झारखंड की पारंपरिक सोहराई कला कभी गांवों की दीवारों में सिमटती जा रही थी। रांची जिले के तमाड़ प्रखंड के चिरूडीह गांव में उपजी सोच ने न सिर्फ इस कला को नई पहचान दी, बल्कि 100 से ज्यादा महिलाओं और युवाओं की जिंदगी भी बदल दी। चिरूडीह के युवा कलाकार मनीष कुमार महतो ने अपनी मां और दो दोस्तों पुष्कर महतो और पवन मुंडा के साथ मिलकर अप्रैल 2024 में गांव में वर्कशॉप की। इसमें 35 महिलाओं को दोबारा सोहराई कला का इस्तेमाल करने को कहा गया। आज चिरूडीह के 120 घरों में से करीब 50 घरों की दीवारें सोहराई कला से सजी हैं। गांव की पहचान अब 'ग्लोबल आर्ट विलेज' की हो गई है। फ्रांस, कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। तस्वीरों में देखें ग्लोबल आर्ट विलेज…. 300-400 की साड़ियां पेंटिंग के बाद 6-7 हजार में बिक रहीं मनीष ने अपने पिता की याद में गांव में कला सदन सह संग्रहालय बनाया है। यहां नई पीढ़ी को फ्री ट्रेनिंग मिलती है। गांव की लड़कियां साड़ियों और गमछों पर सोहराई चित्रकारी कर रही हैं। 300-400 रुपए की साड़ियां पेंटिंग के बाद 7-8 हजार रुपए तक में बिक रही हैं। इससे कई युवतियां हर महीने 8 से 9 हजार रुपए तक कमा रही हैं। ये महिलाएं अब दूसरों को ट्रेनिंग दे रही हैं। वे धनबाद, कोलकाता जैसे शहरों में वर्कशॉप लेकर सोहराई कला सिखा रही हैं। इसके लिए उन्हें रोज 500 से 1000 रुपए तक का मानदेय मिलता है। आसपास के दूसरे गांव भी सजा रहे घरों की दीवारें गांव में फोटो शूट, वीडियो और रील बनाने आने वाले पर्यटक भी स्थानीय कलाकारों को अतिरिक्त आय का अवसर दे रहे हैं। चिरूडीह की सफलता का असर आसपास के गांवों में भी दिखाई देने लगा है। पड़ोसी गांव सिंदवारी और पिरगालडीह जैसे गांवों के लोग भी अब अपनी दीवारों को सोहराई कला से सजाने लगे हैं। कई घरों की दीवारों को मनीष और उनकी टीम की मदद से सजाया गया है। सोहराई कला से बदली जिंदगी और गांव की सूरत सोहराई कला की आर्टिस्ट काजल महतो कहती हैं कि मुझे कला या पेंटिंग के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। 2024 में मैंने सोहराई पेंटिंग सीखनी शुरू की। फिर पेंटिंग के ऑर्डर मिलने लगे। मैंने फोक फेस्टिवल, कोलकाता में हिस्सा लिया। धनबाद में बच्चों को सोहराई कला सिखाने भी गई। आज मैं साड़ी, गमछा और ब्लाउज पर भी सोहराई पेंटिंग कर रही हूं। इस कला ने मुझे पहचान, सम्मान और आत्मविश्वास दिया है। पैसे मिल रहे हैं तो जीवन स्तर भी सुधरा है। गांव की हालत भी बदल गई है।
FIFA वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ-32 में आज तीन मुकाबले खेले जाएंगे। पहले मैच में आइवरी कोस्ट का सामना नॉर्वे से होगा। दोनों टीमें पहली बार आमने-सामने होंगी। यह मुकाबला भारतीय समय के हिसाब से 30 जून रात 10:30 बजे डलास स्टेडियम में खेला जाएगा। इसके अलावा फ्रांस और स्वीडन के बीच मुकाबला 1 जुलाई रात 2:30 बजे न्यूयॉर्क/न्यू जर्सी स्टेडियम में होगा। तीसरे मैच में सह-मेजबान मेक्सिको का सामना इक्वाडोर से सुबह 6:30 बजे मेक्सिको सिटी स्टेडियम में होगा। मैच-77: आइवरी कोस्ट और नॉर्वे पहली बार आमने-सामने आइवरी कोस्ट और नॉर्वे के बीच यह पहला इंटरनेशनल मुकाबला होगा। आइवरी कोस्ट अपने चौथे वर्ल्ड कप में पहली बार नॉकआउट में पहुंचा है। इससे पहले सिर्फ कैमरून (1990) और सेनेगल (2002) ही अपना पहला वर्ल्ड कप नॉकआउट मैच जीतने वाली अफ्रीकी टीमें रही हैं। ग्रुप स्टेज में दोनों टीमों का प्रदर्शन आइवरी कोस्ट ने ग्रुप-E में 2 जीत और 1 हार के साथ नॉकआउट में जगह बनाई। टीम ने इक्वाडोर और कुरासाओ को हराया, जबकि जर्मनी से 2-1 से हार मिली। खास बात यह रही कि तीनों मैचों में पहला गोल आइवरी कोस्ट ने ही किया। ऐसा करने वाली वह 1994 के नाइजीरिया के बाद दूसरी अफ्रीकी टीम बनी। नॉर्वे ने 28 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी करते हुए ग्रुप-I में 2 जीत और 1 हार के साथ अंतिम-32 में जगह बनाई। टीम ने इराक और सेनेगल को हराया, जबकि आखिरी मैच में फ्रांस से 4-1 से हार मिली। यह पिछले 19 मैचों में उसकी सिर्फ दूसरी हार थी। हालैंड के पास 72 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ने का मौका स्टार स्ट्राइकर एरलिंग हालैंड पहले दो वर्ल्ड कप मैचों में 4 गोल कर चुके हैं। अगर वह आइवरी कोस्ट के खिलाफ दो या उससे ज्यादा गोल करते हैं तो 1954 के बाद शुरुआती तीन वर्ल्ड कप मैचों में लगातार दो या अधिक गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन जाएंगे। पेपे और डियोमांडे पर रहेंगी नजर आइवरी कोस्ट के निकोलस पेपे ने कुरासाओ के खिलाफ दो गोल कर वर्ल्ड कप में एक मैच में दो गोल करने वाले देश के दूसरे खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड बनाया। वहीं यान डियोमांडे ने ग्रुप स्टेज में 10 सफल ड्रिब्लिंग और 10 गोल मौके बनाकर 1990 के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले खिलाड़ी बने। पॉसिबल प्लेइंग-11 आइवरी कोस्ट: याहिया फोफाना (गोलकीपर), विल्फ्रेड सिंगो, उस्मान डियोमांडे, इवान एनडिका, घिस्लेन कोनान, फ्रैंक केसी, इब्राहिम सांगारे, सेको फोफाना, यान डियोमांडे, निकोलस पेपे, अमाद डियालो। नॉर्वे: ओरजान नाइलैंड (गोलकीपर), जूलियन रायर्सन, लियो ओस्टिगार्ड, क्रिस्टोफर आजर, डेविड वोल्फ, सैंडर बर्गे, पैट्रिक बर्ग, मार्टिन ओडेगार्ड, एंटोनियो नुसा, अलेक्जेंडर सोरलोथ, एरलिंग हालैंड। मैच-78: फ्रांस ने स्वीडन को 12 बार हराया, वर्ल्ड कप में पहली भिड़ंत फ्रांस और स्वीडन के बीच अब तक 24 इंटरनेशनल मुकाबले हुए हैं। इनमें फ्रांस ने 12, स्वीडन ने 6 मैच जीते, जबकि 6 मुकाबले ड्रॉ रहे। दोनों टीमें वर्ल्ड कप में पहली बार आमने-सामने होंगी। हालांकि बड़े टूर्नामेंट में यह उनकी तीसरी भिड़ंत होगी। यूरो-1992 में मुकाबला 1-1 से ड्रॉ रहा था, जबकि यूरो-2012 में स्वीडन ने फ्रांस को 2-0 से हराया था। ग्रुप स्टेज में दोनों टीमों का प्रदर्शन फ्रांस ने ग्रुप-I में तीनों मैच जीतकर 9 अंक के साथ टॉप किया। टीम ने लगातार तीनों मुकाबलों में 3 या उससे ज्यादा गोल किए। 1998 के बाद किसी बड़े टूर्नामेंट के ग्रुप स्टेज में यह उसका पहला क्लीन स्वीप है। स्वीडन ने ग्रुप-F में 1 जीत, 1 हार और 1 ड्रॉ के साथ नॉकआउट में जगह बनाई। टीम ने ग्रुप स्टेज में 7 गोल किए, जो उसके वर्ल्ड कप इतिहास में किसी भी ग्रुप चरण का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। एमबाप्पे-डेम्बेले के पास रिकॉर्ड बनाने का मौका किलियन एमबाप्पे और उस्मान डेम्बेले ग्रुप स्टेज में 4-4 गोल कर चुके हैं। डेम्बेले ने नॉर्वे के खिलाफ हैट्रिक भी लगाई। दोनों अब तक वर्ल्ड कप में मिलकर 5 गोल बना चुके हैं। अगर इस मैच में भी दोनों गोल में योगदान देते हैं तो 1966 के बाद सबसे सफल जोड़ी का नया रिकॉर्ड बना सकते हैं। फ्रांस और स्वीडन दोनों के सामने रिकॉर्ड फ्रांस के पास वर्ल्ड कप में यूरोपीय टीमों के खिलाफ लगातार 7वीं जीत दर्ज करने का मौका है। वहीं स्वीडन के विक्टर ग्योकेरेस ग्रुप स्टेज में सबसे ज्यादा 11 शॉट और 8 गोल मौके बना चुके हैं। एंथनी एलांगा लगातार दो मैचों में गोल कर चुके हैं। फ्रांस के खिलाफ भी स्कोर करने पर वह वर्ल्ड कप में लगातार तीन मैचों में गोल करने वाले चुनिंदा स्वीडिश खिलाड़ियों में शामिल हो जाएंगे। पॉसिबल प्लेइंग-11 फ्रांस: माइक मेन्यां (गोलकीपर), जूल्स कुंडे, इब्राहिमा कोनाते, विलियम सलीबा, थियो हर्नांडेज, औरेलियन चुआमेनी, एन'गोलो कांते, माइकल ओलिसे, उस्मान डेम्बेले, किलियन एमबाप्पे, डिजायरे डूए। स्वीडन: जैकब जेटरस्ट्रॉम (गोलकीपर), विक्टर लिंडेलोफ, इसाक हिएन, गैब्रियल गुडमुंडसन, लुकास बर्गवाल, यासिन अयारी, मैटियास स्वानबर्ग, एंथनी एलांगा, अलेक्जेंडर इसाक, विक्टर ग्योकेरेस। मैच-79: मेक्सिको और इक्वाडोर की वर्ल्ड कप में दूसरी भिड़ंत मेक्सिको और इक्वाडोर के बीच अब तक 5 इंटरनेशनल मुकाबले हुए हैं। दोनों टीमों ने 1-1 मैच जीता, जबकि 3 मुकाबले ड्रॉ रहे। FIFA वर्ल्ड कप में दोनों की यह दूसरी भिड़ंत होगी। इससे पहले 2002 के ग्रुप स्टेज में मेक्सिको ने 2-1 से जीत दर्ज की थी। ग्रुप स्टेज में दोनों टीमों का प्रदर्शन सह-मेजबान मेक्सिको ने ग्रुप-A में तीनों मैच जीतकर 9 अंक के साथ टॉप किया। टीम ने साउथ अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और चेकिया को हराया। सबसे खास बात यह रही कि उसने ग्रुप स्टेज में एक भी गोल नहीं खाया। वहीं इक्वाडोर ने ग्रुप-E में 1 जीत, 1 हार और 1 ड्रॉ के साथ नॉकआउट में जगह बनाई। टीम ने आखिरी मुकाबले में जर्मनी को 2-1 से हराकर उलटफेर किया। वह 21वीं सदी में ग्रीस (2014) के बाद पहली दो ग्रुप मैचों में गोल किए बिना भी नॉकआउट में पहुंचने वाली दूसरी टीम बनी। क्विन्योनेस पर नजर मेजबान के तौर पर मेक्सिको ने अपने घर में खेले 12 वर्ल्ड कप मैचों में 8 जीते, 3 ड्रॉ खेले और सिर्फ 1 हारी है। हालांकि, पिछले 10 नॉकआउट मुकाबलों में उसे सिर्फ 1 जीत मिली है। फॉरवर्ड जूलियन क्विन्योनेस इस वर्ल्ड कप में 2 गोल कर चुके हैं। इक्वाडोर के खिलाफ गोल करते ही वह 2010 के जेवियर हर्नांडेज के बाद एक ही वर्ल्ड कप में तीन गोल करने वाले पहले मैक्सिकन खिलाड़ी बन जाएंगे। हाई-प्रेस फुटबॉल से चौंका रहा इक्वाडोर जर्मनी के खिलाफ 1-0 से पिछड़ने के बाद निल्सन अंगुलो और गोंजालो प्लाटा के गोल से इक्वाडोर ने शानदार वापसी की। ग्रुप स्टेज में उरुग्वे और कनाडा के बाद विपक्षी हाफ में सबसे ज्यादा हाई-इंटेंसिटी प्रेस करने वाली टीम भी इक्वाडोर रही। इन खिलाड़ियों पर रहेगी नजर मेक्सिको के जूलियन क्विन्योनेस, राउल जिमेनेज और एडसन अल्वारेज पर नजर रहेगी। वहीं इक्वाडोर के लिए मोइसेस कैसेडो, एन्नर वालेंसिया, गोंजालो प्लाटा और केन्ड्री पायेज अहम खिलाड़ी होंगे। पॉसिबल प्लेइंग-11 मेक्सिको: राउल रेंगल (गोलकीपर), जॉर्ज सांचेज, सीजर मोंटेस, जोहान वास्केज, जीसस गालार्डो, एडसन अल्वारेज, एरिक लिरा, लुइस चावेज, जूलियन क्विन्योनेस, राउल जिमेनेज, सैंटियागो जिमेनेज। इक्वाडोर: हर्नान गालिंडेज (गोलकीपर), फेलिक्स टोरेस, पिएरो हिनकापिए, विलियन पाचो, परविस एस्तुपिनान, मोइसेस कैसेडो, एलन फ्रैंको, केन्ड्री पायेज, गोंजालो प्लाटा, एन्नर वालेंसिया, निल्सन अंगुलो।
स्विट्जरलैंड, फ्रांस, जर्मनी… ये नाम सुनते ही दिमाग में एक तस्वीर बनती है। उस तस्वीर में अकसर साफ-सुथरी सड़कें, बर्फीले पहाड़ और मौसम का लुत्फ उठाते लोग होते हैं। लेकिन इस वक्त हकीकत कुछ और है। यूरोप के ये देश रिकॉर्ड गर्मी में जल रहे हैं। सड़कें पिघल रहीं, पटरियां उखड़ रहीं। पिछले 7 दिनों में हीटवेव ने 1300 से ज्यादा लोगों की जान ले ली। गर्मी से बचने को लोग नदियों-तालाबों में कूद रहे, जिससे फ्रांस में 55 लोग डूब गए। आखिर यूरोप में ऐसा क्यों हो रहा और ये गर्मी भारत से अलग कैसे है, आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: यूरोप के देशों में कैसी गर्मी पड़ रही है? जवाबः पहले 3 तस्वीरों में हीटवेव का मंजर… यूरोप की कुल आबादी करीब 74 करोड़ है। इनमें से 19 करोड़ लोग 35 डिग्री से ज्यादा तापमान झेल रहे हैं। देखिए यूरोप के शहरों में गर्मी का हाल… सवाल-2: भारत में इतना तापमान सामान्य गर्मी माना जाता है, फिर यूरोप में हाहाकार क्यों? जवाबः यूरोप दुनिया के ठंडे रिहायशी महाद्वीप में से एक हैं। यहां पूरा सिस्टम ठंड के हिसाब से बना है, न कि जानलेवा गर्मी के लिए। यूरोप का मौजूदा ढांचा इतनी गर्मी झेलने के लिए तैयार नहीं है… 1. पुराने घर गर्मी अंदर सोख लेते हैं 2. एयर कंडीशनर की कमी 3. ज्यादा बुजुर्ग आबादी एनर्जी एंड क्लाइमेट पॉलिसी एक्सपर्ट सिद्धांत सिंह बताते हैं कि भारत की तुलना में यूरोप में सूरज की रोशनी ज्यादा देर तक रहती है। इससे गर्मी की तीव्रता बढ़ जाती है। इस वक्त यूरोप में 16 घंटे सूरज रहता है, जबकि भारत में 12-13 घंटे। यूरोप की मौजूदा गर्मी ज्यादा सूखी है और हवाएं भी नहीं चल रही। लोगों को ऐसी गर्मी की आदत भी नहीं है। इसलिए लोग ज्यादा घुटन महसूस कर रहे हैं। सवाल-3: यूरोप में इस रिकॉर्ड गर्मी की वजह क्या है? जवाबः 3 बड़ी वजहें हैं… 1. ओमेगा ब्लॉक से रुकी मौसमी हवाएं 2. हीट डोम से यूरोप में गर्मी का गुबार बना 3. ग्लोबल वॉर्मिंग से हालात और ज्यादा खराब सवाल-4: इस गर्मी से यूरोप को कब तक राहत मिलेगी? जवाब: मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक हीट डोम धीरे-धीरे पश्चिम यूरोप से पूर्व की तरफ खिसकेगा। अंटार्कटिक की तरफ से सर्द हवाएं आएंगी, जो राहत देंगी। फ्रांस के पश्चिमी हिस्से में इस हफ्ते से राहत मिलनी शुरू होगी। बाकी हिस्सों में 1 जुलाई तक मौसम गर्म ही रहेगा। जर्मनी, इटली और ब्रिटेन में भी 30 जून तक तापमान कम होगा। हालांकि यह राहत कुछ दिनों की ही रहेगी। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक जुलाई में यूरोप के ऊपर एक और हीट डोम एक्टिव हो सकता है। इसका असर पश्चिम और मध्य यूरोप में रहेगा। स्पेन, पुर्तगाल, फ्रांस, जर्मनी, दक्षिण इंग्लैंड, उत्तर इटली में 6 से 9 दिन ज्यादा गर्मी और हीटवेव पड़ेगी। 7 से 10 जुलाई के बीच यह हीट डोम एक्टिव हो सकता है। यह अभी की गर्मी से ज्यादा खतरनाक हो सकता है। पहली हीटवेव ने मिट्टी को सुखा दिया है। सड़कों और इमारतों को गर्म कर दिया है। शहरों में नमी वैसे ही कम हो गई है। ऐसे में लगातार दूसरी हीटवेव शहरों को और ज्यादा गर्म करेगी। अमेरिका की क्लाइमेट इम्पैक्ट कंपनी के मुताबिक अगस्त तक यूरोप में गर्म मौसम बना रहेगा। उस पर इस साल एल-नीनो की वजह से यूरोप में सूखा पड़ने की भी आशंका है। -------- ये खबर भी पढ़िए… आज का एक्सप्लेनर: 194 साल के ‘जोनाथन’ की कहानी, पीएम मोदी के दौरे से सुर्खियों में; 39 अमेरिकी राष्ट्रपति देख चुका, 140 साल छोटी गर्लफ्रेंड पीएम मोदी 27 जून को सेशेल्स दौरे पर गए। दर्जनों खबरें चलीं- ‘मोदी यहां दुनिया के सबसे बुजुर्ग जानवर जोनाथन से मिलेंगे।’ पीएम मोदी कछुओं से मिले भी, लेकिन उनमें जोनाथन नहीं था। दरअसल, जोनाथन सेशेल्स में है ही नहीं। वो तो 7 हजार किमी दूर एक ब्रिटिश टापू सेंट हेलेना में है। पूरी खबर पढ़िए…
अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और शोध सहयोग के क्षेत्र में इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी-दिल्ली) ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यूरोपीय संघ के पब्लिक एंड कल्चरल डिप्लोमेसी प्रोग्राम के तहत शुरू किए गए ईयू-भारत स्टूडेंट एंबेसडर नेटवर्क के लिए देश के 20 प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में आईआईआईटी-दिल्ली का चयन किया गया है। इस पहल का उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच उच्च शिक्षा, छात्र आदान-प्रदान, शोध सहयोग और सांस्कृतिक संबंधों को नई गति देना है। नई दिल्ली में आयोजित लॉन्च समारोह में भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फ़िन की मौजूदगी रही। यूरोपीय संघ कार्यक्रम में चुने गए 3 संस्थानों में शामिल आईआईआईटी-दिल्ली उन चुनिंदा 3 संस्थानों में शामिल रहा, जिन्हें अपने कार्यों की प्रस्तुति देने का अवसर मिला। संस्थान के फैकल्टी सदस्य डॉ जैनेंद्र ने यूरोपीय संघ समर्थित इरासम हब परियोजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह परियोजना भारत के 10 और यूरोप के 4 देशों के सहयोग से रोबोटिक्स और ऑटोनॉमस सिस्टम में क्षमता निर्माण को मजबूत कर रही है। संस्थान की ओर से जोशिता यादव और हार्दिक मदान को स्टूडेंट एंबेसडर बनाया गया है। भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फ़िन ने कहा, यह नेटवर्क भारत और यूरोप के युवाओं तथा प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों को एक साझा मंच देता है। इससे उच्च शिक्षा, सांस्कृतिक समझ और तकनीकी अनुसंधान में सहयोग के नए अवसर विकसित होंगे।
ग्लोबल वार्मिंग और तेजी से बदलते जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के इस दौर में पूरी दुनिया भीषण और जानलेवा गर्मी की चपेट में आ चुकी है. इस समय दक्षिणी और मध्य यूरोप के कई देश एक ऐसी विनाशकारी और अभूतपूर्व हीटवेव (लू) का सामना कर रहे हैं, जिसने वहां की सरकारों और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की नींद उड़ा दी है. फ्रांस, स्पेन और पुर्तगाल जैसे ठंडे माने जाने वाले देशों में थर्मामीटर का पारा 43 डिग्री सेल्सियस को छू रहा है.सबसे चौंकाने वाली और हैरान करने वाली बात यह है कि यही 43C तापमान भारत के लोगों के लिए गर्मियों के मौसम में एक बहुत ही आम बात होती है, जिसे लोग हंसते-खेलते झेल जाते हैं. लेकिन यूरोप में इसी तापमान के कारण चारों तरफ त्राहि-त्राहि मची हुई है और अकेले फ्रांस में अब तक 1000 से ज्यादा लोगों की तड़पकर मौत हो चुकी है. आखिर ऐसा क्यों है कि थर्मामीटर पर एक जैसा दिखने वाला नंबर (43C) भारत के मुकाबले यूरोप में इतना ज्यादा जानलेवा, बेरहम और विनाशकारी साबित हो रहा है? विज्ञान, भूगोल और आर्किटेक्चर के विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कोई थर्मल रीडिंग का अंतर नहीं, बल्कि 8 ऐसी बड़ी और बुनियादी वजहें हैं जो यूरोप की गर्मी को इंसानों के लिए दमघोंटू बना देती हैं.1. 17 घंटे का लंबा टॉर्चर और सूरज का खास तिरछा एंगलयूरोप का ज्यादातर भौगोलिक हिस्सा भारत के मुकाबले पृथ्वी पर काफी उत्तर (North) में स्थित है. उदाहरण के तौर पर समझें तो पेरिस की लोकेशन कनाडा के टोरंटो शहर से भी अधिक उत्तर में है. गर्मियों के दिनों में यहां सूरज का एंगल ऐसा होता है कि धूप सीधे सिर पर पड़ने के बजाय तिरछी पड़ती है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि आसमान में 15 से लेकर 17 घंटे तक दिन की रोशनी रहती है. इतने लंबे समय तक लगातार धूप रहने के कारण शहरों की कंक्रीट की इमारतें, डामर की सड़कें और फुटपाथ दिनभर सोलर एनर्जी (तापमान) सोखते रहते हैं, जिसके चलते ये रात के समय भी ठंडे नहीं हो पाते और रातें भी भट्टी की तरह तपती हैं.2. प्रदूषण मुक्त साफ आसमान: सीधे त्वचा पर वार करती तीखी किरणेंभारत के शहरों में हवा के भीतर धूल-मिट्टी के कण और प्रदूषण का स्तर थोड़ा ज्यादा होता है, जो एक सुरक्षा कवच की तरह सूरज की सीधी किरणों को वायुमंडल में ही बिखेर (Scatter) देते हैं, जिससे धूप की चुभन थोड़ी कम हो जाती है. इसके विपरीत, यूरोप में कड़े नियमों के कारण आसमान बिल्कुल साफ और प्रदूषण मुक्त होता है. हवा में धूल के कण न होने से सूरज की पराबैंगनी (Ultraviolet) और तीखी किरणें सीधे इंसानी स्किन पर वार करती हैं, जिससे 43C तापमान में भी वहां की धूप भारत से कहीं ज्यादा झुलसाने वाली और तेज महसूस होती है.3. हवा का बिल्कुल थम जाना और 'हॉट एयर बैलून' का बननाहालिया हीटवेव और मौसम के बिगड़े पैटर्न के दौरान यूरोप के वायुमंडल में हवा की गति पूरी तरह से ठप यानी रुक गई है. जब हवा बिल्कुल नहीं चलती, तो घने बसे शहरों के ऊपर गर्म हवा का एक अदृश्य गुब्बारा बन जाता है. हवा न चलने के कारण इंसानी शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम (पसीना सूखने की वाष्पीकरण प्रक्रिया) पूरी तरह काम करना बंद कर देता है, जिससे बन्द कमरों के भीतर लोगों का दम घुटने लगता है.4. सूखी गर्मी और 'साइलेंट डिहाइड्रेशन' का जानलेवा खेलभारत में गर्मी के साथ अक्सर उमस (Humidity) होती है, जिससे हमारे शरीर से लगातार पसीना निकलता है और हमें प्यास का अहसास होता रहता है, जिससे हम पानी पीते हैं. लेकिन यूरोप के अंदरूनी मैदानी हिस्सों में पड़ने वाली गर्मी बेहद सूखी (Dry Heat) होती है. यहां शरीर से निकलने वाला पसीना तुरंत हवा में उड़ जाता है, जिससे इंसान को यह अंदाजा ही नहीं हो पाता कि उसका शरीर कितनी डरावनी तेजी से पानी खो रहा है. यह 'साइलेंट डिहाइड्रेशन' (Silent Dehydration) अचानक से शरीर के अंगों को फेल (Multi-Organ Failure) कर रहा है और बुजुर्गों की मौत का सबसे बड़ा कारण बन रहा है.5. 'थर्मस' और ओवन जैसे घर, जो बाहर नहीं निकलने देते गर्मीयूरोप के घरों का इतिहास और आर्किटेक्चर देखें, तो इन्हें सदियों से कड़ाके की ठंड, भारी बर्फबारी और लंबी सर्दियों को ध्यान में रखकर खास तौर पर डिजाइन किया गया है. इन घरों की दीवारें बेहद मोटी और इंसुलेशन वाली होती हैं, खिड़कियां आकार में छोटी होती हैं और छतें गहरे रंग की होती हैं ताकि बाहर की थोड़ी सी भी गर्मी अंदर फंसी रहे और घर गर्म रहे.सर्दियों का यही वरदान अब इस ग्लोबल वार्मिंग के दौर में वहां के लोगों के लिए सबसे बड़ा अभिशाप बन गया है. कंक्रीट के ये घर एक बार गर्म होने के बाद अंदर किसी ओवन (Oven) की तरह चौबीसों घंटे तपते रहते हैं. इसके उलट, पारंपरिक भारतीय घरों में ऊंची छतें, खुले बरामदे, टाइल्स की ठंडी फ्लोरिंग और क्रॉस-वेंटिलेशन को ध्यान में रखकर बनाया जाता है ताकि गर्मी तुरंत बाहर निकल सके.6. बुनियादी ढांचे में एयर कंडीशनिंग (AC) और पंखों का न होनायूरोपियन लाइफस्टाइल और संस्कृति में एसी (Air Conditioner) कभी भी उनकी प्राथमिकता या जरूरत का हिस्सा नहीं रहा. पेरिस, बर्लिन या लंदन जैसे बड़े शहरों में अमूमन गर्मियों का औसत तापमान 25C के आसपास ही रहता था, इसलिए वहां के अधिकांश घरों में न तो सीलिंग फैन (छत के पंखे) होते हैं और न ही एसी की फिटिंग. अब अचानक आई इस अभूतपूर्व और जानलेवा गर्मी से निपटने के लिए वहां का घरेलू इन्फ्रास्ट्रक्चर बिल्कुल भी तैयार नहीं है, जबकि भारत में कूलर, पंखे और एसी गर्मियों की बुनियादी और अनिवार्य जरूरत माने जाते हैं.7. ऐतिहासिक शहरों की खूबसूरती के कड़े और अजीब कानूनयूरोप के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहरों (जैसे पेरिस, रोम या फ्लोरेंस) के पुराने और मुख्य रिहायशी इलाकों में 'आर्किटेक्चरल एस्थेटिक्स' (शहरी सुंदरता) को बनाए रखने के लिए बेहद कड़े कानून हैं. इन नियमों के तहत किसी भी ऐतिहासिक या पुरानी इमारत के बाहरी हिस्से पर एसी का आउटडोर कंप्रेसर या डक्ट लगाने पर पूरी तरह से कानूनी रोक है ताकि पैदल चलने वाले रास्तों और वहां के आउटडोर कैफे कल्चर का विजुअल लुक खराब न हो. सुंदरता को बचाने के लिए बनाए गए ये सरकारी नियम आज के इस आपातकाल में लोगों के लिए काल साबित हो रहे हैं.8. 'बायोलॉजिकल एडप्टेशन': शरीर का मौसम के अनुकूल न ढलनाभारत के लोग जन्म से ही बचपन से 40C से लेकर 45C के ऊपर का प्रचंड तापमान हर साल झेलने के आदी (Acclimatized) होते हैं. बार-बार अत्यधिक गर्मी का सामना करने से हमारा बायोलॉजिकल सिस्टम इसके अनुकूल ढल जाता है, जिससे हमारा दिल और कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम विपरीत परिस्थितियों में भी बेहतर काम करता है और शरीर तुरंत पसीना बहाकर खुद को इंटरनली ठंडा कर लेता है. इसके विपरीत, यूरोपियन लोगों का शरीर और जेनेटिक्स इस तरह के गर्म मौसम के बिल्कुल आदी नहीं हैं, जिसके चलते उनका ब्लड प्रेशर और दिल इतनी भीषण गर्मी में अचानक से कड़ा रिस्पॉन्स नहीं दे पाता और लोग हीट स्ट्रोक का शिकार हो जाते हैं.यह सोचना कि भारतीय लोग केवल शारीरिक रूप से बेहतर हैं, पूरी तरह सही नहीं है; बल्कि इसके पीछे दोनों महाद्वीपों की भौगोलिक और ढांचागत बनावट का बहुत बड़ा हाथ है. भारत की उमस वाली गर्मी जहां चिपचिपी और थका देने वाली होती है, वहीं यूरोप की सूखी गर्मी, तपती कंक्रीट की इमारतें, हवा का थमा होना और लगातार 17 घंटे तक सूरज का आग उगलना वहां की रातों को भी नरक बना रहा है. यही वजह है कि जब यूरोप का पारा 43 डिग्री पहुंचता है, तो वह किसी भीषण प्राकृतिक आपदा (Natural Disaster) की तरह हजारों मासूम जिंदगियों को लीलने लगता है.
एसएस राजामौली ने रचा इतिहास, फ्रांस के शीर्ष फिल्म संस्थान में मिली परमानेंट जगह
भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े और सबसे प्रतिष्ठित फिल्म मेकर्स में से एक, एसएस राजामौली ने 'बाहुबली' फ्रेंचाइजी और 'आरआरआर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के साथ भारतीय फिल्मों को ग्लोबल स्टेज पर ले जाने में एक बेहद अहम भूमिका निभाई है। अपनी भव्य सोच, बड़े पैमाने पर कहानी कहने के अंदाज और भारतीय संस्कृति के गहरे जश्न के लिए मशहूर, राजामौली ने दुनिया भर के दर्शकों और फिल्म मेकर्स से अपार सम्मान कमाया है। हर एक मील के पत्थर के साथ, उन्होंने वैश्विक स्तर पर भारतीय सिनेमा की पहचान को लगातार एक नए मुकाम पर पहुँचाया है। अब, इस मशहूर फिल्म मेकर ने अपने शानदार करियर में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ ली है। एसएस राजामौली को पेरिस के 'सिनेमाथेक फ्रैंकेस' में एक परमानेंट जगह देकर सम्मानित किया गया है, जो दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली फिल्म संस्थानों में से एक है। ALSO READ: किसिंग सीन के दौरान बेकाबू हो गई थीं कंगना रनौट, काट लिए थे वीर दास के होंठ! पत्रकार के दावे पर एक्टर ने तोड़ी चुप्पी महान हेनरी लैंग्लॉइस द्वारा स्थापित इस संस्थान को सिनेमा के इतिहास को सुरक्षित रखने और उसका जश्न मनाने के लिए एक बेहद पवित्र जगह माना जाता है, जो इस सम्मान को राजामौली और भारतीय सिनेमा दोनों के लिए एक ऐतिहासिक पल बनाता है। इस मौके को और भी खास बनाते हुए, राजामौली ने ऑस्कर जीतने वाले दिग्गज ग्रीक-फ्रेंच फिल्म मेकर कोस्टा-गावरास के साथ भी एक यादगार पल साझा किया। राजामौली के काम के प्रति अपने गहरे सम्मान को दिखाते हुए, कोस्टा-गावरास ने उनकी मास्टरक्लास में शामिल होने और वहाँ पूरे समय रुकने से पहले, लगभग आठ घंटे तक राजामौली की फिल्में देखीं, जो इस भारतीय फिल्म मेकर के काम के गहरे प्रभाव को दिखाता है। Having me here in Paris and screening my films is itself an honour for me. But a sweet surprise I never saw coming. It is a feeling I cannot fully put into words. To have a permanent place in the halls of one of the world’s most legendary film institutions, named after the great… pic.twitter.com/XYrNWfm4BU — rajamouli ss (@ssrajamouli) June 28, 2026 तस्वीरों को शेयर करते हुए एसएस राजामौली ने लिखा, मुझे यहां पेरिस में बुलाना और मेरी फिल्मों की स्क्रीनिंग करना ही मेरे लिए अपने आप में एक बहुत बड़ा सम्मान है। लेकिन यह एक ऐसा प्यारा सरप्राइज है, जिसके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था। उन्होंने लिखा, यह एक ऐसा अहसास है जिसे मैं पूरी तरह से शब्दों में बयां नहीं कर सकता। महान हेनरी लैंग्लॉइस के नाम पर बने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म संस्थानों में से एक की दीवारों पर हमेशा के लिए जगह पाना, कुछ ऐसा है जिसे मैं जिंदगी भर अपने साथ संजोकर रखूंगा। इस सम्मान के लिए और भारतीय सिनेमा को इतने प्यार व गर्मजोशी के साथ अपनाने के लिए मैं दिग्गज मिस्टर कोस्टा-गावरास और पूरी सिनेमाथेक फ्रैंकेस फैमिली का दिल से आभार व्यक्त करता हूँ। इस पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए हर्षा चुंदूरु ने लिखा, “सिनेमाथेक फ्रैंकेस ने पिछले कुछ सालों में मार्टिन स्कोर्सेसे, जेम्स कैमरून और डेविड फिन्चर जैसे दिग्गजों का सम्मान किया है... इस तरह के सम्मानों की खास बात यह होती है कि ये किसी एक ब्लॉकबस्टर या एक हिट फिल्म बनाने से नहीं मिलते। ये सालों तक ऐसी फिल्में बनाने से मिलते हैं जो लोगों के दिलों में बस जाती हैं, फिल्म मेकर्स को इंस्पायर (प्रेरित) करती हैं और वर्ल्ड सिनेमा पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ जाती हैं। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें उन्होंने आगे लिखा, यह कैसा अहसास है, इसे शब्दों में बयां कर पाना मुमकिन ही नहीं है। एसएसआर (SSR) को ऐसे बड़े नामों के साथ देखना सच में एक अलग ही लेवल की खुशी देता है। यह विजनरी फिल्म मेकर अब अगले साल रिलीज होने वाली अपनी अगली बड़ी फिल्म 'वाराणसी' के साथ एक बार फिर से कामयाबी के नए रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है। महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा और पृथ्वीराज सुकुमारन जैसे लीड स्टार्स से सजी यह फिल्म एक और ऐतिहासिक सिनेमाई अनुभव होने की उम्मीद जगाती है, जो ग्लोबल स्टेज पर भारतीय कहानी कहने के तरीके की सीमाओं को आगे बढ़ाने की एस.एस. राजामौली की इस असाधारण विरासत को और ज्यादा मजबूत करेगी।
फ्रांस के नैन्सी शहर में विमान दुर्घटनाग्रस्त, 11 लोगों की मौत
पेरिस। फ्रांस के नैन्सी शहर के पास एक नागरिक विमान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से उसमें सवार सभी 11 लोगों की मौत हो गई। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार टॉमब्लेन हवाई अड्डे के समीप यह विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें स्काईडाइवर सवार थे जो एक प्रशिक्षण उड़ान पर थे। यह विमान पहली बार पैराशूट जंप […] The post फ्रांस के नैन्सी शहर में विमान दुर्घटनाग्रस्त, 11 लोगों की मौत appeared first on Sabguru News .
रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से फ्रांस में हाहाकार पश्चिमी यूरोप इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है, जिसका सबसे बुरा असर फ्रांस पर पड़ा है। पब्लिक हेल्थ फ्रांस के ताजा आंकड़ों के अनुसार, रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव के कारण देश में लगभग 1,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। यह गर्मी न केवल इंसानी सहनशक्ति की परीक्षा ले रही है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती बन गई है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े अभी शुरुआती हैं और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, यह संख्या और अधिक बढ़ सकती है।बुजुर्गों और अकेले रहने वालों के लिए बनी काल इस हीटवेव की सबसे दुखद बात यह है कि इसका 85 प्रतिशत शिकार 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्ग हुए हैं। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस और उसके आसपास के 'इले-डी-फ्रांस' (le-de-France) इलाके में घरों के अंदर मरने वालों की संख्या में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जो बुजुर्ग अकेले रहते हैं, वे गर्मी का मुकाबला करने में सबसे ज्यादा कमजोर साबित हो रहे हैं। यह स्थिति समाज में अकेलेपन की समस्या और हीटवेव के दौरान बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत को रेखांकित करती है।रेड अलर्ट और राहत की उम्मीद फ्रांस के कई इलाकों में पिछले कई दिनों से तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था, जिसके चलते प्रशासन को 'रेड अलर्ट' जारी करना पड़ा। हालांकि, रविवार को तापमान में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आम जनता को भीषण गर्मी से हल्की राहत मिली है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे अकेले रहने वाले पड़ोसियों, विशेषकर बुजुर्गों का ध्यान रखें और हीटवेव के दौरान सावधानी बरतें। फिलहाल फ्रांस का स्वास्थ्य विभाग प्रभावित इलाकों में स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है ताकि मौतों के इन बढ़ते आंकड़ों को नियंत्रित किया जा सके।
डोनाल्ड ट्रंप ने टेक टैक्स को लेकर यूरोपीय देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की दी धमकी
वॉशिंगटन। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमरीकी दिग्गज टेक कंपनियों पर डिजिटल सेवा कर लगाने वाले किसी भी यूरोपीय देश के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ऐसे देशों से अमरीका आने वाले तमाम सामान पर तत्काल 100 प्रतिशत का दंडात्मक आयात शुल्क लगाया जाएगा। ‘ट्रुथ सोशल’ […] The post डोनाल्ड ट्रंप ने टेक टैक्स को लेकर यूरोपीय देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की दी धमकी appeared first on Sabguru News .
पिछले 147 साल का रिकॉर्ड टूटा, 'हीट-डोम' से दहला फ्रांस; पेरिस में पारा 44 पार, रेड अलर्ट जारी
पेरिस/इंटरनेशनल डेस्क: यूरोप का खूबसूरत देश फ्रांस इस समय एक भीषण और अप्रत्याशित 'हीट इमरजेंसी' (गर्मी के आपातकाल) का सामना कर रहा है। राजधानी पेरिस सहित पूरे देश में गर्मी ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया है, जिसने पिछले 147 वर्षों (1872-2019) का इतिहास बदल कर रख दिया है। इस हफ्ते पेरिस की सड़कों पर 40C से अधिक तापमान वाले इतने दिन दर्ज किए गए हैं, जितने पिछले डेढ़ सौ साल में कभी नहीं देखे गए। हालात इतने बदतर हैं कि पिस्सॉस में पारा 44.3C तक जा पहुंचा है, जबकि पूरे फ्रांस का राष्ट्रीय औसत तापमान 29.8C रिकॉर्ड हुआ है। मौसम विभाग ने देश के आधे से ज्यादा हिस्से में 'रेड हीट अलर्ट' जारी कर दिया है। इस जानलेवा गर्मी के कारण अब तक 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं नदियों और झीलों में राहत तलाशने के चक्कर में डूबने के मामले भी तेजी से बढ़े हैं।फ्रांस अचानक 'हीट-चैंबर' क्यों बन गया? जानिए इसके पीछे का विज्ञानफ्रांस में अचानक आई इस भयंकर तबाही के पीछे सबसे बड़ा कारण 'हीट डोम' (Heat Dome) को माना जा रहा है। मौसम विज्ञान की भाषा में कहें तो यह एक 'हाई-प्रेशर ब्लॉकिंग सिस्टम' है। जब वायुमंडल के ऊपरी स्तर पर एक बेहद मजबूत हाई प्रेशर जोन बनता है, तो वह आसमान में एक विशाल 'ढक्कन' की तरह काम करने लगता है। यह ढक्कन गर्म हवा को एक ही दायरे में कैद कर लेता है और उसे बाहर नहीं निकलने देता। यह रुकी हुई गर्म हवा नीचे की ओर दबती है और जैसे-जैसे नीचे आती है, इसका घनत्व बढ़ने से यह और ज्यादा खौलने लगती है। फ्रांस के ऊपर यह डोम पिछले कई दिनों से लगातार टिका हुआ है, जिसके कारण तापमान हर दिन नए रिकॉर्ड तोड़ रहा है।यूरोप में भारत से ज्यादा खतरनाक क्यों महसूस हो रही है यह गर्मी?आम तौर पर 40C से 44C का तापमान भारतीयों के लिए नया नहीं है, लेकिन यूरोप के लोगों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो रही है। इसके पीछे कुछ मुख्य कारण हैं:यूरोपीय घरों की खास बनावट: भारत के विपरीत, यूरोपीय देशों में घर मोटी दीवारों और तगड़े इन्सुलेशन वाले बनाए जाते हैं। यह तकनीक सर्दियों में तो घर को गर्म रखने में मदद करती है, लेकिन गर्मियों में यह अभिशाप बन जाती है क्योंकि अंदर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। यहां भारतीय घरों की तरह क्रॉस-वेंटिलेशन (प्राकृतिक हवा का आना-जाना) भी बहुत कम होता है।AC की भारी कमी: ठंडे मौसम के आदी होने के कारण यूरोप के आम घरों और सार्वजनिक जगहों पर एयर कंडीशनिंग (AC) की व्यवस्था नहीं होती है। ऐसे में अचानक आई इस भीषण गर्मी से बचने का लोगों के पास कोई जरिया नहीं बचा है।अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट: पेरिस जैसे बड़े शहरों में कंक्रीट की इमारतें और डामर की सड़कें दिनभर सूरज की तपिश को सोखती हैं और रात के समय उसे वापस छोड़ती हैं, जिससे रात में भी राहत नहीं मिलती।अत्यधिक उमस (Humidity): भारी तापमान के साथ उमस बढ़ जाने के कारण शरीर का पसीना सूख नहीं पाता, जिससे बॉडी का नेचुरल कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है।ग्लोबल वार्मिंग का साइड इफेक्ट: अब सामान्य होती जा रही हैं 'ट्रॉपिकल नाइट्स''वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन' (WWA) के वैज्ञानिकों के एक हालिया अध्ययन ने दुनिया को चौंका दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि फ्रांस में आज जो स्थिति है, वैसी भीषण गर्मी साल 1976 में आना लगभग असंभव था। अगर उस दौर में ऐसी कोई हीटवेव आती भी, तो उसका तापमान आज की तुलना में करीब 3.5 डिग्री सेल्सियस कम होता। इसका सीधा मतलब है कि मानव-जनित जलवायु परिवर्तन ने इस गर्मी की मार को कई गुना बढ़ा दिया है।एक्सपर्ट्स के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता 'ट्रॉपिकल नाइट्स' (उष्णकटिबंधीय रातें) बन गई हैं। ये ऐसी रातें होती हैं जब सूरज डूबने के बाद भी तापमान नीचे नहीं गिरता और रातें भी बेहद गर्म बनी रहती हैं। दिन में झुलसाने वाली धूप और रात में भी भारी गर्मी के कारण मानव शरीर को खुद को ठंडा करने और आराम पाने का मौका नहीं मिल पा रहा है। यही वजह है कि लोगों में हीट स्ट्रोक, गंभीर डिहाइड्रेशन और दिल का दौरा पड़ने का खतरा खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।अल-नीनो नहीं, इंसानी गलतियां हैं जिम्मेदार; क्या है इसका परमानेंट इलाज?वैज्ञानिकों ने पूरी तरह साफ कर दिया है कि इस विनाशकारी गर्मी के लिए प्रकृति या अल-नीनो जिम्मेदार नहीं है, बल्कि इंसानों द्वारा कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों का अंधाधुंध इस्तेमाल है। हवा में लगातार बढ़ रही ग्रीनहाउस गैसों के कारण हमारी धरती एक भट्टी बनती जा रही है। चिंताजनक बात यह है कि यूरोप महाद्वीप बाकी दुनिया के औसत की तुलना में करीब दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है।इस वैश्विक संकट का एकमात्र समाधान यही है कि दुनिया भर के देश जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता को तुरंत खत्म करें। इसकी जगह सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसी स्वच्छ और सस्ती तकनीकों को युद्ध स्तर पर अपनाना होगा। साथ ही, अब ऐसे शहरों और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को डिजाइन करने की जरूरत है जो कंक्रीट के जंगल न बनकर अधिक से अधिक पेड़-पौधों और हरियाली से लैस हों, ताकि भविष्य में आने वाली ऐसी घातक हीटवेव्स का सामना किया जा सके। अगर अभी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह तबाही और भी ज्यादा लंबी और जानलेवा होती जाएगी।
2 बार की वर्ल्ड चैंपियन उरुग्वे फुटबॉल वर्ल्ड कप के लीग स्टेज से बाहर हो गई है। उसे शनिवार को यूरोपियन चैंपियन स्पेन ने 1-0 से हराया। इस जीत के साथ स्पेन ने ग्रुप-एच के टॉप पर रहते हुए नॉकआउट राउंड में प्रवेश किया। स्पेन के लिए मैच का एकमात्र गोल एलेक्स बाएना ने 42वें मिनट में किया। उनका शॉट उरुग्वे के अनुभवी गोलकीपर फर्नांडो मुस्लेरा रोक नहीं पाए। यह टूर्नामेंट में मुस्लेरा की तीसरी बड़ी गलती रही। 40 साल गोलकीपर ने हाफटाइम पर खुद को बदलने का अनुरोध किया, जिसके बाद दूसरे हाफ में सर्जियो रोचेट ने गोलपोस्ट संभाला। इस जीत के साथ स्पेन ने 7 अंकों के साथ ग्रुप-एच में शीर्ष स्थान हासिल किया। अब उसका सामना राउंड ऑफ-32 में ग्रुप जे की उपविजेता टीम ऑस्ट्रिया या अल्जीरिया से होगा। केप वर्डे तीन अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा और नॉकआउट में पहुंच गया। उसने एक अन्य मैच में सऊदी अरब के साथ गोल रहित ड्रा खेला। उरुग्वे इस एडिशन में एक भी मैच नहीं जीत सकी। मैच की हाइलाइट्स बिएल्सा ने ली हार की जिम्मेदारी उरुग्वे के मुख्य कोच मार्सेलो बिएल्सा ने टीम के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी ली। उन्होंने कहा, 'इस समय कोई भी बहाने नहीं सुनना चाहता। इस निराशाजनक प्रदर्शन की जिम्मेदारी मेरी है। मेरे पास बेहतरीन खिलाड़ियों का समूह था, लेकिन मैं उनसे बेहतर परिणाम नहीं दिला सका।' फ्रांस ने नॉर्वे को हराकर ग्रुप-आई में टॉप किया ग्रुप-आई से 2 बार की चैंपियन फ्रांस, नॉर्वे और सेनेगल ने राउंड ऑफ 32 में जगह बना ली। दिन के सबसे चर्चित मुकाबले में फ्रांस ने नॉर्वे को 4-1 हराकर ग्रुप में टॉप पोजिशन हासिल की। नॉर्वे हार के बावजूद नंबर-2 पर रहकर नॉकआउट में पहुंचा। इस मुकाबले को एर्लिंग हालैंड और किलियन एमबाप्पे की टक्कर के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन फ्रांस की जीत के हीरो उस्मान डेम्बेले रहे। उन्होंने 7वें, 20वें और 32वें मिनट में गोल दागे। एक गोल डिजायर दुए इंजरी टाइम के चौथे मिनट में किया। एक अन्य मुकाबले में सेनेगल ने ईराक को 5-0 के बड़े अंतर से हराया। इस जीत का फायदा उसे गोल डिफरेंस में मिला। सेनेगल ने ज्यादा गोल डिफरेंस और अंकों के आधार पर तीसरे स्थान पर रहने वाली टीमों के टॉप-5 में जगह बनाई और नॉकआउट का टिकट हासिल किया। ----------------------------------------------
यूरोपीय महाद्वीप से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और वैश्विक राजनीति को गरमाने वाली खबर सामने आ रही है। यूरोप के एक प्रमुख देश में लाउडस्पीकर के जरिए सार्वजनिक रूप से दी जाने वाली अजान पर पूरी तरह से प्रतिबंध (Ban) लगाने की मांग तेज हो गई है। स्थानीय नागरिकों और राजनेताओं का दावा है कि दिन में कई बार लाउडस्पीकर पर होने वाली तेज आवाजों से लोग बुरी तरह परेशान हो चुके हैं। इस मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब वहां के दक्षिणपंथी और प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपने शांत मुल्क को 'दूसरा पाकिस्तान' या कट्टरपंथी देश नहीं बनने देंगे।लाउडस्पीकर की तेज आवाज और सांस्कृतिक पहचान पर छिड़ी बहसइस यूरोपीय देश के कई शहरों में पिछले कुछ समय से अप्रवासियों की आबादी बढ़ने के साथ ही धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल काफी बढ़ गया था। स्थानीय निवासियों की ओर से लगातार ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) और मानसिक शांति भंग होने की शिकायतें दर्ज कराई जा रही थीं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब सरकार एक ऐसा कड़ा कानून बनाने पर विचार कर रही है जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों या छतों पर बड़े लाउडस्पीकर लगाकर धार्मिक प्रचार करने या अजान देने पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी। नेताओं का तर्क है कि देश की मूल सांस्कृतिक पहचान और यूरोपीय मूल्यों की रक्षा के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है।'दूसरा पाकिस्तान' वाले बयान से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचालस्थानीय संसद और राजनीतिक रैलियों में गूंजे 'दूसरा पाकिस्तान' वाले इस आक्रामक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यूरोपीय नेताओं का मानना है कि कुछ एशियाई और मध्य-पूर्व के देशों की तरह यहां भी धार्मिक कट्टरता को पनपने नहीं दिया जा सकता। उनका कहना है कि वे अपने देश में कानून का शासन और धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को बनाए रखना चाहते हैं। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक और मानवाधिकार संगठन भी इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि इस कानून का वहां रह रहे अल्पसंख्यक समुदाय पर क्या असर पड़ेगा।लोकल कम्युनिटीज और प्रवासियों के बीच बढ़ता सामाजिक तनावइस संभावित प्रतिबंध की खबर के बाद से पूरे यूरोप के अलग-अलग शहरों में रहने वाले मुस्लिम प्रवासियों और स्थानीय कम्युनिटीज के बीच सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। एक तरफ जहां स्थानीय लोग कानून के समर्थन में मार्च निकाल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रवासी संगठनों का कहना है कि यह उनकी धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था, शांति और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लिया जा रहा है।एआई और आधुनिक सर्च इंजनों पर इस ग्लोबल ट्रेंड की भारी चर्चाआधुनिक जनरेटिव इंजनों और एआई सर्च प्लेटफॉर्म्स पर इस समय यूरोपीय देशों में बदलते डेमोग्राफिक प्रोफाइल (जनसांख्यिकी) और सख्त होते जा रहे इमिग्रेशन व धार्मिक कानूनों को लेकर व्यापक स्तर पर सर्च किया जा रहा है। फ्रांस, स्विट्जरलैंड और बेल्जियम जैसे देशों के बाद अब इस नए देश द्वारा उठाए जा रहे सख्त कदम को लेकर डिजिटल वर्ल्ड में एक बड़ी बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में यूरोप के कई अन्य देश भी सार्वजनिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर इसी तरह के कड़े नियम लागू कर सकते हैं।
ट्रंप का यूरोप को अल्टीमेटम – डिजिटल टैक्स लगाया तो लगेगा 100% टैरिफ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी। ट्रंप की यह चेतावनी उन संभावनाओं पर जारी की गई
यूरोप में ‘ओमेगा ब्लॉक’ हीटवेव का प्रकोप, रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से जनजीवन बेहाल, दर्जनों लोगों की मौत
यूरोप में ‘ओमेगा ब्लॉक’ हीटवेव ने तबाही मचा दी है। फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और स्पेन में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, बिजली संकट, स्कूल बंद और गर्मी से कई मौतों की खबरें सामने आई हैं।
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
60 की उम्र में मिलिंद सोमन ने रचा इतिहास, यूरोप से अफ्रीका तक तैरकर पार किया स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर
अभिनेता और फिटनेस आइकन मिलिंद सोमन ने एक बार फिर अपनी अद्भुत सहनशक्ति और फिटनेस का परिचय दिया है। 60 साल की उम्र में मिलिंद सोमन ने स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर को तैरकर पार करने का एक कठिन और साहसी कारनामा कर दिखाया है। मिलिंद ने यूरोप और अफ्रीका के बीच ...
फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन, 88 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
Alain Delon passes away: 'द लेपर्ड' और 'रोक्को एंड हिज ब्रदर्स' जैसी सुपर हिट फिल्मों में अभिनय का जौहर दिखाने वाले फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन हो गया है। एलेन डेलन ने 88 वर्ष की उम्र में आखिरी सांस ली। अभिनेता के पारिवारिक सूत्रों ने ...
इटली से फ्रांस तक समंदर के बीच होगा Anant-Radhika का दूसराप्री वेडिंग फंक्शन, जानिए मेहमानों से लेकरड्रेस कोड तक सबकुछ
Heeramandi के बाद अब Cannes में अपनी 'गजगामिनी चाल' दिखाएंगी Aditi Rao Haidari,फ्रांस के लिए रवाना हुईबिब्बोजान
यूरोप से लेकर Sri Lanka तक इन देशो में शूट हुई है Surya और Bobby Deol की फिल्म Kanguva, बजट उड़ा देगा होश

