जम्मू एयरपोर्ट से जल्द ही अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवा की सुविधा शुरू होगी।
ब्रह्माकुमारीज की स्थापना से लेकर उसके वैश्विक विस्तार तक सिंधी समाज की अहम भूमिका रही है। संस्था की शुरुआत सिंध प्रांत के कराची से हुई थी। लखनऊ में भी इसकी सेवाओं की नींव सिंधी समाज से जुड़े लोगों ने रखी थी। यह जानकारी शनिवार को सुल्तानपुर रोड स्थित नवनिर्मित राजयोग ट्रेनिंग सेंटर गुलजार उपवन में आयोजित सिंधी समाज के स्नेह मिलन कार्यक्रम में संस्था की अतिरिक्त प्रशासिका प्रमुख एवं यूरोपीय निदेशिका राजयोगिनी जयंती ने दी। उन्होंने बताया कि ब्रह्माकुमारीज के शुरुआती तीन वर्ष कराची में बीते। बाबा ने आध्यात्मिक ज्ञान और ईश्वरीय संदेश के माध्यम से इस आंदोलन की शुरुआत की थी। संस्था की कई वरिष्ठ दादियां सिंध प्रांत से थीं। वे आध्यात्मिक संदेश लेकर अफ्रीका और यूरोप के अलग-अलग देशों में गईं और वहां सेवाकेंद्र स्थापित किए। वर्ष 1950 में पूरा परिवार भारत के माउंट आबू आया। इसके बाद देशभर में संस्था की सेवाओं का विस्तार शुरू हुआ। जयंती दीदी ने बताया कि लखनऊ में ब्रह्माकुमारीज की सेवाओं की शुरुआत दादा राम और सावित्री बहन ने की थी। दोनों सिंधी समाज से जुड़े थे। इस तरह शहर में संस्था की नींव रखने में भी समाज का योगदान रहा। राजयोग से मिल सकती है मानसिक शांति जयंती दीदी ने कहा कि वर्तमान संगमयुग अपने भविष्य को श्रेष्ठ बनाने का अवसर है। इसके लिए पुण्य कर्मों के साथ आध्यात्मिक कमाई भी जरूरी है। आज समाज में हिंसा, तनाव, अशांति और नकारात्मकता बढ़ रही है। ऐसे माहौल में राजयोग और आध्यात्मिक ज्ञान मन को शांति देने में सहायक हो सकते हैं। 120 देशों तक पहुंचा संस्था का संदेश उन्होंने बताया कि ब्रह्माकुमारीज का संदेश अब करीब 120 देशों तक पहुंच चुका है। इसका विस्तार किसी पूर्व निर्धारित योजना के बजाय सत्य धर्म की स्थापना के संकल्प से हुआ है। इसमें लोगों को सेवाकेंद्र पर रहकर राजयोग मेडिटेशन का प्रशिक्षण और अनुभव मिल सकेगा। कार्यक्रम की शुरुआत धनराज ने अतिथियों के स्वागत से की। होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. राहुल रोहित आहूजा ने कहा कि आज मन की बीमारियों का असर शरीर पर भी दिखाई दे रहा है। गायक चांद बजाज ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
फ्रांस में विरोध-प्रदर्शन को लेकर हाई अलर्ट, 70 हजार पुलिसकर्मी तैनात; पेरिस में मार्च पर पाबंदी
फ्रांस में लगातार तीसरे सप्ताहांत होने वाले प्रदर्शनों को देखते हुए सरकार ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। हिंसा और अशांति की आशंका के बीच देशभर में 70 हजार पुलिसकर्मियों और सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है।
सीएमजी का यूरोपीय केंद्रीय बैंक की अध्यक्ष के साथ साक्षात्कार
सीएमजी का यूरोपीय केंद्रीय बैंक की अध्यक्ष के साथ साक्षात्कार
नमित मल्होत्रा द्वारा प्रोड्यूस और नितेश तिवारी द्वारा डायरेक्टेड फिल्म 'रामायण' बिना किसी शक साल 2026 की सबसे ज्यादा इंतजार की जाने वाली फिल्मों में से एक है। मेकर्स द्वारा समय-समय पर जारी किए गए पोस्टर्स से लेकर टीजर और ट्रेलर तक, हर एक चीज ने ...
कनाडा बनेगा यूरोपीय संघ का पहला ‘एसोसिएट सदस्य’: मॉन्ट्रियल शिखर सम्मेलन में ऐतिहासिक फैसला, हुआ समझौता canada first associate member european union montreal summit
G20 बैठक में रूस पर घिरे लावरोव, यूरोपीय देशों के विरोध के बाद रद्द हुआ ग्रुप फोटो सेशन
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो शुक्रवार और शनिवार को आयोजित दो दिवसीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी इसमें हिस्सा लेने के लिए अटलांटा पहुंचे हैं। इस बैठक का प्रमुख उद्देश्य दिसंबर में मियामी में प्रस्तावित जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की तैयारियों को आगे बढ़ाना है।
कनाडा : यूरोपीय संघ का पहला ‘एसोसिएट सदस्य’
मॉन्ट्रियल/वाशिंगटन, कनाडा और यूरोपीय संघ (ईयू) ने अपने संबंधों को नया आयाम देते हुए नई दिशा में बड़ा कदम उठाया है। दोनों पक्ष कनाडा को यूरोपीय संघ का पहला ‘एसोसिएट सदस्य’ बनाने की दिशा में काम करेंगे।
फ्रांस में दंगाइयों से वसूला जाएगा नुकसान का पैसा, सरकारी सहायता से भी होगी भरपाई
फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों और दंगों के दौरान सार्वजनिक व निजी संपत्तियों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। इसके तहत हिंसक भीड़ में शामिल लोगों से न केवल उनके द्वारा सीधे की गई तोड़फोड़ का खर्च वसूला जा सकेगा, बल्कि उन दुकानों और प्रतिष्ठानों को हुए नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी भी उन पर डाली जा सकती है, जिन्हें उन्होंने खुद नुकसान नहीं पहुंचाया हो।
अमेरिका ने यूक्रेन को 500 पैट्रियट मिसाइलें बेचने की दी मंजूरी, 19 हजार करोड़ रुपये की डील का खर्च उठाएंगे यूरोप और कनाडा
कनाडा बनेगा यूरोपीय संघ का पहला ‘एसोसिएट सदस्य’
मॉन्ट्रियल/वाशिंगटन, 31 अक्टूबर . कनाडा और यूरोपीय संघ (ईयू) ने अपने संबंधों को नया आयाम देते हुए नई दिशा में बड़ा कदम उठाया है. दोनों पक्ष कनाडा को…
Ukraine-Russia War: यूक्रेन को 500 पैट्रियट मिसाइलें देगा अमेरिका, रूस के हमलों से बचाव के लिए यूरोप और कनाडा उठाएंगे खर्च
पुतिन की यूरोप को सीधी धमकी: 'हम युद्ध के लिए तैयार, लेकिन परमाणु संघर्ष में कोई विजेता नहीं बचेगा'
पुतिन की यूरोप को सीधी धमकी: 'हम युद्ध के लिए तैयार, लेकिन परमाणु संघर्ष में कोई विजेता नहीं बचेगा'
रामायणम् को मिली अंतरराष्ट्रीय सराहना, फ्रांसिस डॉमिनिक ने जताई खुशी
नमित मल्होत्रा की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायणम्' को वैश्विक स्तर पर सराहा गया, जहां कंटेंट क्रिएटर फ्रांसिस डॉमिनिक ने इसके निर्माण और विजुअल क्राफ्ट की तारीफ की।
यूरोप और अमेरिका में आने वाली है रिकॉर्ड महंगाई, देखें दुनिया आजतक
रूसी सेना ने यूक्रेन के दो शहरों निप्रो और चेर्निहिव पर बड़ा हमला किया. जहां रूस ने निप्रो के रेलवे स्टेशन को निशाना बनाया. इस हमले में 14 लोगों की मौत हो गई और कई जख्मी हो गए. चेर्निहि हमले में 15 साल की दो लड़कियों की मौत हो गई और कई जख्मी बताए जा रहे हैं. वहीं, तेल के बढ़ते दाम और यूरोप के साथ अमेरिका में भी महंगाई बढ़ा रहे हैं. यूरोप में लोगों को पेट्रोल के लिए 30 फीसदी ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है. दुनिया की ऐसी ही ताजा और अहम खबरों के लिए देखें दुनिया आजतक.
जापान, साउथ कोरिया और फ्रांस में 'क्लीन' है हाई-स्पीड ट्रेन का रिकॉर्ड
दुनिया भर में हाई-स्पीड ट्रेनों (बुलेट ट्रेनों) का जाल तेजी से बिछ रहा है। समय की बचत और आधुनिक सुविधाओं के कारण रोजाना करोड़ों लोग इनमें सफर करते हैं। जब बात सुरक्षा और विश्वसनीयता की आती है, तो जापान की 'शिंकानसेन' (Shinkansen), फ्रांस की 'टीजीवी' (TGV) और साउथ कोरिया की 'केटीएक्स' (KTX) का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। इन तीनों देशों ने दशकों के अपने परिचालन में ऐसा रिकॉर्ड बनाया है कि आज तक हाई-स्पीड ट्रैक पर ट्रेन की टक्कर या पटरी से उतरने (Derailment) के कारण किसी एक भी यात्री की जान नहीं गई है। लेकिन इसके विपरीत, दुनिया में कुछ ऐसे देश भी हैं जहां हाई-स्पीड रेल नेटवर्क पर कई भयानक हादसों में सैकड़ों बेकसूर यात्री अपनी जान गंवा चुके हैं।#1 जापान, फ्रांस और साउथ कोरिया के 'जीरो-फेटालिटी' सुरक्षा रिकॉर्ड का राजजापान ने साल 1964 में दुनिया की पहली बुलेट ट्रेन 'शिंकानसेन' चलाकर इतिहास रचा था। पिछले 60 से अधिक वर्षों में अरबों लोगों को मंजिल तक पहुंचाने वाली शिंकानसेन का रिकॉर्ड पूरी तरह बेदाग रहा है। जापान का ऑटोमैटिक ट्रेन कंट्रोल (ATC) और अर्ली वार्निंग सिग्नल्स भूकंप या तेज आंधी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के आते ही ट्रेन को कुछ ही सेकंड में रोक देते हैं।ठीक इसी तरह, फ्रांस की प्रसिद्ध TGV (ट्रेन आ ग्रांद वीतेस) ने 1981 से हाई-स्पीड सर्विस शुरू की थी। फ्रांस की टीजीवी का कमर्शियल संचालन में हाई-स्पीड पटरियों पर शून्य यात्री मृत्यु का शानदार रिकॉर्ड है। वहीं दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया की 'केटीएक्स' (KTX) ने 2004 से अपनी सेवाएं शुरू कीं और सख्त रखरखाव मानकों व सेंसर तकनीक के कारण इसका सेफ्टी रिकॉर्ड भी एकदम क्लीन रहा है।#1 दुनिया की हाई-स्पीड ट्रेनों में सबसे ज्यादा मौतें किस देश में हुईं?हाई-स्पीड रेल नेटवर्क (200 किमी/घंटा या उससे अधिक रफ्तार वाली ट्रेनों) में सबसे ज्यादा मौतें दर्ज करने वाले दो प्रमुख देश जर्मनी और चीन हैं:जर्मनी (एशेड हादसा - 1998): यूरोपीय हाई-स्पीड रेल इतिहास का सबसे भीषण और भयावह हादसा 3 जून 1998 को जर्मनी के एशेड (Eschede) में हुआ था। जर्मन ICE 1 हाई-स्पीड ट्रेन लगभग 200 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ रही थी, तभी पहिए में आई यांत्रिक खराबी के कारण ट्रेन पटरी से उतर गई और एक कंक्रीट ओवरपास ब्रिज से जा टकराई। इस दर्दनाक हादसे में 101 लोगों की मौत हो गई थी और 80 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हुए थे।चीन (वेनझोउ हादसा - 2011): दुनिया का सबसे बड़ा और लंबा हाई-स्पीड नेटवर्क रखने वाले चीन में 23 जुलाई 2011 को एक बड़ा हादसा हुआ था। झेजियांग प्रांत के वेनझोउ (Wenzhou) में सिग्नलों की विफलता और आकाशीय बिजली गिरने के कारण एक हाई-स्पीड ट्रेन रुक गई थी, जिसे पीछे से आ रही दूसरी तेज़ रफ्तार हाई-स्पीड ट्रेन ने जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में 40 यात्रियों की मौत हुई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे।#1 स्पेन और स्पेनिश नेटवर्क के दर्दनाक हादसेहाल के वर्षों में स्पेन का हाई-स्पीड रेलवे नेटवर्क भी सुरक्षा चिंताओं के कारण सुर्खियों में रहा है। यद्यपि 2013 में सैंटियागो डी कंपोस्टेला में हुआ भयावह हादसा (जिसमें 80 लोगों की मौत हुई थी) एक पारंपरिक अपग्रेडेड लाइन पर ओवरस्पीडिंग के कारण हुआ था, लेकिन इसके बाद भी हाई-स्पीड कॉरिडोर पर कई बार सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। हादसों के आंकड़ों को देखा जाए तो एकल ट्रेन दुर्घटना (Single High-Speed Train Disaster) के मामले में सबसे ज्यादा मौतें जर्मनी के खाते में दर्ज हैं।
Adani Ports Bid For Evos Terminals Acquisition: अदाणी ग्रुप की प्रमुख कंपनी 'अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन' (APSEZ) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने पोर्ट और टर्मिनल कारोबार को तेजी से बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ग्लोबल स्तर पर अपने पैरों पसारते हुए अदाणी पोर्ट्स ने पैन-यूरोपीय लिक्विड स्टोरेज और टर्मिनल ऑपरेटर 'इवोस टर्मिनल्स' (Evos Terminals) का अधिग्रहण करने के लिए करीब 3 अरब यूरो की बाइंडिंग ऑफर पेश की है।मौजूदा भू-राजनीतिक उथल-पुथल और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की बढ़ती चिंताओं के बीच गौतम अदाणी की अगुवाई वाली यह कंपनी यूरोप के बाजार में अपनी पकड़ को बेहद मजबूत करना चाहती है।क्या है इवोस टर्मिनल्स का बिजनेस और क्षमता?इग्नियो इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स के मालिकाना हक वाली इवोस टर्मिनल्स यूरोप की सबसे बड़ी और प्रमुख लिक्विड स्टोरेज कंपनियों में गिनी जाती है। इवोस के पास यूरोप के 5 प्रमुख देशों के 7 बंदरगाहों पर कुल 8 बड़े टैंक टर्मिनल्स हैं। इन सभी की कुल भंडारण क्षमता 6.4 मिलियन क्यूबिक मीटर है। साल 2025 में इस कंपनी का अनुमानित EBITDA 200 मिलियन यूरो रहा था, जो इसके मजबूत बिजनेस मॉडल को दर्शाता है।दुनिया के दिग्गजों से है कड़ी टक्करअदाणी पोर्ट्स ने यह बाइंडिंग ऑफर इसी हफ्ते एक कड़े कॉम्पिटेटिव ऑक्शन के तहत सबमिट किया है। इस मेगा डील को हथियाने की रेस में दुनिया के कई जाने-माने ग्लोबल इन्वेस्टर्स और फंड्स शामिल हैं, जिनमें KKR, EQT, मैक्वेरी, गोल्डमैन सैक्स अल्टरनेटिव्स, ब्लैकराॅक और सीपीपी इन्वेस्टमेंट्स जैसे नाम बड़े हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले कुछ हफ्तों में इस पूरी डील पर अंतिम फैसला आने की उम्मीद है।यूके डील के बाद ग्लोबल एक्सपेंशन पर फोकसअदाणी पोर्ट्स का यह विदेशी विस्तार प्लान हाल ही में उस घटना के तुरंत बाद आया है, जिसमें कंपनी को यूके-बेस्ड 'एसोसिएटेड ब्रिटिश पोर्ट्स' (ABP) की बिड में सुपरएनुएशन फंड IFM के हाथों पीछे हटना पड़ा था।कंपनी प्रबंधन ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि वह अपने वैश्विक विस्तार रणनीति के तहत दुनिया भर की करीब 20 रणनीतिक परिसंपत्तियों (पोर्ट्स और टर्मिनल्स) का बारीकी से मूल्यांकन कर रही है, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में कंपनी का दबदबा और बढ़ सके।
रूस को उकसाने वाली बयानबाजी से बाज आएं, यूरोप को पेंटागन का सीक्रेट मैसेज
पेंटागन ने लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया समेत कई नाटो सहयोगियों से रूस पर सार्वजनिक बयान नरम रखने को कहा है. यह सलाह यूक्रेन युद्ध पर नई अमेरिकी बातचीत, यूरोप की सुरक्षा चिंताओं और अमेरिकी सैन्य तैनाती की समीक्षा के बीच आई है.
फ्रांस की राजधानी पेरिस और उसके आसपास के इलाकों में इस अक्टूबर महीने दो पंजाबी युवकों की मौत होने की दुखद खबर सामने आई है। मृतकों की पहचान अमृतसर के 22 वर्षीय आयुष वर्मा और जालंधर के 42 वर्षीय नरिंदर कुमार के रूप में हुई है। दोनों के शवों को भारत (पंजाब) लाने के लिए एक समाजसेवी संस्था और पीड़ित परिवार द्वारा आर्थिक मदद की अपील की जा रही है। पहला मामला: समंदर में नहाते समय डूबा 22 साल का आयुष वर्माअमृतसर के कोट खालसा (दशमेश नगर) का रहने वाला 22 वर्षीय आयुष वर्मा कुछ समय पहले ही सुनहरे भविष्य की तलाश में फ्रांस गया था। जानकारी के अनुसार, आयुष फ्रांस के मार्सिले (Marseille) इलाके में समंदर किनारे नहाने गया था। अचानक समंदर में उठीं तेज लहरों के बहाव में आने से वह गहरे पानी में डूब गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान 25 अक्टूबर को उसने दम तोड़ दिया। आयुष का परिवार बेहद गरीब है और उसके शव को भारत लाने के लिए भारी खर्च की आवश्यकता है। दूसरा मामला: बॉबिग्नी में संदिग्ध परिस्थितियों में नरिंदर की मौतदूसरा मामला जालंधर के रुड़का कलां का है। यहां के रहने वाले 42 वर्षीय नरिंदर कुमार की पेरिस के पास बॉबिग्नी (Bobigny) इलाके में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। यह घटना 23 और 24 अक्टूबर की दरमियानी रात को हुई। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पार्थिव शरीर भारत लाने के लिए मदद की अपीलदोनों पंजाबी युवकों के पार्थिव शरीरों को पंजाब (भारत) उनके परिवारों तक पहुंचाने के लिए सामाजिक संस्था 'ऑर्डोन' (Ordon) के संचालक इकबाल सिंह भट्टी और पीड़ित परिवार आगे आए हैं। संस्था ने विदेशों में रहने वाले पंजाबी समुदाय और दानवीरों से आर्थिक सहयोग देने की अपील की है ताकि कागजी कार्रवाई और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च पूरा किया जा सके।
बोस्निया में बड़ा हेलीकॉप्टर हादसा: यूरोपीय संघ के शांति मिशन के चार कर्मियों की मौत, 11 घायल; जांच शुरूBosnia Helicopter crash EU peacekeeping force several killed injured rescue operations hindi news updates
मुख्यमंत्री डॉ. यादव से फ्रांस के महावाणिज्य दूत श्री पैट्रिक लेवेरिनो ने की शिष्टाचार भेंट
मुख्यमंत्री डॉ. यादव से फ्रांस के महावाणिज्य दूत श्री पैट्रिक लेवेरिनो ने की शिष्टाचार भेंट #topmpleader,#topmadhyapradeshleader,#madhyapradeshtopleader,#mpnews,#madhyapradeshnews,#bhopalnews,#DrMohanYadav,#mohanyadav,#mpcm भोपाल : बुधवार, अक्टूबर 28, 2026 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से बुधवार को मुम्बई में फ्रांस के महावाणिज्य दूत श्री पैट्रिक लेवेरिनो के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. […]
यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड ने दिया इस्तीफा, 7 फरवरी 2027 को छोड़ेंगी पद
यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड ने दिया इस्तीफा, 7 फरवरी 2027 को छोड़ेंगी पद
शिकागो रॉकफोर्ड एयरपोर्ट से भारत-यूरोप के बीच नई कार्गो सेवा शुरू
चैलेंज ग्रुप 4 नवंबर 2026 से बोइंग 777 विमानों के जरिए नवी मुंबई और अमेरिका के बीच दवाइयों और विशेष खेपों का परिवहन शुरू करेगा।
एक्टिंग की पहली कमाई से मां को पहली बार यूरोप ले गए थे हॉलीवुड स्टार विन डीजल
मुंबई, 29 अक्टूबर (आईएएनए)। हॉलीवुड स्टार विन डीजल ने एक भावुक नोट साझा किया कि कैसे उन्होंने 1998 की युद्ध फिल्म 'सेविंग प्राइवेट रयान' में अपनी भूमिका के लिए मिले पहले एक्टिंग चेक का इस्तेमाल अपनी मां के लिए यूरोप का टिकट खरीदने में किया।
राजस्थान की संस्कृति, परंपराओं और मेहमाननवाजी का आकर्षण सात समंदर पार फ्रांस तक पहुंच गया। सीकर जिले के दूजोद गांव में फ्रांस के रहने वाले हूबर्ट और उनकी मंगेतर सोफी ने बुधवार शाम भारतीय रीति-रिवाजों के साथ शादी की। दूजोद के पूर्व सरपंच विक्रम सिंह शेखावत के घर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह मंडप सजाया गया। पंडित देवेंद्र शर्मा ने विधि-विधान से रस्में पूरी करवाईं। दोनों ने अग्नि को साक्षी मानकर 7 फेरे लिए। दो साल पहले भारत घूमने आए थे हूबर्ट फ्रांस में बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में रिसर्च कर रहे हूबर्ट करीब दो साल पहले 30 लोगों के एक समूह के साथ भारत घूमने आए थे। इस दौरान दूजोद निवासी फ्रेंच गाइड गोवर्धन सिंह ने उन्हें जयपुर, मंडावा, जैसलमेर, जोधपुर और आगरा की सैर कराई थी। इसी यात्रा के दौरान हूबर्ट भारतीय संस्कृति, संस्कारों और यहां मिलने वाले अपनत्व से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी जीवनसंगिनी सोफी के साथ भारत में ही शादी करने का फैसला कर लिया। इसके बाद दोनों ने राजस्थान के सीकर जिले के दूजोद गांव को अपनी शादी के लिए चुना। पहले देखिए विवाह से जुड़े PHOTOS… जॉइंट फैमिली कल्चर से हुए प्रभावित हूबर्ट ने बताया कि फ्रांस में एक निश्चित उम्र के बाद बच्चे परिवार से अलग रहने लगते हैं। जबकि भारत में परिवार, माता-पिता और रिश्तेदारों के बीच गहरा जुड़ाव और अपनापन देखने को मिलता है। उनके मुताबिक, भारतीय परिवारों में दिखाई देने वाला यह रिश्ता और पारिवारिक संस्कृति उन्हें बेहद खास लगी। इसी पारिवारिक जुड़ाव और भारतीय संस्कृति से प्रभावित होकर उन्होंने फ्रांस से अपनी मंगेतर सोफी को सीकर लाकर शादी की। दुल्हन सोफी ने भी अपनाईं भारतीय कल्चर सोफी फ्रांस के रेवेन्यू डिपार्टमेंट में कार्यरत हैं। उन्होंने भी भारतीय रीति-रिवाजों को खुशी-खुशी अपनाया। विवाह समारोह में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी रस्में पूरी की गईं। आतिशबाजी और स्थानीय लोगों के गर्मजोशी भरे स्वागत ने इस विदेशी जोड़े के लिए शादी के पल को यादगार बना दिया। 11 दिन तक ऐतिहासिक स्थलों की करेंगे सैर विवाह संपन्न होने के बाद अब यह नवविवाहित जोड़ा अगले 11 दिनों तक उदयपुर, मंडावा, बीकानेर, जैसलमेर, पुष्कर और आगरा के ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा करेगा।
बिहार में मिट्टी के बर्तनों पर उकेरी कला, कुम्हारों के हुनर को अमेरिका-यूरोप तक मिला बाजार
Indian Handmade Terracotta Products : मुजफ्फरपुर में उद्यमी डॉ. ऋतुराज की पहल से पारंपरिक कुम्हारी कला को आधुनिक रूप दिया जा रहा है, जिससे मिट्टी के बर्तनों पर मिथिला सहित विभिन्न कला शैलियों का समावेश हो रहा है।
भावनाओं नहीं, संभावनाओं का गठबंधन: यूरोप को भी भारत की उतनी ही जरूरत; गोयल के छह दिन के दौरे से क्या हासिल?---India-Europe Trade Relations: Why Europe Needs India as Much as India Needs Europe
यूरोप में यूपी के ‘योगी मॉडल’ पर अमल के अंतरराष्ट्रीय निहितार्थ
यूरोप में कानून-व्यवस्था, हिंसक प्रदर्शनों, संगठित अपराध और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की घटनाओं के संदर्भ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शासन-शैली पर चर्चा एक महत्त्वपूर्ण राजनीतिक और नीतिगत विषय है। लेकिन इसका विश्लेषण करते समय एक बुनियादी सवाल समझना आवश्यक है कि क्या यूरोप को यूपी के 'योगी मॉडल' की सख्ती अपनाने की जरूरत है, या उसे उस मॉडल के कुछ चुनिंदा प्रशासनिक उपायों से सीख लेनी चाहिए? यहां पर यह बुनियादी सवाल इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि वर्ष 2017 के बाद अमेरिका-यूरोप ने योगी मॉडल की आलोचना की थी! लिहाजा, इस प्रश्न का उत्तर यूरोप की राजनीतिक व्यवस्था, मानवाधिकार संबंधी प्रतिबद्धताओं और उत्तर प्रदेश में अपनाई गई नीतियों के वास्तविक परिणामों को साथ रखकर ही दिया जा सकता है। लेकिन जब 'इस्लामिक अतिवादी' स्थानीय असंतुष्ट लोगों के साथ मिलकर यूरोप का इस्लामीकरण पर उतारू हों और ईरान का परोक्ष बरदहस्त उन्हें प्राप्त हो तो अमेरिका के बाद यूरोपीय विवशता समझी जा सकती है। इसे भी पढ़ें: Yogi Model ने Italy में मचाई धूम, दंगाइयों-उपद्रवियों से UP Style में निबटेंगी PM Giorgia Meloni सबसे पहला सवाल यह है की ‘योगी मॉडल’ से हमारा आपका क्या आशय है? तो माकूल जवाब यही होगा कि राजनीतिक विमर्श में ‘योगी मॉडल’ का प्रयोग मुख्यतः उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देने, अपराधियों के विरुद्ध पुलिस कार्रवाई, संगठित अपराध पर नियंत्रण, प्रशासनिक सख्ती और अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई जैसी नीतियों के लिए किया जाता है। हालाँकि, इन सभी उपायों को एक ही श्रेणी में रखना उचित नहीं है। अपराध की जाँच, दोषसिद्धि, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और संपत्ति संबंधी विवादों का निपटारा अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएँ हैं। चूंकि यूपी में बेलगाम अल्पसंख्यक अपराधियों, सत्ता संरक्षित बाहुबलियों, इनसे जुड़े मनबढ़ युवाओं और शातिर अपराधियों के इशारे पर अपराध कर रहे बहुसंख्यक अपराधियों को नियंत्रित करने में यूपी के योगी मॉडल ने आशातीत सफलता प्राप्त की है, इसलिए चारो तरफ से जल रहे फ्रांस, इटली जैसे यूरोपीय देशों के पास कोई दूसरा चारा भी नहीं है। सर्वप्रथम इटली की प्रमुख और मोदी की मित्र जॉर्जिया मेलोनी ने यूपी के योगी मॉडल पर अमल करने की घोषणा की, तत्पश्चात मोदी के दूसरे मित्र फ्रांस के प्रमुख मैक्रो ने जब यूपी के योगी मॉडल की अच्छी नीतियों पर अमल करना शुरू किया तो अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार 'गैंग' सक्रिय हो गया और यूरोपीय देशों को उस नकारा लोकतंत्र की दुहाई देने लगा, जहां के बेलगाम लोग 'जुल्मी पूंजीवादी अड्डों' को फूंकने के बजाय अपने देश के सार्वजनिक जगहों, नागरिक सुविधाओं और ठिकानों को ही फूंक रहे हैं! यूरोप में इस मॉडल की चर्चा के तीन संभावित कारण हैं:- एक, कानून का प्रभावी प्रवर्तन: हिंसा, लूटपाट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों के विरुद्ध त्वरित एवं निष्पक्ष कार्रवाई करना। दो, प्रशासनिक जवाबदेही: पुलिस और स्थानीय प्रशासन की तैयारी, समन्वय तथा निर्णय लेने की क्षमता में सुधार करना। तीन, राज्य की विश्वसनीयता: नागरिकों को यह भरोसा दिलाना कि शांतिपूर्ण जीवन, सार्वजनिक परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन किसी मॉडल का प्रभाव उसके नाम या राजनीतिक लोकप्रियता से नहीं, बल्कि उसके परिणामों और कानूनी प्रक्रियाओं के पालन से मापा जाना चाहिए। दूसरा प्रासंगिक सवाल यह है कि यूरोप के लिए इसके क्या अंतरराष्ट्रीय निहितार्थ हो सकते हैं? एक, कानून-व्यवस्था की बहस में बदलाव: यदि यूरोपीय देश उत्तर प्रदेश की तरह अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई की गति, पुलिस-प्रशासन के समन्वय और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा पर अधिक ध्यान देते हैं, तो उनकी आंतरिक सुरक्षा नीतियों में बदलाव आ सकता है। इससे भारत के प्रशासनिक अनुभवों में अंतरराष्ट्रीय रुचि बढ़ सकती है। दो, भारत की सॉफ्ट पावर और नीतिगत प्रतिष्ठा: भारत के किसी राज्य की प्रशासनिक नीति पर यूरोप में गंभीर चर्चा होना भारतीय संघीय व्यवस्था के अनुभवों को आंतरिक सुरक्षा नीतियों में बदलाव आ सकता है। इससे भारत के प्रशासनिक अनुभवों में अंतरराष्ट्रीय रुचि बढ़ सकती है। तीन, मानवाधिकार और कानून के शासन पर बहस: यूरोप में पुलिस कार्रवाई के साथ नागरिक स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और न्यायिक समीक्षा का विशेष महत्त्व है। यूरोप की परिषद ने 23 अक्टूबर 2026 के आसपास जारी अपने हालिया वक्तव्य में भी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और हिंसा करने वाले व्यक्तियों के बीच अंतर करने तथा पुलिस बल के कानूनी और आनुपातिक इस्तेमाल पर जोर दिया है। चार, भारत-यूरोप संबंधों में नई चर्चा: यदि यूरोपीय सरकारें भारतीय राज्यों के पुलिस प्रशिक्षण, डिजिटल निगरानी के कानूनी ढाँचे या प्रशासनिक समन्वय जैसे क्षेत्रों में उपयोगी अनुभव पाती हैं, तो तकनीकी सहयोग और नीतिगत संवाद के अवसर बन सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिज्ञ बताते हैं कि इसे अभी एक संभावित दिशा समझना चाहिए, न कि यूरोप द्वारा योगी मॉडल स्वीकार कर लेने का प्रमाण! तीसरा अहम सवाल है कि क्या यूरोप में ‘बुलडोजर नीति’ भी अपनाई जा सकती है? तो जवाब होगा कि यहीं पर इस बहस का सबसे संवेदनशील पक्ष सामने आता है। उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर ‘बुलडोजर मॉडल’ राजनीतिक विमर्श का प्रमुख हिस्सा रहा है। लेकिन अवैध निर्माण हटाना और किसी आपराधिक मामले में आरोपी व्यक्ति को दंडित करने के लिए उसकी संपत्ति गिराना, दोनों अलग बातें हैं। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 13 नवंबर 2024 को स्पष्ट किया कि केवल किसी आपराधिक मामले में आरोपी होने के आधार पर, कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना, किसी की संपत्ति गिराना असंवैधानिक है। न्यायालय ने नोटिस, सुनवाई और न्यायिक समीक्षा से जुड़े निर्देश भी दिए। लिहाजा, यूरोप में भी ऐसी किसी नीति को लागू करने के लिए स्थानीय कानून, संपत्ति अधिकार, निष्पक्ष सुनवाई और आनुपातिक कार्रवाई के मानकों का पालन आवश्यक होगा। इसलिए यूरोप के लिए संभावित सीख यह नहीं कि वह बिना कानूनी प्रक्रिया के कठोर दंडात्मक कार्रवाई अपनाए, बल्कि यह कि अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई प्रभावी, प्रमाण-आधारित और न्यायिक समीक्षा के अधीन हो। चौथा महत्वपूर्ण सवाल है कि योगी मॉडल बनाम यूरोपीय व्यवस्था की तुलनात्मक दृष्टि क्या है? इसे हमलोग विषय दर विषय, उससे संबंधित उत्तर प्रदेश के मॉडल से जुड़ी बहस और यूरोपीय व्यवस्था की प्रमुख कसौटी के आधार पर निम्नलिखित तरीके से समझ सकते हैं:- एक, अपराध नियंत्रण- पुलिस कार्रवाई और अपराधियों पर दबाव - प्रभावी जाँच, अभियोजन और निष्पक्ष सुनवाई। दो, हिंसक भीड़- सार्वजनिक व्यवस्था बहाल करना- हिंसक व्यक्तियों पर कार्रवाई, शांतिपूर्ण प्रदर्शन की सुरक्षा। तीन, संपत्ति संबंधी कार्रवाई- अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाना, कानून के अनुसार नोटिस, सुनवाई और अपील। चार, पुलिस की जवाबदेही- प्रशासनिक अनुशासन और कार्रवाई- आनुपातिक बल प्रयोग, स्वतंत्र जाँच और जवाबदेही। पांच, शासन की विश्वसनीयता- नागरिक सुरक्षा और कानून का प्रवर्तन- सुरक्षा के साथ मौलिक अधिकारों का संरक्षण। यूरोप की परिषद के मानवाधिकार मानकों में पुलिस कार्रवाई के लिए आवश्यकता, आनुपातिकता और जवाबदेही पर जोर दिया जाता है। ये मानक हिंसक घटनाओं से निपटने के साथ-साथ शांतिपूर्ण सभा के अधिकार की रक्षा भी करते हैं। जहां तक अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर इसके संभावित प्रभाव की बात है तो इससे भारत की प्रशासनिक छवि मज़बूत होगी। यदि उत्तर प्रदेश की किसी नीति से अपराध नियंत्रण या पुलिस-प्रशासन के समन्वय में मापने योग्य सुधार सिद्ध होता है, तो भारत अपने अनुभवों को अंतरराष्ट्रीय नीति-चर्चाओं में प्रस्तुत कर सकता है। इससे भारतीय राज्यों के प्रशासनिक प्रयोगों पर शोध और संवाद को बढ़ावा मिल सकता है। चूंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा और सफल लोकतंत्र है, इसलिए भारत की बातों को अनसुनी करना अन्य देशों के लिए घातक भी हो सकता है। जहां तक यूरोप में राजनीतिक ध्रुवीकरण की बात है तो कठोर कानून-व्यवस्था की नीतियों को कुछ राजनीतिक समूह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए आवश्यक मान सकते हैं, जबकि दूसरे समूह उनके दुरुपयोग और नागरिक स्वतंत्रताओं पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर सवाल उठा सकते हैं। इसका वास्तविक प्रभाव देश, सरकार और लागू नीति के अनुसार अलग होगा। जहां तक लोकतांत्रिक शासन की परीक्षा की बात है तो किसी सरकार की क्षमता केवल हिंसा रोकने से नहीं, बल्कि निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा, निष्पक्ष न्याय और प्रशासनिक गलतियों को सुधारने की व्यवस्था से भी मापी जाती है। यह कसौटी भारत और यूरोप, दोनों पर लागू होती है। अब प्रासंगिक सवाल है कि आख़िर यूरोप को वास्तव में किन किन पहलुओं से सीखने पर विचार करना चाहिए? तो जवाब होगा कि यूरोपीय देशों के लिए उपयोगी नीति-चर्चा पाँच बिंदुओं पर केंद्रित हो सकती है:- एक, हिंसक घटनाओं के दौरान पुलिस, अभियोजन पक्ष और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना। दो, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने तथा संगठित अपराध के मामलों में साक्ष्य-आधारित जाँच और समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया का अनुपालन करना। तीन, हिंसक व्यक्तियों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के बीच स्पष्ट अंतर करना और हिंसक व्यक्तियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करना। चार, पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र समीक्षा और गलत कार्रवाई के लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय करना। पांच, अपराध की रोकथाम के साथ उन सामाजिक परिस्थितियों पर भी ध्यान देना जो बार-बार हिंसा को जन्म देती हैं। फ्रांस के न्याय मंत्रालय ने जून-जुलाई 2023 की शहरी हिंसा के बाद गिरफ्तार और दोषसिद्ध व्यक्तियों की पृष्ठभूमि तथा घटनाओं के कारणों का विश्लेषण कराया था। यह उदाहरण बताता है कि हिंसक घटनाओं से निपटने के लिए केवल तत्काल पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि बाद का संस्थागत विश्लेषण भी महत्त्वपूर्ण है। कोरा सवाल है कि क्या योगी मॉडल यूरोप के लिए नया प्रशासनिक विकल्प बन सकता है? तो जवाब होगा कि इस प्रश्न पर गंभीर अंतरराष्ट्रीय चर्चा संभव है, क्योंकि यूरोप ने उत्तर प्रदेश के योगी मॉडल को अपना लिया है। मुख्य बात यह है कि कठोर शासन और प्रभावी शासन एक ही चीज नहीं हैं। प्रभावी शासन वह है जो हिंसा और अपराध पर नियंत्रण रखे, नागरिकों को सुरक्षित बनाए, कानून का निष्पक्ष पालन करे और प्रशासन को भी कानून के प्रति जवाबदेह रखे। यदि उत्तर प्रदेश की किसी विशिष्ट नीति के सकारात्मक परिणाम स्वतंत्र आँकड़ों से प्रमाणित होते हैं, तो यूरोपीय देश उसकी उपयोगिता पर विचार कर सकते हैं। लेकिन नीतियों को उनके नाम या राजनीतिक छवि के आधार पर नहीं, बल्कि प्रमाण, लागत, परिणाम और मानवाधिकारों पर उनके प्रभाव के आधार पर परखना चाहिए। यही वह दृष्टिकोण है जिसके तहत ‘योगी मॉडल’ पर बहस भारत की आंतरिक राजनीति से आगे बढ़कर कानून-व्यवस्था, लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय प्रशासनिक सहयोग के व्यापक प्रश्नों तक पहुँच सकती है। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
फ्रांस में करीना-सैफ का फैमिली वेकेशन, तैमूर-जेह संग देखें खूबसूरत तस्वीरें
करीना कपूर और सैफ अली खान इन दिनों फ्रांस में छुट्टियां मना रहे हैं। सैफ ने वेकेशन की कुछ तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें परिवार का मस्ती भरा अंदाज और कैजुअल लुक देखने को मिल रहा है।
फ्रांस में चंडीगढ़ के विरासत फर्नीचर की नीलामी हुई। 25 अक्टूबर को सात लाॅट 1.68 करोड़ रुपये में बिके। हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल ने प्रशासन से एफआईआर दर्ज करने और बिके फर्नीचर की डिलीवरी रोकने की मांग की है।
मेरठ: सेंट फ्रांसिस वर्ल्ड स्कूल में अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम, साइबर एक्सपर्ट ने छात्राओं को साइबर अपराधों के प्रति किया जागरूक
फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था और बढ़ते जीवन खर्च के खिलाफ छात्रों के हिंसक प्रदर्शनों के बाद सरकार ने विश्वविद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया बदलने का फैसला किया है। सरकार 2027 में मौजूदा ऑनलाइन प्रवेश प्रणाली में बड़े बदलाव करेगी और 2028
Basmati Export: पेरिस व्यापार मेले में यूरोपीय खरीदारों ने दिखाई दिलचस्पी, निर्यात 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद; पश्चिमी यूपी के किसानों को फायदा
लिमिटेड की नई इकाई का उद्घाटन रविवार को राजातालाब के खोचवां में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस यूनिट की स्थापना पर करीब 150 करोड़ रूपये का निवेश किया गया है।
वैचारिक संकेत: यूरोप में हिंसा से जामिया के आंदोलन तक... बयानों के संदर्भ बेशक अलग, संकेतों को समझना जरूरी
फ्रांस में Shamonda Virus का पहला इंसानी केस मिला, WHO ने की पुष्टि
हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने फ्रांस में शमोंडा वायरस के पहले इंसानी मामले की पुष्टि की है। फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, संक्रमित व्यक्ति की उम्र 60 साल से ज्यादा थी और उनका इम्यून सिस्टम भी काफ कमजोर था। लेकिन इनका इलाज के दौरान मौत हो गई। वैसे यह वायरस पहले सिर्फ जानवरों में ही पाया गया था और अब आमतौर पर मवेशियों, भेड़ों, बकरियों और घोड़ों को प्रभावित करता है। आइए आपको बताते हैं वायरस क्या है और इंसानों में इसके लक्षण को कैसे करता है। क्या है शमोंडा वायरस? असल में शमोंडा वायरस पहली बार 1960 के दशक में नाइजीरिया के मवेशियों में पाया गया था। इसके बाद से अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों में इसके छोटे-मोटे मामले दर्ज किए गए हैं। बता दें कि, यह वायरस श्मालेनबर्ग वायरस परिवार से आता है, जो पशुओं में प्रजनन से संबंधित समस्याएं पैदा होती हैं। इंसानों में शमोंडा वायरस के लक्षण वैसे इंसानों में इस वायरस के संक्रमण का ये पहला मामला पाया गया है। इसलिए इंसानों में इसके लक्षण कैसे हो सकते हैं, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। लेकिन इंसानों में इसके संक्रमण की वजह मिज, मक्खी जैसे एक छोटे कीड़े को माना जा रहा है। ये कीड़ा संक्रमित पशुओं के काटने के बाद वायरस का कैरियर बन जाता है और इंसानों में ये वायरस फैल सकता है। हालांकि, इसका अभी तक कोई प्रमाण मिला नहीं है कि शमोंडा वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। वहीं, संक्रमित पशुओं के छूने, उनकी देखभाल करने या उनके पास रहने से भी ये वायरस नहीं फैलता। वायरस के बारे जांच जारी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, संक्रमित व्यक्ति उस क्षेत्र में पाएं जाते हैं, जहां पशुओं में शमोंडा वायरस फैल रहा था और वहां क्यूलिकोइड्स प्रजाति की मिज मक्खियां मौजूद थीं। वैसे संक्रमण के कारण और इनके खतरों को बेहतर तरीके से जानने के लिए अभी भी इस वायरस पर रिसर्च जारी है।
विचार: बड़े संकट की ओर बढ़ता यूरोप
यूरोप की समस्या केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे आर्थिक और राजनीतिक कारण भी हैं।
जागरण संपादकीय: संकट में यूरोप
यूरोप और पश्चिम के अन्य देश जिन समस्याओं से घिरे हैं, उनके लिए वही अधिक जिम्मेदार हैं। ये देश हिंसक प्रदर्शनों को इसलिए नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि लोगों की जायज चिंताओं के बहाने अराजकता फैलाने वालों को कुछ ऐसी शक्तियां भड़काने में लगी हुई हैं, जो अपने संकीर्ण हितों की पूर्ति करना चाहती हैं। इनमें इस्लामिस्टों और कम्युनिस्टों के गठजोड़ की भूमिका कहीं अधिक दिखाई दे रही है।
फ्रांस की हिंसा पर बोलीं कंगना रनौत, रिजीम चेंज पर भी दिया बयान
विपक्ष की ओर से सत्ता परिवर्तन को लेकर दिए गए बयानों पर बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने कहा, 'इस तरह की ओछी हरकतें देश को लगातार यह याद दिलाती हैं कि एक मजबूत नेतृत्व की कितनी जरूरत है.'
फ्रांस में कुछ ठीक नहीं हो रहा: बढ़ता कर्ज, नाराज युवा और राजनीतिक संकट ने बढ़ाई मुश्किलें
फ्रांस में कुछ ठीक नहीं हो रहा: बढ़ता कर्ज, नाराज युवा और राजनीतिक संकट ने बढ़ाई मुश्किलें
स्कॉलरशिप: यूरोप से करें मास्टर डिग्री, 37 नए प्रोग्राम में प्रवेश का मौका, 1.5 लाख+ तक की मदद
इरास्मस मुंड्स जॉइंट मास्टर्स स्कॉलरशिप के तहत यूरोप के 37 नए मास्टर प्रोग्राम में प्रवेश का मौका है। चयनित छात्रों को 24 महीने तक हर माह 1,400 यूरो तक की आर्थिक सहायता मिल सकती है।
फ्रांस के स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट में ट्रंप का बड़ा दावा
फ्रांस में स्कूल और यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट अब देश की राजनीति और अमेरिका तक पहुंच गया है. शुरुआत शिक्षकों, नर्स और स्टाफ की कमी को लेकर हुई, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे बड़े पैमाने पर प्रवासन और इस्लाम से जोड़ दिया. वहीं फ्रांसीसी अधिकारियों और छात्र संगठनों के मुताबिक आंदोलन की शुरुआती मांगें स्कूलों की सुविधाओं और कर्मचारियों से जुड़ी हैं. सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो और भ्रामक दावों ने भी विवाद बढ़ाया है.
फ्रांस में छात्र प्रदर्शन: अबतक 5 हजार गिरफ्तार, इनमें 87% नाबालिग
फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के खिलाफ छात्रों का गुस्सा सड़कों पर है. इस आंदोलन में गिरफ्तार किए गए 5,000 से ज्यादा लोगों में 87 प्रतिशत नाबालिग हैं. स्कूलों में शिक्षकों की कमी, खराब इमारतों और बुनियादी सुविधाओं की कमी से छात्र परेशान हैं. प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस कार्रवाई ने सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.
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फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार 2026 प्रोफेसर फ्रांसिस हाल्जेन को अंटार्कटिका में आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी की स्थापना और ब्रह्मांडीय न्यूट्रिनो की खोज के लिए दिया गया है।
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जलवायु परिवर्तन का संकट झेलने लगा यूरोप
यूरोप में जो लोग समझते थे कि जलवायु परिवर्तन भविष्य की पीढ़ियों के लिए समस्या है उन्हें इस बार की गर्मियों ने सच्चाई बता दी है. जलवायु परिवर्तन के महंगे और जीवन बदलने वाले आर्थिक नतीजे यूरोप को अपनी चपेट में ले चुके हैं
यूरोप में भीषण गर्मी का कहर... इटली में रेड अलर्ट, ऑस्ट्रिया में तापमान का टूटा रिकॉर्ड
यूरोप में भीषण गर्मी और लू ने कई देशों के तापमान रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. इटली सरकार ने 27 प्रमुख शहरों को रेड अलर्ट पर रखा है. ऑस्ट्रिया में तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ज्यादा तापमान है. इस गर्मी और सूखे का असर बिजली उत्पादन, परिवहन और पर्यटन पर भी पड़ा है. पर्यावरणविद ग्लोबल वार्मिंग को इस स्थिति का मुख्य कारण मानते हैं.
भारत की स्लीपर बस का फैन हुआ विदेशी शख्स, बोला- ऐसी सुविधा तो यूरोप में भी नहीं मिलती
भारत की स्लीपर बस का फैन हुआ विदेशी शख्स, बोला- ऐसी सुविधा तो यूरोप में भी नहीं मिलती
'यूरोप के दरवाजे' में घुस रहे 57 अफ्रीकियों को स्पेन ने क्यों मारा?
स्पेन की पुलिस बॉर्डर पर अलर्ट खड़ी है. पुलिस की गोलियों से अंदर घुसने की कोशिश कर रहे कई प्रवासियों की मौत हो चुकी है. 'यूरोप का दरवाजा' कहा जाने वाला स्यूटा शहर में प्रवासियों की बाढ़ ने इस शहर में कानून-व्यवस्था का संकट खड़ा कर दिया है.
फ्रांस में पहली बार दिखा आग का बादल आखिर है क्या?
अभूतपूर्व जंगल की आग से जूझते फ्रांस में पहली बार फायर क्लाउड यानी आग के बादल बनते देखा गया है. आखिर आग के बादल होते क्या हैं और इनका क्या असर होता है. फ्रांस में इसे देखने के बाद क्यों चिंता बढ़ रही है
60 की उम्र में मिलिंद सोमन ने रचा इतिहास, यूरोप से अफ्रीका तक तैरकर पार किया स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर
अभिनेता और फिटनेस आइकन मिलिंद सोमन ने एक बार फिर अपनी अद्भुत सहनशक्ति और फिटनेस का परिचय दिया है। 60 साल की उम्र में मिलिंद सोमन ने स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर को तैरकर पार करने का एक कठिन और साहसी कारनामा कर दिखाया है। मिलिंद ने यूरोप और अफ्रीका के बीच ...
फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन, 88 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
Alain Delon passes away: 'द लेपर्ड' और 'रोक्को एंड हिज ब्रदर्स' जैसी सुपर हिट फिल्मों में अभिनय का जौहर दिखाने वाले फ्रांस के मशहूर अभिनेता एलेन डेलन का निधन हो गया है। एलेन डेलन ने 88 वर्ष की उम्र में आखिरी सांस ली। अभिनेता के पारिवारिक सूत्रों ने ...
इटली से फ्रांस तक समंदर के बीच होगा Anant-Radhika का दूसराप्री वेडिंग फंक्शन, जानिए मेहमानों से लेकरड्रेस कोड तक सबकुछ
यूरोप से लेकर Sri Lanka तक इन देशो में शूट हुई है Surya और Bobby Deol की फिल्म Kanguva, बजट उड़ा देगा होश

