फ्रांस में छात्र प्रदर्शनों पर ट्रंप बोले- 'इस्लाम एक महान देश पर कब्ज़ा करना चाहता है'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ़्रांस में स्टूडेंट्स के बड़े पैमाने पर हो रहे प्रदर्शनों के लिए इस्लाम और माइग्रेशन को जिम्मेदार ठहराया.
रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत की पहल, दोनों पक्षों से बातचीत जारी
भारत ने रूस यूक्रेन जंग पर साफ किया है कि बातचीत और कूटनीति ही समाधान है. प्रधानमंत्री कई बार कह चुके हैं कि यह युद्ध का दौर नहीं है और मैदान से हल नहीं निकलेगा. भारत ने साफ कर दिया है कि अंतहीन युद्ध की जगह युद्ध के अंत का समय आ गया है.
फ्रांस के स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट में ट्रंप का बड़ा दावा
फ्रांस में स्कूल और यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट अब देश की राजनीति और अमेरिका तक पहुंच गया है. शुरुआत शिक्षकों, नर्स और स्टाफ की कमी को लेकर हुई, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे बड़े पैमाने पर प्रवासन और इस्लाम से जोड़ दिया. वहीं फ्रांसीसी अधिकारियों और छात्र संगठनों के मुताबिक आंदोलन की शुरुआती मांगें स्कूलों की सुविधाओं और कर्मचारियों से जुड़ी हैं. सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो और भ्रामक दावों ने भी विवाद बढ़ाया है.
फ्रांस में छात्र प्रदर्शन: अबतक 5 हजार गिरफ्तार, इनमें 87% नाबालिग
फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के खिलाफ छात्रों का गुस्सा सड़कों पर है. इस आंदोलन में गिरफ्तार किए गए 5,000 से ज्यादा लोगों में 87 प्रतिशत नाबालिग हैं. स्कूलों में शिक्षकों की कमी, खराब इमारतों और बुनियादी सुविधाओं की कमी से छात्र परेशान हैं. प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस कार्रवाई ने सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.
फ्रांस-जापान : कगन और केन्सो को केमिस्ट्री का नोबेल पुरस्कार
नई दिल्ली, 2026 के केमिस्ट्री नोबेल पुरस्कार का ऐलान कर दिया गया है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने फ्रांस के हेनरी बी. कगन और जापान के केन्सो सोआई को असिमेट्रिक ऑर्गेनिक सिंथेसिस इन नॉन-लीनियर इफेक्ट्स और ऑटो-कैटालिसिस की खोज के लिए पुरस्कार दिया।
केमिस्ट्री नोबेल 2026 का ऐलान! जानिए फ्रांस के हेनरी कागन और जापान के केन्सो सोआई की उस खोज के बारे में, जिसने दुनिया बदल दी
फ्रांस के कगन और जापान के केन्सो को केमिस्ट्री का नोबेल पुरस्कार
2026 के केमिस्ट्री नोबेल पुरस्कार का ऐलान कर दिया गया है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने फ्रांस के हेनरी बी. कगन और जापान के केन्सो सोआई को असिमेट्रिक ऑर्गेनिक सिंथेसिस इन नॉन-लीनियर इफेक्ट्स और ऑटो-कैटालिसिस की खोज के लिए पुरस्कार दिया।
फ्रांस में छात्रों का उग्र प्रदर्शन, पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले
फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की मांग को लेकर छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है. फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत देश के कई बड़े शहरों में छात्रों ने सड़कों पर उतरकर जबरदस्त प्रदर्शन किया. इस आंदोलन में अब तक करीब ढाई लाख से ज्यादा लोग शामिल हो चुके हैं, जबकि आयोजकों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों की संख्या साढ़े चार लाख से अधिक थी. इस आंदोलन का मुख्य कारण स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और जर्जर स्कूल इमारतों की मरम्मत न होना है.
यूरोप में गरमाया 'हाउसिंग क्राइसिस'! सस्ते घर और कम किराए के दम पर बर्लिन में मिली ऐतिहासिक जीत
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रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए भारत का 3 पॉइंट फॉर्मूला, जानिए क्या है प्रस्ताव
रूस और यूक्रेन युद्ध कब खत्म होगा? इस सवाल का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है, लेकिन प्रयास जारी है। भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध के तुरंत खतरे कम करने के लिए तीन हिस्सों वाला युद्धविराम प्रस्ताव रखा है। आइये जानते हैं प्रस्ताव में क्या-क्या है...
फ्रांस पर कब्जा कर रहे मुसलमान? छात्र आंदोलन को ट्रंप क्यों बता रहे 'इस्लामी टेकओवर'
फ्रांस में स्कूलों में स्टाफ की कमी को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब बड़ा रूप ले चुका है. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे प्रवासन और इस्लाम से जोड़ रहे हैं. आखिर फ्रांस में जमीन पर क्या हो रहा है और ट्रंप के दावे में कितना सच है?
फ्रांस में छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। क्या हैं छात्रों की मांगे और विरोध प्रदर्शन ने सरकार की परेशानी क्यों बढ़ा दी है?
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रूस-यूक्रेन युद्ध में 6.5 लाख मौतें हो चुकीं, अब भारत के सुझाए 3 उपाय मान लेना चाहिए
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ कह दिया है कि भारत सिर्फ वकालत करने से आगे बढ़ चुका है और दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए दोनों के साथ व्यावहारिक बातचीत कर रहा है.भारत का मानना है कि समाधान जंग के मैदान में नहीं, बातचीत के मेज पर है.
France protests latest: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में चल रहे छात्र प्रदर्शनों को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने फ्रांस में बढ़ते विरोध-प्रदर्शनों को 'बेकाबू बड़े पैमाने पर माइग्रेशन' से जोड़ते हुए दावा किया कि यह मामला सिर्फ स्कूलों का नहीं है, बल्कि 'इस्लाम फ्रांस पर कब्जा करना चाहता है।' ट्रंप ने यह टिप्पणी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की। मंगलवार (6 अक्टूबर) को पूरे फ्रांस में प्रदर्शन हुए। लेबर यूनियनों ने हाई स्कूल के उन छात्रों के समर्थन में रैलियां कीं, जो स्टाफ की कमी, खचाखच भरी क्लासरूम और जर्जर इमारतों के विरोध में दो हफ़्ते से स्कूलों को ब्लॉक किए हुए थे। विरोध-प्रदर्शन के कारण सितंबर के आखिर से ही फ्रांस के सैकड़ों हाई स्कूल बंद हैं। छात्रों का विरोध प्रदर्शन पेरिस समेत फ्रांस के 40 से ज्यादा शहरों तक फैल गया है।फ्रांस में क्यों हो रहे हैं छात्र प्रदर्शन?फ्रांस में छात्र स्कूलों और विश्वविद्यालयों की खराब होती स्थिति, शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त बजट नहीं मिलने के खिलाफ सड़कों पर हैं। सितंबर में पेरिस क्षेत्र से शुरू हुआ यह आंदोलन 6 अक्टूबर तक 30 से ज्यादा शहरों में फैल गया। कई जगह ट्रेड यूनियन और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी भी छात्रों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए।छात्रों ने बड़ी संख्या में लिसे (हाई स्कूल) और विश्वविद्यालय परिसरों को ब्लॉक किया। पेरिस, मार्सेई, लिली, लियोन, नांत, स्ट्रासबर्ग और रेनेस समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए। कुछ जगह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, जबकि कई स्थानों पर बैरिकेड जलाने, तोड़फोड़ और पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं भी सामने आईं। पुलिस ने कुछ जगहों पर आंसू गैस और भीड़ को नियंत्रित करने के दूसरे तरीकों का इस्तेमाल किया।प्रदर्शनकारी छात्रों की क्या हैं मांगें? पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति अनुपस्थित शिक्षकों की जगह तुरंत दूसरे शिक्षक उपलब्ध कराना क्लास में छात्रों की संख्या कम करना शिक्षकों और छात्रों पर काम का बोझ घटाना पुराने और असुरक्षित स्कूल भवनों का नवीनीकरण बेहतर किताबें और शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना स्कूलों में नर्स और सोशल वर्कर्स जैसे सपोर्ट स्टाफ बढ़ाना उच्च शिक्षा में ज्यादा सीटें और फंडिंग बढ़ाना 5 हजार से ज्यादा गिरफ्तारफ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों के दौरान 5,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें करीब 87 फीसदी नाबालिग बताए गए हैं। सरकार के मुताबिक, करीब 215 छात्रों और 715 पुलिस अधिकारियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। लेंस शहर में एक गंभीर घटना भी सामने आई, जहां प्रदर्शन के दौरान ग्रेनेड फटने से एक किशोर का हाथ गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने की खबर है। इस मामले की परिस्थितियों की जांच पुलिस निगरानी संस्थाएं कर रही हैं।बजट और चुनाव ने बढ़ाया राजनीतिक दबावफ्रांस में यह आंदोलन ऐसे समय हो रहा है, जब प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू की सरकार 2027 के बजट को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। प्रस्तावित बजट में खर्च में कटौती को लेकर पहले से राजनीतिक विवाद है। ऐसे में छात्रों का आंदोलन अब सिर्फ शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। यह सरकारी खर्च में कटौती, वेतन और सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते दबाव के खिलाफ व्यापक असंतोष से भी जुड़ता जा रहा है।ट्रंप ने अलग दिशा में जोड़ा प्रदर्शनट्रंप ने फ्रांस के आंदोलन को छात्रों की शिक्षा संबंधी मांगों से अलग तरीके से पेश किया। उन्होंने X पर लिखा कि फ्रांस में जो कुछ हो रहा है, वह 'बेकाबू बड़े पैमाने पर प्रवासन' का नतीजा है। साथ ही आरोप लगाया कि यह सिर्फ स्कूलों का मुद्दा नहीं, बल्कि 'इस्लाम द्वारा देश पर कब्जा करने' से जुड़ा मामला है। हालांकि, फ्रांस में जारी छात्र आंदोलन की घोषित प्रमुख मांगें शिक्षा के लिए ज्यादा संसाधन, शिक्षकों की भर्ती, बेहतर स्कूल भवन और उच्च शिक्षा के लिए अधिक फंडिंग हैं।सरकार ने बातचीत का भरोसा दियाफ्रांसीसी सरकार ने छात्रों के साथ बातचीत शुरू करने का संकेत दिया है। मंत्रियों से अक्टूबर के अंत तक शिक्षकों की कमी, स्कूलों के समय और जर्जर स्कूल भवनों के नवीनीकरण को लेकर प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। फिलहाल, छात्र संगठन शिक्षा व्यवस्था में ज्यादा निवेश, अधिक शिक्षक और बेहतर बुनियादी सुविधाओं की मांग पर कायम हैं। दूसरी ओर, आंदोलन के राजनीतिक प्रभाव को लेकर फ्रांस की सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।ये भी पढ़ें- PM मोदी के 25 साल: 'गुजरात मॉडल' से 'विकसित भारत' तक, देश में ऐसे बदली विकास की राजनीति
रूसी राष्ट्रपति पुतिन से बहुत जल्द होगी बात, रूस-यूक्रेन युद्ध पर गहरी चर्चा जारी : राष्ट्रपति ट्रंप
वाशिंगटन, 7 अक्टूबर . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रूसी President व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी बातचीत बहुत जल्द होने वाली है. उन्होंने संकेत दिया कि वाशिंगटन इस पर जल्द ही कुछ और जानकारी दे सकता है, क्योंकि अभी बहुत गहरी चर्चा चल रही है. ट्रंप ने मरीन वन से उतरने के बाद ... Read more
फ्रांस में प्रदर्शन पर ट्रंप का बड़ा दावा: बोले- देश पर कब्जा करना चाहता है इस्लाम; क्यों दिया ऐसा बयान?Donald Trump france school protests mass migration islam
रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण सैन्य तनाव के साए में समुद्र से एक बड़ी और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। रूस के तटीय जलक्षेत्र के पास कच्चे तेल से भरे एक बड़े ऑयल टैंकर में अचानक जोरदार धमाके के साथ भीषण आग लग गई। आग इतनी भयावह थी कि उसकी लपटें कई किलोमीटर दूर से साफ दिखाई दे रही थीं और आसमान में काले धुएं का एक विशाल गुबार छा गया। इस घटना के बाद समुद्री यातायात सुरक्षा और तटरक्षक बलों में हड़कंप मच गया। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस व्यावसायिक जहाज पर तैनात सभी 23 भारतीय क्रू मेंबर्स पूरी तरह सुरक्षित हैं। रूसी बचाव दल और मैरीटाइम इमरजेंसी टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी नाविकों को वक्त रहते जहाज से सकुशल रेस्क्यू कर लिया।आसमान में दिखे काले धुएं के गुबार, युद्ध स्तर पर शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशनप्रत्यक्षदर्शियों और समुद्री निगरानी एजेंसियों के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब टैंकर कार्गो लोड करने के बाद अपने गंतव्य की ओर बढ़ने की तैयारी में था। अचानक जहाज के पिछले हिस्से (इंजन रूम या स्टोरेज डेक) से तेज धमाके की आवाज सुनाई दी और देखते ही देखते लपटों ने जहाज के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। आग की विकरालता को देखते हुए रूसी आपातकालीन मंत्रालय (EMERCOM) और आसपास मौजूद टगबोट्स को तुरंत मौके पर भेजा गया। अग्निशामक जहाजों ने पानी और केमिकल फोम की लगातार बौछारें करके आग को टैंकर के मुख्य कच्चे तेल के मुख्य होल्ड तक पहुंचने से रोका, जिससे समुद्र में एक बड़ा पर्यावरण संकट और ऑयल स्पिल होने से टल गया।सभी 23 भारतीय क्रू मेंबर्स सुरक्षित: भारतीय दूतावास लगातार संपर्क मेंजहाज में आग लगने की सूचना मिलते ही भारत में विदेश मंत्रालय और मास्को स्थित भारतीय दूतावास तुरंत सक्रिय हो गए। जहाज का संचालन करने वाली कंपनी और रूसी अधिकारियों ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि टैंकर पर कुल 23 नाविक सवार थे और वे सभी भारतीय नागरिक हैं। कैप्टन और क्रू के सूझबूझ भरे फैसले के चलते आपातकालीन अलार्म बजते ही लाइफ राफ्ट्स और इमरजेंसी एग्जिट प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किया गया। रूसी बचाव नौकाओं ने सभी 23 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया और उन्हें नजदीकी बंदरगाह पर स्थित मेडिकल सेंटर ले जाया गया। प्राथमिक जांच में पुष्टि हुई है कि किसी भी भारतीय नाविक को गंभीर चोट नहीं आई है और सभी की हालत स्थिर है। दूतावास के अधिकारी लगातार नाविकों और उनके परिजनों के संपर्क में हैं ताकि उनकी सुरक्षित वतन वापसी सुनिश्चित की जा सके।ड्रोन हमला या तकनीकी खराबी? जांच में जुटी रूसी सुरक्षा एजेंसियांइस आग की घटना के पीछे के कारणों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कयास लगाए जा रहे हैं। चूंकि यह इलाका रूस-यूक्रेन युद्ध के लिहाज से सामरिक और संवेदनशील जलमार्ग के दायरे में आता है, जहां पहले भी ब्लैक सी और आस-पास के बंदरगाहों पर सी-ड्रोन (Uncrewed Surface Vessels) और लंबी दूरी के एरियल ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, इसलिए सुरक्षा एजेंसियां किसी आतंकी या ड्रोन हमले के पहलू को भी खारिज नहीं कर रही हैं। हालांकि, रूसी नौसेना और मैरीटाइम ट्रांसपोर्ट मंत्रालय के प्रारंभिक बयानों में शॉर्ट सर्किट या आंतरिक ईंधन रिसाव के चलते आग लगने की संभावना भी जताई गई है। घटना की विस्तृत तकनीकी और फोरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है।अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असरकाला सागर और रूसी बंदरगाहों से होने वाला तेल परिवहन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस घटना ने एक बार फिर संघर्ष क्षेत्र में चल रहे व्यापारिक जहाजों और मर्चेंट नेवी के नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। वैश्विक शिपिंग यूनियनों और मैरीटाइम संगठनों ने युद्ध प्रभावित जलक्षेत्र में नागरिक जहाजों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की मांग दोहराई है। फिलहाल जलते हुए जहाज को स्थिर कर लिया गया है और ईंधन के रिसाव को रोकने के लिए फ्लोटिंग बूम्स लगाए जा रहे हैं, जबकि सुरक्षित बचाए गए भारतीय नाविकों को जल्द ही जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर भारत वापस भेजने की प्रक्रिया चल रही है।
नेता हो तो ऐसा! फ्रांस में छात्रों को पुलिस के लाठीचार्ज से बचाने के लिए ढाल बने मेयर, वीडियो वायरल
पूरे फ्रांस में 15 से 17 साल के बच्चों वाले सैकड़ों हाई स्कूलों के गेट पर छात्र और टीचर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वे टीचरों की कमी, बहुत ज्यादा काम वाले टाइम-टेबल, खराब सुविधाओं वाले क्लासरूम और बढ़ती गर्मी में बिना एसी वाली इमारतों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं.
पश्चिमी यूरोपीय देश फ्रांस एक बार फिर बड़े पैमाने पर नागरिक अशांति और सड़कों पर तीखे विरोध प्रदर्शनों की आग में घिर गया है। सरकारी शिक्षा व्यवस्था के गिरते स्तर, स्कूलों के वार्षिक बजट में भारी कटौती और शिक्षकों के हजारों रिक्त पदों को समाप्त करने की सरकारी योजना के विरोध में पूरा देश हड़ताल की चपेट में आ गया है। शिक्षक यूनियनों, छात्र संगठनों और आम नागरिकों के संयुक्त आह्वान पर राजधानी पेरिस समेत देश के कई बड़े शहरों में जबरदस्त रैलियां निकाली गईं। आंतरिक मंत्रालय और मजदूर यूनियनों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश भर में 2.66 लाख से अधिक प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ आरोप है कि इमैनुएल मैक्रों प्रशासन सरकारी स्कूलों की उपेक्षा कर निजीकरण को बढ़ावा दे रहा है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।पेरिस, ल्योन और मार्सिले में भड़की हिंसा: पुलिस ने बरसाईं लाठियां और छोड़े आंसू गैस के गोलेराजधानी पेरिस की सड़कों पर स्थिति उस वक्त बेकाबू हो गई जब 'प्लेस डी ला रिपब्लिक' और 'प्लेस डे ला नेशन' के बीच मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों के मुख्य जुलूस में कुछ उपद्रवी तत्व घुस गए। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्रालय की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कई स्थानों पर कचरे के डिब्बों में आग लगाकर बैरिकेड्स तोड़ने का प्रयास किया। उग्र भीड़ को तितर-बितर करने और सरकारी इमारतों की सुरक्षा के लिए तैनात फ्रांसीसी दंगा रोधी पुलिस (CRS) ने भारी वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले (Tear Gas) दागे। ल्योन, मार्सिले, टूलूज़ और नैनटेस जैसे शहरों में भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें दर्ज की गईं, जहां दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया गया और कई पुलिसकर्मी व प्रदर्शनकारी घायल हो गए।आखिर क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें और हड़ताल की वजहफ्रांस के प्रमुख शिक्षक यूनियनों (FSU, CGT duc'action और SUD ducation) ने सरकार के आगामी बजट ड्राफ्ट के खिलाफ मोर्चा खोला है। शिक्षकों और अभिभावकों के मुख्य विरोध बिंदु इस प्रकार हैं:शिक्षकों के पदों में भारी कटौती का विरोध: सरकार ने वित्तीय घाटे को पाटने के लिए प्राथमिक और माध्यमिक सरकारी स्कूलों से हजारों शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है, जिसका सीधा असर क्लासरूम में छात्रों की संख्या पर पड़ेगा।वेतन वृद्धि और बेहतर कार्य परिस्थितियां: बढ़ती मुद्रास्फीति और जीवन-यापन के भारी खर्च के मुकाबले शिक्षकों के वेतन में लंबे समय से कोई ठोस संशोधन नहीं हुआ है, जिससे योग्य युवा इस पेशे से दूर हो रहे हैं।स्कूलों के बुनियादी ढांचे के लिए फंड की कमी: कई ग्रामीण और उपनगरीय इलाकों के सरकारी स्कूलों की इमारतें जर्जर हालत में हैं, हीटिंग और बुनियादी शैक्षणिक संसाधनों के लिए बजट में लगातार कटौती की जा रही है।निजी स्कूलों के पक्षपात का आरोप: यूनियनों का दावा है कि सरकारी खजाने का पैसा निजी और संभ्रांत स्कूलों को सब्सिडी देने में खर्च हो रहा है, जबकि आम जनता के पब्लिक स्कूल उपेक्षा के शिकार हैं।सार्वजनिक सेवाओं और स्कूल संचालन पर पड़ा देशव्यापी असरइस व्यापक विरोध प्रदर्शन और हड़ताल के चलते पूरे फ्रांस में प्राथमिक, माध्यमिक विद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में ताले लटक गए हैं। कई बड़े शहरों में लगभग 40% से 50% प्राथमिक स्कूल पूरी तरह बंद रहे, जिससे लाखों कामकाजी अभिभावकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों के समर्थन में रेलवे, मेट्रो और बस परिवहन यूनियनों के आंशिक रूप से शामिल होने से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी चरमरा गई। अस्पतालों और नगरपालिका कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडलों ने भी शिक्षा बचाओ मार्च में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे यह आंदोलन केवल शिक्षकों तक सीमित न रहकर एक व्यापक सामाजिक आक्रोश में बदल चुका है।मैक्रों सरकार के सामने नई राजनीतिक और सामाजिक चुनौतीसंसदीय गतिरोध और आर्थिक सुधारों को लेकर पहले से दबाव झेल रही फ्रांसीसी सरकार के लिए यह जनविद्रोह एक नई और गंभीर चुनौती बन गया है। विपक्षी दलों ने संसद में शिक्षा बजट को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है और तत्काल आपातकालीन फंडिंग जारी करने की मांग की है। वहीं, प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्रालय ने स्थिति को शांत करने के लिए यूनियन नेताओं को वार्ता की मेज पर आने का न्योता दिया है, लेकिन यूनियनों ने साफ कर दिया है कि जब तक बजट कटौती का फैसला वापस नहीं लिया जाता और नए शिक्षकों की भर्ती सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक देशव्यापी आंदोलन और हड़ताल का यह सिलसिला अनवरत जारी रहेगा।
Russia-Ukraine War: मंगलवार को रूस के दक्षिणी तट के पास उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक ऑयल टैंकर में भीषण आग लगने से ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं। बताया जा रहा है कि इस जहाज पर यूक्रेन के नेवल ड्रोन से हमला हुआ था, जिससे रिसॉर्ट शहर सोची के कुछ हिस्सों के ऊपर काले धुएं का गुबार छा गया। वहीं, रूस के ट्रांसपोर्ट मंत्रालय ने बताया कि लाइबेरिया के झंडे वाले इस टैंकर पर काला सागर (Black Sea) में हमला हुआ और पानी पर कच्चा तेल जल रहा था।मंत्रालय ने कहा कि आग इतनी भीषण थी कि फायरफाइटर्स तुरंत उस पर काबू नहीं पा सके, लेकिन जहाज पर मौजूद सभी 23 क्रू मेंबर्स (जो भारतीय नागरिक थे) को सुरक्षित बचा लिया गया।सोची से आए वीडियो और तस्वीरों में समुद्र में तेज लपटें उठती और आसमान में घना काला धुआं फैलता दिखाई दिया। एहतियात के तौर पर अधिकारियों ने समुद्र तटों और तटीय इलाकों के कुछ हिस्सों में लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी। A large fire is burning on the water off Sochi tonight, with footage showing a long line of flame and a massive black smoke column visible across the city — consistent with burning oil from a tanker.Ukrainian-aligned accounts claim the tanker was hit.Russian sources say only that a vessel near the port is on fire with the cause unknown.— Clash Report (@clashreport) October 6, 2026 बीच बंद, लोगों को घर के अंदर रहने को कहा गयासिरियस फेडरल टेरिटरी के प्रमुख दिमित्री प्लिशकिन ने टैंकर में आग लगने की पुष्टि की और स्थानीय बीच को कुछ समय के लिए बंद करने का ऐलान किया।प्लिशकिन ने कहा, ब्लैक सी में एक टैंकर में आग लग गई। लोगों की सुरक्षा के लिए सिरियस के बीच कुछ समय के लिए बंद रहेंगे। पानी और हवा की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि अधिकारी रूस की हाइड्रोमेटियोरोलॉजिकल सर्विस के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।अधिकारियों के हालात पर नजर रखने के दौरान लोगों को घर के अंदर रहने और खिड़कियां बंद रखने की सलाह भी दी गई।यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब रूस और यूक्रेन ब्लैक सी और उसके आस-पास युद्ध से जुड़े एनर्जी फैसिलिटीज और कमर्शियल शिपिंग को निशाना बना रहे हैं।बता दें कि हाल ही में रूस ने रोमानिया के तट के पास यूक्रेनी सामान ले जा रहे अनाज के जहाजों पर हमला किया है, जबकि यूक्रेन ने रूस के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है। यूक्रेन का कहना है कि ये हमले यूक्रेनी शहरों पर मॉस्को के लगातार हमलों का जवाब हैं।दोनों पक्षों ने आने वाले दिनों में अपने हमलों को और तेज करने के संकेत दिए हैं।रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर भी हमले तेज कर दिए हैं, जिनमें दिन के समय ड्रोन हमले और अहम पुलों पर हमले शामिल हैं, जिससे यूक्रेन की राजधानी में भारी व्यवधान पैदा हुआ है।इससे पहले भी दक्षिणी रूस में तेल सुविधाओं पर यूक्रेन के पिछले हमलों के कारण तेल का रिसाव हुआ है, समुद्र तट बंद करने पड़े हैं और पर्यावरण से जुड़ी अन्य चिंताएं पैदा हुई हैं।यह भी पढ़ें:तालिबानी ड्रोन अटैक से कंगाल पाकिस्तान बेहाल! मुनीर ने बॉर्डर चेकपोस्टों पर बंधवाई मछली पकड़ने की जाली
फ्रांस इस समय छात्रों के व्यापक विरोध-प्रदर्शनों की लहर का सामना कर रहा है। पेरिस से शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे देश में फैल चुका है, जिसमें हज़ारों किशोर और युवा सड़कों पर उतरकर स्कूलों की बदहाली, शिक्षकों की कमी और शिक्षा क्षेत्र में बजट की कटौती के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं। इस प्रदर्शन को अब यूनिवर्सिटी के छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और ट्रेड यूनियनों का भी भारी समर्थन मिल रहा है। विरोध-प्रदर्शनों का दायरा तेज़ी से बढ़ा है। मंगलवार, 6 अक्टूबर को फ़्रांसीसी गृह मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, पूरे देश में प्रदर्शनों में 2,66,000 लोग शामिल हुए, जिनमें से 56,000 लोग पेरिस में थे। आयोजकों ने यह संख्या काफ़ी ज़्यादा बताई है - पूरे देश में लगभग 4,50,000। पुलिस ने आँसू गैस का इस्तेमाल किया और कुछ शहरों में झड़पें भी हुईं। गृह मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार को 488 लोगों को हिरासत में लिया गया। छात्र विरोध क्यों कर रहे हैं? यह आंदोलन 21 सितंबर को पेरिस इलाके में शुरू हुआ, जब छात्रों ने शिक्षकों की कमी और खराब हालात के कारण क्लास का बहिष्कार करना और स्कूलों को ब्लॉक करना शुरू कर दिया। इसके बाद विरोध-प्रदर्शन तेज़ी से फ्रांस के अन्य हिस्सों में फैल गए। इस गुस्से की मुख्य वजह एक साधारण सी शिकायत है: छात्रों का कहना है कि उनके स्कूलों में उन्हें वह शिक्षा देने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने शिक्षकों की अनुपस्थिति (बिना किसी विकल्प के), बहुत ज़्यादा भीड़ वाली क्लास, लंबे और थकाऊ टाइम-टेबल और खराब हालत वाली इमारतों की ओर इशारा किया है। कुछ छात्रों ने ऐसी क्लास के बारे में बताया है जहाँ दीवारें टूटी-फूटी हैं, पानी टपकता है और फ़र्नीचर भी ठीक नहीं है। दूसरों ने गर्मी के मौसम में क्लास में बहुत ज़्यादा गर्मी होने की शिकायत की है। छात्र 'Parcoursup' से भी नाखुश हैं, जो फ्रांस में उच्च शिक्षा में दाखिले को मैनेज करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला ऑनलाइन सिस्टम है। उनका तर्क है कि इस सिस्टम को और सरल और पारदर्शी बनाने की ज़रूरत है। छात्र असल में क्या चाहते हैं? उनकी मांगें सिर्फ़ ज़्यादा पैसे की मांग से कहीं आगे हैं। छात्र ज़्यादा शिक्षक और स्टाफ़, बेहतर रखरखाव वाली स्कूल इमारतें, कम भीड़ वाली क्लास और रोज़ाना के स्कूल अनुभव में सुधार चाहते हैं। वे उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को गाइड करने के तरीके में भी बदलाव चाहते हैं। इन विरोध-प्रदर्शनों के पीछे असमानता का मुद्दा भी एक अहम वजह है। गरीब इलाकों के छात्रों का कहना है कि वे अक्सर ऐसे स्कूलों में पढ़ते हैं जहाँ देश के अमीर इलाकों के छात्रों की तुलना में कम संसाधन और खराब सुविधाएँ होती हैं। इस वजह से यह आंदोलन शिक्षा तक समान पहुँच और इस बात पर एक बड़ी बहस में बदल गया है कि क्या किसी छात्र का भविष्य इस बात पर निर्भर होना चाहिए कि वह कहाँ रहता है या किस स्कूल में पढ़ता है। यह आंदोलन इतना बड़ा क्यों हो गया है? विरोध प्रदर्शन अब हाई स्कूल के छात्रों से कहीं आगे बढ़ चुके हैं। यूनिवर्सिटी के छात्र प्रदर्शनों और नाकेबंदी में शामिल हो गए हैं, जबकि शिक्षकों के संगठनों और पब्लिक सेक्टर के अन्य संगठनों ने इस आंदोलन का समर्थन किया है। माता-पिता और अन्य वयस्क भी इसमें शामिल हुए हैं; कुछ का कहना है कि वे किशोरों का समर्थन करना चाहते हैं और पुलिस की कार्रवाई की आशंकाओं के बीच उनकी सुरक्षा करना चाहते हैं। 'ले मोंडे' की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को फ्रांस के लगभग 40% पब्लिक हायर एजुकेशन संस्थानों में कामकाज बाधित रहा। इन प्रदर्शनों ने बहुत अलग-अलग बैकग्राउंड वाले छात्रों को भी एक साथ ला खड़ा किया है, जिनमें गरीब और अमीर, दोनों तरह के स्कूलों के छात्र शामिल हैं। कई युवाओं के लिए, यह गुस्सा उनके भविष्य से जुड़ी व्यापक चिंताओं से भी जुड़ा है, जिनमें असमानता, शिक्षा व्यवस्था का दबाव और वयस्क जीवन में सुरक्षित जगह पाने की मुश्किल शामिल हैं। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव क्यों हो रहा है? ज़्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं, लेकिन कुछ हिंसक हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों के छोटे समूहों ने चीज़ें फेंकी हैं, आग लगाई है या पुलिस से भिड़े हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसी घटनाओं में दंगा-रोधी पुलिस के दखल की ज़रूरत पड़ती है। सरकार की प्रतिक्रिया खुद गुस्से का एक बड़ा कारण बन गई है। पुलिस ने आँसू गैस और दंगा-रोधी अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया है, और प्रदर्शनकारियों, माता-पिता और कुछ राजनीतिक हस्तियों ने अधिकारियों पर किशोरों के खिलाफ़ ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है। इस अशांति के दौरान कई युवाओं के बुरी तरह घायल होने के बाद यह मुद्दा और भी गंभीर हो गया। उत्तरी शहर लेंस में पुलिस के स्टन ग्रेनेड से जुड़ी एक घटना में 15 साल के एक लड़के का हाथ कट गया। असल में क्या हुआ था, इसकी जाँच चल रही है। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज़ ने पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि अधिकारियों ने लगभग सभी मामलों में स्थिति के हिसाब से उचित कार्रवाई की है। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने जिसे वे अत्यधिक हिंसा कहते हैं, उसकी निंदा की है और साथ ही कहा है कि पुलिस के व्यवहार के आरोपों की जाँच होनी चाहिए। इन प्रदर्शनों के बारे में डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा है? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन विरोध प्रदर्शनों पर अपनी राय रखी है। उन्होंने फ्रांस में फैली अशांति के लिए बेकाबू बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन और इस्लाम को ज़िम्मेदार ठहराया है। 6 अक्टूबर को किए गए एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि ये प्रदर्शन पलायन से जुड़ी व्यापक चिंताओं और फ्रांस में इस्लाम के बढ़ते प्रभाव के कारण हो रहे हैं। यह राजनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है? ये विरोध प्रदर्शन फ्रांस के लिए एक संवेदनशील समय पर हो रहे हैं। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपने कार्यकाल के आखिरी दौर में हैं और लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते। इसलिए, अगले राष्ट्रपति चुनाव से पहले राजनीतिक बहस में यह अशांति एक मुद्दा बन गई है। साथ ही, फ्रांस गंभीर वित्तीय दबाव और सरकारी खर्च को लेकर बहस का सामना कर रहा है। इसलिए, स्कूलों में ज़्यादा निवेश की छात्रों की मांगें, सार्वजनिक सेवाओं के लिए सरकार को पैसा कहाँ से मिलेगा, जैसे बड़े सवालों से टकरा रही हैं। इन विरोध प्रदर्शनों ने असमानता, गरीबी और बढ़ती महंगाई (जिसमें ईंधन की ऊंची कीमतें भी शामिल हैं) को लेकर लोगों की निराशा को और बढ़ा दिया है। यही वजह है कि यह आंदोलन अब सिर्फ़ क्लासरूम तक सीमित नहीं रह गया है। यह इस बात की परीक्षा बन गया है कि जब युवा पीढ़ी को लगता है कि उसे नज़रअंदाज़ किया जा रहा है, तो फ्रांसीसी सरकार कैसे प्रतिक्रिया देती है। फ्रांसीसी सरकार क्या कर रही है? सरकार ने हिंसा के खिलाफ़ सख़्त रुख अपनाते हुए प्रतिक्रिया देने की कोशिश की है। शिक्षा मंत्रालय ने एक गुमनाम ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म शुरू किया है जहाँ छात्र अपने स्कूलों की समस्याओं के बारे में बता सकते हैं और बदलाव का सुझाव दे सकते हैं। सरकार ने छात्रों की कई मांगों पर काम करने का वादा भी किया है। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने छात्रों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर काम करने का आदेश दिया है और कहा है कि सरकार स्कूलों की स्थिति और 'पार्सर्सुप' (Parcoursup) सिस्टम की समीक्षा करेगी। उन्होंने हाई स्कूलों में क्लास को कुछ समय के लिए रोकने की भी घोषणा की है ताकि हेडटीचर और छात्र अपनी चिंताओं पर चर्चा कर सकें; उन्होंने इसे आंतरिक लोकतंत्र का दौर कहा। लेकिन सरकार की प्रतिक्रिया से छात्र समूह संतुष्ट नहीं हैं; उनका कहना है कि उन्हें वादों के बजाय ठोस बदलाव चाहिए। आगे क्या होगा? इन विरोध प्रदर्शनों के एक बड़ा मुद्दा बने रहने की संभावना है क्योंकि छात्र, शिक्षक, माता-पिता और यूनियन सरकार पर कार्रवाई के लिए दबाव डाल रहे हैं। यह आंदोलन कई हफ़्तों से चल रहा है और पेरिस क्षेत्र में स्कूलों की घेराबंदी से बढ़कर एक देशव्यापी अभियान बन गया है। मंगलवार के प्रदर्शनों से पता चला कि यह कितना बड़ा हो गया है; आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इसमें लाखों लोगों ने हिस्सा लिया। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार फ्रांसीसी स्कूलों के अंदर की समस्याओं का समाधान कर सकती है और साथ ही विरोध प्रदर्शनों को और अधिक हिंसक होने से रोक सकती है। खुद छात्रों के लिए संदेश बिल्कुल साफ़ है: उन्हें बेहतर स्कूल, ज़्यादा संसाधन, ज़्यादा निष्पक्ष अवसर और उन फ़ैसलों में ज़्यादा भागीदारी चाहिए जो उनके भविष्य को आकार देंगे। Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi Breaking: Clashes in Many parts of #France right now Students calls for mass protests today in #France https://t.co/XB1gZQMi9p — World_Breaking_News03 (@Breaking2003) October 6, 2026 BREAKING: French riot police charge student protestors in Paris near the Place de la Nation after rioters set fires. Unrest continues in France with no end in sight. Follow: @RMXnews https://t.co/XRYcP557uq — Remix News & Views (@RMXnews) October 6, 2026
फ्रांस में हिंसा से डरे यहूदी, इजरायल ने पलायन के लिए शुरू की तैयारी
फ्रांस में छात्र प्रदर्शनों के हिंसक होने के बाद इजरायल ने वहां रह रहे यहूदियों के संभावित बड़े पैमाने पर पलायन की तैयारी शुरू कर दी है. सरकार का कहना है कि सुरक्षा चिंता बढ़ी है और हालात बिगड़ने पर अलीया का दायरा तेजी से बढ़ सकता है.
आशुतोष दीक्षित नए एयर चीफ मार्शल होंगे... फ्रांस से मिराज लाए थे
आशुतोष दीक्षित वायुसेना के नए प्रमुख होंगे। वे 31 अक्टूबर को एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के रिटायर होने पर 29वें वायुसेना प्रमुख बनेंगे। कार्यकाल 31 दिसंबर 2028 तक रहेगा। दीक्षित 1986 में लड़ाकू पायलट बने। 3,500 घंटे उड़ान अनुभव है। 2003 में नंबर-9 स्क्वाड्रन को मिराज-2000 से लैस करते समय दीक्षित ने 10 मिराज फ्रांस से भारत लाने वाली उड़ानों की अगुआई की। साथ ही उनकी देख-रेख में राफेल लाया गया।
भोपाल में बुधवार से मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट शुरू होगा। 10 अक्टूबर तक चलने वाले मार्ट का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। इसमें अमेरिका, फ्रांस, जापान, इटली समेत करीब 34 देश के 100 मेहमान भी शामिल होंगे, जो घरेलू टूर ऑपरेटर्स से अपने अनुभव, पैकेज आदि साझा करेंगे। वहीं, 15 राज्य के 180 घरेलू टूर ऑपरेटर्स सहित 600 से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। शुभारंभ अवसर पर प्रदेश में ₹1,100 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों और अनुबंधों को अंतिम रूप मिलेगा, जबकि सीहोर में ₹848.40 करोड़ का मेगा निवेश समझौता किया जाएगा। यह 7वां संस्करण, बी2बी मंचयह आयोजन राज्य के पर्यटन परिदृश्य का अब तक का सबसे विशाल और रणनीतिक बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) नेटवर्किंग मंच सिद्ध होने जा रहा है। शुभारंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी करेंगे। पिछले साल 21 करोड़ से ज्यादा टूरिस्ट आए सचिव पर्यटन और प्रबंध संचालक एमपी टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैयाराजा टी. ने बताया, वर्ष 2025 में पर्यटकों के आवागमन में 57 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। जिससे प्रदेश में पर्यटकों का कुल आंकड़ा 21.05 करोड़ तक पहुंच गया है। MPTM 2026 का मूल उद्देश्य इसी तीव्र संवृद्धि को वैश्विक निवेश, आधुनिक अधोसंरचना और सतत आजीविका के अवसरों में रूपांतरित करना है। इन देशों के प्रतिनिधि आएंगे MPTM 2026 के इस संस्करण में विश्व के 34 से अधिक प्रमुख देशों के 100 से अधिक विदेशी प्रतिनिधि और पर्यटन स्टेकहोल्डर इस मार्ट में प्रत्यक्ष सहभागिता कर रहे हैं। इनमें यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन, इटली, ग्रीस, नीदरलैंड्स, पोलैंड, फिनलैंड, बुल्गारिया, बेलारूस, अल्बानिया, हंगरी और स्लोवाकिया जैसे प्रमुख यूरोपीय राष्ट्र शामिल हैं। अमेरिकी महाद्वीप से संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको; एशिया-प्रशांत क्षेत्र से ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, फिलीपींस और श्रीलंका तथा पश्चिम एशिया व अफ्रीका से संयुक्त अरब अमीरात, इजराइल, मॉरीशस, केन्या और रूस के प्रमुख टूर ऑपरेटर्स व ट्रैवल लेखक भोपाल पहुंच चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी देश के 15 से अधिक राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों जिनमें दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गोवा, हरियाणा, ओडिशा तथा जम्मू और कश्मीर के 180 से अधिक प्रमुख घरेलू टूर ऑपरेटर्स भाग ले रहे हैं। इतने प्रस्ताव आएंगेआयोजन के दौरान लगभग ₹1,100 करोड़ से अधिक के संयुक्त निवेश प्रस्तावों और अनुबंधों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न अंचलों में होटल, वेलनेस रिसॉर्ट, लक्जरी टेंटेड कैंपिंग और इको-टूरिज्म इकाइयों की स्थापना के लिए 14 प्रमुख प्रोजेक्ट के लिए निजी निवेशकों को ₹252 करोड़ के 'लेटर ऑफ अवार्ड' (LOA) औपचारिक रूप से सौंपे जाएंगे। इसके अलावा पर्यटकों की सड़क यात्रा को सुगम, सुरक्षित और स्वच्छ बनाने के लिए राज्य के 3 प्रमुख पर्यटन राजमार्गों पर अत्याधुनिक 'मार्ग सुविधा केंद्रों' के विकास के लिए भी LOA प्रदान किए जा रहे हैं। सबसे बड़ा आकर्षण सीहोर जिले के रामगढ़ में होने वाला ₹848.40 करोड़ का मेगा पर्यटन निवेश समझौता है। मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड एवं मेसर्स एआरएम फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के मध्य होने वाले इस अनुबंध के अंतर्गत रामगढ़ में अंतरराष्ट्रीय स्तर का गोल्फ कोर्स, गोल्फ विला, वेलनेस रिसॉर्ट, लक्जरी होटल और उच्चस्तरीय आतिथ्य अधोसंरचना का निर्माण किया जाएगा। यह विशाल परियोजना न केवल विंध्य और मालवा क्षेत्र के पर्यटन मानचित्र को वैश्विक पहचान देगी, बल्कि इससे क्षेत्र में लगभग 920 प्रत्यक्ष और सैकड़ों अप्रत्यक्ष स्थानीय रोजगारों का सृजन होगा। मां की रसोई सजीअतिथियों को मध्य प्रदेश के अनूठे खान-पान और संयुक्त राष्ट्र के मिलेट प्रोत्साहन मिशन से जोड़ने के लिए 'मां की रसोई' का विशेष लाइव काउंटर स्थापित किया गया है। इसमें कोदो-मेथी भात, ज्वार-बाजरे की रोटियां, मट्ठे के आलू, चक्की का साग, निघौना, मालवा-निमाड़ का प्रसिद्ध दाल-बाफला, भुने भाटे का भर्ता और सिलबट्टे की ताजी चटनियों जैसे विशुद्ध पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजन परोसे जाएंगे।
ऑनलाइन फंसाता था फिर नाबालिग लड़कियों से जबरन... फ्रांस में पकड़ा गया युवक, बंद कमरे में ट्रायल
फ्रांस में एक भारतीय युवक पर ऐसे ऑनलाइन गिरोह के संचालन के आरोप में मुकदमा शुरू किया गया है, जो कम उम्र की लड़कियों को यौन गतिविधियों में शामिल होने और खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए मजबूर करता था।
देश पर कब्जे के लिए... विरोध-प्रदर्शन के पीछे इस्लाम; फ्रांस में अशांति पर ट्रंप का बड़ा दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में चल रहे छात्र विरोध प्रदर्शनों के लिए बड़े पैमाने पर प्रवास और इस्लाम को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन स्कूलों की समस्या को लेकर नहीं, बल्कि एक समय के महान देश पर कब्जे की कोशिश है।
'फ्रांस पर कब्जे की कोशिश...', ट्रंप ने पेरिस प्रोटेस्ट को इस्लाम से जोड़ा!
फ्रांस में हाई स्कूल में सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू हुआ और ये देखते ही देखते व्यापक हो गया. इस दौरान हिंसा और आगजनी भी हुई है. इस मुद्दे पर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि यह एक महान देश पर कब्जा करने की कोशिश है.
'फ्रांस में अशांति के लिए इस्लाम जिम्मेदार': अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा
ट्रंप ने फ्रांस में छात्रों के बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के लिए इस्लाम को जिम्मेदार ठहराया है. अपने सोशल मीडिया ट्रूथ से उन्होंने ये पोस्ट किया है. ट्रंप आजकल इस्लामी देशों के खिलाफ काफी कड़ा रवैया अपना रहे हैं.
भारत के खतरनाक रास्ते पर साइकिल लेकर घूमने पहुंचा 62 साल का फ्रांसीसी शख्स, लोग बोले- जिंदगी हो तो ऐसी हो
जाब के पटियाला निवासी गगनदीप सिंह रूस-यूक्रेन युद्ध के भयावह हालातों के बीच 9 महीने तक फंसे रहने के बाद आखिरकार सुरक्षित भारत लौट आए हैं। मई 2025 में स्टडी वीजा पर रूस गए गगनदीप ने आरोप लगाया कि कुछ साथियों ने 2 लाख रुपये मासिक वेतन का लालच देकर सितंबर 2025 में उन्हें रूसी सेना में भर्ती करवा दिया था। गगनदीप ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि उन्हें केवल बंकर बनाने का काम देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन ट्रेनिंग के बाद सीधे युद्ध के मोर्चे (फ्रंट लाइन) पर भेज दिया गया। उन्हें यूक्रेन की राजधानी कीव तक ले जाया गया, जहां एक माइन (बारूदी सुरंग) धमाके में वे गंभीर रूप से घायल हो गए। संत सीचेवाल व विदेश मंत्रालय के प्रयासों से हुई वतन वापसी गगनदीप के परिवार ने 20 जनवरी 2026 को राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल से मदद की गुहार लगाई थी। संत सीचेवाल ने इस मामले में विदेश मंत्रालय को तीन बार पत्र लिखा, व्यक्तिगत रूप से विदेश मंत्री से मुलाकात की और संसद में भी इस मुद्दे को उठाया। इन लगातार कोशिशों और भारतीय दूतावास के सहयोग के चलते 26 अगस्त 2026 को गगनदीप सुरक्षित भारत लौटकर अपने परिवार से मिल सके। भारत लौटने पर उन्होंने संत सीचेवाल, विदेश मंत्रालय व दूतावास का आभार जताया। गगनदीप ने जो बताई धोखे और दर्द की कहानी रशियन भाषा में था कॉन्ट्रैक्ट, बिना पढ़े कराए साइन गंगनदीप ने जब अपनी आप बीती सुनाते हुए रो दिया। उसका कहना है कि बिना गगनदीप के अनुसार, रूसी सेना के साथ हुआ समझौता रूसी भाषा में था, जिसे वे समझ नहीं पाए थे। बिना पढ़े कॉन्ट्रैक्ट पर कराए साइन कराए। उसे मात्र बंकर बनाने की ही बात कही गई थी। ‘मुझे लगा अब कभी घर नहीं लौट पाऊंगा’: माइन धमाके में घायल होने के बाद जब हालात और बिगड़े, तो गगनदीप ने अपने जीवित घर लौटने की उम्मीद पूरी तरह छोड़ दी थी। उन्होंने बताया कि रूसी सेना की ओर से मिलने वाली सैलरी उनके रूसी बैंक खाते में ही जमा रही, जिसे वे भारत ट्रांसफर नहीं कर सके और वादे के मुताबिक आर्थिक लाभ भी नहीं उठा पाए। युवाओं से अपील: धोखे और लालच में न आएं गगनदीप ने दावा किया कि अभी भी युद्ध क्षेत्र में 50 से अधिक भारतीय व पंजाबी युवा फंसे हो सकते हैं और कुछ युवाओं की जान भी जा चुकी है। उन्होंने भारत सरकार से उन युवाओं की सुरक्षित वापसी के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने पंजाब के युवाओं को आगाह किया कि वे ट्रैवल एजेंटों या बिचौलियों के किसी भी लालच में न आएं और बिना भाषा समझे किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर न करें।
रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने वर्ष 2026 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को सम्मानित करने का फैसला किया है। उन्हें यह पुरस्कार IceCube Neutrino Observatory में निर्णायक योगदान और खगोलीय स्रोतों से आने वाले ...
फ्रांस में शिक्षा सुधार के लिए सड़कों पर छात्र, सैकड़ों स्कूल बंद; फुटेज में देंखे झड़पों में 190 से ज्यादा घायल
पीयूष गोयल ने बताया कि कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से पूर्णिया से ग्रीस को 1 MT मखाने की खेप निर्यात की गई है।
फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार 2026 प्रोफेसर फ्रांसिस हाल्जेन को अंटार्कटिका में आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी की स्थापना और ब्रह्मांडीय न्यूट्रिनो की खोज के लिए दिया गया है।
नोबेल पुरस्कार 2026: फ्रांसिस हैल्जेन को भौतिकी का नोबेल, हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो की खोज के लिए सम्मान
नोबेल पुरस्कार 2026 में भौतिकी का सम्मान फ्रांसिस हैल्जेन को मिला है। उन्हें आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्ज़र्वेटरी और हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो की खोज में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
फ्रांसिस हाल्जेन को मिला भौतिकी का नोबेल, ब्रह्मांड के रहस्यमयी कणों की खोज के लिए मिला सम्मान
फ्रांसिस हाल्जेन को मिला भौतिकी का नोबेल, ब्रह्मांड के रहस्यमयी कणों की खोज के लिए मिला सम्मान
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आर्थिक सहयोग : दक्षिण कोरिया के स्पीकर का यूरोप दौरा
सोल, दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली के स्पीकर चो जियोंग-सिक मंगलवार को यूरोप के चार देशों की यात्रा पर रवाना होंगे, ताकि आर्थिक और औद्योगिक सहयोग पर चर्चा की जा सके। नौ दिनों में वो वेटिकन सिटी का भी दौरा करेंगे। स्थानीय मीडिया के अनुसार यहां वो उत्तर कोरिया के साथ शांति स्थापित करने को लेकर गहन विमर्श कर सकते हैं।
फ्रांस में बेकाबू हुआ विरोध प्रदर्शन: धमाके में छात्र ने गंवाया हाथ, 5000 गिरफ्तारियों में से ज्यादातर नाबालिग
शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन : फ्रांस
पेरिस, फ्रांस में स्कूलों के बदहाल हालात और शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर जारी छात्र आंदोलन को लंबा वक्त बीत चुका है। विरोध राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन में बदल गया है। देशभर में हजारों छात्रों, शिक्षकों, ट्रेड यूनियनों और अभिभावक संगठनों ने मंगलवार को सड़कों पर उतरना शुरू कर दिया है।
दक्षिण कोरिया के स्पीकर का यूरोप दौरा, आर्थिक सहयोग पर रहेगा फोकस
सोल, 6 अक्टूबर . दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली के स्पीकर चो जियोंग-सिक Tuesday को यूरोप के चार देशों की यात्रा पर रवाना होंगे, ताकि आर्थिक और औद्योगिक सहयोग पर चर्चा की जा सके. नौ दिनों में वो वेटिकन सिटी का भी दौरा करेंगे. स्थानीय मीडिया के अनुसार यहां वो उत्तर कोरिया के साथ शांति ... Read more
फ्रांस से स्पेन तक आग ही आग! यूरोपीय देशों में सड़क पर छिड़ा संग्राम
यूरोप के कई हिस्सों में अलग-अलग मुद्दों को लेकर बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं. फ्रांस में शिक्षा बजट और सुविधाओं को लेकर छात्र पुलिस से भिड़ रहे हैं. स्पेन में महंगे घर और बढ़ते किराए के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं, जबकि कोसोवो में युद्ध अपराध के फैसले के विरोध में प्रदर्शन हो रहा है.
फ्रांस: हाई स्कूल की गिरती शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन आज, लेंस शहर के15 वर्षीय बच्चे ने धमाके में गंवाया हाथ
नेशंस लीग: फ्रांस ने बेल्जियम को 4-1 से हराया, ग्रुप में टॉप पर पहुंची
पेरिस, 6 अक्टूबर . जिनेदिन जिदान की फ्रांस ने अपने मैराथन इंटरनेशनल ब्रेक का अंत स्टेड डी फ्रांस में बेल्जियम के खिलाफ 4-1 की जीत के साथ किया. जीत के साथ नेशंस लीग ग्रुप में टॉप पर पहुंच गई. फ्रांस ने दूसरे हाफ के 14 मिनट में चार गोल किए और मुकाबले में एक गोल ... Read more
युद्ध का नया मोर्चा: यूरोप के साथ भारत का 80% व्यापार लाल सागर के रास्ते; सऊदी समर्थित हूती विरोधी सैन्य अभियान अहम
कोलकाता, 5 अक्टूबर . केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने Monday को कहा कि उनका मंत्रालय जल्द ही अलग-अलग एयरलाइन कंपनियों के साथ बातचीत शुरू करेगा, ताकि कोलकाता को यूरोप के विभिन्न शहरों से जोड़ने वाली सीधी उड़ानें शुरू की जा सकें. नायडू Monday को पश्चिम बंगाल में चार नए एयरपोर्ट के विकास ... Read more
‘फ्रांस से भी महंगा बेंगलुरु…’ 2BHK का 70 हजार किराया देख भड़के लोग, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
‘फ्रांस से भी महंगा बेंगलुरु…’ 2BHK का 70 हजार किराया देख भड़के लोग, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
भारत-फ्रांस : आगे बढ़ने का शानदार मौका है
नई दिल्ली, फ्रांस के मंत्री बेंजामिन हद्दाद ने एफटीए को नई दिल्ली और पेरिस दोनों के लिए वर्तमान परिदृश्य में काफी अहम बताया है। फ्रांस के यूरोप मामलों के मंत्री हद्दाद तीन दिवसीय दौरे पर भारत आए हैं। सोमवार को उन्होंने म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में हिस्सा लिया। बाद में आईएएनएस से बातचीत में फ्रांस और भारत के रिश्तों को लेकर अपनी राय जाहिर की। उन्होंने माना कि 30 साल के रणनीतिक साझेदारों के बीच होने वाला मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) रिश्तों को और समृद्ध करेगा।
फ्रांस में छात्र आंदोलन के कारण 500 माध्यमिक स्कूल रहे बंद
फ्रांस में स्टूडेंट प्रोटेस्ट की आंच लगभग 500 माध्यमिक स्कूलों तक पहुंच गई है। सोमवार को लगभग 500 सेकेंडरी स्कूल पूरी तरह से या आंशिक रूप से बंद रहे। मंगलवार को भी विरोध प्रदर्शन जारी रहने की आशंका है। पिछले कुछ से जारी विरोध प्रदर्शनों में पुलिस के साथ झड़प भी हुई है, स्कूलों को नुकसान भी पहुंचा है और सड़कों पर हिंसक गतिविधियों भी लोग लिप्त पाए गए।
भारत और फ्रांस के लिए मिलकर आगे बढ़ने का शानदार मौका है एफटीए: फ्रांसीसी मंत्री हद्दाद
New Delhi, 5 अक्टूबर . फ्रांस के मंत्री बेंजामिन हद्दाद ने एफटीए को New Delhi और पेरिस दोनों के लिए वर्तमान परिदृश्य में काफी अहम बताया है. फ्रांस के यूरोप मामलों के मंत्री हद्दाद तीन दिवसीय दौरे पर India आए हैं. Monday को उन्होंने म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में हिस्सा लिया. बाद में से बातचीत में ... Read more
वी.पी. बेडेकर एंड संस ने मुंबई की एक छोटी किराना दुकान से शुरुआत कर मसालों और अचार के कारोबार में अपनी पहचान बनाई। यह कंपनी 100 से अधिक वर्षों में चार पीढ़ियों द्वारा संचालित एक वैश्विक खाद्य ब्रांड बन गई है, जिसके उत्पाद विदेशों तक पहुंचते हैं।
फ्रांसीसी दूत गेरार्ड मेस्ट्रैलेट तीन दिन के भारत दौरे पर, ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर और कनेक्टिविटी पर होगी चर्चा
फ्रांस में हिंसक छात्र प्रदर्शन, हर तीन में से एक स्कूल प्रभावित
France student protests: भारत में छात्रों की तिलचट्टा (कॉक्रोच) पार्टी के उग्र प्रदर्शनों पर यूरोप में जो लोग तालियां पीट रहे थे, मोदी सरकार को बुरा-भला कह रहे थे, वे अब फ्रांस के स्कूली छात्रों के हिंसक प्रदर्शनों से सन्नाटे में आ गए हैं। वहां लगभग ...
फ्रांस के स्कूलों से शुरू हुए दंगे अब भयानक: अग्निशामकों के ट्रक जलाए, बुजुर्गों पर हमला
फ्रांस में एक सप्ताह पहले जो स्टूडेंट प्रोटेस्ट शुरू हुआ था, वह थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब यह दंगों का रूप ले चुका है और यह दंगे भयानक होते जा रहे हैं। वहाँ पर अभी तक स्कूलों को ही निशाना बनाया गया था, मगर अब वहाँ पर फायर फाइटर्स से लेकर आम […]
मुंबई के इस इलाके में 2BHK का रेंट ₹1.2 लाख, यूरोप से भी महंगा!
वाशी के ₹1.2 लाख मासिक किराये की इस चर्चा ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा किया है, क्या मुंबई और आसपास के शहरों में घरों की बढ़ती कीमत और किराया लोगों की आय की रफ्तार से कहीं ज्यादा तेज हो रहा है.
घर में लगाया गया एक फूल का पौधा बार-बार खराब हुआ तो एक 10वीं के छात्र के मन में ऐसा सवाल उठा, जिसने उसे तकनीक की दुनिया में नई खोज करने के लिए प्रेरित कर दिया। सवाल था- आखिर पौधा खराब क्यों हो रहा है और इसे समय रहते कैसे बचाया जा सकता है? काम करते-करते तैयार किया मॉडल इसी जिज्ञासा से सीतामढ़ी के छात्र रुद्र चंद्र मिश्रा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ऐसा मॉडल तैयार कर दिया, जो पौधे में बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखाई देने से पहले ही उसकी सेहत में हो रहे बदलावों को पहचानने में मदद करता है। रुद्र के पिता रितेश कुमार, अधिवक्ता हैं। उन्होंने बताया कि वे अक्सर घर में पौधे लाते थे। कुछ समय पहले उन्होंने एक फूल का पौधा लगाया, लेकिन वह खराब हो गया। इसके बाद दूसरा पौधा लाया गया, वह भी खराब हो गया। लगातार पौधों के खराब होने से रुद्र की जिज्ञासा बढ़ी। वह जानना चाहते थे कि पौधा आखिर क्यों खराब हो रहा है और इसे पहले ही कैसे बचाया जा सकता है। इसी सोच पर काम करते-करते रुद्र ने यह मॉडल तैयार किया। 8 माइक्रोकंट्रोलर और कई सेंसर से लैस मॉडल शहर के सेक्रेड हार्ट स्कूल के 10वीं के छात्र रुद्र ने वर्ष 2024 में इस तकनीक पर काम शुरू किया। मॉडल में करीब 8 माइक्रोकंट्रोलर, कई सेंसर, वायु मॉड्यूल, मिट्टी की नमी मापने वाले सेंसर और कैमरा सिस्टम लगाए गए हैं। यह पौधे की सेहत, मिट्टी की नमी और वातावरण की निगरानी करता है। इसका उद्देश्य बीमारी के स्पष्ट लक्षण आने से पहले पौधे में होने वाले बदलावों को पहचानना है। जरूरत के अनुसार पानी पहुंचाने की व्यवस्था भी मॉडल में जोड़ी गई है।रुद्र के इस इनोवेशन को अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिली है। रुद्र के मॉडल को 37वां स्थान फ्रांस के ल्योन में आयोजित InnoRobo by SIDO में उन्होंने ऑनलाइन अपने मॉडल का प्रदर्शन किया। 87 देशों के 1472 विद्यार्थियों ने नवाचार पेश किए थे। रुद्र के मॉडल को 37वां स्थान मिला। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी बधाई दी है। मॉडल को तैयार करने में करीब 45 हजार रुपए खर्च हुए हैं। रुद्र अब इसकी लागत घटाकर 10 से 15 हजार रुपए करने पर काम कर रहे हैं, ताकि भविष्य में किसान भी इसका उपयोग कर सकें।
Yamuna Nagar News: चाचा ने युवक को यूरोप भेजने का झांसा देकर 20 लाख रुपये हड़पे
यूरोप में स्टडी वीजा पर भेजने का झांसा देकर गांधी नगर पार्क निवासी युवक ने 20 लाख रुपये ठगने का आरोप लगाते हुए पुलिस को शिकायत दी है। आरोपी रिश्ते में पीड़ित का चाचा बताया जा रहा है।
'रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा भारत', बोले विदेश मंत्री जयशंकर
भारत ने यूक्रेन युद्ध के समाधान के लिए अपने प्रयासों को तेज किया है, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कीव और मॉस्को दोनों से बातचीत की पुष्टि की है।
पंडित राम चतुर मलिक: बिना ऑडिशन मिला आकाशवाणी का टॉप ग्रेड, गायकी का जादू इंग्लैंड-फ्रांस भी पहुंचा
Mumbai , 4 अक्टूबर . सिर्फ 15 साल की उम्र में पहली सार्वजनिक प्रस्तुति देने वाले पंडित राम चतुर मलिक ने आगे चलकर ध्रुपद-धमार गायन में ऐसी पहचान बनाई कि उनकी आवाज दरभंगा के दरबार से निकलकर इंग्लैंड और फ्रांस तक पहुंची. उन्हें आकाशवाणी का ‘टॉप ग्रेड’ भी बिना ऑडिशन के दिया गया. 5 अक्टूबर ... Read more
ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी से डाक के जरिए ड्रग्स मंगाने वाले को 10 साल की सजा
ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी से डाक के जरिए ड्रग्स मंगाने वाले को 10 साल की सजा
फ्रांस में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान जमकर बवाल, आगजनी-तोड़फोड़
फ्रांस से इस वक्त अशांति और विरोध प्रदर्शन की हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं. देश के कई बड़े शहरों में हाई स्कूल के छात्रों ने सड़कों पर उतरकर एक बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया है. इन आंदोलनों की मुख्य वजह स्कूलों की बदहाल व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार की मांग है. छात्रों का कहना है कि सरकारी उदासीनता के कारण देश भर के स्कूलों की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है. क्लासरूम में क्षमता से अधिक छात्रों की भीड़ है, जिसके कारण पढ़ाई का माहौल खराब हो रहा है.
फ्रांस के मंत्री बेंजामिन हद्दाद आएंगे भारत, कई कार्यक्रमों में होगें शामिल
फ्रांस के मंत्री बेंजामिन हद्दाद 4 से 6 अक्टूबर तक भारत दौरे पर हैं. वह नई दिल्ली में म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में हिस्सा लेंगे. फ्रांस-भारत 1.5 ट्रैक डायलॉग में भी शामिल होंगे. वह रायसीना फोरम फॉर द फ्यूचर ऑफ डिप्लोमेसी को संबोधित करने के साथ फ्रांस, यूरोप और भारत से जुड़े प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे.
फ्रांस से मुंबई रहने आ गया 23 साल का लड़का, बोला- सिर्फ 3 हफ्ते में जिंदगी ने सबक सिखा दिया
पेरिस की चकाचौंध छोड़ मुंबई में नौकरी करने आए 23 साल के फ्रांसीसी लड़के को यहां आते ही लगा जोरदार झटका. मुंबई की वो 3 बातें जिसने इस विदेशी का पूरा नजरिया ही बदल दिया.
इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए टाटा और बॉश के बीच बड़ा गठजोड़, यूरोप में भी मिल गई मंजूरी
यूरोपीय आयोग ने टाटा ऑटो कॉम्प सिस्टम्स और रॉबर्ट बॉश के भारत में प्रस्तावित संयुक्त उपक्रम को मंजूरी दी है। यह उपक्रम भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार के लिए उन्नत इलेक्ट्रिक एक्सल और इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन मोटर का निर्माण करेगा, जिससे जमशेदपुर के टाटा मोटर्स प्लांट को सीधा लाभ मिलेगा।
जोधपुर एयरबेस पर आयोजित तरंगशक्ति युद्धाभ्यास-2026 में विश्व के 8 देशों के अलग-अलग फाइटर जेट्स शामिल हुए हैं। दौरान आसमान में हैरतअंगेज नजारे देखने को मिल रहे हैं। इस प्रैक्टिस को लेकर फ्रांसीसी एयर डिफेंस एंड एयर ऑपरेशंस कमांड के डिप्टी कमांडर मेजर जनरल जूलियन सबेने ने कहा कि मैं पहली बार भारत आया हूं। यहां आकर मैंने महसूस किया कि आपका देश बहुत विशाल है। भारतीय वायुसेना के पास बड़ी संख्या में अलग-अलग प्रकार के विमान हैं। इससे हमें काफी कुछ सीखने को मिला। यह अभ्यास पेगासे-26 का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। कहा-इसकी शुरुआत शानदार रही उन्होंने कहा- हम फ्रांस से करीब 30 हजार किलोमीटर की दूरी तय करके यहां पहुंचे हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि हम हिंद-प्रशांत क्षेत्र का हिस्सा हैं और हमारे नागरिक विदेशी क्षेत्रों में भी रहते हैं। हम एक्सरसाइज तरंग शक्ति की शुरुआत के समय यहां पहुंचने में सफल रहे। इसका शुभारंभ शानदार रहा। हमारा बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस दौरान हमें अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों सहित कई अलग-अलग टीमों और अधिकारियों से मिलने का अवसर मिला। मैंने पाया कि भारतीय वायुसेना ने इस पूरे अभ्यास के आयोजन में शानदार काम किया है और सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी तरह तैयार रखी गई थीं। अमेरिका के F-35A और KC-135R भी अभ्यास में शामिल अमेरिकी पैसिफिक एयर फोर्सेज की ओर से 6 F-35A लाइटनिंग-II लड़ाकू विमान और एक KC-135R स्ट्रैटोटैंकर तरंग शक्ति-26 में शामिल हुए हैं। 6 F-35A जापान के मिसावा एयर बेस स्थित 13वीं फाइटर स्क्वाड्रन के हैं, जबकि KC-135R जापान के काडेना एयर बेस स्थित 909वीं एयर रिफ्यूलिंग स्क्वाड्रन से आया है। अभ्यास के दौरान अमेरिकी वायुसेना, भारतीय वायुसेना और अन्य भाग लेने वाले देशों के साथ मिलकर संयुक्त ट्रेनिंग कर रहे हैं। इसका उद्देश्य बहुराष्ट्रीय हवाई अभियानों की कार्यप्रणाली को समझना और साझा अनुभव विकसित करना है। एक अमेरिकी F-35A पायलट ने कहा कि दुनिया की अलग-अलग वायु सेनाओं के साथ उड़ान भरने से अलग-अलग रणनीतियों, दृष्टिकोण और संचालन के तरीकों को समझने का अवसर मिलता है। इससे पायलट एक-दूसरे से सीखते हैं और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ संयुक्त अभियानों के लिए बेहतर तरीके से तैयार होते हैं। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… जोधपुर- एक साथ उड़ेंगे दुनिया के सबसे खतरनाक 80-फाइटर जेट:राफेल को सुखोई ने किया लीड, 40 हजार फीट पर फ्यूल भरने की प्रैक्टिस; देखें- PHOTOS जोधपुर में 8 देशों की तरंग शक्ति एक्सरसाइज में दुनिया के सबसे खतरनाक 60 से 80 फाइटर जेट्स एक साथ उड़ान भरेंगे। भारत में मौजूद फ्रांस एंबेसी ने इसकी जानकारी दी। मंगलवार को एक्सरसाइज के चौथे दिन सुखोई ने राफेल फाइटर को लीड किया। फ्रांस के एयरबस A-400M और एयरबस A-330 मल्टी रोल टैंकर ट्रांसपोर्ट (MRTT) ने भी एक्सरसाइज में हिस्सा लिया। (पूरी खबर पढ़ें)
भारत की 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की योजना आगे बढ़ रही है। डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह ने कहा कि इस प्रोजेक्ट पर इस वित्त वर्ष के अंत तक फैसला हो सकता है। अभी कंपनियों से मिले प्रस्तावों की जांच की जा रही है। भारत इस डील में ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल करना चाहता है। योजना के मुताबिक, ज्यादातर राफेल विमान भारत में असेंबल किए जाएंगे। इनमें भारत में बने हथियार और दूसरे सिस्टम लगाए जाएंगे। डिफेंस सेक्रेटरी ने बताया कि फ्रांस की कंपनी पहले खरीदे गए राफेल मरीन विमानों में भी भारतीय हथियार लगाने पर सहमत हो गई है। राफेल की खरीद कैसे होगी? यह खरीद ‘बाय एंड मेक’ मॉडल के तहत होगी। इसके तहत राफेल बनाने वाली कंपनी के साथ मिलकर भारत में विमानों की असेंबली और उत्पादन से जुड़े काम किए जाएंगे। रक्षा मंत्रालय को मिले प्रस्तावों का मूल्यांकन पूरा होने के बाद खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। डिफेंस सेक्रेटरी के मुताबिक, इस साल के अंत तक इस प्रक्रिया में कोई निष्कर्ष निकल सकता है। राफेल मरीन में लगेंगे भारतीय हथियार भारत पहले ही राफेल मरीन विमान खरीद चुका है। अब फ्रांस की कंपनी इन विमानों में भारतीय हथियार लगाने के लिए तैयार है। इससे भारत के बनाए हथियारों को राफेल के साथ इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ेगी। नई खरीद में भी भारतीय हथियारों और सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ाने की योजना है। 2027 में तेजस Mk2 की पहली उड़ान डिफेंस सेक्रेटरी ने बताया कि तेजस Mk2 की पहली उड़ान 2027 के मध्य में होने की योजना है। पहले इसके प्रोटोटाइप तैयार होंगे और फिर भारतीय वायुसेना उनका परीक्षण करेगी। वायुसेना ने शुरुआत में करीब 120 तेजस Mk2 विमानों की जरूरत बताई थी। इनकी संख्या पर अंतिम फैसला प्रोटोटाइप के परीक्षण के बाद किया जाएगा। तेजस Mk2 में निजी कंपनियों की भी भूमिका तेजस Mk2 को विकसित करने की मुख्य जिम्मेदारी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL की होगी। इसे फेज वाइज तरीके से विकसित किया जाएगा और जरूरत के हिसाब से इसमें नए बदलाव किए जाएंगे। इस काम में निजी कंपनियां और MSME सेक्टर भी शामिल होंगे। निजी कंपनियां सब-असेंबली के साथ फ्यूजलेज जैसे बड़े हिस्से बनाने में मदद कर रही हैं। कुछ हिस्सों के लिए निजी क्षेत्र की प्रोडक्शन लाइन भी शुरू की गई है। AMCA पर भारत का फोकस भारत ने फिलहाल किसी विदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट में शामिल होने का फैसला नहीं किया है। अभी भारत अपने AMCA यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट पर फोकस कर रहा है। AMCA के लिए शॉर्टलिस्ट की गई कंपनियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। कंपनियों ने प्रोजेक्ट की जटिलता और इस क्षेत्र में पहली बार काम करने की वजह से ज्यादा समय मांगा है। सरकार उन्हें कुछ और समय देने जा रही है। डिफेंस सेक्रेटरी के मुताबिक, फिलहाल भारत का फोकस AMCA प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर है। -------------------------------- यह खबर भी पढ़ें… 114 राफेल फाइटर जेट के लिए फ्रांस ने प्रस्ताव सौंपा:भारत में ही बनाने और स्वदेशी कलपुर्जे लगाने का ऑफर फ्रांस ने भारत को 114 राफेल फाइटर जेट देने का प्रस्ताव सौंप दिया है। 3.25 लाख करोड़ रुपए के सौदे में फाइटर जेट का बड़े पैमाने पर स्थानीय स्तर पर निर्माण और उत्पादन शामिल है। यानी इसमें लगने वाले कलपुर्जे स्वदेशी फैक्टरियों में बनाए जा सकेंगे। पूरी खबर पढ़ें…
अलीगढ़ जिले में आलू की खेती और इससे जुड़े कारोबार को नई दिशा देने के लिए 93.97 करोड़ रुपये की लागत से आलू प्रोसेसिंग की नई यूनिट स्थापित की जा रही है।
श्वेता तिवारी के लिए यूरोपियन विदेशी दूल्हा ढूंढेंगी मल्लिका, बनाया प्लान
‘द ट्रेटर्स 2’ में श्वेता तिवारी की लव लाइफ पर मल्लिका शेरावत ने मजेदार बात कही. मल्लिका बोलीं कि वह श्वेता के लिए एक अच्छा यूरोपियन लड़का ढूंढेंगी.
जलवायु परिवर्तन का संकट झेलने लगा यूरोप
यूरोप में जो लोग समझते थे कि जलवायु परिवर्तन भविष्य की पीढ़ियों के लिए समस्या है उन्हें इस बार की गर्मियों ने सच्चाई बता दी है. जलवायु परिवर्तन के महंगे और जीवन बदलने वाले आर्थिक नतीजे यूरोप को अपनी चपेट में ले चुके हैं
भारत की स्लीपर बस का फैन हुआ विदेशी शख्स, बोला- ऐसी सुविधा तो यूरोप में भी नहीं मिलती
भारत की स्लीपर बस का फैन हुआ विदेशी शख्स, बोला- ऐसी सुविधा तो यूरोप में भी नहीं मिलती
'यूरोप के दरवाजे' में घुस रहे 57 अफ्रीकियों को स्पेन ने क्यों मारा?
स्पेन की पुलिस बॉर्डर पर अलर्ट खड़ी है. पुलिस की गोलियों से अंदर घुसने की कोशिश कर रहे कई प्रवासियों की मौत हो चुकी है. 'यूरोप का दरवाजा' कहा जाने वाला स्यूटा शहर में प्रवासियों की बाढ़ ने इस शहर में कानून-व्यवस्था का संकट खड़ा कर दिया है.
फ्रांस में पहली बार दिखा आग का बादल आखिर है क्या?
अभूतपूर्व जंगल की आग से जूझते फ्रांस में पहली बार फायर क्लाउड यानी आग के बादल बनते देखा गया है. आखिर आग के बादल होते क्या हैं और इनका क्या असर होता है. फ्रांस में इसे देखने के बाद क्यों चिंता बढ़ रही है
यूरोप में ‘ओमेगा ब्लॉक’ हीटवेव का प्रकोप, रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से जनजीवन बेहाल, दर्जनों लोगों की मौत
यूरोप में ‘ओमेगा ब्लॉक’ हीटवेव ने तबाही मचा दी है। फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और स्पेन में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, बिजली संकट, स्कूल बंद और गर्मी से कई मौतों की खबरें सामने आई हैं।
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
60 की उम्र में मिलिंद सोमन ने रचा इतिहास, यूरोप से अफ्रीका तक तैरकर पार किया स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर
अभिनेता और फिटनेस आइकन मिलिंद सोमन ने एक बार फिर अपनी अद्भुत सहनशक्ति और फिटनेस का परिचय दिया है। 60 साल की उम्र में मिलिंद सोमन ने स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर को तैरकर पार करने का एक कठिन और साहसी कारनामा कर दिखाया है। मिलिंद ने यूरोप और अफ्रीका के बीच ...
फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन, 88 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
Alain Delon passes away: 'द लेपर्ड' और 'रोक्को एंड हिज ब्रदर्स' जैसी सुपर हिट फिल्मों में अभिनय का जौहर दिखाने वाले फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन हो गया है। एलेन डेलन ने 88 वर्ष की उम्र में आखिरी सांस ली। अभिनेता के पारिवारिक सूत्रों ने ...
इटली से फ्रांस तक समंदर के बीच होगा Anant-Radhika का दूसराप्री वेडिंग फंक्शन, जानिए मेहमानों से लेकरड्रेस कोड तक सबकुछ
यूरोप से लेकर Sri Lanka तक इन देशो में शूट हुई है Surya और Bobby Deol की फिल्म Kanguva, बजट उड़ा देगा होश

