'राहुल के खिलाफ तुरंत एफआईआर, खड़गे के पत्र पर एक्शन नहीं', कांग्रेस ने लगाए आरोप
कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने कथित 'शुद्धिकरण' मामला, राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और स्वतंत्र भारद्वाज पर कार्रवाई को लेकर केंद्र और भाजपा पर निशाना साधा
केरलम CMO के फेसबुक पेज से हटाए गए पोस्ट Meta ने किए बहाल
केरल में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO Keralam) के फेसबुक पेज से हटाए गए दो आधिकारिक पोस्ट को मेटा ने राज्य सरकार के कड़े हस्तक्षेप के बाद बहाल कर दिया है. मुख्यमंत्री ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए आईटी मंत्रालय और मेटा से स्पष्टीकरण मांगा.
ब्रह्मोस से AMCA जेट्स तक, रक्षा में आत्मनिर्भर भारत की हुंकार, देखें वंदे मातरम्
भारत आज उन चुनिंदा देशों में शुमार हैं जो अपने फाइटर जेट्स खुद बनाते हैं. अपनी मिसाइलें भी खुद बनाते हैं, और अपनी सुरक्षा प्रणाली भी खुद बनाते हैं. इस वंदे मातरम् के एपिसोड में हम आपको 'मेक इन इंडिया' का वही सफर दिखाएंगे. देखें पूरा वीडियो.
केतन मर्डर केस में तीसरा आरोपी गिरफ्तार, सिया गोयल और चेतन चौधरी से क्या कनेक्शन
पुलिस ने इस साल जून में पुणे जिले के लोहगढ़ किले में रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में शनिवार को 22 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
यूपी के पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को नई जिम्मेदारी, बने अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल
बीजेपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है. राष्ट्रपति भवन की ओर से शनिवार देर रात की इसकी घोषणा की गई.
कौन हैं मिस वर्ल्ड 2026 जोहैरी मोला? इस सवाल का जवाब देकर जीता ताज
Miss World 2026 का ताज डोमिनिकन रिपब्लिक की जोहेरी मोल डोमिंग्वेज ने अपने नाम किया है. स्पेन की एलिजाबेथ रेयनेस फर्स्ट रनर-अप और मलेशिया की तानुसिया चेट्टी सेकेंड रनर-अप रहीं. भारत की निकिता टॉप 20 में अपनी जगह नहीं बना पाईं.
क्या चीन का मेगा डैम भारत के लिए खतरा, नेपाल जैसी तबाही को दावत देता प्रोजेक्ट?
चीन ने तिब्बत के मेडोग क्षेत्र में यरलुंग त्संगपो नदी के निचले हिस्से में दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक का निर्माण शुरू किया है। करीब 50 किलोमीटर के क्षेत्र में नदी लगभग 2,000 मीटर नीचे गिरती है।
जिंदा मरीज को भेजा मर्चुरी, फिर हुआ चमत्कार; डॉक्टरों ने की थी मौत की पुष्टि
Rewa Medical Negligence Case: रीवा के संजय गांधी अस्पताल में डॉक्टरों ने जीवित 66 वर्षीय बुजुर्ग को मृत घोषित कर दिया. शव वाहन में रखने के दौरान सांसें चलने पर दोबारा वेंटिलेटर पर भर्ती कराया गया.
नेपाल से NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट: कुछ निशानियों में सिमटकर रह गई जिंदगी
त्रिशूली नदी के उफान ने यहां सब कुछ खत्म कर दिया है. सिर्फ 20 मीटर आगे चलने पर ही देवघाट में बिखरे हुए सपने और जिंदगियों के निशान मिल जाते हैं.
पूर्व सीडीएस अनिल चौहान ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के सुरक्षा समझौते को लेकर कहा कि यह समझौता पाकिस्तान में अति आत्मविश्वास पैदा कर सकता है, जिससे हमें सावधान रहना होगा।
यूएनईपी की 'लिमिटिंग ओवरशूट' रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि दुनिया ग्लोबल वार्मिंग की 1.5 डिग्री सेल्सियस सीमा के करीब पहुंच रही है, जिसे 50 वर्षों की तकनीक भी पूरी तरह उलट नहीं पाएगी।
यूपी, पंजाब सहित 4 चुनावी राज्यों में पहले होगी जनगणना, 1 दिसंबर से शुरुआत
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक जनगणना होगी, जो आगामी चुनावों के कारण समय से पहले की जा रही है।
Bihar Flood: गंगा का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पार, 11 जिलों में 16 लाख लोग बेहाल
(तस्वीरों के साथ)पटना, पांच सितंबर बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है और राज्य के 11 जिलों में 16 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। भारी बारिश के बीच शनिवार सुबह पटना के गांधी घाट और पंडारक में गंगा नदी का जलस्तर 10 सेंटीमीटर बढ़कर ‘उच्चतम बाढ़ स्तर’ को पार कर गया। आधिकारिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई। गंगा और उसकी सहायक नदी पुनपुन का जलस्तर बढ़ने से पटना के ग्रामीण इलाकों में कई जगह पानी भर गया, जिससे रेल और सड़क यातायात बाधित हुआ, जबकि शहर के निचले इलाके जलमग्न हो गए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को भागलपुर एवं नौगछिया के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अधिकारियों को समय पर आवश्यक व्यवस्थाएं करने, पर्याप्त राहत सामग्री उपलब्ध कराने और त्वरित बचाव के उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उन्हें किसी भी तरह की परेशानी न हो।’’मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने तथा राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया है। आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि सबसे अधिक प्रभावित ज़िलों में से एक पटना में 2.32 लाख लोग बाढ़ की चपेट में आए। स्थानीय सांसद रवि शंकर प्रसाद ने उन ग्रामीण इलाकों का दौरा किया जो गंगा और पुनपुन नदियों के पानी से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। प्रसाद ने अपने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात करके उनकी समस्याएं सुनीं तथा अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत और बचाव कार्यों में कोई ढिलाई न बरती जाए और भोजन, दवाइयों व अन्य जरूरी चीजों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। पूर्वी मध्य रेलवे ने उन ट्रेन की सूची जारी की जिन्हें रद्द किया गया है या उनके मार्ग में परिवर्तन किया गया है। अथमलगोला प्रखंड में एनएच-31 पानी में डूब गया, जिससे गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। जल संसाधन विभाग के बुलेटिन के अनुसार, शनिवार सुबह 10 बजे गंगा नदी दो स्थानों पर उच्चतम बाढ़ स्तर से ऊपर बह रही थी, जिससे राजधानी के निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। लोगों से नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सतर्क रहने की अपील की गई है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। बुलेटिन के अनुसार, बिहार में कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनमें डुमरियाघाट और हाजीपुर में गंडक, बलतारा में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, दीघा, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में गंगा, श्रीपालपुर में पुनपुन तथा दरौली में घाघरा नदी शामिल हैं। जल संसाधन विभाग ने बताया कि शनिवार सुबह 10 बजे पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर चार घंटे में 10 सेंटीमीटर बढ़कर 50.53 मीटर स्तर पर पहुंच गया। यह ‘अब तक के सबसे ऊंचे बाढ़ स्तर’ से एक सेंटीमीटर अधिक है। विभाग के अनुसार, गांधी घाट पर गंगा का पिछला उच्चतम बाढ़ स्तर 50.52 मीटर था, जो 21 अगस्त 2016 को दर्ज किया गया था। विभाग ने कहा, ‘‘पूर्वानुमान है कि रविवार सुबह आठ बजे तक गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर और बढ़कर 50.62 मीटर तक पहुंच सकता है। लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।’’विभाग ने बताया कि पटना के पंडारक में पांच सितंबर को सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 43.78 मीटर दर्ज किया गया, जबकि वहां पिछला उच्चतम बाढ़ स्तर 43.73 मीटर था जो 16 अगस्त, 2021 को दर्ज किया गया था। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के बुलेटिन के अनुसार, कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण 11 जिलों के 16 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अररिया शामिल हैं। विभाग ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को एहतियाती कदम उठाने, नदी के पास रहने वाले लोगों को सतर्क करने और बाढ़ जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष दलों की लगातार गश्त सुनिश्चित करने को कहा है। राज्य और पड़ोसी नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद विभिन्न नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। बिहार में सितंबर में अब तक 60.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 69 प्रतिशत अधिक है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए विभिन्न जिलों में 38 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। अब तक बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच 12,300 पॉलीथीन शीट और 2,250 सूखा राशन पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। लोगों की निकासी और आवागमन के लिए 858 नावें संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित जिलों में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के 27 और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के सात दल तैनात किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने पटना नगर निगम, जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को हाई अलर्ट पर रहने तथा आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। पटना में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री स्थिति पर नजर रख रहे हैं। सरकार पूरी तरह से हालात से अवगत है। सभी यह प्रयास कर रहे हैं कि इस आपदा के दौरान लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।’’उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। नेपाल में आई आपदा और लगातार बारिश के बाद से ये हालात हैं।’’इस बीच, पूर्णिया से निर्दलीय लोकसभा सदस्य राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने शनिवार को पटना के दानापुर दियारा क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात की और कथित तौर पर उन्हें आर्थिक सहायता भी मुहैया कराई। उन्होंने प्रशासन से राहत कार्यों में तेजी लाने और प्रभावित लोगों के लिए पर्याप्त भोजन, दवाइयां, नावें, पीने का पानी, राहत शिविर और चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
नरेला में दिनदहाड़े मर्डर से मची सनसनी, CCTV आया सामने
दिल्ली के नरेला में प्रॉपर्टी डीलर प्रमोद कुमार की हत्या का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है. फुटेज में वारदात के बाद दो संदिग्ध मोटरसाइकिल से भागते दिख रहे हैं, जिनमें एक के हाथ में पिस्तौल नजर आ रही है. 3 सितंबर को जिम से लौटते समय प्रमोद पर कई राउंड फायरिंग हुई थी. पुलिस ने मौके से 15 खाली कारतूस बरामद किए. चार टीमें हमलावरों की तलाश में जुटी हैं.
यूपी के पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को बड़ी जिम्मेदारी, बनाया गया उपराज्यपाल; कहां हुई नियुक्ति
उत्तर प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति भवन ने इस बात की जानकारी दी है।
'SRCC को चुनावी मंच बना दिया...', पीएम मोदी की स्पीच पर कांग्रेस का तंज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के 100 साल के शताब्दी समारोह में शरीक हुए. इस दौरान उनके संबोधन को लेकर कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि पीएम मोदी ने SRCC के मंच को चुनावी मंच बना दिया.
त्रिपुरा में 72 घंटे का रेल-सड़क जाम प्रदर्शन खत्म, सरकार के आश्वासन पर बनी बात
त्रिपुरा सरकार के आश्वासन के बाद हथियार डाल चुके उग्रवादियों के मंच ने 72 घंटे का रेल-सड़क जाम प्रदर्शन समाप्त कर दिया है। इस प्रदर्शन से त्रिपुरा के कुछ हिस्सों में रेल और वाहन यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ था।
कौन है 'बिट्टू तबाही', जिनके केविन पीटरसन भी हुए मुरीद
बिट्टू तबाही इस वक्त सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं. वजह है उनकी लगन और वो जुनून, जिसके चलते उन्होंने उस नदी में उतरकर सफाई शुरू कर दी, जिसे लोग कचरे का ढेर समझकर छोड़ चुके थे. अब उनको दुनिया में भी पहचान मिल रही है
UP में बाढ़ का असर घटा, अब केवल 14 जिले प्रभावित: CM Yogi Adityanath
वाराणसी (उप्र), पांच सितंबर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि राज्य में 10 वर्ष पहले 45 जिले बाढ़ से प्रभावित होते थे, लेकिन अब इस बात से संतुष्टि है कि सिर्फ 14 जिलों में थोड़ा-बहुत पानी जमा हुआ है और वहां राहत सामग्री वितरित की जा रही है। योगी आदित्यनाथ शनिवार को वाराणसी में बाढ़ प्रभावितों को राहत सामग्री वितरित करने के बाद एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘जिस प्रदेश में 10 वर्ष पहले 45 जिले बाढ़ से प्रभावित होते थे, दर्जनों जिलों में मस्तिष्क ज्वर से बच्चों की मौत होती थी, आज इस बात से संतुष्टि होती है कि कुल मिलाकर 14 ऐसे जिले हैं, जैसे यहां पर थोड़ा-बहुत पानी आया है।’’मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘उन क्षेत्रों का हम दौरा कर रहे हैं, राहत सामग्री वितरित हो रही है। व्यापक पैमाने पर जिला प्रशासन, सभी जनप्रतिनिधि और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता युद्ध स्तर पर राहत कार्यों से जुड़े हुए हैं।’’योगी ने दावा किया, ‘‘आज जो हम राहत सामग्री वितरित कर रहे हैं, इतनी राहत सामग्री 2017 के पहले नहीं मिलती थी, केवल सूखा ब्रेड मिलता था। तब न बच्चों के लिए दूध था, न गरम भोजन था और न ही सूखा राशन दिया जाता था।’’मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने आपदा राहत निधि से जो पैसा भेजा है, उसी पैसे से सब व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रति वर्ष जब गंगा नदी का जल स्तर बढ़ता है तो निचले क्षेत्रों में जलजमाव की समस्या खड़ी हो जाती है। बरसात के समय में आज से 10 साल पहले 40 से 45 जिले बाढ़ से प्रभावित होते थे और भीषण जल जमाव से लोगों का आवागमन बाधित होता था और उन्हें परेशानी होती थी।’’उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में प्रत्येक क्षेत्र में जो कार्य हुए हैं, उसके परिणाम वाराणसी में भी देखने को मिल रहे हैं। योगी ने कहा, ‘‘आज काशी नयी काशी बन गई है। अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए नये कलेवर के रूप में एक नयी काशी का हम सब दर्शन कर रहे हैं।’’योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सपा सरकार में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि 2017 के पहले बाढ़ पीडि़तों का यही पैसा सपाई खा जाते थे। उन्होंने कहा कि जिन किसानों की फसल डूबी है, उसका सर्वेक्षण किया जा रहा है और उनको भी मुआवजा देने का आदेश कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण की रिपोर्ट आते ही उन्हें तत्काल मुआवजा दिया जाएगा।
धौलपुर में सवारियों से भरी ईको वैन पोखर में पलटी, 3 बच्चों समेत 4 की मौत
राजस्थान के धौलपुर में लगातार हो रही बारिश के बीच शनिवार को बड़ा हादसा हो गया. मनियां थाना क्षेत्र के फूलपुर गांव के पास सवारियों से भरी ईको वैन गहरे पानी से भरे पोखर में पलट गई. ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर 8 लोगों को बाहर निकाला, लेकिन तीन बच्चों और एक महिला की जान नहीं बच सकी.
चाय के साथ ट्राई करें ये 7 साउथ इंडियन स्नैक्स; स्वाद है लाजवाब!
South Indian Snacks: अगर आप रोज-रोज एक ही तरह के स्नैक्स खाकर बोर हो गए हैं और कुछ अलग व टेस्टी ट्राई करना चाहते हैं तो इस बार साउथ इंडियन स्नैक्स बना सकते हैं. ये स्नैक्स खाने में काफी टेस्टी होते हैं और इन्हें आप बेहद आसानी से घर पर तैयार कर सकते हैं.
ऑपरेशन सिंदूर के हीरो पर जानबूझकर विवाद किया जा रहा? देखें राउंड टेबल बहस
राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO एयर मार्शल रिटायर्ड जितेंद्र मिश्र राम काज के लिए अयोध्या पहुंच गए हैं. वो आगे राम ट्रस्ट में कैसे बदलाव लाएंगे, राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड के बाद इस पर सबकी नजर है. लेकिन उन्होंने ये जिम्मा संभाला उसके पहले विवाद हो गया. कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने कहा कि क्या कोई साधु संत नहीं मिला, तो राशिद अल्वी बोले कि ऑपरेशन सिंदूर पर सरकार कुछ छिपाना चाहती है. देखें...
OG, फ्लेक्स... दिल्ली यूनिवर्सिटी में दिखा PM मोदी का Gen Z अंदाज
शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में पहुंचे. इस दौरान उन्होंने छात्रों और पूर्व छात्रों को संबोधित करते हुए Gen-Z भाषा का इस्तेमाल किया.
Sir Ganga Ram Hospital के डॉक्टरों ने महिला के गले से निकाला 15x10 सेमी का Thyroid Tumor
नयी दिल्ली, पांच सितंबर दिल्ली के एक अस्पताल में 43 साल की एक महिला का सफल ऑपरेशन कर थायरॉइड का बहुत बड़ा ट्यूमर निकाला गया। यह ट्यूमर कैरोटिड धमनी के चारों ओर फैल गया था और सीने के ऊपरी हिस्से तक पहुंच गया था। कैरोटिड धमनी मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने वाली प्रमुख रक्त वाहिका है। सर गंगा राम अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि 15 गुना 10 सेंटीमीटर आकार का यह ट्यूमर करीब एक दशक से धीरे-धीरे बढ़ रहा था, लेकिन पिछले कुछ महीनों में इसका आकार तेजी से बढ़ गया। सूजन के ऊपर की त्वचा भी कई जगह से फट गई थी, जिससे खून रिसने लगा था। चिकित्सकों ने बताया कि ट्यूमर के बड़े आकार और तेजी से बढ़ने के कारण शुरुआत में इसके तेजी से फैलने वाले थायरॉइड कैंसर होने की आशंका जताई गई थी। हालांकि, विस्तृत जांच और ‘बायोप्सी’ से पता चला कि यह पैपिलरी थायरॉइड कैंसर है, जिसका इलाज संभव है। चिकित्सकों के अनुसार इसके बाद मरीज की सर्जरी की गयी जो सफल रही।
'हो सकता है जेल के खाने की वजह से मुझे कैंसर हुआ हो', संजय राउत का बड़ा दावा
Sanjay Raut Big Claim: शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने आशंका जताई है कि जेल में उनके खाने में जहर मिलाया गया जिससे उन्हें कैंसर हुआ. राउत ने राहुल गांधी की टॉक्सिसिटी टेस्ट वाली सलाह का भी खुलासा किया.
नाराज फूफाओं ने हर बार अड़ंगा...पीएम मोदी का निशाना; कांग्रेस का पलटवार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में अपने संबोधन के दौरान विपक्ष पर निशाना साधा। वहीं, कांग्रेस ने भी पीएम मोदी के कार्यक्रम पर निशाना साधा है…
दिल्ली में दिनभर बारिश से तापमान में गिरावट, मौसम हुआ सुहाना
दिल्ली में शनिवार को दिनभर हुई हल्की से मध्यम बारिश के चलते अधिकतम और न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई. मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट के बीच शहर का पारा सामान्य से काफी नीचे आ गया. वहीं, हवा की गुणवत्ता भी सुधरकर 'संतोषजनक' श्रेणी में पहुंच गई है.
IIT दिल्ली में बनी ये डिवाइस घटाएगी पुरानी डीजल गाड़ियों से होने वाला पॉल्यूशन
केंद्र सरकार ने पुराने डीजल ट्रक और बसों से निकलने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस (RECD) को मंजूरी दी है. यह डिवाइस PM उत्सर्जन में 90% और NOx उत्सर्जन में 60% तक कमी लाने में सक्षम है.
दो साल में 416 करोड़ का चंदा, अब दफ्तर पर ताला... कौन चला रहा है 'सत्यवादी रक्षक पार्टी'?
2023-24 के दौरान गुजरात की गुनमान सी पार्टी सत्यवादी रक्षक पार्टी को 330 करोड़ रुपये से ज्यादा का चंदा मिला. जब आजतक की टीम ने पार्टी की अध्यक्ष से इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि पार्टी बंद हो गई है.
SRCC के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी का संबोधन, सुनिए भाषण की बड़ी बातें
पीएम मोदी SRCC कॉलेज के 100 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित शताब्दी समारोह में शामिल हुए और कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित किया. पीएम ने संबोधन में कहा कि 'SRCC के एलुमिलाई OG है, धुरंधर न हों लेकिन धूम तो मचाई है.' पीएम मोदी इस दौरान दिल्ली मेट्रो में सफर कर SRCC के शताब्दी समारोह पहुंचे थे. सुनिए भाषण की बड़ी बातें.
इंदौर (मध्यप्रदेश), पांच सितंबर कांग्रेस के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के केवल शुरुआती दो अंतरों के गायन के फैसले पर निशाना साधते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने शनिवार को आरोप लगाया कि गांधी परिवार हमेशा खुद को देश के नियमों और संविधान से ऊपर समझता है। ठाकुर ने इंदौर में संवाददाताओं से कहा कि इस परिवार के पास पूरा राष्ट्रीय गीत गाने के लिए महज तीन मिनट 10 सेकंड का समय नहीं है और वह सदा अपने आप को देश के नियमों और संविधान से ऊपर समझता है। उन्होंने सवाल किया कि ऐसी कौन-सी मजबूरी है कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में पूरा राष्ट्रीय गीत नहीं गाया जाता? पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा,‘‘बाबा साहेब आम्बेडकर ने देश को संविधान दिया, लेकिन कांग्रेस ने उनका अपमान किया और संविधान को तार-तार कर दिया।’’उन्होंने कहा कि देश में आपातकाल का काला अध्याय भी कांग्रेस की ही देन है। ठाकुर ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के इंदौर में 19 सितंबर को प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर भी प्रहार किया। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद ने कहा,‘‘जिस दिन राहुल गांधी देश का अपमान करना बंद कर देंगे, सनातन (धर्म) को कोसना बंद कर देंगे और तुष्टीकरण की राजनीति बंद कर देंगे, तब देश के युवा उनको थोड़ी गंभीरता से लेना शुरू कर देंगे।’’बाद में ठाकुर ने एक कार्यक्रम में युवाओं से वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य को हासिल करने में महती भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को चुनौतियों से डरना नहीं चाहिए और अपना ब्रांड स्वयं बनाना चाहिए। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र की सराहना की और कहा कि वर्ष 2014 में जहां देश में लगभग 500 स्टार्टअप थे, वहीं अब उनकी संख्या बढ़कर 2.23 लाख से अधिक हो चुकी है।
सिर्फ समोसे-पकौड़े बनाने की मशीन नहीं एयर फ्रायर! ये काम भी करता है
Air Fryer Uses: एयर फ्रायर का इस्तेमाल सिर्फ फ्राइज और समोसे बनाने के लिए नहीं होता. ये किचन गैजेट फ्राइंग के अलावा ग्रिलिंग, रीहीटिंग और बेकिंग जैसे कई काम भी आसानी से कर सकता है. मास्टरशेफ पंकज भदौरिया ने एयर फ्रायर के 5 ऐसे इस्तेमाल बताए हैं, जिनके बारे में शायद हर कोई नहीं जानता.
बुर्के में आईं 3 महिलाएं, ज्वेलर्स को बातों में उलझाकर 6 लाख की नथ चुराई
सूरत में ज्वेलरी शॉप को निशाना बनाने वाले तीन महिलाओं के गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. बुर्का और नकाब पहनकर ग्राहक बनकर पहुंचीं महिलाओं ने कारीगर को बातचीत में उलझाया और करीब 6 लाख रुपये की 45 ग्राम सोने की नथ लेकर फरार हो गईं. CCTV और तकनीकी सर्विलांस की मदद से पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया.
ओपन एआई के स्वायत्त एजेंटों ने हाल ही में एक जर्मन वेबसाइट को हैक कर उसे अन्य एआई एजेंटों के लिए संदेश बोर्ड में बदल दिया।
बिहार में गंगा का तांडव, टूटे पुराने सभी रिकॉर्ड
बिहार में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और 5 से 8 सितंबर के बीच और वृद्धि का अनुमान है. पटना के गांधीघाट और पंडारक में अत्यंत गंभीर बाढ़ की स्थिति बनी हुई है. छह जिलों में गंभीर बाढ़ का खतरा बताया गया है. गंगा के बढ़ते दबाव से सोन, पुनपुन, गंडक और कोसी में बैकवाटर प्रभाव बन रहा है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव और निकासी की समस्या बढ़ सकती है.
लिव-इन पार्टनर की बेरहमी से हत्या, पुलिस ने आरोपी को सिखाया सबक
Bhavnagar Bus Stand Murder Case: भावनगर एसटी बस स्टैंड पर प्रेमी फैजल ने शक के चलते काजल बारैया की पीट-पीटकर हत्या कर दी. पुलिस ने आरोपी को पकड़कर सीन रीक्रिएट कराया.
Bhagwant Mann की पत्नी पर शिअद और Congress का हमला, 5 करोड़ की मांग पर FIR की मांग
चंडीगढ़, पांच सितंबर शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और कांग्रेस ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी गुरप्रीत कौर के खिलाफ उन पर दो दुष्कर्म मामलों को दबाने के लिए पांच करोड़ रुपये मांगने के आरोपों को लेकर शनिवार को यहां प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मान की पत्नी गुरप्रीत कौर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। गुरप्रीत कौर ने आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें ‘‘बेबुनियाद’’ बताया है। पंजाब के मुख्यमंत्री के आवास की ओर बढ़ने और उनके आवास का ‘घेराव’ करने के लिए बैरिकेड तोड़ने की कोशिश को लेकर शिअद सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल तथा अकाली दल विधायक गनीव कौर मजीठिया समेत पार्टी की कई महिला नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। अकाली प्रदर्शनकारियों को मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने से रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था और इलाके में बैरिकेड लगाए गए थे। शिअद की महिला इकाई ‘स्त्री अकाली दल’ ने मुख्यमंत्री आवास के घेराव की योजना बनाई थी। पार्टी के अनुसार, हरसिमरत कौर बादल के नेतृत्व में महिला प्रदर्शनकारियों ने जब बैरिकेड पार करके मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने की कोशिश की, तो चंडीगढ़ पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और एक थाने ले गई। अकाली दल के झंडे और तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रही महिला कार्यकर्ताओं ने सेक्टर 28 स्थित अकाली दल कार्यालय के पास सड़क पर बैठकर पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। इससे पहले, महिला प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए हरसिमरत ने मान की पत्नी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि उन्होंने दुष्कर्म के दो मामलों को दबाने के लिए पांच करोड़ रुपये की मांग की। उन्होंने पुलिस से मान की पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की। हरसिमरत ने आरोप लगाया, ‘‘मुख्यमंत्री की पत्नी ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर गुरविंदर सिंह उर्फ गुरी चहल को बचाने के लिए पैसे मांगे थे, जिसके खिलाफ दो महिलाओं ने दुष्कर्म और अपहरण के आरोप लगाए हैं।’’उन्होंने दावा किया कि आरोपी को दो महीने के भीतर ‘‘रिहा’’ कर दिया गया और उसे अमेरिका भी भागने दिया गया। उन्होंने कहा कि कौर की गिरफ्तारी होने तक शिअद पूरे राज्य में जन आंदोलन शुरू करेगा। सांसद ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाली दुष्कर्म पीड़िताओं को सुरक्षा देने की भी मांग की। इसके अलावा उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की। हरसिमरत को हिरासत में लिए जाने के बाद अकाली विधायक गनीव कौर मजीठिया ने कहा कि उन्हें सच बोलने से नहीं रोका जा सकता। पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की पत्नी गनीव कौर मजीठिया ने कहा, ‘‘हमें सच के लिए लड़ने से नहीं रोका जा सकता।’’तीन सितंबर को शिअद के एक प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात करके इस आरोप की स्वतंत्र जांच के लिए उनके हस्तक्षेप की मांग की थी कि मान की पत्नी ने दुष्कर्म के एक मामले को दबाने के लिए पांच करोड़ रुपये मांगे थे। महिला कांग्रेस की पंजाब इकाई ने भी इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने बताया कि पुलिस ने कांग्रेस की महिला कार्यकर्ताओं को मान के आवास का घेराव करने के लिए आगे बढ़ने से रोक दिया। महिला कांग्रेस की पंजाब इकाई की अध्यक्ष बलजीत कौर ने आरोप लगाया कि दुष्कर्म मामले के एक आरोपी की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए पांच करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच और कौर के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की।
भारत आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में साझा ब्रिक्स मुद्रा का समर्थन नहीं करेगा, बल्कि स्थानीय मुद्राओं और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने पर जोर देगा।
नेपाल में 10 दिन मलबे में दबी महिला को बचाया गया जिंदा
नेपाल में भीषण बाढ़ से 1344 लोगों की मौत और पांच हजार से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है. इस तबाही के बीच नुवाकोट के बिदुर से राहत की खबर सामने आई. यहां 60 वर्षीय चंद्रिका श्रेष्ठ को करीब दस दिनों बाद मलबे में दबी हालत से जिंदा बाहर निकाला गया. परिवार ने उन्हें मृत मानकर प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर दिया था. बचावकर्मियों ने हेलीकॉप्टर से अस्पताल पहुंचाया.
आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने युवा स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने भाजपा की विचारधारा से प्रभावित युवाओं से स्वतंत्र भारद्वाज के मामले से सबक लेने की अपील की।
ISRO में प्राइवेट सेक्टर की बढ़ती भागीदारी, कर्मचारियों के 9 संगठनों ने लिखा पत्र; मांगा जवाब
कर्मचारी संगठनों ने आशंका जताई कि कहीं ISRO को रिसर्च और डेवलपमेंट तक सीमित न कर दिया जाए। उन्होंने इन-स्पेस के अध्यक्ष के बयान का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि भविष्य में इसरो प्रक्षेपण यान नहीं बनाएगा।
पणजी में सोमवार को होगी पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की 28वीं बैठक, गृह मंत्री अमित शाह करेंगे अध्यक्षता
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में सोमवार को पणजी में 28वीं पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की बैठक होगी। इसमें गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच अंतर-राज्यीय मुद्दों व सहयोग पर चर्चा की जाएगी।
पीएम मोदी ने शनिवार के दिल्ली मेट्रो का सफर किया। इस दौरान खास अंदाज में वे बच्चों से मिले और उनसे गुफ्तगू की। बता दें कि पीएम मोदी के मेट्रो सफर से मेट्रो एक बार फिर से चर्चा में आ गई है। वे 5 सितंबर को दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ ...
पीएम मोदी ने विपक्ष को ‘नाराज फूफा’ कहकर तंज कसा। पीएम ने कहा- जब हम दुनिया का सबसे बड़ा स्टेच्यू बना रहे थे तब फूफा जी ने कमर कस ली, इसकी जरूरत क्या है। जब हमने हाई स्पीड ट्रेन पर काम किया तो फूफा जी बोले, इसकी जरूरत क्या है। जब यूपीआई लेकर आए तो ...
नौकरी गई तो बन गए थे संत, 26 साल बाद ऐसे चमकी गिरवर सिंह की किस्मत
मध्य प्रदेश के मुरैना के गिरवर सिंह तोमर की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. 1999 में नौकरी से बर्खास्त होने के बाद उन्होंने मंदिर में संत का जीवन अपना लिया, लेकिन वर्दी वापस पाने की उम्मीद नहीं छोड़ी. करीब 26 साल तक अदालत में लड़ाई लड़ी और आखिरकार अगस्त 2026 में छत्तीसगढ़ के बीजापुर में फिर सीआरपीएफ की वर्दी पहनकर ड्यूटी शुरू की.
54 साल पुराना वो गाना जिसमें हैं हेमा मालिनी और धर्मेंद्र की केमेस्ट्री, प्रेम चोपड़ा ने इसमें लगाया छौंक. लता मंगेशकर की मधुर आवाज ने इस गाने को सदाबहार बना दिया.
पाकिस्तान में मुनीर लिख रहे नई पटकथा, निशाने पर जरदारी परिवार, क्या इमरान खान वाला होगा हाल
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि उन्हें PPP की इस दोहरी नीति के पीछे कुछ और दिखाई देता है, और उन्होंने कहा कि सही समय आने पर वे इस मामले की गहराई से पड़ताल करेंगे.
अमृतसर से पटना साहिब तक, भारत के 5 सबसे फेमस गुरुद्वारे
भारत में स्वर्ण मंदिर के अलावा भी कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं, जो अपनी धार्मिक मान्यता, सुंदरता और अनोखी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हैं. यहां जानिए भारत के 5 प्रसिद्ध गुरुद्वारे, जो आस्था, इतिहास और शांति का अनोखा अनुभव देते हैं.
होम्योपैथी की गोली देते ही बेनकाब हुए दिमागी नक्सल, PM मोदी का तंज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोहराया है कि अब भारतीय सेना पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों को मारती है। उन्होंने 'दिमागी नक्सलवाद' पर अपनी टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि उनके बयान से ऐसे लोग बेनकाब हो गए हैं।
31 साल पहले रिलीज हुआ सोनू निगम का यह दर्दभरा गीत आज भी टूटे दिल वालों की पहली पसंद बना हुआ है. बेवफा प्रेमिका की शादी और बिछड़ने के दर्द को बयां करने वाले इस गाने की भावुक लिरिक्स और सोनू निगम की दिल छू लेने वाली आवाज ने इसे सदाबहार बना दिया.
PM मोदी पर बात करते हुए इमोशनल हुईं स्मृति ईरानी, बोलीं- मेरे बाप के गिरेबान तक अगर हाथ पहुंचा तो...
पीएम मोदी के बारे में बात करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी इमोशनल हो गईं। उन्होंने पीएम मोदी को अपने पिता की उम्र का बताते हुए कहा कि मेरे बाप के गिरेबान तक अगर आपका हाथ पहुंचा तो यह मेरी गलती है।
'मैं पठान हूं, गोली चला दो', जब अंडरवर्ल्ड के आगे नहीं झुके शाहरुख
डायरेक्टर संजय गुप्ता मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन के दिनों को याद करते हुए शाहरुख खान से जुड़ा एक किस्सा सुना गए. उन्होंने बताया कि कैसे बाकी लोगों की तरह शाहरुख ने अंडरवर्ल्ड के सामने झुकने से इनकार किया.
SRCC के शताब्दी समारोह में पहुंचे PM मोदी, मेट्रो से किया सफर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में शामिल हुए. उन्होंने संस्थान की 100 साल की उपलब्धियों की सराहना की. प्रधानमंत्री ने कहा कि SRCC ने व्यापार, सार्वजनिक जीवन और समाज के लिए कई पीढ़ियों का नेतृत्व तैयार किया है. इस अवसर पर 100 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया गया. पीएम मोदी मेट्रो से वहां पहुंचे और छात्रों को बधाई दी.
Census 2027: यूपी, पंजाब समेत चार राज्यों में 1 दिसंबर 2026 से शुरू होगी आबादी की गणना
नयी दिल्ली, पांच सितंबर भारत के महापंजीयक ने शनिवार को कहा कि जनगणना 2027 के लिए गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में जनसंख्या की गणना एक दिसंबर, 2026 से चार जनवरी, 2027 तक की जायेगी। अगले साल की शुरुआत में जिन राज्यों में चुनाव होने की संभावना है, वहां जनगणना की यह प्रक्रिया पहले शुरू की जा रही है। भारत के महापंजीयक (आरजीआई) एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने राजपत्र अधिसूचना में कहा कि इन क्षेत्रों के नागरिक 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक स्व-गणना का विकल्प अपना सकते हैं। अधिसूचना में कहा गया है, ‘‘गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड राज्य के बर्फबारी से प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर बाकी इलाकों में जनसंख्या की जनगणना एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक की जाएगी। इसके बाद पांच जनवरी 2027 से नौ जनवरी 2027 तक पुनरीक्षण चरण आयोजित किया जायेगा।’’इसमें कहा गया कि गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के बर्फबारी से प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर राज्य के अन्य हिस्सों के लिए जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि पांच जनवरी 2027 की रात 12 बजे होगी। इसमें कहा गया है, ‘‘केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि एक अक्टूबर 2026 की रात 12 बजे होगी।’’पिछले महीने जारी एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनसंख्या की गणना एक सितंबर से 30 सितंबर तक की जाएगी। जून 2025 को जारी एक सरकारी बयान में कहा गया था कि लद्दाख, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों को छोड़कर देश के बाकी हिस्सों के लिए संदर्भ तिथि एक मार्च 2027 होगी। गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 तक समाप्त हो जायेगा। एक अधिकारी ने कहा कि बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी, मुख्य रूप से शिक्षक, जनगणना और चुनावी कार्यों में लगे हुए हैं। ऐसे में इन दोनों प्रक्रियाओं को एक साथ संचालित करना मुश्किल हो जाता है। शनिवार को आरजीआई द्वारा जारी एक अन्य अधिसूचना में कहा गया कि केंद्र सरकार ने मणिपुर में जनगणना 2027 के लिए मकान-सूचीकरण का कार्य भी स्थगित कर दिया है। स्वतंत्रता के बाद होने वाली आठवीं जनगणना दो चरणों में कराई जा रही है—पहले चरण को मकान-सूचीकरण और आवास जनगणना कहा जाता है, जबकि दूसरे चरण को जनसंख्या की गणना कहा जाता है।
15 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनियाभर में 900 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर बॉक्स ऑफिस पर ऐसा इतिहास रचा, जिसे आज भी सबसे बड़े मुनाफे वाली फिल्मों में गिना जाता है.
फिर उलझेगी विजय सालगांवकर की रहस्यमयी कहानी, इस दिन रिलीज होगा 'दृश्यम 3' का ट्रेलर
'दृश्यम: द कन्क्लूजन' का ट्रेलर 9 सितंबर को रिलीज होगा. अजय देवगन और श्रिया सरन की फिल्म 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में आएगी.
छोड़ी लाखों की जॉब छोड़ आतंकियों से लड़े, कोबरा कमांडो के आर्मी अफसर बनने की कहानी
बिहार के सॉफ्टवेयर इंजीनियर राघवेंद्र झा को गया ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) में कमीशन मिला है. इन्होंने जावा डेवलपर, सीआरपीएफ सब-इंस्पेक्टर से लेकर भारतीय सेना में अधिकारी बनने का प्रेरणादायक सफर तय किया है.
कांग्रेस संगठन में बड़ा फेरबदल, सचिन पायलट को बनाया पंजाब का प्रभारी, सुरेजवाला को गुजरात का प्रभार
कांग्रेस ने संगठन में बदलाव किया है. पूर्व सीएम भूपेश बघेल को पंजाब राज्य प्रभारी पद से हटा दिया है. उन्हें असम की जिम्मेदारी मिली है.
अमेरिकी युद्धपोतों पर हमले के बाद US सेना का एक्शन, ईरान के 3 तेल टैंकरों पर अटैक
अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी में ईरान के तीन तेल टैंकरों पर हमला किया है, जिसमें दो टैंकर पूरी तरह नष्ट हो गए और तीसरे को भी नुकसान पहुंचा का दावा किया है. अमेरिका सेना का कहा है कि ये हमला अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों पर मिसाइल हमलों के जवाब में किया गया.
चीन में टाइफून का कहर, तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा
चीन के तटीय इलाकों में प्राकृतिक आपदा ने भीषण रूप ले लिया है. शक्तिशाली चक्रवाती तूफान टाइफून साउदेल के कारण चीन के तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही देखने को मिल रही है. गवांगडोंग प्रांत में नदियाँ पूरी तरह से उफान पर हैं और वहां जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है. इस भारी बारिश और बाढ़ की गंभीर स्थिति के कारण स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है.
बिहार में पटना समेत 8 जिलों पर मंडराया बाढ़ का खतरा
बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है. गंगा और सोन नदियां उफान पर हैं, जिससे पटना समेत राज्य के 8 जिलों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. अब तक 6 लाख से अधिक लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हो चुके हैं. मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, अगले 4 से 5 दिनों तक जलस्तर में और बढ़ोतरी होने की आशंका है.
रूस ने कीव में सुरक्षा सेवा मुख्यालय को बनाया निशाना
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध अब और भी गंभीर मोड़ ले चुका है. हाल ही में रूस ने यूक्रेन के सुरक्षा सेवा मुख्यालय को निशाना बनाते हुए एक भीषण हमला किया है. इस हमले के बाद पूरे इलाके में तबाही का मंजर देखा जा रहा है. रूस के इस कड़े कदम से यूक्रेन के साथ-साथ उसके सहयोगी देश भी चिंता में आ गए हैं. इस हमले के बाद यूक्रेन ने वैश्विक मंच पर अपनी आवाज बुलंद की है.
आश्रम सीजन 4 की शूटिंग शुरू हो गई है. बॉबी देओल और मेकर्स ने इस बात का ऐलान कर दिया है. लेकिन ऐलान वाली इस पोस्ट पर एक शख्स ने सेट के हालात बताकर विवाद जरूर छेड़ दिया है.
दरभंगा: अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 6.50 लाख की विदेशी शराब बरामद
बिहार के दरभंगा में अवैध शराब के खिलाफ मद्यनिषेध विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. फेकला थाना क्षेत्र के अंदामा में छापेमारी के दौरान करीब 6.50 लाख रुपये की 553.320 लीटर अवैध विदेशी शराब बरामद हुई. मामले में दो आरोपियों के खिलाफ फरार केस दर्ज किया गया है. दोनों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस और विभाग की टीम कार्रवाई कर रही है.
मालदा अस्पताल में 89 शिशुओं की मौत पर बड़ा ऐक्शन, बंगाल सरकार ने हटाए दो बड़े अधिकारी
पश्चिम बंगाल के मालदा अस्पताल में नवजात शिशुओं की मौत का मामला तूल पकड़ने लगा है। इसको लेकर यहां के स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में मालदा मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के सुप्रीटेंडेंट व पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रमुख को हटा दिया गया है।
'SRCC के एलुमिलाई OG, धुरंधर न हों लेकिन धूम तो मचाई...', बोले पीएम मोदी
पीएम मोदी SRCC कॉलेज के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित शताब्दी समारोह में शामिल हुए और कार्यक्रम को संबोधित किया. पीएम ने संबोधन में कहा कि 'SRCC के एलुमिलाई OG है, धुरंधर न हों लेकिन धूम तो मचाई है.' पीएम मोदी इस दौरान दिल्ली मेट्रो में सफर कर SRCC के शताब्दी समारोह पहुंचे. देखें Video.
पोहा-पराठा छोड़ें? मूंग दाल और चुकंदर से बनाएं प्रोटीन वाला ढोकला
Beetroot Dhokla: नाश्ते में अगर रोज वही पोहा-पराठा या चीला खाकर आपका दिल भर गया है तो इस बार कुछ हल्का और टेस्टी ट्राई करें. यहां हम आपको चुकंदर और मूंग दाल का टेस्टी ढोकला बनाने का तरीका बता रहे हैं.
पटना में बदलेगी रावण दहन की जगह, मरीन ड्राइव के पास बनेगा भव्य रामलीला मैदान
बिहार की राजधानी पटना में पिछले सात दशकों से चली आ रही परंपरा में एक बहुत बड़ा बदलाव होने जा रहा है, क्योंकि अब ऐतिहासिक गांधी मैदान की जगह एक नए और समर्पित रामलीला मैदान में रावण वध और रामलीला का मंचन किया जाएगा। भारतीय संस्कृति, पर्व-त्योहारों और राजधानी पटना के राजनीतिक व सांस्कृतिक इतिहास में गांधी मैदान का नाम हमेशा से सबसे ऊपर रहा है, जहां हर साल विजय दशमी के पावन अवसर पर रावण दहन का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। लेकिन अब राज्य सरकार ने एक बड़ा और दूरदर्शी निर्णय लेते हुए यह घोषणा की है कि अगले साल से रावण वध का यह ऐतिहासिक कार्यक्रम गांधी मैदान में आयोजित नहीं किया जाएगा, बल्कि इसके लिए मरीन ड्राइव के पास एक अत्याधुनिक और विशाल रामलीला मैदान का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को पटना के गांधी मैदान में जन्माष्टमी के ठीक अगले दिन आयोजित एक भव्य दही-हांडी सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान शिरकत करते हुए इस बात का आधिकारिक ऐलान किया। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया कि पिछले सात दशकों यानी वर्ष 1955 से लगातार गांधी मैदान में ही दुर्गा पूजा के दौरान रामलीला का मंचन और विजय दशमी पर रावण दहन का यह विशाल आयोजन होता आया है, जिससे शहर की एक खास पहचान जुड़ी हुई है। हालांकि, शहर के लगातार विस्तार, ट्रैफिक प्रबंधन और आयोजनों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए रामलीला समिति के लोगों ने पिछले साल सरकार से यह पुरजोर आग्रह किया था कि रावण वध और धार्मिक आयोजनों के लिए एक अलग और निश्चित जगह आवंटित की जाए। समिति की इसी मांग और जनभावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार ने मरीन ड्राइव के पास जमीन चिह्नित कर ली है और वहां एक नया परिसर विकसित करने का बीड़ा उठाया है। इस फैसले से न केवल गांधी मैदान पर प्रशासनिक दबाव कम होगा, बल्कि राजधानी पटना को एक ऐसा स्थायी और अत्याधुनिक सांस्कृतिक केंद्र मिल जाएगा जो विशेष रूप से धार्मिक और पारंपरिक आयोजनों के लिए समर्पित होगा, जिससे दर्शकों को भी बेहतर सुविधाएं और सुरक्षा मिल सकेगी।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मरीन ड्राइव के पास बन रहे तीन नए विशाल मैदानों की जानकारी देते हुए बताया कि मार्च 2027 तक यह भव्य रामलीला मैदान बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगाराजधानी पटना के विकास कार्यों को एक नई गति देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यह स्पष्ट किया है कि सरकार मरीन ड्राइव के किनारे आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास कर रही है, जिसके तहत बहुत जल्द बड़े प्रोजेक्ट्स जमीन पर उतरने वाले हैं। रामलीला समिति के सदस्यों द्वारा लगातार की जा रही मांग का संज्ञान लेते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है कि मरीन ड्राइव के बगल में कुल तीन बड़े और विशाल मैदानों का निर्माण किया जा रहा है, जो आने वाले समय में पटना के सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों का नया केंद्र बनेंगे। इन तीनों विशाल मैदानों में से एक विशेष मैदान को पूरी तरह से 'रामलीला मैदान' के रूप में आरक्षित किया जाएगा, जहां भविष्य के सभी रामलीला मंचन, सांस्कृतिक उत्सव और दशहरा पर होने वाला रावण वध का कार्यक्रम संपन्न होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वस्त किया है कि इस नए रामलीला मैदान में सनातन परंपरा और आयोजनों की भव्यता को ध्यान में रखते हुए सभी आधुनिक सुविधाएं और आधारभूत संरचनाएं विकसित की जाएंगी, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय दर्शकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने पटना के जिला मजिस्ट्रेट यानी डीएम को भी कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं ताकि निर्माण कार्य में किसी भी तरह की सुस्ती न बरती जाए और गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाए। सरकार की ओर से जो समयसीमा तय की गई है, उसके अनुसार मार्च 2027 तक यह पूरा रामलीला मैदान बनकर सरकार को आधिकारिक तौर पर हैंडओवर मिल जाएगा, जिसके बाद वहां पर स्थायी मंच, पंडाल और अन्य जरूरी संरचनाओं को विकसित करने का काम तेजी से पूरा किया जाएगा। इस ऐतिहासिक बदलाव के बाद पटना के लोगों को एक ऐसा आधुनिक और सुसज्जित परिसर मिलने जा रहा है जो धार्मिक आयोजनों की भव्यता को कई गुना बढ़ा देगा।बिहार में बाढ़ की विकराल स्थिति और गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने बाढ़ नियंत्रण के लिए एक बहुत बड़ा और ठोस मास्टर प्लान देश के सामने रखा।दही-हांडी के इस सांस्कृतिक मंच से बोलते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केवल सांस्कृतिक आयोजनों की ही बात नहीं की, बल्कि वर्तमान समय में बिहार के कई जिलों के सामने मंडरा रहे बाढ़ के गंभीर संकट पर भी बहुत बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि पिछले दस सालों में इस बार गंगा नदी में सबसे अधिक पानी आया है, जिसके कारण राज्य के कई हिस्सों में भारी तबाही और बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार पूरी तरह से सतर्क हो चुकी है और मुख्यमंत्री ने खुद यह जानकारी दी है कि सभी संबंधित मंत्रियों और प्रशासनिक पदाधिकारियों को विशेष रूप से गंगा बेसिन वाले जिलों में तैनात कर दिया गया है ताकि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके। केवल गंगा ही नहीं, बल्कि सोन और गंडक जैसी प्रमुख नदियों से भी लगातार पानी गंगा में आ रहा है, जिससे जलस्तर में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। इस प्राकृतिक आपदा से स्थायी रूप से निपटने के लिए सरकार ने केंद्र सरकार के सहयोग से एक बहुत ही व्यापक और वैज्ञानिक योजना तैयार की है, जिसके तहत गंगा, गंडक और कोसी जैसी खतरनाक नदियों का जल प्रबंधन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि बाढ़ के इस स्थायी समाधान के तहत गंगा नदी के दोनों किनारों पर मजबूत सड़कों का निर्माण किया जाएगा और साथ ही वाटर ट्रांसपोर्टेशन यानी जल परिवहन की व्यवस्था को भी शुरू किया जाएगा। इससे न केवल बरसात के दिनों में बाढ़ से घिरे तटीय इलाकों के लोगों को सुरक्षित निकाला जा सकेगा, बल्कि व्यापार और आवागमन के रास्ते भी सुगम हो जाएंगे। उन्होंने भौगोलिक स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि बक्सर के रास्ते जब गंगा नदी बिहार में प्रवेश करती है, तब उसका जलस्तर मात्र चौदह हजार क्यूसेक होता है, लेकिन जब वह भागलपुर से आगे निकलती है तो पानी का यह प्रवाह चार गुना से भी अधिक बढ़ जाता है। इसके अलावा नेपाल की तरफ से कोसी और गंडक नदियों में आने वाले भारी पानी के सैलाब को रोकने के लिए भी पुख्ता रणनीति बनाई जा रही है, ताकि बिहार की जनता को हर साल बाढ़ के प्रकोप से बचाया जा सके और राज्य का विकास निर्बाध रूप से आगे बढ़ सके।
उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और भावी शिक्षकों को तैयार करने वाले प्रशिक्षण संस्थानों को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बेहद अहम और बड़ा कदम उठाया है। राज्य में विद्यालयी शिक्षा के स्तर को उन्नत बनाने और शिक्षण संस्थानों के कामकाज में पारदर्शिता और गति लाने के उद्देश्य से बेसिक शिक्षा विभाग ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश के कुल 17 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों यानी डायट (DIET) में वरिष्ठता के आधार पर नए प्रधानाचार्यों की नियुक्तियां की गई हैं और उन्हें इस पद का प्रभार सौंपा गया है। इसके साथ ही प्रशासनिक कार्यों में किसी भी प्रकार की रुकावट न आए, इसके लिए एटा, इटावा और मऊ जनपदों के डायट में तीन अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार के इस दूरदर्शी फैसले से न केवल शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूती मिलेगी, बल्कि प्रदेश के दूरदराज के जिलों में चल रहे शैक्षणिक प्रशिक्षण अभियानों को भी एक नई दिशा और प्रभावी नेतृत्व प्राप्त होगा।एससीईआरटी के निदेशक को जारी किए गए निर्देश, वरिष्ठता क्रम के आधार पर मिला प्रभारइस पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत बेसिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव यतीन्द्र कुमार ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तर प्रदेश के निदेशक को एक आधिकारिक पत्र जारी किया है। इस पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित 17 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में कार्यरत वरिष्ठ प्रवक्ताओं को उनकी वरिष्ठता क्रम के आधार पर प्रधानाचार्य पद का प्रभार तुरंत प्रभाव से सौंपा जाए। शासन स्तर पर इस पूरे मामले पर लंबे समय से मंथन चल रहा था और सम्यक विचारोपरांत ही यह निर्णय लिया गया है कि इन संस्थानों का संचालन बिना किसी बाधा के सुचारु रूप से चलता रहे। निदेशक एससीईआरटी को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे संबंधित वरिष्ठ प्रवक्ताओं को पदभार ग्रहण कराने से जुड़ी सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं समय पर पूरी करें, ताकि अकादमिक सत्र प्रभावित न हो।शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था की रीढ़ हैं डायट, प्रभावी नेतृत्व से मजबूत होगी शैक्षणिक गुणवत्ताशिक्षा विशेषज्ञों का हमेशा से यह मानना रहा है कि किसी भी राज्य में स्कूली शिक्षा की नींव तब तक मजबूत नहीं हो सकती जब तक कि शिक्षकों को तैयार करने वाले संस्थान बेहतरीन स्थिति में न हों। डायट (DIET) यानी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान उत्तर प्रदेश की पूरी शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण और मुख्य कड़ी माने जाते हैं। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से लैस करना, उनके कौशल का विकास करना, शैक्षणिक सहयोग प्रदान करना और विद्यालयी शिक्षा में नित नए नवाचारों (Innovations) को प्रभावी ढंग से लागू करने में इन्हीं संस्थानों की सबसे बड़ी भूमिका होती है। ऐसे प्रमुख संस्थानों में लंबे समय से खाली चल रहे नेतृत्व के पदों पर वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रभार सौंपे जाने से इन संस्थानों की कार्यप्रणाली में तेजी आएगी और संस्थागत रूप से पूरी शिक्षण व्यवस्था को एक मजबूत आधार मिलेगा।जानिए किन 17 जिलों के डायट में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को सौंपी गई है प्रधानाचार्य पद की कमानशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार उत्तर प्रदेश के जिन 17 प्रमुख जिलों के डायट में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है, उनमें कई अनुभवी शिक्षाविद शामिल हैं। इस सूची के मुताबिक राजेश कुमार सिंह को बहराइच डायट, राम प्रताप सिंह कोश्रावस्ती डायट, विनोद कुमार को हमीरपुर डायट, मुक्तेश कुमार को फिरोजाबाद डायट, संजय कुमार को फर्रुखाबाद डायट, नवाब वर्मा को हाथरस डायट, दीपक श्रीवास्तव को ललितपुर डायट, अश्वनी प्रताप सिंह को जालौन डायट और विश्वदीपक त्रिपाठी को चंदौली डायट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा विमलेश कुमार त्रिपाठी (मिर्जापुर), सुश्री रिद्धि पाण्डेय (सोनभद्र), सुनील कुमार (बलिया), कुलदीप नारायण सिंह (देवरिया), दीनानाथ (कुशीनगर), नरेन्द्र सिंह (संतकबीर नगर), आशीष चौहान (शाहजहांपुर) और नन्दित कुमार (झांसी) को भी उनके संबंधित डायट संस्थानों में प्रधानाचार्य पद का प्रभार मिला है।एटा, इटावा और मऊ के डायट में तीन वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा गया है विशेष अतिरिक्त प्रभारमुख्य 17 जिलों के अलावा प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों को बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए तीन अन्य महत्वपूर्ण जनपदों में अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की व्यवस्था की गई है। शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार आराध्य उपाध्याय, जो कि डायट अलीगढ़ में वरिष्ठ प्रवक्ता के रूप में कार्यरत हैं, उन्हें डायट एटा के प्रधानाचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही अतुल कुमार सिंह, जो वर्तमान में इटावा के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) के पद पर सेवा दे रहे हैं, उन्हें डायट इटावा का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इसके अतिरिक्त अतुल कुमार तिवारी, जो डायट मऊ में वरिष्ठ प्रवक्ता के पद पर हैं, उन्हें डायट मऊ के प्रधानाचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के लिए तमाम आवश्यक प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने को कहा गया है। इन नियुक्तियों से यह तय हो गया है कि प्रदेश के हर जिले में भावी शिक्षकों को प्रशिक्षित करने का कार्य पूरी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ता रहेगा।
इंग्लैंड में युजवेंद्र चहल का जलवा, काउंटी चैंपियनशिप में 4 विकेट झटककर बल्लेबाजों को किया पस्त
भारतीय क्रिकेट टीम के शानदार और अनुभवी लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल इन दिनों इंग्लैंड की जमीन पर अपनी फिरकी का ऐसा जादू बिखेर रहे हैं कि विरोधी टीमों के होश उड़े हुए हैं और हर तरफ उनके नाम की चर्चा हो रही है,क्रिकेट के मैदान पर जब भी एक बेहतरीन और कलात्मक रिस्ट स्पिनर की बात की जाती है, तो युजवेंद्र चहल का नाम हमेशा सबसे पहले जुबान पर आता है। पिछले लगभग तीन साल से भारतीय राष्ट्रीय टीम की चयन चर्चाओं और प्लेइंग इलेवन से बाहर चल रहे इस जादुई गेंदबाज ने हार न मानने का जज्बा दिखाते हुए इंग्लैंड की प्रतिष्ठित काउंटी चैंपियनशिप (County Championship 2026) का रुख किया और वहां नॉर्थहैम्पटनशायर (Northamptonshire) की तरफ से खेलते हुए अपने प्रदर्शन से तहलका मचा दिया है। डरहम के खिलाफ खेले जा रहे इस रोमांचक और महत्वपूर्ण मुकाबले में चहल ने अपनी गजब की गेंदबाजी कला का नजारा पेश करते हुए एक ही पारी में चार प्रमुख बल्लेबाजों को अपनी फिरकी के जाल में फंसाया और पूरी विरोधी टीम की बल्लेबाजी लाइनअप की धज्जियां उड़ा कर रख दीं। नॉर्थहैम्पटन के ऐतिहासिक काउंटी ग्राउंड पर खेले जा रहे इस मैच के दौरान जब डरहम की टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया, तो उन्हें शायद इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि आगे उनका सामना एक ऐसे भारतीय स्पिनर से होने वाला है जो अपनी कसी हुई गेंदबाजी से मैदान पर कहर बरपा देगा। युजवेंद्र चहल ने इस पारी में नॉर्थहैम्पटनशायर के लिए सबसे ज्यादा विकेट चटकाने वाले गेंदबाज का खिताब अपने नाम किया और यह साबित कर दिया कि जब बात अपनी गेंदबाजी कौशल और क्लास दिखाने की हो, तो वे दुनिया के किसी भी कोने में और किसी भी पिच पर अपनी छाप छोड़ने की पूरी क्षमता रखते हैं। उनके इस शानदार प्रदर्शन ने न केवल उनकी काउंटी टीम को मैच में एक मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है, बल्कि भारत में बैठे उनके करोड़ों प्रशंसकों के दिलों में एक बार फिर से यह उम्मीद जगा दी है कि इस करिश्माई स्पिनर का अंतरराष्ट्रीय करियर अभी खत्म नहीं हुआ है और वे टीम इंडिया में वापसी करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।डरहम के खिलाफ गेंदबाजी का यह जादुई स्पेल इस बात का प्रमाण है कि युजवेंद्र चहल क्यों दुनिया के सबसे खतरनाक और विकेट लेने वाले लेग स्पिनर माने जाते हैंनॉर्थहैम्पटन के मैदान पर जब डरहम की टीम पहले बल्लेबाजी करने के लिए उतरी, तो उनकी शुरुआत ठीक-ठाक रही, लेकिन जैसे ही युजवेंद्र चहल ने गेंदबाजी की कमान संभाली, मैच का पूरा नक्शा ही बदल गया। डरहम की पूरी पारी महज 205 रनों के छोटे स्कोर पर ढेर हो गई, जिसमें उनकी तरफ से डेविड बेडिंगहम ने 81 रनों की सबसे बड़ी पारी जरूर खेली, लेकिन उनके अलावा टीम का कोई भी अन्य बल्लेबाज 50 रनों के आंकड़े को भी नहीं छू सका और चहल की फिरकी के आगे घुटने टेकने पर मजबूर हो गया। भारतीय स्टार स्पिनर युजवेंद्र चहल ने अपनी घातक गेंदबाजी का मुजाहिदा करते हुए मात्र 15.2 ओवरों की गेंदबाजी में केवल 36 रन खर्च किए और इस दौरान उन्होंने 3 बेहद किफायती मेडन ओवर भी फेंके, जो टेस्ट और काउंटी फॉर्मेट में उनकी बेहतरीन लाइन और लेंथ को साफ दर्शाता है। चहल ने अपनी इस शानदार गेंदबाजी के दौरान डरहम के कई बड़े और खतरनाक बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई, जिसमें कप्तान एलेक्स लीज, बेन स्टोक्स, मैथ्यू पॉट्स और केसी एल्ड्रिज जैसे धाकड़ खिलाड़ी शामिल रहे। इस स्पेल की सबसे बड़ी और खास बात यह रही कि उन्होंने मैथ्यू पॉट्स और दिग्गज ऑलराउंडर बेन स्टोक्स जैसे खूंखार बल्लेबाजों को गच्चा देते हुए सीधे बोल्ड आउट किया और उन्हें पवेलियन लौटने पर मजबूर कर दिया। गत 21 जुलाई से ही काउंटी चैंपियनशिप में खेल रहे युजवेंद्र चहल ने इस टूर्नामेंट में जितने भी मुकाबले खेले हैं, लगभग सभी में उन्होंने अपनी विविधता और बेहतरीन फिरकी से विपक्षी बल्लेबाजों को परेशान किया है। उनकी इस निरंतरता और विकेट लेने की अद्भुत क्षमता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि घरेलू हो या विदेशी पिचें, एक उच्च कोटि का स्पिनर हमेशा अपनी गेंदबाजी के दम पर मैच का पासा पलटने का माद्दा रखता है, और चहल ने इंग्लैंड की उन पिचों पर यह कमाल करके दिखाया है जहां आमतौर पर तेज गेंदबाजों का बोलबाला माना जाता है।भारत के लिए व्हाइट बॉल क्रिकेट में लंबे समय से बाहर चल रहे चहल के शानदार अंतरराष्ट्रीय आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि वे देश के सबसे सफल गेंदबाजों में से एक हैं।भले ही युजवेंद्र चहल को पिछले तीन साल से अधिक समय से भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की जर्सी में मैदान पर न देखा गया हो, लेकिन उनके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का रिकॉर्ड इस बात का गवाह है कि उन्होंने देश के लिए कितने बड़े मैच जिताऊ प्रदर्शन किए हैं। भारत के लिए अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला अगस्त 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टी-20 फॉर्मेट में खेलने वाले चहल ने इसके बाद से चयनकर्ताओं के रडार से दूर होने के बावजूद कभी अपनी मेहनत और गेंदबाजी के अभ्यास से समझौता नहीं किया। अगर उनके कुल अंतरराष्ट्रीय करियर पर एक नजर डाली जाए, तो उन्होंने भारत के लिए अब तक 72 वनडे और 80 टी-20 इंटरनेशनल मुकाबले खेल लिए हैं, जिसमें उनके आंकड़े बेहद शानदार और चौंकाने वाले हैं। वनडे क्रिकेट की 69 पारियों में गेंदबाजी करते हुए चहल ने 27.13 के बेहतरीन औसत से कुल 121 विकेट चटकाए हैं, जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 42 रन देकर 6 विकेट लेने का रहा है, और इस दौरान उन्होंने अपने करियर में दो बार 'फाइव विकेट हॉल' यानी पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने का कारनामा भी करके दिखाया है। इसके अलावा, टी-20 इंटरनेशनल मैचों की 79 पारियों में उन्होंने 25.09 की औसत से 96 विकेट अपने नाम किए हैं, जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन 25 रन देकर 6 विकेट चटकाना रहा है और इस छोटे फॉर्मेट में उनकी इकॉनमी भी 8.19 की रही है, जो टी-20 जैसे आक्रामक खेल में बेहद किफायती मानी जाती है। इन आंकड़ों से यह साफ पता चलता है कि चहल ने अपनी फिरकी के दम पर भारत को कितने ही हारे हुए मुकाबले जिताए हैं और जब भी उन्हें टीम के लिए विकेट की जरूरत पड़ी, उन्होंने कप्तान को निराश नहीं किया। यही कारण है कि इंग्लैंड की काउंटी धरती पर उनके द्वारा किया जा रहा यह ताजा प्रदर्शन भारतीय क्रिकेट गलियारों में एक बार फिर से इस बात की बहस छेड़ रहा है कि क्या देश के इस सबसे सफल रिस्ट स्पिनर को नजरअंदाज करना वाकई सही फैसला था या आने वाले दिनों में उन्हें फिर से नीली जर्सी में गेंदबाजी करते हुए देखा जा सकता है।इंग्लैंड की काउंटी परिस्थितियों में लगातार चमक रहे चहल का यह काउंटी सत्र उनके करियर के लिए एक नया और सुनहरा अध्याय साबित हो रहा हैकिसी भी पेशेवर खिलाड़ी के जीवन में ऐसा समय जरूर आता है जब उसे टीम से बाहर का रास्ता देखना पड़ता है, लेकिन असली चैंपियन वही होता है जो मैदान से दूर बैठने के बजाय अपनी कला को निखारने के लिए विदेश की कठिन लीग्स का रुख करता है और वहां अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाता है। युजवेंद्र चहल ने इंग्लैंड की इन मुश्किल और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जिस तरह से नॉर्थहैम्पटनशायर की टीम के लिए लगातार शानदार प्रदर्शन किया है, उसने यह दिखा दिया है कि उनके अंदर क्रिकेट अभी बहुत बाकी है। काउंटी चैंपियनशिप जैसे लंबे और थका देने वाले टूर्नामेंट में लगातार विकेट चटकाना और अपनी टीम के लिए सबसे भरोसेमंद गेंदबाज बनना किसी भी विदेशी खिलाड़ी के लिए आसान काम नहीं होता, लेकिन चहल ने अपनी सूझबूझ, अनुभव और विविधता के दम पर इसे बेहद मुमकिन बना दिया है। उनके द्वारा फेंके गए वे मेडन ओवर और बल्लेबाजों को रक्षात्मक होने पर मजबूर कर देने वाली उनकी गूगली और लेग स्पिन इस बात का सबूत हैं कि उन्होंने अपनी गेंदबाजी की कमियों पर काम किया है और और अधिक धारदार बनकर उभरे हैं। सोशल मीडिया पर उनके इन चार विकेटों की चर्चा जोरों पर है और भारतीय क्रिकेट फैंस लगातार यह मांग कर रहे हैं कि घरेलू क्रिकेट और इस तरह की विदेशी लीगों में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों को कम से कम घरेलू सर्किट में तो पूरा सम्मान मिलना ही चाहिए। आने वाले समय में जैसे-जैसे काउंटी सीजन अपने अंतिम और निर्णायक चरणों में प्रवेश करेगा, फैंस की नजरें एक बार फिर युजवेंद्र चहल के प्रदर्शन पर टिकी होंगी कि वे अपनी टीम के लिए कितने और मैच जिताने में कामयाब होते हैं। उनके इस शानदार खेल ने यह साबित कर दिया है कि सफलता उम्र या टीम से बाहर होने से तय नहीं होती, बल्कि मैदान पर बहाए गए पसीने और अटूट आत्मविश्वास से तय होती है, और चहल इस समय अपनी उसी मेहनत के बल पर इंग्लैंड की धरती पर अपनी सफलता की एक नई और चमकदार इबारत लिख रहे हैं।
UP समेत चार चुनावी राज्यों में पहले होगी जनगणना, 1 दिसंबर से गिनती शूरू
गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में चुनाव के मद्देनजर एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक आबादी की गिनती की जाएगी.
कांग्रेस का बड़ा फेरबदल, भूपेश बघेल को पंजाब से हटाया, सचिन पायलट को जिम्मेदारी
कांग्रेस संगठन में बड़े संगठनात्मक फेरबदल के तहत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पंजाब राज्य प्रभारी पद से हटा दिया गया है. अब उन्हें असम की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रभारी बनाया गया है.
कैरेबियन प्रीमियर लीग के मौजूदा सीजन में 47 साल के अनुभवी कप्तान इमरान ताहिर की अगुवाई वाली गुयाना अमेजन वॉरियर्स ने अपने शानदार और आक्रामक प्रदर्शन से क्रिकेट जगत में तहलका मचा दिया है। क्रिकेट के खेल में उम्र केवल एक संख्या मात्र है, और इस बात को दक्षिण अफ्रीका के पूर्व दिग्गज स्पिनर और वर्तमान में गुयाना अमेजन वॉरियर्स के कप्तान इमरान ताहिर ने मैदान पर अपनी जादुई कप्तानी और बेहतरीन गेंदबाजी से एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिया है। इन दिनों खेले जा रहे कैरेबियन प्रीमियर लीग यानी सीपीएल 2026 (CPL 2026) के रोमांचक मुकाबलों में गुयाना अमेजन वॉरियर्स की टीम ने अपने खेल से ऐसा जादू बिखेरा है कि हर कोई उनके अनुशासन और जीतने के जज्बे का कायल हो चुका है। इस टूर्नामेंट की शुरुआत से ही टीम ने जिस प्रकार का दबदबा बनाया है, उसने सभी विरोधी टीमों के खेमे में खलबली मचा दी है। पिछले साल यानी 2025 के सीजन में यह टीम खिताबी मुकाबले तक पहुंचने के बावजूद उपविजेता यानी रनरअप रही थी और ट्रॉफी उठाने से चूक गई थी, लेकिन इस बार कप्तान इमरान ताहिर और उनके धुरंधर खिलाड़ियों ने मैदान पर उतरते ही जिस तरह का आक्रामक तेवर दिखाया है, उससे यह साफ नजर आ रहा है कि इस बार वे किसी भी कीमत पर ट्रॉफी को अपने नाम करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। शुरुआती पांचों मुकाबलों में टीम ने जिस एकतरफा अंदाज में जीत हासिल की है, उसने केवल पॉइंट्स टेबल में ही अपना शीर्ष स्थान मजबूत नहीं किया है, बल्कि प्लेऑफ में अपनी जगह लगभग पूरी तरह सुरक्षित कर ली है। क्रिकेट विश्लेषक और खेल प्रेमी इस बात को लेकर हैरान हैं कि 47 साल की उम्र में भी इमरान ताहिर न केवल अपनी फिटनेस का अद्भुत नजारा पेश कर रहे हैं, बल्कि मैदान पर उनकी रणनीतिक फैसलेबाजी और खिलाड़ियों को प्रेरित करने की क्षमता कमाल की है। टीम का हर एक खिलाड़ी अपने कप्तान के नेतृत्व में एक इकाई के रूप में प्रदर्शन कर रहा है, जिससे यह सफर लगातार ऐतिहासिक बनता जा रहा है और पूरी दुनिया की नजरें इस समय गुयाना अमेजन वॉरियर्स के विजय रथ पर टिकी हुई हैं।टूर्नामेंट के पहले और दूसरे मुकाबले में मोहम्मद नबी और मावेंद्र डिंड्याल के बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर गुयाना ने अपनी जीत का सिलसिला बहुत ही शानदार अंदाज में शुरू किया थाकैरेबियन प्रीमियर लीग 2026 के अपने अभियान का आगाज करते हुए गुयाना अमेजन वॉरियर्स ने पहले ही मैच में अपनी ताकत का अहसास करा दिया था, जहां उनका मुकाबला जमैका किंग्समेन के साथ हुआ था। उस मैच में पहले बल्लेबाजी करने उतरी जमैका की पूरी टीम गुयाना के गेंदबाजों के आगे टिक नहीं पाई और मात्र 19.4 ओवरों में ही 117 के छोटे स्कोर पर ढेर होकर ऑलआउट हो गई। गुयाना की ओर से गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभालते हुए अनुभवी ऑलराउंडर मोहम्मद नबी ने अपनी फिरकी का जादू चलाया और विरोधी टीम के सबसे ज्यादा 4 महत्वपूर्ण विकेट झटककर उनकी कमर तोड़ दी। इसके बाद छोटे से लक्ष्य का पीछा करने उतरी गुयाना की टीम ने भी शुरुआत में कुछ संभलकर खेला, लेकिन अंततः उन्होंने मात्र 14.1 ओवरों में 4 विकेट खोकर आसानी से लक्ष्य हासिल कर लिया और धमाकेदार अंदाज में जीत दर्ज की। इस छोटे रनचेज के दौरान टीम के स्टार बल्लेबाज शाई होप ने अपनी क्लास दिखाई और महज 41 गेंदों का सामना करते हुए 2 शानदार चौकों और 4 गगनचुंबी छक्कों की मदद से 56 रनों की सबसे बड़ी और जिम्मेदार पारी खेली, जिसने टीम की जीत को बेहद आसान बना दिया। इसके ठीक बाद अपने दूसरे मुकाबले में गुयाना अमेजन वॉरियर्स की भिड़ंत मजबूत मानी जाने वाली सेंट लूसिया किंग्स के साथ हुई। इस रोमांचक मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए सेंट लूसिया ने निर्धारित 20 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 151 रनों का सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया, जिसे हासिल करने के लिए गुयाना को थोड़ी मशक्कत करनी पड़ी। लक्ष्य का पीछा करते हुए अमेजन वॉरियर्स के बल्लेबाजों ने सूझबूझ का परिचय दिया और 18.1 ओवरों में ही 3 विकेट गंवाकर मैच अपने नाम कर लिया। इस मुकाबले की सबसे बड़ी खूबी युवा खिलाड़ी मावेंद्र डिंड्याल की शानदार बल्लेबाजी रही, जिन्होंने दबाव भरे हालात में बेहतरीन खेल दिखाते हुए 51 गेंदों में 50 रनों की सबसे बड़ी और संयमित पारी खेली, जिसमें 5 शानदार चौके और 2 बेहतरीन छक्के शामिल थे, और इस प्रकार टीम ने अपनी लगातार दूसरी जीत दर्ज कर टूर्नामेंट में अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर दी।शिमरोन हेटमायर की तूफानी पारी और बारिश से प्रभावित रोमांचक मुकाबले में ट्रिनबैगो नाइट राइडर्स को मात देकर टीम ने अपने अजय रथ को और अधिक मजबूत कियाजैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ा, गुयाना अमेजन वॉरियर्स की रफ्तार और अधिक खतरनाक होती चली गई और उनके तीसरे तथा चौथे मुकाबले ने तो क्रिकेट प्रेमियों को पूरी तरह झूमने पर मजबूर कर दिया। अपने तीसरे मैच में गुयाना की टक्कर एंटीगुआ एंड बारबुडा फाल्कन्स के साथ हुई, जहां गेंदबाजों ने एक बार फिर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। पहले बल्लेबाजी करते हुए एंटीगुआ की टीम महज 17 ओवरों में ही 116 रनों पर ढेर हो गई और पूरी टीम पवेलियन लौट गई। इस छोटे लक्ष्य का पीछा करने जब अमेजन वॉरियर्स उतरी तो विस्फोटक बल्लेबाज शिमरोन हेटमायर ने मैदान पर चौकों-छक्कों की बारिश कर दी और विरोधी गेंदबाजों के पसीने छुड़ा दिए। हेटमायर ने केवल 19 गेंदों का सामना करते हुए ताबड़तोड़ 49 रनों की सबसे बड़ी और तूफानी पारी खेली, जिसमें 1 चौका और आतिशी अंदाज में 6 छक्के शामिल थे, और इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट हैरान करने वाला 257.89 का रहा। उनकी इस आंधी जैसी बल्लेबाजी के दम पर गुयाना ने महज 9.5 ओवरों में ही 3 विकेट खोकर लक्ष्य को प्राप्त कर लिया और एक और रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इसके बाद चौथे मुकाबले में टीम का सामना ट्रिनबैगो नाइट राइडर्स के खिलाफ हुआ, जो बारिश से प्रभावित होने के कारण 16-16 ओवरों का कर दिया गया था। इस छोटे और रोमांचक मैच में पहले बैटिंग करते हुए गुयाना अमेजन वॉरियर्स ने निर्धारित ओवरों में 5 विकेट के नुकसान पर एक विशाल स्कोर यानी 185 रन बोर्ड पर टांग दिए। जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी ट्रिनबैगो नाइट राइडर्स की टीम ने कड़ा संघर्ष किया, लेकिन वे 16 ओवरों में 7 विकेट पर 172 रन ही बना सकी और गुयाना ने इस कड़े मुकाबले को भी अपने नाम कर लिया। इन लगातार जीतों ने यह साबित कर दिया कि इस टीम की बेंच स्ट्रेंथ और रणनीति कितनी मजबूत है, जहां हर खिलाड़ी जरूरत पड़ने पर अपनी टीम के लिए मैच जिताऊ प्रदर्शन करने का माद्दा रखता है।पांचवें मुकाबले में भी अपनी विजयी लय को बरकरार रखते हुए गुयाना अमेजन वॉरियर्स ने यह साबित कर दिया कि इस सीजन का असली चैंपियन कौन बनने वाला हैअपने शुरुआती चार मुकाबलों में धमाकेदार जीत दर्ज करने के बाद गुयाना अमेजन वॉरियर्स ने अपना पांचवां मुकाबला एक बार फिर जमैका किंग्समेन के खिलाफ खेला, और इस बार भी परिणाम में कोई बदलाव नहीं आया क्योंकि टीम की जीत का सिलसिला पूरी ताकत के साथ जारी रहा। मैच की शुरुआत में पहले बैटिंग करने उतरी जमैका की टीम ने इस बार थोड़ा बेहतर खेल दिखाते हुए 20 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 159 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया, जिसे पार करने के लिए गुयाना को एक सधी हुई शुरुआत की जरूरत थी। लक्ष्य का पीछा करने उतरी गुयाना के बल्लेबाजों ने किसी भी तरह की जल्दबाजी या दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और बेहद करीने से पारी को आगे बढ़ाते हुए मात्र 17.2 ओवरों में ही केवल 2 विकेट गंवाकर आसानी से लक्ष्य को हासिल कर लिया और एक बार फिर मैदान पर अपनी एकतरफा जीत का परचम लहरा दिया। कप्तान इमरान ताहिर की मैदान पर उनकी शानदार कप्तानी, गेंदबाजी बदलाव और खिलाड़ियों का सही इस्तेमाल करने की कला इस पूरे सफर में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई है। उम्र के इस पड़ाव पर आकर भी मैदान पर उनकी ऊर्जा और उत्साह युवाओं के लिए एक मिसाल पेश कर रहा है, और उनकी अगुवाई में पूरी टीम एक परिवार की तरह मैदान पर उतरकर विपक्षी टीमों पर भारी पड़ रही है। लगातार पांच मैचों में एकतरफा जीत हासिल करने के बाद अब इस बात में कोई दोराय नहीं बची है कि गुयाना अमेजन वॉरियर्स इस साल के कैरेबियन प्रीमियर लीग की सबसे प्रबल विजेता के रूप में उभरकर सामने आई है। टीम का नेट रन रेट और खिलाड़ियों का फॉर्म इस बात की पूरी गवाही दे रहा है कि वे इस बार पिछले साल की अपनी असफलता को पीछे छोड़कर ट्रॉफी पर अपना कब्जा जमाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। जैसे-जैसे टूर्नामेंट अपने अगले दौर में प्रवेश कर रहा है, क्रिकेट फैंस की निगाहें अब इमरान ताहिर की इस जादुई टीम के अगले मुकाबलों पर टिकी हुई हैं, और हर कोई यह देखने के लिए बेताब है कि क्या यह विजयी रथ इसी तरह बिना रुके फाइनल तक पहुंचता है या नहीं।
'सभी नाराज फूफाओं को भारत ने जवाब दिया', PM मोदी का विपक्ष पर वार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित शताब्दी समारोह में कॉलेज की उपलब्धियों की सराहना की.
RBI ने दी LIC को बड़ी मंजूरी, ICICI Bank में 9.99% तक हिस्सेदारी खरीदने का साफ हुआ रास्ता
भारतीय वित्तीय बाजार और बैंकिंग सेक्टर से एक बेहद बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। देश की सबसे बड़ी और भरोसेमंद सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC को देश के केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से एक बार फिर से भारी-भरकम निवेश की हरी झंडी मिल गई है। हाल ही में एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) में हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति मिलने के बाद अब आरबीआई ने एलआईसी को निजी क्षेत्र के दिग्गज बैंक यानी आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) में अपनी कुल हिस्सेदारी को बढ़ाकर 9.99 प्रतिशत तक करने की आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इस नियामकीय अनुमति के मिलने के बाद अब एलआईसी के लिए इस प्रमुख निजी बैंक में निवेश का दायरा बढ़ाने का पूरा रास्ता साफ हो गया है, जिसका असर आने वाले समय में शेयर बाजार और दोनों वित्तीय संस्थानों की चाल पर पड़ना तय माना जा रहा है।RBI की नियामकीय फाइलिंग से हुआ बड़ा खुलासा, एक साल के भीतर पूरी करनी होगी प्रक्रियाभारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दी गई यह मंजूरी एक तय समय सीमा और निश्चित नियमों के दायरे में ही वैध होगी। एक्सचेंज फाइलिंग से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आरबीआई की यह महत्वपूर्ण मंजूरी उसके औपचारिक लेटर जारी होने की तारीख से ठीक एक साल तक वैध रहेगी। इसका मतलब यह है कि एलआईसी को इस एक साल की निर्धारित अवधि के भीतर ही आईसीआईसीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी को बढ़ाकर 9.99 प्रतिशत के तय दायरे तक ले जाना होगा। यदि किसी कारणवश एलआईसी इस तय सीमा के भीतर यह हिस्सेदारी हासिल नहीं कर पाती है, तो केंद्रीय बैंक द्वारा दी गई यह मंजूरी स्वतः ही रद्द मानी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान एलआईसी को आरबीआई की तरफ से तय की गई तमाम अन्य शर्तों और दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन करना होगा।4 सितंबर को मिला केंद्रीय बैंक का आधिकारिक पत्र, चुकता शेयर पूंजी और मतदान अधिकारों पर होगा असरइस पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन पर नजर डालें तो आईसीआईसीआई बैंक की ओर से दी गई नियामकीय फाइलिंग में बताया गया है कि बैंक को आरबीआई के इस अनुमति पत्र की आधिकारिक कॉपी 4 सितंबर 2026 को रात 9 बजकर 9 मिनट पर प्राप्त हुई थी। आरबीआई का यह पत्र भी इसी तारीख यानी 4 सितंबर 2026 को ही जारी किया गया था और इसे सीधे तौर पर एलआईसी को संबोधित किया गया था। इस पत्र के माध्यम से केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट रूप से अनुमति दी है कि एलआईसी बैंक की कुल चुकता शेयर पूंजी (Paid-up Share Capital) या बैंक के कुल मतदान अधिकारों (Voting Rights) में अधिकतम 9.99 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी का अधिग्रहण कर सकती है। इस निवेश से देश के सबसे बड़े संस्थागत निवेशकों में शुमार एलआईसी की वित्तीय स्थिति और बाजार में उसकी पकड़ और अधिक मजबूत होगी।अन्य सभी कानूनी और नियामकीय प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य, नियमों के दायरे में होगा सौदाकेंद्रीय बैंक द्वारा दी गई यह छूट या अनुमति केवल हिस्सेदारी खरीदने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ कई तरह के विधिक अनुपालन भी जुड़े हुए हैं। आईसीआईसीआई बैंक द्वारा शेयर बाजारों को दी गई जानकारी के अनुसार, यह प्रस्तावित हिस्सेदारी खरीद अन्य सभी लागू होने वाले कानूनी और नियामकीय प्रावधानों के पूर्ण अधीन होगी। इसमें भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से बैंकिंग नियमों और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम या अन्य संबंधित अधिनियमों के तहत तय की गई शर्तें भी शामिल हैं। एलआईसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह शेयर बाजार के नियमों, सेबी (SEBI) के दिशा-निर्देशों और बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के दायरे में रहते हुए ही इस पूरी निवेश प्रक्रिया को अंजाम दे, ताकि किसी भी प्रकार के नियामकीय संकट से बचा जा सके।हाल ही में HDFC Bank के लिए भी मिल चुकी है ऐसी ही बड़ी मंजूरी, लगातार आक्रामक हो रही है LICगौर करने वाली बात यह है कि एलआईसी को यह अनुमति ऐसे समय में मिली है जब कुछ समय पहले ही उसे देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक यानी एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) में भी अपनी हिस्सेदारी को बढ़ाकर 9.99 प्रतिशत तक करने की हरी झंडी आरबीआई से मिल चुकी है। एचडीएफसी बैंक की ओर से अगस्त के महीने में साझा की गई नियामकीय फाइलिंग में यह बात सामने आई थी कि केंद्रीय बैंक ने एलआईसी के उस आवेदन को स्वीकार कर लिया था जिसमें उसने बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की इच्छा जताई थी। वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक, एचडीएफसी बैंक में एलआईसी के पास पहले से ही लगभग 4.11 प्रतिशत की हिस्सेदारी मौजूद है, और उस अनुमति के बाद एलआईसी को कुल सीमा 9.99 प्रतिशत तक ले जाने का अधिकार मिल गया था। अब आईसीआईसीआई बैंक में भी इसी प्रकार की मंजूरी मिलने से यह साफ हो गया है कि देश के शीर्ष बीमा दिग्गज का रुझान देश के प्रमुख निजी बैंकों में अपने निवेश को सुरक्षित और दीर्घकालिक रूप से बढ़ाने पर पूरी तरह केंद्रित है।शेयर बाजार और निवेशकों के लिए क्या हैं इसके मायने, भविष्य की रणनीतियों पर टिकी निगाहेंएलआईसी और देश के दो सबसे बड़े निजी बैंकों (एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक) के बीच इस प्रकार के बड़े वित्तीय तालमेल का भारतीय पूंजी बाजार पर बहुत बड़ा और सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। चूंकि एलआईसी देश की सबसे बड़ी संस्थागत निवेशक है, इसलिए उसकी ओर से निजी क्षेत्र के बैंकों में इस तरह का बड़ा निवेश इन बैंकों के प्रति बाजार के भरोसे को और अधिक मजबूत करता है। बाजार के विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में एलआईसी चरणबद्ध तरीके से ओपन मार्केट या अन्य माध्यमों से इन बैंकों में अपनी हिस्सेदारी को तय सीमा तक पहुंचा सकती है। निवेशकों के लिहाज से यह घटनाक्रम बैंकिंग सेक्टर में स्थिरता और दीर्घकालिक वृद्धि के मजबूत संकेत देता है, क्योंकि जब देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी किसी बैंक में बड़ा हिस्सा रखती है, तो इससे आम निवेशकों का भरोसा भी उस संस्थान पर और अधिक बढ़ जाता है।
मेट्रो से SRCC पहुंचे पीएम मोदी, शताब्दी समारोह में युवाओं को दिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में शामिल हुए। शिक्षक दिवस पर हुए इस कार्यक्रम की खास बात पीएम की यात्रा रही। वह कारों के लंबे काफिले की जगह दिल्ली मेट्रो से कॉलेज पहुंचे और सफर के दौरान बच्चों व सहयात्रियों से बातचीत करते नजर आए।
बदल जाएगा RCB का नाम? चेयरमैन आर्यमान बिड़ला ने तोड़ी चुप्पी
आईपीएल की सबसे चहेती और धमाकेदार फ्रेंचाइजी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु यानी आरसीबी के नाम में बदलाव को लेकर चल रही सभी अटकलों पर अब आधिकारिक तौर पर विराम लग गया है इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल के इतिहास में अगर किसी टीम के नाम, उसकी जर्सी और उसके करोड़ों फैंस के बीच के इमोशनल जुड़ाव की बात की जाए, तो रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का नाम सबसे ऊपर आता है। पिछले कुछ समय से क्रिकेट के गलियारों में और सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर यह चर्चा बहुत तेजी से गर्म थी कि क्या इस लोकप्रिय फ्रेंचाइजी का मालिकाना हक बदलने के बाद इसके नाम में भी कोई बड़ा बदलाव किया जाएगा। इस तरह की चर्चाओं को तब और अधिक हवा मिल गई थी जब पिछले सीजन की शुरुआत से ठीक पहले यह आधिकारिक खबर सामने आई थी कि इस टीम के मालिकाना हक में बड़ा बदलाव हुआ है और आदित्य बिड़ला ग्रुप, टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप, ब्लैकस्टोन तथा बोल्ट वेंचर्स जैसी दिग्गज कंपनियों ने मिलकर इस फ्रेंचाइजी की शत-प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद ली है। कॉरपोरेट जगत में जब भी किसी बड़े ब्रांड का अधिग्रहण होता है, तो उसका नाम, उसका लोगो और उसकी पहचान बदलने की अटकलें लगना आम बात है, और आरसीबी के मामले में भी यही सब कयास लगाए जा रहे थे जिससे दुनिया भर में फैले इसके करोड़ों फैंस की धड़कनें तेज हो गई थीं। फैंस के मन में लगातार यह सवाल उठ रहा था कि जिस नाम के साथ विराट कोहली से लेकर तमाम दिग्गज खिलाड़ियों ने अपनी पहचान जोड़ी है और जिसे करोड़ों लोग दिल से चाहते हैं, क्या वह नाम इतिहास के पन्नों में दब जाएगा या फिर इसमें कोई संशोधन किया जाएगा। इन तमाम तरह की अफवाहों और चर्चाओं के बीच अब फ्रेंचाइजी के नवनियुक्त चेयरमैन आर्यमान बिड़ला ने खुद आगे आकर इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और एक ऐसा बयान दिया है जिससे आरसीबी के तमाम फैंस ने राहत की सांस ली है। आर्यमान बिड़ला के इस स्पष्टीकरण ने यह साफ कर दिया है कि भले ही इस टीम को चलाने वाले मालिक बदल गए हों और मैनेजमेंट में नए कॉरपोरेट दिग्गज शामिल हो गए हों, लेकिन इस टीम की आत्मा, इसका नाम और इसकी पुरानी विरासत से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी, जिससे यह साबित होता है कि टीम का प्रबंधन अपने फैंस की भावनाओं का कितना आदर करता है।चेयरमैन आर्यमान बिड़ला ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि मालिकाना हक बदलने के बावजूद आरसीबी के नाम में कोई फेरबदल नहीं होगा क्योंकि यह एक बहुत बड़ा ब्रांड हैरेव स्पोर्ट्स के साथ हुई एक खास बातचीत में आरसीबी के चेयरमैन आर्यमान बिड़ला ने टीम के नाम बदलने की चल रही तमाम चर्चाओं को खारिज करते हुए बहुत ही स्पष्ट शब्दों में यह बात देश के सामने रखी। उन्होंने कहा कि भले ही इस फ्रेंचाइजी का मालिकाना हक अब नए कॉर्पोरेट घरानों के हाथों में चला गया हो, लेकिन इसका यह बिल्कुल भी मतलब नहीं है कि टीम की मूल पहचान यानी उसके नाम में किसी भी प्रकार का बदलाव किया जाएगा। आर्यमान बिड़ला ने बहुत ही गर्व के साथ यह बात कही कि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु यानी आरसीबी केवल एक क्रिकेट टीम का नाम नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ा और स्थापित ग्लोबल ब्रांड बन चुका है, जिसे दुनिया भर के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों का अटूट प्यार मिला है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि हमें खुद यह नाम बेहद पसंद है और इस ब्रांड की जो अपनी एक अनूठी पहचान है, उसे पूरी तरह से सुरक्षित रखा जाएगा। यह कोई पहला मौका नहीं है जब टीम के नाम में बदलाव या उसके भविष्य को लेकर इस तरह की आधिकारिक बातें सामने आई हैं, बल्कि इससे पहले भी जब-जब मालिकाना हक या शेयरहोल्डिंग में बदलाव की खबरें आई हैं, तब-तब इस बात को पूरी तरह से स्पष्ट किया गया है कि आरसीबी का यह नाम और इसकी जर्सी का रंग हमेशा वैसा ही रहेगा जैसा इसके फैंस देखना चाहते हैं। चेयरमैन के इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर खुशी की लहर दौड़ गई है और फैंस राहत की सांस ले रहे हैं कि उनकी पसंदीदा टीम का नाम पूरी तरह से सुरक्षित है। किसी भी खेल फ्रेंचाइजी के लिए उसका नाम उसकी सबसे बड़ी पूंजी होती है और आरसीबी के मामले में यह बात सौ फीसदी सच साबित होती है, क्योंकि इस नाम के साथ पिछले डेढ़ दशक से ज्यादा का एक भावुक इतिहास जुड़ा हुआ है। मैनेजमेंट का यह फैसला इस बात का प्रमाण है कि वे व्यवसायिक बदलावों के बीच भी अपने फैंस की भावनाओं और इस टीम की ऐतिहासिक विरासत का पूरा सम्मान करना अच्छी तरह जानते हैं, जिससे आने वाले समय में इस ब्रांड की वैल्यू और अधिक मजबूत होने वाली है।साल 2008 से लेकर 2024 तक के लंबे और संघर्षपूर्ण सफर के बाद आखिरकार कैसे बदली इस टीम की किस्मत और कैसे खत्म हुआ अट्ठारह साल का लंबा सूखारॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का आईपीएल के इतिहास में सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा है, जहां उतार-चढ़ाव, दिल टूटने के लम्हे और अंत में ऐतिहासिक जीत की दास्तान शामिल है। जब साल 2008 में इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत हुई थी और साल 2024 तक का लंबा दौर बीत गया, तब तक बेंगलुरु की इस टीम के हाथ एक भी आईपीएल ट्रॉफी नहीं लगी थी, और इसे अभाग्यशाली टीमों की श्रेणी में गिना जाने लगा था। लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि इतने लंबे समय तक एक भी खिताब नहीं जीतने के बावजूद इस टीम की फैन-फॉलोइंग में कभी कोई कमी नहीं आई, बल्कि दिन-प्रतिदिन इसके चाहने वालों का कारवां और अधिक बड़ा होता चला गया। विराट कोहली की अगुवाई में इस टीम ने दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों के दिलों पर राज किया और मैदान पर उनका आक्रामक अंदाज व हार न मानने का जज्बा ही इस टीम की सबसे बड़ी ताकत और पहचान बना रहा। इस दौरान टीम की कप्तानी कई दिग्गज खिलाड़ियों के हाथों में रही, लेकिन वह प्रतिष्ठित चमचमाती ट्रॉफी हमेशा इनसे दूर ही रही, जिससे फैंस के मन में एक टीस हमेशा बनी रहती थी। आखिरकार वह ऐतिहासिक और स्वर्णिम दिन आ ही गया जब साल 2025 में भारतीय क्रिकेट के उभरते हुए और बेहद प्रतिभाशाली बल्लेबाज रजत पाटीदार को इस टीम की कमान सौंपी गई। रजत पाटीदार की शांत चित्त कप्तानी, मैदान पर उनके सटीक रणनीतिक फैसले और टीम के सभी खिलाड़ियों के एकजुट प्रदर्शन ने चमत्कार कर दिखाया और आरसीबी ने आखिरकार अपना अठारह साल का लंबा सूखा खत्म करते हुए अपना पहला आईपीएल खिताब अपने नाम कर लिया। बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम से लेकर पूरे देश में जिस तरह का जश्न उस दिन मनाया गया, उसने यह साबित कर दिया कि इंतजार जितना लंबा होता है, जीत की खुशी उतनी ही ज्यादा मीठी होती है। इस पहली खिताबी जीत ने न केवल खिलाड़ियों का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंचा दिया, बल्कि यह भी दिखा दिया कि सही नेतृत्व और अनुशासन मिलने पर कोई भी असंभव लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।लगातार दो सीजन में शानदार खिताबी जीत हासिल कर इतिहास रचने वाली आरसीबी अब दुनिया की सबसे खतरनाक और सफल फ्रेंचाइजी के रूप में स्थापित हो चुकी हैसाल 2025 में अपना पहला आईपीएल खिताब जीतकर अठारह साल का सूखा खत्म करने वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की यह विजयी रथ यात्रा यहीं नहीं रुकी, बल्कि उसने अगले ही सीजन में एक और बड़ा इतिहास रच दिया। रजत पाटीदार की कप्तानी और टीम के मुख्य कोच तथा सपोर्ट स्टाफ की बेहतरीन रणनीति का कमाल यह रहा कि टीम ने साल 2026 के आईपीएल सीजन में भी अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखा और लगातार दूसरी बार ट्रॉफी अपने नाम करके पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। क्रिकेट इतिहास में बहुत कम ऐसा देखने को मिलता है कि कोई टीम लगातार दो सीजन में बैक-टू-बैक खिताब जीतकर अपनी बादशाहत साबित करे, लेकिन आरसीबी ने इस असंभव दिखने वाले काम को अपने दम पर मुमकिन कर दिखाया। विराट कोहली के अनुभव, रजत पाटीदार की कप्तानी और युवा तथा अनुभवी खिलाड़ियों के बेहतरीन तालमेल ने इस टीम को इस समय दुनिया की सबसे संतुलित और खतरनाक टी-20 टीम बना दिया है। पिछले दो सालों में जिस तरह काdominance आरसीबी ने मैदान पर दिखाया है, उसने विरोधी टीमों के मन में खौफ पैदा कर दिया है और यह साबित कर दिया है कि यह टीम अब केवल अपनी लोकप्रियता के लिए नहीं, बल्कि अपनी जीत की आदत के लिए जानी जाती है। लगातार दो ट्रॉफियों ने इस फ्रेंचाइजी के वैल्यू को आसमान पर पहुंचा दिया है और यही वजह है कि नए निवेशकों और कॉरपोरेट घरानों ने इसमें इतनी बड़ी रुचि दिखाई है। चेयरमैन आर्यमान बिड़ला के इस बयान के बाद कि टीम का नाम नहीं बदलेगा, फैंस का यह उत्साह और अधिक दोगुना हो गया है क्योंकि वे अब अपनी पसंदीदा टीम को इसी पुराने और जादुई नाम के साथ आने वाले कई और सालों तक जीत के झंडे गाड़ते हुए देखना चाहते हैं। आरसीबी का यह स्वर्णिम दौर इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि कभी हार न मानने की जिद और कड़ी मेहनत इंसान या किसी टीम को फर्श से अर्श तक कैसे पहुंचा सकती है, और आने वाले आईपीएल सीजंस में हर किसी की नजरें इसी चैंपियन टीम पर टिकी रहने वाली हैं।
भारतीय शेयर बाजार में हर हफ्ते निवेशकों के लिए नए अवसर और रणनीतियां बनती-बिगड़ती रहती हैं। सितंबर 2026 के इस कारोबारी हफ्ते में देश के जाने-माने और प्रतिष्ठित ब्रोकरेज हाउस ने कुछ चुनिंदा शेयरों पर गहरी रिसर्च के बाद खरीदारी यानी 'Buy' की रेटिंग जारी की है। इन दिग्गज स्टॉक्स में एडटेक सेक्टर से लेकर एफएमसीजी (FMCG) और बैंकिंग सेक्टर के शेयर शामिल हैं। ब्रोकरेज फर्म्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले समय में इन चुनिंदा शेयरों में मौजूदा कीमतों से 40 प्रतिशत से लेकर 58 प्रतिशत तक की शानदार ग्रोथ या तेजी देखने को मिल सकती है। यदि आप भी अपने पोर्टफोलियो को मजबूत करने और लंबी अवधि में तगड़ा मुनाफा कमाने के लिए बेहतरीन शेयरों की तलाश में हैं, तो इन तीनों कंपनियों का फंडामेंटल एनालिसिस और एक्सपर्ट्स की राय आपके लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। आइए जानते हैं कि किस शेयर पर कितना टारगेट प्राइस दिया गया है और इसके पीछे की मुख्य वजहें क्या हैं।PhysicsWallah Stock Analysis: ₹200 का टारगेट और 58% तक की तगड़ी तेजी की उम्मीदइस हफ्ते ब्रोकरेज रडार पर सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला शेयर एडटेक सेक्टर की प्रमुख कंपनी फिजिक्सवाला (PhysicsWallah) का है। जाने-माने वित्तीय संस्थान मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (Motilal Oswal Financial Services) ने इस शेयर पर मजबूत भरोसा जताते हुए 'Buy' की सलाह दी है। ब्रोकरेज हाउस ने इस शेयर के लिए ₹200 का बड़ा टारगेट प्राइस तय किया है, जबकि इसका मौजूदा बाजार भाव करीब ₹126.55 के आसपास चल रहा है। इस लिहाज से देखा जाए तो निवेशकों को इस शेयर में मौजूदा स्तर से लगभग 58 प्रतिशत तक का भारी-भरकम संभावित रिटर्न मिल सकता है। एडटेक बाजार में इस कंपनी की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है और इसके पीछे इसके अनूठे बिजनेस मॉडल की बड़ी भूमिका है।मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, फिजिक्सवाला की सबसे बड़ी ताकत और प्रतिस्पर्धी बढ़त छात्रों को अपने साथ जोड़ने की बेहद कम लागत यानी लो कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट (CAC) है। कंपनी के लर्निंग ऐप को अब तक 8.3 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है, जो इसकी जबरदस्त लोकप्रियता को दर्शाता है। इसका मार्केटिंग खर्च उन पारंपरिक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में संरचनात्मक रूप से काफी कम है जो आज भी मुख्य रूप से महंगे परफॉर्मेंस डिजिटल मार्केटिंग विज्ञापनों पर निर्भर रहते हैं। ब्रोकरेज का मानना है कि जैसे-जैसे कंपनी का दायरा और पैमाना बड़ा होता जाएगा, इसका कम CAC फायदा और अधिक मजबूत होता जाएगा। हालांकि, निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि शिक्षा क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और इसके ऑफलाइन शिक्षण केंद्रों का प्रदर्शन यदि उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, तो कुछ व्यावसायिक जोखिम बने रह सकते हैं।Godrej Consumer Products Stock Analysis: ₹1,250 का टारगेट, एफएमसीजी सेक्टर के इस शेयर में 42% रिटर्न की संभावनाघरेलू और वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान रखने वाली दिग्गज एफएमसीजी कंपनी गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (Godrej Consumer Products - GCPL) पर भी ब्रोकरेज हाउस बुलिश नजर आ रहे हैं। प्रमुख ब्रोकरेज फर्म एमके (Emkay) ने इस शेयर पर अपनी 'Buy' की राय को बरकरार रखा है और इसके लिए ₹1,250 का आकर्षक टारगेट प्राइस तय किया है। वर्तमान में इस शेयर का बाजार भाव करीब ₹880 के आसपास ट्रेड कर रहा है। इस आधार पर यदि आकलन किया जाए तो निवेशकों को इस शेयर में मौजूदा कीमतों से लगभग 42 फीसदी तक की शानदार संभावित तेजी देखने को मिल सकती है। कंपनी के बुनियादी फंडामेंटल्स मजबूत बने हुए हैं और यह अपने निवेशकों को मध्यम अवधि में अच्छा मुनाफा देने का दम रखती है।ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि कंपनी के शीर्ष प्रबंधन यानी मैनेजमेंट में हाल ही में हुए कुछ अप्रत्याशित बदलावों की वजह से निकट अवधि में बाजार में हल्की अनिश्चितताएं जरूर पैदा हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स मध्यम अवधि में दो अंकों की मजबूत आय वृद्धि (Earnings Growth) दर्ज करने की बेहतरीन स्थिति में है। एमके ने अपनी आय के अनुमानों में किसी प्रकार की कटौती नहीं की है, लेकिन प्रबंधन में बदलाव से जुड़े अतिरिक्त जोखिमों को ध्यान में रखते हुए इसके वैल्यूएशन मल्टीपल में करीब 10 प्रतिशत की मामूली कटौती की है। इसी वजह से इसका टारगेट प्राइस पहले के ₹1,350 से घटाकर ₹7 फीसदी की नरमी के साथ ₹1,250 किया गया है। ब्रोकरेज का स्पष्ट मानना है कि हाल ही में शेयर में आई गिरावट के बाद मौजूदा स्तर पर जोखिम और मिलने वाले संभावित रिटर्न का संतुलन पूरी तरह से निवेशकों के पक्ष में झुकता हुआ दिखाई दे रहा है।Ujjivan Small Finance Bank Stock Analysis: ₹90 का टारगेट, बैंकिंग सेक्टर के इस शेयर में 40% तक की ग्रोथ का अनुमानबैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े शेयरों में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक (Ujjivan Small Finance Bank) एक बेहतरीन विकल्प के रूप में सामने आया है। प्रतिष्ठित ब्रोकरेज हाउस आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज (ICICI Securities) ने इस स्मॉल फाइनेंस बैंक के शेयर पर 'Buy' की सलाह दी है और इसके लिए ₹90 का ठोस टारगेट प्राइस निर्धारित किया है। शेयर का मौजूदा बाजार भाव लगभग ₹64.43 के आसपास चल रहा है। इस मौजूदा कीमत से तुलना करें तो ब्रोकरेज को इस शेयर में करीब 40 प्रतिशत तक की तेज संभावित उछाल की पूरी उम्मीद है। बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि छोटे वित्त बैंकों की बढ़ती पहुंच और उनकी वित्तीय सेहत इस तरह के शेयरों को लंबी अवधि में मजबूत आधार देती है।ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक के मौजूदा प्रबंध निदेशक के समय से पहले सेवानिवृत्त होने और नेतृत्व स्तर पर चल रहे बदलावों के बावजूद, बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपनी पिछली गाइडेंस को पूरी तरह से बरकरार रखा है। आने वाले समय में निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की मुख्य नजर बैंक की भविष्य की सक्सेशन प्लानिंग (उत्तराधिकार योजना) पर टिकी रहेगी। ब्रोकरेज का यह भी मानना है कि शुरुआती संकेतों से संकेत मिलते हैं कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही यानी Q2 इस बैंक के लिए एक बेहद स्थिर और संतोषजनक तिमाही साबित हो सकती है। हालांकि, निवेशकों को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि यदि बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन उम्मीद से कम रहता है या इसके एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) की ग्रोथ में सुस्ती आती है, तो यह बैंक के लिए थोड़ी चुनौती बन सकता है। खास तौर पर असुरक्षित ऋण पोर्टफोलियो (Unsecured Loan Portfolio) की धीमी वृद्धि पर निवेशकों को पैनी नजर रखनी चाहिए।
विनाशक भी, रक्षक भी: जानिए भगवान शिव के दोहरे रूप का असली सच और इसका दार्शनिक महत्व
सनातन संस्कृति और हिंदू पौराणिक ग्रंथों में देवों के देव महादेव यानी भगवान शिव की महिमा अपरंपार है। उन्हें ब्रह्मांड की त्रिमुर्ति में सृष्टिकर्ता ब्रह्मा और पालनकर्ता विष्णु के साथ प्रमुख संहारक के रूप में स्थान दिया गया है। आम जनमानस के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि जो देवता महाप्रलय और संहार का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्हें दुनिया भर में लाखों-करोड़ों लोग एक दयालु रक्षक, संकटमोचन चिकित्सक और सबसे बड़े आश्रयदाता के रूप में क्यों पूजते हैं। काशी विश्वनाथ की पावन नगरी से लेकर हिमालय की गोद में बसे केदारनाथ के दिव्य धाम तक, हर तरफ शिव के जयकारे गूंजते हैं और यह अगाध प्रेम किसी भय के कारण नहीं, बल्कि उनके प्रति गहरी आस्था और समर्पण से उपजा है। भगवान शिव का यह दोहरा स्वरूप—एक तरफ प्रलयकारी संहारक और दूसरी तरफ परम रक्षक—पहली नजर में कुछ लोगों को भले ही विरोधाभासी लगे, लेकिन जब हम इसके दार्शनिक और आध्यात्मिक पक्षों की गहराई में उतरते हैं, तो हमें जीवन के सबसे बड़े रहस्यों का साक्षात्कार होता है।सृजन और विनाश का अनोखा संतुलन: क्यों जरूरी है पुरानी और व्यर्थ चीजों का अंतभगवान शिव के इस दोहरे स्वरूप को समझने के लिए हमें उनके द्वारा किए जाने वाले विनाश और संरक्षण के असली अर्थ को जानना होगा। हिंदू दर्शन और सनातन परंपराओं में विनाश का मतलब हमेशा कोई नकारात्मक घटना, बर्बादी या डर नहीं होता है। इसी प्रकार संरक्षण का अर्थ केवल निष्क्रिय रूप से किसी चीज को बचाकर रखना नहीं है। भगवान शिव केवल किसी चीज के अंत या बर्बादी का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे पुरानी, व्यर्थ, सड़ चुकी और मानवता के विकास में बाधा बनने वाली प्रणालियों को समाप्त करके नए और सुंदर सृजन का मार्ग प्रशस्त करते हैं। जिस प्रकार एक कुशल माली पौधे की सूखी और खराब टहनियों को काट देता है ताकि नया और स्वस्थ विकास हो सके, उसी प्रकार शिव का संहारक रूप विकास की राह में आने वाले तमाम अवरोधों और नकारात्मकताओं को जड़ से उखाड़ फेंकने का काम करता है।अहंकार का नाश और तीसरी आंख का रहस्य: भ्रम को भस्म करने वाली उच्च चेतना के प्रतीक हैं महादेवभगवान शिव के व्यक्तित्व का सबसे गहन और प्रभावशाली पहलू यह है कि वे मानव जीवन के सबसे बड़े शत्रु यानी 'अहकार' का नाश करने वाले माने जाते हैं। हिंदू दर्शन के अनुसार अहंकार मनुष्य की वह स्थिति है जिसमें वह खुद को अपनी भौतिक संपत्ति, उच्च पद, शक्ति या सीमित ज्ञान के साथ गलत तरीके से जोड़ लेता है। यह अहंकार व्यक्ति के भीतर अलगाव पैदा करता है, समाज में दूरियां बढ़ाता है और अंततः संघर्षों का कारण बनता है। शिव की विनाशकारी और प्रचंड शक्तियां मूल रूप से इसी अहंकार की भावनाओं का अंत करती हैं। उनकी मस्तक पर सुशोभित 'तीसरी आंख' कोई सामान्य नेत्र नहीं है, बल्कि यह अज्ञानता और भ्रम को पूरी तरह से भस्म करने वाली उच्च चेतना का प्रतीक है। जब किसी व्यक्ति का अहंकार टूटता है, तो उसे पहली बार में यह किसी बड़े नुकसान, अपमान या दुख जैसा प्रतीत हो सकता है, लेकिन वास्तव में महादेव का यह प्रहार उस जीव को किसी बहुत बड़े नैतिक पतन और आत्मिक विनाश से हमेशा के लिए सुरक्षित कर लेता है।अविद्या और अज्ञानता का अंत: मौन गुरु दक्षिणामूर्ति के रूप में जीवन की सच्चाइयों से कराते हैं अवगतभगवान शिव को केवल प्रलयकारी देवता के रूप में ही नहीं, बल्कि 'महादेव' और 'दक्षिणामूर्ति' यानी आदि गुरु के रूप में भी पूजा जाता है, जो मौन रहकर अपने भक्तों को ज्ञान प्रदान करते हैं। उपनिषदों समेत हमारे तमाम प्राचीन हिंदू धर्म ग्रंथों में 'अविद्या' यानी अज्ञानता को ही समस्त दुखों और कष्टों का मूल कारण माना गया है। यह अविद्या ही है जो मनुष्य की आत्मा को भ्रम, मोह और सांसारिक आसक्ति के अंतहीन चक्र में फंसाए रखती है। इस दार्शनिक संदर्भ में भगवान शिव द्वारा किया जाने वाला संरक्षण इस बात का प्रतीक है कि वे साधक को अंधकार से निकालकर सत्य और प्रकाश की ओर ले जाते हैं। शिव अपने भक्तों को सांसारिक और भौतिक चुनौतियों से हमेशा बचाकर रखने के बजाय उन्हें इतनी मानसिक और आध्यात्मिक जागरूकता प्रदान करते हैं कि वे खुद हर परिस्थिति का सामना करने में सक्षम बन जाएं।रुद्र रूप और ब्रह्मांडीय तांडव: अधर्म और अन्याय का नाश कर संतुलन स्थापित करते हैं महादेववैदिक साहित्य और विशेषकर यजुर्वेद के अंतर्गत आने वाले 'श्री रुद्रम' में भगवान शिव का अत्यंत प्रचंड और शक्तिशाली रूप 'रुद्र' के रूप में प्रकट होता है। यह रुद्र रूप अधर्म, अन्याय और क्रूरता का नाश करने वाली एक ऐसी अजेय शक्ति है जो समाज में न्याय की पुनर्स्थापना करती है। यह प्रचंडता किसी प्रकार की हिंसा या क्रूरता नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था को सुधारने और निखारने का एक आवश्यक माध्यम है। व्यक्तिगत जीवन हो या संपूर्ण समाज, दोनों को ही निरंतर संतुलन की आवश्यकता होती है। जब-जब दुनिया में अन्याय, अहंकार, अत्याचार और अराजकता अपनी सीमाओं को लांघने लगती है, तब-तब ब्रह्मांड में संतुलन की पुनर्स्थापना के लिए विनाश और विध्वंस अनिवार्य हो जाता है। भगवान शिव का प्रसिद्ध 'तांडव नृत्य' इसी ब्रह्मांडीय नृत्य का प्रतीक है, जो पुराने विघटन और नए नवीनीकरण के शाश्वत चक्र को निरंतर गति प्रदान करता है।धर्म की रक्षा और निरंतर विकास: विनाश के बिना अधूरा है संरक्षण का यह पावन चक्रअंततः भगवान शिव के इस दोहरे स्वरूप का निचोड़ यही है कि संरक्षण का अर्थ केवल धर्म की रक्षा करना है, और धर्म वह शाश्वत नैतिक व ब्रह्मांडीय नियम है जो पूरी सृष्टि में सद्भाव और शांति बनाए रखता है। विनाशकारी और विघटनकारी प्रवृत्तियों को जड़ से उखाड़ फेंके बिना संरक्षण का यह कार्य कभी भी पूरा नहीं हो सकता है। महादेव इस बात को भली-भांति सुनिश्चित करते हैं कि ब्रह्मांड में हमेशा उचित संतुलन बना रहे ताकि जीव-जंतुओं और प्रकृति का विकास और स्थिरता लगातार बनी रहे। शिव का संहारक रूप जितना आवश्यक है, उनका पालक रूप भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि वे विनाशक होकर भी सबसे बड़े रक्षक हैं, क्योंकि उनके द्वारा किया गया हर एक अंत असल में एक नई और बेहतर शुरुआत की नींव रखता है।
भारत ग्रो भी कर रहा है और रोजगार भी बना रहा... SRCC के शताब्दी समारोह में बोले पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब कोई संस्थान 100 साल का होता है, तो वह उपलब्धियों और प्रेरणाओं का महासागर हो जाता है. 100 साल की इस यात्रा में SRCC ने पीढ़ियों को उज्जवल भविष्य से जोड़ा है.
शिक्षकों को PM मोदी की सलाह: सिलेबस से बाहर निकल बच्चों के व्यवहार और आदतों पर दें ध्यान
शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर पीएम मोदी ने शिक्षकों से बच्चों में नशे की आदत और बढ़ते स्क्रीन टाइम पर ध्यान देने को कहा।
यूट्यूब पर छाई 90 मिनट की यह दिल छू लेने वाली फिल्म, गोद लेने की कहानी ने जीता सबका दिल
आज के समय में जब दर्शकों का मनोरंजन केवल बड़े बजट की फिल्मों, भारी भरकम एक्शन सीन्स, जटिल सस्पेंस थ्रिलर्स और महंगे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स तक सीमित माना जाता है, तब यूट्यूब पर रिलीज हुई एक बेहद साधारण और जमीन से जुड़ी फिल्म ने यह साबित कर दिया है कि अगर किसी कहानी में सच्ची भावनाएं और गहराई हो, तो उसे दर्शकों का दिल जीतने के लिए किसी बड़े स्टारडम की आवश्यकता नहीं होती है। यह नवीनतम नब्बे मिनट की फिल्म रिलीज होने के कुछ ही दिनों के भीतर इंटरनेट पर इस कदर वायरल हो चुकी है कि सोशल मीडिया के हर कोने में इसी की गूंज सुनाई दे रही है, और लोग इसके हर एक दृश्य की खुलकर तारीफ कर रहे हैं। इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें कोई भारी-भरकम मारधाड़, बेवजह का रोना-धोना या जटिल और डरावना सस्पेंस नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी सरल और सहज कहानी है जो सीधे इंसान की आत्मा को झकझोर कर रख देती है। जैसे ही यह फिल्म यूट्यूब पर हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराई गई, दर्शकों ने इसे हाथों-हाथ लिया और देखते ही देखते यह इंटरनेट की दुनिया का सबसे बड़ा सरप्राइज हिट बन गई। आईएमडीबी (IMDb) जैसी प्रतिष्ठित रेटिंग एजेंसी पर इस फिल्म को 7.7 जैसी बेहद शानदार और सम्मानजनक रेटिंग मिली है, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि आम दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों ने भी इसकी कलात्मकता और संवेदनशीलता को खुले दिल से स्वीकार किया है। लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस फिल्म के छोटे-छोटे क्लिप्स को शेयर कर रहे हैं और दूसरों को यह सलाह दे रहे हैं कि वे अपने व्यस्त जीवन से नब्बे मिनट निकालकर इस मास्टरपीस को जरूर देखें। यह फिल्म यह सिखाती है कि पारिवारिक प्रेम, अपनापन और मानवीय रिश्ते सरहदों और भाषाओं के मोहताज नहीं होते, और यही वजह है कि यह फिल्म आज हर उम्र के दर्शक की पहली पसंद बनती जा रही है।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक भारतीय बच्ची को गोद लेने के सफर और माता-पिता के संघर्ष पर आधारित इस अनोखी फिल्म की मूल कथाआखिर किस अनूठी कहानी पर आधारित है यह फिल्म और इसके निर्माण के पीछे किन कलाकारों और निर्देशकों का हाथ है जो इसे इतना खास बनाता है? इस चर्चित फिल्म का शीर्षक 'ए मॉस्कितो इन द ईयर' (A Mosquito in the Ear) है, जिसे निर्देशक निकोला रिंचियारी (Nicola Rinciari) ने बेहद खूबसूरती के साथ निर्देशित किया है और यह उनके निर्देशन करियर की पहली फिल्म यानी डायरेक्टोरियल डेब्यू है, जिसे उन्होंने अपनी अद्भुत कलात्मक समझ से सजाया है। यह फिल्म किसी ओरिजिनल स्क्रिप्ट पर आधारित नहीं है, बल्कि यह प्रख्यात ग्राफिक नॉवेल 'उना जंकारा नेल ओरेक्चियो' (Una Zanzara nell'Orecchio) पर आधारित है, जिसके हर एक पन्ने को निर्देशक ने परदे पर जीवंत कर दिया है। फिल्म की स्टारकास्ट की बात करें तो इसमें हॉलीवुड और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के जाने-माने चेहरे जैसे कि जेक लेसी (Jake Lacy), नाजान बोनियादी (Nazanin Boniadi) और बाल कलाकार रूही पाल (Ruhi Pal) ने अपनी बेहतरीन और स्वाभाविक अदाकारी से इस कहानी में जान फूंक दी है। फिल्म की मुख्य कहानी एक अमेरिकी दंपती के इर्द-गिर्द घूमती है, जो फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं यानी संतान सुख न मिलने के कारण गहरे मानसिक संघर्ष से गुजर रहे होते हैं। इस समस्या के समाधान के रूप में वे भारत के गोवा राज्य के एक अनाथालय से चार साल की एक छोटी सी भारतीय बच्ची को अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया के तहत गोद लेने का फैसला करते हैं। यहीं से इस कहानी का असली और सबसे रोमांचक व भावनात्मक सफर शुरू होता है, जहां दो अलग-अलग संस्कृतियों, दो अलग-अलग महाद्वीपों और दो बिल्कुल भिन्न जीवन शैलियों के लोग एक ही छत के नीचे एक परिवार के रूप में रहने के लिए मजबूर होते हैं। यह कहानी केवल एक बच्चे को गोद लेने की कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो संस्कृतियों के मिलन और इंसानी संवेदनाओं की एक ऐसी यात्रा है जो देखने वाले की आंखें नम कर देती है और दिल को एक अजीब सा सुकून देती है।जब अमेरिका से आया वह दंपती गोवा के अनाथालय से चार साल की उस नन्ही बच्ची को गोद लेकर अपने घर ले जाता है, तो उनके सामने सबसे बड़ी व्यावहारिक और भावनात्मक चुनौती भाषा की दीवार बनकर खड़ी हो जाती है। बच्ची सिर्फ अपनी मातृभाषा और उस परिवेश को जानती है जिसे उसने अब तक देखा था, वह अंग्रेजी का एक शब्द भी नहीं बोल पाती है, और दूसरी तरफ उन अमेरिकी माता-पिता को हिंदी या स्थानीय भाषा का एक शब्द भी नहीं आता है। इस भाषाई अंतराल के कारण शुरुआती दौर में दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करना लगभग असंभव सा प्रतीत होता है, और यह असमंजस फिल्म के सबसे मार्मिक दृश्यों को जन्म देता है। छोटी सी बच्ची यानी सरवरी अपने उस पुराने घर, अपने जाने-पहचाने समुदाय, अपनी भाषा और अपनी मिट्टी को इतनी शिद्दत से याद करती है कि वह नए माहौल में खुद को आसानी से ढाल नहीं पाती और अपनी जड़ों को छोड़ने से साफ इनकार कर देती है। वह उस अजनबी देश और अजनबी घर में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती, और उसके मन का यह डर और अनिच्छा दर्शकों के दिलों को अंदर तक झकझोर कर रख देती है। फिल्म बहुत ही संवेदनशीलता के साथ यह दर्शाती है कि कैसे वह अमेरिकी दंपती बिना किसी जल्दबाजी या गुस्से के, बेहद धैर्य और असीम प्रेम के साथ उस बच्ची के दिल में अपनी जगह बनाने की कोशिश करता है। उनके बीच की बातचीत भले ही शब्दों की मोहताज न हो, लेकिन उनकी आंखें, उनके स्पर्श और उनका समर्पण एक ऐसा संवाद रचते हैं जो किसी भी भाषा की जरूरत को महसूस नहीं होने देता। फिल्म के कई दृश्य इतने अधिक भावुक और दिल को छू लेने वाले हैं कि दर्शक अपनी हंसी और आंसुओं को रोक नहीं पाते हैं, और यही कारण है कि इसे एक परफेक्ट 'फील-गुड' मूवी माना जा रहा है जो देखने वाले के मन पर एक गहरा और कभी न मिटने वाला सकारात्मक प्रभाव छोड़ जाती है।यूट्यूब पर मुफ्त में उपलब्ध इस मास्टरपीस को दर्शकों से मिल रहे अपार प्यार ने यह साबित कर दिया है कि अच्छी कहानियों को किसी थियेटर या महंगे प्लेटफॉर्म की जरूरत नहीं होतीआज के समय में जब हर छोटी-सी फिल्म या वेब सीरीज को देखने के लिए लोगों को महंगे सब्सक्रिप्शन खरीदने पड़ते हैं, ऐसे में इस बेहतरीन फिल्म का यूट्यूब पर मुफ्त में उपलब्ध होना दर्शकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। निर्देशक और निर्माताओं का यह साहसिक कदम कि उन्होंने अपनी इस कलाकृति को सीधे जनता के बीच यूट्यूब के माध्यम से रखा, पूरी तरह सफल साबित हुआ है क्योंकि आज लाखों लोग इसे बिना किसी बाधा के आसानी से देख पा रहे हैं। इस फिल्म के संवाद, इसकी सिनेमैटोग्राफी, गोवा के समुद्र तटों और अनाथालय के दृश्यों का वास्तविक फिल्मांकन तथा पृष्ठभूमि का शांत संगीत इस पूरी रचना को एक जादुई अनुभव में बदल देता है। जो लोग सस्पेंस और थ्रिलर से भरी फिल्मों से ऊब चुके हैं और अपने परिवार के साथ बैठकर कोई शांत, सुकून भरी और संस्कारी कहानी देखना चाहते हैं, उनके लिए यह नब्बे मिनट का सफर किसी मेडिटेशन से कम नहीं है। सोशल मीडिया पर लोग लगातार यह लिख रहे हैं कि इस फिल्म ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि गोद लेने जैसी प्रक्रियाएं और बच्चों का मानसिक समायोजन कितना संवेदनशील विषय होता है। इस फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारतीय संस्कृति और बाल मनोविज्ञान को जिस गरिमापूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया है, उसकी जितनी भी तारीफ की जाए वह कम है। यदि आपने अभी तक इस फिल्म को नहीं देखा है, तो आपको बिना एक भी पल गंवाए यूट्यूब पर जाकर इस अद्भुत सफर का हिस्सा बनना चाहिए, क्योंकि ऐसी फिल्में रोज-रोज नहीं बनतीं बल्कि दशक में एक बार आती हैं जो इंसानियत में हमारे भरोसे को और अधिक मजबूत कर जाती हैं।
सनातन संस्कृति और पौराणिक आस्था के केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले पावन तीर्थराज प्रयागराज की धरती रहस्यों, चमत्कारों और अध्यात्म का एक ऐसा अद्भुत संगम है, जहां हर एक कोने से कोई न कोई प्राचीन कथा जुड़ी हुई है। संगम के पवित्र तटों पर बसे इस शहर में आस्था का एक ऐसा केंद्र मौजूद है जो दुनिया भर में अपनी अनूठी बनावट और पौराणिक महत्व के कारण अद्वितीय माना जाता है। हम बात कर रहे हैं प्रयागराज के ऐतिहासिक दारागंज मोहल्ले में स्थित उस प्रसिद्ध और भव्य मंदिर की, जहां बजरंगबली अपनी सामान्य खड़ी मुद्रा में नहीं, बल्कि जमीन पर लेटी हुई मुद्रा में विराजमान हैं। 'लेटे हुए हनुमान जी' के नाम से दुनिया भर में विख्यात यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह त्रेतायुग की उन महागाथाओं का जीवंत प्रमाण है जिन्हें सुनकर आज भी भक्तों की आंखें श्रद्धा से नम हो जाती हैं। लंका दहन और लंका विजय के पश्चात बजरंगबली की थकान मिटाने के लिए संगम तट पर विश्राम करने की यह पौराणिक कथा इस स्थान को अत्यंत दुर्लभ और रहस्यमयी बनाती है।तीर्थराज प्रयागराज के दारागंज में स्थित है 600 से 700 साल पुराना यह ऐतिहासिक और दिव्य लेटे हुए हनुमान मंदिरहिंदू धर्म शास्त्रों और वेदों में प्रयागराज को 'तीर्थराज' यानी सभी तीर्थों का राजा होने का गौरव प्राप्त है। इसी पवित्र नगरी में गंगा और यमुना के पावन मिलन स्थल के समीप स्थित लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर इस तीर्थ की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण पहचान माना जाता है। इस प्राचीन मंदिर के इतिहास और स्थापना को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं, जिनके अनुसार इस दिव्य मूर्ति की स्थापना संत समर्थ गुरु रामदास जी द्वारा की गई थी। मंदिर के परिसर में प्रवेश करते ही एक अलग ही प्रकार की सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शांति का अहसास होने लगता है। इस भव्य मंदिर परिसर में केवल बजरंगबली की ही मूर्ति नहीं है, बल्कि उनके साथ-साथ भगवान शिव, माता पार्वती, प्रथम पूज्य गणेश जी, काल भैरव, मां दुर्गा, मां काली और नवग्रहों की सुंदर और भव्य मूर्तियां भी स्थापित हैं। यहां आने वाले हर एक श्रद्धालु को एक ही स्थान पर इन सभी देवी-देवताओं के दर्शन और पूजन का सौभाग्य प्राप्त होता है, जिससे इस तीर्थ स्थल का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।लगभग 20 फीट लंबी है हनुमान जी की दक्षिणाभिमुखी प्रतिमा, दाएं पैर के नीचे दबा है पापी अहिरावणप्रयागराज के इस प्रसिद्ध मंदिर में विराजमान हनुमान जी की प्रतिमा अपने आप में बेहद खास और अद्धभुत है। मान्यताओं के मुताबिक हनुमान जी की यह लेटी हुई मूर्ति दक्षिणाभिमुखी है और इसकी कुल लंबाई लगभग 20 फीट है। यह प्रतिमा धरातल से करीब 6 से 7 फीट नीचे गर्भगृह में स्थित है, जिसके दर्शन करने के लिए भक्तों को सीढ़ियों से नीचे उतरना पड़ता है। स्थानीय लोग और श्रद्धालु इन्हें बड़े हनुमानजी, किले वाले हनुमानजी, लेटे हुए हनुमानजी और बांध वाले हनुमान जी जैसे तमाम नामों से पुकारते हैं। इस पवित्र प्रतिमा के धार्मिक स्वरूप का वर्णन करते हुए विद्वान बताते हैं कि इनके बाएं पैर के नीचे कामदा देवी और दाएं पैर के नीचे पाताल लोक का स्वामी और राम भक्तों का शत्रु अहिरावण दबा हुआ है। इसके साथ ही उनकी प्रतिमा के दाएं हाथ में मर्यादा पुरुषोत्तम राम और माता सीता के छोटे स्वरूप तथा बाएं हाथ में उनकी पारंपरिक गदा सुशोभित है। यहां आने वाले तमाम भक्तों का ऐसा अटूट विश्वास है कि जो भी सच्चे मन से इन चरणों में अपनी अर्जी लगाता है, उसकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं।त्रेतायुग की पौराणिक कथा: लंका विजय के बाद थकान मिटाने के लिए संगम तट पर क्यों लेटे थे संकटमोचनइस मंदिर से जुड़ी सबसे लोकप्रिय और प्राचीन पौराणिक कथा रामायण काल से जुड़ी हुई है। कथा के अनुसार, जब भगवान श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त कर ली और रावण तथा उसके पूरे राक्षस साम्राज्य का अंत कर दिया, तब लंका से अयोध्या लौटते समय रास्ते में महाबली हनुमान जी को अत्यधिक थकान महसूस होने लगी। युद्ध के दौरान उन्होंने जिस असीम पराक्रम और ऊर्जा का प्रदर्शन किया था, उसके बाद उनके शरीर की थकान को दूर करना आवश्यक था। तब माता सीता के कहने और उनकी इच्छा के अनुसार, हनुमान जी ने विश्राम करने के लिए प्रयाग की इस पावन धरती को चुना और वे संगम के इसी पवित्र तट पर आराम करने के लिए लेट गए। माता सीता के स्नेह और आशीर्वाद से उनकी सारी थकान दूर हो गई और वे यहीं विश्राम की मुद्रा मेंलीन हो गए। इसी पौराणिक प्रसंग को आधार मानते हुए सदियों बाद यहां लेटे हुए हनुमान जी का यह भव्य मंदिर स्थापित किया गया, जो आज कम से कम 600 से 700 साल पुराना माना जाता है।साल में एक बार मां गंगा खुद चलकर आती हैं अपने अनन्य भक्त हनुमान जी को स्नान कराने के लिएइस मंदिर से जुड़ा एक ऐसा रहस्य और चमत्कार भी है जो विज्ञान और आस्था के बीच की रेखा को धुंधला कर देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब हनुमान जी लंका विजय के बाद रामजी की सेवा पूरी करके प्रयागराज के संगम तट पर लेटे थे, तब से लेकर आज तक यह स्थान अत्यंत पवित्र और जागृत माना जाता है। हर साल मानसून के मौसम में जब उत्तर भारत में भारी बारिश होती है और नदियां उफान पर होती हैं, तब मां गंगा का जलस्तर इतना बढ़ जाता है कि बाढ़ का पानी सीधे इस मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर जाता है और लेटे हुए हनुमान जी की पूरी प्रतिमा को अपने आंचल में डुबो लेता है। धार्मिक मत के अनुसार इसे कोई सामान्य आपदा नहीं माना जाता, बल्कि इसे इस बात का प्रतीक माना जाता है कि मां गंगा वर्ष में एक बार स्वयं अपने अनन्य भक्त हनुमान जी का अभिषेक करने और उन्हें स्नान कराने के लिए यहां आती हैं। इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु खिंचे चले आते हैं।वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्राकृतिक कारणों से हर साल मंदिर में प्रवेश करता है बाढ़ का पानीजहां एक ओर इस घटना को पूरी तरह से धार्मिक और चमत्कारी माना जाता है, वहीं अगर वैज्ञानिक नजरिए से इस पर विचार किया जाए तो इसके पीछे भौगोलिक और प्राकृतिक कारण छिपे हैं। प्रयागराज तीन नदियों—गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के मिलन स्थल पर स्थित है। मानसून के दौरान जब लगातार मूसलाधार बारिश होती है, तो गंगा और यमुना दोनों नदियों का जलस्तर तेजी से ऊपर उठने लगता है। चूंकि लेटे हुए हनुमान जी का यह मंदिर संगम के बिल्कुल नजदीक और निचले भू-भाग पर स्थित है, इसलिए जलस्तर बढ़ने पर बाढ़ का पानी प्राकृतिक रूप से गर्भगृह के अंदर तक भर जाता है। हालांकि प्रशासन और मंदिर समिति इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करती है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह प्राकृतिक प्रक्रिया किसी बड़े दिव्य अनुष्ठान से कम नहीं होती है। वे इसे मां गंगा और हनुमान जी के प्रेम का मिलन मानते हैं, जिससे इस स्थान की दिव्यता और अधिक बढ़ जाती है।नकारात्मक ऊर्जा का नाश और सुख-शांति की स्थापना का प्रतीक है मां गंगा का यह पावन अभिषेकधार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से मां गंगा द्वारा हनुमान जी के इस वार्षिक स्नान को बहुत बड़ा वरदान माना जाता है। लोगों का विश्वास है कि जब मां गंगा के पवित्र जल से संकटमोचन हनुमान जी का यह अभिषेक होता है, तो इससे न केवल स्थानीय क्षेत्र बल्कि पूरे देश और समाज से नकारात्मक ऊर्जा, बीमारियां और बाधाएं दूर होती हैं। इस विशेष अवधि के दौरान यहां आने वाले भक्तों को जो आत्मिक शांति और ऊर्जा मिलती है, उसकी तुलना किसी अन्य तीर्थ से नहीं की जा सकती है। यही वजह है कि जब-जब गंगा का पानी मंदिर के अंदर प्रवेश करता है, तब-तब श्रद्धालुओं में एक अलग ही प्रकार का उत्साह, उमंग और गहरी आस्था देखने को मिलती है। लोग इस जल को बहुत ही पवित्र मानते हैं और हनुमान जी के दर्शन मात्र से अपने जीवन को धन्य महसूस करते हैं।
मेथी दाना या अंडा? जानिए कौन सा DIY हेयर मास्क बनाता है बालों को चमकदार
ग्लास हेयर जैसा चमकदार और मुलायम लुक पाने के लिए मेथी और अंडे का हेयर मास्क इस्तेमाल किया जाता है. जानिए दोनों में से कौन सा बालों के लिए बेहतर है.
रावण के अहंकार जैसी बन सकती है AI की असीमित ताकत. जानिए जब AI खुद हैकर बन जाए तो कैसे काम करेगा 10-पॉइंट 'Zero-Trust' सुरक्षा फॉर्मूला.
‘हनुमान अंश’ की शूटिंग सिर्फ एक फिल्म की तरह नहीं हुई, बल्कि सेट पर आध्यात्मिक माहौल बनाए रखने के लिए कलाकारों और क्रू ने खास अनुशासन का पालन किया, जिसका असर अब बॉक्स ऑफिस पर भी दिखाई दे रहा है.
भारतीय सिनेमा जगत में जब भी बेहतरीन और रोंगटे खड़े कर देने वाली सस्पेंस थ्रिलर्स की बात होती है, तो 'दृश्यम' फ्रेंचाइजी का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है और अब इस कड़ी का तीसरा हिस्सा यानी 'दृश्यम 3' पर्दे पर तहलका मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है। अभिनेता अजय देवगन एक बार फिर से अपने आइकॉनिक और बेहद चतुर किरदार विजय सलगांवकर के रूप में सिल्वर स्क्रीन पर वापसी कर रहे हैं ताकि दर्शकों को एक बार फिर अपनी बेजोड़ एक्टिंग और उलझा देने वाली कहानियों से पूरी तरह अचंभित कर सकें। फिल्म के मेकर्स और खुद अभिनेता अजय देवगन ने हाल ही में सोशल मीडिया पर इस बात की आधिकारिक घोषणा कर दी है कि इस फिल्म का बहुप्रतीक्षित ट्रेलर किस दिन दुनिया के सामने आने वाला है। इस खबर के सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैंस के बीच जबरदस्त उत्साह और सनसनी फैल गई है, क्योंकि पिछले कई महीनों से दर्शक यह जानने के लिए बेताब थे कि आखिरकार विजय सलगांवकर इस बार अपनी फैमिली को बचाने के लिए कौन सा नया और अचूक दांव चलने वाले हैं। 'दृश्यम' और 'दृश्यम 2' की अपार सफलता के बाद से ही इस तीसरी फिल्म को लेकर दर्शकों की उम्मीदें आसमान छू रही हैं, और जिस तरह का सस्पेंस पहले के भागों में देखने को मिला था, उससे यह अनुमान लगाना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है कि इस बार क्लाइमैक्स उससे भी कहीं ज्यादा खतरनाक और अप्रत्याशित होने वाला है। फिल्म की रिलीज से पहले आने वाला यह ट्रेलर इस पूरी फ्रेंचाइजी के रहस्य पर से पर्दा उठाने की दिशा में पहला सबसे बड़ा कदम होने जा रहा है, जिसे देखने के लिए पूरा देश पलकें बिछाए बैठा है और हर कोई यह जानना चाहता है कि क्या इस बार कानून की लंबी हाथ विजय सलगांवकर तक पहुंच पाएंगे या फिर वे एक बार फिर पुलिस और सिस्टम को अपनी तीक्ष्ण बुद्धि से पूरी तरह चकमा देने में कामयाब हो जाएंगे।फिल्म निर्माताओं द्वारा 'दृश्यम 3' का नया और बेहद रहस्यमयी पोस्टर जारी किया गया है, जिसमें विजय सलगांवकर अपने पूरे परिवार के साथ एक बेहद इंटेंस और संशय से भरे हुए लुक में नजर आ रहे हैं।ट्रेलर की रिलीज डेट के ऐलान के साथ-साथ मेकर्स ने फिल्म का एक नया और दिल दहला देने वाला पोस्टर भी सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जिसने आते ही इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है। इस नए पोस्टर में मुख्य अभिनेता अजय देवगन यानी विजय सलगांवकर अपने पूरे परिवार के साथ बेहद गंभीर, डरे हुए लेकिन किसी गहरी साजिश या बचाव की मुद्रा में नजर आ रहे हैं, जिससे उनके चेहरों पर साफ तौर पर एक नया तनाव और सस्पेंस झलकता है। पोस्टर का विजुअल टोन और रंगों का इस्तेमाल इस बात की पूरी गवाही देता है कि 'दृश्यम 3' पिछली दोनों फिल्मों के मुकाबले और भी ज्यादा डार्क, गंभीर और मनोवैज्ञानिक होने वाली है, जहां हर एक सेकंड पर दर्शक अपनी सीटों से बंधे रहने को मजबूर हो जाएंगे। अजय देवगन ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस पोस्टर को शेयर करते हुए एक बेहद पहेलीनुमा और सस्पेंस से भरा कैप्शन भी लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि सवाल अब भी वही पुराने हैं, पर इस बार उनके जवाब और भी ज्यादा नजदीक आ चुके हैं। उनके इस एक छोटे से वाक्य ने इंटरनेट पर फैंस की उत्सुकता को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है, और लोग तरह-तरह की कहानियां और थ्योरीज सोशल मीडिया पर डिस्कस करने लगे हैं। कोई कह रहा है कि इस बार केस की फाइलें दोबारा खुलेगी, तो कोई अनुमान लगा रहा है कि इस बार परिवार का कोई सदस्य खुद कोई ऐसी गलती कर बैठेगा जिससे बचना नामुमकिन हो जाएगा। पोस्टर में नजर आ रहे किरदारों के भाव और उनकी आंखों में छिपा डर इस बात का साफ संकेत है कि इस बार दांव पर सिर्फ उनकी इज्जत या नौकरी नहीं, बल्कि उनकी पूरी जिंदगी और स्वतंत्रता दांव पर लगी हुई है, जिसके लिए उन्हें अपनी आखिरी सांस तक संघर्ष करना पड़ेगा और यही बात इस फिल्म को इस साल की सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित थ्रिलर फिल्म बनाती है।आखिरकार कब रिलीज होने जा रहा है 'दृश्यम 3' का धमाकेदार ट्रेलर और अजय देवगन ने किस खास अंदाज में फैंस के साथ इस बड़ी खबर को साझा किया है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिरकार वह कौन सी तारीख है जिस दिन दर्शकों का इंतजार खत्म होगा और 'दृश्यम 3' यानी 'दृश्यम द कन्क्लूजन' का रोंगटे खड़े कर देने वाला ट्रेलर रिलीज किया जाएगा? आधिकारिक घोषणा के मुताबिक, इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का ट्रेलर आगामी 9 सितंबर को दुनिया भर के दर्शकों के सामने रिलीज कर दिया जाएगा, जिसके बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर से 'दृश्यम' ट्रेंड करने लगेगा। अजय देवगन ने जैसे ही सोशल मीडिया पर इस बात की जानकारी साझा की, उनके तमाम फैंस और फिल्म प्रेमियों ने कमेंट सेक्शन में अपनी बेताबी और उत्साह का इजहार करना शुरू कर दिया, और कुछ ही घंटों में यह पोस्ट लाखों लाइक्स और शेयर्स के साथ इंटरनेट पर छा गई। फैंस का कहना है कि वे इस ट्रेलर का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे क्योंकि वे यह देखना चाहते हैं कि निर्देशक अभिषेक पाठक इस बार कहानी को किस नए और चौंकाने वाले मोड़ पर लेकर जाने वाले हैं। पिछले दोनों भागों में हमने देखा कि कैसे एक साधारण सा केबल ऑपरेटर अपनी सूझबूझ और सिनेमाई ज्ञान के बल पर गोवा पुलिस के बड़े-बड़े अधिकारियों और आईजी मीरा देशमुख तक को अपनी उंगलियों पर नचाता रहा और सबूतों को इस तरह मिटाया कि कानून भी बेबस नजर आया। अब इस तीसरे और अंतिम अध्याय में यह देखना सबसे ज्यादा रोमांचक और दिलचस्प होगा कि क्या पुलिस के हाथ कोई ऐसा नया और अकाट्य सबूत लग जाता है जिससे विजय सलगांवकर का पूरा किला ढह जाएगा, या फिर इस बार भी कानून की किताबों में दर्ज न हो पाने वाला कोई नया सच सामने आएगा जो सबको हिला कर रख देगा। 9 सितंबर को आने वाला यह ट्रेलर इन सभी सवालों के जवाब तो पूरी तरह नहीं देगा, लेकिन यह जरूर तय कर देगा कि आने वाली 2 अक्टूबर को जब यह फिल्म सिनेमाघरों में उतरेगी, तो बॉक्स ऑफिस पर किस कदर भूचाल आने वाला है और दर्शक किस प्रकार सिनेमाघरों की ओर दौड़ पड़ेंगे।फिल्म की रिलीज के लिए 2 अक्टूबर की तारीख का चुनाव क्यों बेहद खास है और पिछले दो भागों की सफलता के बाद इस फ्रेंचाइजी से दर्शकों की क्या उम्मीदें जुड़ी हुईसिनेमा प्रेमियों के लिए 2 अक्टूबर की तारीख का 'दृश्यम' फ्रेंचाइजी के साथ एक बहुत ही पुराना, गहरा और अटूट रिश्ता रहा है, और इस बार भी फिल्म के मेकर्स ने इसी खास तारीख को अपनी फिल्म की सिनेमाघरों में रिलीज के लिए चुना है। यह वही तारीख है जिससे इस पूरी कहानी की शुरुआत होती है, यही वह दिन है जिस दिन से फिल्म में सारा रायता फैलता है, मिस्ट्री और सस्पेंस की एक ऐसी आंधी चलती है जो आज तक थमने का नाम नहीं ले रही है। अजय देवगन के अलावा इस फिल्म में एक बार फिर से तब्बू, श्रिया सरन और इशिता दत्ता जैसे मंजे हुए और दिग्गज कलाकार अपनी पुरानी भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं, जिनकी अदाकारी ने पिछले दोनों भागों में जान फूंक दी थी। फिल्म का निर्देशन एक बार फिर से प्रतिभाशाली निर्देशक अभिषेक पाठक के हाथों में है, जिन्होंने 'दृश्यम 2' की भी शानदार कमान संभाली थी और यह साबित कर दिया था कि वे ओरिजिनल मलयालम फिल्म के जादू को हिंदी दर्शकों के सामने पूरी शिद्दत के साथ पेश कर सकते हैं। पिछले दो भागों में विजय सलगांवकर ने अपनी परिवार की रक्षा के लिए जिस चालाकी और गजब की मानसिक तैयारी के साथ पुलिस को हर मोड़ पर चकमा दिया था, उसने दर्शकों को पूरी तरह हैरान कर दिया था। अब इस तीसरे पार्ट में जब खेल अपने सबसे अंतिम और निर्णायक पड़ाव पर पहुंच चुका है, तो हर कोई यह देखने के लिए बेताब है कि क्या इस बार सच की जीत होगी या फिर एक बार फिर से '2 अक्टूबर' की वह तारीख इतिहास रचेगी। फिल्म की स्टार कास्ट, इसका दमदार संगीत, निर्देशक का सटीक विजन और अजय देवगन की दमदार स्क्रीन प्रेजेंस इस बात की पूरी गारंटी देती है कि यह फिल्म इस साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित होने वाली है, और दर्शक एक बार फिर से सिनेमाघरों में बैठकर सिनेमा का असली रोमांच महसूस करने वाले हैं।
भारतीय संस्कृति में काजल सिर्फ खूबसूरती का नहीं बल्कि बुरी नजर से बचाव का अचूक रक्षा कवच है
भारतीय समाज और सनातन संस्कृति में सदियों से चली आ रही परंपराएं केवल दिखावे का हिस्सा नहीं होती हैं, बल्कि उनके पीछे एक गहरा मनोवैज्ञानिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विज्ञान छिपा होता है। इनमें से ही एक सबसे पुरानी और सर्वमान्य परंपरा है बच्चों, नवविवाहितों और सफलता हासिल करने वाले व्यक्तियों को बुरी नजर से बचाने के लिए काजल या काले टीके का प्रयोग करना। आज के आधुनिक दौर में जहां लोग इसे केवल अंधविश्वास मानकर खारिज करने की कोशिश करते हैं, वहीं हमारी संस्कृति की जड़ें इस बात की गवाही देती हैं कि काजल का यह छोटा सा काला बिंदु सिर्फ आंखों को सजाने का साधन नहीं है, बल्कि यह किसी भी नकारात्मक ऊर्जा को रोकने वाली एक मजबूत ढाल का काम करता है। दादी-नानी के नुस्खों से लेकर पारंपरिक रीति-रिवाजों तक, काजल का यह सांस्कृतिक महत्व आज भी हमारे जीवन में उतनी ही प्रासंगिकता रखता है जितना कि सदियों पहले हुआ करता था।क्या होती है नजर या बुरी नजर, जानिए इसके पीछे की गहरी सामाजिक और मनोवैज्ञानिक मान्यताएंहमारी लोक संस्कृति में 'नजर लगना' या 'बुरी नजर' एक ऐसा शब्द है जिससे हर कोई वाकिफ है। इस मान्यता के अनुसार जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे की सफलता, उसकी सुंदरता, उसके अच्छे स्वास्थ्य या उसकी खुशहाली को देखकर अत्यधिक ईर्ष्या, जलन या यहां तक कि अत्यधिक प्रशंसा का भाव रखता है, तो उस नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव सामने वाले व्यक्ति के जीवन या स्वास्थ्य पर पड़ने लगता है। जब कोई बच्चा बहुत स्वस्थ और सुंदर होता है, कोई युवा नई नौकरी हासिल करता है, या कोई नया वाहन और मकान खरीदा जाता है, तो परिवार के बुजुर्ग तुरंत यह चेतावनी देते हैं कि इसे नजर लग जाएगी। यह अवधारणा केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की लगभग हर प्राचीन संस्कृति में बुरी नजर से बचने के लिए अलग-अलग उपाय और टोटके अपनाए जाते रहे हैं। मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह समाज की उस सोच को दर्शाता है जहां लोग दूसरों की तरक्की से होने वाली ईर्ष्या के मानसिक प्रभाव को एक अदृश्य ऊर्जा के रूप में महसूस करते हैं।लोग बुरी नजर और नकारात्मकता से बचाव के लिए माथे या गाल पर क्यों लगाते हैं काजलबुरी नजर के प्रभाव को निष्प्रभावी करने के लिए चेहरे, कान के पीछे या पैर पर काजल का टीका लगाने की परंपरा बहुत पुरानी है। इसके पीछे सबसे सरल और प्रचलित मान्यता यह है कि यह छोटा सा काला बिंदु एक सुरक्षात्मक आवरण या कवच के रूप में कार्य करता है। लोगों का ऐसा अटूट विश्वास है कि यह काला निशान बुरी नजर के तीखे प्रभाव को अपनी ओर खींच लेता है और उसे मुख्य व्यक्ति तक पहुंचने से रोक देता है। इसके पीछे दो मुख्य तर्क दिए जाते हैं; पहला यह कि काले रंग में नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर को अपने भीतर सोखने की अद्भुत क्षमता होती है, और दूसरा यह कि चेहरे पर एक छोटा सा अपूर्णता का निशान यानी काला टीका व्यक्ति की संपूर्ण सुंदरता या आकर्षण के प्रभाव को थोड़ा कम कर देता है, जिससे किसी की भी बुरी नजर सीधे तौर पर उस पर टिक नहीं पाती। यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और आज भी तमाम आधुनिकता के बावजूद लोग इस पर पूरा भरोसा करते हैं।बच्चों से लेकर बड़ों तक फैली है काले टीके की यह प्राचीन और अनूठी सांस्कृतिक परंपराआम तौर पर लोगों की यह धारणा होती है कि काजल या काला टीका केवल नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों को नजर से बचाने के लिए लगाया जाता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इसका दायरा बच्चों से कहीं अधिक बड़ा है। भारतीय परिवारों में बड़े-बुजुर्ग पीढ़ियों से हर उम्र के सदस्यों की सुरक्षा के लिए इसका उपयोग करते आए हैं। उदाहरण के तौर पर, विवाह के तुरंत बाद नई दुल्हन के चेहरे पर या कान के पीछे काजल की एक छोटी सी बिंदी लगाई जाती है ताकि उसे किसी की बुरी नजर न लगे। इसके अलावा यदि परिवार के किसी सदस्य को कोई बड़ी सफलता मिल जाए, नया व्यवसाय शुरू हो जाए या कोई बड़ी उपलब्धि हासिल हो जाए, तो घर की महिलाएं तुरंत उसके माथे या कान के पास काजल का एक हल्का सा निशान लगा देती हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि आपकी खुशियों को किसी की नजर न लगे और आपकी तरक्की यूं ही सुरक्षित बनी रहे।प्राचीन मिस्र के कोल से लेकर भारतीय संस्कृति तक, जानिए क्या है काजल का गौरवशाली इतिहासकाजल का इतिहास और इसका उपयोग आज का नहीं है, बल्कि इसके तार हजारों साल पुरानी प्राचीन सभ्यताओं से जुड़े हुए हैं। इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि प्राचीन मिस्र में इसी तरह के सौंदर्य और औषधि उत्पाद का इस्तेमाल किया जाता था जिसे 'कोल' कहा जाता था। मिस्र के लोग अपनी आंखों को धूप और संक्रमण से बचाने के लिए इसका उपयोग करते थे। समय के साथ यह कला और इसका उपयोग मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के विभिन्न हिस्सों में फैल गया और आम जनजीवन का हिस्सा बन गया। जैसे-जैसे समय बीतता गया, अलग-अलग समाजों और संस्कृतियों ने काजल को अपने स्थानीय विश्वासों और अर्थों के साथ जोड़ लिया। भारत में आते ही यह केवल आंखों के सौंदर्य प्रसाधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह लोक परंपराओं, स्वास्थ्य रक्षा और बुरी नजर से मुक्ति पाने का एक अनिवार्य माध्यम बन गया।
रूस ने यूक्रेन के दो एयरपोर्ट पर भी हमला किया है. जेलेंस्की ने इसे शांति प्रक्रिया को बाधा पहुंचाने वाला कदम बताया, मगर रूस की ओर से कोई बयान नहीं दिया गया.
रूस अगले 72 घंटों तक कीव पर नहीं करेगा हमला, राष्ट्रपति पुतिन ने दिए आदेश
एयरपोर्ट पर रूसी दूत किरिल दिमित्रिएव ने इन दूतों का स्वागत किया. दिमित्रिएव ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के विमान से उतरने के दौरान उनसे मुलाकात की तस्वीरें शेयर कीं.

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