Gandhari Review: दम तोड़ता ट्विस्ट, बेअसर है तापसी की 'गांधारी' की कहानी
कैसी है तापसी पन्नू की ‘गांधारी’? बेटी की तलाश, चाइल्ड ट्रैफिकिंग और बदले की इस कहानी में तापसी का एक्शन दमदार है, लेकिन क्या कमजोर कहानी और उलझे ट्विस्ट फिल्म का मजा किरकिरा कर देते हैं? पढ़ें पूरा रिव्यू.
CJP के 'स्कूल ठीक करो' अभियान को SC ने दिया झटका, स्कूल में घुसने से पहले लेनी ही होगी इजाजत
आपको बता दें कि यह याचिका कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे 'स्कूल ठीक करो' अभियान को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। याचिका में मुख्य रूप से दो राज्यों के आदेशों को चुनौती दी गई थी।
6 महीने में 233% भागा ये स्टॉक, अब ₹3200 पर जाएगा, खरीदें!
विदेशी ब्रोकरेज फर्म ने निवेशको को एक शेयर खरीदने की सलाह दी है, जिसने छह महीने में 233 फीसदी की तेजी दिखाई है और अभी भी तेजी पर कारोबार कर रहा है. ब्रोकरेज का कहना है कि इसकी कमाई से लेकर ROE में काफी सुधार हो रहा है.
रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करवाएगा भारत? विदेश मंत्री एस. जयशंकर बोले- हम मदद को तैयार
S Jaishankar about Russia Ukraine war: विदेश मंत्री जयशंकर ने कीव में रूस और यूक्रेन के युद्ध को लेकर कहा है कि अगर जरूरत पड़ती है, तो भारत मदद करने के लिए तैयार है। कीव दौर पर पहुंचे विदेश मंत्री ने अपने यूक्रेनी समकक्ष से मुलाकात की।
आकाश आनंद पर मायावती का यू-टर्न: बताया 'अपरिपक्व', बसपा में नहीं मिलेगी कोई बड़ी जिम्मेदारी
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने गुरुवार को पार्टी की आल इंडिया बैठक में पिछले दिये गये कार्यों की समीक्षा व उनकी कमियों को दूर करने के निर्देश दिए। साथ ही, हर वर्ष के सालाना होने वाली गतिविधियों के बारे में भी पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों को दिये गये जरूरी दिशा-निर्देशों का पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ अनुपालन करने की भी सख्त हिदायत दी।
मणिपुर हिंसा में मई 2023 से अब तक 306 लोगों की मौत और 49 लोग लापता होने की जानकारी राज्य के गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजम ने विधानसभा में दी।
बेटी ने की CM के खिलाफ टिप्पणी तो मंत्री मैडम की कैबिनेट से ही हो गई छुट्टी, पूरा विवाद क्या?
यह मामला दिल्ली में CM रेवंत रेड्डी, उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क, तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़, सुरेखा और अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत के बाद कांग्रेस आलाकमान तक पहुंचा था।
तेलंगाना की वन मंत्री कोंडा सुरेखा को बेटी की टिप्पणी पड़ी भारी, सीएम रेड्डी ने मंत्रिमंडल से निकाला
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने मंत्री कोंडा सुरेखा को उनकी बेटी द्वारा मुख्यमंत्री और पार्टी नेताओं के खिलाफ की गई टिप्पणियों के बाद मंत्रिपरिषद से हटा दिया।
'मथुरा में भी बनेगा भव्य मंदिर'... सपा, बीजेपी, AIMIM के नेता कैसे भिड़ गए
मथुरा में आयोजित 'पंचायत आजतक' के मंच पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि और भव्य मंदिर निर्माण के मुद्दे को लेकर भाजपा और सपा प्रवक्ताओं में तीखी राजनीतिक जंग देखने को मिली. हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रवक्ता वारिस पठान के बीच जमकर बहस हुई.
अभिनंदन वर्तमान प्राइवेट एयरलाइन कंपनी में बने पायलट, जानिए 2019 में क्या हुआ था - BBC
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टैरिफ ने कारोबारियों पर बढ़ाया दबाव, चीन को नुकसान तो भारत के लिए उभर रहा अवसर
वैश्विक व्यापार का नक्शा फिर से खींचा जा रहा है—अंतरराष्ट्रीय कारोबार में किसी अचानक आई गिरावट के कारण नहीं, बल्कि इस अपेक्षाकृत शांत और संभावित रूप से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बदलाव के कारण कि कंपनियां अपनी खरीदारी, विनिर्माण और आपूर्ति का स्रोत कहां से तय कर रही हैं। अमेरिका अपनी टैरिफ नीति में लगातार बदलाव […]
सूट पहनकर टॉयलेट में घुसी महिला कैदी, बुर्का पहनकर भाग निकली!
यूपी के बरेली में पॉक्सो एक्ट की आरोपी महिला कैदी ममता जिला अस्पताल से फिल्मी अंदाज में फरार हो गई. उसने टॉयलेट में कपड़े बदलकर बुर्का पहना और चकमा देकर भाग निकली. एसएसपी ने लापरवाही बरतने वाली दो महिला सिपाहियों को निलंबित कर दिया है.
स्वाइन फ्लू में बुखार नहीं तो क्या संक्रमण नहीं?
स्वाइन फ्लू यानी H1N1 में बुखार आम लक्षण है, लेकिन हर मरीज को बुखार आए यह जरूरी नहीं. सूखी खांसी, गले में खराश, थकान और शरीर में दर्द जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं. सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. वीडियो में जानें कब जाएं डॉक्टर के पास.
तेलंगाना CM Revanth Reddy ने Konda Surekha को Cabinet से हटाया, बेटी की टिप्पणी बनी वजह
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने गुरुवार को कोंडा सुरेखा को तुरंत प्रभाव से मंत्रिपरिषद से हटाने का फैसला किया। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की एक विज्ञप्ति के अनुसार, सरकार ने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला से इसकी सिफारिश की है। मुख्यमंत्री और पार्टी के अन्य नेताओं के बारे में अपनी बेटी की तीखी टिप्पणियों के बाद वन और बंदोबस्त मंत्री कोंडा सुरेखा विवादों में घिर गई थीं, जिस पर सत्ताधारी पार्टी के विधायकों और पदाधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। इसे भी पढ़ें: Kolkata Politics: अभिषेक बनर्जी के ऑफिस में तोड़फोड़ के बाद TMC-BJP में जुबानी जंग तेज, पुलिस ने 6 को किया गिरफ्तार इससे पहले, कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति ने भी उन्हें कैबिनेट से हटाने की सिफारिश की थी। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और पार्कल के विधायक रेवुरी प्रकाश रेड्डी पर कोंडा सुष्मिता की टिप्पणियों के बाद उनकी माँ कोंडा सुरेखा को कैबिनेट से हटा दिया गया है। इन टिप्पणियों पर पार्टी के भीतर तीखी प्रतिक्रिया हुई, जिसके बाद तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) की अनुशासन समिति ने इस मामले में सुरेखा को नोटिस जारी किया। इसे भी पढ़ें: पंजाब की वोटर लिस्ट से नाम हटने पर भड़के राघव चड्ढा, AAP पर लगाया 'राजनीतिक बदले' का आरोप, पार्टी का पलटवार नोटिस का जवाब देते हुए सुरेखा ने कहा कि उनकी बेटी की टिप्पणियाँ पूरी तरह से उनकी अपनी निजी राय थीं। सुरेखा ने कहा कि सिर्फ़ पारिवारिक रिश्तों की वजह से किसी और से राजनीतिक ज़िम्मेदारी लेने की उम्मीद करना या किसी की राय के लिए सफ़ाई माँगना गलत है। उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में खड़गे और पार्टी मामलों की AICC प्रभारी मीनाक्षी नटराजन से भी मुलाकात की और उनके सामने अपना पक्ष रखा। बढ़ते दबाव के बावजूद सुरेखा ने इस्तीफ़ा देने से इनकार कर दिया और पार्टी नेतृत्व को उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की चुनौती दी। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
कृष्ण जन्माष्टमी पर 2 राशियों को मिलेगी बड़ी सफलता, पढ़ें पूरा राशिफल
Kal Ka Rashifal 3 September 2026: कल खर्च बढ़ने से बजट प्रभावित हो सकता है. आर्थिक स्थिति मिश्रित रहेगी, इसलिए निवेश और लेनदेन में सावधानी रखें. लुभावने प्रस्तावों और प्रलोभन से बचें. करियर-कारोबार सामान्य रहेगा.
अभिजीत दीपके अपनी डिग्री दिखाने को तैयार, लेकिन पीएम मोदी का नाम ले रख दी एक शर्त
अभिजीत दीपके ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि लोग मेरी डिग्री देखने का इंतजार करते-करते सच में सब्र खो रहे हैं। मुझे हैरानी होती है कि वे 12 साल से प्रधानमंत्री की डिग्री देखे बिना कैसे रह रहे हैं।
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में गोविंद देव गिरि के प्रमोशन पर उठे सवाल
ram mandir trust govind dev giri: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक में प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। चढ़ावा विवाद के चलते चंपत राय की जिम्मेदारी अब गोविंद देव गिरि को सौंपी गई है। ...
एक्सरसाइज के बाद सांस फूलना नॉर्मल या खतरा? डॉक्टर से जानें
व्यायाम के दौरान और बाद में सांस फूलना सामान्य हो सकता है क्योंकि शरीर को अधिक ऑक्सीजन की जरूरत होती है. डॉक्टरों का कहना है कि सांस लेने में अचानक तकलीफ, सीने में दर्द या जकड़न महसूस होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए.
शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने अपने OSD से पूछा- UPSC की तैयारी कैसे करते हैं? मिला ये जवाब
Education Minister UPSC Video: शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी NCERT के 66वें स्थापना दिवस के मौके पर बोल रहे थे. इस दौरान उन्होंने बताया कि जब भी वो किसी UPSC एस्पिरेंट से पूछते हैं कि इसकी तैयारी वो कैसे करते हैं तो सभी का एक ही जवाब होता है.
आपका दिल कितना मजबूत है? बिना अस्पताल जाए इन 7 आसान घरेलू संकेतों और टेस्ट से जानें दिल का असली हाल
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, बिगड़ी हुई जीवनशैली, अत्यधिक तनाव और पैकेज्ड व जंक फूड के बढ़ते चलन ने हमारे हृदय स्वास्थ्य को सबसे बड़े खतरे में डाल दिया है। पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से कम उम्र के युवाओं और फिट दिखने वाले लोगों में अचानक कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक के चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं, उसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। अक्सर लोग यह मान बैठते हैं कि जब तक सीने में कोई तेज दर्द या सांस का गंभीर दौरा न पड़े, तब तक उनका दिल पूरी तरह ठीक काम कर रहा है। हकीकत यह है कि हृदय से जुड़ी कई बीमारियां और आर्टरीज में ब्लॉकेज चुपचाप विकसित होते हैं, जिन्हें मेडिकल भाषा में साइलेंट किलर कहा जाता है। देश के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट और हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि महंगे मेडिकल टेस्ट कराने से पहले भी कुछ ऐसे बुनियादी शारीरिक संकेत और साधारण सेल्फ-असेसमेंट तरीके हैं, जिनसे आप खुद जान सकते हैं कि आपका दिल कितना तंदुरुस्त और मजबूत है।1. रेस्टिंग हार्ट रेट: 60 से 100 के बीच की धड़कन है सुरक्षा का पैमानासुबह सोकर उठने के तुरंत बाद, जब शरीर पूरी तरह शांत अवस्था में हो, उस वक्त नापी गई पल्स को रेस्टिंग हार्ट रेट (Resting Heart Rate) कहते हैं। एक स्वस्थ वयस्क के दिल की धड़कन सामान्य अवस्था में 60 से 100 बीट्स प्रति मिनट (BPM) के बीच होनी चाहिए। यदि आप नियमित व्यायाम या खेलकूद करते हैं, तो आपका रेस्टिंग हार्ट रेट 50 से 60 के बीच भी हो सकता है, जो एक बेहद मजबूत हृदय मांसपेशी का संकेत माना जाता है। लेकिन अगर शांत बैठे रहने पर भी आपकी धड़कनें लगातार 90 या 100 से ऊपर भाग रही हैं, तो इसका अर्थ है कि शरीर के अंगों तक खून पहुंचाने के लिए आपके दिल को अतिरिक्त दबाव झेलना पड़ रहा है, जो हृदय की कार्यक्षमता कमजोर होने का पहला प्राथमिक संकेत हो सकता है।2. स्टेयर क्लाइम्ब टेस्ट: क्या 45 सेकंड में चढ़ पाते हैं 60 सीढ़ियां?यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी द्वारा प्रमाणित 'स्टेयर क्लाइम्ब टेस्ट' (Stair Climb Test) हृदय स्वास्थ्य को परखने का सबसे आसान और सटीक घरेलू पैमाना माना जाता है। यदि आप बिना रुके, बिना अत्यधिक हांफे या बिना सीने में भारीपन महसूस किए 3 से 4 मंजिल यानी लगभग 60 सीढ़ियां 45 से 60 सेकंड में सामान्य गति से चढ़ लेते हैं, तो यह दर्शाता है कि आपकी कार्डियोवैस्कुलर क्षमता बहुत अच्छी है। इसके विपरीत, यदि महज एक मंजिल चढ़ने में ही आपकी सांस फूलने लगती है, चक्कर आने लगते हैं या दिल की धड़कनें बेकाबू होकर सीने में असहजता पैदा करती हैं, तो यह सीधे तौर पर कमजोर स्टैमिना और हृदय पर अत्यधिक दबाव का स्पष्ट चेतावनी संकेत है।3. रिकवरी रेट: वर्कआउट या तेज चलने के बाद कितनी जल्दी संभलती है सांस?हार्ट की असली फिटनेस इस बात में नहीं है कि एक्सरसाइज के दौरान आपकी धड़कन कितनी तेज होती है, बल्कि इस बात में है कि रुकने के बाद वह कितनी जल्दी सामान्य होती है। इसे हार्ट रेट रिकवरी (HRR) कहा जाता है। जब आप 10 मिनट की तेज सैर (Brisk Walk) या रनिंग पूरी करते हैं, तो रुकने के ठीक 1 मिनट बाद अपनी पल्स चेक करें। यदि 1 मिनट के भीतर आपकी हृदय गति में कम से कम 12 से 20 बीट्स की गिरावट आ जाती है और आपकी सांस सहज होने लगती है, तो इसका मतलब है कि आपका ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम और हार्ट की रिकवरी क्षमता शानदार स्तर पर काम कर रही है।4. ब्लड प्रेशर और सर्कुलेशन: 120/80 का स्वर्णिम संतुलनहृदय की सेहत की सीधी पड़ताल ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) से होती है। आदर्श ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg के आसपास होना चाहिए। लगातार 130/85 से ऊपर रहने वाला बीपी आर्टरीज की भीतरी दीवारों को सख्त और संकरा बना देता है, जिसे हाइपरटेंशन कहते हैं। यदि आपका ब्लड प्रेशर संतुलित रहता है और शरीर में रक्त संचार दुरुस्त है, तो हाथ-पैर ठंडे नहीं पड़ते और सुन्नता नहीं आती। अच्छा ब्लड फ्लो यह साबित करता है कि दिल पूरे शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को बिना किसी रुकावट के पंप करने में पूरी तरह सक्षम है।5. पैरों, टखनों और पंजों में सूजन न होना (नो एडिमा)दिनभर सामान्य कामकाज या कुर्सी पर बैठने के बाद शाम के समय यदि आपके टखनों, पंजों या पिंडलियों में बिना किसी चोट के सूजन (Edema) आ जाती है और उंगली से दबाने पर गड्ढा बन जाता है, तो यह दिल की विफलता (Heart Failure) का शुरुआती लक्षण हो सकता है। जब हृदय रक्त को प्रभावी ढंग से वापस ऊपर की ओर पंप नहीं कर पाता, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण शरीर के निचले अंगों में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। यदि आपके पैरों और टखनों में कोई सूजन नहीं रहती और जूते चुभने जैसी स्थिति नहीं बनती, तो यह बताता है कि आपका वैस्कुलर सिस्टम और राइट वेंट्रिकल ठीक से काम कर रहे हैं।6. दिनभर लगातार स्फूर्ति और बिना वजह अत्यधिक थकान की अनुपस्थितिअगर आपको 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लेने के बाद भी सुबह उठते ही भारीपन, सुस्ती और अत्यधिक शारीरिक थकान महसूस होती है, तो यह कोशिकाओं तक पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त न पहुंचने का संकेत हो सकता है। जब दिल की मांसपेशियां कमजोर होती हैं, तो वह महत्वपूर्ण अंगों जैसे मस्तिष्क और मांसपेशियों तक पूरा खून नहीं पहुंचा पाता, जिससे मरीज को थोड़ी सी चहलकदमी में भी थकावट होने लगती है। यदि आप दिनभर ऊर्जावान महसूस करते हैं और सामान्य काम बिना किसी असामान्य थकान के निपटा लेते हैं, तो आपका दिल अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहा है।7. मुंह की सेहत और सांसों का गहरा संबंध: मसूड़ों की सूजन से सतर्क रहेंचिकित्सा जगत में कई शोध यह साबित कर चुके हैं कि ओरल हेल्थ और हार्ट हेल्थ के बीच गहरा संबंध होता है। मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया और मसूड़ों की सूजन (Periodontitis) खून के रास्ते धमनियों तक पहुंचकर सूजन पैदा कर सकते हैं, जिससे एथेरोस्क्लेरोसिस यानी ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है। मसूड़ों से खून न आना, मुंह का साफ रहना और गहरी सांसें बिना किसी घुटन के ले पाना एक स्वस्थ कार्डियोवैस्कुलर प्रोफाइल का अप्रत्यक्ष लेकिन बेहद अहम पैमाना है।दिल को हमेशा दुरुस्त रखने के 4 जरूरी कार्डियो रूल्सयदि आप चाहते हैं कि आपका दिल दशकों तक बिना किसी रुकावट के धड़कता रहे, तो रोजाना कम से कम 30 मिनट का मध्यम एरोबिक व्यायाम, जैसे तेज गति से चलना या स्विमिंग जरूर करें। अपने भोजन में अत्यधिक नमक, रिफाइंड तेल, ट्रांस फैट्स और चीनी की मात्रा तुरंत सीमित करें और मौसमी हरी सब्जियों व फलों को प्राथमिकता दें। 30 साल की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार अपना लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल टेस्ट), फास्टिंग ब्लड शुगर और ईसीजी (ECG) अवश्य करवाएं। किसी भी प्रकार के असामान्य सीने के दर्द, जबड़े या बाएं हाथ में जाने वाले दर्द को एसिडिटी मानकर नजरअंदाज करने की भूल कभी न करें।
आजकल शहरों में जगह की कमी और गार्डनिंग के बढ़ते शौक के कारण अधिकांश लोग अपने घर की छत (टेरेस) पर तरह-तरह के पेड़-पौधे और गमले रख देते हैं। हरियाली आंखों को सुकून देती है और पर्यावरण को शुद्ध बनाती है, लेकिन वास्तु शास्त्र के नियमों की अनदेखी करने पर यही शौक घर-परिवार के लिए भारी परेशानियों की वजह बन सकता है। कई बार लोग बिना सोचे-समझे छत के किसी भी कोने में भारी गमले रख देते हैं या ऐसे पौधे लगा लेते हैं जो नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं। वास्तु शास्त्र में छत को घर का सुरक्षा चक्र और खुला आकाश तत्व माना गया है। यदि इस स्थान पर वास्तु नियमों के विरुद्ध पेड़-पौधों का भारी जमावड़ा कर दिया जाए, तो यह घर के मुख्य कमाने वाले सदस्य की तरक्की, स्वास्थ्य और धन-संपत्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।छत पर गलत तरीके से गमले रखना क्यों माना जाता है वास्तु दोष?वास्तु विज्ञान के सिद्धांतों के अनुसार घर की छत का संबंध सीधे तौर पर सकारात्मक ऊर्जा के संचार और ग्रहों की स्थिति से होता है। जब छत पर बेतरतीब ढंग से भारी मिट्टी के गमले, सीमेंट के बड़े पॉट्स या घने पेड़ रख दिए जाते हैं, तो छत पर अत्यधिक भार (Weight) बढ़ जाता है। वास्तु में ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) और पूर्व दिशा को हमेशा हल्का, खुला और साफ-सुथरा रखने का विधान है क्योंकि यहीं से दैवीय ऊर्जा और सकारात्मक तरंगें घर में प्रवेश करती हैं। यदि कोई व्यक्ति उत्तर या पूर्व दिशा की छत पर भारी गमलों की कतार लगा देता है, तो उस घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है। इससे गृहस्वामी को लगातार आर्थिक संकट, व्यापार में घाटा और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है।छत पर गीलापन और सीलन: राहु-केतु और शनि का अशुभ प्रभावछत पर बागवानी करने का सबसे बड़ा व्यावहारिक और वास्तु दोष सीलन (Dampness) के रूप में सामने आता है। गमलों में रोजाना पानी देने से गमले के नीचे फर्श पर लगातार नमी बनी रहती है। कई बार ड्रेनेज सही न होने पर काई जम जाती है या पानी रिसकर नीचे कमरों की छतों तक पहुंचने लगता है। वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में घर की छत को शनि और राहु से जोड़कर देखा जाता है। छत पर जमा होने वाली गंदगी, कचरा, सूखी पत्तियां और सीलन राहु दोष को सक्रिय कर देती हैं। ऐसा होने पर घर के सदस्यों के बीच अकारण वाद-विवाद, कानूनी पचड़े, अनिद्रा, अचानक धन हानि और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं बढ़ने लगती हैं।छत पर भूलकर भी न रखें ये पौधे: बढ़ता है तनाव और क्लेशवास्तु शास्त्र में पौधों के प्रकार को लेकर बहुत कड़े दिशा-निर्देश दिए गए हैं। कुछ पौधे ऐसे होते हैं जिन्हें छत पर रखना सीधे तौर पर वास्तु दोष को न्योता देना माना जाता है:कैक्टस और कांटेदार पौधे: गुलाब को छोड़कर किसी भी प्रकार का कांटेदार पौधा (जैसे कैक्टस या थूहर) घर की छत पर बिल्कुल नहीं रखना चाहिए। कांटेदार पौधे नकारात्मक ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं, जिससे परिवार के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक और रिश्तों में खटास आती है।दूध वाले पौधे: जिन पौधों की टहनियां या पत्ते तोड़ने पर सफेद गाढ़ा दूध जैसा द्रव निकलता है, उन्हें छत पर लगाने से धन का अपव्यय होता है और आर्थिक स्थिरता डगमगा जाती है।बोनसाई के पौधे: दिखने में बेहद आकर्षक लगने वाले बोनसाई पौधे असल में विकास को कृत्रिम रूप से रोककर तैयार किए जाते हैं। वास्तु के अनुसार घर की छत पर बोनसाई रखने से परिवार के बच्चों और कारोबार की प्रगति अवरुद्ध हो जाती है।पीपल और बरगद का स्वतः उगना: अक्सर पक्षियों के जरिए छत की दीवारों या कोनों में पीपल या बरगद के पौधे उग आते हैं। वास्तु में इन्हें कभी भी बढ़ने नहीं देना चाहिए। इन्हें पूरी श्रद्धा के साथ जड़ सहित निकालकर किसी मंदिर के पास या खुली जमीन में पुनर्स्थापित कर देना चाहिए।छत पर गमले रखने की सही दिशा और वास्तु के अचूक नियमअगर आप गार्डनिंग के शौकीन हैं और छत पर पौधे रखना ही चाहते हैं, तो वास्तु शास्त्र के कुछ नियमों का पालन करके नकारात्मक प्रभावों से पूरी तरह बच सकते हैं।सबसे पहले दिशा का ध्यान रखें। यदि आपके पास भारी पौधे, बड़े पेड़ या बड़े सीमेंट के गमले हैं, तो उन्हें हमेशा छत के दक्षिण (South), पश्चिम (West) या नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) में ही रखें। वास्तु में यह दिशा भारी और ऊंची रखने का नियम है, इसलिए यहां वजन बढ़ाने से घर में स्थिरता और सुरक्षा की भावना मजबूत होती है।उत्तर और पूर्व दिशा की छत को जितना हो सके खाली और हल्का रखें। यदि इन दिशाओं में पौधे रखने ही हों, तो केवल छोटे गमलों में तुलसी, पुदीना, हरी दूब या हल्के मौसमी फूलों के पौधे ही लगाएं जिनकी ऊंचाई कम हो।गमलों को सीधे छत के फर्श पर टिकाकर रखने के बजाय हमेशा लोहे या कंक्रीट के स्टैंड्स (Planter Stands) पर रखें। स्टैंड का इस्तेमाल करने से गमलों के नीचे हवा का प्रवाह बना रहता है, फर्श पर पानी नहीं ठहरता और सीलन व काई की समस्या से शत-प्रतिशत छुटकारा मिल जाता है। छत की नियमित सफाई करें और गमलों में गिरी सूखी पत्तियों और कचरे को तुरंत हटाएं।प्रकृति और हरियाली हमेशा शुभता का प्रतीक होती है, बशर्ते उसे सही संतुलन, स्वच्छता और वास्तु सम्मत दिशा में संजोया जाए। सही नियमों के साथ छत पर की गई गार्डनिंग सकारात्मक ऊर्जा को कई गुना बढ़ा सकती है।
मुस्लिम बुजुर्ग ने नंगे पैर देखी हनुमान अंश, इमोशनल हुए फैन्स
फिल्म 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की है, 27 दिनों में 61 करोड़ रुपये की कमाई की है. सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो में एक बुजुर्ग मुस्लिम दर्शक बिना चप्पल पहने फिल्म देखता नजर आया, जो आस्था और सम्मान का प्रतीक बना.
नयी दिल्ली, तीन सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि आगामी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की ओर से एक लाख रुपये की जमानत राशि केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि कोई भी ऐसा व्यक्ति दे सकता है जो यह राशि देने में सक्षम हो। अदालत ने यह आदेश ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (आइसा) कार्यकर्ताओं अनन्या रतूड़ी और अक्षत शिखर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में डूसू चुनाव समिति द्वारा निर्धारित उस शपथपत्र को चुनौती दी गई थी जिसमें उम्मीदवारों के लिए अपने माता-पिता या अभिभावक की सहमति और उनकी ओर से एक लाख रुपये की जमानत राशि देना अनिवार्य किया गया था। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा, ‘‘यह शर्त उचित और तर्कसंगत है, सिवाय इसके कि जमानत केवल माता-पिता द्वारा ही नहीं दी जानी चाहिए। इसे कोई भी व्यक्ति दे सकता है, जिसमें ऐसा अभिभावक भी शामिल है जो एक लाख रुपये देने और जमानतदार बनने की स्थिति में हो।’’अदालत ने कहा, ‘‘केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से सक्षम कोई भी व्यक्ति यह राशि दे सकता है।’’अदालत ने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान अफरा-तफरी होती है और प्रत्येक कॉलेज की दीवारों की हालत बेहद खराब हो जाती है। याचिका के अनुसार, शपथपत्र में कहा गया है कि छात्र की पढ़ाई का खर्च उठाने वाले माता-पिता या अभिभावक को जमानतदार बनना होगा। यदि उम्मीदवार या उसके समर्थक चुनाव संबंधी दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हैं, तो एक लाख रुपये तक की राशि वसूल की जा सकती है। उम्मीदवारों को इस शपथपत्र के तहत अपने और अपने माता-पिता या अभिभावक के बैंक खाते का विवरण भी देना होगा। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि यह व्यवस्था 2025 के चुनाव में भी लागू थी और इस वर्ष इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह शर्त केवल संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से रोकने के लिए लगाई गई है। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद कॉलेजों की दीवारों समेत अन्य संपत्ति की हालत खराब हो जाती है। उन्होंने कहा कि माता-पिता से जमानत लेने का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि यदि उम्मीदवार शपथपत्र की शर्तों का उल्लंघन करता है तो कोई आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्ति उस राशि का भुगतान कर सके। डूसू चुनाव 18 सितंबर को होने हैं और परिणाम 19 सितंबर को घोषित किए जाने की उम्मीद है। आइसा ने आरोप लगाया है कि यह शर्त वयस्क छात्रों की स्वायत्तता को प्रभावित करती है और खासकर महिलाओं तथा अपने परिवार पर आर्थिक रूप से निर्भर नहीं रहने वाले छात्रों को चुनाव लड़ने से रोक सकती है। वामपंथी छात्र संगठन ने एक बयान में कहा कि विश्वविद्यालय आने वाले छात्र वयस्क और स्वतंत्र हैं तथा यदि वे चाहें तो किसी भी प्राधिकारी की अनुमति के बिना चुनाव लड़ सकते हैं। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि इस शर्त का महिला छात्रों पर असमान प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि उनके परिवार उनकी राजनीतिक भागीदारी को सीमित कर सकते हैं।
बदलते मौसम और मानसून के उतार-चढ़ाव के बीच देश के विभिन्न राज्यों में इन्फ्लूएंजा संक्रमण के मामले अचानक तेजी से बढ़ने लगे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में तेज बुखार, बदन दर्द और सांस लेने में तकलीफ के साथ पहुंचने वाले मरीजों में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 वायरस की पुष्टि हो रही है। जैसे ही स्वाइन फ्लू का नाम सामने आता है, आम लोगों के मन में कई तरह के सवाल और भ्रांतियां पैदा होने लगती हैं। सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि जब यह बीमारी हवा के जरिए एक संक्रमित इंसान से दूसरे इंसान में इतनी तेजी से फैलती है, तो फिर इसके नाम में 'स्वाइन' यानी सूअर का शब्द क्यों जुड़ा हुआ है? क्या इसका सूअर के मांस खाने या उनके संपर्क में आने से आज भी कोई सीधा संबंध है? सार्वजनिक स्वास्थ्य के जानकारों और वायरोलॉजिस्ट्स के मुताबिक, इसके नामकरण के पीछे एक सदी पुराना जैविक और वैज्ञानिक इतिहास छिपा है।स्वाइन फ्लू के नाम में 'सूअर' क्यों जुड़ा है? समझिए उत्पत्ति का पूरा विज्ञानचिकित्सा विज्ञान में इन्फ्लूएंजा वायरस को अलग-अलग प्रकारों में बांटा गया है। स्वाइन इन्फ्लूएंजा मूल रूप से सूअरों में श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाला एक वायरल संक्रमण था। 1930 के दशक में पहली बार वैज्ञानिकों ने सूअरों में इस वायरस की पहचान की थी। उस समय यह वायरस केवल जानवरों तक ही सीमित रहता था। लेकिन वायरस अपनी प्रकृति के अनुसार लगातार म्यूटेट यानी अपना रूप बदलते रहते हैं। सूअर के श्वसन तंत्र की संरचना ऐसी होती है कि वह इंसानी वायरस, पक्षियों के एवियन वायरस और सूअर के अपने इन्फ्लूएंजा वायरस तीनों के लिए एक 'मिक्सिंग बाउल' (जीववैज्ञानिक प्रयोगशाला) की तरह काम करता है।साल 2009 में जब इस वायरस का एक नया स्ट्रेन सामने आया, तो वैज्ञानिकों ने पाया कि इस नए वायरस के जेनेटिक मटीरियल (आरएनए) में सुअरों में पाए जाने वाले इन्फ्लूएंजा वायरस के गुण बहुत अधिक मात्रा में मौजूद थे। चूंकि इसका मुख्य जेनेटिक ढांचा सूअरों के वायरस से काफी मिलता-जुलता था, इसलिए प्रयोगशालाओं और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे शुरुआती दौर में 'स्वाइन-ओरिजिन इन्फ्लूएंजा वायरस' कहा, जो बाद में बोलचाल में केवल 'स्वाइन फ्लू' बनकर रह गया। हालांकि वैज्ञानिक रूप से इसे इन्फ्लूएंजा ए (H1N1) pdm09 कहा जाता है।क्या आज भी सूअर के संपर्क में आने से फैलता है यह वायरस?यह समाज में फैली सबसे बड़ी भ्रांतियों में से एक है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने पूरी तरह स्पष्ट किया है कि वर्तमान में फैल रहा H1N1 वायरस पूरी तरह से ह्यूमन-टू-ह्यूमन यानी इंसान से इंसान में फैलने वाला वायरस बन चुका है। इसका वर्तमान प्रसार किसी सूअर को छूने या उसके पास जाने से नहीं हो रहा है। इसके अलावा, अच्छी तरह पका हुआ पोर्क या कोई भी अन्य मीट खाने से यह वायरस कतई नहीं फैलता, क्योंकि इन्फ्लूएंजा वायरस 70 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर तुरंत निष्क्रिय हो जाता है। आज यह संक्रमण ठीक उसी तरह फैलता है जैसे आम मौसमी सर्दी-जुकाम या कोविड-19 फैलता है—यानी हवा में तैरती संक्रमित ड्रॉपलेट्स के जरिए।इंसान से इंसान में कैसे फैलता है H1N1 संक्रमण?जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या बात करता है, तो उसके मुंह और नाक से बारीक ड्रॉपलेट्स हवा में फैल जाती हैं। यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति उस हवा में सांस लेता है, तो वायरस सीधे उसके फेफड़ों में प्रवेश कर जाता है। इसके अलावा, जब कोई मरीज खांसते समय अपने मुंह पर हाथ लगाता है और फिर दरवाजे के हैंडल, लिफ्ट के बटन, मेट्रो के पोल या मोबाइल फोन जैसी सतहों को छूता है, तो वहां वायरस कई घंटों तक सक्रिय रहता है। किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा उसी सतह को छूकर अपने मुंह, आंख या नाक पर हाथ लगाने से यह संक्रमण तुरंत शरीर में दाखिल हो जाता है।साधारण फ्लू और स्वाइन फ्लू के अंतर को कैसे पहचानें?शुरुआती दौर में स्वाइन फ्लू के लक्षण आम वायरल बुखार जैसे ही लगते हैं, लेकिन यह बहुत तेजी से गंभीर रूप ले सकता है। स्वाइन फ्लू में अचानक 101 से 104 डिग्री फारेनहाइट तक बहुत तेज बुखार आता है, जिसके साथ मरीज को गंभीर कंपकंपी महसूस होती है। इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:लगातार सूखी खांसी और गले में गंभीर खराश या दर्द, जिसके कारण कुछ भी निगलना मुश्किल हो जाता है। पूरे शरीर की मांसपेशियों में असहनीय दर्द, सिरदर्द और अत्यधिक कमजोरी व थकान होना। कई मरीजों, विशेषकर बच्चों में दस्त, उल्टी और पेट में मरोड़ जैसी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं भी देखी जाती हैं। सबसे खतरनाक संकेत है सीने में जकड़न, सांस लेने में तकलीफ और ऑक्सीजन स्तर का तेजी से नीचे गिरना। यदि किसी मरीज को सांस लेने में कठिनाई हो रही हो या होंठ व नाखून नीले पड़ने लगें, तो इसे आपातकालीन स्थिति मानकर तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए।किन लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है यह संक्रमण?स्वाइन फ्लू अधिकांश स्वस्थ वयस्कों में उचित आराम और दवाओं से 7 से 10 दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ संवेदनशील श्रेणियों (High-Risk Groups) के लिए यह जानलेवा निमोनिया या एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS) का रूप ले सकता है। 5 साल से छोटे बच्चे और 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जिससे उन पर वायरस का हमला गहरा होता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाएं, अनियंत्रित डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, क्रॉनिक किडनी डिजीज या कैंसर से पीड़ित मरीजों में स्वाइन फ्लू फेफड़ों को सीधे डैमेज कर सकता है। ऐसे मरीजों को लक्षण दिखते ही बिना किसी देरी के डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।इलाज, बचाव और संक्रमण की रोकथाम का सही प्रोटोकॉलस्वाइन फ्लू की पुष्टि आरटी-पीसीआर (RT-PCR) टेस्ट के जरिए की जाती है, जिसमें मरीज के गले और नाक का स्वाब लिया जाता है। यदि लक्षण शुरू होने के 48 घंटों के भीतर बीमारी की पहचान हो जाती है, तो डॉक्टर एंटीवायरल दवाएं (जैसे ओसेल्टामिविर/टैमीफ्लू) शुरू करते हैं, जो वायरस के प्रसार को रोक देती हैं। मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से एंटीबायोटिक्स या एस्पिरिन जैसी दवाएं कतई नहीं लेनी चाहिए।बचाव के लिए भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाते समय ट्रिपल लेयर मास्क का प्रयोग करें। नियमित रूप से हाथों को साबुन-पानी से 20 सेकंड तक धोएं या अल्कोहल-बेस्ड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। बिना हाथ धोए चेहरे, आंख और नाक को छूने से बचें। संक्रमण से खुद को सुरक्षित रखने के लिए हर साल अपडेटेड फ्लू वैक्सीन (Quadrivalent Influenza Vaccine) जरूर लगवाएं। यदि कोई व्यक्ति बीमार महसूस कर रहा है, तो वह खुद को घर में आइसोलेट कर ले ताकि परिवार और सहकर्मियों में यह संक्रमण न फैले।
बिहार में नेशनल हाईवे के बाद अब स्टेट हाईवे और बड़े पुलों पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। राज्य सरकार ने बुनियादी ढांचे के बेहतर रखरखाव और राजस्व जुटाने के उद्देश्य से प्रदेश के 55 स्टेट हाईवे और 250 मीटर से अधिक लंबाई वाले 47 बड़े पुलों पर पथ उपयोगकर्ता शुल्क यानी टोल टैक्स (Toll Tax) लागू करने का बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में इस प्रस्ताव पर औपचारिक मुहर लगा दी गई है। इस फैसले के बाद प्रदेश के अलग-अलग जिलों को जोड़ने वाले मुख्य रास्तों से गुजरना अब पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त नहीं रहेगा। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि टोल वसूली तत्काल प्रभाव से शुरू नहीं होगी, बल्कि इसके लिए चरणबद्ध तरीके से पूरी तकनीकी और ढांचागत तैयारी की जाएगी।कैबिनेट का फैसला: 30.95 करोड़ रुपये की सलाहकार सेवा को मंजूरीमंत्रिमंडल सचिवालय विभाग द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, बिहार के अहम राज्य उच्च पथों (State Highways) और प्रमुख नदियों पर बने बड़े पुलों पर टोल वसूली प्रणाली विकसित करने के लिए शुरुआती प्रक्रियाओं पर काम शुरू हो चुका है। इसके तहत एक उच्च स्तरीय सलाहकार एजेंसी (Consultant Agency) की सेवाएं ली जाएंगी, जिस पर करीब 30 करोड़ 94 लाख 71 हजार 500 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। यह सलाहकार कंपनी सड़कों और पुलों पर टोल टैक्स की दरें तय करने, टोल प्लाजा की जगह का चयन करने, डिजिटल सिस्टम स्थापित करने और पूरी व्यवस्था की निगरानी की रूपरेखा तैयार करेगी। सरकार का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से योजना बनाए बिना सीधे टोल वसूलने से यातायात जाम और अव्यवस्था फैल सकती है, इसलिए पहले तकनीकी अध्ययन कराना अनिवार्य किया गया है।वसूली से पहले होगा ओरिजिन-डेस्टिनेशन और ट्रैफिक सर्वेटोल प्लाजा स्थापित करने से पहले संबंधित 55 स्टेट हाईवे और 47 पुलों पर एक व्यापक यातायात सर्वेक्षण (Traffic Survey) कराया जाएगा। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि किस मार्ग या पुल से हर रोज कितने चौपहिया, बस, ट्रक और अन्य वाणिज्यिक वाहन गुजरते हैं। इसके साथ ही ओरिजिन-डेस्टिनेशन सर्वे (Origin-Destination Survey) के जरिए यह ट्रैक किया जाएगा कि गाड़ियां किस शहर या गांव से निकलकर किस दिशा की ओर जा रही हैं। इस डेटा से यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क की क्षमता कितनी है और वहां कितने लेन का टोल प्लाजा बनाया जाना चाहिए ताकि जाम की स्थिति न बने। यदि किसी पुल पर अत्यधिक दबाव है, तो वहां आधुनिक ऑटोमैटिक बूम बैरियर और कई बूथ बनाए जाएंगे।FASTag से लैस होंगे आधुनिक टोल प्लाजा, नहीं लगेगी लंबी कतारबिहार सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्टेट हाईवे और पुलों पर बनाए जाने वाले सभी टोल प्लाजा पूरी तरह डिजिटल होंगे। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की तर्ज पर इन सभी बूथों को फास्टैग (FASTag) तकनीक से जोड़ा जाएगा। इसके लिए विशेष कंप्यूटर प्रणाली, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे और तकनीकी उपकरण लगाए जाएंगे। तकनीकी ढांचा तैयार करने के लिए विशेष तकनीकी संस्थाओं की मदद ली जाएगी। फास्टैग अनिवार्य होने से वाहन चालकों को नकद लेन-देन के लिए रुकना नहीं पड़ेगा और टोल शुल्क स्वतः बैंक खाते या वॉलेट से कट जाएगा। पूरी व्यवस्था ऑनलाइन रहने से टोल संग्रह में पारदर्शिता बनी रहेगी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी।किन पुलों पर लगेगा टोल और स्थानीय लोगों पर क्या होगा असर?वर्तमान में बिहार में गंगा, कोसी, गंडक, सोन और बागमती जैसी बड़ी नदियों पर कई मेगा ब्रिज बने हैं, जिनकी लंबाई 250 मीटर से कहीं अधिक है। पहले चरण में 250 मीटर से अधिक लंबे 47 बड़े पुलों को चिह्नित किया गया है, जो जिलों के बीच लाइफलाइन का काम करते हैं। टोल लागू होने के बाद निजी कार चालकों, टैक्सियों और व्यावसायिक वाहनों को इन पुलों को पार करने के लिए निर्धारित शुल्क देना होगा। इसका सीधा असर रोजाना यात्रा करने वाले नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों पर पड़ेगा। हालांकि, टोल नियमों में आमतौर पर स्थानीय गैर-वाणिज्यिक वाहनों के लिए मासिक पास (Monthly Pass) या रियायती दरों का प्रावधान होता है, जिस पर अंतिम फैसला सर्वे रिपोर्ट आने के बाद लिया जाएगा।माल ढुलाई और बस किराए में बढ़ोतरी की संभावनास्टेट हाईवे पर टोल टैक्स लागू होने का सीधा प्रभाव परिवहन लागत (Logistics Cost) पर पड़ना तय माना जा रहा है। जब मालवाहक ट्रकों और ट्रेलरों से टोल वसूला जाएगा, तो ट्रांसपोर्टर्स माल ढुलाई का किराया बढ़ा सकते हैं, जिसका अप्रत्यक्ष असर रोजमर्रा की वस्तुओं और निर्माण सामग्रियों की कीमतों पर पड़ सकता है। इसी तरह निजी बस ऑपरेटर भी लंबी दूरी और अंतर-जिला बसों के किराए में संशोधन कर सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ, पथ निर्माण विभाग का तर्क है कि टोल से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल सीधे तौर पर इन सड़कों के चौड़ीकरण, गड्ढामुक्त रखरखाव, सड़क सुरक्षा उपायों और आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं को मजबूत करने के लिए किया जाएगा, जिससे सफर सुरक्षित और तेज बनेगा।कब से शुरू होगी वास्तविक वसूली?राज्य सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, सलाहकार कंपनी के चयन, विस्तृत ट्रैफिक सर्वे पूरा करने, भूमि चिह्नित करने, टोल प्लाजा के भौतिक निर्माण और एजेंसी चयन की प्रक्रिया में कई महीनों का समय लगेगा। तकनीकी ढांचा पूरी तरह तैयार होने और कैबिनेट से दरें (Toll Rates) मंजूर होने के बाद ही वास्तविक वसूली शुरू की जाएगी। तब तक के लिए आम जनता और वाहन चालकों को इन मार्गों पर पहले की तरह ही बिना किसी टोल के आवागमन की छूट रहेगी।
देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में उच्च शिक्षा (M.Tech, Ph.D.) और शीर्ष सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) में सरकारी नौकरी पाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE 2027) के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है। इस बार परीक्षा का आयोजन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) द्वारा किया जा रहा है। योग्य व इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक पोर्टल पर जाकर सीधे अपना फॉर्म भर सकते हैं। इस साल की परीक्षा तकनीकी बदलावों के लिहाज से बेहद खास मानी जा रही है, क्योंकि भविष्य की तकनीकों को ध्यान में रखते हुए एक नया पेपर भी जोड़ा गया है। अंतिम दिनों में सर्वर पर लोड बढ़ने और तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए छात्रों को समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है।आवेदन की महत्वपूर्ण तारीखें: 27 सितंबर तक नियमित विंडोआईआईटी मद्रास द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, गेट 2027 के लिए बिना किसी विलंब शुल्क (Regular Registration) के आवेदन करने की अंतिम तिथि 27 सितंबर 2026 तय की गई है। यदि उम्मीदवार इस समय सीमा तक आवेदन नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त लेट फीस के साथ 5 अक्टूबर 2026 तक विस्तारित विंडो का मौका मिलेगा। इसके बाद 14 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 के बीच फॉर्म में संशोधन (Application Rectification Window) की सुविधा मिलेगी। परीक्षा का आयोजन फरवरी 2027 में कुल छह तिथियों—6, 7, 13, 14, 20 और 21 फरवरी को कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में किया जाएगा। परीक्षा के नतीजे 19 मार्च 2027 को घोषित किए जाने की योजना है।GATE 2027 में 'रोबोटिक्स एंड ऑटोमेशन' नया पेपर शामिलइंडस्ट्री 4.0, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन की बढ़ती मांग को देखते हुए इस साल गेट में एक नया टेस्ट पेपर शामिल किया गया है—रोबोटिक्स एंड ऑटोमेशन (Robotics and Automation - RA)। इस नए विषय के जुड़ने से कुल टेस्ट पेपर्स की संख्या बढ़कर 30 हो गई है। यह उन छात्रों के लिए एक सुनहरा अवसर है जो मेकैट्रॉनिक्स, ऑटोमेशन, ड्रोन्स, इंडस्ट्रियल रोबोट्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम्स में विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं या इस क्षेत्र से जुड़ी कोर कंपनियों में करियर बनाना चाहते हैं। छात्र तय संयोजनों (Permitted Combinations) के आधार पर अधिकतम दो पेपर्स के लिए भी परीक्षा दे सकते हैं।भारतीय छात्रों के लिए DigiLocker वेरिफिकेशन अनिवार्यइस साल आवेदन प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव किया गया है। भारतीय नागरिकों के लिए डिजीलॉकर (DigiLocker) के जरिए रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे फॉर्म भरने से पहले अपना डिजीलॉकर खाता अपडेट रखें ताकि शैक्षणिक प्रमाणपत्र, आधार कार्ड और पहचान संबंधी डेटा बिना किसी रुकावट के प्रमाणित हो सके। इससे फर्जी आवेदनों पर लगाम लगेगी और डेटा मिसमैच की समस्या भी दूर होगी।कौन कर सकता है अप्लाई? योग्यता और आयु सीमागेट 2027 के लिए कोई अधिकतम आयु सीमा निर्धारित नहीं है, यानी उम्मीदवार अपनी जरूरत और तैयारी के अनुसार कितनी भी बार यह परीक्षा दे सकते हैं। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, आर्किटेक्चर, साइंस, कॉमर्स, आर्ट्स या ह्यूमैनिटीज में ग्रेजुएशन पूरी कर चुके अभ्यर्थी आवेदन के पात्र हैं। इसके अलावा, अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स के तीसरे वर्ष या उससे उच्च वर्ष में पढ़ रहे छात्र भी परीक्षा में बैठने के लिए पूरी तरह योग्य हैं।आवेदन शुल्क और फॉर्म भरने का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेसमहिला अभ्यर्थियों, एससी (SC), एसटी (ST) और दिव्यांग (PwD) श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क ₹1,000 प्रति पेपर निर्धारित किया गया है। वहीं अन्य सभी श्रेणियों (सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस) के लिए यह शुल्क ₹2,000 प्रति पेपर होगा। लेट फीस विंडो में यह शुल्क बढ़ जाएगा।आवेदन करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट gate2027.iitm.ac.in पर जाएं। होमपेज पर GOAPS पोर्टल लिंक पर क्लिक करके मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी से डिजीलॉकर ऑथेंटिकेशन के जरिए नया खाता बनाएं। इसके बाद व्यक्तिगत विवरण, शैक्षणिक योग्यता और परीक्षा केंद्र की पसंद दर्ज करें। हालिया पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर के स्कैन दस्तावेज अपलोड करें। अंत में ऑनलाइन माध्यम (UPI, नेट बैंकिंग, कार्ड) से शुल्क भुगतान कर फॉर्म सबमिट करें और कन्फर्मेशन पेज का प्रिंट आउट सुरक्षित रख लें।
ऑपरेशन सिंदूर, NEET परीक्षा और राम मंदिर... देश में जब भी छाए संकट के बादल, संकटमोचक बनी वायुसेना
भारतीय वायुसेना ने देश के संकटों में हमेशा ढाल का काम किया है, चाहे वह ऑपरेशन सिंदूर हो या नीट परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्रों की डिलीवरी।
भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम ‘खगांतक-243’ का सफल परीक्षण किया है. 300 किलोग्राम श्रेणी का यह अत्याधुनिक बम 140 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित लक्ष्यों को सटीकता से निशाना बना सकता है.
'श्मशान भी आते-जाते रहा करो', आजतक पर ऐसा क्यों बोले अनिरुद्धाचार्य?
'पंचायत आजतक मथुरा' के मंच पर प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य जी महाराज से आजतक की एंकर और सेशन की मॉडरेटर श्वेता सिंह ने कई अहम मुद्दों पर सवाल-जवाब किए. इस दौरान अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि श्मशान भी आते-जाते रहा करो. पूरी बात जानने के लिए देखें ये वीडियो.
IRCTC टिकट बुकिंग अलर्ट: इन 6 गलतियों से रद्द हो सकता है टिकट, सफर में जुर्माना और रिफंड भी अटकेगा
भारतीय रेलवे से हर दिन करोड़ों यात्री सफर करते हैं और अधिकांश लोग काउंटर की लंबी लाइनों से बचने के लिए IRCTC की वेबसाइट या ऐप से ऑनलाइन ई-टिकट बुक करते हैं। लेकिन जल्दबाजी या नियमों की पूरी जानकारी न होने के कारण कई बार यात्री ऐसी सामान्य गलतियां कर बैठते हैं, जिनका खामियाजा उन्हें ट्रेन के भीतर भारी जुर्माने, सीट गंवाने या फिर अटके हुए रिफंड के रूप में भुगतना पड़ता है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और टिकट चेकिंग स्टाफ (TTE) के कड़े नियमों के चलते अब मामूली विसंगति भी बिना टिकट यात्रा मानी जा सकती है। अगर आप भी आने वाले दिनों में यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो टिकट बुक करते समय इन अहम बातों का ध्यान जरूर रखें ताकि आपकी यात्रा निर्बाध और सुरक्षित रहे।नाम और उम्र में स्पेलिंग की गलती: TTE लगा सकता है भारी जुर्मानाटिकट बुक करते समय सबसे सामान्य गलती यात्रियों के नाम, उम्र या लिंग दर्ज करने में होती है। कई बार लोग जल्दबाजी में आधार कार्ड या सरकारी पहचान पत्र से अलग स्पेलिंग लिख देते हैं। रेलवे के नियमों के मुताबिक, ई-टिकट पर दर्ज नाम आपके ओरिजिनल आईडी प्रूफ से पूरी तरह मेल खाना चाहिए। यदि चेकिंग के दौरान नाम में बड़ा अंतर मिलता है, तो टीटीई को यह अधिकार है कि वह आपको अनधिकृत यात्री घोषित कर दे। ऐसी स्थिति में आपको ट्रेन से उतारा जा सकता है या फिर बिना टिकट मानते हुए भारी जुर्माना और नया टिकट शुल्क वसूला जा सकता है। हमेशा टिकट फाइनल करने से पहले रिव्यू स्क्रीन पर नाम और उम्र की पुष्टि अवश्य करें।ऑनलाइन वेटिंग लिस्ट टिकट लेकर स्लीपर या एसी में चढ़ना पूरी तरह अवैधबहुत से यात्रियों को यह गलतफहमी होती है कि जैसे रेलवे स्टेशन के पीआरएस काउंटर से लिया गया वेटिंग टिकट वैध होता है, वैसे ही आईआरसीटीसी से बुक किया गया ऑनलाइन ई-वेटिंग टिकट भी मान्य होगा। रेलवे का स्पष्ट नियम है कि चार्ट तैयार होने के बाद यदि ऑनलाइन बुक किया गया टिकट वेटिंग लिस्ट में ही रह जाता है, तो वह सिस्टम द्वारा स्वतः रद्द (ऑटो-कैंसिल) कर दिया जाता है। इसका पैसा सीधे यात्री के बैंक खाते में रिफंड भेज दिया जाता है। ऐसे ऑटो-कैंसिल्ड टिकट का प्रिंटआउट या एसएमएस दिखाकर ट्रेन के किसी भी आरक्षित डिब्बे में यात्रा करना कानूनन अपराध है। यदि कोई यात्री इस स्थिति में पकड़ा जाता है, तो उसे बिना टिकट माना जाएगा और न्यूनतम पेनल्टी के साथ पूरा किराया देना होगा।बोर्डिंग स्टेशन बदलने में लापरवाही: खाली सीट दूसरे को हो सकती है अलॉटयदि आपने टिकट किसी बड़े जंक्शन से बुक किया है, लेकिन आप ट्रेन में उसके आगे के किसी छोटे स्टेशन से चढ़ना चाहते हैं, तो समय रहते 'Change Boarding Point' विकल्प का उपयोग करना अनिवार्य है। रेलवे नियमों के अनुसार, यदि कोई यात्री अपने तय बोर्डिंग स्टेशन से अगले एक या दो स्टेशनों तक अपनी सीट पर उपस्थित नहीं होता है, तो टीटीई उस सीट को 'नॉट टर्न्ड अप' (NTU) मार्क कर देता है। इसके बाद वह सीट आरएसी (RAC) या अगले वेटिंग लिस्ट वाले यात्री को आवंटित कर दी जाती है। जब आप आगे जाकर ट्रेन में चढ़ेंगे, तो आपकी सीट जा चुकी होगी और आप पर अनाधिकृत यात्रा का मामला बन सकता है। ट्रेन छूटने से कम से कम 4 घंटे पहले या चार्ट बनने से पहले बोर्डिंग स्टेशन ऑनलाइन जरूर अपडेट कर लें।ऑटो-अपग्रेडेशन और 'Book Only If Confirm' विकल्प को अनदेखा करनाटिकट बुक करते समय दो चेकबॉक्स बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। पहला है 'Consider for Auto Upgradation'। अगर आप इस विकल्प को चुनते हैं, तो बिना कोई अतिरिक्त पैसा दिए आपको स्लीपर से थर्ड एसी या थर्ड एसी से सेकंड एसी में खाली सीट होने पर प्रमोट किया जा सकता है। कई लोग इसे छोड़ देते हैं और इस मुफ्त सुविधा से वंचित रह जाते हैं। दूसरा विकल्प है 'Book only if confirm berths are allotted'। यदि आप केवल कन्फर्म सीट पर ही यात्रा करना चाहते हैं, तो इसे टिक करना जरूरी है। अगर इसे टिक नहीं किया और पेमेंट कर दी, तो आरएसी या वेटिंग टिकट जारी हो जाएगा, जिसे बाद में कैंसिल कराने पर क्लर्क चार्ज कट जाएगा।रिफंड नियमों की अनदेखी: TDR फाइल करने की समय सीमाअगर आपकी ट्रेन 3 घंटे से ज्यादा लेट है, ट्रेन का रूट डायवर्ट हो गया है, या फिर एसी खराब होने जैसी स्थिति बनी है, तो पूरा रिफंड पाने के लिए टिकट डिपॉजिट रसीद (TDR) फाइल करनी होती है। अक्सर यात्री सफर खत्म होने के कई दिनों बाद रिफंड का दावा करते हैं, जिससे उनका आवेदन सीधे खारिज हो जाता है। नियमों के मुताबिक, ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान या वास्तविक प्रस्थान के निश्चित घंटों के भीतर ही टीडीआर दर्ज करना होता है। सही समय पर टीडीआर फाइल न करने पर आपका पूरा किराया रेलवे के खाते में जब्त हो जाता है।गलत पेमेंट मोड चुनना: फेल्ड ट्रांजैक्शन में हफ्तों अटक जाता है पैसातत्काल टिकट बुकिंग या सामान्य बुकिंग के समय पेमेंट गेटवे का चयन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। यदि आप ऐसे समय में धीमे नेट बैंकिंग या अविश्वसनीय वॉलेट का उपयोग करते हैं, तो बैंक से पैसा कट जाता है लेकिन टिकट बुक नहीं होता। इस फंसे हुए पैसे को वापस आने में 3 से 7 कार्यदिवस लग जाते हैं, जिससे तत्काल की सीमित सीटें भी हाथ से निकल जाती हैं। तेज बुकिंग और तुरंत रिफंड के लिए आईआरसीटीसी के अपने वॉलेट (IRCTC iMudra / eWallet) या तेज़ यूपीआई (UPI) गेटवे का उपयोग करना हमेशा सुरक्षित विकल्प रहता है।यात्री हमेशा याद रखें कि ट्रेन टिकट केवल यात्रा की अनुमति नहीं बल्कि एक कानूनी अनुबंध है। विवरण सही भरकर और नियमों का पालन करके आप न केवल तनावमुक्त सफर का आनंद ले सकते हैं, बल्कि किसी भी तरह की आर्थिक चपत से भी बच सकते हैं।
14 सालों बाद पूरी हुई मुराद! जेवर टोल प्लाजा पर Toll से मिलेगी मुक्ति
Jewar Toll Plaza: जेवर टोल प्लाजा के आस-पास के स्थानीय निवासियों को आगामी 17 सितंबर से पहले ही टोल प्लाजा कार्यालय पर अपने जरूरी डॉक्यूमेंट जमा करने होंगे. इसके बाद दस्तावेजों को वेरिफाई कर उनके वाहनों को रजिस्टर्ड किया जाएगा.
Disha Salian Case में CBI जांच पर गरमाई राजनीति, Aditya Thackeray बोले- मेरा कोई लेना-देना नहीं
बॉम्बे हाई कोर्ट के दिशा सालियन की मौत के मामले में CBI को FIR दर्ज करने का निर्देश देने पर, शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि इसका मुझसे कोई लेना-देना नहीं है और मैंने इस बारे में सोचा भी नहीं है। मैं इस पर जवाब क्यों दूं? BJP हर किसी को बदनाम करने की कोशिश करती है। उन्होंने सालों तक राहुल गांधी को 'पप्पू' बनाने की कोशिश की है। उन्होंने पिछले छह सालों से मुझे बदनाम करने की कोशिश की है। जो कोई भी BJP को चुभता है, उन्हें उससे दिक्कत होती है। जैसा कि मैंने कहा, जब आपका किसी चीज़ से कोई लेना-देना न हो, तो उस पर क्यों बोलें या उसे कोई महत्व क्यों दें? यही मेरा स्टैंड है। इसे भी पढ़ें: Kolkata Politics: अभिषेक बनर्जी के ऑफिस में तोड़फोड़ के बाद TMC-BJP में जुबानी जंग तेज, पुलिस ने 6 को किया गिरफ्तार बंबई उच्च न्यायालय ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की प्रबंधक रहीं दिशा सालियान की मौत के मामले में बुधवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराए जाने का आदेश दिया और छह साल तक प्राथमिकी दर्ज नहीं करने के लिए मुंबई पुलिस को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि मुंबई पुलिस की जांच ने जवाब से अधिक सवाल खड़े किए हैं। न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति रंजीतसिंह राजा भोंसले की पीठ ने कहा कि किसी मामले की जांच अनिश्चित समय तक नहीं चल सकती और इस मामले में केंद्रीय एजेंसी से जांच कराया जाना आवश्यक है। पीठ ने पुलिस की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने छह साल तक इसे सिर्फ एक दुर्घटना से हुई मौत माना और जांच में साफ तौर पर कई कमियां पाई गई हैं। सालियान के पिता ने 2020 में हुई उनकी मौत की परिस्थितियों पर संदेह जताया था और उच्च न्यायालय का रुख किया था। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान किसी के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलने तक किसी को भी आरोपी नहीं माना जाएगा। सतीश सालियान ने शिवसेना (उद्धव बाला साहेब ठाकरे) नेता आदित्य ठाकरे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज का अनुरोध किया था लेकिन उच्च न्यायालय ने किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की और कहा कि मामले की जांच करना केंद्रीय एजेंसी का काम है। दिशा सालियान कुछ समय तक अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की प्रबंधक के तौर पर भी काम कर चुकी थीं। अभिनेता ने 14 जून, 2020 को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। सुशांत सिंह की मौत के मामले में भी सीबीआई जांच के आदेश दिए गए थे। मुंबई के मलाड इलाके में आठ जून 2020 को एक रिहायशी इमारत की 14वीं मंजिल से गिरकर दिशा सालियान की मौत हो गई थी। इसके बाद मुंबई पुलिस ने दुर्घटनावश मृत्यु रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज की थी। इसे भी पढ़ें: पंजाब की वोटर लिस्ट से नाम हटने पर भड़के राघव चड्ढा, AAP पर लगाया 'राजनीतिक बदले' का आरोप, पार्टी का पलटवार इससे पहले, आदित्य ठाकरे ने भी उच्च न्यायालय में एक अर्जी दाखिल करके सतीश सालियान की याचिका में दखल देने का अनुरोध किया था और अदालत से गुजारिश की थी कि कोई भी आदेश देने से पहले उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाए। ठाकरे ने अपनी याचिका में कहा कि सतीश सालियान की ओर से दाखिल याचिका झूठी, निराधार और दुर्भावना से प्रेरित है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
सत्येंद्र जैन को मिली जमानत, DJB STP टेंडर घोटाले में कोर्ट का बड़ा फैसला
दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को गुरुवार को राउज एवेन्यू कोर्ट ने जमानत दे दी। उन्हें 2 लाख रुपये के जमानती बॉन्ड और उतनी ही राशि के 2 जमानती बॉन्ड पर जमानत दी गई है। सत्येंद्र जैन समेत 6 लोगों को एंटी-करप्शन ब्रांच ने DJB STP टेंडर घोटाले के ...
अक्सर नौकरीपेशा और कारोबारियों के मन में यह धारणा रहती है कि अगर हर महीने बैंक खाते में लाखों रुपये की सैलरी क्रेडिट हो रही है, तो उनका क्रेडिट स्कोर अपने आप आसमान छू रहा होगा। कई लोग सोचते हैं कि बैंकों के लिए अमीर ग्राहक ही सबसे बेहतर कर्जदार होते हैं, इसलिए भारी पैकेज वाले का CIBIL स्कोर 800 से नीचे जा ही नहीं सकता। हकीकत की जमीन पर यह वित्तीय समीकरण पूरी तरह उलट साबित होता है। हकीकत यह है कि भारत में ट्रांसयूनियन सिबिल, इक्विफैक्स, एक्सपेरियन या सीआरआईएफ हाई मार्क जैसी कोई भी क्रेडिट ब्यूरो एजेंसी आपके बैंक बैलेंस या सैलरी स्लिप को देखकर आपका स्कोर तय नहीं करती। आपकी महीने की कमाई चाहे 30 हजार रुपये हो या 5 लाख रुपये, सिबिल स्कोर की नजर में दोनों एक ही तराजू पर तौले जाते हैं।क्या सैलरी और सिबिल स्कोर का सीधा कनेक्शन है?क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियां केवल यह ट्रैक करती हैं कि आप लिए गए कर्ज को किस अनुशासन से लौटाते हैं। जब आप होम लोन, पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करते हैं, तब बैंक आपकी आय और पे-स्लिप मांगता है, लेकिन जब वही बैंक सिबिल से आपकी क्रेडिट रिपोर्ट मांगता है, तो सिबिल को आपकी सैलरी का कोई डेटा नहीं भेजा जाता। सिबिल के एल्गोरिदम में आपकी आय का कोई कॉलम या वेटेज ही नहीं होता। इसका सीधा मतलब यह है कि 15 लाख रुपये का सालाना पैकेज पाने वाला व्यक्ति भी 600 के खराब सिबिल स्कोर पर अटक सकता है, जबकि 25 हजार रुपये प्रति माह कमाने वाला एक अनुशासित युवा 780 से ज्यादा का बेहतरीन क्रेडिट स्कोर बना सकता है।सिबिल स्कोर की गणना का असली गणित: 5 बड़े पिलरसिबिल स्कोर 300 से 900 अंकों के बीच होता है और 750 से ऊपर का स्कोर कर्ज पाने के लिए आदर्श माना जाता है। इस स्कोर को तय करने के लिए ब्यूरो मुख्य रूप से पांच पैमानों पर आपके वित्तीय व्यवहार को मापता है।पहला और सबसे अहम पैमाना है आपका रीपेमेंट हिस्ट्री। सिबिल स्कोर में लगभग 35 प्रतिशत हिस्सेदारी इसी बात की होती है कि आपने अपने पुराने लोन की ईएमआई और क्रेडिट कार्ड के बिल तय तारीख पर भरे हैं या नहीं। भले ही आपका वेतन भारी-भरकम हो, लेकिन अगर आप बिजी शेड्यूल के चलते क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान भूल जाते हैं या ईएमआई बाउंस हो जाती है, तो आपका स्कोर तेजी से नीचे गिरेगा।दूसरा बड़ा फैक्टर है क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो यानी सीयूआर। इसका कुल स्कोर में 30 प्रतिशत का योगदान होता है। अगर आपके क्रेडिट कार्ड की लिमिट 2 लाख रुपये है और आप हर महीने 1.8 लाख रुपये खर्च कर देते हैं, तो ब्यूरो आपको क्रेडिट हंग्री मान लेता है। भले ही आपकी जेब में बिल भरने के पर्याप्त पैसे हों, 30 प्रतिशत से अधिक लिमिट का लगातार इस्तेमाल स्कोर को नुकसान पहुंचाता है।तीसरा पिलर है क्रेडिट हिस्ट्री की अवधि, जिसका वेटेज करीब 15 प्रतिशत है। आपके पास लोन या क्रेडिट कार्ड कितने लंबे समय से हैं, यह बताता है कि आपका वित्तीय अनुभव कितना पुराना और भरोसेमंद है। अपने पुराने क्रेडिट कार्ड को बंद करने से आपकी क्रेडिट हिस्ट्री छोटी हो जाती है, जिससे स्कोर पर नकारात्मक असर पड़ता है।चौथा फैक्टर है क्रेडिट मिक्स, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत होती है। इसमें देखा जाता है कि आपके पास सुरक्षित और असुरक्षित कर्ज का कैसा संतुलन है। केवल पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड होना असुरक्षित श्रेणी को बढ़ाता है, जबकि होम लोन या ऑटो लोन के साथ इनका सही संतुलन बेहतर माना जाता है।पांचवां पिलर है न्यू क्रेडिट या हार्ड इंक्वायरी, जो 10 प्रतिशत प्रभाव डालती है। जब भी आप किसी नए लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए बार-बार आवेदन करते हैं, तो वित्तीय संस्थाएं आपकी क्रेडिट रिपोर्ट खंगालती हैं, जिससे स्कोर में कुछ अंकों की गिरावट दर्ज होती है।मोटी कमाई वाले लोग कहां कर बैठते हैं चूक?महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और लखनऊ जैसे तेजी से बढ़ते टियर-2 शहरों में हाई-इनकम प्रोफेशनल्स के बीच क्रेडिट मिसमैनेजमेंट के मामले तेजी से बढ़े हैं। ज्यादा वेतन होने पर लोग अक्सर कई सारे प्रीमियम क्रेडिट कार्ड ले लेते हैं। कार्ड की संख्या बढ़ने पर बिल पेमेंट की तारीखें याद रखना मुश्किल हो जाता है। ऑटो-डेबिट सेट न होने पर महज कुछ सौ रुपये के न्यूनतम देय की देरी भी सिबिल में डिफॉल्ट के रूप में दर्ज हो जाती है। इसके अलावा, कई लोग केवल मिनिमम ड्यू भरकर सोचते हैं कि उनका काम हो गया, जबकि बाकी बची रकम पर 40 प्रतिशत तक का सालाना ब्याज लगता है और क्रेडिट यूटिलाइजेशन बढ़ता चला जाता है।लोन अप्रूवल में सैलरी की वास्तविक भूमिका क्या है?अब सवाल उठता है कि अगर सिबिल के लिए सैलरी मायने नहीं रखती, तो बैंक लोन देते वक्त सैलरी स्लिप क्यों मांगते हैं। यहां समझने वाली बात यह है कि लोन अप्रूवल दो अलग-अलग चरणों में काम करता है। सिबिल स्कोर बैंक को यह बताता है कि आपकी नीयत कैसी है, यानी क्या आप ईमानदारी से पैसा लौटाते हैं। वहीं आपकी सैलरी स्लिप और बैंक स्टेटमेंट बैंक को यह बताते हैं कि आपकी क्षमता कैसी है, यानी क्या आपके पास ईएमआई भरने के लिए पर्याप्त नकदी बचती है। अगर आपका सिबिल स्कोर 800 है लेकिन सैलरी बेहद कम है, तो बैंक आपको बड़ा लोन देने से मना कर सकता है। इसी तरह अगर आपकी सैलरी 3 लाख रुपये महीना है लेकिन सिबिल स्कोर 580 है, तो बैंक आपको डिफॉल्टर मानकर फाइल सीधे रिजेक्ट कर सकता है।बेहतरीन क्रेडिट स्कोर बनाने और बनाए रखने के सुनहरे नियमअगर आप अपनी आय चाहे जितनी भी हो, एक मजबूत वित्तीय प्रोफाइल तैयार करना चाहते हैं, तो कुछ बुनियादी अनुशासन अपनाना जरूरी है। सबसे पहले अपने सभी क्रेडिट कार्ड और लोन की ईएमआई के लिए ऑटो-डेबिट एक्टिवेट करें ताकि व्यस्तता में भी पेमेंट मिस न हो। अपने कुल क्रेडिट कार्ड लिमिट का 30 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा कभी इस्तेमाल न करें; अगर खर्च ज्यादा है तो बैंक से लिमिट बढ़वाने का अनुरोध करें। बेवजह नए क्रेडिट कार्ड्स के लिए आवेदन न करें और समय-समय पर अपनी सिबिल रिपोर्ट जरूर चेक करें ताकि किसी भी गलत प्रविष्टि या धोखाधड़ी को समय रहते सुधारा जा सके।कमाई आपकी हैसियत दिखा सकती है, लेकिन सिबिल स्कोर आपकी वित्तीय ईमानदारी और अनुशासन का आईना होता है। बैंक हमेशा उसी ग्राहक पर भरोसा करते हैं जिसकी कमाई के साथ-साथ रीपेमेंट का ट्रैक रिकॉर्ड भी बेदाग हो।
सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल, पर्सनल रील्स, वीडियो और बयानों को शेयर करने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार 'सोशल मीडिया आचार संहिता' लागू करने की योजना बना रही है।
Farrukhabad में Yogi Adityanath ने 1000 बाढ़ पीड़ित परिवारों को बांटी राहत सामग्री
फर्रुखाबाद (उप्र), तीन सितंबर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को फर्रुखाबाद में बाढ़ प्रभावित 1,000 परिवारों को राहत सामग्री वितरित की और कहा कि उनकी सरकार 102 गांवों में बाढ़ से प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता देगी। उन्होंने बाढ़ से बेघर हुए परिवारों को भूमि आवंटन प्रमाण पत्र और राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष से वित्तीय सहायता भी वितरित की। बाढ़ पीड़ितों को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने कहा, मैं यहां आपको आश्वस्त करने आया हूं कि आपदा की इस घड़ी में आप अकेले नहीं हैं। डबल इंजन वाली एनडीए सरकार आपके साथ खड़ी है और यह सुनिश्चित करेगी कि आपकी आवश्यकताओं के अनुसार हरसंभव मदद आप तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने जिले की तीनों बाढ़ प्रभावित तहसीलों - सदर, कायमगंज और अमृतपुर - का निरीक्षण किया है और निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा, हमारी सरकार इस बाढ़ से प्रभावित सभी 102 गांवों के लोगों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए पिछले 15 दिनों से लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चौबीस घंटे चलने वाले नियंत्रण कक्ष, बाढ़ चौकियां और राहत शिविर स्थापित किए गए हैं जबकि जिन परिवारों के घर बाढ़ में डूब गए हैं, उनके लिए भोजन और आवास की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को वितरित की जा रही राहत किट का वजन लगभग 50 किलोग्राम है और इसमें लगभग 50 वस्तुएं हैं, जिनमें 10-10 किलोग्राम चावल, आटा और आलू, दो किलोग्राम अरहर दाल के अलावा चना, मुरमुरे, तेल, मसाले, एक बाल्टी, रेनकोट और डिग्निटी किट शामिल हैं। आदित्यनाथ ने कहा, पिछले 15 दिनों में, हमारे स्थानीय विधायकों ने जिला प्रशासन की मदद से यह सुनिश्चित किया है कि ये राहत सामग्री प्रभावित परिवारों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि शिक्षक राहत शिविरों और गांवों में बच्चों के लिए कक्षाएं संचालित कर रहे हैं जबकि स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किए गए हैं। बाढ़ के दीर्घकालिक समाधान पर आदित्यनाथ ने कहा, एकमात्र स्थायी समाधान गंगा को खोदकर उसका प्रवाहीकरण और नदी से निकाली गई गाद का उपयोग तटबंधों को मजबूत करने में करना है। उन्होंने कहा, इससे नदी के प्रवाह को सुचारू करने, आसपास के गांवों को बाढ़ से बचाने, फसलों को बचाने और लोगों को राहत देने में मदद मिलेगी। आदित्यनाथ ने कहा कि बाढ़ के मौसम के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को अलर्ट पर रखा गया है तथा सांप और बिच्छू के काटने के मामलों से निपटने के लिए अस्पतालों में जहर रोधी दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। सरकारी भर्तियों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने पारदर्शी भर्ती सुनिश्चित की है और चेतावनी दी है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को जेल भेजा जाएगा और उनकी संपत्ति भी जब्त की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी को भी गरीबों के पैसे पर डकैती करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। आउटसोर्सिंग को लेकर पिछली समाजवादी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग एजेंसियां “सैफई सिंडिकेट” से जुड़ी हुई थीं और भ्रष्टाचार और लूट में लिप्त थीं। उन्होंने आरोप लगाया, जो भी आउटसोर्सिंग एजेंसियां मौजूद थीं, वे सैफई सिंडिकेट का हिस्सा थीं। वे लूटपाट करते थे और उनके पास डकैती करने का अनुभव था, जिसका इस्तेमाल उन्होंने यहां किया। उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग सर्विसेज कॉरपोरेशन (यूपीसीओएस) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था में पारदर्शिता लाएगा और सुनिश्चित करेगा कि भुगतान सीधे आउटसोर्स कर्मचारियों के बैंक खातों में किया जाए।
23,000 युवाओं को सिखाई जाएगी AI और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की स्किल
डेल टेक्नोलॉजीज 'उड़ान' प्रोग्राम के जरिए भारत में 23,000 युवाओं को AI और इलेक्ट्रॉनिक्स स्किल की ट्रेनिंग देने जा रहा है. यह अपनी तरह का पहला नेशनल पब्लिक-प्राईवेट कंसोर्टियम है, जिससे FITT-IIT दिल्ली, लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन और जनरेशन इंडिया जुड़े हैं.
1954 की फिल्म ‘नागिन’ का ‘मन डोले मेरा तन डोले’ आज भी अपने बीन वाले म्यूजिक और वैजयंतीमाला के शानदार डांस के लिए याद किया जाता है. जानिए कैसे इस गाने की धुन ने बारातों में ‘नागिन डांस’ को मशहूर कर दिया.
कन्नौज में POCSO आरोपी का एनकाउंटर, 4 दिन पहले हुआ था फरार
कन्नौज में पुलिस ने POCSO एक्ट के आरोपी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया. 30 अगस्त को वह कोर्ट परिसर से पुलिस को चकमा देकर कस्टडी से फरार हो गया था. चार दिन तक तलाश के बाद 3 सितंबर की रात पुलिस ने उसे घेर लिया. पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने फायरिंग की, जवाब में हुई कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी. उसके पास से तमंचा और कारतूस बरामद किए गए हैं.
पीएम नरेंद्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की मुलाकात में रक्षा, जोरावर टैंक, ग्रीन अमोनिया, व्यापार, स्टार्टअप और स्वच्छ ऊर्जा पर चर्चा हुई।
डिजिटल कंटेंट क्रिएटर सबरीना का इंडिया से बनाया गया आखिरी वीडियो देखने के बाद लोग भड़क गए हैं और उन्हें पाकिस्तान ट्रैवल करने की सलाह दे रहे हैं.
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर इस साल बंपर कारोबार होने का अनुमान है. कारोबारी संगठन कैट की मानें तो इस साल जन्माष्टमी पर देशभर में लोग 40,000 करोड़ रुपये खर्च कर सकते हैं. कहां-कहां कितना खर्च करेंगे लोग, पूरी रिपोर्ट देखें.
12 हजार KM पीछा, 5 राज्यों में दबिश; समाजसेवी गुड्डू बादशाह हत्याकांड के 8 आरोपी गिरफ्तार
पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने पहले समझौते का भरोसा दिलाया और फिर गुड्डू को बिहार से दिल्ली बुलाया. लाल कुआं इलाके के एक किराए के गोदाम में ले जाकर उनकी गोली मारकर हत्या कर दी.
कनॉट प्लेस होगा व्हीकल फ्री? NDMC ने मांगा सुझाव, भड़के व्यापारी
NDMC ने दिल्ली के कनॉट प्लेस को व्हीकल फ्री बनाने का प्रस्ताव दिया है और इस पर लोगों से उनकी राय मांगी है. NDMC के इस प्रस्ताव का नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने विरोध किया है. उसका कहना है कि इससे व्यापार प्रभावित होगा. व्यापारियों का कहना है कि 'व्हीकल फ्री' बनाने से कनॉट प्लेस का 'Park & Shop' मॉडल खत्म हो जाएगा.
एक महीने तक चलने वाले सेवा संकल्प अभियान के दौरान BJP कार्यकर्ता देशभर में 14 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तक पहुंचेंगे और उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित करने के लिए 'आंगनवाड़ी सम्मान' और 'मातृ सम्मान' कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
पाकिस्तान में मशहूर फीमेल सिंगर की हत्या, बलूचिस्तान में हमलावरों ने सरेआम सड़क पर दागी गोलियां
यह घटना पाकिस्तान में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा को एक बार फिर सामने लाती है. कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान के टैक्सिला में 28 साल की एक कंटेंट क्रिएटर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
फैमिली कोर्ट में 'रिश्तों का रण'! ससुर-दामाद के बीच जमकर चले लात-घूंसे, पेशी के दौरान हुआ विवाद
टीकमगढ़ जिला न्यायालय में फैमिली कोर्ट की पेशी के दौरान ससुर और दामाद के बीच जमकर मारपीट हो गई. दोनों के बीच लात-घूंसे चले और घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. पारिवारिक विवाद को झगड़े की वजह बताया जा रहा है. कोर्ट परिसर में मौजूद लोगों ने वीडियो बनाया, लेकिन बीच-बचाव नहीं किया.
बार-बार खुल जाती है अलमारी की दराज? 2 मिनट में ऐसे करें ठीक
How To Fix Drawer: क्या आपके घर या किचन की अलमारी की दराज बंद करने के बाद भी बार-बार अपने आप बाहर निकल आती है? कारपेंटर बुलाने या पूरा चैनल बदलने के बजाय आप एक आसान तरीका अपनाकर उसे खुद ठीक कर सकते हैं. आज इस खबर में हम आपको वही बताएंगे.
तेलंगाना के CM ने मंत्री पर लिया एक्शन, बेटी ने लगाए थे आरोप - ABP News
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तिब्बत में आया बड़ा भूकंप, नेपाल में बाढ़ की आपदा के एक हफ्ते बाद हिली धरती
प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस की कैसे शुरू हुई थी लव स्टोरी, एक्ट्रेस ने बताया कहां शेयर किया था नंबर
प्रियंका चोपड़ा ने सोशल मीडिया पर पति निक जोनस के साथ अपनी लव स्टोरी की खास यादें शेयर कीं. एक वीडियो पोस्ट में उन्होंने उस समर को याद किया, जब उन्होंने निक को अपना नंबर दिया था.
चोरी के डर से घर की छत पर ही चढ़ा दी Scorpio! बिहार के शख्स का अनोखा जुगाड़, वीडियो वायरल
बिहार में Mahindra Scorpio को क्रेन से घर की छत पर रखने का वीडियो वायरल हो रहा है. दावा किया जा रहा है कि Scorpio मालिक विदेश जाने से पहले SUV को सुरक्षित रखना चाहता था.
Satyendra Jain को ACB मामले में मिली बड़ी राहत, Delhi Court ने दी Bail
गुरुवार को दिल्ली की एक अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के सीनियर नेता सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड (DJB) से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में ज़मानत दे दी। राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मंत्री जैन को 2 लाख रुपये के जमानती बॉन्ड और इतनी ही रकम के दो ज़मानती बॉन्ड भरने पर ज़मानत दी। यह आदेश स्पेशल जज (PC एक्ट) दिग्विजय सिंह ने दिया, जिन्होंने कहा कि जैन की ज़मानत अर्ज़ी मंज़ूर की जाती है। AAP के सीनियर नेता जैन को एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 18 अगस्त को DJB के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रोजेक्ट्स के लिए टेंडर प्रक्रिया से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ़्तार किया था। उनके साथ पांच और लोगों को भी गिरफ़्तार किया गया था, जिनमें DJB के पूर्व चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव ऑफ़िसर (CEO) उदित प्रकाश राय और पूर्व कॉन्ट्रैक्टुअल कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव शामिल थे।
Palmistry Shani Rekha: हस्तरेखा शास्त्र में शनि पर्वत पर बनी रेखा को खास माना जाता है. जानें गहरी, सीधी, दोहरी या टूटी शनि रेखा व्यक्ति के भाग्य, धन, सफलता और जीवन के संघर्षों को लेकर क्या संकेत देती है.
धोनी का साफ ऐलान- 'Impact Player नहीं बनूंगा', तो IPL कैसे खेलेंगे?
महेंद्र सिंह धोनी ने साफ कर दिया है कि वह IPL में Impact Player के तौर पर नहीं खेलेंगे. पूर्व CSK बल्लेबाज सुब्रमण्यम बद्रीनाथ के मुताबिक, धोनी अगर 2027 IPL में उतरते हैं तो बतौर फुल-टाइम विकेटकीपर ही खेलना चाहते हैं. बढ़ती उम्र और फिटनेस की चुनौतियों के बीच यह फैसला उनके अगले सीजन में खेलने को लेकर सस्पेंस और बढ़ाता है.
'भगवंत मान सरकार 5-5 करोड़ की रिश्वत ले रही', देखें BJP के संगीन आरोप
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर बीजेपी ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. बीजेपी ने दावा किया कि पंजाब में रेप समेत आपराधिक मामलों को खत्म कराने के नाम पर 5 करोड़ रुपये तक की कथित वसूली की जा रही है. बीजेपी ने इस पूरे मामले में दो ऑडियो क्लिप भी जारी किए, जिसमें पार्टी के मुताबिक एक कथित बिचौलिया पैसों की मांग को लेकर बातचीत कर रहा है. हालांकि, आजतक इस ऑडियो की पुष्टि नहीं करता. देखें वीडियो.
दिल्ली जल बोर्ड केस में सत्येंद्र जैन को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी जमानत
दिल्ली की एक कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर स्कैम में जमानत दे दी. इस मामले की जांच एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) कर रही है.
AAP नेता सत्येंद्र जैन को मिली जमानत, सौरभ भारद्वाज का ट्वीट- सत्यमेव जयते
सत्येंद्र जैन को 18 अगस्त को दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने गिरफ्तार किया था. उनको दिल्ली जल बोर्ड के STP टेंडर में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के मामले में अरेस्ट किया गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक असाधारण कदम उठाते हुए NEET-UG 2026 का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) से जुड़े देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों में शामिल 'जेन Z' प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को रद्द कर दिया। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 142 का प्रयोग किया गया। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों की ओर से केस रद्द करने की अर्ज़ी दिए जाने के बाद आपराधिक मामलों को रद्द कर दिया। इसे भी पढ़ें: Kolkata Politics: अभिषेक बनर्जी के ऑफिस में तोड़फोड़ के बाद TMC-BJP में जुबानी जंग तेज, पुलिस ने 6 को किया गिरफ्तार आर्टिकल 142 क्या है आर्टिकल 142 सुप्रीम कोर्ट को पूरा न्याय करने के लिए कोई भी आदेश देने का अधिकार देता है। संविधान का आर्टिकल 142 सुप्रीम कोर्ट को यह खास अधिकार देता है कि वह अपने सामने चल रहे किसी भी मामले में पूरा न्याय करने के लिए ज़रूरी आदेश या डिक्री जारी कर सके। ऐसा आदेश पूरे भारत में लागू होता है। यह अधिकार सिर्फ़ सुप्रीम कोर्ट के पास है और यह उसे तब समाधान निकालने में मदद करता है जब आम कानूनी प्रावधानों से कोई समाधान नहीं मिल पाता। बेंच ने कहा कि आर्टिकल 142 का इस्तेमाल इस शर्त पर किया गया है कि दोनों पक्ष उसके सामने बनी सहमति का पालन करेंगे। बेंच ने कहा कि यहां बताई गई सभी FIR रद्द की जाती हैं। अगर 20-25 जुलाई के बीच हुए विरोध-प्रदर्शन की घटनाओं के संबंध में किसी राज्य या केंद्र-शासित प्रदेश में कोई और FIR दर्ज की गई है, जो औपचारिक रूप से हमारे ध्यान में नहीं लाई गई है, तो उस पर कोई कार्रवाई या जांच नहीं की जाएगी और उसे हर तरह से बंद माना जाएगा। इसे भी पढ़ें: पंजाब की वोटर लिस्ट से नाम हटने पर भड़के राघव चड्ढा, AAP पर लगाया 'राजनीतिक बदले' का आरोप, पार्टी का पलटवार अयोध्या मामले में आर्टिकल 142 का इस्तेमाल कैसे किया गया? इंडिया टुडे के मुताबिक आर्टिकल 142 का सबसे अहम इस्तेमाल 2019 के अयोध्या फ़ैसले में हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने कभी विवादित रही 2.77 एकड़ ज़मीन देवता राम लल्ला को सौंप दी और सरकार को राम मंदिर बनाने के लिए एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया। हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि 1949 में मुसलमानों को गैर-कानूनी तरीके से मस्जिद से बेदखल कर दिया गया था और 6 दिसंबर 1992 को इसे गिराया जाना कानून के शासन का घोर उल्लंघन था। कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए केंद्र या उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वे सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को अयोध्या में किसी प्रमुख जगह पर मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ ज़मीन दें। 2019 के फ़ैसले में कहा गया, अगर कोर्ट उन मुसलमानों के हक़ को नज़रअंदाज़ करता है जिन्हें मस्जिद के ढांचे से ऐसे तरीकों से वंचित किया गया, जिनका इस्तेमाल कानून के राज को मानने वाले धर्मनिरपेक्ष देश में नहीं होना चाहिए था, तो न्याय नहीं हो पाएगा। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
₹20 की थाली से अब है ₹2.5 करोड़ का टर्नओवर... जानिए पूरी कहानी
आज पटना में अम्मा किचन के दो डाइन-इन आउटलेट्स हैं और 30 से ज्यादा लोग उनके यहां काम करते हैं. बिजनेस का सालाना टर्नओवर करीब 2.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. रोजाना मिलने वाले करीब 350 ऑनलाइन ऑर्डर्स यह बताने के लिए काफी हैं कि एक छोटे से होम किचन ने कितनी लंबी दूरी तय की है. आइए जानें इस संघर्ष की पूरी कहानी...
36 खेल, 503 खिलाड़ी... एशियन गेम्स में भारत का मेगा मिशन
हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत ने 107 पदक जीतकर अब तक का सबसे शानदार एशियन गेम्स अभियान पूरा किया था. इस बार 758 सदस्यीय दल के साथ भारत उस रिकॉर्ड को तोड़ना चाहेगा. क्रिकेट, हॉकी, एथलेटिक्स और अन्य खेलों में भारतीय खिलाड़ियों से मेडल की उम्मीद है.
हवा में बिगड़ी पायलट की तबीयत,दोहा-बेंगलुरु इंडिगो फ्लाइट तुरंत मस्कट की ओर मोड़ी गई
मस्कट में इंडिगो फ्लाइट की लैंडिंग के बाद तुरंत पायलट का मेडिकल चेकअप किया गया. वहीं यात्रियों को परेशानी न हो इसके लिए एक वैकल्पिक प्लेन और क्रू सदस्यों की एक नई टीम का इंतजाम किया.
तन्वी की मौत पर AIIMS का बड़ा एक्शन, जांच समिति गठित; इलाज और डॉक्टरों के फैसलों की होगी समीक्षा
राजस्थान की 15 वर्षीय तन्वी की मौत के बाद AIIMS ने जांच समिति गठित की है. समिति इलाज, सर्जरी से जुड़े फैसलों और मौत की परिस्थितियों की समीक्षा करेगी.
सेशेल्स की पहली महिला स्पीकर का भारत दौरा
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सेशेल्स की नेशनल असेंबली की पहली महिला स्पीकर अज़ारेल योलांडा अर्नेस्टा और
गंगा-यमुना के उफान के बीच 80 फीट ऊपर जल रही अखंड ज्योति
यूपी के प्रयागराज में गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर के बीच झूंसी पुल के नीचे बना मचान पानी में डूबा है, लेकिन करीब 80 फीट ऊपर शीशे के सुरक्षित मंच में रखी अखंड ज्योति अब भी जल रही है. करीब दो दशक से रामदास महाराज इसकी सेवा कर रहे हैं. वीडियो में जानें क्या है मामला.
यमुनानगर में जिम के बाहर ट्रांसपोर्टर की गोली मारकर हत्या, उलझी मिस्ट्री
यमुनानगर के मॉडल टाउन में जिम के बाहर ट्रांसपोर्टर और फाइनेंसर हरभजन सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई. बाइक सवार हमलावरों ने 10 से ज्यादा गोलियां चलाईं. इस वारदात ने शहर की कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. पढ़ें पूरी कहानी.
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान और यूपी के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री और फोटो-वीडियोग्राफी पर रोक को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।
बारिश का कहर: उफनते नाले में उतार दी बोलेरो, स्कूटी गड्ढे में समाई
सतना में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच नदी-नाले उफान पर हैं और सड़कों पर जलभराव है. प्रशासन की चेतावनी के बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर पानी से भरे रास्ते पार कर रहे हैं. बुधवार को बडेरा-करौंदी मार्ग पर उफनते नाले में बोलेरो फंस गई, जबकि जैतवारा रेलवे अंडरब्रिज में कमर से ऊपर पानी होने के बावजूद यात्री बस घुसा दी गई और 18 से 20 यात्री फंस गए. वहीं सतना शहर में एक स्कूटी सवार जलभराव के बीच गड्ढे में जा गिरा. तीनों घटनाओं में समय रहते रेस्क्यू होने से बड़ा हादसा टल गया.
'टुकड़े-टुकड़े कर देंगे', पॉडकास्ट के बहाने बुलाकर विजेता दहिया से मारपीट, दी धमकी
पूर्व सीजेपी प्रवक्ता विजेता दहिया ने आरोप लगाया कि 31 अगस्त को उन्हें पॉडकास्ट रिकॉर्डिंग के बहाने जाफराबाद बुलाकर रोका गया, गिरेबान पकड़ा गया और जान से मारने की धमकी दी गई. दहिया का कहना है कि उन्होंने पुलिस में शिकायत देकर जांच, कार्रवाई और अपने परिवार की सुरक्षा मांगी है.
Podcast के बहाने बिछाया गया जाल: Delhi में CJP नेता Vijeta Dahiya को मिली जान से मारने की धमकी
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की पूर्व प्रवक्ता विजेता दहिया ने आरोप लगाया है कि उन्हें पॉडकास्ट रिकॉर्ड करने के बहाने नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के जाफराबाद बुलाया गया, जहाँ हिंदू धर्म और हिंदू देवी-देवताओं पर उनके सोशल मीडिया वीडियो को लेकर कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन लोगों ने उन्हें कई टुकड़ों में काट देने की धमकी दी और जाफराबाद मेट्रो स्टेशन तक उनका पीछा किया। दहिया ने बताया कि यह घटना 31 अगस्त को हुई थी और उन्होंने उसी दिन पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें गलत तरीके से रोका गया, बंधक बनाया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए पुलिस से संपर्क किया था। इसे भी पढ़ें: CJP प्रोटेस्ट क्यों हुआ कैंसिल, CJI ने ऐसा क्या कह दिया, PM मोदी से इसका क्या है कनेक्शन? दहिया ने बताया, रोहित नाम के एक व्यक्ति ने सबसे पहले 5 अगस्त को मुझसे WhatsApp पर संपर्क किया। उसने बताया कि वह प्रिंस गौर की टीम का सदस्य है और मुझे एक पॉडकास्ट के लिए बुलाया। दहिया ने बताया, वही व्यक्ति उन वीडियो में भी दिखा था और MJ मुकेश जैन के तौर पर भी सामने आया था। उन्होंने आगे कहा कि कई दिनों तक बार-बार संपर्क किए जाने के बाद वे पॉडकास्ट के निमंत्रण के लिए आखिरकार मान गए। उन्होंने कहा, मेरे लिए यह एक आम बात है; लोग पॉडकास्ट के लिए मुझसे संपर्क करते रहते हैं और मैं उनमें शामिल भी होता हूँ। 31 अगस्त को दहिया ने बताया कि पिक-एंड-ड्रॉप की सुविधा मिलने के बाद वह उस व्यक्ति से मिलने के लिए तैयार हो गए। दोपहर करीब 3 बजे दहिया के घर एक कैब आई और उन्हें जाफराबाद की DDA कॉलोनी ले गई, जहाँ वह शाम करीब 4 बजे पहुँचे। इसे भी पढ़ें: जहां हुई CJP कार्यकर्ताओं की पिटाई, वहां चला बुलडोजर! दहिया ने बताया कि वहाँ रोहित उनसे मिला—जिसे उन्होंने प्रिंस गौर की टीम का सदस्य बताया—और उसने कैब ड्राइवर को पैसे दिए। साथ ही, उसने दहिया से कहा कि उन्हें पास के एक पार्क में इंतज़ार करना होगा क्योंकि सर आने वाले थे। दहिया का दावा है कि रोहित असल में प्रिंस गौर ही था, जिसने शुरू में अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की थी।
'पूकी बाबा' बुलाए जाने पर बुरा लगा था? देखें अनिरुद्धाचार्य का जवाब
आजतक के कार्यक्रम 'पंचायत आजतक मथुरा' के मंच पर आमंत्रित प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने चिरपरिचित अंदाज में सवालों के जवाब दिए. आजतक की एंकर और सेशन की मॉडरेटर श्वेता सिंह ने उनसे पूछा कि जब उन्हें ये पता चला कि उन्हें 'पूकी बाबा' कहकर बुलाया जाता है तो क्या बुरा लगा था? क्या था अनिरुद्धाचार्य का जवाब, जानने के लिए देखें ये वीडियो.
CM विजय का मास्टरस्ट्रोक: Chennai को मिलेगी Olympic City और F1 रेसिंग का नया हब!
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने गुरुवार को चेन्नई में वर्ल्ड-क्लास 'तमिलनाडु ओलंपिक सिटी' और राज्य की राजधानी में एक खास 'मोटरस्पोर्ट्स सिटी' बनाने की घोषणा की। तमिलनाडु मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, ओलंपिक सिटी को 'तमिलनाडु स्पोर्ट्स डेवलपमेंट अथॉरिटी' विकसित करेगी। इसका मकसद एथलीटों के लिए आधुनिक सुविधाओं वाला एक इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स हब बनाना है। विजय ने तमिलनाडु विधानसभा में नियम 110 के तहत यह घोषणा की। इसे भी पढ़ें: Kolkata Politics: अभिषेक बनर्जी के ऑफिस में तोड़फोड़ के बाद TMC-BJP में जुबानी जंग तेज, पुलिस ने 6 को किया गिरफ्तार प्रस्तावित ओलंपिक सिटी में वर्ल्ड-क्लास स्पोर्ट्स एरीना, अत्याधुनिक स्पोर्ट्स इक्विपमेंट, एक हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग सेंटर और स्पोर्ट्स साइंस व स्पोर्ट्स मेडिसिन के लिए खास सेंटर होंगे। घोषणा के अनुसार, इस सुविधा में खिलाड़ियों और कोचों के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और रहने की व्यवस्था भी शामिल होगी। ओलंपिक सिटी का मकसद तमिलनाडु के खिलाड़ियों को एडवांस्ड ट्रेनिंग और सपोर्ट सुविधाएं देना है। इसका मकसद राज्य के खिलाड़ियों को ओलंपिक खेलों और अन्य इंटरनेशनल स्पोर्ट्स इवेंट्स में ज़्यादा मेडल जीतने में मदद करना है। ओलंपिक सिटी के साथ-साथ, मुख्यमंत्री विजय ने घोषणा की कि चेन्नई में एक खास मोटरस्पोर्ट्स सिटी बनाई जाएगी। इस प्रस्तावित सुविधा का मकसद शहर में फ़ॉर्मूला 1-4 रेस आयोजित करना है। यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब युवा मामले और खेल मंत्रालय (MYAS) देश में मोटरस्पोर्ट्स इकोसिस्टम को मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहा है; इसके लिए जून में मोटरस्पोर्ट्स की निगरानी के लिए एक टास्क फ़ोर्स भी बनाई गई थी। इसे भी पढ़ें: पंजाब की वोटर लिस्ट से नाम हटने पर भड़के राघव चड्ढा, AAP पर लगाया 'राजनीतिक बदले' का आरोप, पार्टी का पलटवार यह टास्क फ़ोर्स 2028 के आखिर तक भारत में फ़ॉर्मूला 1 रेसिंग को वापस लाने के लक्ष्य के साथ बनाई गई है। MYAS के एक सूत्र ने शनिवार को ANI को बताया कि हम 2028 तक भारत में F1 को वापस लाने की कोशिश करेंगे। इसके लिए हमने एक टास्क फ़ोर्स बनाई है जो देश में मोटरस्पोर्ट्स पर नज़र रखती है और मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपती है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
क्या 'नॉटी बॉय' वापस दिलाएगा ISRO का खोया हुआ भरोसा? आज रात होगा GSLV-F17 का लॉन्च
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 4 सितंबर को श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 रॉकेट द्वारा भारत के पहले जियोसिंक्रोनस इमेजिंग सैटेलाइट EOS-05 को लॉन्च करेगा।
'ऑपरेशन सिंदूर में कोई सच तो नहीं छिपा', राम मंदिर CEO पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के नए CEO के रूप में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने इस पर 'ऑपरेशन सिंदूर में छिपे राज' का शक जताया है. वहीं बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए सनातन धर्म और सेना के अपमान के आरोप लगाए हैं.
लाउडस्पीकर पर चला अभियान, पुलिस ने इमामों को दी हिदायत
यूपी के बिजनौर में बिना अनुमति और निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में बज रहे लाउडस्पीकरों के खिलाफ पुलिस ने तीन दिवसीय अभियान शुरू किया है. पहले दिन 90 से ज्यादा लाउडस्पीकर हटाए गए. पुलिस ने धार्मिक स्थलों को तय ध्वनि मानकों का पालन करने की हिदायत दी है.
पहले एक ही परिवार के 4 बच्चों की मौत, अब 4 बच्चे ग्वालियर रेफर
शिवपुरी में एक ही परिवार के चार बच्चों की मौत के बाद अब स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है. बुधवार शाम चार अन्य बच्चों की तबीयत में गिरावट को देखते हुए उन्हें शिवपुरी जिला अस्पताल से ग्वालियर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया. बच्चों के साथ डॉक्टरों की टीम भी भेजी गई है. वहीं स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में 150 से ज्यादा लोगों के ब्लड सैंपल लेकर जांच शुरू की है.
मणिकर्णिका घाट डूबा, छतों पर जल रहीं चिताएं... वाराणसी में बाढ़ के बाद दर्दनाक मंजर
वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से तटवर्ती इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए हैं. महाश्मशान मणिकर्णिका घाट जलमग्न हो चुका है, जिसकी वजह से चिताओं को छतों पर जलाना पड़ रहा है. वहीं, शवयात्रा के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है. वाराणसी से बाढ़ के बाद सामने आ रही तस्वीरें दिल झकझोर देने वाली हैं.
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, Law Students के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार BCI के पास नहीं
बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया के NALSAR लॉ यूनिवर्सिटी से जुड़े उस आदेश को लेकर चल रहे विवाद के बीच, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि BCI और राज्य बार काउंसिलों के पास लॉ स्टूडेंट्स के व्यवहार को रेगुलेट करने की कानूनी शक्ति नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ये संस्थाएं उनके खिलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई तभी कर सकती हैं जब वे एडवोकेट के तौर पर एनरोल हो जाएं। ये टिप्पणियाँ भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की तीन जजों की बेंच ने कीं। बेंच ने कहा कि छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करना उनके संबंधित विश्वविद्यालयों या संस्थानों के अधिकार क्षेत्र में आता है, जो उनके अपने नियमों और विनियमों के तहत होता है। इसे भी पढ़ें: Yasin Malik ने खेला भावनात्मक कार्ड, पाकिस्तानी पत्नी Mushaal को तलाक देने का ऐलान, फांसी की सजा का विरोध नहीं करने का भी लिया निर्णय 'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने कहा, यह अधिकार उस विश्वविद्यालय या शिक्षण संस्थान के पास होता है जिसमें छात्र नामांकित होते हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया कानूनी शिक्षा के मानकों को निर्धारित और लागू कर सकती है, जो कानूनी प्रावधानों और लागू नियमों के अनुसार हों। हालाँकि, वह किसी लॉ छात्र के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं कर सकती है। इसे भी पढ़ें: Kolathur Election Dispute: मद्रास हाईकोर्ट ने MK Stalin की याचिका खारिज की, EVM गड़बड़ी के दावे बेअसर NALSAR विवाद इस सब की शुरुआत BCI के 13 अगस्त के उस आदेश से हुई जिसमें कहा गया था कि NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ़ लॉ के 2026 बैच के ग्रेजुएट्स को राज्य बार काउंसिल्स में एनरोल नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में कांत के शामिल होने का विरोध किया था। हालाँकि, बाद में भारी विवाद के बाद इस आदेश को वापस ले लिया गया। BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने सफाई दी और कहा कि लोकतंत्र में असहमति का हमेशा स्वागत किया जाता है। उन्होंने अपनी बातों के लिए खेद जताते हुए छात्रों से माफ़ी भी मांगी। उन्होंने कहा अगर मौजूदा विवाद से जुड़ी किसी भी चीज़, मेरी किसी भी बात या चिट्ठी से हमारे लॉ स्टूडेंट्स की भावनाएँ आहत हुई हैं, तो मुझे इसका गहरा खेद है और मैं इसके लिए माफ़ी माँगता हूँ। ऐसा कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। खेद जताना प्रतिष्ठा या अहंकार का मामला नहीं है। यह बस यह स्वीकार करना है कि हमारे छात्रों की भावनाएँ और चिंताएँ मायने रखती हैं।
उथल-पुथल के बावजूद GDP 7.8% , हमारी ग्रोथ स्टोरी दुनिया के विश्वास का स्रोत: PM मोदी
बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के साथ हैदराबाद हाउस में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि हम दुनिया में चल रहे युद्धों को बंद करने के प्रयास का समर्थन करते हैं. वेवर ने कहा कि यूक्रेन हो या वेस्ट एशिया हम संघर्ष की शीघ्र समाप्ति और शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करते हैं.
'रंभा हो' गाना फेम 70 साल की उम्र में एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने बॉलीवुड इंडस्ट्री के रवैये पर अपना दर्द बयां किया है. काम मांगने पर अनदेखा किए जाने पर उन्होंने कहा कि लोगों में कम से कम जवाब देने की शालीनता होनी चाहिए.
मैट्रेस फैक्ट्री में लगी भीषण आग, पंजाब के जालंधर की घटना
पंजाब के जालंधर में एक मैट्रेस फैक्ट्री से धुएं का गुबार उठता देख लोगों ने इसकी सूचना फायर ब्रिगेड को दी. इस घटना से इलाके में अफरा-तफरी मच गई.
क्या होती है टेस्टोस्टेरोन जांच? अमेरिका में सैनिकों के लिए इसे क्यों किया गया अनिवार्य
Testosterone screening in US: अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने 30 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी सक्रिय और रिजर्व सैन्य कर्मियों के लिए टेस्टोस्टेरोन की कमी की अनिवार्य जांच से संबंधित नए और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ...
रावण को याद कर पुरुषों को दी अनिरुद्धाचार्य ने नसीहत
पंचायत आजतक में अनिरुद्धाचार्य ने युवाओं के प्रेम संबंध, शादी और रिश्तों में बढ़ती हिंसा पर बात की. उन्होंने युवाओं को पढ़ाई और करियर पर ध्यान देने की सलाह दी है. साथ ही पुरुषों को विवाहेतर संबंधों से बचने और माता-पिता को बेटा-बेटी दोनों को संस्कार देने की बात कही.
तिहाड़ जेल में बंद यासीन मलिक ने सरला भट मर्डर केस में खुद के लिए फांसी की मांग की है और साथ ही कहा है कि वह पत्नी को विधवा की तरह जीवन काटते नहीं देखना चाहते. वह उन्हें इस रिश्ते से आजाद करना चाहते हैं. बेटी रजिया सुल्ताना को उन्होंने एक काम भी सौंपा है.
'डबल इंजन सरकार हर संभव मदद करेगी', बाढ़ पीड़ितों से बोले CM योगी
यूपी के फर्रुखाबाद में सीएम योगी आदित्यनाथ ने सैलाब में समाए इलाकों का मुआयना किया. सीएम योगी ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे कर निरीक्षण किया. साथ ही बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात कर करीब 1000 परिवारों को राहत सामग्री और भूमि आवंटन प्रमाण पत्र बांटे. इस दौरान सीएम योगी ने कहा, आपदा की इस घड़ी में आप अकेले नहीं है. डबल इंजन की सरकार हर संभव मदद करेगी. देखें वीडियो.
इंदौर के होलकर स्टेडियम में 11 अक्टूबर को होने वाले भारत-वेस्टइंडीज टी20 मैच के टिकट रेट जारी हो गए हैं. सबसे सस्ता टिकट ₹1000 और सबसे महंगा ₹12,500 रखा है. एमपीसीए ने ऑनलाइन टिकट बिक्री के लिए डिस्ट्रिक्ट ऐप को अधिकृत पार्टनर बनाया है.
रांची के अमरदीप की कहानी सोशल मीडिया पर क्यों हो रही वायरल, मदद के लिए अब आगे आई सरकार
झारखंड के 29 वर्षीय थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप कुमार की कहानी खेल व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रही है। देश के लिए इंटरनेशनल इवेंट में 4 गोल्ड मेडल जीत चुके अमरदीप अपने परिवार का खर्च चलाने के लिए रांची में सब्जी बेचते हैं और जरूरत पड़ने पर कैब भी चलाते हैं
NEET PG 2026 री-एग्जाम का एडमिट कार्ड जारी, 5 सितंबर को होगी परीक्षा
NEET PG 2026 री-एग्जाम के एडमिट कार्ड NBEMS की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिए गए हैं. 5 सितंबर को कुल 2,445 उम्मीदवार री-एग्जाम देने वाले हैं. जयपुर के सीतापुरा में दो आईओएन डिजिटल जोन सेंटर पर परीक्षा कैंसल होने के बाद, ये उम्मीदवार अब दोबारा एग्जाम देंगे.
चेन्नई, तीन सितंबर तमिलनाडु विधानसभा ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा पेश किए गए उस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार से मद्रास उच्च न्यायालय की प्रमुख के रूप में तमिल को मान्यता देने का आग्रह किया गया है। मुख्यमंत्री द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में कहा गया है कि यह प्रस्ताव किसी भी के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत का संविधान संघीय व्यवस्था के सिद्धांत को कायम रखते हुए और भारत के बहुभाषी तथा बहुसांस्कृतिक स्वरूप को मान्यता देते हुए, राज्यों को अपनी-अपनी आधिकारिक भाषाओं के इस्तेमाल के लिए विभिन्न कानूनी रास्ते उपलब्ध कराता है।’’विजय ने कहा, ‘‘तमिलनाडु विधानसभा सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से आग्रह करती है कि मद्रास उच्च न्यायालय की प्रमुख के रूप में तमिल के इस्तेमाल को सुगम बनाने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं।’’प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायकों ने लंबे समय से इस मांग को उठाये जाने का उल्लेख किया और इस संबंध में अपने-अपने नेताओं द्वारा की गई पहल और प्रयासों को भी याद किया। मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सहित प्रमुख राजनीतिक दलों के विधायकों ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए सदन में अपनी बात रखी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष जे. सी. डी. प्रभाकर ने घोषणा की कि प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया है। अन्नाद्रमुक के पूर्व मंत्री सी. वी. षणमुगम ने कहा कि मद्रास उच्च न्यायालय का नाम बदलकर तमिलनाडु उच्च न्यायालय किया जाना चाहिए। द्रमुक के ई. वी. वेलु ने भी इसी तरह की मांग की। षणमुगम ने ‘‘उत्तर-दक्षिण’’ विभाजन का आरोप लगाते हुए कहा कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों को अपने-अपने उच्च न्यायालय में हिंदी के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। हालांकि, मद्रास उच्च न्यायालय में तमिल के इस्तेमाल की मांग को मंजूरी नहीं दी गई है। द्रमुक के एस. रेगुपति ने कहा कि पार्टी के नेता दिवंगत एम. करुणानिधि ने ही उच्च न्यायालय की के रूप में तमिल को मान्यता दिलाने के प्रयास शुरू किए थे। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में उच्च न्यायालय में तमिल के इस्तेमाल के पक्ष में दो बार प्रस्ताव पारित किए गए थे। कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने कहा कि यह पहली बार है जब किसी प्रस्ताव में तमिल को उच्च न्यायालय की प्रमुख का दर्जा देने की मांग की गई है। हालांकि, रेगुपति ने दोहराया कि उनकी पार्टी के नेतृत्व वाली सरकारें उच्च न्यायालय में तमिल के इस्तेमाल के पक्ष में लगातार आवाज उठाती रही हैं। तमिल को उच्च न्यायालय की प्रमुख का दर्जा देने की मांग वाले प्रस्ताव में तमिल को शास्त्रीय का दर्जा प्राप्त होने, तमिल में कानूनी शब्दावली के क्षेत्र में हुई महत्वपूर्ण प्रगति और तकनीक आधारित अनुवाद जैसी सुविधाओं का भी उल्लेख किया गया है। प्रस्ताव में एक ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है, जिसके तहत उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए सभी फैसले और न्यायिक आदेश तमिल में भी उपलब्ध कराए जाएं। प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया कि तमिल दुनिया की प्राचीन भाषाओं में से एक है, जिसकी व्याकरणिक और साहित्यिक विरासत कई हजार वर्षों से चली आ रही है। इसमें केंद्र सरकार से उच्च न्यायालय की के रूप में तमिल के इस्तेमाल की अनुमति देने का आग्रह किया गया है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 348(1)(ए) के अनुसार, उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय की सभी कार्यवाहियां अंग्रेजी में होंगी। हालांकि, किसी राज्य का राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, उस राज्य में मुख्य पीठ वाले उच्च न्यायालय की कार्यवाही में हिंदी या राज्य के किसी अन्य आधिकारिक कार्यों में इस्तेमाल होने वाली के उपयोग को अधिकृत कर सकता है। कैबिनेट समिति के 21 मई 1965 के निर्णय में यह प्रावधान किया गया था कि उच्च न्यायालय में अंग्रेजी के अलावा किसी अन्य के इस्तेमाल से संबंधित किसी भी प्रस्ताव पर भारत के प्रधान न्यायाधीश की सहमति लेनी होगी।
'हम तलाक नहीं करवाते बस...', आजतक पर अनिरुद्धाचार्य के दिलचस्प जवाब
आजतक के मथुरा में खास कार्यक्रम 'पंचायत आजतक' के मंच पर खासताैर पर आमंत्रित थे- प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य जी महाराज. जहां उन्होंने 'मेरे तो गिरधर गोपाल’ नाम के सेशन में कई अहम मुद्दों पर आजतक के सवालों के बहुत दिलचस्प तरीके से जवाब दिए. देखिए उनका ये चिरपरिचित अंदाज.

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