वाशिंगटन/येरूशलेम। अमरीका ने ईरान के खिलाफ अभियान के संभावित विस्तार से पहले इजराइल को देश में कई और अमरीकी ईंधन भरने वाले विमान तैनात करने की अपनी योजना की सूचना दी है और इजराइली अधिकारियों के अनुसार यह कदम अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मंगलवार को सिचुएशन रूम की बैठक के बाद व्यापक सैन्य अभियान […] The post ईरान पर बड़े हमले की तैयारी में अमरीका, ट्रंप प्रशासन इजराइल में तैनात करेगा अतिरिक्त फ्यूल टैंकर विमान appeared first on Sabguru News .
सोनम वांगचुक की हालत स्थिर, लेकिन इलाज से किया इनकार : सफदरजंग अस्पताल
नई दिल्ली। बीस दिन से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस सफदरजंग अस्पताल लेकर पहुंची, जहां चिकित्सकों ने उनके शरीर में निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) और पोटेशियम की कमी के लक्षण पाए। उन्होंने नस के जरिए (आईवी) तरल, ओआरएस जैसे पेय तथा अन्य दवाएं लेने से इनकार कर दिया है। […] The post सोनम वांगचुक की हालत स्थिर, लेकिन इलाज से किया इनकार : सफदरजंग अस्पताल appeared first on Sabguru News .
जंतर-मंतर पर हिंदू देवताओं का अपमान,कुणाल कामरा और प्रकाश राज पर दर्ज हो एफआईआर
हिन्दू जनजागृति समिति एवं सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की मांग नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और सोनम वांगचुक के नेतृत्व में नीट (NEET) मुद्दे को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के मंच से खुलेआम सनातन धर्म का अपमान और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने का गंभीर मामला सामने आया है। इसके विरुद्ध […] The post जंतर-मंतर पर हिंदू देवताओं का अपमान,कुणाल कामरा और प्रकाश राज पर दर्ज हो एफआईआर appeared first on Sabguru News .
भिण्ड में सोशल मीडिया पर पत्नी के अश्लील फोटो और वीडियो डालने वाले पति पर FIR दर्ज
भिण्ड। मध्यप्रदेश में भिण्ड जिले के गोहद थाना क्षेत्र में एक महिला ने अपने पति पर सोशल मीडिया पर उसके अश्लील फोटो और वीडियो वायरल कर बदनाम करने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि आरोपी पति लंबे समय से उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। विरोध करने पर उसने जान […] The post भिण्ड में सोशल मीडिया पर पत्नी के अश्लील फोटो और वीडियो डालने वाले पति पर FIR दर्ज appeared first on Sabguru News .
बागियों की वापसी पर अभिषेक बनर्जी ने दिया पद छोड़ने का प्रस्ताव
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को पार्टी के बागी नेताओं को बड़ा प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें जिम्मेदार ठहराकर तृणमूल छोड़ने वाले सांसद और विधायक पार्टी में वापस लौट आते हैं तो वे एक घंटे के भीतर पार्टी के सभी पदों से […] The post बागियों की वापसी पर अभिषेक बनर्जी ने दिया पद छोड़ने का प्रस्ताव appeared first on Sabguru News .
वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर ममता ने केंद्र पर साधा निशाना
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर चिंता जताते हुए शनिवार को केंद्र सरकार से बातचीत शुरू करने और शांतिपूर्ण असहमति के लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान करने का आग्रह किया।
गुंटूर में महिला को सरेआम निर्वस्त्र कर पीटने के मामले में तेदेपा नेता निलंबित
गुंटूर/विजयवाड़ा। आंध्र प्रदेश के तटीय शहर गुंटूर स्थित कृष्णाबाबू कॉलोनी में सार्वजनिक नल से पानी भरने के मामूली विवाद में एक महिला को सरेआम निर्वस्त्र कर पीटने का बेहद झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। इस घटना में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के स्थानीय नेता की संलिप्तता के बाद राज्य में भारी राजनीतिक […] The post गुंटूर में महिला को सरेआम निर्वस्त्र कर पीटने के मामले में तेदेपा नेता निलंबित appeared first on Sabguru News .
भिवाड़ी में एटीएम कार्ड बदलकर 73 हजार की ठगी करने वाला शातिर अरेस्ट
खैरथल तिजारा। राजस्थान में खैरथल तिजारा जिले के भिवाड़ी थाना क्षेत्र में पुलिस ने एटीएम कार्ड बदलकर लोगों के खातों से रुपए उड़ाने वाले एक शातिर ठग को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक बृजेश उपाध्याय ने शनिवार को बताया कि आरोपी करीब दो वर्ष से फरार था। पुलिस ने उसे हरियाणा के पलवल जिले से […] The post भिवाड़ी में एटीएम कार्ड बदलकर 73 हजार की ठगी करने वाला शातिर अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
सिरोही के दो नेताओं की जंग में पिसा अधिकारी
सबगुरु न्यूज-सिरोही। सिरोही भाजपा में पिछले चैबीस घंटों से ये चर्चा गर्म है कि यहां के दो नेता एक दूसरे का नीचा दिखाने और पटखनी देने के लिए हर स्तर पर आ चुके हैं। वर्चस्व की ये लडाई अब पिण्डवाडा विधानसभा क्षेत्र में चरम पर पहुंच चुकी है। सिरोही विधानसभा में भी ये खींचतान है। […] The post सिरोही के दो नेताओं की जंग में पिसा अधिकारी appeared first on Sabguru News .
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह पाटा सहित हत्या के 9 दोषियों को उम्रकैद
अलवर। राजस्थान में अलवर के जिला एवं सत्र न्यायालय ने चुनावी रंजिश को लेकर की गई हत्या के नौ आरोपियों को शनिवार को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत भंडारी ने अभियुक्त भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह पाटा सहित अनूप सिंह, कमलजीत सिंह, गुरवचन […] The post भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह पाटा सहित हत्या के 9 दोषियों को उम्रकैद appeared first on Sabguru News .
देश का पहला निजी अंतरिक्ष यान ‘विक्रम-1’अपनी कक्षा तक पहुंचने में सफल
श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश)। देश के पहले निजी तौर पर विकसित आर्बिटल क्लास रॉकेट ‘विक्रम-1’ ने शनिवार को यहां से सफलतापूर्वक अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी और अपनी लक्षित कक्षा तक पहुंचने में सफल रहा। इस उड़ान को देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। हैदराबाद स्थित ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ द्वारा विकसित […] The post देश का पहला निजी अंतरिक्ष यान ‘विक्रम-1’ अपनी कक्षा तक पहुंचने में सफल appeared first on Sabguru News .
वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के बाद दीपके ने किया राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान
नई दिल्ली। पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक को हिरासत में लिये जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने देशभर में लोगों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया है। दीपके ने कहा कि वांगचुक को इस तरह हिरासत में लेना तानाशाही है जिसका विरोध ज़रूरी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म […] The post वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के बाद दीपके ने किया राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान appeared first on Sabguru News .
सोनम वांगचुक की जगह अभिजीत दीपके अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे
नई दिल्ली। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ अनशन पर बैठे शिक्षाविद सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर मंतर से हटाकर अस्पताल में भर्ती करवाए जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने भूख हड़ताल पर बैठने का फैसला किया। दीपके ने सोशल मीडिया मंच […] The post सोनम वांगचुक की जगह अभिजीत दीपके अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे appeared first on Sabguru News .
Maharashtra politics News : महाराष्ट्र की सियासत से बड़ी खबर सामने आई है। उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका लगा है। खबरों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट से अलग हुए 6 सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। इतना ही नहीं बागी सांसदों के इस ...
इंसानी शरीर में कई बीमारियां ऐसी होती हैं जो शुरुआत में बेहद सामान्य लगती हैं, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर वे जानलेवा साबित हो सकती हैं। ऐसा ही एक गंभीर लक्षण है पेशाब में खून दिखाई देना (Blood in Urine)। अधिकांश लोग यूरिन में हल्का लाल या गुलाबी रंग दिखने पर उसे डिहाइड्रेशन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) या किडनी स्टोन का मामूली असर मानकर आसानी से नजरअंदाज कर देते हैं, खासकर तब जब उन्हें कोई दर्द या तकलीफ महसूस नहीं हो रही हो। लेकिन चेन्नई के प्रतिष्ठित एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रोलॉजी एंड यूरोलॉजी के मैनेजिंग डायरेक्टर और प्रमुख यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अरुण कुमार बालकृष्णन के अनुसार, बिना दर्द के पेशाब में खून आना 'किडनी कैंसर' (Kidney Cancer) का सबसे पहला और मुख्य चेतावनी संकेत हो सकता है। चूंकि यह कैंसर शुरुआती चरणों में बिना किसी शोर के चुपचाप शरीर के अंदर फैलता है, इसलिए इसकी एक भी घटना को अनदेखा करना भारी पड़ सकता है।मेडिकल भाषा में क्या है हेमट्यूरिया: यह कैसे आपके पूरे शरीर के लिए एक बड़ा रेड फ्लैग है?चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) में पेशाब के साथ रक्त आने की इस स्थिति को 'हेमट्यूरिया' (Hematuria) कहा जाता है। डॉ. बालकृष्णन स्पष्ट करते हैं कि हेमट्यूरिया का रंग पूरी तरह से लाल, हल्का गुलाबी या कोला (Dark Brown) जैसा हो सकता है। कई बार यह ब्लीडिंग इतनी सूक्ष्म होती है कि नग्न आंखों से दिखाई नहीं देती और इसका पता केवल रूटीन यूरिन टेस्ट के दौरान ही चलता है। यूरोलॉजिस्ट के मुताबिक, चाहे यूरिन में खून केवल एक बार आया हो या बार-बार आ रहा हो, इसके साथ पेट में दर्द हो या न हो, आपको तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। किडनी कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह बहुत धीमी गति से बढ़ता है और जब तक मरीज को लगातार पीठ दर्द, पेट में बड़ी गांठ महसूस होना, अचानक वजन कम होना या अत्यधिक थकान जैसे गंभीर लक्षण दिखने शुरू होते हैं, तब तक यह खतरनाक रूप से एडवांस स्टेज (अंतिम चरण) में पहुंच चुका होता है।जरूरी नहीं कि हर ब्लीडिंग कैंसर ही हो: यूरोलॉजिस्ट ने बताया पूरी जांच का सही तरीकाविशेषज्ञों का कहना है कि यूरिन में खून दिखने का मतलब यह कतई नहीं है कि आपको शत-प्रतिशत किडनी कैंसर ही है। यूरिनरी ट्रैक्ट में किसी भी प्रकार का बैक्टीरियल इन्फेक्शन, गुर्दे की पथरी (Kidney Stone), पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ जाना (Enlarged Prostate) या किडनी से जुड़ी अन्य पुरानी बीमारियां भी इस आंतरिक रक्तस्राव का मुख्य कारण हो सकती हैं। हालांकि, असली समस्या का सटीक पता लगाने के लिए एक संपूर्ण मेडिकल डायग्नोसिस की आवश्यकता होती है। डॉ. बालकृष्णन सलाह देते हैं कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले एक अनुभवी यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेकर यूरिन एनालिसिस (मूत्र जांच), पेट का अल्ट्रासाउंड (Ultrasound), सीटी स्कैन (CT Scan) या आवश्यकतानुसार एमआरआई (MRI) जैसी आधुनिक रेडियोलॉजिकल जांच करानी चाहिए ताकि सही समय पर सही बीमारी का इलाज सुनिश्चित किया जा सके।किडनी कैंसर के मुख्य रिस्क फैक्टर्स: 50 की उम्र पार कर चुके लोग और स्मोकर्स रहें बेहद सावधानआमतौर पर किडनी कैंसर के अधिकांश मामले 50 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में देखे जाते हैं, लेकिन आजकल की बदलती जीवनशैली के कारण युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। डॉ. बालकृष्णन के अनुसार, तंबाकू और सिगरेट का सेवन (Smoking) इस बीमारी का सबसे मजबूत और सबसे बड़ा रोके जा सकने वाला रिस्क फैक्टर है। इसके अलावा, अत्यधिक मोटापा (Obesity), अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension), क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित होना और परिवार में पहले किसी को किडनी कैंसर होने का इतिहास (Family History) भी इस खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। चेन्नई के इस रोबोटिक सर्जन का कहना है कि शरीर के वजन को संतुलित रखकर, तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाकर, नियमित शारीरिक व्यायाम और सालाना हेल्थ चेक-अप के माध्यम से इस घातक बीमारी की चपेट में आने की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।रोबोटिक सर्जरी से अब आसान हुआ इलाज: शरीर के चीखने से पहले उसकी फुसफुसाहट को पहचानेंचिकित्सा जगत में आई आधुनिक तकनीकों की बदौलत आज शुरुआती चरण में पता चलने पर किडनी कैंसर का इलाज बेहद प्रभावी और आसान हो गया है। यूरोलॉजिकल केयर में हुई प्रगति के कारण अब मरीजों को पुराने समय की तरह बड़े चीरे लगवाने की जरूरत नहीं पड़ती। मिनिमली इनवेसिव लैप्रोस्कोपिक (Laparoscopic) और रोबोट-असिस्टेड सर्जरी (Robot-Assisted Surgery) की मदद से बेहद छोटे चीरों के जरिए कैंसरग्रस्त ट्यूमर को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। इससे मरीज की रिकवरी बहुत तेजी से होती है, ऑपरेशन के बाद होने वाला दर्द न्यूनतम होता है और सबसे अच्छी बात यह है कि मरीज के शरीर के स्वस्थ किडनी टिश्यूज को पूरी तरह सुरक्षित बचा लिया जाता है, जिससे जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) प्रभावित नहीं होती। डॉ. बालकृष्णन ने चेतावनी देते हुए एक बेहद खूबसूरत बात कही कि आपका शरीर अक्सर बड़ी तबाही से पहले छोटी फुसफुसाहटों के जरिए संकेत देता है; यूरिन में खून आना भी उसी का हिस्सा है, इसे पहचानें और अपनी जान बचाएं।
वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर एक बेहद डरावनी और आंखें खोल देने वाली चेतावनी सामने आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी की गई 'कैंसर पर ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट 2026' के अनुसार, यदि दुनिया भर के देशों ने इस जानलेवा बीमारी की रोकथाम, शुरुआती जांच (स्क्रीनिंग) और इलाज की बुनियादी सुविधाओं में तत्काल प्रभाव से बड़े सुधार नहीं किए, तो अगले 25 वर्षों में कैंसर एक महामारी का रूप ले सकता है। रिपोर्ट के चौंकाने वाले अनुमानों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर कैंसर के नए मामलों की संख्या आज के 20.6 मिलियन (लगभग 2.06 करोड़) से बढ़कर साल 2050 तक सालाना 35 मिलियन (साढ़े तीन करोड़) के पार पहुंच सकती है। संयुक्त राष्ट्र की इस स्वास्थ्य संस्था ने दुनिया भर में कैंसर के इलाज और उसकी उपलब्धता में मौजूद भारी और अमानवीय असमानताओं को लेकर भी वैश्विक स्तर पर सरकारों को आड़े हाथों लिया है।दिल की बीमारी के बाद मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण: हर दिन 26 हजार से ज्यादा लोग तोड़ रहे हैं दममौजूदा स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण करें तो कैंसर इस समय वैश्विक स्तर पर हृदय रोगों (Heart Diseases) के बाद मानव मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। वर्तमान में हर साल लगभग 10 मिलियन (एक करोड़) लोग इस खामोश हत्यारे की वजह से अपनी जान गंवा देते हैं, जिसका सीधा मतलब है कि हर single दिन दुनिया भर में 26,000 से अधिक मौतें सिर्फ कैंसर के कारण हो रही हैं। डब्लूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि कैंसर न केवल पीड़ित व्यक्ति के शरीर को तोड़ता है, बल्कि यह पूरे परिवार को एक भयंकर मानसिक आघात, सामाजिक अलगाव और अत्यधिक वित्तीय संकट (Financial Crisis) के दलदल में धकेल देता है। इलाज के भारी-भरकम खर्च के कारण लाखों मध्यमवर्गीय परिवार हर साल गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं।गरीब और अमीर देशों के बीच जीवन की असमानता: कम आय वाले मुल्कों में बचने की दर आधी से भी कमइस वैश्विक रिपोर्ट ने हेल्थकेयर सिस्टम के उस कड़वे सच को उजागर किया है, जहां अमीर और गरीब देशों के मरीजों के जीने के अधिकार में भी बड़ा फासला है। उच्च आय वाले विकसित देशों में जहां ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) से पीड़ित लगभग 87% महिलाएं आधुनिक इलाज की बदौलत कम से कम पांच साल या उससे अधिक समय तक जीवित रह जाती हैं, वहीं कम आय वाले विकासशील और गरीब देशों में यह जीवन दर घटकर महज 42% पर सिमट जाती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि दुनिया भर में वर्तमान में तीन में से एक देश भी ऐसा नहीं है जो अपने नागरिकों को यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) के अंतर्गत संपूर्ण कैंसर केयर और मुफ्त दवाएं प्रदान करता हो।एशिया में सबसे ज्यादा तबाही और फेफड़ों का कैंसर बना नंबर वन किलर: जानिए क्या कहते हैं आंकड़ेभौगोलिक दृष्टिकोण से देखें तो पूरे विश्व में कैंसर का सबसे बड़ा और भयावह बोझ एशिया (Asia) महाद्वीप पर आ गिरा है। दुनिया भर में कैंसर के कुल मामलों और इसके कारण होने वाली मौतों में से आधी से अधिक (50% से ज्यादा) हिस्सेदारी अकेले एशियाई देशों में दर्ज की जा रही है। इसके विपरीत, यूरोप के पास दुनिया की कुल आबादी का केवल 9% हिस्सा है, लेकिन वैश्विक स्तर पर कैंसर के कुल मामलों और मौतों में उसका योगदान लगभग पांचवां (20%) बना हुआ है। अगर कैंसर के प्रकारों की बात करें, तो 'फेफड़ों का कैंसर' (Lung Cancer) दुनिया भर में सबसे घातक साबित हो रहा है। पुरुषों में फेफड़े, प्रोस्टेट और कोलोरेक्टल कैंसर के मामले सबसे ज्यादा देखे जा रहे हैं, जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट, फेफड़े और कोलोरेक्टल कैंसर की हिस्सेदारी सबसे तेजी से बढ़ रही है।40% कैंसर के मामलों को रोकना संभव: तंबाकू में गिरावट के बीच लाइफस्टाइल सुधारने की सख्त जरूरतएक तरफ जहां रिपोर्ट भविष्य की भयानक तस्वीर दिखाती है, वहीं दूसरी तरफ यह उम्मीद की एक किरण भी जगाती है। डब्लूएचओ के विशेषज्ञों का अनुमान है कि दुनिया भर में होने वाले कुल कैंसर के मामलों में से लगभग 40% मामलों को केवल जागरूक रहकर और रिस्क फैक्टर्स को नियंत्रित करके पूरी तरह रोका जा सकता है। इनमें तंबाकू का अत्यधिक सेवन, शराब पीना, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, अस्वस्थ खान-पान और कुछ गंभीर संक्रमण जैसे कि ह्यूमन पेपिलोमावायरस (HPV), हेपेटाइटिस B और C शामिल हैं। राहत की बात यह है कि मजबूत पब्लिक हेल्थ पॉलिसियों के कारण साल 2010 के बाद से दुनिया भर में तंबाकू के इस्तेमाल में 27% की कमी आई है, लेकिन अब भी कम और मध्यम आय वाले देशों में कैंसर की आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं की पहुंच बेहद सीमित है, जिसके लिए सरकारों को तुरंत स्वास्थ्य बजट में निवेश बढ़ाना होगा।
वैश्विक खेल मंच से भारत के लिए एक बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (Commonwealth Games 2026) के भव्य उद्घाटन समारोह के लिए भारत की दो दिग्गज महिला एथलीटों को एक बहुत बड़ा सम्मान सौंपा गया है। स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) और चैंपियन मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन (Lovlina Borgohain) को इस प्रतिष्ठित खेल आयोजन में भारतीय दल का आधिकारिक ध्वजवाहक (Flag Bearer) और बैटन वाहक चुना गया है। इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) द्वारा की गई इस आधिकारिक घोषणा के बाद खेल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह है। यह दोनों चैंपियन खिलाड़ी आगामी 23 जुलाई को ग्लासगो के प्रसिद्ध द हाइड्रो (OVO Hydro) में होने वाली ओपनिंग सेरेमनी में भारतीय एथलीटों के पूरे दल का नेतृत्व करती हुई नजर आएंगी, जो वैश्विक मंच पर भारतीय महिला शक्ति की गूंज को और मजबूत करेगा।आईओए ने लगाई मुहर: मीराबाई चानू थामेंगी तिरंगा, लवलीना के हाथों में होगी क्वीन बैटनइंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) ने 18 जुलाई 2026 को इस संबंध में औपचारिक घोषणा करते हुए दोनों एथलीटों के नामों पर मुहर लगाई। तय किए गए प्रोटोकॉल के मुताबिक, उद्घाटन समारोह के दौरान जहां टोक्यो ओलंपिक की सिल्वर मेडलिस्ट मीराबाई चानू गर्व से भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा थामकर आगे चलेंगी, वहीं दूसरी ओर ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन हाथ में प्रतिष्ठित बैटन लेकर भारतीय टीम को लीड करेंगी। ग्लासगो खेलों के आधिकारिक नियमों के तहत प्रतियोगिता की शुरुआत से ठीक पहले सभी 74 राष्ट्रमंडल देशों और क्षेत्रों की बैटन्स को एक साथ लाया जाएगा, जिसके बाद इस भव्य सेरेमनी का आगाज होगा। इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए पूरी दुनिया के खेल प्रेमियों की नजरें ग्लासगो पर टिकी हुई हैं।अध्यक्ष पीटी उषा ने जताया गर्व: यूनाइटेड किंगडम में पसीना बहा रही हैं देश की दोनों स्टार एथलीटइस ऐतिहासिक घोषणा के तुरंत बाद भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष और महान धाविका पीटी उषा ने मीडिया के सामने आकर देश की इन दोनों बेटियों की जमकर सराहना की। पीटी उषा ने बेहद भावुक और गर्व भरे शब्दों में कहा कि मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन के नामों की घोषणा करना पूरे संगठन और देश के लिए एक परम सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि ओवीओ हाइड्रो जैसे प्रतिष्ठित स्टेडियम में इन दोनों महिला एथलीटों को यह सम्मान मिलना पूरी टीम इंडिया का हौसला बढ़ाएगा। अध्यक्ष ने आगे जानकारी दी कि दोनों खिलाड़ी इस समय यूनाइटेड किंगडम (UK) में बेहद कड़े और अनुशासित माहौल में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर रही हैं और वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को बार-बार साबित करने के बाद अब कॉमनवेल्थ में भी पोडियम फिनिश के लिए पूरी तरह तैयार हैं।मेडल की सबसे बड़ी उम्मीदें: टोक्यो ओलंपिक से लेकर एशियन गेम्स तक का शानदार सफरभारतीय खेल दल के दृष्टिकोण से देखा जाए तो मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पोडियम पर तिरंगा लहराने की सबसे मजबूत दावेदार हैं। मीराबाई चानू ने साल 2021 के टोक्यो ओलंपिक्स में वेटलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचा था और इस बार भी फैंस को उनसे गोल्ड की पूरी उम्मीद है। दूसरी तरफ, बॉक्सिंग रिंग में भारत का लोहा मनवाने वाली लवलीना बोरगोहेन ने टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद साल 2023 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में शानदार गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। इसके अलावा एशियन गेम्स 2023 में सिल्वर मेडल जीतने वाली लवलीना का आक्रामक फॉर्म इस समय चरम पर है। इन दोनों दिग्गजों की अगुवाई में भारतीय दल ग्लासगो में नए रिकॉर्ड बनाने के इरादे से मैदान में उतरेगा।
भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही तीन मैचों की वनडे सीरीज का आखिरी और निर्णायक मुकाबला रविवार, 19 जुलाई 2026 को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेला जाना है। इस महामुकाबले से पहले क्रिकेट गलियारों में भारतीय टीम के दिग्गज बल्लेबाज रोहित शर्मा को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि लॉर्ड्स का यह मैदान रोहित शर्मा के अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी मैच साबित हो सकता है क्योंकि चयनकर्ता 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए यशस्वी जायसवाल जैसे युवाओं को तैयार करना चाहते हैं। इन खबरों के बीच कार्डिफ में खेले गए दूसरे वनडे में रोहित के बल्ले से 47 गेंदों में केवल 26 रनों की धीमी पारी निकली, जिसने आलोचकों को सवाल उठाने का मौका दे दिया। 39 वर्षीय रोहित इस सीरीज के पहले मैच में भी महज 11 रन ही बना सके थे, जिससे उनकी टाइमिंग और फॉर्म को लेकर बहस छिड़ गई थी।फॉर्म की कोई चिंता नहीं, नई गेंद के सामने बल्लेबाजी रही मुश्किल: गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल का रोहित को समर्थनलॉर्ड्स वनडे की पूर्व संध्या पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने इन सभी चिंताओं को सिरे से खारिज करते हुए रोहित शर्मा का खुलकर समर्थन किया है। मोर्केल ने अनुभवी बल्लेबाज की काबिलियत पर भरोसा जताते हुए कहा कि पूरी सीरीज के दौरान नई गेंद के सामने बल्लेबाजी करना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है क्योंकि पिच से गेंदबाजों को अच्छी स्विंग मिल रही है। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि रोहित एक बेहद अनुभवी खिलाड़ी हैं और वह जानते हैं कि इस तरह की मुश्किल परिस्थितियों से बाहर कैसे निकला जाता है। कोच ने यह भी साफ किया कि रोहित शर्मा की फॉर्म या उनके काम करने के तरीके को लेकर टीम मैनेजमेंट में किसी भी तरह की कोई परेशानी या चिंता का माहौल नहीं है।टीम में लाते हैं शांति: मोर्कल ने रोहित शर्मा के अनुभव को सराहामोर्ने मोर्कल ने रोहित शर्मा की बल्लेबाजी शैली और ड्रेसिंग रूम में उनकी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब रोहित शीर्ष क्रम में बल्लेबाजी के लिए उतरते हैं, तो वह पूरे बैटिंग लाइनअप में एक खास तरह की शांति और स्थिरता लेकर आते हैं। उनका विशाल अनुभव युवाओं के लिए बेहद मददगार साबित होता है। गेंदबाजी कोच ने उम्मीद जताई कि लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर रोहित निश्चित रूप से अपनी तकनीक में जरूरी सुधार करके बड़ी पारी खेलेंगे और मैच का रुख भारत के पक्ष में मोड़ देंगे। कोच के इस सकारात्मक बयान के बाद भारतीय क्रिकेट प्रेमियों और रोहित के फैंस ने बड़ी राहत की सांस ली है।बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया का बड़ा स्पष्टीकरण: लॉर्ड्स में खेला जाने वाला मैच नहीं होगा रोहित का आखिरी वनडेगेंदबाजी कोच से पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव देवजीत सैकिया ने भी रोहित शर्मा के संन्यास की सभी अफवाहों पर पूरी तरह से पूर्णविराम लगा दिया था। समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) से बातचीत के दौरान सैकिया ने स्पष्ट किया कि मीडिया में रोहित के भविष्य को लेकर चल रही सभी खबरें और अटकलें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। उन्होंने आधिकारिक तौर पर कहा कि बोर्ड या चयन समिति के बीच ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई है कि रविवार को लॉर्ड्स में खेला जाने वाला मैच रोहित शर्मा का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होगा। सैकिया ने साफ शब्दों में कहा कि रोहित भारतीय वनडे टीम के नियमित और बेहद महत्वपूर्ण सदस्य हैं और वह आगे भी देश का प्रतिनिधित्व करना जारी रखेंगे।
प्राथमिक शेयर बाजार (IPO Market) के निवेशकों के लिए अगला हफ्ता बेहद रोमांचक और भारी हलचल वाला साबित होने जा रहा है। दलाल स्ट्रीट में दो बड़े और बहुप्रतीक्षित आईपीओ— एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट (SBI Funds Management) और अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड (Alpine Texworld) के शेयरों की लिस्टिंग होने वाली है। बाजार के जानकारों और रीटेल निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इन दोनों कंपनियों की शेयर बाजार में कैसी धमाकेदार या सुस्त एंट्री होगी। यदि आप भी इन दोनों में से किसी भी आईपीओ में पैसा लगा चुके हैं या लिस्टिंग के दिन खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) से आ रहे ताजा और धमाकेदार संकेत आपकी आंखें खोल देंगे, क्योंकि एक तरफ जहां एसबीआई फंड्स भारी मुनाफे की ओर इशारा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड में निवेशकों की सांसें थमी हुई हैं।एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट आईपीओ का नया धमाका: ₹90 के पार पहुंचा जीएमपी, बंपर कमाई के संकेतदेश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की सहयोगी कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ को लेकर ग्रे मार्केट में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। आईपीओ वॉच के लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, कंपनी का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) वर्तमान में ₹97 के स्तर पर मजबूती से ट्रेड कर रहा है। कंपनी ने अपने पब्लिक इश्यू का अपर प्राइस बैंड ₹574 प्रति इक्विटी शेयर तय किया था। इस लिहाज से देखें तो वर्तमान ट्रेंड के अनुसार एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयर की बाजार में लिस्टिंग ₹670 के पार शानदार प्रीमियम के साथ हो सकती है, जो निवेशकों को लिस्टिंग के पहले ही दिन बंपर मुनाफा देने के लिए तैयार है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, इस आईपीओ को निवेशकों का ऐतिहासिक रेस्पॉन्स मिला और यह कुल 41.66 गुना सब्सक्राइब हुआ, जिसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का हिस्सा रिकॉर्ड 140.11 गुना भरा था।₹11,693 करोड़ का मेगा ओएफएस: एसबीआई और अमुंडी इंडिया होल्डिंग्स बेच रहे अपनी हिस्सेदारीएसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का यह विशाल पब्लिक इश्यू करीब ₹11,693 करोड़ का है, जो पूरी तरह से 20.37 करोड़ इक्विटी शेयरों का 100% ऑफर फॉर सेल (OFS) है। इसका सीधा मतलब यह है कि आईपीओ के जरिए जुटाई गई पूरी रकम कंपनी के मुख्य बिजनेस में नहीं जाएगी, बल्कि इसे बेचने वाले मौजूदा शेयरधारक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और विदेशी पार्टनर अमुंडी इंडिया होल्डिंग (Amundi India Holding) के पास जाएगी। इस बंपर आईपीओ के सफल समापन के बाद देश के सबसे बड़े कमर्शियल बैंक एसबीआई की इस म्यूचुअल फंड हाउस में प्रमोटर हिस्सेदारी 61.76% से घटकर 55.46% पर आ जाएगी, जबकि वैश्विक निवेश फर्म अमुंडी की हिस्सेदारी 32.56% के स्तर पर बनी रहेगी।अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड आईपीओ की रफ्तार थमी: महज ₹1 पर पहुंचा जीएमपी, रीटेलर्स को भारी उम्मीदेंएसबीआई फंड्स के विपरीत, कपड़ा क्षेत्र की कंपनी अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड (Alpine Texworld IPO) के आईपीओ को लेकर ग्रे मार्केट का रुख बेहद ठंडा और सुस्त बना हुआ है। बाजार के सूत्रों के अनुसार, इसका जीएमपी फिलहाल मात्र ₹1 के स्तर पर रेंग रहा है। कंपनी ने इस आईपीओ के लिए ₹100 से ₹105 प्रति इक्विटी शेयर का प्राइस बैंड निर्धारित किया था, जिसके आधार पर इसकी अनुमानित लिस्टिंग प्राइस ₹106 प्रति शेयर के आसपास देखी जा रही है, जो बिल्कुल फ्लैट या मामूली बढ़त के साथ शुरुआत का संकेत है। हालांकि, सब्सक्रिप्शन के दौरान इस आईपीओ को कुल 1.40 गुना आवेदन मिले थे, जिसमें रीटेल इनवेस्टर्स (Retail Investors) की तरफ से सबसे अधिक दिलचस्पी और मांग दर्ज की गई थी।₹126.25 करोड़ के फ्रेश इश्यू का इनसाइड प्लान: गुजरात में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाएगी कंपनीअल्पाइन टेक्सवर्ल्ड का यह आईपीओ पूरी तरह से 1.20 करोड़ इक्विटी शेयरों का फ्रेश इश्यू (Fresh Issue) है, यानी इसमें कोई ऑफर फॉर सेल शामिल नहीं है और जुटाया गया पूरा पैसा सीधे कंपनी के पास जाएगा। कंपनी प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि आईपीओ से प्राप्त होने वाली शुद्ध वित्तीय रकम का प्राथमिक उपयोग गुजरात के अहमदाबाद में उनकी प्रस्तावित तीसरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में एक नई आधुनिक वीविंग यूनिट (Weaving Unit) स्थापित करने के लिए किया जाएगा, जिससे कंपनी के ग्रे फैब्रिक उत्पादन की क्षमता में भारी बढ़ोतरी होगी। इसके अतिरिक्त, इस फंड का एक बड़ा हिस्सा कंपनी के पुराने बकाया कर्जों को समय से पहले चुकाने और सामान्य कॉर्पोरेट कामकाजी खर्चों को पूरा करने के लिए आवंटित किया जाएगा, जो दीर्घकालिक दृष्टिकोण से कंपनी की बैलेंस शीट को मजबूत बनाएगा।
₹4 लाख से कम सैलरी पर भी ITR भरना बेहद जरूरी, अनजाने में की ये भूल तो सीधे आएगा आयकर विभाग का नोटिस
भारत में मध्यमवर्गीय और नौकरीपेशा परिवारों के बीच आमतौर पर यह धारणा बनी हुई है कि यदि उनकी सालाना आय 4 लाख रुपये से कम है या बेसिक छूट सीमा के दायरे में आती है, तो उन्हें आयकर रिटर्न (ITR Filing) दाखिल करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो यह आपकी वित्तीय सेहत के लिए एक बहुत बड़ी और भारी भूल साबित हो सकती है। आयकर विभाग (Income Tax Department) के कड़े नियमों के मुताबिक, टैक्स स्लैब से कम कमाई होने के बावजूद देश के नागरिकों के लिए कुछ विशेष परिस्थितियों में टैक्स रिटर्न दाखिल करना कानूनी रूप से पूरी तरह अनिवार्य (Mandatory ITR Filing) कर दिया गया है। इन महत्वपूर्ण नियमों की अनदेखी करने पर करदाताओं को न सिर्फ आयकर विभाग के लीगल नोटिस का सामना करना पड़ सकता है, बल्कि उन पर भारी-भरकम जुर्माना और दंडात्मक कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।विदेश यात्रा और ₹1 लाख का बिजली बिल: इन खर्चों को करते ही रडार पर आ जाएंगे आपइनकम टैक्स एक्ट के तहत सरकार ने खर्चों के आधार पर टैक्सपेयर्स की ट्रैकिंग प्रणाली को बेहद मजबूत कर दिया है। यदि आपकी सालाना कमाई ₹4 लाख से कम है, लेकिन आपने किसी एक वित्तीय वर्ष (Financial Year) में अपने या परिवार के किसी अन्य सदस्य के विदेशी दौरों या विदेश यात्रा पर कुल ₹2 लाख से अधिक की राशि खर्च की है, तो आपके लिए आईटीआर फाइल करना शत-प्रतिशत अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, यदि कोई घरेलू उपभोक्ता पूरे एक साल में अपने घर या व्यावसायिक प्रतिष्ठान का कुल बिजली बिल ₹1 लाख या उससे अधिक का भुगतान करता है, तो वह सीधे टैक्स विभाग की निगरानी में आ जाता है। ऐसे सभी मामलों में कर योग्य आय (Taxable Income) बेसिक छूट सीमा से कम होने के बावजूद रिटर्न दाखिल करना ही होता है।बैंक खातों में ₹50 लाख का कैश ट्रांजैक्शन: सेविंग्स और करंट अकाउंट धारक ध्यान देंआयकर विभाग बैंकिंग चैनलों के जरिए होने वाले बड़े वित्तीय लेन-देन पर बहुत बारीक नजर रखता है। नए नियमों के अंतर्गत यदि किसी व्यक्ति ने एक वित्त वर्ष के दौरान अपने एक या एक से अधिक बचत खातों (Savings Account) में कुल मिलाकर ₹50 लाख या उससे अधिक की नकद या डिजिटल राशि जमा की है, तो उसे अनिवार्य रूप से आईटीआर दाखिल करना होगा। वहीं, चालू खातों (Current Account) के लिए यह सीमा और अधिक सख्त है; यदि आपके करंट अकाउंट में कुल जमा राशि ₹1 करोड़ को पार कर जाती है, तो रिटर्न दाखिल करने की विधिक बाध्यता लागू हो जाती है। यह नियम उन छोटे व्यापारियों और फ्रीलांसरों पर भी पूरी तरह लागू होता है जिनकी शुद्ध वार्षिक आय टैक्स के दायरे में नहीं आती है।विदेशी संपत्ति और पैरेंट कंपनी के ESOPs: ग्लोबल इनवेस्टमेंट करने वालों के लिए कड़े नियमयदि आपकी घरेलू आय बेहद कम है, लेकिन आपके नाम पर भारत से बाहर यानी विदेश में कोई चल या अचल संपत्ति है, अथवा आप किसी विदेशी एसेट या ट्रस्ट के सीधे लाभार्थी (Beneficiary) हैं, तो आपके लिए भारतीय कर नियमों के तहत टैक्स फाइलिंग करना अनिवार्य है। आजकल आईटी कंपनियों और स्टार्टअप्स में काम करने वाले कई कर्मचारियों को विदेशी पैरेंट कंपनियों के एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन (ESOPs) के जरिए शेयर दिए जाते हैं। यदि आपके पास ऐसे विदेशी शेयर मौजूद हैं या किसी विदेशी बैंक खाते में आपके पास हस्ताक्षर करने का अधिकार (Signing Authority) सुरक्षित है, तो आपको अपनी जीरो लायबिलिटी के बावजूद अपने आईटीआर फॉर्म में इसका पूरा ब्यौरा देना होगा।जीरो टैक्स और धारा 87A का भ्रम: समय पर रिटर्न न भरने पर लगेगा ₹5,000 का भारी जुर्मानासैलरीड क्लास कर्मचारियों में एक और बड़ा भ्रम यह फैला हुआ है कि यदि उन्हें आयकर अधिनियम की धारा 87A (Section 87A) के तहत टैक्स रिबेट मिल रही है और उनकी शुद्ध टैक्स देनदारी शून्य (Zero Tax Liability) हो गई है, तो वे रिटर्न फाइल करने से मुक्त हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रिबेट मिलना एक अलग प्रक्रिया है, लेकिन यदि आप ऊपर दी गई अनिवार्य शर्तों में से किसी एक में भी फिट बैठते हैं, तो आपको डेडलाइन से पहले फॉर्म भरना ही होगा। यदि आप निर्धारित समय सीमा के भीतर आईटीआर दाखिल करने में विफल रहते हैं, तो आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत ₹5 लाख तक की आय पर ₹1,000 और उससे अधिक की आय पर ₹5,000 तक का लेट फाइलिंग जुर्माना (Late Fee Fine) ठोक दिया जाएगा, साथ ही बकाया टैक्स होने पर धारा 234A के तहत मासिक चक्रवृद्घि ब्याज भी चुकाना होगा।
पर्सनल लोन की EMI से हैं परेशान? दूसरे लोन में जोड़ने से पहले जान लें ये बातें, वरना होगा नुकसान
आज के आधुनिक दौर में अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए एक से अधिक पर्सनल लोन लेना बेहद आम बात हो चुकी है। लेकिन जब हर महीने दो, तीन या उससे ज्यादा लोन की ईएमआई (EMI) अलग-अलग तारीखों पर बैंक खाते से कटती है, तो मध्यमवर्गीय परिवारों का पूरा बजट पूरी तरह चरमरा जाता है। इस मानसिक और आर्थिक तनाव से बचने के लिए इन दिनों 'लोन कंसोलिडेशन' (Loan Consolidation) यानी सभी छोटे-छोटे कर्जों को मिलाकर एक बड़े लोन में बदलने का चलन तेजी से बढ़ा है। सुनने में एक ईएमआई और एक ही बैंक का यह विकल्प जितना आसान और आकर्षक लगता है, हकीकत में यह हर बार आपके लिए फायदे का सौदा नहीं होता। बिना सोचे-समझे लिया गया एक गलत वित्तीय फैसला आपकी कुल ब्याज लागत को बेतहाशा बढ़ाकर आपको जिंदगी भर के लिए कर्ज के दलदल में धकेल सकता है।क्या होता है लोन कंसोलिडेशन और कब मिलता है इसका असली फायदा: समझें ब्याज दरों का गणितलोन कंसोलिडेशन के तहत वित्तीय संस्थान या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) आपके मौजूदा सभी एक्टिव पर्सनल लोन को एक नए लोन खाते में ट्रांसफर कर देती हैं, जिससे आपको अलग-अलग लोन की भुगतान तारीखें याद रखने के झंझट से मुक्ति मिल जाती है। बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रक्रिया का असली फायदा आपको केवल और केवल तभी मिल सकता है जब नए लोन की वार्षिक ब्याज दर (Interest Rate) आपके पुराने सभी लोनों की औसत ब्याज दर से काफी कम हो। यदि नई ब्याज दर में कोई बड़ा अंतर नहीं है, तो बैंक द्वारा वसूले जाने वाले नए प्रोसेसिंग शुल्क (Processing Fees), भारी-भरकम डॉक्यूमेंटेशन चार्ज और अन्य छिपे हुए प्रशासनिक शुल्क आपकी सारी अनुमानित बचत को पल भर में पूरी तरह खत्म कर देंगे।कम EMI के छलावे में न आएं: लोन की अवधि बढ़ने से जेब पर पड़ेगा दोगुना बोझअक्सर लोन मर्ज करने वाले विज्ञापन ग्राहकों को बेहद कम मासिक ईएमआई का लालच देकर अपनी ओर आकर्षित करते हैं, लेकिन समझदार उपभोक्ता को इस छलावे से बचना चाहिए। बैंक और वित्तीय कंपनियां हर महीने की किस्त को कम करने के लिए चतुराई से आपके लोन की भुगतान अवधि (Tenure) को बढ़ा देती हैं। उदाहरण के लिए, जो कर्ज आपको दो साल में चुकाना था, उसकी अवधि बढ़कर पांच साल हो जाती है। किस्त छोटी होने से हर महीने राहत तो मिलती है, लेकिन लंबे समय तक चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) लगने के कारण अंत में आपको मूलधन से कहीं ज्यादा रकम ब्याज के रूप में चुकानी पड़ती है, जिससे कुल मिलाकर आपको भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ता है।क्रेडिट स्कोर का खेल और प्रीपेमेंट चार्ज: नया कर्ज लेने से पहले इन बातों का रखें खास ख्याललोन मर्ज करने का आवेदन करने से पहले आपको अपने वर्तमान क्रेडिट स्कोर (Credit Score) का बारीकी से आकलन करना चाहिए। यदि पिछले कुछ वर्षों में आपकी समय पर भुगतान की आदतों के कारण आपका सिबिल स्कोर बेहतर हुआ है, तो आप बैंक से कम ब्याज दर और बेहतर शर्तों पर सौदेबाजी कर सकते हैं। इसके विपरीत, यदि आपकी आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है, तो बैंक आपको पहले से भी अधिक ब्याज दर का प्रस्ताव दे सकता है। एक और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब आप अपने पुराने लोन को समय से पहले पूरी तरह बंद (Foreclosure) करेंगे, तो पुराने बैंक आपसे प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर पेनल्टी वसूलेंगे। इसलिए नए लोन के लिए हामी भरने से पहले इन सभी शुल्कों को एक कागज पर लिखकर कुल खर्च का हिसाब जरूर लगा लें।दोबारा कर्ज के जाल में फंसने का खतरा: वित्तीय अनुशासन है सबसे जरूरी हथियारलोन कंसोलिडेशन के बाद जब कई ईएमआई घटकर सिर्फ एक छोटी किस्त में बदल जाती है, तो कई उपभोक्ता अपनी डिस्पोजेबल इनकम को बढ़ा हुआ मानकर दोबारा से क्रेडिट कार्ड या नया पर्सनल लोन लेना शुरू कर देते हैं। यह आदत उन्हें एक ऐसे भयंकर ऋण जाल (Debt Trap) में फंसा देती है जिससे बाहर निकलना नामुमकिन हो जाता है। यदि आप पूरी वित्तीय योजना और अनुशासन के साथ लोन मर्ज कर रहे हैं, तभी यह आपके सिबिल स्कोर को सुधारने और कर्ज मुक्त होने में मददगार साबित होगा। केवल मासिक ईएमआई का आकार देखकर जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला आपकी वित्तीय स्वतंत्रता को लंबे समय के लिए छीन सकता है।
भारतीय टेलीविजन इतिहास के सबसे बड़े और लोकप्रिय रियलिटी क्विज शो 'कौन बनेगा करोड़पति' (Kaun Banega Crorepati) के फैंस के लिए एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आई है। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन एक बार फिर 'केबीसी सीजन 18' (KBC 18) के साथ छोटे पर्दे पर धमाकेदार वापसी करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सोनी टीवी (Sony TV) ने सोशल मीडिया पर शो के कई आधिकारिक प्रोमो जारी कर दिए हैं, जिसने दर्शकों के बीच खलबली मचा दी है। इस बार हॉटसीट पर बैठने वाले कंटेस्टेंट्स के लिए सिर्फ सामान्य ज्ञान का होना काफी नहीं होगा। मेकर्स ने खुलासा किया है कि आगामी 10 अगस्त 2026 से शुरू हो रहे इस नए सीजन में गेम का पूरा नियम और खेलने का अंदाज बदल दिया गया है, जिसके बाद अब महज रट्टा मारकर आए प्रतियोगी करोड़पति बनने का सपना पूरा नहीं कर पाएंगे।केबीसी 18 का नया ट्विस्ट: इतिहास, विज्ञान और खेल का ज्ञान भी पड़ जाएगा कम, बिग बी ने बताया नया नियमसोनी टीवी द्वारा जारी किए गए पहले प्रोमो में खुद शो के होस्ट अमिताभ बच्चन ने नए सीजन के कड़े नियमों की ओर इशारा करते हुए सबको हैरान कर दिया है। बिग बी ने प्रोमो में साफ शब्दों में कहा है कि इस बार केबीसी के मंच पर इतिहास, खेल और विज्ञान का रटा-रटाया ज्ञान आपके किसी काम नहीं आने वाला है, क्योंकि पूरा खेल अब पूरी तरह बदल चुका है। अब हॉटसीट पर बैठकर केवल सही विकल्प चुन लेना या सीधा जवाब दे देना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्रतियोगियों को अपनी तार्किक क्षमता का प्रदर्शन करना होगा। इस नए बदलाव के तहत अब कंटेस्टेंट्स को किसी भी सवाल का जवाब देने के पीछे का लॉजिक (तर्क) भी समझाना पड़ सकता है, जिससे यह गेम शो अब पहले से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण और बौद्धिक होने वाला है।दुनिया को बदलने वाले AI का केबीसी पर असर: महानायक ने दिया बदलते वक्त के साथ ढलने का मंत्ररिलीज हुए दूसरे प्रोमो में दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन ने आज के आधुनिक दौर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जिक्र करते हुए शो के नए प्रारूप के पीछे की मुख्य वजह बताई है। उन्होंने कहा कि आज एआई ने पूरी दुनिया को बदल कर रख दिया है और इस तकनीकी बदलाव की रफ्तार को रोकना अब किसी के वश में नहीं है। जो चीजें कल तक पूरी तरह असंभव लगती थीं, वे आज तकनीक की मदद से पल भर में मुमकिन हो रही हैं। बिग बी ने आगे कहा कि इस तेजी से बदलती हुई दुनिया में हम सभी को खुद को ढालना होगा, और इसी सोच के साथ इस साल हमने केबीसी के नियमों में भी कुछ बेहद क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। अब हॉटसीट पर आने वाले हर खिलाड़ी को कोई भी उत्तर लॉक करने से पहले गहराई से सोचना और विचार करना होगा।अपकमिंग फिल्में: 'सेक्शन 84' की रिलीज के साथ 'कल्कि 2898 एडी' के सीक्वल में नजर आएंगे अमिताभ बच्चन'कौन बनेगा करोड़पति 18' के जरिए टीवी पर व्यस्त होने के साथ-साथ 80 पार के इस महानायक का फिल्मी करियर भी इस समय पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। अमिताभ बच्चन के पास इस समय बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के कई बड़े प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं। उनकी बहुप्रतीक्षित कोर्टरूम ड्रामा फिल्म 'सेक्शन 84' (Section 84) पूरी तरह बनकर तैयार है और जल्द ही सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इसके अलावा, हाल ही में बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचने वाली ब्लॉकबस्टर फिल्म 'कल्कि 2898 एडी' (Kalki 2898 AD) में अश्वत्थामा के किरदार से तहलका मचाने के बाद बिग बी इसके दूसरे भाग यानी सीक्वल की शूटिंग में व्यस्त हैं, जो साल 2027 में बड़े पर्दे पर रिलीज होगी। छोटे पर्दे पर केबीसी के नए अवतार और बड़े पर्दे पर उनके किरदारों को लेकर दर्शकों में जबरदस्त क्रेज बना हुआ है।
अपार आईडी निर्माण में यूपी नंबर-1, स्कूल और उच्च शिक्षा में बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड
UP ranks first in APAAR ID: उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर शिक्षा के डिजिटलीकरण के क्षेत्र में देशभर में अपनी अग्रणी भूमिका साबित की है। डिजिटल इंडिया के तहत अपार (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) आईडी निर्माण में उत्तर प्रदेश ने स्कूल शिक्षा ...
...तो बंद हो गया होता यूपी का चीनी उद्योग : सीएम योगी
CM Yogi Amroha rally: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले विकास, औद्योगिक निवेश व किसानों को गन्ना भुगतान संभव नहीं था। 2007 से 2017 के बीच सरकारों ने 29 चीनी मिलों को बंद किया था और 21 चीनी मिलों को ...
सपनों को मिले पंख, अमरोहा में CM योगी ने बांटी खुशियों की चाबी
CM Yogi Amroha visit: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अमरोहा दौरा जिले के विकास को एक नई रफ्तार देने के साथ-साथ आम जनमानस के जीवन में खुशियों का नया सवेरा लाया। शनिवार को श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, गजरौला में आयोजित विशाल जनसभा में मुख्यमंत्री ने ...
सोनम वांगचुक के शरीर में डिहाइड्रेशन और बढ़ते कीटोन के संकेत, इलाज से किया इनकार
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ने शनिवार दोपहर करीब 3:30 बजे जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर नया मेडिकल बुलेटिन जारी किया। अस्पताल के अनुसार, वांगचुक में डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण), कॉम्पेन्सेटेड एसिडोसिस, सीरम पोटैशियम का स्तर कम होने और यूरिन में कीटोन का स्तर बढ़ने के संकेत मिले हैं। हालांकि उन्होंने इंट्रावेनस (आईवी) फ्लूइड, ओरल रीहाइड्रेशन फ्लूइड और दवाएं लेने से इनकार कर दिया है।
केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश शिशु देखभालकर्ता महिला को निर्धारित मजदूरी दर के अनुसार किया जाए भुगतान
श्री केशव प्रसाद मौर्य जी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि *बदलते मौसम के दृष्टिगत कार्यस्थलों पर बुनियादी सुविधाओं में कोई कोताही न बरती जाए।* सभी कार्यस्थलों पर स्वच्छ एवं पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता अनिवार्य रूप से हो इसके साथ ही, वर्तमान में चल रही भीषण गर्मी तथा आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए श्रमिकों को मौसम के थपेड़ों से बचाने के लिए शेड (छायादार स्थान) एवं अन्य सुरक्षात्मक साधनों की पर्याप्त व्यवस्था कराई जाए, ताकि किसी भी श्रमिक के स्वास्थ्य पर विपरीत असर न पड़े।उन्होंने निर्देश दिया कि *जिन भी कार्यस्थलों पर 5 वर्ष से कम आयु के 5 या उससे अधिक बच्चे होंगे, वहाँ उनकी उचित देखभाल और सुरक्षा के लिए एक समर्पित महिला की नियुक्ति की जाएगी। इस महिला को उनके कार्य के बदले निर्धारित मजदूरी दर के अनुसार ससमय भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।* इससे जहाँ एक ओर कामकाजी माताओं को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर एक अन्य महिला को रोजगार का अवसर भी प्राप्त होगा।उपमुख्यमंत्री जी ने सरकार के मूल मंत्र को दोहराते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार का एक ही सपना, हर मजदूर सुरक्षित हो अपना। उन्होंने कहा कि *आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार में सभी वर्ग के श्रमिको को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रहा है।* विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने और नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए अधिकारियों को धरातल पर उतरकर नियमित निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
'क्या उनके पास कोई और काम नहीं है,' बुरे वक्त में सलमान खान की मदद वाले दावों पर भड़कीं ईवा ग्रोवर
एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की जानी-मानी अभिनेत्री ईवा ग्रोवर (Eva Grover) ने पिछले लंबे समय से इंटरनेट, विकिपीडिया और यूट्यूब पर चल रहे उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि उनके जीवन के सबसे दर्दनाक और हिंसक शादी वाले दौर में बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान ने उनकी बड़ी आर्थिक या व्यक्तिगत मदद की थी। एक हालिया विस्फोटक इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने इन भ्रामक खबरों पर अपनी गहरी नाराजगी और असहमति जताते हुए साफ किया है कि न तो उन्होंने कभी भाईजान से कोई मदद मांगी और न ही सलमान खान ने कभी उनकी निजी जिंदगी में हस्तक्षेप किया। ईवा ने मीडिया के एक वर्ग द्वारा खबरों को बिना किसी पुष्टि के सनसनीखेज बनाने की आदत पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे पूरी तरह बकवास और मनगढ़ंत करार दिया है।हिंसक शादी के दर्दनाक पांच साल: इंटरव्यू में ईवा ने बयां किया अपना सबसे मुश्किल दौरईवा ग्रोवर ने मशहूर टॉक शो होस्ट सिद्धार्थ कनन को दिए एक विशेष साक्षात्कार में अपनी निजी जिंदगी के उन काले पन्नों को साझा किया, जहां वह लगभग पांच वर्षों तक एक बेहद हिंसक और प्रताड़ना से भरी शादी का हिस्सा रही थीं। इस दर्दनाक दौर से बाहर निकलने और तलाक होने के बाद जब वह अपनी छोटी बेटी के पालन-पोषण और काम के लिए संघर्ष कर रही थीं, तब मीडिया में अचानक यह अफवाहें उड़ने लगीं कि सलमान खान ने संकटमोचक बनकर उनकी मदद की। ईवा ने इस सवाल को पूछने के लिए होस्ट का धन्यवाद करते हुए कहा कि कुछ दिनों पहले जब उन्होंने खुद इंटरनेट पर ये दावे देखे, तो वह हैरान रह गईं कि कैसे एक सह-कलाकार के नाम को उनकी पर्सनल लाइफ के साथ जबरन घसीटा जा रहा है।'रेडी' फिल्म के बाद कभी नहीं हुई बात: सलमान खान को बीच में घसीटने पर जताई कड़ी आपत्तिसुपरस्टार सलमान खान के साथ ब्लॉकबस्टर फिल्म 'रेडी' (Ready) में काम कर चुकीं ईवा ग्रोवर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फिल्म की शूटिंग खत्म होने के बाद से आज तक उनकी सलमान खान से कभी कोई बात या मुलाकात नहीं हुई है। ईवा ने तीखे लहजे में सवाल उठाते हुए कहा कि सलमान खान देश के इतने बड़े सुपरस्टार हैं, क्या उनके पास मेरी पर्सनल लाइफ में क्या चल रहा है या हैदर अली खान मेरे साथ क्या कर रहे हैं, यही देखने के अलावा और कोई काम नहीं बचा है? उन्होंने इन फेक न्यूज पर चिंता जताते हुए कहा कि जब सलमान खान ऐसी खबरें पढ़ेंगे तो वह सोचेंगे कि यह कैसी लड़की है जो पब्लिसिटी के लिए जबरन मेरा नाम इस्तेमाल कर रही है, जबकि हकीकत से इसका कोई लेना-देना नहीं है।बिग बॉस ऑफर होने की असली इनसाइड स्टोरी: नदीम भाई और सेट पर मुलाकात का पूरा सचइंटरनेट पर चल रहे एक और बड़े दावे, जिसमें कहा गया था कि सलमान खान ने खुद फोन करके ईवा ग्रोवर को रियलिटी शो 'बिग बॉस' (Bigg Boss) ऑफर किया था, उसका भी एक्ट्रेस ने पूरी तरह पर्दाफाश कर दिया है। असली घटना का जिक्र करते हुए ईवा ने बताया कि 'रेडी' फिल्म की शूटिंग के दौरान वह सलमान खान के एक दूसरे सेट पर गई थीं, जहां उनकी मुलाकात सलमान का सारा कामकाज देखने वाले मैनेजर नदीम से हुई थी। उस वक्त ईवा को काम की सख्त जरूरत थी, जिस पर नदीम ने उन्हें सुझाव दिया था कि इन दिनों बिग बॉस की कास्टिंग चल रही है और आपको इसके लिए प्रयास करना चाहिए, क्योंकि सलमान खान काफी मददगार स्वभाव के हैं। ईवा के मुताबिक, बस इतनी सी औपचारिक बातचीत के अलावा मीडिया ने पूरी कहानी को बढ़ा-चढ़ाकर एक झूठा प्रोपेगेंडा बना दिया, जिसमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है।
तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार और हाल ही में सक्रिय राजनीति में कदम रखने वाले थलपति विजय के अभिनय करियर की अंतिम और बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जन नायकन' (Jana Nayakan) को लेकर फिल्म इंडस्ट्री और दर्शकों के बीच उत्सुकता चरम पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल होने से पहले विजय की इस विदाई फिल्म को लेकर केवीएन प्रोडक्शंस (KVN Productions) के प्रमुख निर्माता के. वेंकट नारायण ने एक बेहद सनसनीखेज और बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले फिल्म के संवेदनशील दृश्यों के इंटरनेट पर अवैध रूप से लीक होने और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के साथ चले लंबे कानूनी विवाद के बाद, क्रिएटिव टीम ने फिल्म में इतने व्यापक बदलाव किए हैं कि अब दर्शक सिनेमाघरों में पूरी तरह से एक फ्रेश और नई फिल्म का अनुभव करेंगे। एच. विनोथ के निर्देशन में बनी यह हाई-वोल्टेज पॉलिटिकल एक्शन थ्रिलर आगामी २३ जुलाई को दुनिया भर के सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है।ऑनलाइन लीक और सेंसर विवाद के बाद भारी फेरबदल: री-शूटिंग, नए गाने और बदले हुए सीन्स के साथ आएगी मूवीएनडीटीवी को दिए एक विशेष साक्षात्कार में जब प्रोड्यूसर वेंकट नारायण से फिल्म में थलपति विजय के राजनीतिक दल 'तमिझागा वेत्री कड़गम' (TVK) और बाबासाहेब अंबेडकर के संदर्भों को हटाने व विजय का नाम छोटा करने को लेकर तीखे सवाल पूछे गए, तो उन्होंने काफी सतर्कता से जवाब दिया। निर्माता ने कहा कि वे इस समय फिल्म की रणनीतिक सुरक्षा के कारण सभी तकनीकी बातें उजागर नहीं कर सकते, लेकिन यह पूरी तरह सच है कि लीक कांड के बाद फिल्म के मूल ढांचे में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं और अनेक नए सीन्स जोड़े गए हैं। उन्होंने प्रशंसकों को आश्वस्त किया कि सिनेमाघरों में जो वर्जन दिखाया जाएगा, वह लीक हुए कंटेंट से बिल्कुल अलग होगा, जिसमें कई नए गानों को शामिल किया गया है और कुछ गानों को पूरी तरह से री-एडिट और री-शूट किया गया है, ताकि दर्शकों को कोई स्पॉइलर न मिले और उनका उत्साह बना रहे।सीबीएफसी के कट्स और 'ए' सर्टिफिकेट: कोर्ट की जद्दोजहद के बाद मिली हरी झंडी'जन नायकन' को इस साल के शुरुआत में जनवरी के महीने में ही पोंगल के बड़े मौके पर रिलीज किया जाना था, लेकिन ऐन वक्त पर सेंसर बोर्ड (CBFC) ने फिल्म के कड़े राजनीतिक संवादों और सामाजिक मुद्दों पर गहरी आपत्ति जताते हुए सर्टिफिकेट रोकने का फैसला किया था। यह मामला इतना पेचीदा हो गया था कि मेकर्स को राहत के लिए माननीय अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा था, जहां लंबी कानूनी जद्दोजहद के बाद सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाए गए महत्वपूर्ण कट्स, विशेष रूप से राजनीतिक और सामाजिक प्रतीकों के रेफरेंस को संशोधित करने के बाद फिल्म को 'ए' (Adults Only) सर्टिफिकेट के साथ रिलीज की अंतिम मंजूरी दी गई। इन तमाम चुनौतियों और पाइरेसी करने वाले अपराधियों की गिरफ्तारियों के बाद अब फिल्म का नया रूप थिएटर्स में धमाल मचाने को तैयार है।स्टार कास्ट और दमदार कहानी: अनिल रविपुडी की 'भगवंत केसरी' का तमिल अडैप्टेशनराजनीतिक गलियारों और सिनेमाई हलकों में हलचल मचाने वाली यह फिल्म दरअसल प्रसिद्ध तेलुगु फिल्म निर्माता अनिल रविपुडी की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'भगवंत केसरी' का आधिकारिक तमिल रूपांतरण (Adaptation) है। थलपति विजय की चिरपरिचित शैली के अनुरूप यह फिल्म भी एक बेहद मजबूत और संवेदनशील सामाजिक मुद्दे के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो हर आयु वर्ग के दर्शकों को गहराई से जोड़ेगी। फिल्म में थलपति विजय के साथ मुख्य भूमिकाओं में ममिता बैजू, पूजा हेगड़े और खतरनाक विलेन के रूप में बॉलीवुड स्टार बॉबी देओल नजर आने वाले हैं। मुख्यमंत्री बनने से ठीक पहले विजय को आखिरी बार बड़े पर्दे पर एक्शन अवतार में देखने के लिए एडवांस बुकिंग में केवल ६० मिनट के भीतर हजारों टिकटें बिक चुकी हैं, जो बॉक्स ऑफिस पर एक नए इतिहास की ओर इशारा कर रहा है।
दक्षिण एशिया के सबसे अशांत और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र बलूचिस्तान से आ रही स्वतंत्रता की घोषणा के दावों ने अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति और राजनयिक गलियारों में एक अभूतपूर्व भूचाल ला दिया है। यद्यपि अभी तक वैश्विक मंच पर किसी भी संप्रभु देश ने बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में आधिकारिक मान्यता नहीं दी है, परंतु इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने चीन और पाकिस्तान की संयुक्त रीढ़ माने जाने वाले 'चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे' (CPEC) के अस्तित्व पर सबसे बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। करीब ६५ अरब डॉलर (लगभग ५.४ लाख करोड़ रुपये) की भारी-भरकम लागत से बन रहा सीपेक प्रोजेक्ट चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) का सबसे महत्वपूर्ण मुकुट माना जाता है, जो अब बलूचिस्तान की बगावत के चलते पूरी तरह खटाई में पड़ता नजर आ रहा है।ग्वादर बंदरगाह पर संप्रभुता का कानूनी पेंच: अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत फंस सकता है चीन का अरबों का निवेशइस पूरे भू-राजनीतिक विवाद का मुख्य केंद्र बिंदु रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील ग्वादर बंदरगाह (Gwadar Port) है, जो सीधे अरब सागर के मुहाने पर स्थित है। वर्तमान व्यवस्था के तहत इस गहरे पानी के बंदरगाह का संपूर्ण संचालन बीजिंग की सरकारी कंपनी 'चाइना ओवरसीज पोर्ट्स होल्डिंग कंपनी' द्वारा पाकिस्तान सरकार के साथ हुए एक द्विपक्षीय समझौते के तहत किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक संधि के तहत चीन को केवल व्यावसायिक संचालन और टोल वसूलने का अधिकार प्राप्त है, जबकि बंदरगाह की वास्तविक संप्रभुता (Sovereignty) कानूनी रूप से इस्लामाबाद के पास सुरक्षित है। अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यदि बलूचिस्तान एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित होता है, तो ग्वादर बंदरगाह स्वतः ही बलूचिस्तान की संप्रभु सीमा का हिस्सा बन जाएगा, जिससे पूर्व में पाकिस्तान के साथ किए गए चीन के सभी समझौते तकनीकी रूप से अवैध या शून्य घोषित हो सकते हैं।ड्रैगन पर चौतरफा मार: चीनी इंजीनियरों की सुरक्षा, नए वीजा नियम और बीमा लागत में बेतहाशा वृद्धि की आशंकाअंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक, यदि बलूचिस्तान में कोई नई संप्रभु सरकार का गठन होता है, तो उसे यह पूर्ण विधिक अधिकार होगा कि वह चीन के साथ पुराने सीपेक समझौतों को जारी रखे, उनमें अपनी शर्तों पर संशोधन करे, अथवा उन्हें पूरी तरह से निरस्त कर दे। ऐसी विकट स्थिति में चीनी निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालतों (International Arbitration) का दरवाजा खटखटाना पड़ सकता है, जो एक बेहद लंबी और अनिश्चित प्रक्रिया है। इसके अतिरिक्त, ३,००० किलोमीटर लंबे इस आर्थिक गलियारे में काम कर रहे हजारों चीनी इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों के वीजा नियम, स्थानीय श्रम कानून और सबसे महत्वपूर्ण उनकी सुरक्षा (Security Core) की पूरी जिम्मेदारी नए सिरे से तय करनी होगी। बलूच लिबरेशन आर्मी जैसी अलगाववादी ताकतों की सक्रियता बढ़ने से परियोजनाओं की बीमा लागत (Insurance Cost) और बुनियादी ढांचा सुरक्षा खर्च कई गुना बढ़ जाएगा, जिससे चीनी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ना तय है।इस्लामाबाद की लूट के खिलाफ बलूच विद्रोह: स्थानीय संसाधनों के दोहन और रोजगार से वंचित रखने का गंभीर आरोपपाकिस्तान के लिए ग्वादर बंदरगाह और बलूचिस्तान का विशाल भूभाग उसकी सबसे बड़ी रणनीतिक और आर्थिक थाती माना जाता है, लेकिन धरातल पर बलूचिस्तान के स्थानीय नागरिक लंबे समय से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। 'ज्वाइंट बलूच राइट्स कमिटी' और अन्य क्षेत्रीय संगठनों का स्पष्ट आरोप है कि बलूचिस्तान के सोने, तांबे और प्राकृतिक गैस जैसे असीमित प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन करके इसका पूरा वित्तीय लाभ केवल इस्लामाबाद के हुक्मरानों और विदेशी चीनी निवेशकों की जेबों में जा रहा है। बलूच अवाम आज भी बुनियादी सुविधाओं जैसे साफ पीने के पानी, स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा और सम्मानजनक रोजगार के अवसरों से पूरी तरह महरूम है, जिसने अंततः इस क्षेत्र के लोगों को पाकिस्तान से पूरी तरह नाता तोड़कर अपनी आजादी की हुंकार भरने के लिए विवश कर दिया है।
राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा हटाए जाने के बाद शुरू हुआ घटनाक्रम अब एक बेहद हिंसक और विवादित मोड़ ले चुका है। वांगचुक के समर्थन में और उनके स्थान पर भूख हड़ताल पर बैठे एक्टिविस्ट अभिजीत दीपके पर एक महिला ने अचानक मंच पर चढ़कर सरेआम नीली स्याही फेंक दी। इस हाई-प्रोफाइल घटना के तुरंत बाद हमलावर महिला की पहचान बरखा त्रेहन के रूप में हुई है। इस सनसनीखेज घटनाक्रम ने जंतर-मंतर पर मौजूद सुरक्षा व्यवस्था और विभिन्न राजनीतिक गुटों के बीच जारी भारी तनाव को एक बार फिर जगजाहिर कर दिया है, जिसके तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी महिला को हिरासत में ले लिया।पुरुष आयोग की संस्थापक बरखा त्रेहन कौन हैं: जानें उनका सामाजिक और राजनीतिक बैकग्राउंडअभिजीत दीपके पर हुए इस हमले के तुरंत बाद फैक्ट-चेकर्स और सोशल मीडिया पर बरखा त्रेहन के इतिहास को लेकर जानकारियां तेजी से वायरल होने लगीं। बरखा त्रेहन खुद को एक 'मेन्स राइट्स एक्टिविस्ट' (पुरुष अधिकार कार्यकर्ता) और 'पुरुष आयोग' नामक एक गैर-सरकारी संस्था की संस्थापक और अध्यक्ष बताती हैं। पेशेवर नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह खुद को एक उद्यमी, समतावादी (इगैलिटेरियन), और जेंडर-न्यूट्रल समाज की पैरवी करने वाली संवैधानिक कार्यकर्ता के रूप में प्रस्तुत करती हैं। वह पिछले कई वर्षों से विभिन्न मंचों पर पुरुषों के कानूनी अधिकारों और उनके पक्ष में पुरजोर तरीके से अपनी आवाज मुखर करती आई हैं।रेपिस्ट कुलदीप सिंह सेंगर का कर चुकी हैं खुला समर्थन: उन्नाव मामले में आईं थीं चर्चा मेंबरखा त्रेहन का विवादों से नाता नया नहीं है; वह पिछले साल उन्नाव सामूहिक बलात्कार मामले के मुख्य दोषी और पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का खुलेआम समर्थन करने के कारण भारी विवादों और चर्चाओं में घिरी थीं। उस दौरान जब दिल्ली की एक अदालत ने सेंगर की उम्रकैद की सजा को अस्थाई रूप से निलंबित करने की अर्जी पर विचार किया था, तब त्रेहन ने जंतर-मंतर पर 'आई सपोर्ट कुलदीप सेंगर' लिखे हुए तख्तों के साथ प्रदर्शन किया था। उन्होंने दलील दी थी कि बलात्कार जैसे संवेदनशील मामलों पर राजनीति बंद होनी चाहिए और अदालतों के फैसलों का हर हाल में सम्मान किया जाना चाहिए, जिसके चलते महिला संगठनों ने उनकी तीखी आलोचना की थी।स्याही कांड के बाद मारपीट का आरोप और हिरासत: जंतर-मंतर पर लगे जय श्रीराम और जय भीम के नारेशनिवार को हुए इस ताजा घटनाक्रम के वीडियो फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि बरखा त्रेहन अचानक उस मंच की ओर बढ़ती हैं जहां अभिजीत दीपके अनशन पर बैठे थे और उन पर स्याही फेंक देती हैं। स्याही फेंकने के तुरंत बाद वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों और त्रेहन के बीच भारी धक्का-मुक्की शुरू हो गई। जब दिल्ली पुलिस के जवान त्रेहन को हिरासत में लेकर गाड़ी की तरफ ले जा रहे थे, तब उन्होंने हाथ जोड़कर रोते हुए आरोप लगाया कि उनके साथ वहां मौजूद लोगों ने मारपीट की है। इस पूरे हंगामे के दौरान जहां बरखा त्रेहन 'जय श्रीराम' के नारे लगाती दिखीं, वहीं दूसरी ओर नीली स्याही से सराबोर एक्टिविस्ट अभिजीत दीपके ने नीले रंग को अपना पसंदीदा बताते हुए 'जय भीम' के नारे लगाकर अपना अनशन जारी रखने का संकल्प दोहराया।
जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय राजनीति में इस समय एक बहुत बड़ा वैचारिक और रणनीतिक मोड़ आ गया है। केंद्र शासित प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) द्वारा नई दिल्ली में आयोजित किए जाने वाले 'दिल्ली चलो' आंदोलन को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने एक बड़ा झटका दिया है। शनिवार को आधिकारिक बयान जारी करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी इस विरोध प्रदर्शन में केवल एक ही सूरत में शामिल होगी, जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इस आंदोलन के मुख्य एजेंडे में जम्मू-कश्मीर के बुनियादी मुद्दों से जुड़ी कुछ अन्य अनिवार्य और सख्त मांगों को भी शामिल करेंगे।केवल राज्य का दर्जा मांगना अवाम से विश्वासघात: महबूबा मुफ्ती ने फारुख अब्दुल्ला को खत लिख रखा अपना स्टैंडपीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला को एक औपचारिक पत्र भेजकर अपनी शर्तों से अवगत करा दिया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बेहद तल्ख लहजे में कहा कि अगर आंदोलन केवल पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित रहता है, तो इससे यह गलत संदेश जाएगा कि हम ५ अगस्त २०१९ को केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले को स्वीकार कर चुके हैं। महबूबा ने जोर देकर कहा कि प्रदेश की अवाम ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को केवल राज्य का दर्जा वापस पाने के लिए भारी बहुमत नहीं दिया है; इसलिए एजेंडे में ऐतिहासिक आर्टिकल ३70 की बहाली, जेलों में बंद स्थानीय राजनीतिक कैदियों की बिना शर्त रिहाई और जमात-ए-इस्लामी जैसे सामाजिक-राजनीतिक संगठनों पर से प्रतिबंध हटाने की मांग को तुरंत जोड़ा जाना चाहिए।लद्दाख की तर्ज पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की वकालत: सामूहिक नेतृत्व से ही निकलेगा कश्मीर का समाधानमहबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा बिना किसी पूर्व विमर्श के इस तरह के एकतरफा आंदोलन की घोषणा करने पर गहरी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने सुझाव दिया कि लद्दाख के राजनीतिक नेतृत्व की तरह जम्मू-कश्मीर की सभी छोटी-बड़ी राजनीतिक पार्टियों को आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले एक व्यापक सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) बुलाई जानी चाहिए, जिसमें न केवल राजनीतिक दलों के प्रमुख बल्कि नागरिक समाज (सिविल सोसाइटी) के प्रतिनिधि भी हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि एक ईमानदार और सार्थक राजनीतिक प्रक्रिया तभी शुरू हो सकती है जब तक बुनियादी और अमानवीय परिस्थितियों को हल करने के लिए सभी नेता एक सुर में केंद्र सरकार के सामने अपनी मांगें न रखें।जंतर-मंतर पर २० मार्च को शक्ति प्रदर्शन की तैयारी: मीरवाइज को न्योते पर भड़की भाजपाज्ञात हो कि जम्मू-कश्मीर की सत्ता संभाल रहे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आगामी २० मार्च २०२6 को देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर एक विशाल धरने और प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की है। उमर अब्दुल्ला का आरोप है कि केंद्र सरकार उनके धैर्य की परीक्षा ले रही है और पूर्ण राज्य का दर्जा देने के वादे को लगातार टाल रही है। इस राष्ट्रीय आंदोलन को सफल बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने देश के तमाम विपक्षी नेताओं के साथ-साथ कश्मीर के प्रमुख धार्मिक और अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारुख को भी औपचारिक निमंत्रण भेजा है, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उमर अब्दुल्ला पर अलगाववाद को दोबारा बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया है और इस पूरी कवायद का कड़ा विरोध किया है।
वांगचुक की हालत बेहद नाजुक! सोनम ने अस्पताल में दवा और ड्रिप लेने से किया इनकार
Sonam Wangchuk Health Update: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से अनशन पर बैठे लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। शनिवार तड़के दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने ...
दिल्ली से सीधे ऋषिकेश तक दौड़ेगी रैपिड रेल, 5 घंटे का थकाऊ सफर अब सिर्फ 150 मिनट में होगा पूरा!
दिल्ली-एनसीआर से देवभूमि उत्तराखंड के पहाड़ों और पवित्र धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक बेहद शानदार और युगांतरकारी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को हाई-स्पीड कनेक्टिविटी देने वाली देश की सबसे तेज रीजनल रेल 'नमो भारत' (Namo Bharat) अब सीधे हिमालय की तलहटी तक का सफर तय करने जा रही है। केंद्र सरकार ने दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर को मेरठ के मोदिपुरम स्टेशन से आगे बढ़ाते हुए विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्रों हरिद्वार और ऋषिकेश तक ले जाने के ऐतिहासिक प्रस्ताव को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यह लगभग १५० किलोमीटर लंबा नया एक्सटेंशन कॉरिडोर देश के सबसे बड़े पर्यटन हब को दिल्ली से जोड़कर सफर के समय को आधा कर देगा।उत्तराखंड के प्रयासों को मिली हरी झंडी: 'गंगा ग्रोथ कॉरिडोर' के लिए ग्राउंड वर्क और डीपीआर की तैयारी शुरूयह महापरियोजना उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर के समक्ष लगातार की गई मजबूत पैरवी का परिणाम है। केंद्र सरकार से औपचारिक हरी झंडी मिलने के बाद अब उत्तराखंड सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) संयुक्त रूप से इस ड्रीम प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने में जुट गए हैं। इस पूरे रूट का व्यापक हवाई और जमीनी सर्वे करने के साथ-साथ एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है, जिसमें स्टेशनों की संख्या, आवश्यक भूमि अधिग्रहण और जटिल इंजीनियरिंग रूट मैप को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उत्तराखंड शासन ने इस मेगा प्रोजेक्ट के त्वरित क्रियान्वयन के लिए अतिरिक्त सचिव रीना जोशी को विशेष नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया है।मेरठ से लक्ष्मण झूला तक का रूट मैप: जानिए किन-किन बड़े शहरों से होकर गुजरेगी नमो भारतयह अत्याधुनिक सेमी-हाई-स्पीड रेल ट्रैक वर्तमान में संचालित हो रहे दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के अंतिम छोर यानी मोदिपुरम (मेरठ) से आगे विस्तार पकड़ेगा। उत्तर प्रदेश के हिस्से में यह कॉरिडोर मोदिपुरम से शुरू होकर दौराला, खतौली, मुजफ्फरनगर औद्योगिक क्षेत्र और उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड की भौगोलिक सीमा पर स्थित पुरकाजी कस्बे से होकर गुजरेगा। इसके बाद सीमा पार करते हुए यह ट्रेन शिक्षा के बड़े केंद्र रुड़की (IIT रुड़की) और हरिद्वार में पवित्र हर की पौड़ी के करीब से गुजरती हुई सीधे ऋषिकेश में प्रतिष्ठित लक्ष्मण झूला के समीप नवनिर्मित टर्मिनल स्टेशन पर जाकर समाप्त होगी। इस विशाल नेटवर्क का सबसे अनूठा लाभ यह होगा कि हरिद्वार और ऋषिकेश के यात्री बिना किसी रुकावट के गाजियाबाद, आनंद विहार और सराय काले खान पहुंच सकेंगे, जिसे भविष्य में दिल्ली-पानीपत और जेवर एयरपोर्ट रैपिड रेल रूट से भी इंटरचेन्ज के जरिए जोड़ा जाएगा।भारी ट्रैफिक जाम से मिलेगी बड़ी राहत: १६० किमी की रफ्तार से वीकेंड टूरिज्म को मिलेगा जबरदस्त बूस्टवर्तमान समय में दिल्ली से ऋषिकेश या हरिद्वार जाने वाले मुसाफिरों को राष्ट्रीय राजमार्ग-५८ (NH-58) पर मिलने वाले भीषण ट्रैफिक जाम और जटिल मोड़ों से जूझना पड़ता है, जिससे सड़क मार्ग से यात्रा तय करने में औसतन ५ से ६ घंटे का लंबा समय बर्बाद होता है। चूंकि नमो भारत ट्रेनें १६० किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड से पटरियों पर दौड़ने की क्षमता रखती हैं, इसलिए इस डेडीकेटेड ट्रैक के चालू होने के बाद दिल्ली से ऋषिकेश की कुल दूरी महज ढाई से तीन घंटे (१५० मिनट) में आसानी से नापी जा सकेगी। इस क्रांतिकारी परिवहन प्रणाली के विकसित होने से दिल्ली-एनसीआर के कामकाजी लोग और युवा वीकेंड पर आसानी से एडवेंचर स्पोर्ट्स और आध्यात्मिक शांति के लिए ऋषिकेश आ-जा सकेंगे और सुबह जाकर शाम तक वापस अपने घर लौट सकेंगे।निवेश और फंडिंग का महायोजना: वैश्विक बैंकों की मदद से आकार लेगी कई हजार करोड़ की यह परियोजनायद्यपि सरकार ने विस्तृत सर्वे और डीपीआर पूरा होने से पहले इस बड़े प्रोजेक्ट की सटीक आधिकारिक लागत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन बुनियादी ढांचे के विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह एक बेहद विशाल पूंजी निवेश वाला प्रोजेक्ट होगा। संदर्भ के लिए, ८२.१५ किलोमीटर लंबे मौजूदा दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के निर्माण में करीब ₹३०,२७4 करोड़ का बड़ा खर्च आया था, और चूंकि यह नया ऋषिकेश एक्सटेंशन कॉरिडोर उससे लगभग दोगुना लंबा है, इसलिए इसमें भारी बजटीय आवंटन की आवश्यकता होगी। इस वित्तीय आवश्यकता को पूरा करने के लिए केंद्र और दोनों राज्य सरकारों के अंशदान के साथ-साथ एशियाई विकास बैंक (ADB) और एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से बड़े ऋण समझौते किए जा सकते हैं, जबकि उत्तराखंड सरकार ने कुंभ क्षेत्र के बिजली बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ₹७५0 करोड़ की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता मांगी है।केवल तीर्थयात्रा नहीं बल्कि व्यापारिक क्रांति: रियल एस्टेट, वेयरहाउसिंग और महाकुंभ २०२७ के लिए गेम चेंजरआर्थिक जगत के विश्लेषकों और लोहिया वर्ल्डस्पेस के प्रबंध निदेशक पीयूष लोहिया का स्पष्ट मानना है कि इस कॉरिडोर के आने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की पूरी व्यावसायिक तस्वीर बदल जाएगी। इस कॉरिडोर के चालू होने से मुजफ्फरनगर के वेयरहाउसिंग सेक्टर और रुड़की के छात्र-आवास (हॉस्टल्स) व रियल एस्टेट मार्केट में जबरदस्त तेजी देखी जाएगी, साथ ही मुरादाबाद के पीतल उद्योग के निर्यातकों को भी हाईवे पर जाम कम होने से माल को दिल्ली भेजने में बड़ी लॉजिस्टिक्स राहत मिलेगी। दिल्ली-एनसीआर के बड़े निवेशकों द्वारा हरिद्वार और ऋषिकेश में हॉलिडे होम्स, लग्जरी विला और सर्विस अपार्टमेंट्स में भारी निवेश करने की उम्मीद है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि साल २०२७ में आयोजित होने वाले भव्य महाकुंभ और वार्षिक चारधाम यात्रा के दौरान जब उत्तराखंड के मार्ग वाहनों के अत्यधिक दबाव से हांफने लगते हैं, तब यह हाई-स्पीड रैपिड रेल प्रणाली राज्य के संपूर्ण ट्रैफिक मैनेजमेंट और पर्यटन अर्थव्यवस्था के लिए एक अचूक सुरक्षा कवच साबित होगी।
सोनम वांगचुक के अनशन पर पहली बार बोले राहुल गांधी, आधी रात के पुलिस एक्शन पर मोदी सरकार को घेरा
लद्दाख के पर्यावरण और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा जबरन हटाए जाने के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम पर पहली बार अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। शनिवार को केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा मोदी सरकार के मूल सिद्धांत पूरी तरह से असत्य और हिंसा पर टिके हुए हैं। उन्होंने जंतर-मंतर से वांगचुक को हटाए जाने की पुलिसिया कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर करारी चोट बताते हुए स्पष्ट किया कि एक अहिंसक और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को बलपूर्वक दबाना पूरी तरह से अलोकतांत्रिक और निंदनीय है।दिल्ली पुलिस का सीक्रेट ऑपरेशन: जैमर, सादे कपड़े और सफेद चादरों के घेरे में ऐसे हटाए गए वांगचुकसोनम वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने के बाद शनिवार तड़के दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर एक बेहद सुनियोजित और विशेष रणनीति के तहत ऑपरेशन को अंजाम दिया। दिल्ली उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों और डॉक्टरों की आपातकालीन सलाह के बाद शुक्रवार रात करीब १:३० बजे पुलिस मुख्यालय से वरिष्ठ अधिकारियों को वांगचुक की मेडिकल जांच और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के सख्त निर्देश मिले। इसके तुरंत बाद नई दिल्ली जिले के आला अधिकारी मंदिर मार्ग थाने में एकत्र हुए और बिना किसी टकराव के वांगचुक को एक मिनट से भी कम समय में वहां से निकालने का विशेष अभ्यास किया गया। सुबह करीब ५ बजे सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों ने पूरे मंच को बड़ी-बड़ी सफेद चादरों से ढक दिया और विरोध प्रदर्शनकारियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को रोकने के लिए इलाके में मोबाइल नेटवर्क जैमर तक लगा दिए गए, जिसके बाद वांगचुक को तुरंत अस्पताल ले जाया गया।शिक्षा व्यवस्था पर राहुल गांधी का बड़ा हमला: पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्याओं को बताया राष्ट्रीय संकटसोनम वांगचुक के मुद्दे के साथ-साथ राहुल गांधी ने देश के छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर भी मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि लगातार होते प्रश्नपत्र लीक (पेपर लीक), शिक्षा की आसमान छूती लागत और इसके कारण डिप्रेशन में आकर छात्रों द्वारा की जा रही आत्महत्याएं भारत के भविष्य से जुड़े सबसे गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर सरकार को राजनीति से ऊपर उठकर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के लिए किया जाने वाला कोई भी बल प्रयोग देश के युवाओं को उनके हकों की लड़ाई लड़ने से नहीं रोक सकता क्योंकि छात्रों की निर्भीक आवाज ही जीवंत लोकतंत्र की असली पहचान है।देहरादून रैली का भावुक वीडियो साझा: नीट परीक्षा और रिया की आत्महत्या पर टूटे पिता का दर्द बयां कियाअपने बयानों को आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी ने देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को बिल्कुल नए सिरे से तैयार करने की पुरजोर वकालत की ताकि बच्चों के लिए तनावमुक्त व सुरक्षित माहौल का निर्माण हो सके। उन्होंने देहरादून में आयोजित 'छात्रों की गूंज' रैली का एक बेहद भावुक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने मंच पर रिया कुमारी के पिता राजेश कुमार को आमंत्रित किया था। ज्ञात हो कि नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में बड़े पैमाने पर लगे पेपर लीक के आरोपों और परीक्षा रद्द होने के बाद मानसिक तनाव के कारण मई में रिया ने आत्महत्या कर ली थी। राहुल ने भावुक होते हुए लिखा कि अपनी बेटी को खोकर राजेश जी इस कदर टूट चुके हैं कि उन्हें देखकर हर आंख नम हो गई; यह सिर्फ एक परिवार का व्यक्तिगत दर्द नहीं है बल्कि देश में पेपर लीक के माफियाओं ने ऐसे कई हंसते-खेलते परिवारों के बच्चों को उनसे हमेशा के लिए छीन लिया है।
वर्ष 2018 में इसरो के दो पूर्व वैज्ञानिकों द्वारा शुरू किया गया एक महत्वाकांक्षी सपना आज भारत के निजी स्पेस सेक्टर की सबसे बड़ी सफलता की कहानी बन चुका है। पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका के नेतृत्व में स्काईरूट एयरोस्पेस ने भारत का पहला सफल निजी ऑर्बिटल लॉन्च कर इतिहास रच दिया है।
रविवार को जगदीशपुर में होगी मोहन कैबिनेट की अहम बैठक, UCC समेेत कई अहम फैसलों पर टिकी नजर
20 जुलाई से शुरु हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र से पहले रविवार को मोहन कैबिनेट की अहम बैठक जगदीशपुर में होगी। कैबिनेट की बैठक में UCC समेत कई अहम मसौदों को मंजूरी दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जगदीशपुर में कैबिनेट की बैठक लेकर कहा कि भोपाल ...
ये हमारी कहानी नहीं हैं, हमारी कहानी कुछ और है, जिसे हमें खोजना है
जैसे-जैसे हम में संविधान के मूल्य और अधिकारों की समझ बढ़ने लगती है, हम अधिक बेहतर इंसान और बेहतर भारतीय नागरिक बनने की तरफ बढ़ने लगते हैं। एक व्यक्ति अगर अपने अधिकार और खासतौर से संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूक होगा तो वो बेहतर इंसान भी होगा। ...
गुजरात ATS ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद बड़ा खुलासा किया है। जांच में जम्मू-कश्मीर में कथित आतंकी प्रशिक्षण, विस्फोट परीक्षण और विदेशी हैंडलर से संपर्क के आरोपों की जांच जारी है।
सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने पर राहुल गांधी का हमला, बोले- शांतिपूर्ण आंदोलन दबाना गलत
सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल भेजे जाने पर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। NEET परीक्षा अनियमितताओं, शिक्षा सुधार और छात्रों के मुद्दों को लेकर विपक्ष ने कार्रवाई पर सवाल उठाए।
पश्चिम बंगाल दौरे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिलीगुड़ी स्थित BSF चौकी का दौरा कर भारत-बांग्लादेश सीमा और ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर की सुरक्षा की समीक्षा की। IB, BSF और NIA अधिकारियों के साथ हुई हाईलेवल बैठक।
दिल्ली पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके आज से भूख हड़ताल पर बैठ गए। जब वे अनशनस्थल पर कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे तभी एक महिला ने उन पर स्याही फेंक दी। इससे वहां अफरातफरी ...
दिल्ली-NCR, यूपी, हरियाणा और राजस्थान में 10 दिन से अच्छी बारिश क्यों नहीं हो रही? जानिए IMD के अनुसार 'ब्रेक इन मॉनसून', अल नीनो और मानसून ट्रफ का पूरा असर तथा कब लौटेगी झमाझम बारिश।
हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज
Liver Disease Symptoms: क्या आपने कभी अपनी हथेलियों के रंग या अपनी आंखों के सफेद हिस्से (स्केलेरा) पर बारीकी से गौर किया है? अक्सर हम हलकी लालिमा या आंखों के पीलेपन को थकान समझकर टाल देते हैं। लेकिन शरीर के ये छोटे-छोटे बदलाव असल में एक बहुत बड़ी ...
भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी एक सैनिक का जज्बा कभी रिटायर नहीं होता। इसका सटीक उदाहरण हैं पूर्व सैनिक प्रवीण पुंडीर, जिन्होंने खुद देश की सीमाओं की रक्षा करने के बाद अब युवाओं को वर्दी पहनाने का बीड़ा उठा लिया है। वे केवल एक मेंटॉर नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण हैं जो भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और पुलिस में भर्ती होकर देश सेवा का सपना संजोए बैठे हैं। प्रवीण पुंडीर की कहानी आज हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो संघर्षों से लड़कर सफलता की इबारत लिखना चाहता है।सेना के अनुशासन से युवाओं में भर रहे हैं जोशप्रवीण पुंडीर का मानना है कि सेना में भर्ती केवल शारीरिक क्षमता का परीक्षण नहीं है, बल्कि यह मानसिक मजबूती और अनुशासन का एक अनूठा संगम है। उन्होंने अपनी सेवा के वर्षों में जो अनुभव प्राप्त किए, उसे वे अब पूरी निष्ठा के साथ आने वाली पीढ़ी को दे रहे हैं। उनके प्रशिक्षण केंद्र में अनुशासन का स्तर सेना जैसा ही होता है, जिससे युवाओं को पहले दिन से ही एक फौजी की जीवनशैली और मानसिकता का अनुभव मिलने लगता है। वे अपने छात्रों को न केवल फिजिकल ट्रेनिंग देते हैं, बल्कि उन्हें देश प्रेम और समर्पण की भावना से भी ओत-प्रोत करते हैं।कैसे तैयार होते हैं देश के भविष्य के रक्षक?प्रवीण पुंडीर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं की सफलता का ग्राफ तेजी से ऊपर बढ़ा है। वे मानते हैं कि अगर सही दिशा, सटीक मार्गदर्शन और अटूट मेहनत मिल जाए, तो किसी भी ग्रामीण या मध्यम वर्गीय परिवार का युवा देश की सबसे बड़ी सेवा का हिस्सा बन सकता है। वे अपने प्रशिक्षण के दौरान शारीरिक फिटनेस के साथ-साथ लिखित परीक्षा और इंटरव्यू की तैयारी पर भी समान रूप से जोर देते हैं। उनके छात्रों का कहना है कि पुंडीर सर की रणनीति और उनकी व्यावहारिक सीख ही उन्हें बाकी प्रतियोगियों से अलग खड़ा करती है।वर्दी के सपने को सच करने का मिशनएक सैनिक जब अपनी वर्दी उतारता है, तो उसके पास ढेर सारी यादें और अनुभव होते हैं, लेकिन प्रवीण पुंडीर ने अपने इन अनुभवों को समाज सेवा में बदलने का रास्ता चुना। आज जब देश को युवा और ऊर्जावान सुरक्षाकर्मियों की जरूरत है, तब पुंडीर जैसे पूर्व सैनिक अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं। उनका यह सफर इस बात को साबित करता है कि वर्दी सेवा का एक माध्यम मात्र है, और उसे पहनने के बाद भी समाज के प्रति जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। युवाओं को सही राह दिखाकर वे असल मायने में 'देश के रक्षक' तैयार कर रहे हैं, जो आने वाले कल में भारत की सुरक्षा की बागडोर संभालेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्यावरण संरक्षण और हरित परिवहन (Green Transportation) की सोच को हरियाणा की धरती पर एक नई दिशा मिली है। जींद में आयोजित एक विशाल रैली के दौरान 466 इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का एक साथ उपयोग किया गया, जो न केवल भारत के बढ़ते ई-मोबिलिटी संकल्प को दर्शाता है, बल्कि हरियाणा के लोगों की पीएम मोदी के विजन के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है। यह आयोजन देश के भविष्य को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।पर्यावरण संरक्षण और ई-मोबिलिटी का अनूठा संगमजींद की इस रैली में इलेक्ट्रिक वाहनों की भारी संख्या में मौजूदगी ने यह संदेश दिया है कि आम जनता अब 'ग्रीन एनर्जी' को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए पीएम मोदी का जोर लगातार इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग पर रहा है। इस रैली में शामिल हुए 466 इलेक्ट्रिक वाहनों ने न केवल रैली में आने वाले लोगों को सुविधा प्रदान की, बल्कि पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन को कम करने का एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश किया। स्थानीय लोगों के बीच भी इन वाहनों को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।हरियाणा में बढ़ रहा है इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रेजहरियाणा सरकार भी केंद्र की इस पहल को धरातल पर उतारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाया जा रहा है, जिससे लोग अब बेझिझक इलेक्ट्रिक वाहनों का चुनाव कर रहे हैं। जींद की रैली में हुए इतने बड़े पैमाने पर ई-वाहनों का उपयोग यह साबित करता है कि प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों का इकोसिस्टम मजबूती से पनप रहा है। यह न केवल किफायती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक अनिवार्य कदम भी है।पीएम मोदी का विजन और भारत का भविष्यप्रधानमंत्री का सपना एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जो 'आत्मनिर्भर' होने के साथ-साथ 'प्रदूषण मुक्त' भी हो। जींद में दिखा यह जनसमर्थन पीएम मोदी के उस विजन की पुष्टि करता है, जिसमें वे देश की ऊर्जा जरूरतों को अक्षय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के माध्यम से पूरा करना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी प्रकार का जनभागीदारी वाला मॉडल देश भर में अपनाया गया, तो भारत बहुत जल्द ही वैश्विक स्तर पर ग्रीन ट्रांसपोर्ट का नेतृत्व करने में सक्षम होगा। रैली में इतनी बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक वाहनों का आना एक राजनीतिक संदेश के साथ-साथ सामाजिक बदलाव की एक बड़ी दस्तक भी है।
RGHS में 'एक मरीज, कई बार भर्ती': फर्जी क्लेम का हुआ बड़ा खुलासा, अब सरकार ने उठाया ये सख्त कदम
राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में एक बड़े घोटाले की परतें खुल गई हैं। हाल ही में सामने आई अनियमितताओं में एक ही मरीज को बार-बार अस्पताल में भर्ती दिखाकर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का भुगतान उठाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और शासन स्तर पर हड़कंप मच गया है। सरकार ने अब उन निजी अस्पतालों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जो मरीजों के नाम पर फर्जी क्लेम उठाकर सरकारी राशि का दुरुपयोग कर रहे थे।क्या है RGHS में करोड़ों के फर्जी क्लेम का खेल?जांच में यह बात सामने आई कि कई निजी अस्पताल RGHS के तहत आने वाले मरीजों की बीमारी को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते थे या फिर एक ही मरीज को एक ही बीमारी के लिए बार-बार भर्ती दिखाया जाता था। इन अस्पतालों का लक्ष्य केवल सरकारी क्लेम की राशि को हड़पना था। इस प्रक्रिया में मरीज को तो इलाज का नाम मात्र लाभ मिलता था, लेकिन कागजों में भारी-भरकम बिल बनाकर सरकार को चूना लगाया जा रहा था। राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों ने जब डेटा का विश्लेषण किया, तो इस संगठित घोटाले का पता चला, जिसमें करोड़ों रुपये की हेराफेरी का अंदेशा जताया जा रहा है।सरकार का बड़ा एक्शन: ऑडिट के बाद अब होगी रिकवरीइस फर्जीवाड़े के खिलाफ सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए एक बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार, अब राज्य भर के उन सभी अस्पतालों की विशेष ऑडिट की जा रही है, जिनके क्लेम संदिग्ध पाए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि दोषी अस्पतालों को न केवल काली सूची (Blacklist) में डाला जाएगा, बल्कि उनसे वसूली (Recovery) भी की जाएगी। इसके अलावा, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए RGHS पोर्टल पर क्लेम की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और डिजिटल वेरिफिकेशन के दायरे में लाया जा रहा है, ताकि कोई भी अस्पताल मरीजों की जान या उनके कार्ड का दुरुपयोग न कर सके।सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स के लिए क्यों जरूरी है यह सख्ती?RGHS का मुख्य उद्देश्य राज्य के कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों को कैशलेस और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपलब्ध कराना है। इस तरह के घोटालों से न केवल सरकारी खजाने को नुकसान हो रहा है, बल्कि उन वास्तविक मरीजों का हक भी मारा जा रहा है जिन्हें समय पर इलाज की जरूरत है। सरकार की इस कार्रवाई का उद्देश्य व्यवस्था में सुधार करना है ताकि ईमानदार अस्पतालों को परेशानी न हो और भ्रष्ट तत्वों पर लगाम लगाई जा सके। प्रशासन ने लाभार्थियों से भी अपील की है कि अगर उन्हें अपने नाम से अस्पताल में फर्जी भर्ती होने का संदेह हो, तो वे इसकी सूचना तुरंत संबंधित पोर्टल पर दें।
अगर आपको भी WhatsApp या किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'घर बैठे लाखों कमाने' या 'गारंटीड रिटर्न' का लालच देने वाले मैसेज मिल रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। राजस्थान पुलिस ने साइबर ठगों के बढ़ते नेटवर्क को देखते हुए एक सख्त एडवाइजरी जारी की है। साइबर अपराधी आजकल निवेश के नाम पर फर्जी ऐप्स और व्हाट्सएप ग्रुप का जाल बिछा रहे हैं, जिसमें फंसकर लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं। पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है और बताया है कि कैसे ये ठग आपकी गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे हैं।ऐसे काम करता है फर्जी निवेश का साइबर जालसाइबर अपराधी सबसे पहले लोगों को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ते हैं, जहाँ वे खुद को एक्सपर्ट बताकर शेयर बाजार, क्रिप्टो या किसी अज्ञात स्कीम में निवेश करने पर भारी मुनाफे का दावा करते हैं। शुरुआत में ये ठग छोटा निवेश करवाकर थोड़ा रिटर्न देते हैं ताकि विश्वास जीत सकें, लेकिन जैसे ही आप बड़ी रकम निवेश करते हैं, ये आपका पैसा लेकर गायब हो जाते हैं। इन गिरोहों द्वारा बनाए गए फर्जी ऐप्स दिखने में बिल्कुल असली जैसे लगते हैं, लेकिन इनका एकमात्र उद्देश्य आपका पैसा हड़पना होता है। पुलिस के अनुसार, किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करना या किसी संदिग्ध ऐप को डाउनलोड करना आपकी वित्तीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हो सकता है।पुलिस की सलाह: इन संकेतों को पहचानें और सुरक्षित रहेंराजस्थान पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी वैध निवेश योजना कभी भी व्हाट्सएप पर इस तरह के अनचाहे मैसेज नहीं भेजती। पुलिस की एडवाइजरी में कहा गया है कि अगर कोई ऐप आपको बहुत कम समय में दोगुना या तिगुना रिटर्न देने का वादा कर रहा है, तो समझ लीजिए कि यह एक स्कैम है। किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी लें और केवल सेबी (SEBI) या आरबीआई (RBI) द्वारा मान्यता प्राप्त प्लेटफार्मों का ही उपयोग करें। अगर आपके साथ ऐसी कोई घटना होती है, तो तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करें। अनजान व्यक्ति के खाते में कभी भी पैसे ट्रांसफर न करें और न ही किसी भी अज्ञात निवेश ग्रुप में शामिल हों।डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा है जरूरीऑनलाइन निवेश का चलन बढ़ने के साथ ही साइबर धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 'लालच' ही ठगों का सबसे बड़ा हथियार है। स्मार्ट निवेश वही है जो पूरी जानकारी और सावधानी के साथ किया जाए। अपनी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी किसी भी अनवेरिफाइड सोर्स के साथ साझा न करें। राजस्थान पुलिस का यह कदम नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की एक कोशिश है, ताकि आम जनता अपनी गाढ़ी कमाई को इन शातिर अपराधियों से बचा सके। याद रखें, सावधानी ही साइबर ठगी से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।
करौली का 400 साल पुराना शिव मंदिर: यहाँ शिवलिंग पर चढ़ाया जल नंदी तक कैसे पहुंचता है? जानिये चमत्कार
राजस्थान के करौली जिले में एक ऐसा प्राचीन शिव मंदिर स्थित है जो अपनी स्थापत्य कला से कहीं अधिक अपने एक रहस्यमयी चमत्कार के लिए श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। करीब 400 साल पुराने इस शिवालय की महिमा ऐसी है कि यहाँ वैज्ञानिक और भक्त दोनों ही हैरान रह जाते हैं। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल अभिषेक के बाद अपने आप ही नंदी महाराज के चरणों तक पहुँच जाता है। यह जल कहाँ जाता है और इसका मार्ग क्या है, यह आज भी एक अनसुलझा रहस्य बना हुआ है।सदियों पुराना इतिहास और भक्तों की अटूट आस्थाकरौली के इस प्राचीन मंदिर का इतिहास चार शताब्दियों पुराना बताया जाता है। स्थानीय निवासियों और बुजुर्गों के अनुसार, यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र है। मंदिर की बनावट को लेकर पुरातत्वविदों का मानना है कि इसे बहुत ही बारीकी और तकनीक के साथ निर्मित किया गया था। मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग पर जब भक्त श्रद्धा से जल चढ़ाते हैं, तो वह जल चमत्कारिक रूप से बाहर निकलने के बजाय सीधे नंदी की प्रतिमा तक पहुँच जाता है। यह दृश्य न केवल लोगों को भावविभोर करता है, बल्कि मंदिर के शिल्पकारों की अद्भुत इंजीनियरिंग क्षमता को भी प्रदर्शित करता है।क्या वाकई यह चमत्कार है या प्राचीन इंजीनियरिंग का कमाल?भक्त इसे महादेव का साक्षात आशीर्वाद और चमत्कार मानते हैं, वहीं जिज्ञासु लोग इसे प्राचीन भारत की जल प्रबंधन प्रणाली (Water Management System) का एक उत्कृष्ट नमूना मानते हैं। सदियों पहले बनाई गई यह व्यवस्था आज के आधुनिक युग में भी चर्चा का विषय बनी हुई है। मंदिर के पुजारियों का कहना है कि जल के इस रहस्यमयी मार्ग को आज तक कोई भी पूरी तरह से नहीं समझ पाया है। यह नंदी की प्रतिमा से जुड़ा एक ऐसा पाइप या गुप्त जल निकासी प्रणाली हो सकती है जिसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि जल शिवलिंग से नंदी के पास तक बिना किसी रुकावट के पहुँचता है।श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्रकरौली में स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि देश भर से लोग इस अनूठे नजारे को अपनी आँखों से देखने के लिए आते हैं। मंदिर का वातावरण अत्यंत शांत और सकारात्मक है, जो आने वाले हर व्यक्ति को आत्मिक शांति का अनुभव कराता है। विशेष अवसरों पर, जैसे कि महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। यदि आप राजस्थान यात्रा पर निकल रहे हैं, तो करौली के इस चमत्कारी शिव मंदिर के दर्शन जरूर करें। यह मंदिर आपको भारतीय संस्कृति के उस गौरवशाली अतीत से जोड़ता है, जहाँ विज्ञान और अध्यात्म एक साथ चलते थे।
पलामू के जंगलों की रौनक भले ही अभी सफारी के बंद होने से थोड़ी थम गई हो, लेकिन प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। बेतला नेशनल पार्क के मुख्य सफारी मार्ग के बंद होने के बाद भी, पलामू के घने जंगलों के बीच एक 'सीक्रेट रूट' पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। सोशल मीडिया पर इस नए रास्ते की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जो पर्यटकों को जंगल के उस अनछुए हिस्से से रूबरू करा रहे हैं, जिसे अब तक केवल स्थानीय लोग ही जानते थे।क्या है पलामू का ये नया 'सीक्रेट रूट' और क्यों हो रहा है चर्चा?बेतला नेशनल पार्क, जो अपनी जैव विविधता और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है, इन दिनों अपने एक गुप्त रास्ते को लेकर चर्चा में है। जानकारों के अनुसार, यह रास्ता पलामू के जंगलों के उन दुर्गम और शांत हिस्सों से होकर गुजरता है, जहाँ पहले पहुँच पाना आम पर्यटकों के लिए मुश्किल था। सफारी बंद होने के बावजूद, प्रकृति की गोद में शांति तलाशने वाले लोग इस रूट के जरिए जंगलों की अद्भुत सुंदरता का लुत्फ उठा रहे हैं। यहाँ के ऊंचे पहाड़, घने साल के वृक्ष और वन्यजीवों की प्राकृतिक हलचल इस सफर को अविस्मरणीय बना देती है।पलामू की लुभावनी खूबसूरती और वन्य जीवन की झलकइस रूट की सबसे बड़ी खासियत यहाँ की शांति और प्राकृतिक दृश्य हैं। यहाँ आप न केवल पलामू की पहाड़ियों की चोटियों का दीदार कर सकते हैं, बल्कि जंगल के उस प्राकृतिक सौंदर्य को भी देख सकते हैं जो सफारी के शोर-शराबे से दूर रहता है। यदि आप किस्मत वाले रहे, तो रास्ते में आपको हिरणों के झुंड या दुर्लभ पक्षियों की चहचहाहट भी सुनाई दे सकती है। यह रूट पलामू के जंगलों के उस रहस्यमय पक्ष को उजागर करता है, जो अब तक पर्यटकों की नजरों से छिपा था। यदि आप प्रकृति के करीब जाकर फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो यह जगह आपके लिए किसी जन्नत से कम नहीं है।यात्रा से पहले जरूरी सावधानियां और सुझावभले ही यह रास्ता रोमांच से भरा हो, लेकिन यह याद रखना आवश्यक है कि यह एक संरक्षित क्षेत्र है। जंगल के इस 'सीक्रेट रूट' पर जाने से पहले स्थानीय वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन जरूर करें। अपनी सुरक्षा का ध्यान रखें और जंगल की शांति को बनाए रखने के लिए किसी भी तरह की गंदगी न फैलाएं। पलामू के इस रहस्यमय रास्ते का लुत्फ उठाने का सबसे अच्छा समय सुबह की पहली किरण के साथ होता है, जब जंगल अपनी पूरी जीवंतता के साथ जागता है।
झारखंड के मौसम में आज अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के कई हिस्सों में आसमान काले बादलों से घिर गया है और हवाओं के साथ भारी बारिश का सिलसिला शुरू हो चुका है। मौसम विभाग (IMD) ने रांची समेत 6 प्रमुख जिलों के लिए 'येलो' और 'ऑरेंज' अलर्ट जारी किया है। भारी बारिश के साथ-साथ आसमान से गिरती बिजली यानी वज्रपात की चेतावनी ने प्रशासन और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल, मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे या खुले मैदानों में न रहें और अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।इन जिलों पर मंडरा रहा है सबसे बड़ा खतरामौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, रांची, रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो, गुमला और खूंटी जिलों में आज झमाझम बारिश होने की प्रबल संभावना है। इन क्षेत्रों में दोपहर के बाद से ही गरज और चमक के साथ बारिश का दौर तेज हो गया है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की सक्रियता और कम दबाव के क्षेत्र के कारण इन जिलों में अगले कुछ घंटों तक रुक-रुक कर भारी बारिश जारी रह सकती है। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है, जिसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।वज्रपात: जान बचाने के लिए बरतें ये सावधानियांभारी बारिश के साथ वज्रपात (Thunderstorm) की चेतावनी ने सबसे ज्यादा डर पैदा किया है। पिछले कुछ वर्षों में झारखंड में बिजली गिरने से हुई घटनाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने गाइडलाइन जारी की है। यदि आप घर से बाहर हैं और अचानक बिजली कड़कने लगे, तो किसी पक्के मकान या सुरक्षित शेल्टर का सहारा लें। खेतों में काम कर रहे किसानों को विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा गया है। धातु की वस्तुओं, बिजली के खंभों और ऊंचे पेड़ों से दूर रहना ही बचाव का एकमात्र तरीका है। अपने स्मार्टफोन पर मौसम के अपडेट्स पर नजर बनाए रखें और घबराएं नहीं।यातायात और जनजीवन पर असररांची शहर और आसपास के इलाकों में लगातार हो रही बारिश का असर यातायात पर भी दिख रहा है। सड़कों पर दृश्यता (Visibility) कम होने के कारण वाहनों की गति धीमी हो गई है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची सड़कों पर जलभराव की वजह से आवागमन बाधित हुआ है। अगर आपको आज कहीं बहुत जरूरी काम से बाहर जाना है, तो पहले मौसम के ताजा हाल को जरूर जांच लें। सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें स्थिति पर नजर रखे हुए हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। सुरक्षित रहें और सतर्क रहें!
25 लाख का इनामी 'IED एक्सपर्ट' अजय महतो गिरफ्तार, पुलिस के हत्थे चढ़ा खूंखार मास्टरमाइंड
झारखंड के गिरिडीह में सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। लंबे समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे 25 लाख रुपये के इनामी नक्सली अजय महतो को गिरफ्तार कर लिया गया है। अजय महतो न केवल प्रतिबंधित नक्सली संगठन का एक सक्रिय सदस्य था, बल्कि वह IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) प्लांट करने और सुरक्षाबलों को निशाना बनाने में भी 'मास्टरमाइंड' माना जाता था। उसकी गिरफ्तारी से नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा का दायरा और मजबूत होने की उम्मीद है। गिरिडीह पुलिस के इस ऑपरेशन को इलाके में नक्सलियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।IED का जाल बिछाने में था माहिरगिरफ्तारी के बाद पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अजय महतो का मुख्य काम सुरक्षाबलों के रास्तों पर IED छिपाकर लगाना था। वह न केवल खुद विस्फोटक तैयार करने में माहिर था, बल्कि वह नए रंगरूटों को भी बम बनाने और प्लांट करने की ट्रेनिंग देता था। कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें सुरक्षाबलों के काफिले को निशाना बनाने के पीछे उसी की रणनीति थी। अजय महतो की गिरफ्तारी से पुलिस को नक्सलियों के कई ठिकानों और उनके आगामी खतरनाक मंसूबों के बारे में अहम सुराग मिलने की उम्मीद है, जिससे आने वाले समय में बड़े सुरक्षा खतरों को टाला जा सकेगा।लंबे समय से थी पुलिस की 'वांटेड' लिस्ट मेंअजय महतो की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने विशेष टीम का गठन किया था, जो कई महीनों से उसके मूवमेंट पर नजर रख रही थी। उस पर झारखंड और आसपास के राज्यों में दर्जनों संगीन मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, लेवी वसूली और पुलिस पर हमला शामिल है। 25 लाख रुपये का इनाम होने के कारण वह पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ था। उसे गिरफ्तार करने के लिए सुरक्षाबलों ने एक सटीक खुफिया सूचना पर काम किया और अंततः उसे घेरकर दबोच लिया। यह गिरफ्तारी स्थानीय लोगों के बीच सुरक्षा और कानून के प्रति एक नया भरोसा कायम करने वाली है।नक्सल विरोधी अभियानों को मिलेगी नई धारअजय महतो जैसे बड़े नक्सली लीडर का पकड़े जाना इस बात का संकेत है कि अब नक्सलियों के लिए छिपना और अपनी गतिविधियों को अंजाम देना मुश्किल होता जा रहा है। गिरिडीह पुलिस अब इस पूछताछ के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि उसके साथ और कौन से बड़े लीडर इस नेटवर्क में शामिल हैं। पुलिस की बढ़ती सक्रियता और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से अब धीरे-धीरे नक्सलवाद का प्रभाव कम होता जा रहा है। स्थानीय प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि इस गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में शांति और विकास की गतिविधियों को और गति मिलेगी, जिससे आम जनता का डर पूरी तरह से खत्म हो सकेगा।
भारतीय क्रिकेट के 'हिटमैन' रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर मची अटकलों पर BCCI सचिव ने भले ही विराम लगाने की कोशिश की हो, लेकिन क्रिकेट के गलियारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। आधिकारिक बयानों के इतर, रोहित शर्मा की हालिया गतिविधियां और उनके खेल के प्रति नजरिए में आए बदलावों ने उनके करोड़ों चाहने वालों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। BCCI की ओर से भले ही सब कुछ सामान्य बताया जा रहा हो, लेकिन ये 3 बड़े संकेत इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि रोहित शर्मा शायद अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के आखिरी पड़ाव पर खड़े हैं। फैंस अब इस बात को लेकर सहमे हुए हैं कि क्या उनका पसंदीदा खिलाड़ी जल्द ही कोई बड़ा फैसला लेने वाला है।1. अहम सीरीज से लगातार ब्रेक और बढ़ती दूरियांरोहित शर्मा का हालिया समय में लगातार बड़े मैचों और महत्वपूर्ण सीरीज से ब्रेक लेना फैंस के लिए एक चिंता का सबब बन गया है। पहले इसे वर्कलोड मैनेजमेंट का नाम दिया जा रहा था, लेकिन अब यह चर्चा जोरों पर है कि क्या यह ब्रेक केवल थकान दूर करने के लिए है या फिर रोहित खुद को धीरे-धीरे खेल से दूर कर रहे हैं? पिछले कुछ महीनों में उनकी टीम से अनुपस्थिति ने इस सवाल को और बड़ा कर दिया है कि क्या 'हिटमैन' अब केवल बड़े टूर्नामेंट्स पर ही फोकस करना चाहते हैं?2. मैदान पर बॉडी लैंग्वेज और बॉडी फेटिग का संकेतहालिया कुछ मैचों में रोहित शर्मा की बॉडी लैंग्वेज में एक अजीब सा ठहराव और कभी-कभी थकान साफ देखी गई है। फील्डिंग के दौरान जिस ऊर्जा की उम्मीद उनसे की जाती है, उसमें एक बदलाव महसूस हो रहा है। मैदान पर उनके हाव-भाव और साथियों के साथ चर्चाओं में जिस तरह की गंभीरता दिखाई देती है, वह अनुभवी खिलाड़ियों के उस दौर की याद दिलाती है जब वे संन्यास की दहलीज पर होते हैं। फैंस की निगाहें उनके हर कदम पर हैं और यह 'शांति' उन्हें अंदर तक डरा रही है।3. भविष्य की योजना और कप्तानी का 'हैंडओवर'तीसरा और सबसे बड़ा इशारा है टीम में युवा खिलाड़ियों को कमान सौंपने की प्रक्रिया का तेज होना। रोहित शर्मा जिस तरह से युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और उन्हें खुलकर खेलने की आजादी दे रहे हैं, वह किसी 'लीजेंड' के विदाई से ठीक पहले का माहौल जैसा है। क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि रोहित शर्मा अब अपनी भूमिका को केवल रन बनाने तक ही सीमित नहीं रख रहे, बल्कि वे आने वाली पीढ़ी को तैयार करने के मिशन पर हैं। जब एक खिलाड़ी खुद से ज्यादा टीम के भविष्य की चिंता करने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि वह अपनी अंतिम पारी की तैयारी कर रहा है। BCCI की लाख सफाई के बाद भी, ये तीन इशारे रोहित शर्मा के फैंस के लिए एक 'अलार्म' से कम नहीं हैं।
बद्रीनाथ धाम विवाद: पांडा पंचायत की सीएम धामी से मांग, पैसे लेकर विशेष दर्शन कराने की भी हो जांच
चमोली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तराखंड के श्री बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे के गबन मामले की जांच के बीच श्री बद्रीश पांडा पंचायत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर जांच का दायरा बढ़ाने की मांग की है। पंचायत ने आरोप लगाया है कि मंदिर में विशेष दर्शन के नाम पर रिश्वत लेने और बिना अनुमति लोगों को मंदिर परिसर में प्रवेश दिलाने के मामलों की भी जांच कराई जानी चाहिए।
NEET UG का धमाकेदार रिजल्ट: किस राज्य के छात्रों ने मचाया धमाल? 1.70 लाख क्वालीफाई करके रचा इतिहास
नीट यूजी (NEET UG) के परिणाम घोषित होते ही देश भर के मेडिकल एस्पिरेंट्स के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है। इस साल की परीक्षा ने न केवल रिकॉर्ड तोड़ प्रतिभा दिखाई है, बल्कि देश के शैक्षणिक मानचित्र पर कुछ राज्यों को 'मेडिकल हब' के रूप में स्थापित कर दिया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस बार कुल 1.70 लाख से अधिक छात्रों ने नीट यूजी की कठिन परीक्षा को क्वालीफाई कर एक नया बेंचमार्क सेट किया है। हर साल की तरह इस बार भी कुछ राज्यों का दबदबा बरकरार रहा है, जहाँ के छात्रों ने अपनी मेहनत और रणनीति के दम पर टॉपर्स की सूची में अपनी जगह पक्की की है।इन राज्यों ने मारी बाजी, टॉपर्स की लिस्ट में रहा दबदबारिजल्ट का विश्लेषण करें तो उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान ने इस साल भी सबसे अधिक सफल उम्मीदवार दिए हैं। उत्तर प्रदेश से सबसे बड़ी संख्या में छात्र क्वालीफाई हुए हैं, जो राज्य में बढ़ती कोचिंग संस्कृति और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं का प्रमाण है। वहीं, शिक्षा की राजधानी कोटा के कारण राजस्थान से भी सफल होने वाले छात्रों का प्रतिशत देश में सबसे ऊपर रहा है। महाराष्ट्र और दिल्ली-एनसीआर ने भी इस बार शानदार प्रदर्शन किया है, जहां से हजारों छात्रों ने बेहतरीन स्कोर के साथ मेडिकल कॉलेज में अपनी सीट सुरक्षित करने की राह आसान कर ली है।क्यों बढ़ रहा है सफल छात्रों का आंकड़ा?विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा और बेहतर स्टडी मैटेरियल की सुलभता ने सफलता का आंकड़ा बढ़ाया है। ऑनलाइन एजुकेशन, बेहतर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और एआई (AI) आधारित लर्निंग टूल्स ने ग्रामीण इलाकों के छात्रों के लिए भी टॉपर्स के साथ कदमताल करना संभव बना दिया है। लखनऊ, पटना और इंदौर जैसे टियर-2 शहरों से भी इस बार बड़ी संख्या में छात्रों ने 650 से ऊपर स्कोर किया है, जो इस बात का संकेत है कि अब नीट की तैयारी किसी एक शहर या बड़े महानगर तक सीमित नहीं रह गई है। 1.70 लाख क्वालीफायर्स का यह आंकड़ा यह भी बताता है कि मेडिकल शिक्षा की चाह रखने वाले युवाओं में जोश और जुनून चरम पर है।अगले कदम की तैयारी: काउंसलिंग और एडमिशन का दौर शुरूक्वालीफाई करने वाले इन 1.70 लाख छात्रों के लिए अब काउंसलिंग का अहम पड़ाव शुरू होने जा रहा है। अब छात्रों को अपने अंकों के आधार पर सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सीट के लिए आवेदन करना होगा। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि इस बार कट-ऑफ में मामूली बदलाव हो सकता है, इसलिए छात्रों को अपनी पसंद के कॉलेज के चयन में सावधानी बरतनी चाहिए। ऑल इंडिया कोटा (AIQ) और स्टेट कोटा के माध्यम से होने वाली यह काउंसलिंग प्रक्रिया आने वाले हफ्तों में पूरी की जाएगी। सफल छात्रों को अब अपने दस्तावेजों को तैयार रखने और काउंसलिंग पोर्टल पर लगातार नजर रखने की जरूरत है ताकि वे अपनी पसंदीदा मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पा सकें।
10 लाख में बिका पेपर, फिर भी मिली री-एग्जाम की छूट! नीट धांधली के बीच NTA ने अचानक क्यों रोका रिजल्ट
नीट (NEET) परीक्षा की शुचिता पर इस समय पूरे देश में सवाल उठ रहे हैं। एक ओर जहां पेपर लीक की खबरें और आर्थिक लेनदेन के खुलासे ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा तोड़ दिया है, वहीं दूसरी ओर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के फैसलों ने इस मामले को और अधिक रहस्यमयी बना दिया है। ताजा जानकारी के अनुसार, नीट का पेपर 10 लाख रुपये में बेचने वाले एक आरोपी को री-एग्जाम (पुनः परीक्षा) में बैठने की कानूनी अनुमति मिल गई, लेकिन जैसे ही यह मामला सामने आया, NTA ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संबंधित छात्रों का रिजल्ट ही होल्ड पर डाल दिया। आखिर इसके पीछे क्या खेल है, यह अब बड़ा सवाल बन गया है।10 लाख की डील और सवालों के घेरे में NTA की निष्पक्षताजांच एजेंसियों के मुताबिक, नीट पेपर लीक में शामिल गिरोहों ने 10 लाख रुपये प्रति छात्र की दर से पेपर का सौदा किया था। पुलिस ने जब इस रैकेट का भंडाफोड़ किया, तो कई ऐसे अभ्यर्थी सामने आए जिन्हें पहले पेपर मिल चुका था। हैरान करने वाली बात यह है कि इस धांधली में शामिल कुछ उम्मीदवारों को कोर्ट या संबंधित अथॉरिटी से दोबारा परीक्षा देने का मौका मिल गया। इस छूट ने न केवल आम छात्रों में असंतोष पैदा किया, बल्कि नीट की पूरी प्रक्रिया पर ही एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जो छात्र धांधली में सीधे तौर पर लिप्त थे, उन्हें दोबारा परीक्षा का मौका क्यों दिया जा रहा है?रिजल्ट क्यों रोका गया? NTA का स्टैंड और छात्रों का गुस्साजब विवाद बढ़ा और सोशल मीडिया पर NTA के खिलाफ छात्रों ने मोर्चा खोल दिया, तो नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने मामले को दबाने के बजाय संबंधित छात्रों के रिजल्ट पर रोक लगा दी। विशेषज्ञों का मानना है कि NTA यह सुनिश्चित करना चाहता है कि दागदार उम्मीदवारों को मेरिट लिस्ट में जगह न मिले। हालांकि, देरी से लिए गए इस फैसले ने लाखों उन छात्रों के भविष्य को अधर में लटका दिया है जिन्होंने पूरी ईमानदारी से परीक्षा दी थी। लखनऊ, पटना, कोटा और दिल्ली जैसे प्रमुख शिक्षण केंद्रों पर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि नीट का रिजल्ट रद्द कर फिर से पारदर्शिता के साथ परीक्षा आयोजित की जाए।भविष्य पर मंडराता खतरा और न्याय की मांगइस पूरी घटनाक्रम ने शिक्षा व्यवस्था में तकनीकी और सुरक्षा खामियों की पोल खोल दी है। अगर धांधली के आरोपी दोबारा परीक्षा देकर मुख्य धारा में शामिल होते हैं, तो यह उन हजारों होनहारों के साथ अन्याय होगा जिन्होंने रात-दिन मेहनत की है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की ओर हैं, जहां नीट धांधली और NTA की कार्यप्रणाली को लेकर कई याचिकाएं दायर की गई हैं। क्या NTA भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए कोई पुख्ता डिजिटल सिक्योरिटी सिस्टम अपनाएगा? या फिर हर बार इसी तरह छात्रों का भविष्य दांव पर लगता रहेगा? फिलहाल, देश का युवा केवल एक ही मांग कर रहा है—निष्पक्ष जांच और त्वरित न्याय।
भारत के नक्शे पर नजर डालें, तो आपको ऐसे सैकड़ों शहर और कस्बे मिल जाएंगे जिनके नाम के अंत में 'पुर' (pur) जुड़ा होता है। चाहे राजस्थान का गुलाबी शहर जयपुर हो, झीलों की नगरी उदयपुर हो या फिर उत्तर प्रदेश का औद्योगिक केंद्र कानपुर, इन सभी नामों के पीछे एक गहरा भाषाई और ऐतिहासिक कारण छिपा है। अक्सर लोग इसे केवल एक भौगोलिक प्रत्यय (suffix) मान लेते हैं, लेकिन इसका वास्तविक अर्थ भारतीय इतिहास के उन पन्नों से जुड़ा है, जहां नगर बसाने की परंपरा का विकास हुआ था। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि आखिर 'पुर' का असली मतलब क्या है और ये नाम कैसे अस्तित्व में आए, तो यह खबर आपके लिए ही है।'पुर' का शब्दिक अर्थ: केवल एक नगर नहीं, एक व्यवस्थासंस्कृत भाषा के शब्दकोश में 'पुर' का अर्थ होता है—'नगर', 'शहर' या 'किलेबंद बस्ती'। प्राचीन काल में जब भी कोई राजा या शासक किसी नई जगह को बसाता था, तो वह उसे सुरक्षा की दृष्टि से चारों तरफ से ऊंची दीवारों या परकोटे से घेर देता था। इसी सुरक्षित और सुव्यवस्थित नगरीय ढांचे को 'पुर' कहा जाता था। 'पुर' शब्द 'पुरी' (जैसे हस्तिनापुरी या द्वारकापुरी) का ही एक रूप है। समय के साथ-साथ यह शब्द भारतीय संस्कृति और वास्तुकला का पर्याय बन गया, जहां हर 'पुर' का मतलब एक ऐसी जगह से था जहां जीवन के तमाम साधन उपलब्ध थे और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे।राजाओं और शासकों की पहचान बन गए ये नामभारत में शहरों के नामकरण की परंपरा में शासक का नाम और स्थान का महत्व सबसे ऊपर होता था। उदाहरण के तौर पर, जयपुर की स्थापना सवाई जयसिंह ने की थी, इसलिए इसे 'जय' (शासक) + 'पुर' (नगर) यानी 'जयपुर' कहा गया। इसी तरह, उदयपुर की स्थापना महाराणा उदय सिंह ने की थी। कानपुर का नाम भी 'कन्हैयापुर' से बिगड़कर कानपुर हुआ माना जाता है, जिसे कभी राजा कान देव ने बसाया था। इस प्रकार, 'पुर' का इस्तेमाल अक्सर शहर के संस्थापक या उस क्षेत्र की किसी ऐतिहासिक विशेषता को दर्शाने के लिए किया जाता था, जो आज भी भारतीय शहरों की गौरवशाली पहचान बना हुआ है।बदलते भारत में 'पुर' का महत्वआज के आधुनिक युग में जब हम स्मार्ट सिटी की बात करते हैं, तब भी 'पुर' शब्द हमें हमारी जड़ों से जोड़कर रखता है। लखनऊ, जयपुर, कानपुर जैसे शहरों ने अपनी प्राचीन पहचान को बचाए रखा है। शोधकर्ताओं का मानना है कि नाम के पीछे का यह 'पुर' प्रत्यय न केवल भूगोल को परिभाषित करता है, बल्कि यह उस कालखंड के सामाजिक, राजनीतिक और स्थापत्य विकास की कहानी भी सुनाता है। तो अगली बार जब आप किसी 'पुर' वाले शहर से गुजरें, तो समझ लीजिए कि आप किसी ऐसे ऐतिहासिक नगर में हैं जिसे प्राचीन काल में एक सुनियोजित और सुरक्षित बस्ती के रूप में विकसित किया गया था। यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की भारतीय नगरीय सभ्यता का जीता-जागता प्रमाण है।
बिहार की सियासत में मानसून सत्र से पहले ही गर्मी का पारा अपने चरम पर है। आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र के ठीक पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। सत्ताधारी एनडीए (BJP-JDU) गठबंधन ने तेजस्वी यादव के सत्र से पहले राज्य में न होने या सक्रियता न दिखाने पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष के इस प्रमुख चेहरे की चुप्पी और अनुपस्थिति पर सत्ता पक्ष ने इसे जनता से दूरी और जिम्मेदारी से भागने के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया है, जिससे सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।सत्ता पक्ष का हमला, 'विपक्ष का नेता ही गायब'बीजेपी और जेडीयू के नेताओं ने इसे बड़ा मुद्दा बनाते हुए कहा है कि मानसून सत्र जैसे महत्वपूर्ण समय में जब राज्य बाढ़, विकास और कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने वाला है, तब विपक्ष का चेहरा ही नदारद है। एनडीए प्रवक्ताओं का कहना है कि तेजस्वी यादव अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों को छोड़कर विदेश यात्रा पर हैं या निजी व्यस्तताओं में हैं, जो साफ तौर पर बिहार की जनता की अनदेखी को दर्शाता है। बीजेपी का दावा है कि विपक्ष के पास सदन में चर्चा के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वे सत्र के माहौल को भांपकर ही भागने की कोशिश कर रहे हैं।आरजेडी का पलटवार, कहा- 'राजनीति चमकाने का काम न करें'दूसरी ओर, आरजेडी के नेताओं ने इन दावों को पूरी तरह से सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी यादव की पूर्व निर्धारित व्यस्तताएं हैं और वे सत्र के दौरान सदन में पूरी मजबूती के साथ मौजूद रहेंगे। आरजेडी का आरोप है कि सरकार अपने नाकामियों को छिपाने के लिए विपक्ष पर बेबुनियाद सवाल उठा रही है ताकि ध्यान भटकाया जा सके। पार्टी ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार को इस बात की चिंता करनी चाहिए कि कैसे वह इस बार बाढ़ पीड़ितों के लिए काम करेगी, न कि इस बात पर कि विपक्ष का नेता कब और कहां है।मानसून सत्र में क्या होगा बड़ा धमाका?20 जुलाई से शुरू होने वाला यह मानसून सत्र बिहार के लिए काफी अहम माना जा रहा है। इसमें बिहार की वर्तमान आर्थिक स्थिति, शिक्षा विभाग के नए नियम, और हालिया अपराध की घटनाओं को लेकर सदन में हंगामे के पूरे आसार हैं। जानकार मान रहे हैं कि तेजस्वी यादव की वापसी के साथ ही विपक्ष सरकार को घेरने की कोई बड़ी रणनीति तैयार कर चुका है। एनडीए और आरजेडी दोनों के बीच जारी इस वार-पलटवार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार बिहार विधानसभा का सत्र हंगामेदार और चुनौतीपूर्ण होने वाला है, जिसमें आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति की आग और भड़क सकती है।
पटना से दिल्ली तक हलचल! लालू यादव को दिल्ली AIIMS किया गया शिफ्ट, मीसा भारती ने प्रशासन को घेरा
आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की तबीयत एक बार फिर से चिंता का विषय बनी हुई है। पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में इलाज करा रहे लालू यादव को अब बेहतर चिकित्सा देखभाल के लिए दिल्ली एम्स (AIIMS) शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया है। इस दौरान उनकी बड़ी बेटी और सांसद मीसा भारती ने पिता के स्वास्थ्य को लेकर ताजा जानकारी साझा की है, साथ ही पटना प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर अपना सख्त गुस्सा भी जाहिर किया है। लालू यादव के स्वास्थ्य को लेकर आरजेडी समर्थकों और बिहार के राजनीतिक गलियारों में खलबली मची हुई है।मीसा भारती का खुलासा, स्वास्थ्य को लेकर दी बड़ी जानकारीमीसा भारती ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पटना में इलाज के दौरान लालू यादव की सेहत में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा था, जिसके चलते डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें दिल्ली ले जाने का फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि लालू जी की स्थिति नाजुक बनी हुई है और उन्हें विशेष देखभाल की जरूरत है। मीसा ने अपने पिता की सेहत पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि उनकी पुरानी बीमारियों और बढ़ती उम्र को देखते हुए कोई भी जोखिम नहीं लिया जा सकता। दिल्ली में डॉक्टरों की विशेष टीम उनकी निगरानी करेगी।अस्पताल की व्यवस्था पर फूटा मीसा का गुस्सालालू यादव को शिफ्ट करने के दौरान पटना प्रशासन और अस्पताल की व्यवस्था पर मीसा भारती खासी नाराज दिखीं। उन्होंने आरोप लगाया कि आईजीआईएमएस में सुविधाएं और प्रबंधन का स्तर संतोषजनक नहीं रहा, जिससे इलाज में बाधाएं आ रही थीं। उन्होंने सीधे तौर पर पटना प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि व्यवस्था में भारी चूक हुई है और सहयोग के बजाय बाधाएं पैदा की गईं। मीसा ने कहा कि एक वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री के साथ इस तरह का व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है।राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चालालू यादव को दिल्ली शिफ्ट करने की खबर मिलते ही समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा। दिल्ली एम्स में भी उनके पहुंचने से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। लालू यादव के साथ मीसा भारती और परिवार के अन्य सदस्य भी दिल्ली रवाना हो गए हैं। बिहार की राजनीति में लालू यादव का स्वास्थ्य हमेशा से केंद्र बिंदु रहा है, और अब उनके दिल्ली जाने के बाद पटना के सियासी समीकरणों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। समर्थक लगातार उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।
बिहार शिक्षकों के लिए बड़ी अपडेट: तीन चरणों में होंगे बंपर तबादले, देखें पूरा टाइम-टेबल और प्रक्रिया
बिहार शिक्षा विभाग ने राज्य के लाखों शिक्षकों के लिए तबादले की बहुप्रतीक्षित प्रक्रिया का ऐलान कर दिया है। शिक्षा विभाग के नए निर्देश के अनुसार, शिक्षकों का ट्रांसफर अब मनमाने तरीके से नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित तीन-चरणीय प्रक्रिया (Three-Phase Transfer Process) के तहत किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की संख्या को संतुलित करना और उन्हें उनके पसंद के या नजदीकी शिक्षण संस्थानों में पदस्थापित करना है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए विस्तृत टाइम-टेबल और शेड्यूल जारी कर दिया गया है, ताकि शिक्षकों को किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति का सामना न करना पड़े।तीन चरणों में होगा शिक्षकों का ट्रांसफर, जानें कैसे काम करेगा सिस्टमशिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक, तबादले की यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी। पहले चरण में उन शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी जो लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं, या फिर गंभीर बीमारी या अन्य विशेष कारणों से स्थानांतरण के हकदार हैं। दूसरे चरण में पारस्परिक (Mutual) तबादलों को मौका दिया जाएगा, जबकि तीसरे और अंतिम चरण में शेष बचे हुए शिक्षकों को रिक्त पदों पर पदस्थापित किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी न हो, इसलिए पूरी मैपिंग सॉफ्टवेयर के माध्यम से की जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।कब से शुरू होगी प्रक्रिया और कब तक चलेगी?शिक्षा विभाग द्वारा जारी आधिकारिक कैलेंडर के अनुसार, तबादला आवेदन के लिए पोर्टल को अगले सप्ताह से खोल दिया जाएगा। पहले चरण के आवेदनों की समीक्षा के बाद, अगस्त के मध्य तक ड्राफ्ट लिस्ट जारी कर दी जाएगी। पूरे तीन चरणों की यह प्रक्रिया सितंबर के अंतिम सप्ताह तक पूरी कर ली जाएगी, ताकि अक्टूबर के नए शैक्षणिक सत्र या तिमाही से पहले सभी शिक्षक अपने नए स्कूलों में कार्यभार संभाल सकें। विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को निर्देश दिए हैं कि वे रिक्त पदों की संख्या को समय रहते अपडेट करें ताकि आवेदन में कोई तकनीकी बाधा न आए।शिक्षकों को इन बातों का रखना होगा खास ध्यानतबादले की इस पूरी प्रक्रिया में भाग लेने वाले शिक्षकों को अपने सभी जरूरी दस्तावेज, जैसे कि सेवा पुस्तिका (Service Book) और अन्य व्यक्तिगत जानकारी, एनआईसी (NIC) के पोर्टल पर अपडेट रखनी होगी। विभाग की ओर से स्पष्ट कहा गया है कि गलत जानकारी देने वाले या नियमों का उल्लंघन करने वाले आवेदनों को बिना किसी सूचना के रद्द कर दिया जाएगा। अपनी पसंद के स्कूलों का चयन करते समय शिक्षकों को वरिष्ठता और स्कूल की वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखना होगा। यह कवायद बिहार के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई है, जिससे राज्य के दूर-दराज के स्कूलों में भी शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
पश्चिम बंगाल के निवासियों के लिए अगले 48 घंटे बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के अधिकांश हिस्सों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी करते हुए लोगों को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी है। बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव के कारण सोमवार तक मूसलाधार बारिश का अनुमान है, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। कोलकाता से लेकर दार्जिलिंग और तटीय इलाकों तक, स्थिति गंभीर बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि जब तक बहुत जरूरी न हो, सोमवार तक घर से बाहर निकलना जान जोखिम में डालने जैसा हो सकता है।इन जिलों में सबसे ज्यादा खतरा, प्रशासन हाई अलर्ट परमौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, दक्षिण बंगाल के जिलों में जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हो सकती है, जबकि उत्तर बंगाल के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन (Landslide) का खतरा बना हुआ है। कोलकाता, हावड़ा, हुगली और उत्तर 24 परगना के निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका है। आपदा प्रबंधन की टीमें पहले से ही तैनात कर दी गई हैं। प्रशासन ने स्थानीय लोगों को नदियों के किनारे न जाने और जर्जर इमारतों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है। लखनऊ और राज्य के अन्य हिस्सों से आने वाले यात्रियों को भी सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना मौसम के मिजाज को देखते हुए ही बनाएं।सोमवार तक स्कूलों और दफ्तरों पर हो सकता है असररेड अलर्ट को देखते हुए सरकार ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सोमवार तक कई स्कूलों और कॉलेजों में अवकाश घोषित किया जा सकता है। इसके अलावा, सरकारी दफ्तरों में भी उपस्थिति कम रहने की उम्मीद है। परिवहन व्यवस्था भी चरमरा सकती है, क्योंकि भारी बारिश के चलते ट्रेन और बस सेवाओं में देरी की संभावना है। स्थानीय नगर पालिकाओं को जल निकासी के पंप सक्रिय करने और आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों को 24 घंटे चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं।क्या करें और क्या न करें? प्रशासन की गाइडलाइंसआपदा प्रबंधन विभाग ने आम जनता के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। लोगों से अपील की गई है कि वे अपने साथ पावर बैंक, जरूरी दवाइयां और सूखा राशन तैयार रखें। बिजली के तारों और खंभों के पास न जाएं, क्योंकि बारिश के साथ तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है। यदि आप सड़क पर हैं और जलभराव का सामना कर रहे हैं, तो अपने वाहन को सुरक्षित स्थान पर पार्क करें और पानी के बहाव में गाड़ी न डालें। किसी भी आपात स्थिति के लिए स्थानीय पुलिस या आपदा सहायता नंबर पर तुरंत संपर्क करें। यह समय संयम और सतर्कता बरतने का है।
सोनम वांगचुक के बाद अब अभिजीत दिपके ने भरी हुंकार, अनशन की घोषणा से गरमाया लद्दाख का पारा
लद्दाख की स्वायत्तता और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन एक नए मोड़ पर आ पहुंचा है। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य खराब होने के चलते जबरन अस्पताल ले जाए जाने के बाद, अब आंदोलन की कमान अभिजीत दिपके ने अपने हाथों में ले ली है। अभिजीत दिपके ने साफ ऐलान कर दिया है कि वे सोनम वांगचुक की उस अधूरी लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे और उन्होंने भूख हड़ताल पर बैठने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस घटनाक्रम ने लद्दाख के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, और अब यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गया है।अस्पताल भेजे गए सोनम वांगचुक, लेकिन हौसले अब भी बुलंदपिछले कई दिनों से लद्दाख के अधिकारों को लेकर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य बीते 24 घंटों में काफी गिर गया था। डॉक्टरों की सलाह और प्रशासन के दबाव के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। हालांकि, उनके समर्थकों का दावा है कि वांगचुक अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अस्पताल से भी उन्होंने अपने साथियों को आंदोलन जारी रखने का संदेश दिया है, जिसके तुरंत बाद अभिजीत दिपके का सामने आना यह दर्शाता है कि यह मुहिम अब एक व्यक्ति से निकलकर एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है।क्या है लद्दाख आंदोलन का असली मकसद?लद्दाख के लोग मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगों को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देना, इसे संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करना ताकि वहां की जमीन और संस्कृति सुरक्षित रह सके, और लद्दाख के लिए अलग से लोक सेवा आयोग का गठन करना शामिल है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से उनकी स्थानीय आवाज दब गई है और लद्दाख के पारिस्थितिक तंत्र को औद्योगिक विकास के नाम पर खतरा पैदा हो रहा है। यही कारण है कि स्थानीय युवा अब सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके जैसे चेहरों के साथ सड़क पर उतरकर अपना भविष्य सुरक्षित करने की मांग कर रहे हैं।लखनऊ से लेह तक गूंज रही है मांग, प्रशासन पर बढ़ा दबावइस आंदोलन की गूंज सिर्फ लेह-लद्दाख की वादियों में ही नहीं, बल्कि दिल्ली और लखनऊ जैसे बड़े शहरों में भी सुनाई दे रही है। सोशल मीडिया और एआई सर्च प्लेटफॉर्म्स पर भी लद्दाख के मुद्दे को लेकर काफी सर्च वॉल्यूम देखा जा रहा है। अभिजीत दिपके के अनशन पर बैठने के ऐलान के बाद स्थानीय प्रशासन और सरकार पर वार्ता के लिए दबाव और अधिक बढ़ गया है। जानकारों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ही लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ सार्थक बातचीत शुरू नहीं की, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक उग्र हो सकता है, जिससे वहां की शांति और व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
Anand Ambli Village CM Bhupendra Patel Visit: गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने शुक्रवार को एक अनोखा और चौंकाने वाला दौरा किया। वडोदरा में एक कार्यक्रम पूरा कर गांधीनगर लौट रहे मुख्यमंत्री का काफिला आणंद जिले के अंकलाव तालुका के आंबली गांव के ...
पालतू जानवर परिवार का हिस्सा होते हैं, लेकिन उनकी एक अनजानी हरकत भी कभी-कभी बड़े हादसे की वजह बन सकती है। अमेरिका के Maryland में ऐसा ही एक दर्दनाक मामला सामने आया, जहां घर में अकेले छोड़े गए एक पालतू कुत्ते ने गलती से टोस्टर (Toaster) ऑन कर दिया। ...
गुजरात में 'जैश-ए-मोहम्मद' का नेटवर्क खड़ा करने की साजिश, ATS की पूछताछ में बड़ा खुलासा
Gujarat ATS Jaish-e-Mohammed: गुजरात एटीएस (ATS) द्वारा पकड़े गए पांच संदिग्ध आतंकवादियों से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, प्राथमिक जांच में यह जानकारी मिली है कि ये आरोपी गुजरात में ...
तीन साल बाद महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में फिर बढ़े कोरोना के मामले। महाराष्ट्र में 48 और आंध्र प्रदेश में 12 कोविड केस दर्ज, स्वास्थ्य विभाग ने सतर्क रहने की दी सलाह।
भारत की पहली निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने विक्रम-1 ऑर्बिटल रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया। मिशन आगमन की सफलता के साथ भारत अमेरिका और चीन के बाद निजी ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च करने वाला तीसरा देश बना।
अहमदाबाद जा रही इंडिगो फ्लाइट में मिला बम की धमकी वाला नोट, पुलिस ने शुरू की जांच
बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अहमदाबाद जाने वाली इंडिगो की एक उड़ान में बम की झूठी धमकी मिलने से गुरुवार शाम सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। विमान के शौचालय में एक हस्तलिखित नोट मिलने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
Weather Update 18 July : उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में मानसून सक्रिय नजर आ रहा है। लगातार हो रही बारिश की वजह से केदारनाथ में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। पूर्वोत्तर भारत में तेज बारिश का दौर जारी है तो पश्चिम-मध्य एवं दक्षिण प्रायद्वीपीय ...
एआई तकनीक सीखने वालों के लिए सर्वाधिक अवसर बनेंगे: प्रोफेसर आशुतोष कुमार सिंह
एमसीयू भोपाल में आयोजित 10 दिवसीय एआई फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के समापन पर प्रो. आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि एआई सीखने वालों के लिए भविष्य में सबसे अधिक अवसर होंगे। विशेषज्ञों ने मीडिया, शिक्षा और रोजगार में एआई की भूमिका पर चर्चा की।
आमिर खान को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से धमकी, शादी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी; बताया लव जिहाद
आमिर खान को कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से धमकी भरी चिट्ठी और ऑडियो संदेश मिलने का दावा सामने आया है। अभिनेता की निजी जिंदगी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के साथ राजस्थान के एक मामले का भी जिक्र किया गया है।
सोनम वांगचुक सफदरगंज अस्पताल में भर्ती, क्या कहती है उनकी मेडिकल रिपोर्ट?
Sonam Wangchuk health bulletin : जंतर मंतर पर 20 दिन से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने सफदरगंज अस्पताल में भर्ती कराया है। सफदरगंज अस्पताल द्वारा जारी हेल्थ बुलेटिन में सोनम वांगचुक की हालत स्थिर बताई गई है।
सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने पर काकरोच पार्टी के अभिजीत दीपके ने शुरु किया भूख हड़ताल
21 दिन की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य बिगड़ने पर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके ने नया अनशन शुरू किया, जबकि वांगचुक की पत्नी ने इलाज को लेकर महत्वपूर्ण अपील की।
इतिहास रचने को तैयार Vikram-1: PM मोदी का हाथ से लिखा 'वंदे मातरम' पोस्टकार्ड भी जाएगा अंतरिक्ष
Vikram 1 Launch : प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस 18 जुलाई को विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1 के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'वंदे मातरम' लिखा हाथ से लिखा पोस्टकार्ड अंतरिक्ष में भेजेगा। यह भारत के पहले निजी ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट की टेस्ट ...
मेरठ के हस्तिनापुर में पहले सर्पदंश से हुई मौत माने जा रहे मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, पत्नी ने कथित प्रेमी और साथियों के साथ मिलकर पति को पहले नींद की गोलियां दीं और फिर चादर में जहरीला सांप छोड़कर उसकी हत्या कर दी। ...
मुंबई/लखनऊ। बॉलीवुड में चकाचौंध और ग्लैमर के पीछे छिपे काले सच अक्सर कलाकारों के जरिए सामने आते रहते हैं। इसी कड़ी में हिंदी और साउथ सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री समीरा रेड्डी (Sameera Reddy) ने फिल्म इंडस्ट्री में गहरे पैठ जमाए बैठे 'रंगभेद' (Colour Bias) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बेबाक खुलासा किया है। एक होन्डाकास्ट और हालिया इंटरव्यू में अपने फिल्मी सफर को याद करते हुए समीरा ने बताया कि कैसे उनके सांवले रंग (Dusk Skin Tone) के कारण उन्हें अपने डेब्यू के समय ही भारी मानसिक तनाव और भेदभाव का सामना करना पड़ा था। अभिनेत्री के मुताबिक, उनकी पहली फिल्म के दौरान मेकर्स और निर्देशकों को उनका नेचुरल सांवला रंग पसंद नहीं था, जिसके चलते स्क्रीन पर उन्हें जबरन दो से तीन शेड ज्यादा गोरा (Lighter) दिखाया गया था।इंडस्ट्री को एक खास तरह की 'गोरी लड़की' ही चाहिए थीसमीरा रेड्डी ने साल 2002 में फिल्म 'मैंने दिल तुझको दिया' से सोहेल खान के साथ बॉलीवुड में अपना शानदार डेब्यू किया था। उस दौर को याद करते हुए समीरा ने कहा, जब मैंने कदम रखा, तो इंडस्ट्री में सांवली लड़कियों को लेकर एक अजीब सी हिचक थी। मुझे आज भी याद है कि मेरी पहली फिल्म में लाइटिंग और भारी-भरकम बेस मेकअप का इस्तेमाल करके मेरे स्किन टोन को पूरी तरह बदल दिया गया था। मुझे स्क्रीन्स पर 2-3 शेड लाइट दिखाया गया क्योंकि उस समय धारणा थी कि हीरोइन का गोरा दिखना ही सफलता की गारंटी है। उन्होंने आगे बताया कि इस रंगभेद ने उनके आत्मविश्वास को शुरुआती दिनों में काफी ठेस पहुंचाई थी और उन्हें लगने लगा था कि उनके लुक में ही कोई कमी है।साउथ और बॉलीवुड दोनों जगह झेला भेदभावसमीरा ने बताया कि यह समस्या सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं थी, बल्कि साउथ फिल्म इंडस्ट्री (तमिल और तेलुगु सिनेमा) में भी एक्ट्रेस के रंग और बॉडी शेप को लेकर भारी दबाव बनाया जाता था। उन्होंने कहा, मुझसे अक्सर कहा जाता था कि अपनी त्वचा को साफ करने के लिए ट्रीटमेंट करवाओ या हमेशा ब्राइट लाइट्स में ही शूट करो। कपड़ों से लेकर लिपस्टिक के शेड्स तक सिर्फ इसलिए बदल दिए जाते थे ताकि मेरा सांवलापन उभरकर सामने न आए। इस लगातार मिलने वाले रिजेक्शन और कृत्रिम मापदंडों के कारण वे लंबे समय तक 'बॉडी डिस्मॉर्फिया' और असुरक्षा की भावना से जूझती रहीं।अब सोशल मीडिया पर बॉडी पॉजिटिविटी की मिसाल बनीं समीराफिल्मी दुनिया की इन तमाम पाबंदियों और झूठे पैमानों से दूर, आज समीरा रेड्डी सोशल मीडिया पर 'बॉडी पॉजिटिविटी' (Body Positivity) और नेचुरल ब्यूटी की सबसे बड़ी पैरोकार बनकर उभरी हैं। वे अक्सर बिना किसी फिल्टर और बिना मेकअप के अपने सफेद बालों, स्ट्रेच मार्क्स और असल स्किन टोन की तस्वीरें व वीडियो साझा करती हैं। समीरा का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर आकर उन्होंने खुद को अपनी कमियों के साथ पूरी तरह स्वीकार करना सीख लिया है। उनकी इस बेबाकी को आज की युवा पीढ़ी और महिलाओं द्वारा खूब सराहा जा रहा है, जिससे वे रूढ़िवादी ब्यूटी स्टैंडर्ड्स को तोड़ने में एक प्रेरणास्रोत साबित हो रही हैं।
मुंबई/लखनऊ। भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग क्षेत्र (Banking Sector) से एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में सदियों पुरानी पारंपरिक कागजी मुद्रा (Paper Currency) को बदलकर पूरी तरह से प्लास्टिक यानी पॉलिमर नोट (Polymer Banknotes) लाने के बड़े प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर चुका है। देश के करेंसी सिस्टम में इस क्रांतिकारी बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाते हुए आरबीआई की नोट छापने वाली शाखा 'भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड' (BRBNMPL) ने हाल ही में नोट छपाई के काम आने वाले 'ओपेसिफाइड पॉलिमर सब्सट्रेट शीटों' (प्लास्टिक नोट बनाने वाले बेस मटीरियल) की आपूर्ति के लिए वैश्विक निविदा (Global Tender) जारी कर दी है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इस 'ग्लोबल एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (EoI) के तहत इच्छुक वैश्विक निर्माताओं को अपनी बोलियां जमा करने के लिए 18 अगस्त 2026 तक की अंतिम तारीख दी गई है।पहले चरण में ₹10 और ₹20 के नोटों पर होगा ट्रायलआरबीआई की इस योजना के अनुसार, प्लास्टिक केंटेंसी का यह पायलट प्रोजेक्ट (Pilot Project) शुरुआती तौर पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले छोटे मूल्यवर्ग के नोटों यानी ₹10 और ₹20 के नोटों के साथ शुरू किया जाएगा। टेंडर के दस्तावेजों के मुताबिक, शुरुआती आवश्यकता कुल 68,000 रीम (Reams) मटीरियल की है, जिसे दो अलग-अलग मूल्यवर्ग के नोटों की छपाई के लिए 34,000-34,000 रीम में बांटा गया है (ध्यान रहे कि एक रीम में कुल 500 प्लास्टिक शीट्स होती हैं)। इस पायलट प्रोजेक्ट के सफल और सकारात्मक फील्ड ट्रायल के बाद ही देश में बड़े नोटों के लिए पॉलिमर शीट का भारी मात्रा में प्रोक्योरमेंट (खरीद) किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इन प्लास्टिक नोटों का फुल-स्केल रोलआउट (चलन) साल 2027 से भारतीय बाजारों में देखने को मिल सकता है।सुरक्षा के लिए बेहद कड़े नियम, चीन-पाकिस्तान पर कड़ा बैनचूंकि मामला देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा है, इसलिए भारत सरकार और आरबीआई ने निविदा भरने वाली कंपनियों के लिए अत्यंत कड़े नियम और शर्तें रखी हैं:बोली लगाने वाली किसी भी वैश्विक कंपनी का कोई भी ऑपरेशन या यूनिट चीन या पाकिस्तान में सक्रिय नहीं होना चाहिए।भारत के करेंसी प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल होने वाला कोई भी कच्चा माल (Raw Material) इन दोनों देशों से नहीं मंगाया जाएगा।कंपनियों को यह भी वचन देना होगा कि वे भारत के लिए तैयार की जाने वाली विशिष्ट सुरक्षा विशेषताओं वाली इन शीट्स को किसी तीसरे देश को सप्लाई नहीं करेंगी।इसके अलावा धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं का सम्मान करते हुए यह प्रमाणित करना अनिवार्य होगा कि रबर या प्लास्टिक मिश्रण में किसी भी प्रकार की जानवर की चर्बी या डीएनए (DNA) शामिल नहीं है।कागजी नोटों के मुकाबले प्लास्टिक नोट क्यों हैं बेहतर?विशेषज्ञों के मुताबिक, भले ही प्लास्टिक नोटों की छपाई की शुरुआती लागत कागजी नोटों की तुलना में थोड़ी अधिक हो, लेकिन दीर्घकालिक रूप से इसके कई बेमिसाल फायदे हैं:5 गुना ज्यादा लाइफ (Durability): जहां साधारण ₹100 का कागजी नोट औसतन 4 साल में कट-फट जाता है या मैला हो जाता है, वहीं प्लास्टिक नोट पानी, नमी और गंदगी से सुरक्षित रहते हैं और 15 से 20 साल तक बिना खराब हुए चलते हैं।फर्जी नोटों (Counterfeiting) पर लगाम: पॉलिमर नोट्स में ऐसे अत्याधुनिक कलर-शिफ्टिंग सिक्योरिटी फीचर्स और ट्रांसपेरेंट विंडो एम्बेड किए जा सकते हैं, जिनकी हूबहू नकल करना जाली नोट छापने वाले रैकेट और जालसाजों के लिए नामुमकिन होगा।क्या पुराने नोट बंद हो जाएंगे? आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक चरणबद्ध प्रक्रिया है और वर्तमान में आपके बटुए में मौजूद कागजी नोट पूरी तरह से वैध और मान्य रहेंगे, जनता को किसी भी तरह की घबराहट या परेशानी की जरूरत नहीं है। ऑस्ट्रेलिया, यूके, कनाडा और सिंगापुर जैसे विकसित देश पहले से ही पूर्ण रूप से पॉलिमर करेंसी का उपयोग कर रहे हैं।
लखनऊ। सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले 'शुभ मुहूर्त' (Shubh Muhurat) देखने की प्राचीन परंपरा है, विशेषकर जब बात जिंदगी की सबसे बड़ी पूंजी यानी नया मकान, फ्लैट या जमीन खरीदने की हो। शनिवार (25 जुलाई 2026) को देवशयनी एकादशी के पावन अवसर से चातुर्मास (Chaturmas 2026) का आरंभ हो चुका है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज से अगले चार महीनों के लिए सृष्टि के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में लीन हो जाएंगे. भगवान के शयन काल में जाने के कारण हिंदू पंचांग में सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है. ऐसे में रियल एस्टेट मार्केट और घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के मन में यह बड़ा सवाल उठता है कि क्या चातुर्मास के दौरान नया मकान खरीदना, रजिस्ट्री कराना या नए घर में शिफ्ट होना (गृह प्रवेश) शास्त्रों के अनुसार सही है या नहीं? आइए जानते हैं ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के कड़े नियम।1. क्या चातुर्मास में नया मकान या जमीन खरीद सकते हैं?ज्योतिषविदों और पंचांग वेत्ताओं के अनुसार, चातुर्मास को लेकर आम जनमानस में यह गलतफहमी है कि इन चार महीनों में हर तरह के काम बंद हो जाते हैं. शास्त्रों में केवल मांगलिक संस्कारों (जैसे—विवाह, मुंडन, जनेऊ और नए यज्ञ) को वर्जित किया गया है. जहां तक संपत्ति या अचल संपत्ति (Property Purchase) खरीदने का सवाल है, तो निवेश और व्यावसायिक गतिविधियों पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है. यदि आप नया मकान या प्लॉट खरीदना चाहते हैं, तो पंचांग में दिए गए विशिष्ट 'प्रॉपर्टी परचेज मुहूर्त' या राहुकाल को छोड़कर शुभ नक्षत्रों (जैसे—अनुराधा, मघा, विशाखा, मृगशिरा) में टोकन मनी दे सकते हैं या रजिस्ट्री का काम करवा सकते हैं. इसे अशुभ नहीं माना जाता।2. गृह प्रवेश (Housewarming) पर रहता है पूर्ण प्रतिबंध: जानिए क्यों?भले ही आप चातुर्मास में मकान खरीद लें या उसकी रजिस्ट्री करा लें, लेकिन 'गृह प्रवेश' (Griha Pravesh) करने की शास्त्रों में सख्त मनाही होती है. वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार, एक नए घर में जीवन की शुरुआत करने के लिए सौर ऊर्जा, सकारात्मक ब्रह्मांडीय तरंगों और भगवान विष्णु के जाग्रत आशीर्वाद की आवश्यकता होती है. चूंकि इन चार महीनों में भगवान विष्णु शयन में होते हैं और सूर्य व चंद्रमा की कोणीय स्थितियां भी बदलती हैं, इसलिए सावन, भादों, अश्विन और कार्तिक मास में नए या निर्मित मकान में गृह प्रवेश की पूजा नहीं की जाती है. अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026 में गृह प्रवेश का कोई भी सामूहिक शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं है.3. अगर घर शिफ्ट करना बहुत जरूरी हो, तो क्या करें?कई बार किराए का मकान खाली करने, ट्रांसफर होने या किसी आपातकालीन स्थिति (Emergency Relocation) के कारण लोगों को चातुर्मास के दौरान ही नए घर में जाना पड़ता है. शास्त्रों में आपातकाल के लिए अपवाद दिए गए हैं:यदि शिफ्ट होना अनिवार्य है, तो आप बिना किसी तामझाम या बड़े उत्सव के एक साधारण कलश पूजा करके नए मकान में प्रवेश कर सकते हैं.ध्यान रखें कि इसे 'औपचारिक गृह प्रवेश' नहीं माना जाएगा। चातुर्मास समाप्त होने के बाद (20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के बाद) आप विद्वान ब्राह्मण से शुभ मुहूर्त निकलवाकर विधिवत 'वास्तु शांति यज्ञ' और पूर्ण गृह प्रवेश पूजा संपन्न करवा सकते हैं.4. चातुर्मास में संपत्ति से जुड़े इन वास्तु नियमों का रखें ध्यानदशा और दिशा: यदि आप इस अवधि में मकान फाइनल कर रहे हैं, तो वास्तु के अनुसार उत्तर (North) या पूर्व (East) मुखी मुख्य द्वार वाले मकान को प्राथमिकता दें, क्योंकि यह सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है.राहुकाल से बचें: किसी भी संपत्ति के सौदे के कागजात पर हस्ताक्षर करते समय या बयाना (Token Money) देते समय उस दिन के राहुकाल (अशुभ समय) का विशेष ध्यान रखें और उस दौरान वित्तीय लेनदेन से बचें.सफाई और रखरखाव: चातुर्मास के चार महीने आत्म-निरीक्षण और शुद्धि के होते हैं. यदि आपने नया घर लिया है, तो उसमें साफ-सफाई करवाकर रखें, लेकिन मुख्य निर्माण कार्य या बड़ा रेनोवेशन शुरू करने से पहले किसी ज्योतिषी से अपनी व्यक्तिगत कुंडली के ग्रहों की स्थिति जरूर जंचवा लें.
लखनऊ। आज हम सड़कों पर दौड़ती किसी भी गाड़ी—चाहे वह चमचमाती स्पोर्ट्स कार हो, हैवी ट्रक हो या फिर एक साधारण साइकिल—को देखें, तो एक चीज सभी में बिल्कुल समान नजर आती है, और वह है टायरों का काला रंग (Black Tyres)। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऑटोमोबाइल के शुरुआती इतिहास में गाड़ियों के टायर काले नहीं, बल्कि पूरी तरह सफेद हुआ करते थे? जी हां, 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में सड़कों पर चलने वाली विंटेज कारों में सफेद रंग के ही टायर लगे होते थे। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और विज्ञान के मुताबिक, टायरों के सफेद से काले होने का यह सफर कोई फैशन या दिखावे का बदलाव नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक कारण और गाड़ियों की सुरक्षा का फॉर्मूला छिपा हुआ है।शुरुआत में सफेद क्यों होते थे टायर?प्राकृतिक रबर (Natural Rubber) का असली रंग दूधिया सफेद (Milky White) होता है। जब शुरुआत में रबर से टायर बनाने की तकनीक विकसित हुई, तो उसमें कोई अतिरिक्त रंग या तत्व नहीं मिलाया जाता था। रबर को मजबूती देने के लिए उसमें केवल जिंक ऑक्साइड (Zinc Oxide) का इस्तेमाल किया जाता था, जिसके कारण टायरों का रंग पूरी तरह सफेद या मटमैला दिखाई देता था। हालांकि, ये शुरुआती सफेद टायर बहुत ज्यादा टिकाऊ नहीं थे। ये जल्दी घिस जाते थे, धूप की वजह से इनमें दरारें आ जाती थीं और सड़कों पर चलते समय ये बहुत जल्दी गंदे भी हो जाते थे।1917 का वो ऐतिहासिक बदलाव: 'कार्बन ब्लैक' की एंट्रीटायरों को लंबे समय तक टिकाऊ और मजबूत बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने लगातार कई शोध किए। इसी कड़ी में साल 1917 के आसपास टायर निर्माता कंपनियों ने एक क्रांतिकारी खोज की। उन्होंने टायर बनाने वाले रबर के मिश्रण में 'कार्बन ब्लैक' (Carbon Black) नाम का एक रासायनिक पदार्थ मिलाना शुरू किया। कार्बन ब्लैक मूल रूप से पेट्रोलियम उत्पादों के जलने से निकलने वाला एक महीन काला पाउडर होता है। रबर में इस कार्बन ब्लैक को मिलाते ही टायरों का रंग हमेशा के लिए पूरी तरह काला हो गया।टायरों में कार्बन ब्लैक मिलाने के 3 सबसे बड़े फायदे1. कई गुना बढ़ गई टायरों की मजबूती (Durability): वैज्ञानिकों के अनुसार, साधारण सफेद रबर के टायर जहां मुश्किल से 8,000 से 10,000 किलोमीटर ही चल पाते थे, वहीं कार्बन ब्लैक मिलने के बाद टायरों की उम्र लगभग 60,000 से 80,000 किलोमीटर तक बढ़ गई। यह रबर के धागों (Polymers) को आपस में मजबूती से बांध देता है, जिससे टायर सड़कों के घर्षण (Friction) को आसानी से झेल लेते हैं।2. गर्मी और यूवी किरणों (UV Rays) से सुरक्षा: गाड़ियां जब तेज रफ्तार में चलती हैं, तो सड़क और टायर के बीच भारी घर्षण के कारण टायरों का तापमान बहुत बढ़ जाता है। कार्बन ब्लैक एक बेहतरीन 'हीट डिस्पेंसर' का काम करता है, जो टायर की गर्मी को सोखकर उसे समान रूप से फैला देता है। इसके अलावा, यह सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों से रबर को सड़ने या हार्ड होने से बचाता है।3. बेहतर रोड ग्रिप और सेफ्टी: काले टायरों की सड़क पर पकड़ (Road Grip) सफेद टायरों के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत होती है। यह गाड़ियों को मोड़ों पर पलटने से बचाता है और ब्रेक लगाने पर गाड़ी को तुरंत रोकने में मदद करता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा काफी कम हो जाता है।व्हाइट वॉल टायर्स (White Wall Tyres) का दौरकाले टायरों के आने के बाद भी, 1930 और 1950 के दशक के बीच 'व्हाइट वॉल टायर्स' का एक नया फैशन ट्रेंड चला। इसमें टायर का मुख्य हिस्सा तो मजबूत काले रबर का ही होता था, लेकिन उसके बाहरी किनारे (Sidewalls) पर सफेद रबर की एक पट्टी लगा दी जाती थी। उस दौर में ऐसी गाड़ियां अमीरी और स्टेटस सिंबल मानी जाती थीं। हालांकि, रखरखाव में भारी कठिनाई और आधुनिक कारों के बदलते डिजाइन के कारण धीरे-धीरे यह फैशन भी पूरी तरह खत्म हो गया और आज दुनिया भर में केवल 100% ब्लैक टायर ही स्टैंडर्ड बन चुके हैं।
नई दिल्ली/लखनऊ। भारतीय बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन बाजार में तहलका मचाने के लिए चीनी टेक ब्रांड पोको (POCO) एक बार फिर बड़ा धमाका करने के लिए तैयार है। हाल ही में सामने आईं हाइपरओएस (HyperOS) फर्मवेयर और टिप्सटर की लीक रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी जल्द ही भारत में अपनी नई सीरीज के तहत दो बेहद पावरफुल स्मार्टफोन—POCO M8 Power और POCO X8 लॉन्च करने जा रही है। इस खबर ने टेक लवर्स के बीच हलचल इसलिए तेज कर दी है, क्योंकि लीक के मुताबिक POCO M8 Power में 8000mAh की एक विशाल (Massive) बैटरी दी जाएगी, जो कि बजट सेगमेंट में अब तक की सबसे बड़ी बैटरियों में से एक होने वाली है।Redmi Note 17 सीरीज का रीब्रांडेड वर्जन होंगे ये फोन?मशहूर टिप्सटर और लीक रिपोर्ट्स का दावा है कि शाओमी (Xiaomi) अपनी पुरानी रणनीति को दोहराते हुए चीन में हाल ही में लॉन्च हुई अपनी रेडमी नोट 17 सीरीज को ही भारत में पोको ब्रांडिंग के तहत पेश करने वाली है।लीक कोड्स के अनुसार, POCO M8 Power असल में चीन के Redmi Note 17 5G का रीब्रांडेड वर्जन होगा।वहीं, POCO X8 को Redmi Note 17 Pro के रीबैज्ड वर्जन के रूप में भारतीय बाजार में उतारा जा सकता है।POCO M8 Power: संभावित स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्सयदि यह आगामी फोन पूरी तरह से चीनी रेडमी नोट 17 के हार्डवेयर को कॉपी करता है, तो इसमें ग्राहकों को अद्भुत फीचर्स देखने को मिलेंगे:डिस्प्ले: इस फोन की सबसे बड़ी यूएसपी इसका 7.0 इंच का बड़ा FHD+ OLED डिस्प्ले होगा, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 1800 निट्स की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करेगा। इतनी बड़ी स्क्रीन और ओलेड पैनल इस बजट में मिलना वाकई बेमिसाल होगा।बैटरी और चार्जिंग: फोन को पावर देने के लिए इसमें 8000mAh की बड़ी बैटरी दी जाएगी। सबसे अच्छी बात यह है कि ग्लोबल मार्केट में जहां इसकी बैटरी छोटी होने की चर्चा है, वहीं भारतीय वेरिएंट में 8000mAh की पूरी क्षमता को बरकरार रखा जाएगा। इसे चार्ज करने के लिए 45W की फास्ट चार्जिंग और 22.5W की रिवर्स वायर्ड चार्जिंग का सपोर्ट मिलेगा।प्रोसेसर व कैमरा: परफॉर्मेंस के लिए इसमें क्वालकॉम का लेटेस्ट Snapdragon 4 Gen 4 चिपसेट मिल सकता है, जो रोजमर्रा के मल्टीटास्किंग और सामान्य गेमिंग के लिए बेहतरीन है। फोटोग्राफी के लिए पीछे की तरफ 50MP का प्राइमरी कैमरा और सेल्फी के लिए 8MP का फ्रंट शूटर मिलने की उम्मीद है।संभावित कीमत और भारत में कब होगा लॉन्च?कंपनी ने अभी तक इन दोनों स्मार्टफोन्स की आधिकारिक लॉन्चिंग डेट या कीमत का खुलासा नहीं किया है। हालांकि, चीनी मार्केट में रेडमी नोट 17 की शुरुआती कीमत CNY 1,299 (लगभग ₹18,000) रखी गई है। इसे देखते हुए भारतीय बाजार में भी POCO M8 Power की शुरुआती कीमत ₹18,000 से ₹20,000 के बीच होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। जहां तक लॉन्च टाइमलाइन की बात है, तो यह फोन साल 2026 की इस तीसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर के बीच) में कभी भी भारत में दस्तक दे सकता है।
लखनऊ। हिंदू धर्म में सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाने वाली आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi 2026) का व्रत इस साल बेहद खास और दुर्लभ होने जा रहा है। वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, इस बार देवशयनी एकादशी पर 3 बड़े और शुभ महायोगों का निर्माण हो रहा है, जो इस दिन की गई पूजा और व्रत के आध्यात्मिक फल को कई गुना बढ़ा देंगे। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इसी पवित्र तिथि से सृष्टि के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु अगले चार महीनों (120 दिनों) के लिए क्षीर सागर में शेषनाग की शैय्या पर योगनिद्रा में चले जाते हैं। प्रभु के शयन में जाने के साथ ही देश भर में चातुर्मास (Chaturmas 2026) का शुभारंभ हो जाएगा और विवाह, मुंडन, जनेऊ व गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक व शुभ कार्यों पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी।तारीख को लेकर न हों कन्फ्यूज, उदया तिथि के अनुसार इस दिन है व्रतइस साल एकादशी तिथि की शुरुआत और समाप्ति के समय को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बन रही थी। ज्योतिषविदों और पंचांग के अनुसार:एकादशी तिथि का प्रारंभ: 24 जुलाई 2026, शुक्रवार को सुबह 09:12 बजे से होगा।एकादशी तिथि की समाप्ति: 25 जुलाई 2026, शनिवार को सुबह 11:34 बजे होगी।सटीक व्रत की तारीख: सनातन धर्म में उदया तिथि (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) को सर्वोपरि माना जाता है। चूंकि 25 जुलाई की सुबह सूर्योदय के समय एकादशी तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए देवशयनी एकादशी का पावन व्रत 25 जुलाई 2026, शनिवार को ही रखा जाएगा।3 बड़े शुभ योग और पूजा का उत्तम मुहूर्तइस बार की एकादशी ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद अनूठी है क्योंकि यह 3 प्रमुख शुभ योगों के त्रिवेणी संगम में आ रही है, जो जातकों के करियर और आर्थिक स्थिति में उन्नति के द्वार खोलेगी।पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त: 25 जुलाई की सुबह 07:21 बजे से सुबह 09:03 बजे तक का समय भगवान विष्णु की विशेष आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस दौरान श्रीहरि को पंचामृत, पीले फूल, पीले वस्त्र और गुड़-चने का भोग लगाना अत्यंत कल्याणकारी रहेगा।व्रत पारण (Parana Time) का सटीक समयएकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब उसका पारण (व्रत खोलना) नियमों के अनुसार अगले दिन शुभ समय के भीतर किया जाए।पारण की तारीख: 26 जुलाई 2026, रविवार।पारण का समय: रविवार की सुबह 05:39 बजे से लेकर सुबह 08:22 बजे तक रहेगा। इस समयावधि के भीतर ही व्रतियों को सात्विक भोजन ग्रहण कर अपना उपवास खोलना चाहिए।भूलकर भी न करें ये 3 गलतियां, इन बातों का रखें ध्यानधार्मिक नियमों के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन घर में पूर्ण सात्विक माहौल होना चाहिए। इस दिन भूलकर भी घर में लहसुन, प्याज या तामसिक भोजन न बनाएं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना पूरी तरह वर्जित होता है; यदि आपको भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करना है, तो उसे एक दिन पहले (24 जुलाई को) ही तोड़कर रख लें। इसके साथ ही, इस दिन वाद-विवाद और क्रोध से बचकर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' महामंत्र का मानसिक जाप करते रहना चाहिए।
भोपाल/लखनऊ। भारत का दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का सौंदर्य वैसे तो हर मौसम में पर्यटकों को आकर्षित करता है, लेकिन मानसून के दस्तक देते ही इस राज्य का भूगोल और नजारा पूरी तरह बदल जाता है। जुलाई से अक्टूबर के बीच होने वाली मूसलाधार बारिश एमपी के जंगलों, पहाड़ों और घाटियों में एक नई जान फूंक देती है। इस दौरान यहां के ऐतिहासिक किले बादलों से घिर जाते हैं, सूखी नदियां उफान पर आ जाती हैं और सूखी पहाड़ियां मखमली हरी चादर ओढ़ लेती हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन (MP Tourism) के मुताबिक, यदि आप इस मानसूनी सीजन में प्रकृति के करीब जाकर सुकून के कुछ पल बिताना चाहते हैं, तो मध्य प्रदेश की ये 5 जादुई जगहें, जो अपने ऊंचे झरनों और खूबसूरत घाटियों के लिए जानी जाती हैं, आपके सफर को हमेशा के लिए यादगार बना देंगी।1. पचमढ़ी: मध्य प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन (Queen of Satpura)सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच बसा पचमढ़ी (Pachmarhi) मानसून के दौरान बादलों के साए में छिप जाता है। जुलाई से अक्टूबर के बीच यहां का तापमान बेहद सुहावना होता है और चारों तरफ गहरी हरी वादियां नजर आती हैं।मुख्य आकर्षण: यहां का 'बी फॉल' (Bee Fall) और 'डचेस फॉल' बारिश के दिनों में पूरे शबाब पर होते हैं। इसके अलावा हांडी खोह (गहरी घाटी) और धूपगढ़ से ढलते सूरज का नजारा देखना किसी जन्नत से कम नहीं लगता।कैसे पहुंचें: नजदीकी रेलवे स्टेशन पिपरिया (Pipariya) है, जो पचमढ़ी से लगभग 50 किलोमीटर दूर है।2. भेड़ाघाट (जबलपुर): धुआंधार जलप्रपात की जादुई बूंदेंजबलपुर से महज 25 किलोमीटर दूर स्थित भेड़ाघाट (Bhedaghat) नर्मदा नदी के तट पर संगमरमर की विशाल चट्टानों (Marble Rocks) के लिए प्रसिद्ध है।मुख्य आकर्षण: मानसून में जब नर्मदा का पानी उफान पर होता है, तो 'धुआंधार जलप्रपात' (Dhuandhar Waterfall) का नजारा देखने लायक होता है। पानी इतनी ऊंचाई और वेग से गिरता है कि चारों तरफ कोहरे या धुएं जैसा माहौल बन जाता है। बारिश के मौसम में संगमरमर की वादियों के बीच बहती जलधारा का यह रूप रोंगटे खड़े कर देने वाला होता है।3. मांडू: ऐतिहासिक खंडहरों और वादियों का मिलनइंदौर से लगभग 90 किलोमीटर दूर स्थित मांडू (Mandu) एक ऐसा ऐतिहासिक शहर है जो रानी रूपमती और बाज बहादुर के अमर प्रेम की गवाही देता है।मुख्य आकर्षण: मानसून के दिनों में मांडू के ऊंचे महलों और किलों के ऊपर काले बादल तैरते हुए नजर आते हैं। काकड़ा खोह जैसी गहरी हरी-भरी घाटियां और जहाज महल के आस-पास का प्राकृतिक सौंदर्य इस मौसम में देखते ही बनता है। इतिहास और प्रकृति प्रेमियों के लिए मानसून में मांडू घूमना एक बेहतरीन अनुभव है।4. अमरकंटक: नर्मदा का उद्गम और शांत वादियांमैकाल पहाड़ियों के बीच स्थित अमरकंटक (Amerkantak) एक पवित्र तीर्थ स्थल होने के साथ-साथ एक बेहद खूबसूरत प्राकृतिक स्थल भी है। यह हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी के बीच जलविभाजक का काम करता है।मुख्य आकर्षण: यहीं से पवित्र नर्मदा और सोन नदी का उद्गम होता है। मानसून में अमरकंटक के घने जंगल और पहाड़ियां बादलों से ढक जाती हैं। यहां का 'कपिल धारा' और 'दुग्ध धारा' जलप्रपात बारिश के पानी से सराबोर होकर सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।5. पातालपानी और तिंचा फॉल (इंदौर): वीकेंड के लिए बेस्ट डेस्टिनेशनयदि आप इंदौर या उसके आस-पास के इलाकों में हैं, तो मानसून का आनंद लेने के लिए पातालपानी (Patalpani) और तिंचा फॉल (Tincha Fall) से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती।मुख्य आकर्षण: पातालपानी जलप्रपात लगभग 300 फीट की ऊंचाई से गिरता है और इसके आस-पास की गहरी घाटियां पूरी तरह हरी-भरी हो जाती हैं। हालांकि, बारिश के मौसम में यहां पानी का बहाव अचानक बढ़ जाता है, इसलिए पर्यटकों को झरने के बहुत करीब न जाने और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने की सख्त सलाह दी जाती है।
नई दिल्ली/लखनऊ। मेडिकल क्षेत्र के उन अनुभवी प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी और राहत भरी खबर है जो बैंकिंग सेक्टर में एक प्रतिष्ठित और स्थायी सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने स्पेशलिस्ट कैडर ऑफिसर (SCO) के तहत बैंक मेडिकल ऑफिसर (BMO-II) के पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि को आगे बढ़ा दिया है। आधिकारिक अधिसूचना (Official Notification) के मुताबिक, जिन उम्मीदवारों ने किसी कारणवश 14 जुलाई 2026 की समय-सीमा तक अपना फॉर्म नहीं भरा था, वे अब 21 जुलाई 2026 तक एसबीआई के ऑफिशियल करियर पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन और फीस का भुगतान कर सकते हैं। इस भर्ती अभियान के जरिए देश भर के विभिन्न एसबीआई सर्किलों में कुल 35 रिक्त पदों को भरा जाना है।किन सर्किलों में हैं कितनी रिक्तियां?एसबीआई द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल 35 पदों में से सबसे अधिक 6-6 रिक्तियां उत्तर प्रदेश के लखनऊ और महाराष्ट्र सर्किल में उपलब्ध हैं। इसके अलावा राजस्थान के जयपुर और ओडिशा के भुवनेश्वर सर्किल में 4-4 पदों पर तथा बिहार के पटना सर्किल में 3 पदों पर भर्ती की जाएगी। बाकी बची वैकेंसियों को देश के अन्य सर्किलों में उनकी आवश्यकता के अनुसार आवंटित किया गया है।पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria) और आवश्यक योग्यताबैंक मेडिकल ऑफिसर के इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है:शैक्षणिक योग्यता: उम्मीदवार के पास नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) या किसी भी राज्य की मेडिकल काउंसिल द्वारा मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या कॉलेज से MBBS की डिग्री होनी अनिवार्य है। वांछनीय योग्यता के रूप में MD/MS या पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा धारकों को प्राथमिकता दी जाएगी।कार्य अनुभव: केवल डिग्री होना काफी नहीं है; पंजीकरण के बाद का न्यूनतम अनुभव होना जरूरी है। सिर्फ MBBS डिग्री वाले उम्मीदवारों के पास जनरल प्रैक्टिशनर के तौर पर 5 साल का अनुभव होना चाहिए। वहीं, पीजी डिग्री या डिप्लोमा धारकों के लिए न्यूनतम 3 साल का अनुभव आवश्यक है। ध्यान रहे कि इंटर्नशिप की अवधि को इस अनुभव में शामिल नहीं किया जाएगा।आयु सीमा: आवेदन के लिए उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 35 वर्ष (31 मई 2026 के आधार पर) निर्धारित की गई है। हालांकि, आरक्षित श्रेणियों को सरकारी नियमों के तहत अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी; जैसे ओबीसी (OBC) को 3 वर्ष, एससी-एसटी (SC-ST) को 5 वर्ष और दिव्यांग (PwBD) उम्मीदवारों को 10 वर्ष की छूट देय होगी।चयन प्रक्रिया और कितना मिलेगा वेतन?एसबीआई बीएमओ के पदों पर अंतिम रूप से चयनित होने वाले डॉक्टरों को मिडिल मैनेजमेंट ग्रेड स्केल-II (MMGS-II) के तहत 64,820 रुपये से लेकर 93,960 रुपये प्रति माह का मूल वेतनमान प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और 20 फीसदी नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) मिलाकर सकल वेतन काफी आकर्षक हो जाता है। इन पदों के लिए चयन प्रक्रिया लिखित परीक्षा, साक्षात्कार (Interview) और लोकल लैंग्वेज प्रोफिशिएंसी टेस्ट (LLPT) के आधार पर संपन्न की जाएगी। सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए आवेदन शुल्क 750 रुपये है, जबकि एससी, एसटी और दिव्यांगों के लिए आवेदन पूरी तरह निःशुल्क है।
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली और पूरे एनसीआर (Delhi-NCR) में मॉनसून की बेरुखी के चलते लोग भीषण और दमघोंटू उमस भरी गर्मी का सामना कर रहे हैं. इसी बीच मौसम विभाग (IMD) से दिल्लीवालों के लिए एक बड़ी राहत और एक बड़ी चेतावनी दोनों साथ आई हैं. दिल्ली में शुक्रवार (17 जुलाई) को पिछले 5 साल में जुलाई के महीने की सबसे गर्म रात दर्ज की गई, जिसने लोगों को बेहाल कर दिया. हालांकि, इस भीषण तपन के बीच अब मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विभाग ने आज शनिवार (18 जुलाई) और रविवार (19 जुलाई) के लिए दिल्ली-एनसीआर में आंधी-तूफान के साथ हल्की से मध्यम बारिश का 'येलो अलर्ट' (Yellow Alert) जारी किया है, जिससे तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है.न्यूनतम तापमान ने तोड़ा रिकॉर्ड, 2021 के बाद सबसे गर्म रातसफदरजंग मौसम केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान सामान्य से 3.8 डिग्री अधिक यानी 31 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। यह पिछले पांच वर्षों में जुलाई के महीने में दर्ज की गई सबसे गर्म रात है। इससे पहले 1 जुलाई 2021 को न्यूनतम तापमान 31.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था। रात के समय हवा पूरी तरह बंद होने और वातावरण में अत्यधिक नमी (Humidity) होने के कारण लोगों को घरों के भीतर और बाहर भारी परेशानी झेलनी पड़ी।38.8 डिग्री तापमान पर 51 डिग्री जैसी गर्मी का अहसासकेवल रात ही नहीं, बल्कि दिल्ली का दिन भी भयंकर रूप से तप रहा है। शुक्रवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान सामान्य से 3.6 डिग्री ज्यादा यानी 38.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, हवा में 46 से 74 फीसदी तक की उच्च आर्द्रता (उमस) के चलते लोगों को असल में 48 से 51 डिग्री सेल्सियस जैसी झुलसाने वाली गर्मी (Real Feel Temperature) महसूस हुई। लोधी रोड में अधिकतम तापमान 39 डिग्री और पालम में 38.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया.येलो अलर्ट: वीकेंड पर तेज हवाओं के साथ बारिश की उम्मीदमौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं के कारण दिल्ली का मौसम आज दोपहर बाद बदल सकता है। शनिवार और रविवार को आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की प्रबल संभावना है। इस बारिश से उमस से तो तुरंत राहत नहीं मिलेगी, लेकिन अधिकतम तापमान 3 डिग्री तक गिरकर 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास आ सकता है.20 जुलाई के बाद आएगा मॉनसून का असली यू-टर्नस्काईमेट और आईएमडी के विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में मॉनसून का जो लंबा ब्रेक चल रहा था, वह अब समाप्त होने की कगार पर है। असली और व्यापक राहत 20 से 22 जुलाई के बीच देखने को मिलेगी। इस दौरान दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में भारी बारिश का दौर शुरू होगा, जिससे लंबे समय से सूखी पड़ी दिल्ली को भीषण गर्मी से पूरी तरह निजात मिल सकेगी। इस बीच, शुक्रवार शाम दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 176 दर्ज किया गया, जो 'मध्यम' श्रेणी में बना हुआ है.
नई दिल्ली/लखनऊ। क्रिकेट जगत से एक बेहद दुखद और स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई है। खेल इतिहास के सबसे महान ऑलराउंडर और वेस्टइंडीज के पूर्व दिग्गज कप्तान सर गारफील्ड सोबर्स (Sir Garfield Sobers) का 89 वर्ष की आयु में बारबाडोस में उनके गृह आवास पर निधन हो गया है। सर गारफील्ड सोबर्स, जिन्हें उनके चाहने वाले प्यार से 'गैरी सोबर्स' भी कहते थे, क्रिकेट इतिहास की उन चुनिंदा हस्तियों में शामिल थे जिन्होंने इस खेल को एक नई परिभाषा दी। उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने की है, जिसके बाद से पूरी दुनिया के क्रिकेटर्स और खेल प्रेमी इस महान खिलाड़ी को श्रद्धांजलि दे रहे हैं।क्रिकेट के इतिहास में 'किंग क्रिकेट' का सफर28 जुलाई 1936 को बारबाडोस में जन्मे सर गारफील्ड सोबर्स ने साल 1954 से 1974 के बीच दो दशकों तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर राज किया। उन्होंने वेस्टइंडीज के लिए 93 टेस्ट मैच खेले, जिसमें 57.78 की बेमिसाल औसत से 8,032 रन बनाए, जिसमें 26 शतक और 30 अर्धशतक शामिल थे। वह केवल एक महान बल्लेबाज नहीं थे, बल्कि अपनी जादुई बाएं हाथ की गेंदबाजी से उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 235 विकेट भी चटकाए। सोबर्स की खासियत यह थी कि वे तेज गति (Medium Fast) से लेकर ऑर्थोडॉक्स स्पिन और रिस्ट स्पिन तीनों तरह की गेंदबाजी करने में माहिर थे।एक ओवर में 6 छक्के जड़ने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाजक्रिकेट की किताबों में सर गारफील्ड सोबर्स का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज है, क्योंकि वे प्रथम श्रेणी क्रिकेट (First-Class Cricket) में एक ओवर की सभी 6 गेंदों पर 6 छक्के लगाने वाले दुनिया के सबसे पहले बल्लेबाज बने थे। उन्होंने यह ऐतिहासिक कारनामा 31 अगस्त 1968 को नॉटिंघमशायर की तरफ से खेलते हुए ग्लैमॉर्गन के स्पिनर मैल्कम नैश के खिलाफ किया था। उनके इस रिकॉर्ड ने क्रिकेट की दुनिया में आक्रामक बल्लेबाजी के एक नए युग की शुरुआत की थी।पाकिस्तान के खिलाफ बनाया था 365 रनों का रिकॉर्ड*सर गैरी सोबर्स ने साल 1958 में पाकिस्तान के खिलाफ खेलते हुए नाबाद 365 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली थी। यह उस समय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का किसी भी बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर था। सोबर्स का यह जादुई रिकॉर्ड 36 सालों तक अटूट रहा, जिसे बाद में साल 1994 में उन्हीं के हमवतन और वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा (375 रन) ने तोड़ा था।विजडन ने चुना था 'क्रिकेटर ऑफ द सेंचुरी', मिला था नाइटहुडउनकी इसी महानता और खेल के प्रति अद्भुत योगदान को देखते हुए साल 1975 में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने उन्हें 'नाइटहुड' (सर की उपाधि) से सम्मानित किया था। इसके बाद साल 2000 में विजडन ने उन्हें 20वीं सदी के 5 सबसे महान क्रिकेटरों की सूची में शामिल किया था। आधुनिक युग में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) साल के सर्वश्रेष्ठ पुरुष क्रिकेटर को सम्मानित करने के लिए जो सबसे बड़ा पुरस्कार देती है, उसका नाम भी इन्हीं के सम्मान में 'सर गारफील्ड सोबर्स ट्रॉफी' रखा गया है। उनके निधन से क्रिकेट के एक गौरवशाली युग का अंत हो गया है, लेकिन उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।
नई दिल्ली/लखनऊ। आज शनिवार का दिन है और बैंकों से जुड़े कामकाज निपटाने वाले ग्राहकों के मन में अक्सर यह असमंजस रहता है कि आज बैंक खुले हैं या बंद (Bank Open or Closed Today)। यदि आप भी आज यानी 18 जुलाई 2026 को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), एचडीएफसी (HDFC), आईसीआईसीआई (ICICI) या पंजाब नेशनल बैंक (PNB) जैसी किसी भी सरकारी या प्राइवेट बैंक शाखा में जाने का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आधिकारिक हॉलिडे कैलेंडर के मुताबिक, आज देश के अधिकांश हिस्सों में बैंक पूरी तरह खुले रहेंगे और आम दिनों की तरह ही कामकाज होगा।तीसरे शनिवार को खुले रहते हैं बैंक: क्या है RBI का नियम?आरबीआई (RBI) के नियमानुसार, देश के सभी शेड्यूल्ड और नॉन-शेड्यूल्ड बैंक हर महीने के केवल दूसरे (2nd) और चौथे (4th) शनिवार को ही बंद रहते हैं। चूंकि आज 18 जुलाई महीने का तीसरा शनिवार (3rd Saturday) है, इसलिए इसे बैंक वर्किंग डे (कार्यदिवस) माना जाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली-NCR, मुंबई और कोलकाता समेत देश के लगभग सभी प्रमुख राज्यों व शहरों में आज ग्राहक इन-ब्रांच जाकर कैश डिपॉजिट, चेक क्लीयरेंस, डिमांड ड्राफ्ट और पासबुक अपडेट जैसे तमाम काम आसानी से करवा सकते हैं।सिक्किम में आज रहेगी छुट्टी, जानिए क्या है कारण?देशभर में बैंक खुले होने के बावजूद, आज सिक्किम राज्य में सभी बैंक पूरी तरह बंद रहेंगे। दरअसल, आज सिक्किम में पवित्र बौद्ध त्योहार 'द्रुकपा त्शे-जी' (Drukpa Tshe-zi) मनाया जा रहा है। यह त्योहार भगवान बुद्ध द्वारा ज्ञान प्राप्ति के बाद सारनाथ के डियर पार्क में अपने पहले पांच शिष्यों को दिए गए 'चार आर्य सत्यों' के प्रथम उपदेश की याद में मनाया जाता है। इस क्षेत्रीय त्योहार के कारण आरबीआई ने केवल गंगटोक और सिक्किम के अन्य शहरों में आज बैंकों के लिए अवकाश घोषित किया है।डिजिटल और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं रहेंगी चालूसिक्किम के ग्राहकों सहित जिन भी लोगों को आज बैंक बंद होने के कारण असुविधा हो रही है, वे डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं। एटीएम (ATM), इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग ऐप्स और यूपीआई (UPI) सेवाएं 24 घंटे बिना किसी रुकावट के काम करती रहेंगी। इन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए आप पैसों का ट्रांसफर और बिलों का भुगतान घर बैठे ही कर सकते हैं।
नई दिल्ली/लखनऊ। फुटबॉल इतिहास के सबसे बड़े और बहुप्रतीक्षित महामुकाबले से ठीक पहले फाइनल मैच के वेन्यू (स्टेडियम) के बाहर जबरदस्त हंगामा, अफरा-तफरी और अराजकता का माहौल पैदा हो गया है। फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup) के खिताबी क्लैश में एक तरफ जहां सर्वकालिक महान खिलाड़ी लियोनेल मेसी (Lionel Messi) की साख दांव पर है, वहीं दूसरी तरफ दुनिया के सबसे उभरते हुए युवा सनसनी लामिन यमाल (Lamine Yamal) इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतरने वाले हैं। इस ऐतिहासिक 'मेसी बनाम यमाल' की जंग को लाइव देखने के लिए दुनियाभर से लाखों फैंस स्टेडियम पहुंचे हैं। लेकिन मैच की किक-ऑफ से कुछ घंटे पहले ही स्टेडियम के प्रवेश द्वारों (Entry Gates) के बाहर सुरक्षा घेरा टूटने और भारी भीड़ के अनियंत्रित होने के कारण बड़ा बवाल खड़ा हो गया, जिससे वेन्यू पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई।स्टेडियम के बाहर क्यों मची आफत और अफरा-तफरी?ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, फाइनल मुकाबले को लेकर दर्शकों का उत्साह इस कदर चरम पर था कि हजारों की संख्या में बिना टिकट वाले फैंस भी स्टेडियम के सुरक्षा बैरिकेड्स को तोड़कर जबरन अंदर घुसने का प्रयास करने लगे। देखते ही देखते प्रवेश द्वारों पर भारी भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। टिकट धारक फैंस, जो घंटों से कतारों में खड़े थे, वे भी इस अराजकता के कारण फंस गए। भीड़ के दबाव को बढ़ता देख सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए और स्टेडियम के मुख्य द्वारों को कुछ समय के लिए पूरी तरह बंद करना पड़ा, जिससे वेन्यू के बाहर भारी आक्रोश और चिल्ला-पुल्ली का माहौल बन गया।पुलिस ने संभाला मोर्चा, मैच की टाइमिंग पर संकटस्थिति को बेकाबू होता देख स्थानीय दंगा नियंत्रण पुलिस और अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तुरंत मोर्चे पर तैनात किया गया। पुलिस ने उग्र भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया और कई उपद्रवियों को हिरासत में लिया है। स्टेडियम के बाहर मचे इस भयंकर बवाल और अफरा-तफरी के कारण खिलाड़ियों के अभ्यास सत्र और वीआईपी मूवमेंट पर भी गहरा असर पड़ा है। खेल प्रेमियों और फीफा (FIFA) अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर भी चिंता बढ़ गई है कि क्या इस सुरक्षा चूक और हंगामे की वजह से महामुकाबले की शुरुआत में देरी हो सकती है।पिच पर मेसी बनाम लामिन यमाल का ऐतिहासिक क्लैशसुरक्षा के इस बड़े बवाल के इतर, अगर खेल की बात करें तो पूरी दुनिया की नजरें इस फाइनल मैच पर टिकी हैं। अर्जेंटीना के करिश्माई कप्तान लियोनेल मेसी के करियर का यह आखिरी और सबसे बड़ा इम्तिहान माना जा रहा है, जहां वे एक बार फिर विश्व विजेता का ताज अपने सिर सजाना चाहते हैं। वहीं दूसरी तरफ, स्पेनिश सनसनी लामिन यमाल अपनी जादुई ड्रिबलिंग और रफ्तार से मेसी के साम्राज्य को चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। फुटबॉल पंडितों का मानना है कि यह मैच केवल दो देशों की जंग नहीं, बल्कि फुटबॉल के वर्तमान और भविष्य के बीच का सबसे ऐतिहासिक मुकाबला है, बशर्ते स्टेडियम के बाहर की सुरक्षा स्थिति को जल्द से जल्द पूरी तरह नियंत्रित कर लिया जाए।
लखनऊ। शादी हर इंसान की जिंदगी का एक बेहद खूबसूरत और बड़ा टर्निंग पॉइंट होता है। विवाह के शुरुआती कुछ महीने यानी 'हनीमून पीरियड' (Honeymoon Period) किसी परियों की कहानी या रोमांटिक फिल्म जैसा महसूस होता है, जहां हर तरफ सिर्फ प्यार और खुशियां नजर आती हैं। लेकिन रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स और मैरिज काउंसलर्स के मुताबिक, जैसे ही यह शुरुआती खुमार उतरता है, कपल्स का सामना व्यावहारिक जीवन की कड़वी सच्चाइयों से होता है। कई लोग इन बदलावों के लिए पहले से तैयार नहीं होते, जिससे उनके बीच मनमुटाव शुरू हो जाता है। अगर आप भी अपनी शादीशुदा जिंदगी को हकीकत के धरातल पर मजबूत बनाना चाहते हैं, तो शादी से जुड़े उन 5 बड़े और अनकहे सच (Bitter Truths) को जानना बेहद जरूरी है, जो अक्सर लोग आपसे छुपा जाते हैं।1. सिर्फ प्यार से नहीं, समझौते और एडजस्टमेंट से चलती है शादीफिल्मी दुनिया के उलट, असल जिंदगी में केवल 'प्यार' के भरोसे पूरी जिंदगी नहीं काटी जा सकती। शादी के बाद दो अलग-अलग बैकग्राउंड, आदतों और सोच वाले लोग एक छत के नीचे रहते हैं। ऐसे में रोजमर्रा के कामों, खानपान और रहन-सहन को लेकर एक-दूसरे की पसंद-नापसंद का सम्मान करना पड़ता है। शादीशुदा जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई यही है कि यह रिश्ता आपसी समझौतों (Compromises) और निरंतर एडजस्टमेंट के बल पर ही सालों-साल टिकता है।2. पार्टनर की कमियां और खामियां खुलकर सामने आती हैंडेटिंग या कोर्टशिप के दिनों में लोग अक्सर अपना सबसे अच्छा रूप (Best Version) ही सामने वाले को दिखाते हैं। लेकिन शादी के बाद जब आप 24 घंटे साथ रहते हैं, तो पार्टनर की वो आदतें भी सामने आ जाती हैं जो शायद आपको पसंद न हों—जैसे उनका गुस्सा, आलस्य या चीजों को अव्यवस्थित रखना। इस कड़वे सच को स्वीकार करना जरूरी है कि कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता और आपको उनकी खूबियों के साथ-साथ उनकी कमियों को भी अपनाना होगा।3. रोमांस की जगह ले लेती हैं घरेलू जिम्मेदारियांहनीमून पीरियड खत्म होते ही कैंडल लाइट डिनर और लॉन्ग ड्राइव की जगह घर के जरूरी काम, जैसे—किचन का राशन, बिजली का बिल, साफ-सफाई और मासिक बजट (Budgeting) ले लेते हैं। जिम्मेदारियों के इस बोझ के तले शुरुआती रोमांस थोड़ा धीमा जरूर हो जाता है। जो कपल्स इस बदलाव को समझदारी से स्वीकार कर टीमवर्क की तरह काम करते हैं, उनका रिश्ता समय के साथ और ज्यादा मैच्योर और गहरा होता चला जाता है।4. दोनों परिवारों को संभालना एक बड़ी चुनौती बनता हैशादी सिर्फ दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का भी मिलन है। शादी के बाद आपको न केवल अपने पार्टनर को खुश रखना होता है, बल्कि उनके माता-पिता और रिश्तेदारों (In-laws) के साथ भी एक सही तालमेल बिठाना पड़ता है। कई बार दोनों परिवारों की परंपराओं और उम्मीदों में अंतर होने के कारण कपल्स के बीच वैचारिक मतभेद या तनाव पैदा हो जाता है, जिसे बेहद सूझबूझ और धैर्य से संभालने की जरूरत होती है।5. बिना कोशिश किए रिश्ते में बोरियत आना स्वाभाविक हैशादी के कुछ साल बीत जाने के बाद जिंदगी एक तय रूटीन (Monotonous) में बंध जाती है, जिससे रिश्ते में एक तरह की बोरियत या खालीपन महसूस हो सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैवाहिक जीवन में चिंगारी और नयापन बनाए रखने के लिए दोनों पार्टनर्स को लगातार प्रयास करने पड़ते हैं। बिना कोशिश किए या एक-दूसरे को 'टेकन फॉर ग्रांटेड' लेने से रिश्ते में दूरियां बढ़ सकती हैं। इसलिए समय-समय पर एक साथ क्वालिटी टाइम बिताना बेहद जरूरी है।
लखनऊ। शादी के बाद एक नए और खूबसूरत जीवन की शुरुआत होती है, जहां ढेर सारी खुशियों के साथ-साथ कई नई जिम्मेदारियां भी आती हैं। नए शादीशुदा जोड़ों (Newlyweds) के लिए शुरुआती समय बेहद रोमांचक होता है, लेकिन हनीमून, शॉपिंग और घर को नए सिरे से सजाने के चक्कर में अक्सर बजट बिगड़ जाता है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शादी के शुरुआती महीनों में पैसों को लेकर की गई लापरवाही आगे चलकर वैवाहिक जीवन में तनाव का एक बड़ा कारण बन सकती है। यदि आप अपनी शादीशुदा जिंदगी को बिना किसी आर्थिक तंगी के खुशहाल बनाना चाहते हैं, तो शुरुआत से ही कुछ स्मार्ट मनी सेविंग टिप्स (Money Saving Hacks) अपनाना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं उन 5 बेहतरीन तरीकों के बारे में जिनसे आप और आपका पार्टनर मिलकर एक सुरक्षित और मजबूत आर्थिक भविष्य बना सकते हैं।1. एक साथ बैठकर बनाएं व्यावहारिक बजट (Joint Budgeting)शादी के बाद सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम यह है कि दोनों पार्टनर एक साथ बैठें और अपनी कुल मासिक आय (Income) और खर्चों का एक पारदर्शी ब्योरा तैयार करें। घर का किराया, ग्रॉसरी, बिजली बिल और लोन की EMI जैसे जरूरी खर्चों को पहले अलग रखें। इसके बाद मनोरंजन और बाहर खाने-पीने के लिए एक निश्चित सीमा तय करें। जब आप दोनों मिलकर बजट बनाते हैं, तो फिजूलखर्ची पर लगाम लगाना बेहद आसान हो जाता है।2. 'हमारा' सेविंग अकाउंट और इमरजेंसी फंड तैयार करेंभले ही आप दोनों के अपने अलग-अलग पर्सनल बैंक अकाउंट हों, लेकिन एक जॉइंट सेविंग अकाउंट खुलवाना एक बेहतरीन कदम हो सकता है, जिसमें दोनों पार्टनर हर महीने एक निश्चित राशि जमा करें। इसके अलावा, जीवन में आने वाली किसी भी अनपेक्षित समस्या जैसे—अचानक नौकरी जाना या मेडिकल इमरजेंसी—से निपटने के लिए एक 'इमरजेंसी फंड' (Emergency Fund) बनाएं। इस फंड में कम से कम आपके 6 महीने के खर्च के बराबर की राशि सुरक्षित होनी चाहिए।3. 'पहले बचत, फिर खर्च' का स्वर्णिम नियम अपनाएंज्यादातर लोग सैलरी आने के बाद पहले पूरे महीने खर्च करते हैं और अंत में जो बचता है उसे सेव करते हैं। फाइनेंशियल गुरुओं के अनुसार, अमीर बनने का सही नियम इसके बिल्कुल उलट है। जैसे ही हाथ में पैसा आए, सबसे पहले उसका एक तय हिस्सा (कम से कम 20 से 30 फीसदी) निवेश या बचत के लिए अलग निकाल दें। इसके बाद बची हुई रकम से ही पूरे महीने के खर्चों को प्रबंधित करें।4. म्यूचुअल फंड और SIP के जरिए मिलकर करें स्मार्ट निवेशसिर्फ बैंक खाते में पैसा रखना महंगाई के दौर में काफी नहीं है। अपने वित्तीय लक्ष्यों (जैसे—भविष्य में घर खरीदना, कार लेना या बच्चों की पढ़ाई) के अनुसार म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds), एसआईपी (SIP), पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) या शेयर बाजार में निवेश की योजना बनाएं। कम उम्र में और शादी के तुरंत बाद शुरू किया गया छोटा सा निवेश भी कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि ब्याज) की ताकत से भविष्य में एक विशाल फंड में तब्दील हो जाता है।5. कर्ज की आदतों से बचें और वित्तीय लक्ष्यों पर बात करेंआधुनिक लाइफस्टाइल में क्रेडिट कार्ड का अंधाधुंध इस्तेमाल और हर छोटी-बड़ी चीज के लिए 'नो-कॉस्ट ईएमआई' या पर्सनल लोन लेना नए जोड़ों को कर्ज के जाल में फंसा सकता है। दिखावे की संस्कृति से दूर रहें और कोई भी बड़ा खर्च करने से पहले आपस में चर्चा जरूर करें। हर हफ्ते या महीने में एक बार अपने फाइनेंशियल गोल्स को रिव्यू करें कि आप सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं या नहीं।
लखनऊ। विवाह एक ऐसा पवित्र और अटूट बंधन है जो पूरी तरह से आपसी विश्वास, ईमानदारी और समर्पण पर टिका होता है। लेकिन आधुनिक समय में भागदौड़ भरी जिंदगी, सोशल मीडिया का अत्यधिक प्रभाव और भावनात्मक दूरियों के कारण कई बार रिश्तों में दरार आ जाती है। शादीशुदा जिंदगी में सबसे बड़ा झटका तब लगता है जब किसी एक पार्टनर का झुकाव शादी के बाहर (Extra-Marital Affair) किसी और की तरफ होने लगता है। रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स और मैरिज काउंसलर्स के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति जब किसी गुप्त रिश्ते में होता है, तो वह अनजाने में अपनी रोजमर्रा की आदतों और व्यवहार में कुछ ऐसे बदलाव करने लगता है, जिन्हें अगर समय रहते पहचान लिया जाए तो रिश्ते की सच्चाई सामने आ सकती है। आइए जानते हैं उन 5 प्रमुख संकेतों के बारे में जो पार्टनर की बेवफाई की ओर इशारा करते हैं।1. मोबाइल और गैजेट्स को लेकर अचानक अत्यधिक गोपनीयताअगर आपके पार्टनर का फोन पहले अक्सर ऐसे ही टेबल पर खुला रहता था, लेकिन अब वे अचानक अपने फोन, लैपटॉप या सोशल मीडिया अकाउंट्स को लेकर बहुत ज्यादा सतर्क (Secretive) हो गए हैं, तो यह एक बड़ा संकेत हो सकता है। फोन में नए पासवर्ड लगाना, स्क्रीन को हमेशा नीचे की तरफ करके रखना, आपके सामने आने पर तुरंत चैट बंद कर देना या देर रात तक छिपकर मैसेजिंग करना जैसी आदतें रिश्तों में कुछ छुपाए जाने की ओर साफ इशारा करती हैं।2. ग्रूमिंग और लुक्स पर अचानक बहुत ज्यादा ध्यान देनात्वचा विशेषज्ञों (डर्मेटोलॉजिस्ट) और ब्यूटी एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि जब कोई व्यक्ति किसी नए रोमांटिक रिश्ते में आता है, तो वह अपने लुक्स, कपड़ों और ग्रूमिंग को लेकर अचानक बेहद गंभीर हो जाता है। बिना किसी खास वजह के जिम जाना शुरू कर देना, नया वार्डरोब कलेक्शन खरीदना, महंगे परफ्यूम का इस्तेमाल करना और स्किन केयर रूटीन पर अचानक ज्यादा वक्त बिताना भी इस बात का संकेत हो सकता है कि वे किसी नए व्यक्ति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।3. भावनात्मक रूप से दूर होना और बातचीत बंद करना (Emotional Distance)एक स्वस्थ विवाह की पहचान यह है कि दोनों पार्टनर आपस में दिनभर की बातें और अपनी भावनाएं साझा करते हैं। लेकिन अगर आपका जीवनसाथी अब आपसे कतराने लगा है, आपकी बातों में रुचि नहीं लेता और घर में रहने के बावजूद एक मानसिक दूरी (Communication Gap) महसूस होती है, तो यह चिंता का विषय है। जब किसी का भावनात्मक जुड़ाव कहीं और हो जाता है, तो वह अपने मौजूदा पार्टनर से पूरी तरह कूटनीतिक या औपचारिक बातचीत तक सीमित हो जाता है।4. बिना वजह गुस्सा करना और छोटी बातों पर झगड़नाएक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर में शामिल व्यक्ति अक्सर एक आंतरिक अपराध बोध (Guilt) से गुजर रहा होता है। इस अपराध बोध को छुपाने के लिए वे अपने पार्टनर में कमियां निकालना शुरू कर देते हैं। अगर बात-बात पर चिढ़ जाना, बिना किसी ठोस वजह के आप पर शक करना या घर में कलह का माहौल बनाना उनकी आदत बन चुका है, तो वे असल में अपने गलत व्यवहार को सही साबित करने के लिए ऐसा रक्षात्मक रवैया अपना रहे होते हैं।5. रूटीन में अचानक बदलाव और पैसों का अस्पष्ट खर्चऑफिस से अक्सर देर से घर आना, लगातार बिजनेस ट्रिप्स का बढ़ जाना या दोस्तों के साथ ज्यादा वक्त बिताने के बहाने बनाना भी एक आम संकेत है। इसके अलावा, अगर उनके बैंक स्टेटमेंट्स में अचानक ऐसा खर्च दिख रहा है जिसका कोई स्पष्ट हिसाब नहीं है—जैसे महंगे रेस्तरां के बिल, तोहफों की खरीदारी या होटल बुकिंग—तो यह इस बात का मजबूत प्रमाण हो सकता है कि वे अपनी शादीशुदा जिंदगी से बाहर समय और पैसा निवेश कर रहे हैं।

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