ट्रंप ने पुतिन को मिलाया फोन: यूक्रेन युद्ध जल्द खत्म करने पर हुई बात, यूरोप के खिलाफ आक्रामकता पर क्या बोले रूसी राष्ट्रपति?
Kanpur News: बास्केटबाल में सेंट फ्रांसिस जेवियर्स और कानपुर नगर का दबदबा
अशोकनगर स्थित सेंट फ्रांसिस जेवियर्स इंटर कॉलेज में मंगलवार को जनपदीय व मंडलीय विद्यालयीय बास्केटबाल प्रतियोगिता हुई।
रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिश में भारत, दोनों देशों के संपर्क में दिल्ली: विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत के पुराने रुख को दोहराया है। मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि भारत का मानना है कि युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलेगा...
UN में भारत को वीटो दो, ब्रिक्स से पहले बोला यूरोपीय संघ
ब्रिक्स सम्मेलन की ऐतिहासिक बैठक से ठीक पहले यूरोप के दिल से आई एक ऐसी कूटनीतिक मिसाइल दाग दी गई है जिसकी गूंज वाशिंगटन, लंदन, पेरिस से लेकर बीजिंग तक साफ सुनाई दे रही है। यह आवाज किसी और से नहीं बल्कि यूरोप के सबसे समृद्ध और कूटनीतिक रूप से जागरूक देश लग्जमबर्ग के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल ने उठाई है। उन्होंने बिना लाग लपेट के सीधे-सीधे शब्दों में कह दिया कि अगर दुनिया में न्याय चाहिए, तो भारत को तुरंत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी कि यूएससी में स्थाई यानी कि परमानेंट सीट दे देनी चाहिए। भारत का आकार, भारत का समर्थ और भारत का वैश्विक कद अब किसी औपचारिक मुहर का मोहताज नहीं है। लग्जबर्ग के उप प्रधानमंत्री ने भारत के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर बड़ा बयान दिया। इस दौरे पर वे नई दिल्ली में उच्च स्तरीय वार्ताओं के बाद आईआईटी मद्रास चेन्नई के कार्यक्रम में भी हिस्सा लेने पहुंचे। लेकिन उनकी यात्रा की सबसे बड़ी सुर्खी बनी उनका वह बेबाक इंटरव्यू जिसमें उन्होंने यूएससी की मौजूदा बनावट की धज्जियां उड़ा दी। इसे भी पढ़ें: ब्रिक्स 2026: भारत की कूटनीतिक क्षमताओं को चुनौती देता भारत की परमानेंट सीट को लेकर और कैसे इस दादागिरी को खत्म किया जो सिर्फ पांच देशों की जेबों में है। यह केवल एक कूटनीतिक तारीफ नहीं है। यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के वर्तमान ढांचे यानी अभी मौजूदा ढांचे पर एक ऐसी नैतिक चाबू है, सीधा चाबुक है। बैटल ने सिर्फ भारत को परमानेंट सदस्यता का समर्थन ही नहीं किया बल्कि उस सबसे बड़ी बुराई पर हमला बोला जिसने यूएन को एक मूकदर्शक संस्था बना दिया। यानी वीटो पावर। लग्जमबर्ग के विदेश मंत्री ने एक बेहद व्याहारिक समाधान सामने रखा। 2/3 ओवर राइड यानी अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दो तिहाई देश किसी वैश्विक शांति या संकट के मुद्दे पर एक साथ हो तो किसी एक देश के वीटो को निरस्त कर देना चाहिए। ब्रिक्स अब केवल उभरती अर्थव्यवस्था का समूह नहीं रहा है। दोस्तों यह ग्लोबल साउथ की नई धड़कन बन चुका है और उसका प्रतिनिधित्व कौन कर रहा है? भारत। इसे भी पढ़ें: 18th BRICS Summit के लिए NSG का Operation BRICS Kavach: दिल्ली में सुरक्षा का अभेद्य घेरा तैयार ब्रिक्स लगातार एक बहुद्रवी विश्व व्यवस्था और यूएन संस्थाओं के लोकतांत्रीकरण की मांग कर रहा है। जब यूरोपीय संघ यानी इयू का संस्थापक सदस्य और पश्चिमी वित्तीय प्रणाली का केंद्र लग्जमबर्ग ब्रिक्स के मंच पर जाने से पहले भारत और ब्राजील की परमानेंट सीट की वकालत करता है तो यह संदेश साफ है कि पश्चिम दुनिया के भीतर भी अब यह स्वीकार्यता बन चुकी है कि भारत के बिना कोई भी वैश्विक व्यवस्था वैध नहीं हो सकती है। भारत ने भी हाल ही में यूएन के मंच से कड़ा संदेश दिया था और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन की चार्ल्स डी अफेयर्स राजदूत योजना पटेल ने दो टूक शब्दों में कहा था हमने भारत तक पर आपको दिखाया था कि 1945 की दुनिया पूरी तरह से बदल चुकी है।
जर्मनी में दक्षिणपंथी राजनीति का भूचाल: AfD की जीत से यूरोप का संदेश ?
जर्मनी की राजनीति में एक ऐसा बदलाव दिखाई दे रहा है, जिसकी कुछ साल पहले कल्पना करना भी मुश्किल था। दूसरे विश्व युद्ध के बाद जर्मनी की मुख्यधारा की राजनीति में एक स्पष्ट राजनीतिक सहमति रही—अति-दक्षिणपंथी ताकतों को सत्ता और मुख्यधारा से दूर रखा जाएगा। लेकिन अब यह व्यवस्था खुद दबाव में है। पूर्वी जर्मनी […] यह लेख जर्मनी में दक्षिणपंथी राजनीति का भूचाल: AfD की जीत से यूरोप का संदेश ? सर्वप्रथम tfipost.in पर प्रकाशित हुआ है
UK से आई भारत के लिए खुशखबरी! CCTS को दी मान्यता, किसे होगा फायदा? अब यूरोपीय संघ पर भी टिकी निगाहें
ब्रिटेन ने भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) को मान्यता दी है, जिससे भारतीय निर्यातकों को दोहरे कार्बन कराधान से राहत मिलेगी और व्यापार बढ़ेगा। यह फैसला यूरोपीय संघ से भी ऐसी ही मान्यता मिलने की उम्मीद जगाता है।
पेरिस के आइकॉनिक और दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र एफिल टावर से जुड़ी एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भूचाल ला दिया है। फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित इस ऐतिहासिक इमारत को अचानक से पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है, जिसके पीछे स्वामीनारायण संप्रदाय के संतों से जुड़ा एक गंभीर विवाद बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संतों के दौरे या किसी विशेष कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर वहां तैनात महिला कर्मचारियों को उनके काम करने की जगह से हटाने या दूर रखने की मांग की गई, जिसके बाद फ्रांस के कड़े श्रम कानूनों और लैंगिक समानता के सिद्धांतों पर एक बड़ा बवंडर खड़ा हो गया है। इस घटना के सामने आने के बाद से फ्रांसीसी मीडिया, राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है, क्योंकि फ्रांस जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में इस तरह की सांस्कृतिक या धार्मिक मांगों को स्वीकार किए जाने को लेकर तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं।एफिल टावर के अचानक बंद होने से पर्यटकों में निराशा और प्रशासन में खलबलीदुनिया के सात अजूबों में शुमार और पेरिस की शान कहे जाने वाले एफिल टावर के अचानक बंद होने से वहां घूमने पहुंचे हजारों पर्यटकों को भारी निराशा का सामना करना पड़ा है। सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अंदरूनी प्रशासनिक तनाव और अचानक उपजे इस सांस्कृतिक-धार्मिक विवाद के चलते प्रबंधन को एहतियातन यह सख्त कदम उठाना पड़ा है। फ्रांस आने वाले सैलानी जब इस ऐतिहासिक टावर के बंद दरवाजों के पास पहुंचे, तो उन्हें मायूस होकर वापस लौटना पड़ा, जिसके बाद से पेरिस की सड़कों से लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स तक इसी बात की चर्चा हो रही है। इस अप्रत्याशित बंदी से फ्रांस के पर्यटन विभाग को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, और सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कैसे एक निजी धार्मिक दौरे के अरेंजमेंट के चक्कर में वैश्विक स्तर पर पहचान रखने वाले इस स्मारक को विवादों के घेरे में ला दिया गया।महिला कर्मचारियों को हटाने की कथित मांग पर फ्रांस के लेबर यूनियन भड़केइस पूरे विवाद की जड़ में वह कथित मांग बताई जा रही है जिसमें संतों के संप्रदाय या उनके प्रबंधकों द्वारा यह कहा गया था कि वे महिलाओं के साथ सीधे संपर्क या उनके कार्यक्षेत्र के दायरे में असहज महसूस कर सकते हैं, जिसके चलते वहां काम कर रही महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाने या अन्य स्थान पर शिफ्ट करने की बात उठी। फ्रांस अपने सख्त लेबर लॉ, महिला अधिकारों और जेंडर इक्वलिटी के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, ऐसे में किसी भी कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ इस तरह के भेदभाव या उन्हें हटाने की सुगबुगाहट ने वहां की ट्रेड यूनियनों और लेबर संगठनों को आग बबूला कर दिया है। यूनियनों का साफ तौर पर कहना है कि फ्रांस की धरती पर किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक मान्यताओं के नाम पर महिलाओं के काम करने के अधिकार और उनके सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा, चाहे मेहमान कोई भी हों।स्वामीनारायण संप्रदाय के इस प्रकरण से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छिड़ी एक नई बहसस्वामीनारायण संप्रदाय अपनी भव्यता, विशाल मंदिरों और अनुशासित जीवनशैली के लिए वैश्विक स्तर पर जाना जाता है, लेकिन पेरिस की इस घटना ने उनके प्रबंधन और विदेश दौरों के प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब धार्मिक और आध्यात्मिक संगठन अपने पारंपरिक नियमों या मान्यताओं को दूसरे देशों की लोकतांत्रिक और आधुनिक सामाजिक व्यवस्था पर लागू करने की कोशिश करते हैं, तो अक्सर इस तरह के टकराव देखने को मिलते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाओं से न केवल संबंधित धार्मिक संस्था की छवि को धक्का पहुंचता है, बल्कि विदेशों में रह रहे या यात्रा कर रहे अन्य भारतीय नागरिकों के लिए भी एक असहज स्थिति पैदा हो जाती है। फ्रांस जैसे देश में, जहां सेक्युलरिज्म को सबसे ऊपर रखा जाता है, वहां इस तरह की प्रशासनिक मांगें रखना पूरी तरह से अदूरदर्शिता का परिचय देता है।फ्रांस सरकार और स्थानीय प्रशासन का सख्त रुख, भविष्य के आयोजनों पर संकटइस गंभीर विवाद के तूल पकड़ने के बाद फ्रांस की स्थानीय सरकार और प्रशासन इस पूरे मामले की गहन जांच में जुट गए हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर किस स्तर पर इस तरह के निर्देश या मांगें रखी गई थीं। प्रशासन ने यह साफ संकेत दे दिया है कि देश के कानूनों से ऊपर कोई भी व्यक्ति या संस्था नहीं हो सकती है, और यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद से भविष्य में इस तरह के धार्मिक आयोजनों और विदेशी मेहमानों के दौरों के लिए पेरिस प्रशासन और अधिक सख्त गाइडलाइंस तैयार करने पर विचार कर रहा है। अंततः यह प्रकरण इस बात की सीख देता है कि जब भी कोई संगठन अपनी सीमाओं से बाहर किसी दूसरे देश की यात्रा करे, तो वहां की स्थानीय संस्कृति, कानूनों और मानवाधिकारों का पूर्ण सम्मान करना सर्वोपरि होना चाहिए।
रूस-यूक्रेन शांति समझौते में यूरोप की भी होंगी शर्तें: काजा कलास
विल्नियस (लिथुआनिया), 8 सितंबर . यूरोपीय संघ (ईयू) की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने कहा कि यूरोप को अपने हितों का भी ध्यान रखना होगा. रूस और यूक्रेन के बीच भविष्य में होने वाले किसी भी शांति समझौते में यूरोप की तरफ से भी कुछ प्रतिबद्धताएं शामिल होंगी. कलास ने यह बात Monday को ... Read more
जर्मनी में धुर दक्षिणपंथ की बड़ी दस्तक AfD की जीत ने बदला यूरोप की राजनीति का समीकरण
जर्मनी में धुर दक्षिणपंथ की बड़ी दस्तक AfD की जीत ने बदला यूरोप की राजनीति का समीकरण
खबर फ्रांस से आ रही है, जहां पेरिस के मशहूर एफिल टॉवर को सोमवार को कुछ देर के लिए बंद कर दिया गया। टॉवर चलाने वाली कंपनी SETE ने कहा कि यह ‘असामान्य परिस्थितियों’ की वजह से हुआ। कंपनी ने कुतर्क देते हुए कहा कि स्वामीनारायण हिन्दू मंदिर से जुड़े करीब लोगों का दल एफिल […]
Kanpur News: जाजमऊ से अमेरिका और यूरोप के नागरिकों को ठगने वाले कॉल सेंटर पर छापा
जाजमऊ से अमेरिका और यूरोप के नागरिकों को ठगने वाले कॉल सेंटर पर छापा
Mumbai , 7 सितंबर . India की डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) की वैश्विक सफलता अब यूरोपीय देशों का भी ध्यान आकर्षित कर रही है. आयरलैंड की निवेश प्रोत्साहन एजेंसी आईडीए आयरलैंड के फिनटेक एवं पेमेंट्स प्रमुख सीन मैकविलियम्स ने Monday को कहा कि आयरलैंड यूपीआई की तेज प्रगति को समझना चाहता है ... Read more
मुंबई, 7 सितंबर (आईएएनएस)। भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) की वैश्विक सफलता अब यूरोपीय देशों का भी ध्यान आकर्षित कर रही है। आयरलैंड की निवेश प्रोत्साहन एजेंसी आईडीए आयरलैंड के फिनटेक एवं पेमेंट्स प्रमुख सीन मैकविलियम्स ने सोमवार को कहा कि आयरलैंड यूपीआई की तेज प्रगति को समझना चाहता है और यह भी जानना चाहता है कि इस मॉडल का उपयोग आयरलैंड, यूरोपीय संघ (ईयू) और अन्य बाजारों में किस प्रकार किया जा सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एडल्ट कंटेंट को कानूनी बनाने की तैयारी, फुटेज में जाने टैक्स से हर साल ₹236 करोड़ कमाने का प्लान
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के निमंत्रण पर शिवेन्द्र सिंह डूंगरपुर फ्राँस पहुँचे
भारतीय सिनेमा की विरासत को संरक्षित करने और विश्व स्तर पर भारतीय फिल्म संस्कृति को पहचान दिलाने वाले फिल्मकार एवं फिल्म आर्काइविस्ट शिवेन्द्र सिंह डूंगरपुर
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा- खड़गे (राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष), सोनिया गांधी और राहुल गांधी को सबक सिखाना जरूरी है। तभी राष्ट्रभक्त बनेंगे। अमेरिका और यूरोप ने राहुल गांधी पर इनवेस्टमेंट किया, लेकिन बेकार हो गया। अब तरीका बदलकर कॉकरोज जैसों पर इनवेस्टमेंट कर रहे है। राठौड़ ने बाड़मेर में रविवार रात 9 बजे नगर परिषद के प्रत्याशी और कार्यकर्ता के साथ मीटिंग में यह बात कही। प्रदेशाध्यक्ष ने टिकट से नाराज बागियों को चेतावनी देते हुए कहा कि आपके पास अपील करने मौका है। मां (पार्टी) के पीठ में छुरा खोंपने वालों को पार्टी कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। अभी खूब नियुक्तियां पड़ी है, योग्य कार्यकर्ताओं को सम्मान किया जाएगा। राठौड़ बोले- एक-एक वोट की वैल्यू बैठक में राठौड़ ने कहा कि नगर निकाय चुनाव में एक-एक वोट की वैल्यू है। एक वोट से सीपी जोशी हार गए और सांसद प्रत्याशी भी हारे हैं। उन्होंने प्रत्याशियों से पूछा कि टैक्सी बुक कर दी क्या? अगर नहीं की है तो आज ही पोलिंग के लिए टैक्सी बुक कर दो। उन्होंने कहा कि 100 रुपए एक्स्ट्रा दे दो और आज से ही टैक्सी पर भाजपा का झंडा लगाकर चलाओ। राठौड़ ने कहा - बाड़मेर में 55 वार्ड हैं। अगर प्रत्येक प्रत्याशी दो या तीन टैक्सियां लगाए तो शहर में कितनी टैक्सियां भाजपा का झंडा लगाकर घूमती नजर आएंगी। कल्पना करो कि 150 टैक्सियां भाजपा का झंडा लगाकर शहर में घूम रही हैं तो इससे एक माहौल बनेगा। यह व्यवस्था चुनाव संचालन समिति को करनी चाहिए। 10 फीसदी वोट हवा में होते हैं, माहौल से भी असर पड़ता है: राठौड़ राठौड़ ने प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं से कहा कि करीब 10 फीसदी वोट हवा में होते हैं। कुछ वोट जातिगत होते हैं, जबकि कुछ दोस्ती और दुश्मनी के आधार पर पड़ते हैं। 10 फीसदी वोट ऐसे होते हैं जो हवा के साथ जाते हैं। हवा जिसके पक्ष में होती है, वही जीतता है। जब लोगों को लगता है कि इतनी टैक्सियां भाजपा की घूम रही हैं तो बाड़मेर में भाजपा ही जीत रही है, तो चुनाव का माहौल बनता है। बोले- बाड़मेर की 55 सीटें जीतकर भेजो, खड़गे-सोनिया-राहुल को सबक मिलेगा राठौड़ ने कार्यकर्ताओं से कहा कि अगर आपने बाड़मेर की 55 सीटें जीतकर भेज दीं तो उन लोगों को सबक सीखने को मिलेगा। तब वे भी राष्ट्रभक्ति करने लगेंगे और भारत माता की जय बोलने लगेंगे। जब वंदे मातरम् राष्ट्रगीत होते हुए खड़गे जी हिलते हैं तो आपको गुस्सा आता है या नहीं। जब सोनिया गांधी इधर-उधर हिलती-डुलती हैं तो आपको बुरा लगता है या नहीं। जब राहुल नाटक करते हैं तो आपको गुस्सा आता है। राठौड़ ने कार्यकर्ताओं से कहा - उस गुस्से को दबाकर मत रखो। उन लोगों को सबक सिखाना बेहद जरूरी है। तब उन्हें लगेगा कि बाड़मेर की जनता अराष्ट्रीय गतिविधियां कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। तब जाकर उनकी अक्ल ठिकाने आएगी। मैं भी राष्ट्रभक्त हूं और मेरा विरोधी भी राष्ट्रभक्त बने, तभी लोकतंत्र सफल होगा। पूरे राजस्थान की 309 नगर निकाय जीतने का लक्ष्य बताया राठौड़ ने चुनाव संचालन समिति के सदस्यों से कहा कि वे फैल जाएं और जनता को बताएं कि यह समय अराष्ट्रीय गतिविधि करने वालों को सबक सिखाने का है। अगर पूरे राजस्थान की 309 नगर निकाय चुनाव जीत लेंगे तो उन्हें लगेगा कि जनता अराष्ट्रीय गतिविधि बर्दाश्त नहीं करती है। राठौड़ बोले- अमेरिका और यूरोप ने राहुल गांधी पर इनवेस्टमेंट किया, बेकार हो गया राठौड़ ने कहा कि जब कोई व्यक्ति प्रगति करता है तो बहुत लोग उससे जलते हैं। भारत प्रगति करता है तो दुनिया के कई देश जलते हैं और नाराज हैं। वे भारत की प्रगति रोकना चाहते हैं। इसलिए अमेरिका और यूरोप ने हमारे देश के विपक्षियों को पैसा देना शुरू किया। देश को अस्थिर करने की कोशिश की गई। जब उन देशों को लगा कि यह इनवेस्टमेंट तो बेकार हो गया, क्योंकि राहुल गांधी को जितना पैसा दो, वे कोई भी काम करें तो भाजपा को फायदा हो जाता है। इसलिए उन्होंने अपना तरीका बदल दिया। विरोधी देश 'कॉकरोज' जैसे लोगों पर इनवेस्टमेंट कर रहे: राठौड़ राठौड़ ने कहा - विरोधी देशों ने ऐसे लोगों को तैयार किया है। 'कॉकरोज' जैसे लोगों पर इनवेस्टमेंट करना शुरू किया गया है। ऐसे लोग कई जगह सुबबुगाहट उठाते हैं, कई नाटक करते हैं, कई आगजनी करते हैं और गंदी-गंदी भाषा बोल देते हैं। इसके बाद देश उन्हें शांत करने में लग जाता है और इससे विकास रुक जाता है। विरोधी देश इसी तरह सोचते हैं, लेकिन हम रुकने वाले नहीं हैं और कतई चिंता नहीं करने वाले। हम मजबूती के साथ भारत को विकसित भारत बनाना चाहते हैं। बागियों को चेतावनी- पार्टी के खिलाफ गए तो बर्दाश्त नहीं करेंगे टिकट से नाराज दावेदारों और बागियों को लेकर राठौड़ ने कहा कि पार्टी ने अलग-अलग स्तर पर सर्वे करवाकर चुनाव में उम्मीदवार उतारे हैं। प्रत्याशी सेवक बनकर काम करेंगे, लेकिन कई योग्य कार्यकर्ता टिकट से पीछे रह गए क्योंकि टिकट एक ही व्यक्ति को मिल सकता है। ऐसे सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी में शामिल करने और उन्हें अवसर देने की कोशिश होगी। अभी तक नियुक्तियां नहीं हुई हैं और अब नियुक्तियां की जाएंगी। उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए यह व्यवस्था है कि हर कार्यकर्ता को काम और हर काम के लिए कार्यकर्ता हो। यह पार्टी के संस्कार हैं। बोले- कल शाम तक पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में अपील कर दें राठौड़ ने कहा कि कुछ दावेदार गुस्से में आकर नामांकन कर चुके हैं। उनके पास कल शाम तक का समय है। वे पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में अपील निकाल दें। जो नाराज हैं, उन्हें भी सम्मानित किया जाएगा। --- ये खबर भी पढ़ें … जोधपुर में शेखावत-गहलोत फैक्टर से कांटे की टक्कर:उदयपुर में कांग्रेस को बागियों से खतरा; पाली में राठौड़ के गढ़ में निर्दलीयों से बदले समीकरण जोधपुर नगर निगम में 100, उदयपुर में 80 और पाली में 65 वार्ड हैं। अभी तक के समीकरणों में जोधपुर और पाली में कांग्रेस-बीजेपी में टक्कर है। पूरी खबर पढ़ें
प्रधानमंत्री मोदी ने पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर के उद्घाटन मेंवर्चुअली जुड़े, इसे भारत-फ्रांस की दोस्ती का प्रतीक बताया। उन्होंनेभारत-फ्रांस संबंधों की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं।
India-France Relations: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत और फ्रांस के रिश्ते आज नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह रणनीतिक साझेदारी इसलिए खास है क्योंकि यह लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों की मजबूत नींव पर टिकी है।बता दें कि पीएम मोदी ने यह बात पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर के उद्घाटन समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए कही। प्रधानमंक्षी ने उम्मीद जताई कि पेरिस का यह भव्य मंदिर आने वाली कई सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और नए अवसरों के प्रतीक के रूप में खड़ा रहेगा।उन्होंने कहा, हाल के वर्षों में भारत और फ्रांस के रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं। अपने दोस्त, राष्ट्रपति (इमैनुएल) मैक्रों के साथ मिलकर, दोनों देश एक खास ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप (वैश्विक रणनीतिक साझेदारी) बना रहे हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी, AI और डिफेंस से लेकर स्पेस और क्लाइमेट एक्शन तक, भारत और फ्रांस नई गति और ऊर्जा के साथ मिलकर आगे बढ़ रहे हैं।उन्होंने कहा, हम 2026 को 'भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर' के तौर पर भी मना रहे हैं। यह रणनीतिक साझेदारी इसलिए भी खास है क्योंकि यह हमारे लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों की मजबूत नींव पर टिकी है।मोदी ने कहा कि आजकल भारत और फ्रांस के बीच जॉइंट वेंचर की संभावनाओं पर काफी चर्चा हो रही है।उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि फ्रांस में भारतीय सैनिकों का बलिदान आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है।संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में फ्रांसीसी विद्वानों की अहम भूमिकाउन्होंने कहा, भाषा के जानकार यह भी जानते हैं कि संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में फ्रांसीसी विद्वानों ने कितनी अहम भूमिका निभाई। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमेन रोलैंड की रचनाओं ने हमारे समाजों को एक-दूसरे के करीब लाया।इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने कहा कि पेरिस से पुडुचेरी के श्री अरबिंदो आश्रम तक 'द मदर' की आध्यात्मिक यात्रा ने अनगिनत भारतीय और फ्रांसीसी साधकों को प्रेरित किया है।उन्होंने कहा कि दशकों पहले, श्रील प्रभुपाद स्वामी ने भी फ्रांस का दौरा किया था और इस्कॉन (ISKCON) के माध्यम से आध्यात्मिक संबंधों का एक नया अध्याय शुरू किया था।पीएम मोदी ने योग पर दिया संदेशउन्होंने योग की भी चर्चा की और कहा, आज, योग हमारे देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों के लिए एक सेतु बन गया है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर एफिल टॉवर की तस्वीरें फ्रांस में योग की जबरदस्त लोकप्रियता को दर्शाती हैं।पीएम मोदी ने कहा कि स्वामीनारायण मंदिर इन संभावनाओं को एक नया आयाम देता है। यह मंदिर ‘मेड इन इंडिया’ है और ‘बिल्ट इन फ्रांस’ यानी भारत में बना और फ्रांस में तैयार किया गया है।उन्होंने कहा, इसके कई पत्थर भारत में तराशे गए थे, जिससे भारत की प्राचीन कारीगरी और फ्रांस की आधुनिक इंजीनियरिंग का मेल हुआ है।पेरिस के मंदिर में जरूर नमन करेंगे- पीएम मोदीपीएम मोदी ने आगे कहा कि उन्हें भरोसा है कि पेरिस में बने इस नए मंदिर से भारतीय संस्कृति के जो मूल्य निकलेंगे, उनसे पूरे यूरोप के लोगों को फायदा होगा।उन्होंने यह बी कहा कि भविष्य में जब भी समय मिलेगा, वह जरूर इस मंदिर में जाकर नमन करेंगे।प्रधानमंत्री ने कहा, अब, इस शानदार BAPS मंदिर (BAPS स्वामीनारायण संस्था) के जरिए हमारे सांस्कृतिक संबंधों में एक और अहम पड़ाव जुड़ रहा है।स्वामीनारायण मंदिर हमेशा सेसेवा के केंद्र रहे हैं- पीएम मोदीपीएम मोदी ने कहा कि स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा के केंद्र रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा की मुझे बताया गया है कि यह मंदिर भी इसी तरह सेवा कार्यों का केंद्र बनेगा।मोदी ने कहा कि BAPS के जरिए जब भी अलग-अलग देशों में मंदिरों की प्राण-प्रतिष्ठा होती है, तो भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी उनके साथ पहुंचते हैं।उन्होंने कहा, आज फ्रांस में एक भव्य मंदिर तैयार है और यह न केवल फ्रांस की विविधता को समृद्ध करेगा, बल्कि भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक संबंधों को भी नई ऊर्जा देगा।यह भी पढ़ें:Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में मृतकों की संख्या 6 हुई! भरभराकर गिरी इमारत, CCTV में दिखा खौफनाक मंजर
व्यापार जगत: हवाई किराये में मनमानी पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई; यूरोप का प्रमुख डीजल आपूर्तिकर्ता बना भारत
फ्रांस में पहला हिंदू मंदिर: प्राण प्रतिष्ठा में 40 देशों से पहुंचे मेहमान; PM मोदी बोले- संबंध नई ऊंचाइयों पर
‘भारत-फ्रांस रिश्ते नई ऊंचाई पर’, पेरिस मंदिर उद्घाटन में वर्चुअली जुड़े PM मोदी
PM मोदी पेरिस के स्वामीनारायण मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में वर्चुअली जुड़े. उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस के रिश्ते नई ऊंचाई पर पहुंच गए हैं. दोनों देश तकनीक, AI, रक्षा, अंतरिक्ष और जलवायु जैसे क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं
18 साल की बेटी, घर की जिम्मेदारी व पहाड़ों का जुनून: शिवानी ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी पर फहराया तिरंगा; कैसे?
मिडिल ईस्ट संकट के बीच यूरोप का नया डीजल बॉस बना भारत!
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत यूरोप को डीजल सप्लाई करने वाला प्रमुख देश बनकर उभरा है. अगस्त में बाब-अल-मंदेब रास्ते से यूरोप पहुंचने वाले डीजल का करीब 60 फीसदी हिस्सा भारतीय रिफाइनरों ने भेजा. रूस के निर्यात और अमेरिका की आपूर्ति में गिरावट के बीच भारत की भूमिका बढ़ी है. देश की अतिरिक्त रिफाइनिंग क्षमता और विविध आयात रणनीति से वैश्विक ऊर्जा संकट में मजबूती मिली है और नई भूमिका भी बनी है.
फ्रांस में पढ़ाई का खर्चा ₹45 लाख ? भारतीय स्टूडेंट ने गिनाया एजुकेशन से जुड़ा हर खर्च; सुनते ही लगेगा शॉक
फ्रांस की राजधानी पेरिस में आज देश के पहले पारंपरिक हिंदू मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न हुआ। इसके साथ ही यह मंदिर अब सभी दर्शनार्थियों और श्रद्धालुओं के लिए खुल गया है। इस अवसर पर यूरोप, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, अफ्रीका और एशिया से पधारे संतों-भक्तों के साथ ही विश्व के अनेक गणमान्य अतिथियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। आज प्रात: वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बीएपीएस अक्षरधाम संस्थान के वर्तमान गुरु परम पूज्य महंतस्वामी महाराज के करकमलों द्वारा प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव विधि संपन्न हुई। गौरतलब है कि इस मंदिर का निर्माण प्राचीन भारतीय वास्तुकला और वैदिक शिल्पशास्त्र के आधार पर किया गया है, जिसमें फ्रांसीसी आधुनिक तकनीक का भी सुंदर सम्मिश्रण देखने को मिलता है। आपको बता दें कि 13 दिनों तक चलने वाले इस मंदिर महोत्सव में सम्मिलित होने के लिए भारत, अमेरिका, कनाडा, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, और इंग्लैंड समेत 40 से भी अधिक देशों से लोग पधारे हैं। मूर्ति प्राणप्रतिष्ठा विधि और मंदिर का लोकार्पण प्रातः काल वरिष्ठ संतों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महापूजा विधि का प्रारंभ किया, जिसमें श्री अक्षरपुरुषोत्तम महाराज, श्री घनश्याम महाराज, श्री राधा-कृष्ण भगवान, श्री सीता-राम भगवान संग श्री लक्षमण जी एवं श्री हनुमान जी महाराज, श्री पार्वती-शंकर भगवान संग श्री कार्तिकेय जी एवं श्री गणेश जी महाराज, श्री पद्मावती वेंकटेश्वर भगवान, श्री अय्यप्पा स्वामी जी, श्री नीलकंठवर्णी महाराज (भगवान स्वामिनारायण का स्वररूप) और गुरु परंपरा की मूर्तियों की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। मूर्ति प्रतिष्ठा के बाद परम पूज्य महंतस्वामी महाराज ने सभी धर्मों के बीच आपसी प्रेम-सद्भाव बना रहे, वैश्विक शांति और सभी का कल्याण हो इस हेतु मंदिर में प्रथम प्रार्थना की। ऐतिहासिक नगर यात्रा प्रतिष्ठा विधि के पूर्व पेरिस शहर में एक भव्य नगर यात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें संगीत, कला और भक्तिमय प्रस्तुतियों की छटा बिखरी। पारंपरिक वेशभूषा में सजे नृत्य कलाकारों के साथ 14 सुंदर ढंग से सुसज्जित रथों ने भारत की कलात्मक और आध्यात्मिक परंपराओं को साकार किया। सुंदर ढंग से श्रृंगारित मूर्तियों – हिंदू देवी-देवताओं के दिव्य स्वरूपों – को विश्व मानकों और विशेष मार्गों से होकर ले जाया गया। विश्वविख्यात एफिल टावर व एकोल मिलिटेर होते हुए यह नगर यात्रा प्लास द ला कॉनकॉर्ड पहुंचकर पूर्ण हुई। इस आध्यात्मिक नगरयात्रा से फ्रांस में भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म के प्रेम और सौहार्द्र भावना का एक नए अध्याय का आरम्भ हुआ। मंदिर की निर्माण यात्रा पेरिस में एक भव्य मंदिर के निर्माण का संकल्प गुरु योगीजी महाराज ने वर्ष 1970 में किया था। इसके पश्चात विश्ववंदनीय प्रमुखस्वामी महाराज ने अपनी आध्यात्मिक विदेश यात्रा के दौरान यहां अनेकों बार पुष्पवर्षा कर अपने गुरु के संकल्प को एक आकर प्रदान किया और फ्रांस में सत्संग की नींव रखी। वर्ष 2021 में वरिष्ठ संतों की उपस्थिति में मंदिर का भूमि पूजन हुआ और 2022 में शिलान्यास विधि संपन्न हुई। वर्ष 2026 में मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ। मंदिर की विशेषता ●यह मंदिर 5000 वर्गमीटर के क्षेत्र में फैला है। ●इसके ऊपरी तल में पारंपरिक मंदिर और आधार में सांस्कृतिक केंद्र के रूप में एक सुन्दर हवेली का निर्माण किया गया है। ●इसके निर्माण में भारत, इटली, ग्रीस और वियतनाम जैसे देशों से प्राप्त संगमरमर तथा ग्वालियर के बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है। ●इसमें 5 शिखर, 10 विशाल गुंबद, 20 नक्काशीदार स्तंभ, 120 गवाक्ष, 49 चरित्र शिल्प प्रतिमाएं और 4 सुसज्जित छतरियां हैं। ●मंदिर परिसर में सभागृह, कक्षाएं, खेलकक्ष, प्रदर्शनी स्थल एवं कार्यालय जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। भारतीय संस्कृति का ध्वजवाहक और विश्वकल्याण का संदेश फ्रांस की धरती पर स्थापित यह प्रथम पारंपरिक हिंदू मंदिर विश्व भर के लोगों को भारतीय संस्कृति से परिचित कराने का माध्यम बनेगा। साथ ही यह उपासना, प्रेम, सद्भाव और एकता का जीवंत प्रतीक है। यह मंदिर संपूर्ण विश्व के कल्याण के संदेश के साथ सभी को प्रेरित करता रहेगा।
रूस-US रह गए पीछे, अब यूरोप का बड़ा डीजल सप्लायर बना भारत
India Diesel Export: रूस-US से यूरोप को होने वाली डीजल की सप्लाई तमाम रुकावटों के चलते धीमी पड़ी, तो भारत बड़े सप्लायर के तौर पर सामने आया है और अगस्त में Europe पहुंचे डीजल में 60% यहां से पहुंचा है.
VIDEO: फ्रांस में बना पहला हिंदू मंदिर; 40 देशों के लोग पहुंचे, 1970 का था संकल्प, देखें तस्वीरें
इस मंदिर का निर्माण प्राचीन भारतीय वास्तुकला और वैदिक शिल्पशास्त्र के आधार पर किया गया है, जिसमें फ्रांसीसी आधुनिक तकनीक का भी सुंदर सम्मिश्रण देखने को मिलता है.
Putin से 3 घंटे की मुलाकात के बाद कीव पहुंचे ट्रंप के दूत, क्या अब खत्म होगा रूस-यूक्रेन युद्ध?
रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध को खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें एक बार फिर तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुश्नर रविवार को यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे। उनका यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब इससे एक दिन पहले दोनों ने मॉस्को के क्रेमलिन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ तीन घंटे से ज्यादा समय तक बंद कमरे में बैठक की थी। पुतिन के साथ बैठक को बताया 'सकारात्मक' मॉस्को में हुई इस हाईलेवल बैठक को रूसी अधिकारियों ने 'सकारात्मक और उपयोगी' बताया। हालांकि, बैठक के बाद किसी बड़े समझौते का ऐलान नहीं किया गया। बातचीत में युद्ध खत्म करने के संभावित रास्तों के साथ-साथ आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इस बीच, दोनों पक्षों ने कूटनीतिक बातचीत के दौरान माहौल को बेहतर बनाने के लिए तीन दिनों के अस्थायी हवाई सीजफायर पर सहमति जताई है। इसे भी पढ़ें: Ukraine War: शांति वार्ता के लिए Moscow में अमेरिकी दूतों से मिले पुतिन, कीव पर हमले 72 घंटे रोके तीन दिन तक कीव और मॉस्को पर हवाई हमले नहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कीव पर तीन दिनों तक हवाई हमले नहीं करने का आदेश दिया है। वहीं, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने भी अमेरिकी दूतों से बातचीत के बाद सोशल मीडिया के जरिए कहा कि यूक्रेन शनिवार, रविवार और सोमवार को मॉस्को पर जवाबी हमले नहीं करेगा। दोनों देशों की राजधानियों को निशाना न बनाने की इस अस्थायी पहल से आम लोगों को कुछ समय के लिए राहत मिलने की उम्मीद है। इसे भी पढ़ें: Iran War खत्म होते ही Trump चलेंगे बड़ी चाल! इजरायल से लेकर सऊदी अरब तक बदलेंगे समीकरण रूस की मांग को यूक्रेन ने किया खारिज ईरान से जुड़े तनाव के कारण पिछले करीब छह महीनों से धीमी पड़ी शांति प्रक्रिया अब फिर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। अमेरिका दोनों देशों के बीच समझौता कराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन कई मुद्दों पर अभी भी दोनों पक्षों के बीच गहरा मतभेद है। रूस ने यूक्रेन से पूर्वी डोनेट्स्क और लुहान्स्क के उन इलाकों से अपनी सेना हटाने की मांग की है, जिन पर यूक्रेन का नियंत्रण है। यूक्रेन इस मांग को पहले ही खारिज कर चुका है। जेलेंस्की से मुलाकात पर टिकी नजरें अब अमेरिकी दूतों की कीव यात्रा पर सबकी नजरें हैं। स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर की राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ होने वाली बातचीत में युद्ध रोकने और संभावित शांति समझौते को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा होने की उम्मीद है। हालांकि, क्या यह बातचीत रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को खत्म करने की दिशा में कोई बड़ा रास्ता खोल पाएगी, यह आने वाले दिनों में ही साफ होगा।
यूरोप ने बदली भारतीय महिला की लाइफस्टाइल, वीडियो ने छेड़ी नई बहस
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फ्रांस में हुआ देश के पहले पारंपरिक हिंदू मंदिर का भव्य प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न
पेरिस/बुसी-सेंट-जॉर्जेस, 6 सितंबर . फ्रांस की राजधानी पेरिस में Sunday को देश के पहले पारंपरिक हिंदू मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न हुआ. इसके साथ ही यह मंदिर अब सभी दर्शनार्थियों और श्रद्धालुओं के लिए खुल गया है. इस अवसर पर यूरोप, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, अफ्रीका और एशिया से पधारे संतों-भक्तों के साथ ही विश्व के ... Read more
भारत यूरोप के लिए डीजल का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है: रिपोर्ट
New Delhi, 6 सितंबर . वैश्विक ऊर्जा व्यापार में India की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है. ऊर्जा खुफिया फर्म वोर्टेक्सा की एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस से डीजल आपूर्ति में तेज गिरावट और अमेरिका से होने वाले निर्यात में कमजोरी के बीच India यूरोप के लिए डीजल का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा ... Read more
भरोसे का संकट: यूरोप के देशों ने सोना समेटना शुरू किया, अमेरिका-कनाडा से 313 टन लंदन पहुंचा
नीदरलैंड ने अमेरिका और कनाडा से मार्च से अगस्त के बीच वापस लाए गए सोने को लंदन स्थित बैंक ऑफ इंग्लैंड की तिजोरी में रखने का फैसला किया है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लंदन दुनिया के सबसे बड़े सोना व्यापार केंद्रों में शामिल है।
यूरोप से मॉस्को तक 'मेड इन इंडिया' डीजल का जलवा, आखिर कैसे हुआ ये कमाल? अमेरिका-रूस हुए आउट
रूस से डीजल आपूर्ति में गिरावट और अमेरिका से खेप कम होने के कारण भारत यूरोप के लिए डीजल का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। भारत की रिफाइनरी क्षमता घरेलू मांग से अधिक है, लेकिन कच्चे तेल की उपलब्धता निर्यात को प्रभावित कर सकती है।
भारत बना यूरोप का प्रमुख डीजल सप्लायर, रूस में भी तेजी से बढ़ रही भारतीय ईंधन की मांग
अगस्त में रोजाना करीब 2 लाख बैरल डीजल बाब-अल-मंदेब से होकर यूरोप भेजा गया।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति का फ्रांस दौरा, मैक्रों से होर्मुज पर सैन्य तैनाती को लेकर हो सकती है बात
क्रेमलिन का हवाला देते हुए AP की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कीव पर हमले 72 घंटे के लिए रोकने का आदेश दिया है।
Shamli News: यूरोप, अमेरिका, कनाडा और स्विट्जरलैंड में मिल रही गोगी गिरोह के गुर्गाें की लोकेशन
अंकित बालियान हत्याकांड की जांच में गोगी गिरोह के विदेश में बैठे गुर्गे लगातार अपने ठिकाने बदल रहे हैं।
आईआईटी दिल्ली के सोनीपत कैंपस में सौर ऊर्जा का एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा शुरू हुआ है। इसमें आठ देशों के नौ अंतरराष्ट्रीय फेलो शामिल हैं, जिन्हें सौर ऊर्जा के क्षेत्र में प्रशिक्षक बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
हर किसी को घूमने-फिरने का शौक होता है और विदेश तो हर कोई जाना चाहता है। खासकर स्विट्जरलैंड जैसी खूबसूरत जगह, जहां बर्फ से ढके पहाड़, खूबसूरत नजारे, हरे-भरे मैदान देखने को मिलते हैं। लेकिन यहां जाना हर किसी के बस की बात नहीं होती है। होटल, फ्लाइट, खाना-पीना, घूमने आदि का खर्च लाखों में पहुंच जाता है। इस कारण कई लोगों का यह सपना अधूरा रह जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत में ऐसी कुछ जगहें हैं, जिनको देखकर आपको यूरोप वाली फीलिंग आएगी। इन जगहों पर आपको खूबसूरत लेक्स, बर्फीले पहाड़, हसीन वादियां और कलरफुल फ्लावर्स देखने को मिलेंगी। ऐसे में अगर आपका बजट कम है और ऐसी जगहों को एक्सप्लोर करना चाहती हैं, तो आपको ऐसा महसूस होगा कि आप स्विट्जरलैंड पहुंच गई हैं। इसे भी पढ़ें: Long Weekend Travel Plan: अगस्त की छुट्टियों में Udaipur और Coorg की हरियाली और Monsoon नजारों का उठाएं लुत्फ खज्जियार ज्यादातर लोग खज्जियार को भारत का 'मिनी स्विट्जरलैंड' कहते हैं। हिमाचल के चंबा में स्थित यह जगह हरी-भरी घास, देवदार के घने जंगलों और खूबसूरत मैदानों के लिए जानी जाती है। यहां का खज्जियार लेक वालर एरिया देखने में किसी यूरोपियन पोस्टकार्ड जैसा लगता है। मॉनसून और गर्मियों में यहां की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। अगर आप भी प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद करती हैं, तो आपको खज्जियार आना चाहिए। युमथांग वैली सिक्किम की युमथांग वैली को वैली ऑफ फ्लावर्स भी कहा जाता है। यह जगह स्विट्जरलैंड जैसी लगती है। यहां पर दूर-दूर तक फैले फूलों के मैदान, सुंदर नदियां, बर्फ से ढके पहाड़ किसी यूरोपियन देश वाला फील देती हैं। गर्मियों में यहां रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं। जिससे पूरी वैली बेहद खूबसूरत दिखाई देती है। ऐसे में अगर आपको फोटोग्राफी का शौक है, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए। गुलमर्ग माना जाता है कि अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है, तो वह कश्मीर है। यहां के गुलमर्ग की गिनती भारत के सबसे खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस में होती है। गुलमर्ग के बेहद खूबसूरत पहाड़, हरे-भरे घास के मैदान और ठंडी वादियां यहां आने वाले पर्यटकों को स्विट्जरलैंड की याद दिलाती हैं। गर्मियों में यहां की हरियाली और फूलों से भरे मैदान देखने लायक होते हैं। मुनस्यारी अगर आप किसी शांत जगह पर स्विट्जरलैंड वाला फील लेना चाहती हैं। तो आप मुनस्यारी जा सकती हैं। यह जगह अपने शांत वातावरण के लिए जानी जाती है। अगर आपको भी प्रकृति के बीच सुकून भरे पल बिताना चाहती हैं, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए।
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