डिजिटल समाचार स्रोत

...

UNGA में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर को ट्रंप का समर्थन, बोले- ईरानी चेकपॉइंट्स से ऊर्जा व्यवस्था दूर करें

संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान GCC और अरब देशों के नेताओं के साथ बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों ने वैकल्पिक ऊर्जा और व्यापार मार्गों की जरूरत को और बढ़ा दिया है.

NDTV इंडिया 23 Sep 2026 5:42 am

अमेरिका-यूरोप में बढ़ी आयुर्वेदिक दवाओं की मांग: आज दुनिया के 150 देशों में आयुर्वेद दिवस, क्या होगा खास?

अमेरिका-यूरोप में बढ़ी आयुर्वेदिक दवाओं की मांग: आज दुनिया के 150 देशों में आयुर्वेद दिवस, क्या होगा खास?

अमर उजाला 23 Sep 2026 5:38 am

भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी में सहयोग के नए रास्ते खोलती है: डॉ. जितेंद्र सिंह

New Delhi, 22 सितंबर . केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने Tuesday को कहा कि India और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच साझेदारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत अनुसंधान जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खोल रही है. यह बयान यूरोपीय संसद ... Read more

डेली किरण 22 Sep 2026 7:43 pm

भारत बना 'ग्लोबल इकोनॉमिक सुपरपावर': अमेरिका, जापान और यूरोप को पछाड़ 6.7% की स्पीड से दौड़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था

भारत बना 'ग्लोबल इकोनॉमिक सुपरपावर': अमेरिका, जापान और यूरोप को पछाड़ 6.7% की स्पीड से दौड़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था

समाचार नामा 22 Sep 2026 5:40 pm

India GDP Growth: भारत सबसे तेजी से बढ़ती इकोनॉमी, WEF ने भी माना- 6.7% की ग्रोथ के साथ अमेरिका, चीन, जापान, यूरोप से भी आगे है इंडिया

WEF की सितंबर 2026 रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP Growth 6.7% रह सकती है. 74% अर्थशास्त्रियों को मजबूत आर्थिक ग्रोथ की उम्मीद है.

NDTV इंडिया 22 Sep 2026 4:52 pm

Russia-Ukraine War: यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस का डीजल उद्योग तबाह, हर महीने 25,000 मौतें; डोनाल्ड ट्रंप ने जंग तुरंत रोकने की लगाई गुहार

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष अब एक बेहद विनाशकारी और रणनीतिक मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध को 'हास्यास्पद और कभी न खत्म होने वाला' (Ridiculous and never-ending) करार देते हुए दोनों देशों से संघर्ष को तत्काल रोकने की पुरजोर अपील की है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर जारी एक तीखे बयान में ट्रंप ने दावा किया कि यूक्रेन द्वारा किए जा रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण रूस अपने डीजल और ऊर्जा उद्योग पर से नियंत्रण खो चुका है।ट्रंप ने इस युद्ध की मानवीय त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए खुलासा किया कि जंग के मोर्चे पर हर महीने औसतन 25,000 लोगों की जान जा रही है। युद्ध के मैदान में लगातार हो रही मौतों और वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए उन्होंने विश्व नेताओं और दोनों देशों से इसे तुरंत समाप्त करने की मांग की है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक के दौरान यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से मुलाकात से पहले ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा रहा है।रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेन का रणनीतिक हमला: क्यों ठप हो रहा है डीजल नेटवर्क?यूक्रेन ने अपनी रक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए रूस के भीतर सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित प्रमुख तेल रिफाइनरियों, डिपो और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना शुरू किया है। मास्को स्थित प्रमुख रिफाइनरियों से लेकर काला सागर और वोल्गा क्षेत्र तक कई बड़े तेल शोधन संयंत्रों पर सटीक ड्रोन हमले किए गए हैं। इन हमलों का सीधा असर रूस के सबसे बड़े ऊर्जा निर्यात—डीजल और परिष्कृत ईंधन (Refined Products)—पर पड़ा है।रूस के प्रमुख शोधन संयंत्रों की प्राथमिक आसवन इकाइयों (CDU) को नुकसान पहुंचने के कारण उत्पादन क्षमता में भारी गिरावट दर्ज की गई है। रूस अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ डीजल का एक प्रमुख वैश्विक निर्यातक रहा है। हालांकि, इन हमलों के बाद कई संयंत्रों में काम पूरी तरह रुक गया है और रूस को अपने घरेलू बाजार में ईंधन की कमी से बचने के लिए कई बार पेट्रोल व डीजल के निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाने पड़े हैं। संयंत्रों के जटिल कलपुर्जों पर पश्चिमी प्रतिबंधों की मार होने के कारण उनकी मरम्मत करना भी मॉस्को के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।मोर्चे पर हर महीने 25,000 मौतें: विनाशकारी मानवीय लागत का भयावह आंकड़ाडोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में जिस सबसे दर्दनाक पहलू पर रोशनी डाली, वह युद्ध के मैदान में सैनिकों और नागरिकों के हताहत होने की भारी दर है। ट्रंप के अनुसार, युद्ध की भीषण गोलाबारी, ड्रोन हमलों और शहरी टकराव के चलते प्रति माह लगभग 25,000 सैनिकों व लोगों की मौत हो रही है। पूर्वी यूक्रेन के डोनबास और सीमावर्ती क्षेत्रों में जारी तीव्र लड़ाई ने इस आंकड़े को लगातार भयावह बनाए रखा है।हजारों परिवारों के उजड़ने, सैनिकों के हताहत होने और बुनियादी ढांचे के तबाह होने के बावजूद दोनों पक्षों के बीच अब तक कोई स्थायी सुलह नहीं हो सकी है। यूक्रेन अपनी संप्रभुता और जमीन की वापसी पर अड़ा है, जबकि रूस अपनी सुरक्षा चिंताओं और जीते गए क्षेत्रों पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि यह नरसंहार तुरंत नहीं रुका, तो यह न केवल पूर्वी यूरोप बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और स्थिरता को खाई में धकेल देगा।वैश्विक ऊर्जा संकट और तेल कीमतों पर मंडराता नया खतरारूस के तेल उद्योग पर हुए इन हमलों का असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा झटका अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों और डीजल कीमतों पर पड़ रहा है। यूरोप और वैश्विक बाजार में डीजल को औद्योगिक परिवहन, खेती और लॉजिस्टिक्स की रीढ़ माना जाता है। रूसी शोधन क्षमता घटने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल के क्रैक स्प्रेड (कच्चे तेल और परिष्कृत उत्पाद के बीच का अंतर) में तेज उछाल देखा जा रहा है।वैश्विक सप्लाई चेन पहले से ही लाल सागर और पश्चिम एशिया के तनावों के कारण दबाव में है। ऐसे में यदि रूस का रिफाइंड उत्पाद बाजार से बाहर होता है, तो माल ढुलाई महंगी होगी और इसका सीधा असर खाद्य वस्तुओं व आम उपभोक्ता उत्पादों की महंगाई पर पड़ेगा। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिफाइनरियों पर हमले जारी रहे, तो आने वाले दिनों में ईंधन की वैश्विक कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं।ट्रंप का कूटनीतिक रुख: क्या अमेरिका करा पाएगा स्थायी युद्धविराम?डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा करते रहे हैं कि वे सत्ता में रहकर इस युद्ध को कुछ ही दिनों में बातचीत की मेज पर लाकर खत्म करा सकते हैं। उन्होंने बार-बार दोनों पक्षों को सैन्य सहायता और प्रतिबंधों के दबाव के जरिए समझौते के लिए बाध्य करने की वकालत की है। ट्रंप का मानना है कि बिना किसी ठोस समझौते के अरबों डॉलर के हथियारों की आपूर्ति केवल तबाही और मौतों को लंबा खींच रही है।हालांकि, युद्धविराम की राह इतनी आसान नहीं है। ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों को रोकने के लिए पिछले दिनों बने अस्थायी समझौतों पर भी संशय बना हुआ है। यूक्रेन का कहना है कि वह ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने को तभी तैयार होगा जब रूस उसके बिजली और नागरिक ढांचे पर हमले बंद करे। ऐसे नाजुक मोड़ पर ट्रंप की यह नई अपील अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जो यह तय करेगी कि आने वाले महीनों में शांति वार्ता का कोई ठोस रास्ता निकलता है या विनाश का यह सिलसिला आगे बढ़ता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 22 Sep 2026 3:58 pm

राफेल की ऐतिहासिक उड़ान: फ्रांस से 40,000 किमी का सफर तय कर भारत पहुंच रहे फाइटर जेट

भारतीय वायुसेना (IAF) की मारक क्षमता में एक बार फिर अभूतपूर्व इजाफा होने जा रहा है, क्योंकि वैश्विक रक्षा परिदृश्य में अपनी रणनीतिक ताकत का लोहा मनवाते हुए फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमानों का एक नया और शक्तिशाली जत्था अपनी लंबी उड़ान भरकर सीधे भारत की ओर बढ़ चला है। आधुनिक रक्षा कूटनीति और सामरिक क्षेत्र में इसे फ्रांस के अब तक के सबसे बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, जहां इन आधुनिक और मारक विमानों ने आसमान में अपनी अजय क्षमता का परिचय देते हुए एक ऐसा सफर तय किया है जो दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। भारतीय सीमाओं पर सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजामों और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमों के बीच यह खेप बेहद खास मानी जा रही है, क्योंकि इन विमानों ने लगभग 40,000 किलोमीटर की लंबी और चुनौतीपूर्ण दूरी तय करके सीधे भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होने के लिए भारत की सरजमीं की तरफ रुख किया है। इस साहसिक और लंबी दूरी की उड़ान ने एक बार फिर पूरी दुनिया का ध्यान भारत और फ्रांस के बीच मजबूत होते रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और आपसी विश्वास की तरफ आकर्षित किया है, जिससे देश के दुश्मनों की नींद उड़ना तय माना जा रहा है।आसमान की महाशक्ति: 40,000 किलोमीटर का यह सफर क्यों है इतना खास?जब बात आधुनिक सैन्य विमानों की लंबी और महा-उड़ानों की आती है, तो तकनीक, पायलटों की अद्भुत दक्षता और विमान की सहनशक्ति की सबसे कड़ी परीक्षा होती है। फ्रांस से उड़ान भरकर भारत की ओर आ रहे इन राफेल विमानों ने करीब 40,000 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया है, जो अपने आप में एक बहुत बड़ी रणनीतिक और तकनीकी उपलब्धि है। रास्ते में दुनिया के विभिन्न देशों के वायु क्षेत्रों, मौसम के भारी उतार-चढ़ाव, भौगोलिक बाधाओं और महासागरों को पार करते हुए इन विमानों ने जिस तरह से अपनी नॉन-स्टॉप और रीफ्यूलिंग क्षमताओं का परिचय दिया है, उसने यह साबित कर दिया है कि राफेल वर्तमान समय में दुनिया के सबसे भरोसेमंद और बेहतरीन फाइटर जेट्स में से एक हैं। इस महा-सफर के दौरान हवा में ही विमानों में ईंधन भरने की जटिल प्रक्रिया को बेहद सटीकता के साथ अंजाम दिया गया, जिसमें मित्र देशों के टैंकर विमानों ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह शक्ति प्रदर्शन केवल एक साधारण फेरबदल या डिलीवरी नहीं है, बल्कि यह इस बात का खुला और स्पष्ट ऐलान है कि भारतीय वायुसेना और फ्रांस के राफेल मिलकर किसी भी वैश्विक मोर्चे या विपरीत परिस्थिति में दुश्मन को नेस्तनाबूद करने की अचूक और अजेय क्षमता रखते हैं।भारतीय वायुसेना का बढ़ता दम: IAF के साथ मिलकर आसमान में दहाड़ेंगे राफेलभारतीय वायुसेना के बेड़े में इन अत्याधुनिक राफेल विमानों के शामिल होने से भारत की सामरिक स्थिति और स्ट्राइक पावर में जबरदस्त मजबूती आएगी। जब ये नए फाइटर जेट्स भारतीय वायुसेना की सीमा में प्रवेश करेंगे और पहले से मौजूद राफेल स्क्वाड्रन के साथ मिलकर आकाश में संयुक्त युद्धाभ्यास करेंगे, तो आसमान में एक अलग ही और खौफनाक गर्जना सुनाई देगी, जो देश के विरोधियों को स्पष्ट संदेश देगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन उन्नत विमानों के आने से भारत की सामरिक पकड़ और हमलावर क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। अत्याधुनिक और घातक मिसाइल प्रणालियों, उन्नत रडार जैमिंग सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमताओं से पूरी तरह लैस ये फाइटर जेट्स किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में दुश्मन के सबसे सुरक्षित ठिकानों को पलक झपकते ही धूल में मिलाने की ताकत रखते हैं। भारतीय वायुसेना के जांबाज पायलटों की बेहतरीन ट्रेनिंग और राफेल की अद्भुत मारक क्षमता का यह अनूठा संगम भारत के रक्षा क्षेत्र में आधुनिकता और शक्ति के नए आयाम गढ़ रहा है, जिससे पड़ोसी देशों की हर गुप्त और नापाक चाल पर पैनी नजर रखना और भी ज्यादा आसान हो जाएगा।भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी: रणनीतिक रिश्तों की नई और मजबूत इबारतफ्रांस और भारत के बीच रक्षा संबंधों और सामरिक साझेदारी का इतिहास हमेशा से ही भरोसेमंद, अटूट और समय की हर कसौटी पर खरा उतरने वाला रहा है, और राफेल विमानों का यह नया जत्था इसी गहरी दोस्ती का एक और जीवंत उदाहरण है। फ्रांस द्वारा अपनी सबसे उन्नत, गोपनीय और आधुनिक सैन्य तकनीक को भारत के साथ साझा करना और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद समय पर हथियारों की आपूर्ति सुनिश्चित करना दोनों देशों के बीच की गहरी रणनीतिक समझ को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के इस दौर में जहां भू-राजनीतिक समीकरण हर दिन तेजी से बदल रहे हैं, भारत और फ्रांस का यह मजबूत रक्षा गठजोड़ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने में एक मुख्य और निर्णायक भूमिका निभा रहा है। रक्षा जानकारों का कहना है कि इस शानदार शक्ति प्रदर्शन के जरिए फ्रांस ने दुनिया को यह कड़ा संदेश दे दिया है कि भारत उसका सबसे भरोसेमंद और रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक साझीदार है, जो आने वाले समय में रक्षा निर्माण, संयुक्त अनुसंधान और तकनीक हस्तांतरण के क्षेत्र में और भी नए मील के पत्थर स्थापित करने की पूरी क्षमता रखता है।सामरिक और रणनीतिक असर: दुश्मन देशों की बढ़ी चिंता और भारत की अजेय बढ़तजैसे-जैसे ये राफेल विमान अपनी अंतिम मंजिल के बेहद करीब पहुंच रहे हैं, वैसे-वैसे अंतरराष्ट्रीय रक्षा गलियारों और पड़ोसी देशों की राजधानियों में खलबली और चर्चाएं तेज हो गई हैं। भारत की सीमाओं पर लगातार बनी रणनीतिक चुनौतियों और संवेदनशीलता के बीच इस तरह की अजेय ताकत का जुड़ना भारतीय वायुसेना को क्षेत्रीय रूप से सबसे शक्तिशाली बल बनाता है। चीन और पाकिस्तान जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की सीमा से लगे संवेदनशील इलाकों में इन विमानों की रणनीतिक तैनाती से भारत की रक्षात्मक और आक्रामक दोनों क्षमताएं एक साथ मजबूत होंगी। यह शक्ति प्रदर्शन सिर्फ कुछ विमानों की डिलीवरी भर नहीं है, बल्कि यह भारत के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की उस मजबूत और अडिग इच्छाशक्ति का परिणाम है जिसके तहत देश की सेनाओं को दुनिया के सबसे आधुनिक और मारक हथियारों से लैस किया जा रहा है। आने वाले दिनों में जब ये विमान भारतीय वायुसेना के गौरवशाली रंगों में रंगकर देश के आसमान में अपनी पहली आधिकारिक और गरजती हुई उड़ान भरेंगे, तो यह हर भारतवासी के लिए गर्व का ऐतिहासिक पल होगा और देश के दुश्मनों के लिए एक बहुत बड़ी तथा स्पष्ट चेतावनी भी साबित होगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 22 Sep 2026 12:25 pm

भारत की बढ़ती ताकत को दुनिया ने माना, UNSC में स्थायी सीट के लिए यूरोप के 4 देश आए साथ

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में स्थायी सदस्य बनने की भारत की कोशिश काफी पुरानी है। भारत लगातार कहता रहा है कि आज की दुनिया बदल चुकी है, इसलिए सुरक्षा परिषद की व्यवस्था में भी बदलाव होना चाहिए। अब भारत की इस मांग को यूरोप के चार देशों का समर्थन मिला है। हंगरी, पोलैंड, […]

पांचजन्य 22 Sep 2026 11:28 am

UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता को यूरोप का समर्थन, V4 देशों ने बढ़ाया दबाव

UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग को स्लोवाकिया, पोलैंड, हंगरी और चेक रिपब्लिक का समर्थन मिला है। जानें भारत की दावेदारी और सुरक्षा परिषद में सुधार की पूरी कहानी।

देशबन्धु 22 Sep 2026 10:34 am

सूखे से शराब पर संकट! फ्रांस की वाइन इंडस्ट्री पर क्लाइमेट चेंज की मार, 70 साल में सबसे कम प्रोडक्शन

फ्रांस में जलवायु परिवर्तन की वजह से 2026 में वाइन उत्पादन 70 साल के निचले स्तर पर आ सकता है. भीषण गर्मी, सूखे और जल्दी पकते अंगूरों से इंडस्ट्री आर्थिक संकट का सामना कर रही है.

NDTV इंडिया 22 Sep 2026 7:29 am

'उभरती महाशक्ति' भारत को UNSC में मिले स्थायी सीट, 4 प्रमुख यूरोपीय देशों ने स्थायी सीट की दावेदारी का किया समर्थन

India Permanent UNSC Seat: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता की भारत की दावेदारी को यूरोप के चार प्रमुख देशों का समर्थन मिला है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के इतर भारत और विसेग्राद समूह (V4) के देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक में पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य ने भारत की स्थायी सदस्यता की मांग का समर्थन किया। बैठक के बाद स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने कहा कि चारों V4 देश भारत की दावेदारी पर एकमत हैं। उन्होंने भारत को ग्लोबल साउथ का हिस्सा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की 'उभरती महाशक्ति' बताते हुए कहा कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के तौर पर मेज पर होना चाहिए।ब्लानार का बयान ऐसे समय आया है जब भारत संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष निर्णय लेने वाले निकाय में अपनी भूमिका बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। V4 के चारों देशों का संयुक्त समर्थन भारत के लिए कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।भारत और V4 देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमतिविदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहली V4-भारत विदेश मंत्रियों की बैठक को एक ‘नया ऐतिहासिक अवसर’ बताया। बैठक में राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी, रक्षा और लोगों के बीच संपर्क सहित कई क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने पर सहमति बनी। भारत और V4 देशों ने विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठक आयोजित करने और एक वार्षिक बिजनेस फोरम शुरू करने का भी फैसला किया।जयशंकर ने कहा कि भारत और V4 देश तकनीक और इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर तलाशेंगे। साथ ही मौजूदा रक्षा सहयोग को भी आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा, रक्षा के क्षेत्र में सभी V4 देशों के साथ हमारा बहुत मजबूत इतिहास रहा है। हम उस रिकॉर्ड और सहयोग को फिर से मजबूत करते हुए आगे ले जाना चाहते हैं।टेक्नोलॉजी, रक्षा और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चाबैठक में अंतरिक्ष, कनेक्टिविटी, रिसर्च, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। लोगों के बीच संपर्क को भी अहम क्षेत्र माना गया। जयशंकर ने चारों देशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की मौजूदगी का उल्लेख किया। विदेश मंत्रियों ने यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति समेत प्रमुख अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया।ये भी पढ़ें- Weather Forecast: 30 सितंबर तक जारी रहेगा बरसात का दौर! इन राज्यों में होगी आफत की बारिश, जानें- दिल्ली और यूपी समेत पूरे देश का हालजयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि भारत और V4 देशों ने राजनीतिक सहयोग बढ़ाने, आर्थिक संबंधों को गहरा करने तथा टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, रिसर्च और शिक्षा में साझेदारी मजबूत करने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष रक्षा सहयोग को फिर से मजबूत करने, सांस्कृतिक और जन से जन संबंधों का विस्तार करने तथा बहुपक्षवाद (Multilateralism) को समर्थन देने के लिए मिलकर काम करेंगे।

ज़ी न्यूज़ 22 Sep 2026 7:25 am

राजस्थान में वायुसेना अभ्यास 'तरंग शक्ति' में दिखेगा भारत का एयरपावर, अमेरिका-फ्रांस समेत 40 देश लेंगे हिस्सा

बहुदेशीय वायुसैनिक अभ्यास तरंग शक्ति का दूसरा संस्करण 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक राजस्थान के जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पर आयोजित होगा। इसमें अमेरिका और फ्रांस सहित 40 से अधिक देश अपने प्रमुख युद्धक विमानों के साथ हिस्सा लेंगे।

जागरण 22 Sep 2026 6:33 am

'भारत बनने वाला है सुपरपावर', UNSC में स्थायी सदस्यता के समर्थन में उतरे यूरोप के कई देश

वी-4 देशों ने भारत की संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता की वकालत की है और कहा है कि भारत इसके योग्य है। इन देशों में चेक रिपब्लिक, स्लोवाकिया, हंगरी और पोलैंड शामिल है। भारत 1994 से स्थायी सदस्यता का दावा ठोक रहा है।

लाइव हिन्दुस्तान 22 Sep 2026 5:23 am

अमेरिका में H-1B की सख्ती का असर: भारतीय पेशेवर यूरोप-एशिया की ओर मुड़े, स्वदेश लौटने का भी विकल्प

अमेरिका में H-1B की सख्ती का असर: भारतीय पेशेवर यूरोप-एशिया की ओर मुड़े, स्वदेश लौटने का भी विकल्प

अमर उजाला 22 Sep 2026 4:47 am

50 साल पीछे पहुंची भारत की बर्थ रेट, 2023 में पैदा हुए 2.32 करोड़ बच्चे; UP-बिहार को छोड़ TFR यूरोप जैसा

भारत में जन्म दर 50 साल पहले के स्तर पर पहुंच गई है, 2023 में 2.32 करोड़ बच्चे पैदा हुए, जो 2001 से 20% कम है।

जागरण 21 Sep 2026 11:36 pm

यूरोपीय संघ के नियामक की गूगल पर बड़ी कार्रवाई, लोकेशन डेटा के दुरुपयोग को लेकर लगाया 403 मिलियन यूरो का जुर्माना

New Delhi, 21 सितंबर . आयरलैंड के डेटा संरक्षण आयोग (डीपीसी) ने Monday को गूगल पर 403 मिलियन यूरो (करीब 4,000 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगाया और कंपनी को छह महीने के भीतर अपनी लोकेशन डेटा प्रोसेसिंग प्रणाली को नियमों के अनुरूप बनाने का निर्देश दिया. यह मामला गूगल की ‘लोकेशन हिस्ट्री’ सेवा और संबंधित ... Read more

डेली किरण 21 Sep 2026 5:28 pm

राशन इकट्ठा कर लो...यूरोप में क्या बड़ा होने वाला है! ब्रिटेन-फ्रांस अचानक क्यों करने लगे ये अपील?

क्या यूरोप एक बहुत बड़े महायुद्ध के मुहाने पर आकर खड़ा हो गया है? क्या तीसरे विश्वयुद्ध की आहट अब इतनी करीब आ चुकी है कि सरकारों ने अपने नागरिकों से सीधे तौर पर राशन और पानी जमा करने को कह दिया है? ये कोई अफवाह नहीं, बल्कि इस वक्त पूरे यूरोप की जमीनी हकीकत बन चुकी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों खुले तौर पर कह रहे हैं कि यह वक्त बेहद मुश्किल है और सबको एक साथ खड़ा होना होगा। ब्रिटेन से लेकर फ्रांस तक, यूरोप के तमाम मुल्कों में जनता को बाकायदा हिदायत दी जा रही है कि घरों में राशन, सूखा खाना, पीने का पानी और ईंधन स्टॉक करना शुरू कर दें। यूरोप का शायद ही कोई ऐसा अखबार बचा हो जिसकी हेडलाइन में यह खौफ साफ न छलक रहा हो। दूसरी तरफ नजर डालेंगे तो अमेरिका लगभग ग्रीनलैंड की सुरक्षा का पूरा जिम्मा अपने हाथ में ले चुका है और साफ कह दिया है कि अब इस पूरे इलाके की रक्षा अमेरिकी बूट्स करेंगे। लेकिन इन सब के बीच सबसे बड़ा सवाल कि आखिर रूस की तरफ से यूरोप की खुफिया एजेंसियों को ऐसे कौन से इनपुट्स मिले हैं, जिसने पूरे महाद्वीप को हिलाकर रख दिया है? क्यों यूरोपीय राजधानियों में बंकरों की धूल झाड़ी जा रही है और सेनाओं को स्टैंडबाय पर रहने का फरमान जारी हो चुका है? क्या मॉस्को से कोई ऐसा बड़ा तूफान उठने वाला है जो पूरे यूरोप को अपनी जद में ले लेगा? आज इसी का एमआरआई स्कैन करते हैं। इसे भी पढ़ें: Congress का Election Commission पर हमला, SIR प्रक्रिया को बताया मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश 1600 ड्रोंस से रूस पर अटैक यूक्रेन ने 20 सितंबर को यहां कई ड्रोन हमले किए हैं। आप इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि रशिया ने दावा किया है कि यूक्रेन की तरफ से आने वाले 1600 ड्रोंस को उसने इंटरसेप्ट किया है और वीडियो से भी इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस हमले में दो लोगों की मौत हुई है। यूक्रेन ने रशिया की राजधानी मॉस्को की एक ऑयल रिफाइनरी और सेना के लॉजिस्टिक ठिकाने को टारगेट किया। कई इमारतों को इसमें नुकसान भी पहुंचा है। यह हमला ऐसे समय में हुआ जब रूस में संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग चल रही थी। वोटिंग का अंतिम दिन था। लोअर हाउस जो संसद है रूस का उसके लोअर हाउस के लिए यह वोटिंग थी। यूक्रेनी राष्ट्रपति वडदमीर जेलस्की ने खुद हमले की जानकारी दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर लिखा, हमने रूस की ऑयल रिफाइनरी और सेना के लॉजिस्टिक ठिकाने को टारगेट किया। यह वही अरबों डॉलर का तंत्र है जहां रूस अपने डिफेंस का सामान तैयार करता है। जेलस्की ने यह भी बताया हमले में यूक्रेन ने क्या-क्या इस्तेमाल किया है। इसे भी पढ़ें: Shafali Verma के शतक से Asian Games सेमीफाइनल में India ने बनाए 195 रन चुनाव के अंतिम दिन क्यों हुआ हमला यूक्रेन ने हमले के लिए ठीक ऐसा वक्त चुना जब व्लादमीर पुतिन के 26 साल के एक छत्रराज को नई ताकत देने के लिए वोट डाले जा रहे थे। ठीक उसी वक्त जेलस्की के ड्रोन ब्रिगेड ने ऑपरेशन मॉस्को को अंजाम दे दिया। रूसी अधिकारियों के मुताबिक ड्रोन हमलों में तीन लोगों की जान चली गई जबकि 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मतलब साफ है कि यह सिर्फ आसमान में उड़ते हुए यूक्रेन के ड्रोंस नहीं थे बल्कि रूस के दिल माने जाने वाले क्रिमिया पर यूक्रेन का लॉन्ग रेंज अटैक था। मॉस्को के आसमान में जिस तरह से एक के बाद एक धमाके हुए उससे रूस की एयर डिफेंस क्षमता पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। क्योंकि यूक्रेन के हमलों का निशाना बना है मॉस्को का सबसे बड़ा ऑयल रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स जो धमाकों के बाद पूरी तरह से स्वाहा हो गया है। यूक्रेन पिछले कई महीनों से रूस के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है। क्योंकि तेल और गैस से होने वाली कमाई रूस की युद्ध मशीन के लिए बेहद अहम मानी जाती है। ऐसे में रूसी तेल रिफाइनिंग क्षमता पर यूक्रेनी हमलों से रूसी ईंधन की सप्लाई और कीमतों पर भी असर पड़ना तय है। उधर मॉस्को में 21 मंजिला एक रिहााइशी इमारत में ड्रोन टकराने से भीषण आग लग गई। इस बीच यूक्रेन के इस सबसे बड़े ड्रोन अटैक पर बड़ा सवाल यह उठने लगा है कि आखिर चुनाव के अंतिम दिन मॉस्को पर इतना बड़ा हमला क्यों किया गया? इसके जवाब में मॉस्को के मेयर सरगई सोबियानिन ने बताया कि यूक्रेन के हमले का सीधा मकसद रूसी संसदीय चुनाव में खलल डालना था। NATO के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ने की तैयारी में पुतिन रूसी भाषा में बोलते व्लादिमीर पुतिन का एक बयान सामने आया है। जिसमें वो कह रहे हैं कि नाटो हमारी तरफ एक्सपेंड करने की कोशिश कर रहा है। नए-नए इलाके में घुसने कोशिश कर रहा है। अब हमने फैसला किया है कि उनके खिलाफ अब निर्णायक जंग छेड़ दिया जाए। अब हुआ यह कि जैसे ही एक तो रूस के राष्ट्रपति ने कह दिया कि मारेंगे जरूर चाहे जो हो जाए और ऊपर से वहां राशन पानी इकट्ठा करने की बात हो ही गई। सारे यूरोप वाले कह रहे हैं कि हमारी रक्षा तो अमेरिका करता था। तो अमेरिका बचाएगा कि नहीं हमें? डोनाल्ड ट्रंप अलग ही मूड में नजर आ रहे हैं। उन्होंने अनाउंस किया कि हम यूक्रेन में अपने सैनिक तैनात है वापस ले रहे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने कहा है कि गल्फ नेशन में जो अमेरिकन सैनिक हैं हम ईरान के हाथों मरने नहीं दे सकते। उसको भी वापस ले लेंगे। क्या नाटो की सीमा पर बड़ा धमाका होने वाला है यूरोपीय खुफिया एजेंसियों की तरफ से आई एक ताजा और बेहद सनसनीखेज रिपोर्ट ने पूरे पश्चिमी खेमे में खलबली मचा दी है। खुफिया अधिकारियों का दावा है कि रूस बहुत जल्द नाटो की ताकत और उसकी एकजुटता की परीक्षा ले सकता है, और यह संभावित हमला सालों में नहीं, बल्कि कुछ ही महीनों के भीतर देखने को मिल सकता है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने अपनी संसद में साफ लफ्जों में चेतावनी दी है कि मॉस्को आने वाले महीनों में ड्रोन या मिसाइलों के जरिए नाटो की जमीन को निशाना बना सकता है। टस्क के मुताबिक, पुतिन का सीधा मकसद यह साबित करना है कि नाटो का सबसे ताकतवर सुरक्षा कवच यानी आर्टिकल 5, जमीन पर सिर्फ एक किताबी थ्योरी है, हकीकत नहीं। इस चेतावनी की गंभीरता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने टस्क के इन दावों को बेहद सटीक और पुख्ता सबूतों पर आधारित बताया है। हालात इतने नाजुक हो चुके हैं कि मैक्रों ने पेरिस में तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं और राष्ट्रपति पद के दावेदारों की एक आपातकालीन बैठक तलब कर ली, जहां रूस के इस बढ़ते खतरे पर बंद कमरों में रणनीति तैयार की जा रही है। यह चिंता तब बढ़ रही है जब इस हफ़्ते के आखिर में न्यूयॉर्क में UN जनरल असेंबली की बैठक होने वाली है और साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध में दोनों तरफ़ से हवाई हमले तेज़ हो गए हैं। रविवार तड़के कीव ने मॉस्को और रूस के दूसरे इलाकों पर सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलें दागीं। यह इस युद्ध के दौरान किए गए सबसे बड़े हवाई हमलों में से एक था। द गार्जियन को दिए गए अलग-अलग साक्षात्कारों में पश्चिमी खुफिया प्रमुखों ने पुतिन के अगले खतरनाक कदम का जो खाका खींचा है, उसने नाटो मुख्यालय से लेकर तमाम यूरोपीय देशों की नींद उड़ा दी है। चेक गणराज्य की सुरक्षा सेवा 'बीआईएस' के प्रमुख माइकल कोउडेल्का ने प्राग स्थित अपने मुख्यालय में एक दुर्लभ इंटरव्यू के दौरान बेहद सनसनीखेज अंदेशा जताया है। कोउडेल्का के मुताबिक, केवल ड्रोन और मिसाइल स्ट्राइक ही नहीं, बल्कि रूस से सटी नाटो सीमा पर रूसी सेना की एक सीमित जमीनी घुसपैठ यानी 'स्मॉल-स्केल इनवेजन' भी क्रेमलिन के प्लान का सीधा हिस्सा हो सकता है। माइकल कोउडेल्का ने चेताते हुए साफ कहा यह पूरी तरह मुमकिन है। रूस की योजना में एक सीमित सैन्य घुसपैठ, फॉल्स-फ्लैग उकसावे वाली साजिशें और नाटो देशों के भीतर एक बड़े पैमाने का इनफ्लुएंस कैंपेन शामिल हो सकता है। और यह खतरा सालों दूर नहीं, बल्कि महज कुछ महीनों के भीतर हकीकत का रूप ले सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि पश्चिमी सुरक्षा एजेंसियां दिन-रात एक कर रही हैं ताकि हालात इस खौफनाक स्तर तक न पहुँचें। क्या अमेरिका की रणनीतिक चूक से बिगड़े हालात! यह लड़ाई अब तेजी से फैलती दिख रही है। अमेरिका को अपने नागरिकों के लिए अलर्ट जारी करना पड़ा है, डोनल्ड ट्रंप छुट्टी खत्म होने से पहले ही वापस लौट आए। वॉशिंगटन इन हालात से पूरी तरह पल्ला नहीं झाड़ सकता है। ईरान पर हमले से लेकर उसके साथ हुए अंतरिम समझौते को तोड़ने तक, कई मौकों पर गंभीर चूक हुई है। ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन यह आकलन करने में बुरी तरह नाकाम रहा कि संघर्ष किस हद तक जा सकता है। उसने पश्चिम एशिया में अपने सहयोगियों की चिंताओं को भी नजरअंदाज किया और हूतियों का बढ़ता खतरा उसी का नतीजा है।अमेरिकी राष्ट्रपति ने पिछले हफ्ते कहा था कि मास्को और कीव एक-दूसरे के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने के लिए सहमत हुए हैं। पिछले दिनों जब उनकी स्पेशल टीम ने दोनों देशों का दौरा किया था, तब उसे भी इस बात के रूप में प्रचारित किया गया कि अमेरिका अब वास्तविक बातचीत चाहता है । पर रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों वाले नए बिल और इन ताजा हमलों ने सारी कोशिशों को पीछे धकेल दिया है।

प्रभासाक्षी 21 Sep 2026 2:06 pm

जॉर्जिया मेलोनी का नया दांव: इटली के स्कूलों में बुर्का और नकाब बैन करने की तैयारी, विदेशी छात्रों के कोटे का भी प्रस्ताव, यूरोप के कई देशों में पहले से रोक

इटली भी यूरोप के उन देशों की फेहरिस्त में शुमार होने को तैयार है जहां बुर्के पर बैन है। देश की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही सरकार प्रत्येक कक्षा में विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने और देश की संस्कृति को सीखने या समझने में समस्या का सामना कर रहे विदेशी छात्रों के अभिभावकों के लिए इतालवी भाषा सीखना अनिवार्य करने की योजना बना रही है।

देशबन्धु 21 Sep 2026 12:25 pm

मेलोनी का बुर्का-नकाब पर बैन प्लान, यूरोप के कई देशों में पहले से रोक

रोम, 21 सितंबर . इटली भी यूरोप के उन देशों की फेहरिस्त में शुमार होने को तैयार है जहां बुर्के पर बैन है. देश की Prime Minister जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी की घोषणा कर दी है. इसके साथ ही Government प्रत्येक कक्षा में विदेशी छात्रों की ... Read more

डेली किरण 21 Sep 2026 11:58 am

Trump Zelensky Meeting: न्यूयॉर्क में ट्रंप-जेलेंस्की की होगी मुलाकात, रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच बढ़ी कूटनीतिक हलचल

Trump Zelensky Meeting: न्यूयॉर्क में ट्रंप-जेलेंस्की की होगी मुलाकात, रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच बढ़ी कूटनीतिक हलचल

समाचार नामा 21 Sep 2026 9:10 am

जेलेंस्की और ट्रंप की न्यूयॉर्क में मुलाकात तय, रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने पर होगी चर्चा

जेलेंस्की और ट्रंप की न्यूयॉर्क में मुलाकात तय, रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने पर होगी चर्चा

समाचार नामा 21 Sep 2026 8:30 am

कनाडा का यूरोप की ओर बढ़ा कदम: मैक्रों ने ईयू का सहयोगी सदस्य बनाने का किया समर्थन, कार्नी से की मुलाकात

कनाडा का यूरोप की ओर बढ़ा कदम: मैक्रों ने ईयू का सहयोगी सदस्य बनाने का किया समर्थन, कार्नी से की मुलाकात Canada moves closer to Europe: Macron backs associate EU membership, meets Carney.

अमर उजाला 21 Sep 2026 7:49 am

'मैं किसी को भी हरा सकता हूं', सीडब्ल्यूजी 2026 में 'गोल्डन पंच', अब यूरोपियन चैंपियनशिप में आइजैक को दमदार प्रदर्शन का भरोसा

नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। इंग्लैंड के कॉमनवेल्थ गेम्स स्वर्ण पदक विजेता मुक्केबाज आइजैक ओकोह इस साल के शानदार प्रदर्शन के दम पर आत्मविश्वास से भरपूर हैं। अब उनकी नजरें यूरोपीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने पर टिकी हैं।

समाचार नामा 19 Sep 2026 8:20 pm

रूसी हमले के खौफ में यूरोप: मेडिकल बंकर एक्टिव, हेल्थ बजट में कटौती और NATO 3.0 की महातैयारी

यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे भीषण संघर्ष के बीच पूरे यूरोपीय महाद्वीप में सीधे सैन्य टकराव की आशंका गहराने लगी है। हालात इस कदर तनावपूर्ण हो चुके हैं कि अब केवल सीमाओं पर हथियारों की तैनाती तक ही तैयारी सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन से जुड़े स्वास्थ्य बजट में कटौती करने से लेकर दशकों पुराने भूमिगत मेडिकल बंकरों को दोबारा सक्रिय करने जैसे असाधारण कदम उठाए जा रहे हैं। डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) के सभी 32 सदस्य देशों के रक्षा प्रमुखों का दो दिवसीय आपातकालीन महामंथन शुरू हो चुका है। इस उच्चस्तरीय सम्मेलन की कमान इटली के वरिष्ठ नौसेना अधिकारी एडमिरल ज्यूसेप कावो द्रागोने के हाथों में है। बैठक का एकमात्र और सबसे बड़ा एजेंडा यह है कि अगर रूस के साथ किसी भी समय सीधा युद्ध छिड़ता है, तो पूरा यूरोप एक संयुक्त मोर्चे के तौर पर किस प्रकार अपनी रक्षा करेगा, सैन्य तकनीकों में त्वरित निवेश कैसे सुनिश्चित किया जाएगा और यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के कैसे जारी रखी जाएगी।क्या है 'नाटो 3.0': अमेरिकी सुरक्षा छतरी से निकलकर यूरोप की नई रणनीतिक दिशाअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बार-बार यूरोप को अपनी सुरक्षा का वित्तीय बोझ स्वयं उठाने की दो-टूक चेतावनी दिए जाने के बाद इस सैन्य गठबंधन ने अपनी संपूर्ण रणनीतिक दिशा में व्यापक बदलाव किया है। पश्चिमी रक्षा हलकों में इस बड़े नीतिगत बदलाव को 'नाटो 3.0' (NATO 3.0) का नाम दिया जा रहा है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, नाटो के कुल सामूहिक सैन्य खर्च का 57 प्रतिशत भारी-भरकम हिस्सा अकेले संयुक्त राज्य अमेरिका वहन करता आ रहा है। इस अत्यधिक निर्भरता के कारण वॉशिंगटन पर हमेशा अतिरिक्त आर्थिक और सामरिक दबाव बना रहता था।अब नाटो 3.0 के नए ढांचे के तहत यूरोपीय देशों को अपनी सीमाओं और हवाई क्षेत्र की सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी खुद अपने कंधों पर उठानी होगी। अमेरिका का मुख्य सामरिक फोकस अब हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में केंद्रित हो रहा है, जहां उसे चीन की बढ़ती आर्थिक और नौसैनिक चुनौतियों से निपटना है। हालांकि, नए शक्ति संतुलन के बावजूद यूरोप में नाटो का सर्वोच्च सैन्य कमांडर (Supreme Allied Commander) हमेशा की तरह एक अमेरिकी जनरल ही रहेगा। इसके साथ ही ब्रिटेन और फ्रांस के स्वतंत्र परमाणु हथियारों के जखीरे (Nuclear Deterrence) पहले की तरह ही यूरोप की सुरक्षा गारंटी के प्रमुख आधार बने रहेंगे।2035 तक जीडीपी का 5 प्रतिशत रक्षा पर खर्च: वेलफेयर बजट में कटौती का कड़वा फैसलानाटो के सदस्य देशों ने भविष्य के खतरों को भांपते हुए साल 2035 तक अपनी कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 5 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर राष्ट्रीय रक्षा और आंतरिक सुरक्षा पर खर्च करने का ऐतिहासिक और कड़ा लक्ष्य तय किया है। वित्तीय खाके के तहत, इस 5 प्रतिशत में से 3.5 प्रतिशत हिस्सा आधुनिक लड़ाकू हथियारों, मिसाइल प्रणालियों और गोला-बारूद की प्रत्यक्ष खरीद पर लगाया जाएगा, जबकि शेष 1.5 प्रतिशत आवंटन विशेष सुरक्षा बुनियादी ढांचे, सुरक्षित संचार लाइनों और लॉजिस्टिक्स के निर्माण के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।इस विशाल रक्षा बजट को पूरा करने के लिए यूरोपीय देशों को अपने घरेलू बजट में अत्यंत अप्रिय और कठोर आर्थिक फैसले लेने पड़ रहे हैं। नीदरलैंड्स जैसे विकसित और कल्याणकारी देश ने अपने राष्ट्रीय स्वास्थ्य बजट और सामाजिक कल्याण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं में भारी कटौती करने का आधिकारिक प्रस्ताव रखा है। इसके अतिरिक्त, रक्षा जरूरतों की पूर्ति के लिए नए टैक्स लगाकर सालाना 54 हजार करोड़ रुपये (लगभग 6.5 अरब डॉलर) से अधिक का अतिरिक्त राजस्व जुटाने की ठोस योजना बनाई जा रही है, जिससे नागरिकों को मिलने वाली रियायतों पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।जर्मनी से ब्रिटेन तक युद्ध स्तर पर तैयारियां: कोल्ड वॉर के बंकर और नई हथियार फैक्ट्रियांरूस के साथ भविष्य में संभावित महायुद्ध की आहट को देखते हुए प्रमुख यूरोपीय शक्तियों ने जमीनी स्तर पर अपनी नागरिक सुरक्षा और रक्षा उत्पादन प्रणाली को युद्ध स्तर पर ढालना शुरू कर दिया है:जर्मनी की बंकर रणनीति: शीतयुद्ध के दौर में साल 1979 में बनाए गए और बाद में पूरी तरह ठप पड़े भूमिगत मेडिकल बंकरों को जर्मनी अब तेजी से खाली करवाकर अत्याधुनिक जीवन रक्षक प्रणालियों के साथ फिर से चालू कर रहा है, ताकि आपातकालीन स्थिति में बड़े पैमाने पर हताहतों का इलाज किया जा सके।ब्रिटेन का मिसाइल और एम्युनिशन मिशन: यूनाइटेड किंगडम ने अपने रक्षा उत्पादन को अभूतपूर्व गति देने के लिए गोला-बारूद और उच्च क्षमता वाले विस्फोटक बनाने की छह बिल्कुल नई फैक्ट्रियां स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही ब्रिटिश सेना अपनी मारक क्षमता बढ़ाने के लिए घरेलू स्तर पर निर्मित 7,000 लंबी दूरी के अत्याधुनिक मिसाइल और रॉकेट हथियार खरीदने जा रही है।पोलैंड का नागरिक सैन्य प्रशिक्षण मॉडल: रूस के सबसे नजदीकी पड़ोसियों में शामिल पोलैंड ने साल 2027 से हर साल 1 लाख आम नागरिकों को गहन सैन्य प्रशिक्षण देने का अनिवार्य कार्यक्रम तैयार किया है, जिसके तहत 5 लाख प्रशिक्षित नागरिकों की एक विशाल रिजर्व सेना खड़ी की जाएगी।लिथुआनिया और स्वीडन की नागरिक चौकसी: बाल्टिक राष्ट्र लिथुआनिया ने 5,000 युवाओं को अनिवार्य सैन्य सेवा के तहत सीधे सेना में तलब करना शुरू कर दिया है। वहीं, हाल ही में नाटो का सदस्य बने स्वीडन ने अपने सभी नागरिकों को आधिकारिक एडवाइजरी जारी कर युद्ध या किसी भी बड़े संकट की स्थिति में कम से कम 7 दिनों तक बिना किसी सरकारी मदद के जिंदा रहने के लिए राशन, पानी और दवाओं का स्टॉक पहले से तैयार रखने का निर्देश दिया है।अमेरिकी हथियारों पर 90% से अधिक की निर्भरता: यूरोप के सामने आत्मनिर्भरता की बड़ी चुनौतीयूरोपीय देशों की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि उनकी सेनाएं पूरी तरह से अमेरिकी हथियार निर्माण कंपनियों पर निर्भर हैं। रक्षा आंकड़ों के अनुसार, 2016-20 की तुलना में पिछले कुछ वर्षों के भीतर यूरोप के हथियार आयात में 143 प्रतिशत का चौंकाने वाला उछाल दर्ज किया गया है। वर्तमान समय में नॉर्वे और इटली जैसे प्रमुख देश अपनी कुल सैन्य जरूरतों के 93 प्रतिशत हथियार केवल अमेरिका से खरीदते हैं।इसके अलावा नीदरलैंड्स अपनी 89 प्रतिशत, ब्रिटेन 85 प्रतिशत और डेनमार्क 82 प्रतिशत हथियार आवश्यकताओं के लिए पेंटागन और अमेरिकी रक्षा ठेकेदारों पर आश्रित हैं। इस भारी निर्भरता ने संकट के समय यूरोप की स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यही मुख्य कारण है कि नाटो के यूरोपीय सदस्य अब अमेरिकी हथियारों के विकल्प के रूप में अपनी घरेलू हथियार फैक्ट्रियों, संयुक्त लड़ाकू विमान परियोजनाओं और स्वदेशी मिसाइल रक्षा प्रणालियों को मजबूत कर रणनीतिक आत्मनिर्भरता हासिल करने की होड़ में जुट गए हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 19 Sep 2026 5:40 pm

Bridgerton फेम Phoebe Dynevor ने की शादी! प्रोड्यूसर कैमरून फुलर संग फ्रांस में रचाई ड्रीम वेडिंग, शेयर कीं खूबसूरत तस्वीरें

नेटफ्लिक्स की बहुचर्चित और सुपरहिट वेब सीरीज़ 'ब्रिजर्टन' (Bridgerton) में 'डैफने ब्रिजर्टन' का मुख्य किरदार निभाकर दुनिया भर में घर-घर पहचान बनाने वाली ब्रिटिश एक्ट्रेस फीबी डायनेवर (Phoebe Dynevor) शादी के बंधन में बंध गई हैं। फीबी ने अपने लॉन्ग-टाइम बॉयफ्रेंड और हॉलीवुड फिल्म प्रोड्यूसर कैमरून फुलर (Cameron Fuller) के साथ फ्रांस के बेहद खूबसूरत माहौल में एक प्राइवेट सेरेमनी में सात फेरे लिए। हाल ही में एक्ट्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर शादी की खूबसूरत और ब्लैक-एंड-व्हाइट तस्वीरें शेयर कर फैंस को इस खुशखबरी की पहली झलक दिखाई है। इंस्टाग्राम पर अपनी प्राइवेट शादी की तस्वीरें शेयर करते हुए डायनेवर ने लिखा, अपने सबसे अच्छे दोस्त से शादी की... धन्यवाद। इस जोड़े ने 5 सितंबर, 2026 को फ्रांस के प्रोवेंस के ग्रामीण इलाके में स्थित 18वीं सदी की एक खूबसूरत एस्टेट, 'ले मास डेस पोइरियर्स' में शादी की कसमें खाईं। इस मौके के लिए डायनेवर ने खास तौर पर तैयार किया गया लुई वुइटन ब्राइडल गाउन पहना था। उन्होंने एक पोस्ट में फ़ैशन हाउस और इवेंट ऑर्गनाइज़र को टैग किया, जिसमें सजावट, पहनावे और करीबी परिवार और दोस्तों के साथ बिताए गए खूबसूरत फ़्रेंच माहौल की झलक दिखी। मई 2024 में अपनी सगाई की घोषणा करने वाला यह जोड़ा कथित तौर पर 2023 की शुरुआत से एक-दूसरे को डेट कर रहा था। इसे भी पढ़ें: Golmaal 5 Release Date: हंसी का महा-हंगामा! रोहित शेट्टी और अजय देवगन की 'गोलमाल 5' की आधिकारिक रिलीज़ डेट का ऐलान डायनेवर को 2020 में 'ब्रिजर्टन' के पहले सीज़न में मुख्य भूमिका निभाने से अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली। इसमें उन्होंने रेजिेंसी-युग के लंदन के कॉम्पिटिटिव मैरिज मार्केट में ब्रिजर्टन परिवार की सबसे बड़ी बेटी का किरदार निभाया था, जिसमें उनके साथ रेगे-जीन पेज भी थे। इस भूमिका के लिए उन्हें 'ड्रामा सीरीज़ में कलाकारों की टुकड़ी द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन' के लिए स्क्रीन एक्टर्स गिल्ड अवार्ड के लिए नॉमिनेशन मिला। इसके बाद उन्होंने 2022 में दूसरे सीज़न में भी सहायक भूमिका में यह किरदार निभाया। जनवरी 2023 में, डायनेवर ने पुष्टि की कि वह तीसरे सीज़न में नज़र नहीं आएंगी, हालांकि उन्होंने भविष्य की संभावित कहानियों के लिए वापसी करने की इच्छा भी जताई। टेलीविज़न के अलावा, डायनेवर ने 'द कलर रूम' (2021) से फ़िल्मों में डेब्यू किया और 'बैंक ऑफ़ डेव' (2023) में काम किया। उन्हें थ्रिलर फ़िल्म 'फेयर प्ले' (2023) में मुख्य भूमिका के लिए तारीफ़ मिली और उन्होंने 'इनहेरिटेंस' (2025) और 'एनीवर्सरी' (2025) जैसी फ़िल्मों में भी काम किया। इसे भी पढ़ें: Bigg Boss 20 Updates: बिग बॉस के फैसले से भड़कीं अम्रपाली दुबे, बोलीं- टीवी सितारों के लिए सब कुछ क्यों? वहीं, हॉलीवुड प्रोड्यूसर ब्रैड फुलर के बेटे फुलर फ़िल्म प्रोडक्शन में काम कर रहे हैं। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपने हाई-प्रोफाइल करियर के बावजूद, 2023 की शुरुआत में पहली बार साथ देखे जाने के बाद से इस कपल ने अपनी पर्सनल लाइफ़ को काफ़ी हद तक लाइमलाइट से दूर रखा है। Entertainment News Hindi Today only at Prabhasakshi View this post on Instagram A post shared by PD (@phoebedynevor)

प्रभासाक्षी 19 Sep 2026 4:28 pm

फ्रांस में स्मार्ट चश्मे से महिलाओं की रिकॉर्डिंग पर जांच:बिना इजाजत वीडियो सोशल मीडिया पर डाले; पिछले साल मेटा के 70 लाख चश्मे बिके

फ्रांस में स्मार्ट चश्मों से महिलाओं के बिना अनुमति वीडियो बनाने के मामलों की जांच शुरू हुई है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग सड़क पर महिलाओं के वीडियो बनाकर उन्हें इंटरनेट पर डाल रहे थे। इसी को लेकर यौन उत्पीड़न की शिकायतें मिली हैं। इन चश्मों में छोटा कैमरा लगा होता है। इन्हें पहनने वाला बिना मोबाइल निकाले वीडियो बना सकता है। यही वजह है कि इनके गलत इस्तेमाल को लेकर दुनिया के कई देशों में चिंता बढ़ रही है। इन स्मार्ट चश्मों में मेटा के चश्मे सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। मेटा ने ये चश्मे, चश्मा बनाने वाली कंपनी एस्सिलोरलक्सोटिका के साथ मिलकर बनाए हैं। पिछले साल इनके करीब 70 लाख चश्मे बिके थे। फ्रांस में निजी वीडियो बनाने पर एक साल तक जेल का नियम रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस पुलिस ने बताया कि इस मामले में एक आपराधिक जांच शुरू की गई है। हालांकि, पुलिस ने यह नहीं बताया कि महिलाओं के वीडियो बनाने के लिए किस कंपनी के चश्मे का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने दो हफ्ते पहले इन चश्मों को खुद इस्तेमाल करके देखा। पुलिस यह पता करना चाहती थी कि इनसे किस तरह के गलत काम किए जा सकते हैं। फ्रांस में किसी व्यक्ति की निजी जगह पर बिना अनुमति उसकी तस्वीर या वीडियो बनाने पर एक साल तक जेल और 45 हजार यूरो तक जुर्माने का प्रावधान है। महिलाओं को ज्यादा निशाना बनाए जाने की चिंता मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, स्मार्ट चश्मों के गलत इस्तेमाल में महिलाओं को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली इनेस गिरार्द ने कहा कि इसका समाधान यह नहीं हो सकता कि जिस व्यक्ति की रिकॉर्डिंग हो रही है, उसी से कहा जाए कि वह ज्यादा सावधान रहे। उनका कहना है कि स्मार्ट चश्मे बनाने वाली कंपनियों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी तकनीक का इस्तेमाल लोगों को परेशान करने या उनकी निजता भंग करने के लिए न हो। दूसरे देशों में भी स्मार्ट चश्मों पर सवाल जर्मनी: मेटा और स्मार्ट चश्मे से जुड़ी कई कंपनियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की गई है। अमेरिका: एक व्यक्ति ने हिरासत केंद्र के अंदर लोगों के वीडियो चुपके से रिकॉर्ड किया था। इसके बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने इसे लेकर चिंता जताई। ब्रिटेन: इंग्लैंड और वेल्स की अदालतों में मेटा के कैमरा वाले स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर रोक है। कुछ सिनेमाघरों ने भी पाइरेसी के डर से इनके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया है। नॉर्वे: छात्रों की प्राइवेसी को लेकर स्कूलों में स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है ऑस्ट्रेलिया: सरकार सरकारी दफ्तरों में कैमरे वाले स्मार्ट चश्मों पर रोक लगाने पर विचार कर रही है। अमेजन डिलीवरी में भी इस्तेमाल कर रही स्मार्ट चश्मों का इस्तेमाल सिर्फ वीडियो बनाने के लिए नहीं हो रहा है। अमेजन डिलीवरी के काम में भी ऐसे चश्मों का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है। कंपनी ऐसे चश्मे बना रही है, जिनसे डिलीवरी कर्मचारी बिना मोबाइल निकाले पैकेज स्कैन कर सकेंगे, रास्ता देख सकेंगे और सामान पहुंचाने के बाद उसकी तस्वीर ले सकेंगे। रास्ते में कुत्ता या कोई दूसरी रुकावट होने पर चश्मा अलर्ट भी दे सकता है। अमेजन ने इन चश्मों को डिलीवरी कर्मचारियों के साथ टेस्ट किया है। मेटा बिना कैमरे वाला स्मार्ट चश्मा ला सकता है स्मार्ट चश्मों को लेकर उठ रहे निजता के सवालों के बीच मेटा एक ऐसा नया चश्मा लाने की तैयारी कर रहा है, जिसमें कैमरा नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इसका नाम लूना हो सकता है। इस चश्मे में छह माइक्रोफोन और कान के पास स्पीकर होंगे। इनके जरिए यूजर मेटा के एआई से बात कर सकेगा। यानी एआई इस्तेमाल करने के लिए कैमरे की जरूरत नहीं होगी। चश्मे में AI को चालू करने के लिए एक अलग बटन भी दिया जा सकता है। यह सामान्य चश्मे जैसा ही दिखेगा। मेटा इसे क्लबमास्टर और बरबैंक नाम के नए डिजाइन में ला सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा 23 सितंबर से होने वाले अपने डेवलपर कार्यक्रम में इसकी घोषणा कर सकता है। इसकी बिक्री इस साल के आखिर में शुरू होने की बात कही गई है। ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें…. सिंगापुर सरकार किताब पढ़ने के बदले पैसे देगी: रोजाना कम से कम 15 मिनट पढ़ना होगा सिंगापुर सरकार अब लोगों को किताब पढ़ने के लिए पैसे देगी। इसके लिए रोज कम से कम 15 मिनट किताब या लंबे लेख पढ़ने होंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

दैनिक भास्कर 18 Sep 2026 5:40 pm

श्वेता तिवारी के लिए यूरोपियन विदेशी दूल्हा ढूंढेंगी मल्लिका, बनाया प्लान

‘द ट्रेटर्स 2’ में श्वेता तिवारी की लव लाइफ पर मल्लिका शेरावत ने मजेदार बात कही. मल्लिका बोलीं कि वह श्वेता के लिए एक अच्छा यूरोपियन लड़का ढूंढेंगी.

आज तक 20 Aug 2026 7:56 pm

जलवायु परिवर्तन का संकट झेलने लगा यूरोप

यूरोप में जो लोग समझते थे कि जलवायु परिवर्तन भविष्य की पीढ़ियों के लिए समस्या है उन्हें इस बार की गर्मियों ने सच्चाई बता दी है. जलवायु परिवर्तन के महंगे और जीवन बदलने वाले आर्थिक नतीजे यूरोप को अपनी चपेट में ले चुके हैं

देशबन्धु 11 Aug 2026 12:15 am

यूरोप में भीषण गर्मी का कहर... इटली में रेड अलर्ट, ऑस्ट्रिया में तापमान का टूटा रिकॉर्ड

यूरोप में भीषण गर्मी और लू ने कई देशों के तापमान रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. इटली सरकार ने 27 प्रमुख शहरों को रेड अलर्ट पर रखा है. ऑस्ट्रिया में तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ज्यादा तापमान है. इस गर्मी और सूखे का असर बिजली उत्पादन, परिवहन और पर्यटन पर भी पड़ा है. पर्यावरणविद ग्लोबल वार्मिंग को इस स्थिति का मुख्य कारण मानते हैं.

आज तक 6 Aug 2026 6:41 pm

'यूरोप के दरवाजे' में घुस रहे 57 अफ्रीकियों को स्पेन ने क्यों मारा?

स्पेन की पुलिस बॉर्डर पर अलर्ट खड़ी है. पुलिस की गोलियों से अंदर घुसने की कोशिश कर रहे कई प्रवासियों की मौत हो चुकी है. 'यूरोप का दरवाजा' कहा जाने वाला स्यूटा शहर में प्रवासियों की बाढ़ ने इस शहर में कानून-व्यवस्था का संकट खड़ा कर दिया है.

आज तक 31 Jul 2026 7:58 pm

फ्रांस में पहली बार दिखा आग का बादल आखिर है क्या?

अभूतपूर्व जंगल की आग से जूझते फ्रांस में पहली बार फायर क्लाउड यानी आग के बादल बनते देखा गया है. आखिर आग के बादल होते क्या हैं और इनका क्या असर होता है. फ्रांस में इसे देखने के बाद क्यों चिंता बढ़ रही है

देशबन्धु 30 Jul 2026 9:33 pm

यूरोप में ‘ओमेगा ब्लॉक’ हीटवेव का प्रकोप, रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से जनजीवन बेहाल, दर्जनों लोगों की मौत

यूरोप में ‘ओमेगा ब्लॉक’ हीटवेव ने तबाही मचा दी है। फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और स्पेन में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, बिजली संकट, स्कूल बंद और गर्मी से कई मौतों की खबरें सामने आई हैं।

देशबन्धु 25 Jun 2026 9:36 am

अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान

एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं

देशबन्धु 20 Jun 2026 10:59 am

60 की उम्र में मिलिंद सोमन ने रचा इतिहास, यूरोप से अफ्रीका तक तैरकर पार किया स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर

अभिनेता और फिटनेस आइकन मिलिंद सोमन ने एक बार फिर अपनी अद्भुत सहनशक्ति और फिटनेस का परिचय दिया है। 60 साल की उम्र में मिलिंद सोमन ने स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर को तैरकर पार करने का एक कठिन और साहसी कारनामा कर दिखाया है। मिलिंद ने यूरोप और अफ्रीका के बीच ...

वेब दुनिया 6 May 2026 11:49 am

फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन, 88 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

Alain Delon passes away: 'द लेपर्ड' और 'रोक्को एंड हिज ब्रदर्स' जैसी सुपर हिट फिल्मों में अभिनय का जौहर दिखाने वाले फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन हो गया है। एलेन डेलन ने 88 वर्ष की उम्र में आखिरी सांस ली। अभिनेता के पारिवारिक सूत्रों ने ...

वेब दुनिया 18 Aug 2024 5:40 pm

इटली से फ्रांस तक समंदर के बीच होगा Anant-Radhika का दूसरा प्री वेडिंग फंक्शन, जानिए मेहमानों से लेकर ड्रेस कोड तक सबकुछ

इटली से फ्रांस तक समंदर के बीच होगा Anant-Radhika का दूसराप्री वेडिंग फंक्शन, जानिए मेहमानों से लेकरड्रेस कोड तक सबकुछ

समाचार नामा 28 May 2024 10:30 am

Heeramandi के बाद अब Cannes में अपनी 'गजगामिनी चाल' दिखाएंगी Aditi Rao Haidari, फ्रांस के लिए रवाना हुई बिब्बोजान

Heeramandi के बाद अब Cannes में अपनी 'गजगामिनी चाल' दिखाएंगी Aditi Rao Haidari,फ्रांस के लिए रवाना हुईबिब्बोजान

समाचार नामा 21 May 2024 2:45 pm