जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया (JSW MG Motor India) ने गुरुवार, 17 जुलाई को भारत का पहला मल्टी-पावरट्रेन न्यू एनर्जी व्हीकल (NEV) प्लेटफॉर्म 'ADAPT' पेश किया। कंपनी ने घोषणा की है कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के दौरान इस प्लेटफॉर्म पर आधारित एक नई ...
सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता (फिर इंदौर) हमारा
Trip To London: मेरा कथन न तो आत्म मुग्धता है, न अतिशयोक्ति। हर किसी को अपनी माटी, अपना घर, अपने लोग पसंद होते हैं। वह उन सबके साथ सुविधाजनक स्थिति में होता है। फिर भी कोई तो ऐसी बात है कि सैकड़ों साल की गुलामी और लाखों सितम के बाद भी हमारे अभिमान के ...
Ram Mandir Ayodhya Atonement Ritual: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामधन (दान और चढ़ावा) गबन का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस महापाप का पूर्ण रूप से खुलासा होना अभी बाकी है। चोरी कितनी बड़ी है, क्या-क्या गायब हुआ ...
बार-बार KYC कराने से मिलेगा छुटकारा, ऐसे जानें अपनी 14 अंकों की CKYC संख्या, बैंक का काम होगा आसान
अगर आप हर बार नया बैंक खाता खोलने या किसी वित्तीय संस्था में निवेश करते समय बार-बार KYC दस्तावेज़ जमा करने से परेशान हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। सेंट्रल KYC (CKYC) की मदद से यह प्रक्रिया काफी आसान हो सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोगों से ...
पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में गुरुवार को सुरक्षा बलों के एक काफिले पर हुए बड़े हमले में 45 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया गया है। यह दावा बलूचिस्तान पोस्ट की एक रिपोर्ट में किया गया है। प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान ...
गाजियाबाद रेप-मर्डर केस में चार साल की बच्ची का समय पर इलाज न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने निजी अस्पताल और डॉक्टर को कड़ी फटकार लगाई। पुलिस जांच और मेडिकल प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए।
टमाटर भारतीय रसोई का एक ऐसा अनिवार्य हिस्सा है, जिसके बिना हमारी रोजमर्रा की कुकिंग अधूरी मानी जाती है। ज्यादातर घरों में इसका इस्तेमाल सब्जियों की ग्रेवी का बेस बनाने, दाल में तड़का लगाने, गरमा-गरम सूप तैयार करने या फिर सलाद की प्लेट सजाने में किया जाता है। टमाटर का हल्का खट्टा-मीठा स्वाद न केवल खाने के जायके को कई गुना बढ़ा देता है, बल्कि यह हमारे शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व (Nutrients) भी प्रदान करता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से टमाटर में विटामिन सी, विटामिन ए, पोटैशियम, प्रचुर मात्रा में फाइबर और 'लाइकोपीन' (Lycopene) नामक एक बेहद शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। ये सभी तत्व मिलकर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को मजबूत करते हैं, त्वचा की चमक व सेहत बनाए रखते हैं और बॉडी सेल्स को डैमेज होने से बचाते हैं। यही वजह है कि इसे एक संतुलित और पौष्टिक डाइट का बेहद अहम हिस्सा माना जाता है।हालांकि, कई लोग टमाटर के इस्तेमाल को सिर्फ पारंपरिक ग्रेवी या सलाद तक ही सीमित रखते हैं। जबकि हकीकत यह है कि आप टमाटर को मुख्य सामग्री (Main Ingredient) बनाकर कई तरह की स्वादिष्ट, क्विक और हेल्दी रेसिपीज़ तैयार कर सकते हैं, जिन्हें सुबह के नाश्ते, शाम के स्नैक्स या दोपहर व रात के मुख्य भोजन में आसानी से शामिल किया जा सकता है। सही कुकिंग मेथड्स के जरिए टमाटर का उपयोग करने से इसके पोषक तत्व नष्ट नहीं होते। आइए जानते हैं कि टमाटर से कौन-सी 4 लाजवाब रेसिपीज़ बनाई जा सकती हैं और इसे खरीदते व घर में स्टोर करते समय किन जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।टमाटर से बनाएं ये 4 स्वादिष्ट और न्यूट्रिशियस रेसिपीजअगर आप वही पुराना खाना खाकर बोर हो चुके हैं, तो टमाटर के इस अनूठे और हेल्दी मेकओवर को अपने मेन्यू में जरूर शामिल करें:स्वादिष्ट स्टफ्ड टमाटर (Stuffed Tomato): यह देखने में जितना आकर्षक लगता है, खाने में उतना ही पौष्टिक है। इसे बनाने के लिए थोड़े बड़े और सख्त टमाटरों का ऊपरी हिस्सा काटकर अंदर का सारा गूदा (पल्प) बाहर निकाल लें। अब एक मिक्सिंग बाउल में कद्दूकस किया हुआ पनीर, उबले हुए कॉर्न (मक्का), बारीक कटी शिमला मिर्च और हल्के भारतीय मसाले मिलाकर एक स्टफिंग तैयार करें। इस मिश्रण को खाली किए गए टमाटरों के अंदर अच्छी तरह भर दें। इसके बाद इसे ओवन में 10 से 15 मिनट तक बेक करें या कड़ाही में हल्का सा ढककर पकाएं। यह डिश प्रोटीन, विटामिन सी और फाइबर से भरपूर होती है, जिसे आप एक बेहतरीन शाम के स्नैक्स के रूप में परोस सकते हैं।चटपटा टमाटर पुलाव (Tomato Pulao): लंच बॉक्स या रात के खाने के लिए यह एक परफेक्ट और झटपट बनने वाली वन-पॉट मील है। इसे बनाने के लिए एक पैन में थोड़ा सा तेल या घी गर्म करके जीरा, बारीक कटा प्याज और गरम मसाले भूनें। इसके बाद इसमें ढेर सारे कटे हुए पके टमाटर डालकर तब तक पकाएं जब तक वे पूरी तरह गल न जाएं। अब इसमें पहले से भीगे हुए बासमती चावल और आवश्यकतानुसार पानी मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं। चावल पक जाने पर ऊपर से ताजा हरा धनिया डालकर गरमा-गरम रायते के साथ परोसें। टमाटर का प्राकृतिक खट्टापन इस पुलाव को एक यूनिक टेस्ट देता है और शरीर को लाइकोपीन की भरपूर खुराक मिलती है।साउथ इंडियन स्टाइल टमाटर की चटनी (Tomato Chutney): इडली, डोसा, उत्तपम या सादे पराठे के स्वाद को दोगुना करने के लिए यह चटनी बेहतरीन है। इसे बनाने के लिए कटे हुए टमाटर, लहसुन की कलियां, हरी मिर्च या सूखी लाल मिर्च और स्वादानुसार नमक को एक पैन में थोड़ा सा पका लें ताकि उनका कच्चापन दूर हो जाए। ठंडा होने के बाद इसे मिक्सर में पीस लें। अंत में इस चटनी पर राई (सरसों के दाने), उड़द दाल और फ्रेश करी पत्ते का कड़कड़ाता हुआ तड़का लगाएं। एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर यह चटनी पाचन के लिए भी बेहद अच्छी मानी जाती है।प्रोटीन से भरपूर टमाटर का चीला (Tomato Cheela): यह सुबह के नाश्ते के लिए एक बेहद क्विक और वेट-लॉस फ्रेंडली रेसिपी है। इसे तैयार करने के लिए बेसन में बारीक कद्दूकस किए हुए टमाटर, प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया, अजवाइन और नमक मिलाकर एक मध्यम गाढ़ा घोल (बैटर) तैयार कर लें। एक नॉन-स्टिक तवे पर थोड़ा सा घी या तेल लगाकर इस घोल को फैलाएं और दोनों तरफ से सुनहरा व क्रिस्पी होने तक अच्छी तरह सेक लें। बेसन से शरीर को हाई-क्वालिटी प्रोटीन मिलता है और टमाटर से विटामिन सी, जो नाश्ते को पूरी तरह संतुलित बनाता है।टमाटर खरीदते और स्टोर करते समय भूलकर भी न करें ये गलतियांटमाटर की ताजगी और उसमें मौजूद विटामिंस का पूरा लाभ तभी मिलता है जब आप सही क्वालिटी का चुनाव करें और उसे सही तरीके से किचन में रखें:सख्त और बेदाग टमाटर चुनें: मार्केट से टमाटर खरीदते समय हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि टमाटर छूने में ताजे, थोड़े सख्त (Firm) और बिना किसी काले दाग-धब्बे या छेद वाले हों। बहुत ज्यादा पिलपिले, अत्यधिक नरम या कटे-फटे टमाटर लेने से पूरी तरह बचें, क्योंकि ऐसे टमाटरों में बैक्टीरिया बहुत जल्दी पनपते हैं और वे एक ही दिन में सड़कर बाकी सब्जियों को भी खराब कर सकते हैं।कमरे के तापमान (Room Temperature) का नियम: अगर आप बाजार से थोड़े कच्चे या हरे-लाल टमाटर लेकर आए हैं, तो उन्हें तुरंत फ्रिज में ठूंसने की गलती न करें। कच्चे टमाटरों को हमेशा 2 से 3 दिनों के लिए कमरे के सामान्य तापमान पर खुली टोकरी में रखें। जब वे प्राकृतिक रूप से पूरी तरह लाल और पक जाएं, तभी उन्हें फ्रिज में शिफ्ट करें। अच्छी तरह पके टमाटरों को फ्रिज के वेजिटेबल बॉक्स में रखने से वे 5 से 7 दिनों तक पूरी तरह ताजे बने रहते हैं।प्लास्टिक की थैलियों को कहें ना: टमाटरों को कभी भी प्लास्टिक की कसकर बंद थैलियों या एयर-टाइट कंटेनर में स्टोर नहीं करना चाहिए। बंद थैली के भीतर नमी (Moisture) जमा हो जाती है, जिससे टमाटर बहुत जल्दी गलने लगते हैं। इसके बजाय उन्हें बांस या स्टील की खुली जालीदार टोकरी में रखें या फिर किसी पेपर बैग (कागज के लिफाफे) का इस्तेमाल करें ताकि हवा का वेंटिलेशन बना रहे।इस्तेमाल से ठीक पहले ही धोएं: एक और आम गलती जो अक्सर लोग करते हैं, वह है बाजार से सब्जियां लाते ही उन्हें धोकर सीधे स्टोर कर देना। टमाटर को कभी भी बार-बार धोकर या गीला करके स्टोर न करें। नमी के कारण इसकी ऊपरी त्वचा खराब होने लगती है। टमाटर को हमेशा उसी समय पानी से अच्छी तरह धोएं जब आप उसका उपयोग कुकिंग या सलाद बनाने के लिए करने जा रहे हों। इस आसान और व्यावहारिक आदत से आपके टमाटर लंबे समय तक रसीले और फ्रेश बने रहेंगे।
आजकल की भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण जिंदगी में कई लोग छोटी-छोटी बातें भूल जाने की शिकायत करते हैं। कभी किसी परिचित का नाम अचानक दिमाग से उतर जाता है, तो कभी घर या गाड़ी की चाबी कहां रखी है, यह याद नहीं रहता। अधिकांश लोग इसे रोजमर्रा की थकान या सामान्य बात समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, अगर भूलने की यह समस्या बार-बार होने लगे, समय के साथ बढ़ने लगे या आपके रोजमर्रा के जरूरी कामों को प्रभावित करने लगे, तो इस पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी होता है। समय रहते इसकी सही वजह जानने से न केवल सही इलाज में मदद मिलती है, बल्कि भविष्य के बड़े मानसिक खतरों से भी बचा जा सकता है।बार-बार बातें भूलने के पीछे कई सामान्य और अस्थायी कारण हो सकते हैं। जैसे—रात में पर्याप्त नींद न लेना, अत्यधिक मानसिक तनाव (स्ट्रेस), शारीरिक व मानसिक थकान, बढ़ती उम्र का प्राकृतिक असर, शरीर में कुछ जरूरी पोषक तत्वों की कमी या कुछ विशेष दवाओं का साइड इफेक्ट भी आपकी याददाश्त (मेमोरी) को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, कुछ गंभीर मामलों में यह किसी बड़ी न्यूरोलॉजिकल समस्या का शुरुआती अलार्म भी हो सकता है। ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं कि बार-बार बातें भूलना किस गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है और किन लक्षणों के दिखने पर आपको तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।बार-बार बातें भूलना किस गंभीर बीमारी का संकेत है?विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार, हमारे दिमाग का स्वास्थ्य (Brain Health) सीधे तौर पर हमारे सोचने, याद रखने, नई चीजें सीखने और रोजमर्रा के काम को बिना किसी रुकावट के करने की क्षमता से जुड़ा होता है। डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार बातें भूलना हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहे, तो यह डिमेंशिया (Dementia) का शुरुआती और मुख्य लक्षण हो सकता है।चिकित्सकों के मुताबिक, डिमेंशिया अपने आप में कोई एक अकेली बीमारी नहीं है, बल्कि यह दिमाग से जुड़ी एक ऐसी चिकित्सीय स्थिति (कंडीशन) है जिसमें इंसान की याददाश्त, सोचने-समझने, सही निर्णय लेने और रोजमर्रा के सामान्य काम करने की क्षमता धीरे-धीरे और लगातार कमजोर होने लगती है। अल्जाइमर भी इसी का एक प्रमुख रूप है।इसके अलावा, बढ़ती उम्र के साथ दिमाग की कोशिकाओं का कमजोर होना, अत्यधिक डिप्रेशन (अवसाद), नींद की पुरानी बीमारी या विटामिन बी12 (Vitamin B12) की भारी कमी जैसी वजहों से भी याददाश्त का ग्राफ तेजी से गिर सकता है। अगर भूलने की यह समस्या समय के साथ सुधरने के बजाय गंभीर होती जा रही है, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर न्यूरोलॉजिस्ट या डॉक्टर से जांच कराने से इसके सटीक कारण का पता लगाया जा सकता है और सही समय पर इलाज शुरू करके दिमाग को और ज्यादा डैमेज होने से बचाया जा सकता है।किन लक्षणों के दिखने पर तुरंत हो जाएं अलर्ट?भूलने की बीमारी जब सामान्य स्तर से ऊपर उठकर गंभीर रूप लेने लगती है, तो शरीर और व्यवहार में कई तरह के स्पष्ट बदलाव दिखाई देने लगते हैं। यदि आपको या आपके परिवार में किसी सदस्य को निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें, तो बिना समय गंवाए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:कामकाज में परेशानी: रोजमर्रा के बेहद सामान्य और नियमित काम (जैसे चाय बनाना, बैंक का काम या फोन मिलाना) करने में भी अचानक उलझन या परेशानी महसूस होना।सवालों को दोहराना: किसी बात या सवाल का जवाब मिल जाने के बाद भी, उसी बात को बार-बार पूछने की आदत हो जाना।पहचानने में दिक्कत: अपने ही घर के जाने-पहचाने लोगों, पुराने दोस्तों या रोज देखे जाने वाले रास्तों व जगहों को पहचानने में भ्रम होना या रास्ता भूल जाना।भाषा की समस्या: बातचीत के दौरान बहुत ही सामान्य और सही शब्द याद न आना, जिससे अपनी बात कहने में बहुत कठिनाई होना।व्यवहार में बदलाव: निर्णय लेने की क्षमता का कमजोर होना, पैसों के हिसाब-किताब में गलती करना, स्वभाव में अचानक अकारण गुस्सा, चिड़चिड़ापन या डिप्रेशन जैसे गंभीर मानसिक बदलाव आना।याददाश्त को हमेशा शार्प और बेहतर रखने के उपायअपने दिमाग को उम्र के आखिरी पड़ाव तक एक्टिव, स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने के लिए आप अपनी जीवनशैली में कुछ बेहद आसान और प्रभावी आदतों को शामिल कर सकते हैं:पूरी नींद और संतुलित आहार: हर दिन 7 से 8 घंटे की गहरी और सुकून भरी नींद जरूर लें, क्योंकि नींद के दौरान ही हमारा दिमाग पुरानी यादों को स्टोर करता है। अपनी डाइट में हरी सब्जियां, फल, नट्स और विटामिन बी12 से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें।नियमित एक्सरसाइज और मेंटल एक्टिविटी: रोज कम से कम 30 मिनट का शारीरिक व्यायाम या वॉक करें, जिससे दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इसके साथ ही ब्रेन को एक्टिव रखने के लिए सुडोकू, पहेलियां हल करना, किताबें पढ़ना या कोई नई भाषा या कला सीखने जैसी मेंटल एक्टिविटीज अपनाएं।तनाव और नशीली चीजों से दूरी: ध्यान (मेडिटेशन) और योग के जरिए मानसिक तनाव को कम करने की कोशिश करें। धूम्रपान (स्मोकिंग) और शराब के अत्यधिक सेवन से पूरी तरह दूरी बनाए रखें, क्योंकि ये सीधे तौर पर दिमाग की कोशिकाओं को नष्ट करते हैं।यदि भूलने की समस्या इन सब उपायों के बाद भी लगातार बढ़ रही हो और सामाजिक जीवन प्रभावित हो रहा हो, तो जल्द से जल्द किसी योग्य डॉक्टर से मिलकर ब्रेन मैपिंग या जरूरी न्यूरोलॉजिकल टेस्ट कराएं। समय पर शुरू हुआ सही इलाज याददाश्त की इस गंभीर समस्या को नियंत्रित करने में सबसे ज्यादा मददगार साबित होता है।
भारत एक ऐसा देश है जहां साल के अधिकांश महीनों में पर्याप्त और अच्छी धूप निकलती है। इसके बावजूद, देश की एक बहुत बड़ी आबादी इस समय एक बेहद साइलेंट और गंभीर स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रही है, वह है विटामिन डी की कमी (Vitamin D Deficiency)। इस महत्वपूर्ण न्यूट्रिएंट (पोषक तत्व) की कमी के लक्षण शुरुआत में इतनी आसानी और जल्दी से पकड़ में नहीं आते, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, यह शरीर को भीतर से खोखला करने लगती है। रोजमर्रा की जिंदगी में होने वाली लगातार थकान, पूरे बदन में दर्द या मांसपेशियों के खिंचाव (पेन) को अक्सर लोग काम के दबाव या डेली लाइफ की आम प्रॉब्लम मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान के अनुसार इसका सीधा और बड़ा कनेक्शन विटामिन डी की भारी कमी से है। 'इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म' की एक हालिया रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 70 से 90 फीसदी भारतीयों के शरीर में विटामिन डी की भारी कमी देखी गई है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस कमी के पीछे हमारा बदलता हुआ लाइफस्टाइल सबसे बड़ा जिम्मेदार है। आजकल की आधुनिक जीवनशैली में ज्यादातर लोग अपना अधिक से अधिक समय घर, एसी कमरों या ऑफिस की चारदीवारी के अंदर ही बिताते हैं। बच्चों की ऑनलाइन क्लासेस, युवाओं में बढ़ता 'वर्क फ्रॉम होम' (Work From Home) कल्चर और विभिन्न मोबाइल ऐप्स के जरिए घर बैठे ग्रॉसरी व शॉपिंग करने की आदत के कारण इंसानों का प्राकृतिक धूप में बाहर निकलना बेहद कम हो गया है। चूंकि सूर्य की किरणें (धूप) ही मानव शरीर के लिए विटामिन डी का सबसे बड़ा, प्राकृतिक और मुफ्त सोर्स हैं, इसलिए धूप से दूरी ही इस बीमारी की मुख्य जड़ बन चुकी है।हड्डियों से लेकर इम्यून सिस्टम तक: पूरे शरीर पर पड़ता है बुरा असरकैलाश दीपक हॉस्पिटल के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अनुज अग्रवाल का कहना है कि आम जनमानस में यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है कि विटामिन डी का काम सिर्फ हड्डियों को मजबूत रखना होता है। लेकिन चिकित्सा विज्ञान के नजरिए से सच यह है कि इसका कार्यक्षेत्र सिर्फ हड्डियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करता है।डॉक्टर के अनुसार विटामिन डी हमारे शरीर में मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्य करता है:कैल्शियम का अवशोषण: यह हमारे पाचन तंत्र को भोजन से मिलने वाले कैल्शियम को सही तरीके से अवशोषित (इस्तेमाल) करने में मदद करता है। जब तक शरीर में पर्याप्त विटामिन डी नहीं होगा, आप कितना भी कैल्शियम खा लें, वह हड्डियों और दांतों तक नहीं पहुंचेगा।मांसपेशियों की मजबूती: यह हमारी मांसपेशियों (Muscles) के सुचारू संचालन और उनकी कोशिकाओं को ठीक से काम करने की शक्ति देता है। शरीर में इसकी कमी होने पर बिना किसी भारी काम या वजह के भी पूरे बदन में हल्का दर्द बना रहता है, मांसपेशियों में गंभीर कमजोरी महसूस होती है और व्यक्ति सुबह उठते ही थकान से भर जाता है।रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity): यह हमारे शरीर की बीमारियों और संक्रमणों से लड़ने की प्राकृतिक ताकत, यानी इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने और उसे सामान्य तरीके से एक्टिव रखने में एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।खुद डॉक्टर न बनें: सोशल मीडिया देखकर गोलियां खाने की भूल पड़ेगी भारीआजकल इंटरनेट के दौर में विटामिन डी को लेकर समाज में कई तरह की गंभीर गलतफहमियां भी तेजी से फैल रही हैं। डॉ. अनुज अग्रवाल ने आगाह करते हुए बताया कि सबसे बड़ी और आम गलती लोग यह कर रहे हैं कि वे किसी दोस्त-रिश्तेदार की सुनी-सुनाई बातों में आकर या सोशल मीडिया (यूट्यूब/इंस्टाग्राम) के रील्स देखकर खुद से ही मेडिकल स्टोर से विटामिन डी के सप्लीमेंट्स (गोलियां या पाउच) खरीदकर खाना शुरू कर देते हैं। ऐसा करना स्वास्थ्य के साथ एक बहुत बड़ा खिलवाड़ है।चिकित्सकों के मुताबिक, हर किसी के शरीर की जरूरत अलग होती है। यदि आपको अपने शरीर में लगातार थकान या कमजोरी जैसे लक्षण दिख रहे हैं और विटामिन डी की कमी का शक है, तो सबसे पहले किसी योग्य डॉक्टर के पास जाएं। डॉक्टर की लिखित सलाह पर ब्लड टेस्ट (खून की जांच) करवाएं। जांच की रिपोर्ट में जब विटामिन डी का सटीक स्तर (लेवल) सामने आ जाए, तभी यह वैज्ञानिक रूप से तय होता है कि आपको दवा (सप्लीमेंट) की जरूरत है या नहीं, और अगर है तो उसकी सही खुराक (Dose) क्या होनी चाहिए।ज्यादा विटामिन डी लेने से किडनी हो सकती है फेलविटामिन डी को लेकर एक और खतरनाक भ्रांति यह है कि लोग सोचते हैं कि अगर वे ज्यादा मात्रा में विटामिन डी का सेवन करेंगे, तो उनके शरीर को ज्यादा और जल्दी फायदा पहुंचेगा। चिकित्सा विज्ञान इस सोच को पूरी तरह खारिज करता है। डॉक्टर अग्रवाल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि शरीर की जरूरत से ज्यादा या बिना डॉक्टरी पर्चे के हाई-डोज विटामिन डी लेने से शरीर में 'विटामिन डी टॉक्सिसिटी' (विषाक्तता) हो सकती है।जब शरीर में इस विटामिन की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है, तो यह खून में कैल्शियम के स्तर को असामान्य रूप से बढ़ा देता है (जिसे हाइपरकैल्सीमिया कहते हैं)। इसके कारण मरीज को लगातार जी मिचलाना (मतली), बार-बार उल्टी होना, अत्यधिक शारीरिक कमजोरी महसूस होना और गंभीर मामलों में किडनी स्टोन या किडनी फेलियर (गुर्दे की बीमारी) जैसी जानलेवा स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए विटामिन डी को एक सामान्य सप्लीमेंट न समझकर एक गंभीर एलोपैथिक दवा की तरह ही ट्रीट करें। इसे हमेशा डॉक्टर के कड़े परामर्श, सही निगरानी और बताई गई सटीक अवधि व मात्रा में ही लें, तभी यह आपके शरीर को स्वस्थ और दीर्घायु बनाने में मददगार साबित होगा।
एकनाथ शिंदे के ‘ऑपरेशन टाइगर’की कामयाबी के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें
नई दिल्ली/मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राष्ट्रीय राजधानी में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है और वह महज 48 घंटों के भीतर दूसरी बार नयी दिल्ली के दौरे पर हैं। महाराष्ट्र में जैसे-जैसे राजनीतिक स्थितियां बदल रही हैं शिंदे का मकसद केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपने गुट के लिए सत्ता में बड़ी हिस्सेदारी प्राप्त करना […] The post एकनाथ शिंदे के ‘ऑपरेशन टाइगर’ की कामयाबी के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें appeared first on Sabguru News .
शाम होते ही या बाजार से गुजरते वक्त स्ट्रीट फूड का नाम सुनते ही कई लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। समोसा, कचौरी, चाट और दूसरी चटपटी चीजें अपने बेजोड़ स्वाद के कारण हर उम्र के लोगों की पहली पसंद होती हैं। हालांकि, पारंपरिक रूप से इन व्यंजनों को कड़ाही में बहुत ज्यादा तेल के साथ डीप फ्राई (तला) किया जाता है, जिससे इनमें कैलोरी और अनहेल्दी फैट की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है। ऐसी तली-भुनी चीजों का बार-बार सेवन करने से शरीर का वजन बढ़ने, पाचन संबंधी दिक्कतें होने और दिल की सेहत (हार्ट हेल्थ) पर भी बुरा असर पड़ने का खतरा रहता है। इसलिए आज के दौर में स्वाद के साथ-साथ खाना बनाने के तरीके पर भी विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी हो गया है।अगर इन सभी स्ट्रीट फूड्स को कम तेल में या बिना तेल के आधुनिक तरीकों से तैयार किया जाए, तो यह स्वाद के मामले में बेजोड़ रहने के साथ-साथ एक बेहद हेल्दी और पौष्टिक विकल्प बन सकते हैं। सही सामग्री चुनकर और कुछ आसान कुकिंग टिप्स को अपनाकर तेल की मात्रा को 90% तक कम किया जा सकता है। इससे आप बिना किसी गिल्ट या स्वास्थ्य की चिंता किए अपने पसंदीदा स्नैक्स का पूरा आनंद ले सकते हैं। आइए जानते हैं कि घर पर कौन-कौन से टेस्टी स्ट्रीट फूड कम तेल में आसानी से तैयार किए जा सकते हैं और इन्हें बनाते समय किन बड़ी गलतियों से बचना चाहिए।कम तेल और बिना डीप फ्राई किए बनाएं ये 4 लाजवाब स्ट्रीट फूड्सआधुनिक किचन गैजेट्स जैसे एयर फ्रायर, ओवन और नॉन-स्टिक बर्तनों की मदद से आप अपने पसंदीदा व्यंजनों को एक हेल्दी मेकओवर दे सकते हैं:एयर फ्रायर समोसा (Air Fryer Samosa): समोसा प्रेमियों के लिए यह सबसे बेहतरीन विकल्प है। इसे ज्यादा हेल्दी बनाने के लिए मैदे की जगह गेहूं के आटे का इस्तेमाल करें। समोसे की स्टफिंग में केवल आलू भरने के बजाय मटर, बीन्स और दूसरी कटी हुई सब्जियां मिलाएं। समोसे का आकार देने के बाद ऊपर से कुकिंग ऑयल को हल्का सा ब्रश करें और एयर फ्रायर में सुनहरा व क्रिस्पी होने तक पकाएं। इससे समोसा बाहर से पूरी तरह कुरकुरा बनता है, अंदर का स्वाद भी बरकरार रहता है और आप अत्यधिक तेल के सेवन से बच जाते हैं।बेक्ड कचौरी (Baked Kachori): खस्ता कचौरी का स्वाद अब बिना कड़ाही के भी लिया जा सकता है। इसके लिए गेहूं के आटे का डो (आटा) गूंधें और उसमें दाल या मटर की मसालेदार चटपटी स्टफिंग भरें। कचौरी तैयार करने के बाद ऊपर से हल्का सा तेल लगाकर ओवन में रख दें और इसे अच्छी तरह बेक करें। बेकिंग के कारण कचौरी अंदर तक बहुत अच्छी तरह पकती है, इसके पारंपरिक स्वाद में बिल्कुल भी फर्क नहीं आता और तली हुई कचौरी की तुलना में सेहत को कोई नुकसान नहीं होता।वेजिटेबल टिक्की (Healthy Veg Cutlet/Tikki): आलू टिक्की चाट का मजा कम तेल में लेने के लिए उबले हुए आलू में कद्दूकस की हुई गाजर, उबले मटर, शिमला मिर्च और बाइंडिंग के लिए ओट्स का पाउडर या सूजी मिला लें। इस मिश्रण से गोल टिक्कियां तैयार करें और एक नॉन-स्टिक तवे पर बहुत कम (मात्र कुछ बूंदें) तेल डालकर दोनों तरफ से सुनहरा और क्रिस्पी होने तक धीमी आंच पर सेंक लें। इससे टिक्की बाहर से क्रिस्पी बनती है, सब्जियों के कारण फाइबर और पोषण भी बढ़ता है।लो-फैट पनीर टिक्का (Grilled Paneer Tikka): प्रोटीन से भरपूर यह स्नैक बेहद लाजवाब है। पनीर के चौकोर टुकड़ों को गाढ़े दही, बेसन और भारतीय मसालों के मिश्रण में कुछ देर के लिए मैरीनेट होने के लिए रख दें। इसके बाद पनीर को शिमला मिर्च और प्याज के टुकड़ों के साथ सीख (Skewers) में लगाएं। इसे आप तंदूर में ग्रिल कर सकते हैं या फिर एक नॉन-स्टिक पैन पर बेहद कम तेल या बटर ब्रश करके पकाएं। इससे पनीर टिक्का में एक बेहतरीन स्मोकी फ्लेवर आता है, भरपूर प्रोटीन मिलता है और ज्यादा फैट की जरूरत नहीं पड़ती।घर पर स्ट्रीट फूड बनाते समय भूलकर भी न करें ये गलतियांअक्सर लोग घर पर खाना बनाते समय अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिससे भोजन की पौष्टिकता खत्म हो जाती है। स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें:ज्यादा तेल और री-हीटेड ऑयल से बचें: कढ़ाई में जरूरत से ज्यादा तेल डालने से बचें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक बार इस्तेमाल किए जा चुके या बचे हुए तेल को दोबारा गर्म करके कुकिंग करने से पूरी तरह परहेज करें। बार-बार उबाला गया तेल शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल और टॉक्सिन्स को बढ़ाता है, जो दिल के लिए बेहद नुकसानदायक है।सॉस, मक्खन और नमक की अधिकता: स्वाद बढ़ाने के चक्कर में टिक्की या समोसे में जरूरत से ज्यादा नमक, प्रोसेस्ड मक्खन और बाजार में मिलने वाली रेडीमेड तैयार सॉस डालने से बचें। इन कमर्शियल सॉस में सोडियम, प्रिजर्वेटिव्स और हिडन कैलोरी की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो ब्लड प्रेशर और वजन को बढ़ा सकती है। हमेशा ताजी और घर की बनी हरी चटनी का उपयोग करें।बासी और खुली सामग्री का उपयोग: स्ट्रीट फूड बनाते समय हमेशा ताजी, साफ और गुणवत्तापूर्ण सामग्री का ही उपयोग करें। बाजार से लाई गई सब्जियों को पकाने से पहले गुनगुने पानी से अच्छी तरह धो लें। मसालों का एक संतुलित इस्तेमाल करें, ताकि पेट में एसिडिटी न हो और खाना ज्यादा भारी महसूस न हो।ताजा खाने की आदत डालें: कोई भी स्ट्रीट फूड हो, उसे हमेशा गरमा-गरम और ताजा बनाकर ही खाएं। लंबे समय तक फ्रिज में या बाहर खुले में रखा हुआ भोजन खाने से बैक्टीरिया पनपने का डर रहता है। इन छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर आप स्वाद के साथ-साथ अपनी और अपने परिवार की सेहत को भी हमेशा बेहतर बनाए रख सकते हैं।
भारत में पर्यावरण अनुकूल और आधुनिक तकनीक से लैस इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की डिमांड ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है। इसी बढ़ते बाजार पर अपना दबदबा बनाने के लिए देश की दो सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनियां—मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) और हुंडई इंडिया (Hyundai India)—आने वाले समय में अपनी नई और दमदार इलेक्ट्रिक कारें लॉन्च करने की पूरी तैयारी कर चुकी हैं। हालांकि, दोनों ही दिग्गज कंपनियों ने अभी तक इन अपकमिंग मॉडल्स की लॉन्चिंग डेट की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन ऑटोमोबाइल रिपोर्ट्स और इनसाइडर लीक्स के मुताबिक ये नई हाई-टेक EVs साल 2026 के आसपास या उसके अंत तक भारतीय बाजार में औपचारिक रूप से दस्तक दे सकती हैं।इस आगामी टक्कर में जहां देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी एक बेहद खास और बड़े केबिन वाली इलेक्ट्रिक MPV पर काम कर रही है, वहीं दक्षिण कोरियाई दिग्गज हुंडई एक छोटी कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक SUV लाने की तैयारी में है, जो सीधे तौर पर टाटा पंच ईवी (Tata Punch EV) जैसी बेस्ट-सेलिंग गाड़ियों के बाजार को कड़ी टक्कर देगी।Maruti YMC: मारुति की पहली इलेक्ट्रिक MPV होगी बेहद खासमारुति सुजुकी की इस बहुप्रतीक्षित इलेक्ट्रिक MPV को फिलहाल कंपनी के भीतर 'YMC' कोडनेम दिया गया है। इस प्रीमियम मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे कंपनी की सबसे पहली इलेक्ट्रिक SUV 'eVitara' वाले ही एडवांस आर्किटेक्चर और प्लेटफॉर्म पर तैयार किया जा सकता है। ऑटो एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि इस मॉडल को साल 2026 के बिल्कुल आखिर में ग्लोबल लेवल पर पेश किया जाएगा और साल 2027 की शुरुआत में भारतीय सड़कों पर इसकी कमर्शियल बिक्री शुरू हो सकती है।हाल ही में टेस्टिंग (रोड ट्रायल) के दौरान कैमरे में कैद हुई तस्वीरों से साफ पता चलता है कि इस इलेक्ट्रिक MPV का विजुअल डिजाइन मारुति की पारंपरिक गाड़ियों से काफी अलग और एक बोल्ड बॉक्सी स्टाइल का हो सकता है। फीचर्स की बात करें तो इसमें एक ऊंचा फ्रंट प्रोफाइल, आकर्षक बड़े हेडलैंप, एयरोडायनामिक डिजाइन वाले बड़े अलॉय व्हील और रीयर प्रोफाइल में आधुनिक कनेक्टेड टेललैंप जैसे शानदार विजुअल एलिमेंट्स मिलने की पूरी उम्मीद है।बैटरी, पावर और ड्राइविंग रेंज के मोर्चे पर मारुति की यह नई इलेक्ट्रिक MPV अपनी सिस्टर कार eVitara से ही पावरट्रेन शेयर करेगी। इसके तहत ग्राहकों को 49kWh और 61kWh के दो बड़े बैटरी पैक विकल्प मिलने की प्रबल संभावना है। माना जा रहा है कि इसका बड़ा बैटरी वेरिएंट सिंगल फुल चार्ज में करीब 543 किलोमीटर तक की लंबी और शानदार रेंज प्रदान करने में सक्षम होगा, जो लंबी दूरी के पारिवारिक सफर को बेहद आसान बना देगा।Hyundai HE1i: हुंडई की छोटी EV SUV से बढ़ेगा बाजार का तापमानदूसरी तरफ, हुंडई इंडिया भी भारतीय मध्यम वर्ग और बजट बायर्स को ध्यान में रखकर एक नई छोटी इलेक्ट्रिक SUV तैयार कर रही है, जिसे फिलहाल 'HE1i' कोडनेम दिया गया है। यह हुंडई की भारत में पहली ऐसी मास-मार्केट इलेक्ट्रिक SUV हो सकती है जो कम कीमत में आम लोगों के लिए उपलब्ध होगी। बाजार में लॉन्च होते ही इसका सीधा मुकाबला टाटा पंच ईवी (Tata Punch EV) और सिट्रोएन ई-सी3 जैसी स्थापित कारों से होना तय है।यह नई मिनी इलेक्ट्रिक कार हुंडई के विख्यात E-GMP (K) प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी। भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा देते हुए इसका पूरी तरह से निर्माण भारत में ही किया जाएगा। कंपनी इसे विशेष रूप से भारतीय सड़कों की स्थिति, मौसम और स्थानीय ग्राहकों की बुनियादी जरूरतों व प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर ट्यून और डिजाइन कर रही है।हुंडई की मिनी SUV में मिलेंगे दो बैटरी ऑप्शन्स और एडवांस ADASहुंडई की इस अपकमिंग इलेक्ट्रिक SUV (HE1i) के मैकेनिकल स्पेसिफिकेशन्स की बात करें तो इसमें भी ग्राहकों की पसंद और बजट के अनुसार दो अलग-अलग बैटरी विकल्प मिलने की उम्मीद है:स्टैंडर्ड और लॉन्ग रेंज वर्जन: शहर के भीतर रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए एक स्टैंडर्ड रेंज और हाईवे पर लंबी यात्रा के लिए एक लॉन्ग रेंज वर्जन पेश किया जाएगा।बैटरी पैक डिटेल्स: रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें 42kWh और 49kWh के दो आधुनिक लिथियम-आयन बैटरी पैक दिए जा सकते हैं, जो बेहतर फास्ट चार्जिंग क्षमता के साथ आएंगे।इंटीरियर और टेक फीचर्स: कार के केबिन को पूरी तरह से फ्यूचरिस्टिक लुक दिया जा रहा है। इसमें एक बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, ओवर-द-एयर (OTA) सॉफ्टवेयर अपडेट का सपोर्ट, डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, कनेक्टेड कार टेक और पैसेंजर्स की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए लेवल-2 ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) जैसे बेहद आधुनिक और प्रीमियम फीचर्स देखने को मिल सकते हैं।भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट में मारुति और हुंडई की इन दोनों नई इलेक्ट्रिक कारों के एंट्री लेते ही EV बाजार में प्रतिस्पर्धा एक बिल्कुल नए स्तर पर पहुंच जाएगी। आक्रामक और कम कीमत, शानदार ड्राइविंग रेंज और एडवांस्ड फीचर्स के कॉम्बिनेशन के दम पर दोनों ही दिग्गज कंपनियां देश के ज्यादा से ज्यादा पारंपरिक फ्यूल (पेट्रोल-डीजल) ग्राहकों को ग्रीन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगी।
अब आपकी कार देगी ज्यादा माइलेज! सरकार लाएगी नए नियम, आम आदमी को होगा बड़ा फायदा
भारत में कार कंपनियां अब प्रदूषण और ईंधन बचाने के कड़े नियमों के बीच अपना रास्ता निकाल रही हैं। सरकार का नया प्रस्ताव, जिसे हम सीएएफई-III (CAFE-III) नियमों के नाम से जान रहे हैं, कार निर्माताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। पहले कंपनियों को माइलेज और प्रदूषण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए केवल इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड गाड़ियों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब सरकार ने एक स्मार्ट रास्ता निकाला है। नए प्रस्ताव के तहत, अगर कार कंपनियां अपनी गाड़ियों में फ्यूल बचाने वाली आधुनिक तकनीकें लगाती हैं, तो उन्हें सरकार की तरफ से 'कार्बन क्रेडिट' जैसा फायदा दिया जाएगा।आम कारों में भी दिखेंगे आधुनिक फीचर्सऊर्जा मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए इस ड्राफ्ट में उन तकनीकों को शामिल किया गया है जो असल में गाड़ी का पेट्रोल-डीजल कम खर्च करने में मदद करती हैं। इनमें ऑटोमैटिक स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS), रीजेनरेटिव ब्रेकिंग, 6-स्पीड गियरबॉक्स, बेहतर अल्टरनेटर, एडवांस LED लाइटिंग और सोलर रिफ्लेक्टिव पेंट जैसे फीचर्स शामिल हैं। अभी तक आप देखते होंगे कि ये फीचर्स अक्सर महंगी या प्रीमियम कारों में ही मिलते हैं। लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद, कंपनियां इन्हें अपनी छोटी और मिड-रेंज कारों में भी देने के लिए प्रेरित होंगी, क्योंकि इससे उन्हें प्रदूषण कम करने के सरकारी टारगेट को पूरा करने में आसानी होगी।टेक्नोलॉजी अपनाओ, सरकार से राहत पाओइस नए नियम का गणित बहुत सीधा है। ड्राफ्ट के अनुसार, यदि कोई कंपनी अपनी गाड़ी में ऐसी कोई तकनीक जोड़ती है जिससे ईंधन की बचत होती है, तो उसे कार्बन उत्सर्जन में 1 ग्राम प्रति किलोमीटर तक की राहत दी जाएगी। यह कंपनियों के लिए एक 'विन-विन' स्थिति है। एक तरफ उन्हें अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए केवल भारी निवेश करके इलेक्ट्रिक गाड़ियां नहीं बनानी होंगी, वहीं दूसरी तरफ वे ज्यादा से ज्यादा मॉडलों में ये फ्यूल-सेविंग फीचर्स दे पाएंगी। इससे कंपनियों को हाइब्रिड और ईवी के अलावा भी अपनी लाइनअप को बेहतर बनाने का विकल्प मिल जाएगा।ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?आम ग्राहक के लिए यह खबर किसी खुशखबरी से कम नहीं है। अब तक माइलेज का मतलब सिर्फ इंजन की क्षमता से निकाला जाता था, लेकिन अब कंपनियों को गाड़ियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना ही होगा। जब कार में टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम और ऑटोमैटिक स्टार्ट-स्टॉप जैसे फीचर्स आएंगे, तो जाहिर है कि गाड़ी का माइलेज बेहतर होगा और आपका ईंधन का खर्चा बचेगा। साथ ही, अब सरकार फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को भी बढ़ावा दे रही है, जिसका मतलब है कि आने वाले समय में आपको ज्यादा एडवांस, किफायती और आधुनिक तकनीक वाली गाड़ियां सड़कों पर देखने को मिलेंगी। कुल मिलाकर, सीएएफई-III नियम न केवल पर्यावरण के लिए अच्छे साबित होंगे, बल्कि आपकी जेब का बोझ भी कम करेंगे।
सनातन परंपरा और वास्तु शास्त्र में पेड़-पौधों का विशेष महत्व बताया गया है। इन्हीं में से एक 'मनी प्लांट' (Money Plant) को बेहद शुभ और चमत्कारी पौधा माना गया है। वास्तु शास्त्र में इस पौधे को साक्षात धन और समृद्धि को आकर्षित करने वाला पौधा कहा जाता है। यह पौधा न केवल घर की आंतरिक सुंदरता और हरियाली को बढ़ाता है, बल्कि इसे लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का प्रवाह भी निरंतर बना रहता है। हालांकि, अक्सर लोग इस बात को लेकर गहरे भ्रम में रहते हैं कि क्या मनी प्लांट को घर के मुख्य द्वार (Main Gate) पर लगाना सही है या नहीं? वास्तु शास्त्र में मनी प्लांट को लगाने और उसके रखरखाव को लेकर कुछ बेहद स्पष्ट नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने पर ही इसका पूर्ण लाभ मिलता है। आइए इन महत्वपूर्ण नियमों के बारे में विस्तार से जानते हैं।वास्तु शास्त्र के अनुसार, मनी प्लांट को घर के मुख्य द्वार पर लगाना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। किसी भी घर का मुख्य द्वार ऊर्जा का सबसे बड़ा प्रवेश द्वार होता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि यदि मुख्य द्वार पर सही तरीके से मनी प्लांट रखा जाए, तो यह घर में धन, वैभव और सौभाग्य को खींच लाता है। इसके अलावा, मुख्य द्वार पर लगा मनी प्लांट घर के भीतर बाहर से आने वाली किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को प्रवेश करने से रोकता है, जिससे परिवार के सदस्यों की नौकरी और व्यापार में तरक्की के रास्ते खुलते हैं।किस दिशा में लगाएं मनी प्लांट और कहाँ लगाने से होगा भारी नुकसान?मनी प्लांट का पूरा लाभ उठाने और घर में बरकत बनाए रखने के लिए इस पौधे को बिल्कुल सही दिशा में स्थापित करना बेहद जरूरी है। गलत दिशा में लगाया गया मनी प्लांट विपरीत परिणाम भी दे सकता है।दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) है सर्वश्रेष्ठ: वास्तु के नियमों के अनुसार, मनी प्लांट को हमेशा घर की दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्नेय कोण में लगाना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में इस दिशा के अधिष्ठाता देव स्वयं विघ्नहर्ता भगवान गणेश हैं और इस दिशा के प्रतिनिधि ग्रह धन-वैभव के कारक 'शुक्र' हैं। इस दिशा में मनी प्लांट लगाने से घर में कभी भी पैसों की कमी नहीं होती, सुख-सुविधाओं में निरंतर बढ़ोतरी होती है और परिवार के सदस्यों की दिन दोगुनी-रात चौगुनी उन्नति होती है।उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में भूलकर भी न लगाएं: वास्तु शास्त्र के अनुसार, मनी प्लांट को कभी भी घर की उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में नहीं लगाना चाहिए। इस दिशा में मनी प्लांट लगाना बिल्कुल भी अनुकूल नहीं माना जाता है। ऐसा करने से घर में आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और बनते कामों में रुकावट जैसे कई तरह के अशुभ परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।मनी प्लांट लगाते समय कभी न भूलें ये 4 जरूरी बातेंसिर्फ मनी प्लांट लगा देना ही काफी नहीं है, बल्कि इसकी सुरक्षा और देखरेख करते समय वास्तु की कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है:ऊपर की ओर चढ़नी चाहिए बेल: मनी प्लांट की प्रकृति एक लता (बेल) जैसी होती है। वास्तु के अनुसार, इसकी बेल हमेशा ऊपर की ओर ही चढ़नी चाहिए। अगर आपके घर में मनी प्लांट की बेल नीचे की ओर लटक रही है या जमीन को छू रही है, तो उसे किसी धागे या डंडे के सहारे तुरंत ऊपर की ओर कर दें। जमीन पर लटकती बेलें आर्थिक नुकसान का कारण बनती हैं।सूखी और पीली पत्तियां तुरंत हटाएं: पौधे की नियमित देखभाल करें। यदि मनी प्लांट की कोई पत्ती सूख गई है या पीली पड़ गई है, तो उसे तुरंत कैंची से काटकर पौधे से अलग कर दें। वास्तु में सूखी और सड़ती हुई पत्तियां घर में नकारात्मकता और दरिद्रता का प्रतीक मानी जाती हैं।हर हफ्ते बदलें बोतल का पानी: अगर आपने मनी प्लांट को मिट्टी के बजाय कांच की बोतल या जार में पानी के अंदर रखा हुआ है, तो उस पानी को हर सप्ताह नियमित रूप से बदलते रहें। बोतल में गंदा या ठहरा हुआ पानी रखने से नकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है।बाहरी लोगों की नजर से बचाएं: मनी प्लांट को हमेशा बाहरी व्यक्तियों या मेहमानों की सीधी नजर से बचाकर रखना चाहिए। इसे घर के भीतर या बालकनी में किसी ऐसे कोने में व्यवस्थित करें, जहां बाहर से आने वाले किसी अनजान व्यक्ति की नजर इस पर सीधे न पड़े। माना जाता है कि दूसरों की नजर या टोक लगने से पौधे का विकास रुक जाता है, जिससे घर की आर्थिक उन्नति प्रभावित होती है।
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राशि परिवर्तन और उससे बनने वाले संयोगों का मानव जीवन पर गहरा असर पड़ता है। इसी कड़ी में ग्रहों के राजा सूर्य देव के राशि परिवर्तन से एक बेहद अशुभ और तनावपूर्ण ज्योतिषीय स्थिति पैदा हो गई है। 16 जुलाई 2026 यानी बीते कल सूर्य देव ने मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश कर लिया है। सूर्य के इस गोचर के बाद, कुंभ राशि में पहले से ही विराजमान मायावी ग्रह राहु और सूर्य के बीच एक अत्यंत विनाशकारी 'षडाष्टक योग' (Shadashtak Yog) का निर्माण हो गया है।ज्योतिषीय गणनाओं में षडाष्टक योग को बेहद अशुभ, हिंसक और मानसिक तनाव बढ़ाने वाला माना जाता है। जब भी दो ग्रह गोचर चक्र में एक-दूसरे से छठे (6th) और आठवें (8th) भाव में स्थित होते हैं, तब इस नकारात्मक योग का निर्माण होता है। सूर्य और राहु का यह खतरनाक आपसी संबंध पूरे 30 दिनों तक ब्रह्मांड में सक्रिय रहेगा, जिसका विधिवत समापन 17 अगस्त 2026 को सूर्य के अगले गोचर के साथ होगा। हालांकि इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार 4 विशेष राशियों को अगले 30 दिनों तक फूंक-फूंक कर कदम रखने की आवश्यकता है।वृषभ राशि (Taurus): बॉस से विवाद और सेहत पर संकट, निवेश से बचेंषडाष्टक योग का सबसे नकारात्मक और खतरनाक प्रभाव वृषभ राशि के जातकों पर देखने को मिल सकता है। अगले 30 दिन आपके लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होने वाले हैं।करियर में चुनौती: कार्यस्थल (ऑफिस) पर आपके सीनियर्स या बॉस के साथ किसी बात को लेकर तीखी बहस या झगड़ा होने की प्रबल आशंका है। इस दौरान अपनी वाणी और गुस्से पर सख्त संयम रखें।आर्थिक नुकसान: पैसों के लेन-देन में भारी लापरवाही हो सकती है। इस 30 दिनों की अवधि में किसी भी नए प्रोजेक्ट या शेयर बाजार में निवेश करने की गलती बिल्कुल न करें।स्वास्थ्य: मानसिक तनाव के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य में भी गिरावट आ सकती है, इसलिए बेवजह के कोर्ट-कचहरी या पारिवारिक विवादों से खुद को दूर रखें।मिथुन राशि (Gemini): करियर में जल्दबाजी पड़ेगी भारी, धैर्य से लें कामसूर्य का आपकी राशि से निकलना और राहु के साथ यह अशुभ योग बनाना मिथुन राशि के नौकरीपेशा और व्यापार से जुड़े लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।गलत फैसले: इस अवधि में आपके भीतर एक अजीब सी जल्दबाजी देखी जाएगी, जिसके कारण आप करियर से जुड़ा कोई गलत निर्णय ले सकते हैं। बिना सोचे-समझे लिया गया फैसला आपको बड़े आर्थिक संकट में डाल सकता है।व्यापार में रुकावट: यदि आप कोई नया बिजनेस (काम) शुरू करने की सोच रहे हैं, तो 17 अगस्त तक के लिए अपनी योजनाओं को स्थगित कर दें।सलाह: इस पूरे महीने धैर्य बनाए रखें और कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ किसी भी तरह की राजनीति या लड़ाई-झगड़े का हिस्सा बनने से बचें।तुला राशि (Libra): पारिवारिक कलह और वैवाहिक जीवन में आ सकती है खटासतुला राशि के जातकों के लिए यह षडाष्टक योग मानसिक शांति को पूरी तरह से भंग करने वाला साबित हो सकता है।पारिवारिक तनाव: घर-परिवार में छोटी-छोटी बातों को लेकर राई का पहाड़ बन सकता है, जिससे घरेलू माहौल काफी तनावपूर्ण और उदासी भरा रहेगा।रिश्तों में दूरी: आपके और आपके जीवनसाथी (पारpath) के बीच आपसी समझ की कमी के कारण संबंधों में खटास आ सकती है। शक और गलतफहमियों को अपने रिश्ते पर हावी न होने दें।काम का बोझ: ऑफिस में अचानक काम का दबाव (वर्क प्रेशर) अत्यधिक बढ़ जाएगा, जिससे समय पर काम पूरा न होने के कारण आपकी रातों की नींद उड़ सकती है। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें।कुंभ राशि (Aquarius): राहु का आपकी ही राशि में प्रभाव, उदासी और विवाद के संकेतचूंकि राहु आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं और सूर्य से उनका यह अशुभ योग बन रहा है, इसलिए कुंभ राशि वालों को चौतरफा सावधानी बरतनी होगी।मानसिक अवसाद: अगले 30 दिनों तक बिना किसी ठोस वजह के भी आपका मन भीतर से उदास, विचलित और नकारात्मक विचारों से घिरा रह सकता है।विवाद की आशंका: सामाजिक जीवन या पड़ोसियों के साथ अचानक किसी बात को लेकर बड़ा विवाद खड़ा होने के संकेत हैं। अपने गुस्से पर काबू रखें वरना मान-हानि हो सकती है।करियर और सेहत: आपके पेशेवर करियर में अचानक उतार-चढ़ाव आ सकते हैं, साथ ही पुरानी बीमारियां दोबारा उभर सकती हैं, जिससे डॉक्टर के चक्कर काटने पड़ सकते हैं।
सनातन धर्म में सावन (श्रावण) के महीने का एक विशेष और अत्यंत पवित्र स्थान है। यह पूरा माह देवों के देव महादेव की आराधना के लिए समर्पित होता है, जहां भक्त व्रत, विशेष पूजा और जलाभिषेक के जरिए शिव जी को प्रसन्न करते हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल शिव भक्ति का यह पावन महीना 30 जुलाई 2026 से प्रारंभ हो रहा है, जिसका समापन 28 अगस्त 2026 को सावन पूर्णिमा के साथ होगा। सावन का महीना शुरू होते ही देश के राष्ट्रीय राजमार्गों और पवित्र तीर्थों पर केसरिया रंग की बाढ़ आ जाती है, जिसे हम 'कांवड़ यात्रा' के रूप में जानते हैं।सनातन परंपरा में कांवड़ यात्रा को केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि एक बेहद कठिन तपस्या माना गया है। यह सिर्फ पैदल जाकर गंगाजल लाने भर की परंपरा नहीं है, बल्कि यह यात्रा भगवान शिव के प्रति भक्तों की अटूट आस्था, शारीरिक व मानसिक संयम, कठिन तप और पूर्ण समर्पण का जीवंत प्रतीक है। हर साल सावन में लाखों शिवभक्त (कांवड़िये) पवित्र नदियों, विशेषकर मां गंगा से पवित्र जल भरकर, उसे कांवड़ में कंधे पर उठाकर मीलों पैदल यात्रा करते हैं और अपने स्थानीय या प्रमुख शिवालयों में जाकर महादेव का जलाभिषेक करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सदियों पुरानी परंपरा की शुरुआत किसने की थी और इतिहास का पहला कांवड़िया कौन था?कौन था दुनिया का पहला कांवड़िया? जानें सबसे प्रचलित पौराणिक कथाकांवड़ यात्रा की शुरुआत और इतिहास के पहले कांवड़िए को लेकर हिंदू धर्म के विभिन्न ग्रंथों, पुराणों और लोक कथाओं में अलग-अलग प्रसंग मिलते हैं। चूंकि इसके पीछे कई प्राचीन कहानियां हैं, इसलिए किसी एक कथा को सर्वमान्य ऐतिहासिक तथ्य न मानकर, इन सभी को बेहद आदरणीय और गहरी धार्मिक मान्यताओं के रूप में देखा जाता है। इन सभी प्रसंगों में जो कथा सबसे ज्यादा प्रचलित और लोकप्रिय है, उसके अनुसार भगवान परशुराम को संसार का सबसे पहला कांवड़िया माना जाता है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम ने इस पावन परंपरा की नींव रखी थी। बताया जाता है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़) में स्थित पवित्र गंगा तट से एक कांवड़ में पवित्र गंगाजल भरा था। इसके बाद वे वहां से मीलों पैदल यात्रा करते हुए उत्तर प्रदेश के ही बागपत जिले में स्थित ऐतिहासिक 'पुरा महादेव मंदिर' पहुंचे थे। वहां उन्होंने बेहद नियम और निष्ठा के साथ उस पवित्र गंगाजल से भगवान शिव का दिव्य अभिषेक किया था। धार्मिक विद्वानों का मानना है कि परशुराम जी के इसी कदम के बाद से ही आम जनमानस में कांवड़ में जल लाकर शिव को अर्पित करने की इस पावन परंपरा की औपचारिक शुरुआत हुई। यही वजह है कि आज भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पुरा महादेव मंदिर का कांवड़ यात्रा से एक अत्यंत प्राचीन और विशेष आध्यात्मिक संबंध माना जाता है।साल 2026 में कब से कब तक चलेगी कांवड़ यात्रा?धार्मिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में कांवड़ यात्रा का पूरा कालखंड 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक यानी पूरे सावन महीने तक चलेगा। हालांकि, जो श्रद्धालु और कांवड़ संघ लंबी दूरी की यात्राएं तय करते हैं या मुख्य अनुष्ठान में भाग लेते हैं, उनके लिए मुख्य कांवड़ यात्रा 11 अगस्त 2026 तक ही रहेगी।इस समय-सीमा के पीछे एक बेहद महत्वपूर्ण धार्मिक कारण है:सावन शिवरात्रि का महत्व: 11 अगस्त 2026 को सावन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जिसे सावन शिवरात्रि के महापर्व के रूप में मनाया जाता है।यात्रा का समापन: सनातन परंपरा के अनुसार, देश के कोने-कोने से आने वाले अधिकांश कांवड़िये इसी परम पवित्र दिन (शिवरात्रि) की रात या भोर के शुभ मुहूर्त में भगवान भोलेनाथ का महा-जलाभिषेक करते हैं।नियम: शिवरात्रि पर जलाभिषेक करने के साथ ही उनके संकल्प पूरे होते हैं और वे अपनी कठिन कांवड़ यात्रा का आधिकारिक समापन करते हैं। इसके बाद सावन पूर्णिमा तक स्थानीय स्तर पर जल चढ़ाने का सिलसिला सामान्य रूप से चलता रहता है।
स्मार्टफोन जगत से वनप्लस (OnePlus) यूजर्स के लिए एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। चीनी स्मार्टफोन ब्रैंड वनप्लस अपने सबसे लोकप्रिय और सिग्नेचर कस्टम स्किन ऑक्सीजनओएस (OxygenOS) को हमेशा के लिए बंद करने जा रहा है। कंपनी बहुत ही जल्द इसे पैरेंट कंपनी ओप्पो (Oppo) के कस्टम स्किन कलरओएस (ColorOS) के साथ पूरी तरह से बदलने वाली है। यह कदम वनप्लस की एक बहुत बड़ी और नई सॉफ्टवेयर स्ट्रेटेजी का हिस्सा है, जिसका मुख्य मकसद सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट को एकीकृत (यूनिफाइड) करना, सिस्टम अपडेट्स की रफ्तार को तेज करना और सॉफ्टवेयर की ओवरऑल क्वालिटी को पहले से बेहतर बनाना है। इस बड़े बदलाव के बीच हाल ही में टेक बाजारों में वनप्लस के भारत छोड़ने और बोरिया-बिस्तर समेटने की खबरें भी तेजी से वायरल हो रही थीं, लेकिन कंपनी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर उन सभी मीडिया रिपोर्ट्स और दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि कंपनी भारत में अपने सभी ऑपरेशन्स बंद करने की प्लानिंग कर रही है।पूरी तरह बदल जाएगा वनप्लस फोन का सिस्टम, स्टॉक एंड्रॉयड का दौर खत्मयह कदम वनप्लस के स्मार्टफोन मार्केट में कदम रखने के बाद से लेकर अब तक के पूरे इतिहास में सबसे बड़े सॉफ्टवेयर बदलावों में से एक माना जा रहा है। वनप्लस के ऑक्सीजनओएस (OxygenOS) को दुनिया भर के टेक लवर्स इसके क्लीन, ब्लोटवेयर-फ्री और लगभग स्टॉक एंड्रॉयड (Stock Android) जैसे स्मूद एक्सपीरियंस के लिए बेहद खास और प्रीमियम मानते थे। भले ही कंपनी ने भारत में अपने कमर्शियल ऑपरेशन्स को बंद न करने का एक बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है, लेकिन सॉफ्टवेयर लेवल पर होने वाले इस भारी बदलाव से आपके वनप्लस फोन का पूरा यूजर इंटरफेस और इंटरनल सिस्टम जल्द ही पूरी तरह बदलने वाला है, क्योंकि कंपनी अब अपने सभी अपकमिंग और मौजूदा डिवाइसेज को पूरी तरह से कलरओएस (ColorOS) पर शिफ्ट करने की तैयारी में जुट चुकी है।प्रतिष्ठित बिजनेस वेबसाइट 'मनीकंट्रोल' की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, वनप्लस ने अपने आधिकारिक बयान में इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है, हमारी सॉफ्टवेयर स्ट्रैटेजी में किए जा रहे ऑपरेशनल एडजस्टमेंट (परिचालन तालमेल) के हिस्से के तौर पर, सभी वनप्लस डिवाइसेज भविष्य में OxygenOS से हटकर ColorOS में अपडेट होंगे। यह सॉफ्टवेयर माइग्रेशन हमें सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की जटिलताओं को आसान बनाने, हमारी वैश्विक कम्युनिटी में नए अपडेट साइकिल की गति को तेज करने, सॉफ्टवेयर की क्वालिटी और स्टेबिलिटी को बेहतर बनाने में मदद करेगा। साथ ही, यह हमारी शेयर्ड इंजीनियरिंग और आरएंडडी (R&D) क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल कर यूजर्स को एक स्मार्ट, स्मूद और एडवांस्ड सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस प्रदान करेगा। वनप्लस का साफ कहना है कि इस एकीकरण से वे ओप्पो इकोसिस्टम की विशाल इंजीनियरिंग और रिसर्च क्षमताओं का सीधा फायदा उठा पाएंगे, जिससे उपभोक्ताओं को बेहद तेज सॉफ्टवेयर अपडेट का नया अनुभव मिलेगा। इसके साथ ही कंपनी ने अपने पुराने वफादार यूजर्स को भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि इस बड़े बदलाव के बाद भी वनप्लस के कोर एक्सपीरियंस (मूल अनुभव) और ब्रैंड वैल्यू में कोई कमी नहीं आएगी।Oppo की बड़ी कॉरपोरेट रीस्ट्रक्चरिंग का हिस्सा है यह सॉफ्टवेयर माइग्रेशनस्मार्टफोन सॉफ्टवेयर में होने वाला यह ऐतिहासिक बदलाव असल में ओप्पो (Oppo) ग्रुप के भीतर चल रही एक बहुत बड़ी कॉरपोरेट रीस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) की प्रक्रिया का हिस्सा है। जैसा कि मनीकंट्रोल ने अपनी इनसाइडर रिपोर्ट में पहले भी खुलासा किया था, ओप्पो अब भारत सहित वैश्विक बाजारों में वनप्लस (OnePlus) और रियलमी (Realme) जैसे अपने सहयोगी ब्रैंड्स को एक यूनिफाइड ऑपरेटिंग स्ट्रक्चर (एकीकृत परिचालन ढांचे) के तहत एक ही छत के नीचे लाने की पूरी तैयारी कर चुका है।इस नई और आक्रामक बिजनेस स्ट्रैटेजी के तहत मुख्य बदलाव इस प्रकार होने जा रहे हैं:वनप्लस का नया रूप: वनप्लस को पूरे बीबीके (BBK) ग्रुप के एक प्राइमरी 'ऑनलाइन-फोकस्ड' स्मार्टफोन ब्रैंड के तौर पर नए सिरे से री-पोजीशन (स्थापित) किया जाएगा, जिसके तहत कंपनी बहुत ही सेलेक्टिव और प्रीमियम प्रोडक्ट लॉन्च स्ट्रैटेजी पर काम करेगी।रियलमी का अस्तित्व बदलेगा: वहीं दूसरी तरफ, रियलमी (Realme) ब्रैंड को लेकर भी एक बहुत बड़ा बदलाव होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि आगामी दिवाली फेस्टिव सीजन के खत्म होने के बाद रियलमी एक स्वतंत्र और इंडिपेंडेंट ब्रैंड के तौर पर काम करना बंद कर देगा और वह ओप्पो (Oppo) के अंतर्गत ही एक नई प्रोडक्ट स्मार्टफोन सीरीज में पूरी तरह तब्दील हो जाएगा। इस नई कॉरपोरेट रीस्ट्रक्चरिंग से भारतीय स्मार्टफोन बाजार की पूरी तस्वीर बदलने वाली है।
अनुराग कुमार बनाए गए दिल्ली के नए पुलिस कमिश्नर, संभालेंगे सतीश गोलचा की जगह
इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के पूर्व विशेष निदेशक अनुराग कुमार को दिल्ली पुलिस का नया कमिश्नर नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार ने सतीश गोलचा की रिटायरमेंट से पहले ही उन्हें पद से हटाते हुए अनुराग कुमार को कार्यभार सौंपा है।
सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी: नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का अधिकार नहीं
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यदि किसी अपीलीय ट्रिब्यूनल द्वारा किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल न करने का निर्णय लिया जाता है, तब भी निर्वाचन आयोग स्वयं उसकी नागरिकता पर फैसला नहीं कर सकता।
यूपी, बिहार समेत कई राज्यों में अगले 7 दिनों तक होगी भारी बारिश, जानिए कहां-कहां बरसेंगे बादल
IMD ने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में अगले 7 दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। जानिए कहां-कहां होगी मूसलाधार बारिश।
आईसीसी ने डोपिंग मामले मोहम्मद नवाज पर लगाया तीन महीने का प्रतिबंध
दुबई। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने पाकिस्तान के ऑलराउंडर मोहम्मद नवाज पर आईसीसी के एंटी-डोपिंग कोड का उल्लंघन करने के लिए तीन महीने का प्रतिबंध लगाया गया है। आईसीसी ने की ओर यह यह कार्रवाई इस साल की शुरुआत में पुरुषों के टी-20 विश्व कप के दौरान एक प्रतिबंधित पदार्थ लेने की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव […] The post आईसीसी ने डोपिंग मामले मोहम्मद नवाज पर लगाया तीन महीने का प्रतिबंध appeared first on Sabguru News .
अलवर के उमरैन गांव में दो पक्षों मारपीट में घायल सौ वर्षीय वृद्धा की मौत
अलवर। राजस्थान में अलवर जिले के उमरैन गांव में दो पक्षों के बीच हुए विवाद में घायल 100 वर्षीय बुजुर्ग महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। महिला की मौत के बाद शुक्रवार को जिला अस्पताल परिसर में माहौल तनावपूर्ण हो गया। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया और नामजद […] The post अलवर के उमरैन गांव में दो पक्षों मारपीट में घायल सौ वर्षीय वृद्धा की मौत appeared first on Sabguru News .
रोहतक नगर निगम को बम से उड़ाने की खौफनाक धमकी: संयुक्त आयुक्त की ईमेल आईडी पर आया संदेश
हरियाणा के रोहतक जिले से इस वक्त की बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हरियाणा दौरे और चंडीगढ़ सचिवालय को मिली धमकी की सुगबुगाहट के बीच अब रोहतक नगर निगम (Rohtak Municipal Corporation) को भी बम से उड़ाने की बेहद गंभीर और खौफनाक धमकी दी गई है। यह धमकी भरा संदेश रोहतक नगर निगम के संयुक्त आयुक्त (Joint Commissioner) की आधिकारिक ईमेल आईडी पर भेजा गया है। ईमेल के जरिए मिली इस सनसनीखेज धमकी के बाद से ही पूरे प्रशासनिक अमले, पुलिस महकमे और स्थानीय जनता में हड़कंप मच गया है। सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां तुरंत एक्शन में आ गई हैं और नगर निगम परिसर की सुरक्षा को अभेद्य बना दिया गया है।संयुक्त आयुक्त की ईमेल आईडी पर आया संदेश और मचा हड़कंपसूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रोहतक नगर निगम के संयुक्त आयुक्त को उनके आधिकारिक ईमेल पर एक अज्ञात पते से संदेश प्राप्त हुआ। इस ईमेल में बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए दावा किया गया कि नगर निगम की इमारत में बम प्लांट किया गया है और इसे जल्द ही उड़ा दिया जाएगा। जैसे ही इस ईमेल की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को मिली, तुरंत पुलिस विभाग को सूचित किया गया। रोहतक पुलिस के आला अधिकारी, भारी पुलिस बल, बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad) और डॉग स्क्वायड की टीम आनन-फानन में मौके पर पहुंच गई।नगर निगम परिसर को खाली कराकर शुरू की गई सघन तलाशीसुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए नगर निगम की पूरी बहुमंजिला इमारत को खाली करवा लिया। वहां मौजूद सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और अपने काम से आए आम नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद बम निरोधक दस्ते और खोजी कुत्तों की मदद से कार्यालय के चप्पे-चप्पे, फाइलों के रैक, पार्किंग एरिया और बेसमेंट की बेहद बारीकी से तलाशी ली गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में अभी तक कोई भी संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोई भी कसर नहीं छोड़ी जा रही है।साइबर सेल सक्रिय, ईमेल भेजने वाले आईपी एड्रेस की जांच तेजइस सनसनीखेज धमकी के पीछे किसका हाथ है, इसका पता लगाने के लिए रोहतक पुलिस की साइबर सेल और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को काम पर लगा दिया गया है। जिस ईमेल आईडी से यह धमकी भरा संदेश भेजा गया है, उसके आईपी एड्रेस (IP Address) और ओरिजिन को ट्रेस किया जा रहा है। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह किसी शरारती तत्व की महज एक 'हॉक्स कॉल' (झूठी अफवाह) थी या फिर इसके पीछे किसी बड़ी साजिश या असामाजिक संगठन का हाथ है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।रोहतक और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा कड़ीचंडीगढ़ सचिवालय को मिली धमकी के बाद रोहतक नगर निगम को निशाना बनाने की इस धमकी ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके मद्देनजर पूरे रोहतक शहर, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य भीड़भाड़ वाले संवेदनशील सार्वजनिक स्थलों पर पुलिस की गश्त और बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने भी आम जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है और किसी भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की सूचना तुरंत डायल 112 या स्थानीय पुलिस स्टेशन को देने को कहा है।
सनातन धर्म में सावन (श्रावण) के महीने को बेहद पवित्र और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह पूरा महीना देवों के देव महादेव को समर्पित होता है, जिसमें शिव पूजा, व्रत और शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में भगवान विष्णु के शयनकाल में जाने के बाद महादेव ही इस पूरी सृष्टि का संचालन करते हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल शिव भक्ति का यह पावन महीना 30 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है, जिसका समापन 28 अगस्त 2026 को सावन पूर्णिमा के दिन होगा। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी इस साल का सावन बेहद खास होने वाला है, क्योंकि इस दौरान कई बड़े ग्रहों की चाल में बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा।इस सावन मास में तीन प्रमुख ग्रहों का महागोचर होने जा रहा है, जिसका सीधा असर सभी 12 राशियों के जातकों पर पड़ेगा। ज्योतिष गणना के अनुसार, 2 अगस्त 2026 को रात 10 बजकर 59 मिनट पर मंगल ग्रह मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद ग्रहों के राजा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेंगे। वहीं न्याय के देवता शनि 20 अगस्त 2026 को मीन राशि के रेवती नक्षत्र के प्रथम चरण में प्रवेश करने जा रहे हैं। सावन के इस पवित्र काल में मंगल, सूर्य और शनि के इस त्रिकोणीय गोचर से कर्क, सिंह, धनु और मीन राशि के जातकों के जीवन में सुनहरे दिनों की शुरुआत होने वाली है।कर्क राशि (Cancer): भाग्य का मिलेगा पूरा साथ, पूरे होंगे अटके कामसावन का यह महीना कर्क राशि के जातकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं रहने वाला है। ग्रहों के इस महागोचर के प्रभाव से आपको अपने भाग्य का शत-प्रतिशत साथ मिलेगा।काफी लंबे समय से रुके या अटके हुए सरकारी और निजी काम इस अवधि में सुगमता से पूरे हो जाएंगे।करियर के मोर्चे पर आपको सीनियर्स का सहयोग मिलेगा और नौकरी में तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे।आर्थिक मामलों में भी यह समय आपके पक्ष में रहेगा, जिससे आपकी वित्तीय स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत और सकारात्मक होगी।सिंह राशि (Leo): स्वराशि में सूर्य का गोचर, धन लाभ और बढ़ेगा मान-सम्मानसिंह राशि के जातकों के लिए यह सावन आर्थिक और सामाजिक रूप से बेहद शानदार रहने वाला है। चूंकि सूर्य देव आपकी ही राशि में गोचर करने जा रहे हैं, जिससे आपका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर होगा।व्यापार और नौकरीपेशा दोनों ही जातकों के लिए धन लाभ के जबरदस्त योग बन रहे हैं।कार्यस्थल (ऑफिस) और सामाजिक जीवन में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और आपको हर जगह मान-सम्मान प्राप्त होगा।भगवान भोलेनाथ की विशेष अनुकंपा से आपके जीवन में आ रही तमाम बाधाएं और शत्रु बाधाएं हमेशा के लिए दूर हो जाएंगी।धनु राशि (Sagittarius): रोजगार के नए अवसर और घर में गूंजेगी शहनाईधनु राशि के जातकों के लिए तीन ग्रहों का यह गोचर बेहद कल्याणकारी और सुखद परिणाम लेकर आ रहा है। यह समय आपके व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन दोनों को नई दिशा देगा।जो जातक लंबे समय से एक अच्छे जीवनसाथी की तलाश में थे, उन्हें इस महीने अपना मनचाहा पार्टनर मिल सकता है।बेरोजगारी का सामना कर रहे या नई नौकरी की तलाश में जुटे युवाओं को रोजगार के बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे।पारिवारिक जीवन में खुशहाली रहेगी और परिवार के सदस्यों के बीच तालमेल बढ़ने के साथ-साथ कोई शुभ समाचार भी मिल सकता है।मीन राशि (Pisces): शनि के नक्षत्र परिवर्तन से भौतिक सुखों में भारी बढ़ोतरीमीन राशि के जातकों के लिए सावन का यह महीना विशेष रूप से फलदायी और धन-धान्य से पूर्ण रहने वाला है। शनि का रेवती नक्षत्र में प्रवेश आपके लिए आर्थिक मोर्चे पर नए द्वार खोलेगा।व्यापार में नए साझेदार (बिजनेस पार्टनर्स) मिल सकते हैं, जो भविष्य में आपके मुनाफे को दोगुना करने में मददगार साबित होंगे।आकस्मिक धन लाभ होने के योग हैं, जिससे आपके भौतिक सुख-साधनों (जैसे मकान, वाहन या गैजेट्स) में भारी बढ़ोतरी होगी।आर्थिक तंगी से छुटकारा मिलने के साथ ही आपका पारिवारिक वातावरण बेहद सकारात्मक, शांतिपूर्ण और आनंदमय बना रहेगा।
राम-राम.. यो कोई साधारण धरती नहीं सै! जब मंच से हरियाणवी बोले पीएम नरेंद्र मोदी
हरियाणा की वीर और समृद्ध धरा पर आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर अपने अनूठे और ठेठ देसी अंदाज से लाखों लोगों का दिल जीत लिया। दिल्ली-एनसीआर, रोहतक, हिसार, जींद और सोनीपत समेत पूरे हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पीएम मोदी के इस भाषण की जबरदस्त चर्चा हो रही है। मंच पर आते ही जैसे ही प्रधानमंत्री ने हरियाणवी लहजे में 'राम-राम.. यो कोई साधारण धरती नहीं सै' कहकर जनता का अभिवादन किया, वैसे ही पूरा सभा स्थल 'मोदी-मोदी' के नारों से सराबोर हो गया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने हरियाणा की बेमिसाल संस्कृति, यहां के वीर जवानों, जांबाज खिलाड़ियों और यहां के पारंपरिक खान-पान की जमकर सराहना की।मुर्रा भैंस का दूध-दही और देसी बूरा का स्वाद नहीं भूलाहरियाणा के सुप्रसिद्ध खान-पान का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेहद भावुक और गदगद नजर आए। उन्होंने कहा कि हरियाणा की पहचान 'दूध-दही का खाणा' से है। पीएम ने विशेष रूप से यहां की शान कही जाने वाली 'मुर्रा भैंस' के पौष्टिक दूध-दही और पारंपरिक 'देसी बूरा' का उल्लेख किया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि हरियाणा के गांवों में मिलने वाले असली दूध-दही और पारंपरिक व्यंजनों का जो स्वाद उन्होंने चखा है, उसे वे आज तक नहीं भूल पाए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यही पौष्टिक और शुद्ध आहार यहां के युवाओं को इतनी ताकत देता है कि वे खेल के मैदान से लेकर सेना की सीमाओं तक देश का नाम रोशन करते हैं।सावन के महीने में घेवर के लाजवाब स्वाद की यादें हुईं ताजामानसून और सावन के इस बेहद खूबसूरत मौसम में हरियाणा के पारंपरिक मिष्ठान 'घेवर' का जिक्र करना पीएम मोदी नहीं भूले। उन्होंने कहा कि सावन के त्योहारों में मिलने वाले मीठे और स्वादिष्ट घेवर का स्वाद लाजवाब होता है। हरियाणा की खातिरदारी और मेहमाननवाजी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि यहां के लोग जितने दिलदार हैं, उनका खान-पान भी उतना ही लाजवाब और समृद्ध है। पीएम के इस बयान ने स्थानीय लोगों और हलवाई एसोसिएशन के चेहरों पर भी मुस्कान ला दी है, जो सावन के इस महीने में बड़े पैमाने पर घेवर तैयार करने में जुटे हैं।खिलाड़ियों और जवानों की इस खान को पीएम मोदी ने किया नमनअपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हरियाणा केवल कृषि या पशुपालन में ही नंबर वन नहीं है, बल्कि यह देश के रक्षकों और चैंपियनों की भी भूमि है। उन्होंने कहा कि यह कोई साधारण धरती नहीं है; इस मिट्टी ने देश को महान स्वतंत्रता सेनानी, सीमा पर रक्षा करने वाले वीर जवान और ओलंपिक व राष्ट्रमंडल खेलों में तिरंगे का मान बढ़ाने वाले जांबाज खिलाड़ी दिए हैं। पीएम ने कहा कि जब भी देश पर कोई संकट आता है या खेल के मैदान में पदक जीतने की बात होती है, तो हरियाणा का युवा सबसे आगे खड़ा दिखाई देता है।स्थानीय किसानों और पशुपालकों के योगदान को सराहाप्रधानमंत्री ने हरियाणा के मेहनती किसानों और पशुपालकों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि आज उनके कड़े परिश्रम की बदौलत ही देश खाद्य सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भर बना हुआ है। मुर्रा नस्ल की भैंसों के संरक्षण और वैज्ञानिक तरीके से डेयरी फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए चल रही सरकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि सरकार हमेशा किसानों और डेयरी संचालकों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। पीएम मोदी के इस आत्मीय और जमीनी भाषण ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे देश की लोक संस्कृति और आम जनमानस से कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शामली में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्ष पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। सीएम योगी ने कहा कि जो लोग आज आस्था की वकालत करते दिख रहे हैं, ये वही लोग हैं जो साल 2017 के पहले प्रदेश में 'जय श्रीराम' बोलने पर लाठियां मारते थे, गोली चलाते थे और कावंड़ यात्रा को पूरी तरह प्रतिबंधित किया करते थे। आगामी कांवड़ यात्रा को लेकर कांवड़ संघों और शिवभक्तों से अनुशासन बनाए रखने की विशेष अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में धैर्य और मर्यादा हमारी सबसे बड़ी पूंजी होनी चाहिए, इसलिए छोटी-छोटी बातों को लेकर कहीं पर भी किसी तरह की हुड़दंगई या विवाद नहीं होना चाहिए।मुख्यमंत्री ने आगाह करते हुए कहा कि अगर यात्रा के दौरान कहीं कोई हुड़दंगई या अनुशासनहीनता होगी, तो विरोधी दल इस प्रकार के दृश्यों को नोट करके रखेंगे। इसके बाद वे येन-केन-प्रकारेण (किसी भी तरह से) अन्य जगहों से दबाव बनाकर कांवड़ यात्रा को पहले की तरह बाधित करने की कोशिश करेंगे। सीएम योगी ने साफ शब्दों में कहा कि अगर कोई गलत या असामाजिक व्यक्ति भक्तों के बीच आकर उपद्रव करने की कोशिश करता है, तो उसे पहले ही पहचान कर यात्रा से बाहर कर दीजिए।डबल इंजन सरकार में आस्था का सम्मान, पर मर्यादा जरूरीअपनी मर्यादा को समझने की नसीहत देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “कांवड़ यात्रा के सुचारू संचालन के लिए सरकार भक्तों की सुरक्षा, सुविधा और उनकी भक्ति को साकार करने को लेकर हर संभव सहयोग कर रही है। यही डबल इंजन की सरकार है जो जनता की आस्था का सम्मान करती है और कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा करती है, लेकिन इसके बदले में हम सभी श्रद्धालुओं को अपनी मर्यादाओं और सीमाओं को अच्छी तरह समझना होगा।”विपक्ष का नाम लिए बगैर मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले की सरकारें न सिर्फ कांवड़ यात्रा पर रोक लगाती थीं, बल्कि कृष्ण जन्माष्टमी के भव्य आयोजनों को भी रोक दिया जाता था। रामनवमी की पावन शोभायात्राओं को निकलने की अनुमति नहीं मिलती थी और धार्मिक स्थलों की संपत्तियों पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया जाता था। लेकिन आज के उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा को कोई रोक नहीं सकता और पूरा प्रशासनिक अमला शिवभक्तों की सेवा के लिए सड़कों पर तैनात है। उन्होंने याद दिलाया कि हम सब प्रभु श्रीराम के वंशज और भगवान भोलेनाथ के परम भक्त हैं, इसलिए हमारा आचरण भी वैसा ही होना चाहिए।सपा-कांग्रेस पर डेमोग्राफी बदलने और 'जिन्ना के उपासक' होने का आरोपराजनीतिक मोर्चे पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) को आड़े हाथों लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ये लोग राज्य की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) को बदलने की गहरी साजिश रच रहे थे। विपक्ष को 'जिन्ना का उपासक और अनुयायी' बताते हुए सीएम ने कहा कि इन्हीं की नीतियों की वजह से पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हिंदुओं का पलायन हो रहा था।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि कैराना और कांधला से जो पलायन हुआ, वह कोई सामान्य बात नहीं थी बल्कि एक सोची-समझी शरारत के तहत यहाँ की डेमोग्राफी को बदलने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने जनता को आगाह किया कि ये राजनीतिक दल चुनाव और स्वार्थ के लिए समाज को जातियों में बांटने का काम करेंगे, जिससे सभी को सावधान रहने की जरूरत है।सैफई के नौकरी सिंडिकेट और माफियाओं के सफाए पर गर्जे सीएमउत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और माफियाराज के खात्मे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने अपने पुराने वादों को याद दिलाया। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा, “हमने प्रदेश की जनता से वादा किया था कि यूपी में या तो माफिया जेल के भीतर होगा या उसका पूरी तरह सफाया हो जाएगा, आज सरकार ने उसे सच कर दिखाया है।” उन्होंने पिछली सरकारों के भ्रष्टाचार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले युवाओं की सरकारी नौकरी का सिंडिकेट अकेले 'सैफई' से संचालित होता था, जहां भाई-भतीजावाद का बोलबाला था, लेकिन आज पूरी पारदर्शिता के साथ युवाओं को रोजगार मिल रहा है।बिजली और औद्योगिक विकास का जिक्र करते हुए सीएम आदित्यनाथ ने कहा कि आज से 10 साल पहले उत्तर प्रदेश के लोग बिजली की एक-एक बूंद (आपूर्ति) के लिए तरसते थे, लेकिन आज हर शहर और गांव में बिना किसी भेदभाव के निर्बाध बिजली पहुंच रही है। किसानों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सपा और बसपा की सरकारों के दौरान प्रदेश की 29 महत्वपूर्ण चीनी मिलें बंद हो गई थीं और इन लोगों ने चीनी मिलों को औने-पौने दामों में बेच दिया था। इसके विपरीत, आज भाजपा सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड 122 चीनी मिलें पूरी क्षमता के साथ सफलतापूर्वक चल रही हैं और किसानों को उनका हक मिल रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चंडीगढ़ आगमन से ठीक पहले देश की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत में इस खबर के बाद से हड़कंप मच गया है। दरअसल, चंडीगढ़ स्थित पंजाब और हरियाणा के संयुक्त सचिवालय (Civil Secretariat) को बम से उड़ाने की एक बेहद सनसनीखेज और गंभीर धमकी मिली है। सुरक्षा एजेंसियों को मिले इस धमकी भरे पत्र में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो सचिवालय को बम धमाकों से दहला दिया जाएगा। इस बड़ी धमकी के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे चंडीगढ़ को हाई अलर्ट पर रखते हुए चप्पे-चप्पे पर पहरा बिठा दिया है।'सतलुज मूवी' पर रोक लगाने की मांग, धमकी भरे पत्र में खौफनाक चेतावनीचंडीगढ़ पुलिस और खुफिया विभागों को मिले इस लिखित पत्र में 'सतलुज' नामक एक पंजाबी फिल्म का जिक्र किया गया है। पत्र भेजने वाले सिरफिरे या असामाजिक तत्व ने मांग की है कि इस फिल्म के प्रदर्शन पर तुरंत और पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। पत्र में लिखा गया है कि 'सतलुज मूवी पर रोक लगाई गई है' और यदि इस पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो सचिवालय की इमारत को उड़ाने से कोई नहीं रोक पाएगा। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं कि इस पत्र के पीछे किस शरारती तत्व या राष्ट्रविरोधी संगठन का हाथ है।पीएम मोदी के आगमन को लेकर चंडीगढ़ में सुरक्षा बेहद सख्त, अलर्ट पर कमांडोयह धमकी इसलिए भी बेहद संवेदनशील और डराने वाली है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बेहद महत्वपूर्ण चंडीगढ़ दौरा होने वाला है। पीएम मोदी के आगमन को लेकर चंडीगढ़ पुलिस, पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल पहले से ही सुरक्षा तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। ऐसे नाजुक वक्त में सचिवालय को निशाना बनाने की धमकी मिलने के बाद वीवीआईपी सुरक्षा घेरे को और ज्यादा मजबूत कर दिया गया है। चंडीगढ़ पुलिस की बम निरोधक टीम (Bomb Disposal Squad) और डॉग स्क्वायड ने तुरंत एक्शन में आते हुए पूरे सचिवालय परिसर, उसके आसपास के रास्तों और संवेदनशील सरकारी कार्यालयों की सघन जांच शुरू कर दी है।पंजाब और हरियाणा सचिवालय में बढ़ाई गई निगरानी, आम जनता के लिए सुरक्षा अलर्टइस गंभीर इनपुट के बाद चंडीगढ़ के सेक्टर-1 स्थित पंजाब-हरियाणा सचिवालय की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर कड़े बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं। यहां आने-जाने वाले हर वाहन की सघन तलाशी ली जा रही है। सचिवालय में काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के पहचान पत्रों की कड़ाई से जांच की जा रही है, जबकि आम जनता और बाहरी विजिटर्स के प्रवेश पर अस्थायी तौर पर कुछ कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। चंडीगढ़ पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध वस्तु या संदिग्ध व्यक्ति को देखते ही तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या कंट्रोल रूम को सूचित करें।खुफिया एजेंसियां खंगाल रही हैं धमकी भरे पत्र का असली कनेक्शनइस बीच, खुफिया एजेंसियां और साइबर सेल की टीमें इस पत्र के असली स्रोत का पता लगाने में जुटी हुई हैं। पत्र की हैंडराइटिंग, उसे भेजने का स्थान और उसमें इस्तेमाल किए गए शब्दों की गहरी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह पंजाब और हरियाणा की आपसी शांति व भाईचारे को बिगाड़ने की या फिर वीवीआईपी दौरे के दौरान कानून-व्यवस्था को चुनौती देने की एक बड़ी शरारत भी हो सकती है। हालांकि, पुलिस किसी भी स्तर पर जरा सी भी ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है और चंडीगढ़ की सुरक्षा को पूरी तरह से अभेद्य बना दिया गया है।
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। देश के सबसे बड़े सूबे की सत्ता पर दोबारा काबिज होने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जमीनी स्तर पर अपनी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में सबसे बड़ी हलचल पश्चिम उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से सामने आ रही है। बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ समेत पूरे एनसीआर व पश्चिमी यूपी के राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि भाजपा इस बार बुलंदशहर की कुछ विधानसभा सीटों पर बड़ा फेरबदल करने जा रही है। सूत्रों की मानें तो जिले के 3 मौजूदा विधायकों (MLAs) का टिकट कटने की तलवार लटक रही है। इस बीच, 18 जुलाई को सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ बुलंदशहर के दौरे पर पहुंच रहे हैं, जिससे इन अटकलों को और अधिक बल मिल गया है।इन 3 विधायकों के टिकट कटने की क्यों तेज हुई चर्चा?बुलंदशहर जिले में कुल 7 विधानसभा सीटें हैं, और पिछले चुनावों में भाजपा ने यहां बेहतरीन प्रदर्शन किया था। लेकिन आगामी चुनाव के मद्देनजर पार्टी द्वारा कराए जा रहे आंतरिक सर्वे और स्थानीय जनता के फीडबैक ने कुछ विधायकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। चर्चा है कि पार्टी इस बार 'एंटी-इन्कंबेंसी' (विधायकों के प्रति जनता की नाराजगी) को कम करने के लिए नए चेहरों पर दांव खेल सकती है। जिन तीन विधायकों के टिकट कटने की सबसे ज्यादा सुगबुगाहट है, उनमें स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करने, विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और जनता के बीच कम सक्रियता रहने के आरोप लग रहे हैं। हालांकि, पार्टी हाईकमान की ओर से अभी किसी के नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन विधायकों के खेमे में इस चर्चा ने बेचैनी जरूर पैदा कर दी है।18 जुलाई को सीएम योगी आदित्यनाथ का बुलंदशहर दौरा क्यों है बेहद खास?18 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुलंदशहर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करने और कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करने पहुंच रहे हैं। स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि सीएम योगी का यह दौरा केवल विकास कार्यों की सौगात देने तक सीमित नहीं रहेगा। मंच से दिए जाने वाले उनके भाषण, स्थानीय नेताओं के साथ उनकी बंद कमरे में होने वाली संगठनात्मक बैठक और विधायकों के साथ उनकी बॉडी लैंग्वेज से यह साफ हो जाएगा कि बुलंदशहर की सियासत किस करवट बैठने वाली है। सीएम योगी का यह दौरा टिकट के दावेदारों के लिए अपनी ताकत दिखाने का सबसे बड़ा मौका है, वहीं मौजूदा विधायकों के लिए अपनी परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड पेश करने की अंतिम परीक्षा भी।पश्चिम यूपी को साधने के लिए बीजेपी का नया सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूलापश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा से ही किसान आंदोलनों, जातीय समीकरणों और ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द घूमती रही है। बुलंदशहर जिला जाट, गुर्जर, लोध और ठाकुर मतदाताओं के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है। भाजपा के रणनीतिकार जानते हैं कि अगर 2027 के महासमर को जीतना है, तो बुलंदशहर की सातों सीटों पर मजबूत और जिताऊ उम्मीदवारों को ही उतारना होगा। टिकट काटने के पीछे पार्टी की मंशा साफ है—वह किसी भी कीमत पर कमजोर कड़ियों को मौका देकर विपक्षी गठबंधन को बढ़त बनाने का अवसर नहीं देना चाहती। यही वजह है कि नए और बेदाग चेहरों को आगे लाने की तैयारी की जा रही है।बुलंदशहर के टिकटार्थियों ने लखनऊ से दिल्ली तक लगाई दौड़टिकट कटने की खबरों के बीच जिले के मौजूदा विधायकों और नए टिकटार्थियों ने लखनऊ में प्रदेश मुख्यालय से लेकर दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व तक अपनी पैरवी तेज कर दी है। हर कोई अपने-अपने आकाओं के जरिए अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटा हुआ है। 18 जुलाई के इस हाई-प्रोफाइल दौरे के बाद पश्चिमी यूपी की राजनीति में बड़े सियासी घटनाक्रम की उम्मीद जताई जा रही है। अब यह देखना वाकई दिलचस्प होगा कि क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने इस दौरे से बुलंदशहर के इन तीनों विधायकों के राजनीतिक भविष्य का फैसला कर जाएंगे या फिर चुनावी रण में इन्हें एक और मौका मिलेगा।
अगर आप एक सरकारी कर्मचारी हैं और आपके वेतन से हर महीने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का अंशदान कट तो रहा है, लेकिन वह समय पर आपके पेंशन खाते में रिफ्लेक्ट या जमा नहीं हो रहा है, तो यह नई गाइडलाइन आपके लिए एक बहुत बड़ी राहत लेकर आई है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (Department of Expenditure-DoE) ने देश के सभी सरकारी विभागों और मंत्रालयों के लिए बेहद सख्त और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय ने कहा है कि हर हाल में कर्मचारियों का NPS योगदान एक तय समय-सीमा के भीतर पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के पास जमा हो जाना चाहिए। वित्त मंत्रालय का मानना है कि अंशदान जमा होने में थोड़ी सी भी देरी से कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड पर सीधा और नकारात्मक असर पड़ता है, जिससे बाजार में उनका निवेश बढ़ने का सही मौका हाथ से निकल जाता है।देरी होने पर PPF दर से मिलेगा मुआवजा, कर्मचारियों का नुकसान खत्मवित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (DoE) द्वारा 13 जुलाई 2026 को जारी किए गए एक आधिकारिक कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) में कर्मचारियों के हित में एक बड़ा फैसला सुनाया गया है। इस आदेश के अनुसार, यदि किसी भी सरकारी कर्मचारी का मासिक NPS अंशदान प्रशासनिक कारणों या लापरवाही की वजह से तय समय के बाद उसके पेंशन खाते में क्रेडिट होता है, तो सरकार उस कर्मचारी को देरी की पूरी अवधि का उचित ब्याज देगी।यह मुआवजा ब्याज दर पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) की उस समय लागू आधिकारिक ब्याज दर के ठीक बराबर होगा। वर्तमान में पीपीएफ पर 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है, जिसका सीधा मतलब यह है कि विभाग या बैंक की किसी भी लापरवाही का आर्थिक खामियाजा अब कर्मचारियों को नहीं भुगतना पड़ेगा और उन्हें उनके पैसे पर पूरा रिटर्न सुनिश्चित किया जाएगा।अधिकारियों की जेब से होगी वसूली, 31 जुलाई तक मांगी एक्शन रिपोर्टवित्त मंत्रालय इस नए नियम को लेकर बेहद गंभीर है। कार्यालय ज्ञापन में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि यदि NPS का पैसा समय पर जमा न होने के पीछे किसी भी तरह की प्रशासनिक ढिलाई या लापरवाही पाई जाती है, तो इसके लिए संबंधित अधिकारियों की सीधी जवाबदेही (Accountability) तय की जाएगी। किसी भी ऐसे मामले में संबंधित विभागाध्यक्ष (Head of Department) या मुख्य लेखा नियंत्रक (Chief Controller of Accounts) को पूरे प्रकरण की गहन जांच करने के आदेश दिए गए हैं।यदि जांच के दौरान किसी अधिकारी या कर्मचारी की गलती या सुस्ती प्रमाणित होती है, तो पीड़ित कर्मचारी को सरकार द्वारा दिए गए ब्याज की पूरी राशि की भरपाई (वसूली) उसी दोषी अधिकारी के वेतन या पॉकेट से कराई जाएगी। इसके साथ ही, लापरवाही बरतने वाले अधिकारी के खिलाफ गंभीर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है।TDS नियमों की तर्ज पर कसेगा शिकंजा, क्यों अहम है यह फैसला?सरकार ने इस वित्तीय लापरवाही को रोकने के लिए ठीक वैसा ही फॉर्मूला अपनाया है जैसा टैक्स चोरी या देरी पर लागू होता है। आधिकारिक आदेश के मुताबिक, दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी और आर्थिक दंड तय करने का तरीका बिल्कुल वैसा ही होगा, जैसा आयकर अधिनियम, 1961 (Income Tax Act) की धारा 201(1A) के तहत TDS जमा करने में देरी करने वाले डिफॉल्टरों के मामलों में अपनाया जाता है।इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए वित्त मंत्रालय ने सभी सरकारी महकमों से यह रिपोर्ट मांगी है कि अब तक ऐसे मामलों में क्या-क्या कदम उठाए गए हैं। इसकी पूरी विस्तृत रिपोर्ट 31 जुलाई 2026 तक मंत्रालय को सौंपनी होगी। साथ ही सभी विभागाध्यक्षों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने स्तर पर एक ऐसी फुल-प्रूफ प्रणाली बनाएं जिससे भविष्य में किसी भी कर्मचारी का NPS अंशदान एक दिन भी लेट न हो।कर्मचारियों के लिए इसका महत्व: चूंकि NPS एक मार्केट-लिंक्ड लॉन्ग टर्म रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है, इसलिए इसमें हर एक दिन का समय पर निवेश बेहद मायने रखता है। समय पर पैसा न जुटने से चक्रवृद्धि ब्याज (Compounding) का नुकसान होता है। सरकार के इस कदम से न सिर्फ कर्मचारियों के बुढ़ापे की पूंजी सुरक्षित होगी, बल्कि सरकारी दफ्तरों के भीतर काम करने के ढर्रे में भी एक बड़ी जवाबदेही और पारदर्शिता देखने को मिलेगी।
उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से ही शह और मात का खेल शुरू हो चुका है। लखनऊ, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी से लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों तक हर जगह गठबंधन और रणनीतियों को लेकर मंथन जारी है। इसी बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे बेबाक और कद्दावर नेताओं में शुमार, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर (OP Rajbhar) ने एक ऐसा बयान दे दिया है जिसने भारतीय जनता पार्टी (BJP) समेत पूरे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर हलचल तेज कर दी है। राजभर ने मीडिया के सामने खुलकर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा जाहिर करते हुए कहा है कि अगर उन्हें उत्तर प्रदेश का उप मुख्यमंत्री (Deputy CM) बनाया जाएगा तो वे इस पद को जरूर स्वीकार करेंगे।'कौन छोड़ता है उप मुख्यमंत्री का पद?' – राजभर का दोटूक बयानओपी राजभर से जब पत्रकारों ने आगामी चुनाव के बाद उनकी भूमिका और डिप्टी सीएम बनने की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने अपनी चिर-परिचित बेबाक शैली में जवाब दिया। राजभर ने मुस्कुराते हुए कहा, 'अगर उप मुख्यमंत्री बनाएंगे तो बनेंगे, कौन छोड़ता है भाई?' उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। राजभर के इस सीधे और साफ संदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह आगामी विधानसभा चुनावों में एनडीए के भीतर अपनी पार्टी और स्वयं के लिए एक बहुत बड़ी और मजबूत भूमिका की उम्मीद कर रहे हैं।पूर्वांचल की राजनीति में बेहद रसूखदार हैं ओम प्रकाश राजभरओपी राजभर का यह बयान केवल एक सामान्य इच्छा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी राजनीतिक बिसात छिपी हुई है। राजभर समाज और अति पिछड़े वर्ग (OBC) के मतदाताओं पर पूर्वांचल के गाजीपुर, मऊ, बलिया, जौनपुर, वाराणसी और आजमगढ़ जैसे जिलों में सुभासपा की बेहद मजबूत पकड़ मानी जाती है। यूपी की सत्ता के गलियारे तक पहुंचने में पूर्वांचल की भूमिका हमेशा से निर्णायक रही है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले अपनी इस मांग को सार्वजनिक कर राजभर ने बीजेपी हाईकमान को अपनी ताकत और अपनी अहमियत का अहसास कराने की कोशिश की है।क्या राजभर की इस मांग से असहज होगी बीजेपी?राजभर के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश भाजपा के भीतर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। यूपी में पहले से ही जातीय समीकरणों को साधने के लिए कई बड़े चेहरे मौजूद हैं। ऐसे में राजभर द्वारा सीधे तौर पर डिप्टी सीएम पद की दावेदारी ठोकने से एनडीए के अन्य सहयोगी दलों के भीतर भी सुगबुगाहत बढ़ सकती है। हालांकि, बीजेपी के स्थानीय और केंद्रीय नेतृत्व ने इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अंदरखाने यह माना जा रहा है कि टिकट बंटवारे और चुनाव बाद के मंत्रिमंडल गठन को लेकर सहयोगियों के बीच मोलतोल का दौर अब बेहद दिलचस्प होने वाला है।चुनाव से पहले जातीय समीकरणों को साधने की बड़ी कवायदउत्तर प्रदेश की सत्ता पर दोबारा काबिज होने के लिए हर राजनीतिक दल इस समय अति पिछड़े और दलित वोट बैंक को अपने पाले में करने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। राजभर इस वोट बैंक के एक बड़े नेता के तौर पर खुद को स्थापित कर चुके हैं। उनके इस बयान को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है ताकि उनके समर्थक और मतदाता यह समझ सकें कि सुभासपा केवल गठबंधन का हिस्सा नहीं है, बल्कि वह सरकार में शीर्ष स्तर पर भागीदारी की हकदार है। अब देखना होगा कि बीजेपी के शीर्ष रणनीतिकार राजभर की इस खुली इच्छा को किस तरह से संभालते हैं।
अनुराग कुमार दिल्ली के नए पुलिस आयुक्त नियुक्त
नई दिल्ली। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी अनुराग कुमार को दिल्ली पुलिस का नया आयुक्त नियुक्त किया गया है। वे राष्ट्रीय राजधानी के पुलिस बल के प्रमुख के रूप में कार्यरत सतीश गोलचा का स्थान लेंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक आदेश के अनुसार अरूणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम-केंद्रशासित प्रदेश (एजीएमयूटी) संवर्ग के 1994 बैच के […] The post अनुराग कुमार दिल्ली के नए पुलिस आयुक्त नियुक्त appeared first on Sabguru News .
CM योगी की कांवड़ियों से अपील, अनुशासन बनाए रखें, हुड़दंग से बचें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियों से अनुशासन, धैर्य और मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के हुड़दंग से विरोधी यात्रा को बदनाम करने की कोशिश कर सकते हैं।
शामली से योगी का विपक्ष पर तीखा वार, बोले-'जिन्ना के उपासक' विकास और विरासत के विरोधी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को शामली में 581 करोड़ रुपये की लागत वाली 89 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए दोनों दलों को 'जिन्ना का उपासक' बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2017 से पहले विकास कार्य ठप थे, बिजली, सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं बदहाल थीं, लेकिन डबल इंजन सरकार ने उत्तर प्रदेश की तस्वीर और तकदीर बदल दी है।
एक और खौफनाक कांड! पत्नी ने लाइव लोकेशन शेयर कर प्रेमी से करवाया पति का कत्ल
Chittoor Husband Murder Case: अभी पुणे के बहुचर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की आंच ठंडी भी नहीं हुई थी, जहां उसकी मंगेतर सिया गोयल ने अपने होने वाले पति को मौत की खाई में धकेल दिया था। ठीक वैसा ही दिल दहला देने वाला एक और मामला आंध्र प्रदेश के ...
Banyan Tree Sex Health Benefits: आयुर्वेद में बरगद (वट वृक्ष) के फल और दूध को पुरुषों के यौन स्वास्थ्य जैसे शीघ्रपतन और शुक्राणुओं की कमी को दूर करने में बेहद गुणकारी माना गया है। जानिए इसके इस्तेमाल का सही तरीका।
भारत में जल्द शुरू हो सकता है 10 व 20 रुपये के प्लास्टिक नोट, RBI ने पॉलीमर बैंकनोट के लिए बढ़ाए कदम
भारत में पॉलीमर (प्लास्टिक) बैंक नोट लाने की तैयारी तेज। RBI ने पॉलीमर सब्सट्रेट शीट के लिए ग्लोबल EOI जारी किया। 10 और 20 रुपये के नोटों से पायलट प्रोजेक्ट शुरू होने की संभावना।
दुनिया की सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेन भारत में, जींद से पीएम मोदी ने गिनाईं रेलवे की बड़ी उपलब्धियां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद में भारत की 3200 हॉर्स पावर वाली दुनिया की सबसे ताकतवर और सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन की सौगात दी। साथ ही रेलवे के विद्युतीकरण, 14 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं और स्वच्छता का संदेश भी दिया।
कच्छ सीमा पर BSF का बड़ा एक्शन, क्रीक इलाके से पाकिस्तानी नाव जब्त, सर्च ऑपरेशन शुरू
Pakistani Boat Seized Kutch: कच्छ के सीमावर्ती क्रीक इलाके से एक बार फिर लावारिस पाकिस्तानी नाव पकड़े जाने की चौंकाने वाली घटना सामने आई है। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नियमित गश्त कर रहे सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने इस संदिग्ध नाव को ...
बहराइच की घाघरा नदी में मगरमच्छ के हमले से 12 वर्षीय बालक की मौत। धान की रोपाई के बाद हाथ-पैर धोते समय हुआ हादसा, घंटों की तलाश के बाद मिला शव।
गौतमबुद्ध नगर जिले में नोएडा प्राधिकरण द्वारा कराए जा रहे सीवर लाइन सफाई अभियान के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत के मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), ने गंभीरता से लिया है। आयोग ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला माना है।
जर्मनी और चीन से बेहतर है भारत की हाइड्रोजन ट्रेन
जींद। भारत ने हरित एवं स्वच्छ रेल परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल आधारित ट्रेन शुरू कर दी है। जर्मनी और चीन में संचालित हाइड्रोजन ट्रेनों की तुलना में यह अधिक क्षमता और अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। यह ट्रेन भारतीय रेलवे की स्वदेशी इंजीनियरिंग […] The post जर्मनी और चीन से बेहतर है भारत की हाइड्रोजन ट्रेन appeared first on Sabguru News .
मुर्शिदाबाद ट्रेन दुर्घटना में दो स्कूली बच्चों सहित 3 की मौत, कई घायल
मुर्शिदाबाद। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक रेल दुर्घटना में दो स्कूली बच्चों सहित तीन लोगों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। प्राप्त जानकारी के अनुसार निमटीता-कटवा यात्री रेलगाड़ी (संख्या 53054) ने एक रेलवे क्रॉसिंग पर रॉयल अकादमी स्कूल के छात्रों को ले रहे […] The post मुर्शिदाबाद ट्रेन दुर्घटना में दो स्कूली बच्चों सहित 3 की मौत, कई घायल appeared first on Sabguru News .
महाराष्ट्र सरकार ने 25 लाख परिवारों के लिए मुफ्त साड़ी योजना बंद की
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने बढ़ते आर्थिक बोझ के कारण अंत्योदय राशन कार्ड वाले लगभग 25 लाख परिवारों को मुफ्त साड़ी देने की योजना को बंद कर दी है। कपड़ा विभाग के गुरुवार रात जारी इस आदेश से पता चलता है कि सरकार बढ़ते वित्तीय दबाव के बीच राज्य-प्रायोजित कल्याणकारी योजनाओं में बड़ी कटौती कर रही […] The post महाराष्ट्र सरकार ने 25 लाख परिवारों के लिए मुफ्त साड़ी योजना बंद की appeared first on Sabguru News .
सावधान! मौसम विभाग ने यूपी, बिहार और दिल्ली समेत 12 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। अगर आप भी अगले 48 घंटों में घर से बाहर निकलने या किसी यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। मानसून की सक्रियता बढ़ने के कारण ...
बानसूर में कपड़ा व्यापारी को जान से मारने की धमकी देने के मामले में 3 आरोपी अरेस्ट
कोटपूतली-बहरोड़। राजस्थान में कोटपूतली-बहरोड़ जिले के बानसूर कस्बे में उधार के रुपये मांगने पर एक कपड़ा व्यापारी को पिस्तौल दिखाकर धमकाने के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार करके उनसे एक अवैध देशी पिस्तौल बरामद की है। पुलिस सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि कपड़ा व्यापारी प्रमोद महाजन ने पुलिस को शिकायत की […] The post बानसूर में कपड़ा व्यापारी को जान से मारने की धमकी देने के मामले में 3 आरोपी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
सुप्रीम कोर्ट से 'महाप्रभु जगन्नाथ' फिल्म को राहत, 28 जुलाई के बाद होगी देशभर में रिलीज
सुप्रीम कोर्ट ने एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' की रिलीज को 28 जुलाई के बाद शर्त के साथ मंजूरी दी। जानिए पूरा विवाद, हाईकोर्ट की रोक और शीर्ष अदालत का फैसला।
अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब अमेरिका से लेकर एशिया तक के प्रमुख सूचकांकों में भारी गिरावट दर्ज की गई। इस वैश्विक बिकवाली की सबसे बड़ी वजह पिछले काफी समय से बाजार के डार्लिंग रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर (चिप) सेक्टर के शेयरों में आई तेज मुनाफावसूली है। अमेरिकी बाजार के नियमित कारोबार की शुरुआत से पहले ही डाओ फ्यूचर्स (Dow Futures) 400 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि नैस्डैक फ्यूचर्स (Nasdaq Futures) में 450 अंकों से ज्यादा की बड़ी गिरावट देखी गई। अमेरिकी बाजार से शुरू हुई इस गिरावट की लहर ने एशियाई बाजारों को भी अपनी चपेट में ले लिया, जिससे टेक और चिप से जुड़ी बड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली का दौर शुरू हो गया।अमेरिकी वॉल स्ट्रीट से शुरू हुआ तहलका: नैस्डैक में दर्ज हुई बड़ी गिरावटग्लोबल मार्केट में इस मंदी की शुरुआत अमेरिकी बाजार वॉल स्ट्रीट (Wall Street) से हुई, जहां गुरुवार को चिप और टेक्नोलॉजी सेक्टर के शेयरों पर भारी दबाव देखा गया था। इस चौतरफा बिकवाली के कारण टेक-हैवी नैस्डैक कंपोजिट (Nasdaq Composite) इंडेक्स 1.5% गिरकर बंद हुआ। इसके अलावा, एसएंडपी 500 (S&P 500) इंडेक्स में 0.5% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि डाओ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 105.67 अंक यानी करीब 0.2% नीचे आकर बंद हुआ। अमेरिकी बाजारों के इसी निराशाजनक प्रदर्शन ने शुक्रवार सुबह एशियाई बाजारों के खुलते ही निवेशकों के सेंटीमेंट्स को पूरी तरह बिगाड़ दिया।जापानी बाजार में सॉफ्टबैंक और टोक्यो इलेक्ट्रॉन धड़ाम: 9% तक टूटे शेयरअमेरिकी बाजार में आई इस गिरावट का सबसे बड़ा और तत्काल असर जापानी शेयर बाजार पर देखने को मिला। जापान के टेक्नोलॉजी और चिप सेक्टर से जुड़े दिग्गज शेयरों में जोरदार बिकवाली हुई। एआई और टेक इन्वेस्टमेंट के सबसे बड़े नाम सॉफ्टबैंक (SoftBank) के शेयरों में 9.2% की भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, चिप बनाने वाली मशीनों की प्रमुख कंपनी टोक्यो इलेक्ट्रॉन (Tokyo Electron) का शेयर करीब 9% और चिप टेस्टिंग इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनी एडवांटेस्ट (Advantest) का शेयर 9.4% तक टूट गया। वहीं, शुरुआती कारोबार में जापान का प्रमुख सूचकांक निक्केई 225 (Nikkei 225) करीब 0.6% और टॉपिक्स (Topix) 0.3% नीचे कारोबार कर रहे थे, लेकिन चुनिंदा टेक और एआई शेयरों में गिरावट का यह स्तर कहीं अधिक गंभीर था।आखिर क्यों अचानक एआई और चिप शेयरों से दूर भागने लगे निवेशक?बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, इस बिकवाली के पीछे निवेशकों की बढ़ती चिंताएं और एआई ट्रेड (AI Trade) को लेकर उठता संदेह है। पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा सेंटर्स और सेमीकंडक्टर कंपनियों में भारी निवेश किया था, जिससे इन कंपनियों के मूल्यांकन (Valuations) काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गए थे। अब निवेशकों के मन में यह बड़ा सवाल उठने लगा है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर टेक दिग्गज कंपनियों द्वारा किया जा रहा अरबों डॉलर का यह भारी-भरकम खर्च आखिर कब और कितनी जल्दी वास्तविक मुनाफे में तब्दील होगा। इसी संदेह और अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने इन शेयरों में मुनाफावसूली (Profit Booking) करना शुरू कर दिया है।वैनएक सेमीकंडक्टर ईटीएफ (SMH) में बड़ी गिरावट: पूरे चिप सेक्टर पर बढ़ा दबावसेमीकंडक्टर सेक्टर में चल रही इस कमजोरी की गंभीरता को दुनिया के सबसे बड़े चिप ईटीएफ, वैनएक सेमीकंडक्टर ईटीएफ (SMH) की चाल से समझा जा सकता है। यह ईटीएफ शुक्रवार को करीब 4% तक गिर गया, जबकि इस पूरे हफ्ते में इसमें 6.9% की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। यदि गिरावट का यह सिलसिला ऐसे ही जारी रहता है, तो यह पिछले चार हफ्तों में इस ईटीएफ की तीसरी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट होगी। इसके अलावा, दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनी ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) द्वारा उम्मीद से बेहतर दूसरी तिमाही के नतीजे घोषित करने के बावजूद उसके शेयरों पर दबाव रहा, क्योंकि कंपनी ने भविष्य में एआई की मांग को पूरा करने के लिए अपने खर्च के अनुमान (Capital Expenditure Guidance) को बढ़ा दिया है।जापानी चिप कंपनी किओक्सिया को कोर्ट से लगा झटका: शेयर 14% से ज्यादा फिसलाजापानी मेमोरी चिप निर्माता कंपनी किओक्सिया (Kioxia) के शेयरों के लिए शुक्रवार का दिन बेहद खराब साबित हुआ और इसका शेयर 14% से अधिक टूट गया। दरअसल, अमेरिका के टेक्सास में एक फेडरल जूरी ने कंपनी को कंप्यूटर मेमोरी टेक्नोलॉजी से जुड़े पेटेंट उल्लंघन के एक मामले में वायासैट (Viasat) को 22.9 करोड़ डॉलर का भारी जुर्माना यानी हर्जाना देने का आदेश दिया है। इस न्यायिक फैसले के बाद कंपनी के ऊपर आए कानूनी और वित्तीय संकट को देखते हुए निवेशकों ने इस शेयर में भारी बिकवाली की। दूसरी ओर, दक्षिण कोरियाई बाजार शुक्रवार को छुट्टी के कारण बंद था, लेकिन इससे पहले गुरुवार को वहां की प्रमुख एआई मेमोरी चिप निर्माता कंपनी एसके हाइनिक्स (SK Hynix) का शेयर भी 11% से ज्यादा टूटकर बंद हुआ था।नेटफ्लिक्स के नतीजों ने भी बिगाड़ा मूड: अच्छे परफॉर्मेंस के बाद भी शेयर 8% टूटाकेवल चिप सेक्टर ही नहीं, बल्कि अमेरिका के एंटरटेनमेंट और स्ट्रीमिंग जाइंट नेटफ्लिक्स (Netflix) के तिमाही नतीजों ने भी टेक सेक्टर के सेंटीमेंट को कमजोर करने का काम किया। नेटफ्लिक्स ने दूसरी तिमाही के लिए जो वित्तीय परिणाम घोषित किए, वे हालांकि बाजार के अनुमान के बिल्कुल अनुरूप थे, लेकिन इसमें निवेशकों के लिए कोई नया या धमाकेदार सरप्राइज नहीं था। इसके तुरंत बाद नेटफ्लिक्स का शेयर 8% से अधिक लुढ़क गया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब किसी बड़े टेक स्टॉक से बहुत ऊंची उम्मीदें जुड़ी होती हैं, तो केवल अनुमान के मुताबिक नतीजे आना भी शेयर को गिरावट से बचाने के लिए नाकाफी साबित होता है।क्या यह बड़ी मंदी की शुरुआत है? नेड डेविस रिसर्च के चीफ स्ट्रैटेजिस्ट का अहम विश्लेषणवैश्विक बाजारों में मची इस उथल-पुथल के बीच राहत की बात यह है कि एसएंडपी 500 इंडेक्स अभी भी जून में बनाए गए अपने ऑल-टाइम हाई (रिकॉर्ड स्तर) से केवल 1% ही नीचे ट्रेड कर रहा है। नेड डेविस रिसर्च के चीफ यूएस स्ट्रैटेजिस्ट एड क्लिसोल्ड का मानना है कि बाजार का पूरी तरह से न बिखरना यह दर्शाता है कि यह स्थिति किसी बड़ी गिरावट या मंदी (Recession) का संकेत नहीं है। क्लिसोल्ड के अनुसार, निकट अवधि में वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है, लेकिन बड़े आर्थिक संकट की कोई आशंका नहीं है। यह गिरावट वास्तव में कुछ ओवरवैल्यूड (जरूरत से ज्यादा बढ़े हुए) सेक्टरों में एक स्वस्थ कंसॉलिडेशन (ठहराव) और मुनाफावसूली का दौर है, जो अंततः बाजार को अधिक संतुलित और मजबूत बनाएगा।
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की दिग्गज स्मॉलकैप कंपनी सर्वोटेक रिन्यूएबल पावर सिस्टम (Servotech Renewable Power System) के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखा गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में कंपनी का शेयर 5% से अधिक की तेजी के साथ 102.50 रुपये के स्तर पर जा पहुंचा। शेयर बाजार में आई इस शानदार तेजी के पीछे उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मिला एक बेहद बड़ा और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का ऑर्डर है। इस सरकारी ऑर्डर की खबर आते ही निवेशकों में शेयर खरीदने की होड़ मच गई और कंपनी के स्टॉक ने 100 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया।उत्तर प्रदेश सरकार से मिला बड़ा टेंडर: यूपी के गांवों में रोशन होंगे हाइब्रिड सोलर रूफटॉपसर्वोटेक रिन्यूएबल पावर सिस्टम को उत्तर प्रदेश सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के अधीन आने वाले 'उत्तर प्रदेश स्टेट रूरल लाइव्लीहुड मिशन' (UPSRLM) की ओर से यह बड़ा प्रोजेक्ट हासिल हुआ है। इस सरकारी टेंडर के तहत कंपनी को उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में विभिन्न स्थानों पर अत्याधुनिक बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स (BESS) से लैस हाइब्रिड सोलर रूफटॉप सिस्टम्स इंस्टॉल करने की जिम्मेदारी दी गई है। यह परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।12 महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थापित होगी 900 kW की कुल क्षमताइस सरकारी परियोजना के तहत सर्वोटेक रिन्यूएबल को उत्तर प्रदेश राज्य के भीतर कुल 12 महत्वपूर्ण लोकेशंस आवंटित की गई हैं। कंपनी प्रत्येक लोकेशन पर 75 kW क्षमता का हाइब्रिड सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित करेगी, जिससे इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल क्षमता 900 kW हो जाएगी। सर्वोटेक इस प्रोजेक्ट के तहत बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स (BESS) के साथ एकीकृत हाइब्रिड सोलर सिस्टम के डिजाइन, सप्लाई, इंस्टॉलेशन, कमिशनिंग और भविष्य में रखरखाव (मेंटीनेंस) की पूरी जिम्मेदारी संभालेगी।4 साल में दिया 1400% से अधिक का छप्परफाड़ रिटर्न: 2.52 रुपये से शुरू हुआ सफरसर्वोटेक रिन्यूएबल पावर सिस्टम का शेयर इतिहास गवाह है कि इसने अपने दीर्घकालिक निवेशकों को मालामाल कर दिया है। 3 सितंबर 2021 को कंपनी के एक शेयर की कीमत महज 2.52 रुपये थी, जो 17 जुलाई 2026 को 102.50 रुपये के स्तर पर पहुंच गई है। इस तरह पिछले करीब 5 वर्षों में इस स्टॉक ने 3850% से अधिक का ऐतिहासिक रिटर्न दिया है। वहीं, पिछले 4 सालों के प्रदर्शन को देखें तो यह शेयर 6.65 रुपये से बढ़कर 102 रुपये के पार पहुंच गया है, जो 1400% से अधिक की भारी बढ़त को दर्शाता है। पिछले 6 महीनों के भीतर भी कंपनी के शेयर में 43% की अच्छी मजबूती दर्ज की गई है। इस शेयर का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 152.97 रुपये और न्यूनतम स्तर 57.51 रुपये है।दो बार शेयर स्प्लिट कर चुकी है कंपनी: निवेशकों को मिला है दोहरा फायदाअपने निवेशकों को बेहतर लिक्विडिटी और वैल्यू प्रदान करने के लिए सर्वोटेक रिन्यूएबल पावर सिस्टम ने साल 2023 के दौरान दो बार अपने शेयरों का विभाजन (Share Split) किया था। पहली बार फरवरी 2023 में कंपनी ने 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले अपने शेयरों को 2-2 रुपये की फेस वैल्यू के साथ 5 टुकड़ों में विभाजित किया था। इसके तुरंत बाद, जुलाई 2023 में कंपनी ने पुनः 2 रुपये की फेस वैल्यू वाले शेयरों को 1-1 रुपये की फेस वैल्यू वाले 2 शेयरों में स्प्लिट कर दिया था, जिससे निवेशकों के पास शेयरों की संख्या में बड़ी वृद्धि हुई थी।ईवी फास्ट चार्जर और लिथियम-ऑयन बैटरी बनाती है कंपनी: डायवर्सिफाइड है बिजनेससर्वोटेक रिन्यूएबल पावर सिस्टम देश में हाई-एफिशिएंसी वाले सोलर पैनल्स, ग्रिड-टाइड तथा हाइब्रिड इनवर्टर और सोलर चार्ज कंट्रोलर्स की प्रमुख निर्माता है। इसके अतिरिक्त, कंपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट में भी तेजी से पैर पसार रही है और 120 kW से लेकर 360 kW क्षमता की रेंज में प्रीमियम एसी (AC) और डीसी (DC) फास्ट चार्जर्स का निर्माण करती है। कंपनी कमर्शियल, रेजिडेंशियल और ई-रिक्शा के उपयोग के लिए एडवांस बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स और कस्टमाइज्ड लिथियम-ऑयन बैटरी पैक्स की मैन्युफैक्चरिंग भी बड़े पैमाने पर कर रही है।
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के गोचर और उनकी दृष्टि का सभी 12 राशियों के जीवन पर गहरा और निर्णायक प्रभाव पड़ता है। इस समय अंतरिक्ष में न्याय के देवता शनि देव और साहस व पराक्रम के कारक मंगल देव मिलकर एक बेहद शक्तिशाली और उग्र योग का निर्माण कर रहे हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, वर्तमान में कर्मफल दाता शनि मीन राशि में विराजमान हैं, जबकि ग्रहों के सेनापति मंगल वृषभ राशि में गोचर कर रहे हैं। इस स्थिति के कारण शनि देव की तीसरी दृष्टि सीधे मंगल देव पर पड़ रही है। ज्योतिष में शनि को वायु तत्व यानी शीतलता और मंगल को अग्नि तत्व यानी उष्णता का प्रतीक माना जाता है। अग्नि और वायु के इस अद्भुत मिलन से बना यह खास संयोग 3 अगस्त 2026 तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में करियर, व्यापार और धन के मामले में कुछ विशेष राशियों को अप्रत्याशित और चमत्कारी लाभ मिलने के प्रबल संकेत हैं।वृषभ राशि वालों के लिए स्वर्णिम काल: नेतृत्व क्षमता से मिलेगी करियर में बड़ी सफलताशनि और मंगल के इस विशेष दृष्टि संबंध के कारण वृषभ राशि के जातकों के लिए बहुत ही अनुकूल समय शुरू हो चुका है। इस अवधि में आपकी वित्तीय स्थिति में जबरदस्त सुधार देखने को मिलेगा और धन संचय से जुड़ी आपकी सभी योजनाएं सफलतापूर्वक पूरी होंगी। यदि आप नया व्यवसाय शुरू करने या किसी नई योजना में निवेश करने का मन बना रहे हैं, तो 3 अगस्त तक का समय आपके लिए बेहद भाग्यशाली रहने वाला है। नौकरीपेशा जातकों को कार्यस्थल पर अपनी उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता दिखाने का पूरा अवसर मिलेगा, जिससे आपकी साख बढ़ेगी। पारिवारिक मोर्चे पर जीवनसाथी का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा और संतान पक्ष की ओर से कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है, जिससे घर का माहौल खुशनुमा रहेगा।कन्या राशि को मिलेगा भाग्य का साथ: आय में वृद्धि और विदेशी व्यापार से बंपर मुनाफाकन्या राशि के जातकों के लिए शनि-मंगल का यह उग्र संयोग ढेर सारी खुशियां और शुभ समाचार लेकर आया है। नौकरीपेशा लोगों को इस समय पदोन्नति (प्रमोशन) के साथ-साथ सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी का तोहफा मिल सकता है। जो जातक आईटी, इंजीनियरिंग या किसी भी तकनीकी क्षेत्र से जुड़े हैं, उनके लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है। इस अवधि में आपके फिजूलखर्चों पर लगाम लगेगी, जिससे आपकी बैंक बैलेंस और बचत में वृद्धि होगी। विदेशी कंपनियों या आयात-निर्यात के कारोबार से जुड़े व्यापारियों को इस दौरान उम्मीद से कहीं अधिक मुनाफा होने के योग बन रहे हैं। हालांकि, ज्योतिषियों की सलाह है कि इस समय उत्साह में आकर जल्दबाजी में कोई भी बड़ा वित्तीय फैसला लेने से बचें।मकर राशि की बढ़ेगी प्रतिष्ठा: मेहनत का मिलेगा पूरा फल और अटके काम होंगे पूरेमकर राशि के जातकों के लिए शनि और मंगल का यह संबंध बेहद शुभ और फलदायी साबित होने वाला है। पिछले काफी समय से आप जो कठिन परिश्रम कर रहे थे, उसका उचित और पूरा फल मिलने का समय आ गया है। इस दौरान आपके आत्मविश्वास में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होगी, जिससे आप कठिन से कठिन चुनौतियों का डटकर सामना कर पाएंगे। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों (बॉस) का पूरा समर्थन और सराहना आपको मिलेगी, जिससे पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा। व्यापारिक क्षेत्र में उन्नति के साथ-साथ अचानक धन लाभ के मजबूत योग बन रहे हैं। हालांकि, इस समय आपको सलाह दी जाती है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ पैसों का लेन-देन करने से पूरी तरह बचें। जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता आएगी।कुंभ राशि के जातकों का चमकेगा करियर: आय के नए स्रोत बनेंगे और मिलेगा फंसा हुआ पैसाकुंभ राशि के जातकों के लिए यह गोचरीय स्थिति उनके करियर को एक नई और ऊंचाई भरी दिशा देने वाली साबित होगी। शनि-मंगल के शुभ प्रभाव से आपकी आय के नए और मजबूत स्रोत विकसित होंगे, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति बेहद सुदृढ़ हो जाएगी। यदि आपका धन कहीं लंबे समय से फंसा हुआ था, तो वह इस अवधि में वापस मिल सकता है। आपके साहस, पराक्रम और कार्यकुशलता में जबरदस्त वृद्धि देखने को मिलेगी। ऑफिस में आपके काम करने के नए तरीके और अनूठे विचारों से उच्चाधिकारी बेहद प्रभावित होंगे, जिसका सीधा लाभ आपको आने वाले अप्रेजल में देखने को मिल सकता है। आप अपने पारिवारिक दायित्वों को भी पूरी निष्ठा और अनुशासन के साथ निभाने में सफल रहेंगे।
हिंदू धर्म में भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाने वाला पावन त्योहार रक्षा बंधन (Raksha Bandhan 2026) हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस विशेष दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र यानी राखी बांधकर उनकी लंबी आयु, तरक्की और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, वहीं भाई भी अपनी बहनों को जीवनभर हर संकट से बचाने और उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। हालांकि, इस साल सावन पूर्णिमा पर लगने वाले चंद्रग्रहण के साए के कारण लोगों के बीच रक्षा बंधन की सही तारीख और राखी बांधने के समय को लेकर काफी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ज्योतिषीय गणनाओं और पंचांग के अनुसार, इस बार भद्रा का साया कब रहेगा और राखी बांधने का सबसे उत्तम और कल्याणकारी मुहूर्त कौन सा है, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।अगस्त में किस दिन मनाया जाएगा रक्षा बंधन: उदय तिथि ने दूर किया तारीख का भ्रमपंचांग और ज्योतिषविदों के अनुसार, साल 2026 में श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 27 अगस्त को सुबह 09 बजकर 09 मिनट से होने जा रही है। वहीं, इस पूर्णिमा तिथि का समापन अगले दिन यानी 28 अगस्त को सुबह 09 बजकर 49 मिनट पर होगा। हिंदू धर्म और शास्त्र सम्मत परंपराओं के अनुसार, चूंकि उदय तिथि का विशेष महत्व होता है, इसलिए उदय तिथि मान्य होने के कारण रक्षा बंधन का पावन त्योहार शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को ही पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा।रक्षा बंधन पर राखी बांधने का सबसे उत्तम मुहूर्त: नोट कर लें यह पावन समयधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रक्षा बंधन के दिन राखी बांधने के लिए शुभ चौघड़िया और उत्तम मुहूर्त का विचार करना बेहद अनिवार्य माना जाता है। शास्त्रों में स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए हैं कि भद्रा काल, राहुकाल या पंचक जैसी अशुभ घड़ियों के दौरान राखी बांधने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय किए गए कार्यों से अशुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस वर्ष 28 अगस्त को राखी बांधने का सबसे उत्तम और श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 09 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इस समयावधि में रक्षा सूत्र बांधना भाई और बहन दोनों के जीवन में अपार खुशियां और समृद्धि लेकर आएगा।क्या रक्षा बंधन के दिन रहेगा भद्रा का साया? ज्योतिषीय गणना ने दी बड़ी राहतरक्षा बंधन के त्योहार में भद्रा काल का विचार सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधना पूरी तरह से वर्जित है। इस साल भद्रा के साए को लेकर भाई-बहनों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। दरअसल, इस बार रक्षा बंधन के मुख्य दिन यानी 28 अगस्त को भद्रा का साया बिल्कुल भी नहीं रहेगा। सावन पूर्णिमा की शुरुआत के साथ ही भद्रा काल 27 अगस्त को सुबह 09 बजकर 08 मिनट से शुरू होकर उसी रात 09 बजकर 32 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। इस वजह से 28 अगस्त को पूरा दिन भद्रा मुक्त रहेगा और बहनें बिना किसी भय या चिंता के अपने भाइयों की कलाई पर राखी सजा सकेंगी।राखी बांधते समय जरूर रखें इन नियमों का ध्यान: काले रंग से बनाएं दूरीज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राखी बांधने की रस्म को पूरी श्रद्धा और सही नियमों के साथ करना चाहिए ताकि पूजा का पूर्ण फल मिल सके। राखी बांधते समय भाई का मुख हमेशा पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। बहन को सबसे पहले भाई के माथे पर कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाना चाहिए, फिर कलाई पर राखी बांधकर उनकी आरती उतारनी चाहिए। इसके बाद भाई को अपनी बहन के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए और सामर्थ्य के अनुसार उपहार भेंट करना चाहिए। ध्यान रहे कि इस पावन दिन पर भाई-बहन आपस में किसी भी प्रकार के अपशब्दों का प्रयोग न करें और काले रंग के वस्त्र पहनने से पूरी तरह परहेज करें, क्योंकि काला रंग सनातन धर्म में नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।माता लक्ष्मी और भगवान कृष्ण से जुड़ी है रक्षा बंधन की पौराणिक गाथासनातन धर्म में रक्षा बंधन के त्योहार का इतिहास बेहद प्राचीन और गौरवशाली है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सबसे पहले धन की देवी माता लक्ष्मी ने राजा बलि को अपना भाई मानकर उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था और उनसे उपहार स्वरूप भगवान विष्णु को बैकुंठ वापस भेजने का वचन मांगा था। इसके अतिरिक्त, महाभारत काल में भी इस पर्व का बेहद सुंदर प्रसंग मिलता है, जब भगवान श्री कृष्ण की उंगली कट जाने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का आंचल फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था। भगवान कृष्ण ने इस उपकार के बदले द्रौपदी को सदैव रक्षा का वचन दिया था और चीरहरण के समय उनकी लाज बचाकर भाई का अपना फर्ज निभाया था।
न्यूजीलैंड क्रिकेट (NZC) के खेमे से एक बेहद चौंकाने वाली बड़ी खबर सामने आ रही है। ब्लैक कैप्स (Black Caps) के बल्लेबाजी कोच ल्यूक रोंची ने अपने पद से हटने का बड़ा फैसला कर लिया है। वह इस साल के अंत में भारत के खिलाफ होने वाली आगामी घरेलू मल्टी-फॉर्मेट सीरीज की समाप्ति के बाद न्यूजीलैंड पुरुष क्रिकेट टीम के बल्लेबाजी कोच का पद छोड़ देंगे। ल्यूक रोंची के इस अचानक इस्तीफे के पीछे ऑस्ट्रेलियाई टी20 लीग, बिग बैश लीग (BBL) से मिला एक बड़ा ऑफर है। रोंची ने मेलबर्न रेनेगेड्स (Melbourne Renegades) फ्रेंचाइजी के मुख्य कोच (Head Coach) का प्रतिष्ठित पद स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद वह अपनी नई भूमिका में दिखाई देंगे।साल 2020 से कीवी टीम के बल्लेबाजी स्तंभ रहे हैं रोंची: पीटर फुल्टन की ली थी जगहपूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज ल्यूक रोंची साल 2020 से लगातार न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम के साथ बतौर बल्लेबाजी कोच जुड़े हुए थे। उन्होंने पूर्व कीवी क्रिकेटर पीटर फुल्टन के इस्तीफे के बाद इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को संभाला था। रोंची का कोचिंग कार्यकाल न्यूजीलैंड क्रिकेट के स्वर्णिम इतिहास का गवाह रहा है। उनके मार्गदर्शन में कीवी बल्लेबाजों ने दुनिया के हर कोने में रन बनाए। रोंची के रहते हुए ही कीवी टीम ने साल 2021 में पहली आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) का खिताब अपने नाम किया था। इसके अलावा न्यूजीलैंड टीम ने साल 2021 और 2026 के टी20 वर्ल्ड कप फाइनल तक का सफर तय किया और 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी के खिताबी मुकाबले में भी अपनी जगह सुनिश्चित की थी।टेस्ट कप्तान टॉम लैथम ने जताया दुख: रोंची को बताया टीम का बेहद कीमती सदस्यल्यूक रोंची के पद छोड़ने की आधिकारिक घोषणा होने के बाद न्यूजीलैंड के टेस्ट कप्तान टॉम लैथम ने रोंची के योगदान की जमकर तारीफ की और उन्हें विदा करने पर निराशा व्यक्त की। कप्तान लैथम ने मीडिया से बातचीत में कहा, ल्यूक रोंची हमारे इस पूरे ग्रुप के बेहद कीमती और अहम सदस्य रहे हैं। पहले जब वे एक खिलाड़ी के तौर पर मैदान में उतरते थे और बाद में जब उन्होंने कोचिंग की भूमिका संभाली, दोनों ही रूपों में उनका योगदान बेजोड़ रहा। रोंची जैसे शानदार कोच और इंसान को खोना हमारे लिए निश्चित रूप से एक बड़ा झटका और निराशाजनक है। वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जो टीम के ड्रेसिंग रूम के माहौल, संस्कृति और मूल्यों को बहुत गहराई से समझते हैं और हमेशा सकारात्मकता बनाए रखते हैं।'मेरे करियर का सबसे यादगार पल': विदाई की घोषणा पर भावुक हुए ल्यूक रोंचीन्यूजीलैंड क्रिकेट को अलविदा कहने की घोषणा पर ल्यूक रोंची खुद भी काफी भावुक नजर आए। उन्होंने अपने कार्यकाल को करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया। रोंची ने कहा, मेरा हमेशा से यही एक मुख्य लक्ष्य रहा है कि मैं अपने बल्लेबाजों और इस टीम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में मदद कर सकूं। जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो कई बेहद खूबसूरत और यादगार पल दिखाई देते हैं जिनका हिस्सा होने पर मुझे हमेशा गर्व रहेगा। मैं भविष्य में भी न्यूजीलैंड क्रिकेट को बहुत करीब से फॉलो करता रहूंगा और आने वाले सफर के लिए टीम से जुड़े सभी खिलाड़ियों और स्टाफ को दिल से शुभकामनाएं देता हूं। इस बीच न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने साफ किया है कि वे जल्द ही सही समय पर रोंची के विकल्प की घोषणा करेंगे।
Rohit Sharma Retirement Rumors: रोहित शर्मा के संन्यास की खबरों के बीच बैटिंग कोच का बड़ा बयान
भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही तीन मैचों की वनडे सीरीज का रोमांच इस समय अपने चरम पर है। कार्डिफ के सोफिया गार्डन्स में खेले गए दूसरे मुकाबले में टीम इंडिया को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा, जिसके बाद सीरीज अब 1-1 की बराबरी पर खड़ी है। इस हार के बाद जहां टीम की रणनीतियों पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं सबसे ज्यादा चर्चा का विषय अनुभवी बल्लेबाज और कप्तान रोहित शर्मा का फॉर्म बना हुआ है। सोशल मीडिया और मीडिया गलियारों में तेजी से यह अफवाह उड़ रही है कि 19 जुलाई 2026 को ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर होने वाला तीसरा वनडे मैच रोहित शर्मा के इंटरनेशनल करियर का आखिरी मुकाबला हो सकता है। इन तमाम कयासों और आलोचनाओं के बीच भारतीय टीम के बैटिंग कोच सीतांशु कोटक ने फ्रंटफुट पर आकर रोहित शर्मा का जोरदार समर्थन किया है।बैटिंग कोच सीतांशु कोटक का दोटूक जवाब: रोहित जैसे बड़े खिलाड़ी पर कोई दबाव नहींदूसरे वनडे मैच में मिली हार के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय टीम के बल्लेबाजी कोच सीतांशु कोटक ने रोहित शर्मा की बल्लेबाजी और उनके भविष्य को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। कोटक ने रोहित का बचाव करते हुए कहा, मुझे नहीं लगता कि रोहित शर्मा जितना महान और अनुभवी खिलाड़ी किसी भी तरह का मानसिक दबाव महसूस कर सकता है। वह एक विश्व स्तरीय बल्लेबाज हैं और दबाव से निपटना बखूबी जानते हैं। हां, यह सच है कि सीरीज के शुरुआती दो मैचों में उनके बल्ले से बड़ी पारी नहीं निकली है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इससे उनके कद या क्षमता पर कोई फर्क पड़ता है। दूसरे वनडे में भी वह काफी अच्छी लय में दिख रहे थे और लग रहा था कि एक बड़ी पारी खेलेंगे, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से आउट हो गए। क्रिकेट में ऐसा होना बेहद सामान्य है।दूसरे वनडे में अच्छी शुरुआत के बाद लौटे पवेलियन: तीसरे मैच में बड़ी पारी की उम्मीदकार्डिफ में खेले गए दूसरे वनडे मुकाबले में रोहित शर्मा क्रीज पर काफी सहज नजर आ रहे थे। उन्होंने संभलकर बल्लेबाजी करते हुए 47 गेंदों का सामना किया और 26 रन बनाए, लेकिन अपनी इस शुरुआत को वह बड़े स्कोर में तब्दील करने में नाकाम रहे। इससे पहले सीरीज के पहले मुकाबले में, जहां भारतीय टीम 259 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही थी, वहां भी रोहित का बल्ला शांत रहा था और वह 21 गेंदों में केवल 11 रन बनाकर आउट हो गए थे। लगातार दो मैचों में सस्ते में आउट होने के बाद अब रोहित शर्मा के फैंस और टीम मैनेजमेंट को उम्मीद है कि वह सीरीज के सबसे महत्वपूर्ण मैच में अपने पुराने रंग में लौटेंगे।लॉर्ड्स में खेला जाएगा फाइनल मुकाबला: क्या होगा रोहित शर्मा का आखिरी वनडे?अपनी पीढ़ी के सबसे विध्वंसक और महानतम सीमित ओवरों के बल्लेबाजों में शुमार रोहित शर्मा इस समय निश्चित रूप से रन बनाने के लिए बेताब होंगे। संन्यास की लगातार उड़ रही खबरों के बीच उनके पास लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खुद को साबित करने का यह बेहतरीन मौका होगा। इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज का तीसरा और निर्णायक मैच रविवार, 19 जुलाई 2026 को लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर खेला जाना है। चूंकि इस मैच के साथ ही सीरीज की ट्रॉफी का फैसला भी होना है, इसलिए रोहित शर्मा भारतीय टीम के लिए एक कप्तानी पारी खेलकर इस दौरे का सुखद अंत करना चाहेंगे। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस महामुकाबले में दोनों टीमें किस रणनीति के साथ मैदान पर उतरती हैं।
Pele Jersey Auction 2026: फुटबॉल लेजेंड पेले की 10 नंबर जर्सी ₹47 करोड़ में नीलाम
खेल इतिहास के सबसे महानतम फुटबॉल खिलाड़ियों में शुमार ब्राजील के दिवंगत लेजेंड पेले (Pel) की एक ऐतिहासिक जर्सी ने नीलामी के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए एक नया विश्व कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। साल 1958 के फीफा वर्ल्ड कप फाइनल मुकाबले में पेले द्वारा पहनी गई मशहूर नंबर 10 की जर्सी प्रतिष्ठित ऑक्शन हाउस 'सोथबी' (Sotheby's) की नीलामी में कुल 4.9 मिलियन यूएस डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 47 करोड़ रुपये की अविश्वसनीय कीमत पर बिकी है। इस ऐतिहासिक बिक्री के साथ ही यह प्रतिष्ठित शर्ट फुटबॉल जगत के महानतम आइकन पेले के जीवन और करियर से जुड़ी अब तक की सबसे कीमती और महंगी यादगार चीज (Sports Memorabilia) बन गई है।17 साल के पेले का वो जादुई फाइनल: स्वीडन के खिलाफ दागे थे दो ऐतिहासिक गोलरॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ऑक्शन हाउस सोथबी ने बताया कि इस ऐतिहासिक पीली जर्सी के लिए दुनिया भर के पांच से अधिक बड़े खरीदारों के बीच बेहद कड़ी टक्कर देखने को मिली, जिन्होंने कुल 10 बड़ी बोलियां लगाईं। यह वही ऐतिहासिक नंबर 10 की जर्सी है जिसे पहनकर मात्र 17 साल के युवा पेले ने स्टॉकहोम में खेले गए 1958 फीफा वर्ल्ड कप के फाइनल मैच में मेजबान स्वीडन के खिलाफ दो शानदार गोल दागे थे। इस मैच में ब्राजील ने स्वीडन को 5-2 से करारी शिकस्त देकर अपना पहला फीफा वर्ल्ड कप खिताब जीता था। पेले आज भी फीफा वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में गोल करने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने हुए हैं।इतिहास की दूसरी सबसे महंगी फुटबॉल शर्ट बनी: डिएगो माराडोना की जर्सी अब भी पहले नंबर परइस ऐतिहासिक नीलामी के बाद पेले की यह जर्सी दुनिया की दूसरी सबसे महंगी फुटबॉल शर्ट बन गई है। खेल इतिहास में अब तक की सबसे महंगी बिकने वाली जर्सी का रिकॉर्ड अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर डिएगो माराडोना के नाम दर्ज है। साल 2022 में माराडोना की वह अर्जेंटीना जर्सी रिकॉर्ड 9.3 मिलियन डॉलर (करीब 77 करोड़ रुपये से अधिक) में नीलाम हुई थी, जिसे पहनकर उन्होंने 1986 के वर्ल्ड कप क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ अपना मशहूर और ऐतिहासिक हैंड ऑफ गॉड (Hand of God) गोल दागा था। गौरतलब है कि पेले की इस नंबर 10 शर्ट को साल 2004 में भी नीलाम किया गया था, तब यह केवल 70,505 ब्रिटिश पाउंड में बिकी थी, जिसके मुकाबले इस बार इसकी कीमत में कई सौ गुना का उछाल आया है।इकलौते खिलाड़ी जिसने जीते 3 वर्ल्ड कप: पेले के करियर का बेमिसाल सफरदिसंबर 2022 में 82 वर्ष की उम्र में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जंग हारने वाले किंग पेले के नाम फुटबॉल इतिहास के कई ऐसे रिकॉर्ड दर्ज हैं जिन्हें तोड़ पाना नामुमकिन नजर आता है। पेले दुनिया के इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने ब्राजील के लिए खेलते हुए तीन अलग-अलग संस्करणों—1958, 1962 और 1970 में फीफा वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया था। 1958 के ऐतिहासिक डेब्यू वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में उन्होंने कुल 6 गोल दागे थे। इसके बाद 1962 के एडिशन में चोटिल होने के बावजूद उन्होंने एक गोल किया और ब्राजील ने चेकोस्लोवाकिया को हराकर लगातार दूसरी बार कप जीता। वहीं, अपने आखिरी 1970 के विश्व कप फाइनल में पेले ने इटली के खिलाफ ऐतिहासिक 4-1 की जीत में पहला गोल दागकर ब्राजील को तीसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बनाया था।
बॉलीवुड की दो दमदार अभिनेत्रियों—आलिया भट्ट और शरवरी वाघ की मुख्य भूमिकाओं से सजी मोस्ट अवेटेड स्पाई थ्रिलर फिल्म 'अल्फा' (Alpha) को लेकर दर्शकों और समीक्षकों में भारी उत्साह था। यशराज फिल्म्स (YRF) के बहुचर्चित स्पाई यूनिवर्स का हिस्सा होने के कारण इस मेगा-बजट फिल्म से ट्रेड पंडितों को ब्लॉकबस्टर प्रदर्शन की उम्मीद थी। हालांकि, 3 जुलाई 2026 को बड़े पर्दे पर रिलीज होने के बाद यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीदों के मुताबिक खरा उतरने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। बॉक्स ऑफिस पर चल रही लगातार कड़ी प्रतिस्पर्धा और अन्य बड़ी फिल्मों के धमाकेदार प्रदर्शन ने 'अल्फा' की कमाई की रफ्तार पर पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया है, जिससे मेकर्स के चेहरे पर साफ मायूसी दिखाई दे रही है।दो हफ्तों में फुस्स हुई 'अल्फा' की दहाड़: दूसरे हफ्ते में दर्ज हुई भारी गिरावटबेहतरीन स्टार कास्ट और शानदार एक्शन सीक्वेंस होने के बावजूद 'अल्फा' दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में संघर्ष करती नजर आ रही है। फिल्म ने अपने ओपनिंग डे पर 9.25 करोड़ रुपये के साथ संतोषजनक शुरुआत की थी और पहले हफ्ते में 47.45 करोड़ रुपये का बिजनेस किया था। लेकिन दूसरे हफ्ते में फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन बेहद तेजी से नीचे गिरा है। ट्रेड वेबसाइट सैकनिल्क (Sacnilk) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, रिलीज के 14वें दिन (गुरुवार) फिल्म ने देश भर में महज 0.60 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। दूसरे हफ्ते में फिल्म कुल मिलाकर केवल 8.95 करोड़ रुपये ही जोड़ सकी, जिसके चलते भारत में 'अल्फा' का कुल नेट बॉक्स ऑफिस कलेक्शन दो हफ्तों के बाद 56.40 करोड़ रुपये के निराशाजनक आंकड़े पर सिमट गया है।यहाँ देखें 'अल्फा' का वीक-वाइज पूरा कलेक्शन रिपोर्टफिल्म की दिन-प्रतिदिन और सप्ताह-दर-सप्ताह गिरती कमाई के मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:पहला हफ्ता (Week 1): 47.45 करोड़ रुपयेदूसरा हफ्ता (Week 2): 8.95 करोड़ रुपये13वां दिन (बुधवार): 0.60 करोड़ रुपये14वां दिन (गुरुवार): 0.60 करोड़ रुपयेकुल नेट कलेक्शन (Total Net Collection): 56.40 करोड़ रुपयेअजय देवगन की 'धमाल 4' और अक्षय की 'वेलकम 2' ने बिगाड़ा सारा खेल'अल्फा' की इस धीमी रफ्तार के पीछे बॉक्स ऑफिस पर एक साथ कई बड़ी फिल्मों की रिलीज को माना जा रहा है। सिनेमाघरों में पहले से ही अक्षय कुमार की मल्टीस्टारर फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' अच्छी पकड़ बनाए हुए थी, वहीं हाल ही में रिलीज हुई अजय देवगन की कल्ट कॉमेडी फिल्म 'धमाल 4' ने बॉक्स ऑफिस पर तबाही मचाते हुए अधिकांश दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। इन दोनों ही फिल्मों के शानदार प्रदर्शन ने आलिया भट्ट की 'अल्फा' के स्क्रीन काउंट्स और फुटफॉल को काफी हद तक प्रभावित किया है, जिससे फिल्म का पूरा गणित बिगड़ गया।स्टार्स की लंबी फौज भी नहीं आई काम: ऋतिक रोशन का कैमियो भी रहा बेअसरस्पाई थ्रिलर 'अल्फा' का निर्देशन नेटफ्लिक्स की बेहद लोकप्रिय वेब सीरीज 'द रेलवे मैन' फेम डायरेक्टर शिव रवैल ने किया है। फिल्म में आलिया भट्ट और शरवरी वाघ के जबरदस्त एक्शन पैक्ड किरदारों के अलावा बॉलीवुड के एवरग्रीन सुपरस्टार अनिल कपूर और डार्क शेड में बॉबी देओल भी मुख्य भूमिकाओं में नजर आए हैं। इतना ही नहीं, फैंस को सरप्राइज देने के लिए फिल्म में सुपरस्टार ऋतिक रोशन का एक कल्ट कैमियो भी रखा गया था। इसके बावजूद, कमजोर कहानी और धीमी स्क्रिप्ट के कारण यह भारी-भरकम स्टारकास्ट भी दर्शकों को बांधे रखने में असफल साबित हुई।इन 5 बड़ी फिल्मों के कड़े मुकाबले से थमा पहियायशराज फिल्म्स की 'अल्फा' को बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ एक या दो नहीं, बल्कि आधा दर्जन फिल्मों से एक साथ मुकाबला करना पड़ा है। थिएटर्स में चल रही फिल्मों की लिस्ट में शाहिद कपूर की 'कॉकटेल 2', कंगना रनौत की पॉलिटिकल ड्रामा 'भारत भाग्य विधाता', दिलजीत दोसांझ की 'मैं वापस आऊंगा' और डरावनी थ्रिलर 'हॉन्टेड 3डी इकोज ऑफ द पास्ट' जैसी अलग-अलग जॉनर की फिल्में शामिल हैं। इस तगड़े बहुकोणीय मुकाबले के कारण 'अल्फा' को मनमाफिक दर्शक वर्ग नहीं मिल सका और फिल्म बड़ी हिट बनने की रेस से बाहर हो गई।
पश्चिम बंगाल के बहरामपुर में ट्रेन से टकराई स्कूल वैन, 2 बच्चों समेत 3 की मौत
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में रेलवे क्रॉसिंग पर स्कूल वैन को लोकल ट्रेन ने टक्कर मार दी। हादसे में 2 बच्चों समेत 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई बच्चे घायल हुए हैं। गेटमैन को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
आम आदमी पार्टी और सपा के बाद कांग्रेस ने भी दिया वांगचुक को समर्थन
नई दिल्ली। लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को विपक्षी दलों के समर्थन के बीच शुक्रवार को कांग्रेस की तरफ से संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा भी उनसे मिलने पहुंचे। खेड़ा ने आज सुबह धरना स्थल पर पहुंचकर वांगचुक के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और उनसे विचार विमर्श कर […] The post आम आदमी पार्टी और सपा के बाद कांग्रेस ने भी दिया वांगचुक को समर्थन appeared first on Sabguru News .
बिहार के नवादा निवासी आयुष भालोटिया ने नीट-यूजी 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए अखिल भारतीय स्तर पर चौथा स्थान हासिल किया है। इस पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई नेताओं ने बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
मोदी ने जींद से सोनीपत के लिए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को दिखाई हरी झंडी
जींद। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को यहां जींद जंक्शन से सोनीपत के लिए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली इस पैसेंजर ट्रेन में 2600 लोग सफ़र कर सकेंगे। रेल मंत्रालय के अनुसार 10 डिब्बों वाली यह ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक […] The post मोदी ने जींद से सोनीपत के लिए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को दिखाई हरी झंडी appeared first on Sabguru News .
पीएम नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। जानिए हाइड्रोजन ट्रेन की तकनीक, रूट, किराया, रफ्तार, सुरक्षा व्यवस्था, लागत और इसकी खासियत।
Project Meghalaya Controversy: थलपति विजय की सरकार गिराने की बड़ी साजिश? कैसे फंस गई DMK
चेन्नई: तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में इस वक्त एक ऐसा सनसनीखेज और अभूतपूर्व मोड़ आ गया है जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राज्य के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) सरकार को गिराने और उनके विधायकों को खरीदने की एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर जैसी राजनीतिक साजिश का भंडाफोड़ हुआ है। इस पूरे कथित ऑपरेशन को 'प्रोजेक्ट मेघालय' (Project Meghalaya) का कोडनेम दिया गया है। चेन्नई पुलिस की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और मीडिया जगत के कुछ बड़े चेहरों पर शिकंजा कसता जा रहा है, जिससे सूबे की राजनीति में भारी उबाल आ गया है।35-35 करोड़ का ऑफर और 15 विधायकों पर नजर: ऐसे खुला 'प्रोजेक्ट मेघालय' का खौफनाक राजइस हाई-प्रोफाइल मामले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब टीवीके (TVK) के उथंगरई विधानसभा क्षेत्र से विधायक एन. इलैयाराजा ने जून के आखिर में पुलिस में एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी। विधायक इलैयाराजा ने आरोप लगाया था कि मुख्य आरोपी थिरुनावुक्कारासु और उसके सहयोगियों ने उनसे संपर्क किया था। उन्होंने विधानसभा की महत्वपूर्ण कार्यवाही के दौरान पार्टी व्हिप और मुख्यमंत्री विजय के रुख के खिलाफ जाकर मतदान करने के लिए 35 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत की पेशकश की थी। विधायक ने पुलिस को बताया कि जब उन्होंने इस अनैतिक ऑफर को ठुकरा दिया, तो उन्हें और उनके पूरे परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं। पुलिस की हालिया जांच के मुताबिक, इस साजिश के तहत टीवीके के करीब 15 विधायकों को इसी तरह मोटी रकम का लालच देकर सरकार गिराने की पूरी प्लानिंग थी, जिसे सिंडिकेट ने 'प्रोजेक्ट मेघालय' नाम दिया था।एनडीटीवी की रिपोर्ट से खुलासा: वरिष्ठ पत्रकार विजयन हिरासत में, पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी को समनएनडीटीवी (NDTV) की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, चेन्नई पुलिस ने इस मामले में एक बेहद चौंकाने वाली कार्रवाई करते हुए राज्य के प्रसिद्ध क्षेत्रीय समाचार चैनल 'पुथिया थलैमुरई' के वरिष्ठ टेलीविजन पत्रकार विजयन को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने 15 और 16 जुलाई 2026 को थाने में उनसे मैराथन पूछताछ की। यही नहीं, पुलिस ने पत्रकार का मोबाइल फोन भी आधिकारिक रूप से जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए लैब भेज दिया है ताकि उनके डिजिटल फुटप्रिंट्स खंगाले जा सकें। इस मामले में पुलिस अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और जांच की आंच अब सीधे डीएमके के बड़े राजनीतिक चेहरों तक पहुंच गई है। चेन्नई पुलिस ने इस कथित साजिश के सिलसिले में डीएमके (DMK) के पूर्व कद्दावर मंत्री सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक को भी पूछताछ के लिए कड़ा समन जारी किया है।यूट्यूबर थिरुनावुक्कारासु का कनेक्शन: ओपिनियन पोल की आड़ में चल रहा था पूरा खेलचेन्नई पुलिस के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे हॉर्स-ट्रेडिंग नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार और आरोपी थिरुनावुक्कारासु नाम का एक यूट्यूबर है। थिरुनावुक्कारासु यूट्यूब पर 'IPDS' के नाम से एक बेहद लोकप्रिय ओपिनियन पोलिंग ग्रुप चलाता है, जिसकी आड़ में वह राजनीतिक दलों के भीतर पैठ बनाता था। तकनीकी और साइबर सेल की जांच में थिरुनावुक्कारासु और पत्रकार विजयन के बीच कई संदिग्ध और सीधे बातचीत के पुख्ता डिजिटल सबूत मिले हैं। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस ओपिनियन पोलिंग ग्रुप और मीडिया का इस्तेमाल विधायकों को मानसिक रूप से प्रभावित करने और सरकार के खिलाफ माहौल बनाकर तख्तापलट करने की बड़ी साजिश के हिस्से के रूप में किया जा रहा था।कनिमोझी का पलटवार: प्रेस की आजादी पर हमला या राजनीतिक फायदे के लिए रची गई मनगढ़ंत कहानी?इस बीच, वरिष्ठ पत्रकार विजयन से देर रात तक हुई पुलिसिया पूछताछ और उनका मोबाइल फोन जब्त किए जाने के बाद डीएमके (DMK) ने विजय सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। डीएमके की फायरब्रांड सांसद कनिमोझी ने टीवीके सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा, जांच के बहाने एक स्वतंत्र पत्रकार का मोबाइल फोन मनमाने ढंग से जब्त करना और उन्हें पुलिस स्टेशन में घंटों अवैध हिरासत में रखना टीवीके सरकार की पुलिस फोर्स का बेहद निंदनीय और अलोकतांत्रिक कृत्य है। कनिमोझी ने इसे प्रेस की आजादी पर सीधा हमला करार देते हुए पत्रकार की तत्काल रिहाई की मांग की। दूसरी तरफ, चेन्नई प्रेस क्लब ने भी आरोप लगाया कि 15 जुलाई की देर रात बिना किसी कानूनी तय प्रक्रिया का पालन किए पत्रकार को परेशान किया गया। वहीं, डीएमके नेतृत्व ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि थलपति विजय की सरकार अपनी विफलताएं छिपाने और राजनीतिक फायदा लेने के लिए विपक्ष के खिलाफ झूठी और मनगढ़ंत कहानियां गढ़ रही है।
ईडी ने बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठ नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच राज्यों में 13 ठिकानों पर छापेमारी की। विदेशी फंडिंग, फर्जी दस्तावेज और संदिग्ध बैंक लेन-देन की जांच तेज।
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में जमीन विवाद से जुड़े गोलीकांड में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। शालिग्राम पर जमीन कब्जाने के विवाद से जुड़े आरोप में ...
अंक ज्योतिष (Numerology) के अनुसार, हर इंसान की जन्मतिथि का एक विशेष महत्व होता है। यह न केवल व्यक्ति के स्वभाव और व्यक्तित्व का आईना होती है, बल्कि उसके आने वाले कल और वित्तीय स्थिति का भी संकेत देती है। आज 17 जुलाई 2026 का दिन आर्थिक मामलों में हर मूलांक (Moolank) के जातकों के लिए बेहद खास और अलग-अलग परिणाम लेकर आया है।आज जहां कुछ मूलांक के लोगों को अप्रत्याशित धन लाभ और करियर में नए सुनहरे अवसर मिलेंगे, वहीं कुछ मूलांक वालों को अपने बढ़ते खर्चों और नए निवेशों को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है। आइए विस्तार से जानते हैं कि मूलांक 1 से लेकर 9 तक के जातकों के लिए आज का दिन पैसों के मामले में कैसा रहने वाला है:मूलांक 1: जल्दबाजी में बड़े फैसलों से बचेंजन्मतिथि: यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है।आर्थिक स्थिति: आज आपको वित्तीय मामलों में थोड़ा संभलकर कदम आगे बढ़ाने की जरूरत है। दिन की शुरुआत कुछ अनचाहे और अचानक होने वाले खर्चों से हो सकती है, जो आपके मासिक बजट को बिगाड़ सकते हैं।बिजनेस व निवेश: व्यापार जगत से जुड़े लोगों को आज किसी भी बड़ी या नई डील पर जल्दबाजी में हस्ताक्षर या फैसला नहीं करना चाहिए। दिन के उत्तरार्ध (दूसरे हिस्से) में फंसा हुआ पैसा या पुराना उधार वापस मिलने की उम्मीद है। फिलहाल नया लोन (कर्ज) लेने से बचें।मूलांक 2: तरक्की और बड़े मुनाफे के संकेतजन्मतिथि: यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है।आर्थिक स्थिति: आपके लिए आज का दिन आर्थिक दृष्टिकोण से बेहद शानदार और भाग्यशाली रहने वाला है। अतीत में किए गए निवेशों (Past Investments) से अब आपको बेहतरीन रिटर्न मिलना शुरू हो सकता है।करियर: नौकरीपेशा जातकों को कार्यस्थल पर प्रमोशन, इंसेंटिव या बोनस से जुड़ी कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। आज आप परिवार के लिए वाहन या कोई अन्य कीमती इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने की ठोस योजना बना सकते हैं।मूलांक 3: आय और व्यय में बनी रहेगी होड़जन्मतिथि: यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है।आर्थिक स्थिति: आज आपकी आमदनी और खर्च दोनों समानांतर रूप से चलेंगे। एक तरफ से धन का आगमन होगा, तो दूसरी तरफ से अनावश्यक खर्चे भी सामने आ खड़े होंगे।उधार का दबाव: यदि आपने पूर्व में किसी से कर्ज लिया था, तो आज उसे चुकाने का मानसिक दबाव बढ़ सकता है। व्यापार में स्थिति सामान्य रहेगी, लेकिन पार्टनरशिप (साझेदारी) से जुड़े बड़े फैसलों को कुछ दिनों के लिए टाल देना ही समझदारी होगी।मूलांक 4 से 6 तक का वित्तीय लेखा-जोखामूलांक (Moolank)किनके लिए है? (Dates)कैसा रहेगा आज का आर्थिक दिन? (Financial Predictions)मूलांक 44, 13, 22 या 31 तारीखगोल्डन टाइम: आर्थिक मोर्चे पर आज आपकी बेहतरीन प्रगति होगी। लंबे समय से रुके हुए काम पूरे होने से आत्मविश्वास बढ़ेगा। सोना (Gold), फिक्स्ड डिपॉजिट या लंबी अवधि की सरकारी योजनाओं में निवेश के लिए आज का दिन सर्वोत्तम है।मूलांक 55, 14 या 23 तारीखनए अवसर: आज आपको व्यापार या नौकरी में कमाई के नए और आकर्षक अवसर हाथ लग सकते हैं। किसी पुरानी कंपनी या पुराने क्लाइंट से दोबारा बड़ा काम मिलने के संकेत हैं। हालांकि, भावनाओं में बहकर कोई बड़ा खर्च न करें।मूलांक 66, 15 या 24 तारीखसतर्क रहें: अचानक घरेलू खर्च बढ़ने से आज थोड़ी मानसिक चिंता हो सकती है। पैसों की तंगी को दूर करने के लिए किसी मित्र या करीबी रिश्तेदार से मदद लेनी पड़ सकती है। शेयर बाजार (Share Market) या किसी भी प्रकार के जोखिम भरे निवेश से आज पूरी तरह दूरी बना लें।मूलांक 7: संतुलित सोच से पूरे होंगे बड़े कामजन्मतिथि: यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है।आर्थिक स्थिति: आज आपको पैसों के लेन-देन में एक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। सुबह के समय कार्यों की रफ्तार थोड़ी धीमी रह सकती है, लेकिन दोपहर बाद स्थितियों में तेजी से सुधार होगा।धन लाभ: डूबा हुआ या अटका हुआ पैसा वापस मिलने के योग हैं। नौकरी और कारोबार में कुछ ऐसे नए रास्ते खुलेंगे जो भविष्य में आपकी आय को दोगुना करने में मददगार साबित होंगे। परिवार के सहयोग से बड़े खर्च भी आसानी से मैनेज हो जाएंगे।मूलांक 8: पुराने लेन-देन बढ़ा सकते हैं सिरदर्दजन्मतिथि:防护 यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है।आर्थिक स्थिति: आज पैसों के मामलों में आपको 'अति-सावधानी' बरतने की सलाह दी जाती है। पुराने लेन-देन या किसी पुराने विवाद के उभरने से मानसिक परेशानी हो सकती है।निवेश से बचें: क्रेडिटर्स (लेनदारों) का दबाव आज बढ़ सकता है, इसलिए जोखिम भरे सट्टे या शॉर्ट-टर्म निवेश से बिल्कुल दूर रहें। कामकाजी लोगों को साइड इनकम के नए मौके मिलेंगे, लेकिन उनका वास्तविक वित्तीय लाभ आपको धीरे-धीरे और रुक-रुक कर ही प्राप्त होगा।मूलांक 9: पुराने निवेश से बंपर रिटर्न की उम्मीदजन्मतिथि: यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है।आर्थिक स्थिति: मूलांक 9 वाले जातकों के लिए आज का दिन भाग्य का साथ दिलाने वाला है। आपके द्वारा पहले किए गए म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी के निवेश से आज बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है।नया स्टार्टअप: यदि आप कोई नया बिजनेस या स्टार्टअप शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो आज का दिन आपके पक्ष में रहेगा। नौकरीपेशा लोगों को सैलरी हाइक (Salary Hike) की खबर मिल सकती है। आज अपनी बचत और खर्चों के बीच एक सही संतुलन बनाकर चलें ताकि भविष्य का वित्तीय लक्ष्य सुरक्षित हो सके।
हिंदू धर्म और वैदिक संस्कृति में गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) का स्थान सर्वोपरि माना गया है। यह पावन दिन गुरुओं के प्रति आदर, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ-साथ अपनी कुंडली में देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ मास की पूर्णिमा के दिन ही महाभारत, 18 पुराणों और चारों वेदों के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। इसी कारण इस पावन पर्व को 'व्यास पूर्णिमा' (Vyas Purnima) भी कहा जाता है। इस दिन गुरु की वंदना करने से जीवन का अज्ञान रूपी अंधकार दूर होता है और बुद्धि, ज्ञान तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। साल 2026 में गुरु पूर्णिमा के दिन प्रीति योग और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का एक बेहद अद्भुत संयोग बन रहा है, जो गुरु दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष फलदायी है। आइए जानते हैं तिथि, शुभ मुहूर्त और इस दिन का विशेष महत्व:प्रीति योग और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का खास संयोगइस साल की गुरु पूर्णिमा धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए विशेष रूप से शुभ फल देने वाली है:प्रीति योग (Preeti Yog): 29 जुलाई को सुबह से लेकर रात 11 बजकर 58 मिनट तक प्रीति योग रहेगा, जिसके बाद आयुष्मान योग की शुरुआत होगी। ज्योतिष शास्त्र में प्रीति योग के स्वामी ग्रह बुध और देवता भगवान विष्णु माने गए हैं। इस योग में नए रिश्तों की शुरुआत करना, पुराने विवादों को सुलझाना या कोई नई बिजनेस डील फाइनल करना बेहद भाग्यशाली और मान-सम्मान बढ़ाने वाला माना जाता है।नक्षत्रों का प्रभाव: गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह से लेकर दोपहर 03 बजकर 37 मिनट तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, इसके बाद श्रवण नक्षत्र शुरू हो जाएगा। ये दोनों ही नक्षत्र शुभ कार्यों के लिए अत्यंत उत्तम माने गए हैं।गुरु पूर्णिमा 2026: तिथि और समय (Tithi & Timings)पंचांग की गणना के अनुसार, आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि दो दिनों में व्याप्त रहेगी, लेकिन उदयातिथि के नियमों के तहत पर्व 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाया जाएगा।पूर्णिमा तिथि का आरंभ: 28 जुलाई 2026 को शाम 06 बजकर 18 मिनट से।पूर्णिमा तिथि का समापन: 29 जुलाई 2026 को रात 08 बजकर 05 मिनट पर।पूजन, पवित्र स्नान और दान के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्तगुरु पूर्णिमा के दिन सुबह के समय पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने की परंपरा है। यदि आप इस दिन गुरु पूजा या दान करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए शुभ चौघड़िया मुहूर्त (Choghadiya Muhurat) का लाभ उठा सकते हैं:मुहूर्त का प्रकार (Shubh Muhurat)समय अवधि (Time Slots)महत्व (Significance)ब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurat)सुबह 04:17 से 04:59 तकध्यान, मंत्र जप और गुरु स्मरण के लिए सर्वश्रेष्ठ।लाभ - उन्नति मुहूर्त (Labh)सुबह 05:41 से 07:22 तकनए काम की शुरुआत, पठन-पाठन और पूजन के लिए शुभ।अमृत मुहूर्त (Amrit)सुबह 07:22 से 09:04 तकपवित्र स्नान, महादान और गुरु दीक्षा के लिए सर्वोत्तम।शुभ मुहूर्त (Shubh)सुबह 10:46 से दोपहर 12:27 तकगुरु वंदना, आरती और गुरुजनों का आशीर्वाद लेने के लिए श्रेष्ठ।गुरु पूर्णिमा का पौराणिक महत्व और परंपराएंभारतीय सनातन संस्कृति में गुरु को भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है, क्योंकि गुरु ही हमें सही और गलत का भेद समझाकर ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग दिखाते हैं।वेद व्यास जयंती उत्सव: महर्षि वेदव्यास जी ने बिखरे हुए वैदिक मंत्रों का संकलन करके उन्हें चार वेदों में विभाजित किया था। इसी आभार में हर साल उनके जन्मोत्सव पर व्यास जी के चित्र या प्रतिमा का पूजन किया जाता है।कृतज्ञता का पर्व: इस दिन शिष्य अपने-अपने गुरुओं के आश्रम या घर जाकर उनके चरणों में शीश नवाते हैं, उन्हें सामर्थ्य अनुसार उपहार भेंट करते हैं और उनके मार्गदर्शन के लिए आभार जताते हैं।गुरु दोष निवारण: जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह (बृहस्पति) कमजोर स्थिति में है या गुरु दोष के कारण विवाह, शिक्षा व करियर में रुकावटें आ रही हैं, उन्हें इस दिन किसी विद्वान गुरु या भगवान विष्णु की विशेष पूजा करनी चाहिए। इस दिन किया गया दान जीवन के कष्टों को शांत करता है।
विंध्य के लिए ‘भगीरथ’ बने सीएम डॉ. मोहन यादव, जानें कैसे धरातल पर उतारा इंजीनियरिंग का चमत्कार?
मध्यप्रदेश के सिंचाई इतिहास की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल स्लीमनाबाद जल-सुरंग अब पूर्णता के अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आजकटनी जिले में देश की सबसे लंबी और तकनीकी रूप से सबसे जटिल जल-सुरंग का निरीक्षण करेंगे। ...
भारतीय रेलवे की प्रीमियम और सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Express) आज के समय में सिर्फ अपनी बेहतरीन रफ्तार, आधुनिक लुक और आरामदायक सफर के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी विश्वस्तरीय ऑनबोर्ड कैटरिंग सुविधाओं (Onboard Catering Services) के लिए भी यात्रियों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुकी है।लंबी दूरी के सफर के दौरान यात्रियों के खान-पान का विशेष ख्याल रखने के लिए इस ट्रेन में सुबह की शुरुआत से लेकर रात के खाने तक का पूरा बंदोबस्त होता है। ट्रेन में पैसेंजर्स को नाश्ते से लेकर लंच, शाम के स्नैक्स और डेजर्ट (मीठा) तक के कई लजीज ऑप्शन अवेलेबल कराए जाते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि वंदे भारत एक्सप्रेस में सफर के दौरान मिलने वाले फूड मेन्यू (Vande Bharat Menu) में क्या-क्या खास बातें शामिल हैं:1. सुबह की फ्रेश शुरुआत: हर्बल टी, कॉफी और प्री-ब्रेकफास्टवंदे भारत एक्सप्रेस में जैसे ही आपकी यात्रा शुरू होती है, पैसेंजर्स का स्वागत रिफ्रेशिंग हॉट ड्रिंक्स के साथ किया जाता है:चाय/कॉफी के विकल्प: यात्रियों को उनकी पसंद के अनुसार गरमा-गरम प्री-मिक्स चाय, ग्रीन टी या कॉफी परोसी जाती है। इसके साथ में प्रीमियम ब्रांड्स के बिस्किट भी दिए जाते हैं।वेलकम किट: यात्रियों की सुविधा और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए भोजन से पहले एक सर्विस किट दी जाती है, जिसमें चम्मच, गीला टिश्यू पेपर, हैंड सैनिटाइजर, नमक और काली मिर्च के पाउच शामिल होते हैं।2. ब्रेकफास्ट (Morning Breakfast): रूट के अनुसार लजीज विकल्पसुबह के नाश्ते के मेन्यू को ट्रेन के रूट (क्षेत्र) के अनुसार डिजाइन किया जाता है ताकि यात्रियों को स्थानीय स्वाद मिल सके:साउथ और वेस्टर्न रूट्स: यदि आप दक्षिण भारत या पश्चिमी भारत के रूट पर सफर कर रहे हैं, तो नाश्ते में गरम-गरम इडली, कुरकुरा मेदू वड़ा, सूजी उपमा, पारंपरिक पोंगल, सांभर और नारियल की ताजी चटनी जैसे विकल्प मिलते हैं।नॉर्थ रूट्स: उत्तर भारतीय रूट्स पर स्टफ्ड ब्रेड पकोड़ा, कटलेट या वेज सैंडविच जैसे ऑप्शन दिए जाते हैं।कॉम्प्लीमेंट्री साइड्स: नाश्ते को और अधिक पौष्टिक व स्वादिष्ट बनाने के लिए इसके साथ में ताजे कटे हुए फल (या फ्रूट जूस), एगलेस केक/मफिन और एक बार फिर गर्म पेय (चाय/कॉफी) परोसा जाता है।3. दोपहर का भोजन (Grand Lunch): शुद्ध भारतीय फ्लेवर का तड़कावंदे भारत का लंच मेन्यू किसी बेहतरीन रेस्टोरेंट की थाली से कम नहीं होता। इसमें संतुलित और हाइजीनिक तरीके से तैयार भारतीय व्यंजनों का कॉम्बिनेशन होता है:भोजन के प्रकार (Menu Segment)शामिल मुख्य व्यंजन (Dish Details)मुख्य आहार (Main Course)गरमा-गरम बासमती चावल (पुलाव/जीरा राइस), तवा रोटी या पराठा, दाल फ्राई/दाल मखनी और मौसमी हरी सब्जी।साइड डिशेज (Sides)खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए साथ में ताजा दही (या रायता) और चटपटा आम/नींबू का अचार।वेज और नॉन-वेज विकल्पपैसेंजर्स की बुकिंग चॉइस के अनुसार पनीर की स्पेशल सब्जी (शाकाहारी के लिए) या चिकन/एग करी (मांसाहारी के लिए) के विकल्प भी कुछ रूट्स पर उपलब्ध होते हैं।मीठे में डेजर्ट (Sweet)लंच के समापन पर यात्रियों का मुंह मीठा कराने के लिए आइसक्रीम, गुलाब जामुन या कोई प्रांतीय मिठाई दी जाती है।4. शाम के स्नैक्स (High Tea) और हाइजीनिक पैकिंगशाम के सफर को मजेदार बनाने के लिए वंदे भारत में 'हाई-टी' (High Tea) का विशेष प्रबंध होता है:स्नैक बॉक्स: शाम के समय मिलने वाले विशेष बॉक्स में सूखी नमकीन (जैसे भुजिया या कचौड़ी), कोई ट्रेडिशनल मिठाई, प्रीमियम ड्राई फ्रूट्स (काजू/बादाम), फ्रूट जूस का टेट्रा पैक और चाय/कॉफी बनाने के लिए गर्म पानी व प्री-मिक्स किट दी जाती है।हाइजीन और प्रीमियम सर्विस: वंदे भारत में परोसे जाने वाले सभी प्रकार के भोजन को बेहद साफ-सुथरी, लीक-प्रूफ और सीलबंद (Air-tight) पैकेजिंग में सर्व किया जाता है। ट्रेन का आईआरसीटीसी (IRCTC) स्टाफ पूरी तरह से दस्ताने और मास्क पहनकर हाइजीनिक तरीके से सर्विस करता है।यात्री ध्यान दें: वंदे भारत एक्सप्रेस का टिकट बुक करते समय आपके पास 'फूड ऑप्शन' चुनने का विकल्प होता है। यदि आप ट्रेन का खाना नहीं लेना चाहते हैं, तो आप बुकिंग के वक्त 'No Food' का विकल्प चुनकर टिकट की कीमत में से कैटरिंग चार्ज कम करवा सकते हैं। हालांकि, ऑनबोर्ड मिलने वाले बेहतरीन स्वाद को देखते हुए अधिकांश यात्री ट्रेन के भोजन का आनंद लेना ही पसंद करते हैं।
यदि आप आज यानी 17 जुलाई 2026 को घर की रसोई के लिए घरेलू गैस सिलेंडर बुक करने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। आज भी सरकारी तेल कंपनियों ने एलपीजी गैस सिलेंडर (LPG Gas Cylinder) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। देशभर में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर और 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें पूरी तरह से स्थिर बनी हुई हैं।हालांकि, वैश्विक मोर्चे पर बढ़ते भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव ने आने वाले दिनों के लिए भारतीय उपभोक्ताओं की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आइए जानते हैं आज आपके शहर में गैस सिलेंडर के प्रमुख रेट क्या हैं और अंतरराष्ट्रीय हालात का आपकी जेब पर क्या असर पड़ सकता है:आज के प्रमुख शहरों के रेट (LPG Cylinder Rates Today)देश की राजधानी और उससे सटे दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के इलाकों में आज एलपीजी गैस सिलेंडर पुराने दामों पर ही उपलब्ध हैं:दिल्ली (Delhi): राष्ट्रीय राजधानी में 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹942 पर स्थिर है। वहीं, 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2,930 बनी हुई है।नोएडा (Noida): उत्तर प्रदेश के नोएडा में घरेलू गैस सिलेंडर ₹939.50 में मिल रहा है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर का रेट ₹2,930 है।गाजियाबाद (Ghaziabad): नोएडा की तरह गाजियाबाद में भी घरेलू एलपीजी सिलेंडर ₹939.50 और कमर्शियल सिलेंडर ₹2,930 की कीमत पर बिक रहा है।अमेरिका-ईरान तनाव: भारत की एलपीजी सप्लाई पर मंडराया खतरा?अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से गहराते राजनयिक और सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) में खलबली मचा दी है। भारत के नजरिए से यह स्थिति बेहद संवेदनशील है:स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) का संकट:भारत अपनी घरेलू एलपीजी (LPG) जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात (Import) करता है। खाड़ी देशों से आने वाले इस गैस आयात का अधिकांश हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के समुद्री मार्ग से होकर भारत पहुंचता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा आती है, तो भारत में एलपीजी की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। सप्लाई रुकने या कम होने की स्थिति में घरेलू बाजार में कीमतों पर भारी दबाव बढ़ना तय है।क्या फिर महंगी हो सकती है रसोई गैस? (Expert Analysis)ऑटो और एनर्जी सेक्टर के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) और एलपीजी की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो सरकार और तेल कंपनियों के सामने संकट खड़ा हो जाएगा:कंपनियों का बढ़ता घाटा: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को प्रत्येक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर लगभग ₹500 से ₹700 तक का भारी नुकसान (Under-recovery) उठाना पड़ रहा था।सरकार के पास दो विकल्प: इस बढ़ते घाटे को पाटने के लिए सरकार के पास या तो एलपीजी पर मिलने वाली सब्सिडी (Subsidy) का बोझ बढ़ाने का विकल्प होगा, या फिर सीधे तौर पर घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी करके इसका बोझ आम उपभोक्ताओं की जेब पर डालना होगा। लंबे समय तक वैश्विक कीमतें ऊंची रहने की स्थिति में दूसरी संभावना ज्यादा प्रबल हो जाती है।उपभोक्ताओं के लिए सलाह: फिलहाल 17 जुलाई को कीमतें न बढ़ने से आम जनता को बड़ी राहत मिली है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए आने वाले हफ्तों में एलपीजी की कीमतों में संशोधन की आशंका से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में बजट को संतुलित रखने के लिए उपभोक्ताओं को आने वाले दिनों में ईंधन की सप्लाई और कीमतों के अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।
अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें आइलैंड (Islands) की प्राकृतिक खूबसूरती, नीले समंदर और शांत माहौल से प्यार है, लेकिन फ्लाइट (Flight) में सफर करना पसंद नहीं है, तो आपके लिए एक बेहतरीन खबर है। दुनिया में कई ऐसे बेहद खूबसूरत और मशहूर आइलैंड हैं, जहां पहुंचने के लिए आपको हवाई जहाज की टिकट बुक करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।स्कॉटलैंड की रहस्यमयी पहाड़ियों से लेकर जापान के तैरते हुए मंदिरों तक, इन द्वीपों तक आप शानदार रोड ट्रिप, ऐतिहासिक पुलों या रोमांचक फेरी (Ferry) के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं। आइए जानते हैं दुनिया के इन 9 आलीशान आइलैंड्स के बारे में, जहां बिना हवाई सफर के भी एक यादगार और एडवेंचरस वेकेशन बिताया जा सकता है:1. आइल ऑफ स्काई, स्कॉटलैंड (Isle of Skye, Scotland)स्कॉटलैंड के उत्तर-पश्चिम में बसा यह आइलैंड अपनी जादुई खूबसूरती के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां की ऊंची हरी-भरी पहाड़ियां, 'फेयरी पूल्स' और 'ओल्ड मैन ऑफ स्टोर' के नजारे दिल जीत लेते हैं।कैसे पहुंचें: आप ग्लासगो (Glasgow) या इनवरनेस शहर से कार किराए पर लेकर एक बेहतरीन रोड ट्रिप का आनंद लेते हुए 'स्काई ब्रिज' (Skye Bridge) पार करके सीधे यहां पहुंच सकते हैं। इसके अलावा मैलेग से फेरी का विकल्प भी मौजूद है।खर्च/टोल: स्काई ब्रिज पार करने का कोई भी टोल टैक्स या शुल्क नहीं लगता है।2. मोंट सेंट मिशेल, फ्रांस (Mont Saint-Michel, France)फ्रांस के नॉरमैंडी (Normandy) तट पर स्थित यह एक चट्टानी द्वीप है, जिसके ऊपर बना मध्यकालीन मठ (Monastery) किसी परियों की कहानी जैसा दिखता है। ज्वार-भाटे (Tides) के दौरान इसका नजारा देखने लायक होता है।कैसे पहुंचें: पेरिस से ट्रेन या कार के जरिए आप सीधे इस द्वीप के मुहाने तक पहुंच सकते हैं। मुख्य मुख्य भूमि से द्वीप को जोड़ने वाली एक सड़क (कॉजवे) बनी हुई है। अपनी गाड़ी पार्किंग में खड़ी करने के बाद आप पैदल या मुफ्त शटल बस से द्वीप के भीतर जा सकते हैं।खर्च/टोल: शटल बस पूरी तरह मुफ्त है, लेकिन आपको कार पार्किंग का चार्ज देना होगा।3. प्रिंस एडवर्ड आइलैंड, कनाडा (Prince Edward Island, Canada)यह द्वीप अपनी लाल रेत वाले खूबसूरत बीच, ऐतिहासिक लाइटहाउस (Lighthouses), शांत गांवों और बेहतरीन समुद्री भोजन के लिए जाना जाता है।कैसे पहुंचें: यह आइलैंड दुनिया के सबसे लंबे पुलों में से एक 'कॉन्फेडरेशन ब्रिज' (Confederation Bridge) के जरिए मुख्य भूमि से जुड़ा है। आप खुद कार ड्राइव करके यहां पहुंच सकते हैं।खर्च/टोल: आइलैंड में प्रवेश करते समय कोई चार्ज नहीं देना होता, लेकिन वापस लौटते समय आपको पुल का टोल टैक्स चुकाना पड़ता है।फेरी और नाव के जरिए पहुंचने वाले शानदार आइलैंडआइलैंड और देशमुख्य आकर्षण (Key Attractions)कैसे पहुंचें? (Route)अनुमानित किराया/खर्चमियाजिमा, जापान (Miyajima, Japan)पानी में तैरता हुआ ऐतिहासिक 'टोरी गेट' (Torii Gate), प्राचीन मंदिर और इंसानों के बीच शांति से घूमते हुए हिरण।हिरोशिमा के पास स्थित 'मियाजिमागुची' स्टेशन से महज 10 मिनट की एक छोटी सी फेरी राइड लेकर।लगभग 200 से 300 जापानी येनमैकिनाक आइलैंड, अमेरिका (Mackinac Island, USA)प्रदूषण मुक्त शांत माहौल और 19वीं सदी की पुरानी ऐतिहासिक इमारतें। यहाँ कार चलाना पूरी तरह बैन है।मिशिगन राज्य के मैकिना सिटी या सेंट इग्नेस से नियमित रूप से चलने वाली पैसेंजर फेरी के जरिए।लगभग 35 से 45 अमेरिकी डॉलर (राउंड ट्रिप)वैंकूवर आइलैंड, कनाडा (Vancouver Island, Canada)घने प्राचीन वर्षावन (Rainforests), प्रशांत महासागर का खूबसूरत किनारा और समुद्र में व्हेल मछली देखने का रोमांच।वैंकूवर शहर के मुख्य तट से 'बीसी फेरीज' (BC Ferries) की बड़ी जहाजों के जरिए, जिसमें आप अपनी कार भी ले जा सकते हैं।लगभग 20 से 70 कनाडाई डॉलरआइल ऑफ वाइट, इंग्लैंड (Isle of Wight, England)खूबसूरत रेतीले समुद्र तट, समंदर के बीच खड़ी सफेद रंग की विशाल चट्टानें (The Needles) और ब्रिटिश कस्बे।इंग्लैंड के दक्षिणी तट पर स्थित पोर्ट्समाउथ, साउथेम्प्टन या लाइमिंगटन शहरों से सीधे कार-फेरी लेकर।लगभग 20 से 35 ब्रिटिश पाउंड से शुरू5. मोजाम्बिक आइलैंड, मोजाम्बिक (Mozambique Island)मोजाम्बिक के उत्तरी तट पर हिंद महासागर के बीच बसा यह एक छोटा लेकिन ऐतिहासिक द्वीप है, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में भी शामिल है। यहां पुर्तगाली वास्तुकला, पुराने किले और प्राचीन चर्च देखने को मिलते हैं।कैसे पहुंचें: सबसे पहले मोजाम्बिक के 'नामपुला' (Nampula) शहर पहुंचें। वहां से सड़क मार्ग के जरिए आगे बढ़ते हुए आप समुद्र के ऊपर बने मोजाम्बिक आइलैंड ब्रिज को पार करके सीधे आइलैंड में दाखिल हो सकते हैं।खर्च/टोल: इस विशाल समुद्री पुल को पार करने का अलग से कोई भी अतिरिक्त चार्ज नहीं लिया जाता।टैवल टिप 2026: इन जगहों पर जाने से पहले फेरी और टोल टैक्स की लाइव बुकिंग और समय-सारणी (Timetable) को उनके आधिकारिक पोर्टल्स पर जरूर चेक कर लें, क्योंकि मौसम के मिजाज या पीक टूरिस्ट सीजन के अनुसार फेरी के फेरों में बदलाव होता रहता है। कार के शौकीनों के लिए इन आइलैंड्स की यात्रा एक लाइफटाइम रोड ट्रिप का अनुभव देती है।
डिजिटल युग में ऑनलाइन बैंकिंग, शॉपिंग या किसी भी ऐप पर रजिस्ट्रेशन, लॉगिन, अकाउंट रिकवरी और ट्रांजैक्शन कंफर्मेशन के लिए सबसे ज्यादा मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में वन-टाइम पासवर्ड यानी ओटीपी (OTP) सुरक्षा का सबसे बड़ा जरिया माना जाता रहा है। लेकिन अब टेलीकॉम दिग्गज वोडाफोन (Vodafone) वेरिफिकेशन के इस पारंपरिक तरीके को बदलने के लिए तकनीक को एक कदम आगे ले गई है।वोडाफोन ने हाल ही में वैश्विक स्तर पर 'नंबर वेरिफाई 2.0' (Number Verify 2.0) तकनीक को लॉन्च किया है। इस अत्याधुनिक तकनीक के आने के बाद अब यूज़र्स को बार-बार आने वाले ओटीपी के झंझट और एसएमएस के इंतजार से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह नई तकनीक क्या है, कैसे काम करती है और एसएमएस ओटीपी की तुलना में यह कितनी सुरक्षित है:कैसे काम करती है 'नंबर वेरिफाई 2.0' तकनीक? (The Tech Behind It)नंबर वेरिफाई 2.0 तकनीक बिना किसी वन-टाइम पासकोड (OTP) के यूज़र के मोबाइल फोन नंबर को वेरिफाई करने का एक बेहद आसान, तेज और अत्यधिक सुरक्षित विकल्प प्रदान करती है:सिम और डिवाइस का सीधा मिलान: यह तकनीक मोबाइल नेटवर्क (Mobile Network) की आंतरिक क्षमता का सीधा इस्तेमाल करती है। यह बिना किसी बाहरी कोड के बैकएंड पर ही तुरंत वेरिफाई कर लेती है कि ऐप या वेबसाइट पर जिस फोन नंबर से लॉगिन करने का प्रयास किया जा रहा है, वह उस समय डिवाइस में मौजूद सक्रिय सिम (SIM Card) से जुड़ा है या नहीं।क्विक यूजर एक्सपीरियंस: इस प्रक्रिया में यूज़र को कोई भी कोड टाइप नहीं करना पड़ता। बस स्क्रीन पर एक बार अपनी सहमति (Consent) देनी होती है और मोबाइल नेटवर्क तुरंत आपका फोन नंबर संबंधित सर्विस प्रोवाइडर (जैसे बैंक, फिनटेक ऐप या ऑनलाइन रिटेलर) के साथ सुरक्षित रूप से साझा कर देता है।एसएमएस ओटीपी (SMS OTP) क्यों बन चुका है आज के दौर में असुरक्षित?वर्तमान समय में मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन के लिए पूरी दुनिया में एसएमएस ओटीपी को ही डिफॉल्ट तरीका माना जाता है। लेकिन वोडाफोन के अनुसार, यह मॉडर्न साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud) के खतरों और यूज़र्स की उम्मीदों के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहा है:असली ग्राहक की पहचान नहीं: एसएमएस ओटीपी केवल इस बात की पुष्टि करता है कि किसी व्यक्ति ने मोबाइल नंबर पर भेजा गया कोड ऐप में दर्ज कर दिया है। यह कभी साबित नहीं कर पाता कि ओटीपी दर्ज करने वाला व्यक्ति ही उस सिम या नंबर का असली मालिक है।साइबर हमलों का खतरा: इसके कारण व्यवसायों और आम उपभोक्ताओं को फिशिंग (Phishing) और सोशल इंजीनियरिंग जैसे गंभीर साइबर फ्रॉड का सामना करना पड़ता है। आज के दौर में हैकर्स और ऑटोमैटेड बॉट्स बड़ी मात्रा में फर्जी ओटीपी रिक्वेस्ट ट्रिगर करके लोगों के बैंक खाते तक साफ कर देते हैं।आज के खतरों के लिए नहीं बना था OTP — जोहाना वुड (API Director)वोडाफोन में नेटवर्क APIs की डायरेक्टर जोहाना वुड ने इस नई तकनीक के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि, एसएमएस पर आधारित ओटीपी सिस्टम पिछले एक दशक से अधिक समय से पूरी दुनिया में डिफ़ॉल्ट रहा है, लेकिन इसे आज के आधुनिक और जटिल साइबर खतरों वाले माहौल से निपटने के लिए कभी डिज़ाइन नहीं किया गया था। नंबर वेरिफाई 2.0 इस पूरी व्यवस्था को बदल देता है। यह डेवलपर्स को फोन नंबर वेरिफाई करने का एक ऐसा जरिया देता है जो न सिर्फ यूज़र के लिए बेहद तेज और आसान है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी अभेद्य है।किन देशों में सबसे पहले लॉन्च हुई यह तकनीक?वोडाफोन की इस अत्याधुनिक नंबर वेरिफाई 2.0 तकनीक को वैश्विक शुरुआत के तहत अभी यूरोपीय देशों में रोल आउट किया गया है:शुरुआती देश: यह तकनीक वर्तमान में जर्मनी (Germany), नीदरलैंड्स (Netherlands) और यूनाइटेड किंगडम (UK) में आधिकारिक तौर पर लाइव कर दी गई है।प्लेटफॉर्म सपोर्ट: नंबर वेरिफाई 2.0 की यह सेवा सबसे पहले एंड्रॉयड (Android) ऑपरेटिंग सिस्टम वाले डिवाइसेज पर रोल आउट हो रही है, जिसे भविष्य में अन्य प्लेटफॉर्म्स के लिए भी विस्तारित किया जाएगा।इस तकनीक के व्यापक प्रसार के बाद आने वाले समय में पूरी दुनिया में डिजिटल ट्रांजैक्शन और ऐप लॉगिन का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है।
इस समय इनकम टैक्स रिटर्न (ITR - Income Tax Return) दाखिल करने का सीजन पूरे शबाब पर है और देश भर के लाखों नौकरीपेशा (Salaried) लोग अपना रिटर्न भर रहे हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि आईटीआर फाइल करना एक बेहद जिम्मेदारी भरा काम है, जिसमें की गई एक छोटी-सी लापरवाही भी आपके लिए बाद में बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है।अक्सर लोग अंतिम तारीखों की आपाधापी में गलत जानकारी दे देते हैं, अपनी किसी अतिरिक्त आय को छिपा लेते हैं या फिर दस्तावेजों का सही मिलान नहीं करते। ऐसा करने पर आयकर विभाग (Income Tax Department) की ओर से भारी-भरकम टैक्स नोटिस आ सकता है, साथ ही आपको अतिरिक्त टैक्स, भारी ब्याज और पेनल्टी (जुर्माना) भी भरनी पड़ सकती है। आइए टैक्स विशेषज्ञों के हवाले से समझते हैं उन 5 आम गलतियों के बारे में जिनसे आपको हर हाल में बचना चाहिए:1. सिर्फ Form-16 पर निर्भर रहने की भूल (The Form-16 Myth)ज्यादातर सैलरीड कर्मचारी यह सोचते हैं कि कंपनी से मिले Form-16 में उनकी टैक्स से जुड़ी सारी जानकारियां मौजूद हैं, इसलिए वे केवल इसी के आधार पर तुरंत आईटीआर फाइल कर देते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सबसे आम और बड़ी गलतियों में से एक है।क्या करें: रिटर्न सबमिट करने से पहले अपने इनकम टैक्स पोर्टल से Annual Information Statement (AIS) और Form 26AS को डाउनलोड करके उसका मिलान जरूर करें।क्यों है जरूरी: कई बार बैंक से मिलने वाला ब्याज, शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड के ट्रांजैक्शन और आपका कटा हुआ टीडीएस (TDS) इन फॉर्म्स में दर्ज होता है, जो आपके Form-16 में शामिल नहीं हो पाता।2. कमाई के अन्य स्रोतों (Extra Income) को छिपानाआईटीआर भरते समय केवल अपनी मुख्य सैलरी (वेतन) की जानकारी देना काफी नहीं है। आयकर विभाग के पास आपके हर बड़े वित्तीय लेनदेन का पूरा डेटा होता है। रिटर्न दाखिल करते समय नीचे दी गई आय को भी अनिवार्य रूप से शामिल करें:बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और सेविंग अकाउंट से मिलने वाला सालाना ब्याज।शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड्स को बेचने से हुआ कैपिटल गेन (Capital Gain)।मकान या दुकान से आने वाली किराये की आय (Rental Income)।पार्ट-टाइम काम, कंसल्टेंसी या फ्रीलांसिंग के जरिए हुई कमाई।याद रखें, किसी भी वैध आय को छिपाने का सीधा मतलब है टैक्स चोरी की श्रेणी में आना, जिस पर विभाग तुरंत एक्शन लेता है।3. बिना सोचे-समझे गलत टैक्स रिजीम चुननाआज के समय में टैक्सपेयर्स के पास दो विकल्प मौजूद हैं— पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) और नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime)।तुलना है जरूरी: कई कर्मचारी बिना अपनी कटौतियों और निवेश की गणना किए ही किसी भी एक रिजीम का चुनाव कर लेते हैं। इससे वे टैक्स छूट का लाभ लेने से चूक जाते हैं और उन्हें ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ता है।एक्सपर्ट टिप: आईटीआर फॉर्म सबमिट करने से पहले टैक्स कैलकुलेटर के जरिए दोनों व्यवस्थाओं में अपनी टैक्स देनदारी (Tax Liability) की तुलना जरूर कर लें।4. बिना सबूतों के झूठी कटौतियों (Deductions) का दावा करनाकुछ लोग अपने टैक्स को गैर-कानूनी तरीके से बचाने के लिए बिना किसी निवेश के भी मनगढ़ंत कटौतियों का क्लेम कर देते हैं।दस्तावेज होना अनिवार्य: धारा 80C (PPF, LIC, ट्यूशन फीस), धारा 80D (मेडिक्लेम), या होम लोन के ब्याज पर छूट का दावा केवल तभी करें, जब आपके पास उसके वैध और पक्के प्रमाण (Receipts) मौजूद हों।अस्वीकार होने का खतरा: यदि स्क्रूटनी के दौरान आपके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं मिलता, तो विभाग आपके दावों को खारिज कर देगा और आपको पेनल्टी व ब्याज सहित टैक्स चुकाना होगा।5. गलत बैंक डिटेल भरना और ई-वेरिफिकेशन (E-Verification) भूल जानारिफंड अटकने का डर: आईटीआर भरते समय अपने एक्टिव बैंक खाते का नंबर और IFSC कोड बेहद सावधानी से दर्ज करें। यदि बैंक डिटेल्स में एक भी अंक गलत हुआ, तो आपका टैक्स रिफंड (Tax Refund) अधर में लटक सकता है। साथ ही अपने खाते का 'प्री-वैलिडेट' होना भी सुनिश्चित करें।ई-वेरिफिकेशन है सबसे जरूरी: कई लोग समझते हैं कि आईटीआर फॉर्म सबमिट होते ही काम पूरा हो गया। लेकिन नियम के अनुसार, रिटर्न दाखिल करने के बाद तय समय सीमा (प्रचलित नियमों के तहत 30 दिन) के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन (E-Verification) करना अनिवार्य है। यदि आप इसे सत्यापित नहीं करते हैं, तो आपके आईटीआर को अमान्य (Invalid) मान लिया जाएगा।
मई में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ऐतिहासिक जीत और राज्य में पहली बार बीजेपी की सरकार बनने के बाद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) पश्चिम बंगाल के अपने पहले विस्तृत दौरे पर आ रहे हैं। गृह मंत्री 17 से 19 जुलाई 2026 तक राज्य के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे।इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान उनका मुख्य फोकस सीमा सुरक्षा (Border Security), सुशासन, राज्य की कानून-व्यवस्था (Law and Order) और बुनियादी विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर रहेगा। राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों ही दृष्टिकोण से अमित शाह के इस दौरे को बेहद खास माना जा रहा है। आइए जानते हैं गृह मंत्री के इस 3 दिवसीय दौरे का पूरा शेड्यूल और मुख्य कार्यक्रम:18 जुलाई (शनिवार): सिलीगुड़ी में BSF जवानों से संवाद और सीमा मामलों पर बैठकदौरे के दूसरे दिन गृह मंत्री उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी में रहेंगे, जहां वे सुरक्षा बलों का हौसला बढ़ाएंगे और सीमा प्रबंधन की समीक्षा करेंगे:सीमा चौकी का दौरा: 18 जुलाई की सुबह अमित शाह सिलीगुड़ी में सीमा सुरक्षा बल (BSF) की जुमागाछ सीमा चौकी का दौरा करेंगे। यहां वे 18वीं बटालियन बॉर्डर आउटपोस्ट पर तैनात BSF के जवानों से सीधा संवाद (Interaction) करेंगे।विकास कार्यों की सौगात: इस दौरान वे सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए BSF के विभिन्न विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे।बॉर्डर मामलों पर महा-बैठक: दोपहर के समय गृह मंत्री एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसका मुख्य विषय ‘पश्चिम बंगाल में बॉर्डर से जुड़े मामले’ होगा। इसमें घुसपैठ रोकने और सीमा सुरक्षा को अभेद्य बनाने पर रणनीति तैयार होगी।नए कानूनों और रजिस्ट्रेशन पर समीक्षा: इसके बाद वे राज्य में लागू किए गए तीन नए कानूनों के पूर्ण कार्यान्वयन (Implementation) की समीक्षा करेंगे। शाम के वक्त वे बंगाल में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (Birth and Death Registration) से जुड़े मामलों की प्रगति पर भी अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।19 जुलाई (रविवार): कोलकाता में कानून-व्यवस्था की समीक्षा और अमूल प्लांट की सौगातदौरे के अंतिम दिन गृह मंत्री पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता पहुंचेंगे, जहां कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होना है:कानून-व्यवस्था पर हाई-लेवल मीटिंग: कोलकाता पहुंचते ही अमित शाह सबसे पहले पश्चिम बंगाल की वर्तमान कानून-व्यवस्था की स्थिति पर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में राज्य की सुरक्षा व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और प्रशासनिक चुस्ती-दुरुस्ती जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गहन चर्चा की जाएगी।‘म्यूजियम ऑफ वर्ड्स’ का उद्घाटन: प्रशासनिक बैठकों के बाद गृह मंत्री अलीपुर स्थित नेशनल लाइब्रेरी (National Library, Alipore) जाएंगे। वहां वे भारतीय भाषाओं, समृद्ध साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित ‘म्यूजियम ऑफ वर्ड्स’ (Museum of Words) के पहले चरण का आधिकारिक उद्घाटन करेंगे।अमूल डेयरी के दही प्लांट का शिलान्यास: अपने दौरे के समापन पर अमित शाह न्यू टाउन स्थित बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर (Biswa Bangla Convention Center) पहुंचेंगे। यहाँ वे अमूल डेयरी (Amul Dairy) के नए दही प्लांट का शिलान्यास करेंगे। इस बड़ी परियोजना से राज्य के डेयरी उद्योग को एक नई दिशा मिलने, दुग्ध उत्पादक किसानों की आय बढ़ने और स्थानीय स्तर पर रोजगार (Employment) के सैकड़ों नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है।पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद केंद्र और राज्य के बीच विकास और सुरक्षा के तालमेल को मजबूत करने के लिहाज से गृह मंत्री अमित शाह के इस दौरे को बेहद निर्णायक माना जा रहा है।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने देश की लोकतांत्रिक और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े दो बेहद महत्वपूर्ण मामलों पर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने एक तरफ जहां तमिलनाडु में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) समेत कुल 13 याचिकाओं पर कार्यवाही को पूरी तरह बंद कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से संबंधित याचिकाओं के समयबद्ध निस्तारण के लिए विशेष पीठ गठित करने वाली जनहित याचिका (PIL) पर विचार करने से साफ इनकार कर दिया है।प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने इन मामलों की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणियां की हैं। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और शीर्ष अदालत का अंतिम रुख:1. मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी 13 याचिकाएं बंदतमिलनाडु में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) कराने के निर्वाचन आयोग (Election Commission) के फैसले के खिलाफ डीएमके (DMK) ने पिछले साल 3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में आयोग के इस कदम को असंवैधानिक, मनमाना और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा बताया गया था।वकील की दलील: सुनवाई के दौरान डीएमके के संगठन सचिव आरएस भारती की ओर से पेश हुए अधिवक्ता विवेक सिंह ने पीठ के समक्ष दलील दी कि अब इन याचिकाओं पर आगे सुनवाई या किसी नए फैसले की आवश्यकता नहीं रह गई है।बिहार फैसले का हवाला: वकील ने स्पष्ट किया कि हाल ही में 27 मई को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना विस्तृत फैसला सुना दिया है। उस फैसले में शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग के इस विशेष अधिकार को पूरी तरह से वैध और बरकरार रखा था।कोर्ट का आदेश: बिहार मामले में आए नजीर (Precedent) को स्वीकार करते हुए, सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने इस मुद्दे से संबंधित सभी 13 याचिकाओं को आधिकारिक तौर पर निस्तारित (डिस्पोज) करते हुए कार्यवाही बंद कर दी।2. चुनाव याचिकाओं के जल्द निपटारे वाली PIL पर सुनवाई से इनकारसुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक अन्य जनहित याचिका भी पेश हुई, जिसमें अनुरोध किया गया था कि मद्रास हाईकोर्ट को निर्देश दिया जाए कि वह 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से संबंधित लंबित 54 चुनाव याचिकाओं (Election Petitions) का शीघ्र और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करे।क्या था मामला: याचिकाकर्ता के. वेंकटचलपति की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी. एस. नायडू और अधिवक्ता समीर मलिक ने दलील दी कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RPA) की धारा 86(7) के तहत चुनाव से जुड़े विवादों का छह महीने के भीतर निपटारा हो जाना चाहिए।चुनाव परिणाम: याचिका के अनुसार, इस साल 23 अप्रैल 2026 को हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) ने बड़ी जीत हासिल की थी। इसके बाद 4 मई को घोषित परिणामों की वैधता को चुनौती देते हुए 3 जून से 18 जून के बीच विभिन्न क्षेत्रों से 54 चुनाव याचिकाएं दायर की गईं, जो लंबे समय से लंबित हैं।गलत नजीर स्थापित होगी - सीजेआई सूर्यकांत:जब याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मद्रास हाईकोर्ट को एक विशेष पीठ (Special Bench) गठित करने का निर्देश देने की मांग की, तो प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। सीजेआई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, अगर सुप्रीम कोर्ट हर हाईकोर्ट को इस तरह के प्रशासनिक निर्देश देने लगेगा, तो इससे न्यायिक व्यवस्था में एक गलत नजीर (Wrong Precedent) स्थापित होगी।मद्रास हाईकोर्ट जाने की मिली छूटसर्वोच्च अदालत ने भले ही इस जनहित याचिका पर सीधे विचार करने से इनकार कर दिया, लेकिन पीठ ने याचिकाकर्ता के कानूनी अधिकारों को सुरक्षित रखा है। अदालत ने याचिकाकर्ता को यह पूरी छूट (Liberty) प्रदान की है कि वे अपनी इस मांग और आवश्यक राहत के लिए सीधे मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) के मुख्य न्यायाधीश का रुख कर सकते हैं।इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि चुनाव आयोग के पास मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार है और उच्च न्यायालयों के आंतरिक प्रशासनिक मामलों में शीर्ष अदालत सीधे हस्तक्षेप कर कोई गलत परंपरा शुरू नहीं करना चाहती।
जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के डोडा जिले से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की टीम पर हमला करने और सर्विस राइफल छीनने के प्रयास के दौरान गोली लगने से एक युवक की मौत हो गई। इस हिंसक झड़प में तीन पुलिसकर्मी भी गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं।अधिकारियों के मुताबिक, यह घटना डोडा जिले के भद्रवाह (Bhaderwah) इलाके की है। पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद स्पष्ट कर दिया है कि इस पूरी घटना में कोई भी आतंकी एंगल (No Terror Angle) शामिल नहीं है। आइए जानते हैं क्या है पूरी घटना और इसके पीछे की मुख्य वजह:संदिग्ध गतिविधि की सूचना पर नाकेबंदी के दौरान हुआ हमलापुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, डोडा जिले के ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। इसी इनपुट के आधार पर एसओजी (SOG) की एक विशेष टीम क्षेत्र में लगातार निगरानी और गश्त कर रही थी।कहाँ हुई घटना: शुक्रवार को भद्रवाह कस्बे से लगभग 35 किलोमीटर दूर जाई-गांडोह सड़क (Jai-Gandoh Road) पर पुलिस ने एक नाका लगाया हुआ था।देर रात की मुठभेड़: रात करीब 11:30 बजे SOG की टीम ने दो संदिग्ध युवकों को रुकने का इशारा किया। पुलिस टीम द्वारा रोके जाने पर दोनों युवकों ने अचानक पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला बोल दिया।राइफल छीनने की कोशिश और हाथापाई में चली गोलीपुलिस अधिकारियों ने बताया कि जब टीम ने दोनों संदिग्धों को पूछताछ के लिए रोका, तो उनमें से एक युवक ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट शुरू कर दी और ऑन-ड्यूटी जवान की सर्विस राइफल (Service Rifle) छीनने की कोशिश की।हाथापाई में चली गोली: राइफल छीनने की कोशिश के दौरान एसओजी जवानों और युवकों के बीच काफी देर तक हिंसक हाथापाई हुई। इसी छीनाझपटी के दौरान आत्मरक्षा और हथियार को बचाने के लिए एसओजी के एक जवान की बंदूक से गोली चल गई, जो सीधे तौर पर राइफल छीनने का प्रयास कर रहे युवक को जा लगी।इस गंभीर हाथापाई में 3 पुलिसकर्मी भी बुरी तरह घायल हो गए, जिनमें से एक जवान के सिर में काफी गंभीर चोटें आई हैं। घटना का फायदा उठाकर दूसरा संदिग्ध युवक अंधेरे का लाभ उठाते हुए मौके से फरार होने में कामयाब रहा, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।अस्पताल में इलाज के दौरान युवक ने तोड़ा दमघटना के तुरंत बाद पुलिस प्रशासन ने सभी घायल पुलिसकर्मियों और गोली लगने से जख्मी हुए युवक को नजदीकी भद्रवाह उप-जिला अस्पताल (Sub-District Hospital) पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद दोनों पक्षों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत डोडा सरकारी मेडिकल कॉलेज (Doda GMC) रेफर कर दिया गया।हालांकि, डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद इलाज के दौरान गोली लगने वाले युवक ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने मृतक की पहचान 30 वर्षीय आरिफ हुसैन के रूप में की है, जो चीका गांव का निवासी बताया जा रहा है। घटना स्थल मृतक के मूल घर से लगभग 25 किलोमीटर दूर है।शुरुआती जांच में मवेशी तस्करी का अंदेशा (Cattle Smuggling Link)डोडा पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी है। पुलिस के उच्च अधिकारियों के मुताबिक, मामले में किसी भी तरह के आतंकी संगठन या उग्रवाद का हाथ नहीं है। शुरुआती तफ्तीश और साक्ष्यों से यह संकेत मिलते हैं कि मृतक और उसका फरार साथी क्षेत्र में मवेशियों की अवैध तस्करी (Cattle Smuggling) के धंधे में शामिल थे और रात के अंधेरे में इसी इरादे से जा रहे थे। पुलिस फरार दूसरे युवक की तलाश के साथ-साथ मामले के अन्य पहलुओं की भी गहनता से जांच कर रही है।
भारतीय डाक (India Post) के करोड़ों ग्राहकों और इसकी डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने वाले आम नागरिकों के लिए एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अब यदि आप स्पीड पोस्ट (Speed Post), पार्सल (Parcel) या किसी अन्य डाक सेवा की बुकिंग कराने के बाद उसे किन्हीं कारणों से रद्द (Cancel) करते हैं, तो आपका पैसा बिल्कुल नहीं डूबेगा।डाक विभाग ने अपने पारंपरिक नियमों में एक ऐतिहासिक संशोधन करते हुए बुकिंग कैंसल होने पर डाक शुल्क (Postage Fee Refund) वापस करने की आधिकारिक अनुमति दे दी है। इंडिया पोस्ट का यह कदम उसकी डाक सेवाओं को निजी कूरियर कंपनियों की तरह अधिक कस्टमर-फ्रेंडली, आधुनिक और पारदर्शी (Transparent) बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि क्या है नया नोटिफिकेशन और आप कैसे पा सकते हैं अपना रिफंड:ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग पर कैसे मिलेगा रिफंड? (New Rules)इंडिया पोस्ट द्वारा जारी किए गए आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, ग्राहकों को ऑनलाइन और ऑफलाइन (काउंटर) दोनों ही माध्यमों से की गई बुकिंग पर रिफंड का लाभ मिलेगा, जिसके नियम कुछ इस प्रकार हैं:वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप यूज़र्स (Online Booking): जिन भेजने वालों (Senders) ने इंडिया पोस्ट के ऑफिशियल वेब पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए खुद से पोस्टल आइटम की बुकिंग की है, वे पोस्ट ऑफिस द्वारा उस आइटम को फिजिकल रूप से स्वीकार (Accept) किए जाने से पहले अपनी बुकिंग ऑनलाइन कैंसल कर सकते हैं और पूरे पोस्टेज रिफंड का क्लेम (दावा) कर सकते हैं।पोस्ट ऑफिस काउंटर बुकिंग (Offline Booking): यदि आपने सीधे पोस्ट ऑफिस काउंटर पर जाकर पार्सल या स्पीड पोस्ट बुक कराया है, तो भेजने वाला संबंधित पोस्ट ऑफिस में जाकर बुकिंग कैंसल करने का लिखित अनुरोध कर सकता है। इसके अलावा, यदि पोस्ट ऑफिस स्टाफ से बुकिंग के दौरान गलत डेटा एंट्री (जैसे नाम या पते की गलती) हो जाती है, तो विभाग बुकिंग के ही दिन (Same Day) उसे कैंसल करके रिफंड प्रोसेस कर सकता है।सेवाओं के निलंबन और इंटरनेशनल पार्सल पर भी राहतडाक विभाग द्वारा नोटिफाई किए गए नए नियमों में अंतरराष्ट्रीय डाक सेवाओं और आपातकालीन स्थितियों को लेकर भी कई अहम बदलाव किए गए हैं:विशेष शुल्क और एयर सरचार्ज की वापसी: यदि प्रशासनिक निर्देशों या किसी आपात स्थिति के कारण डाक सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित (Suspend) किया जाता है, तो भेजने वाले को पोस्टेज फीस के साथ-साथ विशेष फीस (Special Fee) और एयर सरचार्ज (Air Surcharge) भी वापस किया जाएगा।इंटरनेशनल पार्सल वापस मंगाने की सुविधा: नए नियम भेजने वाले को किसी भी कारण से बुकिंग ऑफिस से ‘अकाउंटेबल आउटवर्ड इंटरनेशनल पोस्टल आइटम’ (यानी वह अंतरराष्ट्रीय पार्सल जिसकी ट्रैकिंग संभव है) को रास्ते से ही वापस मंगाने की अनुमति देते हैं।विदेशी डेस्टिनेशन से रीडायरेक्शन: नए नियमों के तहत अंतरराष्ट्रीय आइटम भेजने वाले ग्राहकों को विदेशी डेस्टिनेशन (Foreign Destination) से भी अपना पार्सल वापस मंगाने या उसे किसी दूसरे पते पर भेजने (Redirect) की अनुमति होगी, जो कि उस समय संबंधित देश के डाक प्रशासन की पॉलिसी के अधीन रहेगा।पार्सल रीडायरेक्ट (Redirect) करने पर अब नहीं लगेगी कोई फीस?नोटिफिकेशन में ग्राहकों को एक और शानदार सुविधा दी गई है। अब ‘अकाउंटेबल इनवर्ड इंटरनेशनल पोस्टल आइटम’ (विदेश से आने वाले ट्रैकेबल पार्सल) को पाने वाला व्यक्ति डिलीवरी ऑफिस में आवश्यक पोस्टेज फीस देकर उसे किसी दूसरे पते पर रीडायरेक्ट करा सकता है।मुफ्त रीडायरेक्शन की शर्त:यदि पार्सल पाने वाला व्यक्ति जिस नए पते पर पार्सल को दोबारा भेजना (Redirect) चाहता है, वह पता उसी पोस्ट ऑफिस के डिलीवरी एरिया (कार्यक्षेत्र) के भीतर आता है, तो इसके लिए डाक विभाग द्वारा ग्राहक से कोई भी अतिरिक्त फीस नहीं ली जाएगी।पोस्टल आइटम की बुकिंग कैंसिल होने पर रिफंड की पूरी प्रक्रिया समय-समय पर डाक विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार संचालित होगी। इस नए बदलाव से ग्राहकों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
सनातन धर्म और वैदिक ज्योतिष में कोई भी मांगलिक कार्य, विशेषकर विवाह संस्कार करने से पहले ग्रहों की स्थिति और शुभ समय (मुहूर्त) का आकलन करना अनिवार्य माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्तमान में शादियों और शुभ कार्यों पर पूरी तरह से ब्रेक लग चुका है।देवताओं के गुरु बृहस्पति (Jupiter) का उदित रहना किसी भी मांगलिक कार्य की सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जब गुरु ग्रह अस्त होते हैं, तो विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत और नामकरण जैसे संस्कारों के शुभ फल प्राप्त नहीं होते हैं। द्रिक पंचांग (Drik Panchang) के अनुसार, 15 जुलाई 2026 को शाम 07 बजकर 59 मिनट पर गुरु ग्रह अस्त हो चुके हैं, जो अब 12 अगस्त 2026 को सुबह 05 बजकर 03 मिनट पर दोबारा उदय होंगे।हालांकि, अगस्त में गुरु के उदय होने के बाद भी शादियों का सीजन तुरंत शुरू नहीं हो पाएगा, क्योंकि इसी दौरान चातुर्मास (Chaturmas) का प्रारंभ होने जा रहा है। आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे का पौराणिक गणित और साल 2026 के आखिरी महीनों में विवाह के कौन-कौन से शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं:चातुर्मास में क्यों नहीं होंगी शादियां? (Devshayani Ekadashi Rule)हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है, जिसका समापन कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी के दिन होता है।भगवान विष्णु की योगनिद्रा: इस साल 25 जुलाई 2026 से चातुर्मास प्रारंभ हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों में सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसे देवताओं का शयनकाल कहा जाता है।शुभ कार्यों पर रोक क्यों?: देवताओं के शयनकाल में होने के कारण इस अवधि में किए गए किसी भी मांगलिक कार्य को दैवीय आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता, जिससे उनके फल निष्फल हो जाते हैं।साधना का समय: चातुर्मास के इस समय को भौतिक सुखों या उत्सवों के बजाय आध्यात्मिक उन्नति, स्नान-दान, कथा-श्रवण, व्रत, जप और तप साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।20 नवंबर से फिर शुरू होगा शादियों का सीजन (Devutthana Ekadashi)द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक माह की देवउठनी एकादशी 20 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।देवताओं का जागरण: इस पावन तिथि पर भगवान विष्णु चार महीने की लंबी योगनिद्रा से जागृत होंगे और पुनः संसार का कार्यभार संभालेंगे।शहनाइयों की गूंज: चूंकि देवउठनी एकादशी को 'अबूझ मुहूर्त' भी माना जाता है, इसलिए 20 नवंबर 2026 से ही देश भर में विवाह और अन्य सभी रुके हुए मांगलिक कार्य पूरी भव्यता के साथ फिर से शुरू हो जाएंगे। यानी शहनाइयों की गूंज सुनने के लिए अब सीधे नवंबर महीने का इंतजार करना होगा।नवंबर और दिसंबर 2026 के विवाह मुहूर्त की पूरी लिस्ट (Shubh Muhurat Dates)यदि आप या आपके परिवार में कोई इस साल के अंत में विवाह के बंधन में बंधने की योजना बना रहा है, तो पंचांग के अनुसार नवंबर और दिसंबर 2026 में केवल यही तिथियां विवाह के लिए शुद्ध और शुभ मानी गई हैं:नवंबर 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त:नवंबर के महीने में देवउठनी एकादशी के बाद शादियों के लिए केवल 4 शुभ दिन मिल रहे हैं:21 नवंबर (शनिवार)24 नवंबर (मंगलवार)25 नवंबर (बुधवार)26 नवंबर (गुरुवार)दिसंबर 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त:साल के आखिरी महीने दिसंबर में कड़ाके की ठंड के बीच शादियों के लिए कुल 7 शुभ दिन उपलब्ध हैं:2 दिसंबर (बुधवार)3 दिसंबर (गुरुवार)4 दिसंबर (शुक्रवार)5 दिसंबर (शनिवार)6 दिसंबर (रविवार)11 दिसंबर (शुक्रवार)12 दिसंबर (शनिवार)ज्योतिषीय सलाह: हालांकि ये तिथियां पंचांग के अनुसार सामान्य रूप से शुद्ध हैं, लेकिन विवाह तय करने से पहले वर और वधू की जन्म कुंडली के आधार पर उनके व्यक्तिगत नक्षत्रों और चंद्रमा की स्थिति का मिलान किसी योग्य ज्योतिषी से अवश्य करवा लेना चाहिए।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने चिकित्सा पाठ्यक्रमों (MBBS, BDS, AYUSH) में प्रवेश के लिए आयोजित देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 (NEET UG 2026) के परिणाम घोषित कर दिए हैं। इस साल 21 जून 2026 को दोबारा आयोजित हुई परीक्षा के बाद एनटीए ने रिकॉर्ड समय में रिजल्ट जारी कर काउंसलिंग और एडमिशन का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है।इस साल देश भर के लगभग 20 लाख छात्र-छात्राओं ने इस कठिन परीक्षा में हिस्सा लिया था, जिनमें से 11.21 लाख कैंडिडेट्स ने सफलता हासिल की है। इस बार के नतीजों में उत्तर और मध्य भारत के राज्यों का दबदबा रहा है, जिसमें पंजाब, हरियाणा और राजस्थान समेत 8 राज्यों के होनहारों ने टॉप 17 रैंक में बाजी मारी है।पंजाब-हरियाणा नंबर-1: इन दो सूरमाओं ने हासिल की AIR 1NEET UG 2026 की परीक्षा में पंजाब और हरियाणा के छात्रों ने संयुक्त रूप से देश में पहला स्थान प्राप्त किया है:संयुक्त टॉपर: पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने संयुक्त रूप से ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1 हासिल की है।स्कोर: दोनों ही मेधावी छात्रों ने 720 में से 715 अंक प्राप्त कर इतिहास रच दिया।टॉप 17 रैंकर्स: 705 से अधिक अंक पाने वाले टॉप 17 रैंकर्स देश के 8 प्रमुख राज्यों (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, तमिलनाडु और तेलंगाना) से आते हैं।नीट यूजी 2026: टॉप-10 अभ्यर्थियों की सूची और स्कोरएनटीए द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश के टॉप 10 स्टूडेंट्स की सूची उनके अंक और पर्सेंटाइल के साथ नीचे दी गई है:रैंक (Rank)छात्र का नाम (Name)राज्य (State)श्रेणी (Category)प्राप्त अंक (Score)पर्सेंटाइल (%)1आर्यन गुप्तापंजाबसामान्य (पुरुष)71599.9999%1पंशुल बंसलहरियाणासामान्य (पुरुष)71599.9999%3उपलक्ष्य गोयलराजस्थानसामान्य (पुरुष)71499.99985%4आयुष भालोटियाबिहारसामान्य (पुरुष)71399.99965%4कुडाले श्रावणी कृष्णामहाराष्ट्रओबीसी-एनसीएल (महिला)71399.99965%4रिया रंजनबिहारओबीसी-एनसीएल (महिला)71399.99965%4आर्यन दुबेउत्तर प्रदेशसामान्य (पुरुष)71399.99965%8गीतांश सरीनपंजाबसामान्य (पुरुष)71299.99915%8गौरव सिंहराजस्थानओबीसी-एनसीएल (पुरुष)71299.99915%8मोहनीश मारुति भोसलेमहाराष्ट्रसामान्य (पुरुष)71299.99915%स्कोर ब्रेकडाउन: किस स्कोर पर कितने छात्र?इस साल 600 से अधिक अंक हासिल करने वाले छात्रों की संख्या काफी अच्छी रही है, जो कट-ऑफ और तगड़े कॉम्पिटिशन को दर्शाती है:700 से ज्यादा नंबर: देश भर में कुल 19 उम्मीदवारों ने 700 या उससे ज्यादा का स्कोर खड़ा किया है।690 से ज्यादा नंबर: कुल 138 अभ्यर्थियों ने 690 से अधिक अंक बटोरे हैं।650 से ज्यादा नंबर: कुल 1,492 स्टूडेंट्स ने 650 से अधिक अंक अर्जित किए।600 से ज्यादा नंबर: कुल 10,160 छात्र 600+ क्लब में शामिल होने में सफल रहे हैं।केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के टॉपर्स:दुर्गम क्षेत्रों से भी छात्रों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। लद्दाख से जिग्मेत यांगचन लामो (530 अंक), अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से ध्रुव त्रिपाठी (606 अंक) और लक्षद्वीप से फहमिदा अनीस (573 अंक) अपने-अपने क्षेत्र में टॉपर रहे हैं।छात्राओं ने फिर गाड़े सफलता के झंडे (58% से ज्यादा हिस्सेदारी)इस साल की परीक्षा में भी बेटियों का दबदबा पूरी तरह कायम रहा। एनटीए के अनुसार, इस साल कुल क्वालिफाई हुए 11.21 लाख अभ्यर्थियों में से 58 प्रतिशत से अधिक छात्राएं हैं। इसके अलावा, सबसे बेहतरीन रैंक हासिल करने वाले ज्यादातर छात्र और छात्राओं की उम्र 17 से 19 साल के बीच दर्ज की गई है।पेपर लीक विवाद के बाद 21 जून को दोबारा हुई थी परीक्षायाद दिला दें कि चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए पहले यह परीक्षा 9 मई को आयोजित की गई थी, लेकिन देशव्यापी स्तर पर पेपर लीक होने के गंभीर आरोपों के बीच एनटीए ने 12 मई को इस परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर दिया था। इस पूरे मामले की जांच फिलहाल सीबीआई (CBI) कर रही है। इसके बाद पूरी पारदर्शिता बरतते हुए 21 जून 2026 को भारत के 551 शहरों और विदेशों के 14 शहरों में फैले 5,440 केंद्रों पर परीक्षा का दोबारा शांतिपूर्ण आयोजन किया गया। यह परीक्षा कुल 13 भाषाओं (अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, तेलुगु, बंगाली, मराठी, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, ओडिया, पंजाबी, असमिया और उर्दू) में आयोजित हुई थी।काउंसलिंग के लिए देश में कुल MBBS सीटों का गणितरिजल्ट समय पर जारी होने से अब मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) और विभिन्न राज्यों के शिक्षा विभाग तय समय पर काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे। देश भर में मेडिकल की कुल सीटों का विवरण इस प्रकार है:कुल उपलब्ध MBBS सीटें: लगभग 1,08,000 सीटेंसरकारी मेडिकल कॉलेज (Government Colleges): लगभग 56,000 सीटें (कम फीस और उच्च प्राथमिकता)निजी मेडिकल कॉलेज (Private Colleges): लगभग 52,000 सीटेंएनटीए ने स्पष्ट किया है कि परिणाम प्रक्रिया में कुछ बड़े तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव (जैसे विभिन्न चरणों को समानांतर चलाना और ओएमआर आपत्तियों को आंसर की से अलग रखना) करके नतीजे समय पर घोषित किए गए हैं ताकि छात्रों का पूरा शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो।
अपने जीवनभर की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने और उस पर एक तय व नियमित आय (Regular Income) पाने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) आज भी देश के बुजुर्गों और वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) के बीच सबसे भरोसेमंद विकल्प बना हुआ है। शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर, जो लोग जोखिम मुक्त निवेश (Risk-Free Investment) की तलाश में हैं, उनके लिए यह समय बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।जुलाई 2026 में देश के कई प्रमुख बैंक वरिष्ठ नागरिकों को 8.50% तक की उच्चतम ब्याज दर (Interest Rate) की पेशकश कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस लिस्ट में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले बैंकों में स्मॉल फाइनेंस बैंक (Small Finance Banks) सबसे आगे चल रहे हैं, जबकि देश के कई बड़े प्राइवेट (निजी) बैंक भी 7.75% से लेकर 8.00% तक का शानदार रिटर्न दे रहे हैं। आइए जानते हैं किस बैंक में मिल रहा है कितना ब्याज और निवेश करते समय आपको किन बातों का ख्याल रखना चाहिए:स्मॉल फाइनेंस बैंकों में मिल रहा है सबसे ज्यादा ब्याज (8.50% तक)यदि आप अपनी जमा राशि पर अधिकतम मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो इस समय स्मॉल फाइनेंस बैंक वरिष्ठ नागरिकों के लिए सबसे बेस्ट रिटर्न दे रहे हैं:इक्विटास और शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक: ये दोनों बैंक इस समय सीनियर सिटीजंस को उनकी एफडी पर 8.50% तक का सालाना ब्याज ऑफर कर रहे हैं।जन और उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक: यहाँ वरिष्ठ नागरिकों को अधिकतम 8.30% तक की ब्याज दर मिल रही है।ESAF और सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक: इन दोनों बैंकों में जमा राशि पर अधिकतम 8.25% तक का रिटर्न उपलब्ध है।निजी (प्राइवेट) बैंकों की ब्याज दरें भी हैं आकर्षक (7.75% से 8.00%)जो निवेशक निजी बैंकों के नेटवर्क और उनकी सेवाओं को प्राथमिकता देते हैं, उनके लिए भी कई बैंकों ने अपनी दरें बेहद मजबूत रखी हैं:निजी बैंक का नाम (Private Banks)वरिष्ठ नागरिकों के लिए अधिकतम ब्याज दरDCB बैंक (DCB Bank)8.00%बंधन बैंक (Bandhan Bank)7.95%जम्मू एंड कश्मीर बैंक (J&K Bank)7.80%SBM बैंक इंडिया (SBM Bank India)7.80%इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank)7.75%यस बैंक (Yes Bank)7.75%ध्यान दें: ये सभी ब्याज दरें एक निश्चित समयावधि (Tenure) की एफडी के लिए लागू हैं। अलग-अलग अवधि (जैसे 1 वर्ष, 2 वर्ष या 5 वर्ष) के लिए दरों में बदलाव हो सकता है, इसलिए निवेश से पहले बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट पर लेटेस्ट दरों को जरूर क्रॉस-चेक कर लें।सुरक्षा का पक्का इंतजाम: क्या है ₹5 लाख का DICGC इंश्योरेंस नियम?अक्सर स्मॉल फाइनेंस या छोटे निजी बैंकों में पैसा लगाने से पहले निवेशकों के मन में सुरक्षा को लेकर थोड़ा डर रहता है। ऐसे में आपको डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के नियम को समझना बेहद जरूरी है:₹5 लाख तक का सरकारी कवर: आरबीआई (RBI) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था DICGC के नियमों के तहत, भारत के प्रत्येक शेड्यूल्ड बैंक में हर एक ग्राहक की ₹5 लाख तक की जमा राशि (मूलधन + ब्याज मिलाकर) पूरी तरह से बीमित (Insured) और सुरक्षित रहती है। किसी भी विषम परिस्थिति में बैंक के डूबने या दिवालिया होने पर सरकार यह राशि ग्राहक को लौटाने की गारंटी देती है।जोखिम कम करने की एक्सपर्ट ट्रिक (Multi-Bank Strategy):यदि आपके पास निवेश करने के लिए ₹15 या ₹20 लाख जैसी बड़ी रकम है, तो उसे किसी एक ही बैंक में फिक्स करने के बजाय ₹5-5 लाख के टुकड़ों में अलग-अलग 3 से 4 बैंकों में निवेश करें। ऐसा करने से आपकी पूरी की पूरी रकम 100% सरकारी बीमा कवर के दायरे में सुरक्षित रहेगी और आपको ऊंचे ब्याज का पूरा फायदा भी मिल जाएगा।FD में निवेश करने से पहले इन 4 बातों का हमेशा रखें ध्यानबैंकिंग और टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, केवल ऊंचे ब्याज के लालच में आकर जल्दबाजी में फैसला न लें। निवेश करने से पहले इन बातों की समीक्षा अवश्य करें:प्री-मैच्योर विड्रॉल पेनल्टी (Premature Penalty): यदि आपको अवधि पूरी होने से पहले अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए और आप एफडी तोड़ते हैं, तो बैंक आपसे कितना जुर्माना (Penल्टी) वसूल करेगा, इसकी जानकारी पहले ही ले लें।नियमित आय का विकल्प (Payout Options): यदि आपको घर खर्च चलाने के लिए हर महीने या हर तिमाही (Quarterly) निश्चित पैसों की जरूरत है, तो एफडी फॉर्म भरते समय 'मंथली या क्वार्टरली पेआउट' का विकल्प ही चुनें।विश्वसनीयता और ट्रैक रिकॉर्ड: बैंक का चुनाव करते समय उसकी वित्तीय स्थिति, मार्केट में उसकी साख और ग्राहकों के प्रति उसके पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को जरूर देखें।टैक्स लायबिलिटी (TDS): याद रखें कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक वित्तीय वर्ष में एफडी से होने वाली ₹50,000 तक की ब्याज आय टैक्स-फ्री होती है। इससे अधिक आय होने पर बैंक टीडीएस (TDS) काटता है। टीडीएस से बचने के लिए समय पर Form 15H जमा करना न भूलें।निश्चित और सुरक्षित रिटर्न चाहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए मौजूदा ब्याज दरों का यह दौर लंबी अवधि (Long Term) के लिए पैसा लॉक करने का एक बेहतरीन और सुनहरा अवसर माना जा सकता है।
Hydrogen Train : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जींद-सोनीपत के बीच हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। 82 करोड़ में बनी 10 कोच वाली इस ट्रेन में जींद से सोनीपत के बीच 89 किमी का किराया 25 रुपए होगा। इस ट्रेन का न्यूनतम किराया मात्र 5 रुपए ...
आधुनिक जीवनशैली, शारीरिक निष्क्रियता और प्रोसेस्ड फूड्स पर अत्यधिक निर्भरता के कारण हाई कोलेस्ट्रॉल (High Cholesterol) की समस्या आज एक गंभीर वैश्विक महामारी का रूप ले चुकी है। कोलेस्ट्रॉल मूल रूप से हमारे खून में पाया जाने वाला मोम (Wax) जैसा एक वसायुक्त (Fat) पदार्थ है, जो नई कोशिकाओं (Cells) के निर्माण, आवश्यक हार्मोन और विटामिन डी बनाने में शरीर की मदद करता है।लेकिन जब शरीर में इसकी मात्रा आवश्यकता से अधिक बढ़ जाती है, तो यह एक साइलेंट किलर (Silent Killer) साबित हो सकता है। खून में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL Cholesterol) का स्तर बढ़ने पर यह नसों की दीवारों पर जमा (Plague) होने लगता है। इससे नसें संकरी हो जाती हैं और हृदय (Heart) तक होने वाला रक्त का प्रवाह (Blood Flow) बुरी तरह बाधित होता है, जिससे हार्ट अटैक (Heart Attack), कोरोनरी आर्टरी डिजीज और ब्रेन स्ट्रोक (Stroke) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि हमारी कौन सी रोजमर्रा की आदतें नसों में इस गंदगी को बढ़ा रही हैं और इससे बचाव के क्या वैज्ञानिक उपाय हैं:बैड कोलेस्ट्रॉल को रॉकेट की रफ्तार से बढ़ाती हैं ये 4 आदतें (Major Causes)नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट (NHLBI) की रिपोर्ट्स के अनुसार, हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या के लिए काफी हद तक हमारी दैनिक दिनचर्या और खानपान जिम्मेदार होता है:सेचुरेटेड और ट्रांस फैट का अत्यधिक सेवन: समोसे, कचौरी, पिज्जा, बर्गर, पैकेट बंद चिप्स, बेकरी प्रोडक्ट्स (केक, पेस्ट्री) और बार-बार गर्म किए गए तेल में बनी चीजों में ट्रांस फैट (Trans Fat) प्रचुर मात्रा में होता है। यह सीधे तौर पर नसों में एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) को बढ़ाता है।शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle): घंटों तक एक ही जगह बैठकर काम करना, वॉक न करना और किसी भी तरह की एक्सरसाइज से दूरी बनाने के कारण शरीर में फैट का दहन (Burn) नहीं हो पाता, जिससे वजन बढ़ने लगता है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर बिगड़ जाता है।धूम्रपान और नशा (Smoking): सिगरेट या तंबाकू का सेवन करने से हमारे शरीर में मौजूद गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL Cholesterol) का स्तर तेजी से घटने लगता है। एचडीएल का काम नसों में जमा अतिरिक्त बैड कोलेस्ट्रॉल को साफ करके लिवर तक पहुंचाना होता है, इसके कम होने से नसों में ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है।अन्य स्वास्थ्य स्थितियां व जेनेटिक्स: बढ़ती उम्र, मोटापा, अनियंत्रित डायबिटीज (High Sugar) और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का जोखिम सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा, यदि परिवार में पहले से ही किसी को दिल की बीमारी या हाई कोलेस्ट्रॉल का इतिहास (Family History) रहा है, तो यह जेनेटिक कारणों से भी आपको प्रभावित कर सकता है।नसों की सफाई और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के 5 अचूक उपाय (Lifestyle Changes)यदि आप बिना दवाओं के या दवाओं के साथ प्राकृतिक रूप से अपने लिपिड प्रोफाइल (Lipid Profile) को सामान्य रखना चाहते हैं, तो लाइफस्टाइल में ये 5 बड़े बदलाव तुरंत लागू करें:हफ्ते में 150 मिनट की एक्सरसाइज: शारीरिक रूप से एक्टिव होना सबसे जरूरी है। रोजाना कम से कम 30 मिनट या हफ्ते में 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाला व्यायाम जैसे—तेज चलना (Brisk Walking), साइकिल चलाना, स्विमिंग या योग जरूर करें। इससे गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है।हार्ट-फ्रेंडली डाइट अपनाएं: अपने दैनिक भोजन में फाइबर से भरपूर चीजें जैसे ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज (ओट्स, दलिया), दालें और बीन्स शामिल करें। भोजन पकाने के लिए रिफाइंड तेल की जगह सीमित मात्रा में हेल्दी फैट (जैसे जैतून का तेल या सरसों का तेल) और मुट्ठी भर मेवे (बादाम, अखरोट) का सेवन करें।वजन और शुगर को रखें नियंत्रित: यदि आपका वजन सामान्य से अधिक है, तो उसे कैलोरी डेफिसिट डाइट और कसरत के जरिए कम करने का प्रयास करें। वजन में 5 से 10% की कमी भी कोलेस्ट्रॉल के स्तर को आश्चर्यजनक रूप से सुधार देती है। साथ ही ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल को नियमित मॉनिटर करें।धूम्रपान से पूरी तरह दूरी: यदि आप स्मोकिंग करते हैं, तो इसे आज ही छोड़ दें। धूम्रपान छोड़ने के कुछ ही हफ्तों के भीतर शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) का स्तर वापस सुधरने लगता है और हार्ट अटैक का खतरा आधा हो जाता है।लक्षणों को न करें नजरअंदाज: कब सीधे भागें डॉक्टर के पास?हाई कोलेस्ट्रॉल को चिकित्सा विज्ञान में 'साइलेंट समस्या' कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके कोई भी बाहरी या स्पष्ट लक्षण शरीर पर दिखाई नहीं देते। लाखों लोगों को इसका पता तब चलता है जब वे किसी अन्य बीमारी के लिए रूटीन ब्लड टेस्ट (लिपिड प्रोफाइल) करवाते हैं।हालांकि, यदि नसों में ब्लॉकेज गंभीर स्तर पर पहुंच जाए, तो शरीर में नीचे दिए गए लक्षण दिखने लगते हैं, जिन्हें भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:सीने में भारीपन, जकड़न या अचानक तेज दर्द होना (एंजाइना)।थोड़ा सा चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर ही सांस फूलने लगना।अचानक शरीर के किसी एक हिस्से में कमजोरी या सुन्नता महसूस होना।बिना किसी कारण के अत्यधिक पसीना आना और चक्कर आना।विशेषज्ञों की सलाह: यदि आपकी उम्र 30 वर्ष से अधिक है और आप मोटापा, डायबिटीज, या हाई बीपी से पीड़ित हैं, अथवा आपके परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास है, तो हर 6 महीने या 1 साल में अपना लिपिड प्रोफाइल टेस्ट (Lipid Profile Test) जरूर करवाएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही अपनी डाइट व उपचार का निर्धारण करें।
RO Water Purifier Myths & Facts: क्या वाकई सेहत के लिए नुकसानदेह है आरओ का पानी?
RO Water Purifier Myths & Facts: आजकल आधुनिक जीवनशैली में अधिकांश घरों में पीने के पानी को साफ करने के लिए RO (रिवर्स ऑस्मोसिस) वॉटर प्यूरीफायर का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका प्राथमिक उद्देश्य पानी में मौजूद अशुद्धियों, भारी धातुओं और हानिकारक बैक्टीरिया को छानकर उसे पीने योग्य बनाना है।लेकिन पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और इंटरनेट पर आरओ के पानी को लेकर कई तरह के दावे और भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, जिसने आम लोगों को गहरे भ्रम में डाल दिया है। कुछ लोग इसे सेहत के लिए अमृत मानते हैं, तो कुछ इसे गंभीर बीमारियों की वजह बताने लगे हैं। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि विज्ञान इस बारे में क्या कहता है। आइए जानते हैं आरओ के पानी से जुड़े 4 सबसे बड़े मिथक (Myths), उनकी ग्राउंड रियलिटी और इसके सही इस्तेमाल के तरीके:RO के पानी से जुड़े 4 बड़े मिथक और उनका वैज्ञानिक सचमिथक 1: आरओ का पानी पीने से शरीर में मिनरल्स की भारी कमी हो जाती हैसच्चाई (WHO का पक्ष): विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह सच है कि रिवर्स ऑस्मोसिस की प्रक्रिया के दौरान पानी में मौजूद कुछ प्राकृतिक मिनरल्स (जैसे कैल्शियम और मैग्नीशियम) छनकर कम हो जाते हैं। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि इसे पीने से आपके शरीर में इन मिनरल्स की पूरी कमी हो जाएगी। मानव शरीर को आवश्यक मिनरल्स का 90% से अधिक हिस्सा एक संतुलित और पौष्टिक आहार (Diet) से मिलता है, न कि केवल पीने के पानी से। यदि आपकी डाइट अच्छी है, तो आपको डरने की जरूरत नहीं है।मिथक 2: हर घर और हर इलाके में RO लगाना अनिवार्य हैसच्चाई: यह पूरी तरह गलत धारणा है। हर घर में आरओ प्यूरीफायर की जरूरत नहीं होती। यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आपके क्षेत्र में आने वाले पानी का टीडीएस (TDS - Total Dissolved Solids) कितना है और उसमें किस तरह के केमिकल मौजूद हैं। यदि आपके घर में आने वाला नल का पानी पहले से ही साफ, मीठा और सुरक्षित है, तो वहां साधारण यूवी (UV) या यूएफ (UF) फिल्टर से भी काम चल सकता है। हमेशा पानी की जांच कराने के बाद ही प्यूरीफायर चुनें।मिथक 3: आरओ का पानी 100% शुद्ध होता है, इसलिए इसे कैसे भी स्टोर कर सकते हैंसच्चाई (CDC की गाइडलाइन): अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के मुताबिक, पानी चाहे कितना भी शुद्ध क्यों न हो, यदि उसे स्टोर करने का तरीका गलत है, तो वह दोबारा दूषित हो सकता है। आरओ से निकले पानी को हमेशा पूरी तरह से साफ, सूखे और ढक्कन बंद कंटेनर (जैसे कांच या अच्छी क्वालिटी के स्टील/मिट्टी के बर्तन) में ही रखना चाहिए। पानी को लंबे समय तक खुला छोड़ने या गंदे हाथों से निकालने पर उसमें दोबारा बैक्टीरिया पनप सकते हैं।मिथक 4: आरओ का पानी पीने से पेट की आंतें (Gut Health) कमजोर हो जाती हैंसच्चाई: इंटरनेट पर चल रहे इस दावे का समर्थन करने के लिए वर्तमान में कोई भी आधिकारिक वैश्विक वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गाइडलाइंस में भी ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की गट हेल्थ (पाचन तंत्र की मजबूती) मुख्य रूप से उसकी पूरी लाइफस्टाइल, भोजन में फाइबर की मात्रा, शारीरिक सक्रियता, संक्रमण और दवाओं के इस्तेमाल पर निर्भर करती है, केवल आरओ के पानी पर नहीं।किन परिस्थितियों में आपके घर के लिए जरूरी है RO प्यूरीफायर?आरओएस सिस्टम मुख्य रूप से तब सबसे ज्यादा उपयोगी और अनिवार्य माना जाता है जब:आपके घर के पानी का TDS लेवल 500 mg/L से अधिक हो और पानी का स्वाद खारा या भारी हो।आपके इलाके के भूजल (Groundwater) में आर्सेनिक, फ्लोराइड, सीसा (Lead), या क्रोमियम जैसी खतरनाक और जहरीली भारी धातुएं घुली हुई हों, जिन्हें साधारण फिल्टर नहीं हटा पाते।इसके विपरीत, यदि पानी का टीडीएस सामान्य है और पानी सुरक्षित है, तो बिना वजह हाई-एंड आरओ लगाने से पानी की बर्बादी (Water Wastage) भी ज्यादा होती है।RO का पानी इस्तेमाल करते समय इन 4 बातों का रखें विशेष ख्यालयदि आप अपने घर में आरओ का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसकी शुद्धता और अपनी सेहत बनाए रखने के लिए इन टिप्स को जरूर फॉलो करें:नियमित सर्विसिंग और फिल्टर चेंज: आरओ प्यूरीफायर की समय-समय पर अधिकृत मैकेनिक से सर्विसिंग जरूर कराएं। इसके भीतर लगी मेम्ब्रेन (Membrane) और कार्बन फिल्टर को तय समय सीमा के भीतर बदलवाएं, ताकि पानी की गुणवत्ता खराब न हो।टीडीएस (TDS) को सही सेट करें: आरओ लगवाते समय टेक्नीशियन से कहकर उसके TDS को 100 से 300 के बीच ही सेट करवाएं। बहुत कम टीडीएस (जैसे 50 से कम) का पानी पीने में पूरी तरह बेस्वाद और मिनरल-विहीन हो जाता है।संतुलित आहार लें: चूंकि पानी से मिनरल्स कम होते हैं, इसलिए अपने दैनिक भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध, दही, सूखे मेवे और ताजे फलों को शामिल करें ताकि शरीर में कैल्शियम और मैग्नीशियम की प्रचुर मात्रा बनी रहे।कांच या तांबे के बर्तन का विकल्प: आरओ के पानी को रिस्टोर करने के लिए प्लास्टिक की बोतलों या कंटेनरों के बजाय कांच के जग या तांबे/मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिए ज्यादा लाभकारी माना जाता है।
बरसात का सुहावना मौसम अपने साथ जितनी राहत लेकर आता है, उतनी ही स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी खड़ी करता है। मानसून के इस दौर में होने वाली एक बेहद सामान्य समस्या यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी यूटीआई (UTI - Urine Infection) को कई बार लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर बहुत भारी पड़ सकता है।शुरुआत में यह समस्या पेशाब करते समय हल्की जलन, बार-बार टॉयलेट जाने की इच्छा होना या पेट के निचले हिस्से में दर्द तक ही सीमित लगती है। लेकिन यदि समय रहते इसका सही डॉक्टरी इलाज न कराया जाए, तो यह साधारण सा दिखने वाला संक्रमण ब्लैडर से ऊपर उठकर सीधे आपकी किडनी (Kidney Infection) को गंभीर रूप से डैमेज कर सकता है। खासकर कम उम्र की बच्चियों और महिलाओं के मामले में इस बीमारी को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। आइए देश के बड़े डॉक्टरों और विशेषज्ञों से समझते हैं कि मानसून में यूटीआई क्यों बढ़ जाता है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है:बरसात के मौसम में क्यों बढ़ जाते हैं UTI के मामले? (Key Causes)अक्सर लोग मानते हैं कि बारिश के पानी में भीगने से यूरिन इंफेक्शन होता है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, संक्रमण की असली वजह इस मौसम में पनपने वाली कुछ आदतें और परिस्थितियां हैं:लंबे समय तक गीले कपड़े पहनना: डॉ. मनीषा अरोड़ा (डायरेक्टर इंटरनल मेडिसिन, सीके बिरला हॉस्पिटल) के मुताबिक, मानसून के दौरान बारिश में भीगने के बाद या पसीने की वजह से लंबे समय तक गीले कपड़ों या अंडरगारमेंट्स में रहना बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माहौल (नमी और गर्माहट) बनाता है।कम पानी पीने की आदत: डॉ. सी. एस. मिथ्रयी (सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी) का कहना है कि बारिश के मौसम में तापमान थोड़ा कम होने से लोगों को प्यास कम लगती है। पानी कम पीने के कारण शरीर में पेशाब (Urine) कम बनता है। नतीजतन, यूरिनरी ट्रैक्ट में मौजूद बैक्टीरिया फ्लश आउट नहीं हो पाते और वहीं टिककर अपनी संख्या बढ़ाने लगते हैं।मुख्य जिम्मेदार बैक्टीरिया: डॉ. विक्रम कालरा (प्रिंसिपल डायरेक्टर, नेफ्रोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट, आकाश हेल्थकेयर) के अनुसार, अधिकांश यूटीआई मामलों के लिए ई. कोलाई (E. coli) नामक बैक्टीरिया मुख्य रूप से जिम्मेदार होता है, जो गंदगी और नमी के कारण तेजी से शरीर में प्रवेश कर जाता है।शुरुआती लक्षणों से लेकर किडनी इंफेक्शन तक का सफर (UTI Symptoms)यूटीआई के लक्षणों को दो चरणों में समझा जा सकता है। पहला शुरुआती संक्रमण और दूसरा गंभीर स्थिति जब इंफेक्शन किडनी तक पहुंच जाता है:शुरुआती सामान्य लक्षण:पेशाब करते समय तेज जलन या दर्द होना।बार-बार पेशाब आने का अहसास होना, लेकिन खुलकर न आना।यूरिन से अत्यधिक तीखी बदबू आना।यूरिन का रंग धुंधला (Cloudy) होना या कभी-कभी उसमें खून के अंश (Hematuria) दिखना।पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में लगातार हल्का दर्द रहना।किडनी में संक्रमण फैलने के गंभीर लक्षण:यदि लापरवाही के कारण इंफेक्शन किडनी तक पहुंच जाता है, तो शरीर ये अलार्म बजाने लगता है:अचानक तेज बुखार आना और शरीर का कांपना (ठंड लगना)।पीठ के निचले हिस्से या कमर में एक तरफ असहनीय तेज दर्द होना।लगातार मतली (जी मिचलाना) या उल्टियां होना।अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना और थकान महसूस होना।इन्हें है सबसे ज्यादा खतरा:गर्भवती महिलाओं (Pregnant Women), डायबिटीज के मरीजों, बुजुर्गों और जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर है, उन्हें यूरिन इंफेक्शन के लक्षण दिखते ही तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए, क्योंकि इनमें जटिलताएं बहुत तेजी से बढ़ती हैं।सही समय पर जांच और इलाज है जरूरीडॉक्टरों के अनुसार, अच्छी बात यह है कि शुरुआती अवस्था में अधिकांश यूटीआई का इलाज बेहद आसान और सटीक होता है।लैब टेस्ट: संक्रमण की पुष्टि के लिए डॉक्टर सबसे पहले यूरिन रूटीन टेस्ट (Urine Routine) और यूरिन कल्चर (Urine Culture) टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। कल्चर टेस्ट से यह पता चलता है कि इंफेक्शन किस विशिष्ट बैक्टीरिया की वजह से हुआ है।एंटीबायोटिक्स: टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर कुछ दिनों का एंटीबायोटिक (Antibiotics) कोर्स प्रिसक्राइब करते हैं। ध्यान रहे कि खुद से कोई भी दवा या पेनकिलर लेने की गलती बिल्कुल न करें और डॉक्टर द्वारा दिए गए एंटीबायोटिक के कोर्स को बीच में अधूरा न छोड़ें।मानसून में यूटीआई से सुरक्षित रहने के 5 अचूक उपाय (Prevention Tips)यदि आप बरसात के इस मौसम में यूरिन इंफेक्शन की परेशानी से कोसों दूर रहना चाहते हैं, तो इन 5 बातों का कड़ाई से पालन करें:भरपूर पानी पिएं (Hydration): प्यास न लगने पर भी दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास (2-3 लीटर) पानी जरूर पिएं। जितना ज्यादा यूरिन पास होगा, बैक्टीरिया उतनी ही आसानी से शरीर से बाहर निकल जाएंगे।गीले कपड़ों को तुरंत बदलें: यदि आप बारिश में भीग गए हैं या वर्कआउट के कारण कपड़े पसीने से गीले हो गए हैं, तो बिना देर किए तुरंत नहाकर सूखे और साफ सूती (Cotton) कपड़े पहनें।पर्सनल हाइजीन का ध्यान रखें: वॉशरुम का इस्तेमाल करने के बाद हमेशा आगे से पीछे की ओर (Front to Back) सफाई करें, ताकि मल मार्ग के बैक्टीरिया यूरिनरी ट्रैक्ट तक न पहुंच सकें। सार्वजनिक शौचालयों का उपयोग करते समय अत्यधिक सावधानी बरतें।पेशाब को रोककर न रखें: जब भी टॉयलेट जाने की इच्छा हो, उसे दबाएं नहीं। लंबे समय तक यूरिन को ब्लैडर में रोककर रखने से बैक्टीरिया को बढ़ने का पूरा समय मिल जाता है।क्रैनबेरी जूस का सेवन: डॉक्टरों की सलाह पर आप क्रैनबेरी जूस (Cranberry Juice) या इसके सप्लीमेंट्स ले सकते हैं। क्रैनबेरी में मौजूद तत्व बैक्टीरिया को ब्लैडर की दीवारों पर चिपकने से रोकते हैं।
बदलते मौसम और लगातार बढ़ते वैश्विक तापमान (Global Warming) का असर अब सिर्फ खेती, पर्यावरण या ग्लेशियरों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह हमारे बेडरूम तक पहुंच चुका है और हमारी सेहत की सबसे जरूरी कड़ी यानी 'नींद' (Sleep) को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत के बड़े शहरों में न केवल दिन का पारा चढ़ा है, बल्कि रात की गर्मी (Nighttime Warming) में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।हाल ही में पर्यावरण अनुसंधान से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय संस्था 'क्लाइमेट सेंट्रल' (Climate Central) ने एक बेहद चौंकाने वाली स्टडी जारी की है। इस स्टडी में साल 2020 से 2025 के बीच दुनिया के 1,300 से ज्यादा शहरों और भारत के 100 से अधिक प्रमुख शहरों के तापमान और इंसानी नींद के आंकड़ों का गहन विश्लेषण (Analysis) किया गया है। रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि भारत के महानगरों में रहने वाले लोग हर साल कई घंटों की जरूरी नींद सिर्फ रात की बढ़ती गर्मी के कारण खो रहे हैं।नींद खोने के मामले में चेन्नई और मुंबई सबसे आगे (Metros Data)Climate Central की रिपोर्ट के मुताबिक, तटीय और अत्यधिक आबादी वाले महानगरों में रात का तापमान सामान्य से कहीं ज्यादा बना रहता है, जिसके कारण वहां के नागरिकों की सालाना नींद में भारी कटौती दर्ज की गई है:प्रभावित भारतीय शहर (Cities)प्रति वर्ष कम होने वाली अनुमानित नींद (घंटे)चेन्नई (Chennai - सबसे प्रभावित)93 घंटे प्रति वर्षमुंबई (Mumbai)84 घंटे प्रति वर्षकोलकाता (Kolkata)80 घंटे प्रति वर्षअहमदाबाद (Ahmedabad)78 घंटे प्रति वर्षहैदराबाद (Hyderabad)75 घंटे प्रति वर्षबेंगलुरु (Bengaluru)67 घंटे प्रति वर्षदिल्ली (Delhi)66 घंटे प्रति वर्षपुणे (Pune)65 घंटे प्रति वर्षक्लाइमेट चेंज का सीधा कनेक्शन:विशेषज्ञों के अनुसार, इन सभी शहरों में हर साल नींद कम होने के कुल समय में से करीब 5 से 8 घंटे की सीधी कमी सीधे तौर पर 'क्लाइमेट चेंज' (जलवायु परिवर्तन) की वजह से बढ़े हुए रातों के तापमान से जुड़ी हुई है।गर्म रातें हमारी नींद और शरीर को कैसे प्रभावित करती हैं? (Scientific Reason)चिकित्सा विज्ञान और इस स्टडी के अनुसार, एक आरामदायक और गहरी नींद (Deep Sleep) में जाने के लिए मानव शरीर का आंतरिक तापमान (Core Body Temperature) स्वाभाविक रूप से थोड़ा कम होना बेहद जरूरी होता है।शरीर को ठंडा होने में दिक्कत: जब रात के समय बाहरी वातावरण या कमरे का तापमान बहुत गर्म और उमस भरा होता है, तो शरीर को खुद को प्राकृतिक रूप से ठंडा करने में बहुत मशक्कत करनी पड़ती है।बार-बार नींद टूटना: इस थर्मल स्ट्रेस (Thermal Stress) के कारण व्यक्ति को या तो जल्दी नींद नहीं आती, या फिर रात में बार-बार उसकी आंख खुलती है।लंबे समय तक नींद की कमी से सेहत को 4 बड़े नुकसानलगातार अच्छी और पर्याप्त नींद न मिलने का असर केवल अगले दिन की थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर में कई गंभीर बीमारियों को जन्म देता है:मानसिक स्वास्थ्य पर असर: नींद पूरी न होने से सुबह उठते ही भारीपन, दिनभर चिड़चिड़ापन, तनाव और किसी भी काम में ध्यान (Concentration) लगाने में भारी परेशानी होती है।हार्ट और नसों की बीमारियां: लंबे समय तक (Chronic) नींद की कमी रहने से शरीर में ब्लड प्रेशर अनियंत्रित हो सकता है, जिससे दिल के दौरे (Heart Attack) और नसों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।कार्यक्षमता में गिरावट: ऑफिस या कार्यस्थल पर नींद आने के कारण परफॉर्मेंस खराब होती है और मानवीय गलतियां (Human Errors) होने की आशंका बढ़ जाती है।दुर्घटनाओं का जोखिम: ड्राइव करते समय या सड़क पर चलते वक्त झपकी आने के कारण जानलेवा सड़क दुर्घटनाओं (Road Accidents) का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है।भीषण गर्मी और उमस में भी अच्छी नींद पाने के 6 बेहतरीन टिप्सयदि आप भी बदलते मौसम के इस दौर में अपनी रातों की नींद को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो हेल्थ एक्सपर्ट्स द्वारा बताए गए इन उपायों को जरूर आजमाएं:कमरे का तापमान नियंत्रित रखें: सोने से पहले कमरे को जितना हो सके ठंडा और हवादार बनाएं। एयर कंडीशनर (AC) या पंखे को एक आरामदायक तापमान (24C से 26C) पर सेट करें।सोने का फिक्स रूटीन: रोजाना रात को एक ही निश्चित समय पर सोने जाएं और सुबह एक ही तय समय पर उठें। इससे शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) मजबूत होती है।गैजेट्स से दूरी बनाएं: सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल, लैपटॉप या टीवी की स्क्रीन देखना बिल्कुल बंद कर दें। इनकी नीली रोशनी (Blue Light) नींद लाने वाले 'मेलाटोनिन' हार्मोन को बनने से रोकती है।हल्का भोजन और कैफीन से परहेज: रात को सोने से ठीक पहले भारी या अत्यधिक मसालेदार भोजन न करें। साथ ही शाम के बाद चाय, कॉफी या सॉफ्ट ड्रिंक्स जैसे कैफीन युक्त पदार्थों के सेवन से बचें।ढीले सूती कपड़े और हाइड्रेशन: सोते समय हमेशा हल्के, ढीले और सूती (Cotton) कपड़े पहनें ताकि पसीना आसानी से सूख सके। दिनभर और सोने से पहले पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे।दिन में शारीरिक गतिविधि: रोजाना सुबह या शाम को नियमित रूप से व्यायाम, योग या वॉक (Physical Activity) करें। इससे शरीर की ऊर्जा का सही इस्तेमाल होता है और रात में जल्दी व गहरी नींद आती है।ध्यान दें: यदि तमाम उपायों के बाद भी आपको लंबे समय से अनिद्रा (Insomnia), बार-बार नींद टूटने या सुबह उठने पर अत्यधिक थकान रहने की समस्या बनी हुई है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे बेहतर विकल्प है।
मौसम में बदलाव आते ही हमारी त्वचा का मिजाज भी बदलने लगता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि मानसून (Monsoon) के दिनों में चेहरे पर निकलने वाले कील-मुंहासे और पिंपल्स (Pimple & Acne) का एकमात्र कारण हवा में मौजूद उमस (Humidity) है। लेकिन स्किन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बारिश के मौसम में उमस और पॉल्यूशन (प्रदूषण) का खतरनाक कॉम्बिनेशन हमारी स्किन की सेहत को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।उत्तर भारत में अप्रैल से लेकर सितंबर तक के महीनों में भीषण गर्मी और उमस पड़ती है। इस दौरान पसीना, धूल-मिट्टी और हवा में मौजूद प्रदूषण के महीन कण मिलकर त्वचा के रोमछिद्रों (Skin Pores) को ब्लॉक कर देते हैं। त्वचा की देखरेख में जरा सी भी लापरवाही पिंपल्स को तेजी से बढ़ा देती है। आइए जानते हैं कि इस मौसम में एक्ने निकलने के पीछे क्या वैज्ञानिक कारण (Scientific Reasons) हैं और इससे बचने के लिए आप किन आसान व असरदार तरीकों को अपना सकते हैं:क्यों निकलते हैं बारिश में ज्यादा पिंपल्स? जानिए इसके 4 वैज्ञानिक कारण1. मॉइस्चर (नमी) और स्वेट ग्लैंड्स का कनेक्शनएक सामान्य इंसान के शरीर में लगभग 20 से 40 लाख स्वेट ग्लैंड्स (पसीने की ग्रंथियां) होती हैं। गर्मी और अत्यधिक उमस के कारण ये ग्रंथियां सामान्य से कहीं ज्यादा एक्टिव हो जाती हैं। हालांकि, पसीने में मुख्य रूप से केवल पानी और नमक होता है, जो सीधे तौर पर स्किन को नुकसान नहीं पहुंचाता; लेकिन जब हवा में नमी ज्यादा होने के कारण यह पसीना जल्दी सूख नहीं पाता, तब समस्या शुरू होती है। पसीने के त्वचा पर लंबे समय तक टिके रहने से त्वचा की बाहरी परत (Stratum Corneum) कमजोर होने लगती है और पोर्स बंद हो जाते हैं।2. डेड सेल्स और पोर्स का ब्लॉक होनाएक्सपर्ट्स के अनुसार, जब त्वचा के रोमछिद्र (Pores) बंद हो जाते हैं, तो त्वचा के भीतर बनने वाले डेड सेल्स (मृत कोशिकाएं) बाहर नहीं निकल पाते। ये डेड सेल्स और गंदगी पोर्स के अंदर ही फंस जाते हैं, जिससे वे इन्फेक्टेड हो जाते हैं। यही प्रक्रिया आगे चलकर ब्लैकहेड्स (Blackheads), वाइटहेड्स (Whiteheads) और लाल दर्दनाक पिंपल्स का रूप ले लेती है।3. हवा में मौजूद प्रदूषण (PM 2.5 कण) का हमलाबारिश के दिनों में हवा में मौजूद पीएम 2.5 (PM 2.5 Particles) जैसे सूक्ष्म कण, धूल और धुआं हमारी त्वचा की सतह पर चिपक जाते हैं। ये विषैले कण त्वचा के प्राकृतिक तेल (सीबम) के साथ मिलकर पोर्स के अंदर गहराई तक चले जाते हैं। इन कणों के साथ पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAH) और हानिकारक धातुएं भी त्वचा में प्रवेश कर जाती हैं, जिससे स्किन बैरियर तेजी से डैमेज होता है।4. ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और 'कटीबैक्टीरियम एक्नीस' बैक्टीरियाजब प्रदूषण के कण त्वचा में जाते हैं, तो वे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (Oxidative Stress) और इन्फ्लेमेशन (सूजन) को बढ़ा देते हैं। मानसून की उमस और सीबम (ऑयल) के बढ़े हुए प्रोडक्शन के कारण त्वचा पर 'कटीबैक्टीरियम एक्नीस' (Cutibacterium Acnes) नामक बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपने लगते हैं। यही बैक्टीरिया मुख्य रूप से चेहरे पर मवाद वाले दानों और एक्ने को जन्म देते हैं।मानसून में बेदाग और निखरी त्वचा पाने के 5 अचूक उपाय (Skin Care Tips)यदि आप इस उमस और गर्मी वाले मौसम में अपनी त्वचा को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ और एक्ने-फ्री रखना चाहते हैं, तो अपने डेली रूटीन में इन आदतों को जरूर शामिल करें:सैलिसिलिक एसिड क्लींजर का उपयोग करें: दिन में दो बार सैलिसिलिक एसिड (Salicylic Acid) युक्त फेस वॉश या क्लींजर से चेहरा साफ करें। यह एसिड पोर्स के भीतर जमी गंदगी, प्रदूषण और अतिरिक्त ऑयल को गहराई से बाहर निकालता है और सीबम प्रोडक्शन को कंट्रोल करता है।नॉन-कॉमेडोजेनिक सनस्क्रीन चुनें: बारिश के बाद बादलों के बीच भी यूवी (UV) किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए हमेशा लाइटवेट और नॉन-कॉमेडोजेनिक (Non-Comedogenic) सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। ये सनस्क्रीन बेहद हल्के होते हैं और त्वचा के रोमछिद्रों को ब्लॉक नहीं करते।बाहर से आते ही करें 'डबल क्लींजिंग': जब भी आप धूप, धूल या प्रदूषण वाले माहौल से घर वापस आएं, तो सबसे पहले अपनी त्वचा को अच्छी तरह साफ करें। ऐसा करने से पॉल्यूशन के हानिकारक कण त्वचा पर लंबे समय तक टिक नहीं पाएंगे और डैमेज का खतरा टल जाएगा।हफ्ते में एक बार माइल्ड स्क्रबिंग: त्वचा के भीतर फंसे डेड सेल्स और ब्लैकहेड्स को हटाने के लिए हफ्ते में कम से कम एक बार हल्के हाथों से स्क्रबिंग (Scrubbing) जरूर करें। ध्यान रहे कि यदि चेहरे पर एक्टिव (बड़े और लाल) पिंपल्स हैं, तो कठोर स्क्रब का इस्तेमाल करने से बचें।विटामिन सी और नियासिनामाइड का इस्तेमाल: त्वचा पर विटामिन सी (Vitamin C) और नियासिनामाइड (Niacinamide) युक्त सीरम लगाना बेस्ट रिजल्ट देता है। विटामिन सी एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाता है और सूजन कम करता है। साथ ही, अपनी डाइट में खट्टे फलों (जैसे नींबू, संतरा, आंवला) को शामिल करें।
Top News 17 July: PM मोदी की हाइड्रोजन ट्रेन, ट्रंप का चीन पर बड़ा आरोप
Top News 17 July : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज हाईड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन पर 22 करोड़ अमेरिकी वोटर्स का डाटा चुराने का आरोप लगाया। ट्रंप प्रशासन ने वीजा नियम बदले। ईरान में बच्चों के कैंसर अस्पताल पर ...
बजट में बराक घाटी के विकास को प्राथमिकता दी गई: हिमंता बिस्वा सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले एक दशक से बराक घाटी के लोगों की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षाओं को पूरा करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह क्षेत्र अब असम के विकास पथ में पीछे नहीं रहेगा।
भाजपा की बैठक में शामिल होने पर असम विधानसभा अध्यक्ष पर कांग्रेस का निशाना
असम विधानसभा में विपक्ष के पूर्व नेता और कांग्रेस नेता देबब्रत सैकिया ने गुरुवार को विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास पर निशाना साधा
बिहार: एआई आधारित सुशासन को बढ़ावा, सीएम ने 'सर्वम एआई-भारत जीपीटी' के साथ समझौते की घोषणा की
बिहार सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सुशासन, नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जानकारी दी कि बिहार सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और सर्वम एआई-भारत जीपीटी के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी के जरिए राज्य में एआई आधारित तकनीकों के विकास, अनुसंधान और जनसेवाओं को नई दिशा मिलेगी।
भारत-श्रीलंका रक्षा अधिकारियों की अहम बैठक, रक्षा साझेदारी को मजबूत करने पर दिया जोर
भारत और श्रीलंका के रक्षा अधिकारियों ने नई दिल्ली में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम बैठक की। इस दौरान आपसी सहयोग से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की और भविष्य में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई।
भारतीय भोजन में चटनी (Chutney) का स्थान बेहद खास और अपरिहार्य माना जाता है। यह न केवल खाने का स्वाद और तीखापन बढ़ाती है, बल्कि साधारण से साधारण भोजन की थाली को भी पूरी तरह से कंप्लीट और जायकेदार बना देती है। चाहे दोपहर का दाल-चावल हो, सुबह के गरमा-गरम पराठे, या फिर दक्षिण भारतीय व्यंजन जैसे इडली-डोसा—हर डिश का असली मजा सही चटनी के बिना अधूरा है।स्वाद के अलावा चटनियां स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद गुणकारी होती हैं। इनमें इस्तेमाल होने वाली कच्ची सामग्रियों जैसे हरी मिर्च, धनिया, पुदीना, लहसुन और नींबू में प्रचुर मात्रा में विटामिन, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो पाचन क्रिया (Digestion) को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं भारतीय रसोई की ऐसी ही 4 सदाबहार और टेस्टी चटनियों के बारे में, जिन्हें आप मिनटों में घर पर तैयार कर सकते हैं:हर खाने की जान हैं ये 4 बेहतरीन चटनियां (Easy Chutney Recipes)1. पुदीना-धनिया चटनी (The Perfect All-Rounder)बनाने की विधि: ताजी पुदीने की पत्तियां, हरा धनिया, हरी मिर्च, लहसुन की कलियां, स्वादानुसार नमक और थोड़ा सा ताजा नींबू का रस मिलाकर ब्लेंडर में अच्छी तरह पीस लें।फायदे और पेयरिंग: पुदीना और धनिया में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर पेट को ठंडक देते हैं। यह हरी चटनी समोसे, कचोरी, सैंडविच, ढोकला और हर तरह के स्टफ्ड पराठों के साथ लाजवाब स्वाद देती है।2. टमाटर-लहसुन की तीखी चटनी (Fiery Tomato-Garlic)बनाने की विधि: पके हुए टमाटर, लहसुन की कलियां और सूखी लाल मिर्च को थोड़े से तेल में हल्का सा भून लें। जब यह मिश्रण ठंडा हो जाए, तो इसमें नमक डालकर मिक्सी में पीस लें।फायदे और पेयरिंग: टमाटर में प्रचुर मात्रा में विटामिन सी और लाइकोपीन पाया जाता है, जबकि लहसुन रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाता है। यह चटनी सादे दाल-चावल, पूरी, लच्छा पराठा और मैसूर मसाला डोसा के साथ खूब पसंद की जाती है।3. नारियल की क्लासिक चटनी (South Indian Coconut Chutney)बनाने की विधि: ताजा कद्दूकस किया हुआ नारियल, भुनी हुई चना दाल (दलिया), हरी मिर्च, थोड़ा सा अदरक और नमक डालकर एक महीन पेस्ट बना लें। स्वाद बढ़ाने के लिए ऊपर से तेल में राई (सरसों के दाने), सूखी लाल मिर्च और ताजे करी पत्ते का कड़क तड़का लगाएं।फायदे और पेयरिंग: नारियल में मौजूद हेल्दी फैट्स और डाइटरी फाइबर शरीर को ऊर्जा देते हैं। यह चटनी इडली, डोसा, उत्तपम, वड़ा और अप्पम के लिए सबसे उत्तम कॉम्बिनेशन है।4. कच्चे आम की खट्टी-मीठी चटनी (Raw Mango Chutney)बनाने की विधि: कच्चे आम (कैरी) के छोटे टुकड़ों में पुदीना, हरा धनिया, हरी मिर्च, जीरा और नमक डालकर पीस लें। यदि आप खट्टा-मीठा स्वाद पसंद करते हैं, तो पीसते समय इसमें थोड़ा सा गुड़ (Jaggery) भी मिला सकते हैं।फायदे और पेयरिंग: कच्चा आम विटामिन सी का एक बेहतरीन और प्राकृतिक स्रोत है जो गर्मियों में लू से बचाता है। यह चटनी पूरी, पराठे, और समर-स्पेशल लंच के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है।चटनी को लंबे समय तक ताजा रखने और स्टोर करने के 5 जरूरी टिप्सअक्सर घर पर बनाई गई चटनियां सही रखरखाव न होने के कारण बहुत जल्दी खराब हो जाती हैं या अपना मूल रंग खो देती हैं। इसकी ताजगी बनाए रखने के लिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें:साफ-सफाई सबसे जरूरी: चटनी बनाने के लिए हमेशा फ्रेश और अच्छी क्वालिटी की हरी सब्जियों का ही चुनाव करें। पीसने से पहले धनिया, पुदीना और मिर्च को पानी से 2-3 बार अच्छी तरह जरूर धो लें।एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल: तैयार चटनी को हमेशा कांच या प्लास्टिक के साफ और पूरी तरह से सूखे एयरटाइट कंटेनर (Air-Tight Container) में ही भरकर फ्रिज में रखें। खुला छोड़ने पर इसका रंग काला पड़ सकता है।गीले चम्मच से बचें: फ्रिज से चटनी निकालते समय कभी भी गीले या पहले से इस्तेमाल किए गए चम्मच का प्रयोग न करें। नमी के संपर्क में आते ही चटनी में फंगस लगने या उसके खराब होने का खतरा दोगुना हो जाता है।नींबू या सिरका: हरी धनिया-पुदीने की चटनी को पीसते समय नींबू का रस या थोड़ा सा सिरका (Vinegar) मिलाने से उसका हरा रंग बरकरार रहता है और वह एक प्राकृतिक प्रिजर्वेटिव का काम करता है।उपयोग की समय-सीमा: यद्यपि फ्रिज में चटनी कुछ दिनों तक सुरक्षित रह सकती है, लेकिन इसके असली स्वाद, पोषक तत्वों और ताजगी का आनंद लेने के लिए इसे 2 से 3 दिनों के भीतर ही बनाकर कंज्यूम (इस्तेमाल) कर लेना चाहिए।
मानव जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियां या परेशानियां आकर खड़ी हो जाती हैं, जब इंसान बेबस होकर कह उठता है— पता नहीं किस जन्म के पापों या कर्मों की सजा मिल रही है। हिंदू धर्म और दर्शन में पुनर्जन्म (Reincarnation) पर गहरा विश्वास व्यक्त किया गया है। सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथों, विशेषकर गरुड़ पुराण (Garuda Purana) में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा, उसके कर्मों के हिसाब और पुनर्जन्म के सिद्धांतों का अत्यंत विस्तार से वर्णन मिलता है।धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, आत्मा कभी नहीं मरती, वह केवल शरीर बदलती है। अक्सर पिछले जन्म की कुछ स्मृतियां और अधूरी भावनाएं हमारी आत्मा के साथ नए जन्म में भी यात्रा करती हैं। आज हम आपको 5 ऐसे रहस्यमयी और मानसिक लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें यदि आप अपने व्यावहारिक जीवन में महसूस करते हैं, तो यह इस बात का साफ इशारा हो सकता है कि आपकी आत्मा का कोई न कोई पिछला जन्म जरूर रहा है:पिछले जन्म का संकेत देने वाले 5 मुख्य लक्षण (Signs of Past Life)1. एक ही स्वप्न का बार-बार दिखाई देना (Recurring Dreams)यदि आपको सोते समय एक ही सपना बार-बार आता है, जिसमें आप खुद को किसी खास कालखंड (Ancient Time), अनजान ऐतिहासिक जगहों या अजीब वेशभूषा वाले लोगों के बीच देखते हैं। सबसे दिलचस्प बात यह कि सपने में आप उन चेहरों और जगहों से पूरी तरह परिचित महसूस करते हैं, लेकिन जागने के बाद लाख कोशिशों के बावजूद यह याद नहीं कर पाते कि इस वर्तमान जीवन में आपने उन्हें कहां देखा है। गरुड़ पुराण के नजरिए से यह आत्मा के अवचेतन मन में दबी पिछले जन्म की कोई गहरी स्मृति हो सकती है।2. पहली ही मुलाकात में अजनबी से गहरा अपनापन (Instant Connection)कई बार हमारे जीवन में किसी ऐसे व्यक्ति की एंट्री होती है, जिससे हम पहले कभी नहीं मिले होते (वह पूरी तरह अजनबी होता है)। लेकिन पहली ही नजर या चंद मिनटों की बातचीत में ही हमें ऐसा महसूस होने लगता है जैसे हम उस व्यक्ति को सदियों या कई वर्षों से जानते हैं। उसके साथ एक अटूट और गहरा मानसिक व भावनात्मक जुड़ाव (Soul Connection) स्थापित हो जाता है। आध्यात्मिक विद्वानों के अनुसार, यह इस बात का संकेत है कि वह व्यक्ति आपके पिछले जन्म के किसी करीबी रिश्ते या परिवार से जुड़ा रहा है।3. बिना कारण किसी वस्तु, स्थान या व्यक्ति से गहरा लगावअक्सर देखा जाता है कि कुछ लोगों को बिना किसी तार्किक कारण के किसी खास शहर, ऐतिहासिक इमारत, पुरानी वस्तुओं या किसी अजनबी व्यक्ति से बहुत ज्यादा लगाव या खिंचाव महसूस होने लगता है। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति का भारत के किसी ऐसे शहर के प्रति आकर्षित होना जहां वह कभी गया ही न हो। शास्त्रों के अनुसार, इस तरह का अकारण लगाव सीधे तौर पर आत्मा के पिछले जीवन के निवास स्थान या उसकी प्रिय वस्तुओं से संबंधित होता है।4. भविष्य की घटनाओं का पहले से आभास होना (Dj Vu / Intuition)क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि कोई घटना आपके सामने घट रही हो और आपको अचानक लगे कि यह सब आपके साथ पहले भी हो चुका है? या फिर कुछ लोगों के पास एक गजब की छठी इंद्री (Sixth Sense) होती है, जिससे उन्हें भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्वाभास हो जाता है और उनकी कही बातें सच हो जाती हैं। माना जाता है कि ऐसी स्थिति में वह आत्मा पिछले जन्मों के अनुभवों से इतनी परिपक्व (Mature Soul) हो चुकी होती है कि उसे आने वाले समय के इशारे पहले ही मिलने लगते हैं।5. अनजाना डर या अकारण उदासी (Unexplained Phobias)कुछ लोगों के भीतर बचपन से ही किसी खास चीज को लेकर एक गहरा और अनजाना डर (Phobia) होता है, जैसे पानी से डर, ऊंचाई से डर, अंधेरे या आग से डर। भले ही वर्तमान जीवन में उनके साथ ऐसी कोई दुर्घटना न हुई हो, फिर भी वे भयभीत रहते हैं। इसके अलावा कई बार व्यक्ति बिना किसी बाहरी कारण के गहरी उदासी या ऐसा व्यवहार करने लगता है जो उसके वर्तमान जीवन की परिस्थितियों से मेल नहीं खाता। इसे भी पिछले जन्म की किसी अधूरी इच्छा, आघात या मृत्यु के समय के डर का साया माना जाता है।गरुड़ पुराण क्या संदेश देता है?गरुड़ पुराण के अनुसार, हमारी आत्मा एक शरीर से दूसरे शरीर में जाते समय अपने साथ संचित कर्मों (अच्छे और बुरे कार्य) का एक सूक्ष्म ब्योरा लेकर चलती है। यही वजह है कि हर मनुष्य का स्वभाव, उसकी रुचियां और उसका भाग्य एक-दूसरे से पूरी तरह अलग होता है। इन संकेतों को समझकर मनुष्य को अपने वर्तमान जीवन में केवल अच्छे और धर्मसम्मत कार्य करने चाहिए ताकि उसकी आत्मा की आगामी यात्रा सुखद और मोक्ष की ओर अग्रसर हो सके।

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