ईरानी हमले की आशंका से नाटो सम्मेलन से लौटते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने बदला था विमान
वाशिंगटन। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में तुर्की में आयोजित नाटो सम्मेलन से लौटते समय कथित ईरानी हमले की आशंका के कारण पुराने एयर फोर्स वन विमान का इस्तेमाल किया था। सीबीएस न्यूज ने अमरीकी अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार अमरीकी खुफिया एजेंसियों को […] The post ईरानी हमले की आशंका से नाटो सम्मेलन से लौटते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने बदला था विमान appeared first on Sabguru News .
आंदोलन के पीछे कोई विदेशी हाथ नहीं : कॉकरोज जनता पार्टी
नई दिल्ली। कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) ने शनिवार को कहा कि उनके आंदोलन के पीछे न तो कोई विदेशी हाथ था और न ही विदेशी धन, यह केवल देश के विद्यार्थियों का आंदोलन था। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास तथा आशुतोष रांका ने कहा कि राजधानी में जन्तर मंतर पर उनके धरने दौरान कुछ उपद्रवी […] The post आंदोलन के पीछे कोई विदेशी हाथ नहीं : कॉकरोज जनता पार्टी appeared first on Sabguru News .
नरसिंहपुर : 5 युवकों की मौत दुर्घटना से नहीं हुई, डम्पर से कुचल कर की हत्या
नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के सुआतला पुलिस थाना के हाथीनाला वॉटरफॉल में पिकनिक मना कर वापस आते समय 19 जुलाई को पांच युवकों की मौत डम्पर के टकराने पर हो गई थी और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस मामले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) ऋषिकेश मीना ने शनिवार को […] The post नरसिंहपुर : 5 युवकों की मौत दुर्घटना से नहीं हुई, डम्पर से कुचल कर की हत्या appeared first on Sabguru News .
सीजेपी का आंदोलन समाप्त होने के बाद सभी मेट्रो स्टेशन खुले
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के देश भर में जारी आंदोलन तत्काल प्रभाव से वापस लेने के बाद दिल्ली मेट्रो ने बंद किए गए सभी मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश द्वार शनिवार शाम खोल दिए। सीजेपी से संसद मार्च के दिन से ही सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए […] The post सीजेपी का आंदोलन समाप्त होने के बाद सभी मेट्रो स्टेशन खुले appeared first on Sabguru News .
जालौन के पिछड़ेपन के जिम्मेदार अब घड़ियाली आंसू बहाकर युवाओं को गुमराह कर रहे
CM Yogi Adityanath Jalaun: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जालौन में विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने बुंदेलखंड के पिछड़ेपन, सूखे और पलायन के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराते हुए ...
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने देशभर में छात्रों और युवाओं के आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को उचित कदम बताते हुए कहा कि यह फैसला पहले ही ले लिया जाना चाहिए था। उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई, आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने और आंदोलन का राजनीतिकरण न करने की अपील की।
अमेरिकी कोर्ट का ट्रंप को बड़ा झटका, H-1B Visa पर भारी शुल्क लगाने के फैसले पर जारी रहेगी रोक
H-1B Visa Donald Trump: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को अमेरिकी न्याय प्रणाली से एक और बड़ा झटका लगा है। अमेरिका की एक संघीय अपीलीय अदालत ने उच्च कौशल वाले विदेशी पेशेवरों (विशेषकर आईटी कर्मचारियों) के लिए एच-1बी (H-1B) वीजा पर एक लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 83 ...
सरकार से अपनी मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद CJP ने वापस लिया आंदोलन
नई दिल्ली। पेपर लीक के मुद्दे पर पिछले एक महीने से अधिक समय से आंदोलन चला रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा और सरकार की ओर से अपनी प्रमुख मांगों को मान लिए जाने के बाद शनिवार शाम को अपना आंदोलन वापस ले लिया। राजधानी में […] The post सरकार से अपनी मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद CJP ने वापस लिया आंदोलन appeared first on Sabguru News .
हमारे शरीर के भीतर काम करने वाली प्राकृतिक 'सर्केडियन रिदम' यानी जैविक घड़ी हमारी सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। शरीर की यह 24 घंटे वाली नेचुरल क्लॉक न सिर्फ हमारे सोने और जागने के चक्र को नियंत्रित करती है, बल्कि भूख और हार्मोन के स्तर को भी संतुलित रखने में मदद करती है। हाल ही में सामने आई एक नई और चौंकाने वाली स्टडी ने इस जैविक घड़ी को लेकर एक बेहद अहम जानकारी दी है। इस रिसर्च के मुताबिक, स्ट्रोक जैसी गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल के बाद रिकवरी प्रक्रिया में यह बायोलॉजिकल क्लॉक दिमाग को ठीक करने में एक वरदान साबित हो सकती है।स्ट्रोक के बाद दिमाग को दुरुस्त करेगी सर्केडियन रिदमप्रतिष्ठित जर्नल 'ऑफ क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन' में प्रकाशित इस नए शोध के अनुसार, शरीर की सर्केडियन रिदम के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ करना भविष्य में भारी नुकसानदायक साबित हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर प्राकृतिक जैविक घड़ी को मजबूत किया जाए और नींद के पैटर्न में सुधार लाया जाए, तो यह स्ट्रोक के बाद दिमाग को तेजी से रिकवर होने में मदद कर सकती है। इस पूरी प्रक्रिया से दिमाग के अंदर जमा होने वाले कचरे को साफ करने और रिकवरी के तरीके को पूरी तरह से बेहतर बनाने का एक नया रास्ता मिल गया है। चूहों पर किए गए इस मॉडल प्रयोग में वैज्ञानिकों ने देखा कि सर्केडियन रिदम को मजबूत करने वाले तरीकों से स्ट्रोक के बाद की रिकवरी में अभूतपूर्व सुधार हुआ है।ग्लिम्फैटिक सिस्टम में सुधार और सूजन वाले मॉलिक्यूल्स में कमीयूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने इस स्टडी के दौरान चूहों के 'ग्लिम्फैटिक सिस्टम' यानी दिमाग से कचरा और टॉक्सिन्स बाहर निकालने वाले नेचुरल ड्रेनेज नेटवर्क में महत्वपूर्ण सुधार देखा। इसके साथ ही, स्ट्रोक के बाद दिमाग में बने रहने वाले सूजन पैदा करने वाले हानिकारक मॉलिक्यूल्स के स्तर में भी भारी कमी दर्ज की गई। यह पूरा सिस्टम सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड को ब्लड वेसल्स के साथ और ब्रेन टिश्यू के माध्यम से संचालित करता है, जिससे मस्तिष्क को जरूरी न्यूट्रिएंट्स मिलते हैं और हानिकारक कचरे तथा सूजन वाले सिग्नल्स को बाहर निकालने में मदद मिलती है। इस रिसर्च से जुड़े न्यूरोसाइंटिस्ट्स का मानना है कि स्ट्रोक के बाद की रिकवरी पर विचार करते समय यह समझना जरूरी है कि स्ट्रोक सिर्फ ब्लड वेसल्स से जुड़ी कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि यह समय से जुड़ी एक बड़ी जैविक गड़बड़ी भी है। शोध में यह भी संकेत मिले हैं कि स्ट्रोक अक्सर दिन के कुछ विशेष समय और खासतौर पर सुबह के वक्त या नींद का समय समाप्त होने के आसपास अधिक गंभीर रूप ले सकते हैं।
आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में हमारी खानपान से जुड़ी आदतें तेजी से बदल रही हैं, जिसका सीधा असर हमारे पूरे शरीर पर पड़ रहा है। हम रोजमर्रा की जिंदगी में जो कुछ भी खाते-पीते हैं, वही हमारे शरीर की सेहत का मुख्य आधार तय करता है। मानव शरीर किसी एक मशीन की तरह काम नहीं करता, बल्कि यह कई छोटे-छोटे महत्वपूर्ण अंगों और प्रणालियों का एक ऐसा समूह है, जहां हर अंग की अपनी अलग जरूरत और कार्यशैली होती है। हम क्या खा रहे हैं, यही तय करता है कि हमारे फेफड़े कितनी अच्छी तरह सांस लेंगे, लिवर शरीर के विषैले तत्वों को कितनी आसानी से बाहर निकालेगा, पाचन तंत्र भोजन से जरूरी पोषक तत्वों को कितना सोखेगा और हमारी आंखें रोजमर्रा की डिजिटल थकान को कितना झेल पाएंगी। यदि आप भी गलत खानपान के आदि हो चुके हैं, तो संभलने का वक्त आ गया है।क्या कहते हैं न्यूट्रिशन एक्सपर्टप्रसिद्ध न्यूट्रिशन एक्सपर्ट लवनीत बत्रा के अनुसार, सही और संतुलित खानपान हमारे शरीर के सभी सिस्टम्स को अंदर से मजबूत बनाता है, जबकि जंक फूड और खराब आदतें धीरे-धीरे इन्हें अंदर से कमजोर कर देती हैं। सेहतमंद रहने के लिए यह कतई जरूरी नहीं है कि आप कोई बहुत मुश्किल और कठिन डाइट अपनाएं, बल्कि आवश्यकता इस बात की है कि आप यह समझें कि कौन-सा पोषक तत्व शरीर के किस खास अंग के लिए जरूरी है। अपनी डाइट में बस छोटे-छोटे और सकारात्मक बदलाव करके आप तमाम गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं।फेफड़ों (Lungs) को मजबूत और सुरक्षित रखने के लिए क्या खाएंसांस लेना भले ही हमें एक सहज और सामान्य प्रक्रिया लगती हो, लेकिन हमारे फेफड़ों की सेहत काफी हद तक हमारी रसोई और डाइट पर निर्भर करती है। आज के समय में बढ़ता प्रदूषण, मानसिक तनाव और लगातार होने वाले संक्रमण हमारे श्वसन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। फेफड़ों की रक्षा के लिए अदरक और हल्दी जैसे पारंपरिक घरेलू मसाले बेहद असरदार साबित होते हैं, क्योंकि इनमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व सूजन को कम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, संतरे, नींबू और मौसमी जैसे खट्टे फल शरीर को भरपूर विटामिन सी प्रदान करते हैं, जो फेफड़ों को बाहरी नुकसान से बचाते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (NIH) की एक स्टडी में भी यह बात सामने आ चुकी है कि एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर आहार फेफड़ों को जहरीले प्रदूषण से महफूज रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।लिवर (Liver) की नैचुरल डिटॉक्सिंग और देखभालहमारा लिवर दिन-रात बिना रुके शरीर की सफाई यानी डिटॉक्सिफिकेशन के काम में लगा रहता है, लेकिन हम अक्सर इसकी सेहत की अनदेखी कर देते हैं। ब्रोकली और क्रूसिफेरस सब्जियों में ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर से हानिकारक टॉक्सिक पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। इसके अलावा, ग्रीन टी और ऑलिव ऑयल (जैतून का तेल) भी लिवर को स्वस्थ और सक्रिय रखने में काफी मददगार माने जाते हैं। मधुमेह और पाचन तंत्र से जुड़े राष्ट्रीय संस्थानों के मुताबिक, सही और फाइबर युक्त आहार फैटी लिवर जैसी गंभीर समस्याओं से बचाव करने में बेहद मददगार साबित होता है।पाचन तंत्र (Digestion) और आंतों की सेहत का राजहमारे पाचन तंत्र को अक्सर शरीर का 'दूसरा दिमाग' कहा जाता है, क्योंकि यह केवल भोजन को पचाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) और मानसिक स्थिति पर भी गहरा असर डालता है। दही में पाए जाने वाले गुड बैक्टीरिया (प्रोबायोटिक्स) पाचन प्रक्रिया को दुरुस्त बनाते हैं, जबकि केला और चिया सीड्स जैसे खाद्य पदार्थ इन अच्छे जीवाणुओं को पोषण देने का काम करते हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, एक स्वस्थ आंत माइक्रोबायोम शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण (Absorption) को बेहतर बनाता है और सूजन से जुड़ी कई तरह की बीमारियों के जोखिम को कम करता है।डिजिटल युग में आंखों (Eyes) की देखभाल और जरूरी पोषक तत्वआज के समय में लैपटॉप, मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण आंखों पर पड़ने वाला दबाव बहुत बढ़ गया है। ऐसे में गाजर और शकरकंद जैसे खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करना बेहद जरूरी है, क्योंकि इनमें प्रचुर मात्रा में बीटा-कैरोटीन पाया जाता है, जो आंखों की रोशनी के लिए वरदान माना जाता है। इसके अलावा, आंवला भी आंखों की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है क्योंकि इसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है, जो आंखों को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाने में मदद करता है।
भारतीय क्रिकेट टीम के युवा और आक्रामक बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी अपनी शानदार फॉर्म के बावजूद जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में लंबी पारी खेलने से चूक गए। पिछले मैच में अपने दमदमार और ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक से महफिल लूटने वाले 15 साल के इस युवा खिलाड़ी ने इस मैच में भी मैदान पर उतरते ही अपने तेवर दिखा दिए थे। जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले जा रहे इस रोमांचक मुकाबले में विपक्षी टीम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया, जिसके बाद भारतीय टीम की शुरुआत कुछ खास नहीं रही और शुरुआती ओवरों में ही टीम ने अपने सलामी बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए। क्रीज पर उतरते ही वैभव ने बड़े शॉट्स खेलने शुरू किए, लेकिन लालच और जल्दबाजी के चक्कर में वह अपना विकेट गंवा बैठे और सिर्फ 9 गेंदों में 20 रन बनाकर आउट हो गए।वैभव सूर्यवंशी की तूफानी पारी और आउट होने का पूरा रोमांचपारी के शुरुआती ओवरों में जब भारतीय टीम दबाव में थी, तब पिछले मैच के हीरो वैभव सूर्यवंशी ने मोर्चा संभाला। हालांकि, दूसरे ओवर तक उन्हें महज तीन गेंदें ही खेलने का मौका मिला था क्योंकि दूसरे छोर पर सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा 8 गेंदों में 8 रन बनाकर आउट हो चुके थे। इसके बाद तीसरे ओवर में वैभव ने जिम्बाब्वे के गेंदबाज रिचर्ड नगारवा के खिलाफ ताबड़तोड़ प्रहार करने की ठान ली। ओवर की पहली दो गेंदों पर उन्होंने समझदारी दिखाई, लेकिन अगली ही गेंद पर उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में करारा चौका जड़ दिया। इसके बाद उन्होंने अगली गेंद पर एक लंबा और गगनचुंबी छक्का लगाया। पारी के इस ओवर की चौथी और पांचवीं गेंद पर भी युवा बल्लेबाज ने चौके की बारिश कर दी। एक वाइड सहित इस ओवर में पहले ही काफी रन आ चुके थे, लेकिन अंतिम गेंद पर एक और बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में वह खुद पर नियंत्रण नहीं रख सके और बाउंड्री पर कैच थमा बैठे। आउट होने से पहले उन्होंने अपनी 9 गेंदों की छोटी सी पारी में 3 शानदार चौके और 1 बेहतरीन छक्का लगाया।सबसे युवा टी20 अर्धशतकवीर का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं वैभवमहज 15 साल और 118 दिन की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले वैभव सूर्यवंशी ने पिछले मुकाबले में पुरुषों के टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक जड़ने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया था। उन्होंने जिब्राल्टर के खिलाड़ी लुइस ब्रूस (16 साल 56 दिन) का पुराना रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रच दिया था। इस मैच में अभिषेक शर्मा के साथ उनकी 10 रन की और ईशान किशन के साथ 19 रन की छोटी साझेदारी हुई। हालांकि वह इस पारी को बड़े स्कोर में नहीं बदल पाए, लेकिन उनकी यह आक्रामक शैली यह साबित करती है कि आने वाले समय में वह भारतीय बल्लेबाजी क्रम के एक सबसे बड़े और खतरनाक मैच विनर बनने की पूरी क्षमता रखते हैं।
उरई में सीएम योगी आदित्यनाथ का जोरदार हमला, बोले- 'विपक्ष युवाओं को भड़काकर कर रहा भ्रमित
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को जालौन जिले के उरई दौरे पर पहुंचकर विपक्ष पर तीखा राजनीतिक प्रहार किया। उरई पुलिस लाइन ग्राउंड पहुंचने के बाद सीएम योगी सड़क मार्ग से जिला स्टेडियम पहुंचे, जहां उन्होंने परिसर में लगी विकास प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने मंच से करीब 1273.96 करोड़ रुपये की भारी-भरकम विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को मकान की चाबियां सौंपीं, गर्भवती महिलाओं की गोदभराई कराई और बच्चों के साथ संवाद कर उन्हें दुलार किया।जालौन अब दस्युओं की नहीं, बल्कि वेदव्यास और विकास की धरा हैउरई के जिला स्टेडियम में जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जालौन और कालपी के गौरवशाली इतिहास को याद किया। उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास ने इसी पावन धरा पर जन्म लिया था और यह भूमि अपनी वीरता के लिए जानी जाती है। विपक्ष पर करारा हमला बोलते हुए सीएम योगी ने सवाल किया कि वे कौन लोग थे जो जालौन को लगातार पीछे धकेलने का काम कर रहे थे? उन्होंने कहा कि ये वही लोग हैं जो आज भी युवाओं को भड़काकर उन्हें भ्रमित करने की राजनीति कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जालौन को शानदार फोरलेन कनेक्टिविटी मिल रही है और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे इस पूरे क्षेत्र को एक नई पहचान दिला रहा है। अब यह इलाका दस्युओं और अपराध के लिए नहीं, बल्कि विकास की नई इबारत लिखने के लिए जाना जा रहा है।सपा ने नोंचा है बुंदेलखंड, माफियाओं के लिए यूपी में कोई जगह नहींकानून-व्यवस्था का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि उन्होंने पहले ही जनता से वादा किया था कि प्रदेश को डकैती और माफिया मुक्त करेंगे और अपराधियों को मिट्टी में मिला देंगे। सरकार ने माफियाओं की अवैध संपत्तियों को जब्त करने का बड़ा काम किया है। सपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा बुंदेलखंड को नोंचने का काम किया है, जिसे यहां की जनता कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि आज जालौन में भाजपा की जिला अध्यक्ष भी एक महिला हैं और प्रदेश में बेटियां पूरी तरह सुरक्षित हैं। अब घर से निकलने वाला व्यापारी पूरी सुरक्षा के साथ वापस लौटता है, जबकि पहले लोग शाम को घर लौटने को लेकर डरे रहते थे। सीएम योगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लूटपाट करने वाले, वन माफिया और जमीन माफिया जहां जाने थे, वहां जा चुके हैं और अब यूपी में अपराधियों के लिए सिर्फ जेल या जहन्नुम की जगह बची है।
सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ के व्रत का एक विशेष और अत्यंत पवित्र स्थान है। सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए सालभर इस पावन दिन का इंतजार करती हैं। इस खास पर्व पर महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, हाथों में मेहंदी रचा नए वस्त्र धारण करती हैं और पूरे दिन बिना अन्न-जल के निर्जला उपवास रखती हैं। रात के समय आकाश में चंद्रमा के दीदार करने के बाद छलनी से पति का चेहरा देखकर और उनके हाथों से जल ग्रहण करके इस कठिन व्रत का पारण किया जाता है। उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड में इस पर्व की रौनक देखते ही बनती है और बाजारों में अभी से सुहाग की वस्तुओं की खरीदारी के लिए महिलाओं की भीड़ जुटने लगी है।करवा चौथ 2026 की सही तिथि और शुभ दिनइस वर्ष सुहागिनों का यह महाव्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। गुरुवार का दिन होने के कारण इस व्रत का धार्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति ग्रह को वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य का मुख्य कारक माना गया है। करवा चौथ के आने से कई दिन पहले ही बाजारों में सुहाग का सामान, छलनी, करवा, और मिट्टी के दीयों की दुकानें सज जाती हैं। महिलाएं सामूहिक रूप से पूजा की कथा सुनने और थाली सजाने की तैयारियों में जुट जाती हैं।करवा चौथ 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समयइस साल करवा चौथ के व्रत और पूजा-पाठ के लिए निम्नलिखित समय सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है:व्रत की कुल अवधि/समय: सुबह 6:31 मिनट से शुरू होकर रात 8:17 मिनट तक रहेगा।करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:38 मिनट से लेकर शाम 6:56 मिनट तक (पूजा की कुल अवधि: 1 घंटा 18 मिनट)।चंद्रोदय का संभावित समय: रात 8:17 मिनट पर चांद के दीदार होने की उम्मीद है, जिसके बाद महिलाएं अपना व्रत खोल सकेंगी।करवा चौथ की संपूर्ण पूजा विधिकरवा चौथ के दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर सरगी ग्रहण करती हैं, जो सास या बड़े बुजुर्गों द्वारा दी जाती है। इसके बाद पूरा दिन बिना पानी पिए निर्जला उपवास रखा जाता है। शाम के समय सुहागिन महिलाएं मिलकर माता पार्वती, भगवान शिव, भगवान गणेश और करवा माता की षोडशोपचार विधि से पूजा करती हैं। पूजा के दौरान दीवार पर करवा चौथ की कथा का चित्र बनाकर या किताब से कथा पढ़ी और सुनी जाती है। रात्रि में जब चांद निकलता है, तब छलनी के जरिए चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखकर उनकी आरती उतारी जाती है। अंत में पति के हाथों से जल पीकर और मिठाई खाकर महिलाएं अपने इस कठिन व्रत को सफलतापूर्वक संपन्न करती हैं।
सीएम योगी आदित्यनाथ का बड़ा ऐलान, आगरा को जल्द मिलेगा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को ऐतिहासिक नगरी आगरा को बड़ी सौगात देते हुए करीब 342 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इस दौरान आगरा में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी के तेवर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर बेहद तीखे नजर आए। उन्होंने डबल इंजन सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए पिछली सरकारों के कार्यकाल पर जमकर निशाना साधा और कहा कि अब उत्तर प्रदेश में न तो कोई कर्फ्यू है और न ही दंगा, क्योंकि यहां अब 'सब चंगा ही चंगा है'।सैफई सिंडिकेट और पिछली सरकारों पर साधा निशानाविपक्ष पर करारा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा केवल 'सैफई सिंडिकेट' की लूट और डकैती का माध्यम बनकर रह गया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि तब युवाओं के भविष्य और नौकरियों पर चाचा-भतीजे कुंडली मारकर बैठ जाते थे, व्यापारियों के साथ छीनाझपटी आम बात थी और मुख्यमंत्री अपनी मौज-मस्ती में व्यस्त रहते थे। सीएम योगी ने कहा कि जिनकी सोच केवल अपने परिवार तक सीमित हो, उनसे बड़े विकास कार्यों की उम्मीद कभी नहीं की जा सकती। उन्होंने पिछली सरकारों के कामकाज की शैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस प्रदेश का मुखिया दोपहर में उठता हो, शाम को जिम और रात में दोस्तों के साथ मौज-मस्ती में व्यस्त रहता हो, वहां की कानून-व्यवस्था का भगवान ही मालिक था।माफियाओं के लिए सिर्फ जेल या जहन्नुम, आगरा में बनेगा छत्रपति शिवाजी महाराज का स्मारककानून-व्यवस्था का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि आज उत्तर प्रदेश में माफियाओं के लिए सिर्फ दो ही जगह बची हैं, या तो जेल या फिर जहन्नुम। उन्होंने कहा कि पहले व्यापारी घर से निकलते वक्त यह सोचते थे कि वे सुरक्षित लौट पाएंगे या नहीं, लेकिन आज डबल इंजन की सरकार में बेटियां और व्यापारी पूरी तरह सुरक्षित हैं। आगरा के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व पर बात करते हुए सीएम योगी ने कहा कि जिस धरती पर छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने शौर्य का परिचय दिया था, वहां पिछली सपा सरकार 'मुगल म्यूजियम' बना रही थी, जिसे हमारी सरकार ने बदलकर राष्ट्रनायक छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर कर दिया और इस वर्ष इसका निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। इसके साथ ही आगरा में उस कोठी पर भी भव्य स्मारक बनेगा जहां शिवाजी महाराज रहते थे। इसके अलावा बटेश्वर, कैलाश, गुरु का ताल, फतेहपुर सीकरी और शौरीपुर जैन तीर्थ का भी तेजी से विकास किया जा रहा है। लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की स्मृति में 500 महिलाओं के लिए श्रमजीवी होटल के निर्माण की भी स्वीकृति दी जा चुकी है।
रवि प्रदोष व्रत पर जरूर पढ़ें यह चमत्कारी पौराणिक कथा, भोलेनाथ की कृपा से दूर होते हैं सभी संकट
सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष और पवित्र महत्व माना गया है। जुलाई महीने का अंतिम प्रदोष व्रत 26 जुलाई 2026 को रविवार के दिन पड़ रहा है, जिसे रवि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। रविवार के दिन पड़ने के कारण इस व्रत का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने और प्रदोष काल में शिव आराधना के दौरान व्रत कथा का पाठ करने से साधक पर महादेव की विशेष कृपा बरसती है। इस व्रत के प्रभाव से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।रवि प्रदोष व्रत कथा का आरंभ और निर्धन ब्राह्मण की कहानीपौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय की बात है कि एक गांव में एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण परिवार निवास करता था। उस ब्राह्मण की पत्नी बहुत ही धार्मिक, परोपकारी और साध्वी स्वभाव की थी, जो पूरी निष्ठा के साथ नियमित रूप से प्रदोष व्रत रखा करती थी। इस दंपत्ति का एक ही पुत्र था, जो उनके जीवन का एकमात्र सहारा था। एक दिन वह बालक अकेला ही गंगा स्नान करने के लिए निकल पड़ा। रास्ते में दुर्भाग्यवश कुछ डाकुओं ने उस बालक को घेर लिया और धमकाते हुए पूछने लगे कि उसके पिता का छिपा हुआ धन कहां है। इस पर बालक ने अत्यंत विनम्रता से जवाब दिया कि वे लोग बहुत गरीब हैं और उनके पास ऐसा कोई छिपा हुआ धन नहीं है।संकट में फंसा बालक और भगवान शिव का दिव्य स्वप्नबालक के पास मौजूद पोटली को देखकर जब डाकुओं ने संदेह जताया, तो उसने बताया कि उसमें उसकी मां ने खाने के लिए रोटियां रखी हैं। बालक की सच्चाई और दीन-दशा को देखकर डाकुओं ने उसे बिना कोई नुकसान पहुंचाए जाने दिया। इसके बाद बालक आगे बढ़ते हुए एक अन्य नगर में पहुंचा और एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे थकान के कारण सो गया। संयोगवश, उसी समय नगर के सिपाही कुछ डाकुओं की तलाश करते हुए वहां पहुंचे और सोते हुए बालक को चोर समझकर गिरफ्तार कर राजा के सामने पेश कर दिया। राजा ने बिना किसी छानबीन के उसे कारावास की सजा सुना दी। उसी रात बालक की माता ने विधि-विधान से प्रदोष व्रत किया और भगवान शिव की आराधना में लीन रहीं। माता की सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने रात्रि में राजा को स्वप्न में दर्शन दिए और चेतावनी दी कि जिस बालक को बंदी बनाया गया है, वह पूरी तरह निर्दोष है। शिवजी ने राजा से कहा कि यदि सुबह होने तक उसे रिहा नहीं किया गया, तो उनका पूरा राज्य और वैभव नष्ट हो जाएगा।राजा की ओर से मिला पुरस्कार और प्रदोष व्रत का महत्वअगली सुबह नींद खुलते ही राजा भयभीत हो गया और उसने तुरंत उस बालक को दरबार में बुलवाया। बालक ने रोते-बिलखते हुए राजा को सारी सच्चाई बता दी। सत्य का ज्ञान होते ही राजा ने अपने सिपाहियों को भेजकर बालक के माता-पिता को आदर सहित राजदरबार में बुलवाया। राजा ने ब्राह्मण परिवार को सांत्वना दी और घोषणा की कि उनका पुत्र पूरी तरह निर्दोष है तथा भगवान शिव की कृपा से उन पर आया संकट टल चुका है। ब्राह्मण परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति को देखकर राजा ने उन्हें रहने और भरण-पोषण के लिए पांच गांव दान में दे दिए। इसके बाद वह निर्धन परिवार सुख-समृद्धि से परिपूर्ण हो गया और आनंदमय जीवन जीने लगा। इस पौराणिक कथा से यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि सच्ची श्रद्धा और प्रदोष व्रत के प्रताप से महादेव अपने भक्तों के सभी बड़े से बड़े संकट हर लेते हैं।
भारत और जिम्बाब्वे के बीच खेली जा रही तीन मैचों की रोमांचक टी20 सीरीज के दूसरे मुकाबले में शनिवार को भारतीय टीम की गेंदबाजी आक्रमण में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले जा रहे इस मैच में विदर्भ के तेज गेंदबाज यश ठाकुर ने आखिरकार अपना इंटरनेशनल टी20 डेब्यू कर लिया है। कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस के दौरान जानकारी दी कि पिछले मैच में खेलने वाले अशोक शर्मा की जगह यश ठाकुर को अंतिम एकादश (Playing XI) में शामिल किया गया है।घरेलू क्रिकेट और आईपीएल का शानदार अनुभवअशोक शर्मा ने सीरीज के पहले मुकाबले में भारत के लिए टी20 इंटरनेशनल में पदार्पण किया था, जहां उन्होंने अपने चार ओवर का पूरा कोटा फेंका था लेकिन कोई सफलता हासिल नहीं कर पाए थे। उनकी जगह टीम में आए 27 वर्षीय तेज गेंदबाज यश ठाकुर के पास क्रिकेट का लंबा अनुभव है। इंटरनेशनल डेब्यू करने से पहले यश कुल 74 टी20 मैच खेल चुके थे, जिसमें उन्होंने 74 पारियों में शानदार गेंदबाजी करते हुए 110 विकेट अपने नाम किए हैं। इसके अलावा, वह इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में लखनऊ सुपर जायंट्स और पंजाब किंग्स जैसी फ्रेंचाइजी के लिए भी खेल चुके हैं, जहां उन्होंने 22 आईपीएल मैचों में 27 विकेट चटकाए हैं।हालिया प्रदर्शन और दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवनयश ठाकुर ने पिछले महीने ही श्रीलंका में आयोजित ट्राई-सीरीज के दौरान भारत ए (India A) का प्रतिनिधित्व किया था, जहां उन्होंने 3 मैचों में 5 विकेट झटके थे। इसके अलावा उन्होंने गाले में श्रीलंका ए के खिलाफ दो अनौपचारिक टेस्ट मैचों में भी 5 विकेट हासिल किए थे। विदर्भ के इस प्रतिभाशाली तेज गेंदबाज ने अपने करियर में अब तक 32 फर्स्ट-क्लास और 57 लिस्ट-ए मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने क्रमशः 93 और 90 विकेट झटके हैं। इस मुकाबले के लिए जिम्बाब्वे की प्लेइंग इलेवन में ब्रायन बेनेट, बेन कुरेन, डायोन मायर्स, कप्तान सिकंदर रजा, रयान बर्ल, वेस्ली मधेवेरे, विकेटकीपर तदिवानाशे मारुमनी, ब्रैड इवांस, न्यूमैन न्यामुरी, रिचर्ड नगारवा और ब्लेसिंग मुजरबानी शामिल हैं। वहीं, भारतीय टीम की प्लेइंग इलेवन में वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, विकेटकीपर ईशान किशन, कप्तान श्रेयस अय्यर, तिलक वर्मा, रिंकू सिंह, शिवम दुबे, रवि बिश्नोई, प्रिंस यादव, यश ठाकुर और मयंक यादव उतर रहे हैं।
देशभर के केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग (Pay Commission) से जुड़ी बड़ी और बेहद रोमांचक खबरें सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां केंद्रीय कर्मचारियों को अगले साल की पहली छमाही तक आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए राज्य सरकार ने बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने आधिकारिक तौर पर 22 जुलाई को राज्य के 7वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) के गठन की विधिवत घोषणा कर दी है, जिससे बंगाल के लाखों कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।सुवेंदु अधिकारी सरकार का बड़ा कदम, इसी वित्त वर्ष में लागू करने का लक्ष्यइससे एक दिन पहले मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में साफ कर दिया था कि राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य चालू वित्त वर्ष के भीतर ही 7वें राज्य वेतन आयोग की सिफारिशों को जमीन पर उतारना है। मई महीने में पश्चिम बंगाल में चुनावी जीत हासिल करने के बाद वहां की सरकार ने अपने चुनावी वादे को पूरा करते हुए इस वेतन आयोग पैनल के गठन को हरी झंडी दिखाई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने भी चुनाव प्रचार के दौरान राज्य के कर्मचारियों से इस बात का वादा किया था, जिसे अब अमलीजामा पहनाया जा रहा है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस आयोग के लिए जो नया पैनल बनाया गया है, वह भविष्य में केंद्र की 8वीं वेतन आयोग की सिफारिशों पर भी विचार कर सकता है, जिसका मतलब है कि बंगाल के कर्मचारियों को दोहरा फायदा मिल सकता है।क्या है पैनल की समय-सीमा और कार्यशैली? (Terms of Reference)पश्चिम बंगाल के वित्त विभाग की ओर से जारी प्रस्ताव के अनुसार, चार सदस्यों वाला यह विशेष पैनल राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों की गहराई से समीक्षा करेगा। इस आयोग का मुख्य मुख्यालय कोलकाता में रहेगा, हालांकि जरूरत पड़ने पर यह राज्य के अन्य हिस्सों या राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी अपनी बैठकें आयोजित कर सकता है। पैनल को निर्देश दिए गए हैं कि वह प्रस्ताव प्रकाशित होने की तारीख से 6 महीने के भीतर या सरकार द्वारा तय किए गए समय के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपे। यह पैनल राज्य के विभिन्न विभागों, वैधानिक और गैर-वैधानिक निकायों तथा निगमों के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन ढांचे को आधुनिक जरूरतों के हिसाब से तर्कसंगत बनाने की सिफारिश करेगा।महंगाई भत्ता (DA) और सेवा शर्तों की होगी समीक्षायह वेतन आयोग केवल मूल वेतन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सरकारी सेवा में बेहतरीन प्रतिभाओं को आकर्षित करने और उन्हें रोके रखने के लिए एक आकर्षक वेतन-भत्ते का नया ढांचा भी सुझाएगा। इसके अलावा, पैनल मौजूदा महंगाई भत्ते (DA) की दरों की पूरी समीक्षा करेगा और आने वाले समय के लिए एक बेहतर फॉर्मूला तैयार करेगा। यात्रा भत्ता (TA) और अन्य विशेष भत्तों तथा रियायतों की भी बारिकी से जांच की जाएगी। चुनाव के दौरान किया गया यह वादा अब धरातल पर उतर चुका है, जिससे आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल के लाखों कर्मचारियों के वेतन में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अपने पद से इस्तीफा देने के बाद से देश की राजनीति और सोशल मीडिया पर एक अलग ही चर्चा छिड़ गई है। शनिवार (25 जुलाई) को दोपहर 2:18 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर कर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के तुरंत बाद, नेटिजन्स का रुख क्रिकेट की दुनिया की ओर मुड़ गया है। अब सोशल मीडिया पर टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर के इस्तीफे की मांग जोर-शोर से उठने लगी है, जिसके पीछे हालिया खराब प्रदर्शन और सीरीज हार को मुख्य वजह बताया जा रहा है।क्यों उठी गौतम गंभीर के इस्तीफे की मांगगौतम गंभीर के कोचिंग कार्यकाल के दौरान टीम इंडिया ने चैंपियंस ट्रॉफी और टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े खिताब अपने नाम किए हैं, लेकिन इसके साथ ही टीम को कई शर्मनाक और ऐतिहासिक हार का भी सामना करना पड़ा है। हाल ही में भारत को आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की टी20 सीरीज में 0-2 से करारी हार झेलनी पड़ी थी, जो किसी भी फॉर्मेट में आयरलैंड के खिलाफ टीम इंडिया की पहली सीरीज हार थी। इसके अलावा, मेन इन ब्लू को इंग्लैंड के खिलाफ भी टी20 सीरीज में 0-4 से क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा था। इन लगातार निराशाजनक प्रदर्शनों के बाद फैंस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है और वे गंभीर को उनके पद से हटाने की मांग कर रहे हैं।सोशल मीडिया पर मीम्स और रिएक्शंस की बाढ़धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इस मौके को लपकते हुए गौतम गंभीर को निशाना बनाना शुरू कर दिया। एक्स (ट्विटर) पर एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में गंभीर की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि शिक्षा मंत्री के जाने के बाद अब हर किसी की निगाहें गौतम गंभीर पर टिकी हैं। वहीं, एक अन्य यूजर ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दीपके को टैग करते हुए लिखा कि अब गौतम गंभीर का भी इस्तीफा मांग लिया जाना चाहिए। इस बीच, मौजूदा समय में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली जा रही तीन मैचों की टी20 सीरीज में वीवीएस लक्ष्मण अंतरिम हेड कोच की भूमिका निभा रहे हैं, जिनकी देखरेख में टीम इंडिया ने पहला मुकाबला जीत लिया है। इस जीत के बाद सोशल मीडिया पर फैंस यह कहते नजर आए कि गंभीर के मैदान से हटते ही टीम ने जीत की पटरी पर वापसी कर ली है।
सीकर। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने सीकर जिले के नीमकाथाना में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) संख्या-एक न्यायालय के सहायक निदेशक अभियोजन कौशल सिंह राठौड़ को 50 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। ब्यूरो के पुलिस महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि राठौड़ को शुक्रवार रात रेलवे स्टेशन […] The post सीकर : नीमकाथाना में एसीजेएम संख्या-1 कोर्ट के सहायक निदेशक अभियोजन कौशल सिंह राठौड़ रिश्वत लेते अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
उदयपुर में होटल की बालकनी से पिछोला झील में गिरी मासूम बालिका
उदयपुर। राजस्थान में उदयपुर शहर के पिछोला झील में शनिवार को एक बालिका की डूबकर मौत हो गई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि दिल्ली निवासी सोनू सिंह तंवर अपनी पत्नी और दो वर्षीय बच्ची के साथ उदयपुर घूमने आए थे। यह परिवार यहां पिछोला झील के किनारे होटल जगत निवास में ठहरा था। सुबह वह […] The post उदयपुर में होटल की बालकनी से पिछोला झील में गिरी मासूम बालिका appeared first on Sabguru News .
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा का स्वागत किया है लेकिन कहा है कि छात्रों का आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। सीजेपी के नेताओं ने शनिवार को यहां जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में मौजूद छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रों की तीन […] The post सीजेपी ने धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे का किया स्वागत, मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखने की घोषणा की appeared first on Sabguru News .
CJP का आंदोलन खत्म, साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉकरोचों का ऐलान, सभी प्रदर्शनकारी घर जाएं
CJP protest ended: स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी (CJP) ने शनिवार को प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान कर दिया है। सीजेपी के प्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षा ...
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों की जीत, अब मोदी मांगे युवाओं से माफी : कांग्रेस
नई दिल्ली। कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को देश के छात्रों और युवाओं के संघर्ष की जीत बताते हुए कहा है कि यह केवल शुरुआत है और असली लड़ाई तो अभी बाकी है। पार्टी ने कहा कि पहली मांग मान ली गई है और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के युवाओं […] The post धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों की जीत, अब मोदी मांगे युवाओं से माफी : कांग्रेस appeared first on Sabguru News .
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा, कहा हाल के घटनाक्रम से मन दुःखी
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले विद्यार्थियों के धरना-प्रदर्शन और विपक्षी दलों के दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेजा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आज दोपहर […] The post केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा, कहा हाल के घटनाक्रम से मन दुःखी appeared first on Sabguru News .
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ी के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और भविष्य में पेपर लीक जैसे अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार संसद में सख्त कानून लाएगी।
देवशयनी एकादशी से शुरू हुआ चातुर्मास: 4 महीने तक न करें ये काम, इन राशियों की चमकेगी किस्मत
आज देवशयनी एकादशी है और इसी के साथ चातुर्मास की शुरुआत हो चुकी है। मान्यता है कि यह वह समय होता है जब भगवान विष्णु पूरे चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान सृष्टि के संचालन का कार्यभार अन्य देवी-देवताओं, विशेषकर भगवान शिव के हाथों में होता है।चातुर्मास (जिसे चौमासा भी कहा जाता है) के इन चार महीनों में शादी-विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। अब सभी शुभ कार्यों की शुरुआत 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन से होगी। भले ही यह समय सांसारिक उत्सवों का नहीं है, लेकिन पूजा-पाठ, जप और साधना के लिए इसे बहुत फलदायी माना गया है।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चातुर्मास के ये चार महीने 4 विशेष राशियों के लिए बहुत लकी साबित होने वाले हैं। आइए जानते हैं किन राशियों पर रहेगी भगवान विष्णु की विशेष कृपा:वृष राशि (Taurus): तरक्की और मुनाफावृष राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक रूप से काफी मजबूती लेकर आ रहा है। अगर आपका कोई काम लंबे समय से रुका हुआ था, तो अब उसे गति मिल सकती है। नौकरीपेशा लोगों के काम की ऑफिस में सराहना होगी और बॉस की तरफ से नई जिम्मेदारियां भी मिल सकती हैं। वहीं, व्यापार से जुड़े लोगों को इस दौरान अच्छा मुनाफा होने की पूरी उम्मीद है।कर्क राशि (Cancer): अटका हुआ धन मिलेगाइस दौरान कर्क राशि के जातकों का आत्मविश्वास काफी बढ़ा हुआ रहेगा। आपकी सही फैसले लेने की क्षमता मजबूत होगी, जिसका सीधा फायदा आपको अपने कार्यक्षेत्र (Workplace) में मिलेगा। सबसे अच्छी खबर यह है कि अगर आपका पैसा कहीं फंसा हुआ था या किसी ने उधार लिया था, तो वह इस समय वापस मिल सकता है।सिंह राशि (Leo): मान-सम्मान और बड़ी सफलतासिंह राशि वालों के लिए यह समय अपनी मेहनत का मीठा फल चखने का है। आपके करियर में अच्छी प्रगति देखने को मिलेगी, जिससे परिवार और समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। अगर आप किसी बड़े लक्ष्य या प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, तो उसमें आपको बड़ी सफलता मिल सकती है।तुला राशि (Libra): नए आय के स्रोत और पारिवारिक शांतितुला राशि के जातकों के लिए चातुर्मास का यह समय करियर और निजी जीवन, दोनों ही मोर्चों पर शानदार रहने वाला है। आपको कमाई के कुछ नए रास्ते मिल सकते हैं, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति में बड़ा और सकारात्मक सुधार आएगा। इसके अलावा, अगर परिवार में कोई अनबन या मतभेद चल रहा था, तो वह भी सुलझ जाएगा और घर में शांति का माहौल रहेगा।क्या आप इस लेख में पाठकों की जानकारी बढ़ाने के लिए चातुर्मास के दौरान किए जाने वाले कुछ विशेष उपायों या पूजा-विधि को भी शामिल करना चाहेंगे?
स्मार्टफोन की कीमतें क्यों छू रही हैं आसमान? इन 5 कारणों से समझें क्या आगे और महंगे होंगे मोबाइल
पिछले कुछ महीनों में बजट से लेकर प्रीमियम सेगमेंट तक लगभग हर स्मार्टफोन की कीमत में जबरदस्त उछाल आया है। फोन के महंगे होने की वजह सिर्फ आम महंगाई नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता दखल, महंगी मेमोरी चिप्स और मैन्युफैक्चरिंग लागत में हुई बढ़ोतरी है।अगर आप भी नया फोन खरीदने का प्लान कर रहे हैं और बढ़ती कीमतों से परेशान हैं, तो आइए एक टेक और बिजनेस एनालिस्ट के नजरिए से समझते हैं स्मार्टफोन के महंगे होने के 5 सबसे बड़े कारण।स्मार्टफोन के महंगे होने की 5 मुख्य वजहें1. AI के कारण मेमोरी चिप्स का महंगा होनादुनिया भर में AI डेटा सेंटर और सर्वर की मांग तेजी से बढ़ रही है।चिप बनाने वाली कंपनियां अब स्मार्टफोन के बजाय AI के लिए इस्तेमाल होने वाली चिप्स के निर्माण पर ज्यादा फोकस कर रही हैं।इससे स्मार्टफोन की रैम (RAM) और स्टोरेज की लागत 2 से 3 गुना तक बढ़ गई है। पहले फोन की कुल लागत में मेमोरी का हिस्सा 10-15% होता था, जो अब बढ़कर 30-40% हो गया है।2. ऑन-डिवाइस AI और उन्नत हार्डवेयरआजकल हर नया फोन ऑन-डिवाइस AI फीचर्स, हाई-एंड कैमरा और ज्यादा रैम के साथ आ रहा है। इन एडवांस्ड फीचर्स को सुचारू रूप से चलाने के लिए ताकतवर प्रोसेसर और महंगे हार्डवेयर की आवश्यकता होती है, जिससे कंपनियों का प्रोडक्शन खर्च सीधा बढ़ जाता है।3. कमजोर रुपया और सप्लाई चेन का दबावस्मार्टफोन के कई अहम कंपोनेंट्स आज भी आयात किए जाते हैं।अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कमजोरी ने आयात लागत को काफी बढ़ा दिया है।इसके साथ ही ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव और लॉजिस्टिक्स (परिवहन) खर्च में हुई बढ़ोतरी ने भी कंपनियों को कीमतें बढ़ाने पर मजबूर किया है।4. बजट स्मार्टफोन बाजार पर सबसे भारी असरबढ़ती लागत की सबसे बड़ी मार 15,000 रुपये से कम कीमत वाले बजट स्मार्टफोन्स पर पड़ी है।काउंटरपॉइंट रिसर्च (Counterpoint Research) के अनुसार, इस बजट सेगमेंट की बिक्री में सालाना आधार पर 45% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन का भी कहना है कि फोन महंगे होने से खुदरा (रिटेल) बिक्री काफी धीमी पड़ गई है।5. क्या भविष्य में और महंगे होंगे फोन?इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की मानें तो फिलहाल आम आदमी को मोबाइल की कीमतों से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है।चिप्स की कमी और AI सर्वर की बढ़ती मांग के कारण कंपोनेंट्स आगे भी महंगे बने रह सकते हैं।लागत को संतुलित करने के लिए कंपनियां अब फोन के बॉक्स से चार्जर हटाने, 4G मॉडल्स पर दोबारा जोर देने और ग्राहकों को फाइनेंस/EMI ऑफर्स देने जैसे कदम उठा रही हैं।क्या आप इस लेख को अपने पाठकों तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया (जैसे Facebook या X) के लिए एक छोटा और आकर्षक पोस्ट भी तैयार करवाना चाहेंगे?
देशभर में नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर चल रहे भारी बवाल और लगातार बढ़ते राजनीतिक व सामाजिक दबाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र में उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे पहले दिन से ही इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी ले रहे थे। आपको बता दें कि सीजेपी (CJP) के नेतृत्व में छात्र पिछले एक महीने से भी अधिक समय से उनके इस्तीफे पर अड़े थे। यहां तक कि मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी छात्रों के समर्थन में लंबी भूख हड़ताल की थी। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बीच, आइए एक नजर डालते हैं धर्मेंद्र प्रधान के बतौर शिक्षा मंत्री कार्यकाल की प्रमुख सफलताओं और विवादों पर।धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की ऐतिहासिक उपलब्धियांउनके कार्यकाल में भारतीय शिक्षा प्रणाली में कई दूरगामी और सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं, जिन्होंने एजुकेशन सिस्टम की दिशा बदल दी।CUET की शुरुआत: देश के सभी केंद्रीय और प्रमुख विश्वविद्यालयों में अंडरग्रेजुएट एडमिशन को पारदर्शी और एक समान बनाने के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG) को सफलतापूर्वक लागू किया गया।सस्ती और सुलभ पाठ्यपुस्तकें: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत NCERT की नई किताबें तैयार की गईं। इनकी छपाई क्षमता तीन गुना तक बढ़ाई गई, जिससे बाजार में किताबों के दाम कम हुए और अभिभावकों को बड़ी आर्थिक राहत मिली।विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में एंट्री: उच्च शिक्षा को ग्लोबल स्टैंडर्ड का बनाने के लिए NEP 2020 के तहत 19 विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस खोलने की ऐतिहासिक मंजूरी दी गई।हायर एजुकेशन और सिंगल रेगुलेटर: मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) और 4 साल के ग्रेजुएशन प्रोग्राम (FYUP) पर खास जोर दिया गया। इसके अलावा यूजीसी और एआईसीटीई जैसी संस्थाओं को मिलाकर एक सिंगल रेगुलेटर बनाने के लिए ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ पेश किया गया।कार्यकाल से जुड़े वो विवाद, जिन्होंने बढ़ाई सरकार की चिंताजहां एक ओर शिक्षा के क्षेत्र में कई सुधार हुए, वहीं कुछ बड़ी राष्ट्रीय परीक्षाओं में हुई धांधली ने सरकार को बैकफुट पर भी धकेला।NEET-UG 2024 और 2026 का पेपर लीक: नीट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में धांधली और अनियमितताओं के आरोपों ने लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए। देशभर में हुए उग्र विरोध प्रदर्शनों ने सरकार की चिंताएं काफी बढ़ा दीं।डिजिटल मूल्यांकन में तकनीकी खामी: सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में पहली बार इस्तेमाल हुई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली तकनीकी खराबी और धुंधली कॉपियों के कारण काफी विवादों में रही।त्रिभाषा फॉर्मूले और UGC नियमों पर तकरार: कक्षा 9 में त्रिभाषा नीति लागू करने पर तमिलनाडु समेत कई गैर-हिंदी भाषी राज्यों ने केंद्र पर 'हिंदी थोपने' का आरोप लगाया। वहीं, यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 को लेकर भी शिक्षा जगत और सामाजिक हलकों में भारी विरोध देखा गया।इन तमाम महत्वपूर्ण उपलब्धियों और गंभीर विवादों के बीच धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल भारतीय शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।
नीट (NEET) पेपर लीक विवाद को लेकर देश भर में जारी भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। लगभग 37 दिनों से जंतर-मंतर पर डटे छात्रों के लगातार बढ़ते दबाव के बाद आखिरकार भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।इस्तीफा देते हुए उन्होंने लिखा कि जंतर-मंतर पर जो स्थिति बनी हुई है, उससे देश की एकता और अखंडता को खतरा हो सकता है। युवाओं का भविष्य बर्बाद न हो और वे कानूनी पेचीदगियों में न फंसे, इसी को देखते हुए उन्होंने अपना त्यागपत्र सौंपने का फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान ऐसे पहले मंत्री हैं, जिन्हें किसी विरोध-प्रदर्शन के दबाव में अपना पद छोड़ना पड़ा है। 2014 से सरकार में रहे प्रधान को मोदी कैबिनेट का काफी कद्दावर मंत्री माना जाता था और वे इससे पहले पेट्रोलियम व इस्पात जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुके थे।धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के 5 मुख्य कारण1. छात्र और विपक्ष का कड़ा रुखजंतर-मंतर पर आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ी रही। सीजेपी के प्रतिनिधियों (सौरव दास और आशुतोष रांका) ने स्पष्ट कर दिया था कि प्रदर्शन तभी खत्म होगा जब शिक्षा मंत्री पद छोड़ेंगे। इसके साथ ही 10 जनपथ से छात्रों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी साफ कर दिया था कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।2. संसद से लेकर सड़क तक मची अफरा-तफरी20 जुलाई से शुरू हुए संसद सत्र के शुरुआती 5 दिनों में लगातार हंगामे के कारण राज्यसभा और लोकसभा दोनों की कार्यवाही ठप रही। वहीं, दिल्ली के अलावा बिहार (पटना, सीवान), महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे बीजेपी शासित राज्यों में भी छात्रों का विरोध-प्रदर्शन उग्र रूप लेने लगा था, जिससे केंद्र सरकार पर दबाव बहुत अधिक बढ़ गया था।3. डैमेज कंट्रोल में नाकामी3 मई को हुए नीट पेपर लीक के बाद खड़े हुए इस विवाद को शिक्षा मंत्रालय ठीक से नहीं संभाल सका। शुरुआती दौर में सरकार की ओर से प्रदर्शन को नजरअंदाज किया गया। जब विवाद बेकाबू हो गया, तो खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हस्तक्षेप करते हुए सख्त कानून बनाने की घोषणा करनी पड़ी, जबकि शिक्षा मंत्री के तौर पर धर्मेंद्र प्रधान डैमेज कंट्रोल करने में असफल रहे।4. अड़ियल रवैया और छात्रों से संवाद का अभावधर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पीछे उनका अड़ियल रवैया और छात्रों से सीधे संवाद न बनाना भी बड़ी वजह माना जा रहा है। जहां कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान जैसे नेताओं ने किसान आंदोलनों के दौरान चंडीगढ़ जाकर बातचीत से मसले सुलझाए, वहीं धर्मेंद्र प्रधान इस पूरे विवाद के दौरान प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं से पूरी तरह कटे रहे।5. एनटीए की लापरवाही और सिफारिशों को लागू न करनावर्ष 2024 में भी नीट पेपर लीक होने के बाद डॉ. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई थी। कमेटी द्वारा दिए गए सुझावों को पूर्ण रूप से लागू न किए जाने और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की लगातार हो रही लापरवाहियों की नैतिक जिम्मेदारी भी आखिरकार शिक्षा मंत्री के सिर आई, जिसके चलते उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी।
नीट (NEET) परीक्षा में कथित धांधली को लेकर देशभर में चल रहे भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर से एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा इस्तीफा दिए जाने की खबर फैलते ही वहां डटे हजारों छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने जोरदार जश्न मनाया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस मौके पर छात्रों को संबोधित करते हुए इसे लोकतंत्र और युवा शक्ति की ऐतिहासिक जीत करार दिया। उन्होंने इस सफलता को उन मासूम छात्रों को समर्पित किया, जिन्होंने नीट विवाद और पेपर लीक के भारी तनाव में आकर अपनी जान गंवा दी थी।‘झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए’जंतर-मंतर के मंच से उत्साहित समर्थकों को संबोधित करते हुए दीपके ने सरकार पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि पहले लोग कहते थे कि इस सरकार में कोई मंत्री इस्तीफा नहीं देता, लेकिन छात्रों की एकजुटता ने साबित कर दिया है कि अगर झुकाने वाला हो तो दुनिया झुकती है और हमने यह कर दिखाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम कॉकरोच हैं और इतनी जल्दी यहां से जाने वाले नहीं हैं। लोकतंत्र में डरने के बजाय अपने हक के लिए बोलना सीखना सबसे जरूरी है। उनके इस जोशीले भाषण के बाद वहां मौजूद छात्रों का उत्साह और भी बढ़ गया।CJP ने दबाव बढ़ाते हुए रखीं 2 और बड़ी मांगेंशिक्षा मंत्री के इस्तीफे की पहली और सबसे बड़ी मांग पूरी होने के बाद अब सीजेपी ने अपनी बाकी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव तेज कर दिया है। पार्टी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि नीट विवाद के कारण आत्महत्या करने वाले सभी मृतक छात्रों के पीड़ित परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का वित्तीय मुआवजा तुरंत दिया जाए। इसके साथ ही, देशभर में चल रहे इस आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों और युवा नेताओं के खिलाफ दर्ज किए गए सभी पुलिस मुकदमे बिना शर्त वापस लिए जाएं। सीजेपी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर भी यह ऐलान किया है कि जब तक ये दोनों मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका संघर्ष सड़कों पर इसी तरह जारी रहेगा।बिहार बंद का दिखा उग्र असरदिल्ली में जहां एक तरफ जश्न और दबाव की रणनीति चल रही है, वहीं दूसरी तरफ नीट धांधली के विरोध में बुलाए गए 'बिहार बंद' ने काफी उग्र रूप ले लिया है। पटना, भागलपुर से लेकर औरंगाबाद तक छात्रों का भारी गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। कई जगहों पर हिंसक प्रदर्शन, पथराव और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया है और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया है।
देश भर में नीट (NEET) पेपर लीक मामले और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से फैलाया जा रहा है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कतिपय पोस्ट्स और संदेशों में कहा जा रहा है कि जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों, भूख हड़ताल और विभिन्न संगठनों की मांगों के दबाव में आकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है।सरकार और PIB ने खारिज की इस्तीफे की अफवाहआधिकारिक सूत्रों और पीआईबी (PIB Fact Check) ने इस तरह के सभी बयानों और वायरल संदेशों का पूरी तरह खंडन किया है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से कोई इस्तीफा नहीं दिया है। सोशल मीडिया पर चल रहे बयानों और टेक्स्ट मैसेजेस में कई मनगढ़ंत बातें, काल्पनिक संगठनों के नाम और असत्य दावे जोड़े गए हैं, जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।परीक्षा प्रणाली में सुधार और कड़े कानून पर सरकार का जोरकेंद्र सरकार का स्पष्ट कहना है कि मंत्री के पद छोड़ने के बजाय प्राथमिकता परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की है। सरकार NTA के पुनर्गठन, पेपर लीक रोधी कड़े कानून (Public Examinations Bill) को लागू करने और धांधली में शामिल भू-माफिया व कोचिंग सिंडिकेट के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
नीट पेपर लीक मामले में छात्र आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज के विरोध में छात्र संगठनों के आह्वान पर शनिवार को बुलाए गए बिहार बंद के दौरान कई जिलों में प्रदर्शन हिंसक हो गया। राजधानी पटना, सीवान, छपरा और औरंगाबाद समेत कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोनम वांगचुक बोले- यह लोकतंत्र की जीत, अब शिक्षा सुधारों की बारी
गुरुग्राम: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक घटनाक्रम नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण जनभागीदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों की सफलता का प्रतीक है। मेदांता अस्पताल में उपचार के दौरान वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए आंदोलन में शामिल युवाओं, छात्रों और देशभर के नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तब मजबूत होता है, जब नागरिक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते हैं और व्यवस्था उनकी आवाज सुनती है। उनके अनुसार, यह घटनाक्रम जनता की एकजुटता और लोकतांत्रिक जवाबदेही का उदाहरण है। शांति, धैर्य और निरंतर संघर्ष की जीत अपने संदेश में सोनम वांगचुक ने लिखा कि यह प्रत्यक्ष लोकतंत्र की जीत है, जो सड़कों से उठकर लोकतांत्रिक संस्थाओं तक पहुंची है। उन्होंने कहा कि यह शांति, धैर्य और लगातार किए गए संघर्ष की भी सफलता है। वांगचुक ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में सकारात्मक बदलाव तभी संभव होता है, जब नागरिक अहिंसक और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखें। उन्होंने आंदोलन में भाग लेने वाले युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद संयम बनाए रखा और अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सामने रखा। युवाओं और नागरिकों को दी बधाई वांगचुक ने अपने संदेश में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), देश की जेन-ज़ेड पीढ़ी और उन सभी नागरिकों को बधाई दी, जिन्होंने आंदोलन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भागीदारी निभाई। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों ने बिना भय के अपनी आवाज उठाई और लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग किया। उनके अनुसार, जनता की एकजुटता ने यह संदेश दिया है कि शांतिपूर्ण जनआंदोलन भी जवाबदेही सुनिश्चित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होती है। जवाबदेही के बाद अब सुधारों पर जोर सोनम वांगचुक ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा किसी आंदोलन का अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने लिखा कि अब जवाबदेही तय होने के बाद शिक्षा व्यवस्था में व्यापक और स्थायी सुधार लागू करने का समय है। उनके मुताबिक, यह अवसर केवल नेतृत्व परिवर्तन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि छात्रों का विश्वास बहाल करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। परीक्षा प्रणाली में सुधार की उठाई मांग वांगचुक ने अपने संदेश में कहा कि देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए व्यापक सुधार आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था केवल परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसलिए सुधारों का उद्देश्य विद्यार्थियों में भरोसा कायम करना और निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित करना होना चाहिए। NEET-UG विवाद की पृष्ठभूमि में आया बयान धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है, जब NEET-UG परीक्षा से जुड़े विवाद और छात्र आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों की ओर से परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग लगातार उठाई जाती रही है। इसी संदर्भ में सोनम वांगचुक का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वे लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। लोकतंत्र में संवाद और सुधार की आवश्यकता अपने संदेश के अंत में वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता की आवाज और व्यवस्था की जवाबदेही में निहित होती है। उन्होंने कहा कि अब समय विरोध और जवाबदेही से आगे बढ़कर सकारात्मक बदलाव लाने का है। उनके अनुसार, यदि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वास को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो यह छात्रों और देश दोनों के हित में होगा।
केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर वायरल उस पोस्ट को भ्रामक बताया जिसमें दावा किया गया था कि केंद्र सरकार ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन के पीछे किसी विदेशी ताकत, पाकिस्तान या चीन की भूमिका से इनकार कर दिया है।
झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले अभिजीत दीपके
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल है। अभिजीत दीपके ने कहा- कहते थे क्रांति नहीं होगी, लेकिन सरकार झुक गई। पढ़ें पूरी खबर।
धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी CJP का धरना जारी, क्या है उनकी 2 अन्य बड़ी मांगें
Dharmendra Pradhan Resigns : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान के इस्तीफे की खबर से जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों में हर्ष की लहर दौड़ गई। हालांकि इस्तीफे के बाद भी जंतर मंतर पर कॉकरोच ...
भागदौड़ भरी जिंदगी और दिनभर की थकान के बाद हर व्यक्ति चाहता है कि उसे अपने बेडरूम में जाकर सुकून की नींद मिले, ताकि अगले दिन के लिए खुद को तरोताजा कर सके। लेकिन कई बार तमाम कोशिशों के बावजूद रातभर नींद नहीं आती, मन बेचैन रहता है और सुबह उठने पर भारीपन महसूस होता है। क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे की वजह आपकी सेहत या काम का तनाव ही नहीं, बल्कि आपके बेडरूम का वास्तु दोष भी हो सकता है? खासकर आपके सोने वाले बेड (Bed) और उसके ठीक नीचे रखी चीजें आपके जीवन की ऊर्जा को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। वास्तु शास्त्र के जानकारों के अनुसार, पलंग के नीचे का स्थान हमेशा साफ-सुथरा और ऊर्जा के प्रवाह से मुक्त होना चाहिए, अन्यथा यह आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है।बेड के नीचे क्या रखना और क्या नहीं रखना है जरूरी?अक्सर लोग घर में जगह की कमी के कारण पलंग के नीचे बने बॉक्स या खाली जगह में फालतू सामान, पुराने बक्से, जूतों के डिब्बे, लोहे का कबाड़ या इलेक्ट्रॉनिक का सामान ठूंस-ठूंस कर भर देते हैं। वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार, बेड के नीचे कभी भी जंग लगा हुआ सामान, धूल-मिट्टी से भरा कबाड़ या भारी और बेकार की वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। ऐसा करने से उस स्थान पर नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) का दायरा बढ़ने लगता है, जो सोते समय इंसान के औरा (Aura) को प्रभावित करता है। इसके परिणामस्वरुप व्यक्ति को बुरे सपने आना, अज्ञात भय बने रहना, छोटी-छोटी बात पर गुस्सा आना और मानसिक बेचैनी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।कौन सी चीजें तुरंत निकाल देनी चाहिए बाहर?यदि आपको भी लंबे समय से बिना किसी कारण के तनाव, सिरदर्द या अनिद्रा की शिकायत महसूस हो रही है, तो सबसे पहले अपने बेडरूम की और अपने पलंग की ताक-झांक करें। पलंग के नीचे रखी टूटी-फूटी वस्तुएं, पुरानी दवाइयां, काले या गंदे कपड़े और भारी चमड़े के सामान तुरंत बाहर कर दें। इसके अलावा कई लोग सोते समय अपने सिरहाने के पास पानी की बोतल या इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स रख लेते हैं, जो वास्तु और स्वास्थ्य दोनों के दृष्टिकोण से उचित नहीं माना जाता है। बेड के आसपास और नीचे का वातावरण जितना खुला, स्वच्छ और हवादार रहेगा, आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह उतना ही बेहतर होगा।वास्तु दोष दूर करने के आसान और प्रभावी उपायअपने बेडरूम के वास्तु को सुधारने और मानसिक शांति पाने के लिए सबसे पहले बेड के नीचे की पूरी सफाई करें। यदि वहां कोई अनावश्यक सामान रखा है, तो उसे तुरंत हटाकर कबाड़ को बाहर का रास्ता दिखाएं। कमरे में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए रोजाना पोछा लगाते समय पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक (Rock Salt) मिला सकते हैं, जिससे कोने-कोने की नकारात्मकता दूर होती है। इसके अलावा बेडरूम में हल्के और soothing रंगों का प्रयोग करें और सोने से पहले कमरे में हल्का कपूर या लैवेंडर एसेंशियल ऑयल जलाएं। इन छोटे-छोटे वास्तु बदलावों को अपनाकर आप न केवल अपनी बेचैनी से छुटकारा पा सकते हैं, बल्कि चैन की गहरी नींद भी हासिल कर सकते हैं।
सनातन संस्कृति में आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) के रूप में बेहद धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह दिन महर्षि वेद व्यास के जन्मोत्सव के रूप में भी जाना जाता है, जिन्हें मानव जाति का पहला गुरु माना गया है। जीवन को सही दिशा दिखाने, ज्ञान का प्रकाश फैलाने और अज्ञानता के अंधकार को दूर करने में गुरु की भूमिका सर्वोपरि होती है। हालांकि, कई लोगों के मन में यह सवाल अक्सर बना रहता है कि जिन लोगों का कोई भौतिक या दीक्षा प्राप्त गुरु नहीं है, क्या वे भी गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व मना सकते हैं और इसका क्या विधान है? इस संबंध में उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों ने बहुत ही महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक बातें साझा की हैं।क्या बिना गुरु के गुरु पूर्णिमा मनाना संभव है?उज्जैन के जाने-माने ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यदि आपके जीवन में कोई प्रत्यक्ष या भौतिक गुरु नहीं है, तब भी आप गुरु पूर्णिमा का यह पर्व पूरी श्रद्धा के साथ मना सकते हैं। सनातन परंपरा में आदि गुरु भगवान शिव, जगत के पालनहार भगवान विष्णु, वेद व्यास जी और अपने माता-पिता को भी प्रथम गुरु का दर्जा दिया गया है। इसके अलावा जिन लोगों ने किसी को अपना गुरु नहीं बनाया है, वे इस दिन भगवान श्री विष्णु, देवर्षि नारद या अपने इष्टदेव को ही अपना गुरु मानकर उनकी विधिवत पूजा-अर्चना कर सकते हैं। आध्यात्मिक रूप से ज्ञान और अच्छे संस्कार देने वाली हर उस वस्तु या शक्ति को गुरु माना जा सकता है जिससे आपने जीवन में कुछ अच्छा सीखा हो।गुरु पूर्णिमा पर करें ये विशेष उपाय और पूजा विधियदि आपका कोई गुरु नहीं है और आप इस दिन का पूर्ण फल प्राप्त करना चाहते हैं, तो सुबह स्नान करने के बाद अपने घर के मंदिर में भगवान विष्णु और महर्षि वेद व्यास के चित्र या प्रतिमा के सामने घी का दीपक प्रज्वलित करें। उन्हें पीले वस्त्र, पीले फूल, मिठाई और फल अर्पित करें। इसके बाद ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः या गुरु ब्रम्हा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरः मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें। इस दिन अपने माता-पिता और बड़े बुजुर्गों के चरण छूकर उनका आशीर्वाद अवश्य लें, क्योंकि उनका आशीर्वाद किसी भी गुरु के आशीर्वाद के समान ही फलदायी माना जाता है।ज्ञान और समर्पण का पर्व है गुरु पूर्णिमागुरु पूर्णिमा केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर के अहंकार को त्यागकर ज्ञान के मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का दिन है। ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि यदि आप किसी को गुरु नहीं बना पाए हैं, तो इस दिन किसी जरूरतमंद विद्यार्थी को शिक्षा से जुड़ी वस्तुएं जैसे किताबें, कॉपियां या पेन दान करें। ऐसा करने से मां सरस्वती और गुरुजनों की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आ रही सभी प्रकार की बौद्धिक बाधाएं दूर होती हैं। इसलिए बिना किसी संकोच के पूरी आस्था के साथ गुरु पूर्णिमा मनाएं और अपने जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से भर लें।
वैभव सूर्यवंशी की आतिशी बैटिंग और मयंक-अशोक की पेस से थरथराएगी विरोधी टीम
भारतीय क्रिकेट का भविष्य अब पूरी तरह से सुरक्षित हाथों में नजर आ रहा है, और इसका सबसे बड़ा उदाहरण घरेलू सर्किट से निकलकर अंतरराष्ट्रीय पटल पर छाने वाले युवा सितारे हैं। भारत और जिम्बाब्वे (IND vs ZIM) के बीच होने वाले मुकाबलों को लेकर क्रिकेट प्रेमियों के बीच उत्साह चरम पर है, क्योंकि इस बार टीम में ऐसे युवा धुरंधरों को मौका मिलने की उम्मीद है जो अपनी आक्रामक शैली से मैच का रुख पलटने का दम रखते हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) का है, जिनकी विस्फोटक बल्लेबाजी शैली किसी भी गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी मानी जाती है। वहीं दूसरी तरफ, गेंदबाजी विभाग में मयंक और अशोक की खौफनाक रफ्तार विपक्षी बल्लेबाजों की शामत लाने के लिए पूरी तरह तैयार है।वैभव सूर्यवंशी का खौफ: क्रीज पर उतरते ही गेंदबाजों की उड़ जाती है नींदकम उम्र में ही अपनी शानदार और बेखौफ बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत में तहलका मचाने वाले वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर सुर्खियों में छाए हुए हैं। उनकी बल्लेबाजी तकनीक और मैदान के चारों तरफ बड़े शॉट खेलने की कला ने चयनकर्ताओं और विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जब वह क्रीज पर उतरते हैं, तो विरोधी गेंदबाजों के माथे पर शिकन साफ देखी जा सकती है। जिम्बाब्वे के खिलाफ सीरीज में उनकी यह आक्रामक शैली टीम इंडिया को पावरप्ले में ही एक मजबूत शुरुआत दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है, जिससे फैंस को मैदान पर चौकों-छक्कों की बारिश देखने को मिलने की पूरी उम्मीद है।मयंक और अशोक की तेज रफ्तार से कांपेगा विपक्षी खेमासिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं, बल्कि गेंदबाजी के मोर्चे पर भी भारत के पास ऐसे युवा तेज गेंदबाज हैं जिनकी रफ्तार और स्विंग अच्छे-अच्छे बल्लेबाजों को बैकफुट पर धकेलने का माद्दा रखती है। मयंक और अशोक (Mayank and Ashok) की जोड़ी अपनी तीव्र गति (Pace and Bounce) के लिए जानी जाती है। पिच पर थोड़ी सी भी मदद मिलने पर ये गेंदबाज विपक्षी टीम के टॉप ऑर्डर को तहस-नहस करने की क्षमता रखते हैं। जिम्बाब्वे की पिचों पर इन गेंदबाजों की बाउंस और यॉर्कर गेंदों का सामना करना किसी भी बल्लेबाज के लिए आसान नहीं होगा, और यही वजह है कि मैदान पर इन दोनों का गदर देखने को मिल सकता है।युवा ब्रिगेड से सजी टीम इंडिया का नया अंदाजभारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की युवा खिलाड़ियों को तराशने की रणनीति का यह एक बेहतरीन नमूना है। सीनियर खिलाड़ियों के साथ-साथ इन युवा प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच देना यह साबित करता है कि आने वाले समय में भारतीय टीम हर प्रारूप में दबदबा बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है। सीरीज के आगाज से पहले ही जिस तरह से इन युवा खिलाड़ियों की चर्चा हो रही है, उसने मुकाबलों के रोमांच को कई गुना बढ़ा दिया है। क्रिकेट फैंस यह देखने के लिए बेताब हैं कि मैदान पर उतरकर ये युवा सितारें अपनी चमक बिखेरने में कितने कामयाब होते हैं।
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज और पूर्व कप्तान रोहित शर्मा (Rohit Sharma) के भविष्य को लेकर पिछले कुछ दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया पर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। खासकर इंग्लैंड दौरे के दौरान उनके फॉर्म और टीम की भविष्य की योजनाओं को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही थीं। इस बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के शीर्ष अधिकारियों ने इन तमाम कयासों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है। बोर्ड के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल रोहित शर्मा के संन्यास या उन्हें टीम से बाहर किए जाने को लेकर कोई चर्चा नहीं है और वह टीम की योजनाओं में पूरी तरह शामिल हैं।बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने खारिज की संन्यास की खबरेंबीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया है कि रोहित शर्मा के अंतरराष्ट्रीय भविष्य को लेकर जो भी बातें फैलाई जा रही हैं, उनका कोई मतलब नहीं है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वर्तमान समय में रोहित के संन्यास का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। बोर्ड के मुताबिक, 'हिटमैन' रोहित शर्मा टीम इंडिया का अभिन्न हिस्सा हैं और जब तक वह चयन के लिए उपलब्ध हैं और स्कीम ऑफ थिंग्स में हैं, तब तक उनका सफर जारी रहेगा। बोर्ड के इस आधिकारिक रुख के बाद उन तमाम रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया गया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि प्रबंधन अब सीनियर खिलाड़ियों से आगे बढ़ने की सोच रहा है।2027 वनडे वर्ल्ड कप खेलना है रोहित का मुख्य लक्ष्यरोहित शर्मा पहले ही टी20 और टेस्ट फॉर्मेट को अलविदा कह चुके हैं, लेकिन उनका पूरा फोकस इस समय वनडे क्रिकेट पर है। वह अपनी फिटनेस पर कड़ी मेहनत कर रहे हैं और उनका सबसे बड़ा सपना साल 2027 में होने वाले अगले वनडे वर्ल्ड कप में देश के लिए मैदान पर उतरना है। हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई सीरीज के दौरान लॉर्ड्स के मैदान पर शानदार शतकीय पारी खेलकर रोहित ने यह साबित कर दिया कि उनके बल्ले की धार अभी कम नहीं हुई है। मैच के बाद उन्होंने खुद भी यह स्पष्ट किया था कि बाहरी शोर और आलोचनाओं से उनका ध्यान नहीं भटकता, उनका काम सिर्फ मैदान पर जाकर देश के लिए रन बनाना और टीम को जिताना है।फैंस के लिए राहत की बड़ी खबरक्रिकेट के गलियारों में इस बात को लेकर बहस छिड़ी हुई थी कि क्या चयनकर्ता युवा खिलाड़ियों को लंबा मौका देने के लिए सीनियर खिलाड़ियों को दरकिनार करेंगे। हालांकि, बीसीसीआई के इस स्पष्टीकरण के बाद यह तय माना जा रहा है कि रोहित शर्मा अपनी शानदार लय और अनुभव के दम पर आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में टीम इंडिया की अगुवाई और बल्लेबाजी क्रम को मजबूती देते रहेंगे। उनके फैंस के लिए यह किसी बड़ी खुशखबरी से कम नहीं है कि उनका यह चहेता खिलाड़ी अभी मैदान पर चौके-छक्के बरसाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
वेस्टइंडीज सीरीज से बाहर होंगे श्रेयस अय्यर समेत 8 धुरंधर खिलाड़ी! बीसीसीआई की नई योजना से मची हलचल
भारतीय क्रिकेट टीम के भविष्य और आगामी अंतरराष्ट्रीय दौरों को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) एक बार फिर बड़े और कड़े फैसले लेने की तैयारी में जुट गया है। क्रिकेट गलियारों से सामने आ रही ताजा खबरों के अनुसार, वेस्टइंडीज के खिलाफ खेली जाने वाली आगामी सीरीज के लिए टीम इंडिया में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इस संभावित बदलाव के तहत मिडिल ऑर्डर के स्टार बल्लेबाज श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) समेत लगभग 8 प्रमुख खिलाड़ियों को इस सीरीज से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। चयनकर्ताओं और बीसीसीआई का यह कदम भविष्य के लिए युवा खिलाड़ियों को तराशने और एक नई संतुलित टीम तैयार करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।क्या है खिलाड़ियों के बाहर होने की असली वजह?बीसीसीआई के सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य रूप से खिलाड़ियों का वर्कलोड मैनेजमेंट (Workload Management), हालिया फॉर्म और आगामी व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर को मुख्य आधार बनाया गया है। लगातार क्रिकेट खेलने के कारण सीनियर खिलाड़ियों पर शारीरिक थकान का दबाव बढ़ रहा है, जिसे कम करने के लिए बोर्ड रोटेशन पॉलिसी अपनाने पर जोर दे रहा है। इसके अलावा, घरेलू क्रिकेट और इंडिया-ए की तरफ से शानदार प्रदर्शन करने वाले युवा खिलाड़ियों को अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का पूरा मौका देने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।युवा खिलाड़ियों को मिलेगा मौका, टीम का बदलेगा कॉम्बिनेशनवेस्टइंडीज दौरे के लिए चुनी जाने वाली संभावित नई टीम में कई युवा चेहरों को शामिल किए जाने की प्रबल संभावना है। घरेलू सर्किट में धमाकेदार पारियां खेलने वाले युवा बल्लेबाजों और गेंदबाजों को स्क्वाड में जगह मिल सकती है ताकि टीम की बेंच स्ट्रेंथ को और अधिक मजबूत किया जा सके। चयन समिति यह स्पष्ट कर चुकी है कि आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स को ध्यान में रखते हुए टीम में फ्रेश टैलेंट को प्रमोट करना बेहद जरूरी है, जिससे टीम की ऊर्जा और फील्डिंग का स्तर दोनों बेहतर हो सकें।चयन समिति और टीम प्रबंधन का अगला कदमश्रेयस अय्यर जैसे अनुभवी खिलाड़ियों का बाहर होना और नई युवा टीम का गठन भारतीय क्रिकेट में एक नए बदलाव का संकेत दे रहा है। हालांकि, इन खिलाड़ियों को पूरी तरह से बाहर किया गया है या इन्हें केवल इस विशिष्ट सीरीज के लिए आराम दिया गया है, इस पर आधिकारिक घोषणा टीम चयन के समय ही स्पष्ट हो पाएगी। क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों की नजरें अब बीसीसीआई की आगामी चयन बैठक पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि वेस्टइंडीज के खिलाफ मैदान पर उतरने वाली नई टीम का फाइनल ब्लूप्रिंट क्या होगा।
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh Weather Update) में मानसून का दौर एक बार फिर बेहद आक्रामक और सक्रिय हो गया है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बादलों की आवाजाही के बीच अब मानसूनी सिस्टम पूरी तरह से मजबूत हो चुका है। मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) की ताजा अपडेट के मुताबिक, राज्य में अगले 48 घंटों के भीतर मौसम का मिजाज एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। प्रदेश के कई जिलों में झमाझम बारिश तो कुछ चुनिंदा इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश (Heavy Rainfall Alert) होने की प्रबल संभावना जताई गई है। लगातार हो रही इस मानसूनी गतिविधि से जहां एक ओर गर्मी और उमस से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ जलभराव और नदियों के बढ़ते जलस्तर को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद हो गया है।एक्टिव मानसूनी सिस्टम का असर, इन जिलों में गिरेगा सबसे ज्यादा पानीमौसम विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में बने मानसूनी सिस्टम और चक्रवाती घेरे के प्रभाव के कारण छत्तीसगढ़ के मध्य और उत्तरी हिस्सों में बारिश का जोर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। राजधानी रायपुर समेत बिलासपुर, दुर्ग, सरगुजा और बस्तर संभाग के कई जिलों में झमाझम बौछारें पड़ने का अनुमान है। पिछले दिनों जिन जिलों में बारिश का आंकड़ा कम दर्ज किया गया था, वहां भी अब बादलों के बरसने से किसानों के चेहरों पर रौनक लौट आई है। हालांकि, मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए मैदानी इलाकों और निचले स्तर पर बसे बस्तियों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।उफान पर आ सकते हैं नदी-नाले, प्रशासन ने जारी की चेतावनीलगातार होने वाली मूसलाधार बारिश के चलते राज्य के कई इलाकों में नदी-नाले उफ़ान पर आने की आशंका बढ़ गई है। सुरक्षा के लिहाज से स्थानीय प्रशासन ने पहले से ही एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। कई बड़े जलाशयों और बांधों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते पानी छोड़ा जा सके। इसके अलावा ग्रामीण अंचलों में लोगों से अपील की गई है कि वे तेज बहाव वाले पुल-पुलियों या उफनते नालों को पार करने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।किसानों के लिए राहत, आम जनजीवन के लिए एहतियात की जरूरतधान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में इस झमाझम बारिश का सीधा फायदा कृषि कार्यों और खरीफ की फसलों, विशेषकर धान की रोपाई को मिल रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह मानसूनी बारिश फसलों के लिए संजीवनी का काम कर रही है। हालांकि, लगातार बारिश से शहर की सड़कों पर जलभराव और यातायात धीमा होने जैसी समस्याओं का सामना आम जनता को करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि आप अगले दो दिनों के दौरान सफर पर निकलने की सोच रहे हैं, तो मौसम के ताज़ा अपडेट पर नजर जरूर बनाए रखें।
देश और राज्यों में डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट क्लासरूम के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh News) के एक सरकारी स्कूल से सामने आई ताजा तस्वीर ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले परिसरों में बुनियादी सुविधाओं का ऐसा अभाव है कि लगभग 867 मासूम छात्र बिना बिजली और पंखे के चिलचिलाती गर्मी और घुटन भरे माहौल में पढ़ने को मजबूर हैं। गनीमत यह रही कि जब इस गंभीर लापरवाही की खबर प्रमुखता से मीडिया में आई, तब जाकर सोई हुई अफसरशाही की नींद टूटी और जिम्मेदारों ने सुध लेना शुरू किया है।बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर स्कूल, छात्रों का हाल बेहालप्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल में पढ़ने वाले इन सैकड़ों बच्चों को पिछले काफी समय से बुनियादी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कक्षाओं में बिजली कनेक्शन न होने या तकनीकी खराबी के चलते पंखे तक नहीं चलते हैं, जिससे उमस भरे मौसम में बच्चों का क्लास में बैठना भी मुहाल हो जाता है। पढ़ाई के दौरान बच्चे पसीने से तरबतर नजर आते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि कई बार स्थानीय अधिकारियों और शिक्षा विभाग के सामने गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।मीडिया रिपोर्ट्स का असर: एक्शन में आए जिम्मेदार अधिकारीजैसे ही इस बदहाली और बच्चों की परेशानी की खबरें मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स के जरिए प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुँची, महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारियों ने तुरंत संज्ञान लिया और संबंधित स्कूल की स्थिति की जांच के आदेश दे दिए। लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं, और अब युद्धस्तर पर स्कूल में बिजली आपूर्ति व पंखों की व्यवस्था दुरुस्त करने की बात कही जा रही है।डिजिटल दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाईयह मामला केवल एक स्कूल का नहीं, बल्कि कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में प्रशासनिक उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण है। एक तरफ सरकारें स्मार्ट एजुकेशन, टैबलेट और डिजिटल बोर्ड के जरिए शिक्षा का स्तर सुधारने के दावे कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं जैसे बिजली, पानी और पंखे के लिए बच्चों का संघर्ष यह सोचने पर मजबूर करता है कि सिस्टम की प्राथमिकताएं असल में कहां हैं। मीडिया के दखल के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि इन 867 मासूमों को जल्द ही राहत मिलेगी और उनकी कक्षाएं बेहतर माहौल में संचालित हो सकेंगी।
देशभर में सनसनी फैलाने वाले और अरबों रुपयों के अवैध कारोबार से जुड़े बहुचर्चित महादेव बेटिंग ऐप (Mahadev Betting App Case) घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसके काले राज एक के बाद एक बाहर आ रहे हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई लगातार तेज बनी हुई है। मामले से जुड़े अहम किरदार विकास गर्ग से हाल ही में की गई गहन पूछताछ के दौरान एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पूछताछ में यह बात सामने आई है कि ऐप के जरिए कमाए गए अवैध और बेहिसाब पैसों को किस तरह से चालाकी से अलग-अलग लोगों और मुख्य चेहरों की पत्नियों के बैंक खातों में डायवर्ट किया जाता था, ताकि जांच एजेंसियों की नजरों से बचा जा सके।कैसे होता था पैसों का हेरफेर और किन खातों का होता था इस्तेमाल?जांच एजेंसियों को लंबे समय से इस बात की तलाश थी कि महादेव ऐप के प्रमोटर्स और उनके सिंडिकेट के सदस्य अवैध रूप से कमाए गए करोड़ों रुपयों को ठिकाने कैसे लगाते हैं। विकास गर्ग से हुई पूछताछ के सूत्रों के अनुसार, हवाला चैनलों और फर्जी कंपनियों के जरिए आने वाले पैसों को छुपाने के लिए कई बेनामी और संदिग्ध बैंक खातों का जाल बुना गया था। इनमें कई ऐसे बैंक खाते भी शामिल थे जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस सिंडिकेट से जुड़े लोगों की पत्नियों या करीबी रिश्तेदारों के नाम पर संचालित हो रहे थे। इन खातों का इस्तेमाल केवल पैसे छिपाने के लिए नहीं, बल्कि आगे की अवैध सट्टेबाजी गतिविधियों में फंड सर्कुलेट करने के लिए भी किया जाता था।मनी लॉन्ड्रिंग के इस जाल से जुड़े कई और बड़े नाम आ सकते हैं सामनेविकास गर्ग द्वारा दिए गए इनपुट और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर ईडी अब उन सभी बैंक खातों की एक-एक डिटेल खंगाल रही है जिनमें यह पैसा ट्रांसफर किया गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे खेल में सिर्फ कुछ लोग ही नहीं, बल्कि कई बड़े हवाला कारोबारियों, स्थानीय सहयोगियों और प्रभावशाली चेहरों की संलिप्तता हो सकती है। पत्नियों और करीबियों के खातों में करोड़ों रुपए जमा कराने के इस खुलासे के बाद अब आने वाले दिनों में कुछ और हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियों और संपत्तियों की जब्ती का सिलसिला तेज होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।कानूनी शिकंजा और देशव्यापी जांच का दायरामहादेव बेटिंग ऐप घोटाला पिछले कुछ सालों से देश की सबसे बड़ी जांचों में से एक बन चुका है। सीमा पार तक फैले इस सट्टेबाजी नेटवर्क के तार कई बॉलीवुड हस्तियों, राजनेताओं और बड़े व्यापारियों से भी जुड़ते नजर आए हैं। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विकास गर्ग के खुलासे के बाद इस मनी ट्रेल (Money Trail) की अंतिम कड़ी तक कैसे पहुंचा जाए, ताकि इस अवैध साम्राज्य को पूरी तरह से ध्वस्त किया जा सके। इस ताजा खुलासे ने एक बार फिर से इस पूरे मामले में सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
बिहार बंद पर सरकार की दो टूक चेतावनी: हिंसा और तोड़फोड़ की तो होगी तत्काल गिरफ्तारी
बिहार की राजनीति में चल रहे गरमागरम माहौल के बीच विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों द्वारा आहूत किए गए बिहार बंद को लेकर प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने साफ शब्दों में चेतावनी जारी कर दी है कि बंद के नाम पर यदि किसी ने भी कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश की, सार्वजनिक या निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया और हिंसा फैलाई, तो बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे उपद्रवियों को तुरंत चिन्हित कर गिरफ्तार करने के कड़े निर्देश सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SPs) को दे दिए गए हैं। राज्यभर में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर लगातार निगरानी रखी जा रही है।प्रशासन का सख्त फरमान: शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार, लेकिन अराजकता बर्दाश्त नहींसरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि लोकतांत्रिक देश में हर किसी को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन इसकी आड़ में आम जनजीवन को बाधित करना, गाड़ियों में तोड़फोड़ करना या कानून-व्यवस्था को खतरे में डालना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगा। पिछले दिनों कुछ जिलों में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसक झड़पों की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए इस बार खुफिया तंत्र और पुलिस प्रशासन को पूरी तरह मुस्तैद रहने को कहा गया है। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी फुटेज के जरिए हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि हुड़दंगियों से सख्ती से निपटा जा सके।आम जनजीवन और यातायात को सुरक्षित रखने के लिए विशेष इंतजामबिहार बंद के मद्देनजर राज्य के प्रमुख शहरों, बाजारों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि आम नागरिकों, यात्रियों और व्यापारियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। पुलिस प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि यातायात बाधित न हो और स्कूल-कॉलेज तथा दफ्तर आने-जाने वाले लोगों को सुरक्षित माहौल मिले। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार फील्ड में उतरकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं और शांति समितियों के साथ बैठक कर सौहार्द बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।राजनीतिक सरगर्मी के बीच जनता से शांति की अपीलएक तरफ जहां राजनीतिक दल अपने-अपने मुद्दों को लेकर सड़क पर उतर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता की सुरक्षा और शांति बनाए रखना प्रशासन की पहली प्राथमिकता बनी हुई है। सरकार और पुलिस की इस कड़ी चेतावनी के बाद अब यह देखना अहम होगा कि बंद का असर जमीन पर कैसा रहता है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने में ज़रा भी देर नहीं लगाई जाएगी, जिससे अराजक तत्वों में खौफ का माहौल साफ देखा जा सकता है।
देशभर में न्यायिक प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज और तकनीक-युक्त बनाने के लिए लगातार बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में झारखंड (Jharkhand) राज्य ने डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक और ऐतिहासिक छलांग लगाई है। राज्य में कानूनी कामकाज, मुकदमों की मॉनिटरिंग और कोर्ट केस के प्रबंधन को पूरी तरह पेपरलेस और पारदर्शी बनाने के लिए अत्याधुनिक 'विधि पोर्टल 2.0' (Vidhi Portal 2.0) को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया गया है। इस नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के शुरू होने से अब राज्यभर के विभिन्न अदालतों में चल रहे मुकदमों, सरकारी मुकदमों की स्थिति और कानूनी मामलों का पूरा हिसाब-किताब एक क्लिक पर डिजिटल रूप में उपलब्ध होगा, जिससे वकीलों, अधिकारियों और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।क्या है 'विधि पोर्टल 2.0' और कैसे बदलेगा न्याय प्रणाली का काम?झारखंड सरकार के विधि विभाग द्वारा तैयार किया गया यह नया पोर्टल पुराने वर्जन का एक एडवांस्ड और हाई-टेक अपडेटेड रूप है। 'विधि पोर्टल 2.0' की मदद से राज्य में दर्ज होने वाले हर छोटे-बड़े कोर्ट केस की रियल-टाइम ट्रैकिंग की जा सकेगी। किस मामले में अगली तारीख कब की है, कौन सा केस किस स्टेज पर है और उसमें सरकार या संबंधित विभाग का पक्ष क्या है, इसकी पूरी जानकारी अब एक ही सुरक्षित डिजिटल डैशबोर्ड पर मिल जाएगी। इससे फाइलों के खोने या लेट-लतीफी जैसी पुरानी समस्याओं से निजात मिलेगी और न्यायिक प्रक्रिया में अभूतपूर्व तेजी आएगी।वकीलों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए वरदान बना डिजिटल प्लेटफॉर्मइस पोर्टल के लॉन्च होने से सबसे बड़ा फायदा न्यायिक अधिकारियों, सरकारी वकीलों (Government Pleaders) और विभिन्न प्रशासनिक विभागों को मिलेगा। पहले जहां मुकदमों के दस्तावेजों और फाइलों को ढूंढने में हफ्तों लग जाते थे, वहीं अब 'विधि पोर्टल 2.0' का स्मार्ट सर्च इंजन कुछ ही सेकंड में सारे दस्तावेज स्क्रीन पर ले आएगा। इसके अलावा, मामलों की ऑनलाइन समीक्षा (Review) करने और वकीलों की परफॉर्मेंस की मॉनिटरिंग करने में भी पारदर्शिता आएगी, जिससे अदालती मामलों के निपटारे में होने वाली देरी पर लगाम लगेगी।झारखंड में ई-ग गवर्नेंस और डिजिटल इंडिया की मजबूत होती नींवझारखंड सरकार की यह पहल डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस विजन को जमीनी स्तर पर उतारने की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित हो रही है। आम जनता से लेकर बड़े कानूनी विशेषज्ञों तक ने इस कदम की सराहना की है। आने वाले दिनों में इस पोर्टल के और अधिक फीचर्स जोड़े जाने की उम्मीद है, जिससे तकनीकी रूप से झारखंड का विधि विभाग देश के अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल बन सके। कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने और पन्नों के बंडलों से मुक्ति दिलाने वाला यह डिजिटल बदलाव राज्य के प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता का एक नया दौर लेकर आया है।
हरियाणा में मतदाता सूचियों को पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान को लेकर एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्यभर में चुनाव आयोग के निर्देश पर बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर किया जाने वाला डोर-टू-डोर सर्वे और सत्यापन का काम सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। इस व्यापक प्रशासनिक कवायद के बाद जो नई ड्राफ्ट मतदाता सूची तैयार की गई है, उसमें लगभग 33 लाख 84 हजार मतदाताओं के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। इस बड़े बदलाव के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।क्या है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन और क्यों की गई यह कार्रवाई?भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूचियों की गुणवत्ता सुधारने और उनमें मौजूद अशुद्धियों को दूर करने के लिए एसआईआर अभियान चलाया जा रहा है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मृत मतदाताओं, स्थाई रूप से अन्य स्थानों पर बस चुके लोगों (Shifted), और डुप्लीकेट प्रविष्टियों को मतदाता सूची से हटाना है, ताकि लोकतंत्र के इस महापर्व में सूचियां पूरी तरह त्रुटिहीन बनी रहें। हरियाणा में इस अभियान के तहत जब बीएलओ ने घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन किया, तो बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता मिले जो लंबे समय से अपने तय पते पर नहीं रह रहे थे या जिनकी पुष्टि नहीं हो पाई।ड्राफ्ट सूची से नाम हटने के पीछे क्या हैं मुख्य कारण?प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, डोर-टू-डोर अभियान के दौरान कई तरह के मामले सामने आए हैं। सत्यापन प्रक्रिया में मृत व्यक्तियों, प्रदेश या देश छोड़कर अन्य स्थानों पर स्थाई रूप से बस चुके नागरिकों और कई जगहों पर एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों को चिन्हित किया गया। नियमानुसार जब इन मामलों में पुख्ता डेटा मैच नहीं हुआ, तो उन्हें ड्राफ्ट सूची में जगह नहीं मिली। हालांकि, निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक जिन वैध मतदाताओं के नाम किन्हीं तकनीकी कारणों से इस सूची में छूट गए हैं, उनके लिए दावे और आपत्तियां (Claims and Objections) दर्ज कराने का प्रावधान रखा गया है ताकि किसी भी वास्तविक नागरिक का अधिकार न छिन सके।राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेजमतदाता सूची से इतनी बड़ी संख्या में नाम बाहर होने की खबर सामने आते ही राज्य में राजनीतिक दलों की सक्रियता भी बढ़ गई है। स्थानीय स्तर पर नेता और कार्यकर्ता इस बात का आकलन करने में जुट गए हैं कि उनके अपने विधानसभा क्षेत्रों में इस फेरबदल का चुनावी समीकरणों पर क्या असर पड़ सकता है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि पूरी पारदर्शिता के साथ नियमानुसार यह प्रक्रिया पूरी की जा रही है और अंतिम सूची के प्रकाशन से पहले सभी पात्र नागरिकों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा ताकि मतदाता सूची पूरी तरह से त्रुटिमुक्त और विश्वसनीय बन सके।
देशभर में संतों और महापुरुषों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राजनीतिक दल लगातार नए-नए अभियान चला रहे हैं। इसी कड़ी में हरियाणा (Haryana) की राजनीति में आगामी गुरु रविदास जयंती (Guru Ravidas Jayanti) के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बेहद भव्य और व्यापक मेगा प्लान तैयार किया है। इस रणनीतिक योजना के तहत उत्तर प्रदेश के पवित्र धार्मिक शहर वाराणसी से गुरु रविदास की जन्मस्थली से जुड़ी पवित्र मिट्टी हरियाणा लाई जाएगी। राज्य के हर कोने और गांव-गांव तक इस मिट्टी को पहुंचाकर 'समरसता संकल्प अभियान' (Samarsata Sankalp Abhiyan) का आगाज किया जाएगा। इस सियासी और सामाजिक रूप से बड़े कदम के जरिए पार्टी का मुख्य उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को एकजुट करना और सामाजिक समरसता का संदेश देना है।वाराणसी से हरियाणा तक जुड़ेगी आस्था की डोरसंत शिरोमणि गुरु रविदास की पावन जन्मस्थली काशी यानी वाराणसी (Varanasi) से लाई जाने वाली इस पवित्र मिट्टी का हरियाणा के प्रत्येक जिले और विधानसभा क्षेत्र में भव्य स्वागत करने की तैयारी की जा रही है। बीजेपी संगठन के वरिष्ठ नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की देखरेख में यह यात्रा निकाली जाएगी। इस पूरी पहल के पीछे का मुख्य उद्देश्य संत रविदास के समानता, भाईचारे और समरसता के संदेश को जमीनी स्तर पर आम जनता तक पहुंचाना है। हरियाणा की राजनीति में अनुसूचित जाति और दलित मतदाताओं की मजबूत पकड़ को देखते हुए इस अभियान को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।गांव-गांव पहुंचेगा 'समरसता संकल्प अभियान' और सियासी समीकरणहरियाणा के गांवों और ढाणियों तक इस अभियान के पहुंचने से बीजेपी को जमीनी स्तर पर एक नया वैचारिक आधार मिलने की उम्मीद है। 'समरसता संकल्प अभियान' के तहत चौपालों पर गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी, जिनमें गुरु रविदास के जीवन दर्शन और उनके उपदेशों पर चर्चा होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष के जातीय समीकरणों और बयानों की काट के लिए बीजेपी का यह सांस्कृतिक और सामाजिक आउटरीच प्रोग्राम बेहद असरदार साबित हो सकता है। चुनाव के लिहाज से इस प्रकार के आयोजनों से पार्टी को मतदाताओं के साथ सीधा और भावनात्मक जुड़ाव बनाने में बड़ी मदद मिलती है।सामाजिक समरसता और राजनीतिक संदेश का अनूठा संगमसंतों की वाणी और उनके विचारों को राजनीति के साथ जोड़कर सकारात्मक संदेश देने की यह अनूठी पहल हरियाणा के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन चुकी है। राज्य के विभिन्न जिलों में इस अभियान की रूपरेखा तैयार कर ली गई है और स्थानीय कार्यकर्ताओं को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। आने वाले दिनों में वाराणसी की इस पवित्र मिट्टी के साथ शुरू होने वाला यह महाअभियान राज्य की राजनीति में कितना बड़ा प्रभाव डालेगा, यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल इस मेगा प्लान ने राजनीतिक तापमान को जरूर बढ़ा दिया है।
बीजेपी का मास्टर सोशल इंजीनियरिंग प्लान, क्या अखिलेश यादव की पीडीए रणनीति पर पड़ेगा भारी
उत्तर प्रदेश की राजनीति में साल 2027 के विधानसभा चुनाव (UP Elections 2027) की सुगबुगाहट अभी से तेज हो चुकी है और सभी राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरणों को दुरुस्त करने में जुट गए हैं। एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के प्रमुख अखिलेश यादव लगातार 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिएजमीनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उनके इस दांव की काट के लिए एक नया और बेहद धारदार सोशल इंजीनियरिंग प्लान तैयार किया है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि बीजेपी का यह नया चुनावी ब्लूप्रिंट विपक्ष की हर चाल को नाकाम करने और सभी जातियों को साधने के लिए पूरी तरह से तैयार किया गया है, जो आने वाले समय में चुनावी नतीजों को पूरी तरह बदल सकता है।बीजेपी का नया सोशल इंजीनियरिंग प्लान और जातियों का नया समीकरणउत्तर प्रदेश की सियासत हमेशा से जातिगत समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। बीजेपी हाईकमान और राज्य नेतृत्व ने मिलकर एक ऐसा नया सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला तैयार किया है जिसके तहत केवल सवर्ण और पारंपरिक पिछड़ी जातियों के अलावा उन अति पिछड़ी और बेहद छोटी जातियों (Most Backward Castes) को प्रमुखता दी जा रही है, जो अब तक राजनीतिक रूप से हाशिए पर थीं। इस रणनीति के तहत स्थानीय स्तर पर क्षेत्रीय क्षत्रपों को आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि विपक्षी दलों के कोर वोटर माने जाने वाले तबके में सेंध लगाई जा सके। बीजेपी की यह खामोश लेकिन बेहद मजबूत रणनीति जमीन पर बूथ स्तर तक काम करना शुरू कर चुकी है।अखिलेश यादव का PDA फॉर्मूला बनाम बीजेपी की चक्रव्यूह रचनाअखिलेश यादव ने पिछले कुछ चुनावों से जिस तरह से पिछ, दलित और अल्पसंख्यकों को जोड़कर एक नया धारदार मोर्चा तैयार किया है, उसने बीजेपी के सामने एक बड़ी चुनौती पेश की है। लोकसभा चुनावों में इस रणनीति के बेहतर परिणाम मिलने के बाद से सपा खेमे का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है। हालांकि, बीजेपी के नए सोशल इंजीनियरिंग प्लान का मकसद इसी पीडीए समीकरण की हवा निकालना है। पार्टी उन छोटी-छोटी जातियों और उप-जातियों को साध रही है जिन्हें सपा या अन्य दल लंबे समय से नजरअंदाज करते आए हैं। यही वजह है कि राजनीतिक विश्लेषक इसे अखिलेश यादव की चुनावी रणनीति पर एक भारी और सुनियोजित प्रहार मान रहे हैं।2027 के दंगल में धरातल पर होगी असली परीक्षाआगामी 2027 के चुनावी रण में कौन सी रणनीति किस पर भारी पड़ेगी, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि उत्तर प्रदेश का राजनीतिक तापमान अपने चरम पर पहुंचने लगा है। लखनऊ से लेकर पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी तक के गांवों और चौपालों पर अब इसी बात की चर्चा है कि क्या बीजेपी का नया सोशल इंजीनियरिंग प्लान विपक्ष के हर वार को बेअसर कर पाएगा या फिर अखिलेश यादव का PDA चक्रव्यूह एक बार फिर बाजी मार ले जाएगा। चुनाव से पहले चल रही इन सियासी चालों ने यह साफ कर दिया है कि इस बार का मुकाबला बेहद रोमांचक और कांटे की टक्कर वाला होने वाला है।
देश भर में NEET-UG, UGC-NET और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक व धांधली को लेकर मचे भारी हंगामे के बीच केंद्र सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और दोषियों पर शिकंजा कसने के लिए सरकार 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026' [Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026] पेश करेगी।इस संशोधित विधेयक में पेपर लीक में शामिल अपराधियों, कोचिंग सेंटरों, सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों और संगठित गिरोहों (Organized Crime Syndicates) के लिए सजा और जुर्माने की रकम में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है। आइए एक नेशनल अफेयर्स और एजुकेशन-पॉलिसी रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं इस नए प्रस्तावित कानून के 5 सबसे कड़े प्रावधान।1. परीक्षा घोटालों में सजा और जुर्माने की नई सीमासरकार ने इस संशोधित कानून में दोषियों के लिए सजा और वित्तीय जुर्माने का दायरा बहुत बढ़ा दिया है:अपराध श्रेणीपुरानी सजा / जुर्मानानया प्रस्तावित कानून (2026)अनुचित साधनों का इस्तेमालकम सजा / ₹10 लाख जुर्माना5 से 10 साल की जेल + ₹50 लाख तक जुर्मानासर्विस प्रोवाइडर एजेंसियां4 साल बैन / ₹1 करोड़ जुर्माना8 साल का बैन + ₹5 करोड़ तक जुर्मानाकंपनी के निदेशक / वरिष्ठ अधिकारीकम कठोर नियमकम से कम 5 साल जेल + ₹5 करोड़ तक जुर्मानासंगठित माफिया / गिरोह5 साल जेल / ₹1 करोड़ जुर्माना7 से 10 साल जेल + ₹10 करोड़ न्यूनतम जुर्माना2. स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट और 3 महीने में न्याय का लक्ष्यअदालतों में मुकदमों के सालों-साल खिंचने की समस्या को खत्म करने के लिए विधेयक में बहुत ही सख्त समय-सीमा (Timeline) तय की गई है:स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट: हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (UT) में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन होगा, जहां केवल परीक्षा घोटालों के मामलों की रोजाना सुनवाई (Daily Hearing) होगी।3 महीने में फैसला: चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत को 3 महीने (90 दिन) के भीतर अपना अंतिम फैसला देना होगा। कानून बनने के बाद पुराने लंबित मामलों को भी इन्हीं अदालतों में शिफ्ट किया जाएगा।हाई कोर्ट में अपील की समय-सीमा: फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच में अपील की जा सकेगी, जिस पर भी 3 महीने के भीतर सुनवाई पूरी करनी होगी।3. STF करेगी जांच, 2 महीने में देनी होगी रिपोर्टपेपर लीक और परीक्षा में धांधली के मामलों की निष्पक्ष और तेज जांच के लिए केंद्र सरकार आवश्यकता पड़ने पर स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन कर सकेगी।2 महीने की समय-सीमा: पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसी (जैसे CBI) या गठित STF को किसी भी सूरत में 2 महीने (60 दिन) के भीतर अपनी जांच पूरी करके चार्जशीट दाखिल करनी होगी, ताकि दोषियों को तुरंत कानूनी शिकंजे में लाया जा सके।स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर: राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को इन मामलों को मजबूती से लड़ने के लिए विशेष सरकारी वकील (Special Public Prosecutor) नियुक्त करने का अधिकार भी दिया गया है।लाखों छात्रों के भविष्य की सुरक्षा का लक्ष्यहाल के महीनों में नीट और यूजीसी-नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में हुई धांधली से लाखों अभ्यर्थियों और अभिभावकों के मन में परीक्षा प्रणाली के प्रति अविश्वास की स्थिति बन गई थी। केंद्र सरकार का मानना है कि फास्ट-ट्रैक अदालतों, भारी आर्थिक जुर्माने और कठोर जेल की सजा जैसे प्रावधानों के लागू होने के बाद परीक्षा माफिया और कोचिंग सिंडिकेट पर नकेल कसेगी और सरकारी परीक्षाओं की पवित्रता फिर से बहाल हो सकेगी
देश की राजधानी दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों तक इन दिनों छात्र प्रदर्शनों और प्रतियोगी परीक्षाओं के मुद्दों को लेकर सियासत अपने उफान पर है। जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए CJP प्रोटेस्ट और विभिन्न छात्र संगठनों के उग्र प्रदर्शनों के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने नकल माफियाओं और शिक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को लेकर एक बार फिर बेहद कड़े तेवर दिखाए हैं। अपने सख्त प्रशासनिक फैसलों और 'बुलडोजर मॉडल' के लिए पहचाने जाने वाले सीएम योगी ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी नकल माफिया को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें पूरी तरह से मिट्टी में मिला दिया जाएगा। उनके इस आक्रामक रुख ने राज्य की राजनीति का पारा और अधिक बढ़ा दिया है।जंतर-मंतर के CJP प्रोटेस्ट और छात्र आंदोलन की गूंज लखनऊ तकदिल्ली में आयोजित CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) प्रोटेस्ट और देश भर के छात्रों द्वारा नीट-पेपर लीक व परीक्षा में धांधली को लेकर किए जा रहे प्रदर्शनों की तपिश अब सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक महसूस की जा रही है। देश के सबसे बड़े युवा मतदाता राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता हमेशा से एक संवेदनशील और बड़ा चुनावी मुद्दा रही है। दिल्ली के मंचों से जब विपक्षी दलों और छात्र नेताओं ने उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, तो उसके जवाब में सीएम योगी का यह कड़ा रुख सीधे तौर पर विरोधियों पर एक बड़ा राजनीतिक पलटवार माना जा रहा है।'मिट्टी में मिला देंगे' वाला पुराना अंदाज और जीरो टॉलरेंस नीतिअपने आक्रामक बयानों के लिए मशहूर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में अपराध और अपराधियों की तरह ही नकल माफियाओं के लिए भी कोई जगह नहीं है। सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) नीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने पिछले दशकों में मेधावी छात्रों के अधिकारों को बेचा है और नकल के दम पर शिक्षा व्यवस्था को कलंकित किया है, उनकी जड़ों पर सख्त कार्रवाई का हथौड़ा लगातार चलता रहेगा। सीएम के इस बयान ने यह साबित कर दिया है कि आगामी चुनावों से पहले सरकार युवाओं के मुद्दों पर किसी भी तरह की defensive मुद्रा में आने के बजाय पूरी आक्रामकता के साथ मैदान में डटी हुई है।यूपी के युवाओं और प्रतियोगी छात्रों के बीच छिड़ी नई बहसमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस कड़ी हुंकार के बाद प्रयागराज, कानपुर, वाराणसी और लखनऊ जैसे प्रमुख छात्र hubs पर युवाओं के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहां छात्र परीक्षाओं के समय पर आयोजन और पेपर लीक मुक्त व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार द्वारा उठाए जा रहे कड़े प्रशासनिक कदमों की सराहना भी हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि CJP प्रोटेस्ट और इस हाई-प्रोफाइल छात्र आंदोलन के बीच सीएम योगी का यह बयान 2027 के चुनावी एजेंडे को पूरी तरह से सेट करने का काम कर रहा है, जहां 'कानून का राज' और 'युवाओं का भविष्य' सबसे बड़े केंद्र बिंदु बने हुए हैं।
यूपी चुनाव 2027: जानिए कैसे सीएम योगी के 'फायरिंग रेंज' में सीधे आ गए अखिलेश यादव
देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर देश भर के छात्रों, युवाओं और विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा हाल ही में किए गए जोरदार प्रदर्शन ने राष्ट्रीय राजनीति की हवा बदल दी है। NEET-UG पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में धांधली और देश के युवाओं से जुड़े मुद्दों पर हुए इस बड़े गदर ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 (UP Elections 2027) के सियासी समीकरणों और एजेंडे को पूरी तरह से हिला कर रख दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के प्रमुख अखिलेश यादव की सक्रियता ने सत्तारूढ़ दल को एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि इस हाई-प्रोफाइल छात्र आंदोलन के सहारे अखिलेश ने भले ही युवाओं को साधने की कोशिश की हो, लेकिन रणनीतिक रूप से वे सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) के 'फायरिंग रेंज' में आ गए हैं।जंतर-मंतर का छात्र आंदोलन और यूपी की सियासत पर इसका कनेक्शनदिल्ली की सरजमीं पर चल रहे इस युवा और छात्र आंदोलन की तपिश अब सीधे तौर पर लखनऊ और उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान तक महसूस की जा रही है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा युवा मतदाता राज्य है, जहां बेरोजगारी, पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाएं हमेशा से चुनावी हार-जीत की बड़ी वजह रही हैं। जंतर-मंतर पर जिस तरह से विभिन्न छात्र संगठनों और 'कॉकरोच जनता पार्टी' जैसे नए दलों के साथ विपक्षी नेता खड़े नजर आए, उसने स्पष्ट कर दिया है कि 2027 के दंगल में 'शिक्षा और युवा' सबसे बड़ा मुद्दा बनने वाला है। इस पूरे विरोध प्रदर्शन ने स्थानीय स्तर पर यूपी के युवाओं के बीच एक नई बहस छेड़ दी है, जिसका असर राज्य के हर जिले और कोचिंग हब में देखा जा रहा है।कैसे सीएम योगी के 'फायरिंग रेंज' में घिर गए अखिलेश यादव?राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जंतर-मंतर के इस मंच पर मुखर होकर कूदना अखिलेश यादव के लिए सियासी नफा-नुकसान दोनों तय कर सकता है। सीएम योगी आदित्यनाथ अपनी आक्रामक कार्यशैली और कानून-व्यवस्था के सख्त फैसलों के लिए जाने जाते हैं। जब बात युवाओं के मुद्दों और प्रशासनिक पारदर्शिता की आती है, तो बीजेपी सरकार हमेशा से विपक्ष पर हमलावर रही है। जंतर-मंतर के बहाने अखिलेश यादव के सीधे मैदान में उतरने से सत्तारूढ़ दल को उन पर और पुरानी सरकारों के कार्यकाल में हुई भर्तियों की पारदर्शिता पर सवाल उठाने का एक बड़ा मौका मिल गया है। मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में बीजेपी ने जिस तरह से माफियाओं और नकल माफियाओं पर बुलडोजर एक्शन लिया है, उसके मुकाबले विपक्ष के इन तेवरों को अब सीधे तौर पर बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के 'फायरिंग रेंज' में सेट कर दिया गया है।2027 के दंगल में युवाओं का वोट बैंक और जमीन पर सियासी गर्मीउत्तर प्रदेश के पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी तक के छात्र और युवा इस समय बहुत बारीकी से दिल्ली और लखनऊ की इन राजनीतिक गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ और कानपुर जैसे बड़े छात्र केंद्रों पर युवा इस बात को लेकर बहस कर रहे हैं कि आखिर उनके भविष्य के लिए कौन सा दल ज्यादा संवेदनशील है। समाजवादी पार्टी जहां इसे बीजेपी सरकार की नाकामी के रूप में भुनाने की कोशिश कर रही है, वहीं सत्ता पक्ष इसे केवल राजनीतिक स्टंट बताकर खारिज कर रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि जंतर-मंतर की यह चिंगारी 2027 के चुनावी रण में कितना बड़ा सियासी भूचाल लाती है, लेकिन फिलहाल इस महासंग्राम ने यूपी के राजनीतिक तापमान को अपने चरम पर पहुंचा दिया है।
नीट (NEET-UG) पेपर लीक विवाद और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधारों की मांग को लेकर देश भर में छात्रों का गुस्सा अब चरम पर पहुंच चुका है। शनिवार (25 जुलाई 2026) को राजधानी दिल्ली से लेकर बिहार, यूपी, उत्तराखंड और केरल तक छात्र संगठनों ने बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया।केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर हो रहे इन प्रदर्शनों के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और छात्रों के बीच तीखी झड़प, लाठीचार्ज और पथराव की घटनाएं सामने आई हैं।1. दिल्ली (जंतर-मंतर): फिर बढ़ा तनाव, लाठीचार्ज और पथरावदिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन शनिवार को अचानक उग्र हो गया:पुलिस संग झड़प: प्रदर्शनकारी छात्र संसद मार्ग की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें रोकने के लिए पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी। इस दौरान बैरिकेड तोड़ने को लेकर छात्रों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और झड़प शुरू हो गई।लाठीचार्ज और वाटर कैनन: स्थिति बेकाबू होते देख सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग और लाठीचार्ज किया।पथराव की खबरें: भीड़ की ओर से पुलिस पर पथराव किए जाने के बाद जंतर-मंतर क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसके जवाब में पुलिस ने कई छात्र नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है।हाई-टेक निगरानी: दिल्ली पुलिस ने पूरे जंतर-मंतर क्षेत्र को हाई-टेक सीसीटीवी (CCTV) कैमरों, मोबाइल सर्विलांस वैन और फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के कड़े घेरे में ले लिया है।2. बिहार में 'बिहार बंद' का व्यापक असर: कई शहरों में हिंसक झड़पेंदिल्ली में छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन के विरोध में वामपंथी छात्र संगठन आईसा (AISA) और अन्य छात्र मोर्चों द्वारा शनिवार को 'बिहार बंद' का आह्वान किया गया था, जिसका राज्य के कई जिलों में व्यापक और हिंसक असर देखा जा रहा है:सड़कों और रेल मार्गों पर जाम: पटना, बेगुसराय, कटिहार, दरभंगा और मुजफ्फरपुर में छात्रों ने सुबह से ही मुख्य सड़कों, राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) और रेलवे पटरियों पर उतरकर आवाजाही ठप कर दी।पथराव और झड़प: कटिहार और बेगुसराय में प्रदर्शनकारियों और पुलिस बल के बीच तीखी झड़पें हुईं, जहां पुलिस पर पथराव की घटनाएं सामने आईं। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले और लाठियां भांजनी पड़ीं।पटना में भारी बल तैनाती: राजधानी पटना में डाकबंगला चौराहा और अशोक राजपथ के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस ने कई स्थानों से प्रदर्शनकारी छात्रों को हिरासत में लिया है।छात्रों और प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगे क्या हैं?शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: छात्र संगठन लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।NTA का पुनर्गठन: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में पूरी पारदर्शिता लाने और पेपर लीक रोधी कड़े कानून लागू करने की मांग की जा रही है।मुआवजे और मुकदमों की वापसी: आंदोलन के दौरान पीड़ित छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दर्ज पुलिस केसों को वापस लेने की मांग उठाई जा रही है।देश भर के विभिन्न राज्यों (केरल, महाराष्ट्र, यूपी और राजस्थान) में भी छात्र संगठनों का समर्थन बढ़ता जा रहा है, जिससे केंद्र सरकार और प्रशासन पर दबाव बेहद बढ़ गया है।
देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए उग्र विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों के साथ हुए टकराव के बाद दंगारोधी विशिष्ट बल रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला किया है। भविष्य में होने वाले किसी भी आंदोलन या भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान अब जवानों द्वारा पैलेट गन (Pellet Guns) और इलेक्ट्रिक शॉक देने वाले आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जाएगा। रैपिड एक्शन फोर्स के आला अधिकारियों ने इन घातक और विवादित उपकरणों के प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है, जिसे देश की आंतरिक सुरक्षा और मानवाधिकारों के लिहाज से एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।जंतर-मंतर के प्रदर्शनों के बाद क्यों लेना पड़ा यह फैसला?पिछले कुछ दिनों में जंतर-मंतर पर छात्रों और विभिन्न संगठनों के बड़े आंदोलनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था। इस दौरान भीड़ को तितर-बितर करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ आधुनिक हथियारों, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक शॉक स्टिक और पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। कई मानवाधिकार संगठनों और नागरिक समाज ने इन हथियारों से प्रदर्शनकारियों को होने वाली गंभीर चोटों पर गहरी आपत्ति जताई थी। इसी फीडबैक और आंतरिक समीक्षा के बाद आरएफ ने अपनी रणनीतियों में यह बड़ा और मानवीय बदलाव करने का फैसला किया।अब उपद्रवियों से निपटने के लिए क्या होगी सुरक्षा बलों की नई रणनीति?इस नए आदेश के बाद रैपिड एक्शन फोर्स ने अपने जवानों के लिए भीड़ प्रबंधन (Crowd Control) के नियमों को पूरी तरह से अपग्रेड कर दिया है। पैलेट गन और इलेक्ट्रिक शॉक हथियारों की जगह अब गैर-घातक (Non-Lethal) और सुरक्षित विकल्पों पर जोर दिया जाएगा। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन, आधुनिक आंसू गैस के गोलों और हल्के लाठीचार्ज जैसे पारंपरिक लेकिन सुरक्षित तरीकों का ही इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही जवानों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि वे बिना किसी को गंभीर नुकसान पहुंचाए कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से बहाल रख सकें।दिल्ली-NCR की सुरक्षा और स्थानीय कानून व्यवस्था पर इसका सीधा असरइस फैसले का सीधा असर दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम जैसे संवेदनशील दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा, जहां आए दिन बड़े धरने और प्रदर्शन होते रहते हैं। दिल्ली पुलिस और आरएएफ की संयुक्त टुकड़ियां अब नए प्रोटोकॉल के तहत ही तैनात की जाएंगी। जानकारों का मानना है कि इस कदम से जहां एक ओर पुलिस और जनता के बीच टकराव के दौरान होने वाली गंभीर हिंसक घटनाओं और मौतों में कमी आएगी, वहीं दूसरी ओर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने वाले नागरिकों में भी सुरक्षा बलों के प्रति एक सकारात्मक संदेश जाएगा।
ब्रांड HMD (Human Mobile Devices) ने चीनी बाजार में अपना एक अनोखा और स्मार्ट फीचर फोन HMD Touch AI पेश किया है। यह फोन उन यूजर्स के लिए तैयार किया गया है जो पुराने नोकिया लूमिया (Nokia Lumia) सीरीज़ वाले एस्थेटिक और कॉम्पैक्ट साइज को पसंद करते हैं, लेकिन साथ ही आज के आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फीचर्स का भी इस्तेमाल करना चाहते हैं।यह एक हाइब्रिड-स्टाइल फीचर फोन है जिसमें कीपैड की जगह 3.2-इंच की टचस्क्रीन दी गई है और यह बाइटडांस (ByteDance) के प्रसिद्ध Doubao AI मॉडल पर काम करता है। आइए एक टेक रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं इस नए फोन की कीमत, फीचर्स और डिजाइन की मुख्य बातें।1. कीमत, रंग और डिजाइन (Price & Design)कीमत: IT Home की रिपोर्ट के अनुसार, चीन में HMD Touch AI की कीमत 469 चीनी युआन (लगभग ₹6,700 रुपये) रखी गई है। फिलहाल इसे चीन में प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध कराया गया है।लूमिया इंस्पायर्ड लुक: फोन का बॉडी स्ट्रक्चर और घुमावदार किनारे पुराने मशहूर Nokia Lumia स्मार्टफोन्स (Fabula Design) की याद दिलाते हैं।इंटरचेंजेबल कवर्स: यह हैंडसेट क्लासिक सियान (Cyan) रंग में पेश हुआ है। इसके अलावा, यूजर अपनी पसंद के अनुसार लुक बदलने के लिए पीले (Yellow), नीले (Blue) और सफेद (White) रंग के रियर कवर अलग से खरीद सकते हैं।2. Doubao AI और स्मार्ट फीचर्सइस छोटे से 3.2-इंच टचस्क्रीन डिवाइस में AI की कई उन्नत क्षमताएं जोड़ी गई हैं:छह एआई असिस्टेंट: फोन में बाइटडांस का Doubao AI मॉडल मौजूद है। यह यूजर्स को रियल-टाइम ट्रांसलेशन, कहानियों का वाचन, भाषा सीखने और बच्चों के होमवर्क को समझाने में मदद करता है।AI आर्टवर्क और इमेज जनरेशन: यूजर केवल लिखकर (Text Prompts) AI की मदद से तस्वीरें जनरेट कर सकते हैं।क्लीन OS और पैरेंटल कंट्रोल: यह ऑपरेटिंग सिस्टम पूरी तरह डिस्ट्रेक्शन-फ्री रखा गया है। इसमें थर्ड-पार्टी ऐप्स या शॉर्ट-वीडियो ऐप्स (टॉकटॉक/रील्स) डाउनलोड नहीं किए जा सकते। इसमें पैरेंटल कंट्रोल, एमपी3 प्लेयर, स्नेक गेम और कैलकुलेटर जैसी जरूरी सुविधाएं दी गई हैं।3. कैमरा, बैटरी और कनेक्टिविटी (Specs & Hardware)कैमरा: फोन में रियर और फ्रंट दोनों तरफ 2-मेगापिक्सल के कैमरे दिए गए हैं। रियर कैमरा AI इमेज रिकग्निशन के साथ-साथ फोटोज को कॉमिक, एनीमेशन या ट्रेडिशनल चाइनीज पेंटिंग स्टाइल में बदलने का काम भी करता है।बैटरी और SOS बटन: इसमें 1,950 mAh की रिमूवेबल बैटरी मिलती है जो USB Type-C पोर्ट से चार्ज होती है। फोन के टॉप पर एक कस्टमाइज़ होने वाला बटन दिया गया है, जिसे इमरजेंसी में टॉर्च या SOS बटन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।कनेक्टिविटी: यह डुअल 4G, VoLTE, डुअल नैनो सिम, वाई-फाई (Wi-Fi), हॉटस्पॉट शेयरिंग और मोबाइल पेमेंट (Alipay) सपोर्ट के साथ आता है।
देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक और सामाजिक खबर आ रही है। देश में पिछले काफी समय से चल रहे नीट (NEET) और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक विवाद ने अब एक उग्र राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस बार सीधे पीड़ित छात्राओं और महिला अभ्यर्थियों की टोली को लेकर जंतर-मंतर पर मैदान में उतर आए हैं। केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए राहुल गांधी ने सीधे देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की मांग की है और साफ कर दिया है कि उन्हें सिर्फ मंत्रालय का फेरबदल कतई मंजूर नहीं होगा।पीड़ित छात्राओं के आंसू देख भावुक हुए राहुल, सरकार को घेराजंतर-मंतर पर आयोजित इस विशाल विरोध प्रदर्शन में देश के कोने-कोने से आई उन छात्राओं ने हिस्सा लिया, जिनकी सालों की मेहनत परीक्षाओं में हुई धांधली की वजह से बेकार हो गई। छात्राओं से सीधे संवाद करते हुए राहुल गांधी काफी भावुक नजर आए। उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह सिर्फ किसी एक परीक्षा का फेलियर नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं और विशेष रूप से हमारी बेटियों के भविष्य के साथ किया गया एक क्रूर मज़ाक है। राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन विपक्ष अब चुप बैठने वाला नहीं है।मंत्रालय बदलना सिर्फ लीपापोती, अब सीधे इस्तीफे पर अड़ा विपक्षप्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता ने एक बेहद आक्रामक रुख अपनाया। राजनीतिक गलियारों में चल रही उन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए, जिसमें शिक्षा मंत्री का विभाग बदलने की अटकलें लगाई जा रही थीं, राहुल गांधी ने दो टूक कहा कि देश के छात्रों को सरकार की यह लीपापोती मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से पूरी तरह से बर्खास्त नहीं किया जाता, तब तक यह लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक जारी रहेगी। विपक्ष का मानना है कि परीक्षा सिस्टम में बैठे बड़े चेहरों पर कार्रवाई किए बिना सिस्टम को नहीं सुधारा जा सकता।दिल्ली-NCR और लोकल युवाओं के बीच बढ़ा उबालराहुल गांधी के इस जंतर-मंतर मार्च के बाद दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम सहित पूरे देश के कोचिंग हब्स में पढ़ने वाले छात्रों के बीच एक नई ऊर्जा और उबाल देखने को मिल रहा है। स्थानीय छात्र संगठनों ने भी इस प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया है। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि युवाओं और विशेषकर महिला छात्रों से जुड़ा यह मुद्दा अब सीधे तौर पर आने वाले विधानसभा चुनावों और देश के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने की ताकत रखता है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों नौकरीपेशा सदस्यों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है। EPFO ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए तय 8.25% की वार्षिक ब्याज दर की राशि सदस्यों के कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खातों में क्रेडिट (जमा) करना शुरू कर दिया है। देश भर के कई पीएफ खाताधारकों को ब्याज जमा होने का आधिकारिक एसएमएस (SMS) मिलना शुरू हो चुका है।यदि आपके मोबाइल पर अभी तक ब्याज जमा होने का मैसेज नहीं आया है, तो घबराने या परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। EPFO ब्याज जमा करने की इस प्रक्रिया को चरणबद्ध (Phase-wise/Batch-wise) तरीके से पूरा करता है। आइए एक पर्सनल फाइनेंस और टेक रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि आप बिना SMS के भी अपने पीएफ खाते का बैलेंस और ब्याज कैसे चेक कर सकते हैं।15 जुलाई से प्रक्रिया शुरू: इन 3 तरीकों से मिनटों में चेक करें पीएफ बैलेंसEPFO ने 15 जुलाई 2026 से ब्याज की रकम खातों में ट्रांसफर करना शुरू किया है। यदि आपके पासबुक में अभी अपडेटेड बैलेंस नहीं दिख रहा है, तो आप नीचे दिए गए तरीकों से कभी भी अपने बैलेंस की जांच कर सकते हैं:1. EPFO मेंबर पासबुक पोर्टल (Online Portal)EPFO के आधिकारिक Unified Member Portal पर जाएं और 'Member Passbook' के विकल्प को चुनें।अपना UAN (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर) और पासवर्ड दर्ज करके लॉग इन करें।अपनी मेंबर आईडी (Member ID) चुनें और पासबुक डाउनलोड या व्यू करें। यदि ब्याज क्रेडिट हो चुका होगा, तो वह पासबुक के अंतिम क्रेडिट कॉलम में स्पष्ट दिखेगा।2. मिस्ड कॉल सेवा (Missed Call Service)यदि आपका मोबाइल नंबर आपके UAN के साथ पंजीकृत है, तो अपने रजिस्टर्ड नंबर से 011-22901406 पर मिस्ड कॉल दें।दो घंटी बजने के बाद कॉल अपने आप कट जाएगी और कुछ ही सेकंड में आपको SMS के जरिए कुल पीएफ बैलेंस, आखिरी योगदान और ब्याज की जानकारी मिल जाएगी।(ध्यान दें: इस सेवा के लिए आपका UAN आधार, पैन और बैंक खाते से लिंक/सीडेड होना अनिवार्य है।)3. SMS भेजकर जानें बैलेंसअपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 7738299899 पर एक टेक्स्ट मैसेज भेजें।मैसेज फॉर्मेट दर्ज करें: EPFOHO UAN ENGयदि आप हिंदी या किसी अन्य क्षेत्रीय भाषा में जानकारी चाहते हैं, तो 'ENG' की जगह उस भाषा के शुरुआती तीन अक्षर लिखें (जैसे हिंदी के लिए HIN, मराठी के लिए MAR)।क्या ब्याज देर से क्रेडिट होने पर कोई आर्थिक नुकसान होगा?कई खाताधारकों के मन में यह सवाल रहता है कि यदि उनके पीएफ खाते में ब्याज का पैसा देर से क्रेडिट होता है, तो क्या उन्हें ब्याज का नुकसान उठाना पड़ेगा?इसका जवाब है—बिलकुल नहीं!EPF योजना 1952 (पैराग्राफ 60) का नियम: ईपीएफ नियमों के अनुसार, ब्याज की गणना हर महीने के रनिंग बैलेंस (Monthly Running Balance) के आधार पर की जाती है।भले ही ब्याज का पैसा खाते में देर से दिखे या प्रोसेस हो, EPFO आपको 1 अप्रैल से लेकर पूरे वित्त वर्ष के लिए घोषित 8.25% की पूरी दर से ही ब्याज देगा। देरी होने की स्थिति में भी सदस्य का एक रुपये का भी नुकसान नहीं होता है।
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के सबसे अशांत समुद्री रास्ते लाल सागर (Red Sea) से इस वक्त की सबसे बड़ी और दिल दहला देने वाली भू-राजनीतिक खबर आ रही है। सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) के बीच एक बार फिर सीधी और खतरनाक जंग छिड़ गई है। सऊदी अरब द्वारा हूतियों के खिलाफ शुरू की गई इस नई सैन्य कार्रवाई के बाद हूती कमांडरों ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए सऊदी शासन को खुली धमकी दी है। हूतियों ने सीधे लफ्जों में कहा है कि वे सऊदी अरब को 'जहन्नुम की आग' दिखाएंगे, जिसके बाद से पूरे क्षेत्र में युद्ध के बादल गहरे हो गए हैं।लाल सागर बना बारूद का ढेर, जहाजों की आवाजाही ठपसऊदी अरब की वायुसेना और नौसेना ने हूतियों के रणनीतिक ठिकानों और मिसाइल लॉन्च पैड्स पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए हैं। इस जवाबी और आक्रामक कार्रवाई से बौखलाए हूती विद्रोहियों ने लाल सागर से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और सऊदी के तेल टैंकरों को निशाना बनाने की कसम खाई है। लाल सागर, जो वैश्विक व्यापार का एक लाइफलाइन रूट माना जाता है, इस समय पूरी तरह से बारूद के ढेर में तब्दील हो चुका है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने इस रूट से अपने जहाजों को हटाना शुरू कर दिया है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह चरमराने की कगार पर पहुंच गई है।हूतियों की 'जहन्नुम' वाली धमकी से दुनिया भर के देश अलर्टहूती विद्रोहियों के प्रवक्ता ने एक आधिकारिक बयान जारी कर सऊदी अरब को चेतावनी दी है कि उनके पास ऐसे घातक ड्रोन और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं जो रियाद और जेद्दा जैसे बड़े सऊदी शहरों के आर्थिक ठिकानों को पल भर में तबाह कर सकती हैं। हूतियों ने कहा कि सऊदी ने इस जंग को छेड़कर अपने लिए तबाही का रास्ता चुन लिया है। इस गंभीर धमकी के बाद अमेरिकी और ब्रिटिश नौसेना बल भी लाल सागर में अत्यधिक सक्रिय हो गए हैं, जिससे यह टकराव अब केवल दो देशों के बीच न रहकर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट का रूप लेता जा रहा है।भारत सहित वैश्विक तेल बाजारों पर टूटेगा बड़ा संकटलाल सागर में बढ़े इस भीषण बवाल का सीधा और बड़ा असर भारत के स्थानीय बाजारों और घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ना तय है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते के जरिए आयात और निर्यात करता है। मुंबई और गुजरात के बंदरगाहों पर आने वाले माल ढुलाई (Freight Rates) के दामों में भारी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। अगर यह जंग लंबी खिंचती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने और महंगाई का एक नया दौर शुरू होने का सीधा खतरा मंडराने लगा है।
ईरान पर टूट पड़ा महासंकट: 2 मुस्लिम देशों ने मिलकर किया भीषण हमला, UAE ने भी थाम लिया हाथ
मिडिल ईस्ट यानी मध्य पूर्व के अशांत और तनावपूर्ण माहौल से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली भू-राजनीतिक (Geopolitical) खबर सामने आ रही है। ईरान के खिलाफ अब एक बिल्कुल नया और बेहद खतरनाक सैन्य मोर्चा खुल चुका है। हमेशा पश्चिमी देशों या इजरायल के निशाने पर रहने वाले ईरान पर इस बार दो बड़े मुस्लिम देशों ने मिलकर एक बड़ा रणनीतिक हमला बोल दिया है। इस चौंकाने वाले सैन्य घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी इस गठबंधन को अपना खुला समर्थन दे दिया, जिसने पूरे खाड़ी क्षेत्र की राजनीति और सुरक्षा समीकरण को हिलाकर रख दिया है।खाड़ी देशों के इस औचक हमले से ईरान में हड़कंपतेहरान से आ रही शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला ईरान के सीमावर्ती और रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया है। दो पड़ोसी मुस्लिम मुल्कों के इस संयुक्त सैन्य एक्शन ने ईरान के रक्षा तंत्र को पूरी तरह से चौंका दिया है। अब तक ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के सीधे सैन्य एक्शन से बचने वाले खाड़ी देशों (Gulf Countries) का यह आक्रामक रुख यह साफ दर्शाता है कि क्षेत्र में क्षेत्रीय संप्रभुता और सुरक्षा को लेकर पानी सिर से ऊपर जा चुका है। हमले के बाद ईरान की सीमाओं और प्रमुख सैन्य अड्डों पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।UAE के पीछे से समर्थन देने के क्या हैं मायने?इस पूरे विवाद में यूएई (UAE) की भूमिका ने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों और कूटनीतिज्ञों को हैरान कर दिया है। आर्थिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले यूएई का इस मोर्चे में शामिल होना यह साफ संकेत देता है कि ईरान की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और प्रॉक्सी वॉर से खाड़ी के देश अब बेहद असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यूएई ने न केवल इस हमले को अपना रणनीतिक समर्थन दिया है, बल्कि खुफिया सूचनाएं साझा करने और लॉजिस्टिक्स के स्तर पर भी सहयोग किया है। यह कदम ईरान को पूरी दुनिया और विशेष रूप से मुस्लिम जगत में अलग-थलग करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।लोकल और ग्लोबल मार्केट पर मंडराया युद्ध का खतराइस नए मोर्चे के खुलने का सीधा असर भारत सहित दुनिया भर के तेल बाजारों (Crude Oil Markets) और मुंबई-दिल्ली जैसे प्रमुख आर्थिक केंद्रों पर देखने को मिल सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के करीब बढ़ते इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल आने की आशंका पैदा हो गई है। स्थानीय बाजारों में लॉजिस्टिक्स और शिपिंग कंपनियों ने अपनी रूटिंग बदलना शुरू कर दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इस हमले का ईरान ने कोई बड़ा पलटवार किया, तो यह सीमित सैन्य कार्रवाई एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकती है, जिससे पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था संकट में आ जाएगी।
देश की कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सरल और करदाता-अनुकूल (Taxpayer-Friendly) बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नियमों का ईमानदारी से पालन करने वाले करदाताओं पर किसी भी तरह का अनावश्यक दबाव या बोझ नहीं पड़ना चाहिए।वित्त मंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि टैक्स चोरी करने वालों और फर्जी क्लेम करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहनी चाहिए, लेकिन देश के ईमानदार करदाताओं के लिए टैक्स असेसमेंट और नोटिस की प्रक्रिया बेहद सरल, सुविधाजनक और भरोसेमंद होनी चाहिए। आइए एक इकोनॉमिक्स और टैक्स पॉलिसी रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं वित्त मंत्री के इन नए निर्देशों के 4 सबसे बड़े पहलू।1. 'टैक्स वसूली ही मकसद नहीं, भरोसा बनाना प्राथमिकता'वित्त मंत्री ने आयकर अधिकारियों को अपना कार्य रवैया (Work Culture) बदलने का निर्देश देते हुए कहा कि कर प्रशासन का उद्देश्य केवल राजस्व या टैक्स वसूलना नहीं है, बल्कि करदाता और विभाग के बीच 'भरोसे का रिश्ता' कायम करना है।अनुपालन (Compliance) आसान बने: सरकार का जोर स्वैच्छिक कर अनुपालन पर है। जब नियम सरल और पारदर्शी होंगे, तो लोग खुद आगे आकर टैक्स भरेंगे।अनावश्यक जांच से राहत: ईमानदार टैक्सपेयर्स को छोटी-छोटी कमियों या क्लैरिफिकेशन के लिए बार-बार स्क्रूटनी (Scrutiny) या आयकर विभाग के चक्कर नहीं कटवाए जाएंगे।2. टैक्स चोरी पकड़ने के लिए AI और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमालसीतारमण ने कहा कि तकनीक के दौर में ईमानदार और बेईमान के बीच फर्क करना बेहद आसान हो गया है:डेटा एनालिटिक्स से निगरानी: आयकर विभाग को आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए ताकि जहां वास्तविक टैक्स चोरी हो रही है, केवल वहीं सटीक कार्रवाई की जा सके।सटीक नोटिस: एआई आधारित निगरानी से एक ओर टैक्स चोरी पर शिकंजा कसेगा, तो दूसरी ओर सामान्य टैक्सपेयर्स को बेवजह के नोटिसों से राहत मिलेगी।3. असेसमेंट ईयर 2026-27: 3.34 करोड़ ITR दाखिल, 2 करोड़ का त्वरित निपटारासरकार द्वारा बीते कुछ वर्षों में किए गए डिजिटल सुधारों (फेशलेस असेसमेंट, ई-फाइलिंग पोर्टल और तेज रिफंड सिस्टम) का असर आंकड़ों में साफ दिख रहा है:3.34 करोड़ से अधिक ITR: चालू आकलन वर्ष (AY 2026-27) के लिए अब तक 3.34 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न सफलतापूर्वक दाखिल किए जा चुके हैं।2 करोड़ रिफंड/प्रोसेसिंग पूरे: दाखिल किए गए रिटर्न में से करीब 2 करोड़ ITR का प्रोसेसिंग और निपटारा विभाग द्वारा रिकॉर्ड समय में पूरा भी कर लिया गया है।4. लंबित टैक्स विवादों के जल्द निपटारे पर जोरवित्त मंत्री ने ट्रिब्यूनल और अदालतों में लंबित पड़े हजारों करोड़ रुपये के टैक्स विवादों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने विभाग को निर्देश दिया कि लंबी कानूनी प्रक्रियाओं में फंसे राजस्व को निकालने के लिए टाइम-बाउंड (समयबद्ध) समाधान निकाले जाएं। इससे न केवल सरकार को अपना राजस्व (Revenue) समय पर मिलेगा, बल्कि कारोबारियों और करदाताओं को भी सालों-साल चलने वाले मुकदमों से मुक्ति मिलेगी।
अमेरिका में खसरे के बाद डायरिया का हाहाकार: अमेरिकी डॉक्टर्स अब दे रहे भारत के आयुर्वेद की सलाह
सुपरपावर अमेरिका इस समय एक के बाद एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझ रहा है। हाल ही में फैले खसरे (Measles) के गंभीर मामलों के बाद, अब पूरे अमेरिका में डायरिया (Diarrhea) यानी दस्त का भीषण प्रकोप देखने को मिल रहा है। वहां के प्रमुख शहरों में पेट के इन्फेक्शन और डिहाइड्रेशन के मामलों में अचानक भारी उछाल आया है। इस गंभीर संकट के बीच सबसे हैरान और गर्व करने वाली बात यह सामने आ रही है कि अमेरिकी डॉक्टर्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स अब इस बीमारी से निपटने के लिए भारत की सदियों पुरानी पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति और घरेलू उपचारों को अपनाने की सलाह दे रहे हैं।अमेरिकी अस्पतालों में बढ़े मरीज, मॉडर्न मेडिसिन के साथ आयुर्वेद का मेलन्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया और टेक्सास जैसे बड़े अमेरिकी राज्यों के अस्पतालों में पेट से संबंधित बीमारियों और गंभीर डायरिया से पीड़ित मरीजों की तादाद तेजी से बढ़ी है। अमेरिकी स्वास्थ्य नियामक संस्थाओं के लिए यह स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। एंटीबायोटिक्स के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने और शरीर में पानी की कमी (Dehydration) को तुरंत रोकने के लिए वहां के पीडियाट्रिशियन और फिजिशियन अब भारतीय आयुर्वेद का रुख कर रहे हैं। डॉक्टर्स का मानना है कि पेट के इन्फेक्शन को शांत करने और आंतों (Gut Health) को मजबूत बनाने में भारत के पारंपरिक तरीके बेहद कारगर साबित हो रहे हैं।डॉक्टर बता रहे भारत के ये अचूक आयुर्वेदिक और घरेलू इलाजअमेरिकी स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा मरीजों को रिकमेंड किए जा रहे भारतीय इलाज में सबसे ऊपर ओआरएस (ORS) के देसी विकल्प के रूप में नींबू-पानी, नमक और चीनी का घोल शामिल है। इसके अलावा, आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार आंतों के गुड बैक्टीरिया को बढ़ाने के लिए छाछ (Buttermilk), भुना हुआ जीरा, सोंठ (सूखा अदरक) और बेल के शर्बत के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। अमेरिकी डॉक्टर्स अब मरीजों को हल्का और सुपाच्य भोजन जैसे मूंग की दाल की खिचड़ी और केला खाने की सलाह दे रहे हैं, जो भारत के हर घर में डायरिया के दौरान सदियों से इस्तेमाल होता आ रहा है।क्यों हो रहा है भारतीय आयुर्वेद की तरफ वैश्विक झुकाव?ग्लोबल मेडिकल साइंस अब धीरे-धीरे यह स्वीकार कर रहा है कि पेट से जुड़ी बीमारियों में केमिकल युक्त दवाओं के बजाय प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उपचार शरीर को बिना किसी साइड इफेक्ट के जल्दी ठीक करते हैं। अमेरिका के स्थानीय क्लीनिकों में अब 'बैलेंस्ड डाइट' और 'हर्बल रेमेडीज' के नाम पर भारतीय नुस्खों का बकायदा पर्चा बनाया जा रहा है। लोकल अमेरिकी नागरिकों के बीच भी इन भारतीय उपचारों को लेकर काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और योग-आयुर्वेद की साख एक बार फिर आसमान छू रही है।
परमाणु बम का असली 'सुपरबॉस': क्या पाकिस्तान में अब सिर्फ शोपीस रह गए हैं प्रधानमंत्री
पड़ोसी देश पाकिस्तान से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और बड़ी राजनीतिक-सैन्य खबर सामने आ रही है। पाकिस्तान के परमाणु हथियारों (Nuclear Weapons) पर अब वहां की चुनी हुई नागरिक सरकार का नियंत्रण पूरी तरह से खत्म हो चुका है। देश के सैन्य ढांचे में हुए एक बड़े और ऐतिहासिक पुनर्गठन के बाद, पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर (Field Marshal Asim Munir) अब देश के नए 'सुपरबॉस' बन गए हैं। इस नए बदलाव के तहत पाकिस्तान के परमाणु बम का रिमोट कंट्रोल और लॉन्चिंग बटन सीधे तौर पर सेना और आसिम मुनीर के हाथों में शिफ्ट हो गया है, जिसके बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की हैसियत महज एक 'शोपीस' जैसी रह गई है।नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड का गठन और चीन वाला मॉडलइस्लामाबाद से आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए लेफ्टिनेंट जनरल आमिर रजा को फोर स्टार जनरल के पद पर प्रमोट किया है और उन्हें नवगठित 'नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड' (NSC) का पहला कमांडर नियुक्त कर दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरा ढांचा काफी हद तक चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैन्य मॉडल पर आधारित है। इस नई सेंट्रलाइज्ड जॉइंट ऑपरेशन कमांड के तहत पाकिस्तान की थल सेना, नौसेना, वायुसेना, रॉकेट फोर्स और स्ट्रैटेजिक कमांड को एक साथ लाया गया है, जिसके सर्वोच्च कमांडर खुद आसिम मुनीर हैं।प्रधानमंत्री के हाथ से निकली असली ताकत, सिर्फ जानकारी तक सीमितइस नए बदलाव से पहले तक पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर पारंपरिक रूप से नागरिक सरकार के नेतृत्व वाली नेशनल कमांड अथॉरिटी (NCA) का दखल माना जाता था, जिसमें प्रधानमंत्री की मुख्य भूमिका होती थी। लेकिन इस नए मिलिट्री ओवरहॉल के बाद अब प्रधानमंत्री की भूमिका सिर्फ परमाणु फैसलों और रणनीतियों की जानकारी लेने (Information Recipient) तक ही सीमित कर दी गई है। अब किसी भी बड़े रणनीतिक या परमाणु एक्शन का अंतिम फैसला सीधे तौर पर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) और आर्मी चीफ दोनों पदों को संभाल रहे आसिम मुनीर के पास सुरक्षित रहेगा।कोर्ट भी नहीं दे सकता मुनीर के फैसले को चुनौतीदिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान की संसद में हुए संवैधानिक संशोधनों के जरिए सेना के इस नए पावर स्ट्रक्चर को पूरी तरह से कानूनी कवच दे दिया गया है। इस नए नियम के तहत नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड के कमांडर की नियुक्ति, दोबारा नियुक्ति या उनके कार्यकाल को बढ़ाने के फैसले को देश की किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है। न्यायिक समीक्षा से बाहर होने के कारण आसिम मुनीर की ताकत अब पाकिस्तान में असीमित हो गई है। इस सैन्य तानाशाही वाले नए समीकरण ने न केवल पाकिस्तान के भीतर लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई हैं, बल्कि दक्षिण एशिया और वैश्विक पटल पर भी परमाणु सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
Instagram की बड़ी कार्रवाई, Meta Smart Glass से बने आपत्तिजनक POV वीडियो हटाए जाएंगे
इंस्टाग्राम का यह फैसला प्लेटफॉर्म की अब तक की सबसे सख्त कंटेंट मॉडरेशन कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। हाल के महीनों में स्मार्ट ग्लास से रिकॉर्ड किए गए ऐसे वीडियो तेजी से वायरल हो रहे थे, जिससे गोपनीयता और डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे थे।
राहुल गांधी ने नीट पेपर लीक और छात्र आंदोलन को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला। कहा- सरकार मेट्रो, सड़कें और दुकानें बंद कर सकती है, लेकिन पेपर लीक नहीं रोक पाई।
आस्था की विजय: जब पंढरपुर में एक बालक के रक्षक बने स्वयं विट्ठल
एक पारिवारिक संस्मरण, जो बताता है कि श्रद्धा का सबसे बड़ा प्रमाण अनुभव होता है, भारत की सांस्कृतिक परंपरा में कुछ पर्व केवल तिथियां नहीं होते, वे लोकजीवन की आत्मा बन जाते हैं। आषाढ़ी एकादशी ऐसा ही एक महापर्व है, जो महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश के ...
महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामले में बड़ी सफलता, मुख्य आरोपी वीरेंद्र कुमार गुप्ता बिहार से गिरफ्तार
मुंबई महाराष्ट्र के चर्चित शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों ने मुख्य आरोपियों में शामिल वीरेंद्र कुमार गुप्ता को बिहार से गिरफ्तार कर लिया है। वह लंबे समय से फरार चल रहा था और उसकी तलाश के लिए महाराष्ट्र पुलिस की विशेष टीम लगातार कई राज्यों में छापेमारी कर रही थी। आखिरकार भिवंडी पुलिस की विशेष टीम ने बिहार में अभियान चलाकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
सीजेपी प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस का बड़ा दावा, 130 पुलिसकर्मी और 65 छात्र घायल; 15 एफआईआर दर्ज
दिल्ली में सीजेपी के 20 जुलाई के 'संसद चलो' प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस का बड़ा दावा। 130 पुलिसकर्मी और 65 छात्र घायल, 15 एफआईआर दर्ज, एफआरएस कैमरों से 2,000 से अधिक लोगों की पहचान।
गुजरात में मानसून के और भी अधिक सक्रिय होने के साथ, अब बारिश का एक और जोरदार दौर शुरू होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, वर्तमान में एक साथ 5 वर्षा प्रणालियां सक्रिय होने के कारण पूरे गुजरात में भारी व्यापक वर्षा की भविष्यवाणी की ...
दिल्ली में सुरक्षा कारणों से शराब की दुकानों का समय बदला। अब सप्ताहांत तक सभी सरकारी शराब की दुकानें रात 8 बजे बंद होंगी। CJP प्रदर्शन के बीच प्रशासन ने लिया फैसला।
सरकार और CJP के बीच तीसरे दौर की बातचीत से पहले संगठन ने केंद्र को चेतावनी दी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, मुआवजे और दर्ज मामलों की वापसी को लेकर CJP अपने रुख पर कायम है।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नई पीढ़ी, परिवार, मातृत्व और भारतीय संस्कृति पर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे हर बात का तर्क चाहते हैं और परिवारों में संवाद बढ़ाने की जरूरत है।
6 दिन बाद फिर शुरू हुई अमरनाथ यात्रा, 6,269 श्रद्धालुओं का जत्था बालटाल मार्ग से रवाना
लगातार छह दिनों तक स्थगित रहने के बाद, दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित अमरनाथ गुफा, कटड़ा में माता वैष्णो देवी मंदिर और जम्मू क्षेत्र के रियासी जिले में स्थित शिव खोड़ी मंदिर की यात्रा भी आज शुरू हो गई हैं।
दिल्ली में आज 18 मेट्रो स्टेशन बंद, जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच DMRC का बड़ा फैसला
जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए आज सुबह 7.30 बजे से अगली सूचना तक 18 मेट्रो स्टेशन बंद रहेंगे। पिछले कई दिनों से मेट्रो बंद होने की वजह से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
राजधानी दिल्ली में जारी प्रदर्शनों और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने ट्रैफिक एडवाइजरी (Traffic Advisory) जारी की है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संवेदनशील इलाकों में भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत सख्त पाबंदियां लागू की गई हैं।पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे नई दिल्ली जिले के मुख्य क्षेत्रों में बिना किसी बेहद जरूरी काम के जाने से बचें और अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाकर निकलें।इन इलाकों में यात्रा से बचने की सलाहदिल्ली पुलिस ने विशेष रूप से निम्नलिखित संवेदनशील इलाकों में अनावश्यक आवाजाही न करने का आग्रह किया है:जंतर-मंतर और संसद भवन परिसरसेंट्रल विस्टा (Central Vista)कनॉट प्लेस (Connaught Place)संपूर्ण नई दिल्ली जिलावाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे इन क्षेत्रों की तरफ जाने वाले रास्तों के बजाय वैकल्पिक मार्गों (Alternate Routes) का चयन करें और चौराहों पर तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें।कैब, फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स सेवाओं के लिए निर्देशदिल्ली पुलिस ने ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म्स (जैसे- ओला, उबर, जोमैटो, स्विगी और क्विक-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स) को भी विशेष सलाह जारी की है:सेवाओं पर नियंत्रण: कंपनियों से कहा गया है कि वे प्रतिबंधित क्षेत्रों में अपनी डिलीवरी और राइड सेवाओं को जरूरत के अनुसार नियंत्रित रखें।जियो-फेंसिंग (Geo-Fencing) तकनीक: कंपनियों को संवेदनशील क्षेत्रों में जियो-फेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल करने या अस्थायी रूप से सेवाएं निलंबित रखने की सलाह दी गई है।सुरक्षा प्राथमिकता: पुलिस के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य डिलीवरी पार्टनर्स, कैब ड्राइवरों और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।आपातकालीन सेवाएं और हेल्पलाइन नंबरइमरजेंसी गाड़ियां रहेंगी फ्री: दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अधिकृत सरकारी वाहनों जैसी सभी आपातकालीन सेवाओं पर कोई रोक नहीं रहेगी और वे बिना किसी रुकावट के चलती रहेंगी।अफवाहों से बचें: लोगों से केवल आधिकारिक घोषणाओं और पुलिस अपडेट पर ही भरोसा करने को कहा गया है। किसी भी आपात स्थिति या सहायता के लिए नागरिक दिल्ली पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर संपर्क कर सकते हैं।
हिंदू धर्म में आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी (हरिशयनी एकादशी) का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज 25 जुलाई 2026 को भगवान श्री हरि विष्णु पाताल लोक में योग निद्रा के लिए चले जाते हैं और इसी के साथ चार महीनों का चतुर्मास (सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक) प्रारंभ हो जाता है।चतुर्मास के दौरान विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है और सृष्टि के संचालन का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं। अब कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी 'देवउठनी एकादशी' पर भगवान विष्णु के जागने के बाद ही पुनः शुभ कार्य शुरू होंगे।देवशयनी एकादशी पर भद्रा का समयपंचांग के अनुसार, आज देवशयनी एकादशी पर सुबह से ही भद्रा काल लग रहा है:भद्रा काल का समय: सुबह 05:27 बजे से सुबह 11:34 बजे तक।राहत की बात: इस दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में विराजमान रहेंगे, जिससे ज्योतिषीय गणना के अनुसार भद्रा का निवास पाताल/स्वर्ग लोक में होगा और पृथ्वी लोक पर इसका अशुभ प्रभाव नहीं माना जाएगा।एकादशी तिथि और पारण का समयएकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:12 बजेएकादशी तिथि समाप्त: 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 बजेव्रत का पारण (26 जुलाई): 26 जुलाई 2026 को सुबह 05:28 बजे से सुबह 08:10 बजे के बीच द्वादशी तिथि में व्रत का पारण करना शुभ रहेगा।आज पूजा के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:03 बजे से 04:45 बजे तकअभिजित मुहूर्त: सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक (पूजा के लिए अति श्रेष्ठ)विजय मुहूर्त: दोपहर 02:28 बजे से दोपहर 03:22 बजे तकगोधूलि मुहूर्त: शाम 06:58 बजे से शाम 07:19 बजे तकअमृत काल: रात 09:41 बजे से रात 11:29 बजे तकदेवशयनी एकादशी: क्या करें और क्या न करें?क्या करें (Dos):सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले या सात्विक वस्त्र धारण करें।भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा में पीले फल, पीले फूल, चंदन और तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अवश्य चढ़ाएं।'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल या फल का दान करें।क्या न करें (Don'ts):एकादशी के दिन चावल (अक्षत) का सेवन भूलकर भी न करें (व्रत न रखने वालों के लिए भी वर्जित)।तुलसी के पौधे में जल न चढ़ाएं, न ही आज के दिन तुलसी पत्र तोड़ें (पूजा के लिए एक दिन पहले ही तोड़ कर रखें)।तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) से दूर रहें।किसी के प्रति मन में गलत विचार न लाएं और न ही किसी का अपमान करें।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली ने विज्ञापन संख्या 103/2026 के तहत नर्सिंग ऑफिसर रिक्रूटमेंट कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (NORCET)-11 का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके जरिए एम्स नई दिल्ली समेत देश भर के भाग लेने वाले अन्य एम्स संस्थानों में ग्रुप-B के तहत नर्सिंग ऑफिसर (Nursing Officer) के पदों पर भर्ती की जाएगी।इच्छुक और योग्य उम्मीदवार एम्स के आधिकारिक परीक्षा पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 13 अगस्त 2026 (शाम 5:00 बजे तक) तय की गई है।महत्वपूर्ण तिथियां (Important Dates)ऑनलाइन आवेदन शुरू होने की तिथि: जुलाई 2026आवेदन की अंतिम तिथि: 13 अगस्त 2026 (शाम 5:00 बजे तक)NORCET-11 प्रीलिमिनरी परीक्षा (Stage-1): 12 सितंबर 2026NORCET-11 मेन्स परीक्षा (Stage-2): 30 सितंबर 2026कौन कर सकता है आवेदन? (Eligibility Criteria)शैक्षणिक योग्यता:उम्मीदवार के पास बी.एससी. (ऑनर्स) नर्सिंग / बी.एससी. नर्सिंग या पोस्ट-बेसिक बी.एससी. नर्सिंग की डिग्री होनी चाहिए और वह राज्य/भारतीय नर्सिंग काउंसिल में नर्स एवं मिडवाइफ के रूप में पंजीकृत हो। अथवाजीएनएम (GNM) डिप्लोमाधारक उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते वे पंजीकृत हों और उनके पास कम से कम 50 बेड वाले अस्पताल में कार्य करने का 2 वर्ष का अनुभव हो।आयु सीमा: 13 अगस्त 2026 तक उम्मीदवार की उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार ऊपरी आयु सीमा में छूट दी जाएगी।वेतनमान (Salary/Pay Scale)चयनित उम्मीदवारों को पे मैट्रिक्स के लेवल-07 के तहत वेतन दिया जाएगा (प्री-रिवाइज्ड पे बैंड-2: ₹9,300 - ₹34,800 + ग्रेड पे ₹4,600)। इसके अलावा अन्य भत्ते व सुविधाएं भी लागू होंगी।आवेदन शुल्क (Application Fee)जनरल / ओबीसी (UR/OBC): ₹3,000एससी / एसटी / ईडब्ल्यूएस (SC/ST/EWS): ₹2,400दिव्यांग (PwD): कोई शुल्क नहीं (निःशुल्क)(नोट: परीक्षा में शामिल होने वाले SC/ST उम्मीदवारों का आवेदन शुल्क रिजल्ट के बाद और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पूरा होने पर वापस (Refund) कर दिया जाएगा।)चयन प्रक्रिया और आवेदन कैसे करें?चयन प्रक्रिया: उम्मीदवारों का चयन दो चरणों के कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) – प्रीलिमिनरी और मेन्स परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर होगा। इसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट आयोजित किया जाएगा।आवेदन कैसे करें: उम्मीदवार एम्स के आधिकारिक परीक्षा पोर्टल norcet11.aiimsexams.ac.in पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करें, फॉर्म भरें, फोटो व सिग्नेचर अपलोड करें और फीस का भुगतान कर सबमिट करें। भविष्य के लिए प्रिंटआउट संभाल कर रखें।
देशभर के सराफा बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट का दौर जारी है। 25 जुलाई 2026 की सुबह राजधानी दिल्ली समेत देश के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट और 22 कैरेट गोल्ड के दामों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। दिल्ली में 24 कैरेट सोना फिसलकर ₹1,44,470 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है, जबकि एक दिन पहले ही इसमें ₹2,000 की भारी नरमी दर्ज की गई थी।घरेलू बाजार में कमजोर खरीदारी और स्थानीय मांग में आई सुस्ती के चलते सोने पर दबाव बना हुआ है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) $4,052.78 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से नीचे आने के कारण वैश्विक बाजार में सोने को हल्का सहारा मिला है, लेकिन घरेलू बाजार में कमजोरी हावी है।देश के प्रमुख शहरों में आज का गोल्ड रेट (₹/10 ग्राम)शहर22 कैरेट सोने का भाव (₹)24 कैरेट सोने का भाव (₹)दिल्ली₹1,32,440₹1,44,470मुंबई₹1,32,290₹1,44,320कोलकाता₹1,32,290₹1,44,320चेन्नई₹1,32,290₹1,44,320लखनऊ₹1,32,440₹1,44,470जयपुर₹1,32,440₹1,44,470अहमदाबाद₹1,32,340₹1,44,370भोपाल₹1,32,340₹1,44,370चंडीगढ़₹1,32,440₹1,44,470हैदराबाद₹1,32,290₹1,44,320चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावटसोने के साथ-साथ चांदी (Silver) की कीमतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 25 जुलाई की सुबह घरेलू बाजार में 1 किलोग्राम चांदी की कीमत ₹2,34,900 प्रति किलोग्राम पर बनी हुई है, जबकि इससे पहले दिल्ली सराफा बाजार में चांदी ₹5,000 तक टूट चुकी है।वैश्विक बाजार की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पॉट सिल्वर मामूली बढ़त के साथ $58.11 प्रति औंस और प्लेटिनम $1,587.17 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।क्यों बदलती हैं सोने-चांदी की कीमतें?भारत में सोने और चांदी के भाव केवल घरेलू मांग और आपूर्ति पर निर्भर नहीं करते, बल्कि इन मुख्य कारकों से भी तय होते हैं:वैश्विक आर्थिक स्थिति व अंतरराष्ट्रीय दरें: अमेरिका और वैश्विक बाजारों में ब्याज दरों का असर।डॉलर-रुपया विनिमय दर: भारतीय रुपये के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी।कच्चे तेल की कीमतें: ऊर्जा क्षेत्र में होने वाले उतार-चढ़ाव।इंपोर्ट ड्यूटी और टैक्स: भारत सरकार द्वारा लगाए जाने वाले सीमा शुल्क और स्थानीय वैट (VAT)/जीएसटी।
हर दिन सुबह 6 बजे देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनियां (OMCs) जैसे इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) पेट्रोल और डीजल की नई दरें जारी करती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में होने वाले बदलावों का सीधा असर इन दामों पर पड़ता है।वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जारी हलचल के बीच आज यानी 25 जुलाई 2026 को भारतीय तेल कंपनियों ने राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। आइए जानते हैं देश के प्रमुख शहरों में आज 1 लीटर पेट्रोल और डीजल का क्या भाव है:देश के प्रमुख शहरों में आज का पेट्रोल-डीजल भाव (₹/लीटर)शहरपेट्रोल का भाव (₹/लीटर)डीजल का भाव (₹/लीटर)नई दिल्ली₹102.12₹95.20मुंबई₹111.21₹97.83कोलकाता₹113.51₹99.82चेन्नई₹107.77₹99.55लखनऊ₹101.89₹95.36नोएडा₹102.12₹97.56गुरुग्राम₹102.77₹95.44चंडीगढ़₹101.51₹89.47पटना₹113.37₹99.36हैदराबाद₹115.69₹103.82जयपुर₹112.66₹97.78बेंगलुरु₹110.93₹98.80भोपाल₹114.57₹99.64रांची₹105.26₹100.49(नोट: राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले स्थानीय वैट (VAT) और माल भाड़े की वजह से हर शहर में पेट्रोल-डीजल के दामों में थोड़ा अंतर होता है।)क्यों तय होती हैं अलग-अलग राज्यों में अलग कीमतें?ईंधन का खुदरा मूल्य मुख्यतः 5 कारकों पर निर्भर करता है:अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत: वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल का रेट।डॉलर-रुपया विनिमय दर: आयात के लिए डॉलर के मुकाबले रुपये का मूल्य।सरकारी टैक्स: केंद्र सरकार द्वारा लगाई जाने वाली एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों का वैट (VAT)।रिफाइनिंग और ट्रांसपोर्टेशन खर्च: कच्चे तेल को प्रोसेस करने और पंपों तक पहुंचाने की लागत।डीलर कमीशन: पेट्रोल पंप संचालकों का तय मार्जिन।SMS के जरिए ऐसे जानें अपने शहर का ताजा भावआप घर बैठे केवल एक SMS भेजकर अपने शहर में पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट जान सकते हैं:Indian Oil (IOCL): अपने फोन से RSP शहर का कोड लिखकर 9224992249 पर भेजें।BPCL: RSP शहर का कोड लिखकर 9223112222 पर भेजें।HPCL: HPPRICE शहर का कोड लिखकर 9222201122 पर भेजें।
बॉलीवुड के 'दबंग' स्टार सलमान खान (Salman Khan) इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और देश के ज्वलंत मुद्दों पर अपनी बात रख रहे हैं। हाल ही में उन्होंने नीट (NEET) पेपर लीक विवाद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर एक पोस्ट शेयर किया था, जिसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पर काफी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा।अब सलमान खान ने देर रात (तड़के सुबह 3 बजे) इंस्टाग्राम पर एक क्रिप्टिक पोस्ट शेयर कर अपने आलोचकों और ट्रोलर्स को करारा जवाब दिया है।सुबह 3 बजे शेयर की शर्टलेस फोटो और क्रिप्टिक कैप्शनसलमान खान ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी दो तस्वीरें पोस्ट की हैं, जिसमें वे अपने मस्कुलर एब्स और टोन्ड फिजीक दिखाते नजर आ रहे हैं। इस शर्टलेस फोटो के साथ उन्होंने जो कैप्शन लिखा है, उसने हर किसी का ध्यान खींच लिया है।सलमान खान ने लिखा:सलमान खान डर गया... हम्म्म! जो डर गया वो समझो मर गया।यह क्रिप्टिक कैप्शन तेजी से इंटरनेट पर वायरल हो रहा है और फैंस इसे ट्रोलर्स के लिए सलमान का 'डायरेक्ट अटैक' मान रहे हैं।क्यों ट्रोल हुए थे सलमान खान?दरअसल, सलमान खान ने गुरुवार को नीट पेपर लीक मामले और जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर एक लंबा-चौड़ा नोट शेयर किया था।पीएम मोदी के ट्वीट का हवाला: सलमान ने लिखा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है, इसलिए अब छात्रों और उनके माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है।सोनम वांगचुक से अपील: उन्होंने लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की गुजारिश करते हुए लिखा था: सोनम भाई, अब सब हो गया, इसे आगे मत बढ़ाइए। अगर भविष्य में जरूरत पड़ी तो फिर लड़ाई लड़ेंगे। अब कुछ खा लीजिए, चाहें तो मैं अपने घर से खाना भिजवा दूंगा।सलमान की इस पोस्ट पर कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने उन्हें आड़े हाथों लिया और आरोप लगाया कि वे गंभीर मुद्दे को हल्का बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी ट्रोलिंग के जवाब में सलमान ने अपना नया पोस्ट शेयर किया है।सलमान खान की अपकमिंग फिल्मेंकाम के मोर्चे की बात करें तो सलमान खान आखिरी बार पैन-इंडिया फिल्म 'सिकंदर' (Sikandar) में नजर आए थे, जिसमें उनके साथ रश्मिका मंदाना मुख्य भूमिका में थीं।अब सलमान अपनी अगली बहुप्रतीक्षित फिल्म 'मातृभूमि' (Matrubhoomi) की तैयारियों में जुटे हैं, जो 2020 के ऐतिहासिक 'बैटल ऑफ गलवान' (Galwan Valley Clash) पर आधारित एक देशभक्ति एक्शन ड्रामा फिल्म है।
तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय (Thalapathy Vijay) की बहुप्रतीक्षित और सिनेमाई करियर की आखिरी फिल्म 'जना नायकन' (Jana Nayagan) आखिरकार भारी विवादों और सर्टिफिकेशन की अड़चनों के बाद सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। बॉक्स ऑफिस पर इसका मुकाबला 'द ओडिसी', 'धमाल 4' और 'इविल डेड बर्न' जैसी बड़ी फिल्मों से देखने को मिल रहा है।जहां पहले दिन फिल्म ने ₹41.6 करोड़ का धमाकेदार ओपनिंग कलेक्शन किया था, वहीं दूसरे दिन (शुक्रवार) इसकी कमाई में लगभग 50% की गिरावट दर्ज की गई है। ट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क (Sacnilk) के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, फिल्म ने रिलीज के दूसरे दिन भारत में लगभग ₹21.15 करोड़ का नेट कलेक्शन किया है।2 दिनों में 50 करोड़ पार, 100 करोड़ क्लब पर नजरदूसरे दिन की कमाई को मिलाकर 'जना नायकन' ने महज 2 दिनों के भीतर भारत में ₹63.85 करोड़ नेट का आंकड़ा पार कर लिया है।पहला दिन (Day 1): ₹42.70 करोड़दूसरा दिन (Day 2): ₹21.15 करोड़कुल भारत कलेक्शन (Net): ₹63.85 करोड़वर्ल्डवाइड ग्रॉस (Worldwide Gross): ओवरसीज मार्केट के शानदार रिस्पॉन्स के बदौलत फिल्म का दुनियाभर में कुल ग्रॉस कलेक्शन ₹112.50 करोड़ पहुंच गया है।₹300-350 करोड़ का बजट और वीकेंड से उम्मीदेंमीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'जना नायकन' का अनुमानित बजट ₹300 से ₹350 करोड़ के आसपास है। शुक्रवार को वर्किंग डे होने की वजह से कलेक्शन में कमी देखी गई, लेकिन ट्रेड एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि शनिवार और रविवार के वीकेंड पर इसकी कमाई में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। अगर वीकेंड पर रफ्तार बनी रही तो यह फिल्म जल्द ही 200 करोड़ क्लब की ओर कदम बढ़ा सकती है।थलपति विजय की आखिरी फिल्म'जना नायकन' थलपति विजय की फिल्मी करियर की आखिरी फिल्म है, क्योंकि वे अब पूरी तरह से राजनीति में कदम रख चुके हैं।निर्देशक व निर्माता: फिल्म का निर्देशन एच. विनोद (H. Vinoth) ने किया है और इसे केवीएन प्रोडक्शंस (KVN Productions) के बैनर तले वेंकट के. नारायणन ने प्रोड्यूस किया है।स्टारकास्ट: फिल्म में विजय के साथ पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, प्रकाश राज, प्रियमाणी और ममिता बैजू जैसे सितारे मुख्य भूमिकाओं में हैं।क्या है फिल्म की कहानी?फिल्म की कहानी एक पूर्व पुलिस अधिकारी (थलपति विजय) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने दिवंगत दोस्त की बेटी का लालन-पालन करता है और उसे भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करता है। इस दौरान उनके जीवन में कई उतार-चढ़ाव आते हैं। इसके साथ ही फिल्म में समाज में फैली भ्रष्टाचार और राजनीतिक अव्यवस्था जैसी गंभीर समस्याओं पर भी कड़ा प्रहार किया गया है।
आमतौर पर जब भी देश में रिकॉर्ड तोड़ और मूसलाधार बारिश का जिक्र होता है, तो मेघालय के चेरापूंजी और मौसिनराम का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। लेकिन इस बार दक्षिण गुजरात के वलसाड (Valsad) जिले ने बारिश के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।वलसाड में महज कुछ ही घंटों के भीतर 46 इंच (लगभग 1,200 मिलीमीटर) रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई, जिसने पूरे क्षेत्र को जलमग्न कर दिया। इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व जलप्रलय के कारण अब वलसाड को देश का नया 'चेरापूंजी' कहा जा रहा है।भारत के इतिहास की तीसरी सबसे भीषण बारिशवलसाड से भाजपा सांसद धवल लक्ष्मणभाई पटेल के अनुसार, दक्षिण गुजरात और विशेषकर वलसाड में हुई यह बारिश कोई सामान्य मानसूनी गतिविधि नहीं है। यह भारत के आधुनिक इतिहास की तीसरी सबसे भीषण बारिश मानी जा रही है।अचानक हुई 46 इंच बारिश के कारण वलसाड का संपर्क आसपास के जिलों से पूरी तरह कट गया है। नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, बस्तियां, सड़कें, सरकारी इमारतें और कृषि योग्य भूमि कई-कई फीट पानी में डूबी हुई हैं।12,000 से अधिक लोगों का रेस्क्यू और राहत कार्यबाढ़ की भयावह स्थिति को देखते हुए राज्य प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) ने युद्ध स्तर पर बचाव अभियान चलाया:सुरक्षित रेस्क्यू: बाढ़ के पानी में फंसे 12,000 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया गया।राशन व मेडिकल किट: दूर-दराज के जलमग्न गांवों में फंसे परिवारों तक बोट्स और हेलीकॉप्टरों के माध्यम से सूखा राशन और इमरजेंसी फूड किट्स पहुंचाए जा रहे हैं।गृह मंत्री का दौरा: गुजरात के गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने स्वयं प्रभावित इलाकों का दौरा कर जमीनी स्तर पर राहत कार्यों का जायजा लिया।मुआवजा व सर्वे: सरकार द्वारा बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे कराया जा रहा है, जिसके बाद प्रभावित परिवारों को सीधे बैंक खातों में वित्तीय सहायता दी जाएगी।वलसाड में क्यों हुई इतनी भयानक और रिकॉर्ड तोड़ बारिश?मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वलसाड में हुई इस ऐतिहासिक बारिश के पीछे कई मौसमी और भौगोलिक कारण एक साथ सक्रिय थे:अरब सागर का मजबूत वेदर सिस्टम: अरब सागर के ऊपर बना एक बेहद कम दबाव का क्षेत्र (Low-Pressure Area) दक्षिण गुजरात के तटीय क्षेत्र के ऊपर आकर स्थिर (Stationary) हो गया।मानसून ट्रफ और पश्चिमी विक्षोभ का मिलना: मानसून ट्रफ रेखा और पश्चिमी विक्षोभ के एक साथ सक्रिय होने से वलसाड के आसमान पर अत्यधिक नमी वाले घने बादलों का जमावड़ा हो गया।भौगोलिक स्थिति (ओरोग्राफिक इफ़ेक्ट): वलसाड पश्चिमी घाट की पहाड़ियों के करीब स्थित एक तटीय जिला है। जब अरब सागर से उठी मानसूनी हवाएं इन पहाड़ियों से टकराईं, तो बादलों को आगे बढ़ने का रास्ता नहीं मिला और वे एक ही जगह रुककर बरसते रहे।ग्लोबल वार्मिंग का असर: समुद्र के तापमान में वृद्धि के कारण बादलों की नमी सोखने और धारण करने की क्षमता कई गुना बढ़ गई, जिसके कारण कम समय में इतना बड़ा बादल फटने जैसी बारिश हुई।
Top News : 26 दिन के अनशन समाप्त होने के बाद ईमानदारी पर उठ रहे सवालों पर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भड़क गए। जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए 18 मेट्रो स्टेशन बंद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों और युवाओं ...
आज 25 जुलाई 2026, शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र है। आज से भगवान श्री हरि विष्णु 4 महीनों के लिए योगनिद्रा में प्रवेश कर रहे हैं, जिसे हरिशयनी या देवशयनी एकादशी कहा जाता है। यह समय मन की शुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ाने का माना जाता है।ग्रहों और नक्षत्रों की चाल के अनुसार, आज का दिन कई राशियों के लिए नए अवसर, आर्थिक लाभ और सफलता लेकर आ रहा है। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. अजय भांबी के अनुसार आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों का आज का राशिफल, शुभ रंग, भाग्यशाली अंक और अचूक उपाय:1. मेष राशि (Aries)आज का दिन: किसी शुभचिंतक की प्रेरणा से लक्ष्य हासिल होगा। संतान पक्ष से खुशखबरी मिल सकती है। बीमा व कमीशन से जुड़े लोग टारगेट पूरा करेंगे। अत्यधिक काम से थकान महसूस हो सकती है।उपाय: शिवालय जाकर सुगंधित जल से भगवान शिव का अभिषेक करें।भाग्यशाली रंग: बादामी | भाग्यशाली अंक: 72. वृष राशि (Taurus)आज का दिन: संपत्ति से जुड़ा रुका हुआ काम हल होगा। कार्यक्षेत्र में किए गए बदलावों के निकट भविष्य में शुभ परिणाम मिलेंगे। पुराने मित्र से मुलाकात होगी। पेट का थोड़ा ध्यान रखें।उपाय: लक्ष्मी-नारायण भगवान के स्वरूप के दर्शन करें और मंत्र जाप करें।भाग्यशाली रंग: पीला | भाग्यशाली अंक: 53. मिथुन राशि (Gemini)आज का दिन: भाइयों के साथ चल रही गलतफहमियां दूर होंगी। व्यापारिक व्यवस्था में सुधार के प्रयास सफल होंगे। प्रेम संबंधों में एक-दूसरे का सम्मान करें। एसिडिटी से बचें।उपाय: प्रातः काल प्रकृति के सानिध्य में कुछ समय व्यतीत करें।भाग्यशाली रंग: हरा | भाग्यशाली अंक: 44. कर्क राशि (Cancer)आज का दिन: घर के रखरखाव पर चर्चा होगी। अपनी योग्यता के बल पर बाजार में नई उपलब्धियां मिलेंगी। दोस्तों के साथ गेट-टुगेदर का प्लान बनेगा। दांतों में दर्द की समस्या हो सकती है।उपाय: जरूरतमंद लोगों को फल या दूध का दान करें।भाग्यशाली रंग: बादामी | भाग्यशाली अंक: 15. सिंह राशि (Leo)आज का दिन: बच्चों की उपलब्धियों से मन प्रसन्न रहेगा। नौकरीपेशा लोगों के लिए पदोन्नति के योग हैं। आय अच्छी रहेगी, हालांकि खर्च भी बढ़ेंगे। गैस या पेट दर्द से सावधान रहें।उपाय: शिव-पार्वती के स्वरूप के दर्शन कर पूजा-अर्चना करें।भाग्यशाली रंग: लाल | भाग्यशाली अंक: 66. कन्या राशि ( कन्या - Virgo)आज का दिन: सपनों और महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का दिन है। व्यक्तिगत जीवन में किसी का हस्तक्षेप न होने दें। फाइनेंस और कंसल्टेंसी के काम में बड़ी सफलता मिलेगी।उपाय: मंदिर जाकर देव दर्शन करें और बुजुर्गों या ब्राह्मणों का आशीर्वाद लें।भाग्यशाली रंग: गुलाबी | भाग्यशाली अंक: 37. तुला राशि (Libra)आज का दिन: अनुभवी लोगों के सानिध्य में सीखने को मिलेगा। नया काम शुरू करने के लिए उचित समय है। दाम्पत्य जीवन में मधुरता बढ़ेगी। पैसों को लेकर किसी रिश्तेदार से विवाद से बचें।उपाय: भगवान गणेश का ध्यान करें और मोदक/लड्डू का भोग लगाएं।भाग्यशाली रंग: लाल | भाग्यशाली अंक: 58. वृश्चिक राशि (Scorpio)आज का दिन: चुनौतियों का डटकर सामना करेंगे। व्यापार में कर्मचारियों से जुड़ा मुद्दा सुलझ जाएगा। प्रेम संबंध विवाह में बदलने के योग हैं। शारीरिक थकान व बदन दर्द हो सकता है।उपाय: जल को व्यर्थ बहाने से बचाएं और संरक्षण करें।भाग्यशाली रंग: केसरिया | भाग्यशाली अंक: 39. धनु राशि (Sagittarius)आज का दिन: अपनी पसंद के कामों के लिए समय निकालें, मानसिक शांति मिलेगी। फाइनेंस से जुड़े फैसलों में खुद पर भरोसा रखें। प्रेम संबंधों में पुरानी गलतफहमियां दूर होंगी।उपाय: श्री सूक्त या पुरुष सूक्त का पाठ करें अथवा श्रवण करें।भाग्यशाली रंग: आसमानी | भाग्यशाली अंक: 210. मकर राशि (Capricorn)आज का दिन: रुके हुए व्यक्तिगत मामले हल होंगे। विरोधी सक्रिय हो सकते हैं, इसलिए अपनी योजनाएं गुप्त रखें। व्यावसायिक गतिविधियों में लापरवाही न बरतें। घर का माहौल खुशनुमा रहेगा।उपाय: एकांत में प्रकृति के करीब कुछ समय बिताएं।भाग्यशाली रंग: हरा | भाग्यशाली अंक: 811. कुंभ राशि (Aquarius)आज का दिन: अस्त-व्यस्त दिनचर्या में सुधार आएगा। व्यापार के विस्तार को लेकर अहम चर्चा होगी। व्यर्थ के प्रेम संबंधों में समय व पैसा बर्बाद न करें। सेहत का ध्यान रखें।उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें।भाग्यशाली रंग: ऑरेंज | भाग्यशाली अंक: 712. मीन राशि (Pisces)आज का दिन: भविष्य की योजनाओं में निवेश से अच्छा मुनाफा होगा। दूसरों के गुस्से के सामने शांत रहें। घर में मेहमानों के आने से उत्सव जैसा माहौल रहेगा। जोड़ों के दर्द से बचें।उपाय: अपनी बहन या बेटियों का सत्कार करें और उन्हें उपहार दें।भाग्यशाली रंग: नीला | भाग्यशाली अंक: 9
अनशन समाप्त होने के बाद ईमानारी पर उठ रहे सवालों पर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भड़क गए। उन्होंने सवाल किया कि छात्रों के लिए 26 दिन तक भूखा रहने के बाद, 11 किलो वजन कम हो गया, मसल्स चले गए और मेरे ऑर्गन्स और ब्रेन डैमेज हो गए। क्या उन्हें किसी से ...
सरकार के साथ CJP की बैठक आज, संसद मार्च पर हो सकता बड़ा ऐलान
आज यानि शनिवार को जंतर-मंतर पर सुरक्षा के इंतजाम और सख्त कर दिए गए हैं। आज केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह की कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के साथ तीसरे दौर की बैठक तय है
महाराष्ट्र: दिल्ली में छात्र विरोध प्रदर्शन स्थल पहुंचे रोहित पवार, सरकार पर साधा निशाना
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध प्रदर्शन स्थल का दौरा कर एकजुटता व्यक्त की
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन से युवक घायल, दोषी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई हो: अलका लांबा
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान एक युवक पेलेट गन से घायल हो गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को युवक को मीडिया के सामने लाकर यह दावा किया
बांकीपुर में भाजपा को रोकने के लिए तेज प्रताप यादव ने किया प्रशांत किशोर का समर्थन
बिहार में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम में जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर को अपनी पार्टी का समर्थन देने की घोषणा की है
सोनम वांगचुक का टूटा दिल, बोले- अनशन पर सवाल उठाने वालों पर धिक्कार
नीट पेपर लीक विरोध और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 26 दिनों तक अनशन पर बैठे रहे सोनम वांगचुक का दिल टूट गया है
सोनम वांगचुक के अनशन खत्म होने पर कांग्रेस का तंज, 'छात्रों की मांग अब भी बरकरार'
कांग्रेस नेता कुलदीप राठौर ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल समाप्त करने के घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा।

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