ईरान युद्ध से भारत‑चीन‑यूरोप पर तगड़ा असर, रूस को फायदा
ईरान युद्ध के चलते दुनिया के लिए ऊर्जा की आवाजाही का सबसे अहम रास्ता बंद हो गया है. चीन, यूरोप और भारत के सामने आपूर्ति की बड़ी चुनौती है
UP के जेवर और महाराष्ट्र के नवी मुंबई की तरह बिहार के सोनपुर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन रहा है। 4,228 एकड़ में फैला यह एयरपोर्ट आकार में भारत का तीसरा सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा। रनवे की लंबाई 4.2 km होगी। दो रनवे बनाए जाएंगे ताकि अधिक विमानों को संभाला जा सके। यहां दुनिया का सबसे बड़ा यात्री विमान एयरबस A380 उतर सकता है। अभी बिहार में कोई ऐसा रनवे नहीं जहां यह विमान लैंडिंग और टेक ऑफ कर सके। दैनिक भास्कर की खास रिपोर्ट में पढ़ें, सोनपुर एयरपोर्ट जहां बनेगा उसकी मौजूदा स्थिति क्या है? स्थानीय लोग क्या कहते हैं? एयरपोर्ट निर्माण के लिए क्या चुनौतियां हैं? यह कितना खास होगा? एयरपोर्ट वाली जमीन पर लहलहा रही गेहूं-सरसों की फसल 2030 तक सारण के सोनपुर के दरियापुर चौर में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बन जाएगा। जिस जगह एयरपोर्ट बनना है वह लो लैंड एरिया है। यहां साल के 6 महीने पानी भरा रहता है। किसान सिर्फ एक फसल (मुख्य रूप से गेहूं और सरसों) की खेती करते हैं। दैनिक भास्कर की टीम प्रस्तावित एयरपोर्ट के ग्राउंड जीरो पर पहुंची। हम पटना से जेपी गंगा सेतु होते हुए हाजीपुर छपरा फोर लेन पहुंचे। यहां तक आने का रास्ता अच्छा है। इसके बाद एयरपोर्ट की जमीन पर पहुंचने के लिए फोर लेन से दक्षिण की तरफ आगे बढ़े। धूल भरे कच्चे रास्ते और खेतों के बीच 2 km से ज्यादा दूरी तय की। रास्ता इतना खराब है कि पसीना छूट जाए। एयरपोर्ट की जमीन पर पहुंचकर हमने देखा कि यहां चारों तरफ गेहूं और काली सरसों (राई) की फसल लहलहा रही है। यह फोरलेन से करीब 15-20 फीट नीचे है। क्या हैं एयरपोर्ट निर्माण की चुनौतियां? एयरपोर्ट बना तो पूरे इलाके का होगा विकास, होटल-मॉल बनेंगे एयरपोर्ट नया गांव के पास बनने वाला है। हमने इस गांव के लोगों से बात की। स्थानीय निवासी अजील सिंह कहा, 'यह नया गांव की जमीन है। पटना से करीब होने के कारण यहां जमीन की खरीद-बिक्री बड़े पैमाने पर हुई है। यह बहुत खुशी की बात है कि इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन रहा है। इससे किसानों को रोजगार मिलेगा।' मंटू ने कहा, 'यहां हमारे पूर्वज खेती करते आए हैं। अब हमलोग खेती कर रहे हैं। प्रस्तावित जमीन पर गांव नहीं है। एयरपोर्ट बनने से स्थानीय लोगों को फायदा होगा। होटल-मॉल खुलेंगे।' रंजीत गुप्ता बोले, 'अभी मुझे तो एयरपोर्ट बनने पर पूरा भरोसा नहीं है। हमें बहुत से सुहाने सपने दिखाए जा रहें हैं। यह जमीन लो लैंड है।' अपने गले पर हाथ रखते हुए उन्होंने कहा, 'यहां तक पानी भरा रहता है। अगर एयरपोर्ट वाली जगह पर मिट्टी भर भी दें तो बाकी जगहों पर पानी भरा रहेगा। एयरपोर्ट बन जाए तो बड़ी बात होगी।' सोनपुर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को साइट क्लीयरेंस मिली सोनपुर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने साइट क्लीयरेंस दे दी है। बिहार सरकार ने जमीन अधिग्रहण के लिए 1,302 करोड़ रुपए खर्च को मंजूरी दी है। 20 फरवरी 2026 को नीतीश कैबिनेट ने सोनपुर में एयरपोर्ट बनाने का फैसला किया था। यह एयरपोर्ट पटना से सिर्फ 15 km दूर है। गंगा नदी के एक तरफ एयरपोर्ट तो दूसरी तरफ पटना है। इस वक्त पटना में गंगा नदी पार कर सोनपुर या हाजीपुर जाने के लिए दो पुल हैं। एक चार लेन वाला गांधी सेतु और दूसरा दो लेन वाला जेपी सेतु। सोनपुर में एयरपोर्ट बनने से पहले ही पटना में गंगा पर दो और पुल बनकर तैयार हो जाएंगे। एक है जेपी सेतु के समानांतर बन रहा 6 लेन पुल और दूसरा है गांधी सेतु के समानांतर बन रहा 4 लेन पुल। इस तरह पटना से गंगा नदी पार कर सोनपुर और हाजीपुर जाने के लिए कुल 16 लेन के चार पुल होंगे। सोनपुर में बनेगा भारत का तीसरा सबसे बड़ा एयरपोर्ट सोनपुन में बनने जा रहा एयरपोर्ट आकार में भारत का तीसरा सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा। इस मामले में हैदराबाद का राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहले स्थान पर है। यह 5,500 एकड़ में फैला है। दूसरे नंबर पर दिल्ली एयरपोर्ट है। सोनपुर एयरपोर्ट 4,228 एकड़ में फैला होगा। अब जानिए, एयरपोर्ट निर्माण के लिए चाहिए कितनी अनुमति अमेरिका-यूरोप की फ्लाइट के लिए नहीं जाना होगा दिल्ली सोनपुर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने से बिहार के साथ ही उत्तर प्रदेश, झारखंड, नेपाल, भूटान और पूर्वोत्तर के राज्यों के लोगों को फायदा होगा। उन्हें अमेरिका, यूरोप या मिडिल ईस्ट के देशों की फ्लाइट के लिए दिल्ली नहीं जाना होगा। इससे पैसे और समय की बचत होगी। सोनपुर एविएशन हब के रूप में विकसित होगा। एक्सपर्ट के मुताबिक, इस स्तर के ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट में लगभग 10 हजार करोड़ रुपए तक का निवेश होता है। इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बड़ा प्रोत्साहन मिल सकता है। सोनपुर में उतरेंगे बोइंग A380 जैसे विमान सोनपुर एयरपोर्ट का रनवे 4.2 km लंबा होगा। यह दुनिया के सबसे बड़े पैसेंजर विमान बोइंग A380 के उतरने और उड़ान भरने के लिए पर्याप्त है। अभी बिहार में एक भी एयरपोर्ट ऐसा नहीं जहां A380 उतर सके। A380 को लैंड और टेकऑफ के लिए कम से कम करीब 3000 मीटर लंबा रनवे चाहिए। सोनपुर एयरपोर्ट का रनवे 4200 मीटर लंबा होगा। A380 दुनिया का सबसे बड़ा डबल-डेकर पैसेंजर एयरक्राफ्ट है। यह इतना बड़ा और भारी है कि इसे उड़ाने के लिए 4 इंजन लगते हैं। आमतौर पर पैसेंजर एयरक्राफ्ट में दो इंजन होते हैं। A380 में 850 से ज्यादा यात्री सवार हो सकते हैं। लो लाइंग एरिया होने के चलते पुनपुन में नहीं बना एयरपोर्ट 2009 में बिहार सरकार ने पटना के पास पुनपुन में एयरपोर्ट बनाने का फैसला लिया था। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की एक टीम ने अक्टूबर 2009 में ग्राउंड जीरो का मुआयना किया था। टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि क्षेत्र निचला इलाका है। यहां जल जमाव की समस्या रहती है। इसके चलते एयरपोर्ट के लिए ठीक नहीं है। इसके बाद पुनपुन में एयरपोर्ट नहीं बन सका। पटना के पास कौन-कौन से एयरपोर्ट? जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट- पटना के जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट का नया टर्मिनल 3 जून 2025 से पूरी तरह चालू हो चुका है, जिससे यात्रियों की क्षमता 30 लाख से बढ़कर 1 करोड़ सालाना हो गई है। बिहटा एयरपोर्ट- पटना के करीब बिहटा में भी एक नए सिविल एन्क्लेव का निर्माण चल रहा है, जिसके 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। यहां एयरफोर्स का एयरपोर्ट है। इसे नागरिक विमानों को संभालने के लिए विकसित किया जा रहा है।
यूरोप छोड़ ब्राजील चले लिंगार्ड! कोरिनथियंस के साथ नई पारी; क्या फिर से चमकेगी किस्मत?
मैनचेस्टर यूनाइटेड के पूर्व स्टार जेसी लिंगार्ड अब ब्राजील के कोरिनथियंस क्लब में दिखाएंगे जलवा। मेम्फिस डेपे के साथ मिलकर जीतेंगे खिताब; पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
मध्य पूर्व संघर्ष से बढ़ा आर्थिक दबाव, ऊर्जा कीमतों में उछाल से यूरोप चिंतित
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष यूरोप पर भारी आर्थिक बोझ डाल रहा है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को कहा कि इस युद्ध के कारण ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं और आयात बिलों में अरबों यूरो का इजाफा हो रहा है।
यूरोप के कई देशों जैसे स्पेन, फ्रांस और ब्रिटेन में 'ब्लड रेन' (लाल बारिश) की दुर्लभ घटना देखी जा रही है। सहारा रेगिस्तान की धूल और बारिश के मेल से बने इस अनोखे मौसम के बारे में विस्तार से जानें।
विश्व में पहली बार बीएचयू के शोधार्थी शैलेश भैंस के विस्थापन पर शोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि भारत से भैंस को इराक, ईरान, मिस्र और इटली में कब और किन रास्तों से ले जाया गया। इस शोध के पीछे उनकी वजह यह है कि यदि सही समय और रास्तों की जानकारी मिल जाती है, तो मानव सभ्यता के सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। ज्ञान लैब में कार्यरत शोध छात्र शैलेश देसाई ने यूनाइटेड किंगडम के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पांच महीने का शोध दौरा पूरा किया। यह दौरा अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 तक रहा, जिसके दौरान उन्होंने प्राचीन डीएनए तकनीकों का उपयोग कर एनिमल डोमेस्टिकशन के इतिहास पर अध्ययन किया। भैंस के जेनेटिक इतिहास का लगाएंगे पता ऑक्सफोर्ड के शोध मे शैलेश ने भैंस के जेनेटिक इतिहास पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप में भैंसों की उत्पत्ति और डोमेस्टिकशन प्रक्रियाओं को समझने पर काम किया, साथ ही यह जांचा कि भैंसें पश्चिम एशिया में कब और कैसे पहुंचीं, जिसमें ईरान, इराक, इटली और मिस्र जैसे क्षेत्र शामिल हैं। हालांकि ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्य भारतीय उपमहाद्वीप और पश्चिम एशिया के बीच लंबे समय से समुद्री संपर्कों की ओर इशारा करते हैं, लेकिन इन क्षेत्रों में भैंसों की पहुंच का समय और आनुवंशिक विशेषताएं अभी तक अबूझ पहेली हैं। टीम ने नदी और दलदली जगहों का लिया सैम्पल इसके अलावा, उन्होंने नदी और दलदली जगहों पर रहने वाली भैंसों की जेनेटिक इतिहास की जांच की, जिसमें पूर्वी एशिया की आबादियां भी शामिल हैं। शोध यात्रा के दौरान, उन्होंने प्रोफेसर लार्सन की प्राचीन डीएनए प्रयोगशाला में डीएनए डेटा उत्पन्न किया। प्राचीन डीएनए अनुसंधान में पुरातात्विक और ऐतिहासिक नमूनों जैसे हड्डियों, बालों और त्वचा से आनुवंशिक सामग्री निकालना शामिल होता है, जिसके लिए विशेष प्रयोगशाला सुविधाओं की आवश्यकता होती है। उनका शोध भारत में एनिमल पैलियोजेनोमिक्स को आस्थापित करने मे मदद करेगा।
ट्रम्प के चंगुल से ग्रीनलैंड को बचाने के लिए कितनी दूर जा सकता है यूरोपीय यूनियन?
ग्रीनलैंड के भविष्य पर चर्चा के लिए वॉशिंगटन वार्ता बुधवार को विफल हो गई, जिसमें डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री व्हाइट हाउस से यह संदेश लेकर घर लौटे कि ग्रीनलैंड सही मायने में अमेरिका का है और ट्रम्प इसके अधिग्रहण के समय पर फैसला करेंगे
खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन करती फ्रांसीसी महिला का वीडियो ईरान के दावे से वायरल
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