आकाश फिर उतरेंगे यूपी की जमीन पर, मायावती ने इस मिशन पर लगाया
बहुजन समाज पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद फिर से यूपी की सियासी जमीन पर उतरने जा रहे हैं. 28 अक्टूबर से अलग-अलग इलाके में रैली करने जा रहे हैं. इस अभियान के तहत वह पार्टी प्रत्याशियों के नामों का ऐलान करने के साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के सियासी जनाधार को फिर से मजबूत करने की कमान संभालेंगे.
इंटरनेट डेस्क। कॉकरोच जनता पार्टी की ‘लहरा दो तिरंगा’रैली से पहले सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन नहीं करने का नोटिस दिया है। खबरों के अनुसार, इस रैली के कुछ घंटे पहले दिल्ली पुलिस झंडेवालान स्थित उस बंगले पर पहुंची, जहां अभिजीत दीपके ठहरे हुए हैं। यहां पर पुलिस ने अभिजीत दीपके को प्रदर्शन नहीं करने का नोटिस दिया है। दीपके को हिरासत में भी लिया जा सकता है। आपको बता दें कि अभिजीत दीपके ने इससे पहले गुरुवार रात पीसी में रैली से पहली अपनी गिरफ्तारी की आशंका जताई थी। कॉकरोच जनता पार्टी की ओर ओर से आज शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में रैली बुलाई है। सीजेपी की ओर से इस रैली का आयोजन पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और आशुतोष रांका और सौरव दास को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के विरोध में किया जाना है। सीजेपी की रैली को देखते हुए कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में 6 हजार पुलिसकर्मी और सीएपीएफके 22 हजार जवान तैनात किए गए हैं। इन इलाकों में धारा 163 लागू कर दी गई है। PC:facebook अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
West Indies कप्तान का आखिरी टी20 मैच से पहले बड़ा खुलासा
भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांचवां टी20 मुकाबला 17 अक्टूबर को बेंगलुरु में खेला जाएगा. निर्णायक मैच से पहले वेस्टइंडीज के ऑलराउंडर रोस्टन चेज ने अपनी कप्तानी और भूमिका पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य सभी को खुश करना नहीं, बल्कि टीम के हित में सही फैसले लेना है. चेज ने अपनी गेंदबाजी रणनीति, तीनों प्रारूपों में बदलती जिम्मेदारियों और टेस्ट क्रिकेट में वापसी के अनुभव भी साझा किए.
रूस-यूक्रेन जंग के बढ़ते दायरे पर क्यों फिक्र में EU, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका और रूस के बीच हुई डीजल डील ने रूस-यूक्रेन जंग को और भड़का दिया. गुरुवार को यूक्रेन के शहरों पर हमले और तेज हो गए. वहीं, यूक्रेन ने रूस के फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया. EU भी रूस-यूक्रेन जंग के बढ़ते दायरे पर को लेकर फिक्र में है. वहीं, थाईलैंड की रानी ने फिर जीत लिया आसमान. देश-दुनिया की ऐसी ही ताजातरीन और अहम खबरों के लिए देखें दुनिया आजतक. Thailand's Queen
Ladakh Pashmina and Traditional Crafts Take Centre Stage at Lakme Fashion Week in New Delhi
लद्दाख के पश्मीना और हाथ से बुने शिल्प लक्मे फैशन वीक, नई दिल्ली में प्रदर्शित किए जा रहे हैं, जिसमें चांगथांग कारीग
चंबल की लहरों में कितनी डॉल्फिन? तीन राज्यों की टीमें गिनती में जुटीं
चंबल नदी में रिवर डॉल्फिन की नई गिनती शुरू हो गई है. तीन राज्यों के वन विभाग और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के विशेषज्ञ आधुनिक तकनीक के साथ सर्वे कर रहे हैं. फरवरी 2026 की गणना में चंबल के 435 किलोमीटर लंबे प्रतिबंधित एरिया में 155 डॉल्फिन दर्ज की गई थीं.
गेहूं की रोटी छोड़े, चावल के आटे और नारियल से बनाएं ये टेस्टी रोटी
Kerala Orotti Recipe: अगर आप रोजाना गेहूं की रोटी खाकर बोर हो गए हैं और कुछ अलग खाना चाहते हैं तो केरल की मशहूर ओरोटी (Orotti) घर पर बना सकते हैं. यह रोटी खाने में काफी टेस्टी होती है और इसे बनाना भी बेहद आसान है. आज हम आपको ओरोटी बनाने की आसान रेसिपी बताएंगे.
'मकसद रिजीम चेंज, बांग्लादेश...', राहुल गांधी और CJP पर धर्मेंद्र प्रधान ने साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने CJP के विरोध प्रदर्शन को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के हितों के नाम पर शुरू हुआ आंदोलन अब देश में अराजकता फैलाने और राजनीतिक व्यवस्था को अस्थिर करने की साजिश बन गया है.
हम तो कह ही रहे रिजीम चेंज करेंगे, राजनाथ सिंह ने जोड़ा बांग्लादेश कनेक्शन तो भड़क गई कांग्रेस
पवन खेड़ा ने कहा कि हम रिजीम चेंज करना चाहते हैं और हम रिजीम चेंज करेंगे। कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि सरकार यह स्पष्ट क्यों नहीं कर देती कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना गैरकानूनी है।
उबले चावलों को लेकर क्यों सवालों के घेरे में मान सरकार? देखें पंजाब आजतक
पंजाब आजतक के स्पेशल बुलेटिन में आज दिखाएंगे उबले चावलों को लेकर क्यों सवालों के कटघरे में है मान सरकार, झोटा केस में पंजाब बंद का कैसा रहा असर, पंजाब में नशे की समस्या को लेकर क्यों पंजाब पुलिस पर उठ रहे हैं और क्यों प्रदर्शन करने को मजबूर हैं आंगनवाड़ी वर्कर्स, लेकिन उससे पहले नजर हेडलाइंस पर.
OCI कार्ड का मतलब भारतीय नागरिक नहीं, सरकार ने याद दिलाए नियम; छूट और पाबंदियां
इमरान खान विवाद के बीच इमिग्रेशन ब्यूरो ने OCI कार्डधारकों के अधिकारों और पाबंदियों की जानकारी दी। जानिए आजीवन वीजा, NEET-JEE, संपत्ति खरीदने, वोट देने, सरकारी नौकरी और भारतीय नागरिकता से जुड़े नियम।
उत्तराखंड की राजनीति में उस वक्त भूचाल आ गया, जब प्रदेश सरकार में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने अपने पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के खिलाफ मारपीट, धोखाधड़ी, जालसाजी और हत्या की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोपों में पुलिस से शिकायत दर्ज कराई। गुरुवार शाम करीब 7:25 बजे देहरादून के गढ़ी कैंट थाने में इस मामले में FIR दर्ज की गई। प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की 13 धाराएं और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के तीन प्रावधान शामिल किए गए हैं। रेखा आर्य ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पुलिस तक पहुंचने की वजह बताई। उन्होंने दावा किया कि एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में उनके पति कथित तौर पर उनकी हत्या की साजिश से जुड़ी बातचीत करते सुनाई देते हैं। मंत्री के मुताबिक, इस रिकॉर्डिंग ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया और उनके रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “क्या सच और ईमानदारी के साथ जीवन जीने का यही परिणाम मिलता है?” रेखा आर्य ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया। उन्हें आशंका है कि उनके पति उनके या उनके नाबालिग बच्चों के खिलाफ कोई गंभीर अपराध कर सकते हैं। हम आपको यह भी बता दें कि शिकायत दर्ज कराने के बाद तबीयत खराब होने की सूचना पर उन्हें अस्पताल भी ले जाया गया। इसे भी पढ़ें: उत्तराखंड कैबिनेट मंत्री Rekha Arya ने पति गिरधारी लाल साहू पर दर्ज कराई FIR हम आपको बता दें कि मंत्री द्वारा साझा की गई 8 मिनट 27 सेकंड की कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग में गिरधारी लाल साहू एक महिला से जमानत और जेल जाने की आशंका पर बातचीत करते सुनाई देने का दावा किया गया है। रिकॉर्डिंग के मुताबिक, वह महिला को “मेरे बाबू” कहकर भरोसा दिलाते हैं कि वह उसके साथ रहेंगे और उसे जमानत मिल जाएगी। बातचीत में महिला कथित तौर पर जेल जाने और खबर सार्वजनिक होने से अपनी छवि खराब होने की चिंता जताती है। जवाब में उसे आश्वस्त किया जाता है कि कुछ बाहर नहीं आएगा। इसी बातचीत में रेखा आर्य की मौत का कथित जिक्र और आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल किए जाने का दावा भी है। ऑडियो लग जायेगा। हम आपको बता दें कि रेखा आर्य ने शिकायत में बताया कि उन्होंने 6 जुलाई 2004 को उत्तर प्रदेश के बरेली में गिरधारी लाल साहू से शादी की थी। उनका आरोप है कि साहू ने खुद को अविवाहित बताया था, जबकि उनकी पहले से पत्नी और बच्चे थे। मंत्री के मुताबिक, उन्हें इस कथित धोखे का पता कई साल बाद चला, लेकिन बच्चों की खातिर उन्होंने चुप्पी बनाए रखी। रेखा आर्य ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पति दूसरी महिलाओं के संपर्क में रहे। विरोध करने पर कथित तौर पर लिखित और मौखिक माफी मांगी गई, लेकिन व्यवहार में बदलाव नहीं आया। शिकायत के अनुसार, आपत्ति जताने पर मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि उनके आधिकारिक आवास पर कर्मचारियों के सामने जातिसूचक अपशब्द कहे गए। हम आपको बता दें कि इस मामले में एक और गंभीर आरोप कथित दस्तावेजी जालसाजी का है। रेखा आर्य का दावा है कि उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से कर ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए, जिनसे यह दिखाया जा सके कि उन्होंने उन कंपनियों के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया है, जिनसे वह जुड़ी थीं। उनका कहना है कि उन्होंने न तो ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और न ही इस्तीफा दिया। FIR में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-B (आपराधिक साजिश), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और 420 (धोखाधड़ी) समेत अन्य धाराएं शामिल हैं। साथ ही SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तीन प्रावधान भी लगाए गए हैं। साथ ही रेखा आर्य ने अपने संदेश में महिलाओं से घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि महिला सामान्य हो या प्रभावशाली, उसे घरेलू अत्याचार सहकर चुप नहीं रहना चाहिए। मंत्री ने संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वह अपनी जिम्मेदारियां निभाती रहेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि उनके मायके पक्ष ने हमेशा उनका साथ दिया है। अब इस मामले में पुलिस जांच की भूमिका अहम होगी। आरोपों की सच्चाई, कथित ऑडियो की प्रामाणिकता और दस्तावेजों से जुड़े दावों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। लेकिन इतना साफ है कि इस प्रकरण ने उत्तराखंड की राजनीति में एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसका जवाब केवल बयानबाजी से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और तथ्यों से ही मिल सकता है।
CMRL Exalogic केस में ED ने पिनाराई विजयन को भेजा समन, 23 अक्टूबर को होगी पूछताछ
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और केरल विधानसभा में विपक्ष के मौजूदा नेता पिनाराई विजयन को समन जारी किया है। उनसे कहा गया है कि वे मनी लॉन्ड्रिंग के एक चल रहे मामले के सिलसिले में 23 अक्टूबर को कोच्चि स्थित ED कार्यालय में पेश हों। यह घटनाक्रम 278 करोड़ रुपये के कथित CMRL-एक्सलॉजिक मामले में चल रही कानूनी कार्यवाही के बीच सामने आया है। इस मामले में कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) और एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस के बीच कथित वित्तीय लेन-देन शामिल है। एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस अब बंद हो चुकी एक फर्म है, जिसे पहले विजयन की बेटी वीना टी. चलाती थीं। इसे भी पढ़ें: Delhi Riots साजिश केस: आरोपी अतहर खान की UAPA मामले में Supreme Court में सुनवाई चार हफ्ते टली शुक्रवार को, सुप्रीम कोर्ट ने विजयन की उस तत्काल याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने गिरफ्तारी और अन्य कठोर कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की थी। विजयन को अपनी गिरफ्तारी का अंदेशा था। विजयन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि 82 वर्षीय नेता को गिरफ्तारी का खतरा है, इसलिए उन्हें तत्काल सुरक्षा दी जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत आगामी दशहरा छुट्टियों के दौरान एक विशेष पीठ गठित करने की संभावना पर विचार करेगी, जो जजों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। अगर ऐसा संभव नहीं हुआ, तो इस मामले को 26 अक्टूबर को सूचीबद्ध किया जाएगा। दशहरा की छुट्टियों के बाद, 26 अक्टूबर से सुप्रीम कोर्ट का कामकाज फिर से सामान्य रूप से शुरू होगा। विजयन ने केरल हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें इस मामले में FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। गुरुवार को, हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने विजयन, उनकी बेटी वीना टी. और उनके दामाद (पूर्व मंत्री) पी.ए. मोहम्मद रियास द्वारा दायर अपीलों को खारिज कर दिया। ये अपीलें सिंगल-जज (एकल न्यायाधीश) के आदेश के खिलाफ दायर की गई थीं। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu में महंगाई पर रोक की तैयारी, राशन की दुकानों पर 30 रुपये किलो मिलेगा बढ़िया Rice 9 अक्टूबर को, एकल-न्यायाधीश पीठ ने राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) को निर्देश दिया था कि वे ED द्वारा पुलिस को भेजी गई एक रिपोर्ट के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज करें। ED ने अपनी जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों के आधार पर मामला दर्ज करने की मांग की थी। इन सबूतों में 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) के तहत की गई तलाशी के दौरान मिली सामग्री भी शामिल है। ये आरोप CMRL और उससे जुड़ी एक कंपनी द्वारा 'एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस' (Exalogic Solutions) को किए गए भुगतानों से जुड़े हैं। एजेंसी का आरोप है कि CMRL ने इन भुगतानों को 'IT कंसल्टेंसी सेवाओं' की फीस बताकर, गलत तरीके से 2.78 करोड़ रुपये 'एक्सलॉजिक' को ट्रांसफर किए।
सीने पर 9 कलश, नौ दिन बिना पानी... नवरात्र साधना की कहानी
नौ दिन, नौ कलश और बिना पानी पिए देवी की आराधना... बिहार के रोहतास जिले के सासाराम में नवरात्र के दौरान आस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसे देखने के लिए लोग पूजा पंडाल पहुंच रहे हैं. मोहद्दीगंज की शिव दुर्गा पूजा समिति में सुनील कुमार अपने सीने पर नौ कलश रखकर साधना कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि वह पिछले 10 से 12 साल से इसी तरह पूजा करते आ रहे हैं.
17 अक्टूबर को 7 राशियों को मिलेगी गुड न्यूज, जानें अपना भविष्यफल
Rashifal 17 October 2026: पेशेवर तेजी बनाए रखेंगे. अड़चन अवरोध दूर होंगे. साथियों के सहयोग से आगे बढ़ेंगे. कार्य व्यापार में लंबित मामले गति पाएंगे. प्रतिभा प्रदर्शन उम्मीद से अच्छा रहेगा.
पहले कोल्ड की ड्रिंक ऑफर, फिर कंधे पर तिरंगा... जब दिपके के घर पुलिस पहुंची- VIDEO
दिल्ली में सीजेपी की तिरंगा यात्रा से पहले दिल्ली पुलिस की टीम शुक्रवार दोपहर पार्टी संस्थापक अभिजीत दिपके के ठहरने वाले घर पहुंची. यह घर एनसीपी-एससीपी प्रवक्ता अनीश गवांडे का है. पुलिस कुछ दस्तावेज लेकर गई थी. वीडियो में माहौल शांत दिखता है, जहां दिपके कंधे पर तिरंगा लपेटे बैठे हैं और पुलिस अधिकारी से बात करते नजर आए.
चीन में एक ही नाम वाले लड़का-लड़की ने की शादी, अब हो रही दिक्कत!
चीन में एक ऐसे कपल की शादी चर्चा में है, जिनका नाम बिल्कुल एक जैसा है. एक ही नाम की वजह से उन्हें शादी के डॉक्यूमेंट बनवाने से लेकर हवाई यात्रा तक में परेशानी का सामना करना पड़ा.
हैरिस का अमेरिका में मिडटर्म चुनावों में जीत का दावा, देखें US Top-10
अमेरिका की आज की 10 प्रमुख खबरों में कमला हैरिस का चुनाव संबंधी बयान और डोनाल्ड ट्रम्प की चुनावी रैलियां शामिल हैं. ट्रम्प ने नए डिफेंस सुपर रेंज की घोषणा की है. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ा है. अमेरिका-रूस के बीच डीजल समझौते पर यूक्रेन ने विरोध जताया है. वहीं जापान न्यू यॉर्क में सेमीकंडक्टर चिप फैक्ट्रियों के लिए भारी निवेश करेगा. न्यू यॉर्क के सेंट्रल पार्क में घोड़ा गाड़ी बंद करने का प्रस्ताव है और सन फ्रांसिस्को चिड़ियाघर में नए कैपीबारा पहुंचे हैं.
अभिजीत दीपके बोले, सरकारी पाबंदियों से होता है व्यापार को नुकसान, प्रदर्शन से नहीं
कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शुक्रवार को कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से व्यापार को नुकसान नहीं पहुंचता, बल्कि नुकसान तब होता है जब सरकार पूरा शहर बंद कर देती है, इंटरनेट निलंबित कर देती है और नागरिकों की आवाजाही पर रोक लगाती है। दीपके ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में शांति और अहिंसा के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि कॉजपा ने मुंबई, पुणे, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु और नागपुर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे और वे सभी पूरी तरह शांतिपूर्ण थे। दीपके ने कहा कि जयपुर में उन पर हमला किया गया था, लेकिन उन्होंने जवाबी कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया, क्योंकि हिंसा का जवाब हिंसा से देना आंदोलन के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा, ‘‘हम शारीरिक बल का सहारा लेने के बजाय डॉ. बी.आर. आंबेडकर के नेतृत्व में तैयार किए गए संविधान द्वारा हमें दिए गए अधिकारों का इस्तेमाल करना पसंद करेंगे।’’दीपके ने कॉजपा के सदस्यों को ‘‘अराजक तत्व’’ साबित करने की कोशिश को खारिज करते हुए कहा कि सरकार से जवाब मांगना, अन्याय के खिलाफ प्रदर्शन करना और सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों से सवाल करना लोकतंत्र की मौलिक अभिव्यक्ति है। उन्होंने सत्तारूढ़ दल पर पाखंड का आरोप लगाते हुए कहा कि जब वह विपक्ष में था, तब उसने विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे और सरकारों से सवाल पूछे थे, लेकिन अब वह इसी तरह के प्रदर्शनों को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बता रहा है। दीपके ने कहा, ‘‘सरकार से जवाब मांगना अराजकता नहीं है, सड़कों पर अन्याय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना अराजकता नहीं है और सार्वजनिक पद संभालने वालों से सवाल पूछना निश्चित रूप से अराजकता नहीं है।’’उन्होंने कहा कि यदि यही प्रतिबंध, डराने-धमकाने के तरीके और पुलिस की सख्ती सत्तारूढ़ दल पर उस समय लागू की जाती जब वह विपक्ष में था, तो उसके कई नेता कभी सत्ता के पदों तक नहीं पहुंच पाते। दीपके ने कहा, ‘‘इसलिए, आइए हम अपने चुने हुए प्रतिनिधियों से सवाल पूछकर, जवाबदेही की मांग करके और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाकर इस देश के नागरिकों के रूप में अपने कर्तव्य को पूरा करें।’’उन्होंने कहा, ‘‘हम किसी विशेषाधिकार या विशेष व्यवहार की मांग नहीं कर रहे हैं। हम केवल उन अधिकारों का प्रयोग करने के लिए कह रहे हैं जो इस गणराज्य के प्रत्येक नागरिक के हैं, चाहे सत्ता में कोई भी दल हो।’’दीपके ने कहा, ‘‘जनता द्वारा चुनी गई सरकार जनता की बात सुनने के लिए बाध्य है, उन्हें चुप कराने के लिए नहीं। वोट गिने जाने के बाद लोकतंत्र खत्म नहीं हो जाता।’’दीपके की यह टिप्पणी कॉजपा और दिल्ली पुलिस के बीच चल रहे गतिरोध के बीच आई है। पार्टी ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रवेश करने के बाद कॉजपा नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद शुक्रवार शाम पांच बजे सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च निकालने का आह्वान किया है। बता दें कि जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर कर दिया है। हालांकि, नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने घोषणा की है कि प्रशासनिक कारणों से शुक्रवार और शनिवार को सेंट्रल पार्क आम जनता के लिए बंद रहेगा। दास, रांका और अन्य लोगों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने व्यापक आंदोलन के तहत पुलिस अवरोधक लांघकर जंतर-मंतर में प्रवेश किया था। कॉजपा के प्रस्तावित मार्च के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने नयी दिल्ली क्षेत्र में 6,000 से अधिक कर्मियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की 220 कंपनियों को तैनात किया है।
'विपक्ष का मकसद ही है रेजीम चेंज', राजनाथ सिंह के बयान पर बोले पवन खेड़ा
राजनाथ सिंह के बयान पर पवन खेड़ा ने कहा कि चुनाव के जरिए सरकार और व्यवस्था बदलना विपक्ष का मकसद और जिम्मेदारी है. उन्होंने चुनाव आयोग, एनडीए सहयोगियों और संसदीय समर्थन के मुद्दों पर सवाल उठाते हुए सरकार बदलने का दावा किया.
Navratri में सपा नेताओं का Chicken Party Video वायरल, BJP बोली- सनातन का अपमान हुआ
समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन, पीलीभीत जिला अध्यक्ष धर्मेश गंगवार और पार्टी के अन्य नेताओं का नवरात्रि के दौरान चिकन खाते हुए एक वीडियो वायरल हो गया है, जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो एक दिन पहले का है, जिसमें ये नेता पीलीभीत में SP नेता मोहम्मद आरिफ के घर पर फ्राइड चिकन और चटनी का आनंद लेते दिख रहे हैं। यह घटनाक्रम तब हुआ जब सुमन पार्टी कार्यालय में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सम्मेलन में शामिल होने गए थे। इसे भी पढ़ें: IAS Officer ने कहा, 'शट अप', KAS Officer ने दिया जवाब, 'तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई', दो अफसरों की लड़ाई से J&K की सियासत गर्माई भाजपा ने एक्स पर वीडियो साझा करते हुए लिखा कि नकली समाजवाद का दोहरा चरित्र बेनकाब! नवरात्रि में जब सनातनी व्रत रख रहे हैं, तब सपा के PDA सम्मेलन में मुर्गे की दावत उड़ रही है। एक तरफ चुनावी हिंदू बनने का नाटक, दूसरी तरफ सनातन का अपमान। यही है सपा का असली PDA - Pरिवारवाद, Dगा और Aपमान। नवरात्रि 11 से 19 अक्टूबर तक मनाई जा रही है। नौ दिनों तक चलने वाले इस त्योहार के दौरान, कई श्रद्धालु अपनी धार्मिक मान्यताओं के चलते मांस, अंडे, लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करते हैं। वायरल हुए एक वीडियो ने त्योहार के दौरान नेताओं के मांसाहारी भोजन करने के फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीलीभीत के जिला अध्यक्ष ने फोन का कोई जवाब नहीं दिया, जबकि अन्य नेताओं ने भी सवालों से किनारा कर लिया। खबरों के अनुसार, राज्य के गन्ना मंत्री संजय सिंह गंगवार ने सवाल उठाया है कि जब मांस की दुकानें बंद थीं, तो यह खाना कहाँ से आया। उन्होंने कहा कि वह इस मामले की जांच की मांग करते हुए जिलाधिकारी को पत्र लिखेंगे। इसे भी पढ़ें: Indian Navy की बढ़ेगी समुद्री ताकत, Karwar बेस पर कमीशन होगा बहुउद्देशीय जहाज समर्थक इस विवाद ने भाजपा सरकार के खिलाफ सुमन की पिछली टिप्पणियों की ओर भी ध्यान खींचा है। एक जनसभा में, सपा सांसद ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनावों में रोटी, पेट और भूख जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। खबरों के अनुसार, उन्होंने मंदिरों पर दिए जा रहे जोर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मंदिरों से मूर्तियां चोरी होने की घटनाओं और राम मंदिर के लिए दिए गए चंदे में कथित अनियमितताओं का जिक्र किया। इसके अलावा, सुमन ने सामाजिक भेदभाव का भी हवाला दिया; इसमें एक ऐसी घटना शामिल है, जिसमें कथित तौर पर राष्ट्रपति को एक मंदिर में प्रवेश करने से रोका गया था। साथ ही, उन्होंने अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री आवास को गंगाजल से धोए जाने की घटना का भी जिक्र किया। नकली समाजवाद का दोहरा चरित्र बेनकाब ! नवरात्रि में जब सनातनी व्रत रख रहे हैं, तब सपा के PDA सम्मेलन में मुर्गे की दावत उड़ रही है। एक तरफ चुनावी हिंदू बनने का नाटक, दूसरी तरफ सनातन का अपमान। यही है सपा का असली PDA - Pरिवारवाद, Dगा और Aपमान https://t.co/Ti0HyrugH3 — BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) October 15, 2026
Delhi Riots साजिश केस: आरोपी अतहर खान की UAPA मामले में Supreme Court में सुनवाई चार हफ्ते टली
उच्चतम न्यायालय ने फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के पीछे की ‘‘बड़ी साजिश’’ से जुड़े गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले में आरोपी अतहर खान की जमानत याचिका पर सुनवाई शुक्रवार को चार सप्ताह के लिए टाल दी। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू के यह बताने के बाद सुनवाई स्थगित कर दी कि मामले में जवाब दाखिल कर दिया गया है। शीर्ष अदालत ने खान को दिल्ली पुलिस के जवाब पर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने की अनुमति दी। उच्चतम न्यायालय ने इससे पहले खान की अपील पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था। खान ने सात जुलाई के दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उसे जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने अधीनस्थ अदालत के 29 जनवरी के आदेश को चुनौती देने वाली खान की अपील खारिज कर दी थी। कॉल सेंटर के पूर्व कर्मचारी अतहर पर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग में प्रदर्शन की साजिश रचने और उसका आयोजन करने वाले मुख्य आरोपियों में शामिल होने का आरोप है। उस पर हिंसा भड़काने के लिए वहां भड़काऊ भाषण देने का भी आरोप है। दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ के अनुसार, अतहर कथित तौर पर गुप्त बैठकों में शामिल हुआ था जिनमें उसने कहा था कि ‘‘दिल्ली को जलाने का समय आ गया है।’’ उस पर सीसीटीवी कैमरों को नष्ट करने में भी शामिल होने का आरोप है। अतहर को जुलाई 2020 में गिरफ्तार किया गया था। उस पर दंगों के ‘‘मुख्य साजिशकर्ताओं’’ में से एक होने के आरोप में यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। इस बड़ी साजिश से जुड़े मामले में कथित संलिप्तता को लेकर कार्यकर्ता शरजील इमाम, खालिद सैफी और उमर खालिद सहित अन्य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच दिल्ली पुलिस का विशेष प्रकोष्ठ कर रहा है।
'नीतीश कुमार कुछ नहीं थे, मैंने दी कुर्बानी'; अनंत सिंह ने किया 9 हत्याओं वाला दावा
मोकामा से विधायक अनंत सिंह ने कहा कि वह पार्टी को अपनी पार्टी मानते हैं। उन्होंने नीतीश कुमार को लेकर कहा कि जब वह कुछ नहीं थे तब उनके लिए उनके 9 लोग मारे गए थे।
भारतीय नौसेना के नए 'आईएनएस समर्थक' पोत के सामने नहीं टिकेंगे दुश्मन, बेड़े में हुआ शामिल
भारतीय नौसेना में 'आईएनएस समर्थक' युद्धपोत शामिल हो गया है, जिससे नौसेना की ताकत में इजाफा हुआ है। यह बहुउद्देशीय पोत आधुनिक सुविधाओं से लैस है और 'मेक इन इंडिया' पहल है।
AI को गाली दी तो बैन हो जाएगा अकाउंट! इस कंपनी ने लिया एक्शन
AI से सवाल जवाब करना कॉमन हो चुका है. लोग अपने अपने तरीके से सवाल पूछते हैं. कुछ लोग पोलाइट होते हैं तो कुछ गुस्से में पूछते हैं. सही सॉल्यूशन नहीं मिलने पर लोग गाली देने पर भी आमादा हो जाते हैं. एंथ्रॉपिक ने इसे लेकर कुछ सेफगार्ड बनाने की बात कही है. आइए जानते हैं क्या है ये.
औरैया में 75 साल के रामसुगर और 30 साल की रानी की शादी चर्चा में, बेटी की सहेली से हुआ रिश्ता
औरैया। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में 75 वर्षीय बुजुर्ग और 30 वर्षीय इंस्टाग्राम ब्लॉगर की शादी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। सहार विकासखंड के अरियारी गांव निवासी रामसुगर और औरैया की रहने वाली रानी राजपूत ने हाल ही में सगाई की है। दोनों के बीच करीब 45 वर्ष का उम्र का […] The post औरैया में 75 साल के रामसुगर और 30 साल की रानी की शादी चर्चा में, बेटी की सहेली से हुआ रिश्ता appeared first on Sabguru News .
Marco Rubio की मुंबई यात्रा पर Rahul Gandhi ने उठाए सवाल, केंद्र और MEA से मांगा स्पष्टीकरण
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को सरकार से सवाल किया कि अगले हफ्ते मुंबई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारतीय सरकारी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित मुलाकात को लेकर विदेश मंत्रालय के अधिकारी उलझन में क्यों हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शायद इस मामले पर सफाई देनी चाहिए। कांग्रेस नेता का यह बयान, अमेरिकी दूत सर्जियो गोर के उस बयान के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि रुबियो मुंबई में भारतीय सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और हमें उम्मीद है कि मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भी वहां मौजूद रहेंगे। इसे भी पढ़ें: IAS Officer ने कहा, 'शट अप', KAS Officer ने दिया जवाब, 'तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई', दो अफसरों की लड़ाई से J&K की सियासत गर्माई 'X' पर एक पोस्ट में गांधी ने कहा कि मिस्टर रुबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है। मोदी जी, विदेश मंत्रालय में आपके अधिकारी इस बात को लेकर उलझन में हैं कि आखिर चल क्या रहा है। शायद आप इस पर कुछ सफाई देना चाहें। या फिर, अगर आप चाहें तो मैं ही बता दूं? गांधी की टिप्पणी पर सरकार या बीजेपी की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई है। रुबियो अगले हफ्ते भारत आएंगे, जहां वे गुजरात के जामनगर में रिलायंस की इकाई का दौरा करेंगे और बाद में मुंबई में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। गुरुवार को कांग्रेस ने रुबियो की भारत यात्रा को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा और पूछा कि मुंबई में अमेरिकी नेता के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर की 'मुलाकात' पर विदेश मंत्रालय चुप क्यों है। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि गोर ने मुंबई में रुबियो के आगामी दौरे के बारे में और जानकारी दी है। इसे भी पढ़ें: BJP में शामिल नेताओं पर बिफरे Rahul Gandhi तो Kharge ने दिलाई पुरानी दोस्ती की याद रमेश ने 'एक्स' (X) पर लिखा कि यह सुनकर भी कोई खास हैरानी नहीं होती कि मिस्टर रुबियो मुंबई में भारत सरकार के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। लेकिन जो बात काफी हैरान करने वाली है, वह उनका यह बयान है कि 'हमें उम्मीद है कि मंत्री डॉ. जयशंकर वहां अन्य लोगों के साथ हमारे साथ शामिल होंगे'। रमेश ने सवाल किया कि भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली मुलाकातों की घोषणा करने का काम, विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता के बजाय किसी और को कब से सौंप दिया गया है?
Indian Navy में शामिल हुआ पहला निजी बहुउद्देशीय पोत Samarthak, L&T ने बनाया
भारत की निजी पोत निर्माण कंपनी द्वारा निर्मित पहले बहुउद्देशीय पोत ‘समर्थक’ को शुक्रवार को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। इसे युद्धपोत निर्माण में घरेलू उद्योग की भूमिका बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। करवार स्थित नौसैन्य अड्डे पर उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन की मौजूदगी में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि पोत का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने तमिलनाडु के कट्टुपल्ली स्थित अपने पोत निर्माण केंद्र में किया है और इस पोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इस अवसर पर कर्नाटक के श्रम मंत्री संतोष लाड भी मौजूद थे। एडमिरल स्वामीनाथन ने इस पोत को नौसेना में शामिल किए जाने को ‘आत्मनिर्भरता’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस पोत का डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण का पूरा काम एलएंडटी के युद्धपोत डिजाइन केंद्र और पोत निर्माण इकाई में किया गया है। ‘समर्थक’ भारतीय नौसेना में शामिल किए जाने वाले चार बहुउद्देशीय पोतों में पहला है। इसे नौसेना में शामिल किया जाना रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के भारत के प्रयासों की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह पोत भविष्य में नौसेना का अहम हिस्सा बनेता और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अभियानों के लिए एक आदर्श उपयोगी पोत साबित होगा। उन्होंने कहा, ‘‘समर्थक पहला बड़ा युद्धपोत है, जिसे किसी निजी पोत निर्माण कंपनी को बनाने का ठेका दिया गया और उसके द्वारा निर्मित किए जाने के बाद इसे भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।’’ इस पोत को कई तरह की अभियानगत और सहायक भूमिकाएं निभाने के लिए तैयार किया गया है। इनमें स्वदेशी हथियारों और सेंसर का परीक्षण, मानवरहित स्वायत्त प्रणालियों से जुड़े अभियान तथा समुद्री निगरानी और गश्त शामिल हैं। एडमिरल स्वामीनाथन ने बताया कि ‘समर्थक’ अत्याधुनिक ‘डायनेमिक पोजिशनिंग प्रणाली’ से लैस है। यह विकास के चरण वाले स्वदेशी हथियारों और सेंसर के परीक्षण के लिए भी एक मंच के रूप में काम करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘आज तेजी से बदलते तकनीकी परिवेश में ये क्षमताएं विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। समुद्र में परिचालन संबंधी बढ़त बनाए रखने के लिए किसी प्रारूप को उत्पादन के चरण तक पहुंचाने में लगने वाला समय कम करना जरूरी है।’’ नौसेना प्रमुख ने कहा कि इस पोत की क्षमताएं केवल परीक्षण और मूल्यांकन तक सीमित नहीं हैं। लंबे समय तक समुद्र में टिके रहने और अन्य पोतों को सहायता देने की इसकी क्षमता से नौसेना को विभिन्न समुद्री क्षेत्रों में लंबे समय तक अभियान जारी रखने में मदद मिलेगी। ‘समर्थक’ में भारी पोतों को खींचने की सुविधा, चिकित्सा संबंधी व्यवस्थाएं और आग बुझाने की क्षमता भी है। इससे यह समुद्र में संकट में फंसे पोतों की मदद करने और आपात स्थितियों से निपटने में सक्षम होगा। यह मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों के साथ-साथ गैर युद्धक अभियानों में भी मदद कर सकता है। एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि यह पोत नौसेना की अभियानगत तैयारियों को मजबूत करेगा और उभरती प्रौद्योगिकियों को व्यावहारिक सैन्य क्षमताओं में बदलने में मदद करेगा। साथ ही, ‘महासागर’ की राष्ट्रीय परिकल्पना के अनुरूप यह क्षेत्र में संकट के समय सबसे पहले सहायता पहुंचाने वाले देश और पसंदीदा सुरक्षा साझेदार की भारत की भूमिका को और मजबूत करेगा। उन्होंने इस परियोजना से जुड़े एलएंडटी के नेतृत्व और कर्मचारियों के साथ-साथ नौसेना की युद्धपोत निर्माण टीमों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, उपकरण निर्माताओं और अन्य औद्योगिक भागीदारों को बधाई दी। हालांकि, नौसेना प्रमुख ने भविष्य में बनने वाले पोतों की निर्माण गुणवत्ता सुधारने और उनके निर्माण में लगने वाला समय कम करने के लिए इस पोत के निर्माण से सबक लेने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘पहली बार हासिल की गई बड़ी सफलता भी हमें अपने प्रयासों को मजबूत करने के लिए उपयोगी सीख दे सकती है।’’ पोत को नौसेना में शामिल किए जाने के समारोह में पोत के चालक दल को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उच्च मानक स्थापित करने की जिम्मेदारी चालक दल की है।
सत्ता के भय से मुक्त अपराधी करने लगे तांडव? बिहार में क्यों बेखौफ हो रहे अपराधी
भारत के राजनीतिक और सामाजिक मानचित्र पर अपनी अनूठी पहचान रखने वाले बिहार राज्य में इन दिनों कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर एक गंभीर बहस छिड़ गई है। आम नागरिकों से लेकर विपक्ष के राजनेताओं और नीति निर्धारकों के मन में एक ही सवाल बार-बार कौंध रहा है कि आखिर क्या वजह है कि राज्य के भीतर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें अब पुलिस, कानून और प्रशासन का कोई खौफ ही नहीं बचा है। दिनदहाड़े गोलीबारी, फिरौती के लिए अपहरण, लूटपाट और हत्या जैसी जघन्य वारदातों ने राज्य के आम जनजीवन को झकझोर कर रख दिया है। एक समय जिस सुशासन की मिसाल देकर बिहार में प्रशासनिक कसावट की बात की जाती थी, आज वही व्यवस्था इन बढ़ते आपराधिक मामलों के आगे सवालों के घेरे में खड़ी नजर आती है। आखिर क्यों ऐसा प्रतीत होता है कि अपराधी सत्ता और कानून के भय से पूरी तरह मुक्त होकर खुलेआम तांडव कर रहे हैं? आइए एक इन्वेस्टिगेटिव और ग्राउंड रिपोर्टर की नजर से गहराई से जानते हैं कि बिहार में अपराधियों के बेखौफ होने के पीछे के वे कौन से सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक कारण हैं जो इस आग में घी डालने का काम कर रहे हैं।कानून का खौफ या प्रशासनिक ढिलाई? क्यों बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं बदमाशकिसी भी सभ्य समाज और राज्य की रीढ़ उसकी मजबूत कानून-व्यवस्था होती है, जहाँ अपराधियों के मन में खाकी वर्दी और कानून का ऐसा खौफ होना चाहिए कि वे कोई भी अपराध करने से पहले सौ बार सोचें। लेकिन पिछले कुछ समय से बिहार के विभिन्न जिलों—चाहे वह राजधानी पटना हो या मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, छपरा या पूर्णिया—से जिस तरह की आपराधिक वारदातें सामने आ रही हैं, वे यह बताने के लिए काफी हैं कि अपराधियों के दिलों से कानून का डर पूरी तरह से गायब हो चुका है। बदमाशों के भीतर यह दुस्साहस इस बात का प्रमाण है कि उन्हें कहीं न कहीं यह यकीन हो चला है कि वे अपराध करने के बाद आसानी से कानून की पैनी नजरों से बच निकलेंगे। पुलिस की कार्यप्रणाली में आती सुस्ती, अदालतों में मुकदमों की लंबी और जटिल प्रक्रिया तथा सजा मिलने में होने वाली भारी देरी इन अपराधियों के मनोबल को और अधिक मजबूत कर देती है। जब किसी समाज में कानून का डर कमजोर पड़ता है, तो अपराध एक समानांतर सत्ता की तरह उभरने लगता है, और यही स्थिति आज बिहार के कई हिस्सों में चिंता का विषय बनती जा रही है।राजनीतिक संरक्षण और अपराधियों का गठजोड़: क्या सत्ता की आड़ में मजबूत हो रहे हैं बदमाश?बिहार की राजनीति और अपराध का पुराना और गहरा नाता रहा है, जिसे समय-समय पर विभिन्न राजनीतिक दलों और विश्लेषकों द्वारा रेखांकित किया जाता रहा है। आज के समय में भी यह एक कड़वा सच है कि कई छोटे-बड़े अपराधी और बाहुबली प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक दलों, स्थानीय क्षत्रपों या सत्ता के गलियारों में बैठे प्रभावशाली लोगों के संरक्षण की आड़ में पलते हैं। जब चुनावों के दौरान या राजनीतिक जोड़-तोड़ में ऐसे तत्वों का इस्तेमाल होने लगता है, तो पुलिस और स्थानीय प्रशासन भी कार्रवाई करने से पहले कई बार राजनीतिक दबावों के आगे घुटने टेकने पर मजबूर हो जाता है। यही वजह है कि जब कोई अपराधी किसी बड़े राजनीतिक चेहरे के आंचल के नीचे सुरक्षित महसूस करता है, तो उसका दुस्साहस सातवें आसमान पर पहुंच जाता है। उसे यह विश्वास होता है कि यदि उस पर कोई कानूनी कार्रवाई हुई भी, तो उसका राजनीतिक गॉडफादर उसे बचा लेगा। जब तक राजनीति और अपराध के इस नापाक गठजोड़ को जड़ से उखाड़ कर फेंका नहीं जाता, तब तक आम जनता को भयमुक्त माहौल मिलना असंभव सा प्रतीत होता है।पुलिसिया सुस्ती, तकनीकी कमियां और जमीनी स्तर पर खुफिया तंत्र की विफलताकानून-व्यवस्था को बनाए रखने की मुख्य जिम्मेदारी राज्य की पुलिस और खुफिया तंत्र (Intelligence Network) पर होती है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बिहार के कई थानों में आज भी आधुनिकीकरण और संसाधनों की भारी कमी बनी हुई है। थानों में पर्याप्त पुलिस बल का न होना, गश्त के लिए वाहनों की कमी और आधुनिक हथियारों व डिजिटल सर्विलांस तकनीक की सुस्त रफ्तार अपराधियों को हमेशा पुलिस से एक कदम आगे रखती है। इसके अलावा, बीट पुलिसिंग (Beat Policing) और जमीनी स्तर की खुफिया जानकारी जुटाने का तंत्र कई जगहों पर कमजोर पड़ चुका है। पुलिस का मुख्य ध्यान अक्सर वीवीआईपी सुरक्षा, धरना-प्रदर्शन और कागजी आंकड़ों को दुरुस्त करने पर रहता है, जिसके कारण जमीनी स्तर पर सक्रिय अपराधियों और छोटे सिंडिकेट्स पर समय रहते नकेल नहीं कस पाती है। जब तक पुलिस का इकबाल बुलंद नहीं होगा और अपराधियों के अंदर त्वरित कार्रवाई का खौफ पैदा नहीं होगा, तब तक इस तरह की वारदातों पर रोक लगाना कठिन होगा।आम जनता के बीच बढ़ता खौफ और राज्य सरकार की कानून व्यवस्था पर उठते गंभीर सवालइन तमाम आपराधिक घटनाओं और बेलगाम हो रहे बदमाशों के तांडव का सबसे बुरा असर राज्य के सामान्य नागरिकों, व्यापारियों और युवाओं पर पड़ रहा है। कारोबारियों में रंगदारी और फिरौती के फोन आने आम बात हो गई है, जिससे राज्य में नए निवेश और उद्योग-धंधों के विकास पर भी बुरा असर पड़ रहा है। आम आदमी अपने ही मोहल्लों और सड़कों पर खुद को असुरक्षित महसूस करने लगा है। विपक्षी दल लगातार सरकार को इस मुद्दे पर घेर रहे हैं और जंगलराज की वापसी के आरोप लगा रहे हैं। जनता अब सिर्फ कागजी दावों और राजनीतिक बयानों से संतुष्ट होने वाली नहीं है, बल्कि वह धरातल पर ठोस कार्रवाई और पुलिस की सक्रियता देखना चाहती है। यदि समय रहते सरकार ने इस दिशा में कठोर और निर्णायक कदम नहीं उठाए, तो यह स्थिति आने वाले समय में राज्य की सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन सकती है।
तेजस्वी यादव की बेटी कात्यायनी का तीसरा जन्मदिन: परिवार में छाई खुशियां
बिहार की राजनीति में हमेशा अपनी रैलियों, बयानों और सियासी उठापटक के बीच व्यस्त रहने वाले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कद्दावर नेता और पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के घर इन दिनों खुशियों और उत्सव का एक बेहद प्यारा माहौल बना हुआ है। राजनीति की तपिश और व्यस्त दिनचर्या से दूर तेजस्वी यादव के परिवार में एक ऐसा निजी और भावुक पल आया है जिसने उनके समर्थकों और चाहने वालों के चेहरों पर भी मुस्कान बिखेर दी है। तेजस्वी यादव और उनकी पत्नी राजश्री यादव की प्यारी बेटी 'कात्यायनी' (Katyayani) आज अपना तीसरा जन्मदिन मना रही हैं। इस खास और पावन अवसर पर तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी लाडली बेटी के साथ कुछ बेहद खूबसूरत और भावुक तस्वीरें साझा करते हुए एक ऐसा प्यारा संदेश लिखा है, जिसने इंटरनेट पर लोगों का दिल जीत लिया है। तेजस्वी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर अपनी बेटी को मां दुर्गा के आशीर्वाद का प्रत्यक्ष अंश बताया है। आइए एक सेलिब्रिटी और सोशल रिपोर्टर की नजर से गहराई से जानते हैं कि तेजस्वी यादव की बेटी के इस जन्मदिन पर परिवार में किस तरह का जश्न मनाया जा रहा है और उन्होंने अपने संदेश में क्या कुछ खास बातें साझा की हैं।सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें: पापा तेजस्वी और मम्मी राजश्री का लाडली पर प्यारजैसे ही कात्यायनी का तीसरा जन्मदिन शुरू हुआ, तेजस्वी यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर बेटी के साथ बिताए गए कुछ अनमोल पलों की तस्वीरें शेयर कीं। इन तस्वीरों में कात्यायनी बेहद प्यारी लग रही हैं और उनके चेहरे की मासूमियत देखते ही बनती है। तस्वीरों को शेयर करते हुए तेजस्वी यादव ने बहुत ही मार्मिक और दिल को छू लेने वाले शब्दों में लिखा कि उनकी बेटी कात्यायनी का उनके जीवन में आना किसी चमत्कार से कम नहीं है। उन्होंने लिखा कि उनकी यह बिटिया उनके और पूरे परिवार के जीवन में उजाला लेकर आई है। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों के सामने आते ही आरजेडी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और देश भर से उनके प्रशंसकों द्वारा जन्मदिन की बधाइयां देने का तांता लग गया है। कुछ ही घंटों में इस पोस्ट पर हजारों लाइक्स और कमेंट्स आ चुके हैं, जिसमें हर कोई नन्हीं कात्यायनी को लंबी उम्र और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दे रहा है।'यह मां दुर्गा के आशीर्वाद का अंश है': क्यों खास है कात्यायनी का यह जन्मदिन?सनातन संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा के नौ रूपों में छठे स्वरूप को 'मां कात्यायनी' के नाम से पूजा जाता है। तेजस्वी यादव ने अपनी बेटी के जन्मदिन के मौके पर इस बात का विशेष रूप से जिक्र किया है कि उनकी बेटी का नाम कात्यायनी रखना और उसका नवरात्रि या उसके आसपास के पावन दिनों में बड़ा होना उनके लिए कितना आध्यात्मिक और खास अनुभव है। तेजस्वी ने अपने संदेश में लिखा कि उनकी लाडली बिटिया उनके लिए किसी देवी के आशीर्वाद से कम नहीं है, जो उनके घर की रौनक और परिवार की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है। राजनीति की तमाम कड़वाहटों, विरोधियों के हमलों और चौबीसों घंटे की चुनावी भागदौड़ के बीच तेजस्वी यादव के भीतर का एक पिता किस तरह अपनी बेटी की छोटी-छोटी मुस्कान में अपनी सारी थकान भूल जाता है, यह उनकी इन पोस्ट्स में साफ झलकता है।राजनीतिक व्यस्तता के बीच परिवार के लिए खास वक्त निकालते हैं तेजस्वी यादवबिहार की राजनीति में इन दिनों आगामी चुनावों और राजनीतिक रणनीतियों को लेकर सरगर्मी अपने चरम पर है। तेजस्वी यादव लगातार जनसभाओं, यात्राओं और पार्टी की बैठकों में व्यस्त चल रहे हैं। इसके बावजूद, वे अपने परिवार और खासकर अपनी बेटी के साथ समय बिताने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देते हैं। राजनीति के मंच पर एक आक्रामक और जुझारू नेता की छवि रखने वाले तेजस्वी यादव जब घर पर अपने परिवार के बीच होते हैं, तो उनका एक पूरी तरह से अलग और स्नेही रूप देखने को मिलता है। कात्यायनी के जन्म के बाद से ही वे अक्सर अपनी बेटी के साथ खेलने और उसकी हर छोटी-बड़ी गतिविधि के वीडियो सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों के साथ साझा करते रहते हैं, जिन्हें जनता का भी भरपूर प्यार मिलता है।समर्थकों में जश्न का माहौल, पटना से लेकर दिल्ली तक दी जा रही हैं बधाइयांतेजस्वी यादव की बेटी के तीसरे जन्मदिन के मौके पर पटना स्थित उनके आवास पर भी एक छोटे और निजी समारोह का आयोजन किया गया है, जिसमें परिवार के करीबी लोग और चुनिंदा रिश्तेदार शामिल हुए हैं। इसके अलावा, बिहार के अलग-अलग जिलों से आरजेडी कार्यकर्ता और समर्थक सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी लिटिल प्रिंसेस को जन्मदिन की बधाइयां भेज रहे हैं। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर विभिन्न दलों के कई नेताओं ने भी तेजस्वी यादव को उनकी बेटी के जन्मदिन पर शुभकामनाएं दी हैं। नन्हीं कात्यायनी का यह जन्मदिन इस बात का सबूत है कि कितनी भी बड़ी राजनीतिक लड़ाइयां क्यों न हों, परिवार का प्यार और बच्चों की मासूमियत इंसान को हमेशा जमीन से जोड़े रखती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
बोलचाल बंद थी, रूठे नीतीश को मनाने के लिए लालू ने दशहरा के दिन किया फोन
बिहार की राजनीति में 'बड़े भाई' लालू प्रसाद यादव और 'छोटे भाई' नीतीश कुमार का रिश्ता हमेशा से ही किसी राजनीतिक थ्रिलर फिल्म की तरह उतार-चढ़ाव भरा रहा है। दोनों नेताओं के बीच दोस्ती और दुश्मनी का यह दौर दशकों से चला आ रहा है, लेकिन वर्ष 2016 के दौरान बिहार की सत्ता के गलियारों में एक ऐसा दौर भी आया था जब दोनों शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत पूरी तरह से बंद हो गई थी। तत्कालीन महागठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इतने ज्यादा नाराज हो गए थे कि उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से दूरी बना ली थी और उनका फोन तक उठाना बंद कर दिया था। लालू यादव को जब लगा कि छोटे भाई का यह गुस्सा उनकी सरकार और बेटे तेजस्वी यादव के राजनीतिक भविष्य के लिए खतरा बन सकता है, तो उन्होंने विजयादशमी यानी दशहरा के पावन अवसर को एक बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। आइए एक पॉलिटिकल रिपोर्टर की नजर से गहराई से जानते हैं कि उस वक्त ऐसा क्या हुआ था जिसके चलते दोनों के बीच बातचीत बंद हो गई थी और कैसे दशहरा के दिन फोन बजते ही सियासत में भूचाल आ गया था।शहाबुद्दीन के 'परिस्थितियों के मुख्यमंत्री' वाले बयान से भड़के थे नीतीश कुमारइस पूरे विवाद और तनातनी की शुरुआत तब हुई थी जब सीवान के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन को अदालत से जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा किया गया था। जेल से बाहर आते ही शहाबुद्दीन ने खुलेआम बयान देते हुए कहा था कि उनके असली नेता तो केवल लालू प्रसाद यादव हैं, जबकि नीतीश कुमार तो महज 'परिस्थितियों के मुख्यमंत्री' हैं। सुशासन बाबू के नाम से जाने जाने वाले नीतीश कुमार के लिए एक शासकीय प्रधान के रूप में यह बयान सीधा उनकी संवैधानिक अथॉरिटी और सम्मान पर बहुत बड़ा हमला था। नीतीश कुमार बेहद गुस्से में आ गए थे। इसके बाद जब शहाबुद्दीन को 30 सितंबर 2016 को दोबारा अदालत में आत्मसमर्पण करना पड़ा, तो उन्होंने फिर से नीतीश कुमार के खिलाफ तीखी टिप्पणी कर दी। राजद खेमे की ओर से शहाबुद्दीन को चुप न कराए जाने से आहत होकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लालू यादव से दूरी बना ली और दोनों के बीच रोजमर्रा की बोलचाल पूरी तरह से ठप हो गई।जब तेजस्वी की डिप्टी सीएम की कुर्सी पर मंडराने लगा खतरा, तो लालू ने बनाया खास प्लान10 साल के लंबे अंतराल के बाद लालू प्रसाद यादव के परिवार को बिहार की सत्ता में वापसी का मौका मिला था। उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव पहली बार विधायक बनने के साथ ही राज्य के उप-मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जबकि बड़े बेटे तेज प्रताप यादव भी कैबिनेट मंत्री थे। लेकिन नीतीश कुमार के इस तीखे तेवर और चुप्पी ने राजद कैंप में खलबली मचा दी थी। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर शुरू हो गई थी कि गुस्से से बौखलाए नीतीश कुमार कभी भी कोई बड़ा राजनीतिक फैसला ले सकते हैं और एनडीए (NDA) के साथ फिर से हाथ मिला सकते हैं। अपने बेटों का राजनीतिक करियर और सत्ता बचाने के लिए लालू यादव लगातार नीतीश कुमार से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन नीतीश किसी भी कीमत पर बात करने के मूड में नजर नहीं आ रहे थे।दशहरा के दिन बजा फोन: कैसे लालू यादव ने मनाया विजयादशमी का बहाना?लालू यादव राजनीति के बहुत पुराने और मझे हुए खिलाड़ी माने जाते हैं। जब सीधे तौर पर बात करने के सारे दरवाजे बंद हो चुके थे, तो उन्होंने धार्मिक और सामाजिक त्योहार का सहारा लिया। विजयादशमी (दशहरा) का दिन था। भारतीय परंपरा में यह माना जाता है कि दशहरे के दिन कोई भी शत्रुता या कड़वाहट भूलकर शुभकामनाएं दी जाती हैं। लालू यादव ने सही मौका भांपते हुए सीधे मुख्यमंत्री आवास फोन लगा दिया। विजयादशमी का पावन अवसर होने के कारण मर्यादावश नीतीश कुमार ने फोन उठाया और लालू यादव ने उन्हें विजयादशमी की बधाई देते हुए बातचीत का सिलसिला फिर से शुरू कर दिया। बातचीत के तुरंत बाद लालू यादव ने मीडिया के सामने आकर बड़े ही शांत अंदाज में बयान दिया कि उनके और नीतीश कुमार के बीच कोई भी मतभेद नहीं है। हालांकि, जब पत्रकारों ने पूछा कि सीएम आवास तो आपके घर के बिल्कुल करीब है, फिर आपने जाकर मिलकर बधाई क्यों नहीं दी, तो लालू यादव इस सवाल को टाल गए थे।क्या मान गए थे 'नीतीश'? आठ महीने बाद बदल गई थी बिहार की पूरी सरकार!ऊपरी तौर पर भले ही विजयादशमी के दिन हुई उस एक फोन कॉल ने उस वक्त के राजनीतिक संकट को कुछ समय के लिए टाल दिया हो और गठबंधन की सरकार चलती दिखाई दी, लेकिन हकीकत यह थी कि नीतीश कुमार उस अपमान को भूले नहीं थे। 'सुशासन बाबू' अपने आत्मसम्मान से समझौता करने वाले नेताओं में से नहीं थे और वे केवल सही मौके का इंतजार कर रहे थे। आखिरकार लगभग आठ महीने बाद जब सीबीआई और अन्य मामलों में तेजस्वी यादव और लालू परिवार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे, तो नीतीश कुमार ने बिना देर किए जुलाई 2017 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राजद के साथ नाता तोड़कर दोबारा बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली। इस घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि दशहरा के दिन लालू यादव का फोन काम तो आया, लेकिन वह नीतीश कुमार के मन में जमे अविश्वास के बर्फ को पिघलाने में पूरी तरह से नाकाम रहा था।
जिम में अचानक गिरा इंसान, सांस और नब्ज बंद! डॉक्टर ने बताया इसका कारण
हाल ही में सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें लोग अचानक बेहोश होकर गिर जाते हैं और उनकी मौत हो जाती है। डॉक्टरों के अनुसार इसका मुख्य कारण कार्डियक अरेस्ट है, जो हार्ट अटैक से अलग एक इलेक्ट्रिकल समस्या है। इसमें दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है जिससे व्यक्ति तुरंत बेहोश हो जाता है। कार्डियक अरेस्ट के समय तुरंत सीपीआर देना जीवन रक्षक साबित हो सकता है। डॉ समीर श्रीवास्तव ने बताया कि हार्ट अटैक में दिल की धड़कन बनी रहती है जबकि कार्डियक अरेस्ट में दिल पूरी तरह बंद हो जाता है। इस स्थिति में त्वरित चिकित्सा सहायता बेहद जरूरी है।
नरेश मीणा का बड़ा सियासी ट्विस्ट: आम आदमी पार्टी से मांगी झाड़ू
राजस्थान की स्थानीय राजनीति और ग्रामीण हलकों में इस वक्त एक नया और बेहद दिलचस्प सियासी ड्रामा देखने को मिल रहा है। अपने आक्रामक तेवरों, किसान आंदोलनों और बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले फायरब्रांड नेता नरेश मीणा एक बार फिर सुर्खियों के केंद्र में आ गए हैं। बारां जिले में होने वाले आगामी पंचायत चुनावों (Panchayat Elections) को लेकर राजस्थान में 'तीसरे मोर्चे' का ताना-बाना बुना जा रहा था, जिसमें आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ गठबंधन की अटकलें जोरों पर थीं। माना जा रहा था कि नरेश मीणा के समर्थकों को आम आदमी पार्टी के सिंबल 'झाड़ू' पर मैदान में उतारा जाएगा। लेकिन जैसे ही आम आदमी पार्टी ने उम्मीदवारों की अपनी पहली आधिकारिक सूची जारी की, उसमें नरेश मीणा समर्थित एक भी दावेदार का नाम नजर नहीं आया। इस बड़े सियासी झटके के तुरंत बाद नरेश मीणा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स (X) पर बसपा का चुनावी प्रतीक 'हाथी' (Elephant Symbol) पोस्ट कर दिया, जिसके बाद से राज्य के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या नरेश मीणा अब बहुजन समाज पार्टी (BSP) का दामन थामने जा रहे हैं? आइए एक राजनीतिक और ग्राउंड रिपोर्टर की नजर से गहराई से जानते हैं कि इस पूरे सियासी घटनाक्रम की इनसाइड स्टोरी क्या है।आम आदमी पार्टी की पहली सूची और नरेश मीणा के समर्थकों को झटकापूरा विवाद तब शुरू हुआ जब राजस्थान के बारां जिले की चार पंचायत समितियों के 41 वार्डों के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की। इससे पहले तक चर्चाएं गर्म थीं कि खाद किल्लत और किसानों की समस्याओं को लेकर हाल ही में बारां से जयपुर तक बड़ा पैदल मार्च निकालने वाले नरेश मीणा और उनके प्रमुख समर्थकों को 'झाड़ू' का सिंबल दिया जाएगा। हालांकि, सूची बाहर आते ही उनके समर्थकों के नाम गायब मिले। नरेश मीणा के खेमे और तीसरे मोर्चे के नेताओं का आरोप है कि आम आदमी पार्टी ने स्थानीय स्तर पर विपक्षी कांग्रेस नेताओं से मिलीभगत करके जानबूझकर नरेश मीणा समर्थकों के टिकट काटे हैं। टिकट कटने और सिंबल न मिलने की इस खबर ने चुनावी माहौल को और ज्यादा गरमा दिया है।एक्स पर अचानक पोस्ट की 'हाथी' की तस्वीर: क्या बसपा से साधी जा रही है चुनावी गोटियां?आम आदमी पार्टी से झटका मिलने के कुछ ही घंटों बाद नरेश मीणा ने सोशल मीडिया पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) के आधिकारिक चुनाव चिन्ह 'हाथी' से जुड़ी एक रहस्यमयी पोस्ट शेयर कर दी। बिना किसी लंबे-चौड़े कैप्शन के किए गए इस एक पोस्ट ने राजस्थान की राजनीति में तहलका मचा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नरेश मीणा इस पोस्ट के जरिए दो बड़े संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। पहला, यह आम आदमी पार्टी के रुख पर उनका एक कड़ा विरोध प्रदर्शन है, और दूसरा, यह उनके समर्थकों के लिए एक नया संकेत हो सकता है कि वे पंचायत चुनाव और आगामी राजनीतिक सफर के लिए बसपा (BSP) के सिंबल या उनके साथ तीसरे विकल्प के रूप में हाथ मिलाने की ओर बढ़ रहे हैं।समर्थकों में असमंजस: अब किस चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरेंगे नरेश मीणा के उम्मीदवार?नरेश मीणा के इस अप्रत्याशित कदम के बाद उनके समर्थकों और बारां के ग्रामीण मतदाताओं के बीच भारी असमंजस की स्थिति बन गई है। समर्थकों ने पंचायत समिति और जिला परिषद चुनावों के लिए महीनों से धरातल पर मेहनत की थी। अब सवाल यह उठता है कि क्या उनके उम्मीदवार निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ेंगे या फिर बहुजन समाज पार्टी औपचारिक रूप से उन्हें अपने सिंबल पर मैदान में उतारेगी। बसपा के स्थानीय नेताओं के साथ भी भीतर ही भीतर बातचीत की खबरें उड़ रही हैं, हालांकि अभी तक किसी औपचारिक शामिल होने का आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है।राजस्थान में तीसरे मोर्चे का भविष्य और ग्रामीण राजनीति पर असरराजस्थान की राजनीति पारंपरिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस (Congress) के बीच सिमटी रही है, लेकिन हाल के वर्षों में नरेश मीणा जैसे निर्दलीय और स्थानीय आंदोलनों से उभरे नेताओं ने एक सशक्त तीसरे मोर्चे की गुंजाइश बनाई है। आम आदमी पार्टी के साथ तालमेल टूटने और बसपा के साथ जुड़ने की इन अटकलों ने यह साफ कर दिया है कि राजस्थान के ग्रामीण और किसान बहुल इलाकों में पंचायत चुनाव बेहद दिलचस्प होने जा रहे हैं। नरेश मीणा का अगला कदम चाहे जो भी हो, लेकिन 'झाड़ू' की मांग से शुरू होकर 'हाथी' की सवारी तक पहुंचे इस ड्रामे ने विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ खेमे दोनों को सोचने पर मजबूर जरूर कर दिया है।
जम्मू-कश्मीर में एक वरिष्ठ IAS अधिकारी की कथित अभद्रता ने प्रशासनिक व्यवस्था, महिला अधिकारियों की गरिमा और सत्ता के अहंकार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हम आपको बता दें कि मिशन युवा (Mission YUVA) की समीक्षा बैठक में वरिष्ठ IAS अधिकारी कुमार राजीव रंजन पर एक महिला KAS अधिकारी के साथ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और विरोध करने पर उन्हें निलंबित कराने की धमकी देने का आरोप लगा है। 14 अक्टूबर को हुई इस बैठक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद घाटी की सियासत में उबाल आ गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के नेताओं ने मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है। वायरल वीडियो के मुताबिक, श्रम एवं रोजगार विभाग के प्रशासनिक सचिव कुमार राजीव रंजन मिशन युवा की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में वर्चुअल माध्यम से शामिल सहायक निदेशक और कश्मीर प्रशासनिक सेवा (KAS) की अधिकारी बेनीश वानी के साथ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) की भूमिका को लेकर बहस शुरू हुई। रंजन ने सवाल उठाया कि कार्यक्रम में NRLM की जरूरत क्यों है और अपना काम दूसरों को क्यों सौंपा जा रहा है? उन्होंने NRLM को केवल सहयोगी माध्यम बताते हुए कहा कि वह कभी प्राधिकरण नहीं रहा। इसे भी पढ़ें: Jammu Kashmir High Court ने 2009-10 से पंजीकृत वकीलों के लिए AIBE पास करना किया अनिवार्य इस पर बेनीश वानी ने जवाब दिया कि NRLM मुख्य प्राधिकरण नहीं है, लेकिन उसे सहयोग तो करना ही होगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनका लक्ष्य पूरा हो चुका है। यहीं से बातचीत का लहजा कथित तौर पर बिगड़ गया। वीडियो में रंजन को महिला अधिकारी पर चिल्लाते हुए ‘शट अप, मत बोलिए’ कहते सुना जा सकता है। वानी ने भी पलटकर जवाब दिया, ‘और आप मुझसे इस तरह बात करने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं?’ इसके बाद दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। आरोप है कि रंजन ने महिला अधिकारी के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। जब वानी ने इस भाषा पर आपत्ति जताई, तो रंजन बैठक में मौजूद एक अधिकारी से उनका निलंबन आदेश टाइप करने को कहते सुनाई दिए। जवाब में वानी ने कहा, ‘कोई बात नहीं, आप मुझे निलंबित कर सकते हैं।’ इसके बाद रंजन ने उन्हें ‘गेट आउट’ कहकर बैठक से बाहर जाने को कहा। वानी भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए वहां से चली गईं। दूसरी ओर, इस घटना पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और श्रीनगर के सांसद आगा रूहुल्लाह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ IAS अधिकारी का महिला KAS अधिकारी से इस तरह बात करना शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि अधिकारी ने अपनी आवाज ऊंची की, जबकि महिला अधिकारी ने अपनी गरिमा की रक्षा की। रूहुल्लाह ने सवाल उठाया कि केवल अपनी बात पूरी करने का अवसर मांगने पर किसी महिला के कॅरियर को खतरे में डालने की धमकी कैसे दी जा सकती है? रूहुल्लाह ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में प्रशासनिक व्यवहार पर भी सवाल उठाए। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्य सचिव को टैग करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अपनी गरिमा की रक्षा करने वाली महिला अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हुई, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उधर, पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने रंजन की भाषा को अपमानजनक और अस्वीकार्य बताते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तथा उपराज्यपाल से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन और पुलिस में स्थानीय अधिकारियों को कमजोर कर बाहरी अधिकारियों के अधीन बनाने की कोशिश हो रही है। मुफ्ती ने कहा कि कश्मीरी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई में दिखाई जाने वाली तत्परता यहां भी दिखनी चाहिए। साथ ही पुलवामा के विधायक और वरिष्ठ पीडीपी नेता वहीद पारा ने भी घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यदि एक महिला अधिकारी के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो आम नागरिकों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। देखा जाये तो यह पहला मौका नहीं है जब 2010 बैच के IAS अधिकारी कुमार राजीव रंजन विवादों में आए हैं। वर्ष 2020 में कथित हथियार लाइसेंस घोटाले में CBI द्वारा गिरफ्तारी के बाद उन्हें निलंबित किया गया था। पिछले वर्ष CBI ने रंजन और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति कथित तौर पर अर्जित करने के मामले में भी केस दर्ज किया था। फिलहाल वायरल वीडियो ने प्रशासनिक जवाबदेही की बहस को तेज कर दिया है। सवाल सिर्फ एक बैठक में इस्तेमाल की गई भाषा का नहीं, बल्कि उस कार्यसंस्कृति का है जिसमें वरिष्ठता को क्या असहमति दबाने और निलंबन की धमकी देने का अधिकार समझ लिया गया है? अब निगाहें सरकार और प्रशासन पर हैं। देखना होगा कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय होगी, या महिला अधिकारी की गरिमा का सवाल भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
अमेरिका-पाकिस्तान युद्ध छिड़ा तो पाकिस्तान के साथ खड़े होंगे
भारतीय राजनीतिक गलियारों में बयानों के तीर अक्सर राजनेताओं के लिए बड़ी मुसीबत बन जाते हैं और ऐसा ही कुछ इन दिनों राजस्थान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ (Madan Rathore) के साथ होता नजर आ रहा है। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है, जिसमें वे यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि यदि कभी अमेरिका और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो भारत को पड़ोसी होने के नाते पाकिस्तान का समर्थन करना चाहिए। इस बयान के सामने आते ही देश की सियासत में भूचाल आ गया है। विपक्षी दलों खासकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) ने इसे लेकर बीजेपी पर तीखा हमला बोला है और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर सवाल खड़े किए हैं। चौतरफा घिरने के बाद अब मदन राठौड़ और पार्टी की ओर से इस पर सफाई दी जा रही है। आइए एक राजनीतिक और ग्राउंड रिपोर्टर की नजर से गहराई से जानते हैं कि इस पूरे विवाद की असल कहानी क्या है और बयान पर क्यों इतना हंगामा मचा हुआ है।वायरल वीडियो और भाषण का वह हिस्सा जिस पर गरमाई देश की सियासतपूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मदन राठौड़ का एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिया गया भाषण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती से जुड़े एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कूटनीतिक और भू-राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा की थी। वायरल फुटेज के मुताबिक, वे यह कहते सुने गए कि यदि कभी अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कोई टकराव या युद्ध होता है, तो भारत को अपने पड़ोसी देश यानी पाकिस्तान के साथ खड़ा होना चाहिए, क्योंकि वह हमारा पड़ोसी है। हालांकि, इसी बयान में उन्होंने यह भी जोड़ा था कि जब बात भारत और पाकिस्तान के आपसी संबंधों या विवाद की आती है, तो देश हमेशा अपने देश यानी भारत के साथ खड़ा नजर आता है। लेकिन उनके इस बयान के पहले हिस्से को लेकर सोशल मीडिया पर विरोधियों को बड़ा हथियार मिल गया और देखते ही देखते यह राष्ट्रीय स्तर पर बहस का मुद्दा बन गया।कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का तीखा हमला: पूछा- क्या यही है बीजेपी का राष्ट्रवाद?इस बयान के बाहर आते ही विपक्षी दलों ने बीजेपी को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता और अन्य नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो पार्टी हर मुद्दे पर दूसरों की देशभक्ति की परीक्षा लेती है, उसके प्रदेश अध्यक्ष का यह बयान हैरान करने वाला है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी इस बयान से इत्तेफाक रखते हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी ने भी इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि जब विपक्ष सवाल पूछता है तो उन्हें देशद्रोही करार दिया जाता है, लेकिन जब सत्ताधारी पार्टी का कोई बड़ा नेता पाकिस्तान के पक्ष में खड़े होने की बात करता है, तो उनका राष्ट्रवाद कहां गायब हो जाता है। इस तरह के राजनीतिक हमलों ने इस बयान को एक बड़े राष्ट्रीय विवाद में बदल दिया।चौतरफा घिरने के बाद मदन राठौड़ की सफाई: बोले- 'मेरे बयान को पूरी तरह से तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया'विपक्ष के तीखे तेवरों और बढ़ते सियासी दबाव को देखते हुए राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष मदन राठौड़ ने सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट की और सफाई दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके बयान को संदर्भ से हटकर गलत तरीके से पेश किया गया है और उनके कहने का मतलब कुछ और था। राठौड़ ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने वह बात एक खेल या क्रिकेट मैच के उदाहरण के तौर पर समझाई थी, न कि किसी वास्तविक सैन्य युद्ध के संदर्भ में। उनका कहना था कि यदि खेल के मैदान पर भी कोई देश किसी अन्य से खेलता है, तो पड़ोसी होने के नाते समीकरण अलग होते हैं, लेकिन उनके बयान के एक छोटे हिस्से को एडिट करके दुर्भावनापूर्ण तरीके से वायरल किया गया है ताकि उनकी और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।आतंकवाद और देशहित के मुद्दों पर बीजेपी का पक्ष स्पष्टविवाद बढ़ने के बाद पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी मोर्चा संभाल लिया है और यह साफ किया है कि भारत की विदेश नीति और आतंकवाद के खिलाफ पार्टी का रुख हमेशा से पूरी तरह स्पष्ट और कठोर रहा है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि जो देश भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देता है, उसके प्रति किसी भी प्रकार की नरमी का सवाल ही पैदा नहीं होता। मदन राठौड़ के इस स्पष्टीकरण के बाद भले ही पार्टी ने डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की हो, लेकिन आने वाले दिनों में यह बयान राजनीतिक मंचों पर विरोधियों के लिए एक बड़ा हथियार बना रहेगा, जिस पर बहस अभी थमती हुई नजर नहीं आ रही है।
केंद्र सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुला सकती है।
JJM Scam: अब जेल से बाहर आएंगे महेश जोशी, सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत
राजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी, सनसनीखेज और राजनीतिक हलचल पैदा करने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य के बहुचर्चित और करोड़ों रुपये के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले के मामले में लंबे समय से कानूनी शिकंजे में फंसे राजस्थान सरकार के पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेश जोशी (Mahesh Joshi) को देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिल गई है। पिछले लगभग डेढ़ साल से जेल की सलाखों के पीछे या कानूनी दांव-पेच के बीच संघर्ष कर रहे महेश जोशी के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में उनकी जमानत याचिका मजबूती से रखी, जिसके बाद अदालत ने उन्हें राहत प्रदान करते हुए जमानत मंजूर कर ली है। इस बड़े फैसले के बाद अब उनके जेल से बाहर आने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। आइए एक इन्वेस्टिगेटिव और पॉलिटिकल रिपोर्टर की नजर से गहराई से जानते हैं कि जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले का पूरा मामला क्या है और सुप्रीम कोर्ट से इस राहत के मिलने के बाद राजस्थान की सियासत पर इसका क्या असर पड़ने वाला है।क्या है बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाला और क्यों घिरे थे महेश जोशी?जल जीवन मिशन (JJM) केंद्र और राज्य सरकारों की एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के हर ग्रामीण घर तक नल से साफ पेयजल पहुंचाना है। लेकिन राजस्थान में इस योजना के क्रियान्वयन के दौरान टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं, फर्जी प्रमाण पत्रों और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए थे। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने इस मामले में ताबड़तोड़ छापेमारी की थी और करोड़ों रुपये के घपले का पर्दाफाश किया था। उस वक्त राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी और महेश जोशी जलदाय विभाग (PHD) के कैबिनेट मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। जांच एजेंसियों का आरोप था कि इस पूरे टेंडर सिंडिकेट और वित्तीय गड़बड़ियों के तार सीधे तौर पर उच्च प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर तक जुड़े हुए थे, जिसके बाद से ही महेश जोशी पर कानूनी शिकंजा कसता चला गया था।डेढ़ साल का कड़ा कानूनी संघर्ष और निचली अदालतों से झटके के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुखमहेश जोशी और उनके कानूनी सलाहकारों के लिए पिछले डेढ़ साल का समय बेहद तनावपूर्ण और संघर्ष भरा रहा है। गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद से ही वे लगातार अदालतों के चक्कर काट रहे थे। निचली अदालतों से लेकर राजस्थान हाईकोर्ट तक में उनकी जमानत याचिकाओं को विभिन्न कानूनी बिंदुओं और जांच के प्रभावित होने की आशंका का हवाला देते हुए खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उनके वकीलों ने हार न मानते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट में चली लंबी और मैराथन सुनवाई के दौरान उनके स्वास्थ्य, उम्र और इस मामले में अन्य सह-आरोपियों की जमानत के आधार पर तर्क दिए गए, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने आखिरकार उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें जमानत दे दी।जेल से बाहर आने के बाद राजस्थान की राजनीति में मचेगी हलचल, कांग्रेस पर क्या होगा असर?महेश जोशी जैसे कद्दावर और अनुभवी नेता के जेल से बाहर आने से राजस्थान की राजनीतिक आबोहवा में एक बार फिर से गर्माहट आने की पूरी उम्मीद है। जयपुर के हवामहल विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके जोशी का राजनीतिक रसूख और पार्टी के भीतर उनकी पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है। हालांकि, भले ही उन्हें सुप्रीम कोर्ट से कानूनी मामलों में बड़ी राहत मिल गई है, लेकिन अभी भी इस मामले की विस्तृत सुनवाई और ट्रायल अदालत में जारी रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके बाहर आने से विपक्षी दलों को एक बार फिर से आक्रामक होने का मौका मिलेगा, वहीं कांग्रेस पार्टी के भीतर भी इस घटनाक्रम को लेकर अंदरखाने कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।जल जीवन मिशन भ्रष्टाचार मामलों में आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया पर टिकी निगाहेंईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियां अभी भी इस पूरे जल जीवन मिशन घोटाले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई हैं। इस घोटाले से जुड़े कई अन्य ठेकेदार, अधिकारी और बिचौलिए भी पहले ही जांच के दायरे में आ चुके हैं। महेश जोशी को मिली यह जमानत केवल इस मामले में एक कानूनी पड़ाव है, क्योंकि आने वाले समय में ट्रायल के दौरान उन्हें अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए मजबूत सबूत पेश करने होंगे। फिलहाल, डेढ़ साल के लंबे और अंधेरे दौर के बाद जेल से बाहर आने की खबर ने उनके परिवार और समर्थकों को बड़ी राहत दी है, और अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि वे आगामी दिनों में सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक गतिविधियों में किस प्रकार अपनी वापसी दर्ज कराते हैं।
Connaught Place में CJP के मार्च से पहले हलचल, Abhijeet Dipke के घर पहुंची पुलिस
दिल्ली शुक्रवार को 'लहरा दो तिरंगा' मार्च के लिए तैयार है। यह मार्च 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने बुलाया है। वे सौरव दास और आशुतोष रंका की रिहाई की मांग कर रहे हैं, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। इन दोनों को जंतर-मंतर में प्रवेश करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था, जबकि जंतर-मंतर को अब विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है। दिल्ली के कनॉट प्लेस में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रस्तावित 'तिरंगा मार्च' से पहले, पुलिस झंडेवालान में अभिजीत दिपके के घर पहुंची; यह जानकारी CJP के इंस्टाग्राम लाइव वीडियो में दिखी। इसे भी पढ़ें: Supreme Court पहुंची व्यापारियों की याचिका, Dipke का दावा- Peaceful Protest से नहीं रुकता व्यापार चेन्नई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन में DMK सांसद कनिमोझी भी शामिल हुईं। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि DMK लोगों को SIR के खिलाफ आगाह करती रही है... हमारे नेता एम.के. स्टालिन ने चुनाव से पहले ही लोगों को चेतावनी दी थी। यह देखकर बहुत भरोसा मिलता है कि देश के युवा इसके खिलाफ विरोध करने के लिए एकजुट हुए हैं, और DMK उनके साथ खड़ी है। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सभी से इस मार्च में शामिल होने की अपील की है। वे सेंट्रल पार्क और कनॉट प्लेस तक राष्ट्रीय ध्वज लेकर जाएंगे। यह सोशल मीडिया समूह केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहा है और आरोप लगा रहा है कि सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञान कुमार को बचा रही है। यह विवाद देशव्यापी 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) अभियान को लेकर चल रहा है। इसे भी पढ़ें: ज्ञानेश कुमार के समर्थन में उतरे 30000 लोग, बयान से तहलका! महाराष्ट्र के रहने वाले दिपके ने गुरुवार को कहा कि मैं सभी राजनीतिक दलों और नागरिक समाज समूहों से अपील करता हूं कि वे अपनी विचारधारा से ऊपर उठकर एक साथ आएं। अगर वोट देने का अधिकार नहीं बचा, तो लोकतंत्र भी नहीं बचेगा। हालांकि, मार्च से पहले सेंट्रल पार्क को बंद कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि वह कुछ चुनिंदा लोगों को किसी उपयुक्त जगह पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान गाने की अनुमति देगी।
नई दिल्ली। सीजेपी (CJP) के आंदोलन में शामिल होने के लिए भारत आए यूट्यूबर ध्रुव राठी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली की साकेत अदालत ने उनके खिलाफ वर्ष 2018 से लंबित आपराधिक मानहानि के मामले में नए सिरे से समन जारी किया है। समन की तामील उनके गुरुग्राम स्थित आवास पर कराई […] The post सीजेपी आंदोलन में शामिल होने भारत आए ध्रुव राठी की बढ़ीं कानूनी मुश्किलें, पुराने मानहानि केस में समन appeared first on Sabguru News .
पंजाब में अपराध और नशे पर Amit Shah सख्त, मान सरकार से केंद्र मांगेगा जवाब
(फाइल फोटो के साथ)नयी दिल्ली/चंडीगढ़, 16 अक्टूबर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार पंजाब के दिड़बा में दबाव के चलते एक पिता द्वारा दबाव में जहर का सेवन करने और मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े हत्या की घटनाओं को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगेगी। शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि पंजाब आज नशे, गैंगस्टरवाद व संगठित अपराध के बढ़ते खतरे से जूझ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से सवाल किया कि आखिर पंजाब के लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? शाह ने कहा, ‘‘दिड़बा में एक पिता का दबाव में जहर खा लेना और मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े हत्या ने पंजाब की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परविंदर के पिता ने ‘आप’ (आम आदमी पार्टी) Amit Shahसरकार और उनके विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गृह मंत्रालय भी इन दोनों घटनाओं पर पंजाब सरकार से जवाब मांगेगा।’’नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की मंगलवार को मानसा के बाजार में मेडिकल स्टोर मालिक ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। आरोपी मेडिकल स्टोर मालिक अश्वनी कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिसने झोटा पर उस समय गोली चलाई जब वह एक बुजुर्ग व्यक्ति को नशीली दवाएं बेचने को लेकर उससे सवाल-जवाब कर रहे थे। वहीं दूसरी घटना संगरूर के दिड़बा निवासी गुलज़ार सिंह की सात सितंबर को आत्महत्या से जुड़ी है। गुलजार के परिवार का आरोप था कि अपने इलाके में मादक पदार्थ तस्करी को लेकर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सवाल पूछने पर प्रताड़ित किए जाने और जातिसूचक अपशब्द किए जाने के बाद उन्होंने जहर खा लिया था। पंजाब में अगले साल की शुरुआत में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा समेत विभिन्न राजनीतिक दल नशे के मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहे हैं। शाह ने अपनी पोस्ट में कहा, ‘‘पंजाब में नशे का कारोबार फल-फूल रहा है, संगठित अपराध का खतरा बढ़ रहा है और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘भगवंत मान जी, पंजाब की जनता को प्रचार नहीं, जवाब, घोषणाएं नहीं, परिणाम, नशे के नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार और अपराधियों को मिलने वाले किसी भी राजनीतिक संरक्षण की निष्पक्ष जांच चाहिए।’’गृह मंत्री ने कहा, ‘‘मैं आज पंजाब की जनता के सामने अपना संकल्प दोहराता हूं कि पंजाब में हमारी सरकार बनने पर हम नशामुक्त, गैंगस्टरमुक्त और सुरक्षित पंजाब बनाने के लिए पूरी ताकत से काम करेंगे।’’उन्होंने कहा कि लक्ष्य स्पष्ट है- नशे के कारोबार पर प्रहार, युवाओं के भविष्य की रक्षा, अपराधियों पर कठोर कार्रवाई और कानून का ऐसा राज, जिसमें कोई भी नागरिक भय के साये में जीने को मजबूर न हो।
BRP ने डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को सभी जिम्मेदारियों से किया मुक्त
पंजाब की सियासत के गलियारों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली राजनीतिक खबर सामने आ रही है। आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों (Punjab Assembly Elections) की तैयारियों के बीच राजनीतिक दलों में लगातार फेरबदल और रणनीतिक बदलाव का दौर चल रहा है। इसी कड़ी में भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी (BRP) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व विधायक और कद्दावर नेता नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू (Dr. Navjot Kaur Sidhu) को पार्टी की सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है। वे अब तक पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव और पंजाब प्रभारी के रूप में बेहद अहम जिम्मेदारी संभाल रही थीं। पार्टी के इस अचानक लिए गए फैसले के बाद से राज्य के राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और हर कोई इसके पीछे की असली वजह जानने की कोशिश कर रहा है। आइए एक राजनीतिक रिपोर्टर की नजर से गहराई से जानते हैं कि इस संगठनात्मक फेरबदल के पीछे पार्टी ने क्या कारण बताए हैं और अब पंजाब में BRP की अगली रणनीति क्या होगी।स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर पार्टी ने लिया बड़ा संगठनात्मक फैसलाभारतीय राष्ट्रवादी पार्टी (BRP) के राष्ट्रीय मुख्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को उनके खराब स्वास्थ्य और चिकित्सा स्थिति (Health Reasons) को ध्यान में रखते हुए पार्टी के सभी पदों और दायित्वों से मुक्त किया गया है। पार्टी हाईकमान का कहना है कि किसी भी नेता के लिए उनका स्वास्थ्य और व्यक्तिगत कल्याण सर्वोपरि होता है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं मुख्यालय प्रभारी मनोज चौबे द्वारा जारी किए गए बयान में डॉ. नवजोत कौर सिद्धू के अब तक के योगदान, उनके राजनीतिक अनुभव और उनके द्वारा दिए गए बहुमूल्य मार्गदर्शन की खुलकर सराहना की गई है। पार्टी ने यह भी साफ किया है कि भले ही उन्हें आधिकारिक जिम्मेदारियों से फिलहाल मुक्त कर दिया गया है, लेकिन पार्टी संगठन के साथ उनका वैचारिक और आत्मीय जुड़ाव हमेशा की तरह आगे भी बना रहेगा।सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल को सौंपी गई पंजाब की कमान, संगठन को धार देने की तैयारीडॉ. नवजोत कौर सिद्धू के हटने के तुरंत बाद BRP ने बिना वक्त गंवाए पंजाब में पार्टी के कामकाज को गति देने के लिए एक नए और अनुभवी चेहरे को कमान सौंप दी है। संगठनात्मक फेरबदल के तहत पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल (Sukhminderpal Singh Grewal) को पंजाब राज्य का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले किए गए इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य पंजाब के सभी जिलों में पार्टी संगठन को और अधिक मजबूत करना, कार्यकर्ताओं में जोश भरना और चुनावी गतिविधियों को तेजी से आगे बढ़ाना है। नए प्रभारी के सामने राज्य की सभी सीटों पर पार्टी के जनाधार को मजबूत करने की एक बड़ी चुनौती होगी।पंजाब की सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटी है BRPगौरतलब है कि कुछ समय पहले ही नवजोत कौर सिद्धू ने पार्टी के साथ जुड़ते हुए यह ऐलान किया था कि उनकी पार्टी पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। पार्टी का मुख्य उद्देश्य राज्य में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और पारंपरिक दलों की नीतियों से अलग हटकर एक मजबूत और विश्वसनीय राजनीतिक विकल्प जनता के सामने पेश करना है। हालांकि, नेतृत्व के स्तर पर हुए इस ताजा बदलाव के बाद अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि BRP आगामी चुनावी मैदान में अपनी रणनीति को किस प्रकार आगे बढ़ाती है और जनता के बीच अपनी पकड़ को कितना मजबूत कर पाती है।
केंद्र के इस बड़े फैसले के खिलाफ पंजाब सरकार पहुंची हाईकोर्ट, मचा सियासी बवाल
देश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी, सनसनीखेज और गर्मागरम खबर सामने आ रही है। पंजाब की राजनीति में केंद्र सरकार और राज्य की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के बीच तनातनी एक बार फिर से अपने चरम पर पहुंच गई है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) को हाल ही में एक आधिकारिक और महत्वपूर्ण यात्रा के तहत फ्रांस (France) जाना था, जिसके लिए राज्य सरकार ने केंद्र से तमाम जरूरी अनुमतियां मांगी थीं। लेकिन केंद्र सरकार ने विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के फ्रांस दौरे पर जाने की आधिकारिक इजाजत देने से साफ इनकार कर दिया है। केंद्र के इस अप्रत्याशित और कड़े फैसले से खफा होकर पंजाब की भगवंत मान सरकार ने सीधा आक्रामक रुख अपना लिया है और केंद्र सरकार के इस आदेश के खिलाफ सीधे पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) का दरवाजा खटखटाया है। इस कानूनी और राजनीतिक ड्रामे ने देश की सियासत में एक नया भूचाल ला दिया है। आइए एक राजनीतिक और लीगल रिपोर्टर की नजर से गहराई से जानते हैं कि इस पूरे विवाद के पीछे की असल इनसाइड स्टोरी क्या है और कोर्ट में क्या कुछ चल रहा है।आखिर क्या था मुख्यमंत्री भगवंत मान का फ्रांस दौरा और क्यों मांगी गई थी अनुमति?इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब पंजाब सरकार ने राज्य में विदेशी निवेश को आकर्षित करने, औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने और कृषि तथा तकनीक के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ फ्रांस की यात्रा का कार्यक्रम तय किया था। मुख्यमंत्री भगवंत मान को वहां कुछ प्रमुख वैश्विक निवेशकों, भारतीय प्रवासियों और तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लेना था। किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री के विदेश दौरे के लिए केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) और गृह मंत्रालय से राजनीतिक तथा आधिकारिक क्लीयरेंस (Political Clearance) लेना अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया होती है। पंजाब सरकार का तर्क है कि यह दौरा पूरी तरह से राज्य के आर्थिक विकास और जनहित से जुड़ा हुआ था, जिससे प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होते।केंद्र सरकार द्वारा इजाजत देने से इनकार करने के पीछे के संभावित कारणकेंद्र सरकार की तरफ से जब मुख्यमंत्री भगवंत मान के फ्रांस दौरे की अनुमति को खारिज किया गया, तो प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। हालांकि केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार सुरक्षा, राजनीतिक संवेदनशीलता या कूटनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर ऐसे दौरों पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केंद्र के पास सुरक्षित होता है, लेकिन विपक्षी दलों और राज्य सरकारों के मामलों में इसे लेकर अक्सर खींचतान देखने को मिलती है। जानकारों का मानना है कि केंद्र और राज्य के बीच चल रहे लंबे समय के वैचारिक मतभेद और प्रशासनिक प्रोटोकॉल से जुड़े कुछ तकनीकी बिंदुओं के चलते इस यात्रा को हरी झंडी नहीं मिल पाई। केंद्र के इस फैसले के बाद राज्य सरकार ने इसे संघीय ढांचे (Federal Structure) के हनन और चुनी हुई सरकार के अधिकारों में सीधा हस्तक्षेप करार दिया है।पंजाब सरकार का बड़ा कानूनी कदम: हाईकोर्ट में याचिका दायर कर केंद्र के फैसले को दी चुनौतीकेंद्र सरकार के इस इनकार से आक्रामक हुई पंजाब सरकार ने बिना देर किए कानूनी लड़ाई लड़ने का मन बना लिया। राज्य सरकार की ओर से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर दी गई है, जिसमें केंद्र के उस आदेश को फौरी तौर पर चुनौती दी गई है जिसके तहत सीएम भगवंत मान की फ्रांस यात्रा को रोका गया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि एक संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री को विदेश जाने से रोकना न केवल उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है, बल्कि यह पंजाब की साढ़े तीन करोड़ जनता के विकास के अवसरों को भी बाधित करने जैसा है। पंजाब सरकार के वकीलों ने कोर्ट में जल्द सुनवाई की गुहार लगाई है, जिस पर अदालत के रुख और आने वाले फैसलों पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।आप और केंद्र के बीच बढ़ता राजनीतिक टकराव: 2026 की सियासत में नया मोड़यह कोई पहला मौका नहीं है जब पंजाब की 'आप' सरकार और केंद्र सरकार आमने-सामने आई हों। इससे पहले भी राज्यपाल और सरकार के बीच तकरार, फंड रोकने के आरोप और विभिन्न प्रशासनिक मुद्दों को लेकर दोनों पक्षों में कई बार कानूनी और राजनीतिक लड़ाइयां देखने को मिल चुकी हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान के फ्रांस दौरे को रोके जाने के इस ताजा मामले ने एक बार फिर से इस बात को साबित कर दिया है कि केंद्र और गैर-भाजपा शासित राज्यों के बीच का यह शीतयुद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला देश की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बनने की पूरी उम्मीद है, क्योंकि आम आदमी पार्टी इस पूरे प्रकरण को जनता के बीच ले जाकर इसे पंजाब के स्वाभिमान और विकास से जोड़कर भुनाने की पूरी कोशिश कर रही है।
झारखंड के इन जिलों में आज हो सकती है बारिश, पलामू में चढ़ेगा पारा
झारखंड के मौसम के मिजाज में इन दिनों लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिससे कभी हल्की ठंड का अहसास हो रहा है तो कभी तेज धूप लोगों को परेशान कर रही है। मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य के कुछ चुनिंदा जिलों में आज बादलों की आवाजाही के बीच हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है, जिससे तापमान में हल्का बदलाव आ सकता है। वहीं दूसरी तरफ, पलामू और उसके आसपास के इलाकों में बारिश के कोई खास आसार नहीं हैं, जिसके चलते वहां तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है और गर्मी का अहसास बना हुआ है। मानसून की विदाई के बाद अब राज्य में मौसम पूरी तरह से करवट ले रहा है, जिससे सुबह और शाम के वक्त हल्की सिहरन महसूस होने लगी है। आइए एक वेदर रिपोर्टर की नजर से जानते हैं कि झारखंड के विभिन्न जिलों में आज मौसम का हाल कैसा रहने वाला है और IMD ने क्या नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।मानसून की विदाई के बाद झारखंड के मौसम में बदलाव और तापमान का हालराज्यभर में मौसम विज्ञान केंद्र रांची के अनुसार मानसून की विदाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब हवा की दिशा में बदलाव आया है। उत्तर-पश्चिमी हवाओं के प्रवेश करने के कारण रात के न्यूनतम तापमान में धीरे-धीरे गिरावट दर्ज की जानी शुरू हो गई है। हालांकि, दिन के वक्त खिलने वाली तेज धूप की वजह से अधिकतम तापमान में अभी भी ज्यादा बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिल रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में सुबह के समय हल्का कोहरा या धुंध देखने को मिल सकती है, जो इस बात का संकेत है कि राज्य में धीरे-धीरे ठंडक दस्तक देने की तैयारी कर रही है।पलामू में चढ़ेगा पारा और बढ़ेगी गर्मी, जानिए उत्तर-पश्चिमी जिलों की स्थितिझारखंड के सबसे गर्म और शुष्क इलाकों में गिने जाने वाले पलामू प्रमंडल के जिलों में मौसम का मिजाज थोड़ा अलग बना हुआ है। IMD के अपडेट के मुताबिक पलामू, गढ़वा और चतरा जैसे जिलों में आज बारिश की कोई संभावना नहीं है, जिसके कारण यहाँ दिन के समय तेज धूप खिली रहेगी और पारा ऊपर चढ़ेगा। पलामू में अधिकतम तापमान के ऊंचे स्तर पर बने रहने के कारण लोगों को अभी भी उमस भरी गर्मी या चुभती धूप का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, रात होते ही तापमान में थोड़ी गिरावट दर्ज की जाती है जिससे हल्की राहत मिलती है, लेकिन दोपहर के वक्त गर्मी के तेवर बरकरार हैं।राज्य के किन जिलों में हो सकती है हल्की बारिश और छाए रहेंगे बादल?पलामू के विपरीत झारखंड के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों यानी सिंहभूम, सिमडेगा, गुमला और उससे सटे कुछ इलाकों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। स्थानीय मौसम तंत्र और नमी के प्रभाव के कारण इन चुनिंदा जिलों में कहीं-कहीं गरज के साथ हल्की बारिश या बौछारें पड़ने की उम्मीद जताई गई है। बारिश होने की वजह से इन इलाकों के तापमान में दो से तीन डिग्री तक की गिरावट आ सकती है, जिससे वहां के लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग लगातार इन गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और किसानों को भी अपने कृषि कार्यों को इसी अनुरूप प्रबंधित करने की सलाह दी जा रही है।त्योहारी सीजन से पहले कैसा रहेगा आगामी दिनों का मौसम?जैसे-जैसे दुर्गा पूजा और आगामी त्योहारों का मौसम नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि आने वाले दिनों में मौसम कैसा रहेगा। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि झारखंड में अब धीरे-धीरे मानसून पूरी तरह विदा हो चुका है और उत्तर-पूर्वी हवाओं का असर बढ़ने वाला है। आने वाले सप्ताह से राज्यभर में रात के तापमान में और अधिक गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे गुलाबी ठंड की शुरुआत हो जाएगी। फिलहाल आज जिन जिलों में बारिश की संभावना है, वहाँ मौसम सुहाना रहने की उम्मीद है, जबकि पलामू जैसे इलाकों में लोगों को अभी कुछ और दिन तीखी धूप और चढ़ते पारे का सामना करना पड़ सकता है।
Street Fighter: फाइट ही फाइट, कहानी=बत्ती गुल! दिमाग की दही कर दी
फिल्म की कहानी का असली मकसद इन किरदारों को एक के बाद एक मुकाबलों में उतारना है. इसके लिए फिल्म कोई खास बहाना बनाने की कोशिश भी नहीं करती. हर थोड़ी देर में एक नई लड़ाई, एक नई दुश्मनी या किसी मशहूर फाइटिंग मूव को दिखाने का मौका आ जाता है.
23 करोड़ कैश, 92 KG चांदी... सांवलिया सेठ को मिला 31 करोड़ का दान
राजस्थान के सांवलिया सेठ के दरबार में जब भंडार खुला, तो चढ़ावे की गिनती पांच चरणों में की गई. इसमें कैश करीब 23.58 करोड़ रुपये निकले. वहीं कुल चढ़ावा 31.17 करोड़ रुपये से ज्यादा रहा. इसके अलावा सोना, चांदी और 19 देशों की विदेशी करेंसी भी मिली.
राजनाथ सिंह के बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा करने के आरोपों पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है और जंतर-मंतर से प्रतिबंध हटाया जाना चाहिए।
दिल्ली में 'तिरंगा यात्रा' से पहले दिपके के घर पहुंची पुलिस
कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा यात्रा से पहले पुलिस CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके के घर झांसी रोड के पास, झंडेवालान इलाके में पहुंच गई है. दिपके ने आज तिरंगा यात्रा का ऐलान किया था.
बीकानेरी भुजिया बहुत खा ली? अब बीकानेर के किले-हवेलियां घूमें
Places to Visit in Bikaner: अगर आप राजस्थान के फेमस शहरों से हटकर किसी ऐसी जगह को एक्सप्लोर करना चाहते हैं, जहां इतिहास, संस्कृति, वास्तुकला और देसी खान-पान का अलग अंदाज देखने को मिले तो बीकानेर बेस्ट ऑप्शन हो सकता है. यहां की कम भीड़ और पुराने राजस्थानी रंग आपको एक अलग ट्रैवल एक्सपीरियंस दे सकते हैं.
अभिजीत दीपके भी जाएंगे जेल? घर पर पहुंच गई पुलिस; सौरभ दास और आशुतोष रांका पहले ही अंदर
कॉकरोच जनता पार्टी के शुक्रवार को प्रदर्शन से पहले दिल्ली में हलचल तेज हो गई है। खबरें हैं कि पुलिस पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके के घर पर पहुंच गई है। हालांकि, इसे लेकर पुलिस ने आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है।
सिर्फ ब्याज से 50 लाख की कमाई, कमाल है ये स्कीम, कौन ले सकता है?
पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाओं के तहत निवेशकों को अच्छा ब्याज दिया जा रहा है. इसी में से एक योजना के तहत अगर आप हर महीने 12,500 रुपये का निवेश करते हैं तो 21 साल में सिर्फ ब्याज से 50 लाख रुपये कमा सकते हैं.
Supreme Court ने Sanjay Raut और निखिल वागले को जारी किया अवमानना नोटिस
(फाइल फोटो के साथ)नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायपालिका के बारे में सार्वजनिक रूप से की गई टिप्पणियों को लेकर आपराधिक अवमानना के मामले में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले को शुक्रवार को कारण बताओ नोटिस जारी किए। हालांकि, प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राज्यसभा सदस्य राउत और वागले को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी। पीठ ने कहा कि वह पहले उनके जवाब पर विचार करेगी। उच्चतम न्यायालय ने ये नोटिस ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन’ (एससीबीए) की ओर से दायर अवमानना याचिका पर जारी किए। एससीबीए के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने आरोप लगाया कि राउत और वागले की टिप्पणियां उचित आलोचना की सीमा से बाहर थीं और इनसे उच्चतम न्यायालय के प्रति जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है। प्रधान न्यायाधीश ने न्यायपालिका को निशाना बनाकर दिए गए बयानों पर चिंता जताते हुए कहा कि अदालतें व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा करने में हमेशा आगे रही हैं और ऐसे में न्यायपालिका जैसी संस्था पर हमले बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। एससीबीए ने राउत और वागले को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया, लेकिन पीठ ने पहले कारण बताओ नोटिस जारी करने का फैसला किया। पीठ ने कहा, ‘‘फिलहाल हम कारण बताओ नोटिस जारी कर रहे हैं। निश्चित रूप से हम व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे रहे हैं। देखते हैं।’’इससे पहले अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 15(1)(बी) के तहत आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की सहमति दी थी। एससीबीए ने 15 अक्टूबर को याचिका दायर की थी और वेंकटरमणी ने उसी दिन अपनी सहमति दे दी थी। यह विवाद तब शुरू हुआ, जब प्रधान न्यायाधीश ने विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल के व्यक्तिगत मुलाकात के अनुरोध को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने संकेत दिया था कि इस मामले को याचिका के जरिए अदालत के समक्ष उठाया जा सकता है। एससीबीए की याचिका के अनुसार, इसके बाद वागले ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने खाते से प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। बताया जाता है कि बाद में उन्होंने अपनी टिप्पणी वापस ले ली थी। राउत ने भी कथित तौर पर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।
मर्डर केस, फायरिंग और जमीन विवाद... गिरधारी लाल साहू की क्राइम हिस्ट्री
उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्य ने रोते हुए वीडियो में अपनी और बच्चों की जान को खतरा बताया और पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर दो कथित ऑडियो साझा किए. इन रिकॉर्डिंग में कल्पना मिश्रा से मुकदमे, पैसों, चुनाव और गोली मरवाने की कथित बातचीत ने पुराने मामलों को फिर चर्चा में ला दिया.
चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा
यात्राएँ केवल पर्यटन नहीं, बल्कि स्वयं को जानने, जन-आस्था को अनुभव करने और प्रकृति के निकट पहुँचने का अवसर होती हैं। धार्मिक यात्रा मनुष्य को सांसारिक भागदौड़ से दूर कर आत्मचिंतन और ईश्वर के सान्निध्य में जाने का मार्ग दिखाती है। इसी भावना के साथ 26 ...
... तो हम पाकिस्तान का साथ देंगे, राजस्थान भाजपा अध्यक्ष राठौड़ के बयान से बवाल
Rajasthan BJP Madan Rathore: राजस्थान भाजपा (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के एक विवादास्पद बयान को लेकर सियासत गरमा गई है। अमेरिका और पाकिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान का समर्थन करने से जुड़े कथित बयान पर कांग्रेस ने भाजपा को घेरते ...
सिर्फ 125 लोगों को मिलेगी ये बाइक... रॉयल एनफील्ड ने किया लॉन्च
रॉयल एनफील्ड ने क्लासिक 650 का स्पेशल एडिशन लॉन्च कर दिया है. ये बाइक सिर्फ 125 लोगों को मिलेगी. बाइक में स्पेशल पेंट वर्क किया गया है, जिससे ये लाइट पड़ने पर अलग-अलग शेड्स में नजर आती है. कंपनी ने इस बाइक को अपनी 125वीं एनिवर्सरी के मौके पर लॉन्च किया है. आइए जानते हैं इस बाइक की कीमत और दूसरी खास बातें.
सीजेआई पर टिप्पणी मामले में संजय राउत और निखिल वागले को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, जानें पूरा मामला
CJI पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले को नोटिस जारी किया है। SCBA की याचिका पर सुनवाई के दौरान दोनों को व्यक्तिगत पेशी से राहत मिली।
मीटर में ऑन है ये बत्ती? डबल आ सकता है बिल, तुरंत बुलाएं इलेक्ट्रीशियन
बिजली के मीटर में कई तरह के इंडीकेटर्स होते हैं. सबका काम अलग- अलग होता है. इनमें से ही एक ऐसा इंडीकेटर होता है, जिसके जलने का मतलब है आपका भारी- भरकम बिल आने वाला है.
Tamil Nadu में महंगाई पर रोक की तैयारी, राशन की दुकानों पर 30 रुपये किलो मिलेगा बढ़िया Rice
तमिलनाडु सरकार ने आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए शुक्रवार को बाजार में हस्तक्षेप से जुड़े कई ठोस उपायों की घोषणा की। इनमें बढ़िया किस्म के चावल की बिक्री 30 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर करना भी शामिल है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री पी वेंकटरमणन ने सचिवालय में घोषणा की कि रियायती दर पर चावल पूरे राज्य में अमुधम विभागीय दुकानों और सहकारी दुकानों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब खुले बाजार में चावल की खुदरा कीमतें बढ़कर 75 से 85 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। मंत्री के अनुसार, कीमतों में इस बढ़ोतरी के पीछे अल नीनो के कारण कृषि पर पड़ा प्रभाव, क्षेत्रीय स्तर पर आपूर्ति की कमी और वैश्विक आर्थिक कारक हैं। घरों पर तत्काल आर्थिक बोझ कम करने के लिए सरकार ने चरणबद्ध वितरण व्यवस्था शुरू की है। पहले चरण में 25,000 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाला कच्चा और उसना चावल 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से 201 सहकारी दुकानों और 49 अमुधम दुकानों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। रसोई का बजट स्थिर रखने के लिए राज्य सरकार सहकारी दुकानों के नेटवर्क के जरिए 130 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से तूर दाल की आपूर्ति भी बढ़ाएगी और प्याज की कीमत 35 रुपये प्रति किलोग्राम बनाए रखेगी। मंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा, “हमारी सबसे पहली और प्रमुख प्राथमिकता एक लाख मीट्रिक टन चावल खरीदने की है। यह ग्रेड-ए किस्म का चावल है। ग्रेड-ए किस्म के लगभग 25,000 मीट्रिक टन चावल को राज्य भर में अमुधम विभागीय दुकानों और सहकारी विभाग की दुकानों के माध्यम से तत्काल वितरण के लिए जारी किया गया है। उन्होंने कहा, “हम अगले सप्ताह सोमवार से सभी दुकानों पर 130 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से तूर दाल और 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से चावल उपलब्ध कराने की योजना बना रहे हैं। इसका वितरण आज या कल से शुरू हो जाएगा।”वेंकटरमणन ने कहा कि बाजार में उपलब्ध आपूर्ति के आधार पर सरकार कीमतों में उतार-चढ़ाव की निगरानी करने और उन्हें स्थिर रखने के लिए एक मूल्य निगरानी समिति गठित करेगी। उन्होंने कहा, “इसी के अनुसार, हम अन्य वस्तुओं के लिए भी योजना बनाएंगे।”आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी के खिलाफ क्या कार्रवाई करने पर विचार किया जा रहा है, इस सवाल पर मंत्री ने कहा, “हम इस पर काम कर रहे हैं। हमें सभी की ओर से सूचनाएं और जानकारियां मिल रही हैं।”सरकार ने यहां जारी एक विज्ञप्ति में कहा कि राज्य सरकार लगभग 2.29 करोड़ राशन कार्डों के माध्यम से वर्तमान में 7.01 करोड़ लाभार्थियों को आवश्यक खाद्य वस्तुओं का नियमित वितरण सुनिश्चित करती है। इनमें प्राथमिकता श्रेणी (पीएचएच), गैर-प्राथमिकता श्रेणी (गैर-पीएचएच) और अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के राशन कार्डधारक शामिल हैं। राज्य सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से चावल की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रहेगी। चीनी, पाम तेल (पामोलीन) और दालों का पर्याप्त भंडार अगले तीन महीनों के लिए सुरक्षित है, जिससे इनका वितरण बिना किसी रुकावट के सुनिश्चित होगा।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने शुक्रवार को कहा कि विपक्ष का मकसद चुनाव के जरिए सरकार बदलना है। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उन आरोपों का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल भारत में सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। खेड़ा ने इन आरोपों पर सवाल उठाते हुए 1977 में हुए सत्ता परिवर्तन का हवाला दिया और कहा कि भारत जैसे लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन चुनाव के जरिए ही होता है। राजधानी दिल्ली में AICC कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए खेड़ा ने कहा, हम 'वोट चोर गद्दी छोड़' नाम से एक अभियान चला रहे हैं। पूरा देश खुलकर यही बात कह रहा है। हम खुद भी अपनी मंशा दोहरा रहे हैं कि हमें इस सरकार को हराना है और इस व्यवस्था को बदलना है। तो, राजनाथ सिंह आगे क्यों आए? हम खुद ही तो कह रहे हैं कि हम सत्ता बदल देंगे। इसे भी पढ़ें: BJP में शामिल नेताओं पर बिफरे Rahul Gandhi तो Kharge ने दिलाई पुरानी दोस्ती की याद उन्होंने आगे कहा विपक्ष का मकसद हमेशा चुनाव के जरिए सत्ता बदलना ही होता है। उन्हें अब लोकतंत्र की आदत नहीं रही। खेरा ने कहा कि 1977 में क्या हुआ था? क्या तब सत्ता नहीं बदली थी? जब भी विपक्ष सड़कों पर उतरता है और कोई आंदोलन होता है, तो सत्ता बदलने की बात होती ही है। भारत जैसे लोकतंत्र में सत्ता कैसे बदलती है? चुनाव के जरिए ही तो बदलती है। उनके ये बयान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस दावे के बाद आए हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनाव आयोग के खिलाफ युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों का इस्तेमाल राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वे बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में भी सत्ता बदलना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष युवाओं को अराजकता की राजनीति का मोहरा बनाकर देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में जो कुछ हुआ है, वह कई गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसा लगता है कि कांग्रेस और उसके राजनीतिक सहयोगी—चाहे सीधे तौर पर हों या अपने जुड़े हुए संगठनों के जरिए—युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों और राष्ट्र-निर्माण में लगाने के बजाय, उसका इस्तेमाल राजनीतिक टकराव और अराजकता फैलाने के लिए कर रहे हैं।
दिल्ली में आज तिरंगा मार्च, 21 सड़कों पर ट्रैफिक डायवर्जन; मेट्रो पर क्या है अपडेट?
नई दिल्ली | तहलका न्यूज | स्नेहलता दिल्ली में शुक्रवार, 16 अक्टूबर को सीजेपी के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के चलते कनॉट प्लेस और मध्य दिल्ली में यातायात प्रभावित रहेगा। प्रदर्शन के मद्देनजर दोपहर 3 बजे के बाद कई प्रमुख सड़कों पर यातायात में बदलाव किया जा सकता है। प्रदर्शन का प्रस्तावित समय शाम 5 […]
New Delhi Railway Station Platform Change: त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर 16 अक्टूबर से 17 नवंबर तक कई ट्रेनों के प्लेटफॉर्म बदल दिए गए हैं. रेलवे ने यात्रियों से यात्रा से पहले प्लेटफॉर्म की जानकारी जांचने की अपील की है.
रिलायंस का मस्क को जवाब, प्रतिस्पर्धा का स्वागत लेकिन भारतीय नियमों का पालन करें
रिलायंस ने कहा कि वह भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन क्षेत्र में स्टारलिंक से मिल रही प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है.
घर में चाहिए खूबसूरत गुलाबी फूल? बस काटकर लगा लें इस पेड़ की टहनी, खिलखिलाकर आएंगे फूल
अगर आप घर में फूलों वाला कोई पौधा लगाना चाहते हैं तो आपके लिए बोगनवेलिया का पौधा काफी अच्छा ऑप्शन हो सकता है. इसे आप टहनी की मदद से आसानी से लगा सकते हैं. आइए जानते हैं सही तरीका...
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर गरमाए राजनीतिक माहौल के बीच मंत्री रेखा आर्या द्वारा अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने का मामला चर्चा में आ गया है.
Palakkad Mob Lynching मामले में 7 गिरफ्तार, SIT करेगी जांच
केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने शुक्रवार को पलक्कड़ जिले में एक अज्ञात व्यक्ति की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने की कथित घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है और घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है। राज्य विधानसभा में चेन्निथला ने इस घटना को “बेहद क्रूर और निंदनीय” बताया। उन्होंने कहा कि केरलम जैसे प्रगतिशील राज्य में इस तरह की क्रूरता स्वीकार नहीं की जा सकती, जिसने पूर्ण साक्षरता हासिल की है और प्रगतिशील कानून लागू किए हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए 10 सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है। उन्होंने सदन को आश्वासन दिया कि अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। मंत्री ने बताया कि मृतक की उम्र 35 से 40 वर्ष के बीच होने का अनुमान है, लेकिन अभी तक उसकी पहचान नहीं हो पाई है। चेन्निथला ने कहा कि उन्होंने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (खुफिया) को निर्देश दिया है कि मृतक की पहचान करने के लिए तमिलनाडु में अपने समकक्ष अधिकारी की मदद लें, क्योंकि यह घटना पड़ोसी राज्य की सीमा से लगे एक गांव में हुई थी। मंत्री ने इस हत्या को अमानवीय और जघन्य बताते हुए कहा कि मृतक के शरीर पर करीब 52 चोटों के निशान थे। उन्होंने सवाल किया, “लोगों का एक समूह एकजुट होकर इस तरह की अमानवीय और जघन्य हत्या करे, तो इसे कैसे जायज ठहराया जा सकता है?”रविवार सुबह मीनाक्षीपुरम के पास मूलथारा बांध के नजदीक एक व्यक्ति का शव मिलने के बाद यह घटना सामने आई। स्थानीय निवासियों ने शव देखा था। चेन्निथला ने कहा कि पुलिस ने शुरुआत में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया था। हालांकि, सीसीटीवी फुटेज की जांच और नए सबूत सामने आने के बाद पता चला कि कथित तौर पर लोगों के एक समूह ने व्यक्ति पर हमला किया था। उन्होंने उस पर पत्थर फेंके और डंडों से उसकी पिटाई की थी। उन्होंने बताया कि इसके बाद आरोपियों के खिलाफ हत्या समेत अन्य धाराएं लगाई गईं। मंत्री के अनुसार, आरोप लगाया गया था कि पीड़ित ने कुछ स्थानीय महिलाओं के सामने अश्लील हरकत की थी, जिसके बाद आरोपियों ने उस पर हमला किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए कानून लागू करने वाली एजेंसियां और अदालतें हैं। किसी को भी किसी व्यक्ति पर हमला करके उसकी हत्या करने और कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पुलिस ने पहले बताया था कि त्रिशूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में किए गए पोस्टमार्टम में हत्या के संकेत मिले थे। बताया गया कि वह व्यक्ति केरलम-तमिलनाडु सीमा क्षेत्र के एक गांव में पिछले कुछ समय से घूम रहा था, लेकिन उसकी पहचान अब तक नहीं हो पाई थी। शनिवार को कथित तौर पर हुई इस घटना से पूरे जिले में सनसनी फैल गई है। हाल के वर्षों में पलक्कड़ में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने की यह तीसरी कथित घटना है। चेन्निथला ने अट्टापडी के चिंडक्की ऊरू के 27 वर्षीय आदिवासी युवक मधु की 2018 में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने की घटना को याद करते हुए कहा कि यह घटना भीड़ की हिंसा की एक भयावह याद दिलाती है। मधु पर एक दुकान से चावल और अन्य किराने का सामान चुराने का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद कथित तौर पर भीड़ ने उसे पीट-पीटकर मार डाला था। दिसंबर 2025 में एक अन्य घटना में, वालयार पुलिस थाना क्षेत्र में चोरी के संदेह में छत्तीसगढ़ के एक निवासी को कथित तौर पर पीट-पीटकर मार डालने के मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
महाराष्ट्र से मंगाया खास पेपर, केमिकल लगाकर कलर प्रिंटर से छापे नोट
मुजफ्फरनगर में नकली नोट बनाने वाले गिरोह को पुलिस ने पकड़ा है. तीन आरोपियों के पास से 5.26 लाख रुपये के नकली नोट, लैपटॉप, प्रिंटर, मोबाइल फोन और प्रिंटिंग पेपर बरामद किए गए हैं. जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्यों ने इसका आइडिया वेब सीरीज ‘फर्जी’ देख लिया था. पुलिस का दावा है कि नकली नोट बनाने के लिए खास पेपर महाराष्ट्र से मंगाया जाता था.
सैलरी लिमिट ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 होने के बाद कर्मचारियों और कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए EPFO ने सितंबर 2026 महीने का ECR रिटर्न दाखिल करने और PF योगदान जमा करने की अंतिम तारीख 15 अक्टूबर से बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2026 कर दी है. आखिर क्यों बढ़ानी पड़ी डेडलाइन?
ऑफिस की डेस्क पर पौधे रखने वाले लोग कैसे होते हैं?
ऑफिस की डेस्क पर पौधे रखने की आदत आपकी पर्सनैलिटी के बारे में क्या बताती है? कुछ लोग अपनी डेस्क पर सिर्फ कंप्यूटर और फाइलें रखते हैं. वहीं, कुछ लोग वहां पौधा, फोटो या अपनी पसंद की दूसरी चीजें भी रखते हैं. ऐसा करने से उनकी डेस्क उन्हें सुंदर और अच्छी लग सकती है.
भूकंप आने से पहले ही Android फोन देगा अलर्ट, गूगल का जबरदस्त फीचर, ऐसे करता है काम
Google ने Android Earthquake Alerts का दायरा बढ़ाकर 200 से अधिक देशों में लागू कर दिया है. इससे मोबाइल पर ही भूकंप का पता लग जाता है. भूंकप आते ही स्क्रीन पर दिखएंगे 3 अलर्ट.
Supreme Court पहुंचा गर्भवती पत्रकार से बदसलूकी का मामला, Rahul Gandhi के खिलाफ सुनवाई तय
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह 26 अक्टूबर को एक गर्भवती पत्रकार की अर्जी पर सुनवाई करेगा। पत्रकार ने आरोप लगाया है कि 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के अंदर राहुल गांधी ने उसे धक्का दिया था। उस दिन राहुल गांधी चुनाव आयोग की मतदाता सूची (इलेक्टोरल रोल) से जुड़ी प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका दाखिल करने के लिए विपक्ष के मार्च का नेतृत्व कर रहे थे। मुख्य न्यायाधीश (CJI) की बेंच - जिसमें जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची शामिल हैं - ने कहा कि इस अर्जी पर 26 या 27 अक्टूबर को सुनवाई की जाएगी। वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया के आग्रह पर बेंच इस मामले की सुनवाई के लिए तैयार हो गई। उन्होंने बेंच से अर्जी को सूचीबद्ध (लिस्ट) करने और यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या इससे जुड़े मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं। इसे भी पढ़ें: BJP में शामिल नेताओं पर बिफरे Rahul Gandhi तो Kharge ने दिलाई पुरानी दोस्ती की याद पत्रकार ऋचा पाराशर ने आरोप लगाया है कि विरोध प्रदर्शन की कवरेज के दौरान राहुल गांधी और उनके सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की। उन्होंने दावा किया कि इस घटना में उन्हें चोटें आईं और उनकी गर्भावस्था के पहले ट्राइमेस्टर (शुरुआती महीनों) में एक मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थिति पैदा हो गई। घटना के बारे में बताते हुए पाराशर ने कहा कि वह विरोध प्रदर्शन को रिकॉर्ड कर रही थीं, तभी राहुल गांधी ने कथित तौर पर उनका हाथ पकड़ा और खींचा, जिसके बाद उनके सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें धक्का दे दिया। उन्होंने कहा मेरे वीडियो में यह साफ दिख रहा है: राहुल गांधी आगे आते हैं, मेरा हाथ पकड़ते हैं और उसे खींचते हैं। उन्होंने हाथ खींचा और मुझे उनकी ताकत महसूस हुई। जैसे ही उन्होंने हाथ खींचा, उसी पल उनके गार्ड्स ने मुझे धक्का दे दिया। पाराशर ने आगे दावा किया कि जब वह अपने आस-पास मौजूद लोगों से धक्का न देने की गुहार लगा रही थीं, तभी वह सुप्रीम कोर्ट की सीढ़ियों पर गिर गईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस घटना में उनका फोन टूट गया। इसे भी पढ़ें: Illinois में मंदिर पर गोलीबारी की साजिश नाकाम, Raja Krishnamoorthi समेत अमेरिकी सांसदों ने की निंदा उन्होंने बताया मैं गिर गई, फोन भी गिर गया, लेकिन माइक्रोफोन मेरे कॉलर पर लगा था, इसलिए सब कुछ रिकॉर्ड हो गया। मैं उठी और चिल्लाने लगी कि 'मेरा माइक्रोफोन गिर गया है', जबकि उनके लोग मुझसे कह रहे थे, 'अरे, तुम कहाँ गिर गईं?' मैंने कहा, यह मेरे कैमरे में रिकॉर्ड हो गया है। आप किसी पत्रकार को दबा नहीं सकते। मैं भारी भीड़ के बीच खड़ी थी और मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। मैंने वहां कहा कि राहुल गांधी ने मुझे धक्का दिया है; वह ठीक मेरे पीछे थे। और मेरी आवाज़ को दबाने के लिए उनके लोग 'राहुल गांधी जिंदाबाद, राहुल गांधी जिंदाबाद' के नारे लगाने लगे। उन्होंने आगे कहा मैं हैरान रह गई क्योंकि मुझे लगा कि वहां कोई तो ऐसा होगा जो पूछेगा क्या आप ठीक हैं? थोड़ा पानी पी लीजिए, एक तरफ हो जाइए।' किसी को तो पूछना चाहिए था कि 'क्या आप ठीक हैं?' लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा। मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी; मैं वहीं बैठकर रोने लगी। मैंने कैमरे के सामने चिल्लाकर कहा, और फिर बैठकर रोने लगी क्योंकि गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में होने के कारण, मुझे नहीं पता था कि आगे क्या होगा। मैं अपने पेट के बल गिरी थी।
Multigrain Atta आज से ही खाना शुरू किया तो वजन और शुगर पर पड़ेगा गजब का असर
आज के दौर में जब हमारी जीवनशैली पूरी तरह से बदल चुकी है, खानपान की गलत आदतें हमारे शरीर को अंदर से खोखला कर रही हैं। सुबह की चाय से लेकर रात के डिनर तक, हमारी थाली का सबसे मुख्य हिस्सा रोटी या चपाती होती है, जो अमूमन सामान्य गेहूं के आटे (Plain Wheat Flour) से बनाई जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस गेहूं के आटे से बनी रोटियां हम वर्षों से खाते आ रहे हैं, क्या वे हमारे आधुनिक और सुस्त लाइफस्टाइल के हिसाब से पूरी तरह फायदेमंद हैं या फिर धीरे-धीरे हमारे शरीर में मोटापा और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों को बुलावा दे रही हैं? आज के समय में हेल्थ एक्सपर्ट्स और डाइटीशियन इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अगर हम अपनी डाइट में थोड़ा सा बदलाव कर लें और सामान्य आटे की जगह 'मल्टीग्रेन आटा' (Multigrain Atta) को अपना लें, तो सेहत में चमत्कारी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आइए एक हेल्थ रिपोर्टर की नजर से गहराई से समझते हैं कि अगर आप आज से ही मल्टीग्रेन आटे का सेवन शुरू कर दें, तो आपके शरीर, वजन और ब्लड शुगर पर इसका क्या गहरा असर पड़ेगा।सामान्य गेहूं का आटा और मल्टीग्रेन आटे में आखिर क्या है मुख्य अंतर?पारंपरिक रूप से हमारे घरों में जिस गेहूं के आटे का इस्तेमाल होता है, उसे आधुनिक मिलों में अत्यधिक रिफाइंड करके या ऊपरी छिलके को हटाकर तैयार किया जाता है, जिससे गेहूं के अधिकांश प्राकृतिक फाइबर और पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। इसके विपरीत, मल्टीग्रेन आटा कई तरह के अनाजों और बीजों को एक निश्चित अनुपात में मिलाकर तैयार किया जाता है। इसमें मुख्य गेहूं के साथ-साथ जौ (Barley), चना (Roasted Gram), बाजरा (Pearl Millet), ज्वार (Sorghum), सोयाबीन (Soybean), मक्का और कई बार अलसी (Flaxseeds) या मेथी के बीज भी शामिल होते हैं। इन सभी अनाजों का मिश्रण हमारे शरीर को एक साथ कार्बोहाइड्रेट, प्लांट-बेस्ड प्रोटीन, हेल्दी फैट्स, विटामिन्स और भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर प्रदान करता है। यही कारण है कि मल्टीग्रेन आटे की एक साधारण रोटी आपके शरीर के लिए किसी मल्टीविटामिन कैप्सूल से कम असरदार नहीं होती है।वजन घटाने के सफर में कैसे वरदान साबित होता है मल्टीग्रेन आटे का सेवन?यदि आप लंबे समय से अपने बढ़ते हुए वजन, तोंद और बैली फैट से परेशान हैं और तमाम कोशिशों के बावजूद वजन कम नहीं हो पा रहा है, तो आपकी रसोई में रखा आटा इसका सबसे बड़ा समाधान बन सकता है। जब आप सामान्य मैदे या रिफाइंड गेहूं की रोटी खाते हैं, तो वह पचने में बहुत आसान होती है और शरीर में जाते ही तुरंत ग्लूकोज में बदलकर ब्लड शुगर को स्पाइक कर देती है, जिससे आपको बार-बार भूख लगती है। इसके उलट, मल्टीग्रेन आटे में मौजूद उच्च मात्रा में फाइबर (Dietary Fiber) पचने में लंबा समय लेता है। फाइबरयुक्त यह आटा पेट में जाने के बाद एक जेल जैसा पदार्थ बनाता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। आपको बार-बार अनहेल्थी स्नैक्स या जंक फूड खाने की इच्छा नहीं होती, जिससे आपकी कुल कैलोरी इंटेक अपने आप कम हो जाती है और वजन तेजी से नियंत्रित होने लगता है।डायबिटीज और ब्लड शुगर के मरीजों के लिए क्यों है यह किसी अमृत से कम नहीं?आज के समय में भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में टाइप-2 डायबिटीज (Type-2 Diabetes) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डायबिटीज के रोगियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती कार्बोहाइड्रेट और शुगर के स्तर को नियंत्रित रखना होता है। गेंहू के आटे में ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) अपेक्षाकृत अधिक होता है, जो शुगर के मरीजों के लिए हानिकारक माना जाता है। वहीं दूसरी तरफ, मल्टीग्रेन आटे का ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी कम होता है। इसका मतलब यह है कि मल्टीग्रेन आटे की रोटी खाने के बाद शरीर में ग्लूकोज बहुत ही धीमी गति से और नियंत्रित मात्रा में रिलीज होता है। इससे अचानक ब्लड शुगर लेवल में होने वाले खतरनाक उतार-चढ़ाव (Blood Sugar Spikes) रुक जाते हैं। यदि डायबिटिक मरीज आज से ही अपनी डाइट में मल्टीग्रेन आटे को शामिल कर लें, तो वे इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार देख सकते हैं और अपनी बीमारी को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं।पाचन तंत्र को मजबूत बनाकर पेट की तमाम समस्याओं से दिलाता है छुटकाराखराब पाचन, गैस, एसिडिटी, कब्ज और पेट का ठीक से साफ न होना आज के समय में आम बीमारियां बन चुकी हैं, जिसकी मुख्य वजह हमारे खाने में फाइबर की कमी है। मल्टीग्रेन आटे में मौजूद विभिन्न अनाजों और बीजों का रफेज (Roughage) हमारे पेट की आंतों की सफाई के लिए एक नेचुरल ब्रश की तरह काम करता है। यह पेट में गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है, जिससे मेटाबॉलिज्म मजबूत होता है और भोजन आसानी से पच जाता है। जिन लोगों को सुबह उठकर पेट साफ न होने की शिकायत रहती है, वे अगर कुछ हफ्तों तक लगातार मल्टीग्रेन आटे की रोटियों का सेवन करें, तो उनके पाचन तंत्र में गजब का सुधार देखने को मिलता है। पेट हल्का रहने से पूरा दिन ऊर्जावान और तरोताजा महसूस होता है।कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण और दिल की सेहत के लिए है बेहद फायदेमंदहमारे शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) का बढ़ना दिल की बीमारियों और हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण बनता है। मल्टीग्रेन आटे में इस्तेमाल होने वाले घटक जैसे जौ, चना और अलसी के बीज शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में अचूक माने जाते हैं। इनमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट्स रक्त धमनियों में होने वाले ब्लॉकेज को रोकते हैं और ब्लड सर्कुलेशन को सुचारू रखते हैं। जब दिल स्वस्थ रहता है, तो शरीर की उम्र लंबी होती है और आप कई तरह की गंभीर कार्डियोवैस्कुलर समस्याओं से सुरक्षित रहते हैं।बाजार का पैकेटबंद मल्टीग्रेन आटा खरीदें या घर पर खुद तैयार करें?आजकल बाजार में तमाम बड़ी ब्रांड्स के 'मल्टीग्रेन आटा' के पैकेट धड़ल्ले से बिक रहे हैं, जिन पर कई तरह के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन एक समझदार उपभोक्ता होने के नाते आपको पैकेट के पीछे लिखे इंग्रेडिएंट्स (Ingredients) को जरूर पढ़ना चाहिए। कई बार कंपनियों के आटे में सिर्फ नाम मात्र के लिए अन्य अनाज मिलाए जाते हैं और बाकी सादा मैदा या गेहूं ही होता है। सबसे बेहतरीन और सुरक्षित तरीका यह है कि आप अपनी पसंद और डॉक्टर की सलाह के अनुसार गेहूं, चना, जौ, बाजरा और थोड़ा सा सोयाबीन या अलसी खुद खरीदकर किसी अच्छी चक्की से पिसवाएं। शुद्ध और ताजे रूप से तैयार किया गया यह घरेलू मल्टीग्रेन आटा आपके और आपके पूरे परिवार के स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा वरदान साबित होगा। आज ही अपनी थाली की इस छोटी सी आदत में बदलाव लाएं और एक स्वस्थ तथा सुखी जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।
गाय को मारे बिना निकालते हैं खून, दूध में मिलाकर पीता है मसाई कबीला; मर्दानगी का माना जाता है सबूत
पूर्वी अफ्रीका का मसाई कबीला ताकत और पोषण के लिए गाय को बिना मारे उसका खून, दूध में मिलाकर पीता है. वर्ल्ड फूड डे पर जानिए इस हैरान कर देने वाली सदियों पुरानी परंपरा के पीछे की असली वजह.
हैदराबाद में डांडिया नाइट्स के दौरान VHP और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पंडाल में 22 गैर-हिंदुओं को पाया, जिससे तनाव पैदा हो गया।
रेस्टोरेंट साफ तो खाना भी सेफ ? तुकाराम मुंढे ने बताए उन खतरों के बारे में, जो आपको दिखते नहीं
वर्ल्ड फूड डे पर तुकाराम मुंढे ने NDTV के लिए लिखे आर्टिकल में बताया कि सिर्फ साफ रेस्टोरेंट सुरक्षित खाने की गारंटी नहीं है. जानिए पनीर, तेल, पानी, स्टोरेज और पैकिंग से जुड़े खतरे.
विजय ने हाल ही में चेन्नई में पीएम मोदी का स्वागत किया था। मेट्रो के एक नए हिस्से के उद्घाटन के दौरान उनके साथ सफर किया, उनके साथ मंदिर गए और एक सरकारी कार्यक्रम में उनके साथ मंच साझा किया था।
Election Commission के खिलाफ AAP का प्रदर्शन, Central Park बंद होने पर उठाए सवाल
राष्ट्रीय राजधानी में आम आदमी पार्टी (AAP) के विरोध मार्च के दौरान तिरंगा थामे हुए, AAP दिल्ली प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने शुक्रवार को राजधानी में भारी सुरक्षा तैनाती को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रशासन नागरिकों को तिरंगा फहराने से क्यों रोक रहा है। AAP कार्यकर्ता और समर्थक 'तिरंगा रैली' निकालने के लिए इकट्ठा हुए थे। उनका यह विरोध प्रदर्शन कथित संस्थागत अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ था। ANI से बात करते हुए, भारद्वाज ने प्रशासनिक पाबंदियों जिसमें कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को अस्थायी रूप से बंद करना भी शामिल है - की निंदा की और इसकी तुलना भारत के स्वतंत्रता संग्राम से की। इसे भी पढ़ें: राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा किए 2 करोड़ रुपये, कोर्ट ने दिया मध्यस्थता का सुझाव और पासपोर्ट जारी करने का आदेश यह सरासर पागलपन है कि वे कह रहे हैं कि हम भारत में तिरंगा नहीं फहरा सकते! हम इसे क्यों नहीं फहरा सकते? क्या हम कुछ गलत कर रहे हैं? और क्या अंग्रेजों के खिलाफ यही लड़ाई नहीं लड़ी गई थी? अंग्रेज कहते थे कि उनका झंडा फहराया जाएगा; भारतीयों ने जोर दिया कि हम अपना तिरंगा फहराएंगे। तो आज हम इसे फहरा रहे हैं, और हम इसे बिल्कुल राष्ट्रपति भवन के सामने फहरा रहे हैं! भारद्वाज ने कहा। सुरक्षा बलों की भारी तैनाती को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए, AAP नेता ने सवाल किया कि शांतिपूर्ण तरीके से झंडा फहराने वाले प्रदर्शनों को रोकने के लिए हजारों सुरक्षाकर्मियों को तैनात करने की क्या जरूरत थी। जरा सोचिए—क्या इस देश में कभी सिर्फ तिरंगे को रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ाई गई है? जब देश के युवा बस इतना कह रहे हैं कि 'हम तिरंगा फहराना चाहते हैं', तो आप 50,000 सुरक्षाकर्मियों को बुला लेते हैं! आपने सेंट्रल पार्क तक बंद कर दिया! इसका क्या मतलब है? यह पूरी तरह से बेवकूफी है! उन्होंने आगे कहा। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इन आरोपों को खारिज करते हुए कि ये प्रदर्शन अराजकता फैलाने और चुनी हुई सरकार को गिराने की साजिश का हिस्सा थे, भारद्वाज ने तर्क दिया कि जन आंदोलन सत्ता परिवर्तन के लिए एक सामान्य लोकतांत्रिक तरीका हैं। इसे भी पढ़ें: पंजाब में Parwinder Singh Jhota की हत्या पर MHA सख्त, AAP सरकार से मांगी रिपोर्ट लोकतंत्र में सरकारें आती-जाती रहती हैं। लोकतंत्र का मतलब ही यही है। अगर कोई सरकार सत्ता में आए और कोई एक व्यक्ति हमेशा के लिए कुर्सी पर ही टिका रहे, तो उसे तानाशाही कहते हैं, लोकतंत्र नहीं! आपकी सरकार भी 2012 और 2013 के जन-आंदोलन के बाद पिछली सरकार के गिरने पर ही सत्ता में आई थी। अब आपके खिलाफ भी एक आंदोलन चल रहा है। आपकी सरकार गिरेगी और एक नई सरकार बनेगी, आम आदमी पार्टी के मंत्री ने जोर देकर कहा। जब उनसे कार्यकर्ता नेहा बोरा की उस विवादास्पद टिप्पणी के बारे में पूछा गया, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश की अशांति की तुलना भारत की स्थिति से की थी, तो भारद्वाज ने सनसनी न फैलाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भारत के पास लोकतांत्रिक आदर्शों की अपनी एक समृद्ध विरासत है।
IRCTC ने भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) के साथ एक MOU साइन किया है किए हैं. इसका उद्देश्य ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर स्थित कैटरिंग यूनिट्स में फूड सेफ्टी और हाइजीन के मामलों में पूरी पारदर्शिता और कड़े नियमों को लागू करना है.
पूर्व सब-इंस्पेक्टर और सरपंच पिता ने की अपने ही सेंगे बेटे की निर्मम हत्या
हरियाणा के जींद जिले से एक ऐसी झकझोर देने वाली और खौफनाक वारदात सामने आई है जिसने खाप पंचायतों, पुलिस प्रशासन और इंसानियत के रिश्तों को हिलाकर रख दिया है। एक तरफ जहां पिता को बच्चों का रक्षक और मार्गदर्शक माना जाता है, वहीं जींद में एक पूर्व सब-इंस्पेक्टर (Retired Sub-Inspector) और एक स्थानीय सरपंच पिता ने अपने ही सेंगे जवान बेटे की गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। घटना के वक्त जब पिता और उसके साथियों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कीं, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मी भी अपनी जान बचाने के लिए मौके से उल्टे पांव भाग खड़े हुए। बेखौफ आरोपियों ने मृतक मुरारी पर एक के बाद एक ताबड़तोड़ 7 गोलियां दाग दीं, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। आइए एक ग्राउंड और क्राइम रिपोर्टर की नजर से जानते हैं कि इस खौफनाक ऑनर किलिंग और पारिवारिक कत्लेआम की पूरी इनसाइड स्टोरी क्या है।ऑनर किलिंग और पारिवारिक रंजिश का खौफनाक अंत: जींद में सरेआम गोलियों की गड़गड़ाहटघटना की शुरुआत तब हुई जब जींद के एक ग्रामीण इलाके में पिछले काफी समय से परिवार के भीतर चल रहा संपत्ति और आपसी रिश्तों का विवाद अपने चरम पर पहुंच गया था। मृतक मुरारी अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर अपनी जिंदगी जीने और कुछ व्यक्तिगत फैसलों पर अड़ा हुआ था, जो उसके पिता और परिवार के रसूखदार सदस्यों को नागवार गुजर रहा था। आरोपी पिता जो कि पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हो चुका था और वर्तमान में गांव की राजनीति में सरपंच या दबंग ओहदे से जुड़ा था, उसने अपने बेटे की बगावत को अपनी इज्जत पर धब्बा मान लिया था। उसने कई बार अपने बेटे को रास्ते से हटाने की धमकी भी दी थी, लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि एक पिता अपने ही खून के प्यासे हो जाएंगे और सरेआम गोलियों से छलनी कर देंगे।फायरिंग शुरू होते ही जान बचाकर भागी पुलिस: कानून-व्यवस्था पर उठे गंभीर सवालइस खौफनाक वारदात का सबसे शर्मनाक और चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि जिस वक्त आरोपियों ने इस हत्या की साजिश को अंजाम देना शुरू किया, उस समय मौके पर कुछ पुलिसकर्मी भी मौजूद थे। जैसे ही आरोपियों ने धड़ाधड़ फायरिंग शुरू की और गोलियों की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठा, तो कानून व्यवस्था बनाए रखने के दावे करने वाली स्थानीय पुलिस अपनी जान बचाने के लिए मौके से भाग खड़ी हुई। पुलिस की इस कायरता और कार्यशैली पर अब स्थानीय ग्रामीणों और मृतक के समर्थकों द्वारा बेहद तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस थोड़ी सी भी मुस्तैदी और बहादुरी दिखाती, तो शायद एक नौजवान बेटे की जान बचाई जा सकती थी। पुलिस के भागने के बाद बेखौफ हत्यारों ने मुरारी के शरीर पर ताबड़तोड़ 7 गोलियां उतारीं और यह सुनिश्चित किया कि उसकी सांसें हमेशा के लिए थम जाएं।मुरारी के शरीर पर दागी गईं 7 गोलियां, मौके पर पसरा सन्नाटा और चीख-पुकारआरोपियों ने इस वारदात को किसी पेशेवर शार्पशूटर की तरह अंजाम दिया। चश्मदीदों के अनुसार, जब मुरारी पर पहला वार किया गया तो वह अपनी जान बचाने के लिए भागा, लेकिन बेरहम पिता और उसके सहयोगियों ने उसे घेर लिया और नजदीक से एक के बाद एक 7 गोलियां उसके सीने और शरीर में उतार दीं। गोलियों की आवाज इतनी भयानक थी कि आसपास के घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद हो गईं। जब तक हमलावर वारदात को अंजाम देकर वहां से फरार हुए, तब तक मुरारी खून से लथपथ होकर जमीन पर ढेर हो चुका था। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद मृतक के घर में कोहराम मच गया और मां तथा अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में मातम के साथ-साथ एक अनजाना डर और तनाव का माहौल व्याप्त है।पुलिस प्रशासन की ताबड़तोड़ छापेमारी और आरोपियों की धरपकड़ के लिए एसआईटी गठितघटना की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा पुलिस के उच्च अधिकारियों ने मामले का तत्काल संज्ञान लिया है और लापरवाह पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। मुख्य आरोपी पूर्व सब-इंस्पेक्टर और उसके साथियों के खिलाफ हत्या, शस्त्र अधिनियम (Arms Act) और आपराधिक साजिश की गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस की कई विशेष टीमों (SIT) का गठन करके आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि चाहे आरोपी कितना भी रसूखदार या पूर्व पुलिसकर्मी क्यों न हो, उसे कानून के दायरे में लाकर कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। इस वीभत्स हत्याकांड ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अहंकार और सामाजिक प्रतिष्ठा के झूठे पाखंड में इंसानियत किस हद तक गिर सकती है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा और मुंबई में भारतीय अधिकारियों से प्रस्तावित मुलाकात को लेकर सरकार से सवाल किया है।
Rajat Sharma's Blog | क्या कांग्रेस भी बांग्लादेश जैसा खूनी सत्ता परिवर्तन चाहती है?
दिल्ली को ढाका बनाने का इरादा खतरनाक है। हिंसा से सरकार बदलने की साजिश नापाक है। दुर्भाग्य की बात ये है कि हिंसा और अराजकता से सरकार बदलने का इरादा रखने वालों को गोद में बिठाकर राहुल गांधी ने अपनी पार्टी कांग्रेस को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
'मेरा बेटा डिप्रेशन में नहीं था', श्रद्धा दुबे के दावों पर भड़कीं शिवा की मां
लखनऊ के शिवा शर्मा डेथ केस में मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे के वीडियो जारी कर खुद को निर्दोष बताने पर मृतक की मां रंजना शर्मा ने तीखा विरोध जताया है. मां ने सवाल उठाया कि अगर वह निर्दोष है तो भाग क्यों रही है. उन्होंने अस्पताल के झूठे ड्रामे और डिप्रेशन के दावों को खारिज करते हुए पुलिस से आरोपी की जल्द गिरफ्तारी और न्याय की मांग की है.
प्लास्टर बैगवर्म क्या हैं? प्लास्टर बैगवर्म कीड़े मारने के लिए सबसे अच्छी दवा कौन सी है
घर से कीड़ा कैसे भगाएं? नमी, गंदगी और बंद जगहों में अक्सर दीवार वाले कीड़े पनपने लगते हैं. ये न काटते हैं और न ही इंसानों के लिए हानिकारक माने जाते हैं लेकिन ये सामान को नुकसान पहुंचा सकते हैं. आइए जानते हैं इन प्लास्टर वाले कीड़े भगाने का तरीका.
शख्स बोला-मैं CM थलापति विजय हूं...घर बनाने में मदद करूंगा
सोशल मीडिया और आधुनिक डिजिटल युग में ठगी और धोखाधड़ी करने वाले शातिर अपराधियों के नए-नए और हैरान करने वाले तरीके रोजाना सामने आते रहते हैं। आम आदमी की भावनाओं, उसकी मजबूरियों और फिल्मी सितारों के प्रति दीवानगी का फायदा उठाकर ठग किस हद तक गिर सकते हैं, इसका एक ताजा और बेहद अजीबोगरीब मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। तमिलनाडु से एक ऐसी घटना सामने आई है जहां एक शातिर ठग ने एक गरीब और सीधी-साधी महिला को फोन पर अपनी आवाज बदलकर यह झांसा दिया कि वह कोई और नहीं बल्कि दक्षिण भारत के मशहूर सुपरस्टार और हाल ही में राजनीति में आए नेता 'थलापति विजय' (Thalapathy Vijay) बोल रहे हैं। आरोपी ने महिला से वादा किया कि वह मुख्यमंत्री (मुख्यमंत्री बनने की अटकलों और राजनीतिक चर्चाओं के बीच) के रूप में उसके सपनों का पक्का घर बनवाने के लिए वित्तीय मदद करेंगे। महिला ने उस फर्जी शख्स की बातों पर आंख मूंदकर भरोसा कर लिया, लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई और वह न्याय के लिए पुलिस थाने पहुंच गई। आइए एक क्राइम रिपोर्टर की नजर से जानते हैं कि इस अनोखी और चौंकाने वाली ठगी की पूरी पटकथा कैसे रची गई।फर्जी कॉलर का फिल्मी ड्रामा: जब खुद को सुपरस्टार और राजनेता बताकर महिला को किया गया फोनघटना की शुरुआत तब हुई जब एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली महिला के पास एक अनजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले शख्स ने बेहद शातिर तरीके से अपनी आवाज में रसूख और अधिकार का लहजा लाते हुए कहा कि वह साउथ के सुपरस्टार और राजनीति में कदम रख चुके थलापति विजय बोल रहे हैं। आरोपी ने महिला से कहा कि उसने सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम से उसकी गरीबी और पक्का मकान न होने की परेशानी को देख लिया है और वह उसकी मदद करना चाहते हैं। शुरुआती दौर में महिला को अपनी कानों पर विश्वास नहीं हुआ कि कोई इतना बड़ा स्टार और नेता सीधे उससे बात कर रहा है। लेकिन उस शातिर ठग ने अपनी बातों के जाल में महिला को ऐसा उलझाया कि उसे लगा कि शायद उसकी किस्मत चमक गई है और अब उसका पक्का घर बनने का सपना सच होने वाला है।घर बनाने की सरकारी मदद और बैंक खातों के नाम पर शुरू हुआ पैसों का खेलफर्जी थलापति विजय बने उस ठग ने महिला का भरोसा पूरी तरह जीतने के बाद उसे सरकारी योजनाओं, आवास अनुदान और विशेष राहत पैकेज के नाम पर झांसे में लेना शुरू कर दिया। आरोपी ने महिला से कहा कि उसके खाते में घर बनवाने के लिए लाखों रुपये ट्रांसफर किए जाने वाले हैं, लेकिन इसके लिए कुछ कागजी कार्रवाई और 'प्रोसेसिंग फीस' के रूप में कुछ छोटी रकम एडवांस में जमा करानी होगी। अपनी गरीबी से तंग आ चुकी और जल्द से जल्द सिर पर छत पाने की चाह रखने वाली उस महिला ने इधर-उधर से उधार मांगकर और अपने छोटे-मोटे गहने गिरवी रखकर उस ठग द्वारा बताए गए खातों में पैसे ट्रांसफर करना शुरू कर दिया। ठग ने हर बार फोन पर बात करते समय अपनी आवाज में फिल्मी अंदाज बनाए रखा ताकि महिला को कभी शक न हो सके कि वह किसी फ्रॉड के जाल में फंस रही है।जब धीरे-धीरे खुलने लगी फरेब की परतें और महिला के उड़े होशकुछ हफ्तों तक पैसे ऐंठने का यह सिलसिला लगातार चलता रहा। महिला जब भी अपने घर के निर्माण कार्य के बारे में पूछती, तो वह फर्जी कॉलर उसे कोई न कोई नया बहाना बनाकर टाल देता और और पैसों की मांग करने लगता। जब महिला के पास पैसे पूरी तरह खत्म हो गए और उसने अपने रिश्तेदारों से इस बारे में चर्चा की, तो उन्हें माजरा कुछ संदिग्ध लगा। त्यों-त्यों जांच-पड़ताल आगे बढ़ी, तो यह साफ हो गया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री या सुपरस्टार थलापति विजय नाम का कोई भी व्यक्ति इस तरह व्यक्तिगत रूप से किसी को फोन करके पैसे नहीं मांगता है। महिला के होश तब उड़ गए जब उसे अहसास हुआ कि उसने जिसे अपना मसीहा और सुपरस्टार समझकर अपनी जमा-पूंजी सौंप दी थी, वह असल में एक शातिर और पेशेवर ठग था जो फिल्मी हस्तियों के नाम का इस्तेमाल करके भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बनाता था।पुलिस थाने पहुंची पीड़िता और साइबर सेल द्वारा आरोपी की तलाश तेजखुद के साथ हुई इस धोखाधड़ी और मानसिक आघात से टूटने के बाद पीड़िता ने बिना देर किए स्थानीय पुलिस थाने का दरवाजा खटखटाया और पूरी आपबीती पुलिस अधिकारियों को सुनाई। पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर आईटी एक्ट और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। चूंकि मामला फोन कॉल्स, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और डिजिटल फ्रॉड से जुड़ा हुआ है, इसलिए स्थानीय पुलिस ने इस केस को साइबर सेल (Cyber Cell) को ट्रांसफर कर दिया है। साइबर एक्सपर्ट्स उन मोबाइल नंबरों और बैंक खातों की तकनीकी जांच कर रहे हैं, जिनके जरिए उस ठग ने महिला से पैसे वसूले थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।आम जनता के लिए बड़ी सीख: सोशल मीडिया और फोन कॉल के झांसे में आने से बचेंयह घटना आज के डिजिटल युग में हम सभी के लिए एक बहुत बड़ा सबक है। आज के समय में ठग एआई (AI) वॉयस क्लोनिंग, सेलिब्रिटी के फर्जी अकाउंट्स और बड़े नेताओं के नाम का दुरुपयोग करके मासूम नागरिकों को आसानी से बेवकूफ बना रहे हैं। कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के फोन पर या सोशल मीडिया पर किए गए ऐसे दावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें, जो आपको रातों-रात अमीर बनाने या सरकारी मदद दिलाने के नाम पर पैसे की मांग करते हैं। सतर्कता और सूझबूझ ही इस तरह के डिजिटल अपराधियों से बचने का एकमात्र अचूक हथियार है।
Kochi में यहूदी प्रार्थनास्थल के पास आगजनी के मामले में SIT कर रही जांच
एर्णाकुलम मार्केट में एक यहूदी प्रार्थनास्थल के पास आगजनी की घटना में संदिग्ध आतंकी संबंधों की जांच कर रही पुलिस आरोपी से जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खंगाल रही है। कोच्चि के पुलिस आयुक्त अरुण के. पवित्रन ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने 12 अक्टूबर को तड़के समीपवर्ती पुथेनक्रूज निवासी बिन पॉल (32) को कथित तौर पर आग लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। आगजनी की यह घटना कोच्चि सेंट्रल पुलिस थाना क्षेत्र के एर्णाकुलम मार्केट में कदवुभागम यहूदी प्रार्थनास्थल के सामने स्थित ब्लॉसम नर्सरी में हुई थी। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने किसी अज्ञात व्यक्ति के निर्देश पर तय किए गए ठिकानों पर हमले किए, उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग की और बदले में भुगतान पाने के लिए फुटेज भेजे। सूत्रों के अनुसार, उसके फोन से मिले संदेशों में भारत के विभिन्न शहरों में यहूदी प्रार्थनास्थलों और उन पर हमलों का उल्लेख था। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इन संदेशों के आदान-प्रदान में शामिल लोग कौन हैं, आरोपी से उनका क्या संबंध है और क्या आगजनी किसी संगठित कार्रवाई का हिस्सा थी। यहां की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को पॉल को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। जांच दल उससे पूछताछ कर रहा है। पवित्रन ने पत्रकारों से कहा कि घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘आरोपी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।’’पवित्रन ने कहा, ‘‘वह जांच में सहयोग कर रहा है और जांच में हमारे सामने कोई अन्य बाधा नहीं है।’’ पुलिस सूत्रों ने बताया कि जांच दल पॉल और उसके एक संदिग्ध संचालक के बीच ‘टेलीग्राम ऐप’ के जरिए हुई ‘चैट’ को बरामद करने की कोशिश कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस बातचीत का ब्योरा मांगने के लिए टेलीग्राम को पत्र लिखेगी। सूत्रों ने बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि पॉल पिछले कई महीनों से एक ऐसे व्यक्ति के संपर्क में था, जो उसे निर्देश दे रहा था। बृहस्पतिवार को जब मजिस्ट्रेट अदालत में पुलिस हिरासत की अर्जी पर सुनवाई हुई, तो पॉल के वकील ने दावा किया कि वह मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए दवाएं ले रहा है। हालांकि, पुलिस सूत्रों ने कहा कि पॉल जांच में पूरा सहयोग कर रहा है। उन्होंने बताया कि अदालत की अनुमति लेकर उसकी अतिरिक्त चिकित्सकीय जांच कराई जाएगी। पुलिस ने पॉल के आवास से हेरोइन, फेंटानिल, ऑक्सीकोडोन, अल्प्राजोलम और केटामाइन समेत कई मादक पदार्थ भी बरामद किए हैं। संदेह है कि इन पदार्थों को ऑनलाइन मंगाया गया था।
35 किलो गांजे के साथ 3 युवतियों समेत 6 तस्कर गिरफ्तार, ओडिशा नेटवर्क का भंडाफोड़
हरियाणा के फरीदाबाद जिले से नशे के सौदागरों के खिलाफ पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी और चौकाने वाली सफलता सामने आई है। फरीदाबाद रेलवे स्टेशन पर क्राइम ब्रांच की विशेष टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए अंतरराज्यीय नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस संयुक्त कार्रवाई में क्राइम ब्रांच की टीम ने 3 युवतियों समेत कुल 6 शातिर ड्रग तस्करों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से भारी मात्रा में यानी कुल 35 किलोग्राम अवैध गांजा बरामद किया गया है। शुरुआती पुलिस पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। यह गिरोह उड़ीसा (ओडिशा) के नक्सल प्रभावित और बीहड़ इलाकों से सस्ते दामों में गांजा खरीदकर ट्रेन के जरिए फरीदाबाद, पलवल और दिल्ली-एनसीआर के नोएडा जैसे हाईटेक शहरों में ऊंचे दामों पर सप्लाई करता था। आइए एक निष्पक्ष क्राइम रिपोर्टर की नजर से जानते हैं कि फरीदाबाद रेलवे स्टेशन पर हुई इस पूरी सर्जिकल स्ट्राइक की परत-दर-परत इनसाइड स्टोरी क्या है।फरीदाबाद रेलवे स्टेशन पर क्राइम ब्रांच का गुप्त जाल और तस्करों की नाटकीय गिरफ्तारीघटनाक्रम के अनुसार, फरीदाबाद पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम को गुप्त सूत्रों से यह बेहद पक्की और पुख्ता जानकारी मिली थी कि ओडिशा से नशीले पदार्थों की एक बड़ी खेप लेकर तस्करों का एक गिरोह एक्सप्रेस ट्रेन के जरिए फरीदाबाद रेलवे स्टेशन पर उतरने वाला है। सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने बिना एक पल की देरी किए रेलवे पुलिस और स्थानीय टीम के साथ मिलकर पूरे स्टेशन परिसर की घेराबंदी कर ली। जैसे ही संदिग्ध ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुंची और उससे तीन पुरुष तथा तीन युवतियां अपने भारी-भरकम ट्रैवल बैग और ट्रॉली बैग लेकर बाहर निकलने लगे, तो पुलिस की स्पेशल टीम ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। पुलिस को अचानक अपने सामने देखकर तस्करों के हाथ-पांव फूल गए और वे भागने का प्रयास करने लगे, लेकिन मुस्तैद क्राइम ब्रांच की टीम ने दौड़कर सभी छह आरोपियों को मौके पर ही धर दबोचा।ट्रैवल बैग्स की तलाशी में निकला 35 किलो गांजा, युवतियों को आगे रखकर देते थे पुलिस को चकमागिरफ्तारी के तुरंत बाद जब क्राइम ब्रांच की टीम ने आरोपियों के पास मौजूद पिट्ठू बैगों और ट्रॉली बैगों की विधिवत तलाशी ली, तो उसमें से खाकी टेप से लपेटकर रखे गए 35 किलोग्राम अवैध गांजे के कई बड़े पैकेट बरामद हुए। गांजे की इस खेप की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है। पुलिस पूछताछ में इस बात का बड़ा खुलासा हुआ कि इस गिरोह में तीन युवतियों को विशेष रूप से शामिल किया गया था ताकि वे पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और चेकिंग टीमों को धोखा दे सकें। आम तौर पर सुरक्षा एजेंसियां महिला यात्रियों और उनके साथ यात्रा कर रहे जोड़ों या परिवारों पर ज्यादा शक नहीं करतीं। इसी बात का फायदा उठाकर ये आरोपी पिछले काफी समय से ओडिशा से गांजा लाकर दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न इलाकों में सुरक्षित पहुंचा रहे थे। महिलाओं को आगे रखकर तस्करी करने की इस नई और शातिर मॉडस ऑपरेंडी (Modus Operandi) ने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है।ओडिशा से पलवल और नोएडा तक फैला था तस्करी का काला नेटवर्क, कॉलेज छात्रों को बनाते थे निशानापुलिस द्वारा की गई शुरुआती गहन पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल करते हुए पूरे सिंडिकेट के नेटवर्क का खुलासा किया है। आरोपियों ने बताया कि वे ओडिशा के सुदूर इलाकों से कम कीमत पर गांजा खरीदते थे और फिर उसे ट्रेन के जरिए हरियाणा के फरीदाबाद और पलवल लेकर पहुंचते थे। इसके बाद इस गांजे की छोटी-छोटी पुड़िया और पैकेट बनाकर दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख इलाकों जैसे नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और पलवल की झुग्गी-झोपड़ियों, कॉलेजों और पेइंग गेस्ट (PG) में रहने वाले युवाओं और छात्रों को बेहद महंगे दामों पर बेचा जाता था। नोएडा और फरीदाबाद के कई बड़े शैक्षणिक संस्थानों और इंडस्ट्रियल एरिया में यह गिरोह लंबे समय से नशीले पदार्थों की सप्लाई में सक्रिय था। क्राइम ब्रांच अब इस बात की भी गहनता से जांच कर रही है कि ओडिशा में इस गिरोह को गांजा कौन मुहैया कराता था और फरीदाबाद-नोएडा में वे किन-किन स्थानीय लोकल डीलरों के सीधे संपर्क में थे।फरीदाबाद पुलिस की सख्त चेतावनी और नशा-मुक्त अभियान पर बड़ा कदमफरीदाबाद रेलवे स्टेशन पर 35 किलो गांजे की इस बड़ी बरामदगी और 6 तस्करों की गिरफ्तारी को पुलिस प्रशासन नशीले पदार्थों के खिलाफ जारी अभियान में एक बहुत बड़ी कामयाबी मान रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पकड़े गए सभी छह आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और उन्हें अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा। पुलिस रिमांड के दौरान इस अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क के अन्य मुख्य सरगनाओं के नाम भी सामने आने की पूरी संभावना है। फरीदाबाद पुलिस कमिश्नर ने सख्त लहजे में संदेश दिया है कि जिले में किसी भी तरह के नशे के कारोबार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और युवा पीढ़ी को बर्बादी के रास्ते पर धकेलने वाले नशा माफियाओं के खिलाफ यह कड़ा और सख्त अभियान लगातार जारी रहेगा।
Dhruv Rathee को क्या गिरफ्तार कर लिया गया? नोएडा पुलिस ने Tweet कर क्या बड़ा बताया
उत्तर प्रदेश के नोएडा में पुलिस ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर किए गए उन दावों का खंडन किया, जिनमें जर्मनी में रहने वाले यूट्यूबर ध्रुव राठी की गिरफ्तारी की बात कही गई थी। पुलिस ने इस जानकारी को पूरी तरह से गलत, भ्रामक और निराधार बताया है। गौरतलब है कि शुक्रवार सुबह से ही, कई यूज़र्स एक्स पर पोस्ट कर रहे हैं और यह कयास लगा रहे हैं कि ध्रुव राठी को नोएडा पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है; साथ ही, वे इस दावे के समर्थन में एक वीडियो भी शेयर कर रहे हैं। एक फैक्ट-चेक स्पष्टीकरण में पुलिस ने कहा कि नोएडा पुलिस ने ध्रुव राठी को गिरफ्तार नहीं किया है। यह स्पष्टीकरण तब आया है जब सोशल मीडिया के कई अकाउंट्स पर ऐसी पोस्ट फैलाई गईं, जिनमें दावा किया गया था कि यूट्यूबर को हिरासत में ले लिया गया है। इसे भी पढ़ें: Congress MP Bimol Akoijam यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली पुलिस के सामने हुए पेश नोएडा पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे भ्रामक या बिना पुष्टि वाले संदेशों को आगे न फैलाएं। साथ ही, सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को सलाह दी गई है कि वे किसी भी जानकारी को ऑनलाइन साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर कर लें। पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि जो लोग गलत जानकारी, भ्रामक सामग्री या अफवाहें फैलाते हुए पाए जाएंगे, उनके खिलाफ मौजूदा कानूनों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट के 'X' (ट्विटर) हैंडल पर किए गए पोस्ट में कहा गया है, आम जनता से अपील है कि वे इस तरह के भ्रामक और बिना पुष्टि वाले संदेशों को न फैलाएं, और किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर कर लें। भ्रामक, गलत या अफवाह फैलाने वाली सामग्री साझा करने वालों के खिलाफ प्रचलित कानूनी प्रावधानों के अनुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसे भी पढ़ें: पंजाब में Parwinder Singh Jhota की हत्या पर MHA सख्त, AAP सरकार से मांगी रिपोर्ट ध्रुव राठी को हिरासत में लिया जाना यह अटकलें तब सामने आई हैं, जब यूट्यूबर को हरियाणा के गुरुग्राम के सेक्टर 56 स्थित उनके आवास से हिरासत में लिए जाने के लगभग 18 घंटे बाद रिहा कर दिया गया। एक अधिकारी ने बताया कि रविवार को एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया। उस पर आरोप है कि वह जंतर-मंतर पर चुनावी सूची में गड़बड़ियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की योजना बना रहा था, जबकि वहां निषेधाज्ञा (धारा 144) लागू थी। पुलिस ने बताया कि 32 वर्षीय सोशल मीडिया एक्टिविस्ट को गुरुग्राम में क्राइम ब्रांच के एक कार्यालय में निगरानी में रखा गया था। रविवार तड़के करीब 3 बजे उसे उसके परिवार वालों को सौंप दिया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा हां, उसे रिहा कर दिया गया है। उसके परिवार वाले उसे लेने के लिए क्राइम ब्रांच के उस कार्यालय पहुंचे, जहां उसे हिरासत में रखा गया था। अधिकारी ने बताया, दिल्ली पुलिस के साथ बातचीत के बाद उसे रिहा किया गया। साथ ही, यह सुनिश्चित किया गया कि वह ऐसे किसी समूह या भीड़ का हिस्सा नहीं बनेगा जो उन इलाकों में कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करने की कोशिश कर रही हो, जहां पहले से ही निषेधाज्ञा लागू है।
देश के प्रतिष्ठित एनआईटी में प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर बंपर भर्ती
देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में अकादमिक करियर बनाने का सपना देख रहे योग्य और मेहनतकश युवाओं के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में शुमार नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) ने विभिन्न विभागों में फैकल्टी पदों पर बंपर भर्तियों के लिए आधिकारिक विज्ञापन जारी कर दिया है। इस भर्ती अभियान के तहत संस्थान के कुल 15 प्रमुख विभागों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त पदों को भरा जाएगा। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले इन संस्थानों में फैकल्टी के रूप में चयनित होना किसी भी शिक्षक के लिए गर्व का विषय होता है। आइए एक शिक्षा और रोजगार रिपोर्टर की नजर से जानते हैं कि इस भर्ती प्रक्रिया के लिए शैक्षणिक योग्यता, पदों का विवरण और आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया क्या है।एनआईटी के विभिन्न विभागों में प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों का पूरा विवरणजारी किए गए आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, इस भर्ती प्रक्रिया के तहत अलग-अलग शैक्षणिक कैडर के लिए कुल पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। इनमें प्रोफेसर (Professor), एसोसिएट प्रोफेसर (Associate Professor), असिस्टेंट प्रोफेसर ग्रेड-I (Assistant Professor Grade-I) और असिस्टेंट प्रोफेसर ग्रेड-II (Assistant Professor Grade-II) के पद शामिल हैं। सबसे ज्यादा पद असिस्टेंट प्रोफेसर के विभिन्न ग्रेड्स के लिए आए हैं, जिससे युवा शोधकर्ताओं और पीएचडी धारकों के पास सुनहरा मौका है। संस्थान अपने कुल 15 आधुनिक तकनीकी और विज्ञान से जुड़े विभागों में इन योग्य शिक्षकों की नियुक्ति करने जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को उच्च स्तर की शिक्षा और अनुसंधान का लाभ मिल सके।जानिए कौन से 15 विभाग हैं शामिल और क्या होनी चाहिए जरूरी शैक्षणिक योग्यताएनआईटी के जिन 15 प्रमुख विभागों में यह भर्तियां निकाली गई हैं, उनमें कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, केमिकल, मेटलरजिकल, फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथमेटिक्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज सहित कई अन्य तकनीकी और व्यावहारिक विषय शामिल हैं। इन सभी पदों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो आवेदक के पास संबंधित विषय में पीएचडी (Ph.D.) की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही उम्मीदवारों के पास स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर प्रथम श्रेणी (First Class) के अंक होने चाहिए। जिन उम्मीदवारों ने बीटेक के तुरंत बाद सीधे पीएचडी की है, वे भी निर्धारित नियमों के तहत आवेदन करने के पात्र माने गए हैं।चयन प्रक्रिया, शॉर्टलिस्टिंग और इंटरव्यू का पूरा पारदर्शी पैमानाएनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फैकल्टी की चयन प्रक्रिया बेहद सख्त और पारदर्शी होती है। सबसे पहले प्राप्त होने वाले ऑनलाइन आवेदनों की विस्तृत स्क्रूटनी की जाती है। इसके बाद उम्मीदवारों के एकेडमिक रिकॉर्ड, रिसर्च पेपर्स, पब्लिकेशन और क्रेडिट पॉइंट्स के आधार पर उन्हें शॉर्टलिस्ट किया जाता है। शॉर्टलिस्ट किए गए योग्य अभ्यर्थियों को टीचिंग और रिसर्च सेमिनार के दौरान प्रेजेंटेशन के लिए बुलाया जा सकता है। अंतिम चरण में विशेषज्ञ पैनल के सामने होने वाले इंटरव्यू (Interview) के आधार पर फाइनल मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है, जिसके बाद सफल उम्मीदवारों को देश के इन नामी संस्थानों में प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में जॉइनिंग मिलती है।ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि और युवाओं के लिए सुनहरा अवसरजो योग्य उम्मीदवार शिक्षा के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारना चाहते हैं और देश के शीर्ष तकनीकी संस्थान में अपनी सेवाएं देना चाहते हैं, वे एनआईटी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं। आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे संस्थान की वेबसाइट पर जारी विस्तृत नोटिफिकेशन को ध्यानपूर्वक पढ़ लें और सभी जरूरी दस्तावेज समय पर तैयार रखें। तय की गई अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। उच्च शिक्षा और बेहतरीन करियर की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह एक ऐसा स्वर्णिम अवसर है जो उनके पेशेवर जीवन को एक नई ऊंचाई दे सकता है।
देश के सबसे बड़े बैंक में फार्मेसी वालों के लिए निकली बंपर नौकरी
सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे देश के युवाओं और विशेष रूप से चिकित्सा एवं फार्मेसी के क्षेत्र में डिग्री हासिल करने वाले उम्मीदवारों के लिए एक बेहद शानदार और खुशखबरी भरी खबर सामने आ रही है। देश के केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फार्मेसी प्रोफेशनल्स के लिए बंपर वेकेंसियों की घोषणा की है। बैंक द्वारा जारी इस नई भर्ती अधिसूचना के अनुसार, योग्य और अनुभवी फार्मासिस्ट उम्मीदवारों को आकर्षक मानदेय पर नियुक्त किया जाएगा, जिसमें रोजाना के लगभग 3000 रुपये तक की कमाई का शानदार अवसर मिल रहा है। रिजर्व बैंक जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में काम करने का यह मौका युवाओं के करियर को एक नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है। आइए एक रोजगार और शिक्षा रिपोर्टर की नजर से जानते हैं कि इस वैकेंसी के लिए पात्रता क्या है, चयन प्रक्रिया कैसी होगी और आप इसके लिए कैसे आवेदन कर सकते हैं।भारतीय रिजर्व बैंक में फार्मासिस्ट पदों पर निकली भर्ती की मुख्य विशेषताएंभारतीय रिजर्व बैंक देश की मौद्रिक नीति और बैंकिंग प्रणाली को नियंत्रित करने वाला सर्वोच्च संस्थान है, जिसके कार्यालय देश के तमाम बड़े महानगरों और राज्यों में फैले हुए हैं। बैंक समय-समय पर अपने कर्मचारियों और अधिकारियों के स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए योग्य चिकित्सा पेशेवरों की सेवाएं अनुबंध (Contractual Basis) या नियमित आधार पर लेता रहता है। इसी कड़ी में फार्मेसी क्षेत्र के योग्य युवाओं के लिए यह विशेष वेकेंसियां निकाली गई हैं। इस भर्ती के तहत चयनित होने वाले उम्मीदवारों को आरबीआई के विभिन्न डिस्पेंसरी और चिकित्सा इकाइयों में अपनी सेवाएं देनी होंगी। बैंक की इस नौकरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें मिलने वाला मेहनताना और सम्मानजनक मानदेय बाजार में अन्य प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों की तुलना में बेहद आकर्षक है, जिससे योग्य युवाओं का रुझान इस तरफ तेजी से बढ़ रहा है।योग्यता और वेतन का पूरा गणित: कैसे मिलेंगे रोजाना के 3000 रुपये?आरबीआई द्वारा जारी किए गए आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, इस पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से फार्मेसी में डिग्री (B.Pharm) या डिप्लोमा (D.Pharm) की न्यूनतम योग्यता होना अनिवार्य है। इसके अलावा, संबंधित क्षेत्र में कुछ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी। बात अगर वेतन या मानदेय की करें, तो बैंक द्वारा तय किए गए कार्यघंटों और नियमों के अनुसार योग्य फार्मासिस्ट को रोजाना के हिसाब से लगभग 3000 रुपये तक का मानदेय प्रदान किया जाएगा। महीने के हिसाब से गणना करें तो यह एक बहुत ही हैंडसम सैलरी पैकेज बनता है, जो किसी भी युवा फार्मासिस्ट के वित्तीय भविष्य को मजबूत करने के लिए काफी है।चयन प्रक्रिया, इंटरव्यू और आवेदन करने की पूरी आसान प्रक्रियाभारतीय रिजर्व बैंक की इस फार्मेसी वैकेंसी के लिए चयन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और योग्यता पर आधारित होती है। सबसे पहले उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर दिए गए फॉर्मेट में अपना आवेदन फॉर्म भरना होगा। इसके बाद प्राप्त आवेदनों की शॉर्टलिस्टिंग की जाएगी। शॉर्टलिस्ट किए गए योग्य उम्मीदवारों को पर्सनल इंटरव्यू (Personal Interview) के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवार के तकनीकी ज्ञान, फार्मेसी के व्यावहारिक अनुभव और संवाद कौशल का परीक्षण किया जाता है। इंटरव्यू में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवारों को तुरंत फाइनल मेरिट लिस्ट में जगह दी जाती है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट rbi.org.in पर जाकर विस्तृत नोटिफिकेशन डाउनलोड कर सकते हैं और समय रहते अपना आवेदन पूरा कर सकते हैं।मेडिकल सेक्टर के युवाओं के लिए सुनहरा अवसर, न गंवाएं यह मौकासरकारी क्षेत्र में नौकरी पाने का सपना देखने वाले और फार्मेसी की पढ़ाई पूरी कर चुके युवाओं के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित बैंक के साथ जुड़कर काम करने का अनुभव आपके बायोडाटा (Resume) के वजन को कई गुना बढ़ा देता है। यदि आपके पास भी फार्मेसी की डिग्री है और आप एक स्थिर, सम्मानित तथा उच्च आय वाली नौकरी की तलाश कर रहे हैं, तो बिना देर किए इस वैकेंसी के लिए आवेदन की तैयारियों में जुट जाएं। समय पर किया गया सही आवेदन आपके सपनों को नई उड़ान दे सकता है और देश के सर्वोच्च बैंकिंग संस्थान का हिस्सा बनने का आपका सपना सच कर सकता है।
Bonus Announcement: केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एड-हॉक बोनस को मंजूरी दे दी है. वित्त मंत्रालय ने आधिकारिक आदेश जारी कर इसका ऐलान किया. जानिए किन कर्मचारियों को मिलेंगे 6,908 रुपये और इसके लिए क्या हैं नियम.

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