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पाली के निशित ने यूरोप में सिल्वर मेडल:अंतरराष्ट्रीय बायोलॉजी ओलंपियाड में भारत ने जीते चार पदक, 78 देशों के 307 स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया

पाली शहर के सुभाष नगर निवासी स्टूडेंट निशित कालानी ने यूरोप के लिथुआनिया की राजधानी विलनियस में हुए 37वें अंतरराष्ट्रीय बायोलॉजी ओलंपियाड (IBO-2026) में रजत पदक जीता है। प्रतियोगिता 12 से 19 जुलाई तक हुई, जिसमें 78 देशों के 307 स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया। भारतीय टीम ने इस प्रतियोगिता में एक स्वर्ण और तीन रजत पदक जीते। निशित की इस उपलब्धि से पाली जिले के साथ पूरे देश का नाम रोशन हुआ है। भारत ने जीते चार पदक भारतीय टीम ने अंतरराष्ट्रीय बायोलॉजी ओलंपियाड (IBO-2026) में शानदार प्रदर्शन किया। भारत की ओर से भाव्या गुणवाल ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि सोमिल, अनमोल और पाली के निशित कालानी ने रजत पदक अपने नाम किए। दो चरणों में हुई परीक्षा ओलंपियाड में स्टूडेंट्स को छह घंटे के प्रैक्टिकल लैब सेशन से गुजरना पड़ा। इसमें आणविक जीवविज्ञान, जैव रसायन, पशु शरीर क्रिया विज्ञान, पशु आकारिकी एवं वर्गीकरण और पादप जीवविज्ञान जैसे विषय शामिल थे। इसके अलावा छह घंटे की रिसर्च आधारित थ्योरी परीक्षा भी हुई। प्रतियोगिता में कुल 31 स्वर्ण, 61 रजत और 91 कांस्य पदक दिए गए। पहले भी जीत चुके हैं अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक पाली के सुभाष नगर निवासी निशित कालानी के पिता विकास कालानी चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) हैं, जबकि उनकी माता नीलम जाजू एक स्कूल प्राचार्य हैं। निशित इससे पहले साल 2025 में रोमानिया में हुए इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स ओलंपियाड में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। उस प्रतियोगिता में भी उन्होंने भारत का नाम रोशन किया था। निशित कालानी की इस उपलब्धि पर पाली जिले में खुशी है। शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और शहरवासियों ने उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

दैनिक भास्कर 19 Jul 2026 4:56 pm

इंगलैंड ने फ्रांस को 6-4 से हराकर जीता FIFA World Cup का ब्रोंज मेडल

बुकायो साका की हैट्रिक की बदौलत इंग्लैंड ने फीफा विश्वकप 2026 के कांस्य पदक मुकाबले में फ्रांस को 6-4 से हराकर तीसरा स्थान हासिल किया।मियामी स्टेडियम में शनिवार रात खेले गये मुकाबले के शुरुआती 20 मिनट में डेकलन राइस और एजरी कॉन्सा ने इंग्लैंड को बढ़त दिलाई। इसके बाद साका ने दो गोल कर टीम का स्कोर 4-0 से कर दिया। डेकलन राइस ने तीसरे मिनट, एजरी कॉन्सा ने 18वें तथा साका ने 37वें और स्टॉपेज समय में गोल दागे। दूसरे हाफ में फ्रांस ने तीन गोल कर वापसी की और बराबरी करने के कई आसान अवसर भी बनाए, लेकिन उन्हें भुना नहीं सका। किलियन एमबापे ने पहला गोल (44) मिनट और 66वें मिनट में अपना दूसरा गोल किया। इन दो गोलों के बीच ब्रैडली बारकोला (54वें मिनट) गोल किया। इन दो गोलों की बदौलत एमबापे 2026 विश्वकप के गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे पहुंच गए। वह विश्व कप इतिहास में 22 गोल के साथ लियोनेल मेसी को पछाड़ते हुए सबसे अधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बन गये है। फ्रांस के लिए बराबरी करने का एक शानदार मौका माइकल ओलिस के पास था, लेकिन उनका शॉट लक्ष्य से चूक गया। और यह चूक इंग्लैंड के लिए महंगी साबित हुई क्योंकि इंग्लैंड ने दूसरी तरफ से हमला किया और पेनल्टी हासिल की, जिस पर साका ने पेनल्टी से अपनी हैट्रिक पूरी। डायोट उपामेकानो के शानदार पास के बाद फ्रांस के चौथे गोल के साथ उस्मान डेम्बेले ने मैच के अंतिम क्षणों में इंग्लैंड को चिंता में डाल दिया । मैच के अंतिम क्षणों में जूड बेलिंगहैम ने 98वें मिनट में निर्णायक गोल करके इंग्लैंड को 1966 के बाद से विश्व कप में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में मदद की। विश्व कप में इंग्लैंड का पिछले 60 साल में यह सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा। 1966 में इंग्लैंड ने विश्व कप का खिताब जीता था।

वेब दुनिया 19 Jul 2026 3:24 pm

साका की हैट्रिक से फुटबॉल वर्ल्डकप में ब्रॉन्ज जीता इंग्लैंड:फ्रांस हारा; एम्बाप्पे गोल्डन बूट की रेस में मेसी से आगे निकले, 2 गोल किए

इंग्लैंड ने फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 के तीसरे स्थान के मैच में फ्रांस को 6-4 से हराकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इंग्लैंड ने वर्ल्ड कप इतिहास में अपना दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। टीम 1966 में चैंपियन बनी थी। इंग्लैंड की जीत के हीरो बुकायो साका रहे, जिन्होंने हैट्रिक लगाई। वहीं, फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे ने दो गोल करके गोल्डन बूट की रेस में मेसी को पीछे छोड़ दिया। उनके 10 गोल हो गए हैं, जबकि मेसी के 8 गोल हैं। इतना ही नहीं, वे वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बने। उनके नाम अब 22 विश्व कप गोल हो गए हैं, जबकि लियोनेल मेसी के 21 गोल हैं। हालांकि, आज देर रात होने वाले वर्ल्ड कप फाइनल में मेसी के पास वापसी करने का मौका है। मैच में खास तीसरे मिनट में पहला गोल आया इंग्लैंड ने मुकाबले की शुरुआत से ही दबदबा बनाया। तीसरे मिनट में डेक्लान राइस ने पहला गोल किया, जबकि 18वें मिनट में एजरी कॉन्सा ने बढ़त 2-0 कर दी। साका ने 37वें मिनट और पहले हाफ के इंजरी टाइम में गोल कर इंग्लैंड को हाफ टाइम तक 4-0 की मजबूत बढ़त दिला दी। एम्बाप्पे ने दूसरे हाफ में 2 गोल दागेदूसरे हाफ में फ्रांस ने वापसी की कोशिश की। एम्बाप्पे ने 48वें मिनट में पहला गोल किया। 54वें मिनट में ब्रैडली बारकोला ने स्कोर 4-2 किया और 66वें मिनट में एम्बाप्पे ने अपना दूसरा गोल कर अंतर सिर्फ एक गोल का कर दिया। पेनल्टी पर गोल से साका की हैट्रिक 87वें मिनट में मिले पेनाल्टी को गोल में बदलकर साका ने अपनी हैट्रिक पूरी की और इंग्लैंड को राहत दिलाई। इंजरी टाइम में उस्मान डेम्बेले ने फ्रांस के लिए गोल किया, लेकिन इसके तुरंत बाद जूड बेलिंगहम ने गोल कर इंग्लैंड की 6-4 की जीत तय कर दी। ----------------------------------------------

दैनिक भास्कर 19 Jul 2026 6:28 am

वर्ल्ड कप फाइनल में 12वीं बार यूरोप Vs लैटिन अमेरिका:अर्जेंटीना जीता तो 64 साल बाद कोई टीम लगातार दो खिताब जीतेगी

फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला देर रात स्पेन और अर्जेंटीना के बीच खेला जाएगा। टूर्नामेंट के 96 साल के इतिहास में यह 23वां फाइनल होगा। 12वीं बार फाइनल मुकाबला यूरोप और लैटिन अमेरिका की टीम के बीच होने जा रहा है। इससे पहले इन दोनों महाद्वीपों की टीमों के बीच हुए 11 फाइनल में 8 बार लैटिन अमेरिकी टीमों ने खिताब जीता। यूरोप की टीम 3 बार ही टाइटल जीत पाई। इतिहास का एक और पहलू अर्जेंटीना के फेवर में है। इससे पहले यूरोप के बाहर 11 वर्ल्ड कप हुए। इनमें से 9 बार लैटिन अमेरिकी टीम चैंपियन बनी। यूरोप की टीमें सिर्फ दो बार ही खिताब जीत पाई।हालांकि, इससे स्पेन का दावा कमजोर नहीं होता। यूरोप की जिन दो टीमों ने यूरोप से बाहर वर्ल्ड कप जीता उसमें एक स्पेन भी है। स्पेन ने 2010 में साउथ अफ्रीका में हुए वर्ल्ड कप में खिताब जीता था। वर्ल्ड कप फाइनल से जुड़े 5 रोचक फैक्ट्स 1. वर्ल्ड कप की ट्रॉफी सिर्फ दो महाद्वीपों में बंटी 1930 से 2022 तक खेले गए 22 वर्ल्ड कप में सिर्फ यूरोप और लैटिन अमेरिका की टीमें ही चैंपियन बनी हैं। यूरोप ने पांच देशों के दम पर 12 और लैटिन अमेरिका ने तीन देशों के दम पर 10 खिताब जीते हैं। यानी 96 साल में कोई एशियाई, अफ्रीकी या उत्तरी अमेरिकी टीम वर्ल्ड चैंपियन नहीं बन सकी। 2. यूरोप के बाहर वर्ल्ड कप... तो लैटिन अमेरिका का दबदबा यूरोप के बाहर अब तक 11 वर्ल्ड कप हुए हैं। इनमें 9 बार लैटिन अमेरिकी और सिर्फ 2 बार यूरोपीय टीम चैंपियन बनी है। स्पेन (2010) और जर्मनी (2014) ही यूरोप की ऐसी टीमें हैं जिन्होंने यूरोप के बाहर हुए वर्ल्ड कप में खिताब जीता है। 3. अर्जेंटीना के पास 64 साल पुराना रिकॉर्ड दोहराने का मौका अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार विश्व कप जीतने से सिर्फ एक कदम दूर है। टीम ने 2022 में कतर में तीसरा वर्ल्ड कप जीता था। अगर वह न्यू जर्सी में स्पेन को हराकर खिताब बचाने में सफल रहती है, तो 1962 के बाद लगातार दो वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली टीम बन जाएगी। अब तक सिर्फ दो देशों ने अपने विश्व कप खिताब का सफल बचाव किया है। इटली ने 1934 और 1938, जबकि ब्राजील ने 1958 और 1962 में लगातार दो बार ट्रॉफी जीती थी। 4. स्पेन ने पहला वर्ल्ड कप यूरोप के बाहर ही जीता था स्पेन ने अपना इकलौता वर्ल्ड कप 2010 में साउथ अफ्रीका में जीता था। अब उसके सामने दूसरी ट्रॉफी जीतने के साथ-साथ गैर-यूरोपीय धरती पर लैटिन अमेरिका के लंबे वर्चस्व को चुनौती देने का मौका है। स्पेन का वर्ल्ड कप सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2010 के खिताब के बाद टीम 2014, 2018 और 2022 में नॉकआउट से आगे नहीं बढ़ सकी। वहीं अर्जेंटीना पिछले चार वर्ल्ड कप में तीन बार सेमीफाइनल और दो बार फाइनल खेल चुका है। 5. फाइनल के आंकड़े किसके पक्ष में? वर्ल्ड कप इतिहास में यूरोप और लैटिन अमेरिका की टीमें 11 बार फाइनल में आमने-सामने आई हैं। इनमें लैटिन अमेरिका ने 8 और यूरोप ने 3 बार जीत दर्ज की है। जर्मनी सबसे ज्यादा 8 फाइनल खेलने वाली टीम है, लेकिन सबसे सफल टीम ब्राजील है, जिसने सात फाइनल में पांच बार ट्रॉफी जीती। अर्जेंटीना 2026 का फाइनल खेलते ही सातवीं बार खिताबी मुकाबले में उतरेगा।

दैनिक भास्कर 19 Jul 2026 5:38 am

निर्वस्त्र डांस और शराब पिलाकर फौजी अफसरों की जासूसी:80 हजार सैनिक मारे गए, फ्रांस ने मौत की सजा दी; माता हारी पार्ट-2

भास्कर सीरीज ‘स्पाई फाइल्स’ में आप पढ़ रहे हैं- ‘जासूस माता हारी’ की कहानी। पार्ट-1 में आपने पढ़ा- 15 अक्टूबर 1917 को फ्रांसिसी सैनिकों ने एक साथ 12 गोलियां मारकर एक महिला को मौत की सजा दी। मौत से पहले महिला ने खास श्रृंगार किया। चिट्ठियां लिखीं- बेटी और प्रेमी को। फिर गोली मारने जा रहे सैनिकों को फ्लाइंग किस का इशारा किया। ये महिला थी- माता हारी। दुनिया की वो खूबसूरत जासूस, जो डांस करते-करते निर्वस्त्र हो जाती थी। यूरोप के तमाम फौजी अफसर, सेना के जनरल और नेता इस महिला के दीवाने थे। इसके एक-एक शो का खर्च करोड़ों में था। माता हारी की जासूसी से कैसे फ्रांस के 80 हजार सैनिक मारे गए…जानते हैं पार्ट-2 में… 1905 की एक शाम। फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक आलीशान बंगला। हॉल में हल्की रोशनी, हवा में घुली इत्र और शराब की खुशबू। संगीत बज रहा था। माता हारी नृत्य कर रही थी। जैसे-जैसे धुन चढ़ती जा रही थी, वो नाचते हुए एक-एक करके अपने कपड़े उतारती जा रही थी। वहां मौजूद लोग अपनी सांसें रोके ये सब देख रहे थे। डांस के आखिरी क्लाइमेक्स पर पहुंचकर माता हारी ने सारे कपड़े उतार दिए। शरीर पर बस कुछ गहने बचे थे। अब वो थिरकते-थिरकते मंच पर रखी शिव की एक मूर्ति के पास पहुंची। हाथ जोड़े और अपनी एड़ियों के बल बैठ गई। तभी हॉल का दरवाजा खुला। शहर के चार-पांच रसूखदार लोग अंदर दाखिल हुए। उनके चेहरे पर गुस्सा था। एक ने चीखते हुए कहा- ‘बंद करो ये अपना फूहड़ डांस। तुम अश्लीलता फैला रही हो।’ तभी दूसरे शख्स ने कहा- ‘इसे पुलिस के हवाले कर दो।’ माता हारी धबरा गई। उसने फर्श पर गिरा रेशमी कपड़ा उठाया और खुद को ढंकते हुए धीरे से बोली- ‘रुक जाइए, प्लीज। मैं कोई अश्लीलता नहीं फैला रही हूं।’ उस शख्स ने गुस्से में कहा- ‘इस तरह सरेआम कपड़े उतारना अश्लीलता नहीं है, तो क्या है?’ माता हारी धीरे से बोली- ‘यह पवित्र आर्ट है। ईश्वर को खुश करने की कला। मैं खुद को उन्हें समर्पित कर रही हूं।’ वो आदमी जोर से चिल्लाया- ‘नाटक बंद करो। हमने पूरे पेरिस में ऐसा नृत्य नहीं देखा।’ माता हारी फर्श पर घुटनों के बल बैठ गई। हाथ जोड़ लिए। फिर बोली- ‘मेरी छोटी सी कहानी सुन लीजिए, फिर जो चाहे सजा दे दीजिएगा।’ लोग कानाफूसी करने लगे। तभी एक अधेड़ बोल पड़ा- ‘इसकी कहानी सुनने में क्या हर्ज है? सुनाओ।’ माता हारी ने आंसू पोंछे। गहरी सांस लेकर बताना शुरू किया- ‘मेरा जन्म भारत के एक दक्षिणी राज्य में हुआ था। मां एक मंदिर में देवदासी थी। बचपन में उनकी शादी मंदिर के देवता कंडास्वामी से करा दी गई। वो भगवान की सेवा करती और उनके सामने यही नृत्य करती थी। जब वो 14 साल की थी, तब मेरा जन्म हुआ, लेकिन मैं मां का मुंह भी नहीं देख पाई। उसी रोज उनकी मौत हो गई। पुजारियों ने मुझे गोद ले लिया। उन्होंने ही मुझे पाला और मां वाला पवित्र नृत्य सिखाया। 13 साल की उम्र में मैंने पहली बार कंडास्वामी के सामने अपने वस्त्र उतारकर नृत्य किया। उसके बाद से यह मेरी दिनचर्या बन गया।’ अब माता हारी चुपचाप खड़ी हो गई। हॉल में सन्नाटा था। तभी एक शख्स ने पूछा- ‘लेकिन तुम भारत से पेरिस कैसे आ गई?’ माता हारी ने उदासीभर मन से कहा- 'वो मंदिर दुनिया में मशहूर है। उस रोज एक ब्रिटिश अफसर आया था। मंदिर में भीड़ नहीं थी। वह मंदिर के बारे में जानना चाहता था। पुजारी ने भी सहजता से उसे गर्भगृह के पास जाने की इजाजत दे दी। उस वक्त मैं श्रृंगार करके भगवान के सामने नृत्य में कर रही थी। वह चुपचाप आया और एक कोने में बैठकर मुझे देखने लगा। नृत्य खत्म होने के बाद अपने कपड़े समेटकर जैसे ही मैं आगे बढ़ी, वह सामने खड़ा था। उसने कहा- ‘तुम अद्भुत हो। आजतक मैंने ऐसा नृत्य नहीं देखा।’ मैंने उससे कुछ कहा नहीं और अपने कमरे की तरफ चली गई। उस दिन के बाद वह लगातार एक हफ्ते तक आता रहा। धीरे-धीरे हमारे बीच बातें होने लगीं... फिर हमें प्यार हो गया। एक रात... वह मौका पाकर मुझे उस मंदिर से भगा ले गया। हमने शादी कर ली।’ अब माता हारी की आंखों में आंसू थे। वो थोड़ा रुकी और फिर बोलना शुरू किया- ‘मेरी किस्मत खराब थी। शादी के कुछ साल बाद ही वो आदमी मुझे छोड़कर कहीं और चला गया। मैंने कुछ महीने उसका इंतजार किया, लेकिन वो नहीं लौटा। मेरे पास जिंदा रहने का कोई और जरिया नहीं था। तब सोचा... क्यों न मैं अपनी उसी पवित्र कला को दोबारा शुरू करूं।’ माता हारी की कहानी सुनने के बाद वो रसूखदार शख्स आगे बढ़ा। माता हारी को सहारा देकर उठाया और कहा- ‘हम सब आपके साथ हैं। आप इस कला को जारी रखिए।’ यहां से माता हारी का सफर चल पड़ा। वो इतनी मशहूर हो गई कि महंगी सिगरेट के पैकेट और शराब की बोतलों पर उसकी फोटो और नाम छपने लगा। नीदरलैंड्स के फ्राइज म्यूजियम की रिपोर्ट के मुताबिक, उस दौर में माता हारी एक शो के लिए आज के हिसाब से करीब चालीस लाख रुपए लेती थी। एक फ्रांसीसी बैंकर ने तो उसके लिए आलीशान महल और बड़ा विला किराए पर ले रखा था। उसके एक प्रेमी ने विदाई के तोहफे के तौर पर इतनी बड़ी रकम दी, जो आज के 9 करोड़ रुपए के बराबर है। हालांकि, माता हारी पैसे बचा नहीं पाती थी। वह जितना कमाती, उतना ही अपनी विलासिता पर उड़ा भी देती थी। 1907 की बात है। माता हारी जर्मनी की राजधानी बर्लिन में शो कर रही थी। हॉल खचाखच भरा था। तभी बर्लिन पुलिस चीफ हेर वॉन जागो रिवॉल्वर लिए अंदर दाखिल हुए। उनके साथ चार और पुलिस वाले थे। पुलिस चीफ सीधे मंच पर चढ़े। संगीत रुक गया। माता हारी के कदम पीछे की ओर हटने लगे। पुलिस चीफ ने चिल्लाते हुए कहा- ‘जर्मनी में इस तरह के लिबास में डांस करना अपराध है। मुझे तुम्हारे कपड़ों की जांच करनी है।’ पुलिस चीफ के इशारे पर सिपाहियों ने माता हारी को घेर लिया। वे उसे मंच के कोने में बने एक बंद कमरे में ले गए। दरवाजा बंद होते ही माता हारी ने वही पुरानी देवदासी वाली कहानी दोहरानी शुरू कर दी। पुलिस चीफ ने उसे डांटते हुए कहा- ‘बनावटी कहानी मत सुनाओ। तुम्हारा असली ठिकाना जेल है। वहीं पर अपनी परफॉर्मेंस दिखाना।’ माता हारी ने पुलिस चीफ की तरफ देखा। धीरे से उनका हाथ पकड़ा और कान में कुछ फुसफुसाई। पुलिस चीफ मुस्कुराने लगे। उन्होंने पुलिस से कहा- ‘छोड़ दो इसे। सबसे सामने गिरफ्तार करना ठीक नहीं है। हम फिर आएंगे।’ कुछ दिन बाद माता हारी को बर्लिन के सबसे महंगे इलाके में एक अपार्टमेंट मिल गया। इसकी देखरेख, नौकरों की तनख्वाह और रखरखाव का पूरा खर्च जर्मन सरकार का खुफिया विभाग उठाता था। वहां काम करने वाले नौकर जर्मन पुलिस के जासूस थे। एक रोज एक विदेशी जनरल बर्लिन पहुंचा। किसी ने उसे माता हारी के बारे में बताया, तो वो सीधे मिलने पहुंच गया। रात के करीब 10 बज रहे थे। जनरल नशे में धुत था। माता हारी उसका हाथ पकड़कर बेडरूम में ले गई। अपने हाथों से जाम पिलाने लगी। इधर, दो नौकर पर्दे के पीछे छिपकर सबकुछ देख रहे थे। विदेशी जनरल ने लड़खड़ाती जुबान में कहा- ‘तुम सच में एक अप्सरा हो। तुम्हारे लिए मैं सबकुछ दांव पर लगा सकता हूं।’ माता हारी ने धीमे से कहा- ‘जनरल साहब। आप जैसे मर्द जब मोर्चे पर होते हैं, तो हम औरतें सलामती की दुआ करती हैं। वैसे, सुना है आपकी फौज अगले महीने उत्तर की तरफ कूच कर रही है? आप मुझे छोड़ कर चले जाएंगे?’ नशे में डूबे जनरल ने कहा- ‘अरे नहीं… उत्तर तो बस दिखावा है। हमारी असली फौज तो पूरब की तरफ कूच करने वाली है।’ कमरे में लगा सीक्रेट कैमरा, जनरल की हरकतों को कैद कर रहा था। पर्दे के पीछे खड़े नौकर डायरी में उसकी बातें नोट कर रहे थे। माता हारी, जनरल के और करीब आ गई। ग्लास में शराब भरते हुए बोली- ‘तो फिर एक जाम और हो जाए…’ जनरल पहले ही बहुत पी चुका था। एक-दो घूंट बाद वह बेसुध पड़ गया। माता हारी ने उसकी जेब से दस्तावेज निकाले, डायरी पर कुछ नोट किया और फिर सबकुछ जस का तस रखकर वहां से चली गई। धीरे-धीरे माता हारी के लिए यह सब रोज की बात हो गई। जर्मन पुलिस उसके जरिए बड़े-बड़े रसूखदारों और विदेशी मेहमानों की जासूसी करवाने लगी। माता हारी को भी इस काम में मजा आने लगा था। 1910 में जर्मन अफसरों को लगा कि माता हारी को प्रोफेशनल ट्रेनिंग देना चाहिए। पैसों के लिए माता हारी राजी भी हो गई। उसे जर्मनी के लोराख इलाके में भेजा गया, जहां सरकार जासूसों के लिए ट्रेनिंग स्कूल चलाती थी। माता हारी को कोड वर्ड समझना, सीक्रेट मैसेज लिखना, नक्शे पढ़ना और पुरुषों को मनोवैज्ञानिक तरीके से वश में करने का कोर्स करवाया गया। ट्रेनिंग के बाद माता हारी ने कई फौजी अफसरों और नेताओं की जासूसी की। इससे जर्मनी पुलिस को कई अहम डिटेल्स मिलीं। अब तो माता हारी अपने मेहमानों की निजी तस्वीरें और दस्तावेजों की फोटो खींचकर रखने लगी थी। कुछ साल यह सब चलता रहा। माता हारी को पैसे और महंगे-महंगे तोहफे भी मिलते रहे। इसी बीच 28 जून 1914 को कुछ चरमपंथियों ने सर्बिया में ऑस्ट्रिया के राजकुमार और उनकी पत्नी की हत्या कर दी। ऑस्ट्रिया ने इसके लिए सीधे तौर पर सर्बिया को जिम्मेदार माना। जल्द ही दो देशों की ये लड़ाई प्रथम विश्वयुद्ध में बदल गई। एक तरफ फ्रांस, रूस और ब्रिटेन जैसे मित्र राष्ट्र थे, तो दूसरी तरफ जर्मनी, ऑस्ट्रिया और हंगरी जैसी केंद्रीय शक्तियां। इसी दौरान फ्रांस और रूस के बीच एक गोपनीय समझौता हुआ। इस समझौते के मसौदे को बर्लिन से होते हुए पेरिस ले जाना था। एक रूसी एजेंट मसौदा लेकर बर्लिन पहुंचा। वह एक आलीशान होटल में ठहरा हुआ था। वहां मौजूद रूसी एंबेसी के अफसर उसकी सीक्रेसी का खासा ध्यान रखे हुए थे, लेकिन जर्मनी के एजेंटों को इसकी भनक लग गई। जर्मनी के एजेंटों ने उस होटल में माता हारी को डांसर बनाकर भेज दिया। रूसी एजेंट ने माता हारी का नाम और तारीफें सुन रखी थी। उसे जैसे यह बात पता चली, फौरन रिसेप्शन में फोन लगा दिया। उसने कहा- ‘मुझे पूरी रात के लिए माता हारी चाहिए। जितने पैसे चाहिए मिल जाएंगे।’ थोड़ी देर बाद माता हारी उसके साथ कमरे थी। दोनों बैठकर शराब पी रहे थे। तभी वेटर ने दरवाजा खटखटाया। उसने रूसी एजेंट से कहा- ‘मैंने आपका सामान रख दिया है। मुझे कुछ सामानों की लिस्ट बनानी है। क्या आपका पेन मिल सकता है?’ रूसी एजेंट हिचकिचाया, फिर माता हारी की तरफ देखते हुए अपनी जैकेट से पेन निलाकर वेटर को दे दिया। वेटर ने एक पेपर पर कुछ लिखा और पेन रूसी एजेंट को वापस कर दिया। वेटर के जाने के बाद माता हारी ने रूसी एजेंट को इतनी शराब पिलाई गई कि वह अपना होश खो बैठा। जर्मनी के जासूस इसी मौके की तलाश में थे। उन लोगों ने रूसी एजेंट के कपड़ों और सूटकेस में मिले दस्तावेजों की फोट खींची और चुपचाप बाहर निकल गए। सुबह जब रूसी एजेंट की आंख खुली, तो उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था। कमरे में सामान बिखरा पड़ा था। घबराकर उसने जेब में हाथ डाला। उसका पेन सुरक्षित था। उसने राहत की सांस ली, पर अंदर से उसे किसी अनहोनी का डर सता रहा था। उसने बैग पैक किया और वहां से निकल गया। इधर, जर्मनी के खुफिया विभाग में हंगामा मचा था। पुलिस चीफ, अफसरों को डांट रहे थे- 'तुम लोगों ने 100 तस्वीरें खींची है, लेकिन कोई भी तस्वीर उस मसौदे से जुड़ी नहीं है। वो मसौदा गया कहां?’ जर्मनी के एजेंटों के पास इसका जवाब नहीं था। अगले दिन रूसी जासूस बेल्जियम पहुंच चुका था। एक रात वो फिल्म देखकर होटल लौट रहा था, तभी गली में एक शख्स ने उसका रास्ता रोक लिया। जासूस ने फौरन पिस्तौल निकाल ली, तभी वो शख्स बोल पड़ा- ‘सर, मैं वो वेटर हूं, जिसने बर्लिन में आपका पेन लिया था। मेरा पेन भी हुबहू वैसा ही है। गलती से मैंने अपना पेन आपको दे दिया।’ रूसी जासूस ने गाली देते हुए कहा- ‘यह क्या बकवास है?’ वेटर ने आराम से कहा- ‘सर, ये पेन लीजिए। इसके निचले हिस्से में सीक्रेट मसौदा अभी भी सुरक्षित है। जर्मनी के जासूसों से मैंने इसे बचा लिया।' रूसी जासूस ने हकलाते हुए कहा- ‘लेकिन... तुम तो जर्मनी के हो?’ वेटर हंसने लगा। असल में वो वेटर फ्रांस का जासूस था। उसने जर्मनी पुलिस के सामने दस्तावेज ढूंढने का नाटक किया, लेकिन चुपके से पूरे दस्तावेज की तस्वीरें खींचकर फ्रांस भेज दिया था। अब तारीख आई 3 अगस्त 1914, जर्मनी ने फ्रांस के खिलाफ जंग का एलान कर दिया। तब माता हारी बर्लिन के एक होटल में पुलिस चीफ हेर वॉन जागो के साथ थी। होटल में बड़े-बड़े फौजी अफसर ठहरे हुए थे। जंग के माहौल में अपने फौजियों की एक झलक पाने के लिए भीड़ ने होटल को बाहर से घेर लिया था। देशभक्ति नारे लग रहे थे। तभी पुलिस चीफ, माता हारी का हाथ पकड़कर होटल से बाहर निकले। भीड़ ने उनका जोरदार स्वागत किया। पुलिस चीफ ने माता हारी को कार में बैठाकर पूरा बर्लिन घूमाया। इसी दौरान फ्रांस के जासूसों की नजर माता हारी पर पड़ी। उन्हें पता चल गया कि यह महिला जर्मनी पुलिस की करीबी है। इधर, युद्ध के कुछ ही महीने के भीतर यूरोप के हालात बदल गए। थिएटरों पर ताले लटक गए। जर्मन सरकार ने माता हारी को शत्रु देश फ्रांस का नागरिक घोषित कर दिया। उसकी सारी संपत्ति और महंगे गहने जब्त कर लिए। माता हारी को धक्का लगा। वह जिस देश के लिए जासूसी कर रही थी, उसी ने उसे रातों-रात कंगाल बना दिया। कुछ दिनों बाद जैसे-तैसे करके वो हॉलैंड पहुंची। वहां फिर से अपना मशहूर नृत्य करना शुरू किया, लेकिन पहले की तरह जादू नहीं रहा। माता हारी की ढलती उम्र इसकी बड़ी वजह थी। उन दिनों हॉलैंड, जर्मनी के खुफिया नेटवर्क का प्रमुख केंद्र था। जर्मनी की खुफिया विभाग को ऐसे मोहरों की जरूरत थी, जो बिना रोक-टोक के मित्र राष्ट्र देशों में आ-जा सकें। माता हारी इसके लिए मुफीद थी, क्योंकि उसके पास हॉलैंड का पासपोर्ट था और पेरिस के ऊंचे हलकों में संबंध। हॉलैंड में तैनात जर्मन खुफिया अफसर कार्ल क्रामर ने एक रोज माता हारी को अपने दफ्तर बुलाया। जब माता हारी, क्रामर के पास पहुंची, तो वह एक नक्शे पर गोल घेरा बना रहा था। उसने माता हारी को कुर्सी पर बैठने का इशारा किया। क्रामर ने कहा- ‘तुम्हें फौरन पेरिस जाना होगा।’ माता हारी- ‘पेरिस? वहां क्यों जाना है?’ क्रामर ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘वही काम , जो तुम सबसे बेहतर जानती हो। पेरिस जाओ, वहां के मंत्रियों और फौजी अफसरों से नजदीकियां बढ़ाओ।’ माता हारी झट से बोल पडी- ‘अब मैं जासूसी के बदले सौदा करूंगी। मुझे 10 हजार फ्रैंक चाहिए। बोलो मंजूर है?’ क्रामर ने अपनी दराज खोला और नोटों की एक गड्डी माता हारी की तरफ सरकाते हुए कहा- ‘तुम्हें 20 हजार फ्रैंक मिलेंगे।’ 20 हजार फ्रैंक, यानी आज के हिसाब से करीब 23 लाख रुपए। माता हारी ने क्रामर की तरफ फ्लाइंग किस उछालते हुए कहा- ‘समझो तुम्हारा काम हो गया।’ क्रामर ने माता हारी को अदृश्य स्याही की तीन शीशियां दीं। साथ में एक पर्ची। जिस पर लिखा था- H21. ये कोड वर्ड में माता हारी का नाम था। पहले विश्व युद्ध में कैप्टन व्लादिमीर मौरोव नाम का एक रूसी पायलट फ्रांस की तरफ से लड़ रहा था। एक रोज उसकी मुलाकात माता हारी से हुई। धीरे-धीरे उनका मिलना-जुलना बढ़ने लगा और फिर माता हारी को उससे प्यार हो गया। इसी बीच एक रोज कैप्टन मैरोव का विमान क्रैश हो गया। वह गंभीर रूप से घायल हो गया। फेफड़ों में जहरीली गैस भर गई। उसे विटेल के मिलिट्री अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। विटेल प्रतिबंधित इलाका था, लेकिन माता हारी उससे मिलने के लिए बेचैन थी। एक रोज वह परमिशन लेने फ्रांस के खुफिया विभाग पहुंच गई। फ्रांस को पहले से माता हारी पर शक था। वहां मौजूद अफसर ने कहा- ‘हम तुम्हें हॉस्पिटल जाने देंगे, लेकिन बदले में तुम्हें हमारे लिए जासूसी करनी होगी।’ माता हारी ने बिना सोचे समझे कहा- ‘ठीक है, मैं तैयार हूं, लेकिन बदले मुझे दस लाख फ्रैंक चाहिए।' अभी के हिसाब से करीब 11.82 करोड़ रुपए। फ्रांसीसी अफसर इस भारी भरकर रकम पर भी राजी हो गया। इस तरह अब माता हारी डबल एजेंट बन चुकी थी। फ्रांस और जर्मनी दोनों देशों की जासूस। विटेल के उस इलाके में रूसी और फ्रांसीसी पायलटों का आना-जाना आम था। लड़ाई से थक-हारकर आने वाले पायलट माता हारी के साथ वक्त बिताना पसंद करते थे। 1915 के अगस्त महीने की बात है। फ्रांस, जर्मनी पर एक बड़े हमले की तैयारी कर रहा था। माता हारी को इसकी भनक रूसी पायलटों से मिल गई थी, लेकिन तारीख पता नहीं थी। एक रात वेटल के एक होटल में 30-35 साल का रूसी पायलट नशे में धुत्त होकर बेड पर पड़ा था। बगल में लेटी माता हारी चुपचाप बिस्तर से उठी, पायलट की जेब में हाथ डाला। एक छोटा सा कागज मिला, जिस पर कोड वर्ड में कुछ लिखा था। माता हारी ने पायलट की तरफ देखा… वो अब भी गहरी नींद में था। उसने एक पेपर पर वो खुफिया मैसेज नोट किया और लिपस्टिक के डिब्बे के पीछे रखकर ढक्कन बंद कर दिया। 2 दिन बाद… हॉलैंड के एक होटल में जर्मन खुफिया अफसर क्रामर परेशान बैठा था। तभी एक एजेंट हांफते हुए आया। उसने एक सीलबंद लिफाफा देते हुए कहा- ‘इसे H21 ने भेजा है।’ क्रामर ने फौरन लिफाफा खोला। जिस पर लिखा हुआ था- ‘25 सितंबर 1915 को फ्रांस बड़ा हमला करने वाला है।’ क्रामर खुशी से चिल्लाया- ‘फौरन बर्लिन कनेक्ट करो, माता हारी ने अपना काम कर दिया है।’ खुफिया मैसेज के बाद जर्मनी ने चुपचाप उस मोर्चे पर बटालियनों की संख्या 90 से बढ़ाकर 192 कर दी। वहां भारी तोपें और मशीनगनें तैनात कर दी। अब तारीख आई 25 सितंबर 1915, फ्रांसीसी पैदल सेना के हजारों जवान नारा लगाते हुए आगे बढ़े। शुरुआती कुछ चौकियों पर उन्हें कामयाबी मिली, लेकिन जैसे ही वे मुख्य मैदान में पहुंचे, घात लगाकर बैठी जर्मन सेना ने हमला कर दिया। अचानक चारों तरफ से तोपों और मशीनगनों से ऐसा हमला हुआ कि फ्रांसीसी सैनिक संभल नहीं पाए। देखते-देखते लाशों के ढेर लग गए। जंग खत्म हुई तो पता चला कि फ्रांस के 80 हजार सैनिक मारे गए। ये युद्ध बैटल ऑफ लूस नाम से जाना जाता है। हार के बाद फ्रांस का मानना था कि उसके साथ किसी ने गद्दारी की है। 2 साल बाद यानी जनवरी 1917, फ्रांस के जासूसों को एक कोड वर्ड मिला- H21. फ्रांसीसी खुफिया विभाग ने जब कड़ियों को जोड़ा, तो वे दंग रह गए। वह कोड नेम माता हारी का था। 13 फरवरी 1917 को फ्रांस पुलिस ने पेरिस से माता हारी को गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेश किया गया। दोनों तरफ की तमाम दलीलों और जिरहों के बाद कोर्ट ने माता हारी को सरेआम गोली मारकर मृत्युदंड की सजा सुनाई। 15 अक्टूबर 1917 को एक साथ 12 सैनिकों ने गोली मारकर माता हारी को मौत की सजा दे दी। जासूस माता हारी की पहली कड़ी भी पढ़िए : नाचते-नाचते निर्वस्त्र हो जाती थी महिला जासूस:एक साथ 12 गोलियां मारकर मौत की सजा, आखिरी इच्छा में प्रेमी को लिखी चिट्ठी; माता हारी पार्ट-1 रेफरेंस : 1. Mata Hari: Courtesan and Spy : By Major Thomas Coulson 2. Mata Hari's Last Dance: By Michelle Moran 3. Mata Hari, the True Story : By Russell Warren Howe 4. The fatal lover : By Julie Wheelwright 5. The Spy: A Novel of Mata Hari : By Paulo Coelho 6. A Tangled Web: Mata Hari: By Mary W. Craig

दैनिक भास्कर 19 Jul 2026 5:00 am

ब्रॉन्ज के लिए फुटबॉल वर्ल्डकप में फ्रांस Vs इंग्लैंड:2022 क्वार्टर फाइनल के बाद फिर आमने-सामने; एमबाप्पे-केन की गोल्डन बूट पर नजर

2022 वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल के बाद फ्रांस और इंग्लैंड एक बार फिर फुटबॉल वर्ल्ड कप के नॉकआउट मुकाबले में आमने-सामने होंगे। हालांकि दोनों टीमों के बीच तीसरे स्थान (ब्रॉन्ज मेडल) के लिए यह पहली भिड़ंत होगी। मियामी के हार्ड रॉक स्टेडियम में शनिवार देर रात 2:30 बजे से मुकाबला खेला जाएगा। फ्रांस तीसरी बार वर्ल्ड कप का ब्रॉन्ज मेडल जीतने उतरेगा। टीम इससे पहले 1958 और 1986 में तीसरे स्थान पर रही थी। दूसरी ओर इंग्लैंड के पास पहली बार वर्ल्ड कप में तीसरा स्थान हासिल करने का मौका होगा। फ्रांस के कोच दिदिएर डेशां का आखिरी मैच होगा। अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी 8 गोल और 4 असिस्ट के साथ गोल्डन बूट में सबसे आगे हैं। फ्रांस के किलियन एमबाप्पे भी 8 गोल कर चुके हैं, जबकि इंग्लैंड के हैरी केन और जूड बेलिंघम के नाम 6-6 गोल हैं। ऐसे में तीनों प्लेयर्स के पास मेसी को पीछे छोड़ने का आखिरी मौका होगा। दोनों टीमों के बीच अब तक 32 मुकाबले खेले गए हैं। इनमें इंग्लैंड ने 17, जबकि फ्रांस ने 10 मैच जीते हैं और 5 मुकाबले ड्रॉ रहे। फीफा वर्ल्ड कप में दोनों टीमें चौथी बार आमने-सामने होंगी। इससे पहले 1966 और 1982 के ग्रुप स्टेज में इंग्लैंड ने जीत दर्ज की थी, जबकि 2022 के क्वार्टर फाइनल में फ्रांस ने 2-1 से इंग्लैंड को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। फ्रांस लगातार तीसरा वर्ल्ड कप फाइनल नहीं खेल सका फ्रांस ने इस वर्ल्ड कप के ग्रुप स्टेज में सेनेगल, इराक और नॉर्वे को हराया। इसके बाद नॉकआउट में स्वीडन, पराग्वे और मोरक्को को हराकर लगातार तीसरी बार सेमीफाइनल में जगह बनाई। हालांकि स्पेन के खिलाफ मिडफील्ड की लड़ाई हारने के कारण 0-2 से हार का सामना करना पड़ा और लगातार तीसरा वर्ल्ड कप फाइनल खेलने का सपना टूट गया। इंग्लैंड फाइनल से सिर्फ 30 मिनट दूर था इंग्लैंड ने ग्रुप स्टेज में क्रोएशिया, घाना और पनामा को पीछे छोड़ नॉकआउट में जगह बनाई। इसके बाद डीआर कांगो, मेक्सिको और नॉर्वे को हराकर सेमीफाइनल पहुंचा। अर्जेंटीना के खिलाफ एंथनी गॉर्डन के गोल से बढ़त भी बनाई, लेकिन आखिरी आधे घंटे में सिर्फ 12% बॉल पोजेशन रखने की वजह से मैच हाथ से निकल गया। अर्जेंटीना ने 2-1 से जीत गया। एमबाप्पे का अटैक Vs केन की फिनिशिंग फ्रांस की सबसे बड़ी ताकत किलियन एमबाप्पे और उस्मान डेम्बेले की जोड़ी है। एमबाप्पे इस टूर्नामेंट में 8 और डेम्बेले 5 गोल कर चुके हैं। दूसरी ओर इंग्लैंड के लिए हैरी केन और जूड बेलिंघम पर नजरें होंगी। केन 14 वर्ल्ड कप गोल के साथ रोनाल्डो की बराबरी से सिर्फ एक गोल दूर हैं, जबकि बेलिंघम ने इस वर्ल्ड कप में 6 गोल किए हैं। पॉसिबल स्टार्टिंग XI फ्रांस: माइक मैग्नन (गोलकीपर), जूल्स कौंडे, दायो उपामेकानो, विलियम सलीबा, थियो हर्नांडेज, ऑरेलियन चुआमेनी, एड्रियन रैबियो, उस्मान डेम्बेले, माइकल ओलीसे, ब्रैडली बारकोला, किलियन एमबाप्पे। इंग्लैंड: जॉर्डन पिकफोर्ड (गोलकीपर), काइल वॉकर, मार्क गुएही, लेवी कोलविल, ल्यूक शॉ, डेक्लान राइस, कोबी मैनू, बुकायो साका, जूड बेलिंघम, एंथनी गॉर्डन, हैरी केन।

दैनिक भास्कर 18 Jul 2026 4:30 am

यूरोप गए तेजस्वी, पटना में युवा RJD ने बनाई रणनीति:प्रदेश अध्यक्ष बोले- PK को घर में घुसने नहीं देंगे, बांकीपुर सहित 5 मुद्दों पर रहा फोकस

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है। जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर ने मैदान में उतर कर लड़ाई रोचक बना दी है। राजद प्रत्याशी रेखा गुप्ता को अपनी पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं का पूरा सपोर्ट नहीं मिल रहा। ऐसे में मंगलवार को पटना स्थित राजद ऑफिस में युवा आरजेडी राज्य कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव यूरोप की यात्रा पर हैं। उनकी अनुपस्थिति में पार्टी ने रणनीति बनाई। युवा आरजेडी राज्य कार्यकारिणी की बैठक में क्या हुआ? राजद के नेताओं ने कौन सी मुख्य बातें की? पढ़िए रिपोर्ट..। युवा राजद के प्रदेश अध्यक्ष ने नारा दिया- भाजपा भगाओ, बिहार बचाओ बैठक में कई नेताओं ने बांकीपुर उपचुनाव को राजद और तेजस्वी यादव के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव कहा। युवा राजद के प्रदेश अध्यक्ष राजेश यादव ने नारा दिया-’ भाजपा भगाओ, बिहार बचाओ।’ वक्ताओं ने बांकीपुर उपचुनाव के बहाने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की भी चर्चा की। आरजेडी नेताओं ने पार्टी की बन रही छवि और संगठन को मजबूत बनाने पर अपनी राय खुल कर रखी। बैठक में इन 5 रणनीति पर रहा फोकस 1-संगठन को मजबूत बनाएगा 4 दिनों का प्रशिक्षण शिविर आरजेडी के वरिष्ठ नेता आलोक मेहता ने कहा, ‘आरजेडी के सभी कार्यकर्ताओं को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि उनका व्यवहार और चरित्र लोगों के बीच किस तरह का हो। सोशल मीडिया का जमाना है और हमारे राजनीतिक दुश्मन इस साजिश में लगे रहते हैं कि आरजेडी और उसके कार्यकर्ताओं को कैसे बदनाम किया जाए।’ आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कहा कि युवा आरजेडी का 4 दिनों का प्रशिक्षण शिविर राजगीर में लगाया जाएगा। बिना प्रशिक्षण के संगठन मजबूत नहीं होगा। 2- खींचतान से हम कई जगह हारे, इससे बचना है आरजेडी के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने विधानसभा चुनाव 2025 में पार्टी की हार पर कहा, ‘आरजेडी का वोट बढ़ा है, लेकिन हमें माहौल बनाने की जरूरत है। आरजेडी को रणनीति बनानी होगी। स्थानीय मुद्दों की लड़ाई राजद नेता से अधिक एक सोशल एक्टिविस्ट के रूप में लड़िए और लोगों का विश्वास जीतिए।’ आरजेडी के प्रधान महासचिव व विधायक रणविजय साहु ने कहा, ‘आरजेडी के कार्यकर्ता डायरी और कलम रखना भूल गए हैं। तेजस्वी यादव भी चाहते हैं कि हर कार्यकर्ता अपने पास डायरी और कलम रखे। समाज के लोगों की हर संभव मदद करें। 3- एक पदाधिकारी 100 नए वोटर बनाएं आरजेडी के एमएलसी सुनील कुमार ने कहा, ‘आरजेडी के लिए न आवास मुद्दा है और न सुरक्षा। इन दोनों मुद्दे पर बीजेपी बिहार में लालू परिवार को झुका नहीं सकी। आरजेडी के सांसद और युवा आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय कुशवाहा ने कहा, ‘विधानसभा चुनाव में कई स्थानों पर खींचतान की वजह से आरजेडी की हार हुई। आपस में नेता-कार्यकर्ता अपनी ही पार्टी के नेताओं के बारे में न लिखें। एक पदाधिकारी साथी 100 नए वोटर बनाएं। ये वैसे वोटर हों जो आरजेडी के साथ अभी नहीं हैं और सामाजिक न्याय की विचारधारा से जुड़ना चाहते हैं।’ 4- हर बूथ की जवाबदेही एक युवा नेता ले बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष व पार्टी के वरिष्ठ नेता उदय नारायण चौधरी ने कहा, ‘यह ऐसा समय है जब न विधायिका, न कार्यपालिका और न न्यायपालिका है। आज देश में आग लगी हुई है। आर्थिक मंदी, महंगाई और बेरोजगारी है। भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। 5- सिर्फ यादव और मुसलमान से काम नहीं चलेगा, दाल में तड़का भी जरूरी आरजेडी नेता विश्वनाथ यादव ने कहा कि सिर्फ यादव और मुसलमान से काम नहीं चलेगा। कई जगहों पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी से आरजेडी की हार हुई। आरजेडी वोट से चुनाव नहीं हारी, प्रशासनिक तंत्र से, मशीन से और अपने ही कुछ कार्यकर्ताओं की मायूसी और नाराजगी से हारी है। पीके कोशिश कर रहे, हम घर में घुसने नहीं देंगे आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने कहा, ‘नितिन नवीन ने सीट को अपने कब्जे में रखने के लिए कमजोर उम्मीदवार उतारा है।’ जन सुराज के प्रशांत किशोर को भी मंगनी लाल मंडल ने आड़े हाथ लिया। कहा कि पीके हमारे घर में भी घुसने की कोशिश कर रहे हैं पर उनकी चालाकी नहीं चल पा रही है। उन्हें घर में घुसने नहीं देंगे। भय के कारण लालू परिवार के खिलाफ सत्ता पक्ष षड्यंत्र कर रहा है। जीत के लिए माइक्रो लेवल मैनेजमेंट ठीक करना जरूरी आरजेडी नेता खुर्शीद ने कहा, ‘बांकीपुर उपचुनाव की मीटिंग बांकीपुर क्षेत्र में हो, पार्टी कार्यालय में नहीं। सेना को तब बुलाया जाता है जब उसकी जरूरत होती है। उसी तरह युवा नेताओं को आज बांकीपुर उपचुनाव के लिए बुलाया गया है।’ ‘आरजेडी को जीत के लिए माइक्रो लेवल मैनेजमेंट ठीक करना होगा, वहां के कार्यकर्ताओं को शिकायत है। आरजेडी का 25 परसेंट वोट दूर हो गया है। इन सबों को जोड़ना होगा।’ राजद की रेखा गुप्ता अकेली पड़ीं, प्रचार के अंतिम 4 दिन बांकीपुर में दिख सकते हैं तेजस्वी तेजस्वी 24 जुलाई को यूरोप से पटना लौट सकते हैं। बांकीपुर में 28 जुलाई को प्रचार खत्म होगा। इस तरह वह अंतिम के चार दिन बांकीपुर में नजर आ सकते हैं। राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव की तबीयत ठीक नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ज्यादा उम्र के चलते ऑफिस से कम ही निकल पाते हैं। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव में राजद की प्रत्याशी रेखा गुप्ता अकेली दिखती हैं। बांकीपुर उपचुनाव में राजद का पूरा दारोमदार फिलहाल स्थानीय नेताओं और जातीय समीकरणों पर टिका है। शीर्ष नेतृत्व की गैरमौजूदगी के चलते प्रचार धीमा है।

दैनिक भास्कर 15 Jul 2026 5:33 am

यूरोप में ‘ओमेगा ब्लॉक’ हीटवेव का प्रकोप, रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से जनजीवन बेहाल, दर्जनों लोगों की मौत

यूरोप में ‘ओमेगा ब्लॉक’ हीटवेव ने तबाही मचा दी है। फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और स्पेन में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, बिजली संकट, स्कूल बंद और गर्मी से कई मौतों की खबरें सामने आई हैं।

देशबन्धु 25 Jun 2026 9:36 am

अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान

एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं

देशबन्धु 20 Jun 2026 10:59 am

60 की उम्र में मिलिंद सोमन ने रचा इतिहास, यूरोप से अफ्रीका तक तैरकर पार किया स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर

अभिनेता और फिटनेस आइकन मिलिंद सोमन ने एक बार फिर अपनी अद्भुत सहनशक्ति और फिटनेस का परिचय दिया है। 60 साल की उम्र में मिलिंद सोमन ने स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर को तैरकर पार करने का एक कठिन और साहसी कारनामा कर दिखाया है। मिलिंद ने यूरोप और अफ्रीका के बीच ...

वेब दुनिया 6 May 2026 11:49 am

फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन, 88 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

Alain Delon passes away: 'द लेपर्ड' और 'रोक्को एंड हिज ब्रदर्स' जैसी सुपर हिट फिल्मों में अभिनय का जौहर दिखाने वाले फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन हो गया है। एलेन डेलन ने 88 वर्ष की उम्र में आखिरी सांस ली। अभिनेता के पारिवारिक सूत्रों ने ...

वेब दुनिया 18 Aug 2024 5:40 pm

इटली से फ्रांस तक समंदर के बीच होगा Anant-Radhika का दूसरा प्री वेडिंग फंक्शन, जानिए मेहमानों से लेकर ड्रेस कोड तक सबकुछ

इटली से फ्रांस तक समंदर के बीच होगा Anant-Radhika का दूसराप्री वेडिंग फंक्शन, जानिए मेहमानों से लेकरड्रेस कोड तक सबकुछ

समाचार नामा 28 May 2024 10:30 am

Heeramandi के बाद अब Cannes में अपनी 'गजगामिनी चाल' दिखाएंगी Aditi Rao Haidari, फ्रांस के लिए रवाना हुई बिब्बोजान

Heeramandi के बाद अब Cannes में अपनी 'गजगामिनी चाल' दिखाएंगी Aditi Rao Haidari,फ्रांस के लिए रवाना हुईबिब्बोजान

समाचार नामा 21 May 2024 2:45 pm

यूरोप से लेकर Sri Lanka तक इन देशो में शूट हुई है Surya और Bobby Deol की फिल्म Kanguva, बजट उड़ा देगा होश

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मनोरंजन नामा 29 Apr 2024 9:00 pm