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भारत-यूरोपीय संघ के बीच अंतरिक्ष साझेदारी क्यों अहम, दोनों को कैसे होगा फायदा

भारत के नए पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ईओएस-05 के प्रक्षेपण के साथ भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच अंतरिक्ष सहयोग को नई गति मिलने की संभावना है...

खास खबर 25 Sep 2026 8:14 pm

2200 साल पुराना… नदी के सीने में दफन था प्राचीन यूरोप का सबसे बड़ा खजाना, बजरी हटाते ही सामने आया जखीरा

2200 साल पुराना… नदी के सीने में दफन था प्राचीन यूरोप का सबसे बड़ा खजाना, बजरी हटाते ही सामने आया जखीरा

समाचार नामा 25 Sep 2026 7:10 pm

यूरोप के इन देशों पर रूस करेगा हाइब्रिड अटैक, CIA की चेतावनी

CTA ने यूरोपीय सरकारों को स्पेन, फ्रांस या इटली पर संभावित रूसी हाइब्रिड अटैक की चेतावनी दी है. समुद्र से कंटेनरों में छिपे गेरबेरा ड्रोन लॉन्च हो सकते हैं. जॉन रैटक्लिफ की मॉस्को यात्रा के बाद यह जानकारी साझा की गई.

आज तक 25 Sep 2026 2:55 pm

Trump बैन करेंगे डीजल, भारत की शरण में आएगा यूरोप! अब दुनिया के सबसे बड़े एनर्जी 'किंग मेकर' बनने की आई बारी

डोनाल्ड ट्रंप का सिर्फ एक बयान और पूरी दुनिया के एनर्जी मार्केट में भूचाल आ गया। अमेरिका ने साफ-साफ कह दिया कि वह अपने डीजल एक्सपोर्ट पर पूरी तरह बैन लगाने जा रहा है। 1970 के बाद से आज तक अमेरिका ने ऐसा सख्त कदम कभी नहीं उठाया था। इसका सीधा मतलब क्या है? इसका सीधा मतलब है यूरोपीय यूनियन, ऑस्ट्रेलिया और मेक्सिको जैसे अमेरिका के सबसे पक्के दोस्त और सहयोगी देश अब रातोंरात एक ऐसे भयानक ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़े हो गए हैं जो उनकी अर्थव्यवस्था को घुटने पर ला सकता है। लेकिन कहानी का असली ट्विस्ट यहां से शुरू होता है। जिस रूसी क्रूड और तेल पर यही पश्चिमी देश भारत को कल तक ज्ञान दे रहे थे। प्रतिबंध और टैरिफ की धमकियां दे रहे थे। आज उसी भारत के दरवाजे पर यूरोप से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक लाइन लगाने को मजबूर हो गए हैं। ग्लोबल एनर्जी की बिसात पर पासा पूरी तरह से पलट चुका है। बॉयर की मनमानी खत्म हो चुकी है और सेलर यानी भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा एनर्जी किंग मेकर बन चुका है। इसे भी पढ़ें: कोई और कायर रह गया है? निकल जाओ...UN के मंच से नेतन्याहू ने ऐसा दहाड़ा, खाली हो गया पूरा हॉल आखिर ट्रंप ने ऐसा कदम क्यों उठाया? 22 सितंबर को यूएन जनरल असेंबली के दौरान जब मीडिया ने डोनाल्ड ट्रंप से सवाल किया तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि हम बहुत सारा डीजल बनाते हैं लेकिन अपने लोगों के लिए हमें एक्सपोर्ट रोकना होगा। डीजल बाहर भेजना बंद करना होगा। उनके साथ मौजूद ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और सीनेट मेजॉरिटी लीडर जॉन ने साफ कर दिया कि एडमिनिस्ट्रेशन इस बैन को लागू करने के तौर तरीकों पर तेजी से काम कर रही है। आसमान छूती कीमतें- अमेरिका में इस वक्त फ्यूल प्राइसेस रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं। कैलिफोर्निया में डीजल $.89 प्रति गैलन और नेशनल एवरेज 6 5 प्रति गैलन पार कर चुका है। आगामी चुनाव और घरेलू राजनीति- ट्रंप के कोर वोटर बेस वाले इलाके जैसे गल्फ को जहां रिफाइनिया है वहां एक्सपोर्ट रोकने से लोकल लेवल पर डीजल की सप्लाई बढ़ेगी और कीमतें अस्थाई रूप से गिरेंगी। शॉर्ट टर्म राहत- घरेलू राजनीति साधने के लिए ट्रंप अपने ही सहयोगियों की बलि चढ़ाने को तैयार दिख रहे हैं। यहां पर अमेरिका इस समय प्रतिदिन लगभग 1.6 मिलियन बैरल डीजल दुनिया भर में एक्सपोर्ट करता है। जब इतना बड़ा सप्लायर अचानक मार्केट से हाथ खींच लेगा पीछे तो क्या होगा? यूरोप की बात की जाए तो यूरोप अपनी एनर्जी के लिए बड़े पैमाने पर यूएस गल्फ कोस्ट की रिफाइन्यू पर निर्भर है। अगस्त में जहां यूरोप 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन यूएस डीजल ले रहा था वो पहले ही घटकर 3.5 लाख बैरल पर आ गया है। गिर गया है। यानी कि अब सऊदी अरब ने क्रूड कार्गो देने से मना कर दिया है। और साउथ कोरिया जेट फ्यूल सप्लाई घटा रहा है। यानी यूरोप के सामने बिजली, ट्रांसपोर्ट और हीटिंग का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ऑस्ट्रेलिया की बात कर लेते हैं। ऑस्ट्रेलिया के पास अपनी रिफाइनिंग क्षमता और क्रूड रिजर्व ना के बराबर है। उनका एक-एक लीटर डीजल जहाजों के जरिए समुद्र पार से आता है। उनके पास सिर्फ कुछ ही हफ्तों का रिजर्व बचा है। जैसे ही यूरोप, एशिया बाजारों यानी कि साउथ कोरिया, जापान, सिंगापुर के डीजल पर भारी बोली लगाएगा, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लिए डीजल मिलना दुबर हो जाएगा। मेक्सिको के एग्रीकल्चर सेक्टर की बात कर ली जाए तो 60% से ज्यादा एनर्जी अमेरिकी डीजल पाइपलाइन से चलती है। अगर वहां डीजल बंद हुआ तो पूरी खेती ठप हो जाएगी। हां पर सवाल यह है कि दुनिया भर की ये बड़ी अर्थव्यवस्थाएं डीजल के लिए किसके पास जाएंगी? इसका एकमात्र और सबसे मजबूत जवाब है भारत। इसे भी पढ़ें: Kusal Mendis के शतक से श्रीलंका ने England को दूसरे ODI में 16 रन से हराया भारत बना ग्लोबल सेवियर भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है जिसकी रिफाइनिंग कैपेसिटी 5.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। भारत अपनी रिफाइनिंग का 20% हिस्सा ग्लोबल मार्केट में एक्सपोर्ट करता है और यूरोपी मार्केट में बाप, अलमंदीप और स्वेज नहर के रास्ते पहुंचने वाले कुल डीजल का 60% से ज्यादा हिस्सा पहले ही भारत से जा रहा है। तुर्की को 1.2 लाख बैरल और यूरोप को 2 लाख बैरल प्रतिदिन डीजल भारत सप्लाई कर रहा है।

प्रभासाक्षी 25 Sep 2026 12:15 pm

सऊदी पर हूती विद्रोहियों के हमले तेज, मदद के लिए उतरेगी फ्रांस की सेना

सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ अपने हमलों को काफी तेज कर दिया है. सऊदी अरब के सैन्य प्रवक्ता के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने लान पोर्ट और ताइफ़ शहर को निशाना बनाकर छह बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं. इसके अलावा, विद्रोहियों ने तेल संयंत्रों और राजधानी रियाद को भी निशाना बनाने का दावा किया है.

आज तक 25 Sep 2026 10:04 am

यूरोपीय समकक्षों से मिले विदेश मंत्री एस जयशंकर, आ​र्थिक सहयोग पर की चर्चा

संयुक्त राष्ट्र महासभा के सालाना सत्र में हिस्सा लेने के लिए यहां पहुंचे विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कई यूरोपीय समकक्षों से मुलाकात की और उनके साथ वैश्विक मुद्दों व आर्थिक सहयोग पर चर्चा की।

जागरण 25 Sep 2026 7:24 am

फ्रांस पहुंचा आईएनएस त्रिशूल, ‘वरुण’ अभ्यास में दिखेगी भारतीय नौसेना की ताकत

फ्रांस पहुंचा आईएनएस त्रिशूल, ‘वरुण’ अभ्यास में दिखेगी भारतीय नौसेना की ताकत

समाचार नामा 24 Sep 2026 3:28 pm

एस. जयशंकर ने यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों से की मुलाकात, व्यापार और वैश्विक मुद्दों पर हुई चर्चा

संयुक्त राष्ट्र, 24 सितंबर . विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपनी बेहद व्यस्त कूटनीतिक बैठकों के बीच चार यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की. इन बैठकों में वैश्विक मुद्दों और आर्थिक सहयोग पर चर्चा हुई. Wednesday को ग्लोबल साउथ के देशों के विदेश मंत्रियों के अलग-अलग समूहों के साथ जयशंकर की तीन बैठकें ... Read more

डेली किरण 24 Sep 2026 11:48 am

हाथ-पैरों में झनझनाहट और सुन्नपन हो सकते हैं न्यूरोपैथी के संकेत

बुजुर्गों में उम्र बढ़ने के साथ रीढ़ और कमर की हड्डियों में घिसाव होने से नसें दबने लगती हैं, जिसे मेडिकल भाषा में ''रेडिकुलोपैथी'' कहा जाता है। नसों की कार्यप्रणाली और क्षति की सटीक पहचान के लिए ''नर्व कंडक्शन स्टडी'' टेस्ट कराया जाता है।

दैनिक जागरण 24 Sep 2026 11:26 am

ट्रंप प्रशासन को इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर पर अमेरिका के पूर्व NSA ने ही कोसा, पॉलिसी पर यूं उठाए सवाल

इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर को ट्रंप के सपोर्ट करने के बाद अमेरिका के पूर्व NSA बोल्टन ने उनके प्रशासन को ही कोसना शुरू कर दिया। बोल्टन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के पास कोई ठोस क्षेत्रीय रणनीति नहीं है।

खबर इंडिया टीवी 24 Sep 2026 7:14 am

ईरान की चुनौती का जवाब बनेगा आईएमईसी: ट्रंप बोले- भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप कॉरिडोर से घटेगी निर्भरता

ईरान की चुनौती का जवाब बनेगा आईएमईसी: ट्रंप बोले- भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप कॉरिडोर से घटेगी निर्भरता- IMEC to counter challenge posed by Iran Trump says India West Asia-Europe corridor will reduce dependency

अमर उजाला 24 Sep 2026 5:10 am

कनाडा और यूरोपीय संघ के साथ भारत की बड़ी डील फाइनल? दिसंबर में FTA पर होगा समझौता

भारत दिसंबर में यूरोपीय संघ और कनाडा के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को अंतिम रूप देने के करीब है।

जागरण 23 Sep 2026 9:19 pm

फ्रांस पर लगाया दोहरे मापदंड का आरोप : ईरानी

न्यूयॉर्क, संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने गए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फ्रांस के अपने समकक्ष जीन-नोएल बारो से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने में ईरान को लेकर पेरिस के रुख की निंदा की और मानवाधिकारों के मामले में “दोहरे मापदंड” अपनाने का आरोप लगाया। दोनों के बीच मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर न्यूयॉर्क में मुलाकात हुई।

देशबन्धु 23 Sep 2026 5:41 pm

एफटीए से पैदा होंगे नए अवसर, भारतीय ग्राहकों के लिए सस्ती होगी यूरोपियन टेक्नोलॉजी: गॉटफ्राइड वॉन गेमिंगेन

New Delhi, 23 सितंबर . India में जर्मन दूतावास में इकोनॉमिक कॉरपोरेशन और डेवलपमेंट के प्रमुख गॉटफ्राइड वॉन गेमिंगेन ने Wednesday को कहा कि भारत-यूरोपियन यूनियन (ईयू) फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) से दोनों पक्ष मजबूत होंगे और इससे बड़ी संख्या में नए अवसर सृजित होंगे. साथ ही,यूरोपियन और जर्मन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भारतीय ग्राहक के लिए ... Read more

डेली किरण 23 Sep 2026 4:18 pm

ट्रंप : भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारे का किया समर्थन

संयुक्त राष्ट्र, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारे के लिए अपने प्रशासन के समर्थन की पुष्टि की है। उन्होंने इस महत्वाकांक्षी कनेक्टिविटी परियोजना को क्षेत्र में ऊर्जा और वस्तुओं के परिवहन के लिए एक वैकल्पिक रास्ते के तौर पर पेश किया।

देशबन्धु 23 Sep 2026 11:42 am

भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर को ट्रंप ने दिया बंपर सपोर्ट! ईरान के समुद्री रास्ते को बाईपास करने की बनाई रणनीति

India-Middle East-Europe Corridor: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) को अपना मजबूत समर्थन देने का ऐलान किया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के इतर जीसीसी (GCC) और अरब देशों के नेताओं के साथ आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध और व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों के बीच मिडिल ईस्ट के ऊर्जा ढांचे को ईरान के नियंत्रण वाले रास्तों और चेकपॉइंट्स से दूर ले जाने की सख्त जरूरत है। इसी रणनीति के तहत उनके प्रशासन ने भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर को बढ़ावा देने का फैसला किया है ताकि तेल और ऊर्जा संसाधनों को पाइपलाइनों या अन्य सुरक्षित माध्यमों से बाहर निकाला जा सके।व्यापारिक जहाजों पर हमलों के बीच ऊर्जा ढांचे को शिफ्ट करने की जरूरतएएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने बैठक में कहा कि पड़ोसी देशों में व्यापारिक जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए आतंकवादी हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मध्य पूर्व के ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर को ईरानी नियंत्रण वाले रास्तों से दूर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। ट्रंप ने कहा कि ईरान के आतंकवादी हमलों ने हमें यह दिखाया है कि मध्य पूर्व के ऊर्जा ढांचे को ईरानी चेकपॉइंट्स से दूर ले जाना कितना जरूरी है। यही वजह है कि मेरा प्रशासन भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर और तेल बाहर निकालने के अन्य जरियों, चाहे वह पाइपलाइन हों या कुछ और, का पुरजोर समर्थन करता है।क्षेत्र को सुरक्षित और समृद्ध बनाने पर जोरजीसीसी और अरब नेताओं की मौजूदगी में अमेरिकी राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि यह क्षेत्र दशकों पुरानी चुनौतियों से उबरने के बेहद करीब है। उन्होंने बैठक में मौजूद नेताओं को अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी और साझेदार बताया। ट्रंप ने कहा कि एक साथ मिलकर हम उन चुनौतियों पर विजय पाने की दहलीज पर हैं, जिन्होंने दशकों से इस क्षेत्र को परेशान कर रखा है। मध्य पूर्व को अधिक सुरक्षित और समृद्ध बनाने के हमारे प्रयासों को जारी रखने के लिए अमेरिका के कुछ सबसे महान और करीबी दोस्तों, सहयोगियों और साझेदारों के साथ यहां मौजूद होना मेरे लिए सम्मान की बात है।क्या है भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC)?साल 2023 में अनावरित किए गए भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) का उद्देश्य भारत, खाड़ी क्षेत्र और यूरोप के बीच व्यापारिक संपर्क को गति देना है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में मुख्य रूप से दो गलियारे शामिल हैं। पहला ईस्टर्न कॉरिडोर जो भारत को खाड़ी क्षेत्र से जोड़ता है। दूसरा नॉर्दर्न कॉरिडोर जो खाड़ी क्षेत्र को यूरोप से जोड़ता है। इस पूरे आर्थिक गलियारे में एक व्यापक रेलवे और शिप-रेल ट्रांजिट नेटवर्क शामिल होगा, जिसके साथ-साथ सड़क परिवहन के मार्ग भी विकसित किए जाएंगे।ट्रंप की ईरान को चेतावनी: वित्तीय रूप से अलग-थलग किया, बर्बाद होने का समय दूर नहींसंयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए अपने बयानों को दोहराते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान को वित्तीय रूप से अलग-थलग कर दिया है और उम्मीद है कि वे जल्द ही सही कदम उठाएंगे। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि 'एक समय ऐसा आएगा जब बहुत देर हो चुकी होगी, और हमारे पास उन्हें एक राष्ट्र के रूप में जीवित रहने देने का मौका नहीं होगा। मैं ऐसा देखना चाहूंगा और मैं आपको बता सकता हूं कि इस टेबल के आसपास बैठे लोग भी यही देखना चाहेंगे।'ये भी पढ़ें- Azamgarh News: आजमगढ़ में घर में पूजा करने आए दो पंडितों और पत्नी को मारने वाले अरविंद के साथ क्या हुआ?

ज़ी न्यूज़ 23 Sep 2026 9:40 am

लौट के ट्रंप भारत के पास आए..., बोले- 'इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर का समर्थन करता हूं'

ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत फिर से शुरू हो गई है। न्यूयॉर्क में 3 घंटे तक चली दोनों पक्षों की बैठक हुई है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर का समर्थन करते हैं।

खबर इंडिया टीवी 23 Sep 2026 6:28 am

अमेरिका-यूरोप में बढ़ी आयुर्वेदिक दवाओं की मांग: आज दुनिया के 150 देशों में आयुर्वेद दिवस, क्या होगा खास?

अमेरिका-यूरोप में बढ़ी आयुर्वेदिक दवाओं की मांग: आज दुनिया के 150 देशों में आयुर्वेद दिवस, क्या होगा खास?

अमर उजाला 23 Sep 2026 5:38 am

राशन इकट्ठा कर लो...यूरोप में क्या बड़ा होने वाला है! ब्रिटेन-फ्रांस अचानक क्यों करने लगे ये अपील?

क्या यूरोप एक बहुत बड़े महायुद्ध के मुहाने पर आकर खड़ा हो गया है? क्या तीसरे विश्वयुद्ध की आहट अब इतनी करीब आ चुकी है कि सरकारों ने अपने नागरिकों से सीधे तौर पर राशन और पानी जमा करने को कह दिया है? ये कोई अफवाह नहीं, बल्कि इस वक्त पूरे यूरोप की जमीनी हकीकत बन चुकी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों खुले तौर पर कह रहे हैं कि यह वक्त बेहद मुश्किल है और सबको एक साथ खड़ा होना होगा। ब्रिटेन से लेकर फ्रांस तक, यूरोप के तमाम मुल्कों में जनता को बाकायदा हिदायत दी जा रही है कि घरों में राशन, सूखा खाना, पीने का पानी और ईंधन स्टॉक करना शुरू कर दें। यूरोप का शायद ही कोई ऐसा अखबार बचा हो जिसकी हेडलाइन में यह खौफ साफ न छलक रहा हो। दूसरी तरफ नजर डालेंगे तो अमेरिका लगभग ग्रीनलैंड की सुरक्षा का पूरा जिम्मा अपने हाथ में ले चुका है और साफ कह दिया है कि अब इस पूरे इलाके की रक्षा अमेरिकी बूट्स करेंगे। लेकिन इन सब के बीच सबसे बड़ा सवाल कि आखिर रूस की तरफ से यूरोप की खुफिया एजेंसियों को ऐसे कौन से इनपुट्स मिले हैं, जिसने पूरे महाद्वीप को हिलाकर रख दिया है? क्यों यूरोपीय राजधानियों में बंकरों की धूल झाड़ी जा रही है और सेनाओं को स्टैंडबाय पर रहने का फरमान जारी हो चुका है? क्या मॉस्को से कोई ऐसा बड़ा तूफान उठने वाला है जो पूरे यूरोप को अपनी जद में ले लेगा? आज इसी का एमआरआई स्कैन करते हैं। इसे भी पढ़ें: Congress का Election Commission पर हमला, SIR प्रक्रिया को बताया मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश 1600 ड्रोंस से रूस पर अटैक यूक्रेन ने 20 सितंबर को यहां कई ड्रोन हमले किए हैं। आप इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि रशिया ने दावा किया है कि यूक्रेन की तरफ से आने वाले 1600 ड्रोंस को उसने इंटरसेप्ट किया है और वीडियो से भी इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस हमले में दो लोगों की मौत हुई है। यूक्रेन ने रशिया की राजधानी मॉस्को की एक ऑयल रिफाइनरी और सेना के लॉजिस्टिक ठिकाने को टारगेट किया। कई इमारतों को इसमें नुकसान भी पहुंचा है। यह हमला ऐसे समय में हुआ जब रूस में संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग चल रही थी। वोटिंग का अंतिम दिन था। लोअर हाउस जो संसद है रूस का उसके लोअर हाउस के लिए यह वोटिंग थी। यूक्रेनी राष्ट्रपति वडदमीर जेलस्की ने खुद हमले की जानकारी दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर लिखा, हमने रूस की ऑयल रिफाइनरी और सेना के लॉजिस्टिक ठिकाने को टारगेट किया। यह वही अरबों डॉलर का तंत्र है जहां रूस अपने डिफेंस का सामान तैयार करता है। जेलस्की ने यह भी बताया हमले में यूक्रेन ने क्या-क्या इस्तेमाल किया है। इसे भी पढ़ें: Shafali Verma के शतक से Asian Games सेमीफाइनल में India ने बनाए 195 रन चुनाव के अंतिम दिन क्यों हुआ हमला यूक्रेन ने हमले के लिए ठीक ऐसा वक्त चुना जब व्लादमीर पुतिन के 26 साल के एक छत्रराज को नई ताकत देने के लिए वोट डाले जा रहे थे। ठीक उसी वक्त जेलस्की के ड्रोन ब्रिगेड ने ऑपरेशन मॉस्को को अंजाम दे दिया। रूसी अधिकारियों के मुताबिक ड्रोन हमलों में तीन लोगों की जान चली गई जबकि 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मतलब साफ है कि यह सिर्फ आसमान में उड़ते हुए यूक्रेन के ड्रोंस नहीं थे बल्कि रूस के दिल माने जाने वाले क्रिमिया पर यूक्रेन का लॉन्ग रेंज अटैक था। मॉस्को के आसमान में जिस तरह से एक के बाद एक धमाके हुए उससे रूस की एयर डिफेंस क्षमता पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। क्योंकि यूक्रेन के हमलों का निशाना बना है मॉस्को का सबसे बड़ा ऑयल रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स जो धमाकों के बाद पूरी तरह से स्वाहा हो गया है। यूक्रेन पिछले कई महीनों से रूस के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है। क्योंकि तेल और गैस से होने वाली कमाई रूस की युद्ध मशीन के लिए बेहद अहम मानी जाती है। ऐसे में रूसी तेल रिफाइनिंग क्षमता पर यूक्रेनी हमलों से रूसी ईंधन की सप्लाई और कीमतों पर भी असर पड़ना तय है। उधर मॉस्को में 21 मंजिला एक रिहााइशी इमारत में ड्रोन टकराने से भीषण आग लग गई। इस बीच यूक्रेन के इस सबसे बड़े ड्रोन अटैक पर बड़ा सवाल यह उठने लगा है कि आखिर चुनाव के अंतिम दिन मॉस्को पर इतना बड़ा हमला क्यों किया गया? इसके जवाब में मॉस्को के मेयर सरगई सोबियानिन ने बताया कि यूक्रेन के हमले का सीधा मकसद रूसी संसदीय चुनाव में खलल डालना था। NATO के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ने की तैयारी में पुतिन रूसी भाषा में बोलते व्लादिमीर पुतिन का एक बयान सामने आया है। जिसमें वो कह रहे हैं कि नाटो हमारी तरफ एक्सपेंड करने की कोशिश कर रहा है। नए-नए इलाके में घुसने कोशिश कर रहा है। अब हमने फैसला किया है कि उनके खिलाफ अब निर्णायक जंग छेड़ दिया जाए। अब हुआ यह कि जैसे ही एक तो रूस के राष्ट्रपति ने कह दिया कि मारेंगे जरूर चाहे जो हो जाए और ऊपर से वहां राशन पानी इकट्ठा करने की बात हो ही गई। सारे यूरोप वाले कह रहे हैं कि हमारी रक्षा तो अमेरिका करता था। तो अमेरिका बचाएगा कि नहीं हमें? डोनाल्ड ट्रंप अलग ही मूड में नजर आ रहे हैं। उन्होंने अनाउंस किया कि हम यूक्रेन में अपने सैनिक तैनात है वापस ले रहे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने कहा है कि गल्फ नेशन में जो अमेरिकन सैनिक हैं हम ईरान के हाथों मरने नहीं दे सकते। उसको भी वापस ले लेंगे। क्या नाटो की सीमा पर बड़ा धमाका होने वाला है यूरोपीय खुफिया एजेंसियों की तरफ से आई एक ताजा और बेहद सनसनीखेज रिपोर्ट ने पूरे पश्चिमी खेमे में खलबली मचा दी है। खुफिया अधिकारियों का दावा है कि रूस बहुत जल्द नाटो की ताकत और उसकी एकजुटता की परीक्षा ले सकता है, और यह संभावित हमला सालों में नहीं, बल्कि कुछ ही महीनों के भीतर देखने को मिल सकता है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने अपनी संसद में साफ लफ्जों में चेतावनी दी है कि मॉस्को आने वाले महीनों में ड्रोन या मिसाइलों के जरिए नाटो की जमीन को निशाना बना सकता है। टस्क के मुताबिक, पुतिन का सीधा मकसद यह साबित करना है कि नाटो का सबसे ताकतवर सुरक्षा कवच यानी आर्टिकल 5, जमीन पर सिर्फ एक किताबी थ्योरी है, हकीकत नहीं। इस चेतावनी की गंभीरता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने टस्क के इन दावों को बेहद सटीक और पुख्ता सबूतों पर आधारित बताया है। हालात इतने नाजुक हो चुके हैं कि मैक्रों ने पेरिस में तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं और राष्ट्रपति पद के दावेदारों की एक आपातकालीन बैठक तलब कर ली, जहां रूस के इस बढ़ते खतरे पर बंद कमरों में रणनीति तैयार की जा रही है। यह चिंता तब बढ़ रही है जब इस हफ़्ते के आखिर में न्यूयॉर्क में UN जनरल असेंबली की बैठक होने वाली है और साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध में दोनों तरफ़ से हवाई हमले तेज़ हो गए हैं। रविवार तड़के कीव ने मॉस्को और रूस के दूसरे इलाकों पर सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलें दागीं। यह इस युद्ध के दौरान किए गए सबसे बड़े हवाई हमलों में से एक था। द गार्जियन को दिए गए अलग-अलग साक्षात्कारों में पश्चिमी खुफिया प्रमुखों ने पुतिन के अगले खतरनाक कदम का जो खाका खींचा है, उसने नाटो मुख्यालय से लेकर तमाम यूरोपीय देशों की नींद उड़ा दी है। चेक गणराज्य की सुरक्षा सेवा 'बीआईएस' के प्रमुख माइकल कोउडेल्का ने प्राग स्थित अपने मुख्यालय में एक दुर्लभ इंटरव्यू के दौरान बेहद सनसनीखेज अंदेशा जताया है। कोउडेल्का के मुताबिक, केवल ड्रोन और मिसाइल स्ट्राइक ही नहीं, बल्कि रूस से सटी नाटो सीमा पर रूसी सेना की एक सीमित जमीनी घुसपैठ यानी 'स्मॉल-स्केल इनवेजन' भी क्रेमलिन के प्लान का सीधा हिस्सा हो सकता है। माइकल कोउडेल्का ने चेताते हुए साफ कहा यह पूरी तरह मुमकिन है। रूस की योजना में एक सीमित सैन्य घुसपैठ, फॉल्स-फ्लैग उकसावे वाली साजिशें और नाटो देशों के भीतर एक बड़े पैमाने का इनफ्लुएंस कैंपेन शामिल हो सकता है। और यह खतरा सालों दूर नहीं, बल्कि महज कुछ महीनों के भीतर हकीकत का रूप ले सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि पश्चिमी सुरक्षा एजेंसियां दिन-रात एक कर रही हैं ताकि हालात इस खौफनाक स्तर तक न पहुँचें। क्या अमेरिका की रणनीतिक चूक से बिगड़े हालात! यह लड़ाई अब तेजी से फैलती दिख रही है। अमेरिका को अपने नागरिकों के लिए अलर्ट जारी करना पड़ा है, डोनल्ड ट्रंप छुट्टी खत्म होने से पहले ही वापस लौट आए। वॉशिंगटन इन हालात से पूरी तरह पल्ला नहीं झाड़ सकता है। ईरान पर हमले से लेकर उसके साथ हुए अंतरिम समझौते को तोड़ने तक, कई मौकों पर गंभीर चूक हुई है। ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन यह आकलन करने में बुरी तरह नाकाम रहा कि संघर्ष किस हद तक जा सकता है। उसने पश्चिम एशिया में अपने सहयोगियों की चिंताओं को भी नजरअंदाज किया और हूतियों का बढ़ता खतरा उसी का नतीजा है।अमेरिकी राष्ट्रपति ने पिछले हफ्ते कहा था कि मास्को और कीव एक-दूसरे के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने के लिए सहमत हुए हैं। पिछले दिनों जब उनकी स्पेशल टीम ने दोनों देशों का दौरा किया था, तब उसे भी इस बात के रूप में प्रचारित किया गया कि अमेरिका अब वास्तविक बातचीत चाहता है । पर रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों वाले नए बिल और इन ताजा हमलों ने सारी कोशिशों को पीछे धकेल दिया है।

प्रभासाक्षी 21 Sep 2026 2:06 pm

फ्रांस में स्मार्ट चश्मे से महिलाओं की रिकॉर्डिंग पर जांच:बिना इजाजत वीडियो सोशल मीडिया पर डाले; पिछले साल मेटा के 70 लाख चश्मे बिके

फ्रांस में स्मार्ट चश्मों से महिलाओं के बिना अनुमति वीडियो बनाने के मामलों की जांच शुरू हुई है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग सड़क पर महिलाओं के वीडियो बनाकर उन्हें इंटरनेट पर डाल रहे थे। इसी को लेकर यौन उत्पीड़न की शिकायतें मिली हैं। इन चश्मों में छोटा कैमरा लगा होता है। इन्हें पहनने वाला बिना मोबाइल निकाले वीडियो बना सकता है। यही वजह है कि इनके गलत इस्तेमाल को लेकर दुनिया के कई देशों में चिंता बढ़ रही है। इन स्मार्ट चश्मों में मेटा के चश्मे सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। मेटा ने ये चश्मे, चश्मा बनाने वाली कंपनी एस्सिलोरलक्सोटिका के साथ मिलकर बनाए हैं। पिछले साल इनके करीब 70 लाख चश्मे बिके थे। फ्रांस में निजी वीडियो बनाने पर एक साल तक जेल का नियम रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस पुलिस ने बताया कि इस मामले में एक आपराधिक जांच शुरू की गई है। हालांकि, पुलिस ने यह नहीं बताया कि महिलाओं के वीडियो बनाने के लिए किस कंपनी के चश्मे का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने दो हफ्ते पहले इन चश्मों को खुद इस्तेमाल करके देखा। पुलिस यह पता करना चाहती थी कि इनसे किस तरह के गलत काम किए जा सकते हैं। फ्रांस में किसी व्यक्ति की निजी जगह पर बिना अनुमति उसकी तस्वीर या वीडियो बनाने पर एक साल तक जेल और 45 हजार यूरो तक जुर्माने का प्रावधान है। महिलाओं को ज्यादा निशाना बनाए जाने की चिंता मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, स्मार्ट चश्मों के गलत इस्तेमाल में महिलाओं को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली इनेस गिरार्द ने कहा कि इसका समाधान यह नहीं हो सकता कि जिस व्यक्ति की रिकॉर्डिंग हो रही है, उसी से कहा जाए कि वह ज्यादा सावधान रहे। उनका कहना है कि स्मार्ट चश्मे बनाने वाली कंपनियों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी तकनीक का इस्तेमाल लोगों को परेशान करने या उनकी निजता भंग करने के लिए न हो। दूसरे देशों में भी स्मार्ट चश्मों पर सवाल जर्मनी: मेटा और स्मार्ट चश्मे से जुड़ी कई कंपनियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की गई है। अमेरिका: एक व्यक्ति ने हिरासत केंद्र के अंदर लोगों के वीडियो चुपके से रिकॉर्ड किया था। इसके बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने इसे लेकर चिंता जताई। ब्रिटेन: इंग्लैंड और वेल्स की अदालतों में मेटा के कैमरा वाले स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर रोक है। कुछ सिनेमाघरों ने भी पाइरेसी के डर से इनके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया है। नॉर्वे: छात्रों की प्राइवेसी को लेकर स्कूलों में स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है ऑस्ट्रेलिया: सरकार सरकारी दफ्तरों में कैमरे वाले स्मार्ट चश्मों पर रोक लगाने पर विचार कर रही है। अमेजन डिलीवरी में भी इस्तेमाल कर रही स्मार्ट चश्मों का इस्तेमाल सिर्फ वीडियो बनाने के लिए नहीं हो रहा है। अमेजन डिलीवरी के काम में भी ऐसे चश्मों का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है। कंपनी ऐसे चश्मे बना रही है, जिनसे डिलीवरी कर्मचारी बिना मोबाइल निकाले पैकेज स्कैन कर सकेंगे, रास्ता देख सकेंगे और सामान पहुंचाने के बाद उसकी तस्वीर ले सकेंगे। रास्ते में कुत्ता या कोई दूसरी रुकावट होने पर चश्मा अलर्ट भी दे सकता है। अमेजन ने इन चश्मों को डिलीवरी कर्मचारियों के साथ टेस्ट किया है। मेटा बिना कैमरे वाला स्मार्ट चश्मा ला सकता है स्मार्ट चश्मों को लेकर उठ रहे निजता के सवालों के बीच मेटा एक ऐसा नया चश्मा लाने की तैयारी कर रहा है, जिसमें कैमरा नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इसका नाम लूना हो सकता है। इस चश्मे में छह माइक्रोफोन और कान के पास स्पीकर होंगे। इनके जरिए यूजर मेटा के एआई से बात कर सकेगा। यानी एआई इस्तेमाल करने के लिए कैमरे की जरूरत नहीं होगी। चश्मे में AI को चालू करने के लिए एक अलग बटन भी दिया जा सकता है। यह सामान्य चश्मे जैसा ही दिखेगा। मेटा इसे क्लबमास्टर और बरबैंक नाम के नए डिजाइन में ला सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा 23 सितंबर से होने वाले अपने डेवलपर कार्यक्रम में इसकी घोषणा कर सकता है। इसकी बिक्री इस साल के आखिर में शुरू होने की बात कही गई है। ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें…. सिंगापुर सरकार किताब पढ़ने के बदले पैसे देगी: रोजाना कम से कम 15 मिनट पढ़ना होगा सिंगापुर सरकार अब लोगों को किताब पढ़ने के लिए पैसे देगी। इसके लिए रोज कम से कम 15 मिनट किताब या लंबे लेख पढ़ने होंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

दैनिक भास्कर 18 Sep 2026 5:40 pm

श्वेता तिवारी के लिए यूरोपियन विदेशी दूल्हा ढूंढेंगी मल्लिका, बनाया प्लान

‘द ट्रेटर्स 2’ में श्वेता तिवारी की लव लाइफ पर मल्लिका शेरावत ने मजेदार बात कही. मल्लिका बोलीं कि वह श्वेता के लिए एक अच्छा यूरोपियन लड़का ढूंढेंगी.

आज तक 20 Aug 2026 7:56 pm

जलवायु परिवर्तन का संकट झेलने लगा यूरोप

यूरोप में जो लोग समझते थे कि जलवायु परिवर्तन भविष्य की पीढ़ियों के लिए समस्या है उन्हें इस बार की गर्मियों ने सच्चाई बता दी है. जलवायु परिवर्तन के महंगे और जीवन बदलने वाले आर्थिक नतीजे यूरोप को अपनी चपेट में ले चुके हैं

देशबन्धु 11 Aug 2026 12:15 am

भारत की स्लीपर बस का फैन हुआ विदेशी शख्स, बोला- ऐसी सुविधा तो यूरोप में भी नहीं मिलती

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समाचार नामा 5 Aug 2026 9:50 pm

'यूरोप के दरवाजे' में घुस रहे 57 अफ्रीकियों को स्पेन ने क्यों मारा?

स्पेन की पुलिस बॉर्डर पर अलर्ट खड़ी है. पुलिस की गोलियों से अंदर घुसने की कोशिश कर रहे कई प्रवासियों की मौत हो चुकी है. 'यूरोप का दरवाजा' कहा जाने वाला स्यूटा शहर में प्रवासियों की बाढ़ ने इस शहर में कानून-व्यवस्था का संकट खड़ा कर दिया है.

आज तक 31 Jul 2026 7:58 pm

फ्रांस में पहली बार दिखा आग का बादल आखिर है क्या?

अभूतपूर्व जंगल की आग से जूझते फ्रांस में पहली बार फायर क्लाउड यानी आग के बादल बनते देखा गया है. आखिर आग के बादल होते क्या हैं और इनका क्या असर होता है. फ्रांस में इसे देखने के बाद क्यों चिंता बढ़ रही है

देशबन्धु 30 Jul 2026 9:33 pm

यूरोप में ‘ओमेगा ब्लॉक’ हीटवेव का प्रकोप, रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से जनजीवन बेहाल, दर्जनों लोगों की मौत

यूरोप में ‘ओमेगा ब्लॉक’ हीटवेव ने तबाही मचा दी है। फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और स्पेन में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, बिजली संकट, स्कूल बंद और गर्मी से कई मौतों की खबरें सामने आई हैं।

देशबन्धु 25 Jun 2026 9:36 am

अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान

एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं

देशबन्धु 20 Jun 2026 10:59 am

60 की उम्र में मिलिंद सोमन ने रचा इतिहास, यूरोप से अफ्रीका तक तैरकर पार किया स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर

अभिनेता और फिटनेस आइकन मिलिंद सोमन ने एक बार फिर अपनी अद्भुत सहनशक्ति और फिटनेस का परिचय दिया है। 60 साल की उम्र में मिलिंद सोमन ने स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर को तैरकर पार करने का एक कठिन और साहसी कारनामा कर दिखाया है। मिलिंद ने यूरोप और अफ्रीका के बीच ...

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फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन, 88 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

Alain Delon passes away: 'द लेपर्ड' और 'रोक्को एंड हिज ब्रदर्स' जैसी सुपर हिट फिल्मों में अभिनय का जौहर दिखाने वाले फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन हो गया है। एलेन डेलन ने 88 वर्ष की उम्र में आखिरी सांस ली। अभिनेता के पारिवारिक सूत्रों ने ...

वेब दुनिया 18 Aug 2024 5:40 pm

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समाचार नामा 28 May 2024 10:30 am

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मनोरंजन नामा 29 Apr 2024 9:00 pm