फ्रांस में सरकार के खिलाफ क्यों सड़कों पर उतरा छात्रों का आक्रोश, देखें
फ्रांस के लियों शहर की ये तस्वीर है. सड़कों पर प्रदर्शनकारी छात्रों का हुजूम, जलती हुई गाड़ियां, धुआं-धुआं आसमान और टीयर गैस से बचने के लिए भागते प्रदर्शनकारी, फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए जारी छात्रों का धरना प्रदर्शन कल बड़े आंदोलन में तब्दील हो गया.
फ्रांस के PM के आश्वासन के बाद भी छात्र प्रदर्शन जारी, देखें दुनिया आजतक
फ्रांस में छात्रों के हिंसक प्रदर्शनों का दौर नहीं थम रहा. बुधवार को फिर से पेरिस की सड़कों पर छात्रों ने जमकर उत्पात मचाया तो बेल्जियम में भी छात्र हिंसक हो गए. यहां भी छात्रों को काबू करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया. दोनों देशों में प्रदर्शनकारी छात्र मौजूदा शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं. वहीं, रूस ने यूक्रेन के कई शहरों पर भीषण कहर बरपा दिया. इस बार इंसानी बस्तियों को निशाना बनाकर हमला किया गया. देश-दुनिया की ऐसी ही ताजातरीन और अहम खबरों के लिए देखें दुनिया आजतक.
फ्रांस में पढ़ाई का खर्चा ₹45 लाख ? भारतीय स्टूडेंट ने गिनाया एजुकेशन से जुड़ा हर खर्च; सुनते ही लगेगा शॉक
थाईलैंड, इंग्लैंड से फ्रांस तक के लोगों ने यूं Zoom से किया पिंडदान
काशी में पितृ पक्ष पर मॉरीशस, इटली, फ्रांस समेत कई देशों के श्रद्धालुओं ने जूम मीटिंग के जरिए जुड़कर ऑनलाइन पिंडदान और तर्पण किया. महामंडलेश्वर अरुणानंद गिरी की देखरेख में गंगा तट पर शास्त्रीय विधि से तर्पण संपन्न हुआ. श्रद्धालुओं ने जूम पर नाम व गोत्र का स्मरण कर संकल्प लिया, जिसके बाद काशी में मौजूद प्रतिनिधियों ने पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की.
फ्रांस और बेल्जियम में छात्रों का प्रदर्शन हुआ उग्र, देखें दुनिया आजतक
फ्रांस में छात्रों के हिंसक प्रदर्शनों का दौर नहीं थम रहा. बुधवार को फिर से पेरिस की सड़कों पर छात्रों ने जमकर उत्पात मचाया तो बेल्जियम में भी छात्र हिंसक हो गए. यहां भी छात्रों को काबू करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया. दोनों देशों में प्रदर्शनकारी छात्र मौजूदा शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं. वहीं, रूस ने यूक्रेन के कई शहरों पर भीषण कहर बरपा दिया. इस बार इंसानी बस्तियों को निशाना बनाकर हमला किया गया. देश-दुनिया की ऐसी ही ताजातरीन और अहम खबरों के लिए देखें दुनिया आजतक.
पेरिस। फ्रांस में लगातार सामने आ रही साइबर सुरक्षा की घटनाओं ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांसीसी सरकार के 36 में से 25 मंत्रियों की निजी जानकारियां साइबर हमलों के बाद इंटरनेट पर उपलब्ध हो गई हैं। इनमें प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू भी शामिल हैं। यह खुलासा फ्रांसीसी साप्ताहिक […] The post फ्रांस में साइबर हमलों से हड़कंप, 25 मंत्रियों का निजी डेटा ऑनलाइन लीक; प्रधानमंत्री लेकोर्नू भी प्रभावित appeared first on Sabguru News .
रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने को भारत का 3-सूत्री प्रस्ताव, दोनों देशों ने सराहा
भारत ने ऊर्जा ठिकानों और ब्लैक सी व्यापार मार्ग की सुरक्षा के लिए योजना पेश की है, जिस पर रूस और यूक्रेन ने सकारात्मक रुख अपनाया है।
Gabriel India Forvia form Joinyt Venture:गेब्रियल इंडिया ने भारत में हाईटेक कार सीटें बनाने के लिए फ्रांस की ऑटोमोटिव टेक कंपनी फॉरविया के साथ जॉइंट वेंचर किया है। इस नए वेंचर का नाम 'फॉरेशिया आनंद सीटिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' होगा। जॉइंट वेंचर में किसकी कितनी हिस्सेदारी होगी? जानें
ट्रंप का ऐसा मजाक! यूरोपीय संसद के पास लगाई गई नग्न मूर्ति, लिखा- अन्याय का राजा
यूरोपीय संसद के पास ट्रंप की 23 कैरेट गोल्ड से बनी न्यूड मूर्ति लगाई गई है। ‘द ऑरेंज प्लेग’ नाम की इस मूर्ति को डेनिश कलाकार जेन्स गाल्शियोट ने बनाया है। मूर्ति में ट्रंप के हाथ में गोल्फ क्लब और न्याय का तराजू दिखाया गया है।
स्कॉलरशिप: यूरोप से करें मास्टर डिग्री, 37 नए प्रोग्राम में प्रवेश का मौका, 1.5 लाख+ तक की मदद
इरास्मस मुंड्स जॉइंट मास्टर्स स्कॉलरशिप के तहत यूरोप के 37 नए मास्टर प्रोग्राम में प्रवेश का मौका है। चयनित छात्रों को 24 महीने तक हर माह 1,400 यूरो तक की आर्थिक सहायता मिल सकती है।
न्यूयॉर्क के बाद यूरोप में दिखने लगा ममदानी इफेक्ट, वीडियो में जाने बर्लिन में महंगे किराए के मुद्दे पर जीती एलिफ एराल्प
21 दिन, 1200 स्कूल, 6500 गिरफ्तारियां... छात्रों के गुस्से से सुलगा फ्रांस
फ्रांस में शिक्षा की बदहाली को लेकर शुरु हुआ प्रदर्शन काफी उग्र हो चुका है. 21 दिन में 6,500 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं जबकि 24 स्कूलों को आग के हवाले कर दिया गया और सैकड़ों स्कूलों को बंद कर दिया गया है. जानिए 21 सितंबर से शुरु हुए बवाल में अब तक क्या हुआ.
फ्रांस और जापान के वैज्ञानिकों को केमिस्ट्री का नोबेल
मेडिसीन और फिजिक्स के बाद इस साल के तीसरे नोबेल यानी केमिस्ट्री के नोबेल पुरस्कार की घोषणा कर दी गई है।
फ्रांस के Gen Z में क्यों आया उबाल? आगजनी, हिंसा और सैकड़ों स्कूल बंद...
जिस फ्रांस ने कभी क्रांति के जरिए सत्ता का चेहरा बदला था, दुनिया को स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का सिद्धांत दिया. आज वही अपने छात्रों के गुस्से को संभालने के लिए जूझ रहा है. प्रदर्शनकारी छात्र सड़क पर हैं, हैरान करने वाली बात यह है कि इन छात्रों की मांगें वहीं है जिसे लेकर अमूमन भारत के छात्र सड़क पर निकलते हैं.
40 साल पहले जिस जुनून को दुनिया ने कहा 'पागलपन', आज उसी पर फ्रांसिस हैल्जेन को मिला फिजिक्स का नोबेल
फिजिक्स का नोबेल 2026 प्रोफेसर फ्रांसिस हैल्जेन को ब्रह्मांडीय न्यूट्रिनो की खोज और आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जरवेट्री की स्थापना में अहम योगदान के लिए मिला है. इस खोज ने ब्रह्मांड को समझने का नया रास्ता खोला है.
'इस्लाम एक महान देश पर कब्जा करना चाहता है...', फ्रांस में जारी प्रदर्शन पर डोनाल्ड ट्रंप का बयान
फ्रांस में कई शहरों में जारी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर हिंसा हो रही है। अब इस प्रदर्शन पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान जारी किया है। ट्रंप ने इस प्रदर्शन को इस्लान से जोड़ दिया है।
फ्रांस में छात्र प्रदर्शनों पर ट्रंप बोले- 'इस्लाम एक महान देश पर कब्ज़ा करना चाहता है'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ़्रांस में स्टूडेंट्स के बड़े पैमाने पर हो रहे प्रदर्शनों के लिए इस्लाम और माइग्रेशन को जिम्मेदार ठहराया.
रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत की पहल, दोनों पक्षों से बातचीत जारी
भारत ने रूस यूक्रेन जंग पर साफ किया है कि बातचीत और कूटनीति ही समाधान है. प्रधानमंत्री कई बार कह चुके हैं कि यह युद्ध का दौर नहीं है और मैदान से हल नहीं निकलेगा. भारत ने साफ कर दिया है कि अंतहीन युद्ध की जगह युद्ध के अंत का समय आ गया है.
फ्रांस के स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट में ट्रंप का बड़ा दावा
फ्रांस में स्कूल और यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट अब देश की राजनीति और अमेरिका तक पहुंच गया है. शुरुआत शिक्षकों, नर्स और स्टाफ की कमी को लेकर हुई, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे बड़े पैमाने पर प्रवासन और इस्लाम से जोड़ दिया. वहीं फ्रांसीसी अधिकारियों और छात्र संगठनों के मुताबिक आंदोलन की शुरुआती मांगें स्कूलों की सुविधाओं और कर्मचारियों से जुड़ी हैं. सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो और भ्रामक दावों ने भी विवाद बढ़ाया है.
फ्रांस में छात्र प्रदर्शन: अबतक 5 हजार गिरफ्तार, इनमें 87% नाबालिग
फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के खिलाफ छात्रों का गुस्सा सड़कों पर है. इस आंदोलन में गिरफ्तार किए गए 5,000 से ज्यादा लोगों में 87 प्रतिशत नाबालिग हैं. स्कूलों में शिक्षकों की कमी, खराब इमारतों और बुनियादी सुविधाओं की कमी से छात्र परेशान हैं. प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस कार्रवाई ने सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.
फ्रांस-जापान : कगन और केन्सो को केमिस्ट्री का नोबेल पुरस्कार
नई दिल्ली, 2026 के केमिस्ट्री नोबेल पुरस्कार का ऐलान कर दिया गया है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने फ्रांस के हेनरी बी. कगन और जापान के केन्सो सोआई को असिमेट्रिक ऑर्गेनिक सिंथेसिस इन नॉन-लीनियर इफेक्ट्स और ऑटो-कैटालिसिस की खोज के लिए पुरस्कार दिया।
केमिस्ट्री नोबेल 2026 का ऐलान! जानिए फ्रांस के हेनरी कागन और जापान के केन्सो सोआई की उस खोज के बारे में, जिसने दुनिया बदल दी
फ्रांस के कगन और जापान के केन्सो को केमिस्ट्री का नोबेल पुरस्कार
2026 के केमिस्ट्री नोबेल पुरस्कार का ऐलान कर दिया गया है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने फ्रांस के हेनरी बी. कगन और जापान के केन्सो सोआई को असिमेट्रिक ऑर्गेनिक सिंथेसिस इन नॉन-लीनियर इफेक्ट्स और ऑटो-कैटालिसिस की खोज के लिए पुरस्कार दिया।
फ्रांस में छात्रों का उग्र प्रदर्शन, पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले
फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की मांग को लेकर छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है. फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत देश के कई बड़े शहरों में छात्रों ने सड़कों पर उतरकर जबरदस्त प्रदर्शन किया. इस आंदोलन में अब तक करीब ढाई लाख से ज्यादा लोग शामिल हो चुके हैं, जबकि आयोजकों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों की संख्या साढ़े चार लाख से अधिक थी. इस आंदोलन का मुख्य कारण स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और जर्जर स्कूल इमारतों की मरम्मत न होना है.
यूरोप में गरमाया 'हाउसिंग क्राइसिस'! सस्ते घर और कम किराए के दम पर बर्लिन में मिली ऐतिहासिक जीत
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रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए भारत का 3 पॉइंट फॉर्मूला, जानिए क्या है प्रस्ताव
रूस और यूक्रेन युद्ध कब खत्म होगा? इस सवाल का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है, लेकिन प्रयास जारी है। भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध के तुरंत खतरे कम करने के लिए तीन हिस्सों वाला युद्धविराम प्रस्ताव रखा है। आइये जानते हैं प्रस्ताव में क्या-क्या है...
फ्रांस पर कब्जा कर रहे मुसलमान? छात्र आंदोलन को ट्रंप क्यों बता रहे 'इस्लामी टेकओवर'
फ्रांस में स्कूलों में स्टाफ की कमी को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब बड़ा रूप ले चुका है. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे प्रवासन और इस्लाम से जोड़ रहे हैं. आखिर फ्रांस में जमीन पर क्या हो रहा है और ट्रंप के दावे में कितना सच है?
फ्रांस में छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। क्या हैं छात्रों की मांगे और विरोध प्रदर्शन ने सरकार की परेशानी क्यों बढ़ा दी है?
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रूस-यूक्रेन युद्ध में 6.5 लाख मौतें हो चुकीं, अब भारत के सुझाए 3 उपाय मान लेना चाहिए
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ कह दिया है कि भारत सिर्फ वकालत करने से आगे बढ़ चुका है और दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए दोनों के साथ व्यावहारिक बातचीत कर रहा है.भारत का मानना है कि समाधान जंग के मैदान में नहीं, बातचीत के मेज पर है.
फ्रांस में प्रदर्शन पर ट्रंप का बड़ा दावा: बोले- देश पर कब्जा करना चाहता है इस्लाम; क्यों दिया ऐसा बयान?Donald Trump france school protests mass migration islam
रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण सैन्य तनाव के साए में समुद्र से एक बड़ी और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। रूस के तटीय जलक्षेत्र के पास कच्चे तेल से भरे एक बड़े ऑयल टैंकर में अचानक जोरदार धमाके के साथ भीषण आग लग गई। आग इतनी भयावह थी कि उसकी लपटें कई किलोमीटर दूर से साफ दिखाई दे रही थीं और आसमान में काले धुएं का एक विशाल गुबार छा गया। इस घटना के बाद समुद्री यातायात सुरक्षा और तटरक्षक बलों में हड़कंप मच गया। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस व्यावसायिक जहाज पर तैनात सभी 23 भारतीय क्रू मेंबर्स पूरी तरह सुरक्षित हैं। रूसी बचाव दल और मैरीटाइम इमरजेंसी टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी नाविकों को वक्त रहते जहाज से सकुशल रेस्क्यू कर लिया।आसमान में दिखे काले धुएं के गुबार, युद्ध स्तर पर शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशनप्रत्यक्षदर्शियों और समुद्री निगरानी एजेंसियों के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब टैंकर कार्गो लोड करने के बाद अपने गंतव्य की ओर बढ़ने की तैयारी में था। अचानक जहाज के पिछले हिस्से (इंजन रूम या स्टोरेज डेक) से तेज धमाके की आवाज सुनाई दी और देखते ही देखते लपटों ने जहाज के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। आग की विकरालता को देखते हुए रूसी आपातकालीन मंत्रालय (EMERCOM) और आसपास मौजूद टगबोट्स को तुरंत मौके पर भेजा गया। अग्निशामक जहाजों ने पानी और केमिकल फोम की लगातार बौछारें करके आग को टैंकर के मुख्य कच्चे तेल के मुख्य होल्ड तक पहुंचने से रोका, जिससे समुद्र में एक बड़ा पर्यावरण संकट और ऑयल स्पिल होने से टल गया।सभी 23 भारतीय क्रू मेंबर्स सुरक्षित: भारतीय दूतावास लगातार संपर्क मेंजहाज में आग लगने की सूचना मिलते ही भारत में विदेश मंत्रालय और मास्को स्थित भारतीय दूतावास तुरंत सक्रिय हो गए। जहाज का संचालन करने वाली कंपनी और रूसी अधिकारियों ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि टैंकर पर कुल 23 नाविक सवार थे और वे सभी भारतीय नागरिक हैं। कैप्टन और क्रू के सूझबूझ भरे फैसले के चलते आपातकालीन अलार्म बजते ही लाइफ राफ्ट्स और इमरजेंसी एग्जिट प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किया गया। रूसी बचाव नौकाओं ने सभी 23 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया और उन्हें नजदीकी बंदरगाह पर स्थित मेडिकल सेंटर ले जाया गया। प्राथमिक जांच में पुष्टि हुई है कि किसी भी भारतीय नाविक को गंभीर चोट नहीं आई है और सभी की हालत स्थिर है। दूतावास के अधिकारी लगातार नाविकों और उनके परिजनों के संपर्क में हैं ताकि उनकी सुरक्षित वतन वापसी सुनिश्चित की जा सके।ड्रोन हमला या तकनीकी खराबी? जांच में जुटी रूसी सुरक्षा एजेंसियांइस आग की घटना के पीछे के कारणों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कयास लगाए जा रहे हैं। चूंकि यह इलाका रूस-यूक्रेन युद्ध के लिहाज से सामरिक और संवेदनशील जलमार्ग के दायरे में आता है, जहां पहले भी ब्लैक सी और आस-पास के बंदरगाहों पर सी-ड्रोन (Uncrewed Surface Vessels) और लंबी दूरी के एरियल ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, इसलिए सुरक्षा एजेंसियां किसी आतंकी या ड्रोन हमले के पहलू को भी खारिज नहीं कर रही हैं। हालांकि, रूसी नौसेना और मैरीटाइम ट्रांसपोर्ट मंत्रालय के प्रारंभिक बयानों में शॉर्ट सर्किट या आंतरिक ईंधन रिसाव के चलते आग लगने की संभावना भी जताई गई है। घटना की विस्तृत तकनीकी और फोरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है।अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असरकाला सागर और रूसी बंदरगाहों से होने वाला तेल परिवहन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस घटना ने एक बार फिर संघर्ष क्षेत्र में चल रहे व्यापारिक जहाजों और मर्चेंट नेवी के नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। वैश्विक शिपिंग यूनियनों और मैरीटाइम संगठनों ने युद्ध प्रभावित जलक्षेत्र में नागरिक जहाजों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की मांग दोहराई है। फिलहाल जलते हुए जहाज को स्थिर कर लिया गया है और ईंधन के रिसाव को रोकने के लिए फ्लोटिंग बूम्स लगाए जा रहे हैं, जबकि सुरक्षित बचाए गए भारतीय नाविकों को जल्द ही जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर भारत वापस भेजने की प्रक्रिया चल रही है।
फ्रांस इस समय छात्रों के व्यापक विरोध-प्रदर्शनों की लहर का सामना कर रहा है। पेरिस से शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे देश में फैल चुका है, जिसमें हज़ारों किशोर और युवा सड़कों पर उतरकर स्कूलों की बदहाली, शिक्षकों की कमी और शिक्षा क्षेत्र में बजट की कटौती के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं। इस प्रदर्शन को अब यूनिवर्सिटी के छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और ट्रेड यूनियनों का भी भारी समर्थन मिल रहा है। विरोध-प्रदर्शनों का दायरा तेज़ी से बढ़ा है। मंगलवार, 6 अक्टूबर को फ़्रांसीसी गृह मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, पूरे देश में प्रदर्शनों में 2,66,000 लोग शामिल हुए, जिनमें से 56,000 लोग पेरिस में थे। आयोजकों ने यह संख्या काफ़ी ज़्यादा बताई है - पूरे देश में लगभग 4,50,000। पुलिस ने आँसू गैस का इस्तेमाल किया और कुछ शहरों में झड़पें भी हुईं। गृह मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार को 488 लोगों को हिरासत में लिया गया। छात्र विरोध क्यों कर रहे हैं? यह आंदोलन 21 सितंबर को पेरिस इलाके में शुरू हुआ, जब छात्रों ने शिक्षकों की कमी और खराब हालात के कारण क्लास का बहिष्कार करना और स्कूलों को ब्लॉक करना शुरू कर दिया। इसके बाद विरोध-प्रदर्शन तेज़ी से फ्रांस के अन्य हिस्सों में फैल गए। इस गुस्से की मुख्य वजह एक साधारण सी शिकायत है: छात्रों का कहना है कि उनके स्कूलों में उन्हें वह शिक्षा देने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने शिक्षकों की अनुपस्थिति (बिना किसी विकल्प के), बहुत ज़्यादा भीड़ वाली क्लास, लंबे और थकाऊ टाइम-टेबल और खराब हालत वाली इमारतों की ओर इशारा किया है। कुछ छात्रों ने ऐसी क्लास के बारे में बताया है जहाँ दीवारें टूटी-फूटी हैं, पानी टपकता है और फ़र्नीचर भी ठीक नहीं है। दूसरों ने गर्मी के मौसम में क्लास में बहुत ज़्यादा गर्मी होने की शिकायत की है। छात्र 'Parcoursup' से भी नाखुश हैं, जो फ्रांस में उच्च शिक्षा में दाखिले को मैनेज करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला ऑनलाइन सिस्टम है। उनका तर्क है कि इस सिस्टम को और सरल और पारदर्शी बनाने की ज़रूरत है। छात्र असल में क्या चाहते हैं? उनकी मांगें सिर्फ़ ज़्यादा पैसे की मांग से कहीं आगे हैं। छात्र ज़्यादा शिक्षक और स्टाफ़, बेहतर रखरखाव वाली स्कूल इमारतें, कम भीड़ वाली क्लास और रोज़ाना के स्कूल अनुभव में सुधार चाहते हैं। वे उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को गाइड करने के तरीके में भी बदलाव चाहते हैं। इन विरोध-प्रदर्शनों के पीछे असमानता का मुद्दा भी एक अहम वजह है। गरीब इलाकों के छात्रों का कहना है कि वे अक्सर ऐसे स्कूलों में पढ़ते हैं जहाँ देश के अमीर इलाकों के छात्रों की तुलना में कम संसाधन और खराब सुविधाएँ होती हैं। इस वजह से यह आंदोलन शिक्षा तक समान पहुँच और इस बात पर एक बड़ी बहस में बदल गया है कि क्या किसी छात्र का भविष्य इस बात पर निर्भर होना चाहिए कि वह कहाँ रहता है या किस स्कूल में पढ़ता है। यह आंदोलन इतना बड़ा क्यों हो गया है? विरोध प्रदर्शन अब हाई स्कूल के छात्रों से कहीं आगे बढ़ चुके हैं। यूनिवर्सिटी के छात्र प्रदर्शनों और नाकेबंदी में शामिल हो गए हैं, जबकि शिक्षकों के संगठनों और पब्लिक सेक्टर के अन्य संगठनों ने इस आंदोलन का समर्थन किया है। माता-पिता और अन्य वयस्क भी इसमें शामिल हुए हैं; कुछ का कहना है कि वे किशोरों का समर्थन करना चाहते हैं और पुलिस की कार्रवाई की आशंकाओं के बीच उनकी सुरक्षा करना चाहते हैं। 'ले मोंडे' की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को फ्रांस के लगभग 40% पब्लिक हायर एजुकेशन संस्थानों में कामकाज बाधित रहा। इन प्रदर्शनों ने बहुत अलग-अलग बैकग्राउंड वाले छात्रों को भी एक साथ ला खड़ा किया है, जिनमें गरीब और अमीर, दोनों तरह के स्कूलों के छात्र शामिल हैं। कई युवाओं के लिए, यह गुस्सा उनके भविष्य से जुड़ी व्यापक चिंताओं से भी जुड़ा है, जिनमें असमानता, शिक्षा व्यवस्था का दबाव और वयस्क जीवन में सुरक्षित जगह पाने की मुश्किल शामिल हैं। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव क्यों हो रहा है? ज़्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं, लेकिन कुछ हिंसक हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों के छोटे समूहों ने चीज़ें फेंकी हैं, आग लगाई है या पुलिस से भिड़े हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसी घटनाओं में दंगा-रोधी पुलिस के दखल की ज़रूरत पड़ती है। सरकार की प्रतिक्रिया खुद गुस्से का एक बड़ा कारण बन गई है। पुलिस ने आँसू गैस और दंगा-रोधी अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया है, और प्रदर्शनकारियों, माता-पिता और कुछ राजनीतिक हस्तियों ने अधिकारियों पर किशोरों के खिलाफ़ ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है। इस अशांति के दौरान कई युवाओं के बुरी तरह घायल होने के बाद यह मुद्दा और भी गंभीर हो गया। उत्तरी शहर लेंस में पुलिस के स्टन ग्रेनेड से जुड़ी एक घटना में 15 साल के एक लड़के का हाथ कट गया। असल में क्या हुआ था, इसकी जाँच चल रही है। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज़ ने पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि अधिकारियों ने लगभग सभी मामलों में स्थिति के हिसाब से उचित कार्रवाई की है। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने जिसे वे अत्यधिक हिंसा कहते हैं, उसकी निंदा की है और साथ ही कहा है कि पुलिस के व्यवहार के आरोपों की जाँच होनी चाहिए। इन प्रदर्शनों के बारे में डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा है? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन विरोध प्रदर्शनों पर अपनी राय रखी है। उन्होंने फ्रांस में फैली अशांति के लिए बेकाबू बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन और इस्लाम को ज़िम्मेदार ठहराया है। 6 अक्टूबर को किए गए एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि ये प्रदर्शन पलायन से जुड़ी व्यापक चिंताओं और फ्रांस में इस्लाम के बढ़ते प्रभाव के कारण हो रहे हैं। यह राजनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है? ये विरोध प्रदर्शन फ्रांस के लिए एक संवेदनशील समय पर हो रहे हैं। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपने कार्यकाल के आखिरी दौर में हैं और लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते। इसलिए, अगले राष्ट्रपति चुनाव से पहले राजनीतिक बहस में यह अशांति एक मुद्दा बन गई है। साथ ही, फ्रांस गंभीर वित्तीय दबाव और सरकारी खर्च को लेकर बहस का सामना कर रहा है। इसलिए, स्कूलों में ज़्यादा निवेश की छात्रों की मांगें, सार्वजनिक सेवाओं के लिए सरकार को पैसा कहाँ से मिलेगा, जैसे बड़े सवालों से टकरा रही हैं। इन विरोध प्रदर्शनों ने असमानता, गरीबी और बढ़ती महंगाई (जिसमें ईंधन की ऊंची कीमतें भी शामिल हैं) को लेकर लोगों की निराशा को और बढ़ा दिया है। यही वजह है कि यह आंदोलन अब सिर्फ़ क्लासरूम तक सीमित नहीं रह गया है। यह इस बात की परीक्षा बन गया है कि जब युवा पीढ़ी को लगता है कि उसे नज़रअंदाज़ किया जा रहा है, तो फ्रांसीसी सरकार कैसे प्रतिक्रिया देती है। फ्रांसीसी सरकार क्या कर रही है? सरकार ने हिंसा के खिलाफ़ सख़्त रुख अपनाते हुए प्रतिक्रिया देने की कोशिश की है। शिक्षा मंत्रालय ने एक गुमनाम ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म शुरू किया है जहाँ छात्र अपने स्कूलों की समस्याओं के बारे में बता सकते हैं और बदलाव का सुझाव दे सकते हैं। सरकार ने छात्रों की कई मांगों पर काम करने का वादा भी किया है। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने छात्रों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर काम करने का आदेश दिया है और कहा है कि सरकार स्कूलों की स्थिति और 'पार्सर्सुप' (Parcoursup) सिस्टम की समीक्षा करेगी। उन्होंने हाई स्कूलों में क्लास को कुछ समय के लिए रोकने की भी घोषणा की है ताकि हेडटीचर और छात्र अपनी चिंताओं पर चर्चा कर सकें; उन्होंने इसे आंतरिक लोकतंत्र का दौर कहा। लेकिन सरकार की प्रतिक्रिया से छात्र समूह संतुष्ट नहीं हैं; उनका कहना है कि उन्हें वादों के बजाय ठोस बदलाव चाहिए। आगे क्या होगा? इन विरोध प्रदर्शनों के एक बड़ा मुद्दा बने रहने की संभावना है क्योंकि छात्र, शिक्षक, माता-पिता और यूनियन सरकार पर कार्रवाई के लिए दबाव डाल रहे हैं। यह आंदोलन कई हफ़्तों से चल रहा है और पेरिस क्षेत्र में स्कूलों की घेराबंदी से बढ़कर एक देशव्यापी अभियान बन गया है। मंगलवार के प्रदर्शनों से पता चला कि यह कितना बड़ा हो गया है; आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इसमें लाखों लोगों ने हिस्सा लिया। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार फ्रांसीसी स्कूलों के अंदर की समस्याओं का समाधान कर सकती है और साथ ही विरोध प्रदर्शनों को और अधिक हिंसक होने से रोक सकती है। खुद छात्रों के लिए संदेश बिल्कुल साफ़ है: उन्हें बेहतर स्कूल, ज़्यादा संसाधन, ज़्यादा निष्पक्ष अवसर और उन फ़ैसलों में ज़्यादा भागीदारी चाहिए जो उनके भविष्य को आकार देंगे। Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi Breaking: Clashes in Many parts of #France right now Students calls for mass protests today in #France https://t.co/XB1gZQMi9p — World_Breaking_News03 (@Breaking2003) October 6, 2026 BREAKING: French riot police charge student protestors in Paris near the Place de la Nation after rioters set fires. Unrest continues in France with no end in sight. Follow: @RMXnews https://t.co/XRYcP557uq — Remix News & Views (@RMXnews) October 6, 2026
फ्रांस में शिक्षा फंडिंग को लेकर सड़कों पर उतरे लोग: पुलिस ने छोड़ी आंसू गैस; बवाल की वजह क्या?
फ्रांस में शिक्षा फंडिंग को लेकर सड़कों पर उतरे लोग: पुलिस ने छोड़ी आंसू गैस; बवाल की वजह क्या?France student protest school funding paris tear gas
आशुतोष दीक्षित नए एयर चीफ मार्शल होंगे... फ्रांस से मिराज लाए थे
आशुतोष दीक्षित वायुसेना के नए प्रमुख होंगे। वे 31 अक्टूबर को एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के रिटायर होने पर 29वें वायुसेना प्रमुख बनेंगे। कार्यकाल 31 दिसंबर 2028 तक रहेगा। दीक्षित 1986 में लड़ाकू पायलट बने। 3,500 घंटे उड़ान अनुभव है। 2003 में नंबर-9 स्क्वाड्रन को मिराज-2000 से लैस करते समय दीक्षित ने 10 मिराज फ्रांस से भारत लाने वाली उड़ानों की अगुआई की। साथ ही उनकी देख-रेख में राफेल लाया गया।
भोपाल में बुधवार से मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट शुरू होगा। 10 अक्टूबर तक चलने वाले मार्ट का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। इसमें अमेरिका, फ्रांस, जापान, इटली समेत करीब 34 देश के 100 मेहमान भी शामिल होंगे, जो घरेलू टूर ऑपरेटर्स से अपने अनुभव, पैकेज आदि साझा करेंगे। वहीं, 15 राज्य के 180 घरेलू टूर ऑपरेटर्स सहित 600 से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। शुभारंभ अवसर पर प्रदेश में ₹1,100 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों और अनुबंधों को अंतिम रूप मिलेगा, जबकि सीहोर में ₹848.40 करोड़ का मेगा निवेश समझौता किया जाएगा। यह 7वां संस्करण, बी2बी मंचयह आयोजन राज्य के पर्यटन परिदृश्य का अब तक का सबसे विशाल और रणनीतिक बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) नेटवर्किंग मंच सिद्ध होने जा रहा है। शुभारंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी करेंगे। पिछले साल 21 करोड़ से ज्यादा टूरिस्ट आए सचिव पर्यटन और प्रबंध संचालक एमपी टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैयाराजा टी. ने बताया, वर्ष 2025 में पर्यटकों के आवागमन में 57 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। जिससे प्रदेश में पर्यटकों का कुल आंकड़ा 21.05 करोड़ तक पहुंच गया है। MPTM 2026 का मूल उद्देश्य इसी तीव्र संवृद्धि को वैश्विक निवेश, आधुनिक अधोसंरचना और सतत आजीविका के अवसरों में रूपांतरित करना है। इन देशों के प्रतिनिधि आएंगे MPTM 2026 के इस संस्करण में विश्व के 34 से अधिक प्रमुख देशों के 100 से अधिक विदेशी प्रतिनिधि और पर्यटन स्टेकहोल्डर इस मार्ट में प्रत्यक्ष सहभागिता कर रहे हैं। इनमें यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन, इटली, ग्रीस, नीदरलैंड्स, पोलैंड, फिनलैंड, बुल्गारिया, बेलारूस, अल्बानिया, हंगरी और स्लोवाकिया जैसे प्रमुख यूरोपीय राष्ट्र शामिल हैं। अमेरिकी महाद्वीप से संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको; एशिया-प्रशांत क्षेत्र से ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, फिलीपींस और श्रीलंका तथा पश्चिम एशिया व अफ्रीका से संयुक्त अरब अमीरात, इजराइल, मॉरीशस, केन्या और रूस के प्रमुख टूर ऑपरेटर्स व ट्रैवल लेखक भोपाल पहुंच चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी देश के 15 से अधिक राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों जिनमें दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गोवा, हरियाणा, ओडिशा तथा जम्मू और कश्मीर के 180 से अधिक प्रमुख घरेलू टूर ऑपरेटर्स भाग ले रहे हैं। इतने प्रस्ताव आएंगेआयोजन के दौरान लगभग ₹1,100 करोड़ से अधिक के संयुक्त निवेश प्रस्तावों और अनुबंधों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न अंचलों में होटल, वेलनेस रिसॉर्ट, लक्जरी टेंटेड कैंपिंग और इको-टूरिज्म इकाइयों की स्थापना के लिए 14 प्रमुख प्रोजेक्ट के लिए निजी निवेशकों को ₹252 करोड़ के 'लेटर ऑफ अवार्ड' (LOA) औपचारिक रूप से सौंपे जाएंगे। इसके अलावा पर्यटकों की सड़क यात्रा को सुगम, सुरक्षित और स्वच्छ बनाने के लिए राज्य के 3 प्रमुख पर्यटन राजमार्गों पर अत्याधुनिक 'मार्ग सुविधा केंद्रों' के विकास के लिए भी LOA प्रदान किए जा रहे हैं। सबसे बड़ा आकर्षण सीहोर जिले के रामगढ़ में होने वाला ₹848.40 करोड़ का मेगा पर्यटन निवेश समझौता है। मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड एवं मेसर्स एआरएम फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के मध्य होने वाले इस अनुबंध के अंतर्गत रामगढ़ में अंतरराष्ट्रीय स्तर का गोल्फ कोर्स, गोल्फ विला, वेलनेस रिसॉर्ट, लक्जरी होटल और उच्चस्तरीय आतिथ्य अधोसंरचना का निर्माण किया जाएगा। यह विशाल परियोजना न केवल विंध्य और मालवा क्षेत्र के पर्यटन मानचित्र को वैश्विक पहचान देगी, बल्कि इससे क्षेत्र में लगभग 920 प्रत्यक्ष और सैकड़ों अप्रत्यक्ष स्थानीय रोजगारों का सृजन होगा। मां की रसोई सजीअतिथियों को मध्य प्रदेश के अनूठे खान-पान और संयुक्त राष्ट्र के मिलेट प्रोत्साहन मिशन से जोड़ने के लिए 'मां की रसोई' का विशेष लाइव काउंटर स्थापित किया गया है। इसमें कोदो-मेथी भात, ज्वार-बाजरे की रोटियां, मट्ठे के आलू, चक्की का साग, निघौना, मालवा-निमाड़ का प्रसिद्ध दाल-बाफला, भुने भाटे का भर्ता और सिलबट्टे की ताजी चटनियों जैसे विशुद्ध पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजन परोसे जाएंगे।
ऑनलाइन फंसाता था फिर नाबालिग लड़कियों से जबरन... फ्रांस में पकड़ा गया युवक, बंद कमरे में ट्रायल
फ्रांस में एक भारतीय युवक पर ऐसे ऑनलाइन गिरोह के संचालन के आरोप में मुकदमा शुरू किया गया है, जो कम उम्र की लड़कियों को यौन गतिविधियों में शामिल होने और खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए मजबूर करता था।
देश पर कब्जे के लिए... विरोध-प्रदर्शन के पीछे इस्लाम; फ्रांस में अशांति पर ट्रंप का बड़ा दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में चल रहे छात्र विरोध प्रदर्शनों के लिए बड़े पैमाने पर प्रवास और इस्लाम को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन स्कूलों की समस्या को लेकर नहीं, बल्कि एक समय के महान देश पर कब्जे की कोशिश है।
फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार 2026 प्रोफेसर फ्रांसिस हाल्जेन को अंटार्कटिका में आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी की स्थापना और ब्रह्मांडीय न्यूट्रिनो की खोज के लिए दिया गया है।
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आर्थिक सहयोग : दक्षिण कोरिया के स्पीकर का यूरोप दौरा
सोल, दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली के स्पीकर चो जियोंग-सिक मंगलवार को यूरोप के चार देशों की यात्रा पर रवाना होंगे, ताकि आर्थिक और औद्योगिक सहयोग पर चर्चा की जा सके। नौ दिनों में वो वेटिकन सिटी का भी दौरा करेंगे। स्थानीय मीडिया के अनुसार यहां वो उत्तर कोरिया के साथ शांति स्थापित करने को लेकर गहन विमर्श कर सकते हैं।
शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन : फ्रांस
पेरिस, फ्रांस में स्कूलों के बदहाल हालात और शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर जारी छात्र आंदोलन को लंबा वक्त बीत चुका है। विरोध राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन में बदल गया है। देशभर में हजारों छात्रों, शिक्षकों, ट्रेड यूनियनों और अभिभावक संगठनों ने मंगलवार को सड़कों पर उतरना शुरू कर दिया है।
Chandigarh News: यूके, फ्रांस और जर्मनी से नशा मंगवाने वाले को 10 साल की कैद
10-year jail term for person who procured drugs from the UK, France, and Germany
घर में लगाया गया एक फूल का पौधा बार-बार खराब हुआ तो एक 10वीं के छात्र के मन में ऐसा सवाल उठा, जिसने उसे तकनीक की दुनिया में नई खोज करने के लिए प्रेरित कर दिया। सवाल था- आखिर पौधा खराब क्यों हो रहा है और इसे समय रहते कैसे बचाया जा सकता है? काम करते-करते तैयार किया मॉडल इसी जिज्ञासा से सीतामढ़ी के छात्र रुद्र चंद्र मिश्रा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ऐसा मॉडल तैयार कर दिया, जो पौधे में बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखाई देने से पहले ही उसकी सेहत में हो रहे बदलावों को पहचानने में मदद करता है। रुद्र के पिता रितेश कुमार, अधिवक्ता हैं। उन्होंने बताया कि वे अक्सर घर में पौधे लाते थे। कुछ समय पहले उन्होंने एक फूल का पौधा लगाया, लेकिन वह खराब हो गया। इसके बाद दूसरा पौधा लाया गया, वह भी खराब हो गया। लगातार पौधों के खराब होने से रुद्र की जिज्ञासा बढ़ी। वह जानना चाहते थे कि पौधा आखिर क्यों खराब हो रहा है और इसे पहले ही कैसे बचाया जा सकता है। इसी सोच पर काम करते-करते रुद्र ने यह मॉडल तैयार किया। 8 माइक्रोकंट्रोलर और कई सेंसर से लैस मॉडल शहर के सेक्रेड हार्ट स्कूल के 10वीं के छात्र रुद्र ने वर्ष 2024 में इस तकनीक पर काम शुरू किया। मॉडल में करीब 8 माइक्रोकंट्रोलर, कई सेंसर, वायु मॉड्यूल, मिट्टी की नमी मापने वाले सेंसर और कैमरा सिस्टम लगाए गए हैं। यह पौधे की सेहत, मिट्टी की नमी और वातावरण की निगरानी करता है। इसका उद्देश्य बीमारी के स्पष्ट लक्षण आने से पहले पौधे में होने वाले बदलावों को पहचानना है। जरूरत के अनुसार पानी पहुंचाने की व्यवस्था भी मॉडल में जोड़ी गई है।रुद्र के इस इनोवेशन को अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिली है। रुद्र के मॉडल को 37वां स्थान फ्रांस के ल्योन में आयोजित InnoRobo by SIDO में उन्होंने ऑनलाइन अपने मॉडल का प्रदर्शन किया। 87 देशों के 1472 विद्यार्थियों ने नवाचार पेश किए थे। रुद्र के मॉडल को 37वां स्थान मिला। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी बधाई दी है। मॉडल को तैयार करने में करीब 45 हजार रुपए खर्च हुए हैं। रुद्र अब इसकी लागत घटाकर 10 से 15 हजार रुपए करने पर काम कर रहे हैं, ताकि भविष्य में किसान भी इसका उपयोग कर सकें।
Yamuna Nagar News: चाचा ने युवक को यूरोप भेजने का झांसा देकर 20 लाख रुपये हड़पे
यूरोप में स्टडी वीजा पर भेजने का झांसा देकर गांधी नगर पार्क निवासी युवक ने 20 लाख रुपये ठगने का आरोप लगाते हुए पुलिस को शिकायत दी है। आरोपी रिश्ते में पीड़ित का चाचा बताया जा रहा है।
श्वेता तिवारी के लिए यूरोपियन विदेशी दूल्हा ढूंढेंगी मल्लिका, बनाया प्लान
‘द ट्रेटर्स 2’ में श्वेता तिवारी की लव लाइफ पर मल्लिका शेरावत ने मजेदार बात कही. मल्लिका बोलीं कि वह श्वेता के लिए एक अच्छा यूरोपियन लड़का ढूंढेंगी.
यूरोप में भीषण गर्मी का कहर... इटली में रेड अलर्ट, ऑस्ट्रिया में तापमान का टूटा रिकॉर्ड
यूरोप में भीषण गर्मी और लू ने कई देशों के तापमान रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. इटली सरकार ने 27 प्रमुख शहरों को रेड अलर्ट पर रखा है. ऑस्ट्रिया में तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ज्यादा तापमान है. इस गर्मी और सूखे का असर बिजली उत्पादन, परिवहन और पर्यटन पर भी पड़ा है. पर्यावरणविद ग्लोबल वार्मिंग को इस स्थिति का मुख्य कारण मानते हैं.
भारत की स्लीपर बस का फैन हुआ विदेशी शख्स, बोला- ऐसी सुविधा तो यूरोप में भी नहीं मिलती
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'यूरोप के दरवाजे' में घुस रहे 57 अफ्रीकियों को स्पेन ने क्यों मारा?
स्पेन की पुलिस बॉर्डर पर अलर्ट खड़ी है. पुलिस की गोलियों से अंदर घुसने की कोशिश कर रहे कई प्रवासियों की मौत हो चुकी है. 'यूरोप का दरवाजा' कहा जाने वाला स्यूटा शहर में प्रवासियों की बाढ़ ने इस शहर में कानून-व्यवस्था का संकट खड़ा कर दिया है.
फ्रांस में पहली बार दिखा आग का बादल आखिर है क्या?
अभूतपूर्व जंगल की आग से जूझते फ्रांस में पहली बार फायर क्लाउड यानी आग के बादल बनते देखा गया है. आखिर आग के बादल होते क्या हैं और इनका क्या असर होता है. फ्रांस में इसे देखने के बाद क्यों चिंता बढ़ रही है
यूरोप में ‘ओमेगा ब्लॉक’ हीटवेव का प्रकोप, रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से जनजीवन बेहाल, दर्जनों लोगों की मौत
यूरोप में ‘ओमेगा ब्लॉक’ हीटवेव ने तबाही मचा दी है। फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और स्पेन में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, बिजली संकट, स्कूल बंद और गर्मी से कई मौतों की खबरें सामने आई हैं।
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
60 की उम्र में मिलिंद सोमन ने रचा इतिहास, यूरोप से अफ्रीका तक तैरकर पार किया स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर
अभिनेता और फिटनेस आइकन मिलिंद सोमन ने एक बार फिर अपनी अद्भुत सहनशक्ति और फिटनेस का परिचय दिया है। 60 साल की उम्र में मिलिंद सोमन ने स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर को तैरकर पार करने का एक कठिन और साहसी कारनामा कर दिखाया है। मिलिंद ने यूरोप और अफ्रीका के बीच ...
फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन, 88 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
Alain Delon passes away: 'द लेपर्ड' और 'रोक्को एंड हिज ब्रदर्स' जैसी सुपर हिट फिल्मों में अभिनय का जौहर दिखाने वाले फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन हो गया है। एलेन डेलन ने 88 वर्ष की उम्र में आखिरी सांस ली। अभिनेता के पारिवारिक सूत्रों ने ...
Heeramandi के बाद अब Cannes में अपनी 'गजगामिनी चाल' दिखाएंगी Aditi Rao Haidari,फ्रांस के लिए रवाना हुईबिब्बोजान
यूरोप से लेकर Sri Lanka तक इन देशो में शूट हुई है Surya और Bobby Deol की फिल्म Kanguva, बजट उड़ा देगा होश

