नितिन नवीन की तिरंगा फहराते हुए फोटो से छेड़छाड़, कांग्रेसी नेता पर एफआईआर
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर फहराए गए तिरंगे के चित्र से छेड़छाड़ करने का आरोप लगा है। इस मामले में कांग्रेस नेता अरुण साहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। साहू बेमेतरा जिला कांग्रेस आइटी सेल के अध्यक्ष हैं।
जयपुर में सीआरपीएफ कैंपस के पास खेत में मिला जिंदा मोर्टार बम, किया डिस्पोज
जयपुर के आमेर क्षेत्र में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) कैंपस के निकट जिंदा बम मिलने से हड़कंप मच गया। सूचना पर पुलिस और नागरिक सुरक्षा की टीम मौके पर पहुंची। बम निरोधक दस्ते को मौके पर बुलाया गया।
‘12वीं की पढ़ाई में बाधा से नुकसान’, पॉक्सो केस में 17 साल के आरोपी को जमानत
मुंबई की पॉक्सो अदालत ने 17 साल के एक लड़के को अग्रिम जमानत दे दी है, जिस पर कॉलेज की सहपाठी का पीछा करने और उसे परेशान करने का आरोप है. जज आर.जे. पवार ने कहा कि बोर्ड परीक्षा के समय लड़के की पढ़ाई रोकना और उसे परिवार से अलग करना ठीक नहीं होगा. पुलिस के मुताबिक लड़की के पिता के मना करने से नाराज लड़के ने उन्हें धमकाया था.
Pakistan: इमरान खान की आंखों में कितना सुधार हुआ? जेल प्रशासन ने सेहत पर सुप्रीम कोर्ट में दी पूरी जानकारी
JSSC-CGL Exam Cancelled: JSSC-CGL पास करने के बाद नौकरी गंवाने वालों का प्रदर्शन
JSSC-CGL Exam Cancelled: JSSC-CGL पास करने के बाद नौकरी गंवाने वालों का प्रदर्शन
सावरकर के पोते का दावा, गोडसे के गोली मारने के बाद महात्मा गांधी को नहीं ले गए अस्पताल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि के मामले में अदालत में पेश होते हुए विनायक दामोदर (वीडी) सावरकार के पोते ने बड़ा दावा किया है। इसमें उन्होंने कहाकि नाथूराम गोडसे द्वारा गोली मारे जाने के बाद महात्मा गांधी 20 मिनट तक उसी जगह पर पड़े रहे।
बिहार प्रशासनिक महकमे में बड़ा फेरबदल, पांच जिलों में नए डीएम तैनात
बिहार सामान्य प्रशासन विभाग ने एक दर्जन से अधिक IAS अधिकारियों का तबादला किया. एच.आर. श्रीनिवास, पंकज कुमार, विनय कुमार, राजेश कुमार, मयंक वरवड़े, संजय कुमार सिंह, विनोद सिंह गुजियाल, बी. कार्तिकेय धनजी और राजीव रौशन सहित कई सचिव स्तर के अधिकारियों के विभाग बदले गए. पटना कमिश्नर का पद भी बदला.
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आपकी लड़ाई प्रेरित करेगी, कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके ने झारखंड के छात्रों को दी बधाई
झारखंड सरकार ने वहां पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगें मान ली हैं। इस पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इन छात्रों को बधाई दी है। उन्होंने इसको लेकर एक्स पर पोस्ट लिखी है।
सड़क पार करते युवक को रोडवेज बस ने कुचला, VIDEO देख उड़ जाएंगे होश
झांसी के खजुराहो हाईवे पर सड़क पार कर रहे 25 वर्षीय युवक सज्जन को रोडवेज बस ने कुचल दिया. यह पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हो गई और वीडियो वायरल हो रहा है. वीडियो में दिख रहा है कि युवक काफी देर तक सड़क पार करने की कोशिश कर रहा था, तभी अचानक बस की चपेट में आ गया.
मध्यप्रदेश ने उद्योग और निवेश के क्षेत्र में बनाई मजबूत पहचान: CM डॉ. मोहन यादव
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने NICDIT एपेक्स अथॉरिटी की बैठक में औद्योगिक विकास, निवेशकों की तैयारी, पीएम मित्र पार्क और GIS-सम
ODOP और GI Tag ने बदली किस्मत, गोरखपुर का टेराकोटा पहुंचा देश-विदेश
उत्तर प्रदेश सरकार की एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना से गोरखपुर के टेराकोटा को नई पहचान मिली. GI Tag, टूलकिट, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव ने कारीगरों के कारोबार को बढ़ाने में मदद की.
छात्रों की मांगें मानने कैसे राजी हुई झारखंड सरकार? देखें 10 तक
रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की बड़ी जीत हुई है. सोमवार को प्रोटेस्ट के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने का ऐलान किया. इसके अलावा, 2014 से हुई सभी छोटी-बड़ी गड़बड़ियों की भी व्यापक जांच की जाएगी. इससे पहले छात्रों ने 20 अगस्त को सीएम हाउस के घेराव की चेतावनी दी थी. देखें 10 तक.
20 साल से छप्पर में रह रही थी विधवा, अब पूरा हुआ पक्के घर का सपना
UP government housing scheme: अमेठी की देवमती के लिए अब सरकारी आवास योजना के तहत पक्का मकान बनकर तैयार हो गया है. पक्की छत और मजबूत दीवारों वाला घर मिलने के बाद देवमती के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही है.
ट्रंप ने किम के लिए दक्षिण कोरिया को धमकाया तो चीन की क्या रही प्रतिक्रिया
ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के साथ अपने अच्छे रिश्तों का हवाला दिया है. यह किम के साथ फिर से जुड़ने की उनकी एक कोशिश हो सकती है, क्योंकि किम अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास को हमले की तैयारी के तौर पर देखते हैं.
मिलावटखोरों पर राजस्थान सरकार का बड़ा एक्शन, 26 दुकानों के लाइसेंस सस्पेंड
राजस्थान सरकार ने मिलावटखोरों के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए 18 पैक्ड खाद्य प्रोडक्ट्स पर दो महीने का बैन लगा दिया है. इसके साथ ही, 26 खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए हैं. खाद्य सुरक्षा विभाग ने जुलाई-अगस्त 2026 में लिए गए नमूनों की जांच के बाद यहे कार्रवाई की है.
हाथ में तिरंगा, पैरों के नीचे कीचड़... भोपाल के सरकारी स्कूल की बदहाली
तस्वीरों में बच्चों की देशभक्ति साफ नजर आती है. एक तरफ हाथों में तिरंगा और राष्ट्रगान का उत्साह था, तो दूसरी तरफ स्कूल तक पहुंचने के लिए कीचड़ भरा रास्ता और जर्जर भवन की तस्वीरें सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही थीं.
डबल इंजन सरकार ने किया कोटेदारों का लाभांश बढ़कर ₹35 प्रति कुंतल स्वीकृत, केशव प्रसाद मौर्य
केशव प्रसाद मौर्य ने आज लोक भवन, लखनऊ में उत्तर प्रदेश के उचित दर विक्रेताओं को राज्य सरकार के बजट से अतिरिक्त लाभांश वितरण घोषणा कार्यक्रम में सहभागिता की। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उचित दर दुकानों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने के लिए अन्नपूर्णा भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। प्रदेश में 8,300 अन्नपूर्णा भवन पूर्ण हो चुके हैं तथा 1,500 भवन निर्माणाधीन हैं। सरकार की मंशा है कि उचित दर दुकानें केवल खाद्यान्न वितरण का केंद्र न रहें, बल्कि स्थानीय स्तर पर नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।कोटेदारों के हित में महत्वपूर्ण निर्णयश्री मौर्य जी ने कहा कि सरकार गरीबों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के साथ उचित दर विक्रेताओं के हितों का भी पूरा ध्यान रख रही है। कोटेदार सार्वजनिक वितरण प्रणाली की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनके माध्यम से ही खाद्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है। उचित दर विक्रेताओं को 39 मानक वस्तुओं की बिक्री की अनुमति दी गई है। इससे उनकी अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ेंगे। इसके साथ ही कोटेदारों का लाभांश बढ़ाकर ₹35 प्रति कुंतल स्वीकृत किया गया है। लाभांश में 25 प्रतिशत अतिरिक्त बढ़ोतरी के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। सरकार उचित दर विक्रेताओं की जायज समस्याओं और मांगों के प्रति संवेदनशील है। कोटेदार आर्थिक रूप से मजबूत होंगे तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित होगी।एफसीआई गोदाम से सीधे कोटेदारों तक खाद्यान्नउप मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्यान्न आपूर्ति व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। एफसीआई गोदाम से सीधे उचित दर विक्रेताओं तक खाद्यान्न पहुंचाया जा रहा है तथा इसका परिवहन निःशुल्क किया जा रहा है। इससे कोटेदारों पर अतिरिक्त परिवहन व्यय का भार कम हुआ है और खाद्यान्न आपूर्ति व्यवस्था अधिक सुचारु हुई है। सरकार का लक्ष्य है कि खाद्यान्न वितरण की पूरी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाए। गरीब परिवारों को उनके अधिकार का खाद्यान्न समय से मिले और उचित दर विक्रेताओं को भी किसी प्रकार की अनावश्यक कठिनाई न हो।गरीब कल्याण और कोटेदारों के हित साथ-साथश्री मौर्य जी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में गरीब कल्याण को विकास की मुख्यधारा का केंद्र बनाया गया है। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार केंद्र की जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतार रही है। गरीबों के खाद्य अधिकार की गारंटी और उचित दर विक्रेताओं के हितों का संरक्षण साथ-साथ चल रहा है। सरकार का संकल्प है कि प्रदेश का कोई भी पात्र परिवार खाद्यान्न से वंचित न रहे। तकनीक, पारदर्शिता और संवेदनशील प्रशासन के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा।इस अवसर पर मा. मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी, उप मुख्यमंत्री श्री बृजेश पाठक जी, मा. मंत्री खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति श्री मनोज कुमार पाण्डेय जी, मा. राज्यमंत्री श्री सतीश चन्द्र शर्मा जी, महापौर लखनऊ श्रीमती सुषमा खर्कवाल जी, मा. सांसद श्री बृजलाल जी, मा. विधायक श्री मुकेश शर्मा जी, मा. विधायक श्री ओ.पी. श्रीवास्तव जी, मा. विधायक श्री नीरज बोरा जी, मा. विधायक श्री योगेश शुक्ला जी, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद श्री अशोक कुमार मेहरौत्रा जी, ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर एसोसिएशन के श्री राजेश तिवारी जी, श्री कमलेश कुमार मिश्र जी, आदर्श कोटेदार एवं उपभोक्ता वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधिगण सहित प्रदेश के उचित दर विक्रेता उपस्थित रहे तथा बड़ी संख्या में कोटेदार जूम के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।
अयोध्या के 100 साल पुराने राजकीय पुस्तकालय की बदलेगी सूरत, 3.23 करोड़ से बनेगी अत्याधुनिक लाइब्रेरी
अयोध्या मे 100 वर्ष पुराने राजकीय पुस्तकालय की अब होगा अत्याधुनिक लाइब्रेरी जिसे योगी सरकार 3.23 करोड़ रुपए की लागत से निर्माण कराने जा रही है जिसका रविवार को अयोध्या के विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भूमिपूजन किया। उत्तरप्रदेश ...
Analysis: नितिन नवीन की नई टीम 2027 के यूपी चुनाव के लिए कितनी मुफीद
बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में अपनी चुनावी मशीनरी को बिल्कुल नए सिरे से तैयार किया है, क्योंकि वह 2024 जैसे नतीजों को दोबारा नहीं दोहरा सकती.
यूक्रेन युद्ध का विरोध करने की सजा... रूसी नेता को 11 साल की जेल
मॉस्को की अदालत ने विपक्षी नेता लेव श्लोसबर्ग को यूक्रेन युद्ध का विरोध करने के आरोप में 11 साल और एक महीने की जेल की सजा सुनाई है.
SBI के अंदर भोजपुरी गाने पर डांस का वीडियो, बैंक मैनेजर ने दी सफाई
Bhojpuri Song Dance Inside SBI: सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि वीडियो में दिखाई दे रही महिलाओं में एक बैंक मैनेजर भी शामिल हैं और वीडियो बैंक के चैंबर का है. हालांकि, वीडियो कब और किस परिस्थिति में बनाया गया, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
कल से बुध अस्त, 1 महीना इन 4 राशियों को होगा भरपूर धन लाभ
Budh Asta 2026: ग्रहों के राजकुमार बुध 18 अगस्त से अस्त होने वाले हैं. बुध 18 सितंबर तक अस्त अवस्था में ही रहेंगे. ज्योतिषविदों का कहना है कि अस्त होते ही बुध चार राशियों को जबरदस्त लाभ दे सकते हैं.
इमरान खान की आंखों की रोशनी अब नॉर्मल, जेल प्रशासन ने कोर्ट में दी जानकारी
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की आंखों की रोशनी में सुधार हुआ है. रावलपिंडी की अदियाला जेल के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उनकी आंखों की स्थिति लगभग सामान्य हो गई है. अगस्त 2023 से जेल में बंद इमरान खान का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में हो रहा था, जिसके बाद उनकी आंखें अब बेहतर हो गई हैं.
रांचीः जेएसएससी-सीजीएल रद्द करने की घोषणा के साथ जयपाल सिंह स्टेडियम में झूमे अभ्यर्थी
झारखंड में 24 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन को सोमवार शाम को उस समय बड़ी सफलता मिली, जब राज्य सरकार ने आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग मानते हुए जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने का फैसला किया
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आज लखनऊ स्थित सरकारी आवास 7 कालिदास पर जनता दर्शन का आयोजन कर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए लोगों की समस्याओं एवं शिकायतों को गंभीरतापूर्वक सुना। श्री विजय पाल वर्मा, बस्ती ने पशुवाड़ा निर्माण के लिए सरकारी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति और पशुओं के बेहतर रखरखाव के लिए पशुवाड़ा निर्माण की आवश्यकता से उप मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया। श्री मौर्य जी ने उनकी समस्या को गंभीरता से सुना और संबंधित विभागीय अधिकारियों को प्रकरण की पात्रता एवं नियमानुसार जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र पशुपालकों और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचना चाहिए।विधवा पेंशन एवं राशन कार्ड से संबंधित समस्याओं की सुनवाईजनता दर्शन में श्रीमती प्रभा टंडन, लखनऊ निवासी ने महिला विधवा पेंशन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। उन्होंने अपनी समस्या से उप मुख्यमंत्री जी को अवगत कराते हुए पेंशन योजना का लाभ दिलाए जाने की मांग की। इसी प्रकार श्रीमती गायत्री, उन्नाव निवासी ने राशन कार्ड में अपना नाम जोड़े जाने का अनुरोध किया। उप मुख्यमंत्री जी ने दोनों महिलाओं की समस्याओं को गंभीरतापूर्वक सुना और संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार परीक्षण करते हुए पात्रता के आधार पर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। श्री मौर्य जी ने कहा कि विधवा पेंशन, राशन कार्ड और अन्य जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंद परिवारों के लिए सरकार की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ दिलाने में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने का अनुरोधश्रीमती वंदना एवं श्रीमती कमला कुमारी, उन्नाव निवासी ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास उपलब्ध कराए जाने का अनुरोध उप मुख्यमंत्री जी से किया। उन्होंने अपने आवास संबंधी समस्या से अवगत कराते हुए सरकारी योजना का लाभ दिलाने की मांग की। उप मुख्यमंत्री जी ने दोनों प्रार्थना-पत्रों को संबंधित अधिकारियों को भेजते हुए नियमानुसार जांच एवं आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है। पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहें, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए।पुत्री के विवाह के लिए सरकारी सहायता का अनुरोधश्री अमरनाथ, लखनऊ निवासी ने अपनी पुत्री के विवाह के लिए सरकारी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। उन्होंने अपनी समस्या और पारिवारिक परिस्थितियों से उप मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया। श्री मौर्य जी ने उनकी बात संवेदनशीलता के साथ सुनी और संबंधित अधिकारियों को पात्रता के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है तथा पात्र लोगों को संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।अधिकारियों से दूरभाष पर वार्ता कर दिए निर्देशजनता दर्शन में प्राप्त प्रकरणों पर त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित कराने के लिए उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी ने मंडलायुक्त झांसी, जिलाधिकारी अंबेडकर नगर, जिलाधिकारी कानपुर देहात, जिलाधिकारी भदोही, जिलाधिकारी हमीरपुर एवं जिलाधिकारी शाहजहांपुर से दूरभाष पर वार्ता की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जनता की समस्याओं पर तत्काल संज्ञान लेते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री जी ने अधिकारियों से कहा कि जनता की समस्याओं को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रखा जाए, बल्कि प्रत्येक प्रकरण का समाधान सुनिश्चित किया जाए। जो मामले शासन स्तर पर निर्णय की आवश्यकता रखते हैं, उनमें समय से पत्रावली प्रस्तुत की जाए तथा जिन मामलों का समाधान जिला या मंडल स्तर पर संभव है, उनका निस्तारण वहीं सुनिश्चित किया जाए।उन्होंने कहा कि जनता दर्शन केवल शिकायत सुनने का माध्यम नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। प्रदेश सरकार आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। अधिकारी जनता के प्रति उत्तरदायी रहें और प्रत्येक पात्र व्यक्ति को शासन की योजनाओं तथा सुविधाओं का लाभ दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। श्री मौर्य जी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनता से जुड़े प्रकरणों में अनावश्यक देरी, लापरवाही अथवा उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी। समस्याओं का समाधान समयबद्ध, पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण एवं नियमानुसार किया जाए, ताकि प्रदेशवासियों को शासन की संवेदनशीलता का प्रत्यक्ष अनुभव हो सके।डबल इंजन सरकार सुशासन, जनसेवा और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। सरकार की प्राथमिकता है कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचे और प्रत्येक जरूरतमंद नागरिक को न्याय एवं राहत उपलब्ध हो।
‘बंटवारा 1947’ देख भावुक हुईं हेमा मालिनी, बोलीं- इंसानियत चुनने की जरूरत
हेमा मालिनी ने ‘बंटवारा 1947’ को बताया शानदार फिल्म. सनी देओल और शबाना आजमी की एक्टिंग की तारीफ करते हुए कहा कि आज देश को नफरत नहीं, इंसानियत और भाईचारे की जरूरत है.
चुनावों में काले धन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एक साल में जांच पूरी करने के दिए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में काले धन के इस्तेमाल को लोकतंत्र और कानून के शासन के लिए गंभीर खतरा बताया है।
आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी, जंक फूड का बढ़ता चलन, शारीरिक निष्क्रियता, पानी की कमी और अत्यधिक तनाव ने आज हर तीसरे व्यक्ति को पाचन से जुड़ी गंभीर समस्याओं में धकेल दिया है। इसमें सबसे कष्टदायक समस्या है कब्ज (Constipation)। सुबह उठते ही घंटों शौचालय में समय बिताना, पेट में भारीपन, गैस, सिरदर्द और अधूरा पेट साफ होने का अहसास पूरे दिन की ऊर्जा और कार्यक्षमता को नष्ट कर देता है। अधिकांश लोग इस समस्या से तात्कालिक राहत पाने के लिए मेडिकल स्टोर से मिलने वाले रेचक चूर्ण (Laxative Powders) या एलोपैथिक गोलियों का सहारा लेने लगते हैं।गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और आयुर्वेद विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि लंबे समय तक सिंथेटिक लैक्सेटिव का सेवन करने से आंतों की प्राकृतिक संकुचन क्षमता (Peristalsis) कमजोर पड़ जाती है और शरीर इन दवाइयों का आदी बन जाता है। प्रकृति ने हमें ऐसे कई पोषक और रसीले फल दिए हैं जिनमें प्रचुर मात्रा में घुलनशील व अघुलनशील फाइबर, पाचक एंजाइम्स, पानी और प्राकृतिक लैक्सेटिव यौगिक पाए जाते हैं। यदि इन 4 फलों को सही तरीके से अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया जाए, तो पुरानी से पुरानी जिद्दी कब्ज की समस्या बिना किसी दवा के जड़ से समाप्त हो सकती है।पुरानी कब्ज क्यों बन जाती है बवासीर और फिशर की गंभीर जड़?जब भोजन पचने के बाद आंतों से गुजरता है, तो बड़ी आंत (Colon) उसमें से पानी को अवशोषित करती है। यदि शरीर में फाइबर और पानी की कमी हो या आंतों की गति धीमी हो, तो मल बहुत अधिक सूख जाता है और कड़ा (Hard Stool) बन जाता है। इस कठोर मल को बाहर निकालने के लिए जब व्यक्ति अत्यधिक जोर लगाता है, तो मलाशय की नसें सूज जाती हैं।समय पर कब्ज का स्थायी समाधान न किया जाए, तो यह आगे चलकर बवासीर (Piles/Hemorrhoids), एनल फिशर (Anal Fissure), भगंदर (Fistula) और आंतों में विषाक्त पदार्थों (Toxins) के दोबारा अवशोषण का कारण बन जाती है, जिससे त्वचा पर कील-मुंहासे और लगातार थकान बनी रहती है। आंतों की दीवारों को चिकनाई और गति प्रदान करने के लिए फलों का प्राकृतिक फाइबर सबसे सुरक्षित उपाय है।1. पपीता (Papaya): 'पपेन' एंजाइम और पानी का अचूक पाचन टॉनिककब्ज और आंतों की सफाई के मामले में पपीते को फलों का राजा माना जाता है। पपीते में लगभग 88% पानी और उच्च मात्रा में घुलनशील फाइबर होता है। इसकी सबसे बड़ी वैज्ञानिक खूबी इसमें पाया जाने वाला एक शक्तिशाली प्रोटियोलिटिक एंजाइम 'पपेन' (Papain) है।पपेन एंजाइम भोजन में मौजूद जटिल प्रोटीन्स को तेजी से तोड़ता है और पाचन प्रक्रिया को सुगम बनाता है। इसके साथ ही पपीते में पाए जाने वाले कार्बनिक अम्ल आंतों की सुस्त पड़ी मांसपेशियों को सक्रिय करते हैं, जिससे मल त्याग की प्रक्रिया अत्यंत सहज हो जाती है। यह आंतों की सूजन को कम करता है और पेट फूलने (Bloating) की समस्या से राहत दिलाता है।सेवन का सही समय और तरीका: सुबह खाली पेट या नाश्ते के 1 घंटे बाद एक मध्यम कटोरी ताजा, पका हुआ पपीता खाना सबसे ज्यादा गुणकारी होता है। ध्यान रखें कि पपीते पर चाट मसाला या बहुत ज्यादा नमक न छिड़कें, इसे प्राकृतिक रूप में ही खाएं।2. अमरूद (Guava): अघुलनशील फाइबर का पावरहाउस जो आंतों की कर दे डीप क्लीनिंगसर्दियों और सामान्य मौसम में आसानी से मिलने वाला अमरूद कब्ज के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। 100 ग्राम अमरूद में लगभग 5.4 ग्राम तक डाइटरी फाइबर पाया जाता है, जो अधिकांश अन्य फलों की तुलना में कहीं अधिक है।अमरूद में मौजूद अघुलनशील फाइबर (Insoluble Fiber) आंतों में जाकर स्पंज की तरह काम करता है। यह मल की मात्रा (Bulk) को बढ़ाता है और उसे नरम बनाकर आंतों की दीवारों से आसानी से फिसलने में मदद करता है। इसके छोटे-छोटे बीज आंतों की भीतरी सतह पर प्राकृतिक स्क्रबर की तरह कार्य करते हैं और पुरानी जमी गंदगी को बाहर धकेलने में सहायक होते हैं। इसके अतिरिक्त अमरूद में विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट्स की प्रचुरता गट माइक्रोबायोम (अच्छे बैक्टीरिया) को मजबूत करती है।सेवन का सही समय और तरीका: दोपहर के भोजन से 1 घंटा पहले या शाम के नाश्ते में एक मध्यम आकार का अच्छी तरह पका हुआ अमरूद चबा-चबाकर खाएं। अधकच्चा या अत्यधिक कड़ा अमरूद खाने से बचें क्योंकि वह वात बढ़ाकर पेट में गैस पैदा कर सकता है।3. नाशपाती और सेब (Pear & Apple): 'पेक्टिन' और 'सॉर्बिटोल' का जादुई संयोजननाशपाती (Pear/बब्बूगोशा) और सेब दोनों ही घुलनशील फाइबर 'पेक्टिन' (Pectin) और एक प्राकृतिक शुगर अल्कोहल 'सॉर्बिटोल' (Sorbitol) के बेहतरीन स्रोत हैं।सॉर्बिटोल एक प्राकृतिक ऑस्मोटिक लैक्सेटिव (Osmotic Laxative) की तरह काम करता है। यह शरीर के अन्य हिस्सों से पानी खींचकर बड़ी आंत में पहुंचाता है, जिससे सूखा और कठोर मल नम होकर आसानी से पास हो जाता है। वहीं पेक्टिन फाइबर आंतों में एक चिकना जेल बनाता है, जो आंतों की गतिशीलता को तेज करता है। नाशपाती में सेब से भी अधिक फ्रुक्टोज और सॉर्बिटोल की मात्रा होती है, जो पुरानी कब्ज से पीड़ित लोगों के लिए त्वरित राहत का काम करती है।सेवन का सही समय और तरीका: नाशपाती और सेब का सेवन हमेशा उनके छिलके सहित करना चाहिए, क्योंकि 60% से अधिक फाइबर उनके बाहरी छिलके में ही केंद्रित होता है। फल को अच्छी तरह धोकर दिन में किसी भी समय स्नैक के रूप में चबाकर खाएं।4. सूखा आलूबुखारा और भीगे हुए अंजीर (Prunes & Figs): सदियों पुराना प्राकृतिक लैक्सेटिवसूखा आलूबुखारा (Prunes) दुनिया भर के चिकित्सा जगत में क्रॉनिक कब्ज के इलाज के लिए सबसे प्रामाणिक प्राकृतिक उपाय माना जाता है। प्रून्स में घुलनशील और अघुलनशील दोनों प्रकार के फाइबर, फेनोलिक यौगिक और उच्च स्तर का सॉर्बिटोल होता है।शोध बताते हैं कि रोजाना 4-5 सूखे आलूबुखारे या 2-3 भीगे हुए अंजीर (Figs) का सेवन करने से आंतों में लाभकारी बैक्टीरिया की संख्या बढ़ती है और मल त्याग की आवृत्ति (Frequency) में उल्लेखनीय सुधार होता है। अंजीर में मौजूद छोटे-छोटे रेशे आंतों के मार्ग को उत्तेजित करते हैं, जिससे सुबह उठते ही बिना किसी खिंचाव या दर्द के पेट एक बार में पूरी तरह साफ हो जाता है।सेवन का सही समय और तरीका: रात को सोने से पहले 2 सूखे अंजीर या 3-4 सूखे आलूबुखारे को आधा कप गुनगुने पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उठकर खाली पेट सबसे पहले उस पानी को पिएं और फलों को खूब चबाकर खाएं।फल खाते समय न करें ये 3 आम गलतियां, वरना नहीं मिलेगा पूरा फायदाफलों का जूस पीने की गलती: कब्ज से पीड़ित लोग अक्सर ताजे फलों को खाने के बजाय उनका जूस निकाल लेते हैं। जूस बनते ही फल का सारा जरूरी अघुलनशील फाइबर छनकर बाहर निकल जाता है और केवल शुगर बचती है। कब्ज दूर करने के लिए हमेशा साबुत फल को चबाकर ही खाना चाहिए।रात को देर से फल खाना: सोने से ठीक पहले भारी या ठंडे फल खाने से पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे रात में अपच, गैस और भारीपन हो सकता है। फलों का सेवन हमेशा सुबह खाली पेट या शाम 5 बजे से पहले करना चाहिए।पानी पीने में लापरवाही: फलों में मौजूद फाइबर तभी असरदार होता है जब शरीर में पर्याप्त पानी मौजूद हो। यदि आप फाइबर का सेवन बढ़ा रहे हैं लेकिन पानी कम पी रहे हैं, तो फाइबर आंतों में सूखकर कब्ज को और अधिक बढ़ा सकता है। इसलिए दिनभर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी अवश्य पिएं।कब है डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी?यद्यपि ये 4 फल सामान्य और मध्यम स्तर की कब्ज को दूर करने में पूरी तरह सक्षम हैं, लेकिन यदि आपको मल त्याग के दौरान गंभीर दर्द, मल के साथ खून आना, अचानक बिना कारण वजन घटना, लगातार उल्टी जैसा लगना या 4-5 दिनों तक बिल्कुल भी शौच न होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य कब्ज मानकर घर पर न बैठें। ऐसी स्थिति में आंतों में किसी गंभीर रुकावट (Intestinal Obstruction) या अन्य चिकित्सीय समस्या की संभावना हो सकती है, जिसके लिए तुरंत किसी योग्य गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य है।फलों के प्राकृतिक पोषण को अपनी दैनिक थाली का हिस्सा बनाएं, सुबह उठकर गुनगुना पानी पिएं, नियमित 30 मिनट टहलें और अपनी आंतों को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ और रोगमुक्त रखें।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 27 साल बाद तक एक भी गड्ढा नहीं, नितिन गडकरी का दावा
नितिन गडकरी ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के मिसिंग लिंक को लेकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान वन विभाग से इजाजत नहीं मिलने के कारण वह इस हिस्से का निर्माण नहीं करा सके। बाद में महाराष्ट्र सरकार ने बनवाया।
बिहार: मस्जिद के अंदर मौलवी की हत्या, सुबह अजान नहीं हुई तो खुला राज
क्या एक शांत मस्जिद के भीतर सो रहे मौलवी को यूं मौत के घाट उतार देना किसी बड़ी साजिश का हिस्सा था? यही सवाल अब अरना गांव से लेकर पूरे इलाके में गूंज रहा है. 50 वर्षीय सफीक आलम भोरे थाना क्षेत्र के सिसई गांव के रहने वाले थे और अरना गांव की मस्जिद में मौलवी के तौर पर सेवा दे रहे थे.
जिन्ना की TB का राज छिपाया, बॉम्बे के 2 डॉक्टरों को सर्वोच्च सम्मान देगा PAK!
भारत के बंटवारे से ठीक पहले के दिनों में जिन्ना की बिगड़ती सेहत उन राज में से एक थी जिन्हें बहुत गुप्त रखा गया था. अब 78 साल बाद पाकिस्तान बॉम्बे के दो पारसी डॉक्टरों को सम्मानित कर रहा है, जिन्होंने देश के संस्थापक का इलाज किया था और इतिहास के एक अहम मोड़ पर उनकी गंभीर बीमारी को छिपाकर रखा था.
पुणे और उसके आसपास आने वाले वर्षों में सड़क व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि पुणे को जाम और प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए करीब 60 हजार करोड़ रुपये की लागत से सड़क नेटवर्क विकसित किया जाएगा। सरकार का जोर शहर के भीतर से गुजरने वाले भारी यातायात को बाहर निकालने और आसपास के इलाकों से बेहतर संपर्क बनाने पर है। नितिन गडकरी ने यह बात सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, लवाले में आयोजित ‘फेस्टिवल ऑफ थिंकर्स’ कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम की विषयवस्तु ‘बुनियादी ढांचा विकास- विकसित भारत की राह’ थी। उन्होंने कहा कि पुणे के आसपास कई बड़े सड़क और राजमार्ग परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है, जिनसे शहर में यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है। बता दें कि प्रस्तावित परियोजनाओं में पुणे-शिरूर, हडपसर-यवत, तलेगांव-चाकण-शिक्रापुर और शिरूर-संभाजीनगर मार्ग प्रमुख हैं। इन सड़कों के विकास का उद्देश्य पुणे को आसपास के औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों से बेहतर तरीके से जोड़ना है। पुणे में वाहनों की बढ़ती संख्या और लगातार बढ़ते यातायात के कारण शहर के कई हिस्सों में जाम की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। मौजूद जानकारी के अनुसार, पुणे-संभाजीनगर द्रुतगति मार्ग भी प्रस्तावित योजनाओं में शामिल है। नितिन गडकरी ने कहा कि इस मार्ग के तैयार होने के बाद पुणे और संभाजीनगर के बीच यात्रा का समय घटकर करीब दो घंटे रह सकता है। इससे दोनों शहरों के बीच आवागमन तेज होने के साथ व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा पुणे-सतारा और पुणे-सोलापुर राजमार्गों को भी बेहतर बनाया जाएगा। शहर के अलग-अलग हिस्सों में ऊंची सड़क परियोजनाएं और नए द्रुतगति मार्ग तैयार किए जाएंगे। इन परियोजनाओं का एक बड़ा उद्देश्य मुंबई, पुणे और बेंगलुरु के बीच संपर्क को मजबूत करना है। गौरतलब है कि पुणे महाराष्ट्र का एक प्रमुख औद्योगिक, शैक्षणिक और तकनीकी केंद्र है। शहर में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, कामगार और उद्योगों से जुड़े लोग रहते हैं। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने से सड़क यातायात पर दबाव लगातार बढ़ा है। ऐसे में नए मार्ग और वैकल्पिक सड़क संपर्क शहर के भीतर भारी वाहनों की आवाजाही कम करने में मदद कर सकते हैं। नितिन गडकरी ने कहा कि नए सड़क नेटवर्क से पुणे से होकर गुजरने वाले यातायात को शहर के बाहर से निकालने में मदद मिलेगी। इससे शहर के प्रमुख हिस्सों में जाम कम हो सकता है और वाहनों से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आने की संभावना है। बेहतर सड़क संपर्क का फायदा पर्यटन, उद्योग और रोजगार को भी मिलने की उम्मीद जताई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में बुनियादी ढांचे के विकास को आगे बढ़ाने में तकनीक, शोध, पारदर्शिता और तेजी से निर्णय लेने की भूमिका महत्वपूर्ण है। सरकार का लक्ष्य केवल सड़कें बनाना नहीं, बल्कि ऐसी परिवहन व्यवस्था तैयार करना है जिससे लोगों और सामान की आवाजाही आसान हो सके। पुणे के लिए प्रस्तावित करीब 60 हजार करोड़ रुपये की ये परियोजनाएं पूरी होने के बाद शहर और आसपास के क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इन परियोजनाओं का वास्तविक असर उनके समय पर पूरा होने और यातायात व्यवस्था के साथ सही तरीके से जोड़ने पर निर्भर करेगा।
आधुनिक जीवनशैली में अनियंत्रित खानपान, अत्यधिक सोडियम (नमक) का सेवन, मानसिक तनाव और शारीरिक निष्क्रियता के कारण उच्च रक्तचाप यानी हाइपरटेंशन (High Blood Pressure) आज हर घर की समस्या बन चुका है। चिकित्सा जगत में हाई बीपी को 'साइलेंट किलर' कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन अंदर ही अंदर यह धमनियों, हृदय, मस्तिष्क और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचाता रहता है। रक्त वाहिकाओं पर पड़ने वाला अत्यधिक दबाव आगे चलकर हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, ब्रेन स्ट्रोक और क्रॉनिक किडनी डिजीज जैसी जानलेवा बीमारियों का प्रमुख कारण बनता है। नियमित दवाओं और डॉक्टर की सलाह के साथ-साथ यदि अपनी दिनचर्या में कुछ खास पोषक तत्वों से भरपूर प्राकृतिक पेय पदार्थों (Healthy Drinks) को शामिल किया जाए, तो नसों के खिंचाव को कम करके ब्लड प्रेशर को सुरक्षित स्तर पर बनाए रखना काफी आसान हो जाता है।साइलेंट किलर हाई ब्लड प्रेशर और प्राकृतिक पेय पदार्थों का विज्ञानमानव शरीर में जब रक्त का दबाव सामान्य सीमा (120/80 mmHg) से लगातार ऊपर (130-140 mmHg या अधिक) बना रहता है, तो रक्त वाहिकाएं अपनी प्राकृतिक लोच (Elasticity) खोने लगती हैं और सख्त हो जाती हैं। उच्च रक्तचाप को कम करने के लिए शरीर को मुख्य रूप से दो चीजों की आवश्यकता होती है—पहला, रक्त वाहिकाओं को चौड़ा (Vasodilation) करना ताकि खून आसानी से बह सके, और दूसरा, शरीर से अतिरिक्त सोडियम व पानी को बाहर निकालना। प्रकृति में ऐसे कई फल, सब्जियां और जड़ी-बूटियां मौजूद हैं जिनमें प्रचुर मात्रा में नाइट्रेट्स, पोटैशियम, मैग्नीशियम और पॉलीफेनोल्स पाए जाते हैं। ये तत्व दवाओं की तरह ही जैविक स्तर पर काम करके ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में सीधे तौर पर मदद करते हैं।1. चुकंदर का रस: 'डाइटरी नाइट्रेट्स' का पावरहाउस जो नसों को तुरंत फैला देचुकंदर का ताजा रस (Beetroot Juice) उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं माना जाता है। विभिन्न क्लीनिकल ट्रायल्स और कार्डियोलॉजी अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि एक ग्लास चुकंदर का जूस पीने के कुछ ही घंटों के भीतर सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जाती है।चुकंदर में प्राकृतिक रूप से इनऑर्गेनिक नाइट्रेट्स (Dietary Nitrates) भारी मात्रा में मौजूद होते हैं। जब आप इसका सेवन करते हैं, तो मुंह में मौजूद लार के बैक्टीरिया और पाचन तंत्र इन नाइट्रेट्स को 'नाइट्रिक ऑक्साइड' (Nitric Oxide) गैस में बदल देते हैं। नाइट्रिक ऑक्साइड रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी दीवारों की चिकनी मांसपेशियों (Endothelial Cells) को तुरंत शिथिल और चौड़ा कर देता है। नसें चौड़ी होने से रक्त प्रवाह का प्रतिरोध घट जाता है और हृदय को पंप करने में कम जोर लगाना पड़ता है। इसके नियमित सेवन से धमनियों का कड़ापन कम होता है। इसे सुबह के नाश्ते के समय या वर्कआउट से पहले ताजा निकालकर बिना नमक या चीनी मिलाए पीना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।2. गुड़हल की चाय (Hibiscus Tea): प्राकृतिक एसीई इन्हिबिटर और मूत्रवर्धक गुणलाल गुड़हल के सूखे फूलों से तैयार की जाने वाली हर्बल टी (Hibiscus Tea) ब्लड प्रेशर को कम करने के लिए दुनिया भर में सबसे प्रसिद्ध पारंपरिक उपायों में से एक है। चिकित्सा शोध बताते हैं कि रोजाना दो से तीन कप गुड़हल की चाय का सेवन बीपी की कुछ हल्की दवाओं (जैसे कैप्टोप्रिल या लिसिनोप्रिल) के बराबर प्रभाव दिखा सकता है।गुड़हल में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे 'एंथोसायनिन' (Anthocyanins) और कार्बनिक अम्ल पाए जाते हैं। यह शरीर में 'एंजियोटेंसिन-कन्वर्टिंग एंजाइम' (ACE) की सक्रियता को स्वाभाविक रूप से धीमा कर देता है। एसीई एंजाइम वही तत्व है जो रक्त वाहिकाओं को सिकोड़कर बीपी बढ़ाता है, और इसे ब्लॉक करने से नसें रिलैक्स रहती हैं। इसके अलावा गुड़हल की चाय एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक (Natural Diuretic) की तरह काम करती है, जो किडनी के जरिए पेशाब के रास्ते शरीर से अतिरिक्त सोडियम और पानी को बाहर निकाल देती है, जिससे रक्त का कुल आयतन और दबाव घट जाता है। इसे गर्म या ठंडे काढ़े के रूप में दिन में कभी भी पिया जा सकता है।3. ताजा अनार का जूस: 'प्यूनिकैलैगिन' एंटीऑक्सीडेंट और धमनियों की सफाईअनार को दिल की सेहत के लिए सबसे उत्तम फलों में गिना जाता है। अनार के ताजे रस में पाए जाने वाले 'प्यूनिकैलैगिन' (Punicalagins) और फ्लेवोनोइड्स जैसे बायोएक्टिव यौगिक इसे एंटीऑक्सीडेंट्स का भंडार बनाते हैं।हाई ब्लड प्रेशर के कारण धमनियों की दीवारों पर जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन पैदा होती है, अनार का जूस उसे तेजी से शांत करता है। यह धमनियों में एलडीएल (बैड कोलेस्ट्रॉल) के जमाव और प्लाक बनने की प्रक्रिया को रोकता है, जिससे नसें साफ और लचीली बनी रहती हैं। अनार का नियमित सेवन सिस्टोलिक और डायस्टोलिक दोनों प्रकार के ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के साथ-साथ हृदय की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति को सुधारता है। बाजार के पैकेटबंद और शुगर-युक्त जूस के बजाय घर पर ताजा अनार छीलकर निकाला गया 150 से 200 मिली जूस दोपहर से पहले पीना सर्वोत्तम परिणाम देता है।4. बिना नमक का टमाटर का रस: लाइकोपीन और पोटैशियम का अचूक कॉम्बिनेशनटमाटर का बिना नमक वाला ताजा सूप या रस (Unsalted Tomato Juice) कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम के लिए एक अत्यंत प्रभावी टॉनिक है। टमाटर में लाल रंग देने वाला शक्तिशाली कैरोटीनॉयड 'लाइकोपीन' (Lycopene) प्रचुर मात्रा में होता है, जो रक्त वाहिकाओं की आंतरिक परत (Endothelium) को स्वस्थ रखता है और उन्हें सख्त होने से बचाता है।इसके साथ ही टमाटर पोटैशियम का एक समृद्ध प्राकृतिक स्रोत है। शरीर में ब्लड प्रेशर बढ़ने का एक मुख्य कारण सोडियम और पोटैशियम का बिगड़ा हुआ संतुलन होता है। जब आप पोटैशियम युक्त टमाटर का रस पीते हैं, तो पोटैशियम कोशिकाओं के भीतर जाकर अतिरिक्त सोडियम के प्रभाव को निष्प्रभावी कर देता है और किडनी को ज्यादा से ज्यादा नमक बाहर निकालने का संकेत देता है। इसके परिणामस्वरूप धमनियों पर पड़ने वाला तनाव कम हो जाता है। ध्यान रहे कि बाजार में मिलने वाले डिब्बाबंद टोमैटो जूस में प्रिजर्वेटिव और सोडियम बहुत अधिक होता है, इसलिए केवल ताजे पके टमाटरों को पीसकर घर पर ही बिना नमक मिलाए इसका सेवन करना चाहिए।बीपी कंट्रोल ड्रिंक्स का सेवन करते समय कभी न करें ये 3 गलतियांनमक या चाट मसाला मिलाने की भूल: अक्सर लोग स्वाद बढ़ाने के लिए ताजे जूस या सब्जियों के रस में काला नमक, सफेद नमक या चाट मसाला डाल लेते हैं। ऐसा करने से जूस का पूरा औषधीय प्रभाव खत्म हो जाता है क्योंकि अतिरिक्त सोडियम सीधे तौर पर बीपी को बढ़ा देगा।पैकेटबंद या मीठे जूस का इस्तेमाल: टेट्रा पैक और बोतलबंद जूस में रिफाइंड शुगर, फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप और सोडियम प्रिजर्वेटिव्स की भारी मात्रा होती है। ये वजन बढ़ाते हैं, इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करते हैं और ब्लड प्रेशर को और अधिक बिगाड़ सकते हैं।दवाइयों को अचानक बंद कर देना: कई लोग प्राकृतिक पेय शुरू करते ही डॉक्टर द्वारा दी गई बीपी की गोलियां खुद से बंद कर देते हैं। यह बेहद खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकता है। कोई भी घरेलू नुस्खा या ड्रिंक दवाओं का पूरक (Supportive Therapy) हो सकता है, उनका विकल्प नहीं। दवाओं में किसी भी प्रकार का बदलाव हमेशा डॉक्टर की निगरानी में ही होना चाहिए।जीवनशैली में जरूरी बदलाव और डॉक्टर से परामर्श कब है जरूरी?इन स्वास्थ्यवर्धक पेयों के साथ-साथ दैनिक जीवन में कुछ बुनियादी आदतों को सुधारना आवश्यक है। अपने भोजन में सोडियम की मात्रा प्रतिदिन 2 ग्राम (लगभग आधा से एक छोटा चम्मच) तक सीमित करें और प्रोसेस्ड व फ्रोजन फूड्स से पूरी तरह बचें। रोजाना कम से कम 30 से 40 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज, तेज चलना या साइकलिंग करें। तनाव को नियंत्रित करने के लिए प्राणायाम, ध्यान और 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लें। यदि घरेलू उपायों के बावजूद आपका ब्लड प्रेशर लगातार 140/90 mmHg से ऊपर बना रहता है, या आपको सिर में तेज दर्द, चक्कर आना, सीने में भारीपन, धुंधला दिखाई देना या सांस फूलने जैसी तकलीफ होती है, तो तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर कार्डियोलॉजिस्ट या फिजिशियन से संपूर्ण जांच कराएं।
भारतीय रसोई का स्वाद और मानव शरीर का इलेक्ट्रोलाइट संतुलन नमक के बिना अधूरा है। पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण साधारण सफेद नमक को लेकर कई तरह की आशंकाएं खड़ी हो गई हैं और बाजार में हिमालयन पिंक सॉल्ट (गुलाबी नमक) तथा सेंधा नमक (रॉक सॉल्ट) की मांग तेजी से बढ़ी है। सोशल मीडिया और हेल्थ इन्फ्लुएंसर्स अक्सर सफेद नमक को 'धीमा जहर' बताकर पूरी तरह से गुलाबी या सेंधा नमक अपनाने की सलाह देते हैं। पोषण विज्ञान और आयुर्वेद के अनुसार आंख मूंदकर किसी भी नमक को पूरी तरह छोड़ देना या अपना लेना दोनों ही सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है। शरीर के लिए तीनों ही प्रकार के नमकों की अपनी रासायनिक संरचना, फायदे, सीमाएं और उपयोग के विशिष्ट नियम हैं।सफेद नमक (Table Salt): रिफाइनिंग का खेल, आयोडीन का वरदान और एंटी-केकिंग एजेंट्ससफेद नमक, जिसे टेबल सॉल्ट या परिष्कृत नमक कहा जाता है, मुख्य रूप से समुद्री जल या भूमिगत खदानों से निकाला जाता है। इसे बाजार में उतारने से पहले भारी औद्योगिक रिफाइनिंग प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जिसमें इसके सभी प्राकृतिक ट्रेस मिनरल्स हट जाते हैं और यह 97% से 99% तक शुद्ध सोडियम क्लोराइड (NaCl) बन जाता है। इसे नमी से बचाने और डिब्बे में आसानी से बहने (Free-flow) योग्य बनाए रखने के लिए इसमें 'एंटी-केकिंग एजेंट्स' (जैसे सोडियम एल्युमिनोसिलिकेट या पोटेशियम फेरोसायनाइड) मिलाए जाते हैं।सफेद नमक की सबसे बड़ी ताकत इसका 'आयोडीन युक्त' (Iodized) होना है। 1980 और 90 के दशक में भारत सरकार ने घेंघा रोग (Goiter), मानसिक दुर्बलता और हाइपोथायरायडिज्म की महामारी को रोकने के लिए नमक में आयोडीन मिलाना अनिवार्य किया था। आज भी थायरॉयड ग्रंथि के सुचारू संचालन और बच्चों के मस्तिष्क विकास के लिए आयोडीन युक्त सफेद नमक सबसे सस्ता और प्रभावी स्रोत है।सेंधा नमक (Rock Salt / Halite): व्रत की थाली से आयुर्वेद के त्रिदोष संतुलन तक का सफरभारतीय परंपरा में सदियों से उपवास और धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग होने वाला सेंधा नमक वास्तव में प्राकृतिक खनिज 'हैलाइट' (Halite) का शुद्ध रूप है। यह नमक प्राचीन काल में सूखे समुद्रों और झीलों के वाष्पीकरण से बनी प्राकृतिक चट्टानों से सीधे खोदा जाता है। इसे किसी भी प्रकार की रासायनिक रिफाइनिंग या ब्लीचिंग प्रक्रिया से नहीं गुजारा जाता, जिससे इसका प्राकृतिक रूप बरकरार रहता है।आयुर्वेद में सेंधा नमक को सभी नमकों में सर्वश्रेष्ठ और 'लवण उत्तम' माना गया है। जहां सफेद नमक शरीर में पित्त और गर्मी बढ़ाता है, वहीं सेंधा नमक की तासीर 'शीत वीर्य' (Cooling) मानी जाती है। यह त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) को संतुलित करता है, जठराग्नि को प्रज्वलित कर पाचन सुधारता है, गैस और सीने की जलन को शांत करता है। रासायनिक रूप से इसमें सफेद नमक की तुलना में सोडियम की मात्रा थोड़ी कम होती है और पोटेशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स प्राकृतिक रूप में उपस्थित होते हैं।हिमालयन गुलाबी नमक (Pink Salt): गुलाबी रंग का राज, 84 मिनरल्स का दावा और हकीकतगुलाबी नमक भी एक प्रकार का रॉक सॉल्ट ही है, जो मुख्य रूप से हिमालय की तलहटी (पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित खेवड़ा सॉल्ट माइन) से निकाला जाता है। इसका आकर्षक हल्का गुलाबी रंग इसमें प्राकृतिक रूप से मौजूद 'आयरन ऑक्साइड' (जंग/लौह तत्व) और अन्य ट्रेस मिनरल्स के कारण होता है।बाजार में यह दावा बहुत लोकप्रिय है कि गुलाबी नमक में 84 प्रकार के दुर्लभ मिनरल्स होते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह बात सही है कि इसमें आयरन, जिंक, कॉपर, मैंगनीज और क्रोमियम जैसे तत्व पाए जाते हैं, लेकिन इनकी मात्रा बहुत सूक्ष्म (Trace Amounts) होती है। केवल गुलाबी नमक खाकर शरीर की दैनिक मिनरल जरूरतों को पूरा नहीं किया जा सकता। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह पूरी तरह अपरिष्कृत, प्रदूषण रहित और एडिटिव्स-मुक्त होता है, जो शरीर के पीएच (pH Level) को संतुलित रखने और मांसपेशियों की ऐंठन को कम करने में मदद करता है।सफेद, गुलाबी और सेंधा नमक में मुख्य अंतरसोडियम की मात्रा: प्रति 100 ग्राम में सफेद नमक में लगभग 39,000 मिलीग्राम (39%) सोडियम होता है, जबकि गुलाबी और सेंधा नमक में क्रिस्टल का आकार बड़ा होने और अन्य खनिजों की मौजूदगी के कारण सोडियम की मात्रा थोड़ी कम (लगभग 36% से 38%) होती है।आयोडीन की उपस्थिति: सफेद नमक फोर्टिफाइड होता है, इसलिए इसमें प्रति ग्राम लगभग 15 से 30 माइक्रोग्राम आयोडीन सुनिश्चित होता है। इसके विपरीत, सेंधा और गुलाबी नमक में प्राकृतिक रूप से आयोडीन बहुत कम या नगण्य होता है।प्रोसेसिंग और केमिकल्स: सफेद नमक अत्यधिक प्रोसेस्ड, ब्लीच्ड और केमिकल एडिटिव्स युक्त होता है। वहीं सेंधा और गुलाबी नमक बिना किसी रासायनिक क्रिया के हाथ से तोड़े और पीसे गए प्राकृतिक लवण हैं।स्वाद और स्वाद की तीव्रता: सफेद नमक बहुत तीखा और तेज नमकीन होता है, जबकि सेंधा और गुलाबी नमक का स्वाद हल्का, मिट्टी जैसा और सौम्य होता है।अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार कौन सा नमक चुनें?हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) और दिल के मरीज: जिन लोगों को उच्च रक्तचाप या हृदय रोग की समस्या है, उनके लिए सेंधा नमक या गुलाबी नमक अधिक फायदेमंद है। इनमें पोटेशियम की मौजूदगी अतिरिक्त सोडियम के प्रभाव को कम करने और रक्त वाहिकाओं को रिलैक्स करने में मदद करती है।थायरॉयड और हार्मोनल असंतुलन के मरीज: यदि आप हाइपोथायरायडिज्म या आयोडीन की कमी से जूझ रहे हैं, तो केवल सेंधा या गुलाबी नमक पर निर्भर न रहें। आपके शरीर को नियमित रूप से आयोडीन की आवश्यकता होती है, जो आयोडीन युक्त सफेद नमक या आयोडीन सप्लीमेंट्स से ही मिल सकता है।कमजोर पाचन, ब्लोटिंग और एसिडिटी: जिन लोगों को खाना खाने के बाद पेट भारी लगना, खट्टी डकारें आना या अपच की शिकायत रहती है, उनके लिए आयुर्वेद के अनुसार भोजन पकाने और छाछ/सलाद में सेंधा नमक का उपयोग सर्वोत्तम है।खिलाड़ी और अत्यधिक पसीना बहाने वाले लोग: वर्कआउट या भारी शारीरिक श्रम के बाद शरीर से निकलने वाले इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई के लिए गुनगुने पानी में एक चुटकी गुलाबी नमक और नींबू मिलाकर पीना स्पोर्ट्स ड्रिंक्स से कहीं बेहतर काम करता है।इस्तेमाल करने का सबसे आदर्श और वैज्ञानिक तरीका: 'रोटेशन और ब्लेंडिंग' तकनीकस्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किसी एक नमक को अपनी रसोई से पूरी तरह बेदखल करने के बजाय उनका संतुलित उपयोग करना सबसे समझदारी भरा कदम है:स्मार्ट ब्लेंडिंग फॉर्मूला: भोजन पकाने (सब्जी, दाल आदि) के लिए 70% सेंधा नमक और 30% आयोडीन युक्त सफेद नमक का अनुपात अपनाएं। इससे आपको रॉक सॉल्ट की शुद्धता और मिनरल्स भी मिलेंगे तथा शरीर में थायरॉयड के लिए जरूरी आयोडीन की कमी भी नहीं होगी।कच्चे नमक का उपयोग: सलाद, रायता, सूप, फल या स्प्राउट्स के ऊपर छिड़कने के लिए कभी भी सफेद नमक का प्रयोग न करें। ऊपर से डालने के लिए हमेशा दरदरे पिसे हुए सेंधा नमक या गुलाबी नमक का ही इस्तेमाल करें।पकाने का सही समय: सेंधा या गुलाबी नमक को तेल-मसाले भूनते समय डालने के बजाय खाना पकने के अंत में डालें। अत्यधिक तेज आंच पर देर तक पकाने से इसके कुछ सूक्ष्म पोषक तत्व नष्ट हो सकते हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार एक वयस्क को प्रतिदिन कुल मिलाकर 5 ग्राम (लगभग 1 छोटा चम्मच) से अधिक नमक का सेवन किसी भी रूप में नहीं करना चाहिए, चाहे वह सफेद हो, गुलाबी हो या सेंधा। नमक का प्रकार बदलने से ज्यादा महत्वपूर्ण उसकी मात्रा पर नियंत्रण रखना है।
वेतन-ग्रेच्युटी की मांग... मुंबई में कल से हड़ताल पर जाएंगे BEST वर्कर्स यूनियन
मुंबई में BEST कर्मचारियों की लंबित वेतन मांगों को लेकर BEST Workers Union ने 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है.
मासिक धर्म शुरू होने से कुछ दिन पहले या पीरियड्स के दौरान अचानक चॉकलेट, पेस्ट्री, आइसक्रीम या किसी खास मीठी चीज को खाने की तीव्र तलब (Food Cravings) महसूस होना दुनिया भर की अधिकांश महिलाओं के लिए एक बेहद आम अनुभव है। अक्सर लोग इसे केवल मन की कमजोरी, मूड स्विंग या सामान्य आदत मानकर टाल देते हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान और न्यूरोबायोलॉजी के अनुसार यह कोई साधारण इच्छा नहीं है। यह हमारे शरीर के भीतर होने वाले तेज हार्मोनल बदलाव, मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर्स में उतार-चढ़ाव और शारीरिक पोषक तत्वों की तात्कालिक मांग का एक स्पष्ट जैविक संकेत (Biological Signal) है। जब शरीर में दर्द, ऐंठन और मानसिक तनाव बढ़ता है, तो दिमाग स्वाभाविक रूप से ऐसे खाद्य पदार्थों की तलाश करता है जो तुरंत राहत और खुशी का अहसास करा सकें।हार्मोनल बदलाव: एस्ट्रोजन और सेरोटोनिन में भारी गिरावट का असरमासिक धर्म चक्र के दूसरे भाग को 'ल्यूटियल फेज' (Luteal Phase) कहा जाता है, जो पीरियड्स शुरू होने से लगभग एक से दो सप्ताह पहले का समय होता है। इस दौरान महिला के शरीर में फीमेल हार्मोन्स—एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) के स्तर में तेजी से भारी गिरावट आती है।एस्ट्रोजन हार्मोन का सीधा संबंध मस्तिष्क में 'सेरोटोनिन' (Serotonin) के उत्पादन से होता है। सेरोटोनिन को 'हैप्पी हार्मोन' या मूड को स्थिर रखने वाला न्यूरोट्रांसमीटर माना जाता है। जब एस्ट्रोजन घटता है, तो मस्तिष्क में सेरोटोनिन का स्तर भी अचानक नीचे गिर जाता है, जिससे चिड़चिड़ापन, उदासी, थकान और डिप्रेशन जैसी भावनाएं उत्पन्न होती हैं। चॉकलेट और मीठे खाद्य पदार्थों में सिंपल कार्बोहाइड्रेट्स और शुगर की प्रचुर मात्रा होती है। जैसे ही आप मीठा खाते हैं, रक्त में ग्लूकोज तेजी से बढ़ता है, जो मस्तिष्क में सेरोटोनिन के स्तर को कुछ समय के लिए तुरंत बढ़ा देता है। मस्तिष्क खुद को बेहतर महसूस कराने के लिए अनजाने में चॉकलेट की मांग करने लगता है।मैग्नीशियम की कमी: शरीर का प्राकृतिक दर्द निवारक सिग्नलचॉकलेट की तीव्र इच्छा के पीछे केवल चीनी ही नहीं, बल्कि इसमें पाया जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण मिनरल 'मैग्नीशियम' (Magnesium) भी प्रमुख कारण है। विशेष रूप से डार्क चॉकलेट मैग्नीशियम का एक समृद्ध प्राकृतिक स्रोत है।मासिक धर्म से ठीक पहले और उस दौरान गर्भाशय की परत टूटने से पेट और कमर में तेज दर्दनाक ऐंठन (Menstrual Cramps) होती है। मैग्नीशियम मांसपेशियों को रिलैक्स करने, नसों की उत्तेजना को शांत करने और गर्भाशय के संकुचन को कम करने में एक प्राकृतिक 'मसल रिलैक्सेंट' का काम करता है। पीरियड्स के दौरान कई महिलाओं के शरीर में मैग्नीशियम का स्तर सामान्य से कम हो जाता है। जब शरीर को मांसपेशियों की ऐंठन और सूजन से राहत पाने के लिए मैग्नीशियम की सख्त जरूरत होती है, तो अवचेतन रूप से दिमाग मैग्नीशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ यानी चॉकलेट की मांग करता है।मस्तिष्क में डोपामाइन और एंडोर्फिन: दर्द से तुरंत राहत की तलाशचॉकलेट में कई ऐसे बायोएक्टिव कंपाउंड्स पाए जाते हैं जो मस्तिष्क के 'रिवॉर्ड सेंटर' को सीधे सक्रिय करते हैं। चॉकलेट में 'एनांडामाइड' (Anandamide) नामक एक विशेष फैटी एसिड न्यूरोट्रांसमीटर होता है, जिसे 'ब्लिस मॉलिक्यूल' (Bliss Molecule) यानी आनंद का अणु भी कहा जाता है। इसके अलावा इसमें थियोब्रोमाइन (Theobromine), कैफीन और फेनिलएथिलामाइन (PEA) जैसे उत्तेजक तत्व होते हैं।जब कोई महिला दर्द या असहजता की स्थिति में चॉकलेट का एक टुकड़ा खाती है, तो मस्तिष्क में 'डोपामाइन' (Dopamine) और 'एंडोर्फिन' (Endorphins) का तेजी से स्राव होता है। एंडोर्फिन शरीर के प्राकृतिक पेनकिलर की तरह काम करते हैं, जो दर्द के संकेतों को मंद कर देते हैं और तनाव को तुरंत कम कर देते हैं। इस तात्कालिक सुकून के कारण मस्तिष्क इसे एक राहत तंत्र के रूप में याद रखता है और हर चक्र में उसी की मांग दोहराता है।मेटाबॉलिक रेट में उछाल: पीरियड्स से पहले शरीर को चाहिए अतिरिक्त ऊर्जाल्यूटियल फेज के दौरान महिला का शरीर संभावित गर्भधारण या गर्भाशय की परत (Endometrium) के पुनर्निर्माण की जटिल तैयारी कर रहा होता है। एंडोक्राइनोलॉजी अध्ययनों से साबित हुआ है कि पीरियड्स शुरू होने से पहले बेसल मेटाबॉलिक रेट (BMR) लगभग 2% से 10% तक बढ़ जाता है। इसका मतलब है कि इस अवधि में शरीर सामान्य दिनों की तुलना में 100 से 300 अतिरिक्त कैलोरी प्रतिदिन बर्न करता है।इस अतिरिक्त ऊर्जा की खपत के कारण भूख बढ़ जाती है। चूंकि कार्बोहाइड्रेट और वसा ऊर्जा के सबसे त्वरित स्रोत हैं, इसलिए शरीर सबसे सघन कैलोरी वाले भोजन यानी मीठे, चॉकलेट और नमकीन स्नैक्स की ओर आकर्षित होता है।'कंफर्ट फूड' की मनोवैज्ञानिक आदत और सामाजिक कंडीशनिंगवैज्ञानिक कारणों के अलावा इसका एक बड़ा मनोवैज्ञानिक पहलू भी है। बचपन से ही हमारे समाज में चॉकलेट और मिठाइयों को खुशी, सांत्वना और तनावमुक्ति के साधन के रूप में देखा जाता रहा है। जब पीरियड्स के दौरान महिलाएं शारीरिक दर्द, सुस्ती और भावनात्मक उतार-चढ़ाव से गुजरती हैं, तो वे भावनात्मक रूप से खुद को शांत करने के लिए 'कंफर्ट फूड' का सहारा लेती हैं। कई बार यह केवल हार्मोनल जरूरत न होकर एक सीखी हुई मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया (Conditioned Psychological Response) भी होती है, जहां मन खुद को पैंपर करने के लिए मीठे की उम्मीद करता है।अनहेल्दी मीठे के जाल से कैसे बचें: क्रेविंग को शांत करने के 5 स्वस्थ तरीके70% या अधिक कोको वाली डार्क चॉकलेट चुनें: सामान्य मिल्क चॉकलेट में कोको कम और चीनी तथा प्रोसेस्ड फैट बहुत ज्यादा होता है, जो कुछ ही देर में शुगर क्रैश और मुंहासों का कारण बनता है। इसकी जगह 70% या 85% डार्क चॉकलेट के 1-2 टुकड़े खाएं, जिससे भरपूर मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स मिलेंगे और शुगर स्पाइक भी नहीं होगा।मैग्नीशियम युक्त संतुलित आहार लें: अपनी नियमित डाइट में कद्दू के बीज (Pumpkin Seeds), चिया सीड्स, भीगे हुए बादाम, पालक, केला और एवोकाडो शामिल करें। शरीर में मैग्नीशियम का स्तर सही रहने पर पीरियड्स क्रैम्प्स कम होंगे और चॉकलेट की तीव्र इच्छा भी नियंत्रित रहेगी।कॉम्प्लेक्स कार्ब्स और प्रोटीन का सेवन बढ़ाएं: सफेद चीनी और मैदे से बनी मिठाइयों के बजाय ओट्स, साबुत अनाज, दालें और नट्स लें। ये रक्त में ग्लूकोज को धीरे-धीरे रिलीज करते हैं, जिससे सेरोटोनिन का स्तर स्थिर बना रहता है और बार-बार मीठा खाने का मन नहीं करता।ताजे फल और खजूर का प्राकृतिक मीठा: जब भी मीठा खाने की तलब हो, तो पेस्ट्री या कैंडी के बजाय सेब, अनार, पके केले या 2-3 खजूर और अंजीर का सेवन करें। इनसे शरीर को प्राकृतिक फ्रुक्टोज के साथ फाइबर भी मिलेगा।भरपूर पानी पिएं और हर्बल चाय लें: कई बार डिहाइड्रेशन के कारण भी मस्तिष्क भूख और मीठे की तलब का भ्रम पैदा करता है। दिनभर गुनगुना पानी, कैमोमाइल टी या पुदीने की चाय पिएं, जो पेट की ऐंठन को शांत करती है और तनाव के स्तर को घटाती है।
भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा: क्या बिहार के हितों को ध्यान में रखकर बदलेगा 'फरक्का समझौता'?
भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारा समझौता 2026 में समाप्त हो रहा है, जिससे बिहार के हितों को नए सिरे से शामिल करने की चुनौती है, जो अपनी पानी की जरूरत और सिल्टेशन की समस्या को नए करार में शामिल करने की मांग कर रहा है।
डॉ. हेमांग जोशी को भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, उन्होंने तेजस्वी सूर्या का स्थान लिया है।
समंदर में दुश्मनों की खैर नहीं: भारतीय नौसेना को मिलेंगे 2 MQ-9B ड्रोन, जानें इस 'बाहुबली' की ताकत
रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को अमेरिकी कंपनी जनरल एटॉमिक्स के साथ भारतीय नौसेना के लिए दो एमक्यू-9बी सी गार्डियन ड्रोन 30 महीने के लिए लीज पर लेने का समझौता किया। इस अनुबंध की कुल लागत लगभग 1943 करोड़ रुपये है।
अपना खुद का घर खरीदना हर नौकरीपेशा और मध्यमवर्गीय परिवार का सबसे बड़ा सपना होता है। भारतीय रियल एस्टेट बाजार में प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों के बीच अधिकांश लोग होम लोन (Home Loan) के जरिए ही अपने इस सपने को साकार करते हैं। जब किसी व्यक्ति की मासिक इन-हैंड सैलरी ₹50,000 होती है, तो उसके मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि बैंक उसे कितना लोन मंजूर करेगा और हर महीने उसकी जेब पर कितने रुपये की ईएमआई (EMI) का बोझ पड़ेगा। वित्तीय विशेषज्ञों और होम लोन सलाहकारों के अनुसार, लोन लेने से पहले अपनी वित्तीय क्षमता और ईएमआई के सटीक फॉर्मूले को समझ लेना बेहद आवश्यक है, ताकि भविष्य में बजट न बिगड़े और लोन का भुगतान तनावमुक्त तरीके से हो सके।बैंकों का 50% FOIR नियम: ₹50,000 सैलरी पर कितनी ईएमआई मंजूर हो सकती है?जब भी आप किसी सरकारी या निजी बैंक में होम लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक आपकी कुल आय के आधार पर 'फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो' (FOIR) की जांच करता है। भारत के प्रमुख बैंक (जैसे SBI, HDFC, ICICI, PNB) किसी भी वेतनभोगी कर्मचारी की कुल इन-हैंड सैलरी का अधिकतम 40% से 50% हिस्सा ही सभी ईएमआई के लिए स्वीकृत करते हैं।इसका सीधा गणित यह है कि यदि आपकी मासिक इन-हैंड सैलरी ₹50,000 है, तो आपकी सभी मासिक किस्तों (EMIs) का कुल योग ₹20,000 से लेकर अधिकतम ₹25,000 प्रति माह से ज्यादा नहीं होना चाहिए। बैंक यह सुनिश्चित करते हैं कि ईएमआई चुकाने के बाद आपके पास परिवार के रोजमर्रा के खर्च, बच्चों की शिक्षा, मेडिकल इमरजेंसी और घरेलू जरूरतों के लिए कम से कम 50% वेतन (यानी ₹25,000) सुरक्षित बचा रहे।यदि आपकी पहले से कोई कार लोन, पर्सनल लोन या बाइक की ₹5,000 की ईएमआई चल रही है, तो बैंक आपके ₹25,000 के अधिकतम बजट में से उसे घटा देगा और आपके नए होम लोन की मासिक किस्त केवल ₹20,000 तक ही सीमित कर दी जाएगी।₹50,000 की सैलरी पर कितना होम लोन मिल सकता है?यदि आपके ऊपर पहले से कोई कर्ज या ईएमआई नहीं है और आपका सिबिल स्कोर 750 से अधिक है, तो ₹25,000 की अधिकतम मासिक ईएमआई क्षमता के आधार पर आपकी लोन पात्रता (Loan Eligibility) तय होती है। वर्तमान में देश के शीर्ष बैंकों में होम लोन की औसत ब्याज दरें 8.50% से 9.00% प्रति वर्ष के आसपास हैं।8.50% की वार्षिक ब्याज दर के आधार पर अलग-अलग समय अवधि के लिए मिलने वाली अनुमानित लोन राशि इस प्रकार है:15 वर्ष की अवधि के लिए: बैंक आपको लगभग ₹25 लाख से ₹26 लाख तक का लोन स्वीकृत कर सकता है, जिसकी मासिक ईएमआई लगभग ₹24,600 से ₹25,000 बनेगी।20 वर्ष की अवधि के लिए: आपकी लोन पात्रता बढ़कर लगभग ₹28.5 लाख से ₹30 लाख तक हो सकती है, जिसमें ₹25,000 के करीब ईएमआई बनेगी।25 वर्ष की अवधि के लिए: आपको लगभग ₹31 लाख से ₹32.5 लाख तक का होम लोन मिल सकता है, जिसकी ईएमआई लगभग ₹25,000 प्रति माह आएगी।30 वर्ष की अवधि के लिए: अधिकतम 30 साल के कार्यकाल के लिए बैंक आपको लगभग ₹32.5 लाख से ₹34 लाख तक का होम लोन दे सकता है।होम लोन EMI निकालने का वैज्ञानिक फॉर्मूला: खुद करें अपनी किस्त की गणनाहोम लोन की मासिक किस्त (EMI) निकालने के लिए बैंकिंग प्रणाली में एक सार्वभौमिक फॉर्मूले का उपयोग किया जाता है। यदि आप इसे समझना चाहते हैं, तो यह फॉर्मूला इस प्रकार है:EMI = [P R (1+R)^N] / [(1+R)^N - 1]यहाँ P का मतलब मूलधन (Principal Loan Amount), R का मतलब मासिक ब्याज दर (वार्षिक दर / 12 / 100), और N का मतलब कुल महीनों की संख्या (Loan Tenure in Months) है।उदाहरण के तौर पर, यदि आप ₹25,00,000 (25 लाख रुपये) का होम लोन 8.50% वार्षिक ब्याज पर 20 साल (240 महीने) के लिए लेते हैं:मासिक ब्याज दर (R) = 8.5 / 12 / 100 = 0.007083महीनों की संख्या (N) = 240इस फॉर्मूले के तहत आपकी मासिक ईएमआई ठीक ₹21,696 आएगी।20 वर्षों में आपका कुल ब्याज भुगतान ₹27,07,040 होगा और कुल पुनर्भुगतान राशि ₹52,07,040 बनेगी।कार्यकाल (Tenure) का असर: लंबी अवधि से ईएमआई घटती है लेकिन ब्याज दोगुना हो जाता हैअक्सर लोग ईएमआई को छोटा रखने के चक्कर में 25 या 30 साल का सबसे लंबा कार्यकाल चुन लेते हैं। कम ईएमआई से मासिक बजट पर दबाव तो कम होता है, लेकिन बैंक को जाने वाला कुल ब्याज मूलधन से भी कहीं अधिक हो जाता है।यदि ₹25 लाख के लोन को 8.5% ब्याज पर विभिन्न अवधियों के लिए देखा जाए:15 वर्ष का कार्यकाल: ईएमआई ₹24,619 होगी और कुल ब्याज ₹19.31 लाख बनेगा।20 वर्ष का कार्यकाल: ईएमआई ₹21,696 होगी और कुल ब्याज ₹27.07 लाख बनेगा।30 वर्ष का कार्यकाल: ईएमआई ₹19,223 होगी और कुल ब्याज ₹44.20 लाख बनेगा।साफ है कि 30 साल के कार्यकाल में ईएमआई केवल ₹5,396 कम होती है, लेकिन आपको ₹24.89 लाख का अतिरिक्त ब्याज चुकाना पड़ता है। इसलिए सैलरी के अनुसार 15 से 20 साल का कार्यकाल चुनना सबसे संतुलित और समझदारी भरा निर्णय माना जाता है।लोन अप्रूवल के लिए जरूरी पात्रता और शर्तेंसैलरी के अलावा बैंक लोन मंजूर करने से पहले इन महत्वपूर्ण कारकों का भी मूल्यांकन करते हैं:क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score): आपका क्रेडिट स्कोर 750 या उससे अधिक होना चाहिए। उत्कृष्ट सिबिल स्कोर होने पर बैंक 0.25% से 0.50% तक कम ब्याज दर की पेशकश करते हैं।नौकरी की स्थिरता: आवेदक को वर्तमान संस्थान में कम से कम 1 वर्ष और कुल कार्य अनुभव कम से कम 2 से 3 वर्ष का होना चाहिए।आयु सीमा: वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए लोन आवेदन के समय न्यूनतम आयु 21 वर्ष और रिटायरमेंट के समय अधिकतम 60 वर्ष तक होनी चाहिए।प्रॉपर्टी के कानूनी दस्तावेज: खरीदी जा रही संपत्ति का टाइटल डीड, स्वीकृत नक्शा और स्थानीय विकास प्राधिकरण (जैसे DDA, BDA, LDA, RERA आदि) से एनओसी होना अनिवार्य है।डाउन पेमेंट की व्यवस्था: बैंक प्रॉपर्टी की रजिस्टर्ड वैल्यू का 75% से 80% ही लोन देते हैं। बाकी 20% से 25% डाउन पेमेंट और रजिस्ट्री/स्टांप ड्यूटी का खर्च आपको अपनी बचत से करना होता है।होम लोन का बोझ कम करने के 4 स्मार्ट गोल्डन नियमसह-आवेदक (Co-applicant) जोड़ें: यदि आपकी पत्नी, माता-पिता या कामकाजी भाई सह-आवेदक बनते हैं, तो उनकी आय भी जुड़ जाती है, जिससे लोन पात्रता ₹50 लाख से ऊपर पहुंच सकती है और ब्याज दर में छूट भी मिल सकती है।सालाना 1 अतिरिक्त ईएमआई का भुगतान करें: यदि आप साल में केवल एक अतिरिक्त ईएमआई का प्री-पेमेंट करते हैं, तो आपका 20 साल का होम लोन लगभग 16 से 17 साल में ही खत्म हो जाएगा और लाखों रुपये का ब्याज बचेगा।सैलरी इंक्रीमेंट के साथ ईएमआई 5% बढ़ाएं: हर साल मिलने वाले इंक्रीमेंट के साथ यदि आप अपनी ईएमआई में सिर्फ 5% की बढ़ोतरी करते हैं, तो 20 वर्ष का लोन मात्र 12 वर्षों में पूरी तरह चुकता हो जाता है।इनकम टैक्स छूट का पूरा लाभ लें: आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत मूलधन पुनर्भुगतान पर ₹1.5 लाख और धारा 24(b) के तहत चुकाए गए ब्याज पर प्रति वर्ष ₹2 लाख तक की टैक्स छूट मिलती है, जिससे आपकी वास्तविक कर देनदारी घट जाती है।
आज के समय में 1 लाख रुपये प्रति माह की इन-हैंड सैलरी को एक बेहतरीन और सुरक्षित आय माना जाता है। इस छह अंकों की कमाई के बावजूद देश के टियर-1 और टियर-2 शहरों में रहने वाले लाखों युवा और प्रोफेशनल्स महीने की 25 तारीख आते-आते खाली बैंक बैलेंस और भारी कर्ज के बोझ तले दबे नजर आते हैं। होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन, नो-कॉस्ट ईएमआई, बीएनपीएल (Buy Now Pay Later) और क्रेडिट कार्ड के भारी-भरकम बिल हर महीने सैलरी का 60 से 70 फीसदी हिस्सा लील जाते हैं।वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च आय होना कभी भी इस बात की गारंटी नहीं है कि आप अमीर और कर्ज-मुक्त रहेंगे। जब तक आप अपनी कमाई का सही प्रबंधन नहीं करते, तब तक 'लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन' (Lifestyle Inflation) और वित्तीय अनुशासन की कमी आपको हमेशा कर्ज के जाल (Debt Trap) में फंसाए रखेगी। अगर आप भी 1 लाख रुपये कमाने के बावजूद हर महीने ईएमआई चुकाने का तनाव झेल रहे हैं, तो यह विस्तृत और व्यावहारिक रोडमैप आपको अगले 12 से 24 महीनों में पूरी तरह कर्ज-मुक्त बना सकता है।1 लाख रुपये की अच्छी सैलरी के बावजूद कर्ज के जाल में क्यों फंसते हैं लोग?उच्च आय वर्ग के लोगों के कर्ज में डूबने का सबसे बड़ा कारण आय के साथ-साथ खर्चों का अनियंत्रित बढ़ना है। जैसे ही सैलरी 50 हजार से बढ़कर 1 लाख होती है, लोग बेहतर अपार्टमेंट, महंगी गाड़ी, हर वीकेंड पर डाइनिंग आउट, ब्रांडेड कपड़े और लग्जरी गैजेट्स पर खर्च बढ़ा देते हैं। इसे पर्सनल फाइनेंस की भाषा में 'कम्फर्ट ट्रैप' कहा जाता है।दूसरा बड़ा कारण है 'आसान क्रेडिट'। 1 लाख की सैलरी स्लिप पर बैंक तुरंत 10 से 15 लाख का प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन और लाखों की लिमिट वाले क्रेडिट कार्ड थमा देते हैं। लोग भविष्य की आय के भरोसे आज की विलासिता खरीदने लगते हैं, जिससे एक ईएमआई खत्म होने से पहले ही दूसरी शुरू हो जाती है।नियम 1: सबसे पहले अपना 'डेट-टू-इनकम' (DTI) रेशियो मापेंकर्ज मुक्ति के सफर में सबसे पहला कदम यह जानना है कि आपकी वित्तीय स्थिति कितनी नाजुक है। इसके लिए अपने डेट-टू-इनकम (Debt-to-Income / DTI) अनुपात की गणना करें।फॉर्मूला: (कुल मासिक ईएमआई + क्रेडिट कार्ड बिल / कुल इन-हैंड मासिक सैलरी) 100यदि आपका डीटीआई 30% से कम है: आपकी स्थिति सुरक्षित और नियंत्रण में है।यदि आपका डीटीआई 30% से 50% के बीच है: आप खतरे के मुहाने पर हैं और तुरंत बजट सुधारने की जरूरत है।यदि आपका डीटीआई 50% से अधिक है: आप गंभीर 'डेट ट्रैप' में हैं और आपको आपातकालीन कदम उठाने होंगे।यदि आपकी सैलरी 1 लाख रुपये है, तो आपकी सभी ईएमआई का कुल योग किसी भी परिस्थिति में 35,000 से 40,000 रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए।डेट स्नोबॉल बनाम डेट एवलांच: कर्ज चुकाने की कौन सी रणनीति है सबसे तेज?अपने सभी कर्जों को एक डायरी या एक्सेल शीट में उनके मूलधन, मासिक ईएमआई और वार्षिक ब्याज दर (Interest Rate) के साथ लिखें। इसके बाद कर्ज चुकाने के लिए दुनिया भर में आजमाई जाने वाली इन दो प्रमुख वैज्ञानिक पद्धतियों में से एक को चुनें:डेट एवलांच मेथड (Debt Avalanche Method - गणितीय रूप से सबसे किफायती): इस रणनीति में आप सबसे अधिक ब्याज दर वाले कर्ज को सबसे पहले खत्म करने का लक्ष्य रखते हैं। उदाहरण के लिए, क्रेडिट कार्ड का कर्ज (36% से 42% वार्षिक ब्याज) या पर्सनल लोन (14% से 18% ब्याज)। बाकी सभी कर्जों की केवल न्यूनतम ईएमआई भरें और अपनी बची हुई अतिरिक्त बचत को सबसे महंगे कर्ज को तेजी से प्री-पे करने में लगा दें। जब वह खत्म हो जाए, तो उससे कम ब्याज वाले कर्ज पर हमला करें। इससे आपका लाखों रुपये का ब्याज बचता है।डेट स्नोबॉल मेथड (Debt Snowball Method - मनोवैज्ञानिक रूप से सबसे असरदार): यदि आप मानसिक रूप से बहुत ज्यादा तनाव में हैं और आपको त्वरित आत्मबल की जरूरत है, तो इस तरीके को अपनाएं। इसमें ब्याज दर को नजरअंदाज करते हुए सबसे छोटी मूलधन राशि वाले कर्ज (जैसे 20,000 रुपये का कोई छोटा पर्सनल लोन या गैजेट ईएमआई) को सबसे पहले पूरा चुकाकर बंद कर दिया जाता है। एक कर्ज के पूरी तरह खत्म होते ही जो मानसिक संतोष और गति मिलती है, वह आपको अगले बड़े कर्ज से निपटने की ऊर्जा देती है।डेट कंसॉलिडेशन: महंगे पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड कर्ज को एक जगह लाएंयदि आपके ऊपर अलग-अलग बैंकों के 4-5 पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड के भारी बिल चल रहे हैं, तो हर महीने अलग-अलग तारीखों पर ईएमआई का प्रबंधन करना सिरदर्द बन जाता है। ऐसी स्थिति में 'डेट कंसॉलिडेशन' (Debt Consolidation) का सहारा लें:अपने बैंक से बात करके कम ब्याज दर (लगभग 10.5% से 12%) पर एक बड़ा कंसॉलिडेशन लोन या बैलेंस ट्रांसफर लोन लें।इस एक लोन की रकम से अपने सभी महंगे क्रेडिट कार्ड आउटस्टैंडिंग (36%+) और छोटे-मोटे पर्सनल लोन (16%+) का पूरा भुगतान एक ही दिन में कर दें।अब आपको 5 जगह अलग-अलग ब्याज देने के बजाय केवल एक जगह कम ब्याज दर पर एक ही ईएमआई चुकानी होगी, जिससे आपकी मासिक ईएमआई तुरंत 20% से 30% तक घट जाएगी।50/30/20 बजट फॉर्मूले को रीसेट करें: लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन पर लगाएं ब्रेक1 लाख रुपये की सैलरी का पुनर्गठन करने के लिए सामान्य 50/30/20 नियम को 'डेट-पेऑफ मोड' में बदलना होगा। जब तक आपके ऊपर उच्च ब्याज वाला कर्ज है, तब तक अपने पैसे को इस प्रकार विभाजित करें:45% अनिवार्य आवश्यकताएं (Needs - ₹45,000): मकान किराया, ग्रॉसरी, बिजली-पानी का बिल, बच्चों की स्कूल फीस और बुनियादी आवागमन खर्च।40% आक्रामक कर्ज भुगतान (Aggressive Debt Payoff - ₹40,000): नियमित ईएमआई और कर्ज का प्री-पेमेंट।10% आपातकालीन फंड व न्यूनतम बचत (Emergency Fund - ₹10,000): किसी अप्रत्याशित मेडिकल खर्च के लिए लिक्विड फंड में जमा करें, ताकि दोबारा नया कर्ज न लेना पड़े।5% गैर-जरूरी शौक व मनोरंजन (Wants - ₹5,000): जब तक कर्ज खत्म नहीं होता, तब तक वीकेंड पार्टियों, महंगे कपड़ों, बाहर खाने और गैर-जरूरी गैजेट्स की खरीदारी पर कठोर नियंत्रण रखें।क्रेडिट कार्ड के 'मिनिमम ड्यू' ट्रैप से तुरंत बाहर निकलेंबैंकों द्वारा क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट में जानबूझकर 'मिनिमम अमाउंट ड्यू' (Minimum Amount Due) का विकल्प प्रमुखता से दिखाया जाता है, जो कुल बिल का केवल 5% होता है। लाखों वेतनभोगी इसे देखकर केवल मिनिमम ड्यू भरते हैं और सोचते हैं कि वे डिफॉल्ट से बच गए। वास्तव में, बचे हुए 95% बैलेंस पर बैंक हर महीने 3% से 3.5% (सालाना 40% से अधिक) का चक्रवृद्धि ब्याज वसूलते हैं। क्रेडिट कार्ड के बकाए को तुरंत खत्म करें और जब तक पिछला हिसाब साफ न हो जाए, तब तक उस कार्ड को अपने फोन के ई-कॉमर्स ऐप्स से हटा दें।12 से 24 महीने का कर्ज मुक्ति एक्शन प्लान: ऐसे करें शुरुआतमहीना 1 से 3: सभी कर्जों की सूची बनाएं, फिजूलखर्ची पूरी तरह रोकें, 50,000 रुपये का एक छोटा आपातकालीन फंड बनाएं और अपने क्रेडिट कार्ड स्वाइप करना पूरी तरह बंद कर दें।महीना 4 से 12: अपनी सैलरी इंक्रीमेंट, बोनस, टैक्स रिफंड या किसी भी अतिरिक्त आय का 100% हिस्सा सीधे कर्ज के प्री-पेमेंट (Principal Foreclosure) में लगाएं। डेट एवलांच पद्धति से सबसे महंगे पर्सनल लोन को समाप्त करें।महीना 13 से 24: जैसे ही महंगे लोन खत्म हों, उनसे बचने वाली मासिक ईएमआई की रकम को बाकी बचे सिक्योर्ड लोन (जैसे कार लोन या होम लोन पार्ट पेमेंट) में झोंक दें।कर्ज से मुक्ति कोई रातों-रात होने वाला चमत्कार नहीं है, बल्कि यह वित्तीय अनुशासन, त्याग और सटीक रणनीति का परिणाम है। 1 लाख रुपये की आय आपको बहुत तेजी से वित्तीय रूप से स्वतंत्र बना सकती है, बशर्ते आप अपनी सैलरी से बैंकों की जेब भरने के बजाय अपने भविष्य की नींव मजबूत करें।
परिवार में किसी प्रियजन के निधन के बाद स्वजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है। ऐसे मुश्किल समय में यदि दिवंगत व्यक्ति के बैंक खाते में जमा पूंजी को निकालने की कानूनी जानकारी न हो, तो परिवार को कई तरह की आर्थिक व प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आम तौर पर लोगों को लगता है कि किसी मृत व्यक्ति के खाते से पैसा निकालना बेहद जटिल और कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने वाला काम है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आम नागरिकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए मृत जमाकर्ताओं (Deceased Depositors) के बैंक खातों के निपटान (Claim Settlement) के लिए बहुत ही पारदर्शी, सरल और समयबद्ध दिशा-निर्देश तय किए हैं। चाहे खाते में नॉमिनी का नाम दर्ज हो, खाता जॉइंट हो या फिर बिना किसी नॉमिनी के खाता खोला गया हो—आरबीआई के नियमों के अनुसार सही प्रक्रिया अपनाकर आप आसानी से धनराशि प्राप्त कर सकते हैं।गलती से भी न करें यह काम: मृत्यु के बाद ATM या नेट बैंकिंग से पैसे निकालना गैरकानूनीअधिकांश मामलों में देखा जाता है कि परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु के बाद लोग तुरंत उनके एटीएम कार्ड, यूपीआई (UPI) या नेट बैंकिंग के जरिए पैसे निकाल लेते हैं। बैंकिंग और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा करना पूरी तरह गैरकानूनी और दंडनीय अपराध माना जा सकता है। मृत्यु के क्षण से ही संबंधित व्यक्ति के बैंक खाते पर उसका व्यक्तिगत अधिकार समाप्त हो जाता है और खाता औपचारिक रूप से कानूनी वारिसों की धरोहर बन जाता है। यदि परिवार का कोई एक सदस्य बिना अन्य कानूनी वारिसों की सहमति के चोरी-छिपे डिजिटल माध्यम से पैसे निकालता है, तो भविष्य में संपत्ति विवाद की स्थिति में उसके खिलाफ धोखाधड़ी और गबन की कानूनी कार्रवाई हो सकती है। सबसे सही और सुरक्षित तरीका यही है कि बैंक को खाताधारक के निधन की विधिवत सूचना दी जाए और अधिकृत प्रक्रिया के तहत ही क्लेम किया जाए।केस 1: खाते में नॉमिनी (Nominee) दर्ज होने पर पैसे पाने की आसान प्रक्रियायदि दिवंगत खाताधारक ने अपने बचत खाते, चालू खाते या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में किसी को नॉमिनी (नामांकित व्यक्ति) बनाया था, तो पैसे निकालने की प्रक्रिया बेहद आसान और तेज होती है।आरबीआई के नियमों के अनुसार, बैंक में नॉमिनी केवल एक ट्रस्टी या कस्टोडियन की भूमिका निभाता है। खाताधारक की मृत्यु के बाद बैंक नॉमिनी को पूरी जमा राशि सौंपने के लिए बाध्य है। इसके लिए नॉमिनी को निम्नलिखित प्रक्रिया अपनानी होती है:संबंधित बैंक शाखा में जाकर 'Deceased Claim Form (For Nominee)' प्राप्त करें या बैंक की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड करें।फॉर्म में दिवंगत खाताधारक का खाता नंबर, मृत्यु की तिथि और नॉमिनी का पूरा विवरण भरें।खाताधारक के मूल मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) की प्रमाणित प्रति संलग्न करें।नॉमिनी को अपना पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी) और पते का प्रमाण (KYC Documents) जमा करना होगा।यदि बैंक में दो गवाहों (Witnesses) के हस्ताक्षर की मांग की जाती है, तो बैंक द्वारा निर्धारित प्रारूप में खाताधारक या प्रतिष्ठित व्यक्तियों के हस्ताक्षर करवाएं।दस्तावेज जमा होते ही बैंक खाता बंद करके पूरी राशि नॉमिनी के खाते में ट्रांसफर कर देता है या उसके नाम से डिमांड ड्राफ्ट (DD) जारी कर देता है।केस 2: जॉइंट बैंक खाता (Joint Account) होने पर 'आइदर या सर्वाइवर' का नियमयदि खाता दो या दो से अधिक व्यक्तियों के नाम पर था और खाते का संचालन 'Either or Survivor' (कोई एक या उत्तरजीवी) या 'Former or Survivor' मोड पर था, तो प्रक्रिया और भी सरल हो जाती है:यदि दो खाताधारकों में से एक का निधन हो जाता है, तो जीवित खाताधारक (Survivor) को खाते की पूरी जमा पूंजी प्राप्त करने और खाता जारी रखने का पूर्ण अधिकार होता है।जीवित खाताधारक को केवल बैंक शाखा में जाकर एक साधारण आवेदन पत्र और मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करना होता है।इसके बाद बैंक मृतक का नाम खाते से हटा देता है और खाता जीवित व्यक्ति के नाम पर एकल (Single) रूप में संचालित होने लगता है। इसके लिए किसी अन्य वारिस की अनापत्ति (NOC) की जरूरत नहीं पड़ती, जब तक कि किसी सक्षम न्यायालय का कोई रोक आदेश न हो।केस 3: जब खाते में कोई नॉमिनी दर्ज न हो (Without Nomination) तो क्या करें?यदि दिवंगत खाताधारक ने किसी को नॉमिनी नहीं बनाया था और खाता भी एकल था, तो ऐसी स्थिति में बैंक खाते की जमा राशि उनके कानूनी उत्तराधिकारियों (Legal Heirs) को मिलती है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, मुस्लिम पर्सनल लॉ या भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार जो भी व्यक्ति क्लास-1 लीगल हेयर (जैसे पत्नी, बच्चे, माता आदि) की श्रेणी में आते हैं, वे इसके हकदार होते हैं। इस स्थिति में आरबीआई ने दो अलग-अलग श्रेणियां तय की हैं:छोटे दावों के लिए सरलीकृत प्रक्रिया (Simplified Procedure for Threshold Limits): आरबीआई के निर्देशानुसार प्रत्येक बैंक ने एक निश्चित सीमा (जैसे ₹50,000 से लेकर ₹5,00,000 तक, जो बैंक के बोर्ड पर निर्भर करती है) तय कर रखी है। यदि खाते में जमा रकम इस निर्धारित सीमा से कम है, तो बैंक बिना कोर्ट के चक्कर लगवाए आसान दस्तावेजों के आधार पर भुगतान कर देता है। इसके लिए सभी कानूनी वारिसों द्वारा हस्ताक्षरित क्लेम फॉर्म, एक क्षतिपूर्ति बंधपत्र (Indemnity Bond), दो सॉल्वेंट जमानतदारों (Sureties) के हस्ताक्षर और अन्य सभी वारिसों का अनापत्ति पत्र (Letter of Disclaimer/NOC) देना होता है, जिसमें वे किसी एक सदस्य के पक्ष में क्लेम छोड़ने की सहमति देते हैं।बड़ी रकम के मामले में जरूरी कानूनी दस्तावेज: यदि खाते में जमा राशि बैंक की निर्धारित सीमा से अधिक है और कोई नॉमिनी नहीं है, तो बैंक सुरक्षा कारणों से कानूनी प्रमाण मांग सकता है:सक्सेशन सर्टिफिकेट (Succession Certificate): यह संबंधित सिविल कोर्ट द्वारा जारी किया जाता है, जो यह प्रमाणित करता है कि मृतक की चल संपत्ति और बैंक खातों पर किस उत्तराधिकारी का कितना कानूनी हक है।लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन या प्रोबेट (Probate of Will): यदि मृतक ने अपनी मृत्यु से पहले कोई वैध वसीयत (Will) बनाई थी, तो कोर्ट से उसका प्रोबेट प्राप्त करके बैंक में प्रस्तुत किया जा सकता है।RBI का सख्त निर्देश: सभी दस्तावेज मिलने के 15 दिनों में बैंक को करना होगा क्लेम सेटलआरबीआई के मास्टर सर्कुलर के अनुसार, यदि नॉमिनी या कानूनी वारिसों ने सभी आवश्यक और वैध दस्तावेज बैंक में जमा कर दिए हैं, तो बैंक को अधिकतम 15 दिनों (15 Days Settlement Rule) के भीतर क्लेम का पूरा निपटारा करना अनिवार्य है। बैंक अनावश्यक रूप से ग्राहकों को परेशान नहीं कर सकते और न ही बिना ठोस कारण के सक्सेशन सर्टिफिकेट की मांग कर सकते हैं, यदि दावा बैंक की आंतरिक सीमा के भीतर आता है। यदि कोई बैंक शाखा 15 दिनों के भीतर क्लेम सेटल करने में आनाकानी करती है, तो ग्राहक बैंक के नोडल अधिकारी (Banking Ombudsman) या आरबीआई के सीएमएस (CMS Portal) पर सीधे शिकायत दर्ज करा सकते हैं।लावारिस जमा (Unclaimed Deposits) और RBI का 'उद्गम' (UDGAM) पोर्टलकई बार ऐसा होता है कि परिवार के सदस्यों को यह पता ही नहीं होता कि दिवंगत व्यक्ति के किस-किस बैंक में खाते थे या उनमें कितना पैसा जमा था। यदि किसी बैंक खाते में 10 साल तक कोई लेन-देन नहीं होता, तो वह रकम आरबीआई के 'डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड' (DEA Fund) में ट्रांसफर हो जाती है।ऐसे लावारिस खातों और पैसों का पता लगाने के लिए आरबीआई ने एक केंद्रीकृत वेब पोर्टल 'UDGAM' (Unclaimed Deposits – Gateway to Access inforMation) शुरू किया है। नागरिक इस पोर्टल पर मुफ्त में रजिस्ट्रेशन करके मृतक का नाम, जन्मतिथि, पैन कार्ड या आधार नंबर डालकर देश भर के विभिन्न बैंकों में मौजूद लावारिस खातों और अनक्लेम्ड पैसों की जानकारी कुछ ही मिनटों में खोज सकते हैं और फिर संबंधित बैंक में जाकर क्लेम कर सकते हैं।बैंक में क्लेम दाखिल करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की पूरी चेकलिस्टबैंक द्वारा निर्धारित प्रारूप में भरा हुआ क्लेम फॉर्म (Claim Application Form)नगर निगम, ग्राम पंचायत या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी मूल मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate)मृतक की बैंक पासबुक, चेकबुक, डेबिट कार्ड या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की मूल रसीदक्लेम करने वाले नॉमिनी या कानूनी वारिसों के आधार कार्ड और पैन कार्ड (KYC)बिना नॉमिनी वाले मामलों में: लीगल हेयर सर्टिफिकेट (Legal Heir Certificate), लेटर ऑफ इंडेम्निटी, शपथ पत्र (Affidavit) और अन्य वारिसों का एनओसी फॉर्मबैंक द्वारा मांगे जाने पर दो स्वतंत्र व्यक्तियों (गवाहों) का परिचय और हस्ताक्षर
रांची में पिछले 24 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच झारखंड सरकार ने अभ्यर्थियों की मांगों पर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एजेंसी टीडीपीएल के जरिए कराई गई झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा समेत उससे जुड़ी सभी परीक्षाओं और उनके परिणामों को रद्द करने का ऐलान किया है। सरकार ने साल 2014 से अब तक हुई भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच कराने का भी फैसला लिया है। बता दें कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के आरोपों को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची में लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र लंबे समय से धरने पर बैठे थे। इससे पहले छात्रों और मंत्रियों की टीम के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी थी। अब सरकार के फैसले के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच खुशी का माहौल है। मौजूद जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ बैठक के बाद छात्रों के पक्ष में यह निर्णय लिया। सरकार ने विवादित एजेंसी से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को तत्काल रोकने के निर्देश भी दिए हैं। इसका असर उन परीक्षाओं पर पड़ेगा जिनके आयोजन या परिणाम में संबंधित एजेंसी की भूमिका रही है। सरकार ने सिर्फ हालिया विवाद तक खुद को सीमित नहीं रखा है। साल 2014 से अब तक हुई भर्ती परीक्षाओं की भी जांच कराने का निर्णय लिया गया है। यह जांच सीआईडी करेगा। सरकार का कहना है कि इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि पिछले वर्षों में भर्ती परीक्षाओं के दौरान कहीं नियमों की अनदेखी या किसी तरह की अनियमितता तो नहीं हुई। हेमंत सोरेन ने कहा है कि सीआईडी और विशेष जांच दल की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। उन्होंने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग में भर्ती कुछ लोगों पर झारखंड लोक सेवा आयोग से जुड़ी परीक्षाओं में धोखाधड़ी और धांधली के आरोपों का भी जिक्र किया। इन मामलों में गिरफ्तारियां होने की जानकारी भी सामने आई है। इसी बीच रांची में सीआईडी ने झारखंड लोक सेवा आयोग की पूर्व सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य के निजी सहायक बीएन राम को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी झारखंड लोक सेवा आयोग से जुड़े मामले की जांच के दौरान हुई है। अब इस मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ कई और तथ्य सामने आने की उम्मीद है। गौरतलब है कि सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति बनाने का भी फैसला किया है। समिति परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों की विस्तृत जांच करेगी। सरकार ने जांच प्रक्रिया को पारदर्शी रखने की बात कही है। वहीं, परीक्षा व्यवस्था में सुधार की जिम्मेदारी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अमिताभ कौशल को दी गई है। सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ बनाए गए कानून का भी जिक्र किया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि युवाओं के हित में सरकार पहले ही इस संबंध में कानून बना चुकी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार के फैसले की जानकारी मिलते ही जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मिठाई बांटकर जश्न मनाया। अभ्यर्थियों ने इसे अपने लंबे आंदोलन की बड़ी जीत बताया। हालांकि, अब उनके सामने नई परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल है। सरकार को यह तय करना होगा कि रद्द परीक्षाओं को दोबारा कब और किस व्यवस्था के तहत कराया जाएगा। वहीं, 2014 से अब तक की जांच में क्या सामने आता है और नई परीक्षा व्यवस्था कितनी भरोसेमंद बनती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
UPSSSC ने 4 साल बाद जारी किया VPO का रिजल्ट, आजतक की खबर का असर
लंबे इंतजार के बाद UPSSSC ने ग्राम पंचायत अधिकारी मुख्य परीक्षा 2023 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया है. 1,468 पदों पर चयन हुआ है. आजतक लगातार इस मामले में अभ्यर्थियों की आवाज उठा रहा था.
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से लेकर फिटनेस एक्सपर्ट्स तक, हर कोई सुबह की शुरुआत नींबू और चिया सीड्स के पानी (Lemon Chia Water) से करने की सलाह दे रहा है। महानगरों से लेकर छोटे कस्बों तक, वजन घटाने, पेट की चर्बी पिघलाने और चेहरे पर प्राकृतिक चमक पाने की चाह में लाखों लोग अपनी दिनचर्या की शुरुआत इसी जादुई समझे जाने वाले डिटॉक्स ड्रिंक से कर रहे हैं। बिना सोचे-समझे किसी भी स्वास्थ्य प्रवृत्ति (Health Trend) को अपनाना कभी-कभी फायदे की जगह गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है। न्यूट्रिशनिस्ट और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट का स्पष्ट मानना है कि अगर आप चिया सीड्स और नींबू के इस मिश्रण को सही तरीके, सही अनुपात और अपनी शारीरिक स्थिति को समझे बिना ले रहे हैं, तो यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर नकारात्मक असर डाल सकता है।शरीर पर नींबू और चिया सीड्स के मिश्रण का वास्तविक असरचिया सीड्स को सुपरफूड माना जाता है क्योंकि इसमें प्रचुर मात्रा में घुलनशील फाइबर (Soluble Fiber), ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन और आवश्यक मिनरल्स होते हैं। जब इन बीजों को पानी में भिगोया जाता है, तो ये अपने वास्तविक आकार से लगभग 10 से 12 गुना पानी सोखकर एक गाढ़े जेल (Mucilage) का रूप ले लेते हैं। वहीं नींबू विटामिन-सी, फ्लेवोनोइड्स और साइट्रिक एसिड का समृद्ध स्रोत है।जब यह मिश्रण सुबह खाली पेट पिया जाता है, तो यह आंतों में भोजन की गति को धीमा करता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और अनावश्यक भूख नहीं लगती। यह शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित करता है और मेटाबॉलिज्म को गति देता है। शरीर विज्ञान के अनुसार, फाइबर और एसिड का यह शक्तिशाली कॉम्बिनेशन हर किसी की पाचन प्रकृति के अनुकूल नहीं होता।क्या सचमुच घटती है पेट की चर्बी या यह सिर्फ एक भ्रम है?वजन घटाने को लेकर समाज में यह भ्रांति फैल चुकी है कि नींबू-चिया पानी पीने से पेट की चर्बी अपने आप पिघलने लगती है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और पोषण विशेषज्ञ इस बात को साफ करते हैं कि कोई भी पेय सीधे तौर पर वसा (Fat Cells) को खत्म नहीं कर सकता।यह ड्रिंक केवल एक सहायक की भूमिका निभाता है। इसमें मौजूद उच्च फाइबर तृप्ति हार्मोन को सक्रिय करता है, जिससे दिनभर में कैलोरी की खपत कम होती है। यदि कोई व्यक्ति नींबू-चिया पानी पीने के बाद भी अस्वास्थ्यकर आहार, अत्यधिक शर्करा और निष्क्रिय दिनचर्या बनाए रखता है, तो इस ड्रिंक से वजन में कोई कमी नहीं आएगी। स्थायी वजन नियंत्रण केवल कैलोरी डेफिसिट और नियमित शारीरिक व्यायाम से ही संभव है।नींबू-चिया पानी के 5 छिपे हुए नुकसान जिन्हें जानना जरूरी हैदांतों के इनेमल का तेजी से क्षरण: नींबू में साइट्रिक एसिड की मात्रा अधिक होती है। जब कोई व्यक्ति रोज सुबह खाली पेट इस अम्लीय घोल को पीता है, तो यह दांतों की सबसे बाहरी सुरक्षात्मक परत यानी इनेमल (Tooth Enamel) को कमजोर करने लगता है। इसके कारण दांतों में झनझनाहट (Sensitivity), पीलापन और कैविटी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।अधकच्चे बीजों से भोजन नली में रुकावट का जोखिम: चिया सीड्स में पानी सोखने की असाधारण क्षमता होती है। यदि बीजों को पर्याप्त समय तक पानी में नहीं भिगोया गया और वे पेट में जाने के बाद फूलने लगे, तो वे भोजन नली (Esophagus) में फंस सकते हैं। इससे सांस लेने और निगलने में गंभीर अवरोध उत्पन्न हो सकता है, जो मेडिकल इमरजेंसी का रूप ले सकता है।पेट में तेज मरोड़, गैस और ब्लोटिंग: जो लोग आमतौर पर कम फाइबर वाला भोजन करते हैं और अचानक रोज सुबह चिया सीड्स की बड़ी खुराक लेना शुरू कर देते हैं, उनकी आंतें इतने फाइबर को एक साथ पचाने में असमर्थ होती हैं। इसके परिणामस्वरूप पेट फूलना, अत्यधिक गैस, ऐंठन और डायरिया जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।ब्लड थिनर और ब्लड प्रेशर की दवाओं के साथ रिएक्शन: चिया सीड्स में उच्च मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जिसमें प्राकृतिक रूप से रक्त को पतला करने वाले गुण होते हैं। यदि कोई मरीज पहले से खून पतला करने वाली दवाएं (जैसे एस्पिरिन, वारफारिन) या उच्च रक्तचाप की दवाएं ले रहा है, तो अधिक चिया सीड्स का सेवन उसके रक्तचाप को अप्रत्याशित रूप से गिरा सकता है।गंभीर एसिड रिफ्लक्स और सीने में जलन: जिन लोगों को पहले से गैस्ट्राइटिस, पेप्टिक अल्सर या जीईआरडी (GERD) की शिकायत है, उनके लिए खाली पेट नींबू पानी का सेवन पेट में जलन, खट्टी डकारें और सीने में तेज दर्द का कारण बन सकता है।किन लोगों को इस ड्रिंक से पूरी तरह दूर रहना चाहिए?पेट के पुराने अल्सर या हाइपरएसिडिटी से पीड़ित मरीज। इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) से जूझ रहे लोग, जिनका पाचन तंत्र अत्यधिक फाइबर के प्रति संवेदनशील होता है। लो ब्लड प्रेशर (Hypotension) के मरीज। जिन लोगों को किसी भी प्रकार की बीज जनित एलर्जी (Seed Allergy) की समस्या हो।नींबू-चिया पानी तैयार करने और पीने का 100% सही तरीकामात्रा का ध्यान रखें: एक गिलास पानी के लिए केवल 1 छोटा चम्मच (लगभग 5 से 10 ग्राम) चिया सीड्स ही पर्याप्त हैं। कभी भी एक साथ दो-तीन चम्मच का इस्तेमाल न करें।भिगोने का सही समय: चिया के बीजों को कम से कम 30 से 45 मिनट तक सामान्य या गुनगुने पानी में भिगोएं, ताकि वे पूरी तरह जेल बन जाएं। सबसे बेहतर तरीका यह है कि इन्हें रातभर पानी में भिगोकर छोड़ दिया जाए।नींबू का संतुलित इस्तेमाल: एक गिलास में केवल आधा ताजा नींबू निचोड़ें। बहुत ज्यादा खट्टा या तीखा घोल बनाने से बचें।स्ट्रॉ का अनिवार्य उपयोग: दांतों के इनेमल को एसिड के सीधे संपर्क से बचाने के लिए इस ड्रिंक को हमेशा एक स्ट्रॉ की मदद से पिएं और पीने के तुरंत बाद सादे पानी से अच्छी तरह कुल्ला करें।दिनभर पर्याप्त पानी पिएं: चिया सीड्स का फाइबर तभी सही काम करता है जब शरीर पूरी तरह हाइड्रेटेड हो। यदि आप इस ड्रिंक का सेवन करते हैं, तो दिनभर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी अवश्य पिएं ताकि आंतों में सूखापन न आए।सेहत किसी भी शॉर्टकट से नहीं बल्कि संतुलन, सही जानकारी और निरंतरता से बनती है। नींबू और चिया सीड्स का पानी निश्चित रूप से पोषक तत्वों का खजाना है, लेकिन इसे चमत्कार मानकर आंख मूंदकर पीने के बजाय अपने शरीर की प्रतिक्रिया को समझना और सही नियमों का पालन करना ही आपको स्वस्थ और फिट रख सकता है।
परीक्षा में गड़बड़ियों पर शिक्षा मंत्री ने एनटीए को लगाई लताड़, मांगी रिपोर्ट
शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने यूजीसी नेट परीक्षा के प्रश्न पत्रों में मिली गड़बड़ियों को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है।
सुबह की शुरुआत एक सेहतमंद ड्रिंक से करना आज की लाइफस्टाइल में सबसे लोकप्रिय हेल्थ ट्रेंड बन चुका है। फिटनेस एक्सपर्ट्स से लेकर न्यूट्रिशनिस्ट तक, हर कोई सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू का रस और भीगे हुए चिया सीड्स (Lemon Chia Seed Water) मिलाकर पीने की सलाह दे रहा है। सुपरफूड की श्रेणी में शामिल चिया के छोटे-छोटे बीज और विटामिन-सी से भरपूर नींबू का यह संयोजन शरीर को भीतर से डिटॉक्स करने, ऊर्जा का स्तर बढ़ाने और कई जीवनशैली जनित बीमारियों से बचाने में बेहद असरदार माना जाता है। यदि आप भी नियमित रूप से इस मॉर्निंग डिटॉक्स ड्रिंक का सेवन करते हैं, तो आपको इसके शरीर पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभाव, पोषण मूल्य और सही सेवन नियमों की पूरी जानकारी होनी चाहिए।मेटाबॉलिज्म बूस्ट और वजन नियंत्रण में अचूक मददगारनींबू और चिया सीड्स का मिश्रण वजन घटाने और पेट की जिद्दी चर्बी (Belly Fat) को कम करने के लिए सबसे ज्यादा आजमाया जाने वाला नुस्खा है। चिया के बीजों में प्रचुर मात्रा में घुलनशील फाइबर (Soluble Fiber) पाया जाता है। जब इन बीजों को पानी में भिगोया जाता है, तो ये अपने वजन से 10 से 12 गुना ज्यादा पानी सोख लेते हैं और एक जेल जैसे पदार्थ (Mucilage) में बदल जाते हैं। सुबह खाली पेट इसे पीने से यह जेल पेट में जाकर धीरे-धीरे पचता है, जिससे लंबे समय तक तृप्ति (Satiety) बनी रहती है और बार-बार अस्वस्थ स्नैक्स खाने की इच्छा (Cravings) नियंत्रित होती है। वहीं, नींबू में मौजूद सिट्रिक एसिड और पॉलीफेनोल्स मेटाबॉलिक रेट को बढ़ाते हैं, जिससे शरीर में कैलोरी बर्न होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।पाचन तंत्र, आंतों की सेहत (गट हेल्थ) और कब्ज से राहतआधुनिक जीवनशैली में अनियमित खानपान के कारण कब्ज, एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं आम हैं। चिया सीड्स का फाइबर आंतों की आंतरिक सफाई में झाड़ू की तरह काम करता है। यह मल की मात्रा (Stool Bulk) को बढ़ाकर आंतों की गतिशीलता (Peristalsis) को सुगम बनाता है, जिससे पुरानी से पुरानी कब्ज की समस्या में भी राहत मिलती है। इसके अलावा, चिया सीड्स एक उत्कृष्ट प्रीबायोटिक का काम करते हैं, जो आंत के अच्छे बैक्टीरिया (Gut Microbiome) को पोषण देते हैं। नींबू का रस पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड और पित्त (Bile) के उत्पादन को सक्रिय करता है, जिससे दिनभर जो भी भोजन खाया जाता है, वह आसानी से पच जाता है।ब्लड शुगर स्पाइक को रोकना और इंसुलिन संवेदनशीलताडायबिटीज और प्री-डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए नींबू-चिया पानी एक वरदान साबित हो सकता है। कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन करने के बाद रक्त में ग्लूकोज का स्तर तेजी से बढ़ता है। चिया सीड्स का जिलेटिनस आवरण कार्बोहाइड्रेट के टूटने और ग्लूकोज के अवशोषण की गति को धीमा कर देता है। नियमित रूप से सुबह इस ड्रिंक का सेवन करने से इंसुलिन संवेदनशीलता (Insulin Sensitivity) बेहतर होती है और भोजन के बाद होने वाले शुगर स्पाइक्स को रोकने में मदद मिलती है।दिल की सेहत और बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) में कमीचिया सीड्स को पौधे-आधारित ओमेगा-3 फैटी एसिड यानी अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA) का सबसे समृद्ध स्रोत माना जाता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड रक्त वाहिकाओं की सूजन को कम करने, ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को घटाने और हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। नींबू में पाए जाने वाले फ्लेवोनोइड्स और एंटीऑक्सीडेंट्स धमनियों में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) के जमाव को रोकते हैं। दोनों का यह संयुक्त प्रभाव कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को मजबूत बनाता है और हृदय रोगों के जोखिम को काफी हद तक कम करता है।स्किन ग्लो, हाइड्रेशन और कोलेजन प्रोडक्शन को बढ़ावायदि आपकी त्वचा बेजान, रूखी या मुंहासों से प्रभावित रहती है, तो यह ड्रिंक त्वचा के लिए प्राकृतिक टॉनिक है। नींबू में मौजूद विटामिन-सी एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो शरीर में कोलेजन (Collagen) के प्राकृतिक निर्माण के लिए अनिवार्य है। कोलेजन त्वचा के लचीलेपन और कसाव को बनाए रखता है। दूसरी ओर, चिया सीड्स शरीर की कोशिकाओं को गहराई से हाइड्रेट करते हैं और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं, जिससे चेहरे पर प्राकृतिक चमक और ताजगी बनी रहती है।नींबू-चिया पानी पीते समय न करें ये 4 गंभीर गलतियांकई लोग इस ड्रिंक के फायदों को देखकर इसका गलत तरीके से सेवन करने लगते हैं, जिससे फायदे की जगह नुकसान हो सकता है:सूखे या अधकच्चे चिया सीड्स का सेवन: कभी भी सूखे चिया बीजों को सीधे निगलने या तुरंत पानी में मिलाकर पीने की गलती न करें। इन्हें कम से कम 20-30 मिनट या रात भर पानी में पूरी तरह भीगने देना जरूरी है, वरना ये भोजन नली में जाकर फूल सकते हैं और रुकावट पैदा कर सकते हैं।दांतों के इनेमल का क्षरण: नींबू में मौजूद एसिड दांतों की सुरक्षात्मक परत (Enamel) को कमजोर कर सकता है। इससे बचने के लिए इस ड्रिंक को हमेशा स्ट्रॉ (Straw) से पिएं और पीने के तुरंत बाद सादे पानी से कुल्ला जरूर करें।अत्यधिक मात्रा में सेवन: चिया सीड्स में फाइबर बहुत अधिक होता है। शुरुआत में केवल आधा से एक चम्मच चिया सीड्स ही लें। अचानक ज्यादा मात्रा लेने से पेट दर्द, गैस और दस्त की समस्या हो सकती है।तेज गर्म पानी का उपयोग: उबलते या बहुत गर्म पानी में नींबू का रस और चिया सीड्स न डालें, क्योंकि अत्यधिक तापमान से नींबू का विटामिन-सी नष्ट हो जाता है। हमेशा गुनगुने या सामान्य तापमान के पानी का इस्तेमाल करें।नींबू-चिया ड्रिंक तैयार करने की सही और वैज्ञानिक विधिएक गिलास (लगभग 250-300 मिली) पानी में 1 छोटा चम्मच (लगभग 10-12 ग्राम) साफ चिया सीड्स डालें। इसे चम्मच से अच्छी तरह हिलाएं ताकि बीज आपस में चिपके नहीं, और 20 मिनट के लिए रख दें। जब बीज फूलकर जेल जैसा गाढ़ा रूप ले लें, तब उसमें आधे ताजे नींबू का रस निचोड़ें। यदि चाहें तो इसमें एक चुटकी काला नमक या आधा चम्मच शुद्ध शहद मिला सकते हैं। इसे सुबह शौच के बाद और नाश्ते से 30 से 45 मिनट पहले घूंट-घूंट करके पिएं।
रात के समय लिया गया एक साधारण और पौष्टिक पेय आपकी संपूर्ण सेहत और नींद की गुणवत्ता को पूरी तरह बदल सकता है। आधुनिक जीवनशैली में तनाव, देर रात का खान-पान और स्क्रीन टाइम के कारण अनिद्रा और पेट से जुड़ी समस्याएं आम हो चुकी हैं। ऐसे में कैफीन-युक्त चाय या कॉफी के स्थान पर सोने से करीब 30-45 मिनट पहले पुदीने की ताजी या सूखी पत्तियों से बनी हर्बल चाय (Peppermint Tea) का सेवन शरीर में कई सकारात्मक जैविक बदलाव लाता है। पुदीने में मौजूद एक्टिव कंपाउंड 'मेंथॉल' (Menthol) और एंटी-ऑक्सीडेंट्स नसों को शांत करने के साथ-साथ आंतरिक अंगों को डिटॉक्स करने में प्रभावी भूमिका निभाते हैं।पाचन तंत्र को आराम और पेट फूलने (ब्लोटिंग) से तुरंत राहतरात को भारी या गरिष्ठ भोजन करने के बाद अक्सर पेट में भारीपन, गैस और अपच की शिकायत होती है, जो आरामदायक नींद में सबसे बड़ा रोड़ा बनती है। पुदीने की चाय में प्राकृतिक एंटीस्पास्मोडिक (Antispasmodic) गुण होते हैं, जो जठरांत्र संबंधी मार्ग (Gastrointestinal tract) की मांसपेशियों को शिथिल करते हैं। मेंथॉल पित्त (Bile) के प्रवाह को उत्तेजित करता है, जिससे रात के समय भोजन का पाचन तेजी से और सुचारू रूप से होता है। इसके नियमित सेवन से सुबह उठते ही पेट साफ रहता है और एसिडिटी या पेट फूलने जैसी दिक्कतों से स्थायी राहत मिलती है।तनाव हार्मोन 'कोर्टिसोल' में कमी और मांसपेशियों को शिथिलतापुदीने की खुशबू और इसमें पाए जाने वाले वाष्पशील तेल तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर शामक (Sedative) प्रभाव डालते हैं। जब आप सोने से पहले गर्म पुदीने की चाय की चुस्कियां लेते हैं, तो इसकी भाप और तत्व मस्तिष्क में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन कोर्टिसोल के स्तर को कम करने में मदद करते हैं। यह शरीर की थकी हुई मांसपेशियों में जकड़न को दूर करता है और शरीर को 'फाइट ऑर फ्लाइट' मोड से बाहर निकालकर विश्राम की अवस्था (Rest and Digest mode) में ले जाता है।कैफीन-मुक्त फॉर्मूला और गहरी नींद (REM Sleep) को बढ़ावाकई हर्बल चायों में कम मात्रा में ही सही लेकिन कैफीन मौजूद होता है, जो नींद के चक्र (Circadian Rhythm) को बाधित कर सकता है। पुदीने की चाय स्वाभाविक रूप से 100% कैफीन-मुक्त होती है। यह मस्तिष्क में मेलाटोनिन के संतुलन को प्रभावित किए बिना शरीर के तापमान को संतुलित करती है। जिन लोगों को रात में बार-बार जागने या बेचैन नींद आने की समस्या (Mild Insomnia) होती है, उनके लिए यह एक सुरक्षित प्राकृतिक स्लीप-ऐड का काम करती है।सांस की नली की सफाई और खराश व बंद नाक से छुटकारामौसम बदलने पर होने वाली एलर्जी, बंद नाक या गले की खराश रात में सांस लेने में रुकावट पैदा करती है, जिसके कारण व्यक्ति मुंह से सांस लेने लगता है और खर्राटे की समस्या बढ़ जाती है। पुदीने में मौजूद मेंथॉल एक प्राकृतिक डिकंजेस्टेंट (Decongestant) और एंटीबैक्टीरियल एजेंट है। पुदीने की गर्म चाय की भाप श्वसन मार्ग के कफ को पतला करती है और साइनस कैविटी को खोलती है, जिससे रात भर फेफड़ों तक ऑक्सीजन का प्रवाह निर्बाध रूप से होता है।तनावजनित सिरदर्द और माइग्रेन के दर्द में प्राकृतिक शांतिदिनभर के मानसिक काम, स्क्रीन के दबाव और थकान से कई लोगों को शाम ढलते ही माथे और कनपटी में भारीपन महसूस होता है। पुदीने की चाय रक्त परिसंचरण (Blood Circulation) को सुधारने और रक्त वाहिकाओं की सूजन को कम करने में मददगार है। रात को सोने से पहले इसे पीने से तनावजनित सिरदर्द (Tension Headache) से बिना किसी पेनकिलर के आराम मिलता है, जिससे मस्तिष्क पूरी तरह शांत होकर सोने के लिए तैयार होता है।मौखिक स्वच्छता और सुबह सांसों की ताजगीपुदीने में मौजूद जीवाणुरोधी और रोगाणुरोधी यौगिक रात भर मुंह के अंदर हानिकारक बैक्टीरिया के पनपने की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं। अधिकांश लोग सुबह उठते ही मुंह की बदबू (Morning Breath) और सूखेपन का अनुभव करते हैं। रात में पुदीने की चाय पीने से मुंह की लार ग्रंथियां सक्रिय रहती हैं और हानिकारक कीटाणु नष्ट होते हैं, जिससे सुबह उठने पर ताजगी बनी रहती है।किन्हें बरतनी चाहिए सावधानी?पुदीने की चाय जहां अधिकांश लोगों के लिए बेहद गुणकारी है, वहीं जिन लोगों को गंभीर जीईआरडी (GERD) या अत्यधिक एसिड रिफ्लक्स (सीने में तेज जलन) की समस्या है, उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए। मेंथॉल इसोफेगल स्फिंक्टर (पेट और भोजन नली के बीच का वॉल्व) को अधिक रिलैक्स कर सकता है, जिससे पेट का एसिड ऊपर की ओर आ सकता है। ऐसे लोगों को इसका सेवन सीमित मात्रा में या चिकित्सक की सलाह पर ही करना चाहिए।पुदीने की चाय बनाने की सही विधिएक पैन में एक से डेढ़ कप पानी उबालें। आंच बंद करके उसमें 7-8 ताजी धुली हुई पुदीने की पत्तियां (या एक चम्मच सूखी पत्तियां) डालें। पैन को ढककर 5 से 7 मिनट के लिए भाप में पत्तियों का सत्व उतरने दें। इसके बाद इसे छान लें और गुनगुना ही पिएं। स्वाद और लाभ बढ़ाने के लिए इसमें आधा चम्मच शहद या कुछ बूंदें नींबू का रस भी मिलाया जा सकता है।
चढ़ावा चोरी पर SIT ने ट्रस्ट को सौंपी फाइनल रिपोर्ट, अब तक की कार्रवाई का भी ब्यौरा
अयोध्या में चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी फाइनल रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के गृह विभाग को सौंप दी है, जिसे अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा गया है.
10 राज्य, 31 प्लांट और हजारों नौकरियां... इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए सरकार का नया प्लान
केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण मैन्यूफैक्चरिंग के लिए 31 निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिससे 10 राज्यों में 7,877 करोड़ रुपये के निवेश से 9,000 से अधिक नौकरियां पैदा होंगी।
होटल जैसे खिले-खिले जीरा राइस बनेंगे घर पर, बस अपनाएं ये टिप्स
Jeera Rice Recipe:अगर आप दाल, राजमा, छोले या कढ़ी के साथ कुछ स्वादिष्ट और खुशबूदार चावल बनाना चाहते हैं तो जीरा राइस एक बेहतरीन ऑप्शन है. इसे बनाना बेहद आसान है और कुछ ही मसालों की मदद से आप घर पर रेस्टोरेंट जैसा स्वाद पा सकते हैं.
Census 2027: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बर्फीले इलाकों में डिजिटल जनगणना शुरू
भारत की 16वीं और आजादी के बाद 8वीं जनगणना (Census 2027) का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण—जनसंख्या गणना (Population Enumeration)—शुरू हो चुका है। गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय (RGI) द्वारा जारी अधिसूचना के तहत, देश के दुर्गम और बर्फीले क्षेत्रों में समय से पहले जनगणना प्रक्रिया संचालित की जा रही है। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख सहित जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के उच्च पर्वतीय और बर्फबारी से प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों के लिए 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक सेल्फ-इन्यूमिरेशन (ऑनलाइन खुद से जानकारी दर्ज करने) का विकल्प सक्रिय कर दिया गया है। इसके बाद 1 सितंबर से 30 सितंबर तक प्रगणक घर-घर जाकर इस डेटा का सत्यापन करेंगे।बर्फीले और दुर्गम इलाकों में समय से पहले शुरुआत की वजहउत्तर भारत के हिमालयी क्षेत्रों—विशेषकर लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा, पुंछ, डोडा जैसे उच्च पर्वतीय जिलों, हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी (जैसे 15,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित कोमिक गांव) और उत्तराखंड के सीमांत इलाकों में अक्टूबर के बाद भीषण बर्फबारी शुरू हो जाती है। सर्दियों में अत्यधिक ठंड और भारी बर्फ के कारण कई दूरदराज के गांव महीनों तक देश के बाकी हिस्सों से कटे रहते हैं। इसी मौसमी चुनौती को देखते हुए सरकार ने इन गैर-समकालिक (Non-Synchronous) क्षेत्रों में मुख्य राष्ट्रीय गणना से पहले ही आबादी की गिनती पूरी करने की योजना बनाई है। जहां देश के मैदानी और सामान्य इलाकों में जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगी, वहीं इन विशेष बर्फीले क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि (Reference Date) 1 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि तय की गई है।घर बैठे कैसे दर्ज करें जानकारी: 17 से 31 अगस्त तक की ऑनलाइन प्रक्रियादेश के इतिहास में पहली बार नागरिकों को यह अधिकार दिया गया है कि वे खुद अपनी और अपने परिवार की जानकारी आधिकारिक पोर्टल पर भर सकें। इसके लिए नागरिकों को किसी सरकारी कर्मचारी के आने का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी।नागरिक आधिकारिक सेल्फ-इन्यूमिरेशन पोर्टल पर जाकर अपना मोबाइल नंबर दर्ज कर लॉग-इन कर सकते हैं।परिवार के मुखिया और सभी सदस्यों से जुड़े निर्धारित सवालों के जवाब ऑनलाइन भरे जा सकते हैं।फॉर्म सबमिट करने के बाद एक विशिष्ट 'सेल्फ-इन्यूमिरेशन आईडी' (Self-Enumeration ID/Reference Code) जेनरेट होगी।1 से 30 सितंबर के बीच जब अधिकृत जनगणना कर्मी (Enumerator) घर पहुंचेंगे, तो नागरिक को केवल वही आईडी दिखानी होगी, जिससे फील्ड वेरिफिकेशन तुरंत पूरा हो जाएगा।जनगणना अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया में किसी भी नागरिक से कोई ओटीपी (OTP) या बैंक संबंधी संवेदनशील पिन नहीं मांगा जाएगा, जिससे साइबर धोखाधड़ी से बचा जा सके।पहली बार पूछे जा रहे हैं ये 40 सवाल: जाति गणना भी शामिलजनगणना 2027 में कुल 40 प्रश्नों की प्रश्नावली तैयार की गई है, जिसमें कई नए आधुनिक पैरामीटर्स शामिल किए गए हैं:जाति विवरण: आजादी के बाद पहली बार जनगणना फॉर्म में 'अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/जाति' का खुला कॉलम (Open-ended format) रखा गया है, जिसमें नागरिक द्वारा बताई गई जाति को बिना किसी पूर्व-निर्धारित सूची की बाध्यता के सीधे दर्ज किया जाएगा।डिजिटल और पहचान दस्तावेज: यदि उपलब्ध हो तो आधार नंबर, वोटर आईडी, पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस की जानकारी ली जा रही है।स्वास्थ्य एवं वित्तीय स्थिति: व्यक्ति को कोविड-19 टीकाकरण कहां लगा था और उसके पास कुल कितने बैंक खाते हैं, इसका ब्योरा भी शामिल है।शिक्षा, डिजिटल साक्षरता और रोजगार: शिक्षा के स्तर के साथ-साथ डिजिटल साक्षरता (कंप्यूटर/इंटरनेट के इस्तेमाल की क्षमता), व्यवसाय, उद्योग का प्रकार और कार्य विवरण पूछा जाएगा।जनसांख्यिकीय डेटा: नाम, मुखिया से संबंध, जन्मतिथि, वैवाहिक स्थिति, शादी के समय उम्र, धर्म, मातृभाषा और प्रवासन (Migration) का इतिहास दर्ज किया जाएगा।पूरी तरह पेपरलेस और 'Census 2027-PE' मोबाइल ऐप का इस्तेमालजनगणना 2027 भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना है। जो नागरिक 31 अगस्त तक ऑनलाइन सेल्फ-इन्यूमिरेशन नहीं करेंगे, उनके घरों में आने वाले प्रगणक भी कागजी फॉर्म के बजाय आधिकारिक 'Census 2027-PE' मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए सीधे डेटा डिजिटल रूप में दर्ज करेंगे। सुरक्षा कारणों से भारतीय सेना, आईटीबीपी और अर्धसैनिक बलों की यूनिट्स के लिए डेटा पहले ऑफलाइन/पेपर मोड में संकलित किया जाएगा और बाद में स्पेशल चार्ज ऑफिसर्स द्वारा सिस्टम में फीड किया जाएगा।दो चरणों की रूपरेखा और राष्ट्रीय परिदृश्ययह महाभियान दो चरणों में विभाजित है। पहले चरण में मकानों की सूची और आवासीय सुविधाओं (House Listing & Housing Operations) का डेटा दर्ज किया गया, जिसमें पेयजल, बिजली, शौचालय, इंटरनेट और संपत्ति के साधनों से जुड़े 33 सवाल शामिल थे। अब दूसरा चरण जनसंख्या गणना का है। लद्दाख की लगभग 2.74 लाख आबादी और जम्मू-कश्मीर के सीमांत व पहाड़ी क्षेत्रों की आबादी को इस विशेष चक्र में गिना जा रहा है। 1 से 5 अक्टूबर 2026 तक रिवीजन राउंड पूरा होने के साथ ही दुर्गम इलाकों का चरण समाप्त होगा, जबकि शेष भारत के लिए अंतिम फील्ड डेटा संकलन मार्च 2027 तक पूरा किया जाएगा।
पवन सिंह, निरहुआ और आम्रपाली पर बरसीं काजल राघवानी, 16 साल के सफर और काम छीनने पर लगाए सनसनीखेज आरोप
भोजपुरी फिल्म जगत का गलियारा इन दिनों पर्दे के पीछे के गंभीर विवादों और तीखी बयानबाजी को लेकर गरमाया हुआ है। JioHotstar पर प्रसारित हो रहे रियलिटी शो 'भोजपुरी बवाल' के मंच से शुरू हुई जुबानी जंग अब सोशल मीडिया से लेकर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सिनेमाई हलकों में चर्चा का केंद्र बन चुकी है। भोजपुरी सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री काजल राघवानी ने इंडस्ट्री के शीर्ष दिग्गजों—पावर स्टार पवन सिंह, जुबली स्टार दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' और यूट्यूब क्वीन आम्रपाली दुबे पर तीखे आरोप लगाते हुए सनसनीखेज खुलासे किए हैं। काजल के इस सीधे पलटवार ने यह साफ कर दिया है कि भोजपुरी पर्दे की चकाचौंध के पीछे रिश्तों की तल्खी और गुटबाजी की जड़ें कितनी गहरी हैं।पवन सिंह पर असहज सीन और सेट छोड़ने का सनसनीखेज दावाशो के दौरान काजल राघवानी ने अपने करियर के पुराने अनुभवों को साझा करते हुए पावर स्टार पवन सिंह के काम करने के तौर-तरीकों पर खुलकर बात रखी। काजल ने दावा किया कि शूटिंग के दौरान असहज दृश्यों और किसिंग सीन को लेकर जब उन्होंने अपनी असहमति जताई, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया था। उनके मुताबिक, मनमुताबिक सीन न होने पर अभिनेता सेट छोड़कर चले जाते थे।काजल ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इंडस्ट्री में उन्होंने हमेशा हर कलाकार के मान-सम्मान का ख्याल रखा, लेकिन बदले में उन्हें वह सम्मान नहीं मिला जिसकी वह हकदार थीं। एक्ट्रेस ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि राजनीति और समाज सेवा से पहले लोगों को अपनी कार्यशैली और पेशेवर जिम्मेदारियों को सही तरीके से संभालना चाहिए। इस बयान के बाद पवन सिंह के प्रशंसकों और आम दर्शकों के बीच सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है।निरहुआ और आम्रपाली दुबे से तीखा आमना-सामना: गाने से बाहर करने का दर्दरियलिटी शो के हालिया एपिसोड्स में सबसे बड़ा विवाद तब सामने आया जब काजल राघवानी ने दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' पर काम में पक्षपात करने का सीधा आरोप लगाया। काजल का कहना था कि निरहुआ की फिल्मों और म्यूजिक प्रोजेक्ट्स में एक खास अभिनेत्री को प्राथमिकता दी जाती रही है। उन्होंने दावा किया कि पहले से तय एक बड़े गाने से उन्हें बिना बताए हटा दिया गया, जिससे उन्हें मानसिक और पेशेवर तौर पर काफी ठेस पहुंची।इस आरोप पर निरहुआ ने भी शो के दौरान कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और काजल के दावों को सिरे से खारिज किया। निरहुआ का तर्क था कि किसी भी प्रोजेक्ट, फिल्म या गाने में कास्टिंग का अंतिम फैसला केवल मुख्य अभिनेता का नहीं होता, बल्कि यह निर्देशक, निर्माता और पूरी प्रोडक्शन टीम का सामूहिक निर्णय होता है। उन्होंने कहा कि बिना ठोस आधार के किसी एक कलाकार पर काम छीनने का इल्जाम लगाना अनुचित है।इसी बहस के बीच वीडियो कॉल पर आम्रपाली दुबे भी चर्चा में शामिल हुईं। आम्रपाली ने काजल के पुराने बयानों और खेसारी लाल यादव के साथ उनके लंबे करियर का हवाला देते हुए सवाल उठाए कि जब वह सालों तक किसी एक स्टार के साथ लगातार काम कर रही थीं, तब क्या किसी और का हक नहीं मारा गया? आम्रपाली ने स्पष्ट किया कि उन्हें अपने टैलेंट के दम पर काम मिलता है और उन्हें किसी दूसरे कलाकार का अवसर छीनने की कोई जरूरत नहीं है।16 साल का लंबा सफर और 'आउटसाइडर' कहे जाने की पीड़ाबयानबाजी का सिलसिला सिर्फ शो के सेट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि काजल राघवानी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक भावुक संदेश लिखकर अपनी व्यथा साझा की। मूल रूप से गुजरात से ताल्लुक रखने वाली काजल ने कहा कि वह पिछले 16 वर्षों से भोजपुरी भाषा, संस्कृति और सिनेमा की सेवा कर रही हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश की माटी ने उन्हें अपार प्यार दिया है, जिसे वह अपनी आत्मा से अपना चुकी हैं।काजल ने दर्द बयां करते हुए लिखा कि इतने लंबे करियर के बावजूद उन्हें बार-बार 'आउटसाइडर' (बाहरी) होने का अहसास कराया जाता है। उन्होंने उन दावों का खंडन किया कि वह किसी सहानुभूति कार्ड या राजनीतिक रसूख के सहारे काम मांगती हैं। एक्ट्रेस ने साफ किया कि उनके पास कोई राजनीतिक बैकग्राउंड या गॉडफादर नहीं है, वह आज जिस मुकाम पर भी हैं, अपने कड़े परिश्रम और जनता के प्यार की बदौलत हैं।भोजपुरी सिनेमा में गुटबाजी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शक वर्गभोजपुरी मनोरंजन उद्योग आज केवल क्षेत्रीय सिनेमा हॉल्स तक सीमित नहीं है, बल्कि ओटीटी और यूट्यूब जैसे डिजिटल मंचों पर करोड़ों व्यूज बटोर रहा है। बिहार के पटना, मुजफ्फरपुर, गया से लेकर यूपी के वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़ और लखनऊ तक फैली इसकी विशाल दर्शक संख्या इस तरह के विवादों पर बारीक नजर रखती है।काजल राघवानी, पवन सिंह, निरहुआ, आम्रपाली दुबे और खेसारी लाल यादव जैसे दिग्गज नामों के इर्द-गिर्द घूमने वाला यह विवाद यह दर्शाता है कि इंडस्ट्री के भीतर खेमेबाजी अब खुलकर सामने आ रही है। एक तरफ जहां काजल के समर्थक उनके साहस की सराहना कर रहे हैं और इसे महिला कलाकारों के हक की लड़ाई बता रहे हैं, वहीं निरहुआ और पवन सिंह के प्रशंसक इसे शो की लोकप्रियता और पब्लिसिटी स्टंट से जोड़कर देख रहे हैं।विवाद से उठे नए सवाल: टीआरपी का दबाव या बरसों पुरानी टीस?'भोजपुरी बवाल' के मंच पर जिस तरह एक के बाद एक पुराने राज खुल रहे हैं, उससे यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या यह सिर्फ टीआरपी जुटाने की रणनीति है या फिर सालों से दबा असंतोष अब ज्वालामुखी बनकर फूट रहा है। भोजपुरी इंडस्ट्री में दशकों से हीरो-सेंट्रिक व्यवस्था और कुछ चुनिंदा जोड़ियों के वर्चस्व का आरोप लगता रहा है। काजल के इस मुखर अंदाज ने इंडस्ट्री के कास्टिंग सिस्टम, पेशेवर स्वतंत्रता और कलाकारों के आपसी समीकरणों पर गंभीर विमर्श छेड़ दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह खींचतान पर्दे पर नए प्रोजेक्ट्स और समीकरणों को किस दिशा में ले जाती है।
कंफर्म हुई जिंदगी ना मिलेगी दोबारा 2, मगर डायरेक्टर ने रखी शर्त
जिंदगी ना मिलेगी दोबारा फिल्म के फैंस के लिए एक गुड न्यूज सामने आ रही है. डायरेक्टर जोया अख्तर ने कंफर्म किया है कि वो अपनी आइकॉनिक फिल्म का सीक्वल जल्द ला रही हैं. जानें उन्होंने और क्या-क्या बताया...
बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद उनकी कथित गर्लफ्रेंड और अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को जिस दौर से गुजरना पड़ा, वह भारतीय मीडिया और फिल्म जगत के सबसे विवादित अध्यायों में से एक रहा है। सुशांत की मौत के बाद लगे गंभीर आरोपों, केंद्रीय जांच एजेंसियों की लंबी पूछताछ और हफ्तों तक जेल में रहने के बाद रिया की जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी। हालांकि, अब धीरे-धीरे सामान्य जीवन में वापसी कर रहीं रिया चक्रवर्ती ने अपने हालिया बयानों और पॉडकास्ट में उस काले दौर का दर्द बयां किया है। उन्होंने खुलासा किया कि उस पूरे मामले का सबसे विनाशकारी असर केवल उन पर ही नहीं, बल्कि उनके पूरे निर्दोष परिवार पर पड़ा, जहां उनके रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर पिता को अपनी नौकरी तक गंवानी पड़ी थी।परिवार का सामाजिक बहिष्कार और पिता की नौकरी पर गिरी गाजरिया चक्रवर्ती ने बताया कि 2020 में शुरू हुए जबरदस्त मीडिया ट्रायल और आरोपों के तूफान ने उनके हंसते-खेलते परिवार को तिनके की तरह बिखेर दिया था। उनके पिता इंद्रजीत चक्रवर्ती, जो भारतीय सेना से एक सम्मानित लेफ्टिनेंट कर्नल के पद से रिटायर हुए थे और बाद में एक प्राइवेट कॉर्पोरेट संस्थान में उच्च पद पर कार्यरत थे, उन्हें अचानक बिना किसी गलती के अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। रिया के अनुसार, समाज और मीडिया के भारी दबाव के चलते कंपनी ने उनके पिता से इस्तीफा ले लिया था। पूरे परिवार का इस कदर सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया था कि पुराने दोस्त और रिश्तेदार तक उनके घर आने या फोन पर बात करने से कतराने लगे थे।'चक्रवर्ती' सरनेम बना मुसीबत का सबबरिया ने बातचीत के दौरान बेहद भावुक होकर उस त्रासदी का जिक्र किया जो उनके सरनेम के कारण उनके करीबियों ने झेली। रिया ने कहा कि उस दौर में स्थिति इतनी जहरीली हो चुकी थी कि केवल उनका नाम या 'चक्रवर्ती' सरनेम जुड़ा होना ही किसी व्यक्ति के लिए मुसीबत बन जाता था। अगर उनके परिवार का कोई सदस्य बाहर ग्रोसरी खरीदने, बैंक के काम से या किसी काम के सिलसिले में जाता और लोगों को पता चलता कि उनका ताल्लुक रिया चक्रवर्ती से है, तो लोग उन्हें संदेह और नफरत की नजर से देखने लगते थे। भाई शौविक चक्रवर्ती को भी लंबी कानूनी लड़ाई और जेल की प्रताड़ना से गुजरना पड़ा, जिससे उनका पूरा युवा करियर और पढ़ाई बीच में ही रुक गई।मानसिक आघात, ट्रॉमा और जेल की वो खौफनाक रातेंरिया ने स्वीकार किया कि उस दौर ने उन्हें और उनके पूरे परिवार को गहरे पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) और डिप्रेशन में धकेल दिया था। भायखला जेल में बिताए गए 28 दिनों के अनुभव को याद करते हुए रिया ने कहा कि जेल की सलाखों के पीछे जिंदा रहना और उम्मीद बनाए रखना दुनिया की सबसे बड़ी लड़ाई थी। बाहर जहां 24 घंटे टीवी चैनलों पर उनके खिलाफ नफरत फैलाई जा रही थी, वहीं जेल के अंदर उन्हें कैदियों के बीच सादगी और जिंदगी का असली मतलब समझ आया। रिया ने कहा कि उस दर्दनाक दौर ने उनके अंदर से मौत और बदनामी का डर पूरी तरह खत्म कर दिया।'चैप्टर 2' के साथ जिंदगी की नई शुरुआतअंधेरे और कठिन वक्त को पीछे छोड़ते हुए रिया चक्रवर्ती ने अब अपनी जिंदगी का 'चैप्टर 2' शुरू किया है। उन्होंने अपना खुद का पॉडकास्ट शुरू किया है, जहां वे मशहूर हस्तियों के साथ जीवन के संघर्षों, मानसिक स्वास्थ्य और री-इन्वेंशन पर खुलकर चर्चा करती हैं। इसके साथ ही वे मॉडलिंग, ब्रांड एंडोर्समेंट्स और फैशन शोज के जरिए इंडस्ट्री में अपनी जगह दोबारा बना रही हैं।रिया का कहना है कि जो कुछ भी उनके और उनके परिवार के साथ हुआ, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता, लेकिन उन्होंने खुद को एक 'विक्टिम' (पीड़िता) के रूप में देखना बंद कर दिया है। रिया मानती हैं कि सबसे बड़ी ताकत उस वक्त को झेलकर खड़े रहने में है और उनके माता-पिता व भाई की अटूट एकता ने ही उन्हें इस सबसे बड़े तूफान से बाहर निकलने की हिम्मत दी।
70 सवाल रिपीट और व्याकरण में गलतियां... क्या NTA ने ठेके पर दे रखी है पेपर तैयार करने की व्यवस्था?
यूजीसी नेट के अंग्रेजी, कामर्स और समाजशास्त्र विषयों के प्रश्न पत्रों में व्याकरण और प्रश्नों के दोहराव जैसी गंभीर खामियां सामने आई हैं, जिससे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की प्रश्न पत्र तैयार करने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
TVK सरकार के 100 दिन: सीएम विजय ने तय कीं प्राथमिकताएं, अब शुरू होगी असली परीक्षा
तमिलनाडु में सीएम विजय की TVK सरकार ने 100 दिन पूरे होने पर '100 डेज ऑफ गवर्नेंस' रिपोर्ट कार्ड जारी किया है।
भारी बारिश से बिगड़ेगा आम आदमी के घर का बजट! टमाटर, हरी सब्जियां और दूध के दाम छू सकते हैं आसमान
देशभर के विभिन्न राज्यों में जारी मूसलाधार बारिश, जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियों ने जहां जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, वहीं अब इसका सीधा और गहरा असर आम आदमी की रसोई के बजट पर पड़ने लगा है। उत्तर भारत से लेकर पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं और प्रमुख राजमार्गों पर आवागमन बाधित होने से फल, सब्जी, दूध और अन्य दैनिक उपयोगी वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) बुरी तरह प्रभावित हुई है। मंडियों में आवक घटने से हरी सब्जियों के दामों में अचानक 30 से 60 प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में खुदरा महंगाई के और भड़कने की आशंका जताई जा रही है।खेतों में पानी भरने से फसलें बर्बाद, मंडियों में घटी आवकमानसून की भारी बारिश का सबसे पहला और तेज झटका सब्जियों के उत्पादन पर लगा है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक जैसे बड़े उत्पादक राज्यों के कई इलाकों में जलजमाव के कारण खेतों में लगी तोरई, लौकी, भिंडी, बैंगन, फूलगोभी और पत्तेदार हरी सब्जियां सड़ने लगी हैं। थोक व्यापारियों के अनुसार, बारिश के मौसम में खेतों से सब्जियों की तुड़ाई और ढुलाई का काम बेहद कठिन हो जाता है। इसके चलते दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, लखनऊ और कोलकाता जैसी बड़ी थोक मंडियों में सब्जियों की दैनिक आपूर्ति में 40 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते इस बड़े अंतर का सीधा असर कीमतों में भारी तेजी के रूप में सामने आ रहा है।टमाटर और प्याज के तेवर फिर तीखे, हरी सब्जियों के दाम दोगुनेसब्जियों के बाजार में सबसे बड़ा झटका टमाटर और प्याज के दामों से लग रहा है। प्रमुख टमाटर उत्पादक क्षेत्रों में अधिक बारिश और फंगस की बीमारी के चलते उत्पादन घटा है, जिससे खुदरा बाजार में टमाटर के दाम एक बार फिर प्रति किलो 60 से 90 रुपये तक पहुंच रहे हैं। इसी तरह प्याज और आलू की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है क्योंकि भंडारण से मंडियों तक माल पहुंचाने में बारिश के कारण देरी हो रही है। धनिया, पुदीना, पालक और मेथी जैसी पत्तेदार सब्जियां पानी के संपर्क में आने से जल्दी गलती हैं, जिसके चलते इनकी कीमतें आसमान छू रही हैं। कई शहरों में जो हरी मिर्च 40 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, वह अब 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है।दूध और डेयरी उत्पादों पर सप्लाई चेन और चारे का संकटभारी बारिश और बाढ़ का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव पशुपालन और डेयरी सेक्टर पर भी पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में जलभराव के चलते हरे चारे की भारी कमी हो गई है, साथ ही चारे के दाम भी बढ़ गए हैं। कई क्षेत्रों में मवेशियों में मौसमी संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ने से दूध के दैनिक उत्पादन में गिरावट आई है। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण कलेक्शन सेंटरों से बड़े शहरों के प्रोसेसिंग प्लांट्स तक दूध के टैंकरों के पहुंचने में लगने वाले अतिरिक्त समय और बढ़े हुए लॉजिस्टिक्स खर्च के कारण डेयरी कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ गई है। यदि बारिश का यह दौर लंबा खिंचता है, तो आने वाले हफ्तों में पैकेट वाले दूध, पनीर, मक्खन और छाछ के खुदरा दामों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।ट्रांसपोर्टेशन जाम और फ्रेट चार्ज बढ़ने से रोजमर्रा का सामान महंगापहाड़ी और मैदानी राज्यों में भूस्खलन, पुलों के टूटने और राष्ट्रीय राजमार्गों पर पानी भरने से भारी ट्रकों की आवाजाही की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। ट्रकों को गंतव्य तक पहुंचने में सामान्य से दो से तीन गुना अधिक समय लग रहा है। डीजल की खपत और बढ़े हुए फ्रेट (भाड़ा) शुल्क के कारण रोजमर्रा के एफएमसीजी (FMCG) सामान—जैसे दालें, खाद्य तेल, पैकेज्ड आटा, मसाले, चाय पत्ती, बिस्कुट और साबुन की सप्लाई कॉस्ट में इजाफा हुआ है। थोक व्यापारियों का कहना है कि जब तक माल की निर्बाध डिलीवरी शुरू नहीं होती, तब तक डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बना रहेगा, जिसका भार अंततः खुदरा ग्राहकों पर ही पड़ेगा।खाद्य महंगाई का खतरा और रिजर्व बैंक की नीतियों पर असरअर्थशास्त्रियों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आने वाला यह मौसमी उछाल देश की खुदरा मुद्रास्फीति (CPI Inflation) को प्रभावित कर सकता है। भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में खाद्य वस्तुओं और सब्जियों की हिस्सेदारी काफी अधिक है। यदि सब्जियों, दूध और दालों के दाम लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बने रहते हैं, तो इससे खाद्य महंगाई दर में तेज उछाल आ सकता है। इसका असर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ब्याज दर नीतियों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती का फैसला लेते समय खाद्य महंगाई के आंकड़ों पर बारीक नजर रखता है।राहत कब तक संभव और सरकार के क्या हैं एहतियाती कदमव्यापारिक जानकारों का मानना है कि मानसून के दौरान सब्जियों की कीमतों में यह तेजी आमतौर पर कुछ हफ्तों के लिए अस्थायी होती है। जैसे ही बारिश का जोर कम होगा और मौसम साफ होगा, स्थानीय स्तर पर नई फसलों की कटाई और मंडियों तक आवागमन सुचारू होने से कीमतों में नरमी आने लगेगी। इस बीच, केंद्र और राज्य सरकारों के उपभोक्ता मामलों के विभाग जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए मंडियों की नियमित निगरानी कर रहे हैं। कई राज्यों में मोबाइल वैन और सरकारी आउटलेट्स के जरिए रियायती दरों पर टमाटर, प्याज और आवश्यक दालें उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है ताकि आम जनता को बढ़ती महंगाई से फौरी राहत मिल सके।
उम्र को थामने और हमेशा 18 साल जैसा जवान दिखने की धुन में हर साल करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने वाले अमेरिकी टेक उद्यमी और अरबपति ब्रायन जॉनसन एक बार फिर अपने बेहद सख्त और अजीबोगरीब लाइफस्टाइल नियमों को लेकर दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गए हैं। अपने एंटी-एजिंग मिशन 'प्रोजेक्ट ब्लूप्रिंट' के जरिए अपनी जैविक उम्र (बायोलॉजिकल एज) को रिवर्स करने का दावा करने वाले 47 वर्षीय ब्रायन जॉनसन ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा चौंकाने वाला खुलासा किया है। ब्रायन ने बताया कि वे रिलेशनशिप में होने के बावजूद अपनी गर्लफ्रेंड के साथ कभी भी एक ही बेड पर रात नहीं बिताते हैं और हमेशा पूरी तरह अलग कमरे में अकेले सोते हैं।पार्टनर के साथ न सोने के पीछे का वैज्ञानिक तर्कब्रायन जॉनसन के अनुसार, उनके लिए अच्छी और गहरी नींद दुनिया की किसी भी दूसरी चीज से ज्यादा कीमती है। वे नींद को केवल आराम का जरिया नहीं बल्कि 'बायोलॉजिकल रिपेयर' की सबसे अहम प्रक्रिया मानते हैं। उनका कहना है कि जब दो लोग एक साथ सोते हैं, तो करवट बदलने, सांस लेने की आवाज, खर्राटे, शरीर के तापमान में बदलाव या चादर खींचने जैसी छोटी-छोटी बातों से भी स्लीप साइकिल में व्यवधान (माइक्रो-अराउजल्स) पैदा होता है। भले ही इंसान पूरी तरह न जागे, लेकिन उसका दिमाग डीप स्लीप (Deep Sleep) और आरईएम स्लीप (REM Sleep) से बाहर आ जाता है। इससे शरीर के सेल्स के रिपेयर होने की रफ्तार धीमी हो जाती है और एजिंग प्रोसेस तेज होने लगता है।रात 8:30 बजे सोने और अलग कमरे की सख्त शर्तेंब्रायन जॉनसन की लाइफस्टाइल में रोमांस से ज्यादा प्राथमिकता उनके 'स्लीप प्रोटोकॉल' को दी जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे डेटिंग शुरू करने से पहले ही अपनी पार्टनर के सामने यह शर्त रख देते हैं कि रात को दोनों अपने-अपने अलग कमरों में सोएंगे। उनका सोने का समय शाम 8:30 बजे तय है। सोने से दो घंटे पहले वे ब्लू-लाइट ब्लॉकिंग चश्मा पहनते हैं, कमरे का तापमान ठीक 19 डिग्री सेल्सियस पर सेट रहता है और कमरा पूरी तरह से साउंडप्रूफ व पिच-ब्लैक (घुप अंधेरा) होता है। उनका मानना है कि पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम दिन में या शाम को बिताया जा सकता है, लेकिन सोने का समय केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य और रिकवरी के लिए आरक्षित होना चाहिए।क्या है 'स्लीप डिवोर्स' और क्यों बढ़ रहा है इसका वैश्विक ट्रेंड?ब्रायन जॉनसन के इस बयान ने आधुनिक रिश्तों में 'स्लीप डिवोर्स' (Sleep Divorce) यानी कपल्स के अलग-अलग बिस्तरों या कमरों में सोने की अवधारणा पर नई बहस छेड़ दी है। कई अंतरराष्ट्रीय स्लीप स्टडीज और न्यूरोलॉजिस्ट्स भी इस बात का समर्थन करते हैं कि खराब नींद सीधे तौर पर चिड़चिड़ापन, तनाव, कमजोर इम्यूनिटी, हार्ट अटैक के खतरे और रिश्तों में कड़वाहट की वजह बनती है। अलग सोने से दोनों पार्टनर्स को बिना किसी खलल के 7 से 8 घंटे की निर्बाध नींद मिलती है, जिससे दिनभर उनका मूड और ऊर्जा का स्तर बेहतर बना रहता है।साल के 16 करोड़ रुपये और 100 से अधिक सप्लीमेंट्स का रूटीनब्रायन जॉनसन की जिंदगी केवल अलग सोने तक सीमित नहीं है। वे 30 से अधिक डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की एक समर्पित टीम की निगरानी में रहते हैं। वे रोजाना सुबह 5 बजे उठते हैं, दिनभर में 100 से ज्यादा विटामिंस और एंटीऑक्सीडेंट्स की गोलियां खाते हैं, रोजाना स्ट्रिक्ट वेगन डाइट लेते हैं और दोपहर 11 बजे के बाद दिन का आखिरी खाना खा लेते हैं। उनके शरीर के हर एक अंग—हार्ट, लिवर, लंग्स, स्किन और डीएनए डैमेज की रोजाना मॉनिटरिंग की जाती है। जॉनसन का दावा है कि उनके इस स्लीप और न्यूट्रिशन रूटीन के कारण उनका हार्ट 37 साल का, फेफड़े 18 साल के और त्वचा 28 साल के युवा जैसी हो चुकी है।रिश्तों से पहले बायोलॉजिकल हेल्थ को प्राथमिकताब्रायन जॉनसन का यह नजरिया यह साबित करता है कि वे अमरता और फिटनेस की अपनी खोज में किसी भी तरह के सामाजिक समझौते के लिए तैयार नहीं हैं। जहां पारंपरिक समाज में पति-पत्नी या कपल्स का एक साथ सोना प्यार और नजदीकी का पैमाना माना जाता है, वहीं ब्रायन जॉनसन का मानना है कि खुद को स्वस्थ और ऊर्जावान रखे बिना किसी दूसरे इंसान के साथ एक मजबूत और प्यार भरा रिश्ता निभाना असंभव है। उनका यह बेबाक खुलासा अब युवाओं और फिटनेस के प्रति जागरूक लोगों के बीच स्लीप हाइजीन का एक नया बेंचमार्क बन गया है।
हादसों का सोमवार: चार राज्यों में भगदड़, 19 लोगों की मौत; PM ने किया आर्थिक सहायता का एलान
सावन के तीसरे सोमवार को बिहार के अशोकधाम और उज्जैन के महाकाल मंदिर में भगदड़ सहित चार राज्यों में हुए हादसों में कुल 27 लोगों की जान चली गई।
11वें भाव का ग्रहण योग! अपार धन, लेकिन अहंकार बिगाड़ता है रिश्ते
जब कुंडली के एकादश भाव में सूर्य और राहु एक साथ स्थित हों, तब सूर्य-राहु की युति से ग्रहण योग बनता है. इसका फल केवल इस युति के आधार पर निश्चित नहीं किया जा सकता. दोनों ग्रह किस राशि में हैं, उनके बीच कितनी दूरी है, एकादशेश की स्थिति कैसी है, अन्य ग्रहों की दृष्टि क्या है तथा चल रही दशा-अंतर्दशा कैसी है, इन सभी पहलुओं को साथ में देखना आवश्यक होता है.
न्योता स्वीकार ही नहीं किया तो जाने का सवाल ही नहीं, NALSAR विवाद पर बोले CJI
नालसर दीक्षांत समारोह विवाद पर CJI सूर्यकांत ने साफ किया कि उन्होंने विश्वविद्यालय का निमंत्रण कभी स्वीकार ही नहीं किया था. 450 से अधिक छात्रों के विरोध के बाद BCI की कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से विवाद बढ़ा था.
JSSC-CGL परीक्षा रद्द, गड़बड़ियों की CID जांच; देखें CM सोरेन के बड़े ऐलान
छात्रों के आंदोलन के आगे झारखंड सरकार झुक गई है. सोमवार को सीएम हेमंत सोरेन ने JSSC-CGL एग्जाम को रद्द कर दिया है. साथ ही TDPL के जरिए कराई गई सभी परीक्षाएं कैंसिल कर दी गईं. सीएम सोरेन ने 2014 से हुई सभी परीक्षाओं की CID जांच का भी ऐलान किया. इस ऐलान के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों में जमकर खुशी मनाई. देखें वीडियो.
JSSC CGL समेत TDPL की सभी परीक्षाएं रद्द, सोरेन का ऐलान
झारखंड में 24 दिन से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच CM हेमंत सोरेन ने JSSC CGL समेत TDPL के जरिए कराई गई सभी परीक्षाएं और रिजल्ट रद्द करने का ऐलान किया है. 2014 से अब तक हुई परीक्षाओं की जांच रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली कमेटी करेगी. छात्रों का कहना है कि लंबे संघर्ष के बाद उनकी मांग मानी गई है.
बार काउंसिल खुद कोई लॉ कॉलेज नहीं चला सकता, सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत भूषण ने क्या कहा
बीसीआई हाल में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, हैदराबाद से जुड़े विवाद को लेकर भी चर्चा में रही है। BCI ने 2026 में ग्रेजुएट होने वाले पूरे बैच के नॉमिनेशन पर रोक लगाने का आदेश दिया था, लेकिन कुछ घंटों बाद इसे वापस ले लिया गया।
बीजेपी की नई टीम: स्मृति ईरानी और राम माधव का कमबैक, मालवीय आउट; गोयल को फिर खजाने की चाबी
नितिन नवीन ने भाजपा की नई टीम का ऐलान किया है, जिसमें अनुभवी और युवा चेहरों का संतुलन है।
देवेंद्र महतो ने किया अनशन खत्म करने का ऐलान, बोले- आगे पेपर लीक न हो
JPSC CGL परीक्षा रद्द होने के बाद देवेंद्र महतो ने कहा कि वह अनशन तोड़ देंगे, लेकिन सरकार से ऐसी गारंटी चाहते हैं, जिससे आगे पेपर लीक, धांधली और पैरवी के आधार पर नौकरी मिलने की कोई गुंजाइश न रहे.
अब महाराष्ट्र में भी बड़े आंदोलन की तैयारी! भूख हड़ताल का ऐलान; पर पहले एक मांग, टेंशन में सरकार?
जरांगे ने मराठा समुदाय से अपनी मांगों को लेकर आक्रामक रुख अपनाने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि समुदाय को किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति के दबाव में नहीं आना चाहिए।
बंगाल के बाद यूपी में स्मृति ईरानी का दांव? जानें प्लान
अमेठी की हार के करीब 26 महीने बाद स्मृति ईरानी की बीजेपी संगठन में बड़ी वापसी हुई है. उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है. बंगाल में सक्रिय भूमिका के बाद अब उनकी नई जिम्मेदारी को यूपी समेत आगामी चुनावों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. ऐसे में उनकी नई भूमिका को पंजाब के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में पार्टी के विस्तार की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है.
‘शाहरुख खान हों या अजय देवगन? किसी को छोड़ेंगे नहीं’, FDA चीफ ने मचाई खलबली
विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर जारी नोटिस पर महाराष्ट्र के एफडीए चीफ तुकाराम मुंढे का बयान आया है। सोमवार को जारी बयान में मुंढे ने स्पष्ट कहाकि चाहे शाहरुख खान हों या अजय देवगन, किसी को भी छोड़ा नहीं जाएगा।
अजमेर में नगरीय निकाय वार्डों की लॉटरी ने बदले नेताओं के राजनीतिक समीकरण
अजमेर। जिले के नगरीय निकायों के वार्डों के लिए आरक्षण निर्धारण की लॉटरी सोमवार को जिला निर्वाचन अधिकारी लोक बन्धु की अध्यक्षता में जवाहर रंगमंच में निकाली गई। उप जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. अभिषेक गोयल ने बताया कि इसमें नगर निगम अजमेर, नगर परिषद पुष्कर एवं किशनगढ़ तथा नगरपालिका नसीराबाद, पीसांगन, सरवाड़, टांटोटी, सावर एवं […] The post अजमेर में नगरीय निकाय वार्डों की लॉटरी ने बदले नेताओं के राजनीतिक समीकरण appeared first on Sabguru News .
उत्तराखंड के नैनीताल जिले के प्रसिद्ध भीमताल में स्थित श्री भीमेश्वर महादेव मंदिर एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र धार्मिक स्थल है. पौराणिक मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान इस दिव्य शिवलिंग की स्थापना की थी.
झारखंड सरकार ने छात्रों की बात मानी, JSSC-CGL परीक्षा रद्द, 2014 से हुई सभी गड़बड़ियों की होगी जांच
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को कहा कि राज्य कैबिनेट ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया है। झारखंड में काफी समय से प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगों को सरकार ने मान लिया है जिसके बाद प्रदर्शनकारी छात्र जश्न मनाते नजर आए। ...
9 साल की नाइंसाफी के खिलाफ भूख हड़ताल पर हबीबा
झारखंड में JSSC-JPSC परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन जारी है. बोकारो की हबीबा 13 दिन से भूख हड़ताल पर हैं और उनका 8 किलो वजन कम हो चुका है. हबीबा ने कहा कि तबीयत बिगड़ने के बावजूद वह मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगी. वीडियो में जानें प्रोटेस्ट से लेकर हंगर स्ट्राइक तक की पूरी कहानी.
शक्तिमान के बाद अब शिव भक्ति में डूबे मुकेश खन्ना, लॉन्च किया हिंदी में ‘शिव तांडव स्तोत्र’
अपने लोकप्रिय किरदार शक्तिमान के लिए कई पीढ़ियों के बीच पहचान बनाने वाले अभिनेता मुकेश खन्ना एक बार फिर अपने नए गीत शिव तांडव स्तोत्र को लेकर चर्चा में हैं.
GTB Hospital Recruitment 2026: जीटीबी अस्पताल में 17 पदों पर भर्ती, 24 अगस्त को होगा वॉक-इन इंटरव्यू
दिल्ली के गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल ने स्टेनोग्राफर, जूनियर असिस्टेंट और सीनियर असिस्टेंट समेत 17 पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है. दिल्ली सरकार के सेवानिवृत्त पेंशनभोगी 24 अगस्त को आयोजित होने वाले वॉक-इन इंटरव्यू में शामिल होकर आवेदन कर सकते हैं.
JSSC CGL एग्जाम कैंसिल, TDPL के जरिए हुईं सभी भर्तियां भी रद्द, सीएम सोरेन का बड़ा ऐलान
झारखंड में JSSC CGL समेत TDPL के जरिए कराई गई सभी परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं. सीएम हेमंत सोरेन ने इसका ऐलान किया है. जांच के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी बनेगी.
देवों के देव महादेव की आराधना का महापर्व सावन (श्रावण) मास अपने चरम पर है। शिव भक्तों के लिए सावन का प्रत्येक दिन पुण्यदायी होता है, लेकिन प्रदोष व्रत का महत्व शास्त्रों में सबसे विशिष्ट माना गया है। सावन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ने वाला दूसरा प्रदोष व्रत बेहद खास संयोग लेकर आ रहा है। जब प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है, तो इसे 'भौम प्रदोष व्रत' कहा जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत भगवान शिव और मंगल देव की संयुक्त कृपा प्राप्त करने का सबसे दुर्लभ अवसर होता है। मान्यता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान से शिव साधना करने पर व्यक्ति को भूमि, भवन, संपत्ति के विवादों और भारी से भारी कर्ज के बोझ से मुक्ति मिल जाती है।सावन के दूसरे प्रदोष व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्तपंचांग गणना के अनुसार, सावन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ और प्रदोष काल का विशेष संयोग शाम के समय निर्मित हो रहा है। प्रदोष व्रत में मुख्य पूजा सूर्यास्त के बाद के समय यानी 'प्रदोष काल' में की जाती है।त्रयोदशी तिथि का समय: सावन शुक्ल त्रयोदशी तिथि का प्रभाव प्रदोष काल में रहेगा।प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: सायं 06:52 PM से रात्रि 09:08 PM तक (कुल अवधि लगभग 2 घंटे 16 मिनट)।अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:58 AM से दोपहर 12:50 PM तक (दिन के समय संकल्प लेने के लिए उत्तम)।अमृत काल मुहूर्त: शाम की पूजा से पूर्व संध्या काल में ध्यान और जप के लिए विशेष फलदायी।भौम प्रदोष व्रत का धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्वमंगलवार को पड़ने के कारण यह भौम प्रदोष कहलाता है। मंगल ग्रह को भूमि का कारक (भूमिपुत्र) माना गया है, जबकि भगवान शिव समस्त ब्रह्मांड के स्वामी और मंगल के अधिष्ठाता देव हैं। इसलिए जिन लोगों की कुंडली में मांगलिक दोष है, जिनका जमीन-जायदाद या पैतृक संपत्ति को लेकर कोई कानूनी विवाद चल रहा है, या जो लंबे समय से अपना घर बनाने का प्रयास कर रहे हैं, उनके लिए सावन का यह भौम प्रदोष व्रत किसी वरदान से कम नहीं है। इस दिन व्रत रखकर शाम के समय रुद्राभिषेक करने से मंगल के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं और अचल संपत्ति के योग बनते हैं।भूमि बाधा और कर्ज मुक्ति के अचूक उपाययदि आप जमीन-जायदाद की अड़चनों, फ्लैट की रजिस्ट्री में देरी या कोर्ट-कचहरी के विवादों से जूझ रहे हैं, तो भौम प्रदोष की शाम को ये विशेष उपाय जरूर करें:शहद और लाल चंदन से अभिषेक: शिवलिंग पर तांबे के लोटे से गंगाजल मिश्रित जल अर्पित करें। इसके बाद शहद और लाल चंदन का लेप लगाएं। इससे मंगल दोष शांत होता है और भूमि विवाद सुलझते हैं।21 बेलपत्र और लाल कनेर के पुष्प: 21 साबुत बेलपत्रों पर ॐ नमः शिवाय लिखकर और लाल कनेर के फूलों के साथ शिवलिंग पर अर्पित करें।ऋणमुक्तेश्वर शिव स्तोत्र का पाठ: यदि सिर पर भारी कर्ज है, तो प्रदोष काल में घी का चौमुखी दीपक जलाकर 'ऋणमुक्तेश्वर महादेव स्तोत्र' या 'मंगल कवच' का कम से कम तीन बार पाठ करें।मसूर की दाल का दान: पूजा के पश्चात किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को लाल मसूर की दाल और गुड़ का दान करने से आर्थिक तंगी दूर होती है।प्रदोष व्रत की संपूर्ण और प्रामाणिक पूजा विधिव्रत के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त हों और सफेद या हल्के लाल वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर भौम प्रदोष व्रत का संकल्प लें। दिनभर निराहार रहें या आवश्यकतानुसार फलाहार ग्रहण करें।शाम को प्रदोष काल शुरू होने से 15 मिनट पहले दोबारा स्वच्छ होकर पूजा स्थल पर बैठें। शिवलिंग को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराएं और फिर शुद्ध जल से अभिषेक करें। इसके बाद शिवलिंग पर भस्म, सफेद व लाल चंदन, अक्षत, धतूरा, भांग, जनेऊ, आंकड़े के फूल और बेलपत्र अर्पित करें। माता पार्वती को लाल चुनरी और सुहाग सामग्री चढ़ाएं। इसके उपरांत धूप-दीप जलाकर सावन प्रदोष व्रत की कथा सुनें या पढ़ें। अंत में 'ॐ नमः शिवाय' और 'महामृत्युंजय मंत्र' की कम से कम 108 बार माला जपें। भगवान शिव और माता गौरी की आरती उतारकर सभी में प्रसाद वितरित करें और अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें।
कश्मीर सिंह राजस्थान पेंशनर समाज अजमेर के पुन:अध्यक्ष निर्वाचित
अजमेर। राजस्थान पेंशनर समाज जिला शाखा अजमेर के चुनाव में कश्मीर सिंह पुन: निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित किए गए हैं। चुनाव अधिकारी के अनुसार अध्यक्ष पद के लिए वर्तमान अध्यक्ष का एक मात्र प्रस्ताव प्राप्त हुआ। अत: कश्मीर सिंह निर्विरोध अध्यक्ष घोषित किया गया। उल्लेखनीय है कि कश्मीर सिंह राज.पेंशनर समाज जयपुर के प्रांतीय उपाध्यक्ष भी […] The post कश्मीर सिंह राजस्थान पेंशनर समाज अजमेर के पुन:अध्यक्ष निर्वाचित appeared first on Sabguru News .
भारतीय रेलवे को दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क्स में गिना जाता है, जहां डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी तक चलने वाली 'विवेक एक्सप्रेस' जैसी ट्रेनें 4,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने में 75 से 80 घंटे का समय लेती हैं। वहीं दूसरी तरफ, हमारे देश में एक ऐसा रेल सफर भी मौजूद है जो शुरू होते ही पलक झपकते खत्म हो जाता है। महज 3 किलोमीटर की दूरी और सिर्फ 7 से 9 मिनट का सफर, लेकिन जब इस सफर के टिकट की कीमत सामने आती है, तो किसी का भी दिमाग चकरा जाना तय है। भारत का यह सबसे छोटा और अनोखा रेल रूट अपने आप में बेहद दिलचस्प और हैरान कर देने वाला है।नागपुर से अजनी: देश का सबसे छोटा सामान्य रेल रूटभारतीय रेलवे के नियमित नेटवर्क में सबसे कम दूरी का सफर महाराष्ट्र के नागपुर जंक्शन से अजनी रेलवे स्टेशन के बीच दर्ज है। इन दोनों स्टेशनों के बीच की पटरियों की दूरी मात्र 2.8 से 3 किलोमीटर है। नागपुर से रवाना होने के बाद ट्रेन को अपनी पूरी रफ्तार पकड़ने का मौका भी नहीं मिलता और वह 7 से 8 मिनट के भीतर अजनी के प्लेटफॉर्म पर खड़ी हो जाती है। यह रूट रेलवे के इतिहास में दो स्टेशनों के बीच सबसे कम दूरी का आधिकारिक रिकॉर्ड रखता है।हजारों रुपये का किराया: आखिर क्यों उड़ जाते हैं लोगों के होश?अक्सर यह सवाल उठता है कि महज 3 किलोमीटर के फासले के लिए जेब इतनी ढीली क्यों करनी पड़ती है? दरअसल, इस रूट पर चलने वाली कई सुपरफास्ट, प्रीमियम और लग्जरी हेरिटेज ट्रेनों के लिए रेलवे का बेस फेयर और मिनिमम डिस्टेंस स्लैब लागू होता है। यदि कोई यात्री इस 3 किलोमीटर के रूट पर किसी प्रीमियम ट्रेन (जैसे राजधानी या दुरंतो के फर्स्ट एसी) या लग्जरी टूरिस्ट ट्रेन के विशेष खंड का टिकट बुक करता है, तो रेलवे के नियमों के अनुसार उससे न्यूनतम 300 से 500 किलोमीटर का बेस फेयर, रिजर्वेशन चार्ज और सुपरफास्ट सरचार्ज वसूला जाता है। लग्जरी टूरिस्ट कोच के पैकेज बुकिंग में यह किराया कई हजार रुपये तक पहुंच जाता है, जिससे यह प्रति किलोमीटर के हिसाब से देश का सबसे महंगा रेल सफर बन जाता है।लोकल यात्रियों के लिए वरदान और अनोखा अनुभवआमतौर पर इस दूरी को लोग लोकल ऑटो, कैब या सिटी बस से तय करते हैं, लेकिन नागपुर और अजनी के बीच दैनिक रूप से यात्रा करने वाले कई कर्मचारी और यात्री पैसेंजर व मेमू ट्रेनों के 10 से 30 रुपये वाले सामान्य टिकट से भी यह सफर पूरा करते हैं। नागपुर स्टेशन पर भारी भीड़ से बचने के लिए कई बार लोग अजनी से ट्रेन पकड़ना ज्यादा सुविधाजनक मानते हैं।रेलवे इतिहास का अनोखा पन्नादुनियाभर में जहां जापान और स्विट्जरलैंड अपनी अत्याधुनिक और लंबी बुलेट ट्रेनों के लिए जाने जाते हैं, वहीं भारतीय रेलवे की यह विविधता इसे सबसे अलग बनाती है। हजारों किलोमीटर का लंबा सफर तय करने वाली विशाल ट्रेनों का मात्र 3 किलोमीटर और 7 मिनट के लिए एक स्टेशन पर रुकना, रेलवे संचालन की तकनीकी व्यवस्था और ऐतिहासिक ढांचे का एक नायाब उदाहरण पेश करता है।
राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (UGC-NET) समेत प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में सामने आई विसंगतियों, पेपर लीक के दावों और तकनीकी गड़बड़ियों को केंद्र सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की साख और कार्यप्रणाली पर उठे चौतरफा सवालों के बीच सरकार ने एजेंसी के आंतरिक ढांचे में बड़ा प्रशासनिक ऑपरेशन शुरू कर दिया है। केंद्रीय कैबिनेट के कड़े निर्देशों और उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद एनटीए के परीक्षा संचालन, आईटी और गोपनीय शाखा से जुड़े 50 से अधिक अधिकारियों व अनुबंधित कर्मियों को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया गया है। पारदर्शी और त्रुटिहीन परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा आंतरिक प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।गोपनीयता और परीक्षा संचालन में लापरवाही पर गिरी गाजहाल के महीनों में यूजीसी नेट परीक्षा को लेकर गृह मंत्रालय के 'इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर' (I4C) से मिले इनपुट्स के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रारंभिक जांच में पाया गया कि प्रश्नपत्रों के निर्माण, मॉडरेशन, डेटा हैंडलिंग और आउटसोर्सिंग वेंडर्स की निगरानी में गंभीर प्रशासनिक शिथिलता बरती गई थी। इसी जवाबदेही को तय करते हुए विभिन्न स्तरों पर तैनात लगभग 50 अधिकारियों, सलाहकारों और समन्वयकों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं तथा कुछ को उनके मूल विभागों में वापस भेज दिया गया है।राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों पर अमल शुरूपरीक्षाओं को फुलप्रूफ और तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाने के लिए सरकार द्वारा इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों को लागू करना शुरू कर दिया गया है। समिति ने एनटीए में बड़े पैमाने पर स्थायी और विषय-विशेषज्ञों की भर्ती, आउटसोर्सिंग स्टाफ पर अत्यधिक निर्भरता घटाने तथा डेटा सुरक्षा के कड़े ऑडिट की वकालत की थी। मौजूदा प्रशासनिक फेरबदल इसी रिफॉर्म का हिस्सा है, जिसके तहत परीक्षा नियंत्रण से जुड़े संवेदनशील पदों पर प्रतिनियुक्ति के बजाय उच्च मानकों वाले स्थायी अधिकारियों को तैनात किया जा रहा है।सीबीआई जांच और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेजयूजीसी नेट मामले में दर्ज आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा की जा रही है। जांच एजेंसियां केवल बाहरी साल्वर गैंग्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एनटीए के आंतरिक तंत्र और प्रिंटिंग प्रेस से लेकर परीक्षा केंद्रों तक की हर कड़ी की फॉरेंसिक जांच कर रही हैं। हटाए गए कर्मियों और संबंधित नोडल अधिकारियों के रिकॉर्ड्स, डिजिटल लॉग्स और संचार विवरणों का भी विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यदि किसी भी स्तर पर मिलीभगत सिद्ध होती है, तो उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जा सके।भविष्य की परीक्षाओं के लिए मल्टी-लेयर सिक्योरिटी सिस्टमप्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों का विश्वास बहाल करने के लिए एनटीए की आगामी सभी परीक्षाओं के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार किया गया है। इसमें बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, रियल-टाइम एआई आधारित सीसीटीवी निगरानी, जैमर्स का अनिवार्य उपयोग और डिजिटल क्वेश्चन पेपर ट्रांसफर के लिए एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन शामिल है। इसके अलावा, राज्य सरकारों और जिला प्रशासन के साथ मिलकर परीक्षा केंद्रों के चयन और भौतिक सत्यापन के नियमों को अत्यंत सख्त कर दिया गया है।लाखों अभ्यर्थियों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकताशिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि देश के करोड़ों मेहनती युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाल ही में लागू हुए 'पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट' के कड़े प्रावधानों के तहत परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ भारी जुर्माने और गैर-जमानती जेल की सजा का रास्ता साफ हो चुका है। एनटीए में यह बड़ा प्रशासनिक शुद्धिकरण इस बात का स्पष्ट संदेश है कि परीक्षा संचालन में किसी भी स्तर की लापरवाही या भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर अपने बोल्ड और बेबाक किरदारों से रातों-रात पहचान बनाने वाली मशहूर अभिनेत्री नेहल वडोलिया ने एडल्ट व बोल्ड कंटेंट की दुनिया को पूरी तरह से अलविदा कह दिया है। 'गंदी बात 3', 'मस्तराम' और 'विमला' जैसी लोकप्रिय वेब सीरीज में काम कर चुकीं नेहल ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बोल्ड इंडस्ट्री के काले सच और शूटिंग के दौरान झेले गए अपने दर्दनाक अनुभवों को साझा किया है। उनके इस खुलासे ने फिल्म और ओटीटी इंडस्ट्री में इंटिमेट सीन्स की शूटिंग के तौर-तरीकों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।बोल्ड सीन्स की शूटिंग के दौरान शारीरिक दर्द और चोटेंनेहल वडोलिया ने बताया कि पर्दे पर जो बोल्ड और रोमांटिक सीन्स दर्शकों को बहुत सहज या ग्लैमरस दिखते हैं, उनकी शूटिंग असल जिंदगी में अभिनेत्रियों के लिए बेहद दर्दनाक और तनावपूर्ण होती है। नेहल के मुताबिक, लगातार कई घंटों तक चलने वाले किसिंग और इंटीमेट सीन्स के कारण उनके होंठ सूज जाते थे और शरीर पर गहरे निशान व खरोंचें पड़ जाती थीं। कई बार को-एक्टर्स सीन में इतने खो जाते थे या आक्रामक हो जाते थे कि वे यह भूल जाते थे कि यह केवल एक एक्टिंग है, जिससे उन्हें अत्यधिक शारीरिक तकलीफ से गुजरना पड़ता था।मानसिक तनाव और प्राइवेसी की कमीशारीरिक दर्द के अलावा ऐसे सीन्स को शूट करते वक्त मानसिक प्रताड़ना भी कम नहीं होती थी। नेहल ने खुलासा किया कि कई प्रोडक्शन हाउस में सेट्स पर बुनियादी प्रोटोकॉल और प्राइवेसी का पालन नहीं किया जाता था। इंटीमेट सीन्स के दौरान भी सेट पर जरूरत से ज्यादा गैर-जरूरी लोग मौजूद रहते थे। हर समय असहज महसूस होने और खुद को वस्तु (ऑब्जेक्टिफाई) की तरह पेश किए जाने के अहसास ने उन्हें गहरे डिप्रेशन और एंग्जायटी में धकेल दिया था। शूटिंग के बाद वे अक्सर घंटों रोती थीं और खुद को अकेला महसूस करती थीं।टाइपकास्ट होने का डर और काम की सीमितताओटीटी स्पेस में एक बार बोल्ड किरदार निभाने के बाद मेकर्स ने उन्हें केवल उसी जॉनर में सीमित करना शुरू कर दिया। नेहल के पास आने वाले ज्यादातर प्रोजेक्ट्स में केवल न्यूडिटी और बोल्डनेस की ही मांग की जा रही थी, जबकि उनकी अभिनय क्षमता को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा था। नेहल एक बहुमुखी अभिनेत्री के तौर पर मुख्यधारा (मेनस्ट्रीम) के टेलीविजन शोज और फिल्मों में सशक्त अभिनय करना चाहती थीं, लेकिन बोल्ड इमेज उनके करियर के आड़े आने लगी थी।परिवार और समाज का दबावबोल्ड किरदारों के चलते नेहल को निजी जीवन में भी काफी आलोचनाओं और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ा। उनके परिवार को रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों के ताने सुनने पड़ते थे। इस तरह के कंटेंट से मिलने वाली बदनामी और निजी जीवन पर पड़ रहे नकारात्मक असर को देखते हुए नेहल ने यह कड़ा फैसला लिया कि वे अब कभी भी किसी वेब सीरीज या फिल्म में सीमा से अधिक बोल्ड या अश्लील दृश्य नहीं करेंगी।टीवी और सार्थक सिनेमा में नई शुरुआतअपने इस बोल्ड अतीत को पीछे छोड़ते हुए नेहल वडोलिया ने अब मुख्यधारा के टीवी धारावाहिकों और संजीदा वेब प्रोजेक्ट्स की ओर रुख किया है। वे 'श्रीकृष्ण' और 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' जैसे लोकप्रिय शोज में अपने अभिनय का हुनर दिखा चुकी हैं। नेहल का कहना है कि अब वे केवल उन्हीं प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनेंगी जहां उनकी अदाकारी का सम्मान हो, न कि उनके शरीर का प्रदर्शन। उनका यह साहसिक कदम इंडस्ट्री में आने वाली नई अभिनेत्रियों के लिए एक बड़ा सबक है कि फेम के चक्कर में अपनी गरिमा और मानसिक शांति से कभी समझौता नहीं करना चाहिए।
सिर्फ चार दिन में गिरे बंटवारा 1947 की टिकट के दाम, इतनी सस्ती हुई फिल्म की टिकट
फिल्म उस मुश्किल दौर को जीवंत करती है, जब लाखों परिवारों को अपनी जड़ों से उखड़ना पड़ा था, फिर भी लोगों ने मजबूती, साहस और आपसी भाईचारे से नई जिंदगी की शुरुआत की.
भाजपा अध्यक्ष नवीन की नई टीम घोषित, 13 उपाध्यक्ष और 8 महासचिव बनाए गए
स्नेहिल चौरसिया नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने अपने राष्ट्रीय संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए अध्यक्ष नवीन की नई टीम की घोषणा कर दी है। नई कार्यकारिणी में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश […]
जयपुर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा से वार्ता की। महामंत्री महेंद्र लखारा ने बताया कि वार्ता के दौरान शिक्षा में स्टाफिंग पैटर्न लागू कर समानुपात में शिक्षकों की नियुक्ति करने, 33000 संविदा शिक्षको को प्रबोधकों […] The post अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) की अतिरिक्त मुख्य सचिव से वार्ता सम्पन्न appeared first on Sabguru News .
6.5 लाख सैनिकों की मौत, 16 हजार+ नागरिक मारे गए; रूस-यूक्रेन युद्ध का हिसाब कब मांगेगी दुनिया?
आज आपको आसान शब्दों में बताते हैं कि आखिर रूस और यूक्रेन की जंग शुरू क्यों हुई थी, इस युद्ध में रूस ने क्या गंवाया है, यूक्रेन को कितना नुकसान हुआ है और इस जंग की वजह से दोनों देशों के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां खड़ी हुई हैं.
Jio का धमाका, 300 रुपये में 1 साल तक का प्लान रिजर्व कर सकते हैं
Jio ने एक ऐसा प्लान लॉन्च किया है जो लोगों को कन्फ्यूज कर रहा है. एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि टेलीकॉम कंपनियां अब अपने प्लान्स महंगे करने वाले हैं. इसी बीच जियो ने प्राइम को दुबारा लॉन्च किया है. कंपनी के मुताबिक इस प्लान को लेने वाले यूजर्स को एक साल तक एक ही प्राइस में रिचार्ज होगा. क्या है इसका पूरा मतलब आइए समझते हैं.

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