दिल्ली के दिल जंतरमंतर पर अब सिर्फ प्रदर्शन नहीं बल्कि संवैधानिक बहस भी खड़ी हो गई है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सख्त जवाब मांगा तो दूसरी तरफ दिल्ली हाईकोर्ट ने सीधा सवाल दाग दिया। आखिर जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए बंद क्यों नहीं कर दिया जाता? देश की राजधानी में विरोध प्रदर्शनों का सबसे बड़ा प्रतीक जंतर-मंतर अब अदालत की कसौटी पर है। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से साफ जवाब मांगा है कि क्या बड़े स्तर के धरनों के लिए कोई वैकल्पिक और ज्यादा व्यवस्थित जगह तय की जा सकती है। दरअसल चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने याचिकाकर्ता सतीश चंद्र कौशिक ने दलील दी कि जंतर-मंतर अब बड़े प्रदर्शनों के लिए व्यवहारिक नहीं रहा। यहां ना पर्याप्त पानी है, ना शौचालय, ना ही बुनियादी व्यवस्थाएं। लंबा धरना हो तो प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ आसपास रहने वाले लोग भी परेशान होते हैं। इसे भी पढ़ें: Calcutta High Court ने स्वैच्छिक रक्तदान शिविर रोकने पर West Bengal सरकार से मांगी रिपोर्ट जंतर-मंतर पर सुविधाओं की कमी, ट्रैफिक और आम लोगों की परेशानी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर लोगों की अलग-अलग राय है। कुछ लोगों का मानना है कि जंतर-मंतर पर सुविधाओं का अभाव है। इससे आम जनता और प्रदर्शनकारी दोनों प्रभावित होते हैं। इसी बीच में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट को लेकर अपनी राय रखी है। एक्स पर लिखा हमसे हमारी विरोध करने की -जगह छीनने की कोशिश करने से पहले हमें यह बताएं कि क्या आप इंडिया गेट को ऐसी जगह के तौर पर तय करेंगे जहां हम शांतिपूर्ण विरोध करने के लिए अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल कर सकें। आपने इंडिया गेट तो छीन ही लिया। अब हम अपना जंतर-मंतर भी छीने जाने को बर्दाश्त नहीं करेंगे। हालांकि जंतर-मंतर पर सिर्फ सुविधाएं ही नहीं ट्रैफिक भी बड़ा मुद्दा बन गया है। दिल्ली के बीचों-बीच होने वाले इन प्रदर्शनों से यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है। एंबुलेंस से लेकर आम राहगीर तक हर कोई इसकी मार झेलता है। इसी बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस मुद्दे पर और भी सख्त रुख दिखाया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से सीधा सवाल किया। जंतर- मंतर को बंद क्यों नहीं कर देते? जंतर-मंतर को प्रदर्शन की तय जगह बनाए रखने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि शहर को बेवजह बंधक क्यों बनाया जाए? साथ ही, केंद्र सरकार से पूछा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में बंद क्यों नहीं कर देते ? जस्टिस अमित महाजन ने ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी की याचिका पर सुनवाई के दौरान ये बातें कहीं। संगठन ने दिल्ली पुलिस को निर्देश देने की मांग की थी कि 10 अगस्त को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगने से जुड़े आवेदन पर फैसला करे। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने कहा कि हम अधिकतम 75 लोग आएंगे। इस पर जस्टिस महाजन ने एएसजी चेतन शर्मा से कहा, आप इसे बंद क्यों नहीं कर देते? एएसजी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट इस सवाल पर विचार कर रहा है। इस पर घोष ने पूछा कि क्या दिल्ली में विरोध प्रदर्शन नहीं हो सकता? जस्टिस महाजन ने कहा, यह पुलिस तय करेगी। हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को संगठन के आवेदन पर 8 अगस्त तक फैसला करने का निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया। इसे भी पढ़ें: Telangana High Court ने मुफ़्त योजनाओं पर जताई चिंता, कहा खजाने पर पड़ रहा वित्तीय बोझ 33 साल से धरने देख रहा जंतर-मंतर... बैन लगा तो सुप्रीम कोर्ट ने हटाया 1988 में किसान आंदोलन के बाद बोट क्लब पर प्रदर्शन रोक दिए गए थे। इसके बाद 1993 में जंतर-मंतर पर पहला प्रदर्शन हुआ था। जंतर-मंतर को धरना स्थल बनाने संबंधी किसी आदेश का रिकॉर्ड नहीं है। यह पुलिस की प्रशासनिक व्यवस्था के रूप में विकसित हुआ। स्थानीय लोगों की शोर, प्रदूषण जैसी शिकायतों पर एनजीटी ने 2017 में यहां प्रदर्शन रोक दिए। धरने-प्रदर्शन रामलीला मैदान में करने को कहा। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा- शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार है। कोर्ट ने प्रतिबंध हटाकर नियंत्रित प्रदर्शन की व्यवस्था बनाने को कहा। अब सुप्रीम कोर्ट में फिर वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल की मांग लंबित है। बहरहाल,अब यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक भी बनता जा रहा है। सवाल यह है कि क्या सरकार प्रदर्शन की आजादी और आम जनता की सुविधा के बीच संतुलन बना पाएगी? क्या जंतर-मंतर का ऐतिहासिक महत्व खत्म कर दिया जाएगा या फिर इसे नए सिस्टम के तहत बदला जाएगा? दरअसल जंतर-मंतर जो कभी लोकतंत्र की आवाज का प्रतीक था अब उसी लोकतंत्र की व्यवस्था के सामने चुनौती बनकर खड़ा है। फैसला सरकार को करना है लेकिन नजरें अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है।
असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, चराइदेव जिले के महमोरा रेवेन्यू सर्कल में एक और व्यक्ति की जान जाने के बाद बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 98 हो गई है। हाल के दिनों में गोलाघाट और उदलगुरी जिलों से भी मौतों की खबर आई है। इसके साथ ही बाढ़ से प्रभावित जिलों की संख्या घटकर 13 और प्रभावित लोगों की संख्या 1.55 लाख रह गई। यह जानकारी आधिकारिक बुलेटिन में दी गई। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बुलेटिन में कहा गया कि एक और व्यक्ति की मौत चराइदेव ज़िले के महमोरा रेवेन्यू सर्कल में हुई। इसमें कहा गया कि 13 जिले - शिवसागर, गोलाघाट, नागांव, होजई, सोनितपुर, धेमाजी, दरांग, बिस्वनाथ, कामरूप (एम), लखीमपुर, उदलगुरी, जोरहाट और चराइदेव बाढ़ से प्रभावित रहे, जिससे 33 राजस्व मंडल और 464 गांव प्रभावित हुए। बुलेटिन के अनुसार, राज्य में प्रभावित लोगों की कुल संख्या अब 1,55,849 है। इसे भी पढ़ें: SRN Hospital का नाम बदलने की मांग, Prayagraj पहुंचेंगे शहीद रोशन सिंह के प्रपौत्र शरद सिंह असम में बाढ़ से मरने वालों की ताज़ा संख्या क्या है? असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) ने बताया कि पिछले 24 घंटों में गोलाघाट और उदलगुरी ज़िलों में एक-एक मौत की खबर मिली है। ASDMA ने X पर लिखा, बाढ़ के हालात असम के कुछ हिस्सों को प्रभावित कर रहे हैं; 15 ज़िले और 1.68 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। राहत और बचाव कार्य जारी हैं, और राहत कैंप व वितरण केंद्र प्रभावित लोगों की मदद कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Telangana High Court ने मुफ़्त योजनाओं पर जताई चिंता, कहा खजाने पर पड़ रहा वित्तीय बोझ शिवसागर और चराइदेव में 10 अगस्त से क्लास फिर से शुरू होंगी असम सरकार ने शिवसागर और चराइदेव जैसे बाढ़ प्रभावित ज़िलों में 10 अगस्त से पढ़ाई फिर से शुरू करने की योजना की घोषणा की है। साथ ही, उन छात्रों के लिए वैकल्पिक इंतज़ाम किए जा रहे हैं जिनके स्कूल हाल की बाढ़ के कारण पहुँच से बाहर हैं या क्षतिग्रस्त हो गए हैं। राज्य के शिक्षा मंत्री रानोज पेगू ने गुरुवार को कहा कि यह फ़ैसला पढ़ाई में रुकावट को कम करने और यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है कि छात्र अपनी पढ़ाई जारी रख सकें, भले ही बाढ़ से प्रभावित कई शिक्षण संस्थानों में मरम्मत का काम चल रहा हो। जो स्कूल अभी छात्रों के लिए तैयार नहीं हैं, वे हालात सुधरने तक बंद रहेंगे। हालाँकि, इन संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए अस्थायी सुविधाएँ दी जाएँगी। असम के लिए IMD का मौसम का ताज़ा पूर्वानुमान क्या है? भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 6 से 12 अगस्त के बीच अरुणाचल प्रदेश में; और 8 से 11 अगस्त के दौरान असम और मेघालय में कहीं-कहीं या छिटपुट बारिश होने की संभावना है। IMD ने कहा, 6-7 अगस्त और 12 अगस्त को असम और मेघालय में; और 6-12 अगस्त के दौरान नागालैंड, मणिपुर, मिज़ोरम और त्रिपुरा में काफ़ी ज़्यादा या व्यापक बारिश होने की संभावना है। मौसम एजेंसी ने कहा, 6 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश में; और 6-10 अगस्त के दौरान असम और मेघालय तथा नागालैंड, मणिपुर, मिज़ोरम और त्रिपुरा में कहीं-कहीं आंधी-तूफ़ान और बिजली गिरने की संभावना है। Read LatestNational News in Hindi only on Prabhasakshi
Telangana High Court ने मुफ़्त योजनाओं पर जताई चिंता, कहा खजाने पर पड़ रहा वित्तीय बोझ
हैदराबाद, सात अगस्त तेलंगाना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने शुक्रवार को कल्याणकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली मुफ्त सुविधाओं और अपात्र लाभार्थियों को मिल रहे लाभों से सरकारी खजाने पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ पर चिंता जताई। अदालत में पेश हुए राज्य के प्रधान सचिव (वित्त) संदीप कुमार सुल्तानिया के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए, न्यायमूर्ति नागेश भीमपाका ने पाया कि कर्मचारियों के वेतन, कर्ज के भुगतान और कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के बाद सरकारी निधि में काफी कमी आ जाती है। उन्होंने तेलुगु में अपनी टिप्पणी में कहा, “बहुत सारी गैर-जरूरी मुफ्त योजनाएं (लागू की जा रही हैं)। हां, (कल्याणकारी कार्यक्रम) लागू होने चाहिए। कई लोग बिना पात्रता के भी इनका फायदा उठा रहे हैं। ‘रायतू बंधु’ (किसानों के लिए निवेश सहायता योजना) जैसी योजनाएं हैं। क्या करोड़पति भी इनका फायदा नहीं उठा रहे हैं? इससे राज्य पर कितना बोझ पड़ता है।”उन्होंने कहा कि जहां पहले की पीढ़ियों के लोग महात्मा गांधी और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों से प्रेरित होकर देश के लिए योगदान देने को उत्सुक रहते थे, वहीं आज लोगों में यह प्रवृत्ति है कि वे सवाल करते हैं कि उन्हें सरकार से क्या व्यक्तिगत लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में अगर किसी एक भी लाभार्थी का पीडीएस राशन कार्ड हटाया जाता है, तो इससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वे किसी की आलोचना नहीं कर रहे हैं, लेकिन राज्य में खेती के काम करने वालों की कमी के कारण गांवों में किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से आए प्रवासी मजदूर राज्य के खेतों में काम कर रहे हैं। इस बात पर जोर देते हुए कि वह कोई राजनीतिक भाषण नहीं दे रहे हैं और न ही सरकार की आलोचना कर रहे हैं, न्यायमूर्ति भीमपाका ने कहा कि इन मुद्दों पर विचार करने की जरूरत है। गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) के परिवारों के लिए बड़ी संख्या में पीडीएस राशन कार्ड और दूसरी मुफ़्त सुविधाओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर मुफ़्त सुविधाओं और अपात्र लोगों को फ़ायदे देने पर भारी खर्च का यह सिलसिला जारी रहा, तो एक दिन भगवान कुबेर (धन के देवता) भी “कंगाल” हो जाएंगे। अदालत ने कहा कि किसी अधिकारी को अदालत में बुलाना दुखद है, लेकिन व्यावहारिक दिक्कतों की वजह से ऐसा करना पड़ा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त के लिए तय की। अदालत ने 10 जुलाई को सुल्तानिया के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया और शहर के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वे उन्हें “जहां भी मिलें” गिरफ्तार करें और शुक्रवार को अदालत में पेश करें। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अगर वरिष्ठ अधिकारी 5,000 रुपये का निजी बॉन्ड भरते हैं और यह भरोसा दिलाते हैं कि वे शुक्रवार को अदालत में पेश होंगे, तो उन्हें जमानत पर रिहा किया जा सकता है।
Sonebhadra News: जयप्रकाश चतुर्वेदी को श्रद्धांजलि देने आज आएंगे तेलंगाना के राज्यपाल
The Governor of Telangana will arrive today to pay tribute to Jayaprakash Chaturvedi.
Government Teacher Bhukya Gawthami को Reel की वजह से किया था सस्पेंड, अब दिया Resignation। Telangana
तेलंगाना के खम्मम जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ मामिलागुडेम सरकारी हाई स्कूल की अंग्रेजी शिक्षिका भुक्या गौतमी ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। देखिए सोशल मीडिया के इस खौफनाक साइड इफेक्ट और सिस्टम के टॉर्चर की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।
तेलंगाना सरकार ने 14 साल के अंतराल के बाद 'गद्दार तेलंगाना फिल्म अवॉर्ड्स' की घोषणा की। यह अवॉर्ड तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किए गए हैं। गद्दार तेलंगाना फिल्म पुरस्कार नाम दिवंगत क्रांतिकारी कवि और कलाकार गद्दार को ...

