जयपुर को मिली पहली महिला उपमहापौर, भाजपा की सरोज कंवर ने कांग्रेस के सलमान मंसूरी को हराया
जयपुर। जयपुर नगर निगम के उपमहापौर पद पर भारतीय जनता पार्टी की सरोज कंवर निर्वाचित हुई हैं। शनिवार को हुए चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी सलमान मंसूरी को पराजित किया। इसके साथ ही सरोज कंवर जयपुर नगर निगम के इतिहास में पहली महिला उपमहापौर बनी हैं। उपमहापौर चुनाव के लिए भाजपा ने वार्ड संख्या 90 […] The post जयपुर को मिली पहली महिला उपमहापौर, भाजपा की सरोज कंवर ने कांग्रेस के सलमान मंसूरी को हराया appeared first on Sabguru News .
UP में 13 की मौत, छत्तीसगढ़ में नदियां उफान पर, 'अर्नब' के तांडव से 14 राज्यों में हाहाकार
बंगाल की खाड़ी से उठा अर्नब चक्रवात भले ही अब कमजोर पड़ गया हो, लेकिन इसकी वजह से कई राज्यों में जमकर बारिश हो रही है. उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में तेज बारिश देखने को मिली है. 14 राज्यों में अलर्ट जारी किया गया है. छत्तीसगढ़ में मौसम का सबसे ज्यादा कहर देखने को मिल रहा है.
पलक ने पति संग हनीमून की खूबसूरत तस्वीरें शेयर कीं
मशहूर टीवी एक्ट्रेस पलक पुरसवानी शादी के बाद से पति रोहन खन्ना संग ड्रीम लाइफ जी रही हैं. वो आए दिन पोस्ट शेयर करके फैंस को ट्रीट देती हैं.पलक ने अब अपने हनीमून से कुछ खास तस्वीरें शेयर की हैं.
Asian Games के लिए बुलेट ट्रेन से नागोया पहुंची टीम इंडिया! GOLD पर नजर
भारतीय टीम एशियन गेम्स में अपने सफर की शुरुआत 28 सितंबर से करने वाली है. भारतीय टीम की पहली टक्कर अफगानिस्तान से होगी. इस मुकाबले में अपना दमखम दिखाने के लिए भारतीय खिलाड़ी पूरी तरह तैयार हैं.
नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ का आरोपी कंप्यूटर शिक्षक राजस्थान से अरेस्ट, बीजापुर पुलिस की कार्रवाई
बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में एक आवासीय विद्यालय की नाबालिग छात्रा से कथित छेड़छाड़ के मामले में फरार चल रहे कंप्यूटर शिक्षक को पुलिस ने राजस्थान के झालावाड़ जिले से गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज है। पुलिस के अनुसार पीड़ित […] The post नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ का आरोपी कंप्यूटर शिक्षक राजस्थान से अरेस्ट, बीजापुर पुलिस की कार्रवाई appeared first on Sabguru News .
2027 वर्ल्ड कप से पहले विराट कोहली ने किया बड़ा ऐलान
विराट कोहली ने संकेत दिया कि 2027 वनडे वर्ल्ड कप भारत के लिए उनका आखिरी 50 ओवर का विश्व कप होगा। वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज से पहले उन्होंने कहा कि यह उनके लिए बड़ी प्रेरणा है और वह टूर्नामेंट में अपना 100 प्रतिशत देना चाहते हैं।
‘वैनिश कुमार को जाना होगा, आखिरी दम तक उठाएंगे आवाज’; ज्ञानेश कुमार पर ममता बनर्जी का तंज
ममता बनर्जी ने शनिवार को कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर तब तक प्रदर्शन करती रहेगी, जब तक इसका समाधान नहीं हो जाता। उन्होंने एसआईआर के तहत मतदाता सूची से नाम हटने वाले लोगों को मुआवजा देने की भी मांग की।
ज्ञानेश कुमार के सपोर्ट में उतरे एनडीए के एक सहयोगी, पहले चिराग पासवान ने उठाए थे सवाल
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने निर्वाचन आयोग की तरफ से जारी बयान के बाद संवैधानिक संस्था पर अपना भरोसा जताया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के लिए भारत की चुनावी संस्था पर भरोसा कम करने की कोशिश करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों के साथ बैठक कर एसआईआर प्रक्रिया को लेकर मतभेद की अटकलों को विराम दिया।
यूपी से लेकर महाराष्ट्र तक... मौसम का बिगड़ा मिजाज, देखें विशेष
विशेष में आज बात मौसम के बदले मिजाज के साथ...देश के कई राज्य इस बारिश बारिश और बाढ की चपेट में हैं.. जी हां आम तौर ऐसा होता है कि सितंबर खत्म होते होते बारिश कम हो जाती है...लेकिन इस बार तस्वीर एकदम अलग नजर आ रही है... यूपी,छत्तीगढ़,झारखंड,बिहार,महाराष्ट्र से लेकर पहाड़ों तक मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है. देखें...
महिला के अपहरण की कोशिश के पीछे 19 साल की युवती, ये है पूरी कहानी
देहरादून के रायपुर इलाके में महिला को जबरन कार में बैठाने की कोशिश के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है. जांच में सामने आया कि डेयरी के कारोबार में हुए 7.50 लाख रुपये के लेनदेन को लेकर विवाद था. महिला को डराने के लिए पांच आरोपी पहुंचे थे. पुलिस ने 19 वर्षीय युवती को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि चार आरोपी फरार हैं.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने चुनाव आयोग के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया पर दिए स्पष्टीकरण को गोलमोल बताया है।
'सच सामने आ गया', वोटर लिस्ट में बदलाव को लेकर कोई मतभेद नहीं; EC की सफाई पर बीजेपी का बयान
भारत के चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर स्पष्ट किया कि सभी फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की पूर्ण सहमति से लिए गए थे।
SIR पर फिर साथ आए राज-उद्धव ठाकरे, 4 अक्टूबर को करेंगे विरोध मार्च
राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र में 4 अक्टूबर को SIR के खिलाफ विरोध मार्च का ऐलान किया है. दोनों ने चुनाव आयोग पर बीजेपी के पक्ष में काम करने और मतदाताओं के साथ धोखा करने का आरोप लगाया है.
अखिलेश यादव का PDA रथ रायबरेली से ही क्यों चला? देखें हल्ला बोल
उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे और राजनीतिक वर्चस्व को लेकर खींचतान जारी है. रायबरेली में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की पीडीए रथ यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में गरमागरम बहस छिड़ गई है. देखें हल्ला बोल.
ईरान ने अमेरिका के सामने क्या नया प्रस्ताव रखा? देखें दुनिया आजतक
ईरान ने अमेरिका के सामने एक प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत होर्मुज़ स्ट्रेट को एक हफ़्ते के भीतर फिर से खोला जा सकता है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि ये प्रस्ताव क़तर के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया गया है और अब फ़ैसला अमेरिका के हाथ में है. देखें...
'2 साल से न मिले, न बात की', प्रेमानंद के शिष्य की मौत के बाद बोले परिजन
प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण ने शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे बाराह घाट मार्ग स्थित गुरु कृपा कुंज आश्रम की छत से कूदकर आत्महत्या कर ली. सोनू पटेल ने बताया कि दीपक लोधी साल 2024 से प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़ा था. उन्होंने बताया कि जब से दीपक ने गुरु दक्षिणा ली थी, तब से परिवार से उसे नहीं मिलने दिया गया.
Maharashtra के 265 तालुके सूखा प्रभावित घोषित, किसानों के लिए राहत उपायों का ऐलान
महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को राज्य के 358 तालुकों में से 265 को यानी करीब तीन चौथाई हिस्से को सूखा प्रभावित घोषित करते हुए राहत उपायों की घोषणा की, जिनमें फसल ऋण नियमों को आसान बनाने, भू-राजस्व में छूट और बिजली बिल में सब्सिडी शामिल है। सरकार तय प्रक्रिया के बाद फसल के नुकसान के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा करेगी। इस बीच, पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि लातूर जिले की शिरूर अनंतपाल तहसील में, बारिश की कमी से फसल के नुकसान और कर्ज के कारण एक किसान ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। शुक्रवार देर रात जारी सरकारी आदेश के अनुसार, 32 जिलों में फैले 265 तालुकों में राज्य का 74 प्रतिशत हिस्सा आ गया है। छत्रपति संभाजीनगर मंडल में सूखे से प्रभावित तालुकों की संख्या सबसे ज्यादा (74) है। शनिवार को जारी एक और सरकारी आदेश में कहा गया कि तय प्रक्रिया के बाद, 265 तालुकों में किसानों को फसल के नुकसान के लिए आर्थिक मदद देने के संबंध में एक अलग सरकारी आदेश जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जिलाधिकारियों को फसल के नुकसान का आकलन तुरंत शुरू करने का निर्देश दिया है और भरोसा दिलाया है कि सूखे की स्थिति में सरकार की राहत कोशिशों के केंद्र में किसान ही रहेंगे। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि किसानों को दी जाने वाली वास्तविक आर्थिक सहायता का निर्णय जमीनी स्तर पर आकलन के बाद किया जाएगा। राज्य सरकार ने सूखे की स्थिति घोषित करने और राहत कार्य शुरू करने के लिए अपने ‘सूखा प्रबंधन नियम 2016’ (2020 में अद्यतन) और ‘सूखा प्रबंधन संहिता’ के तहत ‘ट्रिगर-1’ कदम लागू किया है। ‘ट्रिगर-1’ राज्य के सूखा प्रबंधन ढांचे का पहला चरण है। इसे तब लागू किया जाता है जब बारिश में 25 प्रतिशत से ज़्यादा की कमी हो और 21 दिन तक लगातार सूखे (बिना बारिश वाला समय) का दौर रहे। कृषि आयुक्त की एक रिपोर्ट में पाया गया कि जून से बारिश कम होने और अन्य कारणों से 32 जिलों के 265 तालुकों में सूखे जैसे हालात हैं। रिपोर्ट के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर मंडल में सूखे से प्रभावित तालुकों की संख्या सबसे ज्यादा (74) है; इसके बाद अमरावती (56), नासिक (49), नागपुर (39), पुणे (35) और ठाणे (12) का स्थान है। सूची में रायगढ़ का एक, रत्नागिरि के तीन और सिंधुदुर्ग के आठ तालुका भी शामिल हैं। सरकार ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित तालुकों में फसल के नुकसान का आकलन शुरू करें और फसल की स्थिति का रिकॉर्ड रखने के लिए सर्वेक्षण वाले इलाकों की तस्वीरें तथा जीपीएस अवस्थिति के आंकड़े एकत्र करें। ये रिपोर्ट कृषि आयुक्त के जरिए सरकार को सौंपी जानी हैं। सरकार ने कई राहत उपायों की घोषणा की है, जिनमें भू-राजस्व में छूट, फसल ऋण नियमों को सुगम करना, खेती से जुड़े ऋण की वसूली को टालना और खेती में इस्तेमाल होने वाले पंपों के बिजली बिल में छूट आदि शामिल है। सरकारी आदेश में कहा गया कि 7.5 हॉर्सपॉवर तक के खेती पंपों के बिजली बिल पहले ही माफ़ कर दिए गए थे और नयी घोषित छूट प्रभावित इलाकों में इससे ज़्यादा क्षमता वाले पंपों पर लागू होगी। इन उपायों में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के परीक्षा शुल्क को माफ करना, ज़्यादा से ज़्यादा काम उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के नियमों में ढील देना, ज़रूरत पड़ने पर पानी के टैंकर भेजना और पानी की कमी वाले गांवों में खेती के पंपों को बिना रुकावट बिजली आपूर्ति करना शामिल है। प्रस्ताव के अनुसार, खेती पर निर्भर किसानों और मज़दूरों के लिए अनाज और पशुओं के लिए पर्याप्त चारे का इंतजाम भी किया जाएगा। सरकार ने कहा कि जल संरक्षण के काम और लोगों एवं पशुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था भी की जाएगी। कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने कहा कि अधिकारी सटीक और पारदर्शी पंचनामा (फसल-नुकसान का सर्वे) करेंगे, तुरंत फसल-कटाई के प्रयोग करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि किसानों को फसल बीमा और सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिले। इस बीच, लातूर में पुलिस उपाधीक्षक आकाश जाधव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सूखे के हालत और कर्ज से प्रभावित अंकुश रमेश काले (33) नाम के किसान ने शुक्रवार को जिले के डोंगरगांव बोरी गांव में अपने खेत में अपनी जान दे दी। वहीं, एक अन्य अधिकारी ने कहा, “काले पर लातूर ज़िला केंद्रीय सहकारी बैंक का 40,000 रुपये और भारतीय स्टेट बैंक का एक लाख रुपये का कर्ज़ था। बारिश न होने के कारण उनकी फ़सलें बर्बाद हो गई थीं, जिससे उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा था।”विपक्षी दलों ने आपात स्थिति में प्रक्रिया की जरूरत पर सवाल उठाए और किसानों के लिए वित्तीय सहायता की समयसीमा और राशि की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मांग की कि सरकार आने वाले दशहरा और दिवाली त्योहारों को देखते हुए, सूखा राहत के तौर पर किसानों के बैंक खातों में प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये जमा करे और पंचनामा बाद में करे। उन्होंने रबी के मौसम के लिए कर्ज माफी, मुफ्त बीज और खाद, जानवरों के लिए पर्याप्त चारा और दाना, छात्रों की पढ़ाई की फीस पूरी तरह माफ करने और खेतिहर मजदूरों के लिए अलग से आर्थिक मदद की मांग की। राकांपा (शप) के महासचिव महेश तपासे ने सूखे से राहत के पैकेज पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फसल के नुकसान के लिए आर्थिक मुआवजा देने का काम खेतों के सर्वे पूरे होने तक टाल दिया गया है। शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि राज्य सरकार को अब राहत उपायों को लागू करने पर ध्यान देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर प्रभावित किसान को मदद मिले। सूखा प्रभावित मराठवाड़ा क्षेत्र का दौरा कर रहे ठाकरे ने संवाददाताओं से कहा, “चाहे इसमें (सूखा घोषित करने में) देरी हुई हो या इसे कब घोषित किया जाना चाहिए था... हम लगातार मांग कर रहे थे कि सूखा पहले घोषित किया जाए। महाराष्ट्र से पहले कर्नाटक ने इसे घोषित कर दिया।”उन्होंने कहा, “अब जब इसकी घोषणा हो चुकी है, तो सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सूखे से राहत के पूरे पैकेज के तहत दी जाने वाली हर मदद हर किसान को मिले।”उन्होंने कहा, “इस सूखे या सुपर अल नीनो का असर न सिर्फ़ खेती-बाड़ी के क्षेत्र पर, बल्कि शहरी इलाकों पर भी पड़ेगा। इससे पूरा महाराष्ट्र और देश प्रभावित होगा।”किसान सभा ने मांग की कि लगातार दो खरीफ सत्रों में फसल खराब होने से प्रभावित किसानों को ठोस आर्थिक मदद दी जाए, जिसमें कर्ज माफी और फसल बीमा कवरेज के आधार पर मुआवजा शामिल हो। अल नीनो की स्थिति के बीच राज्य में बारिश में 18.8 प्रतिशत कमी दर्ज की गई। जून से 18 सितंबर तक वास्तविक वर्षा 755.9 मिमी हुई, जबकि औसत बारिश 932.3 मिमी होती है।
पंजाब जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम 2026 पर 7-सदस्यीय समन्वय समिति की बैठक की मेजबानी करेगा, जिस
कर्ज लेकर बोई फसल हुई बर्बाद, किसान ने खुद ही ट्रैक्टर चलाकर उजाड़ दी
महाराष्ट्र के लातूर जिले में मॉनसून के बाद भी पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसानों की खरीफ फसल बर्बाद हो रही है. ऐसे में, लातूर के एक किसान ने बारिश के इंतजार में खेतों में खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाकर उसे नष्ट कर दिया है.
टाइट या पुरानी हो गई है पसंदीदा जींस? इन 5 तरीकों से करें इस्तेमाल
How To Reuse Old Jeans: पुरानी और फटी जींस को फेंकने की जरूरत नहीं है. मजबूत डेनिम कपड़े और जींस की जेबों का इस्तेमाल करके आप घर के लिए कई काम की चीजें आसानी से बना सकते हैं. इससे बैग, वॉल ऑर्गेनाइजर, स्टाइलिश प्लांटर, कोस्टर और स्टोरेज बास्केट जैसी चीजें तैयार की जा सकती हैं.
गर्लफ्रेंड से मिलने आया युवक बना चोर, पैसे खत्म हुए तो चुराने लगा बाइक
ग्वालियर से प्रेमिका से मिलने रायगढ़ पहुंचे 28 वर्षीय युवक के पैसे खत्म हुए तो उसने कथित तौर पर बाइक चोरी शुरू कर दी. पुलिस ने CCTV फुटेज और मुखबिर की सूचना के आधार पर उसे पकड़ लिया. आरोपी की निशानदेही पर चार बाइक और एक स्कूटी बरामद हुई. पुलिस ने पांच वाहन चोरी के मामलों का खुलासा करने का दावा किया है.
संभावना सेठ ने गणपति का जुड़वा बच्चों संग लिया आशीर्वाद
संभावना सेठ ने जुड़वा बच्चों के साथ गणपति बप्पा की पूजा की तस्वीरें शेयर कीं। तस्वीरों में पति अविनाश द्विवेदी, सास-ससुर और ननद भी नजर आए। कपल ने 4 जून 2026 को सरोगेसी के जरिए बेटे और बेटी का स्वागत किया था।
शिकागो विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुपर अल नीनो के कारण अगले छह महीनों में दुनिया भर में 4.51 लाख अतिरिक्त गर्मी संबंधी मौतें हो सकती हैं, जिनमें भारत में 15,800 मौतें शामिल हैं।
'धुरंधर' में छाईं गोरी मेम, अब हाथ लगी सूरज बड़जात्या की फिल्म
'भाभीजी घर पर हैं' की 'गोरी मेम' उर्फ सौम्या टंडन एंटरटेनमेंट वर्ल्ड का बड़ा नाम हैं. धुरंधर जैसी फिल्म के साथ नाम कमा चुकी एक्ट्रेस अब सूरज बड़जात्या की फिल्म में नजर आएंगी.
CEC ज्ञानेश कुमार पर सियासी घमासान: जानिए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और महाभियोग के नियम
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे सियासी घमासान के बीच, यह लेख चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाता है।
राज्यसभा की 10 सीट, MLC चुनाव का प्लान... PM मोदी और CM योगी की इन मुद्दों पर चर्चा!
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने PM नरेंद्र मोदी के साथ मीटिंग की. इस मीटिंग के दौरान मुख्य रूप से राज्यसभा, विधानसभा और एमएलसी चुनावों को लेकर अहम चर्चा हुई. राज्यसभा की 10 सीटों को लेकर रणनीति पर बातचीत की गई.
Asian Games में छाए भारतीय जांबाज, झोली में आए इतने मेडल
एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का जलवा इन दिनों सातवें आसमान पर है. शनिवार को भारत की झोली में 7 मेडल आए. जिससे मेडलों की संख्या बढ़कर अब 30 हो गई है. आज का दिन पूरी तरह से कबड्डी के नाम रहा, जहां हमारी पुरुष और महिला दोनों टीमों ने गोल्ड पर कब्जा जमाया.
Gramin Zameen Patta Process: अगर आप अपने गांव में आवासीय या कृषि भूमि का पट्टा बनवाना चाहते हैं, तो अब ग्राम पंचायत या राज्य के राजस्व पोर्टल के माध्यम से आसानी से आवेदन कर सकते हैं. जानिए आवश्यक दस्तावेज, पटवारी सत्यापन, तहसील प्रक्रिया और केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के तहत पट्टा प्राप्त करने का पूरा तरीका.
Shivpal Yadav बोले- Jaswantnagar में कोशिश भी कर ले Congress, नहीं मिलेगा कोई वोट
समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और जसवंतनगर से छह बार के विधायक शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि कांग्रेस उनके गढ़ जसवंतनगर में पैठ बनाने में सफल नहीं हो पाएगी। शिवपाल ने कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय के एक बयान पर यह प्रतिक्रिया दी। राय ने कहा था कि जिस तरह सपा प्रमुख अपने ‘पीडीए रथ’ से कांग्रेस के गढ़ रायबरेली गए हैं, उसी तरह कांग्रेस नेता भी सपा के गढ़ों में जा सकते हैं। अजय राय ने शुक्रवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा था कि अखिलेश यादव के विशेष रूप से तैयार किए गए ‘पीडीए रथ’ से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली के दौरे को लेकर दोनों दलों के बीच कोई मतभेद नहीं है। राय ने कहा था, “कोई भी व्यक्ति देश के किसी भी हिस्से में जाने के लिए स्वतंत्र है। वह (अखिलेश) रायबरेली गए और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हम भी निश्चित रूप से वाराणसी या इटावा, कन्नौज और मैनपुरी जैसी जगहों पर जाएंगे।” उन्होंने जिन स्थानों का उल्लेख किया था, उनका संबंध सपा के वरिष्ठ नेताओं से है। अखिलेश यादव कन्नौज से सांसद हैं, उनकी पत्नी डिंपल यादव मैनपुरी से सांसद हैं और उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव जसवंतनगर से विधायक हैं। शिवपाल ने जसवंतनगर में कहा, “यह सच है कि कोई भी कहीं भी जा सकता है, तो वे जाएं। अगर वे (कांग्रेस) कोशिश भी करेंगे तो उन्हें पूरे जसवंतनगर में कुछ हासिल नहीं होगा, कोई वोट नहीं मिलेगा।”शिवपाल के इस बयान से सपा-कांग्रेस संबंधों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। शिवपाल के साथ यात्रा कर रहे उनके एक सहयोगी ने बताया कि वह निजी यात्रा पर मुंबई गए हैं और विवाद को तूल नहीं देना चाहते। सहयोगी ने कहा, “उनसे कांग्रेस नेता के जसवंतनगर आने वाले बयान पर सवाल पूछा गया था। उन्होंने कहा कि कोई भी कहीं जा सकता है, लेकिन राजनीतिक रूप से इसका कोई असर नहीं होगा।”सपा ने अभी तक अखिलेश यादव की ‘पीडीए रथ यात्रा’ की औपचारिक शुरुआत का विस्तृत कार्यक्रम घोषित नहीं किया है। पार्टी का कहना है कि बृहस्पतिवार का रायबरेली दौरा हरचंदपुर से सपा विधायक राहुल लोधी से मिलने के लिए था। लोधी ने आरोप लगाया था कि 17 सितंबर को समाजवादी छात्र सभा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के बीच झड़प के बाद पुलिस ने उनके साथ मारपीट की थी। हालांकि, सपा नेताओं ने रायबरेली दौरे को सफल बताया है। पूर्व मंत्री और सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा, “भाजपा सरकार की ज्यादती के शिकार पार्टी विधायक से मिलने के लिए किया गया यह दौरा जबरदस्त हिट रहा। लोगों की प्रतिक्रिया शानदार थी।”राहुल गांधी ने 2024 में रायबरेली लोकसभा सीट से चुनाव जीता था लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस संसदीय क्षेत्र में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। रायबरेली लोकसभा क्षेत्र की पांच विधानसभा सीट में से तीन बछरावां, हरचंदपुर और सरेनी सपा के पास हैं जबकि एक सीट भाजपा के पास है। शिवपाल के बयान के बाद भाजपा को दोनों दलों पर निशाना साधने का मौका मिल गया। भाजपा ने बृहस्पतिवार को कहा था कि अखिलेश यादव का रायबरेली दौरा वहां सपा की ताकत दिखाने और कांग्रेस की स्थिति पर सवाल उठाने के लिए था। भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा था कि कांग्रेस को अब अपना अभियान कन्नौज और मैनपुरी से शुरू करना चाहिए। भाजपा ने कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सपा सांसद इकरा हसन के बयानों का भी उल्लेख किया था, जिनमें दोनों ने अपने-अपने नेताओं को मुख्य विपक्षी चेहरा बताया था। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में 43 सीट पर जीत मिली थीं। सपा ने 37 और कांग्रेस ने छह सीट पर जीत हासिल की थी जबकि भाजपा 33 सीट पर सिमट गई थी।
पेट्रोल, इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड? लग्जीर सेगमेंट में क्या बिक रहा
भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक कारों की तादाद बढ़ रही है. भारत के लग्जरी कार मार्केट में इलेक्ट्रिक कारें लॉन्च हो रही हैं. जहां बीवाईडी की कारें मास मार्केट से काफी दूर हैं. वहीं बीवाईडी का सब-ब्रांड डेंजा भी भारत में एंट्री करने वाला है. इसकी कारें प्रीमियम सेगमेंट में आएंगी. ऐसे में सवाल है कि लग्जरी कार बायर क्या खरीदना पसंद कर रहा है.
देश के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से सबसे अहम राज्य उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच एक बड़ा चुनावी ओपिनियन पोल सामने आ गया है। न्यूज लीडर और प्रतिष्ठित सर्वे एजेंसी मैटराइज द्वारा प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर किए गए व्यापक जनमत सर्वेक्षण ने राज्य के मौजूदा राजनीतिक मूड को उजागर कर दिया है। पिछले नौ वर्षों से सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व को लेकर जनता की राय सामने आई है। इस सर्वे के नतीजों ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के लिए भारी बहुमत और प्रचंड जीत का अनुमान जताया है।सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, यदि राज्य में आज विधानसभा चुनाव आयोजित कराए जाते हैं, तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) 267 सीटों के विशाल आंकड़े के साथ पूर्ण बहुमत से लगातार तीसरी बार सरकार बनाता हुआ दिखाई दे रहा है। वहीं, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP) के नेतृत्व वाला गठबंधन केवल 132 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) और अन्य छोटे दलों की स्थिति बेहद कमजोर दिखाई दे रही है, जहां मायावती की पार्टी को केवल 2 सीटें और अन्य निर्दलीय व गैर-गठबंधन दलों को 2 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है।एनडीए का सीट-वार गणित: बीजेपी अकेले दम पर पार करेगी जादुई आंकड़ामैटराइज के इस सर्वे में एनडीए गठबंधन के भीतर घटक दलों की सीटों का विस्तृत ब्योरा भी प्रस्तुत किया गया है। 403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 202 सीटों का है, लेकिन सर्वे के अनुसार भारतीय जनता पार्टी अपने सहयोगियों के बिना भी अकेले दम पर 246 सीटें जीतने की स्थिति में नजर आ रही है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सत्ता विरोधी लहर की चर्चाओं के विपरीत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशासनिक छवि और विकास योजनाओं की पकड़ मतदाताओं के बीच अभी भी बेहद मजबूत बनी हुई है।गठबंधन के अन्य सहयोगियों की बात करें तो अनुप्रिया पटेल के नेतृत्व वाले अपना दल (सोनेलाल) को 9 सीटें मिलने का अनुमान है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल (RLD) को 3 सीटें, संजय निषाद की निषाद पार्टी को 4 सीटें और ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) को 1 सीट मिलती दिख रही है। यह गठबंधन संतुलन दिखाता है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिमी यूपी के जाट बेल्ट और रुहेलखंड तक एनडीए अपने सामाजिक समीकरणों को एकजुट रखने में काफी हद तक सफल होता दिखाई दे रहा है।समाजवादी पार्टी गठबंधन को 132 सीटें: अखिलेश यादव के लिए लगातार तीसरा बड़ा झटकादूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए यह सर्वे काफी निराशाजनक तस्वीर पेश कर रहा है। सर्वे के अनुसार सपा गठबंधन को राज्य भर में महज 132 सीटें मिलती दिख रही हैं। यदि चुनावी परिणाम इस सर्वे के अनुरूप रहते हैं, तो यह अखिलेश यादव के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका साबित होगा, क्योंकि 2017 और 2022 के बाद उन्हें लगातार तीसरी बार उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर रहना पड़ेगा। 2012 से 2017 तक राज्य की कमान संभालने वाली समाजवादी पार्टी इस बार अकेले 125 सीटें जीतने का अनुमान दिखा रही है, जो पिछले 2022 के चुनाव की 111 सीटों से मामूली बढ़त जरूर है, लेकिन सत्ता की दहलीज से बहुत दूर है।वहीं सपा की प्रमुख सहयोगी कांग्रेस पार्टी को गठबंधन के तहत सिर्फ 7 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। चुनाव नजदीक आते ही सपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच सीट शेयरिंग और स्थानीय प्रभाव को लेकर अंदरूनी खींचतान भी सार्वजनिक होने लगी है। सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद लगातार मुखर बयानबाजी कर रहे हैं, जिसका जवाब कैराना से सपा सांसद इकरा हसन समेत कई सपा नेता तीखे अंदाज में दे रहे हैं। दोनों दलों के बीच का यह जमीनी टकराव जमीनी कैडर के समन्वय को प्रभावित कर रहा है, जिसका सीधा असर सर्वे के आंकड़ों में साफ झलक रहा है।वोट शेयर का अंतर: बीजेपी 44% के साथ आगे, सपा 38% पर अटकीचुनावी राजनीति में सीटों की संख्या के साथ-साथ वोट शेयर सबसे प्रामाणिक पैमाना माना जाता है। मैटराइज के सर्वे के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी गठबंधन को पूरे उत्तर प्रदेश में 44 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी गठबंधन को करीब 38 फीसदी वोट मिल सकता है। दोनों प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों के बीच 6 फीसदी का भारी अंतर दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और बहुकोणीय राजनीति वाले राज्य में 6 प्रतिशत का वोट अंतर नतीजों में जमीन-आसमान का फर्क पैदा करने के लिए पर्याप्त माना जाता है।वहीं एक समय उत्तर प्रदेश की राजनीति की धुरी रही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए यह सर्वे अस्तित्व का संकट पेश करता है। मायावती की बसपा का वोट शेयर गिरकर महज 0.8 फीसदी के आसपास सिमटता दिख रहा है, जिससे साफ है कि पार्टी का पारंपरिक कैडर अन्य विकल्पों की ओर स्थानांतरित हो चुका है। अन्य दलों और निर्दलीयों के खाते में करीब 10 फीसदी वोट शेयर जाने का अनुमान है, जो स्थानीय स्तर पर कुछ सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय बना सकते हैं।2017 और 2022 के पिछले चुनावी नतीजों का तुलनात्मक विश्लेषणउत्तर प्रदेश की हालिया चुनावी पृष्ठभूमि को समझें तो 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 403 में से 255 सीटों पर जीत दर्ज की थी और उसका वोट शेयर 41.3 फीसदी रहा था। उस चुनाव में उसके सहयोगी अपना दल (एस) को 12 और निषाद पार्टी को 6 सीटें मिली थीं। वहीं समाजवादी पार्टी को 111 सीटें और 32.1 फीसदी वोट शेयर हासिल हुआ था, जबकि बसपा महज 1 सीट और 12.9 फीसदी वोट शेयर पर सिमट गई थी और कांग्रेस केवल 2 सीटें जीत सकी थी।इससे पहले 2017 के चुनाव में मोदी लहर के बीच भाजपा ने 312 सीटें और 39.7 फीसदी वोट शेयर हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। उस समय सपा को 47 सीटें, बसपा को 19 सीटें और कांग्रेस को 7 सीटें मिली थीं। यानी 2017 से 2022 के बीच भाजपा की सीटों में 57 की कमी आई थी, लेकिन उसका वोट शेयर करीब 1.6 प्रतिशत बढ़ गया था। इसके विपरीत सपा ने सीटों में 64 का इजाफा किया था और अपने वोट शेयर में करीब 10 प्रतिशत की छलांग लगाई थी। ताजा 2026 के सर्वे के मुताबिक भाजपा अपना वोट शेयर 41.3 से बढ़ाकर 44 फीसदी तक ले जाती दिख रही है, जिससे सीटों की संख्या फिर से 267 तक पहुंचती नजर आ रही है।
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मूसलाधार बारिश और तूफानी हवाओं से भारी तबाही, 42 लोगों की दर्दनाक मौत; अवध से पूर्वांचल तक ब्लैकआउट
उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में पिछले 72 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश और 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तूफानी हवाओं ने भीषण तबाही मचा दी है। शुक्रवार देर रात से शुरू हुआ यह मानसूनी प्रकोप शनिवार की शाम तक प्रदेश के कोने-कोने में जानलेवा साबित हुआ। राज्य के विभिन्न जनपदों में कच्चे मकान ढहने, आकाशीय बिजली गिरने, विशालकाय वृक्षों के उखड़ने और बिजली के पोल टूटने से अब तक 42 लोगों की अकाल मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों नागरिक गंभीर रूप से घायल होकर अस्पतालों में भर्ती हैं। सबसे भीषण त्रासदी अवध और मध्य यूपी के इलाकों में देखने को मिली है, जहां अकेले अवध क्षेत्र में 23 नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है।इसके अलावा बुंदेलखंड और मध्य उत्तर प्रदेश में आठ, गोरखपुर-बस्ती मंडल में आठ, वाराणसी मंडल में दो और ब्रज क्षेत्र में एक व्यक्ति की जान जाने की आधिकारिक पुष्टि हुई है। राज्य में लगातार हो रही इस बारिश से सैकड़ों कच्चे मकान जमींदोज हो गए हैं और कई दर्जन मवेशी मलबे में दबकर काल के गाल में समा गए हैं। प्रदेश की अधिकांश प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में निचले इलाकों में पानी भर जाने से बाढ़ जैसी विभीषिका खड़ी हो गई है। मौसम विभाग (IMD) ने हालात को देखते हुए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए नागरिकों से बिना आवश्यक कार्य के घरों से बाहर न निकलने की कड़ी चेतावनी दी है।अवध क्षेत्र में सबसे भीषण तबाही: बहराइच, अयोध्या, सीतापुर और बाराबंकी में मातमकुदरत के इस कहर ने अवध के जिलों में सबसे ज्यादा खून के आंसू रुलाए हैं। बहराइच जिले में तूफानी हवाओं के साथ हुई बारिश से हाहाकार मच गया, जहां कुल पांच लोगों की मौत दर्ज की गई। कैसरगंज तहसील क्षेत्र में दो, नानपारा में एक और बहराइच कोतवाली देहात क्षेत्र में एक ट्रेनी रिक्रूट सिपाही समेत चार लोग जानलेवा हादसों के शिकार बने, जबकि एक मासूम बच्चे की जान कच्ची दीवार के नीचे दबने से चली गई। पूरे बहराइच में हजारों पेड़ और सैकड़ों बिजली के खंभे उखड़ जाने के कारण समूचा जिला अंधेरे में डूब गया है और ब्लैकआउट जैसे हालात पैदा हो गए हैं। सड़कों पर गिरे पेड़ों से टकराकर कई वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं।सीतापुर जिले के हरगांव और महमूदाबाद विकासखंडों में भी बारिश के बीच कच्चे मकानों की दीवारें गिरने से दर्दनाक हादसों में बुजुर्गों और बच्चों समेत चार लोगों की मौत हो गई। उधर, रामनगरी अयोध्या में आंधी-तूफान के कारण अलग-अलग स्थानों पर विशालकाय पेड़ गिरने से चार लोगों की मौत हो गई। रुदौली में एक 67 वर्षीय बुजुर्ग, अमानीगंज में सात वर्षीय मासूम बालक और मवई में एक राहगीर युवक पेड़ की चपेट में आ गए। पूराकलंदर थाना क्षेत्र में एक चलती कार पर भारी पेड़ गिर जाने से वाहन सवार आधा दर्जन लोग लहूलुहान हो गए, जिन्हें जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया है।बाराबंकी जनपद के फतेहपुर, रामसनेहीघाट और मोहम्मदपुर खाला क्षेत्रों में भी कुदरत ने कहर बरपाया, जहां महिला समेत तीन लोगों की सांसें थम गईं। फतेहपुर के सरदारगंज में 40 वर्षीय महिला की दीवार के मलबे में दबने से और रामसनेहीघाट के गढ़ी गांव में एक बुजुर्ग पर पेड़ गिरने से मौत हो गई। मोहम्मदपुर खाला में दूध बेचकर घर लौट रहे एक मेहनतकश युवक की जान रास्ते में अचानक गिरे पेड़ के नीचे आने से चली गई। बलरामपुर में बीते 72 घंटों की बारिश से 11 मकान ढह गए और दो लोगों की मौत हुई। गोंडा के धानेपुर क्षेत्र में राजापुर मुरावन के पास बाइक सवार दो चचेरे भाइयों, इमरान (35) और खालिद (33) पर विशाल पेड़ की डाल गिर गई, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। अमेठी में दीवार गिरने से महिला की और करंट से एक युवक की जान गई, जबकि श्रावस्ती के सोनवा इलाके में फूस के घर पर गूलर का विशाल पेड़ गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार अन्य दबकर गंभीर रूप से घायल हो गए।बुंदेलखंड और मध्य यूपी में मूसलाधार आफत: उड़े टिनशेड, उखड़े खंभे और आठ मौतेंबुंदेलखंड की सूखी धरती पर इस बार बादलों ने ऐसा तांडव मचाया कि जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया। बुंदेलखंड और मध्य उत्तर प्रदेश के जिलों में वर्षा जनित हादसों में एक मासूम बच्चे समेत कुल आठ लोगों की जान चली गई। हमीरपुर जनपद में सबसे अधिक तीन लोगों की असमय मौत हुई। इसके साथ ही महोबा, बांदा, हरदोई, औरैया और फतेहपुर जिलों में एक-एक व्यक्ति की दीवार ढहने और जलभराव के हादसों में जान गई है। उरई जालौन में एक बड़ा हादसा उस समय टल गया जब यात्रियों से भरी एक स्लीपर बस के ऊपर चलती सड़क पर विशाल पेड़ गिर पड़ा; हालांकि गनीमत रही कि बस सवार सभी यात्री बाल-बाल बच गए।ग्रामीण इलाकों में तीन दर्जन से ज्यादा मवेशी कच्चे गोठ और दीवारों के मलबे में दबकर मारे गए हैं, जिससे गरीब किसानों को भारी आर्थिक क्षति पहुंची है। हमीरपुर और बांदा के निचले इलाकों में यमुना और बेतवा के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। जिला प्रशासनों ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर सक्रिय कर दिए हैं और राजस्व टीमों को नुकसान का आकलन करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।ब्रज और वाराणसी में आंधी का कहर: काशी में 68 किमी की रफ्तार से चली हवाएंपश्चिमी उत्तर प्रदेश और ब्रज मंडल में भी बिगड़े मौसम ने व्यापक नुकसान पहुंचाया है। मैनपुरी के दन्नाहार में एक कच्चा मकान भरभराकर गिरने से एक व्यक्ति की मलबे में दबने से मौत हो गई, जबकि परिवार के छह लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए। मैनपुरी में 100 से अधिक विद्युत पोल धराशायी होने से ग्रामीण अंचलों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है। कासगंज के ढोलना में दो मकानों के लेंटर अचानक गिर पड़े, जहां सो रहे लोगों ने भागकर बमुश्किल अपनी जान बचाई। फिरोजाबाद के जसराना में दीवार गिरने से महिला घायल हुई, जबकि एटा, आगरा और मथुरा में तेज हवाओं के साथ दिनभर रुक-रुककर हुई बारिश ने पारा गिरा दिया और सड़कों पर जलजमाव की स्थिति बना दी।धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी) में शुक्रवार देर रात से ही तूफानी चक्रवात जैसे हालात बने रहे। बनारस में सुबह के समय 68 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली आंधी और 19.8 मिलीमीटर बारिश ने शहर से लेकर देहात तक व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। छावनी क्षेत्र और ग्रामीण इलाकों में पेड़ तथा जर्जर दीवारें गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। कई प्रमुख चौराहों पर 11 केवी के हाईटेंशन तार और खंभे गिरने से शहर के कई उपकेंद्रों की बिजली कई घंटों तक ठप रही। लगातार बारिश से अधिकतम तापमान गिरकर 27 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जिससे उमस से राहत तो मिली लेकिन जलभराव ने सड़कों को तालाब में तब्दील कर दिया।गोरखपुर-बस्ती मंडल में आठ की मौत: करंट और पेड़ गिरने से कई घर उजड़ेपूर्वांचल के गोरखपुर और बस्ती मंडल में भी मौसम के बदले मिजाज ने भारी तबाही मचाई है। पिछले तीन दिनों से लगातार रुक-रुककर हो रही झमाझम बारिश के बीच शनिवार को तेज आंधी ने तबाही की रफ्तार बढ़ा दी। दोनों मंडलों में वर्षा जनित अलग-अलग हादसों में आठ लोगों की अकाल मौत हो गई और तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। गोरखपुर जिले में आंधी के दौरान पेड़ गिरने से चार लोगों की जान चली गई, जिनमें दो की हालत अभी भी मेडिकल कॉलेज में नाजुक बनी हुई है।गोरखपुर के ही एक गांव में बारिश के कारण जमीन पर टूटे पड़े बिजली के लाइव तार की चपेट में आने से एक मासूम बालक की मौके पर ही झुलसकर मौत हो गई। संतकबीरनगर में बाइक पर जा रहे बस्ती के एक नगर पंचायत सफाईकर्मी पर अचानक पेड़ गिर पड़ा, जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई। बस्ती जनपद में भी कच्ची दीवार गिरने से सोते समय एक बुजुर्ग की मलबे में दबकर मौत हो गई, जबकि बिजली के पोल में करंट उतर आने से एक ग्रामीण महिला ने दम तोड़ दिया। प्रशासन ने मृतकों के आश्रितों को आपदा राहत कोष से अनुग्रह राशि प्रदान करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए रविवार, 27 सितंबर का दिन बेहद खास होने जा रहा है, क्योंकि भारत और वेस्टइंडीज के बीच तीन मैचों की एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय सीरीज का बिगुल बजने जा रहा है। श्रृंखला का पहला रोमांचक मुकाबला केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित सुरम्य ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। हालांकि बीते कुछ दिनों से देश के विभिन्न राज्यों और तटीय इलाकों में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने खेल प्रेमियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट गलियारों तक हर प्रशंसक यही सवाल पूछ रहा है कि क्या रविवार को तिरुवनंतपुरम में बादल बरसेंगे और मुकाबला रद्द हो जाएगा?मौसम के मिजाज को लेकर आ रही ताजा जानकारियों ने हालांकि करोड़ों क्रिकेट फैंस को बड़ी राहत पहुंचाई है। तिरुवनंतपुरम में मैच के दिन का मौसम पूर्वानुमान काफी उत्साहवर्धक है। भारतीय टीम शुभमन गिल की कप्तानी में मैदान पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है, जबकि वेस्टइंडीज की कमान अनुभवी विकेटकीपर बल्लेबाज शाई होप संभाल रहे हैं। इस सीरीज में विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गज बल्लेबाजों की मौजूदगी ने मुकाबले के रोमांच को कई गुना बढ़ा दिया है, वहीं नमन धीर और आकिब नबी डार जैसे युवा चेहरों को भी अपनी प्रतिभा साबित करने का मौका मिला है।मौसम का ताजा पूर्वानुमान: सिर्फ 15 प्रतिशत बारिश के आसार, पूरा मैच होने की उम्मीदमौसम विज्ञान एजेंसी एक्यूवेदर (AccuWeather) और स्थानीय मौसम केंद्र के ताजा आंकड़ों के अनुसार, रविवार को तिरुवनंतपुरम में भारी बारिश का कोई गंभीर अलर्ट नहीं है। मैच के निर्धारित समय के दौरान बारिश की संभावना महज 15 प्रतिशत आंकी गई है। इसका सीधा अर्थ यह है कि बादलों की हल्की आवाजाही जरूर देखने को मिल सकती है, लेकिन किसी मूसलाधार बारिश के चलते मैच के रुकने या रद्द होने का खतरा न के बराबर है।दोपहर के समय तापमान सामान्य और नमी के साथ बना रहेगा। आसमान में छिटपुट बादल छाए रहने से तेज धूप का असर कम रहेगा, जो फील्डिंग और गेंदबाजी करने वाली दोनों टीमों के लिए शारीरिक रूप से काफी अनुकूल साबित होगा। तिरुवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड स्टेडियम का ड्रेनेज सिस्टम विश्व स्तरीय माना जाता है, इसलिए यदि किसी समय बूंदाबांदी होती भी है, तो मैदानकर्मी चंद मिनटों में आउटफील्ड को खेलने योग्य बनाने में सक्षम हैं। कुल मिलाकर खेल प्रेमियों को पूरे 50-50 ओवर का पूरा और रोमांचक मुकाबला देखने को मिलने की प्रबल संभावना है।भारत बनाम वेस्टइंडीज हेड-टू-हेड आंकड़े: किसका पलड़ा रहा है भारीएकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास पर नजर डालें तो भारत और वेस्टइंडीज के बीच हमेशा से ही कड़ा और रोमांचक मुकाबला देखने को मिला है। दोनों टीमों के बीच अब तक कुल 142 वनडे इंटरनेशनल मैच खेले जा चुके हैं। इन आमने-सामने की भिड़ंतों में भारतीय क्रिकेट टीम ने 72 मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज कर बढ़त बना रखी है। दूसरी ओर दो बार की पूर्व विश्व विजेता कैरेबियाई टीम ने 64 मैचों में भारत को शिकस्त दी है।इन 142 मुकाबलों में से दो मैच बेहद रोमांचक अंदाज में टाई पर समाप्त हुए हैं, जबकि चार मुकाबले ऐसे रहे हैं जिनका कोई नतीजा नहीं निकल सका। हालिया वर्षों के प्रदर्शन को देखें तो टीम इंडिया का दबदबा वेस्टइंडीज के खिलाफ एकतरफा रहा है। भारतीय टीम ने अपनी सरजमीं पर कैरेबियाई टीम के खिलाफ लगातार मजबूत खेल दिखाया है, हालांकि वेस्टइंडीज के पावर हिटर्स किसी भी दिन मैच का पासा पलटने की पूरी ताकत रखते हैं।टॉस का समय, मैच टाइमिंग और ग्रीनफील्ड स्टेडियम की पिच का मिजाजतिरुवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड स्टेडियम में खेले जाने वाले इस पहले मुकाबले का टॉस दोपहर ठीक 1:30 बजे उछाला जाएगा। टॉस के आधे घंटे बाद यानी दोपहर ठीक 2:00 बजे मैच की पहली गेंद फेंकी जाएगी। इस स्टेडियम की पिच को पारंपरिक रूप से संतुलित माना जाता है। शुरुआत में समुद्री हवाओं और बादलों के साए के कारण तेज गेंदबाजों को नई सफेद गेंद से अच्छी स्विंग और सीम मूवमेंट मिलने की उम्मीद है।जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ेगा और पिच पुरानी होगी, बल्लेबाजों के लिए शॉट खेलना आसान होता जाएगा। शाम के समय फ्लडलाइट्स जलने के बाद ओस (ड्यू) का प्रभाव एक निर्णायक कारक बन सकता है। ऐसे में टॉस जीतने वाले कप्तान के लिए पहले गेंदबाजी करने का फैसला अधिक व्यावहारिक साबित हो सकता है ताकि बाद में लक्ष्य का पीछा करते समय ओस का पूरा फायदा उठाया जा सके।शुभमन गिल की कप्तानी और युवाओं के लिए बड़ा इम्तिहानयह सीरीज भारतीय वनडे टीम के भविष्य के रोडमैप के लिहाज से भी काफी अहम मानी जा रही है। कप्तान शुभमन गिल जहां अपनी कप्तानी कौशल और निरंतरता को साबित करने उतरेंगे, वहीं सीनियर खिलाड़ी विराट कोहली और रोहित शर्मा मैच प्रैक्टिस के साथ-साथ टीम को मजबूती प्रदान करेंगे। घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले नमन धीर और अपनी सटीक रफ्तार के लिए मशहूर गेंदबाज आकिब नबी डार के लिए यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छाप छोड़ने का सुनहरा अवसर है।वेस्टइंडीज की टीम भी शाई होप, निकोलस पूरन और रोवमैन पॉवेल जैसे आक्रामक मैच विनर्स के साथ भारत को उसकी घरेलू परिस्थितियों में कड़ी चुनौती पेश करने के इरादे से मैदान में उतरेगी। रविवार की दोपहर जब दोनों टीमें ग्रीनफील्ड स्टेडियम की हरी-भरी आउटफील्ड पर आमने-सामने होंगी, तो बिना किसी मौसमी रुकावट के एक हाई-वोल्टेज क्रिकेट मुकाबले का गवाह बनने के लिए फैंस पूरी तरह तैयार हैं।
ज्ञानेश कुमार ने मुझे भाजपा से चुनाव लड़ने को कहा था, केरल के पूर्व मुख्य सचिव के दावे से हड़कंप
ज्ञानेश कुमार पर थॉमसन ने कहा कि हम एक फ्लाइट में साथ थे। वह प्रधानमंत्री मोदी के बारे में बहुत अच्छी बातें कर रहे थे और उन्होंने मुझसे खुलकर पूछा कि क्या मैं 2019 के आम चुनाव में पठानमथिट्टा से भाजपा कैंडिडेट के तौर पर चुनाव लड़ने में दिलचस्पी रखता हूं?
भारतीय क्रिकेट के आधुनिक युग के सबसे महान बल्लेबाज विराट कोहली एक बार फिर क्रिकेट की किताबों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कराने के लिए तैयार हैं। भारत और वेस्टइंडीज के बीच तीन मैचों की एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय (ODI) सीरीज का पहला मुकाबला रविवार, 27 सितंबर को केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। यह मुकाबला केवल एक द्विपक्षीय सीरीज का आगाज भर नहीं है, बल्कि एक ऐसे ऐतिहासिक कीर्तिमान का गवाह बनने जा रहा है जिसका इंतजार दुनिया भर के क्रिकेट फैंस सांसें थामकर कर रहे हैं। भारतीय रन मशीन विराट कोहली एकदिवसीय क्रिकेट इतिहास में 15,000 रन पूरे करने से महज 59 रन दूर हैं।चैंपियंस ट्रॉफी के बाद से ही अपनी प्रचंड फॉर्म में चल रहे विराट कोहली ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उम्र चाहे जो हो, क्रीज पर उनकी रनों की भूख कभी कम नहीं होती। वेस्टइंडीज के गेंदबाजों के खिलाफ जब भी विराट बल्ला थामकर मैदान में उतरते हैं, तो मैदान पर चौकों-छक्कों की बारिश होना तय माना जाता है। तिरुवनंतपुरम की हरी-भरी वादियों के बीच स्थित खूबसूरत ग्रीनफील्ड स्टेडियम में क्रिकेट प्रशंसकों को उम्मीद है कि रविवार दोपहर जब किंग कोहली 22 गज की पट्टी पर उतरेंगे, तो वह इस मील के पत्थर को पार करके विश्व क्रिकेट पर अपना दबदबा और मजबूत करेंगे।8 साल पुराना विशाखापट्टनम का वह करिश्मा: जब वेस्टइंडीज के खिलाफ बने थे 10,000 रनक्रिकेट की दुनिया में संयोग भी बेहद दिलचस्प कहानियां लिखते हैं। ठीक आठ साल पहले यानी 24 अक्टूबर 2018 को विशाखापट्टनम के मैदान पर विराट कोहली ने एकदिवसीय क्रिकेट में अपने 10,000 रन पूरे किए थे, और उस दिन भी सामने विरोधी टीम कोई और नहीं बल्कि यही कैरेबियाई टीम वेस्टइंडीज ही थी। उस ऐतिहासिक मैच में विराट ने मात्र 213वें मैच की 205वीं पारी में यह मुकाम हासिल कर क्रिकेट जगत को हैरत में डाल दिया था। वह एकदिवसीय क्रिकेट में सबसे तेज गति से 10,000 रन का आंकड़ा छूने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने थे।आज आठ साल बाद समय का पहिया एक बार फिर उसी बिंदु पर घूमकर आ गया है। अब 15,000 वनडे रनों के महाकीर्तिमान के सामने भी वही वेस्टइंडीज की टीम खड़ी है। क्रिकेट इतिहास में यह दुर्लभ संयोग पहली बार देखने को मिल रहा है कि किसी बल्लेबाज ने एक ही देश के खिलाफ अपने 10 हजारी और 15 हजारी दोनों ऐतिहासिक पड़ाव पूरे करने की पटकथा लिखी हो। क्रिकेट विश्लेषक इस अद्भुत संयोग को नियति का लिखा मान रहे हैं और तिरुवनंतपुरम के दर्शक इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए स्टेडियम के टिकट काउंटर से लेकर ऑनलाइन बुकिंग तक पहले ही हाउसफुल कर चुके हैं।सचिन तेंदुलकर का महारिकॉर्ड होगा ध्वस्त: सबसे तेज 15,000 वनडे रनों का नया वर्ल्ड रिकॉर्डएकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के 55 साल से अधिक लंबे इतिहास में अब तक केवल एक ही बल्लेबाज 15,000 रनों के इस जादुई आंकड़े को छूने में कामयाब रहा है, और वह हैं क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर। सचिन ने अपने शानदार करियर के 463 वनडे मैचों में 18,426 रन बनाए हैं, जो आज भी एक विश्व रिकॉर्ड है। सचिन तेंदुलकर ने अपने 387वें वनडे मैच की 377वीं पारी में 15,000 रन का आंकड़ा पार किया था।अब विराट कोहली इस रिकॉर्ड को पूरी तरह से ध्वस्त करने के मुहाने पर खड़े हैं। विराट ने अब तक खेले 314 मैचों की 302 पारियों में 14,941 रन बना लिए हैं। यदि कोहली तिरुवनंतपुरम में बाकी बचे 59 रन बना लेते हैं, तो वह अपनी 303वीं पारी में ही यह उपलब्धि हासिल कर लेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि विराट सचिन तेंदुलकर से लगभग 74 पारियां पहले इस मुकाम तक पहुंच जाएंगे। एकदिवसीय क्रिकेट में 54 शतक और 79 अर्धशतक जड़ चुके विराट कोहली का यह रिकॉर्ड आने वाली कई पीढ़ियों के लिए तोड़ पाना लगभग नामुमकिन साबित होगा।कैरेबियाई गेंदबाजों के खिलाफ विराट का खौफनाक रिकॉर्ड और 2027 का अंतिम मिशनवेस्टइंडीज के खिलाफ विराट कोहली के आंकड़े किसी भी गेंदबाज की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं। कैरेबियाई टीम के खिलाफ किंग कोहली ने अब तक खेले 43 मैचों की 41 पारियों में 2,261 रन कूटे हैं, जिसमें उनका औसत 65 से भी अधिक का रहा है। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ 9 शानदार शतक ठोके हैं। जब भी वेस्टइंडीज की टीम सामने आती है, कोहली का बल्ला एक अलग ही लय में गाता है।यह सीरीज इस मायने में भी बेहद भावुक और महत्वपूर्ण है क्योंकि टेस्ट और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को पहले ही अलविदा कह चुके विराट कोहली ने इस सीरीज से पहले औपचारिक रूप से यह स्पष्ट कर दिया है कि दक्षिण अफ्रीका में होने वाला 2027 वनडे वर्ल्ड कप उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी विश्व कप होगा। सफेद गेंद के इस सबसे बड़े प्रारूप में अब उनके हर एक मैच को फैंस विदाई की तरह संजो रहे हैं। अपने अंतिम मिशन की ओर बढ़ रहे कोहली का यह समर्पण दिखाता है कि वह भारतीय क्रिकेट को विश्व विजेता बनाकर ही मैदान से विदा होना चाहते हैं।भारत बनाम वेस्टइंडीज पहला वनडे: मैच टाइमिंग, पिच रिपोर्ट और लाइव स्ट्रीमिंग डिटेल्सतिरुवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में भारत और वेस्टइंडीज के बीच यह महामुकाबला 27 सितंबर को दोपहर ठीक 2:00 बजे से शुरू होगा, जबकि टॉस दोपहर 1:30 बजे उछाला जाएगा। ग्रीनफील्ड की पिच ऐतिहासिक रूप से बल्लेबाजों के लिए अनुकूल मानी जाती है, हालांकि नई गेंद से शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को थोड़ी स्विंग मिल सकती है। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ेगा, धूप खिलने के साथ यह विकेट पूरी तरह से बैटिंग पैराडाइज में तब्दील हो जाएगा, जो विराट कोहली के 15,000 रन पूरे करने के लिए एक आदर्श मंच तैयार करेगा।इस रोमांचक मुकाबले का टीवी पर सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क (Star Sports 1, Star Sports 1 HD, Star Sports Hindi) पर विभिन्न भारतीय भाषाओं में किया जाएगा। वहीं जो दर्शक अपने मोबाइल, लैपटॉप या स्मार्ट टीवी पर मैच का लुत्फ उठाना चाहते हैं, उनके लिए जियोहॉटस्टार (JioHotstar) ऐप और वेबसाइट पर मुकाबले की डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग उपलब्ध रहेगी। देश भर के खेल प्रेमी इस मुकाबले को मिस नहीं करना चाहेंगे, क्योंकि यह मैच एक बार फिर भारतीय क्रिकेट के गौरवशाली इतिहास का नया स्वर्णिम पन्ना लिखने जा रहा है।
जमीन पर नहीं, यहां पेड़ों पर रहते हैं लोग... अभी भी शिकार करके भरते हैं पेट
इस दुनिया में ऐसे भी लोग हैं जो जमीन पर नहीं रहते हैं. इनका घर ऊंचे- ऊंचे पेड़ों पर बना रहता है. चलिए जानते हैं आखिर पेड़ों पर रहने वाले ये लोग कहां रहते हैं और ऐसा करने की वजह क्या है.
IND vs WI 1st ODI: तिरुवनंतपुरम में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की संभावित प्लेइंग 11
भारतीय क्रिकेट टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज के पहले मुकाबले के लिए केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम पहुंच चुकी है। दोनों टीमों के बीच तीन मैचों की वनडे श्रृंखला का पहला मुकाबला रविवार, 27 सितंबर को ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। दोपहर 1:30 बजे मैच का टॉस सिक्का उछालकर किया जाएगा, जबकि दोपहर 2:00 बजे से मुकाबले की पहली गेंद फेंकी जाएगी। इस मुकाबले को लेकर क्रिकेट प्रेमियों और विश्लेषकों के बीच सबसे बड़ा कौतूहल भारत की अंतिम एकादश यानी प्लेइंग 11 को लेकर बना हुआ है। शुभमन गिल की कप्तानी में उतर रही भारतीय टीम में सीनियर और युवा खिलाड़ियों के संतुलन को साधने की बड़ी चुनौती टीम मैनेजमेंट के सामने है।तिरुवनंतपुरम की पिच और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए टीम मैनेजमेंट एक ऐसा संतुलन तलाशने की कोशिश कर रहा है जो शुरुआती ओवरों में वेस्टइंडीज के आक्रामक कैरेबियाई बल्लेबाजों पर नकेल कस सके और मध्यक्रम में पारी को स्थिरता दे सके। नियमित खिलाड़ियों की अनुपस्थिति और कार्यभार प्रबंधन के तहत कुछ सीनियर सितारों की भूमिकाओं में आए बदलाव ने इस मैच के चयन समीकरण को काफी रोमांचक बना दिया है।ओपनिंग जोड़ी का पहेलीनुमा गणित: क्या यशस्वी जायसवाल को मिलेगा मौकामैच से पहले क्रिकेट गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि कप्तान शुभमन गिल के साथ ओपनिंग कौन करेगा। कुछ शुरुआती रिपोर्ट्स में यह कयास लगाए जा रहे थे कि बाएं हाथ के आक्रामक ओपनर यशस्वी जायसवाल को पहले मुकाबले की प्लेइंग 11 में बतौर सलामी बल्लेबाज शामिल किया जा सकता है। हालांकि टीम के मौजूदा संतुलन और कॉम्बिनेशन को गहराई से देखें तो ऐसा होना काफी मुश्किल नजर आता है। अनुभवी ओपनर रोहित शर्मा के साथ कप्तान शुभमन गिल की जोड़ी पारी की शुरुआत करने के लिए पहली पसंद मानी जा रही है।गिल और रोहित की यह जोड़ी पहले भी कई मौकों पर टीम इंडिया को ठोस शुरुआत दिला चुकी है। ऐसे में यशस्वी जायसवाल को अपनी बारी के लिए डगआउट में इंतजार करना पड़ सकता है। तीसरे नंबर की पोजीशन पर हमेशा की तरह आधुनिक क्रिकेट के महानतम बल्लेबाज विराट कोहली का उतरना पूरी तरह तय है। वेस्टइंडीज के खिलाफ विराट का बल्ला हमेशा आग उगलता रहा है और इसी मैदान पर वह एक बार फिर लंबी पारी खेलकर कई रिकॉर्ड्स को अपने नाम करने के इरादे से मैदान में उतरेंगे।श्रेयस अय्यर की गैरमौजूदगी में नंबर 4 का संकट: ऋतुराज गायकवाड़ पर दांवभारतीय वनडे टीम के लिए लंबे समय से चौथे नंबर पर रीढ़ की हड्डी बनकर खेलने वाले नियमित उपकप्तान श्रेयस अय्यर इस सीरीज का हिस्सा नहीं हैं। उनके न होने से मध्यक्रम में एक खाली स्थान बन गया है, जिसे भरने के लिए टीम मैनेजमेंट को खासी माथापच्ची करनी पड़ रही है। सूत्रों और तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, इस खाली स्थान को भरने के लिए महाराष्ट्र के तकनीकी रूप से दक्ष बल्लेबाज ऋतुराज गायकवाड़ सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं। गायकवाड़ के पास पारी को संभालने और जरूरत पड़ने पर बड़े शॉट्स लगाने का बेहतरीन कौशल मौजूद है।मध्यक्रम में पांचवें नंबर पर अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज केएल राहुल नजर आएंगे, जो इस सीरीज में उपकप्तानी का दायित्व भी संभाल रहे हैं। संकटमोचक की भूमिका निभाने में माहिर राहुल स्पिन और तेज गेंदबाजी दोनों के खिलाफ बेहतरीन स्ट्राइक रोटेशन के लिए जाने जाते हैं। वहीं छठे नंबर पर ऑलराउंडर नितीश कुमार रेड्डी को फिनिशर और मध्यम गति के गेंदबाज के रूप में आजमाया जा सकता है। सातवें नंबर पर भारत के सबसे भरोसेमंद ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा की मौजूदगी टीम को बैटिंग डेप्थ और चुस्त फील्डिंग दोनों प्रदान करेगी।गेंदबाजी आक्रमण की रणनीति: तीन पेसर और कुलदीप यादव की फिरकीतिरुवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड स्टेडियम की सतह अमूमन नई गेंद से तेज गेंदबाजों को शुरुआती मदद देती है और जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है, पिच धीमी होती जाती है। इसे भांपते हुए भारतीय टीम तीन विशेषज्ञ तेज गेंदबाजों और एक प्रमुख कलाई के स्पिनर के साथ मैदान में उतरने की रणनीति बना रही है। तेज गेंदबाजी विभाग की कमान मोहम्मद सिराज के हाथों में होगी, जिनका साथ लंबे कद के तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा निभाएंगे। कृष्णा की अतिरिक्त उछाल कैरेबियाई बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है।तीसरे तेज गेंदबाज के रूप में उभरते हुए तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ को मौका मिलने की प्रबल संभावना है, जो अपनी गति से विरोधी खेमे में हलचल पैदा कर सकते हैं। वहीं मुख्य स्पिनर के रूप में चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव प्लेइंग 11 का अहम हिस्सा होंगे। कुलदीप के साथ रवींद्र जडेजा की स्पिन जोड़ी बीच के ओवरों में वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को बांधने का काम करेगी। नितीश कुमार रेड्डी के छठे गेंदबाजी विकल्प के रूप में मौजूद रहने से कप्तान शुभमन गिल के पास गेंदबाजी में विविधता के पर्याप्त विकल्प मौजूद रहेंगे।भारत की संभावित प्लेइंग 11 (Probable Playing XI)रोहित शर्माशुभमन गिल (कप्तान)विराट कोहलीऋतुराज गायकवाड़केएल राहुल (विकेटकीपर/उपकप्तान)नितीश कुमार रेड्डीरवींद्र जडेजाकुलदीप यादवमोहम्मद सिराजप्रसिद्ध कृष्णागुरनूर बराड़
27 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है. वहीं हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में काफी ज़्यादा से लेकर बहुत ज़्यादा इलाकों में बारिश होने की संभावना है.
चुनाव आयोग की बैठक में क्या-क्या हुआ, CEC के साथ दिखे दोनों चुनाव आयुक्त, SIR को लेकर कई बड़े फैसले
चुनाव आयोग को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की बैठक हुई है। इसी बीच चुनाव आयोग ने कई मुद्दों पर अपना पक्ष साफ किया है और एसआईआर को लेकर कई फैसले भी लिए हैं।
एग्जॉस्ट फैन पर जम गई चिपचिपी गंदगी? 15 मिनट में ऐसे करें साफ, जान लें आसान घरेलू नुस्खा
आज हम आपको ऐसा आसान घरेलू नुस्खा बताने जा रहे हैं, जिसकी मदद से आप एग्जॉस्ट फैन को 15 मिनट में साफ कर सकते हैं और उसे फिर से नए जैसा बना सकते हैं. इसमें आपको ज्यादा मेहनत भी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
सनातन संस्कृति में देवभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार को मोक्ष का प्रधान द्वार माना गया है। धर्म शास्त्रों के अनुसार जब कुंडली में पितृ दोष सक्रिय होता है, तो व्यक्ति का जीवन निरंतर आर्थिक बाधाओं, पारिवारिक कलह, संतान कष्ट और मानसिक तनाव से घिर जाता है। इस दोष के निवारण हेतु वैदिक ग्रंथों में कई अनुष्ठान बताए गए हैं, परंतु हरिद्वार के दक्षिणी छोर पर बसे पावन उपनगर कनखल में स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर एक ऐसा सिद्ध और चमत्कारी तीर्थ है, जहां दर्शन मात्र और शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करने से पितृ दोष की उग्रता शांत हो जाती है। श्राद्ध पक्ष के दिनों में इस मंदिर का आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है, क्योंकि यहां महादेव साक्षात अपने ससुर राजा दक्ष के उद्धारक के रूप में विराजमान हैं।यह भव्य और जागृत देवालय भगवान शिव और जगज्जननी माता सती के अमर प्रेम, त्याग और आध्यात्मिक मर्यादा का साक्षात प्रतीक है। कनखल की इस पावन भूमि को शिवभक्तों के साथ-साथ समस्त सनातनी अत्यंत आदर की दृष्टि से देखते हैं। पितृ पक्ष के दौरान देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मिक शांति और अपने कुल से पितृ दोष के प्रभाव को मिटाने के लिए दक्षेश्वर महादेव के पावन प्रांगण में पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां किए गए जलाभिषेक से पूर्वजों की अधोगति नष्ट होती है और वे सीधे उत्तम लोकों की ओर प्रस्थान करते हैं।दक्षेश्वर मंदिर का ऐतिहासिक स्वरूप: रानी धनकौर का निर्माण और 1962 का कायाकल्पदक्षेश्वर महादेव मंदिर का वर्तमान स्थापत्य और इतिहास कला तथा आस्था का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। यद्यपि यह स्थल सतयुग के पौराणिक काल से ही अत्यंत पवित्र माना जाता रहा है, परंतु इसके वर्तमान मंदिर ढांचे का ऐतिहासिक निर्माण वर्ष 1810 में रियासत की महारानी धनकौर ने करवाया था। महारानी धनकौर ने कनखल के इस प्राचीन यज्ञ स्थल के आध्यात्मिक महत्व को पहचानते हुए नागर शैली के अनुरूप एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया, जिसमें नक्काशीदार पत्थरों और विशाल शिखर का संयोजन किया गया था।समय के थपेड़ों और गंगा की बाढ़ के प्रभाव को देखते हुए बाद में वर्ष 1962 में महानिर्वाणी अखाड़े और स्थानीय धर्मावलंबियों के सहयोग से मंदिर परिसर का व्यापक स्तर पर जीर्णोद्धार किया गया। मंदिर परिसर के मुख्य गर्भगृह में प्राचीन स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है, जहां स्पर्श दर्शन और रुद्राभिषेक करने से भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर परिसर के भीतर ही वह पौराणिक यज्ञ कुंड आज भी सुरक्षित है, जिसे माता सती के आत्मदाह का साक्षी माना जाता है। इस पावन कुंड की भस्म को मस्तक पर लगाने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है।सती के आत्मदाह और राजा दक्ष के यज्ञ की पौराणिक कथादक्षेश्वर महादेव मंदिर की महत्ता के पीछे श्रीमद्देवीभागवत और शिवपुराण में वर्णित एक अत्यंत मार्मिक और भीषण पौराणिक घटना जुड़ी हुई है। कथा के अनुसार, प्रजापति राजा दक्ष ने कनखल में एक महाविशाल यज्ञ का अनुष्ठान किया था। अहंकार में अंधे होकर राजा दक्ष ने त्रिलोकीनाथ भगवान शिव को इस यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया और जानबूझकर उनका भाग नहीं निकाला। जब माता सती को यह ज्ञात हुआ कि उनके पिता एक विराट यज्ञ कर रहे हैं, तो उन्होंने अपने पति देवाधिदेव महादेव से वहां जाने की प्रार्थना की। भगवान शिव ने उन्हें स्पष्ट रूप से सचेत किया कि बिना निमंत्रण के जाना अपमान का कारण बनता है, परंतु पिता के प्रति स्नेहवश माता सती हठपूर्वक यज्ञ में पहुंच गईं।यज्ञमंडप में पहुंचने पर प्रजापति दक्ष ने पूरी सभा के सामने भगवान शिव के प्रति अत्यंत अपमानजनक और कटु शब्दों का प्रयोग किया। अपने आराध्य और पति के इस घोर निरादर को माता सती सहन न कर सकीं। अपनी मर्यादा और शिव-तत्व के सम्मान की रक्षा हेतु देवी सती ने उसी यज्ञ मंडप में योगाग्नि प्रज्वलित की और यज्ञ की पावन अग्नि में स्वयं को भस्म कर दिया। यह समाचार सुनते ही कैलाश पर भगवान शिव अत्यंत कुपित हो उठे। उनके क्रोध की ज्वाला से समस्त ब्रह्मांड कांप उठा और उन्होंने अपनी जटा से उग्र रूपी वीरभद्र और भद्रकाली को उत्पन्न कर दिया।वीरभद्र का तांडव, दक्ष का वध और बकरे के सिर से मिला जीवनदानभगवान शिव के आदेश पर वीरभद्र ने अपनी प्रलयंकारी सेना के साथ कनखल के यज्ञ स्थल पर धावा बोल दिया। यज्ञशाला को तहस-नहस कर दिया गया, देवताओं को उनके अधर्म का दंड मिला और वीरभद्र ने प्रजापति दक्ष का मस्तक धड़ से अलग करके उसी यज्ञ कुंड की अग्नि में स्वाहा कर दिया। सृष्टि में मचे हाहाकार को देखकर भगवान ब्रह्मा और अन्य सभी देवताओं ने महादेव की स्तुति की और उनके क्रोध को शांत करने की याचना की।देवताओं की विनम्र प्रार्थना और पश्चाताप को देखकर करुणासागर महादेव का हृदय पसीज गया। शिवजी ने राजा दक्ष को क्षमादान दिया, परंतु चूंकि उनका मूल शीश अग्नि में जल चुका था, इसलिए राजा दक्ष के धड़ पर एक बकरे (अज) का सिर लगाकर उन्हें पुनः जीवित किया गया। राजा दक्ष ने पुनर्जीवन पाते ही महादेव के चरणों में गिरकर क्षमा मांगी और 'शिव महिम्न स्तोत्र' से उनकी वंदना की। महादेव ने प्रसन्न होकर यह वरदान दिया कि यह स्थान 'दक्षेश्वर' के नाम से संसार में विख्यात होगा और जो भी प्राणी यहां आकर शिवजी की पूजा करेगा, उसके समस्त अपराध और पूर्वजों के दोष भस्म हो जाएंगे।पितृ पक्ष में दक्षेश्वर धाम में श्राद्ध, तर्पण और शिव पूजा का शास्त्रीय विधानधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राजा दक्ष स्वयं प्रजापति और समस्त जीवों के मूल पूर्वजों (पितरों) के अधिपति माने जाते हैं। जब भगवान शिव ने अपने ससुर दक्ष के अपराधों को क्षमा कर उन्हें सद्गति और मोक्ष प्रदान किया, तभी से यह सिद्ध हो गया कि दक्षेश्वर महादेव पितृ ऋण और पितृ दोष से मुक्ति के सर्वोच्च अधिष्ठाता देव हैं। यही कारण है कि आश्विन मास के पितृ पक्ष के दौरान यहां तर्पण और पिंडदान करने का फल गया तीर्थ के समान माना जाता है।श्राद्ध पक्ष के दिनों में श्रद्धालु प्रातःकाल हरिद्वार के पवित्र हर की पौड़ी या कनखल के सती घाट पर गंगा स्नान करते हैं। इसके उपरांत श्वेत वस्त्र धारण कर, हाथ में कुश की पवित्री पहनकर और तांबे के पात्र में गंगाजल, कच्चा गाय का दूध, काले तिल, जौ, शहद और बेलपत्र लेकर दक्षेश्वर शिवलिंग का विधिवत अभिषेक करते हैं। अभिषेक के समय 'ॐ नमः शिवाय' और महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जप किया जाता है। शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद श्रद्धालु प्राचीन यज्ञ कुंड की परिक्रमा करते हैं और अपने ज्ञात-अज्ञात पितरों के निमित्त प्रार्थना करते हैं। ऐसा करने से पितरों को शांति मिलती है, कुल में चली आ रही बाधाएं दूर होती हैं और साधक के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का स्थायी वास होता है।
रणबीर ने की हनुमान पूजा-उठाया 'शिव धनुष, 'रावण' ने बनाई दूरी
'रामायण' में राम बने रणबीर कपूर, सीता बनीं साई पल्लवी और लक्ष्मण बने रवि दुबे ने हनुमान पूजा करके इवेंट की शुरुआत की.
Samajwadi Party कार्यालय में Ram Govind Chaudhary को Akhilesh Yadav ने दी श्रद्धांजलि
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को विधानसभा के आठ बार सदस्य रहे दिवंगत राम गोविंद चौधरी को अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह सामाजिक न्याय के पुरोधा के रूप में जीवन भर संघर्षरत रहे और उन्होंने जनपक्ष को हमेशा सबसे पहले और ऊपर रखा। सपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता विरोधी दल (2017-2022) राम गोविंद चौधरी के निधन पर पार्टी प्रदेश मुख्यालय में शनिवार को एक शोक सभा हुई। यादव ने चौधरी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। सपा के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार रात लखनऊ स्थित संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में उपचार के दौरान निधन हो गया। वह करीब 74 वर्ष के थे। सपा के मुख्य प्रवक्ता एवं पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी ने बताया कि आज पार्टी प्रदेश मुख्यालय में दिवंगत नेता के लिए शोक प्रस्ताव रखा गया। उपस्थित सभी नेताओं, कार्यकर्ताओं ने रामगोविन्द चौधरी के निधन पर गहरा शोक जताते हुए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। पार्टी की ओर से जारी एक बयान के अनुसार इस मौके पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, ‘‘अब हमारे बीच महान समाजवादी प्रकाश-स्तंभ राम गोविंद चौधरी जी नहीं रहे, जिन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी एवं समाजवादी मार्गदर्शक जय प्रकाश नारायण जी और भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी की अगुवाई में समाजवादी मूल्यों, सिद्धांतों और लक्ष्यों की मशाल सदैव प्रज्वलित रखी।’’यादव ने उनके कार्यों को स्मरण करते हुए कहा कि बलिया की क्रांतिकारी धरती से उठकर छात्र राजनीति के कठिन मार्ग से होते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तक उनकी आवाज और अकाट्य तर्कों का सदैव सम्मान हुआ। सपा प्रमुख ने कहा, ‘‘विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने तब भी अपनी आवाज बुलंद रखी जब सदन में हमारे 50 विधायक भी नहीं थे। जब वह बोलते थे तो सदन उन्हें बड़ी शांति और शिद्दत के साथ सुनता था।’’बलिया जिले के सिकंदरपुर क्षेत्र के एक गांव में नौ जुलाई 1953 को जन्मे राम गोविंद चौधरी ने इसी जिले की चिलकहर और बांसडीह सीट का 1977 से 2022 के बीच विधानसभा में आठ बार प्रतिनिधित्व किया। वह मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के नेतृत्व की सरकारों में मंत्री भी रहे। इसके पहले 1972 में वह बलिया के टाउन कॉलेज छात्रसंघ के महामंत्री और 1974 में अध्यक्ष निर्वाचित हुए। आपातकाल के दौरान उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और जनपद छात्र युवा वाहिनी के सह-संयोजक रहे।
सनातन धर्म की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ और पापनाशक माना गया है। वर्ष भर में आने वाली कुल चौबीस एकादशियों में से आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को 'इंदिरा एकादशी' के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी का महत्व इसलिए कई गुना अधिक बढ़ जाता है क्योंकि यह पितृ पक्ष के पावन पखवाड़े के मध्य पड़ती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के पूर्वज या पितर अपने पूर्व जन्मों के किन्हीं पाप कर्मों के कारण यमलोक में दंड भुगत रहे हों या उन्हें अधोगति प्राप्त हुई हो, तो उनके निमित्त विधि-विधान से इंदिरा एकादशी का व्रत और पूजन करने से उन्हें तुरंत समस्त कष्टों से मुक्ति मिलकर बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।भगवान श्रीहरि विष्णु और माता महालक्ष्मी की आराधना को समर्पित यह पावन पर्व न केवल साधक के जीवन से दरिद्रता, भय और दोषों का नाश करता है, बल्कि कुल के सात पीढ़ियों के पितरों का भी उद्धार करता है। पद्म पुराण और महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को इस एकादशी की महिमा बताते हुए कहा था कि इंदिरा एकादशी का व्रत रखने वाले मनुष्य को वाजपेय यज्ञ के समान पुण्यफल प्राप्त होता है। साल 2026 में आश्विन मास की यह एकादशी एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ खगोलीय संयोग के साथ आ रही है, जिसने इसके प्रभाव को और अधिक फलदायी बना दिया है।6 अक्टूबर 2026 को इंदिरा एकादशी: उदया तिथि, सर्वार्थ सिद्धि योग और शुभ मुहूर्तवैदिक पंचांग की सूक्ष्म गणनाओं के अनुसार आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का शुभारंभ 06 अक्टूबर 2026 को देर रात 02 बजकर 07 मिनट पर होगा। वहीं इस पावन तिथि का समापन 07 अक्टूबर 2026 को देर रात 12 बजकर 34 मिनट पर होगा। चूंकि सनातन धर्म में सूर्योदयव्यापिनी उदया तिथि को ही सर्वोपरि मान्यता प्राप्त है, इसलिए इंदिरा एकादशी का मुख्य व्रत 06 अक्टूबर 2026, मंगलवार के दिन ही पूरी श्रद्धा के साथ रखा जाएगा।इस वर्ष इस तिथि को और अधिक विशेष बना रहा है 'सर्वार्थ सिद्धि योग'। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सर्वार्थ सिद्धि योग एक ऐसा दुर्लभ और शुभ योग होता है जिसमें किए गए सभी धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और संकल्प बिना किसी बाधा के सिद्ध होते हैं। 06 अक्टूबर को यह दिव्य योग सुबह 06 बजकर 25 मिनट से प्रारंभ होकर रात 10 बजकर 17 मिनट तक निरंतर प्रभावी रहेगा। ऐसे में इस समयावधि के भीतर की गई भगवान विष्णु की उपासना और पितरों के नाम से किया गया तर्पण साधक की हर मनोकामना को पूर्ण करने वाला सिद्ध होगा।दिन के अन्य महत्वपूर्ण मुहूर्तों की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 04 बजकर 47 मिनट से 05 बजकर 36 मिनट तक रहेगा, जो ध्यान और साधना के लिए सर्वोत्तम है। दोपहर का विजय मुहूर्त 02 बजकर 17 मिनट से 03 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। वहीं सायंकालीन गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 13 मिनट से 06 बजकर 38 मिनट तक और निशिता मुहूर्त (मध्यरात्रि पूजन) रात्रि 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।इंदिरा एकादशी 2026 व्रत पारण का समय और दान का विशेष विधानशास्त्रों के अनुसार एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब उसका पारण नियत समय पर और शास्त्रीय नियमों के अनुसार द्वादशी तिथि में किया जाए। इंदिरा एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी बुधवार, 07 अक्टूबर 2026 को संपन्न किया जाएगा। पारण का सबसे उत्तम और शास्त्र सम्मत समय सुबह 06 बजकर 17 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। व्रतियों को इसी समयावधि के भीतर हरिवासर समाप्त होने के बाद अपना व्रत खोलना चाहिए।पारण के नियमों के अनुसार व्रत खोलने से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु की आरती करें। इसके उपरांत किसी ब्राह्मण, साधु-संत अथवा जरूरतमंद व्यक्ति को अपने सामर्थ्य अनुसार सीधा (कच्चा अन्न जैसे आटा, दाल, चावल, घी), पीले वस्त्र, मौसमी फल और दक्षिणा का दान अवश्य करें। धर्मग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख है कि एकादशी व्रत के उपरांत किया गया दान अक्षय हो जाता है। गौमाता को हरा चारा या गुड़-रोटी खिलाने के पश्चात ही तुलसी दल और चरणामृत ग्रहण करके स्वयं का व्रत खोलना चाहिए।पितरों की मुक्ति के लिए पूजा विधि और तर्पण की शास्त्रीय प्रक्रियाइंदिरा एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र नदियों में स्नान करने या घर के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करने का विधान है। इसके बाद हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत का दृढ़ संकल्प लें। घर के ईशान कोण में एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान लक्ष्मीनारायण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें और उन्हें पीले पुष्प, पीला चंदन, तुलसी दल, ऋतुफल और पीले मिष्ठान्न का भोग लगाएं। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' महामंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।पितृ पक्ष होने के कारण इस दिन पितरों के निमित्त विशेष तर्पण किया जाता है। दोपहर के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तांबे या पीतल के पात्र में जल, कच्चा दूध, जौ, अक्षत और काले तिल मिलाकर कुश की पवित्री पहनकर पितरों को जलांजलि दें। इसके बाद श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय का पाठ करें और उसके पुण्य का संकल्प अपने पितरों को समर्पित करें। ऐसा करने से पितृ दोष शांत होता है और पितर प्रसन्न होकर अपने वंशजों को दीर्घायु, आरोग्य, धन-धान्य और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।इंदिरा एकादशी व्रत कथा: राजा इंद्रसेन और उनके पिता के उद्धार का प्रसंगपौराणिक कथा के अनुसार सतयुग में महिष्मती नगरी में धर्मपरायण राजा इंद्रसेन शासन करते थे। वे भगवान विष्णु के परम भक्त थे। एक दिन देवर्षि नारद उनके राजदरबार में पधारे और उन्होंने राजा को बताया कि वे यमलोक गए थे, जहां उन्होंने राजा इंद्रसेन के पिता को देखा। उनके पिता पूर्व जन्म में एकादशी व्रत भंग होने के कारण यमलोक के भीषण कष्ट भोग रहे थे। पिता ने नारद जी के माध्यम से अपने पुत्र इंद्रसेन तक यह संदेश भेजा था कि यदि उनका पुत्र आश्विन कृष्ण पक्ष की इंदिरा एकादशी का व्रत रखे और उसका पुण्य उन्हें दान कर दे, तो उन्हें यमलोक के बंधनों से मुक्ति मिल जाएगी।देवर्षि नारद के बताए अनुसार राजा इंद्रसेन ने अपनी प्रजा, मंत्रियों और परिवार सहित आश्विन मास की इंदिरा एकादशी का कठोर उपवास रखा, विधिपूर्वक भगवान शालिग्राम का पूजन किया और ब्राह्मणों को दान देकर व्रत का संपूर्ण पुण्य अपने स्वर्गीय पिता को समर्पित कर दिया। इस व्रत के प्रभाव से आकाश से पुष्प वर्षा हुई और राजा के पिता गरुड़ पर सवार होकर सीधे बैकुंठ धाम चले गए। तभी से यह मान्यता चली आ रही है कि इंदिरा एकादशी का व्रत पूर्वजों को मोक्ष दिलाने वाला सबसे अचूक और शक्तिशाली माध्यम है।
UNGA में दिखा भारत का दबदबा, जयशंकर के संबोधन से पहले 11 दिग्गज नेताओं ने की वकालत
संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के संबोधन से पहले ही 11 देशों के नेताओं ने भारत का विभिन्न संदर्भों में उल्लेख किया।
देव, ऋषि और पितृ तर्पण के नियम, क्या महिलाएं और पुरुष अलग तरीके से देते हैं तिलांजलि
सनातन धर्म और वैदिक परंपरा में पितृ पक्ष का समय पूर्वजों, ऋषियों और देवताओं के प्रति अपनी अगाध कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे पावन कालखंड माना गया है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाले इस पखवाड़े के दौरान लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनकी क्षुधा-तृप्ति के लिए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करते हैं। धर्मग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि केवल भोजन अर्पित करने से ही नहीं, बल्कि कुश, अक्षत, जौ और काले तिल मिले पवित्र जल की अंजलि देने से पितृ तृप्त होते हैं। इस पावन जलदान की प्रक्रिया को ही 'तर्पण' कहा जाता है। तर्पण के माध्यम से व्यक्ति अपने संपूर्ण अस्तित्व और जीवन के लिए ब्रह्मांड की सभी सकारात्मक शक्तियों का आभार प्रकट करता है।धार्मिक मान्यताओं और स्मृति ग्रंथों के अनुसार तर्पण को केवल परिवार के दिवंगत परिजनों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसके अंतर्गत सृष्टि के समस्त ज्ञात-अज्ञात चेतन तत्वों को शामिल किया गया है। शास्त्र सम्मत विधान के अनुसार मुख्य रूप से पांच प्रकार के तर्पण का स्पष्ट निर्देश दिया गया है, जिन्हें क्रमवार संपन्न किया जाता है। आइए समझते हैं कि वे पांच श्रेणियां कौन सी हैं और प्रत्येक का क्या विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व है।देव, ऋषि और दिव्य मानव तर्पण: सृष्टि की दिव्य शक्तियों के प्रति कृतज्ञतातर्पण की शुरुआत हमेशा देव तर्पण से होती है। देव तर्पण के अंतर्गत ब्रह्मा, विष्णु, महेश, इंद्र, अग्नि, वरुण आदि पंचतत्वों और समस्त वैदिक देवताओं की तृप्ति के लिए जल अर्पित किया जाता है। इसमें पूर्व दिशा की ओर मुख करके जनेऊ को सव्य (बाएं कंधे पर) रखते हुए, उंगलियों के अग्रभाग यानी देवतीर्थ से शुद्ध जल, सफेद चंदन और अक्षत मिश्रित जलधारा समर्पित की जाती है। यह विधान हमें स्मरण कराता है कि हमारा अस्तित्व देवताओं की कृपा और प्रकृति के संतुलन पर टिका है।इसके उपरांत ऋषि तर्पण का विधान आता है, जो मानव सभ्यता को ज्ञान, दर्शन और संस्कार प्रदान करने वाले महान ऋषियों को समर्पित होता है। महर्षि वशिष्ठ, विश्वामित्र, भारद्वाज, कश्यप, अत्रि, गौतम और जमदग्नि जैसे सप्तर्षियों का ध्यान करते हुए उत्तर दिशा की ओर मुख करके जल दिया जाता है। इसे ऋषितीर्थ यानी कनिष्ठिका उंगली के मूल भाग से अर्पित किया जाता है। इसके पश्चात दिव्य मानव तर्पण किया जाता है, जिसमें सनक, सनंदन, सनातन और सनत्कुमार जैसे सिद्ध महापुरुषों तथा यमराज के दूतों और दिव्य आत्माओं को जल देकर उनके प्रति नमन किया जाता है। यह तर्पण मनुष्य को सांसारिक मोह से ऊपर उठाकर आध्यात्मिक चेतना की ओर ले जाता है।दिव्य पितृ और कुल पितृ तर्पण: पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति का महामंत्रचौथा प्रकार दिव्य पितृ तर्पण कहलाता है। दिव्य पितरों में वे पूर्वज शामिल होते हैं जो अपने जीवनकाल में किए गए श्रेष्ठ कर्मों और योग साधना के बल पर उच्च लोकों में स्थान पा चुके हैं, जैसे अग्निष्वात्त, बर्हिषद और सोमपा पितृगण। इन्हें दक्षिण दिशा की ओर मुख करके काले तिल और कुश के माध्यम से तृप्त किया जाता है। इनके आशीर्वाद से साधक के घर-परिवार में आध्यात्मिक और भौतिक समृद्धि बनी रहती है।पांचवां और सबसे प्रमुख अंग है पितृ तर्पण, जो सीधे तौर पर हमारे अपने कुल, वंश और परिवार के तीन पीढ़ियों के ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के लिए किया जाता है। इसमें पिता, पितामह (दादा), प्रपितामह (परदादा) तथा माता, पितामही (दादी) और प्रपितामही (परदादी) के साथ-साथ नाना-नानी और अन्य संबंधियों को जल की अंजलि दी जाती है। इस तर्पण में दक्षिण दिशा की ओर मुख किया जाता है और हाथ में कुश की पवित्री धारण करके, अंगूठे और तर्जनी के बीच स्थित पितृतीर्थ से जलधारा प्रवाहित की जाती है। काले तिल और कुश के स्पर्श से दिया गया यह जल पितरों को असीम तृप्ति प्रदान करता है और जन्म-जन्मांतर के पितृ ऋण से मुक्ति दिलाता है।क्या महिला और पुरुष अलग-अलग तरीके से देते हैं तिलांजलि? जानें गरुड़ पुराण के नियमश्राद्ध और तर्पण कर्म को लेकर अक्सर यह जिज्ञासा रहती है कि क्या महिलाएं भी पितरों को तिलांजलि दे सकती हैं और पुरुष व महिला की तर्पण विधि में क्या मूलभूत अंतर होता है। हिंदू धर्मग्रंथों और गरुड़ पुराण के धर्मकाण्ड में यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि पुत्र की अनुपस्थिति में पत्नी, पुत्री या पुत्रवधू को पितृ कर्म, पिंडदान और तर्पण करने का पूर्ण शास्त्रीय अधिकार प्राप्त है। यदि परिवार में कोई पुरुष सदस्य न हो या वह किसी कारणवश असमर्थ हो, तो महिलाएं पूरी निष्ठा के साथ अपने पूर्वजों को जल अर्पित कर सकती हैं।विधि के संदर्भ में सबसे बड़ा अंतर यज्ञोपवीत यानी जनेऊ के नियमों का होता है। पुरुष जब पितरों का तर्पण करते हैं, तो वे अपने जनेऊ को बाएं कंधे से हटाकर दाहिने कंधे पर कर लेते हैं, जिसे वैदिक भाषा में 'अपसव्य' स्थिति कहा जाता है। इसके साथ ही वे दक्षिण दिशा की ओर मुख करके घुटने मोड़कर बैठते हैं और पितृतीर्थ से तिलांजलि देते हैं। चूंकि महिलाओं के लिए जनेऊ धारण करने का नियम नहीं होता, इसलिए उन पर अपसव्य का नियम लागू नहीं होता। महिलाएं शुद्ध और सात्विक वस्त्र धारण करके, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दोनों हाथों में कुश और काला तिल लेकर सीधे भाव से पितरों को जल की अंजलि समर्पित कर सकती हैं। दोनों ही स्थितियों में भाव और श्रद्धा की प्रधानता होती है, क्योंकि शास्त्रों का वचन है कि पितृ केवल जल और श्रद्धा के भूखे होते हैं।तर्पण के समय इन नियमों का रखें खास ध्यान, तभी मिलेगा पूरा फलतर्पण कर्म करते समय कुछ अत्यंत आवश्यक सावधानियों और नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है। तर्पण हमेशा सूर्योदय के बाद और दोपहर 12 बजे से पहले के समय, विशेषकर कुतुप और रौहिण मुहूर्त में ही संपन्न करना चाहिए। संध्याकाल या रात्रि में तर्पण करना शास्त्रों में पूर्णतः वर्जित बताया गया है। इसके अलावा तर्पण करते समय तांबे, पीतल, कांसे या चांदी के पात्र का ही प्रयोग करना चाहिए; लोहे, स्टील या प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग कभी नहीं करना चाहिए।जल में गंगाजल, कच्चा गाय का दूध, जौ, सफेद चंदन, अक्षत और विशेष रूप से काले तिल का सम्मिश्रण अवश्य होना चाहिए। अनामिका उंगली में कुश की अंगूठी (पवित्री) पहनना तर्पण की सबसे अनिवार्य शर्त है, क्योंकि कुश को भगवान विष्णु के रोम से उत्पन्न और अत्यंत पवित्र माना गया है। जब पूर्ण श्रद्धा, एकाग्रता और नियमों के साथ यह पंच-तर्पण संपन्न होता है, तो पितृ तृप्त होकर अपने वंशजों को दीर्घायु, आरोग्य, संतान सुख और कुल वृद्धि का मंगलकारी आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों के बीच फॉर्म 6, वोटर डेटाबेस जैसे अहम मुद्दों पर मतभेदों की खबरें सामने आई हैं। आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अंतिम फैसले आम सहमति से लिए जाते हैं।
UN में भारत का पाकिस्तान को करारा जवाब, जयशंकर ने की बोलती बंद
संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर भारत ने आतंकी देश पाकिस्तान को एक बार फिर करारा जवाब दिया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जब संयुक्त राष्ट्र के मंच से कश्मीर का पुराना राग अलापा और सिंधु जल समझौते को लेकर गीदड़भभकी दी, तो भारत के प्रतिनिधि ने उसी मंच पर पाकिस्तान को खरी-खरी सुना दी. भारतीय प्रतिनिधि ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत अपने आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करना जारी रखेगा.
कन्यादान और स्वाभिमान: शादी के बाद बेटी के घर पानी न पीने का क्या है नियम
भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में पारिवारिक रिश्तों को केवल सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और धार्मिक मर्यादाओं का एक पावन स्वरूप माना गया है। हमारे समाज में सदियों से ऐसी कई परंपराएं और मान्यताएं चली आ रही हैं, जिनका पालन लोग आज भी पूरी निष्ठा के साथ करते हैं। इन्हीं में से एक बेहद चर्चित और गहरी मान्यता यह है कि विवाह के बाद माता-पिता, विशेषकर पिता को अपनी विवाहिता बेटी के घर यानी उसकी ससुराल में अन्न या जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। गांव-देहात से लेकर शहरों तक आज भी कई बुजुर्ग पिता जब अपनी बेटी की ससुराल जाते हैं, तो वहां एक घूंट पानी पीने से भी संकोच करते हैं या फिर बदले में कुछ धन अथवा उपहार भेंट करके ही कुछ स्वीकार करते हैं।समय के साथ आधुनिक समाज में भले ही इस सोच और कठोरता में व्यापक बदलाव आया है, लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से इस परंपरा की जड़ें बहुत गहरी हैं। ज्योतिषियों और धर्मशास्त्र के विद्वानों का कहना है कि इस नियम को केवल एक अंधविश्वास या रूढ़िवादिता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके पीछे प्राचीन वैदिक काल की सामाजिक व्यवस्था, कन्यादान का पावन भाव और माता-पिता के आत्मसम्मान का एक मजबूत दर्शन छिपा हुआ है।कन्यादान का पावन संकल्प: दान की गई वस्तु से लाभ न लेने का धार्मिक विधानसनातन परंपरा में विवाह के समय किए जाने वाले 'कन्यादान' को संसार के सबसे बड़े और पवित्र महादानों में गिना गया है। विवाह के पावन मंडप में अग्नि को साक्षी मानकर माता-पिता अपनी सबसे लाडली संतान यानी कन्या का हाथ सुयोग्य वर को सौंपते हैं। वैदिक मान्यताओं के अनुसार, जब कोई व्यक्ति किसी वस्तु या संकल्प का दान ईश्वर के निमित्त कर देता है, तो उस दान के बदले में कोई फल, सेवा या भौतिक सुख प्राप्त करने की इच्छा रखना उस दान के पुण्य प्रभाव को समाप्त कर देता है।प्राचीन धर्मशास्त्रों का यह स्पष्ट मत रहा है कि कन्यादान के बाद पुत्री अपने नए कुल यानी ससुराल के परिवार का अभिन्न अंग बन जाती है। ऐसे में जिस बेटी का दान कर दिया गया हो, उसी के घर जाकर उसकी सेवाओं का उपभोग करना या उसके ससुराल के संसाधनों से अपने शरीर का पोषण करना आध्यात्मिक रूप से उचित नहीं माना गया। शास्त्रों में वर्णित इस भावना का मुख्य उद्देश्य दानदाता के मन में त्याग और निष्काम भाव को बनाए रखना था ताकि कन्यादान का आध्यात्मिक पुण्य पूरी तरह सुरक्षित रहे।प्राचीन सामाजिक ताना-बाना और आर्थिक बोझ न बनने की संवेदनशील सोचधार्मिक कारणों के अतिरिक्त इस परंपरा के पीछे एक अत्यंत व्यावहारिक और संवेदनशील सामाजिक सोच भी काम कर रही थी। प्राचीन काल में संयुक्त परिवार की व्यवस्था होती थी और आज की तरह आर्थिक साधन इतने सुलभ नहीं थे। बेटियों का विवाह दूर-दराज के गांवों में होता था और ससुराल पक्ष पर पूरे परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी होती थी। ऐसे समय में मायके वालों की यह सोच होती थी कि उनकी बेटी ससुराल में पूरे मान-सम्मान और स्वाभिमान के साथ अपना जीवन व्यतीत करे।माता-पिता यह कभी नहीं चाहते थे कि उनकी बार-बार की आवाजाही या उनके भोजन-पानी के खर्च से बेटी के ससुराल वालों पर किसी भी तरह का आर्थिक दबाव पड़े। यदि मायके वाले बेटी के ससुराल जाकर नियमित रूप से आतिथ्य स्वीकार करते, तो इससे ससुराल पक्ष में बेटी के मान-सम्मान को ठेस पहुंचने या उसे ताने मिलने का भय रहता था। इसी कारण पिता ने यह कड़ा नियम अपने ऊपर लागू किया कि वे बेटी के घर का जल तक ग्रहण नहीं करेंगे, ताकि ससुराल वालों के सामने बेटी का मस्तक हमेशा गर्व से ऊंचा रहे और मायका किसी भी रूप में बोझ न समझा जाए।पिता का आत्मसम्मान और बेटी के प्रति निस्वार्थ वात्सल्य का अनूठा प्रतीकपिता और पुत्री का संबंध संसार में सबसे पवित्र और निस्वार्थ माना गया है। एक पिता अपने जीवन की पूरी जमापूंजी और लाड-प्यार अपनी बेटी के लालन-पालन में लगा देता है। भारतीय पिता का स्वाभिमान हमेशा यह स्वीकार करता है कि वह जीवन भर अपनी संतान को केवल देना जानता है, उससे किसी भी रूप में कुछ लेने की इच्छा नहीं रखता। जब बेटी विदा होकर पराए घर चली जाती है, तो पिता का यह आत्मसम्मान और अधिक सजग हो जाता है।बेटी के घर अन्न-जल न ग्रहण करने का नियम असल में पिता के इसी पितृ-धर्म और स्वाभिमान की रक्षा करता है। पिता का यह भाव होता है कि बेटी कभी अपने पिता की सेवा करने के लिए विवश न हो और न ही पिता कभी बेटी के संसाधनों पर आश्रित दिखें। इसी स्वाभिमान को बनाए रखने के लिए यह लोक-परंपरा भी विकसित हुई कि यदि किसी अपरिहार्य परिस्थिति में पिता को बेटी के घर भोजन या जल ग्रहण करना ही पड़े, तो वे बदले में बेटी को शगुन के रूप में कुछ नकद राशि या उपहार जरूर देते हैं, जिससे यह भाव बना रहे कि पिता ने बेटी से कुछ लिया नहीं, बल्कि उसे कुछ देकर ही आए हैं।आधुनिक युग में बदलती सोच: अंधानुकरण से परे आपसी प्रेम और सहयोग का नया दौरवर्तमान 21वीं सदी में पारिवारिक संरचनाओं, शिक्षा और जीवनशैली में युगांतरकारी परिवर्तन आ चुके हैं। आज बेटियां आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं और अपने माता-पिता के सुख-दुख में बेटों के समान ही बराबर की भागीदार बन रही हैं। आज के समय में दामाद और बेटी दोनों ही माता-पिता की देखभाल को अपना नैतिक कर्तव्य मानते हैं। यही वजह है कि मेट्रो शहरों और आधुनिक परिवारों में अब इस नियम को उस पुराने कठोर रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि इसे रिश्तों के आपसी प्रेम, सम्मान और सहजता के तराजू पर तौला जाता है।धर्म के जानकारों का भी यही मानना है कि किसी भी धार्मिक परंपरा का मूल उद्देश्य रिश्तों में मर्यादा, सम्मान और सद्भाव बनाए रखना होता है, किसी पर जबरन पाबंदी थोपना नहीं। आज यदि कोई पिता अपनी बेटी के घर जाकर प्रेमपूर्वक भोजन करता है, तो उसमें कोई पाप या दोष नहीं है क्योंकि आज का संबंध औपचारिकता से ज्यादा अपनत्व और भावनात्मक सहयोग पर आधारित है। फिर भी, जो परिवार अपनी प्राचीन मान्यताओं और सांस्कृतिक जड़ों का सम्मान करते हुए इस परंपरा का पालन करते हैं, वे इसे अपनी बेटी के प्रति निष्काम त्याग और आत्मसम्मान के एक पावन प्रतीक के रूप में आज भी निभा रहे हैं।
SIR को लेकर दिल्ली-महाराष्ट्र में चुनाव आयोग ने लिया बड़ा फैसला, किया ये बदलाव
भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने शनिवार को वोटर लिस्ट के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) को बेहतर बनाने के लिए कई उपायों की घोषणा की। इनमें नोटिस पाने वाले वोटर्स के लिए घर-घर जाकर वेरिफिकेशन, ऑनलाइन सुनवाई का ज़्यादा इस्तेमाल और कमज़ोर वर्गों के लिए खास मदद शामिल है। आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दर्ज करने की समय-सीमा भी बढ़ा दी है, जिससे वोटर्स को अपनी चिंताएं बताने या लिस्ट में सुधार की मांग करने के लिए ज़्यादा समय मिल सके। ECI ने एक बयान में कहा संशोधित SIR प्रक्रिया के तहत, जिन वोटर्स को नोटिस मिले हैं क्योंकि उन्हें अनमैप्ड माना गया है या उनमें लॉजिकल कमियां पाई गई हैं। उन्हें आम तौर पर इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) या असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) के सामने पेश होने की ज़रूरत नहीं होगी। आयोग ने बताया कि यह फ़ैसला 26 सितंबर, 2026 को हुई बैठक के बाद लिया गया और इसे पूरे आयोग ने मंज़ूरी दी। इसके बजाय, बूथ लेवल ऑफिसर (BLOs) ऐसे वोटरों के घर जाकर ज़रूरी दस्तावेज़ इकट्ठा करेंगे और उन्हें ERO द्वारा विचार किए जाने के लिए ECINET पोर्टल पर अपलोड करेंगे। आयोग ने कहा कि इससे वोटरों को चुनाव कार्यालय जाने की ज़रूरत कम हो जाएगी। इसे भी पढ़ें: Hooghly रैली से Mamata Banerjee का हमला, कहा ECI के CEC Gyanesh Kumar को हटाना होगा ECI ने कहा कि सुनवाई सिर्फ़ ERO द्वारा तय किए गए खास मामलों में ही होगी और प्राथमिकता के तौर पर इसे ऑनलाइन किया जाएगा। अगर सुनवाई की ज़रूरत पड़ती है, तो वोटर के परिवार का कोई बालिग सदस्य वोटर की तरफ़ से पेश होने के लिए अधिकृत किया जा सकता है। अधिकारियों को ऑनलाइन सुनवाई के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। ECI ने ज़िला चुनाव अधिकारियों (DEOs) से कहा कि वे स्थानीय ज़रूरतों के हिसाब से ज़रूरी हेल्प डेस्क बनाएँ और स्पेशल कैंप लगाएँ। ये कैंप नाइट शेल्टर में रहने वाले लोगों, मज़दूरों, आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों, बेघर लोगों और उन अन्य लोगों की मदद के लिए होंगे जिन्हें वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने या सुधार करवाने की प्रक्रिया में मुश्किल हो सकती है। इसे भी पढ़ें: Election Commission का स्पष्टीकरण, SIR के सभी फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए गोवा में उठाए गए कदमों का ज़िक्र करते हुए ECI ने कहा गोवा के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) ने BLOs को निर्देश दिया है कि वे वोटर लिस्ट से छूटे हुए वोटरों के घर-घर जाकर उनसे फ़ॉर्म भरवाएँ। आयोग के अनुसार, ऐसे 97 वोटरों में से 81 ने वोटर लिस्ट में नाम शामिल करवाने के लिए पहले ही फ़ॉर्म 6 जमा कर दिया है। SIR को कंट्रोल करने वाले कानूनी ढांचे पर, कमीशन ने कहा कि इस प्रक्रिया के लिए फॉर्म 6 के साथ जुड़ी घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। कमीशन ने कहा, SIR के दायरे से बाहर की अवधि के लिए, आवेदन 'रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' के तहत प्रोसेस किए जाते रहेंगे। ECI ने अपने ECINET सिस्टम की समीक्षा करने की भी घोषणा की। उसने कहा कि फील्ड अधिकारियों को अभी उनके कानूनी अधिकारों के अनुसार प्लेटफॉर्म का रोल-बेस्ड एक्सेस (भूमिका-आधारित पहुंच) मिला हुआ है।
Bijapur Eklavya School छात्रा से यौन उत्पीड़न का आरोपी शिक्षक Rajasthan से पकड़ा गया
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के सरकारी आवासीय विद्यालय में 14 वर्षीय एक छात्रा का यौन उत्पीड़न करने के आरोपी शिक्षक को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने यह जानकारी दी। बीजापुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (नक्सल विरोधी अभियान) अमन झा ने बताया कि आरोपी देवेंद्र कुमार दहिया (35) को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया और ट्रांजिट रिमांड पर बीजापुर लाया गया। झा के अनुसार दहिया भोपालपट्टनम थानाक्षेत्र के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में कंप्यूटर शिक्षक है। उन्होंने बताया कि छात्रा ने अपनी मां के साथ 12 सितंबर को भोपालपट्टनम थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने बताया कि शिकायत के अनुसार, दहिया ने सात अक्टूबर, 2025 को लड़की को कथित तौर पर गलत तरीके से छुआ था और आरोपी ने कई अन्य मौकों पर भी उसके साथ बदसलूकी करने की कोशिश की थी, जिसका उसने विरोध किया था। उन्होंने बताया कि आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि बीजापुर जिले के पुलिस अधीक्षक उमेश प्रसाद गुप्ता के निर्देश पर आरोपी का पता लगाने और उसे गिरफ्तार करने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था। उन्होंने कहा कि आरोपी की खोज में दलों को राजस्थान और हरियाणा भेजा गया था। उन्होंने बताया कि तकनीकी आसूचना के आधार पर पुलिस ने दहिया का पता लगाया और राजस्थान के झालावाड़ में उसे हिरासत में लिया, जिसके बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर बीजापुर लाया गया। मामला सामने आने के बाद, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बीजापुर के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया था कि वे मामले की गहन जांच करें और कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करें।
Monsoon Latest Update: मॉनसून की वापसी में देरी हो रही है. उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड से लेकर उत्तराखंड तक भारी बारिश हो रही है. चक्रवाती हवाओं का दौर है और बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र है, जिससे मॉनसून अक्टूबर में भी खिंच सकता है.
IPS जया शर्मा ने लिखी Win UPSC Battle, बताया-10 लाख की भीड़ में टॉपर बनने का प्लान
Gen Z IPS जया शर्मा एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार उनकी लिखी किताब 'Win UPSC Battle' और उनकी अनोखी तैयारी की रणनीति की सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हो रही है. साथ ही जानिए हरियाणा DSP से भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी बनने की सक्सेस स्टोरी.
कल का मौसम, 27 सिंतबर: 8 घंटे के भीतर 15 राज्यों में होगी बारिश, 50-60 की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
राजस्थान में 27 सितंबर से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, पूर्वी राजस्थान में 27 से 29 सितंबर के बीच कुछ जगहों पर बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां हो सकती हैं। कल तेज हवाएं भी चलेंगी।
रफीक से बना राजकुमार, अफसरी से अनीता बनी पत्नी... 20 साल बाद'घर वापसी'
उत्तर प्रदेश के झांसी में करीब 20 साल बाद एक परिवार की धर्म और पहचान से जुड़ी कहानी सामने आई है. रक्सा क्षेत्र के राजापुर निवासी राजकुमार का कहना है कि बंगाल में मजदूरी के दौरान उसने मुस्लिम धर्म अपनाया और नाम रफीक हो गया था. अब पत्नी अफसरी और चार बच्चों के साथ लौटे राजकुमार ने पत्नी समेत फिर हिंदू धर्म अपनाया है.
NDTV इलेक्शन एक्सप्रेसवे: रायबरेली में कितनी बदली तस्वीर? डिडौली गांव के लोगों ने बताई सच्चाई
रायबरेली में डिडौली गांव के लोगों का कहना है कि सड़क, बिजली, शौचालय, शिक्षा और कानून-व्यवस्था में सुधार से उनकी जिंदगी पहले की तुलना में काफी आसान हुई है.
बाढ़ आने के बाद बैंकॉक को आपदा क्षेत्र घोषित कर दिया गया, टूरिस्ट भी हो रहे परेशान
एयर ट्रैफिक कंट्रोल अधिकारियों ने पुष्टि की कि उड़ान सेवाएं सामान्य थीं, लेकिन कुछ उड़ानों में देरी हो सकती है. बैंकॉक के गवर्नर चाडचार्ट सिट्टीपुंट ने कहा कि भारी बारिश के बावजूद, बारिश रुकने पर बाढ़ का पानी कम हो जाना चाहिए.
Delhi के Jantar Mantar पर 29 सितंबर को जुटें, PDP चीफ Mehbooba Mufti ने लोगों से की अपील
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने शनिवार को लोगों से अपील की कि वे 29 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल हों। उन्होंने देश के लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाने का आह्वान किया। एक्स पर एक पोस्ट में मुफ़्ती ने लिखा, हर उस भारतीय से अपील है जो हमारे विविध देश को एक साथ बांधने वाले लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को महत्व देता है। आइए हम सब मिलकर उस भारत के लिए आवाज़ उठाएं जिसमें हम विश्वास करते हैं। 29 सितंबर को दोपहर 2 से 5 बजे के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर हमारे साथ जुड़ें। एक्स पर एक वीडियो अपील शेयर करते हुए मुफ़्ती ने कहा कि आने वाले महीनों में देश के कई राज्यों में चुनाव होने वाले हैं और उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिदों, दरगाहों और चर्चों को तोड़ा जा रहा है। इसे भी पढ़ें: मतदाता सूची में हेरफेर से भारत के विफल राष्ट्र बनने का खतरा : Mehbooba Mufti उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में देश के कई राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। आप जानते हैं कि हमारे देश में मस्जिदों, दरगाहों और चर्चों को बहुत बेरहमी से तोड़ा जा रहा है। इसके अलावा, खासकर मुसलमानों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। PDP प्रमुख ने आगे कहा कि 'इंडियन मुस्लिम्स के लिए मॉनिटरिंग कमिटी' ने इन मुद्दों को लेकर 29 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि इन अन्यायपूर्ण कामों के जवाब में 'इंडियन मुस्लिम्स के लिए मॉनिटरिंग कमिटी' ने 29 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। मुफ़्ती ने आगे कहा कि हम सभी धर्मनिरपेक्ष सोच वाले लोगों से अपील करते हैं कि वे इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हों और देश में भाईचारे की भावना और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने में हमारी मदद करें। यह विरोध प्रदर्शन चुनाव आयोग के कामकाज और वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच हो रहा है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने गुरुवार को रिपोर्ट दी कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। इसे भी पढ़ें: Salamabad Trade Centre: महबूबा मुफ्ती ने उमर अब्दुल्ला से केंद्र के समक्ष मुद्दा उठाने की अपील की हालांकि कई विपक्षी पार्टियों ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की है, लेकिन भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने शनिवार को कहा कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) का शेड्यूल 27 अक्टूबर, 2025 को जारी किया गया था, जबकि 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए शेड्यूल आयोग की सर्वसम्मत मंज़ूरी से 14 मई, 2026 को जारी किया गया था।
INDIA ब्लॉक की 30 सितंबर को दिल्ली में बैठक संभव, ममता बनर्जी बोलीं- राहुल को भेजा संदेश
प्रस्तावित बैठक ऐसे समय में हो रही है जब विपक्षी दल निर्वाचन आयोग के कामकाज और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया को लेकर आपसी समन्वय की कोशिश कर रहे हैं।
सभी की सहमति पर हुआ SIR, विवाद के बीच चुनाव आयोग की सफाई; चुनाव आयुक्तों से मिले ज्ञानेश कुमार
अंदरूनी टकराव की खबरों और एसआईआर पर विवाद के बीच शनिवार को चुनाव आयोग की अहम बैठक हुई। इस बैठक की खास बात यह रही कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त एस एस संधू और विवेक जोशी भी इसमें शामिल हुए।
'राहुल गांधी के बिना कोई कुछ नहीं, गलतफहमी मत पालो'; सपा से गठबंधन पर इमरान मसूद; टॉप-5
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के गठबंधन को लेकर दिए बयान पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने काम को लेकर आश्वस्त है। पार्टी के काम और संगठन को लेकर गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए।
वोटर लिस्ट से ECINet तक: बड़े विवाद के बाद चुनाव प्रणाली में अगले बड़े बदलाव की तैयारी
चुनाव आयोग में कथित मतभेद और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच शनिवार, 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ बैठक की। यह बैठक इसलिए भी अहम रही क्योंकि द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया […] यह लेख वोटर लिस्ट से ECINet तक: बड़े विवाद के बाद चुनाव प्रणाली में अगले बड़े बदलाव की तैयारी सर्वप्रथम tfipost.in पर प्रकाशित हुआ है
मछली को लेकर भारत और बांग्लादेश में जंग छिड़ गई है। जिस मछली के लिए यह विवाद शुरू हुआ है उसका नाम है हिल्सा। दरअसल, इस बार बांग्लादेश ने मछली के निर्यात की अभी तक अनुमति नहीं दी है। जिससे दोनों देशों में इसे लेकर विवाद की स्थिति बन गई है। बता ...
'ज्ञानेश कुमार को मैच फिक्सिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई', राहुल गांधी का केंद्र पर हमला
राहुल गांधी ने कहा है कि ज्ञानेश कुमार का इस्तेमाल बीजेपी के लिए भर्ती कराने में किया गया, फिर मोदी और शाह ने उन्हें अंपायर बना दिया और भारत के चुनावों में 'मैच-फिक्सिंग' की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी.
ज्ञानेश कुमार को हटाना आसान नहीं! नोटिस से राष्ट्रपति के आदेश तक, समझें- CEC को हटाने का प्रोसेस
CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्षी पार्टियां तीसरी बार महाभियोग लाने की तैयारी कर रही हैं. संसद के प्रस्तावित विशेष सत्र से पहले विपक्ष लोकसभा और राज्यसभा में नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है.
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर कांग्रेस का रुख एक बार फिर चर्चा में है। केरल के गृह मंत्री और कांग्रेस नेता रमेश
अखिलेश यादव की रायबरेली से राहुल गांधी को सीधी चुनौती
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 24 सितंबर 2026 को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से अपनी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रथयात्रा की शुरुआत की है। अखिलेश यादव ने रायबरेली का चुनाव राहुल गांधी को सीधे चुनौती देने के ...
'पति की चिंता कीजिए' स्वरा पर भड़के शहजाद पूनावाला, Video
राइज एंड फॉल सीजन 2 की शुरुआत में ही शहजाद पूनावाला और स्वरा भास्कर के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जिसमें दोनों ने एक-दूसरे पर राजनीतिक तंज कसे.
Election Commission का स्पष्टीकरण, SIR के सभी फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए
निर्वाचन आयोग ने शनिवार को कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े सभी आदेश तीनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी के बाद जारी किए गए थे और मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है। दो निर्वाचन आयुक्तों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच मतभेदों को लेकर विवाद के बीच, निर्वाचन आयोग ने एक बयान में कहा कि दो आयुक्तों -सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी- द्वारा कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र आयोग या उसके आईटी डिवीजन के किसी नीतिगत मामले से संबंधित नहीं थे, बल्कि आयोग में प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित थे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त समेत दोनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी से जारी बयान में आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी द्वारा जारी कार्य-पुनर्वितरण के आदेश दो निर्वाचन आयुक्तों के आदेश के बाद वास्तव में लागू नहीं किए गए थे। साथ ही, उप निर्वाचन आयुक्त (डीईसी) की ओर से आईटी प्रभाग की निगरानी भी कभी वापस नहीं ली गई थी। निर्वाचन आयोग ने कहा कि हाल के महीनों में उसने देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण समेत कई फैसले लिये हैं। आयोग ने 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर कराने का आदेश जारी किया था, जिसकी शुरुआत बिहार से हुई और इसके बाद पश्चिम बंगाल तथा 30 अन्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में इसे लागू किया गया। आयोग ने कहा कि यह आदेश सर्वसम्मति से मंजूर किया गया था। आयोग ने कहा कि 27 मई 2026 के अपने आदेश में उच्चतम न्यायालय ने भी इसे बरकरार रखा है। निर्वाचन आयोग ने कहा कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर का कार्यक्रम 27 अक्टूबर 2025 को और 19 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 14 मई 2026 को जारी किया गया था। दोनों ही मौकों पर आयोग ने सर्वसम्मति से इसकी मंजूरी दी थी। तीसरे चरण के शेष 12 राज्यों में मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद ही मतदाताओं की अंतिम संख्या पता चलेगी। बयान में कहा गया, ‘‘एसआईआर के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा को उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है। गैर-एसआईआर अवधि के लिए, नियमों (मतदाता पंजीकरण नियम 1960) के अनुसार लागू होने वाले फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।’’आयोग ने कहा कि निर्वाचन आयोग की सभी बैठकों के लिए एजेंडा पहले से साझा किया जाएगा और बैठक का विवरण जारी किया जाएगा। आयोग ने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को आयुक्तों द्वारा जारी सभी निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया जाएगा। अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के बाद निर्वाचन आयोग का यह दूसरा बयान है। खबर में कहा गया कि निर्वाचन आयुक्तों संधू और जोशी ने एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों के संबंध में कई मौकों पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद विपक्ष ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और एसआईआर को रद्द करने की मांग की थी। निर्वाचन आयोग ने इस मामले में अपना पहला बयान उसी दिन जारी किया था, जिस दिन अखबार ने निर्वाचन आयोग के भीतर मतभेदों से जुड़ी खबर प्रकाशित की थी। आयोग ने यह भी कहा कि गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने संबंधित बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) को निर्देश दिया है कि वे उन मतदाताओं के घर-घर जाकर उनके फॉर्म इकट्ठा करें, जिनका नाम अभी तक नहीं जुड़ पाया है। आयोग ने कहा कि 97 में से 81 मतदाताओं ने नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 पहले ही भर दिया है। निर्वाचन आयोग ने यह भी कहा कि एसआईआर के तहत नोटिस पाने वाले लोगों को, कुछ खास मामलों को छोड़कर, व्यक्तिगत सुनवाई के लिए जाने की जरूरत नहीं है। निर्वाचन आयोग ने कहा है कि अलग-अलग राय और विचार संस्थागत चर्चाओं का सामान्य हिस्सा हैं और जोर दिया कि उसके आदेशों को पूरी कानूनी मान्यता प्राप्त है और वे कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हैं।
ज्ञानेश कुमार पर फिर भड़के कॉकरोच पार्टी के अभिजीत दीपके, पूछा- अब तक क्यों नहीं किया था?
कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके ने एक बार फिर से सीईसी ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लिया है। दिल्ली में युवाओं को फॉर्म 6 के बारे में जानकारी देने और एनरोलमेंट के लिए आयोजित होने जा रहे स्पेशल कैंपों को लेकर जवाब मांगा है कि यह पहले क्यों नहीं किया गया?
एक ही बिरयानी एक फूड ऐप पर सस्ती, कहीं महंगी, क्यों बदलती है कीमत
एक ही रेस्टोरेंट की एक ही बिरयानी के लिए अलग-अलग फूड डिलीवरी ऐप पर अलग कीमत क्यों चुकानी पड़ती है? रेडिट यूजर ने 130 रुपये ज्यादा देने का अपना अनुभव शेयर किया, जिसके बाद यह सवाल फिर चर्चा में है. जानिए आखिर ऐप पर खाने की कीमत का पूरा हिसाब कैसे तय होता है.
बेल्जियम टू यूपी: क्या है 308 पहियों वाले ट्रक पर लदी ये विशालकाय मशीन?
उत्तर प्रदेश के नेशनल हाईवे 19 पर उस वक्त सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई जब नेशनल हाईवे से होकर गुजर रहा एक विशालकाय ट्रक चंदौली पहुंचा. उड़ीसा से चलकर लखीमपुर जा रहे इस विशालकाय ट्रक और उस पर रखी गई भारी-भरकम मशीन को देखने के लिए लोग उमड़ पड़े. भीड़ कंट्रोल करने के लिए ट्रैफिक पुलिस के जवानों को लगाना पड़ा. 308 पहिए के इस विशालकाय ट्रक पर रखी हुई यह मशीन बेल्जियम से मंगाई गई है जो उड़ीसा तक समुद्र मार्ग से आई है.
मूंग दाल-आटे से बनता है तंजावुर का ‘अशोका हलवा’, मुंह में घुल जाएगा
Ashoka Halwa Recipe: साउथ इंडिया की मशहूर मिठाई ‘अशोका हलवा’ बहुत ही स्वादिष्ट होता है. इसे मूंग दाल, गेहूं के आटे, चीनी और देसी घी मिलाकर बनाया जाता है. तंजवुर स्टाइल ये सुपर-सॉफ्ट हलवा बनाना बहुत आसान है. इसका टेक्शचर इतना स्मूद और मुलायम होता है कि ये मुंह में जाते ही घुलने लगता है. ड्राई फ्रूट्स और इलायची इसका स्वाद और भी खास बना देते हैं.
प्रियंका गांधी ने क्यों उठाया ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे का मुद्दा? जानिए पूरा विवाद
कांग्रेस महासचिव और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मलप्पुरम में समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन के सभी नेता इस मुद्दे पर एकमत हैं और उनका मानना है कि जो कुछ हो रहा है, वह गैर-कानूनी है। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि अगर चुनाव आयोग कथित तौर पर भाजपा की मदद कर रहा है और उसे बढ़ावा दे रहा है, तो स्वाभाविक है कि भाजपा और उसके नेता आयोग के कदमों को सही ठहराने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं के चुनाव से पहले किए जाने वाले आत्मविश्वास भरे दावों और जमीन पर लोगों के बीच दिखने वाली स्थिति में अंतर नजर आता है। प्रियंका गांधी ने ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा क्यों मांगा? प्रियंका गांधी के मुताबिक, राहुल गांधी की तत्काल मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन इस मुद्दे पर पूरी तरह स्पष्ट है और गठबंधन के प्रत्येक नेता तथा दल की इस बात पर सहमति है कि जो कुछ हो रहा है, वह गैर-कानूनी है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों पर ऐसे कदम उठाने के आरोप हैं, उनसे जवाब मांगा जाना चाहिए और उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। इसे भी पढ़ें: Hooghly रैली से Mamata Banerjee का हमला, कहा ECI के CEC Gyanesh Kumar को हटाना होगा चुनाव आयुक्त को मिले कानूनी संरक्षण पर भी सवाल प्रियंका गांधी ने चुनाव आयुक्तों को मिले कानूनी संरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि ये सुरक्षा प्रावधान मौजूदा सरकार द्वारा लागू किए गए हैं और चुनाव आयुक्तों को उनके काम से जुड़े मामलों में संरक्षण देते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति देश के खिलाफ गैर-कानूनी काम कर रहा है, तो ऐसे सुरक्षा प्रावधानों को हटाया जाना चाहिए। प्रियंका गांधी ने गैर-कानूनी और आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने की भी मांग की। हालांकि, चुनाव आयुक्तों को मिले कानूनी संरक्षण की वास्तविक सीमा को समझने के लिए संबंधित कानून और उस पर चल रही कानूनी बहस को अलग-अलग देखना जरूरी है। इसे सीधे तौर पर यह कहना सही नहीं होगा कि चुनाव आयुक्त के खिलाफ किसी भी परिस्थिति में मुकदमा नहीं चल सकता। इसे भी पढ़ें: Election Commission में मतभेद और नियुक्ति प्रक्रिया पर Congress ने उठाए सवाल भाजपा पर भी साधा निशाना वायनाड सांसद ने भाजपा पर चुनाव आयुक्त का बचाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सिर्फ चुनाव आयुक्त का बचाव नहीं कर रही, बल्कि अपने नेतृत्व को बचा रही है। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि नेतृत्व के पूरे समर्थन के बिना चुनाव आयुक्त का इतने गंभीर गैर-कानूनी कार्यों में शामिल होना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कोई चुनाव आयुक्त लोकतंत्र के खिलाफ इतना गंभीर अपराध कर रहा है, तो उनके अनुसार यह व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है कि वह नेतृत्व के पूरे समर्थन के बिना ऐसा कर रहा हो। विवाद की पृष्ठभूमि क्या है? ज्ञानेश कुमार को लेकर मौजूदा विवाद को चुनाव आयोग के कामकाज और विशेष रूप से मतदाता सूची से जुड़े कदमों पर विपक्ष की आपत्तियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। इस विवाद में चुनाव आयोग के निर्णय लेने की प्रक्रिया, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयुक्तों को मिले कानूनी संरक्षण जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं, जबकि चुनाव आयोग ने अपने फैसलों का बचाव किया है।
फॉर्म 47 सरकार क्या है? पाकिस्तान के 2024 चुनाव के बाद क्यों छिड़ा सियासी विवाद
संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण के बाद भारत ने Right of Reply के तहत पाकिस्तान को जवाब दिया। भारत की ओर से UN में फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने आतंकवाद, कश्मीर, अल्पसंख्यकों और पाकिस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए। इसी दौरान पाकिस्तान की मौजूदा सरकार के […] यह लेख फॉर्म 47 सरकार क्या है? पाकिस्तान के 2024 चुनाव के बाद क्यों छिड़ा सियासी विवाद सर्वप्रथम tfipost.in पर प्रकाशित हुआ है
Rajasthan Police ने 6.80 करोड़ रुपये की साइबर ठगी में 12वें आरोपी को पकड़ा
राजस्थान पुलिस ने 6.80 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में एक और आरोपी को गिरफ़्तार किया है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार इसके साथ ही इस मामले में गिरफ़्तार लोगों की कुल संख्या 12 हो गई है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) विजय कुमार सिंह ने शनिवार को बताया कि आरोपी की पहचान बीकानेर निवासी लक्ष्मण सिंह उर्फ नीशू के तौर पर हुई है। उन्होंने बताया कि सिंह ने साइबर ठगी के लिए बैंक खाते उपलब्ध करवाए, ठगों को ठहराने में सहयोग किया तथा खाताधारकों को होटल में ठहरा कर टेलीग्राम के जरिए साइबर ठगी गिरोह के सरगनाओं को बैंक खाते, एटीएम, मोबाइल फोन/ओटीपी भेजे। उन्होंने बताया कि धोखाधड़ी करने वालों ने ठगी की रकम को अलग-अलग चरणों में प्राप्त करने, छिपाने और इधर-उधर भेजने के लिए म्यूल बैंक खातों, एटीएम, चेक, यूपीआई, क्यूआर कोड, डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया। आरोप है कि ये आरोपी एफ2एफ जयपुर दिल्ली नाम के टेलीग्राम ग्रुप के जरिए साइबर ठगी करने वाले गिरोह के सदस्यों से जुड़े हुए थे। पुलिस ने बताया कि लक्ष्मण सिंह ने 23 अगस्त को रींगस के एक होटल में संदीप कुमार नामक व्यक्ति के लिए कमरे का इंतजाम किया था। आरोप है कि बाद में उसने संदीप से बैंकिंग दस्तावेज, एटीएम/चेकबुक, पहचान पत्र और बैंक खाते से जुड़ी सिम हासिल की। पुलिस के मुताबिक इस सिम का इस्तेमाल बैंक के मोबाइल एप्लिकेशन को सक्रिय करने के लिए किया गया और बाद में उस खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी से मिली रकम को प्राप्त एवं अंतरित करने के लिए किया गया। पुलिस के अनुसार यह मामला अगस्त में जयपुर में दर्ज 6.80 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़ा है। साइबर अपराधियों ने एक निजी कंपनी के ‘कंप्यूटर सिस्टम’ तक पहुंच बना ली थी। कंपनी के एक निदेशक का रूप धरने के लिए व्हाट्सएप वेब का इस्तेमाल किया। उन्होंने कंपनी के ‘अकाउंट्स हेड’ का भरोसा जीतने के लिए निदेशक के नाम और ‘प्रोफ़ाइल पिक्चर’ का इस्तेमाल किया। पुलिस का कहना है कि ठगों ने कंपनी का निदेशक बनकर ‘अकाउंट्स हेड’ से तुरंत भुगतान करने को कहा जिसके बाद 24 अगस्त को तीन बैंक खातों में 6.80 करोड़ रुपये डाले गए। इसका खुलासा होने पर कंपनी ने मामला दर्ज करवाया था।
Hyderabad GPO को स्वतंत्र Group A बनाए रखें, Owaisi ने Jyotiraditya Scindia को लिखी चिट्ठी
एआईएमआईएम के अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्रीय संचार मंत्रालय से हैदराबाद जनरल पोस्ट ऑफिस (GPO) का दर्जा 'ग्रुप A' से घटाकर 'ग्रुप B' करने और इसे हैदराबाद सिटी डिवीज़न में मिलाने के प्रस्ताव को वापस लेने की अपील की है। संचार राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्र शेखर को लिखे एक पत्र में, ओवैसी ने हैदराबाद GPO को एक स्वतंत्र 'ग्रुप A' पोस्ट ऑफिस के तौर पर बनाए रखने की मांग की। उन्होंने इसके ऐतिहासिक महत्व, भारी कामकाज और हैदराबाद के लोगों को डाक सेवाएँ देने में इसकी अहमियत पर ज़ोर दिया। ओवैसी ने कहा कि हैदराबाद GPO एक सदी पुरानी संस्था है और शहर के डाक नेटवर्क में इसने हमेशा अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने GPO में तेलंगाना के फिलाटेलिक ब्यूरो (डाक टिकट संग्रह केंद्र) के होने का भी ज़िक्र किया और कहा कि इसके प्रशासनिक दर्जे पर कोई भी फ़ैसला लेने से पहले इसके संस्थागत महत्व पर विचार किया जाना चाहिए। इसे भी पढ़ें: Uttar Pradesh Assembly Elections 2027 पर Asaduddin Owaisi का बड़ा बयान, उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव नहीं लड़ना चाहते, गठबंधन की तैयारी? AIMIM अध्यक्ष ने केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से अपील की कि वे GPO के ऐतिहासिक महत्व और वहां दी जाने वाली सेवाओं की मात्रा और प्रकार को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव पर फिर से विचार करें। उन्होंने केंद्र सरकार से हैदराबाद GPO को एक स्वतंत्र 'ग्रुप A' संस्थान के तौर पर बनाए रखने का आग्रह किया। हैदराबाद GPO के दर्जे का मुद्दा पहले भी प्रशासनिक और कानूनी विवाद का विषय रहा है। 2021 में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) के सामने हुई कार्यवाही में, रिकॉर्ड्स में हैदराबाद GPO को 'ग्रुप A' से घटाकर 'ग्रुप B' करने के प्रस्ताव का ज़िक्र था। यह प्रस्ताव बदले हुए नियमों के आधार पर किए गए संस्थान के रिव्यू से जुड़ा था। ट्रिब्यूनल के सामने रखे गए रिकॉर्ड्स के अनुसार, विभाग ने 'ग्रुप A' का दर्जा बनाए रखने के लिए 11,000 पॉइंट्स की ज़रूरत का आकलन किया था, जबकि उस समय हुए रिव्यू में 7,343 पॉइंट्स ही पाए गए थे। संस्थान के रिव्यू में अतिरिक्त स्टाफ पदों की भी पहचान की गई थी, और विभाग ने कर्मचारियों को दूसरे पोस्टल डिवीज़न में भेजने का प्रस्ताव दिया था। ये आंकड़े पहले हुए संस्थान के रिव्यू से संबंधित हैं और ज़रूरी नहीं कि ये हैदराबाद GPO के मौजूदा काम के बोझ या स्टाफ की स्थिति को दर्शाते हों।
ग्रेटर नोएडा में सड़क किनारे खड़ी बस धू-धूकर जली
ग्रेटर नोएडा के तुगलपुर गांव में 25 सितंबर की देर रात सड़क किनारे खड़ी निजी हॉस्टल की बस में अचानक आग लग गई। बस खाली होने से बड़ा हादसा टल गया। दमकल की तीन गाड़ियों ने करीब आधे घंटे में आग बुझाई।
Hooghly रैली से Mamata Banerjee का हमला, कहा ECI के CEC Gyanesh Kumar को हटाना होगा
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की अपनी मांग फिर से दोहराई। उन्होंने उन पर SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) के ज़रिए वोटर लिस्ट से वोटरों के नाम 'गायब' करने का आरोप लगाते हुए उन्हें वैनिश कुमार कहा। हुगली में एक रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि जब तक यह मुद्दा हल नहीं हो जाता, उनकी पार्टी विरोध करती रहेगी। उन्होंने SIR के तहत लिस्ट से हटाए गए वोटरों के लिए मुआवज़े की भी मांग की। उन्होंने कहा कि वैनिश कुमार को जाना होगा। हम इस मुद्दे के लिए तब तक विरोध करेंगे जब तक समाधान नहीं हो जाता। उन्होंने आगे कहा SIR लिस्ट वापस आनी चाहिए। जिन लोगों के नाम लिस्ट से हटा दिए गए थे, सरकार को उन्हें हुए नुकसान के लिए मुआवज़ा देना चाहिए। इसे भी पढ़ें: INDIA गठबंधन की दिल्ली में 30 सितंबर को हो सकती है बैठक, Mamata Banerjee ने Rahul Gandhi से की बात यह मामला तब सामने आया है जब 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट में कहा गया कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) प्रक्रिया के तहत लिए गए फैसलों पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई, जो उनकी जानकारी के बिना लिए या जारी किए गए थे। चुनाव आयोग का कहना है कि आंतरिक तकनीकी नोट, लिखित सवाल और सुझाव एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था के सामान्य कामकाज का हिस्सा हैं। ECI ने जोर देकर कहा है कि SIR प्रक्रिया से जुड़े सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे और उन पर तीनों आयुक्तों की मंजूरी थी। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, शिवसेना (UBT) और वामपंथी दलों सहित विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग की आलोचना तेज कर दी है। उन्होंने चुनावी पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई है और जवाबदेही की मांग की है। इसे भी पढ़ें: ममता की रैली में शामिल होने जा रहे कुणाल घोष की कार पर हमला, फेंके गए अंडे बनर्जी ने कहा मैंने राहुल गांधी को एक मैसेज भेजा। नए नियमों के अनुसार, क्लब संभवतः INDIA गठबंधन की 30 सितंबर की बैठक का कार्यक्रम तय करेगा। उन्होंने रैली में जाते समय रुकावटें पैदा किए जाने का भी आरोप लगाया। यहां पहुंचने से पहले ही मुझे खबर मिली। उत्तरपाड़ा में भारी जाम है; लोगों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए यहां आने से रोका जा रहा है। मैं कभी पुलिस को दोष नहीं देती, लेकिन आप खुद से पूछिए कि आप क्या कर रहे हैं।
अब INDIA गठबंधन मजबूत करने में जुटेंगी ममता!30 सितंबर को हो सकती है बैठक, राहुल गांधी को भेजा संदेश
हार के थपेड़ों ने ममता बनर्जी को इतना हिला दिया कि अब उन्होंने इंडिया गठबंधन को मजबूत करने का मन बना लिया है। उन्होंने राहुल गांधी से बात की और इंडिया गठबंधन की बैठक 30 सितंबर को बुलाने को कहा है।
देश-विदेश की बड़ी खबरें: Asian Games कबड्डी में भारत को दोहरा स्वर्ण, निर्वाचन आयोग पर घमासान
नयी दिल्ली, 26 सितंबर की विभिन्न फाइल से शनिवार शाम छह बजे तक जारी मुख्य समाचार इस प्रकार है: दि2 कांग्रेस निर्वाचन आयोगउच्चतम न्यायालय को तत्काल संज्ञान लेकर ज्ञानेश कुमार को जवाबदेह ठहराना चाहिए: कांग्रेसनयी दिल्ली, कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े विवाद के बीच शनिवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जवाबदेह ठहराना चाहिए। प्रादे87 केरलम शाह महिलासहकारिता के माध्यम से महिला सशक्तीकरण मोदी सरकार का प्रमुख उद्देश्य: अमित शाहकोल्लम (केरलम), केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि सहकारिता के माध्यम से महिला सशक्तीकरण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रमुख उद्देश्यों में से एक है। खेल49 खेल एशियाड कबड्डी संपूर्ण लीड भारतएशियाड कबड्डी में भारत का दबदबा कायम, पुरुष और महिला दोनों टीमों ने जीता स्वर्णनागोया, एशियाई खेलों की कबड्डी प्रतियोगिता में भारत का दबदबा बरकरार रहा जहां पुरुष और महिला दोनों टीमों ने शनिवार को खिताबी मुकाबलों में चिर-परिचित प्रतिद्वंद्वी ईरान को हराकर अपने स्वर्ण पदक का बचाव किया। प्रादे66 बंगाल ममतापार्टी नेताओं को ‘नजरबंद’ किया गया : ममता बनर्जीकोलकाता, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को आरोप लगाया कि उनके नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के गुट के नेताओं को “नजरबंद” रखा गया है और श्रीरामपुर में एक रैली में शामिल होने से रोका गया है। प्रादे80 बिहार सीजेआई छात्रन्यायपालिका छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध : प्रधान न्यायाधीशपटना, प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि न्यायपालिका छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और जब इस अधिकार का उल्लंघन होगा तो अदालतें इससे नजर नहीं फेरेंगी। प्रादे95 महाराष्ट्र दूसरीलीड सूखामहाराष्ट्र सरकार ने 358 तालुकों में 265 को सूखा प्रभावित घोषित कियामुंबई, महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को राज्य के 358 तालुकों में से 265 को सूखा प्रभावित घोषित करते हुए राहत उपायों की घोषणा की, जिनमें फसल ऋण नियमों को आसान बनाने, भू-राजस्व में छूट और बिजली बिल में सब्सिडी शामिल है। प्रादे90 उत्तराखंड बारिशभारी बारिश के बीच चारधाम यात्रा दो दिन के लिए स्थगित, पांच जिलों में स्कूल बंददेहरादून, उत्तराखंड में भारी बारिश के बीच मौसम विभाग के ‘रेड’ और ‘ऑरेंज अलर्ट’ को देखते हुए शनिवार को चारधाम यात्रा 27 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई जबकि एहतियातन पांच जिलों में स्कूल भी बंद कर दिये गये। प्रादे88 बंगाल नमो सेवा नाटक कॉलेजकोलकाता: कॉलेज छात्रों ने ‘नमो सेवा’ नाटक में भाग लेने के लिए दबाव बनाए जाने का आरोप लगायाकोलकाता, पश्चिम बंगाल की राजधानी स्थित स्कॉटिश चर्च कॉलेज के कुछ छात्रों ने आरोप लगाया है कि ‘नमो सेवा-अनटोल्ड स्टोरीज’ नामक नाटक में भाग लेने से इनकार करने पर उन्हें प्रतिकूल परिणाम भुगतने की धमकी दी गई, लेकिन संस्थान की प्राचार्य ने इस आरोप से इनकार किया है। प्रादे65 उप्र लीड दीवार मौतदीवार ढहने की अलग-अलग घटनाओं में पांच लोगों की मौतलखीमपुर खीरी/अमेठी/बाराबंकी(उप्र), उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी, अमेठी और बाराबंकी जिलों में दीवार ढह जाने की अलग-अलग घटनाओं में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गयी तथा पेड़ गिरने से एक व्यक्ति की जान चली गयी। पुलिस ने इसकी जानकारी दी। वि6 संरा भारत पाकिस्तानभारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के ‘झूठ’ और ‘छल’ पर साधा निशानासंयुक्त राष्ट्र, भारत ने पाकिस्तान को एक ‘‘कठपुतली शासन’’ करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र में उसके ‘‘झूठ’’ और ‘‘छल’’ पर तीखा प्रहार किया तथा चेतावनी दी कि इस्लामाबाद की ओर से लगातार जारी आतंकवाद के गंभीर परिणाम होंगे। अर्थ8 विनिर्माण सीतारमणसरकार निर्भरता खत्म करने के लिए विनिर्माण क्षेत्र को जरूरी समर्थन दे रही: सीतारमणपुडुचेरी, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश में विनिर्माण को बढ़ावा देने और दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने के लिए उद्योगों को जरूरी समर्थन देने के मकसद से आम बजट में कई घोषणाएं की हैं। ‘द कन्वरसेशन’ से अनुबंध के तहत जारी खबरें : वि13 जेन जी कार्यस्थल संवादकार्यस्थल पर ‘जेन जी’ के संवाद करने का तरीका अलग होने के बावजूद वरिष्ठ सहकर्मी उन्हें समझ सकते हैंबोस्टन, कार्यस्थल पर पीढ़ियों के बीच अंतर को लेकर भले ही काफी चर्चा होती हो, लेकिन इनमें से कुछ सबसे बड़े अंतर बेहद सामान्य और रोजमर्रा के पलों में नजर आते हैं।
अगर ज्ञानेश नहीं जाते हैं...CEC के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन पर दिपके को मिला आदित्य ठाकरे का समर्थन
शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके की उस मांग का समर्थन किया, जिसमें कहा गया था कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार शनिवार तक इस्तीफ़ा नहीं देते हैं, तो देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। यह मांग एक मीडिया रिपोर्ट के बाद चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) को लेकर हुए विवाद के बीच सामने आई है। शुक्रवार को दिपके ने घोषणा की कि अगर कुमार ने शनिवार तक इस्तीफ़ा नहीं दिया, तो वे मुंबई से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे और 2 अक्टूबर को इसे पूरे भारत के शहरों तक फैला देंगे। उन्होंने लिखा इस गांधी जयंती पर आइए लोकतंत्र को बचाने का संकल्प लें। शिवसेना (UBT) नेता ने कुमार के इस्तीफ़े की दिपके की मांग का समर्थन किया और कहा कि मुंबई वोट चोरी के ख़िलाफ़ 2 अक्टूबर को बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरेगी। इसे भी पढ़ें: Voter List और SIR विवाद पर घिरे CEC Gyanesh Kumar, TMC MP Mahua Moitra ने दर्ज कराई शिकायत दिपके की पोस्ट का जवाब देते हुए उन्होंने लिखा अगर ज्ञानेश नहीं गए, तो मुंबई 2 अक्टूबर से वोट चोरी के ख़िलाफ़ बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरेगी। इससे पहले गुरुवार को ठाकरे ने कहा कि CEC के जाने का समय तय हो गया है। उन्होंने एक्स पर लिखा बदलाव आ रहा है, हमारे देश के खोए हुए दशक के लिए ज़िम्मेदार हर व्यक्ति को सज़ा मिलनी चाहिए। शिवसेना (UBT) नेता को जवाब देते हुए, CJP के संस्थापक ने लोकतंत्र बचाने की उनकी अपील का समर्थन करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। दिपके ने पोस्ट किया सभी भारतीयों को, चाहे उनकी राजनीतिक पार्टी या विचारधारा कुछ भी हो S.I.R के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। इसे भी पढ़ें: CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, कॉजपा ने दी राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी CJP ने 2 अक्टूबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की धमकी क्यों दी है? CJP के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक डिपके ने गुरुवार को CEC ज्ञानेश कुमार से इस्तीफ़ा देने की मांग की और चेतावनी दी कि अगर यह मांग नहीं मानी गई, तो जंतर-मंतर 2.0 जैसा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उनका यह बयान द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार उन फ़ैसलों और आदेशों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी, जिनके बारे में उनका कहना था कि ये उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे। ये आपत्तियां वोटर लिस्ट मैनेजमेंट के अहम हिस्सों से जुड़ी थीं, जिनमें वोटरों के नाम जोड़ना, हटाना और बहाल करना, फ़ॉर्म 6 में बदलाव और चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट डेटाबेस तक पहुंच शामिल है।
पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की महाभियोग की प्रस्तावित कोशिश को असंवैधानिक और आधारहीन बताया है।
वैश्विक कूटनीति के सबसे बड़े मंच संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें वार्षिक उच्चस्तरीय सत्र में पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी अंतरराष्ट्रीय फजीहत कराने की पुरानी रिवायत दोहरा दी। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों के समक्ष अपने संबोधन में घरेलू राजनीतिक मजबूरियों के तहत कश्मीर का पुराना और घिसा-पिटा राग अलापा। शहबाज शरीफ ने दावा किया कि उनका मुल्क कश्मीर के लोगों को तब तक राजनीतिक, राजनयिक और नैतिक समर्थन देता रहेगा जब तक उन्हें तथाकथित आत्मनिर्णय का अधिकार नहीं मिल जाता। दुनिया जब जलवायु परिवर्तन, युद्ध संकट और आर्थिक स्थिरता जैसे गंभीर मसलों पर चर्चा कर रही थी, तब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का यह अप्रसांगिक भाषण वैश्विक मंच पर उपहास का पात्र बन गया।भारत ने इस झूठे प्रोपेगेंडा का जवाब देने में रत्ती भर भी देर नहीं की। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने 'राइट टू रिप्लाई' के तहत पाकिस्तान के एक-एक झूठ की धज्जियां उड़ा दीं। भारतीय राजनयिक ने बेहद सधे हुए और तीखे लहजे में कहा कि आज इस प्रतिष्ठित महासभा ने पाकिस्तानी प्रतिनिधि के विचित्र और बेबुनियाद दावे सुने हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब न्यूयॉर्क और पूरा विश्व मानवता के सबसे भीषण आतंकी हमले 9/11 की 25वीं बरसी मना रहा है। पेटल गहलोत ने पूरी दुनिया को याद दिलाया कि इस वीभत्स हमले का मास्टरमाइंड और दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी ओसामा बिन लादेन पाकिस्तानी सेना की प्रमुख काकुल मिलिट्री अकादमी के ठीक बगल में एबटाबाद में वर्षों तक महफूज पनाह पाए हुए था। उन्होंने दो टूक कहा कि जिस पाकिस्तानी सेना और उसकी संस्थाओं के सामने आज के हुक्मरान नतमस्तक हैं, वही असल में वैश्विक आतंकवाद की मुख्य नर्सरी रही है।1948 से आज तक: कश्मीर पर भारत का अटूट रुख और पाकिस्तान की ऐतिहासिक हारभारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर के मुद्दे का संयुक्त राष्ट्र के पन्नों में एक लंबा और ऐतिहासिक रिकॉर्ड रहा है। जनवरी 1948 में जब पहली बार इस मसले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ले जाया गया था, तब से ही भारत ने हर बार यह सिद्ध किया है कि पूरा जम्मू, कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न, अविभाज्य और संप्रभु हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। पाकिस्तान ने 1947-48 में कबायलियों की आड़ में हमला करके जिस हिस्से पर गैर-कानूनी ढंग से कब्जा किया था, वह आज भी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के रूप में उसकी अवैध घुसपैठ का प्रत्यक्ष गवाह है। भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को यह समझाया है कि शिमला समझौते और लाहौर घोषणापत्र के तहत यह विशुद्ध रूप से द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी तीसरे पक्ष या संस्था के दखल की कोई गुंजाइश नहीं है।इसके विपरीत, पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दशकों पुराने और अप्रासंगिक हो चुके प्रस्तावों की दुहाई देकर विश्व का ध्यान अपनी अंदरूनी नाकामियों से भटकाने का प्रयास करता आया है। लेकिन 5 अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से जम्मू-कश्मीर में जिस तेजी से लोकतंत्र की बहाली, ऐतिहासिक मतदान और अभूतपूर्व बुनियादी ढांचागत विकास हुआ है, उसने पाकिस्तान के हर झूठे नैरेटिव की जड़ें हिला दी हैं। यूएन के गलियारों में अब जब भी पाकिस्तान कश्मीर का नाम लेता है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसे एक हताश और दिवालिया मुल्क के राजनीतिक स्टंट के तौर पर ही देखता है।जुलाई 2025 में सुरक्षा परिषद का दुरुपयोग और राजदूत हरीश का कूटनीतिक जवाबपाकिस्तान जब भी किसी मंच की अस्थाई व्यवस्था या अध्यक्षता संभालता है, वह अपने निहित स्वार्थों के लिए उसका दुरुपयोग करने से पीछे नहीं हटता। पिछले साल जुलाई 2025 में जब पाकिस्तान को सुरक्षा परिषद की मासिक अध्यक्षता का अवसर मिला, तो उसने अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने के लिए सिंधु जल संधि और कश्मीर का बेजा इस्तेमाल करने की असफल कोशिश की। उस समय संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वथानेनी हरीश ने सुरक्षा परिषद के खुले सत्र में पाकिस्तान की इन हरकतों का जोरदार और आधिकारिक खंडन किया था।राजदूत हरीश ने तथ्यों और कानूनी दस्तावेजों के आधार पर सुरक्षा परिषद को अवगत कराया कि भारत अपनी संप्रभुता के साथ कभी कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि को लेकर भारत का रुख पूरी तरह विधिक और पारदर्शी है, जबकि पाकिस्तान तकनीकी बदलावों पर सहयोग करने के बजाय हर जल समझौते को राजनीतिक रंग देने का आदी रहा है। भारत के इस सख्त और तर्कसंगत प्रतिरोध ने पाकिस्तान को सुरक्षा परिषद में पूरी तरह अलग-थलग कर दिया था और उसके समर्थक देशों को भी बैकफुट पर जाने के लिए मजबूर कर दिया था।वैश्विक आतंकवाद का केंद्र और 20 से अधिक यूएन प्रतिबंधित आतंकियों की पनाहगाहभारत ने दुनिया के सामने समय-समय पर यह अकाट्य तथ्य उजागर किया है कि पाकिस्तान किस तरह आतंकवाद को अपनी राजकीय नीति के औजार के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। फरवरी 2025 की यूएनएससी की बैठक में भारत ने पाकिस्तान को दुनिया में 'आतंकवाद का वैश्विक उपरिकेंद्र' (Global Epicenter of Terrorism) करार दिया था। जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे दुर्दांत आतंकी संगठनों के सरगना आज भी रावलपिंडी और इस्लामाबाद के साए में सुरक्षित जीवन बिता रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी पाकिस्तान की धरती पर खुलेआम जलसे करते हैं और फंड इकट्ठा करते हैं।भारत ने 2001 का संसद हमला, 26/11 मुंबई नरसंहार और पहलगाम में बेकसूर पर्यटकों पर हुए कायराना हमलों के डिजिटल और फॉरेंसिक सबूत यूएन काउंटर-टेररिज्म कमेटी को सौंपे हैं। मई 2025 में जब भारतीय सुरक्षा बलों ने सीमा पार से घुसपैठ करने वाले आतंकियों को 'ऑपरेशन सिंदूर' में ढेर किया था, तो पाकिस्तानी सेना के उच्च अधिकारियों द्वारा उन आतंकियों के शवों पर अपनी सेना का झंडा लपेटकर राजकीय सम्मान दिए जाने की तस्वीरें सामने आई थीं। भारत ने इन तस्वीरों को संयुक्त राष्ट्र में पेश कर पाकिस्तान के उस पाखंड का पर्दाफाश किया था जिसमें वह खुद को आतंकवाद का शिकार बताता फिरता है।आईएमएफ के कर्ज पर जिंदा मुल्क और बाल अधिकारों पर ढोंग का पर्दाफाशसंयुक्त राष्ट्र के मंचों पर पाकिस्तान का दोहरा चरित्र उस समय और अधिक उजागर हो जाता है जब वह आंतरिक मानवाधिकारों पर उपदेश देने लगता है। जून 2025 में जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बच्चों और सशस्त्र संघर्ष पर खुली परिचर्चा चल रही थी, तब पाकिस्तान ने कश्मीर में बच्चों के अधिकारों को लेकर मनगढ़ंत आरोप लगाए थे। भारत ने तत्काल पलटवार करते हुए बताया कि जो मुल्क अपने खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में मासूम बच्चों को जबरन गायब करवाता है और मदरसों में कट्टरपंथ की भट्टी में झोंकता है, उसे मानवाधिकारों पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।जुलाई 2025 में संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर पर भारत ने वैश्विक समुदाय को यह आईना दिखाया कि एक तरफ भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती आर्थिक व लोकतांत्रिक महाशक्ति के रूप में अंतरिक्ष से लेकर डिजिटल तकनीक तक मानवता का नेतृत्व कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान दिवालिया होने की कगार पर खड़ा है। पाकिस्तान अपनी दैनिक अर्थव्यवस्था को ऑक्सीजन देने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कर्ज और मित्र देशों की आर्थिक खैरात पर निर्भर है। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि कर्ज की बैसाखियों पर चलने वाला और कट्टरता में आकंठ डूबा देश भारत की लोकतांत्रिक परिपक्वता पर सवाल उठाने की स्थिति में नहीं है।भारत की आक्रामक 'राइट टू रिप्लाई' नीति: झूठ के खिलाफ कूटनीतिक सर्जिकल स्ट्राइकसंयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के हर प्रोपेगेंडा को ध्वस्त करने के लिए भारत ने पिछले कुछ वर्षों में एक बेहद आक्रामक, तथ्य-आधारित और अचूक कूटनीतिक रणनीति विकसित की है। इस रणनीति की रीढ़ भारत के युवा राजनयिक हैं, जो बिना किसी लाग-लपेट के दुनिया के सामने पाकिस्तान के नकाब को उतार देते हैं। जब भी पाकिस्तान का कोई नेता या प्रतिनिधि भारत के खिलाफ झूठे आरोप लगाता है, भारत तुरंत 'राइट टू रिप्लाई' का उपयोग करता है और कुछ ही मिनटों में आंकड़ों, अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और ऐतिहासिक संदर्भों के जरिए उनके दावों को ध्वस्त कर देता है।भारत कोरे बयानों पर भरोसा नहीं करता बल्कि सीमा पार घुसपैठ, बरामद चीनी और तुर्किये हथियारों के सीरियल नंबर, जीपीएस ट्रैकर्स और पकड़े गए आतंकियों के कबूलनामे संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद निरोधक समितियों के टेबल पर रखता है। इसके साथ ही भारत पाकिस्तान की आंतरिक बदहाली—सिंध और बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का हनन, हिंदू, सिख और ईसाई अल्पसंख्यकों की बेटियों का जबरन धर्मांतरण और राजनीतिक विरोधियों के दमन—को रिकॉर्ड पर लाता है। नतीजतन, आज आलम यह है कि संयुक्त राष्ट्र में जब भी पाकिस्तान भारत के खिलाफ बोलने के लिए माइक ऑन करता है, दुनिया पहले से ही समझ जाती है कि यह एक असफल देश का नया ड्रामा भर है।
भारत-वेस्टइंडीज मैच में बारिश डालेगी खलल? ऐसा रहेगा मौसम का मिजाज
भारत और वेस्टइंडीज की टीम के बीच में वनडे सीरीज का पहला मुकाबला तिरुवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाना है. लेकिन इस मुकाबले से ठीक पहले फैन्स के लिए एक बुरी खबर सामने आ रही है.
Garhwal Commissioner ने जारी किए निर्देश, भारी बारिश के चलते थमी Char Dham Yatra
उत्तराखंड के कई ज़िलों में बारिश को लेकर रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने के कारण शनिवार दोपहर से रविवार तक चार धाम यात्रा रोक दी गई है। गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप ने सभी ज़िलाधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देश दिया कि वे देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपने-अपने ज़िलों में ज़रूरी कदम उठाएं। पत्र के अनुसार, मौसम की स्थिति बेहतर होने पर यात्रा फिर से शुरू की जाएगी। इसे भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश में Heavy Rain से Lucknow समेत कई जिले प्रभावित, IMD का अलर्ट उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में मौसम का अलर्ट भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 26 और 27 सितंबर के लिए उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। शनिवार को बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के लिए भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। देहरादून, पौडी, रुद्रप्रयाग, चमोली और अल्मोडा के लिए ऑरेंज अलर्ट है, जबकि हरिद्वार, उत्तरकाशी और टिहरी येलो अलर्ट के तहत हैं। देहरादून, टिहरी, पौड़ी और हरिद्वार रेड अलर्ट के तहत हैं, जबकि उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल और रुद्रप्रयाग को ऑरेंज अलर्ट के तहत रखा गया है। बागेश्वर, अल्मोडा, चंपावत, उधम सिंह नगर और पिथौरागढ़ के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसे भी पढ़ें: Chhattisgarh Heavy Rainfall | छत्तीसगढ़ में भारी बारिश और बाढ़ जैसे हालात के बीच स्कूलों में छुट्टी का ऐलान, जानें कब फिर से खुलेंगे स्कूल इस साल 50 लाख से ज़्यादा तीर्थयात्रियों ने चार धाम के दर्शन किए इस साल उत्तराखंड के चार धाम तीर्थस्थलों पर आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या 50 लाख का आंकड़ा पार कर गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक लगभग 50.87 लाख श्रद्धालुओं ने बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन किए हैं। इस आंकड़े में वे लगभग 3.26 लाख तीर्थयात्री भी शामिल हैं जिन्होंने बुधवार तक चमोली ज़िले में हेमकुंड साहिब के दर्शन किए। बद्रीनाथ में सबसे ज़्यादा 17.47 लाख तीर्थयात्री पहुंचे, इसके बाद केदारनाथ में 15.03 लाख, गंगोत्री में 7.95 लाख और यमुनोत्री में 7.13 लाख तीर्थयात्री आए। चार धाम यात्रा 19 अप्रैल को शुरू हुई थी और इसके नवंबर तक चलने की उम्मीद है; सर्दियों की शुरुआत के साथ चारों तीर्थस्थलों के कपाट अलग-अलग तारीखों पर बंद हो जाएंगे। मानसून के दौरान भारी बारिश, भूस्खलन और मौसम से जुड़ी अन्य घटनाओं के कारण इस यात्रा, खासकर केदारनाथ मार्ग पर, बार-बार रुकावटें आईं। इस हफ़्ते की शुरुआत में, केदारनाथ ट्रेकिंग रूट पर चिरबासा के पास भारी बारिश के कारण भूस्खलन होने से यात्रा को दो दिन से ज़्यादा समय के लिए रोक दिया गया था। रास्ता साफ़ होने के बाद मंगलवार को यात्रा फिर से शुरू हुई। सितंबर में यात्रा ने तेज़ी पकड़ी है और पिछले कुछ दिनों में रोज़ाना औसतन लगभग 13,000 तीर्थयात्री चार धाम तीर्थस्थलों पर आ रहे हैं। पिछले दो-तीन सालों में इस यात्रा में हर साल 50 लाख से ज़्यादा तीर्थयात्री शामिल हुए हैं।

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