अब डेस्टिनेशन वेडिंग और बिग फैट वेडिंग ट्रेंड बन चुका हैं, जिसमें लाखों-करोड़ों खर्च होता है। वहीं उदयपुर के बिजनेसमैन ने देसी अंदाज और में अपने गांव मालपुरा (टोंक) में शादी की। दुल्हन पास के डिग्गी की है। इस शादी में भारत जापान, अमेरिका, फ्रांस, ब्राजील, कजाकिस्तान, रूस, चाइना, यूक्रेन, अर्जेंटीना समेत 10 देशों से मेहमान आए। मेहमानों का स्वागत पारंपरिक तरीके से किया गया। विदेशी मेहमानों ने भी देसी संस्कृति और शादी के रीति-रिवाजों को अपने कैमरे में कैद किया। प्रधानमंत्री ने भी एक पत्र के जरिए वर-वधु को आशीर्वाद भेजा। शादी में शामिल मेहमानों की PHOTOS विदेशी मेहमानों ने 4 दिन रहकर शादी की रस्मों को देखामालपुरा (टोंक) के रहने वाले अंकित जैन का उदयपुर में स्टार्टअप एग्री स्टार्टअप ईएफ पॉलीमर है। अंकित जैन की 24 जनवरी को डिग्गी मालपुरा (टोंक) के पास डिग्गी की रहने वाली अदिति से शादी हुई है। अदिति ने पोस्ट ग्रेजुएशन किया और अब पीएचडी कर रही है। अंकित ने अपनी शादी में भारत समेत जापान, अमेरिका, फ्रांस, ब्राजील, कजाकिस्तान, रूस, चाइना, यूक्रेन में अपने दोस्त और परिचितों को भी इनवाइट किया था। शादी में शामिल होने विदेशी मेहमान भी उनके गांव मालपुरा में 21 जनवरी को ही आ गए थे। वे 24 जनवरी को शादी के दिन तक रूके। विदेशी ट्रैक्टर-ट्रॉली में बैठकर बारात में गए विदेशी मेहमानों ने गांव की देसी शादी, यहां की परंपरा और संस्कृति और मेहमान नवाजी का लुत्फ उठाया। बारात कार सहित ट्रैक्टर-ट्रॉली में गई। विदेशी युवक-युवती भारतीय परिधान पहनकर ट्रैक्टर-ट्रॉली में ही बैठकर लड़की वालों के घर गए। ट्रैक्टर-ट्रॉली में ही बैठकर डांस किया। विदेशी लड़कों ने कुर्ता-पायजामा और लड़कियों ने सलवार-सूट पहना। विदेशियों का साफा पहनाकर स्वागत किया गया। मेहमानों का राजस्थानी जायका परोसाविदेशी मेहमानों को खाने में राजस्थानी जायका परोसा गया। खींचड़ा, मक्की के ढोकले, चूरमा, मटर की बाटी, लपसी, मक्की की रोटी, कड़ी और सरसो का साग, दाल-बाटी, गेंहू, मक्का और बेसन तीन प्रकार का चूरमा परोसा गया। मिठाई में काजू अखरोट हलवा, मालपुआ, चीकू रस मलाई, दूध के लडडू, इमरती आदि रहे। चारों दिन अलग-अलग मैन्यू रहा। स्टार्टअप से देश-दुनिया में बनाया नामअंकित ने अपनी पढ़ाई उदयपुर के सरकारी प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय (सीटीएई) कॉलेज में पूरी की। 2017 से 2021 तक यहां पर एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में बीटेक पूरी की। एक साल पहले एग्री स्टार्टअप ईएफ पॉलीमर ने फोर्ब्स इंडिया के नवंबर एडिशन के कवर पेज पर जगह बनाई थी। इस स्टार्टअप को फोर्ब्स इंडिया ने एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के सबसे इनोवेटिव टेक स्टार्टअप में शामिल किया है। यह स्टार्टअप अपने जैविक उत्पाद ‘फसल अमृत’ के जरिए किसानों को कम पानी में बेहतर फसल उत्पादन का स्थायी समाधान दे रहा है। राइजिंग राजस्थान में ईएफ पॉलीमर स्टार्टअप को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सराहा। ईएफ पॉलीमर के को-फाउंडर, सीबीडीओ अंकित जैन मालपुरा के रहने वाले है। ईएफ पॉलीमर भारत, जापान, अमेरिका, फ्रांस, ब्राजील, कजाकिस्तान, रूस, चाइना, यूक्रेन, अर्जेंटीना समेत 10 देशों में कार्यरत हैं। अंकित ने कहा कि बड़ी-बड़ी रॉयल वेडिंग्स की चर्चा दुनिया में जरूर होती है लेकिन हमारी परंपरा और संस्कृति गांव की शादियों में होती है। इसलिए उन्होंने भी अपने पैतृक गांव टोंक के डिग्गी मालपुरा से शादी का फैसला किया।
भारत–यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स’ दुनिया की एक-चौथाई अर्थव्यवस्था और एक-तिहाई वैश्विक व्यापार को जोड़ने वाला ऐतिहासिक समझौता है। यह करार भारत और यूरोप के लिए नए आर्थिक अवसर और वैश्विक व्यापार में बड़ा बदलाव ला सकता है।
यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन के सम्मान में मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में डिनर रखा गया। कार्यक्रम में यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत ग्लोबल राजनीति में टॉप पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा डेवलपमेंट है जिसका यूरोप स्वागत करता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में, भारत और यूरोप की सोच और नजरिए एक जैसे हैं। हमारा मानना है कि वैश्विक चुनौतियों का सामना सिर्फ सामूहिक प्रयासों से ही किया जा सकता है कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजित डोभाल व कई अन्य बड़ी हस्तियां शामिल हुईं। उर्सुला ने और क्या कहा… यूरोपियन काउंसिल प्रेसिडेंट एंटोनियो बोले- आज के नतीजों पर गर्व राष्ट्रपति भवन में आयोजित डिनर में यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा ने कहा, तेजी से बदलती दुनिया में, हमारी रणनीतिक साझेदारी बड़ा आर्थिक और भू-राजनीतिक महत्व रखती है। मुझे आज के शिखर सम्मेलन के नतीजों पर गर्व है। उन्होंने कहा कि हमने ठोस प्रगति की है और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, सुरक्षा और डिफेंस पार्टनर्शिप और 2030 के लिए संयुक्त रणनीतिक एजेंडा के साथ वैश्विक मुद्दों पर सहकारी नेतृत्व का एक उदाहरण पेश किया है। 7 तस्वीरों में देखिए राष्ट्रपति भवन में डिनर… डिनर मेन्यू में हिमालयी डिशेस पर फोकस राष्ट्रपति भवन में आयोजित डिनर में मेन फोकस पहाड़ी डिशेस पर रहा। मेन्यू में याक चीज से लेकर गुच्छी जैसी चीजें सर्व की गईं। डिनर की शुरुआत जाखिया आलू के साथ हरी टमाटर की चटनी और मेआ लून और सफेद चॉकलेट के साथ झांगोरा की खीर जैसे खाने से हुई। इसके बाद सूप कोर्स में सुंदरकला थिचोनी सर्व की गई। मेन कोर्स में खसखस, भुने हुए टमाटर की चटनी और हिमाचली स्वर्णु चावल के साथ सोलन मशरूम शामिल सर्व किए गए। इसके साथ ही राई के पत्ते, कश्मीरी अखरोट, भुने हुए टमाटर और अखुनी से बनी तीन तरह की चटनी रखी गई थी। डेजर्ट में हिमालयी रागी और कश्मीरी सेब का केक डेजर्ट में हिमालयी रागी और कश्मीरी सेब का केक सर्व किया गया। इसमें तिमरू और सी बकथॉर्न क्रीम, खजूर और कच्चे कोको के साथ कॉफी कस्टर्ड और हिमालयी शहद के साथ परोसा गया परसिमन शामिल था। ये डिशेस शेफ प्रतीक साधु और कमलेश नेगी के सहयोग से तैयार किए गए थे। ------------- ये खबर भी पढ़ें… भारत-यूरोपियन यूनियन में 18 साल बाद ट्रेड डील:इम्पोर्टेड लग्जरी कारों पर टैरिफ 110% से घटकर 10%, प्रीमियम शराब पर 150% की जगह 20% टैक्स भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच 18 साल की लंबी बातचीत के बाद मंगलवार को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) हो गया है। भारत और यूरोपियन यूनियन के नेताओं ने मंगलवार को 16वें भारत-EU समिट के दौरान इसका ऐलान किया। इस डील के बाद भारत में इम्पोर्ट होने वाली यूरोपीय कारें जैसे कि BMW, मर्सिडीज पर लगने वाले टैक्स को 110% से घटाकर 10% कर दिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…
एफटीए से भारतीय कपड़ा, मसाले, गहने-जेवरातों को यूरोपीय संघ में मिलेगा शुल्क मुक्त प्रवेश
नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार संधि (एफटीए) के तहत 97 प्रतिशत भारतीय उत्पादों को ईयू के देशों में प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश मिलेगा, जिनमें भारतीय कपड़ा, मसाले, गहने-जेवरातों और कुछ समुद्री उत्पादों पर शून्य सीमा शुल्क का भी प्रावधान है। दोनों पक्षों ने मंगलवार को एफटीए को अंतिम […] The post एफटीए से भारतीय कपड़ा, मसाले, गहने-जेवरातों को यूरोपीय संघ में मिलेगा शुल्क मुक्त प्रवेश appeared first on Sabguru News .
भारत और यूरोपीय संघ के करीब आने से क्यों घबराया अमेरिका? जाने भारत का नया गेमचेंजर प्लान
भारत और यूरोपीय संघ ने ऐतिहासिक 'मुक्त व्यापार समझौते' (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे 'सभी समझौतों की जननी' कहा जा रहा है। वैश्विक जीडीपी के 25% हिस्से वाली इस डील से कार, शराब और चॉकलेट सस्ते होंगे। डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के बीच यह समझौता अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। जानें इस महा-समझौते के सभी महत्वपूर्ण पहलू और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव।
भारत में अब यूरोप से इम्पोर्ट होने वाली कारें सस्ती हो जाएंगी। भारत सरकार ने यूरोप से आने वाली कारों पर लगने वाले इम्पोर्ट ड्यूटी को 110% से घटाकर 10% कर दिया है। हालांकि, सरकार ने इसके लिए 2.5 लाख गाड़ियों की सालाना लिमिट तय की है। ये फैसला भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का हिस्सा है। इस एग्रीमेंट का ऐलान आज (27 जनवरी) को भारत-EU समिट में किया गया। करीब 20 साल चली लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने इस समझौते को अंतिम रूप दिया है। इसे 2027 तक लागू किया जाएगा। भारत में मर्सिडीज बेंज और BMW की ज्यादातर पॉपुलर कारें पहले से ही लोकल असेंबली के जरिए बनती हैं। यानी पार्ट्स इम्पोर्ट करके यहां जोड़कर बनाई जाती हैं। इन पर इंपोर्ट ड्यूटी केवल 15-16.5% तक लगती है, इसलिए EU के साथ FTA होने से इनकी कीमत में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। ऑडी, BMW और मर्सिडीज सस्ती होंगी भारत और यूरोपीयन यूनियन की ओर से जारी स्टेटमेंट के अनुसार, कारों पर टैरिफ धीरे-धीरे 110% से घटाकर 10% तक लाया जाएगा। जिससे यूरोपीय कंपनियां जैसे ऑडी, मर्सिडीज-बेंज और BMW हाई-एंड या स्पेशल मॉडल्स भारतीय बाजार में सस्ते हो जाएंगे। लेकिन यह छूट असीमित नहीं होगी। सरकार ने एक कोटा सिस्टम लागू किया है, जिसके तहत साल भर में केवल 2.50 लाख गाड़ियों पर ही यह कम टैक्स लागू होगा। वहीं इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को पहले 5 साल ड्यूटी कट से बाहर रखा जाएगा, ताकि घरेलू प्लेयर्स जैसे टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा को प्रोटेक्शन मिले। उसके बाद उन पर भी कट लागू हो सकता है। अभी कितना टैक्स लगता है? दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है भारत बिक्री के मामले में भारत इस समय अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार मार्केट है। हालांकि EU मैन्युफैक्चरर्स का भारत के 44 लाख यूनिट सालाना कार बिक्री वाले बाजार में शेयर 4% से कम है। इसके बावजूद भारत ने अपने ऑटो सेक्टर को काफी सुरक्षित (प्रोटेक्टेड) रखा हुआ था। हाई टैक्स की वजह से विदेशी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में अपनी महंगी कारें बेचना मुश्किल होता था। अब इस डील के बाद मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी और फॉक्सवैगन जैसी कंपनियों के लिए भारत में अपना दायरा बढ़ाना आसान हो जाएगा। 190 अरब डॉलर पार कर चुका है आपसी व्यापार साल 2024-25 में कुल व्यापार 190 अरब डॉलर (करीब 15.80 लाख करोड़ रुपए) के पार निकल चुका है। इस दौरान भारत ने यूरोपीय देशों को 75.9 अरब डॉलर का सामान और 30 अरब डॉलर की सर्विस एक्सपोर्ट की। वहीं, यूरोप ने भारत को 60.7 अरब डॉलर का सामान और 23 अरब डॉलर की सर्विस भेजी। इस एग्रीमेंट के बाद दोगुना होने की उम्मीद है। समझौते से सामान और सेवाओं पर टैरिफ कम होंगे, जिससे व्यापार आसान बनेगा। दोनों पक्ष एक रक्षा समझौता और 2026-2030 के लिए रणनीतिक योजना भी घोषित करेंगे। ये खबर भी पढ़ें अमेरिकी राजदूत बोले- भारत से जरूरी कोई देश नहीं:कल ट्रेड डील पर बात होगी; अगले साल भारत आ सकते हैं ट्रम्प भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार को नई दिल्ली में पदभार संभाला। उन्होंने कहा कि अमेरिका के लिए भारत से ज्यादा जरूरी कोई देश नहीं है। उन्होंने ट्रेड डील को लेकर कहा कि कल यानी मंगलवार को दोनों देशों के अधिकारियों के बीच इसे लेकर फोन पर बात होने वाली है। पूरी खबर पढ़ें भारत में UK की व्हिस्की-कारें सस्ती होंगी:दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन, जानिए और किन चीजों के दामों पर असर होगा भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर सस्ते होंगे। करीब 3 साल में 14 राउंड की बातचीत के बाद 24 जुलाई को भारत-यूके ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया। अब भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का ऐतिहासिक यूरोपीय संघ (EU) दौरा! ब्रसेल्स में सैन्य तकनीक हस्तांतरण, हिंद-प्रशांत समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी रणनीति पर होंगे बड़े समझौते। 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत यूरोपीय निवेश और साझा रक्षा विकास पर टिकी दुनिया की नजरें। जानिए भारत-EU रक्षा संबंधों के इस नए अध्याय की पूरी इनसाइड स्टोरी और इसका वैश्विक प्रभाव।
ट्रंप के फैसलों ने बढ़ाया US-EU संबंधों में तनाव, यूरोपीय संघ अब क्यों भारत से लगाए बैठा है उम्मीद?
India EU Free Trade Agreement:ट्रंप के शासन में अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के संबंधों में तनाव बढ़ता जा रहा है. अमेरिका की टैरिफ धमकियां और ग्रीनलैंड विवाद ने यूरोप को इस संबंध में असुरक्षित महसूस कराया है. जिसके कारण अब EU स्थिर और भरोसेमंद साझेदार की तलाश में है और भारत इस स्थिति में एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरा है.
भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच आज मुक्त व्यापार समझौता यानी FTA का ऐलान हो सकता है। इससे 200 करोड़ लोगों का साझा मार्केट तैयार होगा, जो दुनिया की 25% GDP कवर करेगा। भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन दोनों ने इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा है। इसे डोनाल्ड ट्रम्प के अनाप-शनाप टैरिफ का जवाब माना जा रहा है। क्या है ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’, इस समझौते से आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा और क्या इससे ट्रम्प के टैरिफ की भरपाई हो पाएगी; भास्कर एक्सप्लेनर में ऐसे 6 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: भारत-EU के बीच होने वाली ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ क्या है? जवाबः जब दो या ज्यादा देश आपस में ये तय कर लेते हैं कि वे एक-दूसरे के सामान और सेवाओं पर टैक्स, पाबंदियां और रुकावटें कम या खत्म कर देंगे, तो उसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA कहते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो FTA व्यापार का ‘टोल फ्री हाईवे’ है। बीते 4 साल में भारत 7 FTA साइन कर चुका है, जिसमें यूके, ओमान, न्यूजीलैंड शामिल हैं। अब 27 जनवरी को यूरोपियन यूनियन के साथ भी FTA की घोषणा हो सकती है। भारत-EU के बीच होने वाली ट्रेड डील 3 बड़ी वजहों से ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कही जा रही है… लंदन के इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट की सीनियर एनालिस्ट सुमेधा दासगुप्ता के मुताबिक, ‘मौजूदा हालातों की वजह से व्यापार डगमगा रहा है। ऐसे में भारत और EU को भरोसेमंद ट्रेड पार्टनर की जरूरत है। भारत अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करना चाहता है। जबकि EU चीन पर निर्भरता घटाना चाहता है, जिसे वह भरोसेमंद नहीं मानता।’ सवाल-2: भारत और EU इस डील पर साइन करने के लिए कैसे राजी हुए? जवाब: भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच ट्रेड डील को लेकर जून 2007 में बातचीत शुरू हुई। तब इसे व्यापक व्यापार और निवेश समझौता यानी BTIA कहा गया। तब भारत की तरफ से इसकी अगुवाई प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कर रहे थे। 15 दौर की बैठक हुई, लेकिन 2013 में BTIA की बातचीत पूरी तरह थम गई। EU चाहता था कि उसके 95% से ज्यादा एक्सपोर्ट पर टैरिफ खत्म किया जाए, जबकि भारत सिर्फ 90% तक ही तैयार था। इसके अलावा इन 5 बड़ी वजहों से भी डील ठंडे बस्ते में चली गई… जून-जुलाई 2022 में भारत-EU के बीच FTA की बात दोबारा शुरू हुई। तब से लेकर अक्टूबर 2025 तक दोनों पक्षों के अधिकारियों ने 14 मीटिंग्स की। इन बैठकों में 2007 से 2013 तक तय हुए मुद्दों पर भी चर्चा हुई। ये तय हुआ कि… भारत के कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने पिछले हफ्ते बताया कि भारत और EU के बीच डील के 24 में से 20 चैप्टरों पर बात पूरी हो चुकी है। रिपोर्ट्स हैं कि 27 जनवरी को दिल्ली में होने वाले 16वीं भारत-यूरोपीय यूनियन समिट दोनों पक्ष FTA साइन कर सकते हैं। सवाल-3: इस समझौते से भारत को क्या फायदा होगा? जवाब: भारत ने 2025 में EU देशों को 6.8 लाख करोड़ रुपए का सामान बेचा। वहीं EU से 5.5 लाख करोड़ रुपए का सामान खरीदा। भारत-EU की ट्रेड डील से भारत के इन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा… यूरोप में भारतीय कपड़े ज्यादा बिकेंगे भारत में लग सकती हैं यूरोप की डिफेंस फैक्ट्रियां 20% बढ़ सकता है फार्मा और केमिकल ट्रेड कार्बन टैक्स से राहत की उम्मीद इसके अलावा भारत के लोगों को यूरोपियन शराब, यूरोपियन कारें और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स सस्ते मिलेंगे, क्योंकि इन पर लगने वाले प्रीमियम टैरिफ कम हो जाएगा। सवाल-4: इस समझौते से यूरोपियन देशों को क्या फायदा होगा? जवाब: भारत-EU की ट्रेड डील से यूरोपियन यूनियन के इन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा… भारत में यूरोपीय शराब और वाइन की खपत बढ़ेगी भारत में यूरोपीय कारों की डिमांड बढ़ेगी इसके अलावा यूरोप के आईटी, इंजीनियरिंग, बिजनेस सर्विसेज और टेलीकॉम जैसे हाई-वैल्यू सर्विस सेक्टर को भी भारत में ज्यादा मौके मिलेंगे। क्योंकि इन सेक्टर में दूसरे देशों के मुकाबले टैरिफ कम लगेगा। सवाल-5: क्या भारत-EU की ट्रेड डील ट्रम्प के टैरिफ का जवाब बनेगी? जवाब: ट्रम्प ने भारत के सामानों पर फिलहाल 50% टैरिफ लगा रखा है, जो उनके सत्ता में आने से पहले 10% से भी कम था। इससे भारत के एक्सपोर्ट पर बेहद नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के मुताबिक, नवंबर 2025 में भारत का वस्तु निर्यात करीब 3 लाख करोड़ रूपए रहा। ये साल 2024 से 11% कम था। सिर्फ अमेरिका को जाने वाले निर्यात में 28.5% की कमी आई। मई 2025 में भारत ने अमेरिका को लगभग 80 हजार करोड़ का निर्यात किया था। अक्टूबर में ये घटकर 56 हजार करोड़ रूपए रह गया। इसकी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को होने वाला निर्यात साल 2024–2025 के 86.5 अरब डॉलर से घटकर 2025–2026 में करीब 50 अरब डॉलर रह सकता है। यानी भारतीय घरेलू बाजार को 3 लाख करोड़ रूपए का नुकसान होगा। सबसे ज्यादा असर टेक्सटाइल, ज्वेलरी, झींगा (श्रिंप) और कालीन जैसे क्षेत्रों पर पड़ेगा। द हिंदू के मुताबिक, इन सेक्टरों में निर्यात के करीब 70% तक गिरने की आशंका है, इससे लाखों नौकरियों पर खतरा मंडरा सकता है। अमेरिका को होने वाले इस निर्यात पर बढ़े टैरिफ का असर जमीन पर दिखने लगा है। सूरत जैसे प्रमुख हब से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक हीरों के उत्पादन में कटौती शुरू हो चुकी है। सूरत की हीरा पॉलिशिंग इंडस्ट्री 12 लाख लोगों को रोजगार देती है। अर्थशास्त्री शरद कोहली कहते हैं ट्रेड डील के तहत कम से कम 90% चीजों पर टैरिफ जीरो हो जाएगा। इससे भारतीय सामान चीन जितना सस्ता हो सकता है और यूरोप में इसकी डिमांड भी बढ़ेगी। ट्रंप के टैरिफ की वजह से भारत को हीरों और जेम्स में जो नुकसान हुआ है, यहां से उसकी भरपाई हो सकती है। हालांकि, पूरी भरपाई के बारे में कहना संभव नहीं है। लेकिन 3 से 4 सालों में EU–भारत के बीच का व्यापार करीब 22 लाख करोड़ तक जा सकता है। सवाल-6: भारत-EU ट्रेड डील अमेरिका के लिए कैसे मुश्किलें पैदा करेगा? जवाबः EU और भारत के करीब आने से अमेरिका के लिए कई मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं… अंतरराष्ट्रीय मामलों में JNU के प्रोफेसर स्वर्ण सिंह के मुताबिक, ‘ट्रंप के टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल किए जाने से अमेरिका के रणनीतिक साझेदारों को पुरानी व्यापारिक व्यवस्थाओं के विकल्प तलाशने पर मजबूर होना पड़ा है। इससे भारत-EU के बीच FTA महज आर्थिक मजबूरी का नतीजा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक फैसला बन जाता है, जहां दो लोकतांत्रिक साझेदार वैश्विक आर्थिक ढांचे को नया आकार दे रहे हैं।’ यूरोप और अमेरिका पारंपरिक मित्र रहे हैं। ये रिश्ते 100 साल से ज्यादा पुराने हैं। लेकिन कुछ वक्त से अमेरिकी टैरिफ और ग्रीनलैंड को लेकर रिश्ते बिगड़े हैं। वहीं, भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए गए हैं। स्वर्ण सिंह कहते हैं, ‘इन घटनाओं ने EU को NATO से इतर साझेदारियां तलाशने की इच्छा को और मजबूत किया है। इसलिए EU–India FTA केवल आर्थिक कूटनीति तक सीमित न रहकर, अमेरिका के खिलाफ EU के लिए एक जियो-पॉलिटिकल इंश्योरेंस के रूप में सामने आता है।’ ----------------- भारत-EU से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए... यूरोपीय यूनियन ने भारत से रक्षा समझौते को मंजूरी दी: EU बोला- आतंकवाद के खिलाफ लड़ने में मदद मिलेगी यूरोपीय यूनियन (EU) ने भारत के साथ नए रक्षा समझौते (सिक्योरिटी और डिफेंस एग्रीमेंट) को मंजूरी दे दी है। अगले हफ्ते नई दिल्ली में होने वाले भारत-EU शिखर सम्मेलन में इस पर साइन होंगे। पूरी खबर पढ़ें...
भारत-यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक समझौता, पीएम मोदी ने बताया क्यों है यह ‘गेम चेंजर’
भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने के साथ ही, जिसे...
पिछले साल के भारत-पाक संघर्ष का ज़िक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है, 'पाकिस्तान और भारतीय वायु सेना के बीच इस (मई 2025) टकराव में शुरू में पाकिस्तान ने कई दुश्मन लड़ाकू विमानों को गिराकर एक साफ़ सामरिक जीत हासिल की, लेकिन फिर भारतीय क्षेत्र पर हमले करने में बड़े पैमाने पर नाकाम रहा क्योंकि उनका मुकाबला एक इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम ने किया था.
भारत सरकार यूरोप से आने वाली कारों पर लगने वाले इम्पोर्ट टैरिफ में बड़ी कटौती की तैयारी में है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस टैरिफ को 110% से घटकर 40% तक किया जा सकता है। ये फैसला भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का हिस्सा है। इस एग्रीमेंट का ऐलान कल यानी मंगलवार को भारत-EU समिट में किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, मोदी सरकार ने 15 हजार यूरो (करीब 16.3 लाख रुपए) से ऊपर वाली कुछ कारों पर तुरंत टैक्स कम करने पर सहमति दी है। फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज की कारें सस्ती हो सकती हैं FTA के तहत भारत सालाना करीब 2 लाख डीजल-पेट्रोल इंजन कारों पर ड्यूटी 40% तक कम करेगा। भारत में अभी विदेशी कारों पर 70% से 110% इंपोर्ट ड्यूटी है। समय के साथ यह 10% तक गिर सकती है, जिससे यूरोपीय कंपनियां जैसे फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और BMW को भारतीय बाजार में सस्ती हो सकती हैं। हालांकि EU मैन्युफैक्चरर्स का भारत के 44 लाख यूनिट सालाना कार बिक्री वाले बाजार में शेयर 4% से कम है। वहीं इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को पहले 5 साल ड्यूटी कट से बाहर रखा जाएगा, ताकि घरेलू प्लेयर्स जैसे टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा को प्रोटेक्शन मिले। उसके बाद उन पर भी कट लागू हो सकता है। एग्रीमेंट को मदर ऑफ ऑल डील बता चुकीं यूरोपीय कमीशन चीफ इससे पहले 20 जनवरी को यूरोपीय कमीशन चीफ उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता होने वाला है। यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 200 करोड़ लोगों के लिए नया बाजार बनाएगा, जो वैश्विक GDP के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगा। उर्सुला ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में इसे मदर ऑफ ऑल डील्स कहा। वह 25 से 27 जनवरी तक भारत दौरे पर रहेंगी और 27 जनवरी को होने वाले भारत-EU समिट में इस समझौते के पूरा होने की घोषणा की जा सकती है। उर्सुला ने कहा- मैं भारत जा रही हूं। अभी कुछ काम बाकी है, लेकिन हम एक ऐतिहासिक समझौते की दहलीज पर हैं। यह डील यूरोप को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते और सबसे गतिशील देश भारत के साथ व्यापार करने का फर्स्ट-मूवर एडवांटेज (पहला बड़ा मौका) देगी। समझौते से क्या फायदा होगा यह मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दोनों पक्षों के बीच व्यापार को बहुत बढ़ाएगा। EUके साथ ट्रेड 2023-24 में $137.41 बिलियन रहा, इस एग्रीमेंट के बाद दोगुना होने की उम्मीद है। समझौते से सामान और सेवाओं पर टैरिफ कम होंगे, जिससे व्यापार आसान बनेगा। दोनों पक्ष एक रक्षा समझौता और 2026-2030 के लिए रणनीतिक योजना भी घोषित करेंगे। ट्रम्प टैरिफ के बीच भारत-EU समझौते का ऐलान यह समझौता ऐसे समय में हो रहा है जब ट्रम्प की नई टैरिफ नीतियों और व्यापारिक प्रतिबंधों ने वैश्विक सप्लाई चेन में समस्याएं पैदा की हैं। अमेरिका की 'टैरिफ वॉर' से भारत और यूरोपीय संघ के सभी 27 देश प्रभावित हुए हैं। ऐसे में दोनों पक्षों ने आपसी व्यापार को मजबूती देने का फैसला किया है। भारत यूरोपीय देशों के साथ समझौता करके भारतीय प्रोडक्ट्स को बेचने के लिए नए बाजार तलाश कर रहा है। 19 साल का लंबा इंतजार खत्म होगा भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की पहली कोशिश साल 2007 में शुरू हुई थी। हालांकि, महत्वाकांक्षाओं और नियमों में मतभेद के कारण 2013 में इन वार्ताओं को रोक दिया गया था। करीब 9 साल के अंतराल के बाद जून 2022 में फिर से बातचीत शुरू की गई। अब 2026 की शुरुआत में इस डील का फाइनल होने जा रही है। UK के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर चुका भारत इससे पहले 24 जुलाई को भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हुआ था। इससे भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर सस्ते होंगे। करीब 3 साल में 14 राउंड की बातचीत के बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया गया था। अब भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं यूके के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे। इससे 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 120 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। ये खबर भी पढ़ें अमेरिकी राजदूत बोले- भारत से जरूरी कोई देश नहीं:कल ट्रेड डील पर बात होगी; अगले साल भारत आ सकते हैं ट्रम्प भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार को नई दिल्ली में पदभार संभाला। उन्होंने कहा कि अमेरिका के लिए भारत से ज्यादा जरूरी कोई देश नहीं है। उन्होंने ट्रेड डील को लेकर कहा कि कल यानी मंगलवार को दोनों देशों के अधिकारियों के बीच इसे लेकर फोन पर बात होने वाली है। पूरी खबर पढ़ें भारत में UK की व्हिस्की-कारें सस्ती होंगी:दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन, जानिए और किन चीजों के दामों पर असर होगा भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर सस्ते होंगे। करीब 3 साल में 14 राउंड की बातचीत के बाद 24 जुलाई को भारत-यूके ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया। अब भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें
77वां गणतंत्र दिवस: कर्तव्य पथ पर सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और यूरोपीय मेहमानों का साक्षी भारत
देश ने रविवार को 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और गौरव के साथ मनाया। राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित मुख्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ 21 तोपों की सलामी दी गई, जिसने पूरे वातावरण को देशभक्ति की भावना से सराबोर कर दिया।
ग्रीनलैंड पर अमेरिका‑यूरोप रिश्तों में बढ़ता अविश्वास,यूरोप की एकजुटता से ढीले पड़े ट्रंप के तेवर
यूरोपीय नेताओं के हालिया बयानों से साफ हो गया है कि अमेरिका के साथ ‘हर हाल में साथ’ वाली नीति अब अतीत की बात हो चुकी है। यूरोप ने यह तय किया है कि वह न तो ब्लैकमेल वाली कूटनीति स्वीकार करेगा और न ही किसी दबाव में आकर अपने मूल हितों से समझौता करेगा।
हर 26 जनवरी की सुबह, जब धुंध को चीरती सूरज की किरणें दिल्ली के कर्तव्य पथ पर पड़ती हैं, तो वे केवल सैन्य रेजिमेंटों और रंगीन झांकियों को ही रोशन नहीं करतीं, वे परेड की हजारों साल पुराने इतिहास को भी छूती हैं। प्राचीन रोम में सैन्य परेड दुश्मन के खून से पूरी होती थी, जबकि मिस्र में परेड राजा को देवता की शक्ति पाने का जरिया थी। रूस की परेड का जासूसों को इंतजार रहता था, लेकिन आधुनिक दुनिया में पश्चिमी देश परेड से कतराने लगे। आखिर परेड का इतिहास क्या है, भारत हर साल क्यों करता है फौज और हथियारों की नुमाइश और पश्चिमी देश इससे क्यों कतराते हैं; मंडे मेगा स्टोरी में पूरी कहानी… आज से करीब चार हजार साल पहले। नील नदी के किनारे पूरा मिस्र सांस रोककर फराओ यानी अपने राजा का इंतजार कर रहा था। उसी दिन फराओ सेनुसरेत प्रथम, दक्षिण मिस्र पर विजय हासिल कर लौट रहे थे। सजे-धजे सैनिकों के पीछे लोगों की भीड उमड़ पड़ी। सैनिकों के आगे पुजारी चल रहे थे और सबसे आगे स्वयं सेनुसरेत। वे केवल युद्ध से नहीं लौट रहे थे, वे देवता से मिलने जा रहे थे और देवता बनकर लौटने वाले थे। यहीं से प्राचीन मिस्र के ‘ओपेट’ उत्सव की परंपरा ने आकार लिया। शुरुआत में यह विजय का उत्सव था, लेकिन जब जीतने को कुछ नहीं बचा, तब राजा के देवत्व की यात्रा ही परेड बन गई। मिस्रवासियों का विश्वास था कि समय के साथ फराओ की शक्तियां कमजोर पड़ने लगती हैं। उसे दोबारा ईश्वरीय शक्ति प्राप्त करनी होती थी। कर्नाक मंदिर से लक्सर मंदिर तक निकलने वाला यह विशाल जुलूस लगभग सत्ताइस दिनों तक चलता था। लेकिन इस परेड में एक रोचक रहस्य भी छिपा था। हर वर्ष यह तय नहीं होता था कि जुलूस जमीन से जाएगा या नील नदी के रास्ते। यह निर्णय नदी के मिजाज पर निर्भर करता था। यदि जल स्तर ऊंचा होता, तो देवता और फराओ नौकाओं पर सवार होकर यात्रा करते। यदि पानी कम होता, तो जुलूस सड़कों से होकर गुजरता। करीब तीन हजार पांच सौ साल पहले रानी हत्शेपसुत ने इस यात्रा को और अधिक भव्य बना दिया। उसने मार्ग में छह नौका स्टेशन बनवाए। हर स्टेशन पर जुलूस रुकता, देवताओं को बलि और भेंट चढ़ाई जाती और पुजारी घोषणा करते कि फराओ की आत्मा ईश्वरीय आत्मा से एकाकार हो रही है। जब उत्सव समाप्त होता, तो फराओ वही व्यक्ति नहीं रहता जो वह यात्रा से पहले था। लोगों का विश्वास था कि वह नए सिरे से जन्मा है। देवताओं की कृपा से पूरे मिस्र पर शासन करने के लिए फिर से सशक्त। लेकिन इतिहास यहीं ठहरता नहीं। रोम के उदय के साथ मिस्रवासियों को यह समझ में आने लगा कि फराओ की आत्मा और देवताओं की आत्मा के बीच कोई दिव्य संबंध नहीं था। सत्ता बदली, विश्वास बदले और परेड का रास्ता मिस्र से हटकर रोम की सड़कों तक पहुंच गया। प्राचीन रोम का ट्रायम्फ यानी एक दिन का देवता दो हजार साल पहले प्राचीन रोम में परेड यह तय करती थी कि सत्ता किसके हाथ में है। यहां परेड को ट्रायम्फ कहा जाता था, यानी विजय की सार्वजनिक नुमाइश। यह केवल एक जुलूस नहीं था, बल्कि राज्य द्वारा रचा गया ऐसा तमाशा था, जिसमें हारे हुए दुश्मनों को पहले अपमानित किया जाता और फिर मार दिया जाता था। उनके परिवारों को गुलाम बना लिया जाता था। उस समय रोम में संसद का शासन था। जब संसद से ट्रायम्फ की अनुमति मिलती, तो पूरा शहर समझ जाता कि रोम की सेना ने कोई साधारण नहीं, बल्कि बहुत बड़ी जीत हासिल की है। विजयी सेनापति रोम की पवित्र सड़क साक्रा विया से गुजरता था। वह चार घोडों वाले रथ पर खड़ा होता। उसका चेहरा लाल रंग से रंगा जाता था, ठीक उसी रंग में, जैसा देवता जूपिटर की मूर्ति का होता था। कुछ घंटों के लिए वह सेनापति मनुष्य नहीं रहता था। वह देवता बन जाता था। लेकिन इसी दृश्य में रोमन सत्ता की सबसे गहरी समझ छिपी थी। उसी रथ पर, उसके पीछे, एक गुलाम खड़ा रहता था। उसका काम कोई हथियार उठाना नहीं था। वह बस धीरे–धीरे उसके कान में फुसफुसाता रहता था- ‘याद रखो, तुम केवल एक मरणशील मनुष्य हो। तुम केवल एक दिन के देवता हो।’ जब परेड का अंत खून से होता था रोम में हर जीत पर ट्रायम्फ नहीं मिलता था। इसके लिए सीनेट ने एक कठोर नियम तय किया था। ट्रायम्फ पाने के लिए एक ही युद्ध में कम से कम पांच हजार दुश्मन सैनिकों का मारा जाना अनिवार्य था। यह केवल एक आंकड़ा नहीं था। यह एक स्पष्ट संदेश था कि रोमन सत्ता सस्ती और छोटी जीतों से संतुष्ट नहीं होती। ट्रायम्फ का सबसे असरदार हिस्सा जीते हुए जनरल की अगुआई नहीं थी। असली प्रभाव उस दृश्य का होता था, जिसे देखने के लिए जनता आती थी। सोना, चांदी, हथियार, दुश्मन की नावों के टूटे हुए हिस्से। सब कुछ जुलूस में प्रदर्शित किया जाता था, लेकिन सबसे भयावह दृश्य होते थे जंजीरों में बंधे दुश्मन राजा और सेनापति। जनता इनका इंतजार करती थी। आम रोमन नागरिकों ने आज से करीब 2072 साल पहले वर्सिंगजेटोरिक्स नाम के एक सेनापति को अपमानित होते देखा था। परेड के अंत में, शहर के एक चौराहे पर उसका सिर धड़ से अलग कर दिया गया। वह केवल 36 साल का था। आज से करीब 1750 साल पहले पालमाइरा साम्राज्य की रानी जेनोबिया को भी ट्रायम्फ परेड में घुमाया गया था। यह साम्राज्य आज के फिलिस्तीन, मिस्र और अरब के कुछ हिस्सों तक फैला हुआ था। जेनोबिया को उसके सभी सोने के गहने पहनाकर परेड करवाई गई थी। भारी वजन के कारण वह चलते–चलते गिर पड़ती थी और जनता को इसमें क्रूर आनंद मिलता था। उसे बस मारा नहीं गया था। ग्राफिक्स: दृगचंद्र भुर्जी, अजीत सिंह और अंकित द्विवेदी ***** गणतंत्र दिवस से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए... रिपब्लिक डे पर चीफ गेस्ट की कुर्सी कितनी कीमती: पहली बार यूरोपियन यूनियन को न्योता क्यों मिला रिपब्लिक डे के चीफ गेस्ट आमतौर पर उन्हीं देशों से होते हैं, जहां भारत तवज्जो देना चाहता है। 77वें गणतंत्र दिवस परेड के लिए भारत ने यूरोपीय यूनियन के टॉप-2 लीडर्स को चीफ गेस्ट बनाया है- उर्सुला वॉन और एंतोनियो कोस्टो। पूरी खबर पढ़िए...
फ्रांस की नेवी की करतूत, रूसी शैडो टैंकर के भारतीय कैप्टन को हिरासत में लिया; क्यों उठाया ऐसा कदम?
फ्रांस की नेवी ने कथित तौर पर एक संदग्ध रूसी तेल टैंकर को पकड़ा है. इतना ही नहीं नेवी ने जहाज में सवार भारतीयक कैप्टन को भी हिरासत में ले लिया है. बताया जा रहा है जहाज में सवार अन्य सभी क्रू सदस्यों को जहाज में ही रखा गया है.
हरदा में पहली फीडर रेटेड इंटरनेशनल रैपिड शतरंज प्रतियोगिता 24 जनवरी 2026 को हरदा डिग्री कॉलेज परिसर में संपन्न हुई। इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भारत, फ्रांस और श्रीलंका सहित 350 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया। इसका आयोजन कलेक्टर हरदा सिद्धार्थ जैन के संरक्षण में किया गया। प्रतियोगिता पूरी तरह अनुशासित, सुव्यवस्थित और फीडर के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आयोजित की गई। कुल 9 राउंड में खेले गए इस टूर्नामेंट में खिलाड़ियों ने अपनी रणनीति, एकाग्रता और खेल कौशल का प्रदर्शन किया। मैचों का लाइव स्क्रीन पर प्रसारण भी किया गया, जिससे दर्शक हर चाल का आनंद ले सके। इंटरनेशनल मास्टर (IM) एंटोनी बौर्नेल (फ्रांस) और वूमेन इंटरनेशनल मास्टर (WIM) सचिनी रणसिंघे (श्रीलंका) की सहभागिता ने इस प्रतियोगिता को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। भारत के ख्यातिप्राप्त खिलाड़ी डीके.शर्मा, अक्षत खंपारिया, एसके. लशर्मा, कैंडिडेट मास्टर (CM) प्रखर बजाज सहित कई राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों ने भी इसमें हिस्सा लिया। IM एंटोनी बौर्नेल ने प्रथम स्थान प्राप्त कियामुख्य वर्ग में IM एंटोनी बौर्नेल (फ्रांस) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि अनादकट कार्तव्या (गुजरात) दूसरे और CM प्रखर बजाज (मध्यप्रदेश) तीसरे स्थान पर रहे। 2000 से कम रेटिंग वर्ग में वेदांत भारद्वाज, रवि पलसुले और पांडेय अभिषेक विजेता रहे। 1700 से कम रेटिंग वर्ग में हरि, गुप्ता आरके. और धुरिया मुकेश ने जीत हासिल की। अनरेटेड वर्ग में साकिब शेख, आदर्श चक्रवर्ती और अनव अग्रवाल ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया। वरिष्ठ वर्ग (S-60) में FM राठौर एस.के., चतुर्वेदी नरेंद्रनाथ और गुप्ता आर. के. विजेता रहे। महिला वर्ग में तुर्किया दिव्यांशी, सिद्धि यादव और WIM सचिनी रणसिंघे ने पुरस्कार जीते। हरदा जिला वर्ग में सिद्धार्थ जैन, काजी सद्दाम पठान और यश पचोरी ने बाजी मारी। मध्यप्रदेश वर्ग में सूरज चौधरी, युवराज जायसवाल और सुनील जैन विजेता बने। अंडर-13 वर्ग में शिवांश यादव, तुर्किया यश और आर्यन सोलंकी ने जीत दर्ज की। अंडर-11 वर्ग में अयचित रिद्धेश, गुप्ता कबीर और देवांश पटेल ने, जबकि अंडर-9 वर्ग में राघव सिंह, तुर्किया दिव्यांशी और सिद्धि यादव ने पुरस्कार जीते। अंडर-7 वर्ग में माहिर साहू और निर्वाण जैन विजेता रहे। राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर बालिकाओं को विशेष पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जिसकी अभिभावकों और अतिथियों ने सराहना की। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) इस कार्यक्रम का मुख्य प्रायोजक रहा। खिलाड़ियों के लिए उत्कृष्ट भोजन, ठहरने की व्यवस्था, तकनीकी सुविधा और लाइव डिस्प्ले की व्यवस्था की गई थी। अभिभावकों और अतिथियों ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों की एकाग्रता, अनुशासन और बहुमुखी प्रतिभा को निखारते हैं। यह प्रतियोगिता हरदा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हुई है।
India-EU Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील अटकी हुई है, लेकिन ट्रेड वॉर के बीच भारत सबसे बड़ी डील साइन करने जा रहा है. भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच 'मदर ऑफ ऑल डील' होने जा रही है. इस डील के साथ ही भारत और यूरोपीय देशों के बीच कारोबार आसान और तेज हो जाएगा.
EU On Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रट लगाए बैठे थे कि उन्हें ग्रीनलैंड किसी भी कीमत पर चाहिए. कभी टैरिफ तो कभी धमकी देकर वो ग्रीनलैंड हासिल कपना चाहते थे, लेकिन दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान उन्होंने ग्रीनलैंड पर अचानक यूटर्न ले लिया.
Albania News: ईरान में काफी संख्या में लोग सड़कों पर हैं, इसी बीच अल्बानिया की राजधानी तिराना में हजारों लोग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में सड़कों पर उतर आए हैं. यहां पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प भी हुई.
यूरोपीय काउंसिल की अध्यक्ष उर्सुला वॉन पहुंची भारत, गणतंत्र दिवस समारोह में होंगी मुख्य अतिथि
यूरोपीय काउंसिल (ईसी) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत पहुंच चुकी हैं। भारत में केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने ईसी अध्यक्ष का स्वागत किया। ईयू नेताओं के इस दौरे को बेहद खास दृष्टिकोण से देखा जा रहा है
2014 में जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे रिपब्लिक डे के चीफ गेस्ट बने। उसी साल भारत-जापान ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए समझौता किया। 2015 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा मुख्य अतिथि बने। अमेरिका ने भारत को 'मेजर डिफेंस पार्टनर' घोषित किया। 2016 में फ्रेंच राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद चीफ गेस्ट बने। उनके दौरे में ही भारत-फ्रांस ने 36 राफेल फाइटर जेट्स का एग्रीमेंट साइन किया। रिपब्लिक डे के चीफ गेस्ट आमतौर पर उन्हीं देशों से होते हैं, जहां भारत तवज्जो देना चाहता है। 77वें गणतंत्र दिवस परेड के लिए भारत ने यूरोपीय यूनियन के टॉप-2 लीडर्स को चीफ गेस्ट बनाया है- उर्सुला वॉन और एंतोनियो कोस्टो। आखिर भारत ने यूरोपीय यूनियन के लीडर्स को न्योता क्यों दिया, कैसे चुने जाते हैं रिपब्लिक डे के चीफ गेस्ट और इससे भारत क्या हासिल करता है, जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: यूरोपीय यूनियन के नेताओं को भारत ने रिपब्लिक डे का चीफ गेस्ट क्यों बनाया? जवाब: यूरोपीय यूनियन किसी एक देश की तरह नहीं, बल्कि 27 देशों के ब्लॉक की तरह काम करता है। भारत ने इसके टॉप-2 लीडर्स को बुलाकर पूरे यूरोप को एक साथ साधने की कोशिश की है। दरअसल, उर्सुला वॉन डेर लेयेन यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष है। यह EU की एग्जिक्यूटिव विंग है, जो ट्रेड डील और रूल्स को लागू करती है। वहीं एंतोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष हैं। यह सभी 27 देशों के राष्ट्राध्यक्षों का रिप्रेजेंटेशन करते हैं और स्ट्रैटजिक डायरेक्शन तय करते हैं। यूरोपियन यूनियन के नेताओं को चीफ गेस्ट बनाने के पीछे भारत के 3 मकसद हो सकते हैं… 1. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से बनेगा 200 करोड़ ग्राहकों का मार्केट 2. अमेरिका-चीन की खींचतान में 'बफर स्ट्रैटजी' 3. IMEC के लिए EU का साथ जरूरी सवाल-2: गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बुलाने की परंपरा कब और क्यों शुरू हुई? जवाब: पहले गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को ही मुख्य अतिथि बुलाने की परंपरा शुरू हुई। उस दिन की परेड दिल्ली के इरविन स्टेडियम (अब मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम) में हुई थी। तब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो चीफ गेस्ट थे। इंडोनेशिया को पहले चीफ गेस्ट के तौर पर चुनना भी एक सिंबोलिज्म था। क्योंकि दोनों देश हाल ही में आजाद हुए थे और औपनिवेशिक शासन के लिए खिलाफ लड़े थे। दरअसल, 17 अगस्त 1945 को इंडोनेशिया ने आजादी का ऐलान किया था, जिसे 1949 में मान्यता मिली थी। चीफ गेस्ट बुलाने की परंपरा भारत की सॉफ्ट और स्ट्रैटजिक डिप्लोमेसी का हिस्सा है… सवाल-3: आखिर कैसे चुने जाते हैं रिपब्लिक डे के चीफ गेस्ट, प्रोसेस क्या है? जवाब: गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि को चुनना एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें डिप्लोमेसी, ट्रेड, स्ट्रैटजी और मिलिट्री फायदे का बारीकी से एनालिसिस किया जाता है। ये प्रोसेस करीब 6 महीने पहले ही शुरू कर दी जाती है। भले ही 26 जनवरी का कार्यक्रम रक्षा मंत्रालय की जिम्मे है, लेकिन मुख्य अतिथि चुनने का काम विदेश मंत्रालय करता है। मेहमान के नाम चुनने से लेकर उनके कर्तव्य पथ तक पहुंचने का स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस… स्टेप-1: विदेश मंत्रालय में शुरुआती चर्चा विदेश मंत्रालय उन देशों की लिस्ट बनाता है, जिनके साथ भारत अपने रिश्तों को और मजबूत करना चाहता है। इसके इन 3 सवालों का जवाब ढूंढा जाता है और उनका एनालिसिस किया जाता है… स्टेप-2: प्रधानमंत्री की मंजूरी विदेश मंत्रालय अपनी सिफारिशों की फाइल प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO को भेजता है। पीएम और उनके सलाहकार तय करते हैं कि मौजूदा वैश्विक माहौल में किस नेता को बुलाना सबसे सही रहेगा। स्टेप-3: नेता का शेड्यूल पता करना स्टेप-4: राष्ट्रपति के सिग्नेचर के साथ न्योता भेजना PMO से मंजूरी मिलने और मेहमान का शेड्यूल चेक करने के बाद औपचारिक निमंत्रण भारत के राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है, जिस पर वे सिग्नेचर करती हैं। क्योंकि गणतंत्र दिवस का समारोह भारत के राष्ट्रपति आयोजित करते हैं। इसके बाद न्योता मेहमान देश को भेज दिया जाता है। स्टेप-5: सिक्योरिटी और प्रोटोकॉल व्यवस्था यह पूरी प्रोसेस गोपनीय रहती है, जब तक इसका आधिकारिक ऐलान न हो जाए। इसका मकसद फॉरेन रिलेशंस को मजबूत करना और ग्लोबल लेवल पर भारत की पॉजिशन को उभारना है। पूर्व IFS अधिकारी और 1999 से 2002 तक प्रोटोकॉल चीफ रहे मनबीर सिंह के मुताबिक, चीफ गेस्ट की दौरे में पूरा फोकस होता है कि वे प्रसन्न और संतुष्ट हों। उनकी यात्रा आराम से और बिना किसी दिक्कत के साथ हो। कई मेहमानों और उनके राजदूतों ने भारत के सामारोह और प्रोटोकॉल की जमकर तारीफ कर चुके हैं। सवाल-4: क्या यह सिर्फ सम्मान देने का तरीका है या कोई डिप्लोमैटिक मैसेज? जवाब: गणतंत्र दिवस में बतौर मुख्य अतिथि न्योता मिलना किसी देश के लिए प्रोटोकॉल के लिहाज से सर्वोच्च सम्मान की बात है। उन्हें राष्ट्रपति भवन में ऑफिशियल गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। फिर शाम में भारत के राष्ट्रपति उनके लिए स्वागत समारोह आयोजित करते हैं। मेहमान महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने राजघाट भी जाते हैं। उनके लिए भारत के प्रधानमंत्री एक लंच भी रखते हैं, जिसमें सरकारी और गैर-सरकारी VIP मौजूद रहते हैं। पूर्व IFS अधिकारी मनबीर सिंह के मुताबिक, चीफ गेस्ट का दौरा सिंबोलिक अहमियत रखता है। उन्हें भारत के गौरव और खुशी का हिस्सा बनाया जाता है। ये दोनों देशों के बीच मजबूत दोस्ती और बढ़ती साझेदारी की झलक दिखाती है। सम्मान से कहीं ज्यादा ये डिप्लोमैटिक स्ट्रेंथ नुमाइश होती है। चीफ गेस्ट के सिलेक्शन प्रोसेस में भी ये दिखाई देता है। फॉरेन पॉलिसी एक्सपर्ट विनय कौरा के का मानना है कि भारत ऐसे सिंबॉलिक काम से अपनी डिप्लोमैटिक और स्ट्रैटजिक पैठ को मजबूत करता है। इसके जरिए भारत दुनियाभर में अपने रणनीतिक इरादे और विदेश नीति को व्यक्त करता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मेहमान-नवाजी के जरिए भारत बताता है कि उसके लिए कौन अहम है? साथ ही अपनी सॉफ्ट पावर और डिफेंस कैपेबिलिटी की ताल ठोकता है। मेहमान देश के साथ डील्स और पार्टनरशिप भी करता है। सवाल-5: क्या पाकिस्तान और चीन को कभी बतौर चीफ गेस्ट इनवाइट किया गया? जवाब: हां। भारत ने पाकिस्तान और चीन को उस दौर में न्योता दिया, जब वह ‘पड़ोसी पहले’ और ‘शांति के साथ रहने’ की नीति पर चल रहा था… रिश्ते सुधारने के लिए पाकिस्तान को 2 बार न्योता 'हिंदी-चीनी भाई-भाई' के दौर में चीन को बुलाया तब के पीएम पं. नेहरू का मानना था कि ऐसे न्योते और सम्मान से पड़ोसियों के साथ तनाव कम किया जा सकता है। साथ ही वे एशियाई एकजुटता का नेतृत्व कर रहे थे। इसमें चीन और पाकिस्तान को साथ रखना बेहद जरूरी था। सवाल-6: किस देश को सबसे ज्यादा बार और सबसे कम बार न्योता दिया गया? जवाब: 2025 तक 47 देशों के 70 से ज्यादा नेताओं ने गणतंत्र दिवस के मेहमान के तौर पर शिरकत की है। भारत ने चीफ गेस्ट के लिए हमेशा अपने उन सहयोगियों को तरजीह दी है, जो डिफेंस, एनर्जी और स्ट्रैटजिक तौर से सबसे करीब रहे हैं। इसी के मद्देनजर भारत ने सबसे ज्यादा 6 बार फ्रांस को न्योता दिया। 1976, 1980, 1998, 2008, 2016 और 2024 के गणतंत्र दिवस में फ्रांस के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया गया। 5 बार ब्रिटेन, 4-4 बार भूटान, इंडोनेशिया और रूस के नेता चीफ गेस्ट बने। वहीं दुनिया के कई ताकतवर और अहम देश ऐसे हैं, जिन्हें भारत ने सिर्फ एक बार ही न्योता दिया। इसमें चीन (1958), ऑस्ट्रेलिया (1979), ईरान (2003), सऊदी अरब (2006), साउथ कोरिया (2010) और अमेरिका (2015) शामिल हैं। सवाल-7: क्या कभी ऐसा हुआ कि जब कोई मेहमान ही नहीं आए? जवाब: हां। 5 बार ऐसा हुआ है, जब गणतंत्र दिवस की परेड में राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर मुख्य अतिथि की कुर्सी खाली रही। इनमें से 3 मौके शुरुआती साल के थे, जबकि दो मौके कोविड के दौरान के थे। शुरुआती 3 साल नहीं बुलाए चीफ गेस्ट कोरोना महामारी में 2 साल कोई मुख्य अतिथि नहीं ****** गणतंत्र दिवस से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए... गणतंत्र दिवस की थीम वंदेमातरम्, परेड में निकलेंगी 30 झांकियां: सेना की नई भैरव बटालियन भी शामिल होगी भारत के 77वां गणतंत्र दिवस की परेड की थीम वंदेमातरम् पर रखी गई है। परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर 30 झांकियां निकलेंगी, जो 'स्वतंत्रता का मंत्र-वंदे मातरम, समृद्धि का मंत्र-आत्मनिर्भर भारत' थीम पर होंगी। पूरी खबर पढ़िए...
हवा में खाने और सोने में माहिर अबाबील पक्षियां हजारों की संख्या में इन दिनों छत्तीसगढ़ में अपना अशियाना ढूंढ रहे है। हजारों किलोमीटर की उड़ान के बाद रायपुर पहुंचे पक्षियों ने आरंग के कुकरा गांव में महानदी मुख्य नहर पर बने पुल के नीचे अपना स्थायी ठिकाना बनाया है। नेचर एक्सपर्ट ने इसके यूरोप या भारत के हिमाचल प्रदेश से छत्तीसगढ़ पहुंचने की संभावना जताई है। एक्सपर्ट के मुताबिक, इस पक्षी की खासियत है कि ये हवा में उड़ते उड़ते ही खाना भी लेते है और आराम से सो भी जाते है। अबाबील की खासियत केवल इसकी रफ्तार ही नहीं, बल्कि इसकी जीवनशैली भी है। सुबह एक साथ अपने बसेरे से निकलते है और सूर्यास्त के पहले अपने ठिकाने पर लौट आते हैं। रायपुर में इन पक्षियों के झूंड को देखकर आसपास के लोग मोबाइल से इनकी तस्वीरें कैद कर रहे हैं। हजारों की संख्या में यह पक्षी छोटे-छोटे झुंड में भी बट जाते हैं। अबाबील जिसे स्वेल्लो और स्विफ्ट के नाम से भी जाना जाता है, आकार में गौरैया जैसी लेकिन क्षमताओं में उससे कहीं आगे मानी जाती है। यह खूबसूरत देशी-प्रवासी पक्षी अपनी तेज उड़ान और सामूहिक जीवनशैली के लिए प्रसिद्ध है। अबाबिल नर और मादा में आपसी साझेदारी और सहयोग की भावना होती है। बिल्डिंग या पुल के नीचे बनाते है ठिकाना घोंसला निर्माण के मामले में भी अबाबील बेहद अनोखी है। पुराने मकान, महल, खंडहर, मस्जिद, मंदिर, गुफाएं या ओवरब्रिज के नीचे ये घोंसले समूह में बनाए जाते हैं। एक ही जगह सैकड़ों छोटे-छोटे घोंसलों की कॉलोनी विकसित हो जाती है, जो देखने में बेहद आकर्षक लगती है। यूरोप और हिमाचल से छत्तीसगढ़ आने की संभावना बर्ड विशेषज्ञों के मुताबिक, अबाबील एक प्रवासी पक्षी है और समय की बड़ी पाबंद मानी जाती है। यह झुंड में रहना पसंद करती है और निश्चित समय पर लंबी दूरी का सफर तय करती है। छत्तीसगढ़ में ये यूरोप या भारत के हिमाचल प्रदेश से पहुंचने की संभावना है। बर्ड विशेषज्ञ बताते है कि रफ्तार, अनुशासन और सामूहिक जीवन की मिसाल पेश करने वाली अबाबील न सिर्फ प्रकृति की खूबसूरती बढ़ाती है, बल्कि इंसानों को भी मिलकर आगे बढ़ने की सीख देती है। अबाबील का अर्थ जानिए नेचर एक्सपर्ट मोहित साहू स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड के मेंबर भी है, उनके मुताबिक, अबाबील (Ababil) एक प्रकार की काली चिड़िया होती है, जिसे अंग्रेजी में 'Martlet' या 'Swallow' कहते हैं। यह कुरान में वर्णित चमत्कारी पक्षियों के समूह का नाम है, जिन्होंने काबा की रक्षा की थी, और इसका अर्थ बहुत सारे पक्षी भी होता है। इंफोग्राफिक: विपुल शर्मा ....................... इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें... प्रवासी पक्षियों से गुलजार खैरागढ़..ब्राह्मणी बतख भी दिखी: जिले में 213 प्रजाति के पक्षी; वेटलैंड्स में 90 रंगबिरंगे सारस, 1100 से ज्यादा बत्तख दिखे छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ इस समय प्रवासी पक्षियों से गुलजार है। जिले में 213 प्रजाति के पक्षी मिले हैं। रूस के कॉमन क्रेन पक्षी के अलावा 90 पेंटेड स्टॉर्क्स और 1100 से अधिक प्रवासी बत्तखें देखी गई हैं। जलचर पक्षियों में नॉर्दर्न शोवलर, यूरेशियन कर्ल्यू और कॉमन पोचार्ड शामिल हैं। पढ़ें पूरी खबर...
हरियाणा के पर्वतारोही ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर बिना ऑक्सीजन के 24 घंटे बिता दिए। हिसार के गांव मलापुर के रोहताश खिलेरी ने 18,510 फीट की ऊंचाई पर बिना किसी ऑक्सीजन सपोर्ट के लगातार 24 घंटे बिताने के बाद खुद वीडियो शूट किया। रोहताश ने दावा किया कि यह वर्ल्ड रिकॉर्ड है और वह ऐसा कारनामा करने वाले दुनिया के पहले इंसान हैं। वह 8 साल से पर्वतारोहण कर रहे हैं। 20 जनवरी को रोहताश जब माउंट एल्ब्रुस पर्वत पर थे, तब वहां का तापमान -40C से -50C तक था। 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल रही थी। बता दें कि रोहताश के पिता सुभाष चंद्र किसान हैं जबकि माता बंसी देवी गृहिणी हैं। 8 साल का कड़ा संघर्ष और 2 उंगलियों की कुर्बानीरोहताश ने सोशल मीडिया पर अपने एक्सप्रेशन शेयर करते हुए बताया कि यह जीत आसान नहीं थी। उनका यह सफर 2018 में शुरू हुआ था। 2020 में एक गाइड की जान बचाने के लिए उन्हें मिशन बीच में छोड़ना पड़ा और 2023 में खराब मौसम ने रास्ता रोका। इस ऐतिहासिक मिशन के दौरान रोहताश को फ्रॉस्ट बाइट का सामना करना पड़ा, जिसमें उन्होंने अपनी 2 उंगलियां गंवा दीं, लेकिन उनके हौसले नहीं डिगे। इससे पहले बाबू चिरी शेर्पा ने 1999 में माउंट एवरेस्ट के शिखर पर बिना ऑक्सीजन के 21 घंटे बिताए थे, जो कि एक विश्व रिकॉर्ड बना। मौत को मात देकर फहराया तिरंगापर्वतारोही ने बताया कि शिखर पर स्थिति बेहद भयावह थी। तापमान -40C से -50C तक था। कोई भी साथी इतनी ठंड में साथ रुकने को तैयार नहीं था, रोहताश वहां अकेले डटे रहे। रोहताश ने अपनी इस कामयाबी को तिरंगे की शान और देशवासियों को समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि एवरेस्ट की ट्रेनिंग ने उन्हें इस जानलेवा ठंड में जीवित रहने और इतिहास रचने की ताकत दी। इंडिया बुक में रिकॉर्ड दर्ज कर चुकेपर्वतारोही रोहताश खिलेरी का इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज हुआ है। रोहताश को डाक के माध्यम से सर्टिफिकेट मिले। रोहताश ने वर्ष 2021 में 21 मार्च को अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर 24 घंटे रुककर तिरंगा लहराया था, जोकि 5,895 मीटर ऊंची है। इसके आधार पर खिलेरी का इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज हुआ है। इसलिए खास है रोहताश की उपलब्धि... एल्ब्रुस पर सबसे ज्यादा चढ़ाई का रिकॉर्ड भी हरियाणवी के नाम 2 बार माउंट एवरेस्ट फतेह करने वाली संतोष यादव भी हरियाणवीहरियाणा की संतोष यादव ने 2 बार माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई की है। संतोष यादव ने साल 1992 में पहली बार माउंट एवरेस्ट को फतह किया। इसके बाद उन्होंने साल 1993 में वह दोबारा एवरेस्ट को फतह करने गईं और सफल रहीं। संतोष यादव ने दुनिया की पहली महिला होने का रिकॉर्ड कायम किया, जिन्होंने 8848 मीटर शिखर माउंट एवरेस्ट को 2 बार फतह किया हो। संतोष कांगशंग की तरफ से माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ने वाली दुनिया की पहली महिला भी हैं।
ट्रम्प के चंगुल से ग्रीनलैंड को बचाने के लिए कितनी दूर जा सकता है यूरोपीय यूनियन?
ग्रीनलैंड के भविष्य पर चर्चा के लिए वॉशिंगटन वार्ता बुधवार को विफल हो गई, जिसमें डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री व्हाइट हाउस से यह संदेश लेकर घर लौटे कि ग्रीनलैंड सही मायने में अमेरिका का है और ट्रम्प इसके अधिग्रहण के समय पर फैसला करेंगे
खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन करती फ्रांसीसी महिला का वीडियो ईरान के दावे से वायरल
वीडियो में दिख रही महिला फ्रांस की एक्टिविस्ट कैमिली इरोस हैं, उन्होंने बूम से पुष्टि की कि यह वीडियो पेरिस में ईरान के लोगों के समर्थन में हुए प्रदर्शन का है.
उभरती वैश्विक भूराजनीति में यूरोप कहां है?
अमीर यूरोपीय देशों, खासकर जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन की तिकड़ी के लिए, साल 2026 में जो भूराजनीतिक स्थिति बन रही है, उसमें अस्तित्व के संकट के काफी तत्व हैं
फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन, 88 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
Alain Delon passes away: 'द लेपर्ड' और 'रोक्को एंड हिज ब्रदर्स' जैसी सुपर हिट फिल्मों में अभिनय का जौहर दिखाने वाले फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन हो गया है। एलेन डेलन ने 88 वर्ष की उम्र में आखिरी सांस ली। अभिनेता के पारिवारिक सूत्रों ने ...
इटली से फ्रांस तक समंदर के बीच होगा Anant-Radhika का दूसराप्री वेडिंग फंक्शन, जानिए मेहमानों से लेकरड्रेस कोड तक सबकुछ
Heeramandi के बाद अब Cannes में अपनी 'गजगामिनी चाल' दिखाएंगी Aditi Rao Haidari,फ्रांस के लिए रवाना हुईबिब्बोजान

