जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण पूरी दुनिया में मौसम का चक्र तेजी से बदल रहा है, जिसका सबसे गंभीर असर यूरोप महाद्वीप पर देखने को मिल रहा है। गर्मी और सूखे के कारण यूरोप की प्रमुख नदियां अपने न्यूनतम जल स्तर पर पहुंच चुकी हैं, जिससे सदियों पुरानी और गायब हो चुकी सभ्यताएं और ऐतिहासिक अवशेष पानी की गहराई से बाहर आने लगे हैं। इन नदियों का सूखना पर्यावरण के लिए भले ही चिंता का विषय हो, लेकिन इतिहासकार और पुरातत्वविद् इसे एक अनूठे खजाने की तरह देख रहे हैं, जहां पानी के नीचे छिपे कई अनछुए राज दुनिया के सामने आ रहे हैं।राइन और डैन्यूएब नदियों में दिखा इतिहास का खजानायूरोप की कई प्रसिद्ध नदियां जैसे राइन, डैन्यूएब और पो इन दिनों भयंकर सूखे की चपेट में हैं। पानी का स्तर इतना नीचे चला गया है कि नदियों की तली साफ नजर आने लगी है। इन सूखी तलहटी और कीचड़ के बीच से ऐसे अवशेष निकल रहे हैं जिनके बारे में सदियों से किसी को कोई जानकारी नहीं थी। पुरातत्वविदों को इन जगहों पर प्राचीन रोमन काल के पुलों के अवशेष, युद्ध के समय डूबे हुए हथियार और सदियों पुरानी बस्तियों के निशान मिले हैं, जो यह बयां करते हैं कि कभी इन इलाकों में इंसानी गतिविधियां किस स्तर पर थीं।हिमयुग के मैमथ के अवशेष और हिटलर के दौर के युद्धपोतइन खोजों में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि अलग-अलग जगहों से अलग-अलग कालखंड के अवशेष बाहर आ रहे हैं। हंगरी और सर्बिया के पास डैन्यूएब नदी की सूखी तलहटी से द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान डूबे हुए जर्मन नाजी सेना यानी हिटलर के कई युद्धपोत बाहर आए हैं, जिन पर अब भी विस्फोटक और हथियार लदे हुए हैं। इसके साथ ही, अन्य नदियों के पास प्रागैतिहासिक काल यानी हिमयुग के जीवों जैसे विशालकाय मैमथ के कंकाल और हड्डियां भी सुरक्षित अवस्था में मिली हैं, जिन्होंने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है।पर्यावरण के लिए चेतावनी और इतिहास के पन्नों का खुलनावैज्ञानिकों का मानना है कि नदियों का इस तरह सूखना पर्यावरण के लिहाज से बेहद खतरनाक संकेत है, जो आने वाले जल संकट की ओर इशारा करता है। हालांकि, दूसरी तरफ इसने इतिहास के कई अनसुलझे पन्नों को पलटने का मौका दे दिया है। स्थानीय प्रशासन और शोधकर्ता इन ऐतिहासिक अवशेषों को सहेजने में जुट गए हैं ताकि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में इतिहास के इन अनमोल प्रमाणों को सुरक्षित रखा जा सके।
भारत, फ्रांस और अरब देशों के बीच व्यापार व निवेश को मिलेगा बढ़ावा, एसोचैम ने किए अहम रणनीतिक समझौते
नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। देश के प्रमुख उद्योग संगठन एसोचैम ने भारत, फ्रांस और अरब देशों के बीच व्यापार, निवेश तथा कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बिजनेस फ्रांस और भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के साथ रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसकी घोषणा सोमवार को की गई।
यूरोप की नदियां सूखीं तो बाहर निकला हजारों साल का इतिहास, कहीं मिला मैमथ तो कहीं निकला हिटलर का जहाज
यूरोप महाद्वीप में इन दिनों जलवायु परिवर्तन और भयंकर सूखे की वजह से नदियों का जलस्तर तेजी से नीचे गिर रहा है। डेन्यूब, राइन और पो जैसी प्रमुख नदियां सूखने की कगार पर पहुंच चुकी हैं, जिसके कारण सदियों से पानी के भीतर छिपे कई बड़े रहस्य अब दुनिया के सामने आने लगे हैं। वैज्ञानिकों और स्थानीय लोगों के लिए यह स्थिति बेहद हैरान करने वाली है, क्योंकि पानी का स्तर घटने से नदी की तली में दबे प्राचीन अवशेष, प्राचीन सभ्यता की निशानियां और युद्धकाल के अवशेष अपने आप बाहर निकलने लगे हैं।प्राचीन मैमथ के अवशेष और प्रागैतिहासिक काल के खुलासेनदियों के सूखने से केवल आधुनिक इतिहास ही नहीं, बल्कि पृथ्वी के प्राचीन जीवों के अवशेष भी सतह पर आ गए हैं। कई जगहों पर वैज्ञानिकों को हज़ारों साल पुराने मैमथ की हड्डियां और अन्य जीवों के अवशेष मिले हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि इन अवशेषों के बाहर आने से प्रागैतिहासिक काल की जलवायु और उस समय के पर्यावरण को समझने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी। पानी के भीतर सुरक्षित दबे होने के कारण ये अवशेष हजारों साल बाद भी अच्छी हालत में बचे हुए हैं।हिटलर के युद्धपोत और द्वितीय विश्व युद्ध के गहरे राजप्राचीन इतिहास के साथ-साथ इस सूखे ने द्वितीय विश्व युद्ध के समय के काले अध्यायों को भी फिर से उजागर कर दिया है। पूर्वी यूरोप और जर्मनी के आसपास की नदियों में हिटलर की नाजी सेना के डूबे हुए युद्धपोत और हथियार स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। दशकों पहले युद्ध के दौरान जिन जहाजों को जानबूझकर डुबोया गया था या जो युद्ध के हालात में डूब गए थे, वे अब नदी का पानी सूखने के बाद मलबे के रूप में बाहर आ चुके हैं, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में इतिहासप्रेमी और विशेषज्ञ पहुंच रहे हैं।पर्यावरणविदों की चिंता और भविष्य के लिए चेतावनीभले ही इन पुरानी चीजों के मिलने से इतिहास के पन्नों को पलटने का मौका मिल रहा है, लेकिन पर्यावरणविदों के लिए यह स्थिति बेहद डरावनी और चिंताजनक है। नदियों का इस तरह सूखना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन अब इंसानी जीवन और प्रकृति के लिए विकराल रूप धारण कर चुका है। यदि समय रहते पानी के संरक्षण और जलवायु संतुलन को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यूरोप समेत पूरी दुनिया को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
इंसानियत की मिसाल: फ्रांस में जान जोखिम में डालकर 100 से ज्यादा कुत्ते, बिल्ली व घोड़ों को बचाया गया
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रूस के भीषण हमलों के बाद जेलेंस्की की अमेरिका-यूरोप से गुहार, बोले- पैट्रियट मिसाइलें गोदामों में नहीं, यूक्रेन भेजिए
प्रवासी संकट से निपटने के लिए यूरोपीय देशों के बीच एकजुटता जरूरी: ईसी अध्यक्ष
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यूरोप के इस देश में किराए पर मिलते हैं 'पति', महिलाएं घंटों के हिसाब से करती हैं पेमेंट, जानिए वजह
क्या आपने कभी सुना है किराए पर पति मिलते हैं? सुनने में ये काफी अजीब लग रहा है लेकिन यूरोप के एक देश में इस सर्विस से कई महिलाएं काफी खुश हैं। चलिए आपको रेंटल हस्बैंड की पूरी जानकारी देते हैं।
पेरू में टूरिस्ट प्लेन क्रैश, क्रू समेत 13 की मौत: सभी 11 पर्यटक यूरोप से थे, 2000 साल पुरानी नाज्का लाइन्स... bhaskar.com क्रैश हो गया पर्यटकों को ले जा रहा विमान, पायलट सहित सभी यात्रियों की मौत, International Hindi News Hindustan पेरू के नाज्का में टूरिस्ट प्लेन क्रैश, प्लेन में सवार सभी 13 लोगों की मौत AajTak पेरू में प्लेन क्रैश में 13 लोगों की मौत, 'एलियन' वाली नाज्का लाइंस देखने जा रहे थे News18 Hindi पेरू में विमान दुर्घटना में इटली के सात नागरिकों समेत 13 की मौत univarta.com
अवैध प्रवासी बनेंगे यूरोप के महाविनाश का कारण?
अवैधप्रवासीबनेंगेयूरोपकेमहाविनाशकाकारण The post अवैधप्रवासीबनेंगेयूरोपकेमहाविनाशकाकारण? appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
मिडिल ईस्ट के बाद अब यूरोप में महायुद्ध की आहट, NATO के इस कदम पर भड़का नया देश
पूरी दुनिया इस वक्त ईरान और इजरायल के बीच छिड़े भीषण संघर्ष को थामने की कोशिशों में जुटी है, लेकिन इसी बीच वैश्विक मंच पर एक और नया और बेहद खतरनाक मोर्चा खुलता नजर आ रहा है। उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानी नाटो (NATO) ने अपनी पूर्वी सीमाओं पर एक ऐसा आक्रामक सैन्य कदम उठाया है, जिसने सोए हुए एक और बड़े सैन्य दिग्गज को बुरी तरह भड़का दिया है। इस देश ने नाटो की इस ताजा हरकत को महज एक सैन्य अभ्यास मानने से साफ इनकार करते हुए इसे 'युद्ध की खुली तैयारी' करार दे दिया है, जिससे वैश्विक कूटनीति में हड़कंप मच गया है।नाटो ने ऐसा क्या किया जिससे अचानक भड़क उठी चिंगारीदरअसल, नाटो ने रूस और उसके सहयोगियों की सीमाओं के बेहद करीब अपने अत्याधुनिक हथियारों, लड़ाकू विमानों और हजारों सैनिकों के साथ एक बहुत बड़ा और सीक्रेट युद्धाभ्यास शुरू किया है। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में दुश्मन के किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देना है। लेकिन नाटो की इस भारी घेरेबंदी को इस नए देश ने अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक सीधे और बड़े खतरे के रूप में देखा है। इस देश के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर नाटो को चेतावनी दी है कि वे अपनी हदों में रहें, वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें।ईरान जंग के बीच इस नए बवाल से क्यों बढ़ी दुनिया की धड़कनेंएक तरफ जहां लाल सागर और पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बारूद बरस रहा है, वहीं दूसरी तरफ यूरोप के मुहाने पर इस नए विवाद के खड़े होने से दुनिया के रक्षा विशेषज्ञ बेहद चिंतित हैं। जानकारों का मानना है कि यदि यह तनाव थोड़ा भी और आगे बढ़ा, तो यह केवल दो देशों की जंग नहीं रह जाएगी। नाटो के आर्टिकल 5 (सामूहिक रक्षा) के चलते इसमें अमेरिका समेत दुनिया के 30 से ज्यादा शक्तिशाली देश सीधे तौर पर शामिल हो जाएंगे, जो पूरी तरह से तीसरे विश्व युद्ध (Third World War) की शुरुआत जैसा होगा।क्या वैश्विक शांति के लिए अब बहुत देर हो चुकी हैक्रेमलिन के करीबियों और इस नए मोर्चे के रणनीतिकारों का कहना है कि नाटो लगातार यूक्रेन संकट के बाद से ही अपनी सीमाओं का विस्तार करने और रूस के सहयोगियों को उकसाने की कोशिश कर रहा है। इस ताजा बवाल ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की उन सभी कोशिशों पर पानी फेर दिया है जो दुनिया में शांति बहाल करने के लिए की जा रही थीं। अब देखना यह होगा कि क्या नाटो इस कड़े विरोध के बाद अपने कदम पीछे खींचता है या फिर यह नया सैन्य संकट पूरी दुनिया को तबाही के एक नए और गहरे दलदल में धकेल देता है।
स्पेन की सीमा पर बड़ा हादसा, फुटेज में देंखे यूरोप में घुसने की कोशिश में 34 अफ्रीकी प्रवासियों की मौत, 100 से अधिक सुरक्षाकर्मी घायल
Europe: यूरोप बना आग का मैदान, तीन लाख लोग घर छोड़ने को मजबूर; लपटों ने दिखाया विकराल रूप; तोड़े सारे रिकॉर्ड--Europe Wildfires Break Records as Hundreds of Thousands Evacuate Amid Extreme Heat
Spain Unrest: स्पेन में सेना क्यों बुलानी पड़ी; इटली-फ्रांस में कैसी सख्ती, यूरोपीय देशों में क्या हो रहा?---Spain Faces Massive Migrant Crisis as Thousands Enter Ceuta, Italy Suspends Schengen Travel Agreement
‘यूरोप के दरवाजे’ में दाखिल हो रहे अफ्रीकियों का बहा खून, 57 की हो गई मौत; हजारों को लौटना पड़ा
मोरक्को से बड़ी घुसपैठ के बाद स्पेन के सामने चुनौती खड़ी हो गई है। समुद्री रास्ते से तैरकर करीब 60 हजार लोग स्पेन के स्यूटा पहुंचे और इसके बाद सुरक्षाबलों से मुठभेड़ हो गई। करीब 57 लोगों की जान गई है।
'यूरोप के दरवाजे' में घुस रहे 57 अफ्रीकियों को स्पेन ने क्यों मारा?
स्पेन की पुलिस बॉर्डर पर अलर्ट खड़ी है. पुलिस की गोलियों से अंदर घुसने की कोशिश कर रहे कई प्रवासियों की मौत हो चुकी है. 'यूरोप का दरवाजा' कहा जाने वाला स्यूटा शहर में प्रवासियों की बाढ़ ने इस शहर में कानून-व्यवस्था का संकट खड़ा कर दिया है.
Russia-Ukraine War में China की 'चुपचाप' मदद, US Weapon Stock खत्म होने से बढ़ी Xi Jinping की ताकत
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक ऐसी लड़ाई में अमेरिका को उलझा दिया है जिसे शायद जीता नहीं जा सकता, और इससे चीन की स्थिति मज़बूत हुई है। इसके अलावा, बीजिंग दुनिया भर में अपना असर बढ़ा रहा है और यूक्रेन और पश्चिमी देशों के साथ रूस की लड़ाई में चुपचाप उसका साथ भी दे रहा है। अमेरिका के मिसाइल और हथियारों का स्टॉक कम होने की बात लंबे समय से पता है - और ईरान युद्ध ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है - जिसका सीधा फ़ायदा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को मिल रहा है। बहुत मुमकिन है कि चीन और रूस अपनी अगली चालों (क्रमशः ताइवान और यूक्रेन के ख़िलाफ़) की योजना बनाते समय इस बात को ध्यान में रख रहे हों। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War में फंसे भारतीयों पर Supreme Court सख्त, MEA को नोडल अफसर नियुक्त करने का आदेश जैसा कि ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट के सीनियर एनालिस्ट डॉ. मैल्कम डेविस ने कहा यह बात उतनी ही पक्की है जितनी कि दिन के बाद रात का आना यह स्थिति अब अमेरिकी सैन्य क्षमता के लिए एक बहुत ही खतरनाक संकट पैदा कर रही है और यह संकट एक दशक या एक-दो साल बाद नहीं, बल्कि अभी आ रहा है। बेशक, रूस को समर्थन देने के मामले में चीन का रवैया उत्तर कोरिया जितना खुला नहीं रहा है। बीजिंग ने न तो तोप का चारा बनने वाले सैनिक भेजे हैं और न ही मिसाइलें बेची हैं, लेकिन फिर भी वह यूक्रेन में व्लादिमीर पुतिन की लंबी खिंचती लड़ाई का सक्रिय रूप से समर्थन कर रहा है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने चीन को रूस की लड़ाई को निर्णायक रूप से आगे बढ़ाने वाला बताया है। रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बीजिंग की तथाकथित तटस्थता असल में वैसी नहीं है। यह शुरू से ही एक दिखावा रहा है; चीन ने तुरंत मॉस्को की बातों को दोहराया और यहाँ तक कि अनिवार्य कोर्स भी चलाए, जिनमें शिक्षकों और लेक्चररों को यह बताया गया कि पुतिन की लड़ाई के बारे में आधिकारिक नैरेटिव को कैसे पेश किया जाए। तब से चीन अपनी इस बात पर अडिग रहा है। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: Trump की शांति पहल के बीच Kyiv पर मिसाइल वर्षा, क्या पुतिन अब और बढ़ाएंगे युद्ध? चीन अपनी आलोचना को लेकर बहुत सोच-समझकर कदम उठाता है। जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने तुरंत कहा, चाहे कोई भी वजह हो, बिना सोचे-समझे ताकत का इस्तेमाल मंज़ूर नहीं है, और बेगुनाह नागरिकों और गैर-सैन्य ठिकानों पर किसी भी हमले की निंदा की जानी चाहिए। फिर भी, यूक्रेन के खिलाफ पुतिन की चार साल से ज़्यादा चली लड़ाई में, चीन ने मॉस्को को सिर्फ़ एक ही चेतावनी दी है कि वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल न करे। यह बात ही चीन के दोहरे रवैये को दिखाती है। इसके बावजूद, रूस में जन्मे पूर्व शतरंज ग्रैंडमास्टर गैरी कास्पारोव ने कहा, चीन बिना किसी बुरे नतीजे के रूस की सीधे और परोक्ष रूप से मदद करता है। रूस की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने के बावजूद, उसे कोई खास सज़ा नहीं मिली है। हाँ, कुछ चीनी कंपनियों पर अमेरिका, ब्रिटेन या यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन उन्हें कोई खास राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना पड़ा है। तो फिर, रूस के लिए चीन का समर्थन किस तरह का है? काम के बँटवारे के तहत, मॉस्को 'पीपल्स लिबरेशन आर्मी' (PLA) को लड़ाई के गुर सिखाता है, जबकि बदले में चीन रूस को इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और मशीनरी भेजता है ताकि उसके सैन्य-औद्योगिक ढांचे को मदद मिल सके। चीन रूस से लड़ाई के सबक सीखने के लिए उत्सुक है, क्योंकि ये सीधे तौर पर ताइवान को लेकर उसकी सैन्य योजनाओं से जुड़े हैं।
फ्रांस में पहली बार दिखा आग का बादल आखिर है क्या?
अभूतपूर्व जंगल की आग से जूझते फ्रांस में पहली बार फायर क्लाउड यानी आग के बादल बनते देखा गया है. आखिर आग के बादल होते क्या हैं और इनका क्या असर होता है. फ्रांस में इसे देखने के बाद क्यों चिंता बढ़ रही है
3 लाख यात्री दिल्ली में बिना टर्मिनल बदले अमेरिका-यूरोप जा पाएंगे
भास्कर न्यूज | अमृतसर केंद्र सरकार ने अमृतसर से हब-एंड-स्पोक अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवा शुरू कर दी है। यह देश का दूसरा स्पोक एयरपोर्ट बन गया है। इससे हर साल तीन लाख यात्रियों को फायदा होगा। उनका समय तो बचेगा ही साथ ही बार-बार लगेज पर टैगिंग, इमिग्रेशन कस्टम की बार-बार की फॉर्मेलिटी भी पूरी नहीं कर होगी। यात्री बिना टर्मिनल चेंज किए यूरोप- अमेरिका समेत 27 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स तक जा सकेंगे। नई व्यवस्था के तहत दिल्ली के माध्यम से अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिम एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया सहित 27 इंटरनेशनल डेस्टिनेशनल तक अधिक सुगमता से पहुंच सकेंगे। इससे समय बचेगा, बार-बार बैगेज चेक-इन और अन्य औपचारिकताओं की जरूरत नहीं पड़ेगी। सबसे ज्यादा उलझन स्टूडेंट्स और पर्यटकों की उलझन खत्म होगी। मनदीप सिंह : एक ही जगह चेक-इन और बैगेज की सुविधा मिलने से यात्रा काफी आसान हो जाएगी। गुरभेज सिंह : दिल्ली में दोबारा बैगेज और चेक-इन की झंझट खत्म होना सबसे बड़ी राहत है। अमृत पाल सिंह : इससे विदेश जाने वालों का समय बचेगा और सफर पहले से ज्यादा सुविधाजनक होगा। जगतार सिंह : अमृतसर में ऐसी सुविधा शुरू होना पंजाब के लोगों के लिए बड़ी सौगात है। गौरतलब है 1.5 लाख यात्री अंतरराष्ट्रीय उड़ान पकड़ने के लिए अमृतसर से दिल्ली जाते हैं। इतने ही यात्री विदेश से दिल्ली होकर अमृतसर पहुंचते हैं। नई व्यवस्था से इन यात्रियों की यात्रा अधिक सुविधाजनक होगी। एयरलाइंस का अनुमान है कि केवल अमृतसर से रोज करीब 250 यात्री इस सुविधा का लाभ उठाएंगे। आने वाले महीनों में अन्य स्पोक एयरपोर्ट जुड़ने के बाद प्रतिदिन लगभग 1,200 यात्रियों को इसका फायदा मिलेगा, जो सालाना 4.5 लाख यात्रियों के बराबर होगा। ईजी कनेक्ट हब का शुभारंभ करते नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा।
यूरोप में ‘ओमेगा ब्लॉक’ हीटवेव का प्रकोप, रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से जनजीवन बेहाल, दर्जनों लोगों की मौत
यूरोप में ‘ओमेगा ब्लॉक’ हीटवेव ने तबाही मचा दी है। फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और स्पेन में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, बिजली संकट, स्कूल बंद और गर्मी से कई मौतों की खबरें सामने आई हैं।
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
60 की उम्र में मिलिंद सोमन ने रचा इतिहास, यूरोप से अफ्रीका तक तैरकर पार किया स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर
अभिनेता और फिटनेस आइकन मिलिंद सोमन ने एक बार फिर अपनी अद्भुत सहनशक्ति और फिटनेस का परिचय दिया है। 60 साल की उम्र में मिलिंद सोमन ने स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर को तैरकर पार करने का एक कठिन और साहसी कारनामा कर दिखाया है। मिलिंद ने यूरोप और अफ्रीका के बीच ...
फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन, 88 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
Alain Delon passes away: 'द लेपर्ड' और 'रोक्को एंड हिज ब्रदर्स' जैसी सुपर हिट फिल्मों में अभिनय का जौहर दिखाने वाले फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन हो गया है। एलेन डेलन ने 88 वर्ष की उम्र में आखिरी सांस ली। अभिनेता के पारिवारिक सूत्रों ने ...
Heeramandi के बाद अब Cannes में अपनी 'गजगामिनी चाल' दिखाएंगी Aditi Rao Haidari,फ्रांस के लिए रवाना हुईबिब्बोजान
यूरोप से लेकर Sri Lanka तक इन देशो में शूट हुई है Surya और Bobby Deol की फिल्म Kanguva, बजट उड़ा देगा होश

