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यूरोप में कारोबार पर नियमों का भारी बोझ, Piyush Goyal ने The Hague में जताई चिंता

(राजेश राय)हेग, 26 अक्टूबर वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को यूरोप द्वारा व्यवसायों पर बढ़ते नियामकीय बोझ को लेकर चिंता जताई, जबकि नीदरलैंड के व्यापार मंत्री सोर्ड सोर्ड्समा ने कहा कि यूरोपीय संघ (ईयू) की कार्बन सीमा समायोजन प्रणाली (सीबीएएम) एक जरूरी उपाय है। गोयल ने कहा कि यूरोप व्यवसायों पर विनियामक बोझ बढ़ा रहा है, जबकि उद्योग जगत को सरल प्रक्रियाओं और कार्यप्रणाली की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत नियमों को सरल बनाकर कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा कर रहा है। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, दुर्भाग्य से, आपको इस मामले में हमसे एक-दो सबक सीखने की जरूरत है। वाणिज्य मंत्री ने आगे कहा, ‘‘चूंकि यूरोप व्यवसायों पर विनियामक बोझ बढ़ा रहा है, मैं आपको बता दूं कि जब भी मैं यह बात कहता हूं, तो मैं आपके देशों की कंपनियों का चहेता बन जाता हूं... ऐसे कई अवसर आए हैं जब मैंने यूरोपीय आयोग के स्तर पर और कई यूरोपीय देशों में भारी विनियामक अतिरिक्त बोझ के बारे में बात की है।’’मंत्री यहां भारत-नीदरलैंड व्यवसायी मंच को संबोधित कर रहे थे। वह दो दिन की आधिकारिक यात्रा पर यहां आए हैं। नीदरलैंड यूरोपीय संघ (ईयू) का एक महत्वपूर्ण सदस्य है, जिसके साथ भारत ने एक मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया है। इसके दिसंबर में हस्ताक्षरित होने और अगले साल मार्च-अप्रैल तक लागू होने की उम्मीद है। गोयल ने कहा, दुनिया अधिक स्वतंत्रता चाहती है... कारोबारी दुनिया कम अनुपालन, सरल प्रक्रियाओं, सरल कार्यप्रणाली और कम कागजी कार्रवाई चाहती है। उन्होंने आगे कहा कि भारत में सरकार हमेशा कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए उद्योग जगत से सुझाव मांगती है। भारत ने कई मौकों पर सीबीएएम और वनों की कटाई जैसे कई यूरोपीय संघ के नियमों पर चिंता जताई है। इस मौके पर नीदरलैंड के व्यापार मंत्री सोर्ड सोर्ड्समा ने कहा कि उन्हें सीबीएएम के किसी भी नए समझौते की उम्मीद नहीं है, और उन्होंने इसे एक आवश्यक उपाय बताया। उन्होंने हालांकि कहा कि नीदरलैंड छोटे और मझोले उद्यमों (एमएमई) को नियमों को समझने और अनुपालन को आसान बनाने में मदद कर रहा है। यह पूछे जाने पर कि क्या यूरोपीय संघ (ईयू) सीबीएएम पर पुनर्विचार करेगा क्योंकि इससे आयात महंगा हो जाएगा, उन्होंने संवाददाताओं से कहा, मुझे नहीं लगता कि सीबीएएम पर कोई नया समझौता होगा क्योंकि हम इसे यह सुनिश्चित करने के लिए एक जरूरी उपाय के रूप में देखते हैं कि हम उन लक्ष्यों पर टिके रहें जिन पर पूरी दुनिया ने सहमति जताई है, यानी पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्य। उन्होंने पत्रकारों से कहा, हम मानते हैं कि न केवल हमें बल्कि पूरी दुनिया को इन लक्ष्यों का पालन करना चाहिए। ईयू का सीबीएएम लोहा और इस्पात, एल्युमीनियम, सीमेंट, उर्वरक, बिजली और हाइड्रोजन सहित कुछ कार्बन-सघन वस्तुओं के आयात पर कार्बन कर लगाने के लिए तैयार किया गया है। भारतीय वाणिज्य मंत्री ने 22-27 अक्टूबर तक अपने छह दिवसीय दौरे के दौरान जर्मनी और नीदरलैंड का दौरा किया। वह 100 सदस्यीय व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे।

प्रभासाक्षी 26 Oct 2026 9:53 pm

एयर फ्रांस ने मध्य पूर्व की उड़ानें कीं निलंबित, सुरक्षा बनी वजह

सुरक्षा स्थिति और हवाई क्षेत्र की पाबंदियों के कारण एयरलाइन ने परिचालन रोका है। कंपनी हालात की निगरानी के बाद सेवाएं बहाल करेगी।

प्रातःकाल 26 Oct 2026 4:40 pm

भारतीय शांतिप्रिय होते हैं, सड़कों पर उतरकर अशांति नहीं फैलाते; यूरोप में प्रोटेस्ट पर बोले पीयूष गोयल

पीयूष गोयल ने कहा कि किसी दूसरे देश में रहने वाले समुदाय का सम्मान इस बात से भी तय होता है कि वहां के लोग उसे किस नजर से देखते हैं। भारतीय समुदाय को दूसरे देशों में काफी पसंद किया जाता है और उसका स्वागत किया जाता है।

लाइव हिन्दुस्तान 26 Oct 2026 4:14 pm

यूरोप: कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें

फ्रांस, इटली, स्पेन और अल्बानिया समेत यूरोप के कई देशों में बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतरे हुए हैं.

देशबन्धु 26 Oct 2026 3:50 pm

फ्रांस, इटली, बेल्जियम और अल्बानिया में भड़का प्रदर्शन, जगह-जगह हिंसा

यूरोप की सड़कों पर एक बार फिर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं. महंगाई, बढ़ती असमानता और सरकार की नीतियों के खिलाफ फ्रांस, इटली, बेल्जियम और अल्बानिया तक लोग सड़कों पर उतर आए हैं. कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच जोरदार झड़प हुई. कहीं आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल हुआ, तो कहीं आगजनी और पथराव की तस्वीरें सामने आई.

आज तक 26 Oct 2026 3:26 pm

यूरोप में महंगाई और आवास संकट से भड़का गुस्सा, फ्रांस से पुर्तगाल तक सड़कों पर उतरे लाखों लोग

फ्रांस की राजधानी पेरिस से लेकर अल्बानिया के तिराना, इटली के शहरों, स्पेन के मैड्रिड और पुर्तगाल के लिस्बन तक विरोध-प्रदर्शन उग्र होते जा रहे हैं। कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, आंसू गैस छोड़ी गई और गिरफ्तारियां की गईं।

देशबन्धु 26 Oct 2026 1:48 pm

फ्रांस में महंगाई और शिक्षा को लेकर हिंसक प्रदर्शन, अब तक 1300 से ज्यादा लोग हिरासत में, 53 पुलिसकर्मी भी घायल

बढ़ती महंगाई और शिक्षा तंत्र की लचर हालत को लेकर फ्रांस में शुरू हुआ आंदोलन अब बेहद हिंसक रूप अख्तियार कर चुका है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने अब तक 1,300 से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया है।

दैनिक जागरण 26 Oct 2026 12:51 pm

Prabhasakshi NewsRoom: France में Macron के खिलाफ विद्रोह! Marine Le Pen ने ठोकी राष्ट्रपति पद की दावेदारी, कई और यूरोपीय देशों में भारी बवाल

फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। महंगाई, आर्थिक बदहाली और सरकार से बढ़ती नाराजगी के बीच देश हिंसा और अराजकता की चपेट में है। जगह-जगह आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट के बीच हजारों गिरफ्तारियां हो रही हैं। इसी उथल-पुथल ने राष्ट्रपति पद की दावेदार मरीन ले पेन को बड़ा सियासी मौका दे दिया है। उन्होंने मैदान में उतरकर कानून-व्यवस्था बहाल करने और फ्रांस को फिर मजबूत बनाने का दावा ठोक दिया है। उधर, फ्रांस से इटली, अल्बानिया, स्पेन और पुर्तगाल तक सड़कों पर उमड़ता जनाक्रोश बता रहा है कि यूरोप में संकट अब सिर्फ अर्थव्यवस्था का नहीं, सत्ता और सियासत का भी बन चुका है। फ्रांस में जनाक्रोश, हिंसा और सत्ता के सामने चुनौती हम आपको बता दें कि सप्ताहांत में फ्रांस समेत कई यूरोपीय देशों में महंगाई, आर्थिक संकट और सरकार की नीतियों के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हुए। फ्रांस में शनिवार को सड़कों पर उतरे लोगों की संख्या को लेकर सरकार और प्रदर्शन आयोजकों के आंकड़ों में बड़ा अंतर रहा। सरकार ने करीब 4.10 लाख लोगों के प्रदर्शन में शामिल होने की बात कही, जबकि आयोजकों के मुताबिक यह संख्या लगभग आठ लाख थी। प्रदर्शनों के दौरान देशभर में 1,300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसे भी पढ़ें: France Protests: नए उपद्रव की आशंका से Paris के प्रमुख संग्रहालय बंद, 70000 पुलिसकर्मी तैनात कई शहरों में प्रदर्शन हिंसक हो गए। पेरिस में पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, जबकि मार्सेई में सड़क पर अवरोधक जलाए गए और बोर्डो में दुकानों व इमारतों को नुकसान पहुंचाया गया। ल्योन में भी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आंसू गैस छोड़ी। इससे पहले हुए प्रदर्शनों के दौरान लिमोज के ऐतिहासिक सिटी हॉल और ल्योन के पर्यटन कार्यालय में आग लगा दी गई थी। मार्सेई में नगर प्रशासन की इमारत पर हमला हुआ, जबकि पेरिस में कई महंगी दुकानों में लूटपाट और वाहनों में आगजनी की घटनाएं हुईं। हालात पर काबू पाने के लिए सरकार ने करीब 70 हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया और कई शहरों में सख्त पाबंदियां लगाईं। अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार को हुई झड़पों में 53 पुलिसकर्मी घायल हुए। सरकार ने हिंसा के लिए कट्टरपंथी प्रदर्शनकारियों को जिम्मेदार ठहराया, जबकि वामपंथी नेता जां-लुक मेलांशों ने पुलिस की कार्रवाई और मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बढ़ते करों, महंगाई और आर्थिक दबाव ने आम लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। बेरोजगारी, गरीबी और भविष्य को लेकर चिंता से युवा भी परेशान हैं। लगातार बढ़ता यह असंतोष अब मैक्रों सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ले पेन का दांव: अव्यवस्था को बनाया चुनावी मुद्दा दूसरी ओर, फ्रांस में जारी अशांति के बीच दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना अभियान शुरू करते हुए कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय आत्मविश्वास बहाल करने का वादा किया। उन्होंने आव्रजन पर सख्ती, सीमाओं पर नियंत्रण, विदेशी अपराधियों के निष्कासन और गिरोहों तथा मादक पदार्थों के कारोबार के खिलाफ कठोर कार्रवाई का संकल्प लिया। ले पेन ने आर्थिक मोर्चे पर कारोबारियों के लिए करों में कटौती, नौकरशाही घटाने, उद्योग और नवाचार को बढ़ावा देने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता में निवेश का समर्थन किया। उन्होंने सेवानिवृत्ति की आयु में और वृद्धि का विरोध भी किया। हम आपको यह भी बता दें कि एक जनमत सर्वेक्षण में ले पेन को 32 से 33.5 प्रतिशत समर्थन के साथ आगे बताया गया, जबकि मेलांशों 17 प्रतिशत पर थे। हालांकि, ले पेन स्वयं यूरोपीय संसद की निधियों के गबन के मामले में दोषसिद्धि के बाद अपील कर रही हैं। उनकी पार्टी ने जॉर्डन बार्देला को दोबारा अध्यक्ष चुना है और उन्हें संभावित प्रधानमंत्री के रूप में पेश किया है। इटली से अल्बानिया तक, सड़कों पर यूरोप का असंतोष उधर, यूरोप के दूसरे देशों में भी सप्ताहांत के प्रदर्शन सरकारों के लिए चेतावनी बनकर उभरे। इटली के मिलान, रोम, ट्यूरिन, नेपल्स, बोलोनिया और फ्लोरेंस में हजारों युवा सड़कों पर उतरे। कुछ स्थानों पर पत्थर, बोतलें और पटाखे फेंके गए। पुलिस के मुताबिक, आठ शहरों में नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया और 371 लोगों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया, जिनमें 110 नाबालिग थे। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने मिलान में 500 अतिरिक्त सैनिक भेजने और हिंसा में शामिल नाबालिगों के खिलाफ सख्त दंड का ऐलान किया। रोम में प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने कोलोसियम में घुसने की कोशिश की, जबकि एक अलग युद्ध-विरोधी मार्च के दौरान पुलिस से झड़प हुई। मेलोनी ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए, लेकिन नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। वहीं अल्बानिया की राजधानी तिराना में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों के नेतृत्व में प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग भी उठाई। पुलिस ने आंसू गैस, वाटर कैनन और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया। सरकारी इमारतों, बैंकों और दुकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें आईं। सरकार के समर्थन से जुड़े एक महंगे तटीय विकास प्रोजेक्ट को लेकर पहले से ही असंतोष बना हुआ था। स्पेन और पुर्तगाल में पेंशन और मकानों का संकट इसके साथ ही स्पेन में हजारों पेंशनभोगियों और अन्य प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक पेंशन व्यवस्था की सुरक्षा, महंगाई के अनुरूप पेंशन बढ़ाने और महिलाओं तथा पुरुषों के बीच पेंशन के अंतर को कम करने की मांग की। स्पेन में बढ़ती कीमतों के बीच आवास संकट भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। घरों की कीमतें और किराये आम लोगों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। उधर, पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हजारों लोगों ने महंगे किराये और आवास की कमी के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने रोसियो चौक पर 100 से अधिक तंबू लगाए, जिन्हें रविवार तड़के पुलिस ने हटा दिया। इस दौरान कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया और मामूली चोटें लगने की खबरें आईं। प्रदर्शनकारी उस प्रस्तावित कानून का विरोध कर रहे हैं, जिससे मकान मालिकों के लिए किरायेदारों को बेदखल करना आसान हो सकता है और नए किरायों पर लगी सीमाएं हट सकती हैं। हम आपको बता दें कि पुर्तगाल में 2017 के बाद से मकानों की कीमतें दोगुने से अधिक हो चुकी हैं और नए किरायों में भी लगभग इतनी ही वृद्धि दर्ज की गई है। बैंक ऑफ पुर्तगाल के अनुसार, देश में करीब तीन लाख मकानों की कमी है। आर्थिक संकट से राजनीतिक विस्फोट तक देखा जाये तो यूरोप की सड़कों पर उठती आवाजों का संदेश स्पष्ट है। जनता केवल सरकारों के खिलाफ नाराजगी जाहिर नहीं कर रही, बल्कि वह अपने भविष्य, रोजगार, शिक्षा, आवास और आर्थिक सुरक्षा को लेकर जवाब मांग रही है। फ्रांस में मैक्रों विरोधी असंतोष के बीच ले पेन और मेलांशों जैसे नेताओं की राजनीतिक दावेदारी तेज होना इसी गहरे ध्रुवीकरण का संकेत है। बहरहाल, हिंसा और तोड़फोड़ को जनआक्रोश का पर्याय नहीं माना जा सकता। शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का अधिकार है, लेकिन आगजनी और लूटपाट आम नागरिकों की सुरक्षा तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाती हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि यूरोपीय सरकारों के समक्ष कानून-व्यवस्था बनाए रखना और आर्थिक-सामाजिक शिकायतों का ठोस समाधान करने की दोहरी चुनौती है। यदि इन शिकायतों और सवालों को केवल पुलिस कार्रवाई से दबाने की कोशिश हुई, तो मौजूदा असंतोष आने वाले चुनावों में सत्ता के समीकरण बदल सकता है।

प्रभासाक्षी 26 Oct 2026 11:57 am

छात्रों के प्रदर्शन के बाद कैसे जल उठा फ्रांस, आम बजट भी बन गया बड़ी वजह

फ्रांस में स्कूलों के छात्रों का प्रदर्शन देशव्यापी हो गया और लाखों लोग सड़कों पर उतर आए। इसके पीछे महंगाई और सरकार का बजट भी है। सरकार ने लगातार चौथे साल सरकारी कर्मचारियों के वेतन को ना बढ़ाने का फैसला किया है।

लाइव हिन्दुस्तान 26 Oct 2026 11:45 am

बासमती एक्सपोर्ट: यूरोप में बढ़ी भारतीय चावल की मांग,पेरिस व्यापार मेले में यूरोपीय खरीदारों ने दिखाई दिलचस्पी

Basmati Export: पेरिस व्यापार मेले में यूरोपीय खरीदारों ने दिखाई दिलचस्पी, निर्यात 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद; पश्चिमी यूपी के किसानों को फायदा

अमर उजाला 26 Oct 2026 10:40 am

बनारस बनेगा गारमेंट हब: साड़ियों की नगरी का ग्लोबल अवतार, अमेरिका-यूरोप तक निर्यात; पूर्वांचल की बदलेगी पहचान

लिमिटेड की नई इकाई का उद्घाटन रविवार को राजातालाब के खोचवां में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस यूनिट की स्थापना पर करीब 150 करोड़ रूपये का निवेश किया गया है।

अमर उजाला 26 Oct 2026 10:23 am

'भारतीय तोड़फोड़ नहीं करते, जैसा यूरोप में हो रहा', पीयूष गोयल का बड़ा बयान

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जर्मनी और नीदरलैंड के दौरे के दौरान यूरोप में भारतीय समुदाय के सम्मान और सुरक्षा पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि भारतीय आमतौर पर शांतिप्रिय होते हैं और समाज में अशांति नहीं फैलाते.

आज तक 26 Oct 2026 9:44 am

सड़कों पर उतरा यूरोप: पेरिस से तिराना तक लाखों का उग्र प्रदर्शन, 1300 से अधिक गिरफ्तार

यूरोप के प्रमुख देश इस समय गंभीर आर्थिक और सामाजिक असंतोष की आग में झुलस रहे हैं। रहने के लिए महंगे होते मकान, आसमान छूती महंगाई, बुनियादी जीवन-यापन की भारी लागत और जनविरोधी सरकारी नीतियों के खिलाफ आम नागरिकों का धैर्य पूरी तरह जवाब दे चुका है। फ्रांस की राजधानी पेरिस की ऐतिहासिक सड़कों से लेकर अल्बानिया के तिराना, इटली के औद्योगिक शहरों, स्पेन के मैड्रिड और पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन तक असंतोष का ऐसा ज्वार उठा है जिसने महाद्वीप की सरकारों की नींद उड़ा दी है। विभिन्न शहरों में विरोध मार्च हिंसक टकराव में तब्दील हो चुके हैं, जहां पुलिस द्वारा भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे जा रहे हैं, रबर की गोलियां चलाई जा रही हैं और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की जा रही हैं। आंदोलनकारियों में समाज का हर वर्ग शामिल दिखाई दे रहा है, जिसमें कहीं मुख्य मुद्दा आवास का संकट और पेंशन कटौती है, तो कहीं अत्यधिक महंगी होती उच्च शिक्षा, विवादास्पद सरकारी ढांचागत परियोजनाएं और सख्त सुरक्षा नीतियां विरोध के केंद्र में हैं।फ्रांस में 1300 से अधिक गिरफ्तारियां, पेरिस में ड्रोन और हेलिकॉप्टरों से निगरानीफ्रांस में आंदोलन का स्वरूप सबसे उग्र और व्यापक नजर आ रहा है। सप्ताहांत में हुए विरोध प्रदर्शनों में गृह मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार लगभग 4.10 लाख नागरिकों ने भागीदारी की, जबकि आंदोलन की अगुवाई कर रही प्रसिद्ध सीजीटी यूनियन ने दावा किया है कि सड़कों पर उतरने वालों की वास्तविक तादाद आठ लाख से भी ज्यादा थी। अकेले राजधानी पेरिस में करीब ढाई लाख लोग व्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद करने पहुंचे। कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर सुरक्षा बलों द्वारा किए गए कथित अत्यधिक बल प्रयोग ने आग में घी का काम किया है। देशभर से पुलिस ने करीब 1314 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिनमें से अकेले पेरिस शहर से 65 लोगों की गिरफ्तारी हुई। पेरिस, ल्योन, लिले और मार्सिले जैसे प्रमुख नगरों में स्थिति इतनी विकट हो गई कि भीड़ पर नजर रखने के लिए पुलिस को आसमान में हेलिकॉप्टरों और आधुनिक ड्रोनों की मदद लेनी पड़ी।झड़पों के दौरान 53 पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं, जबकि 75 विभिन्न स्थानों पर आगजनी और 24 दुकानों में लूटपाट की घटनाएं दर्ज की गईं। इसी बीच सूचना के मोर्चे पर भी भारी चूक देखने को मिली, जहां फ्रांस के दो प्रमुख समाचार चैनलों, सीन्यूज और फ्रांसइंफो ने अल्बानिया में हुए विरोध प्रदर्शनों के दृश्यों को फ्रांस का बताकर प्रसारित कर दिया, जिसके बाद उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी। आंदोलनकारियों के तेवर नरम पड़ने के बजाय और तीखे होते दिख रहे हैं। प्रमुख मजदूर संगठनों और 2018 के ऐतिहासिक 'येलो वेस्ट' आंदोलन से जुड़े समूहों ने आगामी 31 अक्टूबर और 5 नवंबर को फिर से देशव्यापी हड़ताल और बड़े प्रदर्शनों का खुला आह्वान किया है। येलो वेस्ट संगठन ने ऐलान किया है कि अगले शनिवार को पेरिस के टाउन हॉल और नेशनल असेंबली भवन के ठीक बाहर अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा। उनका कहना है कि प्राथमिक विद्यालयों से लेकर विश्वविद्यालयों तक और खेतों से लेकर कारखानों तक, हर कार्यस्थल पर सरकार के प्रति असंतोष चरम सीमा पर पहुंच चुका है। उधर, पुलिस यूनियनों ने भी हाथ खड़े करते हुए सरकार को चेतावनी दी है कि उनके पास इतने सुरक्षाकर्मी शेष नहीं हैं कि पूरे देश में लगातार लंबे समय तक आपात तैनाती बनाए रखी जा सके।अल्बानिया में बातचीत की कुर्सियां फूंकीं, इटली में ऐतिहासिक कोलोसियम में घुसने की कोशिशअल्बानिया की राजधानी तिराना में हालात तब बेकाबू हो गए जब प्रधानमंत्री एडी रामा ने विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए सख्त प्रशासनिक उपायों और उपद्रवियों पर पांच लाख लेक यानी लगभग 6188 डॉलर का भारी-भरकम जुर्माना लगाने की घोषणा की। इस दंडात्मक फरमान से भड़के लोग मूसलाधार बारिश के बावजूद सड़कों पर उतर आए और शिक्षा मंत्रालय से होते हुए सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर कूच करने लगे। आक्रोशित भीड़ ने शांति वार्ता के लिए प्रशासनिक स्तर पर सजाकर रखी गई कुर्सियों को खुलेआम आग के हवाले कर दिया। इससे एक दिन पहले पुलिस ने भीड़ पर काबू पाने के लिए रबर की गोलियां और आंसू गैस के गोले दागे थे। कई सरकारी भवनों पर पत्थर और पटाखे फेंके गए, जिसमें 300 से अधिक पुलिसकर्मी और आम नागरिक घायल हो चुके हैं।इटली के प्रमुख शहरों मिलान, रोम, ट्यूरिन, नेपल्स, बोलोग्ना और फ्लोरेंस में भी जन आक्रोश सड़कों पर फूटा। यहां उग्र प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर शीशे की बोतलों, पत्थरों और पटाखों से सीधे प्रहार किए। राजधानी रोम में तनाव उस वक्त चरम पर पहुंच गया जब प्रदर्शनकारियों के एक बड़े जत्थे ने ऐतिहासिक स्मारक कोलोसियम के सुरक्षा घेरे को तोड़कर भीतर प्रवेश करने का प्रयास किया। आठ बड़े शहरों में व्यापक अभियान चलाकर 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 110 नाबालिगों सहित कुल 371 लोगों को हिरासत में लिया गया। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षाबलों का आभार जताते हुए देश में हर हाल में कानून व्यवस्था बहाल रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।स्पेन-पुर्तगाल में आवास संकट और डोनाल्ड ट्रंप का अप्रवासियों पर तीखा हमलास्पेन की राजधानी मैड्रिड में पेंशनर्स और युवाओं का संयुक्त मोर्चा सड़कों पर डटा हुआ है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि बढ़ती महंगाई की दर के अनुपात में पेंशन राशि में तत्काल इजाफा किया जाए, न्यूनतम पेंशन स्लैब में व्यापक सुधार हो और पेंशन प्रणाली के किसी भी प्रकार के निजीकरण पर पूर्ण वैधानिक रोक लगे। शहर के प्रसिद्ध प्यूर्टा डेल सोल चौराहे पर लगाया गया विरोध शिविर इस आंदोलन की धुरी बन चुका है, जहां लोग बेतहाशा बढ़ते घर के किरायों के खिलाफ अनवरत धरना दे रहे हैं। पड़ोसी देश पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में भी किराए की दरों को नियंत्रित करने और मकान मालिकों द्वारा किराएदारों को बेदखल करने के नियमों को कड़ा करने की मांग को लेकर तंबू गाड़े गए थे। हालांकि, पुलिस ने रविवार तड़के कार्रवाई करते हुए इन शिविरों को जबरन उखाड़ फेंका, जिसके चलते पुलिस और जनता के बीच तीखी हाथापाई हुई।यूरोप के इस अभूतपूर्व संकट पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस और समूचे यूरोप में भड़की इस हिंसा का ठीकरा वहां की आव्रजन नीतियों पर फोड़ा है। अमेरिका के जॉर्जिया में एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि फ्रांस आज इसलिए जल रहा है क्योंकि उसने अपनी सीमाएं ऐसे लोगों के लिए खोल दीं जो उसकी संस्कृति, परंपरा, ऐतिहासिक इमारतों और कला का सम्मान नहीं करते। ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा कि जब आप ऐसे तत्वों को पनाह देते हैं जो आपके देश से नफरत करते हैं, तो उसका यही हश्र होता है। हालांकि, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पहले भी ट्रंप के इस प्रकार के बयानों को पूरी तरह खारिज करते रहे हैं, लेकिन यूरोप के वर्तमान हालात निश्चित रूप से नीति-निर्माताओं के सामने एक गहरा राजनीतिक और सामाजिक संकट बनकर खड़े हो गए हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 26 Oct 2026 7:12 am

वैचारिक संकेत: यूरोप में हिंसा से जामिया के आंदोलन तक... बयानों के संदर्भ बेशक अलग, संकेतों को समझना जरूरी

वैचारिक संकेत: यूरोप में हिंसा से जामिया के आंदोलन तक... बयानों के संदर्भ बेशक अलग, संकेतों को समझना जरूरी

अमर उजाला 26 Oct 2026 6:10 am

फ्रांस से इटली तक... एक बार फिर सुलगा यूरोप, देखें विशेष

यूरोप की सड़कों पर एक बार फिर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं... महंगाई, बढ़ती असमानता और सरकार की नीतियों के खिलाफ फ्रांस, इटली, बेल्जियम और अल्बानिया तक लोग सड़कों पर उतर आए हैं... कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच जोरदार झड़प हुई... कहीं आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल हुआ, तो कहीं आगजनी और पथराव की तस्वीरें सामने आई..

आज तक 25 Oct 2026 10:55 pm

यूरोप में महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, हिंसक झड़प-बवाल

यूरोप के कई प्रमुख देशों में सरकार की नीतियों, बढ़ती महंगाई, और खराब शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले चुके हैं. फ्रांस, इटली, बेल्जियम, अल्बानिया और स्पेन के शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच जबरदस्त हिंसक झड़पें हुई हैं. पेरिस में शिक्षकों की कमी और खराब शिक्षा व्यवस्था के विरोध में करीब एक लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतरे. पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया. पूरे देश में सौ से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है.

आज तक 25 Oct 2026 7:26 pm

फ्रांस: विरोध प्रदर्शन के बीच पुलिस हिरासत में 1000 लोग

पेरिस, 25 अक्टूबर . Saturday को फ्रांस के विभिन्न शहरों में लाखों लोग सड़कों पर उतरे. इनमें से एक हजार को Police ने हिरासत में लिया. यह विरोध…

डेली किरण 25 Oct 2026 6:43 pm

फ्रांस में विरोध प्रदर्शन, पुलिस बोली- कुछ नकाबपोशों ने हंगामा मचाया

फ्रांस में विरोध प्रदर्शन, पुलिस बोली- कुछ नकाबपोशों ने हंगामा मचाया

समाचार नामा 25 Oct 2026 6:34 pm

फ्रांस में सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोग, 1,000 से ज्यादा गिरफ्तार

फ्रांस में कई मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. देश भर में करीब 4,10,000 लोग सड़कों पर उतरे. पेरिस में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया. पुलिस ने 1,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर लिया है.

आज तक 25 Oct 2026 5:23 pm

कहीं आग है, कहीं धुआं-धुआं, फ्रांस को यह क्या हुआ? पेरिस में क्यों सड़कों पर उतरे लाखों लोग

फ्रांस में बढ़ती महंगाई और शिक्षा को लेकर प्रदर्शन जारी हैं। पहले छात्र संगठनों ने प्रदर्शन को आगे बढ़ाया अब ट्रेड यूनियन और अन्य संगठन मैदान में हैं। प्रदर्शनकारी लगातार सरकार के सामने अपनी मांगों को रख रहे हैं।

लाइव हिन्दुस्तान 25 Oct 2026 4:56 pm

यूरोप में भड़का जनाक्रोश... फ्रांस, इटली और स्पेन में सड़कों पर उतरे लाखों लोग, हिंसक झड़पों के बाद सेना तैनात

यूरोप के कई प्रमुख राष्ट्रों में सप्ताहांत के दौरान व्यापक जनआक्रोश देखने को मिला। जीवन-यापन के बढ़ते खर्च, आवास की किल्लत, घटती पेंशन, शिक्षा प्रणाली की बदहाली और प्रशासनिक भ्रष्टाचार जैसे ज्वलंत मुद्दों को लेकर नागरिकों ने विशाल रैलियां निकालीं।

दैनिक जागरण 25 Oct 2026 3:28 pm

फ्रांस जल रहा है क्योंकि…डोनाल्ड ट्रंप ने बताई चौंकाने वाली वजह, अमेरिका का हवाला क्यों

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को फ्रांस में चल रहे प्रोटेस्ट को लेकर बड़ा दावा किया। ट्रंप ने यह बात खारिज कर दी कि शिक्षा के मुद्दे को लेकर फ्रांस में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

लाइव हिन्दुस्तान 25 Oct 2026 3:22 pm

प्रदर्शन की आग में झुलस रहा यूरोप: फ्रांस में कई जगह भड़की हिंसा, इटली-स्‍पेन में सुरक्षा बलों से टकराए प्रदर्शनकार

New Delhi, 25 अक्टूबर . यूरोप के कई देश फ्रांस, इटली, स्‍पेन और अल्‍बान‍िया प्रदर्शन की आग में झुलस रहे हैं. लोग बढ़ती मकान की कीमतों और महंगे…

डेली किरण 25 Oct 2026 12:58 pm

प्रदर्शन की आग में झुलस रहा यूरोप: फ्रांस में कई जगह भड़की हिंसा, इटली-स्‍पेन में सुरक्षा बलों से टकराए प्रदर्शनकारी

प्रदर्शन की आग में झुलस रहा यूरोप: फ्रांस में कई जगह भड़की हिंसा, इटली-स्पेन में सुरक्षा बलों से टकराए प्रदर्शनकारी

समाचार नामा 25 Oct 2026 12:54 pm

फ्रांस से अल्बानिया तक प्रदर्शनकारियों-पुलिस के बीच जोरदार झड़प, देखें बवाल

यूरोप के कई देशों में इन दिनों हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. फ्रांस, इटली और बेल्जियम समेत कई यूरोपीय देशों में बढ़ती महंगाई, असमानता और सरकारी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उग्र प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं. फ्रांस की राजधानी पेरिस में करीब 1.25 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. देश भर में लगभग 4 लाख से अधिक लोगों ने इन प्रदर्शनों में भाग लिया. पेरिस में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया.

आज तक 25 Oct 2026 11:55 am

फ्रांस में महंगाई और पेंशन को लेकर सड़कों पर लाखों लोग

24 अक्टूबर को फ्रांस में महंगाई, बेरोजगारी, वेतन, पेंशन और स्कूलों की फंडिंग जैसे मुद्दों को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ। राजधानी पेरिस समेत कई शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे।

आज तक 25 Oct 2026 11:43 am

यूरोप को हथियार देने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बना भारत

भारत यूरोप का तीसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक बन गया है. पिछले वित्त वर्ष में 38,424 करोड़ रुपये के रक्षा सामानों यूरोप में एक्सपोर्ट किए गए. यूक्रेन युद्ध के बाद गोला-बारूद की मांग बढ़ी. मेक इन इंडिया से उत्पादन बढ़ा. अब 80 से ज्यादा देशों को निर्यात हो रहा है.

आज तक 25 Oct 2026 11:24 am

फ्रांस में क्यों लगी आग?: ट्रंप ने बताई वजह, प्रदर्शनों पर बोले- शिक्षा के लिए नहीं हो रहा विरोध; और क्या कहा

'फ्रांस में शिक्षा के लिए नहीं हो रहा प्रदर्शन': ट्रंप का दावा, कहा- देश से नफरत करने वालों के लिए खोली सीमा donald-trump-on-france-protests-immigration-policy-border-open-hate-country

अमर उजाला 25 Oct 2026 10:52 am

जल रहा फ्रांस... सड़कों पर उतरे 4 लाख प्रदर्शनकारी, पुलिस ने बरसाईं लाठियां, दागे आंसू गैस के गोले

पेरिस में एक लाख लोग मार्च में शामिल हुए. दिनभर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद अंत में झड़पेंशुरू हो गईं. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलने के लिए लाठियों, आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया.

आज तक 25 Oct 2026 9:30 am

फ्रांस में सड़कों पर उतरे 1.10 लाख लोग, पेरिस में आंसू गैस, क्यों भड़का जनता का गुस्सा?

फ्रांस में बढ़ती महंगाई, शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। शनिवार को राजधानी पेरिस में करीब 1.10 लाख लोगों ने मार्च निकाला। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन ...

वेब दुनिया 25 Oct 2026 8:44 am

फ़्रांस में महंगाई के ख़िलाफ़ लाखों प्रदर्शनकारी सड़कों पर, यूरोप के और देशों का क्या हाल

फ़्रांस के कई शहरों में लगातार दूसरे सप्ताहांत प्रदर्शन हो रहे हैं. शनिवार को इन प्रदर्शनों में लाखों लोग शामिल हुए और इसकी गूंज अब यूरोप के दूसरे शहरों तक भी पहुंच गई है.

बीबीसी हिंदी 25 Oct 2026 8:39 am

यूरोपीय देशों में आंदोलन: कई जगह भिड़े पुलिस, उग्र प्रदर्शनकारी; फ्रांस, इटली, स्पेन से ब्रसेल्स तक कैसा मंजर?

यूरोपीय देशों में आंदोलन: कई जगह भिड़े पुलिस, उग्र प्रदर्शनकारी; फ्रांस,इटली, स्पेन से ब्रसेल्स तक कैसा मंजर?

अमर उजाला 25 Oct 2026 8:10 am

फ्रांस में फिर भड़का जनआक्रोश, सड़कों पर उतरे 4 लाख लोग, करीब 1,000 हिरासत में!

हालांकि मजदूर यूनियनों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों की वास्तविक संख्या सरकार के आंकड़ों से कहीं ज्यादा थी। मार्च के दौरान कई इलाकों में हिंसा भड़कने के बाद दंगा नियंत्रण पुलिस को पानी की बौछारें, स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

लाइव हिन्दुस्तान 25 Oct 2026 7:28 am

रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म होने की उम्मीद! ट्रंप बोले-जंग के बाद दोनों के साथ करेंगे बिजनेस

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध खत्म होने के बाद दोनों देशों के साथ कारोबार करने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा है कि दोनों देशों के बीच लड़ाई खत्म होने के बाद वॉशिंगटन दोनों देशों के साथ बिज़नेस करेगा।

खबर इंडिया टीवी 25 Oct 2026 7:10 am

फ्रांस से लेकर अल्बानिया और स्पेन तक, यूरोप में सड़कों पर लाखों लोग... हिंसक हुए प्रदर्शन, हजारों नागरिक गिरफ्तार

यूरोप के कई शहरों में पेंशन, आवास, महंगाई, शिक्षा और भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. फ्रांस में 2400 और स्पेन में 100 नागरिक गिरफ्तार किए गए हैं. अल्बानिया में प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया है.

NDTV इंडिया 25 Oct 2026 7:07 am

एक्सप्लेनर: एक महीने से सुलग रहा फ्रांस, पानी-एसी और चूहे के नाम पर शुरू हुए आंदोलन में अब तक क्या-क्या हुआ?

एक्सप्लेनर: एक महीने से सुलग रहा फ्रांस, पानी-एसी और चूहे के नाम पर शुरू हुए आंदोलन में अब तक क्या-क्या हुआ?

अमर उजाला 25 Oct 2026 5:57 am

यूरोप जाने की तैयारी कर रहा था अमन:करनाल में बायोमेट्रिक से पहले हत्या; पिता बोले-बेटे ने जाने से मना किया, फिर भी दोस्त ले गया

विदेश जाकर परिवार की आर्थिक हालत सुधारने का सपना देख रहे 19 वर्षीय युवक अमन सैनी हत्या से परिवार टूट गया। आज यानी 25 अक्टूबर को दिल्ली में उसका बायोमेट्रिक होना था और इसके 8 से 10 दिन बाद उसे यूरोप जाना था। परिवार इसके लिए करीब 16.50 लाख रुपए खर्च करने की तैयारी कर रहा था। लेकिन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। पिता ने बेटे के दोस्त रमन पर शक जताते हुए आरोप लगाया कि उसे जबरन साथ ले जाया गया था। पुलिस शक के आधार पर पूछताछ कर रही है। पहले UK का वीजा कम उम्र से रिफ्यूज हुआ था अमन के पिता राजकुमार सैनी कुरुक्षेत्र के लाडवा में साइकिल रिपेयरिंग की दुकान चलाते हैं। उन्होंने बताया कि अमन ने 2022-23 में कॉमर्स से 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उसने लैब का काम सीखा और अलग-अलग लैब में काम भी करता रहा। अमन एक साल पहले यूके जाने के लिए वीजा लगवा चुका था, लेकिन कम उम्र के कारण वीजा नहीं मिला। इसके बाद उसने यूरोप जाने की तैयारी की। वह कहता था कि विदेश जाकर मजदूरी भी करनी पड़े तो करेगा, लेकिन अपने पैरों पर खड़ा होगा। उसकी दो बहनें हैं, जिनमें बड़ी की शादी हो चुकी है। अमन की शादी की योजना 25 साल की उम्र तक नहीं थी। पिता बोले- रमन घर से बुलाकर ले गया था राजकुमार के अनुसार, 24 अक्टूबर की रात करीब 9 बजे रमन अमन को यह कहकर साथ ले गया कि उसके रिश्तेदार का ऑपरेशन हुआ है और अस्पताल में हाल-चाल लेना है। पिता का आरोप है कि अमन ने जाने से मना किया था, फिर भी रमन उसे बाइक पर ले गया। बाद में दोनों न्यू बहादुर चंद कॉलोनी स्थित बालाजी मंदिर के पास पहुंचे, जहां 4-5 हमलावरों ने अमन पर चाकुओं से हमला कर दिया। पिता ने आरोप लगाया कि रमन मौके पर खड़ा रहा और उसे चोट भी नहीं आई। उन्होंने शिवा, कृष गांधी, राधे और 2-3 अन्य युवकों पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया। पिता का कहना है कि हमला अचानक नहीं, बल्कि साजिश के तहत हुआ। हालांकि, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी। पुलिस CCTV फुटेज खंगाल रही हमले में गंभीर रूप से घायल अमन को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस और एफएसएल टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए। थाना शहर के एसएचओ रामलाल और सदर बाजार चौकी इंचार्ज सतीश कुमार के अनुसार, मामले की गहनता से जांच की जा रही है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और शक के आधार पर संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है। पुलिस ने भरोसा दिया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

दैनिक भास्कर 25 Oct 2026 5:25 am

पीयूष गोयल बोले: पर्यावरण बचाने में यूरोप आगे; बाजार से आगे भारत, जर्मन कंपनियां अब बनाएंगी कारखाना-प्रयोगशाला

पीयूष गोयल बोले: पर्यावरण बचाने में यूरोप आगे;बाजार से आगे भारत, जर्मन कंपनियां अब बनाएंगी कारखाना-प्रयोगशाला

अमर उजाला 25 Oct 2026 4:49 am

पंजाब में कानून-व्यवस्था फेल, सीएम को फ्रांस में जन्मदिन मनाने से फुर्सत नहीं: आरपी सिंह

रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित राहुल गांधी की रैली पर सवाल उठाते हुए आरपी सिंह ने तारीख के चयन को लेकर कांग्रेस की मंशा पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 1984 में इसी अवधि के दौरान दिल्ली में सिख-विरोधी हिंसा हुई थी और बड़ी संख्या में सिखों की हत्या की गई थी।

खास खबर 24 Oct 2026 11:17 pm

फ्रांस प्रोटेस्ट: मुश्किल में राष्ट्रपति मैक्रों, सड़कों पर लाखों प्रदर्शनकारी, पेरिस ठप

फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत तमाम शहरों में एक बार फिर प्रदर्शन जोरों पर है। पेरिस में लाखों प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति मैक्रों के सामने शक्ति प्रदर्शन किया। फ्रांस सरकार ने इससे निपटने के लिए 70 हजार से ज्यादा सैनिकों की तैनाती की है।

लाइव हिन्दुस्तान 24 Oct 2026 10:30 pm

यूरोप पर मंडरा रहा है जिहादी हमलों का खतरा! मैसेज में बताया गया कैसे करना है अटैक

यूरोप में महंगाई और आवास संकट के खिलाफ प्रदर्शनों के बीच स्पेन ने जिहादी संदेशों को लेकर चेतावनी दी है। इनमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों पर आत्मघाती हमलों की अपील की गई। भारत ने फ्रांस, इटली और बेल्जियम में नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी।

खबर इंडिया टीवी 24 Oct 2026 6:56 pm

Arab Spring 2.0: फ्रांस, इटली, पोलैंड, ग्रीस, सर्बिया...सब जगह युवा क्यों कर रहे हंगामा?

यूरोप की जो दुनिया को तरक्की, ताकत और लोकतंत्र का पाठ पढ़ाता है। आज उसी यूरोप की सड़कों पर गुस्सा उबल रहा है। फ्रांस से सर्बिया, इटली से स्पेन समेत यूरोप के कई देशों तक महंगाई, बेरोजगारी और मकानों के आसमान छूते किराए से युवा परेशान है। सड़कों पर प्रदर्शन, पुलिस से टकराव और अब विरोध का कैलेंडर। ऐसे में सवाल है क्या यूरोप में 2010 जैसी अरब स्प्रिंग की आहट सुनाई देने लगी है? फ्रांस से जो हिंसा शुरू हुई, जो प्रोटेस्ट शुरू हुआ वो धीरे-धीरे यूरोप के और भी कई देशों में फैल चुका है। कहीं युवा भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं, तो कहीं महंगाई और बेरोजगारी ने सरकारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हो रही हैं, जबकि कुछ देशों में छात्र आंदोलन इस मुकाम पर पहुंच चुके हैं जहां वे चुनावी राजनीति को प्रभावित कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: भारत तो बड़ा खिलाड़ी निकला, यूरोप को दनादन कर रहा गोला-बारूद सप्लाई! आखिर यूरोप से लेकर एशिया तक इतना असंतोष क्यों है? यूरोप से लेकर एशिया तक युवा सड़कों पर हैं और सरकारों के प्रति जनता का आक्रोश साफ देखा जा सकता है। फ्रांस से लेकर सर्बिया और इटली से लेकर इंडोनेशिया तक, कई देशों में छात्र आंदोलनों ने जोर पकड़ लिया है। युवा भ्रष्टाचार, महंगाई और बदहाल शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकारों से जवाब मांग रहे हैं। फ्रांस में छात्र प्रदर्शनों के बीच एक नारा काफी चर्चा का विषय बन गया है—बिस्मिल्लाह से ले तेनब्रे (Bismillah se le tenbre), जिसका अर्थ निकाला गया ईश्वर के नाम पर, यह अंधकार है। दावा किया जाता है कि यह वाक्यांश सोशल मीडिया पर एक मैसेज के स्क्रीनशॉट से निकला। हालांकि, फ्रेंच भाषा में यह कोई व्याकरण के अनुसार सही वाक्य नहीं है, फिर भी अपनी अजीबोगरीब बनावट और शब्दों के अनूठे मेल के कारण यह लोगों की जुबान पर चढ़ गया। ठीक इसी तरह भारत में भी जुलाई के छात्र आंदोलनों के दौरान एक स्लैंग वास्ते गुनाह्या वायरल हुआ था, जिसका अपना कोई खास मतलब नहीं था। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस का यह नारा सबसे पहले स्नैपचैट पर सामने आया। वहां एक शख्स ने छात्र प्रदर्शनकारियों के प्राइवेट चैट ग्रुप में शामिल होने के लिए अलग-अलग प्रोफाइल बनाकर लोगों को संदेश भेजे थे। उस मैसेज में उसने लिखा था बिस्मिल्लाह से ले तेनब्रे, और उसके आगे लिखा था हम सब कुछ तोड़ देंगे। कुछ यूजर्स को इस मैसेज की भाषा अजीब और मजाकिया लगी, जिसके बाद उन्होंने इसके स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर कर दिए। धीरे-धीरे यह जुमला वायरल होकर प्रदर्शनकारियों के पोस्टरों तक पहुंच गया। इसे भी पढ़ें: उछल-उछल कर भारत को फंसा रही थी ये महिला, लगा तगड़ा करंट! दूसरी तरफ, इटली में विरोध-प्रदर्शनों की स्थिति और भी गंभीर नजर आ रही है। बोलोग्ना में नकाबपोश प्रदर्शनकारियों, वामपंथी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हिंसक झड़पों की खबरें हैं, जहां बैरिकेड्स जलाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। वहीं, ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर ट्रक ड्राइवरों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल ने आर्थिक संकट की आशंका बढ़ा दी है। दक्षिणी इटली के कई इलाकों के पेट्रोल पंपों पर ईंधन की भारी किल्लत हो गई है, सुपरमार्केट में ताजे फल-सब्जियों और खाद्यान्न की सप्लाई ठप पड़ने लगी है, और कैप्री तथा इस्चिया जैसे द्वीपों की फेरी सेवाएं बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे हालात में सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की जा रही है। पोलैंड में भी बड़े पैमाने पर लोग विधायी सुधारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क और देश की संसद प्रजनन अधिकारों से जुड़े अपने वादों को पूरा करें। इस आंदोलन का मुख्य केंद्र सरकारी जवाबदेही और अधूरे चुनावी वादों को लागू कराना है। इसे भी पढ़ें: उछल-उछल कर भारत को फंसा रही थी ये महिला, लगा तगड़ा करंट! ग्रीस में भी एक बेहतर शिक्षा प्रणाली की मांग को लेकर हजारों छात्र और शिक्षक लामबंद हैं। एथेंस में करीब 10,000 लोगों ने मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि शिक्षा क्षेत्र के लिए बजट बढ़ाया जाए, स्कूलों की हालत सुधारी जाए, शिक्षकों का वेतन बढ़ाया जाए और युवाओं को किफायती आवास की सुविधा मिले। यानी यहां आंदोलन की मांगें शिक्षा की गुणवत्ता से लेकर लगातार बढ़ती जीवन-यापन लागत (महंगाई) तक फैली हुई हैं। इन सब के बीच, यूरोप की सबसे बड़ी राजनीतिक हलचल सर्बिया से सामने आ रही है। यहां छात्र आंदोलन अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चुनावी राजनीति में अपनी ताकत दिखाने की तैयारी कर रहा है। 25 अक्टूबर के चुनावों से पहले हजारों समर्थक राजधानी बेलग्रेड की ओर मार्च करते देखे गए हैं। इस आंदोलन की शुरुआत नवंबर 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन की छत गिरने और उसमें 16 लोगों की मौत के बाद हुई थी। छात्रों ने इस हादसे के जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई और निर्माण कार्यों में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की मांग की थी। उनका आरोप है कि भ्रष्टाचार ने निर्माण की गुणवत्ता और जवाबदेही को पूरी तरह खत्म कर दिया है। धीरे-धीरे इस आंदोलन को आम नागरिकों, किसानों, शिक्षकों और अन्य वर्गों का व्यापक समर्थन मिलने लगा। अब यह आंदोलन चुनावी मैदान में उतर चुका है, जहां स्टूडेंट्स विन नाम से 250 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं; इनमें विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, कलाकार, किसान और यहां तक कि एक लोकप्रिय रैपर भी शामिल हैं।

प्रभासाक्षी 24 Oct 2026 6:54 pm

फ्रांस में महंगाई के खिलाफ फिर सड़कों पर उतरेंगे लोग, 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात; फुटेज में देंखे 2,700 से ज्यादा गिरफ्तारियां

फ्रांस में महंगाई के खिलाफ फिर सड़कों पर उतरेंगे लोग, 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात; फुटेज में देंखे 2,700 से ज्यादा गिरफ्तारियां

समाचार नामा 24 Oct 2026 6:45 pm

फ्रांस में नए प्रदर्शनों पर सरकार सख्त, वाटर कैनन के साथ 70,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती

फ्रांस में इस समय हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और देश एक बार फिर बड़े पैमाने पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों की आंधी का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में भड़की हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की वारदातों के बाद फ्रांसीसी सरकार ने इस बार किसी भी तरह की कोताही न बरतने का कड़ा फैसला लिया है। राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों के प्रशासन ने देश में कानून और व्यवस्था को बनाए रखने तथा उपद्रवियों पर नकेल कसने के लिए सुरक्षा के ऐसे कड़े इंतजाम किए हैं जो पिछले कई वर्षों में शायद ही कभी देखे गए हों। राजधानी पेरिस से लेकर मार्सिले और ल्योन जैसे प्रमुख शहरों तक सुरक्षा बलों का भारी जमावड़ा देखा जा सकता है, जिससे पूरा देश इस समय एक छावनी में तब्दील नजर आ रहा है।फ्रांस में फिर सुलग रही असंतोष की आग, सड़कों पर उतरने की तैयारी में लाखों लोगफ्रांस की धरती पर एक बार फिर जन-असंतोष सड़कों पर उबाल मारता नजर आ रहा है। छात्र संगठनों, श्रमिक संघों और विभिन्न सामाजिक आंदोलनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर सरकार की नीतियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरने का ऐलान कर दिया है। जानकारों और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सप्ताहांत होने वाले इन प्रदर्शनों में लाखों की संख्या में आम नागरिक, छात्र और कामगार शामिल हो सकते हैं। लोगों का यह गुस्सा मुख्य रूप से बढ़ती महंगाई, जीवनयापन के बढ़ते खर्च, ईंधन की कीमतों में उछाल और सरकारी खर्चों में की जा रही कटौतियों के खिलाफ है। हालांकि अदालतों और स्थानीय प्रशासन के स्तर पर प्रदर्शनों के मार्गों को लेकर शुरुआती खींचतान और पाबंदियां भी देखने को मिली हैं, लेकिन आयोजकों के अड़ियल रुख के बाद सरकार को सुरक्षा के मोर्चे पर अपनी रणनीति पूरी तरह बदलनी पड़ी है। देश के विभिन्न कोनों से लोग राजधानी की तरफ कूच करने की तैयारी में हैं, जिससे प्रशासनिक तंत्र की नींद उड़ी हुई है।सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम: 70 हजार पुलिसकर्मी, वाटर कैनन और आसमान से पहराजन-आंदोलन और संभावित हिंसा को रोकने के लिए फ्रांस के गृह मंत्रालय और प्रशासन ने जिस स्तर की सुरक्षा तैयारी की है, उसने हर किसी को चौंका दिया है। आधिकारिक घोषणा के अनुसार, देश भर में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए लगभग 70,000 पुलिसकर्मियों और सुरक्षा अधिकारियों को तैनात किया गया है। यह तैनाती सामान्य पुलिस बल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आतंकवाद-रोधी अभियानों और दंगों से निपटने में माहिर विशिष्ट इकाइयों को भी शामिल किया गया है। पेरिस और अन्य संवेदनशील शहरों की सड़कों पर भारी भरकम बख्तरबंद वाहन और अत्याधुनिक वाटर कैनन तैनात कर दिए गए हैं ताकि किसी भी उपद्रव की स्थिति में तुरंत पानी की बौछार कर भीड़ को तीतर-बितर किया जा सके। इसके अलावा, जमीन पर पुलिस के साथ-साथ आसमान से भी कड़ी नजर रखी जा रही है। पुलिस के हेलीकॉप्टर और ड्रोन लगातार संवेदनशील इलाकों के ऊपर चक्कर काट रहे हैं ताकि भीड़ के मूवमेंट और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की लाइव फीड सीधे कंट्रोल रूम तक पहुंचाई जा सके। सरकार ने साफ कर दिया है कि इस बार सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने या पुलिस पर हमला करने वालों से बेहद सख्ती से निपटा जाएगा।ऐतिहासिक संग्रहालय और प्रमुख संस्थान बंद, कारोबारियों में दहशत का माहौलसंभावित हिंसक झड़पों और तोड़फोड़ के खतरे को भांपते हुए फ्रांस के प्रमुख सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संस्थानों ने अपनी सुरक्षा के मद्देनजर खुद को बंद रखने का ऐतिहासिक फैसला किया है। दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहने वाला पेरिस का विश्वप्रसिद्ध लूव्र संग्रहालय, ओरसे संग्रहालय, पिकासो संग्रहालय और ग्रैंड पैलेस जैसे प्रतिष्ठित संस्थान सप्ताहांत के दौरान पूरी तरह बंद रहेंगे। कला और संस्कृति के इन वैश्विक केंद्रों के बंद होने से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन इस खतरे को कितनी गंभीरता से ले रहा है। दूसरी ओर, देश के बड़े व्यावसायिक महानगरों के व्यापारियों और दुकानदारों में भारी दहशत का माहौल देखा जा रहा है। पिछले प्रदर्शनों के दौरान उपद्रवियों द्वारा कई दुकानों में लूटपाट और आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिए जाने के बाद, इस बार दुकानदारों ने एहतियात के तौर पर अपनी दुकानों और शोरूमों की खिड़कियों और दरवाजों पर लकड़ी के मजबूत बोर्ड ठोक दिए हैं ताकि किसी भी संभावित हमले से संपत्ति को बचाया जा सके। कारोबारियों का कहना है कि बार-बार होने वाले इन प्रदर्शनों और अराजकता के माहौल से उनके व्यवसाय की कमर टूट चुकी है, और वे सरकार से अपनी सुरक्षा की पुख्ता गारंटी की मांग कर रहे हैं।महंगाई, ईंधन संकट और सरकारी नीतियों के खिलाफ गुस्से का उबालफ्रांस में सुलग रहे इस जन-आंदोलन की जड़ें काफी गहरी हैं और यह मुख्य रूप से देश की आर्थिक बदहाली तथा आम जनता की रोजमर्रा की परेशानियों से जुड़ी हुई हैं। यूरोप में भू-राजनीतिक उथल-पुथल और वैश्विक आर्थिक मंदी के प्रभाव के चलते फ्रांस के नागरिकों को भी भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। इसके अलावा, रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं और खाद्य पदार्थों के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों का जीवन दूभर हो गया है। सरकार द्वारा बजट घाटे को कम करने के नाम पर सार्वजनिक सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं के बजट में कटौती करने के फैसलों ने जनता के गुस्से में घी डालने का काम किया है। नागरिकों का कहना है कि सरकार आम जनता को राहत देने के बजाय उद्योगपतियों और बड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचा रही है। इन तमाम मुद्दों को लेकर पिछले कुछ दिनों से देश के अलग-अलग हिस्सों में छिटपुट विरोध प्रदर्शन चल रहे थे, जो अब एक विशाल जन-आंदोलन का रूप लेते जा रहे हैं।सरकार की दो टूक चेतावनी और नागरिकों के लिए जारी की गई एडवाइजरीदेश के हालात को बेकाबू होने से बचाने के लिए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों और उनकी सरकार ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सरकार ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि प्रदर्शन के नाम पर हिंसा फैलाने, दुकानों में लूटपाट करने या कानून को हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ तुरंत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रदर्शनकारियों पर नकेल कसने के लिए कई इलाकों में चेहरा ढककर प्रदर्शन करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है और स्थानीय प्रशासन द्वारा रात के समय कर्फ्यू जैसे कड़े प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं। इसके साथ ही, भारत समेत दुनिया के कई देशों ने फ्रांस में उत्पन्न इस तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए अपने नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय ने फ्रांस यात्रा पर जाने वाले या वहां रह रहे भारतीय नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतने, अनावश्यक रूप से भीड़भाड़ वाले इलाकों और प्रदर्शन स्थलों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी है। कुल मिलाकर, फ्रांस इस समय एक नाजुक दौर से गुजर रहा है जहां सरकार के सामने कानून-व्यवस्था बहाल करने और जनता के आक्रोश को शांत करने की दोहरी चुनौती खड़ी है, और आने वाले कुछ दिन देश के भविष्य के राजनीतिक व सामाजिक परिदृश्य के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 24 Oct 2026 6:31 pm

फ्रांस में Shamonda Virus का पहला इंसानी केस मिला, WHO ने की पुष्टि

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने फ्रांस में शमोंडा वायरस के पहले इंसानी मामले की पुष्टि की है। फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, संक्रमित व्यक्ति की उम्र 60 साल से ज्यादा थी और उनका इम्यून सिस्टम भी काफ कमजोर था। लेकिन इनका इलाज के दौरान मौत हो गई। वैसे यह वायरस पहले सिर्फ जानवरों में ही पाया गया था और अब आमतौर पर मवेशियों, भेड़ों, बकरियों और घोड़ों को प्रभावित करता है। आइए आपको बताते हैं वायरस क्या है और इंसानों में इसके लक्षण को कैसे करता है। क्या है शमोंडा वायरस? असल में शमोंडा वायरस पहली बार 1960 के दशक में नाइजीरिया के मवेशियों में पाया गया था। इसके बाद से अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों में इसके छोटे-मोटे मामले दर्ज किए गए हैं। बता दें कि, यह वायरस श्मालेनबर्ग वायरस परिवार से आता है, जो पशुओं में प्रजनन से संबंधित समस्याएं पैदा होती हैं। इंसानों में शमोंडा वायरस के लक्षण वैसे इंसानों में इस वायरस के संक्रमण का ये पहला मामला पाया गया है। इसलिए इंसानों में इसके लक्षण कैसे हो सकते हैं, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। लेकिन इंसानों में इसके संक्रमण की वजह मिज, मक्खी जैसे एक छोटे कीड़े को माना जा रहा है। ये कीड़ा संक्रमित पशुओं के काटने के बाद वायरस का कैरियर बन जाता है और इंसानों में ये वायरस फैल सकता है। हालांकि, इसका अभी तक कोई प्रमाण मिला नहीं है कि शमोंडा वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। वहीं, संक्रमित पशुओं के छूने, उनकी देखभाल करने या उनके पास रहने से भी ये वायरस नहीं फैलता। वायरस के बारे जांच जारी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, संक्रमित व्यक्ति उस क्षेत्र में पाएं जाते हैं, जहां पशुओं में शमोंडा वायरस फैल रहा था और वहां क्यूलिकोइड्स प्रजाति की मिज मक्खियां मौजूद थीं। वैसे संक्रमण के कारण और इनके खतरों को बेहतर तरीके से जानने के लिए अभी भी इस वायरस पर रिसर्च जारी है।

प्रभासाक्षी 24 Oct 2026 6:08 pm

फ्रांस में फिर सड़कों पर उतरेंगे प्रदर्शनकारी, 70 हजार पुलिसकर्मी तैनात

फ्रांस में कानून और व्यवस्था की स्थिति एक बार फिर चिंताजनक बनी हुई है. खबरों के अनुसार, विभिन्न मुद्दों और हालिया घटनाओं को लेकर प्रदर्शनकारी एक बार फिर देश भर में सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने जा रहे हैं. पिछले सप्ताह फ्रांस के कई प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर हिंसा, उपद्रव और दुकानों में लूटपाट की गंभीर घटनाएं देखने को मिली थीं. इस स्थिति की पुनरावृत्ति को रोकने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार तथा स्थानीय प्रशासन ने बेहद कड़े कदम उठाए हैं.

आज तक 24 Oct 2026 4:43 pm

भारत को मैन्यूफैक्चरिंग, रिसर्च सेंटर के रूप में देख रहीं जर्मन कंपनियां, विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी करना चाहते हैं यूरोपीय देश

पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध न सिर्फ वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार के द्वार खोलते हैं, बल्कि टैलेंट, इनोवेशन, को-क्रिएशन, को-डिजाइन, को-डेवलपमेंट और को-मैन्यूफैक्चरिंग के द्वार भी खोलते हैं।

ज़ी न्यूज़ 24 Oct 2026 4:14 pm

फ्रांस : दस मिलियन बैरल गैस ऑयल जारी करने का आदेश द‍िया

पेर‍िस, फ्रांस में ह‍िंसा और प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने शन‍िवार को लोगों को राहत पहुंचाने वाला एक आदेश जारी क‍िया। सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्स' पर किए गए एक पोस्ट में पीएम सेबेस्टियन ने बताया क‍ि दस मिलियन बैरल गैस ऑयल जारी करने की अनुमति देने वाला आदेश अब जारी कर दिया गया है। उम्‍मीद है क‍ि इससे गैस ऑयल की कीमत में कुछ कमी आएगी।

देशबन्धु 24 Oct 2026 4:14 pm

फ्रांस सरकार ने दस मिलियन बैरल गैस ऑयल जारी करने का आदेश द‍िया, 18 सेंट प्रति लीटर तक म‍िलेगी राहत

फ्रांस सरकार ने दस मिलियन बैरल गैस ऑयल जारी करने का आदेश दिया, 18 सेंट प्रति लीटर तक मिलेगी राहत

समाचार नामा 24 Oct 2026 3:31 pm

यूरोप : 854 शहरों में गर्मी से 50 हजार से ज्यादा की मौत

नई दिल्ली, यूरोप में 2026 की गर्मियों ने भीषण कहर बरपाया है। इस कारण 50 हजार से अधिक लोगों की मौत होने का अनुमान है। एक नए अध्ययन के अनुसार, इनमें से करीब दो-तिहाई मौतों के लिए जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार रहा। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि लगातार बढ़ता तापमान यूरोप के शहरों में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर रहा है।

देशबन्धु 24 Oct 2026 3:16 pm

यूरोप के 854 शहरों में गर्मी से 50 हजार से ज्यादा की मौत, जलवायु परिवर्तन एक अहम कारण: स्टडी

New Delhi, 24 अक्टूबर . यूरोप में 2026 की गर्मियों ने भीषण कहर बरपाया है. इस कारण 50 हजार से अधिक लोगों की मौत होने का अनुमान है.…

डेली किरण 24 Oct 2026 2:33 pm

रक्षा निर्यात में भारत ने बनाया नया रिकॉर्ड, यूरोप में भारतीय गोला-बारूद की मांग में 1,600% की उछाल, 28वें से दूसरे नंबर पर पहुंचा India

India arms exports to Europe: यूरोप के रक्षा बाजार में भारत की बढ़ती मौजूदगी देश के उभरते डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की नई तस्वीर पेश कर रही है। रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में शुरू हुए घातक युद्ध के बाद पूर्वी और मध्य यूरोप के कई देशों में गोला-बारूद की मांग तेजी से बढ़ी है। इस मांग के बीच भारतीय डिफेंस कंपनियों ने भी अपनी पहुंच का विस्तार किया है। लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, यूरोपीय देशों को भारत से होने वाले चुनिंदा गोला-बारूद और संबंधित उत्पादों के निर्यात में चार साल के भीतर 1,600 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान भारत इन उत्पादों के आपूर्तिकर्ताओं की लिस्ट में 28वें स्थान से दूसरे नंबर पर पहुंच गया है।4 साल में 49.2 मिलियन डॉलर से बढ़कर 872 मिलियन डॉलर हुआ निर्यातब्लूमबर्ग न्यूज (Bloomberg) की रिपोर्ट में ट्रेड डेटा मॉनिटर के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद के चार वर्षों में भारतीय कंपनियों ने यूरोपीय देशों को कम से कम 872 मिलियन डॉलर यानी लगभग 87.2 करोड़ डॉलर के संबंधित उत्पादों का निर्यात किया। इससे पहले के चार वर्षों में यह आंकड़ा 49.2 मिलियन डॉलर यानी लगभग 4.92 करोड़ डॉलर था।इस तरह दोनों अवधियों के बीच निर्यात मूल्य में 1,600 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, यह आंकड़ा भारत के संपूर्ण रक्षा निर्यात का नहीं। बल्कि चुनिंदाकैटेगरी के गोला-बारूद और उनसे जुड़े उत्पादों के व्यापार का है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब पूर्वी और मध्य यूरोप के 13 देशों को इन उत्पादों की आपूर्ति करने वाले देशों में दक्षिण कोरिया के बाद दूसरे स्थान पर है। इसग्रुप में पोलैंड, रोमानिया, बुल्गारिया, क्रोएशिया, चेक गणराज्य और बाल्टिक क्षेत्र के देश शामिल हैं।किन रक्षा उत्पादों की बढ़ी मांग?भारत से यूरोप जाने वाले उत्पादों में मुख्य रूप से तोपों के गोले, मोर्टार गोला-बारूद और विस्फोटक शामिल हैं। ये सैन्य अभियानों में इस्तेमाल होने वाली बुनियादी लेकिन महत्वपूर्ण आपूर्तियां हैं। युद्ध के लंबे खिंचने के कारण यूरोप के कई देशों को अपने सैन्य भंडार की भरपाई करनी पड़ रही है। यूक्रेन को हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराने में भी इस क्षेत्र के कुछ देशों की भूमिका रही है। ऐसे में उनकी अपनी घटती आपूर्ति को दोबारा बढ़ाने की जरूरत ने यूरोप के बाहर के निर्माताओं के लिए भी अवसर पैदा किए हैं।भारत के रक्षा उद्योग के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?भारत लंबे समय से अपनी रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अब घरेलू मांग के साथ-साथ विदेशी बाजारों में बढ़ते अवसर भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए अतिरिक्त कारोबार का रास्ता खोल रहे हैं।यूरोपीय बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती मौजूदगी के कई संभावित आर्थिक प्रभाव हैं। इनमें रक्षा कारखानों की उत्पादन क्षमता का बेहतर इस्तेमाल,मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के अवसर, सप्लाई चैन का विस्तार और भारतीय कंपनियों कोइंटरनेशनल ग्राहकों के साथ काम करने का अनुभव मिलना शामिल है।वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात का नया रिकॉर्डयूरोप में गोला-बारूद की बढ़ती मांग के बीच भारत के समग्र रक्षा निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 23,622 करोड़ रुपये था। इस प्रकार सालाना आधार पर रक्षा निर्यात में 62.66 प्रतिशत की वृद्धि हुई।रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों यानी डिफेंस पीएसयू का निर्यात 21,071 करोड़ रुपये रहा। जबकिप्राइवेट सेक्टर की कंपनियों ने 17,353 करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादों का निर्यात किया। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनियों के निर्यात में 151 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। जबकिप्राइवेट क्षेत्र की वृद्धि दर 14 प्रतिशत रही। इसी अवधि में भारत ने 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात किया।सरकारी कंपनियों की बढ़ी भूमिका,प्राइवेट सेक्टरके लिए भी अवसरभारत के रक्षा निर्यात विस्तार में सरकारी रक्षा कंपनियों की अहम भूमिका रही है। गोला-बारूद के उत्पादन में म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड प्रमुख कंपनियों में शामिल है। इसका गठन 2021 में तत्कालीन आयुध निर्माणी बोर्ड के पुनर्गठन के बाद हुआ था। इस सुधार के तहत बोर्ड के 41 कारखानों के नेटवर्क को अलग-अलग रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में विभाजित किया गया। इसका उद्देश्य उत्पादन व्यवस्था में दक्षता बढ़ाना, कंपनियों को अधिक जवाबदेह बनाना और प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना था।इसके बाद म्यूनिशन्स इंडिया जैसी कंपनियों ने घरेलू सैन्य जरूरतों के अलावा विदेशी बाजारों में भी ग्राहकों तक पहुंच बनाने की कोशिश की है। दूसरी ओर, निजी रक्षा कंपनियों की भागीदारी भी भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को व्यापक बना रही है। सरकारी और निजी कंपनियों की संयुक्त क्षमता भारत को रक्षा उत्पादन के अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर देती है।'मेक इन इंडिया' सेग्लोबल डिफेंस मार्केट तकभारत सरकार ने 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत देश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है। इसका एक प्रमुख उद्देश्य घरेलू सशस्त्र बलों की जरूरतों को देश के भीतर पूरा करने की क्षमता विकसित करना और विदेशी बाजारों में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है।रक्षा निर्यात में वृद्धि से कंपनियों को घरेलू ऑर्डर के अलावा नए बाजारों से भी मांग मिल सकती है। इससे उत्पादन की निरंतरता बनाए रखने और उद्योग के विस्तार में मदद मिल सकती है। बता दें किरूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप के कई देशों ने अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत किया है। उन्होंनेयूक्रेन को सैन्य सहायता दी है। ऐसे में इन देशों को भारतीय गोला-बारूद की आपूर्ति और रूस के साथ भारत के पारंपरिक संबंधों के बीच कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण हो गया है।ये भी पढ़ें- Delhi Awaas Yojana 2026: दिल्ली में सस्ता घर खरीदने का सुनहरा मौका! DDA ला रहा 1,648 नए फ्लैट, 25% डिस्काउंट के साथ सिर्फ 14.95 लाख रुपयेब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों ने इन लेनदेन को व्यावसायिक पहलुओं से प्रेरित बताया। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अपने रक्षा निर्यात बाजार का विस्तार करते हुए अंतरराष्ट्रीय नियमों, अंतिम उपयोगकर्ता संबंधी प्रतिबद्धताओं और प्रमुख रणनीतिक साझेदारों के साथ संबंधों का संतुलन बनाए रखे।

ज़ी न्यूज़ 24 Oct 2026 2:26 pm

भारत यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बना: रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह

भारत यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बना: रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह bharatभारत यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बना: रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह भारत यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। यूरोप में रक्षा उपकरणों की बढ़ती मांग […]

टुडे इंडिया 24 Oct 2026 2:21 pm

फ्रांस में हिंसा की आशंका, 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात; भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी

फ्रांस में संभावित हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। भारतीय नागरिकों से भीड़भाड़ वाले इलाकों और प्रदर्शन स्थलों से दूर रहने तथा बाहर निकलने से पहले स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी लेने को कहा गया है।

देशबन्धु 24 Oct 2026 12:04 pm

अल-नीनो का कहर... यूरोप में गर्मी से इस साल 50 हजार मौतें हुईं

यूरोप में बढ़ती भीषण गर्मी अब जानलेवा साबित हो रही है. 2026 की गर्मियों में 50 हजार से अधिक लोगों की मौत का अनुमान है, जिनमें करीब 32 हजार मौतें जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, जीवाश्म ईंधन का बढ़ता इस्तेमाल तापमान को खतरनाक बना रहा है. बुजुर्गों के साथ युवाओं की जान पर भी गर्मी का खतरा बढ़ रहा है.

आज तक 24 Oct 2026 11:51 am

Kangra News: फ्रांस में हिमाचल का प्रतिनिधित्व करेंगी सीमा

भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की पालमपुर शाखा की वरिष्ठ अभिकर्ता सीमा चौधरी का चयन फ्रांस में आयोजित होने वाले शैक्षिक सेमिनार के लिए हुआ है।

अमर उजाला 24 Oct 2026 1:59 am

'मुझे तो ये लोग यूरोप नहीं जाने देते, पाकिस्तान तो दूर की बात...', CM भगवंत मान ने केंद्र पर साधा निशाना

मुख्यमंत्री भगवंत मान को लाहौर में विश्व पंजाबी सम्मेलन में शामिल होने का न्योता मिला है, जिस पर उन्होंने केंद्र द्वारा विदेश यात्राओं पर रोक का जिक्र किया।

जागरण 23 Oct 2026 10:33 pm

डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से जुड़ा अरबों की फंडिग और भाड़े के सैनिकों वाला दावा क्या है? जिससे UAE से यूरोप-अमेरिका तक मची खलबली!

डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर पर भाड़े के सैनिकों की फंडिंग का आरोप एक किताब में लगाया गया है, जबकि कुशनर इन्हें बेबुनियाद और झूठा बता रहे हैं। जानें ये पूरा मामला क्या है।

खबर इंडिया टीवी 23 Oct 2026 5:35 pm

Vishwakhabram : France में Macron के खिलाफ विद्रोह जैसे हालात, पूरे यूरोप में फैल सकती है जनाक्रोश की आग!

फ्रांस इन दिनों गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकट से गुजर रहा है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। महंगाई, बढ़ती ऊर्जा कीमतों, वेतन में ठहराव और बदहाल सार्वजनिक सेवाओं से नाराज श्रमिकों और छात्रों के आंदोलन ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पिछले सप्ताह प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा, आगजनी और लूटपाट के बाद अब शनिवार को फिर बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन की आशंका है। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि कारोबारियों, संग्रहालयों और कला आयोजनों तक को बंद रखने की तैयारी करनी पड़ रही है। मैक्रों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ हिंसा पर काबू पाना नहीं, बल्कि उस जनाक्रोश को थामना है, जो उनकी सरकार की नीतियों और नेतृत्व पर सीधे सवाल खड़े कर रहा है। सड़कों पर सरकार को सीधी चुनौती हम आपको बता दें कि फ्रांस के प्रमुख छात्र संगठन UNEF ने शनिवार को प्रदर्शनों का आह्वान किया है। वहीं, 2018 में उभरे सरकार-विरोधी येलो वेस्ट आंदोलन ने मध्य पेरिस में मार्च निकालने की योजना बनाई है। हम आपको याद दिला दें कि छात्र आंदोलन की शुरुआत विद्यालयों में शिक्षकों की कमी और जर्जर सुविधाओं के विरोध से हुई थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ती जीवन-यापन लागत, वेतन, बजट कटौती और सार्वजनिक सेवाओं की गिरती गुणवत्ता तक फैल चुका है। इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: France से लेकर India तक हुए प्रदर्शनों के पीछे काम कर रहा था 13 देशों के 101 संगठनों का Network, Fox News ने किया बड़ा खुलासा! मैक्रों ने छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत की पहल की है, लेकिन UNEF ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन नहीं रोके जाएंगे। संगठन ने राष्ट्रपति पर विरोध के अधिकार को कुचलने और गणतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। यह टकराव बताता है कि सरकार के सामने केवल कानून-व्यवस्था का संकट नहीं, बल्कि जनता के एक हिस्से का राजनीतिक विश्वास बनाए रखने की भी चुनौती है। मैक्रों ने हिंसा के लिए अतिवामपंथी और उग्रवादी समूहों को जिम्मेदार ठहराया है, हालांकि वामपंथी दल फ्रांस अनबाउड ने इन आरोपों को खारिज किया है। राष्ट्रपति ने कुछ प्रदर्शनों को अवैध बताते हुए उन पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है। साथ ही ट्रेड यूनियनों के वैध प्रदर्शनों को अनुमति देने, लेकिन उनके मार्ग बदलने की संभावना भी जताई गई है। इस बीच, फ्रांस के प्रमुख श्रमिक संगठन CFDT की महासचिव मैरीलीज लियोन ने चेताया है कि प्रतिबंधों से गुस्सा कम होने के बजाय बढ़ सकता है। उनका तर्क है कि जनता की नाराजगी दूर करने के लिए ठोस प्रस्ताव चाहिए, न कि यह तय करने की कोशिश कि किसे विरोध करने का अधिकार है। सुरक्षा संकट: बंद होते शहर, कारोबार और सांस्कृतिक संस्थान हम आपको याद दिला दें कि पिछले सप्ताह हुई हिंसा के बाद सरकार की चिंता का सबसे बड़ा कारण यह है कि शांतिपूर्ण विरोध के साथ-साथ हिंसक घटनाएं पहले की तरह व्यापक रूप ना ले लें। फ्रांस में 17 अक्टूबर को पांच लाख से अधिक लोग विरोध प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरे थे। हालांकि, शांतिपूर्ण तरीके से हुए इन ऐतिहासिक प्रदर्शनों की चर्चा लूटपाट की घटनाओं पर मीडिया के व्यापक कवरेज के कारण दबकर रह गई। फ्रांस के कानून मंत्री के अनुसार, शनिवार से अब तक लगभग 2,700 गिरफ्तारियां हुई हैं। पेरिस और अन्य शहरों में लगाए गए रात्रिकालीन कर्फ्यू के बाद कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन दोबारा हिंसा भड़कने की आशंका खत्म नहीं हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक मार्सेई और लियोन में शनिवार के लिए प्रस्तावित सभी प्रदर्शनों पर स्थानीय अधिकारियों ने प्रतिबंध लगाया है। मार्सेई के वाणिज्य मंडल ने कारोबारियों से दुकानें बंद रखने का आग्रह किया है। अंतरराष्ट्रीय कला मेला आर्ट बेसल पेरिस को भी सुरक्षा चिंताओं के कारण सप्ताहांत में बंद रखने की घोषणा की गई है। लौवर संग्रहालय और फोंडेशन लुई वितों के भी शनिवार को बंद रहने की योजना है। ये कदम बताते हैं कि अशांति का असर अब सड़कों से निकलकर पर्यटन, व्यापार और फ्रांस की सांस्कृतिक प्रतिष्ठा तक पहुंच चुका है। उधर, मध्य फ्रांस के ओरलियॉं में भी तनाव की आशंका है, जहां धुर दक्षिणपंथी नेशनल रैली की बैठक के विरोध में हजारों लोगों के जुटने की संभावना जताई गई है। इस प्रकार संकट केवल सरकार बनाम प्रदर्शनकारी का नहीं, बल्कि विभिन्न राजनीतिक धाराओं के बीच आमने-सामने के टकराव का भी रूप ले सकता है। आर्थिक मोर्चे पर दोहरी मार देखा जाये तो इस उथल-पुथल की जड़ में गंभीर आर्थिक असंतोष है। बढ़ती ऊर्जा कीमतें, घरेलू बजट पर दबाव, वेतन को लेकर असंतोष और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट ने श्रमिकों तथा युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित किया है। दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि सार्वजनिक खर्च पर नियंत्रण जरूरी है, क्योंकि बढ़ता सरकारी कर्ज और उधारी की लागत राजकोषीय गुंजाइश सीमित कर रहे हैं। दूसरी ओर, वित्तीय बाजार इस संकट को गंभीरता से ले रहे हैं। फ्रांस और जर्मनी के सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दरों के अंतर में वृद्धि निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाती है। 22 अक्टूबर को फ्रांस की 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड लगभग 5.14 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो जुलाई 2002 के बाद का उच्चतम स्तर बताया गया। यह संकेत है कि राजनीतिक अस्थिरता और बजट संबंधी चिंताओं का असर अब सरकारी उधारी पर भी पड़ रहा है। रेटिंग एजेंसी मूडीज की 23 अक्टूबर को फ्रांस की साख पर संभावित कार्रवाई भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण है। फ्रांस की रेटिंग में गिरावट या नकारात्मक दृष्टिकोण कायम रहने से निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है। फ्रांस से आगे यूरोप की परीक्षा साथ ही इस संकट का असर सिर्फ फ्रांस की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी आंच पूरी यूरोपीय अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था तक पहुंच सकती है। अगर मैक्रों सरकार जनता के गुस्से को शांत करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम रहती है, तो सरकार और लोगों के बीच अविश्वास और गहरा होगा। वहीं, बढ़ती उधारी और आर्थिक दबाव के कारण रक्षा, विकास और सार्वजनिक सेवाओं पर खर्च करना भी सरकार के लिए मुश्किल हो सकता है। यूरोपीय संघ की प्रमुख शक्ति होने के कारण फ्रांस में लंबे समय तक जारी अस्थिरता का असर यूरोप के वित्तीय बाजारों और आर्थिक नीतियों पर भी पड़ेगा। दूसरी ओर, प्रदर्शनों पर सख्ती और प्रतिबंध आंदोलन को और भड़का सकते हैं, जबकि हिंसक समूहों पर नियंत्रण न होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है। फ्रांस का येलो वेस्ट आंदोलन पहले भी दिखा चुका है कि जब जनता को लगता है कि उसकी आर्थिक परेशानियों की अनदेखी हो रही है और सत्ता उसकी आवाज नहीं सुन रही, तो असंतोष एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है। बहरहाल, मैक्रों के सामने चुनौती सिर्फ शनिवार के प्रदर्शनों को नियंत्रित करने की नहीं है। असली परीक्षा यह है कि क्या उनकी सरकार सुरक्षा व्यवस्था बहाल करते हुए महंगाई, वेतन, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े सवालों का विश्वसनीय समाधान दे सकती है। केवल प्रतिबंधों और गिरफ्तारी के सहारे व्यवस्था कायम करने की कोशिश विरोध को टाल सकती है, समाप्त नहीं कर सकती। फ्रांस की सड़कों पर उठता यह उबाल अब सरकार की राजनीतिक साख, देश की आर्थिक क्षमता और यूरोप की स्थिरता, तीनों की परीक्षा बन चुका है। -नीरज कुमार दुबे

प्रभासाक्षी 23 Oct 2026 4:52 pm

आखिर क्यों धधक रहा है फ्रांस और अन्य यूरोपीय देश?  पुलिस प्रशासन के सामने क्या हैं चुनौतियाँ?

धधक रहा है फ्रांस और अन्य यूरोपीय देश The post आखिर क्यों धधक रहा है फ्रांस और अन्य यूरोपीय देश? पुलिस प्रशासन के सामने क्या हैं चुनौतियाँ? appeared first on प्रवक्‍ता.कॉम - Pravakta.Com .

प्रवक्ता 23 Oct 2026 2:39 pm

फ्रांस से आए सैलानियों ने विद्यार्थियों से की सार्थक चर्चा व साझा किए अनुभव

फ्रांस से आए विदेशी सैलानी केविन और उनके परिवार के सदस्यों ने स्कूली बच्चों से रूबरू होकर संवाद किया। द नारायण स्कूल में विद्यार्थियों द्वारा विदेशी मेहमानों का स्वागत किया गया। इसके बाद विदेशी मेहमानों ने विद्यालय के छात्र छात्राओं से संवाद किया और अपने अनुभव साझा किए। बच्चों को फ्रांस की संस्कृति, सामाजिक परंपराओं, जीवनशैली और शिक्षा प्रणाली को करीब से जानने का अवसर मिला। विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि वास्तविक शिक्षा केवल कक्षाओं की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर की संस्कृतियों को जोड़ने का सशक्त माध्यम है। इस तरह के प्रेरणादायक संवाद से बच्चों में विविधता को अपनाने, विभिन्न परंपराओं का सम्मान करने और जागरूक वैश्विक नागरिक बनने की भावना विकसित होती है। विद्यालय परिवार ने केविन और उनके परिवार का आभार व्यक्त किया।

दैनिक भास्कर 23 Oct 2026 5:30 am

फ्रांस से समुद्री मार्ग से मुंबई पोर्ट पहुंचेंगे पुर्जे:मप्र सरकार को नवंबर के आखिर में मिलेगा 225 करोड़ का नया हाईटेक हेलीकॉप्टर

मप्र सरकार के नए हाईटेक हेलीकॉप्टर की डिलीवरी नवंबर माह के आखिर तक होने की संभावना है। फ्रांस की एयरबस कंपनी से खरीदे जा रहे एसीएच160 हेलीकॉप्टर को लेकर विमानन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। हालांकि, डिलीवरी की तारीख अभी तय नहीं हुई है। विमानन विभाग के सूत्रों के मुताबिक हेलीकॉप्टर फ्रांस से उड़कर सीधे भारत नहीं आएगा। इसकी दूरी अधिक होने के कारण कंपनी इसे अलग-अलग पुर्जों के रूप में समुद्री मार्ग से मुंबई पोर्ट तक पहुंचाएगी। वहां से पुर्जों को भारत में मौजूद एयरबस की किसी फाइनल असेंबली लाइन भेजा जाएगा। इनमें वडोदरा, बेंगलुरू या नोएडा को चुना जा सकता है, जहां हेलीकॉप्टर को असेंबल किया जाएगा। इसके बाद तैयार हेलीकॉप्टर को उड़ाकर भोपाल लाया जाएगा। डिलीवरी से पहले कंपनी इसका फ्लाइट टेस्ट करेगी, ताकि सुरक्षा मानकों और तकनीकी प्रदर्शन की जांच की जा सके। नए हेलीकॉप्टर के लिए दो पायलट फ्रांस में प्रशिक्षण ले चुके हैं। राज्य सरकार ने आदर्श राय और संजय श्रीवास्तव को फ्रांस में एसीएच160 उड़ाने का प्रशिक्षण दिलाया है। दोनों पायलट सरकार की ओर से हेलीकॉप्टर की डिलीवरी स्वीकार करने की प्रक्रिया में शामिल होंगे। 9 सीटर होगा... नए हेलीकॉप्टर में 2 क्रू मेंबर के अलावा 9 यात्री बैठेंगे। टेकऑफ भार क्षमता 6050 किलो और स्लिंग लोड 1600 किलो होगा। 2011 में खरीदे ईसी155 बी1 में 6 यात्री और 2 क्रू मेंबर बैठते हैं। इसकी टेकऑफ भार क्षमता 4920 किलो है। मूल कीमत करीब 125 करोड़, लेकिन टैक्स और इंटीरियर के कारण 225 होगी लागत... एयरबस एसीएच 160, एयरबस एच160 हेलीकॉप्टर का कॉर्पोरेट और प्राइवेट कैटेगरी की फ्लीट है। इसमें दो इंजन हैं और इसे वीआईपी यात्राओं के लिए विशेष इंटीरियर के साथ तैयार किया जा सकता है। मप्र सरकार ने मुख्यमंत्री की सरकारी यात्राओं और राज्य में वीवीआईपी दौरे से जुड़ी जरूरतों के अनुसार इसका इंटीरियर डिजाइन कराया है। सरकार से अनुबंध के मुताबिक हेलीकॉप्टर की मूल कीमत करीब 125 करोड़ रुपए है। लेकिन इस पर करीब 35 प्रतिशत टैक्स (आईजीएसटी, आयात शुल्क, डीजीसीए शुल्क आदि) चुकाना पड़ेगा, जो करीब 78.75 करोड़ रुपए बैठता है। इसके अलावा करीब 20 करोड़ रुपए इसके कस्टमाइजेशन, इंटीरियर पर खर्च होने का अनुमान है। इस तरह इसकी कुल लागत 225 करोड़ पहुंच सकती है।

दैनिक भास्कर 22 Oct 2026 5:46 am

नेतन्याहू की चेतावनी सही साबित हो रही- फ्रांस चरमपंथी इस्लाम के सामने झुक रहा है!

विश्व के लिए इस्लामी चरमपंथ और जिहाद का खतरा कम नहीं हुआ है, दिनों दिन यह बढ़ता जा रहा है, भारत भी इससे लगातार लड़ रहा है । हमास, आईएसआईएस और उनके समर्थक अभी भी सक्रिय हैं। The post नेतन्याहू की चेतावनी सही साबित हो रही- फ्रांस चरमपंथी इस्लाम के सामने झुक रहा है! appeared first on प्रवक्‍ता.कॉम - Pravakta.Com .

प्रवक्ता 21 Oct 2026 11:41 pm

योगी सरकार की नीतियों से प्रभावित फ्रांसीसी कंपनियों ने दिखाई रुचि, मक्का आधारित उद्योगों में निवेश करेगी रॉकेट

फ्रांसीसी बहुराष्ट्रीय कंपनी रॉकेट ने उत्तर प्रदेश में मक्का आधारित उद्योगों में निवेश की सहमति दी है, जबकि एडेइस ने भी औद्योगिक परियोजनाओं में रुचि दिखाई है। यह निवेश योगी सरकार की अनुकूल नीतियों और कृषि उत्पादों की उपलब्धता से आकर्षित होकर हुआ है, जिससे कृषि और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

जागरण 21 Oct 2026 6:55 pm

फ्रांस हिंसा पर दिल्ली के छात्रनेता बोले- इसे जायज नहीं कह सकते, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और उपद्रव में फर्क जरूरी

फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और लूटपाट पर दिल्ली के छात्र नेताओं ने चिंता जताई है। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अराजकता के बीच अंतर बताते हुए ऐसी गतिविधियों को अनुचित ठहराया है।

जागरण 21 Oct 2026 12:33 pm

पानीपत: पुराने कपड़ों से बने माल का होगा हिसाब, यूरोपीय खरीददार पूछेंगे धागे का प्रतिशत; डिजिटल रिकॉर्ड रखना जरूरी

पानीपत के कपड़ा उद्योग को अब अपने उत्पादों में इस्तेमाल हुए रिसाइकिल धागे का पूरा हिसाब रखना होगा। विदेशी खरीदार, खासकर यूरोपीय देशों से, तैयार कपड़े में रिसाइकिल और नए धागे की हिस्सेदारी जानना चाहते हैं।

जागरण 21 Oct 2026 8:12 am

दावा- CM मान को दिल्ली एयरपोर्ट पर 3 घंटे रोका:₹50,000 का चालान काटा, फ्रांस से लौटे थे; AAP बोली- केंद्र का अहंकार टूटना चाहिए

आम आदमी पार्टी (AAP) ने मंगलवार को दावा किया कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को दिल्ली एयरपोर्ट पर तीन घंटे रोका गया। AAP के मुताबिक, पेरिस से लौटने के बाद अधिकारियों ने मान का 50 हजार रुपए का चालान भी काटा। अधिकारियों ने इसके पीछे ऊपर से बहुत दबाव होने की बात कही। दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने X पर पोस्ट कर कहा कि जैसे दशहरे पर रावण का घमंड खत्म हुआ था, वैसे ही केंद्र सरकार का अहंकार टूटना चाहिए। मान पेरिस में 17 से 21 अक्टूबर तक चल रहे अंतरराष्ट्रीय फूड ट्रेड एग्जीबिशन SIAL पेरिस 2026 में शामिल हुए थे। केंद्र के फैसले के खिलाफ मान को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फ्रांस दौरे की परमिशन दी थी। दावा- सामान लोड होने के बाद काटा चालान पंजाब AAP के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने इस घटना को केंद्र की ओर से मान की विदेश यात्राओं की अनुमति बार-बार रोकने से जोड़ा। उन्होंने X पर वीडियो पोस्ट कर कहा कि अधिकारियों ने शुरू में सामान आने या जांच में देरी का हवाला दिया। जब मुख्यमंत्री मान का सामान उनकी गाड़ी में लोड होने वाला था और वे जाने वाले थे, तभी अधिकारियों ने यह कहते हुए चालान जारी कर दिया कि वे ऊपर से भारी दबाव में हैं। AAP का आरोप- मान को पेरिस में प्रोटोकॉल नहीं मिला AAP नेता बलतेज पन्नू ने केंद्र सरकार पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मान पंजाब के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा देने के लिए पेरिस में आयोजित SIAL फूड ट्रेड एग्जिबिशन में शामिल हुए थे। पन्नू के मुताबिक, हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद पेरिस में भारतीय कॉन्सुल जनरल मान से मिलने नहीं आए। केंद्र ने मान को जाने से मना किया, कोर्ट ने परमिशन दी भारत के विदेश मंत्रालय ने भगवंत मान को कट्टरपंथी गुटों के खतरे के हवाला देते हुए चलते फ्रांस दौरे की इजाजत नहीं दी थी। पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर केंद्र के फैसले को चुनौती दी। तर्क दिया कि दौरा राजनीतिक नहीं, बल्कि राज्य के व्यावसायिक और कृषि हितों को बढ़ाने के लिए है। पंजाब हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर को मान को फ्रांस जाने की अनुमति दे दी। केंद्र पर पंजाब के फंड रोकने का आरोप पन्नू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर पंजाब के विकास में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र ने किसानों को दिल्ली की सीमाओं पर डेढ़ साल तक रोके रखा, पंजाब की जायज रकम रोकी और मुख्यमंत्री की विदेश यात्राओं की अनुमति कम से कम 4 बार नहीं दी। AAP नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र को डर है कि विदेश यात्राओं से पंजाब में निवेश आएगा। --------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… पंजाब CM ने शाह से पूछा- 2007 से 2017 तक नशा बढ़ता रहा, तब पंजाब बचाने की याद क्यों नहीं आई पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे पर सवाल उठाए। मान ने 2007 से 2017 तक अकाली दल के साथ रही सरकार, किसान आंदोलन, नशा तस्करी, गैंगस्टरों और पंजाब के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाते हुए पूछा कि जब इन मामलों में कार्रवाई की जरूरत थी, तब केंद्र को पंजाब की याद क्यों नहीं आई। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 21 Oct 2026 7:52 am

जनाना ड्योढ़ी में गूंजेंगी मारवाड़, ईरान और यूरोप की वीरांगनाओं की दास्तानें

मेहरानगढ़ दुर्ग की ऐतिहासिक प्राचीरों के बीच जोधपुर रिफ में इतिहास की उन वीरांगनाओं, संतों, कवयित्रियों और रानियों के नाम रहेगा, जिनकी आवाजें आवाजें सदियों के शोर में कहीं दब गईं। 22 से 26 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस 19वें संस्करण में 25 अक्टूबर की शाम जनाना कोर्टयार्ड में एक अनूठा अंतरराष्ट्रीय संगीत संगम द बुक ऑफ क्वींस (फारसी में मलकेह नामेह) साकार होगा। जोधपुर रिफ द्वारा यह प्रोजेक्ट भारत में पहली बार (इंडियन प्रीमियर) प्रस्तुत किया जा रहा है। इसका सबसे खास पहलू यह है कि इस कॉन्सर्ट को विशेष रूप से मारवाड़ की महिलाओं और राजस्थान के इतिहास में उनके अप्रतिम योगदान को समर्पित किया गया है। कार्यक्रम मेहरानगढ़ दुर्ग के जनाना कोर्टयार्ड में होगा, जहां कभी रानियों और पटरानियों की मौजूदगी रहती थी। प्रोजेक्ट का कलात्मक नेतृत्व फारसी भाषी फ्रेंच ओपेरा गायिका कैमिली बोर्दे कर रही हैं। मूल रूप से यह यूरोप और ईरान के बीच महिला कला-संस्कृति का एक आख्यान था, लेकिन जोधपुर रिफ के साथ जुड़ते ही इसमें भारतीय शास्त्रीय और लोक परंपराओं को शामिल किया गया। अब यह तीन अलग-अलग संस्कृतियों—यूरोप के प्रारंभिक शास्त्रीय संगीत, ईरान की फ़ारसी परंपरा और भारत के आध्यात्मिक संगीत का अनूठा संगम बन चुका है। Cb breaking मीराबाई से लेकर हिल्डेगार्ड तक: 8 सदियों की महिला चेतना एक मंच पर द बुक ऑफ क्वींस में केवल संगीत नहीं, बल्कि मध्यकाल से लेकर आधुनिक युग तक की महिलाओं के प्रेम, भक्ति, विरह और स्वाभिमान की कहानियों को धुनों में पिरोया गया है। इसमें राजस्थान की भक्त शिरोमणि मीराबाई, कश्मीर की शैव संत ललद्यद (लाल देद) और कर्नाटक की अक्का महादेवी के पदों को फ़ारसी साहित्य की पहली महिला कवयित्री राबिया बल्खी, शाहनामा की योद्धा गोरदाफ़रीद, 12वीं सदी की जर्मन संत हिल्डेगार्ड ऑफ बिंगेन और इटली की संगीतकार बारबरा स्त्रोज़ी की रचनाओं के साथ आमने-सामने रखा गया है। खास जुगलबंदी: जब टकराएंगे थार का कमायचा और पर्शियन कमानचे इस प्रस्तुति में पूरब और पश्चिम के बेहद दुर्लभ पारंपरिक वाद्ययंत्र एक साथ सुर छेड़ेंगे। थार रेगिस्तान के युवा कमायचा वादक कोडे खान मांगणियार और प्रसिद्ध हिंदुस्तानी व सूफ़ी गायिका स्मिता बेल्लूर भारतीय सुरों का प्रतिनिधित्व करेंगे। वहीं ईरान के प्राचीन वाद्य ‘’’’कमानचे’’’’ पर सईद कामजू, तार पर मरियम ताज़देह और ताल वाद्य तोम्बक व डफ पर कनाडाई-ईरानी ड्रमर हामिन होनारी संगत करेंगे।

दैनिक भास्कर 21 Oct 2026 5:30 am

विचार: बड़े संकट की ओर बढ़ता यूरोप

यूरोप की समस्या केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे आर्थिक और राजनीतिक कारण भी हैं।

जागरण 20 Oct 2026 10:47 pm

अखिलेश यादव को भारत नहीं फ्रांस दिख रहा, राहुल गांधी से मिल रही प्रेरणा: दिनेश प्रताप सिंह

अखिलेश यादव को भारत नहीं फ्रांस दिख रहा, राहुल गांधी से मिल रही प्रेरणा: दिनेश प्रताप सिंह

समाचार नामा 20 Oct 2026 6:28 pm

फ्रांस के प्रदर्शनों के बाद दिल्ली में एजेंसियां अलर्ट, JNU-DU समेत दिल्ली के कई शिक्षण संस्थान रडार पर

फ्रांस में भड़के छात्र आंदोलन और विरोध प्रदर्शनों के बाद दिल्ली पुलिस समेत केंद्रीय एजेंसियां अलर्ट पर हैं। जेएनयू, डीयू जैसे शिक्षण संस्थानों और सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

जागरण 20 Oct 2026 2:02 pm

शशि थरूर का किरेन रिजिजू को जवाब, बोले- भारत न बांग्लादेश है, न फ्रांस; SIR वापस लेने की मांग

किरेन रिजिजू के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने कहा कि भारत की परिस्थितियों की तुलना फ्रांस या बांग्लादेश में हुई घटनाओं से नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि भारत बांग्लादेश नहीं है और भारत फ्रांस भी नहीं है। मुझे ये तुलना खास तौर पर प्रासंगिक नहीं लगती।”

देशबन्धु 20 Oct 2026 12:07 pm

मोहन भागवत बोले- भारत में भी फ्रांस और बांग्लादेश जैसे हालात बनाने की कोशिश, राजनीति से प्रेरित आंदोलन गलत

RSS प्रमुख ने कहा कि भारत की सभ्यता और सनातन दृष्टिकोण ने समाज को विविधताओं के बावजूद एकजुट रखने का काम किया है। संत रविदास की 650वीं जयंती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संत रविदास ने कठिन परिस्थितियों में स्वधर्म निष्ठा, भक्ति और सामाजिक समरसता का संदेश दिया था।

देशबन्धु 20 Oct 2026 11:12 am

जागरण संपादकीय: संकट में यूरोप

यूरोप और पश्चिम के अन्य देश जिन समस्याओं से घिरे हैं, उनके लिए वही अधिक जिम्मेदार हैं। ये देश हिंसक प्रदर्शनों को इसलिए नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि लोगों की जायज चिंताओं के बहाने अराजकता फैलाने वालों को कुछ ऐसी शक्तियां भड़काने में लगी हुई हैं, जो अपने संकीर्ण हितों की पूर्ति करना चाहती हैं। इनमें इस्लामिस्टों और कम्युनिस्टों के गठजोड़ की भूमिका कहीं अधिक दिखाई दे रही है।

जागरण 18 Oct 2026 11:02 pm

France Protest Update News: मॉल लूटे, गाड़ियां फूंकी... फ्रांस में बेकाबू हुई हिंसा| Emmanuel Macron

France Protest Update News: फ्रांस में बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत के खिलाफ प्रदर्शन ने कई जगह हिंसक रूप ले लिया। पेरिस समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं से हालात बिगड़ गए।

लाइव हिन्दुस्तान 18 Oct 2026 2:46 pm

फ्रांस की हिंसा पर बोलीं कंगना रनौत, रिजीम चेंज पर भी दिया बयान

विपक्ष की ओर से सत्ता परिवर्तन को लेकर दिए गए बयानों पर बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने कहा, 'इस तरह की ओछी हरकतें देश को लगातार यह याद दिलाती हैं कि एक मजबूत नेतृत्व की कितनी जरूरत है.'

आज तक 18 Oct 2026 10:30 am

फ्रांस के सुपरमार्केट्स पर साइबर अटैक:480 से ज्यादा दुकानों के फ्रिज 50°C तक गर्म, खाना खराब हुआ, कई जगह आग लगी

फ्रांस में सैकड़ों सुपरमार्केट्स के रेफ्रिजरेशन सिस्टम पर सोमवार को बड़ा साइबरअटैक हुआ। इससे 480 से ज्यादा दुकानों के फ्रिज और फ्रीजर का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैकरों ने कई स्टोर्स के रेफ्रिजरेशन सिस्टम को डीफ्रॉस्टिंग मोड में डाल दिया। इससे ताजा और फ्रोजन खाना खराब हो गया। कई स्टोर्स में आग भी लग गई। फ्रांस की बड़ी रिटेल कंपनियों ने इसे अब तक का ऐसा पहला और बेहद गंभीर हमला बताया। प्रधानमंत्री ने जांच के आदेश दिए फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने नेशनल साइबरसिक्योरिटी एजेंसी ANSSI को जांच के आदेश दिए हैं। फ्रांस दूसरे यूरोपीय देशों के साथ मिलकर यह भी जांच कर रहा है कि वहां और कंपनियां प्रभावित हुई हैं या नहीं। पेरिस प्रॉसिक्यूटर ऑफिस ने इसे बड़े स्तर का हमला बताया। ऑफिस के मुताबिक, पूरे फ्रांस में कई बड़े फूड रिटेलर्स के इंटरनेट से जुड़े फ्रिजों को निशाना बनाया गया। आखिर इन फ्रिजों का तापमान कैसे बढ़ाया गया? सुपरमार्केट में फ्रिज और फ्रीजर को आमतौर पर कंट्रोल पैनल से चलाया जाता है। ये पैनल पूरे स्टोर के ठंडक वाले सिस्टम को कंट्रोल करते हैं। इंटरनेट से जुड़े होने के कारण मेंटेनेंस करने वाली कंपनियां दूर बैठकर भी इनकी सेटिंग बदल सकती हैं। अगर कोई हैकर इस सिस्टम तक पहुंचने में कामयाब हो जाए, तो वह फ्रिज और फ्रीजर की सेटिंग बदल सकता है। ऐसा करने के लिए हैकर सिस्टम की सुरक्षा में मौजूद किसी कमजोरी का फायदा उठाता है। इस तरह वह फ्रिज और फ्रीजर की ठंडक कम कर सकता है या डीफ्रॉस्टिंग शुरू कर सकता है। डीफ्रॉस्टिंग वह प्रक्रिया है, जिसमें फ्रिज या फ्रीजर में जमी बर्फ पिघलाई जाती है। डेनमार्क की कंपनी के फ्रिज कंट्रोलिंग सॉफ्टवेयर में खराबी प्रधानमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी के मुताबिक, फ्रांस की साइबर सिक्योरिटी एजेंसी ने डेनमार्क की कंपनी डैनफॉस के सॉफ्टवेयर में एक कमजोरी की पहचान की है। इसी कंपनी के बनाए सिस्टम से सुपरमार्केट के फ्रिज और फ्रीजर कंट्रोल होते हैं। डैनफॉस ने कहा कि उसे फ्रांस में फ्रिज और फ्रीजर के सिस्टम से जुड़ी कुछ घटनाओं की जानकारी है। कंपनी के मुताबिक, इनमें सॉफ्टवेयर का पुराना वर्जन इस्तेमाल हो रहा था। कंपनी ने बताया कि वह ग्राहकों को लंबे समय से सॉफ्टवेयर अपडेट रखने और पुराने उपकरण बदलने की सलाह देती रही है। इससे पहले 9 अगस्त को साइबर सिक्योरिटी कंपनी क्लैरोटी ने डैनफॉस के सिस्टम में मौजूद कुछ कमजोरियों पर एक रिपोर्ट जारी की थी। इसमें बताया गया था कि इन कमजोरियों का फायदा उठाकर हमलावर बिना सही पहचान जांच के सिस्टम तक पहुंच सकते हैं। फ्रांस के रिटेल कारोबार से जुड़े संगठन FCD ने डैनफॉस से इस मामले में पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। रिटेल कंपनियां बोलीं- कई करोड़ यूरो का नुकसान अभी तक पूरे रिटेल सेक्टर को हुए नुकसान का कुल आंकड़ा सामने नहीं आया है। हालांकि, फ्रांस की रिटेल कंपनी इंटरमार्शे के CEO थिएरी कोटियार ने कहा कि इस हमले से देशभर में एक ही दिन में कई करोड़ यूरो का नुकसान हो सकता है। इंटरमार्शे ने AFP को बताया कि प्रभावित स्टोर को खराब हुए सभी ताजा और फ्रोजन प्रोडक्ट फेंकने पड़ेंगे। वहीं, दूसरी कंपनी कोऑपरेटिव यू के CEO डोमिनिक शेल्शर ने कहा कि रविवार रात से ही कंपनी के रेफ्रिजरेशन सिस्टम में दिक्कतें आ रही थीं। उन्होंने बताया कि ताजा सामान को सुरक्षित रखने और लोगों तक खाने-पीने की चीजें पहुंचाने वाले सिस्टम को निशाना बनाना बेहद गंभीर है। उन्होंने इसे अस्वीकार्य बताया और कहा कि ऐसा हमला पहले कभी नहीं हुआ। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… इजराइल ने इंडोनेशियाई पालयट के कारण विमान उतरने नहीं दिया: फ्लाइट वापस लौटी; फ्लाईदुबई हादसे के बाद 11 देशों के पायलट पर रोक लगाई इथियोपियन एयरलाइंस के एक कार्गो विमान को इजराइल में उतरने की मंजूरी नहीं मिली। इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा से आए इस विमान को बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा। इजराइल ने यह फैसला पायलट के इंडोनेशियाई नागरिक होने के कारण लिया। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 13 Oct 2026 10:05 am

स्कॉलरशिप: यूरोप से करें मास्टर डिग्री, 37 नए प्रोग्राम में प्रवेश का मौका, 1.5 लाख+ तक की मदद

इरास्मस मुंड्स जॉइंट मास्टर्स स्कॉलरशिप के तहत यूरोप के 37 नए मास्टर प्रोग्राम में प्रवेश का मौका है। चयनित छात्रों को 24 महीने तक हर माह 1,400 यूरो तक की आर्थिक सहायता मिल सकती है।

अमर उजाला 8 Oct 2026 11:02 am

फ्रांस के स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट में ट्रंप का बड़ा दावा

फ्रांस में स्कूल और यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट अब देश की राजनीति और अमेरिका तक पहुंच गया है. शुरुआत शिक्षकों, नर्स और स्टाफ की कमी को लेकर हुई, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे बड़े पैमाने पर प्रवासन और इस्लाम से जोड़ दिया. वहीं फ्रांसीसी अधिकारियों और छात्र संगठनों के मुताबिक आंदोलन की शुरुआती मांगें स्कूलों की सुविधाओं और कर्मचारियों से जुड़ी हैं. सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो और भ्रामक दावों ने भी विवाद बढ़ाया है.

आज तक 7 Oct 2026 5:52 pm

फ्रांस में छात्र प्रदर्शन: अबतक 5 हजार गिरफ्तार, इनमें 87% नाबालिग

फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के खिलाफ छात्रों का गुस्सा सड़कों पर है. इस आंदोलन में गिरफ्तार किए गए 5,000 से ज्यादा लोगों में 87 प्रतिशत नाबालिग हैं. स्कूलों में शिक्षकों की कमी, खराब इमारतों और बुनियादी सुविधाओं की कमी से छात्र परेशान हैं. प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस कार्रवाई ने सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.

आज तक 7 Oct 2026 5:51 pm

न्यूट्रिनो की खोज के लिए फ्रांसिस हाल्जेन को मिला फिजिक्स नोबेल पुरस्कार, अंटार्कटिका के IceCube लैब से किया कमाल

फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार 2026 प्रोफेसर फ्रांसिस हाल्जेन को अंटार्कटिका में आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी की स्थापना और ब्रह्मांडीय न्यूट्रिनो की खोज के लिए दिया गया है।

लाइव हिन्दुस्तान 6 Oct 2026 4:06 pm

श्वेता तिवारी के लिए यूरोपियन विदेशी दूल्हा ढूंढेंगी मल्लिका, बनाया प्लान

‘द ट्रेटर्स 2’ में श्वेता तिवारी की लव लाइफ पर मल्लिका शेरावत ने मजेदार बात कही. मल्लिका बोलीं कि वह श्वेता के लिए एक अच्छा यूरोपियन लड़का ढूंढेंगी.

आज तक 20 Aug 2026 7:56 pm

जलवायु परिवर्तन का संकट झेलने लगा यूरोप

यूरोप में जो लोग समझते थे कि जलवायु परिवर्तन भविष्य की पीढ़ियों के लिए समस्या है उन्हें इस बार की गर्मियों ने सच्चाई बता दी है. जलवायु परिवर्तन के महंगे और जीवन बदलने वाले आर्थिक नतीजे यूरोप को अपनी चपेट में ले चुके हैं

देशबन्धु 11 Aug 2026 12:15 am

यूरोप में भीषण गर्मी का कहर... इटली में रेड अलर्ट, ऑस्ट्रिया में तापमान का टूटा रिकॉर्ड

यूरोप में भीषण गर्मी और लू ने कई देशों के तापमान रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. इटली सरकार ने 27 प्रमुख शहरों को रेड अलर्ट पर रखा है. ऑस्ट्रिया में तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ज्यादा तापमान है. इस गर्मी और सूखे का असर बिजली उत्पादन, परिवहन और पर्यटन पर भी पड़ा है. पर्यावरणविद ग्लोबल वार्मिंग को इस स्थिति का मुख्य कारण मानते हैं.

आज तक 6 Aug 2026 6:41 pm

भारत की स्लीपर बस का फैन हुआ विदेशी शख्स, बोला- ऐसी सुविधा तो यूरोप में भी नहीं मिलती

भारत की स्लीपर बस का फैन हुआ विदेशी शख्स, बोला- ऐसी सुविधा तो यूरोप में भी नहीं मिलती

समाचार नामा 5 Aug 2026 9:50 pm

'यूरोप के दरवाजे' में घुस रहे 57 अफ्रीकियों को स्पेन ने क्यों मारा?

स्पेन की पुलिस बॉर्डर पर अलर्ट खड़ी है. पुलिस की गोलियों से अंदर घुसने की कोशिश कर रहे कई प्रवासियों की मौत हो चुकी है. 'यूरोप का दरवाजा' कहा जाने वाला स्यूटा शहर में प्रवासियों की बाढ़ ने इस शहर में कानून-व्यवस्था का संकट खड़ा कर दिया है.

आज तक 31 Jul 2026 7:58 pm

फ्रांस में पहली बार दिखा आग का बादल आखिर है क्या?

अभूतपूर्व जंगल की आग से जूझते फ्रांस में पहली बार फायर क्लाउड यानी आग के बादल बनते देखा गया है. आखिर आग के बादल होते क्या हैं और इनका क्या असर होता है. फ्रांस में इसे देखने के बाद क्यों चिंता बढ़ रही है

देशबन्धु 30 Jul 2026 9:33 pm

60 की उम्र में मिलिंद सोमन ने रचा इतिहास, यूरोप से अफ्रीका तक तैरकर पार किया स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर

अभिनेता और फिटनेस आइकन मिलिंद सोमन ने एक बार फिर अपनी अद्भुत सहनशक्ति और फिटनेस का परिचय दिया है। 60 साल की उम्र में मिलिंद सोमन ने स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर को तैरकर पार करने का एक कठिन और साहसी कारनामा कर दिखाया है। मिलिंद ने यूरोप और अफ्रीका के बीच ...

वेब दुनिया 6 May 2026 11:49 am

फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन, 88 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

Alain Delon passes away: 'द लेपर्ड' और 'रोक्को एंड हिज ब्रदर्स' जैसी सुपर हिट फिल्मों में अभिनय का जौहर दिखाने वाले फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन हो गया है। एलेन डेलन ने 88 वर्ष की उम्र में आखिरी सांस ली। अभिनेता के पारिवारिक सूत्रों ने ...

वेब दुनिया 18 Aug 2024 5:40 pm

इटली से फ्रांस तक समंदर के बीच होगा Anant-Radhika का दूसरा प्री वेडिंग फंक्शन, जानिए मेहमानों से लेकर ड्रेस कोड तक सबकुछ

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समाचार नामा 28 May 2024 10:30 am

Heeramandi के बाद अब Cannes में अपनी 'गजगामिनी चाल' दिखाएंगी Aditi Rao Haidari, फ्रांस के लिए रवाना हुई बिब्बोजान

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समाचार नामा 21 May 2024 2:45 pm

यूरोप से लेकर Sri Lanka तक इन देशो में शूट हुई है Surya और Bobby Deol की फिल्म Kanguva, बजट उड़ा देगा होश

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मनोरंजन नामा 29 Apr 2024 9:00 pm