इजरायल की ई-1 बस्ती परियोजना पर यूरोपीय संघ की आपत्ति, वॉन डेर लेयेन ने दो-राष्ट्र समाधान को लेकर जताई चिंता
पीएस ने कहा कि विधेयक के व्याख्यात्मक ज्ञापन में इस्लामोफोबिक उद्देश्य स्पष्ट था, जिस कट्टरपंथी माहौल में हम रह रहे हैं और इससे सीधे तौर पर निशाना बनाए जा रहे समुदायों के लिए जो जोखिम पैदा हो रहे हैं, वह निंदनीय है।
अमेरिका में वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म TikTok ने बच्चों की ऑनलाइन गोपनीयता से जुड़े मामले में 400 मिलियन डॉलर (करीब 3,300 करोड़ रुपये) के समझौते पर सहमति जताई है. अमेरिकी न्याय विभाग का आरोप था कि प्लेटफॉर्म ने 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का निजी डेटा अभिभावकों की अनुमति के बिना एकत्र किया, जिससे लाखों बच्चों की प्राइवेसी और सुरक्षा खतरे में पड़ी.
इस्राएली मंत्री के टारगेट किलिंग वाले बयान पर यूरोपीय राजनीति में उबाल
गाजा पट्टी में फलीस्तीनियों की लक्षित हत्याएं करने की बात कहने वाले इस्राएली मंत्री बेन ग्विर की जर्मनी और फ्रांस ने कड़ी निंदा की है. गाजा पर इस्राएली सरकार का रुख, अब सहयोगियों के धीरज की परीक्षा ले रहा है
New Delhi, 21 अगस्त . फ्रांस के बाद पुर्तगाल में चेहरा ढंकने को लेकर एक बड़ा प्रतिबंध लागू किया है. दरअसल, देश की सेगुरो Government ने सार्वजनिक स्थलों पर चेहरा ढंकने पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है. इस नए प्रतिबंध का पालन ना करने पर 150 यूरो से 3,000 यूरो (भारतीय करेंसी में 17 ... Read more
फ्रांस के बाद पुर्तगाल में लागू हुआ 'हिजाब कानून', सार्वजनिक जगहों पर चेहरा ढकने पर लगेगा लाखों का जुर्माना
क्यों दुनिया से दोगुनी रफ्तार से गर्म हो रहा यूरोप? जानिए इस महाद्वीप के 'हॉट जोन' बनने के बड़े कारण
यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन गया है।वैज्ञानिक इसे लॉन्ग टर्म जलवायु परिवर्तन से जोड़ रहे हैं।
भारत-ईयू एफटीए व्यापार और निवेश के नए अवसर खोलेगा, भारतीय कंपनियों के साथ सहयोग को लेकर उत्साहित हैं यूरोपीय कारोबार: फिनलैंड ट्रेड काउंसलर
भारत-यूरोपियन यूनियन एफटीए बड़ा गेम चेंजर, द्विपक्षीय व्यापार को मिलेगा बढ़ावा : लिथुआनियाई राजदूत
नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। भारत-यूरोपियन यूनियन (ईयू) फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) एक बड़ा गेम चेंजर है और इससे द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। यह जानकारी भारत में लिथुआनियाई राजदूत डायना मिकेविचिएने की ओर से दी गई।
कार्बन टैक्स: घटेगा भारत से यूरोप को स्टील और एल्युमिनियम का निर्यात, छोटे उद्योगों को लगेगा झटका
टाटा स्टील, सेल, जेएसडब्ल्यू से लेकर हिंडाल्को और वेदांता के निर्यात मार्जिन में आएगी कमी2028 से ऑटो पार्ट्स, मशीनरी और पाइप्स जैसे तैयार उत्पादों पर भी कसेगा टैक्स का शिकंजा
इसराइली मंत्री के टारगेट किलिंग वाले बयान पर अंतरराष्ट्रीय उबाल, फ्रांस और जर्मनी ने की कड़ी निंदा
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच इस्राइल की सरकार के भीतर से आ रहे बयानों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। गाजा पट्टी में फलस्तीनियों की 'लक्षित हत्याएं' (Targeted Killings) करने की वकालत करने वाले इस्राइल के धुर दक्षिणपंथी नेता और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्विर (Itamar Ben-Gvir) के एक विवादित बयान पर यूरोपीय देशों में भारी उबाल देखने को मिल रहा है। जर्मनी और फ्रांस समेत कई प्रमुख देशों ने इस बयान की कड़ी निंदा की है।क्या था मंत्री इतमार बेन ग्विर का विवादित बयान?हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान, हमास की कैद से छूटे एक पूर्व इसराइली बंधक के साथ बातचीत करते हुए मंत्री बेन ग्विर ने विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि इस्राइल को गाजा में हर रात 30 या 40 लोगों को निशाना बनाकर खत्म करना चाहिए।इस बयान के सार्वजनिक होते ही यूरोपीय राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं। जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने इस बयान को पूरी तरह से अस्वीकार्य और अमानवीय करार दिया है। जर्मन सरकार के प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा कि यह बयान अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है। वहीं, फ्रांस के विदेश मंत्री जां-नोएल बारो और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेष ने भी इसे घृणित और खतरनाक बताया है।यूरोपीय संघ स्तर पर प्रतिबंध लगाने की मांग तेजइस बयान के बाद अब यूरोपीय देशों में बेन ग्विर के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग फिर से जोर पकड़ने लगी है। जर्मन सरकार पर भी घरेलू स्तर पर दबाव बढ़ रहा है। जर्मनी के उप चांसलर लार्स क्लिंगबाइल ने एक इंटरव्यू में कहा कि इस तरह के बयानों के गंभीर राजनीतिक नतीजे निकलने चाहिए और यूरोपीय स्तर पर इस पर विचार किया जा रहा है।इससे पहले मई 2026 में भी बेन ग्विर द्वारा गाजा राहत सामग्री से जुड़े एक्टिविस्ट्स की हिरासत का मजाक उड़ाए जाने के बाद फ्रांस ने उनके देश में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था।पश्चिमी तट पर बस्तियों के विस्तार पर भी घिरी इस्राइल सरकारइतमार बेन ग्विर के इस ताजा बयान के साथ-साथ जर्मनी ने पश्चिमी तट (West Bank) पर इसराइली बस्तियों के लगातार हो रहे विस्तार पर भी गहरी चिंता जताई है। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध मानी जाने वाली इन बस्तियों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के कार्यकाल के दौरान काफी तेजी आई है। वर्तमान में पूर्वी येरुशलम को छोड़कर पांच लाख से अधिक इस्राइली पश्चिमी तट पर बस चुके हैं, जो क्षेत्र में शांति प्रयासों के लिए एक बड़ी बाधा बनता जा रहा है।
US Army will shut down unit in Europe focused on learning drone warfare - Drone Warfare: ईरान के ड्रोन हमलों के बीच अमेरिका का बड़ा फैसला, जानें क्यों बंद की यूरोप की अहम यूनिट?
श्वेता तिवारी के लिए यूरोपियन विदेशी दूल्हा ढूंढेंगी मल्लिका, बनाया प्लान
‘द ट्रेटर्स 2’ में श्वेता तिवारी की लव लाइफ पर मल्लिका शेरावत ने मजेदार बात कही. मल्लिका बोलीं कि वह श्वेता के लिए एक अच्छा यूरोपियन लड़का ढूंढेंगी.
यूरोपियन महिला ने पहली बार की भारतीय ट्रेन में यात्रा, बाथरूम सेल्फी के दौरान इंडियन दोस्त का रिएक्शन हुआ वायरल
यूरोप में बढ़ेगा जंगल की आग का खतरा, सदी के अंत तक 39 फीसदी अधिक क्षेत्र जलने का अनुमान
New Delhi, 20 अगस्त . यूरोप के कई देश जंगल की आग में झुलस रहे हैं. आने वाले दशकों में यूरोप के जंगलों में आग का खतरा और गंभीर हो सकता है और इसकी आशंका Thursday को प्रकाशित एक स्टडी में की गई है. जिसके मुताबिक वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित करने के बेहतर परिदृश्य ... Read more
खुद शुरू किए युद्ध में अब अपनी ही हार देख रहा रूस: यूरोपियन कमीशन प्रेसिडेंट
नई दिल्ली, 20 अगस्त . यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने यूक्रेन पर रूसी हमलों की आलोचना करते हुए कहा कि दरअसल रूस अपने ही शुरू किए युद्ध में अब खुद की हार देख रहा है. यही कारण है कि वो आमजन और बुनियादे ढांचे पर हमले कर रहा है. उन्होंने कहा ... Read more
मध्य पूर्व और दुनिया भर के कूटनीतिक गलियारों में इस समय तनाव अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका है, और इसका सबसे बड़ा कारण ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ता हुआ वाकयुद्ध है। एक तरफ जहां वैश्विक महाशक्तियों के बीच परमाणु हथियारों और सुरक्षा को लेकर खींचतान जारी है, वहीं दूसरी तरफ तेहरान के तेवर और भी अधिक आक्रामक हो गए हैं। ईरानी सरकार के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य अधिकारियों की तरफ से एक बार फिर अमेरिका को खुली चेतावनी जारी की गई है। ईरान ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि अमेरिका या उसके किसी भी सहयोगी देश ने उसकी धरती पर कोई भी परमाणु या सैन्य हमला करने की हिमाकत की, तो उसका बेहद करारा और तबाही मचाने वाला जवाब दिया जाएगा। इस तीखी बयानबाजी के बीच ईरानी रणनीतिकारों की नजरें अब यूरोपीय देशों की चाल और उनकी प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया भूचाल आ गया है।तेहरान और वॉशिंगटन के बीच क्यों बढ़ रहा है तनाव?पिछले कुछ महीनों के दौरान अमेरिका और ईरान के आपसी संबंध किसी भी समय एक बड़े सैन्य टकराव में बदलने की स्थिति में पहुंच चुके हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रमों, उसके यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के बढ़ते स्तर और मध्य पूर्व में उसके प्रॉक्सी समूहों की गतिविधियों को लेकर अमेरिका और पश्चिमी देश लगातार तेहरान पर दबाव बना रहे हैं। अमेरिका और इजराइल जैसे देश यह कभी बर्दाश्त नहीं कर सकते कि ईरान परमाणु हथियारों की दहलीज तक पहुंचे, जबकि ईरान का हमेशा से यह तर्क रहा है कि उसका पूरा परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों और ऊर्जा जरूरतों के लिए है। इसी बुनियादी वैचारिक और सामरिक मतभेद के कारण दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद लगभग ठप हो चुका है और सैन्य मोर्चे पर दोनों तरफ से लगातार धमकियों का दौर जारी है।ईरान की सैन्य चेतावनी और देश की रक्षा तैयारियांईरान के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और सरकारी प्रवक्ताओं ने हाल ही में अपने एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सेना किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरानी सशस्त्र बल अपनी संप्रभुता और देश की भौगोलिक अखंडता की रक्षा करने के लिए पूरी क्षमता रखते हैं। तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि वॉशिंगटन सरकार ने कोई भी दुस्साहसपूर्ण कदम उठाया, तो मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों और उनके हितों को नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा। ईरान की इस आक्रामक रणनीति का उद्देश्य अमेरिका और उसके सहयोगियों को किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई करने से रोकना है, ताकि वे कूटनीतिक दबाव के आगे झुकने के बजाय अपनी शर्तों पर बात करने के लिए मजबूर हों।यूरोपीय देशों की संदिग्ध भूमिका और तेहरान की पैनी नजरइस पूरे भू-राजनीतिक संघर्ष के बीच ईरान की कूटनीति का एक बहुत बड़ा फोकस यूरोप और यूरोपीय संघ (EU) के रुख पर है। तेहरान अच्छी तरह जानता है कि अमेरिका के साथ सीधे टकराव को टालने या नियंत्रित करने में यूरोपीय देश एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे प्रमुख यूरोपीय देश अभी तक अमेरिकी नीतियों के ही समर्थन में खड़े नजर आए हैं और ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों को बनाए रखने की वकालत करते रहे हैं। इसके बावजूद, ईरान लगातार यूरोपीय राजधानियों के साथ अपने राजनयिक चैनलों को खुला रखने की कोशिश कर रहा है ताकि यदि वॉशिंगटन के साथ कोई गंभीर संकट पैदा हो, तो यूरोपीय देशों के जरिए कुछ कूटनीतिक गुंजाइश बनाई जा सके। तेहरान की यह पैनी नजर इस बात का संकेत है कि वह केवल सैन्य ताकत के भरोसे नहीं, बल्कि कूटनीतिक मोर्चे पर भी पूरी चालें चल रहा है।वैश्विक शांति के लिए मंडराते खतरे और आगे की राहईरान और अमेरिका के बीच चल रहा यह शीत युद्ध और इस तरह की परमाणु धमकियां पूरी दुनिया के लिए गहरी चिंता का विषय बन चुकी हैं। यदि इन दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष सैन्य संघर्ष छिड़ जाता है, तो इसके परिणाम न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी साबित हो सकते हैं। कच्चे तेल की आपूर्ति से लेकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार तक सब कुछ भारी संकट में पड़ सकता है। दुनिया भर के शांतिप्रिय देश और संयुक्त राष्ट्र (UN) लगातार दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर जिस प्रकार की आक्रामक बयानबाजी और सैन्य तैयारियां चल रही हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिन वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद उथल-पुथल भरे और संवेदनशील रहने वाले हैं।
लेबनानी सेना के समर्थन में फ्रांस ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारी तेज की, इजरायल से वार्ता अटकी
पेरिस, 20 अगस्त . लेबनान को जैसी उम्मीद थी वैसा कुछ खास होता नहीं दिखा. इजरायल की ओर से अब भी कुछ इलाकों पर हमले जारी हैं. इस सबके बीच फ्रांस ने लेबनानी सेना को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं. यह पहल ऐसे समय ... Read more
Portugal enacted Burqa Law: पुर्तगाल के राष्ट्रपति अंतोनियो जोसे सेगुरो ने कानून मुहर लगाया. उन्होंने कहा कि चेहरे को इंसान की पहचान और एक-दूसरे से बातचीत का एक अहम हिस्सा माना जाना चाहिए.
Russia-Ukraine War: कीव पर रूस का एक और बड़ा हमला, मिसाइल हमले में छह की मौत; 30 से ज्यादा घायल
Russia Ukraine War: कीव पर रूस का एक और बड़ा हमला, मिसाइल हमले में छह की मौत; 30 से ज्यादा घायल Russia-Ukraine War Another major Russian attack on Kyiv; Many killed and over injured in missile strikes.
अविनाश वाधवन ने याद किया सैन फ्रांसिस्को का सोलो ट्रिप, बोले- इस सफर ने खुद पर भरोसा करना सिखाया
अविनाश वाधवन ने याद किया सैन फ्रांसिस्को का सोलो ट्रिप, बोले- इस सफर ने खुद पर भरोसा करना सिखाया
Germany Woman In India: डिजिटल कंटेंट क्रिएटर सबरीना ने अपनी यात्रा की शुरुआत 15 अगस्त को दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस मनाते हुए की थी. इसके बाद वे ताज महल देखने आगरा गईं और फिर वहां से राजस्थान चली गईं. इस वक्त वे जयपुर शहर घूम रही हैं.
140 साल पुराना पारीछा बांध बना विश्व धरोहर, फ्रांस में आयोजित समारोह में मिलेगा सम्मान
योगी सरकार प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत को विश्व पटल पर पहचान दिलाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इस दिशा में योगी सरकार ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। झांसी के 140 साल पुराना पारीछा बांध अब वैश्विक विरासत का हिस्सा बन गया है। इसे इंटरनेशनल ...
यूपी का 140 साल पुराना पारीछा बांध बना विश्व धरोहर, फ्रांस में 14 अक्तूबर को मिलेगा सम्मान
यूपी का 140 साल पुराना पारीछा बांध विश्व धरोहर बन गया है। पारीछा बांध को फ्रांस के मार्सेई में 14 अक्टूबर में होने वाली 26वीं आईसीआईडी इंटरनेशनल कांग्रेस और 77वीं इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव काउसिंल मीटिंग के दौरान डब्ल्यूएचआईएस अवार्ड-26 दिया जाएगा।
झांसी का 140 साल पुराना पारीछा बांध अब इंटरनेशनल कमीशन ऑन इरिगेशन एंड ड्रेनेज (आईसीआईडी) द्वारा विश्व विरासत सिंचाई संरचना (डब्ल्यूएचआईएस) के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है। यह उपलब्धि योगी सरकार के प्रयासों का परिणाम है और अक्टूबर में फ्रांस में इसे डब्ल्यूएचआईएस अवार्ड-26 से सम्मानित किया जाएगा।
Kawasaki Ninja 500 और निंजा 500 SE को यूरोप में मिले नए रंग, जानें भारतीय अपडेट
Kawasaki Ninja 500: Kawasaki ने अपनी लोकप्रिय स्पोर्टबाइक Ninja 500 और Ninja 500 SE के लिए यूरोप में नए कलर में पेश किए हैं। हालांकि, भारत में इसे लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
Iran-US War Update: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा और सनसनीखेज दावा सामने आया है। ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से युद्ध को और बढ़ाए जाने की स्थिति में यूरोप में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करने पर विचार कर रहा है। 'फाइनेंशियल टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान के शासन के करीबी दो लोगों ने यह जानकारी दी है।रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरानी सैन्य बलों ने दक्षिण-पूर्वी यूरोप में मौजूद अमेरिकी सैन्य सुविधाओं पर संभावित हमलों का आकलन किया है। इनमें बुल्गारिया स्थित सैन्य सुविधाएं भी शामिल हैं। बताया गया है कि पिछले महीने बुल्गारिया ने अमेरिका को अपने बेजमर एयर बेस का इस्तेमाल अमेरिकी ईंधन भरने वाले विमानों के लिए करने की अनुमति दी थी।यूरोप के दूसरे ठिकाने भी निशाने परईरान की संभावित कार्रवाई सिर्फ बुल्गारिया तक सीमित नहीं बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, साइप्रस को भी संभावित टारगेट के तौर पर देखा जा रहा है। ईरानी पक्ष से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि साइप्रस में मौजूद ब्रिटिश सैन्य ठिकाना भी संभावित निशानों में शामिल हो सकता है। मार्च में साइप्रस में एक ब्रिटिश सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमला भी हुआ था।ईरान से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई यूरोपीय देशों के लिए संदेश भी हो सकती है कि अगर वे अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए अपनी जमीन उपलब्ध कराते हैं, तो युद्ध का असर उनके क्षेत्र तक भी पहुंच सकता है।एक ईरानी सूत्र के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि यूरोप को यह समझना चाहिए कि वह भी मिसाइल हमलों की जद में आ सकता है। सूत्रों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ईरान के बुनियादी ढांचे पर बड़ा हमला करता है, तो युद्ध सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि यह यूरोप तक फैल सकता है।समुद्री इंटरनेट केबल भी निशाने पर?रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सैन्य बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्र के भीतर बिछी फाइबर ऑप्टिक केबलों पर हमले की संभावना का भी आकलन किया है। इन केबलों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय संचार और इंटरनेट डेटा के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि ऐसी किसी कार्रवाई को अंजाम दिया जाता है, तो इसका असर केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि वैश्विक संचार व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।अमेरिका के साथ खड़े देशों को ईरान की खुली चेतावनीईरान लंबे समय से उन देशों को चेतावनी देता रहा है जो अपनी जमीन से अमेरिकी सेनाओं को सैन्य अभियान चलाने की अनुमति देते हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पिछले महीने ब्रिटेन को भी चेतावनी दी थी। IRGC ने कहा था कि यदि किसी ब्रिटिश सैन्य अड्डे का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया जाता है, तो वह अड्डा ईरान के लिए वैध सैन्य टारगेट माना जाएगा।ईरान से जुड़े एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि यदि अमेरिका ने बड़ा हमला किया तो तेहरान की प्रतिक्रिया की कोई सीमा नहीं होगी। उसके मुताबिक, अगर अमेरिका बहुत आगे बढ़ता है तो ईरान किसी भी कीमत पर अपनी रक्षा करेगा और जरूरत पड़ने पर क्षेत्र से बाहर जाकर यूरोप में भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकता है। ईरान पहले भी दूर स्थित ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश कर चुका है।ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर यह चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि वह पहले भी अपने क्षेत्र से हजारों किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्यों तक मिसाइल पहुंचाने की कोशिश कर चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल की ओर से फरवरी में युद्ध शुरू किए जाने के बाद अमेरिका ने ईरान पर डिएगो गार्सिया स्थित संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डे की दिशा में कई मिसाइलें दागने का आरोप लगाया था।ईरानी मिसाइल की कितनी है क्षमता?डिएगो गार्सिया ईरान से करीब 4,000 किलोमीटर दूर हिंद महासागर में स्थित है। हालांकि, ईरान से दागी गई कोई भी मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। बाद में तुर्किये ने भी कहा था कि उसकी NATO एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की ओर से दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया था।यूरोप के लिए खतरा कितना बड़ा?रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (RUSI) के एक्सपर्ट सिद्धार्थ कौशल के मुताबिक, यूरोप के लिए ईरान की मिसाइल क्षमता से पैदा होने वाला खतरा वास्तविक है। हालांकि इसकी क्षमता अभी सीमित है। यानी इसका मतलब यह है कि ईरान के पास यूरोप तक खतरा पहुंचाने की कुछ क्षमता जरूर है। लेकिन बड़े पैमाने पर यूरोपीय लक्ष्यों पर हमला करने की उसकी क्षमता को लेकर अभी भी सीमाएं हैं। ईरान की ताजा धमकियां ऐसे समय सामने आई हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ समझौता पिछले महीने टूट गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।ये भी पढ़ें- BBA स्टूडेंट ने 3 महीने तक रोज 8.5 घंटे Rapido चलाया, एक दिन में 1200 रुपये तक कमाए फिर अपना एक्सपीरियंस डिटेल में बताया
'दो ईरानी राजनयिकों को निकालेगा फ्रांस': फ्रांसीसी विदेश मंत्री ने क्या कहा, क्यों बढ़ा दोनों देशों में तनाव?
सीएम भूपेंद्र पटेल सैन फ्रांसिस्को पहुंचे, 'वाइब्रेंट गुजरात 2027' से पहले निवेशकों से करेंगे मुलाकात
मिलिए कर्नल रजनीश जोशी से, यूरोप की सबसे ऊंची चोटी फतह की; अब तक 45 रिकॉर्ड
Colonel Rajneesh Joshi: कर्नल रजनीश जोशी ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस को फतह किया है। वे अब तक माउंट एवरेस्ट समेत 45 शिखर चढ़ चुके हैं। वे उत्तराखंड के रहने वाले हैं।
बिहार ने अमेरिका,इंग्लैंड, फ्रांस, स्पेन को पीछे छोड़ दिया; CEC ज्ञानेश कुमार ने क्यों जताया आभार?
ज्ञानेश कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे बिहार के मतदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करने आये हैं। मतदाता सूची के शुद्धिकरण का देश भर में सबसे सफल आयोजन बिहार से ही शुरू हुआ था।
कैथल के साथ सटे जींद के गांव चूहड़पुर के करीब 22 वर्षीय युवक निहाल सिंह की यूरोप में डूबने से मौत हो गई। वह दोस्तों के साथ वीकएंड पर समुद्र में घूमने गया था। अचानक से जिस वाहन में वे बैठे थे, वह डूबने लगा। वहां पानी में डूबने से युवक की मौत हो गई। युवक निहाल सिंह करीब नौ महीने पहले यूरोप स्टडी वीजा पर गया था और माल्डोवा में रह रहा था। पढ़ाई के साथ साथ वहां पर एक होटल में पार्ट टाइम डिलीवरी बॉय का काम करता था। आज युवक का शव उसके गांव में पहुंचा। निहाल सिंह की बड़ी बहन शीतल ने अपने भाई का अंतिम संस्कार किया और मुखाग्नि दी। नौ महीने पहले विदेश गया चचेरे भाई प्रवीन कुमार ने बताया कि परिवार ने निहाल सिंह नौ महीने पहले इस उम्मीद से विदेश भेजा था कि वहां पर रहकर पढ़ाई और कमाई करेगी, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक होगी, लेकिन अब परिवार के अरमानों पर पानी फिर गया। अब परिवार में केवल उसकी माता सुनीता देवी और बहन शीतल हैं। पिता कृष्ण कुमार की पहले ही हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है। 15 लाख रुपए लगाकर विदेश भेजा प्रवीन ने बताया कि परिवार ने निहाल सिंह को करीब 15 लाख रुपए लगाकर विदेश भेजा था। माता के पास इतने पैसे नहीं थे। ऐसे में उन्होंने अपने जानकारों और रिश्तेदारों से पैसे इकट्ठे किए थे। अब उसके शव को भारत वापस लाने में भी करीब 10 लाख रुपए खर्च करने पड़े। इनमें से कुछ राशि परिवार ने तो कुछ भाईचारे से इकट्ठी की गई। घर के पास करियाना का दुकान उन्होंने बताया कि निहाल सिंह परिवार में अकेला कमाने वाला था। पिता की मौत के बाद मां सुनीता ने ही दोनों बच्चों का पालन पोषण कर रही हैं। उनकी घर के साथ ही करियाना की दुकान है। अब निहाल से ही परिवार को उम्मीद थी। उसकी मौत के बाद परिवार परिवार में मातम छाया हुआ है।
पत्थर शिल्प का 11 करोड़ का कारोबार:ग्वालियर के 200 कारीगरों की कला फ्रांस, स्पेन और दुबई तक पहुंची
ग्वालियर का पत्थर शिल्प देश ही नहीं, विदेशों में भी पहचान बना रहा है। स्थानीय पत्थर से देवी-देवताओं की मूर्तियों से लेकर फाइन आर्ट तैयार किए जा रहे हैं। शहर के करीब 200 कारीगर इस काम से जुड़े हैं और इससे हर साल करीब 11 करोड़ रुपए का कारोबार होने का अनुमान है। इन कलाकृतियों की मांग फ्रांस, स्पेन और दुबई जैसे देशों तक पहुंच रही है। मजबूत पत्थर में बारीक डिजाइन करना आसान राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा के अनुसार, ग्वालियर के पत्थर की खासियत इसकी मजबूती और बारीक रेशा है। यह पत्थर पानी कम सोखता है, जिससे इससे बनी मूर्तियां लंबे समय तक सुरक्षित रहती हैं। पत्थर में बारीक रेशे होने के कारण कारीगर मूर्तियों में जेवर, चेहरे की भाव-भंगिमा और दूसरे बारीक डिजाइन साफ तरीके से उकेर पाते हैं। ऐतिहासिक धरोहरों में भी दिखती है पत्थर की मजबूती दीपक विश्वकर्मा के मुताबिक, ग्वालियर के पत्थर की मजबूती का प्रमाण यहां की ऐतिहासिक धरोहरों में भी मिलता है। तानसेन का मकबरा, ग्वालियर किला और मोती-महल की बारीक जालियां इसकी मजबूती को दिखाती हैं। पड़ावली और मितावली के प्राचीन मंदिरों की मूर्तियां भी सैकड़ों-हजारों साल बाद सुरक्षित हैं। ये इस पत्थर के टिकाऊपन का उदाहरण हैं। फाइबर की मूर्तियों के बीच पत्थर की मांग बरकरार फाइबर की मूर्तियों का चलन बढ़ने के बावजूद पत्थर की प्रतिमाओं की मांग कम नहीं हुई है। फाइन डिटेलिंग और मजबूती के कारण कई जगहों पर इनकी मांग बनी हुई है। कारीगरों को विदेशों से भी लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं। फ्रांस में महाराजा रंजीत सिंह की प्रतिमा और पेरिस के 'मेट्रो गाइड' रोड स्टेशन पर प्रदर्शित कलाकृतियां ग्वालियर की मूर्तिशिल्प कला की विदेशों तक पहुंच का उदाहरण हैं।
हर किसी को घूमने-फिरने का शौक होता है और विदेश तो हर कोई जाना चाहता है। खासकर स्विट्जरलैंड जैसी खूबसूरत जगह, जहां बर्फ से ढके पहाड़, खूबसूरत नजारे, हरे-भरे मैदान देखने को मिलते हैं। लेकिन यहां जाना हर किसी के बस की बात नहीं होती है। होटल, फ्लाइट, खाना-पीना, घूमने आदि का खर्च लाखों में पहुंच जाता है। इस कारण कई लोगों का यह सपना अधूरा रह जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत में ऐसी कुछ जगहें हैं, जिनको देखकर आपको यूरोप वाली फीलिंग आएगी। इन जगहों पर आपको खूबसूरत लेक्स, बर्फीले पहाड़, हसीन वादियां और कलरफुल फ्लावर्स देखने को मिलेंगी। ऐसे में अगर आपका बजट कम है और ऐसी जगहों को एक्सप्लोर करना चाहती हैं, तो आपको ऐसा महसूस होगा कि आप स्विट्जरलैंड पहुंच गई हैं। इसे भी पढ़ें: Long Weekend Travel Plan: अगस्त की छुट्टियों में Udaipur और Coorg की हरियाली और Monsoon नजारों का उठाएं लुत्फ खज्जियार ज्यादातर लोग खज्जियार को भारत का 'मिनी स्विट्जरलैंड' कहते हैं। हिमाचल के चंबा में स्थित यह जगह हरी-भरी घास, देवदार के घने जंगलों और खूबसूरत मैदानों के लिए जानी जाती है। यहां का खज्जियार लेक वालर एरिया देखने में किसी यूरोपियन पोस्टकार्ड जैसा लगता है। मॉनसून और गर्मियों में यहां की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। अगर आप भी प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद करती हैं, तो आपको खज्जियार आना चाहिए। युमथांग वैली सिक्किम की युमथांग वैली को वैली ऑफ फ्लावर्स भी कहा जाता है। यह जगह स्विट्जरलैंड जैसी लगती है। यहां पर दूर-दूर तक फैले फूलों के मैदान, सुंदर नदियां, बर्फ से ढके पहाड़ किसी यूरोपियन देश वाला फील देती हैं। गर्मियों में यहां रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं। जिससे पूरी वैली बेहद खूबसूरत दिखाई देती है। ऐसे में अगर आपको फोटोग्राफी का शौक है, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए। गुलमर्ग माना जाता है कि अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है, तो वह कश्मीर है। यहां के गुलमर्ग की गिनती भारत के सबसे खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस में होती है। गुलमर्ग के बेहद खूबसूरत पहाड़, हरे-भरे घास के मैदान और ठंडी वादियां यहां आने वाले पर्यटकों को स्विट्जरलैंड की याद दिलाती हैं। गर्मियों में यहां की हरियाली और फूलों से भरे मैदान देखने लायक होते हैं। मुनस्यारी अगर आप किसी शांत जगह पर स्विट्जरलैंड वाला फील लेना चाहती हैं। तो आप मुनस्यारी जा सकती हैं। यह जगह अपने शांत वातावरण के लिए जानी जाती है। अगर आपको भी प्रकृति के बीच सुकून भरे पल बिताना चाहती हैं, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए।
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