रूस-यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना में फंसे भारतीय युवाओं के छह परिवारों ने राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल से मदद की गुहार लगाई है। इन परिवारों ने निर्मल कुटिया में संत सीचेवाल से मुलाकात कर अपनी परेशानी बताई। संत सीचेवाल ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे इस मामले को विदेश मंत्री के समक्ष उठाएंगे। परिवारों का कहना है कि उन्हें अपने बेटों से 8 से 9 महीने से कोई संपर्क नहीं हो पाया है और उन्हें उनकी मौजूदा स्थिति या तैनाती के बारे में कोई जानकारी नहीं है। पीड़ित परिवारों के अनुसार, ट्रैवल एजेंटों ने उनके बच्चों को रूसी सेना में भर्ती होने के लिए लुभाया था। एजेंटों ने आकर्षक वेतन, आर्थिक लाभ और अन्य सुविधाओं का लालच दिया था। युवाओं से उनके खातों में 15-15 लाख रुपये जमा कराने और 2.10 लाख रुपये मासिक वेतन देने का वादा किया गया था। कई अभिभावकों ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए विदेश भेजा था और उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उन्हें युद्ध क्षेत्र में तैनात किया जाएगा। इन परिवारों ने यह भी बताया कि जालंधर के गुरसेवक सिंह, लुधियाना के समरजीत सिंह और अमृतसर के हीरा सिंह की युद्ध के दौरान मौत हो चुकी है। गुरसेवक सिंह और समरजीत सिंह के पार्थिव शरीर भारत लाए जा चुके हैं। हालांकि, उनके परिवारों को अभी तक रूसी सेना द्वारा अपने सैनिकों और उनके परिवारों को दी जाने वाली कोई मुआवजा या सुविधा नहीं मिली है। परिजनों ने कहा कि बेटों को खोने के बाद वे आर्थिक रूप से भी टूट चुके हैं। कई राज्यों के लोग फंसे इन परिवारों ने जानकारी दी कि पंजाब के अलावा हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के भी कई युवा रूसी सेना में फंसे हुए हैं। इन सभी युवाओं के परिवार लंबे समय से चिंता और अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं। तरनतारन निवासी हरविंदर सिंह के परिवार ने बताया कि वह 2024 में स्टडी वीजा पर रूस गया था। एजेंटों ने उसे बहला-फुसलाकर अगस्त 2025 में रूसी सेना में भर्ती करवा दिया। परिवार का कहना है कि 17 सितंबर के बाद से हरविंदर से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। इसी प्रकार तरनतारन के जर्नैल सिंह की पत्नी ने बताया कि उनका पति दिसंबर 2024 में स्टडी वीजा पर रूस गया था। वहां उसे तीन लाख रुपये मासिक वेतन और स्थायी दस्तावेजों का लालच देकर सेना में भर्ती कर लिया गया। 28 अगस्त के बाद परिवार से संपर्क नहीं 28 अगस्त के बाद से उसका भी परिवार से कोई संपर्क नहीं हो सका। जर्नैल सिंह की तीन वर्ष की एक बेटी है और पूरा परिवार उसकी आय पर निर्भर था। अब परिवार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है और छोटी बच्ची रोज अपने पिता के बारे में पूछती है। अमृतसर के साहिल सेखड़ी की माता ने संत सीचेवाल को बताया कि उनका पुत्र वर्ष 2025 में मॉस्को गया था। एजेंटों ने उसे वर्क वीजा, शेफ की नौकरी और डेढ़ लाख रुपये मासिक वेतन का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में उसे रूसी सेना में भर्ती कर केवल 15 दिनों की ट्रेनिंग के बाद युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया गया। पिछले नौ महीनों से परिवार को उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। साहिल की विधवा मां और उसकी बहन पूरी तरह उसी पर निर्भर थीं। आर्थिक तंगी के कारण परिवार को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। संत सीचेवाल ने कहा कि बेरोजगारी और आर्थिक मजबूरियों का फायदा उठाकर एजेंटों द्वारा युवाओं को विदेशों में गुमराह करना अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इस मामले में गंभीरता से हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि फंसे हुए युवाओं को सुरक्षित वापस लाया जा सके और प्रभावित परिवारों को न्याय मिल सके।
इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस ने शुक्रवार को इंडियाज डिजिटल इकोनॉमी (साइड) 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत पांचवीं सबसे अधिक डिजिटलाइज्ड इकॉनोमी बन गया है। 2025 में यह आठवें स्थान पर था। वहीं देश एआई प्रदर्शन के मामले में चिप्स-एआई इंडेक्स में अमेरिका, चीन और सिंगापुर के बाद चौथे स्थान पर है। यह उछाल डिजिटल कनेक्टिविटी, फिनटेक विकास और नवाचार क्षमता में सुधार का परिणाम है। दुनिया की जीडीपी के 96% को कवर करने वाले 71 देशों में की गई स्टडी से पता चलता है कि भारत डिजिटल प्रदर्शन में जर्मनी, फ्रांस, जापान और कनाडा सहित प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं से आगे निकल रहा है। भारत ने डिजिटल माध्यमों से करीब 31 लाख करोड़ रुपए का ट्रेड किया और दुनिया के दूसरे सबसे बड़े एआई टैलेंट का हब है। दुनिया के 72% एआई यूजर विकासशील देशों में रिपोर्ट का सबसे बड़ा निष्कर्ष यह है कि दुनिया के 72% एआई उपयोगकर्ता अब विकासशील देशों में हैं। भारत और चीन मिलकर वैश्विक एआई उपयोग का लगभग 40% हिस्सा रखते हैं। भारत अकेले वैश्विक एआई उपयोगकर्ताओं का लगभग 26% हिस्सा रखता है। निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर की सबसे ज्यादा चुनौती भारत में एआई उपयोग और प्रतिभा तो बहुत है, लेकिन वैश्विक निजी एआई निवेश का केवल 1% हिस्सा ही मिलता है। एडवांस चिप्स, कंप्यूटिंग क्षमता और बड़े एआई मॉडल अभी कुछ ही देशों के पास केंद्रित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार भारत को अपने डिजिटल स्केल को इनोवेशन के लिए अधिक निवेश, रिसर्च और स्टार्टअप यूनिवर्सिटी सहयोग को मजबूत करना होगा। ---------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… एआई के दौर में अब इंसान कहानी सुनाना सीखें: एनवीडिया सीईओ हुआंग बोले- बच्चे कौन सा विषय पढ़ें, इससे ज्यादा जरूरी है 'कैसे सीखें' आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज़ रफ्तार दुनिया में अक्सर यह सवाल उठता है कि बच्चों को अब कौन-सा विषय पढ़ना चाहिए ताकि भविष्य सुरक्षित रहे। लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी एआई चिप कंपनी एनवीडिया के सीईओ जेसन हुआंग की राय इससे बिल्कुल अलग है। पूरी खबर पढ़ें…
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