पुलिस निरीक्षक सुनील खोड ने सोमवार को बताया कि प्रेमसिंह, उसके पुत्र […] The post श्रीगंगानगर में युवक की हत्या के आरोप में पिता-पुत्र समेत एक ही परिवार के 4 सदस्य अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
बीकानेर : छुट्टियों के बाद स्कूल खुलते ही कक्षा की 10 पट्टियां गिरीं
बीकानेर। राजस्थान में बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में तोलियासर गांव स्थित सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्रीष्मावकाश समाप्त होने के तुरंत बाद सोमवार को एक बड़ा हादसा टल गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार आज स्कूल खुलने के पहले दिन स्टाफ कक्षाओं के ताले खोल रहा था। इसी दौरान कक्षा संख्या सात में छत की […] The post बीकानेर : छुट्टियों के बाद स्कूल खुलते ही कक्षा की 10 पट्टियां गिरीं appeared first on Sabguru News .
कराची हमले के बाद पाकिस्तान ने पूर्वी अफगानिस्तान में किए हवाई हमले
इस्लामाबाद/काबुल। पाकिस्तान के कराची शहर में रेंजर्स के क्षेत्रीय मुख्यालय पर हुए हमले के बाद पाकिस्तानी सेना ने पूर्वी अफगानिस्तान में सैन्य कार्रवाई और हवाई हमले किए हैं। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने सोमवार को दावा किया कि इस अभियान में 25 आतंकवादी मारे गए है। अफगानिस्तान के अनुसार इन हमलों में 36 […] The post कराची हमले के बाद पाकिस्तान ने पूर्वी अफगानिस्तान में किए हवाई हमले appeared first on Sabguru News .
श्रीगंगानगर : सीमा क्षेत्र में एक और पाकिस्तानी ड्रोन नेटवर्क का खुलासा, 3 तस्कर अरेस्ट
श्रीगंगानगर। राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के समेजा कोठी थाना क्षेत्र पिछले लंबे समय से भारत-पाकिस्तान तस्करों का पसंदीदा स्थल बना हुआ है। यहां पाकिस्तानी तस्करों द्वारा ड्रोन से गिराये जाने वाले हेरोइन और हथियारों के पैकेटों को स्थानीय संपर्कों के जरिए पंजाब के तस्कर उठाते रहे हैं। अब इस पूरे नेटवर्क का एक और बड़ा […] The post श्रीगंगानगर : सीमा क्षेत्र में एक और पाकिस्तानी ड्रोन नेटवर्क का खुलासा, 3 तस्कर अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
चूरू के तारानगर में 1200 वर्ष पुराने जैन मंदिर में 13 अष्टधातु मूर्तियां चोरी
चूरू। राजस्थान में चूरू जिले के तारानगर थाना क्षेत्र में 1200 वर्ष पुराने जैन श्वेतांबर मंदिर में रविवार को रात चोरों ने मंदिर के गर्भगृह से 13 बेशकीमती अष्टधातु की प्राचीन मूर्तियां चुरा लीं। प्राप्त जानकारी के अनुसार मंदिर में कुल 17 अष्टधातु मूर्तियां थीं, जिनमें से 13 चोरी हो गयीं। आज सुबह जब पुजारी […] The post चूरू के तारानगर में 1200 वर्ष पुराने जैन मंदिर में 13 अष्टधातु मूर्तियां चोरी appeared first on Sabguru News .
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सोमवार को तीन-भाषा नीति (Three-Language Policy) को लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कक्षा 10 में पढ़ रहे छात्रों पर नई भाषा व्यवस्था लागू नहीं ...
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप त्रिभाषा नीति को लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हालांकि कक्षा 10 के मौजूदा छात्रों के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है। वे केवल दो भाषाओं के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे व बोर्ड परीक्षा देंगे।
देश के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों (Salaried Employees) के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की ओर से एक बेहद क्रांतिकारी और बड़ा तोहफा मिलने जा रहा है. भविष्य में पीएफ (Provident Fund) से इमरजेंसी फंड निकालने के लिए लगने वाली लंबी-चौड़ी कागजी कार्रवाई, ऑनलाइन क्लेम का लंबा प्रोसेस और हफ़्तों तक बैंक खाते में पैसे आने का इंतजार पूरी तरह खत्म होने वाला है.जिस तरह आप Google Pay, PhonePe या किसी भी UPI ऐप और एटीएम (ATM) से चुटकी बजाकर पैसा ट्रांसफर कर लेते हैं या कैश निकाल लेते हैं, ठीक उतनी ही आसानी से अब आप अपने पीएफ खाते से भी फंड निकाल सकेंगे. ईपीएफओ अपने सबसे आधुनिक और अपग्रेड वर्जन 'EPFO 3.0' के तहत बहुत जल्द एटीएम और यूपीआई के जरिए पीएफ निकासी (PF Withdrawal) की हाई-टेक सुविधा लॉन्च करने की तैयारी में है. हालांकि, इस आसान डिजिटल सिस्टम के जहां अनगिनत फायदे हैं, वहीं वित्तीय विशेषज्ञों ने इसके दूरगामी नुकसानों को लेकर भी कर्मचारियों को आगाह किया है.आसान विड्रॉल से क्या रिटायरमेंट फंड के मुख्य मकसद को लगेगा झटका?पीएफ फंड मूल रूप से आपकी नौकरी खत्म होने के बाद या रिटायरमेंट के बाद आपके बुढ़ापे को आर्थिक सुरक्षा (Financial Security) की गारंटी देने और एक मोटी जमापूंजी तैयार करने के मकसद से बनाया गया है. वर्तमान में यह फंड मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की उच्च शिक्षा या घर बनाने जैसी बेहद बड़ी जरूरतों के समय ही काम आता है.तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि पीएफ निकासी जितनी आसान और डिजिटल फ्रेंडली होती जा रही है, उससे पैसा निकालने की रफ्तार भी उतनी ही तेजी से बढ़ सकती है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या बेहद आसान विड्रॉल सिस्टम से पीएफ के लॉन्ग-टर्म सेविंग (Long-term Savings) के मुख्य उद्देश्य को ठेस पहुंचेगी? हालांकि, ईपीएफओ का स्पष्ट कहना है कि इस नए सिस्टम को लाने का मकसद सब्सक्राइबर्स के लिए एक पारदर्शी और डिजिटल फ्रेंडली प्लेटफॉर्म तैयार करना है, न कि प्री-मैच्योर विड्रॉल (समय से पहले पैसा निकालने) को बढ़ावा देना. त्वरित और आसान लेनदेन से वित्तीय प्रणाली पर लोगों का भरोसा और पीएफ में युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी.बुढ़ापे की लाठी कमजोर होने का खतरा: जल्दी पीएफ निकालने के 3 बड़े नुकसानयूपीआई और एटीएम के जरिए कुछ ही मिनटों में पीएफ का पैसा हाथ में आ जाने की सहूलियत मिलने से लोग छोटी-मोटी इच्छाओं या गैजेट्स खरीदने के लिए भी अपना रिटायरमेंट फंड खाली कर सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, इसके 3 सबसे बड़े और गंभीर नुकसान हो सकते हैं:पेंशन फंड को तगड़ा झटका: आपके पीएफ कंट्रीब्यूशन का एक निश्चित हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाता है. यदि आप नौकरी के दौरान ही बार-बार पीएफ का पैसा निकालते रहते हैं, तो रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली आपकी मंथली पेंशन की राशि में भारी कमी आ जाएगी, जिससे बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा कमजोर होगी.कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि ब्याज) का भारी नुकसान: पीएफ पर मिलने वाला ब्याज कंपाउंडिंग के जादुई फॉर्मूले पर काम करता है. आपका पैसा जितने लंबे समय तक ईपीएफओ के पास सुरक्षित रहेगा, उस पर उतना ही बड़ा और मोटा ब्याज मिलता जाएगा. बीच में ही पैसा निकाल लेने से आप इस बंपर कंपाउंडिंग प्रॉफिट से हाथ धो बैठेंगे.महंगाई (Inflation) से लड़ने की ताकत खत्म: बुढ़ापे में बढ़ती महंगाई का सामना करने के लिए पीएफ एक स्टेबल और सुरक्षित आय का जरिया है. यदि आप अपनी फाइनेंशियल परिस्थितियों और लॉन्ग-टर्म रिटायरमेंट लक्ष्यों को दरकिनार कर इसे जल्दी खर्च कर देते हैं, तो भविष्य में महंगाई की मार झेलना बेहद मुश्किल हो जाएगा.
ग्लोबल वार्मिंग और तेजी से बदलते जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के इस दौर में पूरी दुनिया भीषण और जानलेवा गर्मी की चपेट में आ चुकी है. इस समय दक्षिणी और मध्य यूरोप के कई देश एक ऐसी विनाशकारी और अभूतपूर्व हीटवेव (लू) का सामना कर रहे हैं, जिसने वहां की सरकारों और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की नींद उड़ा दी है. फ्रांस, स्पेन और पुर्तगाल जैसे ठंडे माने जाने वाले देशों में थर्मामीटर का पारा 43 डिग्री सेल्सियस को छू रहा है.सबसे चौंकाने वाली और हैरान करने वाली बात यह है कि यही 43C तापमान भारत के लोगों के लिए गर्मियों के मौसम में एक बहुत ही आम बात होती है, जिसे लोग हंसते-खेलते झेल जाते हैं. लेकिन यूरोप में इसी तापमान के कारण चारों तरफ त्राहि-त्राहि मची हुई है और अकेले फ्रांस में अब तक 1000 से ज्यादा लोगों की तड़पकर मौत हो चुकी है. आखिर ऐसा क्यों है कि थर्मामीटर पर एक जैसा दिखने वाला नंबर (43C) भारत के मुकाबले यूरोप में इतना ज्यादा जानलेवा, बेरहम और विनाशकारी साबित हो रहा है? विज्ञान, भूगोल और आर्किटेक्चर के विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कोई थर्मल रीडिंग का अंतर नहीं, बल्कि 8 ऐसी बड़ी और बुनियादी वजहें हैं जो यूरोप की गर्मी को इंसानों के लिए दमघोंटू बना देती हैं.1. 17 घंटे का लंबा टॉर्चर और सूरज का खास तिरछा एंगलयूरोप का ज्यादातर भौगोलिक हिस्सा भारत के मुकाबले पृथ्वी पर काफी उत्तर (North) में स्थित है. उदाहरण के तौर पर समझें तो पेरिस की लोकेशन कनाडा के टोरंटो शहर से भी अधिक उत्तर में है. गर्मियों के दिनों में यहां सूरज का एंगल ऐसा होता है कि धूप सीधे सिर पर पड़ने के बजाय तिरछी पड़ती है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि आसमान में 15 से लेकर 17 घंटे तक दिन की रोशनी रहती है. इतने लंबे समय तक लगातार धूप रहने के कारण शहरों की कंक्रीट की इमारतें, डामर की सड़कें और फुटपाथ दिनभर सोलर एनर्जी (तापमान) सोखते रहते हैं, जिसके चलते ये रात के समय भी ठंडे नहीं हो पाते और रातें भी भट्टी की तरह तपती हैं.2. प्रदूषण मुक्त साफ आसमान: सीधे त्वचा पर वार करती तीखी किरणेंभारत के शहरों में हवा के भीतर धूल-मिट्टी के कण और प्रदूषण का स्तर थोड़ा ज्यादा होता है, जो एक सुरक्षा कवच की तरह सूरज की सीधी किरणों को वायुमंडल में ही बिखेर (Scatter) देते हैं, जिससे धूप की चुभन थोड़ी कम हो जाती है. इसके विपरीत, यूरोप में कड़े नियमों के कारण आसमान बिल्कुल साफ और प्रदूषण मुक्त होता है. हवा में धूल के कण न होने से सूरज की पराबैंगनी (Ultraviolet) और तीखी किरणें सीधे इंसानी स्किन पर वार करती हैं, जिससे 43C तापमान में भी वहां की धूप भारत से कहीं ज्यादा झुलसाने वाली और तेज महसूस होती है.3. हवा का बिल्कुल थम जाना और 'हॉट एयर बैलून' का बननाहालिया हीटवेव और मौसम के बिगड़े पैटर्न के दौरान यूरोप के वायुमंडल में हवा की गति पूरी तरह से ठप यानी रुक गई है. जब हवा बिल्कुल नहीं चलती, तो घने बसे शहरों के ऊपर गर्म हवा का एक अदृश्य गुब्बारा बन जाता है. हवा न चलने के कारण इंसानी शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम (पसीना सूखने की वाष्पीकरण प्रक्रिया) पूरी तरह काम करना बंद कर देता है, जिससे बन्द कमरों के भीतर लोगों का दम घुटने लगता है.4. सूखी गर्मी और 'साइलेंट डिहाइड्रेशन' का जानलेवा खेलभारत में गर्मी के साथ अक्सर उमस (Humidity) होती है, जिससे हमारे शरीर से लगातार पसीना निकलता है और हमें प्यास का अहसास होता रहता है, जिससे हम पानी पीते हैं. लेकिन यूरोप के अंदरूनी मैदानी हिस्सों में पड़ने वाली गर्मी बेहद सूखी (Dry Heat) होती है. यहां शरीर से निकलने वाला पसीना तुरंत हवा में उड़ जाता है, जिससे इंसान को यह अंदाजा ही नहीं हो पाता कि उसका शरीर कितनी डरावनी तेजी से पानी खो रहा है. यह 'साइलेंट डिहाइड्रेशन' (Silent Dehydration) अचानक से शरीर के अंगों को फेल (Multi-Organ Failure) कर रहा है और बुजुर्गों की मौत का सबसे बड़ा कारण बन रहा है.5. 'थर्मस' और ओवन जैसे घर, जो बाहर नहीं निकलने देते गर्मीयूरोप के घरों का इतिहास और आर्किटेक्चर देखें, तो इन्हें सदियों से कड़ाके की ठंड, भारी बर्फबारी और लंबी सर्दियों को ध्यान में रखकर खास तौर पर डिजाइन किया गया है. इन घरों की दीवारें बेहद मोटी और इंसुलेशन वाली होती हैं, खिड़कियां आकार में छोटी होती हैं और छतें गहरे रंग की होती हैं ताकि बाहर की थोड़ी सी भी गर्मी अंदर फंसी रहे और घर गर्म रहे.सर्दियों का यही वरदान अब इस ग्लोबल वार्मिंग के दौर में वहां के लोगों के लिए सबसे बड़ा अभिशाप बन गया है. कंक्रीट के ये घर एक बार गर्म होने के बाद अंदर किसी ओवन (Oven) की तरह चौबीसों घंटे तपते रहते हैं. इसके उलट, पारंपरिक भारतीय घरों में ऊंची छतें, खुले बरामदे, टाइल्स की ठंडी फ्लोरिंग और क्रॉस-वेंटिलेशन को ध्यान में रखकर बनाया जाता है ताकि गर्मी तुरंत बाहर निकल सके.6. बुनियादी ढांचे में एयर कंडीशनिंग (AC) और पंखों का न होनायूरोपियन लाइफस्टाइल और संस्कृति में एसी (Air Conditioner) कभी भी उनकी प्राथमिकता या जरूरत का हिस्सा नहीं रहा. पेरिस, बर्लिन या लंदन जैसे बड़े शहरों में अमूमन गर्मियों का औसत तापमान 25C के आसपास ही रहता था, इसलिए वहां के अधिकांश घरों में न तो सीलिंग फैन (छत के पंखे) होते हैं और न ही एसी की फिटिंग. अब अचानक आई इस अभूतपूर्व और जानलेवा गर्मी से निपटने के लिए वहां का घरेलू इन्फ्रास्ट्रक्चर बिल्कुल भी तैयार नहीं है, जबकि भारत में कूलर, पंखे और एसी गर्मियों की बुनियादी और अनिवार्य जरूरत माने जाते हैं.7. ऐतिहासिक शहरों की खूबसूरती के कड़े और अजीब कानूनयूरोप के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहरों (जैसे पेरिस, रोम या फ्लोरेंस) के पुराने और मुख्य रिहायशी इलाकों में 'आर्किटेक्चरल एस्थेटिक्स' (शहरी सुंदरता) को बनाए रखने के लिए बेहद कड़े कानून हैं. इन नियमों के तहत किसी भी ऐतिहासिक या पुरानी इमारत के बाहरी हिस्से पर एसी का आउटडोर कंप्रेसर या डक्ट लगाने पर पूरी तरह से कानूनी रोक है ताकि पैदल चलने वाले रास्तों और वहां के आउटडोर कैफे कल्चर का विजुअल लुक खराब न हो. सुंदरता को बचाने के लिए बनाए गए ये सरकारी नियम आज के इस आपातकाल में लोगों के लिए काल साबित हो रहे हैं.8. 'बायोलॉजिकल एडप्टेशन': शरीर का मौसम के अनुकूल न ढलनाभारत के लोग जन्म से ही बचपन से 40C से लेकर 45C के ऊपर का प्रचंड तापमान हर साल झेलने के आदी (Acclimatized) होते हैं. बार-बार अत्यधिक गर्मी का सामना करने से हमारा बायोलॉजिकल सिस्टम इसके अनुकूल ढल जाता है, जिससे हमारा दिल और कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम विपरीत परिस्थितियों में भी बेहतर काम करता है और शरीर तुरंत पसीना बहाकर खुद को इंटरनली ठंडा कर लेता है. इसके विपरीत, यूरोपियन लोगों का शरीर और जेनेटिक्स इस तरह के गर्म मौसम के बिल्कुल आदी नहीं हैं, जिसके चलते उनका ब्लड प्रेशर और दिल इतनी भीषण गर्मी में अचानक से कड़ा रिस्पॉन्स नहीं दे पाता और लोग हीट स्ट्रोक का शिकार हो जाते हैं.यह सोचना कि भारतीय लोग केवल शारीरिक रूप से बेहतर हैं, पूरी तरह सही नहीं है; बल्कि इसके पीछे दोनों महाद्वीपों की भौगोलिक और ढांचागत बनावट का बहुत बड़ा हाथ है. भारत की उमस वाली गर्मी जहां चिपचिपी और थका देने वाली होती है, वहीं यूरोप की सूखी गर्मी, तपती कंक्रीट की इमारतें, हवा का थमा होना और लगातार 17 घंटे तक सूरज का आग उगलना वहां की रातों को भी नरक बना रहा है. यही वजह है कि जब यूरोप का पारा 43 डिग्री पहुंचता है, तो वह किसी भीषण प्राकृतिक आपदा (Natural Disaster) की तरह हजारों मासूम जिंदगियों को लीलने लगता है.
कई बार लोग टैक्स का बोझ कम करने के लिए एक बहुत आम तरीका अपनाते हैं—वे अपनी मेहनत की कमाई का एक हिस्सा अपनी पत्नी के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर या गिफ्ट कर देते हैं. इसके बाद पत्नी उन पैसों को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), सोना, म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार में निवेश कर देती हैं. अगर आप भी ऐसा ही कुछ प्लान कर रहे हैं, तो रुकिए! इनकम टैक्स का एक बेहद कड़ा नियम आपकी इस पूरी प्लानिंग को बिगाड़ सकता है. आयकर कानून के मुताबिक, पत्नी के नाम पर किए गए इस निवेश से जो भी मुनाफा या ब्याज (Income) मिलेगा, उस पर टैक्स आपकी पत्नी को नहीं, बल्कि सीधे तौर पर आपको (पति को) ही चुकाना होगा.इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ऐसे मामलों पर 'क्लबिंग ऑफ इनकम' (Clubbing of Income) के तहत कड़ी नजर रखता है. इसका सीधा उद्देश्य परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्ति या धन का हेर-फेर कर टैक्स चोरी करने की कोशिशों को रोकना है. आइए एक एक्सपर्ट रिपोर्टर की नजर से इस नियम के पीछे की पूरी बारीकी और इससे बचने के कानूनी तरीकों को आसान भाषा में समझते हैं.क्या है आयकर अधिनियम की धारा 64? समझिए 'क्लबिंग ऑफ इनकम' का खेलआयकर अधिनियम (Income Tax Act) की धारा 64 के तहत 'क्लबिंग ऑफ इनकम' का प्रावधान किया गया है. सीधे शब्दों में कहें तो इसका मतलब है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा कमाई गई आय को आपकी कुल सालाना आय में जोड़ (Club) दिया जाता है और फिर आपके टैक्स स्लैब के अनुसार उस पर टैक्स वसूला जाता है.यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को कोई धनराशि उपहार (Gift Money) में देता है और पत्नी उस रकम को किसी भी वित्तीय स्कीम जैसे FD, गोल्ड, शेयर या म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करती हैं, तो उस निवेश से मिलने वाला सालाना ब्याज, डिविडेंड या कैपिटल गेन कानूनी रूप से पति की ही आय माना जाएगा.कब लागू नहीं होते क्लबिंग के नियम? जानिए ये जरूरी अपवादइनकम टैक्स के इस कड़े नियम में कुछ राहत भरे अपवाद भी शामिल हैं, जहां क्लबिंग के प्रावधान पूरी तरह निष्प्रभावी हो जाते हैं:खुद की पेशेवर योग्यता: यदि आपकी पत्नी अपनी किसी तकनीकी, व्यावसायिक या पेशेवर योग्यता (Technical or Professional Qualification) के दम पर स्वयं कमाई करती हैं, तो उनकी उस कमाई पर क्लबिंग का नियम लागू नहीं होगा.वर्किंग प्रोफेशनल्स: उदाहरण के लिए, यदि पत्नी डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA), फ्रीलांसर या अपनी किसी विशेष कला के आधार पर आय अर्जित करती हैं, तो वह आय पूरी तरह उनकी अपनी मानी जाएगी और उन्हें अपने पैन कार्ड पर खुद टैक्स देना होगा.टैक्स प्लानिंग के 3 पूरी तरह सुरक्षित और कानूनी तरीकेअगर आप नियमों के दायरे में रहकर पूरी तरह लीगल तरीके से टैक्स की प्लानिंग करना चाहते हैं, तो आयकर कानून आपको ये बेहतरीन विकल्प देता है:माता-पिता को पैसे गिफ्ट करें: यदि आप अपनी पत्नी के बजाय अपने माता-पिता (Parents) को पैसे उपहार में देते हैं और वे उस रकम को सीनियर सिटीजन एफडी या अन्य सुरक्षित निवेश में लगाते हैं, तो उससे होने वाली आय उन्हीं की मानी जाएगी. चूंकि इस पर क्लबिंग का नियम लागू नहीं होता, इसलिए अगर आपके माता-पिता कम टैक्स स्लैब में आते हैं, तो आप कानूनी रूप से टैक्स बचा सकते हैं.शादी में मिले उपहार (Wedding Gifts): हिंदू विवाह या किसी भी शादी के शुभ अवसर पर रिश्तेदारों और दोस्तों से मिलने वाले कैश या प्रॉपर्टी पर टैक्स नहीं लगता है. अगर उस शादी में मिले गिफ्ट्स की रकम को कहीं इन्वेस्ट किया जाता है, तो उससे होने वाली आय भी प्राप्तकर्ता (जिसकी शादी थी) के हाथों में ही टैक्स योग्य होती है, इस पर कोई क्लबिंग नहीं होती.PPF में निवेश का जादुई विकल्प: यदि आप अपनी पत्नी या नाबालिग बच्चे के नाम पर पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) खाते में पैसे जमा करते हैं, तो उस पर मिलने वाला सालाना ब्याज (Interest) कानूनन पूरी तरह टैक्स-फ्री (Tax-Free) होता है. ब्याज पर टैक्स न होने के कारण यहां क्लबिंग नियम का कोई विपरीत असर नहीं पड़ता. हालांकि, ध्यान रहे कि एक वित्त वर्ष में प्रति PPF खाते में निवेश की अधिकतम सीमा ₹1.5 लाख ही निर्धारित है.
भारतीय रेलवे (Indian Railways) में सफर का आनंद तब तक ही लिया जा सकता है, जब तक आपके आस-पास बैठे सह-यात्री समझदार और तमीजदार हों. सोचिए, आप एक लंबे और थका देने वाले ओवरनाइट सफर के बाद ट्रेन की बोगी में सुकून से सोने की कोशिश कर रहे हों और अचानक कोई पैसेंजर आधी रात को मोबाइल पर फुल वॉल्यूम में रील्स (Reels) या शॉर्ट वीडियो बजाना शुरू कर दे. ऐसा ही एक बेहद परेशान करने वाला और सिरदर्द पैदा करने वाला वाकया इन दिनों इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रहा है. एक महिला की इस गैर-जिम्मेदाराना हरकत से तंग आकर एक सह-यात्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट (Reddit) पर अपनी भड़ास निकाली है, जिसके बाद इंटरनेट पर भारतीयों में 'सिविक सेंस' (Civic Sense) की कमी को लेकर एक नई और तीखी बहस छिड़ गई है.'सुहाने सफर में विलेन बनी महिला': सह-यात्री ने रेडिट पर खोला दुखों का पिटाराएक परेशान रेल यात्री ने रेडिट के एक कम्युनिटी फोरम पर अपने इस बेहद खराब और थका देने वाले सफर का पूरा कच्चा चिट्ठा साझा किया है. यात्री ने बताया कि वह जिस थर्ड एसी (3AC) कोच में सफर कर रहा था, वहां शुरुआत में सब कुछ बेहद शांत और व्यवस्थित था. रात के वक्त लगभग सभी लोग आराम से सो चुके थे और बोगी में मौजूद छोटे बच्चे भी कोई शोर नहीं मचा रहे थे. लेकिन बोगी का यह सुकून ज्यादा देर तक नहीं टिक सका.कोच में एक महिला अपने पति और बच्चे के साथ सफर कर रही थी. यात्री ने लिखा कि उस महिला में बुनियादी सामाजिक समझ (Civic Sense) नाम की कोई चीज नहीं थी. वह शुरुआत से ही बेहद चिड़चिड़े स्वभाव में छोटी-छोटी बातों पर अपने पति से बोगी के बीच कटकट और बहस कर रही थी.आधी रात को फुल आवाज में रील्स: सबका सिरदर्द बनी महिला की जिदयात्री के मुताबिक, महिला का पति और बच्चा ऊपर की बर्थ पर सो रहे थे, जबकि महिला को साइड अपर बर्थ मिली हुई थी. बिना किसी ठोस वजह के उसने आधी रात को अपने पति से सीट बदलने की जिद पकड़ ली और बोगी में हंगामा खड़ा कर दिया. पति के सीट बदलने के बाद जो हुआ, उसने पूरे कोच के पैसेंजर्स का जीना मुहाल कर दिया. सीट पर बैठते ही महिला ने आधी रात के सन्नाटे में अपने स्मार्टफोन पर बिना ईयरफोन (Earphones) लगाए, फुल आवाज में फेसबुक और इंस्टाग्राम की रील्स देखना शुरू कर दिया. मोबाइल की तेज आवाज और लगातार बदलती रील्स के शोर के कारण आस-पास की सीटों पर सो रहे लोगों की नींद पूरी तरह खराब हो गई.परेशानी का क्लाइमेक्स: सुबह 4:30 बजे जबरन जला दी बोगी की लाइट!सह-यात्रियों की परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई, बल्कि सुबह होते-होते यह और ज्यादा बढ़ गई. वह महिला रात में सिर्फ 3-4 घंटे ही सोई और सुबह ठीक 4:30 बजे उठकर बैठ गई. उठते ही उसने फिर से कोच के एसी की कूलिंग और बाकी इंतजामों को लेकर अपने पति से बोगी में जोर-जोर से बहस शुरू कर दी. हद तो तब हो गई जब उसने बिना सोचे-समझे पूरे कंपार्टमेंट की मेन लाइट ऑन कर दी, जबकि बाहर अंधेरा था और बाकी सभी पैसेंजर्स गहरी नींद में थे.जब उसके खुद के पति और अन्य सह-यात्रियों ने उससे बेहद तमीज और शालीनता से लाइट बंद करने का अनुरोध किया, तो वह उन पर ही भड़क गई और बड़बड़ाने लगी. उसने साफ मना करते हुए लाइट बंद नहीं की, जिससे बोगी में मौजूद लोग बेहद असहज हो गए.'इतनी ही दिक्कत है तो प्राइवेट जेट खरीद लो': रेडिट पोस्ट पर फूटा लोगों का गुस्सापरेशान यात्री ने गुस्से में अपनी पोस्ट में लिखा, मुझे समझ नहीं आता कि ऐसे गंवार और बदतमीज लोगों को ट्रेन में कन्फर्म टिकट कैसे मिल जाता है. अगर आपको पब्लिक ट्रांसपोर्ट में आम लोगों के साथ तालमेल बिठाने में इतनी ही दिक्कत है, तो अपना प्राइवेट जेट खरीद कर उससे सफर किया करो. जब जेब में पैसा नहीं है तो एटीट्यूड भी उसी हिसाब से मर्यादित रखना चाहिए. यात्री ने तंज कसते हुए आगे लिखा कि उस बोगी में सफर कर रहे छोटे बच्चे उस महिला से कहीं ज्यादा समझदार और मैच्योर थे, जो कम से कम दूसरों की शांति का ध्यान रख रहे थे.इस रेडिट पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है और लोग रेलवे में ऐसे यात्रियों के खिलाफ कड़े एक्शन की मांग कर रहे हैं. कमेंट सेक्शन में एक यूजर ने अपना दुखड़ा रोते हुए लिखा, मैं भी आज एक ट्रेन से सफर कर रहा हूं और मेरे बगल वाली फैमिली सुबह 4 बजे उठकर मोबाइल पर जोर-जोर से लाउडस्पीकर में भजन बजा रही है. जब मैंने उन्हें टोकने की हिम्मत की, तो वे बोले कि पूरी दुनिया जाग गई है, तुम कितने आलसी हो जो अब तक सो रहे हो. वहीं, एक अन्य यूजर ने तीखा तंज कसते हुए लिखा, कुछ लोगों को लगता है कि पूरी भारतीय रेलवे उनके बाप की जागीर है. चाहे बस हो, ट्रेन हो या फ्लाइट—आप कुछ भारतीयों के साथ कभी भी शांति और सुकून से सफर की उम्मीद नहीं कर सकते.
Sikh Guru Hargobind Sahib: सिख धर्म के छठे गुरु श्री गुरु हरगोविंद सिंह जी, अधिक प्रचलित नाम गुरु हरगोबिंद साहिब जी का जीवन आध्यात्मिकता, साहस, सेवा और न्याय का अद्भुत संगम माना जाता है। उन्होंने यह संदेश दिया कि धर्म की रक्षा केवल उपदेशों से नहीं, ...
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज (29 जून 2026) का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है. सूबे की नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार विधानसभा के विशेष सत्र में देश के सबसे चर्चित और वैचारिक रूप से संवेदनशील 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code-UCC) से जुड़ा बहुप्रतीक्षित विधेयक पेश करने की तैयारी में है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस बड़े फैसले ने राज्य की राजनीति से लेकर आम जनता के बीच एक नई बहस छेड़ दी है.भारतीय जनता पार्टी ने 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान अपने 'संकल्प पत्र' में वादा किया था कि सरकार बनने के छह महीने के भीतर बंगाल में यूसीसी लागू किया जाएगा. उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद अब पश्चिम बंगाल देश का अगला ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहां सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून होगा. आइए एक्सपर्ट रिपोर्टर की नजर से ग्राउंड रियलिटी को समझते हैं कि इस ऐतिहासिक कानून के लागू होने के बाद बंगाल के सामाजिक और पारिवारिक ताने-बाने पर क्या सीधा असर पड़ेगा.शादी के नियमों में एकरूपता: मजहब चाहे जो हो, कानून होगा एकसमान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद सबसे पहला और बड़ा प्रभाव विवाह (Marriage) से जुड़े व्यक्तिगत नियमों पर पड़ेगा. वर्तमान व्यवस्था में अलग-अलग धर्मों के लोग अपने-अपने पर्सनल लॉ (जैसे हिंदू मैरिज एक्ट या मुस्लिम पर्सनल लॉ) के तहत शादी करते हैं. लेकिन यूसीसी आने के बाद शादी की न्यूनतम कानूनी उम्र (लड़कों के लिए 21 वर्ष और लड़कियों के लिए 18 वर्ष), एक से अधिक विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध (पॉलीगैमी का अंत) और शादी का अनिवार्य सरकारी पंजीकरण (Mandatory Registration) सभी समुदायों के लिए समान रूप से लागू हो जाएगा. इससे शादी से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी.तलाक और गुजारे भत्ते (मैंटनेंस) के नियम होंगे बेहद कड़ेअभी तक देश में अलग-अलग मजहबों में तलाक (Divorce) लेने के तौर-तरीके और उसके बाद महिलाओं को मिलने वाले गुजारे भत्ते (Alimony) की व्यवस्था अलग-अलग है. यूसीसी के कानून के दायरे में आते ही तलाक लेने की कानूनी प्रक्रिया सभी धर्मों के पति-पत्नी के लिए एक जैसी हो जाएगी. सबसे महत्वपूर्ण बदलाव महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को लेकर होगा. तलाक की स्थिति में पत्नी और बच्चों को मिलने वाले भरण-पोषण और गुजारे भत्ते के नियम बेहद सख्त और एक समान बनाए जाएंगे, जिससे किसी भी वर्ग की महिला का उत्पीड़न न किया जा सके.बेटा-बेटी को संपत्ति में बराबर का हक, वसीयत के नियम भी बदलेंगेयदि विधानसभा में यह विधेयक पास होता है, तो उत्तराधिकार (Inheritance) और पैतृक संपत्ति के बंटवारे से जुड़े पुराने नियमों में क्रांतिकारी फेरबदल देखने को मिलेगा:समान अधिकार: पिता की संपत्ति पर बेटे और बेटी का बिल्कुल एक समान कानूनी अधिकार होगा, चाहे बेटी शादीशुदा हो या अविवाहित.एक जैसा ढांचा: वसीयत बनाने, गोद लेने (Adoption) और संपत्ति के हस्तांतरण के लिए एक ही कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा.आदिवासियों को छूट की संभावना: सरकारी सूत्रों और उत्तराखंड के मॉडल के अनुसार, बंगाल की सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए आदिवासी (Tribal) समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जा सकता है.लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: लापरवाही पर हो सकती है जेल!पश्चिम बंगाल के प्रस्तावित यूसीसी ड्राफ्ट में सबसे आधुनिक और चर्चा का विषय 'लिव-इन रिलेशनशिप' (Live-in Relationship) को लेकर बनाया गया कानून है. नए नियमों के अनुसार, यदि कोई भी बालिग जोड़ा (कपल) बिना शादी किए एक साथ लिव-इन में रहने का फैसला करता है, तो उन्हें स्थानीय निर्धारित अथॉरिटी के पास जाकर इसका अनिवार्य रूप से पंजीकरण (Registration) कराना होगा.इतना ही नहीं, यदि भविष्य में वे आपसी सहमति या किसी विवाद के कारण इस रिश्ते को खत्म करते हैं, तो उस 'ब्रेकअप' या रिश्ते के समापन का भी आधिकारिक पंजीकरण कराना जरूरी होगा. सरकार का तर्क है कि इस नियम से लिव-इन में रहने वाली महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मिलेगी, उनके अधिकारों की रक्षा होगी और किसी भी प्रकार के आपराधिक या धोखेबाजी के मामलों पर लगाम कसी जा सकेगी.बंगाल में क्यों ममाचा राजनीतिक घमासान?सुवेंदु अधिकारी सरकार जहां इसे महिलाओं के सशक्तिकरण और 'एक देश, एक विधान' के संकल्प की ओर ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष (TMC) ने इस पर तीखा हमला बोला है. तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का आरोप है कि सरकार इस कानून के जरिए धार्मिक और सांस्कृतिक विविधताओं पर प्रहार कर रही है. हालांकि, सरकार विधानसभा के पटल पर इसे कानूनी प्रक्रिया (जज की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों) के तहत ही लागू करने की बात कह रही है. इसके साथ ही सरकार लोक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए 'एंटी-सोशल एक्टिविटी बिल' भी पेश कर रही है, जिससे बंगाल की राजनीति आने वाले दिनों में और गरमाने वाली है.
रेलवे में जूनियर इंजीनियर (JE) बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण खबर है. रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (RRB) ने जूनियर इंजीनियर (सीबीटी-2) परीक्षा 2026 के लिए एडमिट कार्ड (Hall Ticket) आधिकारिक तौर पर जारी कर दिए हैं. इस मुख्य परीक्षा का आयोजन 2 जुलाई 2026 को देश भर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर किया जाएगा. परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवार अपने संबंधित आरआरबी रीजन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर डायरेक्ट लिंक के जरिए तुरंत अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं. बोर्ड ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि आखिरी समय की तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए वे समय रहते अपना हॉल टिकट डाउनलोड कर लें और उसका प्रिंट आउट निकाल लें, क्योंकि बिना एडमिट कार्ड के परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी.2 जुलाई को तीन शिफ्टों में होगा एग्जाम: नोट कर लें अपनी टाइमिंगआरआरबी जेई सीबीटी-2 परीक्षा का आयोजन पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित (CBT) होगा और इसे 2 जुलाई को तीन अलग-अलग शिफ्टों में आयोजित किया जा रहा है. उम्मीदवार अपने एडमिट कार्ड पर रिपोर्टिंग टाइम को ध्यान से देख लें. परीक्षा का शेड्यूल इस प्रकार है:शिफ्टपरीक्षा का समयपहली शिफ्ट (First Shift)सुबह 09:00 बजे से 10:30 बजे तकदूसरी शिफ्ट (Second Shift)दोपहर 12:45 बजे से 02:15 बजे तकतीसरी शिफ्ट (Third Shift)शाम 04:30 बजे से 06:00 बजे तकइन महत्वपूर्ण पदों पर भर्ती के लिए हो रही है परीक्षायह मुख्य परीक्षा रेलवे के केंद्रीयकृत रोजगार अधिसूचना (विज्ञापन संख्या CEN 05/2025) के तहत आयोजित की जा रही है. इस भर्ती अभियान के जरिए भारतीय रेलवे में निम्नलिखित पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाना है:जूनियर इंजीनियर (JE)केमिकल सुपरवाइजर (Chemical Supervisor)डिपो मटीरियल सुपरिटेंडेंट (DMS)मेटालर्जिकल असिस्टेंट (Metallurgical Assistant)इस कंप्यूटर आधारित टेस्ट-2 (CBT 2) में क्वालीफाई करने वाले शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों को ही चयन प्रक्रिया के अगले और अंतिम चरण (दस्तावेज सत्यापन और चिकित्सा परीक्षण) के लिए बुलाया जाएगा.इन 5 आसान स्टेप्स में डाउनलोड करें अपना RRB JE CBT 2 हॉल टिकटउम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस को फॉलो करके अपना एडमिट कार्ड आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं:स्टेप 1: सबसे पहले रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड की आधिकारिक रीजनल वेबसाइट (जैसे rrbkolkata.gov.in, rrbpatna.gov.in आदि) पर जाएं.स्टेप 2: वेबसाइट के होमपेज पर एक्टिव 'CEN 05/2025 Junior Engineer CBT 2 Admit Card' के लिंक पर क्लिक करें.स्टेप 3: अब आपके सामने एक नया लॉगिन पेज खुलेगा, जहां आपको अपना रजिस्ट्रेशन नंबर (Registration Number) और जन्मतिथि (Date of Birth) दर्ज करनी होगी.स्टेप 4: स्क्रीन पर दिख रहा सिक्योरिटी कैप्चा कोड डालें और 'Submit' बटन पर क्लिक करें.स्टेप 5: आपका एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा. इसमें दिए गए सभी विवरण (नाम, फोटो, एग्जाम सेंटर) को अच्छे से चेक करें और भविष्य के लिए इसका एक प्रिंट आउट जरूर निकाल लें.
रोजगार और बेहतर जिंदगी की तलाश में अपना शहर छोड़कर दूसरे शहरों या देशों में बसने वाले लोगों के लिए किराए का मकान ढूंढना और वहां शांति से रहना किसी चुनौती से कम नहीं है. देश-दुनिया में लगातार बढ़ती महंगाई और आसमान छूते किराए ने आम लोगों की कमर तोड़ रखी है. इस बीच, अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को (San Francisco) से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने किराएदारों के अधिकारों और मकान मालिकों की संवेदनशीलता पर एक नई बहस छेड़ दी है. यहां एक कपल को अपने मकान मालिक को प्रेगनेंसी (गर्भावस्था) की खुशखबरी देना बेहद भारी पड़ गया. आरोप है कि जैसे ही मकान मालिक को पता चला कि उनके घर में एक नया मेहमान आने वाला है, उसने सीधे किराए में $10,000 (करीब 8.3 लाख रुपये) की भारी-भरकम बढ़ोतरी कर दी, ताकि कपल खुद-ब-खुद घर खाली करने पर मजबूर हो जाए. परेशान होकर अब इस पीड़ित कपल ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.खुशखबरी मिलते ही बदल गए मकान मालिक के सुर: $14,000 से सीधे $24,000 हुआ किरायास्थानीय मीडिया आउटलेट 'सैन फ्रांसिस्को स्टैंडर्ड' की रिपोर्ट के अनुसार, ओनी परिवार (Oni Family) सैन फ्रांसिस्को के एविला स्ट्रीट पर स्थित एक शानदार तीन-बेडरूम और तीन-बाथरूम वाले घर में पिछले 10 महीनों से किराए पर रह रहा था. परिवार में 42 वर्षीय सबाह (Sabah), जो एक बायोटेक स्टार्टअप की सीईओ (CEO) हैं, और उनके 36 वर्षीय पति गोक्सल (Goksal) शामिल हैं, जो नौकरी के साथ-साथ फैमिली और मैरिज थेरेपी में मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रहे हैं.सबाह जब दूसरी बार प्रेग्नेंट हुईं, तो उन्होंने अपनी लीज रिन्यू कराने से पहले मकान मालिक जेमी पैटन को मैसेज कर यह खुशखबरी साझा की कि वे अपने दूसरे बच्चे का स्वागत करने की तैयारी कर रहे हैं. शुरुआत में मकान मालिक ने उन्हें बधाई दी और कहा कि उनका फिलहाल सैन फ्रांसिस्को लौटने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन वे इस प्रॉपर्टी को बेचने का मन बना रहे हैं. इसके कुछ ही हफ्तों बाद जब नया रेंट प्रपोजल आया, तो कपल के होश उड़ गए. मकान मालिक ने अगले एक साल के लिए मासिक किराया $14,000 (लगभग 11.6 लाख रुपये) से बढ़ाकर सीधे $24,000 (लगभग 20 लाख रुपये) प्रति महीना कर दिया. बीच का रास्ता निकालते हुए जनवरी तक के लिए $18,000 का अस्थाई विकल्प भी दिया गया, लेकिन इतनी बड़ी रकम अचानक चुकाना कपल के लिए असंभव था.घर खाली कराने की सोची-समझी साजिश: पीड़ित कपल ने कोर्ट में दर्ज कराया केसइस अप्रत्याशित और बेतहाशा रेंट हाइक (Rent Hike) से हैरान-परेशान ओनी परिवार को आखिरकार भारी मानसिक तनाव के बीच वह घर छोड़ना पड़ा. हालांकि, उन्होंने मकान मालिक की इस मनमानी के आगे घुटने टेकने के बजाय कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया. ओनी परिवार ने अपने मकान मालिक पैटन परिवार के खिलाफ अदालत में मुकदमा दर्ज कराया है.कपल ने कोर्ट में आरोप लगाया है कि मकान मालिक का असली मकसद सिर्फ किराया बढ़ाना नहीं था, बल्कि वे जानबूझकर इतना ज्यादा किराया मांग रहे थे जिससे थक-हारकर परिवार घर खाली कर दे. ऐसा करने के पीछे मकान मालिक की मंशा यह थी कि घर बिना किसी किराएदार के (Vacant Property) खाली हो जाए, ताकि वे उसे रियल एस्टेट मार्केट में बेहद आसानी से और ऊंची कीमत पर बेच सकें.'रेंट हाइक' बना किराएदारों को निकालने का नया हथियार: वकीलों का बड़ा दावाइस पूरे मामले पर पीड़ित कपल के वकील ने कोर्ट के बाहर मीडिया से बात करते हुए एक चौंकाने वाला ट्रेंड उजागर किया है. उनके वकील के मुताबिक, कानूनी फर्मों के पास अब ऐसे मामलों की बाढ़ आ गई है, जहां मकान मालिक किराएदारों को सीधे निकालने के कानूनी झंझटों और कड़े नियमों से बचने के लिए 'रेंट हाइक' को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.वे किराया इतना ज्यादा बढ़ा देते हैं कि किराएदार के पास घर छोड़ने के अलावा कोई दूसरा रास्ता ही नहीं बचता. सैन फ्रांसिस्को के इस अनोखे और हैरान करने वाले मामले ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं और लोग किराएदारों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों को और सख्त बनाने की मांग कर रहे हैं.
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज से ही साउथ कोरियाई फुटबॉल टीम के अचानक बाहर होने के बाद देश के खेल जगत में जबरदस्त भूचाल आ गया है. टूर्नामेंट में टीम की इस नाकामी के बाद हेड कोच होंग म्युंगबो पर गाज गिरी है और उन्होंने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है. दिलचस्प बात यह है कि साउथ कोरिया ने अपने अभियान की शुरुआत शानदार अंदाज में की थी और पहले मैच में चेकिया को 2-1 से पटखनी दी थी. लेकिन इसके बाद टीम की किस्मत ने ऐसी करवट बदली कि उसे मेक्सिको और साउथ अफ्रीका के खिलाफ लगातार 1-0 के अंतर से दो दर्दनाक हार का सामना करना पड़ा. इन हार के चलते टीम ग्रुप में तीसरे स्थान पर खिसक गई और सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली 8 टीमों में भी जगह बनाने में नाकाम रहकर वर्ल्ड कप की रेस से पूरी तरह बाहर हो गई.कोच होंग म्युंगबो ने ली नाकामी की पूरी जिम्मेदारी, फैंस से मांगी दिल से माफीइस करारी हार और टूर्नामेंट से जल्दी बाहर होने के बाद 57 वर्षीय हेड कोच होंग म्युंगबो ने एक भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में साउथ कोरिया टीम की असफलता की पूरी जिम्मेदारी अपने सिर ली. देश के करोड़ों फुटबॉल फैंस से माफी मांगते हुए होंग ने कहा, 'मैं उन सभी कोरियाई लोगों से दिल से माफी मांगता हूं, जिन्होंने हमारी नेशनल टीम का हमेशा बिना शर्त समर्थन किया. मैंने इस जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाने की कोशिश की, लेकिन मैं वो नतीजा नहीं दे सका जिसकी देश को उम्मीद थी. एक हेड कोच के रूप में अंतिम नतीजा ही सबसे मायने रखता है और मैं इसमें असफल रहा, इसी वजह से मैं अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं.'दिग्गज खिलाड़ी से कोच बनने तक का सफर: कैसा रहा होंग का पूरा कार्यकाल?होंग म्युंगबो कोच बनने से पहले साउथ कोरिया के फुटबॉल इतिहास के सबसे दिग्गज और सम्मानित खिलाड़ियों में शुमार रहे हैं. उन्होंने अपने इंटरनेशनल करियर में देश के लिए रिकॉर्ड 136 मैच खेले थे. साल 2009 में उन्होंने अपने कोचिंग करियर की शुरुआत की थी. इससे पहले वह 2013 और 2014 में भी नेशनल टीम के हेड कोच रह चुके हैं. साल 2024 में उन्होंने दूसरी बार साउथ कोरिया की नेशनल टीम की कमान संभाली थी. उनके इस दूसरे कार्यकाल में टीम ने कुल 26 मैच खेले, जिनमें से 15 में टीम को जीत मिली, 6 मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा और 5 मैच ड्रॉ रहे. अपने विदाई संदेश में होंग ने कहा कि भले ही वह कोच का पद छोड़ रहे हैं, लेकिन कोरियाई फुटबॉल के प्रति उनका प्यार कभी कम नहीं होगा और वह एक सच्चे समर्थक के रूप में हमेशा टीम के साथ खड़े रहेंगे.राष्ट्रपति ली जे-म्युंग का फूटा गुस्सा: 'काबिलियत की जगह भाई-भतीजावाद से चुनी गई टीम'साउथ कोरिया के वर्ल्ड कप से इतनी जल्दी बाहर होने पर देश के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर एक बेहद तीखा पोस्ट साझा करते हुए कोच होंग म्युंगबो और टीम मैनेजमेंट को बुरी तरह लताड़ा है. राष्ट्रपति ने टीम सेलेक्शन में पक्षपात और 'भाई-भतीजावाद' को इस शर्मनाक हार की मुख्य वजह बताया है. उन्होंने खेल मंत्रालय की देखरेख में नेशनल टीम के खराब प्रदर्शन और टीम चयन प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने कड़े शब्दों में कहा, 'मैं इस अप्रत्याशित नतीजे से न सिर्फ हैरान हूं, बल्कि पूरी तरह से चकरा गया हूं. उम्मीद थी कि हमारी टीम इस अपेक्षाकृत आसान ग्रुप से आसानी से आगे बढ़ जाएगी. लेकिन एक बार फिर यह साबित हो गया है कि टीम सेलेक्शन से जुड़े फैसले ही सबसे अहम होते हैं. जब काबिलियत के बजाय 'हम बनाम वे' (पक्षपात) को प्राथमिकता दी जाती है और किसी अयोग्य व्यक्ति को लीडर चुन लिया जाता है, तो नतीजा बिल्कुल ऐसा ही साफ और विनाशकारी होता है.' उन्होंने आगे कहा कि ऐसी गलत नियुक्तियों में सार्वजनिक भलाई के बजाय निजी फायदे को प्राथमिकता दी जाती है, इसलिए ऐसे अधिकारियों की जांच करना और उन्हें जवाबदेह ठहराना बेहद जरूरी है.
धन की तिजोरी पर कंगाली का साया! अलमारी के अंदर भूलकर भी न रखें ये 4 चीजें, रूठ जाएंगी लक्ष्मी
घर की सुख-समृद्धि, खुशहाली और आर्थिक उन्नति का सीधा संबंध वास्तु शास्त्र से होता है. वास्तु विज्ञान के सबसे प्रामाणिक ग्रंथ 'विश्वकर्मा प्रकाश' के अनुसार, हमारे घर में पैसा टिकेगा या पानी की तरह बहेगा, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि हमारी अलमारी और तिजोरी की स्थिति कैसी है. अक्सर लोग इंटरनेट पर यह तो खोज लेते हैं कि अलमारी को किस दिशा में रखना शुभ होता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अलमारी के अंदर रखा सामान भी हमारी किस्मत बदल या बिगाड़ सकता है.वास्तु शास्त्र के मुताबिक, अलमारी की सही दिशा जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी उसके अंदर रखी चीजों का सही होना भी है. अगर आपकी धन रखने वाली अलमारी या लॉकर के भीतर कुछ ऐसी चीजें जमा हैं जो वास्तु के लिहाज से वर्जित हैं, तो यह आपके घर की बरकत को पूरी तरह ब्लॉक कर सकती हैं. आइए जानते हैं कि विश्वकर्मा प्रकाश के नियमों के अनुसार अलमारी से तुरंत किन चीजों को बाहर निकाल देना चाहिए.1. फटे-पुराने या बदबूदार कपड़े: धन के देवता कुबेर हो जाते हैं नाराजहममें से कई लोग अनजाने में अलमारी के निचले खानों या तिजोरी के ठीक पास वाले हिस्से में उन कपड़ों को ठूंस देते हैं जो फटे-पुराने हो चुके हैं या जिनसे सीलन की बदबू आती है. 'विश्वकर्मा प्रकाश' ग्रंथ में इस आदत को सबसे बड़ा वास्तु दोष माना गया है. अलमारी या लॉकर के पास फटे-पुराने और गंदे कपड़े रखने से धन के देवता कुबेर और माता लक्ष्मी अत्यंत क्रोधित हो जाती हैं. इसके अलावा, कुछ लोग पहने हुए या बिना धुले कपड़े भी अलमारी में वापस रख देते हैं, जिससे वहां नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) का वास होने लगता है. यह छोटी सी लापरवाही हंसते-खेलते परिवार को भारी कंगाली और पैसों की तंगी की तरफ धकेल सकती है.2. कोर्ट-कचहरी के कागज और पुरानी रद्दी: बढ़ता है कर्ज का बोझजिस स्थान पर आप अपनी गाढ़ी कमाई के नोट और सोने-चांदी के जेवर रखते हैं, वहां कभी भी फालतू की रद्दी या रसीदें जमा न होने दें. आमतौर पर लोग पुराने मेडिकल बिल, बिजली के बिल, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों के दस्तावेज या बंद हो चुके बैंक खातों की पासबुक भी तिजोरी वाले लॉकर में ही भरकर रख देते हैं.वास्तु नियमों के अनुसार, तिजोरी के अंदर केवल साफ-सुथरे, पवित्र और अत्यंत आवश्यक कीमती दस्तावेज (जैसे रजिस्ट्री या सोने के बिल) ही रखने चाहिए. बेकार और विवादित कागजातों को धन के स्थान पर रखने से घर में कर्ज की स्थिति पैदा होने लगती है और आपके बनते हुए काम भी ऐन वक्त पर बिगड़ने लगते हैं.3. टूटा हुआ शीशा या प्लास्टिक के डिब्बे: दरिद्रता को सीधा न्यौतावास्तु शास्त्र के मूलभूत सिद्धांतों के अनुसार, अलमारी के अंदर का वातावरण हमेशा स्वच्छ और सकारात्मक होना चाहिए. यदि आपकी अलमारी के अंदर कोई टूटा हुआ छोटा आईना, प्लास्टिक का चटका हुआ डिब्बा या बंद पड़ी घड़ियां रखी हैं, तो इन्हें आज ही बाहर का रास्ता दिखाएं. कई लोग तिजोरी के कोने में पुरानी टूटी-फूटी चाबियां या चलन से बाहर हो चुके खोटे सिक्के भी संभालकर रख देते हैं. ये तमाम चीजें सीधे तौर पर दरिद्रता और दुर्भाग्य को आमंत्रित करती हैं.4. नुकीली चीजें: रुक जाता है धन का प्रवाह और बढ़ती है कलहअलमारी के उस खास लॉकर या दराज में, जहां नगदी और गहने रखे जाते हैं, वहां भूलकर भी कोई नुकीली या धारदार चीज जैसे कैंची, नेल कटर, सुरक्षा पिन (सेफ्टी पिन) या छोटा चाकू न रखें. वास्तु के अनुसार, नुकीली वस्तुएं धन के प्रवाह (Cash Flow) को काट देती हैं. इसके प्रभाव से परिवार के सदस्यों के बीच हर समय फिजूलखर्ची और पैसों के नुकसान को लेकर बहस और गृह क्लेश होने लगता है.तिजोरी को हमेशा पैसों से भरा रखने के लिए अपनाएं ये आसान उपायअगर आप चाहते हैं कि आपके घर में हमेशा बरकत बनी रहे, तो अलमारी के अंदर कपड़ों की ढेरी को हमेशा सलीके से तह करके व्यवस्थित रखें. वहां कभी भी कबाड़ जैसा माहौल न बनने दें. विश्वकर्मा प्रकाश में सलाह दी गई है कि धन रखने वाले स्थान पर कपूर की गोलियां, लौंग या हल्की खुशबू वाली चीजें अवश्य रखनी चाहिए. इससे वहां हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता रहता है और धन का आगमन बढ़ता है.
सनातन धर्म में किसी भी पूजा-पाठ, यज्ञ या मांगलिक कार्य का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है, जब उसे पूरी विधि-विधान और सही नियमों के साथ संपन्न किया जाए. हिंदू संस्कृति में वैवाहिक जीवन को आध्यात्मिक यात्रा माना गया है, यही वजह है कि गृहस्थ जीवन में पति-पत्नी को एक-दूसरे का पूरक माना जाता है. अक्सर लोग इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान पत्नी को पति के दाईं (Right) तरफ बैठना चाहिए या बाईं (Left) तरफ. शास्त्रों में इस विषय पर बहुत ही स्पष्ट और विस्तार से नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने से ही पूजा सफल मानी जाती है. आइए जानते हैं कि किस कार्य में पत्नी का स्थान कहां होना चाहिए.कब दाईं ओर बैठना है जरूरी? यज्ञ, हवन और संकल्प के नियमवैसे तो शास्त्रों में पत्नी को 'वामांगी' कहा गया है, जिसका अर्थ होता है बाईं ओर रहने वाली. लेकिन जब बात शुभ कार्यों, यज्ञ और अनुष्ठानों की आती है, तो नियम बदल जाते हैं. शास्त्रों के अनुसार, जब भी कोई विवाहित पुरुष कोई धार्मिक अनुष्ठान या देव-कार्य करता है, तो उसकी पत्नी को उसके दाईं ओर बैठना अनिवार्य और शुभ माना गया है.यदि घर में सत्यनारायण भगवान की कथा हो रही हो, कोई यज्ञ, हवन या विशेष पूजन चल रहा हो, तो पत्नी हमेशा पति के दाहिने हिस्से में ही बैठेगी. इसके अलावा निम्नलिखित परिस्थितियों में भी पत्नी का दाईं ओर बैठना शास्त्रों सम्मत है:कन्यादान: विवाह के समय बेटी का कन्यादान करते हुए और पवित्र संकल्प लेते समय.संस्कार और व्रत: संतान के नामकरण संस्कार के दौरान या किसी भी धार्मिक व्रत का उद्यापन करते समय.पितृ कार्य: श्राद्ध, तर्पण और पितरों से जुड़े अनुष्ठानों में.दान और तीर्थ: किसी को दान देते समय, तीर्थ स्नान करते हुए या किसी विशेष पर्व-त्योहार पर पूजा करते समय.कब बाईं ओर होना चाहिए पत्नी का स्थान?शास्त्रों के नियमों के मुताबिक, कुछ विशेष और सांसारिक परिस्थितियों में पत्नी को पति के बाईं (Left) ओर रहने का विधान है. प्रेम, भौतिक सुख और पारिवारिक दायित्वों से जुड़े मामलों में पत्नी का स्थान बाईं तरफ होता है. इन प्रमुख अवसरों पर पत्नी को बाईं ओर होना चाहिए:सिंदूरदान: विवाह के समय सिंदूरदान की रस्म के दौरान.आशीर्वाद लेते समय: पूजा के बाद जब ब्राह्मणों या घर के बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया जा रहा हो.चरण वंदन: बड़ों के पैर धोते समय या उनका सम्मान करते समय.शयन काल: सोते समय पत्नी को हमेशा पति के बाईं ओर ही लेटना चाहिए.इन प्राचीन और सांस्कृतिक नियमों का पालन करने से न केवल पूजा-पाठ का पूरा पुण्य मिलता है, बल्कि वैवाहिक जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आपसी सामंजस्य भी बढ़ता है.
जेब पर सीधा असर: 1 जुलाई से बदल रहे हैं ये 6 बड़े नियम, लापरवाही की तो लगेगा तगड़ा झटका!
नए महीने की शुरुआत के साथ ही आम लोगों के पर्सनल फाइनेंस और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कई नियमों में बड़ा फेरबदल होने जा रहा है. 1 जुलाई 2026 से टैक्स फाइलिंग, आइडेंटिटी कार्ड्स, क्रेडिट कार्ड बेनिफिट्स और बैंकिंग सिक्योरिटी से जुड़े 6 महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो रहे हैं. इन नए नियमों का सीधा असर आपकी जेब और बैंक अकाउंट पर पड़ेगा. अगर आप समय रहते सतर्क नहीं हुए, तो आपको वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. आइए एक्सपर्ट रिपोर्टर की नजर से जानते हैं कि अगले महीने से क्या-क्या बदलने जा रहा है और आपको किन बातों का विशेष ध्यान रखना है.ITR फाइलिंग की उल्टी गिनती शुरू: 31 जुलाई के बाद लगेगा भारी जुर्मानाटैक्सपेयर्स के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 तय की गई है. अगर आप इस अंतिम तिथि से चूक जाते हैं, तो न सिर्फ आपको ₹5,000 तक का भारी जुर्माना (लेट फीस) देना होगा, बल्कि आप अपनी पसंद का टैक्स रिजीम (Tax Regime) चुनने का मौका भी गंवा सकते हैं. इसके साथ ही, देरी से रिटर्न भरने पर चालू वर्ष के बिजनेस या कैपिटल लॉस (वित्तीय नुकसान) को अगले वर्षों के लिए कैरी फॉरवर्ड करने की सुविधा भी छिन जाएगी. इसलिए आखिरी दिनों की तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए तुरंत अपना आईटीआर फाइल करें.आधार कार्ड यूजर्स के लिए खुशखबरी: ईमेल आईडी अपडेट कराना हुआ बिल्कुल मुफ्तभारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आम नागरिकों को एक बड़ी राहत दी है. 1 जुलाई से लेकर 31 दिसंबर 2026 तक यानी पूरे छह महीनों के लिए आधार मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए अपनी रजिस्टर्ड ईमेल आईडी को अपडेट कराना पूरी तरह निशुल्क (फ्री) कर दिया गया है. इससे पहले इस जरूरी डिजिटल सेवा का लाभ उठाने के लिए यूजर्स को ₹75 का शुल्क देना पड़ता था. ऑनलाइन सुरक्षा और फ्रॉड से बचने के लिए अपने आधार में चालू ईमेल आईडी लिंक रखना बेहद जरूरी है, ऐसे में इस सीमित समय के ऑफर का फायदा उठाकर आप बिना कोई पैसा खर्च किए अपना डेटा अपडेट कर सकते हैं.क्रेडिट कार्ड पर लगाम: SBI और HDFC बैंक ने बदले रिवॉर्ड्स और लाउंज एक्सेस के नियमक्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले शौकीनों के लिए झटका देने वाली खबर है. 1 जुलाई 2026 से PhonePe SBI क्रेडिट कार्ड पर्पल और PhonePe SBI क्रेडिट कार्ड सेलेक्ट ब्लैक के रिवॉर्ड पॉइंट सिस्टम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब इन कार्ड्स पर मिलने वाले मंथली रिवॉर्ड पॉइंट्स की एक अधिकतम सीमा (कैपिंग) तय कर दी गई है, साथ ही इंश्योरेंस और कुछ अन्य ट्रांजैक्शंस पर मिलने वाले पॉइंट्स को बंद या सीमित कर दिया गया है.दूसरी तरफ, HDFC बैंक ने भी अपने चुनिंदा प्रीमियम क्रेडिट कार्ड्स जैसे रेगुलीया गोल्ड पर मिलने वाले मुफ्त घरेलू एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस के नियमों को और सख्त कर दिया है. अब ग्राहकों को किसी तिमाही में फ्री लाउंज का फायदा तभी मिलेगा, जब उन्होंने उसकी ठीक पिछली तिमाही में न्यूनतम ₹60,000 का खर्च किया हो. यानी जुलाई-सितंबर तिमाही में एयरपोर्ट लाउंज का आनंद लेने के लिए अप्रैल-जून के दौरान ₹60k की स्पेंडिंग लिमिट पूरी होना अनिवार्य है.अंतरराष्ट्रीय यात्रा होगी महंगी: 14 साल बाद बढ़ने जा रही है पासपोर्ट की फीसअगर आप विदेश घूमने या पढ़ाई के लिए नया पासपोर्ट बनवाने की सोच रहे हैं, तो आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है. विदेश मंत्रालय ने लगभग 14 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पासपोर्ट (संशोधन) नियम 2026 के तहत सामान्य (Normal) और तत्काल (Tatkaal) दोनों श्रेणियों की फीस में भारी बढ़ोतरी का फैसला किया है. 1 जुलाई से देश और विदेश दोनों जगह नए संशोधित रेट्स लागू हो जाएंगे. इसके तहत साधारण 36 पेज के नए पासपोर्ट की फीस ₹1,500 से बढ़कर ₹2,500 होने जा रही है, जबकि तत्काल सेवा के लिए अब ₹3,500 की जगह ₹5,000 चुकाने होंगे.बैंकिंग सेक्टर में बड़ा सुधार: मिस-सेलिंग पर बैंकों को देना होगा पूरा रिफंड और मुआवजाबैंक ग्राहकों को वित्तीय धोखाधड़ी और धोखेबाजी से बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 1 जुलाई 2026 से एक बेहद कड़ा और नया एंटी-मिस-सेलिंग फ्रेमवर्क लागू करने जा रहा है. अक्सर देखा जाता है कि बैंक कर्मचारी अपने टारगेट पूरे करने के लिए ग्राहकों को गलत या अधूरी जानकारी देकर बीमा पॉलिसी या अन्य इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स बेच देते हैं. नए नियमों के अनुसार, यदि किसी ग्राहक के साथ ऐसी 'मिस-सेलिंग' साबित होती है, तो संबंधित बैंक को न केवल ग्राहक की पूरी मूल राशि वापस (Full Refund) करनी होगी, बल्कि इस दौरान ग्राहक को हुए किसी भी प्रकार के वित्तीय नुकसान की पूरी भरपाई (मुआवजा) भी करनी होगी. इसके अलावा, बैंक अब सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे के तय दायरे के बाहर कोई भी प्रमोशनल या सेल्स कॉल नहीं कर सकेंगे.
जयपुर के अरावली पैलेस में दीवार गिरी, 3 की मौत, ठेकेदार पर FIR दर्ज
Jaipur Aravali Palace Wall Collapse: जयपुर ग्रामीण के आमेर थाना क्षेत्र स्थित 'अरावली पैलेस' (तालामोड़) रिसॉर्ट में हुए दर्दनाक हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़ गई है। मलबे को हटाने के लिए रात-दिन जारी युद्धस्तर के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बचाव दल ...
हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत और वादियों से घिरी कांगड़ा घाटी में एक ऐसा ऐतिहासिक चमत्कार छिपा है, जिसे देखकर आधुनिक इंजीनियर भी दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं. हम बात कर रहे हैं 'मसरूर रॉक कट मंदिर' की, जिसे उत्तर भारत का 'एलोरा' भी कहा जाता है. आम तौर पर दुनिया भर के मंदिर ईंट, सीमेंट और पत्थरों को आपस में जोड़कर ऊंचे खड़े किए जाते हैं, लेकिन मसरूर मंदिर के निर्माण की कहानी बिल्कुल जुदा और हैरान करने वाली है.यह उत्तर भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें कहीं भी कोई जोड़ नहीं है. एक बहुत विशाल बलुआ पत्थर (सैंडस्टोन) की पूरी पहाड़ी को ऊपर से नीचे की तरफ तराशते हुए इस भव्य मंदिर का आकार दिया गया है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के दस्तावेजों और मशहूर इतिहासकार एच. शटलवर्थ के शोध में भी इस प्राचीन कलाकृति को भारतीय वास्तुकला का सबसे बेजोड़ और दुर्लभ नमूना माना गया है.इतिहास और लोककथाओं का अनोखा संगम: राजा जशपाल या पांडवों का अज्ञातवास?इस मंदिर के इतिहास को लेकर दो बेहद दिलचस्प कहानियां प्रचलित हैं. जहां एक तरफ इतिहासकारों का एक बड़ा वर्ग यह मानता है कि इस अद्भुत परिसर का निर्माण 8वीं शताब्दी में राजा जशपाल के शासनकाल के दौरान हुआ था, वहीं दूसरी तरफ कांगड़ा के स्थानीय समाज में सदियों से एक अलग ही मान्यता चली आ रही है. स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, द्वापर युग में जब पांडव अपना अज्ञातवास काट रहे थे, तब उन्होंने इस बेहद दुर्गम और शांत जगह पर इस मंदिर का निर्माण शुरू किया था.कहा जाता है कि समय की कमी के कारण पांडव इस पूरे मंदिर परिसर का निर्माण कार्य पूरा नहीं कर सके. आज भी यदि आप मसरूर मंदिर के दर्शन करने जाएंगे, तो आपको कई हिस्सों में अधूरी नक्काशी और अधूरा काम साफ तौर पर देखने को मिल जाएगा, जो इस ऐतिहासिक स्थल के रहस्य को और ज्यादा गहरा कर देता है.15 मंदिरों का जादुई समूह और अजंता-एलोरा जैसी बेजोड़ नक्काशीअगर बात इस मंदिर की बनावट और वास्तुकला की करें, तो पूरा परिसर किसी प्राचीन नगरी जैसा प्रतीत होता है. इस रॉक-कट परिसर में छोटे-बड़े कुल 15 मंदिरों का एक समूह है, जिसके केंद्र में मुख्य और सबसे बड़ा मंदिर स्थित है. इस मुख्य गर्भगृह के भीतर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम, लक्ष्मण और माता सीता की अत्यंत सुंदर और प्राचीन मूर्तियां विराजमान हैं.इतिहास के पन्नों को खंगालने पर पता चलता है कि मसरूर मंदिर के खंभों और दीवारों पर की गई महीन नक्काशी काफी हद तक महाराष्ट्र की विश्वप्रसिद्ध अजंता और एलोरा की गुफाओं से मेल खाती है. पहाड़ों और जंगलों के बीच सदियों तक छिपे रहने के बावजूद, देश-विदेश से आने वाले इतिहासकार और कला प्रेमी इसे भारत की सबसे अनमोल सांस्कृतिक धरोहरों में से एक मानते हैं.मसरूर झील का जादू: पानी में तैरता पत्थरों का इतिहासमसरूर रॉक कट मंदिर की खूबसूरती को जो चीज सबसे ज्यादा जादुई और जीवंत बनाती है, वह है इसके ठीक सामने स्थित एक विशाल और ऐतिहासिक तालाब, जिसे स्थानीय लोग मसरूर झील के नाम से पुकारते हैं. दिन के समय जब आसमान साफ होता है और सूरज की तेज किरणें इन प्राचीन नक्काशीदार पत्थरों पर पड़ती हैं, तो इस पूरे विशालकाय मंदिर की एक अद्भुत परछाई सामने वाले शांत पानी में तैरती हुई दिखाई देती है.झील के पवित्र और निश्चल पानी के भीतर मंदिर के ऊंचे शिखरों के इस उल्टे प्रतिबिंब को देखना सैलानियों के लिए किसी दैवीय और जादुई अहसास से कम नहीं होता. देश-दुनिया से आने वाले पर्यटक यहां घंटों बैठकर इस अलौकिक और सुकून देने वाले नजारे को अपनी यादों में समेटते हैं.1905 का भयंकर कांगड़ा भूकंप भी नहीं हिला पाया जिसकी नींवसाल 1905 में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा क्षेत्र में एक विनाशकारी और भीषण भूकंप आया था, जिसने पूरे इलाके में भारी तबाही मचाई थी. इस प्राकृतिक आपदा ने मसरूर की इस ऐतिहासिक धरोहर को भी थोड़ा-बहुत नुकसान पहुंचाया था, जिसके निशान आज भी देखे जा सकते हैं. लेकिन चमत्कार की बात यह रही कि मंदिर का मुख्य गर्भगृह और इसका केंद्रीय हिस्सा इस भीषण झटके के बाद भी पूरी तरह सुरक्षित बच गया.आज सदियों बाद भी यह जादुई रॉक-कट मंदिर अपनी पूरी मजबूती और भव्यता के साथ सीना ताने शान से खड़ा है. यदि आप भी देवभूमि हिमाचल प्रदेश की यात्रा का मन बना रहे हैं, तो कांगड़ा के इस प्राचीन और रहस्यमयी अजूबे को अपनी लिस्ट में शामिल करना बिल्कुल न भूलें. पत्थरों को काटकर लिखा गया यह इतिहास हमें याद दिलाता है कि हमारे पूर्वजों के पास विज्ञान, सोच और कला का कितना अद्भुत भंडार था.
जयेष्ठ पूर्णिमा पर होने वाली अमरनाथ यात्रा की प्रथम पूजा को इस बार भी पवित्र गुफा में आयोजित किया गया। 3 जुलाई से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा से पहले सोमवार को पवित्र में प्रथम पूजा की गई। जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल (एलजी) मनोज सिन्हा ने सबसे पहले ...
पश्चिम बंगाल विधानसभा में दो महत्वपूर्ण ओबीसी आरक्षण विधेयक पारित, टीएमसी काल की ओबीसी सूची रद्द
पश्चिम बंगाल में सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण से संबंधित दो महत्वपूर्ण विधेयक सोमवार को विधानसभा में ध्वनि मत से पारित हो गए। इसके साथ ही, राज्य सरकार के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की पिछली सरकार के दौरान तैयार की गई ओबीसी सूची को रद्द करने का रास्ता साफ हो गया है।
पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस में बड़ा खुलासा। पुलिस के अनुसार सिया गोयल ने शादी की शॉपिंग के नाम पर लिए 1 करोड़ रुपये प्रेमी चेतन चौधरी को दे दिए। हत्या की साजिश और भविष्य की योजना का भी खुलासा।
अकाल तख्त का भगवंत मान सरकार को बड़ा अल्टीमेटम, 1 महीने में बेअदबी कानून बदलने का दिया आदेश
पंजाब की भगवंत मान सरकार के 9 मंत्री और 30 विधायक नंगे पांव श्री अकाल तख्त साहिब पर पहुंचे और बेअदबी कानून पर लिखित में अपना स्पष्टीकरण दिया। अकाल तख्त ने मान सरकार से एक माह में बेअदबी कानून में संशोधन करने को कहा। इस दौरान श्री अकाल तख्त साहिब की ...
कौन हैं रिटायर्ड IAS योगेश्वर राम मिश्रा, जो हो सकते हैं राम मंदिर के CEO?
who is IAS Yogeshwar Ram Mishra: अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक फेरबदल और पारदर्शिता लाने की तैयारी चल रही है। एसआईटी (SIT) की जांच रिपोर्ट और संस्तुतियों के बाद ...
मध्यप्रदेश कांग्रेस में दिग्विजय सिंह बनाम जीतू पटवारी की सियासी जंग, जमीन पर खुलकर आई गुटबाजी
मध्यप्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर बड़े नेताओं के बीच की गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। इस बार विवाद वीर भारत न्यास को लेकर है, जहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा लगाए गए आरोपों को पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ...
चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी
Ayodhya Ram Mandir theft: राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी मामले में एक बड़ा और अभूतपूर्व मोड़ आया है। अयोध्या बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि राम मंदिर से जुड़े इस चोरी के मामले में पकड़े गए आरोपियों की पैरवी अयोध्या का कोई भी ...
पुणे कोर्ट का बड़ा फैसला: मासूम से दरिंदगी और हत्या के दोषी भीमराव कांबले को फांसी
नसरापुर में साढ़े तीन साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी बेरहमी से हत्या करने के मामले में पुणे की विशेष अदालत ने आरोपी भीमराव कांबले को भारतीय न्याय संहिता (BJS) और पॉक्सो (POCSO) कानून की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा ...
अरुणाचल के आदिवासी समुदाय का बड़ा दावा, कहा- भारत की जमीन पर चीन ने किया कब्जा
अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में नाह आदिवासी समुदाय ने चीन पर भारतीय जमीन पर अतिक्रमण का आरोप लगाया है। प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।
21 राज्यों में बारिश-तूफान, दिल्ली में 4 जुलाई तक मानसून की दस्तक, यहां लू का अलर्ट
Weather Updates 29 June : मौसम विभाग ने मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र समेत 21 राज्यों में आंधी-बारिश और तूफान का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कई स्थानों पर 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और ...
सरोगेसी पर मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, इस वर्ष की महिला मानी जाएगी पात्र
मद्रास हाई कोर्ट ने कहा है कि 50 वर्ष की महिला, जब तक वह 51 वर्ष की नहीं हो जाती, सरोगेसी के लिए पात्र मानी जाएगी। कोर्ट ने निचली अदालत का आदेश रद्द करते हुए सरोगेसी कानून की उद्देश्यपरक व्याख्या पर जोर दिया।
एक्शन में झारखंड सीएम हेमंत सोरेन, जल्द लौटेंगे तमिलनाडु में फंसे मजदूर
तमिलनाडु के एक औद्योगिक प्रतिष्ठान में अमोनिया गैस रिसाव की घटना में झारखंड के एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि 2 अन्य श्रमिकों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मजदूरों की गुहार पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों ...
राम मंदिर चढ़ावा विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, याचिका में सीबीआई जांच की मांग
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। CBI जांच की मांग वाली याचिका पर 12 जुलाई के बाद सुनवाई होगी। पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी तेज कर दी है।
जिम्स प्रशासन की कर्मचारियों से अपील, कहा- मरीजों के हित में काम पर लौटें, मांगों पर बनेगी समिति
राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स), ग्रेटर नोएडा के प्रशासन ने पिछले 15 दिनों से आंदोलनरत कर्मचारियों से तत्काल कार्य पर लौटने की भावुक अपील की है। प्रशासन ने कहा है कि कर्मचारियों की अधिकांश मांगों के प्रति वह पूरी सहानुभूति रखता है और जिन मुद्दों का समाधान संस्थान स्तर पर संभव होगा, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। वहीं शासन स्तर से जुड़े विषयों को तत्काल कार्रवाई के लिए सरकार को भेजा जाएगा।
राजस्थान में अपराधियों और गैंगस्टरों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष धरपकड़ अभियान के तहत पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। राजस्थान पुलिस की स्पेशल टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए लंबे समय से फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी और कुख्यात हिस्ट्रीशीटर अनिल उर्फ लीला को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने शातिर बदमाश के पास से अवैध हथियार भी बरामद किए हैं। इस हार्डकोर अपराधी की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली है, क्योंकि यह बदमाश इलाके में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में घूम रहा था।गुप्त सूचना पर पुलिस ने बिछाया जाल, घेराबंदी कर दबोचास्थानीय पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस की स्पेशल इनपुट टीम को मुखबिर से इस बात की पुख्ता जानकारी मिली थी कि इनामी बदमाश अनिल उर्फ लीला अवैध हथियारों की खेप के साथ इलाके में देखा गया है। सूचना मिलते ही थाना अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष कमांडो टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने बिना वक्त गंवाए संदिग्ध ठिकाने पर अचानक दबिश दी। पुलिस को देखकर हिस्ट्रीशीटर ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने चारों तरफ से घेराबंदी करते हुए उसे मौके पर ही दबोच लिया और उसकी एक न चलने दी।तलाशी में मिली देशी पिस्टल और जिंदा कारतूस, खंगाला जा रहा है क्रिमिनल रिकॉर्डगिरफ्तारी के बाद जब पुलिस टीम ने अनिल उर्फ लीला की गहनता से तलाशी ली, तो उसके पास से एक अवैध देशी पिस्टल और चार जिंदा कारतूस बरामद हुए। पुलिस ने हथियारों को तुरंत जब्त कर आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत एक नया मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पकड़ा गया बदमाश अनिल एक आदतन अपराधी है और उसके खिलाफ पहले से ही हत्या का प्रयास, रंगदारी, लूट, डकैती और अवैध हथियार तस्करी जैसे दर्जनों गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। लंबे समय से कानून की नजरों से बचकर भाग रहे इस अपराधी पर पुलिस मुख्यालय ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।गैंग के नेटवर्क और मददगारों का पर्दाफाश करेगी पुलिसहिस्ट्रीशीटर अनिल उर्फ लीला की इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसे कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान राज्य में सक्रिय अन्य बड़े गैंगस्टरों, हथियारों के सप्लायरों और उसे फरारी काटने में मदद करने वाले स्थानीय सफेदपोश मददगारों के नामों का खुलासा हो सकता है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अपराधियों के बारे में बिना डरे पुलिस को सूचित करें, उनका नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा।
मरुधरा के लोगों को भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप से जल्द ही बड़ी राहत मिलने वाली है। राजस्थान में मानसून का इंतजार अब खत्म होने की कगार पर है और मानसूनी हवाएं तेजी से आगे बढ़ते हुए प्रदेश की सीमा के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं। मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) से मिली ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के कई हिस्सों में प्री-मानसून की गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं, जिससे पारे में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि आगामी 2 जुलाई से राजस्थान में मानसूनी सिस्टम पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा, जिसके बाद प्रदेश के कई जिलों में मूसलाधार और भारी बारिश का नया दौर शुरू होने का अनुमान है।इन जिलों में मौसम विभाग का अलर्ट, बादलों की आवाजाही तेजमौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, मानसून की पहली जोरदार दस्तक पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान के रास्ते होने जा रही है। कोटा, उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, झालावाड़, और बारां जिलों में 2 जुलाई से भारी से अति भारी बारिश होने की प्रबल संभावना जताई गई है। इन इलाकों के लिए मौसम केंद्र ने विशेष चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही राजधानी जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा और टोंक सहित आसपास के मैदानी इलाकों में भी आसमान में घने बादलों की आवाजाही शुरू हो गई है, जिससे उमस भरी गर्मी से परेशान स्थानीय निवासियों को ठंडी हवाओं का अहसास होने लगा है।पश्चिमी राजस्थान को थोड़ा और इंतजार, जोधपुर और बीकानेर में कब बरसेंगे बादलजहां एक तरफ पूर्वी राजस्थान में मानसून झमाझम बरसने के लिए तैयार है, वहीं पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती जिलों यानी जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर, और जैसलमेर में रहने वाले लोगों को मानसून की मुख्य धारा के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इन रेतीले इलाकों में स्थानीय चक्रवाती सिस्टम और अरब सागर से आ रही नमी के कारण धूलभरी आंधी के साथ हल्की छितराई बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का सिलसिला जारी रहेगा, जिससे तापमान नियंत्रण में रहेगा।किसानों के चेहरे खिले, खरीफ की फसलों के लिए अमृत बनेगी यह बारिशराजस्थान में मानसून के इस सक्रिय दौर की खबर आते ही प्रदेश के अन्नदाताओं (किसानों) के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं। ग्रामीण इलाकों में किसान खेतों को तैयार करने और खरीफ की मुख्य फसलों जैसे बाजरा, मक्का, ग्वार और मूंग की बुवाई के काम में तेजी से जुट गए हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के पहले हफ्ते में होने वाली यह बारिश फसलों के लिए अमृत का काम करेगी। प्रशासन ने भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए जलभराव वाले निचले इलाकों और नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जल स्रोतों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है।
राजस्थान के शेखावाटी अंचल और आसपास के प्यासे इलाकों के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। पिछले तीन दशकों यानी 30 साल से फाइलों में दबे पड़े बहुप्रतीक्षित यमुना जल समझौते को लेकर आज देश की राजधानी दिल्ली में एक बेहद महत्वपूर्ण सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। इस ऐतिहासिक कदम के साथ ही राजस्थान के चूरू, झुंझुनूं और सीकर जैसे जिलों के करोड़ों लोगों का दशकों पुराना सपना सच होने की राह आसान हो गई है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की मौजूदगी में होने वाली इस हाई-प्रोफाइल बैठक और एमओयू के बाद शेखावाटी की सूखी धरती को यमुना के पानी से सींचने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।तीन दशकों का लंबा इंतजार और कानूनी अड़चनें हुईं दूरगौरतलब है कि साल 1994 में राज्यों के बीच यमुना नदी के पानी के बंटवारे को लेकर एक शुरुआती समझौता हुआ था, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी, रूट के चयन और राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया था। राजस्थान के हिस्से का पानी हरियाणा से होकर आना था, जिसे लेकर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय तक तकनीकी और कानूनी खींचतान चलती रही। अब केंद्र सरकार की मध्यस्थता और दोनों राज्यों के प्रशासनिक अधिकारियों की लगातार बैठकों के बाद सभी विवादित बिंदुओं को सुलझा लिया गया है, जिसके बाद आज इस अंतिम एमओयू पर अंतिम मुहर लग रही है।शेखावाटी के इन जिलों को मिलेगा पीने और सिंचाई का भरपूर पानीइस महत्वाकांक्षी यमुना जल परियोजना के धरातल पर उतरने से सबसे बड़ा फायदा राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र को मिलेगा। चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों में भूमिगत जल स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा चुका है और कई इलाके डार्क जोन में तब्दील हो चुके हैं। इस प्रोजेक्ट के जरिए पाइपलाइन और नहरों का एक विशाल नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे न केवल इन जिलों के लाखों घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचेगा, बल्कि कृषि प्रधान इस इलाके के किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए भी पर्याप्त पानी मिल सकेगा। इससे क्षेत्र में खेती-किसानी और समृद्धि के एक नए युग की शुरुआत होगी।दिल्ली में होने वाली इस बैठक पर पूरे राजस्थान की निगाहेंआज दिल्ली में आयोजित होने जा रहे इस एमओयू कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, राजस्थान के मुख्यमंत्री और हरियाणा के मुख्यमंत्री समेत दोनों राज्यों के जल संसाधन विभागों के आला अधिकारी शामिल हो रहे हैं। इस समझौते के तुरंत बाद प्रोजेक्ट के बजट आवंटन, सर्वे और निर्माण कार्य की समयसीमा तय की जाएगी। जनप्रतियोगियों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह सिर्फ पानी का समझौता नहीं है, बल्कि यह शेखावाटी की लाइफलाइन साबित होने वाला प्रोजेक्ट है। अब देखना यह होगा कि इस एमओयू के बाद धरातल पर काम कितनी तेजी से शुरू होता है।
अगर आप आगामी 2 जुलाई को अमृतसर के श्री गुरु रामदास जी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने वाले हैं या किसी को रिसीव करने जा रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। 2 जुलाई को अमृतसर और आसपास के रास्तों पर भारी ट्रैफिक जाम और संगतों की भारी भीड़ देखने को मिल सकती है। धार्मिक मान्यता के केंद्र बाबा जवंद सिंह जी की सालाना बरसी के उपलक्ष्य में देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु अमृतसर पहुंचने वाले हैं। इस विशाल धार्मिक समागम के मद्देनजर एयरपोर्ट अथॉरिटी और स्थानीय ट्रैफिक पुलिस ने यात्रियों के लिए एक बेहद जरूरी ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है।बाबा जवंद सिंह जी की बरसी पर उमड़ेगा आस्था का सैलाबधार्मिक गुरु बाबा जवंद सिंह जी की याद में आयोजित होने वाले इस सालाना समागम में हिस्सा लेने के लिए पंजाब के विभिन्न जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों और विदेशों से भी लाखों की संगत अमृतसर पहुंचती है। 2 जुलाई को मुख्य मार्ग और एयरपोर्ट रोड के आसपास संगतों के काफिले, गाड़ियों की कतारें और पैदल मार्च निकलने की संभावना है। आस्था के इस बड़े सैलाब के कारण सामान्य यातायात पूरी तरह प्रभावित रहेगा, जिसके चलते एयरपोर्ट की तरफ जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर वाहनों की रफ्तार बेहद धीमी हो सकती है।एयरपोर्ट अथॉरिटी की सलाह: फ्लाइट छूटने के डर से बचने के लिए पहले निकलेंअमृतसर एयरपोर्ट प्रशासन और स्थानीय जिला पुलिस ने यात्रियों से विशेष अपील की है कि वे अपनी निर्धारित फ्लाइट के समय से काफी अतिरिक्त समय लेकर अपने घरों से बाहर निकलें। यदि कोई यात्री ऐन वक्त पर निकलता है, तो रास्ते में होने वाली भारी नाकेबंदी और रूट डायवर्जन के कारण उसकी फ्लाइट छूटने का गंभीर खतरा बना रहेगा। अथॉरिटी ने एयरलाइंस कंपनियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे अपने यात्रियों को मैसेज और ईमेल के जरिए इस जाम और भीड़ की स्थिति के बारे में पहले से सूचित कर दें ताकि किसी को परेशानी न हो।ट्रैफिक पुलिस ने तैयार किया रूट डायवर्जन प्लान, इन रास्तों का करें इस्तेमाललाखों की संगत की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए अमृतसर ट्रैफिक पुलिस ने एयरपोर्ट रोड और समागम स्थल की तरफ जाने वाले रास्तों के लिए एक विशेष रूट डायवर्जन प्लान तैयार किया है। भारी वाहनों और ट्रकों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा, जबकि वीआईपी और सामान्य गाड़ियों को वैकल्पिक लिंक रोड से होकर निकाला जाएगा। स्थानीय प्रशासन ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे गूगल मैप्स और ट्रैफिक पुलिस के सोशल मीडिया हैंडल्स पर लाइव ट्रैफिक अपडेट्स देखकर ही अपने सफर की शुरुआत करें ताकि जाम में फंसने से बचा जा सके।
पंजाब में गर्मी और लू (हीटवेव) के तीखे तेवरों ने आम जनजीवन को पूरी तरह बेहाल कर दिया है। सूबे के कई जिलों में पारा 45.7 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाने से लोगों को दोपहर के वक्त घरों से बाहर निकलना मुहाल हो गया है। इस जानलेवा तपिश और उमस के कारण राज्य में बिजली की मांग ने इतिहास के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में खेतों की सिंचाई और घरों में चल रहे एसी-कूलर के कारण पावर ग्रिड पर भारी दबाव है। इसी बीच मौसम विभाग की तरफ से आया मानसून का नया अनुमान भी लोगों की चिंता बढ़ाने वाला है, जिससे राहत की उम्मीदें फिलहाल दूर नजर आ रही हैं।रिकॉर्ड तोड़ पारे से तपा पंजाब, लू के थपेड़ों से जनजीवन ठपमौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, पंजाब के बठिंडा, पटियाला, लुधियाना और अमृतसर समेत अधिकांश हिस्से इस वक्त भट्टी की तरह तप रहे हैं। अधिकतम तापमान सामान्य से 5 से 7 डिग्री ऊपर चल रहा है। दोपहर के समय चलने वाली गर्म हवाएं शरीर को झुलसा रही हैं, जिसके कारण सड़कों पर अघोषित कर्फ्यू जैसा नजारा देखने को मिल रहा है। डॉक्टरों ने इस भीषण लू को देखते हुए लोगों को विशेष सावधानी बरतने और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए लगातार तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी है।बिजली की मांग ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, पावर कॉरपोरेशन के फूले हाथ-पांवइस ऐतिहासिक गर्मी का सीधा असर पंजाब के पावर सेक्टर पर पड़ा है। पंजाब राज्य पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के अधिकारियों के मुताबिक, राज्य में बिजली की दैनिक मांग अपने उच्चतम स्तर को पार कर चुकी है। धान की बुवाई का सीजन होने के कारण ग्रामीण अंचलों में कृषि फीडरों को लगातार बिजली देनी पड़ रही है, वहीं शहरी इलाकों में भी लोड बढ़ने से कई सब-स्टेशनों में तकनीकी खामियां आ रही हैं। अघोषित बिजली कटौती (पावर कट) ने इस उमस भरी गर्मी में स्थानीय निवासियों की रातों की नींद उड़ा दी है।मानसून का इंतजार बढ़ा, कब मिलेगी इस चिलचिलाती गर्मी से राहतपंजाब वासियों के लिए सबसे ज्यादा परेशान करने वाली खबर मौसम विभाग के पूर्वानुमान से आ रही है। पहले जहां जून के आखिरी हफ्ते में प्री-मानसून की फुहारों की उम्मीद जताई जा रही थी, वहीं अब पश्चिमी विक्षोभ और मानसूनी हवाओं की सुस्त रफ्तार के कारण यह इंतजार और लंबा हो गया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक पंजाब और आसपास के मैदानी इलाकों को इसी तरह शुष्क और गर्म मौसम का सामना करना पड़ेगा। उमस का ग्राफ बढ़ने से आने वाले दिनों में गर्मी और ज्यादा परेशान कर सकती है।
अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य अमृतसर के श्री गुरु रामदास जी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नौकरी पाने का सपना देख रहा है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। इन दिनों सोशल मीडिया और इंटरनेट पर अमृतसर एयरपोर्ट पर विभिन्न पदों पर सीधी भर्ती को लेकर कई फर्जी विज्ञापन और लेटर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए अमृतसर एयरपोर्ट अथॉरिटी ने एक सख्त एडवाइजरी जारी कर बेरोजगार युवाओं को इन ठगों और फर्जी विज्ञापनों से पूरी तरह सतर्क रहने की अपील की है। अथॉरिटी ने साफ किया है कि कुछ असामाजिक तत्व युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें ठगने की कोशिश कर रहे हैं।पैसे लेकर थमाए जा रहे फर्जी जॉइनिंग लेटरअमृतसर एयरपोर्ट प्रशासन के मुताबिक, उन्हें लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ अज्ञात गिरोह और फर्जी कंसलटेंसी कंपनियां युवाओं को सुरक्षा गार्ड, ग्राउंड स्टाफ, कस्टमर सर्विस और लोडर जैसे पदों पर शत-प्रतिशत नौकरी लगवाने का झांसा दे रही हैं। ये ठग सीधे-साधे युवाओं से रजिस्ट्रेशन फीस, मेडिकल चेकअप और यूनिफॉर्म के नाम पर मोटी रकम वसूल लेते हैं और बाद में उन्हें एयरपोर्ट अथॉरिटी के नाम का फर्जी जॉइनिंग लेटर थमा देते हैं। जब पीड़ित युवा नौकरी के लिए एयरपोर्ट पहुंचते हैं, तब उन्हें अपने साथ हुई इस बड़ी धोखाधड़ी का अहसास होता है।एयरपोर्ट अथॉरिटी ने बताया भर्ती का असली और सही तरीकाअमृतसर एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इस भ्रम को दूर करने के लिए आधिकारिक बयान जारी कर भर्ती की सही प्रक्रिया की जानकारी दी है। एडवाइजरी में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) या अमृतसर एयरपोर्ट प्रशासन कभी भी किसी भी पद के लिए सीधे नकद पैसों की मांग नहीं करता है और न ही इसके लिए किसी प्राइवेट एजेंट या बाहरी एजेंसी को अधिकृत किया गया है। एयरपोर्ट पर सभी तरह की सरकारी और अनुबंधित भर्तियां केवल एएआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होने वाले ऑफिशियल नोटिफिकेशन और निर्धारित चयन प्रक्रिया (परीक्षा/इंटरव्यू) के माध्यम से ही की जाती हैं।साइबर ठगों से बचने के लिए इन बातों का रखें विशेष ध्यानप्रशासन ने युवाओं और उनके अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत वेबसाइट, व्हाट्सएप ग्रुप या टेलीग्राम चैनल पर आने वाले जॉब लिंक्स पर भरोसा न करें और न ही अपनी निजी जानकारियां और बैंक डिटेल्स उनके साथ साझा करें। किसी भी विज्ञापन पर यकीन करने से पहले एयरपोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर उसकी सत्यता की जांच जरूर कर लें। इसके साथ ही अथॉरिटी ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति नौकरी के बदले पैसों की मांग करता है, तो तुरंत इसकी शिकायत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम सेल में दर्ज कराएं ताकि इन ठगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।
देश के मैदानी इलाकों में आसमान से बरसती आग और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार चल रही गर्म हवाओं (लू) के थपेड़ों से सबसे ज्यादा परेशानी मासूम स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही थी। बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिलाधिकारी (DM) ने जिले की सभी शैक्षणिक संस्थाओं के लिए नया आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। इस नए निर्देश के तहत प्ले स्कूल, प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा आठवीं तक के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और प्राइवेट स्कूलों को आगामी 30 जून तक पूरी तरह से बंद रखने का फैसला किया गया है।मासूमों की सेहत को देखते हुए प्रशासन ने लिया कड़ा फैसलापिछले कुछ दिनों से तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी और भीषण उमस के कारण स्कूलों में बच्चों के बीमार होने की शिकायतें सामने आ रही थीं। कई इलाकों में बच्चों के चक्कर खाकर गिरने और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के मामले बढ़े थे। अभिभावक संघ और डॉक्टरों की ओर से भी लगातार स्कूल बंद करने या समय बदलने की मांग की जा रही थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए बच्चों को इस जानलेवा गर्मी से बचाने के लिए 30 जून तक के लिए तत्काल प्रभाव से छुट्टी का एलान कर दिया है।सभी बोर्ड के स्कूलों पर लागू होगा नियम, आदेश न मानने पर होगी सख्त कार्रवाईजिला प्रशासन द्वारा जारी यह आदेश किसी एक विशेष बोर्ड के लिए नहीं है, बल्कि यह जिले में संचालित होने वाले सीबीएसई (CBSE), आईसीएसई (ICSE), यूपी बोर्ड और अन्य सभी मान्यता प्राप्त निजी और सरकारी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई भी स्कूल संचालक इस अवधि के दौरान कक्षा 8वीं तक के बच्चों के लिए स्कूल खोलता हुआ पाया गया, तो उसका लाइसेंस रद्द करने के साथ-साथ महामारी एक्ट और अन्य प्रशासनिक धाराओं के तहत सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।बड़ी कक्षाओं के लिए समय में बदलाव, ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प खुलाप्रशासन ने जहां कक्षा 8वीं तक के बच्चों के लिए पूरी तरह से ताला लगा दिया है, वहीं कक्षा 9वीं से 12वीं तक के बड़े विद्यार्थियों के लिए भी विशेष गाइडलाइंस जारी की हैं। यदि इन कक्षाओं का संचालन बहुत जरूरी है, तो उन्हें केवल सुबह की शिफ्ट में ही खोला जा सकेगा और दोपहर की तेज धूप से पहले बच्चों की छुट्टी करनी होगी। इसके साथ ही, कई स्कूलों ने बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए एक बार फिर ऑनलाइन क्लासेस (Online Classes) का विकल्प चुन लिया है ताकि बच्चे घर के सुरक्षित माहौल में रहकर अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
बिहार की राजनीति में एक बार फिर सरकारी बंगले को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी की एनडीए सरकार द्वारा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी बंगला खाली करने के लिए दिया गया अल्टीमेटम आज समाप्त हो रहा है। इस समय सीमा के खत्म होने के साथ ही पटना के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या राबड़ी देवी आज अपना यह सरकारी आवास खाली कर देंगी या फिर आरजेडी और सरकार के बीच इस मुद्दे पर कोई नया कानूनी या राजनीतिक गतिरोध पैदा होगा।सम्राट चौधरी सरकार का सख्त रुख, नियमों का दिया हवालाबिहार के उपमुख्यमंत्री और भवन निर्माण विभाग का जिम्मा संभाल रहे सम्राट चौधरी ने पद संभालते ही साफ कर दिया था कि नियमों के विपरीत जाकर किसी भी नेता को सरकारी संपत्तियों पर काबिज रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का तर्क है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को जीवनभर बंगला देने के पुराने नियम में बदलाव हो चुका है, इसलिए वर्तमान पद या पात्रता के हिसाब से ही आवास आवंटित किए जाएंगे। सरकार की तरफ से राबड़ी देवी को बकाये और आवास आवंटन रद्द होने से जुड़े नोटिस के बाद आज तक का अंतिम अल्टीमेटम दिया गया था, जिससे आरजेडी खेमे में भारी नाराजगी है।आरजेडी का पलटवार: विपक्ष को जानबूझकर परेशान करने का आरोपइस पूरे मामले पर राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ताओं और नेताओं ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरजेडी का कहना है कि राबड़ी देवी सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री नहीं हैं, बल्कि वे बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। विपक्ष का आरोप है कि सम्राट चौधरी और एनडीए सरकार राजनीतिक द्वेष की भावना से काम कर रही है और लालू परिवार को मानसिक रूप से परेशान करने के लिए जानबूझकर ऐसे नोटिस भेजे जा रहे हैं। आरजेडी नेताओं के मुताबिक, नियमों के दायरे में रहकर ही आगे का फैसला लिया जाएगा।पटना के वीवीआईपी जोन में बढ़ेगी प्रशासनिक हलचल?इस अल्टीमेटम की समय सीमा आज खत्म होने की वजह से पटना के वीवीआईपी सुरक्षा वाले 10 सर्कुलर रोड और उसके आसपास के प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ गई है। यदि आज शाम तक बंगला खाली करने की प्रक्रिया शुरू नहीं होती है, तो भवन निर्माण विभाग और जिला प्रशासन की टीम आगामी कानूनी कदम उठाने पर विचार कर सकती है। बिहार की राजनीति में पहले भी रामकृपाल यादव, तेजस्वी यादव और चिराग पासवान के दौर में 'बंगला पॉलिटिक्स' पर जमकर लाठियां और बयान चले हैं, ऐसे में राबड़ी देवी के इस आवास को लेकर होने वाला घटनाक्रम आने वाले दिनों में और दिलचस्प मोड़ ले सकता है।
यूसीसी पर कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी बोले- 'कुछ प्रावधान सकारात्मक पर पूरा बिल पढ़ना बाकी'
कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता विधेयक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने अभी तक बिल को पूरी तरह पढ़ा या देखा नहीं है
भागदौड़ भरी जिंदगी और ऑफिस के वर्क प्रेशर से ब्रेक लेने के लिए लोग अक्सर घूमने का प्लान बनाते हैं। पहले ब्रेक का मतलब सिर्फ 'वेकेशन' होता था, जिसके लिए महीनों पहले से प्लानिंग, भारी-भरकम बजट और लंबी दूरी का सफर तय करना पड़ता था। लेकिन आज के समय में, खासकर वर्किंग प्रोफेशनल्स और युवाओं के बीच एक नया शब्द तेजी से ट्रेंड कर रहा है, जिसे 'स्टेकेशन' (Staycation) कहा जाता है। ट्रैवल इंडस्ट्री में आए इस नए बदलाव ने लोगों के छुट्टियां बिताने के अंदाज को पूरी तरह बदल दिया है। आइए जानते हैं कि यह नया कॉन्सेप्ट क्या है और यह ट्रेडिशनल वेकेशन से कितना अलग और मजेदार है।आखिर क्या है स्टेकेशन और यह वेकेशन से कैसे अलग हैसरल शब्दों में कहें तो 'वेकेशन' (Vacation) का मतलब होता है अपने शहर या देश से दूर किसी नए डेस्टिनेशन पर जाकर छुट्टियां बिताना, जिसमें फ्लाइट-ट्रेन की बुकिंग, होटल और साइटसीइंग शामिल होते हैं। इसके विपरीत, 'स्टेकेशन' दो शब्दों 'स्टे' (Stay) और 'वेकेशन' (Vacation) से मिलकर बना है। इसका मतलब है कि आप अपने ही शहर या उसके आसपास के किसी खूबसूरत रिजॉर्ट, बुटीक होटल या होमस्टे में रुकते हैं। इसमें आपको लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ती, बल्कि आप एक ही जगह रहकर आराम करते हैं, अच्छा खाना खाते हैं, पूल साइड वक्त बिताते हैं और खुद को रीचार्ज करते हैं।भागदौड़ से दूर सुकून की तलाश: क्यों युवाओं को भा रहा है यह कॉन्सेप्टआज की युवा पीढ़ी यानी जेन-जी (Gen-Z) और मिलेनियल्स के बीच स्टेकेशन का क्रेज बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है 'नो ट्रैवल फैटीग' यानी सफर की थकान से आजादी। वीकेंड पर बिना किसी लंबी प्लानिंग के बस बैग पैक किया और शहर के ही किसी शांत कोने में चले गए। इसके अलावा, कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले युवाओं के लिए यह मानसिक शांति (Mental Peace) पाने का सबसे बेस्ट तरीका बन गया है। यहां न तो आपको सुबह जल्दी उठकर टूरिस्ट स्पॉट्स पर भागने की जल्दी होती है और न ही कैब बुक करने की झंझट। बस आराम से सोचना, किताबें पढ़ना या स्पा का आनंद लेना ही इसका मुख्य उद्देश्य होता है।जेब पर नहीं पड़ता भारी: बजट और समय दोनों की बड़ी बचतट्रेडीशनल वेकेशन पर जाने का मतलब है जेब पर एक बड़ा आर्थिक बोझ, लेकिन स्टेकेशन पूरी तरह से बजट फ्रेंडली होता है। चूंकि इसमें महंगे हवाई टिकट या लंबी दूरी के सफर का खर्च शून्य हो जाता है, इसलिए पूरा पैसा सिर्फ एक अच्छे लग्जरी स्टे और लजीज व्यंजनों पर खर्च होता है। समय की कमी से जूझ रहे लोग, जिन्हें ऑफिस से लंबी छुट्टियां नहीं मिलतीं, वे शनिवार और रविवार के 2 दिनों का इस्तेमाल करके एक बेहतरीन स्टेकेशन प्लान कर लेते हैं। सोमवार को वे बिना किसी ट्रैवल हैंगओवर या थकान के बिल्कुल फ्रेश माइंड के साथ दोबारा अपने काम पर लौट आते हैं।डिजिटल डिटॉक्स और वर्कवेकेशन का भी मिल जाता है मौकाआजकल कई युवा स्टेकेशन का इस्तेमाल 'डिजिटल डिटॉक्स' के लिए कर रहे हैं, जहां वे कुछ समय के लिए सोशल मीडिया और गैजेट्स से दूरी बना लेते हैं। वहीं दूसरी ओर, 'वर्क फ्रॉम एनीव्हेयर' करने वाले लोगों के लिए यह 'वर्कवेकेशन' का रूप ले चुका है, जहां वे शहर के किसी आलीशान होटल के शांत माहौल में बैठकर अपना काम भी निपटाते हैं और शाम को वेकेशन का मजा भी लेते हैं। यही वजह है कि होमस्टे, लग्जरी विला और नेचर रिजॉर्ट्स अब युवाओं की पसंद को ध्यान में रखकर विशेष स्टेकेशन पैकेज ऑफर कर रहे हैं।
राम मंदिर: सात्विकता, सुशासन और सनातन की अग्निपरीक्षा
अयोध्या धाम में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर का निर्माण केवल शिल्पकला का दर्शन नहीं, बल्कि करोड़ों सनातनियों की सदियों पुरानी अगाध आस्था, तप और संकल्प की पूर्णाहुति है। इस पावन काज में देश-विदेश के रामभक्तों ने अपनी गाढ़ी कमाई का अंश समर्पित किया ...
LIVE: चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार
Latest News Today Live Updates in Hindi : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जल्द सुनवाई से इनकार किया। पल पल की जानकारी...
झारखंड के एक सरकारी आवासीय विद्यालय (रेसिडेंशियल स्कूल) से बेहद हैरान और विचलित करने वाली खबर सामने आई है। स्कूल के हॉस्टल में रात का खाना खाने के बाद 100 से भी अधिक छात्राओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई। देखते ही देखते छात्राओं को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की गंभीर शिकायतें होने लगीं, जिससे पूरे स्कूल परिसर में कोहराम मच गया। आनन-फानन में बीमार बच्चियों को नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के पहुंचने से डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए और अस्पताल परिसर में भारी अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।रात के खाने के बाद बिगड़ी तबीयत, फूड पॉइजनिंग की आशंकास्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, छात्राओं को रात के भोजन में जो खाना परोसा गया था, उसके कुछ ही देर बाद बच्चियों ने बेचैनी की शिकायत की थी। आधी रात बीतते-बीतते एक के बाद एक कई छात्राओं की हालत बेहद नाजुक होने लगी। हॉस्टल प्रबंधन ने स्थिति को बिगड़ता देख तुरंत एम्बुलेंस और स्थानीय वाहनों की मदद से सभी पीड़ित छात्राओं को जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। डॉक्टरों का शुरुआती तौर पर मानना है कि यह सीधे तौर पर फूड पॉइजनिंग (दूषित भोजन) का मामला है, जो उमस और गर्मी के मौसम में खाने की खराबी या साफ-सफाई की कमी की वजह से हो सकता है।अस्पताल में मची चीख-पुकार, प्रशासन और डॉक्टरों की टीम अलर्ट परएक साथ सौ से ज्यादा बच्चियों के अस्पताल पहुंचने के कारण बेड कम पड़ गए, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत एक्शन लेते हुए इमरजेंसी वार्ड में अतिरिक्त बिस्तरों और डॉक्टरों की तैनाती की। कई बच्चियों का इलाज फर्श और स्ट्रेचर पर ही ड्रिप लगाकर शुरू करना पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही जिले के आला प्रशासनिक अधिकारी, उपायुक्त (डीसी) और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने पीड़ित परिजनों को ढांढस बंधाया है और डॉक्टरों को निर्देश दिया है कि बच्चियों के इलाज में किसी भी तरह की कोताही न बरती जाए। राहत की बात यह है कि अधिकांश छात्राओं की स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है।स्कूल की रसोई और राशन की जांच शुरू, दोषियों पर गिरेगी गाजइस गंभीर लापरवाही के बाद झारखंड शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने स्कूल के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। खाद्य सुरक्षा विभाग (फूड सेफ्टी टीम) ने हॉस्टल के किचन से खाने के सैंपल, पीने के पानी और इस्तेमाल किए जा रहे राशन को सील कर जांच के लिए लैब भेज दिया है। अभिभावकों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है; उनका आरोप है कि हॉस्टल में बच्चों को लंबे समय से घटिया क्वालिटी का खाना दिया जा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आते ही हॉस्टल वार्डन, मेस संचालक और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हरियाणा के मुख्यमंत्री के गृह जिले करनाल में रिटायर्ड सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की ओर से अपनी जायज मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया गया है। लंबे समय से प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो रहे बुजुर्ग पेंशनरों ने एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन कर सरकार के खिलाफ अपना रोष प्रकट किया। पेंशनभोगी कल्याण संघ के बैनर तले जुटे इन बुजुर्गों ने साफ शब्दों में कहा कि जीवन भर सरकार और जनता की सेवा करने के बाद भी उन्हें अपने ही हक के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। पेंशनरों ने जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपकर अपनी लंबित मांगों को तुरंत पूरा करने की पुरजोर अपील की है।इन प्रमुख और लंबित मांगों को लेकर अटकी है बातपेंशनरों की बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों और मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। उनकी मुख्य मांगों में छठे और सातवें वेतन आयोग के बकाया एरियर का जल्द से जल्द भुगतान करना, बढ़ती महंगाई को देखते हुए मासिक चिकित्सा भत्ते (मेडिकल अलाउंस) को बढ़ाकर ₹3000 करना और 65, 70 तथा 75 वर्ष की आयु पूरी करने पर मिलने वाली अतिरिक्त पेंशन पेंशनरों के खातों में समय पर ट्रांसफर करना शामिल है। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों को रेलवे टिकटों में मिलने वाली पुरानी रियायत को भी फिर से बहाल करने की मांग तेजी से उठाई गई।बुढ़ापे में सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार पर दिया जोरएसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि बढ़ती उम्र और शारीरिक दिक्कतों के कारण बुजुर्गों का मेडिकल खर्च काफी ज्यादा बढ़ गया है, लेकिन सरकार द्वारा दिया जा रहा मौजूदा चिकित्सा भत्ता ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। उन्होंने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में याद दिलाया कि पेंशन कोई खैरात या दान नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों का कानूनी और सामाजिक अधिकार है। यदि प्रदेश सरकार ने बजट और कैबिनेट बैठकों में उनकी इन जायज मांगों पर तुरंत सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया, तो वे आने वाले दिनों में सड़कों पर उतरकर राज्यव्यापी आंदोलन करने को मजबूर होंगे।करनाल जिला प्रशासन को सौंपा मांग पत्र, मुख्यमंत्री से उम्मीदेंबैठक के समापन के बाद बड़ी संख्या में बुजुर्ग पेंशनर सचिवालय पहुंचे और प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी मांगों का पुलिंदा सौंपा। करनाल के स्थानीय नेताओं और समाजसेवियों ने भी बुजुर्गों की इस मांग का समर्थन किया है। पेंशनरों का कहना है कि करनाल मुख्यमंत्री का मुख्य कार्यक्षेत्र होने के कारण यहां से उठी आवाज का असर सीधे चंडीगढ़ तक होता है, इसलिए उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनके साथ न्याय करेगी। अब देखना यह होगा कि चुनावी साल के इस माहौल में सरकार इन बुजुर्ग वोटरों और वरिष्ठ नागरिकों को खुश करने के लिए क्या कदम उठाती है।
हरियाणा के अंबाला जिले के अधीन आने वाले बराड़ा कस्बे में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक लापता युवक का शव उसके ही पड़ोसी के घर के भीतर बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद किया गया। घटना की सूचना मिलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। मृतक युवक के चेहरे, आंख और कान से लगातार खून बह रहा था, जिसे देखकर परिजनों ने सीधे तौर पर बेरहमी से हत्या किए जाने का आरोप लगाया है। सूचना पाकर मौके पर पहुंची बराड़ा थाना पुलिस और फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम ने मामले की गहनता से तफ्तीश शुरू कर दी है।रात से गायब था युवक, पड़ोसी के कमरे में इस हाल में मिलापारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, मृतक युवक बीते रोज शाम से ही अचानक घर से लापता था। परिजन रातभर उसकी तलाश आसपास के इलाकों और रिश्तेदारों के यहां करते रहे, लेकिन उसका कहीं कोई सुराग नहीं मिला। सुबह जब पड़ोस के ही एक मकान से कुछ संदिग्ध हलचल और अजीब सी गंध आने की बात सामने आई, तो लोगों ने भीतर जाकर देखा। कमरे का नजारा देखते ही सबके होश उड़ गए। गायब युवक वहां फर्श पर बेसुध पड़ा हुआ था। जब पास जाकर देखा गया तो उसकी सांसें थम चुकी थीं और चेहरे पर चोट के गहरे निशान थे।आंख और कान से बहता खून दे रहा बड़ी साजिश का इशाराशव की हालत को देखकर प्रथम दृष्टया यह मामला महज प्राकृतिक मौत या हादसे का नहीं लग रहा है। मृतक की आंख और कान से खून का रिसाव हो रहा था, जो इस बात की तरफ साफ इशारा कर रहा है कि मौत से पहले युवक के साथ गंभीर मारपीट की गई है या उसे कोई जहरीला पदार्थ दिया गया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि पड़ोसी मकान मालिक और उसके करीबियों से तुरंत सख्ती से पूछताछ की जाए, क्योंकि वारदात के बाद से ही कुछ संदिग्ध लोग इलाके से गायब बताए जा रहे हैं।फॉरेंसिक टीम ने जुटाए सुराग, पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी नजरेंघटना की संवेदनशीलता को देखते हुए बराड़ा पुलिस ने तुरंत अंबाला से फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को मौके पर बुलाया। एक्सपर्ट्स ने कमरे के भीतर से उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट्स) और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल भेज दिया गया है। मौत के असली कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है ताकि रात के वक्त मकान में आने-जाने वाले लोगों की पहचान की जा सके।
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में पिछले 24 घंटों के भीतर दो अलग-अलग भीषण सड़क हादसों ने पूरे इलाके को दहला कर रख दिया है। तेज रफ्तार और लापरवाही का शिकार हुए दो युवकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जबकि एक अन्य हादसे में गंभीर रूप से घायल साइकिल सवार पति-पत्नी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। इन हादसों के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। पुलिस ने दोनों मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और फरार वाहन चालकों की तलाश की जा रही है।काल बनकर आया ट्रक, मौके पर ही थमी दो युवकों की सांसेंपहला दिल दहला देने वाला हादसा बेमेतरा के मुख्य मार्ग पर हुआ, जहां अपनी बाइक से घर लौट रहे दो युवकों को सामने से आ रहे एक अनियंत्रित तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और दोनों युवक उछलकर सड़क से दूर जा गिरे। सिर और छाती में गंभीर चोट आने के कारण दोनों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। राहगीरों की सूचना पर पहुंची बेमेतरा थाना पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा। मृतकों की शिनाख्त स्थानीय निवासियों के रूप में हुई है, जिससे उनके परिवारों में मातम पसर गया है।साइकिल सवार दंपती को रौंदा, नाजुक हालत में रायपुर किया गया रेफरअभी पुलिस पहले हादसे की कार्रवाई में जुटी ही थी कि जिले के दूसरे हिस्से से एक और दर्दनाक दुर्घटना की खबर सामने आ गई। एक अधेड़ दंपती अपनी साइकिल से बाजार से लौट रहे थे, तभी एक अज्ञात चार पहिया वाहन ने उन्हें पीछे से बेरहमी से रौंद दिया। हादसे के बाद राहगीरों ने तुरंत एम्बुलेंस बुलाई और घायल पति-पत्नी को बेमेतरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने दोनों की नाजुक हालत, अंदरूनी ब्लीडिंग और मल्टीपल फ्रैक्चर को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए तुरंत रायपुर मेकाहारा (मेडिसीन कॉलेज अस्पताल) रेफर कर दिया है।स्थानीय लोगों में बढ़ा गुस्सा, भारी वाहनों की एंट्री बैन करने की मांगबेमेतरा जिले में लगातार बढ़ते रोड एक्सीडेंट्स को लेकर अब स्थानीय निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि रिहायशी इलाकों और बस्तियों के बीच से गुजरने वाले भारी वाहन तय गति सीमा से कहीं ज्यादा रफ्तार में चलते हैं, जिन पर ट्रैफिक पुलिस का कोई नियंत्रण नहीं है। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पीक आवर्स के दौरान भारी वाहनों की नो-एंट्री कड़ाई से लागू की जाए और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में गति अवरोधक (स्पीड ब्रेकर) और साइन बोर्ड लगाए जाएं ताकि भविष्य में मासूमों की जान बचाई जा सके।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आपातकाल स्मृति दिवस के मौके पर एक गरिमामय और ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल जाने वाले और यातनाएं सहने वाले लोकतंत्र सेनानियों (मीसा बंदियों) को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान आपातकाल के दौर के कड़े संघर्षों और दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले वीर सपूतों की गाथा पर आधारित विशेष पुस्तक 'आपातकाल के योद्धा' का भव्य विमोचन भी किया। इस कार्यक्रम ने एक बार फिर 1975 के उस दौर की यादें ताजा कर दीं जब देश में नागरिक अधिकारों को कुचल दिया गया था।मुख्यमंत्री साय बोले: लोकतंत्र सेनानी हमारे असली नायक हैंसमारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि साल 1975 में लगाया गया आपातकाल स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे काला अध्याय था। उस दौर में जिन लोगों ने बिना डरे तानाशाही के खिलाफ बिगुल फूंका और लोकतंत्र की बहाली के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया, वे हमारे असली नायक हैं। सीएम साय ने जोर देकर कहा कि आज की युवा पीढ़ी को यह जानना बेहद जरूरी है कि हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने के लिए इन योद्धाओं ने कितनी बड़ी कुर्बानियां दी हैं। 'आपातकाल के योद्धा' पुस्तक इसी संघर्ष को जन-जन तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बनेगी।भावुक हुए लोकतंत्र के प्रहरी, साझा किए जेल के वो कठिन दिनसम्मान समारोह के दौरान मंच पर मौजूद कई बुजुर्ग लोकतंत्र सेनानी उस दौर को याद कर भावुक हो उठे। सेनानियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे बिना किसी अपराध के उन्हें महीनों तक काल कोठरी में रखा गया, लेकिन उनके हौसले कभी नहीं डगमगाए। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से आए मीसा बंदियों और उनके परिवारों ने हिस्सा लिया। राज्य सरकार द्वारा दिए गए इस सम्मान और सम्मान निधि के प्रति आभार जताते हुए सेनानियों ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि भारत के संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान है।'आपातकाल के योद्धा' पुस्तक में दर्ज हैं संघर्ष की अनकही कहानियांविमोचित की गई पुस्तक 'आपातकाल के योद्धा' में छत्तीसगढ़ अंचल के उन तमाम आंदोलनकारियों और नेताओं के संस्मरणों को संकलित किया गया है, जिन्होंने आपातकाल का विरोध किया था। इस किताब में तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों, पुलिसिया दमन और भूमिगत रहकर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की अनकही कहानियों को प्रामाणिक दस्तावेजों और तस्वीरों के साथ पेश किया गया है। इतिहासकारों और विश्लेषकों का मानना है कि यह पुस्तक छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास और नागरिक अधिकारों के संघर्ष को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगी।
बस्तर में दिखा बड़ा चमत्कार! सुकमा के मासूम गणेश और सैकड़ों बच्चों को ऐसे मिली कुपोषण से नई जिंदगी
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और धुर अंदरूनी क्षेत्र सुकमा से एक बेहद सुकून देने वाली मानवीय तस्वीर सामने आई है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान' योजना जमीनी स्तर पर बड़ी उम्मीद बनकर रंग ला रही है। इस मुहिम के तहत सुकमा जिले के सुदूर वनांचल गांवों में रहने वाले सैकड़ों कुपोषित और गंभीर रूप से बीमार बच्चों को न सिर्फ नया जीवन मिल रहा है, बल्कि उनके परिवारों के चेहरों पर भी मुस्कान लौट आई है। इसी सफलता की एक जीती-जागती मिसाल बना है नन्हा गणेश, जो कभी बेहद गंभीर कुपोषण की स्थिति में था, लेकिन आज पूरी तरह स्वस्थ होकर खिलखिला रहा है।गंभीर कुपोषण की कगार से सामान्य श्रेणी तक का सफरसुकमा के स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त टीमों ने जब अंदरूनी इलाकों में सर्वे किया, तब मासूम गणेश का वजन उसकी उम्र के हिसाब से बेहद कम था और वह गंभीर कुपोषण (SAM - Severe Acute Malnutrition) से जूझ रहा था। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत एक्टिव हुई मेडिकल टीम ने गणेश को तुरंत चिन्हित किया। इसके बाद उसे नजदीकी पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कराकर विशेष डाइट, जरूरी दवाइयां और चौबीसों घंटे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया। नियमित थेरेपी और पौष्टिक आहार का नतीजा यह रहा कि कुछ ही हफ्तों में गणेश का वजन सामान्य हो गया और वह खतरे से बाहर आ गया।सुदूर वनांचल गांवों तक पहुंच रही हैं चलती-फिरती मेडिकल टीमेंसुकमा जिला प्रशासन और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती इन सुदूर और संवेदनशील इलाकों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना था। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत अंदरूनी हाट-बाजारों और गांवों में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों में बच्चों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं और माताओं के स्वास्थ्य की भी मुफ्त जांच की जा रही है। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के माता-पिता को स्थानीय भाषा में पोषण आहार तैयार करने की ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि बच्चों को घर पर भी सही कैलोरी और प्रोटीन मिल सके।बस्तर के आंगनबाड़ियों और एनआरसी केंद्रों की बदली सूरतइस योजना की सफलता के पीछे सुकमा के स्थानीय प्रशासन, मितानीन बहनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की चौबीसों घंटे की कड़ी मेहनत है। डॉक्टरों का कहना है कि गणेश अकेला ऐसा बच्चा नहीं है; बस्तर संभाग के हजारों बच्चों को इस अभियान के जरिए कुपोषण के जाल से बाहर निकाला गया है। स्वास्थ्य विभाग अब इन बच्चों की नियमित मॉनिटरिंग कर रहा है ताकि वे दोबारा कुपोषण का शिकार न हों। बस्तर के आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य और पोषण के स्तर पर आ रहा यह सकारात्मक बदलाव आने वाले दिनों में जिले की पूरी तस्वीर बदलने की ताकत रखता है।
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल की सियासत में एक बार फिर से भारी सरगर्मी बढ़ गई है। वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली और जौनपुर समेत पूरे इलाके की राजनीतिक गोटियां सेट करने वाले बाहुबली और पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह ने आगामी चुनाव लड़ने का खुला एलान कर दिया है। जेल से बाहर आने के बाद से ही शांत दिख रहे बृजेश सिंह के इस अचानक फैसले ने विपक्षी खेमों में खलबली मचा दी है। पूर्वांचल के बाहुबल और धनबल के समीकरणों में बृजेश सिंह का नाम बेहद खास माना जाता है, ऐसे में उनके चुनावी मैदान में उतरने की खबर से स्थानीय स्तर पर कई बड़े नेताओं के समीकरण बिगड़ना तय माना जा रहा है।पर्दे के पीछे की कहानी: क्या चुन ली है मनपसंद पार्टीबृजेश सिंह के चुनाव लड़ने के आधिकारिक एलान के साथ ही सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि वे किस दल के सिंबल पर चुनावी मैदान में उतरेंगे। हालांकि, उन्होंने अभी तक किसी खास राजनीतिक दल के नाम का खुलकर खुलासा नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं कि सत्तारूढ़ दल या उसके किसी मजबूत सहयोगी दल से उनकी अंदरूनी बातचीत अंतिम दौर में है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बृजेश सिंह हमेशा से परदे के पीछे रहकर सत्ता के करीबी रहे हैं, इसलिए इस बार भी वे किसी मजबूत और जिताऊ समीकरण के साथ ही अपनी नई सियासी पारी की शुरुआत करेंगे।वाराणसी और गाजीपुर के सियासी समीकरणों पर सीधा असरबृजेश सिंह का चुनावी मैदान में उतरना सीधे तौर पर वाराणसी, गाजीपुर और जौनपुर की सीटों पर असर डालेगा। पूर्वांचल में लंबे समय से सिंह परिवार और मुख्तार अंसारी के कुनबे के बीच वर्चस्व की जंग जगजाहिर रही है। मुख्तार अंसारी के निधन के बाद बदले हुए राजनीतिक हालातों में बृजेश सिंह खुद को पूर्वांचल के सबसे बड़े चेहरे के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। स्थानीय मतदाताओं और राजपूत लॉबी के बीच उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए कई छोटे और क्षेत्रीय दल भी उन्हें अपने पाले में लाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।जेल से रिहाई के बाद पहली बार सीधे चुनावी दंगल मेंवाराणसी केंद्रीय कारागार से जमानत पर रिहा होने के बाद बृजेश सिंह काफी समय तक मीडिया और सीधे राजनीतिक बयानों से दूरी बनाए हुए थे। उनके भतीजे सुशील सिंह और परिवार के अन्य सदस्य पहले से ही राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन खुद बृजेश सिंह का सीधे तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला यह साफ करता है कि वे पूर्वांचल की कमान अब पूरी तरह अपने हाथों में लेना चाहते हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में वे किस पार्टी का झंडा थामते हैं और उनके इस कदम का जवाब विरोधी दल किस रणनीति से देते हैं।
पैसे के बंटवारे ने खोला राज! अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी में पवन पांडेय का सबसे बड़ा खुलासा
अयोध्या में रामलला के दरबार से करोड़ों रुपये के चढ़ावे और चंदे की चोरी का मामला इन दिनों देश की सियासत में भूचाल ला चुका है। इस पूरे महाघोटाले को सबसे पहले उजागर करने वाले समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने अब एक और सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने परत-दर-परत उस घटनाक्रम से पर्दा उठाया है कि कैसे सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव तक इस चोरी की खबर सबसे पहले और पुख्ता तरीके से पहुंची। पवन पांडेय के मुताबिक, इस महापाप का भांडाफोड़ किसी जांच से नहीं, बल्कि चोरों के बीच ही पैसे के बंटवारे को लेकर हुई आपस की लड़ाई की वजह से हुआ।जब आपस में ही भिड़ गए चढ़ावा चुराने वालेसपा नेता पवन पांडेय ने अंदरूनी सूत्रों के हवाले से बताया कि राम मंदिर के दानपात्र से करोड़ों रुपये की नगदी और कीमती आभूषणों को गायब करने का खेल काफी समय से सुनियोजित तरीके से चल रहा था। लेकिन इस खेल का अंत तब शुरू हुआ जब चोरी की गई एक बड़ी रकम के मालिकाना हक और हिस्सेदारी को लेकर आरोपियों में आपसी कलह पैदा हो गई। पैसों के बंटवारे को लेकर शुरू हुआ यह विवाद इतना बढ़ गया कि इसकी गूंज मंदिर परिसर से बाहर निकलकर स्थानीय गलियारों तक पहुंच गई।अखिलेश यादव तक ऐसे पहुंची महाघोटाले की सटीक 'इनपुट'पवन पांडेय ने खुलासा किया कि जब आरोपियों के बीच विवाद चरम पर था, तभी कुछ बेहद विश्वसनीय और जमीनी सूत्रों ने इसकी सटीक जानकारी उन तक पहुंचाई। चूंकि यह मामला सीधे तौर पर करोड़ों सनातनी श्रद्धालुओं की आस्था और मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के दरबार से जुड़ा था, इसलिए बिना वक्त गंवाए पूरी रिपोर्ट और सबूतों के इनपुट समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भेजे गए। अखिलेश यादव ने तथ्यों की गंभीरता को देखते हुए इस मुद्दे पर तुरंत स्टैंड लिया और सोशल मीडिया से लेकर हर स्तर पर इस आवाज को बुलंद किया, जिससे पूरे देश में हड़कंप मच गया।एसआईटी जांच और कोर्ट से बड़ी उम्मीदेंइस पूरे चंदा चोरी प्रकरण में अब चौतरफा दबाव के बाद एसआईटी (SIT) की जांच चल रही है और मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ तक भी पहुंच चुका है। विपक्ष का आरोप है कि इतने बड़े स्तर पर हो रही हेराफेरी को दबाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन आपसी फूट ने इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश कर दिया। पवन पांडेय और अखिलेश यादव लगातार इस मामले में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं ताकि भगवान के घर में सेंध लगाने वाले मुख्य साजिशकर्ताओं को बेनकाब किया जा सके।
अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश से मिले दान (चंदा) में सेंधमारी करने वाले गिरोह का जाल लगातार गहराता जा रहा है। राम मंदिर चंदा चोरी मामले में अब दो नए मास्टरमाइंड के नामों का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पुलिस की तफ्तीश और पकड़े गए आरोपियों के बयानों में रत्नेश और गगनदीप नाम के दो शातिर अपराधियों का नाम सामने आया है, जिन्होंने इस पूरी धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए बैक-एंड पर एक बेहद चालाक नेटवर्क तैयार कर रखा था।आरोपियों की जुबानी, नए चेहरों की कहानीइस बड़े घोटाले की परतें तब खुलीं जब पुलिस ने चंदा चोरी के आरोप में कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ के दौरान आरोपियों ने सीधे तौर पर रत्नेश और गगनदीप का नाम उगल दिया। पुलिस के अनुसार, ये दोनों ही इस पूरे रैकेट के असली सूत्रधार हैं, जो सीधे तौर पर बैंक खातों को मैनेज करने और फर्जी रसीदों के जरिए मोटी रकम ठिकाने लगाने का काम देख रहे थे। आरोपियों ने कुबूल किया है कि इन दोनों के इशारे के बिना चंदे की रकम को डायवर्ट करना मुमकिन नहीं था।डिजिटल सेंधमारी और शातिराना खेल का तरीकाजांच में यह बात सामने आई है कि रत्नेश और गगनदीप का काम करने का तरीका बेहद हाईटेक और शातिराना था। ये लोग सीधे तौर पर राम मंदिर ट्रस्ट के नाम से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट्स, फर्जी क्यूआर कोड (QR Codes) और फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। श्रद्धा और आस्था के नाम पर जब भी कोई श्रद्धालु ऑनलाइन चंदा देने की कोशिश करता, तो यह शातिर जोड़ी तकनीक का सहारा लेकर उस पैसे को सीधे अपने फर्जी खातों में ट्रांसफर करवा लेती थी। इसके बाद उस रकम को तुरंत अलग-अलग छोटे खातों में बांट दिया जाता था ताकि किसी को शक न हो।पुलिस की धरपकड़ और आगे की कार्रवाईइन दोनों नए नामों के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस और जांच एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद हो गई हैं। रत्नेश और गगनदीप की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इनके पकड़े जाने के बाद इस बात का भी खुलासा हो सकेगा कि इस चंदा चोरी के खेल में कुल कितने करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई है और इनके तार किन-किन बड़े शहरों या अन्य राज्यों से जुड़े हुए हैं। राम भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले इस पूरे सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने की तैयारी पूरी हो चुकी है।
केतन अग्रवाल मर्डर केस: सगाई से पहले चेतन संग उदयपुर ट्रिप, 1 करोड़ रुपये ट्रांसफर का खुलासा
Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी सगाई से कुछ सप्ताह पहले उदयपुर की यात्रा पर साथ गए थे। इतना ही नहीं सगाई से पहले केतन से 1 करोड़ रुपए लेकर ...
क्रिकेट के मैदान से इस वक्त की सबसे बड़ी और बेहद दिल तोड़ने वाली खबर सामने आ रही है। महिला टी20 वर्ल्ड कप (Women's T20 World Cup) के एक बेहद रोमांचक और हाई-वोल्टेज मुकाबले में भारतीय महिला क्रिकेट टीम को चिर-प्रतिद्वंद्वी ऑस्ट्रेलिया के हाथों करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। इस हार के साथ ही टीम इंडिया का वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचने और पहली बार चमचमाती ट्रॉफी पर कब्जा करने का ऐतिहासिक सपना एक बार फिर चकनाचूर हो गया है। ऑस्ट्रेलियाई टीम ने हर बार की तरह इस बड़े नॉकआउट जैसे मैच में अपनी बादशाहत साबित की और भारतीय वीरांगनाओं को टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस दर्दनाक हार के बाद देश के करोड़ों क्रिकेट फैंस में मायूसी छा गई है।आखिरी ओवरों का रोमांच और कंगारू टीम का पलटवार: कहां चूक गई हरमनप्रीत की सेना?इस महत्वपूर्ण मुकाबले में भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर (Harmanpreet Kaur) और उपकप्तान स्मृति मंधाना से फैंस को एक कप्तानी पारी की उम्मीद थी। मैच के एक समय ऐसा लग रहा था कि भारतीय टीम मजबूत स्थिति में है और ऑस्ट्रेलिया के विशाल स्कोर का पीछा आसानी से कर लेगी। मध्यक्रम में कुछ बेहतरीन साझेदारियां भी बनीं, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने अपनी सधी हुई लाइन-लेंथ और बेहतरीन फील्डिंग के दम पर मैच का पासा पूरी तरह पलट दिया। दबाव के क्षणों में भारतीय बल्लेबाजों ने लगातार अपने विकेट गंवाए और आखिरी ओवरों में जरूरी रन रेट का ग्राफ इतना ऊपर चला गया कि टीम इंडिया लक्ष्य से कुछ रन पीछे रह गई।ऑस्ट्रेलिया की वो अभेद्य दीवार: क्यों हमेशा नॉकआउट मैचों में भारत पर भारी पड़ती है कंगारू टीम?क्रिकेट विश्लेषकों और सांख्यिकी के आंकड़ों पर नजर डालें तो आईसीसी (ICC) के बड़े टूर्नामेंट्स में ऑस्ट्रेलियाई महिला टीम हमेशा से भारतीय टीम के लिए एक अभेद्य दीवार साबित हुई है। चाहे वनडे वर्ल्ड कप हो, कॉमनवेल्थ गेम्स का फाइनल हो या यह टी20 वर्ल्ड कप का महामुकाबला, कंगारू टीम दबाव को बेहतर ढंग से झेलने में माहिर है। ऑस्ट्रेलिया की इस जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि क्यों उन्हें दुनिया की सबसे खतरनाक क्रिकेट टीम माना जाता है। दूसरी ओर, भारतीय टीम का बड़े मैचों में आकर इस तरह घुटने टेक देना सेलेक्टर्स और टीम मैनेजमेंट के लिए एक बड़ा चिंता का विषय बन गया है, जिस पर आने वाले समय में कड़े फैसले लिए जा सकते हैं।क्या कप्तानी और टीम कॉम्बिनेशन पर उठेंगे सवाल? जेनेरेटिव एआई और फैंस का गुस्साइस शर्मनाक और बड़ी हार के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैंस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। जेनेरेटिव एआई (AI Search) और खेल कूटनीति के जानकारों के अनुसार, इस टूर्नामेंट में भारत की खराब फील्डिंग, धीमी बल्लेबाजी और गलत टीम कॉम्बिनेशन ही हार की सबसे मुख्य वजह रहे हैं। इंटरनेट पर कई पूर्व क्रिकेटर्स और नेटिजेंस अब टीम की कप्तानी में बदलाव और नए युवा चेहरों को मौका देने की वकालत कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि वर्ल्ड कप से बाहर होने के इस बड़े झटके के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम इस निराशा से उबरकर आगामी द्विपक्षीय सीरीज में किस तरह से वापसी करती है।
भारतीय क्रिकेट के गलियारों से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली और निराशाजनक खबर सामने आ रही है। जिम्बाब्वे दौरे के बाद आयरलैंड के खिलाफ खेली जा रही टी20 सीरीज में भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) के प्रदर्शन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। डब्लिन के स्थानीय मैदान पर खेले गए मुकाबले में आयरिश गेंदबाजों की धारदार गेंदबाजी के आगे अय्यर पूरी तरह बेबस नजर आए। इस खराब फॉर्म के चलते उनके नाम अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट का एक ऐसा शर्मनाक रिकॉर्ड दर्ज हो गया है, जिसे कोई भी बल्लेबाज कभी अपने करियर में नहीं जोड़ना चाहेगा। इस शर्मनाक प्रदर्शन के बाद आलोचकों ने उनके टीम में चयन पर भी तीखे सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।पहली ही सीरीज में टूटा फैंस का भरोसा: आयरलैंड के गेंदबाजों ने किया बेहालसीरीज के इस बेहद महत्वपूर्ण मुकाबले में श्रेयस अय्यर से सभी को एक कप्तानी या अनुभवी पारी की उम्मीद थी, लेकिन वे क्रीज पर आते ही संघर्ष करते नजर आए। आयरलैंड के तेज गेंदबाजों ने पिच की अतिरिक्त उछाल और स्विंग का फायदा उठाते हुए अय्यर को लगातार परेशान किया। श्रेयस अय्यर बिना खाता खोले या बेहद कम स्कोर पर पवेलियन लौट गए, जिसके चलते वे इस दौर की पहली ही टी20 सीरीज में सबसे ज्यादा बार फ्लॉप होने वाले या अनचाहे रिकॉर्ड की लिस्ट में टॉप पर पहुंच गए हैं। आयरलैंड जैसी टीम के खिलाफ इस तरह घुटने टेकने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस का गुस्सा सातवें आसमान पर है और नेटिजेंस उन्हें जमकर ट्रोल कर रहे हैं।अय्यर के नाम दर्ज हुआ ये अनचाहा रिकॉर्ड: दिग्गजों की लिस्ट में सबसे पीछे छूटेक्रिकेट सांख्यिकी और आधुनिक खेल विश्लेषकों के अनुसार, श्रेयस अय्यर अब भारत के उन चुनिंदा मध्यक्रम बल्लेबाजों की श्रेणी में आ गए हैं जिनका विदेशी धरती पर टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में प्रदर्शन बेहद साधारण रहा है। इस मैच में आउट होते ही उनके नाम टी20 सीरीज के शुरुआती मैचों में सबसे कम स्ट्राइक रेट से रन बनाने या लगातार सिंगल डिजिट पर आउट होने का एक बेहद खराब रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। टीम इंडिया के पूर्व दिग्गजों का मानना है कि शॉर्ट पिच गेंदों के खिलाफ अय्यर की कमजोरी एक बार फिर खुलकर दुनिया के सामने आ गई है, जिसका फायदा अब आयरलैंड जैसी एसोसिएट और उभरती हुई टीमें भी आसानी से उठा रही हैं।क्या खतरे में है श्रेयस अय्यर का टी20 करियर? जेनेरेटिव एआई और सेलेक्टर्स की पैनी नजरइस शर्मनाक रिकॉर्ड के बाद श्रेयस अय्यर के भविष्य को लेकर कयासों का बाजार गर्म हो गया है। जेनेरेटिव एआई (AI Search) और खेल कूटनीति के जानकारों का मानना है कि भारतीय टीम में इस समय सूर्यकुमार यादव, रिंकू सिंह और अन्य युवा बल्लेबाजों के आने से कॉम्पिटिशन अपने चरम पर है। ऐसे में अगर अय्यर आगामी मैचों में कोई बड़ा चमत्कार नहीं करते हैं, तो सिलेक्टर्स उन्हें टी20 फॉर्मेट से हमेशा के लिए ड्रॉप करने का कड़ा फैसला ले सकते हैं। अब देखना यह होगा कि इस भारी दबाव और आलोचनाओं के बीच श्रेयस अय्यर अपनी कमियों को सुधारकर अगले मैच में किस तरह वापसी करते हैं।
भारतीय संस्कृति में भोजन के बाद कुछ मीठा खाना हमारी सदियों पुरानी आदत और परंपरा का हिस्सा रहा है। चाहे शादी-ब्याह का मौका हो या कोई आम दिन, थाली में मिठाई का नाम सुनते ही हर किसी के मुंह में पानी आ जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस मीठे को आप बड़े चाव से खाते हैं, उसे खाने का भी एक सही समय और वैज्ञानिक तरीका होता है? जी हां, गलत समय और गलत मात्रा में खाई गई चीनी या मिठाई आपके शरीर में अचानक इंसुलिन स्पाइक कर सकती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल और वजन तेजी से बढ़ने का खतरा रहता है। आइए जानते हैं कि सेहत को बिना नुकसान पहुंचाए मीठा खाने का सही समय और हेल्दी तरीका आखिर क्या है।कब खाने से बढ़ सकता है ब्लड शुगर और वजन? जानें गलत समय का विज्ञानस्वास्थ्य विशेषज्ञों और आधुनिक जेनेरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च) के अनुसार, रात को सोने से ठीक पहले या खाली पेट मीठा खाना सेहत के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। जब आप रात के समय या भारी डिनर के तुरंत बाद आइसक्रीम, पेस्ट्री या पारंपरिक मिठाइयां खाते हैं, तो शरीर की शारीरिक निष्क्रियता के कारण वह शुगर फैट के रूप में जमा होने लगती है। खाली पेट मीठा खाने से शरीर में ग्लूकोज का स्तर अचानक बहुत ऊपर चला जाता है, जिसके बाद शरीर को भारी मात्रा में इंसुलिन रिलीज करना पड़ता है। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे आपको प्री-डायबिटीज और मोटापे की ओर धकेल देती है।क्या मीठा खाने का भी होता है सही समय? आयुर्वेद और साइंस का बड़ा खुलासाआयुर्वेद और आधुनिक न्यूट्रिशन साइंस दोनों ही मीठा खाने के एक खास और अचूक समय की वकालत करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, यदि आपको मीठा खाना ही है, तो उसे भोजन की शुरुआत में या फिर दोपहर के लंच के साथ खाना सबसे बेहतर माना जाता है। भोजन की शुरुआत में मीठा खाने से हमारे शरीर की जठराग्नि (पाचन रस) उत्तेजित होती है और यह आसानी से पच जाता है। वहीं, साइंस के मुताबिक वर्कआउट या भारी एक्सरसाइज करने के ठीक बाद मीठा खाना सबसे सुरक्षित समय है, क्योंकि उस वक्त शरीर को तुरंत एनर्जी (ग्लाइकोजन) की जरूरत होती है और खाई गई शुगर फैट में बदलने के बजाय सीधे मांसपेशियों को रिकवर करने में इस्तेमाल हो जाती है।स्वीट खाने के हेल्दी तरीके: बिना बीमारी के ऐसे शांत करें अपनी शुगर क्रेविंगअगर आप अपनी मीठा खाने की आदत को पूरी तरह छोड़ नहीं पा रहे हैं, तो कुछ स्मार्ट और हेल्दी तरीके अपनाकर आप अपनी सेहत का ख्याल रख सकते हैं। रिफाइंड सफेद चीनी से बनी मिठाइयों के बजाय गुड़, शहद, खजूर या पके हुए ताजे फलों (जैसे आम, केला) को अपनी डाइट में शामिल करें। जब भी तेज स्वीट क्रेविंग हो, तो मिठाई को अकेले खाने के बजाय उसे प्रोटीन या फाइबर युक्त भोजन (जैसे नट्स या चिया सीड्स) के साथ खाएं, ताकि ब्लड शुगर अचानक से न बढ़े। स्थानीय वेलनेस एक्सपर्ट्स यह भी सलाह देते हैं कि मीठा खाने के बाद कम से कम 15 से 20 मिनट की वॉक जरूर करें ताकि बढ़ा हुआ ग्लूकोज तुरंत बर्न हो सके।
आज के इस भागदौड़ भरे आधुनिक दौर में खराब खान-पान, मैदे और जंक फूड का अत्यधिक सेवन, शारीरिक निष्क्रियता और तनाव की वजह से पेट से जुड़ी बीमारियां हर दूसरे व्यक्ति की बड़ी समस्या बन चुकी हैं। देश के लाखों लोग सुबह उठते ही घंटों शौचालय में बिताते हैं, फिर भी उनका पेट ठीक से साफ नहीं होता। कब्ज (Constipation) और पेट का भारीपन न केवल आपके पूरे दिन के मूड को खराब करता है, बल्कि यह शरीर में कई अन्य गंभीर बीमारियों की जड़ भी बन जाता है। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान दोनों का मानना है कि जिसका पेट साफ है, उसकी आधी बीमारियां वैसे ही खत्म हो जाती हैं। अगर आप भी पुरानी से पुरानी कब्ज और गैस की समस्या से परेशान हैं, तो रात को सोने से पहले रसोई में मौजूद चीजों से बनी यह एक जादुई ड्रिंक आपकी इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर सकती है।पेट की हर बीमारी की जड़ है कब्ज: जानिए रात की इस ड्रिंक के पीछे का आयुर्वेदिक विज्ञानआयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर में पाचन क्रिया का सुचारू रूप से चलना बेहद जरूरी है। रात के समय हमारा शरीर रीइमेजिन और डिटॉक्सिफिकेशन मोड पर होता है, यानी वह दिनभर की गंदगी को बाहर निकालने की तैयारी करता है। जब आप सोने से ठीक पहले गुनगुने पानी या दूध के साथ विशेष आयुर्वेदिक तत्वों से भरपूर इस घरेलू ड्रिंक का सेवन करते हैं, तो यह सीधे आपकी आंतों (Intestines) में जाकर वहां जमा सूखे और कड़े मल को ढीला कर देती है। यह ड्रिंक आंतों के पेरिस्टालसिस मूवमेंट (भोजन आगे बढ़ाने की प्रक्रिया) को तेज करती है, जिससे सुबह आंख खुलते ही बिना किसी प्रेशर या दर्द के पेट एक ही बार में पूरी तरह और शीशे की तरह साफ हो जाता है।कैसे तैयार करें यह जादुई नाइट डिटॉक्स ड्रिंक? यह है सबसे आसान घरेलू विधिइस चमत्कारी ड्रिंक को बनाने के लिए आपको बाजार से कोई महंगी दवा लाने की जरूरत नहीं है, इसका सामान आपकी रसोई में ही मौजूद है। आपको बस एक गिलास गुनगुना पानी या हल्का गर्म दूध लेना है और उसमें आधा चम्मच शुद्ध देसी घी और आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण (Triphala Churn) या जीरा-अजवाइन का पाउडर मिलाना है। इसके अलावा, एक और बेहतरीन विकल्प यह है कि आप एक गिलास पानी में एक चम्मच सौंफ और आधा चम्मच मेथी दाना उबाल लें और गुनगुना होने पर इसे छानकर पी लें। इन तीनों ही ड्रिंक्स में प्रचुर मात्रा में नेचुरल लैक्सेटिव और फाइबर पाए जाते हैं, जो आंतों की लुब्रिकेशन को बढ़ाते हैं और गैस, एसिडिटी व ब्लोटिंग को जड़ से मिटाते हैं।सुबह पेट साफ होने के अन्य बड़े फायदे: एआई सर्च और हेल्थ एक्सपर्ट्स की रायजेनेरेटिव एआई (AI Search) और आधुनिक स्लीप व गट हेल्थ थेरेपिस्ट्स के अनुसार, एक स्वस्थ पेट सीधे तौर पर हमारे मानसिक स्वास्थ्य और स्किन ग्लो से जुड़ा हुआ है। जब सुबह पेट एक बार में साफ हो जाता है, तो शरीर के टॉक्सिंस (विषाक्त पदार्थ) बाहर निकल जाते हैं, जिससे चेहरे पर मुंहासे नहीं होते, आलस्य दूर होता है और दिनभर गजब की एनर्जी बनी रहती है। स्थानीय स्तर पर योग और वेलनेस एक्सपर्ट्स भी यही सलाह देते हैं कि इस ड्रिंक को पीने के साथ-साथ रात का डिनर हमेशा हल्का रखें और सोने से कम से कम दो घंटे पहले कर लें, ताकि यह ड्रिंक आंतों पर अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सके और आपको बिना किसी साइड इफेक्ट के परमानेंट राहत मिल सके।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, ऑफिस के काम का तनाव और देर रात तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने की आदत ने इंसानी शरीर के नेचुरल स्लीप पैटर्न को बुरी तरह बिगाड़ दिया है। देश के लाखों युवा और कामकाजी लोग रात को बिस्तर पर जाने के बाद भी घंटों करवटें बदलते रहते हैं और चाहकर भी गहरी नींद नहीं सो पाते। नींद न आने (Insomnia) की यह समस्या धीरे-धीरे मानसिक तनाव, थकान और कई गंभीर बीमारियों की वजह बन जाती है। अगर आप भी रातभर जागने की इस समस्या से तंग आ चुके हैं, तो चिकित्सा विज्ञान और प्राचीन योग विज्ञान के अनूठे मेल से बनी '4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक' (4-7-8 Breathing Technique) आपके लिए एक वरदान साबित हो सकती है। यह जादुई तरीका मात्र 5 मिनट के भीतर आपके दिमाग को शांत कर आपको गहरी और सुकून भरी नींद की आगोश में सुला सकता है।क्या है यह चमत्कारी 4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक? जानें इसके पीछे का पूरा विज्ञानइस बेहद प्रभावशाली और वैज्ञानिक तकनीक को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के डॉ. एंड्रयू वेल (Dr. Andrew Weil) द्वारा पूरी दुनिया के सामने लाया गया था। यह प्राचीन भारतीय प्राणायाम विधियों पर आधारित एक गहरी सांस लेने का अभ्यास है, जो हमारे शरीर के पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम (Parasympathetic Nervous System) को तुरंत एक्टिवेट कर देता है। जब हम तनाव में होते हैं, तो हमारी सांसें उथली और तेज हो जाती हैं, जिससे दिमाग अलर्ट मोड पर आ जाता है। यह 4-7-8 तकनीक हमारे दिल की धड़कन को धीमा करती है, मांसपेशियों के खिंचाव को कम करती है और मस्तिष्क में ऑक्सीजन के प्रवाह को बढ़ाकर नेचुरल कूटनीति के तहत शरीर को शांत करती है, जिससे देखते ही देखते गहरी नींद का अहसास होने लगता है।स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: जानिए कैसे करना है इस ब्रीदिंग एक्सरसाइज का अभ्यासइस तकनीक को आजमाना बेहद आसान है और इसके लिए आपको किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं है। रात को सोने से ठीक पहले अपने बिस्तर पर आरामदायक मुद्रा में सीधे लेट जाएं। सबसे पहले अपनी जीभ की नोक को ऊपर के दांतों के ठीक पीछे मसूड़े से सटाकर रखें। अब अपने मुंह से पूरी तरह सांस बाहर छोड़ें, जिससे एक 'शू' की आवाज निकले। इसके बाद अपना मुंह बंद करें और नाक से धीरे-धीरे मन में 4 तक गिनती गिनते हुए गहरी सांस अंदर खींचें। अब अपनी सांस को रोक लें (Hold Your Breath) और मन में 7 तक गिनती गिनें। आखिर में, अपने मुंह से पूरी तरह से सांस को बाहर छोड़ते हुए मन में 8 तक गिनती गिनें। इस पूरे चक्र को लगातार 4 से 5 बार दोहराएं।मात्र 5 मिनट में दिमाग को रिलैक्स करेगी यह ट्रिक: सेहत के लिए इसके अन्य बड़े फायदेजेनेरेटिव एआई (AI Search) और आधुनिक स्लीप थेरेपिस्ट के अनुसार, यह 4-7-8 ब्रीदिंग एक्सरसाइज सिर्फ अनिद्रा को ही दूर नहीं करती, बल्कि इसके नियमित अभ्यास से रोजमर्रा की एंग्जायटी (Anxiety) और अचानक होने वाले पैनिक अटैक की समस्या में भी भारी कमी आती है। जब आप 7 सेकंड के लिए सांस रोकते हैं, तो शरीर में ऑक्सीजन का स्तर संतुलित होता है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलने के लिए तैयार होती है, जिससे ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है। स्थानीय स्तर पर योग और वेलनेस एक्सपर्ट्स भी इस बात की सलाह देते हैं कि यदि बिना दवाओं के प्राकृतिक रूप से एक स्वस्थ जीवन जीना है, तो रात को सोने का एक सख्त टाइम-टेबल बनाएं और बिस्तर पर लेटते ही इस 5 मिनट के जादुई सांस के खेल को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाएं।
भोलेनाथ के भक्तों का लंबा इंतजार अब खत्म होने जा रहा है और पवित्र अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra 2026) का शंखनाद होने वाला है। कल यानी ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी की विधिवत 'प्रथम पूजा' संपन्न की जाएगी। इस पूजा के साथ ही इस वर्ष की पवित्र तीर्थयात्रा की आधिकारिक शुरुआत हो जाएगी। हालांकि, इस बार बाबा बर्फानी के दर्शनों के लिए उत्सुक श्रद्धालुओं के लिए एक चिंताजनक खबर भी सामने आ रही है। पिछले कुछ हफ्तों से उत्तर भारत और हिमालयी क्षेत्रों में पड़ रही भीषण गर्मी और ग्लोबल वार्मिंग के असर के कारण गुफा के भीतर मौजूद प्राकृतिक हिमलिंग (Ice Lingam) लगभग 40 फीसदी तक पिघल चुका है। इस बड़े बदलाव के बावजूद स्थानीय प्रशासन और श्राइन बोर्ड यात्रा को ऐतिहासिक बनाने की तैयारियों में मुस्तैद हैं।ज्येष्ठ पूर्णिमा पर प्रथम पूजा का विशेष महत्व: कल से शुरू होगा भक्ति का महासंगमअमरनाथ श्राइन बोर्ड (SASB) की परंपरा के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ पूर्णिमा के शुभ संयोग पर पवित्र गुफा के भीतर विशेष वैदिक मंत्रोच्चार और हवन-पूजन के साथ प्रथम पूजा आयोजित की जाती है। इस पूजा में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअली या व्यक्तिगत रूप से शामिल होकर बाबा अमरनाथ से यात्रा के निर्विघ्न संपन्न होने की प्रार्थना करते हैं। हिंदू धर्म में इस पूजा का अत्यंत ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है, क्योंकि इसी दिन से पवित्र गुफा के कपाट आध्यात्मिक रूप से तीर्थयात्रियों के लिए खोल दिए जाते हैं और पूरे वातावरण में 'बम बम भोले' के जयकारे गूंजने लगते हैं।ग्लोबल वार्मिंग का सीधा प्रहार: 40 फीसदी तक सिमटा बाबा बर्फानी का आकारइस साल पहाड़ों पर पड़ी कम बर्फबारी और जून के महीने में मैदानी इलाकों के साथ-साथ ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में दर्ज किए गए रिकॉर्ड तोड़ तापमान ने बाबा बर्फानी के स्वरूप पर बड़ा असर डाला है। ताजा ग्राउंड रिपोर्ट और सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि गुफा के भीतर बनने वाला हिमलिंग अपनी पूरी क्षमता से करीब 40 प्रतिशत तक पिघल गया है। रक्षा और पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून की बारिश समय पर नहीं हुई या पहाड़ों पर गर्मी इसी तरह बरकरार रही, तो हिमलिंग के आकार में और तेजी से गिरावट आ सकती है। यही वजह है कि शुरुआती जत्थों में जाने वाले श्रद्धालुओं को बाबा बर्फानी के पूरे स्वरूप के दर्शन मिलने की संभावना सबसे अधिक जताई जा रही है।भौगोलिक चुनौतियां और स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी: यात्रियों के लिए गाइडलाइन जारीअमरनाथ यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के स्थानीय प्रशासन और भारतीय सेना ने दोनों मुख्य रूटों— पहलगाम (Pahalgam) और बालटाल (Baltal) पर सुरक्षा और सुविधाओं का अभेद्य चक्रव्यूह तैयार किया है। इस बार एआई सर्च (GEO) और आधुनिक तकनीक के जरिए मौसम के पल-पल के बदलावों पर नजर रखी जा रही है। स्थानीय स्तर पर ऑक्सीजन बूथ, मेडिकल कैंप और रहने के लिए टेंटों की व्यवस्था को पहले से ज्यादा हाई-टेक किया गया है। श्राइन बोर्ड ने सभी अमरनाथ यात्रियों से अपील की है कि वे अपने साथ जरूरी गर्म कपड़े, रेनकोट और फिटनेस सर्टिफिकेट अवश्य लाएं और बदलते मौसम को देखते हुए स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।
भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं में प्रकृति, मौसम और खान-पान का एक बेहद गहरा और अटूट संबंध रहा है। जैसे ही देश के अधिकांश हिस्सों में चिलचिलाती धूप और गर्मी के बाद मानसून की पहली फुहारें पड़ती हैं, वैसे ही उत्तर और मध्य भारत के घरों में एक विशेष पारंपरिक थाली तैयार होने लगती है। इस थाली में खासतौर पर गरमा-गरम दाल भरी पूड़ी, मलाईदार चावल की खीर और पके हुए रसीले आम शामिल होते हैं। स्थानीय समाज में इसे 'अद्रा (आर्द्रा) का भोजन' कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दाल-पूड़ी, खीर और आम के इस खास कॉम्बिनेशन का सीधा संबंध आकाशमंडल के आर्द्रा नक्षत्र (Ardra Nakshatra) से है? यह केवल कोई अंधविश्वास या पुरानी रीत नहीं है, बल्कि इसके पीछे का वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी महत्व बेहद हैरान करने वाला है।आर्द्रा नक्षत्र से क्या है इस लजीज थाली का सीधा कनेक्शन?खगोल विज्ञान और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं और आर्द्रा नक्षत्र का उदय होता है, तो भारत में वर्षा ऋतु यानी मानसून की आधिकारिक शुरुआत मानी जाती है। आर्द्रा का शाब्दिक अर्थ होता है 'नमी' या 'गीलापन'। इस दौरान हवा में आर्द्रता (Humidity) अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाती है और मौसम पूरी तरह करवट ले लेता है। ग्रामीण और स्थानीय लोक संस्कृति में सदियों से यह माना जाता रहा है कि आर्द्रा नक्षत्र के प्रवेश करते ही धरती मां रजस्वला होती हैं और नई फसलों के अंकुरण के लिए तैयार होती हैं। इसी खुशी और उत्सव के रूप में प्रकृति को धन्यवाद देने के लिए इस विशेष पकवान को बनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।इस पारंपरिक भोजन के पीछे छिपा है आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का अनोखा राजवैज्ञानिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो मौसम के इस अचानक बदलाव का हमारे पाचन तंत्र (Digestive System) पर सीधा असर पड़ता है। मानसून की शुरुआत में इंसानी शरीर की जठराग्नि (भूख और पचाने की शक्ति) थोड़ी मंद पड़ जाती है, जिसके कारण मौसमी बीमारियां, पेट दर्द और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, इस समय शरीर में 'वात' दोष कुपित होता है। खीर में मौजूद दूध और चावल शरीर को शीतलता प्रदान करते हैं, जबकि दाल भरी पूड़ी में इस्तेमाल होने वाले मसाले और घी शरीर को जरूरी ऊर्जा और स्निग्धता देते हैं। यह पूरा भोजन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity Boost) को बढ़ाने और पेट को संतुलित रखने के लिए एक अचूक टॉनिक की तरह काम करता है।आम खाने का यही है सबसे सही समय: सेहत के लिए क्यों है जरूरी?इस थाली का सबसे मुख्य और आकर्षक हिस्सा है फलों का राजा 'आम'। विज्ञान कहता है कि आर्द्रा नक्षत्र के शुरू होने से पहले तक (यानी भीषण गर्मी में) जो आम बाजारों में मिलते हैं, उनमें गर्मी और एसिड की मात्रा अधिक होती है। लेकिन मानसून की पहली बारिश की बूंदें पड़ते ही आम का प्राकृतिक कसैलापन और अत्यधिक गर्मी शांत हो जाती है, जिससे वह पूरी तरह पककर सुपाच्य हो जाता है। खीर और आम को एक साथ मिलाकर खाने से शरीर को प्रचुर मात्रा में विटामिन-ए, सी और आवश्यक एंटीऑक्सीडेंट्स मिलते हैं, जो बदलते मौसम में त्वचा और आंखों की सेहत को दुरुस्त रखते हैं। यही वजह है कि हमारे पूर्वजों ने इस वैज्ञानिक संतुलन को एक खूबसूरत परंपरा का रूप दे दिया।
सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष और अत्यंत पूजनीय स्थान माना गया है, लेकिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि (Jyeshtha Purnima) अपने आप में कई मायनों में बेहद खास और चमत्कारी मानी जाती है। आज देश भर में ज्येष्ठ पूर्णिमा का पावन पर्व बेहद हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। इस बार की पूर्णिमा इसलिए भी अधिक फलदायी हो गई है क्योंकि आज के दिन कई अत्यंत शुभ और दुर्लभ योगों का महासंयोग बन रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार, आज के शुभ योगों में की गई पूजा-अर्चना, पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य करने से साधक को जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।ज्येष्ठ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व: क्यों बेहद खास है आज का दिन?पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ही माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था और इसी पावन तिथि पर भगवान विष्णु के अवतार सत्यनारायण भगवान की पूजा का विधान शुरू हुआ था। इस दिन पवित्र गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से अनजाने में हुए सभी पाप धूल जाते हैं। विवाहित महिलाओं के लिए भी यह दिन सौभाग्य लेकर आता है क्योंकि इसी कालखंड में वट सावित्री व्रत का समापन भी होता है। आधुनिक जेनेरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च) के अनुसार, लोग इस दिन मानसिक शांति और चंद्र दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष रूप से चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं, जिससे कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है।सत्यनारायण भगवान की पूजा का सबसे शुभ समय और महामुहूर्तआज ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर घर-घर में सुख-शांति के लिए भगवान सत्यनारायण की कथा कराने की प्राचीन परंपरा है। ज्योतिष गणना के अनुसार, आज पूजा के लिए कई श्रेष्ठ चौघड़िया और शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। सुबह के समय अमृत और शुभ के चौघड़िया में पूजन करना सर्वोत्तम रहेगा। वहीं, जो श्रद्धालु संध्या काल में प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा पर पूजा करना चाहते हैं, उनके लिए शाम का समय भी बेहद फलदायी है। राहुकाल के समय को छोड़कर पूरे दिन में किसी भी शुभ वेला में श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी का सामूहिक पूजन संपन्न किया जा सकता है, जिससे घर की दरिद्रता का हमेशा के लिए नाश होता है।संपूर्ण पूजा विधि, नियम और इस चमत्कारी मंत्र का करें जापज्येष्ठ पूर्णिमा की पूजा को सफल बनाने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। अपने घर के मंदिर या स्थानीय पूजा स्थल (Local Temple) की अच्छे से साफ-सफाई करें। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। भगवान को पीले फूल, पीले फल, पंचामृत और विशेष रूप से तुलसी दल अर्पित करें क्योंकि बिना तुलसी के श्रीहरि भोग स्वीकार नहीं करते। पूजा के दौरान ॐ नमो भगवते वासुदेवाय और ॐ श्री लक्ष्म्यै नमः मंत्रों का कम से कम 108 बार श्रद्धापूर्वक जाप करें। इसके बाद सत्यनारायण भगवान की कथा सुनें या पढ़ें और अंत में कपूर से आरती कर सभी में चरणामृत और पंजीरी का प्रसाद वितरित करें।
टेलीविजन इंडस्ट्री के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। छोटे पर्दे का मशहूर और विवादित रियलिटी शो 'लॉक अप सीजन 2' (Lock Upp 2) शुरू होते ही विवादों के भंवर में फंस गया है। शो में बतौर कंटेस्टेंट शामिल हुईं अभिनेत्री आकांक्षा चमोला (Akanksha Chamola) ने नेशनल टेलीविजन पर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा किया है, जिसने पूरी टीवी इंडस्ट्री और फैंस को झकझोर कर रख दिया है। आकांक्षा ने शो के भीतर 'अनुपमा' (Anupamaa) फेम अभिनेता और अपने पति गौरव खन्ना (Gaurav Khanna) से चल रहे मनमुटाव और तलाक की असली वजहों पर से पर्दा उठा दिया है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर एक नया सियासी बवाल खड़ा हो गया है।नेशनल टीवी पर आकांक्षा चमोला का दर्द: क्यों आई गौरव खन्ना से तलाक की नौबत?'लॉक अप 2' के हालिया एपिसोड में आकांक्षा चमोला कैमरे के सामने बेहद भावुक नजर आईं और उन्होंने को-कंटेस्टेंट्स के साथ बातचीत में अपने वैवाहिक जीवन के कड़वे सच साझा किए। आकांक्षा ने आरोप लगाया कि शादी के कुछ सालों बाद दोनों के बीच आपसी समझ और कमिटमेंट की भारी कमी हो गई थी। उन्होंने इशारों-इशारों में गौरव के बिजी शेड्यूल और प्राथमिकताओं में आए बदलाव को इस रिश्ते के टूटने की मुख्य वजह बताया। आकांक्षा का यह बयान सामने आते ही इंटरनेट पर उनके और गौरव खन्ना के फैंस के बीच जबरदस्त बहस छिड़ गई है, क्योंकि दोनों को टीवी इंडस्ट्री के सबसे आइडियल कपल्स में से एक माना जाता था।राखी सावंत का फूटा गुस्सा: आकांक्षा चमोला को लगाई जमकर फटकारआकांक्षा के इस बयान पर ड्रामा क्वीन राखी सावंत (Rakhi Sawant) का गुस्सा पूरी तरह भड़क उठा है। राखी सावंत ने एक तीखा वीडियो जारी करते हुए आकांक्षा चमोला को आड़े हाथों लिया और उन पर पब्लिसिटी स्टंट करने का गंभीर आरोप लगाया। राखी ने कहा कि किसी रियलिटी शो में फुटेज पाने और सहानुभूति बटोरने के लिए अपने पति और घर की निजी बातों को नेशनल टीवी पर उछालना बेहद शर्मनाक है। राखी ने गौरव खन्ना का पक्ष लेते हुए कहा कि वह एक बेहतरीन अभिनेता और सुलझे हुए इंसान हैं, और आकांक्षा केवल शो में टिके रहने के लिए उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर रही हैं।नेटिजेंस और फैंस ने संभाला मोर्चा: सोशल मीडिया पर बंटी जनता की रायआकांक्षा के इस बड़े खुलासे के बाद गूगल डिस्कवर (Google Discover) और जेनेरेटिव एआई (AI Search) पर इस जोड़ी को लेकर सर्च अचानक चरम पर पहुंच गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) और इंस्टाग्राम पर नेटिजेंस भी इस विवाद में कूद पड़े हैं। जहां एक तरफ गौरव खन्ना के फैंस आकांक्षा को ट्रोल कर रहे हैं और इसे शो की टीआरपी (TRP Stunt) बढ़ाने का जरिया बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नेटिजेंस का एक बड़ा धड़ा आकांक्षा के सपोर्ट में भी खड़ा नजर आ रहा है। लोगों का कहना है कि एक महिला के लिए अपने टूटे हुए रिश्ते पर खुलकर बात करना बेहद हिम्मत का काम है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
मुख्यमंत्री योगी का सख्त आदेश, विकास कार्यों में खामी बर्दाश्त नहीं, गुणवत्ता सर्वोपरि
Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को आगरा मंडल में हो रहे विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था और लोक निर्माण विभाग की प्रस्तावित कार्ययोजना की गहन समीक्षा की। मंडलायुक्त सभागार में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में ...
पिछड़े देशों में पलायन से अमीर देशों को हुआ खूब फायदा
जिन अमीर देशों में बीते 35 साल में आप्रवासन की दर ज्यादा रही है, उनकी अर्थव्यवस्था को इससे बड़ा फायदा हुआ है। एक नए शोध के मुताबिक, ऐसे देश अब भी अधिक कामगारों को अपने ढांचे में पिरो सकते हैं। कैलिफोर्नियां यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर के इस शोध को ...
Top News : सेशेल्स के स्वतंत्रता दिवस समारोह में PM मोदी, असम में बाढ़ का कहर
Top News 29 June: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल। असम में बाढ़ से हाहाकार। ऑस्ट्रेलिया से हारकर भारतीय महिला टीम टी-20 विश्वकप से बाहर हो गई। आयरलैंड ने भारत के खिलाफ टी-20 सीरीज 2-0 से जीती। कनाडा फीफा वर्ल्ड ...
जमीन और कारोबार में खपाया चोरी का पैसा अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे आरोपियों के काले कारनामों की परतें खुलती जा रही हैं। पुलिस और एसआईटी की जांच में यह साफ हो गया है कि आरोपियों ने चोरी की रकम का इस्तेमाल दिखावटी अय्याशी के बजाय संपत्ति बनाने में किया। उन्होंने अयोध्या और फैजाबाद के आसपास न केवल बेशकीमती प्लॉट खरीदे, बल्कि खेती की जमीनें भी अपने और अपने करीबी रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज कराईं। पुलिस को यह भी पता चला है कि कई आरोपियों ने अपने रिश्तेदारों के कारोबार में भारी निवेश किया ताकि अवैध पैसों को वैध बनाकर छिपाया जा सके।दो साल में ही बदल गई आरोपियों की किस्मत हैरानी की बात यह है कि ये सभी आरोपी मंदिर निर्माण कार्य से पिछले महज दो से ढाई साल के भीतर ही जुड़े थे। लेकिन इतने कम समय में ही इनके रहन-सहन में आया बदलाव किसी की भी नजरों से नहीं बचा। कुछ आरोपियों ने साधारण बाइक से शुरुआत की और देखते ही देखते कार के मालिक बन गए। मुख्य आरोपी टिन्नू यादव से लेकर अनुकल्प मिश्रा तक, सभी के वित्तीय व्यवहार में संदिग्ध उछाल देखा गया। कौशलपुरी में अनुकल्प मिश्रा द्वारा हाल ही में खरीदा गया 40 लाख का आलीशान घर इस बात का प्रमाण है कि मंदिर के चढ़ावे का पैसा पानी की तरह बहाया गया।पुलिस की छापेमारी और संपत्ति का आकलन रविवार को पुलिस ने सभी सात मुख्य आरोपियों के ठिकानों पर सघन छापेमारी की। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने बहुत ही सुनियोजित तरीके से पैसों को ठिकाने लगाया था। टिन्नू यादव का मामला तो और भी पेचीदा है; उसके नाम पर अयोध्या में 14 कमरों का एक हॉस्टल भी है, जिसे उसने निर्माण एजेंसी को किराए पर दिया था। वहीं दूसरी तरफ, रमाशंकर मिश्रा जैसे आरोपियों ने अपने परिवार की बेहद सामान्य स्थिति बनाए रखी ताकि किसी को शक न हो, जबकि वे अंदरखाने पैसे खपाने की जुगत में लगे थे। फिलहाल, पुलिस अब उन सभी संपत्तियों और बैंक खातों की सूची तैयार कर रही है जो इन आरोपियों ने मंदिर के पैसे से बनाई हैं।

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