उपराष्ट्रपति ने दिग्गज पार्श्व गायिका एस. जानकी अम्मा के निधन पर शोक व्यक्त किया
भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने दिग्गज पार्श्व गायिका एस. जानकी अम्मा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
बिना किसी भेदभाव के लोगों की सेवा कर रही पीएम मोदी की सरकार: किरेन रिजिजू
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' की भावना से काम कर रही है, ताकि धर्म या समुदाय के आधार पर बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक नागरिक का विकास सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्यमंत्री योगी ने विपक्ष पर किया जोरदार प्रहार, बोले- रामभक्तों के खून से सना है सपा का इतिहास
Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की राजनीति पर जोरदार प्रहार करते हुए कहा कि जब भी मौका मिला, कांग्रेस और सपा ने भारतीय मानबिंदुओं पर कुठाराघात किया है। सपा का इतिहास रामभक्तों के खून से सना ...
बारुईपुर एनकाउंटर का जवाब दे सरकार, सौगत रॉय का सीएम सुवेंदु पर तीखा हमला
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बारुईपुर की घटना, स्वास्थ्य योजनाओं और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की बड़ी घोषणा, मध्यप्रदेश सरकार देगी डिजिटल कंटेंट क्रिएटर अवॉर्ड
Chief Minister Dr. Mohan Yadav : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 11 जुलाई को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 'मध्यप्रदेश युवा कॉन्क्लेव-2026' में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के साथ परस्पर संवाद किया। उन्होंने युवाओं के उत्थान और जनजागरूकता के ...
SIM Ejector Tool Hidden Uses: आज के दौर में जब भी हम कोई नया स्मार्टफोन खरीदते हैं, तो हमारा पूरा ध्यान उसके चमचमाते डिस्प्ले, बेहतरीन कैमरे, प्रोसेसर और फास्ट चार्जर पर होता है. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि फोन के खूबसूरत बॉक्स के अंदर एक बेहद छोटी, पतली और चमकीली मेटल की पिन भी छिपी होती है? इसे तकनीकी भाषा में 'सिम इजेक्टर टूल' (SIM Ejector Tool) कहा जाता है. ज्यादातर लोग इसका इस्तेमाल सिर्फ नया सिम कार्ड या मेमोरी कार्ड लगाने के लिए करते हैं और उसके बाद इसे वापस डिब्बे में फेंक देते हैं या कहीं खो देते हैं.लेकिन क्या आप जानते हैं कि मजबूत और टिकाऊ मेटल से बनी यह छोटी सी सुई जैसी पिन आपके कई बड़े और जरूरी कामों को चुटकियों में आसान बना सकती है? आइए जानते हैं सिम इजेक्टर पिन के 5 ऐसे कमाल के हैक्स और छिपे हुए इस्तेमाल (Hidden Uses), जो बहुत कम लोग जानते हैं.1. वाई-फाई (Wi-Fi) राउटर को करें चुटकियों में रीसेटअगर आपका घर या ऑफिस का वाई-फाई राउटर अचानक काम करना बंद कर दे, इंटरनेट की स्पीड बहुत स्लो हो जाए या बार-बार कनेक्शन टूटने की समस्या आए, तो यह पिन आपके लिए वरदान साबित हो सकती है.लगभग सभी कंपनियों के राउटर्स के पीछे एक बेहद बारीक और अंदर की तरफ धंसा हुआ 'रीसेट' (Reset) बटन होता है, जिसे सुरक्षा के लिहाज से उंगली से नहीं दबाया जा सकता.इस सिम पिन की नुकीली नोक को उस छेद में डालकर 10 सेकंड तक दबाकर रखने से आपका राउटर पूरी तरह से फैक्टरी सेटिंग्स पर रीसेट हो जाता है और इंटरनेट की समस्या ठीक हो जाती है.जरूरी बात: वाई-फाई राउटर को रीसेट करने से आपका पहले से सेव किया हुआ नेटवर्क नाम और पासवर्ड पूरी तरह हट जाएगा, जिसे आपको दोबारा सेट करना होगा.2. वायरलेस ईयरबड्स और चार्जिंग केस की कनेक्टिविटी समस्या होगी दूरआजकल ज्यादातर लोग ब्लूटूथ ईयरबड्स या नेकबैंड का इस्तेमाल करते हैं. कई बार ऐसा होता है कि एक ईयरबड काम नहीं करता या फोन से पेयर होने में दिक्कत आती है.इन वायरलेस ईयरबड्स और उनके चार्जिंग केस के भीतर या पीछे एक छोटा सा हिडन (छिपा हुआ) बटन दिया होता है.जब भी ईयरबड्स को फोन से कनेक्ट करने में परेशानी हो, तो आप इस सिम पिन की सहायता से उस बारीक बटन को दबाकर ईयरबड्स को रीसेट या दोबारा से फ्रेश पेयर (Pair) कर सकते हैं.3. अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को रीसेट करने का परफेक्ट टूलसिर्फ राउटर या ईयरबड्स ही नहीं, बल्कि कई ब्रांडेड टैबलेट्स, ब्लूटूथ स्पीकर्स, स्मार्ट वॉच, पोर्टेबल गैजेट्स और अन्य नेटवर्किंग डिवाइसेज में भी ऐसे छिपे हुए रीसेट बटन दिए जाते हैं. इन जगहों पर उंगली या पेन की नोक नहीं पहुंच पाती. ऐसे में यह सिम पिन एक परफेक्ट और सुरक्षित टूल का काम करती है जिससे गैजेट की बॉडी को कोई नुकसान नहीं पहुंचता.4. इमरजेंसी में कूरियर और पार्सल खोलने के लिए कटर का कामआजकल ऑनलाइन शॉपिंग का क्रेज बहुत बढ़ गया है और घर पर रोजाना कूरियर आते रहते हैं. अगर किसी वक्त आपके पास कटर, चाकू या कैंची उपलब्ध नहीं है और आपको कोई पार्सल या बॉक्स खोलना है, तो सिम इजेक्टर पिन का नुकीला हिस्सा बहुत काम आ सकता है. इसकी मजबूत नोक की सहायता से आप हैवी पैकेजिंग टेप, प्लास्टिक रैपिंग या किसी नई बोतल की सील को आसानी से काट या हटा सकते हैं. बस इसका उपयोग करते समय थोड़ा ध्यान रखें ताकि हाथ में चोट न लगे.5. छोटे-मोटे घरेलू काम और स्क्रूड्राइवर का विकल्पचूंकि यह पिन बहुत ही मजबूत मेटल से बनी होती है, इसलिए यह मुड़ती नहीं है. इमरजेंसी के समय यह आपके चश्मे या किसी छोटे खिलौने के बहुत बारीक स्क्रू (पेच) को कसने या ढीला करने के लिए मिनी-पेचकस का काम कर सकती है. इसके अलावा, किसी संकरी जगह में फंसी बेहद छोटी चीज को ऊपर उठाने या अपनी जगह से खिसकाने में भी यह काफी मददगार साबित होती है.इस छोटी सी पिन की गजब की उपयोगिता और इमरजेंसी जरूरतों को देखते हुए, कई समझदार लोग इसे अपने घर या गाड़ी की चाबियों के रिंग (Key Ring) में फंसाकर रखते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर यह तुरंत जेब से निकाली जा सके.
Deepika Padukone Second Pregnancy Update: बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) इन दिनों अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी (Second Pregnancy) के खूबसूरत लेकिन चुनौतीपूर्ण सफर का आनंद ले रही हैं. वह और उनके पति रणवीर सिंह (Ranveer Singh) जल्द ही अपने घर में एक और नन्हे मेहमान का स्वागत करने वाले हैं. भले ही दीपिका पिछले कुछ समय से बड़े पर्दे और लाइमलाइट से थोड़ी दूरी बनाए हुए हैं, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए वह अपने फैंस के साथ जुड़ी रहती हैं. हाल ही में उन्होंने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक ऐसी मजेदार और रिलेटेबल स्टोरी शेयर की है, जिसने हर होने वाली मां का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.बाथरूम जाने की चुनौती पर दीपिका ने शेयर किया मजेदार वीडियोप्रेग्नेंसी के आखिरी महीनों यानी थर्ड ट्राइमेस्टर (3rd Trimester) में महिलाओं को कई तरह की शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. दीपिका ने ठीक इसी स्थिति को बयां करती हुई एक रील (Video) अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर रीपोस्ट की. इस वीडियो में एक गर्भवती महिला रात के समय भारी शरीर के साथ बड़ी मुश्किल से धीरे-धीरे बाथरूम की तरफ कदम बढ़ाती नजर आ रही है.इस रील के कैप्शन में लिखा था— तीसरी तिमाही में रात को बार-बार बाथरूम जाने के लिए उठना. दीपिका ने इस वीडियो को एक उल्टे स्माइली इमोजी (Upside-Down Face Emoji) के साथ शेयर किया है, जिससे साफ पता चलता है कि वे खुद भी इन दिनों ठीक इसी स्थिति और थकावट से जूझ रही हैं.दीपिका का अपडेट देख फैंस ने बरसाया भरपूर प्यारदीपिका की यह स्टोरी सामने आते ही सोशल मीडिया पर उनके फैंस के रिएक्शन की बाढ़ आ गई. कई महिलाओं ने कमेंट कर कहा कि यह परेशानी लगभग हर होने वाली मां महसूस करती है.एक फैन ने लिखा, दुआ का छोटा भाई या बहन जल्द ही आने वाला है, आप बहुत मजबूत हैं दीपिका, आप यह कर सकती हैं.वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, काश मैं इस समय अपनी पसंदीदा एक्ट्रेस की कोई मदद कर पाती.ज्यादातर फैंस इस बात से खुश दिखे कि दीपिका ने काफी समय बाद अपनी प्रेग्नेंसी से जुड़ा कोई पर्सनल अपडेट साझा किया है.डेढ़ साल बाद ही दी दूसरी प्रेग्नेंसी की गुड न्यूज़दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की शादी के 5 साल बाद, साल 2024 में उनके घर पहली बेटी 'दुआ' (Dua) का जन्म हुआ था. दुआ के एक साल के होने पर कपल ने उसकी बेहद प्यारी तस्वीरें भी फैंस के साथ शेयर की थीं. बेटी के जन्म के करीब डेढ़ साल बाद ही, इस साल की शुरुआत में दीपिका-रणवीर ने एक बेहद अनोखे अंदाज में अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की खुशखबरी दी थी. उन्होंने एक फोटो शेयर की थी जिसमें उनकी नन्ही बेटी दुआ एक पॉजिटिव प्रेग्नेंसी टेस्ट किट पकड़े नजर आई थी.वर्कफ्रंट: मां बनने के बाद इन फिल्मों से करेंगी धमाकाप्रेग्नेंसी के इस फेज में होने के बावजूद दीपिका के पास बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के कई मेगा-बजट प्रोजेक्ट्स हैं, जो आने वाले समय में बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाने के लिए तैयार हैं:'किंग' (King): निर्देशक सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में बन रही यह मोस्ट अवेटेड फिल्म इसी साल 24 दिसंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. इस एक्शन-थ्रिलर फिल्म में दीपिका के साथ शाहरुख खान, सुहाना खान, अभिषेक बच्चन, जयदीप अहलावत, राघव जुयाल और अरशद वारसी जैसे दिग्गज कलाकार मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे.'राका' (Raka): इसके अलावा दीपिका साउथ के मशहूर डायरेक्टर एटली (Atlee) की आगामी फिल्म 'राका' में नजर आएंगी. इस फिल्म में वह पहली बार साउथ के सुपरस्टार अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) के साथ स्क्रीन शेयर करती दिखेंगी, जिसकी शूटिंग फिलहाल चल रही है.
Jammu Kashmir Politics: जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर हॉर्स-ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) का बेहद गंभीर आरोप लगाया है. शनिवार (11 जुलाई 2026) को एक जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम उमर अब्दुल्ला ने दावा किया कि भाजपा ने जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) के एक विधायक को पाला बदलने के लिए 20 से 30 करोड़ रुपये और कैबिनेट मंत्री पद का तगड़ा लालच दिया था.मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके विधायक ने इस बड़े ऑफर को तुरंत ठुकरा दिया और पूरी घटना की जानकारी सीधे उन्हें दी. इस खुलासे के बाद घाटी से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा चढ़ गया है.'सुप्रीम कोर्ट के वकील और बीजेपी नेता ने बंद कमरे में दिया ऑफर'उमर अब्दुल्ला ने बिना नाम लिए भाजपा के एक बड़े पदाधिकारी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, भाजपा के एक अधिकारी, जो सुप्रीम कोर्ट के वकील भी हैं, उन्होंने जम्मू क्षेत्र से आने वाले मेरे एक विधायक से बंद कमरे में मुलाकात की. उन्होंने विधायक से कहा कि तुम हमारे साथ आ जाओ, हम तुम्हें 20-30 करोड़ रुपये, एक मंत्रालय और राज्य का दर्जा देंगे.इस पर तीखा पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि क्या भाजपा को लगता है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं का ईमान और जनता का विश्वास इतना सस्ता है कि उसे पैसों से खरीदा जा सके?'पिछले दरवाजे से सत्ता में आने की कोशिश कर रही है BJP'उमर अब्दुल्ला ने भाजपा को सीधे चेतावनी देते हुए कहा कि वे नेशनल कॉन्फ्रेंस को कमजोर आंकने की भूल कतई न करें. उन्होंने कहा, भाजपा के लोगों, हमें इतना कमजोर मत समझो. आपके लिए पिछले दरवाजे (चोर दरवाजे) से सत्ता में एंट्री करना मुमकिन नहीं है. आप पिछले दरवाजे से आगे की कुर्सी (मुख्यमंत्री की कुर्सी) तक नहीं पहुंच पाएंगे. फिलहाल जम्मू-कश्मीर की जनता ने आपको विपक्ष में यानी पीछे बैठाया है और आप वहीं रहेंगे.अनुमति न मिलने पर भी 20 जुलाई को दिल्ली में होगा महा-प्रदर्शनजम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य (Full Statehood) का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस आगामी 20 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन करने जा रही है. मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस द्वारा इस प्रदर्शन की अनुमति अभी तक नहीं दी गई है.उमर अब्दुल्ला का संकल्प: अनुमति मिले या न मिले, हमारा 20 जुलाई का कार्यक्रम तय है और यह आगे बढ़ेगा. यह लड़ाई केवल नेशनल कॉन्फ्रेंस की नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर के हर नागरिक और हर राजनीतिक दल की है.उन्होंने घाटी के सभी वर्तमान व पूर्व विधायकों और सभी विपक्षी दलों के नेताओं से अपील की कि वे अगले तीन साल के लिए चुनावी रंजिशों और लड़ाइयों को भूल जाएं और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की इस साझा लड़ाई में एकजुट होकर दिल्ली आएं. उन्होंने कहा कि जो नेता डर या दबाव के कारण इस प्रदर्शन से दूर रहेंगे, वे जनता के साथ विश्वासघात करेंगे.'कॉकरोच पार्टी' को 24 घंटे में मिली इजाजत, हमें क्यों नहीं?दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति को लेकर आ रही दिक्कतों पर तंज कसते हुए सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा, एक 'कॉकरोच पार्टी' को दिल्ली में प्रदर्शन करने की अनुमति मिलने में 24 घंटे भी नहीं लगे, जबकि हम पिछले 4-5 दिनों से अनुमति की कोशिश कर रहे हैं. कुछ ताकतें जानबूझकर हमारे इस बड़े कार्यक्रम को बिगाड़ने की साजिश रच रही हैं और उन्होंने जानबूझकर अपनी तारीखें हमारे कार्यक्रम के साथ मिला दी हैं.आर्टिकल 370 हटने के बाद से जारी है राज्य के दर्जे की मांगगौरतलब है कि अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 (Article 370) को निरस्त कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में विभाजित कर दिया था. इसके बाद साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र के इस फैसले को संवैधानिक रूप से बरकरार रखा था. हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में भरोसा दिया था कि घाटी में स्थिति पूरी तरह सामान्य होने पर जम्मू-कश्मीर को दोबारा पूर्ण राज्य का दर्जा लौटा दिया जाएगा. नेशनल कॉन्फ्रेंस इसी वादे को पूरा कराने के लिए अब दिल्ली में हुंकार भरने की तैयारी में है.
Women Health Warning Signs : आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं परिवार, ऑफिस और घर की दोहरी जिम्मेदारियों को निभाते-निभाते अपनी सेहत का ख्याल रखना ही भूल जाती हैं. कई बार शरीर में दिखने वाले छोटे-मोटे बदलावों या हल्की तकलीफों को वे रोजमर्रा की थकावट समझकर नजरअंदाज कर देती हैं. लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स और डॉक्टरों ने सख्त चेतावनी दी है कि महिलाओं को अपने शरीर से मिलने वाले कुछ खास सिग्नल्स को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. हार्मोनल बदलाव, बढ़ता तनाव और खराब लाइफस्टाइल कई बार शुरुआत में मामूली दिखने वाले लक्षणों के जरिए किसी बड़ी और जानलेवा बीमारी की ओर इशारा कर रहे होते हैं.महिलाओं के लिए 5 सबसे बड़े 'वार्निंग साइन्स' (Warning Signs)1. लगातार गंभीर थकान और अचानक आई कमजोरीअगर आप बिना ज्यादा शारीरिक काम किए भी हर वक्त अत्यधिक थकान, सुस्ती या कमजोरी महसूस करती हैं, तो यह शरीर में पोषक तत्वों की भारी कमी का संकेत है.संभावित कारण: महिलाओं में यह समस्या मुख्य रूप से आयरन की कमी (एनीमिया), हार्मोनल असंतुलन या थायराइड की बीमारी के कारण होती है.स्ट्रोक का खतरा: विशेषज्ञों के अनुसार, अगर शरीर में अचानक से तेज कमजोरी महसूस हो, जुबान लड़खड़ाने लगे, चलने में दिक्कत आए या कंफ्यूजन हो, तो यह स्ट्रोक (Stroke) का शुरुआती लक्षण हो सकता है, जिसके लिए तुरंत इमरजेंसी मेडिकल हेल्प की जरूरत होती है.2. अनियमित पीरियड्स और हेवी ब्लीडिंगपीरियड्स का समय पर आना एक स्वस्थ महिला की सबसे बड़ी पहचान है. यदि आपके पीरियड्स का साइकिल अनियंत्रित हो गया है, बहुत ज्यादा या बहुत कम ब्लीडिंग हो रही है, तो इसे सामान्य समझने की भूल न करें.संभावित कारण: बार-बार पीरियड्स का अनियमित होना थायराइड, पीसीओडी (PCOD), पीसीओएस (PCOS) या गर्भाशय में फाइब्रॉएड (गांठ) होने का पुख्ता संकेत हो सकता है. इसके अलावा, संबंध बनाने (सेक्स) के दौरान होने वाले तेज दर्द को भी महिलाओं को गंभीरता से लेना चाहिए.3. बार-बार पेट फूलना (ब्लोटिंग) और पाचन की खराबीपीरियड्स आने से ठीक पहले थोड़ा गैसी महसूस होना एक सामान्य प्रक्रिया है. लेकिन अगर आपको बिना किसी वजह के रोजाना पेट में सूजन, भारीपन या गंभीर ब्लोटिंग बनी रहती है, तो यह खतरे की घंटी है.संभावित कारण: गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट और गायनेकोलॉजिस्ट के अनुसार, लगातार बनी रहने वाली ब्लोटिंग इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS), एंडोमेट्रियोसिस या बेहद खतरनाक ओवेरियन कैंसर (अंडाशय का कैंसर) का भी शुरुआती लक्षण हो सकती है.4. बिना किसी कारण के अचानक वजन का घटना या बढ़नायदि आप अपनी डाइट या एक्सरसाइज में कोई बदलाव नहीं कर रही हैं, फिर भी आपका वजन अचानक से तेजी से बढ़ रहा है या बहुत ज्यादा घट रहा है, तो समझ लें कि शरीर के अंदरूनी सिस्टम में कुछ गड़बड़ है.संभावित कारण: यह मुख्य रूप से मेटाबॉलिज्म की खराबी, गंभीर थायराइड की समस्या या गंभीर हार्मोनल असंतुलन के कारण होता है. खासकर 30 की उम्र पार करने के बाद वजन में आने वाले ऐसे अप्रत्याशित बदलावों पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.5. ब्रेस्ट साइज में बदलाव या असामान्य वजाइनल डिस्चार्जअपने शरीर की बनावट पर बारीकी से नजर रखना बेहद जरूरी है.स्तन में गांठ: ब्रेस्ट (स्तन) के साइज में अचानक कोई बदलाव दिखना या वहां किसी भी तरह की गांठ (Lump) महसूस होना फाइब्रोएडीनोमा जैसी साधारण स्थिति से लेकर ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) तक की वजह बन सकता है.असामान्य डिस्चार्ज: इसके अतिरिक्त, यदि वजाइनल डिस्चार्ज (योनि स्राव) में अत्यधिक बदबू हो, वह बहुत गाढ़ा हो या उसका रंग लाल, गुलाबी या मटमैला दिखाई दे, तो यह गंभीर यीस्ट इंफेक्शन या अन्य आंतरिक संक्रमण का लक्षण है, जिसके लिए तुरंत गायनेकोलॉजिस्ट से चेकअप कराना अनिवार्य है.कब और क्यों जरूरी है डॉक्टर से संपर्क करना?चिकित्सकों का कहना है कि 30 की उम्र पार करने के बाद महिलाओं का शरीर तेजी से बदलता है. ऐसे में अगर हड्डियों में लगातार दर्द रहे, त्वचा पर असामान्य चकत्ते या बदलाव दिखें या अत्यधिक थकान बनी रहे, तो तुरंत हेल्थ चेकअप कराएं. बीमारियां हमेशा अचानक नहीं आतीं, बल्कि वे शरीर में बहुत धीरे-धीरे पनपती हैं और शुरुआती लक्षणों को इग्नोर करने पर भविष्य में बड़ी मुसीबत बन जाती हैं. महिलाओं को अपनी सेहत को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए और साल में कम से कम एक बार रूटीन बॉडी चेकअप जरूर कराना चाहिए.
Yoga vs Gym for Heart Health: आज के इस आधुनिक और भागदौड़ भरे दौर में फिटनेस को लेकर अक्सर ‘योग बनाम जिम’ (Yoga vs Gym) की बहस छिड़ी रहती है. कोई जिम जाकर पसीना बहाने को बेहतर मानता है, तो कोई योग और प्राणायाम के जरिए खुद को फिट रखना पसंद करता है. लेकिन मेडिकल साइंस और हृदय रोग विशेषज्ञों (Cardiologists) के अनुसार, दोनों के अपने अलग-अलग फायदे हैं और दिल की सेहत (Heart Health) को हमेशा दुरुस्त रखने के लिए इन दोनों का सही संतुलन सबसे उत्तम माना जाता है. 'पाथकाइंड लैब्स' (Pathkind Labs) की एक रिपोर्ट में भी विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि योग और जिम दोनों ही हृदय प्रणाली को मजबूत बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं.जिम और योग: दोनों के कार्य और फायदे अलग हैंजिम (कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के लाभ):जिम में की जाने वाली एरोबिक एक्सरसाइज (जैसे ट्रेडमिल पर दौड़ना, रनिंग, साइकिल चलाना) और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (वजन उठाना) सीधे तौर पर हमारे दिल की मांसपेशियों को मजबूत बनाती हैं.यह शरीर में रक्त संचार (Blood Circulation) में तेजी से सुधार करता है.खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है.यह हृदय गति (Heart Rate) को एक सही स्तर पर बढ़ाने और शरीर की सहनशक्ति (Stamina) निर्माण के लिए सबसे बेहतरीन माध्यम है.योग (लचीलापन और मानसिक शांति के लाभ):जिम जहां शरीर को बाहर से मजबूत बनाता है, वहीं योग शरीर को अंदर से हील करता है.योग हमारे शरीर में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन यानी 'कोर्टिसोल' (Cortisol) के स्तर को तेजी से कम करता है.यह बढ़े हुए रक्तचाप (High Blood Pressure) को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने और मानसिक शांति प्रदान करने में बेजोड़ है.कार्डियोलॉजिस्ट्स का मानना है कि योग के सूक्ष्म व्यायाम, आसन और प्राणायाम उन लोगों या हृदय रोगियों के लिए अधिक सुरक्षित और प्रभावशाली होते हैं जो भारी वजन नहीं उठा सकते.हृदय विशेषज्ञों के 3 अचूक और मार्गदर्शक टिप्सयदि आपके पास रोजाना वर्कआउट करने का लंबा समय नहीं है, तो भी आप डॉक्टरों द्वारा बताए गए इन 3 आसान नियमों को अपनाकर अपने दिल को सुरक्षित रख सकते हैं:1. हमेशा सक्रिय रहें (Stay Active)अगर आपको किसी वजह से जिम जाने का समय नहीं मिल पा रहा है, तो अपनी दिनचर्या में छोटे बदलाव करें. जैसे—ऑफिस या मॉल में लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. हेल्थ रिसर्च के अनुसार, दिन में सिर्फ 5-10 मिनट सीढ़ियां चढ़ना भी हृदय रोग (Heart Attack/Stroke) के खतरे को 20% तक कम कर सकता है.2. तनाव प्रबंधन पर दें विशेष ध्यान (Stress Management)आज की व्यस्त और तनावपूर्ण जीवनशैली दिल की सबसे बड़ी दुश्मन बन चुकी है. अत्यधिक मानसिक तनाव से धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है. इससे बचने के लिए रोजाना सुबह या शाम को कम से कम 10-15 मिनट प्राणायाम, अनुलोम-विलोम या गहरी सांस लेने (Deep Breathing) का अभ्यास जरूर करें. यह धमनियों को स्वस्थ और लचीला रखता है.3. पर्याप्त नींद और सही हाइड्रेशन है जरूरीदिल को चौबीसों घंटे काम करना पड़ता है, इसलिए उसकी मरम्मत (Repairing) के लिए रात में 7-8 घंटे की गहरी और सुकून भरी नींद बेहद अनिवार्य है. इसके साथ ही, दिनभर में पर्याप्त पानी पीकर खुद को हाइड्रेटेड रखें. अपने भोजन में सोडियम (नमक) और रिफाइंड चीनी की मात्रा को जितना हो सके कम करें.निष्कर्ष (Final Verdict)भागदौड़ भरी जिंदगी में मुस्तैद रहने के लिए योग और जिम दोनों का अपना महत्व है. विशेषज्ञों की सलाह है कि सप्ताह में कम से कम 3 से 4 दिन 30 मिनट का मध्यम व्यायाम या कार्डियो करें और बाकी के दिन मानसिक शांति व स्ट्रेचिंग के लिए योग को दें. इसके अलावा, जिम में कभी भी दूसरों को देखकर अत्यधिक भारी वजन (Heavy Weights) न उठाएं, बल्कि उतना ही वजन उठाएं जितना आपका शरीर आसानी से और बिना किसी दर्द के सहन कर सके. सावधानी और निरंतरता ही एक स्वस्थ दिल की असली चाबी है.
महाराष्ट्र सरकार के ऋण माफी प्रतिबंधों में ढील देने से किसान एकता की जीत हुई: रोहित पवार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (एनसीपी-एसपी) के विधायक रोहित पवार ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर ऋण माफी योजना से जुड़ी प्रतिबंधात्मक शर्तों को समाप्त करने का निर्णय राज्य भर के किसानों, संगठनों और राजनीतिक नेताओं के सामूहिक संघर्ष की एक बड़ी जीत है।
Fatty Liver Grade 1 2 3 Symptoms: आज के समय में खराब लाइफस्टाइल और असंतुलित खानपान के कारण 'फैटी लिवर' (Fatty Liver) भारत में एक महामारी (Silent Epidemic) का रूप ले चुका है. अंतर्राष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, दुनियाभर में लगभग एक अरब लोग इससे प्रभावित हैं, जबकि भारत में यह दर 9% से लेकर 32% तक देखी गई है. इसे मेडिकल भाषा में गैर-शराबी लिवर रोग (MASLD/NAFLD) कहा जाता है, जो धीरे-धीरे बिना किसी बड़े शोर के लिवर को अंदर से खोखला करता है.मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और उच्च कोलेस्ट्रॉल से जूझ रहे लोगों के लिए फैटी लिवर के ग्रेड 1 से लेकर ग्रेड 3 तक की पूरी जानकारी होना बेहद जरूरी है, ताकि समय रहते इसका इलाज और इसे पूरी तरह रिवर्स (ठीक) किया जा सके.ग्रेड 1 फैटी लिवर: शुरुआती चरण और अक्सर लक्षणहीनफैटी लिवर ग्रेड 1 (या लाइट स्टेटोसिस) तब माना जाता है, जब लिवर की कुल कोशिकाओं के 5% से 33% हिस्से में वसा (Fats) जमा हो जाती है.मुख्य लक्षण: दिल्ली के प्रसिद्ध गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. नीरज धमीजा के अनुसार, इस शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते. जातक को केवल हल्की थकान, कमजोरी या पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में थोड़ा भारीपन महसूस हो सकता है, जिसे लोग अक्सर सामान्य गैस समझकर इग्नोर कर देते हैं.कारण और जांच: इसका मुख्य कारण मोटापा, अनियंत्रित ट्राइग्लिसराइड्स और खराब खानपान है. डॉक्टर एक साधारण पेट के अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) और लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) के जरिए इसका पता लगाते हैं.बचाव व इलाज: यह चरण पूरी तरह से रिवर्सिबल है. केवल जीवनशैली में सुधार करके, रिफाइंड चीनी और जंक फूड का त्याग कर और नियमित 30 मिनट व्यायाम करके इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है.ग्रेड 2 फैटी लिवर: मध्यम स्थिति और बढ़ता जोखिमजब लिवर के 34% से 66% हिस्से में वसा जमा हो जाती है, तो उसे ग्रेड 2 फैटी लिवर की श्रेणी में रखा जाता है. इस चरण में लिवर का सामान्य कामकाज प्रभावित होने लगता है.मुख्य लक्षण: डॉ. सौरभ सिंघल जैसे विशेषज्ञों के मुताबिक, इस स्टेज पर शरीर स्पष्ट चेतावनी देने लगता है. मरीज को भूख कम लगना, पेट में लगातार सूजन या ब्लोटिंग होना, अत्यधिक प्यास लगना और हर वक्त गंभीर थकावट बने रहने जैसे लक्षण महसूस होते हैं.कारण और जांच: लगातार लंबे समय तक बैठकर काम करने वाली सुस्त जीवनशैली, तला-भुना खाना और अनियंत्रित शुगर इसके मुख्य कारण हैं. इसकी गहराई नापने के लिए एलएफटी के साथ 'फाइब्रोस्कैन' (Fibroscan) या सीटी स्कैन कराया जाता है.बचाव व इलाज: इस चरण में डॉक्टर मरीज को अपने कुल वजन का 7 से 10% तक कम करने की सख्त सलाह देते हैं. यदि इस स्टेज पर लापरवाही बरती जाए, तो यह तेजी से ग्रेड 3 में बदल जाता है.ग्रेड 3 फैटी लिवर: गंभीर स्थिति और सिरोसिस का खतरायह फैटी लिवर की सबसे चरम और खतरनाक स्थिति है, जिसमें लिवर के 67% से भी अधिक हिस्से पर चर्बी की मोटी परत चढ़ जाती है.मुख्य लक्षण: डॉ. नीरज धमीजा चेतावनी देते हैं कि ग्रेड 3 में लिवर में गंभीर सूजन आ जाती है. इसके लक्षणों में पेट में तेज दर्द, अचानक वजन का तेजी से गिरना, बार-बार मतली (उल्टी) आना, हाथ-पैरों में सूजन (एडिमा) और आंखों व त्वचा का पीला होना (पीलिया/Jaundice) शामिल हैं.कारण और जांच: ग्रेड 1 और 2 के लक्षणों को लगातार नजरअंदाज करना, शराब का सेवन और अनियंत्रित डायबिटीज इसे खतरनाक स्तर पर ले जाते हैं. सटीक स्थिति जानने के लिए डॉक्टर लिवर बायोप्सी (Biopsy) की सलाह दे सकते हैं.बचाव व इलाज: इस स्टेज पर केवल डाइट और एक्सरसाइज काफी नहीं होती, बल्कि डॉक्टर की सख्त दवाओं की जरूरत पड़ती है. लिवर डैमेज होने की स्थिति में 'लिवर ट्रांसप्लांट' (Liver Transplant) ही एकमात्र विकल्प बचता है. इसलिए, समय पर रेगुलर चेकअप कराना ही इससे बचने का सबसे बेहतरीन उपाय है.
Lemon Water Benefits on Empty Stomach: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई अपनी सुबह की शुरुआत एक ऐसी आदत से करना चाहता है जो दिनभर शरीर को ऊर्जावान बनाए रखे. सुबह खाली पेट गुनगुना नींबू पानी (Lemon Water) पीना एक ऐसी ही साधारण लेकिन बेहद शक्तिशाली आदत है. नींबू विटामिन सी, शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स और सिट्रिक एसिड का खजाना है.न्यूट्रिशनिस्ट और आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित रूप से सही तरीके से नींबू पानी का सेवन वजन नियंत्रित करने से लेकर त्वचा में चमक लाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाने में रामबाण साबित हो सकता है. आइए डीप रिसर्च के आधार पर जानते हैं इसके फायदे, पीने का सही तरीका, समय और किन लोगों को इसके सेवन से बचना चाहिए.सुबह खाली पेट नींबू पानी पीने के 5 प्रमुख फायदे1. पाचन तंत्र (Digestion) को करे एक्टिवरात भर की लंबी नींद के बाद सुबह हमारा पेट पूरी तरह खाली होता है. नींबू में मौजूद सिट्रिक एसिड पेट के गैस्ट्रिक जूस और पित्त (Bile) के स्राव को बढ़ावा देता है. न्यूट्रिशनिस्ट दीप्ति खटूजा के अनुसार, यह पेट फूलने (ब्लोटिंग), गैस और हार्टबर्न (सीने की जलन) से तुरंत राहत दिलाता है और कब्ज की समस्या को जड़ से खत्म करता है.2. इम्यूनिटी को देता है 30% तक बूस्टनींबू विटामिन सी का सबसे बेहतरीन प्राकृतिक स्रोत है. विटामिन सी हमारे शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं (WBC) को मजबूत बनाता है, जो बीमारियों और संक्रमणों से लड़ती हैं. एक वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक, रोजाना सही मात्रा में विटामिन सी का सेवन करने से हमारा इम्यून सिस्टम 20 से 30 फीसदी बेहतर तरीके से काम करने लगता है, जिससे सर्दी-जुकाम और मौसमी बीमारियां दूर रहती हैं.3. त्वचा में लाता है कुदरती निखार (Glowing Skin)नींबू पानी में मौजूद विटामिन सी शरीर में 'कोलेजन' (Collagen) प्रोटीन के उत्पादन को बढ़ाता है. कोलेजन त्वचा का लचीलापन बनाए रखता है जिससे चेहरे की झुर्रियां कम होती हैं. इसके शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं, जिससे चेहरे के एक्ने, कील-मुंहासे और दाग-धब्बे धीरे-धीरे साफ हो जाते हैं.4. वजन प्रबंधन (Weight Loss) में मददगारजो लोग तेजी से वजन घटाना चाहते हैं, उनके लिए नींबू पानी एक बेहतरीन कैटलिस्ट है. यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को हल्का बूस्ट देता है. नींबू में मौजूद पेक्टिन फाइबर असमय लगने वाली भूख को नियंत्रित करता है. सुबह की दूध वाली भारी चाय या कॉफी की जगह नींबू पानी पीने से आपकी एक्स्ट्रा कैलोरी की खपत कम हो जाती है. हालांकि, शोध साफ कहते हैं कि नींबू पानी अकेला फैट बर्न नहीं करता; यह संतुलित डाइट और एक्सरसाइज के साथ मिलकर ही असर दिखाता है.5. बॉडी की नेचुरल क्लीनिंग (Detoxification)अक्सर माना जाता है कि नींबू पानी सीधे लिवर को साफ करता है, लेकिन आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि यह लिवर को सीधे डिटॉक्स नहीं करता. बल्कि, यह पाचन क्रिया को दुरुस्त करके शरीर की अपनी प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया (Natural Detoxification) की रफ्तार को तेज कर देता है.नींबू पानी तैयार करने का स्टेप-बाय-स्टेप सही तरीकानींबू पानी का पूरा फायदा तभी मिलता है जब उसे सही तरीके से बनाया और पिया जाए:पानी का तापमान: पानी को बहुत ज्यादा गर्म न करें, क्योंकि अत्यधिक तापमान से विटामिन सी नष्ट हो जाता है. पानी गुनगुना (लगभग 40-45 डिग्री सेल्सियस) होना चाहिए.मात्रा: एक गिलास (250-300 मिली) गुनगुने पानी में केवल आधा ताजा नींबू ही निचोड़ें. पैकेज्ड या प्रिजर्व्ड नींबू रस का इस्तेमाल बिल्कुल न करें.मीठे से परहेज: वजन घटाने और अच्छे स्वास्थ्य के लिए इसमें चीनी (Sugar) बिल्कुल न मिलाएं. स्वाद के लिए आप एक चम्मच शुद्ध शहद या अदरक का रस मिला सकते हैं. डायबिटीज के मरीज इसे बिना शहद के ही पिएं.दांतों की सुरक्षा (Most Important): नींबू का एसिड दांतों के इनेमल (Enamel) को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए नींबू पानी को हमेशा स्ट्रॉ (Straw) की मदद से पिएं और पीने के तुरंत बाद सादे पानी से अच्छी तरह कुल्ला कर लें.पीने का सबसे सटीक समय क्या है?सुबह सोकर उठने के बाद, ब्रश करने के बाद और नाश्ता (Breakfast) करने से 15-30 मिनट पहले का समय इसके सेवन के लिए सबसे सर्वोत्तम माना जाता है. इस समय खाली पेट होने के कारण शरीर इसके पोषक तत्वों को अधिकतम अवशोषित (Absorb) कर पाता है.किन्हें अपनाना चाहिए और किन्हें बरतनी चाहिए सावधानी?इनके लिए है वरदान: जो लोग अपना वजन घटाना चाहते हैं, जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है, जिन्हें बार-बार कब्ज रहता है या जो एथलीट्स/जिम जाने वाले लोग हैं, वे इसे नेचुरल एनर्जी बूस्टर के रूप में अपना सकते हैं. गर्भवती महिलाएं भी हाइड्रेशन के लिए डॉक्टर की सलाह से इसका सेवन कर सकती हैं.ये लोग भूलकर भी न पिएं (नुकसान): यदि आपको गंभीर एसिडिटी, अल्सर या जीईआरडी (GERD) की समस्या है, तो खाली पेट नींबू पानी पीने से बचें, क्योंकि यह पेट की जलन और एसिड को बढ़ा सकता है. इसके अलावा, जिन लोगों के दांत अत्यधिक सेंसिटिव हैं, जिन्हें माइग्रेन है या जोड़ों के दर्द (Joint Pain) की शिकायत रहती है, उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए. नींबू पानी की अत्यधिक मात्रा से शरीर में पोटैशियम का असंतुलन या मुंह में छाले भी हो सकते हैं.
Weakest Currencies in the World: जब हम किसी दूसरे देश की यात्रा करते हैं और अपनी करेंसी बदलवाते हैं, तो कभी-कभी नोटों का एक बड़ा बंडल देखकर हमें लगता है जैसे हम रातोंरात अमीर हो गए हों. लेकिन बाज़ार में जाकर जब हम खर्च करना शुरू करते हैं, तब पता चलता है कि उन नोटों की असली खरीदने की क्षमता (Buying Power) बेहद कम है. किसी भी देश की करेंसी की असली ताकत उसकी विनिमय दर (Exchange Rate) से तय होती है. जिन देशों में अत्यधिक महंगाई होती है, राजनीतिक बाज़ार अस्थिर होते हैं या आर्थिक विकास धीमा होता है, उनकी करेंसी वैश्विक स्तर पर कमजोर हो जाती है. आइए जानते हैं दुनिया की 6 सबसे कमजोर करेंसी और उनके इस हाल के पीछे के मुख्य कारणों के बारे में.1. लेबनानी पाउंड (Lebanese Pound) – राजनीतिक और आर्थिक संकटपिछले कुछ वर्षों में लेबनान की करेंसी (पाउंड) के मूल्य में ऐतिहासिक और बेहद डरावनी गिरावट दर्ज की गई है.कमजोरी के कारण: देश में लंबे समय से चला आ रहा गंभीर आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और बेलगाम महंगाई (हाइपरइन्फ्लेशन) इसकी मुख्य वजहें हैं.असर: इस गिरावट के कारण लेबनान के आम नागरिकों के लिए रोज़मर्रा का जरूरी सामान खरीदना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है. यहाँ आधिकारिक सरकारी दर और खुले बाज़ार की विनिमय दर में एक बहुत बड़ी खाई है, जिससे आर्थिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है.2. ईरानियन रियाल (Iranian Rial) – अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की मारईरान की मुद्रा 'ईरानियन रियाल' लंबे समय से दुनिया की सबसे कमजोर करेंसी की सूची में बनी हुई है और इसकी कीमत लगातार रसातल में जा रही है.कमजोरी के कारण: ईरान पर लगे सख्त अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध (International Sanctions), देश के भीतर बेकाबू महँगाई और विदेशी व्यापार में आई भारी कमी इसके तीन सबसे बड़े कारण हैं.असर: विदेशी पर्यटकों को अपनी मजबूत करेंसी के बदले यहाँ नोटों की गड्डियां मिल जाती हैं, लेकिन स्थानीय नागरिकों के लिए जीवनयापन बेहद कठिन हो चुका है क्योंकि उनकी कमाई की वास्तविक वैल्यू लगातार घट रही है.3. वियतनामी डोंग (Vietnamese Dong) – सरकारी नीति का परिणामवियतनामी डोंग (Dong) लंबे समय से वैश्विक स्तर पर सबसे कम वैल्यू वाली मुद्राओं में गिनी जाती है, लेकिन इसके पीछे की कहानी थोड़ी अलग और दिलचस्प है.कमजोरी के कारण: वियतनाम की अर्थव्यवस्था कमजोर नहीं है, बल्कि वहां की सरकार ने जानबूझकर अपनी मुद्रा की वैल्यू को कम रखने की नीति अपनाई है. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि वियतनाम का निर्यात (Export) वैश्विक बाजार में सस्ता और प्रतिस्पर्धी बना रहे.असर: मजबूत करेंसी लेकर वियतनाम जाने वाले यात्रियों को थोड़े से पैसे के बदले ढेर सारे डोंग मिल जाते हैं. यही वजह है कि वियतनाम आज दुनिया के सबसे किफायती और बजट-फ्रेंडली टूरिस्ट डेस्टिनेशंस में से एक है.4. लाओशियन किप (Laotian Kip) – भारी कर्ज का दबावदक्षिण-पूर्व एशिया का एक बेहद खूबसूरत और प्राकृतिक देश होने के बावजूद लाओस अपनी कमजोर मुद्रा के कारण आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है.कमजोरी के कारण: लाओस की करेंसी 'किप' (Kip) किसी बड़ी वैश्विक विदेशी मुद्रा से लिंक्ड नहीं है, जिससे इसमें भारी उतार-चढ़ाव आता है. देश पर बढ़ा विदेशी कर्ज, धीमी आर्थिक वृद्धि दर और एक्सपोर्ट का बेहद कम होना इसकी वैल्यू को लगातार गिरा रहा है.असर: यहाँ पर्यटकों को छोटी-मोटी खरीदारी करने के लिए भी नोटों के भारी-भरकम बंडल अपने साथ बैग में लेकर चलने पड़ते हैं.5. इंडोनेशियाई रुपिया (Indonesian Rupiah) – आयात पर अधिक निर्भरताइंडोनेशिया एक तेजी से उभरती हुई और बड़ी अर्थव्यवस्था है, इसके बावजूद वैश्विक विनिमय दर के मामले में 'इंडोनेशियाई रुपिया' (Rupiah) अभी भी काफी कमजोर पायदान पर है.कमजोरी के कारण: देश में रहने वाली लगातार महंगाई, कई महत्वपूर्ण चीजों के लिए दूसरे देशों से आयात (Import) पर अत्यधिक निर्भरता और वैश्विक बाज़ार की उठा-पटक इसके मुख्य कारण हैं. साथ ही, देश की विशाल आबादी और पूरी तरह विकसित न हो पाया बुनियादी ढाँचा भी इस पर आर्थिक दबाव डालता है.असर: पर्यटकों के लिए यहाँ घूमना बहुत सस्ता पड़ता है, लेकिन रुपिया की कम वैल्यू के कारण हर छोटे-बड़े लेन-देन में बहुत सारे शून्य (Zeros) वाले बड़े नोटों का इस्तेमाल करना पड़ता है.6. उज्बेक सोम (Uzbek Som) – पुराना आर्थिक दबावमध्य एशिया के देश उज्बेकिस्तान ने हाल के वर्षों में अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई बड़े और कड़े आर्थिक सुधार किए हैं, फिर भी उज्बेक 'सोम' (Som) दुनिया की सबसे कम वैल्यू वाली मुद्राओं में शामिल है.कमजोरी के कारण: देश पर पुराना आर्थिक दबाव, लंबे समय से चली आ रही आंतरिक महंगाई और कुछ ही चुनिंदा चीजों (जैसे कपास और सोना) के निर्यात पर देश की अत्यधिक निर्भरता इसकी सबसे बड़ी कमजोरी है. हालांकि कुछ सेक्टर्स में स्थिति सुधर रही है, लेकिन वैश्विक बाजार में सोम को मजबूत होने में अभी लंबा वक्त लगेगा.
सनातन संस्था की सद्गुरु अंजली गाडगीळ ने किए खोले के हनुमान जी में दर्शन
साधकों को मिला गुरुपूर्णिमा से पूर्व अमूल्य मार्गदर्शन जयपुर। सनातन संस्था की सद्गुरु श्रीचित्शक्ति अंजली गाडगीळ इन दिनों राजस्थान प्रवास पर हैं। इस दिव्य प्रवास के दौरान उन्होंने जयपुर के अत्यंत जागृत और प्रसिद्ध खोले के हनुमान जी मंदिर में जाकर दर्शन किए। इस अवसर पर उन्होंने प्रभु हनुमान जी के चरणों में हिंदू राष्ट्र […] The post सनातन संस्था की सद्गुरु अंजली गाडगीळ ने किए खोले के हनुमान जी में दर्शन appeared first on Sabguru News .
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी पंजाब कांग्रेस गुट और पार्टी के महासचिव भूपेश बघेल के बीच शनिवार को बहुप्रतीक्षित बैठक हुई।
Aadhaar Enabled Payment System : आज के डिजिटल दौर में ज्यादातर लोग ऑनलाइन और यूपीआई (UPI) पेमेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके बावजूद, रोजमर्रा के कई छोटे-मोटे कामों या आपातकालीन स्थिति में हमें कैश (नकद) की जरूरत पड़ ही जाती है. ऐसे समय में अगर आप अपना एटीएम या डेबिट कार्ड घर भूल गए हैं या आपके पास कार्ड नहीं है, तो बैंक से पैसे निकालना एक बड़ी सिरदर्द बन जाता है.लेकिन अब आपको बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) की एक विशेष तकनीक की मदद से अब आप सिर्फ अपने आधार कार्ड (Aadhaar Card) के जरिए बैंक खाते से सुरक्षित तरीके से कैश निकाल सकते हैं. आइए जानते हैं कि यह पूरी प्रणाली कैसे काम करती है और इसका लाभ आप कैसे उठा सकते हैं.क्या है AEPS सुविधा और कैसे करती है काम?NPCI ने बैंकिंग को ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक सुलभ बनाने के लिए आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AEPS) की शुरुआत की है. यह एक ऐसी सुरक्षित वित्तीय प्रणाली है, जिसके तहत आपको पैसे निकालने के लिए किसी भी सिग्नेचर, डेबिट कार्ड या पिन (PIN) की आवश्यकता नहीं होती.बायोमेट्रिक सुरक्षा: इस सिस्टम में पैसे का लेन-देन करने के लिए केवल आपके आधार नंबर और आपके फिंगरप्रिंट (अंगूठे या उंगली के निशान) का उपयोग किया जाता है.मिलती हैं ये 4 मुख्य सुविधाएं: AEPS के जरिए आप केवल कैश ही नहीं निकाल सकते, बल्कि बैंक खाते में पैसे जमा करना, अकाउंट का बैलेंस चेक करना और मिनी स्टेटमेंट (Mini Statement) निकालने जैसे जरूरी काम भी चुटकियों में कर सकते हैं.सबसे जरूरी शर्त: इस बैंकिंग सुविधा का लाभ आप केवल तभी उठा सकते हैं, जब आपका आधार कार्ड आपके संबंधित बैंक खाते (Bank Account) से पूरी तरह लिंक और एक्टिव हो.आधार कार्ड से कैश निकालने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रियायदि आप बिना एटीएम कार्ड के नकदी निकालना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए आसान चरणों का पालन करें:बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (BC) एजेंट से मिलें: सबसे पहले अपने नजदीकी किसी भी बैंक के अधिकृत बैंकिंग प्रतिनिधि यानी बीसी एजेंट (BC Agent) के पास जाएं. ये एजेंट आमतौर पर आपके पास की छोटी किराना दुकानों, ग्राहक सेवा केंद्रों (CSP) या बैंक की मिनी ब्रांच में माइक्रो-एटीएम मशीन के साथ मिल जाते हैं.आधार नंबर दर्ज कराएं: एजेंट को अपना 12 अंकों का आधार नंबर बताएं, जिसे वह अपनी स्वाइप या माइक्रो-एटीएम मशीन में फीड करेगा.बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन: अपनी पहचान को सुरक्षित तरीके से वेरिफाई करने के लिए मशीन से जुड़े फिंगरप्रिंट स्कैनर पर अपना अंगूठा या उंगली रखें.सर्विस का चयन करें: मशीन की स्क्रीन पर दिए गए विकल्पों में से 'कैश विड्रॉल' (Cash Withdrawal) का चुनाव करें.राशि भरें: आपको अपने खाते से जितनी नकदी निकालनी है, वह राशि (Amount) वहां दर्ज करें.कैश प्राप्त करें: जैसे ही आपका फिंगरप्रिंट बैंक के सर्वर से वेरिफाई हो जाएगा, ट्रांजेक्शन सफल हो जाएगा और एजेंट आपको आपका कैश सौंप देगा. इसके तुरंत बाद आपके बैंक खाते से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर पैसे कटने का पुष्टिकरण एसएमएस (SMS) भी आ जाएगा.
Ganga Expressway Industrial Corridor Meerut: उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजना 'गंगा एक्सप्रेसवे' (Ganga Expressway) के किनारे औद्योगिक गलियारा (Industrial Corridor) विकसित करने की योजना जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) के पेंच में फंसती नजर आ रही है. उत्तर प्रदेश सरकार और यूपीडा (UPIEDA) के सख्त आदेशों के बावजूद, मेरठ जिला प्रशासन के लिए परियोजना के लिए पर्याप्त जमीन जुटाना एक बड़ी और सिरदर्द चुनौती बन चुका है. किसानों के भारी विरोध और धरना प्रदर्शन के कारण एक्सप्रेसवे के इस बड़े प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी पड़ गई है.पहले चरण में 214 हेक्टेयर की जरूरत, प्रशासन के हाथ लगी केवल 159 हेक्टेयरमेरठ के विकास को नई ऊंचाई देने के लिए गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे पहले चरण के तहत औद्योगिक गलियारा बनाने के लिए 214 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है. इस जमीन को खरीदने की प्रक्रिया एक साल से भी अधिक समय से चल रही है, लेकिन पिछले कई महीनों से यह काम लगभग ठप पड़ा था.अधिग्रहण का गणित: शुरुआत में किसानों से कुल 203 हेक्टेयर जमीन खरीदी जानी थी, जिसमें से 143 हेक्टेयर की रजिस्ट्री (बैनामा) होने के बाद काम अचानक रुक गया.सरकारी जमीन की किल्लत: इसके अलावा, कॉरिडोर के लिए चिन्हित 11 हेक्टेयर सरकारी जमीन में से भी प्रशासन को अब तक केवल 7 हेक्टेयर जमीन ही हस्तांतरित हो पाई है.DM की बैठक के बाद एक्शन में प्रशासन, एक दिन में हुए 9 बैनामेजमीन अधिग्रहण के गतिरोध को तोड़ने के लिए हाल ही में मेरठ के जिलाधिकारी (DM) ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की थी. इस बैठक में मिले कड़े निर्देशों के बाद सोमवार को तहसील प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की. प्रशासन ने एक ही दिन में 17 किसानों से 9 अलग-अलग बैनामों के माध्यम से 9 हेक्टेयर जमीन का सफलतापूर्वक अधिग्रहण कर लिया. इस नई खरीद के बाद अब प्रशासन के पास कुल उपलब्ध जमीन का आंकड़ा बढ़कर 159 हेक्टेयर तक पहुंच गया है, लेकिन लक्ष्य (214 हेक्टेयर) से यह अब भी काफी दूर है.दूसरे चरण के लिए साढ़े नौ महीने से धरने पर बैठे हैं किसानपहले चरण की मुश्किलों के बीच, औद्योगिक गलियारे के दूसरे चरण (Phase 2) का रास्ता और भी ज्यादा कांटों भरा नजर आ रहा है.300 हेक्टेयर का पेंच: दूसरे चरण के विकास के लिए तीन प्रमुख गांवों से कुल 300 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है.आर-पार की लड़ाई: इन गांवों के किसान किसी भी कीमत पर अपनी उपजाऊ जमीन सरकार को देने के लिए तैयार नहीं हैं. अपनी जमीनों को बचाने और उचित मुआवजे व अन्य मांगों को लेकर किसान पिछले साढ़े नौ महीने से लगातार धरना प्रदर्शन और विरोध कर रहे हैं, जिससे यूपीडा की मुश्किलें बढ़ गई हैं.यूपी के 12 जिलों में 1500 हेक्टेयर में बनेंगे गलियारेगौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार की योजना गंगा एक्सप्रेसवे के रूट पर आने वाले मेरठ समेत कुल 12 जिलों में लगभग 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridors) स्थापित करने की है. सरकार का मकसद एक्सप्रेसवे के किनारे लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस और मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है ताकि स्थानीय स्तर पर लाखों युवाओं को रोजगार मिल सके और सूबे की अर्थव्यवस्था को रफ्तार दी जा सके. लेकिन मेरठ में चल रहा यह भूमि विवाद सरकार की समयसीमा के आड़े आ रहा है.
आज के समय में हर युवा चाहता है कि वह अपनी पढ़ाई जल्द से जल्द पूरी करके कमाई करना शुरू कर दे. बहुत से लोगों के मन में यह गलतफहमी होती है कि एक अच्छी और हाई-पेइंग नौकरी पाने के लिए सालों-साल लंबी डिग्रियां (Degrees) लेना जरूरी है. लेकिन आज के डिजिटल और स्किल-बेस्ड (कौशल आधारित) दौर में सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है.12वीं के बाद कुछ ऐसे बेहतरीन शॉर्ट-टर्म कोर्सेज मौजूद हैं, जिन्हें करने के बाद आप बिना किसी बड़ी डिग्री के एक शानदार कॉर्पोरेट नौकरी पा सकते हैं या खुद का बिजनेस शुरू कर सकते हैं. आइए विस्तार से जानते हैं इन 5 सबसे बेहतरीन और ज्यादा कमाई कराने वाले कोर्सेज के बारे में.1. डिजिटल मार्केटिंग (Digital Marketing) – घर बैठे फ्रीलांसिंग का मौकाआजकल चाहे छोटी दुकान हो या बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी, हर कोई इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए अपने ग्राहकों तक पहुंचना चाहता है. यही वजह है कि डिजिटल मार्केटिंग की मांग बाजार में सबसे ज्यादा है.कोर्स में क्या सीखते हैं: इस कोर्स में आपको सोशल मीडिया मार्केटिंग (Facebook, Instagram, LinkedIn), सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO), गूगल एड्स और कंटेंट मार्केटिंग की बारीकियां सिखाई जाती हैं.अवधि: यह कोर्स मात्र 3 से 6 महीने में पूरा हो जाता है.कमाई और स्कोप: शुरुआत में ही आप ₹3 से ₹6 लाख तक का सालाना पैकेज आसानी से पा सकते हैं. अनुभव बढ़ने के साथ आप सोशल मीडिया मैनेजर या एसईओ विशेषज्ञ (SEO Expert) के रूप में मोटी सैलरी ले सकते हैं. इसमें सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप घर बैठे दुनिया भर के क्लाइंट्स के लिए फ्रीलांसिंग भी कर सकते हैं.2. वेब डेवलपमेंट और कोडिंग (Web Development & Coding)इंटरनेट के इस दौर में हर बिजनेस की अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप है. ऐसे में वेबसाइट बनाने और उसे मेंटेन करने वाले डेवलपर्स की मांग दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है.कोर्स में क्या सीखते हैं: इस स्किल को आप 6 महीने से 1 साल के भीतर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स (जैसे Udemy, Coursera या FreeCodeCamp) से सीख सकते हैं. इसमें आपको HTML, CSS, JavaScript और विभिन्न प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सिखाई जाती हैं.कमाई और स्कोप: कोर्स के बाद आप फ्रंटएंड, बैकएंड या फुल-स्टैक डेवलपर बन सकते हैं. शुरुआती स्तर पर आपकी सालाना कमाई ₹4 से ₹8 लाख तक हो सकती है. टेक स्टार्टअप्स और आईटी कंपनियों में इन प्रोफेशनल्स की भारी डिमांड है.3. आईटीआई कोर्सेज (ITI Courses) – सरकारी और टेक्निकल फील्ड में एंट्रीयदि आपकी रुचि तकनीकी कार्यों (Technical Work) में है और आप कम खर्चे में व्यावहारिक ज्ञान (Practical Knowledge) हासिल करना चाहते हैं, तो इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI) के कोर्सेज आपके लिए सबसे बेस्ट हैं.कोर्स में क्या सीखते हैं: इसमें इलेक्ट्रिशियन, वेल्डर, फिटर, मोटर मैकेनिक और कंप्यूटर ऑपरेटर जैसे कई ट्रेड्स में ट्रेनिंग दी जाती है.अवधि: इन कोर्सेज की अवधि 6 महीने से लेकर 2 साल तक होती है.कमाई और स्कोप: आईटीआई पास करने के बाद आप सालाना ₹2 से ₹5 लाख तक कमा सकते हैं. भारतीय रेलवे, बिजली बोर्ड, रक्षा क्षेत्र और बड़े कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में आईटीआई युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों के ढेरों अवसर होते हैं. साथ ही, सरकार द्वारा अप्रेंटिसशिप के तहत ट्रेनिंग के दौरान स्टाइपेंड (वेतन) भी दिया जाता है.4. कमर्शियल पायलट ट्रेनिंग (Commercial Pilot Training) – आसमान छूने का सपनाअगर आपका सपना आसमान में उड़ने का है और आप एक एडवेंचरस और बेहद सम्मानजनक करियर चाहते हैं, तो 12वीं (साइंस स्ट्रीम) के बाद कमर्शियल पायलट की ट्रेनिंग ले सकते हैं.कोर्स का प्रारूप: यह कोर्स थोड़ा महंगा और लंबा होता है, जिसके लिए आपको सख्त मेडिकल और फिजिकल टेस्ट पास करने होते हैं.अवधि: इसकी ट्रेनिंग 18 से 24 महीने (लगभग 2 साल) की होती है.कमाई और स्कोप: ट्रेनिंग पूरी होने के बाद आप विभिन्न एयरलाइंस में कमर्शियल पायलट या फ्लाइट इंस्ट्रक्टर बन सकते हैं. इस फील्ड में शुरुआती सैलरी ही ₹12 से ₹25 लाख सालाना तक होती है. हालांकि इसमें शुरुआती निवेश ज्यादा है, लेकिन इसके बाद का करियर और लाइफस्टाइल बेहद शानदार होता है.5. ग्राफिक डिजाइनिंग और UI/UX डिजाइन – क्रिएटिव लोगों की पहली पसंदअगर आप स्वभाव से रचनात्मक (Creative) हैं, आपको रंगों, आकृतियों और विजुअल्स के साथ खेलना पसंद है, तो ग्राफिक डिजाइनिंग और यूजर इंटरफेस (UI/UX) डिजाइनिंग आपके लिए एक परफेक्ट करियर है.कोर्स में क्या सीखते हैं: 6 महीने से 1 साल के इस कोर्स में आपको Photoshop, Illustrator और Figma जैसे एडवांस सॉफ्टवेयर चलाना सिखाया जाता है, जिससे आप वेबसाइट, ऐप्स, बैनर और लोगो डिजाइन कर सकें.कमाई और स्कोप: कोर्स पूरा करने के बाद आप किसी भी मीडिया हाउस, एड एजेंसी या आईटी कंपनी में ₹3 से ₹7 लाख सालाना के शुरुआती पैकेज पर काम शुरू कर सकते हैं. इस फील्ड में भी रिमोट वर्क (Work from Home) और फ्रीलांसिंग की अपार संभावनाएं मौजूद हैं.
वियतनाम में नौका डूबने से 15 भारतीय पर्यटकों की मौत, 21 को सुरक्षित बचा लिया गया
हनोई। वियतनाम में भारतीय पर्यटकों से भरी एक नौका के शनिवार को समुद्र में पलट जाने से 15 भारतीयों की मौत हो गई जबकि 17 भारतीयों और चालक दल के चार वियतनामी सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। स्थानीय मीडिया के अनुसार ओशन पर्ल आइलैंड कंपनी की एक चलने वाली मोटर नौका स्थानीय समयानुसार दोपहर […] The post वियतनाम में नौका डूबने से 15 भारतीय पर्यटकों की मौत, 21 को सुरक्षित बचा लिया गया appeared first on Sabguru News .
अलवर : पेट्रोल के पैसे मांगे तो सेल्समैन को मारी गोली, आरोपी अरेस्ट
अलवर। राजस्थान में अलवर के सदर थाना क्षेत्र स्थित बुर्जा के नायरा पेट्रोल पंप पर शनिवार को दिनदहाड़े हुई गोलीबारी की घटना से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार महज 800 रुपए के पेट्रोल के भुगतान को लेकर हुए विवाद में मोटर साइकिल पर सवार एक नकाबपोश बदमाश ने पेट्रोल पंप […] The post अलवर : पेट्रोल के पैसे मांगे तो सेल्समैन को मारी गोली, आरोपी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
भजनलाल शर्मा ने केकड़ी में करीब 880 करोड़ रुपए के कार्यों का किया शिलान्यास-लोकार्पण
अजमेर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने और अगली पीढ़ी के लिए मजबूत बुनियादी ढांचे के निर्माण को लेकर प्रतिबद्धता जताते हुए कहा है कि हमारी ‘डबल इंजन’ सरकार धरातल पर काम कर आमजन के जीवन को सुगम बना रही है। शर्मा शनिवार को […] The post भजनलाल शर्मा ने केकड़ी में करीब 880 करोड़ रुपए के कार्यों का किया शिलान्यास-लोकार्पण appeared first on Sabguru News .
कानपुर के एक होटल के कमरे में युगल ने की आत्महत्या
कानपुर। उत्तर प्रदेश में कानपुर के कलेक्टरगंज क्षेत्र में एक प्रेमी युगल ने शनिवार को जहरीले पदार्थ का सेवन का अपनी इहलीला समाप्त कर ली। सहायक पुलिस आयुक्त आनंद कुमार ओझा ने पत्रकारों को बताया कि पुलिस को आज शाम करीब साढ़े चार बजे सूचना मिली कि कलेक्टरगंज क्षेत्र स्थित एक होटल के कमरे में […] The post कानपुर के एक होटल के कमरे में युगल ने की आत्महत्या appeared first on Sabguru News .
अलवर में सूने मकान से लाखों रुपए के आभूषण और नकदी चोरी
अलवर। राजस्थान में अलवर के कोतवाली थाना क्षेत्र में सबसे पॉश कॉलोनियों में शुमार स्कीम नंबर-1 में दिनदहाड़े एक सूने मकान को चोरों ने निशाना बनाकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार मकान मालिक रवि अग्रवाल अपने परिवार के साथ चार जुलाई को जयपुर स्थित अपनी बेटी के घर गये हुए […] The post अलवर में सूने मकान से लाखों रुपए के आभूषण और नकदी चोरी appeared first on Sabguru News .
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में बारिश का कहर देखने को मिल रहा है। पिथौरागढ़ में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनपद के सीमांत क्षेत्रों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। मुनस्यारी के मल्ला जोहार क्षेत्र में बिल्जू नदी के उफान पर आने से मिलम जाने वाला मुख्य सड़क मार्ग बंद हो गया है, जिससे क्षेत्र के करीब 80 से 90 परिवारों का संपर्क प्रभावित हो गया है।
Ayodhya Ram Mandir Conflict: अयोध्या राम मंदिर निर्माण और ट्रस्ट के आंतरिक तालमेल को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा दो दिवसीय दौरे पर अयोध्या पहुंचे। जब मीडिया ने उनसे आगामी 22 जुलाई को ...
शहर में संचालित कोचिंग सेंटरों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए शनिवार से विशेष जांच अभियान शुरू कर दिया। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम ने अल्फा कमर्शियल बेल्ट स्थित ओम टावर में संचालित 11 कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण कर वहां लगाए गए अग्निशमन उपकरणों और सुरक्षा इंतजामों की बारीकी से जांच की।
गांव के होनहारों को अफसर बनाने के लिए योगी सरकार का मेगा प्लान
UP High Tech Digital Library Scheme: ग्रामीण युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर भारतीय प्रशासनिक सेवा, प्रांतीय सिविल सेवा और अन्य सरकारी नौकरियों की तैयारी के लिए गांवों में ही आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।
जनसेवा सर्वोपरि, प्रतिकूल मौसम में भी CM योगी ने किया जनता दर्शन
CM Yogi Janta Darshan Gorakhpur: ‘जनसेवा सर्वोपरि’ के ध्येय से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार सुबह मौसम प्रतिकूल होने के बावजूद जन समस्याओं के निस्तारण के निस्तारण के लिए ‘जनता दर्शन’ किया। बारिश में दूरदराज से आए लोगों से उन्होंने गोरखनाथ ...
JioFinance से अब सिर्फ 24 रुपए से भरें ITR, साथ में मिलेगा JioPoints का फायदा
Income Tax Return Filing Service : टैक्स फाइलिंग सीजन के बीच जियोफाइनेंस (JioFinance) ने अपने ग्राहकों के लिए टैक्स प्लानिंग और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग सेवा दोबारा शुरू कर दी है। इस बार कंपनी ने टैक्स फाइलिंग को और किफायती बनाने के साथ-साथ ...
मध्यप्रदेश की सरकार युवाओं के भविष्य के लिए, आने वाले कल के लिए, युवाओं के सपनों के लिए हर मदद के लिए तैयार है। भारत दुनिया का सबसे युवा देश और मध्यप्रदेश सबसे युवा प्रदेश है। युवा शक्ति अवसरों का लाभ उठाए। प्रदेश सरकार युवा शक्ति को आगे बढ़ाने के ...
बालिका सुरक्षा को लेकर अखिल भारतीय कोली समाज की महिला विंग ने किया मंथन
अभिभावकों से सजग रहने और बच्चियों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनने की अपील कोटा। अखिल भारतीय कोली समाज रजिस्टर नई दिल्ली की कोटा महिला विंग की बैठक शुक्रवार शाम टीचर्स कॉलोनी स्थित कोटा जिला अध्यक्ष निर्मला वर्मा के निवास पर आयोजित हुई। बैठक में महिला एवं बालिका सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से […] The post बालिका सुरक्षा को लेकर अखिल भारतीय कोली समाज की महिला विंग ने किया मंथन appeared first on Sabguru News .
मोजतबा ने कसम खाई, 'दुश्मनों' से बदला लेंगे, ट्रंप बोले- ईरान को मिटाने के लिए 1000 मिसाइलें तैयार
Middle East tensions: मिडिल ईस्ट बारूद के ढेर पर बैठ चुका है और कभी भी महाविनाश का बटन दब सकता है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता और पूर्व सुप्रीमो अली खामेनेई के जनाजे पर पूरी दुनिया के सामने इजराइल और अमेरिका को तबाह ...
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी अपने एक विवादित बयान को लेकर घिर गए हैं। महिलाओं की शादी की उम्र को लेकर दिए गए उनके बयान पर देशभर में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। महिला आयोग, भाजपा और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) समेत कई लोगों ने उनके बयान की कड़ी आलोचना की है।
आईएनएस महेंद्रगिरि के लोकार्पण पर राजनाथ सिंह ने कहा, भारतीय नौसेना देश की अर्थव्यवस्था की भी प्रहरी
आईएनएस महेंद्रगिरि के कमीशनिंग समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना केवल सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि देश की आर्थिक सुरक्षा की भी सशक्त प्रहरी बन चुकी है।
क्या कैलाश विजयवर्गीय को पता था, नरोत्तम मिश्रा का दतिया से टिकट कटेगा?
दतिया उपचुनाव में भाजपा के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद अब मध्यप्रदेश भाजपा के अंदरूनी सियासत गर्मा गई है। उपचुनाव में दतिया से अपनी उम्मीदवारी तक मानकर चल रहे है नरोत्तम मिश्रा जहां पूरी ताकत से चुनाव प्रचार में जुटे थे, वहीं ...
अयोध्या के भव्य श्री राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान की कथित चोरी का मामला इन दिनों देश भर में गरमाया हुआ है. इस सुरक्षा और प्रशासनिक चूक के बाद मंदिर ट्रस्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. राम मंदिर के संपूर्ण प्रबंधकीय, वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज को संभालने के लिए अगले हफ्ते से एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू होने जा रही है. इसके लिए गठित 3 सदस्यीय विशेष समिति अगले 2-3 दिनों के भीतर एक महत्वपूर्ण बैठक करने वाली है.नियुक्ति के लिए बनी 3 सदस्यीय समिति में शामिल हैं ये दिग्गजराम मंदिर के नए सीईओ के चयन की जिम्मेदारी देश की तीन जानी-मानी और प्रतिष्ठित हस्तियों को सौंपी गई है:जस्टिस प्रमोद कोहली (रिटायर्ड जज)लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी (रिटायर्ड सैन्य अधिकारी)डॉ. सुरेश काशीनाथ हावरे (प्रसिद्ध न्यूक्लियर साइंटिस्ट)यह समिति जल्द ही बैठक कर आवेदन की शर्तों और नियमों को अंतिम रूप देगी. समिति के सदस्य और परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावरे ने स्पष्ट किया है कि समिति का काम सिर्फ योग्य उम्मीदवारों का इंटरव्यू लेकर एक फाइनल पैनल (सूची) तैयार करना है. सीईओ के नाम पर अंतिम मुहर लगाने का विशेषाधिकार मंदिर ट्रस्ट के महासचिव (General Secretary) के पास ही होगा.सीईओ पद के लिए क्या होंगी अनिवार्य योग्यताएं?डॉ. सुरेश हावरे के मुताबिक, इस बेहद जिम्मेदारी भरे पद के लिए वर्किंग (कार्यरत) या रिटायर्ड (सेवानिवृत्त) कोई भी योग्य व्यक्ति आवेदन कर सकता है. उम्मीदवारों के चयन में निम्नलिखित तीन मुख्य कसौटियों का विशेष ध्यान रखा जाएगा:धर्म और अध्यात्म के प्रति निष्ठा: उम्मीदवार की सनातन धर्म, संस्कृति और अध्यात्म के प्रति गहरी रुचि और सकारात्मक दृष्टिकोण होना अनिवार्य है.प्रबंधन और वित्तीय अनुभव: उम्मीदवार के पास बड़े संस्थानों को चलाने का प्रशासनिक, प्रबंधकीय और मजबूत वित्तीय (Financial) अनुभव होना चाहिए.मंदिर प्रबंधन का अनुभव: यदि किसी उम्मीदवार के पास पहले से किसी बड़े और प्रसिद्ध मंदिर या तीर्थ क्षेत्र की व्यवस्था संभालने का अनुभव है, तो उसे प्राथमिकता दी जा सकती है.क्या होंगी सुविधाएं, सैलरी और कार्यक्षेत्र?अयोध्या में रहना होगा अनिवार्य: नियुक्त होने वाले सीईओ का मुख्य कार्यक्षेत्र संपूर्ण राम मंदिर परिसर होगा और उन्हें स्थाई रूप से अयोध्या में ही निवास करना होगा.मिलेगी लग्जरी लाइफ: मंदिर ट्रस्ट की ओर से सीईओ को आकर्षक वेतन (सैलरी) के साथ-साथ रहने के लिए आलीशान मकान और आवागमन के लिए आधिकारिक गाड़ी (वाहन) जैसी सभी वीआईपी सुविधाएं दी जाएंगी.रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर: सीईओ सीधे तौर पर राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव को रिपोर्ट करेंगे और उनके अधीन रहकर ही सारे फैसले लागू करेंगे.परमाणु वैज्ञानिक से 'टेम्पल मैनेजमेंट' गुरु बने डॉ. सुरेश हावरेसीईओ चयन समिति के मुख्य सदस्य डॉ. सुरेश काशीनाथ हावरे देश की एक जानी-मानी शख्सियत हैं. वह एक रिटायर्ड परमाणु वैज्ञानिक (Nuclear Scientist) हैं, जिन्होंने देश के परमाणु ऊर्जा विभाग में पूरे 27 साल तक अपनी सेवाएं दी हैं. विज्ञान के साथ-साथ उन्हें देश के बड़े मंदिरों के प्रबंधन का भी लंबा और व्यावहारिक अनुभव है. डॉ. हावरे शिरडी के सुप्रसिद्ध 'श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट' के प्रमुख रह चुके हैं. वर्तमान में वह रायपुर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) के अध्यक्ष और 'श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड' के सम्मानीय सदस्य भी हैं. खास बात यह है कि उन्होंने मंदिर प्रबंधन को आधुनिक ढर्रे पर लाने के लिए ‘टेम्पल मैनेजमेंट’ नामक एक बेहद चर्चित पुस्तक भी लिखी है.
सुबह का नाश्ता हमारे दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन माना जाता है. एक पौष्टिक और संतुलित ब्रेकफास्ट न केवल हमारे मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखता है, बल्कि शरीर को दिनभर एक्टिव रहने के लिए जरूरी ऊर्जा (Energy) भी प्रदान करता है. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर ऐसे नाश्ते के विकल्प तलाशते हैं जो सेहतमंद होने के साथ-साथ मिंटों में तैयार हो जाएं. 'सूजी' (Semolina) रसोई में मौजूद एक ऐसी ही बेहतरीन सामग्री है, जिससे बेहद कम समय में कई तरह के स्वादिष्ट और पौष्टिक व्यंजन बनाए जा सकते हैं.पोषक तत्वों से भरपूर है सूजीसूजी में मुख्य रूप से कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है, जो शरीर को धीरे-धीरे और लंबे समय तक एनर्जी देता है. इसके अलावा इसमें सीमित मात्रा में प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम, फोलेट और विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स जैसे जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स भी मौजूद होते हैं. अगर सूजी को सही तरीके से सब्जियों और दही के साथ मिलाकर पकाया जाए, तो यह एक कम्पलीट और परफेक्ट वेट-लॉस डाइट का हिस्सा बन सकती है.सूजी से बनने वाले 5 झटपट और टेस्टी ब्रेकफास्ट विकल्प1. वेजी सूजी उपमा (Suji Upma)उपमा दक्षिण भारत का एक पारंपरिक और बेहद हल्का नाश्ता है.बनाने का तरीका: सबसे पहले सूजी को सूखा (बिना तेल के) हल्का भून लें. अब एक पैन में आधा चम्मच तेल गरम करके राई, करी पत्ता, हरी मिर्च, बारीक कटा प्याज और अपनी पसंदीदा सब्जियां (जैसे मटर, गाजर, बीन्स) भूनें. इसके बाद पानी और भुनी हुई सूजी डालकर गाढ़ा होने तक पकाएं.फायदा: यह फाइबर, विटामिन्स और कार्बोहाइड्रेट का एक बेहतरीन कॉम्बिनेशन है, जो लंबे समय तक आपके पेट को भरा रखता है और असमय होने वाली फूड क्रेविंग को रोकता है.2. इंस्टेंट सूजी चीला (Suji Cheela)यदि आप सुबह के वक्त रोटी-सब्जी बनाने के झंझट से बचना चाहते हैं, तो सूजी का चीला सबसे बेस्ट ऑप्शन है.बनाने का तरीका: सूजी में ताजा दही, थोड़ा सा पानी, कद्दूकस की हुई गाजर, बारीक कटी शिमला मिर्च, प्याज, हरा धनिया और स्वादानुसार नमक मिलाकर एक गाढ़ा बैटर (घोल) तैयार करें. इसे नॉन-स्टिक तवे पर बिल्कुल कम तेल या घी के साथ दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंक लें.फायदा: यह नाश्ता विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है और बच्चों के लंच बॉक्स के लिए भी एक बेहतरीन विकल्प है.3. सॉफ्ट सूजी इडली (Suji Idli)पारंपरिक चावल की इडली बनाने में समय लगता है, लेकिन सूजी की इडली मात्र 15 मिनट में तैयार हो जाती है.बनाने का तरीका: सूजी और दही को बराबर मात्रा में मिलाकर 10 मिनट के लिए रख दें. इसके बाद बैटर में थोड़ा पानी और एक चुटकी ईनो (Eno) या बेकिंग सोडा मिलाकर इडली के सांचे में डालकर 10-12 मिनट के लिए स्टीम (भाप में) कर लें. इसे नारियल या पुदीने की हरी चटनी के साथ गरमा-गरम परोसें.फायदा: भाप में पके होने के कारण यह डिश पूरी तरह ऑयल-फ्री होती है. यह पेट के लिए बेहद हल्की और आसानी से पचने वाली मानी जाती है.4. कलरफुल सूजी उत्तपम (Suji Uttapam)बनाने का तरीका: इसके लिए भी आपको सूजी और दही का गाढ़ा घोल तैयार करना होगा. इस घोल को तवे पर थोड़ा मोटा फैलाएं और ऊपर से बारीक कटे टमाटर, प्याज, शिमला मिर्च और बारीक कटी मिर्च डालकर दबा दें. दोनों तरफ से हल्का तेल लगाकर अच्छे से सेक लें.फायदा: सब्जियों की टॉपिंग के कारण यह डिश दिखने में जितनी आकर्षक लगती है, सेहत के लिहाज से उतनी ही शानदार होती है क्योंकि इससे भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर और मिनरल्स मिलते हैं.5. स्टीम्ड वेज सूजी ढोकला (Suji Dhokla)बनाने का तरीका: सूजी, दही और पानी के घोल में कद्दूकस की हुई गाजर और शिमला मिर्च मिलाएं. इसमें ईनो डालकर थाली या ढोकला मेकर में 15 मिनट के लिए भाप में पकाएं. पकने के बाद इसके ऊपर राई, सफेद तिल और करी पत्ते का हल्का सा तड़का लगाएं.फायदा: यह कम तेल में बनने वाली एक अत्यधिक पौष्टिक और स्पंजी डिश है, जो वजन नियंत्रित रखने वाले लोगों के लिए सबसे उत्तम ब्रेकफास्ट है.सूजी का नाश्ता बनाते समय इन 4 बातों का जरूर रखें ध्यानसूजी से बने व्यंजनों का अधिकतम स्वास्थ्य लाभ उठाने के लिए कुकिंग के दौरान इन बातों को कभी न भूलें:ड्राई रोस्टिंग (Dry Roasting): सूजी का इस्तेमाल करने से पहले उसे हमेशा कड़ाही में बिना तेल या घी के हल्का सा भून लें. ऐसा करने से डिश का स्वाद और टेक्सचर (बनावट) दोनों काफी बेहतर हो जाते हैं और वह चिपचिपी नहीं बनती.सब्जियों का अधिक उपयोग: सूजी के व्यंजनों को और ज्यादा न्यूट्रिशियस (पौष्टिक) बनाने के लिए उसमें तेल-मसालों की मात्रा कम रखें और अधिक से अधिक मौसमी हरी सब्जियों, पनीर या उबले हुए अंकुरित अनाजों को शामिल करें.सही स्टोरेज: हमेशा अच्छी ब्रांड और पैक्ड सूजी का ही इस्तेमाल करें. सूजी को हमेशा एयर-टाइट कंटेनर में सूखी जगह पर रखें. इस्तेमाल से पहले जांच लें कि उसमें कोई नमी, जाले या कीड़े न हों.सीमित और संतुलित मात्रा: हालांकि सूजी सेहतमंद है, लेकिन इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है. इसलिए इसका सेवन हमेशा सीमित और संतुलित मात्रा में ही करें.
गुजरात: जूनागढ़ में खड़े ट्रक से टकराई कार, एक ही परिवार के चार लोगों की मौत; चार घायल
गुजरात के जूनागढ़ जिले में शनिवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए। हादसा माजेवड़ी गांव के पास फोरलेन सड़क पर उस समय हुआ, जब परिवार की अर्टिगा कार सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से जा टकराई।
जयपुर की इस चर्चित हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को दहलाकर रख दिया है। अब तक सामने आए तथ्यों के बाद अब इस मामले में एक नया और सनसनीखेज मोड़ आ गया है। आरोपी आयुषी के मामा ने अब जो खुलासा किया है, उसने पुलिस और आम जनता दोनों को चौंका दिया है। मामा का आरोप है कि आयुषी ने अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने और नौकरी पाने की हवस में न केवल अपनी मां, बल्कि अपने पिता की भी बेरहमी से जान ली थी। यह दावा परिवार की नींव को हिला देने वाला है, जिसने अब इस पूरे केस को एक नए नजरिए से देखने पर मजबूर कर दिया है।नौकरी और जिद बनी मौत की वजह?मामा का दावा है कि आयुषी का अपने माता-पिता के साथ विवाद काफी समय से चल रहा था, जिसका मुख्य कारण उसकी नौकरी और जीवनशैली से जुड़ी जिद थी। आरोपों के मुताबिक, आयुषी ने घर की सुख-शांति को अपनी राह का कांटा समझ लिया था। मामा ने मीडिया के सामने बयान देते हुए कहा कि आयुषी ने जिस तरह से इस पूरी वारदात की साजिश रची, वह यह साबित करती है कि वह किसी भी हद तक जाने को तैयार थी। माता-पिता की हत्या के बाद जिस तरह से उसने सबूत मिटाने की कोशिश की, उससे उसकी क्रूरता का साफ पता चलता है। यह घटना अब एक पारिवारिक विवाद से कहीं ज्यादा, एक सोची-समझी हत्या की साजिश की ओर इशारा कर रही है।मामा के खुलासे से पुलिस की जांच में बड़ी चुनौतीआयुषी के मामा के इस बयान के बाद अब पुलिस के सामने भी चुनौती बढ़ गई है। क्या वाकई इस हत्याकांड की पटकथा पहले ही लिख ली गई थी? क्या यह एक दोहरा हत्याकांड था जिसे आयुषी ने अंजाम दिया? पुलिस अब इन नए आरोपों की गहराई से जांच कर रही है और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के वक्त कौन-कौन वहां मौजूद था। इस मामले ने जयपुर में सनसनी फैला दी है और लोग अब कानून से जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं। आयुषी का यह 'डार्क साइड' सामने आने के बाद हर कोई स्तब्ध है।
राजस्थान सरकार ने प्रशासनिक दक्षता को गति देने के लिए एक बड़े पैमाने पर तबादला सूची जारी की है। इस फेरबदल के दायरे में पीडब्ल्यूडी (PWD) और वन विभाग के कई आला अधिकारी शामिल हैं। राज्य में चल रही विकास परियोजनाओं और वन संरक्षण कार्यों में नई ऊर्जा भरने के उद्देश्य से ACE (एडिशनल चीफ इंजीनियर) स्तर से लेकर रेंज अधिकारियों तक के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है। अचानक हुए इन तबादलों से प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।PWD में बड़े प्रशासनिक बदलावपीडब्ल्यूडी विभाग में किए गए इन बदलावों को राज्य की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अहम माना जा रहा है। सरकार ने ACE स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं ताकि राज्य भर में चल रहे सड़क निर्माण और रखरखाव के काम में तेजी लाई जा सके। विभाग के जानकारों का मानना है कि निर्माण कार्यों में देरी और गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों को दूर करने के लिए यह प्रशासनिक कसावट बेहद जरूरी थी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तत्काल प्रभाव से अपनी नई पदस्थापना पर ज्वाइन करें और लंबित परियोजनाओं की समीक्षा करें।वन विभाग में भी व्यापक फेरबदलउधर, वन विभाग में भी बड़े पैमाने पर रेंज अधिकारियों और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर तैनात कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं। वन्यजीव संरक्षण, अवैध खनन पर रोक और वनों के बेहतर प्रबंधन के लिए यह प्रशासनिक बदलाव काफी मायने रखता है। विशेषकर उन जिलों में अधिकारियों को बदला गया है जहां वन संसाधनों की सुरक्षा को लेकर चुनौतियां बनी हुई थीं। विभाग की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए सरकार की ओर से यह एक बड़ी कवायद देखी जा रही है।तबादलों का असर और आगे की राहप्रशासनिक जानकारों का कहना है कि आगामी मानसून सत्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं के क्रियान्वयन को देखते हुए यह तबादला सूची बहुत सोच-समझकर तैयार की गई है। ACE से लेकर नीचे के अधिकारियों के स्तर पर बदलाव से कामकाज में नई गति आने की उम्मीद है। वहीं, जिन अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, उनके सामने अब नई चुनौतियों के साथ-साथ विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का दबाव भी होगा। राज्य भर के कर्मचारियों और अधिकारियों में अब इन तबादलों के बाद नई नियुक्तियों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
राजस्थान की राजनीति और प्रशासन के गलियारों में एक बार फिर बजरी खनन का मुद्दा गरमा गया है। मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने एक गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है, जिसने प्रशासनिक महकमे में खलबली मचा दी है। मंत्री का आरोप है कि जिस कंपनी की संपत्ति प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अटैच की गई है, उसे आखिर 20 करोड़ रुपये का बड़ा बजरी खनन ठेका कैसे आवंटित कर दिया गया? यह मामला न केवल वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है, बल्कि सरकारी टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े कर रहा है।नियमों की अनदेखी या मिलीभगत का खेल?मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने अपने पत्र में साफ तौर पर कहा है कि यदि किसी कंपनी पर मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप हैं और उसकी संपत्ति ED की निगरानी में है, तो सरकारी नियमों के अनुसार उसे किसी भी नए ठेके में भाग लेने या उसे हासिल करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद, खनन विभाग द्वारा इस कंपनी को ठेका दिया जाना किसी बड़ी मिलीभगत या उच्च-स्तरीय लापरवाही का संकेत है। मंत्री ने मांग की है कि इस पूरे आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर किन अधिकारियों की मिलीभगत से यह ठेका आवंटित हुआ।मुख्यमंत्री के सामने बड़ी चुनौती, जांच की मांगइस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद अब मुख्यमंत्री कार्यालय पर दबाव बढ़ गया है। 20 करोड़ रुपये का यह मामला राजस्थान के खनन सेक्टर में चल रहे बड़े खेल की केवल एक बानगी माना जा रहा है। किरोड़ी लाल मीणा ने अपने पत्र के माध्यम से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से इस ठेके को रद्द किया जाए और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। इस मामले ने विपक्ष को भी एक बड़ा मुद्दा दे दिया है, जिससे सरकार के लिए आने वाले दिनों में मुश्किल खड़ी हो सकती है। लोग अब यह जानने के उत्सुक हैं कि क्या सरकार वास्तव में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी या यह मामला केवल फाइलों में दबकर रह जाएगा।प्रशासनिक सतर्कता पर सवालखनन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जहां सरकारी राजस्व का बड़ा हिस्सा दांव पर होता है, वहां ED जैसी केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई को नजरअंदाज करना कई संदेह पैदा करता है। जानकारों का कहना है कि टेंडर जारी करने से पहले कंपनी की वित्तीय साख और बैकग्राउंड चेक अनिवार्य होता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अधिकारियों ने जानबूझकर यह जानकारी छुपाई या सिस्टम में इतनी बड़ी खामी है। किरोड़ी लाल मीणा की इस पहल ने एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी छवि को मजबूत किया है, और अब सभी की निगाहें सीएम की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
अयोध्या राम मंदिर में नई समस्या! 23 कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा
Ram Mandir donation counting staff resignation: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हुए चढ़ावा और दान चोरी प्रकरण के बाद से नित नए खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब राम मंदिर के भीतर से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। मंदिर में आने वाले ...
बहुमत के बावजूद बीजेपी के हाथ से कैसे फिसली मेयर की कुर्सी? किसने बिछाया ये मास्टरस्ट्रोक
पंजाब के अबोहर की राजनीति में एक बेहद चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। नगर निगम चुनाव के नतीजों में बीजेपी की स्थिति काफी मजबूत थी और बहुमत का आंकड़ा भी उनके पक्ष में दिख रहा था, लेकिन ऐन वक्त पर मेयर की कुर्सी का समीकरण पूरी तरह बदल गया। बीजेपी के हाथ से जीत की बाजी कैसे फिसल गई और किसे मिली इस उलटफेर की चाबी, यह सवाल अब अबोहर के हर गली-चौराहे पर चर्चा का विषय बना हुआ है। किसी को उम्मीद नहीं थी कि जीत की दहलीज पर खड़ी बीजेपी को इतनी बुरी तरह पटखनी मिलेगी।गणित और राजनीति: कहाँ चूकी बीजेपी?राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अबोहर में बीजेपी की हार का मुख्य कारण पार्टी के भीतर की आपसी गुटबाजी और आखिरी समय पर बदली गई सियासी बिसात रही। मेयर का चुनाव केवल आंकड़ों का खेल नहीं होता, बल्कि इसमें जोड़-तोड़ और रणनीति की अहम भूमिका होती है। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के कुछ असंतुष्ट पार्षदों ने क्रॉस-वोटिंग की, जिससे पूरा चुनावी समीकरण उलट गया। बहुमत होने के बावजूद पार्टी अपने पार्षदों को एकजुट रखने में विफल रही, जिसका सीधा फायदा विपक्ष को मिला। विपक्ष ने इस मौके को भुनाते हुए एक ऐसा गठबंधन तैयार किया जिसने बीजेपी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।कौन बना बीजेपी की हार का कारण?इस हार के पीछे अब विपक्ष की सक्रियता और रणनीतिक तालमेल को मुख्य कारण माना जा रहा है। स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, विपक्ष ने पर्दे के पीछे से एक ऐसी रणनीति तैयार की थी, जिसके बारे में बीजेपी के रणनीतिकार अंत तक बेखबर रहे। जैसे ही मेयर चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई, विपक्ष ने अपने सारे पत्ते खोल दिए और बीजेपी के लिए संभलने का मौका ही नहीं छोड़ा। यह पटखनी इतनी जोरदार थी कि पार्टी के स्थानीय नेतृत्व को भी समझ नहीं आया कि स्थिति इतनी जल्दी कैसे बदल गई। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह हार बीजेपी के लिए भविष्य का बड़ा सबक साबित होगी या आने वाले समय में अबोहर की राजनीति में कोई बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा।क्या अबोहर में बदलेगी सत्ता की दिशा?मेयर की कुर्सी गंवाने के बाद अब बीजेपी के लिए अपना खोया हुआ जनाधार वापस पाना एक बड़ी चुनौती बन गई है। वहीं दूसरी तरफ, इस उलटफेर से उत्साहित विपक्ष अब अपनी पकड़ और मजबूत करने में जुट गया है। अबोहर की जनता के लिए यह घटना किसी सियासी ड्रामे से कम नहीं है, जहां चुनाव के नतीजे आने के बाद भी कुर्सी किसी और के हाथ में चली गई। प्रशासनिक गलियारों में भी इस बात की चर्चा है कि इस हार के बाद अब बीजेपी के स्थानीय संगठन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बीजेपी इस हार का बदला कैसे लेती है और विपक्ष इस नई मिली हुई ताकत को कैसे संभालता है।
पंजाब के अमृतसर में एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के एक रिहायशी इलाके में पुरानी रंजिश के चलते एक युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई। हमलावरों ने बेहद शातिर तरीके से युवक को उसके घर के बाहर बुलाया और फिर उस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। मौके पर ही युवक ने दम तोड़ दिया। मृतक अपने माता-पिता का इकलौता सहारा था, जिसकी मौत के बाद से पूरे इलाके में मातम और डर का माहौल व्याप्त है।कैसे रची गई खौफनाक साजिश?प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, युवक को किसी ने फोन करके घर से बाहर बुलाया था। जैसे ही वह घर के मुख्य द्वार पर पहुंचा, पहले से घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उसे घेर लिया और बिना किसी बहस के उस पर फायरिंग कर दी। गोलियों की आवाज सुनकर जब तक परिजन और पड़ोसी बाहर आए, तब तक हमलावर हथियारों के साथ मौके से फरार हो गए। युवक को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस को आशंका है कि इस वारदात के पीछे कोई पुरानी निजी दुश्मनी है, जिसे लेकर आरोपी काफी समय से मौके की तलाश में थे।इकलौते बेटे की मौत से बिखर गया परिवारइस हृदयविदारक घटना में जान गंवाने वाला युवक अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। घर के चिराग के बुझ जाने से माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का कहना है कि उन्हें किसी से भी ऐसी दुश्मनी का अंदाजा नहीं था जो इतनी बड़ी कीमत पर खत्म होगी। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके। इलाके के लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि सरेआम घर के बाहर इस तरह की वारदात को अंजाम दिया गया।पुलिस की जांच और सुरक्षा पर उठते सवालअमृतसर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और संदिग्धों की धरपकड़ के लिए कई टीमें गठित की गई हैं। फिलहाल पुलिस पुरानी रंजिश के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों और मोबाइल लोकेशन के जरिए पुलिस हमलावरों तक पहुंचने की कोशिश में है। दिनदहाड़े हुई इस हत्या ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, जिसके चलते लोग अब सड़कों पर सुरक्षा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को जल्द ही सलाखों के पीछे कर दिया जाएगा।
पंजाब कांग्रेस में फिर गरमाया 'चेहरा' बनने का खेल: आखिर क्यों चन्नी की नजरें अध्यक्ष पद पर
पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही सियासी उठापटक एक बार फिर से दिलचस्प मोड़ पर आ गई है। प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर पार्टी के भीतर सुगबुगाहट तेज है और सबसे बड़ा नाम जो चर्चाओं के केंद्र में है, वह है पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी। सूत्रों की मानें तो चन्नी एक बार फिर पंजाब की सियासत में 'सुपर एक्टिव' मोड में हैं। चर्चा यह है कि वे कैप्टन अमरिंदर सिंह के उस पुराने 'विक्ट्री फॉर्मूले' को अपनाना चाहते हैं, जिसने उन्हें राज्य की राजनीति में निर्विवाद नेता के रूप में स्थापित किया था।कैप्टन वाले फॉर्मूले पर चन्नी की चालराजनीतिक गलियारों में इस बात की जोरदार चर्चा है कि चन्नी किस तरह कैप्टन अमरिंदर सिंह के उस दौर के फॉर्मूले को दोहराने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें 'एक चेहरा, एक कमान' का मंत्र काम करता था। चन्नी बखूबी समझते हैं कि पंजाब की राजनीति में जातीय समीकरण और 'कॉमन मैन' वाली छवि का बड़ा असर पड़ता है। वे प्रदेश अध्यक्ष बनकर पार्टी के भीतर अपनी पकड़ को दोबारा मजबूत करना चाहते हैं ताकि आने वाले चुनावों में वे खुद को मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में प्रोजेक्ट कर सकें। पार्टी कार्यकर्ताओं और जमीनी स्तर के नेताओं के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए चन्नी सक्रिय रूप से उन तमाम दांव-पेंचों का उपयोग कर रहे हैं जो कभी कैप्टन के लिए तुरुप का इक्का साबित हुए थे।अध्यक्ष पद क्यों है चन्नी की पहली प्राथमिकता?अध्यक्ष पद की दौड़ में चन्नी का नाम आगे आने के पीछे कई सियासी रणनीतियां छिपी हैं। पहला, प्रदेश अध्यक्ष के हाथ में संगठन की पूरी ताकत होती है, जिससे टिकट वितरण और जिलों में अपने वफादार नेताओं को तैनात करने की शक्ति मिलती है। चन्नी जानते हैं कि अगर वे संगठन की चाबी अपने पास रखते हैं, तो वे पार्टी के भीतर किसी भी चुनौती को आसानी से बेअसर कर पाएंगे। दूसरी तरफ, उनका उद्देश्य कांग्रेस को दलित और आम वोट बैंक के बीच एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में पेश करना है। चन्नी के इस कदम ने पंजाब कांग्रेस के अन्य बड़े नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं, क्योंकि अगर चन्नी सफल होते हैं, तो पार्टी का पूरा पावर सेंटर बदल सकता है।क्या चन्नी की महत्वाकांक्षा कांग्रेस में नया संकट लाएगी?हालांकि, चन्नी का यह कदम पार्टी के लिए फायदे का सौदा साबित होगा या फिर से किसी बड़े गुटबाजी का कारण बनेगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा। प्रदेश में कांग्रेस पहले से ही आपसी खींचतान से जूझ रही है। ऐसे में चन्नी का अध्यक्ष बनने का सपना पार्टी आलाकमान के लिए एक सिरदर्द बन सकता है। एक तरफ जहाँ वे अपनी साख बचाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कैप्टन के पुराने 'पावर फॉर्मूले' को अपनाना उनके लिए जोखिम भरा भी हो सकता है। क्या चन्नी का यह दांव उन्हें फिर से 'किंग' बनाएगा या यह महज एक सियासी छलावा है? पंजाब की जनता और कांग्रेस के कार्यकर्ता अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि पार्टी हाईकमान किसके नाम पर मुहर लगाता है।
झारखंड के निवासियों के लिए मौसम विभाग ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। राज्य में आज से अगले तीन दिनों तक मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ रहेगा। मॉनसूनी सक्रियता के चलते राज्य के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश होने के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र ने रांची, बोकारो सहित प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं को लेकर रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।इन जिलों पर मंडरा रहा खतरा, 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी हवामौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, इस दौरान हवा की रफ्तार 50 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जो सामान्य से काफी अधिक है। भारी बारिश के साथ चलने वाली ये तेज हवाएं कच्चे घरों और पेड़-पौधों के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। मुख्य रूप से रांची, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़ और सिमडेगा जैसे जिलों में मौसम का सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिलेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिजली कड़कने के साथ-साथ कई इलाकों में वज्रपात की भी पूरी आशंका है, जिसे लेकर ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।प्रशासन ने जारी की एडवायजरी, लोगों से की सावधानी की अपीललगातार हो रही बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे बारिश के दौरान पेड़ के नीचे या पुराने जर्जर भवनों के आसपास खड़े न हों। साथ ही, किसानों को अपने खेतों में काम करते समय विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। यात्रा करने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि यदि बहुत जरूरी न हो, तो अगले तीन दिनों तक लंबी दूरी की यात्रा टाल दें। खराब मौसम के कारण यातायात बाधित होने की भी संभावना बनी हुई है, इसलिए सड़कों पर सावधानी से वाहन चलाएं।बिजली और बुनियादी सेवाओं पर पड़ सकता है असरमौसम की इस मार का सीधा असर राज्य की बुनियादी सेवाओं, विशेषकर बिजली आपूर्ति पर पड़ने की संभावना है। तेज हवाओं के कारण बिजली के खंभों के गिरने और तारों के टूटने की घटनाएं हो सकती हैं, जिससे कई क्षेत्रों में घंटों बिजली गुल रहने की आशंका है। संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके। आपको सलाह दी जाती है कि अपने मोबाइल फोन चार्ज रखें और आपातकालीन नंबरों को अपने पास नोट कर लें।
झारखंड की सियासत में इन दिनों गहमागहमी का माहौल है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के एक के बाद एक फैसलों ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। पहले सुरक्षाकर्मियों को हटाना और अब सरकारी गाड़ी का उपयोग बंद कर निजी वाहन में सफर करना, राज्य के सियासी दिग्गजों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। आम लोगों और विपक्षी दलों के बीच अब एक ही सवाल तैर रहा है—क्या वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर सरकार से नाराज हैं और क्या वे जल्द ही अपने पद से इस्तीफा देने वाले हैं?विवाद की जड़: पुलिस मुख्यालय से तनातनीसूत्रों के मुताबिक, इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब वित्त मंत्री ने अपनी सुरक्षा में तैनात 16 जवानों के लिए अतिरिक्त संसाधनों की मांग की थी। मंत्री का तर्क था कि वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था और सीमित वाहनों में जवानों का चलना अव्यावहारिक है। हालांकि, पुलिस मुख्यालय की ओर से उनकी मांग को अनसुना कर दिया गया और उलटे एक मौजूदा सरकारी वाहन को वापस करने का नोटिस थमा दिया गया। इस घटनाक्रम से आहत होकर वित्त मंत्री ने अपनी पूरी सुरक्षा और सभी सरकारी वाहनों को वापस करने का कठोर फैसला लिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि उन्हें अपनी सुरक्षा से ज्यादा ईश्वर पर भरोसा है।क्या इस्तीफा देने वाले हैं राधाकृष्ण किशोर?जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, वित्त मंत्री की नाराजगी की खबरें तेज होती जा रही हैं। हाल ही में उन्हें अपनी सरकारी गाड़ी छोड़कर निजी वाहन का इस्तेमाल करते हुए देखा गया, जिससे यह चर्चा और प्रबल हो गई है कि सरकार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। हालांकि, मंत्री ने स्वयं मीडिया के सामने आकर ऐसी खबरों को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि वे नाराज नहीं हैं। बावजूद इसके, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकारी महकमे के साथ उनका यह व्यवहार भविष्य में किसी बड़े प्रशासनिक या राजनीतिक बदलाव का संकेत हो सकता है।पार्टी और प्रशासन में सन्नाटावित्त मंत्री जैसे वरिष्ठ पद पर बैठे नेता का इस तरह से सरकारी सुविधाओं का त्याग करना हेमंत सरकार के लिए भी चुनौती बना हुआ है। पार्टी आलाकमान की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस घटना ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, सभी की निगाहें मंत्री के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वे इसे एक वैचारिक विरोध के रूप में जारी रखेंगे या जल्द ही सब कुछ सामान्य हो जाएगा।
हरियाणा के अंबाला में यातायात की तस्वीर बदलने वाली है। बहुप्रतीक्षित अंबाला रिंग रोड का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में है, जिसका 90 प्रतिशत काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह प्रोजेक्ट न केवल स्थानीय लोगों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि पड़ोसी राज्यों पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के यात्रियों के लिए भी कनेक्टिविटी का नया आयाम खोलेगा। इस रिंग रोड के शुरू होने से न केवल शहर को जाम से बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख रूटों के साथ इसका जुड़ाव सफर को बेहद आसान बना देगा।पांच नेशनल हाईवे का एक जंक्शन, बदलेगी कनेक्टिविटीअंबाला रिंग रोड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पांच महत्वपूर्ण नेशनल हाईवे को आपस में जोड़ेगा। इस रोड के चालू होते ही पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच आवाजाही करने वाले भारी वाहनों को शहर के अंदर प्रवेश करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे अंबाला शहर में लगने वाले जाम से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। यह रिंग रोड रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे, अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे और अन्य प्रमुख मार्गों को एक साथ जोड़ता है, जिससे माल ढुलाई और लंबी दूरी की यात्रा का समय घंटों कम हो जाएगा।विकास की नई गति, पीएम मोदी करेंगे उद्घाटनप्रोजेक्ट की गति को देखते हुए अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि अंतिम 10 प्रतिशत का कार्य भी युद्धस्तर पर पूरा किया जा रहा है। इस विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को लेकर क्षेत्र में काफी उत्साह है। जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्य संपन्न होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही इस रिंग रोड का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इस उद्घाटन के साथ ही हरियाणा के विकास मानचित्र पर अंबाला एक बड़े लॉजिस्टिक और ट्रांजिट हब के रूप में उभरेगा, जिसका सीधा लाभ क्षेत्र के औद्योगिक और व्यापारिक विकास पर पड़ेगा।स्थानीय जनता और यात्रियों के लिए बड़ा राहत का पैगामरिंग रोड के निर्माण से यात्रा के समय में भारी कटौती होने की उम्मीद है। अभी तक अंबाला से गुजरने वाले यात्रियों को शहर के भीतर के कंजेशन से जूझना पड़ता था, लेकिन रिंग रोड के चालू होते ही वे आउटर रिंग से सीधे अपने गंतव्य की ओर निकल सकेंगे। इसके साथ ही, बेहतर सड़क नेटवर्क से सड़क हादसों में कमी आने और ईंधन की बचत होने की भी पूरी संभावना है। प्रशासनिक स्तर पर इसे पूरा करने की समय सीमा तय कर दी गई है और विभाग अंतिम फिनिशिंग का काम तेजी से निपटा रहा है।
Trip To London: पाउंड को रुपए में गिनेंगे तो चाय भी नहीं पी सकेंगे
Trip To London: जब भी पर्यटन के लिए विदेश जाएं तो भारतीय रुपए में मूल्य आंकना मुसीबत खड़ी करेगा। वजह साफ है कि विश्व की अधिकांश लेन-देन की मुद्रा का मूल्य रुपए से कई गुना ज्यादा है। प्रमुख तौर पर डॉलर 95 रुपए का, पाउंड 130 रुपए का, यूरो 111 का, ...
मछली या चिकन! बारिश में कौन देता है ज्यादा पोषण और किससे बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा
चिलचिलाती गर्मी के बाद मानसून और झमाझम बारिश का मौसम (Monsoon Season) हर किसी को राहत देता है। इस सुहावने मौसम में लोगों की फूड क्रेविंग्स भी काफी बढ़ जाती हैं, खासकर नॉन-वेज खाने के शौकीनों के लिए मसालेदार चिकन या क्रिस्पी फिश फ्राई का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो बारिश का यह सुहावना मौसम अपने साथ कई तरह के बैक्टीरिया और फंगल इन्फेक्शन भी लेकर आता है। ऐसे में यह सवाल उठना बेहद लाजिमी है कि मानसून में सेहत के लिहाज से मछली या चिकन (Fish vs Chicken in Monsoon) में से कौन सा विकल्प ज्यादा सुरक्षित और पौष्टिक है? आइए जानते हैं कि इस मौसम में इन दोनों में से किसका सेवन आपकी इम्यूनिटी बढ़ाएगा और कौन सी चीज आपके पेट को बीमार कर सकती है।मानसून में मछली खाने से क्यों बचते हैं लोग: प्रजनन काल और दूषित पानी का बड़ा खतरापारंपरिक मान्यताओं और आधुनिक विज्ञान दोनों के अनुसार, बारिश के महीनों में मछली और अन्य सी-फूड्स (Sea Food) का सेवन करने से बचने की सलाह दी जाती है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि मानसून का समय जलीय जीवों, खासकर मछलियों का प्रजनन काल (Breeding Season) होता है। इस दौरान मछलियों के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे उनका मांस सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इसके अलावा, बारिश का पानी जब नदियों, तालाबों और समुद्र में जाकर मिलता है, तो पानी अत्यधिक दूषित हो जाता है। ऐसे प्रदूषित पानी में पलने वाली मछलियों के शरीर में खतरनाक बैक्टीरिया और टॉक्सिंस जमा हो जाते हैं, जिन्हें खाने से फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त और पेट का गंभीर इन्फेक्शन होने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।चिकन है पोषण का पावरहाउस, लेकिन पकाने के तरीके में रखनी होगी विशेष सावधानीमछली की तुलना में मानसून के दौरान चिकन को एक अधिक सुरक्षित और सुपाच्य विकल्प माना जाता है। चिकन लीन प्रोटीन (Lean Protein), विटामिन B6, जिंक और सेलेनियम का एक बेहतरीन स्रोत है, जो शरीर के इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है। बारिश के मौसम में कमजोर पड़ रहे डाइजेशन को ठीक रखने के लिए चिकन सूप या कम तेल-मसालों में पका हुआ स्टू बेहद फायदेमंद साबित होता है। हालांकि, पोल्ट्री फार्म्स में स्वच्छता की कमी के कारण इस मौसम में साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया का खतरा चिकन में भी बना रहता है। इसलिए हमेशा फ्रेश और अच्छी तरह साफ किया हुआ चिकन ही खरीदें।वरिष्ठ न्यूट्रिशनिस्ट्स और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट्स का कड़ा परामर्श: मानसून में हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म और पाचन तंत्र काफी धीमा हो जाता है। इस मौसम में तली-भुनी और अत्यधिक हैवी नॉन-वेज डिशेज को पचाना मुश्किल होता है। यदि आप बारिश में चिकन का आनंद ले रहे हैं, तो उसे 100 डिग्री से ऊपर के तापमान पर अच्छी तरह से डीप-कुक (Well Cooked Chicken) करना अनिवार्य है, ताकि सभी हानिकारक कीटाणु मर जाएं। जहां तक संभव हो, इन महीनों में कच्ची या अधपकी मछली और स्ट्रीट वेंडर्स से नॉन-वेज मोमोज या कबाब खाने से पूरी तरह परहेज करें।स्थानीय बाजारों में बढ़ी सतर्कता और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सही डाइट की खोजजियोपॉलिटिकल और स्थानीय स्वास्थ्य (Geographical Health and Dietary Trends) दृष्टिकोण से देखें तो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, दिल्ली-एनसीआर, बिहार के पटना और बंगाल (Local Consumption Hubs) जैसे क्षेत्रों में मानसून के आते ही नॉन-वेज के शौकीन काफी सतर्क नजर आ रहे हैं। आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI Search) और डिजिटल युग में लोग लगातार इस बात को सर्च कर रहे हैं कि बारिश में पेट खराब होने से कैसे बचा जाए। स्थानीय डॉक्टरों का कहना है कि स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का पालन करते हुए यदि घर पर पूरी साफ-सफाई के साथ ताजा और अच्छी तरह उबला हुआ चिकन खाया जाए, तो यह शरीर को बिना किसी नुकसान के भरपूर पोषण प्रदान करता है।
शुगर, बीपी समेत कई बीमारियों के लिए रामबाण है जामुन की गुठली, फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान
गर्मियों और मॉनसून के मौसम में आने वाला रसीला फल जामुन (Jamun Fruit) स्वाद में जितना बेहतरीन होता है, सेहत के लिए भी उतना ही गुणकारी माना जाता है। अक्सर लोग जामुन खाने के बाद उसकी गुठलियों को बेकार समझकर कूड़ेदान में फेंक देते हैं। लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, आप जिसे कचरा समझ रहे हैं, वह वास्तव में सेहत का एक ऐसा अनमोल खजाना है जो डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और पेट की पुरानी से पुरानी बीमारियों को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखता है। जामुन की गुठली (Jamun Seed Powder) का सही तरीके से इस्तेमाल शरीर के लिए किसी जादुई बूस्टर से कम नहीं है, जिसके स्वास्थ्य लाभ आपको पूरी तरह हैरान कर देंगे।डायबिटीज के मरीजों के लिए प्राकृतिक इंसुलिन: कैसे कंट्रोल होता है ब्लड शुगर?डायबिटीज (Type-2 Diabetes) से पीड़ित मरीजों के लिए जामुन की गुठली किसी दिव्य औषधि से कम नहीं है। इसमें 'जंबोलिन' (Jamboline) और 'जंबोसिन' (Jambosine) नामक दो बेहद खास तत्व पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर के भीतर स्टार्च को शुगर में बदलने की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं, जिससे भोजन के बाद अचानक बढ़ने वाला ब्लड शुगर लेवल पूरी तरह नियंत्रित रहता है। इसके साथ ही, जामुन की गुठली का पाउडर अग्न्याशय (Pancreas) की कोशिकाओं को सक्रिय करता है, जिससे प्राकृतिक रूप से इंसुलिन का उत्पादन बढ़ता है। डॉक्टर भी मानते हैं कि सुबह खाली पेट इसके चूर्ण का सेवन करने से इंसुलिन पर निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है।हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों को रखेगा कोसों दूर: धमनियों की करेगा सफाईसिर्फ शुगर ही नहीं, बल्कि हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) और दिल के मरीजों के लिए भी जामुन की गुठली का सेवन बेहद फायदेमंद साबित होता है। इस गुठली में 'एलाजिक एसिड' (Ellagic Acid) नामक एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो रक्त वाहिकाओं यानी धमनियों को चौड़ा करने और उनके लचीलेपन को बनाए रखने में मदद करता है। इसके नियमित सेवन से धमनियों में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) जमा नहीं हो पाता और ब्लड सर्कुलेशन सुचारू रूप से चलता है, जिससे हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है।आयुर्वेदाचार्यों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का बड़ा दावा: जामुन की गुठली में प्रचुर मात्रा में फाइबर, विटामिन और मिनरल्स होते हैं। यह पेट से जुड़ी गंभीर समस्याओं जैसे क्रोनिक अपच, गैस, एसिडिटी और कब्ज को ठीक करने में रामबाण है। यह शरीर को अंदर से डिटॉक्सिफाई करती है, जिससे लिवर और किडनी की कार्यक्षमता में सुधार होता है। इसे सुखाकर बनाया गया चूर्ण एक सुरक्षित और पूरी तरह से प्राकृतिक सप्लीमेंट है, जिसे हर उम्र के लोग अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं।कैसे तैयार करें और क्या है इस्तेमाल करने का सही तरीका?जामुन की गुठली का लाभ उठाने के लिए सबसे पहले जामुन खाने के बाद गुठलियों को अच्छी तरह धो लें। इसके बाद इन्हें कुछ दिनों तक तेज धूप में पूरी तरह सुखा लें। जब ये सूख जाएं, तो इनका ऊपरी छिलका उतारकर अंदर के हिस्से को मिक्सी में पीसकर बारीक चूर्ण (Jamun Gutli Churn) बना लें। इस चूर्ण को एक कांच के एयरटाइट जार में सुरक्षित रख लें। रोज सुबह खाली पेट एक गिलास हल्के गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच इस चूर्ण का सेवन करें।डिजिटल हेल्थ और आधुनिक एआई सर्च (AI Health Search) के इस दौर में, लखनऊ, दिल्ली, पटना जैसे बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों (Geographical Health Grid) तक के लोग अब एलोपैथिक दवाओं के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए इन प्राचीन घरेलू नुस्खों और प्राकृतिक हर्बल सप्लीमेंट्स की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। अगर आप भी लंबे समय से शुगर या बीपी की समस्या से परेशान हैं, तो आज ही से जामुन की गुठली को फेंकने के बजाय इसका चूर्ण बनाकर इस्तेमाल करना शुरू करें और एक स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब जीवनशैली और असंतुलित खान-पान के कारण दिल से जुड़ी बीमारियां (Heart Diseases) बहुत तेजी से बढ़ रही हैं। कम उम्र में ही लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट जैसी गंभीर समस्याओं का शिकार हो रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में ही कुछ ऐसे प्राकृतिक सुपरफूड्स मौजूद हैं, जो आपके दिल को बुढ़ापे तक पूरी तरह फिट और जवान रख सकते हैं? हेल्थ एक्सपर्ट्स और न्यूट्रिशनिस्ट्स के अनुसार, तीन खास रंगों— लाल, सफेद और नीले (Red, White and Blue Foods) के खाद्य पदार्थ आपके कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ को मजबूत करने के साथ-साथ कैंसर और डायबिटीज जैसी जानलेवा बीमारियों के खतरे को भी जड़ से खत्म कर सकते हैं।लाल रंग के फूड्स: धमनियों को रखेंगे साफ और ब्लड प्रेशर करेंगे कंट्रोलटमाटर, सेब, अनार, चुकंदर और तरबूज जैसे लाल रंग के खाद्य पदार्थों में 'लाइकोपीन' (Lycopene) और एंथोसायनिन जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL Cholesterol) के स्तर को तेजी से कम करते हैं और धमनियों में ब्लॉकेज होने से रोकते हैं। नियमित रूप से लाल रंग के फलों और सब्जियों का सेवन करने से शरीर में रक्त का संचार बेहतर होता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या नियंत्रित रहती है। इसके अलावा, ये एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की कोशिकाओं को डैमेज होने से बचाते हैं, जिससे कैंसर जैसी घातक बीमारी का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।सफेद रंग का जादू: इंसुलिन बढ़ाएगा और डायबिटीज को रखेगा कोसों दूरअक्सर लोग सफेद रंग के खाद्य पदार्थों को सेहत के लिए ठीक नहीं मानते, लेकिन प्रकृति में मिलने वाले प्राकृतिक सफेद फूड्स जैसे लहसुन, प्याज, मूली, मशरूम और फूलगोभी दिल के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। खासकर लहसुन में 'एलिसिन' (Allicin) नामक एक बेहद सक्रिय तत्व पाया जाता है, जो खून को प्राकृतिक रूप से पतला करने का काम करता है और क्लॉटिंग की समस्या से बचाता है। ये सफेद फूड्स शरीर में इंसुलिन की संवेदनशीलता को सुधारते हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल हमेशा नियंत्रण में रहता है और टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों को बहुत बड़ी राहत मिलती है।वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों और डाइटिशियनों का साझा पैनल कहता है: हमारी डाइट सीधे तौर पर हमारे दिल की उम्र तय करती है। यदि कोई व्यक्ति अपने दैनिक आहार में रंग-बिरंगे प्राकृतिक फलों और सब्जियों को शामिल करता है, तो उसे भविष्य में कभी भी महंगे इलाज या कार्डियक सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ेगी। लाल, सफेद और नीले रंग के इन सुपरफूड्स का कॉम्बिनेशन शरीर के इम्यून सिस्टम को बूस्ट करता है और मेटाबॉलिज्म को इतना मजबूत बना देता है कि शरीर में क्रोनिक इन्फ्लेमेशन (सूजन) पैदा नहीं हो पाती, जो कि हार्ट अटैक और कैंसर की मुख्य जड़ है।नीले और बैंगनी फूड्स: दिमाग को रखेंगे तेज और कैंसर सेल्स को करेंगे नष्टनीले और बैंगनी रंग के खाद्य पदार्थ जैसे जामुन, ब्लूबेरी, काली मिर्च, बैंगन और काले अंगूर सेहत का खजाना माने जाते हैं। इनमें प्रचुर मात्रा में फ्लेवोनोइड्स पाए जाते हैं, जो दिल की मांसपेशियों को अंदरूनी मजबूती प्रदान करते हैं। वैज्ञानिक शोधों में यह बात साबित हो चुकी है कि नीले रंग के फलों में मौजूद तत्व कैंसर की कोशिकाओं (Cancer Cells) को बढ़ने से रोकते हैं और शरीर के भीतर मौजूद टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद करते हैं। बढ़ती उम्र में याददाश्त कमजोर होने की समस्या और भूलने की बीमारी (Alzheimer's) से बचाने में भी ये नीले फूड्स बेहद कारगर साबित होते हैं।डिजिटल युग और आधुनिक हेल्थ सर्च (AI Search Engines) के दौर में लोग अपनी सेहत को लेकर काफी जागरूक हो रहे हैं। लखनऊ, दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों से लेकर टियर-2 और टियर-3 कस्बों तक के लोग अब ऑर्गेनिक और कलर-बेस्ड डाइट चार्ट को तेजी से अपना रहे हैं। डॉक्टर भी सलाह देते हैं कि बाजार के पैकेटबंद सप्लीमेंट्स खाने के बजाय प्राकृतिक रूप से मिलने वाले इन तीन रंगों के जादुई फूड्स को अपनी थाली का हिस्सा बनाएं और बुढ़ापे तक एक सेहतमंद व रोगमुक्त जीवन का आनंद लें।
सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की पूजा का विधान है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाने वाली आषाढ़ विनायक चतुर्थी (Ashadha Vinayaka Chaturthi 2026) इस बार बेहद खास और चमत्कारी संयोग लेकर आ रही है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस पावन दिन पर पूरे 13 घंटे के लिए अत्यंत शुभ 'रवि योग' का निर्माण हो रहा है, जो भक्तों की हर मनोकामना पूरी करने और जीवन से आर्थिक तंगी को हमेशा के लिए दूर करने में सक्षम माना जाता है। लेकिन इस महापर्व के साथ एक बेहद कड़ा धार्मिक नियम भी जुड़ा हुआ है, जिसका पालन न करने पर व्यक्ति पर झूठे आरोप और कलंक लग सकता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भूलकर भी चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। आइए जानते हैं क्या है इसका सही मुहूर्त और पौराणिक महत्व।विनायक चतुर्थी 2026 की सही तारीख और 13 घंटे के रवि योग का समयपंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत और समापन के समय को ध्यान में रखते हुए इस साल विनायक चतुर्थी व्रत जुलाई 2026 के मध्य में बेहद शुभ संयोगों के बीच रखा जाएगा। इस दिन सुबह से लेकर शाम तक पूरे 13 घंटे के लिए रवि योग (Ravi Yoga) रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में रवि योग को सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर माना गया है, जिसमें किया गया कोई भी निवेश, व्यापारिक सौदा या नया काम शत-प्रतिशत सफलता प्रदान करता है। इस योग में गणपति बप्पा की पूजा करने से कुंडली के सूर्य दोष और मंगल दोष से भी मुक्ति मिलती है।भूलकर भी न करें चंद्र दर्शन, श्रीकृष्ण पर भी लग गया था 'स्यमंतक मणि' की चोरी का कलंकपौराणिक कथाओं के अनुसार, विनायक चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन (Chandra Darshan Prohibited) करना पूरी तरह से वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि एक बार भगवान गणेश के स्वरूप को देखकर चंद्र देव ने उनका उपहास उड़ाया था, जिससे क्रोधित होकर गजानन ने उन्हें श्राप दे दिया था कि जो भी इस दिन चंद्रमा को देखेगा, वह समाज में कलंकित हो जाएगा। यही वजह है कि इसे 'कलंक चतुर्थी' के रूप में भी जाना जाता है। द्वापर युग में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने भी अनजाने में इस दिन चंद्रमा को देख लिया था, जिसके कारण उन पर 'स्यमंतक मणि' चुराने का झूठा आरोप लगा था। यदि अनजाने में आपसे चांद दिख जाए, तो तुरंत दोष निवारण मंत्र का जाप करना चाहिए।देश के प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्यों का बड़ा परामर्श: विनायक चतुर्थी के दिन दोपहर के समय श्री गणेश की पूजा का सबसे श्रेष्ठ विधान है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को सुबह स्नान के बाद 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए और बप्पा को दूर्वा, मोदक व लाल चंदन अर्पित करना चाहिए। रवि योग होने के कारण इस दिन तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य देना भी सोया हुआ भाग्य जगाने जैसा फल प्रदान करेगा। रात्रि के समय जब चंद्रमा उदय हो, तो अपनी नजरें नीचे रखें और मानसिक रूप से भगवान गणेश से क्षमा याचना करें।स्थानीय स्तर पर उत्तर भारत और यूपी के मंदिरों में विशेष तैयारियांजियोपॉलिटिकल और स्थानीय सांस्कृतिक (Geographical Traditional Grid) नजरिए से देखें तो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, वाराणसी, कानपुर और दिल्ली-एनसीआर (Local Region) समेत पूरे उत्तर भारत के सिद्धपीठ गणेश मंदिरों में आषाढ़ विनायक चतुर्थी को लेकर विशेष तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। टियर-2 और टियर-3 शहरों के स्थानीय बाजारों में बप्पा के प्रिय मोदक, दूर्वा घास और पूजा सामग्री की दुकानें सज गई हैं। डिजिटल और आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI Search) के इस दौर में लोग विनायक चतुर्थी की पूजा विधि और चंद्र दर्शन दोष से बचने के उपायों को तेजी से सर्च कर रहे हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया यह व्रत जीवन के सभी विघ्नों को हर लेता है।
सनातन धर्म और हिंदू पूजा पद्धति में मंत्रों के जाप का विशेष महत्व माना गया है। चाहे भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र हो या फिर महामृत्युंजय और गायत्री मंत्र, किसी भी देवी-देवता की आराधना के लिए जब भक्त माला हाथ में लेते हैं, तो उसमें दानों की संख्या हमेशा 108 (108 Beads in Mala) ही होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह संख्या न कम होती है और न ज्यादा? आखिर 108 अंक में ऐसा क्या खास है जो इसे इतना पवित्र और अचूक माना गया है? इसके पीछे केवल कोई एक धार्मिक मान्यता नहीं है, बल्कि हमारे पूज्य संतों, ज्योतिषियों और प्राचीन वैज्ञानिकों ने इसके पीछे बेहद गहरा खगोलीय और आध्यात्मिक गणित छिपा रखा है।ज्योतिष और नक्षत्रों का अद्भुत गणित: 108 अंक से जुड़ा है आपका भाग्यभारतीय वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) के अनुसार, संपूर्ण ब्रह्मांड को 27 नक्षत्रों में विभाजित किया गया है। इन 27 नक्षत्रों के चार मुख्य चरण होते हैं, जिन्हें पद कहा जाता है। यदि हम इस खगोलीय व्यवस्था का गणितीय गुणा करें, तो $27 imes 4$ का कुल योग ठीक 108 आता है। इसके अलावा, ज्योतिष शास्त्र में 12 राशियां और 9 मुख्य ग्रह माने गए हैं। जब इन ग्रहों का राशियों के साथ संबंध देखा जाता है, तो $12 imes 9$ का परिणाम भी 108 ही प्राप्त होता है। यही वजह है कि जब कोई श्रद्धालु 108 दानों की माला फेरता है, तो वह अनजाने में ही पूरे ब्रह्मांड के चक्कर लगा लेता है और सभी ग्रहों व नक्षत्रों को अपने अनुकूल कर लेता है।सूर्य और पृथ्वी की दूरी का वैज्ञानिक रहस्य: क्या कहते हैं खगोलविद?प्राचीन भारतीय विज्ञान और आधुनिक खगोल शास्त्र का बड़ा विश्लेषण: जाप माला के 108 दानों का सीधा संबंध हमारे सौरमंडल के राजा सूर्य देव से है। खगोलीय गणनाओं के अनुसार, सूर्य का व्यास (Diameter) और पृथ्वी से सूर्य की दूरी के बीच का अनुपात लगभग 108 गुना है। ठीक इसी तरह, पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी भी चंद्रमा के व्यास की करीब 108 गुना है। हमारे ऋषियों-मुनियों को हजारों साल पहले इस ब्रह्मांडीय दूरी का सटीक ज्ञान था। इसलिए उन्होंने ईश्वर से जुड़ने के लिए और शरीर चक्रों को जाग्रत करने के लिए 108 की संख्या को सबसे अचूक माध्यम बनाया।हिंदू शास्त्रों के अनुसार, एक स्वस्थ मनुष्य दिन और रात मिलाकर 24 घंटों में कुल 21,600 बार सांस लेता है। इसमें से 12 घंटे सोने और अन्य कार्यों में निकल जाते हैं, बचे 12 घंटों में मनुष्य 10,800 बार सांस लेता है। इसी संख्या के अंतिम दो शून्यों को हटाकर 108 मनकों की माला तैयार की गई है, ताकि भक्त का हर एक जाप उसकी सांसों के साथ सीधे ईश्वर तक पहुंच सके।क्या है माला का 'सुमेरु' और क्यों इसे लांघना माना जाता है वर्जित?यदि आपने कभी ध्यान दिया हो, तो 108 दानों के अलावा माला के शीर्ष पर एक बड़ा दाना अलग से लगा होता है, जिसे 'सुमेरु' (Sumeru Bead) कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जब भी मंत्रों का जाप किया जाता है, तो सुमेरु को कभी भी लांघा नहीं जाता। 108 मनके पूरे होने के बाद वहीं से माला को पलट लिया जाता है। सुमेरु को ब्रह्मांड के केंद्र और ईश्वर का प्रतीक माना गया है। टियर-2 और टियर-3 शहरों से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचलों के मंदिरों में जब पंडित भक्तों को दीक्षा देते हैं, तो वे इस नियम को सबसे अनिवार्य बताते हैं ताकि आध्यात्मिक ऊर्जा शरीर के भीतर ही संचित रहे। इस अद्भुत व्यवस्था से साफ है कि हमारी सनातनी परंपरा का एक-एक नियम विज्ञान की कसौटी पर पूरी तरह खरा उतरता है।
क्या युवाओं का डिग्री से मोहभंग हो गया? पहली बार घटा UG कॉलेजों में एडमिशन; हैरान कर देगी वजह!
भारत में हर साल लाखों युवा कॉलेज लाइफ और एक अदद अदभुत करियर का सपना लेकर ग्रेजुएशन (UG) में एडमिशन लेते हैं। लेकिन हाल ही में आए सरकारी आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण
मध्य प्रदेश: दतिया में जुलूस, सभा और प्रदर्शन पर रोक, शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा-163 लागू
मध्य प्रदेश के दतिया जिले में होने वाले विधानसभा के उपचुनाव के मद्देनजर जिला प्रशासन ने दतिया अनुभाग में कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा-163 लागू कर दी है। यहां जुलूस, सभा और प्रदर्शन आदि पर रोक लगा दी गई है। इसके लिए प्रशासन की अनुमति आवश्यक होगी।
ओरी ने दिखाई अंशुला की शादी की इनसाइड झलक, पुंगी सॉन्ग पर पूरे कपूर खानदान ने मचाया गदर!
बॉलीवुड के सबसे प्रतिष्ठित और चहेते परिवारों में से एक, कपूर खानदान से इस वक्त की बेहद खूबसूरत और बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। बोनी कपूर की लाडली और अभिनेता अर्जुन कपूर की सगी बहन अंशुला कपूर (Anshula Kapoor) शादी के पवित्र बंधन में बंध चुकी हैं। इस ग्रैंड वेडिंग की आधिकारिक तस्वीरें आने से पहले ही, बॉलीवुड के मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और सेलेब्रिटीज के चहेते दोस्त ओरी (Orry) ने शादी के जश्न की कुछ ऐसी धमाकेदार इनसाइड तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर लीक कर दिए हैं, जिसने इंटरनेट का तापमान बढ़ा दिया है। शादी के संगीत और रिसेप्शन पार्टी में पूरे कपूर खानदान ने ऐसा गदर मचाया है कि उसके वीडियो लगातार वायरल हो रहे हैं।संगीत सेरेमनी में फूटा मनोरंजन का बम: अर्जुन, जान्हवी और खुशी का धमाकेदार डांसअंशुला कपूर की शादी के इस जश्न में बॉलीवुड के तमाम बड़े सितारे और पूरा कपूर परिवार एक छत के नीचे नजर आया। ओरी द्वारा शेयर किए गए इनसाइड वीडियो में शादी की सबसे बड़ी हाइलाइट तब देखने को मिली जब मंच पर 'पुंगी' (Pungi Song) गाना बजा। इस गाने की धुन सुनते ही दूल्हा-दुल्हन के साथ-साथ भाई अर्जुन कपूर, बहनें जान्हवी कपूर, खुशी कपूर और शनाया कपूर ने स्टेज पर मोर्चा संभाल लिया। सभी भाई-बहनों ने मिलकर इस फुट-टैपिंग नंबर पर ऐसा एनर्जेटिक डांस किया कि वहां मौजूद मेहमान भी खुद को झूमने से नहीं रोक पाए। बोनी कपूर भी अपनी बेटी की शादी की खुशी में बेहद भावुक और खुश नजर आए।ओरी के कैमरों में कैद हुईं अनदेखी झलकियां, एथनिक लुक में सजे सितारेबॉलीवुड फैशन और वेडिंग ट्रेंड्स के इनसाइडर एक्सपर्ट्स का बड़ा दावा: अंशुला कपूर की इस शादी ने साल 2026 के नए वेडिंग गोल्स सेट कर दिए हैं। जहां अंशुला अपने ब्राइडल लहंगे में बेहद खूबसूरत और रॉयल लग रही थीं, वहीं जान्हवी और खुशी कपूर के पेस्टल कलर के डिजाइनर लहंगों ने महफिल लूट ली। ओरी ने जिस तरह से इस प्राइवेट फैमिली वेडिंग के मजेदार और अनफिल्टर्ड मोमेंट्स को फैन्स के सामने पेश किया है, उसने इस शादी को गूगल डिस्कवर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर टॉप ट्रेंडिंग टॉपिक बना दिया है। कपूर खानदान का यह पारिवारिक जुड़ाव हमेशा फैन्स का दिल जीत लेता है।समारोह के दौरान ओरी को हमेशा की तरह अपने सिग्नेचर पोज में न्यूलीमैरिड कपल और पूरी स्टार कास्ट के साथ तस्वीरें क्लिक कराते हुए देखा गया।स्थानीय स्तर पर बॉलीवुड फैन्स और सोशल मीडिया पर शादी की भारी चर्चाजियोपॉलिटिकल और स्थानीय एंटरटेनमेंट हब्स (Geographical Entertainment Trends) के नजरिए से देखें तो देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों जैसे लखनऊ, इंदौर, पटना, जयपुर और अहमदाबाद के युवाओं के बीच इस हाई-प्रोफाइल शादी को लेकर भारी क्रेज देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया ग्रुप्स पर अंशुला के वेडिंग आउटफिट्स और अर्जुन-जान्हवी के डांस मूव्स की रील्स लगातार शेयर की जा रही हैं। लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि इस ग्रैंड वेडिंग में कौन-कौन से वीआईपी मेहमान शामिल हुए थे। एआई और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के दौर में, ओरी द्वारा लीक की गई इनसाइड वीडियो क्लिप्स ने इस शाही शादी के रोमांच को दोगुना कर दिया है।
बॉलीवुड के 'मिस्टर परफेक्टनिस्ट' यानी आमिर खान (Aamir Khan) एक बार फिर अपनी पर्सनल लाइफ और अपनी एक बेहद खास विदेशी यात्रा को लेकर जबरदस्त सुर्खियों में आ गए हैं। सोशल मीडिया और सिनेमा गलियारों में इस वक्त एक बेहद सनसनीखेज खबर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि 60 वर्ष की उम्र में आमिर खान अपनी करीबी दोस्त गौरी संग ऑस्ट्रेलिया में अपना हनीमून मनाने की प्लानिंग कर रहे हैं। इतना ही नहीं, इस खबर को तब और ज्यादा हवा मिल गई जब यह बात सामने आई कि इस ट्रिप पर आमिर के साथ उनके दोनों बेटे जुनैद खान और आजाद राव खान भी साथ रहने वाले हैं और इसके लिए उन्होंने बाकायदा मेलबर्न की टिकटें भी बुक करा ली हैं। आइए जानते हैं कि इस वायरल दावे के पीछे की असली इनसाइड स्टोरी क्या है।हनीमून या कुछ और? जानिए क्यों कटवाई गई है ऑस्ट्रेलिया (IFFM) की टिकटइस पूरे मामले की जब गहराई से पड़ताल की गई, तो पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही निकल कर सामने आई। दरअसल, यह पूरी यात्रा कोई गुपचुप हनीमून ट्रिप नहीं, बल्कि एक बेहद प्रतिष्ठित सिनेमाई इवेंट का हिस्सा है। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित होने वाले 'इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न' (IFFM) में आमिर खान को एक विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। आमिर खान अपनी आगामी फिल्मों और सिनेमाई प्रोजेक्ट्स के सिलसिले में इस इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर शामिल होने जा रहे हैं। रही बात दोनों बेटों के साथ जाने की, तो आमिर अक्सर अपने पारिवारिक दौरों और खास मौकों पर बच्चों को साथ रखना पसंद करते हैं, जिसे सोशल मीडिया पर 'हनीमून' का भ्रामक नाम देकर वायरल किया जा रहा है।कौन हैं गौरी और क्या है आमिर खान के साथ उनके रिश्ते का पूरा सच?बॉलीवुड और मनोरंजन जगत के वरिष्ठ इनसाइडर विश्लेषकों का कहना है: इंटरनेट पर किसी भी सेलिब्रिटी की दोस्ती या उनके साथ दिखने वाले चेहरों को तुरंत शादी या रिलेशनशिप से जोड़कर पेश कर दिया जाता है। आमिर खान और गौरी के बीच का रिश्ता विशुद्ध रूप से पेशेवर और एक अच्छी दोस्ती का है। आमिर खान इन दिनों अपनी अगली फिल्मों के प्रोडक्शन और क्रिएटिव आइडियाज पर काम कर रहे हैं, और इसी सिलसिले में उनकी टीम और करीबी लोग उनके साथ ट्रैवल कर रहे हैं। 60 की उम्र में शादी या हनीमून की ये अफवाहें सिर्फ और सिर्फ सोशल मीडिया पर क्लिकबेट बटोरने का एक जरिया हैं।आमिर खान ने हमेशा अपनी निजी जिंदगी को लेकर बेहद सधे हुए और स्पष्ट बयान दिए हैं, इसलिए फैन्स को ऐसी किसी भी उड़ती हुई खबर पर बिना आधिकारिक पुष्टि के भरोसा नहीं करना चाहिए।सोशल मीडिया पर फैन्स के बीच मची खलबली, टियर-2 और टियर-3 शहरों में चर्चा तेजजियोपॉलिटिकल और स्थानीय एंटरटेनमेंट हब्स (Geographical Entertainment Trends) के लिहाज से देखें तो बॉलीवुड की खबरों को लेकर देश के छोटे कस्बों और टियर-2, टियर-3 शहरों में बहुत ज्यादा उत्सुकता रहती है। यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान के स्थानीय सोशल मीडिया ग्रुप्स पर आमिर खान की इस कथित ट्रिप को लेकर फैन्स के बीच लगातार बहस छिड़ी हुई है। कुछ लोग जहां उनके इस कूल अंदाज की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कई यूजर्स इसे सिर्फ सिनेमाई पब्लिसिटी स्टंट मान रहे हैं। सच तो यह है कि आमिर खान फिलहाल अपनी फिल्मों और अपने बेटों के करियर को संवारने में पूरी तरह व्यस्त हैं और मेलबर्न की यह यात्रा पूरी तरह से प्रोफेशनल और सिनेमा को समर्पित है।
देशभर के तकनीकी शिक्षा संस्थानों और इंजीनियरिंग कॉलेजों में इस साल एडमिशन का एक बेहद चौंकाने वाला और नया ट्रेंड सामने आया है। कभी कोर ब्रांचेज मानी जाने वाली सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल के दबदबे को पीछे छोड़ते हुए एक खास इंजीनियरिंग स्ट्रीम छात्रों की पहली और सबसे पसंदीदा पसंद बन चुकी है। देश की प्रमुख टेक्निकल यूनिवर्सिटीज और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) से लेकर स्थानीय स्तर के निजी कॉलेजों में होने वाले दाखिलों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो यह साफ हो गया है कि हर 10 में से 4 स्टूडेंट्स केवल इसी एक फील्ड में एडमिशन ले रहे हैं। इस बंपर मांग की वजह से कॉलेजों में इस सीट को पाने के लिए मारामारी और कड़ी प्रतिस्पर्धा का माहौल बन गया है।कंप्यूटर साइंस और एआई (AI) का नया दौर: क्यों दीवाने हो रहे हैं स्टूडेंट्स?तकनीकी विशेषज्ञों और करियर काउंसिलर्स के अनुसार, कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (Computer Science Engineering) और इसके आधुनिक स्पेशलाइजेशन जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) और डेटा साइंस ने इस समय पूरे एजुकेशन मार्केट पर कब्जा कर लिया है। आज के आधुनिक दौर में जिस तेजी से जेनरेटिव एआई और ऑटोमेशन की तकनीक आगे बढ़ रही है, उसे देखते हुए 40 प्रतिशत से अधिक छात्र अपना सुरक्षित भविष्य इसी सेक्टर में देख रहे हैं। यही वजह है कि काउंसलिंग के पहले ही राउंड में कंप्यूटर साइंस की सीटें पूरी तरह से फुल हो जाती हैं।बंपर प्लेसमेंट और हाई-पेइंग सैलरी पैकेज हैं सबसे बड़ा आकर्षणशिक्षा जगत और आईटी इंडस्ट्री के दिग्गजों का मानना है: छात्रों का इस ब्रांच की तरफ झुकाव होना बेहद स्वाभाविक है। वर्तमान ग्लोबल मार्केट में सबसे ज्यादा और हाई-पेइंग नौकरियां आईटी (IT) और टेक कंपनियों में ही निकल रही हैं। दूसरे कोर इंजीनियरिंग क्षेत्रों की तुलना में कंप्यूटर साइंस के फ्रेशर्स को शुरुआती पैकेज काफी शानदार मिलता है। इसके अलावा, वर्क फ्रॉम होम (WFH) की सुविधा और ग्लोबल एक्सपोजर की वजह से भी टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवा इसे अपनी पहली प्राथमिकता बना रहे हैं।मांग को देखते हुए कई बड़ी यूनिवर्सिटीज ने अपने यहां ट्रेडिशनल कोर्सेज की सीटें कम करके एआई और डेटा साइंस के नए सेक्शंस शुरू कर दिए हैं।स्थानीय इंजीनियरिंग कॉलेजों और राज्यों की काउंसलिंग पर भी पड़ा गहरा असरजियोपॉलिटिकल और स्थानीय (Geographical Education Hubs) स्तर की बात करें तो उत्तर प्रदेश के एकेटीयू (AKTU), दिल्ली के आईपी यूनिवर्सिटी (IPU), कर्नाटक के कॉमेडके (COMEDK) और महाराष्ट्र के एमएचटी-सीईटी (MHT-CET) जैसे प्रमुख स्टेट काउंसलिंग बोर्ड्स में भी यही ट्रेंड मजबूती से देखा जा रहा है। स्थानीय स्तर पर लखनऊ, नोएडा, बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद जैसे टेक-हब्स के आस-पास स्थित कॉलेजों में इस कंप्यूटर साइंस और एआई ब्रांच के कट-ऑफ ऐतिहासिक रूप से ऊंचे चले गए हैं। जानकारों की सलाह है कि छात्रों को केवल भेड़चाल में शामिल होने के बजाय कोडिंग में अपनी वास्तविक रुचि और एप्टीट्यूड को परख कर ही इस कोर या स्पेशलाइज्ड फील्ड का चयन करना चाहिए।
नौकरीपेशा पति की असामयिक मृत्यु के बाद परिवार को आर्थिक संकट से उबारने के लिए सरकार अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) का प्रावधान करती है। अक्सर देखा जाता है कि कम उम्र में विधवा हुई महिलाएं अपने भविष्य और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बाद में दूसरा विवाह करने का फैसला लेती हैं। लेकिन दूसरी शादी (Remarriage) के इस फैसले के साथ ही एक बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा हो जाता है कि क्या पुनर्विवाह करने के बाद मृतक कर्मचारी की पत्नी से अनुकंपा के आधार पर मिली सरकारी नौकरी वापस छीन ली जाएगी? इस विषय पर देश के विभिन्न विभागों के सेवा नियमों (Service Rules) और अदालतों के कई महत्वपूर्ण फैसले आ चुके हैं, जिन्हें हर कामकाजी महिला के लिए जानना बेहद जरूरी है।क्या दूसरी शादी करने से बदल जाता है मृतक कर्मचारी से रिश्ता?कानूनी और प्रशासनिक नियमों के मुताबिक, अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य कर्मचारी के निधन के तुरंत बाद उसके आश्रित परिवार को भुखमरी और कंगाली से बचाना होता है। यदि मृतक की पत्नी को योग्यता के आधार पर अनुकंपा पर सरकारी नौकरी मिल जाती है, तो वह उस पद पर एक स्वतंत्र सरकारी सेवक (Government Servant) के रूप में कार्य करने लगती है। देश की सर्वोच्च अदालत और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने अपने ऐतिहासिक फैसलों में साफ किया है कि अनुकंपा पर नौकरी मिलने के बाद यदि कोई महिला दूसरी शादी करती है, तो महज इस आधार पर उसकी नौकरी नहीं छीनी जा सकती। अदालत का मानना है कि पुनर्विवाह करने से भी वह महिला अपने दिवंगत पति के बच्चों की मां और उसके बूढ़े माता-पिता की बहू बनी रहती है।सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट्स का क्या है ऐतिहासिक रुख?कानूनी विशेषज्ञों और सेवा नियमों के जानकारों का कहना है: कई राज्यों के सेवा नियमों और अदालतों के फैसलों में यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है कि पुनर्विवाह किसी भी नागरिक का व्यक्तिगत और मौलिक अधिकार है। यदि अनुकंपा नियुक्ति की शर्तों को पूरा करते हुए एक बार नौकरी दे दी गई है, तो दूसरी शादी करने को सेवा शर्तों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। हालांकि, इसमें एक सबसे महत्वपूर्ण पेंच यह फंसा होता है कि महिला को अपने दिवंगत पति के आश्रितों, जैसे कि उसके बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता का भरण-पोषण करना अनिवार्य होगा। यदि वह ऐसा नहीं करती है, तो परिवार की शिकायत पर विभाग कार्रवाई कर सकता है।केंद्रीय सिविल सेवा (सीसीएस) नियमों के तहत भी कुछ विभागों में इसके लिए बेहद स्पष्ट गाइडलाइंस बनाई गई हैं, जो महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करती हैं।स्थानीय स्तर पर राज्यों के नियमों में भिन्नता और आश्रितों की जिम्मेदारीभौगोलिक और क्षेत्रीय (Geographical Rules) दृष्टिकोण से देखें तो भारत के अलग-अलग राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान) के सिविल सेवा अनुकंपा नियुक्ति नियमों में थोड़े-बहुत स्थानीय बदलाव देखने को मिलते हैं। स्थानीय स्तर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों में ऐसे कई मामले सामने आते हैं जहां ससुराल पक्ष द्वारा दूसरी शादी के बाद नौकरी का विरोध किया जाता है। लेकिन कानूनी रूप से यदि महिला अपने पहले पति के बच्चों की जिम्मेदारी सही ढंग से निभा रही है, तो उसकी नौकरी पूरी तरह सुरक्षित रहती है। डिजिटल और एआई सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के दौर में इस विषय पर सही और सटीक कानूनी जानकारी होना आवश्यक है ताकि किसी भी कामकाजी महिला को उनके कानूनी अधिकारों से वंचित न किया जा सके।
भारत में नीट (NEET), पेपर लीक और भर्ती घोटालों से छात्र परेशान हैं, वहीं एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। जानिए क्यों मोदी सरकार के बड़े-बड़े मंत्रियों के बच्चे ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड जैसे विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं और इस पर क्या ...
विमानन इतिहास से एक बेहद हैरान और विचलित कर देने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया के एविएशन सेक्टर को हिलाकर रख दिया है। एक ही दिन के भीतर एक ही एयरलाइन कंपनी के दो विमान भीषण हादसों का शिकार हो गए हैं। इस दोहरे विमान हादसे (Double Plane Crash) में कम से कम 10 लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। एक ही एयरलाइन के साथ लगातार हुए इन दो बड़े हादसों ने यात्रियों की सुरक्षा और विमानों के रखरखाव पर बहुत बड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।कुछ ही घंटों के अंतराल पर दो विमानों ने तोड़ा दम, सुरक्षा तंत्र पर उठे सवालशुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, पहला हादसा उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद तकनीकी खराबी के कारण हुआ, जहां विमान अनियंत्रित होकर क्रैश हो गया। अभी राहत और बचाव दल पहले हादसे की जगह पर तफ्तीश कर ही रहा था कि कुछ ही घंटों के भीतर उसी एयरलाइन के दूसरे विमान के भी क्रैश होने की डरावनी खबर आ गई। इस दोहरे झटके से न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा एजेंसियां भी हैरान हैं। एक्सपर्ट्स इस बात की गहनता से जांच कर रहे हैं कि क्या यह किसी गंभीर तकनीकी खराबी का नतीजा था, मौसम की खराबी थी या फिर एयरलाइन प्रबंधन की कोई बड़ी लापरवाही।युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, ब्लैक बॉक्स की तलाश तेजस्थानीय आपदा प्रबंधन और एविएशन एक्सपर्ट्स का कहना है: किसी एक एयरलाइन के दो विमानों का एक ही दिन क्रैश होना बेहद दुर्लभ और खतरनाक घटना है। दोनों दुर्घटना स्थलों पर स्थानीय प्रशासन और रेस्क्यू टीमों को युद्ध स्तर पर तैनात किया गया है। मलबे से शवों और घायलों को निकालने का काम जारी है। हमारा पूरा ध्यान अब दोनों विमानों के ब्लैक बॉक्स (Black Box) को ढूंढने पर है, क्योंकि उसी से साफ हो पाएगा कि आसमान में उन आखिरी पलों में वास्तव में क्या हुआ था।हादसे के बाद संबंधित एयरलाइन ने अपनी सभी मौजूदा उड़ानों को अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया है और यात्रियों की सुरक्षा के लिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।दुनिया भर के हवाई यात्रियों में खौफ का माहौल, स्थानीय एयरपोर्ट्स पर अलर्टइस भयानक खबर के बाद से दुनिया भर के हवाई यात्रियों और स्थानीय एयरपोर्ट्स पर सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। भारत सहित विभिन्न देशों के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियां भी इस घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। स्थानीय स्तर पर यात्रा करने वाले कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर इस एयरलाइन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े सवाल उठाए हैं। इस हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि एविएशन सेक्टर में सुरक्षा मानकों के साथ थोड़ी सी भी अनदेखी कितनी बड़ी इंसानी तबाही का कारण बन सकती है।
प्रशांत क्षेत्र में भारत की कूटनीति को एक नई और ऐतिहासिक उड़ान मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड के ऑकलैंड की सफल आधिकारिक यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को एक अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। इस बेहद महत्वपूर्ण दौरे के दौरान भारत और न्यूजीलैंड के बीच एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 18 द्विपक्षीय समझौतों (Bilateral Agreements) पर मुहर लगी है। इसके साथ ही, वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कद को स्वीकार करते हुए न्यूजीलैंड ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे को अपना खुला और मजबूत समर्थन दे दिया है। इस यात्रा को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के भू-राजनीतिक समीकरणों को बदलने वाला माना जा रहा है।व्यापार से लेकर तकनीक तक: इन 18 समझौतों से कैसे बदलेगी दोनों देशों की तकदीरभारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए ये 18 समझौते केवल कागजी कार्रवाई नहीं हैं, बल्कि इनमें दोनों देशों के भविष्य का रोडमैप छिपा है। इन समझौतों में मुख्य रूप से मुक्त व्यापार को बढ़ावा देने, डिजिटल कॉमर्स, कृषि तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) और दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क (Direct Flights) को आसान बनाने जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। न्यूजीलैंड की अत्याधुनिक डेयरी और कृषि तकनीक का फायदा अब सीधे भारतीय किसानों को मिल सकेगा। वहीं, भारत के तेजी से बढ़ते आईटी और फिनटेक सेक्टर्स के लिए न्यूजीलैंड के बाजार के दरवाजे पूरी तरह से खुल गए हैं।संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में न्यूजीलैंड का समर्थन भारत के लिए क्यों है खासअंतरराष्ट्रीय कूटनीति के विशेषज्ञों का मानना है: UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए न्यूजीलैंड का नया और स्पष्ट सपोर्ट मिलना भारत की बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत है। चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति व स्थिरता बनाए रखने के लिए न्यूजीलैंड अब भारत को एक अपरिहार्य और मजबूत वैश्विक साझेदार के रूप में देख रहा है। यह समर्थन आने वाले समय में वैश्विक मंचों पर भारत की आवाज को और अधिक वजनदार बनाएगा।इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर भी गहरी प्रतिबद्धता जताई है।स्थानीय स्तर पर प्रवासियों और छात्रों के लिए खुले सुनहरे अवसरइस ऐतिहासिक यात्रा का एक सबसे बड़ा और व्यावहारिक फायदा न्यूजीलैंड में रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों (Diaspora) और वहां पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों को मिलने वाला है। समझौतों के तहत दोनों देशों ने शिक्षा और वर्क वीजा की प्रक्रियाओं को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने पर सहमति जताई है। इसके अलावा, भारत के विभिन्न राज्यों से हर साल न्यूजीलैंड जाने वाले पर्यटकों और व्यापारियों के लिए यात्रा के नियमों को लचीला बनाया जाएगा। ऑकलैंड में भारतीय समुदाय के बीच पीएम मोदी के इस दौरे को लेकर भारी उत्साह देखा गया, जिसका सीधा सकारात्मक असर भारत में मौजूद उनके पैतृक गांवों और शहरों (Geographical Connect) के आर्थिक विकास पर भी पड़ेगा।
वैश्विक राजनीति और मिडिल ईस्ट के अशांत माहौल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बेहद आक्रामक और बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने साफ शब्दों में ईरान के सामने एक ऐसी शर्त रख दी है, जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी बातचीत या समझौते से पहले तेहरान को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग यानी 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए हमेशा खुला रखने का खुला और आधिकारिक ऐलान करना होगा। ट्रंप के मुताबिक, इस कदम के बिना ईरान की किसी भी बात पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं किया जा सकता।आखिर क्यों पूरी दुनिया के लिए इतना खास है होर्मुज जलडमरूमध्य?रणनीतिक और आर्थिक रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया की 'आर्थिक लाइफलाइन' माना जाता है। वैश्विक स्तर पर कुल तेल व्यापार का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान अक्सर अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ तनाव बढ़ने पर इस जलमार्ग को बंद करने या व्यापारिक जहाजों को जब्त करने की धमकी देता रहा है। ट्रंप अच्छी तरह जानते हैं कि अगर इस रास्ते में थोड़ी सी भी रुकावट आती है, तो पूरी दुनिया में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिसका सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक बाजारों पर पड़ेगा। यही वजह है कि उन्होंने इसे अपनी सबसे पहली और बड़ी शर्त बनाया है।ट्रंप की 'मैक्सिमम प्रेशर' नीति की वापसी और ईरान की घेराबंदीवैश्विक कूटनीति के जानकारों का कहना है: डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान उनकी पुरानी 'मैक्सिमम प्रेशर' (अधिकतम दबाव) वाली रणनीति का हिस्सा है। वह ईरान पर आर्थिक और रणनीतिक रूप से इतना दबाव बना देना चाहते हैं कि उसे बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर होना पड़े। होर्मुज को खोलने की शर्त रखकर ट्रंप ने न केवल अमेरिकी हितों की रक्षा की है, बल्कि दुनिया के अन्य बड़े तेल आयातक देशों को भी अपने पाले में लाने का दांव खेला है।ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान जब तक अपनी आक्रामक नीतियों और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं दी जानी चाहिए।भारत समेत स्थानीय और वैश्विक बाजारों पर क्या होगा इसका असर?इस पूरे घटनाक्रम पर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों की भी पैनी नजर बनी हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करता है, और ये सभी जहाज होर्मुज के रास्ते से ही भारत के स्थानीय बंदरगाहों तक पहुंचते हैं। अगर ट्रंप के इस दबाव के बाद ईरान झुकता है और होर्मुज जलमार्ग को सुरक्षित घोषित करता है, तो इससे भारत के तेल आयात की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ट्रंप की इस सीधी चुनौती और कड़ी शर्त पर ईरान के सर्वोच्च नेता और सरकार की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है।
वैश्विक डिफेंस और जियोपॉलिटिक्स के मंच से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। रूस का सबसे घातक और अचूक माना जाने वाला S-400 ट्रायम्फ मिसाइल डिफेंस सिस्टम (S-400 Missile System) इस समय दो अलग-अलग देशों के लिए बिल्कुल अलग कहानी लिख रहा है। एक तरफ जहां यह अत्याधुनिक सिस्टम भारत की सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक अभेद्य और मजबूत ढाल बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ तुर्की (Turkey) के लिए यह एक बड़ा सिरदर्द और अंतरराष्ट्रीय बवाल का कारण बन चुका है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन अब इस सिस्टम को किसी तीसरे देश को बेचने या इससे पीछा छुड़ाने के रास्ते तलाश रहे हैं, लेकिन इस पूरे सौदे की चाबी अब भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हाथों में है।तुर्की के लिए क्यों गले की फांस बन गया रूस का यह महाविनाशक सिस्टम?तुर्की ने जब अमेरिका के कड़े विरोध और प्रतिबंधों की धमकियों को दरकिनार कर रूस से S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदा था, तो इसे एर्दोगन का एक बड़ा और स्वतंत्र रणनीतिक कदम माना गया था। लेकिन इस एक फैसले की तुर्की को बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ी। अमेरिका ने न केवल तुर्की पर सख्त 'काट्सा' (CAATSA) प्रतिबंध लगाए, बल्कि उसे अपने सबसे आधुनिक F-35 स्टील्थ फाइटर जेट प्रोग्राम से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके चलते तुर्की की वायुसेना को आधुनिक लड़ाकू विमानों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। अब अपनी खोई हुई सैन्य ताकत और अमेरिका के साथ रिश्तों को सुधारने के लिए तुर्की इस रूसी सिस्टम को किसी तरह ठिकाने लगाना चाहता है, जिससे वह F-35 प्रोग्राम में दोबारा एंट्री पा सके।भारत का S-400 और तुर्की का सौदा: दोनों में क्या है बुनियादी अंतर?जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट्स और रक्षा मामलों के विश्लेषकों का मानना है कि भारत और तुर्की के मामलों में जमीन-आसमान का अंतर है। भारत ने अपनी संप्रभुता और सीमाओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए रूस के साथ यह डील की थी और अमेरिकी दबाव के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया था। भारतीय वायुसेना (IAF) ने S-400 के स्क्वाड्रनों को चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर इस तरह तैनात किया है कि दुश्मन का कोई भी विमान या मिसाइल भारत की हवाई सीमा में घुसने की हिम्मत नहीं कर सकता। भारत के लिए यह रक्षा का सबसे बड़ा हथियार है, जबकि तुर्की के लिए यह केवल एक राजनीतिक और आर्थिक बोझ बनकर रह गया है।डिफेंस एक्सपर्ट्स का बड़ा दावा: तुर्की चाहकर भी S-400 को इतनी आसानी से किसी तीसरे देश को नहीं बेच सकता। रूस के साथ हुए मूल समझौते में एंड-यूज़र सर्टिफिकेट (End-User Certificate) की सख्त शर्तें शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि मॉस्को यानी व्लादिमीर पुतिन की लिखित अनुमति के बिना तुर्की इस सिस्टम के एक नट-बोल्ट को भी किसी को ट्रांसफर नहीं कर सकता। पुतिन इस समय पूरी तरह से ड्राइविंग सीट पर हैं और वह अमेरिका को फायदा पहुंचाने वाला कोई भी कदम आसानी से नहीं उठाने देंगे।वैश्विक रक्षा बाजार और भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी पर इसका असरइस पूरे घटनाक्रम का असर केवल तुर्की तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के रक्षा बाजार और भारत-रूस के मजबूत रणनीतिक रिश्तों की गवाही देता है। दुनिया के रक्षा जानकार अब भारत की उस कूटनीतिक जीत की तारीफ कर रहे हैं, जिसके तहत भारत ने रूस से हथियार भी खरीदे और अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को भी प्रभावित नहीं होने दिया। तुर्की की इस छटपटाहट और पुतिन के कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक मिलिट्री डील्स में केवल पैसा ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी कूटनीति और मजबूत वैश्विक साख की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
हिंदू धर्म और वैदिक पंचांग में अमावस्या तिथि का एक विशेष और बेहद पवित्र स्थान है. इस तिथि को मुख्य रूप से देवी-देवताओं की आराधना, पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण व श्राद्ध कर्म के लिए सबसे उत्तम माना जाता है. हर महीने आने वाली अमावस्या का अपना एक अलग धार्मिक महत्व होता है, लेकिन आषाढ़ मास में आने वाली अमावस्या (Ashadha Amavasya) को सुख-समृद्धि, पुण्य प्राप्ति और पितृ दोषों से मुक्ति के लिए बेहद खास माना गया है.साल 2026 में आषाढ़ अमावस्या की सही तारीख को लेकर आम जनता और व्रतियों के बीच थोड़ा भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि यह 13 जुलाई को है या 14 जुलाई को. आइए पंचांग के गणित के अनुसार जानते हैं इसकी सही तारीख, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजा विधि.13 या 14 जुलाई? जानें क्या कहती है उदया तिथिपंचांग की गणना के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की शुरुआत 13 जुलाई 2026, सोमवार को शाम 6 बजकर 49 मिनट पर होने जा रही है. इस तिथि का समापन अगले दिन 14 जुलाई 2026, मंगलवार को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर होगा.तारीख का निर्णय: सनातन धर्म के नियमों के अनुसार, किसी भी व्रत, त्योहार या अमावस्या जैसे पर्व का निर्धारण 'उदया तिथि' (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) के आधार पर किया जाता है. चूंकि 14 जुलाई को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि पूरी तरह से व्याप्त रहेगी, इसलिए आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई 2026, मंगलवार को ही मनाई जाएगी. इसी दिन व्रत रखना, पवित्र नदियों में स्नान करना, दान देना और पितृ तर्पण करना शास्त्र सम्मत और महाकल्याणकारी रहेगा.स्नान-दान और तर्पण का सबसे शुभ मुहूर्त14 जुलाई 2026 को आषाढ़ अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से ठीक पहले) में उठकर स्नान करना सर्वोत्तम माना गया है.घर पर स्नान का नियम: यदि आप किसी पवित्र नदी (जैसे गंगा, यमुना या नर्मदा) के तट पर जाने में असमर्थ हैं, तो घर पर ही नहाने के सामान्य पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं.तर्पण का समय: सूर्योदय होने के बाद से लेकर दोपहर के समय तक का काल पितृ तर्पण, श्राद्ध कर्म और दान-पुण्य के लिए सबसे शुभ और फलदायी माना जाता है.आषाढ़ अमावस्या की सरल और प्रामाणिक पूजा विधिइस पावन दिन पर पुण्य लाभ कमाने के लिए सुबह से लेकर शाम तक इस विधि से पूजा-अर्चना करें:प्रातः काल नियम: सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान करें और साफ-स्वच्छ वस्त्र (यदि संभव हो तो सफेद या पीले रंग के) धारण करें.सूर्य अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और फूल डालकर भगवान सूर्य नारायण को जल अर्पित (अर्घ्य) करें.देव आराधना: घर के मंदिर या पूजा स्थल में बैठकर जगत के पालनहार भगवान विष्णु, धन की देवी माता लक्ष्मी और न्याय के देवता शनिदेव की विधि-विधान से धूप-दीप जलाकर पूजा करें.पीपल पूजा: इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है. पीपल में त्रिदोषों और पितरों का वास माना गया है.पितृ तर्पण: अपने पूर्वजों (पितरों) को याद करते हुए हाथ में काले तिल, जौ और जल लेकर तर्पण करें और उनसे परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करें.दान प्रक्रिया: पूजा संपन्न होने के बाद अपनी क्षमता के अनुसार किसी गरीब, ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न और वस्त्र आदरपूर्वक दान करें.इस दिन क्या करना रहेगा बेहद शुभ?भगवान विष्णु के महामंत्रों का जाप करें और धार्मिक ग्रंथों (जैसे भगवद्गीता) का पाठ करें.किसी स्थानीय गौशाला में जाकर गायों को हरा चारा, लापसी या भोजन खिलाएं.चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा और मछलियों को आटे की गोलियां खिलाना भी इस दिन विशेष फल देता है.अमावस्या पर दान का विशेष महत्व और राशियांधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या तिथि पर किया गया छोटा सा दान भी कई गुना होकर वापस लौटता है. इस दिन काले तिल, गेहूं, चावल, कपड़े, छाता, जल से भरा मिट्टी का पात्र और सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा का दान करना सबसे उत्तम माना गया है. ऐसा करने से न केवल पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं, बल्कि घर की दरिद्रता भी हमेशा के लिए दूर हो जाती है.इस अमावस्या का गहरा आध्यात्मिक महत्वआषाढ़ अमावस्या का महत्व सिर्फ पितृ शांति तक ही सीमित नहीं है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की जन्म कुंडली में पितृ दोष या कालसर्प दोष होता है, उनके लिए इस दिन किया गया उपाय संजीवनी का काम करता है. इसके अतिरिक्त, मंगलवार के दिन यह अमावस्या पड़ने के कारण इसे 'भौमवती अमावस्या' का संयोग भी मिल रहा है. इस दिन शनिदेव की पूजा करने और काले तिल का दान करने से साढ़ेसाती और ढैय्या जैसी शनि संबंधी समस्याओं और कष्टों से भी जातकों को बड़ी राहत मिलती है.
भारतीय शेयर बाजार में आज सरकारी बैंकों (PSU Banks) के शेयरों ने जबरदस्त धूम मचा रखी है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा जारी किए गए शानदार तिमाही नतीजों और बंपर कमाई के आंकड़ों ने दलाल स्ट्रीट के समीकरण बदल दिए हैं। मुनाफे में आई इस भारी उछाल की खबर आते ही निवेशकों ने बैंकिंग शेयरों पर भरोसा जताया है, जिससे सरकारी बैंकिंग इंडेक्स में बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। इस पूरे एक्शन में इंडियन बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र सबसे बड़े विनर बनकर उभरे हैं और इनके शेयरों में सबसे तगड़ी लिफ्टिंग देखने को मिल रही है।इंडियन बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र के शेयरों में तेजी की असली वजहबाजार खुलने के साथ ही इंडियन बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र के काउंटर्स पर खरीदारों की भारी भीड़ देखी गई। इस जबरदस्त तेजी के पीछे बैंकों का मजबूत फंडामेंटल और वित्तीय प्रदर्शन है। दोनों ही बैंकों ने अपने फंसे हुए कर्ज यानी एनपीए (NPA) को कम करने में बड़ी सफलता हासिल की है। इसके साथ ही, लोन बुक में आई मजबूती और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में सुधार होने से बैंकों का शुद्ध मुनाफा उम्मीद से कहीं ज्यादा रहा है। इसी बंपर कमाई ने निवेशकों को इन शेयरों की आक्रामक खरीदारी करने के लिए प्रेरित किया है।क्रेडिट ग्रोथ और ग्रामीण भारत से मिल रहा है सरकारी बैंकों को बूस्टबैंकिंग सेक्टर के विशेषज्ञों का विश्लेषण: भारतीय अर्थव्यवस्था में जारी मजबूत रिकवरी का सीधा फायदा सरकारी बैंकों को मिल रहा है। विशेषकर टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण इलाकों (Geographical Demand) में लोन की मांग तेजी से बढ़ी है। होम लोन, ऑटो लोन और एमएसएमई (MSME) सेक्टर को दिए गए कर्ज में हुई बढ़ोतरी ने बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ को ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचा दिया है, जिससे इनकी कमाई में यह बंपर उछाल दिख रहा है।लंबे समय तक निजी बैंकों से पीछे रहने के बाद, अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अपनी डिजिटल बैंकिंग सेवाओं और बेहतर कस्टमर रीच के दम पर मार्केट शेयर वापस हासिल कर रहे हैं।रिटेल निवेशकों और स्थानीय बाजार के लिए आगे क्या हैं कमाई के मौके?स्थानीय शेयर बाजारों और ब्रोकिंग फर्म्स के अनुसार, इस तेजी ने रिटेल निवेशकों (Retail Investors) का हौसला काफी बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि सरकारी बैंकों में आई यह तेजी केवल शॉर्ट-टर्म सेंटीमेंट नहीं है, बल्कि यह इनके बदलते कामकाज का नतीजा है। जो निवेशक बैंकिंग सेक्टर में लॉन्ग-टर्म के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन दौर साबित हो सकता है। हालांकि, बाजार के ऊंचे स्तरों को देखते हुए जानकारों ने सलाह दी है कि किसी भी बड़ी गिरावट पर धीरे-धीरे (Averaging) इन शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में जोड़ना एक स्मार्ट रणनीति होगी।
ज्योतिष शास्त्र में 'गजकेसरी योग' (Gajkesari Yog) को सबसे प्रभावशाली, बलशाली और राजयोग समान शुभ योगों में से एक माना गया है. जब भी आकाशमंडल में मन के कारक चंद्रमा और ज्ञान के देवता देवगुरु बृहस्पति की युति होती है, तो इस अद्भुत योग का निर्माण होता है. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 14 जुलाई 2026 से कर्क राशि में चंद्रमा और गुरु के मिलन से एक बेहद शक्तिशाली गजकेसरी योग बनने जा रहा है.कर्क राशि में चंद्रमा का यह गोचर 16 जुलाई 2026 को शाम 7 बजकर 52 मिनट तक रहेगा. इस 50 से अधिक घंटों की अवधि में कई राशियों के जीवन में चमत्कारी और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. ज्योतिषियों के मुताबिक, विशेष रूप से मेष, कर्क, सिंह और धनु राशि के जातकों के लिए यह समय भाग्य बदलने वाला और बंपर लाभ देने वाला साबित हो सकता है.क्या होता है गजकेसरी योग और क्यों है यह इतना खास?वैदिक ज्योतिष के नियमों के अनुसार, जब कुंडली या गोचर में देवगुरु बृहस्पति और चंद्रमा एक ही राशि में एक साथ बैठे हों, अथवा चंद्रमा से गुरु केंद्र भाव (पहले, चौथे, सातवें या दसवें भाव) में स्थित हों, तब गजकेसरी योग का सृजन होता है.गज और केसरी का अर्थ: 'गज' का अर्थ हाथी (जो बुद्धिमत्ता और असीम शक्ति का प्रतीक है) और 'केसरी' का अर्थ सिंह (जो साहस, शौर्य और राजसी ठाट-बाट का प्रतीक है) होता है.ग्रहों का प्रभाव: गुरु को ज्ञान, भाग्य, संतान और समृद्धि का कारक माना जाता है, जबकि चंद्रमा हमारे मन, एकाग्रता और मानसिक शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं. जब ये दोनों ग्रह एक साथ अनुकूल स्थिति में आते हैं, तो जातक की निर्णय लेने की क्षमता, आत्मविश्वास और धन-वैभव में अप्रत्याशित वृद्धि होती है.इन 4 भाग्यशाली राशियों पर होगी धन और सम्मान की बौछार1. मेष राशि (Aries) - अटके काम होंगे पूरे, मिलेगी नई संपत्तिमेष राशि के जातकों के लिए यह गजकेसरी योग पारिवारिक सुख और आर्थिक मोर्चे पर शानदार परिणाम लेकर आ रहा है.यदि लंबे समय से आपका कोई काम सरकारी या निजी क्षेत्र में अटका हुआ था, तो वह इस दौरान गति पकड़ेगा.घर-परिवार में चल रहा मानसिक तनाव दूर होगा और माहौल खुशनुमा बनेगा.जो लोग नया मकान, वाहन या कोई कीमती संपत्ति खरीदने का मन बना रहे हैं, उनके लिए यह समय निवेश करने के लिहाज से सबसे उत्तम है.2. कर्क राशि (Cancer) - आत्मविश्वास में वृद्धि, करियर में बड़ा उछालचूंकि यह महाशुभ योग कर्क राशि में ही बनने जा रहा है, इसलिए सबसे अधिक और सीधा लाभ इसी राशि के जातकों को मिलेगा.आपके भीतर एक नया आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा देखने को मिलेगी.कार्यक्षेत्र (Career) में सीनियर अधिकारियों का भरपूर सहयोग मिलेगा और कोई नई बड़ी जिम्मेदारी या प्रमोशन की बात आगे बढ़ सकती है.सामाजिक दायरे में आपका मान-सम्मान और मान-प्रतिष्ठा शिखर पर होगी.3. सिंह राशि (Leo) - मानसिक शांति और अचानक धन लाभसिंह राशि के जातकों के लिए गुरु-चंद्र की यह युति मानसिक चिंताओं से मुक्ति दिलाने वाली साबित होगी.यदि आप पिछले कुछ समय से किसी बात को लेकर डिप्रेशन या तनाव में थे, तो आपको मानसिक शांति का अहसास होगा.व्यापार या निवेश के माध्यम से अचानक धन लाभ (Financial Gain) के प्रबल योग बन रहे हैं.यदि आपने हाल ही में किसी नई व्यावसायिक योजना या प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है, तो उसमें आपको उम्मीद से बेहतर नतीजे मिलेंगे.4. धनु राशि (Sagittarius) - स्वामी ग्रह का सपोर्ट, नौकरी में सुनहरे अवसरधनु राशि के स्वामी स्वयं देवगुरु बृहस्पति हैं, इसलिए अपनी ही मित्र राशि के साथ मिलकर बन रहा यह योग धनु राशि वालों के लिए विशेष रूप से फलदायी है.नौकरीपेशा जातकों को करियर में तरक्की के बेहतरीन और नए अवसर प्राप्त होंगे.जो लोग लंबे समय से मनमुताबिक नौकरी बदलने या ट्रांसफर की योजना बना रहे थे, उन्हें इस दौरान कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है.आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत और स्थिर होगी.अन्य राशियों पर प्रभाव और शुभ फल का नियमऐसा नहीं है कि इस योग का लाभ केवल इन्हीं चार राशियों को मिलेगा. ब्रह्मांड में जब भी इतना बड़ा शुभ योग बनता है, तो उसका सकारात्मक या सामान्य प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ता है. हालांकि, यह बात भी ध्यान रखने योग्य है कि किसी भी व्यक्ति को मिलने वाले शुभ फल की वास्तविक मात्रा उसकी व्यक्तिगत जन्म कुंडली, वर्तमान में चल रही ग्रहों की महादशा-अंतरदशा और अन्य क्रूर ग्रहों की दृष्टि पर भी पूरी तरह निर्भर करती है.
गिरते बाजार में भी इन म्यूचुअल फंड्स ने मचाया धमाल! लार्जकैप की रफ्तार पड़ी सुस्त, निवेशकों की चांदी
भारतीय शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और गिरावट के जोखिम के बीच म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए एक बेहद चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया है। आम तौर पर सुरक्षित माने जाने वाले लार्जकैप फंड्स (Large Cap Funds) इस बदलते दौर में सुस्त नजर आ रहे हैं। इसके विपरीत, बाजार के उतार-चढ़ाव को मात देते हुए मिडकैप (Mid Cap) और स्मॉलकैप (Small Cap) फंडों ने रिटर्न के मामले में बाजी मार ली है। इस प्रदर्शन ने रिटेल निवेशकों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है कि मौजूदा समय में निवेश के लिए सबसे सही रणनीतिक विकल्प कौन सा है।लार्जकैप फंड्स की सुस्ती के पीछे क्या है असली वजह?बाजार के जानकारों का कहना है कि दिग्गज और बड़ी कंपनियों (Large Cap Companies) के शेयरों में हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का सीधा असर देखने को मिला है। चूंकि लार्जकैप फंड्स का मुख्य निवेश इन्हीं फ्रंटलाइन कंपनियों में होता है, इसलिए बाजार की गिरावट के दौरान इनका प्रदर्शन काफी हद तक थमा हुआ या सुस्त नजर आ रहा है। बड़े फंड मैनेजरों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक दबाव और वैल्यूएशन के ऊंचे स्तर पर होने की वजह से बड़ी कंपनियां शॉर्ट-टर्म में उस गति से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं, जिसकी उम्मीद निवेशक कर रहे थे।मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों ने कैसे पलटी बाजी?दूसरी तरफ, घरेलू सेक्टर्स में मजबूत डिमांड और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों (Local Economic Factors) के दम पर मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों ने शानदार रिकवरी दिखाई है। मिडकैप और स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड्स ने इसी तेजी का पूरा फायदा उठाया है। इन फंड्स ने न केवल गिरते बाजार के जोखिम को बेहतर तरीके से मैनेज किया, बल्कि आक्रामक ग्रोथ चाहने वाले निवेशकों को उम्मीद से कहीं बेहतर रिटर्न कमा कर दिया है। यही वजह है कि सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए इन कैटेगरीज में लगातार रिकॉर्ड निवेश आ रहा है।बाजार विशेषज्ञों की राय: गिरते बाजार में लार्जकैप फंड्स पोर्टफोलियो को स्थिरता जरूर देते हैं, लेकिन अगर आप अल्फा (Alpha) यानी बेंचमार्क से ज्यादा रिटर्न कमाना चाहते हैं, तो मौजूदा चक्र में मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स ज्यादा मजबूत नजर आ रहे हैं। हालांकि, निवेशकों को अपने जोखिम लेने की क्षमता (Risk Appetite) को ध्यान में रखकर ही एसेट एलोकेशन करना चाहिए।स्थानीय और खुदरा निवेशकों के लिए आगे क्या है रणनीति?लोकल मार्केट सेंटिमेंट की बात करें तो भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों से आने वाले नए और खुदरा निवेशक (Retail Investors) अब काफी समझदार हो चुके हैं। वे बाजार की हर गिरावट को एक अवसर के रूप में देख रहे हैं। फाइनेंशियल एडवाइजर्स की सलाह है कि बाजार के इस सुस्त दौर में निवेशकों को एकमुश्त (Lumpsum) बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए। इसके बजाय, मिड और स्मॉलकैप फंड्स में अपनी एसआईपी को जारी रखना या गिरावट के समय स्मॉलकैप में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाना एक स्मार्ट और फायदेमंद लॉन्ग-टर्म रणनीति साबित हो सकती है।
बीजेपी के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा का दतिया से टिकट कटने और उसके बाद उनके समर्थकों के जमकर बवाल के बाद अब पहली बार नरोत्तम मिश्रा का रिएक्शन सामने आया है। डबरा में मीडिया से बात करते हुए नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि यह पार्टी का निर्णय है। वहीं ...
शिमला के संजौली में तड़के 4 बजे भूस्खलन; मलबे की चपेट में आईं कई इमारतें, लोगों में दहशत
राजधानी शिमला के संजौली कॉलेज के समीप स्थित बोथवेल क्षेत्र में शनिवार तड़के हुए भारी भूस्खलन से इलाके में दहशत फैल गई। सुबह करीब चार बजे हुए इस भूस्खलन के समय अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन तीन-चार रिहायशी मकानों पर खतरा मंडरा रहा है।
E-20 पेट्रोल पर पीछे नहीं हटेगी सरकार, निवेश, किसानों और ऊर्जा सुरक्षा का दिया हवाला
सरकार ने पहली बार यह स्वीकार किया है कि ई-20 पेट्रोल के उपयोग से कुछ वाहनों का माइलेज लगभग पांच प्रतिशत तक कम हो सकता है। हालांकि मंत्रालय का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और उत्पादन लागत को देखते हुए ई-20 की कीमत घटाना फिलहाल संभव नहीं है।
मानसून ट्रफ के उत्तर की ओर खिसकने से उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश कम होगी, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और बंगाल में अगले कुछ दिनों तक अच्छी वर्षा की संभावना है।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक निर्माणाधीन मॉल से 7 वर्षीय बच्ची का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। शक के आधार पर पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है और लगातार पूछताछ की जा रही है।
क्या 1600 और 140 सीरीज से आने वाले कॉल्स हैं फेक? सरकार ने जारी की एडवाइजरी
1600 और 140 सीरीज के फोन नंबरों को लेकर सामने आ रही कुछ मीडिया रिपोर्ट्स पर केंद्र सरकार ने शुक्रवार को स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने कहा कि इन रिपोर्ट्स से लोगों में गलतफहमी फैल सकती है और इन नंबरों के इस्तेमाल को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है।
कांवड़ यात्रा के लिए हरिद्वार पुलिस की नई गाइडलाइन, ऊंची कांवड़ और तेज डीजे पर रोक
हरिद्वार पुलिस ने कांवड़ यात्रा 2026 के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। ऊंची कांवड़, हथियार, तेज डीजे और रेट्रो साइलेंसर पर प्रतिबंध लगाया गया है।
तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में एक व्यक्ति पर दो परिवारों के छह सदस्यों की हत्या का आरोप है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश तेज कर दी है।
LIVE: स्टील्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि नौसेना में शामिल
Latest News Today Live Updates in Hindi : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े में छठे प्रोजेक्ट 17ए स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि को शामिल किया। पल पल की जानकारी...
गुजरात राज्य परीक्षा बोर्ड ने TAT-HS (Teacher Aptitude Test-Higher Secondary) 2026 की मुख्य परीक्षा की तारीख घोषित कर दी है। परीक्षा 2 अगस्त को आयोजित होगी। जल्द ही एडमिट कार्ड, परीक्षा केंद्र और अन्य महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए जाएंगे।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में एक नया स्वर्णिम इतिहास रच दिया है. इंग्लैंड के खिलाफ लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स (Lord's) मैदान पर खेले जा रहे इकलौते टेस्ट मैच में कप्तानी कर रही हरमनप्रीत ने अपनी शानदार बल्लेबाजी के दम पर भारत की दो महान महिला क्रिकेटरों—मिताली राज और स्मृति मंधाना के एक बेहद खास और एलीट क्लब में अपनी जगह पक्की कर ली है. मैच के पहले ही दिन नंबर 5 पर बल्लेबाजी करने उतरीं कप्तान हरमनप्रीत ने 121 गेंदों में 58 रनों की जुझारू पारी खेली.स्मृति मंधाना के साथ जमाई धाकड़ पार्टनरशिप, जड़े 7 कड़क चौकेलॉर्ड्स की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भारतीय पारी को संभालते हुए हरमनप्रीत कौर ने अपनी पारी के दौरान 7 बेहतरीन चौके जड़े. उन्होंने टीम की उप-कप्तान स्मृति मंधाना के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए 155 गेंदों में 89 रनों की एक बेहद महत्वपूर्ण और सूझबूझ भरी साझेदारी (Partnership) की. इस मजबूत पार्टनरशिप की बदौलत भारतीय टीम मैच के पहले दिन इंग्लैंड के खिलाफ एक सम्मानजनक स्थिति में पहुंचने में कामयाब रही. स्मृति मंधाना ने भी इस दौरान 108 गेंदों में 83 रनों की शानदार पारी खेली.इंटरनेशनल क्रिकेट में 9000 रन पूरे, बनीं ऐसा करने वाली तीसरी भारतीय महिलाइस ऐतिहासिक टेस्ट मैच के शुरू होने से पहले हरमनप्रीत कौर को इंटरनेशनल क्रिकेट में अपने 9000 रन पूरे करने के लिए सिर्फ 13 रनों की दरकार थी. भारत की पारी के 24वें ओवर की पांचवीं गेंद पर जैसे ही उन्होंने अपना 13वां रन लिया, उन्होंने इस जादुई आंकड़े को छू लिया. 7 मार्च 2009 को पाकिस्तान के खिलाफ वनडे मैच से अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत करने वाली हरमनप्रीत अब पूर्व कप्तान मिताली राज और स्मृति मंधाना के बाद महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में 9000 रन का आंकड़ा पार करने वाली भारत की तीसरी और दुनिया की चुनिंदा बल्लेबाजों में शुमार हो गई हैं.महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली भारतीय त्रिमूर्ति:मिताली राज: 10,868 रन (333 मैच)स्मृति मंधाना: 10,667 रनहरमनप्रीत कौर: 9,045* रनहरमनप्रीत का शानदार करियर रिकॉर्ड: महिला क्रिकेट इतिहास में सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का रिकॉर्ड रखने वाली हरमनप्रीत कौर ने अब तक 164 वनडे (ODI) मैचों में 4541 रन, 202 टी20 (T20I) मैचों में 4216 रन और आठ टेस्ट मैचों की 12 पारियों में कुल 288* रन बनाए हैं. खेल के हर फॉर्मेट में उनका यह लाजवाब प्रदर्शन उन्हें विश्व क्रिकेट के सबसे महान ऑलराउंडर्स की फेहरिस्त में खड़ा करता है.
भारतीय सिनेमा जगत में किसी भी फिल्म को बड़े पर्दे पर रिलीज होने से पहले केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी सेंसर बोर्ड (CBFC) के कड़े नियमों, जांच और रेगुलेशन के दौर से गुजरना अनिवार्य होता है. इसके बिना किसी भी फिल्म को सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने की अनुमति कानूनी रूप से नहीं मिलती. सेंसर बोर्ड (CBFC) के आधिकारिक सदस्य राज मिश्रा ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में साफ किया कि बिना उचित सर्टिफिकेशन के फिल्म को पब्लिक डोमेन में रिलीज करना एक बेहद गंभीर और दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि बोर्ड फिल्मों की स्क्रीनिंग और नियमों को लेकर पूरी तरह सख्त है और उल्लंघन करने वालों पर भारी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.प्रसून जोशी संभाल रहे हैं कमान, MIB तय करता है सेंसर बोर्ड का स्ट्रक्चरराज मिश्रा ने सेंसर बोर्ड की आंतरिक कार्यप्रणाली और इसके संगठनात्मक ढांचे (Organizational Structure) पर विस्तार से बात की. उन्होंने बताया कि:अध्यक्ष की नियुक्ति: सेंसर बोर्ड के पूरे कामकाज की देखरेख के लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) द्वारा बोर्ड के अध्यक्ष (Chairman) की नियुक्ति की जाती है. वर्तमान में इस गरिमामयी पद की जिम्मेदारी मशहूर गीतकार और लेखक प्रसून जोशी संभाल रहे हैं.कमेटी का आकार: बोर्ड की मुख्य जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि समाज में दिखाई जाने वाली फिल्में देश की संप्रभुता और तय गाइडलाइंस के अनुकूल हों. इस बोर्ड में अध्यक्ष के अलावा 25 अन्य गैर-सरकारी सदस्य शामिल होते हैं, जो फिल्मों का निष्पक्ष मूल्यांकन करते हैं.क्या है 'A' और 'UA' सर्टिफिकेट का असली मतलब?फिल्मों को मिलने वाली श्रेणियों को लेकर दर्शकों और मेकर्स के बीच अक्सर भ्रम रहता है, जिसे राज मिश्रा ने स्पष्ट किया:'A' (Adult) सर्टिफिकेशन: यह श्रेणी केवल 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वयस्कों के लिए होती है. जिन फिल्मों में अत्यधिक बोल्ड, इंटीमेट सीन्स या जरूरत से ज्यादा खून-खराबा और वीभत्स हिंसा (Crime & Violence) दिखाई जाती है, उन्हें दर्शकों की मानसिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस कैटेगरी में डाला जाता है.'UA' (Unrestricted Public Exhibition Under Parental Guidance) सर्टिफिकेशन: इसका सीधा मतलब है कि फिल्म में बहुत कम या हल्की-फुल्की हिंसा/संवाद हैं, जिसे बच्चे अपने माता-पिता या परिवार के किसी बड़े सदस्य की देखरेख और मार्गदर्शन में आसानी से देख सकते हैं. यह बच्चों के मानसिक विकास की सुरक्षा के लिए एक तरह का 'सेफ्टी क्लॉज' है.फिल्म रिजेक्ट होने पर क्या करें मेकर्स? 11 सदस्यों की कमेटी और ट्रिब्यूनल का रास्ताइंटरव्यू के दौरान एक महत्वपूर्ण सवाल यह उठा कि यदि शुरुआत में पांच सदस्यों की प्राथमिक जांच कमेटी (Examining Committee) किसी फिल्म को पास करने से मना कर दे, तो फिल्ममेकर्स के पास क्या कानूनी विकल्प बचते हैं?री-एग्जामिनेशन प्रोसेस: मेकर्स के पास अपनी फिल्म को दोबारा जांच के लिए भेजने का पूरा वैधानिक अधिकार होता है. इस प्रक्रिया के तहत फिल्म को 11 सदस्यों की एक बड़ी 'री-एग्जामिनिंग कमेटी' के सामने दोबारा स्क्रीन किया जाता है.ट्रिब्यूनल का आखिरी रास्ता: यदि यह बड़ी कमेटी भी फिल्म में सुधारों से संतुष्ट नहीं होती और इसे पास करने से इनकार कर देती है, तो निर्माताओं के पास देश की राजधानी दिल्ली में मौजूद अपीलीय ट्रिब्यूनल (Tribunal) का दरवाजा खटखटाने का अंतिम विकल्प होता है. हालांकि, राज मिश्रा ने साफ किया कि व्यावहारिक रूप से ऐसे मामले बहुत ही दुर्लभ होते हैं जहां किसी फिल्म को हर स्तर पर पूरी तरह खारिज कर दिया जाए.क्रिएटिव आजादी का सम्मान, लेकिन राष्ट्र विरोधी कंटेंट पर नो-टॉलरेंसराज मिश्रा ने स्पष्ट किया कि आधुनिक दौर और समकालीन परिस्थितियों के हिसाब से सेंसर बोर्ड के नियमों में भी लचीलापन आया है. आज के समय में कहानी की मांग के अनुसार हल्की-फुल्की हिंसा या यथार्थवाद को स्वीकार कर लिया जाता है. लेकिन अगर फिल्म में बहुत ज्यादा घिनौने, समाज में नफरत फैलाने वाले या खौफनाक दृश्य हैं, तो बोर्ड को जनहित में दखल देना ही पड़ता है.अंत में, उन्होंने रचनात्मक स्वतंत्रता (Creative Freedom) पर बोलते हुए कहा कि फिल्ममेकर्स को पूरी आजादी मिलती है, लेकिन उसकी भी संवैधानिक सीमाएं तय हैं. कोई भी फिल्म देश विरोधी विचारों को बढ़ावा देने वाली, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाली या देश की नीतियों को नीचा दिखाने वाली नहीं होनी चाहिए. उन्होंने बोर्ड पर किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि CBFC पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ अपना काम करता है.
आज के डिजिटल युग में जब भी हमारे स्मार्टफोन की घंटी बजती है, हमारी नजरें सबसे पहले स्क्रीन पर जाती हैं. अगर वहां लाल रंग में 'Spam Call' लिखा दिखाई दे, तो हम बिना सोचे-समझे कॉल को काट देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि आपके फोन को कैसे पहले ही पता चल जाता है कि सामने वाली कॉल फ्रॉड या किसी टेलीमार्केटर की है? कौन तय करता है कि किस नंबर को स्पैम घोषित करना है? हाल ही में टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने केंद्र सरकार से Truecaller जैसे थर्ड-पार्टी ऐप्स पर लगाम लगाने के लिए सख्त अधिकारों की मांग की है, जिसने इस पूरे सिस्टम की प्राइवेसी और कार्यप्रणाली पर एक नई राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है.TRAI क्यों लेना चाहता है एक्शन और MeitY का क्या है रुख?भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने केंद्र सरकार से एक बेहद महत्वपूर्ण मांग की है. ट्राई चाहता है कि उसे Truecaller जैसी कॉलर आईडी (Caller ID) और कॉल मैनेजमेंट ऐप्स के खिलाफ सीधी कार्रवाई करने और उन पर जुर्माना लगाने का कानूनी अधिकार मिले. इसके लिए ट्राई ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को एक आधिकारिक पत्र लिखा है. मंत्रालय अब इस संवेदनशील मामले पर कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रहा है और दूरसंचार विभाग (DoT) के साथ मिलकर रूपरेखा तैयार कर रहा है. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो इन ऐप्स की मनमानी और डेटा हैंडलिंग पर कड़ी रोक लग सकती है.बैंकों की बढ़ी बड़ी चिंता: जरूरी कॉल्स भी हो रहे हैं ब्लॉकइस पूरे विवाद की मुख्य शुरुआत तब हुई जब देश के कई बड़े सरकारी और निजी बैंकों ने अपनी गंभीर परेशानी नियामक के सामने रखी. बैंकों का आरोप है कि ग्राहकों की सुरक्षा और सुविधा के लिए जारी किए गए उनके आधिकारिक और जरूरी नंबर्स (जैसे 140 और 1600 सीरीज वाले कॉल्स) को भी ये ऐप्स ऑटोमैटिकली स्पैम या ब्लॉक लिस्ट में दिखा देते हैं. इसके कारण:महत्वपूर्ण अलर्ट्स हो रहे मिस: ग्राहक अपने लोन की ईएमआई रिकवरी, बैंकिंग फ्रॉड या किसी संदिग्ध ट्रांजैक्शन से जुड़े जरूरी अलर्ट्स और वेरिफिकेशन कॉल्स को नहीं उठा पा रहे हैं.वित्तीय नुकसान: यह स्थिति बैंकों के बिजनेस और ग्राहकों की सुरक्षा दोनों के लिए एक बड़ा नुकसान साबित हो रही है.कैसे काम करता है Truecaller का स्पैम डिटेक्शन सिस्टम?Truecaller के आधिकारिक दावों के मुताबिक, उनका कॉल मैनेजमेंट सिस्टम मुख्य रूप से तीन स्तंभों पर काम करता है—पहला है व्यापक यूजर्स का लाइव फीडबैक (Crowdsourcing), दूसरा ऑटोमेटेड डिटेक्शन एल्गोरिदम और तीसरा उनका खुद का इन-हाउस डेटा एनालिसिस. जब एक ही नंबर को बहुत से लोग बार-बार स्पैम रिपोर्ट करते हैं, तो उस नंबर का स्पैम स्कोर (Spam Score) बढ़ जाता है और वह लाल रंग में दिखने लगता है. इसके अलावा, कंपनी कॉलिंग पैटर्न, कॉल की अवधि और कॉल की फ्रीक्वेंसी (आवृत्ति) को भी ट्रैक करती है. हालांकि, वैध कंपनियां अपने नंबर को व्हाइटलिस्ट कराने के लिए रिव्यू की मांग भी कर सकती हैं.Airtel का नेटवर्क लेवल दिमाग: बिना ऐप के एआई (AI) सुरक्षाभारती एयरटेल (Airtel) का स्पैम रोकने का तरीका इन थर्ड-पार्टी ऐप्स से बिल्कुल अलग और बेहद सुरक्षित है. एयरटेल अपने टेलीकॉम नेटवर्क के कोर लेयर के अंदर ही इन-बिल्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल करता है. यह एडवांस सिस्टम ग्राहकों के हैंडसेट तक कॉल पहुंचने से ठीक पहले ही मिलिसेकंड्स में उसकी पहचान कर लेता है.सुरक्षा का फायदा: इसके लिए ग्राहकों को अपने फोन में कोई भी असुरक्षित थर्ड-पार्टी ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होती. खास बात यह है कि एयरटेल का यह एआई सिस्टम कॉल या मैसेज के पर्सनल कंटेंट को कभी नहीं पढ़ता, बल्कि सिर्फ नेटवर्क डेटा और सिग्नलिंग पैटर्न के आधार पर फ्रॉड को पकड़ता है.Google का बिजनेस डेटा और इन-डिवाइस AI तकनीकएंड्रॉइड स्मार्टफोन्स में डिफॉल्ट रूप से मिलने वाला 'Google Phone App' भी स्पैम कॉल्स को रोकने में बेहद कारगर भूमिका निभाता है. गूगल अपने विशाल डेटाबेस में मौजूद वेरिफाइड पब्लिक बिजनेस लिस्टिंग्स से आने वाले नंबरों का तुरंत मिलान करता है. इसके साथ ही, गूगल ने अब पूरी तरह डिवाइस के अंदर ही प्रोसेस होने वाला एक नया 'AI स्कैम डिटेक्शन' (AI Scam Detection) फीचर पेश किया है. यह फीचर कॉल के दौरान बातचीत के पैटर्न और स्कैमर द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले संदिग्ध शब्दों को समझकर यूजर को तुरंत स्क्रीन पर अलर्ट कर देता है कि यह एक फ्रॉड कॉल हो सकती है.Jio का तरीका: जागरूकता और ऑफिशियल चैनल्स पर भरोसादूसरी तरफ, देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो (Reliance Jio) का नजरिया इस मामले में थोड़ा अलग है. जियो ने अभी तक एयरटेल की तरह कोई नेटवर्क-वाइड एआई फिल्टरिंग सिस्टम बड़े पैमाने पर लॉन्च नहीं किया है. जियो का मुख्य फोकस अपने ग्राहकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक बनाने पर है. जियो समय-समय पर अपने यूजर्स को आधिकारिक संदेशों के जरिए सलाह देता है कि वे कभी भी किसी कॉल पर अपनी संवेदनशील बैंकिंग डिटेल्स या ओटीपी शेयर न करें और किसी भी अनजान कॉल या ऑफर की सत्यता की जांच खुद संबंधित कंपनी के ऑफिशियल चैनल के माध्यम से ही करें.
भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही पांच मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज का पांचवां और आखिरी निर्णायक मुकाबला आज साउथेम्प्टन के ऐतिहासिक 'द रोज बाउल' मैदान पर खेला जाएगा. यह मैच भारतीय समयानुसार आज शाम 7:00 बजे से लाइव शुरू होगा. टीम इंडिया के लिए यह मुकाबला अपनी इज्जत और साख बचाने का आखिरी मौका है, क्योंकि पांच मैचों की इस सीरीज में भारतीय टीम पहले ही 3-0 से पिछड़कर सीरीज गंवा चुकी है (सीरीज का पहला मैच बारिश की भेंट चढ़ गया था). अब देखना यह है कि क्या कप्तान श्रेयस अय्यर साउथेम्प्टन में सांत्वना जीत दर्ज कर पाते हैं या नहीं.टीम इंडिया में बड़े बदलाव के संकेत: 3 फ्लॉप खिलाड़ी होंगे ड्रॉप!इंग्लैंड के मजबूत गढ़ में अपनी इज्जत बचाने के लिए भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर प्लेइंग इलेवन (Playing XI) में 3 बहुत बड़े और कड़े बदलाव करने का मन बना चुके हैं. लगातार खराब फॉर्म और लचर प्रदर्शन से जूझ रहे युवा ओपनर वैभव सूर्यवंशी, मिडिल ऑर्डर के बल्लेबाज तिलक वर्मा और ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर को आज के मुकाबले से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है. कप्तान इन तीनों की जगह टीम में नए और आक्रामक चेहरों को मौका देकर इंग्लैंड को चौंकाने की रणनीति बना रहे हैं.संजू सैमसन करेंगे ओपनिंग, ऐसा होगा भारत का नया बैटिंग ऑर्डरआज के मैच में भारतीय टीम एक बिल्कुल नए और आक्रामक टॉप ऑर्डर के साथ मैदान पर उतर सकती है:विस्फोटक ओपनिंग जोड़ी: लगातार फ्लॉप साबित हो रहे वैभव सूर्यवंशी (3 मैचों में महज 42 रन) को बाहर कर उनके स्थान पर ताबड़तोड़ विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन को अभिषेक शर्मा के साथ ओपनिंग की कमान सौंपी जा सकती है.मिडिल ऑर्डर: विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन नंबर-3 पर पारी को संभालेंगे, जबकि खुद कप्तान श्रेयस अय्यर नंबर-4 पर बल्लेबाजी की जिम्मेदारी लेंगे. पिछले 4 मैचों में फ्लॉप रहे तिलक वर्मा (13, 24*, 3, 11 रन) की जगह टीम में शिवम दुबे को नंबर-5 और घरेलू क्रिकेट के खूंखार लोअर-ऑर्डर फिनिशर सूर्यांश शेडगे को नंबर-6 पर ऑलराउंडर के तौर पर प्रमोट किया जा सकता है.गेंदबाजी में दिखेगा दम: बिश्नोई-अक्षर संभालेंगे स्पिन, अर्शदीप पर पेस अटैक का जिम्मासाउथेम्प्टन की पिच को ध्यान में रखते हुए भारतीय टीम मैनेजमेंट दो मुख्य स्पिनरों और तीन विशेषज्ञ तेज गेंदबाजों के कॉम्बिनेशन के साथ उतर सकता है. स्पिन विभाग की कमान स्टार लेग स्पिनर रवि बिश्नोई और अनुभवी ऑलराउंडर अक्षर पटेल के हाथों में होगी. वहीं, तेज गेंदबाजी के मोर्चे पर प्रिंस यादव, प्रसिद्ध कृष्णा और यॉर्कर किंग अर्शदीप सिंह इंग्लैंड के बल्लेबाजों की गिल्लियां बिखेरते नजर आएंगे. चौथे तेज गेंदबाज की भूमिका ऑलराउंडर शिवम दुबे निभाएंगे.इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें T20I के लिए भारत की संभावित Playing XI:अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन, श्रेयस अय्यर (कप्तान), शिवम दुबे, अक्षर पटेल, सूर्यांश शेडगे, रवि बिश्नोई, प्रिंस यादव, प्रसिद्ध कृष्णा और अर्शदीप सिंह.
सनातन धर्म में देवाधिदेव महादेव का स्वरूप अन्य सभी देवी-देवताओं से बिल्कुल अलग, अनूठा और अलौकिक है. शिव जी का रहन-सहन और वेशभूषा सांसारिक आकर्षणों से परे है. उनके गले में लिपटा भयंकर नाग, जटाओं से बहती गंगा, मस्तक पर सजा अर्धचंद्र और शरीर पर रमी भस्म—ये केवल बाहरी रूप नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे ब्रह्मांड, जीवन, मृत्यु और अध्यात्म के बेहद गहरे रहस्य छिपे हैं. यदि आप भी महादेव के सच्चे भक्त हैं, तो आपको भगवान शिव द्वारा धारण किए गए इन 10 मुख्य प्रतीकों (Mahadev Symbols Meaning) के वास्तविक और आध्यात्मिक अर्थ को जरूर समझना चाहिए.1. शिव की जटाएं: अनंत अंतरिक्ष का वासभगवान शिव की बिखरी और विशाल जटाएं साक्षात असीम अंतरिक्ष (Space) का प्रतीक हैं. यह इस बात को दर्शाती हैं कि संपूर्ण ब्रह्मांड और वायुमंडल महादेव के भीतर ही समाया हुआ है. जटाओं से मां गंगा का अवतरण इस बात का संकेत है कि ज्ञान और पवित्रता का प्रवाह हमेशा ऊंचे विचारों से ही होता है.2. मस्तक पर अर्धचंद्र: मन पर पूर्ण नियंत्रण और शीतलतामहादेव के माथे पर विराजमान बालचंद्र (आधा चंद्रमा) समय के चक्र (Time Cycle) को प्रदर्शित करता है. चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है. शिव के मस्तक पर चंद्रमा का होना यह सिखाता है कि विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी व्यक्ति को अपने मन पर पूर्ण नियंत्रण रखना चाहिए और स्वभाव में शीतलता व धैर्य बनाए रखना चाहिए.3. महादेव के त्रिनेत्र: भूत, वर्तमान और भविष्य की दिव्य दृष्टिशिव जी की तीसरी आंख भौतिक संसार के भ्रम से परे हटकर दिव्य दृष्टि, सर्वज्ञान और आत्मज्ञान का प्रतीक है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महादेव के तीन नेत्र तीन मुख्य गुणों (सत्व, रज, तम), तीन कालों (भूत, वर्तमान, भविष्य) और तीनों लोकों (स्वर्ग, मृत्यु और पाताल) के संतुलन को दर्शाते हैं. जब यह तीसरा नेत्र खुलता है, तो अज्ञान और वासना का नाश हो जाता है.4. गले में सर्पहार: तामसी शक्तियों पर विजय और संतुलनसांप जैसा अत्यंत हिंसक और जहरीला जीव महादेव के गले में नागराज वासुकी के रूप में लिपटा रहता है. यह प्रतीक हमें सिखाता है कि अहंकार, क्रोध और हिंसक प्रवृत्तियां (तमोगुण) कितनी भी भयानक क्यों न हों, यदि उन्हें सही दिशा दी जाए तो वे वश में हो सकती हैं. शिव का सर्पहार प्रकृति के खतरनाक जीवों के साथ भी संतुलन और जीव-दया का संदेश देता है।5. मारक शस्त्र त्रिशूल: तीनों तापों का समूल नाशमहादेव के हाथ में मौजूद त्रिशूल केवल एक मारक शस्त्र नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के तीन सबसे बड़े कष्टों—भौतिक (सांसारिक), दैविक (प्राकृतिक) और आध्यात्मिक (मानसिक) तापों को नष्ट करने की परम शक्ति रखता है. यह सृष्टि के तीन मुख्य कार्यों (उत्पत्ति, पालन और संहार) के नियमन का भी सूचक है.6. डमरू का नाद: ब्रह्मांड की पहली ध्वनि और चेतनाभगवान शिव जब तांडव करते हैं, तो उनके हाथ में मौजूद डमरू से एक विशेष नाद (ध्वनि) निकलती है. डमरू की इस ध्वनि को ही 'ब्रह्म रूप' यानी सृष्टि की पहली आवाज माना गया है. यह ब्रह्मांड की लय, निरंतर चेतना और नए जीवन के निर्माण का प्रतीक है. इसी नाद से संसार में सुर और संगीत का जन्म हुआ है.7. मुंडमाला: सती का अटूट प्रेम और मृत्यु पर विजयशिव जी के गले में सुशोभित मुंडमाला माता सती के प्रति उनके अटूट, शाश्वत प्रेम और अमरता की कहानी कहती है. यह माला इस परम सत्य का बोध कराती है कि महादेव ने काल (मृत्यु) को पूरी तरह से अपने वश में किया हुआ है, इसलिए उन्हें 'महाकाल' भी कहा जाता है.8. व्याघ्र चर्म (बाघ की खाल): अहंकार और क्रूरता का दमनमहादेव किसी लक्जरी वस्त्र के बजाय बाघ की खाल धारण करते हैं और उसी पर आसन लगाते हैं. बाघ को पशु जगत में सबसे हिंसक और शक्तिशाली माना जाता है, जो इंसानी अहंकार और क्रूरता का प्रतीक है. इस खाल पर बैठना यह दर्शाता है कि शिव ने संसार की समस्त हिंसक भावनाओं और अहंकार को अपने नीचे दबाकर जीत लिया है.9. शरीर पर भस्म: जीवन की नश्वरता का परम सत्यशिव जी अपने पूरे शरीर पर श्मशान की भस्म (राख) लगाते हैं. भस्म जीवन के सबसे बड़े और कड़वे रहस्य को उजागर करती है—कि यह दृश्यमान संसार नश्वर है. हर खूबसूरत और शक्तिशाली चीज को एक न एक दिन जलकर राख में ही तब्दील होना है. यह हमें मोह-माया से दूर रहने की प्रेरणा देती है.10. नंदी (वृषभ): धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के चार स्तंभमहादेव का परम प्रिय वाहन वृषभ (बैल) यानी नंदी हमेशा उनके साथ रहता है. शास्त्रों में बैल को साक्षात 'धर्म' का रूप माना गया है, जिस पर स्वयं महादेव सवारी करते हैं. बैल के चार पैर जीवन के चार प्रमुख पुरुषार्थों—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को दर्शाते हैं, जिनकी प्राप्ति केवल महादेव की असीम अनुकंपा से ही संभव है.
क्या आपकी वॉशिंग मशीन भी आजकल पानी भरने में बहुत ज्यादा वक्त लगा रही है? या फिर उसमें पानी आना बिल्कुल ही बंद हो गया है? रुकिए, मैकेनिक को फोन घुमाने और बेवजह हजारों रुपये खर्च करने से पहले इस आसान से घरेलू तरीके को जान लीजिए. अक्सर लोग समझते हैं कि मशीन की मोटर या कोई महंगा इंटरनल पार्ट खराब हो गया है, लेकिन असल में समस्या एक बहुत ही छोटी सी जगह पर होती है, जिसे इनलेट वाटर फिल्टर (Inlet Water Filter) कहा जाता है. यह एक छोटी सी जाली होती है जो पानी की पाइप के जोड़ के पास लगी होती है. इसका काम आपके घर के पानी में आने वाली मिट्टी, जंग और कचरे को मशीन के अंदर जाने से रोकना है. जब यह ब्लॉक हो जाती है, तो मशीन में पानी आना बंद हो जाता है. आइए जानते हैं कि कैसे आप इसे खुद घर पर सिर्फ 10 मिनट में ठीक कर सकते हैं.मानसून के मौसम में क्यों जाम होती है यह जाली?बरसात के दिनों में नगर निगम या बोरवेल के पानी में मिट्टी, सिल्ट, रेत और जंग के कण सामान्य दिनों के मुकाबले बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं. जब यह गंदा पानी पाइप के रास्ते आपकी वॉशिंग मशीन में प्रवेश करता है, तो इनलेट फिल्टर इस सारे बारीक कचरे को रोक लेता है. लगातार कुछ हफ़्तों तक ऐसा होने से यह जाली पूरी तरह से चोक (जाम) हो जाती है. यही कारण है कि मानसून में मशीन पानी भरने में दोगुना समय लेती है या फिर बीच में ही 'वॉटर एरर कोड' (Water Error Code) दिखाकर रुक जाती है. अगर समय पर इसे साफ न किया जाए, तो पानी का प्रेशर कम होने के कारण कपड़ों की धुलाई भी ठीक से नहीं हो पाती.इनलेट वाटर फिल्टर साफ करने का स्टेप-बाय-स्टेप आसान तरीकाइसे साफ करना बेहद आसान है और इसके लिए आपको किसी विशेष टूल या तकनीकी ज्ञान की जरूरत नहीं है. बस नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें:सुरक्षा सबसे पहले: कोई भी काम शुरू करने से पहले सुरक्षा का ध्यान रखते हुए वॉशिंग मशीन का स्विच ऑफ करें और प्लग को सॉकेट से बाहर निकाल दें.पानी बंद करें: इसके बाद पानी की सप्लाई वाले मुख्य नल को पूरी तरह से बंद कर दें ताकि पाइप खोलते समय पानी घर में न फैले.पाइप को खोलें: अब मशीन के पिछले हिस्से में लगे इनलेट होज (पानी की प्लास्टिक पाइप) को थ्रेड से घुमाकर आराम से खोलें.फिल्टर को निकालें: पाइप हटाते ही आपको मशीन के अंदर एक छोटी प्लास्टिक या स्टील की रंगीन जाली दिखाई देगी. एक सामान्य प्लास (Pliers) या अपनी उंगलियों की मदद से इस फिल्टर को धीरे से बाहर खींच लें. आप देखेंगे कि इस पर भूरे रंग की मिट्टी की मोटी परत जमा होगी.ब्रश से करें सफाई: इस फिल्टर को बहते हुए साफ पानी के नीचे रखें. अगर कचरा ज्यादा पुराना और सख्त है, तो एक बेकार पड़े पुराने टूथब्रश की मदद से जाली को हल्के हाथों से रगड़कर साफ करें.वापस फिट करें: जब जाली बिल्कुल साफ हो जाए और उसके आर-पार रोशनी दिखने लगे, तो उसे वापस उसकी जगह पर सीधा फिट कर दें. पाइप को दोबारा मजबूती से कसें, नल चालू करके लीक टेस्ट करें और फिर मशीन का प्लग लगाकर इस्तेमाल करें.कितने दिनों में करनी चाहिए इस फिल्टर की सफाई?अगर मानसून का महीना चल रहा है या आपके इलाके में खारा/मटमैला पानी आता है, तो आपको हर 3 से 4 हफ्ते में एक बार इस फिल्टर को खोलकर जरूर साफ कर लेना चाहिए. साल के बाकी सामान्य महीनों में, हर 2 से 3 महीने में एक बार इसकी सफाई करना पर्याप्त रहता है. लेकिन अगर आपको कभी भी अचानक पानी का प्रेशर कम लगे या मशीन स्क्रीन पर एरर दिखाए, तो बिना देर किए तुरंत इस फिल्टर को साफ कर लें. ऐसा करने से आपकी महंगी मशीन की उम्र बढ़ेगी, बिजली की बचत होगी और कपड़े भी बिल्कुल साफ धुलेंगे.
दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा आलाकमान ने चौंकाते हुए पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। 2008 से लेकर 2023 तक दतिया विधानसभा सीट से लगातार 15 साल विधायक रहे भाजपा के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा जो ...
केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव, और दादरा और नगर हवेली से एक ऐसी चुनावी खबर सामने आ रही है जिसने पूरे राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है. भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के एक बड़े फैसले के बाद जारी हुई नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से अचानक लगभग 29.7% यानी करीब एक-तिहाई वोटर्स के नाम पूरी तरह साफ कर दिए गए हैं. भारतीय चुनावी इतिहास में ड्राफ्ट स्टेज पर इतनी बड़ी तादाद में नाम हटाए जाने का यह देश का अब तक का सबसे बड़ा और पहला मामला है.प्रवासी मजदूरों और औद्योगिक व्यवस्था के कारण आया यह चौंकाने वाला आंकड़ावोटर लिस्ट के इस स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की निगरानी कर रहे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने इस अप्रत्याशित आंकड़े के पीछे की मुख्य वजह इस केंद्र शासित प्रदेश की खास औद्योगिक अर्थव्यवस्था को बताया है.3 लाख प्रवासी आबादी: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे केंद्र शासित प्रदेश (UT) की कुल आबादी लगभग 6.8 लाख के आसपास है.लगातार बदलता है पता: इस आबादी में से करीब 3 लाख लोग बाहरी राज्यों से आकर यहां की विभिन्न कंपनियों और फैक्ट्रियों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर हैं. यह फ्लोटिंग पॉपुलेशन (अस्थायी आबादी) रोजगार और बेहतर अवसरों के चलते लगातार अपनी रहने की जगहें बदलती रहती है, जिससे सरकारी रिकॉर्ड में उनका मिलान मुश्किल हो जाता है.बीएलओ (BLO) के बार-बार चक्कर काटने पर भी नहीं मिले लोग, ये हैं नाम कटने के 5 बड़े कारणप्रशासन द्वारा जारी की गई आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, वोटर लिस्ट से इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने के पीछे अलग-अलग तकनीकी और व्यावहारिक कारण सामने आए हैं, जो इस प्रकार हैं:एब्सेंट/अनट्रेसेबल (22.5%): बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) ने जब लोगों के रजिस्टर्ड पतों पर कई बार फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए विजिट किया, तो ये लोग अपने दिए गए पते पर मौजूद नहीं मिले.परमानेंटली शिफ्टेड (4.6%): ये वे वोटर हैं जो नौकरी बदलने, ट्रांसफर होने या किसी अन्य निजी कारण से हमेशा के लिए यह केंद्र शासित प्रदेश छोड़ चुके हैं.मृत्यु (1.7%): जिन रजिस्टर्ड मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, उनके नामों को सूची से आधिकारिक तौर पर हटा दिया गया है.डुप्लिकेट वोटर (0.6%): ये वे लोग थे जिनका नाम एक से अधिक पोलिंग बूथ, विधानसभा क्षेत्र या अलग-अलग राज्यों की सूचियों में एक साथ दर्ज पाया गया.अन्य कारण (0.2%): कुछ अन्य फॉर्मल और तकनीकी कमियों के चलते इन नामों को बाहर किया गया है.घबराएं नहीं! 11 अगस्त को आएगी फाइनल वोटर लिस्ट, ऐसे जुड़वाएं अपना नामइस केंद्र शासित प्रदेश में कुल 4.28 लाख रजिस्टर्ड वोटर्स का डेटा था, जिनमें से केवल 3 लाख (70.3%) लोगों ने ही 4 जून को शुरू हुए वेरिफिकेशन ड्राइव के दौरान अपना एन्यूमरेशन फॉर्म (Enumeration Form) जमा किया था. जिन लोगों का कोई अता-पता या दस्तावेज नहीं मिला, फिलहाल केवल उनके नाम ही इस ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर किए गए हैं.सुधार का मौका: प्रशासन ने साफ किया है कि जनता को बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह अंतिम सूची नहीं है. जिन जायज वोटर्स के नाम इस लिस्ट से कट गए हैं, वे चुनाव आयोग द्वारा दिए गए 'दावे और आपत्ति' (Claims & Objections) के निर्धारित समय के भीतर अपने जरूरी दस्तावेज दिखाकर नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं. इसके साथ ही, नए पात्र मतदाता भी 'फॉर्म 6' (Form 6) भरकर अपना नाम दर्ज करा सकते हैं. इन सभी सुधारों और स्क्रूटनी के बाद, अंतिम और शुद्ध वोटर लिस्ट 11 अगस्त, 2026 को आधिकारिक रूप से प्रकाशित की जाएगी.
एप्पल (Apple) के दीवानों के लिए टेक जगत से एक बेहद सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आ रही है. कंपनी इस साल सितंबर में अपनी अगली जनरेशन के आईफोन्स को दुनिया के सामने पेश करने की भव्य तैयारी में जुटी हुई है. इस बार एप्पल की प्रीमियम लाइनअप में कुछ ऐसे क्रांतिकारी और चौंकाने वाले बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिनकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी. टेक मार्केट में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा एप्पल के पहले फोल्डेबल आईफोन को लेकर हो रही है, जिसे 'iPhone Ultra' नाम दिया जा सकता है. इसके साथ ही आईफोन 18 प्रो सीरीज में पहले से कहीं ज्यादा पावरफुल बैटरी और एक बिल्कुल नया लुक मिलने वाला है, हालांकि इन बेहतरीन अपग्रेड्स के लिए ग्राहकों को अपनी जेब काफी ढीली करनी पड़ेगी.महंगे कंपोनेंट्स के कारण कीमतों में होगी ₹16,500 तक की भारी बढ़ोतरी'काउंटरपॉइंट रिसर्च' (Counterpoint Research) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल के आने वाले फ्लैगशिप मॉडल्स को बनाने की लागत (Production Cost) पिछले वेरिएंट्स के मुकाबले काफी ज्यादा आ रही है:महंगे हुए पार्ट्स: अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाल के महीनों में NAND स्टोरेज और DRAM मेमोरी जैसे महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के दाम काफी बढ़ गए हैं.एडवांस 2nm प्रोसेसर: एप्पल का अगला इन-हाउस प्रोसेसर एडवांस 2nm प्रोसेस तकनीक पर आधारित होने वाला है, जिसकी मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बहुत अधिक है.वेरिएबल-अपर्चर कैमरा: प्रो मॉडल्स में इस बार बिल्कुल नया वेरिएबल-अपर्चर मेन कैमरा सिस्टम दिया जा सकता है, जो फोटोग्राफी को तो नेक्स्ट लेवल पर ले जाएगा लेकिन कैमरा हार्डवेयर को महंगा बना देगा.इन्हीं कारणों से एप्पल अपने कुछ प्रीमियम और हायर स्टोरेज वेरिएंट्स की कीमतों में $200 (लगभग ₹16,500) तक की बड़ी बढ़ोतरी कर सकता है.'iPhone Ultra' में मिलेगा डुअल-सेल बैटरी सेटअप, सैमसंग को मिलेगी टक्करइस बार की सबसे बड़ी लीक आईफोन अल्ट्रा की बैटरी को लेकर आई है. चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो (Weibo) पर मशहूर टिपस्टर 'डिजिटल चैट स्टेशन' ने खुलासा किया है कि एप्पल के एक प्रमुख बैटरी सप्लायर ने हाल ही में दो अलग-अलग बैटरी सेल्स को एक साथ सर्टिफाई कराया है. ऐसा डुअल-सेल (Dual-Cell) सेटअप आमतौर पर सिर्फ फोल्डेबल फोन्स में ही इस्तेमाल होता है क्योंकि वहां स्क्रीन को बीच से मोड़ा जाता है.रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों बैटरियों की क्षमता क्रमशः 1,921mAh और 2,962mAh है, जो मिलकर कुल 4,883mAh की रेटेड कैपेसिटी बनाती हैं. इसका साफ मतलब है कि लॉन्च के वक्त आईफोन अल्ट्रा की असली मार्केटेड क्षमता लगभग 5,000mAh के आसपास होने वाली है. यह बड़ा अपग्रेड सीधे तौर पर सैमसंग और गूगल के प्रीमियम फोल्डेबल फोंस को कड़ी टक्कर देगा.वजन में भारी होंगे प्रो मॉडल्स, ब्लैक कलर की हो सकती है छुट्टीबैटरी और कैमरे का यह बड़ा अपग्रेड सिर्फ अल्ट्रा मॉडल तक ही सीमित नहीं रहेगा. लीक्स के अनुसार, iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max में भी बैटरी लाइफ में काफी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा.हालांकि, इन भारी-भरकम बदलावों की वजह से इस साल के प्रो मॉडल्स पिछले वेरिएंट्स के मुकाबले काफी भारी हो सकते हैं, यहाँ तक कि प्रो मैक्स मॉडल का वजन 240 ग्राम के पार भी जा सकता है. बड़े कैमरा मॉड्यूल के कारण फोन की मोटाई भी थोड़ी बढ़ सकती है. रंगों (Colors) की बात करें तो इस बार प्रो मॉडल्स में से क्लासिक ब्लैक कलर को हटाया जा सकता है. एप्पल इसकी जगह डार्क चेरी, लाइट ब्लू और सिल्वर जैसे बेहद आकर्षक और नए शेड्स पर अपना पूरा फोकस कर रहा है. एप्पल के सितंबर में होने वाले मेगा इवेंट में इन सभी फीचर्स पर से आधिकारिक तौर पर पर्दा उठ जाएगा.
PM मोदी बोले- 9 महीने में हुआ भारत-न्यूजीलैंड FTA, 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को दोनों देशों के रिश्तों में ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। ऑकलैंड में उन्होंने 9 महीने में हुए इस समझौते, UPI सहयोग और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य साझा

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