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यूरोप की राजकुमारी से निकाह करने जा रहे बिलावल... सोशल मीडिया पर शोर

पाकिस्तान के राष्ट्रपति और बिलावल के पिता आसिफ़ अली ज़रदारी के सात दिन की निजी यात्रा पर ऑस्ट्रिया पहुंचे हैं. जरदारी की निजी यात्रा को लेकर सोशल मीडिया पर कई कयास लगाए जा रहे हैं.

आज तक 30 Aug 2026 9:02 pm

Shivani Mehrotra: 'उम्र के साथ सपने धुंधले नहीं पड़ते'; 43 साल की शिवानी ने हौसलों से फतह की यूरोप की सबसे ऊंची चोटी, माउंट एल्ब्रुस पर फहराया तिरंगा

Who is Shivani Mehrotra: कुछ सपने उम्र के साथ धुंधले नहीं पड़ते, बल्कि जिम्मेदारियों के बीच और मजबूत होते जाते हैं। इसका जीवंत उदाहरण 43साल की शिवानी मेहरोत्रा हैं, जिन्होंने 18 वर्षीय बेटी की परवरिश, परिवार की जिम्मेदारियां एवं रोजमर्रा की जिंदगी के बीच अपने पर्वतारोहण के जुनून को कभी पीछे नहीं छोड़ा। उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर लगातार अपने हौसले तथा हदों को परखती रहीं।मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की निवासी शिवानी मेहरोत्रा की शादी 24 साल की उम्र में लखनऊ में हुई और अब वह अपने परिवार के साथ मुंबई में रहती हैं। इस साल स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी रूस स्थित 'माउंट एल्ब्रुस' पर तिरंगा फहराकर इस दिन को अपने लिए यादगार बना दिया।'हौसले की परीक्षा थी'शिवानी ने रूस से भारत लौटने के दौरान न्यूज एजेंसी पीटीआई से फोन पर कहा कि 15 अगस्त को चोटी तक पहुंचना जितना शरीर की ताकत का इम्तिहान था। उतना ही मन के हौसले की भी परीक्षा थी।उन्होंने कहा, उम्र सिर्फ एक नंबर भर है। असली ताकत लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प और उसे पाने के लिए जरूरी अनुशासन में होती है।शिवानी के लिए पर्वतारोहण अपने सपनों और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन की कहानी भी है। वह अपने माता-पिता, पति, बेटी और दोस्तों को अपनी ताकत मानती हैं। शिवानी बताती हैं कि खासकर 40 वर्ष की उम्र पार कर चुकी महिला पर्वतारोहियों और ट्रेकर की संख्या बहुत कम है।शिवानी ने कहा, मुझे पहाड़ों पर 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं बहुत कम ही दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा, मेरे परिवार ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया और मुझे यह करने का साहस दिया। वह अपने पर्वतारोहण अभियानों का खर्च भी काफी हद तक अपनी बचत से उठाने की कोशिश करती हैं।कैसे हुआपहाड़ों से लगाव?शिवानी ने बताया कि पहाड़ों से उनका लगाव 2019 में गहरा हुआ, जब उन्होंने अपनी सबसे करीबी दोस्त के साथ 'माउंट एवरेस्ट' आधार शिविर तक ट्रेकिंग की योजना बनाई थी। एक यात्रा की वह छोटी-सी योजना कब जुनून में बदल गई, उन्हें खुद पता नहीं चला। इसके बाद कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और हिमालय के कई हिस्से उनकी मंजिल बनते चले गए।इसके बाद शिवानी ने 'फ्रेंडशिप पीक' और 'माउंट किलिमंजारो' जैसी कठिन चोटियों पर भी चढ़ाई की। कैलाश से जुड़े पांच प्रमुख पर्वत अभियानों में से चार वह अब तक पूरा कर चुकी हैं। हालांकि, उनका सबसे बड़ा सपना अभी बाकी है 'माउंट एवरेस्ट' फतह करना।साथ ही दुनिया की सातों सबसे ऊंची चोटियों पर भारतीय तिरंगा फहराना।दुबई होते हुए पहुंचीं रूस'माउंट एल्ब्रुस' अभियान के लिए शिवानी ने आठ अगस्त को मुंबई से अपनी यात्रा शुरू की। दुबई होते हुए वह रूस के मिनरल्नी वोडी पहुंचीं।10 दिन के इस अभियान का आयोजन रूस की 'चतुर टूर्स' नामक कंपनी ने किया था। शिखर पर मौसम के अचानक बदलने की आशंका को देखते हुए अभियान में एक अतिरिक्त दिन भी रखा गया था।खराब मौसम ने चढ़ाई को और कठिन बना दिया। तेज बर्फबारी, बारिश, कड़ाके की ठंड और ऊंचाई की चुनौती के बीच दल ने अंतिम चढ़ाई से पहले खुद को मौसम और ऊंचाई के अनुकूल बनाने के लिए कई अभ्यास चढ़ाइयां कीं। इनमें करीब 3,000, 4,000 और 4,700 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचना शामिल था।रुकना नहीं है, चलते रहना है...शिखर पर पहुंचने वाले दिन दल ने रात करीब दो बजे चढ़ाई शुरू की। इस दौरान अंधेरा से लेकर जमा देने वाली ठंड, तेज हवाएं, भारी सामान और कम ऑक्सीजन लेवल तक... हर कदम मुश्किल था। लेकिन शिवानी के भीतर एक ही बात गूंजती रही- रुकना नहीं है, चलते रहना है। करीब साढ़े चार घंटे की कठिन चढ़ाई के बाद उन्होंने शिखर पर कदम रखा।उन्होंने कहा कि इतनी ऊंचाई पर पहुंचकर छोटे से छोटा काम भी मुश्किल हो जाता है। 5,000 मीटर के बाद ऑक्सीजन का स्तर तेजी से कम होने लगता है। बर्फीले मौसम से बचाव के लिए भारी भरकम कपड़ों और जूतों में लगे कांटेदार उपकरणों के साथ एक-एक कदम बढ़ाना भी शरीर के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।'सेल्फ-अरेस्ट' तकनीकों की ट्रेनिंग भी लीइस अभियान में शिवानी ने खुद को बचाने की तकनीक काट्रेनिंग भी लिया। बर्फ पर फिसलने की स्थिति में खुद को रोकना और आपात स्थिति में सही तरीके से प्रतिक्रिया देना इसका हिस्सा था। शिवानी ने कहा कि चढ़ाई का आखिरी पड़ाव अक्सर शरीर से ज्यादा मन के हौसले की परीक्षा लेता है।उन्होंने कहा, पहले की यात्राओं में जहां मुझे लगता था कि अब मैं इससे आगे नहीं जा सकती, वहीं मैंने सीखा कि असल शुरुआत तो वहीं से होती है। शिखर पर पहुंचते ही वह घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने पहाड़, अपने दोस्तों और उन पर विश्वास जताने वालों के प्रति आभार जताया।उस पल को याद करते हुए उन्होंने कहा, मैंने माउंट एल्ब्रुस के सामने सिर झुकाया और कहा-धन्यवाद। उनके लिए यह चोटी उस बड़े सपने की एक सीढ़ी थी, जिसे वह अभी पूरा करना चाहती हैं।फिटनेस पर काफी ध्यान देती हैं शिवानीशिवानी फिटनेस पर भी बहुत ध्यान देती हैं। वह फुल मैराथन, हाफ मैराथन के अलावा 50 किलोमीटर की दौड़ भी पूरी कर चुकी हैं।कोरोना वायरस महामारी के दौरान उन्होंने योग को अपनाया। बाद मेंउन्होंनेएडवांस्ड योग इंस्ट्रक्टर और थेरेपिस्ट के तौर पर ट्रेनिंग लिया। करीब छह वर्षों से वह योग सिखा रही हैं। इनमें गर्भावस्था से पहले और बाद की महिलाओं तथा कैंसर रोगियों के लिए विशेष योग कार्यक्रम भी शामिल हैं।कैसी है दिनचर्या?उनकी दिनचर्या भी उनके संकल्प जैसी ही सख्त है। वह तड़के करीब साढ़े तीन बजे उठती हैं और योग, जिम में कसरत, दौड़ तथा पर्वतारोहण की तैयारी करती हैं। खान-पान को लेकर भी वह बेहद अनुशासित रहती हैं। शिवानी के लिए पर्वतारोहण सिर्फ किसी निश्चित ऊंचाई तक पहुंचने का नाम नहीं है। वह कहती हैं, मैं नहीं मानती कि ऊंचाई के आधार पर कोई चोटी कम या ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। हर पहाड़ अपने साथ एक अलग अनुभव लाता है और हर पहाड़ सम्मान मांगता है। अब उनकी नजर नेपाल की ऊंचाई वाली चोटियों पर है। यह तैयारी उन्हें अपने सबसे बड़े लक्ष्य माउंट एवरेस्ट तक ले जाएगी।पैसे कीचुनौतीआई सामनेउन्होंने विश्वास के साथ कहा, एवरेस्ट मेरा मुख्य लक्ष्य है। मुझे इसे करना ही है। हालांकि, इस सपने की राह मेंपैसे भी बड़ी चुनौती है। एवरेस्ट अभियान पर करीब 40 से 50 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। दूसरे अंतरराष्ट्रीय पर्वत अभियानों का खर्च भी कई लाख रुपये तक पहुंच जाता है।ये भी पढ़ें- VIDEO: प्रयागराज में मां गंगा ने कराया 'लेटे हनुमान जी' को महास्नान! गर्भगृह तक पहुंचा नदी का पानी; वीडियो वायरलशिवानी ने अब तक अपने योग पेशे से हुई बचत से ही अधिकांश अभियानों का खर्च उठाया है। उन्होंने कहा, मैं यह अपने दम पर करना चाहती हूं। इस उम्र में भी शिवानी के कदम रुके नहीं हैं। उनका कहना है, अगर आपने मन में ठान लिया है कि आपको कुछ हासिल करना है, तो आप उसे कर सकते हैं। बस अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना होता है।

ज़ी न्यूज़ 30 Aug 2026 7:00 pm

43 वर्षीय शिवानी मेहरोत्रा ने यूरोप के माउंट एल्ब्रुस पर फहराया तिरंगा

कुछ सपने उम्र के साथ धुंधले नहीं पड़ते, बल्कि जिम्मेदारियों के बीच और मजबूत होते जाते हैं। इसका जीवंत उदाहरण 43 वर्षीय शिवानी मेहरोत्रा ने 18 वर्षीय बेटी की परवरिश, परिवार की जिम्मेदारियां व रोजमर्रा की जिंदगी के बीच अपने पर्वतारोहण के जुनून को कभी पीछे नहीं छोड़ा और दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर लगातार अपने हौसले तथा हदों को परखती रहीं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की निवासी शिवानी मेहरोत्रा की शादी 24 साल की उम्र में लखनऊ में हुई और अब वह अपने परिवार के साथ मुंबई में रहती हैं। इस साल स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी रूस स्थित ‘माउंट एल्ब्रुस’ पर तिरंगा फहराकर इस दिन को अपने लिए यादगार बना दिया। शिवानी ने रूस से भारत लौटने के दौरान ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर कहा कि 15 अगस्त को चोटी तक पहुंचना जितना शरीर की ताकत का इम्तिहान था, उतना ही मन के हौसले की भी परीक्षा थी। उन्होंने कहा, ‘‘उम्र सिर्फ अंकभर है। असली ताकत लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प और उसे पाने के लिए जरूरी अनुशासन में होती है।’’ शिवानी के लिए पर्वतारोहण अपने सपनों और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन की कहानी भी है। वह अपने माता-पिता, पति, बेटी और दोस्तों को अपनी ताकत मानती हैं। शिवानी बताती हैं कि खासकर 40 वर्ष की उम्र पार कर चुकी महिला पर्वतारोहियों और ट्रेकर की संख्या बहुत कम है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पहाड़ों पर 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं बहुत कम ही दिखाई देती हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरे परिवार ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया और मुझे यह करने का साहस दिया।’ वह अपने पर्वतारोहण अभियानों का खर्च भी काफी हद तक अपनी बचत से उठाने की कोशिश करती हैं। पहाड़ों से उनका लगाव 2019 में गहरा हुआ, जब उन्होंने अपनी सबसे करीबी दोस्त के साथ ‘माउंट एवरेस्ट’ आधार शिविर तक ट्रेकिंग की योजना बनाई थी। एक यात्रा की वह छोटी-सी योजना कब जुनून में बदल गई, उन्हें खुद पता नहीं चला। इसके बाद कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और हिमालय के कई हिस्से उनकी मंजिल बनते चले गए। इसके बाद शिवानी ने ‘फ्रेंडशिप पीक’ और ‘माउंट किलिमंजारो’ जैसी कठिन चोटियों पर भी चढ़ाई की। कैलाश से जुड़े पांच प्रमुख पर्वत अभियानों में से चार वह अब तक पूरा कर चुकी हैं। इसे भी पढ़ें: Pilibhit में Tiger Attack से 60 वर्षीय किसान की मौत, आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम की हालांकि, उनका सबसे बड़ा सपना अभी बाकी है-‘माउंट एवरेस्ट’ फतह करना और दुनिया की सातों सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराना। ‘माउंट एल्ब्रुस’ अभियान के लिए शिवानी ने आठ अगस्त को मुंबई से अपनी यात्रा शुरू की। दुबई होते हुए वह रूस के मिनरल्नी वोडी पहुंचीं। दस दिन के इस अभियान का आयोजन रूस की ‘चतुर टूर्स’ नामक कंपनी ने किया था। शिखर पर मौसम के अचानक बदलने की आशंका को देखते हुए अभियान में एक अतिरिक्त दिन भी रखा गया था। खराब मौसम ने चढ़ाई को और कठिन बना दिया। तेज बर्फबारी, बारिश, कड़ाके की ठंड और ऊंचाई की चुनौती के बीच दल ने अंतिम चढ़ाई से पहले खुद को मौसम और ऊंचाई के अनुकूल बनाने के लिए कई अभ्यास चढ़ाइयां कीं। इनमें करीब 3,000, 4,000 और 4,700 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचना शामिल था। शिखर पर पहुंचने वाले दिन दल ने रात करीब दो बजे चढ़ाई शुरू की। अंधेरा, जमा देने वाली ठंड, तेज हवाएं, भारी सामान और कम ऑक्सीजन स्तर—हर कदम मुश्किल था। लेकिन शिवानी के भीतर एक ही बात गूंजती रही-“रुकना नहीं है, चलते रहना है।” करीब साढ़े चार घंटे की कठिन चढ़ाई के बाद उन्होंने शिखर पर कदम रखा। उन्होंने कहा कि इतनी ऊंचाई पर पहुंचकर छोटे-से-छोटा काम भी मुश्किल हो जाता है। 5,000 मीटर के बाद ऑक्सीजन का स्तर तेजी से कम होने लगता है। बर्फीले मौसम से बचाव के लिए भारी भरकम कपड़ों और जूतों में लगे कांटेदार उपकरणों के साथ एक-एक कदम बढ़ाना भी शरीर के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। इस अभियान में शिवानी ने खुद को बचाने की तकनीक का प्रशिक्षण भी लिया। इसे भी पढ़ें: NCW ने Delhi में 21-वर्षीय छात्रा की हत्या का लिया संज्ञान, आरोपी की जल्द गिरफ्तारी की मांग बर्फ पर फिसलने की स्थिति में खुद को रोकना और आपात स्थिति में सही तरीके से प्रतिक्रिया देना इसका हिस्सा था। शिवानी ने कहा कि चढ़ाई का आखिरी पड़ाव अक्सर शरीर से ज्यादा मन के हौसले की परीक्षा लेता है। उन्होंने कहा, “पहले की यात्राओं में जहां मुझे लगता था कि अब मैं इससे आगे नहीं जा सकती, वहीं मैंने सीखा कि असल शुरुआत तो वहीं से होती है।” शिखर पर पहुंचते ही वह घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने पहाड़, अपने दोस्तों और उन पर विश्वास जताने वालों के प्रति आभार जताया। उस पल को याद करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने माउंट एल्ब्रुस के सामने सिर झुकाया और कहा—धन्यवाद।” उनके लिए यह चोटी उस बड़े सपने की एक सीढ़ी थी, जिसे वह अभी पूरा करना चाहती हैं। शिवानी फिटनेस पर भी बहुत ध्यान देती हैं। वह फुल मैराथन, हाफ मैराथन के अलावा 50 किलोमीटर की दौड़ भी पूरी कर चुकी हैं। कोविड महामारी के दौरान उन्होंने योग को अपनाया। बाद में उन्नत योग प्रशिक्षक और चिकित्सक के रूप में प्रशिक्षण लिया। करीब छह वर्षों से वह योग सिखा रही हैं। इनमें गर्भावस्था से पहले और बाद की महिलाओं तथा कैंसर रोगियों के लिए विशेष योग कार्यक्रम भी शामिल हैं। उनकी दिनचर्या भी उनके संकल्प जैसी ही सख्त है। इसे भी पढ़ें: Palghar के आश्रम स्कूल में 7 वर्षीय छात्र की बुखार से मौत, जांच के लिए SIT गठित वह तड़के करीब साढ़े तीन बजे उठती हैं और योग, जिम में कसरत, दौड़ तथा पर्वतारोहण की तैयारी करती हैं। खान-पान को लेकर भी वह बेहद अनुशासित रहती हैं। शिवानी के लिए पर्वतारोहण सिर्फ किसी निश्चित ऊंचाई तक पहुंचने का नाम नहीं है। वह कहती हैं, “मैं नहीं मानती कि ऊंचाई के आधार पर कोई चोटी कम या ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। हर पहाड़ अपने साथ एक अलग अनुभव लाता है और हर पहाड़ सम्मान मांगता है।” अब उनकी नजर नेपाल की ऊंचाई वाली चोटियों पर है। यह तैयारी उन्हें अपने सबसे बड़े लक्ष्य माउंट एवरेस्ट तक ले जाएगी। उन्होंने विश्वास के साथ कहा, ‘‘एवरेस्ट मेरा मुख्य लक्ष्य है। मुझे इसे करना ही है।” हालांकि, इस सपने की राह में धन भी बड़ी चुनौती है। एवरेस्ट अभियान पर करीब 40 से 50 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। दूसरे अंतरराष्ट्रीय पर्वत अभियानों का खर्च भी कई लाख रुपये तक पहुंच जाता है। शिवानी ने अब तक अपने योग पेशे से हुई बचत से ही अधिकांश अभियानों का खर्च उठाया है। उन्होंने कहा, “मैं यह अपने दम पर करना चाहती हूं।” इस उम्र में भी शिवानी के कदम रुके नहीं हैं। उनका कहना है, “अगर आपने मन में ठान लिया है कि आपको कुछ हासिल करना है, तो आप उसे कर सकते हैं। बस अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना होता है।

प्रभासाक्षी 30 Aug 2026 2:35 pm

Dharamshala की चाय पर बारिश का असर, जर्मनी-फ्रांस में जबरदस्त डिमांड

Dharamshala की चाय पर बारिश का असर, जर्मनी-फ्रांस में जबरदस्त डिमांड

अमर उजाला 30 Aug 2026 8:55 am

1918 का वो फ्लू जिसने दिल्ली में मचाई थी तबाही, एक यूरोपीय मरीज की एंट्री और हो गई 7044 मौतें

1918-19 की फ्लू महामारी ने दिल्ली में भारी तबाही मचाई थी, जिसमें अकेले शहर में 7,044 और पूरे दिल्ली प्रांत में 23,175 लोगों की मौत हुई। शुरुआती संक्रमण एक बीमार यूरोपीय के शिमला से दिल्ली आने के बाद सामने आया। महामारी के बाद सितंबर 1920 में इन्फ्लूएंजा को आधिकारिक संक्रामक रोग घोषित किया गया।

खबर इंडिया टीवी 29 Aug 2026 8:44 pm

दक्षिण कोरिया-फ्रांस रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमत, उत्तर कोरिया-रूस सैन्य गठजोड़ पर चिंता

सोल, 29 अगस्त . उत्तर कोरिया और रूस के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग पर दक्षिण कोरिया और फ्रांस ने चिंता जाहिर की. इसके साथ ही दोनों देशों ने रणनीतिक और रक्षा समन्वय मजबूत करने पर सहमति जताई. दोनों देशों के रक्षा अधिकारियों ने कोरियाई प्रायद्वीप और यूरोप की सुरक्षा चुनौतियों के बीच बढ़ते आपसी संबंधों ... Read more

डेली किरण 29 Aug 2026 12:23 pm

यूरोप की हवाई सुरक्षा पर मंडराया खतरा? पैट्रियट इंटरसेप्टर की कमी, टेंशन में नाटो

अमेरिका ने ईरान युद्ध के दौरान यूरोप में तैनात पैट्रियट मिसाइलें मिडिल ईस्ट भेज दी हैं, जिससे नाटो की हवाई रक्षा खतरनाक रूप से कमजोर पड़ गई है। यूरोप में मौजूद अमेरिकी और नाटो अधिकारियों के अनुसार, अब रूस के किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल हमले को रोकने के लिए पर्याप्त इंटरसेप्टर नहीं बचे हैं।

लाइव हिन्दुस्तान 27 Aug 2026 11:18 pm

'जेन जेड' और 'जेन अल्फा' अमेरिका-यूरोप का कॉन्सेप्ट, हमारा उससे कोई लेना-देना नहीं: हिमंता सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने ‘जेन जेड’ और ‘जेन अल्फा’ को लेकर कहा कि ये अवधारणाएं अमेरिका और यूरोप से आई हैं और भारतीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था से इनका सीधा संबंध नहीं है।

खास खबर 27 Aug 2026 2:04 pm

‘जेन जेड’ और ‘जेन अल्फा’ अमेरिका-यूरोप का कॉन्सेप्ट, हमारा उससे कोई लेना-देना नहीं: हिमंता सरमा

सोमनाथ, 27 अगस्त . असम के Chief Minister हिमंता बिस्वा सरमा ने ‘जेन जेड’ और ‘जेन अल्फा’ को लेकर कहा कि ये अवधारणाएं अमेरिका और यूरोप से आई हैं और भारतीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था से इनका सीधा संबंध नहीं है. सोमनाथ में मीडिया से बातचीत के दौरान सीएम हिमंता सरमा ने कहा कि हमारे ... Read more

डेली किरण 27 Aug 2026 2:03 pm

'जेन जेड' और 'जेन अल्फा' अमेरिका-यूरोप का कॉन्सेप्ट, हमारा उससे कोई लेना-देना नहीं: हिमंता सरमा

'जेन जेड' और 'जेन अल्फा' अमेरिका-यूरोप का कॉन्सेप्ट, हमारा उससे कोई लेना-देना नहीं: हिमंता सरमा

समाचार नामा 27 Aug 2026 1:55 pm

श्वेता तिवारी के लिए यूरोपियन विदेशी दूल्हा ढूंढेंगी मल्लिका, बनाया प्लान

‘द ट्रेटर्स 2’ में श्वेता तिवारी की लव लाइफ पर मल्लिका शेरावत ने मजेदार बात कही. मल्लिका बोलीं कि वह श्वेता के लिए एक अच्छा यूरोपियन लड़का ढूंढेंगी.

आज तक 20 Aug 2026 7:56 pm

Travel Tips: Switzerland on a Budget? ये 4 Indian Destinations देंगे आपको यूरोप जैसी हसीन वादियों का अनुभव

हर किसी को घूमने-फिरने का शौक होता है और विदेश तो हर कोई जाना चाहता है। खासकर स्विट्जरलैंड जैसी खूबसूरत जगह, जहां बर्फ से ढके पहाड़, खूबसूरत नजारे, हरे-भरे मैदान देखने को मिलते हैं। लेकिन यहां जाना हर किसी के बस की बात नहीं होती है। होटल, फ्लाइट, खाना-पीना, घूमने आदि का खर्च लाखों में पहुंच जाता है। इस कारण कई लोगों का यह सपना अधूरा रह जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत में ऐसी कुछ जगहें हैं, जिनको देखकर आपको यूरोप वाली फीलिंग आएगी। इन जगहों पर आपको खूबसूरत लेक्स, बर्फीले पहाड़, हसीन वादियां और कलरफुल फ्लावर्स देखने को मिलेंगी। ऐसे में अगर आपका बजट कम है और ऐसी जगहों को एक्सप्लोर करना चाहती हैं, तो आपको ऐसा महसूस होगा कि आप स्विट्जरलैंड पहुंच गई हैं। इसे भी पढ़ें: Long Weekend Travel Plan: अगस्त की छुट्टियों में Udaipur और Coorg की हरियाली और Monsoon नजारों का उठाएं लुत्फ खज्जियार ज्यादातर लोग खज्जियार को भारत का 'मिनी स्विट्जरलैंड' कहते हैं। हिमाचल के चंबा में स्थित यह जगह हरी-भरी घास, देवदार के घने जंगलों और खूबसूरत मैदानों के लिए जानी जाती है। यहां का खज्जियार लेक वालर एरिया देखने में किसी यूरोपियन पोस्टकार्ड जैसा लगता है। मॉनसून और गर्मियों में यहां की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। अगर आप भी प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद करती हैं, तो आपको खज्जियार आना चाहिए। युमथांग वैली सिक्किम की युमथांग वैली को वैली ऑफ फ्लावर्स भी कहा जाता है। यह जगह स्विट्जरलैंड जैसी लगती है। यहां पर दूर-दूर तक फैले फूलों के मैदान, सुंदर नदियां, बर्फ से ढके पहाड़ किसी यूरोपियन देश वाला फील देती हैं। गर्मियों में यहां रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं। जिससे पूरी वैली बेहद खूबसूरत दिखाई देती है। ऐसे में अगर आपको फोटोग्राफी का शौक है, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए। गुलमर्ग माना जाता है कि अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है, तो वह कश्मीर है। यहां के गुलमर्ग की गिनती भारत के सबसे खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस में होती है। गुलमर्ग के बेहद खूबसूरत पहाड़, हरे-भरे घास के मैदान और ठंडी वादियां यहां आने वाले पर्यटकों को स्विट्जरलैंड की याद दिलाती हैं। गर्मियों में यहां की हरियाली और फूलों से भरे मैदान देखने लायक होते हैं। मुनस्यारी अगर आप किसी शांत जगह पर स्विट्जरलैंड वाला फील लेना चाहती हैं। तो आप मुनस्यारी जा सकती हैं। यह जगह अपने शांत वातावरण के लिए जानी जाती है। अगर आपको भी प्रकृति के बीच सुकून भरे पल बिताना चाहती हैं, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए।

प्रभासाक्षी 12 Aug 2026 6:15 pm

जलवायु परिवर्तन का संकट झेलने लगा यूरोप

यूरोप में जो लोग समझते थे कि जलवायु परिवर्तन भविष्य की पीढ़ियों के लिए समस्या है उन्हें इस बार की गर्मियों ने सच्चाई बता दी है. जलवायु परिवर्तन के महंगे और जीवन बदलने वाले आर्थिक नतीजे यूरोप को अपनी चपेट में ले चुके हैं

देशबन्धु 11 Aug 2026 12:15 am

यूरोप में भीषण गर्मी का कहर... इटली में रेड अलर्ट, ऑस्ट्रिया में तापमान का टूटा रिकॉर्ड

यूरोप में भीषण गर्मी और लू ने कई देशों के तापमान रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. इटली सरकार ने 27 प्रमुख शहरों को रेड अलर्ट पर रखा है. ऑस्ट्रिया में तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ज्यादा तापमान है. इस गर्मी और सूखे का असर बिजली उत्पादन, परिवहन और पर्यटन पर भी पड़ा है. पर्यावरणविद ग्लोबल वार्मिंग को इस स्थिति का मुख्य कारण मानते हैं.

आज तक 6 Aug 2026 6:41 pm

यूरोप के इस देश में किराए पर मिलते हैं 'पति', महिलाएं घंटों के हिसाब से करती हैं पेमेंट, जानिए वजह

क्या आपने कभी सुना है किराए पर पति मिलते हैं? सुनने में ये काफी अजीब लग रहा है लेकिन यूरोप के एक देश में इस सर्विस से कई महिलाएं काफी खुश हैं। चलिए आपको रेंटल हस्बैंड की पूरी जानकारी देते हैं।

लाइव हिन्दुस्तान 2 Aug 2026 1:00 pm

'यूरोप के दरवाजे' में घुस रहे 57 अफ्रीकियों को स्पेन ने क्यों मारा?

स्पेन की पुलिस बॉर्डर पर अलर्ट खड़ी है. पुलिस की गोलियों से अंदर घुसने की कोशिश कर रहे कई प्रवासियों की मौत हो चुकी है. 'यूरोप का दरवाजा' कहा जाने वाला स्यूटा शहर में प्रवासियों की बाढ़ ने इस शहर में कानून-व्यवस्था का संकट खड़ा कर दिया है.

आज तक 31 Jul 2026 7:58 pm

फ्रांस में पहली बार दिखा आग का बादल आखिर है क्या?

अभूतपूर्व जंगल की आग से जूझते फ्रांस में पहली बार फायर क्लाउड यानी आग के बादल बनते देखा गया है. आखिर आग के बादल होते क्या हैं और इनका क्या असर होता है. फ्रांस में इसे देखने के बाद क्यों चिंता बढ़ रही है

देशबन्धु 30 Jul 2026 9:33 pm

यूरोप में ‘ओमेगा ब्लॉक’ हीटवेव का प्रकोप, रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से जनजीवन बेहाल, दर्जनों लोगों की मौत

यूरोप में ‘ओमेगा ब्लॉक’ हीटवेव ने तबाही मचा दी है। फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और स्पेन में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, बिजली संकट, स्कूल बंद और गर्मी से कई मौतों की खबरें सामने आई हैं।

देशबन्धु 25 Jun 2026 9:36 am

अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान

एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं

देशबन्धु 20 Jun 2026 10:59 am

60 की उम्र में मिलिंद सोमन ने रचा इतिहास, यूरोप से अफ्रीका तक तैरकर पार किया स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर

अभिनेता और फिटनेस आइकन मिलिंद सोमन ने एक बार फिर अपनी अद्भुत सहनशक्ति और फिटनेस का परिचय दिया है। 60 साल की उम्र में मिलिंद सोमन ने स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर को तैरकर पार करने का एक कठिन और साहसी कारनामा कर दिखाया है। मिलिंद ने यूरोप और अफ्रीका के बीच ...

वेब दुनिया 6 May 2026 11:49 am

फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन, 88 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

Alain Delon passes away: 'द लेपर्ड' और 'रोक्को एंड हिज ब्रदर्स' जैसी सुपर हिट फिल्मों में अभिनय का जौहर दिखाने वाले फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन हो गया है। एलेन डेलन ने 88 वर्ष की उम्र में आखिरी सांस ली। अभिनेता के पारिवारिक सूत्रों ने ...

वेब दुनिया 18 Aug 2024 5:40 pm

इटली से फ्रांस तक समंदर के बीच होगा Anant-Radhika का दूसरा प्री वेडिंग फंक्शन, जानिए मेहमानों से लेकर ड्रेस कोड तक सबकुछ

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समाचार नामा 28 May 2024 10:30 am

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मनोरंजन नामा 29 Apr 2024 9:00 pm